| বাংলা | |||
| পালি | অট্ঠকথা | টীকা | অন্ন |
| 1101 পারাজিক পালি 1102 পাচিত্তিয় পালি 1103 মহাবগ্গ পালি (বিনয়) 1104 চূলবগ্গ পালি 1105 পরিবার পালি | 1201 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-১ 1202 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-২ 1203 পাচিত্তিয় অট্ঠকথা 1204 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (বিনয়) 1205 চূলবগ্গ অট্ঠকথা 1206 পরিবার অট্ঠকথা | 1301 সারত্থদীপনী টীকা-১ 1302 সারত্থদীপনী টীকা-২ 1303 সারত্থদীপনী টীকা-৩ | 1401 দ্বেমাতিকাপালি 1402 বিনয়সংগহ অট্ঠকথা 1403 বজিরবুদ্ধি টীকা 1404 বিমতিবিনোদনী টীকা-১ 1405 বিমতিবিনোদনী টীকা-২ 1406 বিনয়ালংকার টীকা-১ 1407 বিনয়ালংকার টীকা-২ 1408 কঙ্খাবিতরণীপুরাণ টীকা 1409 বিনয়বিনিচ্ছয়-উত্তরবিনিচ্ছয় 1410 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-১ 1411 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-২ 1412 পাচিত্যাদিযোজনাপালি 1413 খুদ্ধসিক্খা-মূলসিক্খা 8401 বিসুদ্ধিমগ্গ-১ 8402 বিসুদ্ধিমগ্গ-২ 8403 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-১ 8404 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-২ 8405 বিসুদ্ধিমগ্গ নিদানকথা 8406 দীঘনিকায় (পু-বি) 8407 মজ্ঝিমনিকায় (পু-বি) 8408 সংযুত্তনিকায় (পু-বি) 8409 অঙ্গুত্তরনিকায় (পু-বি) 8410 বিনয়পিটক (পু-বি) 8411 অভিধম্মপিটক (পু-বি) 8412 অট্ঠকথা (পু-বি) 8413 নিরুত্তিদীপনী 8414 পরমত্থদীপনী সংগহমহাটীকাপাঠ 8415 অনুদীপনীপাঠ 8416 পট্ঠানুদ্দেস দীপনীপাঠ 8417 নমক্কারটীকা 8418 মহাপণামপাঠ 8419 লক্খণাতো বুদ্ধথোমনাগাথা 8420 সুতবন্দনা 8421 কমলাঞ্জলি 8422 জিনালংকার 8423 পজ্জমধু 8424 বুদ্ধগুণগাথাবলী 8425 চূলগন্থবংস 8426 মহাবংস 8427 সাসনবংস 8428 কচ্চায়নব্যাকরণং 8429 মোগ্গল্লানব্যাকরণং 8430 সদ্দনীতিপ্পকরণং (পদমালা) 8431 সদ্দনীতিপ্পকরণং (ধাতুমালা) 8432 পদরূপসিদ্ধি 8433 মোগ্গল্লানপঞ্চিকা 8434 পযোগসিদ্ধিপাঠ 8435 বুত্তোদয়পাঠ 8436 অভিধানপ্পদীপিকাপাঠ 8437 অভিধানপ্পদীপিকাটীকা 8438 সুবোধালংকারপাঠ 8439 সুবোধালংকারটীকা 8440 বালাবতার গণ্ঠিপদত্থবিনিচ্ছয়সার 8441 লোকনীতি 8442 সুত্তন্তনীতি 8443 সূরস্সতীনীতি 8444 মহারহনীতি 8445 ধম্মনীতি 8446 কবিদপ্পণনীতি 8447 নীতিমঞ্জরী 8448 নরদক্খদীপনী 8449 চতুরারক্খদীপনী 8450 চাণক্যনীতি 8451 রসবাহিনী 8452 সীমাবিসোধনীপাঠ 8453 বেস্সন্তরগীতি 8454 মোগ্গল্লান বুত্তিবিবরণপঞ্চিকা 8455 থূপবংস 8456 দাঠাবংস 8457 ধাতুপাঠবিলাসিনিয়া 8458 ধাতুবংস 8459 হত্থবনগল্লবিহারবংস 8460 জিনচরিতয় 8461 জিনবংসদীপং 8462 তেলকটাহগাথা 8463 মিলিদটীকা 8464 পদমঞ্জরী 8465 পদসাধনং 8466 সদ্দবিন্দুপকরণং 8467 কচ্চায়নধাতুমঞ্জুসা 8468 সামন্তকূটবণ্ণনা |
| 2101 সীলক্খন্ধবগ্গ পালি 2102 মহাবগ্গ পালি (দীঘ) 2103 পাথিকবগ্গ পালি | 2201 সীলক্খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 2202 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (দীঘ) 2203 পাথিকবগ্গ অট্ঠকথা | 2301 সীলক্খন্ধবগ্গ টীকা 2302 মহাবগ্গ টীকা (দীঘ) 2303 পাথিকবগ্গ টীকা 2304 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-১ 2305 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-২ | |
| 3101 মূলপণ্ণাস পালি 3102 মজ্ঝিমপণ্ণাস পালি 3103 উপরিপণ্ণাস পালি | 3201 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-১ 3202 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-২ 3203 মজ্ঝিমপণ্ণাস অট্ঠকথা 3204 উপরিপণ্ণাস অট্ঠকথা | 3301 মূলপণ্ণাস টীকা 3302 মজ্ঝিমপণ্ণাস টীকা 3303 উপরিপণ্ণাস টীকা | |
| 4101 সগাথাবগ্গ পালি 4102 নিদানবগ্গ পালি 4103 খন্ধবগ্গ পালি 4104 সলায়তনবগ্গ পালি 4105 মহাবগ্গ পালি (সংযুত্ত) | 4201 সগাথাবগ্গ অট্ঠকথা 4202 নিদানবগ্গ অট্ঠকথা 4203 খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 4204 সলায়তনবগ্গ অট্ঠকথা 4205 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (সংযুত্ত) | 4301 সগাথাবগ্গ টীকা 4302 নিদানবগ্গ টীকা 4303 খন্ধবগ্গ টীকা 4304 সলায়তনবগ্গ টীকা 4305 মহাবগ্গ টীকা (সংযুত্ত) | |
| 5101 এককনিপাত পালি 5102 দুকনিপাত পালি 5103 তিকনিপাত পালি 5104 চতুক্কনিপাত পালি 5105 পঞ্চকনিপাত পালি 5106 ছক্কনিপাত পালি 5107 সত্তকনিপাত পালি 5108 অট্ঠকাদিনিপাত পালি 5109 নবকনিপাত পালি 5110 দশকনিপাত পালি 5111 একাদশকনিপাত পালি | 5201 এককনিপাত অট্ঠকথা 5202 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত অট্ঠকথা 5203 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত অট্ঠকথা 5204 অট্ঠকাদিনিপাত অট্ঠকথা | 5301 এককনিপাত টীকা 5302 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত টীকা 5303 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত টীকা 5304 অট্ঠকাদিনিপাত টীকা | |
| 6101 খুদ্ধকপাঠ পালি 6102 ধম্মপদ পালি 6103 উদান পালি 6104 ইতিবুত্তক পালি 6105 সুত্তনিপাত পালি 6106 বিমানবত্থু পালি 6107 পেতবত্থু পালি 6108 থেরগাথা পালি 6109 থেরীগাথা পালি 6110 অপদান পালি-১ 6111 অপদান পালি-২ 6112 বুদ্ধবংস পালি 6113 চরিয়াপিটক পালি 6114 জাতক পালি-১ 6115 জাতক পালি-২ 6116 মহানিদ্দেস পালি 6117 চূলনিদ্দেস পালি 6118 পটিসম্ভিদামগ্গ পালি 6119 নেত্তিপ্পকরণ পালি 6120 মিলিন্দপঞ্হ পালি 6121 পেটকোপদেস পালি | 6201 খুদ্ধকপাঠ অট্ঠকথা 6202 ধম্মপদ অট্ঠকথা-১ 6203 ধম্মপদ অট্ঠকথা-২ 6204 উদান অট্ঠকথা 6205 ইতিবুত্তক অট্ঠকথা 6206 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-১ 6207 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-২ 6208 বিমানবত্থু অট্ঠকথা 6209 পেতবত্থু অট্ঠকথা 6210 থেরগাথা অট্ঠকথা-১ 6211 থেরগাথা অট্ঠকথা-২ 6212 থেরীগাথা অট্ঠকথা 6213 অপদান অট্ঠকথা-১ 6214 অপদান অট্ঠকথা-২ 6215 বুদ্ধবংস অট্ঠকথা 6216 চরিয়াপিটক অট্ঠকথা 6217 জাতক অট্ঠকথা-১ 6218 জাতক অট্ঠকথা-২ 6219 জাতক অট্ঠকথা-৩ 6220 জাতক অট্ঠকথা-৪ 6221 জাতক অট্ঠকথা-৫ 6222 জাতক অট্ঠকথা-৬ 6223 জাতক অট্ঠকথা-৭ 6224 মহানিদ্দেস অট্ঠকথা 6225 চূলনিদ্দেস অট্ঠকথা 6226 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-১ 6227 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-২ 6228 নেত্তিপ্পকরণ অট্ঠকথা | 6301 নেত্তিপ্পকরণ টীকা 6302 নেত্তিবিভাবিনী | |
| 7101 ধম্মসংগণী পালি 7102 বিভঙ্গ পালি 7103 ধাতুকথা পালি 7104 পুগ্গলপঞ্ঞাত্তি পালি 7105 কথাবত্থু পালি 7106 যমক পালি-১ 7107 যমক পালি-২ 7108 যমক পালি-৩ 7109 পট্ঠান পালি-১ 7110 পট্ঠান পালি-২ 7111 পট্ঠান পালি-৩ 7112 পট্ঠান পালি-৪ 7113 পট্ঠান পালি-৫ | 7201 ধম্মসংগণি অট্ঠকথা 7202 সম্মোহবিনোদনী অট্ঠকথা 7203 পঞ্চপকরণ অট্ঠকথা | 7301 ধম্মসংগণী-মূলটীকা 7302 বিভঙ্গ-মূলটীকা 7303 পঞ্চপকরণ-মূলটীকা 7304 ধম্মসংগণী-অনুটীকা 7305 পঞ্চপকরণ-অনুটীকা 7306 অভিধম্মাবতারো-নামরূপপরিচ্ছেদো 7307 অভিধম্মত্থসংগহো 7308 অভিধম্মাবতার-পুরাণটীকা 7309 অভিধম্মমাতিকাপালি | |
| 中文 | |||
| 巴利 | 義註 | 複註 | 藏外典籍 |
| 1101 巴拉基咖(波羅夷) 1102 巴吉帝亞(波逸提) 1103 大品(律藏) 1104 小品 1105 附隨 | 1201 巴拉基咖(波羅夷)義註-1 1202 巴拉基咖(波羅夷)義註-2 1203 巴吉帝亞(波逸提)義註 1204 大品義註(律藏) 1205 小品義註 1206 附隨義註 | 1301 心義燈-1 1302 心義燈-2 1303 心義燈-3 | 1401 疑惑度脫 1402 律攝註釋 1403 金剛智疏 1404 疑難解除疏-1 1405 疑難解除疏-2 1406 律莊嚴疏-1 1407 律莊嚴疏-2 1408 古老解惑疏 1409 律抉擇-上抉擇 1410 律抉擇疏-1 1411 律抉擇疏-2 1412 巴吉帝亞等啟請經 1413 小戒學-根本戒學 8401 清淨道論-1 8402 清淨道論-2 8403 清淨道大複註-1 8404 清淨道大複註-2 8405 清淨道論導論 8406 長部問答 8407 中部問答 8408 相應部問答 8409 增支部問答 8410 律藏問答 8411 論藏問答 8412 義注問答 8413 語言學詮釋手冊 8414 勝義顯揚 8415 隨燈論誦 8416 發趣論燈論 8417 禮敬文 8418 大禮敬文 8419 依相讚佛偈 8420 經讚 8421 蓮花供 8422 勝者莊嚴 8423 語蜜 8424 佛德偈集 8425 小史 8427 佛教史 8426 大史 8429 目犍連文法 8428 迦旃延文法 8430 文法寶鑑(詞幹篇) 8431 文法寶鑑(詞根篇) 8432 詞形成論 8433 目犍連五章 8434 應用成就讀本 8435 音韻論讀本 8436 阿毗曇燈讀本 8437 阿毗曇燈疏 8438 妙莊嚴論讀本 8439 妙莊嚴論疏 8440 初學入門義抉擇精要 8446 詩王智論 8447 智論花鬘 8445 法智論 8444 大羅漢智論 8441 世間智論 8442 經典智論 8443 勇士百智論 8450 考底利耶智論 8448 人眼燈 8449 四護衛燈 8451 妙味之流 8452 界清淨 8453 韋桑達拉頌 8454 目犍連語釋五章 8455 塔史 8456 佛牙史 8457 詞根讀本注釋 8458 舍利史 8459 象頭山寺史 8460 勝者行傳 8461 勝者宗燈 8462 油鍋偈 8463 彌蘭王問疏 8464 詞花鬘 8465 詞成就論 8466 正理滴論 8467 迦旃延詞根注 8468 邊境山注釋 |
| 2101 戒蘊品 2102 大品(長部) 2103 波梨品 | 2201 戒蘊品註義註 2202 大品義註(長部) 2203 波梨品義註 | 2301 戒蘊品疏 2302 大品複註(長部) 2303 波梨品複註 2304 戒蘊品新複註-1 2305 戒蘊品新複註-2 | |
| 3101 根本五十經 3102 中五十經 3103 後五十經 | 3201 根本五十義註-1 3202 根本五十義註-2 3203 中五十義註 3204 後五十義註 | 3301 根本五十經複註 3302 中五十經複註 3303 後五十經複註 | |
| 4101 有偈品 4102 因緣品 4103 蘊品 4104 六處品 4105 大品(相應部) | 4201 有偈品義注 4202 因緣品義注 4203 蘊品義注 4204 六處品義注 4205 大品義注(相應部) | 4301 有偈品複註 4302 因緣品註 4303 蘊品複註 4304 六處品複註 4305 大品複註(相應部) | |
| 5101 一集經 5102 二集經 5103 三集經 5104 四集經 5105 五集經 5106 六集經 5107 七集經 5108 八集等經 5109 九集經 5110 十集經 5111 十一集經 | 5201 一集義註 5202 二、三、四集義註 5203 五、六、七集義註 5204 八、九、十、十一集義註 | 5301 一集複註 5302 二、三、四集複註 5303 五、六、七集複註 5304 八集等複註 | |
| 6101 小誦 6102 法句經 6103 自說 6104 如是語 6105 經集 6106 天宮事 6107 餓鬼事 6108 長老偈 6109 長老尼偈 6110 譬喻-1 6111 譬喻-2 6112 諸佛史 6113 所行藏 6114 本生-1 6115 本生-2 6116 大義釋 6117 小義釋 6118 無礙解道 6119 導論 6120 彌蘭王問 6121 藏釋 | 6201 小誦義注 6202 法句義注-1 6203 法句義注-2 6204 自說義注 6205 如是語義註 6206 經集義注-1 6207 經集義注-2 6208 天宮事義注 6209 餓鬼事義注 6210 長老偈義注-1 6211 長老偈義注-2 6212 長老尼義注 6213 譬喻義注-1 6214 譬喻義注-2 6215 諸佛史義注 6216 所行藏義注 6217 本生義注-1 6218 本生義注-2 6219 本生義注-3 6220 本生義注-4 6221 本生義注-5 6222 本生義注-6 6223 本生義注-7 6224 大義釋義注 6225 小義釋義注 6226 無礙解道義注-1 6227 無礙解道義注-2 6228 導論義注 | 6301 導論複註 6302 導論明解 | |
| 7101 法集論 7102 分別論 7103 界論 7104 人施設論 7105 論事 7106 雙論-1 7107 雙論-2 7108 雙論-3 7109 發趣論-1 7110 發趣論-2 7111 發趣論-3 7112 發趣論-4 7113 發趣論-5 | 7201 法集論義註 7202 分別論義註(迷惑冰消) 7203 五部論義註 | 7301 法集論根本複註 7302 分別論根本複註 7303 五論根本複註 7304 法集論複註 7305 五論複註 7306 阿毘達摩入門 7307 攝阿毘達磨義論 7308 阿毘達摩入門古複註 7309 阿毘達摩論母 | |
| English | |||
| Pali Canon | Commentaries | Sub-commentaries | Other |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
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| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| हिंदी | |||
| पाली कैनन | कमेंट्री | उप-टिप्पणियाँ | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळि 1102 पाचित्तिय पाळि 1103 महावग्ग पाळि (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळि 1105 परिवार पाळि | 1201 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-1 1202 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-2 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-1 1302 सारत्थदीपनी टीका-2 1303 सारत्थदीपनी टीका-3 | 1401 द्वेमातिकापाळि 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-1 1405 विमतिविनोदनी टीका-2 1406 विनयालंकार टीका-1 1407 विनयालंकार टीका-2 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-1 1411 विनयविनिच्छय टीका-2 1412 पाचित्यादियोजनापाळि 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-1 8402 विसुद्धिमग्ग-2 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-1 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-2 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अङ्गुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी सङ्गहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवन्दना 8421 कमलाञ्जलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगन्थवंस 8427 सासनवंस 8426 महावंस 8429 मोग्गल्लानब्याकरणं 8428 कच्चायनब्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपञ्चिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गण्ठिपदत्थविनिच्छयसार 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमञ्जरी 8445 धम्मनीति 8444 महारहनीति 8441 लोकनीति 8442 सुत्तन्तनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8450 चाणक्यनीति 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8451 रसवाहिनी 8452 सीमविसोधनीपाठ 8453 वेस्सन्तरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपञ्चिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमञ्जरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिन्दुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमञ्जुसा 8468 सामन्तकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खन्धवग्ग पाळि 2102 महावग्ग पाळि (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळि | 2201 सीलक्खन्धवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खन्धवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-1 2305 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-2 | |
| 3101 मूलपण्णास पाळि 3102 मज्झिमपण्णास पाळि 3103 उपरिपण्णास पाळि | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-1 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-2 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळि 4102 निदानवग्ग पाळि 4103 खन्धवग्ग पाळि 4104 सळायतनवग्ग पाळि 4105 महावग्ग पाळि (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खन्धवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खन्धवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळि 5102 दुकनिपात पाळि 5103 तिकनिपात पाळि 5104 चतुक्कनिपात पाळि 5105 पञ्चकनिपात पाळि 5106 छक्कनिपात पाळि 5107 सत्तकनिपात पाळि 5108 अट्ठकादिनिपात पाळि 5109 नवकनिपात पाळि 5110 दसकनिपात पाळि 5111 एकादसकनिपात पाळि | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळि 6102 धम्मपद पाळि 6103 उदान पाळि 6104 इतिवुत्तक पाळि 6105 सुत्तनिपात पाळि 6106 विमानवत्थु पाळि 6107 पेतवत्थु पाळि 6108 थेरगाथा पाळि 6109 थेरीगाथा पाळि 6110 अपदान पाळि-1 6111 अपदान पाळि-2 6112 बुद्धवंस पाळि 6113 चरियापिटक पाळि 6114 जातक पाळि-1 6115 जातक पाळि-2 6116 महानिद्देस पाळि 6117 चूळनिद्देस पाळि 6118 पटिसम्भिदामग्ग पाळि 6119 नेत्तिप्पकरण पाळि 6120 मिलिन्दपञ्ह पाळि 6121 पेटकोपदेस पाळि | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-1 6203 धम्मपद अट्ठकथा-2 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-1 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-2 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-1 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-2 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-1 6214 अपदान अट्ठकथा-2 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-1 6218 जातक अट्ठकथा-2 6219 जातक अट्ठकथा-3 6220 जातक अट्ठकथा-4 6221 जातक अट्ठकथा-5 6222 जातक अट्ठकथा-6 6223 जातक अट्ठकथा-7 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-1 6227 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-2 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसङ्गणी पाळि 7102 विभङ्ग पाळि 7103 धातुकथा पाळि 7104 पुग्गलपञ्ञत्ति पाळि 7105 कथावत्थु पाळि 7106 यमक पाळि-1 7107 यमक पाळि-2 7108 यमक पाळि-3 7109 पट्ठान पाळि-1 7110 पट्ठान पाळि-2 7111 पट्ठान पाळि-3 7112 पट्ठान पाळि-4 7113 पट्ठान पाळि-5 | 7201 धम्मसङ्गणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पञ्चपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसङ्गणी-मूलटीका 7302 विभङ्ग-मूलटीका 7303 पञ्चपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसङ्गणी-अनुटीका 7305 पञ्चपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसङ्गहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळि | |
| Indonesia | |||
| Kanon Pali | Komentar | Sub-komentar | Lainnya |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| 日文 | |||
| パーリ仏典 | 註釈書 | 副註釈書 | その他 |
| 1101 パーラージカ・パーリ 1102 パーチッティヤ・パーリ 1103 マハーヴァッガ・パーリ(ヴィナヤ) 1104 チューラヴァッガ・パーリ 1105 パリヴァーラ・パーリ | 1201 パーラージカカンダ・アッタカター-1 1202 パーラージカカンダ・アッタカター-2 1203 パーチッティヤ・アッタカター 1204 マハーヴァッガ・アッタカター(ヴィナヤ) 1205 チューラヴァッガ・アッタカター 1206 パリヴァーラ・アッタカター | 1301 サーラッタディーパニー・ティーカー-1 1302 サーラッタディーパニー・ティーカー-2 1303 サーラッタディーパニー・ティーカー-3 | 1401 ドヴェマーティカー・パーリ 1402 ヴィナヤサンガハ・アッタカター 1403 ヴァジラブッディ・ティーカー 1404 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-1 1405 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-2 1406 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-1 1407 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-2 1408 カンカーウィタラニープラーナ・ティーカー 1409 ヴィナヤヴィニッチャヤ-ウッタラヴィニッチャヤ 1410 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-1 1411 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-2 1412 パーチッティヤーディヨージャナー・パーリ 1413 クッダシッカー-ムーラシッカー 8401 ヴィスッディマッガ-1 8402 ヴィスッディマッガ-2 8403 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-1 8404 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-2 8405 ヴィスッディマッガ・ニダーナカター 8406 ディーガニカーヤ(プ・ヴィ) 8407 マッジマニカーヤ(プ・ヴィ) 8408 サンユッタニカーヤ(プ・ヴィ) 8409 アングッタラニカーヤ(プ・ヴィ) 8410 ヴィナヤピタカ(プ・ヴィ) 8411 アビダンマピタカ(プ・ヴィ) 8412 アッタカター(プ・ヴィ) 8413 ニルッティディーパニー 8414 パラマッタディーパニー・サンガハマハーティカーパータ 8415 アヌディーパニーパータ 8416 パッターヌッデーサ・ディーパニーパータ 8417 ナマッカラ・ティーカー 8418 マハーパナーマ・パータ 8419 ラッカナート・ブッダトーマナーガーター 8420 スタヴァンダナー 8421 カマラーニャジャリ 8422 ジナランカーラ 8423 パッジャマドゥ 8424 ブッダグナガーター・ヴァリー 8425 チューラガンタヴァンサ 8427 サーサナヴァンサ 8426 マハーヴァンサ 8429 モッガラーナ・ビャーカラナン 8428 カッチャーヤナ・ビャーカラナン 8430 サッダニーティッパカラナン(パダマーラー) 8431 サッダニーティッパカラナン(ダートゥマーラー) 8432 パダルーパシッディ 8433 モッガラーナ・パンチカー 8434 パヨーガシッディ・パータ 8435 ヴットーダヤ・パータ 8436 アビダーナッパディーピカー・パータ 8437 アビダーナッパディーピカー・ティーカー 8438 スボーダーランカーラ・パータ 8439 スボーダーランカーラ・ティーカー 8440 バーラーヴァターラ・ガンティパダッタヴィニッチャヤサーラ 8446 カヴィダッパナニーティ 8447 ニーティマンジャリー 8445 ダンマニーティ 8444 マハーラハニーティ 8441 ローカニーティ 8442 スタンタニーティ 8443 スーラッサティニーティ 8450 チャーナキャニーティ 8448 ナラダッカディーパニー 8449 チャトゥラーラッカディーパニー 8451 ラサヴァーヒニー 8452 シーマヴィソーダニー・パータ 8453 ヴェッサンタラ・ギーティ 8454 モッガラーナ・ヴッティヴィヴァラナパンチカー 8455 トゥーパヴァンサ 8456 ダーターヴァンサ 8457 ダートゥパータヴィラーヴィシニヤー 8458 ダートゥヴァンサ 8459 ハッタヴァナッガラヴィハーラヴァンサ 8460 ジナチャリタヤ 8461 ジナヴァンサディーパン 8462 テーラカターガーター 8463 ミリダ・ティーカー 8464 パダマンジャリー 8465 パダサーダナン 8466 サッダビンドゥパカラナン 8467 カッチャーヤナ・ダートゥマンジューサー 8468 サーマンタクータ・ヴァンナナー |
| 2101 シーラッカンダワッガ・パーリ 2102 マハーワッガ・パーリ(ディーガ) 2103 パーティカワッガ・パーリ | 2201 シーラッカンダワッガ・アッタカター 2202 マハーワッガ・アッタカター(ディーガ) 2203 パーティカワッガ・アッタカター | 2301 シーラッカンダワッガ・ティーカー 2302 マハーワッガ・ティーカー(ディーガ) 2303 パーティカワッガ・ティーカー 2304 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-1 2305 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-2 | |
| 3101 ムーラパンナーサ・パーリ 3102 マッジマパンナーサ・パーリ 3103 ウパリパンナーサ・パーリ | 3201 ムーラパンナーサ・アッタカター-1 3202 ムーラパンナーサ・アッタカター-2 3203 マッジマパンナーサ・アッタカター 3204 ウパリパンナーサ・アッタカター | 3301 ムーラパンナーサ・ティーカー 3302 マッジマパンナーサ・ティーカー 3303 ウパリパンナーサ・ティーカー | |
| 4101 サガーター・ワッガ・パーリ 4102 ニダーナ・ワッガ・パーリ 4103 カンダ・ワッガ・パーリ 4104 サラーヤタナ・ワッガ・パーリ 4105 マハーワッガ・パーリ(サンユッタ) | 4201 サガーター・ワッガ・アッタカター 4202 ニダーナ・ワッガ・アッタカター 4203 カンダ・ワッガ・アッタカター 4204 サラーヤタナ・ワッガ・アッタカター 4205 マハーワッガ・アッタカター(サンユッタ) | 4301 サガーター・ワッガ・ティーカー 4302 ニダーナ・ワッガ・ティーカー 4303 カンダ・ワッガ・ティーカー 4304 サラーヤタナ・ワッガ・ティーカー 4305 マハーワッガ・ティーカー(サンユッタ) | |
| 5101 エーカカニパータ・パーリ 5102 ドゥカニパータ・パーリ 5103 ティカニパータ・パーリ 5104 チャトゥッカニパータ・パーリ 5105 パンチャカニパータ・パーリ 5106 チャッカニパータ・パーリ 5107 サッタカニパータ・パーリ 5108 アッタカーディニパータ・パーリ 5109 ナヴァカニパータ・パーリ 5110 ダサカニパータ・パーリ 5111 エーカーダサカニパータ・パーリ | 5201 エーカカニパータ・アッタカター 5202 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・アッタカター 5203 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・アッタカター 5204 アッタカーディニパータ・アッタカター | 5301 エーカカニパータ・ティーカー 5302 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・ティーカー 5303 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・ティーカー 5304 アッタカーディニパータ・ティーカー | |
| 6101 クッダカパータ・パーリ 6102 ダンマパダ・パーリ 6103 ウダーナ・パーリ 6104 イティヴッタカ・パーリ 6105 スッタニパータ・パーリ 6106 ヴィマーナヴァットゥ・パーリ 6107 ペーヴァットゥ・パーリ 6108 テーラガーター・パーリ 6109 テーリーガーター・パーリ 6110 アパダーナ・パーリ-1 6111 アパダーナ・パーリ-2 6112 ブッダヴァンサ・パーリ 6113 チャリヤーピタカ・パーリ 6114 ジャータカ・パーリ-1 6115 ジャータカ・パーリ-2 6116 マハーニッデーサ・パーリ 6117 チューラニッデーサ・パーリ 6118 パティサンビダーマッガ・パーリ 6119 ネッティッパカラナ・パーリ 6120 ミリンダパンハ・パーリ 6121 ペータコーパデーサ・パーリ | 6201 クッダカパータ・アッタカター 6202 ダンマパダ・アッタカター-1 6203 ダンマパダ・アッタカター-2 6204 ウダーナ・アッタカター 6205 イティヴッタカ・アッタカター 6206 スッタニパータ・アッタカター-1 6207 スッタニパータ・アッタカター-2 6208 ヴィマーナヴァットゥ・アッタカター 6209 ペータヴァットゥ・アッタカター 6210 テーラガーター・アッタカター-1 6211 テーラガーター・アッタカター-2 6212 テーリーガーター・アッタカター 6213 アパダーナ・アッタカター-1 6214 アパダーナ・アッタカター-2 6215 ブッダヴァンサ・アッタカター 6216 チャリヤーピタカ・アッタカター 6217 ジャータカ・アッタカター-1 6218 ジャータカ・アッタカター-2 6219 ジャータカ・アッタカター-3 6220 ジャータカ・アッタカター-4 6221 ジャータカ・アッタカター-5 6222 ジャータカ・アッタカター-6 6223 ジャータカ・アッタカター-7 6224 マハーニッデーサ・アッタカター 6225 チューラニッデーサ・アッタカター 6226 パティサンビダーマッガ・アッタカター-1 6227 パティサンビダーマッガ・アッタカター-2 6228 ネッティッパカラナ・アッタカター | 6301 ネッティッパカラナ・ティーカー 6302 ネッティヴィバーヴィニー | |
| 7101 ダンマサンガニー・パーリ 7102 ヴィバンガ・パーリ 7103 ダートゥカター・パーリ 7104 プッガラパンニャッティ・パーリ 7105 カター・ヴァットゥ・パーリ 7106 ヤマカ・パーリ-1 7107 ヤマカ・パーリ-2 7108 ヤマカ・パーリ-3 7109 パッターナ・パーリ-1 7110 パッターナ・パーリ-2 7111 パッターナ・パーリ-3 7112 パッターナ・パーリ-4 7113 パッターナ・パーリ-5 | 7201 ダンマサンガニ・アッタカター 7202 サンモーハヴィノーダニー・アッタカター 7203 パンチャパカラナ・アッタカター | 7301 ダンマサンガニー・ムーラティーカー 7302 ヴィバンガ・ムーラティーカー 7303 パンチャパカラナ・ムーラティーカー 7304 ダンマサンガニー・アヌティーカー 7305 パンチャパカラナ・アヌティーカー 7306 アビダンマーヴァターロ・ナーマルーパパリッチェード 7307 アビダンマッタ・サンガホ 7308 アビダンマーヴァターラ・プラーナティーカー 7309 アビダンマ・マーティカーパーリ | |
| ខ្មែរ | |||
| ព្រះត្រៃបិដកបាលី | អដ្ឋកថា | ដីកា | ផ្សេងទៀត |
| 1101 បារាជិកបាឡិ 1102 បាចិត្តិយបាឡិ 1103 មហាវគ្គបាឡិ (វិន័យ) 1104 ចូឡវគ្គបាឡិ 1105 បរិវារបាឡិ | 1201 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-១ 1202 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-២ 1203 បាចិត្តិយអដ្ឋកថា 1204 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (វិន័យ) 1205 ចូឡវគ្គអដ្ឋកថា 1206 បរិវារអដ្ឋកថា | 1301 សារត្ថទីបនីដីកា-១ 1302 សារត្ថទីបនីដីកា-២ 1303 សារត្ថទីបនីដីកា-៣ | 1401 ទ្វេមាតិកាបាឡិ 1402 វិនយសង្គហអដ្ឋកថា 1403 វជិរពុទ្ធិដីកា 1404 វិមតិវិនោទនីដីកា-១ 1405 វិមតិវិនោទនីដីកា-២ 1406 វិនយាលង្ការដីកា-១ 1407 វិនយាលង្ការដីកា-២ 1408 កង្ខាវិតរណីបុរាណដីកា 1409 វិនយវិនិច្ឆយ-ឧត្តរវិនិច្ឆយ 1410 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-១ 1411 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-២ 1412 បាចិត្យាទិយោជនាបាឡិ 1413 ខុទ្ទសិក្ខា-មូលសិក្ខា 8401 វិសុទ្ធិមគ្គ-១ 8402 វិសុទ្ធិមគ្គ-២ 8403 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-១ 8404 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-២ 8405 វិសុទ្ធិមគ្គ និទានកថា 8406 ទីឃនិកាយ (បុ-វិ) 8407 មជ្ឈិមនិកាយ (បុ-វិ) 8408 សំយុត្តនិកាយ (បុ-វិ) 8409 អង្គុត្តរនិកាយ (បុ-វិ) 8410 វិនយបិដក (បុ-វិ) 8411 អភិធម្មបិដក (បុ-វិ) 8412 អដ្ឋកថា (បុ-វិ) 8413 និរុត្តិទីបនី 8414 បរមត្ថទីបនី សង្គហមហាដីកាបាឋ 8415 អនុទីបនីបាឋ 8416 បដ្ឋានុទ្ទេស ទីបនីបាឋ 8417 នមក្ការដីកា 8418 មហាបណាមបាឋ 8419 លក្ខណាតោ ពុទ្ធថោមនាគាថា 8420 សុតវន្ទនា 8421 កមលាញ្ជលិ 8422 ជិនាលង្ការ 8423 បជ្ជមធុ 8424 ពុទ្ធគុណគាថាវលី 8425 ចូឡគន្ថវង្ស 8427 សាសនវង្ស 8426 មហាវង្ស 8429 មោគ្គល្លានព្យាករណំ 8428 កច្ចាយនព្យាករណំ 8430 សទ្ទនីតិប្បករណំ (បទមាលា) 8431 សទ្ទនីតិប្បករណំ (ធាតុមាលា) 8432 បទរូបសិទ្ធិ 8433 មោគ្គល្លានបញ្ចិកា 8434 បយោគសិទ្ធិបាឋ 8435 វុត្តោទយបាឋ 8436 អភិធានប្បទីបិកាបាឋ 8437 អភិធានប្បទីបិកាដីកា 8438 សុពោធាលង្ការបាឋ 8439 សុពោធាលង្ការដីកា 8440 បាលាវតារ គណ្ឋិបទត្ថវិនិច្ឆយសារ 8446 កវិទប្បណនីតិ 8447 នីតិមញ្ជរី 8445 ធម្មនីតិ 8444 មហារហនីតិ 8441 លោកនីតិ 8442 សុត្តន្តនីតិ 8443 សូរស្សតិនីតិ 8450 ចាណក្យនីតិ 8448 នរទក្ខទីបនី 8449 ចតុរារក្ខទីបនី 8451 រសវាហិនី 8452 សីមវិសោធនីបាឋ 8453 វេស្សន្តរគីតិ 8454 មោគ្គល្លាន វុត្តិវិវរណបញ្ចិកា 8455 ថូបវង្ស 8456 ទាឋាវង្ស 8457 ធាតុបាឋវិលាសិនិយា 8458 ធាតុវង្ស 8459 ហត្ថវនគល្លវិហារវង្ស 8460 ជិនចរិតយ 8461 ជិនវង្សទីបំ 8462 តេលកដាហគាថា 8463 មិលិទដីកា 8464 បទមញ្ជរី 8465 បទសាធនំ 8466 សទ្ទពិន្ទុបករណំ 8467 កច្ចាយនធាតុមញ្ជុសា 8468 សាមន្តកូដវណ្ណនា |
| 2101 សីលក្ខន្ធវគ្គបាឡិ 2102 មហាវគ្គបាឡិ (ទីឃ) 2103 បាថិកវគ្គបាឡិ | 2201 សីលក្ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 2202 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (ទីឃ) 2203 បាថិកវគ្គអដ្ឋកថា | 2301 សីលក្ខន្ធវគ្គដីកា 2302 មហាវគ្គដីកា (ទីឃ) 2303 បាថិកវគ្គដីកា 2304 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-១ 2305 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-២ | |
| 3101 មូលបណ្ណាសបាឡិ 3102 មជ្ឈិមបណ្ណាសបាឡិ 3103 ឧបរិបណ្ណាសបាឡិ | 3201 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-១ 3202 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-២ 3203 មជ្ឈិមបណ្ណាសអដ្ឋកថា 3204 ឧបរិបណ្ណាសអដ្ឋកថា | 3301 មូលបណ្ណាសដីកា 3302 មជ្ឈិមបណ្ណាសដីកា 3303 ឧបរិបណ្ណាសដីកា | |
| 4101 សគាថាវគ្គបាឡិ 4102 និទានវគ្គបាឡិ 4103 ខន្ធវគ្គបាឡិ 4104 សឡាយតនវគ្គបាឡិ 4105 មហាវគ្គបាឡិ (សំយុត្ត) | 4201 សគាថាវគ្គអដ្ឋកថា 4202 និទានវគ្គអដ្ឋកថា 4203 ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 4204 សឡាយតនវគ្គអដ្ឋកថា 4205 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (សំយុត្ត) | 4301 សគាថាវគ្គដីកា 4302 និទានវគ្គដីកា 4303 ខន្ធវគ្គដីកា 4304 សឡាយតនវគ្គដីកា 4305 មហាវគ្គដីកា (សំយុត្ត) | |
| 5101 ឯកកនិបាតបាឡិ 5102 ទុកនិបាតបាឡិ 5103 តិកនិបាតបាឡិ 5104 ចតុក្កនិបាតបាឡិ 5105 បញ្ចកនិបាតបាឡិ 5106 ឆក្កនិបាតបាឡិ 5107 សត្តកនិបាតបាឡិ 5108 អដ្ឋកាទិនិបាតបាឡិ 5109 នវកនិបាតបាឡិ 5110 ទសកនិបាតបាឡិ 5111 ឯកាទសកនិបាតបាឡិ | 5201 ឯកកនិបាតអដ្ឋកថា 5202 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតអដ្ឋកថា 5203 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតអដ្ឋកថា 5204 អដ្ឋកាទិនិបាតអដ្ឋកថា | 5301 ឯកកនិបាតដីកា 5302 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតដីកា 5303 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតដីកា 5304 អដ្ឋកាទិនិបាតដីកា | |
| 6101 ខុទ្ទកបាឋបាឡិ 6102 ធម្មបទបាឡិ 6103 ឧទានបាឡិ 6104 ឥតិវុត្តកបាឡិ 6105 សុត្តនិបាតបាឡិ 6106 វិមានវត្ថុបាឡិ 6107 បេតវត្ថុបាឡិ 6108 ថេរគាថាបាឡិ 6109 ថេរីគាថាបាឡិ 6110 អបទានបាឡិ-១ 6111 អបទានបាឡិ-២ 6112 ពុទ្ធវង្សបាឡិ 6113 ចរិយាបិដកបាឡិ 6114 ជាតកបាឡិ-១ 6115 ជាតកបាឡិ-២ 6116 មហានិទ្ទេសបាឡិ 6117 ចូឡនិទ្ទេសបាឡិ 6118 បដិសម្ភិទាមគ្គបាឡិ 6119 នេត្តិប្បករណបាឡិ 6120 មិលិន្ទបញ្ហាបាឡិ 6121 បេដកោបទេសបាឡិ | 6201 ខុទ្ទកបាឋអដ្ឋកថា 6202 ធម្មបទអដ្ឋកថា-១ 6203 ធម្មបទអដ្ឋកថា-២ 6204 ឧទានអដ្ឋកថា 6205 ឥតិវុត្តកអដ្ឋកថា 6206 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-១ 6207 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-២ 6208 វិមានវត្ថុអដ្ឋកថា 6209 បេតវត្ថុអដ្ឋកថា 6210 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-១ 6211 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-២ 6212 ថេរីគាថាអដ្ឋកថា 6213 អបទានអដ្ឋកថា-១ 6214 អបទានអដ្ឋកថា-២ 6215 ពុទ្ធវង្សអដ្ឋកថា 6216 ចរិយាបិដកអដ្ឋកថា 6217 ជាតកអដ្ឋកថា-១ 6218 ជាតកអដ្ឋកថា-២ 6219 ជាតកអដ្ឋកថា-៣ 6220 ជាតកអដ្ឋកថា-៤ 6221 ជាតកអដ្ឋកថា-៥ 6222 ជាតកអដ្ឋកថា-៦ 6223 ជាតកអដ្ឋកថា-៧ 6224 មហានិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6225 ចូឡនិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6226 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-១ 6227 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-២ 6228 នេត្តិប្បករណអដ្ឋកថា | 6301 នេត្តិប្បករណដីកា 6302 នេត្តិវិភាវិនី | |
| 7101 ធម្មសង្គណីបាឡិ 7102 វិភង្គបាឡិ 7103 ធាតុកថាបាឡិ 7104 បុគ្គលបញ្ញត្តិបាឡិ 7105 កថាវត្ថុបាឡិ 7106 យមកបាឡិ-១ 7107 យមកបាឡិ-២ 7108 យមកបាឡិ-៣ 7109 បដ្ឋានបាឡិ-១ 7110 បដ្ឋានបាឡិ-២ 7111 បដ្ឋានបាឡិ-៣ 7112 បដ្ឋានបាឡិ-៤ 7113 បដ្ឋានបាឡិ-៥ | 7201 ធម្មសង្គណិអដ្ឋកថា 7202 សម្មោហវិនោទនីអដ្ឋកថា 7203 បញ្ចបករណអដ្ឋកថា | 7301 ធម្មសង្គណី-មូលដីកា 7302 វិភង្គ-មូលដីកា 7303 បញ្ចបករណ-មូលដីកា 7304 ធម្មសង្គណី-អនុដីកា 7305 បញ្ចបករណ-អនុដីកា 7306 អភិធម្មាវតារោ-នាមរូបបរិច្ឆេទោ 7307 អភិធម្មត្ថសង្គហោ 7308 អភិធម្មាវតារ-បុរាណដីកា 7309 អភិធម្មមាតិកាបាឡិ | |
| 한국인 | |||
| 팔리 대장경 | 주석서 | 부주석서 | 기타 |
| 1101 빠라지카 빨리 1102 빠찟띠야 빨리 1103 마하왁가 빨리 (비나야) 1104 출라왁가 빨리 1105 빠리와라 빨리 | 1201 빠라지까깐다 앗타카타-1 1202 빠라지까깐다 앗타카타-2 1203 빠찟띠야 앗타카타 1204 마하왁가 앗타카타 (비나야) 1205 출라왁가 앗타카타 1206 빠리와라 앗타카타 | 1301 사랏타디빠니 띠까-1 1302 사랏타디빠니 띠까-2 1303 사랏타디빠니 띠까-3 | 1401 드베마띠까빨리 1402 위나야상가하 앗타카타 1403 와지라붓디 띠까 1404 위마띠위노다니 띠까-1 1405 위마띠위노다니 띠까-2 1406 위나야랑까라 띠까-1 1407 위나야랑까라 띠까-2 1408 깡카위따라니뿌라나 띠까 1409 위나야위닛차야-웃따라위닛차야 1410 위나야위닛차야 띠까-1 1411 위나야위닛차야 띠까-2 1412 빠찟땨디요자나빨리 1413 쿳닷시카-물라시카 8401 위숟디막가-1 8402 위숟디막가-2 8403 위숟디막가-마하띠까-1 8404 위숟디막가-마하띠까-2 8405 위숟디막가 니다나까타 8406 디가니까야 (뿌-위) 8407 맛지마니까야 (뿌-위) 8408 삼윳따니까야 (뿌-위) 8409 앙굳따라니까야 (뿌-위) 8410 위나야삐따까 (뿌-위) 8411 아비담마삐따까 (뿌-위) 8412 앗타카타 (뿌-위) 8413 니룻띠디빠니 8414 빠라맛타디빠니 상가하마하띠까빠타 8415 아누디빠니빠타 8416 빳타누ㄸ데사 디빠니빠타 8417 나막까라띠까 8418 마하빠나마빠타 8419 락카나또 붓다토마나가타 8420 수타완다나 8421 까말란자리 8422 지나랑까라 8423 빳자마두 8424 붓다구나가타왈리 8425 출라간타왕사 8427 사사나왕사 8426 마하왕사 8429 목갈라나뱌까라낭 8428 깟차야나뱌까라낭 8430 삿다니띠빠까라낭 (빠다말라) 8431 삿다니띠빠까라낭 (다두말라) 8432 빠다루빠싣디 8433 목갈라나빤찌까 8434 빠요가싣디빠타 8435 붇또다야빠타 8436 아비다나빠디피까빠타 8437 아비다나빠디피까띠까 8438 수보다랑까라빠타 8439 수보다랑까라띠까 8440 발라와따라 간티빠닷타위닛차야사라 8446 까위닷빠나니띠 8447 니띠만자리 8445 담마니띠 8444 마하라하니띠 8441 로까니띠 8442 숫딴따니띠 8443 수랏사띠니띠 8450 짜낙야니띠 8448 나라닥카디빠니 8449 짜뚜라락카디빠니 8451 라사와히니 8452 시마위소다니빠타 8453 웨산따라기띠 8454 목갈라나 붇띠위와라나빤찌까 8455 투빠왕사 8456 다타왕사 8457 다두빠타윌라시니야 8458 다두왕사 8459 핟타와나갈라위하라왕사 8460 지나짜리따야 8461 지나왕사디빵 8462 떼라까타하가타 8463 밀리다띠까 8464 빠다만자리 8465 빠다사다낭 8466 삿다빈두빠까라낭 8467 깟차야나다두만주사 8468 사만따꿋타완나나 |
| 2101 실락칸다왁가 빨리 2102 마하왁가 빨리 (디가) 2103 빠티까왁가 빨리 | 2201 실락칸다왁가 앗타카타 2202 마하왁가 앗타카타 (디가) 2203 빠티까왁가 앗타카타 | 2301 실락칸다왁가 띠까 2302 마하왁가 띠까 (디가) 2303 빠티까왁가 띠까 2304 실락칸다왁가-아비나와띠까-1 2305 실락칸다왁가-아비나와띠까-2 | |
| 3101 물라빤나사 빨리 3102 맛지마빤나사 빨리 3103 우빠리빤나사 빨리 | 3201 물라빤나사 앗타카타-1 3202 물라빤나사 앗타카타-2 3203 맛지마빤나사 앗타카타 3204 우빠리빤나사 앗타카타 | 3301 물라빤나사 띠까 3302 맛지마빤나사 띠까 3303 우빠리빤나사 띠까 | |
| 4101 사가타왁가 빨리 4102 니다나왁가 빨리 4103 칸다왁가 빨리 4104 살라야따나왁가 빨리 4105 마하왁가 빨리 (삼윳따) | 4201 사가타왁가 앗타카타 4202 니다나왁가 앗타카타 4203 칸다왁가 앗타카타 4204 살라야따나왁가 앗타카타 4205 마하왁가 앗타카타 (삼윳따) | 4301 사가타왁가 띠까 4302 니다나왁가 띠까 4303 칸다왁가 띠까 4304 살라야따나왁가 띠까 4305 마하왁가 띠까 (삼윳따) | |
| 5101 에까까니빠따 빨리 5102 두까니빠따 빨리 5103 띠까니빠따 빨리 5104 짜뚝까니빠따 빨리 5105 빤짜까니빠따 빨리 5106 착까니빠따 빨리 5107 삿따까니빠따 빨리 5108 앗타까디니빠따 빨리 5109 나와까니빠따 빨리 5110 다사까니빠따 빨리 5111 에까다사까니빠따 빨리 | 5201 에까까니빠따 앗타카타 5202 두까-띠까-짜뚝까니빠따 앗타카타 5203 빤짜까-착까-삿따까니빠따 앗타카타 5204 앗타까디니빠따 앗타카타 | 5301 에까까니빠따 띠까 5302 두까-띠까-짜뚝까니빠따 띠까 5303 빤짜까-착까-삿따까니빠따 띠까 5304 앗타까디니빠따 띠까 | |
| 6101 쿳닥까빠타 빨리 6102 담마빠다 빨리 6103 우다나 빨리 6104 이띠웃따까 빨리 6105 숫따니빠따 빨리 6106 위마나왓투 빨리 6107 베따왓투 빨리 6108 테라가타 빨리 6109 테리가타 빨리 6110 아빠다나 빨리-1 6111 아빠다나 빨리-2 6112 붓다왕사 빨리 6113 짜리야삐따까 빨리 6114 자따까 빨리-1 6115 자따까 빨리-2 6116 마하닷데사 빨리 6117 출라닷데사 빨리 6118 빠티삼비다막가 빨리 6119 넷띠빠까라나 빨리 6120 밀린다빤하 빨리 6121 뻬따꼬빠데사 빨리 | 6201 쿳닥까빠타 앗타카타 6202 담마빠다 앗타카타-1 6203 담마빠다 앗타카타-2 6204 우다나 앗타카타 6205 이띠웃따까 앗타카타 6206 숫따니빠따 앗타카타-1 6207 숫따니빠따 앗타카타-2 6208 위마나왓투 앗타카타 6209 베따왓투 앗타카타 6210 테라가타 앗타카타-1 6211 테라가타 앗타카타-2 6212 테리가타 앗타카타 6213 아빠다나 앗타카타-1 6214 아빠다나 앗타카타-2 6215 붓다왕사 앗타카타 6216 짜리야삐따까 앗타카타 6217 자따까 앗타카타-1 6218 자따까 앗타카타-2 6219 자따까 앗타카타-3 6220 자따까 앗타카타-4 6221 자따까 앗타카타-5 6222 자따까 앗타카타-6 6223 자따까 앗타카타-7 6224 마하닷데사 앗타카타 6225 출라닷데사 앗타카타 6226 빠티삼비다막가 앗타카타-1 6227 빠티삼비다막가 앗타카타-2 6228 넷띠빠까라나 앗타카타 | 6301 넷띠빠까라나 띠까 6302 넷띠위바비니 | |
| 7101 담마상가니 빨리 7102 위방가 빨리 7103 다뚜까타 빨리 7104 뿍갈라빤냣띠 빨리 7105 까타왓투 빨리 7106 야마까 빨리-1 7107 야마까 빨리-2 7108 야마까 빨리-3 7109 빳타나 빨리-1 7110 빳타나 빨리-2 7111 빳타나 빨리-3 7112 빳타나 빨리-4 7113 빳타나 빨리-5 | 7201 담마상가니 앗타카타 7202 삼모하위노다니 앗타카타 7203 빤짜빠까라나 앗타카타 | 7301 담마상가니-물라띠까 7302 위방가-물라띠까 7303 빤짜빠까라나-물라띠까 7304 담마상가니-아누띠까 7305 빤짜빠까라나-아누띠까 7306 아비담마와따로-나마루빠빠릳체도 7307 아비담맛타상가호 7308 아비담마와따라-뿌라나띠까 7309 아비담마마띠까빨리 | |
| ອັກສອນລາວ | |||
| ປາລີ | ອັດຖະກະຖາ | ຏີກາ | ອັນຍາ |
| 1101 ປາຣາຊິກະ ປາລີ 1102 ປາຈິດຕິຍະ ປາລີ 1103 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ວິໄນ) 1104 ຈູລະວັກຄະ ປາລີ 1105 ປະລິວາລະ ປາລີ | 1201 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-1 1202 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-2 1203 ປາຈິດຕິຍະ ອັດຖະກະຖາ 1204 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ວິໄນ) 1205 ຈູລະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 1206 ປະລິວາລະ ອັດຖະກະຖາ | 1301 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-1 1302 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-2 1303 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-3 | 1401 ທເວມາຕິກາປາລີ 1402 ວິນະຍະສັງຄະຫະ ອັດຖະກະຖາ 1403 ວະຊິລະພຸດທິ ຏີກາ 1404 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-1 1405 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-2 1406 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-1 1407 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-2 1408 ກັງຂາວິຕະຣະນີປຸຣານະ ຏີກາ 1409 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ-ອຸຕຕະຣະວິນິດສະຍະ 1410 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-1 1411 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-2 1412 ປາຈິຕະຍາທິໂຍຊະນາປາລີ 1413 ຂຸທະທະສິກຂາ-ມູລະສິກຂາ 8401 ວິສຸດທິມັກຄະ-1 8402 ວິສຸດທິມັກຄະ-2 8403 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-1 8404 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-2 8405 ວິສຸດທິມັກຄະ ນິທານະກະຖາ 8406 ທີຆະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8407 ມັດຊິມະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8408 ສັງຍຸຕຕະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8409 ອັງຄຸຕຕະລະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8410 ວິນະຍະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8411 ອະພິທັມມະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8412 ອັດຖະກະຖາ (ປຸ-ວິ) 8413 ນິລຸຕຕິທີປະນີ 8414 ປະຣະມັດຖະທີປະນີ ສັງຄະຫະມະຫາຏີກາປາຖະ 8415 ອະນຸທີປະນີປາຖະ 8416 ປັດຖານຸທເທສະ ທີປະນີປາຖະ 8417 ນະມັກກາລະຏີກາ 8418 ມະຫາປະຖາມະປາຖະ 8419 ລັກຂະນາໂຕ ພຸດທະຖະມະນາຄາຖາ 8420 ສຸຕະວັນທະນາ 8421 ກະມະລາຍຈະລິ 8422 ຊິນາລັງກາລະ 8423 ປັດຊະມະທຸ 8424 ພຸດທະຄຸນະຄາຖາວະລີ 8425 ຈູລະຄັນຖະວັງສະ 8426 ມະຫາວັງສະ 8427 ສາສະນະວັງສະ 8428 ກັດຈາຍະນະພະຍາກະລະນັງ 8429 ມົກຄັນທານະພະຍາກະລະນັງ 8430 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ປະທະມາລາ) 8431 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ຘາຕຸມາລາ) 8432 ປະທະຣູປະສິດທິ 8433 ໂມຄັນທານະປັນຈິກາ 8434 ປະໂຍຄະສິດທິປາຖະ 8435 ວຸຕະໂທຍະປາຖະ 8436 ອະພິທານະປະປະທີປິກາປາຖະ 8437 ອະພິທານະປະປະທີປິກາຏີກາ 8438 ສຸໂພທາລັງກາລະປາຖະ 8439 ສຸໂພທາລັງກາລະຏີກາ 8440 ພາລາວະຕາລະ ຄັນຖິປະທັດຖະວິນິດສະຍະສາລະ 8441 ໂລກະນີຕິ 8442 ສຸດຕັນຕະນີຕິ 8443 ສູລັດສະຕິນີຕິ 8444 ມະຫາລະຫະນີຕິ 8445 ທັມມະນີຕິ 8446 ກະວິທັບປະຖານີຕິ 8447 ນີຕິມັນຊະລີ 8448 ນະລະທັກຂະທີປະນີ 8449 ຈະຕຸຣາລັກຂະທີປະນີ 8450 ຈານັກຍະນີຕິ 8451 ລະສະວາຫິນີ 8452 ສີມາວິໂສທະນີປາຖະ 8453 ເວສສັນຕະລະຄີຕິ 8454 ໂມຄັນທານະ ວຸຕຕິວິວະລະນະປັນຈິກາ 8455 ຖູປະວັງສະ 8456 ທາຐາວັງສະ 8457 ຘາຕຸປາຖະວິລາສິນີຍາ 8458 ຘາຕຸວັງສະ 8459 ຫັດຖະວະນະຄັນລະວິຫາລະວັງສະ 8460 ຊິນະຈະລິຕະຍະ 8461 ຊິນະວັງສະທີປັງ 8462 ເຕລະກະຕາຫາຄາຖາ 8463 ມິລິທະຏີກາ 8464 ປະທະມັນຊະລີ 8465 ປະທະສາຘະນັງ 8466 ສັດທະພິນທຸປະກະລະນັງ 8467 ກັດຈາຍະນະຘາຕຸມັນຊຸສາ 8468 ສາມັນຕະກູຏະວັນນະນາ |
| 2101 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 2102 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ທີຆະ) 2103 ປາຖິກະວັກຄະ ປາລີ | 2201 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 2202 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ທີຆະ) 2203 ປາຖິກະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ | 2301 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 2302 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ທີຆະ) 2303 ປາຖິກະວັກຄະ ຏີກາ 2304 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-1 2305 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-2 | |
| 3101 ມູລະປັນຍາສະ ປາລີ 3102 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ປາລີ 3103 ອຸປະລິປັນຍາສະ ປາລີ | 3201 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-1 3202 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-2 3203 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ 3204 ອຸປະລິປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ | 3301 ມູລະປັນຍາສະ ຏີກາ 3302 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ຏີກາ 3303 ອຸປະລິປັນຍາສະ ຏີກາ | |
| 4101 ສະຄາຖາວັກຄະ ປາລີ 4102 ນິທານະວັກຄະ ປາລີ 4103 ຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 4104 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ປາລີ 4105 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4201 ສະຄາຖາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4202 ນິທານະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4203 ຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4204 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4205 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4301 ສະຄາຖາວັກຄະ ຏີກາ 4302 ນິທານະວັກຄະ ຏີກາ 4303 ຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 4304 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ຏີກາ 4305 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ສັງຍຸຕຕະ) | |
| 5101 ເອກະກະນິປາຕະ ປາລີ 5102 ທຸກະນິປາຕະ ປາລີ 5103 ຕິກະນິປາຕະ ປາລີ 5104 ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ປາລີ 5105 ປັຈຈະກະນິປາຕະ ປາລີ 5106 ຉັກກະນິປາຕະ ປາລີ 5107 ສັດຕະກະນິປາຕະ ປາລີ 5108 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ປາລີ 5109 ນະວະກະນິປາຕະ ປາລີ 5110 ທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ 5111 ເອກາທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ | 5201 ເອກະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5202 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5203 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5204 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ | 5301 ເອກະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5302 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ຏີກາ 5303 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5304 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ຏີກາ | |
| 6101 ຂຸທະທະກະປາຖະ ປາລີ 6102 ທຳມະປະທະ ປາລີ 6103 ອຸທານະ ປາລີ 6104 ອິຕິວຸຕຕະກະ ປາລີ 6105 ສຸດຕະນິປາຕະ ປາລີ 6106 ວິມານະວັດຖຸ ປາລີ 6107 ເປຕະວັດຖຸ ປາລີ 6108 ເຖລະຄາຖາ ປາລີ 6109 ເຖລີຄາຖາ ປາລີ 6110 ອະປະທານະ ປາລີ-1 6111 ອະປະທານະ ປາລີ-2 6112 ພຸດທະວັງສະ ປາລີ 6113 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ປາລີ 6114 ຊາຕະກະ ປາລີ-1 6115 ຊາຕະກະ ປາລີ-2 6116 ມະຫານິທເທສະ ປາລີ 6117 ຈູລະນິທເທສະ ປາລີ 6118 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ປາລີ 6119 ເນຕຕິປະກະລະນະ ປາລີ 6120 ມິລິນທະປັນຫາ ປາລີ 6121 ເປຏະກົປເທສະ ປາລີ | 6201 ຂຸທະທະກະປາຖະ ອັດຖະກະຖາ 6202 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-1 6203 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-2 6204 ອຸທານະ ອັດຖະກະຖາ 6205 ອິຕິວຸຕຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6206 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-1 6207 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-2 6208 ວິມານະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6209 ເປຕະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6210 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-1 6211 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-2 6212 ເຖລີຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ 6213 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-1 6214 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-2 6215 ພຸດທະວັງສະ ອັດຖະກະຖາ 6216 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6217 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-1 6218 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-2 6219 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-3 6220 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-4 6221 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-5 6222 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-6 6223 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-7 6224 ມະຫານິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6225 ຈູລະນິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6226 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-1 6227 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-2 6228 ເນຕຕິປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 6301 ເນຕຕິປະກະລະນະ ຏີກາ 6302 ເນຕຕິວິພາວິນີ | |
| 7101 ທຳມະສັງຄະນີ ປາລີ 7102 ວິພັງຄະ ປາລີ 7103 ຘາຕຸກະຖາ ປາລີ 7104 ປຸກຄະລະປັນຍັດຕິ ປາລີ 7105 ກະຖາວັດຖຸ ປາລີ 7106 ຍະມະກະ ປາລີ-1 7107 ຍະມະກະ ປາລີ-2 7108 ຍະມະກະ ປາລີ-3 7109 ປັດຖານະ ປາລີ-1 7110 ປັດຖານະ ປາລີ-2 7111 ປັດຖານະ ປາລີ-3 7112 ປັດຖານະ ປາລີ-4 7113 ປັດຖານະ ປາລີ-5 | 7201 ທຳມະສັງຄະນິ ອັດຖະກະຖາ 7202 ສັມໂມຫະວິໂນທະນີ ອັດຖະກະຖາ 7203 ປັຈຈະປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 7301 ທຳມະສັງຄະນີ-ມູລະຏີກາ 7302 ວິພັງຄະ-ມູລະຏີກາ 7303 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ມູລະຏີກາ 7304 ທຳມະສັງຄະນີ-ອະນຸຏີກາ 7305 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ອະນຸຏີກາ 7306 ອະພິທັມມາວະຕາໂຣ-ນາມະຣູປະປະຣິຈເທໂທ 7307 ອະພິທັມມັດຖະສັງຄະໂຫ 7308 ອະພິທັມມາວະຕາລະ-ປຸຣານະຏີກາ 7309 ອະພິທັມມາມາຕິກາປາລີ | |
| मराठी | |||
| पाळी | अट्ठकथा | टीका | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळी 1102 पाचित्तिय पाळी 1103 महावग्ग पाळी (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळी 1105 परिवार पाळी | 1201 पाराजिककंड अट्ठकथा-१ 1202 पाराजिककंड अट्ठकथा-२ 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-१ 1302 सारत्थदीपनी टीका-२ 1303 सारत्थदीपनी टीका-३ | 1401 द्वेमातिकापाळी 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-१ 1405 विमतिविनोदनी टीका-२ 1406 विनयालंकार टीका-१ 1407 विनयालंकार टीका-२ 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-१ 1411 विनयविनिच्छय टीका-२ 1412 पाचित्यादियोजनापाळी 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-१ 8402 विसुद्धिमग्ग-२ 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-१ 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-२ 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अंगुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी संगहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवंदना 8421 कमलांजलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगंथवंस 8426 महावंस 8427 सासनवंस 8428 कच्चायनव्याकरणं 8429 मोग्गल्लानव्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपंचिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गंठिपदत्थविनिच्छयसार 8441 लोकनीति 8442 सुत्तंतनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8444 महारहनीति 8445 धम्मनीति 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमंजरी 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8450 चाणक्यनीति 8451 रसवाहिनी 8452 सीमाविसोधनीपाठ 8453 वेस्संतरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपंचिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमंजरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिंदुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमंजुसा 8468 सामंतकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खंधवग्ग पाळी 2102 महावग्ग पाळी (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळी | 2201 सीलक्खंधवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खंधवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-१ 2305 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-२ | |
| 3101 मूलपण्णास पाळी 3102 मज्झिमपण्णास पाळी 3103 उपरिपण्णास पाळी | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-१ 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-२ 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळी 4102 निदानवग्ग पाळी 4103 खंधवग्ग पाळी 4104 सळायतनवग्ग पाळी 4105 महावग्ग पाळी (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खंधवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खंधवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळी 5102 दुकनिपात पाळी 5103 तिकनिपात पाळी 5104 चतुक्कनिपात पाळी 5105 पंचकनिपात पाळी 5106 छक्कनिपात पाळी 5107 सत्तकनिपात पाळी 5108 अट्ठकादिनिपात पाळी 5109 नवकनिपात पाळी 5110 दसकनिपात पाळी 5111 एकादसकनिपात पाळी | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळी 6102 धम्मपद पाळी 6103 उदान पाळी 6104 इतिवुत्तक पाळी 6105 सुत्तनिपात पाळी 6106 विमानवत्थु पाळी 6107 पेतवत्थु पाळी 6108 थेरगाथा पाळी 6109 थेरीगाथा पाळी 6110 अपदान पाळी-१ 6111 अपदान पाळी-२ 6112 बुद्धवंस पाळी 6113 चरियापिटक पाळी 6114 जातक पाळी-१ 6115 जातक पाळी-२ 6116 महानिद्देस पाळी 6117 चूळनिद्देस पाळी 6118 पटिसंभिदामग्ग पाळी 6119 नेत्तिप्पकरण पाळी 6120 मिलिंदपंह पाळी 6121 पेटकोपदेस पाळी | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-१ 6203 धम्मपद अट्ठकथा-२ 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-१ 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-२ 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-१ 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-२ 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-१ 6214 अपदान अट्ठकथा-२ 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-१ 6218 जातक अट्ठकथा-२ 6219 जातक अट्ठकथा-३ 6220 जातक अट्ठकथा-४ 6221 जातक अट्ठकथा-५ 6222 जातक अट्ठकथा-६ 6223 जातक अट्ठकथा-७ 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-१ 6227 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-२ 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसंगणी पाळी 7102 विभंग पाळी 7103 धातुकथा पाळी 7104 पुग्गलपंयत्ति पाळी 7105 कथावत्थु पाळी 7106 यमक पाळी-१ 7107 यमक पाळी-२ 7108 यमक पाळी-३ 7109 पट्ठान पाळी-१ 7110 पट्ठान पाळी-२ 7111 पट्ठान पाळी-३ 7112 पट्ठान पाळी-४ 7113 पट्ठान पाळी-५ | 7201 धम्मसंगणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पंचपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसंगणी-मूलटीका 7302 विभंग-मूलटीका 7303 पंचपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसंगणी-अनुटीका 7305 पंचपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसंगहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळी | |
မိလိဒဋီကာ मिलिंदटीका နမော တဿ ဘဂဝတော အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ त्या भगवंत, अर्हत, सम्यक्संबुद्धांना माझा नमस्कार असो. နိရန္တရံ လောကဟိတဿ ကာရကံနိရန္တရံ လောကဟိတဿ ဒေသကံ,နိရန္တရံ လောကဟိတဿ စိန္တကံနမာမိ ဝီရံ နရဒမ္မသာရထိံ; निरंतर जगाच्या हिताचे कार्य करणाऱ्या, निरंतर जगाच्या हिताचा उपदेश करणाऱ्या, निरंतर जगाच्या हिताचा विचार करणाऱ्या, त्या वीर नरदम्यसारथीला (मनुष्यांचे दमन करणाऱ्या श्रेष्ठ सारथीला) मी वंदन करतो. ပဉှဓမ္မဝိဒုံ နာထံ ဂုယှဓမ္မပ္ပကာသကံ,နမဿိဝါန သမ္ဗုဒ္ဓံ ဓမ္မံ သာဓုဂုဏမ္ပိ စ; प्रश्नांच्या धर्माला (रहस्याला) जाणणाऱ्या, गुप्त धर्माचा प्रकाश करणाऱ्या त्या नाथ सम्यक्संबुद्धांना, सद्धर्माला आणि सत्पुरुषांच्या गुणांना (किंवा संघगुणांना) नमस्कार करून; နာဂသေနမဟာထေရံ ပိဋကတ္တယကောဝိဒံ,ဝဒိဝါ တမ္ပိ သိရသာ ပဉှဓမ္မပ္ပကာသကံ; त्रिपिटकामध्ये निष्णात असलेल्या आणि प्रश्नांच्या धर्माचा प्रकाश करणाऱ्या महास्थवीर (महाथेर) नागसेनांना सुद्धा मस्तकाने वंदन करून; မိလိဒပဉှဝိဝရဏံ မဓုရထပ္ပကာသိနိံ,ရစယိဿံ သမာသေန တံ သုဏာထ သမာဟိတာ; मधुर अर्थाचा प्रकाश करणाऱ्या 'मिलिंदपञ्हविवरण' (मिलिंदप्रश्नांचे स्पष्टीकरण) या ग्रंथाची मी संक्षेपाने रचना करीन, तो तुम्ही एकाग्र चित्ताने ऐकावा; ၁. တထ ပကိဏ္ဏကထဝိဝရဏံ ဇာတကုဒ္ဓရဏန္တိ ဒွေ ယေဝမာတိကာ. १. त्यामध्ये 'प्रकीर्णकथाविवरण' (कीटकथांचे स्पष्टीकरण) आणि 'जातकउद्धरण' (जातकांचे उद्धरण) अशा दोनच मातृका (अनुक्रमणिका) आहेत. တထ- त्यामध्ये- သမ္ဗဓော စ ပဒဉ္စေဝ ပဒထော ပဒဝိဂ္ဂဟောစောဒနာ ပရိဟာရော’တိ ဆဗ္ဗိဓာ အထဝဏ္ဏနာ’တိ; 'संबंध, पद, पदार्थाचा अर्थ (पदार्थ), पदविग्रह, चोदना (आक्षेप) आणि परिहार (उत्तर)' अशी सहा प्रकारची अर्थवर्णना (स्पष्टीकरण) आहे; ဝုတ္တတ္တာ သမ္ဗဓော တာဝ ဝေဒိတဗ္ဗော. သော စ ယထာဝုတ္တာဇ္ဈာဟာရဝသေန ဒုဝိဓော. सांगितल्याप्रमाणे प्रथम 'संबंध' समजून घेतला पाहिजे. आणि तो वर सांगितल्याप्रमाणे अध्याहाराच्या (अध्याहारवश) आधारे दोन प्रकारचा आहे. ပကိဏ္ဏကထဝိဝရဏံ प्रकीर्णकथाविवरण တေသု –’မိလိဒေါ နာမ သော ရာဇာ …ပေ… သာဂရန္တိ ဧထ အဇ္ဈာဟာရသမ္ဗဓော ဝေဒိတဗ္ဗော ယော’ပိ မိလိဒေါ ရာဇာ ဘဂဝတော ပရိနိဗ္ဗာနတော ပဉ္စဝဿသတေ အတိက္ကန္တေ ရာဇကုလေ ဥပ္ပန္နော သော ရာဇာ မိလိဒေါ နာမ. त्यांपैकी – 'मिलिंद नावाचा तो राजा... पे... सागर' येथे अध्याहार-संबंध समजून घ्यावा. जो कोणी मिलिंद राजा भगवंतांच्या परिनिर्वाणानंतर पाचशे वर्षे उलटून गेल्यावर राजकुलात उत्पन्न झाला, तो राजा 'मिलिंद' नावाचा होता. သာဂလာယံ ပုရုတ္တမေ သာဂလနာမကေ ဥတ္တမနဂရေ ရဇ္ဇံ ကာရေန္တော နာဂသေနထေရံ ဥပဂဉ္ဆိ ကိံ ဝိယာ?တိ. 'सागल' नावाच्या उत्तम नगरात राज्य करीत असताना, ते नागसेन थेरांकडे (स्थविरांकडे) गेले. कशाप्रमाणे? ဂင်္ဂါဝ ယထ သာဂရန္တိ အာဟ. ယထာ ဂင်္ဂါ ဝါ ယမုနာဒီသု အညတရာ ဝါ သာဂရံ ဥပဂဉ္ဆိ တထာ ဥပဂဉ္ဆိ’တိ အထော. ဝ-သဒ္ဒေါ ဝေထ သမုစ္စယထော. ဂင်္ဂါ ဝါ’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ အာကာရဿ ရဿတ္တံ ကဝါ ဂင်္ဂါဝ ဣတိ ဝုတ္တံ. ဥပ္ပလံဝ ယထောဒကေ’တိ ဧထ ဝုတ္တသမုစ္စယထော ဝါသဒ္ဒေါ ဝိယ. 'जशी गंगा सागराला' असे म्हटले आहे. ज्याप्रमाणे गंगा किंवा यमुना इत्यादींपैकी कोणतीही नदी सागराला जाऊन मिळते, त्याप्रमाणे ते गेले असा याचा अर्थ आहे. येथे 'व' (va) हा शब्द समुच्चयार्थक आहे. 'गंगा वा' असे म्हणण्याऐवजी आकाराचा र्हस्व करून 'गंगाव' (gaṅgāva) असे म्हटले आहे. जसे 'उप्पलंव यथोदके' (पाण्यात कमळाप्रमाणे) येथे 'वा' हा शब्द समुच्चयार्थी वापरला आहे, त्याप्रमाणेच. အာသဇ္ဇ ရာဇာ …ပေ… ဝိဒါဠနေ’တိ ဧထ ယထာဝုတ္တသမ္ဗဓော ဝေဒိတဗ္ဗော. သော စ သုဝိဉေဉယျော’ဝ. ပဒန္တိ ဥပသဂ္ဂ နိပါတနာမအာချာတပဒဝသေန စတုဗ္ဗိဓံ. တေသု နာမပဒံ သာမညဂုဏ-ကိတ္တိမ-ဩပပါတိက-နာမ ဝသေန စတုဗ္ဗိဓံ. တထ ပဌမကပ္ပိကမဟာဇနေန သမ္မန္တိဝါ ဌပိတတ္တာ မဟာသမ္မတော’တိ ရညော နာမံ သာမဉဉနာမံ နာမ. ဓမ္မကထိကော ပံသုကုလိကော ဝိနယဓရော တေပိဋကော သဒ္ဓေါ ပသန္နော’တိ ဧဝရူပံ ဂုဏတော အာဂတံ နာမံ ဂုဏနာမံ နာမ. ယမ္ပန ဇာတဿ ကုမာရဿ နာမဂဟဏဒိဝသေ ဒက္ခိဏေယျာနံ သက္ကာရံ ကဝါ သမီပေ ဌိတာ ဉာတကာ ကပ္ပေဝါ’အယံ အမုကော နာမာ’တိ နာမံ ကရောန္တိ ဣဒံ ကိတ္တိမ နာမံ နာမ. ယာ ပန ပုရိမပညတ္တိ ပစ္ဆိမပညတ္တိယံ ပတတိ, ပုရိမဝေါဟာရော ပစ္ဆိမဝေါဟာရေ သေယျထိဒံ ပုရိမကပ္ပေ’ပိ စဒေါ စဒေါယေဝ နာမ ဧတရဟိ’ပိ စဒေါ စဒေါယေဝ နာမ, အတီတေ သူရိယော သမုဒ္ဒေါ ပထဝီ ပဗ္ဗတောယေဝ နာမ. ဧတရဟိ’ပိ ပဗ္ဗတော ပဗ္ဗတောယေဝ နာမာတိ ဣဒံ ဩပပါတိကနာမံ နာမ, ဣဒံ နာမစတုက္ကံ အဘိဓမ္မပရိယာယေန ဝုတ္တံ. သဒ္ဒသထေ ပန နာမနာမ-သဗ္ဗနာမ-သမာသနာမ-တဒ္ဓိတနာမ-ကိတနာမဝသေန ပဉ္စဝိဓံ ဝုတ္တံ. တံ သဗ္ဗံ ဣဓ ယထာရဟံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ပဒထော ပန အာသဇ္ဇာ’တိ ပဝါ. ဌာနာဌာနဂတေ’တိ ကာရဏာကာရဏဂတေ. 'जवळ जाऊन राजा... पे... विदारण करण्यात' येथे वर सांगितलेला संबंध समजून घ्यावा. आणि तो सहज समजण्यासारखाच आहे. 'पद' हे उपसर्ग, निपात, नाम आणि आख्यात (क्रियापद) या भेदाने चार प्रकारचे आहे. त्यांपैकी नामपद हे सामान्यनाम, गुणनाम, कृत्रिमनाम आणि औपपातिकनाम या भेदाने चार प्रकारचे आहे. त्यामध्ये, पहिल्या कल्पामधील (युगातील) लोकांनी संमतीने ठरविल्यामुळे 'महासम्मत' हे राजाचे नाव 'सामान्यनाम' आहे. 'धम्मकथिका' (धर्माचा उपदेशक), 'पांसुकुलिका' (चिंध्यांचे वस्त्र परिधान करणारा), 'विनयधर' (विनयपिटक जाणणारा), 'तेपिटक' (त्रिपिटक जाणणारा), 'श्रद्धाळू' (सद्धो), 'प्रसन्न' (पासन्नो) अशा गुणांमुळे प्राप्त झालेले नाव 'गुणनाम' होय. परंतु, जन्मलेल्या बालकाच्या नामकरणाच्या दिवशी दान देण्यास योग्य असणाऱ्यांचा (दक्खिणेय्य) सत्कार करून, जवळ उभे राहिलेले नातेवाईक विचार करून 'हा अमुक नावाचा आहे' असे जे नाव ठेवतात, ते 'कृत्रिमनाम' होय. आणि जी पूर्वसंज्ञा उत्तरसंज्ञेमध्ये येते, पूर्वव्यवहार उत्तरव्यवहारामध्ये येतो, जसे की – पूर्व कल्पामध्येही चंद्राला 'चंद' (चंद्र) असेच नाव होते आणि आताही चंद्राला 'चंद' असेच नाव आहे; भूतकाळात सूर्य, समुद्र, पृथ्वी आणि पर्वताला पर्वतच म्हटले जात होते आणि आताही पर्वताला पर्वतच म्हटले जाते, हे 'औपपातिकनाम' होय. ही नामांची चतुर्विधता अभिधम्म पद्धतीनुसार (अभिधम्मपरियाय) सांगितली आहे. व्याकरणशास्त्रामध्ये (सद्दसत्थ) मात्र नामनाम, सर्वनाम, समासनाम, तद्धितनाम आणि कृदंतनाम (कितनाम) या भेदाने ते पाच प्रकारचे सांगितले आहे. ते सर्व येथे योग्यतेनुसार समजून घ्यावे. शब्दाचा अर्थ (पदार्थ) – 'आसज्ज' म्हणजे 'जवळ जाऊन'. 'ठानाठानगते' म्हणजे 'कारण आणि अकारणामध्ये गेलेले' (योग्य आणि अयोग्य गोष्टींमध्ये गेलेले). ပုထူ’တိ နာနပ္ပကာရေ. 'पुथू' (पृथू) म्हणजे 'नाना प्रकारे' (विविध प्रकारे). သုတ္တဇာလသမထိတာ’တိ သုတ္တန္တပိဋကသင်္ခါတသုတ္တသမူဟေန သမထိတာ ပထိတာ, သုတ္တံ အာဟရိဝါ သုတ္တထဝိသောဓနဝသေန သုတ္တဇာလသောဓကာ 'सुत्तजालसमथिता' म्हणजे सुत्तंतपिटक नावाच्या सूत्रांच्या समूहाने मंथन केलेली (अभ्यासलेली), सूत्र आणून सूत्राच्या अर्थाचे विशोधन करण्याच्या दृष्टीने 'सूत्रजालाचे शोधन करणारे'. နယေဟိ စာတိ အဘိဓမ္မဝိနယာဒီဟိ နယေဟိ ယုတ္တီဟိ ဝါ. 'नयेहि च' (आणि नयांनी) म्हणजे अभिधम्म, विनय इत्यादी नयांनी (पद्धतींनी) किंवा युक्तींनी. ပဏိဓာယာ စာတိ အဘိဓမ္မဝိနယာဒီဟိ နယေဟိ ယုတ္တီဟိ ဝါ. 'पणिधाय च' म्हणजे अभिधम्म, विनय इत्यादी नयांनी किंवा युक्तींनी. ပဏိဓာယာတိ အတ္တနော ဉာဏံ ဌပေန္တော. 'पणिधाय' म्हणजे आपले ज्ञान प्रस्थापित करणे (किंवा एकाग्र करणे). ဘာသယိဝါန မာနသန္တိ အတ္တနော စိတ္တံ အတိသယေန ပုနပ္ပုနံ ပဝတ္တာပနဝသေန ဟာသေဝါ 'भासयिवान मानसं' (मनाला प्रफुल्लित करून) म्हणजे आपले चित्त अतिशय वेगाने वारंवार प्रवृत्त करून हर्षित करणे. ကင်္ခါဌာနဝိဒါဠနေ’တိ ကင်္ခါယ ဝိစိကိစ္ဆာယ ဝဿာ ကာရဏဘူတာနံ အဝိဇ္ဇာဒိကိလေသာနံ ဓမ္မာနံ ဝိဒါဠနကာရဏေ. 'कंखाठानविदारणे' (शंकेच्या स्थानाचे विदारण करण्यात) म्हणजे शंका आणि विचिकित्सेला कारणीभूत असणाऱ्या अविद्या इत्यादी क्लेशरूप धर्मांचे विदारण करण्याच्या कारणात. အယံ ပဒထော နာမ. याला 'पदार्थ' (शब्दाचा अर्थ) असे म्हणतात. ဝိဂ္ဂဟော ပန ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗော? विग्रह (शब्दाची फोड) कसा समजून घ्यावा? ယောနကသင်္ခါတာနံ မိလာနံ ဣဒေါ योनक म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या मिलांचा (ग्रीकांचा) जो स्वामी (इन्द/इदो) तो; မိလိဒေါ. मिलिंद. သောတံ ပတိတာနံ ဇနာနံ သံသီဒနံ ရာတိ အာဒဒါတီ’တိ प्रवाहामध्ये पडलेल्या लोकांचे बुडणे जो दूर करतो (किंवा सावरून घेतो), तो; သာဂရော, တံ သာဂရံ. सागर, त्या सागराला. အဘိဓမ္မဝိနယေသု အနုပဝိသနထေန ဩဂါဠှာ अभिधम्म आणि विनय यामध्ये प्रवेश करण्याच्या अर्थाने जे अवगाहन (प्रवेश) करते, ते; အဘိဓမ္မဝိနယောဂါဠှာ. 'अभिधम्मविनयावगाढ' (अभिधम्मविनयोग्हा). သုတ္တဇာလဿ သမထိတာ सूत्रजालाचे मंथन केलेले, ते; သုတ္တဇာလသမထိတာ. 'सुत्तजालसमथिता' (सूत्रजालसमथिता). ကင်္ခါ စ ကင်္ခါဌာနဉ္စ ကင်္ခါဌာနာနိ ကင်္ခါဌာနာနံ ဝိဒါဠနံ शंका आणि शंकेचे स्थान म्हणजे शंकास्थाने; शंकास्थानांचे विदारण करणे म्हणजे; ကင်္ခါဌာနဝိဒါဠနံ. 'कंखाठानविदारण' (शंकास्थानविदारण). အယံ ဝိဂ္ဂဟော. हा विग्रह होय. ဣမာ ပဉ္စ ဂါထာ ကေန ကတာ?တိ စောဒနာ ဘဒန္တဗုဒ္ဓဃောသာစရိယေန ကတာ’တိ ပရိဟာရော. န ကေဝလံ ပဉစ ဂါထာ’ဝ, ထေရရာဇဝစနေ’ပိ အညံ ပုဗ္ဗာပရဝစနမ္ပိ တေန ဝုတ္တံ. "या पाच गाथा कोणी रचल्या?" हा आक्षेप (चोदना) आहे. "त्या भदंत बुद्धघोषाचार्यांनी रचल्या आहेत" हे उत्तर (परिहार) आहे. केवळ या पाच गाथाच नव्हे, तर थेर (स्थवीर) आणि राजा यांच्या संवादातील इतर पूर्व-अपर (आधीचे व नंतरचे) संभाषणही त्यांनीच सांगितले आहे. တေသု သမ္ဗဓနယေ– त्यांमध्ये संबंध जोडण्याच्या पद्धतीत (संबंधनयात)– ‘ဧကချာတော ပဒစ္စယော သိယာ ဝါကျံ သကာရကော’တိ စ 'एक आख्यात (क्रियापद) आणि कारकांसह असलेला पदांचा समूह म्हणजे वाक्य होय' आणि; ‘ယေန ယဿ ဟိ သမ္ဗဓော ဒူရဋ္ဌမ္ပိ စ တဿ တံ,အထတော အသမာနာနံ အာသန္နတ္တံ အကာရဏံန္တိ စ; 'ज्याचा ज्याच्याशी संबंध असतो, तो दूर असला तरी त्याचाच मानला जातो. अर्थाच्या दृष्टीने असमान असलेल्या शब्दांचे केवळ जवळ असणे हे संबंधाचे कारण असू शकत नाही' आणि; ‘နာနတ္တာ သတိ ယာ နာနာ-ကြိယာ ဟောတိ ယထာရဟံ,ဧကကြိယာယ ဆန္နန္တု နထိ ကာရကတာ သဒါ’; 'भिन्नता असताना योग्यतेनुसार वेगवेगळ्या क्रिया होतात. परंतु एकाच क्रियेने आच्छादित असलेल्यांमध्ये नेहमी कारकत्व नसते.' ‘ဝေါဟာရဝိသယော သဒ္ဒေါ’နေကထပရမထတော,ဗုဒ္ဓိဝိကပ္ပတော စထော တဿထော’တိ ပဝုစ္စတိ; ‘व्यवहारविषयक शब्द’ हा अनेक अर्थ आणि परमार्थ यांच्या बुद्धीच्या कल्पनेने (बुद्धिविकल्प) युक्त असतो, आणि त्याचा जो अर्थ आहे, त्यालाच ‘त्याचा अर्थ’ असे म्हटले जाते. တီဏီ’ပိ လက္ခဏာနိ သလ္လက္ခေဝါ ယထာ အထော စ သဘာဝေါ စ လဗ္ဘတိ, တထာ သဒ္ဒပ္ပယောဂေါ ကာတဗ္ဗော. သဒ္ဒပ္ပယောဂေန ဟိ အတ္ထသဘာဝါ အနုဝတ္တိတဗ္ဗာ, န အတ္ထသဘာဝေဟိ သဒ္ဒပ္ပယောဂေါ အပိ စ အာစရိယာ နာနာရဋ္ဌေသု ဌိတာ အတ္တနော အတ္တနော ရဋ္ဌဝေါဟာရာနုရူပေန သဒ္ဒပ္ပယောဂဿ အထံ ဝဒန္တိ. ဣဓ အမှာကံ ဗိင်္ဂရဋ္ဌေ သိလိဋ္ဌဝေါဟာရာနုရူပေန သဒ္ဒပ္ပယောဂဿ အထော ဝတ္တဗ္ဗော. ယထာ ဝစနံ သိလိဋ္ဌံ ဟောတိ ကုလပုတ္တာနဉ္စ ဟဒယံ ပဝိသတိ တထာ ဝတ္တဗ္ဗော ကထံ? ယဒိ ပဌမာ ကတ္တာ ဟောတိ, ဒုတိယာ ကမ္မံ သဝိသေသနံ ပဌမန္တကတ္တံ ဝဝါ ကြိယာပဒံ ဝတ္တဗ္ဗံ. ကြိယာပဒံ ဝဝါ သဝိသေသနံ ဒုတိယန္တကမ္မံ ဝတ္တဗ္ဗံ. ယဒိ သဝိသေသနံ ပဌမန္တပဒံ ကမ္မံ ဟောတိ တံ တဿ ဝိသေသနဉ္စ ဝဝါ တတိယန္တကတ္တာ ဝတ္တဗ္ဗော. တံ ဝဝါ ကြိယာပဒံ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ. तिन्ही लक्षणांचे नीट निरीक्षण करून ज्याप्रमाणे अर्थ आणि स्वभाव प्राप्त होतो, त्याप्रमाणे शब्दप्रयोगाचा वापर केला पाहिजे. कारण शब्दप्रयोगाने अर्थाच्या स्वभावाचे अनुकरण केले पाहिजे, अर्थाच्या स्वभावाने शब्दप्रयोगाचे नाही. शिवाय, वेगवेगळ्या देशांत राहणारे आचार्य आपापल्या देशाच्या व्यवहाराला अनुसरून शब्दप्रयोगाचा अर्थ सांगतात. येथे आमच्या बिंग देशात शिष्ट व्यवहाराला अनुसरून शब्दप्रयोगाचा अर्थ सांगितला पाहिजे. जसे वचन शिष्ट (मधुर) होईल आणि कुलपुत्रांच्या हृदयात प्रवेश करेल, तसे कसे बोलावे? जर प्रथमा विभक्ती कर्ता असेल, द्वितीया कर्म असेल, तर विशेषणासह प्रथमान्त कर्ता किंवा क्रियापद सांगितले पाहिजे. किंवा क्रियापद आणि विशेषणासह द्वितीयान्त कर्म सांगितले पाहिजे. जर विशेषणासह प्रथमान्त पद कर्म असेल, तर ते आणि त्याचे विशेषण किंवा तृतीयान्त कर्ता सांगितला पाहिजे. किंवा क्रियापद सांगितले पाहिजे. ပဒထော ပန – पदाचा अर्थ तर - ‘အထပ္ပကာရဏာ လိင်္ဂါ ဩဇညာ (?) ဒေသကာလတော; သဒ္ဒထာ ဝိဘဇီယန္တိ; န သဒ္ဒါယေဝ ကေဝလာ’တိ စ; ‘अर्थाच्या प्रकारावरून, लिंगावरून, ओजस्वीपणावरून (?), देश आणि काळावरून शब्दांचे अर्थ विभागले जातात; केवळ शब्दांवरूनच नव्हे’ असेही; ‘ပရဘာဝပထာပေက္ခံ သ-အမာဒိ တု ကာရကံ,ပစ္စယဿ သဓာတုဿ အထဘုတန္တု သာဓနန္တိ စ; ‘दुसऱ्या भावाच्या मार्गाची अपेक्षा ठेवणारे, ’अम्‘ इत्यादी प्रत्ययांसह असणारे कारक असते, आणि धातूसह प्रत्ययाचा जो अर्थभूत भाग असतो, त्याला साधन म्हणतात’ असेही; ‘ဓာတု သဒ္ဒေါ ကြိယာဝါစီ ပစ္စယော သာဓနဝါစကော,အထဿ ဝါစကံ လိင်္ဂံ ဝိဘတ္တိ အထဇောတကာ; ’ ‘धातू हा क्रियावाचक शब्द आहे, प्रत्यय हा साधनवाचक आहे, लिंग हे अर्थाचे वाचक आहे आणि विभक्ती ही अर्थाची द्योतक (स्पष्ट करणारी) आहे;’ တိ စ လက္ခဏာနိ သလ္လက္ခေဝါ ဧကေကပဒဿ အထဝိဂ္ဂဟော ဝတ္တဗ္ဗော. अशा लक्षणांचे नीट निरीक्षण करून प्रत्येक पदाचा अर्थविग्रह (अर्थाचे स्पष्टीकरण) सांगितला पाहिजे. ပဒ ဝိဂ္ဂဟော ပန- पदविग्रह तर - ‘ဓာဝထော ဟိ သိယာ ဟေတု - ပစ္စယထော သိယာ ဖလံ,ဒွိန္နံ ဇာနနထဉ္စ ဣတိ သဒ္ဒေါ ပယုဇ္ဇတေ; ‘धातूचा अर्थ हा हेतू (कारण) असावा आणि प्रत्ययाचा अर्थ हा फल (परिणाम) असावा, या दोन्हीच्या ज्ञानाच्या अर्थासाठी ’इति‘ हा शब्द वापरला जातो; သဗ္ဗဝါကျေ ကြိယာသဒ္ဒေါ ဣတိသဒ္ဒေါ စ ဟောတိ ဟိ; ကြိယာဗျုပ္ပတ္တိ နိမိတ္တံ ဣတိသဒ္ဒေန ဒီပိတန္တိ,အာဒီနိ လက္ခဏာနိ သလ္လက္ခေဝါ ဝတ္တဗ္ဗော; कारण सर्व वाक्यांमध्ये क्रियावाचक शब्द आणि ’इति‘ शब्द असतोच; क्रिया उत्पत्तीचे निमित्त ’इति‘ शब्दाने प्रकाशित केले जाते, इत्यादी लक्षणांचे नीट निरीक्षण करून सांगितले पाहिजे; အယံ အမှေဟိ ဝုတ္တော သဒ္ဒပ္ပယောဂအထပ္ပယောဂေါ ယောဇနာနံ နယော သဗ္ဗထ ဥပကာရော ကုလပုတ္တေဟိ ဥဂ္ဂဟေတဗ္ဗော သလ္လက္ခေတဗ္ဗောယေဝ. आमच्याद्वारे सांगितलेला हा शब्दप्रयोग आणि अर्थप्रयोगाच्या योजनांचा मार्ग सर्व प्रकारे उपकारक असून कुलपुत्रांनी तो ग्रहण केलाच पाहिजे आणि त्याचे नीट मनन केलेच पाहिजे. ဣတော ပရံ ယံ အထတော စ ရူပတော စ အပါကဋံ, တံယေဝ ဝဏ္ဏယိဿာမ. यानंतर, जे अर्थाच्या दृष्टीने आणि रूपाच्या दृष्टीने स्पष्ट नाही, त्याचेच आम्ही वर्णन करू. သုဝိဘတ္တ-ဝီထိ-စစ္စရ-စတုက္က-သိင်္ဃာဋကန္နိ သုဝိဘတ္တာ ရထိကာသင်္ခါတာ ဝီထိ စစ္စရသင်္ခါတာ စတုက္ကာ မဂ္ဂသဓိသင်္ခါတာ သိင်္ဃာဋကာ ဧထာတိ သုဝိဝိဘတ္တဝီထိစစ္စရစတုက္ကသိင်္ဃာဋံ. ဝုတ္တဉှေတံ အဘိဓာနပ္ပဒီပိကာယံ; ‘सुविभक्त-वीथि-चच्चर-चतुक्क-सिंघाटक’ म्हणजे जेथे सुविभक्त (सुव्यवस्थित) अशा रथिका नावाच्या गल्ल्या (वीथि), चच्चर नावाचे चौक (चतुक्क) आणि मार्गांचे सांधे (संगम) असणारे तिठे किंवा नाके (सिंघाटक) आहेत, ते ‘सुविभक्तवीथिचच्चरचतुक्कसिंघाटक’ होय. अभिधानप्पदीपिकामध्ये असे म्हटले आहे की; ‘‘ရစ္ဆာ စ ဝိသိခါ ဝုတ္တာ ရဋိကာ ဝီထိ စာပျထဝျုဟော ရစ္ဆာ အနိဗ္ဗိဒ္ဓါ နိဗ္ဗိဒ္ဓါ တု ပထဒ္ဓိ စ,စတုက္ကံ စစ္စရေ မဂ္ဂ-သဓိ-သိင်္ဃာဋကမ္ဘဝေ’’တိ; “रच्छा आणि विसिखा यांना रथिका आणि वीथि असेही म्हणतात. बंद गल्लीला व्यूह म्हणतात आणि मोकळ्या रस्त्याला पथद्धि म्हणतात. चच्चर म्हणजे चौक (चतुक्क) आणि मार्गांचा सांधा म्हणजे सिंघाटक होय.” ကာသိက-ကောဋုမ္ဗရကာဒိ - နာနာဝိဓဝထာပဏသမ္ပန္နန္တိ ဧထ မဟဂ္ဃဝထံ ကာသိကံ ကာသိကရဋ္ဌေ ဝါ ဥပ္ပန္နံ ကာသိကံ. ကောဋုမ္ဗရဒေသေ ဇာတံ ဝထံ ကောဋုမ္ဗရံ. အာဒိသဒ္ဒေန ခေါမံ ကပ္ပာသိကံ ကောသေယျံ ကမ္ဗလံ သာဏံ ဘင်္ဂန္တိ. ဓဝလဝထာနိ စ ခေါမဿ အနုလောမဘုတံ ဒုကုလံ ကောသေယျဿ အနုလောမဘုတာနိ ပတ္တုန္နပဋ္ဋ-သောမာရ-စီနဇ ဝထာနိ စ သင်္ဂဏှာတိ. ဝုတ္တဉှေတံ ခုဒ္ဒကသိက္ခာဂထေ? ‘कासिक-कोटुम्बरक-आदि - नानाविधवत्थापणसम्पन्नं’ (काशी आणि कोटुम्बर येथील वस्त्रे इत्यादी विविध प्रकारच्या वस्त्रांच्या दुकानांनी समृद्ध) यामध्ये अत्यंत मौल्यवान वस्त्र म्हणजे कासिक, किंवा काशी राज्यात उत्पन्न झालेले ते कासिक होय. कोटुम्बर देशात उत्पन्न झालेले वस्त्र म्हणजे कोटुम्बरक होय. ‘आदि’ शब्दाने क्षौम (तागाचे वस्त्र), कार्पासिक (सुती वस्त्र), कौशेय (रेशमी वस्त्र), कम्बल (लोकरीचे वस्त्र), शाण (तागाचे वस्त्र) आणि भंग (भांगेच्या धाग्यांचे वस्त्र) यांचा संग्रह होतो. पांढरी वस्त्रे आणि क्षौम वस्त्राच्या सदृश असणारे दुकूल वस्त्र, कौशेय वस्त्राच्या सदृश असणारे पट्टुर्णपट्ट, सोमार आणि चीन देशात उत्पन्न झालेली वस्त्रे यांचाही यात समावेश होतो. खुद्दकसिक्खेच्या गाथेमध्ये असे म्हटले आहे ना? ဒုကူလဉ္စေဝ ပတ္တုန္န - ပတ္တံ သောမာရစီနဇံ ဣဒ္ဓိဇံ ဒေဝဒိန္နဉ္စ တဿ တဿာနုလောမကန္တိ. “दुकूल, pattuṇṇa, पट्ट, सोमार आणि चीन देशात उत्पन्न झालेली वस्त्रे, ऋद्धीने उत्पन्न झालेली आणि देवांनी दिलेली वस्त्रे, ही त्या त्या वस्त्रांच्या सदृश (अनुकूल) असतात.” တဿ ဋီကာယဉ္စ’ဝါကမယတ္တာ ဒုကုလာ သာဏဿ အနုလောမကေဟိ ကတသုတ္တမယတ္တာ ပတ္တုဏ္ဏပဋ္ဋ-သောမာရစီနဝထာနိ ကောသေယျဿ အနုလောမာနိ ဣဒ္ဓိဇဒေဝဒိန္နဝထာနိ ဆန္နံ ဝထာနံ အနုလောမာနိ တေသံ အညတရမယတ္တာ’တိ ဝုတ္တံ. त्याच्या टीकेमध्ये असे म्हटले आहे की— ‘वल्कलापासून (झाडाच्या सालीपासून) बनविलेले असल्यामुळे दुकूल हे शाण (तागाच्या) वस्त्राच्या सदृश असते. कापलेल्या सुतापासून बनविलेले असल्यामुळे पट्टुर्ण, पट्ट, सोमार आणि चिनी वस्त्रे ही कौशेय (रेशमी) वस्त्राच्या सदृश असतात. ऋद्धीने उत्पन्न झालेली आणि देवांनी दिलेली वस्त्रे ही सहा प्रकारच्या वस्त्रांच्या सदृश असतात, कारण ती त्यांच्यापैकीच एका प्रकारची बनलेली असतात.’ တထ မိလိဒပဉှော လက္ခဏပဉှော ဝိမတိစ္ဆေဒနပဉှော’တိ ဒုဝိဓော’တိ ဧထ ဓမ္မာနံ လက္ခဏပုစ္ဆနဝသေန ပဝတ္တော ပဉှော လက္ခဏပဉေဟာ.ဓမ္မာနံ လက္ခဏပဉှော’တိ ကထစိ လိခိတံ. ဌာနုပ္ပန္တိကပဋိဟာနော’တိ တသ္မိံ တသ္မိံ ဂမ္ဘီရထဝိစာရဏကာလေ ကတ္တဗ္ဗကိစ္စသင်္ခါတေ ဌာနေ ဥပ္ပတ္တိ ဥပ္ပဇ္ဇနံ ဌာနုပ္ပတ္တိ သာ အဿ အထိတိ ဌာနုပ္ပတ္တိကံ. အာရမ္မဏေ ပဋိဘာတီတိ ပဋိဘာနံ, ဉာဏံ. ဌာနုပ္ပတ္တိကံ ပဋိဘာနံ ယဿ သော ဌာနုပ္ပတ္တိကပဋိဘာနော. तेथे ‘मिलिन्दपञ्हो’ (मिलिंद प्रश्न) हा ‘लक्षणप्रश्न’ आणि ‘विमतिच्छेदनप्रश्न’ (शंका निरसन प्रश्न) असा दोन प्रकारचा आहे. त्यापैकी धर्मांच्या लक्षणांविषयी विचारण्याच्या स्वरूपात असलेला प्रश्न म्हणजे ‘लक्षणप्रश्न’ होय. काही ठिकाणी ‘धम्मांन लक्षणपञ्हो’ असे लिहिले आहे. ‘ठाणुप्पत्तिकपटिभानो’ म्हणजे त्या त्या गंभीर अर्थाच्या विचाराच्या वेळी कर्तव्य कर्माच्या स्वरूपात असणाऱ्या प्रसंगी (स्थान) जी उत्पत्ती (उत्पन्न होणे) होते, ती ‘स्थानोत्पत्ती’ (ठाणुप्पत्ति) होय, आणि ती ज्याच्याजवळ आहे तो ‘स्थानोत्पत्तिक’ होय. आलंबनामध्ये जे स्फुरते ते ‘प्रतिभान’ (पटिभान) म्हणजेच ज्ञान होय. ज्याच्याजवळ तात्कालिक प्रसंगी स्फुरणारे प्रतिभान (ज्ञान) आहे, तो ‘ठाणुप्पत्तिकपटिभानो’ (तात्कालिक प्रसंगी प्रतिभावान असणारा) होय. ပဋိဗလော အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္နာနန္တိ ဧထ အထာနံ ဇာနိတုန္တိ ပါဌသေသော ကာတဗ္ဗော သောယေဝ ဝါ ပါဌော. တထ အဟံ အတီတဘဝေ ဒိန္နဒါနော ရက္ခိတသီလော ဘာဝိတဘာဝနော ကတကလျာဏော ဣဒါနိ ဉာဏသမ္ပန္နော ဓနဝါ ယသဝါ’တိ အတီတထံ ဇာနိတုံ ပဋိဗလော ဣဒါနိ မယာ ဒါနာဒိ ပုညံ ကတ္တဗ္ဗံ သမ္ပတ္တိ ဘဝတော. သမ္ပတ္တိ ဘဝေ ဥပ္ပဇ္ဇိဝါ သုခီ ဟုဝါ ပရိနိဗ္ဗာယိဿာမီ’တိ. ဧဝံ ပစ္စုပ္ပန္နအနာဂတထေ ဇာနိတုံ ပဋိဗလော နာမ. ‘पटिबलो अतीतानागतपच्चुप्पन्नानं’ (भूत, भविष्य आणि वर्तमानकाळातील गोष्टी जाणण्यास समर्थ) यामध्ये ‘अर्थांना जाणण्यासाठी’ (अत्थानं जानितुं) असा पाठशेष (अध्याहार) केला पाहिजे किंवा तोच पाठ असावा. तेथे ‘मी भूतकाळात दान दिले होते, शील राखले होते, भावना विकसित केली होती, कल्याणकारी कर्मे केली होती, म्हणून आता मी ज्ञानसंपन्न, धनवान आणि कीर्तिमान आहे’ अशा प्रकारे भूतकाळातील अर्थ जाणण्यास समर्थ असणारा; आणि ‘आता माझ्याद्वारे दानादी पुण्यकर्मे केली पाहिजेत, ज्यामुळे संपत्ती प्राप्त होईल. संपत्तीच्या भवात उत्पन्न होऊन, सुखी होऊन मी परिनिर्वाण प्राप्त करीन’ अशा प्रकारे वर्तमान आणि भविष्यकाळातील अर्थ जाणण्यास समर्थ असणारा, तो ‘पटिबलो’ (समर्थ) होय. သမန္တယောဂဝိဓာနကိရိယာနံ ကရဏကာလေ’တိ ယုဉ္ဇိတဗ္ဗော ယောဂေါ. သမန္တတော သဗ္ဗတော သဗ္ဗကာလေ ယောဂေါ သဗ္ဗကာလေသု သဗ္ဗကတ္တဗ္ဗကမ္မာနံ ဝိဒဟနံ ဝိဓာနံ နာမ. ဣဒဉ္စိဒဉ္စ ကရိဿာမိ, ဣမသ္မိံ ကတေ ဣဒံ ဘဝိဿတီ’တိ ပုဗ္ဗဘာဂေ ဥပါယေန ကတ္တဗ္ဗဝိဓာနံ ကိရိယာ နာမ ကရဏကာလေယေဝ လဗ္ဘတိ. ပုဗ္ဗဘာဂေ စ ကရဏကာလေ စ နိသမ္မကာရီတိ အဓိပ္ပာယော. ‘समन्तयोगविधानक्रियानं करणकाले’ (सर्व बाजूंनी योगाच्या विधानाच्या क्रिया करण्याच्या वेळी) यामध्ये जोडला जाणारा तो ‘योग’ होय. सर्व बाजूंनी, सर्व प्रकारे, सर्व काळी असणारा योग म्हणजे सर्व काळात सर्व कर्तव्य कर्मांचे आयोजन करणे, याला ‘विधान’ म्हणतात. ‘मी हे आणि हे करीन, हे केल्यावर हे होईल’ अशा प्रकारे पूर्वभागात (आधीच) उपायाने करावयाचे आयोजन म्हणजे ‘क्रिया’ होय, जी प्रत्यक्ष करण्याच्या वेळीच प्राप्त होते. पूर्वभागात आणि प्रत्यक्ष करण्याच्या वेळी विचारपूर्वक कार्य करणारा (निसम्मकारी), असा याचा अभिप्राय आहे. သေယျထီဒန္တိ ယာနိ သထာနိ တေန ဥဂ္ဂဟိတာနိ တာနိ သေယျထိဒံ ဝိဘဇိဿာမီတိ အထော အနေကထတော မဟနိဒါနသုတ္တဝဏ္ဏနာယဉ္စ ဧဝမေဝထော ဝုတ္တော’ သေယျထိဒံ ကတမာနီ’တိ ကေစိ ဝဒန္တိ. တံ’ကတမေ ပဉ္စုပါဒါနက္ခဓာ? သေယျထိဒံ? ရူပူပါဒါနက္ခဓော’တိအာဒိနာ နယေန သမေတိ. တေသု စ ဧကူနဝီသတိသထေသု. ‘सेय्यथीदं’ (जसे की/उदाहरणाथ) म्हणजे त्याने जी शास्त्रे ग्रहण केली आहेत, ती ‘सेय्यथीदं’ (याप्रमाणे) विभागून सांगेन असा अर्थ आहे. अनेक अर्थांमुळे महानिदानसुत्ताच्या वर्णनातही असाच अर्थ सांगितला आहे. काही जण ‘सेय्यथीदं कतमानि’ (ते कोणते?) असे म्हणतात. ते ‘कतमे पञ्चुपादानक्खन्धा? सेय्यथीदं? रूपुपादानक्खन्धो’ (पाच उपादानस्कंध कोणते? जसे की— रूपोपादानस्कंध) इत्यादी पद्धतीने जुळते. आणि त्या एकोणवीस शास्त्रांमध्ये... သုတီတိ ဧထ သုယျတေ ဓမ္မော ဧတာယာတိ သုတိ, ဝေဒေါ. ‘सुति’ (श्रुती) म्हणजे ज्याच्याद्वारे धर्म ऐकला जातो ती सुति, म्हणजेच वेद होय. သမ္မုတီတိ သဒ္ဒဂန္ထော. သေသာ သင်္ချာဒယောပိ စ ကတ္တုယောနကတ္တာ ဗာဟိရ သထေသု ယဒိ ဒိဿန္တိ တေ သုဂဟေတဗ္ဗာ ယေဝါတိ. ‘सम्मत’ (संमृती) म्हणजे शब्दशास्त्र (व्याकरण ग्रंथ). उर्वरित संख्या इत्यादी शास्त्रे देखील जर बाह्य शास्त्रांमध्ये कर्त्याच्या उत्पत्तीमुळे दिसत असतील, तर ती चांगल्या प्रकारे ग्रहण केलीच पाहिजेत. ဘတ္တဝိဿဂ္ဂကရဏထာယာတိ ဘတ္တကိစ္စကရဏထာယ. ‘भत्तविस्सग्गकरणत्थाय’ (भोजन विसर्जन करण्यासाठी) म्हणजे भोजनविधी (जेवण) करण्यासाठी. သကိံ ဧဝံ စက္ခုံ ဥဒပါဒီတိ အတီတဘဝေ တီသု ဝေဒေသု ပရိစယသတိဉာဏဗလေန သကိမေဝ ဧကုဂ္ဂဟဏဝါရမေဝ စက္ခု ဝေဒုဂ္ဂဟဉာဏစက္ခု ဥဒပါဒိ. ဗဟုတရံ အဝစာပေဝါ ဧကဝါရမေဝ ဝဒါပေဝါ ဓာရေတုံ အသက္ကောန္တဿ ဉာဏစက္ခု ဥဒပါဒီတိ အဓိပ္ပာယော. ‘सकिं एव चक्खुं उदपादि’ (एकदाच असे चक्षु उत्पन्न झाले) म्हणजे भूतकाळात तीन वेदांच्या परिचयाच्या स्मृती आणि ज्ञानाच्या बळावर एकदाच, केवळ एकाच ग्रहणाने चक्षु म्हणजेच वेदग्रहणाचे ज्ञानचक्षु उत्पन्न झाले. अधिक वेळा न वदवता, केवळ एकदाच वदवून (बोलवून) ते धारण करण्यास असमर्थ असणाऱ्याचे ज्ञानचक्षु उत्पन्न झाले, असा याचा अभिप्राय आहे. အာစရိယဿ အနုယောဂံ ဒဝါ’တိ’အာစရိယ, တုမှေဟိ ယံ ယံ ဣစ္ဆထ, တံ တံ မံ ပုစ္ဆထ, အဟံ ဝိဿဇေဿာမိ. ဗျာကာတုံ အသက္ကောန္တဿ မေ အာစိက္ခထာ’တိ အာစရိယဿ အတ္တနော အနုယောဂံ အနုယုဉ္ဇနံ စောဒနံ ဒဝါ. ဧကစ္စော ဟိ အနုယောဂံ ဒါတုံ သက္ကောတိ ဗျာကာတုံ ပန န သက္ကောတိ. နာဂသေနဒါရကော ပန တဒုဘယမ္ပိ ကာတုံ သက္ကောတိယေဝ. आचार्यांना अनुयोग (प्रश्न विचारण्याची संधी) देऊन—'आचार्य, तुम्हाला जे जे हवे असेल, ते ते मला विचारा, मी त्याचे उत्तर देईन. जर मी स्पष्टीकरण देण्यास असमर्थ ठरलो, तर मला सांगा'—अशा प्रकारे आचार्यांना स्वतःचा अनुयोग, उलटतपासणी आणि प्रेरणा देऊन. कारण कोणी एक जण अनुयोग (प्रश्न) विचारू शकतो, पण त्याचे स्पष्टीकरण देऊ शकत नाही. परंतु नागसेन बालक मात्र हे दोन्ही करण्यास समर्थ होतेच. ဓမ္မစက္ခုံ ဥဒပါဒီတိ’ယံ ကိဉ္စိ သမုဒယဓမ္မံ သဗ္ဗံ တံ နိရောဓဓမ္မန္တိဓမ္မစက္ခု သောတာပတ္တိမဂ္ဂဉာဏံ နိဗ္ဗာနာရမ္မဏံ ဟုဝါ ဧဝံ ဥပ္ပဇ္ဇနာကာရေန ဥဒပါဒိယံ ကိဉ္စိ သင်္ခတံ ဓမ္မဇာတံ သမုဒယဓမ္မံ ဥပ္ပဇ္ဇနသဘာဝံ သဗ္ဗံ တံ နိရောဓဓမ္မံ, သဗ္ဗံ တံ ဓမ္မဇာတံ နိရုဇ္ဈနသဘာဝံ အနိစ္စံ ခယဝယဓမ္မန္တိ ဥဒပါဒိ. ကသ္မာ နိဗ္ဗာနာရမ္မဏံယေဝ မဂ္ဂဉာဏမေဝ ဥဒပါဒီ?တိ. တပ္ပဋိစ္ဆာဒကမောဟဓကာရံ ဝိဒ္ဓံသေဝါ ဥပ္ပန္နတ္တာ. 'धम्मचक्षू उत्पन्न झाला' म्हणजे—'जे काही उत्पन्न होण्याच्या स्वभावाचे आहे, ते सर्व निरोध होण्याच्या (नष्ट होण्याच्या) स्वभावाचे आहे.' धम्मचक्षू म्हणजे निर्वाणाचे आलंबन असणारे सोतापत्तिमग्गञाण (स्रोतापत्ती मार्गज्ञान) होय, जे अशा प्रकारे उत्पन्न होण्याच्या रूपाने प्रकट झाले. जे काही संस्कृत (कारण-सामग्रीने बनलेले) धर्म उत्पन्न होण्याच्या स्वभावाचे आहे, ते सर्व निरोध होण्याच्या स्वभावाचे आहे; ते सर्व धर्म नष्ट होण्याच्या स्वभावाचे, अनित्य आणि क्षय-व्यय होण्याच्या स्वभावाचे आहेत, असे ज्ञान उत्पन्न झाले. केवळ निर्वाणाचे आलंबन असणारे मार्गज्ञानच का उत्पन्न झाले? कारण त्याला झाकून टाकणाऱ्या मोहरूपी अंधकाराचा विध्वंस करूनच ते उत्पन्न झाले होते. (ဒေါသိနာ) ဒေါသိတာတိ ဝတ္တဗ္ဗေ တကာရဿ တကာရံ ကဝါ ဒေါသိနာ’တိ ဝုတ္တံ. (दोसिना) 'दोसिता' असे म्हणावयाचे असताना 'त' काराचा 'न' कार करून 'दोसिना' असे म्हटले आहे. ရထံ အာရုယှာ’တိ ဧထ သာမိကံ ရမယတီတိ ရထော’တိ ဝိဂ္ဂဟော ကာတဗ္ဗော. 'रथावर आरूढ होऊन' (रथं आरुय्ह) येथे 'जो आपल्या स्वामीला आनंदित करतो तो रथ' (सामिकं रमयतीति रथो) असा विग्रह केला पाहिजे. ရာဇရထော နာမ သဗ္ဗရတနဝိစိတ္တော ဣစ္ဆိတဗ္ဗော. 'राजरथ' म्हणजे सर्व प्रकारच्या रत्नांनी सुशोभित असलेला रथ असे समजले पाहिजे. (ဝယဟံ) ဝဟန္တီ ဧတေနာတိ ဝယဟံ ဥပရိမဏ္ဍပသဒိသပဒရစ္ဆန္နသဗ္ဗမာလာဂုဏ္ဌိမံ ဝါ ဆာဒေဝါတိ အဋ္ဌကထာယံ ဝုတ္တနယေန ကတသကဋံ ဝယှံ နာမ. (वय्हं) ज्याद्वारे वाहून नेले जाते ते 'वय्ह' होय. अट्ठाकथेमध्ये सांगितलेल्या पद्धतीनुसार, वरच्या बाजूला मंडपासारखे कापडाने झाकलेले आणि सर्व बाजूंनी फुलांच्या माळांनी वेढलेले जे वाहन (गाडी) तयार केले जाते, त्याला 'वय्ह' असे म्हणतात. သဒမာနိကာ’တိ ဥဘောသု ပဿေသု သုဝဏ္ဏရဇတာဒိမယာ ဂေါပါနသိယော ဒဝါ ဂရုဠပက္ခကနယေန သဒမာနိကာ’တိ အဋ္ဌကထာယံ ဝုတ္တနယေန ကတော ယာနဝိသေသော ဝယှာဒိဒွယံ စေကထာယ ဣဓာနီတံ 'सदमानिका' म्हणजे दोन्ही बाजूंना सोन्या-चांदीच्या बनवलेल्या वळचणी (गोपानसी) गरुडाच्या पंखांच्या आकारासारख्या देऊन, अट्ठाकथेमध्ये सांगितलेल्या पद्धतीनुसार तयार केलेले एक विशिष्ट वाहन होय. 'वय्ह' इत्यादी दोन प्रकारची वाहने येथे टीकेमधून (अट्ठाकथेतून) घेतली आहेत. တိထကရော’တိ’ဥဂ္ဂဟော သဝဏံ ပုစ္ဆာ ကထနံ ဓာရဏံ ဣတိ ပဉ္စဓမ္မဝသေနေဝ တိထဝါသော ပဝုစ္စတီ’တိ ဧဝံ ဝုတ္တေ တိထဝါသေ ပတိဋ္ဌာယ ပရေ စ ပတိဋ္ဌာပေဝါ ပိဋကတ္တယတိထဆေကကရဏေန ဓမ္မတိထင်္ကရော. 'तित्थकरो' (तीर्थकर) म्हणजे—ग्रहण करणे (उग्गह), श्रवण करणे, प्रश्न विचारणे, कथन करणे आणि धारण करणे या पाच धर्मांच्या आधारेच 'तीर्थवास' असे म्हटले जाते. अशा प्रकारे सांगितलेल्या तीर्थवासात स्वतः प्रतिष्ठित होऊन आणि इतरांनाही त्यात प्रतिष्ठित करून, त्रिपिटकरूपी तीर्थाला सुगम/कुशल बनविल्यामुळे ते 'धम्मतित्थंकर' (धम्मतीर्थकर) होत. နိပုဏော’တိ ဗဓာဒီသု ဥပဇာနနသမထော. 'निपुणो' (निपुण) म्हणजे बाधा (अडथळे) इत्यादी गोष्टी जाणून घेण्यास समर्थ असलेला. ဝိသာရဒေါ’တိ ပရိသာသု ဘယရဟိတော. 'विशारदो' (विशारद) म्हणजे सभांमध्ये भयमुक्त असलेला. သာမယိကော’တိ ဒေသဇဘာသာသင်္ခါတသမယကုသလော သကသမယသမယန္တရစ္ဆေကဉာဏဝန္တော. 'सामयिको' (सामयिक) म्हणजे देशीय भाषांच्या संकेतांमध्ये (समयामध्ये) कुशल असलेला आणि स्वतःच्या सिद्धांतांचे (स्वसमय) व इतर सिद्धांतांचे (परसमय) सूक्ष्म ज्ञान असलेला. ပဋိဘာဏော’တိ ကလျာဏဝါကျ သင်္ချာတပဋိဘာဏဝန္တော. 'पटिभाणो' (प्रतिभावान) म्हणजे कल्याणकारी वचनांनी युक्त अशी वक्तृत्वकला किंवा प्रतिभा असलेला. မေဓာဝီတိ ဓမ္မောဇပညာယ မေဓာဝီ. ဓမ္မောဇပညာ နာယ ဉာနဂတော ပဏ္ဍိတော’ကိံ သုတံ ကိံ ဝါ သုဏာမိ, ကိံ ကုသလံ ဂဝေသိန္တိ’ ယာယ ဝိစာရေတိ သာ ဓမ္မောဇပညာ နာမ. 'मेधावी' म्हणजे धम्माच्या ओजस्वी प्रज्ञेने (धम्मोजप्रज्ञा) युक्त असलेला. धम्मोजप्रज्ञा म्हणजे ज्या प्रज्ञेच्या आधारे ज्ञानी पंडित मनुष्य असा विचार करतो की—'मी काय ऐकले आहे? किंवा मी काय ऐकत आहे? मी कोणत्या कुशल धर्माचा शोध घेत आहे?'—तिला 'धम्मोजप्रज्ञा' असे म्हणतात. အာယသ္မာပိ ခေါ နာဂသေနော ပဋိသမ္မောဒိ…ပေ… အာရာဓေသိတိ ယေနေဝ သမ္မောဒနိယဝစနေန ထေရော ရဉေဉာ မိလိဒဿ စိတ္တံ အာရာဓေသိ တောသေသိ တေနေဝ သမ္မောဒနီယဝစနေန ရညာ သဒ္ဓိံ ပဋိသမ္မောဒီတိ ယောဇနာ. 'आयुष्यमान नागसेन यांनी देखील परस्पर स्वागत केले... प्रसन्न केले' याचा संबंध असा आहे की, ज्या संमोदनीय (आनंददायी) वचनांनी थेरांनी राजा मिलिंदाच्या चित्ताला प्रसन्न व संतुष्ट केले, त्याच संमोदनीय वचनांनी त्यांनी राजासोबत परस्पर स्वागत केले. ဉာယာမီတိ ဉာတော ပါကဋော ဟောမိ. 'ञायामी' (मी ओळखला जातो) म्हणजे मी ज्ञात किंवा प्रसिद्ध होतो. အပိ စ ခေါ မဟာရာဇ …ပေ… နာဂသေနော’တိ ယံ ဣဒံနာဂသေနော’တိ နာမံ ဧသာ သင်္ခါ သမညာ ပညတ္တိ ဝေါဟာရော နာမမတ္တံ ဟောတီတိ ယောဇနာ. 'परंतु हे महाराज! ... नागसेन' याचा संबंध असा आहे की, हे जे 'नागसेन' असे नाव आहे, ती केवळ एक संज्ञा (संखा), समज्ञा (समञ्ञा), प्रज्ञप्ती (पण्ञत्ति), व्यवहार (वोहारो) आणि केवळ नाममात्र आहे. (သင်္ခါ) ဧထ စ သင်္ခါယတီတိ သင်္ခါ. သင်္ကထိယတီတိ အထော ကိန္တိ သင်္ကထိယတိ? ပရဿာတိ အတ္တာ’တိ ဘဝေါ’တိ ပေါသော’တိ ပုဂ္ဂလော’တိ နရော’တိ မာဏဝေါ’တိ တိဿော’တိ ဒတ္တော’တိ မဉ္စပီဌံ ဘိသိဗိမ္ဗော ဟနန္တိ ဝိဟာရော ပရိဝေဏံ ဒွါရံ ဝါတပါနန္တိ. ဧဝံ အနေကေဟိ အာကာရေဟိ သင်္ကထီယတိတိ သင်္ခါ. (संखा) येथे ज्याचे संकथन (वर्णन) केले जाते ती 'संखा' (संज्ञा) होय. याचा अर्थ 'तिचे संकथन केले जाते' असा आहे. कशा प्रकारे संकथन केले जाते? 'दुसरा', 'आत्मा', 'भव', 'पोष' (पुरुष), 'पुद्गल', 'नर', 'माणवक' (तरुण), 'तिस्स', 'दत्त', 'पलंग', 'पीठ' (आसन), 'गादी', 'बिंब', 'विहार', 'परिवेण' (प्रांगण), 'द्वार', 'खिडकी' इत्यादी रूपाने. अशा प्रकारे अनेक रूपांनी जिचे संकथन केले जाते, ती 'संखा' (संज्ञा) होय. သမညာ သမ္မာ ဉာယတီတိ ကိန္တိ ဉာယတီ?တိ. အဟန္တိ မမန္တိ…ပေ… ဒွါရံ ဝါတပါနန္တိ သမ္မာ ဉာယတီတိ သမညာ. 'समञ्ञा' (समज्ञा) म्हणजे जे सम्यक प्रकारे (योग्य रीतीने) जाणले जाते. ते कशा प्रकारे जाणले जाते? 'मी', 'माझे'... 'द्वार', 'खिडकी' इत्यादी रूपाने जे सम्यक प्रकारे जाणले जाते, ती 'समञ्ञा' होय. (ပညတ္တိ) ပညာပီယတီတိ ပညတ္တိ. (पण्ञत्ति) ज्याद्वारे प्रज्ञापित (स्पष्ट/प्रकट) केले जाते, ती 'पण्ञत्ति' (प्रज्ञप्ती) होय. (ဝေါဟာရော). ကိန္တိ ပညာပီယတီတိ…ပေ… ဝေါဟရီယတီတိ ဝေါဟာရော. ကိန္နိ ဝေါဟရီယတိတိ. အဟန္တိ မမန္တိ…ပေ… ဒွါရံ ဝါတပါတန္တိ ဝေါဟရီယတီတိ ဝေါဟာရော. ဣမေဟိ စတုဟိ သင်္ခါအာဒီဟိ ပဒေဟီ နာမပညတ္တိယေဝ အဓိပ္ပေတာ နာမမတ္တန္တိ ဒဿနတော. (वोहारो) ते कशा प्रकारे प्रज्ञापित केले जाते... ज्याद्वारे व्यवहार केला जातो तो 'वोहारो' (व्यवहार) होय. कशा प्रकारे व्यवहार केला जातो? 'मी', 'माझे'... 'द्वार', 'खिडकी' इत्यादी रूपाने ज्याचा व्यवहार केला जातो, तो 'वोहारो' होय. संखा (संज्ञा) इत्यादी या चार पदांद्वारे केवळ 'नामप्रज्ञप्ती' (नामाचा व्यवहार) हाच अभिप्रेत आहे, कारण ते केवळ 'नाममात्र' असल्याचे दर्शविते. သစေ ဝံ မဟာရာဇ ပဏ္ဍိတဝါဒါ သလ္လပိဿသီတိ ဝံ သစေ မယာ သဒ္ဓိံ ပဏ္ဍိတာနံ သလ္လာပေန. 'जर, हे महाराज! आपण पंडितांच्या पद्धतीने चर्चा कराल' म्हणजे: जर आपण माझ्याशी पंडितांच्या संवादाच्या पद्धतीने चर्चा कराल. အာဝေဌနမ္ပိ ကယိရတိ နိဗ္ဗေဌနမ္ပိ ကယိရတီ’တိ ပဉှပူစ္ဆနဝသေန ဝေဌနံ ပဏ္ဍိတေဟိ ကယိရတိ ပဉှဝိဿဇ္ဇနဝသေန ဝေဌနံ ပဏ္ဍိတေဟိ ကယိရတိ ပဉှဝိဿဇ္ဇနဝသေန နိဗ္ဗေဌနမ္ပိ ကယိရတိ. 'आवेढन (गुंतागुंत) देखील केले जाते आणि निवेढन (उकल) देखील केले जाते' म्हणजे प्रश्न विचारण्याच्या रूपाने पंडितांद्वारे आवेढन केले जाते, प्रश्न सोडविण्याच्या रूपाने पंडितांद्वारे आवेढन केले जाते आणि प्रश्न सोडविण्याच्या रूपाने निवेढन (उकल) देखील केले जाते. နိဂ္ဂဟော’ပိ ကယိရတီ’တိ နာဂသေနထေရော မုသာဘဏတီတိအာဒိနာ နိဂ္ဂဟနယေန အညပဏ္ဍိတာနံ နိဂ္ဂဟဏဝစနံ အညပဏ္ဍိတေဟိ ကယိရတိ. အပိ စ ကထာဝထုပ္ပကရဏေ အာဂတော သဗ္ဗနိဂ္ဂဟော နိဂ္ဂဟောယေဝ. 'निग्रह (खंडन) देखील केला जातो' म्हणजे 'थेर नागसेन असत्य बोलत आहेत' इत्यादी निग्रह करण्याच्या पद्धतीने इतर पंडितांचे निग्रहवचन (खंडन करणारे शब्द) इतर पंडितांद्वारे उच्चारले जातात. शिवाय, कथावत्थु प्रकरणामध्ये आलेले सर्व निग्रह हे निग्रहच आहेत. ပဋိက္ကမမ္ပီ’တိ ဝံ မဟာရာဇ’ရာဇာ မိလိဒေါ ဇမ္ဗုဒီပေ အဂ္ဂရာဇာ ကသ္မာ မုသာ ဘဏသီ’တိအာဒိနာ ပဋိက္ကမမ္ပိ ကယိရတိ. 'प्रतिक्रम (माघार घेणे/चूक दुरुस्त करणे) देखील केला जातो' म्हणजे 'हे महाराज! राजा मिलिंद जंबुद्विपातील सर्वश्रेष्ठ राजा आहेत, मग आपण असत्य का बोलता?' इत्यादी प्रकारे प्रतिक्रम देखील केला जातो. ဝိသေသော ‘ပီတိ’သမ္ပန္နံ မုနိနော စိတ္တံ, ‘ကမ္မနာ ဗျတ္တတ္တေန စ ဝိဇ္ဇာစရဏသမ္ပန္နံ ဓမ္မဂတာနံ ပသံသတီ’တိအာဒိနာ ဂုဏပသံသနသင်္ခါတ ဝိသေသော. ဣဓ ပန ကလ္လော’သိ ဘန္တေ’တိအာဒိ ပဋိဂ္ဂဟဏဝိသေသော’တိ’သမ္ပန္နံ မုနိနော စိတ္တံ…ပေ… ဓမ္မဂတာနံ အနုမောဒသီ’တိအာဒိနာ ဂုဏပသံသနသင်္ခါတော ပဋိဂ္ဂဟဏဝိသေသော. ဣဓ ပန သာဓု ခေါ ဝံ မဟာရာဇ ရထံ ဇာနာသီ’တိအာဒိ. ဧကံ ဝထုံ ပဋိဇာနန္တီတိ ကလျာဏမဏိအာဒိကံ အညတရံ ဧကံ ဝထုံ ကလျာဏံ ဝါ အထိ နထိတိ ပဋိဇာနန္တိ ပဌမဒိဝသေ တယော ပဉှာ ရညာ ပုစ္ဆိတာ နာမပညတ္တိပဉှော သတ္တဝဿိကပဉှော ဝီမံသနပဉှော. 'विशेष देखील' म्हणजे—'मुनींचे चित्त संपन्न आहे, कर्माने आणि कुशलतेने विद्याचरणसंपन्न असलेल्या धम्ममार्गावरील लोकांची ते प्रशंसा करतात' इत्यादी प्रकारे गुणांची प्रशंसा करण्याच्या रूपाने असलेला विशेष होय. परंतु येथे 'भन्ते, आपण समर्थ आहात' इत्यादी स्वीकार करण्याचा विशेष आहे. 'मुनींचे चित्त संपन्न आहे... धम्ममार्गावरील लोकांचे आपण अनुमोदन करता' इत्यादी प्रकारे गुणांची प्रशंसा करण्याच्या रूपाने असलेला स्वीकार करण्याचा विशेष होय. परंतु येथे 'हे महाराज, आपण रथाला उत्तम प्रकारे जाणता' इत्यादी. 'एका वस्तूचा स्वीकार करतात' म्हणजे कल्याणकारी मणी इत्यादींपैकी कोणतीही एक वस्तू कल्याणकारी आहे किंवा नाही, अथवा ती अस्तित्वात आहे की नाही, याचा स्वीकार करतात. पहिल्या दिवशी राजाने तीन प्रश्न विचारले होते: नामप्रज्ञप्तीचा प्रश्न, सात वर्षांच्या बालकाचा प्रश्न आणि मीमांसा (परीक्षा घेणारा) प्रश्न. ဘန္တေ နာဂသေန ပုစ္ဆိဿာမီတိ …ပေ… ကိမ္ပန မဟာရာဇ တယာ ပုစ္ဆိတန္တိ တတိယော ဝီမံသနပဉှော ဌာနုပ္ပတ္တိကပဋိဟာနဇာနနထာယ ဝီမံသနဝသေန ပုစ္ဆိတတ္တာ ဝိမံသနပဉှော နာမ. တထ’ပုစ္ဆိတော မေ ဘန္တေ’တိ ဣဒံ ရညာ အတ္တနာ ဟေဋ္ဌာ ပုစ္ဆိတေ ဒွေ ပဉှေ သဓာယ ဝုတ္တံ. 'भन्ते नागसेन, मी विचारणार आहे... पण हे महाराज, आपण काय विचारले आहे?' हा तिसरा प्रश्न मीमांसा प्रश्न आहे, कारण तो तात्कालिक प्रतिभेची (हजरजबाबीपणाची) परीक्षा घेण्यासाठी विचारण्यात आल्यामुळे त्याला 'मीमांसा प्रश्न' असे म्हणतात. त्यामध्ये 'भन्ते, मी विचारले आहे' हे राजाने स्वतः आधी विचारलेल्या दोन प्रश्नांच्या संदर्भात म्हटले आहे. ဝိဿဇ္ဇိတံ မေ’တိ ဣဒမ္ပိ ထေရေန အတ္တနာ ဟေဋ္ဌာ ဝိဿဇ္ဇိတေ ဒွေ ပဉှေ သဓာယ ဝုတ္တံ. 'मी उत्तर दिले आहे' हे देखील थेरांनी स्वतः आधी उत्तर दिलेल्या दोन प्रश्नांच्या संदर्भात म्हटले आहे. နာဂသေနော နာဂသေနော’တိ သဇ္ဈာယံ ကရောန္တော ပက္ကာမီတိ ရညာ နာဂသေနထေရေ ဗဟုမာနဂါရဝေါ ကတော’တိ ဒီပေတုံ ဗုဒ္ဓဃောသာစရိယေန ဝုတ္တံ အဂါရဝေါ ဟိ ပုဂ္ဂလော ဂရုဋ္ဌာနိယံ ပုဂ္ဂလံ ဒိသွာပိ သုဝါပိ ဇာနိဝါပိ အပဿန္တော အသုဏန္တော အဇာနန္တော ဝိယ ဟောတီတိ. တတြာယံ ဝစနထော? အာဂုံ ပါပံ န ကရောတီတိ နာဂေါ. သေန္တိ သယန္တိ ဧတေန ဝါဒပစ္စထိကာ ဇနာတိ သေနော နာဂေါ စ သော သေနော စာတိ နာဂသေနော သာမညာဒီသု စတုသု နာမေသု ဣဒံ ကိတ္တိမနာမံ. ‘नागसेन, नागसेन’ असा सज्झाय (स्मरण) करत तो निघून गेला, याद्वारे राजाने नागसेन थेरांबद्दल अत्यंत आदर व बहुमान व्यक्त केला, हे दर्शवण्यासाठी आचार्य बुद्धघोषांनी म्हटले आहे. कारण आदर नसलेली व्यक्ती आदरणीय व्यक्तीला पाहूनही, ऐकूनही किंवा जाणून घेऊनही न पाहिल्यासारखी, न ऐकल्यासारखी आणि न जाणल्यासारखीच असते. तिथे शब्दाचा अर्थ काय आहे? जो पाप (आगुं) करत नाही तो ‘नाग’ होय. ज्याच्याद्वारे वाद घालणारे प्रतिपक्षी शांत होतात (शयन करतात) तो ‘सेन’ होय. जो नागही आहे आणि सेनही आहे तो ‘नागसेन’ होय. सामान्य इत्यादी चार प्रकारच्या नावांमध्ये हे ‘कृत्रिम नाव’ (दिलेले नाव) आहे. သုဋ္ဌု ထေရော အဗဘနုမောဒီတိ’သာဓု သုဋ္ဌု’တိ ဝစနေန. အန္တရာမဂ္ဂေ ပုစ္ဆိတော အနထကာလပဉှော. थेरांनी ‘साधू, सुठ्ठू’ (उत्तम, छान) या शब्दांनी चांगल्या प्रकारे अनुमोदन केले. वाटेत विचारलेला प्रश्न हा अयोग्य वेळचा प्रश्न (अनर्थकालप्रश्न) होता. ကတမေထ နာဂသေနော’တိ ကတမော ဓမ္မော ဧတသ္မိံ ဝစနေ နာဂသေနော နာမ ဟောတီတိ ပုစ္ဆိ. ‘यात नागसेन कोण आहे?’ म्हणजे या वचनात कोणता धर्म (घटक) ‘नागसेन’ नावाचा आहे, असा प्रश्न विचारला. ဇီဝေါ’တိ ဇီဝဘုတော ဝါယော. ‘जीव’ म्हणजे जीवभूत वायू (प्राणवायू) होय. အဿာသပဿာသာ နာမေတေ ကာယသင်္ခါရော’တိ ထေရော အဘိဓမ္မကထံ အကာသီတိ ဣမိနာ အနန္တကာယဿ ဧတေ အန္တော-ပဝိသန-ဗဟိ-နိက္ခမတဝါတာ အဿာသပဿသာ နာမ ကရဇကာယေန အဘိသင်္ခရီယန္တိ, တသ္မာ ကာယသင်္ခါရာ စ ဟောန္တိ, တေနေဝ ဇီဝေန နာဂသေနော နာဂသေနော’တိ ဣမိနာ နာမမတ္တံ ဂဏှာတိ န ပုဂ္ဂလော ဇီဝေါ ဂဟေတဗ္ဗော’တိ ထေရော အဘိဓမ္မကထံ အကာသိ. ‘श्वास आणि उच्छ्वास हे कायसंस्कार आहेत’ या वचनाने थेरांनी अभिधम्म चर्चा केली. याद्वारे अनंतकायाचे (शरीराचे) हे आत जाणारे आणि बाहेर पडणारे वायू म्हणजेच श्वास-उच्छ्वास होत, जे या भौतिक शरीराद्वारे (करजकाय) संस्कारित केले जातात. म्हणूनच ते कायसंस्कार आहेत. त्याचप्रमाणे, केवळ त्या जीवामुळे ‘नागसेन, नागसेन’ असे नाममात्र ग्रहण केले जाते, तिथे कोणताही स्वतंत्र ‘पुद्गल’ किंवा ‘जीव’ ग्रहण केला जाऊ शकत नाही, अशी थेरांनी अभिधम्म चर्चा केली. ဥပါသကတ္တံ ပဝေဒေသီ’တိ အတ္တသန္နိယျာတနေန သိဿဘာဝူပဂမနေန ပဏိပါတေန သမာဒါနေနာတိ စတုသု သရဏဂမနူပါယေသု သမာဒါနေန ရတနတ္တယဿ စ ထေရဿ စ ဥပါသကဘာဝံ, ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂစ္ဆာမိ, ဓမ္မံ သရဏံ ဂစ္ဆာမိ, သံဃံ သရဏံ ဂစ္ဆာမိ, တဉ္စ သရဏံ ဂစ္ဆာမိ, ဥပါသကံ မံ ဓာရေဟိ အဇ္ဇတဂ္ဂေ ပါဏုပေတံ သရဏံ ဂတန္တိ. ‘उपासकत्व जाहीर केले’ म्हणजे स्वतःला समर्पित करून, शिष्यत्व पत्करून, वंदन करून आणि व्रत ग्रहण करून, अशा चार प्रकारच्या शरणगमनाच्या उपायांपैकी व्रत ग्रहणाने (समादानाने) त्रिरत्न आणि थेरांच्या प्रति उपासकभाव व्यक्त केला की, ‘मी बुद्धाला शरण जातो, मी धम्माला शरण जातो, मी संघाला शरण जातो; आणि मी तुम्हालाही शरण जातो. आजपासून मला प्राण असेपर्यंत शरण गेलेला उपासक म्हणून स्वीकारावे.’ အနန္တကာယပဉှော စတုထော. अनंतकाय प्रश्न चौथा समाप्त. ကိမှိ ဟောတိ ကထာသလ္လာပေါ’တိ ကိမှိ ကာရဏေ နိမိတ္တဘုတေ ကထာသလ္လာပေါ ဟောတိ. ကိမ္ပယောဇနော ကထာသလ္လာပေါ’တိ အဓိပ္ပာယော ဣဒံ ရဉဉာ ကိမထာယ ဝုတ္တံ? အနုယောဂဒါနထာယ စေဝ ပုစ္ဆနဿ ဩကာသဒါပနထာယ စာတိ ဉာတဗ္ဗံ. ‘कशात संभाषण होते?’ म्हणजे कोणत्या कारणाने किंवा निमित्ताने संभाषण होते? ‘संभाषणाचा हेतू काय?’ हा राजाचा विचार कशासाठी होता? तो प्रश्न विचारण्याची संधी देण्यासाठी आणि चर्चा पुढे नेण्यासाठी होता, असे समजावे. အထေန မယံ မဟာရာဇ အထိကာ အထေန ဟောတု ကထာသလ္လပေါ’တိ ဣမိနာ ထေရော ရညော အနုယောဂဉ္စေဝ ဩကာသဉ္စ ဒေတိ တထ အထေနာ’တိ. ‘महाराज, आम्ही अर्थाचे (प्रयोजनाचे) अर्थी आहोत, अर्थासाठीच संभाषण होऊ दे’ या वचनाने थेर राजाला प्रश्न विचारण्याची आणि संभाषणाची संधी देतात, तसेच ‘अर्थाने’ असे म्हणतात. ’အထော ပယောဇနော သဒ္ဒါ’ဘိဓေယျ ဝုဒ္ဓိယံ ဓနေ,ဝထမှိ ကာရဏေ နာသေ ဟိတေ ပစ္ဆိမပဗ္ဗတေ’တိ; ‘अर्थ, प्रयोजन, शब्द, अभिधेय, वृद्धी, धन, कारण, नाश, हित आणि पश्चिम पर्वत (अस्त पर्वत) या अर्थांमध्ये ‘अथ’ हा शब्द वापरला जातो.’ ဧဝံ ဝုတ္တေသု အထေသု ဣဓ ပယောဇနဉ္စ ဟိတဉ္စ လဗ္ဘတိ. တေသု လောကိယလောကုတ္တရဖလံ ပယောဇနံ နာမ, သာသနဝုဒ္ဓိ ဝါ. ယထိစ္ဆိတဖလနိပ္ဖာဒါနော ဟိနောတိ ပဝတ္တတီတိ ဟိတံ. ဒါနသီလာဒိလောကိယလောကုတ္တရကာရဏံ. अशा प्रकारे सांगितलेल्या अर्थांमध्ये येथे ‘प्रयोजन’ आणि ‘हित’ हे दोन अर्थ अभिप्रेत आहेत. त्यापैकी लौकिक आणि लोकोत्तर फळाला ‘प्रयोजन’ किंवा ‘शासनवृद्धी’ (धम्माची वृद्धी) म्हणतात. इच्छित फळ मिळवून देणारे ते ‘हित’ होय, जे दान, शील इत्यादी लौकिक व लोकोत्तर गुणांचे कारण आहे. ကိန္တီ’တိ ကိမှိ အသင်္ခတဓာတုသင်္ခါတေ နိဗ္ဗာနေ ဖလသင်္ခါတေ နိဗ္ဗာနေ ဣဒံ ပစ္စုပ္ပန္နဒုက္ခံ နိရုဇ္ဈေယျ. ‘कशासाठी?’ म्हणजे कशामध्ये, ज्याला असंस्कृत धातू किंवा निर्वाण म्हटले जाते, त्या निर्वाणरूपी फळामध्ये हे वर्तमान दुःख निरुद्ध व्हावे (नष्ट व्हावे). အနုပါဒါပရိနိဗ္ဗာနန္တိ အရဟတ္တဖလသင်္ခါတံ အနုပါဒါပရိနိဗ္ဗာနံ. နိဗ္ဗာနဉှိ ဒုဝိဓံ အပစ္စယပရိနိဗ္ဗာနံ အနုပါဒါပရိနိဗ္ဗာနန္တိ. တေသု အဝိဇ္ဇာဒိပစ္စယရဟိတတ္တာ အသင်္ခတဓာတု အပစ္စယ-ပရိနိဗ္ဗာနံ နာမ. ကိလေသသင်္ခတ-ပရိနိဗ္ဗာနသင်္ခါတံ ဥပါဒါန ရဟိတတ္တာ အရဟတ္တဖလံ အနုပါဒါပရိနိဗ္ဗာနံ နာမ. ‘अनुपादापरिनिर्वाण’ म्हणजे अर्हतफळरूपी अनुपादापरिनिर्वाण होय. निर्वाण दोन प्रकारचे आहे: अप्रत्ययपरिनिर्वाण आणि अनुपादापरिनिर्वाण. त्यापैकी अविद्या इत्यादी प्रत्ययांपासून (कारणांपासून) रहित असल्यामुळे असंस्कृत धातूला ‘अप्रत्ययपरिनिर्वाण’ म्हणतात. क्लेशरूपी उपादानांपासून रहित असल्यामुळे अर्हतफळाला ‘अनुपादापरिनिर्वाण’ म्हणतात. ရာဇာဘိနီတာ’တိ ရာဇူဟိ ပီဠိတာ ရာဇဘီတာ ဝါ. ‘राजाकडून पीडित’ म्हणजे राजाने त्रास दिलेले किंवा राजाच्या भयाने पळून आलेले. ဣဏဋ္ဋာ’တိ ဣဏေန ပီဠိတာ. ‘कर्जबाजारी’ म्हणजे कर्जाने पीडित झालेले. ကလ္လော’သီတိ ဗျာကရဏ ဉာဏေန ဆေကော’သိ, အင်္ဂုတ္တရဋီကာယံ’ ဗျာကရဏေ သမထော’. ပဋိဗလော’တိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ ယေဝါတိ. ‘तू समर्थ आहेस’ म्हणजे उत्तराच्या ज्ञानाने तू चतुर आहेस. अंगुत्तरटीकेमध्ये ‘व्याकरणात (उत्तरामध्ये) कुशल’ असा अर्थ आहे. ‘प्रतिबल’ (समर्थ) असे म्हणणेही योग्यच आहे. ပဗ္ဗဇ္ဇာပဉှော ပဉ္စမော. प्रव्रज्या प्रश्न पाचवा समाप्त. သောပါဒါနော’တိ သကိလေသော. ‘सोपादान’ म्हणजे क्लेशांसह असलेला. ပဋိသဒဟနပဉှော ဆဋ္ဌော. प्रतिसंधान (पुनर्जन्म) प्रश्न सहावा समाप्त. ယောနိသော မနသိကာရေနာတိ အနိစ္စံ ဒုက္ခန္တိ ဥပါယေန ပထေန သာရဏလက္ခဏေန အာရမ္မဏပဋိပါဒကမနသိကာရေန. ‘योनिशो मनसिकाराने’ म्हणजे अनित्य आणि दुःख या योग्य मार्गाने, लक्षणांचे स्मरण करून आलंबनाला ग्रहण करणाऱ्या मनसिकाराने. မနသိကာရပဉှော သတ္တမော. मनसिकार प्रश्न सातवा समाप्त. ဥဿဟနလက္ခဏေ’တိ သမ္ပယုတ္တာနံ အာရမ္မဏေ သံယောဇနဝသေန ဥဿဟနလက္ခဏေ ဂဏှနလက္ခဏေ ဝါ. ‘उत्साह हे लक्षण आहे’ म्हणजे संप्रयुक्त धर्मांना आलंबनामध्ये जोडण्याच्या दृष्टीने उत्साह दाखवणे किंवा त्यांना ग्रहण करणे हे लक्षण होय. မနသိကာရလက္ခဏပဉှော အဋ္ဌမော. मनसिकार लक्षण प्रश्न आठवा समाप्त. ယော သီလက္ခဓော ဝရပါတိမောက္ခိယော’တိ ယော ပါတိမောက္ခသီလသံဝရသင်္ခါတော ဗုဒ္ဓုပ္ပာဒေယေဝ ဥပ္ပန္နော သီလဂုဏော သယံ ပတိဋ္ဌာတိ ဣဒုယာဒီနံ ဧကဒသန္နံ ကုသလဓမ္မာနံ နိဿယာကာရေန နိဿယပစ္စယော စေဝ ဗလဝကာရဏဋ္ဌေန ဥပနိဿယော စ ပထဝီ ဣဝ သတ္တာနံ ပတိဋ္ဌာ. ‘जो शीलस्कंध श्रेष्ठ प्रातिमोक्ष आहे’ म्हणजे जो प्रातिमोक्षसंवर शीलरूपी बुद्धोत्पाद काळातच उत्पन्न झालेला शीलगुण स्वतः प्रस्थापित करतो, तो श्रद्धा इत्यादी अकरा कुशल धर्मांना आश्रय देण्याच्या स्वरूपात ‘निश्रयप्रत्यय’ आणि प्रबळ कारण असल्यामुळे ‘उपनिष्रयप्रत्यय’ ठरतो, जशी पृथ्वी सर्व प्राण्यांचा आधार असते. သီလပတိဋ္ဌာနလက္ခဏပဉှော နဝမော. शीलप्रतिष्ठापन लक्षण प्रश्न नववा समाप्त. အညေသံ စိတ္တံ ဝိမုတ္တံ ပဿိဝါ’တိ အညေသံ အရိယာနံ သောတာပတ္တိဖလာဒိကေ ဖလေ ဝိသေသေန အဓိမုတ္တံ ပက္ခဒန္တံ ဉာဏစက္ခုနာ ပဿိဝါ. ‘इतरांचे चित्त विमुक्त झालेले पाहून’ म्हणजे इतर आर्य पुद्गलांचे चित्त स्रोतापत्ती इत्यादी फळांमध्ये विशेष रूपाने विमुक्त व प्रविष्ट झालेले ज्ञानचक्षूने पाहून. သဒ္ဓါလက္ခဏပဉှော ဒသမော. श्रद्धा लक्षण प्रश्न दहावा समाप्त. သဗ္ဗေ ကုသလာ ဓမ္မာ’တိ သဗ္ဗေ လောကိယကုသလဓမ္မာ ဥပ္ပန္နာ န ပရိဟာယန္တိ. ‘सर्व कुशल धर्म’ म्हणजे उत्पन्न झालेले सर्व लौकिक कुशल धर्म नष्ट होत नाहीत. ဝီရိယလက္ခဏပဉှော ဧကာဒသမော. वीर्य (प्रयत्न) लक्षण प्रश्न अकरावा समाप्त. အပိလာပနလက္ခဏော’တိ အာရမ္မဏေ အနုပဝိသနဋ္ဌေန ဩဂါဟနလက္ခဏော သပ္ပဋိဘာဂဓမ္မော’တိ ပဋိဘာဂေန ပစ္စထိကေန သဟ ဝတ္တန္တီတိ သပ္ပဋိဘာဂါ သုက္ကော စ ကဏှပဋိဘာဂေန သပ္ပဋိဘာဂေါ. ‘अपिलापन (न विसरणे) हे लक्षण आहे’ म्हणजे आलंबनामध्ये प्रविष्ट न होता त्यात खोलवर उतरणे हे लक्षण होय. ‘सप्रतिभाग धर्म’ म्हणजे जे विरोधी धर्मांसोबत राहतात. जसे शुक्ल (शुभ) हे कृष्ण (अशुभ) धर्माच्या प्रतिपक्षाने सप्रतिभाग आहे. ကဏှသုက္ကသပ္ပဋိဘာဂေ’တိ ဤဒိသပါဌော ယဒိ အထိ သုဒရောယေဝ. ‘कृष्ण-शुक्ल-सप्रतिभाग’ असा पाठ जर असेल, तर तो अतिशय उत्तम आहे. အပိလာပေတီတိ အနုပဝိသနဋ္ဌေန ဩဂါဟတိ. ‘अपिलापेती’ म्हणजे प्रविष्ट न होता खोलवर उतरतो. ဟိတာဟိတာနံ ဓမ္မာနံ ဂတိယော’တိ ကုသလာကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဣဋ္ဌာနိဋ္ဌ-ဝိပါကဒါနဘာဝ-သံခါတ-နိပ္ဖတ္တိယော. ‘हितकारक आणि अहितकारक धर्मांची गती’ म्हणजे कुशल आणि अकुशल धर्मांचे इष्ट व अनिष्ट विपाक देण्याच्या स्वरूपातील परिणाम. သဗ္ဗထကန္တိ သဗ္ဗကိစ္စေ နိယုတ္တံ သဗ္ဗလီနုဓစ္စေသု ဣစ္ဆိတဗ္ဗံ ဝါ. ‘सर्वार्थक’ म्हणजे सर्व कार्यांमध्ये नियुक्त असलेला किंवा सर्व आळस व उद्धतपणामध्ये इच्छिण्याजोगा. သတိလက္ခဏပဉှော ဒွါဒသမော. स्मृती लक्षण प्रश्न बारावा समाप्त. တပ္ပမုခါ’ဝါတိ ရာဇပ္ပဓာနာ ဣဝ. ‘त्यांच्यात प्रमुख असलेला’ म्हणजे राजाप्रमाणे मुख्य असलेला. သမာဓိပဉှော တေရသမော. समाधी प्रश्न तेरावा समाप्त. ယော ဥပ္ပဇ္ဇတိ သော ဧဝ သော’တိ ယော ပထဝိဖဿာဒိပရမထဓမ္မော ဥပ္ပဇ္ဇတိ, သော ဥပ္ပန္နပုဗ္ဗဓမ္မော ဧဝ. ‘जो उत्पन्न होतो तोच तो आहे’ म्हणजे जो पृथ्वी, स्पर्श इत्यादी परमार्थ धर्म उत्पन्न होतो, तो पूर्वी उत्पन्न झालेला धर्मच होय. ပညာလက္ခဏပဉှော စုဒ္ဒသမော. प्रज्ञा लक्षण प्रश्न चौदावा समाप्त. နာနာ-ဧကကိစ္စကရဏပဉှော ပဏ္ဏရသမော. नाना-एककृत्यकरण प्रश्न पंधरावा समाप्त. ပဏ္ဏရသပဉှဝန္တော ပဌမဝဂ္ဂေါ သမတ္တော. पंधरा प्रश्नांचा पहिला वर्ग समाप्त झाला। ဝံ ပန ဘန္တေ ဧဝံ ဝုတ္တေ ကိံ ဝဒေယျာသီ’တိ ယဒါ ဝံ ဒဟရော တရုဏော မဒေါ ဥတ္တာနသေယျကော အဟောသိ သောယေဝ ဝံ ဧတရဟိ မဟန္တော’တိ ဣမသ္မိံ ဝစနေ မယာ စ ကေနဝိဓ ပုစ္ဆနဝသေန ဝုတ္တေ ဝံ ကိံ ဝဒေယျာသီတိ ယောဇနာ. पण भन्ते, असे विचारले असता आपण काय म्हणाल? 'जेव्हा आपण लहान, तरुण, कोमल आणि पाठीवर निजणारे (बाळ) होतात, तेच आपण आता मोठे झाला आहात काय?' या वाक्यात माझ्याद्वारे किंवा इतर कोणाद्वारे विचारलेल्या प्रश्नाच्या संदर्भात 'आपण काय म्हणाल?' अशी योजना आहे। ဒုတိယဝဂ္ဂေ ပန ဓမ္မသန္တတိပဉှော ပဌမော. दुसऱ्या वर्गात धम्मसंततीचा प्रश्न पहिला आहे। န ပဋိသဒဟနဇာနနပဉှော ဒုတိယော. प्रतिसंधि न जाणण्याचा प्रश्न दुसरा आहे। သကိစ္စယန္တိ အတ္တနော ဝိသယောဘာသနကိစ္စံ. 'स्वतःचे कार्य' म्हणजे स्वतःच्या विषयाला प्रकाशित करण्याचे कार्य। အာလိမ္ပနံ ဝိဇ္ဈာပေတုန္တိ အဂ္ဂိံ နိဗ္ဗာပေတုံ 'पेटलेली आग विझवणे' म्हणजे अग्नी विझवणे। ပညာနိရုဇ္ဈနပဉှော တတိယော. प्रज्ञेच्या निरोधाचा प्रश्न तिसरा आहे। နိဗ္ဗိသံ ဘတကော ယထာ’တိ ယထာ ဘတကော ဘတကကမ္မံ ကဝါ လက္ခံ နိဗ္ဗိသံ နိဗ္ဗိသန္တော လဘန္တော ဒုက္ခံ ဇီဝိတုံ နာဘိနဒတိ မရဏဉ္စ နာဘိနဒတိ မရဏကာလံ အာဂမေတိ, ဧဝမေဝါဟံ ကာလံ မရဏကာလံ ပဋိကင်္ခါမိ အာဂမေမီတိ အဓိပ္ပာယော. 'ज्याप्रमाणे मजुरी मिळवणारा मजूर' म्हणजे ज्याप्रमाणे मजूर मजुरीचे काम करून, ठरलेली मजुरी मिळवत असताना, दुःखाने जगण्याचीही इच्छा करत नाही आणि मरणाचीही इच्छा करत नाही, तर केवळ मरणाच्या वेळेची वाट पाहतो; त्याचप्रमाणे मी मरणाच्या वेळेची (काळाची) प्रतीक्षा करतो, वाट पाहतो, असा अभिप्राय आहे। ပရီနိဗ္ဗာနပဉှော စတုထော. परिनिर्वाणाचा प्रश्न चौथा आहे। ယဒိ ကုသလာ န ဒုက္ခာ’တိ သုခါ ဝေဒနာ ကုသလာ ယဒိ သိယာ သာ ကုသလာ ဝေဒနာ န ဒုက္ခဘူတာ.ယဒိ သိယာ သာ ကုသလာ န ဟောတိ. ကုသလံ ဒုက္ခန္တိ န ဥပပဇ္ဇတီ’တိ ကုသလံ ဒုက္ခဘုတန္တိ ဝစနံ န ဥပပဇ္ဇတီတိ ဝတ္တုံ န ယုဇ္ဇတိ. ကုသလံ ဒုက္ခံ န. အညမညပစ္စနီကတ္တာ’တိ ရညော အဓိပ္ပာယော. သဘာဝေါ ပန ဧဝံ န ဟောတိ. ကုသလာ ဟိ သုခါ ဝေဒနာ သင်္ခါရဒုက္ခေန ဝိပရိဏာမဒုက္ခေန’ပိ ဒုက္ခာ. နေက္ခမ္မနိဿိတဒေါမနဿသင်္ခါတဒုက္ခာ’ပိ အနဝဇ္ဇဋ္ဌေန ကုသလာ သိယာတိ ထေရော ပန မယိ ရာဇာနံ အယောဂုဠဟိမပိဏ္ဍပဉှံ ပုစ္ဆန္တေ တံ ရာဇာ မိစ္ဆာ ဗျာကရိဿတိ. တသ္မိံ ဒေါသံ အာရောပေဿာမိ. ရာဇာ တံ မိစ္ဆာ ဗျာကရိဿတိ. တသ္မိံ ဒေါသံ အာရောပေဿာမိ. ရာဇာ တံ ဟရိတုံ အသက္ကောန္တော မံ အထဇပ္ပနံ ယာစိဿတိ. အထ ရာဇာတံ သဘာဝထံ သညာပေဿာမီတိ မနွာ တံ ကိမ္မညသိ မဟာရာဇာ’တိအာဒိမာဟ. ကိန္နု ခေါ မဟာရာဇ ဥဘော’ပိ တေ ဒဟေယျုန္တိ ဣမသ္မိံ ပုစ္ဆာဝစနေ ထေရေန ဝုတ္တေ ရာဇာ သီတုဏှသမညာတာ တေဇောဓာတု’တိ သုတတ္တာ သီတဟိမပိဏ္ဍဿ ခရခါဒနဘာဝဉ္စ သဓာယ ဓာတုနံ ဥဿဒဘာဝဇာနနဉာဏတော ဝိရုဇ္ဈိဝါ’အာမ ဘန္တေ ဥဘော’ပိ တေ ဒဟေယျုန္တိ ဝိရုဒ္ဓပဋိဝစနံ အဒါသိ. ‘जर कुशल दुःखकारक नसेल तर’ म्हणजे जर सुखद वेदना कुशल असेल, तर ती कुशल वेदना दुःखमय असणार नाही। जर ती (दुःखमय) असेल, तर ती कुशल असणार नाही। ‘कुशल हे दुःखकारक आहे हे जुळत नाही’ म्हणजे ‘कुशल हे दुःखमय आहे’ असे म्हणणे योग्य नाही। ‘कुशल हे दुःख नाही, कारण ते एकमेकांच्या परस्पर विरोधी आहेत’ असा राजाचा अभिप्राय आहे। परंतु वास्तविकता (स्वभाव) अशी नसते। कारण कुशल सुखद वेदना सुद्धा संस्कार-दुःख आणि विपरिणाम-दुःख यामुळे दुःखमयच असते। नैष्क्रम्य-आश्रित दौर्मनस्य नावाचे दुःख देखील दोषरहित (अनवद्य) असल्यामुळे कुशल असू शकते। थेरांनी विचार केला की, 'मी राजाला लोखंडाचा तप्त गोळा आणि बर्फाचा गोळा याविषयी प्रश्न विचारला असता, राजा त्याचे चुकीचे उत्तर देईल। मग मी त्याच्यावर दोषारोप करीन। राजा त्याचे खंडन करण्यास असमर्थ होऊन मला अर्थ स्पष्ट करण्याची विनंती करेल। तेव्हा मी राजाला वास्तविक अर्थ समजावून सांगेन।' असा विचार करून त्यांनी 'महाराज, आपल्याला काय वाटते?' इत्यादी विचारले। 'महाराज, ते दोन्ही आपल्याला जाळतील का?' या थेरांच्या प्रश्नवचनावर, राजाने - शीत आणि उष्ण या दोन्हीला 'तेजोधातू' म्हटले जाते असे ऐकले असल्यामुळे आणि बर्फाच्या गोळ्याच्या तीव्र दाहकतेचा विचार करून, धातूंच्या तीव्रतेच्या ज्ञानाच्या विरुद्ध जाऊन - 'होय भन्ते, ते दोन्ही जाळतील' असे परस्परविरोधी उत्तर दिले। န ဟိ ဘန္တေ’တိ ရညော အဝဇာနနပဋိက္ခပနံ. 'नाही भन्ते' हे राजाचे नकार देणे आणि नाकारणे (अस्वीकार करणे) आहे। အဇာနာဟိ နိဂ္ဂဟန္တိ ထေရဝစနံ. ယသ္မာ တေ ပုရိမာယ’အာမာ’တိ ပဋိညာယ ပစ္ဆိမာ’န ဟိ ဘန္တေ’တိ ပဋိညာ ပစ္ဆိမာယ စ ပုရိမာ န သဓိယတီ. တသ္မာ ဝံ နိဂ္ဂဟံ ပတ္တော. ဝံ နိဂ္ဂဟံ ဒေါသံ အပရာဓံ သမ္ပိဋိစ္ဆာဟီ’တိ အထော. ဣဒါနိ ဥဘိန္နံ တတ္တာဘာဝဒဿနဝသေန ဥဘိန္နံ သီတလာဘာဝဒဿနဝသေန စ တံ နိဂ္ဂဟံ ပါကဋံ ကရောန္တော ယဒိ တတ္တံ ဒဟတီ’တိအာဒိမာဟ. 'निग्रह (पराभव) समजून घ्या' हे थेरांचे वचन आहे। कारण तुमच्या पहिल्या 'होय' या प्रतिज्ञेशी नंतरची 'नाही भन्ते' ही प्रतिज्ञा जुळत नाही, आणि नंतरच्या प्रतिज्ञेने पहिली सिद्ध होत नाही। त्यामुळे आपण निग्रहाला (पराभवाला) प्राप्त झाला आहात। आपण आपला निग्रह, दोष आणि अपराध मान्य करावा, असा याचा अर्थ आहे। आता दोन्हीच्या उष्णतेचा अभाव दाखवून आणि दोन्हीच्या शीतलतेचा अभाव दाखवून तो निग्रह स्पष्ट करताना 'जर उष्ण जाळते' इत्यादी म्हटले आहे। တထ– ‘ယဒိ တတ္တံ ဒဟတီ’တိ သစေ ဥဘိန္နံ တတ္တတာ ဒဟတိ. ယဒိ တတ္တံ ဒဟတီ’တိ စ ဌပနဝစနံ. तेथे - 'जर उष्ण जाळते' म्हणजे जर त्या दोन्हीची उष्णता जाळते। आणि 'जर उष्ण जाळते' हे प्रस्थापना-वचन (गृहीतक) आहे। န စ တေ ဥဘော’တိ ဒေါသာရောပနဝစနံ. 'आणि ते दोन्ही नाही' हे दोषारोप करणारे वचन आहे। တေန န ဥပ္ပဇ္ဇတီ’တိ တေန တသ္မိံ ဥဘိန္နံ ဥဏှဘာဝကာရဏာ ဥဘော’ပေတေ ဒဟန္တိ’တိ ဝစနံ တတ္တဘာဝဿ ဒဟနေ န ဥပပဇ္ဇတိ, န ယုဇ္ဇတိ. 'त्यामुळे हे जुळत नाही' म्हणजे त्यामुळे त्या दोन्हीच्या उष्णतेच्या कारणामुळे 'ते दोन्ही जाळतात' हे म्हणणे उष्णतेच्या जाळण्याच्या बाबतीत जुळत नाही, योग्य ठरत नाही। ယဒိ သီတလံ ဒဟတီတိ သစေ ဥဘိန္နံ သီတလဘာဝေါ ဒဟတိ တေန န ဥပပဇ္ဇတီ’တိ တသ္မာ ကာရဏာ ဥဘိန္နံ သီတလာဘာဝကာရဏာ ဥဘော’ပိ တေ ဒဟန္တိ’တိ ဝစနံ သီတလဘာဝဿ ဒဟနေန န ဥပပဇ္ဇတီ’တိ ဝတ္တုံ န ယုဇ္ဇတိ ပုန တံ ဒေါသံ ပါကဋတရံ ကရောန္တော ထေရော ကိဿ ပန တေ မဟာရာဇ ဥဘော’ပိ ဒဟန္တိတိအာဒိမာဟ. 'जर शीतल जाळते' म्हणजे जर त्या दोन्हीचा शीतलभाव जाळतो। 'त्यामुळे हे जुळत नाही' म्हणजे त्या कारणाने, दोन्हीच्या शीतलतेच्या कारणामुळे 'ते दोन्ही जाळतात' हे म्हणणे शीतलभावाच्या जाळण्याच्या बाबतीत जुळत नाही, असे म्हणणे योग्य ठरत नाही। पुन्हा तो दोष अधिक स्पष्ट करताना थेरांनी 'तर मग महाराज, ते दोन्ही आपल्याला का जाळतात?' इत्यादी विचारले। (ကိဿ)တထ-ကိဿာတိ ကေန ကာရဏေန ဥဘောပိ တေ ဒဟန္တီတိ. तेथे - 'का' म्हणजे कोणत्या कारणाने ते दोन्ही जाळतात। တေန န ဥပပဇ္ဇတီတိ ကေန တသ္မာ ကာရဏာ ဧကဿ ဥဏှဿ ဧကဿ သီတလဿ ဘာဝကာရဏာ ဥဘောပိ တေ ဒဟန္တီ’တိ တယာ ဝုတ္တဝစနံ န ဥပပဇ္ဇတိ န ဝဋ္ဋတိ. ဥဘောပိ တေ ဒဟန္တီတိ ဝုတ္တံ, အယုတ္တမ္ပိ တယာ ဝုတ္တမေဝ. ကုသလံ ဒုက္ခန္တိ ဝတ္တုံ ဝုတ္တမေဝ ကုသလံ ဒုက္ခန္တိ န ဥပပဇ္ဇတီတိ ဣဒံ ဝံ ကသ္မာ ဝဒသိ? ဝတ္တုံ ယုတ္တဝစနံ န ယုဇ္ဇတီတိ ဝဒသိ ဝတ္တုံ အယုတ္တဝစနံ ယုဇ္ဇတီတိ ဝဒသီတိ ထေရဿ ဝစနေန အတ္တနော ဝါဒေ ဒေါသံ ပဿန္တော တံ ပရိဟရိတုံ အသက္ကောန္တော နီဝမနော ထေရံ အထဇပ္ပနံ ယာစန္တော’နာဟံ ပဋိဗလော’တိအာဒိမာဟ. 'त्यामुळे हे जुळत नाही' म्हणजे ज्या कारणाने, एक उष्ण आणि एक शीतल असल्यामुळे 'ते दोन्ही जाळतात' असे आपण म्हटलेले वचन जुळत नाही, योग्य ठरत नाही। 'ते दोन्ही जाळतात' असे म्हटले गेले, जे अयोग्य असूनही आपणच म्हटले आहे। 'कुशल हे दुःखकारक आहे' असे म्हणणे योग्य असताना 'कुशल हे दुःखकारक आहे हे जुळत नाही' असे आपण का म्हणता? जे म्हणणे योग्य आहे त्याला आपण अयोग्य म्हणता आणि जे अयोग्य आहे त्याला योग्य म्हणता। थेरांच्या या वचनाने आपल्या वादातील दोष पाहून, त्याचे निवारण करण्यास असमर्थ ठरल्यामुळे नम्र होऊन थेरांना अर्थ स्पष्ट करण्याची याचना करत 'मी समर्थ नाही' इत्यादी म्हणाला। တယာ ဝါဒိနာတိ ယုတ္တမထဂမ္ဘီရဝိစိတ္တပဋိဘာနဝါဒိနာ 'आपल्यासारख्या वादविवादातील कुशल व्यक्तीशी' म्हणजे योग्य, गंभीर आणि विविध प्रकारच्या प्रतिभेने युक्त वाद करणाऱ्याशी। သာဓူ အထံ ဇပ္ပေဟီ တီ သာဓု ယာစာမိ. သုခါ ဝေဒနာ ကုသလာတိ ဝါ အကုသလာ အဗျာကတာတိ ဝါ ဣမဿ မယာ ပုစ္ဆိတဝစနဿ အထံ ဇပ္ပေဟိ ဒေသေဟိ အထေနာဟံ အထိကော, ကိံ ဝိဝါဒေနာတိ အဓိပ္ပာယော. 'कृपया अर्थ सांगावा' म्हणजे मी प्रार्थना करतो। 'सुखद वेदना कुशल आहे की अकुशल की अव्याकृत' या माझ्या विचारलेल्या प्रश्नाचा अर्थ सांगावा, उपदेश करावा। कारण मी अर्थाचा अर्थी (इच्छुक) आहे, वादाशी काय देणेघेणे, असा अभिप्राय आहे। ဂေဟနိဿိတာနီတိ ဂေဟသဒိသကာမဂုဏနိဿိတာနိ တမာရဗ္ဘ ပဝတ္တာနီတိ အထော. 'गृह-आश्रित' म्हणजे घरासारख्या कामगुणांवर आश्रित असणारे आणि त्यासंबंधी प्रवृत्त होणारे, असा अर्थ आहे। နေက္ခမ္မနိဿီတာနီ’တိ. 'नैष्क्रम्य-आश्रित' (नेक्खम्मनिस्सित)। ဧထ येथे। ‘ပဗ္ဗဇ္ဇာ ပဌမံ ဓာနံ နိဗ္ဗာနဉ္စ ဝိပဿနာသဗ္ဗေပိ ကုသလာ ဓမ္မာ နေက္ခမ္မန္တိ ပဝုစ္စတီ’တိ,ဝုတ္တနေက္ခမ္မေသု နိဗ္ဗာနဝိပဿနာကုသလဓမ္မသင်္ခါတေ; 'प्रव्रज्या, पहिले ध्यान, निर्वाण आणि विपश्यना, तसेच सर्व कुशल धम्मांना नैष्क्रम्य म्हटले जाते', अशा प्रकारे सांगितलेल्या नैष्क्रम्यामध्ये निर्वाण, विपश्यना आणि कुशल धम्म समाविष्ट आहेत। နေက္ခမ္မေ နိဿိတာနိ. नैष्क्रम्यावर आश्रित असणारे। သုခဝေဒနာပဉှော ပဉ္စမော. सुखद वेदनेचा प्रश्न पाचवा आहे। သော စ အညပဉှေဟိ ဂမ္ဘီရတရော, ကုလပုတ္တေဟိ မယာ ဝုတ္တအထမတ္တေန သန္တောသံ ကဝါ အတ္တနော ပညာနုဘာဝေန စ ပုနပ္ပုနံ စိန္တေဝါ ပုဗ္ဗာပရံ သလ္လက္ခေဝါ ယော မယာ ဝုတ္တအထတော ယုတ္တရော သော အထော ဂဟေတဗ္ဗော ယေဝါတိ. आणि तो इतर प्रश्नांपेक्षा अधिक गंभीर आहे। कुलपुत्रांनी माझ्याद्वारे सांगितलेल्या केवळ अर्थानेच संतुष्ट न होता, आपल्या प्रज्ञेच्या प्रभावाने वारंवार विचार करून, पूर्व-अपर संबंध लक्षात घेऊन, माझ्याद्वारे सांगितलेल्या अर्थापेक्षा जो अधिक योग्य अर्थ असेल, तोच ग्रहण करावा। နာမရူပန္တိ နာမကရဏဋ္ဌေန နမနဋ္ဌေန စတ္တာရော အရူပိနော ခဓာ နာမံ. ဣဓ ဝိပါကနာမံ အဓိပ္ပေတံ သီတာဒီဟိ ရုပ္ပနဋ္ဌေန ရူပံ နိပ္ပရိယာယတော ဆန္နဝုတိရူပကောဋ္ဌာသသင်္ခါတံ နိပ္ဖန္နရူပံ ပရိယာယတော ဒသဝိဓာ အနိပ္ဖန္နရူပဉ္စ စက္ခုသောတဃာနဇိဝှာကာယဘာဝဝထုဒသကသင်္ခါတာ သတ္တ ဒသကာ, စိတ္တ ဥတု-အာဟာရဇအဋ္ဌကာ တယော, စိတ္တဇ ဥတုဇသဒ္ဒဝသေန ဒွေ သဒ္ဒါ’တိ ဆန္နဝုတိရူပကောဋ္ဌာသာ. ဣဓ ပန ကမ္မဇရူပံ အဓိပ္ပေတံ. 'नामरूप' म्हणजे नामकरण करण्याच्या अर्थाने आणि नमण्याच्या (झुकण्याच्या) अर्थाने चार अरूपी स्कंध म्हणजे 'नाम' होय। येथे विपाक-नाम अभिप्रेत आहे। थंडी इत्यादींमुळे बाधित होण्याच्या अर्थाने 'रूप' होय। मुख्य अर्थाने शहाण्णव रूप-कोष्ठांमध्ये विभागलेले निष्पन्न-रूप, आणि गौण अर्थाने दहा प्रकारचे अनिष्पन्न-रूप होय। चक्षु, श्रोत्र, घ्राण, जिव्हा, काय, भाव आणि वस्तू या दशकांच्या रूपाने सात दशक; चित्तज, ऋतुज आणि आहारज अष्टकांच्या रूपाने तीन अष्टक; चित्तज आणि ऋतुज शब्दांच्या रूपाने दोन शब्द - असे शहाण्णव रूप-कोष्ठांश आहेत। परंतु येथे कर्मज-रूप अभिप्रेत आहे। တေန ကမ္မေန အညံ နာမရူပံ ပဋိသဒဟတီတိ တေန ကုသလာကုသလကမ္မေန အညံ နာမရူပံ အညံ အနာဂတနာမရူပံ သုဂတိဒုဂ္ဂတိပရိယာပန္နံ ဣမိနာ ပစ္စုပ္ပန္နနာမရူပေန သဒ္ဓိံ ပဋိသဒဟတိ. त्या कर्माने दुसरे नामरूप प्रतिसंधी घेते (पुनर्जन्म घेते) म्हणजे त्या कुशल-अकुशल कर्माने दुसरे नामरूप, दुसरे अनागत (भविष्यातील) नामरूप जे सुगती किंवा दुर्गतीमध्ये समाविष्ट आहे, ते या वर्तमान नामरूपासोबत प्रतिसंधी घेते. ပုရိမံ ဘန္တေ အမ္ဗဗီဇံ ဘူတံ မူလကာရဏဘူတံ အပစ္စက္ခာယ အဝိဇဟိဝါ နိဗ္ဗတ္တေန ပစ္ဆိမေန အမ္ဗေန ပုရိသော ဒဏဍပ္ပတ္တော ဘဝေယျာတိ ယောဇနာ. भन्ते, पूर्वीचे आंब्याचे बीज जे मूळ कारण होते, त्याचा त्याग न करता किंवा त्याला न सोडता, नंतर उत्पन्न झालेल्या आंब्यामुळे मनुष्य दण्डास पात्र ठरेल, अशी ही योजना (जुळणी) आहे. နာမရူပပဋိသဒဟနပဉေဟာ ဆဋ္ဌော. नामरूप-प्रतिसंधीचा प्रश्न हा सहावा आहे. သတ္တောပမာပတိမဏဍိတော. सात उपमांनी सुशोभित. အဓိကာရန္တိ မဟန္တံ ပူဇာသက္ကာရံ. အယံ သတ္တမောပဉှော ပုန ပုစ္ဆတေ. ဥပမံ သောတုကာမတာဝသေန ပုန ပုစ္ဆိတော’တိ ဉာတဗ္ဗံ. 'अधिकार' म्हणजे मोठा पूजा-सत्कार. हा सातवा प्रश्न पुन्हा विचारला गेला आहे. उपमा ऐकण्याच्या इच्छेमुळे तो पुन्हा विचारला गेला आहे, असे समजावे. ပုနပဋိသဒဟနပဉှော သတ္တမော. पुन्हा प्रतिसंधी घेण्याचा प्रश्न हा सातवा आहे. နာမရူပပဉှော အဋ္ဌမော. नामरूपाचा प्रश्न हा आठवा आहे. အဒ္ဓါပဉှော နဝမော. अद्धा (काळाचा) प्रश्न हा नववा आहे. နဝပဉှဝန္တော ဒုတိယော ဝဂ္ဂေါ. नau प्रश्नांचा दुसरा वर्ग. တတိယဝဂ္ဂေ အဒ္ဓါမုလပုစ္ဆနပဉှော ပဌမော. तिसऱ्या वर्गामध्ये, अद्धाच्या (काळाच्या) मुळाविषयी विचारलेला प्रश्न हा पहिला आहे. ပထဝိယာ စက္ကံအလိခိဝါ’တိ ဘမစက္ကံ ပုနပ္ပုနံ ပရိဝတ္တနဝသေန အာ ဘုသော လိခိဝါ. 'जमीनीवर चक्र आखून' म्हणजे फिरणारे चक्र वारंवार फिरवण्याच्या स्वरूपात पुन्हा पुन्हा आखून. ပုဗ္ဗာကောဋိ နပညာယန ပဉှော ဒုတိယော. पूर्वकोटी (सुरुवात) माहीत न होण्याविषयीचा प्रश्न हा दुसरा आहे. ခဓာ စ ဒုက္ခဿ ဗီဇာတီတိ ပဋိသဓိဘုတာ ဗဓာ ကေဝလဿ သကလဿ ပဝတ္တိဒုက္ခရာသိဿ မုလကာရဏဘာဝေန ဗီဇာနိ ဧဝံ ခဏကောဋိသင်္ခါတပဋိသဓိဗဓတော ပဝတ္တိ ဒုက္ခဝဍ္ဎနံ သက္ကာ ကာတုန္တိ အဓိပ္ပာယော. 'स्कंध हे दुःखाचे बीज आहेत' म्हणजे प्रतिसंधीरूप झालेले स्कंध हे संपूर्ण प्रवृत्ती-दुःखराशीचे मूळ कारण असल्यामुळे बीजांसारखे आहेत. अशा प्रकारे, क्षणकोटी नावाच्या प्रतिसंधी-स्कंधापासून प्रवृत्ती-दुःखाची वृद्धी केली जाऊ शकते, असा अभिप्राय आहे. ကောဋိဝဍ္ဎနပဉှော တတိယော. कोटी-वृद्धीचा प्रश्न हा तिसरा आहे. စက္ခုသ္မိဉ္စ ခေါ မဟာရာဇ သတိ ရူပေသု စ စက္ခုဝိညာဏံ ဟောတီတိ ဧထ အဘိဓမ္မာဝတာရဋီကာပရိယာယေန ဧကတော သဟဇာတေသု ဗဟူသု စက္ခုပ္ပသာဒေသု ယံ စက္ခု ဝိသဒိတံ တံ စက္ခုဝိညာဏဿ နိဿယပစ္စယော. စက္ခုသ္မိဉ္စာတိ ဧကဝစနဒဿနတော. ရူပေသု စာ’တိ ဗဟုဝစနဿ ဒဿနတော ပန ဗဟူနိပိ ရူပါနိ စက္ခုဝိညာဏဿ ပုရေဇာတပစ္စယော ပစ္စယဘာဝ. ဝိသေသ-သဘာဝတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. “महाराज, चक्षू (डोळा) असताना आणि रूपे असताना चक्षुविज्ञानाची उत्पत्ती होते” - येथे अभिधम्मावतार-टीकेच्या पद्धतीने, एकत्र उत्पन्न झालेल्या अनेक चक्षुप्रसादांपैकी जे चक्षू स्पष्ट आहे, ते चक्षुविज्ञानाचा निश्रयप्रत्यय (निसयपच्चय) आहे; कारण 'चक्खुस्मिञ्च' (चक्षूमध्ये) असे एकवचन दिसते. परंतु 'रूपेसु च' (रूपांमध्ये) या बहुवचनाच्या दर्शनावरून अनेक रूपे देखील चक्षुविज्ञानाचा पुरेजातप्रत्यय (पुरेजातपच्चय) आहेत, असे त्यांच्या विशेष स्वभावावरून समजावे. အထိ-ကေစိ-သဉ္ဇာနနပဉှော စတုထော. 'काही संज्ञान (जाणून घेणे) आहे काय?' हा प्रश्न चौथा आहे. ဘဝန္တာယေဝ ခေါ မဟာရာဇ သင်္ခါရာ ဇာယန္တိတိ ဧထ အန္တပ္ပစ္စယော အတီတေ ဟောတိ. အတီတေ ဘူတာ’တိ အထော. “महाराज, संस्कार उत्पन्न होत असतानाच अस्तित्वात येतात” - येथे 'अन्त' प्रत्यय भूतकाळात आहे. 'भूतकाळात झालेले' असा याचा अर्थ आहे. အယဉ္စ ဂါထာ’တိ သဒိသဂါထာ. အဟုဝါ သမ္ဘောတီတိ စ ဂါထာ ခဏိကဂါထာ’တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧဝဉှိ ပုဗ္ဗာပရံ သမေတိ. 'आणि ही गाथा' म्हणजे सदृश गाथा. 'अहुत्वा सम्भोति' (न होता उत्पन्न होते) ही गाथा क्षणिकतेविषयीची गाथा आहे असे समजावे. कारण अशा प्रकारे पूर्व आणि अपर (आधीचे आणि नंतरचे) सुसंगत होते. (ဥတ္တရာရဏိ) အရဏိသဟိတေကန္တကိစ္စကရော ဒဏ္ဍော ဥတ္တရာရဏိ နာမ. (उत्तरारणि) अरणीशी (मंथनकाष्ठाशी) जोडलेला आणि घर्षणाचे कार्य करणारा दंड म्हणजे 'उत्तरारणि' होय. ဘဝန္တဇာယနပဉှော သတ္တောပမာသဟိတော ပဉ္စမော. सात उपमांसह असलेला 'अस्तित्वात येऊन उत्पन्न होण्याचा' प्रश्न हा पाचवा आहे. ဝေဒဂုပဉှော ဆဋ္ဌော. वेदगूचा (ज्ञात्याचा) प्रश्न हा सहावा आहे. စက္ခုဝိညာဏာဒိပဉှော သတ္တမော. चक्षुविज्ञान इत्यादींविषयीचा प्रश्न हा सातवा आहे. ဖုသနလက္ခဏော’တိ စိတ္တာရမ္မဏဖုသနလက္ခဏော. ယထာ စက္ခု’တိ ဧထ စက္ခုပ္ပသာဒေါ’ပိ စက္ခုဝိညာဏမ္ပိ လဗ္ဘတိ. 'स्पर्श लक्षण' म्हणजे चित्ताच्या आलंबनाला (विषयाला) स्पर्श करण्याचे लक्षण. 'जसे चक्षू' यामध्ये चक्षुप्रसाद आणि चक्षुविज्ञान हे दोन्ही प्राप्त होतात. သံဃဋ္ဋနရသော’တိ ဣမေသံ ဝထာရမ္မဏာနံ သံဃဋ္ဋနရသော သမ္ပတ္တိ ဧတဿာ တ အထော လဗ္ဘတိ. ယဒါ စက္ခုဝိညာဏမ္ပိ လဗ္ဘတိ. တဒါ စိတ္တာရမ္မဏသံဃဋ္ဋနရသော ကိစ္စံ ဧတဿေတိ အထော လဗ္ဘတိ. သံဃဋ္ဋနရသော’တိ စ ပဉ္စဒွါရိကဖဿေ လဗ္ဘတိ. န မနောဒွါရိကဖဿေ’တိ အယမိဒိသော အထော အတ္ထသာလိနိယံ ဝုတ္တော ယေဝါ’တိ. 'संघट्टन रस' (आघाताचे कार्य) म्हणजे या वस्तू आणि आलंबन यांच्या संघट्टनाचा रस (कार्य) होय, असा अर्थ प्राप्त होतो. जेव्हा चक्षुविज्ञान देखील प्राप्त होते, तेव्हा चित्त आणि आलंबन यांच्या संघट्टनाचा रस हे त्याचे कार्य आहे, असा अर्थ प्राप्त होतो. आणि 'संघट्टन रस' हा पंचद्वारिक स्पर्शामध्ये प्राप्त होतो, मनोध्वारिक स्पर्शामध्ये नाही; असा हा अर्थ अट्ठसालिनीमध्ये सांगितलेलाच आहे. ဖုသနလက္ခဏပဉှော အဋ္ဌမော. स्पर्श-लक्षणाचा प्रश्न हा आठवा आहे. ဝေဒနာလက္ခဏပဉှော နဝမော. वेदना-लक्षणाचा प्रश्न हा नववा आहे. သညာလက္ခဏပဉှော ဒသမော. संज्ञा-लक्षणाचा प्रश्न हा दहावा आहे. စေတနာလက္ခဏပဉှော ဧကာဒသမော. चेतना-लक्षणाचा प्रश्न हा अकरावा आहे. ဝိညာဏလက္ခဏပဉှော ဒွါဒသမော. विज्ञान-लक्षणाचा प्रश्न हा बारावा आहे. ဝဍ္ဎကီ သုပရိကမ္မကတံ ဒါရုံ သဓိသ္မိံ အပ္ပေတီတိ ဝဍ္ဎကီ ဇနော သုဋ္ဌုပရိကမ္မကတံ ဒါရုံ သဓိသ္မိံ အပ္ပေတိ ပါပေတိ ပဝေသေတိ. 'सुतार चांगल्या प्रकारे संस्कारित केलेले लाकूड सांध्यामध्ये जोडतो' म्हणजे सुतार चांगल्या प्रकारे संस्कारित केलेले लाकूड सांध्यामध्ये जोडतो, पोहोचवतो किंवा प्रवेशित करतो. ဝိတက္ကလက္ခဏပဉှော တေရသမော. वितर्क-लक्षणाचा प्रश्न हा तेरावा आहे. ဝိစာရလက္ခဏပဉှော စုဒ္ဒသမော. विचार-लक्षणाचा प्रश्न हा चौदावा आहे. စုဒ္ဒသပဉှဝန္တော တတိယဝဂ္ဂေါ သမတ္တော. ဝိနိဗ္ဘုဇိဝါ ဝိနိဗဘုဇိဝါ’တိ အညမညာတော ဝိသုံ ဝိသုံ ကဝါ ဝိဘဇိဝါ ဝိဘဇိဝါ. चौदा प्रश्न असलेला तिसरा वर्ग समाप्त झाला. 'विनिब्भुजित्वा विनिब्भुजित्वा' (वेगळे करून, वेगळे करून) म्हणजे एकमेकांपासून वेगळे करून, विभागून विभागून. ဝဂ္ဂတော အတိရေကပဌမပဉှော ဝိဘဇ္ဇပဉှော ပဌမော. वर्गाच्या व्यतिरिक्त असलेला पहिला प्रश्न, म्हणजेच विभज्ज-प्रश्न (विश्लेषणात्मक प्रश्न) हा पहिला आहे. နနု လောဏမေဝ အာဟရိတဗ္ဗန္တိ သကဋေဟိ သုဒ္ဓလောဏမေဝ ဗလိဝဒ္ဒေဟိ အာဟရိတဗ္ဗံ. “केवळ मीठच आणले पाहिजे ना?” म्हणजे गाड्यांद्वारे आणि बैलांद्वारे केवळ शुद्ध मीठच आणले पाहिजे. န သက္ကာ မဟာရာဇ လောဏမေဝ အာဟရိတုန္တိ ပါဌေန ဘဝိတဗ္ဗန္တိ နကာရော ပေါထကေ ဒိဿတိ. “महाराज, केवळ मीठच आणणे शक्य नाही” असा पाठ असावा, कारण पुस्तकात 'न' (नकारार्थी शब्द) दिसतो. လောဏပဉှော ဒုတိယော, ရညော ဓမ္မလက္ခဏေသု ဒဠှပတိဋ္ဌာပနထံ ထေရေန ပဌမံ ဝုတ္တော. मिठाचा प्रश्न हा दुसरा आहे, जो थेरांनी राजाला धम्मलक्षणांमध्ये दृढपणे प्रस्थापित करण्यासाठी सर्वप्रथम सांगितला. ဧတ္တာဝတာ တေစတ္တာဠီသ ပဉှာ သမတ္တာ. येथपर्यंत त्रेचाळीस प्रश्न समाप्त झाले. စတုထဝဂ္ဂေ နာနာကမ္မေဟိ မဟာရာဇ နိဗ္ဗတ္တာနိ န ဧကေန ကမ္မေနာ’တိ အာပါယိကသတ္တာနံ ပဉ္စာယတနာနိ နာနာအကုသလကမ္မေဟိ နိဗ္ဗတ္တာနိ သုဂတိပရိယာပန္နသတ္တာနံ ပဉ္စာယတနာနိ နာနာကုသလကမ္မေဟိ ဧကေန ကမ္မေန ဧကေန ပဋိသဓိဇနကကမ္မေနေဝ နိဗ္ဗတ္တာနိ. အဘိဓမ္မာဝတာရဋီကာယံ ပဋိသဓိက္ခဏေ မဟဂ္ဂတစေတနာ ကဋတ္တာရူပါနံ ကမ္မပစ္စယေန ပစ္စယော’တိ ဝစနေန ပဋိသဓိက္ခဏေ ဝိဇ္ဇမာနာနံ သဗ္ဗေသံယေဝ ကဋတ္တာရူပါနံ ကမ္မပစ္စယော ဟောတီတိ ဝိညာယတိ. နာနာစေတနာဟိ တဒါ ဣဒြိယုပ္ပတ္တိယံ သတိ အတိပရိတ္တေန စ မဟဂ္ဂတေန စ ကမ္မေန နိဗ္ဗတ္တံ ကဋတ္တာရူပံ အာပဇ္ဇေယျ, န စေကာ ပဋိသဓိ အနေကမ္မနိဗ္ဗတ္တာ ဟောတီ’တိ.’သဒ္ဓိံ ဧကေန ကမ္မေန အနေကိဒိရယုပ္ပတ္တိ ဟောတီ’တိ ဝုတ္တံ. ဝိစာရေဝါ ယံ ယုတ္တတရံ တံ ဂဟေတဗ္ဗံ. တတြာယံ ဝိစာရဏာကာရော? चौथ्या वर्गात, “महाराज, ते वेगवेगळ्या कर्मांमुळे उत्पन्न होतात, एका कर्माने नाही” म्हणजे अपायकारक (नरक इत्यादी) प्राण्यांचे पाच आयतन वेगवेगळ्या अकुशल कर्मांमुळे उत्पन्न होतात आणि सुगतीमध्ये समाविष्ट असलेल्या प्राण्यांचे पाच आयतन वेगवेगळ्या कुशल कर्मांमुळे किंवा एकाच कर्माने, म्हणजेच एकाच प्रतिसंधी-जनक कर्माने उत्पन्न होतात. अभिधम्मावतार-टीकेमध्ये 'प्रतिसंधीच्या क्षणी महग्गत चेतना ही कटत्तारूपांना (कर्मज रूपांना) कर्मप्रत्ययाने प्रत्यय (कारण) होते' या वचनावरून प्रतिसंधीच्या क्षणी विद्यमान असलेल्या सर्वच कटत्तारूपांना कर्मप्रत्यय होतो, असे समजते. कारण वेगवेगळ्या चेतनांमुळे तेव्हा इंद्रियांची उत्पत्ती होत असताना, अतिशय परीत्त (मर्यादित) आणि महग्गत कर्माने उत्पन्न झालेले कटत्तारूप प्राप्त होईल, आणि एकच प्रतिसंधी अनेक कर्मांनी उत्पन्न होत नाही. 'एका कर्मासोबत अनेक इंद्रियांची उत्पत्ती होते' असे म्हटले आहे. विचार करून जे अधिक योग्य असेल ते स्वीकारावे. त्यामध्ये विचार करण्याची पद्धत अशी आहे: မဟဂ္ဂတသတ္တာနံ ဣဒြိယာနိ ဧကေန ပဋိသဓိဇနကကမ္မေန နိဗ္ဗတ္တာနိ. နာဂသေနထေရော ပန အရဟာ ခီဏာသဝေါ ဗုဒ္ဓမတညု တဿ အဓိပ္ပာယာနုရူပေန ကာမာဝစရကသတ္တာနံ နာနာကမ္မေဟိ နိဗ္ဗတ္တီတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. महग्गत (उच्च भूमीतील) प्राण्यांची इंद्रिये एकाच प्रतिसंधी-जनक कर्माने उत्पन्न होतात. परंतु थेर नागसेन हे अर्हत, क्षीणासव आणि बुद्धमताचे ज्ञाते होते; त्यांच्या अभिप्रायानुसार कामावचर प्राण्यांची उत्पत्ती वेगवेगळ्या कर्मांमुळे होते, असे समजावे. နာနာကမ္မနိဗ္ဗတ္တာယတနပဉှော ပဌမော. विविध कर्मांमुळे उत्पन्न होणाऱ्या आयतनांविषयीचा प्रश्न पहिला. မဟာကုလီနတာတိ ဥစ္စကုလီနတာ. သောယေဝ ဝါ ပါဌော. အာဗာဓ-ဝဏ္ဏ-သုက္ခ-ဘောဂ-ကုလီနံ ပညကာ ဧတေ စုဒ္ဒသ ပဉှာ’ပိ သုဘသုတ္တေ ပကာသိတာ’တိ အယံ ဂါထာ သုခဝါစုဂ္ဂတကရဏထံ ပေါရာဏေဟိ ဝုတ္တာ. 'महाकुलीनता' म्हणजे 'उच्चकुलीनता'. तोच पाठ आहे. आजार, वर्ण, सुख, भोग, कुलीनता आणि प्रज्ञा हे चौदा प्रश्न सुद्धा सुभसुत्तात (सुभ सूत्रात) प्रकाशित केले आहेत, ही गाथा पाठांतर सुलभ करण्यासाठी प्राचीन आचार्यांनी म्हटली आहे. မနုဿနာနာဘာဝပဉှော ဒုတိယော. मनुष्यांच्या विविधतेविषयीचा प्रश्न दुसरा. ကိံ ပဋိဂစ္စေဝ ဝါယမိတေနာ’တိ ပုဗ္ဗေ ဝါယာမေန သဟ ပဝတ္တကမ္မေန ဝါယာမကရဏေန ကိံ ပယောဇနံ အထိ? 'आधीच प्रयत्न करण्याने काय?' म्हणजे पूर्वी केलेल्या प्रयत्नासह प्रवृत्त झालेल्या कर्माने, प्रयत्न करण्याने काय प्रयोजन आहे? အကိစ္စကရော’တိ ဧထ ယထိစ္ဆိတဖလသင်္ခါတံ ကိစ္စံ န ကရောတီတိ အကိစ္စကရော. အယဉ္စ အယုတ္တသမာသော. သဒ္ဓံ မတကဘောဇနံ န ဘုဉ္ဇတီတိ အသဒ္ဓဘောဇိတိအာဒိကော ဝိယာ’တိ. 'अकिच्चकरो' म्हणजे येथे इच्छित फळ देणारे कार्य न करणारा तो 'अकिच्चकरो'. आणि हा अयुक्त समास आहे. जसे 'श्राद्धाचे भोजन न जेवणारा तो असद्धभोजी' इत्यादी प्रमाणे. ဗုဘုက္ခိတော’တိ ဗုဓာဘိဘူတော. 'बुभुक्खितो' म्हणजे भुकेने पीडित झालेला. ပဋိဂစ္စကိစ္စကရဏပဉှော တတိယော. आधीच कार्य करण्याविषयीचा प्रश्न तिसरा. ပစ္စမာနာ’တိ နိရယဂ္ဂီနာ ဍယှမာနာ. 'पच्चमाना' म्हणजे नरकाच्या अग्नीने जळणारे. သော န တာဝ ကာလံ ကရောတီတိ တာဝ တတ္တကံ သော နေရယိကသတ္တော ကာလံ မရဏံ န ကရောတိ. ကမ္မာဓိကတေနာ’တိ ပုဗ္ဗေ အဓိကတေန ကမ္မေန မူလကာရဏဘုတေန. 'तो तोपर्यंत काळ करत नाही' म्हणजे तोपर्यंत तो नरकातील प्राणी मृत्यू पावत नाही. 'कर्माधिकृतेन' म्हणजे पूर्वी केलेल्या कर्माने, जे मूळ कारण बनले आहे. နဝိလီယနပဉှော စတုထော. न विरघळण्याविषयीचा प्रश्न चौथा. အာကာသ-ဥဒက-ပထဝိဓာရဏပဉှော ပဉ္စမော. आकाश, पाणी आणि पृथ्वी धारण करण्याविषयीचा प्रश्न पाचवा. အဇ္ဈောသာယာ’တိ တဏှာယ ဂိလိဝါ ပရိနိဋ္ဌပေဝါ. 'अज्झोसाय' म्हणजे तृष्णेने गिळून किंवा पूर्णपणे त्यात मग्न होऊन. နိရောဓနိဗ္ဗာနပဉှော ဆဋ္ဌော. निरोध आणि निर्वाणाविषयीचा प्रश्न सहावा. အဘိညေယျေ ဓမ္မေ’တိ အဘိဝိသိဋ္ဌေန စတုသစ္စဉာဏေန ဇာနိတဗ္ဗေ ဓမ္မေ, စတုသစ္စဓမ္မေ. 'अभिञ्ञेय्ये धम्मे' म्हणजे अतिविशिष्ट अशा चतुरार्यसत्य ज्ञानाने जाणण्यायोग्य धर्म, म्हणजेच चतुरार्यसत्य धर्म. နိဗ္ဗာနလဘနပဉှာ သတ္တမော. निर्वाण प्राप्तीविषयीचा प्रश्न सातवा. နိဗ္ဗာနဇာနနပဉှော အဋ္ဌမော. निर्वाण जाणण्याविषयीचा प्रश्न आठवा. အဋ္ဌပဉှဝန္တော စတုထော ဝဂ္ဂေါ. आठ प्रश्नांचा हा चौथा वर्ग आहे. ပဉ္စမဝဂ္ဂေ နထိဗုဒ္ဓပဉှော ပဌမော. पाचव्या वर्गातील 'बुद्ध अस्तित्वात नाहीत' हा प्रश्न पहिला. ဗုဒ္ဓါနုတ္တရပဉှော ဒုတိယော. बुद्धांच्या अनुत्तरतेविषयीचा प्रश्न दुसरा. သက္ကာ ဇာနိတုံ ဗုဒ္ဓေါ အနုတ္တရော’တိ ဣဒံ ရညာ’ဘဂဝါ ဗုဒ္ဓေါ အနုတ္တရော’တိ ထေရံ ပုဗ္ဗေ ပုစ္ဆိတံ. ပုန ကသ္မာ ဝုတ္တံ? ပုဗ္ဗပဉှော ထေရဿ ဝိဇာနနံ သဓာယ ပုစ္ဆိတံ ပုစ္ဆာပဉှော သဗ္ဗပဉှော ထေရဿ ဝိဇာနနံ သဓာယ ပုစ္ဆိတံ. ပုစ္ဆာပဉှော သဗ္ဗပဏ္ဍိတာနံ ဇာနနံ သဓာယ ပုစ္ဆိတော’တိ ဝိညာတဗ္ဗံ. 'बुद्ध अनुत्तर आहेत हे जाणणे शक्य आहे का?' हा प्रश्न राजाने 'भगवान बुद्ध अनुत्तर आहेत' या स्वरूपात थेरांना पूर्वी विचारला होता. पुन्हा का विचारले गेले? पूर्वीचा प्रश्न थेरांच्या स्वतःच्या ज्ञानाच्या संदर्भात विचारला गेला होता, तर हा प्रश्न सर्व पंडितांच्या ज्ञानाच्या संदर्भात विचारला गेला आहे, असे समजावे. သက္ကာ ဗုဒ္ဓါနုတ္တရပဉှော တတိယော. 'बुद्ध अनुत्तर आहेत हे जाणणे शक्य आहे का' हा प्रश्न तिसरा. ဗုဒ္ဓနေတ္တီယာ’တိ နိဗ္ဗာနံ နေတိ ဧတာယ သဒေဝကေ လောကေ’တိ နေတ္တိ, သုတ္တန္တာဘိဓမ္မပါလိ. 'बुद्धनेत्ती' म्हणजे ज्याच्याद्वारे देवलोकासह संपूर्ण जगाला निर्वाणाकडे नेले जाते ती 'नेत्ती', म्हणजेच सुत्तंत आणि अभिधम्म पाळी. (ဗုဒ္ဓပညတ္တိ) ပညာယပီယတိ ဧတာယ ဘဂဝတော အာဏာ’တိ ပညတ္တိ. ဗုဒ္ဓဿ ပညတ္တိ ဗုဒ္ဓပညတ္တိ, ဝိနယပါလိ. 'बुद्धप्रज्ञप्ती' म्हणजे ज्याच्याद्वारे भगवंतांची आज्ञा प्रज्ञापित केली जाते ती 'प्रज्ञप्ती'. बुद्धांची प्रज्ञप्ती ती 'बुद्धप्रज्ञप्ती', म्हणजेच विनय पाळी. ယာဝဇီဝံ သာဝကေဟိ ဝတ္တိတဗ္ဗန္တိ ဣဒံ ထေရေန’အာမ မဟာရာဇ ဓမ္မော မယာ ဒိဋ္ဌော’တိ အဝိဿဇ္ဇေဝါ ကသ္မာ ဝုတ္တံ? ရာဇာ ထေရဿ ဓမ္မဒဿနဘာဝံ ပစ္စက္ခတော ဉဝါ ဝိစိတြပဋိဘာနံ သောတုကာမော ပုစ္ဆတိ, န ဇာနနထာယ ထေရော တဿ အဇ္ဈာသယံ ဉဝါ ဧဝမာဟ. အဒိဋ္ဌဓမ္မော ဟိ ဗုဒ္ဓနေတ္တိယာ ဗုဒ္ဓပညတ္တိယာ ယာဝဇီဝံ ဝတ္တိတုံ သက္ကောတိ. 'श्रावकांनी आयुष्यभर आचरण केले पाहिजे' हे थेरांनी 'होय महाराज, मी धर्म पाहिला आहे' असे थेट न सांगता का म्हटले? राजा थेरांच्या धर्मदर्शनाची स्थिती प्रत्यक्ष जाणून घेऊन त्यांची विविध प्रकारची प्रतिभा ऐकण्याच्या इच्छेने विचारत आहे, केवळ माहिती मिळवण्यासाठी नाही; थेरांनी त्यांचा हा हेतू जाणून असे म्हटले. कारण ज्याने धर्म पाहिलेला नाही, तो देखील बुद्धनेत्ती आणि बुद्धप्रज्ञप्तीनुसार आयुष्यभर आचरण करू शकतो. ဓမ္မဒိဋ္ဌပဉှော စတုထော. धर्मदर्शनाविषयीचा प्रश्न चौथा. နဝသင်္ကမတိပဉှော ပဉ္စမော. संक्रमण न होण्याविषयीचा प्रश्न पाचवा. ဝေဒဂု ဥပလဗ္ဘတီတိ အယမ္ပဉှော ပုဗ္ဗေ စ ပုစ္ဆိတော. ကသ္မာ ပုန ပုစ္ဆိတော? ပုဗ္ဗပဉှော ဇီဝဝေဒဂုံ သဓာယ ပုစ္ဆိတော. အယံ’ယေ ဗြာဟ္မဏာ ဝေဒဂု’တိအာဒိနာ ဝုတ္တံ ပုဂ္ဂလဝေဒဂုံ သဓာယ ပုစ္ဆိတော. သဝေ ထေရော’န ဥပလဗ္ဘတီ’တိ ဗျာကရိဿတိ, တဿ ဝါဒေ ဒေါသံ အာရောပေတုကာမတာယ ပုစ္ဆတိ. ထေရော ပန ဝိဇ္ဇမာနေန အဝိဇ္ဇမာနပညတ္တိံ သဓာယ’ပရမထေန ခေါ မဟာရာဇ ဝေဒဂု န ဥပလဗ္ဘတီ’တိ အာဟ. ပရမထေန န ဥပလဗ္ဘတိ, ဝေါဟာရတော ဥပလဗ္ဘတီ’တိ ထေရဿ အဓိပ္ပာယော. 'वेदगू आढळतो का?' हा प्रश्न पूर्वीही विचारला गेला होता. पुन्हा का विचारला गेला? पूर्वीचा प्रश्न 'जीव-वेदगू' च्या संदर्भात विचारला गेला होता. हा प्रश्न 'जे ब्राह्मण वेदगू आहेत' इत्यादी वाक्यांत सांगितलेल्या 'पुद्गल-वेदगू' च्या संदर्भात विचारला गेला आहे. जर थेर 'तो आढळत नाही' असे उत्तर देतील, तर त्यांच्या वादात दोषारोप करण्याच्या इच्छेने राजाने हा प्रश्न विचारला आहे. परंतु थेरांनी विद्यमान द्वारे अविद्यमान प्रज्ञप्तीचा संदर्भ देत 'महाराज, परमार्थतः वेदगू आढळत नाही' असे म्हटले. 'परमार्थतः तो आढळत नाही, परंतु व्यवहारात आढळतो' असा थेरांचा अभिप्राय आहे. ပုဂ္ဂလဝေဒဂုပဉှော ဆဋ္ဌော. पुद्गल-वेदगूविषयीचा प्रश्न सहावा. န ခေါ-ပေ တေန ရောပိတာနိတိ တာနိ အမ္ဗာနိ အဝဟာရိယာနိ တာနိ အမ္ဗာနိ ပုရိသေန အဝဟရိတာနိ တေန သာမိကပုရိသေန ရောပိတာနိ ရောပိတအမ္ဗဘုတာနိ န ဟောန္တိတိ အထော 'त्याने लावलेले नाहीत' म्हणजे चोरलेली ती आंबे, जी त्या माणसाने चोरली आहेत, ती त्या मालकाने लावलेली मूळ आंबे नसतात, असा अर्थ आहे. ဣမမှာကာယ ပဉှောသတ္တမော. 'या कायापासून' हा प्रश्न सातवा. ကုဟိန္တိပဉှော အဋ္ဌမော. 'कोठे?' हा प्रश्न आठवा. ဥပပဇ္ဇတိ-ဇာနာတိ ပဉှော နဝမော. 'उत्पन्न होतो आणि जाणतो' हा प्रश्न नववा. အထိဗုဒ္ဓပဉှော ဒသမော. 'बुद्ध अस्तित्वात आहेत' हा प्रश्न दहावा. ဒသပဉှသဟိတော ပဉ္စမော ဝဂ္ဂေါ. दहा प्रश्नांचा हा पाचवा वर्ग आहे. သမန္တတော ပဂ္ဃရတီတိ အယံ ခေါ ဂုထမုတ္တာဒီဟိ အသုစိဝထူဟိ သမန္တတော ပဂ္ဃရာပေတိ. 'सर्व बाजूंनी पाझरते' म्हणजे हे शरीर विष्ठा, मूत्र इत्यादी अशुद्ध पदार्थांनी सर्व बाजूंनी पाझरत राहते. ဆဋ္ဌဝဂ္ဂေ ကာယအပ္ပိယပဉှော ပဌမော. सहाव्या वर्गातील 'शरीराच्या अप्रियतेविषयीचा' प्रश्न पहिला. သမ္ပတ္တကာလပဉှော ဒုတိယော. योग्य वेळेविषयीचा प्रश्न दुसरा. ဒွတ္တိံသ…ပေ…ပရိရဉ္ဇိတော’တိ ဧထ ဒွတ္တိံသမဟာပုရိသလက္ခဏသရူပံ ဗဟုသု သုတ္တေသု အာဂတံ. တံ ပါကဋံ အသီတျနုဗဉ္ဇနသုရူပံ န ပါကဋံ ဇိနာလင်္ကာရဋီကာယံယေဝ အာဂတံ. တသ္မာ တံ ဒဿယိဿာမ. ကတမာနိ အသီတျာနုဗျဉ္ဇနနာနိ? စိတင်္ဂုလိတာ, အနုပုဗ္ဗင်္ဂုလိတာ, ဝဋ္ဋင်္ဂုလိတာ, တမ္ဗနခတာ, တုင်္ဂနခတာ, သိနိဒ္ဓနခတာ, နိဂုဠှဂေါပ္ဖကတာ, သမပါဒတာ, ဂဇသမာနက္ကမနတာ, သီဟသမာနက္ကမနတာ, ဟံသသမာနက္ကမနတာ, ဥသဘသမာနက္ကမနတာ, ဒက္ခိဏာဝဋ္ဋဂတ္တတာ, သမန္တတောစာရုဇာဏုမဏဍလတာ, ပရိပုဏ္ဏ ပုရိသဗျဉ္ဇနတာ, အစ္ဆိဒ္ဒနာဘိတာ, ဂမ္ဘီရနာဘိတာ, ဒက္ခိဏာဝဋ္ဋနာဘိတာ, သုဝဏ္ဏကဒလုရုတာ, ဧရာဝဏကရသဒိသဘုဇတာ, အနုပုဗ္ဗဂတ္တတာ, မဋ္ဌကဂတ္တတာ, သုစိဂတ္တတာ, သုဝိဘတ္တဂတ္တတာ, အနုဿန္နာနုဿန္နသဗ္ဗဂတ္တတာ, အလီနဂတ္တတာ, တိလကာဒိဝိရဟိတဂတ္တတာ, အနုပုဗ္ဗရုစိရဂတ္တတာ, ဝိသုဒ္ဓဂတ္တတာ, ကောဋိသဟဿဟထိဗလဓရ ဂတ္တတာ, တုင်္ဂနာသတာ, သုသဏ္ဌာနနာသတာ, ရတ္တဒွိဇမံသတာ, သုသုက္ကဒန္တတာ, သုဝိသုဒ္ဓိဒြိယတာ, ဝဋ္ဋဒါဌတာ, ရတ္တောဋ္ဌသမဗိမ္ဗိတာ, အာယတဝဒနတာ, ဂမ္ဘီရပါဏိလေခတာ, အာယတလေခတာ, ဥဇုလေခတာ, သုရုစိရသဏ္ဌာနလေခတာ, ပရိမဏ္ဍလကာယဝန္တတာ, ပရိပုဏ္ဏကပေါလတာ, အာယတဝိသာလနေတ္တတာ, ပဉ္စပသာဒဝန္တနေတ္တတာ, အာကုစိတဂ္ဂပခုမတာ, မုဒုတနုက-ရတ္တဇီဝှတာ, အာယတဇီဝှတာ, အာယတရုစိရကဏ္ဏတာ, နိဂ္ဂဏ္ဌိသိရတာ, နိဂ္ဂုယှသိရတာ, ဆတ္တသန္တိဘစာရုသီသတာ, အာယတ-ပုထုလ-လလာဋ-သောဘတာ, သုသဏ္ဌာနဘမုကတာ, ကဏှဘမုကတာ, သုခုမာလဂတ္တတာ, အတိဝိယ ဥဇ္ဇလိတဂတ္တတာ, အတိဝိယသောမ္မဂတ္တတာ, အတိဝိမလဂတ္တတာ, ကောမလဂတ္တတာ, သိနိဒ္ဓဂတ္တတာ, သုဂဓတနုတာ, သမလောမတာ, အတိသုခုမအဿာသပဿာသဓာရဏတာ, သုသဏ္ဌာနမုခတာ, သုဂဓမုခတာ, သုဂဓမုဒ္ဓတာ, သုနီလကေသတာ, ဒက္ခိဏာဝဋ္ဋကေသတာ, သုသဏ္ဌာနကေသတာ, သိနိဒ္ဓကေသတာ, သဏှကေသတာ, အလုလိတကေသတာ, ကေတုမာလာရတနစိတ္တတာ. ဒွတ္တီံသပုရိသလက္ခဏပဉှော တတိယော. ३२ (बत्तीस)...पे... 'परिरंजित' येथे बत्तीस महापुरुष लक्षणांचे स्वरूप अनेक सूत्तांमध्ये आले आहे. ते प्रसिद्ध आहे. ऐंशी अनुव्यंजनांचे स्वरूप प्रसिद्ध नाही, ते केवळ 'जिनालंकारटीका' मध्येच आले आहे. म्हणून आम्ही ते दाखवू. ऐंशी अनुव्यंजने कोणती आहेत? चित अंगुली (सुंदर बोटे), अनुपूर्व अंगुली (क्रमशः निमुळती बोटे), वर्तुळ अंगुली (गोल बोटे), तांबडी नखे, उन्नत नखे, स्निग्ध नखे, गुप्त घोटे (न दिसणारे घोटे), सम पाद (समान पावले), हत्तीसारखी चाल, सिंहासारखी चाल, हंसासारखी चाल, वृषभासारखी चाल, उजवीकडे वळलेले शरीर, सर्व बाजूंनी सुंदर गुडघ्यांचे मंडल, परिपूर्ण पुरुषव्यंजन, छिद्ररहित नाभी, खोल नाभी, उजवीकडे वळलेली नाभी, सोन्याच्या केळीसारखी मांड्यांची ठेवण, ऐरावत हत्तीच्या सोंडेसारखे बाहू, क्रमशः निमुळते अवयव, गुळगुळीत अवयव, स्वच्छ अवयव, सुविभक्त अवयव, मांसल आणि सुदृढ सर्व अवयव, लीन नसलेले (उन्नत) अवयव, तीळ इत्यादी डाग नसलेले अवयव, क्रमशः सुंदर अवयव, विशुद्ध अवयव, कोटी सहस्र हत्तींचे बळ धारण करणारे शरीर, उन्नत नाक, सुसंस्थान नाक (सुंदर आकाराचे नाक), लाल हिरड्या, अत्यंत पांढरे शुभ्र दात, सुविशुद्ध इंद्रिये, वर्तुळाकार सुळे, बिंबफळासारखे लाल ओठ, लांबट चेहरा, खोल हाताच्या रेषा, लांब रेषा, सरळ रेषा, सुरेख आकाराच्या रेषा, परिमंडळ (गोलाकार) शरीर, परिपूर्ण गाल, लांब व विशाल डोळे, पाचही प्रसाद (रंग) असलेले डोळे, कुरळ्या पापण्या, मऊ, पातळ व लाल जीभ, लांब जीभ, लांब व सुंदर कान, शिरा नसलेले डोके (शिरा न दिसणारे), गुप्त शिरा, छत्रासारखे सुंदर डोके, लांब व रुंद कपाळाची शोभा, सुसंस्थान (सुंदर) भुवया, काळ्या भुवया, सुकुमार शरीर, अत्यंत उजळलेले शरीर, अत्यंत सौम्य शरीर, अतिशय निर्मळ शरीर, कोमल शरीर, स्निग्ध शरीर, सुगंधी शरीर, सम रोम (समान केस), अतिशय सूक्ष्म श्वासोच्छ्वास धारण करणे, सुसंस्थान (सुंदर) मुख, सुगंधी मुख, सुगंधी मस्तक, अतिशय निळे (काळेभोर) केस, उजवीकडे वळलेले...पे...केस, सुसंस्थान (सुंदर) केस, स्निग्ध केस, मऊ केस, न विस्कटलेले केस, केतुमाला रत्नाने सुशोभित मस्तक. बत्तीस महापुरुष लक्षण प्रश्न तिसरा समाप्त. ဗြဟ္မစရိယပဉှော ပဉ္စမော. ब्रह्मचर्य प्रश्न पाचवा समाप्त. အဿုပဉေဟာ ဆဋ္ဌော. अश्रू प्रश्न सहावा समाप्त. ရသပဋိသံဝေဒိပဉှော အဋ္ဌမော. रसप्रतिसंवेदी प्रश्न आठवा समाप्त. ပညာပဉှော အဋ္ဌမော. प्रज्ञा प्रश्न आठवा समाप्त. သံသာရပဉှော နဝမော. संसार प्रश्न नववा समाप्त. သတိပဉှော ဒသမော. स्मृती प्रश्न दहावा समाप्त. ဧဝဉှိ ဘန္တေ နာဂသေန သဗ္ဗာ သတိ အဘိဇာနန္တီ ဥပ္ပဇ္ဇတိ နထိ ကဋုမိကာ သတီတိ ဧဝံ မယာ စိန္တနာကာရေ သဗ္ဗာ သတိ အဘိဇာနန္တီ သယံ ပါကဋာ ပရူပဒေသရဟိတာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ, ကဋုမိကာ ပရိနိဗ္ဗဇ္ဇန-ပရူပဒေသ-သင်္ခါတာ ကဋုမသဟိတာ သတိ နထိတိ အထော. हे भन्ते नागसेन! जर सर्व स्मृती (स्मरण) स्वतःहून जाणून घेणारीच उत्पन्न होते, कोणतीही कृत्रिम (कटुमिका) स्मृती नसते, तर माझ्या विचार करण्याच्या पद्धतीनुसार सर्व स्मृती स्वतःहून जाणून घेणारी, स्वतःच प्रकट होणारी आणि दुसऱ्याच्या उपदेशाशिवाय उत्पन्न होणारी असते; आणि कृत्रिम, दुसऱ्याच्या उपदेशाने किंवा प्रयत्नाने उत्पन्न होणारी, क्लेशयुक्त स्मृती नसते, असा याचा अर्थ आहे. သတိ အဘိဇာနနပဉှော ဧကာဒသမော. स्मृती अभिज्ञान प्रश्न अकरावा समाप्त. ဧကာဒသပဉှသဟိတော ဆဋ္ဌဝဂ္ဂေါ. अकरा प्रश्नांसह सहावा वर्ग समाप्त. အဘိဇာနတော’တိ သတိသဟိတံအဘိဝိသေသံဇာနတော. ကဋုမိကာယာ’တိ ပရိပီဠန-ပရသာသန-သင်္ခါတကဋုမိကာယ. ဩလာရိကဝိညာဏတော’တိ မဟန္တေ အာရမ္မဏေ ပဝတ္တဝိညာဏတော. အဟိတဝိညာဏတော’တိ ဒုက္ခသင်္ခါတအဟိတေ ပဝတ္တဝိညာဏတော. သဘာဂနိမိတ္တတော’တိ သဘာဂါရမ္မဏတော. ဝိသဘာဂနိမိတ္တတော’တိ နာမဝဏ္ဏာဒိ - အညမညဝိသဒိသာရမ္မဏတော. ကထာဘိညာဏတော’တိ ပရကထာသင်္ခါတအဘိညာဏတော. လက္ခဏတော’တိ ဂေါဏ-သကဋ-ဒန္တ-ပိဠကာဒိလက္ခဏတော. သရဏတော’တိ ပရေဟိ သရာပနတော မုဒ္ဒါတော’တိ အက္ခရသိက္ခနတော. ဘာဝနာတော’တိ အဘိညာသသင်္ခါတဘာဝနာတော. ပေါထကနိဗဓနတော’တိ ပေါထကေ လိခိတဩဝါဒအက္ခရဓာရဏတော. အနုဘူတတော’တိ ဆန္နံ အာရမ္မဏာနံ အနုဘုတပုဗ္ဗတော. နိဗဓန္တီ’တိ ပီဠေန္တိ. လိပိယာ သိက္ခိတတ္တာ’တိ အက္ခရဿ သိက္ခိတတ္တာ. 'अभिज्ञान' म्हणजे स्मृतीसह विशेष रूपाने जाणणे. 'कटुमिका' म्हणजे पीडा देणारे किंवा दुसऱ्याच्या शासनाने (उपदेशाने) युक्त असणे. 'ओळारिक विज्ञानामुळे' म्हणजे मोठ्या आलंबनावर प्रवृत्त होणाऱ्या विज्ञानामुळे. 'अहित विज्ञानामुळे' म्हणजे दुःखरूप अहितावर प्रवृत्त होणाऱ्या विज्ञानामुळे. 'सभाग निमित्तामुळे' म्हणजे समान आलंबनामुळे. 'विसभाग निमित्तामुळे' म्हणजे नाम, वर्ण इत्यादी परस्पर भिन्न आलंबनामुळे. 'कथाभिज्ञानामुळे' म्हणजे दुसऱ्याच्या बोलण्याने होणाऱ्या ज्ञानामुळे. 'लक्षणावरून' म्हणजे बैल, गाडी, दात, तीळ इत्यादी लक्षणांवरून. 'स्मरण करून दिल्यामुळे' म्हणजे दुसऱ्यांनी आठवण करून दिल्यामुळे. 'मुद्रा' म्हणजे अक्षरांच्या शिक्षणावरून. 'भावनेमुळे' म्हणजे अभिज्ञा नावाच्या भावनेमुळे. 'पुस्तकात लिहिलेल्यावरून' म्हणजे पुस्तकात लिहिलेल्या उपदेशात्मक अक्षरांचे धारण करण्यावरून. 'अनुभवावरून' म्हणजे सहा आलंबनांचा पूर्वी घेतलेल्या अनुभवावरून. 'निबंधन्ती' म्हणजे पीडा देतात. 'लिपी शिकल्यामुळे' म्हणजे अक्षरांचे शिक्षण घेतल्यामुळे. သတ္တမေဝဂ္ဂေ သတိအာကာရပဉှော ပဌမော. सातव्या वर्गात स्मृतीचा आकार प्रश्न पहिला समाप्त. ဝဿသတပဉှော ဒုတိယော. वर्षशत (शंभर वर्षे) प्रश्न दुसरा समाप्त. အနာဂတပဉှော တတိယော. अनागत (भविष्य) प्रश्न तिसरा समाप्त. ဒူရဗြဟ္မလောကပဉှော စတုထော. दूर ब्रह्मलोक प्रश्न चौथा समाप्त. ဗြဟ္မလောကကသ္မီရပဉှော ပဉ္စမော. ब्रह्मलोक-काश्मीर प्रश्न पाचवा समाप्त. သတ္တဗောဇ္ဈင်္ဂပဉှော ဆဋ္ဌော. सप्तबोध्यंग प्रश्न सहावा समाप्त. ပုညဗဟုတရပဉှော သတ္တမော. पुण्यबहुतर (अधिक पुण्य) प्रश्न सातवा समाप्त. ဇာနာဇာနပဉှော အဋ္ဌမော. जाणणे-न जाणणे प्रश्न आठवा समाप्त. ဥတ္တရကုရုပဉှော နဝမော. उत्तरकुरु प्रश्न नववा समाप्त. ဒီဃအဋ္ဌိကပဉှော ဒသမော. दीर्घअस्थी (लांब हाड) प्रश्न दहावा समाप्त. အဿာသပဿာသပဉှော ဧကာဒသမော. श्वासोच्छ्वास प्रश्न अकरावा समाप्त. သမုဒ္ဒပဉှော ဒွါဒသမော. समुद्र प्रश्न बारावा समाप्त. ဧကရသပဉှော တေရသမော. एकरस प्रश्न तेरावा समाप्त. နထိ ဒုတိယံ ပညာယ ဆေဒနန္တိ ယံ ဆေဒနံ ပညာယ သဒ္ဓိံ ဒွယံ တံ ဆေဒနံ နထိတိ အထော. ဆေဒနပဉှော စုဒ္ဒသမော. ဘုတဇိဝပဉှော ပန္နရသမော. ဒုက္ကရပဉှော သောဠသမော ထေရေန ပဌမံ ဝုတ္တော. သောဠသပဉှသဟိတော သတ္တမော ဝဂ္ဂေါ. 'प्रज्ञेसारखे दुसरे कोणतेही छेदन (कापणारे साधन) नाही' याचा अर्थ असा की, प्रज्ञेशिवाय दुसरे कोणतेही छेदन करणारे साधन नाही. छेदन प्रश्न चौदावा समाप्त. भूतजीव प्रश्न पंधरावा समाप्त. दुष्कर प्रश्न सोळावा, जो थेरांनी प्रथम सांगितला होता, समाप्त. सोळा प्रश्नांसह सातवा वर्ग समाप्त. သမ္ပတိ ကာ ဝေလာ’တိ ဣဒါနိ ကာ ဝေလာ သမ္ပတ္တာ’တိ ယောဇနာ. ဂမိဿန္တိတိ တယာ သဒ္ဓိံ ဂမိဿန္တိ. ဘဏ္ဍတော ဘဏ္ဍာဂါရတော. ရာဇဒေယျာနီတိ ရာဇသန္တကာနိ. 'संपती का वेला' म्हणजे 'आता कोणती वेळ आली आहे' असा संबंध आहे. 'गमिस्संती' म्हणजे तुझ्यासोबत जातील. 'भांडतो' म्हणजे भांडारातून. 'राजदेय्यानी' म्हणजे राजाच्या मालकीचे. တဿ ပဉှဝေယျာကရဏေန တုဋ္ဌေ ရာဇာ’တိ တဿ နာဂသေနထေရဿ အသီတိပဉှဝေယျာကရဏေန တုဋ္ဌော ရာဇာ. အဗ္ဘန္တရကထာယဉှိ အဋ္ဌာသီတိ ပဉှာ ပဌမဒိဝသေ ဝိသဇ္ဇိတာ. တယော ဒိဝသေ ပါသာဒေ ဘတ္တကိစ္စတော ပဋ္ဌာယ ယာဝ ပဌမယာမာဝသာနာ အဋ္ဌာသီတိ ပဉှာ ဝိသဇ္ဇိတာ အဟေသုံ. 'त्याच्या प्रश्नोत्तराने राजा संतुष्ट झाला' म्हणजे त्या थेर नागसेनांच्या ऐंशी प्रश्नांच्या उत्तरांनी राजा संतुष्ट झाला. कारण पहिल्या दिवशी अंतर्गत चर्चेत (अभ्यंतर कथेत) अठ्ठ्याऐंशी प्रश्नांची उत्तरे दिली गेली. तीन दिवस राजवाड्यात भोजनानंतर पहिल्या प्रहराच्या समाप्तीपर्यंत अठ्ठ्याऐंशी प्रश्नांची उत्तरे दिली गेली होती. ဗာဟိရကထာပဉှာ တယော. တေန သဒ္ဓိံ ဧကနဝုတိ ပဉှာ ဟောန္တိ. बाह्य चर्चेतील (बाहिरकथेतील) प्रश्न तीन आहेत. त्यासह एक्याण्णव (९१) प्रश्न होतात. ဧကနဝုတီပဉှ ပဋိမဏ္ဍိတာ. एक्याण्णव प्रश्नांनी सुशोभित. မိလိဒပဉှဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. मिलिंदप्रश्न-वर्णना समाप्त झाली. မေဏ္ဍကပဉှေ ပန ဘဿပ္ပဝါဒီတိ ဝေါဟာရကုသလတာယ ယုတ္တဝစနသင်္ခါတဘဿဝဒနသီလော. ဝေတဏဍီတိ ထေရဝါဒေန သဒ္ဓိံ ဝိရုဒ္ဓဝစနဝဒနသီလော. मेंडकप्रश्नात 'भस्सप्पवादी' म्हणजे व्यवहारातील कुशलतेमुळे योग्य वचन बोलण्याचा स्वभाव असलेला. 'वेतणडी' (वितंडवादी) म्हणजे थेरवादाच्या विरुद्ध बोलण्याचा स्वभाव असलेला. ဝသန္တော တဿ ဆာယာယာတိ ဓမ္မစရိယ-ဂုရုသဒ္ဓါပညာဒိဂုဏမဏ္ဍိတော, အဿဒ္ဓေါပိ သော တဿ’ မေဓာဝီ အမတာဘိမုခေါ’တိ ဧဝံ ဝုတ္တေဟိ သောဘဂ္ဂဂုဏေဟိ သမန္နာဂတော တဿ ထေရဿ ကရုဏာပညာဝသေန ပဝတ္တကာရဏာကာရဏဟိတုပမာယုတ္တိဥပဒေသဝစနသင်္ခါတဆာယာယ ဝသန္တော. တာနိ ဟိ ထေရဿ ကရုဏာဉာဏံ နာမကာယတော ပဝတ္တန္တိ ပကတိသရီရတော ပဝတ္တဆာယာ ဝိယ ဟောတီ တီ. 'त्याच्या छायेत राहणारा' म्हणजे धम्माचरण, गुरूवरील श्रद्धा, प्रज्ञा इत्यादी गुणांनी सुशोभित असलेला; अश्रद्ध असला तरी तो 'बुद्धिमान आणि अमृताकडे (निर्वाणाकडे) सन्मुख असलेला' अशा प्रकारे सांगितलेल्या सौभाग्यगुणांनी युक्त होऊन, त्या थेरांच्या करुणा व प्रज्ञेच्या प्रभावाने प्रवृत्त झालेल्या कारण-अकारण, हितकारक उपमा, युक्ती आणि उपदेशवचनांच्या छायेत राहणारा. कारण थेरांचे ते करुणा-ज्ञान त्यांच्या नामकायापासून (चित्तापासून) प्रवृत्त होते, जे नैसर्गिक शरीरापासून निघणाऱ्या छायेसारखेच असते. အဒ္ဒက္ခိ မေဏ္ဍကေ ပဉှေ’တိ ဉာဏစက္ခုနာ မေဏ္ဍကေ ဂမ္ဘီရေ ပဉှေ အဒ္ဒက္ခိ. အထဝါ သေနကာဒိဘာသိတဗ္ဗံ အနေကပရိယာယဘာဝေန စေဝ အဘုတဘာဝေန စ မေဏဍကပဉှသဒိသေ. အထဝါ ဒွီဝစနဝန္တတ္တာ တဿ ပဉှဿ ဒွိမေဏ္ဍကယုဒ္ဓသဒိသေ’တိပိ ဝုတ္တံ ဝဋ္ဋတိ. 'अद्दक्खि मेण्डके पञ्हे' (मेंढक प्रश्न पाहिले) म्हणजे ज्ञानचक्षूने मेंढक (दोन शिंगे असलेले/द्विधात्मक) गंभीर प्रश्न पाहिले. किंवा सेनकादींनी बोलण्यायोग्य असलेल्या अनेक पर्यायांच्या भावाने आणि अभूतभावाने (असत्यतेने) मेंढक प्रश्नासारखे (द्विधात्मक प्रश्नासारखे) आहे. किंवा द्विवचन असल्यामुळे त्या प्रश्नाला दोन मेंढ्यांच्या युद्धासारखे (द्विमेण्डकयुद्धसदृश) असेही म्हणणे योग्य ठरते. ပရိယာယ ဘာသိတံ အထိ’တိ’အာနဒ, မယာဒွေ’ပိ ဝေဒနာ ဝုတ္တာ ပရိယာယေနာ’တိအာဒိကံ ပရိယာယဝစနံ အထိ. ကထံ ဣမိဿာ ပရိယာယနိပ္ပရိယာယဒေသနာဘာဝေါ ဇာနိတဗ္ဗော? ဥပေက္ခာဝေဒနာ ဟိ သန္တမိံ ပဏီတေ သုခေ ဝုတ္တာ ဘဂဝတာ’တိ အယံ ဟေထ ပရိယာယော. 'परियाय भासितं अत्थि' (पर्याय-भाषित आहे) म्हणजे 'आनंदा, मी दोन वेदना देखील पर्यायाने (अप्रत्यक्षपणे/वेगळ्या प्रकारे) सांगितल्या आहेत' इत्यादी पर्यायवचन आहे. या (देशनेचा) पर्याय-निप्परियाय (पर्याय आणि निष्पर्याय/थेट) देशनाभाव कसा जाणून घ्यावा? कारण, उपेक्षा वेदना ही भगवंतांनी शांत आणि प्रणीत सुखात सांगितली आहे, हा येथे 'पर्याय' (परियाय) आहे. သဘာဝဘာသိတံ အထိတိ’တိဿော ဣဟ ဘိက္ခဝေ ဝေဒနာ သုခါ ဒုက္ခာ ဥပေက္ခာ ဝေဒနာ’တိအာဒိကံ နိပ္ပရိယာယဝစနံ အထိ. ကထံ နိပ္ပရိယာယဘာဝေါ ဇာနိတဗ္ဗော? ဝေဒနာသဘာဝေါ ဟိ တိဝိဓော’တိ အယမေထ နိပ္ပရိယာယော အထိ. 'सभावभासितं अत्थि' (स्वभाव-भाषित आहे) म्हणजे 'भिक्खूहो, येथे तीन वेदना आहेत - सुखद वेदना, दुःखद वेदना आणि उपेक्षा वेदना' इत्यादी निष्पर्यायवचन (थेट वचन) आहे. निष्पर्यायभाव कसा जाणून घ्यावा? कारण वेदनेचा स्वभाव त्रिविध (तीन प्रकारचा) आहे, हा येथे 'निष्पर्याय' (निप्परियाय) आहे. သဓာယဘာသိတန္တိ’တီဟိ ဘိက္ခဝေ ဌာနေဟိ ဇမ္ဗုဒီပိကာ မနုဿာ ဒေဝေ တာဝတိံသေ ဥတ္တရကုရုကေ စ မနုဿေ အဓိဂဏှန္တိ. ကတမေဟိ တီဟိ? သူရာ သတိမန္တော ဣဓ ဗြဟ္မစရိယဝါသော’တိအာဒိကံ သဓာယ ဘာသိတံ အထိ.’ဣဓ ဗြဟ္မစရိယဝါသော’တိ ဣဒံ ပဗ္ဗဇ္ဇာဗြဟ္မစရိယဝါသနံ ဝုတ္တံ န မဂ္ဂဗြဟ္မစရိယဝါသံ. နေယျထနီတထဝစနံ ဣဓ အနာဂတံ. တမ္ပိ အာဟရိဝါ ဒဿေတဗ္ဗံ.’ယံ ကိဉ္စိ ဝေဒယိတံ သဗ္ဗံ တံ ဒုက္ခန္တိ’အာဒိကံ နျေထဝစနံ.’သုခါပိ ခေါ ဝေဒနာ အနိစ္စာ သင်္ခတာ’တိအာဒိကံ ယထာရုတဝသေန ဇာနိတဗ္ဗံ နီတထဝစနံ အထီတိ. 'सधायभासितं' (सप्रयोजन भाषित) म्हणजे 'भिक्खूहो, तीन कारणांनी जम्बुद्विपातील मनुष्य तावतिंस देव आणि उत्तरकुरुतील मनुष्यांपेक्षा श्रेष्ठ ठरतात. कोणत्या तीन कारणांनी? शूर, स्मृतिमान आणि येथे ब्रह्मचर्यवास आहे' इत्यादी सप्रयोजन भाषित (सधाय भाषित) आहे. 'येथे ब्रह्मचर्यवास' हे प्रव्रज्या-ब्रह्मचर्यवासाविषयी सांगितले आहे, मार्ग-ब्रह्मचर्यवासाविषयी नाही. नेय्यार्थ (नेय्यत्थ - अर्थ लावायचा असलेला) आणि नीतार्थ (नीतत्थ - स्पष्ट अर्थ असलेला) वचन येथे आलेले नाही. ते देखील आणून दाखवले पाहिजे. 'जे काही वेदित (अनुभवले) जाते, ते सर्व दुःख आहे' इत्यादी नेय्यार्थ वचन आहे. 'सुखद वेदना देखील अनित्य, संस्कृत (संखत) आहे' इत्यादी शब्दांच्या अर्थानुसार जाणून घेण्यासारखे नीतार्थ वचन आहे. ‘နေယျထဝစနဉ္စေဝ အထော သဓာယဘာသိတံပရိယာယဘာသိတဉ္စေဝ အထော သဘာဝဘာသိတံ’,ဣတိ ပဉ္စပ္ပဘေဒံ’ဝ သာသနေ ဇိနဘာသိတံသလ္လက္ခေဝါန တံ သဗ္ဗံ အထံ ဝဒေထ ပဏ္ဍိတော’တိ; 'नेय्यार्थ वचन आणि सप्रयोजन भाषित, पर्याय भाषित आणि स्वभाव भाषित', अशा प्रकारे शासनातील जिनभाषिताचे (बुद्धांच्या वचनांचे) पाच प्रकार नीट लक्षात घेऊन पंडिताने त्या सर्वांचा अर्थ सांगावा. န ရဟဿကံ ကာတဗ္ဗန္တိ အထပဋိစ္ဆန္နဝစနံ န ကာတဗ္ဗံ. 'न रहस्सकं कातब्बं' (रहस्य करू नये) म्हणजे गुप्त किंवा झाकलेले भाषण करू नये. ဂရုကံ ပရိဏမတီတိ ဂရုဘာဝေန ပရိပါကံ ဂစ္ဆတိ ဒဓဘာဝေန ပါကဋော ဟောတိတိ အဓိပ္ပာယော. 'गरुकं परिणमति' (गंभीरपणे परिणत होते) म्हणजे गुरुभावाने (गंभीरतेने) परिपाकाला जाते, दृढभावाने प्रकट होते, असा अभिप्राय आहे. ဣတ္တရတာယာတိ အပ္ပပညတာယ. 'इत्तरताया' म्हणजे अल्पप्रज्ञतेमुळे (कमी बुद्धीमुळे). တိထဝါသေနာတိ 'तिथवासेना' म्हणजे - ‘ဥဂ္ဂဟော သဝနံ ပုစ္ဆာ ကထနံ ဓာရဏံ ဣတိ,ပဉ္စဓမ္မဝသေနေဝ တိထဝါသော ပဝုစ္စတီ’တိ; 'उद्ग्रहण (शिकणे), श्रवण (ऐकणे), पृच्छा (प्रश्न विचारणे), कथन (सांगणे) आणि धारण (लक्षात ठेवणे), या पाच धर्मांच्या (गोष्टींच्या) आधारेच 'तिथवास' (तीर्थवास/शासनात निवास) म्हटला जातो.' ဧဝံဝုတ္တတိထဝါသေန. अशा प्रकारे सांगितलेल्या तिथवासाने (तीर्थवासाने). သ္နေဟသံသေဝါ’တိ ပိယပုဂ္ဂလသံသေဝနဝသေန. မန္တိသဟာယော’တိ မန္တီ ဝိစာရဏပညော သဟာယော ဧတဿာတိ မန္တိသဟာယော. 'स्नेहसंसेवा' म्हणजे प्रिय व्यक्तीच्या सेवनाच्या (सहवासाच्या) कारणाने. 'मंतिसहाया' (मंत्रिसहाय) म्हणजे विचार करणारी प्रज्ञा असलेला मित्र ज्याचा आहे तो 'मंतिसहाय' (विचारशील मित्र असलेला) होय. မာ ဟာယိ အထော တေ အဘိက္ကမတီတိ အတ္တာနုဝါဒါဒိဘယေ ဥပ္ပန္နေ ဝံ ဧတ္တကေန ကာရဏေန မာ ဘာယိ. ကတပုညော ကတဘီရုတ္တာဏော ဉာဏသမ္ပန္နောသမ္မာပယောဂေ ဌိတော န စိရဿေဝ လောကိယလောကုတ္တရရထော တေ အဘိက္ကမတိ အဘိက္ကမိဿတိ ပဝတ္တိဿတိ. 'मा हायि अथो ते अभिक्कमति' (भिऊ नकोस, तुझी प्रगती होत आहे) म्हणजे स्वतःवर दोषारोप इत्यादींचे भय उत्पन्न झाले असता, तू एवढ्या कारणाने भिऊ नकोस. पुण्य केलेला, भयापासून स्वतःचे रक्षण केलेला, ज्ञानसंपन्न आणि सम्यक् प्रयोगात (योग्य प्रयत्नात) स्थित असलेला तुझा लौकिक व लोकोत्तर रथ लवकरच प्रगती करेल, पुढे जाईल, प्रवृत्त होईल. အလ္လာပေါ’တိ ပဌမာမန္တာနာ’တိ ကေစိ ဝဒန္တိ. ရဋ္ဌကဝစနံ အာမန္တနာ. 'अल्लापो' म्हणजे पहिले संबोधन असे काही जण म्हणतात. देशाच्या भाषेतील संबोधन (राष्ट्रकवचन). သက္ကစ္စကာရိနာ’တိ ဟိတကရဏ-ဟိတဒေသန-ဟိတစိန္တနာနံ အခဏ္ဍကာရိနာ. 'सकच्चकारिना' (आदरपूर्वक/काळजीपूर्वक करणारा) म्हणजे हित करणे, हितोपदेश देणे आणि हितचिंतन करणे या गोष्टी अखंडपणे करणारा. ခလိတေ ဓမ္မေန ပဂ္ဂဟေတဗ္ဗော’တိ သမ္မာပဋိပတ္တိတော ဝါ ယုတ္တဝစနတော ဝါ ခလိတေ အန္တေဝါသိကမှိ ဓမ္မေန သဘာဝေန တံ တံ ကာရဏံ ဝဝါ သီလာဒိဂုဏေသု ပဂ္ဂဟေတဗ္ဗော. 'खलिते धम्मेन पग्गहेतब्बो' (चूक झाली असता धर्माने सांभाळून घ्यावे) म्हणजे सम्यक् प्रतिपत्तीपासून (योग्य आचरणापासून) किंवा योग्य वचनापासून अंतेवासी (शिष्य) घसरला असता, त्याला धर्माने, स्वाभाविकपणे ते ते कारण सांगून शीलादी गुणांमध्ये प्रस्थापित करावे (सांभाळून घ्यावे). မေဏ္ဍကပဉှာ ဂမ္ဘီရဂဏ္ဌိဂုယှပဉှာ. 'मेण्डकपञ्हा' (मेंढक प्रश्न) म्हणजे गंभीर, कठीण आणि गुप्त प्रश्न होत. အဘိဝဍ္ဎိယာ ဝါယမတီ’တိ ပရိယတ္တိပဋိပတ္တိသာသနာနံ အဘိဝဍ္ဎနထာယ စတုပစ္စယဒါနာဒိနာ ဥပါယေန ဝါယာမံ ကရောတိ. 'अभिवड्ढिया वायमति' (अभिवृद्धीसाठी प्रयत्न करतो) म्हणजे परियत्ती (अभ्यास) आणि पटिपत्ती (आचरण) रूप शासनाच्या अभिवृद्धीसाठी चार प्रत्यय (चीवर, पिंडपात, सेनासन, ग्लानप्रत्यय भैषज्य) दानादी उपायांनी प्रयत्न करतो. ‘ဘဝတိ သံဃေန သမသုခေါ ဒုက္ခိ ဓမ္မာဓိပတိကော’ပိ စ; သံဝိဘာဂီ ယထာထာမံ ဇိနစက္ကာဘိဝဍ္ဎကောသမ္မာဒိဋ္ဌိပုရေက္ခာရော အနညသထုကော တထာ; သုရက္ခော ကာယကမ္မာဒိ သမဂ္ဂါဘိရတော’ပိ စအကုဟော န ဝရော စက္ကေ ဗုဒ္ဓါဒိသရဏံ ဂတောဒသ ဥပါသကဂုဏာ နာဂသေနေန ဘာသိတာ’တိ; 'तो संघासोबत समान सुख-दुःख मानणारा, धर्मालाच सर्वश्रेष्ठ मानणारा (धर्माधिपती), आपल्या शक्तीनुसार दान देणारा (संविभागी), जिनचक्राची (बुद्धशासनाची) अभिवृद्धी करणारा, सम्यक् दृष्टीला अग्रभागी ठेवणारा, दुसरा कोणी शास्ता (गुरू) न मानणारा, कायकर्म इत्यादींचे उत्तम रक्षण करणारा, समूहाच्या ऐक्यात रमणारा, कपट न करणारा, श्रेष्ठ अशा चक्रात (धम्मचक्रात) राहणारा आणि बुद्ध आदींच्या चरणी शरण गेलेला असतो. हे उपासकाचे दहा गुण नागसेनांनी सांगितले आहेत.' ဣမာ တိဿော ဂါထာ. या तीन गाथा आहेत. ‘ပဉ္စမံ လဟု သဗ္ဗထ သတ္တမံ ဒွိစတုထိသု,ဆဋ္ဌံ တု ဂရုပါဒါနံ သေသာ အနိယမာ မတာ’တိ; 'पाचवे अक्षर सर्व चरणांत लघु असते, सातवे अक्षर दुसऱ्या आणि चौथ्या चरणात लघु असते, सहावे अक्षर सर्व चरणांत गुरू असते आणि उर्वरित अक्षरे अनियमित मानली जातात.' ဣမိနာ ဝုတ္တလက္ခဏေန ဝုတ္တာ. या सांगितलेल्या लक्षणाने (वृत्ताने) म्हटल्या आहेत. လောကသာဓာရဏော’တိ သတ္တလောကေန သဒိသော,အပ္ပတ္တမာနသာနန္တိ အပပတ္တအရဟတ္တဖလာနံ; 'लोकसाधारणो' म्हणजे सत्त्वलोकासारखा (प्राणिमात्रांच्या जगासारखा), 'अप्पत्तमानसानं' म्हणजे ज्यांनी अर्हतपद (अर्हतफळ) प्राप्त केले नाही अशांचा. ဉာဏရတနာရမ္မဏေနာ’တိ အရဟတ္တမဂဂပဒဋ္ဌာနသဗဗညုတ ဉာဏော ဘဂဝါ သဗ္ဗညု သဗ္ဗဒဿာဝီ ဒသဗလသမန္နာဂတော စတုဟိ ဝေသရဇ္ဇေဟိ သမနနာဂတော ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေါ ဆဠဘိညော စ အသာဓာရဏဉာဏော အဋ္ဌာရသဗုဒ္ဓဓမ္မသမန္နာဂတော, တဿ အရဟတ္တမဂဂဉာဏံ ဒသဗလာဒိသဗ္ဗဂုဏဒါယကံ သဗ္ဗညုတဉာဏံ သဗ္ဗဉေယျဓမ္မဇာနနသမထန္တိ ဘဂဝတော ဉာဏရတနာရမ္မဏေန သကသကစိတ္တုပ္ပာဒေန. 'ञाणरतनारम्मणेन' (ज्ञानरत्न आलंबनाने) म्हणजे अर्हतमार्गाच्या प्रदानाने सर्वज्ञता प्राप्त झालेले भगवान हे सर्वज्ञ, सर्वदर्शी, दशबलांनी युक्त, चार वैशारद्यांनी युक्त, प्रभिन्न-प्रतिसंभिदा (विश्लेषणात्मक ज्ञान) असलेले, षडभिज्ञ (सहा अभिज्ञा असलेले), असाधारण ज्ञानी आणि अठरा बुद्धधर्मांनी युक्त आहेत. त्यांचे अर्हतमार्गज्ञान हे दशबलादी सर्व गुण देणारे आहे आणि सर्वज्ञताज्ञान हे सर्व ज्ञेय धर्म जाणण्यास समर्थ आहे; अशा भगवंतांच्या ज्ञानरत्न आलंबनाने आपापल्या चित्तोत्पादाने (चित्त उत्पन्न होण्याने) होय. ဥဗ္ဗတ္တီယန္တေ’တိ ပကတိပကတိတော ဝိပရီယန္တော ဝိနဿန္တေ ဝါ. 'उब्बत्तीयन्ते' म्हणजे मूळ स्वभावापासून विपरीत होणे किंवा नष्ट होणे. နိပ္ပဘာ ဇာတာ ကုတိထိယာ ဝံ ဂဏီဝရပဝရမာသဇ္ဇာတိ ကုတိထိယာ မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိကာ ဝံ ဘဒန္တံ ဂဏိဝရပဝရံ ဂဏိဝရေဟိ ပရံ သေဋ္ဌံ အာသဇ္ဇ ပဝါ နိပ္ပဘာ နိဇ္ဇောတာ ဘဝေယျုန္တိ ယောဇနာ. 'निप्पभा जाता कुतित्थिया वं गणिवरपवरमासज्जा' म्हणजे कुतीर्थीय (मिथ्यादृष्टी असलेले) लोक त्या भदन्त गणिवरप्रवरांना (गणांच्या प्रमुखांमध्ये श्रेष्ठ असलेल्यांना) भेटून निष्प्रभ, निस्तेज होतील, अशी योजना (अन्वय) आहे. မေဏ္ဍကပဉှေသု ပူဇာဝဉ္ဓာဝဉ္ဓာပဉှော အဋ္ဌုပမာသဟိတော ပဌမော. मेंढक प्रश्नांमध्ये (द्विधात्मक प्रश्नांमध्ये) आठ उपमांनी युक्त असलेला 'पूजा-वंध्या-अवंध्या प्रश्न' (पूजेचे फलदायी व निष्फळ असण्याविषयीचा प्रश्न) हा पहिला आहे. ဝါဟသတံ ခေါ မဟာရာဇ ဝီဟီနံ အဍ္ဎုစူဠဉ္စ ဝါဟာ ဝီဟီ သတ္တမ္မဏာနိ ဒွေ စ တုမ္ဗာ ဧကစ္ဆရက္ခဏေ ပဝတ္တဝိတ္တဿ ဧတ္တကာဝိဟီတိ လက္ခံ ဌပီယမာနာ ပရိက္ခယံ ပရိယာဒါနံ ဂစ္ဆေယျုန္တိ ဧထ သာဒိကဒိယဍ္ဎဝါဟသတံ ထောကေန ဥဒ္ဓံ ဥပဍ္ဎာဝါဟသတဿ ပတနာလိကေ တုမ္ဗော’တိ အင်္ဂုတ္တရဋီကာယံ ဝုတ္တံ. အဍ္ဎစူဠန္တိ ဝါဟဿ တဿ အဍ္ဎာဓိကာ ဝါဟဝီဟီ’တိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိယေဝ. 'महाराज, एकशे पन्नास वाह (गाड्या) भात आणि सात अम्मण व दोन तुंब भात, एका चुटकी वाजवण्याच्या वेळात खाली पडणाऱ्या भाताच्या दाण्यांना मोजण्यासाठी जर एकेक चिन्ह ठेवले, तर ते संपून जातील आणि संपुष्टात येतील' - येथे दीडशे वाहपेक्षा थोडे अधिक आणि दीडशे वाहच्या खाली पडण्याच्या प्रमाणात 'तुंब' हे माप आहे, असे अंगुत्तर टीकेमध्ये म्हटले आहे. 'अड्ढचूळ' म्हणजे त्या वाहच्या अर्ध्याहून अधिक वाह भात, असे म्हणणे देखील योग्यच आहे. ‘ကုဍုဗော ပသတော ဧကော ပထော တေ စတုရော သိယုံအာဠှကော စတုရော ပထာ ဒေါဏံ ဝါ စတုရာဠှကံ,မာဏိကာ စတုရော ဒေါဏာ ခါရီတိ စတုမာဏိကာ; 'एक कुडुब म्हणजे एक पस्त (पसभर) होय, चार कुडुब मिळून एक पथ होतो, चार पथ मिळून एक आढक होतो, चार आढक मिळून एक द्रोण होतो, चार द्रोण मिळून एक माणिका होते आणि चार माणिका मिळून एक खारी होते.' ခါရိယော ဝီသ ဝါဟော’ထ သိယာ တုမ္ဗော ဒသမ္မဏံအာဠဟကော နိထိယံ တုမ္ဗော ပထော တု နာဠိ နာရိယံ,ဝါဟော တု သကဋော စေကော ဒသ ဒေါဏာ တု အမ္မဏ’န္တိ; 'वीस खारी मिळून एक वाह होतो, तसेच दहा अम्मण मिळून एक तुंब होतो. आढक हा स्त्रीलिंगी शब्द आहे, तुंब आणि पथ हे पुल्लिंगी आहेत, तर नाळी हा स्त्रीलिंगी शब्द आहे. वाह म्हणजे एक गाडी (बैलगाडी) आणि दहा द्रोण मिळून एक अम्मण होतो.' အဘိဓာနပ္ပဒိပိကာယံ ဝုတ္တော သကဋပပမာဏော ဝါဟော’တိ ဝိနယဋီကာယမ္ပန’ ဒွေ သကဋာ ဝါဟာ ဧကော ဝါဟော’တိ ဝုတ္တံ. ဝိဟီနံ ဝါဟသတဉ္စ အဍ္ဎစူလဉ္စ ဝါဟသတဿ အဍဎဉစ စူဠံ အဍဎတော ထောကေန ဦနံ ဝါ ဟောတိ. ယထာဝုတ္တဝါဟတော အဓိကာနိ ဝီဟိသတ္တမ္မဏာနိ ဝီဟီနံ သတ္တ အမ္မဏာနိ ဒွေ စ တုမ္ဗာ ဟောန္တီ’တိ ယောဇနာ. ဝီဟီနံ သာဓိကဒိယဍ္ဎဝါဟသတန္တိ အဓိပ္ပာယော. अभिधानप्पदीपिकामध्ये 'वाह' म्हणजे एका गाडीचे प्रमाण (शकटप्रमाण) असे म्हटले आहे, परंतु विनयटीकेमध्ये दोन गाड्यांचा एक 'वाह' होतो असे म्हटले आहे. भाताचे शंभर वाह आणि शंभर वाहांचे अर्धे चूल (अड्ढचूल) किंवा अडढ आणि चूल म्हणजे अडढपेक्षा थोडे कमी असते. सांगितलेल्या वाहापेक्षा अधिक असलेले भाताचे सात अम्मण आणि दोन तुंब होतात, अशी योजना आहे. भाताचे दीडशे वाहांपेक्षा काही अधिक (साधिकदियड्ढवाहसत) असा याचा अभिप्राय आहे. ဧကစ္ဆရက္ခဏေ ပဝတ္တစိတ္တဿာ’တိ ဣမဿ လက္ခန္တိ ဣမိနာ သမ္ဗဓော. လက္ခနတိ စိ ဂဟဏသလ္လက္ခဏထံ သမ္ပဒါနထေ စေတံ ဥပယောဂဝစနံ’ ဒိဝါဝိဟာရံ ပါဝိသီ’တိ ဒိဝါဝိဟာရထာယ ပါဝိသိတိအာဒိသု ဝိယ. လက္ခသဒ္ဒေါ စ လက္ခဏဝါစကော. ဝုတ္တဉှေတံ အဘိဓာနသထေ. 'एकच्छरक्खणे पवत्तचित्तस्स' (एका चुटकी वाजवण्याच्या काळात उत्पन्न होणाऱ्या चित्ताचे) याचा 'लक्खं' याच्याशी संबंध आहे. 'लक्खं' हे ग्रहण आणि संलक्षण (नोंद घेणे) या अर्थी संप्रदान अर्थामध्ये हे द्वितीया विभक्तीचे वचन (उपयोगवचन) आहे, जसे 'दिवाविहारं पाविसी' म्हणजे 'दिवाविहारत्थाय पाविसी' (दिवसाच्या विश्रांतीसाठी प्रवेश केला) इत्यादींमध्ये असते. आणि 'लक्ख' हा शब्द 'लक्षण' वाचक आहे. कारण अभिधानशास्त्रामध्ये असे म्हटले आहे. ‘ကလင်္ကော လဉ္ဆနံ လက္ခံ အင်္ကော’ဘိညာဏလက္ခဏံ,စိဏှဉ္စာပိ တု သောဘာ တု ပရမာ သုသမာ’ထ စာ’တိ; 'कलङ्को लाञ्छनं लक्खं अङ्कोऽभिञ्ञाणलक्खणं, चिण्हञ्चापि तु सोभा तु परमा सुसमाऽथ चा'ति; (कलंक, लांछन, लक्ष, अंक, अभिज्ञान, लक्षण, चिन्ह आणि शोभा, परम सुसमा हे समानार्थी शब्द आहेत); ပရိက္ခယံ ပရိယာဒါနန္တိ ခီဏဘာဝံ ဂစ္ဆေယျုံ. ဣမိနာ ဒသာဓိကဒိဍ္ဎဝါဟသတဝီဟိတော အဓိကာနိဧကစ္ဆရက္ခဏေ ပဝတ္တစိတ္တာနီ’တိ ဒဿေတိ. 'परिक्खयं परियादानं' म्हणजे क्षीणतेला (नाशाला) प्राप्त होतील. याद्वारे हे दर्शविले आहे की, एका चुटकी वाजवण्याच्या काळात उत्पन्न होणारी चित्ते ही एकशे साठ (दीडशे अधिक दहा) वाह भातापेक्षाही अधिक आहेत. ဧဝံ ဧကစ္ဆရက္ခဏေ ပဝတ္တစိတ္တဿ ဧတ္တကဝီဟိတော အနေကဘာဝံ ဒဿေဝါ ဣဒါနိ ဧကစ္ဆရက္ခဏေ ပဝတ္တစိတ္တဿ ပုဂ္ဂလဝိသေသဝသေန ဝိသေသဘာဝံ ဒဿေတုံ တတြီမေ’တိအာဒိမာဟ. अशा प्रकारे एका चुटकी वाजवण्याच्या काळात उत्पन्न होणाऱ्या चित्ताचे एवढ्या भातापेक्षाही अनेकत्व (असंख्यत्व) दर्शवून, आता एका चुटकीच्या काळात उत्पन्न होणाऱ्या चित्ताचे पुद्गल-विशेषाच्या (व्यक्तीच्या वैशिष्ट्यांच्या) आधारे वैशिष्ट्य दर्शवण्यासाठी 'तत्रीमे' इत्यादी म्हटले आहे. တထ त्यात - တတြာတိ သတ္တဝိဓေသု သတ္တေသု. 'तत्र' म्हणजे सात प्रकारच्या प्राण्यांमध्ये. ဣမေ သတ္တဝိဓာ စိတ္တာ ပဝတ္တန္တီတိ ဣမာနိ သတ္တဝိဓာနိ စိတ္တာနိ ပဝတ္တန္တိ. 'इमे सत्तविधा चित्ता पवत्तन्ति' म्हणजे ही सात प्रकारची चित्ते प्रवृत्त होतात (उत्पन्न होतात). အဘာဝိတကာယာ’တိ ပဉ္စုပါဒါနက္ခဓကာယေသု အနိစ္စာဒိဝသေန အဘာဝိတကာယာ. 'अभावितकाया' म्हणजे पाच उपादानस्कंधरूप कायांमध्ये अनित्यता इत्यादी रूपाने भावना न केलेले (अभावित काया असलेले). အဘာဝိတသီလာ’တိ အဘာဝိတလောကုတ္တရသီလာ. 'अभावितसीला' म्हणजे जिन्हींनी लोकोत्तर शीलाची भावना केलेली नाही. တီသု ဌာနေသု’တိ သက္ကာယဒိဋ္ဌိ-ဝိစိကိစ္ဆာ-သီလဗ္ဗတပရာမာသ သမုဂ္ဃာဋိတဋ္ဌာနဝသေန တီသု ဌာနေသု. ဥပရိဘုမီသု’တိ သကဒါဂါမိအာဒီနံ ပဉ္စက္ခဓသင်္ခါတ ဥပရိဘုမိသု? 'तीसु ठानेसु' (तीन स्थानांमध्ये) म्हणजे सत्कायदृष्टी (सक्कायदिट्ठि), विचिकित्सा आणि शीलव्रतपरामर्श यांच्या समूच्छेद (उन्मूलन) करण्याच्या स्थानांच्या रूपाने तीन स्थानांमध्ये. 'उपरिभूमीसु' (उच्च भूमींमध्ये) म्हणजे सकदागामी इत्यादींच्या पाच स्कंधांनी युक्त अशा उच्च भूमींमध्ये. ပဉ္စသု ဌာနေသု’တိ ဟေဋ္ဌာ ဝုတ္တေသု တီသု ဌာနေသု ရာဂဒေါသတနုဋ္ဌာနဒွယံ ပက္ခိပိဝါ ပဉ္စ ဌာနာနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. 'पञ्चसु ठानेसु' (पाच स्थानांमध्ये) म्हणजे वर सांगितलेल्या तीन स्थानांमध्ये राग आणि द्वेष यांच्या तनूकरणाच्या (मंद करण्याच्या) दोन स्थानांना मिळवून पाच स्थाने समजावीत. ဒသသု ဌာနေသု’တိ ဟေဋ္ဌာ ပဉ္စဋ္ဌာနာနိ စေဝ ဂဟိတဂ္ဂဟဏနယေန သက္ကာယဒိဋ္ဌိ-ဝိစိကိစ္ဆာ-သီလဗ္ဗတပရာမာသ-လောဘ-ဝျာပါဒ-သင်္ခါတ-ပ- ဉ္စောရမ္ဘာဂယသညေဇနသမုဂ္ဃာဋိတဒ္ဓါနဝသေန ပဉ္စ္ौဒ္ဓမှာဂိယ သံယောဇန သမုဂ္ဃာဋိတဋ္ဌာနဝသေနေဝ. အပရာတိ ပဉ္စာ’တိ ဒသ ဌာနာနိ ဝိပဿနာယ အာရမ္မဏဘုတာ ပဉ္စုပါဒါနက္ခဓာ ယေဝါတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. 'दससु ठानेसु' (दहा स्थानांमध्ये) म्हणजे वर सांगितलेली पाच स्थाने आणि ग्रहण केलेल्याच्या ग्रहण करण्याच्या पद्धतीने सत्कायदृष्टी, विचिकित्सा, शीलव्रतपरामर्श, loभ आणि व्यापाद या रूपाने पाच ओराम्भागीय (खालच्या) संयोजनांच्या उन्मूलनाच्या स्थानांच्या रूपाने आणि पाच उद्धम्भागीय (वरच्या) संयोजनांच्या उन्मूलनाच्या स्थानांच्या रूपाने. इतर आचार्य म्हणतात की 'पाच' म्हणजे विपश्यनेचे आलंबन असणारे पाच उपादानस्कंधच दहा स्थाने म्हणून ग्रहण करावेत. နာရာစဿာ’တိ ဥသုအဂ္ဂပဝေသိတ-အယောမယ နာရာဝဿ 'नाराचस्स' म्हणजे बाणाच्या टोकावर बसवलेल्या लोखंडी नाराचाचे (बाणाचे). ဒဠှံ စာပသမာရူဠှဿာ’တိ ဒဠှစာပဓနုမှိ အာရောပိတဿ. 'दळ्हं चापसमारूळ्हस्स' म्हणजे मजबूत धनुष्यावर चढवलेल्या (बाणाचे). တထာ’တိ ဘဂဝတော လဟုကပရိဝတ္တနေ. ဥတ္တရိကာရဏ’န္တိ ယမကပါဋိဟာရိယတော ဥတ္တရိယံ ဝုတ္တံ 'तथा' म्हणजे भगवंतांच्या शीघ्र परिवर्तनामध्ये (चपळतेने वळण्यामध्ये). 'उत्तरीकारणं' म्हणजे यमकप्रातिहार्यापेक्षा अधिक श्रेष्ठ असे सांगितले आहे. တမ္ပိ မဟာရာဇ ပါဋိဟိရန္တိ တမဘဂဝတော အဂ္ဂိက္ခဓ-ဥဒကဓာရာ-ပဝတ္တန-သင်္ခါတ-ယမကပါဋိဟီရံ အတ္တနော ပရေသံ ရာဂါဒိပစ္စနီကဟရဏတော ပါဋိဟိရံ. 'तम्पि महाराज पाटiहीरं' (ते देखील, हे महाराजा, प्रातिहार्य आहे) म्हणजे भगवंतांचे ते अग्नीचा समूह आणि पाण्याच्या धारा उत्पन्न करण्याच्या रूपाने असलेले यमकप्रातिहार्य, स्वतःच्या आणि इतरांच्या रागादी शत्रूंचे हरण करत असल्यामुळे 'प्रातिहार्य' आहे. အာဝဇ္ဇနဝိကဠမတ္တကေနာ’တိ ဘဂဝတာ အနုပ္ပာဒိတဝသေန မနောဒွါရာဝဇ္ဇနဿ ဟီနဝသေန 'आवर्जनविकळमत्तकेन' म्हणजे भगवंतांनी उत्पन्न न केल्यामुळे मनोध्वारावर्जनाच्या अभावाच्या (हीनतेच्या) केवळ कारणाने. သဗ္ဗညုပဉှော ဒုတိယော. सर्वज्ञप्रश्न हा दुसरा होय. ဆကောဋ္ဌာသေ ကတေ ကပ္ပေ’တိ စတုသဋ္ဌိအန္တရကပ္ပပမာဏေ ဝိဝဋ္ဋဋ္ဌာယိကပ္ပေ ဆကောဋ္ဌာသေ ကတေ. 'छकोट्ठासे कते कप्पे' (कल्पाचे सहा भाग केले असता) म्हणजे चौसष्ट अंतरकल्पांच्या प्रमाणाच्या विवर्तस्थायी कल्पाचे सहा भाग केले असता. အတိက္ကန္တေ ပဌမကောဋ္ဌာသေ ကိဉ္စိ သာဓိကဒသန္တရကပ္ပပမာဏေ ဝိစဋ္ဋဋ္ဌာယိကပ္ပဿ ပဌမကောဋဌာသေ အတိက္ကန္တေ ဒေဝဒတ္တော သံဃံ ဘိဒိ ဒေဝဒတ္တပဗ္ဗဇ္ဇာပဉှော တတိယော 'अतिक्कन्ते पठमकोट्ठासे' (पहिला भाग निघून गेल्यावर) म्हणजे विवर्तस्थायी कल्पाचा पहिला भाग, जो दहा अंतरकल्पांपेक्षा काहीसा अधिक प्रमाणाचा आहे, तो निघून गेल्यावर देवदत्ताने संघभेद केला. देवदत्तप्रव्रज्याप्रश्न हा तिसरा होय. ယမနိယမေ’တိ 'यम नियमात' म्हणजे - ‘ယံ ဒေဟသာဓနာပေက္ခံ နိစ္စံ ကမ္မမယံ ယမော,အာဂန္တံ သာဓနံ ကမ္မံ အနိစ္စံ နိယမော ဘဝေ; 'जे शरीराच्या साधनावर अवलंबून असते, नित्य असते आणि कर्ममय असते तो 'यम' होय; आणि जे आगंतुक (बाह्य) साधनरूप कर्म आणि अनित्य असते तो 'नियम' होय; အဟိံသာသစ္စမာဓေယျံ ဗြဟ္မစာရ ပရိဂ္ဂဟော,နိစ္စံ သရီရသောစေယျံ ယမော နာမာတိ ဝုစ္စရေ; अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करणे), ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह आणि शरीराची नित्य शुद्धता याला 'यम' असे म्हटले जाते; သန္တောသ-မောန-သဇ္ဈာယာ ကိစ္ဆာကဟာရော စ ဘာဝနာ,သယမ္ပာက-ဝနေ ဝါသာ-နိယမာ-နိစ္စသာဓျတာ’; संतोष, मौन, स्वाध्याय, कृच्छ्र आहार (कठोर उपवास), भावना (ध्यान), स्वतः स्वयंपाक करणे आणि वनात राहणे—हे 'नियम' असून ते अनित्य साध्य आहेत'; ဧဝံ ဝုတ္တေ ယမကမ္မေ စ နိယမကမ္မေ စ. असे म्हटले असता, यमकर्मामध्ये आणि नियमकर्मामध्ये. ယံ တထာဂတော…ပေ… ဧဝမဓိပ္ပာယော အထိ ယံ ယေန ဂုဏေန ဟေတု ဘုတေန…ပေ…ဧဝံ အဓိပ္ပယော ဟောတိ တံ ဗုဒ္ဓါနံ ဂုဏံ အဘုတံ အထိတိ ယောဇနာ. 'जे तथागत...पे... असा अभिप्राय आहे. जे ज्या गुणाने हेतूभूत होऊन...पे... असा अभिप्राय होतो, तो बुद्धांचा गुण अभूत (असत्य) नाही, अशी योजना आहे. ပရက္ကမော ဒက္ခာပိတော’တိ ပါရမီပူရဏေ ပရက္ကမော ဝါယာမော ဒက္ခာပိတော ပေက္ခာပိတော. 'परक्कमो दक्खापितो' (पराक्रम दाखवला) म्हणजे पारमिता पूर्ण करण्यासाठी केलेला पराक्रम आणि व्यायाम (प्रयत्न) दाखवला गेला, दर्शवला गेला. ဟိယျော ဩဘာသိတာ’တိ ဇိနာနံ ပါရမီ စ နယာ ဘိယျော အတိသယေန ဩဘာသိတာ. 'भिय्यो ओभासिता' (अधिक प्रकाशित झाली) म्हणजे जिनांची (बुद्धांची) पारमिता आणि नय (पद्धती) अत्यंत प्रकर्षाने प्रकाशित झाली. ဘိဒိ တိထိယာနံ ဝါဒဂဏ္ဌိန္တိ ဝံ တိထိယာနံ မိစ္ဆာဝါဒဂဏ္ဌိံ ပဘိဒိ. 'भिदि तिथियानं वादगण्ठिं' म्हणजे आपण तीर्थिकांच्या (अन्यधर्मीयांच्या) मिथ्यावादाची गाठ तोडली. ဘိန္နာ ပရပ္ပဝါဒကုမ္ဘာ’တိ ပရပ္ပဝါဒါ တယာ ဘိန္နာ. 'भिन्ना परप्पवादकुम्भा' म्हणजे परवाद्यांचे (इतर मतवाद्यांचे) कुंभ आपण फोडले (त्यांच्या वादांचे खंडन केले). ဂမ္ဘီရော ဥတ္တာနိကတော’တိ အတိဝိယ ဂမ္ဘီရော ပဉှော တယာ ဥတ္တာတီကတော. 'गम्भीरो उत्तानीकतो' म्हणजे अत्यंत गंभीर असलेला प्रश्न आपण स्पष्ट (सुलभ) केला. သမ္မာလဒ္ဓံ ဇိနပုတ္တာနံ နိဗ္ဗာဟနန္တိ ပရမိစ္ဆာဝါဒဟရဏေ ဥပါယသင်္ခါတံ နိဗ္ဗာဟနမုခံ ဇိနပုတ္တာနံ ဇိနပုတ္တေဟိ သုဋ္ဌု လဒ္ဓံ. 'सम्माळद्धं जिनपुत्तानं निब्बाहनं' म्हणजे पर-मिथ्यावादाचे हरण करण्यासाठी उपायभूत असलेले मोक्षाचे द्वार जिनपुत्रांनी (बुद्धपुत्रांनी) चांगल्या प्रकारे प्राप्त केले आहे. ဧဝမေတန္တိ သဗ္ဗံ ဟေဋ္ဌာဝုတ္တဝစနံ တယာ ဝုတ္တံ ယထာ ဟောတိ တံ,သဗ္ဗံ ဝစနံ ဧဝံ သဘာဝတော ဟောတီတိ အဇ္ဈာဟာရယောဇနာ; 'एवमेतं' म्हणजे वर सांगितलेले सर्व वचन आपण जसे म्हटले आहे तसेच आहे, 'सर्व वचन अशा प्रकारे स्वभावतःच आहे' अशी अध्याहार योजना आहे; ဂဏီဝရပဝရာ’တိ အာလပနမေတံ ဂဏီနံ ဂဏပရိသာနံ ဝရပရမ,အတိသေဋ္ဌ ယထာ တယာ ဝုတ္တံ မယံ တထာ သမ္ပဋိစဆာမာ’တိ; 'गणीवरपवरा' हे संबोधन आहे; 'हे गणींचे (गणांचे नायक) आणि गणपरिषदांचे श्रेष्ठ, परम आणि अतिश्रेष्ठ नायक! आपण जसे म्हटले आहे, आम्ही त्याचा तसाच स्वीकार करतो'; ပထဝိကမ္ပနဟေတုပဉှော စတုထော. पृथ्वीकंपनहेतू प्रश्न हा चौथा होय. နထညံ စေထာတိ ဧတေသု သစ္စေသု ဝိဇ္ဇမာနံ သစ္စတော အညံ ကာရဏံ ပဋိဝေဓဿ စ နထိ. 'नत्थञ्ञं चेत्थ' म्हणजे या सत्यांमध्ये विद्यमान असलेल्या सत्याशिवाय प्रतिवेधाचे (ज्ञानाचे) दुसरे कोणतेही कारण नाही. သီဟရထေနာ’တိ သေဋ္ဌရထေန မဉ္စရထေန. သီဟသဒ္ဒေါ ဝါ ဥသဘသဒ္ဒေါ ဝါ အညသဒ္ဒေန ပယုတ္တော သေဋ္ဌဝါစကော ဟောတီတိ. 'सीहरथेन' म्हणजे श्रेष्ठ रथाने किंवा मुख्य रथाने. 'सिंह' शब्द किंवा 'ऋषभ' शब्द जेव्हा दुसऱ्या शब्दासोबत वापरला जातो, तेव्हा तो 'श्रेष्ठ' या अर्थाचा वाचक असतो. သိဝိရာဇဒိဗ္ဗစက္ခုပဉှော ပဉ္စမော. शिविराज दिव्यचक्षु प्रश्न हा पाचवा होय. ကလလံ ဩသရတီတိ ဣဒံ မာတုယာ ပိဋ္ဌိကဏ္ဋကနာဘီနံ မဇ္ဈဋ္ဌာနဘုတေ ဂဗ္ဘပတိဋ္ဌာနာရဟဋ္ဌာနေ သန္နိစိတံ ပဋိကလလသဒိသံ မဒရတ္တလောဟိတံ သဓာယ ဝုတ္တံ, န ကလလရူပံ. 'कललं ओसरति' (कलल खाली उतरते) हे मातेच्या पाठीचा कणा आणि नाभी यांच्या मध्यभागी असलेल्या गर्भाशयाच्या स्थानामध्ये जमा झालेल्या, दाट कललासारख्या फिकट लाल रक्ताच्या संदर्भात म्हटले आहे, कलल-रूपाच्या संदर्भात नाही. မုခပါနေနပိ ဒွယသန္တိပါတော ဘဝတီတိ မုခပါနေနပိ သဟ မာတာ စ ဥတုနီ ဂဗ္ဘော ပစ္စုပဋ္ဌိတော’တိ ဒွယသန္နိပါတော ဘဝတိ. ‘मुखाद्वारे पिण्याने देखील दोघांचा संयोग होतो’ म्हणजे मुखाद्वारे पिण्याने देखील, माता ऋतुमती असणे आणि गंधर्व उपस्थित असणे, असा दोघांचा संयोग होतो. ပုရိမေန တထ ကာရဏံ ဝက္ခာမီတိ ပုရိမေန သာမဝထုနာ တေသံ ဒွိန္နံ တိဏ္ဏံ သန္နိပါတာနံ အန္တောဂဓဘာဝေ ကာရဏံ ယူတ္တိဝစနံ ကထေဿာမိ. ‘पूर्वीच्या उदाहरणाने मी कारण सांगेन’ म्हणजे पूर्वीच्या श्यामाच्या कथेच्या उदाहरणाने त्या दोन किंवा तीन संयोगांच्या अंतर्भावाचे कारण आणि युक्तियुक्त वचन मी सांगेन. တေ သဗ္ဗေ’တိ ယေ ကေစိ သတ္တာ မာတုဂဗ္ဘံ ဩက္ကန္တာ တေ သဗ္ဗေ သတ္တာ ယေ ဝနရုက္ခာဒယော’တိ ယောဇနာ. ‘ते सर्व’ म्हणजे जे कोणी प्राणी मातेच्या गर्भात प्रवेश करते झाले आहेत, ते सर्व प्राणी; जसे की वनवृक्ष इत्यादी, अशी योजना आहे. ယော ကောစိ ဂဓဗ္ဗော’တိ ယော ကောဝိ အတ္တနော ကမ္မေန တထ တထ ဥပဂန္နဗ္ဗသတ္တော. ‘जो कोणी गंधर्व’ म्हणजे जो कोणी आपल्या कर्माने त्या त्या ठिकाणी उत्पन्न होणारा प्राणी आहे. ဂဗဘာဝက္ကန္တိပဉှော ဆဋ္ဌော. गर्भावक्रांती प्रश्न हा सहावा आहे. သဒ္ဓမ္မော’တိ ပဋိသမ္ဘိဒါပ္ပတ္တခီဏာသဝသန္တကာဓိဂမသဒ္ဓမ္မော သုဒ္ဓနယ-ပဋိဝတ္တနဝသေန ပဋိဝေဓသဒ္ဓမ္မော ဝါ. ‘सद्धम्म’ म्हणजे प्रतिसंभिदा प्राप्त क्षीणासवांच्या संतानातील अधिगम-सद्धम्म किंवा शुद्ध नयाच्या प्रतिवर्तनाने प्राप्त होणारा प्रतिवेध-सद्धम्म होय. တံ ခယံ ပရိဒီပယန္တော’တိ တေန ဝစနေန ပုဗ္ဗပဉ္စဝဿသတပ္ပ-မာဏဋ္ဌာနာရဟ-သဒ္ဓမ္မက္ခယံ ပရိဒီပယန္တော. ‘त्या क्षयाचे स्पष्टीकरण करताना’ म्हणजे त्या वचनाने पूर्वीच्या पाचशे वर्षांच्या काळापर्यंत टिकण्यास योग्य अशा सद्धम्माच्या क्षयाचे स्पष्टीकरण करताना. သေသကံ ပရိစ္ဆိဒီတိ သေသကံ ပစ္ဆိမပဉ္စဝဿသတံ သဒ္ဓမ္မတိဋ္ဌနက္ခဏံ ပရိစ္ဆိဒိ. တံ ဒီပနာကာရံ ပရိစ္ဆဒနာကာရဉ္စ ဒဿေန္တော ဝဿသတံ သဟဿန္တိအာဒိမာဟ. ‘उर्वरित काळ मर्यादित केला’ म्हणजे उर्वरित शेवटच्या पाचशे वर्षांचा सद्धम्म टिकण्याचा काळ मर्यादित केला. तो स्पष्ट करण्याचा प्रकार आणि मर्यादित करण्याचा प्रकार दर्शवताना ‘शंभर वर्षे, हजार वर्षे’ इत्यादी म्हटले आहे. နဋ္ဌာယိကော’တိ နဋ္ဌဓနော. ‘नष्टायिक’ म्हणजे ज्याचे धन नष्ट झाले आहे असा. ဝဿသတပ္ပမာဏပဉှော သတ္တမော. शंभर वर्षांच्या प्रमाणाचा प्रश्न हा सातवा आहे. တတြ ယေ တေ သတ္တေ ကမ္မံ ဝိဗာဓတိ တေ ဣမေ သတ္တာ ကာရဏံ ပဋိဗာဟန္တိ, တေသံ တံ ဝစန မိစ္ဆာ’တိ ပေါထကေသု လိခိတံ တံ ဒုဇ္ဇာနံ. တသ္မာ ယေ သတ္တေ ကမ္မံ ဝိဗာဓတိ, တေ သတ္တာ ကမ္မဝိပါကဇာ, ဒုက္ခ ဝေဒနာ ဝေဒယန္တီတိ ယေ ပန သတ္တာ ကာရဏံ ပဋိဗာဟန္တိ တေသံ တံ ဝစနံ မိစ္ဆာ’တိ ပါဌေန ဘဝိတဗ္ဗံ. ဧဝဉှိ သတိ ပုဗ္ဗာပရံ သမေတိ. त्यात ‘जे प्राणी कर्माने पीडित होतात, ते प्राणी कारणाचा प्रतिकार करतात, त्यांचे ते बोलणे खोटे आहे’ असे पुस्तकांमध्ये लिहिले आहे, ते समजण्यास कठीण आहे. म्हणून ‘जे प्राणी कर्माने पीडित होतात, ते प्राणी कर्मविपाकामुळे उत्पन्न होणारी दुःखद वेदना अनुभवतात; परंतु जे प्राणी कारणाचा प्रतिकार करतात, त्यांचे ते बोलणे खोटे आहे’ असा पाठ असावा. कारण असे असल्यास पूर्व आणि उत्तर भागाचा मेळ बसतो. တတြ ယေ တေ နဝဝိဓာ’တိ တတြ ဒသဝိဓေသု ကုပ္ပဝါတေသု ယေ တေ နဝဝိဓာ ကုပ္ပဝါတာ. ‘त्यात जे नऊ प्रकारचे’ म्हणजे त्या दहा प्रकारच्या कुपित वायूंपैकी जे नऊ प्रकारचे कुपित वायू आहेत. န တေ အတီတေ ဥပ္ပဇ္ဇန္တိတိ တေ ဝါတာ အတီတေ ဘဝေ ကမ္မဗလေန န ဥပ္ပဇ္ဇန္တိ. သေသ ပဒဒွယေ’ပိ ဧသေဝ နယော. ‘ते भूतकाळात उत्पन्न होत नाहीत’ म्हणजे ते वायू भूतकाळातील अस्तित्वात कर्माच्या बलाने उत्पन्न होत नाहीत. उर्वरित दोन पदांमध्येही हाच नियम लागू होतो. တေဟိ တေဟိ ကောပေဟီ’တိ တေဟိ တေဟိ သီတာဒိကောပပ္ပကာရေဟိ. ‘त्या त्या कोपांमुळे’ म्हणजे त्या त्या थंडी इत्यादींच्या कोपांच्या प्रकारांमुळे. သကံ သကံ ဝေဒနန္တိ အတ္တနော အတ္တနော ဖလဘူတံ ဝေဒနံ. ‘आपली आपली वेदना’ म्हणजे स्वतःची स्वतःची फलभूत असणारी वेदना. ဝိသမပရိဟာရဇာ’တိ စတုန္နံ ဣရိယာပထာနံ ဝိသဒိသဟရဏတော ဇာတာ ဝေဒနာ. ‘विषम परिहारजन्य’ म्हणजे चारही इर्यापथांच्या अयोग्य हालचालींमुळे उत्पन्न झालेली वेदना. ဩပက္ကမိကေနာ’တိ ဒဏ္ဍပ္ပဟာရဒိဝသေန ပရူပက္ကမေန. ‘औपक्रमिक’ म्हणजे काठीच्या प्रहाराने इत्यादी दुसऱ्यांच्या उपक्रमामुळे. ကမ္မဝိပါကဇာ’တိ ကမ္မဝိပါကဘုတပဉ္စက္ခဓတော ဇာတာ. ‘कर्मविपाकजन्य’ म्हणजे कर्मविपाकरूप अशा पंचस्कंधांच्या धातूंपासून उत्पन्न झालेली. ဗဟုတရံ အဝသေသန္တိ ကမ္မဝိပါကဇဝေဒနာတော အဝသေသံ ဝေဒယိတံ ဗဟုတရံ. ‘उर्वरित बहुतांश’ म्हणजे कर्मविपाकजन्य वेदनेपेक्षा उर्वरित अनुभवलेली वेदना ही बहुतांश असते. န သမ္ဘဝတီတိ န သမ္ပဇ္ဇတိ. ‘संभवत नाही’ म्हणजे घडून येत नाही. ဗီဇဒုဋ္ဌတာ’တိ ခေတ္တတော အညကာရဏဒုဋ္ဌတာ. ‘बीजदुष्टता’ म्हणजे शेताव्यतिरिक्त इतर कारणांमुळे झालेली दुष्टता. ကမ္မဝိပကတော ဝါ’တိ ဧထ ‘किंवा कर्मविपाकामुळे’ येथे ‘ဝေမာတုဘာတိကံ ပုဗ္ဗေ ဓနဟေတု ဟနိံ အဟံတေန ကမ္မဝိပါကေန ဒေဝဒတ္တော သိလံ ခိပိ; အင်္ဂုဋ္ဌံ ပိံသယီ ပါဒေ မမ ပါသာဏသက္ခရာ’တိ; ‘पूर्वी मी संपत्तीसाठी सावत्र भावाला मारले होते. त्या कर्मविपाकामुळे देवदत्ताने शिळा फेकली; आणि दगडाच्या कपचीने माझ्या पायाचा अंगठा चिरडला गेला.’ အယံ ဂါထာ ဝတ္တဗ္ဗာ တထ ဓနဟေတု’တိ ဒါသိဒါသသင်္ခါတ-ဇင်္ဂမဓန-ဟေတု. ဓနဉှိ ထာဝရဇင်္ဂမ-သံဟာရိမ-အင်္ဂသမ-အနုဂါမိဓနဝသေန ပဉ္စဝိဓံ. ही गाथा म्हणावी. तेथे ‘संपत्तीसाठी’ म्हणजे दासी-दास इत्यादी जंगम संपत्तीसाठी. संपत्ती ही स्थावर, जंगम, संहारिम, अंगसम आणि अनुगामी संपत्तीच्या रूपाने पाच प्रकारची असते. ကိရိယတော ဝါ’တိ ဒေဝဒတ္တဿ ဥပက္ကမကိရိယတော ဝါ. ‘किंवा क्रियेमुळे’ म्हणजे देवदत्ताच्या उपक्रम-क्रियेमुळे. ဘောဇနံ ဝိသမံ ပရိဏမတီတိ ကုစ္ဆိဂတဘောဇနံ ဝိသမံ ပရိပက္ကဘာဝံ ဂစ္ဆတိ. ‘भोजन विषम रीतीने पचते’ म्हणजे उदरात गेलेले भोजन विषम रीतीने पचन पावते. တာယ စ ပန ဝေဒနာယာ’တိ ဣဒံ ကတ္တထေ ကရဏဝစနံ. ‘आणि त्या वेदनेने’ हे कर्त्याच्या अर्थातील करणवाचक रूप आहे. နိကာယဝရဉ္ဆကေ’တိ ဧထ လဉ္ဆန္တိ သဉ္စာနန္တိ ဧတေန ဧထ ဝါ ပုညပါပါနိ ပဏ္ဍိတဇနာတိ လဉ္ဆကော’တိ နိကာယဝရော စ သော လဉ္ဆကော စာတိ ဝိဂ္ဂဟော. ‘निकायवरलांछक’ यामध्ये, ज्याच्याद्वारे पंडित लोक पुण्य आणि पाप ओळखतात, तो ‘लांछक’ होय. ‘निकायवर’ आणि ‘लांछक’ असा याचा विग्रह आहे. သဗ္ဗာကုသလဇ္ဈာပနပဉှော အဋ္ဌမော. सर्व अकुशलांचे दहन करण्याचा प्रश्न हा आठवा आहे. ဣမသ္မိံ ပဉှေ ထေရဿ ဧကံသိကံ ဗျာကရဏံ န ဟောတိ. တသ္မာ ဝိစာရေဝါ ယံ ယုတ္တရံ တံ ဂဟေတဗ္ဗံ. တတြာယံ ဝိစာရဏာကာရော. မဂ္ဂဝဇ္ဈာ ဟိ ကိလေသာ အနုပါဒိန္နကဘုတာ ယေ နေဝ အတီတာ အနာဂတာ န ပစ္စုပ္ပန္နာ. ဥပါဒိန္နကနိရောဓကထာ စ အနာဂတဘဝံ သဓာယ ကထိတာ ဘဂဝတော ဥပ္ပန္နာ ဝေဒနာ ဣမသ္မိံ ပစ္စုပ္ပန္နဘဝေယေဝ ဟောတိ. အပရာပရဝေဒနိယကမ္မဉ္စ ဗုဒ္ဓပစ္စေကဗုဒ္ဓေဟိ’ပိ န သက္ကာ နိဝါရေတုံ. တသ္မာ ထေရဿ ကမ္မဝိပါကတော ဝါ ဧသာ ဝေဒနာ နိဗ္ဗတ္တာ’တိ ဝါဒေါ ယုတ္တတရော’တိ ဂဟေတဗ္ဗံ. ယဒိ ဧဝံ ကသ္မာ ထေရော အနေကဝိဟိတံ ကထေသီ?တိ. ရာဇာ မိလိဒေါ ဉာဏဘေဒံ ဂဝေသန္တော ဝိစိတြပဋိဘာနံ သောတုကာမော ဟောတိ. တဿ အဇ္ဈာသယဝသေန အနေကဝိဟိတံ ကထေသီ’တိ ပရိဟာရော ဝတ္တဗ္ဗော အညေသု ဤဒိသေသု ဌာနေသု ယုတ္တိယေဝ ဂဝေသိတဗ္ဗာ, န ဧကစိန္တိနာ ဘဝိတဗ္ဗန္တိ. या प्रश्नात स्थविरांचे एकांतिक उत्तर नाही. म्हणून विचार करून जे अधिक योग्य असेल ते स्वीकारावे. त्यातील विचार करण्याची पद्धत अशी आहे: मार्गाने नष्ट होणारे क्लेश हे अनुपादिन्नक असतात, जे भूतकाळात, भविष्यकाळात किंवा वर्तमानकाळातही नसतात. आणि उपादिन्नक निरोधाची कथा ही भावी जन्माचा संदर्भ देऊन सांगितली आहे, तर भगवंतांना उत्पन्न झालेली वेदना याच वर्तमान जन्मात होते. तसेच अपरापरवेदनीय कर्म हे बुद्ध आणि प्रत्येकबुद्धांना देखील टाळता येत नाही. म्हणून स्थविरांचा ‘ही वेदना कर्मविपाकामुळेच उत्पन्न झाली’ हा वाद अधिक योग्य आहे असे मानावे. जर असे आहे, तर स्थविरांनी अनेक प्रकारे का सांगितले? राजा मिलिंद हा ज्ञानाचा भेद शोधणारा आणि विविध प्रकारची प्रतिभा ऐकण्याची इच्छा असणारा होता. त्याच्या इच्छेनुसार त्यांनी अनेक प्रकारे सांगितले, असे उत्तर द्यावे. इतर अशा ठिकाणी केवळ युक्तीच शोधावी, एकाच विचारावर ठाम राहू नये. ကတဿ ပတိစယော’တိ စတုသု သစ္စေသု ကတသောဠသကိစ္စဿ ပတိစယော ပုန ဝဍ္ဎနံ နထိ. ‘केलेल्याचा संचय’ म्हणजे चार आर्या सत्यांमध्ये केलेल्या सोळा कर्तव्यांचा संचय किंवा पुन्हा वाढ होत नाही. နိဗ္ဗာဟိတဗ္ဗော’တိ နိဗ္ဗေဌေတဗ္ဗော ကထေတဗ္ဗော. ပဋိသလ္လာနန္တိ ကာယိကစေတသိကပဋိသလ္လာနကိရိယာ. အထတော ပန ပဋိသလ္လာနဋ္ဌာနေ လဟိတဗ္ဗာ သမာဓိသတိသမ္ပဇညာဒယော ကုသလာ ဓမ္မာ ပဋိသလ္လာနံ နာမ. ‘निस्तारावा’ म्हणजे स्पष्ट करावा किंवा सांगावा. ‘प्रतिसंलयन’ म्हणजे कायिक आणि चैतसिक एकांताची क्रिया. आणि प्रतिसंलयनाच्या स्थितीत प्राप्त होणारे समाधी, स्मृती, संप्रजन्य इत्यादी कुशल धर्म म्हणजेच प्रतिसंलयन होय. ရက္ခတီတိ သမ္ပရာယိကအပါယာဒိဒုက္ခတော ရက္ခတိ. ‘रक्षण करतो’ म्हणजे परलोकातील अपाय इत्यादी दुःखांपासून रक्षण करतो. ပဋိသလ္လာနပဉှော နဝမော. प्रतिसंलयनाचा प्रश्न हा नववा आहे. တံ ဣဒ္ဓိဗလန္တိ တေန ဣဒ္ဓိဗလေန လဘိတဗ္ဗကပ္ပကပ္ပာဝဿဋ္ဌာနံ. ‘ते ऋद्धिबल’ म्हणजे त्या ऋद्धिबलाने प्राप्त होणारे कल्प किंवा कल्पापेक्षा अधिक काळ टिकून राहणे. အန္တမသော အစ္ဆရာသံဃာတမတ္တမ္ပီတိ သဗ္ဗန္တိမေန ပရိစ္ဆေဒေန အစ္ဆရာသံဃာတမတ္တမ္ပိ ကာလံ ပဉ္စက္ခဓသင်္ခါတဘဝဿ ပဝတ္တနံ န ဝဏ္ဏေမိ, အပ္ပဝတ္တနနိဗ္ဗာနမေဝ ဝဏ္ဏေမီတိ အဓိပ္ပာယော. ‘अगदी चुटकी वाजवण्याच्या काळापुरते देखील’ म्हणजे अगदी शेवटच्या मर्यादेपर्यंत, चुटकी वाजवण्याच्या काळापुरते देखील पंचस्कंधात्मक अस्तित्वाचे चालू राहणे मी प्रशंसत नाही, तर त्याचे न चालणे म्हणजेच निर्वाणाचीच मी प्रशंसा करतो, असा अभिप्राय आहे. ဣဒ္ဓိဗလကိတ္တနပဉှော ဒသမော. ऋद्धिबलाच्या कीर्तनाचा प्रश्न हा दहावा आहे. ဒသပဉှပဋိမဏ္ဍိတအဋ္ဌမဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. दहा प्रश्नांनी सुशोभित असलेल्या आठव्या वर्गाची वर्णना समाप्त झाली. အဘိညာယာဟံ ဘိက္ခဝေ ဓမ္မံ ဒေသေမီတိ ပဉ္စက္ခဓာ, ဒွါဒသာယတနာနိ, အဋ္ဌာရသ ဓာတုယော, စတ္တာရိ သစ္စာနိ, ဗာဝီသတိဒြိယာနိ, နဝ ဟေတု, စတ္တာရော အာဟာရာ, သတ္တဝဿာ, သတ္တ ဝေဒနာ, သတ္တ သညာ, သတ္တ စေတနာ, သတ္တ စိတ္တာနီတိအာဒိနာ အဘိဝိသေသေန သဗ္ဗညုတဉာဏေန ဇာနိဝါ ဓမ္မံ ဒေသေမိ. ‘भिक्षूंनो, मी अभिज्ञेने धम्माचा उपदेश करतो’ म्हणजे पंचस्कंध, बारा आयतने, अठरा धातू, चार आर्यसत्ये, बावीस इंद्रिये, नऊ हेतू, चार आहार, सात वर्ष, सात वेदना, सात संज्ञा, सात चेतना, सात चित्त इत्यादींच्या विशेष रूपाने, सर्वज्ञता-ज्ञानाने जाणून मी धम्माचा उपदेश करतो. အညံ ဥတ္တရိံ…ပေ…သတန္တိ ခုဒ္ဒါနုခုဒ္ဒကတော အညံ ဥတ္တရိံ စတုပါရာဇိက - တေရသ သံဃာဒိသေသ - တိံသနိဿဂ္ဂိယ - ဒွါနဝုတိ - ပါစိတ္တိယ - စတုပါဋိဒေသနီယ - သတ္တာဓိကရဏ -သိက္ခာပဒ - သင်္ခါတဒိယဍ္ဎ - သိက္ခာပဒသတံ. ‘इतर श्रेष्ठ...पे...शंभर’ म्हणजे क्षुद्र आणि अनुक्षुद्र नियमांपेक्षा इतर श्रेष्ठ असे चार पाराजिक, तेरा संघादिशेष, तीस नैसर्गिक पाचित्तिय, ब्याण्णव पाचित्तिय, चार पाटिदेसनीय, सात अधिकरण-शमथ आणि दीडशे शिक्षापदे होत. တေဟိပိ န ဧကဇ္ဈကတာ’တိ အတ္တနော စိတ္တနိဋ္ဌာ ဧကန္တဘာဝေန န ကတာ. ‘तेहिपि न एकज्झकता’ (त्यांच्याद्वारेही एकनिष्ठता केली गेली नाही) म्हणजे स्वतःच्या चित्ताचा निश्चय एकांतभावाने (पूर्ण निश्चिततेने) केला गेला नाही. ဓမ္မသဏ္ဌိတပရိယာယေနာတိ ယဉ္စ တံ အာပတ္တိံ အာပန္နော တဉ္စ ယထာဓမ္မော ကာရေတဗ္ဗော’တိ ဝုတ္တဓမ္မသဏ္ဌိတိပရိယာယေန. ‘धम्मसण्ठितपरियायेन’ (धम्म-स्थितीच्या पर्यायाने) म्हणजे ज्याने ती आपत्ती (नियमभंग) केली आहे, त्याला धम्मानुसार (यथाधम्म) प्रायश्चित्त दिले पाहिजे, या अर्थाने सांगितलेल्या धम्मस्थितीच्या पर्यायाने. ခုဒ္ဒါနုခုဒ္ဒကသမူဟနနပဉှော ပဌမော. खुद्दानुखुद्दलक (क्षुद्र व अनुक्षुद्र) नियम रद्द करण्याविषयीचा प्रश्न पहिला. အနိစ္စမ္ပန ရူပန္တိ ဝိဘဇ္ဇဗျာကရဏိယော ပဉှော’တိ အနိစ္စံ နာမရူပံ, ကိံ. ရူပမေဝါ?တိ ပုဋ္ဌော အနိစ္စံ နာမရူပမ္ပိ အနိစ္စာ ဝေဒနာ ပီ’တိအာဒိနာ နယေန ဝိဘဇိဝါ ဗျာကာတဗ္ဗော ဝိဘဇ္ဇဗျာကရဏီယော နာမာ’တိ အထော. ကိန္နု ခေါ စက္ခုနာ သဗ္ဗံ ဝိဇာနာတီတိ ပုဂ္ဂလော သဗ္ဗံ စက္ခုနာ ကိံ ဝိဇာနာတီတိ ဣမသ္မိံ ပဉှေ ကေနာပိ ပုဋ္ဌော’ကတမေန စက္ခုနာ သမန္တစက္ခုနာ ဥဒါဟု မံသစက္ခုနာ’တိ ဝုတ္တေ’အာမာ’တိ ဝတ္တဗ္ဗော’တိ အယံ ပဉှော ပဋိပုစ္ဆာဗျာကရဏီယော ပဉှော နာမာတိ ယောဇနာ. ‘रूप अनित्य आहे काय?’ हा विभज्जव्याकरणीय (विश्लेषण करून उत्तर देण्याचा) प्रश्न आहे. ‘केवळ रूपच अनित्य आहे की नामरूप अनित्य आहे?’ असे विचारले असता, ‘नामरूपही अनित्य आहे आणि वेदनाही अनित्य आहे’ इत्यादी पद्धतीने विश्लेषण करून उत्तर दिले पाहिजे, याला ‘विभज्जव्याकरणीय’ म्हणतात. ‘काय डोळ्याने सर्व काही जाणता येते?’ या प्रश्नावर जर कोणी विचारले की, ‘कोणत्या डोळ्याने? समंतचक्षूने की मांसचक्षूने?’ असे विचारल्यावर ‘होय’ असे म्हणावे, या प्रश्नाला ‘पटिपुच्छाव्याकरणीय’ (प्रतिप्रश्न करून उत्तर देण्याचा) प्रश्न म्हणतात, अशी ही योजना आहे. မာလုင်္ကျပုတ္တပဉှော ဒုတိယော. मालुंक्यपुत्तांचा प्रश्न दुसरा. သမုဟတော ဘယဟေတု အရဟတော’တိ ဘယဟေတု အရဟတော အရဟန္တေန သမူဟတော. ‘समुहतो भयहेतु अरहतो’ (अर्हतासाठी भयाचे कारण नष्ट झाले आहे) म्हणजे अर्हताने भयाचे कारण समूळ नष्ट केले आहे. ဥန္နတာဝနတာ’တိ သုခေ ဥန္နတိဌာနဝသေန ဥန္နတာ ဒုက္ခေ မင်္ကုဝသေန ဩနတာ ‘उन्नतावनता’ (उन्नत आणि अवनत) म्हणजे सुखाच्या वेळी उन्नत (हर्षित) होणे आणि दुःखाच्या वेळी खिन्नतेमुळे अवनत (उदासीन) होणे. ကုဋိပုရိသေ’တိ ပါကဋပုရိသေ. ‘कुटिपुरिसे’ म्हणजे प्रकट (प्रसिद्ध किंवा उघड) मनुष्य. အာဟစ္စပဒန္တိ ဘဂဝတော သဗ္ဗညုတဉာဏေန ဝိသေသေဝါ ဝုတ္တဝစနံ. ‘आहच्चपद’ म्हणजे भगवंतांच्या सर्वज्ञतेच्या ज्ञानाने विशेष रूपाने सांगितलेले वचन. သဗ္ဗတသပဉှော တတိယော. सब्बतस-प्रश्न तिसरा. တေန တေသံ ပဝတ္တေနာ’တိ တေသံ ပရိတ္တာနံ တေဇဝန္တာနံ တေန ပဝတ္တေန. ‘तेन तेसं पवत्तेन’ (त्यांच्या प्रवृत्तीने) म्हणजे त्या तेजस्वी परित्तांच्या (संरक्षक सूत्रांच्या) त्या प्रवृत्तीने (प्रभावाने). ဝိသံ စိက္ခဿန္တော’တိ ဝိသံ ဝိနာသယမာနော. ‘विसं चिक्खस्संतो’ म्हणजे विषाचा नाश करणारा. ဥဒ္ဓမဓော အာစယမာနော’တိ သရီရဿ ဥဒ္ဓံ သုခံ ဝဍ္ဎယမာနော. ‘उद्धमधो आचयमानो’ (वर आणि खाली संचय करणारा) म्हणजे शरीराच्या वरील भागाचे सुख वाढवणारा. စောရာနံ ဥက္ခိတ္တလဂုဠန္တီ ပေါထကေသု လိခိတံ ဝေရိစောရာနံ ဥက္ခတ္တလဂုဠမ္ပီတိ ပါဌေန ဘဝိတဗ္ဗံ. ဝေရိစောရေဟိ ဥက္ခိတ္တမုဂ္ဂရံ န သမ္ဘဝတီတိ အထော. पुस्तकांमध्ये ‘चोरानं उक्खित्तलगुळं’ (चोरांनी उगारलेली काठी) असे जे लिहिले आहे, त्याऐवजी ‘वेरिचोरानं उक्खित्तलगुळम्पि’ (वैरी चोरांनी उगारलेली काठीसुद्धा) असा पाठ असायला हवा. वैरी चोरांनी उगारलेली मुद्गल (काठी) लागू शकत नाही, असा याचा अर्थ आहे. အာဟာရထံ ဝါ ဧရတီ’တိ အာဟာရကိစ္စံ သမ္ပာဒေတိ. ‘आहारथं वा एरती’ म्हणजे आहाराचे कार्य संपन्न करतो. သူစိကာယာ’တိ ဥဒ္ဓ-ဝမနာဗာဓေန. ‘सूचिका’ म्हणजे उलट्या होण्याच्या (वमन) आजाराने. ဒူရုပစာရေနာ’တိ ဒုဋ္ဌပယုတ္တေန ကာရဏေန. ‘दूरुपचारेन’ म्हणजे दुष्ट हेतूने केलेल्या प्रयोगाच्या कारणाने. သတ္တာနံ ရက္ခနံ မဟာရာဇာ ပရိတ္တန္တိ မဟာရာဇ, ပရိတ္တံ နာမ သတ္တာနံ ရက္ခန္တာနံ သတ္တာနံ အနုရက္ခနံ ဟောတီတိ ယောဇနာ. ‘सत्तां रक्खनं महाराजा परित्तं’ म्हणजे ‘हे महाराजा, परित्त (संरक्षण सूत्र) हे स्वतःचे रक्षण करणाऱ्या प्राण्यांचे रक्षण करणारे ठरते’, अशी ही योजना आहे. အတ္တနာ ကတေန အာရက္ခံ ဇနာတီ’တိ ကမ္မာစရဏာဒိတော ပါပပုဂ္ဂလော အတ္တနာ ကတေန ဒေါသေန ပရိတ္တဿ ရက္ခနဘာဝံ ဇဟတိ ဝိနာသေတိ. ‘अत्तना कतेन आरक्खं जहाति’ (स्वतःच्या कर्माने रक्षण गमावतो) म्हणजे कर्माच्या आचरणामुळे पापी मनुष्य स्वतः केलेल्या दोषामुळे परित्ताच्या रक्षणभावाचा त्याग करतो, तो नष्ट करतो. ပရရိတ္တာနုရက္ခနပဉှော စတုထော. परित्ताद्वारे रक्षणाचा प्रश्न चौथा. ဗုဒ္ဓဗလတော စ မာရဗလံ ဗလဝတရံ န ဟောတီ’တိ ယောဇနာ. आणि बुद्धबलापेक्षा मारबल अधिक बलवान नसते, अशी ही योजना आहे. ပဉ္စသာလဂါပဉှော ပဉ္စမော. पंचसालगाम-प्रश्न पाचवा. တတြ အထန္တရံ အထိ’တိ တထ တေသု ဒွီသု ဝစနေသု. အထဘေဒေါ အထဝိသေသော အထိ.’ ‘तत्र अत्थन्तरं अत्थि’ (तेथे अर्थाचा भेद आहे) म्हणजे त्या दोन वचनांमध्ये अर्थाचा भेद (अत्थभेद) किंवा अर्थाचा विशेष (अत्थविसेस) आहे. အန္တရံ မဇ္ဈဝထဉ္စ ခဏောကာသော’ပိ ဟေတုသု ဝျဝဓာနေ ဝိနာ စေထ ဘေဒေ ဆိဒ္ဒေ မနသျပီ’တိ အဘိဓာနသထေ ဝုတ္တံ. ‘अंतरं मज्झवथञ्च खणोकासोऽपि हेतुसु व्यवधाने विना चेथ भेदे छिद्दे मनस्यपि’ (अंतर हा शब्द मध्य, अर्थ, क्षण, अवकाश, हेतू, व्यवधान, विना, भेद, छिद्र आणि मन या अर्थांमध्ये वापरला जातो) असे अभिधानशास्त्रामध्ये (कोशग्रंथात) म्हटले आहे. သညာဝိမောက္ခောတိ သညာယ ဘာဝေန အာပတ္တိဘာဝတော ဝိမောက္ခော သညဝိမောက္ခော. သစိတ္တကာပတ္တီတိ အထော. ‘सञ्ञाविमोक्खो’ (संज्ञाविमोक्ष) म्हणजे संज्ञेच्या (जाणिवेच्या) अस्तित्वामुळे आपत्तीच्या (नियमभंगाच्या) भावापासून मुक्त होणे. याचा अर्थ सचित्तक आपत्ती (सचेतन मनाची आपत्ती) असा आहे. နော သညာဝိမောက္ခောတိ သညာယာဘာဝေန အာပတ္တိဘာဝတော နော ဝိမောက္ခော, နသညာဝိမောက္ခော, အစိတ္တကာပတ္တီတိ အထော. ‘नो सञ्ञाविमोक्खो’ (संज्ञाविमोक्ष नसणे) म्हणजे संज्ञेच्या (जाणिवेच्या) अभावामुळे आपत्तीच्या भावापासून मुक्त न होणे. याचा अर्थ अचित्तक आपत्ती (अचेतन मनाची आपत्ती) असा आहे. ပါပါဇာနပဉှော ဆဋ္ဌော. पापाजान-प्रश्न (पाप जाणण्याविषयीचा प्रश्न) सहावा. ဧတသ္မိဉ္စ မဟာရာဇ ပဉှေ’တိ ဧတသ္မိံ တယာ ပုစ္ဆိတပဉှေ. ‘एतस्मिञ्च महाराज पण्हे’ म्हणजे ‘हे महाराजा, आपण विचारलेल्या या प्रश्नात’. ဧကော အထော သာဝသေသော’တိ’တထာဂတဿ ခေါ အာနဒဧဝံ ဟောတီ’တိအာဒိဝစနဿ ဧကော အထော နရာမိသပရိဟရဏသင်္ခါတအထေန အဝသေသေန သာဝသေသော. ‘एको अत्थो सावसेसो’ (एक अर्थ अपूर्ण आहे) म्हणजे ‘हे आनंदा, तथागतांना असे वाटते’ इत्यादी वचनाचा एक अर्थ नरामिष-परिहार (मानवी आमिषाचा त्याग) नावाच्या अर्थाच्या अवशेषाने अपूर्ण आहे. ဂဏပရိဟရဏပဉှော သတ္တမော. गणपरिहरण-प्रश्न (संघाचे नेतृत्व/रक्षण करण्याविषयीचा प्रश्न) सातवा. ကတေန အာဒါနေန ဝါတိ ကတေန ဒေါသေန ဝါ. ‘कतेन आदानेन वा’ म्हणजे केलेल्या दोषाने. အဘေဇ္ဇပရိသပဉှော အဋ္ဌမော. अभिज्जपरिस-प्रश्न (अभेद्य परिषदेविषयीचा प्रश्न) आठवा. အဋ္ဌပဉှဝန္တော ဒုတိယဝဂ္ဂေါ. आठ प्रश्नांचा दुसरा वर्ग. သေဋ္ဌော ယမော’တိ ‘सेट्ठो यमो’ (श्रेष्ठ यम) म्हणजे... ‘ယံ ဒေဟသာဓနာပေက္ခံ နိစ္စကမ္မမယံ ယမောအာဂန္တုကသာဓနံ ကမ္မမနိစ္စံနိယမောဘဝေ’; ‘जे शरीराच्या साधनाची अपेक्षा ठेवणारे आणि नित्य कर्माने युक्त असते, तो यम होय. जे आगंतुक (नैमित्तिक) साधन आणि अनित्य कर्म असते, तो नियम होय.’ အဟိံသာ သစ္စမာဓေယျံ ဗြဟ္မစာရိ အပရိဂ္ဂဟောနိစ္စံ သရီရေ သာဓျတ္တာ ယမော နာမာတိ ဝုစ္စရေ’တိ; ‘अहिंसा, सत्य, अस्तेय (प्रामाणिकपणा), ब्रह्मचर्य आणि अपरिग्रह—शरीराद्वारे नित्य साध्य असल्यामुळे यांना यम म्हटले जाते.’ ဧဝံ ဝုတ္တော သေဋ္ဌော ယမော. अशा प्रकारे श्रेष्ठ यम सांगितला आहे. အဂ္ဂေါ နိယမော’တိ ‘अग्गो नियमो’ (उत्कृष्ट नियम) म्हणजे... သန္တောသ မောန-သဇ္ဈာယာ ကိစ္ဆာပရော စ ဘာဝနာ,သယမ္ပာကဝနဝါသာ နိယမာနိ စ သာဓယတော’တိ; ‘संतोष, मौन, स्वाध्याय, तपश्चर्या, भावना (ध्यान), स्वतः स्वयंपाक करणे आणि वनवास—हे नियम साध्य करणाऱ्याचे नियम आहेत.’ ဧဝံ ဝုတ္တော အဂ္ဂေါ နိယမော. अशा प्रकारे उत्कृष्ट नियम सांगितला आहे. တထ အဟိံသာ’တိ ဣမိနာ ကရုဏာ ဝုတ္တာ. သစ္စန္တိ ဝစီသစ္စဉာဏသစ္စပရမထသစ္စာနိ. အာဓေယျန္တိ အာဓေယျဝစနတာ ဗြဟ္မစာရီတိ မေထုနဝိရတိ. အပရိဂ္ဂဟောတိ မမ ဣဒန္တိ ပရိဂ္ဂဟိတတဏှာရဟိတဘာဝေါ ဝုတ္တော သန္တောသမောနသဇ္ဈာယာ’တိ ဒွါဒသဝိဓသန္တောသာ ပါပပ္ပဝါဟာ န ဗုဒ္ဓဝစန သဇ္ဈာယာ. ကိစ္ဆာပရောတိ ဣမိနာ ဓူတင်္ဂပရိဟရဏံ ဘာဝနာ’တိ ပရိကမ္မ ဘာဝနာဒယော တိဿော ဘာဝနာ. သယမ္ပာကဝနေ ဝါသာ’တိ ဧထ ဣမသ္မိံ သယမ္ပာကေဝနေ ဗုဒ္ဓသာသနေ သယမ္ပာကဝိရတိ ဂဟေတဗ္ဗာ. အာဒိအာကာရေနစာတိ. तसेच 'अहिंसा' याने करुणा म्हटली आहे. 'सच्च' (सत्य) म्हणजे वची-सत्य (वाणीचे सत्य), ज्ञान-सत्य आणि परमत्थ-सत्य (परमार्थ सत्य) होय. 'आधेय्य' म्हणजे आदरणीय वचन बोलणे. 'ब्रह्मचारी' म्हणजे मैथुनविरती (मैथुनापासून अलिप्तता). 'अपरिग्गहो' (अपरिग्रह) म्हणजे 'हे माझे आहे' अशा ग्रहण करण्याच्या तृष्णेपासून रहित असणे होय. 'संतोस-मोन-सज्झाय' (संतोष, मौन आणि स्वाध्याय) म्हणजे बारा प्रकारचा संतोष आणि पापांचा त्याग होय, बुद्धवचनाचा स्वाध्याय नव्हे. 'किच्छापरो' (कष्टाला तत्पर) याने धुतंगाचे परिपालन करणे आणि 'भावना' याने परिकम्म-भावना इत्यादी तीन प्रकारच्या भावना अभिप्रेत आहेत. 'सयम्पाकवने वासो' (स्वयंपाकवनात वास) यामध्ये या बुद्धशासनात स्वतः अन्न शिजवण्यापासून विरती (निवृत्ती) ग्रहण करावी. आणि 'आदि' या आकाराने (प्रकाराने) देखील. စာရော’တိ သေခိယ ဝဂ္ဂါနုရူပေနဂါမဝိဟာရေသု စာရော. 'चारो' (चार/आचरण) म्हणजे सेखिय वर्गाला अनुसरून गावांमधील आणि विहारांमधील आचरण होय. ဝိဟာရော’တိ သမဏသာရုပ္ပေရိယာပထဝိဟာရော စေဝ ဒိဗ္ဗဗြဟ္မအရိယဝသေန တိဝိဓဓမ္မဝိဟာရော စ. 'विहारो' (विहार) म्हणजे श्रमणाला योग्य अशा ईर्यापथातील विहार आणि दिव्य, ब्रह्म व आर्य या रूपाने तीन प्रकारचा धम्मविहार होय. သယံမော’တိ ဣဒြိယသံယမော. 'संयमो' (संयम) म्हणजे इंद्रियसंयम होय. သံဝရော’တိ ပါတိမောက္ခသံဝရော. 'संवरो' (संवर) म्हणजे पातिमोक्ख-संवर होय. ခန္တီ’တိ အဓိဝါသနခန္တိ ဉာဏခန္တိ. 'खंती' (क्षांती/सहनशीलता) म्हणजे अधिवासन-क्षांती आणि ज्ञान-क्षांती होय. သိက္ခာပဒါနံ ဥဒ္ဒေသော’တိ သိက္ခာပဒါနံ ပါဠိ. 'सिक्खापदानं उद्देसो' (शिक्षानियमांचा उद्देश) म्हणजे सिक्खापदांची पाळी (मूळ पाठ) होय. ဥဂ္ဂဟပရိပုစ္ဆာ’တိ သိက္ခာပဒါနံ အဋ္ဌကထာ ဥဂ္ဂဟဏံ 'उग्गहपरिपूच्छा' (ग्रहण व परिपृच्छा) म्हणजे सिक्खापदांच्या अट्ठकथांचे ग्रहण (शिकणे) होय. ကာသာဝဓာရဏံ ဘဏ္ဍုဘာဝေါ’တိ ဣမိနာ ဒွိလိင်္ဂသရူပံ ဒဿေတိ 'कासावधारणं भण्डुभावो' (काषाय वस्त्र धारण करणे आणि मुंडित होणे) याने दोन लिंगांचे (श्रमण चिन्हांचे) स्वरूप दर्शविले आहे. ဘဏ္ဍုဘာဝေါ ဒွင်္ဂုလကေသောဝါ နဝမုဏ္ဍော ဝါ’တိ အဓိပ္ပာယော ဘဝတိ ဟိ. 'भण्डुभावो' (मुंडित होणे) म्हणजे दोन बोटे केस असलेला किंवा नुकताच मुंडण केलेला, असा अभिप्राय आहे. ‘‘ယမော စ နိယမော စေဝ စာရော စဝိဟာရော တထာ,သံယမော သံဝရော စေဝ ခန္တီ စ သောရစ္စမ္ပိ စ; “यम आणि नियम, तसेच चार (आचरण) आणि विहार, संयम आणि संवर, तसेच क्षांती (सहनशीलता) आणि सोरच्च (सौजन्य/सुशीलता); ဧကန္တစရိယာ စေဝ ဧကတ္တာဘိရတာ’ပိ စ,ပဋိသလ္လာနသေဝနံ ဟိရိဩတပ္ပမေဝ စ; एकांतचर्या आणि एकांतात रममाण होणे, प्रतिसंलयन (ध्यान) सेवन करणे, आणि हिरी (लाज) व ओत्तप्प (भय) हेच; အပ္ပမာဒေါ စ ဝီရိယံ ဥဒ္ဒေသပရိပုစ္ဆာ တထာ,သီလာဒျဘိရတိ စေဝ နိရာလယသဘာဝတော; अप्प्रमाद (जागरूकता) आणि वीर्य (प्रयत्न), तसेच उद्देस (पाठ) व परिपुच्छा (प्रश्नोत्तर), शील इत्यादींमध्ये अभिरती आणि अनासक्त स्वभावामुळे; သိက္ခာပဒါဘိပူရဏမိတိ ဝီသပ္ပဘေဒေန,သမဏကရဏာ ဓမ္မာ နာဂသေနေန ဒေသိတာ; शिक्षानियमांची परिपूर्ती करणे, अशा वीस भेदांनी (प्रकारांनी) श्रमण बनवणारे धम्म नागसेनांनी देशित केले आहेत; ကာသာဝဓာရဏဉ္စေဝ ဘဏ္ဍုဘာဝေါ တထာ ဣတိ,ဒုဝေ သမဏလိင်္ဂါ’စ နာဂသေနေနဒေသိတာ’တိ; काषाय वस्त्र धारण करणे आणि मुंडित होणे, हे दोन श्रमण-लिंग (चिन्हे) देखील नागसेनांनी देशित केले आहेत.” သာမညံ ဥပဂတော’တိ ဝီသတိဓမ္မဒွိလိင်္ဂေဟိ သဒိသဘာဝင်္ဂတော. 'सामञ्ञं उपगतो' (श्रमणत्वाला प्राप्त झालेला) म्हणजे वीस धम्म आणि दोन लिंगांच्या (चिन्हांच्या) सादृश्याला प्राप्त झालेला. သော သာမညန္တိ သော သမဏဘာဝေါ. အဂ္ဂပရိသန္တိ ဘိက္ခုပရိသသင်္ခါတံ အဂ္ဂပရိသံ. 'सो सामञ्ञं' म्हणजे तो श्रमणभाव. 'अग्गपरिसं' म्हणजे भिक्खू-परिषदेला म्हटलेली श्रेष्ठ परिषद. သော မေ အာဂမော’တိ ဝီသတိဓမ္မဒွိလိင်္ဂါနံ မယှံ သတ္တာနေ သော အာဂမော နထိ. 'सो मे आगमो' म्हणजे त्या वीस धम्म आणि दोन लिंगांचा माझ्या संतानामध्ये (प्रवाहात) तो आगम (प्राप्ती) नाही. ပုထုဇ္ဇနပဉှော ပဌမော. पुथुज्जन-प्रश्न पहिला. ယေ တေ ဘဗ္ဗာ’တိ ယေ တေ သတ္တာ ဘဝျာ ယုတ္တာ 'ye te bhabbā' म्हणजे जे प्राणी भव्य (योग्य/पात्र) आहेत. မုခလောဟိတပဂ္ဃရဏပဉှော ဒုတိယော. मुखलोहितपग्घरण-प्रश्न (मुखातून रक्त वाहण्याचा प्रश्न) दुसरा. တပ္ပဋိဘာဂန္တိ တေန ဝထဂုယှေန သဒိသံ. 'तप्पटिभागं' म्हणजे त्या वत्थगुह्याशी (गुह्य भागाशी) सदृश. အနုသာသနိယံ အနုဝါသေတီတိ ဥပရိဘာဂေ ပဿာဝမဂ္ဂေ ဝထိကမ္မံဝုတ္တံ အာယုဗ္ဗေဒေ 'अनुसासनीयं अनुवासेति' म्हणजे वरच्या भागात मूत्रमार्गात वत्थिकम्म (बस्तीकर्म) करणे, जे आयुर्वेदात सांगितले आहे. ‘ဝမနံ ရေစနံ နသျံ နိရူဟ အနုဝါသနံဉေယျံ ပဉ္စဝိဓံ ကမ္မံ ဝိဓာနံ တဿ ဝုစ္စတေ’တိ; “वमन, रेचन, नस्य, निरूह आणि अनुवासन, हे पाच प्रकारचे कर्म (पंचकर्म) जाणावे, त्याचे विधान सांगितले जाते.” နိရူဟအနုဝါသနဝသေန ဟိ ဒုဝိဓံ ဝထိကမ္မံ. निरूह आणि अनुवासन या भेदाने वत्थिकम्म (बस्तीकर्म) दोन प्रकारचे असते. တထ နိရူဟဝထိကမ္မံ အဓောဘာဂေ ဝစ္စမဂ္ဂေ ကာတဗ္ဗံ. အနုဝါသနဝထိကမ္မံ ဥပရိဘာဂေ ပဿာဝမဂ္ဂေ ကာတဗ္ဗံ. ဝထိကမ္မံ ဥတ္တရဝထိကမ္မမ္ပိ ဣဒံ နာမဒွယံ တေသံယေဝ နာမန္တိ. တဿ ဋီကာ? त्यात निरूह-वत्थिकम्म खालच्या भागात मलमार्गात करावे. अनुवासन-वत्थिकम्म वरच्या भागात मूत्रमार्गात करावे. 'वत्थिकम्म' आणि 'उत्तरवत्थिकम्म' ही दोन नावे त्यांचीच नावे आहेत. त्याची टीका काय? ‘‘သမ္ဗာဓဿေဝ သာမန္တာ တထ ကမ္မံ ဒုဝင်္ဂုလံ,ဝါရိတံ ဝထိကမ္မမ္ပိ သမ္ဗာဓေယေဝ သတ္ထုနာ’’; “गुह्यभागाच्या सभोवताली तसेच दोन बोटे अंतरावर केलेले कर्म, आणि गुह्यभागातच केलेले वत्थिकम्म देखील शास्त्यांनी (बुद्धांनी) वर्ज्य केले आहे.” ဝထိကမ္မန္တိ တေလဘေသဇ္ဇာနံ ဝိဇ္ဈနဝသေနကတ္တဗ္ဗံ ဝထိကမ္မန္တိ ဝိနယဋီကာ. 'वत्थिकम्म' म्हणजे तेल आणि औषधांच्या पिचकारीने (इंजेक्शनने) करावयाचे वत्थिकम्म (बस्तीकर्म), अशी विनय-टीका आहे. ဂုယှပ္ပကာသနပဉှော တတိယော. गुय्हप्पकासन-प्रश्न (गुह्य प्रकटीकरणाचा प्रश्न) तिसरा. အသာရမ္ဘေနာတိ နိဒ္ဒေါသေန. 'असारंभेन' म्हणजे निर्दोष रीतीने. စတုသစ္စာဟိသမယော’တိ စတုန္နံ အရိယသစ္စာနံ ဉာဏေန အဘိသမယော. 'चतुसच्चाभिसमयो' म्हणजे चार आर्य सत्यांचा ज्ञानाने होणारा अभिसमय (साक्षात्कार). ပုရိသတ္တနန္တိ ပုရိသတ္တံ, သောယေဝ ဝါ ပါဌော. 'पुरिसत्तनं' म्हणजे पुरुषत्व, किंवा तोच पाठ आहे. အညံ ကယိရမာနံ အညေန သမ္ဘဝတီတိ အညံ လောကုတ္တရဖလံ အာရဗ္ဘ ဝိပဿနာ ကမ္မံ တေန ကယိရမာနံ အညေန လောကိယဖလေန သမ္ဘဝတိ, လောကိယဖလံ ဒေတီတိ အဓိပ္ပာယော. သဘာဝမ္ပီ’တိ သဘာဝေန ဝစနေန. 'अञ्ञं कयिरमानं अञ्ञेन सम्भवति' म्हणजे अन्य लोकोत्तर फलाला उद्देशून केलेले विपश्यना कर्म, त्या केल्या जाणाऱ्या कर्माने अन्य लौकिक फल संभवते (लौकिक फल देते), असा अभिप्राय आहे. 'सभावम्पि' म्हणजे स्वाभाविक वचनाने. ယော အက္ကောသန္တော’တိ ယော ပရံ အက္ကောသန္တော. 'यो अक्कोसंतो' म्हणजे जो दुसऱ्याला शिवीगाळ करतो (आक्रोश करतो). ကိရိယာယေဝ ကတာ’တိ ဒေါသဝန္တဿ ပုဂ္ဂလဿ ကိရိယာယယေဝ ကရဏေနယေဝ မောဃပုရိသဝစနကတာ’တိ. 'किरियायेव कता' म्हणजे दोषयुक्त पुद्गलाच्या (व्यक्तीच्या) क्रियेनेच, केवळ करण्यानेच 'मोघपुरुष' (व्यर्थ मनुष्य) असे वचन म्हटले गेले आहे. သဝဏေန…ပေ… ဇိဂုစ္ဆတီတိ ဘဂဝတော ဘဂဝန္တဿ သဝဏေန သာသနသဝဏေန. 'सवणेन...पे... जिगुच्छति' म्हणजे भगवंतांचे, भगवंतांच्या शासनाचे श्रवण केल्याने. ဩတ္တပ္ပတီ’တိ ဇိဂုစ္ဆတိ. 'ओत्तप्पति' म्हणजे संकोच वाटतो (किळस वाटते). ဘိယျောဒဿနေနာတိ ဘဂဝတော ဒဿနေန ဩတ္တပ္ပတိ ဇိဂုစ္ဆတိ. 'भिय्योदस्सनेन' म्हणजे भगवंतांच्या दर्शनाने संकोच वाटतो, किळस वाटते. မောဃပုရိသဝစနပဉှော စတုထော. मोघपुरिसवचन-प्रश्न (मोघपुरुष वचनाचा प्रश्न) चौथा. ‘‘အစေတနံ ဗြာဟ္မဏ အဿုဏန္တံဇာနံ အဇာနန္တမိမံ ပလာသံ,အာရဒ္ဓဝီရိယော ဓုဝမပ္ပမတ္တောသုခသေယျံ ပုစ္ဆသိ ကိဿဟေတု’’တိ; “हे ब्राह्मणा! अचेतन, न ऐकणाऱ्या, जाणत असूनही न जाणणाऱ्या या पळसाच्या झाडाला, तू वीर्य (प्रयत्न) आरंभून, नेहमी अप्रमत्त (जागरूक) राहून, कोणत्या कारणासाठी सुखाच्या शय्येविषयी विचारत आहेस?” ဣဒံ စတုက္ကနိပါတ္ဉာဂတံ ပလာသဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ. हे चतुक्कनिपातात आलेल्या पलासजातकाच्या संदर्भात म्हटले आहे. ဣတိ ဖဒန ရုက္ခေ’ပိ တာဝဒေ’တိ မိလိဒေ အာဂတံ. ဇာတကေ ပန अशा प्रकारे फदन वृक्षावरही... हे मिलिंदप्रश्नात आले आहे. परंतु जातकामध्ये तर - ‘‘ဣတိ ဖဒနရုက္ခေပိ ဒေဝတာ အဇ္ဈဘာသတ,မယှမ္ပိ ဝစနံ အထိ ဘာရဒွါဇ သုဏောဟိ မေ’’တိ; अशा प्रकारे फदन वृक्षावरील देवतेनेही म्हटले, 'हे भारद्वाज, माझेही काही सांगणे आहे, ते माझ्याकडून ऐकून घे.' အာဂတံ ဣဒဉ္စ တေရသနိပါတေ အာဂတံ ဖဒနဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ. हे जे आले आहे, ते तेरसनिपातात आलेल्या फदनजातकाच्या संदर्भात म्हटले आहे. ရုက္ခာစေတနပဉှော ပဉ္စမော. वृक्षांच्या अचेतनतेचा प्रश्न पाचवा. နဝန္နံ မဟာရာဇ အနုပုဗ္ဗဝိဟာရသမာပတ္တီနန္တိ အဋ္ဌရူပါဝစရသမာပတ္တိဧကနိရောဓသမာပတ္တိဝသေန နဝန္နံ အနုပုဗ္ဗဝိဟာရသမာပတ္တီနံ. နိဗ္ဗာနသုတ္တကထာယမ္ပန ဖလသမာပတ္တိသမတ္တာယ ပရိနိဗ္ဗာနသမတ္တာယ တေသံ ဒွိန္နံ ဒါယကာနံ အနုဿရဏေ သမတ္တာယာတိ တီဟိ ကာရဏေဟိဒွေ ပိဏ္ဍပါတာ သမဖလာ ဝုတ္တာ. हे महाराजा, 'नऊ अनुक्रमिक विहार समापत्तींचे' म्हणजे आठ रूपावचर समापत्ती आणि एक निरोध समापत्ती या रूपाने नऊ अनुक्रमिक विहार समापत्तींचे. परंतु, निब्बानसुत्त कथेमध्ये फलसमापत्तीच्या पूर्णतेमुळे, परिनिब्बानाच्या पूर्णतेमुळे आणि त्या दोन्ही दानशूर दात्यांच्या अनुस्मरणाच्या पूर्णतेमुळे, या तीन कारणांनी दोन्ही पिंडपात समान फळ देणारे सांगितले आहेत. ဒွိပိဏ္ဍပါတသမဖလပဉှော ဆဋ္ဌော. दोन पिंडपातांच्या समान फळाचा प्रश्न सहावा. ပူဇေထ နံ ပူဇနီယဿ ဓာတုံ ဧဝံ ကိရ ဘော သဂ္ဂမိတော ဂမိဿထာတိ ဣဒံအနေကဝဏ္ဏဝိမာနေ ဝုတ္တံ. 'पूजनीय व्यक्तीच्या धातूची (अस्थींची) पूजा करा, अशा प्रकारे हे महाशयांनो, तुम्ही येथून स्वर्गात जाल' - हे अनेकवण्णविमानात म्हटले आहे. ဗုဒ္ဓပူဇာပဉှော သတ္တမော. बुद्धपूजेचा प्रश्न सातवा. အနိမိတ္တကတသဒိသာ’တိ အသလ္လက္ခနကတသဒိသာ. 'अनिमित्त केल्यासारखे' म्हणजे लक्ष न देता केल्यासारखे. အပါသနပပဋိကပဉှော အဋ္ဌမော. अपासन-पपटिका (शिळेच्या तुकड्याचा) प्रश्न आठवा. ခီဏာသဝပဉှော နဝမော. खीणासव (क्षीणास्रव) प्रश्न नववा. ဥဗ္ဗိလာဝိတပဉှော ဒသမော. उब्बिलावित (उत्तेजित होण्याचा) प्रश्न दहावा. မာမကော’တိ မမ သန္တကော မမ သာဝကော. 'मामक' म्हणजे माझा स्वतःचा, माझा श्रावक. ကာရဏာ’တိ ပီဠနာ. 'कारणा' म्हणजे पीडा देणे. သန္နတိဝိကောပနန္တိ နာမရူပသန္တတိဝိနာသနံ ဓမ္မော ဟိ မဟာရာဇအဟိံသာလက္ခဏော’တိ သကလော ဟိ သဘာဝဝစနဓမ္မော အဟိံသာဝစနလက္ခဏော. ဥဒ္ဓတံ မဟာရာဇ စိတ္တံ နိဂ္ဂဟေတဗ္ဗန္တိ ယောဂါဝစရေဟိ ဥဒ္ဓတံ စိတ္တံ ပဿဒ္ဓိသမာဓိဥပေက္ခာသမ္ဗောဇ္ဈင်္ဂေဟိ နိဂ္ဂဟေတဗ္ဗံ ပဂ္ဂဟေတဗ္ဗန္တီ ပဂ္ဂဟဒဏ္ဍသဒိသေဟိ ဓမ္မဝိစယဝီရိယပီတိသမ္ဗောဇ္ဈင်္ဂေဟိ ပဂ္ဂဟေတဗ္ဗံ. သတိ ပန သဗ္ဗထ လီနုဒ္ဓစ္စေသုဣစ္ဆိတဗ္ဗာ? ‘‘သတိံ ခဝါဟံ ဘိက္ခဝေသဗ္ဗထိကံ ဝဒါမီ’’တိ ဝစနတော. 'सन्ततिविकोपन' म्हणजे नामरूप-संततीचा विनाश. 'हे महाराजा, धम्म हा अहिंसालक्षण आहे' कारण संपूर्ण स्वभाववचन धम्म हा अहिंसावचन लक्षण असलेला आहे. 'हे महाराजा, उद्धत (चंचल) चित्ताचा निग्रह करावा' म्हणजे योगावकरांनी (साधकांनी) उद्धत चित्ताचा निग्रह पस्सद्धि (प्रश्रब्धि), समाधी आणि उपेक्खा (उपेक्षा) या संबोध्यंगांद्वारे केला पाहिजे. 'प्रग्रह (उत्साहित) करावे' म्हणजे प्रग्रहदंडासारख्या धम्मविचय, वीरिय (वीर्य) आणि पीति (प्रीती) या संबोध्यंगांद्वारे प्रग्रह केला पाहिजे. परंतु, लीनता (आळस) आणि उद्धतता (चंचलता) या सर्व अवस्थांमध्ये सती (स्मृती) आवश्यक आहे का? 'भिक्खूंनो, मी सतीला सर्वोपयोगी म्हणतो' या वचनानुसार (ती आवश्यक आहे). သယင်္ကတေနသောဃာတီယတီတိ သော စောရော အတ္တနာ ကတေန ဒုစ္စရိတကမ္မေနကတ္တုဘုတေန ပရိဃာတီယတိ. 'तो स्वतः केलेल्या कर्माने मारला जातो' म्हणजे तो चोर स्वतः केलेल्या दुष्कृत्यरुपी कर्मामुळे नष्ट होतो. အပိ စ ဓမ္မာနုသထိ အနုသာသီယတီတိ ဧကံသေန ဘဂဝတော အနုသိဋ္ဌိ ပဏ္ဍိတဇနေ အပရာဓိကမနုဿေ အနုသာသယတိ ဓမ္မေန အနုဝဒါပေတိ.’ နိဂ္ဂဟေ နိဂ္ဂဟာရဟန္တိဝစနတော ဝဒတော ဘဂဝတော ဒေါသော နထိတိ အဓိပ္ပာယော’နိဂ္ဂဟေ နိဂ္ဂဟာရဟန္တိ’ ဣဒဉ္စ ဓမ္မေန နိဂဟနံ သဓာယ ဝုတ္တံ, န ပီဠနကမ္မံ သဓာယ ဝုတ္တန္တိ ဣဒံ ထေရေန ဝတ္တဗ္ဗံ ကသ္မာ နဝုတ္တန္တိ စေ ရညော ရုစိယာ အနနုကူလတ္တာ. ထေရော ဟိ ယထာ ရာဇာ ကင်္ခံ ဝိနယိဝါ ဓမ္မသဘာဝံ ဇာနာတိ တထာ ပဉှံ ဗျာကရောတီတိ. ဘဂဝတာ သင်္ခေပဝိထာရဒေသိတနယေန တထာ တထာ ဟိ ပဉှံ ပကာသေတိ. ဧသ ယထာ ယထာဿ သဒ္ဓမ္မတေဇဝိဟတဝိလယနခဏေန မိလိဒရာဇဟဒယေ ဝိမတိ ပယာတီတိ. शिवाय, 'धम्मानुशासनाने अनुशासित केले जाते' म्हणजे निश्चितपणे भगवंतांचे अनुशासन सुज्ञ लोकांना आणि अपराधी मनुष्यांना अनुशासित करते, धम्मानुसार वागायला लावते. 'निग्रहामध्ये जे निग्रहास पात्र आहेत' या वचनावरून, बोलणाऱ्या भगवंतांचा काही दोष नाही, असा अभिप्राय आहे. 'निग्रहामध्ये जे निग्रहास पात्र आहेत' हे धम्माच्या निग्रहाच्या संदर्भात म्हटले आहे, पीडा देण्याच्या कर्माच्या संदर्भात नाही. हे थेरांनी का सांगितले नाही? कारण ते राजाच्या आवडीला अनुकूल नव्हते. थेर तर अशा प्रकारे प्रश्नाचे स्पष्टीकरण करतात की जेणेकरून राजा आपली शंका दूर करून धम्मस्वभाव जाणून घेईल. भगवंतांनी संक्षेप आणि विस्ताराने उपदेशिलेल्या पद्धतीने ते त्या त्या प्रकारे प्रश्न स्पष्ट करतात. हे अशासाठी की, सद्धम्माच्या तेजाने शंकेचा नाश आणि विलय होऊन मिलिंद राजाच्या हृदयातील संभ्रम दूर व्हावा. နိဂ္ဂဟပဉှော ဧကာဒသမော. निग्रह प्रश्न अकरावा. ပဏာမေသီတိ ပဗ္ဗာဇေသိ. 'प्रणामेसि' (दूर केले) म्हणजे 'पब्बाजेसि' (प्रव्रजित केले/संघातून बाहेर काढले). အပ္ပတိဝတ္တိတော’တိ အပ္ပဟီဏော. 'अप्पटिवत्तितो' (न परतवलेला) म्हणजे 'अप्पहीणो' (न नष्ट केलेला). နိစ္ဆုဟတီတိ နီဟရတိ. 'निच्छुhति' (बाहेर टाकणे) म्हणजे 'नीहरति' (बाहेर काढणे). ထလံ ဥဿာဒေတီ’တိ ထလဋ္ဌာနေ ရာသိံ ကရောတိ. 'थलं उस्सादेति' (कोरड्या जमिनीवर ढीग करणे) म्हणजे कोरड्या जागेवर ढीग करणे. ပရိလီယတီ’တိ ပဋိလီယိတုံ အရဟတိ 'परिलीियति' म्हणजे मागे हटण्यास योग्य असणे. ပဏာမီယတီ’တိ ပဏမေတုံ ဝါ ပဗ္ဗာဇေတုံ ဝါ အရဟတိ. 'प्रणामीयति' (दूर केले जाणे) म्हणजे दूर करण्यास किंवा प्रव्रजित करण्यास योग्य असणे. ပဏာမနပဉှော ဒွါဒသမော. प्रणामन (निष्कासनाचा) प्रश्न बारावा. ဒွါဒသပဉှဝန္တတတိယဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. बारा प्रश्नांचा समावेश असलेल्या तिसऱ्या वर्गाची (वग्ग) वर्णना समाप्त झाली. ကမ္မာဓိဂ္ဂဟိတဿာတိ အဘိဘဝနီယမာနဿ. 'कम्माधिग्गहितस्स' (कर्माच्या प्रभावाखाली आलेल्याचे) म्हणजे 'अभिभवनीयमानस्स' (पराभूत होत असलेल्याचे). မောဂ္ဂလ္လာန နိဗ္ဗာနပဉှော ပဌမော. मोग्गल्लानांच्या (मुद्गल्यान) निब्बानाचा (निर्वाणाचा) प्रश्न पहिला. အထရသော’တိ ဖလံ ကထိတံ. 'अत्थरसो' (अर्थरस) म्हणजे फळ सांगितले आहे. ဓမ္မရသော’တိ ဟေတု. 'धम्मरसो' (धम्मरस) म्हणजे हेतू (कारण). ဝိမုတ္တိရသော’တိ နိဗ္ဗာနံ. 'विमुत्तिरसो' (विमुक्तीरस) म्हणजे निब्बान (निर्वाण). အညံ အာရာဓေတီတိ သမတ္တကာရီ ပရိပုဏ္ဏကာရီ အညံ အရဟတ္တဖလံ အာရာဓေတိ, အတ္တနော သန္တာနေ နိပ္ဖာဒေတိ. 'दुसऱ्याला प्राप्त करतो' (अञ्ञं आराधति) म्हणजे पूर्णपणे कार्य करणारा, परिपूर्ण कार्य करणारा दुसऱ्या अर्हतफलाला प्राप्त करतो, आपल्या स्वतःच्या संतानात (चित्तसंततीमध्ये) ते उत्पन्न करतो. သဝရပုရံ အနုဂတ’န္တိ မနုဿဇာနပဒပုရံ အနုပ္ပတ္တံ. 'सवरपुरं अनुगतं' (सवरपुराप्रत गेलेला) म्हणजे मानवी जनपदाच्या नगरात पोहोचलेला. ပါတိမောက္ခပိဟိတပဉှော ဒုတိယော. पातिमोक्ख (प्रातिमोक्ष) पिहित (गुप्त ठेवण्याचा) प्रश्न दुसरा. ဥစ္ဆိဇ္ဇတီ’တိ ယံ ယေန ကာရဏေန ဘိက္ခုဘာဝေါ ဥစ္ဆိဇ္ဇတိ. 'उच्छिज्जति' (नष्ट होते) म्हणजे ज्या कारणाने भिक्खूभाव नष्ट होतो. ဥဘတော ပက္ခေ’တိ မာတုပိတုပက္ခသင်္ခါတေ ဥဘတောပက္ခေ. 'उभतो पक्खे' (दोन्ही बाजूंनी) म्हणजे माता आणि पिता या दोन्ही पक्षांच्या बाजूने. မနုဿန္တရေနာ’တိ မနုဿသာနတ္တေန. ဆန္နဉှိ နာနတ္တံ အတိဝိယ နာနတ္တံ ဟောတိ. ဝုတ္တဉှေတံ ဝေဒသထေ- 'मनुस्सन्तरेण' (मनुष्यांमधील फरकाने) म्हणजे मानवी विविधतेने. कारण सहा प्रकारची विविधता ही अत्यंत मोठी विविधता असते. वेदशास्त्रातही असे म्हटले आहे - ‘‘ဝါဇီ ဝါ မရဏလောဟာနံ ကဋ္ဌပါသာဏဝါသသံ,နာရီပုရိသဂေါယာနံ အန္တရံ ဗဟုတန္တရန္တိ’’; 'घोडे, लोखंड (शस्त्रे), लाकूड, दगड, वस्त्रे, स्त्री, पुरुष आणि गायी यांच्यातील अंतर (फरक) खूप मोठे असते.' မုသာဝါဒတရပဉှော တတိယော. मुसावाद (असत्य बोलणे) याविषयीचा प्रश्न तिसरा. နိမေသန္တရမ္ပတိ စက္ခုနိမ္မိသနက္ခဏမ္ပိ. डोळ्यांची पापणी लवण्याच्या कालावधीइतका, अगदी डोळे मिटण्याच्या क्षणाएवढा सुद्धा. ဝါဏိဇော ဟထိနာဂေါ စ သာကဋိကော နိယာမကောဟိသက္ကော ဥတ္တရသေတု ဘိက္ခု စေဝ ဗောဓိသတ္တော,ဥတ္တရသေတု ပဋိပန္နကော ပုဂ္ဂလော; ဧတေ အနာဂတံ အဋ္ဌ ဇနာ ဝိလောကိယာ; ဝိက္ကယာနာဂတမဂ္ဂေါ တိထံ တီရမာယုထိရံအနာဂတံ ကုလမ္ပိ စ အဋ္ဌဋ္ဌာနာ ဝိလောကိယာ’တိ; व्यापारी, हत्ती, गाडीवान, नाविक, वैद्य, उत्तरसेतू (पूल), भिक्खू आणि बोधिसत्त, तसेच उत्तरसेतूवर चालणारा मनुष्य; हे आठ भविष्याकडे पाहणारे लोक आहेत. विक्री, येणारा मार्ग, घाट, काठ, आयुष्य, स्थिर, भविष्य आणि कूळ ही आठ स्थाने पाहण्याजोगी आहेत. ကုလဝိလောကနပဉှော စတုထော. कुळ-अवलोकन प्रश्न चौथा. ယထာဓမ္မော ကာရေတဗ္ဗောတိအာပတ္တိဓမ္မော ဝိနယေ တိဋ္ဌတိ. ယထာ တိဋ္ဌတိ, တထာ သော ဘိက္ခု သံဃေန ကာရေတဗ္ဗော, တထာ ဗောဓေတဗ္ဗော. "धम्मानुसार कारवाई करावी" म्हणजे विन्यामध्ये आपत्तीचा (चुकीचा) नियम जसा आहे, तसाच त्या भिक्खूवर संघाने धम्मानुसार उपचार (कारवाई) केला पाहिजे आणि त्याला समज दिले पाहिजे. အတ္တနိပါတနပဉှော ပဉ္စမော. आत्मपात (स्वतःला झोकून देणे) प्रश्न पाचवा. နေတေ မဟာရာဇ ဂုဏာ ပုဂ္ဂလဿာတိ ပုဂ္ဂလဿ ဧတေ ဂုဏာ ဧကာဒသာဒိသင်္ခါ န ဟောန္တိ. မေတ္တာ ဘာဝနာယ ဧဝ ဧတေ ဂုဏာ. မေတ္တာဝိဟာရိ ပုဂ္ဂလဿ သံဝိဇ္ဇန္တီတိ အဓိပ္ပာယော. "हे गुण, महाराज, पुद्गलाचे (व्यक्तीचे) नाहीत" म्हणजे व्यक्तीचे हे अकरा इत्यादी संख्येचे गुण नसतात. हे गुण मैत्री भावनेचेच आहेत. मैत्री विहार करणाऱ्या (मैत्री भावनेत राहणाऱ्या) व्यक्तीमध्ये ते आढळतात, असा याचा अभिप्राय आहे. ယဿာတိ ယဿ ဂုဏဿ ဟေတု. "ज्या" म्हणजे ज्या गुणाच्या कारणाने. အန္တရဓာနမူလန္နိတိ ပကတိသရီရဿ အန္တရဓာန-ဒိဗ္ဗဘေသဇ္ဇရုက္ခမူလံ. "अंतर्धान मूळ" म्हणजे नैसर्गिक शरीराला अंतर्धान (अदृश्य) करणारे दिव्य औषधी झाडाचे मूळ. အန္တရဓာနဿာ’တိ အန္တရဓာနကရဏဿ. "अंतर्धानाचा" म्हणजे अंतर्धान (अदृश्य) करण्याच्या. ယန္တိ ယေန ဂုဏေန. "यान्ति" म्हणजे ज्या गुणाने. မေတ္တံ သမာပန္တော’တိ အပ္ပဏာပ္ပတ္တံ မေတ္တံ သမာပန္နော. "मैत्री समापन्न" म्हणजे अर्पणावस्थेला (एकाग्रतेला) प्राप्त झालेल्या मैत्री भावनेत लीन झालेला. မေတ္တာဘာဝနာ ဟိတာနမ္ပိ အဟိတာနမ္ပီတိ ဟိတရဟိတာနမ္ပိ သတ္တေသု ဖရဏကမေတ္တာဘာဝနာ သဗ္ဗကုသလဂုဏာဝဟာ သဗ္ဗနိရဝဇ္ဇဂုဏာနိသံသာ’ဝ ဟောတိ. "हितकारक आणि अहितकारक यांच्याविषयी मैत्री भावना" म्हणजे हित नसलेल्या प्राण्यांवरही पसरवलेली मैत्री भावना सर्व कुशल गुणांना आणणारी आणि सर्व दोषरहित गुणांचे फायदे देणारीच असते. သဗ္ဗေသန္တိ သဗ္ဗေသု ဝိညာဏဗဒ္ဓေသု သတ္တေသု မဟာနိသံသာ မေတ္တာဘာဝနာ သမဖရဏဝသေန ပဏ္ဍိတေဟိ သံဝိဟဇိတဗ္ဗာ. "सर्वांचे" म्हणजे सर्व सचेतन (चेतनायुक्त) प्राण्यांमध्ये, विद्वानांनी समान रूपाने पसरवून महा-फायद्याच्या मैत्री भावनेचा विस्तार केला पाहिजे. သုဝဏ္ဏသာမမေတ္တာဝိဟာရပဉှော ဆဋ္ဌော. सुवर्णसाम मैत्रीविहार प्रश्न सहावा. နဋ္ဌာယိကော’တိ နဋ္ဌဓနော. "नठ्ठायिको" म्हणजे ज्याचे धन नष्ट झाले आहे असा. ယဒါ ဒေဝဒတ္တော သိဂါလော အဟောသိ ခတ္တိယဓမ္မော, သော ယာဝတာ ဇမ္ဗုဒီပေ ပဒေသရာဇာနော တေ သဗ္ဗေ အနုယုတ္တေ အကာသိ. တဒါ ဗောဓိသတ္တော ဝိဓုရော နာမ ပဏ္ဍိတော အဟောသီတိ ဣဒံ ဒုကနိပါတေ သဗ္ဗဒါဌဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ. जेव्हा देवदत्त क्षत्रिय स्वभावाचा कोल्हा होता, त्याने जम्बुद्वीपातील सर्व प्रादेशिक राजांना आपले अनुयायी बनवले होते. त्यावेळी बोधिसत्त 'विधुर' नावाचे पंडित होते; हे दुकनिपातातील 'सब्बदाठ जातक' लक्षात घेऊन सांगितले आहे. ယထာ ပဏိဟိတန္တိ ယထာ ဣစ္ဆိတံ, ယထာ ဌပိတံ ဝါ. "यथा प्रणिहित" म्हणजे जशी इच्छा केली होती, किंवा जसे स्थापित केले होते. ဗောဓိသတ္တာဓိကသမပဉှော သတ္တမော. बोधिसत्त अधिक-समानता प्रश्न सातवा. သပက္ခော’တိ သပရိဝါရော. "सपक्खो" (सपक्ष) म्हणजे परिवारासह (अनुयायांसह). မိတ္တသမ. နော’တိ အတ္တနာ သဟဇာတ-သဟဇနာဓိကေဟိ မိတ္တေဟိ သမန္နာဂတော. "मित्तसमनो" (मित्रसमान) म्हणजे स्वतःसोबत जन्मलेल्या किंवा स्वतःपेक्षा श्रेष्ठ मित्रांनी युक्त असलेला. အာယူဟကော’တိ ဓနပုညာနံ အာယူဟကော. "आयुहको" म्हणजे धन आणि पुण्याचा संग्रह करणारा. သင်္ဂါဟကော’တိ စတုဟိ ဒါနာဒိသင်္ဂဟဝထူဟိ စတုဟိ ဇနသင်္ဂါဟကေဟိ သင်္ဂါဟကော. "संग्राहक" म्हणजे दान इत्यादी चार संग्रहवस्तूंद्वारे आणि चार लोकसंग्राहक गुणांनी युक्त असलेला. သခိလော’တိ မဓုကဝစနော ဟဒယင်္ဂမကဏ္ဏသုခမဋ္ဌဝစနော. "सखिलो" (सौम्य) म्हणजे गोड बोलणारा, हृदयस्पर्शी, कानाला सुखद वाटणारे आणि मृदू बोलणारा. ဟိတေသီ ဥပနိဿိတာနန္တိ သတ္တာန နိဿာယ ဝသန္တာနံ ပုဂ္ဂလာနံ ဓနယသပညာသင်္ခါတဟိတဂဝေသနသီလော. "आश्रितांचे हितचिंतक" म्हणजे आपल्या आश्रयाने राहणाऱ्या प्राण्यांच्या (लोकांच्या) धन, यश आणि प्रज्ञा या रूपातील हिताचा शोध घेणारा स्वभाव असलेला. ဓနဝါ’တိ ထာဝရဇင်္ဂမသံဟာရိမအင်္ဂသမအနုဂါမိဓနသင်္တေဟိ ပဉ္စဓနေဟိ ဓနဝါ. "धनवान" म्हणजे स्थावर, जंगम, संहारिम (साठवण्याजोगे), अंगसम आणि अनुगामी या पाच प्रकारच्या धनांनी समृद्ध असलेला. အမရာဒေဝိနိမန္တနပဉှော အဋ္ဌမော. अमरादेवी निमंत्रण प्रश्न आठवा. ဩပတန္တီတိ ဥပဂစ္ဆန္တိ. "ओपतन्ति" म्हणजे जवळ येतात (किंवा प्राप्त होतात). အရဟန္တသဘာယနပဉှော နဝမော. अरहंत भयभीत होणे प्रश्न नववा. ဩကဿာ’တိ အာကဍ္ဎိဝါ ပါဂုပမေယျကဿ. (?) "ओकस्सा" म्हणजे ओढून किंवा मागे खेचून. သကျောပမာဟရဏပဉှော ဒသမော. शाक्य उपमाहरण प्रश्न दहावा. ဒသပဉှပဋိမဏ္ဍိတစတုထဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. दहा प्रश्नांनी सुशोभित असलेल्या चौथ्या वर्गाची वर्णना (टीका) समाप्त झाली. ဒွေ အထဝသေ’တိ ဒွေ အာနိသံသေ. "दोन अर्थवश" म्हणजे दोन फायदे (किंवा दोन शिफारसी/फळ). ဗျတ္တသင်္ကေတာ’တိ ပါကဋသင်္ကေတာ သုလဘဒဿနံ ဒဿနကာမာနန္တိ သီလဝန္တာနံ ဒဿနကာမာနံ ဥပါသကောပါသိကာနံ သုလဘဒဿနံ သုခေန လဘိတဗ္ဗံ သီလဝန္တဒဿနံ ဘဝိဿတိ. "व्यक्तसंकेत" म्हणजे स्पष्ट संकेत. "दर्शन इच्छिणाऱ्यांना सुलभ दर्शन" म्हणजे शीलवंतांचे दर्शन घेण्याची इच्छा असणाऱ्या उपासक-उपासिकांना शीलवंतांचे दर्शन सहजपणे आणि सुखाने प्राप्त होईल. အနိကေတပဉှော ပဌမော. अनिकेत (घर नसणे) प्रश्न पहिला. ဝန္တဿ…ပေ… အာတုရဿာ’တိ ဝန္တဿ ဝေဇ္ဇေန ဝမာပေတဗ္ဗဿ. "ओकलेल्याचे...पे... आजारी माणसाचे" म्हणजे वैद्याने ओकारी करविलेल्या माणसाचे. ဝိရိတ္တဿ အဓောဝိရစိတဿ. "विरीत्त" म्हणजे जुलाब करविलेल्याचे (खालच्या मार्गाने शुद्ध केलेल्याचे). အနုဝါသိတဿ ပဿာဝမဂ္ဂကတ္တဗ္ဗဿအနုဝါသကမ္မဿ, အာတုရဿ ဂိလာနပုဂ္ဂလဿ. "अनुवासित" म्हणजे बस्तीकर्म (एनिमा) केलेल्याचे, जे मूत्रमार्गाने किंवा गुदद्वाराने केले जाते; "आतुर" म्हणजे आजारी व्यक्तीचे. ဥဒရသံယတပဉှော ဒုတိယော. उदरसंयम (पोटावर ताबा ठेवणे) प्रश्न दुसरा. ဗာဟိရာနံ အာဂမာနန္တိ’တိ ပိဋကတ္တယတော ဗာဟိရာနံ. "बाह्य आगम" म्हणजे त्रिपिटकाबाहेरील ग्रंथ किंवा परंपरांचे. အနုတ္တရဘီသက္ကပဉှော တတိယော. अनुत्तर भिषक (सर्वश्रेष्ठ वैद्य) प्रश्न तिसरा. မဂ္ဂိယန္တိ ဂဝေသိတဗ္ဗံ. ‘मग्गियन्ति’ म्हणजे शोधले पाहिजे (गवेसितब्बं). တဿပကတန္တိ တေနအပရစက္ကဝတ္တိနာ ပကတံ. ‘तस्सपकतं’ म्हणजे ‘त्या दुसऱ्या चक्रवर्ती राजाने केलेले’. ယောနိယာ ဇနယိဝါ’တိ အတ္တနော ပဿာစမဂ္ဂဒွါရေန ဇနေဝါ. ‘योनिया जनयित्वा’ म्हणजे आपल्या स्वतःच्या मूत्रमार्गाच्या द्वाराने जन्म देऊन. အနုပ္ပန္နမဂ္ဂုပ္ပာဒနပဉှော စတုထော. अनुत्पन्न मार्गाच्या उत्पत्तीचा प्रश्न हा चौथा होय. ဝါဇပေယျန္တိ သပ္ပိအာဒိဝထုသင်္ခါတံ ဝါဇံ ပိဝန္တိ ဧထာတိ ဝါဇပေယျော, တံ ရာဂဝသေန ဝိသညိနာ’တိ ရာဂဗလေန ပကတိသ္ဉာရဟိတေန လောမသကဿပဗောဓိသတ္တေန. ‘वाजपेय्य’ म्हणजे ज्यामध्ये तूप इत्यादी वस्तूंनी युक्त असे ‘वाज’ पितात ते वाजपेय्य होय; ‘त्या रागाच्या वशतेमुळे अचेतन झालेल्याने’ म्हणजे रागाच्या प्रभावामुळे स्वाभाविक भान हरवून बसलेल्या लोमस्सकस्सप बोधिसत्त्वाने. ရတ္တော ရာဂဝသေနာ’တိ ပုတ္တာဒိသု ရတ္တော ပုတ္တာဒီနံ မင်္ဂလထာယ ရာဂဗလေန ပါဏံ ဟန္တိ. ဘဝတီ ဟ- ‘रत्तो’ म्हणजे ‘रागाच्या वशतेने’; पुत्रादींवर आसक्त असलेला पुत्रादींच्या कल्याणासाठी रागाच्या प्रभावाने प्राण्यांची हत्या करतो. असे म्हटले आहे की— ‘‘ရတ္တော ဒုဋ္ဌော စ မူဠှော စ မာနီ လုဒ္ဓေါ တထာ’လသော,ရာဇာ စ ဃာတကာ အဋ္ဌ နာဂသေနေန ဒေသိတာ; ’’ “आसक्त, द्वेषी, मूढ, मानी, लोभी, आळशी, राजा आणि घातक—हे आठ नागसेनांनी उपदेशिले आहेत;” ဩနမေယျာ’တိ ပါဏံ ဃာတေယျ. ‘ओनमेय्य’ म्हणजे प्राण्याची हत्या करावी. သသမုဒ္ဒပရိယာယန္တိ သသမုဒ္ဒပရိက္ခေပံ. ‘ससमुद्दपरियाय’ म्हणजे समुद्राने वेढलेले. လောမသကဿပပဉှော ပဉ္စမော. लोमस्सकस्सप प्रश्न हा पाचवा होय. ဇောတိပါလဆဒ္ဒန္တပဉှော ဆဋ္ဌော. जोतिपाल-छद्दन्त प्रश्न हा सहावा होय. ကဿပဗုဒ္ဓကုဋိကာဩဝဿနပဉှော သတ္တမော. कस्सप बुद्धांच्या कुटीच्या गळतीचा प्रश्न हा सातवा होय. ဗြာဟ္မဏရာဇပဉှော အဋ္ဌမော. ब्राह्मण-राजा प्रश्न हा आठवा होय. ဂါထာဘိဂီတပဉှော နဝမော. गाथा गायनाचा प्रश्न हा नववा होय. နောဓမ္မဒေသနစိတ္တနမနပဉှော ဒသမော. धम्मदेशनेकडे चित्त न वळण्याचा प्रश्न हा दहावा होय. ဒသပဉှပဋိမဏ္ဍိတပဉ္စမဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာ. दहा प्रश्नांनी सुशोभित अशा पाचव्या वर्गाचे वर्णन. ဩနောဇေဝါ’တိ ဥဒကံ ပါတေဝါ ‘ओनोजेत्वा’ म्हणजे पाणी ओतून. နမ္ဉာစရိယောအထိပဉှော ပဌမော. ‘माझा कोणी आचार्य नाही’ हा प्रश्न पहिला होय. သမုပါဒိကာ’တိ သာမံ ဥဒ္ဓံပထဝိံ ပဝတ္တီ’တိ သမုပါဒိကာ. ဥဒကဿ ဥပရိ သမဂမနံ နိဗ္ဗတ္တီတိ အထော. ‘समुपादिका’ म्हणजे जी स्वतः पृथ्वीवरून वर जाते ती समुपादिका होय. पाण्याचा वर एकत्र येणे किंवा उत्पन्न होणे असा याचा अर्थ आहे. ဒွိဗုဒ္ဓေါပ္ပဇ္ဇနပဉှော ဒုတိယော. दोन बुद्धांच्या उत्पत्तीचा प्रश्न हा दुसरा होय. မာရဗလနိသူဒနေ ဗုဒ္ဓေ’တိ မာရဗလနိမ္မဒ္ဒနသမထေ ဗုဒ္ဓေ. ‘मारबलाचा नाश करणाऱ्या बुद्धामध्ये’ म्हणजे माराच्या सैन्याचे दमन करण्यास समर्थ असणाऱ्या बुद्धामध्ये. ဧကော မနောပသာဒေါ ဗုဓသရဏဂမနစိတ္တုပ္ပာဒေါ. ‘एक मनःप्रसाद’ म्हणजे बुद्ध सरण जाण्याचा चित्तोत्पाद होय. အဉ္ဇလိပဏာမော အဉ္ဇလိပဏမနမတ္တေန ဝဒနာကာရော ‘अंजली प्रणाम’ म्हणजे केवळ हात जोडून वंदन करण्याचा प्रकार होय. ဥဿဟတေ တာရယိတုန္တိ အပါယဒုက္ခဝဓဒုက္ခတော တာရယိတုံ သက္ကောတိ. ‘तारून नेण्यास समर्थ होतो’ म्हणजे अपायदुःख आणि वधदुःखातून तारून नेण्यास समर्थ होतो. ဂေါတမီဒိန္နဝထပဉှော တတိယော. गौतमीने दिलेल्या वस्त्राचा प्रश्न हा तिसरा होय. အာရာဓကော ဟောတိ ဉာယံ ဓမ္မံ ကုသလန္တိ မဂ္ဂဖလနိဗ္ဗာနသင်္ခါတံ ဉာယံ ကုသလဓမ္မံ အာရာဓကော သမိဇ္ဈနကော ဟောတိ. ‘न्याय्य धम्म आणि कुशल धम्माचा आराधक होतो’ म्हणजे मार्ग, फल आणि निब्बाण संज्ञक अशा न्याय्य कुशल धम्माचा आराधक होतो. ပဗ္ဗဇ္ဇာနိရထပဉှော စတုထော. प्रव्रज्येच्या निरर्थकतेचा प्रश्न हा चौथा होय. ဒုက္ကရကိရိယာနိရထကပဉှော ပဉ္စမော. दुष्करचर्येच्या निरर्थकतेचा प्रश्न हा पाचवा होय. ဣဒမေထ ကာရဏန္တိ မနုဿာနံ ဣဒံ နိဋ္ဌာဝစနံ ဧထ အရိယမဂ္ဂအပါပုရဏပဗ္ဗဇနေ ကာရဏံ ဟောတီတိ ယောဇနာ. ‘येथे हेच कारण आहे’ हे मनुष्यांचे अंतिम वचन आहे; येथे आर्यमार्गाचे द्वार उघडणाऱ्या प्रव्रज्येचे हेच कारण आहे, असा संबंध जोडला पाहिजे. သယန္တိ သာသနဿ အတ္တနာ ဇိနသာသနဝိဗ္ဘန္တံ ပုဂ္ဂလံ ကိံ သောဓေဿတိ? ‘स्वतः’ म्हणजे जिनशासनातून भ्रष्ट झालेल्या व्यक्तीला तो स्वतः कसा शुद्ध करणार? နိဗ္ဗိသေသာ’တိသီလာဒိဂုဏဝိသေသရဟိတာ. ‘निब्बिसेसा’ म्हणजे शील इत्यादी गुणविशेषांनी रहित. အကတပုညာ’တိ ပုဗ္ဗဇိနသာသနေသု ပဗ္ဗဇ္ဇာပုညဿ အကရဏေန အကတပုညာ. ‘अकतपुञ्ञा’ म्हणजे पूर्व जिनशासनांमध्ये प्रव्रज्येचे पुण्य न केल्यामुळे पुण्यहीन राहिलेले. အဝေမူဠှာ ဇိနသာသနေ’တိ သီလာဒိဂုဏဝေမူဠှဘာဝံ ပါပုဏိတုံ အသမထာ. ‘जिनशासनात संभ्रमरहित’ म्हणजे शील इत्यादी गुणांच्या बाबतीत संभ्रमित अवस्था प्राप्त करण्यास असमर्थ. ဟီနာယဝတ္တနဒေါသပဉှော ဆဋ္ဌော. हीन जीवनाकडे परतण्याच्या दोषाचा प्रश्न हा सहावा होय. အရဟန္တကာယိကဒုက္ခဝေဒနာပဉှော သတ္တမော. अरहंतांच्या कायिक दुःखद वेदनेचा प्रश्न हा सातवा होय. ပါရာဇိကအဇ္ဈာနပဉှော အဋ္ဌမော. पाराजिक आणि ध्यानाचा प्रश्न हा आठवा होय. သံဃသမယံအနုပဝိဋ္ဌတာယာ’တိ သံဃသမယံ ပဝိဋ္ဌဘာဝေန. ‘संघसमयात प्रवेश केल्यामुळे’ म्हणजे संघाच्या समयात प्रवेश केलेल्या भावाने. ပဗ္ဗဇိတဂိဟီဒုဿီလပဉှော နဝမော. प्रव्रजित आणि गृहस्थाच्या दुःशीलेचा प्रश्न हा नववा होय. ဥဒကဇီဝပဉှော ဒသမော. पाण्यातील जीवाचा प्रश्न हा दहावा होय. ဒသပဉှဝန္တဆဋ္ဌဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. दहा प्रश्नांनी युक्त अशा सहाव्या वर्गाचे वर्णन समाप्त झाले. မဟာရဇက္ခာ’တိ ပညာမယေ အက္ခိမှိ မဟန္တာ ရာဂါဒိရဇာ ဧတေသန္တိ မဟာရဇက္ခာ အထ ဝါ အက္ခံ ယေသံ အတ္ထိတိ အက္ခာ. မဟန္တံ ရာဂါဒိရဇံ ဧတေသန္တိ မဟာရာဇာ. မဟာရဇာ စ တေ အက္ခာ စာ တ မဟာရဇက္ခာ. မဟာရဇာ ဧ မဟာရဇက္ခာ’တိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိယေဝ. ဣမသ္မိံ ပစ္ဆိမဝိကပ္ပေ အက္ခသဒ္ဒေါ နိရထော. 'महारजक्खा' म्हणजे प्रज्ञारूपी डोळ्यांमध्ये ज्यांच्या राग इत्यादींचा मोठा रज (मळ) आहे ते 'महारजक्खा' होत. किंवा ज्यांच्याकडे डोळे (अक्ख) आहेत ते 'अक्खा'. ज्यांच्यामध्ये राग इत्यादींचा मोठा रज आहे ते 'महाराजा'. आणि जे 'महाराजा' आणि 'अक्खा' आहेत ते 'महारजक्खा'. 'महारजा' ला 'महारजक्खा' असे म्हणणे देखील योग्यच आहे. या शेवटच्या विकल्पात 'अक्ख' हा शब्द निरर्थक आहे. နိပ္ပပဉ္စပဉှော ပဌမော. निप्पपंच प्रश्न पहिला. ဝိသမကောဋ္ဌဿာ’တိ ဝိသမအန္တဿ. 'विसमकोट्ठस्स' म्हणजे विषम कोठा (पचनसंस्था) असलेला. ဒုဗ္ဗလဂဟဏဿာ’တိ အပ္ပဒုဗ္ဗလန္တရဒေဟိဿ. 'दुब्बल गहणस्स' म्हणजे दुर्बळ अंतर्देह (पचनशक्ती) असलेला. ဂိဟီအရဟန္တပဉှော ဒုတိယော. गिही-अरहंत प्रश्न दुसरा. မဂ္ဂေါ ပိ တဿမဟိယာ အနညာတော’တိ မဟိယာ မဂ္ဂေါ တဿ အဒ္ဓိကဿ အရဟတော အနညာတော. 'त्या पृथ्वीवरील मार्गही त्याला अज्ञात आहे' म्हणजे त्या प्रवासी अरहंताला पृथ्वीवरील मार्ग अज्ञात आहे. အရဟန္တသတိသမ္မောသပဉှော တတိယော. अरहंत-स्मृतिभ्रंश (सतिसंमोस) प्रश्न तिसरा. တီဏိနထိပဉှော စတုထော. 'तीन गोष्टी नाहीत' (तीणि नत्थि) प्रश्न चौथा. နထိဓမ္မန္တိ အဝိဇဟနသဘာဝံ. 'नत्थिधम्म' म्हणजे न सोडण्याचा स्वभाव (अविजहनस्वभाव). အထိဓမ္မန္တိ ဝိဇဟနသဘာဝံ. 'अत्थिधम्म' म्हणजे सोडण्याचा स्वभाव (विजहनस्वभाव). အကမ္မဇပဉှော ပဉ္စမော. अकर्मज प्रश्न पाचवा. ဗီဇဇာတာနီ’တိ ဗီဇဝါသိယော. 'बीजजातानि' म्हणजे बीजामध्ये राहणारे (बीजवासी). ကမ္မဇပဉှော ဆဋ္ဌော. कर्मज प्रश्न सहावा. ယက္ခကုဏပပဉှော သတ္တမော. यक्ष-शव (यक्खकुणप) प्रश्न सातवा. အနာဂတေသုပညတ္တိသိက္ခာပဉှော နဝမော. अनागत काळातील प्रज्ञप्त शिक्षापद प्रश्न नववा. သူရိယတပနပဉှော ဒသမော. सूर्यताप प्रश्न दहावा. ဒသပဉှဝန္တသတ္တမဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. दहा प्रश्नांनी युक्त असलेल्या सातव्या वर्गाचे वर्णन समाप्त झाले. ပုနဒေဝ လတာယ ဗဓိဝါ အဒါသီ’တိ ဣဒံဇာတကေ န ပါကဋံ. ရညော ပရမ္ပရာဂတဝစနံ ဂဟေဝါ ဝုတ္တံ သိယာ. အပိ စ ဗောဓိသတ္တော အတ္တနော သန္တိကံ အာဂတေ ဗဓနာ အမုဉ္စိဝါ အဇ္ဈုပေက္ခိတော ပုနဒေဝ လတာယ ဗဓိဝါ အဒါသိ ဝိယ သညာယ ဝုတ္တံ သိယာ. 'पुन्हा वेलीने बांधून दिले' हे जातक कथेमध्ये स्पष्ट नाही. राजाच्या परंपरेने चालत आलेल्या वचनाला धरून हे म्हटले असावे. शिवाय, बोधिसत्त्वांनी आपल्याजवळ आलेल्यांना बंधनातून मुक्त न करता उपेक्षा केली, म्हणून 'पुन्हा वेलीने बांधून दिले' अशा समजुतीने हे म्हटले असावे. ရူဠရူဠဿ ဖရုသာတိဖရုသဿ ဘီမဘီမဿ ဇူဇကဿ ဗြာဟ္မဏဿ သဝဏေ ဝတ္တမာနော. अत्यंत कठोर, अतिशय क्रूर आणि भयानक अशा जुजक ब्राह्मणाच्या कानावर पडत असताना. ဒါရကေဒါရကဒွယေ ဗောဓိသတ္တဿ အဒဿနံ ဂမိတေ သတိ သော ဗောဓိသတ္တော သတဓာ ဝါ သဟဿဓာ ဝါ သောကဝသေန. दोन्ही बालकांना बोधिसत्त्वांच्या दृष्टीआड नेले असता, ते बोधिसत्त्व शोकामुळे शंभर किंवा हजार तुकड्यांत... ဟဒယံ န ဧလိ န ဖလေသိ ဣဒံ သတ္တမံ ဒုက္ကရတော ဒုက္ကရတရံ အဟောသီတိ ယောဇနာ. 'हृदय विदीर्ण झाले नाही किंवा फुटले नाही' - हा सातवा प्रसंग कठीणापेक्षाही अत्यंत कठीण होता, असा याचा संबंध (योजना) आहे. ဝေဿန္တရပုတ္တဒါရဒါနပဉှော ပဌမော. वेस्सन्तरांचे पुत्र आणि पत्नी दान करण्याचा प्रश्न पहिला. ဒုက္ကရကာရိပဉှော ဒုတိယော. दुष्करकार्य करण्याचा प्रश्न दुसरा. လောကိယံ ဘန္တေ နာဂသေန လောကုတ္တရေန ဝိညာပိတန္တိ လောကိကံ အထဇာတံ ဝိယ…ပေ…တယာ လောကုတ္တရေန အထဇာတေန ဝိညာပိတံ. "भन्ते नागसेन, लौकिक हे लोकोत्तराद्वारे स्पष्ट केले गेले आहे" म्हणजे लौकिक विषयाप्रमाणे... पे... लोकोत्तर अशा तुमच्याद्वारे उत्पन्न झालेल्या विषयाने स्पष्ट केले गेले आहे. ပါပဗလပဉှော တတိယော. पापबळ प्रश्न तिसरा. ပေတပါပုဏနကပုညပဉှော စတုထော. प्रेतांना पुण्य मिळण्याचा प्रश्न चौथा. ဒိဗ္ဗော အထော’တိ ဒိဗ္ဗသဒိသော စ ဧကန္တဒိဗ္ဗော စ အထော. 'दिव्य शब्द' (दिब्बो अत्थो) म्हणजे दिव्यासारखा आणि पूर्णपणे दिव्य असलेला शब्द. မိဒ္ဓသမာပန္နော’တိ ဘဝင်္ဂဝသေန နိဒ္ဒံ အာပန္နော. 'तंद्री लागलेला' (मिद्धसमापन्नो) म्हणजे भवांगाच्या प्रभावाने झोपेत गेलेला. ကပိမိဒ္ဓပရေတော’တိ ကပိနိဒ္ဒါယ သမန္နာဂတော. 'वानर-तंद्रीने युक्त' (कपिमिद्धपरेतो) म्हणजे वानरासारख्या झोपेने युक्त असलेला. ယော ကာယဿ ဩနာဟော’တိ နာမကာယဿ စ ရူပကာယဿ စ ဗဓနာကာရော. 'जो शरीराचा अवरोध (ओनाहो) आहे' म्हणजे नामकाय (मानसिक शरीर) आणि रूपकाय (भौतिक शरीर) या दोन्हीच्या बंधनाचा प्रकार. ပတိယောနာဟော’တိ ကမ္မံ ကာတုံ အသမထတာဝသေန သမန္တတော ဗဓနာကာရော. 'प्रति-अवरोध' (पतियोनाहो) म्हणजे कर्म करण्यास असमर्थ असल्यामुळे सर्व बाजूंनी बांधले जाण्याची अवस्था. ယော မဟာရာဇ ကပိနိဒ္ဒါပရေတော ဝေါကိဏ္ဏတာ ဇာဂရတီ’တိ ယာ ကပိနိဒ္ဒါယ ပိဠိတဿ ပုဂ္ဂလဿ နိဒ္ဒါ ဝေါကိဏ္ဏကံ ဇာဂရံ ဂတိယာ နိဒ္ဒါမိဿကဇာဂရပဝတ္တနံ. "महाराज, जो वानर-तंद्रीने युक्त असतो तो संमिश्र अवस्थेत जागतो" म्हणजे वानरासारख्या झोपेने पीडित असलेल्या व्यक्तीची झोप ही जागृतीशी संमिश्र असते, म्हणजेच झोप आणि जागृती यांचे संमिश्र चालू राहणे होय. သုပိနပဉှော ပဉ္စမော. स्वप्न प्रश्न पाचवा. အကာရဏမရဏပဉှော ဆဋ္ဌော. अकारण मृत्यू प्रश्न सहावा. ပရိနိဗ္ဗုတပါဋိဟာရိယပဉှော သတ္တမော. परिनिर्वृत प्रातिहार्य (परिनिब्बुतो पाटिहारिय) प्रश्न सातवा. ဦနသတ္တဝဿပဉှော အဋ္ဌမော. सात वर्षांपेक्षा कमी वय असलेला प्रश्न आठवा. သုခဒုက္ခမိဿနိဗ္ဗာနပဟော နဝမော. सुख-दुःख मिश्रित निर्वाण प्रश्न नववा. သဘာဝတော နထိ’တိ ကိဉ္စိ ဩပမ္မနိဒဿနမတ္တံ သဘာဝတော သရူပတော နထိ. ဂုဏတော ပန အနုပလိတ္တော ဒွိဂုဏတော ကိဉ္စိ ဩပမ္မနိဒဿနမတ္တံ သက္ကာ တုယှံ ဥပဒဿယိတုံ ပကာသေတုံ. 'स्वभावाने नाही' म्हणजे स्वभावाने किंवा स्वरूपाने कोणतेही उपमेचे उदाहरण नाही. परंतु गुणांच्या दृष्टीने, जसे की अलिप्त असणे इत्यादी गुणांमुळे, आपल्याला काही उपमेचे उदाहरण दाखवणे व स्पष्ट करणे शक्य आहे. ပဒုမံ ဥဒကံ နေဝ အဂဒံ သာဂရော တထာ कमळ, पाणी, औषध आणि त्याचप्रमाणे सागर. ဘောဇနံ အာကာသ-မဏိရတနဝဒနံ भोजन, आकाश आणि मणिरत्न-मुख. သပ္ပိမဏ္ဍော ဂိရိ ဝထူ ဒသူပမာ घृतमण्ड (तूप), पर्वत, वस्तू अशा दहा उपमा. ဧကဒွိတိစတ္တာရိ ပဉ္စကဒသကာ တီဏိ. एक, दोन, तीन, चार, पाच, दहा आणि तीन. ပုန တီဏိ ပုန တီဏိ ပဉ္စ ဂုဏာ ပဏ္ဍိတေဟိ ဝိဇာနိယာ पुन्हा तीन, पुन्हा तीन आणि पाच गुण पंडितांनी जाणावेत. တထ ပဒုမဿ ဥဒကေ အနုပလိတ္တဘာဝေါ ဧကော ဂုဏော နိဗ္ဗာနံ အနုပ္ပဝိဋ္ဌော. त्यात कमळाचा पाण्यात अलिप्त राहण्याचा एक गुण निब्बाणात समाविष्ट आहे. ဥဒကဿ သီတလတာ ပိပါသာဝိနယတာ’တိ ဒွေ ဂုဏာ. पाण्याचे शीतलता आणि तहान शमवणे हे दोन गुण आहेत. အဂဒဿ ပဋိသရဏတာ ရောဂအန္တကရဏတာ အမတတာ’တိ တယော ဂုဏာ. औषधाचे आश्रय असणे, रोगाचा अंत करणे आणि अमृतत्व हे तीन गुण आहेत. သမုဒ္ဒဿ ကုဏပသုညတာ သဝန္တီဟိ အပူရဏတာ မဟန္တဘူတာဝါသတာ အပရိမိတဝိစိတ္တပုပ္ဖသံကုသုမိတတာ’တိစတ္တာရော ဂုဏာ ဘောဇနဿ အာယုဓာရဏတာ ဗလဝဍ္ဎနတာ ဝဏ္ဏဇနနတာ ဒရထဝူပသမနတာ ဇိဂစ္ဆာဒုဗ္ဗလျပဋိဝိနောဒနတာ’တိ ပဉ္စဂုဏာ. အာကာသဿ အဇာယနတာ အဇီရဏတာ အမီယနတာ အစဝနတာ အနုပ္ပဇ္ဇနတာ ဒုပ္ပသဟတာ အစောရဟရဏတာ အနိဿိတတာ ဝိဟဂဂမနတာ နိရာဝရဏတာ အနန္တတာ’တိ ဒသ ဂုဏာ. समुद्राचे - प्रेत नसणे, नद्यांनी न भरणे, महाकाय प्राण्यांचे निवासस्थान असणे आणि अपरिमित विविध रत्नांनी सुशोभित असणे हे चार गुण; भोजनाचे - आयुष्य टिकवणे, बल वाढवणे, वर्ण निर्माण करणे, थकवा दूर करणे आणि भूक व दुर्बलता दूर करणे हे पाच गुण; आकाशाचे - उत्पन्न न होणे, जीर्ण न होणे, न मरणे, च्युत न होणे, पुनरुत्पन्न न होणे, पराभूत न करता येणे, चोरांनी न चोरता येणे, कशावरही आश्रित नसणे, पक्ष्यांच्या गमनाचा मार्ग असणे, अनावरण असणे आणि अनंत असणे हे दहा गुण आहेत. မဏိရတနဿ ကာမဒဒတာ ဟာသကာရဏတာ ဥဇ္ဇောတထကရဏတာ’တိ တယော ဂုဏာ. मणिरत्नाचे - इच्छा पूर्ण करणे, आनंदाचे कारण असणे आणि प्रकाश निर्माण करणे हे तीन गुण आहेत. လောဟိတစဒနဿ ဒုလ္လဘတာ အသမဂဓတာ သုဇနပ္ပသထတာတိ တယော ဂုဏာ. रक्तचंदनाचे - दुर्मिळ असणे, अतुलनीय सुगंध असणे आणि सज्जनांद्वारे प्रशंसित असणे हे तीन गुण आहेत. သပ္ပိမဏ္ဍဿ ဝဏ္ဏသမ္ပန္နတာ ဂဓသမ္ပန္နတာ ရသသမ္ပန္နတာ’တိ တယော ဂုဏာ. घृतमंडाचे (तुपाचे) - वर्णसंपन्नता (उत्कृष्ट रंग), गंधसंपन्नता (उत्कृष्ट सुवास) आणि रससंपन्नता (उत्कृष्ट चव) हे तीन गुण आहेत. ဂိရိသိခရဿ အစ္စုဂ္ဂတတာ အစလတာ ဒုရဘိရောဟတာ ဗီဇာရူဟဏတာ အနုနယပဋိဃဝိပ္ပမုတ္တတာ’တီ ပဉ္စဂုဏာ နဗ္ဗာနံ အနုပ္ပဝိဋ္ဌာ’တိ. पर्वतशिखराचे - अत्यंत उंच असणे, अचल असणे, चढण्यास कठीण असणे, बी न रुजणे आणि अनुनय (राग) व प्रतिघ (द्वेष) यांपासून मुक्त असणे हे पाच गुण निब्बाणात समाविष्ट आहेत. နိဗ္ဗာနာနုပ္ပဝိဋ္ဌဂုဏပဉှော ဒသမော. निब्बाणात समाविष्ट असलेल्या गुणांविषयीचा प्रश्न - दहावा. ဧထေဝါကိရာ’တိ ဧထ ဧဝ တယာ သိက္ခိတေ နိဗ္ဗာနေ အာကိရာဟီ’တိ အဘိကရောဟိ ဝါ အယမေဝ ဝါ ပါဌော. 'एथेवाकिरा' म्हणजे येथेच तुझ्याद्वारे शिकलेल्या निब्बाणात विखुरणे (किंवा ओतणे) किंवा 'अभिकरोहि' (कर) असाच हा पाठ आहे. အနီတိတော’တိ အနီတိဘာဝတော နိဗ္ဗာနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. သေသေသု’ပိ ဧသေဝ နယော. 'अनीतीतो' म्हणजे उपद्रवरहित भावाने निब्बान पाहावे. उर्वरित बाबतीतही हाच नियम लावावा. ကုဟီယတီ’တ ဝိမ္ဘယစိတ္တော ဟောတိ. 'कुहीयती' म्हणजे विस्मित चित्त होणे. နိဗ္ဗာနသစ္ဆိကရဏပဉှော ဒွါဒသမော. निब्बान साक्षात्काराचा प्रश्न - बारावा. ဒွါဒသပဉှဝန္တအဋ္ဌမဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. बारा प्रश्नांनी युक्त असलेल्या आठव्या वर्गाची वर्णना समाप्त झाली. မေဏ္ဍကပဉှေ အဌမဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. मेंडकप्रश्नातील आठव्या वर्गाची वर्णना समाप्त झाली. အနုမာနပဉှော. अनुमान प्रश्न. ကမ္မမူလံ ဂဟေဝါနာ’တိ ပုဗ္ဗဗုဒ္ဓါနံသန္တိကေ ကတကုသလမူလံ ဂဟေဝါ. 'कम्ममूलं गहेवाना' म्हणजे पूर्व बुद्धांच्या सन्निध केलेले कुशलमूळ ग्रहण करून. တတော မုစ္စထ ဝိမုတ္တိယာ’တိ တတော တေန အာရမ္မဏကိဏနေန ဒသ သညာဘာဝနာနုယောဂေန ဝိမုတ္တိယာ သမုစ္ဆေဒဝိမုတ္တိယာ ဝဋ္ဋဒုက္ခတော မုစ္စထ. 'ततो मुच्चथ विमुत्तिया' म्हणजे त्या आलंबनाच्या चिंतनाने आणि दहा संज्ञांच्या भावनेच्या अभ्यासाने विमुक्तीद्वारे (समुच्छेद विमुक्तीद्वारे) संसारदुःखातून मुक्त व्हावे. အနိဝါယန္တီ’တိ အပ္ပဋိဝါတာ ဟုဝါ ဝါယန္တိ. 'अनिवायन्ती' म्हणजे अनुकूल वारा होऊन वाहतात. သရဏသီလန္တိ သရဏဂမနံ ဂဟေဝါ ဂဟေတဗ္ဗံ ပဉ္စသီလံ. 'शरणशील' म्हणजे शरणगमन स्वीकारून ग्रहण करावयाचे पंचशील. ပဉ္စုဒ္ဒေသပရိယာပန္နန္တိ နိဒါနုဒ္ဒေသ-ပရာဇိကုဒ္ဒေသ-သံဃာဒိသေသုဒ္ဒေသ-အနိယတုဒ္ဒေသ သင်္ခါတံ ပဉ္စုဒ္ဒေသပရိယာပန္နံ. 'पंचउद्देशपर्यापन्न' म्हणजे निदान-उद्देश, पराजिक-उद्देश, संघादिसेस-उद्देश, अनियत-उद्देश या संज्ञेने युक्त असलेले पाच उद्देशांमध्ये समाविष्ट असलेले. ပါတိမောက္ခသံဝရသီလန္တိ သတ္တဝီသာဓိကဒွိသတပါတိမောက္ခသံဝရသီလံ. 'पातिमोक्खसंवरसील' म्हणजे दोनशे सत्तावीस (२२७) नियमांनी युक्त असलेले प्रातिमोक्षसंवरशील. ဥပါဒါယုပါဒါယ ဝိမုတ္တာနန္တိ တဏှာဒိဋ္ဌိသင်္ခါတောပယေ ဥပါဒါယုပါဒါယ ဝိမုတ္တာနံ သောတာပန္နသကဒါဂါမိအနာဂါမီနံ 'उपादायोपादाय विमुत्तानं' म्हणजे तृष्णा आणि दृष्टी या उपादानांचा अवलंब करून मुक्त झालेल्या सोतापन्न, सकदागामी आणि अनागामींचे. ဂေဟဇနော’တိ ဒါသကမ္မကရာဒိကော ဂေဟေ ဌိတဇနော. 'गेहजन' म्हणजे दास, कामगार इत्यादी घरात राहणारे लोक. တထာ ဗုဒ္ဓံ သောကနုဒံ…ပေ… ဥမ္မ ဒိသွာ သဒေဝကေ’တိ ဧထ တထာ ဧဝ ဥမ္မိံ ဒိသွာ မဟန္တံ ဓမ္မ္ौမ္မိံ ဉာဏစက္ခုနာ ဒိသွာ ဗုဒ္ဓံ သောကနုဒံ အနုမာနေန အနုမာနဉာဏေန ကာတဗ္ဗံ ဉာတဗ္ဗံ. သဒေဝကေလောကေ ယထာ ဓမ္မော ဥမ္မိဝိပ္ဖာရော တထာ သဒေဝကေ လောကေဗုဒ္ဓေါ အဂ္ဂေါ ဘဝိဿတီ’တိ အနုမာနေန ဉာတဗ္ဗန္တိ ယောဇနာ. 'तथा बुद्धं सोकनुदं...पे... उम्मिं दिस्वा सदेवके' यामध्ये, त्याचप्रमाणे लाट पाहून, ज्ञानचक्षूने मोठी धम्म-लाट पाहून, शोक दूर करणाऱ्या बुद्धांना अनुमानाने (अनुमान ज्ञानाने) जाणावे. सदेवक लोकात जसा धम्माचा लाटांसारखा विस्तार आहे, तसेच सदेवक लोकात बुद्ध सर्वश्रेष्ठ असतील, हे अनुमानाने जाणावे, अशी ही योजना आहे. မိဂရာဇဿာ’တိ စတုပ္ပာဒါနံ မဟန္တဘာဝေန မိဂရာဇဿ ဟထိနော. 'मिगराजस्स' म्हणजे चौपायांमध्ये मोठेपणा असल्यामुळे प्राण्यांचा राजा असलेल्या हत्तीचे. ပဒန္တိ ဓမ္မပဒံ. 'पद' म्हणजे धम्मपद. ဓမ္မရာဇေန ဂဇ္ဇိတန္တိ ဗုဒ္ဓသီဟနာဒဝစနံ ဓမ္မရာဇေန ကထိတံ. 'धम्मराजेन गज्जितं' म्हणजे धम्मराजांनी (बुद्धांनी) गर्जलेले बुद्धसिंहनादाचे वचन. အနုမာနေန ဉာတဗ္ဗံ ဗုဒ္ဓေါ စ မဟန္တော ဗုဒ္ဓသီဟနာဒေါ စ မဟန္တော’တိ ဝိညာတဗ္ဗံ. अनुमानाने जाणावे की, बुद्धही महान आहेत आणि बुद्धांचा सिंहनादही महान आहे, असे समजावे. လဂ္ဂံ ဒိသွာ ဘုသံ ပင်္ကံ ကလလဒ္ဒံ ဂတံ မဟိန္တိ လဂ္ဂံ လဂ္ဂါပနသမထံ မဟန္တံ ပင်္ကဉ္စ ဒိသွာ ကလလဒါယကံ ဥဒကဉ္စ ဂတံ မဟိံ မဟိယာ ဂတံ ပဝိဋ္ဌံ ဒိသွာ ပဏ္ဍိတာ မဟာဝါရိက္ခဓော ဂတော ပဝတ္တော’တိ အနုမာနေန ဇာနန္တိ. 'लग्गं दिस्वा भुसं पंकं कललद्दं गतं महिं' म्हणजे चिखलात अडकण्यास कारणीभूत असणारा मोठा चिखल पाहून आणि चिखल निर्माण करणारे पाणी पृथ्वीवर पसरलेले पाहून, पंडित लोक अनुमानाने जाणतात की मोठा पाण्याचा प्रवाह वाहून गेला आहे. ဇနန္တိ သာဓုဇနသမုဟံ. 'जन' म्हणजे साधू लोकांचा (सज्जनांचा) समूह. ရဇပင်္ကသမောဟိတန္တိ ရာဂါဒိရဇသင်္ခါတပင်္ကေဟိ အဇ္ဈောထဋံ ပရိယောနဒ္ဓံ. 'रजपंकसमोहितं' म्हणजे रागादी रज रूपी चिखलाने व्यापलेले आणि वेढलेले. ဝဟိတံ ဓမ္မနဒ္ဓိယာ’တိ ပရိယတ္တိပဋိပတ္တိဓမ္မနဒ္ဓိယာ ဝဟိတံ. 'वहितं धम्मनद्धिया' म्हणजे परियत्ती आणि पटिपत्ती रूपी धम्म-नौकेने वाहून नेलेले. ဝိဿဋ္ဌံ ဓမ္မသာဂရေ’တိ နိဗ္ဗာနသင်္ခါတေ မဟာသမုဒ္ဒေ ဓမ္မနဒ္ဓိယာ ဝိဿဋ္ဌံ ဝိဿဇ္ဇိတံ ပဝေသိတံ. 'विस्सट्ठं धम्मसागरे' म्हणजे निब्बान रूपी महासागरात धम्म-नौकेद्वारे सोडलेले किंवा प्रवेश करवलेले. ဓမ္မာမတဂတံ ဓမ္မာမတေ ပဝတ္တံ သဒေဝကံ သဗြဟ္မကံ ဣံ မဟိံ မဟိယာ ဌိတံ ဣမံ သာဓုဇနသမူဟံ. 'धम्मामतगतं' म्हणजे धम्म-अमृतात प्रवृत्त झालेल्या, देव आणि ब्रह्मासहित या पृथ्वीवर स्थित असलेल्या या साधू लोकांच्या समूहाला. ဒိသွာ ဉာဏစက္ခုနာ ပဿိဝါ. 'दिस्वा' म्हणजे ज्ञानचक्षूने पाहून. ဓမ္မက္ခဓော မဟာ’ဂတော’တိ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓစရဏသင်္ခါတော စတုရာသီတိယာ ဓမ္မက္ခဓသဟဿာနံ ဒေသိတတ္တာ မဟာဓမ္မက္ခဓောအာဂတော ပဝတ္တော’တိ အနုမာနဉာဏေန ဉာတဗ္ဗန္တိ ယောဇနာ. 'धम्मक्खन्धो महा गतो' म्हणजे सम्यक्संबुद्धांच्या चरित्रात समाविष्ट असलेल्या चौऱ्याऐंशी हजार (८४,०००) धम्मस्कंधांच्या देशनेमुळे 'महान धम्मस्कंध आला आहे (प्रवृत्त झाला आहे)' असे अनुमान ज्ञानाने जाणावे, अशी ही योजना आहे. အနုမာနပဉှော ဧကာဒသမော. (ဓုတင်္ဂကထာ) अनुमानपञ्ह अकरावा. (धुतङ्गकथा) ကတမေန တေ ပရိယာယေန အနုယောဂံ တေ ဒမ္မိ’တိ အနုယောဂံ ဝံ ပုစ္ဆိ အဟံ ဗျာကရိဿာမိ. အနုယောဂဝစနံ တေ တဝ ကတမေန ကာရဏေန ဒမ္မိ. मी तुम्हाला कोणत्या पर्यायाने (पद्धतीने) प्रश्न विचारू? असे विचारल्यावर, 'तुम्ही प्रश्न विचारा, मी त्याचे उत्तर देईन.' मी तुम्हाला कोणत्या कारणाने प्रश्न विचारू? ဝမေဝေတံ ဗြူဟီတိ ရာဇဝစနံ ဘန္တေ နာဂသေန ဝမေဝ ပရိယာယံ ဗြူဟိ. राजे म्हणाले, 'भन्ते नागसेन, तुम्ही त्याच पद्धतीने सांगा.' တေနဟီ’တိ တသ္မာ တဝ သောတုကာမတာယ သတေန ဝါ…ပေ…ကောဋိသတသဟဿေန ဝါ ပရိယာယံ တေ ကထယိဿာမီတိ ယောဇနာ. 'तर मग' यावरून, 'तुमच्या ऐकण्याच्या इच्छेमुळे मी शंभर किंवा... पे... एक लाख कोटी पर्यायांनी (पद्धतींनी) तुम्हाला सांगेन' अशी योजना आहे. ယာ ကာစိ ကထာ’တိ သမ္ဗဓောဣဓာ’တိ ဣမသ္မိံ ဓုတင်္ဂဝရဂုဏေ,အဘိဝုဋ္ဌန္တိ ဝဿောဒကေနအဘိဝုဋ္ဌံသမ္ပာဒကေ သတီတိ ပဋိပါဒကေ ပုဂ္ဂလေ သတိ. 'जी काही कथा' हा संबंध आहे. 'येथे' म्हणजे या श्रेष्ठ धुतङ्गगुणामध्ये. 'पावसाच्या पाण्याने वर्षाव होतो' म्हणजे वर्षाव झालेला. 'संपादक असताना' म्हणजे प्रतिपादन करणारा (आचरण करणारा) पुद्गल (व्यक्ति) असताना. မယှံ ပုဋ္ဌော’တိ ဣမသ္မိံ ဓူတင်္ဂဝရဂုဏေ ပရိဗျတ္တတာယ ဆေကတာယ ပါကဋာယ ဗုဒ္ဓိယာ ယုတ္တကာရဏပရိဒီပနံ သမောသရိဿတီတိ. 'मला विचारले असता' म्हणजे या श्रेष्ठ धुतङ्गगुणामध्ये स्पष्टतेने, निपुणतेने आणि प्रकट बुद्धीने युक्त कारणांचे स्पष्टीकरण एकत्र येईल. ဝိဇဋိတကိလေသဇာလဝထူ’တိ တံ ကိလေန သမုဟပဉ္စက္ခဓဝထု. 'क्लेशजालाचे जाळे नष्ट करणारी वस्तू' म्हणजे क्लेशांनी युक्त असलेला पंचस्कंध रूपी आधार. ဘိန္နဘဂ္ဂသင်္ကုဋိတသဉ္ဆန္နဂတိနိဝါရဏော’တိ အရဟတ္တမဂ္ဂဖလေန ဘိန္နဘဂ္ဂသင်္ကုဋိတသဉ္ဆိန္နဂတိနိဝါရဏော. 'भिन्न, भग्न, संकुचित आणि आच्छादित गतीचे निवारण करणारे' म्हणजे अर्हत् मार्ग आणि फलाद्वारे भिन्न, भग्न, संकुचित आणि छिन्न झालेल्या गतीचे निवारण करणारे. အဘိနီတဝါသော’တိ အဘိပုညကာမေဟိ အဘိပထိတဝါသော အဘိနီတ္ैရိယာပထဝါသော ဝါ. 'अभिनीतवास' म्हणजे पुण्याची इच्छा करणाऱ्यांनी इच्छिलेला वास किंवा नियंत्रित इरियापथ (चर्या) असलेला वास. ဝိမုတ္တိဇ္ဈာယိတတ္တော’တိ အရဟတ္တဖလဇ္ဈာနသမ္ပယုတ္တစိတ္တော အစလဒဠှဘီရုတ္တာဏဋ္ဌာနံ အာရမ္မဏကရဏဝသေန ဥပဂတော. 'विमुक्ति-ध्यायी आत्मा' म्हणजे अर्हत् फल आणि ध्यानाने युक्त चित्त असलेला, जो अचल, दृढ आणि भयरहित अशा शरणस्थानाला आलंबन बनवून प्राप्त झाला आहे. ဓူတင်္ဂပဉှကထာသင်္ခါတယောဂိကထာ သမတ္တာ. धुतङ्गप्रश्नकथा नावाची योगीकथा समाप्त झाली. စတုရာသီတိပဉှပဋိမဏ္ဍိတမေဏ္ဍကပဉှဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. चौऱ्याऐंशी प्रश्नांनी सुशोभित असलेली मेण्डकप्रश्न-वर्णना समाप्त झाली. မိလိဒပဉှမေဏ္ဍကပဉှေသု သဗ္ဗေ ပဉှာ သမ္ပိဏ္ဍိတာ ပဉ္စသတ္တာဓိကသတပဉှာ ဟောန္တိ. အင်္ဂဂဟဏကထာယ ပန နာဓိကသတမာတိကာသု သတ္တသဋ္ဌိမာတိကာ နိဒ္ဒေသဝသေနအဝိဿဇ္ဇိတာ. သေသာ’ ရညော စတ္တာရိ အင်္ဂါနိ ဂဟေတဗ္ဗာနီ’တိအာဒိကာ ဧကူနစတ္တာဠီသ မာတိကာ နိဒ္ဒေသဝသေန အဝိဿဇ္ဇိတာ ယထ ပေါထကေသု ဒိဿန္တိ တတော ဂဟေတဗ္ဗာ ယေဝါ’တိ. मिलिन्दप्रश्नातील मेण्डकप्रश्नांमध्ये सर्व प्रश्न मिळून एकशे पंच्याहत्तर (१७५) प्रश्न होतात. परंतु, अंगग्रहणकथेमध्ये शंभरहून अधिक मातृकांपैकी सदुसष्ट (६७) मातृका निर्देशानुसार अनुत्तरित राहिल्या आहेत. उर्वरित 'राजाने चार अंगे ग्रहण करावीत' इत्यादी एकोणचाळीस (३९) मातृका निर्देशानुसार अनुत्तरित राहिल्या आहेत, ज्या पुस्तकांमध्ये दिसतात त्यावरूनच त्या ग्रहण कराव्यात. စတဿော ဓမ္မဒေသနာယော; ဓမ္မာဓိဋ္ဌာနာ ဓမ္မဒေသနာ, ဓမ္မာဓိဋ္ဌာနာ ပုဂ္ဂလဒေသနာ, ပုဂ္ဂလာဓိဋ္ဌာနာ ဓမ္မဒေသနာ, ပုဂ္ဂလာဓိဋ္ဌာနာ ပုဂ္ဂလဒေသနာ’တိ. တာသု ပုရိမာ တိဿော ဓမ္မဒေသနာ ဣဓ ဂထေ လဗ္ဘန္တိ, စတုထော န လဗ္ဘတိ. चार धर्मदेशना आहेत: धर्माधिष्ठित धर्मदेशना, धर्माधिष्ठित पुद्गलदेशना, पुद्गलाधिष्ठित धर्मदेशना आणि पुद्गलाधिष्ठित पुद्गलदेशना. त्यांपैकी पहिल्या तीन धर्मदेशना येथे ग्रंथात आढळतात, चौथी आढळत नाही. အပရာ’ပိ စုဒ္ဒသဝိဓာ ဒေသနာ? အထသဒဿန-ဂုဏပရိဒီပန-နိဂ္ဂဟ-သမ္ပဟံသနစရိယာဝေါဒါနနိဒဿန -ပုစ္ဆာဝိသဇ္ဇန-အနုသာသန-ပုဂ္ဂလဝိသောဓနအဇ္ဈာသယပရိပူရဏပဝေဏိ သဒဿန-ပရပ္ပဝါဒမဒ္ဒနောပနိဿယပစ္စယနိဒဿနတုဋ္ဌာ-ကာရသဒဿနဓမ္မသဘာ-ဝဂုဏာဒိ-နိဒဿနာကာရဒေသနာ’တိ. इतरही चौदा प्रकारच्या देशना कोणत्या? अर्थदर्शन, गुणपरिवर्णन (गुणप्रकाशन), निग्रह, संप्रहंसन (उत्साहवर्धन), चर्या-अवदान-निदर्शन (चरित्र व शुद्धतेचे उदाहरण), पृच्छा-विसर्जन (प्रश्न-उत्तर), अनुशासन, पुद्गलविशोधन, अध्याशयपरिपूरण, प्रवेणिदर्शन (वंशपरंपरा दर्शन), परप्रवादमर्दन (परमतांचे खंडन), उपनिषयप्रत्ययनिदर्शन (उपनिश्रय व प्रत्ययांचे दर्शन), तुष्टाकारदर्शन (संतुष्टतेचे दर्शन) आणि धर्मस्वभावगुणादि-निदर्शन देशना. တထ त्यामध्ये - ပစ္စယာကာရဒေသနာ’တိ ပစ္စယာကာရသုတ္တန္တ-သတိပဋ္ဌာန-သမ္မပ္ပ-ဓာန-ဣဒ္ဓိပါဒ-ဣဒြိယဗလ-ဗောဇ္ဈင်္ဂါဒိသုတ္တန္တသမ္ဗဓာ. 'प्रत्ययाकारदेशना' म्हणजे प्रत्ययाकार सुत्तंत, सतिपट्ठान (स्मृतिप्रस्थान), सम्मप्पधान (सम्यक् प्रधान), इद्धिपाद (ऋद्धिपाद), इन्द्रिय, बल, बोज्झङ्ग (बोध्यंग) इत्यादी सुत्तांशी संबंधित देशना. (အထသဒဿနာ) ပစ္စယာကာရပစ္စယထပရမထံ ဒေသေန္တီ ပဝတ္တာ ဓမ္မဒေသနာ အထသဒဿနာ နာမ. (अर्थदर्शना) प्रत्ययाकार आणि प्रत्ययार्थ अशा परमार्थाचा उपदेश करणारी जी धर्मदेशना प्रवृत्त होते, तिला 'अर्थदर्शना' म्हणतात. (ဂုဏပရိဒီပနီ). သုသီမ-ဂေါသာလ-ဂေါသိင်္ဂသမ္ပသာဒန-ပါသာဒိက-ဒသဗလ-ဂေါတမက- မဟာသီဟနာဒါဒိသုတ္တန္တသမ္ဗဓ အတ္တဂုဏပရဂုဏ-သာသနဂုဏပရိဒီပနီ ဂုဏပရိဒီပနီ နာမ. (गुणपरिवर्णनी) सुसीम, गोसाल, गोसिंगसंपसादन, पासादिक, दसबळ, गोतमक, महासीहनाद इत्यादी सुत्तांशी संबंधित, स्वतःचे गुण, इतरांचे गुण आणि शासनाचे (धम्माचे) गुण प्रकाशित करणारी देशना म्हणजे 'गुणपरिवर्णनी' होय. (နိဂ္ဂဟဒေသနာ) သကလဝိနယပိဋကံ အာဒိံ ကဝါ ယာ ကာစိ ကိလေသပါပပုဂ္ဂလနိဂ္ဂဟဒေသနာ ဧသာ နိဂ္ဂဟဒေသနာ နာမ. (निग्रहदेशना) संपूर्ण विनयपिटकाला आरंभ करून, जी कोणतीही क्लेश आणि पापी पुद्गलांच्या निग्रहासाठी केलेली देशना असते, तिला 'निग्रहदेशना' म्हणतात. (သမ္ပဟံသနာ) ဘယဘီရုကာနံ ပုဂ္ဂလာနံ ဘယပဋိသေဓနထာယ ဥပထမ္ဘဇနန-မဂ္ဂါနိသံသ-သီလထောမနာဒိကာ ဒေသနာ သမ္ပဟံ-သနာ နာမ. (संप्रहंसना) भयभीत झालेल्या पुद्गलांचे भय दूर करण्यासाठी, त्यांना आधार देणारी, मार्गाचे फायदे सांगणारी आणि शीलाची प्रशंसा करणारी देशना म्हणजे 'संप्रहंसना' होय. (စရိယာဝေါဒါနနိဒဿနာ) သကလဇာတကံ အစ္ဆိယသုတ္တံ အာဒိံ ကဝါ ဒွေဓာဝိတက္ကဗောဓိရာဇကုမာရသုတ္တာဒိသမ္ဗဓာဒေသနာ စရိယာဝေါဒါနနိဒဿနာ နာမ. (चर्या-अवदान-निदर्शना) संपूर्ण जातककथा, अच्छरिय सुत्त इत्यादींना आरंभ करून, द्वेधावितक्क सुत्त, बोधिराजकुमार सुत्त इत्यादींशी संबंधित देशना म्हणजे 'चर्या-अवदान-निदर्शना' होय. (ပုစ္ဆာဝိဿဇ္ဇနာ) အဋ္ဌဟိ ပရိသာဟိ ပုစ္ဆိတာနံ ပဉှာနံ ဝိဿဇ္ဇနာပဋိသံယုတ္တာ သကလသဂါထဝဂ္ဂမာဒိံ ကဝါ ဝမ္မိကသုတ္တ-ပရာယဏသုတ္တာဒိကာ ဒေသနာ ပုစ္ဆာဝိဿဇ္ဇနာ နာမ. (पृच्छा-विसर्जना) आठ प्रकारच्या परिषदांनी विचारलेल्या प्रश्नांच्या उत्तरांशी संबंधित, संपूर्ण सगाथवग्गला आरंभ करून, वम्मिक सुत्त, पारायण सुत्त इत्यादी देशना म्हणजे 'पृच्छा-विसर्जना' होय. (အနုသာသနာ). အရိယဝံသ-ပုညာဘိသဒ-ဓုတင်္ဂါနုသာသန-ဝတ္တာနုသာသန-သမ္ဗဓာ ဒေသနာ အနုသာသနာ နာမ. (अनुशासना) अरियवंस (आर्यवंश), पुञ्ञाभिसंद (पुण्याभिष्यंद), धुतङ्ग-अनुशासन, वत्त-अनुशासन (कर्तव्य-अनुशासन) यांच्याशी संबंधित देशना म्हणजे 'अनुशासना' होय. (ပုဂ္ဂလဝိသောဓနာ) ဘယသဒဿနဒေသနာပဋိသံယုတ္တာ ဒေဝဒူတအဂ္ဂိက္ခဓောပမာဒိသုတ္တသမ္ဗဓာပုဂ္ဂလာနံ သီလဝတ္တာဒိဝိသောဓနထာယ ဝုတ္တာ ပုဂ္ဂလဝိသောဓနာ နာမ. (पुद्गलविशोधना) भयाचे दर्शन घडवणाऱ्या देशनेशी संबंधित, देवदूत सुत्त, अग्गिक्खन्धोपम सुत्त इत्यादींशी संबंधित, पुद्गलांच्या शील आणि व्रतादींच्या शुद्धीसाठी सांगितलेली देशना म्हणजे 'पुद्गलविशोधना' होय. (အဇ္ဈာသယပရိပူရဏာ). တဝဋကနာဠက-ပဋိပဒါ-ဓမ္မဒါယာဒသုတ္တာဒိကာ ပုဂ္ဂလာနံ သမထဝိပဿနာပရိပူရဏထာယ ကထိတာ အဇ္ဈာသယပရိပူရဏာ နာမ. (अध्याशयपरिपूरणी) तुवटकमहाविय सुत्त, नाळक सुत्त, प्रतिपदा सुत्त, धम्मदायाद सुत्त इत्यादी, पुद्गलांच्या समथ आणि विपश्यनेच्या परिपूर्तीसाठी सांगितलेली देशना म्हणजे 'अध्याशयपरिपूरणी' होय. (ပဝေနိသဒဿနကထာ). ဗုဒ္ဓဝံသ-မဟာပဒါနသုတ္တာကာရာ အတ္တနော စ ပရေသဉ္စ အဘိနီဟာရမာရဗ္ဘ ပရိနိဗ္ဗာနပရိယောသာနာ ပဝေနိသဒဿနကထာ နာမ. (प्रवेणिदर्शनकथा) बुद्धवंस आणि महापादन सुत्ताच्या स्वरूपातील, स्वतःच्या आणि इतरांच्या अभिनिहाराला (प्रार्थनेला) आरंभ करून परिनिर्वाणापर्यंतची कथा म्हणजे 'प्रवेणिदर्शनकथा' होय. (ပရပ္ပဝါဒမဒ္ဒနာ). စရိယာပိဋကမာဒိံ ကဝါ မဟာသီဟနာဒ-စူလ္လသီဟနာဒ-ဓာနာဘိညာသံဝဏ္ဏနာ-ပဋိဗဒ္ဓါ ဒေသနာ ပရပ္ပဝါဒမဒ္ဒနာ နာမ. (परप्रवादमर्दना) चरियापिटकाला आरंभ करून, महासीहनाद सुत्त, चूळसीहनाद सुत्त, ध्यान-अभिज्ञा वर्णना यांच्याशी संबंधित देशना म्हणजे 'परप्रवादमर्दना' होय. (ဥပနိဿယပစ္စယနိဒဿနာ). ယထူပနိဿယာ ဒိဿမာနာ ဒိဿမာနကာယေန ဒေသနာ ဣတိဝုတ္တကမာဒိံ ကတွာ ဓနိယသုတ္တ-အရုဏဝတိယသုတ္တ-နဒနပရိယာယသုတ္တာဒိပ္ပဘေဒါဥပနိဿာယ– ပစ္စယနိဒဿနာ နာမ. (उपनिश्रयप्रत्ययनिदर्शना) उपनिश्रयानुसार प्रत्यक्ष शरीराने दिली जाणारी देशना, इतिवुत्तकाला आरंभ करून, धनिय सुत्त, अरुणवतीय सुत्त, नन्दनपरियाय सुत्त इत्यादी प्रकारची देशना म्हणजे 'उपनिश्रयप्रत्ययनिदर्शना' होय. (တုဋ္ဌာကာရသဒဿနာ). သကလောဒါန-သမ္ပသာဒနိယ-သင်္ဂီတိသုတ္တာဒိကာ ဒေသနာ တုဋ္ဌာကာရသဒဿနာ နာမ. (तुष्टाकारदर्शना) संपूर्ण उदान, संपसादनीय सुत्त, संगीति सुत्त इत्यादी देशना म्हणजे 'तुष्टाकारदर्शना' होय. (ဓမ္မသဘာဝဂုဏနိဒဿနာ) ခဓဓာဝါယတနိဒြိယသစ္စပဋိစ္စ သမုပ္ပာဒမဂ္ဂဖလာဒယော ဓမ္မာ ဝိဘတ္တာ တံ တထ သဘာဂဝိသဘာဂပရိဒီပိကာ အဘိဓမ္မဒေသနာ စ လက္ခဏပရိဒီပိကာ ယေ စညေ ဓမ္မာ သလက္ခဏဓာရဏကာ အတ္တနော သဘာဝဝသေန ဝုတ္တာ ဧသာ ဓမ္မသဘာဝဂုဏနိဒဿနာ နာမ. (धर्मस्वभावगुणनिदर्शना) स्कंध, धातू, आयतन, इंद्रिय, सत्य, प्रतीत्यसमुत्पाद, मार्ग, फल इत्यादी धर्मांचे विभाजन करून, तेथे सभाग आणि विसभाग स्पष्ट करणारी अभिधम्मदेशना, लक्षणे स्पष्ट करणारी देशना आणि इतर जे धर्म स्वतःच्या लक्षणांचे धारण करणारे आहेत, त्यांच्या स्वतःच्या स्वभावाच्या स्वरूपात सांगितलेली देशना म्हणजे 'धर्मस्वभावगुणनिदर्शना' होय. ဣမေဟိ စုဒ္ဒသဝိဓေဟိ လောကဂ္ဂနာယကာ ဓမ္မံ ဒေသေန္တိ တေသဉ္စ သာဝကာ’တိ. या चौदा प्रकारांनी लोकनायक (बुद्ध) आणि त्यांचे श्रावक धर्माचा उपदेश करतात. တေသု ပစ္ဆာဝိသဇ္ဇနာ ဒေသနာ ဣဓ ပါကဋာ. သေသာ ယထာရဟံ ဣဓ ဂဟေတဗ္ဗာ ယေဝါတိ. त्यांपैकी पृच्छा-विसर्जना देशना येथे स्पष्ट आहे. उर्वरित देशना योग्यतेनुसार येथे ग्रहण कराव्यात. (သာပတတ္တိကထာ). ဒုဝိဓာကထာ ဣမသ္မိံ မိလိဒပဉှပ္ပကရဏေဟောန္တိ သာပတ္တိကထာ စ အနာပတတ္တိကထာ စ. တထ ယံ ထေရေန ဘဂဝတော ဝစနံ ရညော သညာပနထံ အာဘတံ တံသာပတ္တိကထာ နာမ. (सापत्तिकथा) या मिलिन्दप्रश्न ग्रंथामध्ये दोन प्रकारच्या कथा आहेत: सापत्तिकथा आणि अनापत्तिकथा. त्यामध्ये, थेरांनी राजाला पटवून देण्यासाठी भगवंतांचे जे वचन उद्धृत केले आहे, त्याला 'सापत्तिकथा' म्हणतात. (အနာပတ္တိကထာ). ယာ ထေရေန သကပဋိဘာနေန ဝုတ္တာ သာ အနာပတ္တိကထာ နာမ. (अनापत्तिकथा) जी थेरांनी स्वतःच्या प्रतिभेने सांगितली आहे, तिला 'अनापत्तिकथा' म्हणतात. ဝုတ္တဉှေတံ ပဒသောဓမ္မသိက္ခာပဒဿ အဋ္ဌကထာယံ-’ कारण, पदसोधम्म सिक्खापदाच्या अट्ठकथेत असे म्हटले आहे की - မေဏ္ဍကမိလိဒပဉှေသု ထေရဿ သကပဋိဘာနေန အနာပတ္တိ. ယမ္ပနရညော သဉဉာပနထံ အာဟရဝါ ဝုတ္တံ တထ အာပတ္တီ’တိ (ဒွေ ကထာ) ပုန ဒွေ ကထာ ဣဓ ဟောန္တိ သမ္မုတိကထာ စ ပရမထကထာ စ. मेण्डक आणि मिलिन्दप्रश्नांमध्ये थेरांच्या स्वतःच्या प्रतिभेने अनापत्ती होते. परंतु राजाला पटवून देण्यासाठी जे उदाहरण देऊन सांगितले आहे, त्यात आपत्ती (दोष) आहे’ (अशा दोन कथा आहेत). पुन्हा येथे दोन प्रकारच्या कथा आहेत - संमुतिकथा (व्यावहारिक कथा) आणि परमत्थकथा (परमार्थ कथा). (သမ္မုတိကထာ). တထ သမ္မုတိကထာ နာမ’ဘန္တေ နာဂသေန ဝေဒဂု ဥပလဗ္ဘတီ’တိအာဒိကာ. (संमुतिकथा). त्यापैकी संमुतिकथा म्हणजे ‘भन्ते नागसेन, वेदगू (जाणणारा) उपलब्ध आहे का?’ इत्यादी. ပရမထကထာ နာမ’ယော ဥပ္ပဇ္ဇတိ သော ဧဝ သော’တိအာဒိကာတေနာဟ? परमत्थकथा म्हणजे ‘जो उत्पन्न होतो, तोच तो आहे का?’ इत्यादी. म्हणूनच म्हटले आहे - ဒုဝေ သစ္စာနိ အက္ခာသိ သမ္ဗုဒ္ဓေါ ဝဒတံ ဝရော,သမ္မုတိံ ပရမထဉ္စ တတိယံ နူပလဗ္ဘတီ’တိ. वक्त्यांमध्ये श्रेष्ठ असलेल्या संबुद्धांनी दोन सत्ये सांगितली आहेत - संमुति (व्यावहारिक सत्य) आणि परमत्थ (परमार्थ सत्य); तिसरे सत्य उपलब्ध नाही. ယမ္ပုဗ္ဗေ ဝုတ္တံ အနုမာနကထာ ဥပမာကထာ’တိ, တာသု ဥပမာကထာယ ဝိသုံ ကောဋ္ဌာသဘာဝေါ နထိ. မိလိဒပဉှမေဏ္ဍကပဉှာနံ အန္တရန္တရာ ဌိတာ ဟောတိ. အနုမာနကထာ ပန ဝိသုံ ကောဋ္ဌာသဘာဝေန ဟောတီတိ. पूर्वी जे ‘अनुमानकथा’ आणि ‘उपमाकथा’ असे म्हटले गेले आहे, त्यापैकी उपमाकथेचा स्वतंत्र विभाग नाही. ती मिलिन्दप्रश्न आणि मेण्डकप्रश्नांच्या मध्ये-मध्ये आलेली आहे. परंतु अनुमानकथा ही स्वतंत्र विभागाच्या रूपाने आहे. ဝိစရေထ အနုံ ပရမေ ပရမေသုဇနဿ သုခံ နယနေ နယနေ,ကဋု ဟောတိ ပဓာနရတော နရတောဣဓ ယော ပန သာရမတေ ရမတေ. अतिशय सूक्ष्म अशा परम तत्त्वाचा विचार करावा, जो सज्जनांच्या डोळ्यांना सुख देणारा आहे. जो मनुष्य केवळ बाह्य गोष्टींमध्ये मग्न असतो, त्याला ते कडू वाटते; परंतु जो येथे सारात (सत्यात) रममाण होतो, तो सुखी होतो. ပကိဏ္ဏကဝစနဝဏ္ဏနာ သမတ္တာ. प्रकीर्णक वचन वर्णन समाप्त झाले. ဇာတကုဒ္ဓရဏံ. जातक-उद्धरण (जातकांचे संदर्भ). ဇာတကုဒ္ဓရဏံ ပန ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. မေဏ္ဍကပဉှတတိယဝဂ္ဂေ ပဉ္စ ပဉ္စ ပဉှာ. जातकांचे उद्धरण याप्रमाणे समजून घ्यावे. मेण्डकप्रश्नांच्या तिसऱ्या वर्गात पाच-पाच प्रश्न आहेत. ‘‘အစေတနံ ဗြာဟ္မဏ အသုဏန္တံ…ပေ… ပုစ္ဆသိ တံ ကိဿ ဟေတု‘‘တိ ဣဒံစတုက္ကနိပါတေ အာဂတံပလာသဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ. ကတမံ တံ ဇာတကန္တိ?’ “हे ब्राह्मणा, अचेतन आणि न ऐकणाऱ्या...पे... तू त्याला कोणत्या कारणासाठी विचारत आहेस?” हे चतुक्कनिपातात आलेले पलासजातक (पळस जातक) लक्षात घेऊन म्हटले आहे. ते जातक कोणते आहे? အစေတနံ ဗြာဟ္မဏာ’တိ ဣဒံ သထာ ပရိနိဗ္ဗာနမဉ္စေ နိပန္နော အာနဒထေရံ အာရဗ္ဘ ကထေသိ. “अचेतन ब्राह्मणा” हे शास्त्यांनी परिनिर्वाण मंचावर पडलेले असताना थेर आनंदांना उद्देशून सांगितले. ‘‘သော ပါယသ္မာ ရုက္ခဒေဝတာ ပနာ အဟမေဝါ’’တိ. “तो पायस (खीर) देणारा वृक्षदेवता तर मीच होतो.” ပလာသဇာတကံ သမတ္တံ. पलासजातक समाप्त. ‘‘ဣတိ ဖဒနရုက္ခာ’ပိ တာ ဒေဝတာ…ပေ… ဘာရဒွါဇ သုဏောဟိ မေ’’တိ အာဂတံ. ဣဒဉ္စ တေရသနိပါတေဖဒနဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ. ကတမံ တံ ဇာတကန္တိ? “अशा प्रकारे फदन वृक्षाच्या देखील त्या देवता...पे... हे भारद्वाजा, माझे ऐक” असे आले आहे. हे तेरसव्या निपातातील फदनजातक लक्षात घेऊन म्हटले आहे. ते जातक कोणते आहे? ‘‘ကုဌာရိဟထော ပုရိသော’တိ ဣဒံ သထာ ရောဟိဏီနဒီတီရေ ဝိဟရန္တော ဉာတကာနံ ကလဟံ အာရဗ္ဘ ကထေသိ ဝနသဏ္ဍေ ဒေဝတာ အဟ’’န္တိ. “हातात कुऱ्हाड घेतलेला माणूस” हे शास्त्यांनी रोहिणी नदीच्या तीरावर विहार करत असताना नातेवाईकांच्या कलहाचा संदर्भ देऊन सांगितले, “त्या वनखंडातील देवता मीच होतो.” ဖဒနဇာတကံ ဒုတိယံ တေရသနိပါတံ. फदनजातक दुसरे, तेरसव्या निपातात. မေဏ္ဍကပဉှစတုထဝဂ္ဂေ ဒေဝဒတ္တဗောဓိသတ္တာဓိကသမ္ပဉှေ ဗာဝီသတိဇာတကာနိ အာဂတာနီ’တိ. मेण्डकप्रश्नांच्या चौथ्या वर्गात देवदत्त आणि बोधिसत्त्वांच्या अधिकारासंबंधीच्या प्रश्नात बावीस जातके आली आहेत. ‘‘ဘန္တေ နာဂသေန, တုမှေ ဘဏထ? ဒေဝဒတ္တောဧကန္တကဏှော ဧကန္တကဏှေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နဂတော, ဗောဓိသတ္တော ဧကန္တသုက္ကေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နဂတော’တိ. ပုန စ ဒေဝဒတ္တော ဘဝေ ဘဝေ ယသေန စ ပက္ခေန စ ဗောဓိသတ္တေန သမသမော ဟောတိ ကဒါစိ အဓိကတရော ဝါ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော နဂရေ ဗာရာဏသိယံ ဗြဟ္မဒတ္တဿ ရညော ပုရောဟိတပုတ္တော အဟောသိ, တဒါ ဗောဓိသတ္တော ဆဝကစဏ္ဍာလော ဝိဇ္ဇာဓရော, ဝိဇ္ဇံ ပရိဇပိဝါ အကာလေ အမ္ဗဖလာနိ နိဗ္ဗတ္တေသိ. ဧထ တာဝ ဗောဓိသတ္တော ဒေဝဒတ္တေန ဇာတိယာ နိဟီနော ယသသာ စ နိဟီနော …ပေ… ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော တာပေါ နာမ ရာဇာ အဟောသိ တဒါဗောဓိသတ္တော တဿ ပုတ္တော ဓမ္မပါလော နာမ အဟောသိ တဒါ သော ရာဇာ သကပုတ္တဿ ဟထပါဒေ သီသဉ္စ ဆိဒါပေသိ. တထ တာဝ ဒေဝဒတ္တောယေဝ ဥတ္တရော အဓိကတရော. အဇ္ဇေတရဟိ ဥဘော’ပိ သကျကုလေ ဇာယိသု. ဗောဓိသတ္တော ဗုဒ္ဓေါ အဟောသိ သဗ္ဗညု လောကနာယကော. ဒေဝဒတ္တော အတိဒေဝဿ သာသနေ ပဗ္ဗဇိဝါ ဣဒ္ဓိံ နိဗ္ဗတ္တေဝါ ဗုဒ္ဓါလယံ အကာသိ. ကိန္နု ခေါ ဘန္တေ နာဂသေန ယံ မယာ ဘဏိတံ တံ သဗ္ဗံ တထံ ဥဒါဟု ဝိတထန္တိ? ‘‘အယမ္ပန မိလိဒရညာ ယာနိ ဗာဝီသတိဇာတကာနိ နိဿာယ ပုစ္ဆိတော ဟောတိ တာနိ မယာ ဥဒ္ဓရိဝါ ဣဓ ကထေတဗ္ဗာနိ. “भन्ते नागसेन, आपण म्हणता की - देवदत्त हा एकांततः कृष्ण (अत्यंत पापी) आणि कृष्ण धर्मांनी युक्त होता, तर बोधिसत्त्व हे एकांततः शुक्ल (अत्यंत पुण्यवान) आणि शुक्ल धर्मांनी युक्त होते. परंतु पुन्हा देवदत्त जन्मोजन्मी यश आणि अनुयायांच्या बाबतीत बोधिसत्त्वांच्या समान किंवा कधीकधी त्यांच्यापेक्षा श्रेष्ठ होता. जेव्हा देवदत्त वाराणसी नगरात राजा ब्रह्मदत्ताचा पुरोहितपुत्र होता, तेव्हा बोधिसत्त्व चांडाळ कुळातील विद्याधर होते, ज्यांनी मंत्राचा जप करून अकाली आंब्याची फळे निर्माण केली होती. येथे तर बोधिसत्त्व देवदत्तापेक्षा जातीने आणि यशाने हीन होते...पे... आणि पुन्हा जेव्हा देवदत्त ‘तप’ नावाचा राजा होता, तेव्हा बोधिसत्त्व त्याचे ‘धम्मपाल’ नावाचे पुत्र होते; तेव्हा त्या राजाने आपल्याच पुत्राचे हात, पाय आणि डोके कापून टाकले होते. येथे तर देवदत्तच श्रेष्ठ आणि अधिक शक्तिशाली होता. आज दोघेही शाक्य कुळात जन्मले. बोधिसत्त्व हे सर्वज्ञ, लोकनायक बुद्ध झाले. देवदत्ताने अतिदेवाच्या (बुद्धांच्या) शासनात प्रव्रज्या घेऊन, ऋद्धी प्राप्त करून बुद्धांचे स्थान मिळवण्याचा प्रयत्न केला. तर भन्ते नागसेन, मी जे काही म्हटले आहे ते सर्व सत्य आहे की असत्य?” राजा मिलिन्दाने ज्या बावीस जातकांचा आधार घेऊन हा प्रश्न विचारला आहे, ती जातके मी उद्धृत करून येथे सांगत आहे. တထ စ,’ယဒါ စ ဒေဝဒတ္တော နဂရေ ဗာရာဏသိယံ ဗြဟ္မဒတ္တဿ ရညော ပုရောဟိတပုတ္တော အဟောသိ တဒါ ဗောဓိသတ္တော ဆဝကစဏ္ဍာလော အဟောသိ ဝိဇ္ဇာဓရော ဝိဇ္ဇံ ပရိဇပိဝါ အကာလေ အမ္ဗဖလာနိ နိဗ္ဗတ္တေသိ. ဧထ တာဝ ဗောဓိသတ္တော ဒေဝဒတ္တတော ဇာတိယာ နိဟီနော ယသသာ စ နိဟီနော. ‘‘ဣဒမ္ပန ဝစနံ ဇေတဝနာရာမေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ တေရသနိပါတေ ဒေဝဒတ္တမာရဗ္ဘ ကထိတံ အမ္ဗဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ဒေဝဒတ္တော ဟိ ‘‘အဟံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဝိဿာမိ…ပေ… စဏ္ဍာလပုတ္တော အဟမေဝါ’’တိ. त्यात असे आहे - ‘जेव्हा देवदत्त वाराणसी नगरात राजा ब्रह्मदत्ताचा पुरोहितपुत्र होता, तेव्हा बोधिसत्त्व चांडाळ कुळातील विद्याधर होते, ज्यांनी मंत्राचा जप करून अकाली आंब्याची फळे निर्माण केली होती. येथे तर बोधिसत्त्व देवदत्तापेक्षा जातीने आणि यशाने हीन होते.’ हे वचन जेतवन आरामात विहार करत असताना शास्त्यांनी तेराव्या निपातात देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या अंबजातकाचा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. कारण देवदत्त म्हणाला होता, “मी बुद्ध होईन...पे... तो चांडाळपुत्र मीच होतो.” ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ အမ္ဗဇာတကံ သဓာယ ကထိတံ ဟောတီတိ ဣဒံ ရညော အာဘတံ ပဌမံ ဇာတကံ. अशा प्रकारे राजा मिलिन्दाने या अंबजातकाचा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. हे राजाने मांडलेले पहिले जातक आहे. ‘‘ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော ရာဇာ အဟောသိ မဟီပတိ သဗ္ဗကာမသမင်္ဂီ တဒါ ဗောဓိသတ္တော တဿူပဘောဂေါ အဟောသိ ဟထိနာဂေါ သဗ္ဗလက္ခဏသမ္ပန္နော တဿ စာရုဂတိဝိလာသံ အသဟမာနော ရာဇာ ဝဓံ ဣစ္ဆန္တော ဟထာစရိယံ ဧဝမဝေါဝ? ‘‘အသိက္ခိတော တေ အာစရိယ ဟထိနာဂေါ တဿ အာကာသဂမနံ နာမ ကာရဏံ ဟောတီ’’တိ တထပ တာစ ဗောဓိသတ္တော ဒေဝဒတ္တတော ဇာတိယာ နီဟီနော, လာမကော တိရစ္ဆာနဂတော’’တိ. ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဝေဠုဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဧကကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တမာရဗ္ဘကထိတံ ဒုမ္မေဓဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ ဓမ္မသဘာယံ ဘိက္ခု’အာဝုသော ဒေဝဒတ္တော …ပေ… ဟထိ ပန အဟမေဝါ’’တိ ဧဝမေတံ မိလိဒရညော ဣမံ ဒုမ္မေဓဇာတကံ သဓာယ ကထိတံ ဟောတီတိ. ဒုတိယံ ဇာတကံ. “आणि पुन्हा जेव्हा देवदत्त सर्व कामभोगांनी युक्त असलेला पृथ्वीचा राजा होता, तेव्हा बोधिसत्त्व त्याचा उपभोग्य, सर्व लक्षणांनी संपन्न असलेला हत्ती होते. त्याच्या सुंदर चालीचा हेवा वाटून, राजाने त्याचा वध करण्याची इच्छा धरून हत्तीच्या शिक्षकाला असे म्हटले - ‘हे आचार्या, तुझा हत्ती अशिक्षित आहे, त्याचे आकाशात उडणे हेच त्याचे कारण आहे.’ अशा प्रकारे तेथे बोधिसत्त्व देवदत्तापेक्षा जातीने हीन आणि कनिष्ठ अशा प्राण्यांच्या योनीत जन्मलेले होते.” हे वचन राजा मिलिन्दाने वेळुवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी पहिल्या निपातात देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या दुम्मेधजातकाचा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. धर्मसभेत भिक्खू म्हणाले, ‘आयुष्यमान देवदत्त...पे... तो हत्ती तर मीच होतो.’ अशा प्रकारे राजा मिलिन्दाने या दुम्मेधजातकाचा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. हे दुसरे जातक होय. ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော မနုဿော အဟောသိ. ပဝနေ နဋ္ဌာယိကော တဒါ ဗောဓိသတ္တော မဟာပထဝိ နာမ မက္ကဋော အဟောသိ. ဧထပိ တာဝ ဒိဿတိ ဝိသေသော မနုဿဿ စ တိရစ္ဆာနဂတဿ စ. ဧထပိ တာဝ ဗောဓိသတ္တော ဒေဝဒတ္တတော ဇာတိယာ နိဟီနော’တိ ဣမံ ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဝေဠုဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ တိံသနိပါတေ ဒေဝဒတ္တဿ သိလာပဝိဇ္ဈနမာရဗ္ဘ ကထိတံ မဟာကပိဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ? ‘‘တေန ဟိ ဓနုဂ္ဂဟေ ပယောဇေဝါ…ပေ… ကပိရာဇာ အဟမေဝါ’’တိ ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံမဟာကပိဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီတိ. တတိယံ ဇာတကံ. “आणि पुन्हा जेव्हा देवदत्त मनुष्य होता आणि वनात राहणारा होता, तेव्हा बोधिसत्त्व ‘महापठवी’ नावाचे माकड होते. येथे देखील मनुष्य आणि प्राण्यामधील फरक दिसून येतो. येथे देखील बोधिसत्त्व देवदत्तापेक्षा जातीने हीन होते.” हे वचन राजा मिलिन्दाने वेळुवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी तिसाव्या निपातात देवदत्ताच्या शिलाफेक करण्याच्या कृत्याला उद्देशून सांगितलेल्या महाकपिजातकाचा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. “त्यामुळे धनुर्धारी लोकांना पाठवून...पे... तो वानरराज मीच होतो.” अशा प्रकारे राजा मिलिन्दाने या महाकपिजातकाचा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. हे तिसरे जातक होय. ‘‘ပူန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော မနုဿော ဟောတိ သောဏုတ္တရော နာမ နေသာဒေါ ဗလဝါ ဗလဝတရော နာဂဗလော တဒါဗောဓိသတ္တော ဆဒ္ဒန္တော နာမ နာဂရာဇာ အဟောသိ. တဒါ လုဒ္ဒကော တံ ဟထိနာဂံ ဃာတေသိ. တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တော အဓိကတရော‘‘တိ ဣဒံ ဝစနံ မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ မဟာဝိဟာရေ ဝိဟာရန္တေန သထာရာ တိံသနိပါတေ ဧကံ ဒဟရဘိက္ခုနိံ အာရဗ္ဘ ကထိတံ ဆဒ္ဒန္တဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ တထ ဘဂဝတာ ဝိထာရတော ဒေသိတံ ဆဒ္ဒန္တဇာတကံ တံ မယာ ဣဓ သင်္ခေပတော ဥဒ္ဓရိဝါ ကထေတဗ္ဗမေဝ. ‘‘သာ ကိရ သာဝထိယံ…ပေ… သာ ပန ဘိက္ခုဏီ ပစ္ဆာ ဝိပဿိဝါ အရဟတ္တံ ပတ္တာ’’တိ. ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ ဆဒ္ဒန္တဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. စတုထာဇာတကံ. “आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त मनुष्य होता, सोणुत्तर नावाचा बलवान, महाबलवान, हत्तीचे बळ असलेला पारधी होता, तेव्हा बोधिसत्व छद्दंत नावाचे नागराज होते. तेव्हा त्या पारध्याने त्या हत्तीराजाला मारले. तरीही देवदत्तच अधिक श्रेष्ठ होता' हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवन महाविहारात विहार करत असताना शास्त्यांनी तिंसनिपातात एका तरुण भिक्खुणीला उद्देशून सांगितलेल्या 'छद्दंत जातका'चा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. तेथे भगवंतांनी सविस्तरपणे उपदेशिलेले जे छद्दंत जातक आहे, ते मी येथे संक्षेपाने उद्धृत करून सांगितले पाहिजे. 'ती श्रावस्तीमध्ये... पे... ती भिक्खुणी नंतर विपश्यना करून अर्हतपदाला प्राप्त झाली.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या छद्दंत जातकाचा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. चौथे जातक।” ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော မနုဿော အဟောသိ ဝနစရကော အနိကေတဝါသီ တဒါ ဗောဓိသတ္တော သကုဏော အဟောသိ တိတ္တိရော မန္တဇ္ဈာယီ. တဒါ သော ဝနစရကော တံ သကုဏံ ဃာတေသိ. တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တော ဇာတိယာ အဓိကတရော’’တိ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဂိဇ္ဈကူဋေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ နဝကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တဿ ဝဓာယ ပရိသက္ကနံ အာရဗ္ဘ ကထိတံ ဒဒ္ဒရဇာတကံ (တိတ္တိရဇာတကံ) သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘တသ္မိံ သမယေ ဓမ္မသဘာယံ ကထံ သမုဋ္ဌာပေသုံ…ပေ… တိတ္တိရပဏ္ဍိတော ပန အဟမေဝါ’’တိ. ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ ဒဒ္ဒရဇာတကံ သဓာယ ကထိတံ ဟောတီတိ. ပဉ္စမဇာတကံ. “आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त मनुष्य होता, वनात भटकणारा आणि घर नसलेला (अनिकेतवासी) होता, तेव्हा बोधिसत्व मंत्रांचे ध्यान करणारे तित्तिर (तितर) नावाचे पक्षी होते. तेव्हा त्या वनचराने त्या पक्षाला मारले. तरीही देवदत्त जन्माने श्रेष्ठ होता' हे वचन मिलिंद राजाने, गिज्झकूट पर्वतावर विहार करत असताना शास्त्यांनी नवकनिपातात देवदत्ताच्या वधाच्या प्रयत्नाचा संदर्भ घेऊन सांगितलेल्या 'दद्दर जातक' (तित्तिर जातक) चा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. 'त्या वेळी धर्मसभेत चर्चा सुरू झाली... पे... तो तित्तिर पंडित तर मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या दद्दर जातकाचा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. पाचवे जातक।” ‘‘ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော ကလာဗု နာမ ဗာရာဏသိရာဇာ အဟောသိ တဒါ ဗောဓိသတ္တော တာပသော အဟောသိ ခန္တိဝါဒီ. တဒါ သော ရာဇာ တဿတာပသဿ ကုဒ္ဓေါ ဟထပါဒေ ဝံသကလီရေ ဝိယ ဆေဒါပေသိ. တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တောယေဝ အဓိကတရော ဇာတိယာ စ ယသေန စာ’’တိ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဇေစဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ စတုက္ကနိပါတေ ဧကံ ကောဓနဘိက္ခုံ အာရဗ္ဘ ကထိတံ ခန္တိဝါဒိဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘သထာ ပန တံ ဘိက္ခုံ ကသ္မာဝံ…ပေ… ခန္တိဝါဒိတာပသောပန အဟမေဝါ’’တိ ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ ခန္တိဝါဒိဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီတိ. ပဋ္ဌဇာတကံ. “आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त वाराणसीचा कलाबू नावाचा राजा होता, तेव्हा बोधिसत्व 'खंतिवादी' (क्षमावादी) नावाचे तापस होते. तेव्हा त्या राजाने त्या तापसावर क्रुद्ध होऊन त्यांचे हात आणि पाय बांबूच्या कोंबाप्रमाणे कापून टाकले. तरीही देवदत्तच जन्माने आणि यशाने श्रेष्ठ होता' हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी चतुक्कनिपातात एका क्रोधी भिक्खूला उद्देशून सांगितलेल्या 'खंतिवादी जातका'चा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. 'शास्त्यांनी त्या भिक्खूला विचारले... पे... तो खंतिवादी तापस तर मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या खंतिवादी जातकाचा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. सहावे जातक।” ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော အဟောသိ ဝနစရော တဒါဗောဓိသတ္တော နဒိယော နာမ ဝါနရိဒေါ အဟောသိ. တဒါပိ သော ဝနစရော တံ ဝါနရိဒံ ဃာတေသိ သဒ္ဓိံ မာတရာ ကတိဋ္ဌဘာတိကေနပိ. တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တောယေဝအဓိကတရော ဇာတိယာ‘‘တိ ဣဒံ ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဝေဠုဝနေ ဝိဟရန္တေနသထာရာ ဒုကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တံ အာရဗ္ဘ ကထိတံ စုလ္လနဒိယဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘ဧကဒိဝသဉှိ ဘိက္ခူ ဓမ္မသဟာယံ …ပေ… သုပဏ္ဏရာဇာ ပန အဟမေဝါ’’တိ ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ ပဏ္ဍရဇာတကံ သဓာယ ပရတောဃောသဝသေန ဗောဓိသတ္တော ပဏ္ဍရကော နာမ နာဂရာဇ အဟောသီ’’တိ ကထိတံ ဟောတိ တထာဟိ ဣမသ္မိံ ဇာတကေ ဗောဓိသတ္တော သုပဏ္ဏရာဇာ ယေဝါ’တိ. အဋ္ဌမံ ဇာတကံ. “आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त वनचर होता, तेव्हा बोधिसत्व 'नदिय' नावाचे वानरराज होते. तेव्हाही त्या वनचराने त्या वानरराजाला त्याच्या आई आणि लहान भावासह मारले. तरीही देवदत्तच जन्माने श्रेष्ठ होता' हे वचन मिलिंद राजाने, वेळुवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी दुकनिपातात देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या 'चुल्लनदिय जातका'चा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. 'एका दिवशी भिक्खूंनी धर्मसभेत... पे... तो सुपण्णराज (गरुडराज) तर मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'पण्डर जातका'चा संदर्भ देऊन, दुसऱ्याच्या सांगण्यावरून (परतोघोषवशात) 'बोधिसत्व पण्डरक नावाचे नागराज होते' असे म्हटले आहे, कारण या जातकात बोधिसत्व सुपण्णराजच होते. आठवे जातक।” ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော မနုဿော အဟောသိပဝနေ ဇဋိလကော တဒါ ဗောဓိသတ္တော တစ္ဆကော နာမ မဟာသူကရော အဟောသိ. တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တောယေဝ ဇာတိယာ အဓိကတရော’’တိ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ပကိဏ္ဏကနိပါတေ ဒွေ မဟလ္လကေ ထေရေ အာရဗ္ဘ ကထိတံ တစ္ဆကသူကရဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘မဟာကောသလော ပန ဗိမ္ဗိသာရဿ ဓိတရံ ဒေန္တော…ပေ…ရုက္ခဒေဝတာ ပန အဟမေဝါ’’တိ. “आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त मनुष्य होता, जंगलात राहणारा जटाधारी (जटिलक) होता, तेव्हा बोधिसत्व 'तच्छक' नावाचे महाशूकर (रानडुक्कर) होते. तरीही देवदत्तच जन्माने श्रेष्ठ होता' हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी पकिण्णकनिपातात दोन वृद्ध थेरांना उद्देशून सांगितलेल्या 'तच्छकसूकर जातका'चा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. 'महाकोसलने बिंबिसाराला आपली कन्या देताना... पे... ती वृक्षदेवता तर मीच होतो।'” ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ တစ္ဆကသူကရဇာတကံ သဓာယ ပရတောဃောသဝသေန ဗောဓိသတ္တော မဟာတစ္ဆကသူကရော နာမ အဟောသိတိ ကထိတံ တထာ ဟိ ဣမသ္မိံ ဇာတကေ ဗောဓိသတ္တော ရုက္ခဒေဝတာယေဝ အဟောသီတိ. နဝမံ ဇာတကံ. “अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'तच्छकसूकर जातका'चा संदर्भ देऊन, दुसऱ्याच्या सांगण्यावरून (परतोघोषवशात) 'बोधिसत्व महातच्छकसूकर नावाचे होते' असे म्हटले आहे, कारण या जातकात बोधिसत्व वृक्षदेवताच होते. नववे जातक।” ပုန စ ပရံ ယဒါဒေဝဒတ္တော စေတိယေသု သုရပရိစရော နာမ ရာဇာ အဟောသိ ဥပရိ ပုရိသမတ္တေ ဂဂနေဝေဟာသင်္ဂမော, တဒါ ဗောဓိသတ္တော ကပိလော နာမ ဗြာဟ္မဏော အဟောသိ. တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တဿ ပထဝိပ္ပဝေသမာရဗ္ဘ ကထိတံ စေတိယဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘တသ္မိဉှိ ဒိဝသေ ဘိက္ခူ ဓမ္မသဟာယံ. ပေ-ကပိလ-ဗြာဟ္မဏော ပန အဟမေဝါ’’တိ ဧဝဉ္စေတံ မိလိဒရညာ ဣဒံစေတိယဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီတိ. ဒသမံ ဇာတကံ. “आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त चेती देशात 'सुरपरिचर' नावाचा राजा होता, जो माणसाच्या उंचीएवढा वर आकाशात हवेत चालणारा होता, तेव्हा बोधिसत्व 'कपिल' नावाचे ब्राह्मण होते. तरीही देवदत्ताच्या पृथ्वीत धसण्याविषयी (पृथ्वीप्रवेशाविषयी) सांगितलेल्या 'चेतिय जातका'चा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. 'त्या दिवशी भिक्खूंनी धर्मसभेत... पे... तो कपिल ब्राह्मण तर मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'चेतिय जातका'चा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. दहावे जातक।” ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော မနုဿော အဟောသိ သာမော နာမ, တဒါ ဗောဓိသတ္တော ရူရုနာမ မိဂရာဇာ အဟောသိ. တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တောယေဝ ဇာတိယာ အဓိကတရော’တိ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ တေရသကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တမာရဗ္ဘကထိတံ ရူရူမဂရာဇဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. သော ကိရ ဘိက္ခူဟိ’ဗဟုပကာရော အာဝုသော-ပေရူရုမိဂေါ ပန အဟမေဝါ’’တိ. ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံရူရုမိဂဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီ’တိ ဧကာဒသမံ ဇာတကံ. “आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त 'साम' नावाचा मनुष्य होता, तेव्हा बोधिसत्व 'रुरु' नावाचे मृगराज (हरणांचे राजा) होते. तरीही देवदत्तच जन्माने श्रेष्ठ होता' हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी तेरसकनिपातात देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या 'रुरुमृगराज जातका'चा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. 'तो खरोखर भिक्खूंनी 'हे आवुसो, खूप उपकारी आहे'... पे... तो रुरुमृग तर मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'रुरुमृग जातका'चा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. अकरावे जातक।” ‘‘ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော မနုဿော အဟောသိ လုဒ္ဒကော ပဝနစရော, တဒါ ဗောဓိသတ္တော ဟထိနာဂေါ အဟောသိ သော လုဒ္ဒကော တဿ ဟထိနာဂဿ သတ္တက္ခတ္တုံ ဒန္တေ ဆိဒိဝါ ဟရိ တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တောယေဝ ယောနိယာ အဓိကတရော’တိ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဧကကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တမာရဗ္ဘ ကထိတံ သီလဝနာဂရာဇဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ဓမ္မသဘာယဉှိ ဘိက္ခူ’အာဝုသော ဒေဝဒတ္တော…ပေ… သီလဝနာဂရာဇာ ပန အဟမေဝါတိ. “आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त जंगलात फिरणारा पारधी होता, तेव्हा बोधिसत्व हत्तीराज होते. त्या पारध्याने त्या हत्तीराजाचे सुळे सात वेळा कापून नेले. तरीही देवदत्तच योनीने (जन्माने) श्रेष्ठ होता' हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी एककनिपातात देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या 'सीलवनागराज जातका'चा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. 'धर्मसभेत भिक्खूंनी 'हे आवुसो, देवदत्त...'... पे... तो सीलवनागराज तर मीच होतो।'” ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ သီလဝနာဂရာဇဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီ’တိ ဒွါဒသမံ ဇာတကံ. “अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'सीलवनागराज जातका'चा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. बारावे जातक।” ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော သိဂါလော အဟောသိ ခတ္တိယဓမ္မော, သော ယာဝတာ ဇမ္ဗုဒီပေ ပဒေသရာဇာနော တေ သဗ္ဗေ အနုယုတ္တေ အကာသိ, တဒါ ဗောဓိသတ္တော ဝိဓုရော နာမ ပဏ္ဍိတော အဟောသိ တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တောယေဝ ယသေန အဓိကတရော’တိ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဝေဠုဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဒုကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တမာရဗ္ဘ ကထိတံ သဗ္ဗဒါဌဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘ဒေဝဒတ္တော အဇာတသတ္တုံ ပသာဒေဝါ…ပေ… ပုရောဟိတော ပန အဟမေဝါ’’တိ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त 'खत्तियधम्म' (क्षत्रियधर्मी) नावाचा कोल्हा होता, आणि त्याने जम्बुद्विपातील सर्व प्रादेशिक राजांना आपले करद (अनुयायी) बनवले होते, तेव्हा बोधिसत्व 'विधुर' नावाचे पंडित होते; तरीही देवदत्तच कीर्तीमध्ये श्रेष्ठ होता. हे वचन मिलिंद राजाने, वेळुवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी दुकनिपातात देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या 'सब्बदाठ जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे: 'देवदत्ताने अजातशत्रूला प्रसन्न करून... पे... पुरोहित तर मीच होतो.' ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ သဗ္ဗဒါဌိက ဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ပရတောဃောသဝသေန ‘‘သော ယာဝတာ ဇမ္ဗုဒီပေ ပဒေသရာဇာနော, တေ သဗ္ဗေ အနုယုတ္တေ အကာသီ’’တိ ဝုတ္တံ တဒါ ဟိ သောန သဗ္ဗေ ရာဇာနော အနုယုတ္တေ အကာသီ’တိ. တေရသမံ ဇာတကံ. अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'सब्बदाठिक जातका'च्या संदर्भाने हे म्हटले आहे. ऐकीव माहितीच्या आधारे (परतोघोषवशात) 'त्याने जम्बुद्विपातील सर्व प्रादेशिक राजांना आपले अनुयायी बनवले' असे म्हटले आहे, कारण तेव्हा त्याने सर्व राजांना आपले अनुयायी बनवले नव्हते. तेरावे जातक. ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော သထိနာဂေါ ဟုဝါ လဋုကိကာယ သကုဏိကာယ ပုတ္တကေဃာတေသိ, တဒါ ဗောဓိသတ္တော’ပိ ဟထိနာဂေါ အဟောသိ ယုထပတိ တထ တာဝ ဥဘော’ပိ သမသမာ အဟေသုန္တိ’ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဝေဠုဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ပဉ္စကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တမာရရဗ္ဘ ကထိတံ လဋုကိကဇာတကံ သဓာယဝုတ္တံ ဟောတီ’တိ စုဒ္ဒသမံ ဇာတကံ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त हत्ती होऊन लटुकीका (लाव्हा) पक्ष्याच्या पिलांना मारत होता, तेव्हा बोधिसत्व देखील हत्ती आणि कळपाचे प्रमुख (यूथपती) होते. तेथे ते दोघेही समसमान होते. हे वचन मिलिंद राजाने, वेळुवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी पंचकनिपातात देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या 'लटुकीक जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे. चौदावे जातक. ပုန စ ပရံ ‘‘ယဒါ ဒေဝဒတ္တော ယက္ခော အဟောသိ အဓမ္မော နာမ, တဒါ ဗောဓိသတ္တောပိ ယက္ခော အဟောသိ ဓမ္မော နာမ. တထပိ တာဝ ဥဘောပိ သမသမာ အဟေသုန္တိ‘‘ဣဒံ ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဧကာဒသကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တဿ ပထဝိပ္ပဝေသမာရဗ္ဘ ကထိတံ ဓမ္မဒေဝပုတ္တ ဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘တဒါ ဘိက္ခု ဓမ္မိသဘာယံ ဓမ္မဒေဝပုတ္တော ပန အဟမေဝ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ’’တိ. ဧဝမေတံ မိလိဒရညော ဣမံ ဓမ္မဒေဝပုတ္တဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီတိ ပဏ္ဏရသမံ ဇာတကံ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त 'अधम्म' नावाचा यक्ष होता, तेव्हा बोधिसत्व देखील 'धम्म' नावाचे यक्ष होते. तरीही ते दोघेही समसमान होते. हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी एकादकनिपातात देवदत्ताच्या पृथ्वीत प्रवेश करण्याच्या (जिवंत जमिनीत गाडले जाण्याच्या) प्रसंगाला उद्देशून सांगितलेल्या 'धम्मदेवपुत्त जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे: 'तेव्हा, हे भिक्खूहो! धर्मसभेत जो धम्मदेवपुत्र होता, तो मीच सम्यक्संबुद्ध होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'धम्मदेवपुत्त जातका'च्या संदर्भाने हे म्हटले आहे. पंधरावे जातक. ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော နာဝိကော အဟောသိ, ပဉ္စန္နံ ကုလသတာနံ ဣဿရော, တဒါ ဗောဓိသတ္တောပိ နာဝိကော အဟောသိ ပဉ္စန္နံ ကုလသတာနံ ဣဿရော တထပိ တာဝ ဥဘောပိ သမသမာ’စ အဟေသုန္တိ‘‘ဣဒမ္ပန မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဒွါဒသကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တဿ ပဉ္စကုလသတာနိ ဂဟေဝါ နိရယေ ပဝိဋ္ဌဘာဝမာရဗ္ဘ ကထိတံ သမုဒ္ဒဝါဏိဇဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘သော ဟိ အဂ္ဂသာဝကေသု ပရိသံ ဂဟေဝါ သောပဏ္ဍိတဝဍဎကီ နာမ အဟမေဝါ’’တိ. ဧဝမေတံ မိလိဒရရဉဉာ ဣမံ သမုဒ္ဒဝါဏိဇဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီ’တိ. သောဠသမံ ဇာတကံ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त पाचशे कुटुंबांचा स्वामी असलेला नावाडी होता, तेव्हा बोधिसत्व देखील पाचशे कुटुंबांचे स्वामी असलेले नावाडी होते. तरीही ते दोघेही समसमान होते. हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी द्वादकनिपातात देवदत्ताच्या पाचशे कुटुंबांना घेऊन नरकात प्रवेश करण्याच्या प्रसंगाला उद्देशून सांगितलेल्या 'समुद्दवाणिज जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे: 'कारण तो अग्रश्रावकांमध्ये परिषद घेऊन गेला, तो पंडित सुतार (पंडितवड्ढकी) मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'समुद्दवाणिज जातका'च्या संदर्भाने हे म्हटले आहे. सोळावे जातक. ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော သထဝါဟော အဟောသိ ပဉ္စန္နံ သကဋသတာနံ ဣဿရော, တဒါ ဗောဓိသတ္တောပိ သထဝါဟော အဟောသိ ပဉ္စန္နံ သကဋသတာနံ ဣဿရော. တထပိ တာဝ ဥဘောပိ သမသမာ အဟေသု’’န္တိ ဣဒမ္ပနဝစနံ မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဧကကနိပါတေ အနာထပိဏ္ဍိကဿသဟာယကေ တိထယသာဝကေ အာရဗ္ဘ ကထိတံ အပဏ္ဏက ဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီ’တိ. သတ္တရသမံ ဇာတကံ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त पाचशे गाड्यांचा स्वामी असलेला सार्थवाह होता, तेव्हा बोधिसत्व देखील पाचशे गाड्यांचे स्वामी असलेले सार्थवाह होते. तरीही ते दोघेही समसमान होते. हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी एककनिपातात अनाथपिंडिकाच्या मित्रांना आणि तीर्थक श्रावकांना उद्देशून सांगितलेल्या 'अपण्णक जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे. सतरावे जातक. ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော သာခေါ နာမ မိဂရာဇာ အဟောသိ, တဒါ ဗောဓိသတ္တောပိ နိဂြောဓော နာမ မိဂရာဇာ အဟောသိ. တထပိ တာဝ ဥဘောပိ သမသမာ အဟေသုန္တိ ‘‘ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဧကကနိပါတေ ကုမာရကဿပမာတရံ ဘိက္ခုဏိံ အာရဗ္ဘ ကထိတံ နိဂြောဓမိဂဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ သာ ကိရ ရာဇဂဟနဂရေ မဟာဝိဘဝဿ သေဋ္ဌိနော ဓီတာ အဟောသိ နိဂြောဓမိဂရာဇာ ပန အဟမေဝါ’’တိ ဧဝ မေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ နိဂြောဓမိဂရာဇဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီ’တိ. အဋ္ဌာရသမံ ဇာတကံ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त 'शाख' नावाचा मृगराज होता, तेव्हा बोधिसत्व देखील 'निग्रोध' नावाचे मृगराज होते. तरीही ते दोघेही समसमान होते. हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी एककनिपातात कुमारकस्सपाच्या माता असलेल्या भिक्खुणीला उद्देशून सांगितलेल्या 'निग्रोधमिग जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे: 'ती खरोखर राजगृह नगरातील एका महावैभवशाली श्रेष्ठीची मुलगी होती, आणि निग्रोध मृगराज तर मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'निग्रोधमिग जातका'च्या संदर्भाने हे म्हटले आहे. अठरावे जातक. ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော သာခေါ နာမ သေနာပတိ အဟောသိ, တဒါ ဗောဓိသတ္တော နိဂြောဓော နာမ ရာဇာ အဟောသိ. တထပိ တာဝ ဥဘောပိ သမသမာ အဟေသုန္တိ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဝေဠုဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဒသကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တာမာရဗ္ဘ ကထိတံ နိဂြောဓဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘ဧကဒိဝသဉှိ ဘိက္ခူ နိဂြောဓဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတီ’တိ. ဧကုနဝိသတိမံ ဇာတကံ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त 'शाख' नावाचा सेनापती होता, तेव्हा बोधिसत्व 'निग्रोध' नावाचे राजा होते. तरीही ते दोघेही समसमान होते. हे वचन मिलिंद राजाने, वेळुवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी दशकनिपातात देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या 'निग्रोध जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे: 'कारण एका दिवशी भिक्खूंनी...' अशा प्रकारे हे 'निग्रोध जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे. एकोणिसावे जातक. ပုန စ ပရံ သဒါ ဒေဝဒတ္တော ခဏ္ဍဟာလော နာမ ဗြာဟ္မဏော အဟောသိ, တဒါ ဗောဓိသတ္တော စဒေါ နာမ ရာဇကုမာရော အဟောသိ. တထာပိ တာဝ အနေန ခဏ္ဍဟာလော အဓိကတရော’တိ ‘‘ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဂိဇ္ဈကူဋေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဒသဇာတကေဒေဝဒတ္တမာရဗ္ဘ ကထိတံ စဒကုမာရဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ တံ သင်္ခေပနော ဒဿယိဿာမ. ‘‘တဿ ဝထု သံဃဘေဒက္ခဓကေ အာဂတမေဝ စဒကုမာရော ပန အဟမောဝါ’’တိ ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ ဝဒကုမာရဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တန္တိ ဝီသတိမဇာတကံ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त 'खंडहाल' नावाचा ब्राह्मण होता, तेव्हा बोधिसत्व 'चंद' नावाचे राजकुमार होते. तरीही या बाबतीत खंडहाल श्रेष्ठ होता. हे वचन मिलिंद राजाने, गिद्धकुटावर विहार करत असताना शास्त्यांनी देवदत्ताला उद्देशून सांगितलेल्या 'चंदकुमार जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे, ते आम्ही संक्षेपाने दाखवू: 'त्याची कथा संघभेदक स्कंधकात आलेलीच आहे, आणि चंदकुमार तर मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'चंदकुमार जातका'च्या संदर्भाने हे म्हटले आहे. विसावे जातक. ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော ဗြဟ္မဒတ္တော နာမ ရာဇ အဟောသိ, တဒါ ဗောဓိသတ္တော တဿ ပုတ္တော မဟာပဒုမော နာမ ကုမာရော အဟောသိ, တဒါ သောရာဇာ သကပုတ္တံ စောရပ္ပပါတေ ခိပါပေသိ. ယတော ကုတောစိ ပိတာ ပုတ္တာနံ အဓိကတရော အဟောသိ ဝိသိဋ္ဌော, တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တောယေဝ အဓိကတရော’တိ ဣဒမ္ပန ဧဝနံ မိလိဒရညာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ဒွါဒသကနိပါတေ စိဉ္စံ မာဏဝိကမာရဗ္ဘ ကထိတံ မဟာပဒုမဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ. ‘‘ပဌမဗောဓိယဉှိ ဒသဗလဿ အဟံ တဒါ ရာဇပုတ္တော, ဧဝံ ဓာရေထ ဇာတကန္တိ, ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ မဟာပဒုမဇာတကံ သဓာယ ပုတ္တန္တိ ဧကဝီသတိမဇာတကံ. आणि पुन्हा, जेव्हा देवदत्त 'ब्रह्मदत्त' नावाचा राजा होता, तेव्हा बोधिसत्व त्याचा मुलगा 'महापदुम' नावाचा राजकुमार होते. तेव्हा त्या राजाने आपल्या मुलाला चोरप्रपातात (चोरांच्या दरीत) फेकून दिले होते. ज्या अर्थी पिता पुत्रापेक्षा श्रेष्ठ आणि विशिष्ट असतो, तरीही देवदत्तच श्रेष्ठ होता. हे वचन मिलिंद राजाने, जेतवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी द्वादकनिपातात चिंचा माणविकेला उद्देशून सांगितलेल्या 'महापदुम जातका'च्या संदर्भाने म्हटले आहे: 'दशबलांच्या प्रथम बोधीच्या वेळी मी तेव्हा राजपुत्र होतो, असे हे जातक लक्षात ठेवा.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'महापदुम जातका'च्या संदर्भाने हे म्हटले आहे. एकविसावे जातक. ပုန စ ပရံ ယဒါ ဒေဝဒတ္တော မဟာပတာပေါ နာမ ရာဇာ အဟောသိ, တဒါ ဗောဓိသတ္တော တဿ ပုတ္တော ဓမ္မပါလော နာမ ကုမာရော အဟောသိ, တဒါ သော ရာဇာ သကပုတ္တဿ ဟထပါဒေ သီသဉ္စ ဆေဒါပေသိ. တထပိ တာဝ ဒေဝဒတ္တော ယေစ ဥတ္တရော အဓိကတရော’’တိ ဣဒမ္ပန ဝစနံ မိလိဒရညာ ဝေဠုဝနေ ဝိဟရန္တေန သထာရာ ပဉ္စကနိပါတေ ဒေဝဒတ္တဿဝဓပရိသက္ကနမာရဗ္ဘ ကထိတံ စုလ္လဓမ္မပါလဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ‘‘အထေကဒိဝသံ ဘိက္ခု ဓမ္မသဘာယံ ကထံ ဓမ္မပါလကုမာရော ပန အဟမေဝါ’’တိ ဧဝမေတံ မိလိဒရညာ ဣမံ စုလ္လဓမ္မပါလဇာတကံ သဓာယ ဝုတ္တန္တိ ဗာဝီသတိမ ဇာတကံ သမတ္တံ. आणखी पुढे, जेव्हा देवदत्त 'महाप्रताप' नावाचा राजा होता, तेव्हा बोधिसत्व त्याचा 'धम्मपाल' नावाचा राजकुमार (पुत्र) होता. तेव्हा त्या राजाने आपल्या स्वतःच्या पुत्राचे हात, पाय आणि डोके कापून टाकले होते. तरीही देवदत्त हाच श्रेष्ठ आणि अधिक ठरला...' हे वचन मिलिंद राजाने, वेळुवनात विहार करत असताना शास्त्यांनी (बुद्धांनी) पंचकनिपातात देवदत्ताच्या वधाच्या प्रयत्नाचा संदर्भ घेऊन सांगितलेल्या 'चुल्लधम्मपाल जातका'चा संदर्भ देऊन म्हटले आहे. 'एका दिवशी भिक्खूंनी धम्मसभेत चर्चा केली की, धम्मपाल राजकुमार तर मीच होतो.' अशा प्रकारे मिलिंद राजाने या 'चुल्लधम्मपाल जातका'चा संदर्भ देऊन हे म्हटले आहे. हे बाविसावे जातक समाप्त झाले. အမ္ဗဇာတက-ဒုမ္မေဓဇာတကာနိ မဟာကပိ- अंब जातक, दुम्मेध जातक, महाकपि जातक, ဆဒ္ဒန္တ-ဒဒ္ဒရဉ္စာပိ ခန္တိဝါဒိကဇာတကံ छद्दंत जातक, दद्दर जातक आणि खंतिवादि जातक, စုလ္လနဒိယ-ပဏ္ဍရက-တစ္ဆသုကရဇာတကံ चुल्लनदिय जातक, पंडरक जातक, तच्छसूकर जातक, စေတိယဇာတကဉ္စာပိ ရူရုမိဂိဒဇာတကံ चेतिय जातक आणि रुरुमिग जातक, သီလဝံ သဗ္ဗဒါဌဉ္စ လဋုကိကဉ္စ အပဏ္ဏကံ सीलव जातक, सब्बदाठ जातक, लटुकिक जातक आणि अपण्णक जातक, နိဂြောဓမိဂ-နိဂြောဓ-စဒကုမာရဇာတကံ निग्रोधमिग जातक, निग्रोध जातक, चंदकुमार जातक, မဟာပဒုမကုမာရ-ဓမ္မပါလကဇာတကံ महापदुमकुमार जातक, धम्मपालक जातक, ဣတိ ဧတာနိ ဗာဝီသ ဇာတကာနိ ယထာက္ကမံ अशी ही बावीस जातके अनुक्रमाने မိလိဒေါ နာမုပဒါယ နာဂသေနဿ အဗြဝီတိ. मिलिंद राजाने नागसेनांना उद्देशून सांगितली. ဧဝဉ္စ သော ရာဇာ ဣမာနိ ဇာတကာနိ သဓာယ ကထေဝါ ပုနပိ ဧဝမာဟ? ‘‘ဘန္တေ နာဂသေန, အဇ္ဇေကရဟိ ဥဘောပိ သကျကုလေသု ဇာယိံသု. ဗောဓိသတ္တောပိ ဗုဒ္ဓေါ အဟောသိ. သဗ္ဗညု လောကနာယကော, ဒေဝဒတ္တော တဿ ဒေဝါတိဒေဝဿ သာသနေ ပဗ္ဗဇိဝါ ဗုဒ္ဓါလယံ အကာသိ. ကိန္နုခေါ ဘန္တေ နာဂသေန, ယံ မယာ ဘဏိတံ တံ သဗ္ဗမ္ပိ တထံ ဥဒါဟု ဝိတထန္တိ.’’ आणि अशा प्रकारे त्या राजाने या जातकांचा संदर्भ देऊन पुन्हा असे म्हटले: “भंते नागसेन, आजच्या काळात ते दोघेही शाक्य कुळात जन्मले. बोधिसत्व बुद्ध झाले, जे सर्वज्ञ आणि लोकनायक आहेत. देवदत्ताने त्या देवातिदेवाच्या शासनात प्रवज्जा घेऊन बुद्धांच्या स्थानाची (बुद्धत्वाच्या पदाची) आकांक्षा केली. भंते नागसेन, मी जे काही म्हटले आहे, ते सर्व सत्य आहे की असत्य?” ဇာတကုဒ္ဓရဏံ သမတ္တံ. जातक-उद्धरण समाप्त झाले. ဂါထာသရူပံ गाथांचे स्वरूप ဂါထာသရူပမ္ပန ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗံ? गाथांचे स्वरूप याप्रमाणे समजून घ्यावे: မိလိဒေါ နာမ သော ရာဇာ သာဂလာယမ္ပုရုတ္တမေ तो मिलिंद नावाचा राजा सागल नावाच्या उत्तम नगरात राहणारा, ဥပဂဉ္ဆိ နာဂသေနံ ဂင်္ဂါ’ဝ ယထသာဂရံ. ज्याप्रमाणे गंगा नदी सागराकडे जाते, त्याप्रमाणे नागसेनांकडे गेला. အာသဇ္ဇ ရာဇာ စိတြကထီ ဥက္ကာဓာရံ တမောနုဒံ အပုစ္ဆိ နိပုဏေ ပဉှေ ဌာနာဌာနဂတေ ပုထူ, त्या चित्रकथी (विविध प्रकारे बोलणाऱ्या) राजाने, अज्ञानाचा अंधकार दूर करणाऱ्या आणि ज्ञानाची मशाल धारण करणाऱ्या नागसेनांच्या जवळ जाऊन, योग्य-अयोग्य स्थानांविषयीचे अनेक सूक्ष्म प्रश्न विचारले. ပုစ္ဆာ ဝိသဇ္ဇနာ စေဝ ဂမ္ဘိရထူပနိဿိတာ ते प्रश्न आणि त्यांची उत्तरे गंभीर अर्थावर आधारित होती, ဟဒယင်္ဂမာ ကဏ္ဏသုခါ အဗ္ဘုတာ လောမဟံသနာ ती हृदयस्पर्शी, कानांना सुख देणारी, अद्भुत आणि अंगावर रोमांच उभे करणारी होती. အဘိဓမ္မဝိနယောဂါဠှာ သုတ္တဇာလသမထိတာ ती अभिधम्म आणि विनयात खोलवर शिरलेली आणि सुत्तांच्या जाळ्याने सुव्यवस्थित केलेली होती. နာဂသေနကထာ စိတြာ ဩပမ္မေဟိ နယေဟိ စ नागसेनांचे ते संभाषण विविध उपमांनी आणि न्यायांनी (तर्कांनी) युक्त असे चित्रमय होते. တထ ဉာဏမ္ပဏိဓာယ ဟာသယိဝါန မာနသံ त्याचप्रमाणे ज्ञानावर लक्ष केंद्रित करून, मनाला आनंदित करत, သုဏောထ နိပုဏေ ပဉှေ ကင်္ခါဋ္ဌာနဝိဒါဠနေ’တိ शंकांचे स्थान छिन्नभिन्न करणारे हे सूक्ष्म प्रश्न ऐका. တေနာဟု?- त्यामुळे ते म्हणाले:- ဗဟုဿုတော စိတြကထီ နိပုဏော စ ဝိသာရဒေါ,သာမယိကော စ ကုသလော ပဋိဘာနေ စ ကောဝိဒေါ; ते बहुश्रुत, चित्रकथी (विविध प्रकारे बोलणारे), निपुण, विशारद, समयोचित बोलण्यात कुशल आणि प्रतिभेत कोविद (तज्ज्ञ) होते. တေပိ တေပိဋကာ ဘိက္ခူ ပဉ္စနေကာယိကာပိ စ,စတုနေကာယိကာ စေဝ နာဂသေနံ ပုရက္ခရုံ; ते त्रिपिटकधारी भिक्खू, पाच निकायांचे ज्ञाते आणि चार निकायांचे ज्ञाते भिक्खू नागसेनांना पुढे करून चालत होते. ဂမ္ဘီရပညော မေဓာဝီ မဂ္ဂါမဂ္ဂဿ ကောဝိဒေါ,ဥတ္တမထမနုပ္ပတ္တော နာဂသေနော ဝိသာရဒေါ; गंभीर प्रज्ञा असलेले, मेधावी, मार्ग आणि अमार्गाचे ज्ञाते, उत्तम अर्थाला (परम सत्याला) प्राप्त झालेले नागसेन विशारद होते. တေဟိ ဘိက္ခူဟိ ပရိဝုတော နိပုဏေဟိ သစ္စဝါဒိဘီ,စရန္တော ဂါမနိဂမံ သာဂလံ ဥပသင်္ကမီ; त्या निपुण आणि सत्यवादी भिक्खूंनी वेढलेले नागसेन, गावे आणि नगरांमध्ये चारिका करत सागल नगरात आले. သင်္ခေယျပရိဝေဏသ္မိံ နာဂသေနော တဒါ ဝသီ,ကထေတိ သော မနုဿေဟိ ပဗ္ဗတေ ကေသရီ ယထာ’တိ; तेव्हा नागसेन 'संख्येय' परिवेणात (विहारात) राहत होते. पर्वतावरील सिंहाप्रमाणे ते लोकांशी संवाद साधत असत. စရဏေန စေဝ သမ္ပန္နံ သုဒန္တံ ဥတ္တမေ ဒမေ,ဒိသွာ ရာဇာ နာဂသေနံ ဣဒံ ဝစနမဗြဝိ; शील आणि आचरणाने संपन्न, उत्तम दमनाने सुदमन झालेल्या नागसेनांना पाहून राजाने हे वचन म्हटले: ကထိကာ မယာ ဗဟူ ဒိဋ္ဌာ သာကစ္ဆာ ဩသဋာ ဗဟူ,န တာဒိသံ ဘယံ အာသိ အဇ္ဇတာသော ယထာ မမ; “मी अनेक वक्ते पाहिले आहेत, अनेक चर्चांमध्ये भाग घेतला आहे, परंतु मला कधीही अशी भीती वाटली नव्हती, जशी आज वाटत आहे. နိဿံသယံ ပရာဇယော မမ အဇ္ဇ ဘဝိဿတိ,ဇယော’ဝ နာဂသေနဿ ယထာ စိတ္တံ န သဏ္ဌိတန္တိ; आज माझा पराजय निश्चित आहे आणि नागसेनांचाच विजय होईल, कारण माझे मन स्थिर राहिलेले नाही.” ဗာဟိရဂါထာ बाह्य गाथा ယထာ ဟိ အင်္ဂသမ္ဘာရာ ဟောတိ သဒ္ဒေါ ရထော ဣတိ,ဧဝံ ခဓေသု သန္တေသု ဟောတိ သတ္တောတိ သမ္မုတိ; ज्याप्रमाणे विविध भागांच्या जोडणीमुळे 'रथ' हा शब्द (किंवा संज्ञा) वापरला जातो, त्याचप्रमाणे स्कंध अस्तित्वात असताना 'सत्त्व' (प्राणी) अशी व्यावहारिक संज्ञा होते. သီလေ ပတိဋ္ဌာယ နရော သပဉေဉာ စိတ္တံ ပညဉ္စ ဘာဝယံ,အာတာပီ နိပကော ဘိက္ခု သော ဣမံ ဝိဇဋယေ ဇဋန္တိ; शीलावर प्रतिष्ठित होऊन, प्रज्ञावान मनुष्य चित्त आणि प्रज्ञेची भावना करतो. असा उद्योगी आणि बुद्धिमान भिक्खू या गुंतागुंतीला (जटा) सोडवतो. အယမ္ပတိဋ္ဌာ ဓရဏီဝ ပါဏိနံ ဣဒဉ္စ မူလံ ကုသလာဘိဝုဒ္ဓိယာ,မုခဉ္စိဒံ သဗ္ဗဇိနာနုသာသနေ ယော သူလက္ခဓော ဝရပါတိမောက္ခိယော’တိ; ज्याप्रमाणे पृथ्वी सर्व प्राण्यांचा आधार आहे, त्याचप्रमाणे हे (शील) कुशल धर्मांच्या वृद्धीचे मूळ आहे. सर्व जिनांच्या (बुद्धांच्या) शासनात हेच मुख्य द्वार आहे, जे श्रेष्ठ प्रातिमोक्षाने सुसंरक्षित आहे. သဒ္ဓါယ တရတီ ဩဃံ အပ္ပမာဒေန အဏ္ဏဝံ,ဝီရိယေန ဒုက္ခံ အစ္စေတိ ပညာယ ပရိသုဇ္ဈတိ; श्रद्धेने मनुष्य (संसाररूपी) ओघ (पूर) पार करतो, अप्रमादाने (जागरूकतेने) महासागर पार करतो, वीर्याने (प्रयत्नाने) दुःखाच्या पलीकडे जातो आणि प्रज्ञेने पूर्णपणे शुद्ध होतो. နာဘိနဒါမိ မရဏံ နာဘိနဒါမိ ဇီဝိတံ,ကာလဉ္စ ပဋိကင်္ခါမိ နိဗ္ဗိသံ ဘတကော ယထာ; मी मरणाचे अभिनंदन (इच्छा) करत नाही, आणि जीवनाचेही अभिनंदन करत नाही. ज्याप्रमाणे एखादा मजूर आपल्या मजुरीची वाट पाहतो, त्याप्रमाणे मी केवळ काळाची (मृत्यूची) वाट पाहत आहे. နာဘိနဒါမိ မရဏံ နာဘိနဒါမိ ဇီဝိတံ,ကာလဉ္စ ပဋိကင်္ခါမိ သမ္ပဇာနော ပတိဿတော; मी मरणाचे अभिनंदन करत नाही, आणि जीवनाचेही अभिनंदन करत नाही. मी सजग आणि स्मृतिमान राहून केवळ काळाची वाट पाहत आहे. ပဋိဂစ္စေဝ တံ ကယိရာ ယံ ဇညာ ဟိတမတ္တနော,န သာကာဋိကစိန္တာယ မန္တာ ဓီရော ပရက္ကမေ; मनुष्याने आधीच ते केले पाहिजे जे स्वतःच्या हिताचे आहे असे त्याला ठाऊक आहे. धीर पुरुषाने गाड्या चालवणाऱ्याच्या (चुकीच्या) विचाराप्रमाणे विचार करून पराक्रम करू नये. ယထာ သာကဋိကော နာမ သမံ ဟိဝါ မဟာပထံ,ဝိသမံ မဂ္ဂမာရုယှ အက္ခဘိန္နော’ဝ ဓာယတိ; ज्याप्रमाणे एखादा गाडीवान सपाट महामार्ग सोडून, विषम (खडबडीत) मार्गावर जातो आणि कणा (अक्ष) तुटल्यामुळे धावपळ करतो (किंवा दुःखी होतो); ဧဝံ ဓမ္မာ အပက္ကမ္မ အဓမ္မမနုဝတ္တိယ,မဒေါ မစ္စုမုခမ္ပတ္တော အက္ခစ္ဆိန္နော’ဝ သောစတိ; त्याचप्रमाणे, धम्मापासून दूर जाऊन आणि अधम्माचे आचरण करून, मदांध झालेला मनुष्य मृत्यूच्या मुखात पडतो आणि अक्ष तुटलेल्या गाडीवानाप्रमाणे शोक करतो; အလ္လဝမ္မပဋိစ္ဆန္နော နဝဒွါရော မဟာဝဏော,သမန္တတော ပဂ္ဃရတိ အသုစိ ပူတိဂဓိယော’တိ; ओल्या कातडीने झाकलेला, नऊ द्वारे (छिद्रे) असलेला हा एक मोठा व्रण (जखम) आहे, ज्यातून सर्व बाजूंनी अशुद्ध आणि दुर्गंधीयुक्त स्राव वाहत असतो; မိလိဒပဉှေ ဌိတာ ဗာဝီသတိ ဂါထာ သမတ္တာ. मिलिन्दपन्हामध्ये असलेल्या बावीस गाथा समाप्त झाल्या. ဘဿပ္ပဝေဒီ ဝေတဏ္ဍီ အတိဗုဒ္ဓိဝိစက္ခဏော,မိလိဒေါ ဉာဏဘေဒါယ နာဂသေနမုပါဂမီ; संभाषणकलेत निपुण, वितंडवादी आणि अत्यंत कुशाग्र बुद्धीचे मिलिंद राजे ज्ञानपरीक्षेसाठी नागसेनांकडे गेले; ဝသန္တော တဿ ဆာယာယ ပရိပုစ္ဆန္တော ပုနပ္ပုနံ,ပဘိန္နဗုဒ္ဓိ ဟုဝါန သော’ပိ အာသိ တိပေဋကော; त्यांच्या छायेत राहून, वारंवार प्रश्न विचारून, प्रगल्भ बुद्धीचे होऊन ते स्वतःही तिपिटकधारी (त्रिपिटकज्ञ) झाले; နဝင်္ဂံ အနုမဇ္ဇန္တော ရတ္တိဘာဂေ ရဟောဂတော,အဒ္ဒက္ခိ မေဏ္ဍကေ ပဉှေ ဒုန္နိဝေဌေ သနိဂ္ဂဟေ; रात्रीच्या वेळी एकांतात बसून नवअंग (नवांग) बुद्धवचनांचे मनन करत असताना, त्यांनी सोडवण्यास कठीण आणि निग्रह करण्यास अवघड असलेले 'मेंडक प्रश्न' (द्विधा प्रश्न) पाहिले; ပရိယာယဘာသိတံ အထိ အထိ သဓာယ ဘာသိတံ,သဘာဝဘာသိတံ အထိ ဓမ္မရာဇဿ သာသနေ; धम्मराजाच्या (बुद्धांच्या) शासनात पर्यायाने (अप्रत्यक्षपणे) सांगितलेले, विशिष्ट हेतूने (अभिप्राय ठेवून) सांगितलेले आणि स्वभावतः (यथार्थपणे) सांगितलेले वचन आहे; တေသံ အထမဝိညာယ မေဏ္ဍကေ ဇိနဘာသိတေ,အနာဂတမှိ အဒ္ဓါနေဝိဂ္ဂဟော တထ ဟေဿတိ; जिनांनी (बुद्धांनी) भाषिलेल्या त्या मेंडक प्रश्नांचा अर्थ न समजल्यामुळे, भविष्यात त्यावरून वादविवाद निर्माण होतील; ဟဒ ကထိမ္ပသာဒေတွာ ဆေဇ္ဇာပေဿာမိ မေဏ္ဍကေ,တဿ နိဒ္ဒိဋ္ဌမဂ္ဂေန နိဒ္ဒိသိဿန္တျနာဂတေ; म्हणून, मन प्रसन्न करून मी या मेंडक प्रश्नांचे निरसन करीन; त्यांनी दाखवलेल्या मार्गानेच भविष्यातील लोक मार्गदर्शन करतील; ဝိသမံ သဘယံ အတိဝါတော ပဋိစ္ဆန္နံ ဒေဝနိဿိတံ,ပထော စ သင်္ကမော တိထံ အဋ္ဌေတေ ပရိဝဇ္ဇိယာ; विषम (खडबडीत), भययुक्त, अतिवारा असलेले, आच्छादित (लपलेले), देवांवर आश्रित असलेले, अरुंद रस्ता, पूल आणि घाट (तीर्थ) – या आठ गोष्टी वर्ज्य कराव्यात; ရတ္တော ဒုဋ္ဌော စ မူဠှော စ မာနီ လုဒ္ဓေါ တထာ’လသော,ဧကစိန္တီ စ ဗာလော စ ဧတေ အထဝိနာသကာ; रागी (आसक्त), द्वेषी, मोहाने ग्रासलेला, अभिमानी, लोभी, आळशी, केवळ स्वतःचाच विचार करणारा आणि मूर्ख – हे (आठ) अर्थाचा (कल्याणाचा) नाश करणारे आहेत; ရတ္တော ဒုဋ္ဌော စ မူဠှော စ ဘီရု အာမိသစက္ခုကော,ဣထိ သောဏ္ဍော ပဏ္ဍကော စ နဝမော ဘဝတိ ဒါရကော; रागी (आसक्त), द्वेषी, मोहाने ग्रासलेला, भीरू (भित्रा), आमिषावर डोळा ठेवणारा, स्त्री, मद्यपी, नपुंसक आणि नववा लहान बालक; နဝေတေ ပုဂ္ဂလာ လောကေ ဣတ္တရာ စလိတာ စလာ,ဧတေဟိ မန္တိတံ ဂုယှံ ခိပ္ပံ ဘဝတိ ပါကဋံ; जगात हे नऊ प्रकारचे लोक चंचल आणि अस्थिर मनाचे असतात; त्यांनी गुप्तपणे केलेली चर्चा लवकरच उघड होते; ဝသေန ယသပုစ္ဆာဟိ တိထဝါသေန ယောနိသော,သာကစ္ဆာ သ္နေဟသံသေဝါ ပတိရူပဝသေန စ प्रभावाने, यशाच्या चौकशीने, एकत्र वास्तव्याने, योनिशो (योग्य) मननाने, चर्चा-संवादाने, स्नेहादराने आणि योग्य वर्तनाने; ဧတာနိ အဋ္ဌ ဌာနာနိ ဗုဒ္ဓိဝိသဒကာရကာ,ယေသံ ဧတာနိ သမှောန္တိ တေသံ ဗုဒ္ဓိ ပဘိဇ္ဇတိ; ही आठ स्थाने (कारणे) बुद्धीला निर्मळ करणारी आहेत; ज्यांच्यामध्ये ही असतात, त्यांची बुद्धी प्रगल्भ (तीक्ष्ण) होते; ပူဇီယန္တာ အသမသမာ သဒေဝမာနုသေဟိ တေ,န သာဒိယန္တိ သက္ကာရံ ဗုဒ္ဓါနံ ဧသ ဓမ္မတာ’တိ देव आणि मनुष्यांद्वारे पूजिले जात असतानाही, ते अनुपम (असमसम) बुद्ध सत्काराची आस धरत नाहीत; बुद्धांचा हाच स्वभाव (धम्मता) आहे; အယံ ဂါထာ သာရိပုတ္တထေရေန ဝုတ္တာ. ही गाथा थेर सारिपुत्तांनी म्हटली आहे. ဣမေဟိ အဋ္ဌိဟိ တမဂ္ဂပုဂ္ဂလံဒေဝါတိဒေဝံ နရဒမ္မသာရထိံ,သမန္တစက္ခုံ သတပုညလက္ခဏံပါဏေဟိ ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂတော’သ္မိ; या आठ गुणांनी युक्त असलेल्या, सर्वश्रेष्ठ पुरुषाला, देवातिदेवाला, मानवांचे दमन करणाऱ्या सारथीला, समंतचक्षू (सर्वदर्शी) आणि शतपुण्यलक्षण असलेल्या बुद्धांना मी प्राण असेपर्यंत शरण गेलो आहे; ဇာလိံကဏှာဇိနံ ဓီတံ မဒ္ဒိဒေဝိံ ပတိဗ္ဗတံ,စဇမာနော နစိန္တေသိံ ဗောဓိယာယေဝ ကာရဏာ; (ဇာတကဂါထာ) जाली, माझी कन्या कन्हाजिना आणि पतिव्रता मद्दी देवी यांचा त्याग करताना मी केवळ बोधीच्या प्राप्तीसाठीच विचार केला (दुसरा कोणताही विचार केला नाही); (जातकगाथा) န အန္တလိက္ခေ န သမုဒ္ဒမဇ္ဈေန ပဗ္ဗတာနံ ဝိဝရံ ပဝိဿ,န ဝိဇ္ဇတိ သော ဇဂတိပ္ပဒေသောယထဋ္ဌိတံ နပ္ပသဟေယျ မစ္စု; आकाशात नाही, समुद्राच्या मध्यभागी नाही, की पर्वतांच्या कपारीत प्रवेश करूनही नाही; या जगात अशी कोणतीही जागा अस्तित्वात नाही, जिथे राहून मृत्यू माणसाला पराभूत करू शकणार नाही; ကာယေန သံဝရော သာဓု သာဓုဝါစာယ သံဝရော,မနသာ သံဝရော သာဓု သာဓု သဗ္ဗထသံဝရော; कायेने (शरीराने) संयम राखणे चांगले आहे, वाणीने संयम राखणे चांगले आहे, मनाने संयम राखणे चांगले आहे आणि सर्व प्रकारे संयम राखणे कल्याणकारी आहे; အစေတနံ ဗြာဟ္မဏ အဿုဏန္တံဇာနံ အဇာနန္တမိမံ ပလာသံ,အာရဒ္ဓဝီရိယော ဓုဝမပ္ပမတ္တောသုခသေယျံ ပုစ္ဆသိ ကိဿ ဟေတု’တိ; (ဇာတကဂါထာ) हे ब्राह्मणा! अचेतन, न ऐकणाऱ्या आणि काहीही न जाणणाऱ्या या पळसाच्या झाडाला तू वीर्यवान (प्रयत्नशील) आणि सदैव अप्रमत्त (सावध) राहून कोणत्या कारणासाठी सुखाच्या झोपेविषयी विचारत आहेस? (जातकगाथा) ဣတိ ဖဒန ရုက္ခော’ပိ တာဝဒေ အဇ္ဈဘာသထ,မယှမ္ပိ ဝစနံ အထိ ဘာဇဒွါဇ သုဏောဟိ မေ’တိ; (ဇာတကဂါထာ) तेव्हा त्या फंदन वृक्षानेही असे म्हटले: "हे भारद्वाजा! माझेही काही सांगणे आहे, ते तू ऐक." (जातकगाथा) စုဒဿ ဘတ္တံ ဘုဉ္ဇိဝါ ကမ္မာရဿာ’တိ မေ သုတံ,အာဗာဓံ သမ္ဖုသီ ဓီရော ပဗာဠှံ မာရဏန္တိကတ္တိ "लोहार चुंदाचे भोजन ग्रहण केल्यानंतर, त्या धीर (बुद्धांना) अत्यंत तीव्र आणि प्राणघातक वेदना (आजार) झाली," असे मी ऐकले आहे; သထဝါတော ဘယံ ဇာတံ နိကေတာ ဇာယတီ ရဇော,အနိကေတမသထဝံ ဧတံ ဝေ မုနိဒဿနန္တိ; (ဇိနဘာသိတာ မိနိဒေန ဝုတ္တာ) आसक्तीतून (सहवासातून) भय निर्माण होते आणि घरापासून (आश्रयापासून) धूळ (क्लेश) उत्पन्न होते; अनासक्त आणि गृहहीन असणे, हेच मुनींचे दर्शन आहे; (जिनांनी भाषिलेली आणि मिलिंदाने म्हटलेली) သသမုဒ္ဒပရိယာယံ မဟိံ သာဂရကုဏ္ဍလံ,န ဣစ္ဆေ သဟ နိဒါယ ဧဝံ သယှ ဝိဇာနဟီတိ; (ဇာတကဂါထာ လောမကဿပေန ဝုတ္တာ) समुद्राने वेढलेली आणि सागराचे कुंडल घातलेली ही संपूर्ण पृथ्वीही मला निद्रेच्या (अज्ञानाच्या) मोबदल्यात नको आहे; हे सय्ह, तू असे समज; (लोमकस्सपाने म्हटलेली जातकगाथा) ဝဓိဿမေတန္တိ ပရာမသန္တောကာသာဝမဒ္ဒက္ခိ ဓဇံ ဣသီနံ,ဒုက္ခေန ဖုဋ္ဌဿုဒပါဒိ သညာအရဟဒ္ဓဇော သဗ္ဘိ အဝဇ္ဈရူပေါ’တိ; (ဇာတကဂါထာ ဆဒ္ဒန္တနာဂရာဇေန ဝုတ္တာ) "मी याला मारीन" असा विचार करून स्पर्श करत असतानाच, त्याने ऋषींचा ध्वज असलेले काषाय वस्त्र पाहिले; दुःखाने व्याकुळ झालेल्या त्याला ही जाणीव झाली की, अरहंतांचा ध्वज सज्जनांसाठी अवध्य (न मारण्यायोग्य) असतो; (षड्दंत नागराजाद्वारे म्हटलेली जातकगाथा) ဂါထာဘိဂီတမ္မေ အဘောဇနေယျံသမ္ပဿတံ ဗြာဟ္မဏ နေသ ဓမ္မော,ဂါထာဘိဂီတံ ပနုဒန္တိ ဗုဒ္ဓါဓမ္မေ သတိ ဗြာဟ္မဏ ဝုတ္တိရေသာ; (သုတ္တာနိပါတဂါထာ ဇိနဘာသိတာ) "गाथा गायन करून मिळवलेले अन्न माझ्यासाठी अभोज्य (न खाण्यायोग्य) आहे; हे ब्राह्मणा! सत्य पाहणाऱ्यांचा हा धम्म नाही. बुद्ध गाथा गायनाने मिळालेल्या अन्नाचा त्याग करतात; जोपर्यंत धम्म अस्तित्वात आहे, तोपर्यंत हीच त्यांची उपजीविकेची पद्धत आहे;" (जिनांनी भाषिलेली सुत्तनिपात गाथा) န မေ အာစရိယော အထ သဒိသော မေ န ဝိဇ္ဇတိ,သဒေဝကသ္မိံ လောကသ္မိံ နထိ မေ ပဋိပုဂ္ဂလော’တိ; (ခဓကဂါထာ ဇိနဘာသိတာ) "माझा कोणीही आचार्य (गुरु) नाही आणि माझ्यासारखा दुसरा कोणी अस्तित्वात नाही; देवलोकासह संपूर्ण जगात माझ्या तोडीचा कोणीही प्रतिपुद्गल (प्रतिस्पर्धी) नाही;" (जिनांनी भाषिलेली खंधक गाथा) ဝိပုလော ရာဇဂဟိကာနံ ဂိရိသေဋ္ဌော ပဝုစ္စတိ,သေတော ဟိမဝတံ သေဋ္ဌော အာဒိစ္စော အဃဂါမိနံ; राजगृहातील पर्वतांमध्ये विपुल पर्वत श्रेष्ठ मानला जातो, हिमालयातील पर्वतांमध्ये श्वेत (कैलास) पर्वत श्रेष्ठ आहे, आकाशात फिरणाऱ्यांमध्ये सूर्य श्रेष्ठ आहे; သမုဒ္ဒေါ’ဒဓိနံ သေဋ္ဌော နက္ခတ္တာနဉ္စ စဒိမာ,သဒေဝကဿ လောကဿ ဗုဒ္ဓေါ အဂ္ဂေါ ပဝုစ္စတီတိ; जलाशयांमध्ये समुद्र श्रेष्ठ आहे आणि नक्षत्रांमध्ये चंद्र श्रेष्ठ आहे; त्याचप्रमाणे देवलोकासह संपूर्ण जगात बुद्ध सर्वश्रेष्ठ मानले जातात; (ဒွေ ဂါထာ မာဏဝကဒေဝပုတ္တေန ဝုတ္တာ နာဂသေနထေရေန ဝုတ္တာ) (या दोन गाथा माणवक देवपुत्राने म्हटल्या असून थेर नागसेनांनी उद्धृत केल्या आहेत) ဧကော မနောပသာဒေါ သရဏဂမနံ အဉ္ဇလိပ္ပဏာမော ဝါ,ဥဿဟတေ တာရယိတုံ မာရဗလနိသူဒနေ ဗုဒ္ဓေ’တိ; (အယံ ဂါထာ သာရိပုတ္တထေရေနာဘတာ) मारबलाचा नाश करणाऱ्या बुद्धांच्या प्रति केवळ एक वेळची मनःप्रसन्नता, शरण जाणे किंवा हात जोडून नमस्कार करणे देखील (संसारसागरातून) तारून नेण्यास समर्थ ठरते; (ही गाथा थेर सारिपुत्तांनी उद्धृत केली आहे) အာရဟထ နိက္ခမထ ယုဇ္ဇထ ဗုဒ္ဓသာသနေ,ဓုနာထ မစ္စုနော သေနံ နဠာဂါရံ’ဝ ကုဉ္ဇရော’တိ; (ဇိနဘာသိတာ မိလိဒေန ဝုတ္တာ) "आरंभ करा, निष्क्रमण करा (गृहत्याग करा), बुद्धशासनात प्रयत्नशील व्हा; मृत्यूच्या सेनेचा तसाच नाश करा, ज्याप्रमाणे हत्ती गवताची झोपडी चिरडून टाकतो;" (जिनांनी भाषिलेली आणि मिलिंदाने म्हटलेली) ယော သီလ ဝါ ဒုဿီလေသု ဒဒါတိ ဒါနံဓမ္မေန လဒ္ဓံ သုပသန္န စိတ္တော,အဘိသဒ္ဒဟံ ကမ္မဖလံ ဥလာရံတံ ဝေ ဒါနံ ဒါယကတော ဝိသုဇ္ဈတီ’တိ; (အယံ နာဂသေနေန အာဘတာ) "जो शीलवान मनुष्य, अधार्मिकाला (दुःशीलाला) धम्मपूर्वक मिळवलेले दान प्रसन्न चित्ताने देतो आणि कर्माच्या महान फळावर दृढ विश्वास ठेवतो, ते दान दात्याच्या बाजूने शुद्ध होते;" (ही गाथा नागसेनांनी उद्धृत केली आहे) န မေ ဒေဿာ ဥဘော ပုတ္တာ မဒ္ဒီ ဒေဝီ န အပ္ပိယာ,သဗ္ဗညုတံ ပိယံ မယှံ တသ္မာ ပိယေ အဒါသဟန္တိ; "मला माझे दोन्ही पुत्र अप्रप्रिय नव्हते, की मद्दी देवी नावडती नव्हती; परंतु मला सर्वज्ञता (सर्वज्ञत्व) अधिक प्रिय होती, म्हणूनच मी माझ्या प्रियजनांचे दान केले;" သဟဿဂ္ဃဉှိ မံ တာတော ဗြာဟ္မဏဿ ပိတာ အဒါ,အထော ကဏှာဇိနံ ကညံ ဟထိနဉ္စ သတေန စာ’တိ; "कारण माझ्या वडिलांनी मला आणि माझी कन्या कन्हाजिना हिला शंभर हत्तींसह त्या ब्राह्मणाला दिले होते;" ဇိဂစ္ဆာယ ပိပါသာယ အဟိနာ ဒဋ္ဌော ဝိသေန စ,အဂ္ဂိ ဥဒက သတ္တီဟိ အကာလေ တထ မိယျတိ; भूक, तहान, सर्पदंश आणि विषबाधा, तसेच अग्नी, पाणी किंवा शस्त्रांमुळे मनुष्य अकाली मृत्यू पावतो; အနုမာနပဉှေ ဝုစ္စမာနာ ဣမာ ဂါထာ သလ္လက္ခေတဗ္ဗာ? अनुमानप्रश्नामध्ये सांगितलेल्या या गाथा लक्षात घेतल्या पाहिजेत का? ဗဟု ဇနေ တာရယိဝါ နိဗ္ဗုတော ဥပဓိက္ခယေ,အနုမာနေနဉာတဗ္ဗံ’အထိ သော ဒီပဒုတ္တမော’တိ; अनेक लोकांना (संसारसागरातून) तारून, उपाधींच्या क्षयाने परिनिर्वाण पावलेले ते 'द्विपदोत्तम' (मनुष्यांमध्ये श्रेष्ठ/सर्वश्रेष्ठ दीप) अस्तित्वात आहेत, हे अनुमानाने जाणावे. ကမ္မမူလံ ဂဟေတွာန အာပဏံ ဥပဂစ္ဆထ,အာရမ္မဏံ ကိဏိဝါန တတော မုစ္စထ မုတ္တိယာတိ; कर्माचे भांडवल (कर्ममूल्य) घेऊन बाजारात जा, आणि (ध्यान) आलंबन खरेदी करून त्याद्वारे विमुक्ती मिळवून मुक्त व्हा. န ပုပ္ဖဂဓော ပဋိဝါတမေတိ န စဒနံ တဂရမလ္လိကာ ဝါ,သတဉ္စ ဂဓော ပဋိဝါတမေတိ သဗ္ဗာ ဒိသာသပ္ပုရိသော ပဝါတိ; फुलांचा सुगंध वाऱ्याच्या विरुद्ध दिशेला जात नाही, तसेच चंदन, तगर किंवा मोगऱ्याचाही जात नाही; परंतु सत्पुरुषांचा सुगंध वाऱ्याच्या विरुद्ध दिशेलाही जातो. सत्पुरुष सर्व दिशांना सुगंधित करतात. စဒနံ တဂရံ ဝါပိ ဥပ္ပလံ အထ ဝဿိကီ,ဧတေသံ ဂဓဇာတာနံ သီလဂဓော အနုတ္တရော; चंदन, तगर, कमळ किंवा चमेली या सर्व प्रकारच्या सुगंधांमध्ये शील-सुगंध हाच सर्वोत्तम आहे. အပ္ပမတ္တော အယ ဂဓော ယဝါယံ နဂရစဒနီ,ယော စ သီလဝတံ ဂဓော ဝါတ ဒေဝေသု ဥတ္တမော’တိ; तगर आणि चंदनाचा हा जो सुगंध आहे तो अत्यंत अल्प आहे; परंतु शीलवंतांचा जो सुगंध आहे, तो देवांमध्येही सर्वोत्तम होऊन दरवळतो. ကမ္မမူလံ ဇနာ ဒဝါ ဂဏှန္တိ အမတံ ဖလံ,တေန တေ သုခိတာ ဟောန္တိ ယေ ကီတာ အမတံ ဖလန္တိ; लोक कर्माचे मूल्य देऊन अमृतफळ प्राप्त करतात; ज्यांनी ते अमृतफळ विकत घेतले आहे, ते त्यामुळे सुखी होतात. ယေ ကေစိ လောကေ အဂဒါ ဝိသာနံ ပဋိဗာဟကာ,ဓမ္မာဂဒသမံ နထိ ဧတံ ပိဝထ ဘိက္ခဝေါ’တိ; जगात विषाचा नाश करणारी जी काही औषधे आहेत, त्यांपैकी धम्मरूप औषधासारखे दुसरे कोणतेही औषध नाही; म्हणून हे भिक्खूंनो, तुम्ही याचे प्राशन करा. ယေ ကေစိ ဩသဓာ လောကေ ဝိဇ္ဇန္တိ ဝိဝိဓာ ဗဟူ,ဓမ္မောသဓ သမံ နထိ ဧတံ ပိဝထ ဘိက္ခဝေါ’တိ; जगात विविध प्रकारची जी अनेक औषधे अस्तित्वात आहेत, त्यांपैकी धम्मरूप औषधासारखे दुसरे कोणतेही औषध नाही; म्हणून हे भिक्खूंनो, तुम्ही याचे प्राशन करा. ဓမ္မောသဓံ ပိဝိဝါန အဇရာမရဏာ သိယုံ,ဘာဝယိဝါ စ ပဿိဝါ နိဗ္ဗုတာ ဥပဓိက္ခယေ’တိ; धम्मरूप औषधाचे प्राशन करून ते जरा आणि मरणापासून मुक्त होतात; आणि (विपश्यनेची) भावना करून व साक्षात्कार करून, उपाधींच्या क्षयाने परिनिर्वाण प्राप्त करतात. ဗျာဓိတံ ဇနတံ ဒိသွာ အမတာပဏံ ပသာရယီ,ကမ္မေန တံ ကိဏိဝါန အမတမာဒေထ ဘိက္ခဝေါ’တိ; लोकांना व्याधीग्रस्त पाहून त्यांनी अमृताचा बाजार मांडला; हे भिक्खूंनो, कर्माच्या मूल्याने ते खरेदी करून तुम्ही अमृत प्राप्त करा. ဧဝရူပါနိ သီလာနိသန္တိ ဗုဒ္ဓဿ အာပဏေ,ကမ္မေန တံ ကိဏိဝါန ရတနံ ဝေါ ပိလဓထာ’တိ; बुद्धांच्या बाजारामध्ये अशा प्रकारची शिले आहेत; कर्माच्या मूल्याने ती खरेदी करून तुम्ही हे (शील) रत्न परिधान करा. သမာဓိရတနမာလဿ ကုဝိတက္ကာ န ဇာယရေ,န စ ဝိက္ခိပ္ပတေ စိတ္တံ ဧတံ တုမှေ ပိလဓထာ’တိ; समाधीरूपी रत्नांची माळ परिधान करणाऱ्याच्या मनात कुविचार उत्पन्न होत नाहीत आणि त्याचे चित्त विचलित होत नाही; म्हणून तुम्ही हे परिधान करा. ပညာရတနမာလဿ န စိရံ ဝတ္တတေ ဘဝေါ,ခိပ္ပံ ဖဿေတိ အမတံ န စ သော ရောစတေ ဘဝေ’တိ; प्रज्ञारूपी रत्नांची माळ परिधान करणाऱ्याचा संसार (भवचक्र) फार काळ टिकत नाही; तो त्वरित अमृताचा (निर्वाणाचा) स्पर्श करतो आणि त्याला संसारात रस राहत नाही. မဏိမာလာဓရံ ဂေဟဇနော သာမိံ ဥဒိက္ခတိ,ဝိမုတ္တိရတနမာလန္တု ဥဒိက္ခန္တိ သဒေဝကာ’တိ; मण्यांची माळ परिधान करणाऱ्या मालकाकडे त्याचे कुटुंबीय पाहतात; परंतु विमुक्तीरूपी रत्नांची माळ परिधान करणाऱ्याकडे देवलोकासह सर्व लोक आदराने पाहतात. ယေန ဉာဏေန ဗုဇ္ဈန္တိ အရိယာ ကတကိစ္စတံ,တံ ဉာဏရတနံ လဒ္ဓုံ ဝါယမေထ ဇိနောရသာ’တိ; ज्या ज्ञानामुळे आर्य जन आपले कर्तव्य पूर्ण झाल्याचे (कृतकृत्यता) जाणतात, ते ज्ञानरूपी रत्न प्राप्त करण्यासाठी, हे जिनपुत्रांनो, तुम्ही प्रयत्न करा. ပဋိသမ္ဘိဒါ ကိဏိဝါနဉာဏေန ဖဿယေယျ ယော,အသမ္ဘီတော အနုဗ္ဗိဂ္ဂေါ အတိရောစတိ သဒေဝကေ’တိ; जो प्रतिसंभिदा खरेदी करून ज्ञानाने त्याचा स्पर्श करतो, तो निर्भय आणि उद्वेगरहित होऊन देवलोकासह सर्व लोकांमध्ये अतिशय शोभून दिसतो. ဗောဇ္ဈင်္ဂရတနမာလဿ ဥဒိက္ခန္တိ သဒေဝကာ,ကမ္မေန တံ ကိဏိဝါန ရတနံ ဝေါ ပိလဓထာ’တိ; बोझ्झंगरूपी रत्नांची माळ परिधान करणाऱ्याकडे देवलोकासह सर्व लोक पाहतात; कर्माच्या मूल्याने ते खरेदी करून तुम्ही हे रत्न परिधान करा. အာယု အာရောဂတာ ဝဏ္ဏံ သဂ္ဂံ ဥစ္စာကုလီနတာ,အသင်္ခတဉ္စ အမတံ အထိ သဗ္ဗာပဏေ ဇိနေ; आयुष्य, आरोग्य, वर्ण (सौंदर्य), स्वर्ग, उच्च कुळात जन्म आणि असंस्कृत (असंखत) अमृत (निर्वाण) – हे सर्व जिनांच्या बाजारामध्ये उपलब्ध आहे. အပ္ပေန ဗဟုကေနာပိ ကမ္မမူလေန ဂယှတိ,ကိဏိဝါ သဒ္ဓါမူလေန သမိဒ္ဓါ ဟောထ ဘိက္ခဝေါ; थोड्या किंवा जास्त कर्माच्या मूल्याने ते प्राप्त केले जाऊ शकते; म्हणून हे भिक्खूंनो, श्रद्धारूपी मूल्याने ते खरेदी करून तुम्ही समृद्ध व्हा. ဘဝတီဟ- येथे असे म्हटले आहे – ဝီတရာဂါ ဝီတဒေါသာ ဝီတမောဟာ အနာသဝါ,ဝီတတဏှာ အနာဒါနာ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे वीतरागी, वीतद्वेषी, वीतमोही, अनासव, तृष्णारहित आणि उपादानरहित आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. အာရညကာ ဓူတဓရာ ဓာယိနော လူခစီဝရာ,ဝိဝေကာဘိရတာ ဓီရာ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ’တိ; जे अरण्यवासी, धुतंग पाळणारे, ध्यानी, खडबडीत चीवर परिधान करणारे, विवेकात रमणारे आणि धीर आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. နေသဇ္ဇိကာ သထတိကာ အထော’ပိ ဌာနဝင်္ကမာ,ပံသုကူလဓရာ သဗ္ဗေ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे केवळ बसून राहण्याचे व्रत पाळणारे, स्मृतिमान, तसेच उभे राहून व चंक्रमण करून साधना करणारे आणि पांसुकूल चीवर परिधान करणारे आहेत, ते सर्व या धम्मनगरात निवास करतात. တိစီဝရဓရာ သဗ္ဗေ စမ္မခဏ္ဍစတုထကာ,ရတာ ဧကာသနေ ဝိညု ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे त्रिचीवर धारण करणारे, चर्मखंडाचा चौथा भाग म्हणून वापर करणारे आणि एकाच आसनावर भोजन करण्यात रमणारे सुज्ञ लोक आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. အပ္ပိစ္ဆာ နိပကာ ဓီရာ အပ္ပာဟာရာ အလောလုပါ,လာဘာလာဘေန သန္တုဋ္ဌာ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे अल्पेच्छ, चतुर, धीर, अल्पाहारी, अलोलुपी आणि लाभ-अलाभाने संतुष्ट राहणारे आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. ဓာယီ ဓာနရတာ ဓီရာ သန္တစိတ္တာ သမာဟိတာ,အာကိဉ္စညံ ပထယာနာ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တီ တေ; जे ध्यानी, ध्यानमग्न, धीर, शांतचित्त, समाधीस्थ आणि अकिंचनतेची इच्छा बाळगणारे आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. ပဋိပန္နာ ဖလဋ္ဌာ စ သေက္ခာ ဖလသမင်္ဂိနော,အာသိံသကာ ဥတ္တမထံ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे मार्गावर आरूढ (प्रतिपन्न) आहेत, फलप्राप्त आहेत, शैक्ष आहेत, फलयुक्त आहेत आणि उत्तम अर्थाची आकांक्षा बाळगणारे आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. သောတာပန္နာ စ ဝိမလာ သကဒါဂါမိနော စ ယေ,အနာဂါမီ စ အရဟန္တော ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे विमल सोतापन्न, सकदागामी, अनागामी आणि अरहंत आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. သတိပဋ္ဌာနကုသလာ ဗောဇ္ဈင်္ဂဘာဝနာရတာ,ဝိပဿကာ ဓမ္မဓရာ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे सतिपट्ठान साधनेत कुशल, बोझ्झंग भावनेत रमणारे, विपश्यना करणारे आणि धम्म धारण करणारे आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. ဣဒ္ဓိပါဒေသု ကုသလာ သမာဓိဘာဝနာရတာ,သမ္မပ္ပဓာနမနုယုတ္တာ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे इद्धिपाद साधनेत कुशल, समाधी भावनेत रमणारे आणि सम्मप्पधान साधनेत मग्न असणारे आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. အဘိညာပါရမိပ္ပတ္တာ ပေတ္တိကေ ဂေါစရေ ရတာ,အန္တဠိက္ခမှိ စရဏာ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे अभिज्ञांमध्ये पारगामी झालेले, पितृ-परंपरेच्या क्षेत्रात रमणारे आणि आकाशात गमन करणारे आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. ဩက္ခိတ္တစက္ခု မိတဘာဏီ ဂုတ္တဒွါရာ သုသံဝုတာ,သုဒန္တာ ဥတ္တမေ ဒမေ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे खाली नजर ठेवणारे, मोजकेच बोलणारे, इंद्रियांचे रक्षण करणारे, सुसंयत आणि उत्तम संयमाने सुदंत आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. တေဝိဇ္ဇာ ဇဠဘိညာ စ ဣဒ္ဓိယာ ပါရမိံ ဂတာ,ပဉဉာယ ပါရမိပ္ပတ္တာ ဓမ္မနဂရေ ဝသန္တိ တေ; जे त्रिविद्य, षडभिज्ञ, ऋद्धींमध्ये पारंगत आणि प्रज्ञेमध्ये पारमिता प्राप्त आहेत, ते या धम्मनगरात निवास करतात. ယထာပိ နဂရံ ဒိသွာ သုဝိဘတ္တံ မနောရမံ,အနုမာနေန ဇာနန္တိ ဝဍ္ဎကိဿ မဟတ္တနံ; ज्याप्रमाणे एखादे सुविभक्त आणि मनोहारी नगर पाहून, लोक अनुमानाने त्याच्या वास्तुविशारदाच्या महानतेचा अंदाज लावतात; တထေဝ လောကနာထဿ ဒိသွာ ဓမ္မပုရံ ဝရံ,အနုမာနေန ဇာနန္တိ အထိ သော ဘဂဝါ ဣတိ; त्याचप्रमाणे लोकनाथांचे हे श्रेष्ठ धम्मपूर पाहून, लोक अनुमानाने जाणतात की ते भगवान खरोखरच अस्तित्वात आहेत. အနုမာနေနဇာနန္တိ ဦမိံ ဒိသွာန သာဂရေ,ယထာ’ယံ ဒိဿတေ ဦမီ မဟန္တော သော ဘဝိဿတိ; ज्याप्रमाणे समुद्रातील लाट पाहून लोक अनुमानाने जाणतात की, जर ही लाट अशी दिसत आहे, तर तो समुद्र किती विशाल असेल; တထာ ဗုဒ္ဓံ သောကနုဒံ သဗ္ဗထမပရာဇိတံ,တဏှက္ခယမနုပ္ပတ္တမ္ဘဝသံသာရမောစနံ; त्याचप्रमाणे शोक दूर करणारे, सर्व प्रकारे अपराजित असणारे, तृष्णेचा क्षय प्राप्त केलेले आणि भवसंसारातून मुक्त करणारे बुद्ध; အနုမာနေန ဉာတဗ္ဗံ ဦမိံ ဒိသွာ သဒေဝကေ,ယထာ ဓမ္မုမိဝိပ္ဖရော အဂ္ဂေါ ဗုဒ္ဓေါ ဘဝိဿတိ; देवलोकासह सर्व लोकांमध्ये पसरलेली धम्मरूपी लाट पाहून अनुमानाने हे जाणले पाहिजे की, बुद्ध हेच सर्वश्रेष्ठ आहेत. အနုမာနေန ဇာနန္တိ ဒိသွာ အစ္စုဂ္ဂတံ ဂိရိံ,ယထာ အစ္စုဂ္ဂတော ဧသ ဟိမဝါ သော ဘဝိဿတိ; ज्याप्रमाणे एखादा अतिशय उंच पर्वत पाहून लोक अनुमानाने जाणतात की, हा जो अत्यंत उंच पर्वत दिसत आहे, तो नक्कीच लय असेल; တထာ ဒိသွာဓမ္မဂိရိံ သီတီဘုတံ နိရူပဓိံ,အစ္စုဂ္ဂတံ ဘဂဝတော အစလံ သုပ္ပတိဋ္ဌိတံ; त्याचप्रमाणे भगवंतांचा अत्यंत उंच, अचल, सुप्रतिष्ठित, शीतल आणि उपाधिरहित असा धम्मरूपी पर्वत पाहून (अनुमानाने त्यांच्या महानतेची जाणीव होते). အနုမာနေန ဉာတဗ္ဗံ ဒိသွာန ဓမ္မပဗ္ဗတံ,တထာ ဟိ သော မဟာဝီရော အဂ္ဂေါ ဗုဒ္ဓေါ ဘဝိဿတိ; धम्मपर्वत पाहून अनुमानाने हे जाणले पाहिजे की, तसेच ते महावीर सर्वश्रेष्ठ बुद्ध होतील. ယထာပိ ဂဇရာဇဿ ပဒံ ဒိသွာန မာနုသာ,အနုမာနေနဇာနန္တိ မဟာ ဧသ ဂဇော ဣတိ; ज्याप्रमाणे गजराजाचे (हत्तीच्या राजाचे) पाऊल पाहून लोक अनुमानाने जाणतात की, 'हा मोठा हत्ती आहे'; တထေဝ ဗုဒ္ဓနာဂဿ ပဒံ ဒိသွာ ဝိဘာဝိနော,အနုမာနေန ဇာနန္တိ ဥဠာရော သော ဘဝိဿတိ; त्याचप्रमाणे बुद्धरूपी श्रेष्ठ हत्तीचे (बुद्धनागाचे) पाऊल पाहून बुद्धिमान लोक अनुमानाने जाणतात की, 'ते महान होतील'; အနုမာနေနဇာနန္တိ ဘီတေ ဒိသွာန ကုမ္မိဂေ,မိဂရာဇဿ သဒ္ဒေနဘီတာ’မေ ကုမ္မိဂါ ဣတိ; भ्यालेल्या लहान प्राण्यांना पाहून अनुमानाने जाणतात की, 'मृगराजाच्या (सिंहाच्या) गर्जनेने हे लहान प्राणी भयभीत झाले आहेत'; တထေဝ တိထိယေ ဒိသွာ ဝိထဒ္ဓေ ဘီတမာနသေ,အနုမာနေန ဉာတဗ္ဗံ ဓမ္မရာဇေန ဂဇ္ဇိတံ; त्याचप्रमाणे भयभीत मनाच्या आणि स्तंभित झालेल्या तीर्थिक लोकांना पाहून अनुमानाने हे जाणले पाहिजे की, 'धम्मराजांनी गर्जना केली आहे'; နိဗ္ဗုတံ ပထဝိံ ဒိသွာ ဟရိတပတ္တံ မဟောဒကံ,အနမာနေန ဇာနန္တိ မဟာမေဃေန နိဗ္ဗုတံ; शांत झालेली पृथ्वी, हिरवी पाने आणि मुबलक पाणी पाहून अनुमानाने जाणतात की, 'महामेघाने (मोठ्या पावसाने पृथ्वीला) शांत केले आहे'; တထေဝိမံ ဇနံ ဒိသွာ အာမောဒိတပမောဒိတံ,အနုမာနေန ဉာတဗ္ဗံ ဓမ္မရာဇေန တပ္ပိတံ; त्याचप्रमाणे या लोकांना अत्यंत आनंदित व प्रफुल्लित पाहून अनुमानाने हे जाणले पाहिजे की, 'धम्मराजांनी (त्यांना धम्माने) तृप्त केले आहे'; လဂ္ဂံ ဒိသွာ ဘိသံ ပင်္ကံ ကလလဒ္ဒဂတံ မဟိံ,အနုမာနေန ဇာနန္တိ ဝါရိက္ခဓော မဟာ ဂတော; चिखलात रुतलेले कमळाचे कंद आणि चिखलमय झालेली जमीन पाहून अनुमानाने जाणतात की, 'पाण्याचा मोठा लोंढा येथून गेला आहे'; တထေဝိမံ ဇနံ ဒိသွာ ရဇောပက္ခသမာဟိတံ,ဝဟိတံ ဓမ္မနဒိယာ ဝိဿဋ္ဌံ ဓမ္မသာဂရေ; त्याचप्रमाणे या लोकांना रागरूपी धुळीने माखलेले असूनही धम्मरूपी नदीने वाहून नेलेले आणि धम्मरूपी सागरात विसर्जित झालेले पाहून; ဓမ္မာမတဂတံ ဒိသွာ သဒေဝကမိမံ မဟိံ,အနုမာနေန ဉာတဗ္ဗံ ဓမ္မက္ခဓော မဟာ ဂတော; देवलोकासह या पृथ्वीला धम्मरूपी अमृताप्रत गेलेले पाहून अनुमानाने हे जाणले पाहिजे की, 'धम्मरूपी मोठा स्कंध येथून गेला आहे'; အနုမာနေန ဇာနန္တိ ဃာယိဝါ ဂဓမုတ္တမံ,ယထာ’ယံ ဝါယတီ ဂဓော ဟေဿန္တိ ပုပ္ဖိတာ ဒုမာ; उत्कृष्ट सुगंध घेऊन अनुमानाने लोक जाणतात की, 'ज्या अर्थी हा सुगंध दरवळत आहे, त्या अर्थी वृक्ष बहरलेले असतील'; တထေဝါယံ သီလဂဓော ပဝါယတိ သဒေဝကေ,အနုမာနေန ဉာတဗ္ဗံ အထိ ဗုဒ္ဓေါ အနုတ္တရော’တိ; त्याचप्रमाणे हा शीलरूपी सुगंध देवलोकासह सर्वत्र दरवळत आहे, यावरून अनुमानाने हे जाणले पाहिजे की, 'अनुत्तर बुद्ध अस्तित्वात आहेत'; အနုမာနပဉှံ. अनुमान प्रश्न समाप्त. ပဿတာရညကေ ဘိက္ခူ အဇ္ဈောဂါဠှေ ဓုတေ ဂုဏေ,ပုန ပဿတိ ဂိဟိ ရာဇာ အနာဂါမိဖလေ ဌိတေ; अरण्यवासी भिक्खूंना धुतगुणांमध्ये मग्न झालेले पाहून, पुन्हा राजा गृहस्थांना अनागामी फलावर प्रतिष्ठित झालेले पाहतो; ဥဘော’ပိ တေ ဝိလောကေဝါ ဥပ္ပဇ္ဇိ သံသယော မဟာ,ဗုဇ္ဈေယျ စေ ဂိဟိဓမ္မေ ဓုတင်္ဂံ နိပ္ဖလံ သိယာ; या दोघांनाही पाहून (राजाच्या मनात) मोठा संशय निर्माण झाला की, 'जर गृहस्थ धर्मातच (निर्वाण) जाणता येत असेल, तर धुतांग निष्फळ ठरेल'; ပရဝါဒိဝါဒမထနံ နိပုဏံ ပိဋကတ္တယေ,ဟဒ ပုစ္ဆေ ကထိသေဋ္ဌံ သော မေ ကင်္ခံ ဝိနောဿတီ’တိ चला, परवाद्यांच्या वादाचे मंथन करणाऱ्या, तिपिटकात निपुण असलेल्या आणि श्रेष्ठ वक्त्याला मी विचारतो, ते माझी शंका दूर करतील. မေဏ္ဍကပဉှေ ဌိတာ ဒွါသီတိ ဂါထာ သမတ္တာ. मेंडक प्रश्नातील ब्याऐंशी (८२) गाथा समाप्त झाल्या. မိလိဒပ္ပကရဏေ သဗ္ဗာ ဂါထာ သမ္ပိဏ္ဍိတာ စတုရာဓိကသတဂါထာ ဟောန္တိ. मिलिन्दपन्हामधील सर्व गाथा मिळून एकूण एकशे चार (१०४) गाथा होतात. မိလိဒပ္ပကရဏေ သဗ္ဗဂါထာသရူပဂဟဏံ သမတ္တံ. मिलिन्दपन्हामधील सर्व गाथांचे स्वरूप ग्रहण समाप्त झाले. သံချာသရူပံ संख्या स्वरूप သင်္ချာသရူပံ ပန ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ဧက-ဒွိ-တိ-စတု-ပဉ္စ-ဆ-သတ္တ-အဋ္ဌ-နဝ-ဒသ-ဧကာဒသ-ဒွါဒသ- တေရသ-စုဒ္ဒသ-သောဠသ-သတ္တရသ-အဋ္ဌာရသ-ဧကူနဝီသတိ-ပဉ္စဝီသတိ-အဋ္ဌဝီသတိ-တိံသာ -ဆသဋ္ဌိ-ဒိယဍ္ဎသတန္တိ ပဉ္စဝီသတိဝိဓာ သင်္ချာ. တထ ဗုဒ္ဓေါ ဧကော, ပထဝိ ဧကာ, သမုဒ္ဒေါ ဧကော, သိနေရု ဧကော, ဒေဝလောကော ဧကော, ဗြဟ္မလောကော ဧကော’တိ ဆ ဧကကာ မိလိဒပ္ပကရဏေ အာဂတာ. संख्या स्वरूप याप्रमाणे जाणावे. एक, दोन, तीन, चार, पाच, सहा, सात, आठ, नऊ, दहा, अकरा, बारा, तेरा, चौदा, सोळा, सतरा, अठरा, एकूणवीस, पंचवीस, अठ्ठावीस, तीस, सहासष्ट आणि दीडशे अशा पंचवीस प्रकारच्या संख्या आहेत. त्यामध्ये बुद्ध एक, पृथ्वी एक, समुद्र एक, सिनेरू (मेरू पर्वत) एक, देवलोक एक आणि ब्रह्मलोक एक - हे सहा 'एकक' मिलिन्दपन्हामध्ये आले आहेत. ဒွေ အထဝသေ သမ္ပဿမာနာ ဘဂဝတာ ဝိဟာရဒါနံ အနုညာတံ? ဝိဟာရဒါနံ နာမ သဗ္ဗဗုဒ္ဓေဟိ ဝဏ္ဏိတံ အနုမတံ ထောမိတံ ပသထံ ဝိဟာရဒါနံ ဒဝါ ဒေဝမနုဿာ ဇာတိဇရာဗျာဓိမရဏေဟိ မုစ္စိဿန္တိ. ဝိဟာရေ သတိ ဘိက္ခူ ဘိက္ခုနိယော ဝါ ကတောကာသာ ဒဿနကာမာနံ သုလဘဒဿနံ ဘဝိဿန္တီ’တိ. कोणत्या दोन कारणांना पाहून भगवंतांनी विहारदान अनुमत केले? विहारदान हे सर्व बुद्धांनी वर्णिलेले, अनुमत केलेले, स्तुती केलेले आणि प्रशंसिलेले आहे. विहारदान देऊन देव आणि मनुष्य हे जन्म, जरा, व्याधी आणि मृत्यूपासून मुक्त होतील. विहार असल्यावर भिक्खू किंवा भिक्खुणी यांना अवकाश प्राप्त होईल आणि दर्शन इच्छिणाऱ्यांना त्यांचे दर्शन सुलभ होईल. ဒွေ အထဝသေ ပဋိစ္စ သဗ္ဗဗုဒ္ဓါ အတ္တနာ နိမ္မိတံ စတုပစ္စယံ န ပရိဘုဉ္ဇန္တိ? အဂ္ဂဒက္ခိဏေယျော သထာ’တိ ဗဟူ ဒေဝမနုဿာ စတုပစ္စယံ ဒတွာ ဒုက္ခာ မုစ္စိဿန္တိ. ဗုဒ္ဓါ ပဋိဟာရိယံ ကဝါ ဇီဝိတဝုတ္တိံ ပရိယေသန္တီ’တိ ပရူပဝါဒလောပနထဉ္စာတိ. कोणत्या दोन कारणांमुळे सर्व बुद्ध स्वतः निर्माण केलेल्या चतुःप्रत्ययांचा उपभोग घेत नाहीत? 'शास्ता हे सर्वश्रेष्ठ दक्षिणेस पात्र आहेत' असे मानून अनेक देव आणि मनुष्य चतुःप्रत्यय देऊन दुःखातून मुक्त होतील. आणि 'बुद्ध प्रातिहार्य करून उपजीविका शोधतात' या परनिंदेचे निवारण करण्यासाठी. ဒွေ အကမ္မဇာ အဟေတုဇာ အနုတုဇာ? အာကာသော နိဗ္ဗာနဉ္စာ’တိ कोणत्या दोन गोष्टी अकर्मज, अहेतुज आणि अनृतुज आहेत? आकाश आणि निर्वाण. ဒွေ အထဝသေ သမ္ပဿမာနေန ဝေဿန္တရေန ရညာ ဒွေ ပုတ္တာ ဒိန္နာ? ဒါနပထောဝ မေ န ပရိဟာယိဿတိ, ဣမေ ကုမာရာ မူလဇလာဟာရဘုဉ္ဇနဒုက္ခတော မုစစိဿန္တီ’တိ. कोणत्या दोन कारणांना पाहून राजा वेस्संतराने आपल्या दोन पुत्रांचे दान केले? 'माझा दानमार्ग नष्ट होणार नाही' आणि 'हे कुमार कंदमुळे व पाणी खाण्याच्या दुःखातून मुक्त होतील'. ဥဒကဿ ဒွေ ဂုဏာ နိဗ္ဗာနံ အနုပ္ပဝိဋ္ဌာ? သီတလဘာဝေါ, ပီတဿ ဃမ္မဝိနယနဘာဝေါ စာ’တိ. पाण्याचे कोणते दोन गुण निर्वाणात समाविष्ट आहेत? शीतलता आणि प्यायल्यावर उष्णता दूर करणे. အသတိယာ အဇာနနေန စာ’တိ ဒွီဟိ ကာရဏေဟိ အာပတ္တိံ အာပဇ္ဇန္တီ’တိ ဆ ဒုကာ အာဂတာ. अस्मृती आणि अज्ञान या दोन कारणांमुळे भिक्खू आपत्तीला प्राप्त होतात - हे सहा 'द्विक' आले आहेत. သီတေန ဥဏှေန အတိဘောဇနေနာ’တိ တီဟိ အာကာရေဟိ ပိတ္တံ ကုပ္ပတိ. थंडी, उष्णता आणि अतिभोजन या तीन कारणांमुळे पित्त प्रकोपित होते. သီတေန ဥဏှေန အန္နာပါနေန စာ’တိ တဟီ အာကာရေဟိ သေမှံ ကုပ္ပတိ. थंडी, उष्णता आणि अन्न-पाण या तीन कारणांमुळे कफ प्रकोपित होतो. ဗုဒ္ဓဝံသတာယ ဓမ္မဂရုကတာယ ဘိက္ခုဘုမိမဟန္တတာယာ’တိ တီဟိ ကာရဏေဟိ ပါတိမောက္ခံ ပဋိစ္ဆန္နံ ကာရာပေတိ. बुद्धवंशामुळे, धम्माच्या आदरामुळे आणि भिक्खू भूमीच्या महानतेमुळे - या तीन कारणांमुळे पातिमोक्ख गुप्त ठेवले जाते. အဂဒဿ တယော ဂုဏာ နိဗ္ဗာနံ အနုပ္ပဝိဋ္ဌာ? ဂိလာနကာနံ ပရိသရဏံ ရောဂဝိနာသနံ အမတကရဏန္တိ. औषधाचे कोणते तीन गुण निर्वाणात समाविष्ट आहेत? आजारी लोकांचे रक्षण करणे, रोगाचा नाश करणे आणि अमृतत्व प्रदान करणे. မဏိရတနဿ တယော ဂုဏာ နိဗ္ဗာနံ အနုပ္ပဝိဋ္ဌာ? သဗ္ဗကာမဒဒံ နဟာသကရံ ဥဇ္ဇောတထကရန္တိ. मणिरत्नाचे कोणते तीन गुण निर्वाणात समाविष्ट आहेत? सर्व इच्छा पूर्ण करणे, आल्हाददायक असणे आणि प्रकाश देणे. ရတနစဒနဿ တယော ဂုဏာ? ဝဏ္ဏသမ္ပန္နော ဂဓသမ္ပန္နော ရသသမ္ပန္နော’တိ သတ္တ တိကာ ဝုတ္တာ. रत्नचंदनाचे कोणते तीन गुण आहेत? वर्णसंपन्न, गंधसंपन्न आणि रससंपन्न - हे सात 'त्रिक' सांगितले आहेत. သပ္ပိမဏ္ဍဿ တယော ဂုဏာ? ဝဏ္ဏသမပန္နော, ဂဓသမ္ပန္နော, ရသသမ္ပန္နော’တိ သတ္တတိကာ ဝုတ္တာ ဒိဋ္ဌဓမ္မဖာသုဝိဟာရတာယ အနဝဇ္ဇဂုဏဗဟုလတာယအသေသအရိယဝီထိဘာဝတော သဗ္ဗဗုဒ္ဓပသထတာယာတိ ဣမေ စတ္တာရော အထဝသေ သမ္ပဿမာနာ ဗုဒ္ဓါ ပဋိသလ္လာနံ သေဝန္တိ. तूपमंडाचे कोणते तीन गुण आहेत? वर्णसंपन्न, गंधसंपन्न आणि रससंपन्न - हे सात त्रिक सांगितले आहेत. या जन्मात सुखाने विहरण्यासाठी, निर्दोष गुणांच्या बहुलतेसाठी, संपूर्ण आर्यमार्गाच्या स्वरूपासाठी आणि सर्व बुद्धांनी प्रशंसिलेले असल्यामुळे - या चार कारणांना पाहून बुद्ध एकांताचे सेवन करतात. နိန္နတာယ ဒွါရတာယ စိဏ္ဏတာယ သမုဒါစရိတတ္တာတိ စတုဟိ အာကာရေဟိ မနောဝိညာဏံ ဒွိပဉ္စဝိညာဏေ အနုပဝတ္တတိ. प्रवणता, द्वारभाव, सवय आणि आचरण या चार कारणांमुळे मनोविज्ञानाचा द्विपंचविज्ञानामध्ये अनुप्रवृत्ती होते. ကမ္မဝသေန ယောနိဝသေန ကုလဝသေန အာယာစနဝသေနာ’တိ စတုန္နံ သန္နိပါတာနံ ဝသေန ဂဗ္ဘဿာဝက္ကန္တိ ဟောတိ. कर्म, योनी, कूळ आणि प्रार्थना या चार घटकांच्या संयोगामुळे गर्भाची अवक्रांती (प्रवेश) होते. အဒိဋ္ဌန္တရာယော, ဥဒ္ဒိဿကတဿ အန္တရာယော, ဥပက္ခဋန္တရာယော ပရိဘောဂန္တရာယော’တိ စတ္တာရော အန္တရာယာ တေသု အဒိဋ္ဌန္တရာယော ဘဂဝတော အထိ, သေသာ တယော နထိ, ဥဒ္ဒိဿကတဿ ဗျာမပ္ပဘာယ သဗ္ဗညုတဉာဏဿ ဇီဝိတဿ စာ’တိ စတုန္နံ အန္တရာယာဘာဝါ. अदृष्ट अंतराय, उद्दिष्ट अंतराय, उपकृत अंतराय आणि परिभोग अंतराय हे चार अंतराय आहेत. त्यापैकी अदृष्ट अंतराय भगवंतांना आहे, उर्वरित तीन नाहीत; कारण उद्दिष्ट, व्यामप्रभा, सर्वज्ञता ज्ञान आणि जीवित या चार गोष्टींना अंतराय नसतो. အဗ္ဘာ, မဟိကာ, မေဃော, ရာဟု စာ’တိ စတ္တာရော သူရိယရောဂါ သမုဒ္ဒသသ စတ္တာရော ဂုဏာ? ကုဏပေဟိ အသံဝါသိယဘာဝေါ, နဒီဟိ အပူရဏတာ, မဟာဘုတာဝါသတာ, ဝိစိတ္တပုပ္ဖသမာကိဏ္ဏတာ’တိ.သတ္တ စတုက္ကာ ဝုတ္တာ. ढग, धुके, मेघ आणि राहू हे सूर्याचे चार रोग आहेत. समुद्राचे चार गुण कोणते? प्रेतांशी एकत्र न राहणे, नद्यांनी न भरणे, महाभूतांचे निवासस्थान असणे आणि विविध प्रकारच्या फुलांनी (रत्नांनी) युक्त असणे - हे सात 'चतुष्क' सांगितले आहेत. ၅. ဘုမိမဟန္တတာ, ပရိသုဒ္ဓဝိမလတာ, ပါပေဟိအသံဝါသိယတာ, ဒုပ္ပဋိဝိဇ္ဈတာ, ဗဟုဝိဓသံဝရရက္ခိယတာ’တိ သာသနဿ ဣမေ အတုလျာ ပဉ္စ ဂုဏာ ဝတ္တန္တိ ပကာသန္တိ. ५. भूमीची विशालता, परिशुद्धता व विमलता, पापांशी एकत्र न राहणे, दुर्बोधता आणि अनेक प्रकारच्या संवरांनी रक्षिलेले असणे - शासनाचे हे पाच अतुलनीय गुण टिकून आहेत आणि प्रकाशत आहेत. ဘောဇနဿ ပဉ္စ ဂုဏာ နိဗ္ဗာနံ အနုပ္ပဝိဋ္ဌာ? အစ္စုဂ္ဂတတာ, အစလတာ ဒုရဓိရောဟဏတာ ဗီဇာရူဟဏတာ ကောပါနုနယဝိဝဇ္ဇနတာ’တိ. भोजनाचे (पर्वताचे) कोणते पाच गुण निर्वाणात समाविष्ट आहेत? अत्यंत उच्चता, अचलता, चढण्यास कठीण असणे, बीजाचे अंकुरित होणे आणि राग व अनुनय यांचा त्याग करणे. အာဟစ္စပဒေန ရသေန အာစရိယဝံသတာယ အဓိပ္ပာယာကာရတာယ ဉာဏုတ္တရတာယာ’တိ ဣမေဟိ ပဉ္စဂုဏေဟိ အထော ပဋိဂ္ဂဟေတဗ္ဗော စာ’တိ စတ္တာရော ပဉ္စကာ ဝုတ္တာ. आहच्चपद (स्पष्ट शब्द), रस (अर्थ/चव), आचार्यवंश (आचार्यांची परंपरा), अभिप्रायाकार (हेतूचा प्रकार) आणि ज्ञानोत्तरता (ज्ञानाची श्रेष्ठता) या पाच गुणांमुळे आणि तसेच 'स्वीकार केला पाहिजे' यासह चार पंचक (पाचचे गट) सांगितले आहेत. ၆. သေနာပတိ, ပုရောဟိတော, အက္ခဒဿော, ဘဏ္ဍာဂါရိကော, ဆတ္တဂါဟော, ခဂ္ဂဂါဟော အမစ္စော’တိ ဆ အမစ္စာ ဂဏီယန္တိ. ဝေပုလ္လော ရာဇဂဟိယာနံ ဗုဒ္ဓေါ အဂ္ဂေါ ပဝုစ္စတီ’တိ ဆ အဂ္ဂါ. မာဏဝဂါမိကဒေဝပုတ္တေန ဝုတ္တဂါထာ နာဂသေနေန အာဟရိဝါ ဝုတ္တာ. ६. सेनापती, पुरोहित, अक्षदर्शक (न्यायाधीश), भांडागारिक (कोषाध्यक्ष), छत्रधारक आणि खड्गधारक अमात्य - हे सहा अमात्य (मंत्री) मोजले जातात. 'राजगृहातील पर्वतांमध्ये वेपुल्ल पर्वत श्रेष्ठ आहे आणि सर्व प्राण्यांमध्ये बुद्ध श्रेष्ठ म्हटले जातात' - हे सहा श्रेष्ठ आहेत. माणवगामिक देवपुत्राने म्हटलेली गाथा नागसेनांनी उद्धृत करून सांगितली आहे. ဝါတိကော, ပိတ္တိကော, သေမှိကော, ဒေဝတူပသံဟာရတော, သမုဒါစိဏ္ဏတော, ပုဗ္ဗနိမိတ္တတော’တိ ဆ ဇနာ သုပိနံပဿန္တီ’တိ တယော ဆက္ကာ ဝုတ္တာ. वातप्रकृतीचा, पित्तप्रकृतीचा, कफप्रकृतीचा, देवतेच्या प्रभावाने, सततच्या अनुभवाने (सवयीने) आणि पूर्वनिमिताने (भविष्यातील संकेताने) - हे सहा प्रकारचे लोक स्वप्न पाहतात; असे तीन षट्क (सहाचे गट) सांगितले आहेत. ၇. ပုထုဇ္ဇနစိတ္တံ, သောတာပန္နစိတ္တံ, သကဒါဂါမိစိတ္တံ, အနာဂါမိစိတ္တံ, အရဟန္တစိတ္တံ, ပစ္စေကဗုဒ္ဓစိတ္တံ, သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓစိတ္တန္တိ သတ္တ စိတ္တဝိမုတ္တိယော. ७. पृथग्जन-चित्त, सोतापन्न-चित्त, सकदागामी-चित्त, अनागामी-चित्त, अरहंत-चित्त, प्रत्येकबुद्ध-चित्त आणि सम्यक्संबुद्ध-चित्त, या सात चित्तविमुक्ती आहेत. နာရဒေါ, ဓမ္မန္တရီ, အံဂီရသော, ကပိလော, ကဏ္ဍရဂ္ဂိသာမော, အတုလော, ပုဗ္ဗကစ္စာယနော’တိ သတ္တ အာစရိယာ ဩဝါဒကာရကာ. नारद, धन्वंतरी, अंगीरस, कपिल, कंडरग्गीसाम, अतुल आणि पूर्वकात्यायन - हे सात उपदेश करणारे आचार्य आहेत. ‘‘ဇိဃစ္ဆာယ, ပိပါသာယ, အဟိနာ ဒဋ္ဌော, ဝိသေန စ,အဂ္ဂီ-ဥဒက-သတ္တီဟိ အကာလေ တတ္ထ မိယျတီ’’တိ; भूकेने, तहानेने, सर्पदंशाने, विषाने, अग्नीने, पाण्याने आणि शस्त्राने मनुष्य तेथे अकाली मृत्यू पावतो. ဣမေ သတ္တ ဇနာ အကာလမရဏိကာ နာမာ’တိ တယော သတ္တကာ ဝုတ္တာ. हे सात लोक 'अकालमरण पावणारे' म्हणून ओळखले जातात; असे तीन सप्तक (सातचे गट) सांगितले आहेत. ၈. ဝိသမံ သဘယံ …ပေ… အဋ္ဌေတေ ပရိဝဇ္ဇိယာ’တိ ဣမာနိ အဋ္ဌဋ္ဌာနာနိ ပဏ္ဍိတေဟိ ပရိဝဇ္ဇနီယာနီတိ ပရိဝဇ္ဇနီယဋ္ဌာနဋ္ဌကံ နာမ. ८. 'विषम, भययुक्त... इत्यादी आठ गोष्टी वर्ज्य कराव्यात' - पंडितांनी वर्ज्य करण्यायोग्य असलेल्या या आठ स्थानांना 'वर्जनीयस्थान-अष्टक' असे म्हणतात. ရတ္တောဒုဋ္ဌော …ပေ… ဧတေ အထဝိနာသကာ’တိ ဣဒံ အထဝိနာသကဋ္ဌကံ နာမ. 'रागाने अंध झालेला, द्वेषाने दूषित झालेला... इत्यादी हे अर्थविनाशक (कल्याण नष्ट करणारे) आहेत' - याला 'अर्थविनाशक-अष्टक' असे म्हणतात. ဝသေန ယသပုစ္ဆာဟိ …ပေ… တေသံ ဗုဒ္ဓိ ပဘိဇ္ဇတီ’တိ ဣဒံ ဗုဒ္ဓိဝိသဒကရဏဋ္ဌကံ နာမ. 'वशतेने, यशाच्या प्रश्नांनी... इत्यादी त्यांची बुद्धी प्रगल्भ (स्पष्ट) होते' - याला 'बुद्धिविशदीकरण-अष्टक' असे म्हणतात. ကာလံ ဒေသံ ဒီပံ ကုလံ ဇနေတ္တိမာယုံ မာသံ နေက္ခမ္မံ ဝိလောကေတီ’တိ ဣဒံ ဗောဓိသတ္တေန ဝိလောကိယဋ္ဌကံ နာမ. काळ, देश, द्वीप, कुल, जननी (माता), आयुष्य, महिना आणि नैष्क्रम्य (गृहत्याग) यांचे अवलोकन करणे - याला बोधिसत्त्वांचे 'अवलोकन-अष्टक' असे म्हणतात. ‘‘ဝိက္ကယာနာဂတမဂ္ဂေါ တိထံ တီရံ အာယုထိရံ; အနာဂတံ ကုသလံဝါ’တိ အဋ္ဌဋ္ဌာနာ ဝိလောကိယာ’’တိ; विक्री, न आलेला मार्ग (भविष्यातील मार्ग), तीर्थ (घाट), तीर (काठ), आयुष्याची स्थिरता, आणि भविष्य किंवा कुशल - ही आठ स्थाने अवलोकन करण्यायोग्य आहेत. ဣဒံ အနာဂတဝိလောကိယဋ္ဌကံ နာမ. याला 'अनागत-अवलोकन-अष्टक' (भविष्यातील अवलोकनाचे अष्टक) असे म्हणतात. ‘‘ဝါဏိဇော ဟထိနာဂေါ စ သာကဋိကော နိယာမကောဘိသက္ကော ဥတ္တရသေတု ဘိက္ခု စေဝ ဇိနင်္ကုရော,ဧတေ အဋ္ဌ အနာဂတေ အဋ္ဌ ဇနာ ဝိလောကိယာ’’တိ; व्यापारी, हत्ती (हस्तिराज), गाडीवान, नावाडी (नाविक), वैद्य, पूल बांधणारा, भिक्खू आणि जिनंकुर (बोधिसत्त्व) - हे आठ लोक भविष्यात अवलोकन करणारे आहेत. ဣဒံ ဝိလောကိယဋ္ဌကံ နာမ. याला 'अवलोकन-अष्टक' असे म्हणतात. ရတ္တော ဒုဋ္ဌော’စ မူဠှော စ မာနီ လုဒ္ဓေါ တထာ’လသော ရာဇာ စ ဃာတကာ အဋ္ဌ နာဂသေနေန ဒေသိတာ’တိဣဒံ ဃာတကဋ္ဌကံ နာမ. रागी (आसक्त), द्वेषी, मोही (भ्रमित), मानी (अहंकारी), लोभी, आळशी, राजा आणि घातक (हिंसक) - हे आठ घातक नागसेनांनी सांगितले आहेत; याला 'घातक-अष्टक' असे म्हणतात. ဝါတ ပိတ္တေန သေမှေန …ပေ… အကာလေ တထ ဝိယျတီ’တိ ဣဒံ အကာလမရဏကာရဏဋ္ဌကံ နာမ. 'वात, पित्त, कफ... इत्यादींमुळे मनुष्य तेथे अकाली मृत्यू पावतो' - याला 'अकालमरण-कारण-अष्टक' असे म्हणतात. န ဝါ အထော အနုသာသိတဗ္ဗော, န ရာဂုပသံဟိတံ စိတ္တံ န ဒေါသူပသံဟိတံ စိတ္တံ န မောဟူပသံဟိတံ စိတ္တံ ဥပဋ္ဌာပေတဗ္ဗံ, ဒါသကမ္မကရပေါရိသေသု နီစဝုတ္တိနာ ဘဝိတဗ္ဗံ, ကာယိကဝါစသိကံ သုဋ္ဌု ရက္ခိတဗ္ဗံ, ဆဠိဒြိယာနိ သုဋ္ဌူ ရက္ခိတဗ္ဗာနိ, မေတ္တာဘာဝနာယ မာနသံ ဥပဋ္ဌာပေတဗ္ဗန္တိ ဣဒံ ရညာ မိလိဒေန သမာဒိန္နံ ဝတ္တဋ္ဌကံ နာမ. दुसऱ्यांवर विनाकारण शासन करू नये, रागाने (आसक्तीने) युक्त चित्त उत्पन्न होऊ देऊ नये, द्वेषाने युक्त चित्त उत्पन्न होऊ देऊ नये, मोहाने युक्त चित्त उत्पन्न होऊ देऊ नये, दास, कामगार आणि सेवकांशी नम्रतेने वागावे, कायिक व वाचिक कर्मांचे चांगले रक्षण करावे, सहा इंद्रियांचे चांगले रक्षण करावे आणि मनामध्ये मैत्रीभावनेची स्थापना करावी - राजा मिलिंदाने स्वीकारलेल्या या व्रतांना 'व्रत-अष्टक' असे म्हणतात. ပုပ္ဖာပဏံ ဂဓာပနံ ဖလာပဏံ အဂဒါပဏံ ဩသဓာပဏံ အမတာပဏံ ရတနာပဏံ သဗ္ဗာပဏန္တိ ဣဒံ အာပဏဋ္ဌကံ နာမာ’တိ. ဒသ အဋ္ဌကာ ဝုတ္တာ. पुष्प-दुकान (फुलांचे दुकान), गंध-दुकान (सुगंधी द्रव्यांचे दुकान), फल-दुकान (फळांचे दुकान), अगद-दुकान (विषनाशक औषधांचे दुकान), औषध-दुकान, अमृत-दुकान, रत्न-दुकान आणि सर्ववस्तू-दुकान - याला 'आपण-अष्टक' (दुकान-अष्टक) असे म्हणतात. अशा प्रकारे दहा अष्टक (आठचे गट) सांगितले आहेत. ၉.’ရတ္တော ဒုဋ္ဌော စ မူဠှော စ …ပေ… ခိပ္ပံ ဘဝတိ ပါကဋန္တိ’ ဣဒံ ဣတ္တရနဝကံ နာမ. ९. 'रागी, द्वेषी आणि मोही... इत्यादी लवकरच प्रकट होतात' - याला 'इत्तर-नवक' (अल्प-नवक) असे म्हणतात. နဝါနုပုဗ္ဗဝိဟာရသင်္ခါတဓမ္မာနုမဇ္ဇဇနဝကန္တိ ဒွေ နဝကာ ဝုတ္တာ. नऊ अनुपूर्वविहार नावाच्या धर्मांचे मनन करणारे नवक - असे दोन नवक (नऊचे गट) सांगितले आहेत. ၁၀. १०. ’သံဃသမုသုခေါ ဒုက္ခိ ဓမ္မာဓိပတိကောပိ စ संघाच्या सुखात सुखी आणि दुःखात दुःखी असणारा, धम्मालाच आपला अधिपती मानणारा, သံဝိဘာဂီ ယထာထာမံ ဇိနစက္ကာဘိဝဍ္ဎကော आपल्या क्षमतेनुसार दानधर्म करणारा (वाढून घेणारा), जिनचक्राची (बुद्धांच्या शासनाची) वृद्धी करणारा, သမ္မဒိဋ္ဌိပုရက္ခာရော အနညသထုကော တထာ सम्यक् दृष्टीला पुढे ठेवणारा (प्राधान्य देणारा) आणि इतर कोणालाही आपला शास्ता (गुरू) न मानणारा, သုရက္ခော ကာယကမ္မာဒိ သမဂ္ဂါဘိရတောပိ စ कायिक कर्मादींचे उत्तम रक्षण करणारा आणि एकतेमध्ये (सामंजस्यात) रममाण होणारा, အကုဘော န စရေ စက္ကေ ဗုဒ္ဓါဒိသရဏင်္ဂတော कुटिलतेने न वागणारा, बुद्ध आदींच्या (बुद्ध, धम्म, संघ) चरणी शरण गेलेला, ဒသ ဥပါသကဂုဏာ နာဂသေနေန ဒေသိတာ’တိ हे उपासकाचे दहा गुण नागसेनांनी सांगितले आहेत. ဣဒံ ဥပါသကဂုဏဒသကံ နာမ. याला 'उपासकगुण-दशक' असे म्हणतात. ဂင်္ဂါ ယမုနာ အစိရဝတီ သရဘု မဟီ သိဓု သရဿတီ ဝေတြဝတီ ဝိတထာ စဒဘာဂါ’တီ ဣဒံနဒိဒသကံ နာမ. गंगा, यमुना, अचिरवती, सरभू, मही, सिंधू, सरस्वती, वेत्रवती, वितथा आणि चंद्रभागा - याला 'नदी-दशक' असे म्हणतात. သီတံ ဥဏှံ ဇိဃစ္ဆာ ပိပါသာ ဥစ္စာရော ပဿာဝေါ ထိနမိဒ္ဓံ ဇရာ ဗျာဓိ မရဏန္တိ ဣဒံ ကာယာနုဝတ္တကဒသကံ နာမ. थंडी, उष्णता, भूक, तहान, मलविसर्जन, मूत्रविसर्जन, आळस-गुंगी (स्त्यान-मिद्ध), जराजर्जरता (वृद्धत्व), व्याधी (आजारपण) आणि मरण - याला 'कायानुवर्तक-दशक' (शरीराच्या नैसर्गिक धर्मांचे दशक) असे म्हणतात. ဗုဒ္ဓေ သဂါရဝေါ, ဓမ္မေ သဂါရဝေါ, သံဃေ သဂါရဝေါ, သဗြဟ္မစာရိသု သဂါရဝေါ, ဥဒ္ဒေသပရိပုစ္ဆာသု ဝါယမတိ, သဝဏဗဟုလော ဟောတိ, ဘိန္နသီလော’ပိ အာကပ္ပံ ဥပဋ္ဌာပေတိ, ဂရဟဘယာ ကာယိကဝါစသိကဉ္စဿ သုရက္ခိတံ ဟောတိ, ပဓာနာဘိမုခံ စိတ္တံ ဟောတိ, ကရောန္တောပိ ပါပံ ပဋိစ္ဆန္နံ အာစရတီ’တိ ဣဒံ ဂိဟိဒုဿီလာဓိကဂုဏဒသကံ နာမ. बुद्धांविषयी आदर बाळगणारा, धम्माविषयी आदर बाळगणारा, संघाविषयी आदर बाळगणारा, सब्रह्मचाऱ्यांविषयी आदर बाळगणारा, उद्देश (पाठ) आणि परिपृच्छा (प्रश्न विचारणे) यांमध्ये प्रयत्न करणारा, बहुश्रुत असणारा (ऐकण्यात तत्पर), शीलभंग झालेला असला तरीही योग्य आचरण ठेवणारा, निंदेच्या भयाने आपले कायिक व वाचिक कर्म सुरक्षित ठेवणारा, चित्त प्रधानांकडे (प्रयत्नांकडे) वळवणारा आणि पाप करतानाही ते लपवून (लज्जेने) करणारा - याला 'गृहस्थ-दुःशील-अधिकगुण-दशक' (शीलहीन गृहस्थाच्या अधिक गुणांचे दशक) असे म्हणतात. အဝဇ္ဈကဝစဓာရဏကော, ဣသိသာမညဘဏ္ဍလိင်္ဂဓာရဏကော, သံဃသမယမနုပဝိဋ္ဌတာယ ဗုဒ္ဓဓမ္မသံဃရတနဂတတာယ ပဓာနာလယနိကေတဝါသတာယ ဇိနသာသနေ ဓနပရိယေသနတော ဝရဓမ္မဒေသနတော ဓမ္မဒီပဂတိပရာယဏတာယ’ အဂ္ဂေါ ဗုဒ္ဓေါ’တိ ဧကန္တောဇုဒိဋ္ဌိတာယ ဥပေါသထသမာဒါနတော ဒက္ခိဏံ ဝိသောဓေတီ’တိ ဧကန္တောဇုဒိဋ္ဌိတာယ ဥပေါသထသမာဒါနတော ဒက္ခိဏံ ဝိသောဓေတီ’တိ ဧကန္တောဇုဒိဋ္ဌိတာယ ဥပေါသထသမာဒါနတော ဒက္ခိဏံ ဝိသောဓေတီ’တိ ဣဒံ ဒက္ခိဏာဝသေန ဒသကံ နာမ. अवध्य कवच धारण करणारा, ऋषींच्या श्रमणवेषाचे चिन्ह धारण करणारा, संघामध्ये प्रविष्ट झाल्यामुळे, बुद्ध-धम्म-संघ या रत्नांच्या आश्रयाला गेल्यामुळे, प्रधान (प्रयत्न) आणि आलयाच्या (निलयाच्या) वासामुळे, जिनशासनात धनाचा शोध घेणारा, श्रेष्ठ धम्माचा उपदेश करणारा, धम्मरूपी द्वीपाचा आश्रय घेणारा, 'बुद्ध श्रेष्ठ आहेत' अशी एकांत ऋजू दृष्टी (सम्यक् दृष्टी) बाळगणारा आणि उपोसथ समादानाने दक्षिणा (दान) शुद्ध करणारा - याला 'दक्षिणावश-दशक' असे म्हणतात. အလဂ္ဂနတာ, နိရာလယတာ, ဝါဂေါ, ပဟာဏံ, အပုနရာဝတ္တိတာ, သုခုမတာ, မဟန္တတာ, ဒုရနုဗောဓတာ, ဒုလ္လဘတာ အသဒိသတာ, ဗုဒ္ဓဓမ္မဿာ’တိ ဣဒံ ဗောဓိသတ္တဂုဏဒသကံ နာမ. अनासक्ती (अलग्नता), निरालयता (आसक्तीरहितता), त्याग, प्रहाण (त्याग करणे), अपुनरावृत्ती (पुन्हा न परतणे), सूक्ष्मता, महानता, दुरनुबोधता (समजण्यास कठीण असणे), दुर्लभता आणि बुद्धधम्माची असदृशता (अतुलनीयता) - याला 'बोधिसत्त्वगुण-दशक' असे म्हणतात. မဇ္ဇဇဒါနံ, သမဇ္ဇဒါနံ, ဣထိဒါံ, အသဘဒါနံ, စိတ္တကမ္မဒါနံ, ဝိသဒါနံ, သထဒါနံ, သင်္ခလိကဒါနံ, ကုက္ကုဋသူကရဒါနံ, တုလာကူဋ မာနနကူဋဒါနနန္တိ ဣဒံ လောကေ အဒါနသမ္မတဒါနံ နာမ. मद्यदान, समाजदान (करमणुकीचे खेळ देणे), स्त्रीदान, वृषभदान, चित्रकर्मदान (कामोत्तेजक चित्रे देणे), विषदान, शस्त्रदान, साखळ्यांचे (बंधनांचे) दान, कोंबड्या व डुक्कर यांचे दान, आणि खोट्या तराजू व मापांचे दान - याला जगात 'अदानसंमत दान' (दान न मानले जाणारे दान) असे म्हणतात. မာတာ ဗဓနံ, ပိတာ ဗဓနံ, ဘရိယာ ဗဓနံ, ပုတ္တာ ဗဓနံ, ဉာတီ ဗဓနံ, မိတ္တာဗဓနံ, ဓနံ ဗဓနံ, လာဘသက္ကာရောဗဓနံ, ဣဿရိယံ ဗဓနံ, ပဉ္စကာမဂုဏာ ဗဓနန္တိ ဣဒံ ဗဓနဒသကံ နာမ. माता हे बंधन आहे, पिता हे बंधन आहे, पत्नी हे बंधन आहे, पुत्र हे बंधन आहे, ज्ञाती (नातेवाईक) हे बंधन आहे, मित्र हे बंधन आहे, धन हे बंधन आहे, लाभ आणि सत्कार हे बंधन आहे, ऐश्वर्य (सत्ता) हे बंधन आहे आणि पाच कामगुण हे बंधन आहेत - याला 'बंधन-दशक' असे म्हणतात. ဝိဓဝါ ဣထိ, ဒုဗ္ဗလော ပုဂ္ဂလော, အမိတ္တဉာတိပုဂ္ဂလော, မဟဂ္ဃသော, အနာစာရိယကုလဝါသီ, ပါပမိတ္တော, ဓနဟီနော, အာစရိယဟီနော, ကမ္မဟီနော, ပယောဂဟီနော ပုဂ္ဂလော’တိ ဣဒံ ဩဉာတဗ္ဗပုဂ္ဂလဒသကံ နာမ. विधवा स्त्री, दुर्बल व्यक्ती, मित्र व नातेवाईक नसलेली व्यक्ती, अतिखादाड व्यक्ती, आचार नसलेल्या कुळात राहणारी व्यक्ती, पापी मित्र असणारी व्यक्ती, धनहीन व्यक्ती, आचार्य नसलेली व्यक्ती, कर्महीन व्यक्ती आणि उद्योगहीन (प्रयत्नहीन) व्यक्ती - याला 'अवज्ञेय-व्यक्ती-दशक' (तुच्छ मानल्या जाणाऱ्या व्यक्तींचे दशक) असे म्हणतात. ဒမေ သမေ ခန္တိသံဝရေ ယမေ နိယမေ အက္ကောဓေ ဝိဟိံသာယ သစ္စေ သောစေယျေ’တိ ဒသဋ္ဌာနေသု သတတံ စိတ္တံ ပဝတ္တတီ’တိ ဣဒံ ဝေဿန္တရဂုဏဒသကံ နာမာ’တိ. दम (इंद्रियनिग्रह), शम (चित्तशांती), क्षमा, संवर (संयम), यम, नियम, अक्रोध, अहिंसा, सत्य आणि शौच (शुद्धता) - या दहा स्थानांमध्ये ज्यांचे चित्त सतत कार्यरत असते, याला 'वेस्सन्तरगुण-दशक' असे म्हणतात. ဧကာဒသ ဒသကာ ဝုတ္တာ. अकरा दशक सांगितले आहेत. ၁၁. အာကာသဿ ဧကာဒသ ဂုဏာ နိဗ္ဗာနံ အနုပ္ပဝိဋ္ဌာ? န ဇာယတိ, နဇိယျတိ, န မိယျတိ, န စဝတိ, န ဥပ္ပဇ္ဇတိ, ဒုပ္ပသယှော, အစောရဟရဏော, အနိဿိတော, ဝိဟင်္ဂဂမနော, နိရာဝရဏော, အနန္တော’တိ ဣဒံ အာကာသဂုဏကာဒသကံ နာမ. ११. आकाशाचे अकरा गुण जे निर्वाणात अनुप्रविष्ट (समाविष्ट) आहेत, ते कोणते? ते जन्म घेत नाही, जीर्ण होत नाही, मरत नाही, च्युत होत नाही, उत्पन्न होत नाही, ते दुर्धर्ष (पराभूत करण्यास कठीण) आहे, चोरांकडून चोरले न जाणारे आहे, अनाश्रित आहे, विहंगगमन (पक्ष्यांच्या विहाराचा मार्ग) आहे, अनावृत (अडथळा नसलेले) आहे आणि अनंत आहे; याला 'आकाशगुण-एकादशक' असे म्हणतात. သီလပါကာရံ …ပေ… သတိပဋ္ဌာနဝီထိကန္တိ ဣဒံ ဓမ္မနဂရပရိဝါရေကာဒသကံ နာမာ’တိ ဒွေ ဧကာဒသကာ ဝုတ္တာ. शील-प्राकार (शीलाची भिंत) ...पे... सतिपट्ठान-वीथी (स्मृतीप्रस्थानाचा मार्ग) - याला 'धम्मनगर-परिवर-एकादशक' (धम्मनगराच्या परिवाराचे अकरा घटक) असे म्हणतात. अशा प्रकारे दोन एकादशक (अकराचे गट) सांगितले आहेत. ၁၂. ရတ္တော ရာဂဝသေန အပစိတိံ န ကရောတိ, ဒုဋ္ဌော ဒေါသဝသေန, မူဠှော မောဟဝသေန, ဥန္နဠောမာနဝသေန, နိဂ္ဂုဏော အဝိသေသတာယ, အတိထဒ္ဓေါ အတိသေဓတာယ, ဟီနော ဟီနဘာဝတာယ,ဝစနကရော အနိဿရတာယ, ပါပေါ ကဒရိယတာယ, ဒုက္ခာပိတော ဒုက္ခာပိတတာယ, လုဒ္ဓေါ လောဘဝသေန, အာယူဟိတော အထသာဓနဝသေန အပစိတိံ န ကရောတီတိ ဣဒံ အပစိတိအကာရကပုဂ္ဂလဒွါဒသကံ နာမ ဧကမေဝ အာဂတံ. १२. रागाने रंजलेला मनुष्य रागाच्या वशतेमुळे आदर करत नाही; द्वेषयुक्त मनुष्य द्वेषाच्या वशतेमुळे, मोहग्रस्त मनुष्य मोहाच्या वशतेमुळे, उद्धट मनुष्य मानाच्या (अहंकाराच्या) वशतेमुळे, निर्गुणी मनुष्य विशेष गुणांच्या अभावामुळे, अत्यंत ताठर मनुष्य अति-ताठरतेमुळे, हीन मनुष्य हीनभावामुळे, आज्ञाधारक मनुष्य पराधीनतेमुळे (स्वातंत्र्य नसल्यामुळे), पापी मनुष्य कृपणतेमुळे (कंजूषपणामुळे), पीडित मनुष्य पीडित अवस्थेमुळे, लोभी मनुष्य लोभाच्या वशतेमुळे आणि धडपड करणारा मनुष्य केवळ अर्थसाधनाच्या वशतेमुळे आदर करत नाही; याला 'अपचिती-अकारक-पुद्गल-द्वादशक' (आदर न करणाऱ्या बारा व्यक्तींचा गट) असे म्हणतात, जे एकच आले आहे. ၁၃. ပံသုကူလိကင်္ဂံ တေစီဝရိကင်္ဂံ ပိဏ္ဍပါတိကင်္ဂံ သပဒါနစာရိကင်္ဂံ ဧကာသနိကင်္ဂံ ပတ္တပိဏ္ဍိကင်္ဂံ ခလုပစဆာဘတ္တိကင်္ဂံ အာရညိကင်္ဂံ ရုက္ခမူလိကင်္ဂံ အဗ္ဘောကာသိကင်္ဂံ သောသာနိကင်္ဂံ ယထာသထတိကင်္ဂံ နေသဇဇိကင်္ဂန္တိ ဣဒံ ဓုတင်္ဂတေရသကံ နာမ ဧကမေဝ. १३. पांसुकूलिकंग (पांसुकूल धारण करण्याचे अंग), तेचीवरिकंग (तीन चिवरे धारण करण्याचे अंग), पिंडपातिकंग (पिंडपाताने उपजीविका करण्याचे अंग), सपदानचारिकंग (सलग घरांतून भिक्षाटन करण्याचे अंग), एकासनिकंग (एकाच आसनावर भोजन करण्याचे अंग), पत्तपिंडिकंग (पात्रातच भोजन करण्याचे अंग), खलुपच्छाभत्तिकंग (भोजनोत्तर पुन्हा न खाण्याचे अंग), आरण्यिकंग (अरण्यात राहण्याचे अंग), रुक्खमूलिकंग (वृक्षाच्या मुळाशी राहण्याचे अंग), अब्भोकासिकंग (उघड्या जागेत राहण्याचे अंग), सोसानिकंग (स्मशानात राहण्याचे अंग), यथासंथतिकंग (मिळेल त्या आसनावर समाधान मानण्याचे अंग) आणि नेसज्जिकंग (केवळ बसून राहण्याचे/न झोपण्याचे अंग) - याला 'धुतांग-तेरसक' (तेरा धुतांगांचा गट) असे म्हणतात, जे एकच आहे. ၁၄. စုဒ္ဒသဗုဒ္ဓဉာဏဝသေန စုဒ္ဒသကံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. १४. चौदा बुद्धज्ञानांच्या द्वारे 'चौदाचा गट' (चोद्दासक) समजावा. ၁၆. အလင်္ကာရပဠိဗောဓော, မဏ္ဍနပဠိဗောဓော, တေလမက္ခနပဠိဗောဓော, ဝဏ္ဏပဠိဗောဓော, မာလာပဠိဗောဓော, ဂဓပဠိဗောဓော, ဝါသပဠိဗောဓော, ဟရီဋကိပဠိဗောဓော, အာမလကပဠိဗောဓော, ရင်္ဂပဠိဗောဓော, ဗဓနပဠိဗောဓော, ကောစ္ဆပဠိဗောဓော, ကပ္ပကပဠိဗောဓော, ဝိဇဋနပဠိဗောဓော, ဦကာပဠိဗောဓော, ကေသေသု လူယန္တေသု သောစန္တိ ကိလမန္တိ ပရိဒေဝန္တိ ဥရတ္တာဠိံ ကဒန္တိ သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇန္တီတိ ဣဒံ ကေသပဠိဗောဓသောဠကံ. १६. अलंकाराचा अडथळा (अलंकार-पळिबोध), प्रसाधनाचा अडथळा, तेल लावण्याचा अडथळा, रंग लावण्याचा अडथळा, पुष्पमाला धारण करण्याचा अडथळा, गंधाचा अडथळा, सुवासिक द्रव्यांचा अडथळा, हिरड्याचा अडथळा, आवळ्याचा अडथळा, रंगाचा अडथळा, केस बांधण्याचा अडथळा, कंगव्याचा अडथळा, न्हाव्याचा अडथळा, जटा सोडवण्याचा अडथळा, उवांचा अडथळा, आणि केस गळू लागल्यावर (किंवा कापले जात असताना) शोक करणे, कष्टी होणे, विलाप करणे, छाती बडवून रडणे व संमोहित होणे - याला 'केस-पळिबोध-सोळसक' (केसांच्या सोळा अडथळ्यांचा गट) असे म्हणतात. တိရစ္ဆနဂတော ပေတော မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိတော ကုဟကော မာတုဃာတကော ပိတုဃာတကော အရဟန္တဃာတကော လောဟိတုပ္ပာဒကော သံဃဘေဒကော တိထိယပက္ကန္တကော ထေယျသံဝါသကော ဘိက္ခုနီဒူသကော တေရသန္နံ ဂရုကာပတ္တီနံ အညတရံ အာပဇ္ဇိဝါ အဝုဋ္ဌိတော ပဏ္ဍကော, ဥဘတောဗျဉ္ဇနကော, ဦနသတ္တဝဿကော’တိ ဣဒံ အဓမ္မာဘိသမယပုဂ္ဂလသောဠသကန္တီ ဒွေ သောဠသကာ ဝုတ္တာ. तिर्यक योनीतील प्राणी (पशू), प्रेत, मिथ्यादृष्टी असलेला, ढोंगी, मातृघातक, पितृघातक, अर्हतघातक, बुद्धांच्या शरीरातून रक्त काढणारा, संघभेदक, इतर पंथात गेलेला (तीर्थक-पक्कांतक), चोरून संघात राहणारा, भिक्षुणीला दूषित करणारा, तेरा गुरु-आपत्तींपैकी (संघादिसेस) कोणत्याही एका आपत्तीत पडलेला आणि त्यातून मुक्त न झालेला, नपुंसक (पंडक), उभयव्यंजनक आणि सात वर्षांपेक्षा कमी वयाचा बालक - याला 'अधम्माभिसमय-पुद्गल-सोळसक' (धम्माचा साक्षात्कार करण्यास अपात्र असलेल्या सोळा व्यक्तींचा गट) असे म्हणतात. अशा प्रकारे दोन सोळसक (सोळाचे गट) सांगितले आहेत. ၁၇. အဘိဇာနတော သတိ ဥပ္ပဇ္ဇတိ ကဋုမိကာယ, ဩဠာရိကဝိညာဏတော ဟိတဝိညာဏတော အဟိတဝိညာဏတော သဘာဂနိမိတ္တတော ဝီသဘာဂနိမိတ္တတော ကထာဘိဉဉာဏတော လက္ခဏတော သရဏတော မုဒ္ဒတော ဂဏနာတော ဓာရဏတော ဘာဝနတော ပေါတ္ထကနိဗဓနတော ဥပနိက္ခေပတော အနုဘုတတော သတိ ဥပ္ပဇ္ဇတီတိ ဣဒံ သတိဥပ္ပဇ္ဇနာကာရသတ္တရသကံ ဧကမေဝ. १७. अभिज्ञानामुळे (विशेष ज्ञानामुळे) स्मृती उत्पन्न होते, कटुमिका (पूर्वीच्या संकेतामुळे), स्थूल विज्ञानामुळे, हितकारक विज्ञानामुळे, अहितकारक विज्ञानामुळे, समान निमित्तामुळे, असमान निमित्तामुळे, संभाषणाच्या ज्ञानामुळे, लक्षणावरून, स्मरणावरून, मुद्रेवरून, गणनेवरून, धारणेवरून, भावनेमुळे, ग्रंथबद्ध करण्यामुळे, उपनिक्षेपामुळे (ठेवलेल्या वस्तूवरून) आणि पूर्वी अनुभवलेल्या गोष्टीवरून स्मृती उत्पन्न होते; याला 'सति-उप्पज्जन-आकार-सत्तरसक' (स्मृती उत्पन्न होण्याच्या सतरा प्रकारांचा गट) असे म्हणतात, जे एकच आहे. ၁၈. အဋ္ဌာရသဗုဒ္ဓဓမ္မဝသေန အဋ္ဌာရသကံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. १८. अठरा बुद्धधम्मांच्या द्वारे 'अठराचा गट' (अट्ठाठसक) समजावा. ၁၉. သုတိ သုမုတိ သံချယောဂါ ဉာယဝေသေသိကာ ဂဏိတာ ဂဓဗ္ဗာ တိကိစ္ဆာ စတုဗ္ဗေဒါ ပုရာဏာ ဣတိဟာသဇောတိသာ မာယာ ဟေတု မန္တနာ ယုဒ္ဓါ ဆဒသာ ဗုဒ္ဓဝစနေန ဧကူနဝီသတီတိ ဣဒံ ရညော သိက္ခိတသထေကူနဝိသတိကံ. १९. श्रुती, स्मृती, सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, गणित, गंधर्वविद्या (संगीत), चिकित्सा (वैद्यकशास्त्र), चार वेद, पुराणे, इतिहास, ज्योतिष, माया (इंद्रजाल), हेतू (तर्कशास्त्र), मंत्रविद्या, युद्धकला, छंदशास्त्र आणि बुद्धवचन - हे एकोणीस आहेत; याला 'राजाचे शिकलेले एकोणीस शास्त्रे' (राज्ञो सिक्खितसत्थ-एकोनवीसतिक) असे म्हणतात. ၂၂. အဂ္ဂေါ ယမော သေဋ္ဌော နိယမော ဟာရော ဝိဟာရော သံယမော သံဝရော ခန္တိ သောရစ္စံ ဧကန္တစရိယာ ဧကတ္တာဘိရတိ ပဋိသလ္လာနံ ဟိရိ ဩတ္တပ္ပံ ဝီရိယံ အပ္ပမာဒေါ သိက္ခာပဒါနံ ဥဒ္ဒေသော ပရိပုစ္ဆာ သီလာဒိအဘိရတိ နိရာလယတာ သိက္ခာပဒပါရိပူရိတာတိ ဗာဝီသတိသမဏကရဏာ ဓမ္မာ ကာသာဝဓာရဏံ ဘဏ္ဍုဘာဝေါ စာ’တိ ဒွေ လိင်္ဂါနိ ပက္ခိပိဝါ ဝဒနကာရဏဂုဏဗာဝီသတိကံ. २२. अग्र (श्रेष्ठत्व), यम, श्रेष्ठत्व, नियम, हार (धारण करणे), विहार, संयम, संवर, क्षंती (सहनशीलता), सोरच्च (सौजन्य), एकांतचर्या, एकांतात रममाण होणे, प्रतिसंलयन (एकांत ध्यान), हिरी (लज्जा), ओत्तप्प (पापभीरुता), वीर्य (प्रयत्न), अप्पमाद (सतर्कता), शिक्षापदांचा उद्देश (पाठ करणे), परिपृच्छा (प्रश्न विचारणे), शीलादींमध्ये अभिरती, निरालयता (अनासक्ती) आणि शिक्षापदांची परिपूर्ती - हे बावीस श्रमण बनवणारे धर्म आहेत; आणि काषाय वस्त्र धारण करणे व मुंडण करणे ही दोन चिन्हे मिळवून, वंदन करण्याचे कारण असणारे बावीस गुण (वंदनकारणगुण-बावीसतिक) होतात. ၂၅. အာရက္ခာ သေဝနာ စေဝ ပမတ္တပ္ပမတ္တာ တထာ သေယျာဝကာသော ဂေလညံ ဘောဇနံ လဗ္ဘကဉ္စေဝ ဝိသေသော စ ဝိဇာနိယာ ပတ္တဘတ္တံ သံဝိဘဇေ အဿာသော စ ပဋိစာရော ဂါမဝိဟရံ စာရာ ဗေ သလ္လာပေါ ပန ကာတဗ္ဗော ဆိဒ္ဒံ ဒိသွာ ခမေယျ စ သက္ကစ္စာခဏ္ဍကာရီ ဒွေ အရဟဿာသေသကာရိ ဒွေ ဇနေယျ ဇနကံ စိတ္တံ ဝဍ္ဎိစိတတံ ဇနေယျ စ သိက္ခာဗလေ ဌပေယျ နံ မေတ္တံ စိတ္တဉ္စ ဘာဝယေ. န ဇဟေ အပဒါယ စ ကရဏီယေ စ ဥဿုကံ ပဂ္ဂဟေ ခလိကံ ဓမ္မေ. ဣတိ ပံစဝီသ ဂုဏာမိလိဒေန ပကာသိတာ’တိ ဣဒံ အန္တေဝါသိကမှိ အာစရိယေန ကတဂုဏပံစဝီသတိကံ २५. रक्षण करणे, सेवा करणे, प्रमादी व अप्रमादी यांच्याकडे लक्ष देणे, शय्या व निवासस्थान देणे, आजारपणात औषधोपचार करणे, भोजन देणे, जे काही लाभेल ते देणे, विशेष गोष्टी जाणून घेणे, पात्रातील अन्नाचा विभाग करणे (वाटून घेणे), आश्वासन देणे, परिचर्या करणे, गावात विहार करणे, चारित्र्य राखणे, संभाषण करणे, दोष पाहून क्षमा करणे, आदरपूर्वक आणि अखंडपणे कार्य करणे (हे दोन), रहस्य न लपवणे आणि सर्व काही सांगणे (हे दोन), उत्पादक चित्त निर्माण करणे, वर्धमान चित्त निर्माण करणे, त्याला शिक्षणात स्थापित करणे, मैत्रीपूर्ण चित्ताची भावना करणे, संकटसमयी सोडून न देणे, कर्तव्यकर्मात उत्सुक असणे आणि धर्मात प्रगती करणे - अशा प्रकारे मिलिंदाने पंचवीस गुण प्रकाशित केले आहेत; याला 'आचार्यांनी अंतेवासिकावर (शिष्यावर) करावयाच्या पंचवीस गुणांचा गट' (अंतेवासिकम्ही आचरियेन कतगुण-पंचवीसतिक) असे म्हणतात. ကောဓော ဥပနာဟော မက္ခော ပလာသော ဣဿာ မစ္ဆရိယံ မာယာ သာဌေယျံ ထမှော သာရမှော မာနော အတိမာနော မဒေါ ပမာဒေါ ထိနမိဒ္ဓံ နဒိ အာလသျံ ပါပမိတ္တတာ ရူပါ သဒ္ဒါ ဂဓာ ရသာ ဖောဋ္ဌဗ္ဗာ ဗုဓာ ပိပါသာ အရတီတိ ဣဒံ စိတ္တဒုဗ္ဗလီကရဏဓမ္မပဉ္စဝီသတိကန္တိ ဒွေ ပဉ္စဝီသတိကာ ဝုတ္တာ. क्रोध (राग), उपनाह (वैर बांधणे), मख (गुण झाकणे), पलास (मत्सर), ईर्ष्या, मात्सर्य (कंजूषपणा), माया (ढोंग), शाठ्य (लबाडी), थंभ (ताठरपणा), सारंभ (स्पर्धात्मक वृत्ती), मान (अहंकार), अतिमान (अति-अहंकार), मद (गर्व), प्रमाद (बेसावधपणा), थिनमिद्ध (आळस आणि डुलकी), नदी (तृष्णा), आळस, पापमित्रता (वाईट मित्रांची संगत), रूप, शब्द, गंध, रस, स्पर्श, क्षुधा (भूक), पिपासा (तहान) आणि अरती (उदासीनता) - याला 'चित्त दुर्बल करणारे पंचवीस धर्म' (चित्तदुब्बलीकरणधम्म-पंचवीसतिक) असे म्हणतात. अशा प्रकारे दोन पंचवीसतिक (पंचवीसचे गट) सांगितले आहेत. ၂၈. ပဋိသလ္လာနံ ပဋိသလ္လိယမာနံ ပုဂ္ဂလံ ရက္ခတိ. အာယုံ ဝဍ္ဎေတိ, ဗလံ ဝဍ္ဎေတိ, ဝဇ္ဇံ ပိဒဟတိ, အယသံ အပနေတိ, ယသံ ဥပဒဟတိ, အရတိံ အပနေတိ, ရတိံ ဥပဒဟတိ, ဘယံ အပနေတိ, ဝေသာရဇ္ဇံ ကရောတိ, ကောသဇ္ဇံ အပနေတိ, ဝီရိယံ အဘိဇနေတိ, ရာဂံ အပနေတိ, ဒေါသံ အပနေတိ, မောဟံ အပနေတိ, မာနံ နိဟန္တိ, ဝိတက္ကံ ဘဉ္ဇတိ, စိတ္တမေကဂ္ဂံ ကရောတိ, မာနသံ သိနေဟယတိ, ဟာသံအဘိဇနေတိ, ဂရုကံကရောတိ, မာနံ ဥပ္ပာဒယတိ, နမဿိယံ ကရောတိ, ပီတိံ ပါပေတိ, ပါမောဇ္ဇံ ကရောတိ, သင်္ခါရာနံ သဘာဝံ ဒဿယတိ, ဘဝပဋိသဓိံ ဥဂ္ဃာဋေတိ, သဗ္ဗသာမညံ ဒေတီတိ ဣဒံပဋိသလ္လာနေ ဂုဏဋ္ဌဝီသတိကံ. २८. प्रतिसंलयन (एकांत ध्यान) ध्यान करणाऱ्या व्यक्तीचे रक्षण करते. ते आयुष्य वाढवते, बल वाढवते, दोष दूर करते, अपयश दूर करते, यश मिळवून देते, अरती (उदासीनता) दूर करते, रती (धम्मातील प्रीती) निर्माण करते, भय दूर करते, वैशारद्य (आत्मविश्वास) निर्माण करते, आळस दूर करते, वीर्य (प्रयत्न) उत्पन्न करते, राग (आसक्ती) दूर करते, द्वेष दूर करते, मोह दूर करते, मान (अहंकार) नष्ट करते, वितर्क नष्ट करते, चित्त एकाग्र करते, मनाला कोमल करते, आनंद उत्पन्न करते, आदरणीय बनवते, आदर उत्पन्न करते, नमस्कार करण्यास पात्र बनवते, प्रीती प्राप्त करून देते, प्रमोद (हर्ष) निर्माण करते, संस्कारांचा स्वभाव दाखवते, भव-प्रतिसंधी (पुनर्जन्म) नष्ट करते आणि सर्व श्रमणत्व प्रदान करते; याला 'प्रतिसंलयनाचे अठ्ठावीस गुण' (पटिसल्लाने गुण-अट्ठावीसतिक) असे म्हणतात. မဟောသဓော မဟာရာဇ သူရော, ဟိရိမာ, ဩတ္တာပီ, သပက္ခော, မိတ္တသမ္ပန္နော, ခမော, သီလဝါ, သစ္စဝါဒီ, သောစေယျသမ္ပန္နော, အကောဓနော, အနတိမာနီ, အနုသူယကော, ဝီရိယဝါ, အာယူဟကော, သင်္ဂါဟကော, သံဝိဘာဂီ, သခိလော, နိဝါတဝုတ္တိ, အသဌော, အမာယာဝီ, ဗုဒ္ဓိသမ္ပန္နော, ကိတ္တိမာ, ဝိဇ္ဇာသမ္ပန္နော, ဟိတေသီ ဥပနိဿိတာနံ, အဘိရူပေါ ဒဿနီယော, ပထိတော သဗ္ဗဇနဿ, ဓနဝါ ယသဝါ’တိ ဣဒံ မဟောသဓဂုဏဋ္ဌဝီသတိကံ ဣတိ ဒွေ အဋ္ဌဝီသတိကာ ဝုတ္တာ. हे महाराज, महौषध शूर, लज्जावान, पापभीरू, मित्रपरिवार असलेला, मित्रसंपन्न, क्षमाशील, शीलवान, सत्यवादी, पवित्रता असलेला, अक्रोधन (राग न करणारा), निरहंकारी, असूया नसलेला, वीर्यवान (प्रयत्नशील), उद्योगी, संग्राहक, संविभागी (वाटून घेणारा), मधुर बोलणारा, विनम्र वृत्तीचा, लबाड नसलेला, ढोंगी नसलेला, बुद्धिसंपन्न, कीर्तिमान, विद्यासंपन्न, आश्रितांचे हित चिंतणारा, अभिरूप (सुंदर), दर्शनीय, सर्व लोकांमध्ये प्रसिद्ध, धनवान आणि यशवंत आहे; याला 'महौषधाचे अठ्ठावीस गुण' (महोसधगुण-अट्ठावीसतिक) असे म्हणतात. अशा प्रकारे दोन अठ्ठावीसतिक (अठ्ठावीसचे गट) सांगितले आहेत. ၃၀. ဣမေဟိ တေရသဟိ ဓုတဂုဏေဟိ ပုဗ္ဗေ အာသေဝိတေဟိ နိသေဝိတေဟိ စိဏ္ဏေဟိ ပရိစိဏ္ဏေဟိ စရိတေဟိ ပရိပူရိတေဟိ နိမိတ္တဘူတေဟိ အရိယသာဝကော ဣဓ ဘဝေ တိံသဂုဏဝရေဟိ သမုပေတော ဟောတိ ကတမေဟိ တိံသဂုဏဝရေဟိ? သိနိဒ္ဓမုဒုမဒ္ဒဝမေတ္တစိတ္တော ဟောတိ, ဃာတိတဟတဝိဟတကိလေသော ဟောတိ, ဟတနိဟတမာနဒပ္ပော ဟောတိ, အစလဒဠှနိဝိဋ္ဌနိဗ္ဗေမတိကသဒ္ဓေါ ဟောတိ, ပရိပုဏ္ဏ-ပီဏိတ. ပဟဋ္ဌလောဘနိယ-သန္တ-သုခ-သမာပတ္တိလာဘီ ဟောတိ, သီလ-ဝရ-ပဝရ-အသမ-သုစိဂဓပရိဘာဝိတော ဟောတိ, ဒေဝမနုဿာနံ ပိယော ဟောတိ မနာပေါ, ခီဏာသဝ-အရိယပုဂ္ဂလ-ပထိတော ဟောတိ, ဒေဝမနုဿာနံ ဝဒိတပူဇိတော ထုတထဝိတထောမိတပသထော, ဣဓ ဝါ ဟုရံ ဝါ လောကေန အနုပလိတ္တော, အပ္ပထောကဝဇ္ဇေ’ပိ ဘယဒဿာဝီ, ဝိပုလ-ဝရ-သမ္ပတ္တိကာမာနံ မဂ္ဂဖလဝရထသာဓနော, အယာစိတဝိပုလပဏီတပစ္စယဘာဂီ, အနိကေတသနော, ဓာနဇ္ဈာယိတပဝရဝိဟာရီ, ဝိဇဋိတကိလေသဇာလဝထုကော, ဘိန္န-ဘဂ္ဂ-သင်္ကုဋိတ-သမှိန-ဂတိနိဝါရဏော, အကုပ္ပဓမ္မော, အဟီနီတဝါသော, အနဝဇ္ဇဘောဂီ, ဂတိဝိမုတ္တော, ဥတ္တိဏ္ဏသဗ္ဗဝိစိကိစ္ဆော, ဝိမုတ္တိဇ္ဈာယိတတ္တော, ဒိဋ္ဌဓမ္မော, အစလဒဠှဘီရုတ္တာဏမုပဂတော, သမုစ္ဆိန္နာနုသယော, သဗ္ဗာသဝက္ခယမ္ပတ္တော, သန္တသုခသမာပတ္တိဝိဟာရဗဟုလော, သဗ္ဗသမဏဏဂုဏသမုပေတော, ဣမေဟိ တိံသဂုဏဝရေဟိ သမုပေတော ဟောတိ. ဣတိ ဓုတင်္ဂဂုဏာနိသံသဂုဏဝရတိံသကံ. ३०. पूर्वी आचरलेल्या, सेवन केलेल्या, अभ्यासलेल्या, वारंवार सराव केलेल्या, आचरणात आणलेल्या, परिपूर्ण केलेल्या आणि निमित्तभूत झालेल्या या तेरा धुतगुणांमुळे आर्यश्रावक या जन्मात तीस श्रेष्ठ गुणांनी युक्त होतो. कोणत्या तीस श्रेष्ठ गुणांनी? तो स्निग्ध, मृदू, कोमल आणि मैत्रीपूर्ण चित्ताचा होतो; त्याचे क्लेश नष्ट, हत आणि विहत झालेले असतात; त्याचा मान आणि दर्प नष्ट व निहत झालेला असतो; त्याची श्रद्धा अचल, दृढ, प्रस्थापित आणि संशयरहित असते; तो परिपूर्ण, तृप्त, हर्षित करणाऱ्या शांत व सुखद समापत्तींचा लाभ घेणारा असतो; तो शीलरूपी श्रेष्ठ, प्रवर, अनुपम आणि पवित्र सुवासाने सुवासित असतो; तो देव आणि मनुष्यांना प्रिय व मनपसंत असतो; तो क्षीणासव (अर्हत) आणि आर्यपुद्गलांना संमत असतो; तो देव आणि मनुष्यांकडून वंदित, पूजित, स्तुत, प्रशंसित आणि सन्मानित असतो; तो या जगात किंवा परलोकात अलिप्त असतो; तो अगदी लहान दोषातही भय पाहणारा असतो; तो विपुल व श्रेष्ठ संपत्तीची इच्छा करणाऱ्यांसाठी मार्ग आणि फलरूपी श्रेष्ठ अर्थाचे साधन असतो; तो न मागताही विपुल व प्रणीत (उत्कृष्ट) प्रत्यय (दान) मिळवणारा असतो; तो अनिकेत (घर नसलेला/आसक्ती नसलेला) असतो; तो ध्यानात मग्न राहणारा आणि श्रेष्ठ विहारात राहणारा असतो; त्याने क्लेशांचे जाळे नष्ट केलेले असते; त्याने गतीचे (संसारगमनाचे) निवारण छिन्नभिन्न, भग्न, संकुचित आणि नष्ट केलेले असते; तो अकुप्पधम्मा (अकंपित स्वभावाचा) असतो; तो हीन नसलेल्या (उच्च) विहारात राहणारा असतो; तो अनवद्य (दोषरहित) भोगांचा उपभोग घेणारा असतो; तो गतीपासून मुक्त असतो; त्याने सर्व शंका-कुशंका पार केलेल्या असतात; तो विमुक्तीचे ध्यान करणारा असतो; त्याने धम्माचा प्रत्यक्ष साक्षात्कार केलेला असतो; तो अचल, दृढ, अभय आणि शरण प्राप्त झालेला असतो; त्याचे अनुशय (सुप्त क्लेश) समूळ नष्ट झालेले असतात; त्याने सर्व आसवांचा क्षय (सर्व क्लेशांचा नाश) मिळवलेला असतो; तो शांत व सुखद समापत्ती विहारात बहुतांश काळ घालवणारा असतो; आणि तो सर्व श्रमणगुणांनी युक्त असतो. या तीस श्रेष्ठ गुणांनी तो युक्त होतो. अशा प्रकारे हे धुतंगगुणांच्या आनिशंसाचे (फायद्यांचे) तीस श्रेष्ठ गुण आहेत. ဇာတိပိ ဒုက္ခာ, ဇရာပိ ဒုက္ခာ, ဗျာဓိပိ ဒုက္ခော, မရဏမ္ပိ ဒုက္ခံ, သောကောပိ ပရိဒေဝေါပိ ဒုက္ခော,ဥပါယာသောပိ အပ္ပိယေဟိ သမ္ပယောဂေါပိ ပိယေဟိ ဝိပ္ပယောဂေါပိ, မာတုမရဏမ္ပိ ပိတုမရဏမ္ပိ ဘာတုမရဏမ္ပိ ဘဂိနိမရဏမ္ပိ ဉာတိမရဏမ္ပိ ဉာတိဗျသနမ္ပိ ဘောဂဝျသနမ္ပိ သီလဗျသနမ္ပိ ဒိဋ္ဌိဗျသနမ္ပိ ရာဇဗျသနမ္ပိ စောရဗျသနမ္ပိ ဝေရိဘယမ္ပိ ဒုဗ္ဘိက္ခဘယမ္ပိ အဂ္ဂိဘယမ္ပိ ဒုက္ခံ, ဥဒကဘယမ္ပိ ဒုက္ခံ, ဦမိဘယမ္ပိ အာဝဋ္ဋဘယမ္ပိ ကုမ္ဘီလဘယမ္ပိ သုံသုမာရဘယမ္ပိ အတ္တာနုဝါဒဘယမ္ပိ ပရာနုဝါဒဘယမ္ပိ အသိလောကဘယမ္ပိ ဒဏ္ဍဘယမ္ပိ ဒုဂ္ဂတိဘယမ္ပိ ပရိသသာရဇ္ဇဘယမ္ပိ အာဇီဝိကဘယမ္ပိ မရဏဘယမ္ပိ မဟာဘယမ္ပိ ဝေတ္တေဟိ တာဠနမ္ပိ ကသာဟိ တာဠနမ္ပိ အဍ္ဎဒဏ္ဍကေဟိ တာဠနမ္ပိ ဟထစ္ဆေဒမ္ပိ ပါဒစ္ဆေဒမ္ပိ နာသစ္ဆေဒမ္ပိ ကဏ္ဏစ္ဆေဒမ္ပိ ကဏ္ဏနာသစ္ဆေဒမ္ပိ ဗိဠင်္ဂထာလိကမ္ပိ သင်္ခမုဏ္ဍိကမ္ပိ ရာဟုမုခမ္ပိ ဇောတိမလိကမ္ပိ ဟထပဇ္ဇောတိကမ္ပိ ဧရကဝတ္တိကမ္ပိ စီရကဝါသိကမ္ပိ ဧနေယျကမ္ပိ ဗလိသမံသိကမ္ပိ ကဟာပဏိကမ္ပိ ခါရာပတစ္ဆိကမ္ပိ ပဠိဃပရိဝတ္တိကမ္ပိ ပလာလပီဌိကမ္ပိ တတ္တေနပိ တေလေန ဩသိဉ္စနမ္ပိ သုနခေဟိ ခါဒါပနမ္ပိ ဇီဝသူလာရောပဏမ္ပိ အသိနာသီသစ္ဆေဒနမ္ပီတိ ဣဒံ ဒုက္ခသဋ္ဌိကံ. जन्मही दुःख आहे, जरा (वृद्धत्व) देखील दुःख आहे, व्याधी (आजारपण) देखील दुःख आहे, मरणही दुःख आहे, शोक आणि परिदेव (रडणे-ओरडणे) देखील दुःख आहे, उपायास (निराशा) देखील, अप्रियांचा संयोग आणि प्रियांचा वियोग देखील, मातेचा मृत्यू, पित्याचा मृत्यू, भावाचा मृत्यू, बहिणीचा मृत्यू, नातेवाईकांचा मृत्यू, नातेवाईकांचे व्यसन (नाश), भोगांचे व्यसन (संपत्तीचा नाश), शीलाचे व्यसन (शीलभ्रष्टता), दृष्टीचे व्यसन (मिथ्यादृष्टी), राजाचे भय (राजव्यसन), चोरांचे भय (चोरव्यसन), शत्रूचे भय, दुष्काळाचे भय, अग्नीचे भय देखील दुःख आहे, पाण्याचे भय देखील दुःख आहे, लाटांचे भय, भोवऱ्याचे भय, मगरीचे भय, सुंसुमार (जलचर प्राणी) चे भय, स्वतःच्या निंदेचे भय, इतरांच्या निंदेचे भय, अपकीर्तीचे भय, दंडाचे (शिक्षेचे) भय, दुग्गतीचे (नरकादी गतींचे) भय, परिषदेत घाबरण्याचे भय, उपजीविकेचे भय, मरणाचे भय, महाभय, छडीने मारणे, चाबकाने मारणे, अर्ध्या काठीने मारणे, हात कापून टाकणे, पाय कापून टाकणे, नाक कापून टाकणे, कान कापून टाकणे, कान आणि नाक दोन्ही कापून टाकणे, बिळंगथालिक (कांजीचे भांडे), संखमुंडिक (शंखासारखे डोके करणे), राहुमुख, जोतिमालिक (तेजस्वी माळ), हत्थपज्जोतिक (हाताची मशाल), एरकवत्तिक (एरका गवतासारखे सोलणे), चीरकवासिक (झाडाच्या सालीसारखे वस्त्र करणे), एणेय्यक (हरणासारखे करणे), बळिसमंसिक (गळाने मांस उपटणे), कहापणिक (कार्षापणासारखे तुकडे करणे), खारापतच्छिक (खारट पाणी शिंपडणे), पळिघपरिवत्तिक (खांबाभोवती फिरवणे), पलालपीठिक (पेंढ्याच्या पिढ्यासारखे करणे), तापलेल्या तेलाने सिंचन करणे, कुत्र्यांकडून खाऊ घालणे, जिवंत सुळावर चढवणे आणि तलवारीने डोके कापून टाकणे - हे साठ प्रकारचे दुःख (दुःखसठ्ठिक) आहे. သင်္ခမုဏ္ဍကန္တိ သင်္ခမုဏ္ဍကမ္မကရဏံ တံ ကရောန္တာ ဥတ္တရောဋ္ဌဿ ဥဘယတော ကဏ္ဏစူဠိကဂလဝါဋကပရိစ္ဆေဒေန စမ္မံ ဆိဒိဝါ သဗ္ဗကေသေ ဧကတော ဂဏ္ဌိံ ကဝါ ဒဏ္ဍကေန ဝေဎဝါ ဥပ္ပာဋေန္တိ သဟ ကေသေဟိ စမ္မံ ဥဋ္ဌဟတိ တတော သီသကဋာဟံထူလသက္ခရာဟိ ဃံသိဝါ ဓောဝန္တာ သင်္ခဝဏ္ဏံ ကရောန္တိ. 'संखमुंडिक' म्हणजे संखमुंडिक नावाची शिक्षा. ती करताना, वरच्या ओठाच्या दोन्ही बाजूंच्या कानाच्या पाळीपासून गळ्याच्या भागापर्यंतची त्वचा कापून, सर्व केसांची एकत्र गाठ बांधून, ती एका काठीने गुंडाळून उपटून काढतात. केसांसोबत त्वचाही निघून येते. त्यानंतर डोक्याची कवटी जाड वाळूने घासून व धुवून शंखासारख्या पांढऱ्या रंगाची करतात. တထ ဗိဠင်္ဂထာလိကန္တိ ကဉ္ဇိယောက္ခလိကကမ္မကရဏံ. တံ ကရောန္တာ သိသကဋာဟံ ဥပ္ပာဋေဝါ တတ္တံ အယောဂုဠံ သဏ္ဍာသေန ဂဟေဝါ တထ ပက္ခိပန္တိ. တေန မထလုင်္ဂံ ပက္ကဌိဝါ ဥပရိ ဥတ္တရတိ. तसेच 'बिळंगथालिक' म्हणजे कांजीच्या भांड्यासारखी शिक्षा. ती करताना, डोक्याची कवटी उघडी करून, तापलेला लोखंडी गोळा पक्कडीने पकडून त्यात टाकतात. त्यामुळे मेंदू उकळून वर येतो. ရာဟုမုခန္တိ ရာဟုမုခကမ္မကရဏံ. တံ ကရောန္တာ သင်္ကုနာ ဝိဝရိဝါ အန္တောမုခေ ဒီပံ ဇာလေန္တိ. ကဏ္ဏစူဠိကာဟိ ဝါ ပဋ္ဌာယ မုခံ နိခါဒနေန ခဏန္တိ လောဟိတံပဂ္ဃရိဝါ မုခံ ပူရေတိ. 'राहुमुख' म्हणजे राहुमुख नावाची शिक्षा. ती करताना, खिळ्याने तोंड उघडे ठेवून तोंडाच्या आत दिवा पेटवतात. किंवा कानाच्या पाळीपासून सुरुवात करून छिन्नीने तोंड कोरतात, ज्यामुळे वाहणाऱ्या रक्ताने तोंड भरून जाते. ဇောတိမာလိကန္တိ သကလသရီရံ တေလပိလောတိကာယ ဝေဌေဝါ အာလိမ္ပေန္တိ. 'joतिमालिक' म्हणजे संपूर्ण शरीराला तेलात भिजवलेल्या कापडाने गुंडाळून आग लावणे. ဟထပဇ္ဇောတိကန္တိ ဟထေ တေလပိလောတိကာယ ဝေဌေဝါ ပဇ္ဇာလေန္တိ. 'हत्थपज्जोतिक' म्हणजे हातांना तेलात भिजवलेल्या कापडाने गुंडाळून पेटवणे. ဧရကဝတ္တိကန္တိ ဧရကဝတ္တကမ္မကရဏံ. တံ ကရောန္တာ ဟေဋ္ဌာဂိဝတော ပဋ္ဌာယ စမ္မဝဋ္ဋေ ကန္တန္တာ ဂေါပ္ဖကေ ပါတေန္တီ အထ နံ ယောတ္တေဟိ ဗဓိဝါ ကဍ္ဎန္တိ. သော အတ္တနော’ဝစမ္မဝဋ္ဋေ အက္ကမိဝါ ပတတိ စီရကဝါသိကန္တိ စိရကဝါသိကကမ္မကရဏံ. တံ ကရောန္တာ တထေဝ စမ္မဝဋ္ဋေ ကန္တိဝါ ကဋိယံ ဌပေန္တိ. ကဋိတော ပဋ္ဌာယ ကန္တိဝါဂေါပ္ဖကေသု ဌပေန္တိ. ဥပရိမေဟိ ဟေဋ္ဌိမသရီရံ စီရကနိဝါသနနိဝထံ ဝိယ ဟောတိ. 'एरकवत्तिक' म्हणजे एरकवत्त नावाची शिक्षा. ती करताना, मानेच्या खालच्या भागापासून सुरुवात करून त्वचेच्या पट्ट्या कापत घोट्यापर्यंत आणतात. नंतर त्याला दोऱ्यांनी बांधून ओढतात. तो स्वतःच्याच त्वचेच्या पट्ट्यांवर पाय देऊन पडतो. 'चीरकवासिक' म्हणजे चीरकवासिक नावाची शिक्षा. ती करताना, त्याचप्रमाणे त्वचेच्या पट्ट्या कापून कंबरेपर्यंत ठेवतात. कंबरेपासून कापून घोट्यापर्यंत ठेवतात. यामुळे वरच्या व खालच्या शरीराची त्वचा झाडाच्या सालीचे वस्त्र नेसल्यासारखी दिसते. ဧဏေယျကန္တိ ဧဏေယျကကမ္မကရဏံ. တံ ကရောန္တာ ဥဟောသု ကပ္ပရေသု စ ဇဏ္ဏုကေသု စ အယသလာကယော ဒဝါ အယသူလာနိ ကောဋ္ဋေန္တိ. သော စတုဟိ အယယုလေဟိ ဘုမိယံ ပတိဋ္ဌဟတိ. အထ နံ ပရိဝါရေဝါ အဂ္ဂိံ ကရောန္တိ. တံ သဓိသဓိတော သူလာနိ အပနောဝါ စတုဟိ အဋ္ဌိကောဋီဟိယေဝ ဌပေန္တိ. 'एणेय्यक' म्हणजे एणेय्यक नावाची शिक्षा. ती करताना, दोन्ही कोपर आणि गुडघ्यांमध्ये लोखंडी सळ्या घालून लोखंडी खिळे ठोकतात. तो चार लोखंडी खिळ्यांच्या आधारे जमिनीवर उभा राहतो. नंतर त्याच्याभोवती आग पेटवतात. जेव्हा त्याचे मांस जळून नष्ट होते, तेव्हा खिळे काढून त्याला केवळ चार हाडांच्या टोकांवर उभे ठेवतात. ဗဠိသမံသိကန္တိဥဘတောမုခေဟိ ဗဠိသေဟိ ပဟရိဝါ စမ္မမံသနဟာရူနိ ဥပ္ပာဋေန္တိ. 'बळिसमंसिक' म्हणजे दोन्ही बाजूंनी टोकदार असलेल्या गळाने (मासे पकडण्याच्या आकड्याने) मारून त्वचा, मांस आणि शिरा उपटून काढणे. ကဟာပဏကန္တိ သကလ သရီရံ တိဏှာဟိ ဝါသီဟိ ကောဋိတော ပဋ္ဌာယ ကဟာပဏ မတ္တံ ကဟာပဏ မတ္တံ ပါတေန္တာ ကောဋ္ဋေန္တိ. 'कहापणिक' म्हणजे कंबरेपासून सुरुवात करून तीक्ष्ण कुऱ्हाडीने संपूर्ण शरीरावर कार्षापणाच्या (नाण्याच्या) आकाराचे तुकडे पाडत मारणे. ခါရာပတစ္ဆိကန္တိ သရီရံ တထ တထ အာဝုဓေဟိ ပဟရိဝါ ကောစ္ဆေဟိ ခါရံ သံသေန္တိ စမ္မမံသနဟာရူနိ ပဂ္ဃရိဝါ အဋ္ဌကသင်္ခလိကာ’ဝ တိဋ္ဌတိ. 'खारापतच्छिक' म्हणजे शरीरावर जागोजागी शस्त्रांनी वार करून, खरखरीत कुंचल्याने खारट पाणी किंवा आम्ल घासणे, ज्यामुळे त्वचा, मांस आणि शिरा विरघळून वाहून जातात आणि केवळ हाडांचा सांगाडाच शिल्लक राहतो. ပဠိဃပရိဝတ္တကတီ ဧကေန ပဿေန နိပဇ္ဇာပေဝါ ကဏ္ဏဏစ္ဆိဒ္ဒေ အယသူလံ ကောဋ္ဋေဝါ ပထဝိယာ ဧကဗဒ္ဓံ ကရောန္တိ အထ နံ ပါဒေ ဂဟေဝါ အာဝိဇ္ဈန္တိ. 'पळिघपरिवत्तिक' म्हणजे एका कुशीवर झोपवून, कानाच्या छिद्रात लोखंडी खिळा ठोकून त्याला जमिनीशी जखडून टाकणे आणि नंतर त्याचे पाय पकडून त्याला गोल फिरवणे. ပလာလပီဌိကန္တိ ဆေကော ကာရဏိကော ဆဝိစမ္မံ အစ္ဆိဒိဝါ နိသဒပေါတကေဟိ အဋ္ဌိနိ ဘိဒိဝါကေသကလာပေ ဂဟေဝါ ဥက္ခိပန္တိ. မံသရာသိယေဝ ဟောတိ. အထ နံ ကေသေဟေဝ ပရိယောနဓိဝါ ဂဏှန္တိ ပလာလဝဋ္ဋိံ ဝိယ ကဝါ ပဠိဝေဌေန္တီ’တိ ဝိနယဋီကာ. 'पलालपीठिक' म्हणजे चतुर जल्लाद बाहेरील त्वचा न कापता, पाटा-वरवंट्याने आतील हाडे फोडून टाकतो आणि केसांचा झुपका धरून वर उचलतो. ते केवळ मांसाचा गोळा बनते. नंतर त्याला केसांनीच वेढून पेंढ्याच्या पेंढीसारखे गुंडाळतात, असे विनयटीकेत म्हटले आहे. ဣမဉ္စ သဋ္ဌိဝိဓံ ဒုက္ခံ သလ္လက္ခေဝါ ဘဝေသု နိဗ္ဗိဒိဝါ ဝိရဇ္ဇိဝါ ဘဝတဏှံ ပဟာဝါ ဒုက္ခလက္ခဏံ ဒုက္ခာနုပဿနာ ဉာဏေန ပဿိတဗ္ဗန္တိ. या साठ प्रकारच्या दुःखाचे नीट निरीक्षण करून, संसाराविषयी निर्वेद (वैराग्य) प्राप्त करून, विरक्त होऊन, भव-तण्हा (अस्तित्वाची तृष्णा) नष्ट करून, दुःखलक्षण हे दुःखानुपस्सना ज्ञानाने पाहिले पाहिजे. ဒိယဍ္ဎသိက္ခာပဒသတန္တိ ပဉ္စသတ္တတိ သေခိယေ အပနေဝါ သေသာနံ ဝသေန ဒိယဍ္ဎသိက္ခာပဒသတံ ဝေဒိတဗ္ဗန္တိ. दीडशे शिक्षापदे (दिअड्ढसिक्खापदसतं) म्हणजे पंच्याहत्तर सेखिय (नियम) वगळून उर्वरित नियमांच्या आधारे दीडशे शिक्षापदे समजावीत. သင်္ချာပရိစ္ဆေဒဿ သရူပဂဟဏံ သမတ္တံ. संख्यांच्या वर्गीकरणाचे (संख्यापरिच्छेदाचे) स्वरूपग्रहण समाप्त झाले. စတုရာဓိကသတေသု ဂဟေတဗ္ဗထေသု ပန စတုတ္တိံသ ဧကထာနီ, စတုတ္တိံသ ဒွေယထာနိ သောဠသ တျထာနိ, ပံစ စတုရထာနိ, တေရသ ပဉ္စထာနိ, ဒွေ သတ္တထာနီ’တိ. एकशे चार ग्रहण करण्यायोग्य अर्थांमध्ये, चौतीस एका अर्थाची (किंवा एका स्थानाची), चौतीस दोन अर्थांची, सोळा तीन अर्थांची, पाच चार अर्थांची, तेरा पाच अर्थांची आणि दोन सात अर्थांची आहेत. မိလိဒပဉှဋီကာ သမတ္တာ. मिलिन्दपञ्ह-टीका समाप्त झाली. ကုသလေန ဌိတာ ကုသလာကုသလော အဓိဂစ္ဆတိ သန္တိပဒံ,ကထိတံ မုနိနာ သုစိတံပရမထ သဘာဝဂတီသု ဂတံ; कुशलामध्ये (पुण्यामध्ये) प्रतिष्ठित असलेले कुशल (ज्ञानी) लोक शांत पदाला (निर्वाणाला) प्राप्त करतात, जे मुनींनी (बुद्धांनी) सांगितले आहे, उत्तम प्रकारे दर्शविले आहे आणि जे परमार्थ व स्वभावाच्या गतीमध्ये लीन आहे. နာနာအဓိပ္ပာယဝသာ ပဝတ္တေပါဌာနမထေ ကုသလော ဝိဒိဝါ,အာရောစမာနော ဝရယုတ္တမထံဂဏှေယျ သီဟော ဝိယ နာဂရာဇံ; विविध अभिप्रायांच्या वशने प्रवृत्त झालेल्या पाठांच्या अर्थाला कुशलतेने जाणून, श्रेष्ठ आणि योग्य अर्थ प्रकट करत, सिंहाने हत्तींच्या राजाला पकडावे त्याप्रमाणे तो ग्रहण करावा. ဟိဝါ အသာရံ သုဟိတဉ္စ ဂဏှေအာရောဂျကာမော အဟိတံ’ဝ ရောဂံ,ဝိညု ပဝေသေယျ စ ယုတ္တမထံဟံသာဓိပေါ ဝါ ဥဒကံ’ဝ ခီရာ’တိ; आरोग्याची इच्छा करणाऱ्याने अहितकारक रोगाचा त्याग करावा, त्याप्रमाणे निस्सार गोष्टींचा त्याग करून हितकारक गोष्टी ग्रहण कराव्यात. सुज्ञ माणसाने योग्य अर्थाचा स्वीकार करावा, ज्याप्रमाणे राजहंस दुधातून पाणी वेगळे करतो. ပရမဝိသုဒ္ဓသဒ္ဓါဗုဒ္ဓိဝီရိယပတိမဏ္ဍိတေန သီလာစာရဇ္ဇဝမဒ္ဒဝါဒိ-ဂုဏသမုဒယသမုဒိတေနသကသမယသမယန္တရဂဟဏဇ္ဈောဂါဟသမထေန- ပညာဝေယျတ္တိယသမန္နာဂတေန တိပိဋကပရိယတ္တိပ္ပဘေဒေ သာဋ္ဌ-ကထေ သထုသာသနေ အပ္ပဋိဟတဉာဏပ္ပဘာဝေန အာနနုဘာဝကရဏ- သမ္ပတ္တိဇနိတသုခဝိနိဂ္ဂတမဓုရောဠာရဝစနလာဝဉဉယုတ္တေန ယုတ္တ-မထဝါဒိနာ ဝါဒီဝရေန မဟာကဝိနာ သုဝိပုလဝိမလဗုဒ္ဓိနာ မဟာတိပိဋက- စူဠာဘယထေရော’တိ ဂရူဟိ ဂဟိတနာမဓေယျေနထေရေန ကတော မိလိဒဋီကာဂထော သမတ္တော. परम विशुद्ध श्रद्धा, बुद्धी आणि वीर्याने (उत्साहाने) सुशोभित; शील, आचार, आर्जव (सरळपणा), मार्दव (मृदुता) इत्यादी गुणांच्या समूहाने युक्त; स्वतःच्या आणि इतर सिद्धांतांचे ग्रहण व आकलन करण्यात समर्थ; प्रज्ञेच्या प्रगल्भतेने संपन्न; अट्ठकथांसह त्रिपिटक-परियत्तीच्या विभागांमध्ये आणि शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) शासनामध्ये अप्रतिहत (अखंड) ज्ञानप्रकाश असलेल्या; अनुपम प्रभावामुळे उत्पन्न झालेल्या सुखातून निघालेल्या मधुर व उदात्त वाणीच्या सौंदर्याने युक्त; योग्य अर्थ सांगणारे, श्रेष्ठ वक्ते, महाकवी, अत्यंत विशाल व विमल बुद्धी असलेले आणि गुरूंनी ज्यांना 'महात्रिपिटक चुळाभय थेर' असे नाव दिले होते, अशा थेरांनी रचलेला हा 'मिलिन्द-टीका' ग्रंथ समाप्त झाला. တာဝ တိဋ္ဌတု လောကသ္မိံ လောကနိထရဏေသိတံဒဿေန္တော ကုလပုတ္တာနံ နယပညာ ဝိသုဒ္ဓိယာ,ယာဝ ဗုဒ္ဓေါ’တိ နာမမ္ပိ သုဒ္ဓစိတ္တဿ တာဒိနောလောကမှိ လောကဇေဋ္ဌဿ ပဝတ္တတိ မဟေသိနော; जोपर्यंत या जगात शुद्ध चित्त असलेल्या, स्थिरबुद्धी, जगातील ज्येष्ठ आणि महर्षी अशा 'बुद्ध' हे नाव देखील अस्तित्वात आहे, तोपर्यंत हा ग्रंथ कुलपुत्रांना प्रज्ञा आणि विशुद्धीचा मार्ग दाखवत, जगाला संसारातून तारण्यासाठी या जगात टिकून राहो. ဘုတ္တာ သုဓာဒွါဒသ ဟန္တိ ပါပကေခုဓံ ပိပါသံ အတိဒရံတြိမံ (?)ကောဓုပနာဟဉ္စဝိဝါဒပေသုနိံသိတုဏှတဒိဉ္စ ရသဂ္ဂမာဝဟာ; सेवन केलेले अमृत ज्याप्रमाणे भूक, तहान, अत्यंत भीती, राग, द्वेष, वादविवाद, चहाडी, थंडी, उष्णता इत्यादी त्रासांचा नाश करते आणि उत्तम रस प्रदान करते; ဒေန္တဿ ပါကာဒိသကပ္ဖလာဝဟာဓမ္မော သုဝုတ္တော ပန ကောပဓာပကေ,တဒုတ္တရိံ ဟန္တိ အသေသပါပကေဒေန္တဿ သောတာဒိသကပ္ဖလာဝဟော; त्याचप्रमाणे, चांगल्या प्रकारे उपदेशिलेला धम्म हा संताप शमवणारा असून, तो दान देणाऱ्याला किंवा आचरण करणाऱ्याला सोतापन्न (स्रोतापन्न) इत्यादी फळे देणारा आहे आणि तो त्याहूनही अधिक सर्व पापांचा समूळ नाश करतो. ဣတိ ပဉ္စ တိယဍ္ဎသတေ သကိဒေ (?)မဓုရာဘိရမေကရသေနန ယုတော,မိလိဒါ သုဋိကာ သုဂုဏာ သုကတာနိဘယေန ဒွီပသေန (?) ယတာ သမတော; अशा प्रकारे, मधुर आणि अत्यंत रमणीय अशा एकाच रसाने युक्त, उत्तम गुणांनी संपन्न आणि चांगल्या प्रकारे रचलेली ही 'मिलिन्द-सुटीका' (मिलिन्द-टीका) संयमी आणि निर्भय अशा थेरांद्वारे समाप्त झाली आहे. လင်္ကဝှယေ ဒိပဝရေ သုသဏဏ္ဌိတာမဟာဝိဟာရေ စ ဇိနောရသာလယေ,ပရမ္ပရာ ထေရဂဏာ သုသဏ္ဌိတာပကာသကာ ယေ ဝရသထုသာသနေ; लंका नावाच्या श्रेष्ठ द्वीपावर आणि जिनांच्या (बुद्धांच्या) पुत्रांचे निवासस्थान असलेल्या महाविहारामध्ये सुप्रतिष्ठित असलेली, आणि श्रेष्ठ शास्त्यांच्या शासनाचा प्रकाश पसरवणारी थेरांची परंपरा चांगल्या प्रकारे स्थापित आहे. တေသံ အလင်္ကာရဘဝေန သာသနေတိပေဋကေ သုဒ္ဓဝိသုဒ္ဓဗုဒ္ဓိနာ,သဟာသယန္တေန နရေ သရာဇိကေပဟာသယန္တေန ဂဏေ ဂဏုတ္တမေ; त्यांच्या शासनाचे भूषण बनून, त्रिपिटकामध्ये अत्यंत शुद्ध बुद्धी असलेल्या, राजांसह सर्व लोकांना आनंदित करणाऱ्या आणि श्रेष्ठ संघामध्ये आनंद निर्माण करणाऱ्या (माझ्याद्वारे); ဋီကာ’တိ နာမေန မိလိဒဒီပိကာဝရထတော ဂထပ္ပကရေန သမ္ဘဝံ (?)သုဂထကာရေနဇိနင်္ကုရေန မေကတဉ္စ ယံ ယံ ဝရပုည သမ္ပဒံ (?) 'मिलिन्ददीपिका' नावाच्या या टीकेच्या रूपाने, श्रेष्ठ अर्थाच्या गाथांच्या माध्यमातून, बुद्धपुत्र (जिनांकुर) असलेल्या माझ्याद्वारे जे काही श्रेष्ठ पुण्य संचित केले गेले आहे; ကုသလေန တေနေဝဟိပထယန္တာဝရဗောဓိဉာဏံ တိဝိဓေသု ယေ ယံ,နိဘယေန တေသံ တုရသိဇ္ဈတံ တံ (?)ပရမဉ္စ သဗ္ဗညုတံ ပါပုဏေယျံ; त्या पुण्याच्या प्रभावाने, जे लोक तीन प्रकारच्या बोधींपैकी ज्या कोणत्या श्रेष्ठ बोधिज्ञानाची आकांक्षा धरतात, त्यांची ती आकांक्षा निर्भयपणे आणि वेगाने पूर्ण होवो आणि मलाही परम सर्वज्ञता प्राप्त होवो. ဣတော စုတော’ဟံသုဟိတေန ကမ္မုနာဘဝါမိ ဒေဝေ တုသိတဝှယေ ပုရေ,စိရံ စရန္တော ကုသလံ ပုနပ္ပုနံတထေဝ မေတ္တေယျဝရေ နိရန္တရံ; येथून च्युत (मृत) झाल्यावर, या कल्याणकारी कर्मामुळे मी तुषित नावाच्या देवलोकात उत्पन्न व्हावे, आणि तेथे दीर्घकाळ पुन्हा पुन्हा कुशल कर्मे करत, श्रेष्ठ मैत्रेय बुद्धांच्या सानिध्यात निरंतर राहावे. တတော နရန္တော’ဝ ဇိနင်္ကုရော ဝရောယထာ ဝီရဗုဒ္ဓေါ’တိ ဘဝေကနာယကော,တတော တရန္တော ဝရပုညကာရကောဘဝါမိ နရာနရပူဇိတော သဒါ; त्यानंतर तेथून मनुष्यलोकात येऊन, एक श्रेष्ठ बुद्धपुत्र (बोधिसत्व) म्हणून, वीर बुद्धांप्रमाणे संसाराचा एकमेव नायक व्हावे, आणि संसारसागर पार करत, श्रेष्ठ पुण्यकर्मे करत, मनुष्य आणि देवांकडून सदैव पूजनीय व्हावे. သုသုရော ပဝရော သုမနော ဝရဒေါပိဋကေန ဝသေ သဇနေ ကထိတေ,ပဝရထ ပကာသကဉာဏဝရောဝရဓမ္မသုခေသနကော သီလဝါ (?) अत्यंत शूर, श्रेष्ठ, प्रसन्न मनाचे, वर देणारे, त्रिपिटकामध्ये पारंगत, सज्जनांना उपदेश करणारे, श्रेष्ठ ज्ञानाचा प्रकाश पसरवणारे, श्रेष्ठ धम्मसुखाचा शोध घेणारे आणि शीलवान व्हावे. သစေ တိဒိဝေ တုသိတေ မနောရမေဘဝါမိ ဇာတော မနောရထပ္ပတိ,ဝရပ္ပဒေသေ ပတိရူပကေ သဒါဓီရာ ပဇာယန္တိ သုပုည ကမ္မိနော; जर मी त्या मनोहारी तुषित स्वर्गात उत्पन्न झालो, तर माझ्या सर्व मनोकामना पूर्ण होवोत. पुण्यवान आणि धैर्यवान लोक नेहमी योग्य व श्रेष्ठ प्रदेशातच जन्म घेतात. အဟမ္ပိ တထေဝ ပဒေသမုတ္တမေဘဝါမိ နာရီဟိ နရေဟိ ပူဇိတော,ဓနေန ဉာဏေန ယသေန ဒီပိတောဝိသောဓယန္တော ပုန သထုသာသနနံ; मी देखील त्याचप्रमाणे उत्तम प्रदेशात जन्म घेऊन, स्त्री-पुरुषांकडून पूजनीय व्हावे; धन, ज्ञान आणि यशाने प्रकाशमान होऊन शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) शासनाला पुन्हा विशुद्ध करावे. အနေန ပုညေန ဘဝါဝသာနကေသဗ္ဗညုတံယာဝ စ ပါပူဏေဝရံ,နိရန္တရံ လောကဟိတဿ ကာရကောဘဝေ ဘဝေယျံ သုစိတော စ ပါရမီ; या पुण्याच्या प्रभावाने, संसाराच्या शेवटी जोपर्यंत मी श्रेष्ठ सर्वज्ञता प्राप्त करत नाही, तोपर्यंत प्रत्येक जन्मात निरंतर जगाचे कल्याण करणारा आणि पारमिता पूर्ण करणारा व्हावे. ပုညေနနေန ဝိပုလေန ဘဝါဘဝေသုပုညာဘိဝူဍ္ဎ ပရိသုဒ္ဓဂုဏာဓိဝါသော,ဟုဝါ နရာဓိကတရော (ဝတ) သဗ္ဗသေဋ္ဌော; ဗုဒ္ဓေါ ဘဝေယျမဟမုတ္တမနာထနာထော; या विपुल पुण्याच्या प्रभावाने, विविध जन्मांमध्ये पुण्याची वृद्धी करणारा, अत्यंत शुद्ध गुणांचे निवासस्थान असलेला, मानवांमध्ये श्रेष्ठ आणि सर्वांत उत्तम असा मी 'बुद्ध' व्हावे, जो उत्तम नाथांचा (रक्षकांचा) नाथ असेल. ပုညေန စိဏ္ဏေန ပိယေ မယာ’ဒရံ (?)သတ္တာ အဝေရာ သုခိတာ ဘဝန္တု တေ,ဒေဝါ နရိဒါ သကလံ ဣမံ မဟိံရက္ခန္တု ဓမ္မေန သမေန ဓမ္မိနော’တိ; मी आदराने आणि प्रेमाने संचित केलेल्या या पुण्याच्या प्रभावाने सर्व प्राणी वैरमुक्त आणि सुखी होवोत! देव आणि राजे या संपूर्ण पृथ्वीचे धम्मपूर्वक आणि समतेने रक्षण करोत आणि ते स्वतः धम्माचे आचरण करणारे होवोत! | |||
| မြန်မာ | |||
| ပါဠိတော် | အဋ္ဌကထာ | ဋီကာ | အခြား |
| 1101 ပါရာဇိက ပါဠိ 1102 ပါစိတ္တိယ ပါဠိ 1103 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဝိနယ) 1104 စူဠဝဂ္ဂ ပါဠိ 1105 ပရိဝါရ ပါဠိ | 1201 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၁ 1202 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၂ 1203 ပါစိတ္တိယ အဋ္ဌကထာ 1204 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဝိနယ) 1205 စူဠဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 1206 ပရိဝါရ အဋ္ဌကထာ | 1301 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၁ 1302 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၂ 1303 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၃ | 1401 ဒွေမာတိကာပါဠိ 1402 ဝိနယသင်္ဂဟ အဋ္ဌကထာ 1403 ဝဇိရဗုဒ္ဓိ ဋီကာ 1404 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၁ 1405 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၂ 1406 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၁ 1407 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၂ 1408 ကင်္ခာဝိတရဏီပုရာဏ ဋီကာ 1409 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ-ဥတ္တရဝိနိစ္ဆယ 1410 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၁ 1411 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၂ 1412 ပါစိတျာဒိယောဇနာပါဠိ 1413 ခုဒ္ဒသိက္ခာ-မူလသိက္ခာ 8401 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၁ 8402 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၂ 8403 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၁ 8404 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၂ 8405 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ နိဒါနကထာ 8406 ဒီဃနိကာယ (ပု-ဝိ) 8407 မဇ္ဈိမနိကာယ (ပု-ဝိ) 8408 သံယုတ္တနိကာယ (ပု-ဝိ) 8409 အင်္ဂုတ္တရနိကာယ (ပု-ဝိ) 8410 ဝိနယပိဋက (ပု-ဝိ) 8411 အဘိဓမ္မပိဋက (ပု-ဝိ) 8412 အဋ္ဌကထာ (ပု-ဝိ) 8413 နိရုတ္တိဒီပနီ 8414 ပရမတ္ထဒီပနီ သင်္ဂဟမဟာဋီကာပါဌ 8415 အနုဒီပနီပါဌ 8416 ပဋ္ဌာနုဒ္ဒေသ ဒီပနီပါဌ 8417 နမက္ကာရဋီကာ 8418 မဟာပဏာမပါဌ 8419 လက္ခဏာတော ဗုဒ္ဓထောမနာဂါထာ 8420 သုတဝန္ဒနာ 8421 ကမလာဉ္ဇလိ 8422 ဇိနာလင်္ကာရ 8423 ပဇ္ဇမဓု 8424 ဗုဒ္ဓဂုဏဂါထာဝလီ 8425 စူဠဂန္ထဝံသ 8427 သာသနဝံသ 8426 မဟာဝံသ 8429 မောဂ္ဂလ္လာနဗျာကရဏံ 8428 ကစ္စာယနဗျာကရဏံ 8430 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) 8431 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ဓါတုမာလာ) 8432 ပဒရူပသိဒ္ဓိ 8433 မောဂလ္လာနပဉ္စိကာ 8434 ပယောဂသိဒ္ဓိပါဌ 8435 ဝုတ္တောဒယပါဌ 8436 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာပါဌ 8437 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာဋီကာ 8438 သုဗောဓါလင်္ကာရပါဌ 8439 သုဗောဓါလင်္ကာရဋီကာ 8440 ဗာလာဝတာရ ဂဏ္ဌိပဒတ္ထဝိနိစ္ဆယသာရ 8446 ကဝိဒပ္ပဏနီတိ 8447 နီတိမဉ္ဇရီ 8445 ဓမ္မနီတိ 8444 မဟာရဟနီတိ 8441 လောကနီတိ 8442 သုတ္တန္တနီတိ 8443 သူရဿတိနီတိ 8450 စာဏကျနီတိ 8448 နရဒက္ခဒီပနီ 8449 စတုရာရက္ခဒီပနီ 8451 ရသဝါဟိနီ 8452 သီမဝိသောဓနီပါဌ 8453 ဝေဿန္တရဂီတိ 8454 မောဂ္ဂလ္လာန ဝုတ္တိဝိဝရဏပဉ္စိကာ 8455 ထူပဝံသ 8456 ဒါဌာဝံသ 8457 ဓါတုပါဌဝိလာသိနိယာ 8458 ဓါတုဝံသ 8459 ဟတ္ထဝနဂလ္လဝိဟာရဝံသ 8460 ဇိနစရိတယ 8461 ဇိနဝံသဒီပံ 8462 တေလကဋာဟဂါထာ 8463 မိလိဒဋီကာ 8464 ပဒမဉ္ဇရီ 8465 ပဒသာဓနံ 8466 သဒ္ဒဗိန္ဒုပကရဏံ 8467 ကစ္စာယနဓါတုမဉ္ဇုသာ 8468 သာမန္တကူဋဝဏ္ဏနာ |
| 2101 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 2102 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဒီဃ) 2103 ပါထိကဝဂ္ဂ ပါဠိ | 2201 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 2202 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဒီဃ) 2203 ပါထိကဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ | 2301 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 2302 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (ဒီဃ) 2303 ပါထိကဝဂ္ဂ ဋီကာ 2304 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၁ 2305 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၂ | |
| 3101 မူလပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3102 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3103 ဥပရိပဏ္ဏာသ ပါဠိ | 3201 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၁ 3202 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၂ 3203 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ 3204 ဥပရိပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ | 3301 မူလပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3302 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3303 ဥပရိပဏ္ဏာသ ဋီကာ | |
| 4101 သဂါထာဝဂ္ဂ ပါဠိ 4102 နိဒါနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4103 ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 4104 သဠာယတနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4105 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (သံယုတ္တ) | 4201 သဂါထာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4202 နိဒါနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4203 ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4204 သဠာယတနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4205 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (သံယုတ္တ) | 4301 သဂါထာဝဂ္ဂ ဋီကာ 4302 နိဒါနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4303 ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 4304 သဠာယတနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4305 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (သံယုတ္တ) | |
| 5101 ဧကကနိပါတ ပါဠိ 5102 ဒုကနိပါတ ပါဠိ 5103 တိကနိပါတ ပါဠိ 5104 စတုက္ကနိပါတ ပါဠိ 5105 ပဉ္စကနိပါတ ပါဠိ 5106 ဆက္ကနိပါတ ပါဠိ 5107 သတ္တကနိပါတ ပါဠိ 5108 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ပါဠိ 5109 နဝကနိပါတ ပါဠိ 5110 ဒသကနိပါတ ပါဠိ 5111 ဧကာဒသကနိပါတ ပါဠိ | 5201 ဧကကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5202 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5203 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5204 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ အဋ္ဌကထာ | 5301 ဧကကနိပါတ ဋီကာ 5302 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ ဋီကာ 5303 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ ဋီကာ 5304 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ဋီကာ | |
| 6101 ခုဒ္ဒကပါဌ ပါဠိ 6102 ဓမ္မပဒ ပါဠိ 6103 ဥဒါန ပါဠိ 6104 ဣတိဝုတ္တက ပါဠိ 6105 သုတ္တနိပါတ ပါဠိ 6106 ဝိမာနဝတ္ထု ပါဠိ 6107 ပေတဝတ္ထု ပါဠိ 6108 ထေရဂါထာ ပါဠိ 6109 ထေရီဂါထာ ပါဠိ 6110 အပဒါန ပါဠိ-၁ 6111 အပဒါန ပါဠိ-၂ 6112 ဗုဒ္ဓဝံသ ပါဠိ 6113 စရိယာပိဋက ပါဠိ 6114 ဇာတက ပါဠိ-၁ 6115 ဇာတက ပါဠိ-၂ 6116 မဟာနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6117 စူဠနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6118 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ ပါဠိ 6119 နေတ္တိပ္ပကရဏ ပါဠိ 6120 မိလိန္ဒပဉှ ပါဠိ 6121 ပေဋကောပဒေသ ပါဠိ | 6201 ခုဒ္ဒကပါဌ အဋ္ဌကထာ 6202 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၁ 6203 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၂ 6204 ဥဒါန အဋ္ဌကထာ 6205 ဣတိဝုတ္တက အဋ္ဌကထာ 6206 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၁ 6207 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၂ 6208 ဝိမာနဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6209 ပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6210 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၁ 6211 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၂ 6212 ထေရီဂါထာ အဋ္ဌကထာ 6213 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၁ 6214 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၂ 6215 ဗုဒ္ဓဝံသ အဋ္ဌကထာ 6216 စရိယာပိဋက အဋ္ဌကထာ 6217 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၁ 6218 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၂ 6219 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၃ 6220 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၄ 6221 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၅ 6222 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၆ 6223 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၇ 6224 မဟာနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6225 စူဠနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6226 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၁ 6227 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၂ 6228 နေတ္တိပ္ပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 6301 နေတ္တိပ္ပကရဏ ဋီကာ 6302 နေတ္တိဝိဘာဝိနီ | |
| 7101 ဓမ္မသင်္ဂဏီ ပါဠိ 7102 ဝိဘင်္ဂ ပါဠိ 7103 ဓါတုကထာ ပါဠိ 7104 ပုဂ္ဂလပညတ္တိ ပါဠိ 7105 ကထာဝတ္ထု ပါဠိ 7106 ယမက ပါဠိ-၁ 7107 ယမက ပါဠိ-၂ 7108 ယမက ပါဠိ-၃ 7109 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၁ 7110 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၂ 7111 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၃ 7112 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၄ 7113 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၅ | 7201 ဓမ္မသင်္ဂဏိ အဋ္ဌကထာ 7202 သမ္မောဟဝိနောဒနီ အဋ္ဌကထာ 7203 ပဉ္စပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 7301 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-မူလဋီကာ 7302 ဝိဘင်္ဂ-မူလဋီကာ 7303 ပဉ္စပကရဏ-မူလဋီကာ 7304 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-အနုဋီကာ 7305 ပဉ္စပကရဏ-အနုဋီကာ 7306 အဘိဓမ္မာဝတာရော-နာမရူပပရိစ္ဆေဒေါ 7307 အဘိဓမ္မတ္ထသင်္ဂဟော 7308 အဘိဓမ္မာဝတာရ-ပုရာဏဋီကာ 7309 အဘိဓမ္မမာတိကာပါဠိ | |
| português | |||
| Páli | Aṭṭhakathā | Ṭīkā | Outro |
| 1101 Ofensas Graves (Pārājika) 1102 Ofensas Leves (Pācittiya) 1103 Grande Seção do Vīnaya (Mahāvagga) 1104 Pequena Seção do Vīnaya (Cūḷavagga) 1105 Apêndice do Vīnaya (Parivāra) | 1201 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 1 1202 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 2 1203 Comentário das Ofensas Leves 1204 Comentário da Grande Seção do Vīnaya 1205 Comentário da Pequena Seção do Vīnaya 1206 Comentário do Apêndice do Vīnaya | 1301 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 1 1302 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 2 1303 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 3 | 1401 Texto das Duas Matrizes 1402 Comentário do Compêndio do Vīnaya 1403 Subcomentário de Vajirabuddhi 1404 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 1 1405 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 2 1406 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 1 1407 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 2 1408 Antigo Subcomentário que Supera Dúvidas 1409 Decisão sobre o Vīnaya e Decisão Superior 1410 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 1 1411 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 2 1412 Texto da Aplicação das Regras 1413 Pequeno Treinamento e Treinamento Fundamental 8401 Caminho da Purificação - Vol. 1 8402 Caminho da Purificação - Vol. 2 8403 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 1 8404 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 2 8405 História da Origem do Caminho da Purificação 8406 Coleção dos Longos Discursos (índice Pāli-Vietnamita) 8407 Coleção dos Discursos Médios (índice Pāli-Vietnamita) 8408 Coleção dos Discursos Agrupados (índice Pāli-Vietnamita) 8409 Coleção dos Discursos Numerados (índice Pāli-Vietnamita) 8410 Cesto da Disciplina (índice Pāli-Vietnamita) 8411 Cesto do Abhidhamma (índice Pāli-Vietnamita) 8412 Comentários (índice Pāli-Vietnamita) 8413 Elucidação da Etimologia 8414 Grande Subcomentário do Compêndio que Elucida o Sentido Supremo 8415 Texto do Subcomentário Elucidativo 8416 Texto Elucidativo sobre a Exposição das Condições 8417 Subcomentário da Saudação 8418 Grande Texto de Saudação 8419 Versos de Louvor a Buda pelos Sinais 8420 Saudação com Recitação 8421 Oferenda de Lótus 8422 Ornamento dos Vencedores 8423 Mel dos Versos 8424 Coleção de Versos sobre as Qualidades de Buda 8425 Pequena Crônica dos Livros 8427 Crônica do Ensinamento 8426 Grande Crônica 8429 Gramática de Moggallāna 8428 Gramática de Kaccāyana 8430 Tratado sobre a Gramática - Série de Palavras 8431 Tratado sobre a Gramática - Série de Raízes 8432 Realização das Formas das Palavras 8433 Comentário de Moggallāna 8434 Texto sobre a Realização da Aplicação 8435 Texto sobre a Origem dos Versos 8436 Texto do Dicionário Iluminado 8437 Subcomentário do Dicionário Iluminado 8438 Texto sobre o Ornamento da Boa Compreensão 8439 Subcomentário do Ornamento da Boa Compreensão 8440 Essência da Decisão sobre os Termos do Glossário de Bālāvatāra 8446 Ética do Poeta 8447 Coleção de Ética 8445 Ética do Dhamma 8444 Grande Ética Secreta 8441 Ética do Mundo 8442 Ética dos Suttas 8443 Ética do Herói 8450 Ética de Cāṇakya 8448 Elucidação sobre os Perigos para os Homens 8449 Elucidação sobre as Quatro Proteções 8451 O Fluxo do Sabor - Histórias Edificantes 8452 Texto sobre a Purificação dos Limites 8453 Canto de Vessantara 8454 Explicação do Comentário de Moggallāna 8455 Crônica das Estupas 8456 Crônica da Relíquia do Dente 8457 O Esplendor da Leitura dos Elementos 8458 Crônica das Relíquias 8459 Crônica do Mosteiro de Hatthavanagalla 8460 História do Vencedor 8461 Ilha da Linhagem dos Vencedores 8462 Versos da Panela de Óleo 8463 Subcomentário de Milinda 8464 Cacho de Flores de Palavras 8465 Realização das Palavras 8466 Tratado sobre os Pontos da Gramática 8467 Coleção de Raízes de Kaccāyana 8468 Descrição do Pico de Sāmantakūṭa |
| 2101 Seção da Moralidade - Dīgha 2102 Grande Seção - Dīgha 2103 Seção de Pāthika - Dīgha | 2201 Comentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2202 Comentário da Grande Seção - Dīgha 2203 Comentário da Seção de Pāthika - Dīgha | 2301 Subcomentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2302 Subcomentário da Grande Seção - Dīgha 2303 Subcomentário da Seção de Pāthika - Dīgha 2304 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 1 2305 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 2 | |
| 3101 Cinquenta Discursos Fundamentais - Majjhima 3102 Cinquenta Discursos Médios - Majjhima 3103 Cinquenta Discursos Superiores - Majjhima | 3201 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 1 3202 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 2 3203 Comentário dos Cinquenta Médios 3204 Comentário dos Cinquenta Superiores | 3301 Subcomentário dos Cinquenta Fundamentais 3302 Subcomentário dos Cinquenta Médios 3303 Subcomentário dos Cinquenta Superiores | |
| 4101 Seção com Versos - Saṃyutta 4102 Seção das Causas - Saṃyutta 4103 Seção dos Agregados - Saṃyutta 4104 Seção das Seis Bases dos Sentidos - Saṃyutta 4105 Grande Seção - Saṃyutta | 4201 Comentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4202 Comentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4203 Comentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4204 Comentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4205 Comentário da Grande Seção - Saṃyutta | 4301 Subcomentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4302 Subcomentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4303 Subcomentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4304 Subcomentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4305 Subcomentário da Grande Seção - Saṃyutta | |
| 5101 Grupos de Um - Aṅguttara 5102 Grupos de Dois - Aṅguttara 5103 Grupos de Três - Aṅguttara 5104 Grupos de Quatro - Aṅguttara 5105 Grupos de Cinco - Aṅguttara 5106 Grupos de Seis - Aṅguttara 5107 Grupos de Sete - Aṅguttara 5108 Grupos de Oito, etc. - Aṅguttara 5109 Grupos de Nove - Aṅguttara 5110 Grupos de Dez - Aṅguttara 5111 Grupos de Onze - Aṅguttara | 5201 Comentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5202 Comentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5203 Comentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5204 Comentário dos Grupos de Oito, etc. | 5301 Subcomentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5302 Subcomentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5303 Subcomentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5304 Subcomentário dos Grupos de Oito, etc. | |
| 6101 Pequena Leitura (Khuddakapāṭha) 6102 Versos do Dhamma (Dhammapada) 6103 Exclamações Inspiradas (Udāna) 6104 Assim Foi Dito (Itivuttaka) 6105 Coleção de Discursos (Suttanipāta) 6106 Histórias das Mansões Celestiais 6107 Histórias dos Fantasmas 6108 Versos dos Monges Anciãos 6109 Versos das Monjas Anciãs 6110 Histórias Passadas - Vol. 1 6111 Histórias Passadas - Vol. 2 6112 História dos Budas (Buddhavaṃsa) 6113 Cesto das Condutas (Cariyāpiṭaka) 6114 Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6115 Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6116 Grande Exposição (Mahāniddesa) 6117 Pequena Exposição (Cūḷaniddesa) 6118 Caminho da Discriminação Analítica 6119 O Guia (Nettippakaraṇa) 6120 As Perguntas de Milinda 6121 Instrução do Cesto (Peṭakopadesa) | 6201 Comentário da Pequena Leitura 6202 Comentário do Dhammapada - Vol. 1 6203 Comentário do Dhammapada - Vol. 2 6204 Comentário do Udāna 6205 Comentário do Itivuttaka 6206 Comentário do Suttanipāta - Vol. 1 6207 Comentário do Suttanipāta - Vol. 2 6208 Comentário das Histórias das Mansões 6209 Comentário das Histórias dos Fantasmas 6210 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 1 6211 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 2 6212 Comentário dos Versos das Monjas 6213 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 1 6214 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 2 6215 Comentário da História dos Budas 6216 Comentário do Cesto das Condutas 6217 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6218 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6219 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 3 6220 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 4 6221 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 5 6222 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 6 6223 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 7 6224 Comentário da Grande Exposição 6225 Comentário da Pequena Exposição 6226 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 1 6227 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 2 6228 Comentário do Guia | 6301 Subcomentário do Guia 6302 Elucidação do Guia | |
| 7101 Enumeração dos Fenômenos (Dhammasaṅgaṇī) 7102 Análise (Vibhaṅga) 7103 Discurso sobre os Elementos (Dhātukathā) 7104 Designação das Pessoas (Puggalapaññatti) 7105 Pontos da Discussão (Kathāvatthu) 7106 O Livro dos Pares - Vol. 1 7107 O Livro dos Pares - Vol. 2 7108 O Livro dos Pares - Vol. 3 7109 Condições de Originação - Vol. 1 7110 Condições de Originação - Vol. 2 7111 Condições de Originação - Vol. 3 7112 Condições de Originação - Vol. 4 7113 Condições de Originação - Vol. 5 | 7201 Comentário da Enumeração dos Fenômenos 7202 Comentário que Dissipa a Confusão 7203 Comentário dos Cinco Tratados | 7301 Subcomentário Principal da Enumeração dos Fenômenos 7302 Subcomentário Principal da Análise 7303 Subcomentário Principal dos Cinco Tratados 7304 Subcomentário Secundário da Enumeração dos Fenômenos 7305 Subcomentário Secundário dos Cinco Tratados 7306 Introdução ao Abhidhamma - Análise de Nome e Forma 7307 Compêndio do Abhidhamma 7308 Antigo Subcomentário da Introdução ao Abhidhamma 7309 Matriz do Abhidhamma | |
| русский | |||
| Палийский канон | Комментарии | Субкомментарии | Другое |
| 1101 Параджика-пали 1102 Пачиттия-пали 1103 Махавагга-пали (Виная) 1104 Чулавагга-пали 1105 Паривара-пали | 1201 Параджиканда-аттхакатха-1 1202 Параджиканда-аттхакатха-2 1203 Пачиттия-аттхакатха 1204 Махавагга-аттхакатха (Виная) 1205 Чулавагга-аттхакатха 1206 Паривара-аттхакатха | 1301 Сараттхадипани-тика-1 1302 Сараттхадипани-тика-2 1303 Сараттхадипани-тика-3 | 1401 Двематика-пали 1402 Винаясангаха-аттхакатха 1403 Ваджирабуддхи-тика 1404 Вимативинодани-тика-1 1405 Вимативинодани-тика-2 1406 Винаяланкара-тика-1 1407 Винаяланкара-тика-2 1408 Канкхавитаранипурана-тика 1409 Винаявиниччая-уттаравиниччая 1410 Винаявиниччая-тика-1 1411 Винаявиниччая-тика-2 1412 Пачиттиядийоджана-пали 1413 Кхуддасиккха-муласиккха 8401 Висуддхимагга-1 8402 Висуддхимагга-2 8403 Висуддхимагга-махатика-1 8404 Висуддхимагга-махатика-2 8405 Висуддхимагга-ниданакатха 8406 Дигханикая (пу-ви) 8407 Мадджхиманикая (пу-ви) 8408 Самъюттаникая (пу-ви) 8409 Ангуттараникая (пу-ви) 8410 Винаяпитака (пу-ви) 8411 Абхидхаммапитака (пу-ви) 8412 Аттхакатха (пу-ви) 8413 Нируттидипани 8414 Параматтхадипани Сангахамахатикапатха 8415 Анудипанипатха 8416 Паттхануддеса дипанипатха 8417 Намаккаратика 8418 Махапанамапатха 8419 Лаккханато буддхатхоманагатха 8420 Сутавандана 8421 Камаланджали 8422 Джиналанкара 8423 Паджамадху 8424 Буддхагунагатхавали 8425 Чулагантхавамса 8427 Сасанавамса 8426 Махавамса 8429 Моггалланабьякарана 8428 Каччаянабьякарана 8430 Садданитиппакарана (падамала) 8431 Садданитиппакарана (дхатумала) 8432 Падарупасиддхи 8433 Могалланапанчика 8434 Пайогасиддхипатха 8435 Вуттодаяпатха 8436 Абхидханаппадипикапатха 8437 Абхидханаппадипикатика 8438 Субодхаланкарапатха 8439 Субодхаланкаратика 8440 Балаватара гантхипадаттхавиниччаясара 8446 Кавидаппананити 8447 Нитиманджари 8445 Дхамманити 8444 Махараханити 8441 Локанити 8442 Суттантанити 8443 Сурассатинити 8450 Чанакьянити 8448 Нарадаккхадипани 8449 Чатурараккхадипани 8451 Расавахини 8452 Симависодханипатха 8453 Вессантарагити 8454 Моггаллана вуттививаранапанчика 8455 Тхупавамса 8456 Датхавамса 8457 Дхатупатхавиласиния 8458 Дхатувамса 8459 Хаттхаванагаллавихаравамса 8460 Джиначаритая 8461 Джинавамсадипа 8462 Телакатахагатха 8463 Милидатика 8464 Падаманджари 8465 Падасадхана 8466 Саддабиндупакарана 8467 Каччаянадхатуманджуса 8468 Самантакутаваннана |
| 2101 Силаккхандхавагга-пали 2102 Махавагга-пали (Дигха) 2103 Патхикавагга-пали | 2201 Силаккхандхавагга-аттхакатха 2202 Махавагга-аттхакатха (Дигха) 2203 Патхикавагга-аттхакатха | 2301 Силаккхандхавагга-тика 2302 Махавагга-тика (Дигха) 2303 Патхикавагга-тика 2304 Силаккхандхавагга-абхинаватика-1 2305 Силаккхандхавагга-абхинаватика-2 | |
| 3101 Мулапаннаса-пали 3102 Мадджхимапаннаса-пали 3103 Упарипаннаса-пали | 3201 Мулапаннаса-аттхакатха-1 3202 Мулапаннаса-аттхакатха-2 3203 Мадджхимапаннаса-аттхакатха 3204 Упарипаннаса-аттхакатха | 3301 Мулапаннаса-тика 3302 Мадджхимапаннаса-тика 3303 Упарипаннаса-тика | |
| 4101 Сагатхавагга-пали 4102 Ниданавагга-пали 4103 Кхандхавагга-пали 4104 Салаятанавагга-пали 4105 Махавагга-пали (Самъютта) | 4201 Сагатхавагга-аттхакатха 4202 Ниданавагга-аттхакатха 4203 Кхандхавагга-аттхакатха 4204 Салаятанавагга-аттхакатха 4205 Махавагга-аттхакатха (Самъютта) | 4301 Сагатхавагга-тика 4302 Ниданавагга-тика 4303 Кхандхавагга-тика 4304 Салаятанавагга-тика 4305 Махавагга-тика (Самъютта) | |
| 5101 Экаканипата-пали 5102 Дуканипата-пали 5103 Тиканипата-пали 5104 Чатукканипата-пали 5105 Панчаканипата-пали 5106 Чхакканипата-пали 5107 Саттаканипата-пали 5108 Аттхакадинипата-пали 5109 Наваканипата-пали 5110 Дасаканипата-пали 5111 Экадасаканипата-пали | 5201 Экаканипата-аттхакатха 5202 Дука-тика-чатукканипата-аттхакатха 5203 Панчака-чхакка-саттаканипата-аттхакатха 5204 Аттхакадинипата-аттхакатха | 5301 Экаканипата-тика 5302 Дука-тика-чатукканипата-тика 5303 Панчака-чхакка-саттаканипата-тика 5304 Аттхакадинипата-тика | |
| 6101 Кхуддакапатха-пали 6102 Дхаммапада-пали 6103 Удана-пали 6104 Итивуттака-пали 6105 Суттанипата-пали 6106 Виманаваттху-пали 6107 Петаваттху-пали 6108 Тхерагатха-пали 6109 Тхеригатха-пали 6110 Ападана-пали-1 6111 Ападана-пали-2 6112 Буддхавамса-пали 6113 Чарияпитака-пали 6114 Джатака-пали-1 6115 Джатака-пали-2 6116 Маханиддеса-пали 6117 Чуланиддеса-пали 6118 Патисамбхидамагга-пали 6119 Неттиппакарана-пали 6120 Милиндапаньха-пали 6121 Петакопадеса-пали | 6201 Кхуддакапатха-аттхакатха 6202 Дхаммапада-аттхакатха-1 6203 Дхаммапада-аттхакатха-2 6204 Удана-аттхакатха 6205 Итивуттака-аттхакатха 6206 Суттанипата-аттхакатха-1 6207 Суттанипата-аттхакатха-2 6208 Виманаваттху-аттхакатха 6209 Петаваттху-аттхакатха 6210 Тхерагатха-аттхакатха-1 6211 Тхерагатха-аттхакатха-2 6212 Тхеригатха-аттхакатха 6213 Ападана-аттхакатха-1 6214 Ападана-аттхакатха-2 6215 Буддхавамса-аттхакатха 6216 Чарияпитака-аттхакатха 6217 Джатака-аттхакатха-1 6218 Джатака-аттхакатха-2 6219 Джатака-аттхакатха-3 6220 Джатака-аттхакатха-4 6221 Джатака-аттхакатха-5 6222 Джатака-аттхакатха-6 6223 Джатака-аттхакатха-7 6224 Маханиддеса-аттхакатха 6225 Чуланиддеса-аттхакатха 6226 Патисамбхидамагга-аттхакатха-1 6227 Патисамбхидамагга-аттхакатха-2 6228 Неттиппакарана-аттхакатха | 6301 Неттиппакарана-тика 6302 Неттивибхавини | |
| 7101 Дхаммасангани-пали 7102 Вибханга-пали 7103 Дхатукатха-пали 7104 Пуггалапаннятти-пали 7105 Катхаваттху-пали 7106 Ямака-пали-1 7107 Ямака-пали-2 7108 Ямака-пали-3 7109 Паттхана-пали-1 7110 Паттхана-пали-2 7111 Паттхана-пали-3 7112 Паттхана-пали-4 7113 Паттхана-пали-5 | 7201 Дхаммасангани-аттхакатха 7202 Саммохивинодани-аттхакатха 7203 Панчапакарана-аттхакатха | 7301 Дхаммасангани-мулатика 7302 Вибханга-мулатика 7303 Панчапакарана-мулатика 7304 Дхаммасангани-анутика 7305 Панчапакарана-анутика 7306 Абхидхаммаватаро-намарупапариччхедо 7307 Абхидхамматтхасангахо 7308 Абхидхаммаватара-пуранатика 7309 Абхидхаммаматика-пали | |
| සිංහල | |||
| පාලි කැනනය | විවරණ | අටුවා | වෙනත් |
| 1101 පාරාජික පාළි 1102 පාචිත්තිය පාළි 1103 මහාවග්ග පාළි (විනය) 1104 චූළවග්ග පාළි 1105 පරිවාර පාළි | 1201 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-1 1202 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-2 1203 පාචිත්තිය අට්ඨකථා 1204 මහාවග්ග අට්ඨකථා (විනය) 1205 චූළවග්ග අට්ඨකථා 1206 පරිවාර අට්ඨකථා | 1301 සාරත්ථදීපනී ටීකා-1 1302 සාරත්ථදීපනී ටීකා-2 1303 සාරත්ථදීපනී ටීකා-3 | 1401 ද්වෙමාතිකාපාළි 1402 විනයසංගහ අට්ඨකථා 1403 වජිරබුද්ධි ටීකා 1404 විමතිවිනෝදනී ටීකා-1 1405 විමතිවිනෝදනී ටීකා-2 1406 විනයාලංකාර ටීකා-1 1407 විනයාලංකාර ටීකා-2 1408 කඞ්ඛාවිතරණීපුරාණ ටීකා 1409 විනයවිනිච්ඡය-උත්තරවිනිච්ඡය 1410 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-1 1411 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-2 1412 පාචිත්යාදියෝජනාපාළි 1413 ඛුද්දසික්ඛා-මූලසික්ඛා 8401 විසුද්ධිමග්ග-1 8402 විසුද්ධිමග්ග-2 8403 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-1 8404 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-2 8405 විසුද්ධිමග්ග නිදානකථා 8406 දීඝනිකාය (පු-වි) 8407 මජ්ඣිමනිකාය (පු-වි) 8408 සංයුත්තනිකාය (පු-වි) 8409 අඞ්ගුත්තරනිකාය (පු-වි) 8410 විනයපිටක (පු-වි) 8411 අභිධම්මපිටක (පු-වි) 8412 අට්ඨකථා (පු-වි) 8413 නිරුත්තිදීපනී 8414 පරමත්ථදීපනී සඞ්ගහමහාටීකාපාඨ 8415 අනුදීපනීපාඨ 8416 පට්ඨානුද්දේස දීපනීපාඨ 8417 නමක්කාරටීකා 8418 මහාපණාමපාඨ 8419 ලක්ඛණාතෝ බුද්ධථෝමනාගාථා 8420 සුතවන්දනා 8421 කමලාඤ්ජලි 8422 ජිනාලඞ්කාර 8423 පජ්ජමධු 8424 බුද්ධගුණගාථාවලී 8425 චූළගන්ථවංස 8427 සාසනවංස 8426 මහාවංස 8429 මොග්ගල්ලානබ්යාකරණං 8428 කච්චායනබ්යාකරණං 8430 සද්දනීතිප්පකරණං (පදමාලා) 8431 සද්දනීතිප්පකරණං (ධාතුමාලා) 8432 පදරූපසිද්ධි 8433 මොග්ගල්ලානපඤ්චිකා 8434 පයෝගසිද්ධිපාඨ 8435 වුත්තෝදයපාඨ 8436 අභිධානප්පදීපිකාපාඨ 8437 අභිධානප්පදීපිකාටීකා 8438 සුබෝධාලඞ්කාරපාඨ 8439 සුබෝධාලඞ්කාරටීකා 8440 බාලාවතාර ගණ්ඨිපදත්ථවිනිච්ඡයසාර 8446 කවිදප්පණනීති 8447 නීතිමඤ්ජරී 8445 ධම්මනීති 8444 මහාරහනීති 8441 ලෝකනීති 8442 සුත්තන්තනීති 8443 සූරස්සතිනීති 8450 චාණක්යනීති 8448 නරදක්ඛදීපනී 8449 චතුරාරක්ඛදීපනී 8451 රසවාහිනී 8452 සීමවිසෝධනීපාඨ 8453 වෙස්සන්තරගීති 8454 මොග්ගල්ලාන වුත්තිවිවරණපඤ්චිකා 8455 ථූපවංස 8456 දාඨාවංස 8457 ධාතුපාඨවිලාසිනියා 8458 ධාතුවංස 8459 හත්ථවනගල්ලවිහාරවංස 8460 ජිනචරිතය 8461 ජිනවංසදීපං 8462 තේලකටාහගාථා 8463 මිලිදටීකා 8464 පදමඤ්ජරී 8465 පදසාධනං 8466 සද්දබින්දුපකරණං 8467 කච්චායනධාතුමඤ්ජුසා 8468 සාමන්තකූටවණ්ණනා |
| 2101 සීලක්ඛන්ධවග්ග පාළි 2102 මහාවග්ග පාළි (දීඝ) 2103 පාථිකවග්ග පාළි | 2201 සීලක්ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 2202 මහාවග්ග අට්ඨකථා (දීඝ) 2203 පාථිකවග්ග අට්ඨකථා | 2301 සීලක්ඛන්ධවග්ග ටීකා 2302 මහාවග්ග ටීකා (දීඝ) 2303 පාථිකවග්ග ටීකා 2304 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-1 2305 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-2 | |
| 3101 මූලපණ්ණාස පාළි 3102 මජ්ඣිමපණ්ණාස පාළි 3103 උපරිපණ්ණාස පාළි | 3201 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-1 3202 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-2 3203 මජ්ඣිමපණ්ණාස අට්ඨකථා 3204 උපරිපණ්ණාස අට්ඨකථා | 3301 මූලපණ්ණාස ටීකා 3302 මජ්ඣිමපණ්ණාස ටීකා 3303 උපරිපණ්ණාස ටීකා | |
| 4101 සගාථාවග්ග පාළි 4102 නිදානවග්ග පාළි 4103 ඛන්ධවග්ග පාළි 4104 සළායතනවග්ග පාළි 4105 මහාවග්ග පාළි (සංයුත්ත) | 4201 සගාථාවග්ග අට්ඨකථා 4202 නිදානවග්ග අට්ඨකථා 4203 ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 4204 සළායතනවග්ග අට්ඨකථා 4205 මහාවග්ග අට්ඨකථා (සංයුත්ත) | 4301 සගාථාවග්ග ටීකා 4302 නිදානවග්ග ටීකා 4303 ඛන්ධවග්ග ටීකා 4304 සළායතනවග්ග ටීකා 4305 මහාවග්ග ටීකා (සංයුත්ත) | |
| 5101 එකකනිපාත පාළි 5102 දුකනිපාත පාළි 5103 තිකනිපාත පාළි 5104 චතුක්කනිපාත පාළි 5105 පඤ්චකනිපාත පාළි 5106 ඡක්කනිපාත පාළි 5107 සත්තකනිපාත පාළි 5108 අට්ඨකාදිනිපාත පාළි 5109 නවකනිපාත පාළි 5110 දසකනිපාත පාළි 5111 එකාදසකනිපාත පාළි | 5201 එකකනිපාත අට්ඨකථා 5202 දුක-තික-චතුක්කනිපාත අට්ඨකථා 5203 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත අට්ඨකථා 5204 අට්ඨකාදිනිපාත අට්ඨකථා | 5301 එකකනිපාත ටීකා 5302 දුක-තික-චතුක්කනිපාත ටීකා 5303 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත ටීකා 5304 අට්ඨකාදිනිපාත ටීකා | |
| 6101 ඛුද්දකපාඨ පාළි 6102 ධම්මපද පාළි 6103 උදාන පාළි 6104 ඉතිවුත්තක පාළි 6105 සුත්තනිපාත පාළි 6106 විමානවත්ථු පාළි 6107 පේතවත්ථු පාළි 6108 ථේරගාථා පාළි 6109 ථේරීගාථා පාළි 6110 අපදාන පාළි-1 6111 අපදාන පාළි-2 6112 බුද්ධවංස පාළි 6113 චරියාපිටක පාළි 6114 ජාතක පාළි-1 6115 ජාතක පාළි-2 6116 මහානිද්දේස පාළි 6117 චූළනිද්දේස පාළි 6118 පටිසම්භිදාමග්ග පාළි 6119 නෙත්තිප්පකරණ පාළි 6120 මිලින්දපඤ්හ පාළි 6121 පේටකෝපදේස පාළි | 6201 ඛුද්දකපාඨ අට්ඨකථා 6202 ධම්මපද අට්ඨකථා-1 6203 ධම්මපද අට්ඨකථා-2 6204 උදාන අට්ඨකථා 6205 ඉතිවුත්තක අට්ඨකථා 6206 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-1 6207 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-2 6208 විමානවත්ථු අට්ඨකථා 6209 පේතවත්ථු අට්ඨකථා 6210 ථේරගාථා අට්ඨකථා-1 6211 ථේරගාථා අට්ඨකථා-2 6212 ථේරීගාථා අට්ඨකථා 6213 අපදාන අට්ඨකථා-1 6214 අපදාන අට්ඨකථා-2 6215 බුද්ධවංස අට්ඨකථා 6216 චරියාපිටක අට්ඨකථා 6217 ජාතක අට්ඨකථා-1 6218 ජාතක අට්ඨකථා-2 6219 ජාතක අට්ඨකථා-3 6220 ජාතක අට්ඨකථා-4 6221 ජාතක අට්ඨකථා-5 6222 ජාතක අට්ඨකථා-6 6223 ජාතක අට්ඨකථා-7 6224 මහානිද්දේස අට්ඨකථා 6225 චූළනිද්දේස අට්ඨකථා 6226 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-1 6227 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-2 6228 නෙත්තිප්පකරණ අට්ඨකථා | 6301 නෙත්තිප්පකරණ ටීකා 6302 නෙත්තිවිභාවිනී | |
| 7101 ධම්මසංගණී පාළි 7102 විභඞ්ග පාළි 7103 ධාතුකථා පාළි 7104 පුග්ගලපඤ්ඤත්ති පාළි 7105 කථාවත්ථු පාළි 7106 යමක පාළි-1 7107 යමක පාළි-2 7108 යමක පාළි-3 7109 පට්ඨාන පාළි-1 7110 පට්ඨාන පාළි-2 7111 පට්ඨාන පාළි-3 7112 පට්ඨාන පාළි-4 7113 පට්ඨාන පාළි-5 | 7201 ධම්මසංගණි අට්ඨකථා 7202 සම්මෝහවිනෝදනී අට්ඨකථා 7203 පඤ්චපකරණ අට්ඨකථා | 7301 ධම්මසංගණී-මූලටීකා 7302 විභඞ්ග-මූලටීකා 7303 පඤ්චපකරණ-මූලටීකා 7304 ධම්මසංගණී-අනුටීකා 7305 පඤ්චපකරණ-අනුටීකා 7306 අභිධම්මාවතාරෝ-නාමරූපපරිච්ඡේදෝ 7307 අභිධම්මත්ථසංගහෝ 7308 අභිධම්මාවතාර-පුරාණටීකා 7309 අභිධම්මමාතිකාපාළි | |
| Español | |||
| El Canon Pali | Los Comentarios | Los Subcomentarios | Otros |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| แบบไทย | |||
| บาลีแคน | ข้อคิดเห็น | คำอธิบายย่อย | อื่น |
| 1101 ปาราชิกปาฬิ 1102 ปาจิตติยปาฬิ 1103 มหาวคฺคปาฬิ (วินัย) 1104 จูฬวคฺคปาฬิ 1105 ปริวารปาฬิ | 1201 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๑ 1202 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๒ 1203 ปาจิตฺติยอฏฺฐกถา 1204 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (วินัย) 1205 จูฬวคฺคอฏฺฐกถา 1206 ปริวารอฏฺฐกถา | 1301 สารตฺถทีปนีฏีกา-๑ 1302 สารตฺถทีปนีฏีกา-๒ 1303 สารตฺถทีปนีฏีกา-๓ | 1401 ทเวมาติกาปาฬิ 1402 วินยสํคหอฏฺฐกถา 1403 วชิรพุทฺธิฏีกา 1404 วิมติวิโนทนีฏีกา-๑ 1405 วิมติวิโนทนีฏีกา-๒ 1406 วินยาลงฺการฏีกา-๑ 1407 วินยาลงฺการฏีกา-๒ 1408 กงฺขาวิตรณีปุราณฏีกา 1409 วินยวินิจฉย-อุตฺตรวินิจฉย 1410 วินยวินิจฉยฏีกา-๑ 1411 วินยวินิจฉยฏีกา-๒ 1412 ปาจิตฺยาทิโยชนาปาฬิ 1413 ขุทฺทสิกฺขา-มูลสิกฺขา 8401 วิสุทฺธิมคฺค-๑ 8402 วิสุทฺธิมคฺค-๒ 8403 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๑ 8404 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๒ 8405 วิสุทฺธิมคฺค-นิทานกถา 8406 ทีฆนิกาย (ปุ-วิ) 8407 มชฺฌิมนิกาย (ปุ-วิ) 8408 สํยุตฺตนิกาย (ปุ-วิ) 8409 องฺคุตฺตรนิกาย (ปุ-วิ) 8410 วินยปิฎก (ปุ-วิ) 8411 อภิธมฺมปิฎก (ปุ-วิ) 8412 อฏฺฐกถา (ปุ-วิ) 8413 นิรุตฺติทีปนี 8414 ปรมตฺถทีปนี สงฺคหมหาฏีกาปาฐ 8415 อนุทีปนีปาฐ 8416 ปฎฺฐานุทฺเทสทีปนีปาฐ 8417 นมกฺการฏีกา 8418 มหาปณามปาฐ 8419 ลกฺขณาโต พุทฺธโถมนาคาถา 8420 สุตวทน 8421 กมลาญฺชลิ 8422 ชินาลงฺการ 8423 ปชฺชมธุ 8424 พุทฺธคุณคาถาวลี 8425 จูฬคนฺถวํส 8427 สาสนวํส 8426 มหาวํส 8429 โมคฺคลฺลานพฺยากรณํ 8428 กจฺจายนพฺยากรณํ 8430 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ปทมาลา) 8431 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ธาตุมาลา) 8432 ปทรูปสิทฺธิ 8433 โมคคฺลานปญฺจิกา 8434 ปโยคสิทฺธิปาฐ 8435 วุตฺโตทยปาฐ 8436 อภิธานปฺปทีปิกาปาฐ 8437 อภิธานปฺปทีปิกาฏีกา 8438 สุโพธาลงฺการปาฐ 8439 สุโพธาลงฺการฏีกา 8440 พาลาวตาร คณฺฐิปทตฺถวินิจฺฉยสาร 8446 กวิทปฺปณนีติ 8447 นีติมญฺชรี 8445 ธมฺมนีติ 8444 มหารหนีติ 8441 โลกนีติ 8442 สุตฺตนฺตนีติ 8443 สูรสฺสตินีติ 8450 จาณกฺยนีติ 8448 นรทกฺขทีปนี 8449 จตุราวรกฺขทีปนี 8451 รสวาหินี 8452 สีมวิโสธนีปาฐ 8453 เวสฺสนฺตรคีติ 8454 โมคฺคลฺลาน วุตฺติวิวรณปญฺจิกา 8455 ถูปวํส 8456 ทาฐาวํส 8457 ธาตุปาฐวิลาสินิยา 8458 ธาตุวํส 8459 หตฺถวนคัลลวิหารวํส 8460 ชนจริตย 8461 ชนวํสทีปํ 8462 เตลกฏาหคาถา 8463 มิลิทฏีกา 8464 ปทมญฺชรี 8465 ปทสาธนํ 8466 สทฺทพินฺทุปกรณํ 8467 กจฺจายนธาตุมญฺชุสา 8468 สามนฺตกูฏวณฺณนา |
| 2101 สีลกฺขนฺธวคฺคปาฬิ 2102 มหาวคฺคปาฬิ (ทีฆ) 2103 ปาถิกวคฺคปาฬิ | 2201 สีลกฺขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 2202 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (ทีฆ) 2203 ปาถิกวคฺคอฏฺฐกถา | 2301 สีลกฺขนฺธวคฺคฏีกา 2302 มหาวคฺคฏีกา (ทีฆ) 2303 ปาถิกวคฺคฏีกา 2304 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๑ 2305 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๒ | |
| 3101 มูลปณฺณาสปาฬิ 3102 มชฺฌิมปณฺณาสปาฬิ 3103 อุปริปณฺณาสปาฬิ | 3201 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๑ 3202 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๒ 3203 มชฺฌิมปณฺณาสอฏฺฐกถา 3204 อุปริปณฺณาสอฏฺฐกถา | 3301 มูลปณฺณาสฏีกา 3302 มชฺฌิมปณฺณาสฏีกา 3303 อุปริปณฺณาสฏีกา | |
| 4101 สคาถาวคฺคปาฬิ 4102 นิทานวคฺคปาฬิ 4103 ขนฺธวคฺคปาฬิ 4104 สฬายตนวคฺคปาฬิ 4105 มหาวคฺคปาฬิ (สํยุตฺต) | 4201 สคาถาวคฺคอฏฺฐกถา 4202 นิทานวคฺคอฏฺฐกถา 4203 ขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 4204 สฬายตนวคฺคอฏฺฐกถา 4205 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (สํยุตฺต) | 4301 สคาถาวคฺคฏีกา 4302 นิทานวคฺคฏีกา 4303 ขนฺธวคฺคฏีกา 4304 สฬายตนวคฺคฏีกา 4305 มหาวคฺคฏีกา (สํยุตฺต) | |
| 5101 เอกกนิปาตปาฬิ 5102 ทุกนิปาตปาฬิ 5103 ติกนิปาตปาฬิ 5104 จตุกฺกนิปาตปาฬิ 5105 ปญฺจกนิปาตปาฬิ 5106 ฉกฺกนิปาตปาฬิ 5107 สตฺตกนิปาตปาฬิ 5108 อฏฺฐกาทินิปาตปาฬิ 5109 นวกนิปาตปาฬิ 5110 ทสกนิปาตปาฬิ 5111 เอกาทสกนิปาตปาฬิ | 5201 เอกกนิปาตอฏฺฐกถา 5202 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตอฏฺฐกถา 5203 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตอฏฺฐกถา 5204 อฏฺฐกาทินิปาตอฏฺฐกถา | 5301 เอกกนิปาตฏีกา 5302 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตฏีกา 5303 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตฏีกา 5304 อฏฺฐกาทินิปาตฏีกา | |
| 6101 ขุทฺทกปาฐปาฬิ 6102 ธมฺมปทปาฬิ 6103 อุทานปาฬิ 6104 อิติวุตฺตกปาฬิ 6105 สุตฺตนิบาตปาฬิ 6106 วิมานวตฺถุปาฬิ 6107 เปตวตฺถุปาฬิ 6108 เถรคาถาปาฬิ 6109 เถรีคาถาปาฬิ 6110 อปทานปาฬิ-๑ 6111 อปทานปาฬิ-๒ 6112 พุทธวงฺสปาฬิ 6113 จริยาปิฏกปาฬิ 6114 ชาตกปาฬิ-๑ 6115 ชาตกปาฬิ-๒ 6116 มหานิทฺเทสปาฬิ 6117 จูฬนิทฺเทสปาฬิ 6118 ปฏิสมฺภิทามคฺคปาฬิ 6119 เนตฺติปฺปกฺรณปาฬิ 6120 มิลินฺทปญฺหาปาฬิ 6121 เปฏโกปเทสปาฬิ | 6201 ขุทฺทกปาฐอฏฺฐกถา 6202 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๑ 6203 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๒ 6204 อุทานอฏฺฐกถา 6205 อิติวุตฺตกอฏฺฐกถา 6206 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๑ 6207 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๒ 6208 วิมานวตฺถุอฏฺฐกถา 6209 เปตวตฺถุอฏฺฐกถา 6210 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๑ 6211 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๒ 6212 เถรีคาถาอฏฺฐกถา 6213 อปทานอฏฺฐกถา-๑ 6214 อปทานอฏฺฐกถา-๒ 6215 พุทธวงฺสอฏฺฐกถา 6216 จริยาปิฏกอฏฺฐกถา 6217 ชาตกอฏฺฐกถา-๑ 6218 ชาตกอฏฺฐกถา-๒ 6219 ชาตกอฏฺฐกถา-๓ 6220 ชาตกอฏฺฐกถา-๔ 6221 ชาตกอฏฺฐกถา-๕ 6222 ชาตกอฏฺฐกถา-๖ 6223 ชาตกอฏฺฐกถา-๗ 6224 มหานิทฺเทสอฏฺฐกถา 6225 จูฬนิทฺเทสอฏฺฐกถา 6226 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๑ 6227 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๒ 6228 เนตฺติปฺปกฺรณอฏฺฐกถา | 6301 เนตฺติปฺปกฺรณฏีกา 6302 เนตฺติวิภาวินี | |
| 7101 ธมฺมสงฺคณีปาฬิ 7102 วิภงฺคปาฬิ 7103 ธาตุกถาปาฬิ 7104 ปุคฺคลปญฺญตฺติปาฬิ 7105 กถาวตฺถุปาฬิ 7106 ยมกปาฬิ-๑ 7107 ยมกปาฬิ-๒ 7108 ยมกปาฬิ-๓ 7109 ปฎฺฐานปาฬิ-๑ 7110 ปฎฺฐานปาฬิ-๒ 7111 ปฎฺฐานปาฬิ-๓ 7112 ปฎฺฐานปาฬิ-๔ 7113 ปฎฺฐานปาฬิ-๕ | 7201 ธมฺมสงฺคณิอฏฺฐกถา 7202 สมฺโมหวินิทนีอฏฺฐกถา 7203 ปญฺจปกรณอฏฺฐกถา | 7301 ธมฺมสงฺคณีมูลฏีกา 7302 วิภงฺคมูลฏีกา 7303 ปญฺจปกรณมูลฏีกา 7304 ธมฺมสงฺคณีอนุฏีกา 7305 ปญฺจปกรณอนุฏีกา 7306 อภิธมฺมาวตาโร-นามรูปปริจฺเฉโท 7307 อภิธมฺมตฺถสงฺคโห 7308 อภิธมฺมาวตาร-ปุราณฏีกา 7309 อภิธมฺมมาติกาปาฬิ | |
| བོད་མི | |||
| པཱ་ལི་གསུང་རབ། | འགྲེལ་བཤད། | འགྲེལ་བཤད་ཕྲན། | གཞན། |
| 1101 ཕ་ར་ཇི་ཀ་པཱ་ལི། 1102 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་པཱ་ལི། 1103 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (ཝི་ན་ཡ) 1104 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 1105 པ་རི་ཝཱ་ར་པཱ་ལི། | 1201 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 1202 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 1203 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1204 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (ཝི་ན་ཡ) 1205 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1206 པ་རི་ཝཱ་ར་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 1301 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1302 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1303 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༣ | 1401 དྭེ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། 1402 ཝི་ན་ཡ་སངྒ་ཧ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1403 ཝ་ཇི་ར་བུད་དྷི་ཊཱི་ཀཱ། 1404 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1405 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1406 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1407 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1408 ཀངྑཱ་ཝི་ཏ་ར་ཎཱི་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 1409 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཨུ་ཏྟ་ར་ཝི་ནི་ཙ་ཡ། 1410 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1411 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1412 པཱ་ཙི་ཏྱཱ་དི་ཡོ་ཇ་ནཱ་པཱ་ལི། 1413 ཁུད་ད་སིཀྑཱ་མཱུ་ལ་སིཀྑཱ། 8401 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༡ 8402 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༢ 8403 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 8404 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 8405 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་ནི་དཱ་ན་ཀ་ཐཱ། 8406 དཱི་གྷ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8407 མཛྷི་མ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8408 སཾ་ཡུཏྟ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8409 ཨངྒུ་ཏྟ་ར་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8410 ཝི་ན་ཡ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8411 ཨ་བྷི་དྷམྨ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8412 ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (པུ་ཝི) 8413 ནི་རུཏྟི་དཱི་པ་ནཱི། 8414 པ་ར་མཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་སངྒ་ཧ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8415 ཨ་ནུ་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8416 པཊྛཱ་ནུདྡེ་ས་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8417 ན་མཀྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8418 མ་ཧཱ་པ་ཎཱ་མ་པཱ་ཋ། 8419 ལཀྑ་ཎཱ་ཏོ་བུདྡྷ་ཐོ་མ་ནཱ་གཱ་ཐཱ། 8420 སུ་ཏ་ཝནྡ་ནཱ། 8421 ཀ་མ་ལཱཉྫ་ལི། 8422 ཇི་ནཱ་ལངྐཱ་ར། 8423 པཛྫ་མ་དྷུ། 8424 བུདྡྷ་གུ་ཎ་གཱ་ཐཱ་ཝ་ལཱི། 8425 ཙཱུ་ལ་གནྠ་ཝཾ་ས། 8427 སཱ་ས་ན་ཝཾ་ས། 8426 མ་ཧཱ་ཝཾ་ས། 8429 མོགྒ་ལླཱ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8428 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8430 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (པ་ད་མཱ་ལཱ) 8431 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (དྷཱ་ཏུ་མཱ་ལཱ) 8432 པ་ད་རཱུ་པ་སིད་དྷི། 8433 མོ་ག་ལླཱ་ན་པཉྩ་ཀཱ། 8434 པ་ཡོ་ག་སིད་དྷི་པཱ་ཋ། 8435 བུཏྟོ་ད་ཡ་པཱ་ཋ། 8436 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8437 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་ཊཱི་ཀཱ། 8438 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་པཱ་ཋ། 8439 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8440 བཱ་ལཱ་ཝ་ཏཱ་ར་གཎྛི་པ་དཏྠ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་སཱ་ར། 8446 ཀ་ཝི་དཔྤ་ཎ་ནཱི་ཏི། 8447 ནཱི་ཏི་མཉྫ་རཱི། 8445 དྷམྨ་ནཱི་ཏི། 8444 མ་ཧཱ་ར་ཧ་ནཱི་ཏི། 8441 ལོ་ཀ་ནཱི་ཏི། 8442 སུཏྟནྟ་ནཱ་ཏི། 8443 སཱུ་རསྶ་ཏི་ནཱི་ཏི། 8450 ཙཱ་ཎཀྱ་ནཱི་ཏི། 8448 ན་ར་དཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8449 ཙ་ཏུ་རཱ་རཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8451 ར་ས་ཝཱ་ཧི་ནཱི། 8452 སཱི་མ་ཝི་སོ་ད་ནཱི་པཱ་ཋ། 8453 ཝེསྶནྟ་ར་གཱི་ཏི། 8454 མོགྒ་ལླཱ་ན་བུཏྟི་ཝི་ཝ་ར་ཎ་པཉྩ་ཀཱ། 8455 ཐཱུ་པ་ཝཾ་ས། 8456 དཱ་ཊྷཱ་ཝཾ་ས། 8457 དྷཱ་ཏུ་པཱ་ཋ་ཝི་ལཱ་སི་ནི་ཡཱ། 8458 དྷཱ་ཏུ་ཝཾ་ས། 8459 ཧཏྠ་ཝ་ན་གལླ་ཝི་ཧཱ་ར་ཝཾ་ས། 8460 ཇི་ན་ཙ་རི་ཏ་ཡ། 8461 ཇི་ན་ཝཾ་ས་དཱི་པཾ། 8462 ཏེ་ལ་ཀ་ཊཱ་ཧ་གཱ་ཐཱ། 8463 མི་ལི་ད་ཊཱི་ཀཱ། 8464 པ་ད་མཉྫ་རཱི། 8465 པ་ད་སཱ་ད་ནཾ། 8466 སདྡ་བིནྡུ་པ་ཀ་ར་ཎཾ། 8467 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་དྷཱ་ཏུ་མཉྫུ་སཱ། 8468 སཱ་མནྟ་ཀཱུ་ཊ་ཝཎྞ་ནཱ། |
| 2101 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 2102 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (དཱི་གྷ) 2103 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་པཱ་ལི། | 2201 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 2202 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (དཱི་གྷ) 2203 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 2301 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2302 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (དཱི་གྷ) 2303 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2304 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 2305 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༢ | |
| 3101 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3102 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3103 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། | 3201 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 3202 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 3203 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 3204 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 3301 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3302 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3303 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 4101 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4102 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4103 ཁནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4104 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4105 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4201 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4202 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4203 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4204 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4205 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4301 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4302 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4303 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4304 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4305 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | |
| 5101 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5102 དུ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5103 ཏི་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5104 ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5105 པཉྩ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5106 ཆཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5107 སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5108 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5109 ན་ཝ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5110 ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5111 ཨེ་ཀཱ་ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། | 5201 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5202 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5203 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5204 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 5301 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5302 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5303 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5304 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 6101 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་པཱ་ལི། 6102 དྷམྨ་པ་ད་པཱ་ལི། 6103 ཨུ་དཱ་ན་པཱ་ལི། 6104 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་པཱ་ལི། 6105 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 6106 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6107 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6108 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6109 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6110 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 6111 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 6112 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་པཱ་ལི། 6113 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་པཱ་ལི། 6114 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 6115 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 6116 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6117 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6118 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་པཱ་ལི། 6119 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་པཱ་ལི། 6120 མི་ལིནྡ་པཉྷ་པཱ་ལི། 6121 པེ་ཊ་ཀོ་པ་དེ་ས་པཱ་ལི། | 6201 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6202 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6203 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6204 ཨུ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6205 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6206 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6207 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6208 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6209 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6210 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6211 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6212 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6213 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6214 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6215 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6216 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6217 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6218 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6219 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༣ 6220 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༤ 6221 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༥ 6222 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༦ 6223 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༧ 6224 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6225 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6226 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6227 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6228 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 6301 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 6302 ནེཏྟི་ཝི་བྷཱི་ནཱི། | |
| 7101 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་པཱ་ལི། 7102 ཝི་བྷངྒ་པཱ་ལི། 7103 དྷཱ་ཏུ་ཀ་ཐཱ་པཱ་ལི། 7104 པུགྒ་ལ་པཉྙཏྟི་པཱ་ལི། 7105 ཀ་ཐཱ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 7106 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 7107 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 7108 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༣ 7109 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 7110 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 7111 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༣ 7112 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༤ 7113 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༥ | 7201 དྷམྨ་སངྒ་ཎི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7202 སམྨོ་ཧ་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7203 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 7301 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7302 ཝི་བྷངྒ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7303 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7304 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7305 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7306 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་རོ་ནཱ་མ་རཱུ་པ་པ་རི་ཙྪེ་དོ། 7307 ཨ་བྷི་དྷམྨཏྠ་སངྒ་ཧོ། 7308 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་ར་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 7309 ཨ་བྷི་དྷམྨ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། | |
| Tiếng Việt | |||
| Kinh điển Pali | Chú giải | Phụ chú giải | Khác |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Tạng Luật) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 1 1202 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 2 1203 Chú Giải Pācittiya 1204 Chú Giải Mahāvagga (Tạng Luật) 1205 Chú Giải Cūḷavagga 1206 Chú Giải Parivāra | 1301 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 1 1302 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 2 1303 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Chú Giải Vinayasaṅgaha 1403 Phụ Chú Giải Vajirabuddhi 1404 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 1 1405 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 2 1406 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 1 1407 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 2 1408 Phụ Chú Giải Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 1 1411 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Thanh Tịnh Đạo - 1 8402 Thanh Tịnh Đạo - 2 8403 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 1 8404 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 2 8405 Lời Tựa Thanh Tịnh Đạo 8406 Trường Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8407 Trung Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8408 Tương Ưng Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8409 Tăng Chi Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8410 Tạng Luật (Vấn Đáp) 8411 Tạng Vi Diệu Pháp (Vấn Đáp) 8412 Chú Giải (Vấn Đáp) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Phụ Chú Giải Namakkāra 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Phụ Chú Giải Abhidhānappadīpikā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Phụ Chú Giải Subodhālaṅkāra 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8444 Mahārahanīti 8445 Dhammanīti 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8450 Cāṇakyanīti 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Phụ Chú Giải Milinda 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Trường Bộ) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2202 Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2203 Chú Giải Pāthikavagga | 2301 Phụ Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2302 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2303 Phụ Chú Giải Pāthikavagga 2304 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 1 2305 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 1 3202 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 2 3203 Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3204 Chú Giải Uparipaṇṇāsa | 3301 Phụ Chú Giải Mūlapaṇṇāsa 3302 Phụ Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3303 Phụ Chú Giải Uparipaṇṇāsa | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Tương Ưng Bộ) | 4201 Chú Giải Sagāthāvagga 4202 Chú Giải Nidānavagga 4203 Chú Giải Khandhavagga 4204 Chú Giải Saḷāyatanavagga 4205 Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | 4301 Phụ Chú Giải Sagāthāvagga 4302 Phụ Chú Giải Nidānavagga 4303 Phụ Chú Giải Khandhavagga 4304 Phụ Chú Giải Saḷāyatanavagga 4305 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Chú Giải Ekakanipāta 5202 Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5203 Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5204 Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | 5301 Phụ Chú Giải Ekakanipāta 5302 Phụ Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5303 Phụ Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5304 Phụ Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi - 1 6111 Apadāna Pāḷi - 2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi - 1 6115 Jātaka Pāḷi - 2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Chú Giải Khuddakapāṭha 6202 Chú Giải Dhammapada - 1 6203 Chú Giải Dhammapada - 2 6204 Chú Giải Udāna 6205 Chú Giải Itivuttaka 6206 Chú Giải Suttanipāta - 1 6207 Chú Giải Suttanipāta - 2 6208 Chú Giải Vimānavatthu 6209 Chú Giải Petavatthu 6210 Chú Giải Theragāthā - 1 6211 Chú Giải Theragāthā - 2 6212 Chú Giải Therīgāthā 6213 Chú Giải Apadāna - 1 6214 Chú Giải Apadāna - 2 6215 Chú Giải Buddhavaṃsa 6216 Chú Giải Cariyāpiṭaka 6217 Chú Giải Jātaka - 1 6218 Chú Giải Jātaka - 2 6219 Chú Giải Jātaka - 3 6220 Chú Giải Jātaka - 4 6221 Chú Giải Jātaka - 5 6222 Chú Giải Jātaka - 6 6223 Chú Giải Jātaka - 7 6224 Chú Giải Mahāniddesa 6225 Chú Giải Cūḷaniddesa 6226 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 1 6227 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 2 6228 Chú Giải Nettippakaraṇa | 6301 Phụ Chú Giải Nettippakaraṇa 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi - 1 7107 Yamaka Pāḷi - 2 7108 Yamaka Pāḷi - 3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi - 1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi - 2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi - 3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi - 4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi - 5 | 7201 Chú Giải Dhammasaṅgaṇi 7202 Chú Giải Sammohavinodanī 7203 Chú Giải Pañcapakaraṇa | 7301 Phụ Chú Giải Gốc Dhammasaṅgaṇī 7302 Phụ Chú Giải Gốc Vibhaṅga 7303 Phụ Chú Giải Gốc Pañcapakaraṇa 7304 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Dhammasaṅgaṇī 7305 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Pañcapakaraṇa 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Phụ Chú Giải Cổ Điển Abhidhammāvatāra 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |