| বাংলা | |||
| পালি | অট্ঠকথা | টীকা | অন্ন |
| 1101 পারাজিক পালি 1102 পাচিত্তিয় পালি 1103 মহাবগ্গ পালি (বিনয়) 1104 চূলবগ্গ পালি 1105 পরিবার পালি | 1201 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-১ 1202 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-২ 1203 পাচিত্তিয় অট্ঠকথা 1204 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (বিনয়) 1205 চূলবগ্গ অট্ঠকথা 1206 পরিবার অট্ঠকথা | 1301 সারত্থদীপনী টীকা-১ 1302 সারত্থদীপনী টীকা-২ 1303 সারত্থদীপনী টীকা-৩ | 1401 দ্বেমাতিকাপালি 1402 বিনয়সংগহ অট্ঠকথা 1403 বজিরবুদ্ধি টীকা 1404 বিমতিবিনোদনী টীকা-১ 1405 বিমতিবিনোদনী টীকা-২ 1406 বিনয়ালংকার টীকা-১ 1407 বিনয়ালংকার টীকা-২ 1408 কঙ্খাবিতরণীপুরাণ টীকা 1409 বিনয়বিনিচ্ছয়-উত্তরবিনিচ্ছয় 1410 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-১ 1411 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-২ 1412 পাচিত্যাদিযোজনাপালি 1413 খুদ্ধসিক্খা-মূলসিক্খা 8401 বিসুদ্ধিমগ্গ-১ 8402 বিসুদ্ধিমগ্গ-২ 8403 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-১ 8404 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-২ 8405 বিসুদ্ধিমগ্গ নিদানকথা 8406 দীঘনিকায় (পু-বি) 8407 মজ্ঝিমনিকায় (পু-বি) 8408 সংযুত্তনিকায় (পু-বি) 8409 অঙ্গুত্তরনিকায় (পু-বি) 8410 বিনয়পিটক (পু-বি) 8411 অভিধম্মপিটক (পু-বি) 8412 অট্ঠকথা (পু-বি) 8413 নিরুত্তিদীপনী 8414 পরমত্থদীপনী সংগহমহাটীকাপাঠ 8415 অনুদীপনীপাঠ 8416 পট্ঠানুদ্দেস দীপনীপাঠ 8417 নমক্কারটীকা 8418 মহাপণামপাঠ 8419 লক্খণাতো বুদ্ধথোমনাগাথা 8420 সুতবন্দনা 8421 কমলাঞ্জলি 8422 জিনালংকার 8423 পজ্জমধু 8424 বুদ্ধগুণগাথাবলী 8425 চূলগন্থবংস 8426 মহাবংস 8427 সাসনবংস 8428 কচ্চায়নব্যাকরণং 8429 মোগ্গল্লানব্যাকরণং 8430 সদ্দনীতিপ্পকরণং (পদমালা) 8431 সদ্দনীতিপ্পকরণং (ধাতুমালা) 8432 পদরূপসিদ্ধি 8433 মোগ্গল্লানপঞ্চিকা 8434 পযোগসিদ্ধিপাঠ 8435 বুত্তোদয়পাঠ 8436 অভিধানপ্পদীপিকাপাঠ 8437 অভিধানপ্পদীপিকাটীকা 8438 সুবোধালংকারপাঠ 8439 সুবোধালংকারটীকা 8440 বালাবতার গণ্ঠিপদত্থবিনিচ্ছয়সার 8441 লোকনীতি 8442 সুত্তন্তনীতি 8443 সূরস্সতীনীতি 8444 মহারহনীতি 8445 ধম্মনীতি 8446 কবিদপ্পণনীতি 8447 নীতিমঞ্জরী 8448 নরদক্খদীপনী 8449 চতুরারক্খদীপনী 8450 চাণক্যনীতি 8451 রসবাহিনী 8452 সীমাবিসোধনীপাঠ 8453 বেস্সন্তরগীতি 8454 মোগ্গল্লান বুত্তিবিবরণপঞ্চিকা 8455 থূপবংস 8456 দাঠাবংস 8457 ধাতুপাঠবিলাসিনিয়া 8458 ধাতুবংস 8459 হত্থবনগল্লবিহারবংস 8460 জিনচরিতয় 8461 জিনবংসদীপং 8462 তেলকটাহগাথা 8463 মিলিদটীকা 8464 পদমঞ্জরী 8465 পদসাধনং 8466 সদ্দবিন্দুপকরণং 8467 কচ্চায়নধাতুমঞ্জুসা 8468 সামন্তকূটবণ্ণনা |
| 2101 সীলক্খন্ধবগ্গ পালি 2102 মহাবগ্গ পালি (দীঘ) 2103 পাথিকবগ্গ পালি | 2201 সীলক্খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 2202 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (দীঘ) 2203 পাথিকবগ্গ অট্ঠকথা | 2301 সীলক্খন্ধবগ্গ টীকা 2302 মহাবগ্গ টীকা (দীঘ) 2303 পাথিকবগ্গ টীকা 2304 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-১ 2305 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-২ | |
| 3101 মূলপণ্ণাস পালি 3102 মজ্ঝিমপণ্ণাস পালি 3103 উপরিপণ্ণাস পালি | 3201 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-১ 3202 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-২ 3203 মজ্ঝিমপণ্ণাস অট্ঠকথা 3204 উপরিপণ্ণাস অট্ঠকথা | 3301 মূলপণ্ণাস টীকা 3302 মজ্ঝিমপণ্ণাস টীকা 3303 উপরিপণ্ণাস টীকা | |
| 4101 সগাথাবগ্গ পালি 4102 নিদানবগ্গ পালি 4103 খন্ধবগ্গ পালি 4104 সলায়তনবগ্গ পালি 4105 মহাবগ্গ পালি (সংযুত্ত) | 4201 সগাথাবগ্গ অট্ঠকথা 4202 নিদানবগ্গ অট্ঠকথা 4203 খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 4204 সলায়তনবগ্গ অট্ঠকথা 4205 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (সংযুত্ত) | 4301 সগাথাবগ্গ টীকা 4302 নিদানবগ্গ টীকা 4303 খন্ধবগ্গ টীকা 4304 সলায়তনবগ্গ টীকা 4305 মহাবগ্গ টীকা (সংযুত্ত) | |
| 5101 এককনিপাত পালি 5102 দুকনিপাত পালি 5103 তিকনিপাত পালি 5104 চতুক্কনিপাত পালি 5105 পঞ্চকনিপাত পালি 5106 ছক্কনিপাত পালি 5107 সত্তকনিপাত পালি 5108 অট্ঠকাদিনিপাত পালি 5109 নবকনিপাত পালি 5110 দশকনিপাত পালি 5111 একাদশকনিপাত পালি | 5201 এককনিপাত অট্ঠকথা 5202 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত অট্ঠকথা 5203 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত অট্ঠকথা 5204 অট্ঠকাদিনিপাত অট্ঠকথা | 5301 এককনিপাত টীকা 5302 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত টীকা 5303 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত টীকা 5304 অট্ঠকাদিনিপাত টীকা | |
| 6101 খুদ্ধকপাঠ পালি 6102 ধম্মপদ পালি 6103 উদান পালি 6104 ইতিবুত্তক পালি 6105 সুত্তনিপাত পালি 6106 বিমানবত্থু পালি 6107 পেতবত্থু পালি 6108 থেরগাথা পালি 6109 থেরীগাথা পালি 6110 অপদান পালি-১ 6111 অপদান পালি-২ 6112 বুদ্ধবংস পালি 6113 চরিয়াপিটক পালি 6114 জাতক পালি-১ 6115 জাতক পালি-২ 6116 মহানিদ্দেস পালি 6117 চূলনিদ্দেস পালি 6118 পটিসম্ভিদামগ্গ পালি 6119 নেত্তিপ্পকরণ পালি 6120 মিলিন্দপঞ্হ পালি 6121 পেটকোপদেস পালি | 6201 খুদ্ধকপাঠ অট্ঠকথা 6202 ধম্মপদ অট্ঠকথা-১ 6203 ধম্মপদ অট্ঠকথা-২ 6204 উদান অট্ঠকথা 6205 ইতিবুত্তক অট্ঠকথা 6206 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-১ 6207 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-২ 6208 বিমানবত্থু অট্ঠকথা 6209 পেতবত্থু অট্ঠকথা 6210 থেরগাথা অট্ঠকথা-১ 6211 থেরগাথা অট্ঠকথা-২ 6212 থেরীগাথা অট্ঠকথা 6213 অপদান অট্ঠকথা-১ 6214 অপদান অট্ঠকথা-২ 6215 বুদ্ধবংস অট্ঠকথা 6216 চরিয়াপিটক অট্ঠকথা 6217 জাতক অট্ঠকথা-১ 6218 জাতক অট্ঠকথা-২ 6219 জাতক অট্ঠকথা-৩ 6220 জাতক অট্ঠকথা-৪ 6221 জাতক অট্ঠকথা-৫ 6222 জাতক অট্ঠকথা-৬ 6223 জাতক অট্ঠকথা-৭ 6224 মহানিদ্দেস অট্ঠকথা 6225 চূলনিদ্দেস অট্ঠকথা 6226 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-১ 6227 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-২ 6228 নেত্তিপ্পকরণ অট্ঠকথা | 6301 নেত্তিপ্পকরণ টীকা 6302 নেত্তিবিভাবিনী | |
| 7101 ধম্মসংগণী পালি 7102 বিভঙ্গ পালি 7103 ধাতুকথা পালি 7104 পুগ্গলপঞ্ঞাত্তি পালি 7105 কথাবত্থু পালি 7106 যমক পালি-১ 7107 যমক পালি-২ 7108 যমক পালি-৩ 7109 পট্ঠান পালি-১ 7110 পট্ঠান পালি-২ 7111 পট্ঠান পালি-৩ 7112 পট্ঠান পালি-৪ 7113 পট্ঠান পালি-৫ | 7201 ধম্মসংগণি অট্ঠকথা 7202 সম্মোহবিনোদনী অট্ঠকথা 7203 পঞ্চপকরণ অট্ঠকথা | 7301 ধম্মসংগণী-মূলটীকা 7302 বিভঙ্গ-মূলটীকা 7303 পঞ্চপকরণ-মূলটীকা 7304 ধম্মসংগণী-অনুটীকা 7305 পঞ্চপকরণ-অনুটীকা 7306 অভিধম্মাবতারো-নামরূপপরিচ্ছেদো 7307 অভিধম্মত্থসংগহো 7308 অভিধম্মাবতার-পুরাণটীকা 7309 অভিধম্মমাতিকাপালি | |
| 中文 | |||
| 巴利 | 義註 | 複註 | 藏外典籍 |
| 1101 巴拉基咖(波羅夷) 1102 巴吉帝亞(波逸提) 1103 大品(律藏) 1104 小品 1105 附隨 | 1201 巴拉基咖(波羅夷)義註-1 1202 巴拉基咖(波羅夷)義註-2 1203 巴吉帝亞(波逸提)義註 1204 大品義註(律藏) 1205 小品義註 1206 附隨義註 | 1301 心義燈-1 1302 心義燈-2 1303 心義燈-3 | 1401 疑惑度脫 1402 律攝註釋 1403 金剛智疏 1404 疑難解除疏-1 1405 疑難解除疏-2 1406 律莊嚴疏-1 1407 律莊嚴疏-2 1408 古老解惑疏 1409 律抉擇-上抉擇 1410 律抉擇疏-1 1411 律抉擇疏-2 1412 巴吉帝亞等啟請經 1413 小戒學-根本戒學 8401 清淨道論-1 8402 清淨道論-2 8403 清淨道大複註-1 8404 清淨道大複註-2 8405 清淨道論導論 8406 長部問答 8407 中部問答 8408 相應部問答 8409 增支部問答 8410 律藏問答 8411 論藏問答 8412 義注問答 8413 語言學詮釋手冊 8414 勝義顯揚 8415 隨燈論誦 8416 發趣論燈論 8417 禮敬文 8418 大禮敬文 8419 依相讚佛偈 8420 經讚 8421 蓮花供 8422 勝者莊嚴 8423 語蜜 8424 佛德偈集 8425 小史 8427 佛教史 8426 大史 8429 目犍連文法 8428 迦旃延文法 8430 文法寶鑑(詞幹篇) 8431 文法寶鑑(詞根篇) 8432 詞形成論 8433 目犍連五章 8434 應用成就讀本 8435 音韻論讀本 8436 阿毗曇燈讀本 8437 阿毗曇燈疏 8438 妙莊嚴論讀本 8439 妙莊嚴論疏 8440 初學入門義抉擇精要 8446 詩王智論 8447 智論花鬘 8445 法智論 8444 大羅漢智論 8441 世間智論 8442 經典智論 8443 勇士百智論 8450 考底利耶智論 8448 人眼燈 8449 四護衛燈 8451 妙味之流 8452 界清淨 8453 韋桑達拉頌 8454 目犍連語釋五章 8455 塔史 8456 佛牙史 8457 詞根讀本注釋 8458 舍利史 8459 象頭山寺史 8460 勝者行傳 8461 勝者宗燈 8462 油鍋偈 8463 彌蘭王問疏 8464 詞花鬘 8465 詞成就論 8466 正理滴論 8467 迦旃延詞根注 8468 邊境山注釋 |
| 2101 戒蘊品 2102 大品(長部) 2103 波梨品 | 2201 戒蘊品註義註 2202 大品義註(長部) 2203 波梨品義註 | 2301 戒蘊品疏 2302 大品複註(長部) 2303 波梨品複註 2304 戒蘊品新複註-1 2305 戒蘊品新複註-2 | |
| 3101 根本五十經 3102 中五十經 3103 後五十經 | 3201 根本五十義註-1 3202 根本五十義註-2 3203 中五十義註 3204 後五十義註 | 3301 根本五十經複註 3302 中五十經複註 3303 後五十經複註 | |
| 4101 有偈品 4102 因緣品 4103 蘊品 4104 六處品 4105 大品(相應部) | 4201 有偈品義注 4202 因緣品義注 4203 蘊品義注 4204 六處品義注 4205 大品義注(相應部) | 4301 有偈品複註 4302 因緣品註 4303 蘊品複註 4304 六處品複註 4305 大品複註(相應部) | |
| 5101 一集經 5102 二集經 5103 三集經 5104 四集經 5105 五集經 5106 六集經 5107 七集經 5108 八集等經 5109 九集經 5110 十集經 5111 十一集經 | 5201 一集義註 5202 二、三、四集義註 5203 五、六、七集義註 5204 八、九、十、十一集義註 | 5301 一集複註 5302 二、三、四集複註 5303 五、六、七集複註 5304 八集等複註 | |
| 6101 小誦 6102 法句經 6103 自說 6104 如是語 6105 經集 6106 天宮事 6107 餓鬼事 6108 長老偈 6109 長老尼偈 6110 譬喻-1 6111 譬喻-2 6112 諸佛史 6113 所行藏 6114 本生-1 6115 本生-2 6116 大義釋 6117 小義釋 6118 無礙解道 6119 導論 6120 彌蘭王問 6121 藏釋 | 6201 小誦義注 6202 法句義注-1 6203 法句義注-2 6204 自說義注 6205 如是語義註 6206 經集義注-1 6207 經集義注-2 6208 天宮事義注 6209 餓鬼事義注 6210 長老偈義注-1 6211 長老偈義注-2 6212 長老尼義注 6213 譬喻義注-1 6214 譬喻義注-2 6215 諸佛史義注 6216 所行藏義注 6217 本生義注-1 6218 本生義注-2 6219 本生義注-3 6220 本生義注-4 6221 本生義注-5 6222 本生義注-6 6223 本生義注-7 6224 大義釋義注 6225 小義釋義注 6226 無礙解道義注-1 6227 無礙解道義注-2 6228 導論義注 | 6301 導論複註 6302 導論明解 | |
| 7101 法集論 7102 分別論 7103 界論 7104 人施設論 7105 論事 7106 雙論-1 7107 雙論-2 7108 雙論-3 7109 發趣論-1 7110 發趣論-2 7111 發趣論-3 7112 發趣論-4 7113 發趣論-5 | 7201 法集論義註 7202 分別論義註(迷惑冰消) 7203 五部論義註 | 7301 法集論根本複註 7302 分別論根本複註 7303 五論根本複註 7304 法集論複註 7305 五論複註 7306 阿毘達摩入門 7307 攝阿毘達磨義論 7308 阿毘達摩入門古複註 7309 阿毘達摩論母 | |
| English | |||
| Pali Canon | Commentaries | Sub-commentaries | Other |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
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| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| हिंदी | |||
| पाली कैनन | कमेंट्री | उप-टिप्पणियाँ | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळि 1102 पाचित्तिय पाळि 1103 महावग्ग पाळि (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळि 1105 परिवार पाळि | 1201 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-1 1202 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-2 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-1 1302 सारत्थदीपनी टीका-2 1303 सारत्थदीपनी टीका-3 | 1401 द्वेमातिकापाळि 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-1 1405 विमतिविनोदनी टीका-2 1406 विनयालंकार टीका-1 1407 विनयालंकार टीका-2 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-1 1411 विनयविनिच्छय टीका-2 1412 पाचित्यादियोजनापाळि 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-1 8402 विसुद्धिमग्ग-2 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-1 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-2 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अङ्गुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी सङ्गहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवन्दना 8421 कमलाञ्जलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगन्थवंस 8427 सासनवंस 8426 महावंस 8429 मोग्गल्लानब्याकरणं 8428 कच्चायनब्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपञ्चिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गण्ठिपदत्थविनिच्छयसार 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमञ्जरी 8445 धम्मनीति 8444 महारहनीति 8441 लोकनीति 8442 सुत्तन्तनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8450 चाणक्यनीति 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8451 रसवाहिनी 8452 सीमविसोधनीपाठ 8453 वेस्सन्तरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपञ्चिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमञ्जरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिन्दुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमञ्जुसा 8468 सामन्तकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खन्धवग्ग पाळि 2102 महावग्ग पाळि (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळि | 2201 सीलक्खन्धवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खन्धवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-1 2305 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-2 | |
| 3101 मूलपण्णास पाळि 3102 मज्झिमपण्णास पाळि 3103 उपरिपण्णास पाळि | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-1 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-2 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळि 4102 निदानवग्ग पाळि 4103 खन्धवग्ग पाळि 4104 सळायतनवग्ग पाळि 4105 महावग्ग पाळि (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खन्धवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खन्धवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळि 5102 दुकनिपात पाळि 5103 तिकनिपात पाळि 5104 चतुक्कनिपात पाळि 5105 पञ्चकनिपात पाळि 5106 छक्कनिपात पाळि 5107 सत्तकनिपात पाळि 5108 अट्ठकादिनिपात पाळि 5109 नवकनिपात पाळि 5110 दसकनिपात पाळि 5111 एकादसकनिपात पाळि | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळि 6102 धम्मपद पाळि 6103 उदान पाळि 6104 इतिवुत्तक पाळि 6105 सुत्तनिपात पाळि 6106 विमानवत्थु पाळि 6107 पेतवत्थु पाळि 6108 थेरगाथा पाळि 6109 थेरीगाथा पाळि 6110 अपदान पाळि-1 6111 अपदान पाळि-2 6112 बुद्धवंस पाळि 6113 चरियापिटक पाळि 6114 जातक पाळि-1 6115 जातक पाळि-2 6116 महानिद्देस पाळि 6117 चूळनिद्देस पाळि 6118 पटिसम्भिदामग्ग पाळि 6119 नेत्तिप्पकरण पाळि 6120 मिलिन्दपञ्ह पाळि 6121 पेटकोपदेस पाळि | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-1 6203 धम्मपद अट्ठकथा-2 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-1 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-2 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-1 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-2 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-1 6214 अपदान अट्ठकथा-2 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-1 6218 जातक अट्ठकथा-2 6219 जातक अट्ठकथा-3 6220 जातक अट्ठकथा-4 6221 जातक अट्ठकथा-5 6222 जातक अट्ठकथा-6 6223 जातक अट्ठकथा-7 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-1 6227 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-2 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसङ्गणी पाळि 7102 विभङ्ग पाळि 7103 धातुकथा पाळि 7104 पुग्गलपञ्ञत्ति पाळि 7105 कथावत्थु पाळि 7106 यमक पाळि-1 7107 यमक पाळि-2 7108 यमक पाळि-3 7109 पट्ठान पाळि-1 7110 पट्ठान पाळि-2 7111 पट्ठान पाळि-3 7112 पट्ठान पाळि-4 7113 पट्ठान पाळि-5 | 7201 धम्मसङ्गणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पञ्चपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसङ्गणी-मूलटीका 7302 विभङ्ग-मूलटीका 7303 पञ्चपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसङ्गणी-अनुटीका 7305 पञ्चपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसङ्गहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळि | |
| Indonesia | |||
| Kanon Pali | Komentar | Sub-komentar | Lainnya |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| 日文 | |||
| パーリ仏典 | 註釈書 | 副註釈書 | その他 |
| 1101 パーラージカ・パーリ 1102 パーチッティヤ・パーリ 1103 マハーヴァッガ・パーリ(ヴィナヤ) 1104 チューラヴァッガ・パーリ 1105 パリヴァーラ・パーリ | 1201 パーラージカカンダ・アッタカター-1 1202 パーラージカカンダ・アッタカター-2 1203 パーチッティヤ・アッタカター 1204 マハーヴァッガ・アッタカター(ヴィナヤ) 1205 チューラヴァッガ・アッタカター 1206 パリヴァーラ・アッタカター | 1301 サーラッタディーパニー・ティーカー-1 1302 サーラッタディーパニー・ティーカー-2 1303 サーラッタディーパニー・ティーカー-3 | 1401 ドヴェマーティカー・パーリ 1402 ヴィナヤサンガハ・アッタカター 1403 ヴァジラブッディ・ティーカー 1404 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-1 1405 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-2 1406 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-1 1407 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-2 1408 カンカーウィタラニープラーナ・ティーカー 1409 ヴィナヤヴィニッチャヤ-ウッタラヴィニッチャヤ 1410 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-1 1411 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-2 1412 パーチッティヤーディヨージャナー・パーリ 1413 クッダシッカー-ムーラシッカー 8401 ヴィスッディマッガ-1 8402 ヴィスッディマッガ-2 8403 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-1 8404 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-2 8405 ヴィスッディマッガ・ニダーナカター 8406 ディーガニカーヤ(プ・ヴィ) 8407 マッジマニカーヤ(プ・ヴィ) 8408 サンユッタニカーヤ(プ・ヴィ) 8409 アングッタラニカーヤ(プ・ヴィ) 8410 ヴィナヤピタカ(プ・ヴィ) 8411 アビダンマピタカ(プ・ヴィ) 8412 アッタカター(プ・ヴィ) 8413 ニルッティディーパニー 8414 パラマッタディーパニー・サンガハマハーティカーパータ 8415 アヌディーパニーパータ 8416 パッターヌッデーサ・ディーパニーパータ 8417 ナマッカラ・ティーカー 8418 マハーパナーマ・パータ 8419 ラッカナート・ブッダトーマナーガーター 8420 スタヴァンダナー 8421 カマラーニャジャリ 8422 ジナランカーラ 8423 パッジャマドゥ 8424 ブッダグナガーター・ヴァリー 8425 チューラガンタヴァンサ 8427 サーサナヴァンサ 8426 マハーヴァンサ 8429 モッガラーナ・ビャーカラナン 8428 カッチャーヤナ・ビャーカラナン 8430 サッダニーティッパカラナン(パダマーラー) 8431 サッダニーティッパカラナン(ダートゥマーラー) 8432 パダルーパシッディ 8433 モッガラーナ・パンチカー 8434 パヨーガシッディ・パータ 8435 ヴットーダヤ・パータ 8436 アビダーナッパディーピカー・パータ 8437 アビダーナッパディーピカー・ティーカー 8438 スボーダーランカーラ・パータ 8439 スボーダーランカーラ・ティーカー 8440 バーラーヴァターラ・ガンティパダッタヴィニッチャヤサーラ 8446 カヴィダッパナニーティ 8447 ニーティマンジャリー 8445 ダンマニーティ 8444 マハーラハニーティ 8441 ローカニーティ 8442 スタンタニーティ 8443 スーラッサティニーティ 8450 チャーナキャニーティ 8448 ナラダッカディーパニー 8449 チャトゥラーラッカディーパニー 8451 ラサヴァーヒニー 8452 シーマヴィソーダニー・パータ 8453 ヴェッサンタラ・ギーティ 8454 モッガラーナ・ヴッティヴィヴァラナパンチカー 8455 トゥーパヴァンサ 8456 ダーターヴァンサ 8457 ダートゥパータヴィラーヴィシニヤー 8458 ダートゥヴァンサ 8459 ハッタヴァナッガラヴィハーラヴァンサ 8460 ジナチャリタヤ 8461 ジナヴァンサディーパン 8462 テーラカターガーター 8463 ミリダ・ティーカー 8464 パダマンジャリー 8465 パダサーダナン 8466 サッダビンドゥパカラナン 8467 カッチャーヤナ・ダートゥマンジューサー 8468 サーマンタクータ・ヴァンナナー |
| 2101 シーラッカンダワッガ・パーリ 2102 マハーワッガ・パーリ(ディーガ) 2103 パーティカワッガ・パーリ | 2201 シーラッカンダワッガ・アッタカター 2202 マハーワッガ・アッタカター(ディーガ) 2203 パーティカワッガ・アッタカター | 2301 シーラッカンダワッガ・ティーカー 2302 マハーワッガ・ティーカー(ディーガ) 2303 パーティカワッガ・ティーカー 2304 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-1 2305 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-2 | |
| 3101 ムーラパンナーサ・パーリ 3102 マッジマパンナーサ・パーリ 3103 ウパリパンナーサ・パーリ | 3201 ムーラパンナーサ・アッタカター-1 3202 ムーラパンナーサ・アッタカター-2 3203 マッジマパンナーサ・アッタカター 3204 ウパリパンナーサ・アッタカター | 3301 ムーラパンナーサ・ティーカー 3302 マッジマパンナーサ・ティーカー 3303 ウパリパンナーサ・ティーカー | |
| 4101 サガーター・ワッガ・パーリ 4102 ニダーナ・ワッガ・パーリ 4103 カンダ・ワッガ・パーリ 4104 サラーヤタナ・ワッガ・パーリ 4105 マハーワッガ・パーリ(サンユッタ) | 4201 サガーター・ワッガ・アッタカター 4202 ニダーナ・ワッガ・アッタカター 4203 カンダ・ワッガ・アッタカター 4204 サラーヤタナ・ワッガ・アッタカター 4205 マハーワッガ・アッタカター(サンユッタ) | 4301 サガーター・ワッガ・ティーカー 4302 ニダーナ・ワッガ・ティーカー 4303 カンダ・ワッガ・ティーカー 4304 サラーヤタナ・ワッガ・ティーカー 4305 マハーワッガ・ティーカー(サンユッタ) | |
| 5101 エーカカニパータ・パーリ 5102 ドゥカニパータ・パーリ 5103 ティカニパータ・パーリ 5104 チャトゥッカニパータ・パーリ 5105 パンチャカニパータ・パーリ 5106 チャッカニパータ・パーリ 5107 サッタカニパータ・パーリ 5108 アッタカーディニパータ・パーリ 5109 ナヴァカニパータ・パーリ 5110 ダサカニパータ・パーリ 5111 エーカーダサカニパータ・パーリ | 5201 エーカカニパータ・アッタカター 5202 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・アッタカター 5203 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・アッタカター 5204 アッタカーディニパータ・アッタカター | 5301 エーカカニパータ・ティーカー 5302 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・ティーカー 5303 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・ティーカー 5304 アッタカーディニパータ・ティーカー | |
| 6101 クッダカパータ・パーリ 6102 ダンマパダ・パーリ 6103 ウダーナ・パーリ 6104 イティヴッタカ・パーリ 6105 スッタニパータ・パーリ 6106 ヴィマーナヴァットゥ・パーリ 6107 ペーヴァットゥ・パーリ 6108 テーラガーター・パーリ 6109 テーリーガーター・パーリ 6110 アパダーナ・パーリ-1 6111 アパダーナ・パーリ-2 6112 ブッダヴァンサ・パーリ 6113 チャリヤーピタカ・パーリ 6114 ジャータカ・パーリ-1 6115 ジャータカ・パーリ-2 6116 マハーニッデーサ・パーリ 6117 チューラニッデーサ・パーリ 6118 パティサンビダーマッガ・パーリ 6119 ネッティッパカラナ・パーリ 6120 ミリンダパンハ・パーリ 6121 ペータコーパデーサ・パーリ | 6201 クッダカパータ・アッタカター 6202 ダンマパダ・アッタカター-1 6203 ダンマパダ・アッタカター-2 6204 ウダーナ・アッタカター 6205 イティヴッタカ・アッタカター 6206 スッタニパータ・アッタカター-1 6207 スッタニパータ・アッタカター-2 6208 ヴィマーナヴァットゥ・アッタカター 6209 ペータヴァットゥ・アッタカター 6210 テーラガーター・アッタカター-1 6211 テーラガーター・アッタカター-2 6212 テーリーガーター・アッタカター 6213 アパダーナ・アッタカター-1 6214 アパダーナ・アッタカター-2 6215 ブッダヴァンサ・アッタカター 6216 チャリヤーピタカ・アッタカター 6217 ジャータカ・アッタカター-1 6218 ジャータカ・アッタカター-2 6219 ジャータカ・アッタカター-3 6220 ジャータカ・アッタカター-4 6221 ジャータカ・アッタカター-5 6222 ジャータカ・アッタカター-6 6223 ジャータカ・アッタカター-7 6224 マハーニッデーサ・アッタカター 6225 チューラニッデーサ・アッタカター 6226 パティサンビダーマッガ・アッタカター-1 6227 パティサンビダーマッガ・アッタカター-2 6228 ネッティッパカラナ・アッタカター | 6301 ネッティッパカラナ・ティーカー 6302 ネッティヴィバーヴィニー | |
| 7101 ダンマサンガニー・パーリ 7102 ヴィバンガ・パーリ 7103 ダートゥカター・パーリ 7104 プッガラパンニャッティ・パーリ 7105 カター・ヴァットゥ・パーリ 7106 ヤマカ・パーリ-1 7107 ヤマカ・パーリ-2 7108 ヤマカ・パーリ-3 7109 パッターナ・パーリ-1 7110 パッターナ・パーリ-2 7111 パッターナ・パーリ-3 7112 パッターナ・パーリ-4 7113 パッターナ・パーリ-5 | 7201 ダンマサンガニ・アッタカター 7202 サンモーハヴィノーダニー・アッタカター 7203 パンチャパカラナ・アッタカター | 7301 ダンマサンガニー・ムーラティーカー 7302 ヴィバンガ・ムーラティーカー 7303 パンチャパカラナ・ムーラティーカー 7304 ダンマサンガニー・アヌティーカー 7305 パンチャパカラナ・アヌティーカー 7306 アビダンマーヴァターロ・ナーマルーパパリッチェード 7307 アビダンマッタ・サンガホ 7308 アビダンマーヴァターラ・プラーナティーカー 7309 アビダンマ・マーティカーパーリ | |
| ខ្មែរ | |||
| ព្រះត្រៃបិដកបាលី | អដ្ឋកថា | ដីកា | ផ្សេងទៀត |
| 1101 បារាជិកបាឡិ 1102 បាចិត្តិយបាឡិ 1103 មហាវគ្គបាឡិ (វិន័យ) 1104 ចូឡវគ្គបាឡិ 1105 បរិវារបាឡិ | 1201 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-១ 1202 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-២ 1203 បាចិត្តិយអដ្ឋកថា 1204 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (វិន័យ) 1205 ចូឡវគ្គអដ្ឋកថា 1206 បរិវារអដ្ឋកថា | 1301 សារត្ថទីបនីដីកា-១ 1302 សារត្ថទីបនីដីកា-២ 1303 សារត្ថទីបនីដីកា-៣ | 1401 ទ្វេមាតិកាបាឡិ 1402 វិនយសង្គហអដ្ឋកថា 1403 វជិរពុទ្ធិដីកា 1404 វិមតិវិនោទនីដីកា-១ 1405 វិមតិវិនោទនីដីកា-២ 1406 វិនយាលង្ការដីកា-១ 1407 វិនយាលង្ការដីកា-២ 1408 កង្ខាវិតរណីបុរាណដីកា 1409 វិនយវិនិច្ឆយ-ឧត្តរវិនិច្ឆយ 1410 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-១ 1411 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-២ 1412 បាចិត្យាទិយោជនាបាឡិ 1413 ខុទ្ទសិក្ខា-មូលសិក្ខា 8401 វិសុទ្ធិមគ្គ-១ 8402 វិសុទ្ធិមគ្គ-២ 8403 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-១ 8404 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-២ 8405 វិសុទ្ធិមគ្គ និទានកថា 8406 ទីឃនិកាយ (បុ-វិ) 8407 មជ្ឈិមនិកាយ (បុ-វិ) 8408 សំយុត្តនិកាយ (បុ-វិ) 8409 អង្គុត្តរនិកាយ (បុ-វិ) 8410 វិនយបិដក (បុ-វិ) 8411 អភិធម្មបិដក (បុ-វិ) 8412 អដ្ឋកថា (បុ-វិ) 8413 និរុត្តិទីបនី 8414 បរមត្ថទីបនី សង្គហមហាដីកាបាឋ 8415 អនុទីបនីបាឋ 8416 បដ្ឋានុទ្ទេស ទីបនីបាឋ 8417 នមក្ការដីកា 8418 មហាបណាមបាឋ 8419 លក្ខណាតោ ពុទ្ធថោមនាគាថា 8420 សុតវន្ទនា 8421 កមលាញ្ជលិ 8422 ជិនាលង្ការ 8423 បជ្ជមធុ 8424 ពុទ្ធគុណគាថាវលី 8425 ចូឡគន្ថវង្ស 8427 សាសនវង្ស 8426 មហាវង្ស 8429 មោគ្គល្លានព្យាករណំ 8428 កច្ចាយនព្យាករណំ 8430 សទ្ទនីតិប្បករណំ (បទមាលា) 8431 សទ្ទនីតិប្បករណំ (ធាតុមាលា) 8432 បទរូបសិទ្ធិ 8433 មោគ្គល្លានបញ្ចិកា 8434 បយោគសិទ្ធិបាឋ 8435 វុត្តោទយបាឋ 8436 អភិធានប្បទីបិកាបាឋ 8437 អភិធានប្បទីបិកាដីកា 8438 សុពោធាលង្ការបាឋ 8439 សុពោធាលង្ការដីកា 8440 បាលាវតារ គណ្ឋិបទត្ថវិនិច្ឆយសារ 8446 កវិទប្បណនីតិ 8447 នីតិមញ្ជរី 8445 ធម្មនីតិ 8444 មហារហនីតិ 8441 លោកនីតិ 8442 សុត្តន្តនីតិ 8443 សូរស្សតិនីតិ 8450 ចាណក្យនីតិ 8448 នរទក្ខទីបនី 8449 ចតុរារក្ខទីបនី 8451 រសវាហិនី 8452 សីមវិសោធនីបាឋ 8453 វេស្សន្តរគីតិ 8454 មោគ្គល្លាន វុត្តិវិវរណបញ្ចិកា 8455 ថូបវង្ស 8456 ទាឋាវង្ស 8457 ធាតុបាឋវិលាសិនិយា 8458 ធាតុវង្ស 8459 ហត្ថវនគល្លវិហារវង្ស 8460 ជិនចរិតយ 8461 ជិនវង្សទីបំ 8462 តេលកដាហគាថា 8463 មិលិទដីកា 8464 បទមញ្ជរី 8465 បទសាធនំ 8466 សទ្ទពិន្ទុបករណំ 8467 កច្ចាយនធាតុមញ្ជុសា 8468 សាមន្តកូដវណ្ណនា |
| 2101 សីលក្ខន្ធវគ្គបាឡិ 2102 មហាវគ្គបាឡិ (ទីឃ) 2103 បាថិកវគ្គបាឡិ | 2201 សីលក្ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 2202 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (ទីឃ) 2203 បាថិកវគ្គអដ្ឋកថា | 2301 សីលក្ខន្ធវគ្គដីកា 2302 មហាវគ្គដីកា (ទីឃ) 2303 បាថិកវគ្គដីកា 2304 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-១ 2305 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-២ | |
| 3101 មូលបណ្ណាសបាឡិ 3102 មជ្ឈិមបណ្ណាសបាឡិ 3103 ឧបរិបណ្ណាសបាឡិ | 3201 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-១ 3202 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-២ 3203 មជ្ឈិមបណ្ណាសអដ្ឋកថា 3204 ឧបរិបណ្ណាសអដ្ឋកថា | 3301 មូលបណ្ណាសដីកា 3302 មជ្ឈិមបណ្ណាសដីកា 3303 ឧបរិបណ្ណាសដីកា | |
| 4101 សគាថាវគ្គបាឡិ 4102 និទានវគ្គបាឡិ 4103 ខន្ធវគ្គបាឡិ 4104 សឡាយតនវគ្គបាឡិ 4105 មហាវគ្គបាឡិ (សំយុត្ត) | 4201 សគាថាវគ្គអដ្ឋកថា 4202 និទានវគ្គអដ្ឋកថា 4203 ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 4204 សឡាយតនវគ្គអដ្ឋកថា 4205 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (សំយុត្ត) | 4301 សគាថាវគ្គដីកា 4302 និទានវគ្គដីកា 4303 ខន្ធវគ្គដីកា 4304 សឡាយតនវគ្គដីកា 4305 មហាវគ្គដីកា (សំយុត្ត) | |
| 5101 ឯកកនិបាតបាឡិ 5102 ទុកនិបាតបាឡិ 5103 តិកនិបាតបាឡិ 5104 ចតុក្កនិបាតបាឡិ 5105 បញ្ចកនិបាតបាឡិ 5106 ឆក្កនិបាតបាឡិ 5107 សត្តកនិបាតបាឡិ 5108 អដ្ឋកាទិនិបាតបាឡិ 5109 នវកនិបាតបាឡិ 5110 ទសកនិបាតបាឡិ 5111 ឯកាទសកនិបាតបាឡិ | 5201 ឯកកនិបាតអដ្ឋកថា 5202 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតអដ្ឋកថា 5203 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតអដ្ឋកថា 5204 អដ្ឋកាទិនិបាតអដ្ឋកថា | 5301 ឯកកនិបាតដីកា 5302 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតដីកា 5303 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតដីកា 5304 អដ្ឋកាទិនិបាតដីកា | |
| 6101 ខុទ្ទកបាឋបាឡិ 6102 ធម្មបទបាឡិ 6103 ឧទានបាឡិ 6104 ឥតិវុត្តកបាឡិ 6105 សុត្តនិបាតបាឡិ 6106 វិមានវត្ថុបាឡិ 6107 បេតវត្ថុបាឡិ 6108 ថេរគាថាបាឡិ 6109 ថេរីគាថាបាឡិ 6110 អបទានបាឡិ-១ 6111 អបទានបាឡិ-២ 6112 ពុទ្ធវង្សបាឡិ 6113 ចរិយាបិដកបាឡិ 6114 ជាតកបាឡិ-១ 6115 ជាតកបាឡិ-២ 6116 មហានិទ្ទេសបាឡិ 6117 ចូឡនិទ្ទេសបាឡិ 6118 បដិសម្ភិទាមគ្គបាឡិ 6119 នេត្តិប្បករណបាឡិ 6120 មិលិន្ទបញ្ហាបាឡិ 6121 បេដកោបទេសបាឡិ | 6201 ខុទ្ទកបាឋអដ្ឋកថា 6202 ធម្មបទអដ្ឋកថា-១ 6203 ធម្មបទអដ្ឋកថា-២ 6204 ឧទានអដ្ឋកថា 6205 ឥតិវុត្តកអដ្ឋកថា 6206 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-១ 6207 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-២ 6208 វិមានវត្ថុអដ្ឋកថា 6209 បេតវត្ថុអដ្ឋកថា 6210 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-១ 6211 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-២ 6212 ថេរីគាថាអដ្ឋកថា 6213 អបទានអដ្ឋកថា-១ 6214 អបទានអដ្ឋកថា-២ 6215 ពុទ្ធវង្សអដ្ឋកថា 6216 ចរិយាបិដកអដ្ឋកថា 6217 ជាតកអដ្ឋកថា-១ 6218 ជាតកអដ្ឋកថា-២ 6219 ជាតកអដ្ឋកថា-៣ 6220 ជាតកអដ្ឋកថា-៤ 6221 ជាតកអដ្ឋកថា-៥ 6222 ជាតកអដ្ឋកថា-៦ 6223 ជាតកអដ្ឋកថា-៧ 6224 មហានិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6225 ចូឡនិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6226 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-១ 6227 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-២ 6228 នេត្តិប្បករណអដ្ឋកថា | 6301 នេត្តិប្បករណដីកា 6302 នេត្តិវិភាវិនី | |
| 7101 ធម្មសង្គណីបាឡិ 7102 វិភង្គបាឡិ 7103 ធាតុកថាបាឡិ 7104 បុគ្គលបញ្ញត្តិបាឡិ 7105 កថាវត្ថុបាឡិ 7106 យមកបាឡិ-១ 7107 យមកបាឡិ-២ 7108 យមកបាឡិ-៣ 7109 បដ្ឋានបាឡិ-១ 7110 បដ្ឋានបាឡិ-២ 7111 បដ្ឋានបាឡិ-៣ 7112 បដ្ឋានបាឡិ-៤ 7113 បដ្ឋានបាឡិ-៥ | 7201 ធម្មសង្គណិអដ្ឋកថា 7202 សម្មោហវិនោទនីអដ្ឋកថា 7203 បញ្ចបករណអដ្ឋកថា | 7301 ធម្មសង្គណី-មូលដីកា 7302 វិភង្គ-មូលដីកា 7303 បញ្ចបករណ-មូលដីកា 7304 ធម្មសង្គណី-អនុដីកា 7305 បញ្ចបករណ-អនុដីកា 7306 អភិធម្មាវតារោ-នាមរូបបរិច្ឆេទោ 7307 អភិធម្មត្ថសង្គហោ 7308 អភិធម្មាវតារ-បុរាណដីកា 7309 អភិធម្មមាតិកាបាឡិ | |
| 한국인 | |||
| 팔리 대장경 | 주석서 | 부주석서 | 기타 |
| 1101 빠라지카 빨리 1102 빠찟띠야 빨리 1103 마하왁가 빨리 (비나야) 1104 출라왁가 빨리 1105 빠리와라 빨리 | 1201 빠라지까깐다 앗타카타-1 1202 빠라지까깐다 앗타카타-2 1203 빠찟띠야 앗타카타 1204 마하왁가 앗타카타 (비나야) 1205 출라왁가 앗타카타 1206 빠리와라 앗타카타 | 1301 사랏타디빠니 띠까-1 1302 사랏타디빠니 띠까-2 1303 사랏타디빠니 띠까-3 | 1401 드베마띠까빨리 1402 위나야상가하 앗타카타 1403 와지라붓디 띠까 1404 위마띠위노다니 띠까-1 1405 위마띠위노다니 띠까-2 1406 위나야랑까라 띠까-1 1407 위나야랑까라 띠까-2 1408 깡카위따라니뿌라나 띠까 1409 위나야위닛차야-웃따라위닛차야 1410 위나야위닛차야 띠까-1 1411 위나야위닛차야 띠까-2 1412 빠찟땨디요자나빨리 1413 쿳닷시카-물라시카 8401 위숟디막가-1 8402 위숟디막가-2 8403 위숟디막가-마하띠까-1 8404 위숟디막가-마하띠까-2 8405 위숟디막가 니다나까타 8406 디가니까야 (뿌-위) 8407 맛지마니까야 (뿌-위) 8408 삼윳따니까야 (뿌-위) 8409 앙굳따라니까야 (뿌-위) 8410 위나야삐따까 (뿌-위) 8411 아비담마삐따까 (뿌-위) 8412 앗타카타 (뿌-위) 8413 니룻띠디빠니 8414 빠라맛타디빠니 상가하마하띠까빠타 8415 아누디빠니빠타 8416 빳타누ㄸ데사 디빠니빠타 8417 나막까라띠까 8418 마하빠나마빠타 8419 락카나또 붓다토마나가타 8420 수타완다나 8421 까말란자리 8422 지나랑까라 8423 빳자마두 8424 붓다구나가타왈리 8425 출라간타왕사 8427 사사나왕사 8426 마하왕사 8429 목갈라나뱌까라낭 8428 깟차야나뱌까라낭 8430 삿다니띠빠까라낭 (빠다말라) 8431 삿다니띠빠까라낭 (다두말라) 8432 빠다루빠싣디 8433 목갈라나빤찌까 8434 빠요가싣디빠타 8435 붇또다야빠타 8436 아비다나빠디피까빠타 8437 아비다나빠디피까띠까 8438 수보다랑까라빠타 8439 수보다랑까라띠까 8440 발라와따라 간티빠닷타위닛차야사라 8446 까위닷빠나니띠 8447 니띠만자리 8445 담마니띠 8444 마하라하니띠 8441 로까니띠 8442 숫딴따니띠 8443 수랏사띠니띠 8450 짜낙야니띠 8448 나라닥카디빠니 8449 짜뚜라락카디빠니 8451 라사와히니 8452 시마위소다니빠타 8453 웨산따라기띠 8454 목갈라나 붇띠위와라나빤찌까 8455 투빠왕사 8456 다타왕사 8457 다두빠타윌라시니야 8458 다두왕사 8459 핟타와나갈라위하라왕사 8460 지나짜리따야 8461 지나왕사디빵 8462 떼라까타하가타 8463 밀리다띠까 8464 빠다만자리 8465 빠다사다낭 8466 삿다빈두빠까라낭 8467 깟차야나다두만주사 8468 사만따꿋타완나나 |
| 2101 실락칸다왁가 빨리 2102 마하왁가 빨리 (디가) 2103 빠티까왁가 빨리 | 2201 실락칸다왁가 앗타카타 2202 마하왁가 앗타카타 (디가) 2203 빠티까왁가 앗타카타 | 2301 실락칸다왁가 띠까 2302 마하왁가 띠까 (디가) 2303 빠티까왁가 띠까 2304 실락칸다왁가-아비나와띠까-1 2305 실락칸다왁가-아비나와띠까-2 | |
| 3101 물라빤나사 빨리 3102 맛지마빤나사 빨리 3103 우빠리빤나사 빨리 | 3201 물라빤나사 앗타카타-1 3202 물라빤나사 앗타카타-2 3203 맛지마빤나사 앗타카타 3204 우빠리빤나사 앗타카타 | 3301 물라빤나사 띠까 3302 맛지마빤나사 띠까 3303 우빠리빤나사 띠까 | |
| 4101 사가타왁가 빨리 4102 니다나왁가 빨리 4103 칸다왁가 빨리 4104 살라야따나왁가 빨리 4105 마하왁가 빨리 (삼윳따) | 4201 사가타왁가 앗타카타 4202 니다나왁가 앗타카타 4203 칸다왁가 앗타카타 4204 살라야따나왁가 앗타카타 4205 마하왁가 앗타카타 (삼윳따) | 4301 사가타왁가 띠까 4302 니다나왁가 띠까 4303 칸다왁가 띠까 4304 살라야따나왁가 띠까 4305 마하왁가 띠까 (삼윳따) | |
| 5101 에까까니빠따 빨리 5102 두까니빠따 빨리 5103 띠까니빠따 빨리 5104 짜뚝까니빠따 빨리 5105 빤짜까니빠따 빨리 5106 착까니빠따 빨리 5107 삿따까니빠따 빨리 5108 앗타까디니빠따 빨리 5109 나와까니빠따 빨리 5110 다사까니빠따 빨리 5111 에까다사까니빠따 빨리 | 5201 에까까니빠따 앗타카타 5202 두까-띠까-짜뚝까니빠따 앗타카타 5203 빤짜까-착까-삿따까니빠따 앗타카타 5204 앗타까디니빠따 앗타카타 | 5301 에까까니빠따 띠까 5302 두까-띠까-짜뚝까니빠따 띠까 5303 빤짜까-착까-삿따까니빠따 띠까 5304 앗타까디니빠따 띠까 | |
| 6101 쿳닥까빠타 빨리 6102 담마빠다 빨리 6103 우다나 빨리 6104 이띠웃따까 빨리 6105 숫따니빠따 빨리 6106 위마나왓투 빨리 6107 베따왓투 빨리 6108 테라가타 빨리 6109 테리가타 빨리 6110 아빠다나 빨리-1 6111 아빠다나 빨리-2 6112 붓다왕사 빨리 6113 짜리야삐따까 빨리 6114 자따까 빨리-1 6115 자따까 빨리-2 6116 마하닷데사 빨리 6117 출라닷데사 빨리 6118 빠티삼비다막가 빨리 6119 넷띠빠까라나 빨리 6120 밀린다빤하 빨리 6121 뻬따꼬빠데사 빨리 | 6201 쿳닥까빠타 앗타카타 6202 담마빠다 앗타카타-1 6203 담마빠다 앗타카타-2 6204 우다나 앗타카타 6205 이띠웃따까 앗타카타 6206 숫따니빠따 앗타카타-1 6207 숫따니빠따 앗타카타-2 6208 위마나왓투 앗타카타 6209 베따왓투 앗타카타 6210 테라가타 앗타카타-1 6211 테라가타 앗타카타-2 6212 테리가타 앗타카타 6213 아빠다나 앗타카타-1 6214 아빠다나 앗타카타-2 6215 붓다왕사 앗타카타 6216 짜리야삐따까 앗타카타 6217 자따까 앗타카타-1 6218 자따까 앗타카타-2 6219 자따까 앗타카타-3 6220 자따까 앗타카타-4 6221 자따까 앗타카타-5 6222 자따까 앗타카타-6 6223 자따까 앗타카타-7 6224 마하닷데사 앗타카타 6225 출라닷데사 앗타카타 6226 빠티삼비다막가 앗타카타-1 6227 빠티삼비다막가 앗타카타-2 6228 넷띠빠까라나 앗타카타 | 6301 넷띠빠까라나 띠까 6302 넷띠위바비니 | |
| 7101 담마상가니 빨리 7102 위방가 빨리 7103 다뚜까타 빨리 7104 뿍갈라빤냣띠 빨리 7105 까타왓투 빨리 7106 야마까 빨리-1 7107 야마까 빨리-2 7108 야마까 빨리-3 7109 빳타나 빨리-1 7110 빳타나 빨리-2 7111 빳타나 빨리-3 7112 빳타나 빨리-4 7113 빳타나 빨리-5 | 7201 담마상가니 앗타카타 7202 삼모하위노다니 앗타카타 7203 빤짜빠까라나 앗타카타 | 7301 담마상가니-물라띠까 7302 위방가-물라띠까 7303 빤짜빠까라나-물라띠까 7304 담마상가니-아누띠까 7305 빤짜빠까라나-아누띠까 7306 아비담마와따로-나마루빠빠릳체도 7307 아비담맛타상가호 7308 아비담마와따라-뿌라나띠까 7309 아비담마마띠까빨리 | |
| ອັກສອນລາວ | |||
| ປາລີ | ອັດຖະກະຖາ | ຏີກາ | ອັນຍາ |
| 1101 ປາຣາຊິກະ ປາລີ 1102 ປາຈິດຕິຍະ ປາລີ 1103 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ວິໄນ) 1104 ຈູລະວັກຄະ ປາລີ 1105 ປະລິວາລະ ປາລີ | 1201 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-1 1202 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-2 1203 ປາຈິດຕິຍະ ອັດຖະກະຖາ 1204 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ວິໄນ) 1205 ຈູລະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 1206 ປະລິວາລະ ອັດຖະກະຖາ | 1301 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-1 1302 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-2 1303 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-3 | 1401 ທເວມາຕິກາປາລີ 1402 ວິນະຍະສັງຄະຫະ ອັດຖະກະຖາ 1403 ວະຊິລະພຸດທິ ຏີກາ 1404 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-1 1405 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-2 1406 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-1 1407 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-2 1408 ກັງຂາວິຕະຣະນີປຸຣານະ ຏີກາ 1409 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ-ອຸຕຕະຣະວິນິດສະຍະ 1410 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-1 1411 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-2 1412 ປາຈິຕະຍາທິໂຍຊະນາປາລີ 1413 ຂຸທະທະສິກຂາ-ມູລະສິກຂາ 8401 ວິສຸດທິມັກຄະ-1 8402 ວິສຸດທິມັກຄະ-2 8403 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-1 8404 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-2 8405 ວິສຸດທິມັກຄະ ນິທານະກະຖາ 8406 ທີຆະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8407 ມັດຊິມະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8408 ສັງຍຸຕຕະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8409 ອັງຄຸຕຕະລະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8410 ວິນະຍະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8411 ອະພິທັມມະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8412 ອັດຖະກະຖາ (ປຸ-ວິ) 8413 ນິລຸຕຕິທີປະນີ 8414 ປະຣະມັດຖະທີປະນີ ສັງຄະຫະມະຫາຏີກາປາຖະ 8415 ອະນຸທີປະນີປາຖະ 8416 ປັດຖານຸທເທສະ ທີປະນີປາຖະ 8417 ນະມັກກາລະຏີກາ 8418 ມະຫາປະຖາມະປາຖະ 8419 ລັກຂະນາໂຕ ພຸດທະຖະມະນາຄາຖາ 8420 ສຸຕະວັນທະນາ 8421 ກະມະລາຍຈະລິ 8422 ຊິນາລັງກາລະ 8423 ປັດຊະມະທຸ 8424 ພຸດທະຄຸນະຄາຖາວະລີ 8425 ຈູລະຄັນຖະວັງສະ 8426 ມະຫາວັງສະ 8427 ສາສະນະວັງສະ 8428 ກັດຈາຍະນະພະຍາກະລະນັງ 8429 ມົກຄັນທານະພະຍາກະລະນັງ 8430 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ປະທະມາລາ) 8431 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ຘາຕຸມາລາ) 8432 ປະທະຣູປະສິດທິ 8433 ໂມຄັນທານະປັນຈິກາ 8434 ປະໂຍຄະສິດທິປາຖະ 8435 ວຸຕະໂທຍະປາຖະ 8436 ອະພິທານະປະປະທີປິກາປາຖະ 8437 ອະພິທານະປະປະທີປິກາຏີກາ 8438 ສຸໂພທາລັງກາລະປາຖະ 8439 ສຸໂພທາລັງກາລະຏີກາ 8440 ພາລາວະຕາລະ ຄັນຖິປະທັດຖະວິນິດສະຍະສາລະ 8441 ໂລກະນີຕິ 8442 ສຸດຕັນຕະນີຕິ 8443 ສູລັດສະຕິນີຕິ 8444 ມະຫາລະຫະນີຕິ 8445 ທັມມະນີຕິ 8446 ກະວິທັບປະຖານີຕິ 8447 ນີຕິມັນຊະລີ 8448 ນະລະທັກຂະທີປະນີ 8449 ຈະຕຸຣາລັກຂະທີປະນີ 8450 ຈານັກຍະນີຕິ 8451 ລະສະວາຫິນີ 8452 ສີມາວິໂສທະນີປາຖະ 8453 ເວສສັນຕະລະຄີຕິ 8454 ໂມຄັນທານະ ວຸຕຕິວິວະລະນະປັນຈິກາ 8455 ຖູປະວັງສະ 8456 ທາຐາວັງສະ 8457 ຘາຕຸປາຖະວິລາສິນີຍາ 8458 ຘາຕຸວັງສະ 8459 ຫັດຖະວະນະຄັນລະວິຫາລະວັງສະ 8460 ຊິນະຈະລິຕະຍະ 8461 ຊິນະວັງສະທີປັງ 8462 ເຕລະກະຕາຫາຄາຖາ 8463 ມິລິທະຏີກາ 8464 ປະທະມັນຊະລີ 8465 ປະທະສາຘະນັງ 8466 ສັດທະພິນທຸປະກະລະນັງ 8467 ກັດຈາຍະນະຘາຕຸມັນຊຸສາ 8468 ສາມັນຕະກູຏະວັນນະນາ |
| 2101 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 2102 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ທີຆະ) 2103 ປາຖິກະວັກຄະ ປາລີ | 2201 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 2202 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ທີຆະ) 2203 ປາຖິກະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ | 2301 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 2302 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ທີຆະ) 2303 ປາຖິກະວັກຄະ ຏີກາ 2304 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-1 2305 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-2 | |
| 3101 ມູລະປັນຍາສະ ປາລີ 3102 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ປາລີ 3103 ອຸປະລິປັນຍາສະ ປາລີ | 3201 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-1 3202 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-2 3203 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ 3204 ອຸປະລິປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ | 3301 ມູລະປັນຍາສະ ຏີກາ 3302 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ຏີກາ 3303 ອຸປະລິປັນຍາສະ ຏີກາ | |
| 4101 ສະຄາຖາວັກຄະ ປາລີ 4102 ນິທານະວັກຄະ ປາລີ 4103 ຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 4104 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ປາລີ 4105 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4201 ສະຄາຖາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4202 ນິທານະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4203 ຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4204 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4205 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4301 ສະຄາຖາວັກຄະ ຏີກາ 4302 ນິທານະວັກຄະ ຏີກາ 4303 ຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 4304 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ຏີກາ 4305 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ສັງຍຸຕຕະ) | |
| 5101 ເອກະກະນິປາຕະ ປາລີ 5102 ທຸກະນິປາຕະ ປາລີ 5103 ຕິກະນິປາຕະ ປາລີ 5104 ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ປາລີ 5105 ປັຈຈະກະນິປາຕະ ປາລີ 5106 ຉັກກະນິປາຕະ ປາລີ 5107 ສັດຕະກະນິປາຕະ ປາລີ 5108 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ປາລີ 5109 ນະວະກະນິປາຕະ ປາລີ 5110 ທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ 5111 ເອກາທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ | 5201 ເອກະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5202 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5203 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5204 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ | 5301 ເອກະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5302 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ຏີກາ 5303 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5304 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ຏີກາ | |
| 6101 ຂຸທະທະກະປາຖະ ປາລີ 6102 ທຳມະປະທະ ປາລີ 6103 ອຸທານະ ປາລີ 6104 ອິຕິວຸຕຕະກະ ປາລີ 6105 ສຸດຕະນິປາຕະ ປາລີ 6106 ວິມານະວັດຖຸ ປາລີ 6107 ເປຕະວັດຖຸ ປາລີ 6108 ເຖລະຄາຖາ ປາລີ 6109 ເຖລີຄາຖາ ປາລີ 6110 ອະປະທານະ ປາລີ-1 6111 ອະປະທານະ ປາລີ-2 6112 ພຸດທະວັງສະ ປາລີ 6113 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ປາລີ 6114 ຊາຕະກະ ປາລີ-1 6115 ຊາຕະກະ ປາລີ-2 6116 ມະຫານິທເທສະ ປາລີ 6117 ຈູລະນິທເທສະ ປາລີ 6118 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ປາລີ 6119 ເນຕຕິປະກະລະນະ ປາລີ 6120 ມິລິນທະປັນຫາ ປາລີ 6121 ເປຏະກົປເທສະ ປາລີ | 6201 ຂຸທະທະກະປາຖະ ອັດຖະກະຖາ 6202 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-1 6203 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-2 6204 ອຸທານະ ອັດຖະກະຖາ 6205 ອິຕິວຸຕຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6206 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-1 6207 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-2 6208 ວິມານະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6209 ເປຕະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6210 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-1 6211 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-2 6212 ເຖລີຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ 6213 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-1 6214 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-2 6215 ພຸດທະວັງສະ ອັດຖະກະຖາ 6216 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6217 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-1 6218 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-2 6219 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-3 6220 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-4 6221 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-5 6222 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-6 6223 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-7 6224 ມະຫານິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6225 ຈູລະນິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6226 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-1 6227 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-2 6228 ເນຕຕິປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 6301 ເນຕຕິປະກະລະນະ ຏີກາ 6302 ເນຕຕິວິພາວິນີ | |
| 7101 ທຳມະສັງຄະນີ ປາລີ 7102 ວິພັງຄະ ປາລີ 7103 ຘາຕຸກະຖາ ປາລີ 7104 ປຸກຄະລະປັນຍັດຕິ ປາລີ 7105 ກະຖາວັດຖຸ ປາລີ 7106 ຍະມະກະ ປາລີ-1 7107 ຍະມະກະ ປາລີ-2 7108 ຍະມະກະ ປາລີ-3 7109 ປັດຖານະ ປາລີ-1 7110 ປັດຖານະ ປາລີ-2 7111 ປັດຖານະ ປາລີ-3 7112 ປັດຖານະ ປາລີ-4 7113 ປັດຖານະ ປາລີ-5 | 7201 ທຳມະສັງຄະນິ ອັດຖະກະຖາ 7202 ສັມໂມຫະວິໂນທະນີ ອັດຖະກະຖາ 7203 ປັຈຈະປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 7301 ທຳມະສັງຄະນີ-ມູລະຏີກາ 7302 ວິພັງຄະ-ມູລະຏີກາ 7303 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ມູລະຏີກາ 7304 ທຳມະສັງຄະນີ-ອະນຸຏີກາ 7305 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ອະນຸຏີກາ 7306 ອະພິທັມມາວະຕາໂຣ-ນາມະຣູປະປະຣິຈເທໂທ 7307 ອະພິທັມມັດຖະສັງຄະໂຫ 7308 ອະພິທັມມາວະຕາລະ-ປຸຣານະຏີກາ 7309 ອະພິທັມມາມາຕິກາປາລີ | |
| मराठी | |||
| पाळी | अट्ठकथा | टीका | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळी 1102 पाचित्तिय पाळी 1103 महावग्ग पाळी (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळी 1105 परिवार पाळी | 1201 पाराजिककंड अट्ठकथा-१ 1202 पाराजिककंड अट्ठकथा-२ 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-१ 1302 सारत्थदीपनी टीका-२ 1303 सारत्थदीपनी टीका-३ | 1401 द्वेमातिकापाळी 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-१ 1405 विमतिविनोदनी टीका-२ 1406 विनयालंकार टीका-१ 1407 विनयालंकार टीका-२ 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-१ 1411 विनयविनिच्छय टीका-२ 1412 पाचित्यादियोजनापाळी 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-१ 8402 विसुद्धिमग्ग-२ 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-१ 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-२ 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अंगुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी संगहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवंदना 8421 कमलांजलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगंथवंस 8426 महावंस 8427 सासनवंस 8428 कच्चायनव्याकरणं 8429 मोग्गल्लानव्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपंचिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गंठिपदत्थविनिच्छयसार 8441 लोकनीति 8442 सुत्तंतनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8444 महारहनीति 8445 धम्मनीति 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमंजरी 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8450 चाणक्यनीति 8451 रसवाहिनी 8452 सीमाविसोधनीपाठ 8453 वेस्संतरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपंचिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमंजरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिंदुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमंजुसा 8468 सामंतकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खंधवग्ग पाळी 2102 महावग्ग पाळी (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळी | 2201 सीलक्खंधवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खंधवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-१ 2305 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-२ | |
| 3101 मूलपण्णास पाळी 3102 मज्झिमपण्णास पाळी 3103 उपरिपण्णास पाळी | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-१ 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-२ 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळी 4102 निदानवग्ग पाळी 4103 खंधवग्ग पाळी 4104 सळायतनवग्ग पाळी 4105 महावग्ग पाळी (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खंधवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खंधवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळी 5102 दुकनिपात पाळी 5103 तिकनिपात पाळी 5104 चतुक्कनिपात पाळी 5105 पंचकनिपात पाळी 5106 छक्कनिपात पाळी 5107 सत्तकनिपात पाळी 5108 अट्ठकादिनिपात पाळी 5109 नवकनिपात पाळी 5110 दसकनिपात पाळी 5111 एकादसकनिपात पाळी | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळी 6102 धम्मपद पाळी 6103 उदान पाळी 6104 इतिवुत्तक पाळी 6105 सुत्तनिपात पाळी 6106 विमानवत्थु पाळी 6107 पेतवत्थु पाळी 6108 थेरगाथा पाळी 6109 थेरीगाथा पाळी 6110 अपदान पाळी-१ 6111 अपदान पाळी-२ 6112 बुद्धवंस पाळी 6113 चरियापिटक पाळी 6114 जातक पाळी-१ 6115 जातक पाळी-२ 6116 महानिद्देस पाळी 6117 चूळनिद्देस पाळी 6118 पटिसंभिदामग्ग पाळी 6119 नेत्तिप्पकरण पाळी 6120 मिलिंदपंह पाळी 6121 पेटकोपदेस पाळी | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-१ 6203 धम्मपद अट्ठकथा-२ 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-१ 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-२ 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-१ 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-२ 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-१ 6214 अपदान अट्ठकथा-२ 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-१ 6218 जातक अट्ठकथा-२ 6219 जातक अट्ठकथा-३ 6220 जातक अट्ठकथा-४ 6221 जातक अट्ठकथा-५ 6222 जातक अट्ठकथा-६ 6223 जातक अट्ठकथा-७ 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-१ 6227 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-२ 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसंगणी पाळी 7102 विभंग पाळी 7103 धातुकथा पाळी 7104 पुग्गलपंयत्ति पाळी 7105 कथावत्थु पाळी 7106 यमक पाळी-१ 7107 यमक पाळी-२ 7108 यमक पाळी-३ 7109 पट्ठान पाळी-१ 7110 पट्ठान पाळी-२ 7111 पट्ठान पाळी-३ 7112 पट्ठान पाळी-४ 7113 पट्ठान पाळी-५ | 7201 धम्मसंगणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पंचपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसंगणी-मूलटीका 7302 विभंग-मूलटीका 7303 पंचपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसंगणी-अनुटीका 7305 पंचपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसंगहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळी | |
1 ปทสาธนํ पदसाधन นโม ตสฺส ภควโต อรหโต สมฺมาสมฺพุทฺธสฺส त्या भगवंत, अर्हत, सम्यक्संबुद्धांना माझा नमस्कार असो. พุทฺธมฺพุชํ นมสฺสิตฺวา สทฺธมฺมมธุ ภาชนํ,คุณโมปทปทํ สงฺฆมธุพฺพตนิเสวิตํ; बुद्धरूपी कमळाला, सद्धम्मरूपी मधाचे पात्र असलेल्या आणि गुणांचा आधार असलेल्या, तसेच संघरूपी भ्रमरांद्वारे (मधुकर) सेवन केलेल्या (संघाला) नमस्कार करून; โมคฺคลฺลายนาจริย จรญฺจ เยน ธีมตา,กตํ ลฆุมยนฺทิทฺธมนุนํ สทฺทลกฺขณํ; ज्या बुद्धिमान आचार्यांनी मोग्गल्लायन आचार्यांच्या पद्धतीचे अनुसरण करून, हे संक्षिप्त, स्पष्ट आणि परिपूर्ण असे व्याकरण (शब्दलक्षण) रचले आहे; อารภิสฺสํ สมาเสน พาลตฺถํ ปทสาธนํ,โมคฺคลฺลายนสทฺทตฺถรตนากรปทฺธตึ; नवशिक्यांच्या (बालकांच्या) हितासाठी, मोग्गल्लायन यांच्या शब्द आणि अर्थरूपी रत्नांच्या खाणीसारख्या पद्धतीचे अनुसरण करून, मी संक्षेपाने 'पदसाधन' सुरू करतो; สญฺญาปริคฺคเหเนว ลกฺขเณสุ สราทโย,ญายนฺติติ ตเมวาโท ทสฺสยิสฺสํ วิภาคโต; लक्षणांमध्ये (व्याकरण नियमांमध्ये) संज्ञांच्या ग्रहणानेच स्वरादींचे ज्ञान होते, म्हणून मी सुरुवातीला तेच विभागशः (स्पष्टपणे) दाखवून देईन; ออาทโย ติตาฬีส วณณา. 'अ' इत्यादी त्रेचाळीस वर्ण आहेत. ชินวจนานุรูปา อการเทโย นิคฺคหิตนฺตา เตจตฺตาฬี สกฺขรา ปจฺเจกํ วณฺณา นาม โหนฺติ ยถา - อ อา อิ อี อุ อู เอ โอ ก ข ค ฆ ง จ ฉ ช ฌ ญ ฏ ฐ ณ ต ถ ท ธ น ป ผ พ ภ ม ย ร ล ว ส ห ฬ อํ อิติ-กการาทิสฺวกาโร อุจฺจารณตฺโถ = วณณียติ อตฺโถ เอเตหีติ วณฺณา-ออาทิ มริยาทา ภูโต เยสนฺโต ออาทโย. जिनवचनाला (बुद्धवचनाला) अनुसरून, 'अ' पासून सुरू होणारे आणि निग्गहीत (अनुस्वार) शेवटी असणारे हे त्रेचाळीस अक्षरे प्रत्येकी 'वर्ण' या नावाने ओळखले जातात. जसे की - अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ओ, क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, स, ह, ळ, अं. येथे 'क' इत्यादींमधील 'अ' हा केवळ उच्चारणासाठी आहे. "ज्यांच्याद्वारे अर्थाचे वर्णन केले जाते ते वर्ण होत" आणि 'अ' ज्यांच्या सुरुवातीला आहे ते 'अ-आदी' (अ-इत्यादी) होत. ออาทโยติ วตฺตเต ยาว ‘‘พินฺทุนิคฺคหีต’’นฺติ-ตญฺจโขอตฺถ วสา วิภตฺติจีปรินาโมติ สตฺตมฺยนฺตมภิสมฺพนฺธียเต. 'अ-आदी' हा अधिकार "बिंदु निग्गहीत" या सूत्रापर्यंत चालतो. आणि तो अर्थाच्या आवश्यकतेनुसार विभक्ती बदलून (विभक्ती-विपरिणामाने) सप्तम्यंत रूपाने जोडला जातो. ทสาโท สรา सुरुवातीचे दहा स्वर आहेत. ออาทิสฺวาทิมฺหิ นิทฺทิฏฺฐา โอทนฺตา ทสวณฺณา สรา นาม โหนฺติ-ยถา-อ อา อิ อี อุ อู เอ โอ = สรนฺติ ปวตฺตนฺตีติ สรา-ทสา โทติ วตฺตเต ตีสุ จกฺกมาเนสุ. 'अ' इत्यादींच्या सुरुवातीला निर्देश केलेले आणि 'ओ' पर्यंतचे दहा वर्ण 'स्वर' या नावाने ओळखले जातात. जसे की - अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ओ. "जे स्वतः उच्चारले जातात किंवा प्रवृत्त होतात ते स्वर होत." 'सुरुवातीचे दहा' हा अधिकार पुढील तीन सूत्रांमध्ये चालतो. ทฺเว ทฺเว สวณฺณา. दोन-दोन (वर्ण) सवर्ण आहेत. ออาสฺวาทิเมสุ ทสฺสุ ทฺเว ทฺเว สวณฺณา นาม โหนฺติ. ยถากฺกมํ-ยถา-ออา อิติ, อุอู อิติ, เอ อิติ, โอ อิติ = สมานา สาทิสา วณฺณา สวณฺณา-สมานตฺตญฺจ ฐานโต. 'अ' इत्यादी पहिल्या दहा स्वरांमध्ये अनुक्रमे दोन-दोन वर्ण 'सवर्ण' (समान वर्ण) मानले जातात. जसे की - 'अ-आ', 'उ-ऊ', 'ए', 'ओ'. "समान किंवा सदृश असणारे वर्ण म्हणजे सवर्ण होत." आणि ही समानता त्यांच्या उच्चारस्थानावरून ठरते. ฉ วณฺณานํหิ อุปฺปตฺติฏฺฐานานิ กณฺฐาตาลุมุทฺธทนฺตโอฏฺฐานา สิกาวเสน-เตสุ อวณฺณกวคฺคหานํ กณฺโฐฐานํ-อิวณฺณ จวคฺคยานํ ตาลุ-ฏวคฺครฬานํ มุทฺธา-ตวคฺคลสานํ ทนฺตา-อุ วณฺณปวคฺคานํ โอฏฺฐา-เอวณฺณสฺส กณฺฐตาลุ-โอวณฺณสฺส กณฺโฐฏฺฐํ-วการสฺส ทนฺโตฏฺฐํ-นิคฺคหิตสฺส นาสิกา-งญณนมานํ สกฏฺฐานํ นาสิกา จ-ทฺเวทฺเวติ วตฺตเต. वर्णांची उत्पत्तीची सहा स्थाने आहेत - कंठ (गळा), तालू (टाळू), मूर्धा, दंत (दात), ओष्ठ (ओठ) आणि नासिका (नाक). त्यांपैकी 'अ-वर्ण' (अ, आ), 'क-वर्ग' आणि 'ह' यांचे स्थान कंठ आहे; 'इ-वर्ण' (इ, ई), 'च-वर्ग' आणि 'य' यांचे स्थान तालू आहे; 'ट-वर्ग', 'र' आणि 'ळ' यांचे स्थान मूर्धा आहे; 'त-वर्ग', 'ल' आणि 'स' यांचे स्थान दंत आहे; 'उ-वर्ण' आणि 'प-वर्ग' यांचे स्थान ओष्ठ आहे; 'ए-वर्णा'चे स्थान कंठ-तालू आहे; 'ओ-वर्णा'चे स्थान कंठ-ओष्ठ आहे; 'व' काराचे स्थान दंत-ओष्ठ आहे; 'निग्गहीता'चे स्थान नासिका आहे; आणि 'ङ, ञ, ण, न, म' यांचे स्थान आपापले स्थान आणि नासिका हे दोन्ही आहे. 'दोन-दोन' हा अधिकार पुढे चालू राहतो. ปุพฺโพ รสฺโส पहिला (वर्ण) र्हस्व असतो. เตสฺเจว ทสสุ เย ทฺเว ทฺเว สวณฺณา เตสุ โย โย ปุพฺโพ โส โส รสฺสสญฺโญ โหติ-ยถา-อ อิ อุ เอ โอ-เตสุ สํโยค ปุพฺพาจ ทิสฺสนฺติ ทฺเว ปนนฺติมา ทีเปตุํ ตตฺถ สาธุตฺตํ เตสมฺปิ อิธ สงฺคโห = รสฺสกาลโยคา ตพฺพนฺตตาย วา รสฺสา-ตถา ทีฆา-อิธาปิทฺเวทฺเวติ วตฺตเต. त्या दहा स्वरांमध्ये जे दोन-दोन सवर्ण आहेत, त्यांपैकी जो जो पहिला आहे, त्याला 'र्हस्व' संज्ञा प्राप्त होते. जसे की - अ, इ, उ, ए, ओ. त्यांपैकी संयुक्त व्यंजनांच्या आधी येणारे (ए आणि ओ) देखील र्हस्व दिसतात. शेवटचे दोन (ए, ओ) र्हस्व आहेत हे दर्शवण्यासाठी आणि त्यांचे साधुत्व सिद्ध करण्यासाठी त्यांचा येथे संग्रह केला आहे. र्हस्व काळाच्या योगाने किंवा त्या मर्यादेमुळे ते 'र्हस्व' ठरतात; तसेच 'दीर्घ' देखील. येथेही 'दोन-दोन' हा अधिकार चालू राहतो. ปโร ทีโฆ. दुसरा (वर्ण) दीर्घ असतो. ออาทิสฺวาทิภุเตสุ ทสสุ เย ทฺเว ทฺเว สวณฺณา เตสุ โย โย ปโร โส โส ทีฆสญฺโญ โหติ-ยถา-อา อี อู. 'अ' इत्यादी पहिल्या दहा स्वरांमध्ये जे दोन-दोन सवर्ण आहेत, त्यांपैकी जो जो दुसरा (नंतरचा) आहे, त्याला 'दीर्घ' संज्ञा प्राप्त होते. जसे की - आ, ई, ऊ. กาทโย พฺยญฺชนา. 'क' इत्यादी व्यंजने आहेत. ออาทิสุ กาทโย นิคฺคหีตปริยนฺตา เตตฺตึส พฺยญฺชนานาม โหนฺติ-ยถา-ก ข ค ฆ ง จ ฉ ช ฌ ญ ฏ ฐ ฑ ณ ต ถ ท ธ น ป ผ พ ภ ม ย ร ลว ส ห ฬ อํ = พฺยญฺชียติ อตฺโถ เอเตหีติ พฺยญฺชนา-กาทโยติ วตฺตเต. वर्णांमध्ये 'क' पासून सुरू होऊन 'निग्गहीत' (अनुस्वार) पर्यंतचे तेहतीस वर्ण 'व्यंजन' या नावाने ओळखले जातात. जसे की - क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, स, ह, ळ, अं. "ज्यांच्याद्वारे अर्थ स्पष्ट केला जातो (व्यंजित केला जातो) ती व्यंजने होत." 'क-आदी' हा अधिकार पुढे चालू राहतो. ปญฺจ ปญฺจกา วคฺคา. पाच-पाचचे गट 'वर्ग' आहेत. ออาทสุ กการาทโย มการนฺตา ปญฺจ ปญฺจกา วคฺคา นาม โหนฺติ-ยถา-กขคฆง, จฉชฌญ, ฏฐฑฒณ, ตถทธน, ปผพภม. = วชฺเชนฺติ ยการาทโยติ วคฺคา. वर्णांमध्ये 'क' कारापासून सुरू होऊन 'म' कारापर्यंतचे पाच-पाचचे पाच गट 'वर्ग' या नावाने ओळखले जातात. जसे की - क-ख-ग-घ-ङ, च-छ-ज-झ-ञ, ट-ठ-ड-ढ-ण, त-थ-द-ध-न, प-फ-ब-भ-म. "जे 'य' इत्यादींना वगळतात ते वर्ग होत." พินฺทุ นิคฺคหิตํ बिंदू (अनुस्वार) हा 'निग्गहीत' आहे. อการาทีสุยวายํ วณฺโณ พินฺทุมตฺโต โส นิคฺคหิตสญฺโญโหติ = รสฺสสรํ นิสฺสาย คหิตมุจฺจาริตํ นิคฺคหีตํ. 'अ' इत्यादी स्वरांच्या वर जो केवळ बिंदूच्या स्वरूपात असणारा वर्ण आहे, त्याला 'निग्गहीत' संज्ञा प्राप्त होते. "र्हस्व स्वराचा आश्रय घेऊन ज्याचा उच्चार केला जातो, ते निग्गहीत होय." สญฺญา วิธานํ. संज्ञा विधान (संज्ञांचे नियम). สนฺธิ วุจฺจเต-ปุริส อุตฺตโม, ปญฺญา อินฺทฺริยํ. สติอารกฺโข,โภคิ อินฺโท, จกฺขุ อายตนํ, อภิภุ อายตนํ, ธนมฺเม อตฺถิ, กุโต เอตฺถา’ ติธ-สโร โลโป สเร. आता संधीचे नियम सांगितले जातात - जसे की, पुरिस उत्तमो, पञ्ञा इन्द्रियं, सति आरक्खो, भोगि इन्द्दो, चक्खु आयतनं, अभिभु आयतनं, धनं मे अत्थि, कुतो एत्थ - या उदाहरणांमध्ये "स्वराच्या पुढे स्वर आल्यास स्वराचा लोप होतो" (सरो लोपो सरे) हा नियम लागू होतो. สโร สโร โลปนีโย โหติ-สเรโตปสิเลสิกาธารสตฺตมี ตโต วณฺณกาลวฺยวธาเน การิยํ น โหติ-ตฺวมสิ, กตมา จานนฺท อนิจฺจสญฺญา’ติ-อญฺญตฺถาปิ สํหตายโมปสิเลสกาธา เรเยว สตฺตมี-วิธีติ วตฺตมาเน. स्वराच्या पुढे स्वर आल्यास स्वराचा लोप होतो. "सरे" (स्वराच्या पुढे) ही सप्तमी विभक्ती उपश्लेषिक आधार (निकटता दर्शवणारी) आहे; त्यामुळे इतर वर्णाचा किंवा काळाचा व्यवधान (अंतर) असल्यास हा नियम लागू होत नाही. जसे की - 'त्वमसि', 'कतमा चानन्द अनिच्चसञ्ञाति'. इतर ठिकाणीही संहितेमध्ये (निकटतेमध्ये) उपश्लेषिक आधार असलेलीच सप्तमी मानली जाते. 'विधी' हा अधिकार चालू असताना. สตฺตมิยํ ปุพฺพสฺส. सप्तमीच्या निर्देशात पूर्व स्वराचा (लोप होतो). สตฺตมีนิทฺเทเส ปุพฺพสฺเสว วิธิติ ปุพฺพสรโลโป-ปุริสุตฺตโม,ปญฺญินฺทฺริยํ, สตารกฺโข, โภคินฺโท, จกฺขายตนํ. อภิภายตนํ, ธนมฺมตฺถิ, กุเตตฺถ. ปุพฺพสฺส การิยวิธานา สตฺตมีนิทฺทิฏฺฐสฺส ปรตาว คมฺยเตติ ปเรตุปริวจนมฺปิ ฆฏเต-โส อหํ, จตฺตาโร อิเม, ยโต อุทกํ, ปาโต เอวํ’ตีธ-‘‘สโร โลโป สเร’’ติ วตฺตเต. सप्तमीच्या निर्देशात पूर्व स्वराचाच लोप होतो, म्हणून पूर्व स्वराचा लोप होऊन पुढील रूपे बनतात - पुरिसुत्तमो (पुरिस + उत्तमो), पञ्ञिन्द्रियं (पञ्ञा + इन्द्रियं), सतारक्खो (सति + आरक्खो), भोगिन्दो (भोगि + इन्द्दो), चक्खायतनं (चक्खु + आयतनं), अभिभायतनं (अभिभु + आयतनं), धम्मत्थि (धनं मे + अत्थि), कुतेत्थ (कुतो + एत्थ). पूर्व स्वरासाठी कार्य विहित केल्यामुळे, सप्तमीने निर्दिष्ट केलेल्या वर्णाची परता (नंतर असणे) समजली जाते, त्यामुळे "पर स्वराचा" असा नियम देखील योग्य ठरतो. जसे की - 'सो अहं', 'चत्तारो इमे', 'यतो उदकं', 'पातो एवं' - या उदाहरणांमध्ये "स्वराच्या पुढे स्वर आल्यास स्वराचा लोप होतो" हा नियम चालू राहतो. ปโร กฺวจิ. पर स्वराचा कधीकधी (लोप होतो). สรมฺหา ปโร สโร กฺวจิ โลปนีโย โหติ-โสหํ, จตฺตาโรเม, ยโตทกํ. ปาโตจ-กฺวจิติกึ?-ปญฺญินฺทฺริยํ-อสฺสาธิกาโร สพฺพสนฺธิสุ-ตสฺส อิทํ, ตสฺส อิทํ, วาต อีริตํ, วาต อีริตํ, สีต อุทกํ, สีต อุทกํ, วาม อูรุ,วาม อูรุ, อิติธ-ปุพฺพสร โลเป-สเร เวติ จ วตฺตเต. स्वराच्या नंतर येणाऱ्या पर स्वराचा कधीकधी लोप होतो. जसे की - सोहं (सो + अहं), चत्तारोमे (चत्तारो + इमे), यतोदकं (यतो + उदकं), पातोच. "कधीकधी" (क्वचि) असे का म्हटले आहे? 'पञ्ञिन्द्रियं' सारख्या ठिकाणी पर स्वराचा लोप होऊ नये म्हणून. हा अधिकार सर्व संधींमध्ये लागू होतो. जसे की - तस्स इदं, वात ईरितं, सीत उदकं, वाम ऊरु. या उदाहरणांमध्ये पूर्व स्वराचा लोप झाल्यावर, "स्वराच्या पुढे" आणि "पर्यायाने (वा)" हे अधिकार चालू राहतात. ยุวณณานมฺโญ ลุตฺตา. लोप पावलेल्या स्वरांच्या नंतर येणाऱ्या 'इ-वर्ण' आणि 'उ-वर्ण' यांच्या जागी अनुक्रमे 'ए' आणि 'ओ' होतात. ลุตฺตา สราปเรสํ อิวณฺณวณฺณานํ โญ โหนฺติ วายถากฺกมํ. लोप पावलेल्या स्वरांच्या नंतर येणाऱ्या 'इ-वर्ण' आणि 'उ-वर्ण' यांच्या जागी अनुक्रमे 'ए' आणि 'ओ' हे वर्ण पर्यायाने (वा) होतात. วณฺณปเรน สวณฺเณปิ. 'वर्ण' शब्दाने सवर्ण देखील घेतला जातो. วณฺณสทฺโท ปโร ยสฺมา เตน สวณฺโณปิ คยฺหติ สยํ เจติ อี อู นมฺปิ เอ โอ-ตสฺเสทํ, ตสฺสิทํ-วาเตริตํ. วาติริตํ-สีโตทกํ, ‘‘พฺยญฺชเน ทีครสฺสา’’ติ ทีเฆ-สีตุทกํ-วาโมรุ,วามูรุ-ลุตฺเตติกึ-ทส อิเม. ज्या अर्थी 'वर्ण' शब्द वापरला आहे, त्यावरून सवर्ण देखील घेतला जातो आणि तो स्वतः देखील; म्हणून 'ई' आणि 'ऊ' यांच्या जागी देखील 'ए' आणि 'ओ' होतात. जसे की - तस्सेदं, तस्सिदं; वातेरितं, वातिरितं; सीतोदकं, "व्यंजने दीर्घ र्हस्व" या नियमाने दीर्घ होऊन - सीतुदकं; वामोरु, वामूरु. "लोप पावलेल्या" असे का म्हटले आहे? 'दस इमे' सारख्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. อติปฺปสงฺคพาธกสฺส กฺวจิสทฺทสฺสานุวตฺตนโต น วิกปฺปวิธี นิยตา-เตน อุเปโต’ติ เอวมาทีสุ วิกเกปฺปา นารกิตาทิสุ วิธิ จ น โหติ-จิ อกาสิ, จิ อกาสิ. สุ อาคตํ, สุ อาคตํ’ติธยุวณฺณานํ เว’ติ จ วตฺตเต. अतिप्रसंग (अति-व्याप्ती) टाळण्यासाठी "क्वचि" (कधीकधी) या शब्दाच्या अनुवृत्तीमुळे हे पर्यायी नियम निश्चित (अनिवार्य) नाहीत. त्यामुळे 'उपेतो' इत्यादी शब्दांमध्ये पर्याय होत नाही आणि 'नारकित' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होत नाही. जसे की - 'चि अकासि', 'सु आगतं'. या उदाहरणांमध्ये "इ-वर्ण आणि उ-वर्ण यांच्या जागी" आणि "पर्यायाने (वा)" हे अधिकार चालू राहतात. ยวา สเร. स्वराच्या पुढे 'य' आणि 'व' होतात. สเร ปเร อิว ณฺณุวณฺณานํ ยการวการา โหนฺติ วา ยถากฺกมํ-อการสฺส ทีเฆ-วฺยากาสิ, ‘‘วนตรคาวา คามา’’ติ ยาคเม-วิยากาสิ-สฺวาคตํ. สาคตํ-กฺวจิตฺเวว-ยานีธ. आगे स्वर आल्यास, 'इ-वर्ण' आणि 'उ-वर्ण' यांच्या जागी अनुक्रमे 'य' आणि 'व' हे वर्ण पर्यायाने होतात. 'अ' काराचा दीर्घ होऊन - 'व्याकासि' बनते; आणि 'य' आगम होऊन - 'वियाकासि' बनते. तसेच 'स्वागतं' आणि 'सागतं' बनते. "कधीकधी" (क्वचि) या नियमानेच - 'यानीध' बनते. เต อชฺช, เต อชฺช, โส อยํ, โส อยํ, อิตีธ-‘‘ยวาสเร’’ ‘เว’ติ จ วตฺตเต. 'ते अज्ज', 'सो अयं' या उदाहरणांमध्ये "स्वराच्या पुढे य आणि व होतात" आणि "पर्यायाने (वा)" हे अधिकार चालू राहतात. โญนํ 'ए' आणि 'ओ' यांच्या जागी (होतात). โญนํ ยการวการา โหนฺติ วา สเร ปเร ยถากฺกมํ. स्वर पुढे असताना 'ञो' (इ आणि उ वर्णांच्या) जागी अनुक्रमे यकार आणि वकार विकल्पेकरून होतात. ตฺยชฺช, เตชฺช-‘‘พฺยญฺชเน ทีฆรสฺสา’’ติทีเฆ-สฺวายํ, โสยํ. उदा. त्यज्ज, तेज्ज - 'ब्यञ्जने दीघरस्सा' या सूत्राने दीर्घ झाल्यावर - स्वायं, सोयं. กฺวจีตฺเวว-ธนมฺมตฺถี-โค เอฬกมิติธ-สเร’ติ วตฺตเต. 'क्वचि' (कधीतरी/विकल्पेकरून) असेच - धनम्मत्थी. 'गो एळकं' यामध्ये 'सरे' (स्वर पुढे असताना) हे अनुवृत्त होते. โคสฺสาวง. 'गो' शब्दाच्या जागी 'अवण' आदेश होतो. สเร ปเร โคสฺส อวง อาเทโส โหติ-สจ‘‘ฏนุพนฺธาเนก วณฺณาสพฺพสฺสา’’ติ สพฺพสฺสปฺปสงฺเค-อนฺตสฺเส’ติ วตฺตมาเน. स्वर पुढे असताना 'गो' शब्दाच्या जागी 'अवण' आदेश होतो. जर 'टानुबन्ध आणि अनेक वर्ण असलेल्या आदेशाच्या जागी सर्व आदेश होतो' या नियमाने सर्व शब्दाच्या जागी आदेश प्राप्त होत असताना, 'अन्तस्स' (शेवटच्या वर्णाच्या जागी) हे अनुवृत्त होते. งนุ พนฺโธ. 'ङ' हा अनुबंध (इत्-संज्ञक) आहे. งกาโรนุพนฺโธ ยสฺส โส เนกวณฺโณปิ อนฺตสฺส โหติติ औการสฺเสว โหติ,-‘‘สงฺเกโตนวยโวนุ พนฺโธ’’ติวจนา งการสฺสาปฺปโยโค-ปโยชนํ‘‘งนุพนฺโธ’’ติ สงฺเกโต-คเวฬกํ. ज्याला 'ङ' कार अनुबंध आहे, तो अनेक वर्णांचा असला तरी शेवटच्या वर्णाच्या जागी होतो, म्हणजेच 'ओ' काराच्या जागीच होतो. 'संकेत हा अवयव नसून अनुबंध आहे' या वचनानुसार 'ङ' काराचा प्रयोग होत नाही. 'ङानुबंध' या संकेताचे प्रयोजन - गवेळकं हे रूप सिद्ध करणे आहे. อิติ เอว, อิติ เอวา ‘‘ตีธ- 'इति एव', 'इति एवा' यामध्ये - วิติสฺเสเว วา किंवा 'इति' च्या जागी विकल्पेकरून 'व' होतो. เอวสทฺเท ปเร อิติสฺส โว โหติ วา-สจ. 'एव' शब्द पुढे असताना 'इति' च्या जागी विकल्पेकरून 'व' (वकार) होतो. ฉฏฺฐิยนฺตสฺส. षष्ठी विभक्तीने निर्दिष्ट केलेल्याच्या जागी. ฉฏฺฐินทฺทิฏฺฐสฺส ยํ การิยํ ตทนฺตสฺส วิญฺเญยฺยนฺติ อิการสฺสาเทโส โหติ = ฐานีนมามทฺทิยทิสฺสติ อุจฺจาริยติ’ติ อาเทโส-อิตฺเวว, อญฺญตฺร ยาเทเส-‘‘ตวคฺควรณนํ เย จวคฺคพยญา’’ติ ตการสฺส โว-‘‘วคฺคลเยหิ เต’’ติ ยสฺส จ จกาโร, อิจฺเจว-ทุ องฺคิกํ, จิ อิตฺวา, อชฺช อคฺเค, ปาตุ อเหสุํ, ปา เอว, อิธ อิชฺฌติ, ปริ อนฺตํ, อตฺต อตฺถมิติธ-‘‘มยทาสเร’’ติ วตฺตเต. षष्ठी विभक्तीने निर्दिष्ट केलेले जे कार्य आहे, ते त्याच्या अन्त्य वर्णाचे समजावे, या नियमाने 'इ' काराच्या जागी आदेश होतो. मूळ स्थानी असलेल्याच्या जागी जो उच्चारला जातो त्याला 'आदेश' म्हणतात. उदा. इत्वेव. इतर ठिकाणी 'य' आदेश झाल्यावर - 'तवग्गवरणानं ये चवग्गबयञा' या सूत्राने 'त' काराच्या जागी 'व' आणि 'वग्गलयेहि ते' या सूत्राने 'य' च्या जागी 'च' होऊन 'इच्चेव' असे रूप होते. 'दु अङ्गिकं', 'चि इत्वा', 'अज्ज अग्गे', 'पातु अहेसुं', 'पा एव', 'इध इज्झति', 'परि अन्तं', 'अत्त अत्थं' यामध्ये 'मयदासरे' हे अनुवृत्त होते. วตตรคา จาคมา. आणि 'व, त, त, र, ग' (इत्यादी) आगम होतात. เอเต มยทา วาคมา โหนฺติ วา สเร กฺวจิ,-อาคมิโน อนิยเมปิ สโรเยวาคมี โหติ วนาทินนฺตุ ญาปกา-อญฺญถาหิ ปทาทีนํ ยุกฺวีธาน มนตฺถกํ-ทุวงฺคิกํ, จินิตฺวา, อชฺชตคฺเค, ปาตุรเหสุํ, -‘‘พฺยญฺชเนทีฆรสฺสา’’ติ รสฺเส-ปเคว, อิธมิชฺฌติ, ปริยนฺตํ, อตฺตทตฺถํ-วาตฺเวว-อตฺตตฺถํ. हे 'म, य, द, व, त, र, ल, ग' इत्यादी आगम स्वर पुढे असताना विकल्पेकरून होतात. आगम कोणाला व्हावा असा नियम नसला तरी स्वरालाच आगम होतो, हे 'वनादि' शब्दांवरून स्पष्ट होते. अन्यथा शब्दाच्या सुरुवातीला 'य' आणि 'व' करण्याचे विधान निरर्थक ठरले असते. उदा. दुवङ्गिकं, चिनित्वा, अज्जतग्गे, पातुरहेसुं - 'ब्यञ्जने दीघरस्सा' या सूत्राने रस्व होऊन - पगेव, इधमिज्झति, परियन्तं, अत्तदत्थं. विकल्पेकरून - अत्तत्थं. ฉ อภิญฺญา, ฉ อภิญฺญา,’ตีธ-วา สเร อาคโม’ติ จ วตฺตเต. 'छ अभिञ्ञा', 'छ अभिञ्ञा' यामध्ये 'वा सरे आगमो' हे अनुवृत्त होते. ฉา โฬ. 'छ' शब्दाच्या पुढे 'ळ' कार (आगम होतो). ฉ สทฺทา ปรสฺส สรสฺส ฬกาโร อาคโม โหติ วา-ฉฬภิญฺญา, ฉอภิญฺญา. 'छ' शब्दानंतर येणाऱ्या स्वराला विकल्पेकरून 'ळ' कार आगम होतो. उदा. छळभिञ्ञा, छअभिञ्ञा. สรสนฺธิ. स्वरसंधी. กญฺญา อิว-กญฺญา อิวา ตีธ-ปุพฺพปรสรานํ โลเป สมฺปตฺเต-สโร ปโรติ จ วตฺตเต. 'कञ्ञा इव', 'कञ्ञा इव' यामध्ये पूर्व आणि पर स्वरांचा लोप प्राप्त झाला असता - 'सरो परो' हे अनुवृत्त होते. นทฺเววา. दोन्हीचाही विकल्पेकरून लोप होत नाही. ปุพฺพปรสรา ทฺเวปิ วา กฺวจิ น ลุปฺยนฺเต-กญฺญาอิว, กญฺเญว, กญฺญาว. पूर्व आणि पर हे दोन्ही स्वर कधीकधी विकल्पेकरून लोप पावत नाहीत. उदा. कञ्ञाइव, कञ्ञेव, कञ्ञाव. สรสนฺธิ นิเสโธ. स्वरसंधीचा निषेध. ตตฺร อภิรติ, ขนฺติ ปรมํ, สมฺมา อกฺขาโต’ตีธ- 'तत्र अभिरति', 'खन्ति परमं', 'सम्मा अक्खातो' यामध्ये - พฺยญฺฉเน ทีฆรสฺสา. व्यंजन पुढे असताना रस्व आणि दीर्घ स्वरांचे कधीकधी अनुक्रमे दीर्घ आणि रस्व होतात. รสฺสทีฆานํ กฺวจิ ทีฆรสฺสา โหนฺติ พฺยญฺชเน-ตตฺราภิรติ, ขนฺตีปรมํ,’ สมฺมทกฺขาโต’ ติทาคเม รสฺโส-กฺวจีตฺเวจ-ตฺยชฺช-กถํ ยานิว อนฺตลิกฺเข’ติ -ทีฆรสฺสาติ โยควิภาคา. व्यंजन पुढे असताना रस्व आणि दीर्घ स्वरांचे कधीकधी दीर्घ आणि रस्व होतात. उदा. तत्राभिरति, khantīparamaṃ, सम्मदक्खातो (येथे 'द' आगम झाल्यावर रस्व होतो). 'क्वचि' असेच - त्यज्ज. 'यानीव अन्तलिक्खे' हे कसे सिद्ध होते? 'दीघरस्सा' या सूत्राच्या योगविभागामुळे (सूत्र विभागल्यामुळे) हे सिद्ध होते. จิ คโห, ตติย ฌานํ. วิ โขโป, อิติธ-พฺยญฺชเน’ติ วตฺตเต. 'वि गहो' (विग्गहो), 'ततिय झानं' (ततियज्झानं), 'वि खोपो' (विक्खेपो) यामध्ये 'ब्यञ्जने' (व्यंजन पुढे असताना) हे अनुवृत्त होते. สรมฺหา ทฺเว. स्वराच्या पुढे असलेल्या व्यंजनाचे द्वित्व होते. สรมฺหา ปรสฺส พฺยญฺชนสฺส กฺวจิ ทฺเวรูปานิ โหนฺติ-วิคฺคโห. स्वराच्या पुढे असलेल्या व्यंजनाचे कधीकधी द्वित्व (दोन रूपे) होते. उदा. विग्गहो. จตุตฺถ ทุติเยสฺเวสํ ตติย ปฐมา. चौथ्या आणि दुसऱ्या वर्णांचे द्वित्व करताना त्यांच्या जागी अनुक्रमे तिसरा आणि पहिला वर्ण होतो. จตุตฺถทุติเยสุ ปเรสฺเวสํ จตุตฺถทุติยานํ ตพฺพคฺเค ตติย ปฐมา โหนฺติ ปจฺจาสตฺยาติ ปุพฺพฌการขการานํ ชการกกรา-ตติยชฺฌานํ, วิกฺเขโป-สรมฺหา’ติกึ?-ตํ วนํ. อกรมฺภเสเต, อกรมฺภเสเต, เอโส อตฺโถ, เอโส อตฺโถ, อิติธ-เจ’ติวตฺตเต. चौथा आणि दुसरा वर्ण पुढे असताना, त्या चौथ्या आणि दुसऱ्या वर्णांच्या जागी त्यांच्याच वर्गातील अनुक्रमे तिसरा आणि पहिला वर्ण निकटतेमुळे होतो. म्हणून पूर्वीच्या 'झ' आणि 'ख' च्या जागी अनुक्रमे 'ज' आणि 'क' होतात. उदा. ततियज्झानं, विक्खेपो. 'सरम्हा' (स्वराच्या पुढे) असे का म्हटले आहे? उदा. तं वनं. 'अकरम्भसेते', 'अकरम्भसेते', 'एसो अत्थो', 'एसो अत्थो' यामध्ये 'च' हे अनुवृत्त होते. เอ โอ น ม วณฺเณ. 'ए' आणि 'ओ' च्या जागी व्यंजन पुढे असताना कधीकधी 'अ' होतो. เอ โอ นํ วณฺเณ กฺวจิ อ โหติ วา-อกรมฺภสเน, อกรมฺห เสเต-เอสอตฺโถ, เอโสอตฺโถ-วณฺเณติกึ?-โส. 'ए' आणि 'ओ' च्या जागी व्यंजन पुढे असताना विकल्पेकरून 'अ' होतो. उदा. अकरम्भसने, अकरम्ह सेते, एसअत्थो, एसोअत्हो. 'वण्णे' (वर्ण पुढे असताना) असे का म्हटले आहे? उदा. सो. สรพฺยญฺชนสนฺธิ. स्वरव्यंजनसंधी. อต ยนฺตํ. ตถ ยํ. มท ยํ, พุธิ ยติ, ธน ยํ. เสว โย, ปเยสนา, โปกฺขรณ โย, อิติธ- 'अति अन्तं', 'तथ यं', 'मद यं', 'बुधि यति', 'धन यं', 'सेव यो', 'पयेसना', 'पोक्खरण यो' यामध्ये - ตวคฺควรณนํเย จวคฺคขยญา. 'त' वर्ग आणि 'व' कार यांच्या जागी 'य' कार पुढे असताना अनुक्रमे 'च' वर्ग आणि 'ब, य, ञ' होतात. ตวคฺควรณนํ จวคฺคพยญา โหนฺติ ยถากฺกมํ ยกาเร, ‘‘วคฺคลเสหิ เต’’ติ วคฺคา ปรสฺส ยสฺส ปุพฺพรูปํ-อจฺจนฺตํ. ตจฺฉํ, มชฺชํ, พุชฺฌติ, ธญฺญํ, เสพฺโพ, ปยฺเยสนา, โปกฺขรญฺโญ-กฺวจีตฺเวจ, มตฺยา-เยติ วตฺตเต วกฺขมาเนสุ ตีสุ. สก ยเต, รุจ ยเต, ปฏฺยเต, ลุปฺยเต, สลฺยเต, ทิสฺยเต’ตีธ. 'त' वर्ग आणि 'व' कार यांच्या जागी 'य' कार पुढे असताना अनुक्रमे 'च' वर्ग आणि 'ब, य, ञ' होतात. 'वग्गलसेहि ते' या सूत्राने वर्गातील वर्ण, 'ल' आणि 'स' यांच्या पुढे असलेल्या 'य' काराचे पूर्वरूप होते. उदा. अच्चन्तं, तच्छं, मज्जं, बुज्झति, धञ्ञं, सेब्बो, पय्येसना, पोक्खरण्ञो. 'क्वचि' असेच - मत्या. पुढील तीन सूत्रांमध्ये 'ये' (य कार पुढे असताना) हे अनुवृत्त होते. 'सक यते', 'रुच यते', 'पट्यते', 'लुप्यते', 'सल्यते', 'दिस्यते' यामध्ये - วคฺคลเสหิ เต वर्ग, 'ल' आणि 'स' यांच्या पुढे असलेल्या 'य' काराच्या जागी कधीकधी तेच वर्ग, 'ल' आणि 'स' (पूर्वरूप) होतात. วคฺคลเสหิ ปรสฺส ยการสฺส กฺวจิ เต วคฺคลสา โหนฺติ. वर्ग, 'ल' आणि 'स' यांच्या पुढे असलेल्या 'य' काराच्या जागी कधीकधी तेच वर्ग, 'ल' आणि 'स' होतात. สกฺกเต, รุจฺจเต,ปฏฺฏเต, ลุปฺปเต, สลฺลเต, ทิสฺสเต. กฺวจิตฺเวว-กฺยาหํ-มุห = ยตี’ตีธ- उदा. सक्कते, रुच्चते, पट्टते, लुप्पते, सल्लते, दिस्सते. 'क्वचि' असेच - क्याहं. 'मुह यति' यामध्ये - หสฺส วิปลฺลาโส 'ह' काराचा विपर्यास (स्थानबदल) होतो. หสฺส วิปลฺลาโส โหติ ยกาโร-มุยฺหติ, 'ह' चा विपर्यास (व्यत्यय) होतो आणि 'य' कार मिळून 'य्ह' होतो - जसे 'मुय्हति' (muyhati). พหุอาพาโธ, พหุ อาพาโธ’ตีธ-อุสฺสวกาเร ‘‘หสฺส วิปลฺลาโส’’ติ วตฺตเต. 'बहुआबाधो' (bahuābādho) - 'बहु आबाधो' येथे 'उस्सवकारे' सूत्रात 'हस्स विपल्लासो' (ह चा विपर्यास) हे अनुवृत्त होते. เววา. किंवा. หสฺส วิปลฺลาโส โหติวา วกาเร-พวฺหาพาโธ, พหฺวาพาโธ. किंवा 'व' कार असताना 'ह' चा विपर्यास होतो - जसे 'बव्हाबाधो' (bavhābādho), 'बह्वाबाधो' (bahvābādho). พฺยญฺชน สนฺธิ. व्यंजन संधी. อกฺขิรุชติ. อกฺขิรุชตี’ตีธ-เวติ วตฺตเต ยาว‘‘มยทาสเร’’ติ. 'अक्खिरुजति' (akkhirujati). 'अक्खिरुजति' येथे 'वा' (पर्यायाने) हे 'मयदासरे' या सूत्रापर्यंत अनुवृत्त होते. นิคฺคหิตํ. निग्गहीत (अनुस्वार). นิคฺคหีตมาคโม โหติวา กฺวจิ = ฐานีนมาลิงฺคิย คจฺฉติ ปวตฺตตี’ติ อาคโม-อกฺขึ รุชติ,อกฺขิ รุชติ-‘‘ยาวทฺวิธา’’ติ อาโท นิจฺจํ ววตฺถิต วิภาสตฺตา วาธิการสฺส-วาสทฺโท หิ อตฺถวเย วตฺตเต กตฺถจิ วิกปฺเป กตฺถจิ ยถาววตฺถิตรูป ปริคฺคเหติ-ยทา ปจฺฉิเม ตทา นจฺจมนิจฺจมสนฺตญฺจ วิธึ ทีเปติ-เอตฺถ ปน กฺว จิสทฺทสฺสานุ วตฺตนโต เตเนวาสนฺตวิธิ สิทฺโธ’ติ วาสทฺเท นิตรทฺวยํ-สํ รมฺโห, สํรมฺโห, ปุํ ลิงฺคํ,ปุํ ลิงฺคมิตีธ-นิคฺคหีตาธิกาโร อา ‘‘มยทา สเรติ’’. काही ठिकाणी निग्गहीताचा (अनुस्वाराचा) आगम पर्यायाने होतो. 'आगम' म्हणजे मूळ स्थानाला आलिंगन देऊन प्रवृत्त होणे - जसे 'अक्खिं रुजति' (akkhiṃ rujati), 'अक्खि रुजति' (akkhi rujati). 'यावद्विधा' इत्यादी सूत्रांमध्ये 'वा' या अधिकाराच्या व्यवस्थित विभाषेमुळे (नियमबद्ध पर्याय) हा नियम नित्य (अनिवार्य) होतो. कारण 'वा' हा शब्द दोन अर्थांनी वापरला जातो: काही ठिकाणी विकल्प (पर्याय) दर्शवण्यासाठी, तर काही ठिकाणी व्यवस्थित रूपाचा स्वीकार करण्यासाठी. जेव्हा तो नंतरच्या अर्थात असतो, तेव्हा तो अनित्य, स्थिर आणि असंत (अविद्यमान) विधी दर्शवतो. येथे 'क्वचि' या शब्दाच्या अनुवृत्तीमुळे 'असंत विधी' सिद्ध होतो, म्हणून 'वा' या शब्दात दुहेरी अर्थ आहे - जसे 'सं रम्हो' (saṃ ramho), 'संरम्हो' (saṃramho), 'पुं लिंगं' (puṃ liṅgaṃ), 'पुंलिंगं' (puṃliṅgaṃ). येथे निग्गहीताचा अधिकार 'मयदा सरे' या सूत्रापर्यंत चालतो. โลโป. लोप. นิคฺคหีตสฺส โลโป โหติ วา กฺวจิ-ทีฆทิตฺตานิ, สารมฺโห, สารมฺโห-ปุลฺลิงฺคํ, ปุํลิงฺคํ-ปฏิสลฺลาเณ ปาตุกาโม’ติอาทิสุ นิจฺจํ-ปุปฺผํ อสฺสา, ปุปฺผํ อสฺสา, กึ อิติ, กึ อิตี’ตีธ- काही ठिकाणी निग्गहीताचा (अनुस्वाराचा) लोप पर्यायाने होतो - (त्यानंतर) दीर्घत्व आणि द्वित्व होते, जसे 'सारम्हो' (sāramho), 'पुल्लिङ्गं' (pulliṅgaṃ) किंवा 'पुंलिङ्गं' (puṃliṅgaṃ). 'पटिसल्लाणे पातुकामो' इत्यादींमध्ये हा लोप नित्य (अनिवार्य) असतो. 'पुप्फं अस्सा' (pupphaṃ assā), 'पुप्फं अस्सा', 'किं इति' (kiṃ iti), 'किं इति' येथे - ปรสรสฺส. परस्वराचा (पुढील स्वराचा). นิคฺคหีตมฺหา ปรสฺส สรสฺส โลโป โหติ วา กฺวจิ. निग्गहीतानंतर येणाऱ्या परस्वराचा (पुढील स्वराचा) काही ठिकाणी पर्यायाने लोप होतो. สํโยคาทิ โลโป. संयोगादीचा (संयुक्त व्यंजनाच्या सुरुवातीच्या अक्षराचा) लोप. อนนฺตรา พฺยญฺชนา สํโยโค-อตฺร โย อาทภุตาวยโว ตสฺส วา กฺวจิ โลโป โหตี’ติ สสฺสาทิสฺส โลโป-ปุปฺผํสา, ‘‘มยทา สเร’’ติ นิคฺคหีตสฺส มกาโร-ปุปฺผมสฺสา, ‘‘วคฺเค วคฺค’นฺโต’’ติ โน นคฺคหีตสฺส-กินฺติ, กิมิติ. लागोपाठ येणाऱ्या व्यंजनांना 'संयोग' (संयुक्त व्यंजन) म्हणतात. येथे जो त्याचा सुरुवातीचा अवयव (भाग) असतो, त्याचा काही ठिकाणी पर्यायाने लोप होतो - जसे 'स्स' मधील पहिल्या 'स' चा लोप होऊन 'पुप्फंसा' (pupphaṃsā) होते. 'मयदा सरे' या सूत्राने निग्गहीताचा 'म' कार होऊन 'पुप्फमस्सा' (pupphamassā) होते. 'वग्गे वग्गन्तो' या सूत्राने निग्गहीताचा 'न' कार होऊन 'किन्ति' (kinti) होते, किंवा 'किमिति' (kimiti) राहते. ตํ ข ณํ, ตํ ขณํ, ธมฺมํ จเร, ธมฺมํ จเร, ตํ ฑหติ, ตํ ฑหติ, ตํ ทานํ, ตํ ทานํ, ตํ ผลํ, ตํ เอลมิตีธ- 'तं खणं' (taṃ khaṇaṃ), 'तं खणं', 'धम्मं चरे' (dhammaṃ care), 'धम्मं चरे', 'तं डहति' (taṃ ḍahati), 'तं डहति', 'तं दानं' (taṃ dānaṃ), 'तं दानं', 'तं फलं' (taṃ phalaṃ), 'तं फलं' येथे - วคฺเค วคฺคนฺโต. वर्गाचे व्यंजन पुढे असताना निग्गहीताचा त्याच वर्गाचा अंत्य वर्ण (अनुनासिक) होतो. นคฺคหีตสฺส โข วคฺเค วคฺคนฺโต วา โหติ ปจฺจาสตฺยา-ตงฺกณํ,ตํขณํ-ธมฺมญฺจเร, ธมฺมํจเร-ตณฺฑหติ, ตํฑหติ-ตนฺทานํ, ตํทานํ-ตมฺผลํ, ตํผลํ-คนฺตฺวา สมฺมโตติ’อาทิสุ นิจฺจํ-อานนฺตริกํ ยมาหุ, อานนฺตริกํ ยมาหุ, ปจฺจตฺตํ เอว, ปจฺจตฺตํ เอว, ตญฺหิ. ตญฺหิ, อิติธ- वर्गाचे व्यंजन पुढे असताना, सान्निध्यामुळे निग्गहीताचा (अनुस्वाराचा) पर्यायाने त्याच वर्गाचा अंत्य वर्ण (अनुनासिक) होतो - जसे 'तङ्कणं' (taṅkaṇaṃ) / 'तं खणं' (taṃkhaṇaṃ), 'धम्मञ्चरे' (dhammañcare) / 'धम्मं चरे' (dhammaṃcare), 'तण्डहति' (taṇḍahati) / 'तं डहति' (taṃḍahati), 'तन्दानं' (tandānaṃ) / 'तं दानं' (taṃdānaṃ), 'तम्फलं' (tamphalaṃ) / 'तं फलं' (taṃphalaṃ). 'गन्त्वा' (gantvā), 'सम्मतो' (sammato) इत्यादींमध्ये हा नियम नित्य (अनिवार्य) असतो. 'आनन्तरिकं यमाहू' (ānantarikaṃ yamāhu), 'आनन्तरिकं यमाहू', 'पच्चत्तं एव' (paccattaṃ eva), 'पच्चत्तं एव', 'तञ्हि' (tañhi), 'तं हि' (taṃhi) येथे - เยวหิสุญฺโญ. 'य', 'एव' आणि 'हि' शब्द पुढे असताना निग्गहीताचा 'ञ' कार होतो. ยเอวหิสทฺเทสุ นิคฺคหีตสฺสโญ วา โหติ-‘‘วคฺคลเสหิ เต’ติ ยสฺส ญกาเร-อานนฺตริกญฺญ มาหุ. อานนฺตริกํ ยมาหุ, ญสฺส ทฺวิตฺเต-ปจฺจตฺตญฺเญว, ปจฺจตฺตํเอว-ตญฺหิ, ตํหี-เอว สทฺทสหจริยาเยติ ยสทฺทสฺเสว คหณํ-สํยโต, สํยโต’ตีธ 'य', 'एव' आणि 'हि' हे शब्द पुढे असताना निग्गहीताचा पर्यायाने 'ञ' कार होतो. 'वग्गलसेहि ते' या सूत्राने 'य' चा 'ञ' कार झाल्यावर - 'आनन्तरिकञ्ञमाहू' (ānantarikaññamāhu) / 'आनन्तरिकं यमाहू' (ānantarikaṃ yamāhu). 'ञ' चे द्वित्व झाल्यावर - 'पच्चत्तञ्ञेव' (paccattaññeva) / 'पच्चत्तं एव' (paccattaṃeva), 'तञ्हि' (tañhi) / 'तं हि' (taṃhī). 'एव' शब्दाच्या सहचर्यामुळे येथे केवळ 'य' शब्दाचेच ग्रहण होते. 'संयतो' (saṃyato), 'संयतो' येथे - เย สํสฺส 'य' कार पुढे असताना 'सं' च्या निग्गहीताचा - สํสทฺทสฺส ยํ นิคฺคหีตํ ตสฺส วา โญ โหติ ยกาเร- 'सं' या शब्दाच्या निग्गहीताचा 'य' कार पुढे असताना पर्यायाने 'ञ' कार होतो - สญฺญโต, สํยโต-อิธยการมตฺโตว คยฺหเต ปุนพฺพจนา. 'सञ्ञतो' (saññato), 'संयतो' (saṃyato). येथे पुनरुक्तीमुळे केवळ 'य' कारच ग्रहण केला जातो. ตํ เอว, ตํ เอว, ตํ อิทํ, ตํ อิทํ, ตํ อิมินา, ตํ อิมินาตีธ- 'तं एव' (taṃ eva), 'तं एव', 'तं इदं' (taṃ idaṃ), 'तं इदं', 'तं इमिना' (taṃ iminā), 'तं इमिना' येथे - มยทาสเร. स्वर पुढे असताना निग्गहीताचे 'म', 'य', 'द' होतात. นิคฺคหีตสฺส มยทา โหนฺติ วา สเร กฺวจิ-ตเมว, ตํเอว-ตยิทํ’ ตํอิทํ-ตทมินา, ตํ อิมินา เอตฺถ-‘‘ตทมินาทีนี’’ตินิปาตนา อิการสฺส อกาโร-ลกฺขณนฺตเรนาวิหิตาเทสโลปาคมวิปลฺลาสา สพฺพตฺถ อิมินาว ทฏฺฐพฺพา-เตน นิชโก. นิยโก,’ติอาทิ สิทฺธํ-พุทฺธม สรณมิจฺจาทิสุ โยควิภาคา. स्वर पुढे असताना काही ठिकाणी निग्गहीताचे पर्यायाने 'म', 'य', 'द' होतात - जसे 'तमेव' (tameva) / 'तं एव' (taṃeva), 'तयिदं' (tayidaṃ) / 'तं इदं' (taṃidaṃ), 'तदमिना' (tadaminā) / 'तं इमिना' (taṃ iminā). येथे 'तदमिनादीनि' या निपातनाने 'इ' काराचा 'अ' कार होतो. इतर लक्षणांनी (सूत्रांनी) न विहित केलेले आदेश, लोप, आगम आणि विपर्यास सर्वत्र याच सूत्राने जाणावेत. त्यामुळे 'निजको' (nijako), 'नियको' (niyako) इत्यादी रूपे सिद्ध होतात. 'बुद्धम सरणं' इत्यादींमध्ये योगविभागामुळे (सूत्राच्या विभाजनामुळे) हे होते. นิคฺคหิต สนฺธิ. निग्गहीत संधी (अनुस्वार संधी). อถ นามานิ วุจฺจนฺเต. आता नामांचे (प्रातिपदिकांचे) विवेचन केले जाते. ตานิ วิวิธานิ สลิคาลิควเสน-ตตฺถ สลิเคยุ ตาว อการนฺตโต ปุลฺลิงฺคา พุทฺธสทฺทา สตฺตวิภตฺติโย ปรา โยชียนฺโต-พุทฺธ อิติ ฐิเต. ती (नामे) लिंगांच्या भेदानुसार विविध प्रकारची असतात. त्यांपैकी प्रथम, 'अ' कारान्त पुल्लिंगी 'बुद्ध' शब्दाला सात विभक्तींचे प्रत्यय जोडले जातात - 'बुद्ध' अशी स्थिती असताना: ทฺเว ทฺเว กาเนเกสุ นามสฺมา สิโย อํโย นาหิ ยนํ สฺมาสนํ สฺมึสุ नामापुढे एकवचन आणि बहुवचनात दोन-दोन प्रत्यय लागतात: 'सि-यो', 'अं-यो', 'ना-हि', 'य-नं', 'स्मा-सनं', 'स्मिं-सु'. เอเตสํ ทฺเวทฺเว โหนฺติ เอกาเนกตฺเถสุ วตฺตมานโต นาม สฺมาติ ยถากฺกมํ เอกมฺหิ จตฺตพฺโพ เอกวจนานํ พหุมฺหิ วตฺตพฺเพ พหุวจนานํ จาติยเมนปฺปยงฺเค-นามสฺมา’ติอธิกาโร. नामापुढे एक आणि अनेक अर्थ सांगताना अनुक्रमे हे दोन-दोन प्रत्यय होतात. एक अर्थ सांगायचा असल्यास एकवचनाचे प्रत्यय आणि अनेक अर्थ सांगायचे असल्यास बहुवचनाचे प्रत्यय होतात, अशा नियमाने हे जोडले जातात. येथे 'नामास्मा' (नामापासून) हा अधिकार आहे. ปฐมาตฺถมตฺเต केवळ प्रथमेच्या अर्थामध्ये (प्रथमा विभक्ती होते). สกตฺถทพฺพลิงฺคานิ สงฺขฺยากมฺมาทิปญฺจกํ स्वार्थ (शब्दाचा स्वतःचा अर्थ), द्रव्य, लिंग, संख्या आणि कर्मादी पाच - นามตฺโถ ตสฺส สามญฺญมตฺตมตฺตํ ปวุจฺจเต. याला नामाचा अर्थ (नामार्थ) म्हणतात, जो त्याचा केवळ सामान्य अर्थ दर्शवतो. นามสฺสาภิเธยฺย มตฺเต ปฐมาวิภตฺติ โหติ’ติ วตฺติจฺฉาวสา ปฐมาเยกวจนพหุวจนานิ. नामाच्या केवळ अभिधेय (वाच्य) अर्थामध्ये प्रथमा विभक्ती होते. बोलण्याच्या इच्छेनुसार प्रथमेचे एकवचन आणि बहुवचन प्रत्यय होतात. สิโยอิติ ปฐมา, สิสฺสิการสฺสานุพนฺธตฺตปฺเปโยโค-ปโยชนํ‘‘กิ มํ สีสู’’ติ สงฺเกโต-ตถา อํ วจนสฺสการสฺส-สิ-อโต’ติ วตฺตเต-ตสฺส นามวิเสสนตฺตา ‘‘วิธิพฺพิเสสนนฺตสฺสา’’ติ ตทนฺตโต วิธิ. 'सि-यो' ही प्रथमा विभक्ती आहे. 'सि' मधील 'इ' कार हा अनुबंध (संकेत) असल्यामुळे त्याचा प्रत्यक्ष प्रयोग होत नाही. त्याचे प्रयोजन 'कि मं सीसू' इत्यादी संकेतांमध्ये आहे. तसेच 'अं' मधील 'अ' काराचे प्रयोजन आहे. 'सि' आणि 'अतो' हे अनुवृत्त होतात. ते नामाचे विशेषण असल्यामुळे 'विघिविसेसनन्तस्सा' या नियमाने तदन्त (त्या अक्षराने अंत होणाऱ्या) शब्दाला हा विधी लागू होतो. สิสฺโส. 'सि' चा 'ओ' होतो. อการนฺตโต นามสฺมา ปรสฺส สิสฺส โอโหติ-ปุพฺพสรโลโป พุทฺโธ ติฏฺฐติ-โย. 'अ' कारान्त नामापुढे येणाऱ्या 'सि' प्रत्ययाचा 'ओ' होतो. पूर्व स्वराचा लोप होऊन 'बुद्धो तिट्ठति' (buddho tiṭṭhati - बुद्ध उभे आहेत) हे रूप बनते. आता 'यो' प्रत्यय - อโต โยนํ ฏาเฏ. 'अ' कारानंतर येणाऱ्या 'यो' प्रत्ययाचे अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' होतात. อการนฺตโต นามสฺมา ปเรสํ ปฐมาทุติยาโยนํ ฏาเฏ โหนฺติ ยถากฺกมํ-ฏการานุพนฺธตฺตา‘‘ฏนุพนฺธาเนกวณฺณา สพฺพสฺสา’’ติ สพฺพาเทโส-พุทฺธา ติฏฺฐนฺติ. ‘ปฐมาตฺถมตฺเต’’ติวตฺตเต. 'अ' कारान्त नामापुढे येणाऱ्या प्रथमा आणि द्वितीयेच्या 'यो' प्रत्ययाचे अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' होतात. 'ट' कार हा अनुबंध असल्यामुळे 'टनुबन्धानेकवण्णा सब्बस्सा' या सूत्राने हा सर्वादेश (पूर्ण प्रत्ययाच्या जागी आदेश) होतो - जसे 'बुद्धा तिट्ठन्ति' (buddhā tiṭṭhanti - बुद्ध उभे आहेत). येथे 'पठमात्थमत्ते' हे अनुवृत्त होते. อามนฺตเณ. संबोधन अर्थामध्ये (संबोधनात). สทฺเทนาภิมุขี กาโร วิชฺชมานสฺส วตฺถุโนอามนฺตณํ วิธาตพฺเพ นตฺถิ ราชา ภเวติ ตํ; विद्यमान वस्तूच्या (किंवा व्यक्तीच्या) शब्दाने सन्मुख करणे (लक्ष वेधून घेणे) याला 'आमंत्रण' (संबोधन) म्हटले जाते. संबोधन करताना 'राजा' असा (सामान्य) प्रयोग होत नाही. อามนฺตณธิเก อตฺถมตฺเต ปฐมา วิภตฺติ โหตี’ติ เอกสฺมึ เอกวจนํ สิ. संबोधन (आमंत्रण) अधिक अर्थाच्या बाबतीत प्रथमा विभक्ती होते; एकवचनामध्ये 'सि' (si) प्रत्यय लागतो. โคสฺยาลปเณ. 'गो स्याळपणे' (संबोधनात 'गो' शब्दाच्या बाबतीत). อาลปเณ สิ คสญฺโญ โหติ-โลโป’ติ วตฺตเต संबोधनात 'सि' प्रत्ययाला 'ग' संज्ञा (गसञ्ञा) होते. 'लोप' (lopo) चे अनुवर्तन होते. คสีนํ. 'गसीनां' (ग आणि सि प्रत्ययांचा). นามสฺมาคสีนํโลโปโหติ-โภพุทฺธมํปาลย-เค’ติวตฺตเต. नामाच्या पुढे 'ग' आणि 'सि' प्रत्ययांचा लोप होतो. जसे - 'भो बुद्ध मं पालय' (हे बुद्ध! माझे रक्षण करा). 'गे' (ge) चे अनुवर्तन होते. อยุนํ วา ทีโฆ. 'अयु' स्वरांचे वैकल्पिक दीर्घीकरण होते. ऐอุ อิจฺเจสํ วา ทีโฆ โหติ เคปเร ติลิงฺเค’ติทีโฆ-พุทฺธา, เกจิ ทีฆํ ทูราลปเณ เยวิจฺฉนฺติ สมีปาลปเณปิ ทสฺสโต ตํ น คเหตพฺพํ-โยมฺหิ,-พุทฺธา มํ ปาเลถ. ऐ उ इत्यादी स्वरांचे 'गे' प्रत्यय पुढे असताना तिन्ही लिंगांत वैकल्पिक दीर्घीकरण होते - 'बुद्धा'. काही व्याकरणकार केवळ दूरच्या संबोधनातच दीर्घीकरण मानतात, परंतु जवळच्या संबोधनातही ते दिसून येत असल्याने ते (मत) स्वीकारू नये. 'यो' प्रत्यय असताना - 'बुद्धा मं पालेथ' (हे बुद्धहो, माझे रक्षण करा). กมฺเม ทุติยา कर्म अर्थी द्वितीया विभक्ती होते. กตฺตุกฺริยาภิสมฺพนฺธํ การกํ กมฺมมุจฺจเต; นิพฺพตฺติ วิกติปฺปตฺติ เภทา ตํ ติวิธํ ภเว. कर्त्याच्या क्रियेशी संबंधित असलेल्या कारकाला 'कर्म' (कम्म) म्हटले जाते; निर्वृत्ती (उत्पत्ती), विकृती (रूपांतर) आणि प्राप्ती (पोहोचणे) या भेदांमुळे ते तीन प्रकारचे असते. อสฺมึ ทุติยา วิภตฺติโหติ-อํโย อิติ ทุติยา-อํ-พุทฺธํปณมามิ, โยสฺสเฏ-พุทฺเธ. या (कर्मा) मध्ये द्वितीया विभक्ती होते. 'अं' (aṃ) आणि 'यो' (yo) हे द्वितीया विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. 'अं' प्रत्यय लागून - 'बुद्धं पणमामि' (मी बुद्धांना वंदन करतो); 'यो' प्रत्ययाचा 'ए' आदेश झाल्यावर - 'बुद्धे'. กตฺตุกรเณสุ ตติยา. कर्ता आणि करण अर्थी तृतीया विभक्ती होते. กฺริยํ โย กุรุเต มุขฺโย ส กตฺตา โยชิโต น วา กรณํ ตํ วิเสเสน ยํ กฺริยาสิทฺธิเหตุกํ. जो प्रामुख्याने क्रिया करतो (वाक्यात तो स्पष्टपणे योजलेला असो वा नसो) तो 'कर्ता' (कत्ता) होय; आणि जे क्रिया सिद्ध होण्याचे विशेष साधन असते, त्याला 'करण' म्हणतात. เตสุ การเกสุ ตติยา วิภตฺติ โหติ-นาภิ อิติ ตติยา-นา-นาสฺสา’ติ วตฺตเต. त्या कारकांमध्ये तृतीया विभक्ती होते. 'ना' (nā) आणि 'भि' (bhi) हे तृतीया विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. 'ना' प्रत्ययाच्या बाबतीत 'नास्सा' (nāssā) चे अनुवर्तन होते. อเตน 'अतेन' (अकारान्त नामाच्या पुढे 'ना' चा 'एन' होतो). อการนฺตโต นามสฺมา ปรสฺส นาวจนสฺส เอนาเทโส โหติ-พุทฺเธน เทสิโต ธมฺโม-หิ- अकारान्त नामाच्या पुढे येणाऱ्या 'ना' प्रत्ययाचा 'एन' (ena) आदेश होतो. जसे - 'बुद्धेन देसितो धम्मो' (बुद्धांनी उपदेशिलेला धम्म). 'हि' प्रत्यय असताना - สุหิสฺวเสส. 'सुहिस्वसेस' (सु आणि हि प्रत्यय पुढे असताना अकारान्त अंगाचा 'ए' होतो). อการนฺตสฺส สุหีสฺเวโหติ-พุทฺเธหิ-เว’ติ วตฺตเต. अकारान्त नामाच्या पुढे 'सु' आणि 'हि' प्रत्यय असताना 'ए' होतो. जसे - 'बुद्धेहि' (बुद्धांद्वारे). 'वे' (ve) चे अनुवर्तन होते. สฺมาหิสฺมินฺนํ มฺหาภีมฺหิ. 'स्माहिस्मिन्नं म्हाभीम्हि' (स्मा, हि आणि स्मिन् प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे म्हा, भि आणि म्ही आदेश होतात). นามสฺมา ปเรสํ สฺมาหิสฺมินฺนํ มฺหาภีมฺหิ วา โหนฺติ ยถากฺกมํ-หิสฺส ภิยาเทโส-พุทฺเธภี, กรเณ-พุทฺเธน โลโก สุจรติ, พุทฺเธหิ, พุทฺเธหิ, วา. नामाच्या पुढे येणाऱ्या 'स्मा', 'हि' आणि 'स्मिन्' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'म्हा', 'भि' आणि 'म्हि' हे आदेश वैकल्पिकरित्या होतात. 'हि' प्रत्ययाचा 'भि' आदेश होतो - 'बुद्धेभी'. करण अर्थी - 'बुद्धेन लोको सुचरति' (बुद्धांमुळे लोक सन्मार्गाने चालतात), किंवा 'बुद्धेहि', 'बुद्धेभी' असे रूप होते. จตุตฺถี สมฺปทาเน. संप्रदान अर्थी चतुर्थी विभक्ती होते. อนุมนฺตฺวนิรากตฺตุชฺเฌสกานํ วสา ตธา; ททาติ กมฺมนา ยุตฺตํ สมฺปทานมุทิริตํ. अनुमती देणारा, विरोध न करणारा, हेवा करणारा, इच्छा करणारा आणि देण्याच्या क्रियेच्या कर्माशी जो जोडलेला असतो, त्याला 'संप्रदान' (सम्पदान) म्हटले जाते. ตสฺมึ สมฺปทานการเก จตุตฺถิ สิยา-สนํ อิติ จตุตฺถี-ส. त्या संप्रदान कारकामध्ये चतुर्थी विभक्ती होते. 'स' (sa) आणि 'नं' (naṃ) हे चतुर्थीचे प्रत्यय आहेत. 'स' प्रत्यय असताना - สุญฺสสฺส. 'सुञ्सस्स' ('स' प्रत्ययाचा 'सुञ्' होतो). นามสฺมา ปรสฺส สสฺส สุญฺโหติ-สจ-ฉฏฺฐิยา’ติวตฺตมาเน नामाच्या पुढे येणाऱ्या 'स' प्रत्ययाचा 'सुञ्' (suñ) होतो. 'स च' - 'षष्ठी' (छट्ठिया) चे अनुवर्तन होत असताना - ญกานุพนฺธาทฺยนฺตา. 'ञकानुबन्धाद्यन्ता' ('ञ' आणि 'क' हे अनुबंध असलेले आदेश अनुक्रमे आधी आणि शेवटी होतात). ฉฏฺฐีนิทฺทิฏาฐสฺส ญานุพนฺธกานุพนฺธาทฺยนฺตา โหนฺตี’ติอาทิภุโต โหติ-อุกาโร อุจฺจารณตฺโถ-ญากาโร เอตฺเถว สงฺเกตตฺโถ-พุทฺธสฺส ปุปฺผํ เทหิ.-อโต วา พหุลมิติจ วตฺตเต. षष्ठीने निर्दिष्ट केलेल्या अर्थाच्या जागी 'ञ' आणि 'क' अनुबंध असलेले आदेश अनुक्रमे सुरुवातीला आणि शेवटी होतात. त्यानुसार तो सुरुवातीला येतो. 'उ' कार हा केवळ उच्चारणासाठी आहे, तर 'ञ' कार हा येथे संकेत (अनुबंध) म्हणून आहे. जसे - 'बुद्धस्स पुप्फं देहि' (बुद्धांना फूल द्या). 'अतो वा बहुलं' याचेही अनुवर्तन होते. สสฺสาย จตุตฺถิยา 'सस्साय चतुत्थिया' (चतुर्थीच्या 'स' प्रत्ययाचा 'आय' होतो). อการนฺตโต ปรสฺส สสฺส จตุตฺถิยา อาโย โหติ วา พหุลํ-พุทฺธาย, เยภุยฺเยน ตาทตฺเถ เยวายมาโย ทิสฺสตี’ติ อิโตปรํ โนทาหรียเต-นํ-ทีโฆ’ติวตฺตเต. अकारान्त नामाच्या पुढे येणाऱ्या चतुर्थीच्या 'स' प्रत्ययाचा बहुतांशी 'आय' (āya) आदेश होतो - 'बुद्धाय'. हा 'आय' आदेश बहुधा तादर्थ्य (त्यासाठी या) अर्थीच दिसत असल्याने, यापुढे त्याचे उदाहरण दिले जात नाही. 'नं' प्रत्यय असताना - 'दीर्घ' (dīgho) चे अनुवर्तन होते. สุนํหิสุ 'सुनंहिसु' ('सु', 'नं' आणि 'हि' प्रत्यय पुढे असताना). เอสุ นามสฺส ทีโฆ โหติ-พุทฺธานํ. हे प्रत्यय पुढे असताना नामाचा अंत्य स्वर दीर्घ होतो. जसे - 'बुद्धानं' (बुद्धांना/बुद्धांचे). ปญฺจมฺยวธิสฺมา. अवधी (मर्यादा किंवा अपादान) अर्थी पंचमी विभक्ती होते. สีมาภุโต ปทตฺถานํ โย จโล นิจฺจโล’ถ วา; อจฺจุโต ปุพฺพกา รูปา นมาหุรวธิมฺพุธา. पदार्थांची जी सीमा असते, मग ती गतिमान असो वा स्थिर, ज्या मूळ रूपापासून (दुसरी वस्तू) विलग होते, त्याला विद्वानांनी 'अवधी' (अपादान) म्हटले आहे. เอตสฺมา การกา ปญฺจมีวิภตฺติ โหติ-สฺมา หี อิติ ปญฺจมี-สฺมา-อโต โยนํ ฏาเฏ เวติ ทฺว วตฺต เต. या कारकामध्ये पंचमी विभक्ती होते. 'स्मा' (smā) आणि 'हि' (hi) हे पंचमीचे प्रत्यय आहेत. 'स्मा' प्रत्यय असताना - 'अतो योनं...' चे अनुवर्तन होते. สฺมาสฺมินฺตํ. 'स्मास्मिंतं' (स्मा आणि स्मिन् प्रत्ययांच्या जागी). อการนฺตโต นามสฺมา ปเรสํ สฺมาสฺมินฺนํ ฏาเฏ วา โหนฺติ ยถากฺกมํ. अकारान्त नामाच्या पुढे येणाऱ्या 'स्मा' आणि 'स्मिन्' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' (किंवा म्हा आणि म्ही) हे आदेश वैकल्पिकरित्या होतात. พุทฺธา ปหา นิจฺฉรติ. พุทฺธมฺหา, พุทฺธสฺมาวา-หิ-พุทฺเธหิ, พุทฺเธภิ. बुद्धांपासून प्रकाश बाहेर पडतो - 'बुद्धा', 'बुद्धम्हा' किंवा 'बुद्धस्मा'. 'हि' प्रत्यय असताना - 'बुद्धेहि', 'बुद्धेभि'. ฉฏฺฐิ สมฺพนฺเธ संबंध अर्थी षष्ठी विभक्ती होते. กฺริยาการกสญฺชาโต อสฺเสทมฺหาวเหตุโก; สมฺพนฺโธ’ติ ปวุตฺโต โส สมฺพนฺธิทฺวยนิสฺสิโต. क्रिया आणि कारकांपासून उत्पन्न होणारा किंवा इतर कारणांमुळे होणारा, आणि दोन संबंधी घटकांवर आश्रित असणारा जो भाव आहे, त्याला 'संबंध' (सम्बन्ध) म्हटले जाते. สมฺพนฺธิตฺตาวิเสเสปิ ฉฏฺฐี เหทกโต สิยา; ตโต หิ ชาตา สมฺพนฺธํ วเทยฺย น ปนญฺญโต. संबंध हा थेट कारक नसला तरीही, त्या निमित्ताने षष्ठी विभक्ती होते; कारण त्यापासून उत्पन्न झालेला संबंध ती व्यक्त करते, इतर कशानेही नाही. สมฺพนฺเธ ฉฏฺฐิ วิภตฺติ โหติ-ส นํ อิติ ฉฏฺฐิ-ส-พุทฺธสฺส วิหาโร-นํ-พุทฺธานํ. संबंध अर्थामध्ये षष्ठी विभक्ती होते. 'स' (sa) आणि 'नं' (naṃ) ही षष्ठी विभक्ती आहे. 'स' चे उदाहरण - 'बुद्धस्स विहारो' (बुद्धांचा विहार). 'नं' चे उदाहरण - 'बुद्धानां' (बुद्धांचे). สตฺตมฺยาธาเร. अधिकरण (आधार) अर्थामध्ये सप्तमी विभक्ती होते. กิริยา กตฺตุกมฺมฏฺฐา อาธารียติ เยน โส; อาธาโร จตุธา วุตฺโต วฺยาปกาทิปฺปเภทโต. कर्ता किंवा कर्मामध्ये राहणारी क्रिया ज्याच्याद्वारे आधारली जाते (आश्रय घेते), त्याला 'आधार' म्हणतात. व्यापक इत्यादी भेदांमुळे आधार चार प्रकारचा सांगितला आहे. อาธารการเก สตฺตมี วิภตฺติ โหติ- आधारकारकामध्ये (अधिकरण कारकात) सप्तमी विभक्ती होते - สฺมึ สุ อิติ สตฺตมี-สฺมึ-พุทฺเธ ปสนฺโน-พุทฺธมฺหิ, พุทฺธสฺมึ, วา-สุ พุทฺเธสุ. 'स्मिं' (smiṃ) आणि 'सु' (su) ही सप्तमी विभक्ती आहे. 'स्मिं' चे उदाहरण - 'बुद्धे पसन्नो' (बुद्धांवर प्रसन्न/श्रद्धावान), 'बुद्धम्हि', 'बुद्धस्मिं' किंवा 'सु' चे उदाहरण - 'बुद्धेसु' (बुद्धांमध्ये). พุทฺโธ สพฺพตฺถทายี ภวติ หิ ภชตํ พุทฺธ พุทฺธํ น ตํ กึ ทินฺนํ พุทฺเธน โลเก สิวปทมปิ เต ยนฺติ พุทฺเธน ยสฺมา อสฺมา พุทฺธสฺส ปีตึ ปรหิตวิธยํเทติ พุทฺธานเปโต มญฺโญ พุทฺธสฺส นิจฺจํ ฆฏยติ มติมา โกนุ ภตฺตึ น พุทฺเธ. बुद्ध (प्रथमा) हे भजणाऱ्यांना सर्व काही देणारे आहेत. हे बुद्ध (संबोधन)! बुद्धाला (द्वितीया) जगात काय दिले गेले नाही? बुद्धाद्वारे (तृतीया) लोक परम शांतीचे पद (निर्वाण) प्राप्त करतात, कारण या बुद्धापासून (पंचमी) परहित करणाऱ्याला प्रीती मिळते. बुद्धापासून (पंचमी) दूर न गेलेला बुद्धिमान मनुष्य नेहमी बुद्धासाठी (चतुर्थी/षष्ठी) आपले मन लावतो. बुद्धांच्या ठिकाणी (सप्तमी) कोण बरं भक्ती करणार नाही? เอวมญฺเญยมฺปิ ฆฏปฏาทีนมการนฺตานํ ปุลฺลิงฺคานํ รูปนโย กฺริยาภิสมฺพนฺโธ จ-วิเสสนมฺปน วกฺขาม-อิโต ปรํ ฉฏฺฐิยา จตุตฺถีสมตฺตา ปญฺจมีพหุวจนสฺส จ ตติยาสมตฺตา น ตา ทสฺสียนฺเต-คุมฺพสิ-อโต สิสฺสาติ จ วตฺตเต. याचप्रमाणे इतरही 'अ'कारान्त पुल्लिंगी शब्द जसे की घट, पट इत्यादींच्या रूपांची पद्धत आणि क्रियापदाशी असलेला संबंध समजून घ्यावा. आता आपण विशेषणांविषयी सांगू. यापुढे षष्ठीप्रमाणेच चतुर्थीचे रूप समजावे आणि पंचमी बहुवचनाचे रूप तृतीया बहुवचनाप्रमाणेच समजावे, म्हणून ते येथे दाखवले जात नाहीत. 'गुम्बसि' या सूत्रात 'अतो सिस्स' चे अनुवर्तन होते. กฺวเจ วา. 'क्वचे वा' (कधीकधी किंवा पर्यायाने). อการนฺตโต นามสฺมา ปรสฺส สิสฺส เอ โหติ วา กฺวจี-คุมฺเพ, คุมฺโพ-เสสํ พุทฺธสมํ-เอวํ วตฺตพฺเพ, วตฺตพฺโพ อิจฺจาทิ. अकारान्त नामाच्या पुढे असलेल्या 'सि' प्रत्ययाचा कधीकधी पर्यायाने 'ए' होतो - जसे की 'गुम्बे' (gumbe), 'गुम्बो' (gumbo). उर्वरित रूपे 'बुद्ध' शब्दाप्रमाणे समजावीत. याचप्रमाणे 'वत्तब्बे' (vattabbe), 'वत्तब्बो' (vattabbo) इत्यादी रूपे होतात. โยสฺส เฏ’ติ จ วตฺตเต. 'योस्स टे' (yossa ṭe) याचे अनुवर्तन होते. เอกจฺจาทีหโต. 'एकच्च' (ekacca) इत्यादी शब्दांच्या पुढे. อการนฺเตหิ เอกจฺจาทีหิ โยนํ เฏ โหติ-เอกจฺเจ,(โภ)เอกจฺเจ, เอกจฺเจ-เอวํ ปฐมสทฺทสฺส-นาสฺส สา เว’ติ จ วตฺตเต. अकारान्त 'एकच्च' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'यो' प्रत्ययाचा 'टे' (ṭe) होतो - जसे की 'एकच्चे' (ekacce), '(भो) एकच्चे' (ekacce), 'एकच्चे' (ekacce). याचप्रमाणे पहिल्या शब्दाचे रूप होते. 'नास्स सा वे' (nāssa sā ve) याचे अनुवर्तन होते. โกธาทีหิ. 'कोध' (kodha - क्रोध) इत्यादी शब्दांच्या पुढे. เอหิ นาสฺส สา โหติ วา-โกธสา, โกเธน, อตฺถสา, อตฺเถเนจฺจาทิ-เวติ วตฺตเต. यांच्यापुढे 'ना' प्रत्ययाचा पर्यायाने 'सा' होतो - जसे की 'कोधसा' (kodhasā), 'कोधेन' (kodhena), 'अत्थसा' (atthasā), 'अत्थेन' (atthena) इत्यादी. 'वे' (vā - पर्यायाने) याचे अनुवर्तन होते. มนาทีหิ สฺมึสนฺนาสฺมานํ สิโสโอสาสา. 'मन' (mana) इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'स्मिं', 'स', 'ना' आणि 'स्मा' प्रत्ययांचे अनुक्रमे 'सि', 'सो', 'सा' आणि 'सा' हे आदेश होतात. มนาทีหิ สฺมมาทินํ สิโสมสาสา โหนฺติ วา ยถากฺกมํ-มโน, มนํ-มนสา, มเนน-มนโส, มนสฺส-มนสา, มนา, มนมฺหา, มนสฺมา-มนสิ, มเน, มนมฺหิ, มนสฺมึ. 'मन' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'स्मा' इत्यादी प्रत्ययांचे अनुक्रमे पर्यायाने 'सि', 'सो', 'सा', 'सा' हे आदेश होतात - जसे की 'मनो' (mano), 'मनं' (manaṃ) - 'मनसा' (manasā), 'मनेन' (manena) - 'मनसो' (manaso), 'मनस्स' (manassa) - 'मनसा' (manasā), 'मना' (manā), 'मनम्हा' (manamhā), 'मनस्मा' (manasmā) - 'मनसि' (manasi), 'मने' (mane), 'मनम्हि' (manamhi), 'मनस्मिं' (manasmiṃ). ตม ตป เตช อุร สิรปฺปภุตโย มนาทโย. तम (tama), तप (tapa), तेज (teja), उर (ura), सिर (sira) इत्यादी शब्द 'मन' (manādi) गणातील आहेत. คจฺฉนฺตสิ-สิสฺส เว’ติ จ วตฺตเต-ปรโต ภิยฺโย นานุ วตฺตยิสฺสาม วุตฺติยาเยวานุวุตฺตสฺสคมฺยมานตฺตา. 'गच्छन्तसि' (gacchantasi) या सूत्रात 'सिस्स वे' (sissa ve - सि प्रत्ययाचा पर्यायाने) याचे अनुवर्तन होते. यापुढे आपण अनुवर्तनाचा वारंवार उल्लेख करणार नाही, कारण वृत्तीवरूनच ते समजून येते. นฺตสฺสํ. 'न्त' (nta) प्रत्ययाच्या जागी 'अं' (aṃ) होतो. สิมฺหิ นฺตปฺปจฺจยสฺส อํ โหติ วา-‘‘คสีน’’นฺติ สิโลเป-คจฺฉํ-อญฺญตฺร-คจฺฉนฺโต. 'सि' प्रत्यय पर असताना 'न्त' (nta) प्रत्ययाचा पर्यायाने 'अं' (aṃ) होतो. "गसीनं" या सूत्राने 'सि' चा लोप झाल्यावर - 'गच्छं' (gacchaṃ) हे रूप बनते. इतर ठिकाणी - 'गच्छन्तो' (gacchanto) असे रूप होते. นฺตนฺตุนํ นฺโต โยมฺหิ ปฐเม. पहिल्या (प्रथमा विभक्तीच्या) 'यो' प्रत्ययामध्ये 'न्त' आणि 'न्तु' प्रत्ययांच्या जागी विभक्तीसह 'न्तो' (nto) असा आदेश होतो. ปฐเม โยมฺหิ นฺตนฺตุนํ สวิภตฺตีนํ นฺโต อิจฺจาเทโส วา โหติ-พหุลาธิการา ปุเมเยว-คจฺฉนฺโต, คจฺฉนฺตา. प्रथमेच्या 'यो' प्रत्ययामध्ये 'न्त' आणि 'न्तु' प्रत्ययांच्या जागी विभक्तीसह पर्यायाने 'न्तो' (nto) असा आदेश होतो. 'बहुल' अधिकाराने हे केवळ पुल्लिंगातच होते - जसे की 'गच्छन्तो' (gacchanto), 'गच्छन्ता' (gacchantā). ฏฏาอํ เค. 'गे' (संबोधन एकवचन) पर असताना 'न्त' आणि 'न्तु' प्रत्ययांच्या जागी विभक्तीसह 'ट' (ṭa), 'टा' (ṭā) आणि 'अं' (aṃ) हे आदेश होतात. เค ปเร นฺตนฺตุนํ สวิภตฺตีนํ ฏฏาอํ อิจฺจาเทสา โหนฺติ พหุลํ-(โภ)คจฺฉ, คจฺฉา, คจฺฉํ, คจฺฉนฺโต, คจฺฉนฺตา. 'गे' (संबोधन) पर असताना 'न्त' आणि 'न्तु' प्रत्ययांच्या जागी विभक्तीसह 'ट', 'टा' आणि 'अं' हे आदेश बहुधा (bahulaṃ) होतात - जसे की '(भो) गच्छ' (gaccha), 'गच्छा' (gacchā), 'गच्छं' (gacchaṃ), 'गच्छन्तो' (gacchanto), 'गच्छन्ता' (gacchantā). นฺตสฺส จ ฏ วํเส. 'अं' आणि 'सु' प्रत्यय पर असताना 'न्त' प्रत्ययाच्या जागी पर्यायाने 'ट' (ṭa) होतो. อํเสสุ นฺตปฺปจฺจยสฺส ฏ โหติ วา นฺตุสฺส จ-ววตฺถิตวิภาสายายํ-คจฺฉํ, คจฺฉนฺตํ. 'अं' आणि 'सु' प्रत्यय पर असताना 'न्त' आणि 'न्तु' प्रत्ययाच्या जागी पर्यायाने 'ट' (ṭa) होतो. हा व्यवस्थित विकल्प (vavatthitavibhāsā) आहे - जसे की 'गच्छं' (gacchaṃ), 'गच्छन्तं' (gacchantaṃ). โตตาติตา สสฺมาสฺมึนาสุ. 'स', 'स्मा', 'स्मिं' आणि 'ना' प्रत्यय पर असताना 'न्त' आणि 'न्तु' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'तो' (to), 'ता' (tā), 'ति' (ti) आणि 'ता' (tā) हे आदेश होतात. สาทิสุ นฺตนฺตุนํ สวิภตฺตีนํ โตตาติตา โหนฺติ วา ยถากฺกมํ-คจฺฉตา, คจฺจนฺเตน-คจฺฉโต, คจฺฉสฺส, คจฺฉนฺตสฺส. 'स' इत्यादी प्रत्यय पर असताना 'न्त' आणि 'न्तु' प्रत्ययांच्या जागी विभक्तीसह अनुक्रमे पर्यायाने 'तो', 'ता', 'ति', 'ता' हे आदेश होतात - जसे की 'गच्छता' (gacchatā), 'गच्छन्तेन' (gacchantena) - 'गच्छतो' (gacchato), 'गच्छस्स' (gacchassa), 'गच्छन्तस्स' (gacchantassa). นํ นมฺหิ. 'नं' (naṃ) प्रत्यय पर असताना 'तं' (taṃ) होतो. นมฺหิ นฺตนฺตุนํ สวิภตฺตีนํ ตํ วา โหติ-คจฺจตํ. คจฺฉนฺตานํ-คจฺฉตา, คจฺฉนฺตา, คจฺฉนฺตมฺหา,คจฺฉนฺตสฺมา-คจฺฉติ,คจฺฉนฺเต, คจฺฉนฺตมฺหิ, คจฺจนฺตสฺมึ-เอวํ ตปนฺต ชปนฺตาทโย-ภวนฺตสิ. 'नं' (naṃ) प्रत्यय पर असताना 'न्त' आणि 'न्तु' प्रत्ययांच्या जागी विभक्तीसह पर्यायाने 'तं' (taṃ) होतो - जसे की 'गच्छतं' (gacchataṃ), 'गच्छन्तानं' (gacchantānaṃ) - 'गच्छता' (gacchatā), 'गच्छन्ता' (gacchantā), 'गच्छन्तम्हा' (gacchantamhā), 'गच्छन्तस्मा' (gacchantasmā) - 'गच्छति' (gacchati), 'गच्छन्ते' (gacchante), 'गच्छन्तम्हि' (gacchantamhi), 'गच्छन्तस्मिं' (gacchantasmiṃ). याचप्रमाणे 'तपन्त' (tapanta), 'जपन्त' (japanta) इत्यादींचे रूप होते. पुढील सूत्र - 'भवन्तसि' (bhavantasi). ภุโต. 'भू' (bhū) धातूच्या पुढे. ภุธาตุโต นฺตสฺส อํ โหติ สิมฺหิ นิจฺจมฺปุนพฺพิธานา-ภวํ. 'भू' धातूच्या पुढे 'सि' प्रत्यय पर असताना 'न्त' प्रत्ययाच्या जागी 'अं' (aṃ) हा आदेश पुनरुक्तीमुळे नित्य (नियमितपणे) होतो - जसे की 'भवं' (bhavaṃ). ภวโต วา โภนฺโต คโยนาเส. 'भवन्त' शब्दाच्या जागी 'गे', 'यो', 'ना' आणि 'से' प्रत्यय पर असताना पर्यायाने 'भोन्तो' (bhonto) असा आदेश होतो. ภวนฺตสทฺทสฺส โภนฺตาเทโส วา โหติ คโยนาเส-โภนฺโต, โภนฺตา, ภวนฺโต, ภวนฺตา-เอวมาลปเนปิ-เค ปน-(โภ) โภนฺต, โภนฺตา, ภว, ภวา, ภวํ-ภวํ, ภวนฺตํ, โภนฺเต, ภวนฺเต-โภตา, โภนฺเตน, ภวตา, ภวนฺเตน-โภโต, โภนฺตสฺส, ภวโต, ภวสฺส, ภวนฺตสฺส. 'भवन्त' शब्दाच्या जागी 'गे', 'यो', 'ना' आणि 'से' प्रत्यय पर असताना पर्यायाने 'भोन्तो' (bhonto) असा आदेश होतो - जसे की 'भोन्तो' (bhonto), 'भोन्ता' (bhontā), 'भवन्तो' (bhavanto), 'भवन्ता' (bhavantā). संबोधनातही (आलपन) याचप्रमाणे होते. 'गे' प्रत्यय पर असताना - '(भो) भोन्त' (bhonta), 'भोन्ता' (bhontā), 'भव' (bhava), 'भवा' (bhavā), 'भवं' (bhavaṃ). द्वितीयेत - 'भवं' (bhavaṃ), 'भवन्तं' (bhavantaṃ), 'भोन्ते' (bhonte), 'भवन्ते' (bhavante). तृतीयेत - 'भोता' (bhotā), 'भोन्तेन' (bhontena), 'भवता' (bhavatā), 'भवन्तेन' (bhavantena). षष्टीत - 'भोतो' (bhoto), 'भोन्तस्स' (bhontassa), 'भवतो' (bhavato), 'भवस्स' (bhavassa), 'भवन्तस्स' (bhavantassa). สโตสพฺเภ. 'सन्त' (santa) शब्दाच्या जागी 'भि' प्रत्यय पर असताना 'सब्भ' (sabbha) असा आदेश होतो. สนฺตสทฺทสฺส สพฺภวติ ภกาเร-สพฺภิ. 'सन्त' शब्दाच्या जागी 'भ' (भि) प्रत्यय पर असताना 'सब्भ' (sabbha) असा आदेश होतो - जसे की 'सब्भि' (sabbhi). มหนฺตารหนฺตานํ วา ฏา 'सि' प्रत्यय पर असताना 'महन्त' (mahanta) आणि 'अरहन्त' (arahanta) शब्दांच्या जागी पर्यायाने 'टा' (ṭā) होतो. สิมฺหิ มหนฺตารหนฺตานํ นตสฺส ฏา วา โหติ-มหา, มหํ, มหนฺโต-อรหา, อรหํ, อรหนฺโต-ภวนฺตาทีนํ เสสํ คจฺฉนฺตสมํ-อสฺมสิ. 'सि' प्रत्यय पर असताना 'महन्त' आणि 'अरहन्त' शब्दांमधील 'न्त' च्या जागी पर्यायाने 'टा' (ṭā) होतो - जसे की 'महा' (mahā), 'महं' (mahaṃ), 'महन्तो' (mahanto) - 'अरहा' (arahā), 'अरहं' (arahaṃ), 'अरहन्तो' (arahanto). 'भवन्त' इत्यादींचे उर्वरित रूप 'गच्छन्त' शब्दाप्रमाणेच होते. पुढील सूत्र - 'अस्मसि' (asmasi). ราชาทิยุวาทิตฺวา. 'राज' (rāja) इत्यादी आणि 'युव' (yuva) इत्यादी शब्दांच्या पुढे. ราชาทิหิ ยุวาทีหิ จ ปรสฺส สิสฺส อา โหติ-อสฺมา. 'राज' इत्यादी आणि 'युव' इत्यादी शब्दांच्या पुढे असलेल्या 'सि' प्रत्ययाचा 'आ' (ā) होतो - जसे की 'अस्मा' (asmā). โยนมาโน. 'यो' आणि 'नम्' प्रत्ययांच्या जागी 'आनो' आदेश होतो. ราชาทีหิ ยุวาทีหิ จ โยนมาโน วา โหติ-อสฺมาโน, อสฺมา-(โภ)อสฺม, อสฺมา, อสฺมาโน, อสฺมา. 'राज' इत्यादी आणि 'युव' इत्यादी शब्दांनंतर 'यो' आणि 'नम्' प्रत्ययांच्या जागी विकल्प करून 'आनो' होतो - अस्मानो, अस्मा, (हे) अस्म, अस्मा, अस्मानो, अस्मा. วามฺหา นง. 'म्हा' प्रत्यय असताना विकल्प करून 'नङ्' होतो. ราชาทินํ ยุวาทนํ จานงฺโหติ วามฺหิ-อสฺมานํ, อสฺมึ, อสฺมาโน, อสฺเม. 'राज' इत्यादी आणि 'युव' इत्यादी शब्दांच्या जागी 'म्हि' प्रत्यय असताना विकल्प करून 'अनङ्' होतो - अस्मानं, अस्मिं, अस्मानो, अस्मे. นาสฺเสโน 'ना' (तृतीया एकवचन) प्रत्ययाच्या जागी 'एनो' होतो. กมฺมาทิโต นาวจนสฺส เอโน วา โหติ-อสฺเมน, อสฺมนา. 'कम्म' (कर्म) इत्यादी शब्दांनंतर 'ना' प्रत्ययाच्या जागी विकल्प करून 'एनो' होतो - अस्मेन, अस्मना. กมฺมาทิโต. 'कम्म' (कर्म) इत्यादी शब्दांनंतर. กมฺมาทิโต สฺมิโน นิ โหติ วา-อสฺมนิ, อสฺเม, อสฺมมฺหิ, อสฺมสฺมึ-เสสํ พุทฺธสทฺทสมํ-มุทฺธ คาณฺฑีวธตฺว อนิม ลฆิมาทโย อสฺมาสมา-เอวํ ราชา กาลทฺธานวาจี อทฺธาจ ปฐมาทุติยาสุ อตฺตาตุ มาโน ตติยาสตฺตมฺเยกวจเนสุจ. 'कम्म' इत्यादी शब्दांनंतर 'स्मिं' प्रत्ययाच्या जागी विकल्प करून 'नि' होतो - अस्मनि, अस्मे, अस्मम्हि, अस्मस्मिं. उर्वरित रूपे 'बुद्ध' शब्दाप्रमाणे होतात. मुद्ध, गाण्डीवधन्व, अणिम, लघिमा इत्यादी शब्द 'अस्मन्' शब्दासारखे चालतात. याचप्रमाणे 'राजा', काळ आणि मार्ग वाचक 'अद्धा' शब्द, आणि प्रथमा व द्वितीया विभक्तीत 'अत्ता', 'आतुमा' आणि 'मानो' शब्द, तसेच तृतीया व सप्तमीच्या एकवचनातही (याचप्रमाणे चालतात). ราชสฺสิ นามฺหิ. 'ना' प्रत्यय असताना 'राज' शब्दाच्या (अन्त्य स्वराच्या) जागी 'इ' होतो. ราชสฺสิ วา โหติ นามฺหิ-ราชินา-อญฺญตฺร- 'ना' प्रत्यय असताना 'राज' शब्दाच्या जागी विकल्प करून 'इ' होतो - राजिना. इतरत्र - นาสฺมาสุรญฺญา. 'ना' आणि 'स्मा' प्रत्यय असताना 'रञ्ञा' होतो. นาสฺมาสุ ราชสฺส สวิภตฺติสฺส รญฺญา โหติ-รญฺญา. 'ना' आणि 'स्मा' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'राज' शब्दाच्या जागी 'रञ्ञा' होतो - रञ्ञा. สุนํ หิสู. 'सु', 'नम्' आणि 'हि' प्रत्यय असताना 'ऊ' होतो. ราชสฺส อู โหติ วา สุนํหิสุ-ราชูภิ, ราเชหิ, ราชูภิ, ราเชภิ. 'सु', 'नम्' आणि 'हि' प्रत्यय असताना 'राज' शब्दाच्या (अन्त्य स्वराच्या) जागी विकल्प करून 'ऊ' होतो - राजूभि, राजेहि, राजूभि, राजेभि. รญฺโญ รญฺญสฺส ราชิโน เส. 'स' प्रत्यय असताना 'रञ्ञो', 'रञ्ञस्स' आणि 'राजिनो' हे आदेश होतात. เส ราชสฺส สวิภตฺติสฺส เอเต อาเทสา โหนฺติ-รญฺโญ รญฺญสฺส, ราชิโน, ราชูนํ. 'स' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'राज' शब्दाच्या जागी हे आदेश होतात - रञ्ञो, रञ्ञस्स, राजिनो, (आणि बहुवचनात) राजूनां. ราชสฺส รญฺญํ. 'नम्' प्रत्यय असताना 'राज' शब्दाच्या जागी 'रञ्ञं' होतो. นมฺหิ ราชสทฺทสฺส สวิภตฺติสฺส รญฺญํ โหติ วา-รญฺญํ, ราชานํ-รญฺญา. 'नम्' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'राज' शब्दाच्या जागी विकल्प करून 'रञ्ञं' होतो - रञ्ञं, राजानं, रञ्ञा. สฺมิมฺหิ รญฺเญราชินิ. 'स्मिं' प्रत्यय असताना 'रञ्ञे' आणि 'राजिनि' हे आदेश होतात. สฺมิมฺหิ ราชสฺส สวิภตฺติสฺส รญฺเญราชินี โหนฺติ-รญฺเญ, ราชินิ, ราชุสุ, ราเชสุ ‘‘สมาเส วา’’ติ ราชสฺส นาสสฺมาสฺมึสุ ยํ วุตฺตํ ตํ วา โหติ-ยถา-กาสิรญฺญา, กาสิราเชน = กาสิรญฺโญ, กาสิรญฺญสฺส, กาสิราชิโน, กาสิราชสฺส-กาสิรญฺญา, กาสิราชา, กาสิราชมฺหา, กาสิราชสฺมา-กาสิรญฺเญ, กาสิราชินิ, กาสิราเช, กาสิราชมฺหิ, กาสิราชสฺมึ-อทฺธโต นามฺหิ. 'स्मिं' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'राज' शब्दाच्या जागी 'रञ्ञे' आणि 'राजिनि' हे आदेश होतात - रञ्ञे, राजिनि, राजुसु, राजेसु. "समासे वा" (समासात विकल्प करून) या सूत्रानुसार 'राज' शब्दाच्या 'ना', 'स', 'स्मा' आणि 'स्मिं' प्रत्ययांच्या बाबतीत जे सांगितले आहे, ते विकल्प करून होते. जसे - कासिरञ्ञा, कासिराजेन; कासिरञ्ञो, कासिरञ्ञस्स, कासिराजिनो, कासिराजस्स; कासिरञ्ञा, कासिराजा, कासिराजम्हा, कासिराजस्मा; कासिरञ्ञे, कासिराजिनि, कासिराजे, कासिराजम्हि, कासिराजस्मिं. 'अद्ध' शब्दाच्या पुढे 'ना' प्रत्यय असताना: ปุมกมฺมถามทฺธานํ วา สสฺมาสุจ ปุมาทินมุโหติ วา สสมาสุนามฺหิ เจติ อุตฺเต-อทฺธุนา-อญฺญตฺร กมฺมาทิตฺตา วา เอเน-อทฺเธน-อทฺธนา-เส อุกาเร จ. 'पुम', 'कम्म', 'थाम' आणि 'अद्ध' शब्दांच्या जागी 'स', 'स्मा' आणि 'ना' प्रत्यय असताना विकल्प करून 'उ' होतो - अद्धुना. इतरत्र 'कम्म' इत्यादी सूत्राने विकल्प करून 'एन' (किंवा 'एना') होतो - अद्धेन, अद्धना. 'स' प्रत्यय असताना 'उ' कार देखील होतो. อิยุวณฺณาชฺฌลา นามสฺสเนก. 'इ' आणि 'उ' वर्णांना (म्हणजे इ, ई, उ, ऊ यांना) 'झल' संज्ञा आहे. นามสฺสนฺเต วตฺตมานา อิวณฺณุวณฺณาฌลสญฺญา โหนฺติ ยถากฺกมํ. नामाच्या शेवटी असणारे 'इ-वर्ण' (इ, ई) आणि 'उ-वर्ण' (उ, ऊ) यांना अनुक्रमे 'झ' आणि 'ल' (झल) संज्ञा प्राप्त होते. ฌลา สสฺส โน. 'झ' आणि 'ल' संज्ञक शब्दांनंतर 'स' प्रत्ययाच्या जागी 'नो' होतो. ฌลโต สสฺส โน วา โหติ-อทฺธุโน, อทฺธุสฺส, อทฺธสฺส. 'झ' आणि 'ल' संज्ञक शब्दांनंतर 'स' प्रत्ययाच्या जागी विकल्प करून 'नो' होतो - अद्धुनो, अद्धुस्स, अद्धस्स. นา สฺมาสฺส 'स्मा' प्रत्ययाच्या जागी 'ना' होतो. ฌลโต สฺมาสฺส นา โหติ วา-อทฺธุนา, อทฺธุมฺหา, อทฺทุสฺมา, อทฺธา, อทฺธมฺหา, อทฺธสฺมา-อทฺธนิ, อทฺเธ, อทฺธมฺหิ, อทฺธสฺมึ-อตฺตสทฺทโนหมฺหิ 'झ' आणि 'ल' संज्ञक शब्दांनंतर 'स्मा' प्रत्ययाच्या जागी विकल्प करून 'ना' होतो - अद्धुना, अद्धुम्हा, अद्धुस्मा, अद्धा, अद्धम्हा, अद्धस्मा; (सप्तमीत) अद्धनि, अद्धे, अद्धम्हि, अद्धस्मिं. 'अत्त' शब्दाच्या पुढे 'हि' प्रत्यय असताना: สุหีสุ นก. 'सु' आणि 'हि' प्रत्यय असताना 'नक' होतो. อตฺตอาตุมานํ สุหีสุ วา นก โหติ-กกาโร อนฺตาวยวตฺโถ. อตฺตเนหิ, อตฺตเนภิ, อตฺเตหิ, อตฺเตหิ. 'अत्त' आणि 'आतुमा' शब्दांच्या पुढे 'सु' आणि 'हि' प्रत्यय असताना विकल्प करून 'नक' होतो - 'क'कार हा अन्त्य अवयवासाठी आहे. जसे - अत्तनेहि, अत्तनेभि, अत्तेहि, अत्तेभि. โนตตาตุมา. 'अत्त' आणि 'आतुमा' शब्दांनंतर 'स' प्रत्ययाच्या जागी 'नो' होतो. อตฺตอาตุเมหิ สสฺส โน โหติ วา-อตฺตโน, อตฺตสฺส. 'अत्त' आणि 'आतुमा' शब्दांनंतर 'स' प्रत्ययाच्या जागी विकल्प करून 'नो' होतो - अत्तनो, अत्तस्स. สฺมาสฺส นา พฺร มา จ. 'ब्रह्मा', 'अत्त' आणि 'आतुमा' शब्दांनंतर 'स्मा' प्रत्ययाच्या जागी 'ना' होतो. พฺรหฺมา อตฺตอาตุเมหิ จ ปรสฺส สฺมาสฺส นา โหติ-อตฺตนา-อตฺตเนสุ, อตฺเตสุ-อาตุมา อตฺตาว-พฺรหฺม เค. 'ब्रह्मा', 'अत्त' आणि 'आतुमा' शब्दांनंतर येणाऱ्या 'स्मा' प्रत्ययाच्या जागी 'ना' होतो - अत्तना. (सप्तमी बहुवचनात) अत्तनेसु, अत्तेसु. 'आतुमा' शब्द 'अत्ता' शब्दाप्रमाणेच चालतो. 'ब्रह्म' शब्दाच्या पुढे 'गे' (संबोधन) प्रत्यय असताना: ฆพฺรหฺมาทิเต 'घ' संज्ञक आणि 'ब्रह्म' इत्यादी शब्दांनंतर 'ए' होतो. ฆสญฺญโต พฺรหฺม กตฺตุ อิสิ สขาทีหิ จ คสฺเส วา โหติ-พฺรหฺเม, พฺรหฺม, พฺรหฺมา. 'घ' संज्ञा असलेल्या शब्दांनंतर आणि 'ब्रह्म', 'कत्तु' (कर्ता), 'इसि' (ऋषी), 'सखा' इत्यादी शब्दांनंतर 'ग' (संबोधन एकवचन) प्रत्ययाच्या जागी विकल्प करून 'ए' होतो - ब्रह्मे, ब्रह्म, ब्रह्मा. นามฺหี. 'ना' प्रत्यय असताना. พฺรหฺมสฺสุ โหติ นามฺหิ-พฺรหฺมุนา. 'ना' प्रत्यय असताना 'ब्रह्म' शब्दाच्या (अन्त्य स्वराच्या) जागी 'उ' होतो - ब्रह्मुना. พฺรหฺมสสุ วา. 'स' आणि 'सु' प्रत्यय असताना 'ब्रह्म' शब्दाच्या जागी विकल्प करून 'उ' होतो. พฺรหฺมสฺสุ วา โหติ สนํสุ-พฺรหฺมุโน, พฺรหมุสฺส, พฺรหฺมสฺส, พฺรหฺมูนํ,พฺรหฺมานํ-พฺรหมุนา-‘‘อมฺพาทิหี’’ติ สฺมิโน นิโหติ วา-พฺรหฺมนิ. พฺรหฺเม, พฺรหฺมมฺหิ, พฺรหฺมสฺมึ-เสสํ อสฺมสมํ. 'स', 'नम्' आणि 'सु' प्रत्यय असताना 'ब्रह्म' शब्दाच्या जागी विकल्प करून 'उ' होतो - ब्रह्मुनो, ब्रह्मुस्स, ब्रह्मस्स, ब्रह्मूनं, ब्रह्मानं, ब्रह्मुना. "अम्बादीहि" या सूत्रानुसार 'स्मिं' प्रत्ययाच्या जागी विकल्प करून 'नि' होतो - ब्रह्मनि, ब्रह्मे, ब्रह्मम्हि, ब्रह्मस्मिं. उर्वरित रूपे 'अस्मन्' शब्दाप्रमाणे होतात. สขา-ราชาทิตฺตา สิสฺส อา. 'सखा' शब्दाच्या पुढे 'राजादितो' इत्यादी सूत्राने 'सि' प्रत्ययाच्या जागी 'आ' होतो. อาโยโน จ สขา. 'सखा' शब्दाहून 'यो' प्रत्ययाचा 'आय' आदेश होतो. สขโต โยนมาโย โน โหนฺติ วา อาโน จ-สขาโย, สขาโน. 'सखा' शब्दाहून 'यो' प्रत्ययांचे 'आय' आणि 'आनो' हे आदेश विकल्पेकरून होतात; (त्यामुळे) 'सखायो' आणि 'सखानो' (अशी रूपे होतात). โนนาเสสฺมิ. 'नो', 'ना' आणि 'सेस' प्रत्यय असताना. สขสฺส อิ โหติ โนนาเสสุ-สขิโน-อญฺญตฺร- 'नो', 'ना' आणि 'सेस' प्रत्यय असताना 'सखा' शब्दाचा 'इ' होतो - जसे 'सखिनो' - इतरत्र... โยสฺวํหิสุ จารง. 'यो', 'सु', 'अं' आणि 'हि' प्रत्यय असताना 'आरङ' आदेश होतो. สขสฺส วา อารง โหติ โยสฺวํหิสุ สฺมานํสุ จ. 'यो', 'सु', 'अं', 'हि' आणि 'स्मा', 'नं', 'सु' प्रत्यय असताना 'सखा' शब्दाचा विकल्पेकरून 'आरङ' आदेश होतो. อารงฺสฺมา 'आरङ' आदेशानंतर... อารงาเทสโต ปเรสํ โยนํ โฏ โหติ-สขาโร-อารทฺธาโท. 'आरङ' आदेशानंतर येणाऱ्या 'यो' प्रत्ययांचा 'टो' होतो - जसे 'सखारो', 'आरद्धादो'. สภาเว-สขา-เอวมาลปเน-เคตุ-สโข, สข, สขา-อมฺหิ-สขานํ, สขารํ, สขํ, สขาโย, สขา โน, สขิโน. प्रथमा विभक्तीत - 'सखा'. तसेच संबोधनात 'गे' प्रत्यय असताना - 'सखो', 'सख', 'सखा'. 'अं' प्रत्यय असताना - 'सखानं', 'सखारं', 'सखं'. 'यो' प्रत्यय असताना - 'सखायो', 'सखानो', 'सखिनो'. โฏเฏ วา. 'टो' आणि 'टे' हे आदेश विकल्पेकरून होतात. อารงาเทสมฺหา โยนํ โฏเฏ วา โหนฺติ ยถากฺกมนฺติ เฏ-ปกฺเข-‘‘อารงิสฺมา’’ ติโฏ-สขาเร, สขาโร, สเข-สขีนา, สขาเรหิ, สเขหิ, สขาเรหิ, สเขหิ-สขิโน, สขิสฺส, สขารานํ. 'आरङ' आदेशानंतर येणाऱ्या 'यो' प्रत्ययांचे 'टो' आणि 'टे' हे आदेश यथाक्रम विकल्पेकरून होतात. 'टे' च्या पक्षात - 'आरङिस्मा' सूत्राने 'टो' होऊन - 'सखारे', 'सखारो', 'सखे' (अशी रूपे होतात). तृतीया विभक्तीत - 'सखीना', 'सखारेहि', 'सखेहि', 'सखारेहि', 'सखेहि'. चतुर्थी विभक्तीत - 'सखिनो', 'सखिस्स', 'सखारानं'. สมานํสุ วา. 'स्मा', 'नं' आणि 'सु' प्रत्यय असताना विकल्पेकरून... สขสฺส วา อิ โหติ สฺมานํสุ-สขีนํ, สขานํ. 'स्मा', 'नं' आणि 'सु' प्रत्यय असताना 'सखा' शब्दाचा विकल्पेकरून 'इ' होतो - जसे 'सखीनं', 'सखानं'. ฏา นาสฺมานํ. 'ना' आणि 'स्मा' प्रत्ययांचा 'टा' होतो. อารงาเทสมฺหา นาสฺมานํ ฏา โหติ-สขารา-พหุลาธิการา สขารสฺมา-สขีนา, สขีมฺหา,สขิสฺมา, สขา, สขมฺหา, สขสฺมา. 'आरङ' आदेशानंतर येणाऱ्या 'ना' आणि 'स्मा' प्रत्ययांचा 'टा' होतो - जसे 'सखारा'. बहुल अधिकारामुळे 'सखारस्मा' - 'सखीना', 'सखीम्हा', 'सखिस्मा', 'सखा', 'सखम्हा', 'सखस्मा'. เฏ สฺมิโน. 'स्मि' प्रत्ययाचा 'टे' होतो. สขโต สฺมิโน เฏ โหติ นิจฺจํ-สเข, สขาเรสุ, สเขสุ-‘‘ธมฺโมวาญฺญตฺเถ’ติ ราชาทียุ ปาฐา ทฬฺหธมฺมาทโย วา อสฺมสมา. 'सखा' शब्दाहून येणाऱ्या 'स्मि' प्रत्ययाचा नित्य 'टे' होतो - जसे 'सखे', 'सखारेसु', 'सखेसु'. 'धम्मोवाञ्ञत्थे' इत्यादी सूत्रांमुळे राजा इत्यादी शब्दांचे पाठ दृढधर्मा इत्यादी किंवा 'अस्म' समान असतात. โยนํ โนเน วา. 'यो' प्रत्ययांचे विकल्पेकरून 'नो' आणि 'ने' हे आदेश होतात. ยุวาทิหิ โยนํ โนเน วา โหนฺติ ยถากฺกมํ. 'युव' इत्यादी शब्दांनंतर येणाऱ्या 'यो' प्रत्ययांचे यथाक्रम विकल्पेकरून 'नो' आणि 'ने' हे आदेश होतात. โนนาเนสฺมา. 'नो', 'ना' आणि 'ने' प्रत्यय असताना... เอสุ ยุวาทินมา โหติ-ยุวาโน, ยุวา-ยุวานํ, ยุวํ, ยุวาเน, ยุเว-ยุวานา. हे प्रत्यय असताना 'युव' इत्यादी शब्दांचा 'आ' होतो - जसे 'युवानो', 'युवा' - 'युवानं', 'युवं', 'युवाने', 'युवे' - 'युवाना'. ยุวาทินํ สุหิสฺวานงิ. 'सु' आणि 'हि' प्रत्यय असताना 'युव' इत्यादी शब्दांचा 'आनङ' होतो. สุหิสุ ยุวาทินมานงิโหติ-ยุวาเนหิ, ยุวาเนภิ. 'सु' आणि 'हि' प्रत्यय असताना 'युव' इत्यादी शब्दांचा 'आनङ' होतो - जसे 'युवानेहि', 'युवानेभि'. ยุวา สสฺสิโน. 'युव' शब्दाहून येणाऱ्या 'स' प्रत्ययाचा 'इनो' होतो. ยุวา สสฺส วา อิโน โหติ-ยุวโน, ยุวสฺส. 'युव' शब्दाहून येणाऱ्या 'स' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'इनो' होतो - जसे 'युवनो', 'युवस्स'. สมาสมินฺนํ นาเน. 'स्मा' आणि 'स्मि' प्रत्ययांचे 'ना' आणि 'ने' हे आदेश होतात. ยุวาทิหิ สฺมาสฺมินฺนํ นาเน โหนฺติ ยถากฺกมํ-ยุวานํ-ยุวาเน,ยุวาเนสุ-รูปสิทฺธิยํ ปนสฺส อญฺญถา รูปนโย ทสฺสิโต เนโส คเหตพฺโพ-อมูลตฺตา-นหิ ตตฺถาคมาทิมูลมตฺถิ-เอวมิที สมญฺญมฺปิ-มฆวปุมวตฺตหสทฺทา ยุวสทฺทสมา-อยนฺตุ วิเสโส. 'युव' इत्यादी शब्दांनंतर येणाऱ्या 'स्मा' आणि 'स्मि' प्रत्ययांचे यथाक्रम 'ना' आणि 'ने' हे आदेश होतात - जसे 'युवानं' - 'युवाने', 'युवानेसु'. रूपसिद्धीमध्ये मात्र याचा दुसरा रूपनय दाखवला आहे, तो स्वीकारू नये, कारण तो अमूलक आहे - कारण तिथे आगम इत्यादींचे मूळ नाही. याचप्रमाणे ही सामान्य संज्ञा देखील आहे - 'मघव', 'पुम', 'वत्तह' हे शब्द 'युव' शब्दासारखेच आहेत - हा विशेष आहे. คสฺสํ. 'ग' प्रत्ययाचा 'अं' होतो. ปุมสทฺทโต คสฺส อํ วา โหติ-ปุมํ, ปุม, ปุมา. 'पुम' शब्दाहून येणाऱ्या 'ग' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'अं' होतो - जसे 'पुमं', 'पुम', 'पुमा'. นามฺหิ. 'ना' प्रत्यय असताना... นามฺหิ ปุมสฺส วา อา โหติ-ปุมานา-อญฺญตฺร-วา อุตฺเต = ปุมุนา, ปุเมน-ปุมุโน, ปุมุสฺส, ปุมสฺส-ปุมุนา, ปุมานา-‘‘ปุมา’’ติ สฺมิโน เน วา โหติ-ปุมาเน, ปุเม, ปุมมฺหิ, ปุมสฺมึ. 'ना' प्रत्यय असताना 'पुम' शब्दाचा विकल्पेकरून 'आ' होतो - जसे 'पुमाना'. इतरत्र विकल्पेकरून 'उ' कार झाल्यावर = 'पुमुना', 'पुमेन'. 'पुमुनो', 'पुमुस्स', 'पुमस्स'. 'पुमुना', 'पुमाना'. 'पुमा' या शब्दाहून येणाऱ्या 'स्मि' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'ने' होतो - जसे 'पुमाने', 'पुमे', 'पुमम्हि', 'पुमस्मिं'. สุมฺหา จ. 'सु' प्रत्यय असताना देखील... ปุมสฺส สุมฺหิ ยํ วุตฺตํ ตํ อา จ วา โหตีติ อานงิ อา จ โหติ-ปุมาเนสุ ปุมาสุ ปุเมสุ. 'पुम' शब्दाच्या 'सु' प्रत्ययात जे सांगितले आहे, ते 'आ' आणि विकल्पेकरून होते, म्हणजेच 'आनङ' आणि 'आ' देखील होतो - जसे 'पुमानेसु', 'पुमासु', 'पुमेसु'. วตฺตหา สนนฺนํ โนนานํ. 'वत्तहा' शब्दाहून येणाऱ्या 'स' आणि 'नं' प्रत्ययांचे 'नो' आणि 'नां' हे आदेश होतात. วตฺตหา สนนฺนํ โนนานํ โหนฺติ ยถากฺกมํ-วตฺตหาโน วตฺตหานานํ. 'वत्तहा' शब्दाहून येणाऱ्या 'स' आणि 'नं' प्रत्ययांचे यथाक्रम 'नो' आणि 'नां' हे आदेश होतात - जसे 'वत्तहानो', 'वत्तहानानं'. อการนฺตํ. अकारान्त (शब्द). สาสิ 'सा' शब्दाहून 'सि' प्रत्यय असताना... เอกวจนโยสฺวโฆนํ. एकवचन आणि 'यो' प्रत्यय असताना 'अघो' (अकारान्त नसलेल्या) शब्दांचा... เอกวจเน โยสุ จ ฆโอการนฺตวชฺชิตานํ นามานํ รสฺโส โหติ ติลิงฺเค’ติ รสฺเส สมฺปตฺเต-‘‘สิสฺมินฺนานปุํสกสฺสา‘‘ติ อนปุํสกสฺส สิมฺหิ ตุน โหติ-สา-ยุวาทิตฺตา สิสฺส อา-สาโน, โนตฺตาภาวปกฺเข-‘‘โยนมาโน‘‘ติ วาธิการสฺส ววตฺถิต วิภา สตฺตานิจฺจมาโน-สาโน-ตถา โนตฺตาภาว ปกฺเข. एकवचन आणि 'यो' प्रत्यय असताना 'घ' संज्ञक आणि अकारान्त वगळता इतर नामांचा तिन्ही लिंगांत र्हस्व होतो, या नियमाने र्हस्व प्राप्त झाल्यावर - 'सिस्मिन्नानपुंसकस्स' या सूत्राने अनपुंसकलिंगात 'सि' प्रत्यय असताना 'तु' होत नाही - 'सा'. 'युव' इत्यादींप्रमाणे 'सि' प्रत्ययाचा 'आ' होतो - 'सानो'. 'नो' भाव नसलेल्या पक्षात - 'योनामालो' या अधिकारातील व्यवस्थित विभाषेमुळे नित्य 'आनो' होतो - 'सानो'. तसेच 'नो' भाव नसलेल्या पक्षात देखील. สาสฺสํเส จานงิ. 'सा' शब्दाहून 'स', 'अं' आणि 'से' प्रत्यय असताना 'आनङ' होतो. สาสทฺทสฺส อานงิ โหติ อํเส เค จ-(โภ)สาน, สานา, สาโน, สานํ, สาเน, สาโน-เสสํ ยุวสทฺทสมํ-เสตุ-สานสฺส-สุวายุวาว-‘‘เอกวจนโยสฺวโฆนํ’’ติร- สฺสตฺตํว วิเสโส-เคตุ. 'सा' शब्दाला 'अं' आणि 'गे' (संबोधन एकवचन) प्रत्यय असताना 'आनङ्' (आन) आदेश होतो - (हे) सान, साना, सानो, सानं, साने, सानो. उर्वरित रूपे 'युव' शब्दाप्रमाणे होतात. 'से' प्रत्यय असताना - सानस्स. 'सु' आणि 'यु' असताना - सुवा, युवा. "एकवचनयोस्वघोनं" या सूत्राने र्हस्व होणे हाच विशेष फरक आहे. 'गे' प्रत्यय असताना. เค วา. 'गे' प्रत्यय असताना विकल्पे करून (र्हस्व होतो). อโฆนํ เค วา รสฺโส โหติ ติลิงฺเค-(โห)สุว, สุวา. 'अघोन्' शब्दांचा 'गे' प्रत्यय असताना तिन्ही लिंगांत विकल्पे करून र्हस्व होतो - (हे) सुव, सुवा. อาการนฺตํ. आकारान्त (पुल्लिंगी नामे समाप्त). มุนิ. मुनि (इकारान्त पुल्लिंगी). โยสุชฺฌิสฺส ปุเม. पुल्लिंगात 'यो' प्रत्यय असताना 'झ' संज्ञक (इकार आणि उकार) चा (ए किंवा ओ) होतो. ฌสญฺญสฺส อิสฺส โยสุ วา ฏ โหติ ปุลฺลิงฺเค-มุนโย-อโต’ติ สามญฺญนิทฺเทสา อโต โยนํ ฏาเฏ สมฺปตฺตาปิ อวิธาน สามตฺถิยา น โหนฺติ-อญฺญตฺร- 'झ' संज्ञक इकाराचा 'यो' प्रत्यय असताना पुल्लिंगात विकल्पे करून 'ए' (किंवा ओ) होतो - मुनयो. "अतो" या सामान्य निर्देशामुळे 'अ' कारावरून 'यो' प्रत्ययाला 'आ' आणि 'ए' प्राप्त झाले तरी विधानाच्या अभावामुळे ते होत नाहीत - इतरत्र - โลโป. लोप होतो. ฌลโต โยนํ โลโป โหตี’ติ โย โลเป. 'झ' आणि 'ल' संज्ञकांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा लोप होतो, या सूत्राने 'यो' चा लोप झाल्यावर. โยโลปนิสุ ทีโฆ. 'यो' चा लोप झाल्यावर आणि 'नि' (किंवा 'सु') प्रत्यय असताना दीर्घ होतो. โยนํ โลโป นิสุ จ ทีโฆ โหติ-มุนี-(โภ)มุนี, มุนโย, มุนี-มุนึ มุนโย มุนี = มุนินา มุนีหิ มุนีภิ-โยโลป นีสุ วี มนฺตุวนฺตุนมิจฺจาทิ ญาปกา อิการา การานํ ‘‘สุนํหิสูติ’’ทีฆ สฺสานิจฺจตฺตา มุนิหจฺจาทีปิ โหติ-มุนิโน, มุนิสฺส มุนีนํ, มุนินา มุนิมฺหามุนิสฺมา, มุนิมฺหิ มุนิสฺมึ มุนีสุ-เอวํ กวิกปิคิริ อาทโย-อคฺคิอิสีนํ อยํ วเสโส. 'यो' चा लोप झाल्यावर आणि 'नि' (किंवा 'सु') प्रत्यय असताना दीर्घ होतो - मुनी. (संबोधन) - (हे) मुनी, मुनयो, मुनी. द्वितीया - मुनिं, मुनयो, मुनी. तृतीया - मुनिना, मुनीहि, मुनीभि. 'यो' चा लोप आणि 'नि' प्रत्यय असताना 'मन्तु', 'वन्तु' इत्यादी ज्ञापकांवरून इकार आणि उकारांना "सु-नं-हिसु" या सूत्राने होणारा दीर्घ विकल्पे करून होत असल्यामुळे 'मुनिहि' इत्यादी रूपेही होतात. चतुर्थी/षष्ठी - मुनिनो, मुनिस्स, मुनीनं. पंचमी - मुनिना, मुनिम्हा, मुनिस्मा. सप्तमी - मुनिम्हि, मुनिस्मिं, मुनीसु. याचप्रमाणे कवि, कपि, गिरि इत्यादी शब्द चालतात. 'अग्गि' आणि 'इसि' शब्दांचा हा विशेष नियम आहे. สสฺสาคฺคิ โต นิ. 'अग्गि' शब्दापुढील 'स' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'नि' होतो. อคฺคิสฺมา สิสฺส นิ โหติ วา-อคฺคินิ. อคฺคิ, อคฺคโย, อคฺคี. 'अग्गि' शब्दापुढील 'स' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'नि' होतो - अग्गिनी. अग्गि, aggayo, अग्गी. เฏ สิสฺสิสิสฺมา. 'इसि' शब्दापुढील 'स' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'ए' होतो. อิสิสฺมา สิสฺส เฏ วา โหติ-อิเส, อิสิ-พฺรหฺมาทิตฺตา คสฺเส วา-(โภ)อิเส อิสิ อิสี. 'इसि' शब्दापुढील 'स' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'ए' होतो - इसे, इसि. 'ब्रह्मा' इत्यादी शब्दांप्रमाणे 'गे' (संबोधन) प्रत्यय असताना विकल्पे करून - (हे) इसे, इसि, इसी. ทุติยสฺส โยสฺส. द्वितीयेच्या 'यो' प्रत्ययाचा (विकल्पे करून 'ए' होतो). อิสสฺมา ปรสฺส ทุติยา โยสฺส เฏ วา โหติ-อิเส, อิสโย, อิสิ, เสสํมุนิสทฺทสมํ-อาทิสทฺทโน สฺมิมฺหิ-รตฺยาทิหิ โฏ สฺมิโน. 'इसि' शब्दापुढील द्वितीयेच्या 'यो' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'ए' होतो - इसे, इसयो, इसि. उर्वरित रूपे 'मुनि' शब्दाप्रमाणे होतात. 'आदि' शब्दाचा 'स्मिं' प्रत्यय असताना - 'रति' इत्यादी शब्दांप्रमाणे 'स्मिं' चा 'ओ' होतो. รตฺยาทีหิ สฺมิโน โฏ โหติ วา-อาโท, อาทิมฺหิ, อาทิสฺมึ. สมาเส อิการนฺตโต โยสฺมึสุ วิเสโส. 'रति' इत्यादी शब्दांनंतर 'स्मिं' चा विकल्पे करून 'ओ' होतो - आदो, आदिम्हि, आदिस्मिं. समासात इकारान्त शब्दांनंतर 'यो' आणि 'स्मिं' प्रत्यय असताना विशेष नियम आहे. อิโตญฺญตฺเถ ปุเม. अन्य अर्थ असणाऱ्या (बहुव्रीहि समासातील) इकारान्त पुल्लिंगी शब्दांनंतर. อญฺญปทตฺเถ วตฺตมานา อิการนฺตโต นามสฺมา โยนํ โน เน วา โหนฺติ ยถากฺกมํ ปุลฺลิงฺเค-อริยวุตฺติโน, อริยวุตฺตโย, อริยวุตฺติ-เอวมาลปเน-อริยวุตฺติเน, อริยวุตฺตโย อริยวุตฺตี. अन्यपदार्थात (बहुव्रीहि समासात) वर्तमान असणाऱ्या इकारान्त नामांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा पुल्लिंगात अनुक्रमे 'नो' आणि 'ने' विकल्पे करून होतो - अरियवुत्तिनो, अरियवुत्तयो, अरियवुत्ति. याचप्रमाणे संबोधनात - अरियवुत्तिने, अरियवुत्तयो, अरियवुत्ती. เน สฺมิโน กฺวจิ. 'स्मिं' प्रत्ययाचा काही ठिकाणी 'ने' होतो. อญฺญปทตฺเถ วตฺตมานา อิการนฺตโต นามสฺมา สฺมิโน เน โหติ วา กฺวจิ-อริยวุตฺติเน, อริยวุตฺติมฺหิ, อริยวุตฺติสฺมึ, ‘‘กฺวจี‘‘ติ วุตฺตตฺตา ยถาทสฺสนํ น สพฺพตฺต เน อาเทโส. अन्यपदार्थात वर्तमान असणाऱ्या इकारान्त नामांनंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचा काही ठिकाणी विकल्पे करून 'ने' होतो - अरियवुत्तिने, अरियवुत्तिम्हि, अरियवुत्तिस्मिं. "क्वचि" असे म्हटल्यामुळे सर्व ठिकाणी 'ने' हा आदेश होत नाही, तर प्रयोगांनुसार होतो. อิการนฺตํ. इकारान्त (पुल्लिंगी नामे समाप्त). ททฺธี, สิโลโป, อนปุํสกตฺตา น รสฺโส. दद्धी (दधिन्). 'सि' प्रत्ययाचा लोप होतो. नपुंसकलिंग नसल्यामुळे र्हस्व होत नाही. โยนํ โนเน ปุเม. 'यो' प्रत्ययाचा पुल्लिंगात 'नो' आणि 'ने' होतो. ฌสญฺญิโต โยนํ โนเนวาโหนฺติ ยถากฺกมํ ปุลฺลิงฺเค. ททฺธิโน. 'झ' संज्ञक शब्दांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा पुल्लिंगात अनुक्रमे 'नो' आणि 'ने' विकल्पे करून होतो - दद्धिनो. ชนฺตุเหตฺวีฆเปหิ วา. 'जन्तु', 'हेतु', ईकारान्त आणि 'घ', 'प' संज्ञक शब्दांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा विकल्पे करून लोप होतो. ชนฺตุเหตุหิ อีการนฺเตหิ ฆปสญฺเญหิ จ ปเรสํ โยนํ วา โลโป โหติ-ททฺธี, ททฺธิโย-เอวมาลปเน-เคตุ-ททฺธิ, ททฺธี. 'जन्तु', 'हेतु', ईकारान्त आणि 'घ', 'प' संज्ञक शब्दांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा विकल्पे करून लोप होतो - दद्धी, दद्धियो. याचप्रमाणे संबोधनात - 'गे' प्रत्यय असताना - दद्धि, दद्धी. น ฌีโก. 'झ' संज्ञक ईकारान्त शब्दांनंतर 'अं' प्रत्ययाचा 'नं' होतो. ฌสญฺญิโต อํวจนสฺส นํ วา โหติ-ทณฺฑินํ, ทณฺฑึ, ทณฺฑิเน. 'झ' संज्ञक शब्दांनंतर 'अं' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'नं' होतो - दण्डिनं, दण्डिं, दण्डिने. โน. 'नो' (आदेश होतो). ฌิโต โยนํ โน วา โหติ ปุลฺลิงฺเคหิ ทุติยา โยสฺส โน ทณฺฑิโน, ทณฺฑิ, ทณฺฑินา, ทณฺฑีหิ, ทณฺฑีภิ-ทณฺฑิโน, ทณฺฑิสฺส, ทณฺฑินํ-ทณฺฑินา, ทณฺฑิมฺหา, ทณฺฑิสฺมา. 'झ' संज्ञक शब्दांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'नो' होतो. पुल्लिंगात द्वितीयेच्या 'यो' चा 'नो' होतो - दण्डिनो, दण्डि, दण्डिना, दण्डीहि, दण्डीभि - दण्डिनो, दण्डिस्स, दण्डिनं - दण्डिना, दण्डिम्हा, दण्डिस्मा. สฺมิโน นิ. 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'नि' होतो. ฌิโต สฺมึวจนสฺส นิ โหติ วา-ทณฺฑินิ. ทณฺฑิมฺหิ, ทณฺฑิสฺมึ, ทณฺฑีสุเอวํ สงฺฆิ คณิ คามณิปฺปภุตโย. 'झ' संज्ञक शब्दांनंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'नि' होतो - दण्डिनि. दण्डिम्हि, दण्डिस्मिं, दण्डीसु. याचप्रमाणे संघी, गणी, गामणी इत्यादी शब्द चालतात. อีการนฺตํ. ईकारान्त (पुल्लिंगी नामे समाप्त). ภิกฺขุ. भिक्खु (उकारान्त पुल्लिंगी). ลา โยนํ โว ปุเม. 'ल' संज्ञक शब्दांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा पुल्लिंगात 'वो' होतो. ลโต โยนํ โว โหติ วา ปุลฺลิงฺเค. 'ल' संज्ञक शब्दांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा पुल्लिंगात विकल्पे करून 'वो' होतो. เวโวสุ ลุสฺส 'वे' आणि 'ओ' प्रत्यय असताना 'ल' संज्ञक उकाराचा (अ) होतो. ลสญฺญสฺส อุสฺส เวโวสุ ฏ โหติ-ภิกฺขโว-อญฺญตฺร-โย โลเป ทีโฆ-ภิกฺขุ (โภ)ภิกฺขุ. 'ल' संज्ञक उकाराचा 'वे' आणि 'ओ' प्रत्यय असताना 'अ' होतो - भिक्खवो. इतरत्र - 'यो' चा लोप झाल्यावर दीर्घ होतो - भिक्खू. (संबोधन) - (हे) भिक्खू. ปุมาลปเน เวโว. पुल्लिंगी संबोधनात 'वे' आणि 'वो' (हे आदेश) होतात. ลสญฺญโต อุโต โยสฺสาลปเน เวโว โหนฺติ วา ปุลฺลิงฺเค-ภิกฺขเว, ภิกฺขโว, ภิกฺขุ-ภิกฺขุํ, ภิกฺขโว, ภิกฺขุ-ภิกฺขุนา, ภิกฺขุหิ,ภิกฺขูภิ-ภิกฺขุโน, ภิกฺขุสฺส, ภิกฺขูนํ-ภิกฺขุนา, ภิกฺขุมฺหา. ภิกฺขุสฺมา-ภิกฺขุมฺหิ. ภิกฺขุสฺมึ, ภิกฺขูสุ-เอวํ เสตุ เกตุ ภานุ อาทโย-ชนฺตุเหตูนํ โยสฺวยมฺเหโท-ชนฺตฺวาทินา วา โยสฺส โลเป-ชนฺตุ. पुल्लिंगात 'ल' संज्ञा असलेल्या 'उ' काराच्या पुढे 'यो' विभक्तीच्या ठिकाणी संबोधनात 'वे' आणि 'वो' हे (आदेश) विकल्पेकरून होतात - भिक्खवे (bhikkhave), भिक्खवो (bhikkhavo), भिक्खू (bhikkhu) [संबोधन]. भिक्खुं (bhikkhuṃ), भिक्खवो (bhikkhavo), भिक्खू (bhikkhu) [द्वितीया]. भिक्खुना (bhikkhunā), भिक्खूहि (bhikkhūhi), भिक्खूभि (bhikkhūbhi) [तृतीया]. भिक्खुनो (bhikkhuno), भिक्खुस्स (bhikkhussa), भिक्खूनं (bhikkhūnaṃ) [चतुर्थी/षष्ठी]. भिक्खुना (bhikkhunā), भिक्खुम्हा (bhikkhumhā), भिक्खुस्मा (bhikkhusmā) [पंचमी]. भिक्खुम्हि (bhikkhumhi), भिक्खुस्मिं (bhikkhusmiṃ), भिक्खूसु (bhikkhūsu) [सप्तमी]. याचप्रमाणे सेतु (setu), केतु (ketu), भानु (bhānu) इत्यादींचे रूपे होतात. 'जन्तु' आणि 'हेतु' शब्दांच्या 'यो' विभक्तीमध्ये 'अय' आणि 'अव' आदेश होतात - जन्तु इत्यादींच्या 'यो' चा लोप झाल्यावर - जन्तु (jantu). จนฺตฺวาทิโต โน จ. चन्त्वादि (किंवा जन्त्वादि) शब्दांच्या पुढे 'नो' देखील होतो. ชนฺตฺวาทิโต โยนํ โน โหติ โว จ วา ปุลฺลิงฺเค-ชนฺตุโน, ชนฺตโว, ชนฺตุโย-เอวํ ทุติยาโยมฺหิ-(โภ) ชนฺตุ, ชนฺตุ, ชนฺตุโน ชนฺตโว-‘‘ปุมาลปเน เวโว’’ติวา เว โว จ ชนฺตเว, ชนฺตโว, ชนฺตุโย-เหตุ, เหตโว, เหตุ. เหตุโย-‘‘โยมฺหิวา กฺวจี‘‘ตี โยสุลสญฺญสฺส อุสฺส วา ฏา เทโส เหตโย, เหตุโย-(โภ)เหตุ, เหตุ, เหตเว, เหตโว, เหตโย, เหตุโย-เหตุํ, เหตุ, เหตโว, เหตโย, เหตุโย พหุสทฺทา นมฺหิ. पुल्लिंगात जन्तु इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'यो' विभक्तीच्या ठिकाणी 'नो' आणि 'वो' हे विकल्पेकरून होतात - जन्तुनो (jantuno), जन्तवो (jantavo), जन्तुयो (jantuyo). याचप्रमाणे द्वितीयेच्या 'यो' विभक्तीमध्ये - (भो) जन्तु (jantu), जन्तु (jantu), जन्तुनो (jantuno), जन्तवो (jantavo). "पुमाल्पने वेवो" या सूत्राने विकल्पेकरून 'वे' आणि 'वो' देखील होतात - जन्तवे (jantave), जन्तवो (jantavo), जन्तुयो (jantuyo). हेतु (hetu), हेतवो (hetavo), हेतु (hetu), हेतुयो (hetuyo). "योम्हिवा क्वचि" या सूत्राने 'यो' विभक्तीमध्ये 'ल' संज्ञा असलेल्या 'उ' काराच्या जागी विकल्पेकरून 'अ' आदेश होतो - हेतयो (hetayo), हेतुयो (hetuyo). (भो) हेतु (hetu), हेतु (hetu), हेतवे (hetave), हेतवो (hetavo), हेतयो (hetayo), हेतुयो (hetuyo). हेतुं (hetuṃ), हेतु (hetu), हेतवो (hetavo), हेतयो (hetayo), हेतुयो (hetuyo). 'बहु' शब्दाच्या पुढे 'नं' विभक्ती आल्यावर - พหุกตินฺนํ बहुकतिन्नं (बहु आणि कति शब्दांच्या पुढे). นมฺหี พหุโน กติสฺส จ นุก โหติ ติลิงฺเค-พหุนฺนํเสสํ ภิกฺขุสมํ-พหุ. พหโว, พหู-(โภ) พหุ, พหุ, พหเว, พหโว, พหุ พหุํ, พหโว, พหุ-พหุนา. พหุหิ,พหูภิ-พหุโน, พหุสฺส, พหุนฺนํ-พหุนา, พหุมฺหา. พหุสฺมา-พหุมฺหิ, พหุสฺมึ, พหุสุ-วตฺตุสิ. 'नं' विभक्तीमध्ये तिन्ही लिंगांत 'बहु' आणि 'कति' शब्दांच्या पुढे 'नुक' (न्न) होतो - बहुन्नं (bahunnaṃ). उर्वरित रूपे 'भिक्खु' शब्दाप्रमाणे होतात - बहु (bahu), बहवो (bahavo), बहू (bahū). (भो) बहु (bahu), बहु (bahu), बहवे (bahave), बहवो (bahavo), बहु (bahu) [संबोधन]. बहुं (bahuṃ), बहवो (bahavo), बहु (bahu) [द्वितीया]. बहुना (bahunā), बहूहि (bahūhi), बहूभि (bahūbhi) [तृतीया]. बहुनो (bahuno), बहुस्स (bahussa), बहुन्नं (bahunnaṃ) [चतुर्थी/षष्ठी]. बहुना (bahunā), बहुम्हा (bahumhā), बहुस्मा (bahusmā) [पंचमी]. बहुम्हि (bahumhi), बहुस्मिं (bahusmiṃ), बहूसु (bahūsu) [सप्तमी]. 'वत्तु' शब्दाच्या 'सि' विभक्तीमध्ये - ลตุปิตาทินมา สิมฺหิ. 'लतु' प्रत्ययान्त आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'सि' विभक्तीमध्ये 'आ' होतो. ลตุปฺปจฺจยนฺตานํ ปิตุ มาตุ ภาตุ ธีตุ ทุหิตุ ชามาตุ นตฺตุ โหตุ โปตุนญฺจา โหติ สิมฺหิ-วตฺตา. 'लतु' प्रत्ययान्त आणि पितु (pitu), मातु (mātu), भातु (bhātu), धीतु (dhītu), दुहितु (duhitu), जामातु (jāmātu), नत्तु (nattu), होतु (hotu), पोतु (potu) यांच्या पुढे 'सि' विभक्तीमध्ये 'आ' होतो - वत्ता (vattā). ลตุปิตาทินมเส. 'लतु' प्रत्ययान्त आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'यो' विभक्तीमध्ये 'आरो' होतो. ลตุปฺปจฺจยนฺตานํ ปิตาทินํ จารงิ โหติ สโตญฺญตฺร-‘‘อารงิสฺมา’’ติ โฏ-วตฺตาโร. 'लतु' प्रत्ययान्त आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'स' विभक्तीशिवाय इतरत्र 'आरङ्' (आर) आदेश होतो - "आरङिस्मा" या सूत्राने 'तो' होऊन - वत्तारो (vattāro). เค อา จ. 'गि' (संबोधन एकवचन) विभक्तीमध्ये 'अ' आणि 'आ' देखील होतात. ลตุปิตาทีนํ อ โหติ เค อา จ-(โภ) วตฺต, วตฺตา. วตฺตาโร, วตฺตารํ. วตฺตาเร, วตฺตาโร-นาวจนสฺส ‘‘ฏานาสฺมาน’’นฺติ ฏา-วตฺตารา. 'लतु' प्रत्ययान्त आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'गि' विभक्तीमध्ये 'अ' आणि 'आ' होतात - (भो) वत्त (vatta), वत्ता (vattā). वत्तारो (vattāro) [संबोधन बहुवचन]. वत्तारं (vattāraṃ) [द्वितीया एकवचन]. वत्तारे (vattāre), वत्तारो (vattāro) [द्वितीया बहुवचन]. 'ना' विभक्तीच्या ठिकाणी "टानास्मानं" या सूत्राने 'टा' होऊन - वत्तारा (vattārā). สุหิสฺวารงิ 'सु' आणि 'हि' विभक्तींमध्ये 'आरङ्' (आर) होतो. สุภิสุ ตุปิตาทีนมารงิ วา โหติ-วตฺตาเรหิ, วตฺตาเรภิ, วตฺตูหิ, วตฺตูภิ. 'सु' आणि 'भि' (हि) विभक्तींमध्ये 'लतु' प्रत्ययान्त आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे विकल्पेकरून 'आरङ्' (आर) होतो - वत्तारेहि (vattārehi), वत्तारेभि (vattārebhi), वत्तूहि (vattūhi), वत्तूभि (vattūbhi). สโลโป. 'स' चा लोप होतो. ลตุปิตาทีหิสสฺส โลโป วา โหติ-วตฺตุ, นวตฺตุโน, วตฺตุสฺส. 'लतु' प्रत्ययान्त आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'स' विभक्तीचा विकल्पेकरून लोप होतो - वत्तु (vattu), किंवा वत्तुरूप न झाल्यास - वत्तुनो (vattuno), वत्तुस्स (vattussa). นมฺหิ วา. 'नं' विभक्तीमध्ये विकल्पेकरून होतो. นมฺหิ ลตุปตาทินมารงิ วา โหติ-วตฺตารานํอญฺญตฺร. 'नं' विभक्तीमध्ये 'लतु' प्रत्ययान्त आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे विकल्पेकरून 'आरङ्' (आर) होतो - वत्तारानं (vattārānaṃ), इतर ठिकाणी - อา 'आ' होतो. นมฺหิ ลตุปิตาทีนมาวา โหติ-วตฺตานํ. วตฺตุนํ-สฺมาสฺส วา-วตฺตารา. 'नं' विभक्तीमध्ये 'लतु' प्रत्ययान्त आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे विकल्पेकरून 'आ' होतो - वत्तानं (vattānaṃ), वत्तुनं (vattunaṃ). 'स्मा' विभक्तीच्या ठिकाणी विकल्पेकरून - वत्तारा (vattārā). ฏิสฺมิโน. 'स्मिं' विभक्तीच्या ठिकाणी 'टि' होतो. อารงาเทสมฺหาสฺมโน ฏิ โหติ. 'आरङ्' आदेश झालेल्या शब्दाच्या पुढे 'स्मिं' विभक्तीच्या ठिकाणी 'टि' होतो. รสฺสาร งิ. 'स्मिं' विभक्तीमध्ये 'आर' चा ऱ्हस्व होतो. สฺมิมฺหิ อาโร รสฺโส โหติ-วตฺตริ, วตฺตาเรสุ, วตฺตุสุ-เอวํ ภตฺตุ โหตฺตุ อาทโย-สตฺถุสทฺทสฺส ปน นมฺหิ พหุลาธิการา วา อารงาเทเส-สตฺถารา, สตฺถุนา-ปิตา. 'स्मिं' विभक्तीमध्ये 'आर' चा ऱ्हस्व होतो - वत्तरि (vattari). सप्तमी बहुवचनात - वत्तारेसु (vattāresu), वत्तूसु (vattusu). याचप्रमाणे भत्तु (bhattu), होतु (hotu) इत्यादींचे रूपे होतात. परंतु 'सत्थु' (शास्ता/बुद्ध) शब्दाच्या पुढे 'ना' विभक्तीमध्ये बहुल अधिकाराने विकल्पेकरून 'आरङ्' आदेश होतो - सत्थारा (satthārā), सत्थुना (satthunā). आता 'पिता' शब्दाचे रूप - ปิตาทินมนตฺวาทินํ 'नत्तु' इत्यादी वगळून 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या बाबतीत. นตฺวาทิวชฺชิตานํ ปิตาทินมาโร รสฺโส โหติ สพฺพาสุ วิภตฺติสุ-ปิตโร อิจฺจาทิ จตฺตุสมํ-รสฺโสว วิเสโส-นตฺวาทิ นนฺตุ รสฺสาภาวา นตฺตาโร อิจฺจาทิ คุณวนฺตุสิ. 'नत्तु' इत्यादी वगळून 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या 'आर' चा सर्व विभक्तींमध्ये ऱ्हस्व होतो - पितरो (pitaro) इत्यादी रूपे 'चत्तु' शब्दाप्रमाणे होतात, केवळ ऱ्हस्व होणे हाच विशेष फरक आहे. 'नत्तु' इत्यादी शब्दांमध्ये ऱ्हस्व होत नसल्यामुळे नत्तारो (nattāro) इत्यादी रूपे होतात. आता 'गुणवन्तु' शब्दाच्या 'सि' विभक्तीमध्ये - นฺตุสฺส. 'न्तु' च्या ठिकाणी. สิมฺหิ นฺตุสฺส ฏา โหติ-คุณวา-นฺตุว วนฺตฺวาทิ สมฺพนฺธิเยว คยฺหเต นฺตุวนฺตุมนฺตฺวาวนฺตุตวนฺตุสมฺพนฺธิ’ติ วจนโต น ชนฺตุตนตฺวาทินํ-โย-นฺตนฺตุนมาทินาวานฺโต-คุณวนฺโต อญฺญตฺร. 'सि' विभक्तीमध्ये 'न्तु' च्या ठिकाणी 'टा' (आ) होतो - गुणवा (guṇavā). येथे 'वन्तु' इत्यादींशी संबंधित असलेलाच 'न्तु' घेतला जातो, कारण "न्तु-वन्तु-मन्तु-आवन्तु-तवन्तु-सम्बन्धी" असे वचन आहे; जन्तु, तनत्तु इत्यादींचा 'न्तु' घेतला जात नाही. 'यो' विभक्तीमध्ये "न्तन्तुनमादिना" या सूत्राने 'अन्तो' होऊन - गुणवन्तो (guṇavanto), इतर ठिकाणी - ยฺวาโท นฺตุสฺส. 'यो' इत्यादी विभक्तींमध्ये 'न्तु' च्या ठिकाणी. ยวาทิสุ นฺตุสฺส อ โหติ-อการนฺตตฺตา ฏา-คุณวนฺตา-น เจ ห อวิธานสามตฺถิยา อปฺตฺติ อวิธานสฺส จริตตฺถตาย คุณวนฺตสฺสาติ-(โภ) คุณว,คุณวา, คุณวํ, คุณวนฺโต, คุณวนฺตา-คุณวํ, คุณวนฺตํ, คุณวนฺเต-คุณวตา, คุณวนฺเตน, คุณวนฺเตหิ, คุณวนฺเตภิ-คุณวโต, คุณวสฺส, คุณวนฺตสฺส, คุณวตํ. คุณวนฺตานํ-คุณวตา, คุณวนฺตา, คุณวนฺตมฺหา, คุณวนฺตสฺมา-คุณวติ, คุณวนฺเต, คุณวนฺตมฺหิ. คุณวนฺตสฺมึ, คุณวนฺเตสุ-เอวํ มฆวนฺตุ ภควนฺตุปฺปภุตโย. 'यो' इत्यादी विभक्तींमध्ये 'न्तु' च्या ठिकाणी 'अ' होतो. अकारान्त असल्यामुळे 'टा' (आ) होऊन - गुणवन्ता (guṇavantā). ... (भो) गुणव (guṇava), गुणवा (guṇavā), गुणवं (guṇavaṃ), गुणवन्तो (guṇavanto), गुणवन्ता (guṇavantā) [संबोधन]. गुणवं (guṇavaṃ), गुणवन्तं (guṇavantaṃ), गुणवन्ते (guṇavante) [द्वितीया]. गुणवता (guṇavatā), गुणवन्तेन (guṇavantena), गुणवन्तेहि (guṇavantehi), गुणवन्तेभि (guṇavantebhi) [तृतीया]. गुणवतो (guṇavato), गुणवस्स (guṇavassa), गुणवन्तस्स (guṇavantassa), गुणवतं (guṇavataṃ), गुणवन्तानं (guṇavantānaṃ) [चतुर्थी/षष्ठी]. गुणवता (guṇavatā), गुणवन्ता (guṇavantā), गुणवन्तम्हा (guṇavantamhā), गुणवन्तस्मा (guṇavantasmā) [पंचमी]. गुणवति (guṇavati), गुणवन्ते (guṇavante), गुणवन्तम्हि (guṇavantamhi), गुणवन्तस्मिं (guṇavantasmiṃ), गुणवन्तेसु (guṇavantesu) [सप्तमी]. याचप्रमाणे मघवन्तु (maghavantu), भगवन्तु (bhagavantu) इत्यादींचे रूपे होतात. หิมวโต วา โอ. 'हिमवन्तु' शब्दाच्या पुढे 'सि' विभक्तीमध्ये 'न्तु' च्या ठिकाणी विकल्पेकरून 'ओ' होतो. หิมวโต สิมฺหิ นฺตุสฺส โอ วา โหติ-หิมวนฺโต, หิมวา-เสสํ คุณวาว. 'हिमवन्तु' शब्दाच्या पुढे 'सि' विभक्तीमध्ये 'न्तु' च्या ठिकाणी विकल्पेकरून 'ओ' होतो - हिमवन्तो (himavanto), हिमवा (himavā). उर्वरित रूपे 'गुणवन्तु' शब्दाप्रमाणेच होतात. อุการนฺตํ. उकारान्त (किंवा ऊकारान्त). เวสฺสภุ. เวสฺสภุโว, เวสฺสภุ-(โภ) เวสฺสภุ, เวสฺสภุเว, เวสฺสภุโว, เวสฺสภุ-เสสํ ภิกฺขุสทฺทสมํ-เอวํ สยมฺภุ ปราภิภุ อภิภุอาทโย-โคตฺรภุ สหภุ สทฺเทหิปนโยนํ‘‘ชนฺตฺวาทิโต โน เว’’ติ โน โว วา-โคตฺรภุโน, โคตฺรภุโว, โคตฺรภุ-สภภุโน, สหภุโว. สหภุ-สพฺพญฺญุสทฺทสฺสโยสฺเวว วิเสโส. वेस्सभू (vessabhu) [प्रथमा एकवचन]. वेस्सभुवो (vessabhuvo), वेस्सभू (vessabhu) [प्रथमा बहुवचन]. (भो) वेस्सभू (vessabhu), वेस्सभुवे (vessabhuve), वेस्सभुवो (vessabhuvo), वेस्सभू (vessabhu) [संबोधन]. उर्वरित रूपे 'भिक्खु' शब्दाप्रमाणे होतात. याचप्रमाणे स्वयम्भू (sayambhu), पराभिभू (parābhibhu), अभिभू (abhibhu) इत्यादींचे रूपे होतात. परंतु 'गोत्रभू' (gotrabhu) आणि 'सहभू' (sahabhu) शब्दांच्या पुढे 'यो' विभक्तीमध्ये "जन्तुवादितो नो वे" या सूत्राने विकल्पेकरून 'नो' आणि 'वो' होतात - गोत्रभुनो (gotrabhuno), गोत्रभुवो (gotrabhuvo), गोत्रभू (gotrabhu). सहभुनो (sahabhuno), सहभुवो (sahabhuvo), सहभू (sahabhu). 'सब्बञ्ञू' (sabbaññu) शब्दाच्या 'यो' विभक्तीमध्येच विशेष नियम आहे. กุโต. 'कु' प्रत्ययान्ताच्या पुढे. กุปฺปจฺจยนฺตโต โยนํ โน วา โหติ ปุลฺลิงฺเค-สพฺพญฺญุโน-อญฺญตฺร โลโป จ-‘‘ลา โยนํ โว ปุเม’’ติ น โว ‘‘กุโต’’ติ ชนฺตฺวาทีหิ ปุถกฺกรณ-สพฺพญฺญุ-เอวํ วิญฺญุวิทุ เวทคุ ปารคุ อาทโย กุปฺปจฺจยนฺตา. पुल्लिंगात 'कु' प्रत्ययान्त शब्दांच्या पुढे 'यो' विभक्तीच्या ठिकाणी विकल्पेकरून 'नो' होतो - सब्बञ्ञुनो (sabbaññuno). इतर ठिकाणी लोप देखील होतो - "ला योनं वो पुमे" या सूत्राने 'वो' होत नाही, कारण "कुतो" या सूत्राने जन्तु इत्यादींपेक्षा वेगळे केले आहे - सब्बञ्ञू (sabbaññu). याचप्रमाणे विञ्ञू (viññu), विदू (vidu), वेदगू (vedagu), पारगू (pāragu) इत्यादी 'कु' प्रत्ययान्त शब्द आहेत. อูการนฺตํ. ऊकारान्त. โค. 'गो' (go) शब्द. โคสฺสาคยิหินํสุ คาวควา. 'गो' शब्दाच्या पुढे 'सि', 'हि', 'नं' आणि 'सु' विभक्तींमध्ये 'गाव' आणि 'गव' हे आदेश होतात. คสิหินํวชฺชิตาสุ วิภตฺติสุ โคสทฺทสฺส คาวควา โหนฺติ. 'गि' (संबोधन), 'सि', 'हि' आणि 'नं' विभक्ती वगळता इतर विभक्तींमध्ये 'गो' शब्दाच्या ठिकाणी 'गाव' (gāva) आणि 'गव' (gava) हे आदेश होतात. อภโคหิ โฏ अभगो शब्दांनंतर 'टो' प्रत्यय होतो. อุภโคหิ โยนํ โฏ โหติ-คาโว, คโว-(โภ) โค, คาโว, คโว. दोन्ही 'भ' आणि 'गो' शब्दांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा 'टो' होतो - गावो, गवो - (संबोधन) हे गो, गावो, गवो. คาวุมฺหิ. 'गावु' मध्ये. อํวจเนโคสฺส คาวุวาโหติ-คาวุํ, คาวํ, ควํ, คาโว, คโว. 'अं' वचनामध्ये (द्वितीया एकवचनात) 'गो' शब्दाचा विकल्पे करून 'गावु' होतो - गावुं, गावं, गवं, गावो, गवो. นาสฺสา. 'ना' प्रत्यय असताना 'आ' होतो. โคโต นาสฺส อา โหติ วา-คาวา, คาเวน, ควา, คเวน โคหิ, โคภิ. 'गो' शब्दाहून 'ना' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'आ' होतो - गावा, गावेन, गवा, गवेन, गोहि, गोभि. ควํ เสน 'स' प्रत्ययासोबत 'गवं' होते. โคสฺส เส วา ควํ โหติ สห เสน-ควํ, คาวสฺส, ควสฺส. 'गो' शब्दाचा 'स' प्रत्यय असताना 'स' प्रत्ययासोबत विकल्पे करून 'गवं' होतो - गवं, गावस्स, गवस्स. คุนฺนญฺจ นนฺตา. आणि 'न' प्रत्ययानंतर 'गुन्नं' होते. นํวจเนน สห โคสฺส คุนฺนํ โหติ ควญฺจ วา-คุนฺนํ คมํ, โคนํ-คาวา, คาวมฺหา, คาวสฺมา, ควา, ควมฺหา, ควสฺมา-คาเว, คาวมฺหิ, คาวสฺมึ, คเว, ควมฺหิ, ควสฺมึ. 'नं' वचनासोबत (षष्ठी बहुवचनात) 'गो' शब्दाचा 'गुन्नं' आणि विकल्पे करून 'गवं' (किंवा गमं) आणि 'गोनं' होतो - गुन्नं, गमं, गोनं - गावा, गावम्हा, गावस्मा, गवा, गवम्हा, गवस्मा - गावे, गावम्हि, गावस्मिं, गवे, गवम्हि, गवस्मिं. สุมฺหิ วา. 'सु' प्रत्यय असताना विकल्पे करून. โคสฺส สุมฺหิ คาวควา โหนฺติ วา-คาเวสุ, คเวสุ, โคสุ. 'गो' शब्दाचा 'सु' प्रत्यय असताना विकल्पे करून 'गाव' आणि 'गव' होतात - गावेसु, गवेसु, गोसु. โอการนฺตํ-ปุลฺลิงฺคํ. ओ-कारान्त पुल्लिंग. กญฺญา. कञ्ञा. สา. सा. อิตฺถิยํ วตฺตมานสฺส นามสฺสนฺเต วตฺตมาโน อากาโร ฆสญฺโญ โหติ-ชนฺตฺวาทินา วาโยโลโป-กญฺญา, กญฺญาโย-‘‘ฆพฺรหฺมาทิเต’’ติ คสฺเสวา-กญฺเญ, กญฺญา-โยมฺหิ-กญฺญา, กญฺญาโย. स्त्रीलिंगात वापरल्या जाणाऱ्या नामाच्या शेवटी असलेला 'आ' कार 'घ' संज्ञक होतो. 'जंतू' इत्यादी सूत्राने विकल्पे करून 'यो' चा लोप होतो - कञ्ञा, कञ्ञायो. 'घब्रह्मादिते' या सूत्राने 'घ' चा 'ए' होतो - कञ्ञे, कञ्ञा. 'यो' प्रत्यय असताना - कञ्ञा, कञ्ञायो. โฆ สฺสํสสาสสายํตึสุ घो स्सं-स-सा-स-सायं-तिं-सु. สฺสมาทิสุ โฆ รสฺโส โหติ-กญฺญํ, กญฺญา, กญฺญาโย- 'स्सं' इत्यादी प्रत्ययांमध्ये 'घ' चा र्हस्व होतो - कञ्ञं, कञ्ञा, कञ्ञायो. ฆปเตกสฺมึ นทีนํ ยยา. घपते कस्मिं नदीनं यया. ฆปโต นทีนเมกสฺมึ ยยา โหนฺติ ยถากฺกมํ-กญฺญาย, กญฺญาหิ, กญฺญาภิ-กญฺญาย, กญฺญานํ, -สฺมิมฺหิ- 'घ', 'प' आणि 'नदी' संज्ञक शब्दांनंतर एकवचनात अनुक्रमे 'य' आणि 'आ' होतात - कञ्ञाय, कञ्ञाहि, कञ्ञाभि - कञ्ञाय, कञ्ञानं - 'स्मिं' प्रत्यय असताना - ยํ. यं. ฆปโต สฺมิโน ยํ วา โหติ-กญฺญายํ. กญฺญาย, กญฺญาสุ. เอวํ สทฺธา สุธา สุขาอาทโย-‘‘นามฺมาทีหี’’ติ อมฺมา อนฺนา อมฺพาหิ คสฺส เอการาภาเว. 'घ' आणि 'प' संज्ञक शब्दांनंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'यं' होतो - कञ्ञायं, कञ्ञाय, कञ्ञासु. याचप्रमाणे सद्धा (श्रद्धा), सुधा, सुखा इत्यादी रूपे होतात. 'नाम्मादीहि' या सूत्राने अम्मा, अन्ना, अम्बा शब्दांच्या 'घ' चा 'ए' कार न झाल्यास... รสฺโส วา. विकल्पे करून र्हस्व होतो. อมฺมาทินํ เค รสฺโส วา โหติ-อมฺม, อมฺมา อิจฺจาทิ-เสสํกญฺญาว-สหาปริสาหิ สฺมิโน’’ติ สภาปริสายา’’ติ ตึ วา โหติ ‘‘โฆสฺส’’ มิจฺจาทินา รสฺเส-สหตึ-อญฺญตฺร-สหายํ, สหาย-ปริสตึ, ปริสายํ, ปริสาย. अम्मा इत्यादी शब्दांच्या 'गे' (संबोधन) प्रत्ययात विकल्पे करून र्हस्व होतो - अम्म, अम्मा इत्यादी. उर्वरित रूपे 'कञ्ञा' प्रमाणेच होतात. 'सभा' आणि 'परिसा' शब्दांनंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'सभामधून' किंवा 'परिषदेमधून' विकल्पे करून 'तिं' होतो. 'घोस्स' इत्यादी सूत्राने र्हस्व झाल्यावर - सहतिं, इतरत्र - सहायं, सहाय, परिसतिं, परिसायं, परिसाय. อาการนฺตํ. आ-कारान्त स्त्रीलिंग. มติ-โยมฺหิ- मति - 'यो' प्रत्यय असताना - ปิตฺถิยํ. स्त्रीलिंगात 'प' संज्ञा होते. อิตฺถิยํ วตฺตมานสฺส นามสฺสนฺเต วตฺตมานา อิวณฺณุวณฺณา ปสญฺญา โหนฺติ. स्त्रीलिंगात वापरल्या जाणाऱ्या नामाच्या शेवटी असलेले 'इ' आणि 'उ' वर्ण 'प' संज्ञक होतात. เยปสฺสวณฺณสฺส. येपस्सवण्णस्स. ปสญฺญสฺส อิวณฺณสฺส โลโป วา โหติ ยกาเร-วจตฺถิตวิ ภาสายํ-มตฺโย-อญฺญตฺร-ชนฺตฺวาทินา วา โยโลเป-มตี, มติโย-(โภ)มติ, มตฺโย, มติ, มติโย-มตึ, มตฺโย, มตี, มติโย ‘‘ฆป’’อิจฺจาทินา ยาเทเส-มตฺยา, มติยา, มตีหิ, มติหิ-มตฺยา, มติยา, มตีนํ-สฺมิมฺหิ-มตฺยํ, มติยํ, มตฺยา, มติยา, มตีสุ-เอวํ กิตฺติ กนฺติ ตนฺติปฺปภุตโย-รตฺติยา สฺมิโน ‘‘รตฺยาทีหิโว สฺมิโน’’รตฺยาทีหิโว สฺมิโน’’ติ โฏ วา-รตฺเต-อญฺญตฺร-รตฺยํ, รตฺติยํ, รตฺยา, รตฺติยา-เสสํ มติยา สมํ. 'प' संज्ञक 'इ' वर्णाचा 'य' कार पुढे असताना विकल्पे करून लोप होतो - मत्यो. इतरत्र 'जंतू' इत्यादी सूत्राने 'यो' चा लोप झाल्यावर - मती, मतियो. (संबोधन) हे मति, मत्यो, मति, मतियो - मतिं, मत्यो, मती, मतियो. 'घप' इत्यादी सूत्राने 'या' आदेश झाल्यावर - मत्या, मतिया, मतीहि, मतिहि - मत्या, मतिया, मतीनं. 'स्मिं' प्रत्यय असताना - मत्यं, मतियं, मत्या, मतिया, मतीसु. याचप्रमाणे कित्ति (कीर्ती), कन्ति (कांती), तन्ति (तंतू) इत्यादी रूपे होतात. 'रत्ति' (रात्र) शब्दाच्या 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'रत्यादीहि...' सूत्राने विकल्पे करून 'तो' होतो - रत्ते. इतरत्र - रत्यं, रत्तियं, रत्या, रत्तिया. उर्वरित रूपे 'मति' प्रमाणेच होतात. อิการนฺตํ. इ-कारान्त स्त्रीलिंग. ทาสี, ทาสฺโย, ทาสี, ทาสิโย-(โภ)ทาสิ, ทาสี, ทาสฺโย, ทาสี, ทาสิโย. दासी, दास्यो, दासी, दासियो - (संबोधन) हे दासि, दासी, दास्यो, दासी, दासियो. ยํ ปีโต. यं पीतो. ปสญฺญิโต อํวจนสฺส ยํ วา โหติ-ทาสฺยํ, ทาสิยํ, ทาสึ, ทาสฺโย, ทาสี, ทาสิโย-ทาสฺยา, ทาสิยา, ทาสีหิ, ทาสีภิ-ทาสฺยา, ทาสิยา, ทาสีนํ-ทาสฺยํ, ทาสิยํ, ทาสฺยา, ทาสิยา, ทาสีสุ-เอวโมสธี โปกฺขรณี อาทโย-นทิสทฺทา โยสุ- 'प' संज्ञक 'इ' कारानंतर 'अं' वचनाचा विकल्पे करून 'यं' होतो - दास्यं, दासियं, दासिं, दास्यो, दासी, दासियो - दास्या, दासिया, दासीहि, दासीभि - दास्या, दासिया, दासीनं - दास्यं, दासियं, दास्या, दासिया, दासीसु. याचप्रमाणे ओसधी (औषधी), पोक्खरणी (पुष्करिणी) इत्यादी रूपे होतात. 'नदी' शब्दाचा 'यो' प्रत्यय असताना - นชฺชา โยสฺวาม. नज्जा योस्वाम. โยสุ นทิสทฺทสฺส อาม วา โหติ-สจ. 'यो' प्रत्यय असताना 'नदी' शब्दाचा विकल्पे करून 'आम' होतो - 'च' कारसह. มนุพนฺโธ สรานมนฺตา ปโร. 'म' हा अनुबंध स्वरांच्या शेवटी असलेल्या स्वराच्या पुढे येतो. มกาโรนุพนฺโธ ยสฺส โส สรานมนฺตา สรา ปโร โหตี’ติ อีการา ปโร-‘‘ยวา สเร’’ติ ยกาเร ทสฺส จวคฺโค ยสฺส ปุพฺพ รูปํ-นชฺชาโย-อญฺญตฺร-วา ปโลปโยโลเปสุ-นชฺโช, นที, นทิโย อิจฺจาทิ. ज्याला 'म' कार अनुबंध आहे, तो स्वरांच्या शेवटी असलेल्या स्वराच्या म्हणजेच 'ई' कारच्या पुढे येतो. 'यवा सरे' या सूत्राने 'य' कार असताना 'द' चा च-वर्ग (म्हणजे 'ज') होतो आणि त्याचे द्वित्व (पूर्वरूप) होते - नज्जायो. इतरत्र, 'प' आणि 'यो' चा विकल्पे करून लोप झाल्यावर - नज्जो, नदी, नदियो इत्यादी रूपे होतात. อีการนฺตํ. ई-कारान्त स्त्रीलिंग. ยาคุ, ยาคุ, ยาคุโย-(โภ)ยาคุ, ยาคุ, ยาคุโย-ยาคุํ, ยาคุ, ยาคุโย-ยาคุยา, ยาคุหิ, ยาคุภิ-ยาคุยา, ยาคุนํ-ยาคุยํ, ยาคุยา, ยาคุสุ-เอวํ เธนุ สสฺสุ ปิยงฺคุปฺปภุตโย-มาตุ ธีตุ ทุหิตุ สทฺทา ปิตุสทฺทสมา-สโลปาภาวปกฺเข ยาเทเส มาตุสทฺทสฺส ปน ‘‘เย ปสฺสา’’ติ โยควิภาคา วา ปโลโป-มตฺยา, มาตุยา. यागु (पेज), यागु, यागुयो - (संबोधन) हे यागु, यागु, यागुयो - यागुं, यागु, यागुयो - यागुया, यागुहि, यागुभि - यागुया, यागुनं - यागुयं, यागुया, यागुसु. याचप्रमाणे धेनु (गाय), सस्सु (सासू), पियंगु इत्यादी रूपे होतात. मातु (माता), धीतु (कन्या), दुहितु (कन्या) हे शब्द 'पितु' (पिता) शब्दाप्रमाणे चालतात. 'स' चा लोप न होण्याच्या पक्षात 'या' आदेश झाल्यावर 'मातु' शब्दाचा 'ये पस्सा' या योगविभागाने विकल्पे करून लोप होतो - मातुया (किंवा मात्या), मातुया. อุการนฺตํ. 'उ' कारान्त (स्त्रीलिंग). วธู, วธู, วธุโย-(โภ)วธุ, วธุ, วธุโย-วธุํ, วธู, วธุโย-วธุยา, วธูหิ, วธูภิ-วธุยา, วธูนํ-วธุยํ, วธุยา, วธูสุ-เอวํ ชมฺพุ วาโมรู สรภุ อาทโย. वधू, वधू, वधुयो - (संबोधन) भो वधु, वधु, वधुयो - (द्वितीया) वधुं, वधू, वधुयो - (तृतीया) वधुया, वधूहि, वधूब्ही - (चतुर्थी/पंचमी) वधुया, वधूनं - (सप्तमी) वधुयं, वधुया, वधूसु - याचप्रमाणे जम्बु, वामोरू, सरभू इत्यादी शब्द चालतात. อูการนฺตํ. 'ऊ' कारान्त (स्त्रीलिंग). โค อิจฺจาทิ ปุเมน สมํ. 'गो' इत्यादी शब्द पुल्लिंगाप्रमाणे चालतात. อิตฺถิลิงฺคํ. स्त्रीलिंग (समाप्त). จิตฺตสิ. 'चित्त' शब्दापुढे 'सि' प्रत्यय असता. อํ นปุํสเก. नपुंसकलिंगात 'अं' होतो. อการนฺตโต นามสฺมา สิสฺส อํ โหติ นปุํสกลิงฺเค-มิตฺตํ-โยมฺหิ. नपुंसकलिंगात अकारान्त नामापुढे 'सि' प्रत्ययाचा 'अं' होतो - जसे, 'मित्तं' (मित्र). 'यो' प्रत्यय असता - โยนนฺติ. 'यो' प्रत्ययाचा 'नि' होतो. อการนฺตโต นามสฺมา โยนํ นี โหติ นปุํสเก’ติ นิ อาเทโส. नपुंसकलिंगात अकारान्त नामापुढे 'यो' प्रत्ययाचा 'नि' (किंवा 'नी') असा आदेश होतो. นีนํ วา. 'नि' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून (लोप किंवा दीर्घ होतो). อการนฺตโต นามสฺมา นีนํ ฏาเฏ วา โหนฺติ ยถากฺกมํ-จิตฺตา, อญฺญตฺร-‘‘โยโลปนีสุ ทีโฆ’’ติทีเฆ-จิตฺตานิ-(โภ) จิตฺต, จิตฺตา, จิตฺตา, จิตฺตานิ-จิตฺตํ, จิตฺเต, จิตฺตานิ-จิตฺเตเนจฺจาทิ พุทฺธสทฺทสมํ-เอวํ ปานทานปฺปภุตโย-เอกจฺจาทินํ ตุ ปฐมานิมฺหิ วิเสโส. अकारान्त नामापुढे 'नि' प्रत्ययाचा अनुक्रमे 'टा' आणि 'अ' (किंवा 'आ') विकल्पेकरून होतो - जसे, 'चित्ता'. इतर ठिकाणी "योलोपनीसु दीघो" या सूत्राने दीर्घ होऊन - 'चित्तानि'. (संबोधन) हे चित्त, चित्ता, चित्ता, चित्तानि. (द्वितीया) चित्तं, चित्ते, चित्तानि. तृतीया इत्यादी विभक्तींमध्ये 'बुद्ध' शब्दाप्रमाणे रूपे होतात - जसे, 'चित्तेन' इत्यादी. याचप्रमाणे 'पान', 'दान' इत्यादी शब्द चालतात. परंतु 'एकच्च' इत्यादी शब्दांच्या प्रथमेच्या 'नि' प्रत्ययात विशेष नियम आहे. น นิสฺส ฏา. 'नि' प्रत्ययाचा 'टा' होत नाही. เอกจฺจาทีหิ ปรสฺส นิสฺส ฏา น โหติ-เอกจฺจานิ, ปฐมานิ-ปทาทีหิ นาสฺมึสุ. 'एकच्च' इत्यादी शब्दांच्या पुढे असलेल्या 'नि' प्रत्ययाचा 'टा' होत नाही - जसे, 'एकच्चानि', 'पठमानि'. 'पद' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'ना' आणि 'स्मिं' प्रत्यय असता - นาสฺส สา. 'ना' प्रत्ययाचा 'सा' होतो. ปทาทิหิ นาสฺส สา โหติ วา-ปทสา, ปเทส-พิลสา, พิเลน. 'पद' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'ना' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'सा' होतो - जसे, 'पदसा', 'पदेन'; 'बिलसा', 'बिलेन'. ปทาทิหิ สิ. 'पद' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'सि' होतो. เอหิ สฺมิโน สิ โหติ วา-ปทสิ, ปเท, ปทมฺหิ, ปทสฺมึ-กมฺม สทฺทโต นาสฺส‘‘นาสฺเสโน’’ติ เอโน วา-กมฺเมน-อญฺญตฺร ปุมาทินา วา อุตฺเต-กมฺมุนา, กมฺมนา-อิมินาว สสฺมาสุ อุตฺตํ-ตสฺส ลสญฺญายํ-สสฺมานํ ยถาโยคํ โนนา นิจฺจํ-ววตฺถิตวิภาสายํ-กมฺมุโน, กมฺมสฺส-กมฺมุนา, กมฺมา, กมฺมมฺหา, กมฺมสฺมา-‘‘กมฺมาทิโต’’ติ สฺมิโน วา นิมฺหิ-กมฺมนิ, กมฺเม, กมฺมมฺหิ, กมฺมสฺมึ-เสสํ จิตฺตสมํ-จมฺม เวสฺม ภสฺมาทโย กมฺมสฺมา อุตฺตโตญฺญตฺร-คจฺฉนฺตสิ-‘‘นฺตสฺสํ’’ติ วา อมฺหิสิโลโป-คจฺฉํ-อญฺญตฺร สิสฺส อํ-คจฺฉนฺตํ, คจฺฉนฺตา คจฺฉนฺตานิ-(โภ)คจฺฉ, คจฺฉา, คจฺฉํ, คจฺฉนฺตา, คจฺฉนฺตานิ-คจฺฉํ, คจฺฉนฺตํ, คจฺฉนฺเต, คจฺฉนฺตานิ-นาทิสุ ปุลฺลิงฺคสฺมํ-เอวํ ยชนฺต วชนฺตาทโย. यांच्यापुढे 'स्मिं' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'सि' होतो - जसे, 'पदसि', 'पदे', 'पदम्हि', 'पदस्मिं'. 'कम्म' शब्दापुढे 'ना' प्रत्ययाचा "नास्सेनो" या सूत्राने विकल्पेकरून 'एन' होतो - जसे, 'कम्मेन'. इतर ठिकाणी पुल्लिंगाप्रमाणे किंवा 'उ' कार होऊन - 'कम्मुना', 'कम्मना'. याच सूत्राने 'स' आणि 'स्मा' प्रत्यय असता 'उ' कार होतो. त्याची 'ल' संज्ञा झाल्यावर 'स' आणि 'स्मा' प्रत्ययांच्या जागी योग्यतेनुसार नेहमी 'नो' आणि 'ना' आदेश होतात - व्यवस्थित विकल्पाने - 'कम्मुनो', 'कम्मस्स'; 'कम्मुना', 'कम्मा', 'कम्मम्हा', 'कम्मस्मा'. "कम्मादितो" या सूत्राने 'स्मिं' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'नि' होतो - 'कम्मनि', 'कम्मे', 'कम्मम्हि', 'कम्मस्मिं'. उर्वरित रूपे 'चित्त' शब्दाप्रमाणे होतात. 'चम्म', 'वेस्म', 'भस्म' इत्यादी शब्द 'कम्म' शब्दाप्रमाणे 'उ' कार होण्याव्यतिरिक्त चालतात. 'गच्छन्त' शब्दापुढे 'सि' प्रत्यय असता - "न्तस्सं" या सूत्राने किंवा 'अम्हि' असताना 'सि' चा लोप होतो - 'गच्छं'. इतर ठिकाणी 'सि' चा 'अं' होतो - 'गच्छन्तं', 'गच्छन्ता', 'गच्छन्तानि'. (संबोधन) हे गच्छ, गच्छा, गच्छं, गच्छन्ता, गच्छन्तानि. (द्वितीया) गच्छं, गच्छन्तं, गच्छन्ते, गच्छन्तानि. तृतीया इत्यादी विभक्तींमध्ये पुल्लिंगाप्रमाणे रूपे होतात. याचप्रमाणे यजन्त, वजन्त इत्यादी शब्द चालतात. อการนฺตํ. अकारान्त (नपुंसकलिंग समाप्त). อฏฺฐิ 'अट्ठि' (हाड) शब्द. ฌลา วา. 'झ' आणि 'ल' संज्ञक वर्णांपुढे विकल्पेकरून. ฌลโต โยนํ นิ โหติ วา นปุํสกลิงฺเค-อฏฺฐินิ-โย โลปทิเฆสุ-อฏฺฐิ-(โภ)อฏฺฐิ, อฏฺฐีนิ, อฏฺฐี-อฏฺฐึ, อฏฺฐินิ, อฏฺฐิ = ตติยาทิสุ มุนิสทฺทสมํ-เอวมจฺฉิ อกฺขิ ทธิ สตฺถิ อาทโย. नपुंसकलिंगात 'झ' आणि 'ल' संज्ञक वर्णांपुढे 'यो' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'नि' होतो - जसे, 'अट्ठिनि'. 'यो' चा लोप आणि दीर्घ झाल्यावर - 'अट्ठि'. (संबोधन) हे अट्ठि, अट्ठीनि, अट्ठी. (द्वितीया) अट्ठिं, अट्ठिनि, अट्ठि. तृतीया इत्यादी विभक्तींमध्ये 'मुनि' शब्दाप्रमाणे रूपे होतात. याचप्रमाणे अक्खि (डोळा), दधि (दही), सत्थि (मांडी) इत्यादी शब्द चालतात. อิการนฺตํ. इकारान्त (नपुंसकलिंग). ทณฺฑี-‘‘เอกวจเน’’จฺจาทินา รสฺโส-สิโลโป-ทณฺฑีนิ, ททฺธี-(โภ)ทณฺฑิ, ทณฺฑี, ทณฺฑีนิ, ททฺธี-ทณฺฑินํ,ทณฺฑึ, ทณฺฑีนิ, ทณฺฑี-เสสํ ปุลฺลิงฺคสฺมํ-เอวํ สุขการี สีฆยายี อาทโย. 'दण्डी' शब्द. "एकवचने..." इत्यादी सूत्राने र्हस्व आणि 'सि' चा लोप होतो - 'दण्डीनि', 'दण्डी'. (संबोधन) हे दण्डि, दण्डी, दण्डीनि, दण्डी. (द्वितीया) दण्डिनं, दण्डिं, दण्डीनि, दण्डी. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणे होतात. याचप्रमाणे सुखकारी, सीघयायी इत्यादी शब्द चालतात. อีการนฺตํ. ईकारान्त (नपुंसकलिंग). จกฺขุ, จกฺขุนิ, จกฺขุ-อฏฺฐิสทฺทสม-เอวมายุ มธุ มตฺถุ ธนุ จิตฺตคุปฺปภุตโย-อายุสาติ โกธาทิตฺตา นาสฺส สา วา-อมฺพุสทฺทา สฺมิโน‘‘อมฺพวาทีหี’’ติ วา นิ อาเทสา-อมฺพุนิ, อมฺพุมฺหิ, อมฺพุสฺมึ. 'चक्खु' (डोळा) शब्द. चक्खु, चक्खुनि, चक्खु - हे 'अट्ठि' शब्दाप्रमाणे चालतात. याचप्रमाणे आयु, मधु, मत्थु (ताक), धनु, चित्तगु इत्यादी शब्द चालतात. 'आयुसा' मध्ये 'कोधादि' गणात असल्यामुळे 'ना' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'सा' होतो. 'अम्बु' शब्दापुढे 'स्मिं' प्रत्ययाचा "अम्बवादीहि..." या सूत्राने विकल्पेकरून 'नि' आदेश होतो - 'अम्बुनि', 'अम्बुम्हि', 'अम्बुस्मिं'. คุณวนฺตุสิ. 'गुणवन्तु' शब्दापुढे 'सि' प्रत्यय असता. อทฺธํนปุํสเก. नपुंसकलिंगात 'अद्धं' होतो. นฺตุสฺส อทฺธํ โหติ สิมฺหิ นปุํสเก-คุณวํ, คุณวนฺตํ-โยมฺหิ-‘‘ยวาโทนฺตุสฺสา’’ติ อกาเร‘‘โยนํ นี’’ติ นิ ตสฺส วา ฏาเทเส-คุณวนตานิจฺจาทิ-คจฺฉนฺตสมํ-เอวํ ยสวนฺตุ ธนวนฺตุ โคมนฺตฺวาทโย. नपुंसकलिंगात 'सि' प्रत्यय असता 'न्तु' प्रत्ययाचा 'अद्धं' होतो - जसे, 'गुणवं', 'गुणवन्तं'. 'यो' प्रत्यय असता - "यवादोन्तुस्स..." या सूत्राने अकार होऊन, "योनां नी" या सूत्राने 'नि' आणि त्याचा विकल्पेकरून 'टा' आदेश होतो - 'गुणवन्तानि' इत्यादी. हे 'गच्छन्त' शब्दाप्रमाणे चालते. याचप्रमाणे यसवन्तु, धनवन्तु, गोमन्तु इत्यादी शब्द चालतात. อุการนฺตํ. उकारान्त (नपुंसकलिंग). โคตฺรภุ, โคตฺรภุติ, โคตฺรภุ-(โภ)โคตฺรภุ, โคตฺรภุนิ, โคตฺรภุ-โคตฺรภุํ, โคตฺรภุติ, โคตฺรภุ-โคตฺรภุนา อิจฺจาทิ ปุลฺลิงฺเค เวสฺสภุสทฺทสมํ-เอวํ อภิภุ สยมภุ ธมฺมญฺญ อาทโย. 'गोत्रभू' शब्द. गोत्रभू, गोत्रभूनि, गोत्रभू. (संबोधन) हे गोत्रभू, गोत्रभूनि, गोत्रभू. (द्वितीया) गोत्रभुं, गोत्रभूनि, गोत्रभू. तृतीया विभक्तीत 'गोत्रभूना' इत्यादी रूपे पुल्लिंगातील 'वेस्सभू' शब्दाप्रमाणे होतात. याचप्रमाणे अभिभू, सयम्भू, धम्मञ्ञू इत्यादी शब्द चालतात. อูการนฺตํ-นปุํสกลิงฺคํ. ऊकारान्त नपुंसकलिंग (समाप्त). อถ สพฺพาทีนํ รูปนโย นิทฺทิสียเต-สพฺพ กตร กตม อุภย อิตร อญฺญ อญฺญตร อญฺญตม ปุพฺพ ปราปร ทกฺขิณุตฺตราธ รานิววตฺถายมสญฺญายํ-ย ตฺย ต เอต อิม อมุ กึ เอก ตุมฺหอมฺห อิจฺเจเต สพฺพาทโย-สพฺโพ. आता 'सब्ब' इत्यादी सर्वनामांची रूपे दाखविली जातात - सब्ब (सर्व), कतर, कतम, उभय, इतर, अञ्ञ (अन्य), अञ्ञतर, अञ्ञतम, पुब्ब (पूर्व), परापर, दक्खिण (दक्षिण), उत्तर, अधर (हे संज्ञा नसलेल्या आणि व्यवस्था दर्शविणाऱ्या अर्थी), य, त्य, त, एत, इम, अमु, किं, एक, तुम्हा, अम्हा - हे 'सब्ब' इत्यादी (सर्वनाम) शब्द आहेत - 'सब्बो'. โยนเมฏ. 'यो' प्रत्ययाचा 'ए' होतो. อการนฺเตหิ สพฺพาทิหิ โยนเมฏ โหติ-สพฺเพ-เอวมาลปน ทุติยาโยสุ. अकारान्त 'सब्ब' इत्यादी शब्दांपुढे 'यो' प्रत्ययाचा 'ए' होतो - जसे, 'सब्बे'. याचप्रमाणे संबोधन आणि द्वितीया विभक्तीतही होते. สพฺพาทีนํ นมฺหิ จ. 'सब्ब' इत्यादी शब्दांपुढे 'नं' प्रत्यय असता आणि (इतर प्रत्यय असताही 'ए' होतो). อการนฺตานํ สพฺพาทีนํ เอ โหติ นมฺหิ สุหิสุ จ. अकारान्त 'सब्ब' इत्यादी शब्दांच्या अंती असलेल्या 'अ' चा 'नं', 'सु' आणि 'हि' प्रत्यय पुढे असता 'ए' होतो. สํสานํ. 'सं' आणि 'सानं' आदेश होतात. สพฺพาทิโต นํวจนสฺส สํสานํ โหนฺติ-สพฺเพสํ, สพฺเพสานํ-เสสํ พุทฺธสมํ-อิตฺถิยํ ‘‘อิตฺถิยมตฺวา’’ติ อาปฺปจฺจเย สรโลเป จ กเต อาการสฺส ฆสญฺญายํ กญฺญาสทฺทสฺเสว รูปนโย, อยนฺตุ วิเสโส. 'सब्ब' इत्यादी शब्दांपुढे 'नं' विभक्ती प्रत्ययाचे 'सं' आणि 'सानं' हे आदेश होतात - जसे, 'सब्बेसं', 'सब्बेसानं'. उर्वरित रूपे 'बुद्ध' शब्दाप्रमाणे होतात. स्त्रीलिंगात "इत्थियमत्वा" या सूत्राने 'आ' प्रत्यय आणि स्वराचा लोप झाल्यावर, आकाराची 'घ' संज्ञा होऊन 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाप्रमाणेच रूपे होतात, परंतु हा विशेष फरक आहे - ฆปา สสฺส สฺสา วา. 'घ' आणि 'पा' संज्ञक शब्दांपुढे 'स' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'स्सा' होतो. สพฺพาทีนํ ฆปโต สสฺส สฺสา วา โหติ-‘‘โฆสฺส’’มิจฺจาทนา รสฺเส-สพฺพสฺสา. สพฺพาย-นมฺหิ-สพฺพาสํ. สพฺพาสานํ. 'सब्ब' इत्यादी प्रातिपदिकानंतर येणाऱ्या 'घ' आणि 'प' संज्ञक प्रत्ययांच्या जागी 'स्स' चा 'स्सा' विकल्पेकरून होतो - "घोस्स" इत्यादी सूत्राने र्हस्व होऊन - 'सब्बस्सा' (sabbassā) रूप बनते. 'सब्बाय' (sabbāya) - 'नं' (naṃ) प्रत्यय असताना - 'सब्बासं' (sabbāsaṃ), 'सब्बासानं' (sabbāsānaṃ) रूपे होतात. สฺมิโน สฺสํ. 'स्मिं' (smiṃ) प्रत्ययाच्या जागी 'स्सं' (ssaṃ) आदेश होतो. สพฺพาทินํ ฆปโต สฺมิโน สฺสํ วา โหติ-สพฺพสฺสํ, สพฺพายํ, สพฺพาย-นปุํสเก-สพฺพํ-โยสฺส นิมฺหิ- 'सब्ब' इत्यादी प्रातिपदिकानंतर येणाऱ्या 'घ' आणि 'प' संज्ञक प्रत्ययांच्या जागी 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'स्सं' विकल्पेकरून होतो - 'सब्बस्सं' (sabbassaṃ), 'सब्बायं' (sabbāyaṃ), 'सब्बाय' (sabbāya). नपुंसकलिंगात - 'सब्बं' (sabbaṃ). 'यो' प्रत्यय असताना 'नि' आदेश झाल्यावर - สพฺพาทีหิ. 'सब्ब' इत्यादी प्रातिपदिकानंतर. สพฺพาทิหิ ปรสฺส นิสฺส ฏา น โหติ-สพฺพานิ-(โภ)สพฺพ, สพฺพา, สพฺพานิ-สพฺพํ, สพฺเพ, สพฺพานิ-นาทิสุ ปุเมว-กตราทโย ตโย ตีสุ ลิงฺเคสุ สพฺพสมา-เอวํ อิตร อญฺญสทฺทา-สฺสาสฺสํสุ วิเสโส. 'सब्ब' इत्यादी प्रातिपदिकानंतर येणाऱ्या 'नि' प्रत्ययाचा 'टा' आदेश होत नाही - 'सब्बानि' (sabbāni). संबोधनात - 'भो सब्ब' (bho sabba), 'सब्बा' (sabbā), 'सब्बानि' (sabbāni). द्वितीयेत - 'सब्बं' (sabbaṃ), 'सब्बे' (sabbe), 'सब्बानि' (sabbāni). 'ना' इत्यादी प्रत्यय असताना पुल्लिंगाप्रमाणेच रूपे होतात. 'कतर' इत्यादी तीन शब्द तिन्ही लिंगांत 'सब्ब' शब्दाप्रमाणे चालतात. याचप्रमाणे 'इतर' आणि 'अञ्ञ' शब्द चालतात; केवळ 'स्सा' आणि 'स्सं' प्रत्ययांमध्ये विशेष फरक असतो. สฺสํสฺสาสฺยาเยสฺวิตเรกญฺเญติมานมิ. 'स्सं', 'स्सा', 'स्या' आणि 'ये' प्रत्यय असताना 'इतर', 'एक', 'अञ्ञ', 'एत' आणि 'इम' या शब्दांमधील अंत्य स्वराच्या जागी 'इ' कार होतो. สฺสมาทิสุ อิตรเอกอญฺญเอต อิมฺैญฺเญสํ อิ โหติ-อิตริสฺสา, อิตริสฺสํ-อญฺญิสฺสา, อญฺญิสฺสํ-อญฺญตรอญฺญตมสทฺทา ลิงฺคตฺตเย สพฺพสมา-ปุพฺโพ-โย. 'स्सं' इत्यादी प्रत्यय असताना 'इतर', 'एक', 'अञ्ञ', 'एत' आणि 'इम' या शब्दांच्या अंत्य स्वराच्या जागी 'इ' होतो - 'इतरिस्सा' (itarissā), 'इतरिस्सं' (itarissaṃ), 'अञ्ञिस्सा' (aññissā), 'अञ्ञिस्सं' (aññissaṃ). 'अञ्ञतर' आणि 'अञ्ञतम' हे शब्द तिन्ही लिंगांत 'सब्ब' शब्दाप्रमाणे चालतात. 'पुब्ब' शब्दाच्या पुढे 'यो' प्रत्यय आल्यास - ปุพฺพาทีหิ ฉหิ. 'पुब्ब' इत्यादी सहा प्रातिपदिकानंतर. เอเตหิ ฉหิ สวิสเย เอฏ วา โหติ’ติ โยสฺเสฏ-ปุพฺเพ, ปุพฺพา-(โภ)ปุพฺพ, ปุพฺพา, ปุพฺเพ, ปุพฺพา-ปุพฺพํ, ปุพฺเพ, ปุพฺพา-เสสํ สพฺพลิงฺเค สพฺพสมํ-เอวํ ปราทโย ปญฺจ-โย, ยา, ยมิจฺจาทิ สพฺพสมํ-ยาทินมาลปเน รูปํ น สมฺภวติ-ตฺยสิ. या सहा प्रातिपदिकानंतर आपल्या विषयात 'यो' प्रत्ययाच्या जागी 'ए' आदेश विकल्पेकरून होतो - 'पुब्बे' (pubbe), 'पुब्बा' (pubbā). संबोधनात - 'भो पुब्ब' (bho pubba), 'पुब्बा' (pubbā), 'पुब्बे' (pubbe), 'पुब्बा' (pubbā). द्वितीयेत - 'पुब्बं' (pubbaṃ), 'पुब्बे' (pubbe), 'पुब्बा' (pubbā). उर्वरित रूपे सर्व लिंगांत 'सब्ब' शब्दाप्रमाणेच होतात. याचप्रमाणे 'पर' इत्यादी पाच शब्द चालतात. 'यो', 'या', 'यं' इत्यादी रूपे 'सब्ब' शब्दाप्रमाणेच होतात. 'य' इत्यादी शब्दांचे संबोधन रूप होत नाही. 'ति' आणि 'सि' प्रत्यय असताना - ตฺยเตตานํ ตสฺส โส. 'त', 'एत' यांच्या 'त' काराच्या जागी 'स' कार होतो. ตฺยเตตานมนปุํสกานํ ตสฺส โส โหติ สิมฺหิ-สฺโย, สฺยาตฺยมิจฺจาทิ-โส. नपुंसकलिंग सोडून 'त' आणि 'एत' या शब्दांमधील 'त' काराच्या जागी 'सि' प्रत्यय असताना 'स' कार होतो - 'सो' (so), 'सा' (sā) इत्यादी. ต ตสฺส โน สพฺพาสุ. 'त' शब्दाच्या 'त' काराच्या जागी सर्व विभक्तींमध्ये विकल्पेकरून 'न' कार होतो. ตสทฺทสฺส ตสฺส โน วา โหติ สพฺพาสุ วิภตฺติสุ-เน, เต-นํ ตํ, เน, เต-เนน, เตน, เนหิ, เตหิ, เนภิ, เตภิ- 'त' शब्दाच्या 'त' काराच्या जागी सर्व विभक्तींमध्ये विकल्पेकरून 'न' कार होतो - 'ने' (ne), 'ते' (te). द्वितीयेत - 'नं' (naṃ), 'तं' (taṃ), 'ने' (ne), 'ते' (te). तृतीयेत - 'नेन' (nena), 'तेन' (tena), 'नेहि' (nehi), 'तेहि' (tehi), 'नेभि' (nebhi), 'तेभि' (tebhi). ฏ สสฺมาสฺมึสฺสายสฺสํสฺสาสํมฺหามฺหิสฺมิมิมสฺส จ. 'टा', 'स', 'स्मा', 'स्मिं', 'स्सा', 'यस्सं', 'स्सासं', 'म्हा', 'म्हि', 'स्मिं' प्रत्यय असताना 'इम' आणि 'त' शब्दाच्या जागी 'अ' आदेश होतो. สาทสฺวิมสฺส ตสทฺทตการสฺส จ โฏ วา โหติ-ปุพฺพสร โลเป-อสฺส, นสฺส, ตสฺส-เนสํ, เนสานํ, เตสํ, เตสานํ-อมฺหา, อสฺมา, นมฺหา, นสฺมา, ตมฺหา, ตสฺมา-อมฺหิ, อสฺมึ, นมฺหิ, นสฺมึ, ตมฺภิ, ตสฺมึ, เนสุ. เตสุ-อิตฺถิยํ-สา, นา, นาโย, ตา, ตาโย-นํ, ตํ, นา, นาโย, ตา, ตาโย-นามฺหิ กเต- 'सा' इत्यादी प्रत्यय असताना 'इम' शब्दाच्या आणि 'त' शब्दाच्या 'त' काराच्या जागी विकल्पेकरून 'अ' होतो - पूर्व स्वराचा लोप झाल्यावर - 'अस्स' (assa), 'नस्स' (nassa), 'तस्स' (tassa). बहुवचनात - 'नेसं' (nesaṃ), 'नेसानं' (nesānaṃ), 'तेसं' (tesaṃ), 'तेसानं' (tesānaṃ). पंचमीत - 'अम्हा' (amhā), 'अस्मा' (asmā), 'नम्हा' (namhā), 'नस्मा' (nasmā), 'तम्हा' (tamhā), 'तस्मा' (tasmā). सप्तमीत - 'अम्हि' (amhi), 'अस्मिं' (asmiṃ), 'नम्हि' (namhi), 'नस्मिं' (nasmiṃ), 'तम्हि' (tamhi), 'तस्मिं' (tasmiṃ), 'नेसु' (nesu), 'तेसु' (tesu). स्त्रीलिंगात - 'सा' (sā), 'ना' (nā), 'नायो' (nāyo), 'ता' (tā), 'तायो' (tāyo). द्वितीयेत - 'नं' (naṃ), 'तं' (taṃ), 'ना' (nā), 'नायो' (nāyo), 'ता' (tā), 'तायो' (tāyo). 'ना' प्रत्यय असताना - สฺสา วา เตติมามูหิ. 'ता', 'एता', 'इमा' आणि 'अमू' या 'घ' संज्ञक शब्दांनंतर 'ना' प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'स्सा' आदेश होतो. ฆปสญฺเญหิ ตา เอตา อิมา อมูหิ นาทนเมกสฺมึ สฺสา วา โหติ-วา ฏา เทเส-อสฺสา, นสฺสา, นาย. 'घ' आणि 'प' संज्ञा असलेल्या 'ता', 'एता', 'इमा' आणि 'अमू' या शब्दांनंतर एकवचनात 'ना' प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'स्सा' होतो - 'टा' आदेश विकल्पेकरून झाल्यावर - 'अस्सा' (assā), 'नस्सा' (nassā), 'नाय' (nāya). ตาย วา. विकल्पेकरून 'ताय' (tāya) आदेश होतो. สฺสํสฺสาสฺสาเยสุ ตสฺส วา อิ โหติ-ติสฺสา, ตสฺสา, ตาย-นาหิ, นาภิ, ตาหิ, ตาภิ-สสฺส วา สฺสามฺหิ-อสฺสา, นสฺสา, ติสฺสา, ตสฺสา, สฺสาเทสาภาวปกฺเข. 'स्सं', 'स्सा', 'स्साय' प्रत्यय असताना 'त' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'इ' होतो - 'तिस्सा' (tissā), 'तस्सा' (tassā), 'ताय' (tāya). तृतीयेत - 'नाहि' (nāhi), 'नाभि' (nābhi), 'ताहि' (tāhi), 'ताभि' (tāhi). 'स' प्रत्यय असताना विकल्पेकरून 'स्सा' होतो - 'अस्सा' (assā), 'नस्सा' (nassā), 'तिस्सा' (tissā), 'तस्सा' (tassā) - 'स्सा' आदेश न होण्याच्या पक्षात. เตติมาโต สสฺส สฺสาย. 'ता', 'एता' आणि 'इमा' या शब्दांनंतर 'स' प्रत्ययाच्या जागी 'स्साय' आदेश होतो. ตา เอตา อิมาโต สสฺส สฺสาโย โหติ วา-อสฺสาย, นสฺสาย, 'ता', 'एता' आणि 'इमा' या शब्दांनंतर 'स' प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'स्साय' होतो - 'अस्साय' (assāya), 'नस्साय' (nassāya), ติสฺสาย, ตสฺสาย-ทฺวิหิ มุตฺตปกฺเข-ตาย ตาย-นํวจนสฺส สมาเทเส ตการสฺส จ วา ฏาเทเส ‘‘สุนํหิสุ‘‘ติ ทีเฆ จ กเต-อาสํ, นาสํ, นาสานํ, ตาสํ, ตาสานํ-สตฺตมิยํ-อสฺสํ, อสฺสา, นสฺสํ, นสฺสา, นายํ, นาย, ติสฺสํ, ติสฺสา, ตสฺสํ, ตสฺสา, ตายํ, ตาย, นาสุ, ตาสุ-นปุํสเก-นํ, ตํ, นาติ, ตาติ, นํ, ตํ,เน, นา, นิ, เต, ตานิ-นาทิสุ ปุเมว-เอวเมตสทฺทสฺส ตีสุ ลิงฺเคสุ-ฏนาเทสาภาโว’ว วิเสโส-อิมสิ. 'तिस्साय' (tissāya), 'तस्साय' (tassāya). दोन्ही आदेश न होण्याच्या पक्षात - 'ताय' (tāya), 'ताय' (tāya). 'नं' प्रत्ययाच्या जागी 'सं' आदेश झाल्यावर आणि 'त' काराच्या जागी विकल्पेकरून 'अ' आदेश झाल्यावर, "सुनंहीसु" या सूत्राने दीर्घ केल्यावर - 'आसं' (āsaṃ), 'नासं' (nāsaṃ), 'नासानं' (nāsānaṃ), 'तासं' (tāsaṃ), 'तासानं' (tāsānaṃ) रूपे होतात. सप्तमीत - 'अस्सं' (assaṃ), 'अस्सा' (assā), 'नस्सं' (nassaṃ), 'नस्सा' (nassā), 'नायं' (nāyaṃ), 'नाय' (nāya), 'तिस्सं' (tissaṃ), 'तिस्सा' (tissā), 'तस्सं' (tassaṃ), 'तस्सा' (tassā), 'तायं' (tāyaṃ), 'ताय' (tāya), 'नासु' (nāsu), 'तासु' (tāsu) रूपे होतात. नपुंसकलिंगात - 'नं' (naṃ), 'तं' (taṃ), 'ना' (nā), 'ता' (tā), 'नं' (naṃ), 'तं' (taṃ), 'ने' (ne), 'ना' (nā), 'नि' (ni), 'ते' (te), 'तानि' (tāni). 'ना' इत्यादी प्रत्यय असताना पुल्लिंगाप्रमाणेच रूपे होतात. याचप्रमाणे 'एत' शब्दाची रूपे तिन्ही लिंगांत होतात; केवळ 'टा' आणि 'न' आदेश न होणे हाच विशेष फरक आहे. 'इम' शब्दाच्या पुढे 'सि' प्रत्यय असताना - สิมฺหิ นปุํสกสฺสายํ. 'सि' प्रत्यय असताना नपुंसकलिंग सोडून 'इम' शब्दाच्या जागी 'अयं' आदेश होतो. อิมสทฺทสฺสานปุํสกสฺสายํ โหติสิมฺหิ-อยํ, อิเม, อิมํ, อิเมนา. 'इम' शब्दाच्या जागी नपुंसकलिंग सोडून 'सि' प्रत्यय असताना 'अयं' आदेश होतो - 'अयं' (ayaṃ), 'इमे' (ime), 'इमं' (imaṃ), 'इमेना' (imenā). นามฺหินิมิ. 'ना' प्रत्यय असताना 'अन' आणि 'इम' आदेश होतात. อิมสทฺทสฺสานิตฺถิยํ นามฺหิ อนฺैมิจฺจาเทสา โหนฺติ-อเนน, อิมินา-หิ- स्त्रीलिंग सोडून 'इम' शब्दाच्या जागी 'ना' प्रत्यय असताना 'अन' आणि 'इम' हे आदेश होतात - 'अनेन' (anena), 'इमिना' (iminā). 'हि' प्रत्यय असताना - อิมสฺสา นิตฺถิยํ เฏ. स्त्रीलिंग सोडून 'इम' शब्दाच्या जागी 'ए' आदेश होतो. อิมสทฺทสฺสานิตฺถิยํ เฏ โหติวา สุนํหิสุ-เอหิ, เอหิ, อิเมหิ, อิเมหิ-ส-ฏสสฺมาสฺมิ มิจฺจาทินา สพฺพสฺสิมสฺส วา ฏาเทเส-อสฺส, อิมสฺส, เอสํ, เอสานํ. อิเมสํ, อิเมสานํ-อมฺหา, อสฺมา, อิมมฺหา, อิมสฺมา-อมฺหิ, อสฺมึ, อิมมฺหิ, อิมสฺมึ, เอสุ, อิเมสุ-อิตฺถิยํ-อยํ, อิมา, อิมาโย-อิมํ, อิมา, อิมาโย-นา-‘‘สฺสา วา เตติมามูหี’’ติ สฺสา วา, ฏาเทเส สฺสมิจฺจาทินา อิ อา เทเส จ-อสฺสา, อิมิสฺสา-อญฺญตฺร = อิมาย, อิมาหิ, อิมาหิ-ส-อสฺสา, อิมิสฺสา, อสฺสาย, อิมิสฺสาย, อิมาย, นํวจนสฺส สมาเทเส อิมสฺส จ ฏาเทเส ‘‘สุนํหสู’’ติ ทีเฆ จ กเน-อาสํ, อิมายํ-สานมาเทเส-อิมาสานํ-สตฺตมิยํ-อสฺสํ, อิมิสฺสํ. อสฺสาย, อิมิสฺสาย, อิมายํ, อิมาย, อิมาสุ-นปุํสเก. स्त्रीलिंग सोडून 'इम' शब्दाच्या जागी 'सु', 'नं' आणि 'हि' प्रत्यय असताना विकल्पेकरून 'ए' आदेश होतो - 'एहि' (ehi), 'एहि' (ehi), 'इमेहि' (imehi), 'इमेहि' (imehi). 'स' प्रत्यय असताना - 'टा', 'स', 'स्मा', 'स्मिं' इत्यादी सूत्राने संपूर्ण 'इम' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'अ' आदेश झाल्यावर - 'अस्स' (assa), 'इमस्स' (imassa), 'एसं' (esaṃ), 'एसानं' (esānaṃ), 'इमेसं' (imesaṃ), 'इमेसानं' (imesānaṃ). पंचमीत - 'अम्हा' (amhā), 'अस्मा' (asmā), 'इमम्हा' (imamhā), 'इमस्मा' (imasmā). सप्तमीत - 'अम्हि' (amhi), 'अस्मिं' (asmiṃ), 'इमम्हि' (imamhi), 'इमस्मिं' (imasmiṃ), 'एसु' (esu), 'इमेसु' (imesu). स्त्रीलिंगात - 'अयं' (ayaṃ), 'इमा' (imā), 'इमायो' (imāyo). द्वितीयेत - 'इमं' (imaṃ), 'इमा' (imā), 'इमायो' (imāyo). 'ना' प्रत्यय असताना - "स्सा वा तेतिमामूही" या सूत्राने विकल्पेकरून 'स्सा' आदेश झाल्यावर, आणि 'टा' आदेश झाल्यावर 'स्सं' इत्यादी सूत्राने 'इ' आदेश झाल्यावर - 'अस्सा' (assā), 'इमिस्सा' (imissā); इतर ठिकाणी - 'इमाय' (imāya), 'इमाहि' (imāhi), 'इमाहि' (imāhi). 'स' प्रत्यय असताना - 'अस्सा' (assā), 'इमिस्सा' (imissā), 'अस्साय' (assāya), 'इमिस्साय' (imissāya), 'इमाय' (imāya). 'नं' प्रत्ययाच्या जागी 'सं' आदेश झाल्यावर आणि 'इम' शब्दाच्या जागी 'अ' आदेश झाल्यावर, "सुनंहीसु" या सूत्राने दीर्घ केल्यावर - 'आसं' (āsaṃ), 'इमायं' (imāyaṃ). 'सानं' आदेश झाल्यावर - 'इमासानं' (imāsānaṃ). सप्तमीत - 'अस्सं' (assaṃ), 'इमिस्सं' (imissaṃ), 'अस्साय' (assāya), 'इमिस्साय' (imissāya), 'इमायं' (imāyaṃ), 'इमाय' (imāya), 'इमासु' (imāsu). नपुंसकलिंगात - อิมสฺสิทํ วา. 'इम' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'इदं' (idaṃ) आदेश होतो. อํสิสุ สห เตหิ อิมสฺสิทํ วา โหติ นปุํสเก-อิทํ, อิมํ, อิมา, อิมานิ-อิทํ, อิมํ, อิเม, อิมานิ-ตติยาทิสุ ปุลฺลิงฺคสฺมํ-อมุสิ. नपुंसकलिंगात 'अं' आणि 'सि' प्रत्यय असताना त्यांच्यासह 'इम' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'इदं' आदेश होतो - 'इदं' (idaṃ), 'इमं' (imaṃ), 'इमा' (imā), 'इमानि' (imāni). द्वितीयेत - 'इदं' (idaṃ), 'इमं' (imaṃ), 'इमे' (ime), 'इमानि' (imāni). तृतीया इत्यादी विभक्तींमध्ये पुल्लिंगाप्रमाणेच रूपे होतात. 'अमु' शब्दाच्या पुढे 'सि' प्रत्यय असताना - มสฺสามุสฺส. 'अमु' शब्दाच्या 'म' काराच्या जागी 'स' कार होतो. อนปุํสกสฺสามุสฺส มการสฺส โส โภติ สิมฺหิ-อสุ-โย- नपुंसकलिंग सोडून 'अमु' शब्दाच्या 'म' काराच्या जागी 'सि' प्रत्यय असताना 'स' कार होतो - 'असु' (asu). 'यो' प्रत्यय असताना - โลโป มุสฺมา. 'अमु' शब्दाच्या पुढील प्रत्ययाचा लोप होतो. อมุสทฺทโต โยนํ โลโป วา โหติ ปุลฺลิงฺเค’ติ นิจฺจํโย โลเป ทิโฆ-อมุ-อมุํ, อมู-อมุนา, อมูหิ, อมูภิ- पुल्लिंगात 'अमु' शब्दाच्या पुढील 'यो' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून लोप होतो. 'यो' चा लोप झाल्यावर नेहमी दीर्घ स्वर होतो - 'अमू' (amū). द्वितीयेत - 'अमुं' (amuṃ), 'अमू' (amū). तृतीयेत - 'अमुना' (amunā), 'अमूर्हि' (amūhi), 'अमूर्भि' (amūbhi). น โน สสฺส. 'स' प्रत्ययाच्या जागी 'नो' आणि 'न' आदेश होतात. อมุสฺมา สสฺส โน น โหติ-อมุสฺส, อมุสํ, อมุสานํ-อมุนา, อมุมฺหา, อมุสฺมา-อมุมฺหิ,อมุสฺมึ, อมุสุ-อิตฺถิยํ-อสุ, อมุ, อมุโย- 'अमु' शब्दाच्या पुढील 'स' प्रत्ययाच्या जागी 'नो' आणि 'न' आदेश होतात - 'अमुस्स' (amussa), 'अमुसं' (amusaṃ), 'अमुसानं' (amusānaṃ). तृतीयेत - 'अमुना' (amunā). पंचमीत - 'अमुम्हा' (amumhā), 'अमुस्मा' (amusmā). सप्तमीत - 'अमुम्हि' (amumhi), 'अमुस्मिं' (amusmiṃ), 'अमुसु' (amusu). स्त्रीलिंगात - 'असु' (asu), 'अमु' (amu), 'अमुयो' (amuyo). อมุํ, อมู, อมุโย-นา-‘‘สฺสาวา, เตติมามูหี’’ติ สฺสา วา-อมุสฺสา, อมุยา, อมูหิ, อมูภิ-อมุสฺสา, อมุยา, อมุสํ, อมูสานํ-สตฺตมิยํอมุสฺสา. อมุสฺสํ. อมุยํ, อมุยา, อมุสุ-นปุํสเก- द्वितीयेत - 'अमुं' (amuṃ), 'अमू' (amū), 'अमुयो' (amuyo). 'ना' प्रत्यय असताना - "स्सा वा तेतिमामूही" या सूत्राने विकल्पेकरून 'स्सा' होतो - 'अमुस्सा' (amussā), 'अमुया' (amuyā). तृतीयेत - 'अमूर्हि' (amūhi), 'अमूर्भि' (amūbhi). चतुर्थी-षष्ठीत - 'अमुस्सा' (amussā), 'अमुया' (amuyā), 'अमुसं' (amusaṃ), 'अमूसानं' (amūsānaṃ). सप्तमीत - 'अमुस्सा' (amussā), 'अमुस्सं' (amussaṃ), 'अमुयं' (amuyaṃ), 'अमुया' (amuyā), 'अमुसु' (amusu). नपुंसकलिंगात - อมุสฺสาทุํ. 'अमु' शब्दाच्या जागी 'अदुं' (aduṃ) आदेश होतो. อํสิสุ สห เตหิ อมุสฺส อทุํ โหติ วา นปุํสเก-อทุํ-อญฺญ नपुंसकलिंगात 'अं' आणि 'सि' प्रत्यय असताना त्यांच्यासह 'अमु' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'अदुं' आदेश होतो - 'अदुं' (aduṃ). इतर ठिकाणी - ตฺร สิโลเป-อมุ, อมุน, อมู, อทุํ, อมุํ, อมุนิ, อมู-เสสํ ปุเมว-กึสิ. 'सि' प्रत्ययाचा लोप झाल्यावर - 'अमु' (amu), 'अमुन' (amuna), 'अमू' (amū), 'अदुं' (aduṃ), 'अमुं' (amuṃ), 'अमुनि' (amuni), 'अमू' (amū). उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच होतात. 'किं' शब्दाच्या पुढे 'सि' प्रत्यय असताना - กิสฺส โก สพฺพาสุ. सर्व विभक्तींमध्ये 'किं' (किस्स) च्या जागी 'को' होतो. สพฺพาสุ วิภตฺตีสุ กิสฺส โก โหติ-สิสฺโส-โก, เก, กํ, เก, เกน, กหิ, เกหิ. सर्व विभक्तींमध्ये 'किं' (किस्स) च्या जागी 'को' होतो - जसे की: को, के, कं, के, केन, कहि, केहि. กิ สสฺมึสุ วา นิตฺถิยํ. स्त्रीलिंग नसताना 'स' आणि 'स्मिं' विभक्तींमध्ये 'किं' च्या जागी 'कि' विकल्पेकरून होतो. อนิตฺถิยํ กิสฺส กิ วา โหติ สสฺมึสุ-กิสฺส, กสฺส, เกสํ, เกสานํ, กมฺหา, กสฺมา, กิมฺหิ, กิสฺมึ, กมฺหิ, กสฺมึ, เกสุ-อิตฺถิยํ-กอาเทเส อการนฺตตฺตา อาปฺปจฺจโย-กา, กา, กาโย อิจฺจาทิ สพฺพาว-นปุํสเก. स्त्रीलिंग नसताना 'स' आणि 'स्मिं' विभक्तींमध्ये 'किं' च्या जागी 'कि' विकल्पेकरून होतो - जसे की: किस्स, कस्स, केसं, केसाणं, कम्हा, कस्मा, किम्हि, किस्मिं, कम्हि, कस्मिं, केसु. स्त्रीलिंगात - 'क' आदेश झाल्यावर अ-कारान्त असल्यामुळे 'आ' प्रत्यय लागतो - जसे की: का, का, कायो इत्यादी. नपुंसकलिंगात सर्व (पुल्लिंगाप्रमाणेच) असते. กิมํสิสุ สห นปุํสเก. नपुंसकलिंगात 'अं' आणि 'सि' विभक्तींमध्ये त्यांच्यासह 'किं' होतो. อํสิสุ สห เตหิ กึสทฺทสฺส กึ โหติ นปุํสเก-กึ, กานิ, กึ, เก, กานิ-เกเนจฺจาทิ ปุเมว-เอกสทฺโท สงฺขฺยาตุลฺยญฺญา สหายวจโน-อตฺร สงฺขฺยาสทฺโท สํเขยฺยวาจิ-ยทา สงฺเขยฺย วาจี ตเทกวจนนฺโต อญฺญตฺร พหุวจนนฺโตปิ-เอโก เอกา เอกมิจฺจาทิ-สพฺพสมํ ติลิงฺเคสุ-สฺสาสฺสํสุ ปน-สฺสมาทินา อิมฺหิ เอกิสฺสา เอกิสฺสํ-ตุมฺห อมฺภสทฺทา อลิงฺคา-ตถา อุภ กติญฺจิ สทฺทา ปญฺจาทโย อฏฺฐารสนฺตา จ-ตุมฺหสิ อมฺหสิ. 'अं' आणि 'सि' विभक्तींमध्ये त्यांच्यासह नपुंसकलिंगात 'किं' शब्दाचा 'किं' होतो - जसे की: किं, कानि, किं, के, कानि. 'केने' इत्यादी पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. 'एक' शब्द संख्या, समान, अन्य आणि सोबती या अर्थाचा वाचक आहे. येथे 'संख्या' शब्द संख्येय (मोजण्यायोग्य) वाचक आहे. जेव्हा तो संख्येय वाचक असतो, तेव्हा तो एकवचनात असतो, इतर ठिकाणी बहुवचनातही असतो - जसे की: एको, एका, एकं इत्यादी. तिन्ही लिंगांत तो 'सब्ब' शब्दाप्रमाणे चालतो. परंतु 'स्सा' आणि 'स्सं' विभक्तींमध्ये 'स्सा' इत्यादी सूत्राने 'एकिस्सा', 'एकिस्सं' असे होते. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्द लिंगविरहित आहेत. तसेच 'उभ', 'कति' शब्द आणि 'पञ्च' पासून 'अट्ठाठारस' (पाच ते अठरा) पर्यंतचे शब्दही लिंगविरहित आहेत. 'तुम्ह' + 'सि', 'अम्ह' + 'सि'. ตุมฺหสฺส ตุวํ ตฺวมมฺหิ จ. 'तुम्ह' शब्दाच्या जागी 'अम्हि' (आणि 'सि') विभक्तीमध्ये 'तुवं' आणि 'त्वं' होतात. อมฺหิสิมฺหิ จ ตุมฺหสฺส สวิหตฺติสฺส ตุวํ ตฺวํ โหนฺติ-ตุวํ ตฺวํ. 'अम्हि' आणि 'सि' विभक्तींमध्ये विभक्तीसह 'तुम्ह' शब्दाच्या जागी 'तुवं' आणि 'त्वं' होतात - जसे की: तुवं, त्वं. สิมฺหิ หํ. 'सि' विभक्तीमध्ये 'हं' (अहं) होतो. สิมฺหิ อมฺหสฺส สวิภตฺติสฺส อหํ โหติ-อหํ-โย-ตุมฺเห. 'सि' विभक्तीमध्ये विभक्तीसह 'अम्ह' शब्दाच्या जागी 'अहं' होतो - जसे की: अहं. 'यो' विभक्तीमध्ये - तुम्हे. มยมสมามฺหสฺส. 'अम्ह' शब्दाच्या जागी 'मयं' आणि 'अस्मा' होतात. โยสฺวมฺหสฺส สวิภตฺติสฺส มยมสฺมา วา โหนฺติ ยถากฺกมํ-มยํ, อสฺมา, อมฺเห-อํ-ตุวํ. ตฺวํ. 'यो' विभक्तींमध्ये विभक्तीसह 'अम्ह' शब्दाच्या जागी अनुक्रमे 'मयं' आणि 'अस्मा' विकल्पेकरून होतात - जसे की: मयं, अस्मा, अम्हे. 'अं' विभक्तीमध्ये - तुवं, त्वं. อมฺหิ ตํ มํ ตวํ มมํ. 'अम्हि' ('अं') विभक्तीमध्ये 'तं', 'मं', 'तवं', 'ममं' होतात. อมฺหิ ตุมฺหอมฺหสทฺทานํ สวิภตฺตีนํ ตํ มํ ตวํ มมํ โหนฺติ ยถากฺกมํ-ตํ, ตวํ, มํ, มมํ. 'अम्हि' ('अं') विभक्तीमध्ये विभक्तीसह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी अनुक्रमे 'तं', 'मं', 'तवं', 'ममं' होतात - जसे की: तं, तवं, मं, ममं. ทุติเย โยมฺหิ วา. द्वितीयेच्या 'यो' विभक्तीमध्ये विकल्पेकरून (होतात). ตุมฺหอมฺหสทฺทานํ สวิหตฺตีนํ ปจฺเจกํ งํ งากํ วา โหนฺติ ทุติเย โยมฺหิ-ตุมฺหากํ ตุมฺเห, อมฺหํ, อมฺหากํ, อสฺมา, อมฺเห. द्वितीयेच्या 'यो' विभक्तीमध्ये विभक्तीसह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी प्रत्येक वेळी विकल्पेकरून 'ङं' आणि 'ङाकं' (तुम्हाकं, अम्हाकं) होतात - जसे की: तुम्हाकं, तुम्हे, अम्हं, अम्हाकं, अस्मा, अम्हे. นาสฺมาสุ ตยา มยา. 'ना' आणि 'स्मा' विभक्तींमध्ये 'तया' आणि 'मया' होतात. นาสฺมาสุ ตุมฺหอมฺหสทฺทานํ สวิภตฺตีนํ ตยา มยา โหนฺติ ยถากฺกมํ. 'ना' आणि 'स्मा' विभक्तींमध्ये विभक्तीसह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी अनुक्रमे 'तया' आणि 'मया' होतात. ตยาตยินํ ตฺว วา ตสฺส. 'तया' आणि 'तयि' विभक्तींमध्ये 'तुम्ह' च्या 'त' काराच्या जागी विकल्पेकरून 'त्व' होतो. ตุมฺหสฺส ตยาตยีนํ ตการสฺส ตฺว โหติ วา-ตฺวยา, ตยา, มยา, ตุมฺเหหิ, ตุมฺเหภิ. อมฺเหหิ, อมฺเหภิ. 'तुम्ह' शब्दाच्या 'तया' आणि 'तयि' विभक्तींमध्ये 'त' काराच्या जागी विकल्पेकरून 'त्व' होतो - जसे की: त्वया, तया, मया, तुम्हेहि, तुम्हेभि, अम्हेहि, अम्हेभि. ตว มม ตุยฺหํ มยฺหํ เส. 'स' विभक्तीमध्ये 'तव', 'मम', 'तुय्हं', 'मय्हं' होतात. เส ตุมฺหอมฺหสทฺทานํ สฺวิภตฺตีนํ ตว มม ตุยฺหํ มยฺหํ โหนฺติ ยถากฺกมํ-ตว ตุยฺหํ มม มยฺหํ. 'स' विभक्तीमध्ये विभक्तीसह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी अनुक्रमे 'तव', 'मम', 'तुय्हं', 'मय्हं' होतात - जसे की: तव, तुय्हं, मम, मय्हं. นํเสสฺว สมากํ มมํ. 'नं' आणि 'स' विभक्तींमध्ये 'अस्माकं' आणि 'ममं' होतात. นํเสสฺวมฺหสฺส สวิภตฺติสฺส อสฺมากํ มมํ โหนฺติ ยถากฺกมํ-มมํ. 'नं' आणि 'स' विभक्तींमध्ये विभक्तीसह 'अम्ह' शब्दाच्या जागी अनुक्रमे 'अस्माकं' आणि 'ममं' होतात - जसे की: ममं. งํ งากํ นมฺหิ. 'नं' विभक्तीमध्ये 'ङं' आणि 'ङाकं' होतात. นมฺหิ ตุมฺหอมฺหสทฺทานํ สวิภตฺตีนํ งํ งากํ โหนฺติ ปจฺเจกํ-ตุมฺหํ ตุมฺหากํ อมฺหํ อมฺหากํ อสฺมากํ. 'नं' विभक्तीमध्ये विभक्तीसह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी प्रत्येक वेळी 'ङं' आणि 'ङाकं' होतात - जसे की: तुम्हं, तुम्हाकं, अम्हं, अम्हाकं, अस्माकं. สฺมามฺหิ ตฺวมฺหา. 'स्मा' विभक्तीमध्ये 'त्वम्हा' होतो. สฺมามฺหิ ตุมฺหสฺส สวิภตฺติสฺส ตฺวมฺหา โหติ วา-ตฺวมฺหา ตฺวยาตยา มยา. 'स्मा' विभक्तीमध्ये विभक्तीसह 'तुम्ह' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'त्वम्हा' होतो - जसे की: त्वम्हा, त्वया, तया, मया. สฺมิมฺหิ ตุมฺหามฺหานํ ตยิ มยิ. 'स्मिं' विभक्तीमध्ये 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी 'तयि' आणि 'मयि' होतात. สฺมิมฺหิ ตุมฺห อมฺหสทฺทานํ สวิภตฺตีนํ ตยิ มยิ โหนฺติ ยถากฺกมํ-ตฺวยิ ตยิ มยิ, ตุมฺเหสุ. 'स्मिं' विभक्तीमध्ये विभक्तीसह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी अनुक्रमे 'तयि' आणि 'मयि' होतात - जसे की: त्वयि, तयि, मयि, तुम्हेसु. สุมฺหามฺหสยาสฺมา. 'सु' विभक्तीमध्ये 'अम्ह' च्या जागी 'अस्मा' होतो. อมฺหสฺส อสฺมา โหติ วา สุมฺหิ-อสฺมาสุ อมฺเหสุ. 'सु' विभक्तीमध्ये 'अम्ह' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'अस्मा' होतो - जसे की: अस्मासु, अम्हेसु. ‘‘อปาทาโท ปทเตกวากฺเย’’ติ อธิกาโร. "अपादादो पदते कवाक्ये" (पादाच्या किंवा वाक्याच्या सुरुवातीला नसलेल्या, दुसऱ्या पदाच्या नंतर असलेल्या आणि एकाच वाक्यात असलेल्या) हा अधिकार (नियम) आहे. โยนํ หิสฺวปญฺจมฺยา โว โน. पंचमी विभक्ती सोडून 'यो' आणि 'हि' विभक्तींमध्ये 'वो' आणि 'नो' होतात. อปญฺจมิยา โยนํ หิสฺวปาทาโท วตฺตมานานํ ปทสฺมา ปเรส เมกวากฺเย ฐิตานํ ตุมฺหอมฺภสทฺทานํ สวิภตฺตีนํ โว โน โหนฺติ วา ยถากฺกมํ-ติฏฺฐถ โว, ติฏฺฐถ ตุมฺเห, ติฏฺฐาม โน, ติฏฺฐาม มยํ-ปสฺสติ โว, ปสฺสติ ตุมฺเห, ปสฺสติ โน, ปสฺสติ อมฺเห-ทิยเต โว, ทิยเต ตุมฺหํ, ทิยเต โน, ทิยเต อมฺหํ-ธนํ โว, ธนํ ตุมฺหํ,ธนํ โน, ธนํ อมฺหํ-กตํ โว, กตํ ตุมฺเหหิ, กตํ โน, กตํ อมฺเหหิ. पंचमी विभक्ती सोडून 'यो' आणि 'हि' विभक्तींमध्ये, पादाच्या किंवा वाक्याच्या सुरुवातीला नसलेल्या, दुसऱ्या पदाच्या नंतर असलेल्या आणि एकाच वाक्यात असलेल्या 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी विभक्तीसह अनुक्रमे 'वो' आणि 'नो' विकल्पेकरून होतात - जसे की: तिट्ठथ वो (तिट्ठथ तुम्हे), तिट्ठाम नो (तिट्ठाम मयं), पस्सति वो (पस्सति तुम्हे), पस्सति नो (पस्सति अम्हे), दियते वो (दियते तुम्हं), दियते नो (दियते अम्हं), धनं वो (धनं तुम्हं), धनं नो (धनं अम्हं), कतं वो (कतं तुम्हेहि), कतं नो (कतं अम्हेहि). เต เม นา เส. 'ना' आणि 'स' विभक्तींमध्ये 'ते' आणि 'मे' होतात. นามฺหิ เส จ อปาทาโท วตฺตมานานํ ปทสฺมา ปเรสํ เอกวากฺเย ฐิตานํ ตุมฺหอมฺหสทฺทานํ สวิหตฺตีนํ เต เม วา โหนฺติ ยถากฺกมํ-กตํ เต, กตํ ตยา, กตํ เม, กตํ มยา-ทิยเต เต, ทียเต ตว, ทียเต เม, ทิยเต มม-ธนํ เต, ธนํ ตว, ธนํ เม, ธนํ มม. 'ना' आणि 'स' विभक्तींमध्ये, पादाच्या किंवा वाक्याच्या सुरुवातीला नसलेल्या, दुसऱ्या पदाच्या नंतर असलेल्या आणि एकाच वाक्यात असलेल्या 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांच्या जागी विभक्तीसह अनुक्रमे 'ते' आणि 'मे' विकल्पेकरून होतात - जसे की: कतं ते (कतं तया), कतं मे (कतं मया), दियते ते (दियते तव), दियते मे (दियते मम), धनं ते (धनं तव), धनं मे (धनं मम). นจวาหาเหวโยเค. 'च', 'वा', 'ह', 'अह', 'एव' यांच्याशी योग (संबंध) असताना (हे आदेश) होत नाहीत. จวาหอหเอเวหิโยเค ตุมฺหอมฺหสทฺทานมาเทสาน โหนฺติ. คจฺฉาม ตุมฺเห จ, มยญฺจ-ปสฺสติ ตุมฺเห จ, อมฺเห จ-กตํ ตุมฺเหหิ จ, อมฺเหหิ จ-ทิยเต ตุมฺหญฺจ, อมฺหญฺจ-ธนํ ตุมฺหญฺจ, อมฺหญฺจ-กตํ ตยา จ, มยา จ-ทียเต ตว จ, มม จ-ธนํ ตว จ มม จ-วาทิโยเคปฺเยวํ เญยฺยํ-อุภ กติ สทฺทา พหุวจนตฺตา-‘‘อุภโคหิ โฏ‘‘ติ โยนํ โฏ-อุโภ, อุโภ-สุหิสุภสฺโส. 'च', 'वा', 'ह', 'अह', 'एव' यांच्याशी योग असताना 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचे आदेश होत नाहीत - जसे की: गच्छाम तुम्हे च, मयञ्च; पस्सति तुम्हे च, अम्हे च; कतं तुम्हेहि च, अम्हेहि च; दियते तुम्हञ्च, अम्हञ्च; धनं तुम्हञ्च, अम्हञ्च; कतं तया च, मया च; दियते तव च, मम च; धनं तव च मम च. 'वा' इत्यादींच्या योगातही असेच समजावे. 'उभ' आणि 'कति' हे शब्द बहुवचनी असल्यामुळे - "उभगोहि टो" या सूत्राने 'यो' विभक्तीच्या जागी 'टो' होतो - जसे की: उभो, उभो. 'सु' आणि 'हि' विभक्तींमध्ये 'उभ' शब्दाचा 'उभ' होतो. อุภสฺส สุหิสฺโว โหติ-อุโภหิ อุโภหิ- 'उभ' शब्दाच्या जागी 'सु' आणि 'हि' विभक्तींमध्ये 'ओ' होतो - जसे की: उभोहि, उभोहि. อุภินฺนํ. उभिण्णं. อุภา นํวจนสฺส อินฺนํ โหติ-อุภินฺนํ, อุโภสุ. 'उभ' शब्दाच्या पुढील 'नं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'इण्णं' होतो - उभिण्णं, उभोसू. ฏิ กติมฺหา 'कति' शब्दाहून 'टि' होतो. กติมฺหาโยนํฏิ โหติ-กติ,กติ,กตีหิ,กตีภิ, กตินฺนํ กตีสุ. 'कति' शब्दाहून पुढील 'यो' प्रत्ययाचा 'टि' होतो - कति, कति, कतीहि, कतीभि, कतिण्णं, कतीसु. อถ สงฺขฺยาสทฺทา วุจฺจนฺเต. आता संख्यावाचक शब्द सांगितले जातात. เอกาทโย อฏฺฐารสนฺตา สงฺเขยฺยวจนา-วีสติอาทโย ปน สงฺขฺยานวจนาจ-เอกสทฺโท สพฺพาทิสุ วุตฺโตว-ทฺวาทินมฏฺฐารสนฺตานํ พหุวจนนฺตตฺตา เอกวจนาภาโว-ทฺวิสทฺทา โยมฺหิ. एकपासून अठरापर्यंतचे शब्द संख्यावाचक (मोजल्या जाणाऱ्या वस्तूंचे वाचक) आहेत, तर वीस इत्यादी शब्द संख्या मोजण्याचे वाचक आहेत. 'एक' शब्द 'सब्बादि' (सर्व इत्यादी) गणात आधीच सांगितला आहे. 'द्वि' पासून अठरापर्यंतचे शब्द बहुवचनी असल्यामुळे त्यांचे एकवचन होत नाही. 'द्वि' शब्दाच्या पुढे 'यो' प्रत्यय आल्यावर - โยมฺหิ ทฺวินฺนํ ทุเว ทฺเว. 'यो' प्रत्यय असताना 'द्वि' शब्दाचे 'दुवे' आणि 'द्वे' असे रूप होते. โยมฺหิ ทฺวิสฺส สวิภตฺติสฺส ทุเว ทฺเว โหนฺติ ปจฺเจกํ-ทุเว ทฺเว, ทฺวีหิ ทฺวีภิ. 'यो' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'द्वि' शब्दाच्या जागी अनुक्रमे 'दुवे' आणि 'द्वे' हे आदेश होतात - दुवे, द्वे, द्वीहि, द्वीभि. ทุวินฺนํ นมฺหิ วา. 'नं' प्रत्यय असताना 'दुविण्णं' विकल्पे करून होते. นมฺหิ ทฺวิสฺส สวิภตฺติสฺส ทุวินฺนํ โหติ วา-ทุวินฺนํ-อญฺญตฺร. 'नं' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'द्वि' शब्दाच्या जागी विकल्पे करून 'दुविण्णं' होते - दुविण्णं; इतर ठिकाणी - นมฺหิ นุก ทฺวาทีนํ สตฺตรสนฺตํ. 'नं' प्रत्यय असताना 'द्वि' पासून सतरापर्यंतच्या संख्यांना 'नुक' आगम होतो. ทฺวาทีนํ สตฺตรสนฺนํ สงฺขฺยานํ นุโขติ นมฺหิ วิภตฺติมฺหิ. อุกาโรอุจฺจารณตฺโถ-กกาโร อนฺตาวยวตฺโถ-เตน นมฺภีน ทีโฆ-ทฺวินฺนํ,ทฺวีสุ-ติสทฺทา โยมฺหิ. 'द्वि' पासून सतरापर्यंतच्या संख्यावाचक शब्दांना 'नं' विभक्ती प्रत्यय असताना 'नुक' आगम होतो. 'उ' कार हा उच्चारणासाठी आहे, 'क' कार हा अंत्य अवयव दर्शवण्यासाठी आहे. त्यामुळे 'नं' प्रत्यय असताना दीर्घ होत नाही - द्विण्णं, द्वीसु. 'ति' शब्दाच्या पुढे 'यो' प्रत्यय आल्यावर - ปุเม ตโย จตฺตาโร. पुल्लिंगात 'तयो' आणि 'चत्तारो' होतात. โยมฺหิ สวิภตฺตีนํ ติวตุนฺนํ ตโย จตฺตาโร โหนฺติ ยถากฺกมํ ปุลฺลิงฺเค-ตโย, ตโย, ตีหิ, ตีภิ. 'यो' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'ति' आणि 'चतु' शब्दांच्या जागी पुल्लिंगात अनुक्रमे 'तयो' आणि 'चत्तारो' होतात - तयो, तयो, तीहि, तीभि. ณฺณํ ณฺณนฺนํ ติโตชฺฌา. 'झ' संज्ञक 'ति' शब्दाहून पुढील 'नं' प्रत्ययाचा 'ण्णं' आणि 'ण्णन्नं' होतो. ฌสญฺญโต ติโต นํวจนสฺส ณฺณํ ณฺณนฺนํ โหนฺติ-ติณฺณํ ตินฺณนฺนํ,ตีสุ-อิตฺถียํ. 'झ' संज्ञक 'ति' शब्दाहून पुढील 'नं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'ण्णं' आणि 'ण्णन्नं' होतो - तिण्णं, तिण्णन्नं, तीसु. स्त्रीलिंगात - ติสฺโส จตสฺโส โยมฺหิ สวิภตฺตีนํ. 'यो' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'ति' आणि 'चतु' शब्दांचे 'तिस्सो' आणि 'चतस्सो' होतात. วิภตฺติสหิตานํ ติวตุนฺนํ โยมฺหิ ติสฺโส จตสฺโส โหนฺติตฺถิยํ ยถากฺกมํ-ติสฺโส, ติสฺโส, ตีหิ ตีภิ. विभक्तीसह 'ति' आणि 'चतु' शब्दांच्या जागी 'यो' प्रत्यय असताना स्त्रीलिंगात अनुक्रमे 'तिस्सो' आणि 'चतस्सो' होतात - तिस्सो, तिस्सो, तीहि, तीभि. นมฺหิ ติจตุนฺนมิตฺถิยํ ติสฺสจตสฺสา. स्त्रीलिंगात 'नं' प्रत्यय असताना 'ति' आणि 'चतु' शब्दांचे अनुक्रमे 'तिस्स' आणि 'चतस्स' होतात. นมฺหิ ติจตุนฺนํ ติสฺส จตสฺสา โหนฺติตฺถิยํ ยถากฺกมํ-ติสฺสนฺนํ, ตีสุ-นปุํสเก. 'नं' प्रत्यय असताना स्त्रीलिंगात 'ति' आणि 'चतु' शब्दांच्या जागी अनुक्रमे 'तिस्स' आणि 'चतस्स' होतात - तिस्सन्नं, तीसु. नपुंसकलिंगात - ตีณิ จตฺตาริ นปุํสเก. नपुंसकलिंगात 'तीणि' आणि 'चत्तारि' होतात. โยมฺหิ สวิภตฺตีนํ ติจตุนฺนํ ยถากฺกมํ ตีณิ จตฺตาริ โหนฺติ นปุํสเก-ตีณิ ตีณิ-เสสํ ปุลฺลิงฺคสมํ-จตุ โย. 'यो' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'ति' आणि 'चतु' शब्दांच्या जागी नपुंसकलिंगात अनुक्रमे 'तीणि' आणि 'चत्तारि' होतात - तीणि, तीणि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणे असतात. 'चतु' शब्दाच्या पुढे 'यो' प्रत्यय आल्यावर - จตุโร วา จตุสฺส. 'चतु' शब्दाचे विकल्पे करून 'चतुरो' होते. จตุสทฺทสฺส สวิภตฺติสฺส โยมฺหิ จตุโร วา โหติ ปุลฺลิงฺเค-จตุโร, จตุโร-อญฺญตฺร-จตฺตาโร, จตฺตาโร-จตูหิ จตูภิ. पुल्लिंगात 'यो' प्रत्यय असताना विभक्तीसह 'चतु' शब्दाच्या जागी विकल्पे करून 'चतुरो' होतो - चतुरो, चतुरो; इतर ठिकाणी - चत्तारो, चत्तारो, चतूहि, चतूभि. ฏ ปญฺจาทีหิ จุทฺทสหิ. पाच इत्यादी चौदा संख्यांच्या पुढे 'यो' प्रत्ययाचा 'ट' (लोप) होतो. ปญฺจาทีหิ จุทฺทสหิ สงฺขฺยาหิ โยนํ โฏ โหติ-ปญฺจ, ปญฺจ. पाच इत्यादी चौदा संख्यावाचक शब्दांच्या पुढील 'यो' प्रत्ययाचा 'ट' होतो - पञ्च, पञ्च. ปญฺจาทีนํ จุทฺทสนฺนม. पाच इत्यादी चौदा संख्यांच्या पुढे 'अ' होतो. ปญฺจาทีนํ จุทฺทสนฺนํ สุนํหิสฺว โหติ-เอตฺตาปวาโทยํ-ปญฺจหิ ปญฺจภิ, ปญฺจนฺตํ ปญฺจสุ-เอวํ ฉาทโย อฏฺฐารสนฺตา-เอโก จ ท ส จาติ จตฺถสมาเส เอเกน อธิกา ทสาติ ตติยาสมาเส วา กเต ‘‘เอกตฺถตาย’’นฺติ วิภตฺติโลโป-เอวมุปริ จ. पाच इत्यादी चौदा संख्यांच्या पुढील 'सु', 'नं' आणि 'हि' प्रत्यय असताना 'अ' होतो. हा 'ए' काराचा अपवाद आहे - पञ्चहि, पञ्चभि, पञ्चन्नं, पञ्चसु. याचप्रमाणे 'छ' (सहा) इत्यादी अठरापर्यंतचे शब्द होतात. 'एक आणि दहा' असा द्वंद्व समास केल्यावर किंवा 'एकाने अधिक दहा' असा तृतीया तत्पुरुष समास केल्यावर 'एकत्थता' (एकार्थता) मुळे विभक्तीचा लोप होतो. यापुढील संख्यांचेही याचप्रमाणे समजावे. เอกฏฺฐานมา. 'एक' आणि 'अट्ठ' यांच्या जागी 'आ' होतो. เอกอฏฺฐานํ อา โหติ ทเส ปเร. पुढे 'दस' शब्द असताना 'एक' आणि 'अट्ठ' यांच्या जागी 'आ' होतो. ร สงฺธฺยาโต วา. संख्यावाचक शब्दाच्या पुढील 'दस' च्या जागी विकल्पे करून 'र' होतो. สงฺขฺยาโต ปรสฺส ทสสฺส ร โหติ วิภาสา-สจ‘‘ปญฺจมิยํ ปรสฺเส’’ติ อนุวตฺตมาเน ‘‘อาทิสฺสา‘‘ติ ทการสฺเสว โหติ-เอกา รส, เอกาทส. संख्यावाचक शब्दाच्या पुढील 'दस' शब्दाच्या जागी विकल्पे करून 'र' होतो. 'पञ्चमियं परस्स' या सूत्राच्या अनुवृत्तीने 'आदिस्स' या नियमानुसार केवळ 'द' काराच्या जागीच 'र' होतो - एकारस, एकादस. อา สงฺขฺยายาสตาโท’นญฺญตฺเถ. शंभर इत्यादी नसलेल्या इतर अर्थी संख्यावाचक उत्तरपद पुढे असताना 'द्वि' च्या जागी 'आ' होतो. สงฺขฺยายมุตฺตรปเท ทฺวิสฺส อา โหตสตาโท’นญฺญตฺเถ-ทฺวาทส. शंभर इत्यादी नसलेल्या इतर अर्थी संख्यावाचक उत्तरपद पुढे असताना 'द्वि' शब्दाच्या जागी 'आ' होतो - द्वादस. ขา จตฺตาฬีสาโท. चाळीस इत्यादींच्या पुढे 'द्वि' च्या जागी 'खा' होतो. ทฺวิสฺส ขา วา โหตจตฺตาฬีสาโท’นญฺญตฺเถ-พารส. चाळीस इत्यादी नसलेल्या इतर अर्थी संख्यावाचक उत्तरपद पुढे असताना 'द्वि' च्या जागी विकल्पे करून 'बा' (किंवा 'खा') होतो - बारस. ติสฺเส. 'ति' च्या जागी 'ए' होतो. สงฺขฺยายมุตฺตรปเท ติสฺส เอ โหตสตาโท’นญฺญตฺเถ. शंभर इत्यादी नसलेल्या इतर अर्थी संख्यावाचक उत्तरपद पुढे असताना 'ति' शब्दाच्या जागी 'ए' होतो. ฉตีหิ โฬ จ. 'छ' आणि 'ति' यांच्या पुढील 'दस' च्या जागी 'ळ' आणि 'र' होतो. ฉติหิ ปรสฺส ทสสฺส โฬ โหติ โร จ-เตฬส-เตรส. 'छ' आणि 'ति' यांच्या पुढील 'दस' शब्दाच्या जागी 'ळ' आणि 'र' होतो - तेळस, तेरस. จตุสฺส จุโจ โหนฺติ วา ทสสทฺเท ปเร-ทฺวิตฺเต-จุทฺทส โจทฺทส จตุทฺทส. 'दस' (दहा) हा शब्द पुढे असताना 'चतु' (चार) या शब्दाचा 'चु' किंवा 'चो' असा आदेश विकल्पेकरून होतो, आणि द्वित्व होऊन 'चुद्दस' (cuddasa), 'चोद्दस' (coddasa) आणि 'चतुद्दस' (catuddasa) अशी रूपे होतात. วีสติทเสสุ ปญฺจสฺส ปณฺณุปณฺณา. 'वीसति' (वीस) आणि 'दस' (दहा) हे शब्द पुढे असताना 'पञ्च' (पाच) या शब्दाचे 'पण्णु' आणि 'पण्णा' असे आदेश होतात. วีสติทเสสุ ปเรสุ ปญฺจสฺส ปณฺณุปณฺณา โหนฺติ วา ยถากฺกมํ-ปณฺณรส ปญฺจทส. 'वीसति' आणि 'दस' हे शब्द पुढे असताना 'पञ्च' या शब्दाचे अनुक्रमे 'पण्णु' आणि 'पण्णा' हे आदेश विकल्पेकरून होतात - जसे की 'पण्णरस' (पंधरा) आणि 'पञ्चदस'. ฉสส โส. 'छ' (सहा) या शब्दाचा 'सो' असा आदेश होतो. ฉสฺส โส อิจฺจยมาเทโส โหติ ทสสทฺเท ปเร-โสฬส โสรส, สตฺตรส สตฺตทส, อฏฺฐารส อฏฺฐาทส-เอเกน อูนา วีสตีติ วิเสสนสมาสคพฺเภ ตติยาสมาเส. 'दस' शब्द पुढे असताना 'छ' चा 'सो' हा आदेश होतो - जसे की 'सोळस' (soḷasa), 'सोरस' (sorasa) [सोळा]. तसेच 'सत्तरस' (sattarasa), 'सत्तदस' (sattadasa) [सतरा]; 'अट्ठाारस' (aṭṭhārasa), 'अट्ठादस' (aṭṭhādasa) [अठरा]. 'एकेन ऊना वीसति' (एकाने कमी वीस, म्हणजे एकोणीस) हा विशेषण-समासयुक्त तृतीया-तत्पुरुष समास आहे. อิตฺถิยมฺหาสิตปุมิตฺถิ ปุเมเวกตฺเถ. स्त्रीलिंगी नामाच्या संदर्भात, समान अर्थ असणाऱ्या उत्तरपदाच्या पुढे असताना, पूर्वी पुल्लिंगात उच्चारलेला शब्द पुल्लिंगाप्रमाणेच राहतो (पुंवद्भाव होतो). อิตฺถิยํ วตฺตมาเน เอกตฺเถ สมานาธิกรเณ อุตฺตรปเท ปเร ภาสิตปุมิตฺถิ ปุเมว โหตีติ ปุมฺภาวา อาปฺปจฺจโย นิวตฺตเต-เอกูนวีสติ-อิตฺถิลิงฺเคกวจนนฺโต-วีสติอาทโย หิ อานวุติยา เอกวจนนฺตา อิตฺถิลิงฺคา-(โภ) เอกูนวีสติ เอกูนวีสติมิจฺจาทิ-เอวํ วีสติ เอกวีสติ ทฺวาวีสติ พาวีสติ เตวีสติปฺปภุตโย. स्त्रीलिंगामध्ये वर्तमान असताना, समान अर्थ असणारे (समानाधिकरण) उत्तरपद पुढे असल्यास, पूर्वी पुल्लिंगात बोललेला शब्द पुल्लिंगासारखाच होतो, या पुंवद्भावामुळे 'आ' प्रत्यय निवृत्त होतो - जसे की 'एकूनाविसति' (ekūnavīsati - एकोणीस) हा स्त्रीलिंगी एकवचनान्त शब्द आहे. कारण 'वीसति' पासून 'नवुति' (नव्वद) पर्यंतचे संख्यावाचक शब्द एकवचनान्त आणि स्त्रीलिंगी असतात - (हे) 'एकूनाविसति', 'एकूनाविसतिं' इत्यादी. याचप्रमाणे 'वीसति' (वीस), 'एकवीसति' (एकवीस), 'द्वावीसति' किंवा 'बावीसति' (बावीस), 'तेवीसति' (तेवीस) इत्यादी रूपे होतात. วีสตยํ ปญฺจสฺส วา ปณฺณอาเทเส-ปณฺณุวีสติ, ปญฺจวีสติ-เอเกน อูนา ตึสติ ตึสา วา เอกุนตึสติ เอกุนตึสา-มติกญฺญา สมา-เอวํ ตึสติ ตึสาปฺปภุตโย-ตึสาสทฺทสฺส ปน สิโลเป-ทีฆรสฺสาติ โยควิภาคา รสฺเส-ตึส-นิคฺคหีตาคเม จ ตึสนฺติปิ โหติ-เอวมุปริ จ ยถาสมฺภวํ-ทฺวตฺตึสติอาทินํ รสฺสญฺจตฺตานิ-จตฺตาฬีสาย สมฺหิ-จตฺตาฬีสา จตฺตาฬีส จตฺตาฬีสํ วา,เอวํ จตฺตารีสา จตฺตาริส จตฺตารีสํ. 'वीसति' मध्ये 'पञ्च' चा विकल्पेकरून 'पण्ण' असा आदेश होतो - 'पण्णुवीसति' (paṇṇuvīsati), 'पञ्चवीसति' (pañcavīsati) [पंचवीस]. एकाने कमी तीस म्हणजे 'एकोनतिंसति' (ekunatiṃsati) किंवा 'एकोनतिंसा' (ekunatiṃsā) [एकोणतीस] - हे शब्द अनुक्रमे 'मति' आणि 'कञ्ञा' (कन्या) प्रमाणे चालतात. याचप्रमाणे 'तिंसति' (tiṃsati) किंवा 'तिंसा' (tiṃsā) [तीस] इत्यादी रूपे होतात. 'तिंसा' शब्दातील 'सि' प्रत्ययाचा लोप झाल्यावर, 'दीघ-रस्स' या सूत्राच्या योगविभागाने र्हस्व होऊन 'तिंस' (tiṃsa) आणि निग्गहीत (अनुस्वार) आगम होऊन 'तिंसं' (tiṃsaṃ) असेही रूप होते. यापुढेही यथासंभव असेच समजावे. 'द्वत्तिंसति' (बत्तीस) इत्यादी शब्दांचे र्हस्वत्व इत्यादी बदल होतात. 'चत्ताळीसा' (चाळीस) च्या प्रथमेच्या एकवचनात 'चत्ताळीसा' (cattāḷīsā), 'चत्ताळीस' (cattāḷīsa) किंवा 'चत्ताळीसं' (cattāḷīsaṃ) अशी रूपे होतात; याचप्रमाणे 'चत्तारीसा' (cattārīsā), 'चत्तारिस' (cattārisa), 'चत्तारीसं' (cattārīsaṃ) अशी रूपे होतात. ทฺวิสฺสา จ. आणि 'द्वि' (दोन) या शब्दाचा देखील (चत्ताळीस इत्यादींच्या पुढे असताना 'ए' किंवा 'आ' होतो). อสตาโท’นญฺญตฺเถ จตฺตาฬีสาโท ทฺวิสฺส เอ โหติ วา อา จ-ทฺเว จตฺตาฬีส ทฺวาจตฺตาฬีส ทฺวีจตฺตาฬีส-เอวํ ทฺเววตฺตาริส ทฺวาจตฺตารีส ทฺวิจตฺตารีส, ทฺเวจตฺตาฬีสติ ทฺวาจตฺตาฬีสติ ทฺวิจตฺตาฬีสติ. 'सत' (शंभर) इत्यादींशिवाय इतर अर्थांमध्ये, 'चत्ताळीसा' (चाळीस) इत्यादी शब्द पुढे असताना 'द्वि' या शब्दाचा विकल्पेकरून 'ए' किंवा 'आ' होतो - जसे की 'द्वेचत्ताळीस' (dvecattāḷīsa), 'द्वाचत्ताळीस' (dvācattāḷīsa), 'द्विचत्ताळीस' (dvicattāḷīsa) [बेचाळीस]. याचप्रमाणे 'द्वेचत्तारीस', 'द्वाचत्तारीस', 'द्विचत्तारीस' आणि 'द्वेचत्ताळीसति', 'द्वाचत्ताळीसति', 'द्विचत्ताळीसति' अशी रूपे होतात. จตฺตาฬีสาโท วา. 'चत्ताळीसा' (चाळीस) इत्यादी शब्द पुढे असताना विकल्पेकरून (ति चा 'ते' किंवा 'ति' होतो). อสตาโท’นญฺญตฺเถ จตฺตาฬีสาโท ติสฺเส วา โหติ-เตจตฺตาฬีส ติวตฺตาฬีส เตจตฺตาฬีสติ ติจตฺตาฬีสติ-เตจตฺตารีส ติจตฺตารีส-ทฺเวปญฺญาส ทฺวาปญฺญาส ทฺวิปญฺญาส ทฺเวปณฺณาสติ ปณฺณาส, ทฺเวสฏฺฐิ ทฺวาสฏฺฐิ ทฺวิสฏฺฐิ, เตสฏฺฐิ ติสฏฺฐิ, ทฺเวสตฺตติ ทฺวา สตฺตติ ทฺวีสตฺตติ ทฺเวสตฺตริ ทฺวาสตฺตริ ทฺวิสตฺตริ, เตสตฺตติ ติสตฺตติ เตสตฺตริ ติสตฺตริ, ทฺวฺญสีติ ทฺวาอสีติ ทฺวียาสีติ-ยาคโม-ตฺญสีติ ติยาสีติ, ทฺเวนวุติ ทฺวานวุติ ทฺวินวุติ, เตนวุติ ตินวุติ-สตํ, นปุํสก เมกวจนนฺตํ-เอวํ สหสฺสทโย-โกฏิ ปโกฏิ โกฏิปฺปโกฏิ อกฺโขหิณิโย อิตฺถิลิงฺเคกวจนนฺตา-วคฺคเภเท ตุ สพฺพาสมฺปิ สงฺขฺยานํ พหุวจนญฺจ โหเตว-ยถา-ทฺเว วิสติโย, ติสฺโส วีสติโย อิจฺจาทิ-ทส อสกํ สตํ นาม,ทสสตํ สหสฺสํ, ทสสหสฺสํ นหุตํ, ทสนหุตํ ลกฺขํ, สตสหสฺสนฺติปิ วุจฺจติ-ลกฺขสตํ โกฏิ, โกฏิลกฺขสตํ ปโกฏิ, ปโกฏิลกฺขสตํ โกฏิปฺปโกฏิ-เอวํ นหุตํ นินฺนหุตํ อกฺโขหิณี พินฺทุ อพฺพุทํ นิรพฺพุทํ อหกหํ อพพํ อฏฏํ โสคนฺธิกํ อุปฺปลํ กุมุทํ ปุณฺฑริกํ ปทุมํ กถานํ มหากถานํ อสงฺเขยฺยนฺติ ยถากฺกมํ สตลกฺขคุณํ เวทิตพฺพํ. 'सत' (शंभर) इत्यादींशिवाय इतर अर्थांमध्ये, 'चत्ताळीसा' (चाळीस) इत्यादी शब्द पुढे असताना 'ति' (तीन) या शब्दाचा विकल्पेकरून 'ते' किंवा 'ति' होतो - जसे की 'तेचत्ताळीस' (tecattāḷīsa), 'तिचत्ताळीस' (ticattāḷīsa), 'तेचत्ताळीसति', 'तिचत्ताळीसति', 'तेचत्तारीस', 'तिचत्तारीस' [त्रेचाळीस]. तसेच 'द्वेपञ्ञास' (dvepaññāsa), 'द्वापञ्ञास' (dvāpaññāsa), 'द्विपञ्ञास' (dvipaññāsa), 'द्वेपण्णासति' (dvepaṇṇāsati), 'पण्णास' (paṇṇāsa) [बावन/पन्नास]; 'द्वेसट्ठि' (dvesaṭṭhi), 'द्वासट्ठि' (dvāsaṭṭhi), 'द्विसट्ठि' (dvisaṭṭhi) [बासष्ट]; 'तेसट्ठि' (tesaṭṭhi), 'तिसट्ठि' (tisaṭṭhi) [त्रेसष्ट]; 'द्वेसत्तति' (dvesattati), 'द्वासत्तति' (dvāsattati), 'द्वीसत्तति' (dvīsattati), 'द्वेसत्तरि' (dvesattari), 'द्वासत्तरि' (dvāsattari), 'द्विसत्तरि' (dvisattari) [बाहत्तर]; 'तेसत्तति' (tesattati), 'तिसत्तति' (tisattati), 'तेसत्तरि' (tesattari), 'तिसत्तरि' (tisattari) [त्र्याहत्तर]; 'द्व्यासीति' (dvyāsīti), 'द्वासीति' (dvāsīti), 'द्वीयासीति' (dvīyāsīti) - येथे 'य' चा आगम होतो; 'त्यासीति' (tyāsīti), 'तियासीति' (tiyāsīti) [त्र्याऐंशी]; 'द्वेनवुति' (dvenavuti), 'द्वानवुति' (dvānavuti), 'द्विनवुति' (dvinavuti) [ब्याण्णव]; 'तेनवुति' (tenavuti), 'तिनवुति' (tinavuti) [त्र्याण्णव]. 'सतं' (sataṃ - शंभर) हा नपुंसकलिंगी एकवचनान्त शब्द आहे. याचप्रमाणे 'सहस्स' (sahassa - हजार) इत्यादी शब्द आहेत. 'कोटि' (koṭi), 'पकोटि' (pakoṭi), 'कोटिप्पकोटि' (koṭippakoṭi), 'अक्खोहिणी' (akkhohiṇī) हे स्त्रीलिंगी एकवचनान्त शब्द आहेत. परंतु, जेव्हा समूहाचा भेद (वर्गभेद) दर्शवायचा असतो, तेव्हा सर्वच संख्यावाचक शब्दांचे बहुवचन देखील होते - जसे की 'द्वे वीसतियो' (दोन विसावे), 'तिस्सो वीसतियो' (तीन विसावे) इत्यादी. दहा वेळा दहा म्हणजे 'सत' (शंभर), दहा शंभर म्हणजे 'सहस्स' (हजार), दहा हजार म्हणजे 'नहुत' (nahuta), दहा नहुत म्हणजे 'लक्ख' (lakkha - लाख), याला 'सतसहस्स' (satasahassa) असेही म्हणतात. शंभर लाख म्हणजे 'कोटि' (कोटी), शंभर लाख कोटी म्हणजे 'पकोटि', शंभर लाख पकोटि म्हणजे 'कोटिप्पकोटि'. याचप्रमाणे 'नहुत', 'निन्नहुत', 'अक्खोहिणी', 'बिन्दु', 'अब्बुद', 'निरब्बुद', 'अहह' (ahakahaṃ), 'अबब', 'अटट', 'सोगन्धिक', 'उप्पल', 'कुमुद', 'पुण्डरीक', 'पदुम', 'कथान', 'महाकथान' आणि 'असंखेय्य' (asaṅkheyya) हे शब्द अनुक्रमे मागील संख्येला शंभर लाखांनी (दहा दशलक्षांनी किंवा कोटीने) गुणून येणारे समजावेत. อถาสงฺขฺยมุจฺจเต. आता 'असंख्य' (अव्यय/अव्ययीभाव) याविषयी सांगितले जात आहे. ตํ ทุวิธํ ปาทิจาทิเภเทน-ตตฺถ-ป ปรา อป สํ อนุ อว โอ นิ ทุ วิ อธิ อปิ อติ สุ อุ อภิ ปติ ปริ อุป อา-อิเม วีสติ ปาทโย-จาทโย ปน-จ วา ห อห เอว เอวมิจฺจาทโย-อิเม ทฺเวปิ ลิงฺคสงฺขฺยารหิตา-เอเตหิ ปน ยถาสมฺภวํ วิหิตานํ วิภตฺตินํ. ते 'पादि' (प्र-आदी उपसर्ग) आणि 'चादि' (च-आदी निपात) अशा दोन प्रकारांचे आहे. त्यामध्ये - 'प' (pa), 'परा' (parā), 'अप' (apa), 'सं' (saṃ), 'अनु' (anu), 'अव' (ava), 'ओ' (o), 'नि' (ni), 'दु' (du), 'वि' (vi), 'अधि' (adhi), 'अपि' (api), 'अति' (ati), 'सु' (su), 'उ' (u), 'अभि' (abhi), 'पति' (pati), 'परि' (pari), 'उप' (upa), 'आ' (ā) - हे वीस 'पादि' (उपसर्ग) आहेत. आणि 'चादि' म्हणजे - 'च' (ca), 'वा' (vā), 'ह' (ha), 'अह' (aha), 'एव' (eva) इत्यादी. हे दोन्ही (उपसर्ग आणि निपात) लिंग आणि संख्या विरहित असतात. यांच्यापुढे यथासंभव विहित केलेल्या विभक्ती प्रत्ययांचा... อสงฺขฺเยหิ สพฺพาสํ. 'असंख्य' (अव्ययांच्या) पुढे असणाऱ्या सर्व (विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होतो). อวิชฺชมานสงฺขฺโยหิ ปราสํ สพฺพาสํ วิภตฺตีนํ โลโป โหตีติ โลโป จ. संख्या नसलेल्या (म्हणजेच अव्ययांच्या) पुढे असणाऱ्या सर्व विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होतो, म्हणून त्यांचा लोप होतो. วิภตฺติยา ตโต เภโท สลิงฺคานํ ภเว ตถา ตุมฺหาทินํ ตฺวลิงฺเคสุ เนวตฺถิ ปาทิวาทินํ. ज्याप्रमाणे सलिंगी (लिंग असणाऱ्या) शब्दांच्या बाबतीत विभक्तीमुळे भेद होतो, तसेच 'तुम्ह' (तू) इत्यादी लिंगरहित शब्दांच्या बाबतीतही होतो, तसा भेद 'पादि' (उपसर्ग) आणि 'चादि' (निपात) यांच्या बाबतीत मुळीच होत नाही. วุตตานิ สฺยาทฺยนฺตานิ. 'सि' इत्यादी प्रत्ययांनी अंत होणारे (सुबन्त) शब्द सांगितले गेले आहेत. อเถกตฺถมุจฺจเต-อุปสทฺทา ปฐเมกวจนํ สิ-ตสฺส ‘‘อสงฺขฺเยหิ สพฺพาสํ’’ติ โลโป-กุมฺภสทฺทา ฉฏฺฐเยกวจนํ ส-อุป กุม อส อิติ ฐิเต ‘‘อวิคฺคโภ นิจฺจสมาโส ปทนฺตรวิคฺคโห เว’’ติ สมีปํ กุมฺภสฺเสติ ปทนฺตรจิคฺคเห-‘‘สฺยาทิ สฺยาทิเนกตฺถ’’นฺติ สพฺพตฺเถกตฺเถ วตฺตเต. आता 'एकत्थ' (समास/एकार्थीभाव) याविषयी सांगितले जात आहे - 'उप' या शब्दापुढे प्रथमेचे एकवचन 'सि' येते, त्याचा "असंख्येहि सब्बासं" या सूत्राने लोप होतो. 'कुम्भ' शब्दापुढे षष्ठीचे एकवचन 'स' येते. 'उप + कुम्भ + स' अशी स्थिती असताना, "अविग्गहो निच्चसमासो पदन्तरविग्गहो वा" या नियमाने 'समीपं कुम्भस्स' (घड्याच्या जवळ) असा दुसऱ्या पदाने विग्रह केला असता, "स्यादि स्यादिनेकत्थं" या सूत्राने सर्व अर्थांमध्ये एकार्थीभाव (समास) होतो. อสงฺขฺยํ วิภตฺติ สมฺปตฺติ สมิป สากลฺยาหาว ยถาปจฺฉา ยุคปทตฺเถ. 'असंख्य' (अव्यय) हे विभक्ती, संपत्ती, समीप (जवळ), साकल्य (पूर्णता), अभाव, यथा (योग्यता/अनतिक्रम), पच्छा (मागे) आणि युगपत् (एकाच वेळी) या अर्थांमध्ये वर्तमान असणाऱ्या सुबन्त पदासोबत एकार्थी (समास) होते. อสงฺขฺยํ สฺยาทฺยนฺตํ วิภตฺตฺยาทินมตฺเถวตฺตมานํ สฺยาทฺยนฺเตน สเหกตฺถมฺภวติ. विभक्ती इत्यादी अर्थांमध्ये वर्तमान असणारे 'असंख्य' (अव्यय) सुबन्त पद, दुसऱ्या सुबन्त पदासोबत एकार्थी (समास) होते. เอกตฺถตายํ. या एकार्थीभावात (समास झाल्यावर). อียาทิณทิสมาเสหิ เอกตฺถิภาโว เอกตฺถตา-ตสฺมึ สฺยาทิ โลโป โหติ-‘‘ตํ นปุํสก’’มิตินปุํสกลิงฺคํ-ตโต สฺยาทิ-‘‘ปุพฺพสฺมามาทิโต’’ติ โลเป สมฺปตฺเต. 'ईय', 'ण', 'दि' इत्यादी प्रत्ययांनी किंवा समासाने एक अर्थ होणे म्हणजेच 'एकार्थीभाव' होय. त्यामध्ये सुबन्त प्रत्ययांचा (स्यादि) लोप होतो. "तं नपुंसकं" या सूत्राने तो नपुंसकलिंगी होतो. त्यानंतर सुबन्त प्रत्यय आल्यावर, "पुब्बस्मामादितो" या सूत्राने लोप प्राप्त होतो. นาโต มปญฺจมิยา. अकारान्त नपुंसकलिंगी शब्दाच्या पुढे असणाऱ्या विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होत नाही (पंचमी विभक्ती सोडून), तर त्या प्रत्ययांचा 'अं' (am) असा आदेश होतो. อมาเทกตฺถา ปุพฺพํ ยเทกตฺถมการนฺตํ ตโต ปราสํ สพฺพาสํ วิภตฺตีนํ โลโป น โหติ อํตุ ภวตฺยปญฺจมิยา-อุปกุมฺภํ ติฏฺฐติ-กุมฺภสฺส สมีปํ ติฏฺฐตีติ อตฺโถ-อุปกุมฺภํ ปกสฺส. एकार्थीभावामध्ये (समासात) जे पूर्वपद अकारान्त असते, त्याच्यापुढे असणाऱ्या सर्व विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होत नाही (पंचमी विभक्ती सोडून), तर त्यांचा 'अं' (am) होतो - जसे की 'उपकुम्भं तिट्ठति' (घड्याच्या जवळ उभा राहतो) असा अर्थ आहे - 'कुम्भस्स समीपं तिट्ठति'. 'उपकुम्भं पकस्स' (पक्व घड्याच्या जवळ). วา ตติยาสตฺตมีนํ. तृतीया आणि सप्तमी विभक्तीच्या प्रत्ययांचा विकल्पेकरून 'अं' होतो. อมาเทกตฺถา ปุพฺพํ ยเทกตฺถมการนฺตํ ตโต ปราสํ ตติยา สตฺตมีนํ อํ โหติ วา-อุปกุมฺภํ กตํ, อุปกุมฺเภน วา, อุป กุมฺภํ เทหิ-ปญฺจมิยํ อมภาวา-อุปกุมฺภา อเปหิ-อุปกุมฺภมายตฺตํ-อุปกุมฺภํ นีเธหิ, อุปกุมฺเภ วา-เอวมุปนครมิจฺจาทิ-สมีปํ อคฺคิโนอุปคฺคิ-เอตฺถปน-‘‘ปุพฺพสฺมามาทิโต’’ติ สพฺพสฺยาทิ โลโปว-เอวมุปคุรุ-เวติ สพฺพตฺถ วตฺตเต. एकार्थीभावामध्ये (समासात) जे पूर्वपद अकारान्त असते, त्याच्यापुढे असणाऱ्या तृतीया आणि सप्तमी विभक्ती प्रत्ययांचा विकल्पेकरून 'अं' होतो - जसे की 'उपकुम्भं कतं' (upakumbhaṃ kataṃ) किंवा 'उपकुम्भेण' (upakumbhena) [घड्याच्या जवळ केलेले]; 'उपकुम्भं देहि' (घड्याच्या जवळ दे). पंचमी विभक्तीमध्ये 'अं' होत नसल्यामुळे - 'उपकुम्भा अपेहि' (upakumbhā apehi - घड्याच्या जवळून दूर जा). 'उपकुम्भमायत्तं' (upakumbhamāyattaṃ - घड्याच्या जवळील गोष्टीवर अवलंबून). 'उपकुम्भं निधेहि' (upakumbhaṃ nīdhehi) किंवा 'उपकुम्भे' (upakumbhe) [घड्याच्या जवळ ठेव]. याचप्रमाणे 'उपनगरं' (upanagaraṃ - नगराच्या जवळ) इत्यादी रूपे होतात. अग्नीच्या जवळ म्हणजे 'उपग्गि' (upaggi) - येथे मात्र "पुब्बस्मामादितो" या सूत्राने सर्व सुबन्त प्रत्ययांचा लोपच होतो. याचप्रमाणे 'उपगुरु' (upaguru - गुरूंच्या जवळ). 'वा' (विकल्पेकरून) हा नियम सर्वत्र लागू होतो. อมาทิ. 'अं' (am) इत्यादी आदेश होतात. อมาทิ สฺยาทฺยนฺตํ สฺยาทฺยนฺเตน สห พหุลเมกตฺถํ โหติ-คามํ คโต คามคโต, มุหุตฺตํ สุขํ มุหุตฺตสุขํ-วุตฺติเยโวปปทส มาเส-กุมฺภกาโร, เอตฺถ พหุลาธิการา อสฺยาทฺยนฺเตนาปิ สมาโส. นฺตมานกฺตวนฺตูหิ วากฺย-ธมฺมํ สุณนฺโต, ธมฺมํ สุณมาโน, โอทนํ ภุตฺตวา, รญฺคฺญา ภโต ราชหโต, อสินา ชินฺโน อสิจฺฉินฺโน, ปิตราสทิโสปิตุสทิโส, ทธินา อุปสิตฺตํ โภชนํ ทธิโภชนํ, คุเฬน มิสฺโส โอทโน คุโฬทโน-อิห ปน วุตฺติ ปเทเนโวปสิตฺตาทิ กฺริยายาขฺยาปนโต น ตตฺถายุตฺตตฺถตา-กฺวจิวุตฺติเยว-อุรโค-กฺวจิ วากฺยเมว-เอรสุนา ฉินฺนวา, ทสฺสเนน ปหาตพฺพา, พฺราหฺมณสฺส เทยฺยํพฺราหฺมณเทยฺยํยุปาย ทารุ ยุปทารุ, อิธ นโหติ สงฺฆสฺส ทาตพฺพํ-คามา นิคฺคโต คาม นิคฺคโต, กฺวจิวุตฺติ เยว-กมฺมชํ-อิธ น โหติ รุกฺขา ปติโต-รญฺโญ ปุริโส ราชปุริโส-พหุลาธิการา นฺตมานนิทฺธาริยปุรณ ภาวติ ภาวติ ตฺตตฺเถหิ นโหติ-มมานุกุพฺพํ, มมานุกุรุกมาโน, คุนฺนํกณฺหา สมฺปนฺนขีรตมา, สิสฺสานํ ปญฺจโม, ปฏสฺส สุกฺกตา-กฺวจิ โหเตว-วตฺตมานสามีปฺยํ, ผลานํ ติตฺโต, ผลานํ สุหิโต, พฺราหฺมณสฺส กณฺหา ทนฺตา อิจฺจตฺร ทนฺตาเปกฺขา ฉฏฺฐิติ กณฺเหนสมฺพนฺธาภาวา น สมาโส-อญฺญมญฺญสมฺพนฺธานํหิ สมาโสยทา ตุ กณฺหา จ เต ทนฺตา เจติ วิเสสนสฺมาโส ตทา ฉฏฺฐิ กณฺหทนฺตาเปกฺกาติ พฺราหฺมณกณฺหทนฺตาติ โหเตว-รญฺโญ มาคธสฺส ธนมิจฺจตฺร รญฺโญติ ฉฏฺฐิ ธนมเปกฺขเต น มาคธํ ราชา เอว มาคธสทเทน วุจฺจเตติ เภทาภาวา สมฺพนฺธาภาโวติ ตุลฺยาธิกรเณน มาคเธน สห ราชา น สมสฺยเต-รญฺโญ อสฺโส จ ปุริโส จาติ เอตฺถ รญฺโญ อสฺโส ปุริโสติ จ ปจฺเจกํ สมฺพนฺธโต สาเปกฺกตาย น สมาโส-อสฺโส จ ปุริโส จาติ จตฺถสมาเส กเต ตุ ราชสฺสปุริสาติ โหเตวญฺญานเปกฺขตฺตา-รญฺโญ ครุปุตฺโตติ เอตฺถ ปน ราชาเปกฺขิโนปิ ครุโน ปุตฺเตน สห สมาโส คมกตฺตา-คมกตฺตมฺปิหิ สมาสสฺส นิพนฺธนํ-ทาเน โสณฺโฑ ทานโสณฺโฑ-กฺวจิ วุตฺติเยว-ปพฺพตฏฺโฐ-กฺวจี สมาเสปิ วิภตฺยโลโป-ชเน สุโต. 'अम्' इत्यादी विभक्तीप्रत्ययान्त (स्याद्यन्त) नामपद दुसऱ्या विभक्तीप्रत्ययान्त नामपदासोबत बहुधा एकार्थी (समासयुक्त) होते - गामं गतो = गामगतो (गावाला गेलेला), मुहुत्तं सुखं = मुहुत्तसुखं (क्षणभराचे सुख). उपपद समासामध्ये केवळ वृत्तीच (समासयुक्त रूपच) होते - कुम्भकारो (कुंभार). येथे 'बहुलाधिकार' असल्यामुळे विभक्तीप्रत्ययरहित शब्दासोबतही समास होतो. 'न्त', 'मान' आणि 'क्तवन्तु' प्रत्ययांच्या बाबतीत केवळ वाक्यच (विग्रहच) होते - धम्मं सुणन्तो (धर्म ऐकणारा), धम्मं सुणमानो (धर्म ऐकणारा), ओदनं भुत्तवा (भात खाल्लेला). 'रञ्ञा हतो = राजहतो' (राजाने मारलेला), 'असिना छिन्नो = असिच्छिन्नो' (तलवारीने कापलेला), 'पितरा सदिसो = पितुसदिसो' (वडिलांसारखा), 'दधिना उपसित्तं भोजनं = dadi भोजनं' (दह्याने माखलेले अन्न), 'गुळेन मिस्सो ओदनो = गुळोदनो' (गुळाने मिश्रित भात). येथे वृत्ती पदानेच 'उपसिक्त' इत्यादी क्रिया स्पष्ट होत असल्याने तेथे अयुक्तार्थता (असंगती) नाही. काही ठिकाणी केवळ वृत्तीच होते - उरगो (साप). काही ठिकाणी केवळ वाक्यच (विग्रहच) होते - एरसुना छिन्नवा, दस्सनेन पहातब्बा. 'ब्राह्मणस्स देय्यं = ब्राह्मणदेय्यं' (ब्राह्मणाला देण्यायोग्य), 'यूपाय दारु = यूपदारु' (यज्ञाच्या खांबासाठी लाकूड). येथे समास होत नाही - 'सङ्घस्स दातब्बं' (संघाला देण्यायोग्य). 'गामा निग्गतो = गामनिग्गतो' (गावातून बाहेर पडलेला). काही ठिकाणी केवळ वृत्तीच होते - कम्मजं (कर्मापासून उत्पन्न). येथे समास होत नाही - 'रुक्खा पतितो' (झाडावरून पडलेला). 'रञ्ञो पुरिसो = राजपुरिसो' (राजाचा माणूस). बहुलाधिकारामुळे 'न्त', 'मान', निर्धारण, पूरण, भाव आणि 'तत्त' प्रत्ययांच्या अर्थांमध्ये समास होत नाही - ममानुकुब्बं, ममानुकुरुमानो, गुन्नं कण्हा सम्पन्नखीरतमा (गाईंमध्ये काळी गाय सर्वात जास्त दूध देणारी), सिस्सानं पञ्चमो (शिष्यांमध्ये पाचवा), पटस्स सुक्कता (वस्त्राचा पांढरेपणा). काही ठिकाणी समास होतोच - वत्तमानसमीप्यं, फलानं तित्तो (फळांनी तृप्त), फलानं सुहितो (फळांनी तृप्त). 'ब्राह्मणस्स कण्हा दन्ता' (ब्राह्मणाचे काळे दात) येथे 'दन्त' शब्दाच्या अपेक्षेने षष्ठी विभक्ती आहे, 'कण्ह' शब्दाशी संबंध नसल्यामुळे समास होत नाही; कारण परस्परांशी संबंध असलेल्या शब्दांचाच समास होतो. परंतु जेव्हा 'कण्हा च ते दन्ता च' असा विशेषण समास होतो, तेव्हा षष्ठी 'कण्हदन्त' शब्दाच्या अपेक्षेने 'ब्राह्मणकण्हदन्ता' असा समास होतोच. 'रञ्ञो मागधस्स धनं' (मगध देशाच्या राजाचे धन) येथे 'रञ्ञो' ही षष्ठी 'धना'ची अपेक्षा करते, 'मागध' शब्दाची नाही. राजाच 'मागध' या शब्दाने ओळखला जातो, त्यामुळे त्यांच्यात भेद नसल्याने संबंधही नाही; म्हणून समान अधिकरण असलेल्या 'मागध' शब्दासोबत 'राजा'चा समास होत नाही. 'रञ्ञो अस्सो च पुरिसो च' (राजाचा घोडा आणि माणूस) येथे 'रञ्ञो' हा शब्द 'अस्सो' आणि 'पुरिसो' या प्रत्येकाशी स्वतंत्रपणे संबंधित असल्याने सापेक्षतेमुळे समास होत नाही. परंतु 'अस्सो च पुरिसो च' असा च-अर्थी (द्वंद्व) समास केल्यावर 'राजस्सपुरिसा' असा समास होतो, कारण तेथे अन्य शब्दाची अपेक्षा नसते. 'रञ्ञो गरुपुत्तो' (राजाच्या गुरूचा मुलगा) येथे राजाची अपेक्षा करणाऱ्या 'गरु' (गुरू) शब्दाचा 'पुत्त' (मुलगा) शब्दासोबत समास होतो, कारण तो गमक (बोधक) आहे. गमकत्व हे देखील समासाचे कारण आहे. 'दाने सोण्डो = दानसोण्डो' (दानात पटाईत). काही ठिकाणी केवळ वृत्तीच होते - पब्बतट्ठो (पर्वतावर राहणारा). काही समासांमध्ये विभक्तीचा लोप होत नाही (अलुक समास) - जने सुतो (लोकांमध्ये प्रसिद्ध). วิเสสนเมกตฺเถน. विशेषण हे विशेष्यासोबत (समान अधिकरण असलेल्या पदासोबत) एकार्थी (समासयुक्त) होते. วิเสสนํ สฺยาทฺยนฺตํ วเสสฺเสน สฺยาทฺยนฺเตน สมานาธิการเณน สเหกตฺถํ โหติ-นีลญฺจ ตํ อุปฺปลํ เจติ นิลุปฺปลํ-วากฺเย ตุลฺยาธิกรณภาวปฺปกาสนตฺถํ จตสทฺทปฺปโยโค-วุตฺติยนฺตุ สมาเสเนว ตปฺปกาสนโต น ตปฺปโยโค-เอว มญฺญตฺราปิ วุตฺตฏฺฐานมปฺปโยโค-พหุลาธิการา กฺวจิ อุปมานภุตํ วิเสสนมฺปรํ ภวติ-สีโห’จ สีโห-มุนิ จ โส สีโห จาติ มุนิสีโห-มุนิสทฺโทเยว วา วิเสสนํ-ตถาหิ-สีโหติ วุตฺเต อุปจริตานุปจริตสีหานํ สามญฺญปฺปตีติยํ มุนิสทฺโท วิเสเสติ-สีลเมว ธนํ สีลธนํ-ธมฺโมติ สมฺมโต ธมฺมสมฺมโต-มหนฺติ จ สา สทฺธา จาติ สมาเส กเต-‘‘อิตฺถิยมฺภาสิตปุมิตฺถิ ปุเมเวกตฺถ’’ต ปุมฺภาวา งีปฺปจฺจยาภาโว-‘‘ฏนฺตนฺตุนนฺติ’’นฺตสฺส เฏ-‘‘พฺยญฺชเน ทีฆรสฺสา’’ติ ทิเฆ-มหาสทฺธา. विभक्तीप्रत्ययान्त विशेषण हे समान अधिकरण असलेल्या विभक्तीप्रत्ययान्त विशेष्यासोबत एकार्थी (समासयुक्त) होते - नीलञ्च तं उप्पलं चेति = नीलउप्पलं (निळे कमळ). वाक्यात (विग्रहात) समान अधिकरण भाव प्रकट करण्यासाठी 'च' आणि 'तद्' शब्दांचा प्रयोग केला जातो. परंतु वृत्तीमध्ये (समासात) समासानेच तो भाव प्रकट होत असल्याने त्यांचा प्रयोग केला जात नाही. इतर ठिकाणीही उक्त (आधीच सांगितलेल्या) अर्थाचा पुन्हा प्रयोग केला जात नाही. बहुलाधिकारामुळे काही ठिकाणी उपमानभूत विशेषण नंतर येते - 'मुनि च सो सीहो चाति = मुनिसीहो' (मुनींमध्ये सिंहासारखा). किंवा 'मुनि' शब्दच विशेषण आहे. कारण 'सीहो' असे म्हटले असता लाक्षणिक व अ-लाक्षणिक सिंहांचे सामान्य ज्ञान होते, त्यात 'मुनि' शब्द विशेष करतो. 'सीलमेव धनं = सीलधनं' (शील हेच धन), 'धम्मोति सम्मतो = धम्मसम्मतो' (धर्म म्हणून संमत). 'महन्ती च सा सद्धा चाति' असा समास केल्यावर 'इत्थियम्भासितपुमित्थि पुमेवेकत्थ' या सूत्राने पुल्लिंगी भाव झाल्यामुळे 'ङी' प्रत्ययाचा अभाव होतो, 'टन्तन्तुनन्ति' सूत्राने 'न्त' चा 'ट' होतो आणि 'ब्यञ्जने दीघरस्सा' सूत्राने दीर्घ होऊन 'महासद्धा' (मोठी श्रद्धा) असे रूप बनते. นญ. 'नञ्' (नकारार्थी अव्यय) चा समास होतो. นญิจฺเจตํ สฺยาทฺยนฺตํ สฺยาทฺยนฺเตน สเหกตฺถํ โหติ-ญกาโร‘‘ฏนญฺญสฺสา’’ติ วิเสสนตฺโถ-ปามนปุตฺตาทีสุ มา โหตูติ. 'नञ्' हे विभक्तीप्रत्ययान्त पद दुसऱ्या विभक्तीप्रत्ययान्त पदासोबत एकार्थी (समासयुक्त) होते. 'नञ्' मधील 'ञ' कार हा 'टनञ्ञस्स' या सूत्रातील विशेषणासाठी आहे, जेणेकरून 'पामनपुत्त' इत्यादी शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये. ฏนญฺญสฺส. नञ् व्यतिरिक्त इतर शब्दांच्या बाबतीत उत्तरपद असताना 'नञ्' च्या जागी 'अ' (ट) होतो. อุตฺตรปเท นญฺสทฺทสฺส ฏ โหติ-น พฺราหฺมโณ อพฺราหฺมโณ, นญยํ ปริยุทาสวุตฺติ ปสชฺชปฺปฏิเสธวุตฺติ จ-ปฐมปกฺเข-พฺราหฺมณ อญฺโญ พฺราหฺมณนฺตานชฺฌาสิโน ขตฺติยาทิ พฺราหฺมณ สทิโสเยว อพฺราหฺมเณติ วุตฺเต ปติยเต-อิตรสฺมึ ปน ปกฺเข เกนจิ สํสยนิมิตฺเตน ขตฺติยาโท พฺราหฺมเณติ ปวนฺตสฺส มิจฺฉาญาณนิวุตฺติ กรียติ-พฺราหฺมเณ ยํ’น ภวติ พฺราหฺมเณติ พฺราหฺมณนฺตชฺฌาสิโต น ภวตีติ อตฺโถ-ตตฺถ วินา สทิสตฺตํ มิจฺฉาญาณสมฺภวา ปโยคสามตฺถิยา จ สทิสปฏิปฺปตฺติ ตคฺคตาจ ลิงฺคสงฺขฺยา ภวนฺติ-อโตเยโวจฺจเต นญิวยุตฺต มญฺญสทิสาธิกรเณ ตถา หิ อตฺถสมฺปจฺจโยติ-ตเทวํ ปกฺขญฺจเยว ปุพฺพปทตฺถปฺปธานตฺตํ-เอวมนสฺโส-อิหตุ. उत्तरपद असताना 'नञ्' शब्दाच्या जागी 'अ' (ट) होतो - न ब्राह्मणो = अब्राह्मणो (जो ब्राह्मण नाही तो). हा 'नञ्' पर्युदास वृत्ती (भेद दर्शवणारा) आणि प्रसज्यप्रतिषेध वृत्ती (पूर्ण नकार दर्शवणारा) अशा दोन प्रकारचा असतो. पहिल्या पक्षात (पर्युदासमध्ये) - ब्राह्मणापेक्षा भिन्न, ब्राह्मणेतर विचार असलेला, क्षत्रिय इत्यादी ब्राह्मणासारखाच असलेला पुरुष 'अब्राह्मण' म्हटल्यावर समजला जातो. दुसऱ्या पक्षात (प्रसज्यप्रतिषेधमध्ये) - एखाद्या संशयामुळे क्षत्रिय इत्यादींना 'ब्राह्मण' म्हणणाऱ्याच्या मिथ्या ज्ञानाचे निवारण केले जाते. ब्राह्मणामध्ये जे नसते ते 'अब्राह्मण' होय, म्हणजेच ब्राह्मणाचा स्वभाव नसलेला, असा अर्थ होतो. तेथे सादृश्याशिवाय मिथ्या ज्ञानाची शक्यता नसल्यामुळे आणि प्रयोगाच्या सामर्थ्यामुळे सादृश्य प्रतीती आणि त्यानुसार लिंग व वचन प्राप्त होतात. म्हणूनच म्हटले आहे की, 'नञ्' युक्त शब्द हा दुसऱ्या सदृश अधिकरणाचा बोध करून देतो, कारण तसा अर्थ प्रतीत होतो. अशा प्रकारे या पक्षात पूर्वपदाच्या अर्थाची प्रधानता असते. याचप्रमाणे 'अनस्सो' (जो घोडा नाही तो). येथे मात्र... อน สเร. स्वर पुढे असताना 'अन' होतो. สราโท อุตฺตรปเท นญฺสทฺทสฺส อน โหตีติ นสฺส อน. स्वरादी उत्तरपद पुढे असताना 'नञ्' शब्दाच्या जागी 'अन' होतो, म्हणजेच 'न' चा 'अन' होतो. กุปาทโย นิจฺจมสฺยาทิวิธิมฺหิ. 'कु' आणि 'प्र' इत्यादी उपसर्ग विभक्तीप्रत्ययांच्या विधीव्यतिरिक्त इतर ठिकाणी नित्य एकार्थी (समासयुक्त) होतात. กุสทฺโท ปาทโย จ สฺยาทฺยนฺเตน สเหกตฺถา โหนฺติ นิจฺจํ สฺยาทิวิธิวิสยโต’ญฺญตฺถ-กุจฺฉิโต พฺราหฺมโณ กุพฺราหฺมโณ-เอวํกุปุริโส-‘‘ปุริเส วา’’ติ ปกฺเข กาเทเส-กาปุริโส-อีสกํ อุณฺหํ กทุณฺหํ-‘‘สเร กท กุสฺสุตฺตรตฺเถ’’ติ กุสฺส กทาเทโส-อปฺปกํ ลวณํ กาลวณํ-‘‘กาปฺปตฺเถ’’ติ กาเทโส. 'कु' शब्द आणि 'प्र' इत्यादी उपसर्ग विभक्तीप्रत्ययान्त पदासोबत नित्य एकार्थी (समासयुक्त) होतात, विभक्ती विधीच्या विषयाव्यतिरिक्त इतर ठिकाणी - कुत्सित ब्राह्मण = कुब्राह्मणो (वाईट ब्राह्मण). याचप्रमाणे - कुपुरिसो (वाईट माणूस). 'पुरिसे वा' या सूत्राने पर्यायी पक्षात 'का' आदेश होऊन - कापुरिसो. थोडे गरम = कदुण्हं (कोमट). 'सरे कद कुस्सुत्तरत्थे' या सूत्राने 'कु' च्या जागी 'कद' आदेश होतो. थोडे मीठ = कालवणं. 'काप्पत्थे' या सूत्राने 'का' आदेश होतो. ปาทโย คตาทฺยตฺเถ ปฐมาย. 'प्र' इत्यादी उपसर्ग 'गेलेला' इत्यादी अर्थांमध्ये प्रथमा विभक्तीच्या पदासोबत समासयुक्त होतात. ปคโต อาจริโย ปาจริโย-เอวํ ปนฺเตวาสี-สุฏฺฐุกตํ สุกตํ-กิจฺเฉน กตํ ทุกฺกตํ. प्रगत (पुढे गेलेला) आचार्य = पाचरीयो (प्राचार्य). याचप्रमाणे - पन्तेवासी (जवळ राहणारा शिष्य). चांगल्या प्रकारे केलेले = सुकतं (सुकृत). कष्टाने केलेले = दुक्कतं (दुष्कृत). อจฺจาทโย กนฺตาทฺยตฺเถ ทุติยาย. 'अति' इत्यादी उपसर्ग 'ओलांडलेला' इत्यादी अर्थांमध्ये द्वितीया विभक्तीच्या पदासोबत समासयुक्त होतात. อติกฺกนฺโต มาลมติมาโล. माळेचे उल्लंघन केलेला = अतिमालो. ฆปสฺสานฺตสฺยาปฺปกานสฺส. अप्रधान असलेल्या 'घ' आणि 'प' प्रत्ययान्त स्त्रीलिंगी शब्दाच्या अन्त्य स्वराचा विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना र्हस्व होतो. อนฺตภุตสฺสาปฺปธานสฺส ฆปสฺส สฺยาทิสุ รสฺโส โหตีติ รสฺโส. अंतर्भूत असलेल्या अप्रधान 'घ' आणि 'प' प्रत्ययान्त शब्दाचा विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना र्हस्व होतो, म्हणून र्हस्व झाला. อววาทโย กุฏฺฐาทฺยตฺเถ ตติยาย. 'अव' इत्यादी उपसर्ग 'आक्रोषित' इत्यादी अर्थांमध्ये तृतीया विभक्तीच्या पदासोबत समासयुक्त होतात. อวกุฏฺฐํ โกกิลาย วนมวโกกิลํ-อวกุฏฺฐนฺติ ปริจฺจตฺตํ. कोकिळेने आक्रोषित केलेले (कूजन केलेले) वन = अवकोकिलं. 'अवकुट्ठं' म्हणजे परित्यक्त (सोडून दिलेले). ปริยาทโย คิลานาทฺยตฺเถ จตุตฺถิยา. 'परि' इत्यादी उपसर्ग 'ग्लान' (थकलेला) इत्यादी अर्थांमध्ये चतुर्थी विभक्तीच्या पदासोबत समासयुक्त होतात. ปริคิลาโน’ชฺเฌนาย ปริยชฺเฌโน. अध्ययनासाठी अत्यंत थकलेला = परियज्झेनो. นฺยาทโย กนฺตาทฺยตฺเถ ปญฺจมิยา. 'नि' इत्यादी उपसर्ग 'निघालेला' इत्यादी अर्थांमध्ये पंचमी विभक्तीच्या पदासोबत समासयुक्त होतात. นิกฺกนฺโต โกสมฺพิยา นิกฺโกสมฺพิ-ฆปาทินา รสฺโส. कोसंबीहून निघालेला = निक्कोसम्बि. 'घप' इत्यादी सूत्राने र्हस्व झाला. วา เนกญฺญตฺเถ. अनेक विभक्तीप्रत्ययान्त पदे दुसऱ्या पदाच्या अर्थामध्ये (अन्यपदार्थप्रधान समासात) विकल्पेकरून एकार्थी (समासयुक्त) होतात. อเนกํ สฺยาทฺยนฺต มญฺญสฺส ปทสฺสตฺเถ เอกตฺถํ วา โหติ-โอ ติณฺโณ หํโส ยํ โส โอติณฺณหํโส-(ชลาสโย). अनेक विभक्तीप्रत्ययान्त पदे दुसऱ्या पदाच्या अर्थामध्ये विकल्पेकरून एकार्थी होतात - ज्याच्यामध्ये हंस उतरले आहेत तो = ओतिण्णहंसो (जलाशय). ชิโต มาโร เยน โส ชิตมาโร-(ภควา)-ชินฺโนตรุ เยน โส ฉินฺนตรุ(ผรสุ)ทินฺโน สุงฺโก ยสฺสโส ทินฺนสุงฺโก(ราชา)-อปคตํ กาลกํ ยสฺมา โส อปคตกาลโก (ปโฏ)ปหุตํ ธนํ ยสฺส โส ปหุตธโน-(ปุริโส)-นตฺถิ สโม ยสฺส โส อสโม-นสฺส ฏาเทโส-จิตฺตา คาโว ยสฺสาติ สมาเส กเต. ज्यांनी माराला जिंकले आहे ते = जितमारो (भगवान). ज्याच्याद्वारे झाड कापले गेले आहे ते = छिन्नतरु (कुऱ्हाड). ज्याला कर (शुल्क) दिला गेला आहे तो = दिन्नसुङ्को (राजा). ज्याच्यावरील काळा डाग निघून गेला आहे ते = अपगतकालको (वस्त्र). ज्याच्याकडे पुष्कळ धन आहे तो = पहुतधनो (पुरुष). ज्यांच्यासारखा दुसरा कोणी नाही ते = असमो (अतुलनीय) - येथे 'न' च्या जागी 'अ' (ट) आदेश झाला आहे. 'चित्ता गावो यस्स' (ज्याच्या चितकबरी गाई आहेत तो) असा समास केल्यावर... โคสฺสุ 'गो' शब्दाच्या बाबतीत... อนฺตภุตสฺสาปฺปธานสฺส โคสฺส สฺยาทีสุ อุ โหติ-จิตฺตคุ-(โคมา)-มตฺตาเนเก คชา ยสฺมึ ตํ มตฺตาเนกคชํ-(วนํ) สห ปุตฺเตน วตฺตมาโน สปุตฺโต สห ปุตฺโต วา-‘‘สหสฺส โส’ญฺญตฺเถ‘‘ติ ปกฺเข สหสฺส โส-ธวา จ พทิรา จ ปลาสา เจติ วิคฺคเห. अंतर्भूत आणि अप्रधान असलेल्या 'गो' शब्दाच्या जागी 'स्यादि' प्रत्यय असताना 'उ' होतो - जसे की 'चित्तगु' (चित्रविचित्र गाई असलेला). ज्या वनात अनेक मत्त हत्ती आहेत ते 'मत्तानेकगजं' (वन). पुत्रासह वर्तमान असलेला तो 'सपुत्तो' किंवा 'सहपुत्तो'. 'सहस्स सोऽञ्ञत्थे' या सूत्राने पर्यायाने 'सह' च्या जागी 'स' होतो. 'धवा च बदिरा च पलासा च' (धवा, खदिर आणि पळस) असा विग्रह असताना। จตฺเถ. 'च' च्या अर्थामध्ये (द्वंद्व समासात)। อเนกํ สฺยาทฺยนฺตํ จตฺเถ เอกตฺถํ วา ภวติ-สมุจฺจโย’นฺวาวโย อิตรีตรโยโค สมาหาโร เจติ จตตาโร จตฺถา-ตตฺถ อิตรีตรโยเค สมาหาเร จ เอกตฺถีภาโว สมฺภวติ ปทานํ อญฺญมญฺญสมฺพนฺธโต-น สมุจฺจเย นาปฺยนฺวาจเย ตทภาวโต, จสทฺทนิวุตฺติ. अनेक 'स्यादि' प्रत्ययान्त शब्द 'च' च्या अर्थामध्ये एकरूप (समास) होतात. समुच्चय, अन्वाचय, इतरेतरयोग आणि समाहार हे 'च' चे चार अर्थ आहेत. त्यापैकी इतरेतरयोग आणि समाहार यामध्ये पदांच्या परस्पर संबंधामुळे 'एकत्थीभाव' (एकरूपता) संभवतो; समुच्चय आणि अन्वाचय यामध्ये तो संबंध नसल्यामुळे एकत्थीभाव होत नाही. येथे 'च' शब्दाची निवृत्ती (लोप) होते। สมาหาเร นปุํสกํ. समाहार समासात नपुंसकलिंग होते। จตฺเถ สมาหาเร ยเทกตฺถํ ตํ นปุํสกลิงฺคํ ภวติ-สมาหารสฺเสกตฺตา เอกวจนเมว-ธวขทิรปลาสํ-กตฺถ จิ น โหติ’สภาปริสายา’ติ ญาปกา-อาธิปจฺจปริวาโร-อิตรีตรโยเค อวยวปฺปธานตฺตา พหุวจนํ-ธวขทิรปลาสา-สมาเส ยํ ปุพฺพํ วูตฺตํ ตเทว ปุพฺพํ นิปตติ-กมาติกฺกเม ปโยชนาภาวา-กฺวจิ วิปลฺลาโสปิ โหติ พหุลาธิการโต-ทนฺตานํ ราชา ราชทนฺโต-ปาปา ภุมิ ยสฺมึ ปาปา จ สาภุมิ เจติ วา วิคฺคยฺห สมาเส สมาสนฺตฺเวจฺจาธิกาโร. 'च' च्या अर्थातील समाहार समासात जे एकरूप होते, ते नपुंसकलिंगी होते. समाहाराच्या एकत्वामुळे ते नेहमी एकवचनातच असते - जसे की 'धवखदिरपलासं' (धवा, खदिर आणि पळस यांचा समूह). काही ठिकाणी हे होत नाही, जसे 'सभापरिसाया' या ज्ञापकावरून सिद्ध होते - जसे की 'आधिपच्चपरिवारो'. इतरेतरयोगात अवयवांच्या (घटकांच्या) प्रधानतेमुळे बहुवचन होते - जसे की 'धवखदिरपलासा'. समासामध्ये जे आधी सांगितले आहे तेच आधी येते, कारण क्रमाचे उल्लंघन करण्याचे कोणतेही प्रयोजन नसते. 'बहुल' अधिकाराने काही ठिकाणी विपर्यास (क्रमबदल) देखील होतो - जसे की 'दन्तानं राजा' चा 'राजदन्तो' होतो. 'पापा भुमि यस्मिं' (ज्या ठिकाणी वाईट भूमी आहे) किंवा 'पापा च सा भुमि च' असा विग्रह करून समास केल्यावर 'समासान्त' प्रत्ययांचा अधिकार सुरू होतो। ปาปาทีหิ ภุมิยา. 'पाप' इत्यादी शब्दांनंतर आलेल्या 'भुमि' शब्दाला समासान्त 'अ' प्रत्यय लागतो। ปาปาทีหิ ปรา ยา ภุมิ ตสฺสา สมาสนฺโต อ โหติ-ปาปภุมํ, (ฐานํ)-อิตฺถิยมิจฺจาทินาอาปฺปจฺจโย นิวตฺตเน-ชาติยา อุป ลกฺขิตา ภุมิ ชาติภุมํ. 'पाप' इत्यादी शब्दांनंतर आलेल्या 'भुमि' शब्दाला समासान्त 'अ' प्रत्यय होतो - जसे की 'पापभूमं' (स्थान). 'इत्थियं...' इत्यादी सूत्राने स्त्रीलिंगी 'आ' प्रत्ययाची निवृत्ती (लोप) होते. जातीने उपलक्षित असलेली भूमी म्हणजे 'जातिभूमं'। สงฺขฺยาหิ संख्यावाचक शब्दांनंतर (असलेल्या 'भुमि' शब्दाला समासान्त 'अ' प्रत्यय होतो)। สงฺขฺยาหิ ปรา ยา ภุมิ ตสฺสา สมาสนฺโต อโหติ-ทฺเว ภุมิโย อสฺสาติ ทฺวีภุมํ-เอวํ ติภุมํ, จตุภุมํ-พหุลาธิการา กฺวจิ น เหกาติ-จตุภุมิ. संख्यावाचक शब्दांनंतर आलेल्या 'भुमि' शब्दाला समासान्त 'अ' प्रत्यय होतो - जसे की 'द्वे भूमियो अस्साति द्वीभूमं' (दोन मजली). याचप्रमाणे 'तिभूमं', 'चतुभूमं'. 'बहुल' अधिकाराने काही ठिकाणी हा प्रत्यय होत नाही - जसे की 'चतुभुमि'। ทีฆาโหวสฺเสกเทเสหิ จ รตฺยา. 'दीघ' (दीर्घ), 'अह' (दिवस), 'वस्स' (वर्ष) आणि दिवसाचे भाग (एकदेश) यांच्यानंतर आलेल्या 'रत्ति' (रात्र) शब्दाला समासान्त 'अ' प्रत्यय होतो। ทีฆาทีหิ อสงฺขฺเยหิ สงฺขฺยาหิ จ ปรสฺมา รตฺติสทฺทา อนญฺญาสงฺขฺยตฺเถสุ สมสิตา สมาสนฺโต อ โหติ-ทีฆา จ สา รตฺติ จาติ ทีฆรตฺตํ-อโห จ รตฺติ จ อโหรตฺตํ-อหสฺส อปาทิตฺตา ‘‘มนาทฺยปาทีนโม มเย จา’’ติ โอ-วสฺสาสุ รตฺติ วสฺสารตฺตํ-ปุพฺพา จ สา รตฺติ จาตี ปุพฺพรตฺตํ-เอวํ อปรรตฺตํ, อฑฺฒรตฺตํ-อติกฺกนฺโต รตฺตึ อติรตฺโต-ทฺวินฺนํ รตฺตีนํ สมาหาโร ทฺวิรตฺตํ-อนญฺญาสงฺขฺยตฺเถสุตฺเวว-ทิฆรตฺติ-(เหมนฺโต)-อุป รตฺติ-กฺวจิ โหเตว พหุลํ วิธานา-ยถารตฺตํ. 'दीघ' इत्यादी संख्यारहित आणि संख्यावाचक शब्दांनंतर आलेल्या 'रत्ति' शब्दाचा इतर संख्यावाचक अर्थांशिवाय इतर अर्थांत समास झाला असता, त्याला समासान्त 'अ' प्रत्यय होतो - जसे की 'दीघा च सा रत्ति चाति दीघरत्तं' (दीर्घ काळ/रात्र). 'अहो च रत्ति च अहोरात्तं' (दिवस आणि रात्र) - येथे 'अह' शब्दाच्या अपादित्वारूळे 'मनाद्यपादीनमो मये च' या सूत्राने 'ओ' होतो. 'वस्सासु रत्ति वस्सारत्तं' (वर्षाऋतूतील रात्र). 'पुब्बा च सा रत्ति चाती पुब्बरत्तं' (रात्रीचा पूर्वभाग). याचप्रमाणे 'अपररत्तं', 'अड्ढरत्तं'. 'अतिक्कन्तो रत्तिं अतिरत्तो' (रात्र ओलांडून गेलेला). 'द्विन्नं रत्तीनं समाहारो द्विरत्तं' (दोन रात्रींचा समूह). 'इतर संख्यावाचक अर्थांशिवाय' असे का म्हटले आहे? कारण 'दीघरत्ति' (हेमंत ऋतू), 'उपरत्ति' यामध्ये हा प्रत्यय होत नाही. 'बहुल' विधानामुळे काही ठिकाणी हा प्रत्यय होतोच - जसे की 'यथारत्तं'। โคตฺว จตฺเถ จาโลเป. 'च' च्या अर्थाशिवाय (द्वंद्व समासाशिवाय) आणि लोप नसताना 'गो' शब्दाला समासान्त 'अ' प्रत्यय होतो। โคสทฺทา อโลปจิสยา สมาสนฺโต อ โหติ น เจ จตฺเถ लोप न होण्याच्या विषयात 'गो' शब्दाला समासान्त 'अ' प्रत्यय होतो, परंतु 'च' च्या अर्थात (द्वंद्व समासात) होत नाही। สมาโส อญฺญปทตฺเถ อสงฺขฺยตฺเต จ-รญฺโญ โค ราชคโว-อวง-ปญฺจ คาโว ธนมสฺส ปญฺจควธโน-วิเสสนสมาสคพฺโภ อญฺญปทตฺถสมาโส-ทสนฺนํ คุนฺนํ สมาหาโรทสควํ-อโลเปติ กึ?-ปญฺจหิโคภิ กีโต ปญฺจคุ-วิเสสนสมาเส-‘‘เตน กตํ กีต’’มิจฺจาทินา ณิเก ‘‘โลโป’’ติ ตสฺส โลเป จ กเน ‘‘โคสฺสุติ อุกาโร-อวตฺเถติ กึ?-อชสฺสคาโว-อนญฺญาสงฺขฺยตฺเถยุตฺเวว-จิตฺตคุ, อุปคุ-วิสาลานิ อกฺขีนิ อสฺสาติ อญฺญปทตฺถสมาเส‘‘อกฺขิสฺมาญฺญตฺเถ’’ติ อกาเร-วิสาลกฺโข-ปธานตฺถตาวเสน จตุพฺพิธเมกตฺตํ ติวิธนฺติ เกจิ-วุตฺตหิ. हा समास अन्यपदार्थ (बहुव्रीहि) आणि संख्यारहित अर्थात होतो - जसे की 'रञ्ञो गो राजगवो' (राजाची गाय) - येथे 'अवङ्' आदेश होतो. 'पञ्च गावो धनमस्स पञ्चगवधनो' (ज्याचे धन पाच गाई आहेत तो) - हा विशेषण-समासगर्भ अन्यपदार्थ समास आहे. 'दसन्नं गुन्नं समाहारो दसगवं' (दहा गाईंचा समूह). 'अलोपे' (लोप नसताना) असे का म्हटले आहे? 'पञ्चहि गोभि कीतो पञ्चगु' (पाच गाईंनी खरेदी केलेला) - विशेषण समासात 'तेन कतं कीतं...' इत्यादी सूत्राने 'णिक' प्रत्यय होऊन 'लोपो' या सूत्राने त्याचा लोप होतो आणि 'गोस्सु' या सूत्राने 'उ' कार होतो. 'अचत्थे' ('च' च्या अर्थाशिवाय) असे का म्हटले आहे? 'अजस्सगावो' (शेळ्या आणि गाई). 'इतर संख्यारहित अर्थांतच' असे का म्हटले आहे? 'चित्तगु', 'उपगु'. 'विसालानि अक्खीनि अस्साति' (ज्याचे डोळे मोठे आहेत तो) या अन्यपदार्थ समासात 'अक्खिस्माञ्ञत्थे' या सूत्राने 'अ' कार होऊन 'विसालक्खो' असा शब्द बनतो. अर्थाच्या प्रधानतेनुसार समास चार प्रकारचे किंवा काही जणांच्या मते तीन प्रकारचे असतात, असे म्हटले आहे। ปุพฺพุตฺตโรภยญฺญตฺถมิจฺเจกตฺถํ จตุพฺพิธํ วิเสสฺสญฺโญภยตฺถตา ติธา วกฺขนฺติ ตํ ปเร. पूर्वपदप्रधान, उत्तरपदप्रधान, उभयपदप्रधान आणि अन्यपदप्रधान अशा प्रकारे एकत्व (समास) चार प्रकारचे असते. इतर आचार्य विशेष्यप्रधान, अन्यपदप्रधान आणि उभयपदप्रधान असे तीन प्रकार सांगतात। เอกตฺถํ. एकत्व (समास)। อถ อิตฺถิปฺปจฺจยนฺตา นิทฺทิสียนฺเต. आता स्त्रीलिंगी प्रत्ययांचे निरूपण केले जात आहे। อิตฺถิยมตฺวา. स्त्रीलिंगी अर्थामध्ये अ-कारान्त शब्दाला... อิตฺถิยํ วตฺตมานโต อการนฺตโต นามสฺมา อาปฺปจฺจโย โหติ-เทวทตฺตา, อชา, โกกิลา, อิจฺจาทิ. स्त्रीलिंगी अर्थ व्यक्त करताना अ-कारान्त नामाला 'आ' प्रत्यय लागतो - जसे की 'देवदत्ता', 'अजा' (शेळी), 'कोकिला' (कोकिळा) इत्यादी। นทาทิโต งี. 'नदी' इत्यादी शब्दांनंतर 'ङी' प्रत्यय होतो। อากติคเณ’ยํ-นทาทีหิ อิตฺถิยํ งีปฺปจฺจโย โหติ งกาโร ‘‘นฺตนฺตุนํ งิมฺหิ โต เว’’ติ สงฺเกตตฺโถ-นที, มหี, กุมารี, ตรุณิ, วารุณิ, โคตมี, คจฺฉนฺติ-‘‘นฺตนฺตุนํ งิมฺหิ โต เว’’ติ วา ตกาเร-คจฺฉตี-คจฺฉตี-เอวํ คุณวนฺติ, คุณวตี-‘‘โคโตวา‘‘ติ นทาทิสุ ปาฐา วา งีมฺหิ ‘‘โคสฺสาวง’’ติ โคสทฺทสฺส อาวง-คาวี, โค. हा एक आकृतिगण आहे. 'नदी' इत्यादी शब्दांनंतर स्त्रीलिंगात 'ङी' प्रत्यय होतो. 'ङ' कार हा 'न्तन्तुनं ङिम्हि तो वे' या सूत्राच्या संकेतासाठी आहे - जसे की 'नदी', 'मही', 'कुमारी', 'तरुणी', 'वारुणी', 'गोतमी', 'गच्छन्ती'. 'न्तन्तुनं ङिम्हि तो वे' या सूत्राने पर्यायाने 'त' कार होऊन - 'गच्छती' किंवा 'गच्छन्ती' असे रूप बनते. याचप्रमाणे 'गुणवन्ती', 'गुणवती'. 'गोतो वा' या सूत्राने 'नदी' इत्यादी गणात पाठा असल्यामुळे पर्यायाने 'ङी' प्रत्यय झाल्यावर 'गोस्सावण' या सूत्राने 'गो' शब्दाला 'आवण' आदेश होऊन 'गावी' किंवा 'गो' असे रूप बनते। ยกฺขาทิตฺวินี จ. 'यक्ख' (यक्ष) इत्यादी शब्दांनंतर स्त्रीलिंगात 'इनी' आणि 'ङी' प्रत्यय होतात। ยกฺขาทิโต อิตฺถียมินี โหติ งี จ-ยกฺขินี,ยกฺขี-นาคินี,นาคี. 'यक्ख' इत्यादी शब्दांनंतर स्त्रीलिंगात 'इनी' आणि 'ङी' प्रत्यय होतात - जसे की 'यक्खिनी', 'यक्खी', 'नागिनी', 'नागी'। ยุวณฺเณหิ นี. इ-कार आणि उ-कार अन्त असलेल्या शब्दांनंतर 'नी' प्रत्यय होतो। อิตฺถิยมิวณฺณุวณฺณนฺเตหิ นี โหติ พหุลํ-ปยตปาณินี, ทณฺฑินี, ภิกฺขุนี, ปรจิตฺตวิทุนี. स्त्रीलिंगात इ-कार आणि उ-कार अन्त असलेल्या शब्दांनंतर बहुधा 'नी' प्रत्यय होतो - जसे की 'पयतपाणिनी', 'दण्डिनी', 'भिक्खुनी' (भिक्षुणी), 'paracittavidunī' (परचित्तविदुनी)। ยุวา ตี. 'युव' शब्दाला स्त्रीलिंगात 'ती' प्रत्यय होतो। ยุวสทฺทโต ตี โหติตฺถิยํ-ยุวตี. 'युव' शब्दापासून स्त्रीलिंगात 'ती' प्रत्यय होतो - जसे की 'युवती'। อิตฺถิปฺปจฺจยนฺตา. स्त्रीलिंगी प्रत्यय समाप्त। อถ ณทโย วุจฺจนฺเต-รฆุสฺสาปจฺจมีติ วิคฺคเห. आता 'ण' इत्यादी (तद्धित) प्रत्यय सांगितले जात आहेत - 'रघुस्स अपच्चं' (रघूचा वंशज/पुत्र) असा विग्रह असताना। เณ วาปจฺเจ. अपत्य (वंशज) या अर्थामध्ये पर्यायाने 'ण' प्रत्यय होतो। ฉฏฺฐิยนฺตา นามสฺมา วา ณปฺปจฺจโย โหตปจฺเจ’ภิเธยฺเย-ณกาโร ณนุพนฺธการิยตฺโถ-เณเนว อปจฺจตฺถสฺส วุตฺตตฺตา อปจฺจสทฺทาปฺปโยโค-‘‘เอกตฺถตาย’’มิติ สฺยาทิ โลโป. षष्ठीविभक्त्यन्त नामापासून अपत्य (वंशज) हा अर्थ सांगायचा असताना पर्यायाने 'ण' प्रत्यय होतो. 'ण' कार हा 'ण' अनुबंधाच्या कार्यासाठी आहे. 'ण' प्रत्ययानेच अपत्य हा अर्थ व्यक्त होत असल्यामुळे 'अपच्च' (अपत्य) या शब्दाचा प्रयोग केला जात नाही. 'एकत्थतायं' या सूत्राने 'स्यादि' विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होतो। สรานมาทิสฺสายุวณฺณสฺสา เอ โอ ณนุพนฺเธ. 'ण' अनुबंध असताना स्वरांच्या आदिभूत असलेल्या 'अ', 'इ/ई' आणि 'उ/ऊ' यांच्या जागी अनुक्रमे 'आ', 'ए' आणि 'ओ' वृद्धी होते। สรานมาทิภุต เย อการิวณฺณวณฺณา เตสํ อา เอ โอ โหนฺติ ยถากฺกมํ ณนุพนฺเธติ อการสฺส อกาโร. स्वरांच्या सुरुवातीला असलेले जे 'अ', 'इ-वर्ण' (इ/ई) आणि 'उ-वर्ण' (उ/ऊ) आहेत, त्यांच्या जागी 'ण' अनुबंध असताना अनुक्रमे 'आ', 'ए' आणि 'ओ' होतात. येथे अकाराचा आकार होतो। อุวณฺณสฺสาวง สเร स्वर पुढे असताना 'उ-वर्णा'च्या जागी 'अवण्' (अव) आदेश होतो। สราโท ณนุพนฺเธ อุวณฺณสฺส อวงฺโหติ-ตโต สฺยาทิ-ราฆโวจฺจาทิ-อิตฺถิยํ-ราฆวจฺจาทิ-วา วิธานา รฆุสฺสาปจฺจํ รคฺวปจฺจนฺติปิ โหติ. स्वरादी 'ण' अनुबंध प्रत्यय पुढे असताना 'उ-वर्णा'च्या जागी 'अवण्' होतो - त्यानंतर 'स्यादि' प्रत्यय लागून 'राघवो' इत्यादी रूपे बनतात. स्त्रीलिंगात 'राघवी' इत्यादी रूपे बनतात. 'वा' (पर्यायाने) या विधानामुळे रघूचे अपत्य या अर्थी 'रग्वपच्चं' असेही रूप होते। ณทโย’ภิเธยฺยลิงฺคา อปจฺเจ ตฺวนปุํสกานปุํสเก สกตฺเถ ณฺโย ภิยฺโย ภาวสมูหชา; ตา ตุตฺถิยมสงกฺขฺยาเน ตฺวาทิ จิปฺปจฺจยนฺตกานปุํสเกน ลิงฺเคน สทฺทา’ทาหุ ปุเมเน วานิทฺทิสฺสตีติ ญตพฺพมวิเสเส ปนิจฺฉิเต. 'ण' इत्यादी प्रत्ययान्त शब्द विशेष्याच्या लिंगानुसार असतात, परंतु अपत्य अर्थात ते नपुंसकलिंगी नसतात. स्वार्थात (सकत्थ), भाव आणि समूह अर्थात उत्पन्न होणारा 'ण्य' प्रत्यय बहुधा नपुंसकलिंगात असतो. 'ता' प्रत्ययान्त शब्द स्त्रीलिंगात असतात, संख्या मोजण्याव्यतिरिक्त. 'त्व' आणि 'चि' प्रत्ययान्त शब्द नपुंसकलिंगी असतात. जेव्हा कोणताही विशेष भेद विवक्षित नसतो, तेव्हा शब्द नपुंसकलिंगात किंवा पुल्लिंगात निर्देशिले जातात असे समजावे। วา อปจฺเจติ วาธิกาโร. 'वा अपच्चे' हा अधिकार सूत्र आहे। วจฺฉาทิโต ณน ณยนา. 'वच्छ' (वत्स) इत्यादी शब्दांनंतर 'णन' आणि 'णयन' प्रत्यय होतात। วจฺฉาทิโต โคตฺตาทิภุตา คณโต จ ณน ณยนปฺปจฺจยา โหนฺติ ปปุตฺตาโท’ปจฺเจ-ปปุตฺตปฺปภุติ โคตฺตํ-วจฺฉสฺสา ปจฺจํ วจฺฉาโน, วจฺฉายโน-‘สํโยเค กฺวจี’ติ วุตฺตตฺตา น วุทฺธิ-กติสฺสาปจฺจํ กจฺจาโน, กจฺจายโน-ยการจวคฺคปุพฺพ รูปานิ-ยาคเม-กาติยาโน. गोत्रसंज्ञक असलेल्या 'वच्छ' इत्यादी गणातील शब्दांनंतर पणतू इत्यादी अपत्याच्या अर्थात 'णन' आणि 'णयन' प्रत्यय होतात. पणतूपासून पुढे 'गोत्र' मानले जाते. वच्छाचे अपत्य ते 'वच्छानो', 'वच्छायनो'. 'संयोगे क्वचि' या नियमामुळे येथे वृद्धी होत नाही. कतीचे अपत्य ते 'कच्चानो', 'कच्चायनो' - येथे य-कार आणि च-वर्गाचे पूर्वरूप होते. 'य' आगम झाल्यावर 'कातियानो' असे रूप बनते। กตฺติกาย อปจฺจมิจฺเจวมาทิ วิคฺคเห. 'कत्तिकाया अपच्चं' (कृत्तिकेचे अपत्य) इत्यादी विग्रह असताना। กตฺติกาวิธวาทีหิ เณยฺยเณรา. 'कत्तिका', 'विधवा' इत्यादी शब्दांपासून 'णेय्य' आणि 'णेर' प्रत्यय होतात. กตฺติกาทีหิ วิธวาทีหิ จ เณยฺยเณรา วา ยถากฺกมํ, โหนฺต ปจฺเจ-กตฺติเกยฺโย, เวณเตยฺโย-เวธเวโร, สามเณโร. 'कत्तिका' इत्यादी आणि 'विधवा' इत्यादी शब्दांपासून अनुक्रमे 'णेय्य' आणि 'णेर' प्रत्यय होतात; जसे की - कत्तिकेय्यो, वेणतेय्यो आणि वेधवेरो, सामणेरो. ณฺย ทิจฺจาทีหิ 'दिति' इत्यादी शब्दांपासून 'ण्य' प्रत्यय होतो. ทิติปฺปภุตีหิ ณฺโย วา โคตปจฺเจ. 'दिति' इत्यादी शब्दांपासून गोत्र-अपत्य अर्थात 'ण्य' प्रत्यय होतो. สํโยเค กฺวจิ. संयोग असताना काही वेळा (आदि स्वराची वृद्धी होते). สรานมาทิภุตา เย อยุวณฺณา เตสํ อา เอ โอ โหนฺติ กฺวจิ เทว สํโยควิสเย ณนุพนฺเธติ วิสยสตฺตมิยา นิทฺทิฏฺฐตฺตา สํโยคโต ปุพฺเพว เอกาโร. स्वरांमध्ये जे आदिभूत 'अ', 'इ-ई', 'उ-ऊ' वर्ण आहेत, त्यांच्या जागी काही वेळा संयोग विषयात 'ण' अनुबंध असताना अनुक्रमे 'आ', 'ए', 'ओ' होतात. विषयसप्तमीने निर्देश केल्यामुळे संयोगाच्या पूर्वीच 'ए' कार होतो. โลโป’วณฺณิวณฺณานํ. 'अ-वर्ण' (अ, आ) आणि 'इ-वर्ण' (इ, ई) यांचा लोप होतो. ยการาโท ปจฺจเย อวณฺณิวณฺณานํ โลโป โหติ-ทิติยา อปจฺจํ เทจฺโจ, กุณฺฑนิยา อปจฺจํ โกณฺฑญฺโญ-นสฺส เญ ปุพฺพรูปํ-ภาตุโน อปจฺจํ ภาตพฺโพ-เอตฺถ- यकारादी प्रत्यय असताना 'अ-वर्ण' आणि 'इ-वर्ण' यांचा लोप होतो; जसे - दितीचे अपत्य 'देच्चो', कुण्डनीचे अपत्य 'कोण्डञ्ञो' (येथे 'न' चे 'ञ' मध्ये पूर्वरूप होते), भावाचे अपत्य 'भातब्वो' - येथे... ยมฺหิ โคสฺส จ. 'य' प्रत्यय असताना 'गो' शब्दाच्या उ-काराला 'अवङ्' आदेश होतो. ยการาโท ปจฺจเย โคสฺสุวณฺณสฺส จ อวง โหตีติ อุการสฺส อวง. यकारादी प्रत्यय असताना 'गो' शब्दाच्या उ-वर्णाला 'अवङ्' होतो, म्हणजेच उ-काराचा 'अवङ्' होतो. อา ณิ. अकारान्त शब्दाहून 'णि' प्रत्यय होतो. อการนฺตโต ณิ วา โหตปจฺเจ พหุลํ-ทกฺกสฺสาปจฺจํ ทกฺขิ-เอวํ วารุณิ-พหุลํ วิธานา น สพฺเพหิ อการนฺเตหิ-เต เนว วสิฏฺฐสฺสาปจฺจํ วาสิฏฺโฐ ตฺเวว โหติ. अकारान्त शब्दापासून अपत्य अर्थात बहुधा 'णि' प्रत्यय होतो; जसे - दक्खचे अपत्य 'दक्खि', तसेच 'वारुणि'. 'बहुधा' विधान असल्यामुळे सर्व अकारान्त शब्दांपासून हा प्रत्यय होत नाही; म्हणूनच वसिष्ठाचे अपत्य 'वासिट्ठो' असेच होते. ราชโต ญฺโญ ชาติยํ 'राज' शब्दापासून जाती अर्थ गम्यमान असताना 'ञ्ञ' प्रत्यय होतो. ราชสทฺทโต ญฺโญ วา โหตปจฺเจ ชาติยํ คมฺมมานายํ-รญฺโญ อปจฺจํ ราชญฺโญ-ชาติยนฺติ กึ?-ราชาปจฺจํ. 'राज' शब्दापासून जाती अर्थ गम्यमान असताना अपत्य अर्थात 'ञ्ञ' प्रत्यय होतो; जसे - राजाचे अपत्य 'राजञ्ञो'. 'जाती अर्थात' असे का म्हटले? (कारण केवळ राजाचे अपत्य असेल तर) 'राजापच्चं' (असे होईल). ขตฺตา ยียา. 'खत्त' शब्दापासून 'य' आणि 'इय' प्रत्यय होतात. ขตฺตสทฺทา เยยา โหนฺตปจฺเจ ชาติยํ-ขตฺตสฺสาปจฺจํ ขตฺตฺโย, ขตฺติโย-ชาติยนฺตฺเวว-ขตฺติ. 'खत्त' शब्दापासून जाती अर्थात अपत्य अर्थी 'य' आणि 'इय' प्रत्यय होतात; जसे - खत्तचे अपत्य 'खत्त्यो', 'खत्तियो'. 'जाती अर्थातच' असे म्हटल्यामुळे (जाती अर्थ नसताना) 'खत्ति' असे होते. มนุโต สฺส สณ. 'मनु' शब्दापासून 'स्स' आणि 'सण' प्रत्यय होतात. มนุสทฺทโต ชาติยํ สฺส สณ โหตปจฺเจ-มกนุโน อปจฺจํ มนุสฺโส, มานุโส-ชาติยนฺตฺเวว-มานโว. 'मनु' शब्दापासून जाती अर्थात अपत्य अर्थी 'स्स' आणि 'सण' प्रत्यय होतात; जसे - मनूचे अपत्य 'मनुस्सो', 'मानुसो'. 'जाती अर्थातच' असे म्हटल्यामुळे (जाती अर्थ नसताना) 'मानवो' असे होते. ชนปทนามสฺมา ขตฺติยา รญฺเญ จ โณ. जनपदाच्या नावावरून क्षत्रिय आणि राजा या अर्थात 'ण' प्रत्यय होतो. ชนปทสฺส ยํ นาม, ตนฺนามสฺมา ขตฺติยาปจฺเจ รญฺเญ จ เณ โหติ-ปญฺจาลานํ อปจฺจํ ราชา วา ปญฺจาโล, มาคโธ-ชนปทนามสฺมาติ กึ?-ทาสรถิ-ขนฺติยาติ กึ? ปญฺจาลสฺสพฺราหฺมณสฺสาปจฺจํ ปญฺจาลิ. जनपदाचे जे नाव आहे, त्या नावापासून क्षत्रिय अपत्य आणि राजा या अर्थात 'ण' प्रत्यय होतो; जसे - पंचालांचे अपत्य किंवा राजा 'पञ्चालो', 'मागधो'. 'जनपदनामापासून' असे का म्हटले? (कारण जनपदनाम नसताना) 'दासरथि' (असे होते). 'क्षत्रिय' असे का म्हटले? पंचालातील ब्राह्मणाचे अपत्य 'पञ्चालि' (असे होते). ณฺย กุรุสิวีหิ. 'कुरु' आणि 'सिवि' शब्दांपासून 'ण्य' प्रत्यय होतो. กุรุสิวีหปจฺเจ รญฺเญ จ ณฺโย โหติ-กุรุนํ อปจฺจํ ราชาวา โกรพฺโพ, เสพฺโพ. 'कुरु' आणि 'सिवि' शब्दांपासून अपत्य आणि राजा या अर्थात 'ण्य' प्रत्यय होतो; जसे - कुरूंचे अपत्य किंवा राजा 'कोरब्बो', सिवींचे अपत्य किंवा राजा 'सेब्बो'. ณ ราคาเตน รตฺตํ. 'रागाने (रंगाने) रंगवलेले' या अर्थात तृतीयान्त शब्दापासून 'ण' प्रत्यय होतो. รชฺชเต เยน โส ราโค-ตโต ราควาจิตติยนฺตโต รตฺตมิจฺเจตสฺมึ อตฺเถเณ โหติ-กสาเวน รตฺตํ กาสาวํ, โกสุมฺหํ-อิธ กสฺมา น โหติ’ นีลํ ปีตนฺติ? คุณวจนตฺตา วินาปิ เณน ณตฺถสฺสาภิธานโต. ज्याने रंगवले जाते तो 'राग' (रंग) होय. त्या रागवाचक तृतीयान्त शब्दापासून 'रंगवलेले' या अर्थात 'ण' प्रत्यय होतो; जसे - कषाय (काढ्याने) रंगवलेले 'कासावं', कुसुंभाने रंगवलेले 'कोसुम्हं'. येथे 'नीलं', 'पीतं' यामध्ये प्रत्यय का होत नाही? कारण हे गुणवाचक शब्द असल्यामुळे 'ण' प्रत्ययाशिवायच त्या अर्थाचे प्रतिपादन करतात. นกฺขโต นินฺทุยุตฺเตน กาเล. चंद्राने युक्त असलेल्या नक्षत्रावरून काळ दर्शवण्यासाठी तृतीयान्त नक्षत्रवाचक शब्दापासून 'ण' प्रत्यय होतो. ตติยตฺตโต นกฺขตฺตา เตน ลกฺขิเต กาเล เณ โหติ ตญฺเจ นกฺขตฺตมินฺทุยุตฺตํ โหติ-ผุสฺเสน อินฺทุยุตฺเตน ลกฺขิตา ปุณฺณมาสี ผุสฺสี, ปุสฺโส (อโห)-มฆาย อินฺทุยุตฺตายลกฺขิตา ปุณฺณมาสี มาฆี, มาโฆ (อโห) तृतीयान्त नक्षत्रवाचक शब्दापासून त्याने दर्शवलेल्या काळात 'ण' प्रत्यय होतो, जर ते नक्षत्र चंद्राने युक्त असेल; जसे - पुष्य नक्षत्राने (चंद्राने युक्त असलेल्या) दर्शवलेली पौर्णिमा 'फुस्सी', आणि तो दिवस 'फुस्सो' (दिवस); मघा नक्षत्राने (चंद्राने युक्त असलेल्या) दर्शवलेली पौर्णिमा 'माघी', आणि तो दिवस 'माघो' (दिवस). ยา สฺส เทวตา ปุณฺณมาสิ. 'ती त्याची देवता आहे' किंवा 'ती त्याची पौर्णिमा आहे' या अर्थात प्रथमान्त शब्दापासून षष्ठीच्या अर्थात 'ण' प्रत्यय होतो. เสติ ปฐมนฺตา อสฺเสติ ฉฏฺฐตฺเถ เณ โหติ ยํ ปฐมนฺตํ สา ทฺเว เทวตา ปุณฺณมาสี วา-สุคโต เทวตา อสฺเสติ โสคโต-มาหินฺโท, ยาโม, จารุโณ-ผุสฺสี ปุสฺณมาสี อสฺส สมฺพนฺธินีติ ผุสฺโส, (มาโส) เอวมฺมาโฆ. 'ती' अशा प्रथमान्त शब्दापासून 'त्याची' या षष्ठीच्या अर्थात 'ण' प्रत्यय होतो, जे प्रथमान्त पद देवता किंवा पौर्णिमा दर्शवणारे असते; जसे - सुगत ही ज्याची देवता आहे तो 'सोगतो'; तसेच 'माहिन्दो', 'यामो', 'चारुणो'. पुष्य पौर्णिमा ज्याच्याशी संबंधित आहे तो 'फुस्सो' (महिना), याचप्रमाणे 'माघो'. วฺยากรณมธิเต ชานาติ วาตฺเววมาทิวคฺคเห. 'व्याकरण शिकतो किंवा जाणतो' इत्यादी विग्रहात (प्रत्यय होतात). ตมธีเต ตญฺชานาติ กณิกา จ. 'ते शिकतो' किंवा 'ते जाणतो' या अर्थात द्वितीयान्त शब्दापासून 'ण', 'णिक' आणि 'अ' प्रत्यय होतात. ทุติยนฺตโต ตมธีเต ตญฺชานาตีติ เอเตสฺวตฺเตสุ เณโหติ โกณิโก จ-เวยฺยากรเณ-กตยาเทสสฺสิการสฺส‘‘ตทา เทสา ตทิว ภวนฺติ‘‘ติ ญายา สรานมจฺจาทินา เอกาเร ยาคมทฺวิตฺตานิ-เก-กมโก, ปทโก-ณิเก-สุตฺตนฺติโก, เวนยิโก-‘‘เตน นิพฺพตฺเต’’ติ ตติยนฺตา นิพฺพตฺตตฺเถเณ-กุสมฺเพน นิพฺพตฺตา โกสมฺพี, (นครี.) द्वितीयान्त शब्दापासून 'ते शिकतो' किंवा 'ते जाणतो' या अर्थांमध्ये 'ण' आणि 'णिक' प्रत्यय होतात; जसे - 'वेय्याकरणो' (व्याकरण जाणणारा) - येथे 'य' आदेश झालेल्या इ-काराला "तदादेशा तदिव भवन्ति" या न्यायाने 'सरामच्चादिना' सूत्राने 'ए' कार होऊन 'य' आगम आणि द्वित्व होते. 'क' प्रत्यय असताना - 'कमको', 'पदको'. 'णिक' प्रत्यय असताना - 'सुत्तन्तिको', 'वेनयिको'. "तेन निब्बत्ते" (त्याने निर्माण केलेले) या अर्थात तृतीयान्तापासून 'ण' प्रत्यय होतो; जसे - कुसंबाने निर्माण केलेली 'कोसम्बी' (नगरी). ตตฺร ภเว. 'तेथे उत्पन्न होणारे किंवा असणारे' या अर्थात सप्तम्यन्त शब्दापासून 'ण' प्रत्यय होतो. สตฺตมฺยนฺตา ภวตฺเถ เณ โหติ-อุทเก ภโว โอทโก-‘‘อชฺชาทีหิ ตโน’’ติ ภวตฺเถ ตโน-อชฺชภโว อชฺชตโน-เอวํ หียตฺตโน-‘‘โญนมวณฺเณ’’ติ อกาโร-‘‘สรมฺภา ทฺเว’’ติ ตสฺส ทฺวิภาโว. सप्तम्यन्त शब्दापासून 'होणारे/असणारे' या अर्थात 'ण' प्रत्यय होतो; जसे - पाण्यात असणारे 'ओदको'. "अज्जादीहि तनो" या सूत्राने 'होणारे' या अर्थात 'तन' प्रत्यय होतो - आज होणारे 'अज्जतनो', याचप्रमाणे 'हीयत्तनो'. "ञोनमवण्णे" या सूत्राने अ-कार होतो आणि "सरम्भा द्वे" या सूत्राने त्याचे द्वित्व होते. ปุราโตโณ จ 'पुरा' शब्दापासून 'होणारे' या अर्थात 'ण' आणि 'तन' प्रत्यय होतात. ปุรา อิจฺเจตสฺมา ภวตฺเถ เณ โหติ ตโน ว-ปุรา ภโว ปุราเณ, ปุราตโน. 'पुरा' या शब्दापासून 'होणारे' या अर्थात 'ण' किंवा 'तन' प्रत्यय होतो; जसे - पूर्वीचे 'पुराणो', 'पुरातनो'. อมาตฺวจฺโจ. 'अमा' शब्दापासून 'होणारे' या अर्थात 'अच्च' प्रत्यय होतो. อมา สทฺทโต อจฺโจ โหติ ภวตฺเถ-อมา ภโว อมจฺโจ. 'अमा' शब्दापासून 'होणारे' या अर्थात 'अच्च' प्रत्यय होतो; जसे - जवळ राहणारा 'अमच्चो'. มชฺฌาทิตฺวิโม. 'मज्झ' इत्यादी सप्तम्यन्त शब्दांपासून 'होणारे' या अर्थात 'इम' प्रत्यय होतो. มชฺฌาทีหิ สตฺตมฺยนฺเตหิ ภวตฺเถ อิโม โหติ-มชฺเฌ ภโว มชฺฌิโม, อนฺติโม-กุสิณรายํ ภโว จฺเจวมาทิวิคฺคเห. 'मज्झ' इत्यादी सप्तम्यन्त शब्दांपासून 'होणारे' या अर्थात 'इम' प्रत्यय होतो; जसे - मध्ये असणारा 'मज्झिमो', शेवटी असणारा 'अन्तिमो'; 'कुसिनारायं भवो' इत्यादी विग्रहातही हाच प्रत्यय होतो. กณฺเณยฺย เณยฺยกยฺยา. 'कण्ण' इत्यादी शब्दांपासून 'णेय्य' आणि 'कय्य' प्रत्यय होतात. สตฺตมฺยนฺตา เอเต ปจฺจยา โหนฺติ พหุลํ ภวตฺเถ-กณ-โกสิณรโก-เณยฺย-คงฺเคยฺโย, วาเนยฺโย-เณยฺยก-โกเลยฺยโก-ย-คมฺโม-รสฺสาการโลปปุ- พฺพรูปานิ-อิย-คมิโย, อุทริยํ-‘‘ณิโก’’ติ สตฺตมฺยนฺตา ภวตฺเถ ณิโก โหติ สรเท ภาโว สารทิโก, เหมนฺติโก. सप्तम्यन्त (सप्तमी विभक्तीच्या शेवटी असलेल्या) शब्दांपासून 'भव' (उत्पन्न होणे किंवा असणे) या अर्थात हे प्रत्यय बहुधा होतात. उदा. कण् - कोसिणरको; णेय्य - गङ्गेय्यो, वानेय्यो; णेय्यक - कोलेय्यको; य - गम्मो; (र्हस्व, आकारलोप आणि पूर्वरूप होऊन) इय - गमियो, उदरियं. "णिको" या सूत्राने सप्तम्यन्त शब्दांपासून 'भव' (असणे/होणे) या अर्थात 'णिक' प्रत्यय होतो. जसे की, 'सरदे भावो' (शरद ऋतूत होणारा) = सारदिको, हेमन्तिको. ตมสฺส สิปฺปํ สีลมฺปณฺยมฺปหรณมฺปโยชนํ. "ते त्याचे शिल्प (कला), शील (स्वभाव/आचरण), पण्य (व्यापाराची वस्तू), प्रहरण (शस्त्र) किंवा प्रयोजन (हेतू) आहे" (या अर्थांमध्ये पुढील प्रत्यय होतात). ปฐมนฺตา สิปฺปาทิวาจกา อสฺเสติ ฉฏฺฐตฺเถ ณิโก โหติ-วีณาวาทนํ สิปฺปมสฺส เวณิโก. ปํชสุกูลธารณํ สีลมสฺส ปกํสุกุลิโก, คนฺโธ ปณฺยมสฺส คนฺธิโก, วาโป ปหรณมสฺส วาปิโก, สตํ ปโยชนมสฺส สาติกํ‘‘ตํหนฺตารหติ คจฺฉตุญฺฉติจรติ’’ติ ทุติยนฺตา ภนฺติจฺเจวมาทิสวตฺเถสุ ณิโก โหติ-ปกฺขีโนภนฺติติ ปกฺขิโก-สากุณีโก-สตมรหตีติ สาติกํ-ปรทารํ คจฺฉตีติปารทาริโก-พทเร อุญฺฉตีติ พาทริโก-ธมฺมํ จรตีติ ธมฺมิโก-อธมฺมิโก-‘‘เตน กตํ กีตํ พทฺธมภิยงฺขตํ กสํสฏฺฐํ หตํ หนฺติ ชิตํ ชยติ ทิพฺพติ ขนติ ตรติ จรติ วหติ ชีวติ’’ติ ตติยนฺตา กตาทิสฺวตฺเถสุ ณิโก โหติ-กาเยน กตํวกายิกํ-สเตน กีตํ สาติกํ-วรตฺตาย พทฺโธวา รตฺติโก-ฆเตน อภิสงฺขตํ กสํสฏฺฐํ วา ฆาติกํ-(อภิสงฺขตํ กตาภิสงฺขารํ, กสํสฏฺฐํ มิสฺสิตํ)-ชาเลน หโต ภนฺตีติวา จาลิโก-อกฺเขหิ ชิตมกฺขิกํ-อกฺเขหิ ชยติ ทิพฺพตีติ วา อกฺขิโก-ขนิตฺติยา ขนตีติ ขานิตฺติโก-อิห นภวติ ‘‘องฺคุลิยา ขนฺตี’’ติ อนภิธานา อภิธานลกฺขณ หิ ตพฺพาทิ ณทิสมาสา-อุฬุมฺเปน ตรตีติ โอฬุมฺปิโก-สกเฏน จรตีติ สากฏิโก-ขนฺเธน วหตีติ ขนฺธิโก-เวตเนน ชีวตีติ เวตนิโก-‘‘ตสฺส สํวตฺตตี’’ติ จตุตฺถฺยนฺตา สํวตฺตตีติ โปโนภวิโก-‘‘มนาทฺยปาทินโม มเย เจ’’ติ ทุติโยกาโร. प्रथमान्त शिल्प इत्यादी वाचक शब्दांपासून 'त्याचे' (अस्य) या षष्ठ्यर्थात 'णिक' प्रत्यय होतो. जसे की - वीणा वाजवणे हे ज्याचे शिल्प (कला) आहे तो = वेणिको. पांसुकूल (चिंध्यांचे वस्त्र) धारण करणे हे ज्याचे शील (नियम/स्वभाव) आहे तो = पंकसुकुलिको. गंध (सुवासिक द्रव्य) हे ज्याचे पण्य (विक्रीची वस्तू) आहे तो = गंधिको. चाप (धनुष्य) हे ज्याचे प्रहरण (शस्त्र) आहे तो = वापिको. शंभर हे ज्याचे प्रयोजन आहे ते = सातिकं. "त्याला मारतो, योग्य आहे, जातो, गोळा करतो, आचरण करतो" या अर्थांमध्ये द्वितीयान्त शब्दांपासून 'णिक' प्रत्यय होतो. जसे की - पक्षांना मारतो तो = पक्खिको, साकुणिको. शंभरासाठी योग्य आहे ते = सातिकं. परस्त्रीकडे जातो तो = पारदारिको. बोरे गोळा करतो तो = बादरिको. धर्माचे आचरण करतो तो = धम्मिको, अधम्मिको. "त्याने केलेले, खरेदी केलेले, बांधलेले, तयार केलेले, मिश्रित केलेले, मारलेले, मारतो, जिंकलेले, जिंकतो, खेळतो, खणतो, तरतो (पार करतो), चालतो/प्रवास करतो, वाहून नेतो, जगतो" या अर्थांमध्ये तृतीयान्त शब्दांपासून 'णिक' प्रत्यय होतो. जसे की - कायेने (शरीराने) केलेले = कायिकं. शंभराने खरेदी केलेले = सातिकं. चामड्याच्या वादीने बांधलेला = वारत्तिको. तुपाने तयार केलेले किंवा मिश्रित केलेले = घातिकं (अभिसंखत म्हणजे संस्कार केलेले/तयार केलेले, कंसट्ठ म्हणजे मिश्रित केलेले). जाळ्याने मारलेला किंवा जाळे टाकणारा = चालिको. फाशांनी जिंकलेले = अक्खिकं. फाशांनी जिंकतो किंवा खेळतो तो = अक्खिको. कुदळीने खणतो तो = खानित्तिको. येथे "बोटाने खणतो" यात प्रत्यय होत नाही, कारण अनभिधान (तसा प्रयोग रूढ नसणे) आहे. तद्धित, कृदन्त आणि समास हे अभिधानलक्षण (लोकरूढीवर आधारित) असतात. तराफ्याने पार करतो तो = ओळुम्पिको. गाडीने प्रवास करतो तो = साकटिको. खांद्यावरून वाहून नेतो तो = खन्धिको. वेतनावर (पगारावर) जगतो तो = वेतनिको. "त्याच्यासाठी कारणीभूत ठरते" या अर्थात चतुर्थीविभक्तीच्या शब्दापासून 'णिक' प्रत्यय होतो, जसे की - 'पुनर्भवासाठी कारणीभूत ठरणारे' = पोनोभविको. "मनाद्यपादिनमो मये चे" या सूत्रातील दुसरा 'ओ'कार आहे. ตโตสมฺภุตมาคตํ. "त्यापासून उत्पन्न झालेले किंवा आलेले" (या अर्थांमध्ये). ปญฺจมฺยนฺตา สมฺภุ ตมาคตนฺติ เอเตสฺวตฺเถสุณิโก โหติ-มาติโต สมฺภุตมาคตํ วา มตฺติกํ, เปตฺติกํ. पंचम्यन्त (पंचमी विभक्तीच्या शेवटी असलेल्या) शब्दांपासून 'उत्पन्न झालेले' (संभूत) किंवा 'आलेले' (आगत) या अर्थांमध्ये 'णिक' प्रत्यय होतो. जसे की, आईपासून उत्पन्न झालेले किंवा आलेले = मत्तिकां, वडिलांपासून = पेत्तिकां. สุรภิโต สมภุตนฺติ นวิคฺคเห. "सुरभितो संभूतं" (सुरभीपासून उत्पन्न झालेले) असा विग्रह होत नाही. ทิสฺสนฺตญฺเญปิ ปจฺจยา. इतरही प्रत्यय दिसून येतात. วุตฺตโต’ญฺเญปิ ปจฺจยา ทิสฺสนฺติ วุตฺตาวุตฺตตฺเถสุติณฺโย-โสรพฺภํ-‘‘ตตฺถ วสติ กวิทิโตภตฺโต นิยุตฺโต’’ติ ณิโก-รุกฺขมูเล วสตีติ รุกฺขมูลิโก, โลเก วิทิโต โลกิโก, จตุมหาราเชสุ ภตฺตา จตุมฺมหาราชิกา-ทฺวาเร นิยุตฺโต โทวาริโก-ทสฺโสก ตทมินาทิปาฐา. सांगितलेल्या प्रत्ययांपेक्षा इतरही प्रत्यय सांगितलेल्या किंवा न सांगितलेल्या अर्थांमध्ये दिसून येतात. जसे की, 'ण्य' प्रत्यय - सुरभीपासून उत्पन्न = सोरब्भं. "तेथे राहतो, जाणतो, प्रसिद्ध आहे, भक्त (आदर करणारा) आहे, नियुक्त आहे" या अर्थांमध्ये 'णिक' प्रत्यय होतो. जसे की - वृक्षाच्या मुळाशी (झाडाखाली) राहतो तो = रुक्खमूलिको. लोकात प्रसिद्ध असलेला = लोकिको. चातुर्महाराजिकांचे भक्त = चातुम्महाराजिका. द्वारावर (दरवाजावर) नियुक्त असलेला = दोवारिको. 'दस्सोक' इत्यादी पाठांवरून हे सिद्ध होते. ตสฺสิทํ. "हे त्याचे आहे" या अर्थात. ฉฏฺฐิยนฺตา อิทมิจฺจสฺมึ อตฺเถ ณิโก โหติ-สงฺฆสฺส อิทํ สงฺฆิกํ, ปุคฺคลิกํ-‘‘เณ’’ติ ฉฏฺฐิยนฺตา อิทมิจฺจตสฺมึ อตฺเถเณ-โมคฺคลฺลายนสฺส อิทํ โมคฺคลฺลายนํ, (วฺยากรณํ)-โสคตํ, (สาสนํ). षष्ठ्यन्त शब्दांपासून 'हे त्याचे' (इदम्) या अर्थात 'णिक' प्रत्यय होतो. जसे की - संघाचे जे आहे ते = संघिकं, पुद्गलाचे (व्यक्तीचे) जे आहे ते = पुग्गलिकं. "णे" या सूत्राने षष्ठ्यन्त शब्दांपासून 'हे त्याचे' या अर्थात 'ण' प्रत्यय होतो. जसे की - मोग्गल्लायनाचे जे आहे ते = मोग्गल्लायनं (व्याकरण), सुगतांचे (बुद्धांचे) जे आहे ते = सोगतं (शासन). ปิติโต ภาตริ เรยฺยณ. 'पितु' (वडील) शब्दापासून त्यांच्या भावाच्या (काकाच्या) अर्थात 'रेय्यण' प्रत्यय होतो. ปิตุสทฺทา ตสฺส ภาตริ เรยฺยณ โหติ-โรนุ’พนฺโธ. 'पितु' शब्दापासून त्याच्या भावाच्या अर्थात 'रेय्यण' प्रत्यय होतो. यात 'र' हा अनुबन्ध (लोप पावणारा) आहे. รานุพนฺเธ’นฺตสราทิสฺส. 'र' अनुबन्ध असताना अन्त्य स्वरादीचा (शेवटच्या स्वराचा आणि त्यानंतरच्या भागाचा) लोप होतो. อนฺโต สโร อาทิ ยสฺสาวยวสฺส ตสฺส โลโป โหติ รานุพนฺเธติ อุโลโป-ปิตุ ภาตา เปตฺเตยฺโย. ज्या अवयवाचा आदि अंत्य स्वर आहे, त्याचा 'र' अनुबन्ध असताना लोप होतो; येथे 'उ' चा लोप होतो. वडिलांचा भाऊ = पेत्तेय्यो (काका). มาติโต จ หคินิยํ โฉ. 'मातु' (आई) शब्दापासून तिच्या बहिणीच्या (मावशीच्या) अर्थात 'छ' प्रत्यय होतो. มาตุโต เจ ปิตุโต จ เตสํ ภคินิยํ โฉ โหติ-มาตุภคินิ มาตุจฺฉา-‘‘อิตฺถิยมตฺวา’’ติ อา-เอวมฺปิตุจฺฉา. 'मातु' आणि 'पितु' शब्दांपासून त्यांच्या बहिणीच्या अर्थात 'छ' प्रत्यय होतो. आईची बहीण = मातुच्छा (मावशी). "इत्थियमत्वा" या सूत्राने स्त्रीलिंगात 'आ' प्रत्यय होऊन, याचप्रमाणे वडिलांची बहीण = पितुच्छा (आत्या) असा शब्द बनतो. มาตาปิตุสฺวามโห. 'माता' आणि 'पितु' शब्दांपासून त्यांच्या माता-पित्यांच्या अर्थात 'आमह' प्रत्यय होतो. มาตาปิตุหิ เตสํ มาตาปิตุสฺวามโห โหติ-มาตุ มาตา มาตามหี-มาตุ ปิตา มาตามโห-ปิตุ มาตา ปิตามหี-ปิตุ ปิตาปิ นามโห. 'मातु' आणि 'पितु' शब्दांपासून त्यांच्या माता-पित्यांच्या अर्थात 'आमह' प्रत्यय होतो. आईची आई = मातामही (आजी). आईचे वडील = मातामहो (आजोबा). वडिलांची आई = पितामही (आजी). वडिलांचे वडील = पितामहो (आजोबा). หิเต เรยฺยณ. 'हितकारक' या अर्थात 'रेय्यण' प्रत्यय होतो. มาตาปิตูหิ หิเต เรยฺยณ โหติ-มาตุ หิโต มตฺเตยฺโย, ปิตุ หิโต เปตฺเตยฺโย. 'मातु' आणि 'पितु' शब्दांपासून 'हितकारक' या अर्थात 'रेय्यण' प्रत्यय होतो. जसे की, आईसाठी हितकारक = मत्तेय्यो, वडिलांसाठी हितकारक = पेत्तेय्यो. ตมสฺย ปริมาณํ ณิโก จ. "ते त्याचे परिमाण (माप) आहे" या अर्थात 'णिक' आणि 'क' प्रत्यय होतात. ปฐมนฺตา อสฺเสติ อสฺมึ อตฺเถ ณิโก โหติ โกว ตญฺเจ ปฐมนฺตํ ปริมาณมฺภวติ. प्रथमान्त शब्दापासून 'त्याचे' या अर्थात 'णिक' किंवा 'क' प्रत्यय होतो, जर तो प्रथमान्त शब्द परिमाण (माप) दर्शवणारा असेल. โทเณ ปริมาณมสฺส โทณิโก, (วีหิ)-เอกมฺปริมาณมสฺส เอกกํ-ทฺวิกํ, ติกํ, จตุกฺกํ, ปญฺจกมิจฺจาทิ. द्रोण (एक माप) हे ज्याचे परिमाण आहे तो (भात/तांदूळ) = दोणिको. एक हे ज्याचे परिमाण आहे ते = एककं. याचप्रमाणे द्विकं, तिकं, चतुक्कं, पंचकं इत्यादी. สญฺชาตา ตารกาทิตฺวิโต 'तारका' इत्यादी शब्दांपासून 'इत' प्रत्यय होतो. ตารกาทิหิ ปฐมนฺเตหิ อสฺเสติ ฉฏฺฐตฺเถ อิโต โหติ เต तारका इत्यादी प्रथमान्त शब्दांपासून 'त्याचे' या षष्ठ्यर्थात 'इत' प्रत्यय होतो, जर ते... เจ สญฺชาตา โหนฺติ-ตารกา สญฺชาตา อสฺส ตารกิตํ-(คคนํ)-ปุปฺฉิโต-(รุกฺโข). ...उत्पन्न झाले असतील तर. जसे की, ज्याच्यामध्ये तारे उत्पन्न झाले आहेत ते (आकाश) = तारकितं (गगनं); ज्याला फुले आली आहेत तो (वृक्ष) = पुप्फितो (रुक्खो). มาเน มตฺโต. परिमाणाच्या (मापाच्या) अर्थात 'मत्त' (मात्र) प्रत्यय होतो. ปฐมนฺตา มานวุตฺติโต อสฺเสติ อสฺมึ อตฺเถ มตฺโต โหติ-ผขลํ อุมฺมานมสฺส ขผลมตฺตํ. หตฺโถ ปริมาณมสฺส หตฺถมตฺตํ, สตํ มานมสฺส สตมตฺตํ. परिमाण दर्शवणाऱ्या प्रथमान्त शब्दापासून 'त्याचे' या अर्थात 'मत्त' प्रत्यय होतो. जसे की, 'पखल' (एक माप) हे ज्याचे परिमाण आहे ते = पखलमत्तं (किंवा खफलमत्तं); हात हे ज्याचे परिमाण आहे ते = हत्थमत्तं; शंभर हे ज्याचे माप आहे ते = सतमत्तं. เณ จ ปุริสา आणि 'पुरिस' (पुरुष) शब्दापासून 'णे' प्रत्यय होतो. ปุริสา ปฐมนฺตา อุทฺธมานวุตฺติโต อสฺเสติ อสฺมึ อตฺเถ เณ โหติ มตฺต ตคฺฆา จ-ปุริโส อุมฺมานมสฺส โปริสํ, ปุริสมตฺตํ. ปุริสตคฺฆํ. उंचीचे परिमाण दर्शवणाऱ्या 'पुरिस' या प्रथमान्त शब्दापासून 'त्याचे' या अर्थात 'णे' प्रत्यय होतो, तसेच 'मत्त' आणि 'तग्ध' प्रत्ययही होतात. जसे की, पुरुषाची उंची हे ज्याचे परिमाण आहे ते = pोरिसं, पुरिसमत्तं, पुरिसतग्धं. ตสฺส ภาวกมฺเมสุ ตฺต ตา ตฺตนณฺยเณยฺย ณิฆ ณิยา. त्याच्या 'भाव' (अस्तित्व/अवस्था) आणि 'कर्म' (क्रिया) या अर्थांमध्ये 'त्त', 'ता', 'त्तन', 'ण्य', 'णेय्य', 'णिघ', 'णिय' हे प्रत्यय होतात. ภวนฺติ เอตสฺมา สทฺทพุทฺธีติ ภาโว สทฺทปฺปวตฺติ นิมิตฺตํ-กมฺมํ กฺริยา-ฉฏาฐิยนฺตา ภาเว กมฺเม จ ตฺต ตาทโย โหนฺติ พหุลํ-สามญฺญวิธโย ปโยคมนุสารยนฺติติ กุโต จิ ทฺวีสุกุโต จิ ภาเว เยว-น จ สพฺเพ สพฺพโต โหนฺติ อญฺญตฺร ตฺตตาหิ-นีลสฺส ปฏาสฺส ภาโว นีลตฺตํ นีลตาติ คุเณ ภาโว-อิห คุณวสา นิลสทฺโทนีลคุณยุตฺเต ทพฺเพ วตฺตเต นิมิตฺตสฺสรุปานุคตาญฺจพุทฺธิ-เอวมญฺญตฺราปิ ยถานุรูปํญาตพฺพํ นีลสฺสคุณสฺส ภาโว นีลตฺตํนีลตาติ นีลคุณชาติ-โคตฺตํ โคตาติ โคชาติ-ปาจกตฺตตฺติ ปจนกฺริยาสมฺพนฺโธ-ราชปุริสตฺตนฺติ ราชสมฺพนฺโธ-เทวทตฺตํ จนฺทตฺตํ สูริยตฺตนฺติ ตทวตฺถาวิเสส สามญฺญํ-อากาสตฺตํ อภาวตฺตนฺติ อุปจริตเภทสามญฺญํ-อลสสฺส ภาโว กมฺมํ วา อลสตฺตํ อลสตา-ตฺตน, ปุถุชฺชนตฺตนํ-ณฺย, จาปกลฺยํ‘‘สกตฺเถตี‘‘สกตฺเถปิ-อกิญฺจนเมว อากิญฺจญฺญํ-เณยฺย, โสเจยฺยํ-ณ, ปาฏวํ-อวง-อิย, นคฺคิยํ-ณิ ย, โปโรหิติยํ. ज्याच्यामुळे शब्दाची प्रवृत्ती आणि बुद्धी (ज्ञान) होते तो 'भाव' (शब्दाच्या प्रवृत्तीचे निमित्त) होय. 'कर्म' म्हणजे क्रिया. षष्ठ्यन्त शब्दांपासून 'भाव' आणि 'कर्म' या अर्थांमध्ये 'त्त', 'ता' इत्यादी प्रत्यय बहुधा होतात. सामान्य नियम प्रयोगाचे अनुसरण करतात, म्हणून काही शब्दांपासून दोन्ही अर्थांत (भाव आणि कर्म) आणि काहींपासून केवळ 'भाव' अर्थातच प्रत्यय होतात. 'त्त' आणि 'ता' प्रत्यय वगळता सर्व प्रत्यय सर्व शब्दांपासून होत नाहीत. निळ्या वस्त्राचा भाव = नीलत्तं, नीलता (निळेपणा - हा गुणातील भाव आहे). येथे गुणवाचक असल्यामुळे 'नील' शब्द निळ्या गुणाने युक्त असलेल्या द्रव्याचा बोध करून देतो आणि निमित्ताच्या स्वरूपाचे ज्ञान करून देतो. याचप्रमाणे इतर ठिकाणीही योग्यतेनुसार समजून घ्यावे. निळ्या गुणाचा भाव = नीलत्तं, नीलता (निळ्या गुणाची जाती). गो-पणा (गाय असणे) = गोत्तं, गोता (गो-जाती). पाचकत्व = पाचकत्तं (स्वयंपाक करण्याच्या क्रियेचा संबंध). राजपुरुषत्व = राजपुरिसत्तं (राजाशी असलेला संबंध). देवदत्तत्व, चंद्रत्व, सूर्यत्व हे त्यांच्या विशिष्ट अवस्थेचे सामान्य रूप आहे. आकाशत्व, अभावत्व हे उपचाराने मानलेले भेदसामान्य आहे. आळशाचा भाव किंवा कर्म = अलसत्तं, अलसता (आळस). 'त्तन' प्रत्यय - पुथुज्जनत्तनं (पृथग्जनत्व). 'ण्य' प्रत्यय - चापकल्यं (चपळता); स्वार्थे (त्याच अर्थात) देखील - अकिंचन असणे म्हणजेच आकिंचञ्ञं (अकिंचनत्व). 'णेय्य' प्रत्यय - सोचेय्यं (शुचिता/पवित्रता). 'ण' प्रत्यय - पाटवं (पटुता/कौशल्य). 'इय' प्रत्यय - नग्गियं (नग्नता). 'णिय' प्रत्यय - पोरोहितियं (पुरोहितपण). ตร ตมิสฺสิกิยิฏฺฐาติสเย. अतिशय (अधिकता किंवा श्रेष्ठता) दर्शवण्याच्या अर्थात 'तर', 'तम', 'इस्सिक', 'इय', 'इट्ठ' हे प्रत्यय होतात. อติสเย วตฺตมานนโต โหนฺเตเต ปจฺจยา-อติสเยน ปาโป ปาปตโร, ปาปตโม, ปาปิสฺสิโก. ปาปิโย. ปาปิฏฺโฐ-อติสยนฺตาปิ อติสยปฺปจฺจโย-อติสเยน ปาปิฏฺโฐ ปาปิฏฺฐตโร-อุทุมฺพรสฺส วิกาโร’วยโวตฺเววมาทิวิคฺคเห. अतिशय अर्थ व्यक्त करणाऱ्या शब्दांपासून हे प्रत्यय होतात. जसे की, अतिशय पापी = पापतरो, पापतमो, पापिस्सिको, पापियो, पापिट्ठो. अतिशय अर्थ असलेल्या शब्दाला पुन्हा अतिशय प्रत्यय लागतो, जसे की - अतिशय पापिष्ठ = पापिट्ठतरो. "उदुंबराचा विकार (बदललेले रूप) किंवा अवयव (भाग)" इत्यादी विग्रहांमध्ये (पुढील प्रत्यय होतात). ตสฺส วิการาวยเวสุ ณ ณิก เณยฺย มยา. त्याच्या 'विकार' (रूपांतर) आणि 'अवयव' (भाग) या अर्थांमध्ये 'ण', 'णिक', 'णेय्य', 'मय' हे प्रत्यय होतात. ปกติยา อุตฺตรมวตฺถนฺตรํ วิกาโร-ฉฏฺฐิยนฺตา นามสฺมา วิกาเร’วยเว จ ณทโย โหนฺติ พหุลํ-ณ, โอทุมฺพรํ-(ภสฺมํ ปณฺณํ วา)-ณิก, กปฺปาสิกํ-เนยฺย, เอเณยฺยํ-มย. ติณมยํ-‘‘อญฺญสฺมินฺติ’’ อตฺถนฺตเรปิ-คุนฺนํ กริสํ โคมยํ. मूळ प्रकृतीपेक्षा वेगळी झालेली अवस्था म्हणजे 'विकार' (रूपांतर) होय. षष्ठी विभक्तीत असलेल्या नामापासून 'विकार' (रूपांतर) आणि 'अवयव' (भाग) या अर्थांमध्ये 'ण' इत्यादी प्रत्यय बहुधा (बहुलं) होतात. जसे की— 'ण' प्रत्यय लागून: ओदुम्बरं (उदुंबराची राख किंवा पान); 'णिक' प्रत्यय लागून: कप्पासिकं (कापसाचे बनलेले); 'नेय्य' प्रत्यय लागून: एणेय्यं (हरणाच्या चामड्याचे किंवा अवयवाचे); 'मय' प्रत्यय लागून: तिणमयं (गवताचे बनलेले). 'अञ्ञस्मिन्ति' (इतर अर्थांमध्येही) या सूत्रानुसार इतर अर्थांमध्येही हे प्रत्यय होतात, जसे की— गुन्नं करिसं गोमयं (गाईचे शेण). มนุสฺสานํ สมุโหตฺเววมาทิวิคฺคเห. "मनुस्सानं समूहो" (मनुष्यांचा समूह) इत्यादी विग्रहामध्ये— สมุเห กณฺณณิกา. समूह या अर्थामध्ये 'कण्', 'ण' आणि 'णिक' हे प्रत्यय होतात. ฉฏฺฐิยนฺตา สมูเห กณฺณณิกา โหนฺติ-มานุสฺสกํ. กากํ, อาปุปิกํ-‘‘ชนาทีหิ ตา’’ติ สมูเห ตา-ชนานํ สมูโห ชนตา. คชตา, พนฺธุตา. षष्ठी विभक्तीत असलेल्या नामापासून समूह या अर्थामध्ये 'कण्', 'ण' आणि 'णिक' हे प्रत्यय होतात. जसे की— मानुस्सकं (मनुष्यांचा समूह), काकं (कावळ्यांचा समूह), आपुपिकं (पुऱ्यांचा/अपुपांचा समूह). "जनादीहि ता" या सूत्रानुसार समूह अर्थात 'ता' प्रत्यय होतो, जसे की— जनानं समूहो जनता (लोकांचा समूह म्हणजे जनता), गजनां समूहो गजतता (हत्तींचा समूह), बंधुता (बंधूंचा समूह). เอกา กากฺยสหาเย. 'एक' शब्दापासून असहाय (एकटेपणा) या अर्थामध्ये 'क' आणि 'आकी' हे प्रत्यय होतात. เอกสฺมา อสหายตฺเถ ก อากี โหนฺติ-เอโก’ว เอกโก, เอกากี. 'एक' शब्दापासून असहाय (एकटेपणा) या अर्थामध्ये 'क' आणि 'आकी' हे प्रत्यय होतात. जसे की— एको'व एकको (एकटाच तो एकक), एकाकी (एकटा). อยุภทฺวิตีหํเส. 'उभ', 'द्वि' आणि 'ति' या शब्दांनंतर अवयव (भाग) अर्थामध्ये 'अय' प्रत्यय होतो. อุปทฺวิตีหิ อวยววุตฺตีหิ ปฐมนฺเตหิ อสฺเสติ ฉฏฺฐตฺเถ อโย โหติ-อุโภ อํสา อสฺส อุภยํ. ทฺวยํ. ตยํ-จินฺตํ ปุรเณจฺจา ทิวิคฺคเห-‘‘จตุตฺถทุติเยสฺเวสํ ตติยปฐมา’’ติ นิปาตนา ปูรณตฺเถ ทฺวิโต ติโย ทฺวิสฺส ทุ จ ติจตุหิ อติยตฺตาจ-ทุติโย. ตติโย. จตุตฺโถ. अवयव (भाग) दर्शवणाऱ्या प्रथमा विभक्तीतील 'उभ', 'द्वि' आणि 'ति' या शब्दांपासून "त्याचे" (अस्स) या षष्ठीच्या अर्थामध्ये 'अय' प्रत्यय होतो. जसे की— उभो अंसा अस्स उभयं (त्याचे दोन्ही भाग म्हणजे उभय), द्वयं (दोन भाग/जोडी), तयं (तीन भाग/त्रयी). पूरण (क्रमवाचक संख्या) अर्थाच्या विग्रहामध्ये "चतुत्थदुतियेस्वेसं ततियपठमा" या निपातनाद्वारे पूरण अर्थात 'द्वि' शब्दापासून 'तिय' प्रत्यय होऊन आणि 'द्वि' चे 'दु' होऊन— दुतियो (दुसरा); 'ति' शब्दापासून 'तिय' प्रत्यय होऊन आणि 'ति' चे 'त' होऊन— ततियो (तिसरा); आणि 'चतु' शब्दापासून 'थ' प्रत्यय होऊन— चतुत्तो (चौथा) असे रूप बनते. ม ปญฺจาทิหิ กตีหิ. 'पञ्च' (पाच) इत्यादी संख्यावाचक शब्दांनंतर आणि 'कति' शब्दांनंतर 'म' प्रत्यय होतो. ฉฏฺฐิยนฺตาย ปญฺจาทิกาย สงฺขฺยาย กติสฺมา จ โม โหติ ปูรณตฺเถ-ปญฺจนฺนํ ปุรเณ ปญฺจโม-เอวํ สตฺตโม, อฏฺฐโม, อิจฺจาทิ. षष्ठी विभक्तीत असलेल्या 'पञ्च' इत्यादी संख्यावाचक शब्दांपासून आणि 'कति' शब्दापासून पूरण (क्रमवाचक) अर्थामध्ये 'म' प्रत्यय होतो. जसे की— पञ्चन्नं पुरणे पञ्चमो (पाच पूर्ण करणारा तो पाचवा). याचप्रमाणे सत्तमो (सातवा), अट्ठमो (आठवा) इत्यादी रूपे बनतात. ฉาฏฺฐ ฏฺฐมา. 'छ' (सहा) शब्दापासून पूरण अर्थात 'ट्ठ' आणि 'ट्ठम' हे आदेश/प्रत्यय होतात. ฉสทฺทา ฏฺฐ ฏฺฐมา โหนฺติ ปุรณตฺเถ-ฉนฺนํ ปูรเณ ฉฏฺโฐ, ฉฏฺฐโม วา. 'छ' (सहा) शब्दापासून पूरण (क्रमवाचक) अर्थामध्ये 'ट्ठ' आणि 'ट्ठम' हे प्रत्यय होतात. जसे की— छन्नं पूरणे छट्ठो किंवा छट्ठमो (सहा पूर्ण करणारा तो सहावा). ตสฺส ปุรเณกาทสาทิโต วา. पूरण (क्रमवाचक) अर्थामध्ये 'एकादस' (अकरा) इत्यादी संख्यावाचक शब्दांनंतर विकल्पेकरून 'ड' प्रत्यय होतो. ฉฏฺฐิยนฺตาเยกาทสาทิกาย สงฺขฺยาย โฑ โหติ ปูรณตฺเถ วิภาสา-ฑกาโร’นุพนฺโธ-เอกาทสนฺตํ ปูรเณ เอกาทโส-อญฺญตฺร-เอกาทสโมจฺจาทิ-เอวํ ทฺวาทโส อิจฺจาทิ-เอกูนวีสตฺยาทิหิตุเฑ. षष्ठी विभक्तीत असलेल्या 'एकादस' (अकरा) इत्यादी संख्यावाचक शब्दांपासून पूरण (क्रमवाचक) अर्थामध्ये विकल्पेकरून 'डो' (ड) प्रत्यय होतो. यात 'ड्' हा अनुबंध (लोप पावणारा) आहे. जसे की— एकादसन्तं पूरणे एकादसो (अकरा पूर्ण करणारा तो अकरावा). विकल्प नसल्यास— एकादसमो इत्यादी रूपे होतात. याचप्रमाणे द्वादसो (बारावा) इत्यादी रूपे बनतात. 'एकोनवीसति' (एकोणीस) इत्यादी शब्दांनंतरही 'ड' प्रत्यय होतो. เส สติสฺส ติสฺส. 'स' प्रत्यय किंवा वर्ण पुढे असताना 'सति' शब्दातील 'ति' चा लोप होतो. เส ปเร สตฺยนฺตสฺส ติการสฺส โลโป โหตีติ ติโลโป. เอกุนวีโส. 'स' पुढे असताना 'सति' अंत असणाऱ्या शब्दातील 'ति' या अक्षराचा लोप होतो, याला 'ति-लोप' म्हणतात. जसे की— एकुनवीसो (एकोणिसावा). สตาทีนมิ จ. 'सत' (शंभर) इत्यादी शब्दांनंतर पूरण अर्थात 'म' प्रत्यय होतो आणि त्यांच्या अंताला 'इ' आदेश होतो. สตาทิกาย สงฺขฺยาย ฉฏฺฐิยนฺตาย ปุรนตฺเถ โม โหติ สตา ทินมิ จานฺตาเทโส-สตสฺส ปูรเณ สติโม, สหสฺสิโม. วีสติ อธิกา อสฺมึ สเต สหสฺเส วาติ เอวมาทิวิคฺคเห. षष्ठी विभक्तीत असलेल्या 'सत' (शंभर) इत्यादी संख्यावाचक शब्दांपासून पूरण अर्थामध्ये 'म' प्रत्यय होतो आणि 'सत' इत्यादींच्या अंत्य स्वराच्या जागी 'इ' हा आदेश होतो. जसे की— सतस्स पूरणे सतिमो (शंभरावा), सहस्सिमो (हजारावा). "वीसति अधिका अस्मिं सते सहस्से वा" (या शंभरात किंवा हजारात वीस अधिक आहेत) इत्यादी विग्रहामध्ये— สงฺขฺยาย สจฺจุตีสาสทสนฺตายาธิกาสฺมึ สตสหสฺเส โฑ. 'ति', 'उ', 'ई', 'आ' आणि 'दस' अंत असणाऱ्या संख्यावाचक शब्दांपासून "यात अधिक आहे" या अर्थी शंभर, हजार किंवा लाख पुढे असताना 'डो' (ड) प्रत्यय होतो. สตฺยนฺตาย มุตฺยนฺตาย อีสนฺตาย อาสนฺตาย ทสนฺตาย จ สงฺขฺยาย ปฐมนฺตาย อสฺมินฺติ สตฺตมฺยตฺเถ โฑ โหติ สา เจ สงฺขฺยา อธิกา โหติ ยทสฺมินฺติ ตญฺเจ สตํ สหสฺสํ สตสหสฺสํ วา โหติ-ติโลเป-วีสํ-สตํ, สหสฺสํ, สตสหสฺสํ วา-อุตฺยนฺตาย-นหุตํ-สตํ. สหสฺสํ, สตสหสฺสํ วา-อีสนฺตาย-จตฺตารีสํ-สตํ. สหสฺสํ, สตสหสฺสํ วา-อาสนฺตาย-ปญฺญาสํ-สตํ, สหสฺสํ. สตสหสฺสํ วา-ทสนฺตาย-เอกาทสํ-สตํ, สหสฺสํ, สตสหสฺสํ วา-สจฺจุตีสาสทสนฺตายาติ กึ? ฉ อธิกา อสฺมึ สเต-อธิเกติ กึ? ปญฺจทส หีนา อสฺมึ สเต-อสฺมินฺติ กึ?วีสติ อธิกา เอตสฺมา สตา-สตสหสฺเสติ กึ? เอกาทสาธิกา อสฺสํ วีสติยํ. 'ति' अंत, 'उ' अंत, 'ई' अंत, 'आ' अंत आणि 'दस' अंत असणाऱ्या प्रथमा विभक्तीतील संख्यावाचक शब्दांपासून "यात" (अस्मिन्) या सप्तमीच्या अर्थामध्ये 'डो' (ड) प्रत्यय होतो; जर ती संख्या 'अधिक' असेल आणि ज्याच्यामध्ये ती अधिक आहे ते शंभर (सतं), हजार (सहस्सं) किंवा लाख (सतसहस्सं) असेल. 'ति' अंत शब्दाचे उदाहरण (ति-लोप होऊन): वीसं-सतं (एकशे वीस), वीसं-सहस्सं (एक हजार वीस) किंवा वीसं-सतसहस्सं (एक लाख वीस). 'उ' अंत शब्दाचे उदाहरण: नहुतं-सतं, सहस्सं, सतसहस्सं वा. 'ई' अंत शब्दाचे उदाहरण: चत्तारीसं-सतं, सहस्सं, सतसहस्सं वा. 'आ' अंत शब्दाचे उदाहरण: पञ्ञासं-सतं, सहस्सं, सतसहस्सं वा. 'दस' अंत शब्दाचे उदाहरण: एकादसं-सतं, सहस्सं, सतसहस्सं वा. "सच्चुतीसासदसन्ताय" (ति, उ, ई, आ, दस अंत असणारेच) असे का म्हटले आहे? कारण— छ अधिका अस्मिं सते (या शंभरात सहा अधिक आहेत; येथे 'छ' ला हे अंत नसल्याने प्रत्यय होत नाही). "अधिके" (अधिक असणे) असे का म्हटले आहे? कारण— पञ्चदस हीना अस्मिं सते (या शंभरात पंधरा कमी आहेत; येथे कमी अर्थ असल्याने प्रत्यय होत नाही). "अस्मिन्" (यात) असे का म्हटले आहे? कारण— वीसति अधिका एतस्मा सता (या शंभरापेक्षा वीस अधिक आहेत; येथे पंचमी अर्थ असल्याने प्रत्यय होत नाही). "सतसहस्से" (शंभर, हजार, लाख) असे का म्हटले आहे? कारण— एकादसाधिका अस्सं वीसतियं (या वीसमध्ये अकरा अधिक आहेत; येथे शंभर इत्यादी नसल्याने प्रत्यय होत नाही). ตเมตฺถสฺสตฺถีติ มนฺตุ. "ते येथे आहे" (तं एत्थ अत्थि) किंवा "ते त्याचे आहे" (तस्स अत्थि) या अर्थांमध्ये प्रथमा विभक्तीतील शब्दापासून 'मन्तु' प्रत्यय होतो. ปฐมนฺตา เอตฺถ อสฺส อตฺถีติ เอเตสฺวตฺเถสุ มนฺตุ โหติ-อิติสทฺทสฺส วิวกฺขานิยมนตฺถตฺตา ปหุตาทิยุตฺเตเยว อตฺถฺยตฺเถ โหติ-วุตฺตํหิ. प्रथमा विभक्तीतील शब्दापासून "येथे आहे" (एत्थ अत्थि) या किंवा "त्याचे आहे" (अस्स अत्थि) या अर्थांमध्ये 'मन्तु' प्रत्यय होतो. 'इति' शब्दाच्या विवक्षा-नियमन अर्थामुळे हा 'अस्तित्व' (अत्थि) अर्थ केवळ प्रचुरता (पुष्कळ असणे) इत्यादींनी युक्त असतानाच होतो. कारण असे म्हटले आहे की— ปหุเต จ ปสํสายํ นินฺทายทฺวาติสายเน; นิจฺจโยเค จ สํสคฺเค โหนฺติเม มนฺตุอาทโย. प्रचुरता (पुष्कळ असणे), प्रशंसा (स्तुती), निंदा, अतिशायन (अतिशय असणे), नित्ययोग (नेहमीचा संबंध) आणि संसर्ग (संपर्क) या अर्थांमध्ये 'मन्तु' इत्यादी प्रत्यय होतात. ปหุตา คาโว เอตฺถ เทเส อสฺส วา ปุริสสฺส สนฺตีติ สโคมาปสํสายํ. ปสตฺถา ชาติ อสฺส อตฺถีติ ชาติมา-นินฺทายํ, วลิมาอติสายเน, พุทฺธิมา-นิจฺจโยเค, ชุติมา-สํสคฺเค, หลิทฺทิมา. ตเมตฺถสฺสตฺถีติ อธิกาโร. प्रचुरतेमध्ये— "पहुता गावो एत्थ देसे अस्स वा पुरिसस्स सन्तीति गोमा" (या देशात किंवा या माणसाकडे पुष्कळ गाई आहेत तो 'गोमा'). प्रशंसेमध्ये— "पसत्था जाति अस्स अत्थीति जातिमा" (ज्याची जात प्रशंसनीय आहे तो 'जातिमा'). निंदेमध्ये— 'वलिमा' (ज्याला सुरकुत्या आहेत तो). अतिशायनमध्ये— 'बुद्धिमा' (अतिशय बुद्धी असलेला). नित्ययोगामध्ये— 'जुतिमा' (नेहमी तेज असलेला). संसर्गामध्ये— 'हलिद्दिमा' (हळदीचा संसर्ग असलेला). "तमेत्थस्सत्थीति" हा अधिकार (नियम) आहे. วนฺตฺววณฺณา. 'अ' किंवा 'आ' (अवर्ण) अंत असणाऱ्या प्रथमा विभक्तीतील शब्दापासून 'मन्तु' च्या अर्थात 'वन्तु' प्रत्यय होतो. ปฐมนฺตโต อวณฺณนฺตา มนฺตฺวตฺเถ วนฺตุ โหติ-สีลวา, ทยาวา-อวณฺณาติ กึ? พุทฺธิมา. प्रथमा विभक्तीतील 'अ' किंवा 'आ' (अवर्ण) अंत असणाऱ्या शब्दापासून 'मन्तु' च्या अर्थामध्ये 'वन्तु' प्रत्यय होतो. जसे की— सीलवा (शीलवान), दयावा (दयाळू). "अवर्णा" (अ किंवा आ अंत असणारे) असे का म्हटले आहे? कारण— बुद्धिमा (येथे 'इ' अंत असल्याने 'मन्तु' चा 'बुद्धिमा' असाच प्रयोग होतो). ทณฺฑาทิตฺวิกอี. 'दण्ड' इत्यादी शब्दांनंतर 'मन्तु' च्या अर्थात विकल्पेकरून 'इक' आणि 'ई' हे प्रत्यय होतात. ทณฺฑาทีหิ อิก อี โหนฺติ วา มนฺตฺวตฺเถ-ทณฺฑิโก, ทณฺฑี-คนฺธิโก คนฺธิ-อิติสทฺทสฺส วิสสนิยมนฺตฺถตฺตา กุโต จิ ทฺเว กุโตเจ กเมกํว-นาวิโก, สุขี. 'दण्ड' इत्यादी शब्दांपासून 'मन्तु' च्या अर्थामध्ये विकल्पेकरून 'इक' आणि 'ई' हे प्रत्यय होतात. जसे की— दण्डिको, दण्डी (दंडा धारण करणारा); गन्धिको, गन्धी (सुगंध असलेला). 'इति' शब्दाच्या नियमन अर्थामुळे काही शब्दांपासून दोन्ही प्रत्यय होतात, तर काहींपासून एकच होतो. जसे की— नाविको (नाविक - फक्त 'इक'), सुखी (सुखी - फक्त 'ई'). ตปาทิหิ สฺสี. 'तप' इत्यादी शब्दांनंतर 'मन्तु' च्या अर्थात विकल्पेकरून 'स्सी' प्रत्यय होतो. ตปาทิโต วา สฺสี โหติ มนฺตฺวตฺเถ-ตปสฺสี, ยสสฺสี-วาตฺเวจ-ยสวา. 'तप' इत्यादी शब्दांपासून 'मन्तु' च्या अर्थामध्ये विकल्पेकरून 'स्सी' प्रत्यय होतो. जसे की— तपस्सी (तपस्वी), यसस्सी (यशस्वी). "वा" (विकल्पेकरून) म्हटल्यामुळे— यसवा (यशस्वी - 'वन्तु' प्रत्यय लागून) असेही रूप होते. สทฺธาทิตฺว. 'सद्धा' (श्रद्धा) इत्यादी शब्दांनंतर 'मन्तु' च्या अर्थात विकल्पेकरून 'अ' प्रत्यय होतो. สทฺธาทีหิมนฺตฺวตฺถอโหติวา-สทฺโธ, ปญฺโญ-วาตฺเวว-ปญฺญวา. 'सद्धा' (श्रद्धा) इत्यादी शब्दांपासून 'मन्तु' च्या अर्थामध्ये विकल्पेकरून 'अ' प्रत्यय होतो. जसे की— सद्धो (श्रद्धाळू), पञ्ञो (बुद्धिमान). "वा" (विकल्पेकरून) म्हटल्यामुळे— पञ्ञवा (बुद्धिमान - 'वन्तु' प्रत्यय लागून) असेही रूप होते. เณ ตปา. 'तप' शब्दापासून 'मन्तु' च्या अर्थात 'ण' प्रत्यय होतो. ตปสทฺทา เณ โหติ มนฺตฺวตฺเถ-ตาปโส-มนาทิตฺตา ‘‘มนาทีนํ สก’’อิติ ณนุพนฺเธ สก-‘‘มายาเมธาหิ วี’’ติ มนฺตฺวตฺเถ วี-มายาวิ, เมธาวี. 'तप' शब्दापासून 'मन्तु' च्या अर्थामध्ये 'ण' प्रत्यय होतो. जसे की— तापसो (तपस्वी). मनादि गणात असल्यामुळे "मनादीनं सक" या सूत्रानुसार 'ण' अनुबंध असताना 'सक' आदेश होतो. "मायामेधाही वी" या सूत्रानुसार 'मन्तु' च्या अर्थात 'वी' प्रत्यय होतो, जसे की— मायावी, मेधावी. โต ปญฺจมฺยา. पंचमी विभक्तीत असलेल्या शब्दापासून बहुधा 'तो' प्रत्यय होतो. ปญฺจมฺยนฺตา พหุลํ โต โหติ-คามสฺมา คามโต-อิเมน กึ สทฺเทหิ โตมฺหิ-‘‘อิโต เตตฺโต กุโต’’ติ อิมสฺส ฏิ นิปจฺจเต เอตสฺส ฏเอต กสฺส กุตฺตญฺจ-อิมสฺมา อิโต, เอตสฺมา อโต เอตฺโต, กสฺมา กุโต. पंचमी विभक्तीत असलेल्या शब्दापासून बहुधा 'तो' प्रत्यय होतो. जसे की— गामस्मा चे गामतो (गावापासून). 'इम', 'एत' आणि 'किं' या शब्दांनंतर 'तो' प्रत्यय लागताना "इतो तेत्तो कुतो" या सूत्रानुसार निपातनाने 'इम' च्या जागी 'इ', 'एत' च्या जागी 'एत/एत्' आणि 'किं' च्या जागी 'कु' आदेश होतो. जसे की— इमस्मा चे इतो (यापासून), एतस्मा चे अतो किंवा एत्तो (त्यापासून), कस्मा चे कुतो (कशापासून/कुठून). อภฺยาทิหิ. 'अभि' इत्यादी शब्दांनंतरही 'तो' प्रत्यय होतो. อภิอาทีหิ โต โหติ-อปญฺจมฺยนฺเตหิปิ วิธานตฺโต’ยํ-อภิโต, ปริโต, ปจฺฉโต, เหฏฺฐโต. 'अभि' इत्यादी शब्दांपासून 'तो' प्रत्यय होतो. हा प्रत्यय पंचमी विभक्ती नसलेल्या शब्दांपासूनही विहित केला आहे. जसे की— अभितो (समोर/जवळ), परितो (सर्व बाजूंनी), पच्छतो (मागून/मागे), हेट्ठतो (खालून/खाली). อาทฺยาทีหิ. 'आदि' इत्यादी शब्दांनंतर 'तो' प्रत्यय होतो. อาทิปฺปภุตีหิ โต โหติ-อาโท อาทิโต, มชฺเฌ มชฺฌโต, ยํ ยโต. 'आदि' इत्यादी शब्दांपासून 'तो' प्रत्यय होतो. जसे की— आदो चे आदितो (सुरुवातीपासून), मज्झे चे मज्झतो (मध्यापासून), यं चे यतो (ज्यापासून). สพฺพาทิโต สตฺตมฺยา ตฺรตฺถา. 'सब्ब' इत्यादी शब्दांहून सप्तमी विभक्तीच्या अर्थात 'त्र' आणि 'त्थ' हे प्रत्यय होतात. สพฺพาทีหิ สตฺตมฺยนฺเตหิ ตฺรตฺถา โหนฺติ-สพฺพสฺมึ สพฺพตฺร, สพฺพตฺถ-ยสฺมึ ยตฺร, ยตฺถ-พหุลาธิการา น ตุมฺหามฺเหหิ. सप्तम्यन्त 'सब्ब' इत्यादी शब्दांहून 'त्र' आणि 'त्थ' प्रत्यय होतात - जसे की, sabbasmiṃ (सर्वांमध्ये) या अर्थी sabbatra, sabbattha; yasmiṃ (ज्यामध्ये) या अर्थी yatra, yattha. 'बहुलाधिकारा'मुळे (नियम बहुल असल्यामुळे) 'तुम्ह' (तुम्ही) आणि 'अम्ह' (आम्ही) या शब्दांहून हे प्रत्यय होत नाहीत. กตฺเถตฺถ กุตฺราตฺร กฺเวหิธ. कत्थ (kattha), एत्थ (ettha), कुत्र (kutra), अत्र (atra), क्व (kva), इह (iha), इध (idha) हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात. เอเต สทฺทา นิปจฺจนฺเต-กสฺมึ กตฺถ, กุตฺร, กฺว-เอตสฺมึ เอตฺถ, อตฺร-อสฺมึ อิห, อิธ. हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात - kasmiṃ (कशामध्ये/कोठे) या अर्थी kattha, kutra, kva; etasmiṃ (यामध्ये/येथे) या अर्थी ettha, atra; asmiṃ (यात/येथे) या अर्थी iha, idha. ธี สพฺพา วา. सप्तम्यन्त 'सब्ब' शब्दाहून 'धि' प्रत्यय विकल्पाने होतो. สตฺตมฺยนฺตโต สพฺพสฺมา ธิวา โหติ-สพฺพธิ-วาติกึ, สพฺพตฺร. सप्तम्यन्त 'सब्ब' शब्दाहून 'धि' प्रत्यय विकल्पाने होतो - जसे की, sabbadhi. 'विकल्पाने' (वा) असे का म्हटले? कारण विकल्प नसताना 'sabbatra' असे रूप होते. ยา หึ. सप्तम्यन्त 'य' (ya) शब्दाहून 'हिं' (hiṃ) प्रत्यय होतो. สตฺตมฺยนฺตา ยสทฺทา หึ วา โหติ-ยหึ-วาตฺเวว-ยตฺร. सप्तम्यन्त 'य' शब्दाहून 'हिं' प्रत्यय विकल्पाने होतो - जसे की, yahiṃ. 'विकल्पाने' (वा) असे का म्हटले? कारण विकल्प नसताना 'yatra' असे रूप होते. ตา หจ. सप्तम्यन्त 'त' (ta) शब्दाहून 'हं' (haṃ) आणि 'हिं' (hiṃ) हे प्रत्यय विकल्पाने होतात. สตฺตมฺยนฺตา ตโต วาหํ โหติ หิญฺจ-ตหํ, ตหึ-วาตฺเวว-ตตฺร. सप्तम्यन्त 'त' शब्दाहून 'हं' आणि 'हिं' प्रत्यय विकल्पाने होतात - जसे की, tahaṃ, tahiṃ. 'विकल्पाने' (वा) असे का म्हटले? कारण विकल्प नसताना 'tatra' असे रूप होते. กุหึกตํ. कुहिं (kuhiṃ) आणि कहं (kahaṃ) हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात. กึสทฺทา สตฺตมฺยนฺตา หึ หํ นิปจฺจนฺเต กิสฺส กุกา จ-กุหึ กหํ-สพฺพสฺมึ กาเลจฺเจวมาทิ วิคฺคเห. सप्तम्यन्त 'किं' (kiṃ) शब्दाहून 'हिं' (hiṃ) आणि 'हं' (haṃ) प्रत्यय निपातनाने होतात आणि 'किं' च्या जागी अनुक्रमे 'कु' (ku) आणि 'क' (ka) आदेश होतात - जसे की, kuhiṃ, kahaṃ. 'सब्बस्मिं काले' (सर्व काळात) इत्यादी विग्रहांमध्ये (पुढील प्रत्यय होतात). สพฺเพกญฺญยเตหิ กาเล ทา. 'सब्ब', 'एक', 'अञ्ञ', 'य', 'त' या सप्तम्यन्त शब्दांहून काळाच्या (वेळेच्या) अर्थी 'दा' (dā) प्रत्यय होतो. เอเตหิ สตฺตมฺยนฺเตหิ กาเล ทา โหติ-สพฺพทา เอกทา, อญฺญทา, ยทา, ตทา. या सप्तम्यन्त शब्दांहून काळाच्या अर्थी 'दा' प्रत्यय होतो - जसे की, sabbadā (सर्वदा/नेहमी), ekadā (एकदा), aññadā (इतर वेळी), yadā (जेव्हा), tadā (तेव्हा). กทา กุทา สทา ธุเนทานิ. कदा (kadā), कुदा (kudā), सदा (sadā), अधुना (adhunā), इदानि (idāni) हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात. เอเต สทฺทา นิปจฺจนฺเต-กสฺมึ กาเล กทา, กุทา-สพฺพสฺมึ กาเล สทา-อิมสฺมึ กาเล อธุนา, อิทานิ. हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात - kasmiṃ kāle (कोणत्या वेळी) या अर्थी kadā, kudā; sabbasmiṃ kāle (सर्व वेळी) या अर्थी sadā; imasmiṃ kāle (या वेळी) या अर्थी adhunā, idāni. อชฺช สชฺชวปรชฺเชวตรหิ กรหา. अज्ज (ajja), सज्ज (sajju), अपरज्ज (aparajju), एतरहि (etarahi), करहा (karahā) हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात. เอเต สทฺทา นิปจฺจนฺเต- हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात - ปกติ ปจฺจโย อาเทโส กาลวิเสโสติ สพฺพเมตํ นิปาตนา ลพฺภติ-อิมสฺส โฏ ชฺโช วาหนิ นิปจฺจเต-อสฺมึ อหนิ อชฺช-สมานสฺส สภาโวชฺชุ วาหติ-สมาเน อหติ สชฺชุ-อปรสฺมา ชฺชุ วาหติ-อปรสฺมึ อหติ อปรชฺชุ-อิมสฺเสโต กาเลรหิ จ-อิมสฺมึ กาลฺเญตรหิ-กึสทฺทสฺส โก รห วานชฺชตเน-กสฺมึ กาเล กรห. मूळ प्रकृती (pakati), प्रत्यय (paccayo), आदेश (ādeso) आणि विशिष्ट काळ (kālaviseso) हे सर्व निपातनाने प्राप्त होते - 'इम' (ima) शब्दाच्या जागी 'अज्ज' (ajja) हा आदेश 'दिवस' (ahani) या अर्थी निपातनाने होतो: asmiṃ ahani (या दिवशी) या अर्थी ajja; 'समान' (samāna) शब्दाच्या जागी 'सज्जु' (sajju) होतो: samāne ahani (त्याच दिवशी) या अर्थी sajju; 'अपर' (apara) शब्दाहून 'ज्जु' (jju) होतो: aparasmiṃ ahani (दुसऱ्या दिवशी) या अर्थी aparajju; 'इम' शब्दाच्या जागी 'एत' (eta) आणि काळाच्या अर्थी 'रहि' (rahi) प्रत्यय होतो: imasmiṃ kāle (या काळी) या अर्थी etarahi; 'किं' शब्दाच्या जागी 'क' (ka) आणि अनद्यतन (भूत किंवा भविष्य) काळात 'रहा' (rahā) प्रत्यय होतो: kasmiṃ kāle (कोणत्या काळी) या अर्थी karaha. สพฺพาทีหิ ปกาเร ถา. 'सब्ब' इत्यादी शब्दांहून प्रकार (रीत/पद्धत) या अर्थी 'था' (thā) प्रत्यय होतो. สามญฺญสฺส เภทโก วิเสโส ปกาโร, ตตฺถ วตฺตมาเนหิ สพฺพาทีหิ ถา โหติ-สพฺเพน ปกาเรน สพฺพถา-ยถา, ตถา. सामान्य गोष्टीचा भेद करणारा विशेष म्हणजे 'प्रकार' होय. त्या अर्थी वर्तमान असलेल्या 'सब्ब' इत्यादी शब्दांहून 'था' प्रत्यय होतो - जसे की, sabbena pakārena (सर्व प्रकारे) या अर्थी sabbathā; yathā (ज्या प्रकारे), tathā (त्या प्रकारे). กถมิตฺถํ. कथं (kathaṃ) आणि इत्थं (itthaṃ) हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात. เอเต สทฺทา นิปจฺจนฺเต ปกาเรติ กิมิเมหิ ถํปจฺจโยเกต เตสํ ยถากฺกมํ-เกน ปกาเรน กถํ, อิมินา ปกาเรน อิตฺถํ. प्रकार या अर्थी 'किं' (kiṃ) आणि 'इम' (ima) शब्दांहून 'थं' (thaṃ) प्रत्यय होऊन आणि त्यांच्या जागी अनुक्रमे आदेश होऊन हे शब्द निपातनाने सिद्ध होतात - जसे की, kena pakārena (कोणत्या प्रकारे) या अर्थी kathaṃ; iminā pakārena (या प्रकारे) या अर्थी itthaṃ. เอเกน ปกาเรน เอกํ วา ปการํ กโรติจฺเจวมาทิวิคฺคเห. 'ekena pakārena' (एका प्रकारे) किंवा 'ekaṃ vā pakāraṃ karoti' (किंवा एक प्रकार करतो) इत्यादी विग्रहांमध्ये (पुढील प्रत्यय होतो). ธา สงฺขฺยาหิ. संख्यावाचक शब्दांहून प्रकार या अर्थी 'धा' (dhā) प्रत्यय होतो. สงฺขฺยาวาจีหิ ปกาเร ธา ปโร โหติ-เอกธา กโรติ-ทฺวิธา,ติธา, จตุธา, ปญฺจธา กโรติจฺเจวมาทิวิคฺคโห-พหุสทฺทา เวปุลฺลวาจี สงฺขฺยาวาจี จ-ยทา สงฺขฺยาวาจี ตทา พหุธา กโรติ. संख्यावाचक शब्दांहून प्रकार या अर्थी 'धा' प्रत्यय लागतो - जसे की, ekadhā karoti (एका प्रकारे करतो), dvidhā (दोन प्रकारे), tidhā (तीन प्रकारे), catudhā (चार प्रकारे), pañcadhā karoti (पाच प्रकारे करतो) इत्यादी विग्रह आहेत. 'बहु' (bahu) हा शब्द विपुलतावाचक आणि संख्यावाचकही आहे. जेव्हा तो संख्यावाचक असतो, तेव्हा 'bahudhā karoti' (अनेक प्रकारे करतो) असे रूप होते. เวกา ชฺฌํ. 'एक' (eka) शब्दाहून प्रकार या अर्थी 'ज्झं' (jjhaṃ) प्रत्यय विकल्पाने होतो. เอกสฺมา ปกาเร ชฺฌํ วา โหติ-เอกชฺฌํ-วาติ กึ, เอกธา. 'एक' शब्दाहून प्रकार या अर्थी 'ज्झं' प्रत्यय विकल्पाने होतो - जसे की, ekajjhaṃ (एकत्र/एका ठिकाणी). 'विकल्पाने' (वा) असे का म्हटले? कारण विकल्प नसताना 'ekadhā' असे रूप होते. ทฺวิตีเหธา. 'द्वि' (dvi) आणि 'ति' (ti) शब्दांहून प्रकार या अर्थी 'एधा' (edhā) प्रत्यय विकल्पाने होतो. ทฺวิตีหิ ปกาเร เอธา วา โหติ-เมธา, เตธา-วาตฺเวว-ทฺวิธา, ติธา-เอกํ วารํ ภุญฺชติจฺเจวมาทิวิคฺคเห. 'द्वि' आणि 'ति' शब्दांहून प्रकार या अर्थी 'एधा' प्रत्यय विकल्पाने होतो - जसे की, dvedhā (पाठात medhā), tedhā. 'विकल्पाने' (वा) असे का म्हटले? कारण विकल्प नसताना 'dvidhā', 'tidhā' अशी रूपे होतात. 'ekaṃ vāraṃ bhuñjati' (एकदा जेवतो) इत्यादी विग्रहांमध्ये (पुढील प्रत्यय होतो). วาร สงฺขฺยาย กฺขตฺตุํ. वार (वेळ/खेप) दर्शवणाऱ्या संख्यावाचक शब्दाहून 'क्खत्तुं' (kkhattuṃ) प्रत्यय होतो. วารสมฺพนฺธิติยา กติสงฺขฺยาย กฺขตฺตุํ โหติ-กติวาเร ภุชติ กติกฺขตฺตุํ ภุญฺชติ. वाराशी (वेळेशी) संबंधित संख्यावाचक शब्दाहून 'क्खत्तुं' प्रत्यय होतो - जसे की, kativāre bhuñjati (किती वेळा जेवतो) या अर्थी katikkhattuṃ bhuñjati. พหุมฺหา ธา จ ปจฺจาสตฺติยํ. 'बहु' (bahu) शब्दाहून वाराशी (वेळेशी) संबंधित अर्थी 'धा' (dhā) आणि 'क्खत्तुं' (kkhattuṃ) प्रत्यय होतात, जर वारंवारता (paccāsatti) दर्शवायची असेल. วารสมฺพนฺธินิยา พหุสงฺขฺยาย ธา โหติ กฺขตฺตุญฺจ วารานญฺเจ ปจฺจาสตฺติ โหติ-พหุวาเร พุญฺชติ พหุธา วา ทิวสสฺส พุญฺชติ, ขหุกฺขตฺตุํ วา, ปจฺจาสตฺติยนฺติ กึ, พหุกฺขตฺตุํ มกาสสฺส ภุญฺชติ. वाराशी संबंधित 'बहु' शब्दाहून 'धा' आणि 'क्खत्तुं' प्रत्यय होतात, जर त्या वेळांमध्ये वारंवारता (जवळकी) असेल - जसे की, bahuvāre bhuñjati (अनेक वेळा जेवतो) या अर्थी bahudhā vā divasassa bhuñjati (दिवसातून अनेकदा जेवतो) किंवा bahukkhattuṃ vā. 'वारंवारता असेल तरच' (paccāsattiyaṃ) असे का म्हटले? कारण वारंवारता नसताना 'bahukkhattuṃ māsassa bhuñjati' (महिन्यातून अनेकदा जेवतो) असे रूप होते. สกึ วา. 'एकदा' (ekaṃ vāraṃ) या अर्थी 'सकिं' (sakiṃ) हा शब्द विकल्पाने निपातनाने सिद्ध होतो. เอกํ วารมิจฺจสฺมึ อตฺเถ สกินฺติ วา นิปจฺจเต เอกสฺมา กึ เอกสฺส จ สาเทโส-เอกํ วารํ ภุญฺชติ สกึ ภุญฺชติ-วาติ กึ, เอกกฺขตฺตุํ ภุญฺชติ. 'ekaṃ vāraṃ' (एकदा) या अर्थी 'सकिं' (sakiṃ) हा शब्द विकल्पाने निपातनाने सिद्ध होतो, ज्यामध्ये 'एक' शब्दाहून 'किं' प्रत्यय होतो आणि 'एक' च्या जागी 'स' (sa) आदेश होतो - जसे की, ekaṃ vāraṃ bhuñjati (एकदा जेवतो) या अर्थी sakiṃ bhuñjati. 'विकल्पाने' (वा) असे का म्हटले? कारण विकल्प नसताना 'ekakkhattuṃ bhuñjati' असे रूप होते. โส วีจฺฉาปฺปกาเรสุ. वीप्सा (पुनरावृत्ती/व्याप्ती) आणि प्रकार या अर्थांमध्ये 'सो' (so) प्रत्यय होतो. กฺริยาย คุเณน ทพฺเพน วา ภินฺเน อตฺเถ วฺยาปิตุมิจฺฉา วีจฺฉาวีจฺฉายมฺปกาเร จ โส โหติ พหุลํ-สามญฺญนิทฺเทสา ยถาสมฺภวํ วิภตฺตฺยนฺตา ยโต กุโต วิสทฺทา โหติ-วิจฺฉายํ-ขณฺฑํ ขณฺฑํ กโรติ ขณฺฑโส กโรติ-สพฺเพน ปกาเรน สพฺพโส. क्रिया, गुण किंवा द्रव्य यांच्याद्वारे भिन्न अर्थांना व्यापून घेण्याची इच्छा म्हणजे 'वीप्सा' (vīcchā) होय. या वीप्सा आणि प्रकार अर्थांमध्ये 'सो' प्रत्यय बहुधा (bahulaṃ) होतो. सामान्य निर्देशामुळे योग्यतेनुसार कोणत्याही विभक्त्यन्त शब्दाहून हा प्रत्यय होतो - वीप्सेमध्ये: khaṇḍaṃ khaṇḍaṃ karoti (तुकडे तुकडे करतो) या अर्थी khaṇḍaso karoti; प्रकार अर्थी: sabbena pakārena (सर्व प्रकारे) या अर्थी sabbaso. อภุต ตพฺภาเว กรายภุโยเค วิการา จี. जे पूर्वी नव्हते ते तसे होणे (अभूततद्भाव) या अर्थी, 'कर' (kara), 'अस' (asa) किंवा 'भू' (bhū) धातूंचा योग असताना, विकारवाचक शब्दाहून 'ची' (cī) प्रत्यय होतो. อวตฺถาวโต’วตฺถนฺตเรนาภุตสฺส ตายาวตฺถาย ภาเว กราสภูหิ สมฺพนฺเธ สติ วการวาจกาจี โหติ-จกาโร‘‘จี กฺริยตฺเถหี’’ติ วิเสสนตฺโถ-อธวลํ ธวลํ กโรตีติ ธวลีกโรติ-อธวโล ธวโล สิยา ภวติ วา ธวลีสิยา. ธวลีภวติ-อภุตตพฺภา เวติ กึ, ฆฏํ กโรติ-กราสภุโยเคติ กึ. อธวโล ธวโล ชาตเต-วิการาติ กึ, สุวณฺณํ กุณฺฑลีกโรติ. एका अवस्थेतून दुसऱ्या अवस्थेत जाणे, जे पूर्वी नव्हते, अशा अभूततद्भाव अर्थी 'कर', 'अस' आणि 'भू' धातूंचा संबंध असताना विकारवाचक शब्दाहून 'ची' (cī) प्रत्यय होतो. 'ची' मधील 'च' कार हा 'cī kriyatthehi' या सूत्रातील विशेषणासाठी आहे - जसे की, adhavalaṃ dhavalaṃ karoti (जे पांढरे नाही ते पांढरे करतो) या अर्थी dhavalīkaroti; adhavalo dhavalo siyā/bhavati (जे पांढरे नाही ते पांढरे होते) या अर्थी dhavalīsiyā, dhavalībhavati. 'अभूततद्भाव अर्थीच' असे का म्हटले? कारण तसे नसताना 'ghaṭaṃ karoti' (घडा बनवतो) असे रूप होते. 'कर, अस, भू धातूंचा योग असतानाच' असे का म्हटले? कारण तसे नसताना 'adhavalo dhavalo jāyate' (जे पांढरे नाही ते पांढरे उत्पन्न होते) असे रूप होते. 'विकारवाचक शब्दाहूनच' असे का म्हटले? कारण विकारालाच प्रत्यय लागतो, जसे की 'suvaṇṇaṃ kuṇḍalīkaroti' (सोन्याचे कुंडल बनवतो - येथे कुंडल हा विकार असल्याने 'कुण्डलीकरोति' असे होते, 'सुवण्णीकरोति' नाही). ณท โย. णद यो. อถ ตพฺพาทโย วุจฺจนฺเต กฺริยตฺเถหิ ‘‘กฺริยตฺถา’’ติ อธิการโต, กฺริยา อตฺโถ เอตสฺสาติ กฺริยาตฺโถ(ธาตุ)-โส จ ทฺวิวิโธ สกมฺมกา กมกฺมกวเสน-ตตฺต ยสฺมึ กฺริยตฺเถ กตฺตุวาจินิ กมฺมํ คเวสียเต, โส สกมฺมโก อิตโร อกมฺมโก-เตสุ ยถารหํ สกมฺม กโต กมฺมาโท การเก กมฺมาวจนิจฺฉายมฺภาเว จ ตพฺพาทโย เวทิตพฺพา-อกมฺมกโต ปน ภาโว กมฺมวชฺชิเต จ การเก-กฺริยาติ จ คมนปจนาทิโก อสตฺตสมฺมโต กตฺตรี กมฺเมวา ปติฏฺฐิโต การกสมูหสาธิโย ปทตฺโถ วุจฺจติ, วุตฺตํหิ. आता 'तब्ब' इत्यादी प्रत्यय सांगितले जातात. 'क्रियार्थ' (धातू) या अधिकारावरून 'क्रियार्थां'पासून (हे प्रत्यय होतात). ज्याचा अर्थ 'क्रिया' आहे तो 'क्रियार्थ' (धातू) होय. तो सकर्मक आणि अकर्मक अशा दोन प्रकारचा आहे. त्यापैकी ज्या कर्तृवाचक क्रियार्थात कर्माची अपेक्षा असते, तो 'सकर्मक' आणि इतर (ज्यात कर्माची अपेक्षा नसते तो) 'अकर्मक' होय. त्यामध्ये योग्यतेनुसार सकर्मक धातूपासून कर्म इत्यादी कारकांमध्ये आणि कर्माची विवक्षा असताना 'तब्ब' इत्यादी प्रत्यय जाणावेत. अकर्मक धातूपासून मात्र 'भाव' (भाववाच्य) आणि कर्माव्यतिरिक्त इतर कारकांमध्ये (हे प्रत्यय होतात). 'क्रिया' म्हणजे जाणे, शिजवणे इत्यादी, जी द्रव्यरूप नसून (असत्त्वसम्मत), कर्ता किंवा कर्मामध्येच प्रतिष्ठित असते आणि कारकसमूहाद्वारे साध्य होणारा पदार्थ म्हटली जाते. कारण असे म्हटले आहे की - ‘‘อทฺทพฺพภุตํ กตฺตาทิ-การกคฺคามสาธิยํ; ปทตฺถํ กตฺตุกมฺมฏาฐํ-กฺริยมิจฺฉนฺติ ตพฺพิทุ’’. "जे द्रव्यरूप नसून कर्ता इत्यादी कारकसमूहाद्वारे साध्य होते, कर्ता आणि कर्माच्या ठिकाणी राहणाऱ्या अशा पदार्थाला विद्वान लोक 'क्रिया' मानतात." กร กรเณ-อกาโร อุจฺจารณตฺโถ-เอวมุตฺตรตฺราปิ-กริติ ฐิเต-พหุลมิติ สพฺพตฺถ วตฺตเต. 'कर' (धातू) करणे या अर्थात आहे. (त्यातील) 'अ'कार हा केवळ उच्चारणासाठी आहे. पुढेही असेच समजावे. 'कर' अशी स्थिती असताना, 'बहुळम्' (बहुधा) हा अधिकार सर्वत्र लागू होतो. ภาวกมฺเมสุ ตพฺพานียา. भाव आणि कर्म अर्थांमध्ये 'तब्ब' आणि 'अनीय' प्रत्यय होतात. ตพฺพอนิยา กฺริยตฺถา ปเร ภาวกมฺเมสุ พหุลํ ภวนฺติ-ปจฺจเยติ ปจฺจยวิธานโตญฺญสฺมึ สพฺพตฺถาธิกาโร. 'तब्ब' आणि 'अनीय' प्रत्यय क्रियार्थाच्या (धातूच्या) पुढे भाव आणि कर्म अर्थांमध्ये बहुधा होतात. 'प्रत्ययः' हा अधिकार प्रत्ययविधानामुळे इतर सर्व ठिकाणी लागू होतो. ตุํตุนตพฺเพสุ วา. 'तुं', 'तुन' आणि 'तब्ब' प्रत्यय असताना विकल्पेकरून (आ होतो). ตุมาทิสุ ปจฺจเยสุ วา กรสฺส อา โหติ-อญฺญตฺร. 'तुं' इत्यादी प्रत्यय असताना 'कर' धातूच्या (अंत्य वर्णाला) विकल्पेकरून 'आ' होतो, इतर ठिकाणी नाही. ปรรูปมยกาเร พฺยญฺชเน. 'य'कार नसलेल्या व्यंजनादी प्रत्यय असताना पररूप होते. กฺริยตฺถานมนฺตพฺยญฺชนสฺส ปรรูปํ โหติ ยการโต’ญฺญสฺมึ พฺยญฺชนาโท ปจฺจเยติ ปรรูปํ-กรณํ กาตพฺพํ. กตฺตพฺพํ วา-นปุํสกลิงฺคํ-ภาวสฺเสกตฺตาปิ ตพฺพาทฺยภิหิโต ภาโว ทพฺพมิว ปกาสตีติ พหุวจนญฺจ โหติ-กมฺเม-กรียตีติ กาตพฺโพก กตฺตพฺโพ-อภิเธยฺยสฺเสว ลิงฺควจนานิ. क्रियार्थांच्या (धातूंच्या) अंत्य व्यंजनाला 'य'कार नसलेल्या व्यंजनाने सुरू होणाऱ्या प्रत्ययामध्ये पररूप होते, म्हणून पररूप होऊन - करणे म्हणजे 'कातब्बं' किंवा 'कत्तब्बं'. हे नपुंसकलिंगी रूप आहे. भावाचे एकवचन असले तरी 'तब्ब' इत्यादी प्रत्ययांनी सांगितलेला भाव द्रव्यासारखा भासतो, म्हणून बहुवचनही होते. कर्म अर्थात - जे केले जाते ते 'कातब्बो' किंवा 'कत्तब्बो'. येथे विशेष्याप्रमाणेच लिंग आणि वचन होतात. วิเสสฺสลิงฺคา ตพฺพาทิ ตตฺถาโท ปญฺจ ภาวชา,นปุํสเก สิยุํ ภาเว กฺโต จาโน อกนฺตรี; ภาวสฺมึ ฆฺยณ ปุเม เอวํ อิยุวณฺณคหาทิโช,อปฺปจฺจโย’ปิ จาสงกฺขฺยา ตุมาทิ กตฺวานฺตกา สิยุํ. 'तब्ब' इत्यादी प्रत्यय विशेष्याप्रमाणे लिंग असणारे असतात. त्यामध्ये सुरुवातीचे पाच भाववाचक प्रत्यय भाव अर्थात नपुंसकलिंगात असतात; 'क्त' आणि 'अन' प्रत्यय अकर्तृवाचक कारकात (नपुंसकलिंगात असतात); भाव अर्थात 'घ्यण' प्रत्यय पुल्लिंगात असतो; तसेच 'इ', 'उ' वर्ण आणि 'गह' इत्यादी धातूंपासून होणारा 'अ' प्रत्यय देखील (पुल्लिंगात असतो); आणि 'तुं' इत्यादी व 'त्वा' प्रत्ययान्त शब्द संख्यारहित (अव्यय) असतात. อนีเย- 'अनीय' प्रत्यय असताना - รา นสฺส เณ. 'र'काराच्या पुढे 'न'काराचा 'ण'कार होतो. รานฺตโต กฺริยตฺถา ปรสฺส ปจฺจยนการสฺส โณ โหติ-กรณียํ-พหุลาธิการา กรณาทิสุปิ ภวนฺตี-สินา โสเจยฺเย-ทิวา ทิเสโส-สินายนฺเต’เนนาติ สินานียํ(จุณฺณํ)-ทา ทาเน-ทิยเต อสฺสาติ ทานีโย-(พฺราหฺมเณ)-ฐา คตินิวุตฺติยํ-อุป ปุพฺโพ-อุปติฏฺฐตีติ อุปฏฺฐานีโย-(สิสฺโส)-ธาตุนมเนกตฺถตฺตาเยว ฐา อิจฺจสฺมึ ธาตุมฺหิ สนฺตเมโวปฏฺฐานตฺถํ อุปสทฺโท โชเตติ-วุตฺตํหิ. 'र'कारान्त क्रियार्थाच्या (धातूच्या) पुढे असलेल्या प्रत्ययातील 'न'काराचा 'ण'कार होतो - उदा. करणीयं. 'बहुळ' अधिकाराने करण इत्यादी कारकांमध्येही हे प्रत्यय होतात - 'सिना' (न्हाणे) शुद्धीकरणाच्या अर्थात - दिवसाचा विशेष - ज्याच्याद्वारे स्नान केले जाते ते 'सिनानीयं' (स्नानचूर्ण). 'दा' देणे या अर्थात - ज्याला दिले जाते तो 'दानीयो' (ब्राह्मण). 'ठा' गती थांबवणे (स्थिर राहणे) या अर्थात - 'उप' उपसर्ग पूर्व असताना - जो सेवा करतो तो 'उपठ्ठानीयो' (शिष्य). धातूंचे अनेक अर्थ असल्यामुळेच 'ठा' या धातूमध्ये आधीच विद्यमान असलेला 'सेवा करणे' हा अर्थ 'उप' हा उपसर्ग प्रकट करतो. कारण असे म्हटले आहे की - ‘‘สนฺตเมว หิ นีลาทิ-วณฺณํ ทีปาทโย วิย; ธาตุสฺมึ สนฺตเมวตฺถํ อุปสคฺคา ปกาสโก’’. "ज्याप्रमाणे दिवा इत्यादी आधीच विद्यमान असलेल्या निळ्या इत्यादी रंगांना प्रकाशित करतात, त्याचप्रमाणे उपसर्ग धातूमध्ये आधीच विद्यमान असलेल्या अर्थाला प्रकाशित करतात." วจ พฺยตฺตวจเน- 'वच' स्पष्ट बोलणे या अर्थात - ฆฺยณ. 'घ्यण' प्रत्यय होतो. ภาวกมฺเมสุ กฺริยตฺถา ปโร ฆฺยณ โหติ พหุลํ-ฆการณการานุพนฺธา. भाव आणि कर्म अर्थांमध्ये क्रियार्थाच्या (धातूच्या) पुढे 'घ्यण' प्रत्यय बहुधा होतो. (यात) 'घ'कार आणि 'ण'कार हे अनुबंध आहेत. กคา จชานํ ฆานุพนฺเธ. 'घ'कार अनुबंध असताना 'च' आणि 'ज' यांच्या जागी अनुक्रमे 'क' आणि 'ग' होतात. ฆานุพนฺเธ จการชการนฺตานํ กฺริยตฺถานํ กคา โหนฺติ ยถากฺกมนฺติ วสฺส โก. 'घ'कार अनुबंध असताना 'च'कारान्त आणि 'ज'कारान्त क्रियार्थांच्या जागी अनुक्रमे 'क' आणि 'ग' होतात, म्हणून 'वच' च्या 'च' चा 'क' होतो. อสฺสา ณนุพนฺเธ. 'ण'कार अनुबंध असताना 'अ'काराचा 'आ' होतो. ณการานุพนฺเธ ปจฺจเย ปเร อุปนฺตสฺส อการสฺส อา โหติ-วุจฺจตีติ วากฺยํ-จิ วเย-ฆฺยณ. 'ण'कार अनुबंध असलेला प्रत्यय पुढे असताना उपधा 'अ'काराचा 'आ' होतो - जे बोलले जाते ते 'वाक्यं'. 'चि' गोळा करणे या अर्थात - 'घ्यण' प्रत्यय होतो. ยุวณฺณานมฺโญ ปจฺจเย. 'ञ'कार नसलेला प्रत्यय पुढे असताना 'इ' आणि 'उ' वर्णांचा अनुक्रमे 'ए' आणि 'ओ' होतो. อิวณฺณุวณฺณนฺตานํ กฺริยตฺตานํ เอ โอ โหนฺติ ยถากฺกมํ ปจฺจเยติ อิสฺเสกาเร‘‘สรมฺหา ทฺเว’’ติ ยสฺส ทฺวิภาเว จ-จยนํ จิยตีติ วา เจยฺยํ-ทา ทาเน. 'इ' वर्ण आणि 'उ' वर्ण अन्त असणाऱ्या क्रियार्थांच्या जागी प्रत्यय पुढे असताना अनुक्रमे 'ए' आणि 'ओ' होतात. 'इ' चा 'ए'कार झाल्यावर 'सरम्हा द्वे' या सूत्राने 'य' चे द्वित्व होते - गोळा करणे किंवा जे गोळा केले जाते ते 'चेय्यं'. 'दा' देणे या अर्थात. อาสฺเส จ. 'आ'काराचा 'ए' होतो. อาการนฺตโต ฆฺยณ โหติ ภาวกมฺเมสุ อาสฺส เอ จ-ทานํ ทียตีติ วา เทยฺยํ-วท ปจเน‘‘วทาทีหิ โย’’ติ ภาวกมฺเมสุ โยจวคฺคปุพฺพรูเปสุ-วทนํ วทิตพฺพํ วา วชฺชํ-อม คม คมเน วทาทิตฺตา เย-คมนํ คมฺยเตติ วา คมฺยํ-คุห สํวรเณ-‘‘คุหาทีหิยก’’อิติ ภาวกมฺเมสุ ยก-กกาโร กานุพนฺธการิยตฺโถ. आकारान्त धातूच्या पुढे भाव आणि कर्म अर्थांमध्ये 'घ्यण' प्रत्यय होतो आणि 'आ' चा 'ए' होतो - देणे किंवा जे दिले जाते ते 'देय्यं'. 'वद' बोलणे/शिजवणे या अर्थात - 'वदादीहि यो' या सूत्राने भाव आणि कर्म अर्थांमध्ये 'य' प्रत्यय आणि च-वर्ग पररूप झाल्यावर - बोलणे किंवा जे बोलले पाहिजे ते 'वज्जं'. 'अम', 'गम' जाणे या अर्थात, 'वदादि' गणामध्ये असल्यामुळे 'य' प्रत्यय झाल्यावर - जाणे किंवा जेथे गेले जाते ते 'गम्यं'. 'गुह' लपवणे या अर्थात - 'गुहादीहि यक' या सूत्राने भाव आणि कर्म अर्थांमध्ये 'यक' प्रत्यय होतो - (यात) 'क'कार हा 'क'कार अनुबंधाचे कार्य करण्यासाठी आहे. ลหุสฺสุปนฺตสฺส लघु उपधा असलेल्या (स्वराचा गुण होतो). ลหุภุตสฺส อุปนฺตสฺส ยุวณฺณสฺส เอ โอ โหนฺติ ยถากฺกมํ ปจฺจเยติ สมฺปตฺตสฺโส การสฺส ‘‘นเต กานุพนฺธนาคเมสุ’’ติ ปฏิเสโธ-คุหณํ คุหิตพฺพํ กวา คุยฺหํ-วิปลฺลาโส-สาส อนุสฏฺฐิยํ-ยก. लघु असलेल्या उपधा 'इ' आणि 'उ' वर्णांच्या जागी प्रत्यय पुढे असताना अनुक्रमे 'ए' आणि 'ओ' होतात. येथे प्राप्त झालेल्या 'ओ'काराचा 'न ते कानुबन्धनागमेसु' या सूत्राने निषेध होतो - लपवणे किंवा जे लपवले पाहिजे ते 'गुय्हं' (येथे वर्णांचा विपर्यास होतो). 'सास' उपदेश करणे या अर्थात - 'यक' प्रत्यय होतो. สาสสฺย สิส วา. 'सास' धातूच्या जागी विकल्पेकरून 'सिस' होतो. สาสสฺส วา สิส โหติ กานุพนฺเธ-ปุพฺพรูเป-สาสียตีติ สิสฺโส-สิสาเทสาภาวปกฺเข- 'क'कार अनुबंध पुढे असताना 'सास' च्या जागी विकल्पेकरून 'सिस' होतो - पूर्वरूप झाल्यावर - ज्याला उपदेश केला जातो तो 'सिस्सो' (शिष्य). 'सिस' आदेश न होण्याच्या पक्षात - เออิ พฺยญฺชนสฺส. व्यंजनादी प्रत्यय पुढे असताना 'ए' आणि 'इ' होतात. กฺริยตฺถา ปรสฺส พฺยญฺชนาทิปฺปจฺจยสฺส ญิ วา โหติ-ญกาโร ‘‘ญิ ลสฺเส’’ติ วิเสสนตฺโถ,สาสิโย-ววตฺถิตวิภาสตฺตา วาธิการสฺส กฺวจิ ญิสฺสาภาโว-กตฺตพฺพํ. क्रियार्थाच्या (धातूच्या) पुढे असलेल्या व्यंजनादी प्रत्ययाला विकल्पेकरून 'ञि' आगम होतो. 'ञ'कार हा 'ञि लस्से' या सूत्रातील विशेषणासाठी आहे - उदा. सासियो. 'वा' या अधिकाराच्या व्यवस्थित विभाषेमुळे काही ठिकाणी 'ञि' चा अभाव होतो - उदा. कत्तब्बं. กตฺตริ ลตุณกา. कर्ता कारकात 'लतु' आणि 'णक' प्रत्यय होतात. กตฺตริ การเก กฺริยตฺถา ลตุณกา โหนฺติ-ลกาโร ‘‘ลตุปิตาทนมา สิมฺหี’’ติ วิเสสนตฺโถ-ททาตีติ ทาตา-ณเก- कर्ता कारकात क्रियार्थाच्या (धातूच्या) पुढे 'लतु' आणि 'णक' प्रत्यय होतात. 'ल'कार हा 'लतुपितानमं सिम्ही' या सूत्रातील विशेषणासाठी आहे - जो देतो तो 'दाता'. 'णक' प्रत्यय असताना - อสฺสาณปิมฺหิ ยุก. 'अ'कारान्त धातूला 'ण' किंवा 'प' अनुबंध असलेला प्रत्यय पुढे असताना 'युक' आगम होतो. อการนฺตสฺส กฺริยตฺถสฺส ยุก โหติ ณปิโต’ญฺญสฺมึ ณนุพนฺเธ, ทายโก-วธหึสายํ-‘‘ญิพฺยญฺชนสฺสา’’ติ ญิ-วเธตีติวธิตา,ณเก-‘‘อสฺสานนุพนฺเธ’’ติ อุปนฺตสฺส อสฺส อาตฺเตสมฺปตฺเต- आकारान्त क्रियार्थाला 'ण' आणि 'प' व्यतिरिक्त इतर 'ण'कार अनुबंध असलेला प्रत्यय पुढे असताना 'युक' आगम होतो - उदा. दायको. 'वध' हिंसा करणे या अर्थात - 'ञि व्यञ्जनस्स' या सूत्राने 'ञि' आगम होऊन - जो वध करतो तो 'वधिता'. 'णक' प्रत्यय असताना - 'अस्सा णनुबन्धे' या सूत्राने उपधा 'अ'काराला 'आ'कार प्राप्त झाला असता - อญฺญตฺราปิ. इतर ठिकाणीही (निषेध होतो). กานุพนฺธนาคมโต’ญฺญสฺมิมฺปิ เต เอ โอ อา กฺวจิ น โหนฺตีกิ ปฏาเสโธ-วธโก-ลุจฺเฉทเน. 'क'कार अनुबंध आणि आगम याव्यतिरिक्त इतर ठिकाणीही 'ए', 'ओ', 'आ' हे काही वेळा होत नाहीत, असा निषेध होतो - उदा. वधको. 'लु' तोडणे या अर्थात. กฺววณ. काही ठिकाणी 'अण' प्रत्यय होतो. กมฺมโต ปรา กฺริยตฺถา กฺวจิ อณ โหติ กตฺตริ-โอกาเร- कर्मपदाच्या पुढे असलेल्या क्रियार्थापासून (धातूपासून) कर्ता कारकात काही वेळा 'अण' प्रत्यय होतो - 'ओ'कार झाल्यावर - อายาวา ณนุพนฺเธ. 'ण्' अनुबंध (इत्-संज्ञा) असताना 'आय' आणि 'आव' हे आदेश होतात. โญนมายาวา โหนฺติ ยถากฺกมํ สราโท ณนุพนฺเธติ ตสฺสา วาเทโส-สรํ ลุณตีติ สรลาโว, กุมฺภํ กโรตีติ กุมฺภกาโร-กฺวจีติ กึ, กมฺมกาโร-เอตฺถ‘‘ภาวการเกสฺว ฆณฆกา’’ติ อปฺปจฺจโย-ทิส เปกฺขเณ. 'ञ्' आणि 'उण्' यांच्या जागी अनुक्रमे 'आय' आणि 'आव' होतात, जेव्हा 'ण्' अनुबंध असतो. त्याचा हा आदेश आहे - 'सरं लुणातीति सरलाळो' (तळे कापतो तो सरलाळ), 'कुम्भं करोतीति कुम्भकारो' (कुंभार). 'क्वचि' (कधीतरी) कशासाठी? 'कम्मकारो' (काम करणारा). येथे “भावकारकेष्व घणघका” या सूत्राने 'अ' प्रत्यय (अप्पच्चय) होतो. 'दिस' धातू पाहण्याच्या (पेक्खण) अर्थात आहे. สมานญฺญภวนฺตยาทิตุปมานา ทิสา กมฺเม รีริกฺขกา สมานาทิหิ ยาทีหิ โจปมาเนหิ ปรา ทิสา กมฺมการเก รีริกฺขกา โหนฺติ-‘‘รานุพนฺเท’นฺตสราทิสฺสา’’ติ ทิสสฺส อิสภาคสฺส โลเป‘‘รีริกฺขเกสู’’-ติ สมานสฺส สาเทเส จ-สมาโน วิย ทสฺสตีติ สที, สทิกฺโข-เก- उपमानवाचक असलेल्या 'समान', 'अञ्ञ', 'भवन्त', 'यादि' इत्यादी शब्दांनंतर कर्म कारकात 'दिस' धातूला 'री', 'रिक्ख' आणि 'क' प्रत्यय होतात. समान इत्यादी आणि यादि इत्यादी उपमानांनंतर असलेल्या 'दिस' धातूला कर्म कारकात 'री', 'रिक्ख' आणि 'क' प्रत्यय होतात. “रानुबन्धेऽन्तसरादिस्सा” या सूत्राने 'दिस' मधील 'इ' भागाचा लोप होतो आणि “रीरिक्खकेसू” या सूत्राने 'समान' च्या जागी 'स' आदेश होतो. 'समानो विय दस्सतीति सदी, सदिक्खो' (समानाप्रमाणे दिसतो तो सदी, सदिक्ख). 'के' (क प्रत्यय असताना)... น เต กานุพนฺธนาคเมสุ. 'क' अनुबंध असताना आणि आगम असताना 'ते' (ते, ए, ओ, आ) होत नाहीत. เต เอ โอ อา กานุพนฺเธ นาคเม จ น โหนฺตีติ เอตฺตาภาเว, สทิโส. 'क' अनुबंध असताना आणि आगम असताना 'ते' म्हणजेच 'ए', 'ओ', 'आ' होत नाहीत. म्हणून 'ए' कारच्या अभावी 'सदिसो' (असे रूप बनते). สมานา โร รีริกฺขเก. 'री' आणि 'रिक्ख' प्रत्यय असताना 'समान' शब्दाच्या पुढे 'र' आदेश होतो. สมานสทฺทโต ปรสฺส ทิสสฺส ร โหติ วา รีริกฺกเกสูติ ปกฺเข ทสฺส ราเทเส-สรี, สริกฺโข, สริโส. 'समान' शब्दानंतर असलेल्या 'दिस' धातूच्या जागी 'री' आणि 'रिक्ख' प्रत्यय असताना 'र' आदेश विकल्पेकरून होतो. त्या पक्षात 'दिस' च्या जागी 'र' आदेश झाल्यावर - 'सरी', 'सरिक्खो', 'सरिसो' (अशी रूपे बनतात). สพฺพาทีนมา. 'री', 'रिक्ख' आणि 'क' प्रत्यय असताना 'सब्ब' इत्यादींच्या जागी 'आ' होतो. รีริกฺขเกสุ สพฺพาทีนมา โหติ-อญฺญาที, อญฺญาทิกฺโก, อญฺญาทิโส. 'री', 'रिक्ख' आणि 'क' प्रत्यय असताना 'सब्ब' इत्यादींच्या जागी 'आ' होतो - 'अञ्ञादी', 'अञ्ञादिक्खो', 'अञ्ञादिसो'. นฺตกิมิมานํ ฏา กี ฏี. 'अन्त' (भवन्त), 'किं' आणि 'इम' यांच्या जागी अनुक्रमे 'टा', 'की' आणि 'टी' हे आदेश होतात. รีริกฺกเกสุ นฺต กึ อิม สทฺทานํ ฏา กี ฏี โหนฺติ ยถากฺกมํ ฏการา สพฺพาเทสตฺถา-ภวาที, ภวาทิกฺโข, ภวาทิโส-ยาทิ, ยาทิกฺโข, ยาทิโส-ตฺยาทิ, ตฺยาทิกฺโข, ตฺยาทิโสจฺจาทิ-ตุมฺหามฺหา นนฺตุ อยํ วิเสโส. 'री', 'रिक्ख' आणि 'क' प्रत्यय असताना 'अन्त' (भवन्त), 'किं' आणि 'इम' या शब्दांच्या जागी अनुक्रमे 'टा', 'की' आणि 'टी' होतात. 'ट' कार हा सर्वादेशासाठी (पूर्ण शब्दाच्या जागी आदेश होण्यासाठी) आहे - 'भवादी', 'भवादिक्खो', 'भवादिसो'; 'यादि', 'यादिक्खो', 'यादिसो'; 'त्यादि', 'त्यादिक्खो', 'त्यादिसो' इत्यादी. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' यांच्यासाठी मात्र हा विशेष नियम आहे. ตุมฺหามฺหานํ ตา เมกสฺมึ. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' यांच्या जागी अनुक्रमे 'ता' आणि 'मा' हे आदेश एका पक्षात होतात. รีริกฺขเกสุตุมฺหอมฺหานํ ตา มา โหนฺเต กสฺมึ ยถากฺกมํ-ตาทิ, มาทิ, ตาทิกฺโข, มาทิกฺโข, ตาทิโส, มาทิโส-เอกฺैสฺมินฺติ กึ, ตุมฺหาทิโส, อมฺหาทิโส-จิ จเย. 'री', 'रिक्ख' आणि 'क' प्रत्यय असताना 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' यांच्या जागी अनुक्रमे 'ता' आणि 'मा' हे आदेश एका पक्षात होतात - 'तादि', 'मादि', 'तादिक्खो', 'मादिक्खो', 'तादिसो', 'मादिसो'. 'एका पक्षात' (एकस्मिं) असे का म्हटले आहे? (कारण दुसऱ्या पक्षात) 'तुम्हादिसो', 'अम्हादिसो' अशी रूपे होतात. 'चि' धातू गोळा करणे (चय) या अर्थात आहे. ภาวการ เกสฺวฆณฆกา. भाव आणि कारकात (कर्त्याव्यतिरिक्त इतर कारकांमध्ये) धातूंच्या पुढे 'अ', 'घण', 'घ' आणि 'क' हे प्रत्यय बहुधा (बहुलं) होतात. ภเว การเก จ กฺริยตฺถา อ ฆณ ฆ กา โหนฺติ พหุลํ-อ-อิสฺเสกาเร. भाव आणि कारकात क्रियावाचक धातूंच्या पुढे 'अ', 'घण', 'घ' आणि 'क' हे प्रत्यय बहुधा होतात. 'अ' प्रत्यय असताना 'इ' चा 'ए' होतो. โญนมยวา สเร. स्वर पुढे असताना 'ञ्' आणि 'उ' यांच्या जागी अनुक्रमे 'अय' आणि 'अव' हे आदेश होतात. สเร ปเร โญนมยวา โหนฺติ ยถากฺกมนฺติ ตสฺส อยาเทโส จ-วยนํ จิยตีติ วาจโย-นีปาปุณเน-วิ ปุพฺโพวินยนํ วิเนตีติ วา วินโย-รุ สทฺเท-รวนํ รโว-ภุ สตฺตายํ. ภวนํ ภโว-คห อุปาทาเน-ป ปุพฺโพ-ปคฺคณฺหณํ ปคฺคโห-คห มท ทป รณ สร วร จราทโย คหาทโย-กร กรเณ, กิจฺฉตฺเถ ทุมฺหิ อกิจฺฉตฺเถสุ อีสํ สุสุ จุปฺปเทสุ-ทุกฺเขน กรียตีติ กรณํ วา ทุกฺกรํ-สุเขน กรียตีติ กรณํ วา อีสกฺกรํ, สุกรํ-จช หานิยํ-ฆณ-จชนํ จาโค-ปจ ปาเก-นิ ปุพฺโพฆ,นิปจตีติ นิปโก-ขิป เปรเณ-ก-ขิปตีติ ขิปโก-ปีตปฺปเณ. स्वर पुढे असताना 'ञ्' आणि 'उ' यांच्या जागी अनुक्रमे 'अय' आणि 'अव' होतात. त्याचा 'अय' आदेश होतो - 'चयनं चियतीति वा चयो' (निवडणे किंवा गोळा करणे म्हणजे चय). 'नी' धातू प्राप्त करणे (पापुणन) या अर्थात आहे. 'वि' उपसर्ग असताना - 'विनयनं विनेतीति वा विनयो' (दूर नेणे किंवा शिस्त म्हणजे विनय). 'रु' धातू आवाजाच्या (सद्द) अर्थात आहे - 'रवणं रवो' (आवाज म्हणजे रव). 'भु' धातू अस्तित्वाच्या (सत्ता) अर्थात आहे - 'भवनं भवो' (अस्तित्व म्हणजे भव). 'गह' धातू ग्रहण करण्याच्या (उपादान) अर्थात आहे. 'प' उपसर्ग असताना - 'पग्गण्हणं पग्गहो' (स्वीकारणे किंवा प्रयत्न म्हणजे पग्गह). 'गह', 'मद', 'दप', 'रण', 'सर', 'वर', 'चर' इत्यादी 'गहादि' धातू आहेत. 'कर' धातू करण्याच्या (करण) अर्थात आहे. कठीण (किच्छ) अर्थात 'दु' उपसर्ग असताना आणि सुलभ (अकिच्छ) अर्थात 'ईसं' व 'सु' उपसर्ग असताना - 'दुक्खेन करीयतीति करणं वा दुक्करं' (कष्टाने केले जाते ते दुक्कर). 'सुखेन करीयतीति करणं वा ईसक्करं, सुकरं' (सुखाने केले जाते ते ईसक्कर किंवा सुकर). 'चज' धातू त्याग करण्याच्या (हानि) अर्थात आहे. 'घण' प्रत्यय असताना - 'चजनं चागो' (त्याग म्हणजे चाग). 'पच' धातू शिजवण्याच्या (पाक) अर्थात आहे. 'नि' उपसर्ग आणि 'घ' प्रत्यय असताना - 'निपचतीति निपको' (परिपक्व किंवा चतुर म्हणजे निपक). 'खिप' धातू फेकण्याच्या (पेरण) अर्थात आहे. 'क' प्रत्यय असताना - 'खिपतीति खिपको' (फेकणारा तो खिपक). 'पी' धातू तृप्त करण्याच्या (तप्पण) अर्थात आहे. ยุวณณานมิยทฺธุวง สเร. स्वर पुढे असताना 'इ-वर्ण' आणि 'उ-वर्ण' यांच्या जागी अनुक्रमे 'इयङ्' आणि 'उवङ्' हे आदेश होतात. อิวณฺณุวณฺณนฺตานํ กฺริยตฺถานมิยพุทฺธวง โหนฺติ สเร กฺวจีติ อิยง-เณตีติ ปิโย-ภุ สตฺตายํ-อภิ ปุพฺโพ. 'इ-वर्ण' आणि 'उ-वर्ण' शेवटी असलेल्या धातूंच्या जागी स्वर पुढे असताना कधीतरी (क्वचि) 'इयङ्' आणि 'उवङ्' होतात. 'इयङ्' चे उदाहरण - 'णेतीति पियो' (जो नेतो किंवा प्रिय वाटतो तो पिय). 'भु' धातू अस्तित्वाच्या (सत्ता) अर्थात आहे. 'अभि' उपसर्ग असताना... กฺวิ 'क्वि' प्रत्यय. กฺริยตฺถา กฺวิ โหติ พหุลํ ภาวการเกสุ. भाव आणि कारकात धातूंच्या पुढे 'क्वि' प्रत्यय बहुधा होतो. กฺวีสฺส. 'क्वि' प्रत्ययाचा लोप होतो. กฺริยตฺถา ปรสฺส กฺวิสฺส โลโป โหตีติ กฺวิโลเป-อภิภวตีติ อภิภุ-เอวํ สยมฺภุ-อม คม คมเน-กฺวิมฺหิ-‘‘กฺวิมฺหิ โลโป’นฺตพฺยญฺชนสฺสา’’ติ มโลโป-อุรสา คจฺฉตีติ อุรโค-ทา ทา เน-‘‘อโน’’ติ กฺริยตฺถา ภาวการเกสฺวาโน-ทตฺติ ทิยตีติ วาทานํ-สํป ปุพฺเพ-สมฺมา ปทียเต ยสฺส ตํ สมฺปทานํ-อป อา ปุพฺเพ-อปาททาติ เอตสฺมาติ อปาทานํ-กร กรเณ-อธิ ปุพฺโพ-‘‘รา นสฺส เณ’’-ติ เณ-อธิกรียติ เอตสฺมินฺติ อธิกรณํ-คห อุปาทาเน. धातूच्या पुढे असलेल्या 'क्वि' प्रत्ययाचा लोप होतो. 'क्वि' चा लोप झाल्यावर - 'अभिभवतीति अभिभू' (जो पराभूत करतो तो अभिभू). याचप्रमाणे 'सयम्भू' (स्वयंभू). 'अम', 'गम' धातू जाण्याच्या (गमन) अर्थात आहेत. 'क्वि' प्रत्यय असताना “क्विम्हि लोपोऽन्तब्यञ्जनस्सा” या सूत्राने अंतिम व्यंजनाचा ('म्' चा) लोप होतो - 'उरसा गच्छतीति उरगो' (छातीने चालतो तो उरग, म्हणजे साप). 'दा' धातू देण्याच्या (दान) अर्थात आहे. “अनो” या सूत्राने भाव आणि कारकात धातूंच्या पुढे 'अन' प्रत्यय होतो - 'दत्ति दीयतीति वा दानं' (देणे म्हणजे दान). 'सं' आणि 'प' उपसर्ग असताना - 'सम्मा पदीयते यस्स तं सम्पादनं' (ज्याला योग्य प्रकारे दिले जाते ते सम्प्रदान/सम्पादन). 'अप' आणि 'आ' उपसर्ग असताना - 'अपाददाति एतस्माति अपादानं' (ज्यापासून दूर केले जाते ते अपादान). 'कर' धातू करण्याच्या (करण) अर्थात आहे. 'अधि' उपसर्ग असताना. “रा नस्स णे” या सूत्राने 'न' च्या जागी 'ण' होतो - 'अधिकरीयति एतस्मिन्ति अधिकरणं' (ज्यामध्ये क्रिया केली जाते ते अधिकरण). 'गह' धातू ग्रहण करण्याच्या (उपादान) अर्थात आहे. ตถนรานํ ฏฐณฬา. 'त', 'थ', 'न' आणि 'र' यांच्या जागी विकल्पेकरून अनुक्रमे 'ट', 'ठ', 'ण' आणि 'ळ' हे आदेश होतात. ตถนรานํ ฏฐณฬา โหนฺติ วา ยถากฺกมนฺติ นสฺส ณเทเส-คณฺหิตพฺพํ คหณํ-ปท คมเน-นิปุพฺโพ. 'त', 'थ', 'न' आणि 'र' यांच्या जागी विकल्पेकरून अनुक्रमे 'ट', 'ठ', 'ण' आणि 'ळ' होतात. 'न' च्या जागी 'ण' आदेश झाल्यावर - 'गण्हितब्बं गहणं' (ग्रहण करण्यायोग्य ते गहण). 'पद' धातू जाण्याच्या (गमन) अर्थात आहे. 'नि' उपसर्ग असताना. ปทาทีนํ กฺวจิ. 'पद' इत्यादी धातूंच्या जागी कधीतरी (क्वचि) 'युक' (किंवा तत्सम आदेश) होतो. ปทาทีนํ ยุก โหติ กฺวจิ ปจฺจเย-นีปตฺติ นิปชฺชนํ-ปี ตปฺปเณ-อนมฺหิ วนาทินา นาคเม จ’น เต’ อิจฺจาทินา เอ น โหติ-ปีติ ปีณนํ-วิชิ ภย จลเนสุ-สํ ปุพฺโพ-สํวินฺติ สํเวชนํ-‘‘อญฺญตฺราปี’’ติ เอตฺตาภาเว-สํวิชนํ-กุธ โกเป-กุชฺฌติ สีเลนาติ โกธโน-ภิกฺข ยาจเน. 'पद' इत्यादी धातूंच्या जागी प्रत्यय असताना कधीतरी 'युक' होतो - 'नीपत्ति निपज्जनं' (झोपणे किंवा पडणे). 'पी' धातू तृप्त करण्याच्या (तप्पण) अर्थात आहे. 'अन' प्रत्यय असताना 'वनादि' सूत्राने 'न' चा आगम होतो आणि “न ते” इत्यादी सूत्राने 'ए' कार होत नाही - 'पीति पीणनं' (तृप्ती किंवा आनंद). 'विजि' धातू भीती आणि कंप पावण्याच्या (भय, चलन) अर्थात आहे. 'सं' उपसर्ग असताना - 'संविन्ति संवेजनं' (संवेग किंवा उद्वेग). “अञ्ञत्रापि” या सूत्राने 'ए' कारच्या अभावी - 'संविजनं'. 'कुध' धातू क्रोधाच्या (कोप) अर्थात आहे - 'कुज्झति सीलेनाति कोधनो' (स्वभावाने रागवणारा तो कोधन). 'भिक्ख' धातू याचना करण्याच्या (याचन) अर्थात आहे. อิตฺถิยม ณ กฺติ ก ยก ยา จ. स्त्रीलिंगात, भाव आणि कारकात धातूंच्या पुढे 'अ', 'म', 'ण', 'क्ति', 'क', 'यक' आणि 'या' हे प्रत्यय होतात. อิตฺถิลงฺเค ภาเว การเก จ กฺริยตฺถา ออาทโย โหนฺตฺยโน จ พหุลํ-อ-ภิกฺกนํ ภิกฺขียตีติ วา ภิกฺขา-อาปจฺจโย-โณ-การณํ การา-จารกํ-ยถากถญฺจิ สทฺทนิปฺผนฺติ รูฬฺหิโต อตฺถนิจฺจโย-ภิท วิทารเณ-กฺติ-เภทนํ ภิชฺชเตติ วา ภิตฺติ-รูช ภงฺเค-โก-รุชตีติ รุชา-วิท ญาเณ-ยก-เวทนํ วิทนฺติ เอตายาติ วา วิชฺชา-อช วช คมเน-ป ปุทฺโธ-โย-ปพฺพช นํ ปพฺพชฺชา-‘‘จวคฺคพยญา’’ติ โยควิภาคา วสฺส พกาเร ญฺจิตฺตํ-วนฺท อภิวาทนตฺถุติสุ-อโน-วนฺทนํ วนฺทนา. स्त्रीलिंगात, भाव आणि कारकात क्रियावाचक धातूंच्या पुढे 'अ' इत्यादी आणि 'अन' प्रत्यय बहुधा होतात. 'अ' प्रत्यय - 'भिक्खनं भिक्खीयतीति वा भिक्खा' (भिक्षा मागणे म्हणजे भिक्षा). 'आ' प्रत्यय. 'ण' प्रत्यय - 'कारणं कारा' (तुरुंग म्हणजे कारा), 'चारकं'. शब्दांची उत्पत्ती कशीही झाली तरी रूढीने त्यांचा अर्थ निश्चित होतो. 'भिद' धातू फोडण्याच्या (विदारण) अर्थात आहे. 'क्ति' प्रत्यय - 'भेदनं भिज्जतेति वा भित्ति' (भिंत म्हणजे भित्ति). 'रूज' धातू वेदना किंवा मोडण्याच्या (भङ्ग) अर्थात आहे. 'क' प्रत्यय - 'रुजतीति रुजा' (वेदना म्हणजे रुजा). 'विद' धातू ज्ञानाच्या (ञाण) अर्थात आहे. 'यक' प्रत्यय - 'वेदनं विदन्ति एतायाति वा विज्जा' (विद्या म्हणजे विज्जा). 'अज', 'वज' धातू जाण्याच्या (गमन) अर्थात आहेत. 'प' उपसर्ग आणि 'य' प्रत्यय असताना - 'पब्बजनं पब्बज्जा' (प्रव्रज्या म्हणजे पब्बज्जा). “चवग्गबयञा” या योगविभागाने 'व' चा 'ब' आणि 'ज' चा 'ज्ज' होतो. 'वन्द' धातू अभिवादन आणि स्तुती (अभिवान, थुति) या अर्थात आहे. 'अन' प्रत्यय - 'वन्दनं वन्दना' (वंदन म्हणजे वंदना). อิ กิติ สรูเป. धातूच्या स्वतःच्या स्वरूपाचा बोध करून द्यायचा असताना धातूच्या पुढे 'इ', 'कि' आणि 'ति' हे प्रत्यय होतात. กฺริยตฺถสฺส สรูเป’ภิเธยฺเย กฺริยตฺถา ปเร อิ กิ ตี โหนฺติ-อิ-วจ อิจฺจยํ ธาตุ เอว วจิ-กิมฺหิ-ยุธิ-ติ-สรุเป ติมฺหิ กโร ติสฺส โขติ วิกรณสฺส ญาตตฺตา ‘‘กตฺตริ โล’’ติ โล-ปจติ-กถมกาโร อิจฺจาทิ? ฆณนฺเตน การสทฺเทน ฉฏฺฐิสมาโส-อสฺส กาโร อกาโร-ภุช ปาลนชฺโฌหาเรสุ. धातूच्या स्वतःच्या स्वरूपाचा बोध करून द्यायचा असताना धातूच्या पुढे 'इ', 'कि' आणि 'ति' हे प्रत्यय होतात. 'इ' प्रत्यय - 'वच' हा धातू म्हणजेच 'वचि'. 'कि' प्रत्यय असताना - 'युधि'. 'ति' प्रत्यय असताना - स्वरूपबोधक 'ति' प्रत्यय असताना 'कर' धातूच्या 'ति' चा 'ख' होतो. विकरण माहीत असल्यामुळे “कत्तरि लो” या सूत्राने लोप होतो - 'पचति'. 'अकारो' इत्यादी रूपे कशी बनतात? 'घण' प्रत्ययान्त 'कार' शब्दासोबत षष्ठी तत्पुरुष समास होतो - 'अस्स कारो अकारो' (अ चा कार म्हणजे अकार). 'भुज' धातू पालन आणि खाणे (पालन, अज्झोहार) या अर्थात आहे. สีลาภิกฺขญฺญาวสฺสเกสุ ณี. स्वभाव (शील), वारंवारता (अभिक्खञ्ञ) आणि अनिवार्यता (आवस्सक) हे अर्थ प्रतीत होत असताना धातूच्या पुढे 'णी' प्रत्यय होतो. กฺริยตฺถาณิ โหติ สีลาทีสุ ปตียมาเนสุ-อุณฺหํ ภุญฺชติ สีเลนาติ อุณฺหโภชี-ปา ปาเน-‘‘อสฺสาณปิมฺหิ ยุก’’อิติ-ยุก-ขีรมฺภิกฺขญฺญมฺปิพตีติ ขีรปายี-อวสฺสํ กโรตีติ อวสฺสการี, สตมวสฺสํ ททาตีติ สตนฺทายี. शील इत्यादी अर्थ प्रतीत होत असताना धातूच्या पुढे 'णी' प्रत्यय होतो - 'उण्हं भुञ्जति सीलेनाति उण्हभोजी' (स्वभावाने गरम अन्न खाणारा तो उण्हभोजी). 'पा' धातू पिण्याच्या (पान) अर्थात आहे. “अस्साणपिम्हि युक” या सूत्राने 'युक' चा आगम होतो - 'खीरं अभिक्खञ्ञं पिबतीति खीरपायी' (वारंवार दूध पिणारा तो खीरपायी). 'अवस्सं करोतीति अवस्सकारी' (निश्चितपणे करणारा तो अवस्सकारी), 'सतं अवस्सं ददातीति सतंदायी' (शंभर निश्चितपणे देणारा तो सतंदायी). กตฺตริ ภูเต กฺตวนฺตุ กฺตาวิ. कर्ता कारकात आणि भूतकाळात धातूच्या पुढे 'क्तवन्तु' आणि 'क्तावी' हे प्रत्यय होतात. ภุเต ปริสมตฺเต อตฺเต วตฺตมานโต กฺริยตฺถากฺตนฺตุกฺตาวี โหนฺติ กตฺตร-อภุญฺชีติ ภุตฺตวา, ภุตฺตาวี-สุสวกเณ-อสุณิ ติสุตวา, สุตาวี. पूर्ण झालेल्या भूतकाळात कर्ता कारकात धातूंच्या पुढे 'क्तवन्तु' आणि 'क्तावी' हे प्रत्यय होतात - 'अभुञ्जीति भुत्तवा, भुत्तावी' (ज्याने भोजन केले तो भुत्तवा, भुत्तावी). 'सु' धातू ऐकण्याच्या (सवण) अर्थात आहे - 'असुणीति सुतवा, सुतावी' (ज्याने ऐकले तो सुतवा, सुतावी). กฺโต ภาวกมฺเมสุ भाव आणि कर्म कारकात भूतकाळात 'क्त' प्रत्यय होतो. ภาเว กมฺเมจ ภุเต กฺโต โหติ-อาส อุปเวสเน-อาสนมาสิตํ-ญิ-รุท โรทเน. भाव आणि कर्म कारकात भूतकाळात 'क्त' प्रत्यय होतो - 'आस' धातू बसण्याच्या (उपवेसन) अर्थात आहे - 'आसनमासितं' (बसले गेले). 'रुद' धातू रडण्याच्या (रोदन) अर्थात आहे. วา กฺวจิ. कधीतरी विकल्पेकरून (वा क्वचि) होतो. เต เอ โอ อา กฺวจิ วา น โหนฺติ กานุพนฺธนาคเมสุ-โรทนํ รุทิตํ, โรทิตํ-กรียิตฺถาติ กโต, 'क' अनुबंध असताना आणि आगम असताना 'ते' (ए, ओ, आ) कधीतरी विकल्पेकरून होत नाहीत - 'रोदनं रुदितं, रोदितं' (रडणे म्हणजे रुदित किंवा रोदित). 'करीयित्थाति कतो' (जे केले गेले ते कत). คมาทิรานํ โลโป’นฺตสฺส. 'गम' इत्यादी धातूंच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. คมาทินํ รการนฺตานญฺจานฺตสฺส โลโป โหติ ตการาโท 'गम्' इत्यादी धातूंच्या आणि 'र' अंत असणाऱ्या धातूंच्या अंत्य वर्णाचा 'त' कारादी प्रत्यय पर असताना लोप होतो. กานุพนฺเธ ปจฺจเย กตฺวานกตฺวาวชฺชิเตติ รโลโป-ยา ปา ปุณเน. 'क्' अनुबंध असणारा प्रत्यय पर असताना, 'कत्वान' आणि 'कत्वा' प्रत्यय वगळून, 'र' चा लोप होतो. 'या' आणि 'पा' धातू प्राप्ती (पोहोचणे) या अर्थात आहेत. คมนตฺถากมฺมกาธาเร จ. गमनार्थक (गती दर्शविणाऱ्या) आणि अकर्मक धातूंच्या संदर्भात आधाराच्या (अधिकरणाच्या) अर्थातही [हा प्रत्यय होतो]. คมนตฺถโต อกมฺมกโต จ กฺริยตฺถา อาธาเร กฺโต โหติ กตฺตริ ภาวกมฺเมสุ จ-ยาตวนฺโต’สฺมินฺติ ยาตํ-(ฐานํ)-ยา ตวนฺโต ยานา-ยานํ ยาตํ-ยายิตฺถาติ ยาโต-(ปโถ)-อาสิตวนฺโต’สฺมินฺติ อาสิตํ-(ฐานํ)-อาสิตวนฺโต อาสิตา-อาสน มาสิตํ-ญิ. गमनार्थक आणि अकर्मक धातूंच्या पुढे आधाराच्या अर्थात 'क्त' प्रत्यय होतो, तसेच कर्ता, भाव आणि कर्म या अर्थांमध्येही होतो. जसे की—'यातवन्तोऽस्मिन्' (ज्या ठिकाणी गेले गेले आहे) ते 'यातं' (स्थान); 'या तवन्तो याना' (गेलेले लोक म्हणजे यान); 'यानं यातं'; 'यायित्था' (ज्या मार्गाने गेले गेले) तो 'यातो' (मार्ग); 'आसितवन्तोऽस्मिन्' (ज्या ठिकाणी बसले गेले आहे) ते 'आसितं' (स्थान); 'आसितवन्तो आसिता' (बसलेले लोक); 'आसनं आसितं'. 'ञि' (इत्यादी). เนตา กตฺตริ วตฺตมาเน. वर्तमानकाळात कर्त्याच्या अर्थात 'न्ता' (किंवा 'अन्त') प्रत्यय होतो. อารทฺธาปริสมตฺเต อตฺเถ วตฺตมานโต กฺริยตฺถา นฺโต โหติ กตฺตริ. सुरू झालेल्या परंतु पूर्ण न झालेल्या (अपूर्ण) वर्तमानकाळात धातूपासून कर्त्याच्या अर्थात 'न्त' प्रत्यय होतो. กตฺตริ โล. कर्त्याच्या अर्थात 'ल' (लकार) प्रत्यय होतो. กุยตฺถโต อปโรกฺเขสุ กตฺตุวิหิตมานนฺตทิสุ โล โหติ-ลกาโร‘‘ญิ ลสฺเส‘‘-ติ วิเสสนตฺโถ-ปวตีติ ปวนฺโต-‘‘มาโน‘‘ติ กตฺตริ มาโน-ปจมาโน. धातूंपासून परोक्ष (परोक्ष भूतकाळ) वगळता इतर काळांमध्ये कर्त्याच्या अर्थात विहित केलेल्या 'मान', 'अन्त' इत्यादी प्रत्ययांच्या जागी 'ल' (लकार) होतो. 'ल'कार हा "ञि लस्से" या सूत्राने विशेष अर्थासाठी आहे. जसे की—'पवतीति पवन्तो' (वाहणारा तो पवन्त); कर्त्याच्या अर्थात 'मान' प्रत्यय होऊन—'पचमानो' (शिजवणारा). ภาวกมฺเมสุ भाव आणि कर्म या अर्थांमध्ये. วตฺตมานตฺเถ วตฺตมานโต กฺริยตฺถา ภาเว กมฺเม จ มาโน โหติ. वर्तमानकाळात धातूपासून भाव आणि कर्म या अर्थांमध्ये 'मान' प्रत्यय होतो. กฺโย ภาวกมฺเมสฺวปโรกฺเขสุ มานนฺตตฺยาทิสุ परोक्ष काळ वगळता इतर काळांमध्ये 'मान', 'अन्त', 'ति' इत्यादी प्रत्यय पर असताना भाव आणि कर्म या अर्थांमध्ये 'क्य' प्रत्यय होतो. ภาวกมฺมวิหิเตสุ ปโรกฺขาวชฺชิเตสุ มานนฺตาทิสุ ปเรสุ กฺโย โหติ กฺริยตฺถา-กกาโร อวุทฺธตฺโถ-ภาเว-ภุยเตติ ภุยมานํ-กมฺเม-ปจฺจเตติ ปจฺจมาโน. भाव आणि कर्म या अर्थांमध्ये विहित केलेल्या, परोक्ष काळ वगळता इतर 'मान', 'अन्त' इत्यादी प्रत्यय पर असताना धातूपासून 'क्य' प्रत्यय होतो. 'क्य' मधील 'क'कार हा वृद्धी न होण्यासाठी (अवृद्धीसाठी) आहे. भावाच्या अर्थात—'भूयते इति भूयमानं'; कर्माच्या अर्थात—'पच्यते इति पचमानो'. เต สฺสปุพฺพานาคเต भविष्यकाळात ते ('अन्त' आणि 'मान' प्रत्यय) 'स्स' पूर्वी असणारे होतात. อนารทฺเธ อตฺเถ วตฺตมานโต กฺริยตฺถา เต นฺตมานา สฺสปุพฺพา โหนฺติ สวิสเย-ญิ-กตฺตริ-ปจิสฺสตีติ ปจิสฺสนฺโต,ปจิสฺสมาโน-หาเว-ภุยิสฺสตีติ ภุยิสฺสมานํ-กมฺเม-ปจฺจิสฺส เตติ ปจฺจิสฺสมาโน-กร กรเณ. अद्याप सुरू न झालेल्या (भविष्यकाळ) अर्थात धातूपासून ते 'न्त' आणि 'मान' प्रत्यय आपापल्या विषयात 'स्स' पूर्वी असणारे होतात. जसे की—'ञि'—कर्त्याच्या अर्थात: 'पचिस्सतीति पचिस्सन्तो, पचिस्समानो'; भावाच्या अर्थात: 'भूयिस्सतीति भूयिस्समानं'; कर्माच्या अर्थात: 'पच्चिस्सते इति पच्चिस्समानो'. 'कर' धातू करणे या अर्थात आहे. ตุํ ตาเย ตเว ภาเว ภวิสฺสติกฺริยายํ ตทตฺถายํ. भविष्यकाळातील क्रिया आणि तिच्या उद्देशासाठी (हेतूसाठी) क्रिया दर्शविली असता, भावाच्या अर्थात 'तुं', 'ताये' आणि 'तवे' हे प्रत्यय होतात. ภวิสฺสติอตฺเถ วตฺตมานโต กฺริยตฺถา ภาเว ตุํ ตาเย ตเว โหนฺติ กฺริยายํ ตทตฺถายํ ปตียมานายํ-‘‘ตุํตุนตพฺเพสุ วา’’ติ วา อกาโร-อญฺญตฺร ปรรูปํ-กรณย คจฺฉติ กาตุํ คจฺฉติ กตฺตุํ, กตฺตาเย วา-ตเว-‘‘กรสฺสา ตเว’’-ติ อา-กาตเว-ภาเวติ กึ, กริสฺสามีติ คจฺฉติ-กฺริยายนฺติ กึ, ภิกฺขิสฺสํ อิจฺจสฺส ชฏา-ตทตฺถายนฺติ กึ, คจฺฉิสฺสโต เต ภวิสฺสติ ภตฺตํ โภชนาย-คห อุปาทาเน. भविष्यकाळाच्या अर्थात धातूपासून भावाच्या अर्थात 'तुं', 'ताये' आणि 'तवे' प्रत्यय होतात, जेव्हा त्या उद्देशासाठी असणारी दुसरी क्रिया प्रतीत होत असते. "तुंतुनातब्बेसु वा" या सूत्राने 'अ'कार विकल्पेकरून होतो, इतरत्र पररूप होते. जसे की—करण्यासाठी जातो या अर्थात 'कातुं गच्छति' किंवा 'कत्तुं गच्छति', किंवा 'कत्ताये'; 'तवे' प्रत्यय पर असताना "करस्सा तवे" या सूत्राने 'आ' होऊन—'कातवे'. 'भावाच्या अर्थात' असे का म्हटले? 'करिष्यामि इति गच्छति' (मी करीन म्हणून जातो) येथे होऊ नये म्हणून. 'क्रिया असताना' असे का म्हटले? 'भिक्खिस्सं इच्चस्स जटा' (भिक्षा मागेन म्हणून जटा धारण करतो) येथे होऊ नये म्हणून. 'त्याच्या उद्देशासाठी' असे का म्हटले? 'गच्छिस्सतो ते भविस्सति भत्तं भोजनाय' (जाणाऱ्या तुला जेवणासाठी भात मिळेल) येथे होऊ नये म्हणून. 'गह' धातू ग्रहण करणे (स्वीकारणे) या अर्थात आहे. ปุพฺเพกกตฺตุกานํ. एकाच कर्ता असणाऱ्या क्रियांपैकी जी पूर्वकालीन क्रिया असते, तिच्या अर्थात [हे प्रत्यय होतात]. เอโก กตฺตา เยสํ พฺยาปารานํ เตสุ โย ปุพฺโพ ตทตฺถโต กฺริยตฺถา ตุนกตฺวาน กตฺวา โหนฺติ ภาเว-ญิ. ज्या क्रियांचा कर्ता एकच असतो, त्यांपैकी जी पूर्वकालीन क्रिया असते, त्या अर्थातील धातूपासून भावाच्या अर्थात 'तुन', 'कत्वान' आणि 'कत्वा' हे प्रत्यय होतात. जसे की—'ञि'. เออิ ลสฺส จ. आणि काही ठिकाणी 'ए' आणि 'इ' हे आदेश होतात. เออิลานเม โหติ กฺวจิ-คณฺหณํ กตฺวา ยาติ คเหตูน ยาติ, คเหตฺวาน, คเหตฺวา วา-อสฺส รุธาทิตฺตา. काही ठिकाणी 'ए', 'इ' इत्यादींच्या जागी 'ए' होतो. जसे की—'गहणं कत्वा याति' (ग्रहण करून जातो) या अर्थात 'गहेतून याति', 'गहेत्वान' किंवा 'गहेत्वा'. 'अस्' धातूचा रुधादी गणात समावेश असल्यामुळे. มํ วา รุธาทีนํ. रुधादी गणातील धातूंना विकल्पेकरून 'मं' (अनुस्वार) होतो. รุธาทีนํ กฺวจิ มํ วา โหติ ปจฺจเยติ ปกฺเข มํ ภวํ อปิ มนุพนฺธตฺตา อการา ปโร. रुधादी गणातील धातूंना प्रत्यय पर असताना काही ठिकाणी विकल्पेकरून 'मं' होतो. पक्षामध्ये (विकल्पाने) 'मं' होत असताना, 'म्' अनुबंध असल्यामुळे तो 'अ' कारानंतर येतो. เณ นิคฺคหีตสฺส. निग्गहीत (अनुस्वारा) च्या जागी 'णे' होतो. คหสฺส นิคฺคหีตสฺส เณ โหติ-คณฺหิ ตุน, คณฺหิตฺวาน, คณฺหิตฺวา-เอกกตฺตุกานนฺติ กึ, ภุตฺตสฺมึ เทวทตฺเต ยญฺญ ทตฺโต วชติ-ปุพฺพาติ กึ, ภุญฺชติ จ ปจติ จ-อปฺปตฺวา นทึ ปพฺพโต ภวติ อติกฺกมฺม ปกพฺพตํ นทีติ ภุธาตุสฺส สพฺพตฺถ สมฺภวา เอกกตฺตุกตา ปุพฺพกาลตา จ คมฺยเต. 'गह' धातूच्या निग्गहीताच्या (अनुस्वाराच्या) जागी 'णे' होतो. जसे की—'गण्हितुन', 'गण्हित्वान', 'गण्हित्वा'. 'एकाच कर्ता असणाऱ्या' असे का म्हटले? 'भुत्तस्मिं देवदत्ते यञ्ञदत्तो वजति' (देवदत्ताने जेवण केल्यावर यज्ञदत्त जातो—येथे कर्ते भिन्न आहेत) यात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 'पूर्वकालीन' असे का म्हटले? 'भुञ्जति च पचति च' (तो जेवतो आणि शिजवतो—दोन्ही क्रिया सोबत आहेत) यात लागू होऊ नये म्हणून. 'अप्पत्वा नदिं पब्बतो भवति, अतिक्कम्म पब्बतं नदी' (नदीला न पोहोचता पर्वत आहे, पर्वताला ओलांडून नदी आहे) येथे 'भू' धातूचा सर्वत्र संभव असल्यामुळे एकाच कर्त्याची स्थिती आणि पूर्वकालता समजली जाते. เยภุยฺยวุตฺติยา ลิงฺคํ ทสฺสิตํ ตตฺถ สพฺพโส; วิเสโส ปน วิญฺญหิ เญยฺโย ปาฐานุสารโต. बहुतांश ठिकाणी सामान्य नियमाने लिंग (किंवा चिन्ह) दर्शविले गेले आहे; परंतु त्यातील विशेष भेद विद्वानांनी पाठाच्या (किंवा प्रयोगाच्या) अनुषंगाने समजून घ्यावा. ตพฺพาทโย. 'तब्ब' इत्यादी प्रत्यय. อิทานิ ตฺยาทโย วุจฺจนฺเต-ปจ ปาเก-ปจ อิติ ฐิเต-กฺริยตฺถา พหุลมิติ จ สพฺพตฺถ วตฺตเต. आता 'ति' इत्यादी प्रत्यय सांगितले जात आहेत. 'पच' धातू शिजवणे या अर्थात आहे. 'पच' अशी स्थिती असताना, "क्रियार्था बहुलम्" हा नियम सर्वत्र लागू होतो. วตฺตมาเนติ อนฺติ สิถมิมเต อนฺเต เส เวค เอมฺเห. वर्तमानकाळात 'ति, अन्ति, सि, थ, मि, म, ते, अन्ते, से, व्हे, ए, म्हे' हे प्रत्यय होतात. วตฺตมาเน อารทฺธา ปริสมตฺเต อตฺเถ วตฺตมานโต กฺริยตฺถาตฺยาทโย โหนฺติ-เตสมฺปนิยเม. सुरू झालेल्या परंतु पूर्ण न झालेल्या (अपूर्ण) वर्तमानकाळात धातूपासून 'ति' इत्यादी प्रत्यय होतात. आता त्यांच्या नियमांचे स्पष्टीकरण केले जाते. ปุพฺพปรจฺฉกฺกานเมกาเนเกสุ ตุมฺหามฺหเสเสสุ ทฺเวทฺเว มชฺฌิมุตฺตมปฐมา. पहिल्या सहा (परस्मैपद) आणि नंतरच्या सहा (आत्मनेपद) प्रत्ययांच्या गटांमध्ये, एकवचन आणि अनेकवचनात, 'तुम्ह' (तू/तुम्ही), 'अम्ह' (मी/आम्ही) आणि उर्वरित (तो/ते इत्यादी) नामे कर्ता असताना, अनुक्रमे मध्यम, उत्तम आणि प्रथम पुरुष असे दोन-दोन प्रत्यय होतात. เอกาเนเกสุตุมฺหามฺหสทฺทวจนีเยสุตทญฺญสทฺทวจนีเยสุ จ การเกสุ ปุพฺพจฺฉกฺกานํ ปรจฺฉกฺกนญฺจ มชฺฌิมุตฺตมปฐมา ทฺเวทฺเว โหนฺติ ยถากฺกมํ กฺริยตฺถาติ เอกมฺหิ วตฺตพฺเพ เอกวจนํ ติ-ติ อนฺติ อิติ ปฐโม อาโท นิทฺทิฏฺฐตฺตา-สิ ถ อิติ มชฺฌิโม มชฺฌิ นิทฺทิฏฺเฐตฺตา-มิ ม อิติ อุตฺตโม-อุตฺตมสทฺโทยํ สภาวโต ติปฺปภุตีนมนฺตทฺวยมาห-เอวํ ปรจฺฉกฺเกปกิ ยถากฺกมํ โยชนียํ-ตฺยาทิสุ ปรภุเตสุ กตฺตุกมฺมภาว วิหิเตสุ กฺยลาทโยภวนฺตีติ ‘‘กฺโย ภาวกมฺเมสฺวกกปโรกฺเขสุ มานนฺต ตฺยาทิสุ กตฺตรี โล’’อิจฺจาทินา เตสํ วิธานา ตฺยาทโย กตฺตุ กมฺมภาเวสฺเจว วิญฺญายนฺตีติ กตฺตริ ติมฺหิ โล-ปจติ-พหุมฺหิ จตฺตพฺเพ อนฺตึ एकवचन आणि अनेकवचनात 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांनी दर्शविले जाणारे, तसेच त्याव्यतिरिक्त इतर शब्दांनी दर्शविले जाणारे कारक (कर्ता) असताना, पहिल्या सहा आणि नंतरच्या सहा प्रत्ययांच्या गटांमध्ये अनुक्रमे मध्यम, उत्तम आणि प्रथम पुरुष असे दोन-दोन प्रत्यय होतात. धातूपासून एकाचा निर्देश करायचा असल्यास एकवचन 'ति' प्रत्यय होतो. 'ति, अन्ति' हे सुरुवातीला निर्दिष्ट केल्यामुळे प्रथम पुरुष आहेत; 'सि, थ' हे मध्ये निर्दिष्ट केल्यामुळे मध्यम पुरुष आहेत; 'मि, म' हे शेवटी निर्दिष्ट केल्यामुळे उत्तम पुरुष आहेत. हा 'उत्तम' शब्द स्वभावानेच 'ति' इत्यादींच्या शेवटच्या दोन प्रत्ययांना दर्शवितो. याचप्रमाणे नंतरच्या सहा (आत्मनेपद) प्रत्ययांच्या बाबतीतही अनुक्रमे योजना करावी. 'ति' इत्यादी प्रत्यय पर असताना कर्ता, कर्म आणि भाव या अर्थांमध्ये विहित केलेले 'क्य', 'ल' इत्यादी प्रत्यय होतात. "क्यो भावकम्मेस्वपरोक्खेसु..." आणि "कर्तरि लो" इत्यादी सूत्रांनी त्यांचे विधान केल्यामुळे 'ति' इत्यादी प्रत्यय कर्ता, कर्म आणि भाव या अर्थांमध्येच जाणले जातात. कर्त्याच्या अर्थात 'ति' प्रत्यय असताना 'ल' (लकार) होऊन—'पचति' (तो शिजवतो); अनेकवचनाचा निर्देश करायचा असल्यास 'अन्ति' प्रत्यय होतो. กฺวจิ วิกรณนํ. काही ठिकाणी विकरण प्रत्ययांचा लोप होतो. วิกรณนํ กฺวจิ โลโป โหตีติ ลสฺสาการสฺส โลโป-ปวนฺติ-ปจสิ ปจถ. विकरण प्रत्ययांचा काही ठिकाणी लोप होतो, म्हणून 'ल' च्या 'अ'काराचा लोप होतो. जसे की—'पवन्ति', 'पचसि', 'पचथ'. หิมิเมสฺวสฺส. 'हि', 'मि' आणि 'म' प्रत्यय पर असताना 'अ'काराचा दीर्घ होतो. อการสฺส ทีโฆ โหติ หิมิเมสุ-ปจามิ ปจาม-ปรจฺฉกฺเก-ปจเต ปจนฺเต, ปจเส ปจวฺเห,ปเจ ปจามฺเห-กมฺเม-กฺโย ภาวกมฺเมสฺวจฺจาทินา กฺโย. 'हि', 'मि' आणि 'म' प्रत्यय पर असताना 'अ'काराचा दीर्घ होतो. जसे की—'पचामि', 'पचाम'. नंतरच्या सहा (आत्मनेपद) प्रत्ययांमध्ये—'पचते', 'पचन्ते', 'पचसे', 'पचव्हे', 'पचे', 'पचाम्हे'. कर्माच्या अर्थात—"क्यो भावकम्मेसु..." इत्यादी सूत्राने 'क्य' प्रत्यय होतो. กฺยสฺส. 'क्य' प्रत्ययाच्या जागी. กฺริยตฺถา ปรสฺส กฺยสฺส อีญ วา โหติ-ญกาโร อาทฺยวยวตฺโถ, ปจียติ ปจฺจติ. धातूच्या पुढे असणाऱ्या 'क्य' प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'ईय' होतो. 'ञ'कार हा सुरुवातीचा अवयव दर्शविण्यासाठी आहे. जसे की—'पचीयति' किंवा 'पच्चति'. คุรุปุพฺพา รสฺสาเร’นฺเต’นฺตีนํ. गुरुसंज्ञक वर्ण पूर्वी असणाऱ्या र्हस्व स्वराच्या पुढे असणाऱ्या 'अन्ते' आणि 'अन्ति' यांच्या जागी विकल्पेकरून 'रे' होतो. คุรุปุพฺพสฺมา รสฺสา ปเรสํ อนฺเต’นฺตินํ เร วา โหติ-ปจียเร ปจียนฺติ ปจฺจเร ปจฺจนฺติ, ปจียสิ ปจฺจสิ ปจียถ ปจฺจถ, ปจียามิ ปจฺจามิ ปจียาม ปจฺจาม-ปจียเต, ปจฺจเต ปจียเร ปจียนฺเต ปจฺจเร ปจฺจนฺเต, ปจียเส ปจฺจเส ปจียวฺเห ปจฺจวฺเห, ปจีเย ปจฺเจ ปจียามฺเห ปจฺจามฺเห-ภาเว-ภุ สตฺตายํ-ภาวสฺเสกตฺตา เอกวจนเมว-ตญฺจ ปฐมปุริเสเยว สมฺภวติ-ภุยติ เทวทตฺเตน, พุยเต วา-เทวทตฺตสฺส สมฺปติ ภวนนฺติ อตฺโถ-เนหิญ พหุลํ วิธานา. गुरुसंज्ञक वर्ण पूर्वी असणाऱ्या र्हस्व स्वराच्या पुढे असणाऱ्या 'अन्ते' आणि 'अन्ति' यांच्या जागी विकल्पेकरून 'रे' होतो. जसे की—'पचीयरे', 'पचीयन्ति', 'पच्चरे', 'पच्चन्ति'; 'पचीयसि', 'पच्चसि', 'पचीयथ', 'पच्चथ'; 'पचीयामि', 'पच्चामि', 'पचीयाम', 'पच्चाम'; 'पचीयते', 'पच्चते', 'पचीयरे', 'पचीयन्ते', 'पच्चरे', 'पच्चन्ते'; 'पचीयसे', 'पच्चसे', 'पचीयव्हे', 'पच्चव्हे'; 'पचीये', 'पच्चे', 'पचीयाम्हे', 'पच्चाम्हे'. भावाच्या अर्थात—'भू' धातू असणे (अस्तित्व) या अर्थात आहे. भावाचे एकत्व असल्यामुळे केवळ एकवचनच होते आणि ते फक्त प्रथम पुरुषातच संभवते. जसे की—'भूयति देवदत्तेन' किंवा 'भूयते' (देवदत्ताद्वारे असणे घडते, म्हणजेच देवदत्त आता अस्तित्वात आहे असा अर्थ होतो). हे 'नेहिञ' इत्यादी सूत्रांच्या बहुल विधानामुळे होते. กฺริยตฺถา กตฺตริ ตฺยาทิ กมฺมสฺมิญฺจ สกมฺมกา,ภาเว จา’กมฺมกากกมฺมา’วจนิจฺฉายมญฺญโต; धातूपासून कर्त्याच्या अर्थात 'ति' इत्यादी प्रत्यय होतात; सकर्मक धातूंच्या बाबतीत कर्माच्या अर्थातही हे प्रत्यय होतात. अकर्मक धातूंच्या बाबतीत भावाच्या अर्थात, किंवा कर्माची विवक्षा (बोलण्याची इच्छा) नसताना इतर धातूंच्या बाबतीतही भावाच्या अर्थात हे प्रत्यय होतात. ภวิสฺสติ สฺสติ สฺสนฺติ สฺสสิ สฺสถ สฺสามิ สฺสาม สฺสเต สฺสนฺเต สฺสเส สฺสวฺเห สฺสํ สฺสามฺเห. भविष्यत् काळामध्ये (bhavissati) स्सति, स्सन्ति, स्ससि, स्सथ, स्सामि, स्साम, स्सते, स्सन्ते, स्ससे, स्सव्हे, स्सं, स्साम्हे (हे प्रत्यय होतात). ภวิสฺสติ อนารทฺเธ อตฺเถ วตฺตมานโต กฺริยตฺถา สฺสตฺยาทโย โหนฺติ. अद्याप सुरू न झालेल्या (अनारब्ध) भविष्यकाळाच्या अर्थामध्ये धातूंना 'स्सति' इत्यादी प्रत्यय लागतात. อ อีสฺสาทินํ พฺยญฺชนสฺสิญ. व्यंजन पुढे असताना 'ई', 'स्स' इत्यादींच्या जागी 'अ' होतो. กฺริยตฺถา ปเรสํ ออาทีนํ อีอาทีนํสฺสาทีนญฺจ พฺยญฺชนสฺสิญฺเหกาติ วา-ววตฺถีตวิภาสายํ สฺเสติ สฺสาทีนํสฺสจฺจาทีนทฺวาวโย อธิปฺเปโต-‘‘ญิ พฺยญฺชนสฺสา’’ติ สิทฺเธปิ ตฺยาทิสุ ปรภุเตสุ เอเต สเมวาติ นิยมตฺโตยมารมฺโห-ลสฺสาการสฺส โลเป-ปจิสฺสติ ปจิสฺสเร ปจิสฺสนฺติ, ปจิสฺสสิ ปจิสฺสถ, ปจิสฺสามิ ปจิสฺสาม-ปจิสฺสเต ปจิสฺสเร ปจิสฺสนฺเต, ปจิสฺสเสปจิสฺสวฺเห, ปจิสฺสํ ปจิสฺสามฺเห-กมฺเม-ปจิยิสฺสติ. व्यंजन पुढे असताना धातूंच्या पुढील 'अ' इत्यादी, 'ई' इत्यादी आणि 'स्स' इत्यादींच्या जागी 'इ' चा आगम होतो... 'ल' च्या अकाराचा लोप झाल्यावर - पचिस्सति, पचिस्सरे, पचिस्सन्ति, पचिस्ससि, पचिस्सथ, पचिस्सामि, पचिस्साम - पचिस्सते, पचिस्सरे, पचिस्सन्ते, पचिस्ससे, पचिस्सव्हे, पचिस्सं, पचिस्साम्हे - कर्मणी प्रयोगात (kamme) - पचियिस्सति. กฺยสฺส สฺเส. 'स्से' पुढे असताना 'क्य' प्रत्ययाचा (लोप होतो). กฺยสฺส วา โลโป โหติ สฺเส-ปจิสฺสติ ปจฺจิสฺสติ, ปจียิสฺสเร ปจยิสฺสนฺติ ปจิสฺสเร ปจสฺสนฺติ ปจฺจิสฺสเร ปจฺจิสฺสนฺติจฺจาทิ-กตฺตุสมํ-กฺโยว วิเสโส-ภาเว-ภุยิสฺสติ ภวิสฺสติ, ภุยิสฺสเต ภวิสฺสเต. 'स्से' पुढे असताना 'क्य' चा विकल्पेकरून लोप होतो - पचिस्सति पच्चिस्सति, पचीयिस्सरे पचयिस्सन्ति पचिस्सरे पचस्सन्ति पच्चिस्सरे पच्चिस्सन्ति इत्यादी - हे कर्तरी प्रयोगासारखेच आहे - केवळ 'क्य' चाच विशेष फरक आहे - भाव प्रयोगात - भुयिस्सति भविस्सति, भुयिस्सते भविस्सते. นาเม ครหาวมฺหเยสุ. 'नाम' शब्द असताना, निंदा (गरहा) आणि आश्चर्य (विम्हय) व्यक्त होत असल्यास 'स्सति' इत्यादी प्रत्यय होतात. นามสทฺเท นิปาเต สติ ครหายํ วิมฺภเย จ คมฺยมาเน สฺส ตฺยาทโย โหนฺติ-ครหายํ-สาปิ นาม ปจิสฺสตีจฺจาทิ-วิมฺพเย-อจฺฉริยํ วต โภ อพฺภูตํ วต โภ อนฺโธ นาม ปจิสฺสติจฺจาทิ. 'नाम' हा निपात शब्द असताना, निंदा आणि आश्चर्य प्रतीत होत असल्यास 'स्सति' इत्यादी प्रत्यय होतात. निंदेमध्ये - 'सापि नाम पचिस्सति' (ती सुद्धा शिजवेल काय!) इत्यादी. आश्चर्यामध्ये - 'अच्छरियं वत भो अब्भुतं वत भो अन्धो नाम पचिस्सति' (अरे आश्चर्य आहे! अरे अद्भुत आहे! आंधळा सुद्धा शिजवेल!) इत्यादी. ภุเต อี อุํ ธ ตฺถ อึ มฺหา อา อู เสวฺหํ อ มฺเห. भूतकाळात (bhute) ई, उं, ध, त्थ, इं, म्हा, आ, ऊ, सेव्हं, अ, म्हे (हे प्रत्यय होतात). ภุเต ปริสมตฺเต อตฺเถ วตฺตมานโต กฺริยตฺถา อี อาทโย โหนฺติ-ภุตานชฺชตเน วกฺขมานตฺตา อิเม ภุตนชฺชตเน ภุตสามญฺเญ จ ภวนฺติ. पूर्ण झालेल्या भूतकाळाच्या अर्थामध्ये धातूंना 'ई' इत्यादी प्रत्यय लागतात. 'भूत-अनद्यतन' (नजीकचा नसलेला भूतकाळ) पुढे सांगण्यात येणार असल्यामुळे, हे प्रत्यय अनद्यतन भूतकाळात आणि सामान्य भूतकाळात होतात. อหสฺสุภยโต อฑฺฒรตฺตํ วาว ตทุปฑฺฒกํ,อนฺโต กตฺวาน วิญฺเญยฺโย อโห อชฺชโน อิติ; दिवसाच्या दोन्ही बाजूंचे अर्धे-अर्धे रात्र मिळून जो काळ होतो, त्याला 'अद्यतन' (आजचा काळ) असे समजावे. ตทญฺโญ ปน โย กาโล โส’นชฺชตนสญฺญิโต. त्याव्यतिरिक्त जो दुसरा काळ आहे, त्याला 'अनद्यतन' (आजचा नसलेला काळ) अशी संज्ञा आहे. อาอีสฺสาทิสฺวญ วา. 'आ', 'ई', 'स्स' इत्यादी प्रत्यय पुढे असताना विकल्पेकरून 'अ' (किंवा 'अञ') होतो. อาอาโท อีอาโท สฺสาอาโท จ กฺริยตฺถสฺส อญ วา โหติ, 'आ' इत्यादी, 'ई' इत्यादी आणि 'स्स' इत्यादी प्रत्यय पुढे असताना धातूच्या जागी विकल्पेकरून 'अञ' होतो. เอยฺยาถ สฺเส อ อา อี ถานํ โอ อ อํ ตฺถ ตฺโถ เวหาก. एय्याथ, स्से, अ, आ, ई यांच्या जागी अनुक्रमे ओ, अ, अं, त्थ, त्थो, वेहाक (हे आदेश) होतात. อาสหจริโตว อกาโร คยฺหเต-น ปโรกฺเข วิหิโต-โถ ปน’นฺเต นิทฺเทสา ตฺวาทิสมฺพนฺธิเยว ตสฺเสว วา นิสฺสิตตฺตา-นิสฺสยกรณมฺปิ หิ สุตฺตการาจิณฺณํ-เอยฺยาถาทีนํ โออาทโย วา โหนฺติ ยถากฺกมนฺติ อีสฺสวาตฺโถ-อปจิตฺโถ ปจิตฺโถ อปวตฺโถ ปจตฺโถ. 'आ' च्या सहचारामुळे 'अ' कार ग्रहण केला जातो - परोक्ष काळामध्ये विहित नाही - 'त्थो' हा शेवटी निर्देश केल्यामुळे 'त्वा' इत्यादींशी संबंधित आहे किंवा त्यावरच आश्रित आहे - कारण आश्रय देणे ही सूत्रकारांची पद्धत आहे - 'एय्याथ' इत्यादींच्या जागी अनुक्रमे 'ओ' इत्यादी विकल्पेकरून होतात, असा याचा अर्थ आहे - अपचित्थो, पचित्थो, अपवत्थो, पचत्थो. อาอีอูมฺหาสฺสาสฺสมฺหานํ วา. 'आ', 'ई', 'ऊ', 'म्हा', 'स्सा', 'स्सम्हा' यांचा विकल्पेकरून र्हस्व होतो. เอเตสํ วา รสฺโส โหตีติ ปกฺเข รสฺเส จ-อปจิ ปจิ อปจี ปจี. यांचा विकल्पेकरून र्हस्व होतो, आणि र्हस्व झाल्यावर - अपचि, पचि, अपची, पची. อุํสฺสึสฺวํสุ. 'उं' च्या जागी 'इंसु' किंवा 'अंसु' होतो. อุมิจฺจสฺส อึสุ อํสุ วา โหนฺติ-อปวึสุ ปวึสุ อปจํสุ ปจํสุ อปวุํ ปจุํ. 'उं' या प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'इंसु' किंवा 'अंसु' होतात - अपविंसु, पविंसु, अपचंसु, पचंसु, अपवुं, पचुं. โอสฺส อ อิ ตฺถ ตฺโถ. 'ओ' च्या जागी 'अ', 'इ', 'त्थ', 'त्तो' होतात. โอสฺส ออาทโย วา โหนฺติ-อปจ ปจ อปจิ ปจิ อปจิตฺถ ปจิตฺถ อปวตฺถ ปจตฺถ อปจิตฺเถ ปจิตฺโถ อปจตฺโถ ปจตฺโถ. 'ओ' च्या जागी विकल्पेकरून 'अ' इत्यादी होतात - अपच, पच, अपचि, पचि, अपचित्थ, पचित्थ, अपवत्थ, पचत्थ, अपचित्थो, पचित्तो, अपचत्थो, पचत्थो. สิ. 'ओ' च्या जागी 'सि' होतो. โอสฺส สิ วา โหติ-อปจิสิ ปจิสิ อปจสิ ปจสิ อปโจ ปโจ. 'ओ' च्या जागी विकल्पेकरून 'सि' होतो - अपचिसि, पचिसि, अपचसि, पचसि, अपचो, पचो. มฺหาตฺถาน มุญ. 'म्हा' आणि 'त्थ' यांच्या जागी 'मुं' होतो. มฺหาตฺถานมุญ วา โหติ-อีอาทิสมฺพนฺธินเมว คหณํ-อปวุตฺถ ปจุตฺถ. 'म्हा' आणि 'त्थ' यांच्या जागी विकल्पेकरून 'मुं' होतो - केवळ 'ई' इत्यादींशी संबंधित असलेल्यांचेच ग्रहण होते - अपवुत्थ, पचुत्थ. อึสฺส จ สิญ. आणि 'इं' च्या जागी 'सिं' होतो. อิมิจฺจสฺส สิญ วา โหติ มฺหาตฺถานญฺจ พหุลํ-ญกาโร อาทฺยวย วตฺโถ-อปจสิตฺถ ปจสิตฺถ อปจิตฺถ ปจิตฺถ อปจตฺถ ปจตฺถ, อปจิสึ ปจิสึ อปจสึ ปจสึ อปจึ ปจึ, อปจุมฺห ปจุมฺห อปจุมฺหา ปจุมฺหา อปจมฺห ปจมฺห อปจมฺหา ปจมฺหา อปจสิมฺห ปจสิมฺห อปจสิมฺหา ปจสิมฺหา อปจิมฺห ปจิมฺห อปจิมฺหา ปจิมฺหา อปจมฺห ปจมฺห อปจมฺหา ปจมฺหา-ปรจฺฉกฺเก-อปวิตฺถ ปจิตฺถ อปวตฺถ ปวตฺถ อปจ ปจ อปจา ปจา, อปจุ ปจุ อปจุ ปจุ, อปจิเส ปจิเส อปจเส ปจเส, อปจิวฺหํ ปจิวฺหํ อปจวฺหํ ปจวฺหํ-อสฺส วา อมาเทเส-อปจํ ปจํ อปจ ปจ อปจิมฺเห ปจิมฺเห อปจมฺเห ปจมฺเห-กมฺเม-อปจียิตฺโถ ปจิยิตฺโถ อปจียตฺโถ ปจียตฺโถ อปจฺจิตฺโถ ปจฺจิตฺโถ อปจฺจตฺโถ ปจฺจตฺโถ อปจียิ ปจียิ อปจียี ปจิยี อปจฺจิ ปจฺจิ อปจฺจิ ปจฺจิ, อปจียึสุ ปจิยึสุ อปจฺจึสุ ปจฺจึสุ อปจิยํสุ ปจียํสุ อปจฺจํสุ ปจฺจํสุ อปจียุํ ปจียุํ อปจฺจุํ ปจฺจุมิจฺจาทิ-ภาเว-อภุยิตฺโถ ภุยิตฺโถ อภุยตฺโถ ภุยตฺโถ อภุยิ ภุยิ อภุยี ภูยี, อภุยิตฺถ ภุยิตฺถ อภุยตฺถ ภุยตฺถ อภุย ภุย อภยา ภุยา-‘‘สมฺภาวเนวา’’ติ อิโต เวติ วตฺตมาเน. 'इं' च्या जागी विकल्पेकरून 'सिं' होतो आणि 'म्हा' व 'त्थ' च्या जागी बहुधा होतो... अपचसित्थ, पचसित्थ, अपचित्थ, पचित्थ, अपचत्थ, पचत्थ, अपचिसिं, पचिसिं, अपचसिं, पचसिं, अपचिं, पचिं, अपचुम्ह, पचुम्ह, अपचुम्हा, पचुम्हा, अपचम्ह, पचम्ह, अपचम्हा, पचम्हा, अपचसिंह, पचसिंह, अपचसिंम्हा, पचसिंम्हा, अपचिम्ह, पचिम्ह, अपचिम्हा, पचिम्हा, अपचम्ह, पचम्ह, अपचम्हा, पचम्हा - परषट्कामध्ये (दुसऱ्या सहा प्रत्ययांमध्ये) - अपवित्थ, पचित्थ, अपवत्थ, पवत्थ, अपच, पच, अपचा, पचा, अपचु, पचु, अपचु, पचु, अपचिसे, पचिसे, अपचसे, पचसे, अपचिव्हं, पचिव्हं, अपचव्हं, पचव्हं - 'अ' च्या जागी विकल्पेकरून 'अं' आदेश झाल्यावर - अपचं, पचं, अपच, पच, अपचिम्हे, पचिम्हे, अपचम्हे, पचम्हे - कर्मणी प्रयोगात (kamme) - अपचीयित्थो, पचियित्तो, अपचीयत्थो, पचीयत्तो, अपच्चित्थो, पच्चित्तो, अपच्चत्थो, पच्चत्तो, अपचीयि, पचीयि, अपचीयी, पचियी, अपच्चि, पच्चि, अपच्चि, पच्चि, अपचीयिंसु, पचियिंसु, अपच्चिंसु, पच्चिंसु, अपचियंसु, पचीयंसु, अपच्चंसु, पच्चंसु, अपचीयुं, पचीयुं, अपच्चुं, पच्चुं इत्यादी - भाव प्रयोगात (bhāve) - अभुयित्तो, भुयित्तो, अभुयत्तो, भुयत्तो, अभुयि, भुयि, अभुयी, भूयी, अभुयित्थ, bhuyittha, अभुयत्थ, भुयत्थ, अभुय, भुय, अभया, भुया - 'संभावने वा' या सूत्रातून 'वा' चे अनुवर्तन होत असताना. มาโยเค อีอาอาทิ. 'मा' (नकारार्थी अव्यय) चा योग असताना 'ई' इत्यादी आणि 'आ' इत्यादी प्रत्यय होतात. มาโยเค สติ อีอาทโย อาอาทโย จ วา โหนฺติ-อสกฺกาล ตฺโถยมารมฺโห-มา ภวํ ปุนปิ เอวรูปมปจิตฺโถ อิจฺจาทิ-วาวิ ธานโต สฺสตฺยาทิ เอยฺยาทิ ตฺวาทโยปิ โหนฺติ-มาภวํ ปจิสฺสติ, มา ภวํ ปเจยฺย, มา ภวํ ปจตุ อิจฺจาทิ. 'मा' चा योग असताना 'ई' इत्यादी आणि 'आ' इत्यादी प्रत्यय विकल्पेकरून होतात... 'मा भवं पुनपि एवरूपमपचित्थो' (आपण पुन्हा असे शिजवू नये) इत्यादी. 'वा' च्या विधानामुळे 'स्सति' इत्यादी, 'एय्य' इत्यादी आणि 'तु' इत्यादी प्रत्यय देखील होतात - 'मा भवं पचिस्सति', 'मा भवं पचेय्य', 'मा भवं पचतु' इत्यादी. อนชฺชตเน อา อู โอ ตฺถ อ มฺหา ตฺถ ตฺถุํ เสวฺหํ อึ มฺหเส. अनद्यतन भूतकाळात (anajjatane) आ, ऊ, ओ, त्थ, अ, म्हा, त्थ, त्थुं, सेव्हं, इं, म्हसे (हे प्रत्यय होतात). อวิชฺชมานชฺชตเน ภุตตฺเถวตฺตมานโต กฺริยตฺถาอาอาทโย โหนฺติ-วาตฺเถ รสฺเส จ-อปจตฺถ ปวตฺถ อปจ ปจ อปจา ปจา, อปจุ ปจุ อปจุ ปจู-โอ-อปจ ปจ อปจิ ปจิ อปจตฺถ ปจตฺถ อปจตฺโถ ปจตฺโถ อปจสิ ปจสิ อปโจ ปโจ, อปวตฺถ ปจตฺถ อปจํ ปจํ อปจปจ, อปจมฺห ปจมฺห อปจมฺหา ปจมฺหา-อปจตฺถ ปจตฺถ, อปจตฺถุํ ปจตฺถุํ, อปจเส ปจเส, อปจวฺหํ ปจวฺหํ. อปสึ ปจสึ อปจึ ปจึ, อปจมฺหเส ปจมฺหเส-กมฺเม-อปจียตฺถ ปจียตฺถ อปจฺจตฺถ ปจฺจตฺถ อปจีย ปจีย อปจียา ปจียา อปจฺจ ปจฺจ อปจฺจา ปจฺจา, อปจียุ ปจียุ, อปจียุ ปจียุ, อปจฺจุ ปจฺจุ อปจฺจู ปจฺจูจฺจาทิ-ภาเว-อภุยตฺถ ภุยตฺถ อภุย ภุย อภุยา ภุยา-อภุยตฺถ ภุยตฺถ-‘‘มาโยเค อีอาอาทิ’’ติ อิมินา มาโยเคปิ อาอาทโย โหนฺติ-มา ภวํ อปจิตฺถ อิจฺจาทิ. अविद्यमान-अद्यतन (आजचा नसलेला) भूतकाळाच्या अर्थामध्ये धातूंना 'आ' इत्यादी प्रत्यय लागतात... कर्मणी प्रयोगात - अपचीयत्थ, पचीयत्थ, अपच्चत्थ, पच्चत्थ, अपचीय, पचीय, अपचीया, पचीया, अपच्च, पच्च, अपच्चा, पच्चा, अपचीयु, पचीयु, अपचीयु, पचीयु, अपच्चु, पच्चु, अपच्चू, पच्चू इत्यादी - भाव प्रयोगात - अभुयत्थ, भुयत्थ, अभुय, भुय, अभुया, भुया - अभुयत्थ, भुयत्थ - 'मायोगे ईआआदि' या सूत्राने 'मा' च्या योगात देखील 'आ' इत्यादी प्रत्यय होतात - 'मा भवं अपचित्थ' इत्यादी. ปโรกฺเข อ อุ เอ ตฺถ อมฺห ตฺถเร ตฺโถ วฺโห อิมฺเห. परोक्ष भूतकाळात (parokkhe) अ, उ, ए, त्थ, अम्ह, त्थरे, त्थो, व्हो, इम्हे (हे प्रत्यय होतात). อปจฺจกฺเข ภุตานชฺชตนตฺเถ วตฺตมานโต กฺริยตฺถา ออาทโย โหนฺติ-อปโรกฺเขสูติ วจนา น วิกรณุปฺปตฺติ. अप्रत्यक्ष (परोक्ष) अनद्यतन भूतकाळाच्या अर्थामध्ये धातूंना 'अ' इत्यादी प्रत्यय लागतात. 'परोक्ष' असे म्हटल्यामुळे विकरण प्रत्यय उत्पन्न होत नाही. ปโรกฺขายญฺจ. आणि परोक्ष काळामध्ये देखील (द्वित्व होते). ปโรกฺขายํ ปฐมเมกสฺสรํ สทฺทรูปํ ทฺเว ภวติ. परोक्ष काळामध्ये पहिल्या एका स्वराच्या शब्दरूपाचे द्वित्व होते (ते दोन वेळा होते). โลโป’นาทิพฺยญฺชนสฺส. सुरुवातीचे नसलेल्या (अनादी) व्यंजनाचा लोप होतो. ทฺวิตฺเต ปุพฺพสฺสาทิโต’ญฺญสฺส พฺยญฺชนสฺส โลโป โหติ-ปปจ ปฺปจุ’ปปเจ ปปจิตฺถ-อิญภาวปกฺเข สํโยคาทิ โลโปปปจตฺถ, ปปจ ปปจิมฺห, ปปจิตฺถ ปปจตฺถ ปปจิเร, ปปจิตฺโถ ปปจตฺโถ ปปจิวฺโห, ปกปจิ ปปจิมฺเห-เอวํ กมฺเมปิ-ภาเว-ภุสฺย วุก. द्वित्व (द्विरुक्ती) झाले असता, पूर्व (पहिल्या) अक्षराव्यतिरिक्त इतर व्यंजनाचा लोप होतो - जसे की, पपच, पपचु, पपचे, पपचित्थ. इञ्-भावाच्या पक्षात संयोगादीचा लोप होऊन 'पपचत्थ' होते; पपच, पपचिम्ह, पपचित्थ, पपचत्थ, पपचिरे, पपचित्थो, पपचत्त्हो, पपचिव्हो, पपचि, पपचिम्हे. याचप्रमाणे कर्मणि आणि भावे प्रयोगातही रूपे होतात. 'भू' धातूच्या जागी 'वुक' आदेश होतो. ออาทิยุ ภุสฺส วุก โหติ. अ-आदि प्रत्यय पर असताना 'भू' धातूच्या जागी 'वुक' आदेश होतो. ปุพฺพสฺส อ. पूर्व (पहिल्या) अक्षराच्या स्वराच्या जागी 'अ' होतो. ออาทิสุ ทฺวตฺเต ปุพฺพสฺส ภุสฺส อ โหติ. अ-आदि प्रत्यय पर असताना, द्वित्व झाल्यावर पूर्व 'भू' च्या जागी 'अ' होतो. จตุตฺถทุติยานํ ตติยปฐมา. चतुर्थ आणि द्वितीय वर्णांच्या जागी अनुक्रमे तृतीय आणि प्रथम वर्ण होतात. ทฺวิตฺเต ปุพฺเพสํ จตุตฺถทุติยานํ ตติยปฐมา โหนฺติ ยถากฺกมนฺติ พกาเร-พภุว พภุวิตฺถ. द्वित्व झाले असता, पूर्व अक्षरांमधील चतुर्थ आणि द्वितीय वर्णांच्या जागी अनुक्रमे तृतीय आणि प्रथम वर्ण होतात. जसे की, ब-कारात - बभूव, बभूवित्थ. เอยฺยาโท วา’ติปตฺติยํ สฺสา สสํสุสฺเส สสถสฺสํ สฺสมฺหา สฺสถสฺสึสุ สสเส สฺสวฺเห สฺสึ สฺสามฺหเส. एय्यादि प्रत्ययांच्या विषयात, क्रियातिपत्तीमध्ये 'स्सा, ससं, सुस्से, ससथ, स्सं, स्स म्हा, स्सथ, स्सिंसु, सससे, स्सव्हे, स्सिं, स्साम्हसे' हे प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. เอยฺยาโท วิสเย กฺริยาติปตฺติยํ สฺสาทโย โหนฺติ วิภาสา-วิธุรปฺปจฺจโยปนิปาตโต การณเวกลฺลโต วา กฺริยายาติปตฺติ อนิปฺผตฺติ กฺริยาติปตฺติ-เอเตจสฺสาทโย สามตฺถิยา ตีตานาคเต สฺเววโหนฺติ-น วตฺตมาเนน ตตฺร กฺริยาติปตฺตฺยสมฺภวา-อาอีอิ จฺจาทินาวา รสฺเส-อปจิสฺส ปจิสฺส อปจิสฺสา ปจิสฺสา, อปจิสฺสํสุ ปจิสฺสํสุ-สฺเสสฺส เอยฺยาถาทีนา วา อกาเร-อปจิสฺส ปจิสฺส อปจิสฺเส ปจิสฺเส,อปจิสฺสถ ปจิสฺสถ,อปจิสฺสํ ปจิสฺสํ. อปจิสฺสมฺห, ปจิสฺสมฺห, อปจิสฺสมฺหา ปจิสฺสมฺหา, อปจิสฺสถ ปจิสฺสถ, อปจิสฺสึสุ ปจิสฺสึสุ, อปจิสฺสเส ปจิสฺสเส, อปจิสฺสวฺเห ปจิสฺสวฺเห, อปจิสฺสึปจิสฺสึ, อปจิสฺสามฺหเย ปจิสฺสามฺหเส-กมฺเม-อปจียิสฺส ปจิยิสฺสอปจียิสฺสา ปจิยิสฺสา-กฺยสฺส วา โลเป-อปจิสฺส ปจิสฺส อปจิสฺสา ปจิสฺสา อปจฺจิสฺส ปจฺจิสฺส อปจฺจิสฺสาน ปจฺจิสฺสา, อปจิยิสฺสํสุ ปจียิสฺสํสุอปจิสฺสํสุ ปจิสฺสํสุ. อปจฺจิสฺสํสุ ปจฺจิสฺสํสุ, อิจฺจาทิภาเว-อภุยิสฺส ภุยิสฺส อภุยิสฺสา ภุยิสฺสา, อภุยิสฺสถ ภุยิสฺสถ-วาติ วกึ, ทกฺขิเณนน เจ คมิสฺสติ นายกฏมฺปริยา ภวิสฺสติ. एय्यादि प्रत्ययांच्या विषयात क्रियातिपत्तीमध्ये 'स्सा' इत्यादी प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. प्रतिकूल कारणांच्या उपस्थितीमुळे किंवा कारणांच्या अभावामुळे क्रियेची अतिपत्ती म्हणजे निष्पत्ती न होणे (क्रिया अपूर्ण राहणे) याला 'क्रियातिपत्ती' म्हणतात. आणि हे 'स्सा' इत्यादी प्रत्यय सामर्थ्यामुळे केवळ भूतकाळ आणि भविष्यकाळातच होतात, वर्तमानकाळात नाही; कारण वर्तमानकाळात क्रियातिपत्तीचा असंभव असतो. 'आ, ई, इ' इत्यादी सूत्राने विकल्पेकरून र्हस्व झाल्यावर - अपचिस्स, पचिस्स, अपचिस्सा, पचिस्सा, अपचिस्सुं, पचिस्सुं. 'स्से' च्या जागी 'एय्याथ' इत्यादींनी विकल्पेकरून 'अ' कार झाल्यावर - अपचिस्स, पचिस्स, अपचिस्से, पचिस्से, अपचिस्सथ, pचिस्सथ, अपचिस्सं, पचिस्सं. अपचिस्सम्ह, पचिस्सम्ह, अपचिस्सम्हा, पचिस्सम्हा, अपचिस्सथ, पचिस्सथ, अपचिस्सिंसु, पचिस्सिंसु, अपचिस्ससे, पचिस्ससे, अपचिस्सव्हे, पचिस्सव्हे, अपचिस्सिं, पचिस्सिं, अपचिस्साम्हये, अपचिस्साम्हसे. कर्मणि प्रयोगात - अपचीयिस्स, पचीयिस्स, अपचीयिस्सा, पचीयिस्सा. 'क्य' चा विकल्पेकरून लोप झाल्यावर - अपचिस्स, पचिस्स, अपचिस्सा, पचिस्सा, अपच्चिस्स, पच्चिस्स, अपच्चिस्सान, पच्चिस्सा, अपचीयिस्सुं, पचीयिस्सुं, अपचिस्सुं, पचिस्सुं, अपच्चिस्सुं, पच्चिस्सुं इत्यादी. भावे प्रयोगात - अभूयिस्स, भूयिस्स, अभूयिस्सा, भूयिस्सा, अभूयिस्सथ, भूयिस्सथ. 'वा' (विकल्पेकरून) हे कशासाठी? 'दक्खिणेन चे गमिस्सति, न अयकटं परिया भविस्सति' (जर तो दक्षिणेने गेला असता, तर लोखंडी कढई प्राप्त झाली नसती - येथे क्रियातिपत्ती असूनही भविष्यकाळाचा प्रत्यय झाला आहे). เหตุผเลสฺเวยฺย เอยฺยุํ เอยฺยาสิ เอยฺยาถ เอยฺยามิ เอยฺยาม เอถ เอรํ เอโถ เอยฺยวฺโห เอยฺยํ เอยฺยามฺเห. हेतू आणि फळ यांच्या अर्थात 'एय्य, एय्युं, एय्यासि, एय्याथ, एय्यामि, एय्याम, एथ, एरं, एथो, एय्यव्हो, एय्यं, एय्याम्हे' हे प्रत्यय होतात. เหตุภุตายํ ผลภูตายญฺจ กฺริยายํ วตฺตมานโต กฺริยตฺถ เอยฺยาทโย วา โหนฺติ. हेतूभूत आणि फलभूत क्रियेमध्ये वर्तमानकाळाच्या अर्थी धातूच्या पुढे 'एय्य' इत्यादी प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. เอยฺเยยฺยาเสนฺตํ เฏ. एय्य, एय्यासि आणि एय्यं यांच्या जागी विकल्पेकरून 'ए' होतो. เอยฺย เอยฺยาสิ เอยฺยมิจฺเจสํ เฏ วา โหติ-ปเจ ปเจยฺย. एय्य, एय्यासि आणि एय्यं यांच्या जागी विकल्पेकरून 'ए' होतो - जसे की, पचे, पचेय्य. เอยฺยุํสฺสุํ. एय्युं च्या जागी 'स्सुं' होतो. เอยฺยุมิจฺจสฺส อุํ วา โหติ-ปจุํ ปเจยฺยุํ,ปเจ ปเจยฺยาสิ,-วา โอกาเร-ปเจยฺยาโถ ปเจยฺยาถ, ปเจยฺยามิ. एय्युं च्या जागी विकल्पेकरून 'उं' होतो - जसे की, पचुं, पचेय्युं; पचे, पचेय्यासि; विकल्पेकरून 'ओ' कार झाल्यावर - पचेय्याथो, पचेय्याथ, पचेय्यामि. เอยฺยามสฺเสมุ จ एय्याम च्या जागी विकल्पेकरून 'एमु' आणि 'उ' देखील होतो. เอยฺยามสฺส เอมุ วา โหติ อุ จ-ปเจมุ ปเจยฺยามุ ปเจยฺยามก, ปเจถ ปเจรํ ปเจโถ ปเจยฺยวฺโห, ปเจ ปเจยฺยํ ปเจยฺยามฺเห-กมฺเม-ปจีเย ปจียฺเย ปจฺเจ ปจฺเจยฺย, ปจิยุํ ปจีเยยฺยุํ ปจฺจุํ ปจฺเจยฺยุมิจฺจาทิ-ภาเว-ภุเย ภุเยยฺย, ภุเยถ. एय्याम च्या जागी विकल्पेकरून 'एमु' आणि 'उ' देखील होतो - जसे की, पचेमु, पचेय्यामु, पचेय्यामक; पचेथ, पचेरं, पचेथो, पचेय्यव्हो, पचे, पचेय्यं, पचेय्याम्हे. कर्मणि प्रयोगात - पचीये, पचीय्ये, पच्चे, पच्चेय्य, पचियुं, पचीयेय्युं, पच्चुं, पच्चेय्युं इत्यादी. भावे प्रयोगात - भूये, भूयेय्य, भूयेथ. ปาโต ปเจยฺย เจ ภุญฺเช อิจฺเจตฺถ ปจนกฺริยา 'पातो पचेय्य चे भुञ्जे' (जर सकाळी स्वयंपाक केला तर जेवीन) या वाक्यात स्वयंपाक करण्याची क्रिया... เหตุภุตาติ วิญฺเญยฺยา ผลนตฺวนุภวกฺริยา. ...ही हेतूभूत क्रिया आहे असे समजावे, आणि भोजन (अनुभव) करण्याची क्रिया ही फलभूत क्रिया आहे. สตฺตฺย รเหสฺเวยฺยาทิ. सामर्थ्य आणि योग्यता या अर्थांमध्ये 'एय्य' इत्यादी प्रत्यय होतात. สตฺติยํ อรหตฺเถว กฺริยตฺถา เอยฺยาทโย โหนฺติ-ภวํ ขลุ ภตฺตํ ปเจยฺย, ภวํ สมตฺโถ, ภวํ อรโภ. सामर्थ्य आणि योग्यता या अर्थांमध्ये धातूच्या पुढे 'एय्य' इत्यादी प्रत्यय होतात - जसे की, 'भवं खलु भत्तं पचेय्य' (आपण खरोखरच भात शिजवू शकता), 'भवं समत्थो' (आपण समर्थ आहात), 'भवं अरहो' (आपण योग्य आहात). สมฺภาวเน วา. संभावना (शक्यता) अर्थ व्यक्त होत असताना विकल्पेकरून 'एय्य' इत्यादी प्रत्यय होतात. สมฺภาวเน คมฺยมาเน ธาตุนา วุจฺจมาเน จ เอยฺยาทโย โหนฺติ นวิภาสา-อปิ ภวํ คิลิตํ ปาสาณํ ปเจยฺย อุทรคฺคินา-สมฺหาเวมิ สทฺทหามิ ภวํ ปเจยฺย,ภวํ ปจิสฺสติ. ภวํ อปจิ. संभावना अर्थ समजला जात असताना आणि धातूद्वारे तो सांगितला जात असताना 'एय्य' इत्यादी प्रत्यय विकल्पेकरून होतात - जसे की, 'अपि भवं गिलितं पासाणं पचेय्य उदरग्गिना' (कदाचित आपण गिळलेला दगडही जठराग्नीने पचवू शकाल - मी अशी संभावना करतो किंवा विश्वास ठेवतो की आपण पचवू शकाल), 'भवं पचेय्य', 'भवं पचिस्सति', 'भवं अपचि'. ปญฺหปตฺถนาวิธิสุ. प्रश्न, प्रार्थना आणि विधी (आज्ञा) या अर्थांमध्ये 'एय्य' इत्यादी प्रत्यय होतात. ปญฺหาทิสุ กฺริยตฺตโต เอยฺยาทโย โหนฺติ. प्रश्न इत्यादी अर्थांमध्ये धातूच्या पुढे 'एय्य' इत्यादी प्रत्यय होतात. ปญฺโห สมฺปุจฺฉนํ อิฏฺฐา สึสนํ ยาจนํ ทุเวปตฺถนา ภตฺติยา วาถ น นวา วฺยาปารณ วิธิ; प्रश्न म्हणजे विचारणे; इष्ट गोष्टीची आकांक्षा करणे आणि याचना करणे या दोन्हीला 'प्रार्थना' म्हणतात; भक्तीने किंवा आदराने दुसऱ्याला कामात प्रवृत्त करणे म्हणजे 'विधी' होय. ปญฺเห, กึ โส ภตฺตํ ปเจยฺย อุทาหุ พฺยญฺชนํ วา-ปตฺถนายํ, อโห วต โส ปเจยฺย เม-วิธิมฺหิ, ภวํ ภตฺตํ ปเจยฺย. प्रश्नामध्ये - 'किं सो भत्तं पचेय्य उदाहु ब्यञ्जनं वा' (तो भात शिजवेल की भाजी?); प्रार्थनेमध्ये - 'अहो वत सो पचेय्य मे' (अरे, त्याने माझ्यासाठी स्वयंपाक करावा!); विधीमध्ये - 'भवं भत्तं पचेय्य' (आपण भात शिजवावा). ตุ อนฺตุ หิ ถ มิ ม ตํ อนฺตํ สฺสุ วฺโห เอ อามเส. 'तु, अन्तु, हि, थ, मि, म, तं, अन्तं, स्सु, व्हो, ए, आमसे' हे प्रत्यय होतात. ปญฺหปตฺตนาวิธิสฺเวเต โหนฺติ กฺริยตฺถโต-ปจตุ ปจนฺตุ. प्रश्न, प्रार्थना आणि विधी या अर्थांमध्ये धातूच्या पुढे हे प्रत्यय होतात - जसे की, पचतु, पचन्तु. หิสฺส’โต โลโป. 'अ' कारानंतर याणाऱ्या 'हि' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून लोप होतो. อโต ปรสฺส หิสฺส วา โลโป โหติ-ปจ ปจาหิ-ถสฺส วา เวหาก-ปจวฺโห ปจถ,ปจามิ ปจาม, ปจตํ ปจนฺตํ, ปจสฺสุ ปจวฺโห, ปเจ ปจามเส-กมฺเม-ปจียตุ ปจฺจตุ ปจียนฺตุ ปจฺจนฺตุ อิจฺจาทิ-ภาเว, ภุยตุ ภุยตํ-ปจิตุํ ปยุตฺตีติ ปจนิจฺฉายํ. 'अ' कारानंतर येणाऱ्या 'हि' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून लोप होतो - जसे की, पच, पचाहि; 'थ' च्या जागी विकल्पेकरून 'व्ह' किंवा 'थ' होतो - पचव्हो, पचथ, पचामि, पचामा, पचतं, पचन्तं, पचस्सु, पचव्हो, पचे, पचामसे. कर्मणि प्रयोगात - पचीयतु, पच्चतु, पचीयन्तु, पच्चन्तु इत्यादी. भावे प्रयोगात - भूयतु, भूयतं. 'पचितुं पयुत्ती' म्हणजे शिजवण्याची इच्छा असणे. ปโยชกวฺยาปาเร ณปิ จ. प्रयोजक व्यापारात (प्रयोजक कर्त्याच्या व्यापारात) 'णि' आणि 'णापे' प्रत्यय देखील बहुधा होतात. กตฺตารํ โย ปโยเชติ ตสฺส วฺยาปาเร กฺริยตฺถา ณิ ณฺปิ โหนฺติ พหุลํ-‘‘อสฺสาณนุพนฺเธ’’ติ อา-ปโยชกวฺยาปาเร ณิณปินํ วิธานา ตทนฺตสฺส กฺริยตฺถตาติ ปาจิสทฺทโต ตฺยาทโย. जो कर्त्याला प्रवृत्त करतो, त्याच्या व्यापारात धातूच्या पुढे 'णि' आणि 'णापे' प्रत्यय बहुधा होतात. 'अस्साणनुबन्धे' या सूत्राने 'आ' होतो. प्रयोजक व्यापारात 'णि' आणि 'णापे' प्रत्ययांचे विधान केल्यामुळे, तदन्त शब्दाला धातूत्व प्राप्त होते, म्हणून 'पाचि' शब्दाच्या पुढे 'ति' इत्यादी प्रत्यय येतात. ณิณปฺยาปิหิ วา. 'णि' आणि 'णापे' प्रत्ययांच्या पुढे विकल्पेकरून... ณฺยาทฺยนฺเตหิ กฺริยตฺเถหิ อปโรกฺเกสุกตฺตุวิหิต กมานนฺตตฺยาทิสุ โล โหติ วิภาสา-‘‘ยุวณฺณานเม โอปฺปจฺจเย’’ติ เอกาเร ‘‘โญนมยวา สเร’’ติ อยาเทเส จ-ปาจยติ-อญฺญตฺร-ปาเจติ-ปาจยเร ปาจยนฺติ ปาเจนฺติจฺจาทิ-กมฺเม- 'णि' इत्यादी प्रत्ययांनी अन्त होणाऱ्या धातूंच्या पुढे परोक्ष नसलेल्या, कर्ता आणि कर्म अर्थांमध्ये विहित केलेल्या 'ति' इत्यादी प्रत्ययांचा विकल्पेकरून लोप होतो. 'युवण्णानामे ओप्पच्चये' या सूत्राने 'ए' कार झाल्यावर आणि 'ञोनमयवा सरे' या सूत्राने 'अय' आदेश झाल्यावर - पाचयति, दुसऱ्या पक्षात - पाचेति, पाचयरे, पाचयन्ति, पाचेन्ति इत्यादी. कर्मणि प्रयोगात - ทีโฆ สรสฺส. स्वराचा दीर्घ होतो. สรนฺตสฺส กฺริยตฺถสฺส ทีโฆ หาติ กฺเย-ปาจียติ ปาจียเร ปาจียนฺติจฺจาทิ-วุตฺตนเยน เญยฺยํ-ปโยชกวฺยาปาเร ณิณปฺยนฺตานํ สกมฺมกตฺตา น นภาเว รูปนโย. स्वराने अन्त होणाऱ्या धातूच्या स्वराचा 'क्य' प्रत्यय पर असताना दीर्घ होतो - जसे की, पाचीयति, पाचीयरे, पाचीयन्ति इत्यादी. हे पूर्वोक्त नियमाने जाणावे. प्रयोजक व्यापारात 'णि' आणि 'णापे' प्रत्ययांनी अन्त होणाऱ्या धातूंचे रूप सकर्मक आणि अकर्मक प्रयोगांनुसार होते. อกมฺมกาปิ โหนฺเตว ณิณปฺยนฺตา สกมฺมกา,สกมฺมกา ทฺวีกมฺมาสฺสุ ทฺวิกมฺมา จ ติกมฺมกา; अकर्मक धातू देखील 'णि' आणि 'णापे' प्रत्यय लागल्यावर सकर्मक होतात; सकर्मक धातू द्विकर्मक होतात आणि द्विकर्मक धातू त्रिकर्मक होतात. ภวิสฺสติ-ปาจยิสฺสติ ปาเจสฺสติ ปาจยิสฺสเร ปาจยิสฺสนฺติ ปาเจสฺสเร ปาเจสฺสนฺติจฺจาทิ-กมฺเม-ปาจียิสฺสติ-กฺยโลโป-ปาจิสฺสตีจฺจาทิ-ภุเต-อปาจยิตฺโถ ปาจยตฺโต อปาจยตฺโถ ปาจยตฺโถ อปาเจตฺโถ ปาเจตฺโถ อปาจยิ ปาจยิ. อปาจยี ปาจยี อปาจยึสุ ปาจยึสุ อปาจยํสุ ปาจยํสุ. भविष्यकाळात - पाचयिस्सति, पाचेस्सति, पाचयिस्सरे, पाचयिस्सन्ति, पाचेस्सरे, पाचेस्सन्ति इत्यादी. कर्मणि प्रयोगात - पाचीयिस्सति, 'क्य' चा लोप झाल्यावर - पाचिस्सति इत्यादी. भूतकाळात - अपाचयित्थो, पाचयत्तो, अपाचयत्थो, पाचयत्तो, अपाचेत्थो, पाचेत्तो, अपाचयि, पाचयि, अपाचयी, पाचयी, अपाचयिंसु, पाचयिंसु, अपाचयंसु, पाचयंसु. โญตฺตา สุํ. ञ-कार आणि ओ-कार आदेशांनंतर 'उं' च्या जागी विकल्पेकरून 'सुं' होतो. ญาเทสโต โออาเทสโต จ ปรสฺส อุมิจฺจสฺส สุํ วา โหติ-อปาจยสุํ ปาจยสุํ อปาเจสุํ ปาเจสุํ อปาจยุํ ปาจยุมิจฺจาทิ-อุสฺส สุเมว วิเสโส-กมฺเม-อปาจียิตฺโถ ปาจียิตฺโถ อปาจียตฺโถ ปาจียตฺโถ อปาจิยิ ปาจียิ อปาจิยี ปาจียิ อิจฺจาทิ-อนชฺชตเน-อปาจยตฺถ ปาจยตฺถ อปาเจตฺถ กปาเจตฺถ อปาจย ปาจย อปาจยา ปาจยา อปาจยุ ปาจยุ อปาจยู ปาจยู อิจฺจาทิ-กมฺเม-อปาจียตฺถ ปาจียตฺถ อปาจีย ปาจีย อปาจียา ปาจียา อิจฺจาทิ-ปโรกฺเข- ञ-कार आणि ओ-कार आदेशांनंतर येणाऱ्या 'उं' च्या जागी विकल्पेकरून 'सुं' होतो - जसे की, अपायचसुं, पायचसुं, अपाचेसुं, पाचेसुं, अपाचयुं, पाचय्युं इत्यादी. येथे 'उ' च्या जागी 'सुं' होणे हाच विशेष आहे. कर्मणि प्रयोगात - अपाचीयित्थो, पाचीयित्थो, अपाचीयत्तो, पाचीयत्तो, अपाचीयि, पाचीयि, अपाचीयी, पाचीयी इत्यादी. अनद्यतन भूतकाळात (ह्यस्तनीमध्ये) - अपाचयत्थ, पाचयत्थ, अपाचेत्थ, पाचेत्थ, अपाचय, पाचय, अपाचया, पाच्या, अपाचयु, पाचयु, अपाचयू, पाचयू इत्यादी. कर्मणि प्रयोगात - अपाचीयत्थ, पाचीयत्थ, अपाचीय, पाचीय, अपाचीया, पाचीया इत्यादी. परोक्ष भूतकाळात - รสฺโส ปุพฺพสฺส. पूर्वीच्या स्वराचा र्हस्व होतो. ทฺวิตฺเต ปุพฺพสฺส สโร รสฺโส โหติ-ปปาจย ปปาจยุ ปปาจเย ปปาจยิตฺถ ปปาเจตฺถ อิจฺจาทิ-กมฺเม-สพฺพํ กตฺตุสมํ-อตปตฺติยํอปาจยิสฺส ปาจยิสฺส อปาจยิสฺสา ปาจยิสฺสา อปาจยิสฺสํสุ ปาจยิสฺสํสุ อิจฺจาทิ-กมฺเม-อปาจิยิสฺส ปาจิยิสฺส อปาจียิสฺสา ปาจิยิสฺส อปาจิสฺส ปาจิสฺส อปาจิสฺสา ปาจิสฺสา อิจฺจาทิ-เหตุผเลสุ-ปาจเย ปาจเยยฺย ปาจยุํ ปาจเยยยุมิจฺจาทิ-กมฺเม-ปาจีเย ปาจีเยยยุมิจฺจาทิ-ตฺวาทิสุ-ปาจยตุ ปาเจตุ ปาจยนฺตุ ปาเจนฺตุ อิจฺจาทิ-กมฺเม-ปาจียตุ ปาจียนฺตุ อิจฺจาทิ-ณปิมฺหิ-ปาจาปยติ ปาจาเปติจฺจาทิ นฺยนฺตสมํ-ปาจยิตุมฺปยุตฺติติ ณฺยนฺตโตปิ ณิ. द्वित्व असताना पूर्वीचा स्वर र्हस्व होतो - पपाचय, पपाचयु, पपाचये, पपाचयित्थ, पपाचेत्थ इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात सर्व कर्तरी प्रयोगासारखेच असते. अतिपत्तीमध्ये (conditional) - अपाचयिस्स, पाचयिस्स, अपाचयिस्सा, पाचयिस्सा, अपाचयिस्सुं, पाचयिस्सुं इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - अपाचियिस्स, पाचियिस्स, अपाचीयिस्सा, पाचियिस्सा, अपाचिस्स, पाचिस्स, अपाचिस्सा, पाचिस्सा इत्यादी. प्रयोजक (हेतुफल) मध्ये - पाचये, पाचयेय्य, पाचयुं, पाचयेय्युं इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - पाचीये, पाचीयेय्युं इत्यादी. 'तु' इत्यादी प्रत्ययांमध्ये - पाचयतु, पाचेतु, पाचयन्तु, पाचेन्तु इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - पाचीयतु, पाचीयन्तु इत्यादी. 'णापि' प्रत्यय असताना - पाचापयति, पाचापेति इत्यादी ण्यन्त रूपांसारखेच असतात. 'पाचयितुं प्रयुक्तः' (शिजवण्यासाठी प्रवृत्त केलेला) या अर्थी ण्यन्त धातूहूनही 'णि' प्रत्यय होतो. ณิณปินํ เตสุ. त्यांच्यापुढे 'णि' आणि 'णापि' प्रत्ययांचा लोप होत नाही. ณี ณปินํ โลโป นโหติ เตสุ ณี ณปิสุ’ติก ปุพฺพณิโลเป-ปาจยติ ปาเจติจฺจาทิ สพฺพตฺถเญยฺยํ-ณปิเจวํ. 'णि' आणि 'णापि' प्रत्ययांचा लोप होत नाही. त्या 'णि' आणि 'णापि' प्रत्ययांच्या पुढे पूर्वीच्या 'णि' चा लोप झाल्यावर - पाचयति, पाचेति इत्यादी रूपे सर्व ठिकाणी जाणावीत. 'णापि' प्रत्यय असतानाही याचप्रमाणे जाणावे. ภุวาทิ นโย. भुवादि पद्धती (नय). อธุนา วิกรณปฺปเภทปฺปกาสนตฺถํ รุธาทีนํ อฏาฐคณนมาทิภุตสฺเสเกกสฺส กฺริยตฺถสฺส กานิ จิ รูปานิ อุทาหริยนฺเต-รุธ อาวรเณ-ตฺยาทิ. आता विकरण-भेदांचे प्रकटीकरण करण्यासाठी, रुधादि इत्यादी आठ गणांमधील प्रत्येकाच्या क्रियापदांची (धातूंची) काही रूपे उदाहरणादाखल दिली जात आहेत - रुध (आवरण करणे/रोखणे) इत्यादी. มญฺจ รุธาทีนํ. रुधादि धातूंच्या अंत्य स्वराच्या पुढे 'मं' (अनुस्वार) होतो. รุธาทิโต อปโรกฺเขสุกตฺตุวิหิตมานนฺตตฺยาทิสุ โลโหติ มญฺจานฺตสรา ปโร-รุนฺธติ รุนฺธเร รุนฺธนฺติจฺจาทิ-กมฺเม-‘‘มํ วา รุธาทีน’’นฺติ วา มํ-รุนฺธิยติ รุชฺฌตีจจาทิ-ปจิวิย สพฺพตฺถ เญยฺยํ. रुधादि धातूंच्या पुढे परोक्ष नसलेल्या, कर्तरि प्रयोगात विहित केलेल्या 'अन्ति' इत्यादी प्रत्ययांमध्ये अंत्य स्वराच्या पुढे 'मं' (अनुस्वार) होतो - रुन्धति, रुन्धरे, रुन्धन्ति इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - 'मं वा रुधादीनं' या सूत्राने विकल्प करून 'मं' होतो - रुन्धियति, रुज्झति इत्यादी. 'पच' धातूच्या रूपांप्रमाणे सर्व ठिकाणी जाणावे. รุธาทิ นโย. रुधादि पद्धती (नय). ทิว กีฬา วิชิคึสา โวหารชฺชุติ ถุติ คตีสุ. दिवु (धातू) क्रीडा (खेळणे), विजिगीषा (जिंकण्याची इच्छा), व्यवहार, द्युति (चमकणे), स्तुती आणि गती या अर्थांमध्ये आहे. ทิวาทีหิ ยก. दिवादि धातूंच्या पुढे 'यक' प्रत्यय होतो. ทิวาทีหิ ลวิสเย ยก โหติ-กกาโร กานุพนฺธการิยตฺโถ-เอวมุปริจ-ทิพฺพติ ทิพฺพเร ทิพฺพนฺติจฺจาทิ-กมฺเม-กิวียติ ทิพฺพติ ทิวียเร ทิวิยนฺติ ทิพฺพเร ทิพฺพนฺติจฺจาทิ. दिवादि धातूंच्या पुढे 'ल' (लकार) च्या विषयात 'यक' प्रत्यय होतो. 'क' कार हा अनुबंध-कार्यासाठी आहे. पुढेही याचप्रमाणे - दिब्बति, दिब्बरे, दिब्बन्ति इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - किवीयति, दिब्बति, दिवीयरे, दिवियन्ति, दिब्बरे, दिब्बन्ति इत्यादी. ทิวาทิ นโย. दिवादि पद्धती (नय). ตุท วฺยถเน. तुद (धातू) व्यथा (दुःख देणे/पीडा देणे) या अर्थी आहे. ตุทาทีหิ โก. तुदादि धातूंच्या पुढे 'को' प्रत्यय होतो. ตุทาทีหิ ลวิสเย โก โหติ-ตุทติ ตุทนฺติจฺจาทิ-กมฺเม-ตุทียติ ตุชฺชติ ตุทียเรตุทิยนฺติ ตุชฺชเร ตุทฺยนฺติจฺจาทิ. तुदादि धातूंच्या पुढे 'ल' च्या विषयात 'को' प्रत्यय होतो - तुदति, तुदन्ति इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - तुदीयति, तुज्जति, तुदीयरे, तुदियन्ति, तुज्जारे, तुद्यन्ति इत्यादी. ตุทาทิ นโย. तुदादि पद्धती (नय). ชิ ชเย. जि (धातू) जय मिळवणे (जिंकणे) या अर्थी आहे. ชฺยาทีหิ กฺตา. ज्यादि धातूंच्या पुढे 'क्ता' प्रत्यय होतो. ชิอาทีหิ กลวิสเย กฺนา โหติ-ชินาติ ชินนฺติจฺจาทิ-กมฺเม-ชิยติ ชิยเร ชิยนฺติจฺจาทิ. जि इत्यादी धातूंच्या पुढे 'ल' च्या विषयात 'क्ना' प्रत्यय होतो - जिनाति, जिनन्ति इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - जियति, जियरे, जियन्ति इत्यादी. ชฺยาทิ นโย. ज्यादि पद्धती (नय). กี ทพฺพวินีมเย. की (धातू) द्रव्य-विनिमय (खरेदी-विक्री) या अर्थी आहे. กฺยาทีหิ กฺณา. क्यादि धातूंच्या पुढे 'क्णा' प्रत्यय होतो. กีอาทีหี ลวิสเย กณา โหติ. की इत्यादी धातूंच्या पुढे 'ल' च्या विषयात 'कणा' (क्णा) प्रत्यय होतो. นาณสุ รสฺโส. 'ना' आणि 'णा' प्रत्यय पुढे असताना (धातूच्या स्वराचा) र्हस्व होतो. นาณสุ กฺริยตฺถสฺส รสฺโส โหติ-กิณติ กิณนฺติจฺจาทิ-กมฺเม-กียติ กียเร กียนฺติจฺจาที. 'ना' आणि 'णा' प्रत्यय पुढे असताना धातूच्या स्वराचा र्हस्व होतो - किणति, किणन्ति इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - कीयति, कीयरे, कीयन्ति इत्यादी. กฺยาทิ นโย. क्यादि पद्धती (नय). สุ สวเณ. सु (धातू) श्रवण करणे (ऐकणे) या अर्थी आहे. สฺวาทีหิ เกณา. स्वादि धातूंच्या पुढे 'केणा' प्रत्यय होतो. สฺวาทีหิ ลวิสเย เกณา โหติ-สุเณติ สุณนฺติจฺจาทิ. กมฺเม-สูยติ สูยเร สูยนฺติจฺจาทิ. स्वादि धातूंच्या पुढे 'ल' च्या विषयात 'केणा' प्रत्यय होतो - सुणेति, सुणन्ति इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - सूयति, सूयरे, सूयन्ति इत्यादी. สฺวาทิ นโย. स्वादि पद्धती (नय). ตน วิตฺถาเร. तन (धातू) विस्तार करणे या अर्थी आहे. ตนาทิตฺโว. तनादि धातूंच्या पुढे 'उ' आणि 'ओ' प्रत्यय होतात. ตนาทีหิ ลวิสเย โอ โหติ-ตโนติ ตโนนฺติจฺจาทิ. ปรจฺฉกฺเก. तनादि धातूंच्या पुढे 'ल' च्या विषयात 'ओ' प्रत्यय होतो - तनोति, तनोन्ति इत्यादी. परषट्क (परस्मैपद सहा प्रत्यय) असताना. โอวิกรณสฺสุ ปรจฺฉกฺเก. परषट्क असताना 'ओ' विकरणाचा 'उ' होतो. โอวิกรณสฺส อุ โหติ ปรจฺฉกฺกวิสเย-ตนุเต ตตฺวนฺเต อิจฺจาทิ-กมฺเม- 'ओ' विकरणाचा 'उ' होतो परषट्क विषयात - तनुते, तन्वन्ते इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - ตนสฺสา วา. 'तन' धातूच्या जागी विकल्प करून 'आ' होतो. ตนสฺส อา โหติ วา กฺเย-ตายติ ตญฺญาติ ตายเร ตายนฺติ ตญฺญเร ตญฺญนฺติจฺจานฺทิ. 'तन' धातूच्या जागी विकल्प करून 'आ' होतो 'क्य' प्रत्यय पुढे असताना - तायति, तञ्ञाति, तायरे, तायन्ति, तञ्ञरे, तञ्ञन्ति इत्यादी. ตนาทิ นโย. तनादि पद्धती (नय). วูร เถยฺเย. वूर (धातू) चोरी करणे या अर्थी आहे. จุราทิโต ณิ. चुरादि गणापासून 'णि' प्रत्यय होतो. จุราทีหิ กฺริยตฺเตหิ สกตฺเถ ณิ ปโร โหติ พหุลํ-โจรยติ โจรติ โจรยเร โจรยนฺติโจเรนฺติจฺจาทิ-กมฺเม-โจริยติ โจรียเร โจรียนฺติจฺจาทิ. चुरादि गणातील क्रियावाचक धातूंहून स्वार्थात 'णि' प्रत्यय नंतर (पर) बहुधा होतो - चोरयति, चोरति, चोरयरे, चोरयन्ति, चोरन्ति इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात - चोरियति, चोरीयरे, चोरीयन्ति इत्यादी. จุราทิ นโย-ตฺยาทโย. हा चुरादि नियम (नय) होय - 'ति' इत्यादी प्रत्यय लागून. ปรตฺถาย มยา ลทฺธํ กตฺวาน ปทสาธนํปุญฺเญน เตน โลโก’ยํ สาเธตุ ปทมจฺจุนํ; इतरांच्या कल्याणासाठी हे 'पदसाधन' रचून माझ्याद्वारे जे पुण्य प्राप्त झाले आहे, त्या पुण्याच्या प्रभावाने हा लोक (संसार) अच्युत पदाला (निर्वाणाला) प्राप्त करो. สุทฺธาสเยน ปริสุทฺธคุเณทิเตนสาเรน สารยติสงฺฆนิเสวิเตนรมฺเม’นุราธนคเร วสตมฺพุเชนวิทฺวาลิตํ นิชวิสุทฺธ กุลทฺธเชน; शुद्ध आशय असलेल्या, अत्यंत शुद्ध गुणांनी युक्त, श्रेष्ठ अशा सारयति संघाचे सेवन करणाऱ्या, रमणीय अनुराधापूर नगरात राहणाऱ्या, आपल्या विशुद्ध कुळाचे ध्वज असलेल्या आणि विद्वान अशा... มาเนนฺเตน ตถาคตํ ปฏิปทาโยเคน สทฺธาลุนานิจฺจาขณฺฑตโป’นเลหิ นิขิลปฺปาปาริสนฺตาปิตาสทฺธมฺมวฺหยสีหเตลฐติยา จามีกรตฺถาลินานานาวาทิกุทิฏฺฐิเภทปฏุนา นวาณิ กนวธู สามินา; प्रतिपत्तीच्या (आचरणाच्या) योगाने तथागतांचा आदर करणाऱ्या, श्रद्धाळू, निरंतर अखंड तपोअग्नीने सर्व पापरूपी शत्रूंना संतापविणाऱ्या (नष्ट करणाऱ्या), सद्धम्मरूपी सिंहतेलाला धारण करण्यासाठी सुवर्णपात्रासमान असलेल्या, विविध वाद आणि कुदृष्टींचे खंडन करण्यात चतुर असलेल्या, नवव्याकरणरूपी नववधूच्या स्वामी असलेल्या... สตฺถานํ กรุณวตา คตวตา กปารมฺปรํ ธีมตาเถเรนาตุมปาทปญฺชรคโต โย สทฺทสตฺตาทิสุโมคฺคลฺลายนวิสฺสุเตติห สุวจฺฉาโป วินีโต กยถาโส’กาสี ปิยทสฺสิ นาม ยติทํ พฺยตฺตํ สุขปฺปตฺติยา; करुणावान, पारमितेच्या पार गेलेल्या, बुद्धिमान अशा शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) चरणी लीन असलेल्या, शब्दशास्त्रात (व्याकरणात) निपुण असलेल्या, मोग्गल्लायन या नावाने प्रसिद्ध असलेल्या थेरांच्या चरणांजवळ राहणाऱ्या, विनयशील आणि सुपुत्राप्रमाणे असलेल्या 'पियदस्सी' नावाच्या भिक्खूने (यति) सुखाच्या प्राप्तीसाठी हे स्पष्ट (व्याकरण) रचले. วุตฺโตว วุตฺตมุปโภคินิยา สกายปินปฺปโยธรวนาปคเสวิกายรมฺหาวิหารวธุยา ติลกาตุเลนสนฺเตน กปฺปิณสมวฺหยมาตุเลน; आपल्या उपभोग घेणाऱ्या, पुष्ट स्तनांसारख्या पर्वतांतून वाहणाऱ्या नद्यांचे सेवन करणाऱ्या, रम्य विहाररूपी वधूच्या अनुपम तिलकासमान असलेल्या, शांत अशा 'कप्पिण' नावाच्या मामाने (प्रेरित केल्यानुसार)... ปทสาธนํ นิฏฺฐิตํ. पदसाधन समाप्त झाले. | |||
| မြန်မာ | |||
| ပါဠိတော် | အဋ္ဌကထာ | ဋီကာ | အခြား |
| 1101 ပါရာဇိက ပါဠိ 1102 ပါစိတ္တိယ ပါဠိ 1103 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဝိနယ) 1104 စူဠဝဂ္ဂ ပါဠိ 1105 ပရိဝါရ ပါဠိ | 1201 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၁ 1202 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၂ 1203 ပါစိတ္တိယ အဋ္ဌကထာ 1204 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဝိနယ) 1205 စူဠဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 1206 ပရိဝါရ အဋ္ဌကထာ | 1301 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၁ 1302 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၂ 1303 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၃ | 1401 ဒွေမာတိကာပါဠိ 1402 ဝိနယသင်္ဂဟ အဋ္ဌကထာ 1403 ဝဇိရဗုဒ္ဓိ ဋီကာ 1404 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၁ 1405 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၂ 1406 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၁ 1407 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၂ 1408 ကင်္ခာဝိတရဏီပုရာဏ ဋီကာ 1409 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ-ဥတ္တရဝိနိစ္ဆယ 1410 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၁ 1411 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၂ 1412 ပါစိတျာဒိယောဇနာပါဠိ 1413 ခုဒ္ဒသိက္ခာ-မူလသိက္ခာ 8401 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၁ 8402 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၂ 8403 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၁ 8404 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၂ 8405 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ နိဒါနကထာ 8406 ဒီဃနိကာယ (ပု-ဝိ) 8407 မဇ္ဈိမနိကာယ (ပု-ဝိ) 8408 သံယုတ္တနိကာယ (ပု-ဝိ) 8409 အင်္ဂုတ္တရနိကာယ (ပု-ဝိ) 8410 ဝိနယပိဋက (ပု-ဝိ) 8411 အဘိဓမ္မပိဋက (ပု-ဝိ) 8412 အဋ္ဌကထာ (ပု-ဝိ) 8413 နိရုတ္တိဒီပနီ 8414 ပရမတ္ထဒီပနီ သင်္ဂဟမဟာဋီကာပါဌ 8415 အနုဒီပနီပါဌ 8416 ပဋ္ဌာနုဒ္ဒေသ ဒီပနီပါဌ 8417 နမက္ကာရဋီကာ 8418 မဟာပဏာမပါဌ 8419 လက္ခဏာတော ဗုဒ္ဓထောမနာဂါထာ 8420 သုတဝန္ဒနာ 8421 ကမလာဉ္ဇလိ 8422 ဇိနာလင်္ကာရ 8423 ပဇ္ဇမဓု 8424 ဗုဒ္ဓဂုဏဂါထာဝလီ 8425 စူဠဂန္ထဝံသ 8427 သာသနဝံသ 8426 မဟာဝံသ 8429 မောဂ္ဂလ္လာနဗျာကရဏံ 8428 ကစ္စာယနဗျာကရဏံ 8430 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) 8431 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ဓါတုမာလာ) 8432 ပဒရူပသိဒ္ဓိ 8433 မောဂလ္လာနပဉ္စိကာ 8434 ပယောဂသိဒ္ဓိပါဌ 8435 ဝုတ္တောဒယပါဌ 8436 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာပါဌ 8437 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာဋီကာ 8438 သုဗောဓါလင်္ကာရပါဌ 8439 သုဗောဓါလင်္ကာရဋီကာ 8440 ဗာလာဝတာရ ဂဏ္ဌိပဒတ္ထဝိနိစ္ဆယသာရ 8446 ကဝိဒပ္ပဏနီတိ 8447 နီတိမဉ္ဇရီ 8445 ဓမ္မနီတိ 8444 မဟာရဟနီတိ 8441 လောကနီတိ 8442 သုတ္တန္တနီတိ 8443 သူရဿတိနီတိ 8450 စာဏကျနီတိ 8448 နရဒက္ခဒီပနီ 8449 စတုရာရက္ခဒီပနီ 8451 ရသဝါဟိနီ 8452 သီမဝိသောဓနီပါဌ 8453 ဝေဿန္တရဂီတိ 8454 မောဂ္ဂလ္လာန ဝုတ္တိဝိဝရဏပဉ္စိကာ 8455 ထူပဝံသ 8456 ဒါဌာဝံသ 8457 ဓါတုပါဌဝိလာသိနိယာ 8458 ဓါတုဝံသ 8459 ဟတ္ထဝနဂလ္လဝိဟာရဝံသ 8460 ဇိနစရိတယ 8461 ဇိနဝံသဒီပံ 8462 တေလကဋာဟဂါထာ 8463 မိလိဒဋီကာ 8464 ပဒမဉ္ဇရီ 8465 ပဒသာဓနံ 8466 သဒ္ဒဗိန္ဒုပကရဏံ 8467 ကစ္စာယနဓါတုမဉ္ဇုသာ 8468 သာမန္တကူဋဝဏ္ဏနာ |
| 2101 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 2102 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဒီဃ) 2103 ပါထိကဝဂ္ဂ ပါဠိ | 2201 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 2202 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဒီဃ) 2203 ပါထိကဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ | 2301 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 2302 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (ဒီဃ) 2303 ပါထိကဝဂ္ဂ ဋီကာ 2304 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၁ 2305 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၂ | |
| 3101 မူလပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3102 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3103 ဥပရိပဏ္ဏာသ ပါဠိ | 3201 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၁ 3202 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၂ 3203 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ 3204 ဥပရိပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ | 3301 မူလပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3302 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3303 ဥပရိပဏ္ဏာသ ဋီကာ | |
| 4101 သဂါထာဝဂ္ဂ ပါဠိ 4102 နိဒါနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4103 ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 4104 သဠာယတနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4105 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (သံယုတ္တ) | 4201 သဂါထာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4202 နိဒါနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4203 ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4204 သဠာယတနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4205 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (သံယုတ္တ) | 4301 သဂါထာဝဂ္ဂ ဋီကာ 4302 နိဒါနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4303 ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 4304 သဠာယတနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4305 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (သံယုတ္တ) | |
| 5101 ဧကကနိပါတ ပါဠိ 5102 ဒုကနိပါတ ပါဠိ 5103 တိကနိပါတ ပါဠိ 5104 စတုက္ကနိပါတ ပါဠိ 5105 ပဉ္စကနိပါတ ပါဠိ 5106 ဆက္ကနိပါတ ပါဠိ 5107 သတ္တကနိပါတ ပါဠိ 5108 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ပါဠိ 5109 နဝကနိပါတ ပါဠိ 5110 ဒသကနိပါတ ပါဠိ 5111 ဧကာဒသကနိပါတ ပါဠိ | 5201 ဧကကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5202 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5203 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5204 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ အဋ္ဌကထာ | 5301 ဧကကနိပါတ ဋီကာ 5302 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ ဋီကာ 5303 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ ဋီကာ 5304 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ဋီကာ | |
| 6101 ခုဒ္ဒကပါဌ ပါဠိ 6102 ဓမ္မပဒ ပါဠိ 6103 ဥဒါန ပါဠိ 6104 ဣတိဝုတ္တက ပါဠိ 6105 သုတ္တနိပါတ ပါဠိ 6106 ဝိမာနဝတ္ထု ပါဠိ 6107 ပေတဝတ္ထု ပါဠိ 6108 ထေရဂါထာ ပါဠိ 6109 ထေရီဂါထာ ပါဠိ 6110 အပဒါန ပါဠိ-၁ 6111 အပဒါန ပါဠိ-၂ 6112 ဗုဒ္ဓဝံသ ပါဠိ 6113 စရိယာပိဋက ပါဠိ 6114 ဇာတက ပါဠိ-၁ 6115 ဇာတက ပါဠိ-၂ 6116 မဟာနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6117 စူဠနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6118 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ ပါဠိ 6119 နေတ္တိပ္ပကရဏ ပါဠိ 6120 မိလိန္ဒပဉှ ပါဠိ 6121 ပေဋကောပဒေသ ပါဠိ | 6201 ခုဒ္ဒကပါဌ အဋ္ဌကထာ 6202 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၁ 6203 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၂ 6204 ဥဒါန အဋ္ဌကထာ 6205 ဣတိဝုတ္တက အဋ္ဌကထာ 6206 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၁ 6207 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၂ 6208 ဝိမာနဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6209 ပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6210 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၁ 6211 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၂ 6212 ထေရီဂါထာ အဋ္ဌကထာ 6213 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၁ 6214 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၂ 6215 ဗုဒ္ဓဝံသ အဋ္ဌကထာ 6216 စရိယာပိဋက အဋ္ဌကထာ 6217 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၁ 6218 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၂ 6219 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၃ 6220 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၄ 6221 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၅ 6222 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၆ 6223 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၇ 6224 မဟာနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6225 စူဠနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6226 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၁ 6227 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၂ 6228 နေတ္တိပ္ပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 6301 နေတ္တိပ္ပကရဏ ဋီကာ 6302 နေတ္တိဝိဘာဝိနီ | |
| 7101 ဓမ္မသင်္ဂဏီ ပါဠိ 7102 ဝိဘင်္ဂ ပါဠိ 7103 ဓါတုကထာ ပါဠိ 7104 ပုဂ္ဂလပညတ္တိ ပါဠိ 7105 ကထာဝတ္ထု ပါဠိ 7106 ယမက ပါဠိ-၁ 7107 ယမက ပါဠိ-၂ 7108 ယမက ပါဠိ-၃ 7109 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၁ 7110 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၂ 7111 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၃ 7112 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၄ 7113 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၅ | 7201 ဓမ္မသင်္ဂဏိ အဋ္ဌကထာ 7202 သမ္မောဟဝိနောဒနီ အဋ္ဌကထာ 7203 ပဉ္စပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 7301 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-မူလဋီကာ 7302 ဝိဘင်္ဂ-မူလဋီကာ 7303 ပဉ္စပကရဏ-မူလဋီကာ 7304 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-အနုဋီကာ 7305 ပဉ္စပကရဏ-အနုဋီကာ 7306 အဘိဓမ္မာဝတာရော-နာမရူပပရိစ္ဆေဒေါ 7307 အဘိဓမ္မတ္ထသင်္ဂဟော 7308 အဘိဓမ္မာဝတာရ-ပုရာဏဋီကာ 7309 အဘိဓမ္မမာတိကာပါဠိ | |
| සිංහල | |||
| පාලි කැනනය | විවරණ | අටුවා | වෙනත් |
| 1101 පාරාජික පාළි 1102 පාචිත්තිය පාළි 1103 මහාවග්ග පාළි (විනය) 1104 චූළවග්ග පාළි 1105 පරිවාර පාළි | 1201 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-1 1202 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-2 1203 පාචිත්තිය අට්ඨකථා 1204 මහාවග්ග අට්ඨකථා (විනය) 1205 චූළවග්ග අට්ඨකථා 1206 පරිවාර අට්ඨකථා | 1301 සාරත්ථදීපනී ටීකා-1 1302 සාරත්ථදීපනී ටීකා-2 1303 සාරත්ථදීපනී ටීකා-3 | 1401 ද්වෙමාතිකාපාළි 1402 විනයසංගහ අට්ඨකථා 1403 වජිරබුද්ධි ටීකා 1404 විමතිවිනෝදනී ටීකා-1 1405 විමතිවිනෝදනී ටීකා-2 1406 විනයාලංකාර ටීකා-1 1407 විනයාලංකාර ටීකා-2 1408 කඞ්ඛාවිතරණීපුරාණ ටීකා 1409 විනයවිනිච්ඡය-උත්තරවිනිච්ඡය 1410 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-1 1411 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-2 1412 පාචිත්යාදියෝජනාපාළි 1413 ඛුද්දසික්ඛා-මූලසික්ඛා 8401 විසුද්ධිමග්ග-1 8402 විසුද්ධිමග්ග-2 8403 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-1 8404 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-2 8405 විසුද්ධිමග්ග නිදානකථා 8406 දීඝනිකාය (පු-වි) 8407 මජ්ඣිමනිකාය (පු-වි) 8408 සංයුත්තනිකාය (පු-වි) 8409 අඞ්ගුත්තරනිකාය (පු-වි) 8410 විනයපිටක (පු-වි) 8411 අභිධම්මපිටක (පු-වි) 8412 අට්ඨකථා (පු-වි) 8413 නිරුත්තිදීපනී 8414 පරමත්ථදීපනී සඞ්ගහමහාටීකාපාඨ 8415 අනුදීපනීපාඨ 8416 පට්ඨානුද්දේස දීපනීපාඨ 8417 නමක්කාරටීකා 8418 මහාපණාමපාඨ 8419 ලක්ඛණාතෝ බුද්ධථෝමනාගාථා 8420 සුතවන්දනා 8421 කමලාඤ්ජලි 8422 ජිනාලඞ්කාර 8423 පජ්ජමධු 8424 බුද්ධගුණගාථාවලී 8425 චූළගන්ථවංස 8427 සාසනවංස 8426 මහාවංස 8429 මොග්ගල්ලානබ්යාකරණං 8428 කච්චායනබ්යාකරණං 8430 සද්දනීතිප්පකරණං (පදමාලා) 8431 සද්දනීතිප්පකරණං (ධාතුමාලා) 8432 පදරූපසිද්ධි 8433 මොග්ගල්ලානපඤ්චිකා 8434 පයෝගසිද්ධිපාඨ 8435 වුත්තෝදයපාඨ 8436 අභිධානප්පදීපිකාපාඨ 8437 අභිධානප්පදීපිකාටීකා 8438 සුබෝධාලඞ්කාරපාඨ 8439 සුබෝධාලඞ්කාරටීකා 8440 බාලාවතාර ගණ්ඨිපදත්ථවිනිච්ඡයසාර 8446 කවිදප්පණනීති 8447 නීතිමඤ්ජරී 8445 ධම්මනීති 8444 මහාරහනීති 8441 ලෝකනීති 8442 සුත්තන්තනීති 8443 සූරස්සතිනීති 8450 චාණක්යනීති 8448 නරදක්ඛදීපනී 8449 චතුරාරක්ඛදීපනී 8451 රසවාහිනී 8452 සීමවිසෝධනීපාඨ 8453 වෙස්සන්තරගීති 8454 මොග්ගල්ලාන වුත්තිවිවරණපඤ්චිකා 8455 ථූපවංස 8456 දාඨාවංස 8457 ධාතුපාඨවිලාසිනියා 8458 ධාතුවංස 8459 හත්ථවනගල්ලවිහාරවංස 8460 ජිනචරිතය 8461 ජිනවංසදීපං 8462 තේලකටාහගාථා 8463 මිලිදටීකා 8464 පදමඤ්ජරී 8465 පදසාධනං 8466 සද්දබින්දුපකරණං 8467 කච්චායනධාතුමඤ්ජුසා 8468 සාමන්තකූටවණ්ණනා |
| 2101 සීලක්ඛන්ධවග්ග පාළි 2102 මහාවග්ග පාළි (දීඝ) 2103 පාථිකවග්ග පාළි | 2201 සීලක්ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 2202 මහාවග්ග අට්ඨකථා (දීඝ) 2203 පාථිකවග්ග අට්ඨකථා | 2301 සීලක්ඛන්ධවග්ග ටීකා 2302 මහාවග්ග ටීකා (දීඝ) 2303 පාථිකවග්ග ටීකා 2304 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-1 2305 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-2 | |
| 3101 මූලපණ්ණාස පාළි 3102 මජ්ඣිමපණ්ණාස පාළි 3103 උපරිපණ්ණාස පාළි | 3201 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-1 3202 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-2 3203 මජ්ඣිමපණ්ණාස අට්ඨකථා 3204 උපරිපණ්ණාස අට්ඨකථා | 3301 මූලපණ්ණාස ටීකා 3302 මජ්ඣිමපණ්ණාස ටීකා 3303 උපරිපණ්ණාස ටීකා | |
| 4101 සගාථාවග්ග පාළි 4102 නිදානවග්ග පාළි 4103 ඛන්ධවග්ග පාළි 4104 සළායතනවග්ග පාළි 4105 මහාවග්ග පාළි (සංයුත්ත) | 4201 සගාථාවග්ග අට්ඨකථා 4202 නිදානවග්ග අට්ඨකථා 4203 ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 4204 සළායතනවග්ග අට්ඨකථා 4205 මහාවග්ග අට්ඨකථා (සංයුත්ත) | 4301 සගාථාවග්ග ටීකා 4302 නිදානවග්ග ටීකා 4303 ඛන්ධවග්ග ටීකා 4304 සළායතනවග්ග ටීකා 4305 මහාවග්ග ටීකා (සංයුත්ත) | |
| 5101 එකකනිපාත පාළි 5102 දුකනිපාත පාළි 5103 තිකනිපාත පාළි 5104 චතුක්කනිපාත පාළි 5105 පඤ්චකනිපාත පාළි 5106 ඡක්කනිපාත පාළි 5107 සත්තකනිපාත පාළි 5108 අට්ඨකාදිනිපාත පාළි 5109 නවකනිපාත පාළි 5110 දසකනිපාත පාළි 5111 එකාදසකනිපාත පාළි | 5201 එකකනිපාත අට්ඨකථා 5202 දුක-තික-චතුක්කනිපාත අට්ඨකථා 5203 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත අට්ඨකථා 5204 අට්ඨකාදිනිපාත අට්ඨකථා | 5301 එකකනිපාත ටීකා 5302 දුක-තික-චතුක්කනිපාත ටීකා 5303 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත ටීකා 5304 අට්ඨකාදිනිපාත ටීකා | |
| 6101 ඛුද්දකපාඨ පාළි 6102 ධම්මපද පාළි 6103 උදාන පාළි 6104 ඉතිවුත්තක පාළි 6105 සුත්තනිපාත පාළි 6106 විමානවත්ථු පාළි 6107 පේතවත්ථු පාළි 6108 ථේරගාථා පාළි 6109 ථේරීගාථා පාළි 6110 අපදාන පාළි-1 6111 අපදාන පාළි-2 6112 බුද්ධවංස පාළි 6113 චරියාපිටක පාළි 6114 ජාතක පාළි-1 6115 ජාතක පාළි-2 6116 මහානිද්දේස පාළි 6117 චූළනිද්දේස පාළි 6118 පටිසම්භිදාමග්ග පාළි 6119 නෙත්තිප්පකරණ පාළි 6120 මිලින්දපඤ්හ පාළි 6121 පේටකෝපදේස පාළි | 6201 ඛුද්දකපාඨ අට්ඨකථා 6202 ධම්මපද අට්ඨකථා-1 6203 ධම්මපද අට්ඨකථා-2 6204 උදාන අට්ඨකථා 6205 ඉතිවුත්තක අට්ඨකථා 6206 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-1 6207 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-2 6208 විමානවත්ථු අට්ඨකථා 6209 පේතවත්ථු අට්ඨකථා 6210 ථේරගාථා අට්ඨකථා-1 6211 ථේරගාථා අට්ඨකථා-2 6212 ථේරීගාථා අට්ඨකථා 6213 අපදාන අට්ඨකථා-1 6214 අපදාන අට්ඨකථා-2 6215 බුද්ධවංස අට්ඨකථා 6216 චරියාපිටක අට්ඨකථා 6217 ජාතක අට්ඨකථා-1 6218 ජාතක අට්ඨකථා-2 6219 ජාතක අට්ඨකථා-3 6220 ජාතක අට්ඨකථා-4 6221 ජාතක අට්ඨකථා-5 6222 ජාතක අට්ඨකථා-6 6223 ජාතක අට්ඨකථා-7 6224 මහානිද්දේස අට්ඨකථා 6225 චූළනිද්දේස අට්ඨකථා 6226 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-1 6227 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-2 6228 නෙත්තිප්පකරණ අට්ඨකථා | 6301 නෙත්තිප්පකරණ ටීකා 6302 නෙත්තිවිභාවිනී | |
| 7101 ධම්මසංගණී පාළි 7102 විභඞ්ග පාළි 7103 ධාතුකථා පාළි 7104 පුග්ගලපඤ්ඤත්ති පාළි 7105 කථාවත්ථු පාළි 7106 යමක පාළි-1 7107 යමක පාළි-2 7108 යමක පාළි-3 7109 පට්ඨාන පාළි-1 7110 පට්ඨාන පාළි-2 7111 පට්ඨාන පාළි-3 7112 පට්ඨාන පාළි-4 7113 පට්ඨාන පාළි-5 | 7201 ධම්මසංගණි අට්ඨකථා 7202 සම්මෝහවිනෝදනී අට්ඨකථා 7203 පඤ්චපකරණ අට්ඨකථා | 7301 ධම්මසංගණී-මූලටීකා 7302 විභඞ්ග-මූලටීකා 7303 පඤ්චපකරණ-මූලටීකා 7304 ධම්මසංගණී-අනුටීකා 7305 පඤ්චපකරණ-අනුටීකා 7306 අභිධම්මාවතාරෝ-නාමරූපපරිච්ඡේදෝ 7307 අභිධම්මත්ථසංගහෝ 7308 අභිධම්මාවතාර-පුරාණටීකා 7309 අභිධම්මමාතිකාපාළි | |
| Español | |||
| El Canon Pali | Los Comentarios | Los Subcomentarios | Otros |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| แบบไทย | |||
| บาลีแคน | ข้อคิดเห็น | คำอธิบายย่อย | อื่น |
| 1101 ปาราชิกปาฬิ 1102 ปาจิตติยปาฬิ 1103 มหาวคฺคปาฬิ (วินัย) 1104 จูฬวคฺคปาฬิ 1105 ปริวารปาฬิ | 1201 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๑ 1202 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๒ 1203 ปาจิตฺติยอฏฺฐกถา 1204 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (วินัย) 1205 จูฬวคฺคอฏฺฐกถา 1206 ปริวารอฏฺฐกถา | 1301 สารตฺถทีปนีฏีกา-๑ 1302 สารตฺถทีปนีฏีกา-๒ 1303 สารตฺถทีปนีฏีกา-๓ | 1401 ทเวมาติกาปาฬิ 1402 วินยสํคหอฏฺฐกถา 1403 วชิรพุทฺธิฏีกา 1404 วิมติวิโนทนีฏีกา-๑ 1405 วิมติวิโนทนีฏีกา-๒ 1406 วินยาลงฺการฏีกา-๑ 1407 วินยาลงฺการฏีกา-๒ 1408 กงฺขาวิตรณีปุราณฏีกา 1409 วินยวินิจฉย-อุตฺตรวินิจฉย 1410 วินยวินิจฉยฏีกา-๑ 1411 วินยวินิจฉยฏีกา-๒ 1412 ปาจิตฺยาทิโยชนาปาฬิ 1413 ขุทฺทสิกฺขา-มูลสิกฺขา 8401 วิสุทฺธิมคฺค-๑ 8402 วิสุทฺธิมคฺค-๒ 8403 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๑ 8404 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๒ 8405 วิสุทฺธิมคฺค-นิทานกถา 8406 ทีฆนิกาย (ปุ-วิ) 8407 มชฺฌิมนิกาย (ปุ-วิ) 8408 สํยุตฺตนิกาย (ปุ-วิ) 8409 องฺคุตฺตรนิกาย (ปุ-วิ) 8410 วินยปิฎก (ปุ-วิ) 8411 อภิธมฺมปิฎก (ปุ-วิ) 8412 อฏฺฐกถา (ปุ-วิ) 8413 นิรุตฺติทีปนี 8414 ปรมตฺถทีปนี สงฺคหมหาฏีกาปาฐ 8415 อนุทีปนีปาฐ 8416 ปฎฺฐานุทฺเทสทีปนีปาฐ 8417 นมกฺการฏีกา 8418 มหาปณามปาฐ 8419 ลกฺขณาโต พุทฺธโถมนาคาถา 8420 สุตวทน 8421 กมลาญฺชลิ 8422 ชินาลงฺการ 8423 ปชฺชมธุ 8424 พุทฺธคุณคาถาวลี 8425 จูฬคนฺถวํส 8427 สาสนวํส 8426 มหาวํส 8429 โมคฺคลฺลานพฺยากรณํ 8428 กจฺจายนพฺยากรณํ 8430 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ปทมาลา) 8431 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ธาตุมาลา) 8432 ปทรูปสิทฺธิ 8433 โมคคฺลานปญฺจิกา 8434 ปโยคสิทฺธิปาฐ 8435 วุตฺโตทยปาฐ 8436 อภิธานปฺปทีปิกาปาฐ 8437 อภิธานปฺปทีปิกาฏีกา 8438 สุโพธาลงฺการปาฐ 8439 สุโพธาลงฺการฏีกา 8440 พาลาวตาร คณฺฐิปทตฺถวินิจฺฉยสาร 8446 กวิทปฺปณนีติ 8447 นีติมญฺชรี 8445 ธมฺมนีติ 8444 มหารหนีติ 8441 โลกนีติ 8442 สุตฺตนฺตนีติ 8443 สูรสฺสตินีติ 8450 จาณกฺยนีติ 8448 นรทกฺขทีปนี 8449 จตุราวรกฺขทีปนี 8451 รสวาหินี 8452 สีมวิโสธนีปาฐ 8453 เวสฺสนฺตรคีติ 8454 โมคฺคลฺลาน วุตฺติวิวรณปญฺจิกา 8455 ถูปวํส 8456 ทาฐาวํส 8457 ธาตุปาฐวิลาสินิยา 8458 ธาตุวํส 8459 หตฺถวนคัลลวิหารวํส 8460 ชนจริตย 8461 ชนวํสทีปํ 8462 เตลกฏาหคาถา 8463 มิลิทฏีกา 8464 ปทมญฺชรี 8465 ปทสาธนํ 8466 สทฺทพินฺทุปกรณํ 8467 กจฺจายนธาตุมญฺชุสา 8468 สามนฺตกูฏวณฺณนา |
| 2101 สีลกฺขนฺธวคฺคปาฬิ 2102 มหาวคฺคปาฬิ (ทีฆ) 2103 ปาถิกวคฺคปาฬิ | 2201 สีลกฺขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 2202 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (ทีฆ) 2203 ปาถิกวคฺคอฏฺฐกถา | 2301 สีลกฺขนฺธวคฺคฏีกา 2302 มหาวคฺคฏีกา (ทีฆ) 2303 ปาถิกวคฺคฏีกา 2304 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๑ 2305 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๒ | |
| 3101 มูลปณฺณาสปาฬิ 3102 มชฺฌิมปณฺณาสปาฬิ 3103 อุปริปณฺณาสปาฬิ | 3201 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๑ 3202 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๒ 3203 มชฺฌิมปณฺณาสอฏฺฐกถา 3204 อุปริปณฺณาสอฏฺฐกถา | 3301 มูลปณฺณาสฏีกา 3302 มชฺฌิมปณฺณาสฏีกา 3303 อุปริปณฺณาสฏีกา | |
| 4101 สคาถาวคฺคปาฬิ 4102 นิทานวคฺคปาฬิ 4103 ขนฺธวคฺคปาฬิ 4104 สฬายตนวคฺคปาฬิ 4105 มหาวคฺคปาฬิ (สํยุตฺต) | 4201 สคาถาวคฺคอฏฺฐกถา 4202 นิทานวคฺคอฏฺฐกถา 4203 ขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 4204 สฬายตนวคฺคอฏฺฐกถา 4205 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (สํยุตฺต) | 4301 สคาถาวคฺคฏีกา 4302 นิทานวคฺคฏีกา 4303 ขนฺธวคฺคฏีกา 4304 สฬายตนวคฺคฏีกา 4305 มหาวคฺคฏีกา (สํยุตฺต) | |
| 5101 เอกกนิปาตปาฬิ 5102 ทุกนิปาตปาฬิ 5103 ติกนิปาตปาฬิ 5104 จตุกฺกนิปาตปาฬิ 5105 ปญฺจกนิปาตปาฬิ 5106 ฉกฺกนิปาตปาฬิ 5107 สตฺตกนิปาตปาฬิ 5108 อฏฺฐกาทินิปาตปาฬิ 5109 นวกนิปาตปาฬิ 5110 ทสกนิปาตปาฬิ 5111 เอกาทสกนิปาตปาฬิ | 5201 เอกกนิปาตอฏฺฐกถา 5202 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตอฏฺฐกถา 5203 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตอฏฺฐกถา 5204 อฏฺฐกาทินิปาตอฏฺฐกถา | 5301 เอกกนิปาตฏีกา 5302 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตฏีกา 5303 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตฏีกา 5304 อฏฺฐกาทินิปาตฏีกา | |
| 6101 ขุทฺทกปาฐปาฬิ 6102 ธมฺมปทปาฬิ 6103 อุทานปาฬิ 6104 อิติวุตฺตกปาฬิ 6105 สุตฺตนิบาตปาฬิ 6106 วิมานวตฺถุปาฬิ 6107 เปตวตฺถุปาฬิ 6108 เถรคาถาปาฬิ 6109 เถรีคาถาปาฬิ 6110 อปทานปาฬิ-๑ 6111 อปทานปาฬิ-๒ 6112 พุทธวงฺสปาฬิ 6113 จริยาปิฏกปาฬิ 6114 ชาตกปาฬิ-๑ 6115 ชาตกปาฬิ-๒ 6116 มหานิทฺเทสปาฬิ 6117 จูฬนิทฺเทสปาฬิ 6118 ปฏิสมฺภิทามคฺคปาฬิ 6119 เนตฺติปฺปกฺรณปาฬิ 6120 มิลินฺทปญฺหาปาฬิ 6121 เปฏโกปเทสปาฬิ | 6201 ขุทฺทกปาฐอฏฺฐกถา 6202 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๑ 6203 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๒ 6204 อุทานอฏฺฐกถา 6205 อิติวุตฺตกอฏฺฐกถา 6206 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๑ 6207 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๒ 6208 วิมานวตฺถุอฏฺฐกถา 6209 เปตวตฺถุอฏฺฐกถา 6210 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๑ 6211 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๒ 6212 เถรีคาถาอฏฺฐกถา 6213 อปทานอฏฺฐกถา-๑ 6214 อปทานอฏฺฐกถา-๒ 6215 พุทธวงฺสอฏฺฐกถา 6216 จริยาปิฏกอฏฺฐกถา 6217 ชาตกอฏฺฐกถา-๑ 6218 ชาตกอฏฺฐกถา-๒ 6219 ชาตกอฏฺฐกถา-๓ 6220 ชาตกอฏฺฐกถา-๔ 6221 ชาตกอฏฺฐกถา-๕ 6222 ชาตกอฏฺฐกถา-๖ 6223 ชาตกอฏฺฐกถา-๗ 6224 มหานิทฺเทสอฏฺฐกถา 6225 จูฬนิทฺเทสอฏฺฐกถา 6226 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๑ 6227 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๒ 6228 เนตฺติปฺปกฺรณอฏฺฐกถา | 6301 เนตฺติปฺปกฺรณฏีกา 6302 เนตฺติวิภาวินี | |
| 7101 ธมฺมสงฺคณีปาฬิ 7102 วิภงฺคปาฬิ 7103 ธาตุกถาปาฬิ 7104 ปุคฺคลปญฺญตฺติปาฬิ 7105 กถาวตฺถุปาฬิ 7106 ยมกปาฬิ-๑ 7107 ยมกปาฬิ-๒ 7108 ยมกปาฬิ-๓ 7109 ปฎฺฐานปาฬิ-๑ 7110 ปฎฺฐานปาฬิ-๒ 7111 ปฎฺฐานปาฬิ-๓ 7112 ปฎฺฐานปาฬิ-๔ 7113 ปฎฺฐานปาฬิ-๕ | 7201 ธมฺมสงฺคณิอฏฺฐกถา 7202 สมฺโมหวินิทนีอฏฺฐกถา 7203 ปญฺจปกรณอฏฺฐกถา | 7301 ธมฺมสงฺคณีมูลฏีกา 7302 วิภงฺคมูลฏีกา 7303 ปญฺจปกรณมูลฏีกา 7304 ธมฺมสงฺคณีอนุฏีกา 7305 ปญฺจปกรณอนุฏีกา 7306 อภิธมฺมาวตาโร-นามรูปปริจฺเฉโท 7307 อภิธมฺมตฺถสงฺคโห 7308 อภิธมฺมาวตาร-ปุราณฏีกา 7309 อภิธมฺมมาติกาปาฬิ | |
| བོད་མི | |||
| པཱ་ལི་གསུང་རབ། | འགྲེལ་བཤད། | འགྲེལ་བཤད་ཕྲན། | གཞན། |
| 1101 ཕ་ར་ཇི་ཀ་པཱ་ལི། 1102 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་པཱ་ལི། 1103 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (ཝི་ན་ཡ) 1104 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 1105 པ་རི་ཝཱ་ར་པཱ་ལི། | 1201 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 1202 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 1203 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1204 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (ཝི་ན་ཡ) 1205 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1206 པ་རི་ཝཱ་ར་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 1301 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1302 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1303 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༣ | 1401 དྭེ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། 1402 ཝི་ན་ཡ་སངྒ་ཧ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1403 ཝ་ཇི་ར་བུད་དྷི་ཊཱི་ཀཱ། 1404 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1405 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1406 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1407 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1408 ཀངྑཱ་ཝི་ཏ་ར་ཎཱི་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 1409 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཨུ་ཏྟ་ར་ཝི་ནི་ཙ་ཡ། 1410 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1411 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1412 པཱ་ཙི་ཏྱཱ་དི་ཡོ་ཇ་ནཱ་པཱ་ལི། 1413 ཁུད་ད་སིཀྑཱ་མཱུ་ལ་སིཀྑཱ། 8401 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༡ 8402 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༢ 8403 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 8404 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 8405 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་ནི་དཱ་ན་ཀ་ཐཱ། 8406 དཱི་གྷ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8407 མཛྷི་མ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8408 སཾ་ཡུཏྟ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8409 ཨངྒུ་ཏྟ་ར་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8410 ཝི་ན་ཡ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8411 ཨ་བྷི་དྷམྨ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8412 ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (པུ་ཝི) 8413 ནི་རུཏྟི་དཱི་པ་ནཱི། 8414 པ་ར་མཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་སངྒ་ཧ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8415 ཨ་ནུ་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8416 པཊྛཱ་ནུདྡེ་ས་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8417 ན་མཀྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8418 མ་ཧཱ་པ་ཎཱ་མ་པཱ་ཋ། 8419 ལཀྑ་ཎཱ་ཏོ་བུདྡྷ་ཐོ་མ་ནཱ་གཱ་ཐཱ། 8420 སུ་ཏ་ཝནྡ་ནཱ། 8421 ཀ་མ་ལཱཉྫ་ལི། 8422 ཇི་ནཱ་ལངྐཱ་ར། 8423 པཛྫ་མ་དྷུ། 8424 བུདྡྷ་གུ་ཎ་གཱ་ཐཱ་ཝ་ལཱི། 8425 ཙཱུ་ལ་གནྠ་ཝཾ་ས། 8427 སཱ་ས་ན་ཝཾ་ས། 8426 མ་ཧཱ་ཝཾ་ས། 8429 མོགྒ་ལླཱ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8428 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8430 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (པ་ད་མཱ་ལཱ) 8431 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (དྷཱ་ཏུ་མཱ་ལཱ) 8432 པ་ད་རཱུ་པ་སིད་དྷི། 8433 མོ་ག་ལླཱ་ན་པཉྩ་ཀཱ། 8434 པ་ཡོ་ག་སིད་དྷི་པཱ་ཋ། 8435 བུཏྟོ་ད་ཡ་པཱ་ཋ། 8436 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8437 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་ཊཱི་ཀཱ། 8438 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་པཱ་ཋ། 8439 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8440 བཱ་ལཱ་ཝ་ཏཱ་ར་གཎྛི་པ་དཏྠ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་སཱ་ར། 8446 ཀ་ཝི་དཔྤ་ཎ་ནཱི་ཏི། 8447 ནཱི་ཏི་མཉྫ་རཱི། 8445 དྷམྨ་ནཱི་ཏི། 8444 མ་ཧཱ་ར་ཧ་ནཱི་ཏི། 8441 ལོ་ཀ་ནཱི་ཏི། 8442 སུཏྟནྟ་ནཱ་ཏི། 8443 སཱུ་རསྶ་ཏི་ནཱི་ཏི། 8450 ཙཱ་ཎཀྱ་ནཱི་ཏི། 8448 ན་ར་དཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8449 ཙ་ཏུ་རཱ་རཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8451 ར་ས་ཝཱ་ཧི་ནཱི། 8452 སཱི་མ་ཝི་སོ་ད་ནཱི་པཱ་ཋ། 8453 ཝེསྶནྟ་ར་གཱི་ཏི། 8454 མོགྒ་ལླཱ་ན་བུཏྟི་ཝི་ཝ་ར་ཎ་པཉྩ་ཀཱ། 8455 ཐཱུ་པ་ཝཾ་ས། 8456 དཱ་ཊྷཱ་ཝཾ་ས། 8457 དྷཱ་ཏུ་པཱ་ཋ་ཝི་ལཱ་སི་ནི་ཡཱ། 8458 དྷཱ་ཏུ་ཝཾ་ས། 8459 ཧཏྠ་ཝ་ན་གལླ་ཝི་ཧཱ་ར་ཝཾ་ས། 8460 ཇི་ན་ཙ་རི་ཏ་ཡ། 8461 ཇི་ན་ཝཾ་ས་དཱི་པཾ། 8462 ཏེ་ལ་ཀ་ཊཱ་ཧ་གཱ་ཐཱ། 8463 མི་ལི་ད་ཊཱི་ཀཱ། 8464 པ་ད་མཉྫ་རཱི། 8465 པ་ད་སཱ་ད་ནཾ། 8466 སདྡ་བིནྡུ་པ་ཀ་ར་ཎཾ། 8467 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་དྷཱ་ཏུ་མཉྫུ་སཱ། 8468 སཱ་མནྟ་ཀཱུ་ཊ་ཝཎྞ་ནཱ། |
| 2101 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 2102 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (དཱི་གྷ) 2103 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་པཱ་ལི། | 2201 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 2202 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (དཱི་གྷ) 2203 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 2301 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2302 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (དཱི་གྷ) 2303 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2304 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 2305 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༢ | |
| 3101 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3102 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3103 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། | 3201 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 3202 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 3203 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 3204 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 3301 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3302 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3303 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 4101 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4102 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4103 ཁནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4104 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4105 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4201 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4202 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4203 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4204 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4205 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4301 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4302 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4303 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4304 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4305 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | |
| 5101 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5102 དུ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5103 ཏི་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5104 ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5105 པཉྩ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5106 ཆཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5107 སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5108 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5109 ན་ཝ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5110 ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5111 ཨེ་ཀཱ་ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། | 5201 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5202 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5203 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5204 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 5301 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5302 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5303 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5304 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 6101 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་པཱ་ལི། 6102 དྷམྨ་པ་ད་པཱ་ལི། 6103 ཨུ་དཱ་ན་པཱ་ལི། 6104 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་པཱ་ལི། 6105 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 6106 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6107 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6108 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6109 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6110 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 6111 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 6112 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་པཱ་ལི། 6113 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་པཱ་ལི། 6114 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 6115 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 6116 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6117 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6118 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་པཱ་ལི། 6119 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་པཱ་ལི། 6120 མི་ལིནྡ་པཉྷ་པཱ་ལི། 6121 པེ་ཊ་ཀོ་པ་དེ་ས་པཱ་ལི། | 6201 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6202 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6203 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6204 ཨུ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6205 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6206 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6207 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6208 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6209 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6210 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6211 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6212 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6213 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6214 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6215 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6216 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6217 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6218 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6219 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༣ 6220 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༤ 6221 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༥ 6222 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༦ 6223 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༧ 6224 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6225 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6226 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6227 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6228 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 6301 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 6302 ནེཏྟི་ཝི་བྷཱི་ནཱི། | |
| 7101 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་པཱ་ལི། 7102 ཝི་བྷངྒ་པཱ་ལི། 7103 དྷཱ་ཏུ་ཀ་ཐཱ་པཱ་ལི། 7104 པུགྒ་ལ་པཉྙཏྟི་པཱ་ལི། 7105 ཀ་ཐཱ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 7106 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 7107 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 7108 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༣ 7109 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 7110 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 7111 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༣ 7112 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༤ 7113 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༥ | 7201 དྷམྨ་སངྒ་ཎི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7202 སམྨོ་ཧ་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7203 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 7301 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7302 ཝི་བྷངྒ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7303 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7304 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7305 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7306 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་རོ་ནཱ་མ་རཱུ་པ་པ་རི་ཙྪེ་དོ། 7307 ཨ་བྷི་དྷམྨཏྠ་སངྒ་ཧོ། 7308 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་ར་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 7309 ཨ་བྷི་དྷམྨ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། | |
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| Kinh điển Pali | Chú giải | Phụ chú giải | Khác |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Tạng Luật) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 1 1202 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 2 1203 Chú Giải Pācittiya 1204 Chú Giải Mahāvagga (Tạng Luật) 1205 Chú Giải Cūḷavagga 1206 Chú Giải Parivāra | 1301 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 1 1302 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 2 1303 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Chú Giải Vinayasaṅgaha 1403 Phụ Chú Giải Vajirabuddhi 1404 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 1 1405 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 2 1406 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 1 1407 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 2 1408 Phụ Chú Giải Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 1 1411 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Thanh Tịnh Đạo - 1 8402 Thanh Tịnh Đạo - 2 8403 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 1 8404 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 2 8405 Lời Tựa Thanh Tịnh Đạo 8406 Trường Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8407 Trung Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8408 Tương Ưng Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8409 Tăng Chi Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8410 Tạng Luật (Vấn Đáp) 8411 Tạng Vi Diệu Pháp (Vấn Đáp) 8412 Chú Giải (Vấn Đáp) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Phụ Chú Giải Namakkāra 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Phụ Chú Giải Abhidhānappadīpikā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Phụ Chú Giải Subodhālaṅkāra 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8444 Mahārahanīti 8445 Dhammanīti 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8450 Cāṇakyanīti 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Phụ Chú Giải Milinda 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Trường Bộ) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2202 Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2203 Chú Giải Pāthikavagga | 2301 Phụ Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2302 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2303 Phụ Chú Giải Pāthikavagga 2304 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 1 2305 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 1 3202 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 2 3203 Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3204 Chú Giải Uparipaṇṇāsa | 3301 Phụ Chú Giải Mūlapaṇṇāsa 3302 Phụ Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3303 Phụ Chú Giải Uparipaṇṇāsa | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Tương Ưng Bộ) | 4201 Chú Giải Sagāthāvagga 4202 Chú Giải Nidānavagga 4203 Chú Giải Khandhavagga 4204 Chú Giải Saḷāyatanavagga 4205 Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | 4301 Phụ Chú Giải Sagāthāvagga 4302 Phụ Chú Giải Nidānavagga 4303 Phụ Chú Giải Khandhavagga 4304 Phụ Chú Giải Saḷāyatanavagga 4305 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Chú Giải Ekakanipāta 5202 Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5203 Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5204 Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | 5301 Phụ Chú Giải Ekakanipāta 5302 Phụ Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5303 Phụ Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5304 Phụ Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi - 1 6111 Apadāna Pāḷi - 2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi - 1 6115 Jātaka Pāḷi - 2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Chú Giải Khuddakapāṭha 6202 Chú Giải Dhammapada - 1 6203 Chú Giải Dhammapada - 2 6204 Chú Giải Udāna 6205 Chú Giải Itivuttaka 6206 Chú Giải Suttanipāta - 1 6207 Chú Giải Suttanipāta - 2 6208 Chú Giải Vimānavatthu 6209 Chú Giải Petavatthu 6210 Chú Giải Theragāthā - 1 6211 Chú Giải Theragāthā - 2 6212 Chú Giải Therīgāthā 6213 Chú Giải Apadāna - 1 6214 Chú Giải Apadāna - 2 6215 Chú Giải Buddhavaṃsa 6216 Chú Giải Cariyāpiṭaka 6217 Chú Giải Jātaka - 1 6218 Chú Giải Jātaka - 2 6219 Chú Giải Jātaka - 3 6220 Chú Giải Jātaka - 4 6221 Chú Giải Jātaka - 5 6222 Chú Giải Jātaka - 6 6223 Chú Giải Jātaka - 7 6224 Chú Giải Mahāniddesa 6225 Chú Giải Cūḷaniddesa 6226 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 1 6227 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 2 6228 Chú Giải Nettippakaraṇa | 6301 Phụ Chú Giải Nettippakaraṇa 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi - 1 7107 Yamaka Pāḷi - 2 7108 Yamaka Pāḷi - 3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi - 1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi - 2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi - 3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi - 4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi - 5 | 7201 Chú Giải Dhammasaṅgaṇi 7202 Chú Giải Sammohavinodanī 7203 Chú Giải Pañcapakaraṇa | 7301 Phụ Chú Giải Gốc Dhammasaṅgaṇī 7302 Phụ Chú Giải Gốc Vibhaṅga 7303 Phụ Chú Giải Gốc Pañcapakaraṇa 7304 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Dhammasaṅgaṇī 7305 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Pañcapakaraṇa 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Phụ Chú Giải Cổ Điển Abhidhammāvatāra 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |