| বাংলা | |||
| পালি | অট্ঠকথা | টীকা | অন্ন |
| 1101 পারাজিক পালি 1102 পাচিত্তিয় পালি 1103 মহাবগ্গ পালি (বিনয়) 1104 চূলবগ্গ পালি 1105 পরিবার পালি | 1201 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-১ 1202 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-২ 1203 পাচিত্তিয় অট্ঠকথা 1204 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (বিনয়) 1205 চূলবগ্গ অট্ঠকথা 1206 পরিবার অট্ঠকথা | 1301 সারত্থদীপনী টীকা-১ 1302 সারত্থদীপনী টীকা-২ 1303 সারত্থদীপনী টীকা-৩ | 1401 দ্বেমাতিকাপালি 1402 বিনয়সংগহ অট্ঠকথা 1403 বজিরবুদ্ধি টীকা 1404 বিমতিবিনোদনী টীকা-১ 1405 বিমতিবিনোদনী টীকা-২ 1406 বিনয়ালংকার টীকা-১ 1407 বিনয়ালংকার টীকা-২ 1408 কঙ্খাবিতরণীপুরাণ টীকা 1409 বিনয়বিনিচ্ছয়-উত্তরবিনিচ্ছয় 1410 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-১ 1411 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-২ 1412 পাচিত্যাদিযোজনাপালি 1413 খুদ্ধসিক্খা-মূলসিক্খা 8401 বিসুদ্ধিমগ্গ-১ 8402 বিসুদ্ধিমগ্গ-২ 8403 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-১ 8404 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-২ 8405 বিসুদ্ধিমগ্গ নিদানকথা 8406 দীঘনিকায় (পু-বি) 8407 মজ্ঝিমনিকায় (পু-বি) 8408 সংযুত্তনিকায় (পু-বি) 8409 অঙ্গুত্তরনিকায় (পু-বি) 8410 বিনয়পিটক (পু-বি) 8411 অভিধম্মপিটক (পু-বি) 8412 অট্ঠকথা (পু-বি) 8413 নিরুত্তিদীপনী 8414 পরমত্থদীপনী সংগহমহাটীকাপাঠ 8415 অনুদীপনীপাঠ 8416 পট্ঠানুদ্দেস দীপনীপাঠ 8417 নমক্কারটীকা 8418 মহাপণামপাঠ 8419 লক্খণাতো বুদ্ধথোমনাগাথা 8420 সুতবন্দনা 8421 কমলাঞ্জলি 8422 জিনালংকার 8423 পজ্জমধু 8424 বুদ্ধগুণগাথাবলী 8425 চূলগন্থবংস 8426 মহাবংস 8427 সাসনবংস 8428 কচ্চায়নব্যাকরণং 8429 মোগ্গল্লানব্যাকরণং 8430 সদ্দনীতিপ্পকরণং (পদমালা) 8431 সদ্দনীতিপ্পকরণং (ধাতুমালা) 8432 পদরূপসিদ্ধি 8433 মোগ্গল্লানপঞ্চিকা 8434 পযোগসিদ্ধিপাঠ 8435 বুত্তোদয়পাঠ 8436 অভিধানপ্পদীপিকাপাঠ 8437 অভিধানপ্পদীপিকাটীকা 8438 সুবোধালংকারপাঠ 8439 সুবোধালংকারটীকা 8440 বালাবতার গণ্ঠিপদত্থবিনিচ্ছয়সার 8441 লোকনীতি 8442 সুত্তন্তনীতি 8443 সূরস্সতীনীতি 8444 মহারহনীতি 8445 ধম্মনীতি 8446 কবিদপ্পণনীতি 8447 নীতিমঞ্জরী 8448 নরদক্খদীপনী 8449 চতুরারক্খদীপনী 8450 চাণক্যনীতি 8451 রসবাহিনী 8452 সীমাবিসোধনীপাঠ 8453 বেস্সন্তরগীতি 8454 মোগ্গল্লান বুত্তিবিবরণপঞ্চিকা 8455 থূপবংস 8456 দাঠাবংস 8457 ধাতুপাঠবিলাসিনিয়া 8458 ধাতুবংস 8459 হত্থবনগল্লবিহারবংস 8460 জিনচরিতয় 8461 জিনবংসদীপং 8462 তেলকটাহগাথা 8463 মিলিদটীকা 8464 পদমঞ্জরী 8465 পদসাধনং 8466 সদ্দবিন্দুপকরণং 8467 কচ্চায়নধাতুমঞ্জুসা 8468 সামন্তকূটবণ্ণনা |
| 2101 সীলক্খন্ধবগ্গ পালি 2102 মহাবগ্গ পালি (দীঘ) 2103 পাথিকবগ্গ পালি | 2201 সীলক্খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 2202 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (দীঘ) 2203 পাথিকবগ্গ অট্ঠকথা | 2301 সীলক্খন্ধবগ্গ টীকা 2302 মহাবগ্গ টীকা (দীঘ) 2303 পাথিকবগ্গ টীকা 2304 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-১ 2305 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-২ | |
| 3101 মূলপণ্ণাস পালি 3102 মজ্ঝিমপণ্ণাস পালি 3103 উপরিপণ্ণাস পালি | 3201 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-১ 3202 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-২ 3203 মজ্ঝিমপণ্ণাস অট্ঠকথা 3204 উপরিপণ্ণাস অট্ঠকথা | 3301 মূলপণ্ণাস টীকা 3302 মজ্ঝিমপণ্ণাস টীকা 3303 উপরিপণ্ণাস টীকা | |
| 4101 সগাথাবগ্গ পালি 4102 নিদানবগ্গ পালি 4103 খন্ধবগ্গ পালি 4104 সলায়তনবগ্গ পালি 4105 মহাবগ্গ পালি (সংযুত্ত) | 4201 সগাথাবগ্গ অট্ঠকথা 4202 নিদানবগ্গ অট্ঠকথা 4203 খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 4204 সলায়তনবগ্গ অট্ঠকথা 4205 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (সংযুত্ত) | 4301 সগাথাবগ্গ টীকা 4302 নিদানবগ্গ টীকা 4303 খন্ধবগ্গ টীকা 4304 সলায়তনবগ্গ টীকা 4305 মহাবগ্গ টীকা (সংযুত্ত) | |
| 5101 এককনিপাত পালি 5102 দুকনিপাত পালি 5103 তিকনিপাত পালি 5104 চতুক্কনিপাত পালি 5105 পঞ্চকনিপাত পালি 5106 ছক্কনিপাত পালি 5107 সত্তকনিপাত পালি 5108 অট্ঠকাদিনিপাত পালি 5109 নবকনিপাত পালি 5110 দশকনিপাত পালি 5111 একাদশকনিপাত পালি | 5201 এককনিপাত অট্ঠকথা 5202 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত অট্ঠকথা 5203 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত অট্ঠকথা 5204 অট্ঠকাদিনিপাত অট্ঠকথা | 5301 এককনিপাত টীকা 5302 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত টীকা 5303 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত টীকা 5304 অট্ঠকাদিনিপাত টীকা | |
| 6101 খুদ্ধকপাঠ পালি 6102 ধম্মপদ পালি 6103 উদান পালি 6104 ইতিবুত্তক পালি 6105 সুত্তনিপাত পালি 6106 বিমানবত্থু পালি 6107 পেতবত্থু পালি 6108 থেরগাথা পালি 6109 থেরীগাথা পালি 6110 অপদান পালি-১ 6111 অপদান পালি-২ 6112 বুদ্ধবংস পালি 6113 চরিয়াপিটক পালি 6114 জাতক পালি-১ 6115 জাতক পালি-২ 6116 মহানিদ্দেস পালি 6117 চূলনিদ্দেস পালি 6118 পটিসম্ভিদামগ্গ পালি 6119 নেত্তিপ্পকরণ পালি 6120 মিলিন্দপঞ্হ পালি 6121 পেটকোপদেস পালি | 6201 খুদ্ধকপাঠ অট্ঠকথা 6202 ধম্মপদ অট্ঠকথা-১ 6203 ধম্মপদ অট্ঠকথা-২ 6204 উদান অট্ঠকথা 6205 ইতিবুত্তক অট্ঠকথা 6206 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-১ 6207 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-২ 6208 বিমানবত্থু অট্ঠকথা 6209 পেতবত্থু অট্ঠকথা 6210 থেরগাথা অট্ঠকথা-১ 6211 থেরগাথা অট্ঠকথা-২ 6212 থেরীগাথা অট্ঠকথা 6213 অপদান অট্ঠকথা-১ 6214 অপদান অট্ঠকথা-২ 6215 বুদ্ধবংস অট্ঠকথা 6216 চরিয়াপিটক অট্ঠকথা 6217 জাতক অট্ঠকথা-১ 6218 জাতক অট্ঠকথা-২ 6219 জাতক অট্ঠকথা-৩ 6220 জাতক অট্ঠকথা-৪ 6221 জাতক অট্ঠকথা-৫ 6222 জাতক অট্ঠকথা-৬ 6223 জাতক অট্ঠকথা-৭ 6224 মহানিদ্দেস অট্ঠকথা 6225 চূলনিদ্দেস অট্ঠকথা 6226 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-১ 6227 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-২ 6228 নেত্তিপ্পকরণ অট্ঠকথা | 6301 নেত্তিপ্পকরণ টীকা 6302 নেত্তিবিভাবিনী | |
| 7101 ধম্মসংগণী পালি 7102 বিভঙ্গ পালি 7103 ধাতুকথা পালি 7104 পুগ্গলপঞ্ঞাত্তি পালি 7105 কথাবত্থু পালি 7106 যমক পালি-১ 7107 যমক পালি-২ 7108 যমক পালি-৩ 7109 পট্ঠান পালি-১ 7110 পট্ঠান পালি-২ 7111 পট্ঠান পালি-৩ 7112 পট্ঠান পালি-৪ 7113 পট্ঠান পালি-৫ | 7201 ধম্মসংগণি অট্ঠকথা 7202 সম্মোহবিনোদনী অট্ঠকথা 7203 পঞ্চপকরণ অট্ঠকথা | 7301 ধম্মসংগণী-মূলটীকা 7302 বিভঙ্গ-মূলটীকা 7303 পঞ্চপকরণ-মূলটীকা 7304 ধম্মসংগণী-অনুটীকা 7305 পঞ্চপকরণ-অনুটীকা 7306 অভিধম্মাবতারো-নামরূপপরিচ্ছেদো 7307 অভিধম্মত্থসংগহো 7308 অভিধম্মাবতার-পুরাণটীকা 7309 অভিধম্মমাতিকাপালি | |
| 中文 | |||
| 巴利 | 義註 | 複註 | 藏外典籍 |
| 1101 巴拉基咖(波羅夷) 1102 巴吉帝亞(波逸提) 1103 大品(律藏) 1104 小品 1105 附隨 | 1201 巴拉基咖(波羅夷)義註-1 1202 巴拉基咖(波羅夷)義註-2 1203 巴吉帝亞(波逸提)義註 1204 大品義註(律藏) 1205 小品義註 1206 附隨義註 | 1301 心義燈-1 1302 心義燈-2 1303 心義燈-3 | 1401 疑惑度脫 1402 律攝註釋 1403 金剛智疏 1404 疑難解除疏-1 1405 疑難解除疏-2 1406 律莊嚴疏-1 1407 律莊嚴疏-2 1408 古老解惑疏 1409 律抉擇-上抉擇 1410 律抉擇疏-1 1411 律抉擇疏-2 1412 巴吉帝亞等啟請經 1413 小戒學-根本戒學 8401 清淨道論-1 8402 清淨道論-2 8403 清淨道大複註-1 8404 清淨道大複註-2 8405 清淨道論導論 8406 長部問答 8407 中部問答 8408 相應部問答 8409 增支部問答 8410 律藏問答 8411 論藏問答 8412 義注問答 8413 語言學詮釋手冊 8414 勝義顯揚 8415 隨燈論誦 8416 發趣論燈論 8417 禮敬文 8418 大禮敬文 8419 依相讚佛偈 8420 經讚 8421 蓮花供 8422 勝者莊嚴 8423 語蜜 8424 佛德偈集 8425 小史 8427 佛教史 8426 大史 8429 目犍連文法 8428 迦旃延文法 8430 文法寶鑑(詞幹篇) 8431 文法寶鑑(詞根篇) 8432 詞形成論 8433 目犍連五章 8434 應用成就讀本 8435 音韻論讀本 8436 阿毗曇燈讀本 8437 阿毗曇燈疏 8438 妙莊嚴論讀本 8439 妙莊嚴論疏 8440 初學入門義抉擇精要 8446 詩王智論 8447 智論花鬘 8445 法智論 8444 大羅漢智論 8441 世間智論 8442 經典智論 8443 勇士百智論 8450 考底利耶智論 8448 人眼燈 8449 四護衛燈 8451 妙味之流 8452 界清淨 8453 韋桑達拉頌 8454 目犍連語釋五章 8455 塔史 8456 佛牙史 8457 詞根讀本注釋 8458 舍利史 8459 象頭山寺史 8460 勝者行傳 8461 勝者宗燈 8462 油鍋偈 8463 彌蘭王問疏 8464 詞花鬘 8465 詞成就論 8466 正理滴論 8467 迦旃延詞根注 8468 邊境山注釋 |
| 2101 戒蘊品 2102 大品(長部) 2103 波梨品 | 2201 戒蘊品註義註 2202 大品義註(長部) 2203 波梨品義註 | 2301 戒蘊品疏 2302 大品複註(長部) 2303 波梨品複註 2304 戒蘊品新複註-1 2305 戒蘊品新複註-2 | |
| 3101 根本五十經 3102 中五十經 3103 後五十經 | 3201 根本五十義註-1 3202 根本五十義註-2 3203 中五十義註 3204 後五十義註 | 3301 根本五十經複註 3302 中五十經複註 3303 後五十經複註 | |
| 4101 有偈品 4102 因緣品 4103 蘊品 4104 六處品 4105 大品(相應部) | 4201 有偈品義注 4202 因緣品義注 4203 蘊品義注 4204 六處品義注 4205 大品義注(相應部) | 4301 有偈品複註 4302 因緣品註 4303 蘊品複註 4304 六處品複註 4305 大品複註(相應部) | |
| 5101 一集經 5102 二集經 5103 三集經 5104 四集經 5105 五集經 5106 六集經 5107 七集經 5108 八集等經 5109 九集經 5110 十集經 5111 十一集經 | 5201 一集義註 5202 二、三、四集義註 5203 五、六、七集義註 5204 八、九、十、十一集義註 | 5301 一集複註 5302 二、三、四集複註 5303 五、六、七集複註 5304 八集等複註 | |
| 6101 小誦 6102 法句經 6103 自說 6104 如是語 6105 經集 6106 天宮事 6107 餓鬼事 6108 長老偈 6109 長老尼偈 6110 譬喻-1 6111 譬喻-2 6112 諸佛史 6113 所行藏 6114 本生-1 6115 本生-2 6116 大義釋 6117 小義釋 6118 無礙解道 6119 導論 6120 彌蘭王問 6121 藏釋 | 6201 小誦義注 6202 法句義注-1 6203 法句義注-2 6204 自說義注 6205 如是語義註 6206 經集義注-1 6207 經集義注-2 6208 天宮事義注 6209 餓鬼事義注 6210 長老偈義注-1 6211 長老偈義注-2 6212 長老尼義注 6213 譬喻義注-1 6214 譬喻義注-2 6215 諸佛史義注 6216 所行藏義注 6217 本生義注-1 6218 本生義注-2 6219 本生義注-3 6220 本生義注-4 6221 本生義注-5 6222 本生義注-6 6223 本生義注-7 6224 大義釋義注 6225 小義釋義注 6226 無礙解道義注-1 6227 無礙解道義注-2 6228 導論義注 | 6301 導論複註 6302 導論明解 | |
| 7101 法集論 7102 分別論 7103 界論 7104 人施設論 7105 論事 7106 雙論-1 7107 雙論-2 7108 雙論-3 7109 發趣論-1 7110 發趣論-2 7111 發趣論-3 7112 發趣論-4 7113 發趣論-5 | 7201 法集論義註 7202 分別論義註(迷惑冰消) 7203 五部論義註 | 7301 法集論根本複註 7302 分別論根本複註 7303 五論根本複註 7304 法集論複註 7305 五論複註 7306 阿毘達摩入門 7307 攝阿毘達磨義論 7308 阿毘達摩入門古複註 7309 阿毘達摩論母 | |
| English | |||
| Pali Canon | Commentaries | Sub-commentaries | Other |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
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| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| हिंदी | |||
| पाली कैनन | कमेंट्री | उप-टिप्पणियाँ | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळि 1102 पाचित्तिय पाळि 1103 महावग्ग पाळि (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळि 1105 परिवार पाळि | 1201 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-1 1202 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-2 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-1 1302 सारत्थदीपनी टीका-2 1303 सारत्थदीपनी टीका-3 | 1401 द्वेमातिकापाळि 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-1 1405 विमतिविनोदनी टीका-2 1406 विनयालंकार टीका-1 1407 विनयालंकार टीका-2 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-1 1411 विनयविनिच्छय टीका-2 1412 पाचित्यादियोजनापाळि 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-1 8402 विसुद्धिमग्ग-2 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-1 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-2 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अङ्गुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी सङ्गहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवन्दना 8421 कमलाञ्जलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगन्थवंस 8427 सासनवंस 8426 महावंस 8429 मोग्गल्लानब्याकरणं 8428 कच्चायनब्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपञ्चिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गण्ठिपदत्थविनिच्छयसार 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमञ्जरी 8445 धम्मनीति 8444 महारहनीति 8441 लोकनीति 8442 सुत्तन्तनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8450 चाणक्यनीति 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8451 रसवाहिनी 8452 सीमविसोधनीपाठ 8453 वेस्सन्तरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपञ्चिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमञ्जरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिन्दुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमञ्जुसा 8468 सामन्तकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खन्धवग्ग पाळि 2102 महावग्ग पाळि (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळि | 2201 सीलक्खन्धवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खन्धवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-1 2305 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-2 | |
| 3101 मूलपण्णास पाळि 3102 मज्झिमपण्णास पाळि 3103 उपरिपण्णास पाळि | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-1 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-2 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळि 4102 निदानवग्ग पाळि 4103 खन्धवग्ग पाळि 4104 सळायतनवग्ग पाळि 4105 महावग्ग पाळि (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खन्धवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खन्धवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळि 5102 दुकनिपात पाळि 5103 तिकनिपात पाळि 5104 चतुक्कनिपात पाळि 5105 पञ्चकनिपात पाळि 5106 छक्कनिपात पाळि 5107 सत्तकनिपात पाळि 5108 अट्ठकादिनिपात पाळि 5109 नवकनिपात पाळि 5110 दसकनिपात पाळि 5111 एकादसकनिपात पाळि | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळि 6102 धम्मपद पाळि 6103 उदान पाळि 6104 इतिवुत्तक पाळि 6105 सुत्तनिपात पाळि 6106 विमानवत्थु पाळि 6107 पेतवत्थु पाळि 6108 थेरगाथा पाळि 6109 थेरीगाथा पाळि 6110 अपदान पाळि-1 6111 अपदान पाळि-2 6112 बुद्धवंस पाळि 6113 चरियापिटक पाळि 6114 जातक पाळि-1 6115 जातक पाळि-2 6116 महानिद्देस पाळि 6117 चूळनिद्देस पाळि 6118 पटिसम्भिदामग्ग पाळि 6119 नेत्तिप्पकरण पाळि 6120 मिलिन्दपञ्ह पाळि 6121 पेटकोपदेस पाळि | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-1 6203 धम्मपद अट्ठकथा-2 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-1 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-2 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-1 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-2 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-1 6214 अपदान अट्ठकथा-2 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-1 6218 जातक अट्ठकथा-2 6219 जातक अट्ठकथा-3 6220 जातक अट्ठकथा-4 6221 जातक अट्ठकथा-5 6222 जातक अट्ठकथा-6 6223 जातक अट्ठकथा-7 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-1 6227 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-2 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसङ्गणी पाळि 7102 विभङ्ग पाळि 7103 धातुकथा पाळि 7104 पुग्गलपञ्ञत्ति पाळि 7105 कथावत्थु पाळि 7106 यमक पाळि-1 7107 यमक पाळि-2 7108 यमक पाळि-3 7109 पट्ठान पाळि-1 7110 पट्ठान पाळि-2 7111 पट्ठान पाळि-3 7112 पट्ठान पाळि-4 7113 पट्ठान पाळि-5 | 7201 धम्मसङ्गणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पञ्चपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसङ्गणी-मूलटीका 7302 विभङ्ग-मूलटीका 7303 पञ्चपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसङ्गणी-अनुटीका 7305 पञ्चपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसङ्गहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळि | |
| Indonesia | |||
| Kanon Pali | Komentar | Sub-komentar | Lainnya |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| 日文 | |||
| パーリ仏典 | 註釈書 | 副註釈書 | その他 |
| 1101 パーラージカ・パーリ 1102 パーチッティヤ・パーリ 1103 マハーヴァッガ・パーリ(ヴィナヤ) 1104 チューラヴァッガ・パーリ 1105 パリヴァーラ・パーリ | 1201 パーラージカカンダ・アッタカター-1 1202 パーラージカカンダ・アッタカター-2 1203 パーチッティヤ・アッタカター 1204 マハーヴァッガ・アッタカター(ヴィナヤ) 1205 チューラヴァッガ・アッタカター 1206 パリヴァーラ・アッタカター | 1301 サーラッタディーパニー・ティーカー-1 1302 サーラッタディーパニー・ティーカー-2 1303 サーラッタディーパニー・ティーカー-3 | 1401 ドヴェマーティカー・パーリ 1402 ヴィナヤサンガハ・アッタカター 1403 ヴァジラブッディ・ティーカー 1404 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-1 1405 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-2 1406 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-1 1407 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-2 1408 カンカーウィタラニープラーナ・ティーカー 1409 ヴィナヤヴィニッチャヤ-ウッタラヴィニッチャヤ 1410 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-1 1411 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-2 1412 パーチッティヤーディヨージャナー・パーリ 1413 クッダシッカー-ムーラシッカー 8401 ヴィスッディマッガ-1 8402 ヴィスッディマッガ-2 8403 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-1 8404 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-2 8405 ヴィスッディマッガ・ニダーナカター 8406 ディーガニカーヤ(プ・ヴィ) 8407 マッジマニカーヤ(プ・ヴィ) 8408 サンユッタニカーヤ(プ・ヴィ) 8409 アングッタラニカーヤ(プ・ヴィ) 8410 ヴィナヤピタカ(プ・ヴィ) 8411 アビダンマピタカ(プ・ヴィ) 8412 アッタカター(プ・ヴィ) 8413 ニルッティディーパニー 8414 パラマッタディーパニー・サンガハマハーティカーパータ 8415 アヌディーパニーパータ 8416 パッターヌッデーサ・ディーパニーパータ 8417 ナマッカラ・ティーカー 8418 マハーパナーマ・パータ 8419 ラッカナート・ブッダトーマナーガーター 8420 スタヴァンダナー 8421 カマラーニャジャリ 8422 ジナランカーラ 8423 パッジャマドゥ 8424 ブッダグナガーター・ヴァリー 8425 チューラガンタヴァンサ 8427 サーサナヴァンサ 8426 マハーヴァンサ 8429 モッガラーナ・ビャーカラナン 8428 カッチャーヤナ・ビャーカラナン 8430 サッダニーティッパカラナン(パダマーラー) 8431 サッダニーティッパカラナン(ダートゥマーラー) 8432 パダルーパシッディ 8433 モッガラーナ・パンチカー 8434 パヨーガシッディ・パータ 8435 ヴットーダヤ・パータ 8436 アビダーナッパディーピカー・パータ 8437 アビダーナッパディーピカー・ティーカー 8438 スボーダーランカーラ・パータ 8439 スボーダーランカーラ・ティーカー 8440 バーラーヴァターラ・ガンティパダッタヴィニッチャヤサーラ 8446 カヴィダッパナニーティ 8447 ニーティマンジャリー 8445 ダンマニーティ 8444 マハーラハニーティ 8441 ローカニーティ 8442 スタンタニーティ 8443 スーラッサティニーティ 8450 チャーナキャニーティ 8448 ナラダッカディーパニー 8449 チャトゥラーラッカディーパニー 8451 ラサヴァーヒニー 8452 シーマヴィソーダニー・パータ 8453 ヴェッサンタラ・ギーティ 8454 モッガラーナ・ヴッティヴィヴァラナパンチカー 8455 トゥーパヴァンサ 8456 ダーターヴァンサ 8457 ダートゥパータヴィラーヴィシニヤー 8458 ダートゥヴァンサ 8459 ハッタヴァナッガラヴィハーラヴァンサ 8460 ジナチャリタヤ 8461 ジナヴァンサディーパン 8462 テーラカターガーター 8463 ミリダ・ティーカー 8464 パダマンジャリー 8465 パダサーダナン 8466 サッダビンドゥパカラナン 8467 カッチャーヤナ・ダートゥマンジューサー 8468 サーマンタクータ・ヴァンナナー |
| 2101 シーラッカンダワッガ・パーリ 2102 マハーワッガ・パーリ(ディーガ) 2103 パーティカワッガ・パーリ | 2201 シーラッカンダワッガ・アッタカター 2202 マハーワッガ・アッタカター(ディーガ) 2203 パーティカワッガ・アッタカター | 2301 シーラッカンダワッガ・ティーカー 2302 マハーワッガ・ティーカー(ディーガ) 2303 パーティカワッガ・ティーカー 2304 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-1 2305 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-2 | |
| 3101 ムーラパンナーサ・パーリ 3102 マッジマパンナーサ・パーリ 3103 ウパリパンナーサ・パーリ | 3201 ムーラパンナーサ・アッタカター-1 3202 ムーラパンナーサ・アッタカター-2 3203 マッジマパンナーサ・アッタカター 3204 ウパリパンナーサ・アッタカター | 3301 ムーラパンナーサ・ティーカー 3302 マッジマパンナーサ・ティーカー 3303 ウパリパンナーサ・ティーカー | |
| 4101 サガーター・ワッガ・パーリ 4102 ニダーナ・ワッガ・パーリ 4103 カンダ・ワッガ・パーリ 4104 サラーヤタナ・ワッガ・パーリ 4105 マハーワッガ・パーリ(サンユッタ) | 4201 サガーター・ワッガ・アッタカター 4202 ニダーナ・ワッガ・アッタカター 4203 カンダ・ワッガ・アッタカター 4204 サラーヤタナ・ワッガ・アッタカター 4205 マハーワッガ・アッタカター(サンユッタ) | 4301 サガーター・ワッガ・ティーカー 4302 ニダーナ・ワッガ・ティーカー 4303 カンダ・ワッガ・ティーカー 4304 サラーヤタナ・ワッガ・ティーカー 4305 マハーワッガ・ティーカー(サンユッタ) | |
| 5101 エーカカニパータ・パーリ 5102 ドゥカニパータ・パーリ 5103 ティカニパータ・パーリ 5104 チャトゥッカニパータ・パーリ 5105 パンチャカニパータ・パーリ 5106 チャッカニパータ・パーリ 5107 サッタカニパータ・パーリ 5108 アッタカーディニパータ・パーリ 5109 ナヴァカニパータ・パーリ 5110 ダサカニパータ・パーリ 5111 エーカーダサカニパータ・パーリ | 5201 エーカカニパータ・アッタカター 5202 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・アッタカター 5203 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・アッタカター 5204 アッタカーディニパータ・アッタカター | 5301 エーカカニパータ・ティーカー 5302 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・ティーカー 5303 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・ティーカー 5304 アッタカーディニパータ・ティーカー | |
| 6101 クッダカパータ・パーリ 6102 ダンマパダ・パーリ 6103 ウダーナ・パーリ 6104 イティヴッタカ・パーリ 6105 スッタニパータ・パーリ 6106 ヴィマーナヴァットゥ・パーリ 6107 ペーヴァットゥ・パーリ 6108 テーラガーター・パーリ 6109 テーリーガーター・パーリ 6110 アパダーナ・パーリ-1 6111 アパダーナ・パーリ-2 6112 ブッダヴァンサ・パーリ 6113 チャリヤーピタカ・パーリ 6114 ジャータカ・パーリ-1 6115 ジャータカ・パーリ-2 6116 マハーニッデーサ・パーリ 6117 チューラニッデーサ・パーリ 6118 パティサンビダーマッガ・パーリ 6119 ネッティッパカラナ・パーリ 6120 ミリンダパンハ・パーリ 6121 ペータコーパデーサ・パーリ | 6201 クッダカパータ・アッタカター 6202 ダンマパダ・アッタカター-1 6203 ダンマパダ・アッタカター-2 6204 ウダーナ・アッタカター 6205 イティヴッタカ・アッタカター 6206 スッタニパータ・アッタカター-1 6207 スッタニパータ・アッタカター-2 6208 ヴィマーナヴァットゥ・アッタカター 6209 ペータヴァットゥ・アッタカター 6210 テーラガーター・アッタカター-1 6211 テーラガーター・アッタカター-2 6212 テーリーガーター・アッタカター 6213 アパダーナ・アッタカター-1 6214 アパダーナ・アッタカター-2 6215 ブッダヴァンサ・アッタカター 6216 チャリヤーピタカ・アッタカター 6217 ジャータカ・アッタカター-1 6218 ジャータカ・アッタカター-2 6219 ジャータカ・アッタカター-3 6220 ジャータカ・アッタカター-4 6221 ジャータカ・アッタカター-5 6222 ジャータカ・アッタカター-6 6223 ジャータカ・アッタカター-7 6224 マハーニッデーサ・アッタカター 6225 チューラニッデーサ・アッタカター 6226 パティサンビダーマッガ・アッタカター-1 6227 パティサンビダーマッガ・アッタカター-2 6228 ネッティッパカラナ・アッタカター | 6301 ネッティッパカラナ・ティーカー 6302 ネッティヴィバーヴィニー | |
| 7101 ダンマサンガニー・パーリ 7102 ヴィバンガ・パーリ 7103 ダートゥカター・パーリ 7104 プッガラパンニャッティ・パーリ 7105 カター・ヴァットゥ・パーリ 7106 ヤマカ・パーリ-1 7107 ヤマカ・パーリ-2 7108 ヤマカ・パーリ-3 7109 パッターナ・パーリ-1 7110 パッターナ・パーリ-2 7111 パッターナ・パーリ-3 7112 パッターナ・パーリ-4 7113 パッターナ・パーリ-5 | 7201 ダンマサンガニ・アッタカター 7202 サンモーハヴィノーダニー・アッタカター 7203 パンチャパカラナ・アッタカター | 7301 ダンマサンガニー・ムーラティーカー 7302 ヴィバンガ・ムーラティーカー 7303 パンチャパカラナ・ムーラティーカー 7304 ダンマサンガニー・アヌティーカー 7305 パンチャパカラナ・アヌティーカー 7306 アビダンマーヴァターロ・ナーマルーパパリッチェード 7307 アビダンマッタ・サンガホ 7308 アビダンマーヴァターラ・プラーナティーカー 7309 アビダンマ・マーティカーパーリ | |
| ខ្មែរ | |||
| ព្រះត្រៃបិដកបាលី | អដ្ឋកថា | ដីកា | ផ្សេងទៀត |
| 1101 បារាជិកបាឡិ 1102 បាចិត្តិយបាឡិ 1103 មហាវគ្គបាឡិ (វិន័យ) 1104 ចូឡវគ្គបាឡិ 1105 បរិវារបាឡិ | 1201 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-១ 1202 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-២ 1203 បាចិត្តិយអដ្ឋកថា 1204 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (វិន័យ) 1205 ចូឡវគ្គអដ្ឋកថា 1206 បរិវារអដ្ឋកថា | 1301 សារត្ថទីបនីដីកា-១ 1302 សារត្ថទីបនីដីកា-២ 1303 សារត្ថទីបនីដីកា-៣ | 1401 ទ្វេមាតិកាបាឡិ 1402 វិនយសង្គហអដ្ឋកថា 1403 វជិរពុទ្ធិដីកា 1404 វិមតិវិនោទនីដីកា-១ 1405 វិមតិវិនោទនីដីកា-២ 1406 វិនយាលង្ការដីកា-១ 1407 វិនយាលង្ការដីកា-២ 1408 កង្ខាវិតរណីបុរាណដីកា 1409 វិនយវិនិច្ឆយ-ឧត្តរវិនិច្ឆយ 1410 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-១ 1411 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-២ 1412 បាចិត្យាទិយោជនាបាឡិ 1413 ខុទ្ទសិក្ខា-មូលសិក្ខា 8401 វិសុទ្ធិមគ្គ-១ 8402 វិសុទ្ធិមគ្គ-២ 8403 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-១ 8404 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-២ 8405 វិសុទ្ធិមគ្គ និទានកថា 8406 ទីឃនិកាយ (បុ-វិ) 8407 មជ្ឈិមនិកាយ (បុ-វិ) 8408 សំយុត្តនិកាយ (បុ-វិ) 8409 អង្គុត្តរនិកាយ (បុ-វិ) 8410 វិនយបិដក (បុ-វិ) 8411 អភិធម្មបិដក (បុ-វិ) 8412 អដ្ឋកថា (បុ-វិ) 8413 និរុត្តិទីបនី 8414 បរមត្ថទីបនី សង្គហមហាដីកាបាឋ 8415 អនុទីបនីបាឋ 8416 បដ្ឋានុទ្ទេស ទីបនីបាឋ 8417 នមក្ការដីកា 8418 មហាបណាមបាឋ 8419 លក្ខណាតោ ពុទ្ធថោមនាគាថា 8420 សុតវន្ទនា 8421 កមលាញ្ជលិ 8422 ជិនាលង្ការ 8423 បជ្ជមធុ 8424 ពុទ្ធគុណគាថាវលី 8425 ចូឡគន្ថវង្ស 8427 សាសនវង្ស 8426 មហាវង្ស 8429 មោគ្គល្លានព្យាករណំ 8428 កច្ចាយនព្យាករណំ 8430 សទ្ទនីតិប្បករណំ (បទមាលា) 8431 សទ្ទនីតិប្បករណំ (ធាតុមាលា) 8432 បទរូបសិទ្ធិ 8433 មោគ្គល្លានបញ្ចិកា 8434 បយោគសិទ្ធិបាឋ 8435 វុត្តោទយបាឋ 8436 អភិធានប្បទីបិកាបាឋ 8437 អភិធានប្បទីបិកាដីកា 8438 សុពោធាលង្ការបាឋ 8439 សុពោធាលង្ការដីកា 8440 បាលាវតារ គណ្ឋិបទត្ថវិនិច្ឆយសារ 8446 កវិទប្បណនីតិ 8447 នីតិមញ្ជរី 8445 ធម្មនីតិ 8444 មហារហនីតិ 8441 លោកនីតិ 8442 សុត្តន្តនីតិ 8443 សូរស្សតិនីតិ 8450 ចាណក្យនីតិ 8448 នរទក្ខទីបនី 8449 ចតុរារក្ខទីបនី 8451 រសវាហិនី 8452 សីមវិសោធនីបាឋ 8453 វេស្សន្តរគីតិ 8454 មោគ្គល្លាន វុត្តិវិវរណបញ្ចិកា 8455 ថូបវង្ស 8456 ទាឋាវង្ស 8457 ធាតុបាឋវិលាសិនិយា 8458 ធាតុវង្ស 8459 ហត្ថវនគល្លវិហារវង្ស 8460 ជិនចរិតយ 8461 ជិនវង្សទីបំ 8462 តេលកដាហគាថា 8463 មិលិទដីកា 8464 បទមញ្ជរី 8465 បទសាធនំ 8466 សទ្ទពិន្ទុបករណំ 8467 កច្ចាយនធាតុមញ្ជុសា 8468 សាមន្តកូដវណ្ណនា |
| 2101 សីលក្ខន្ធវគ្គបាឡិ 2102 មហាវគ្គបាឡិ (ទីឃ) 2103 បាថិកវគ្គបាឡិ | 2201 សីលក្ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 2202 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (ទីឃ) 2203 បាថិកវគ្គអដ្ឋកថា | 2301 សីលក្ខន្ធវគ្គដីកា 2302 មហាវគ្គដីកា (ទីឃ) 2303 បាថិកវគ្គដីកា 2304 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-១ 2305 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-២ | |
| 3101 មូលបណ្ណាសបាឡិ 3102 មជ្ឈិមបណ្ណាសបាឡិ 3103 ឧបរិបណ្ណាសបាឡិ | 3201 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-១ 3202 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-២ 3203 មជ្ឈិមបណ្ណាសអដ្ឋកថា 3204 ឧបរិបណ្ណាសអដ្ឋកថា | 3301 មូលបណ្ណាសដីកា 3302 មជ្ឈិមបណ្ណាសដីកា 3303 ឧបរិបណ្ណាសដីកា | |
| 4101 សគាថាវគ្គបាឡិ 4102 និទានវគ្គបាឡិ 4103 ខន្ធវគ្គបាឡិ 4104 សឡាយតនវគ្គបាឡិ 4105 មហាវគ្គបាឡិ (សំយុត្ត) | 4201 សគាថាវគ្គអដ្ឋកថា 4202 និទានវគ្គអដ្ឋកថា 4203 ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 4204 សឡាយតនវគ្គអដ្ឋកថា 4205 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (សំយុត្ត) | 4301 សគាថាវគ្គដីកា 4302 និទានវគ្គដីកា 4303 ខន្ធវគ្គដីកា 4304 សឡាយតនវគ្គដីកា 4305 មហាវគ្គដីកា (សំយុត្ត) | |
| 5101 ឯកកនិបាតបាឡិ 5102 ទុកនិបាតបាឡិ 5103 តិកនិបាតបាឡិ 5104 ចតុក្កនិបាតបាឡិ 5105 បញ្ចកនិបាតបាឡិ 5106 ឆក្កនិបាតបាឡិ 5107 សត្តកនិបាតបាឡិ 5108 អដ្ឋកាទិនិបាតបាឡិ 5109 នវកនិបាតបាឡិ 5110 ទសកនិបាតបាឡិ 5111 ឯកាទសកនិបាតបាឡិ | 5201 ឯកកនិបាតអដ្ឋកថា 5202 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតអដ្ឋកថា 5203 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតអដ្ឋកថា 5204 អដ្ឋកាទិនិបាតអដ្ឋកថា | 5301 ឯកកនិបាតដីកា 5302 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតដីកា 5303 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតដីកា 5304 អដ្ឋកាទិនិបាតដីកា | |
| 6101 ខុទ្ទកបាឋបាឡិ 6102 ធម្មបទបាឡិ 6103 ឧទានបាឡិ 6104 ឥតិវុត្តកបាឡិ 6105 សុត្តនិបាតបាឡិ 6106 វិមានវត្ថុបាឡិ 6107 បេតវត្ថុបាឡិ 6108 ថេរគាថាបាឡិ 6109 ថេរីគាថាបាឡិ 6110 អបទានបាឡិ-១ 6111 អបទានបាឡិ-២ 6112 ពុទ្ធវង្សបាឡិ 6113 ចរិយាបិដកបាឡិ 6114 ជាតកបាឡិ-១ 6115 ជាតកបាឡិ-២ 6116 មហានិទ្ទេសបាឡិ 6117 ចូឡនិទ្ទេសបាឡិ 6118 បដិសម្ភិទាមគ្គបាឡិ 6119 នេត្តិប្បករណបាឡិ 6120 មិលិន្ទបញ្ហាបាឡិ 6121 បេដកោបទេសបាឡិ | 6201 ខុទ្ទកបាឋអដ្ឋកថា 6202 ធម្មបទអដ្ឋកថា-១ 6203 ធម្មបទអដ្ឋកថា-២ 6204 ឧទានអដ្ឋកថា 6205 ឥតិវុត្តកអដ្ឋកថា 6206 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-១ 6207 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-២ 6208 វិមានវត្ថុអដ្ឋកថា 6209 បេតវត្ថុអដ្ឋកថា 6210 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-១ 6211 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-២ 6212 ថេរីគាថាអដ្ឋកថា 6213 អបទានអដ្ឋកថា-១ 6214 អបទានអដ្ឋកថា-២ 6215 ពុទ្ធវង្សអដ្ឋកថា 6216 ចរិយាបិដកអដ្ឋកថា 6217 ជាតកអដ្ឋកថា-១ 6218 ជាតកអដ្ឋកថា-២ 6219 ជាតកអដ្ឋកថា-៣ 6220 ជាតកអដ្ឋកថា-៤ 6221 ជាតកអដ្ឋកថា-៥ 6222 ជាតកអដ្ឋកថា-៦ 6223 ជាតកអដ្ឋកថា-៧ 6224 មហានិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6225 ចូឡនិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6226 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-១ 6227 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-២ 6228 នេត្តិប្បករណអដ្ឋកថា | 6301 នេត្តិប្បករណដីកា 6302 នេត្តិវិភាវិនី | |
| 7101 ធម្មសង្គណីបាឡិ 7102 វិភង្គបាឡិ 7103 ធាតុកថាបាឡិ 7104 បុគ្គលបញ្ញត្តិបាឡិ 7105 កថាវត្ថុបាឡិ 7106 យមកបាឡិ-១ 7107 យមកបាឡិ-២ 7108 យមកបាឡិ-៣ 7109 បដ្ឋានបាឡិ-១ 7110 បដ្ឋានបាឡិ-២ 7111 បដ្ឋានបាឡិ-៣ 7112 បដ្ឋានបាឡិ-៤ 7113 បដ្ឋានបាឡិ-៥ | 7201 ធម្មសង្គណិអដ្ឋកថា 7202 សម្មោហវិនោទនីអដ្ឋកថា 7203 បញ្ចបករណអដ្ឋកថា | 7301 ធម្មសង្គណី-មូលដីកា 7302 វិភង្គ-មូលដីកា 7303 បញ្ចបករណ-មូលដីកា 7304 ធម្មសង្គណី-អនុដីកា 7305 បញ្ចបករណ-អនុដីកា 7306 អភិធម្មាវតារោ-នាមរូបបរិច្ឆេទោ 7307 អភិធម្មត្ថសង្គហោ 7308 អភិធម្មាវតារ-បុរាណដីកា 7309 អភិធម្មមាតិកាបាឡិ | |
| 한국인 | |||
| 팔리 대장경 | 주석서 | 부주석서 | 기타 |
| 1101 빠라지카 빨리 1102 빠찟띠야 빨리 1103 마하왁가 빨리 (비나야) 1104 출라왁가 빨리 1105 빠리와라 빨리 | 1201 빠라지까깐다 앗타카타-1 1202 빠라지까깐다 앗타카타-2 1203 빠찟띠야 앗타카타 1204 마하왁가 앗타카타 (비나야) 1205 출라왁가 앗타카타 1206 빠리와라 앗타카타 | 1301 사랏타디빠니 띠까-1 1302 사랏타디빠니 띠까-2 1303 사랏타디빠니 띠까-3 | 1401 드베마띠까빨리 1402 위나야상가하 앗타카타 1403 와지라붓디 띠까 1404 위마띠위노다니 띠까-1 1405 위마띠위노다니 띠까-2 1406 위나야랑까라 띠까-1 1407 위나야랑까라 띠까-2 1408 깡카위따라니뿌라나 띠까 1409 위나야위닛차야-웃따라위닛차야 1410 위나야위닛차야 띠까-1 1411 위나야위닛차야 띠까-2 1412 빠찟땨디요자나빨리 1413 쿳닷시카-물라시카 8401 위숟디막가-1 8402 위숟디막가-2 8403 위숟디막가-마하띠까-1 8404 위숟디막가-마하띠까-2 8405 위숟디막가 니다나까타 8406 디가니까야 (뿌-위) 8407 맛지마니까야 (뿌-위) 8408 삼윳따니까야 (뿌-위) 8409 앙굳따라니까야 (뿌-위) 8410 위나야삐따까 (뿌-위) 8411 아비담마삐따까 (뿌-위) 8412 앗타카타 (뿌-위) 8413 니룻띠디빠니 8414 빠라맛타디빠니 상가하마하띠까빠타 8415 아누디빠니빠타 8416 빳타누ㄸ데사 디빠니빠타 8417 나막까라띠까 8418 마하빠나마빠타 8419 락카나또 붓다토마나가타 8420 수타완다나 8421 까말란자리 8422 지나랑까라 8423 빳자마두 8424 붓다구나가타왈리 8425 출라간타왕사 8427 사사나왕사 8426 마하왕사 8429 목갈라나뱌까라낭 8428 깟차야나뱌까라낭 8430 삿다니띠빠까라낭 (빠다말라) 8431 삿다니띠빠까라낭 (다두말라) 8432 빠다루빠싣디 8433 목갈라나빤찌까 8434 빠요가싣디빠타 8435 붇또다야빠타 8436 아비다나빠디피까빠타 8437 아비다나빠디피까띠까 8438 수보다랑까라빠타 8439 수보다랑까라띠까 8440 발라와따라 간티빠닷타위닛차야사라 8446 까위닷빠나니띠 8447 니띠만자리 8445 담마니띠 8444 마하라하니띠 8441 로까니띠 8442 숫딴따니띠 8443 수랏사띠니띠 8450 짜낙야니띠 8448 나라닥카디빠니 8449 짜뚜라락카디빠니 8451 라사와히니 8452 시마위소다니빠타 8453 웨산따라기띠 8454 목갈라나 붇띠위와라나빤찌까 8455 투빠왕사 8456 다타왕사 8457 다두빠타윌라시니야 8458 다두왕사 8459 핟타와나갈라위하라왕사 8460 지나짜리따야 8461 지나왕사디빵 8462 떼라까타하가타 8463 밀리다띠까 8464 빠다만자리 8465 빠다사다낭 8466 삿다빈두빠까라낭 8467 깟차야나다두만주사 8468 사만따꿋타완나나 |
| 2101 실락칸다왁가 빨리 2102 마하왁가 빨리 (디가) 2103 빠티까왁가 빨리 | 2201 실락칸다왁가 앗타카타 2202 마하왁가 앗타카타 (디가) 2203 빠티까왁가 앗타카타 | 2301 실락칸다왁가 띠까 2302 마하왁가 띠까 (디가) 2303 빠티까왁가 띠까 2304 실락칸다왁가-아비나와띠까-1 2305 실락칸다왁가-아비나와띠까-2 | |
| 3101 물라빤나사 빨리 3102 맛지마빤나사 빨리 3103 우빠리빤나사 빨리 | 3201 물라빤나사 앗타카타-1 3202 물라빤나사 앗타카타-2 3203 맛지마빤나사 앗타카타 3204 우빠리빤나사 앗타카타 | 3301 물라빤나사 띠까 3302 맛지마빤나사 띠까 3303 우빠리빤나사 띠까 | |
| 4101 사가타왁가 빨리 4102 니다나왁가 빨리 4103 칸다왁가 빨리 4104 살라야따나왁가 빨리 4105 마하왁가 빨리 (삼윳따) | 4201 사가타왁가 앗타카타 4202 니다나왁가 앗타카타 4203 칸다왁가 앗타카타 4204 살라야따나왁가 앗타카타 4205 마하왁가 앗타카타 (삼윳따) | 4301 사가타왁가 띠까 4302 니다나왁가 띠까 4303 칸다왁가 띠까 4304 살라야따나왁가 띠까 4305 마하왁가 띠까 (삼윳따) | |
| 5101 에까까니빠따 빨리 5102 두까니빠따 빨리 5103 띠까니빠따 빨리 5104 짜뚝까니빠따 빨리 5105 빤짜까니빠따 빨리 5106 착까니빠따 빨리 5107 삿따까니빠따 빨리 5108 앗타까디니빠따 빨리 5109 나와까니빠따 빨리 5110 다사까니빠따 빨리 5111 에까다사까니빠따 빨리 | 5201 에까까니빠따 앗타카타 5202 두까-띠까-짜뚝까니빠따 앗타카타 5203 빤짜까-착까-삿따까니빠따 앗타카타 5204 앗타까디니빠따 앗타카타 | 5301 에까까니빠따 띠까 5302 두까-띠까-짜뚝까니빠따 띠까 5303 빤짜까-착까-삿따까니빠따 띠까 5304 앗타까디니빠따 띠까 | |
| 6101 쿳닥까빠타 빨리 6102 담마빠다 빨리 6103 우다나 빨리 6104 이띠웃따까 빨리 6105 숫따니빠따 빨리 6106 위마나왓투 빨리 6107 베따왓투 빨리 6108 테라가타 빨리 6109 테리가타 빨리 6110 아빠다나 빨리-1 6111 아빠다나 빨리-2 6112 붓다왕사 빨리 6113 짜리야삐따까 빨리 6114 자따까 빨리-1 6115 자따까 빨리-2 6116 마하닷데사 빨리 6117 출라닷데사 빨리 6118 빠티삼비다막가 빨리 6119 넷띠빠까라나 빨리 6120 밀린다빤하 빨리 6121 뻬따꼬빠데사 빨리 | 6201 쿳닥까빠타 앗타카타 6202 담마빠다 앗타카타-1 6203 담마빠다 앗타카타-2 6204 우다나 앗타카타 6205 이띠웃따까 앗타카타 6206 숫따니빠따 앗타카타-1 6207 숫따니빠따 앗타카타-2 6208 위마나왓투 앗타카타 6209 베따왓투 앗타카타 6210 테라가타 앗타카타-1 6211 테라가타 앗타카타-2 6212 테리가타 앗타카타 6213 아빠다나 앗타카타-1 6214 아빠다나 앗타카타-2 6215 붓다왕사 앗타카타 6216 짜리야삐따까 앗타카타 6217 자따까 앗타카타-1 6218 자따까 앗타카타-2 6219 자따까 앗타카타-3 6220 자따까 앗타카타-4 6221 자따까 앗타카타-5 6222 자따까 앗타카타-6 6223 자따까 앗타카타-7 6224 마하닷데사 앗타카타 6225 출라닷데사 앗타카타 6226 빠티삼비다막가 앗타카타-1 6227 빠티삼비다막가 앗타카타-2 6228 넷띠빠까라나 앗타카타 | 6301 넷띠빠까라나 띠까 6302 넷띠위바비니 | |
| 7101 담마상가니 빨리 7102 위방가 빨리 7103 다뚜까타 빨리 7104 뿍갈라빤냣띠 빨리 7105 까타왓투 빨리 7106 야마까 빨리-1 7107 야마까 빨리-2 7108 야마까 빨리-3 7109 빳타나 빨리-1 7110 빳타나 빨리-2 7111 빳타나 빨리-3 7112 빳타나 빨리-4 7113 빳타나 빨리-5 | 7201 담마상가니 앗타카타 7202 삼모하위노다니 앗타카타 7203 빤짜빠까라나 앗타카타 | 7301 담마상가니-물라띠까 7302 위방가-물라띠까 7303 빤짜빠까라나-물라띠까 7304 담마상가니-아누띠까 7305 빤짜빠까라나-아누띠까 7306 아비담마와따로-나마루빠빠릳체도 7307 아비담맛타상가호 7308 아비담마와따라-뿌라나띠까 7309 아비담마마띠까빨리 | |
| ອັກສອນລາວ | |||
| ປາລີ | ອັດຖະກະຖາ | ຏີກາ | ອັນຍາ |
| 1101 ປາຣາຊິກະ ປາລີ 1102 ປາຈິດຕິຍະ ປາລີ 1103 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ວິໄນ) 1104 ຈູລະວັກຄະ ປາລີ 1105 ປະລິວາລະ ປາລີ | 1201 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-1 1202 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-2 1203 ປາຈິດຕິຍະ ອັດຖະກະຖາ 1204 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ວິໄນ) 1205 ຈູລະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 1206 ປະລິວາລະ ອັດຖະກະຖາ | 1301 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-1 1302 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-2 1303 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-3 | 1401 ທເວມາຕິກາປາລີ 1402 ວິນະຍະສັງຄະຫະ ອັດຖະກະຖາ 1403 ວະຊິລະພຸດທິ ຏີກາ 1404 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-1 1405 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-2 1406 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-1 1407 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-2 1408 ກັງຂາວິຕະຣະນີປຸຣານະ ຏີກາ 1409 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ-ອຸຕຕະຣະວິນິດສະຍະ 1410 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-1 1411 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-2 1412 ປາຈິຕະຍາທິໂຍຊະນາປາລີ 1413 ຂຸທະທະສິກຂາ-ມູລະສິກຂາ 8401 ວິສຸດທິມັກຄະ-1 8402 ວິສຸດທິມັກຄະ-2 8403 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-1 8404 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-2 8405 ວິສຸດທິມັກຄະ ນິທານະກະຖາ 8406 ທີຆະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8407 ມັດຊິມະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8408 ສັງຍຸຕຕະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8409 ອັງຄຸຕຕະລະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8410 ວິນະຍະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8411 ອະພິທັມມະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8412 ອັດຖະກະຖາ (ປຸ-ວິ) 8413 ນິລຸຕຕິທີປະນີ 8414 ປະຣະມັດຖະທີປະນີ ສັງຄະຫະມະຫາຏີກາປາຖະ 8415 ອະນຸທີປະນີປາຖະ 8416 ປັດຖານຸທເທສະ ທີປະນີປາຖະ 8417 ນະມັກກາລະຏີກາ 8418 ມະຫາປະຖາມະປາຖະ 8419 ລັກຂະນາໂຕ ພຸດທະຖະມະນາຄາຖາ 8420 ສຸຕະວັນທະນາ 8421 ກະມະລາຍຈະລິ 8422 ຊິນາລັງກາລະ 8423 ປັດຊະມະທຸ 8424 ພຸດທະຄຸນະຄາຖາວະລີ 8425 ຈູລະຄັນຖະວັງສະ 8426 ມະຫາວັງສະ 8427 ສາສະນະວັງສະ 8428 ກັດຈາຍະນະພະຍາກະລະນັງ 8429 ມົກຄັນທານະພະຍາກະລະນັງ 8430 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ປະທະມາລາ) 8431 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ຘາຕຸມາລາ) 8432 ປະທະຣູປະສິດທິ 8433 ໂມຄັນທານະປັນຈິກາ 8434 ປະໂຍຄະສິດທິປາຖະ 8435 ວຸຕະໂທຍະປາຖະ 8436 ອະພິທານະປະປະທີປິກາປາຖະ 8437 ອະພິທານະປະປະທີປິກາຏີກາ 8438 ສຸໂພທາລັງກາລະປາຖະ 8439 ສຸໂພທາລັງກາລະຏີກາ 8440 ພາລາວະຕາລະ ຄັນຖິປະທັດຖະວິນິດສະຍະສາລະ 8441 ໂລກະນີຕິ 8442 ສຸດຕັນຕະນີຕິ 8443 ສູລັດສະຕິນີຕິ 8444 ມະຫາລະຫະນີຕິ 8445 ທັມມະນີຕິ 8446 ກະວິທັບປະຖານີຕິ 8447 ນີຕິມັນຊະລີ 8448 ນະລະທັກຂະທີປະນີ 8449 ຈະຕຸຣາລັກຂະທີປະນີ 8450 ຈານັກຍະນີຕິ 8451 ລະສະວາຫິນີ 8452 ສີມາວິໂສທະນີປາຖະ 8453 ເວສສັນຕະລະຄີຕິ 8454 ໂມຄັນທານະ ວຸຕຕິວິວະລະນະປັນຈິກາ 8455 ຖູປະວັງສະ 8456 ທາຐາວັງສະ 8457 ຘາຕຸປາຖະວິລາສິນີຍາ 8458 ຘາຕຸວັງສະ 8459 ຫັດຖະວະນະຄັນລະວິຫາລະວັງສະ 8460 ຊິນະຈະລິຕະຍະ 8461 ຊິນະວັງສະທີປັງ 8462 ເຕລະກະຕາຫາຄາຖາ 8463 ມິລິທະຏີກາ 8464 ປະທະມັນຊະລີ 8465 ປະທະສາຘະນັງ 8466 ສັດທະພິນທຸປະກະລະນັງ 8467 ກັດຈາຍະນະຘາຕຸມັນຊຸສາ 8468 ສາມັນຕະກູຏະວັນນະນາ |
| 2101 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 2102 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ທີຆະ) 2103 ປາຖິກະວັກຄະ ປາລີ | 2201 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 2202 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ທີຆະ) 2203 ປາຖິກະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ | 2301 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 2302 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ທີຆະ) 2303 ປາຖິກະວັກຄະ ຏີກາ 2304 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-1 2305 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-2 | |
| 3101 ມູລະປັນຍາສະ ປາລີ 3102 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ປາລີ 3103 ອຸປະລິປັນຍາສະ ປາລີ | 3201 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-1 3202 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-2 3203 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ 3204 ອຸປະລິປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ | 3301 ມູລະປັນຍາສະ ຏີກາ 3302 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ຏີກາ 3303 ອຸປະລິປັນຍາສະ ຏີກາ | |
| 4101 ສະຄາຖາວັກຄະ ປາລີ 4102 ນິທານະວັກຄະ ປາລີ 4103 ຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 4104 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ປາລີ 4105 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4201 ສະຄາຖາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4202 ນິທານະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4203 ຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4204 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4205 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4301 ສະຄາຖາວັກຄະ ຏີກາ 4302 ນິທານະວັກຄະ ຏີກາ 4303 ຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 4304 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ຏີກາ 4305 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ສັງຍຸຕຕະ) | |
| 5101 ເອກະກະນິປາຕະ ປາລີ 5102 ທຸກະນິປາຕະ ປາລີ 5103 ຕິກະນິປາຕະ ປາລີ 5104 ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ປາລີ 5105 ປັຈຈະກະນິປາຕະ ປາລີ 5106 ຉັກກະນິປາຕະ ປາລີ 5107 ສັດຕະກະນິປາຕະ ປາລີ 5108 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ປາລີ 5109 ນະວະກະນິປາຕະ ປາລີ 5110 ທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ 5111 ເອກາທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ | 5201 ເອກະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5202 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5203 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5204 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ | 5301 ເອກະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5302 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ຏີກາ 5303 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5304 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ຏີກາ | |
| 6101 ຂຸທະທະກະປາຖະ ປາລີ 6102 ທຳມະປະທະ ປາລີ 6103 ອຸທານະ ປາລີ 6104 ອິຕິວຸຕຕະກະ ປາລີ 6105 ສຸດຕະນິປາຕະ ປາລີ 6106 ວິມານະວັດຖຸ ປາລີ 6107 ເປຕະວັດຖຸ ປາລີ 6108 ເຖລະຄາຖາ ປາລີ 6109 ເຖລີຄາຖາ ປາລີ 6110 ອະປະທານະ ປາລີ-1 6111 ອະປະທານະ ປາລີ-2 6112 ພຸດທະວັງສະ ປາລີ 6113 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ປາລີ 6114 ຊາຕະກະ ປາລີ-1 6115 ຊາຕະກະ ປາລີ-2 6116 ມະຫານິທເທສະ ປາລີ 6117 ຈູລະນິທເທສະ ປາລີ 6118 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ປາລີ 6119 ເນຕຕິປະກະລະນະ ປາລີ 6120 ມິລິນທະປັນຫາ ປາລີ 6121 ເປຏະກົປເທສະ ປາລີ | 6201 ຂຸທະທະກະປາຖະ ອັດຖະກະຖາ 6202 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-1 6203 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-2 6204 ອຸທານະ ອັດຖະກະຖາ 6205 ອິຕິວຸຕຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6206 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-1 6207 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-2 6208 ວິມານະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6209 ເປຕະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6210 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-1 6211 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-2 6212 ເຖລີຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ 6213 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-1 6214 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-2 6215 ພຸດທະວັງສະ ອັດຖະກະຖາ 6216 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6217 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-1 6218 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-2 6219 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-3 6220 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-4 6221 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-5 6222 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-6 6223 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-7 6224 ມະຫານິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6225 ຈູລະນິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6226 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-1 6227 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-2 6228 ເນຕຕິປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 6301 ເນຕຕິປະກະລະນະ ຏີກາ 6302 ເນຕຕິວິພາວິນີ | |
| 7101 ທຳມະສັງຄະນີ ປາລີ 7102 ວິພັງຄະ ປາລີ 7103 ຘາຕຸກະຖາ ປາລີ 7104 ປຸກຄະລະປັນຍັດຕິ ປາລີ 7105 ກະຖາວັດຖຸ ປາລີ 7106 ຍະມະກະ ປາລີ-1 7107 ຍະມະກະ ປາລີ-2 7108 ຍະມະກະ ປາລີ-3 7109 ປັດຖານະ ປາລີ-1 7110 ປັດຖານະ ປາລີ-2 7111 ປັດຖານະ ປາລີ-3 7112 ປັດຖານະ ປາລີ-4 7113 ປັດຖານະ ປາລີ-5 | 7201 ທຳມະສັງຄະນິ ອັດຖະກະຖາ 7202 ສັມໂມຫະວິໂນທະນີ ອັດຖະກະຖາ 7203 ປັຈຈະປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 7301 ທຳມະສັງຄະນີ-ມູລະຏີກາ 7302 ວິພັງຄະ-ມູລະຏີກາ 7303 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ມູລະຏີກາ 7304 ທຳມະສັງຄະນີ-ອະນຸຏີກາ 7305 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ອະນຸຏີກາ 7306 ອະພິທັມມາວະຕາໂຣ-ນາມະຣູປະປະຣິຈເທໂທ 7307 ອະພິທັມມັດຖະສັງຄະໂຫ 7308 ອະພິທັມມາວະຕາລະ-ປຸຣານະຏີກາ 7309 ອະພິທັມມາມາຕິກາປາລີ | |
| मराठी | |||
| पाळी | अट्ठकथा | टीका | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळी 1102 पाचित्तिय पाळी 1103 महावग्ग पाळी (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळी 1105 परिवार पाळी | 1201 पाराजिककंड अट्ठकथा-१ 1202 पाराजिककंड अट्ठकथा-२ 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-१ 1302 सारत्थदीपनी टीका-२ 1303 सारत्थदीपनी टीका-३ | 1401 द्वेमातिकापाळी 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-१ 1405 विमतिविनोदनी टीका-२ 1406 विनयालंकार टीका-१ 1407 विनयालंकार टीका-२ 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-१ 1411 विनयविनिच्छय टीका-२ 1412 पाचित्यादियोजनापाळी 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-१ 8402 विसुद्धिमग्ग-२ 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-१ 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-२ 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अंगुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी संगहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवंदना 8421 कमलांजलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगंथवंस 8426 महावंस 8427 सासनवंस 8428 कच्चायनव्याकरणं 8429 मोग्गल्लानव्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपंचिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गंठिपदत्थविनिच्छयसार 8441 लोकनीति 8442 सुत्तंतनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8444 महारहनीति 8445 धम्मनीति 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमंजरी 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8450 चाणक्यनीति 8451 रसवाहिनी 8452 सीमाविसोधनीपाठ 8453 वेस्संतरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपंचिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमंजरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिंदुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमंजुसा 8468 सामंतकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खंधवग्ग पाळी 2102 महावग्ग पाळी (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळी | 2201 सीलक्खंधवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खंधवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-१ 2305 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-२ | |
| 3101 मूलपण्णास पाळी 3102 मज्झिमपण्णास पाळी 3103 उपरिपण्णास पाळी | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-१ 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-२ 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळी 4102 निदानवग्ग पाळी 4103 खंधवग्ग पाळी 4104 सळायतनवग्ग पाळी 4105 महावग्ग पाळी (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खंधवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खंधवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळी 5102 दुकनिपात पाळी 5103 तिकनिपात पाळी 5104 चतुक्कनिपात पाळी 5105 पंचकनिपात पाळी 5106 छक्कनिपात पाळी 5107 सत्तकनिपात पाळी 5108 अट्ठकादिनिपात पाळी 5109 नवकनिपात पाळी 5110 दसकनिपात पाळी 5111 एकादसकनिपात पाळी | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळी 6102 धम्मपद पाळी 6103 उदान पाळी 6104 इतिवुत्तक पाळी 6105 सुत्तनिपात पाळी 6106 विमानवत्थु पाळी 6107 पेतवत्थु पाळी 6108 थेरगाथा पाळी 6109 थेरीगाथा पाळी 6110 अपदान पाळी-१ 6111 अपदान पाळी-२ 6112 बुद्धवंस पाळी 6113 चरियापिटक पाळी 6114 जातक पाळी-१ 6115 जातक पाळी-२ 6116 महानिद्देस पाळी 6117 चूळनिद्देस पाळी 6118 पटिसंभिदामग्ग पाळी 6119 नेत्तिप्पकरण पाळी 6120 मिलिंदपंह पाळी 6121 पेटकोपदेस पाळी | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-१ 6203 धम्मपद अट्ठकथा-२ 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-१ 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-२ 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-१ 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-२ 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-१ 6214 अपदान अट्ठकथा-२ 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-१ 6218 जातक अट्ठकथा-२ 6219 जातक अट्ठकथा-३ 6220 जातक अट्ठकथा-४ 6221 जातक अट्ठकथा-५ 6222 जातक अट्ठकथा-६ 6223 जातक अट्ठकथा-७ 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-१ 6227 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-२ 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसंगणी पाळी 7102 विभंग पाळी 7103 धातुकथा पाळी 7104 पुग्गलपंयत्ति पाळी 7105 कथावत्थु पाळी 7106 यमक पाळी-१ 7107 यमक पाळी-२ 7108 यमक पाळी-३ 7109 पट्ठान पाळी-१ 7110 पट्ठान पाळी-२ 7111 पट्ठान पाळी-३ 7112 पट्ठान पाळी-४ 7113 पट्ठान पाळी-५ | 7201 धम्मसंगणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पंचपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसंगणी-मूलटीका 7302 विभंग-मूलटीका 7303 पंचपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसंगणी-अनुटीका 7305 पंचपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसंगहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळी | |
นโม ตสฺส ภควโต อรหโต สมฺมาสมฺพุทฺธสฺส त्या भगवंत, अर्हत, सम्यक्संबुद्धांना माझा नमस्कार असो. อภิธานปฺปทีปิกา अभिधानप्पदीपिका พุทฺธปฺปณาโม बुद्धप्रणाम ๑. १. ตถาคโต [Pg.1] โย กรุณากโร กโร,ปยาต’โมสชฺช สุขปฺปทํ ปทํ; อกา ปรตฺถํ กลิสมฺภเว ภเว,นมามิ ตํ เกวลทุกฺกรํ กรํ. ज्या करुणाकर तथागतांनी सुखदायक अशा (निर्वाण) पदाला प्राप्त करून, या दोषांनी भरलेल्या संसारात परोपकार केला आणि अत्यंत दुष्कर कार्ये केली, त्या तथागतांना मी वंदन करतो. ธมฺมปฺปณาโม धम्मप्रणाम ๒. २. อปูชยุํ ยํ มุนิกุญฺชรา ชรา,รุชาทิมุตฺตา ยหิมุตฺตเร ตเร; ฐิตา ติวฏฺฏมฺพุนิธึ นรานรา,ตรึสุ ตํ ธมฺมมฆปฺปหํ ปหํ. ज्या जरा (वृद्धत्व) आणि व्याधी इत्यादींपासून मुक्त असलेल्या श्रेष्ठ धम्माची मुनिश्रेष्ठांनी पूजा केली, ज्या धम्माचा आश्रय घेऊन मनुष्य आणि देव या त्रिविध संसाररूपी महासागरातून पार झाले, त्या पापनाशक आणि सन्मार्ग दाखवणाऱ्या धम्माला मी वंदन करतो. สงฺฆปฺปณาโม संघप्रणाम ๓. ३. คตํ มุนินฺโท’รสสูนุตํ นุตํ,สุปุญฺญเขตฺตํ ภุวเน สุตํ สุตํ; คณมฺปิ ปาณีกตสํวรํ วรํ,สทา คุโณเฆน นิรนฺตร’นฺตรํ. मुनींद्रांचे (बुद्धांचे) औरस पुत्र असलेल्या, जगात उत्तम पुण्यक्षेत्र म्हणून प्रसिद्ध असलेल्या, इंद्रिय संवर धारण करणाऱ्या आणि सदा गुणांच्या समूहाने अंतर्बाह्य परिपूर्ण असलेल्या त्या श्रेष्ठ संघाला मी वंदन करतो. ปฏิญฺญา प्रतिज्ञा ๔. ४. นามลิงฺเคสุ โกสลฺล, มตฺถนิจฺฉยการณํ; ยโต มหพฺพลํ พุทฺธ, วจเน ปาฏวตฺถินํ. नाम (शब्द) आणि लिंग यांमधील कौशल्य हे अर्थ निश्चित करण्याचे कारण आहे, कारण बुद्धवचनांमध्ये प्राविण्य मिळवू इच्छिणाऱ्यांसाठी हे अत्यंत बलशाली साधन आहे. ๕. ५. นามลิงฺคานฺย’โต [Pg.2] พุทฺธ, ภาสิตสฺสา’รหานฺย’หํ; ทสฺสยนฺโต ปกาเสสฺส, มภิธานปฺปทีปิกํ. म्हणून, बुद्धवचनांसाठी उपयुक्त असलेले नाम आणि लिंग दर्शवत मी 'अभिधानप्पदीपिका' हा ग्रंथ रचत (प्रकाशित करत) आहे. ปริภาสา परिभाषा ๖. ६. ภิยฺโย รูปนฺตรา สาห, จริเยน จ กตฺถจิ; กฺวจา’ หจฺจวิธาเนน เญยฺยํ ถีปุนฺนปุํสกํ. बहुतांश वेळा शब्दाच्या रूपावरून, कधी सहचर्यावरून, तर कधी विशेष नियमांद्वारे स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंग ओळखावे. ๗. ७. อภินฺนลิงฺคานํเยว, ทฺวนฺโท จ, ลิงฺควาจกา; คาถาปาทนฺตมชฺฌฏฺฐา, ปุพฺพํ ยนฺตฺยปเร ปรํ. समान लिंग असलेल्या शब्दांचाच द्वंद्व समास होतो. गाथेच्या चरणाच्या शेवटी, मध्ये किंवा सुरुवातीला असलेले लिंगवाचक शब्द आधीच्या किंवा नंतरच्या शब्दांशी संबंधित असतात. ๘. ८. ปุมิตฺถิยํ ปทํ ทฺวีสุ, สพฺพลิงฺเค จ ตีสฺวิติ; อภิธานนฺตรารมฺเภ, เญยฺยํ ตฺว’นฺต มถาทิ จ. पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगासाठी 'द्वि' (दोन) हा शब्द आणि तिन्ही लिंगांसाठी 'त्रि' (तीन) हा शब्द समजावा. शब्दाच्या सुरुवातीला आणि शेवटी 'आदि' आणि 'अन्त' हे शब्द जाणावे. ๙. ९. ภิยฺโย ปโยค มาคมฺม, โสคเต อาคเม กฺวจิ; นิฆณฺฑุ ยุตฺติ ญฺจานีย, นามลิงฺคํ กถียตีติ. बहुतांश वेळा बौद्ध आगमांमधील प्रयोगांच्या आधारे, आणि निघंटू (कोश) व व्याकरणाच्या नियमांचा विचार करून येथे नाम आणि लिंग सांगितले जात आहे. ๑. สคฺคกณฺฑ १. सग्गकंड (स्वर्ग विभाग) ๑. १. พุทฺโธ ทสพโล สตฺถา, สพฺพญฺญู ทฺวิปทุตฺตโม; มุนินฺโท ภควา นาโถ, จกฺขุม’งฺคีรโส มุนิ. बुद्ध, दसबल (दशबल), सत्था (शास्ता), सब्बञ्ञू (सर्वज्ञ), द्विपदुत्तम (मनुष्यांमध्ये श्रेष्ठ), मुनिंद (मुनींद्र), भगवा (भगवंत), नाथ, चक्खुमा (चक्षुमान), अंगीरस आणि मुनी (हे बुद्धांचे समानार्थी शब्द आहेत). ๒. २. โลกนาโถ’ นธิวโร, มเหสิ จ วินายโก; สมนฺตจกฺขุ สุคโต, ภูริปญฺโญ จ มารชิ. लोकनाथ, अनधिवर, महेसी (महर्षी), विनायक, समंतचक्खु (समंतचक्षु), सुगत, भूरिपञ्ञ (भूरिप्रज्ञ) आणि मारजी (मारजित). ๓. ३. นรสีโห นรวโร, ธมฺมราชา มหามุนิ; เทวเทโว โลกครุ, ธมฺมสฺสามี ตถาคโต. नरसीह (नरसिंह), नरवर, धम्मराजा (धर्मराज), महामुनी, देवदेव, लोकगरू (लोकगुरू), धम्मसामी (धम्मस्वामी) आणि तथागत. ๔. ४. สยมฺภู สมฺมาสมฺพุทฺโธ, วรปญฺโญ จ นายโก; ชิโน, สกฺโก ตุ สิทฺธตฺโถ, สุทฺโธทนิ จ โคตโม. सयंभू (स्वयंभू), सम्मासम्बुद्ध (सम्यक्संबुद्ध), वरपञ्ञ (वरप्रज्ञ), नायक, जिन, सक्क (शाक्य), सिद्धत्थ (सिद्धार्थ), सुद्धोदनी (शुद्धोदनी) आणि गोतम (गौतम). ๕. ५. สกฺยสีโห ตถา สกฺย, มุนิ จาทิจฺจพนฺธุ จ; सक्यसीह (शाक्यसिंह), सक्यमुनी (शाक्यमुनी) आणि आदिच्चबंधू (आदित्यबंधू). ๖. ६. โมกฺโข นิโรโธ นิพฺพานํ, ทีโป ตณฺหกฺขโย ปรํ; ตาณํ เลณ มรูปญฺจ, สนฺตํ สจฺจ มนาลยํ. मोक्ष, निरोध, nibbānaṃ (निर्वाण), दीप, तण्हाक्खय (तृष्णाक्षय), परं (परम), ताण (त्राण), लेण (आश्रय), अरूप, संत (शांत), सच्च (सत्य) आणि अनालय (आसक्तिरहित) (हे निर्वाणाचे समानार्थी शब्द आहेत). ๗. ७. อสงฺขตํ สิว มมตํ สุทุทฺทสํ,ปรายณํ สรณ มนีติกํ ตถา; อนาสวํ ธุว มนิทสฺสนา’ กตา,ปโลกิตํ นิปุณ มนนฺต มกฺขรํ. असंखत (असंस्कृत), सिव (शिव/कल्याण), अमत (अमृत), सुदुद्दरस (सुदुर्दर्श), परायण, सरण (शरण), अनीतिक (उपद्रवरहित), अनासव (अनास्रव), धुव (ध्रुव), अनिदस्सन (अनिदर्शन), अकत (अकृत), अपलोकित, निपुण, अनंत आणि अक्खर (अक्षर). ๘. ८. ทุกฺขกฺขโย [Pg.3] พฺยาพชฺฌญฺจ, วิวฏฺฏํ เขม เกวลํ; อปวคฺโค วิราโค จ, ปณีต มจฺจุตํ ปทํ. दुक्खक्खय (दुःखक्षय), अब्याबज्झ (अव्यापद्य), विवट्ट, खेम (क्षेम), केवल, tapavaggo (अपवर्ग), विराग, पणीत (प्रणीत) आणि अच्चुत पद (अच्युत पद). ๙. ९. โยคกฺเขโม ปาร มปิ, มุตฺติ สนฺติ วิสุทฺธิโย; วิมุตฺย’ สงฺขตธาตุ, สุทฺธิ นิพฺพุติโย สิยุํ. योगक्खेम (योगक्षेम), पार, मुत्ति (मुक्ती), संति (शांती), विसुद्धि (विशुद्धी), विमुत्ति (विमुक्ती), असंखतधातू (असंस्कृतधातू), सुद्धि (शुद्धी) आणि निब्बुति (निवृत्ती). ๑๐. १०. ขีณาสโว ตฺว’เสกฺโข จ, วีตราโค ตถา’ รหา; เทวโลโก ทิโว สคฺโค,ติทิโว ติทสาลโย. खीणासव (क्षीणास्रव), असेक्ख (अशैक्ष), वीतराग आणि अरहा (अर्हत) [हे अर्हताचे समानार्थी शब्द आहेत]; देवलोक, दिव, सग्ग (स्वर्ग), तिदिव (त्रिदिव) आणि तिदसालय (त्रिदशालय) [हे स्वर्गाचे समानार्थी शब्द आहेत]. ๑๑. ११. ติทสา ตฺว’มรา เทวา, วิพุธา จ สุธาสิโน; สุรา มรู ทิโวกา จา, มตปา สคฺควาสิโน. तिदसा (त्रिदश), अमरा (अमर), देवा (देव), विबुधा (विबुध), सुधासिनो (अमृत पिणारे), सुरा (सूर), मरू, दिवोका (दिवौकस), अमतपा (अमृतप) आणि सग्गवासिनो (स्वर्गवासी) [हे देवांचे समानार्थी शब्द आहेत]. ๑๒. १२. นิชฺชรา’ นิมิสา ทิพฺพา, อปุเม เทวตานิ จ ; निज्जरा (निर्जर), अनिमिसा (अनिमिष), दिब्बा (दिव्य) आणि नपुंसकलिंगात 'देवतानि' (देवता). ๑๓. १३. สิทฺโธ ภูโต จ คนฺธพฺโพ, คุยฺหโก ยกฺข รกฺขสา; กุมฺภณฺโฑ จ ปิสาจา’ที, นิทฺทิฏฺฐา เทวโยนิโย. सिद्ध, भूत, गंधब्ब (गंधर्व), गुय्हक (गुह्यक), यक्ख (यक्ष), रक्खस (राक्षस), कुंभंड (कुंभांड) आणि पिसाच (पिशाच) इत्यादी देवयोनी म्हणून निर्दिष्ट केल्या आहेत. ๑๔. १४. ปุพฺพเทวา สุรริปู, อสุรา ทานวา ปุเม; ตพฺพิเสสา ปหาราโท, สมฺพโร พลิอาทโย. पुल्लिंगात पुब्बदेवा (पूर्वदेव), सुररिपू, असुरा (असुर) आणि दानवा (दानव); आणि त्यांचे विशेष प्रकार प्रह्लाद, शंबर, बलि इत्यादी आहेत. ๑๕. १५. ปิตามโห ปิตา พฺรหฺมา, โลเกโส กมลาสโน; ตถา หิรญฺญคพฺโภ จ, สุรเชฏฺโฐ ปชาปติ. पितामह, पिता, ब्रह्मा, लोकेस (लोकेश), कमलासन, तसेच हिरञ्ञगब्भ (हिरण्यगर्भ), सुरजेट्ठ (सुरज्येष्ठ) आणि प्रजापति (प्रजापती) [हे ब्रह्माचे समानार्थी शब्द आहेत]. ๑๖. १६. วาสุเทโว หริ กณฺโห, เกสโว จกฺกปาณฺย’ถ; มหิสฺสโร สิโว สูลี, อิสฺสโร ปสุปตฺย’ปิ. वासुदेव, हरी, कण्ह (कृष्ण), केसव (केशव), चक्कपाणी (चक्रपाणी) [हे विष्णूचे समानार्थी शब्द आहेत]; आणि महिसर (महेश्वर), सिव (शिव), सुली (शूली), इस्सर (ईश्वर) व पसुपति (पशुपती) [हे शिवाचे समानार्थी शब्द आहेत]. ๑๗. १७. หโร วุตฺโต กุมาโร ตุ, ขนฺโธ สตฺติธโร ภเว; हर (हे शिवाचे नाव आहे); आणि कुमार, खंध (स्कंद) व सत्तिधर (शक्तिधर) हे कार्तिकेयाचे नाव आहे. ๑๘. १८. สกฺโก ปุรินฺทโท เทว, ราชา วชิรปาณิ จ; สุชมฺปติ สหสฺสกฺโข, มหินฺโท วชิราวุโธ. सक्क (शक्र), पुरिंदद (पुरंदर), देवराजा, वजिरपाणी (वज्रपाणी), सुजंपति (सुजंपती), सहस्सक्ख (सहस्राक्ष), महिंद (महेंद्र) आणि वजिरावुध (वज्रायुध) [हे इंद्राचे समानार्थी शब्द आहेत]. ๑๙. १९. วาสโว จ ทสสต, นยโน ติทิวาธิภู; สุรนาโถ จ วชิร, หตฺโถ จ ภูตปตฺย’ปิ. वासव, दससतनयन (दशशतनयन), तिदिवाधिभू (त्रिदिवाधिभू), सुरनाथ, वजिरहत्थ (वज्रहस्त) आणि भूतपति (भूतपती) [हे देखील इंद्राचे समानार्थी शब्द आहेत]. ๒๐. २०. มฆวา โกสิโย อินฺโท, วตฺรภู ปากสาสโน; วิโฑโช ถ สุชา ตสฺส, ภริยา ถ ปุรํ ภเว. मघवा, कोसिय (कौशिक), इंद (इंद्र), वत्रभू (वृत्रभू), पाकसासन (पाकशासन) आणि विडोज (विडौज) [हे इंद्राचे शब्द आहेत]; सुजा (शची) ही त्याची पत्नी आहे; आणि त्याचे नगर (पुढीलप्रमाणे आहे): ๒๑. २१. มสกฺกสารา [Pg.4] วสฺโสก, สารา เจวา’ มราวตี; เวชยนฺโต ตุ ปาสาโท,สุธมฺมา ตุ สภา มตา. मसक्कसारा (मशक्कसारा), वस्सोकसारा आणि अमरावती (हे इंद्राच्या नगरीचे नाव आहे); वेजयंत (वैजयंत) हा त्याचा प्रासाद (वाडा) आहे आणि सुधम्मा (सुधर्मा) ही त्याची सभा मानली जाते. ๒๒. २२. เวชยนฺโต รโถ ตสฺส,วุตฺโต มาตลิ สารถิ; เอราวโณ คโช ปณฺฑุ, กมฺพโล ตุ สิลาสนํ. वैजयंत हा त्याचा रथ आहे, मातली हा त्याचा सारथी आहे, एरावण (ऐरावण) हा त्याचा हत्ती आहे आणि पंडुकंबल हे त्याचे शिलासन (सिंहासन) आहे. ๒๓. २३. สุวีโรจฺจาทโย ปุตฺตา, นนฺทา โปกฺขรณี ภเว; นนฺทนํ มิสฺสกํ จิตฺต, ลตา ผารุสกํ วนา. सुवीर, उच्च इत्यादी त्याचे पुत्र आहेत; नंदा ही त्याची पुष्करणी (तलाव) आहे; आणि नंदन, मिस्सक (मिश्रक), चित्तलता व फारुसक (पारुषक) ही त्याची वने (उद्याने) आहेत. ๒๔. २४. อสนิ ทฺวีสุ กุลิสํ, วชิรํ ปุนฺนปุํสเก; อจฺฉราโยตฺถิยํ วุตฺตา, รมฺภา อลมฺพุสาทโย; เทวิตฺถิโย ถ คนฺธพฺพา, ปญฺจสิโขติ อาทโย. "असनि" (वीज/वज्र) हे दोन लिंगांत (पुल्लिंग व स्त्रीलिंग) येते; "कुलिस" आणि "वजिर" (वज्र) हे पुल्लिंग व नपुंसकलिंगात येतात. "अच्छरा" (अप्सरा) हा शब्द स्त्रीलिंगी असून, रंभा, अलंबुसा इत्यादी देवस्त्रिया (अप्सरा) आहेत. तसेच पंचशिख इत्यादी गंधर्व आहेत. ๒๕. २५. วิมาโน นิตฺถิยํ พฺยมฺหํ, ปียูสํ ตฺวมตํ สุธา; สิเนรุ เมรุ ติทิวา, ธาโร เนรุ สุเมรุ จ. "विमान" आणि "ब्यम्ह" (देवविमान) हे शब्द स्त्रीलिंग सोडून (पुल्लिंग व नपुंसकलिंगात) आहेत. "पीयूष", "अमत" (अमृत) आणि "सुधा" हे अमृताचे समानार्थी शब्द आहेत. "सिनेरु", "मेरु", "तिदिवाधार", "नेरु" आणि "सुमेरु" हे मेरू पर्वताचे समानार्थी शब्द आहेत. ๒๖. २६. ยุคนฺธโร อีสธโร, กรวีโก สุทสฺสโน; เนมินฺธโร วินตโก, อสฺสกณฺโณ กุลาจลา. युगंधर, ईसधर, करवीक, सुदस्सन (सुदर्शन), नेमिंधर, विनतक आणि अस्सकण्ण (अश्वकर्ण) हे सात कुलाचल (मेरू पर्वताभोवतीचे सात पर्वत) आहेत. ๒๗. २७. มนฺทากินี ตถา’กาส, คงฺคา สุรนที ปฺยถ; "मंदाकिनी", "आकासगंगा" (आकाशगंगा) आणि "सुरनदी" हे देवनदीचे (स्वर्गातील गंगेचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๒๘. २८. โกวิฬาโร ตถา ปาริ, จฺฉตฺตโก ปาริชาตโก; กปฺปรุกฺโข ตุ สนฺตานา, ทโย เทวทฺทุมา สิยุํ. "कोविळार", "पारिच्छत्तक", "पारिजातक", "कप्परुक्ख" (कल्पवृक्ष) आणि "संतान" इत्यादी देववृक्ष (स्वर्गातील वृक्ष) आहेत. ๒๙. २९. ปาจี ปตีฌุ’ ทีจิ’ตฺถี, ปุพฺพ ปจฺฉิม อุตฺตรา; ทิสาถ ทกฺขิณา’ ปาจี, วิทิสา’นุทิสา ภเว. "पाची" (पुब्बा/पूर्व), "पटीची" (पच्छिमा/पश्चिम), "उदीची" (उत्तरा/उत्तर) हे स्त्रीलिंगी शब्द आहेत. तसेच "दक्खिणा" (अपाची/दक्षिण) ही दिशा आहे. "विदिसा" आणि "अनुदिसा" म्हणजे उपदिशा होत. ๓๐. ३०. เอราวโต ปุณฺฑรีโก, วามโน กุมุโท’ ญฺชโน; ปุปฺผทนฺโต สพฺพภุมฺโม, สุปฺปตีโก ทิสาคชา. ऐरावत, पुंडरीक, वामन, कुमुद, अंजन, पुप्फदंत (पुष्पदंत), सब्बभुम्म (सार्वभौम) आणि सुप्पतीक (सुप्रतीक) हे आठ दिग्गज (दिशांचे हत्ती) आहेत. ๓๑. ३१. ธตรฏฺโฐ จ คนฺธพฺพา, ธิโป, กุมฺภณฺฑสามิ ตุ; วิรุฬฺหโก, วิรูปกฺโข, ตุ นาคาธิปตีริโต. धतरट्ठ (धृतराष्ट्र) हा गंधर्वांचा अधिपती आहे; विरूळ्हक (विरूढक) हा कुंभांडांचा स्वामी आहे; आणि विरूपक्ख (विरूपाक्ष) हा नागांचा अधिपती म्हटला गेला आहे. ๓๒. ३२. ยกฺขาธิโป เวสฺสวโณ, กุเวโร นรวาหโน; อฬกา ฬกมนฺทาสฺส, ปุรี, ปหรณํ คทา; จตุทฺทิสาน มธิปา, ปุพฺพาทีนํ กมา อิเม. "वेस्सवण" (वैश्रमण), "कुवेर" (कुबेर) आणि "नरवाहन" हे यक्षांचे अधिपती आहेत. "अळका" किंवा "अळकमंदा" ही त्यांची नगरी असून "गदा" हे त्यांचे शस्त्र आहे. हे चार (धतरट्ठ, विरूळ्हक, विरूपक्ख आणि वेस्सवण) अनुक्रमे पूर्व इत्यादी चार दिशांचे अधिपती (लोकपाल) आहेत. ๓๓. ३३. ชาตเวโท [Pg.5] สิขี โชติ, ปาวโก ทหโน’ นโล; หุตาวโห’ จฺจิมา ธูม, เกตฺว’คฺคิ คินิ ภานุมา. "जातवेद", "शिखी", "जोती" (ज्योती), "पावक", "दहन", "अनल", "हुतावह", "अच्चिमा" (अर्चिमान), "धूमकेतू", "अग्गी" (अग्नी), "गिनी" आणि "भानुमा" हे अग्नीचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๔. ३४. เตโช ธูมสิโข วายุ, สโข จ กณฺหวตฺตนี; เวสฺสานโร หุตาโส ถ, สิขาชาล’จฺจิ จาปุเม. "तेज", "धूमशिख", "वायुसख" (वायुसखा), "कण्हवत्तनी" (कृष्णवर्त्मा), "वेस्सानर" (वैश्वानर) आणि "हुतास" (हुताश) हे अग्नीचे समानार्थी शब्द आहेत. "शिखा", "जाला" (ज्वाला) आणि "अच्ची" (अर्चि/ज्योत) हे ज्वालाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๕. ३५. วิปฺผุลิงฺคํ ผุลิงฺคญฺจ, ภสฺมา ตุ เสฏฺฐิ ฉาริกา; "विप्फुलिंग" आणि "फुलिंग" म्हणजे ठिणगी; "भस्म", "सेट्ठी" आणि "छारिका" म्हणजे राख होय. ๓๖. ३६. กุกฺกุโฬ ตุ’ณฺหภสฺมสฺมิ, มงฺคาโร’ลาต มุมฺมุกํ ; สมิธา อิธุมํ เจ’โธ, อุปาทานํ ตถินฺธนํ. "कुक्कुळ" म्हणजे उष्ण राख (गरम राख); "अंगार", "अलात" आणि "मुम्मुक" म्हणजे निखारा किंवा कोळसा; "समिधा", "इधुम", "एध", "उपादान" आणि "इंधन" हे जळण किंवा सरपणाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๗. ३७. อโถ’ภาโส ปกาโส จา,'โลโก’ชฺโชตา’ตปา สมา; มาลุโต ปวโน วายุ, วาโต’นิล สมีรณา; คนฺธวาโห ตถา วาโย, สมีโร จ สทาคติ. "ओभास" (अवभास), "पकास" (प्रकाश), "आलोक", "उज्जोत" (उद्योत) आणि "आतप" हे प्रकाशाचे समानार्थी शब्द आहेत. "मालुत", "पवन", "वायू", "वात", "अनिल", "समीरण", "गंधवाह", "वायो", "समीर" आणि "सदागती" हे वायूचे (हवेचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๓๘. ३८. วายุเภทา อิเม ฉุ’ทฺธ, งฺคโม จาโธคโม ตถา; กุจฺฉิฏฺโฐ จ โกฏฺฐาสโย, อสฺสาสงฺคานุสาริโน. शरीरातील वायूचे हे सहा प्रकार आहेत: "उद्धंगम" (वर जाणारा वायू), "अधोगम" (खाली जाणारा वायू), "कुच्छिट्ठ" (पोटातील वायू), "कोट्ठासय" (कोठ्यातील वायू), "अस्सास" (श्वास) आणि "अंगानुसारी" (अवयवांमध्ये संचार करणारा वायू). ๓๙. ३९. อโถ อปานํ ปสฺสาโส,อสฺสาโส อาน มุจฺจเต. तसेच "अपान" याला "पस्सास" (उच्छ्वास) म्हणतात आणि "अस्सास" याला "आन" (श्वास घेणे) असे म्हणतात. ๔๐. ४०. เวโค ชโว รโย ขิปฺปํ, ตุ สีฆํ ตุริตํ ลหุ; อาสุ ตุณฺณ มรํ จาวิ, ลมฺพิตํ ตุวฏํปิ จ. "वेग", "जव", "रय", "खिप्प" (क्षिप्र), "सीघ" (शीघ्र), "तुरित" (त्वरित), "लहू" (लघु), "आसू" (आशु), "तुण्ण", "अर", "अळंबित" आणि "तुवट" हे सर्व वेगाने किंवा जलद या अर्थाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๑. ४१. สตตํ นิจฺจ มวิรตา, นารต สนฺตต มนวรตญฺจ ธุวํ; ภุส มติสโย จ ทฬฺหํ, ติพฺเพ’กนฺตา’ติมตฺต, พาฬฺหานิ; ขิปฺปาที ปณฺฑเก ทพฺเพ, ทพฺพคา เตสุ เย ติสุ. "सतत", "निच्च" (नित्य), "अविरत", "अनारत", "संतत", "अनवरत" आणि "धुव" (ध्रुव) हे निरंतर किंवा नेहमी या अर्थाचे शब्द आहेत. "भुस" (भृश), "अतिसय" (अतिशय), "दळ्ह" (दृढ), "तिब्ब" (तीव्र), "एकांत", "अतिमत्त" आणि "बाळ्ह" हे अत्यंत किंवा तीव्र या अर्थाचे शब्द आहेत. "खिप्प" इत्यादी शब्द क्रियाविशेषण असताना नपुंसकलिंगी असतात, परंतु विशेषण म्हणून ते तिन्ही लिंगांत वापरले जातात. ๔๒. ४२. อวิคฺคโห ตุ กาโม จ, มโนภู มทโน ภเว; อนฺตโก วสวตฺตี จ, ปาปิมา จ ปชาปติ. "अविग्गह" (अनंग), "काम", "मनोभू" आणि "मदन" हे कामाचे (मदनाचे) समानार्थी शब्द आहेत. "अंतक", "वसवत्ती" (वशवर्ती), "पापिमा" (पापी) आणि "पजापती" (प्रजापती) हे माराचे (मार/पापी देवतेचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๔๓. ४३. ปมตฺตพนฺธุ กณฺโห จ, มาโร นมุจิ, ตสฺส ตุ; ตณฺหา’รตี รคา ธีตู, หตฺถี ตุ คิริเมขโล. "पमत्तबंधु" (प्रमत्तबंधू), "कण्ह" (कृष्ण), "मार" आणि "नमुची" हे देखील माराचेच समानार्थी शब्द आहेत. "तण्हा" (तृष्णा), "अरती" आणि "रगा" (रागा) या त्याच्या मुली आहेत, तर "गिरिमेखल" हा त्याचा हत्ती आहे. ๔๔. ४४. ยมราชา จ เวสายี, ยโม’สฺส นยนาวุธํ; เวปจิตฺติ ปุโลโม จ, กิมฺปุริโส ตุ กินฺนโร. "यमराजा", "वेसायी" आणि "यम" हे यमाचे समानार्थी शब्द आहेत; "नयनावुध" (दृष्टी हेच शस्त्र) हे त्याचे शस्त्र आहे. "वेपचित्ती" आणि "पुलोम" हे असूर आहेत. "किंपुरिस" आणि "किन्नर" हे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๕. ४५. อนฺตลิกฺขํ ข’มาทิจฺจ, ปโถ’พฺภํ คคน’มฺพรํ; เวหาโส จานิลปโถ, อากาโส นิตฺถิยํ นภํ. "अंतलिक्ख" (अंतरिक्ष), "ख", "आदिच्चपथ" (आदित्यपथ), "अब्भ" (अभ्र), "गगन", "अंबर", "वेहास" (विहायस), "अनिलपथ", "आकास" (आकाश) आणि "नभ" हे आकाशाचे समानार्थी शब्द आहेत. "नभ" हा शब्द स्त्रीलिंग सोडून (पुल्लिंग व नपुंसकलिंगात) आहे. ๔๖. ४६. เทโว [Pg.6] เวหายโส ตารา,ปโถ สุรปโถ อฆํ. तसेच "देव", "वेहायस", "तारापथ", "सुरपथ" आणि "अघ" हे देखील आकाशाचेच समानार्थी शब्द आहेत. ๔๗. ४७. เมโฆ วลาหโก เทโว, ปชฺชุนฺโน’มฺพุธโร ฆโน; ธาราธโร จ ชีมูโต, วาริวาโห ตถา’มฺพุโท. "मेघ", "वलाहक", "देव", "पज्जुन्न" (पर्जन्य), "अंबुधर", "घन", "धाराधर", "जीमूत", "वारिवाह" आणि "अंबुद" हे ढगाचे (मेघाचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๔๘. ४८. อพฺภํ ตีสฺวถ วสฺสญฺจ, วสฺสนํ วุฏฺฐิ นาริยํ; สเตรตา’กฺขณา วิชฺชุ, วิชฺชุตา จาจิรปฺปภา. "अब्भ" (अभ्र) हा शब्द तिन्ही लिंगांत येतो. "वस्स" (वर्ष), "वस्सन" (वर्षण) आणि "वुट्ठि" (वृष्टी - स्त्रीलिंगी) हे पावसाचे समानार्थी शब्द आहेत. "सतेरता", "अक्खणा", "विज्जु" (विद्युत), "विज्जुता" आणि "अचिरप्पभा" (अचिरप्रभा) हे विजेचे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๙. ४९. เมฆนาเท ตุ ธนิตํ, คชฺชิตํ รสิตาทิ จ; อินฺทาวุธํ อินฺทธนุ, วาตกฺขิตฺตมฺพุ สีกโร. "धनित", "गज्जित" (गर्जित) आणि "रसित" इत्यादी ढगांच्या गडगडाटाचे समानार्थी शब्द आहेत. "इंदावुध" (इंद्रायुध) आणि "इंदधनु" (इंद्रधनुष्य) हे इंद्रधनुष्याचे समानार्थी शब्द आहेत. "सीकर" म्हणजे वाऱ्याने उडवलेले पाण्याचे तुषार होय. ๕๐. ५०. อาสาโร ธารา สมฺปาโต,กรกา ตุ ฆโนปลํ; ทุทฺทินํ เมฆจฺฉนฺนาเห, ปิธานํ ตฺวปธารณํ. "आसार" म्हणजे मुसळधार पाऊस (धारासंपात); "करका" म्हणजे गार (घनोपल); "दुद्दिन" (दुर्दिन) म्हणजे ढगांनी झाकलेला दिवस; आणि "पिधान" व "अपधारण" म्हणजे झाकण होय. ๕๑. ५१. ติโรธาน’นฺตรธานา, ปิธาน ฉาทนานิ จ; อินฺทุ จนฺโท จ นกฺขตฺต, ราชา โสโม นิสากโร. "तिरोधान", "अंतरधान", "पिधान" आणि "छादन" हे झाकणे किंवा नाहीसे होणे या अर्थाचे शब्द आहेत. "इंदू", "चंद" (चंद्र), "नक्खत्तराजा" (नक्षत्रराज), "सोम" आणि "निसाकर" (निशाकर) हे चंद्राचे समानार्थी शब्द आहेत. ๕๒. ५२. โอสธีโส หิมรํสิ, สสงฺโก จนฺทิมา สสี; สีตรํสิ นิสานาโถ, อุฬุราชา จ มา ปุเม. "ओसधीस" (औषधीश), "हिमरंसि" (हिमरश्मी), "ससंक" (शशांक), "चंदिमा", "ससी" (शशी), "सीतरंसि" (शीतरश्मी), "निसानाथ" (निशानाथ), "उळूराजा" (उडुराज) आणि "मा" (पुल्लिंगी) हे देखील चंद्राचेच समानार्थी शब्द आहेत. ๕๓. ५३. กลา โสฬสโม ภาโค, พิมฺพํ ตุ มณฺฑลํ ภเว; อฑฺโฒ ตฺวทฺโธ อุปฑฺโฒ จ, วา ขณฺฑํ สกลํ ปุเม. "कला" म्हणजे चंद्राचा सोळावा भाग; "बिंब" आणि "मंडल" म्हणजे वर्तुळ किंवा तबकडी; "अड्ढ", "अद्ध" (अर्ध), "उपड्ढ" आणि "खंड" म्हणजे अर्धा भाग किंवा तुकडा; आणि "सकल" (पुल्लिंगी) म्हणजे संपूर्ण होय. ๕๔. ५४. อทฺธํ วุตฺตํ สเม ภาเค, ปสาโท ตุ ปสนฺนตา; โกมุที จนฺทิกา ชุณฺหา, กนฺติ โสภา ชุติ จฺฉวิ. "अद्ध" (अर्ध) हा शब्द समान भागासाठी वापरला जातो; "पसाद" (प्रसाद) आणि "पसन्नता" (प्रसन्नता) म्हणजे स्पष्टता किंवा निर्मळता; "कोमुदी" (कौमुदी), "चंदिका" (चंद्रिका) आणि "जुण्हा" (ज्योत्स्ना) हे चांदण्याचे समानार्थी शब्द आहेत; "कांती", "सोभा" (शोभा), "जुती" (द्युती) आणि "छवी" हे सौंदर्याचे किंवा तेजाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๕๕. ५५. กลงฺโก ลญฺฉนํ ลกฺขํ, องฺโก’ภิญฺญาณ ลกฺขณํ; จิหนํ จาปิ โสภา ตุ, ปรมา สุสมา ถ จ. "कलंक", "लंच्छन" (लांछन), "लक्ख" (लक्ष), "अंक", "अभिञ्ञाण" (अभिज्ञान), "लक्खण" (लक्षण) आणि "चिहन" (चिन्ह) हे खुणेचे किंवा चिन्हाचे समानार्थी शब्द आहेत. "सोभा" (शोभा), "परमा" आणि "सुसमा" हे अत्यंत सौंदर्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๕๖. ५६. สีตํ คุเณ, คุณิลิงฺคา, สีต สิสิร สีตลา; หิมํ ตุหิน มุสฺสาโว, นีหาโร มหิกา ปฺยถ. "सीत" (शीत) हा शब्द गुणाच्या अर्थी नपुंसकलिंगी असतो; "सीत", "सिसिर" (शिशिर) आणि "सीतल" (शीतल) हे विशेषण म्हणून नामानुसार लिंग बदलतात. "हिम", "तुहिन", "उस्साव" (ओस), "नीहार" आणि "महिका" (धुके) हे बर्फ किंवा दवबिंदूचे समानार्थी शब्द आहेत. ๕๗. ५७. นกฺขตฺตํ โชติ ภํ ตารา, อปุเม ตารโก’ฬุ จ; "नक्खत्त" (नक्षत्र), "जोती" (ज्योती), "भ" आणि "तारा" (स्त्रीलिंगी) तसेच "तारक" (पुल्लिंग सोडून) आणि "उळू" (पुल्लिंगी) हे ताऱ्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๕๘. ५८. อสฺสยุโช ภรณิตฺถี, สกตฺติกา โรหิณี ปิจ; มิคสิร มทฺทา จ ปุนพฺพสุ, ผุสฺโส จาสิเลส’ปิ. अस्सयुज (अश्विनी), भरणी (स्त्रीलिंगी), कत्तिका (कृत्तिका), रोहिणी, मिगसिर (मृगशीर्ष), अद्दा (आर्द्रा), पुनब्बसू (पुनर्वसू), फुस्स (पुष्य) आणि असिलेसा (आश्लेषा) ही नक्षत्रांची नावे आहेत. ๕๙. ५९. มาฆา จ ผคฺคุนี ทฺเว จ, หตฺถา จิตฺตา จ สฺวาติปิ; วิสาขา’ นุราธา เชฏฺฐา, มูลา’ สาฬฺหา ทุเว ตถา. माघा, दोन फग्गुनी (पूर्वाफाल्गुनी व उत्तराफाल्गुनी), हत्थ (हस्त), चित्ता (चित्रा), स्वाती, विशाखा, अनुराधा, जेट्ठा (ज्येष्ठा), मूला आणि दोन आसाळ्हा (पूर्वाषाढा व उत्तराषाढा) ही नक्षत्रांची नावे आहेत. ๖๐. ६०. สวโณ [Pg.7] จ ธนิฏฺฐา จ, สตภิสโช ปุพฺพุ’ตฺตรภทฺทปทา; เรวตฺยปีติ กมโต, สตฺตาธิกวีสนกฺขตฺตา. सवण (श्रवण), धिट्ठा (धनिष्ठा), सतभिसज (शततारका), पुब्बभद्दपदा (पूर्वाभाद्रपदा), उत्तरभद्दपदा (उत्तराभाद्रपदा) आणि रेवती; ही अनुक्रमे सत्तावीस (२७) नक्षत्रे आहेत. ๖๑. ६१. โสพฺภานุ กถิโต ราหุ, สูราที ตุ นวคฺคหา; ราสิ เมสาทิโก ภทฺท, ปทา โปฏฺฐปทา สมา. "सोब्भानु" (स्वर्भानू) याला राहू म्हणतात. सूर्य इत्यादी नऊ ग्रह (नवग्रह) आहेत. "रासी" (राशी) म्हणजे मेष इत्यादी राशी होत. "भद्दपदा" आणि "पोट्ठपदा" हे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๒. ६२. อาทิจฺโจ สูริโย สูโร, สตรํสิ ทิวากโร; เวโรจโน ทินกโร, อุณฺหรํสิ ปภงฺกโร. "आदिच्च" (आदित्य), "सूरिय" (सूर्य), "सूर", "सतरंसि" (शतरश्मी), "दिवाकर", "वेरोचन" (वैरोचन), "दिनकर", "उण्हरंसि" (उष्णरश्मी) आणि "पभंकर" (प्रभाकर) हे सूर्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๓. ६३. อํสุมาลี ทินปติ, ตปโน รวิ ภานุมา; รํสิมา ภากโร ภานุ, อกฺโก สหสฺสรํสิ จ. "अंशुमाली", "दिनपती", "तपन", "रवी", "भानुमा" (भानुमान), "रंसिमा" (रश्मीमान), "भाकर" (भास्कर), "भानू", "अक्क" (अर्क) आणि "सहस्सरंसि" (सहस्ररश्मी) हे देखील सूर्याचेच समानार्थी शब्द आहेत. ๖๔. ६४. รํสิ อาภา ปภา ทิตฺติ, รุจิ ภา ชุติ ทีธิติ; มรีจิ ทฺวีสุ ภานฺวํ’สุ, มยูโข กิรโณ กโร. रश्मी, आभा, प्रभा, दीप्ती, रुची, भा, द्युती, दीधिती, मरीची, भानू, अंशू, मयूख, किरण आणि कर हे किरणाचे (प्रकाशाचे) वाचक शब्द आहेत. ๖๕. ६५. ปริธิ ปริเวโส ถ, มรีจิ มิคตณฺหิกา; สูรสฺโสทยโต ปุพฺพุ’, ฏฺฐิตรํสิ สิยา’ รุโณ. परिधी आणि परिवेश (सूर्याभोवतीचे तेजोवलय); मरीची आणि मृगतृष्णिका (मृगजळ); आणि सूर्योदयापूर्वी पडणाऱ्या किरणांना 'अरुण' म्हणतात. ๖๖. ६६. กาโล’ทฺธา สมโย เวลา,ตพฺพิเสสา ขณาทโย; ขโณ ทสจฺฉรากาโล,ขณา ทส ลโย ภเว. काळ, अद्धा, समय आणि वेळा हे काळाचे वाचक शब्द आहेत. त्याचे विशेष भेद क्षण इत्यादी आहेत. दहा वेळा चुटकी वाजवण्याचा काळ म्हणजे एक 'क्षण' होय आणि दहा क्षणांचा एक 'लय' होतो. ๖๗. ६७. ลยา ทส ขณลโย,มุหุตฺโต เต สิยา ทส; ทส ขณมุหุตฺโต เต, ทิวโส ตุ อหํ ทินํ. दहा लयांचा एक 'क्षणलय' होतो. दहा क्षणलयांचा एक 'मुहूर्त' होतो. दहा क्षणमुहूर्तांचा एक 'दिवस' (अह किंवा दिन) होतो. ๖๘. ६८. ปภาตญฺจ วิภาตญฺจ, ปจฺจูโส กลฺล มปฺยถ; อภิโทโส ปโทโส ถ,สาโย สญฺฌา ทินจฺจโย. प्रभात, विभात, पच्चूस (प्रत्यूष) आणि कल्ल हे सकाळचे वाचक आहेत. अभिदोष आणि प्रदोष हे सायंकाळचे वाचक आहेत. साय, संध्या आणि दिनाच्चय हे देखील सायंकाळचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๙. ६९. นิสา จ รชนี รตฺติ, ติยามา สํวรี ภเว; ชุณฺหา ตุ จนฺทิกายุตฺตา, ตมุสฺสนฺนา ติมิสิกา. निशा, रजनी, रत्ती (रात्र), तियामा आणि संवरी हे रात्रीचे वाचक आहेत. चांदण्याने युक्त रात्रीला 'जुण्हा' (ज्योत्स्ना) म्हणतात आणि दाट अंधाराने युक्त रात्रीला 'तिमिसिका' म्हणतात. ๗๐. ७०. นิสีโถ มชฺฌิมา รตฺติ, อฑฺฒรตฺโต มหานิสา; อนฺธกาโร ตโม นิตฺถี, ติมิสํ ติมิรํ มตํ. निशीथ, मज्झिमरत्ती (मध्यरात्र), अढ्ढरत्त (अर्धरात्र) आणि महानिशा हे मध्यरात्रीचे वाचक आहेत. अंधकार, तम, तिमिस आणि तिमिर हे अंधाराचे वाचक मानले जातात. ๗๑. ७१. จตุรงฺคตมํ เอวํ, กาฬปกฺขจตุทฺทสี; วนสณฺโฑ ฆโน เมฆ, ปฏลํ จา’ฑฺฒรตฺติ จ. चतुरंगतम (चार प्रकारचा दाट अंधार) म्हणजे: कृष्ण पक्षातील चतुर्दशी, दाट वनराई, ढगांचे पटल (आच्छादन) आणि मध्यरात्र (या चार गोष्टी एकत्र आल्यावर होणारा अंधार). ๗๒. ७२. อนฺธตมํ [Pg.8] ฆนตเม, ปหาโร ยาม, สญฺญิโต; ปาฏิปโท ตุ ทุติยา, ตติยาที ติถี, ตายติ ปาเลตีติ ติถิ, ตา+อิติ (ณฺวาทิ) ทฺวิสุ. अतिशय दाट अंधाराला 'अंधतम' म्हणतात. प्रहराला 'याम' असे म्हणतात. प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया इत्यादींना 'तिथी' म्हणतात. ๗๓. ७३. ปนฺนรสี ปญฺจทสี, ปุณฺณมาสี ตุ ปุณฺณมา; อมาวสี ปฺยมาวาสี, ถิยํ ปนฺนรสี’ ปรา. पन्नरसी, पंचदसी, पुण्णमासी आणि पुण्णमा हे पौर्णिमेचे वाचक आहेत. अमावासी आणि अमावासी हे अमावस्येचे वाचक आहेत. पन्नरसी हा शब्द दुसऱ्या (अमावस्येच्या) पंधराव्या दिवसासाठीही स्त्रीलिंगात वापरला जातो. ๗๔. ७४. ฆฏิกา สฏฺฐฺย’ โหรตฺโต, ปกฺโข เต ทส ปญฺจ จ; เต ตุ ปุพฺพาปรา สุกฺก,กาฬา, มาโส ตุ เต ทุเว. साठ घटिकांचा एक 'अहोरात्र' (दिवस-रात्र) होतो. पंधरा अहोरात्रांचा एक 'पक्ष' (पंधरवडा) होतो. ते शुक्ल (पूर्व) आणि कृष्ण (अपर) असे दोन प्रकारचे असतात. दोन पक्षांचा मिळून एक 'महिना' (मास) होतो. ๗๕. ७५. จิตฺโต เวสาข, เชฏฺโฐ จา, สาฬฺโห ทฺวีสุ จ สาวโณ; โปฏฺฐปาท’สฺสยุชา จ, มาสา ทฺวาทส กตฺติโก. चित्त (चैत्र), वेसाख (वैशाख), जेट्ठ (ज्येष्ठ), आसाळ्ह (आषाढ), सावण (श्रावण), पोट्ठपाद (भाद्रपद), अस्सयुज (अश्विन) आणि कत्तिक (कार्तिक) हे बारा महिन्यांपैकी आहेत... ๗๖. ७६. มาคสิโร ตถา ผุสฺโส, กเมน มาฆ ผคฺคุณา; กตฺติก’สฺสยุชา มาสา, ปจฺฉิม ปุพฺพกตฺติกา. ...तसेच मागसिर (मार्गशीर्ष), फुस्स (पौष), माघ आणि फग्गुण (फाल्गुन) हे अनुक्रमे महिने आहेत. कत्तिक आणि अस्सयुज महिन्यांना अनुक्रमे पश्चिम-कत्तिक आणि पूर्व-कत्तिक असेही म्हणतात. ๗๗. ७७. สาวโณ นิกฺขมนีโย,จิตฺตมาโส ตุ รมฺมโก. सावण (श्रावण) महिन्याला 'निक्खमनीय' आणि चित्त (चैत्र) महिन्याला 'रम्मक' असेही म्हणतात. ๗๘. ७८. จตุโร จตุโร มาสา, กตฺติกกาฬปกฺขโต; กมา เหมนฺต คิมฺหาน, วสฺสานา อุตุโย ทฺวิสุ. कार्तिक महिन्याच्या कृष्ण पक्षापासून सुरू होणारे प्रत्येकी चार-चार महिने हे अनुक्रमे हेमंत, गिम्ह (ग्रीष्म) आणि वस्सान (वर्षा) हे ऋतू मानले जातात. ๗๙. ७९. เหมนฺโต สิสิร มุตู,ฉ วา วสนฺโต จ คิมฺห วสฺสานา; สรโทติ กมา มาสา, ทฺเว ทฺเว วุตฺตานุสาเรน. किंवा हेमंत, sिसिर (शिशिर), वसंत, गिम्ह (ग्रीष्म), वस्सान (वर्षा) आणि सरद (शरद) असे सहा ऋतू असतात; पूर्वी सांगितलेल्या नियमानुसार प्रत्येकी दोन-दोन महिन्यांचा एक ऋतू होतो. ๘๐. ८०. อุณฺโห นิทาโฆ คิมฺโหถ,วสฺโส วสฺสาน ปาวุสา; อุตูหิ ตีหิ วสฺสานา, ทิเกหิ ทกฺขิณายนํ. उण्ह (उष्ण), निदाघ आणि गिम्ह हे उन्हाळ्याचे वाचक आहेत. वस्स, वस्सान आणि पावुस हे पावसाळ्याचे वाचक आहेत. वर्षा ऋतूपासून सुरू होणाऱ्या तीन ऋतूंनी (किंवा दोन अयनांनी) 'दक्षिणायन' होते. ๘๑. ८१. อุตฺตรายน มญฺเญหิ, ตีหิ วสฺสายนทฺวยํ; วสฺส สํวจฺฉรา นิตฺถี, สรโท หายโน สมา. इतर तीन ऋतूंनी 'उत्तरायण' होते. या दोन अयनांचा मिळून एक वर्ष होतो. वस्स, संवत्सर, सरद, हायन आणि समा हे वर्षाचे वाचक शब्द आहेत. ๘๒. ८२. กปฺปกฺขโย ตุ สํวฏฺโฏ, ยุคนฺต ปลยา อปิ; อลกฺขี กาลกณฺณิตฺถี, อถ ลกฺขี สิริ’ตฺถิยํ. कप्पक्खय (कल्पक्षय), संवट्ट (संवर्त), युगांत आणि प्रलय हे कल्पविनाशाचे वाचक आहेत. अलक्खी (अलक्ष्मी) आणि कालकण्णी (कालकर्णी) हे दुर्भाग्याचे वाचक आहेत. लक्खी (लक्ष्मी) आणि सिरी (श्री) हे भाग्याचे वाचक स्त्रीलिंगी शब्द आहेत. ๘๓. ८३. ทนุ ทานวมาตา ถ, เทวมาตา ปนา’ทิติ; दनू ही दानवांची माता आहे आणि अदिती ही देवांची माता आहे. ๘๔. ८४. ปาปญฺจ กิพฺพิสํ เวรา, ฆํ ทุจฺจริต ทุกฺกฏํ; อปุญฺญา’กุสลํ กณฺหํ, กลุสํ ทุริตา’คุ จ. पाप, किब्बिस (किल्मिष), वेर (वैर), अघ, दुच्चरित (दुश्चरित), दुक्कट (दुष्कृत), अपुञ्ञ (अपुण्य), अकुसल (अकुशल), कण्ह (कृष्ण कर्म), कलुस (कलुष), दुरित आणि अगू हे पापाचे वाचक शब्द आहेत. ๘๕. ८५. กุสลํ [Pg.9] สุกตํ สุกฺกํ, ปุญฺญํ ธมฺม มนิตฺถิยํ; สุจริต มโถ ทิฏฺฐ, ธมฺมิกํ อิหโลกิกํ. कुसल (कुशल), सुकत (सुकृत), सुक्क (शुक्ल कर्म), पुञ्ञ (पुण्य), धम्म (धर्म) आणि सुचरित हे चांगल्या कर्माचे (पुण्याचे) वाचक आहेत. 'दिट्ठधम्मिक' आणि 'इहलोकिक' हे या लोकाशी (या जन्माशी) संबंधित गोष्टींचे वाचक आहेत. ๘๖. ८६. สนฺทิฏฺฐิก มโถ ปาร, โลกิกํ สมฺปรายิกํ; ตกฺกาลํ ตุ ตทาตฺวํ โจ,ตฺตรกาโล ตุ อายติ. 'संदिट्ठिक' (प्रत्यक्ष दिसणारे) हे देखील याच जन्माशी संबंधित आहे. 'पारलोकिक' आणि 'सामपरायिक' हे परलोकाशी (पुढील जन्माशी) संबंधित आहेत. 'तक्काल' (तत्काळ) आणि 'तदात्व' हे वर्तमानकाळाचे वाचक आहेत, तर 'उत्तरकाळ' आणि 'आयती' हे भविष्यकाळाचे वाचक आहेत. ๘๗. ८७. หาโส’ ตฺตมนตา ปีติ, วิตฺติ ตุฏฺฐิ จ นาริยํ; อานนฺโท ปมุทา’โมโท, สนฺโตโส นนฺทิ สมฺมโท. हास, अत्तमनता, पीती (प्रीती), वित्ती, तुट्ठी (तुष्टी), आनंद, पमुदा (प्रमुदा), आमोद, संतोस (संतोष), नंदी आणि सम्मद हे आनंदाचे वाचक शब्द आहेत. ๘๘. ८८. ปาโมชฺชญฺจ ปโมโท ถ, สุขํ สาตญฺจ ผาสฺว’ถ; ภทฺทํ เสยฺโย สุภํ เขมํ, กลฺยาณํ มงฺคลํ สิวํ. पामोज्ज (प्रामोज्य), प्रमोध, सुख, सात आणि फासु हे सुखाचे वाचक आहेत. भद्द (भद्र), सेय्य (श्रेय), suभ (शुभ), खेम (क्षेम), कल्याण, मंगल आणि सिव (शिव) हे कल्याणाचे वाचक आहेत. ๘๙. ८९. ทุกฺขญฺจ กสิรํ กิจฺฉํ, นีโฆ จ พฺยสนํ อฆํ; ทพฺเพ ตุ ปาปปุญฺญานิ, ตีสฺวากิจฺฉํ สุขาทิ จ. दुक्ख (दुःख), कसिर (कष्ट), किच्छ (कृच्छ्र), नीघ, ब्यसन (व्यसन) आणि अघ हे दुःखाचे वाचक आहेत. द्रव्य (विशेष्य) अर्थात पाप आणि पुण्य हे शब्द तिन्ही लिंगांत वापरले जातात, तसेच किच्छ आणि सुखादी शब्दही तिन्ही लिंगांत होतात. ๙๐. ९०. ภาคฺยํ นิยติ ภาโค จ, ภาคเธยฺยํ วิธี’ริโต; อโถ อุปฺปตฺติ นิพฺพตฺติ, ชาติ ชนน มุพฺภโว. भाग्य, नियती, भाग, भागधेय आणि विधी हे नशिबाचे वाचक आहेत. उप्पत्ती (उत्पत्ती), निब्बत्ती (निवृत्ती/उत्पत्ती), जाती, जनन आणि उब्भव (उद्भव) हे जन्माचे वाचक आहेत. ๙๑. ९१. นิมิตฺตํ การณํ ฐานํ, ปทํ พีชํ นิพนฺธนํ; นิทานํ ปภโว เหตุ, สมฺภโว เสตุ ปจฺจโย. निमित्त, कारण, ठाण (स्थान), पद, बीज, निबंधन, निदान, पभव (प्रभव), हेतू, संभव, सेतू आणि पच्चय (प्रत्यय) हे कारणाचे वाचक शब्द आहेत. ๙๒. ९२. การณํ ยํ สมาสนฺนํ, ปทฏฺฐานนฺติ ตํ มตํ; ชีโว ตุ ปุริโส’ตฺตา ถ, ปธานํ ปกติตฺถิยํ. जे अत्यंत जवळचे कारण असते, त्याला 'पदट्ठान' (पदस्थान) मानले जाते. जीव, पुरिस (पुरुष) आणि अत्ता (आत्मा) हे आत्म्याचे वाचक आहेत. प्रधान आणि पकती (प्रकृती) हे स्त्रीलिंगात मूळ प्रकृतीचे वाचक आहेत. ๙๓. ९३. ปาโณ สรีรี ภูตํ วา, สตฺโต เทหี จ ปุคฺคโล; ชีโว ปาณี ปชา ชนฺตุ,ชโน โลโก ตถาคโต. पाण (प्राण), शरीरी, भूत, सत्त (सत्त्व), देही, पुग्गल (पुद्गल), जीव, पाणी (प्राणी), पजा (प्रजा), जंतू, जन, लोक आणि तथागत हे सर्व प्राण्याचे (जीवाचे) वाचक शब्द आहेत. ๙๔. ९४. รูปํ สทฺโท คนฺธ รสา, ผสฺโส ธมฺโม จ โคจรา; อาลมฺพา วิสยา เต ฉา, รมฺมณา ลมฺพณานิ จ. रूप, सद्द (शब्द), गंध, रस, फस्स (स्पर्श) आणि धम्म (धर्म) हे सहा गोचर (इंद्रियांचे विषय) आहेत. त्यांना आलंब, विषय, आरम्मण आणि आलंबन असेही म्हणतात. ๙๕. ९५. สุกฺโก โคโร สิโต’ทาตา,ธวโล เสต, ปณฺฑรา; โสโณ ตุ โลหิโต รตฺโต,ตมฺพ มญฺชิฏฺฐ โรหิตา. सुक्क (शुक्ल), गोर (गौर), सित (श्वेत), ओदात, धवल, सेत आणि पांढर हे पांढऱ्या रंगाचे वाचक आहेत. सोण, loहित, रत्त (रक्त), तंब (ताम्र), मंजिट्ठ (मंजिष्ठ) आणि रोहित हे लाल रंगाचे वाचक आहेत. ๙๖. ९६. นีโล กณฺหา’สิตา กาโฬ,เมจโก สาม สามลา; สิตปีเตตุ ปณฺฑุ’ตฺโต, อีสํปณฺฑุตุ ธูสโร. नील, कण्ह (कृष्ण), असित, काळ, मेचक, साम आणि सामल हे काळ्या रंगाचे वाचक आहेत. पांढऱ्या आणि पिवळ्या मिश्रित रंगाला 'पांडू' म्हणतात, आणि थोड्या पांडुर रंगाला 'धूसर' म्हणतात. ๙๗. ९७. อรุโณ [Pg.10] กิญฺจิรตฺโต ถ,ปาฏโล เสตโลหิโต; อโถ ปีโต หลิทฺยาโภ,ปลาโส หริโต หริ. थोड्या लाल रंगाला 'अरुण' म्हणतात. पांढऱ्या आणि लाल मिश्रित रंगाला 'पाटल' (गुलाबी) म्हणतात. पीत (पिवळा) आणि हळदीच्या रंगासारख्या रंगाला 'हलिद्याभ' म्हणतात. पलास, हरित आणि हरी हे हिरव्या रंगाचे वाचक आहेत. ๙๘. ९८. กฬาโร กปิโล นีล, ปีเต ถ โรจนปฺปเภ; ปิงฺโค ปิสงฺโค ปฺยถวา, กฬาราที ตุ ปิงฺคเล. काळार आणि कपिल हे निळ्या व पिवळ्या रंगाच्या मिश्रणाला किंवा गोरोचनाच्या प्रकाशासारख्या रंगाला दर्शवतात. पिंग आणि पिसंग हे देखील पिंगट रंगाचे वाचक आहेत; काळार इत्यादी शब्द पिंगट रंगासाठी वापरले जातात. ๙๙. ९९. กมฺมาโส สพโล จิตฺโต,สาโว ตุ กณฺหปีตเก; วาจฺจลิงฺคา คุณินฺเยเต, คุเณ สุกฺกาทโย ปุเม. कम्मास (कल्माश), सबल आणि चित्त (चित्र) हे ठिपके असलेल्या किंवा संमिश्र रंगाचे वाचक आहेत. काळ्या आणि पिवळ्या मिश्रित रंगाला 'साव' (श्याव) म्हणतात. हे सर्व शब्द गुणवाचक विशेषण म्हणून तिन्ही लिंगांत चालतात, परंतु केवळ गुणाचा निर्देश करताना ते पुल्लिंगी असतात. ๑๐๐. १००. นจฺจํ นฏฺฏญฺจ นฏนํ, นตฺตนํ ลาสนํ ภเว; นจฺจํ ตุ วาทิตํ คีต, มิติ นาฏุมิทํ ตยํ. नच्च (नृत्य), नट्ट, नटन, नत्तन आणि लासन हे नृत्याचे वाचक आहेत. नृत्य, वादित (वादन) आणि गीत या तिन्हींच्या समूहाला 'नाट्य' असे म्हणतात. ๑๐๑. १०१. นจฺจฏฺฐานํ สิยา รงฺโค, ภินโย สูจฺยสูจนํ; องฺคหาโร’งฺควิกฺเขโป, นฏฺฏโก นฏโก นโฏ. नृत्याच्या स्थानाला 'रंग' (रंगमंच) म्हणतात. अभिनयाला 'सूच्यसूचन' म्हणतात. अंगहाराला 'अंगविक्षेप' म्हणतात. नट्टक, नाटक आणि नट हे अभिनेत्याचे वाचक आहेत. ๑๐๒. १०२. สิงฺคาโร กรุโณ วีร, พฺภุต หสฺส ภยานกา; สนฺโต พีภจฺฉ รุทฺทานิ, นว นาฏฺยรสา อิเม. सिंगार (शृंगार), करुण, वीर, अब्भुत (अद्भुत), हास्य, भयानक, संत (शांत), बीभच्छ (बीभत्स) आणि रुद्द (रौद्र) हे नऊ नाट्यरस आहेत. ๑๐๓. १०३. โปสสฺส นาริยํ โปเส, อิตฺถิยา สงฺคมํ ปติ; ยา ปิหา เอส สิงฺคาโร, รติกีฬาทิการโณ. पुरुषाची स्त्रीविषयी आणि स्त्रीची पुरुषाविषयी मीलनाची जी इच्छा असते, जी रतिक्रीडा इत्यादींचे कारण बनते, त्याला 'सिंगार' (शृंगार रस) म्हणतात. ๑๐๔. १०४. อุตฺตม ปฺปกติปฺปาโย, อิตฺถิปุริสเหตุโก; โส สมฺโภโค วิโยโคติ,สิงฺคาโร ทุวิโธ มโต. उत्तम प्रकृतीचा (स्वभावाचा) आश्रय असलेला, स्त्री आणि पुरुष यांच्या निमित्ताने उत्पन्न होणारा, तो शृंगार 'संभोग' आणि 'वियोग' असा दोन प्रकारचा मानला गेला आहे. ๑๐๕. १०५. ภาสิตํ [Pg.11] ลปิตํ ภาสา, โวหาโร วจนํ วโจ; อุตฺติ วาจา คิรา วาณี, ภารตี กถิตา วจี. भासित, लपित, भाषा, वोहार (व्यवहार), वचन, वच, उत्ती, वाचा, गिरा, वाणी, भारती, कथिता आणि वची - हे सर्व वाणीचे (भाषणाचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๑๐๖. १०६. เอกาขฺยาโต ปทจโย, สิยา วากฺยํสการโก; อาเมฑิตนฺติ วิญฺเญยฺยํ, ทฺวตฺติกฺขตฺตุ มุทีรณํ. एक क्रियापद आणि कारकांसह असलेला पदांचा (शब्दांचा) समूह म्हणजे 'वाक्य' होय. दोन किंवा तीन वेळा उच्चारल्या जाणाऱ्या शब्दाला 'आमेडित' (द्विरुक्ती) असे समजावे. ๑๐๗. १०७. ภเย โกเธ ปสํสายํ, ตุริเต โกตูหเล’จฺฉเร; หาเส โสเก ปสาเท จ, กเร อาเมฑิตํ พุโธ. भय, क्रोध, प्रशंसा, घाई (त्वरा), कुतूहल, आश्चर्य, हास्य, शोक आणि प्रसन्नता (प्रसाद) यामध्ये सुज्ञ माणसाने 'आमेडित' (द्विरुक्ती) करावी. ๑๐๘. १०८. อิรุ นารี ยชุ สาม, มิติ เวทา ตโย สิยุํ; เอเต เอว ตยี นารี, เวโท มนฺโต สุติตฺถิยํ. इरु (ऋग्वेद), यजु (यजुर्वेद) आणि साम (सामवेद) हे तीन वेद आहेत. यांनाच 'तयी' (त्रयी) असेही म्हणतात. वेद, मंत (मंत्र) आणि सुतित्थिय हे समानार्थी शब्द आहेत. ๑๐๙. १०९. อฏฺฐโก วามโก วาม, เทโว จงฺคีรโส ภคุ; ยมทคฺคิ จ วาสิฏฺโฐ, ภารทฺวาโช จ กสฺสโป; เวสฺสามิตฺโตติ มนฺตานํ, กตฺตาโร อิสโย อิเม. अट्ठक, वामक, वामदेव, अंगीरस, भगु, यमदग्गी, वासिठ्ठ, भारद्वाज, कस्सप आणि वेस्सामित्त - हे मंत्रांचे कर्ते (रचनाकार) ऋषी आहेत. ๑๑๐. ११०. กปฺโป พฺยากรณํ โชติ, สตฺถํ สิกฺขา นิรุตฺติ จ; ฉนฺโทวิจิติ เจตานิ, เวทงฺคานิ วทนฺติ ฉ. कप्प (कल्प), ब्याकरण (व्याकरण), जोतिसत्थ (ज्योतिष), सिक्खा (शिक्षा), निरुत्ति (निरुक्त) आणि छंदोविचिती (छंद) - या सहा गोष्टींना 'वेदांगे' म्हणतात. ๑๑๑. १११. อิติหาโส ปุราวุตฺต, ปฺปพนฺโธ ภารตาทิโก; นามปฺปกาสกํ สตฺถํ, รุกฺขาทีนํ นิฆณฺฑุ โส. भारत (महाभारत) इत्यादी प्राचीन घटनांच्या प्रबंधाला 'इतिहास' म्हणतात. वृक्ष इत्यादींच्या नावांचे प्रकटीकरण करणाऱ्या शास्त्राला 'निघंडु' (कोश) म्हणतात. ๑๑๒. ११२. วิตณฺฑสตฺถํ วิญฺเญยฺยํ, ยํ ตํ โลกายตํ อิติ; เกฏุภํ ตุ กฺริยากปฺป, วิกปฺโป กวินํ หิโต. जे वितंडशास्त्र आहे, त्याला 'लोकायतन' (लोकायत) असे समजावे. कवींना हितकारक असणाऱ्या क्रियाकल्प आणि विकल्पाच्या शास्त्राला 'केटुभ' म्हणतात. ๑๑๓. ११३. อาขฺยายิโกปลทฺธตฺถา, ปพนฺธกปฺปนา กถา; ทณฺฑนีตฺย’ตฺถสตฺถสฺมึ, วุตฺตนฺโต ตุ ปวตฺติ จ. ऐतिहासिक सत्यावर आधारित कथेला 'आख्यायिका' म्हणतात, तर काल्पनिक रचनेला 'कथा' म्हणतात. दंडनीती आणि अर्थशास्त्रामध्ये 'वृत्तांत' आणि 'पवत्ती' (प्रवृत्ती/वृत्त) हे शब्द वापरले जातात. ๑๑๔. ११४. สญฺญา, ขฺยา, วฺหา สมญฺญา จา, ภิธานํ นาม มวฺหโย; นามเธยฺยา’ ธิวจนํ, ปฏิวากฺยํ ตุ อุตฺตรํ. संज्ञा, ख्या, व्हा, समञ्ञा (समज्ञा), अभिधान, नाम, अव्हाय, नामधेय आणि अधिवचन हे 'नाव' या अर्थाचे शब्द आहेत. 'पटिवाक्य' आणि 'उत्तर' हे प्रतिउत्तराचे समानार्थी शब्द आहेत. ๑๑๕. ११५. ปญฺโห ตีสฺว นุโยโค จ, ปุจฺฉา ปฺยถ นิทสฺสนํ; อุโปคฺฆาโต จ ทิฏฺฐนฺโต, ตโถ’ทาหรณํ ภเว. पञ्ह (प्रश्न), अनुयोग आणि पुच्छा (पृच्छा) हे 'प्रश्न' या अर्थाचे शब्द आहेत. तसेच निदस्सन (निदर्शन), उपोद्घात, दिट्ठंत (दृष्टांत) आणि उदाहरण हे 'उदाहरण' या अर्थाचे शब्द आहेत. ๑๑๖. ११६. สมา สงฺเขป สํหารา, สมาโส สงฺคโห ปฺยถ; สตํ ธารยสี ตฺยาทฺย, พฺภกฺขานํ ตุจฺฉภาสนํ. समा, संखेप (संक्षेप), संहार, समास आणि संग्रह हे संक्षेपाचे समानार्थी शब्द आहेत. 'तू माझे शंभर रुपये देणे लागतोस' इत्यादी खोट्या आरोपाला 'अब्भक्खान' (अभ्याख्यान) किंवा 'तुच्छभाषण' (असत्य भाषण) म्हणतात. ๑๑๗. ११७. โวหาโร ตุ วิวาโท ถ, สปนํ สปโถปิ จ; ยโส สิโลโก กิตฺติตฺถี,โฆสนา ตุ’จฺจสทฺทนํ. वोहार (व्यवहार) आणि विवाद हे 'भांडण/खटला' या अर्थाचे शब्द आहेत. सपन आणि सपथ (शपथ) हे 'शपथ' या अर्थाचे शब्द आहेत. यस (यश), सिलोक (श्लोक) आणि कित्ती (कीर्ती) हे 'कीर्ती' या अर्थाचे शब्द आहेत. मोठ्या आवाजात ओरडण्याला 'घोषणा' म्हणतात. ๑๑๘. ११८. ปฏิโฆโส ปฏิรโว, โถ’ ปญฺญาโส วจีมุขํ; กตฺถนา จ สิลาฆา จ, วณฺณนา จ นุติ ตฺถุติ. पटिघोस (प्रतिघोष) आणि पटिरव (प्रतिरव) हे 'पडसाद' या अर्थाचे शब्द आहेत. उपञ्ञास (उपन्यास) आणि वचीमुख हे 'प्रस्तावना' या अर्थाचे शब्द आहेत. कत्थना, सिलाघा (श्लाघा), वण्णना (वर्णन), नुती आणि thuti (स्तुती) हे 'स्तुती' या अर्थाचे शब्द आहेत. ๑๑๙. ११९. โถมนญฺจ ปสํสาถ, เกกา นาโท สิขณฺฑินํ; คชานํ โกญฺจนาโท ถ,มตา เหสา หยทฺธนิ. थोमन आणि पसंसा (प्रशंसा) हे देखील स्तुतीचेच शब्द आहेत. मोर (शिखंडी) यांच्या आवाजाला 'केका' म्हणतात. हत्तींच्या ओरडण्याला 'कोञ्चनाद' (क्रौंचनाद) म्हणतात आणि घोड्यांच्या आवाजाला 'हेसा' (हेषारव) मानले गेले आहे. ๑๒๐. १२०. ปริยาโย เววจนํ, สากจฺฉา ตุ จ สํกถา; อุปวาโท จุ’ปกฺโกสา, วณฺณวาทา’นุวาโท จ; ชนวาทา’ปวาทาปิ, ปริวาโท จ ตุลฺยตฺถา. परियाय (पर्याय) आणि वेवचन (वेवचन/समानार्थी) हे समानार्थी शब्द आहेत. साकच्छा (साकल्याने केलेली चर्चा) आणि संकथा हे 'संभाषणाचे' शब्द आहेत. उपवाद, उपक्कोस, वण्णवाद, अनुवाद्, जनवाद, अपवाद आणि परिवाद हे सर्व 'निंदा/बदनामी' या अर्थाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๑๒๑. १२१. เขโป [Pg.12] นินฺทา ตถา กุจฺฉา, ชิคุจฺฉา ครหา ภเว; นินฺทาปุพฺโพ อุปารมฺโภ, ปริภาสน มุจฺจเต. खेप, niंदा, कुच्छा (कुत्सा), जिगुच्छा (जुगुप्सा) आणि गरहा (गर्हा) हे 'निंदा' या अर्थाचे शब्द आहेत. निंदापूर्वक केलेल्या उपालंभाला (दोषारोपणाला) 'परिभासन' (शिवीगाळ किंवा कानउघाडणी) म्हणतात. ๑๒๒. १२२. อฏฺฐานริยโวหาร, วเสน ยา ปวตฺติตา; อภิวากฺยํ สิยา วาจา, สา วีติกฺกมทีปนี. आठ प्रकारच्या अनार्य व्यवहारांच्या (अष्टांग अनार्य व्यवहारांच्या) वश होऊन जी वाणी बोलली जाते आणि जी मर्यादांचे उल्लंघन दर्शवते, तिला 'अभिवाक्य' म्हणतात. ๑๒๓. १२३. มุหุํภาสา นุลาโปถ, ปลาโป นตฺถิกา คิรา; อาโทภาสน มาลาโป,วิลาโป ตุ ปริทฺทโว. वारंवार बोलण्याला 'अनुलाप' म्हणतात. निरर्थक बोलण्याला 'पलाप' (प्रलाप) म्हणतात. सुरुवातीला बोलण्याला 'आलाप' म्हणतात आणि रडण्याला/शोक करण्याला 'विलाप' किंवा 'परिद्देव' (परिदेवना) म्हणतात. ๑๒๔. १२४. วิปฺปลาโป วิโรโธตฺติ, สนฺเทโสตฺติ ตุ วาจิกํ; สมฺภาสนํ ตุ สลฺลาโป, วิโรธรหิตํ มิถุ. परस्परविरोधी बोलण्याला 'विप्पलाप' (विप्रलाप) म्हणतात. तोंडी निरोपाला 'वाचिक' किंवा 'संदेसोत्ती' (संदेशोक्ती) म्हणतात. आपापसातील विरोधविरहित संभाषणाला 'संभाषण' किंवा 'सल्लाप' (संलाप) म्हणतात. ๑๒๕. १२५. ผรุสํ นิฏฺฐุรํ วากฺยํ, มนุญฺญํ หทยงฺคมํ; สํกุลํ ตุ กิลิฏฺฐญฺจ, ปุพฺพาปรวิโรธินี. कठोर शब्दांना 'फरुस' (परुष) किंवा 'निट्ठुर' (निष्ठुर) म्हणतात. मनाला प्रिय वाटणाऱ्या शब्दांना 'मनुञ्ञ' (मनोज्ञ) किंवा 'हदयंगम' म्हणतात. पूर्व-अपर विरोधी (परस्परविरोधी) आणि क्लिष्ट असणाऱ्या वाणीला 'संकुल' किंवा 'किलिट्ठ' (क्लिष्ट) म्हणतात. ๑๒๖. १२६. สมุทายตฺถรหิตํ, อพทฺธมิติ กิตฺติตํ; วิตถํ ตุ มุสา จาถ, ผรุสาที ติลิงฺคิกา. समुदायाच्या अर्थाने रहित असणाऱ्या (असंगत) वाणीला 'अबद्ध' म्हटले गेले आहे. असत्य वाणीला 'वितथ' किंवा 'मुसा' (मृषा) म्हणतात. 'फरुस' (परुष) इत्यादी शब्द तिन्ही लिंगांत चालणारे (त्रिलिंगी) आहेत. ๑๒๗. १२७. สมฺมา พฺยยญฺจา วิตถํ, สจฺจํ ตจฺฉํ ยถาตถํ; ตพฺพนฺตา ตีสฺว ลีกํ ตฺว, สจฺจํ มิจฺฉา มุสา พฺยยํ. सम्मा (अव्यय), अवितथ, सच्च (सत्य), तच्छ (तथ्य) आणि यथातथ हे सत्याचे समानार्थी शब्द आहेत. सत्यवान पुरुष तिन्ही लिंगांत असतात. अलीक, असच्च (असत्य), मिच्छा (मिथ्या) आणि मुसा (मृषा) हे असत्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๑๒๘. १२८. รโว นินาโท นินโท จ สทฺโท,นิคฺโฆส นาท ทฺธนโย จ ราโว; อาราว สํราว วิราว โฆสา,รวา สุติตฺถี สร นิสฺสนา จ. रव, निनाद, निनद, सद्द (शब्द), निग्घोस (निर्घोष), नाद, धनय, राव, आराव, संराव, विराव, घोस (घोष), सुतित्थी, सर (स्वर) आणि निस्सन (निस्वन) हे सर्व 'आवाज' (ध्वनी) या अर्थाचे शब्द आहेत. ๑๒๙. १२९. วิสฺสฏฺฐ มญฺชุ วิญฺเญยฺยา, สวนียา วิสาริโน; พินฺทุ คมฺภีร นินฺนาที, ตฺเยว มฏฺฐงฺคิโก สโร. विस्सट्ठ (स्पष्ट), मञ्जु (मधुर), विञ्ञेय्य (सहज समजणारा), सवनीय (ऐकण्यास सुश्राव्य), विसारी (दूरवर पसरणारा), बिंदु (घट्ट/सुबद्ध), गंभीर आणि निन्नादी (प्रतिध्वनित होणारा) - असा हा आठ अंगांनी युक्त (अष्टांगयुक्त) स्वर असतो. ๑๓๐. १३०. ติรจฺฉานคตานญฺหิ, รุตํ วสฺสิต มุจฺจเต; โกลาหโล กลหโล,คีตํ คานญฺจ คีติกา. प्राण्यांच्या ओरडण्याला 'रुत' किंवा 'वस्सित' म्हणतात. कोलाहल आणि कलहल हे 'गोंधळ' या अर्थाचे शब्द आहेत. गीत, गान आणि गीतिका हे 'गाणे' या अर्थाचे शब्द आहेत. ๑๓๑. १३१. สรา สตฺต ตโย คามา, เจกวีสติ มุจฺฉนา; ตานา เจกูนปญฺญาส, อิจฺเจตํ สรมณฺฑลํ. सात स्वर, तीन ग्राम, एकवीस मूर्च्छना आणि एकोणपन्नास तान - या सर्वांना मिळून 'स्वरमंडळ' म्हणतात. ๑๓๒. १३२. อุสโภ เธวโต เจว, ฉชฺช คนฺธาร มชฺฌิมา; ปญฺจโม จ นิสาโทติ, สตฺเต’เต คทิตา สรา. उसभ (ऋषभ), धेवत (धैवत), chajj (षड्ज), गंधार, मज्झिम (मध्यम), पंचम आणि निसाद (निषाद) - हे सात स्वर सांगितले आहेत. ๑๓๓. १३३. นทนฺติ [Pg.13] อุสภํ คาโว, ตุรคา เธวตํ ตถา; ฉชฺชํ มยูรา คนฺธาร, มชา โกญฺจา จ มชฺฌิมํ. गायी 'उसभ' (ऋषभ) स्वरात ओरडतात, घोडे 'धेवत' स्वरात ओरडतात, मोर 'छज्ज' (षड्ज) स्वरात, शेळ्या 'गंधार' स्वरात आणि क्रौंच पक्षी 'मज्झिम' (मध्यम) स्वरात ओरडतात. ๑๓๔. १३४. ปญฺจมํ ปรปุฏฺฐาที, นิสาทมฺปิ จ วารณา; ฉชฺโช จ มชฺฌิโม คามา,ตโย สาธารโณติ จ. कोकिळा इत्यादी पक्षी 'पंचम' स्वरात आणि हत्ती 'निसाद' स्वरात ओरडतात. छज्ज (षड्ज), मज्झिम (मध्यम) आणि साधारण हे तीन 'ग्राम' आहेत. ๑๓๕. १३५. สเรสุ เตสุ ปจฺเจเก, ติสฺโส ติสฺโส หิ มุจฺฉนา; สิยุํ ตเถว ตานานิ, สตฺต สตฺเตว ลพฺภเร. त्या स्वरांपैकी प्रत्येकामध्ये तीन-तीन मूर्च्छना असतात आणि तसेच सात-सात तान प्राप्त होतात. ๑๓๖. १३६. ติสฺโส ทุเว จตสฺโส จ, จตสฺโส กมโต สเร; ติสฺโส ทุเว จตสฺโสติ, ทฺวาวีสติ สุตี สิยุํ. स्वरांमध्ये अनुक्रमे तीन, दोन, चार, चार, तीन, दोन आणि चार अशा एकूण बावीस 'सुती' (श्रुती) असतात. ๑๓๗. १३७. อุจฺจตเร รเว ตาโร, ถาพฺยตฺเต มธุเร กโล; คมฺภีเร ตุ รเว มนฺโท, ตาราที ตีสฺวโถ กเล; กากลี สุขุเม วุตฺโต,กฺริยาทิสมตา ลโย. अत्यंत उच्च आवाजाला 'तार' म्हणतात, अस्पष्ट पण मधुर आवाजाला 'कल' म्हणतात, गंभीर आवाजाला 'मंद' म्हणतात. 'तार' इत्यादी शब्द तिन्ही लिंगांत चालतात. सूक्ष्म आवाजाला 'काकली' म्हणतात आणि क्रिया इत्यादींच्या समानतेला 'लय' म्हणतात. ๑๓๘. १३८. วีณา จ วลฺลกี สตฺต, ตนฺตี สา ปริวาทินี; โปกฺขโร โทณิ วีณาย,อุปวีโณ ตุ เวฐโก. वीणा आणि वल्लकी हे वीणेचे समानार्थी शब्द आहेत. सात तारा असलेल्या वीणेला 'परिवादिनी' म्हणतात. वीणेच्या पोकळ भागाला (द्रोणीला) 'पोक्खर' किंवा 'दोणी' म्हणतात आणि वीणेच्या वेष्टनाला (कव्हरला) 'उपवीण' किंवा 'वेठक' म्हणतात. ๑๓๙. १३९. อาตตญฺเจว วิตต, มาตตวิตตํ ฆนํ; สุสิรํ เจติ ตูริยํ, ปญฺจงฺคิก มุทีริตํ. आतत, वितत, आततवितत, घन आणि सुसिर - या पाच प्रकारच्या वाद्यांना 'पंचांगिक तूर्य' (पाच प्रकारची वाद्ये) म्हटले गेले आहे. ๑๔๐. १४०. อาตตํ นาม จมฺมาว, นทฺเธสุ เภริยาทิสุ; ตเล’เกกยุตํ กุมฺภ, ถุณ ททฺทริกาทิกํ. 'आतत' म्हणजे भेरी इत्यादींसारखी चामड्याने मढवलेली वाद्ये, ज्यांच्या एकाच बाजूला चामडे असते, जसे की कुंभथुण, दद्दरिक इत्यादी. ๑๔๑. १४१. วิตตํ โจ’ภยตลํ, ตูริยํ มุรชาทิกํ; อาตตวิตตํ สพฺพ, วินทฺธํ ปณวาทิกํ. दोन्ही बाजूंनी चामड्याने मढवलेल्या वाद्याला 'वितत' म्हणतात, जसे की मुरज इत्यादी. सर्व बाजूंनी चामड्याने वेढलेल्या वाद्याला 'आततवितत' म्हणतात, जसे की पणव इत्यादी. ๑๔๒. १४२. สุสิรํ วํสสงฺขาทิ, สมฺมตาลาทิกํ ฆนํ; อาโตชฺชํ ตุ จ วาทิตฺตํ, วาทิตํ วชฺช มุจฺจเต. बासरी (वंस), शंख इत्यादी फुंकून वाजवण्याच्या वाद्यांना 'सुसिर' म्हणतात. झांज (सम्मताल) इत्यादी धातूच्या वाद्यांना 'घन' म्हणतात. आतोज्ज, वादित्त, वादित आणि वज्ज हे वाद्यांचे समानार्थी शब्द आहेत. ๑๔๓. १४३. เภรี (เภริ) ทุนฺทุภิ วุตฺโต ถ,มุทิงฺโค มุรโชสฺส ตุ; อาลิงฺค, งฺกฺโย, ทฺธกา เภทา,ติณโว ตุ จ ฑิณฺฑิโม. भेरी आणि दुंदुभी हे नगार्याचे समानार्थी शब्द आहेत. मुदिंग (मृदंग) आणि मुरज हे मृदंगाचे शब्द आहेत. आलिंग, अंक्य आणि अद्धक हे त्याचेच भेद आहेत. तिणव आणि डिंडिम हे देखील वाद्यांचे प्रकार आहेत. ๑๔๔. १४४. อาลมฺพโร [Pg.14] ตุ ปณโว, โกโณ วีณาทิวาทนํ; ททฺทรี ปฏโห เภริ, ปฺปเภทา มทฺทลาทโย. आलंबर म्हणजे पणव (एक प्रकारचा ढोल), वीणा वाजवण्याच्या साधनाला (धनुष्याला) 'कोण' म्हणतात. दद्दरि, पटह, भेरी आणि मद्दल (मृदंग) इत्यादी ढोलाचे प्रकार आहेत. ๑๔๕. १४५. ชนปฺปิเย วิมทฺทุฏฺเฐ, คนฺเธ ปริมโล ภเว; โส ตฺวา โมโท ทูรคามี, วิสฺสนฺตา ตีสฺวิโต ปรํ. लोकांना प्रिय असलेल्या आणि चोळल्याने (मर्दन केल्याने) उत्पन्न होणाऱ्या सुगंधाला 'परिमल' म्हणतात. दूरवर पसरणाऱ्या सुगंधाला 'आमोद' म्हणतात आणि त्याहून अधिक पसरणाऱ्या सुगंधाला 'विस्सन्त' म्हणतात. ๑๔๖. १४६. อิฏฺฐคนฺโธ จ สุรภิ, สุคนฺโธ จ สุคนฺธิ จ; ปูติคนฺธิ ตุ ทุคฺคนฺโธ, ถ วิสฺสํ อามคนฺธิ ยํ. इष्ट (प्रिय) गंधाला 'सुरभी', 'सुगंध' आणि 'सुगंधी' म्हणतात. दुर्गंधीला 'पूतिगंध' म्हणतात आणि कच्च्या मांसासारख्या किंवा माशासारख्या वासाला 'विस्स' किंवा 'आमगंध' म्हणतात. ๑๔๗. १४७. กุงฺกุมญฺเจว ยวน, ปุปฺผญฺจ ตครํ ตถา; ตุรุกฺโขติ จตุชฺชาติ, คนฺธา เอเต ปกาสิตา. कुंकुम (केशर), यवनपुष्प, तगर आणि तुरुष्क (लोबान/शिलाजित) हे चार प्रकारचे सुगंध (चतुर्जाती गंध) सांगितले आहेत. ๑๔๘. १४८. กสาโว นิตฺถิยํ ติตฺโต, มธุโร ลวโณ อิเม; อมฺพิโล กฏุโก เจติ, ฉ รสา ตพฺพตี ติสุ. कसाय (कडू/तुरट - नपुंसकलिंगी), तिक्त (कडू), मधुर (गोड), लवण (खारट), आंबिल (आंबट) आणि कटुक (तिखट) हे सहा रस आहेत. ๑๔๙. १४९. สิยา ผสฺโส จ โผฏฺฐพฺโพ,วิสยี ตฺวกฺข มินฺทฺริยํ; นยนํ ตฺวกฺขิ เนตฺตญฺจ, โลจนํ จ’จฺฉิ จกฺขุ จ. स्पर्श हा 'फस्स' आणि 'फोट्ठब्ब' (फोष्टव्य) आहे. इंद्रियाला 'अक्ख' आणि 'इंद्रिय' म्हणतात. डोळ्याला 'नयन', 'अक्खि', 'नेत्त', 'लोचन', 'अच्छि' आणि 'चक्खु' म्हणतात. ๑๕๐. १५०. โสตํ สทฺทคฺคโห กณฺโณ, สวนํ สุติ นตฺถุ ตุ; นาสา จ นาสิกา ฆานํ, ชิวฺหาตุ รสนา ภเว. कानाला 'सोत', 'सद्दग्गह', 'कण्ण', 'सवन' आणि 'सुति' म्हणतात. नाकाला 'नत्थु', 'नासा', 'नासिका' आणि 'घान' म्हणतात. जिभेला 'जिव्हा' आणि 'रसना' म्हणतात. ๑๕๑. १५१. สรีรํ วปุ คตฺตญฺจา, ตฺตภาโว โพนฺทิ วิคฺคโห; เทหํ วา ปุริเส กาโย, ถิยํ ตนุ กเฬวรํ. शरीराला 'सरीर', 'वपु', 'गत्त', 'अत्तभाव', 'बोन्दि', 'विग्गह', 'देह' (पुल्लिंगी किंवा नपुंसकलिंगी), 'काय' (पुल्लिंगी), 'तनु' (स्त्रीलिंगी) आणि 'कळेवर' म्हणतात. ๑๕๒. १५२. จิตฺตํ เจโต มโน นิตฺถี, วิญฺญาณํ หทยํ ตถา; มานสํ ธี ตุ ปญฺญา จ, พุทฺธิ เมธา มติ มุติ. मनाला 'चित्त', 'चेतो', 'मनो' (नपुंसकलिंगी), 'विञ्ञाण' (विज्ञान), 'हदय' (हृदय) आणि 'मानस' म्हणतात. बुद्धीला 'धी', 'पञ्ञा' (प्रज्ञा), 'बुद्धी', 'मेधा', 'मती' आणि 'मुती' म्हणतात. ๑๕๓. १५३. ภูรี มนฺตา จ ปญฺญาณํ, ญาณํ วิชฺชา จ โยนิ จ; ปฏิภาน มโมโห ถ, ปญฺญาเภทา วิปสฺสนา. बुद्धीला 'भूरी', 'मन्ता', 'पञ्ञाण', 'ञाण' (ज्ञान), 'विज्जा' (विद्या), 'योनी', 'पटिभान' आणि 'अमोह' देखील म्हणतात. प्रज्ञेचा (बुद्धीचा) एक प्रकार 'विपस्सना' (विपश्यना) आहे. ๑๕๔. १५४. สมฺมาทิฏฺฐิ ปภุติกา, วีมํสา ตุ วิจารณา; สมฺปชญฺญํ ตุ เนปกฺกํ, เวทยิตํ ตุ เวทนา. सम्मादिट्ठि (सम्यक दृष्टी) इत्यादी प्रज्ञेचे प्रकार आहेत. चिकित्सेला 'वीमंसा' (मीमांसा) आणि 'विचारणा' म्हणतात. सजगतेला 'सम्पजञ्ञ' (संप्रजन्य) आणि 'नेपक्क' म्हणतात. वेदनेला 'वेदयित' आणि 'वेदना' म्हणतात. ๑๕๕. १५५. ตกฺโก วิตกฺโก สงฺกปฺโป,ปฺปโน’ หา’ ยุ ตุ ชีวิตํ; เอกคฺคตา ตุ สมโถ, อวิกฺเขโป สมาธิ จ. विचाराला 'तक्क' (तर्क), 'वितक्क' (वितर्क), 'संकप्प' (संकल्प), 'अप्पना' (अर्पणा) आणि 'ऊहा' म्हणतात. आयुष्याला 'आयु' आणि 'जीवित' म्हणतात. चित्ताच्या एकाग्रतेला 'एकग्गता' (एकाग्रता), 'समथ' (शमथ), 'अविक्खेप' (अविक्षेप) आणि 'समाधी' म्हणतात. ๑๕๖. १५६. อุสฺสาหา’ ตปฺป ปคฺคาหา, วายาโม จ ปรกฺกโม; ปธานํ วีริยํ เจหา, อุยฺยาโม จ ธิติ ตฺถิยํ. प्रयत्नाला (वीर्याला) 'उस्साह' (उत्साह), 'आतप्प' (आतप), 'पग्गाह' (प्रग्रह), 'वायाम' (व्यायाम), 'परक्कम' (पराक्रम), 'पधान' (प्रधान), 'वीरिय' (वीर्य), 'ईहा', 'उय्याम' (उद्योग) आणि 'धिती' (धृती - स्त्रीलिंगी) म्हणतात. ๑๕๗. १५७. จตฺตาริ วีริยงฺคานิ, ตจสฺส จ นหารุโน; อวสิสฺสน มฏฺฐิสฺส, มํสโลหิตสุสฺสนํ. वीर्याची (प्रयत्नाची) चार अंगे आहेत: त्वचा, शिरा (स्नायू) आणि हाडे शिल्लक राहणे, आणि मांस व रक्ताचे सुकणे (शोषून जाणे). ๑๕๘. १५८. อุสฺโสฬฺหี [Pg.15] ตฺว ธิมตฺเตหา, สติ ตฺว นุสฺสติ ตฺถิย; ลชฺชา หิรี สมานา ถ, โอตฺตปฺปํ ปาปภีรุตา. तीव्र प्रयत्नाला 'उस्सोळ्ही' आणि 'अधिमत्त ईहा' म्हणतात. स्मृतीला 'सती' (स्मृती) आणि 'अनुस्सती' (अनुस्मृती - स्त्रीलिंगी) म्हणतात. लज्जेला 'लज्जा' आणि 'हिरी' (ह्री) म्हणतात. पापाच्या भीतीला 'ओत्तप्प' (अपत्रपा) आणि 'पापभीरुता' म्हणतात. ๑๕๙. १५९. มชฺฌตฺตตา ตุ’เปกฺขา จ, อทุกฺขมสุขา สิยา; จิตฺตาโภโค มนกฺกาโร,อธิโมกฺโข ตุ นิจฺฉโย. तटस्थतेला 'मज्झत्तता' (मध्यस्थता), 'उपेक्खा' (उपेक्षा) आणि 'अदुक्खमसुखा' (अदुःख-असुख) म्हणतात. मनाच्या एकाग्रतेला/लक्ष देण्याला 'चित्ताभोग' आणि 'मनस्कार' (मनसिकार) म्हणतात. निश्चयाला 'अधिमोक्ख' (अधिmoक्ष) आणि 'निच्छय' (निश्चय) म्हणतात. ๑๖๐. १६०. ทยา’ นุกมฺปา การุญฺญํ, กรุณา จ อนุทฺทยา; ถิยํ เวรมณี เจว, วิรตฺยา’ รติ จาปฺยถ. दयेला 'दया', 'अनुकम्पा', 'कारुञ्ञ' (कारुण्य), 'करुणा' आणि 'अनुद्दया' म्हणतात. विरतीला (पापापासून दूर राहण्याला) 'वेरमणी' (स्त्रीलिंगी), 'विरती' आणि 'आरती' म्हणतात. ๑๖๑. १६१. ติติกฺขา ขนฺติ ขมนํ, ขมา เมตฺตา ตุ เมตฺย’ถ; ทสฺสนํ ทิฏฺฐิ ลทฺธิตฺถี, สิทฺธนฺโต สมโย ภเว. क्षमेला 'तितिक्खा' (तितिक्षा), 'खन्ती' (क्षांती), 'खमन' आणि 'खमा' (क्षमा) म्हणतात. मैत्रीला 'मेत्ता' (मैत्री) आणि 'मेत्ती' म्हणतात. सिद्धांताला (मताला) 'दस्सन' (दर्शन), 'दिट्ठि' (दृष्टी), 'लद्धि' (लब्धी - स्त्रीलिंगी), 'सिद्धान्त' आणि 'समय' म्हणतात. ๑๖๒. १६२. ตณฺหา จ ตสิณา เอชา, ชาลินี จ วิสตฺติกา; ฉนฺโท ชฏา นิกนฺตฺยา’สา, สิพฺพินี ภวเนตฺติ จ. तृष्णेला 'तण्हा' (तृष्णा), 'तसिणा', 'एजा', 'जालिनी', 'विसत्तिका', 'छन्द' (छंद), 'जटा', 'निकन्ती', 'आसा' (आशा), 'सिब्बिनी' (शिवनी) आणि 'भवनित्ती' (भवनेत्री) म्हणतात. ๑๖๓. १६३. อภิชฺฌา วนโถ วานํ, โลโภ ราโค จ อาลโย; ปิหา มโนรโถ อิจฺฉา, ภิลาโส กาม โทหฬา; อากงฺขา รุจิ วุตฺตา สา, ตฺวธิกา ลาลสา ทฺวิสุ. लोभाला 'अभिज्झा' (अभिध्या), 'वनथ', 'वान', 'लोभ', 'राग' आणि 'आलय' म्हणतात. इच्छेला 'पिहा' (स्पृहा), 'मनोरथ', 'इच्छा', 'अभिलास' (अभिलाषा), 'काम', 'दोहळ' (डोहाळा), 'आकङ्खा' (आकांक्षा) आणि 'रुची' म्हणतात. तीव्र इच्छेला 'लालसा' म्हणतात. ๑๖๔. १६४. เวรํ วิโรโธ วิทฺเทโส, โทโส จ ปฏิฆญฺจ วา; โกธา’ ฆาตา โกป โรสา,พฺยาปาโท’ นภิรทฺธิ จ. वैराला 'वेर' (वैर), 'विरोध', 'विद्देस' (विद्वेष), 'दोस' (द्वेष) आणि 'पटिघ' (प्रतिघ) म्हणतात. क्रोधाला 'कोध' (क्रोध), 'आघात', 'कोप', 'रोस' (रोष), 'ब्यापाद' (व्यापाद) आणि 'अनभिरद्धी' म्हणतात. ๑๖๕. १६५. พทฺธเวร มุปนาโห, สิยา โสโก ตุ โสจนํ; โรทิตํ กนฺทิตํ รุณฺณํ, ปริเทโว ปริทฺทโว. मनात धरलेल्या वैराला 'बद्धवेर' आणि 'उपनाह' म्हणतात. शोकाला 'सोक' (शोक) आणि 'सोचन' (शोचन) म्हणतात. रडण्याला 'रोदित', 'कन्दित' (क्रंदित), 'रुण्ण' (रुदित), 'परिदेव' आणि 'परिद्दव' म्हणतात. ๑๖๖. १६६. ภีติตฺถิ ภย มุตฺตาโส, เภรวํ ตุ มหพฺภยํ; भीतीला 'भीती' (स्त्रीलिंगी), 'भय' आणि 'उत्तास' (त्रास/भीती) म्हणतात. महाभयाला 'भेरव' (भैरव) आणि 'महब्भय' (महाभय) म्हणतात. ๑๖๗. १६७. เภรวํ ภีสนํ ภีมํ, ทารุณญฺจ ภยานกํ; โฆรํ ปฏิภยํ เภสฺมํ, ภยงฺกร มิเม ตีสุ. भयानक गोष्टीला 'भेरव', 'भीसन' (भीषण), 'भीम', 'दारुण', 'भयानक', 'घोर', 'पटिभय' (प्रतिभय), 'भेस्म' (भीष्म) आणि 'भयङ्कर' (भयंकर) म्हणतात (हे तिन्ही लिंगांत वापरले जातात). ๑๖๘. १६८. อิสฺสา อุสูยา มจฺเฉรํ, ตุ มจฺฉริย มจฺฉรํ; โมโห’วิชฺชา ตถา’ญาณํ, มาโน วิธา จ อุนฺนติ. ईर्ष्याला 'इस्सा' (ईर्ष्या) आणि 'उसूया' (असूया) म्हणतात. कंजूषपणाला 'मच्छेर', 'मच्छरिय' (मात्सर्य) आणि 'मच्छर' म्हणतात. मोहाला 'मोह', 'अविज्जा' (अविद्या) आणि 'अञ्ञाण' (अज्ञान) म्हणतात. अभिमानाला 'मान', 'विधा' आणि 'उन्नती' म्हणतात. ๑๖๙. १६९. อุทฺธจฺจ มุทฺธฏํ จาถ, ตาโป กุกฺกุจฺจเมว จ; ปจฺฉาตาโป นุตาโป จ, วิปฺปฏิสาโร ปกาสิโต. चंचलतेला 'उद्धच्च' (औद्धत्य) आणि 'उद्धट' म्हणतात. पश्चात्तापाला 'ताप', 'कुक्कुच्च' (कुकृत्य/पश्चात्ताप), 'पच्छाताप' (पश्चात्ताप), 'अनुताप' आणि 'विप्पटिसार' (विप्रतिसार) म्हणतात. ๑๗๐. १७०. มโนวิเลข สนฺเทหา, สํสโย จ กถํกถา; ทฺเวฬฺหกํ วิจิกิจฺฉา จ, กงฺขา สงฺกา วิมตฺยปิ. संशयाला 'मनोविलेख', 'संदेह', 'संसय' (संशय), 'कथंकथा', 'द्वेळ्हक', 'विचिकिच्छा' (विचिकित्सा), 'कङ्खा' (कांक्षा), 'sङ्का' (शंका) आणि 'विमती' (विमति) म्हणतात. ๑๗๑. १७१. คพฺโพ [Pg.16] ภิมาโน’หํกาโร, จินฺตาตุ ฌาน มุจฺจเต; นิจฺฉโย นิณฺณโย วุตฺโต, ปฏิญฺญา ตุ ปฏิสฺสโว. गर्वाला 'गब्ब' (गर्व), 'अभिमान' आणि 'अहंकार' म्हणतात. चिंतनाला 'चिंता' आणि 'झान' (ध्यान) म्हणतात. निर्णयाला 'निच्छय' (निश्चय) आणि 'निण्णय' (निर्णय) म्हणतात. प्रतिज्ञेला 'पटिञ्ञा' (प्रतिज्ञा) आणि 'पटिस्सव' (प्रतिश्रव) म्हणतात. ๑๗๒. १७२. อวมานํ ติรกฺกาโร, ปริภโว ปฺย’ นาทโร; ปราภโว ปฺย’ วญฺญา ถ, อุมฺมาโท จิตฺตวิพฺภโม. अपमानाला 'अवमान', 'तिरक्कार' (तिरस्कार), 'परिभव', 'अनादर', 'पराभव' आणि 'अवञ्ञा' (अवज्ञा) म्हणतात. वेडेपणाला 'उम्माद' (उन्माद) आणि 'चित्तविब्भम' (चित्तविभ्रम) म्हणतात. ๑๗๓. १७३. เปมํ สิเนโห สฺเนโห ถ, จิตฺตปีฬา วิสญฺญิตา; ปมาโท สติโวสฺสคฺโค, โกตูหลํ กุตูหลํ. प्रेमाला 'पेम' (प्रेम), 'सिनेह' आणि 'स्नेह' म्हणतात. मानसिक वेदनेला/बेहोशीला 'चित्तपीडा' आणि 'विसञ्ञिता' (विसंज्ञिता) म्हणतात. प्रमादाला (अनावधानाला) 'पमाद' (प्रमाद) आणि 'सतिवोस्सग्ग' (स्मृत्युत्सर्ग) म्हणतात. कुतूहलाला 'कोतूहल' आणि 'कुतूहल' म्हणतात. ๑๗๔. १७४. วิลาโส ลลิตํ ลีลา, หาโว เหฬา จ วิพฺภโม; อิจฺจาทิกา สิยุํ นาริ, สิงฺคารภาวชา กิริยา. विलास, ललित, लीला, हाव, हेळा आणि विभ्रम इत्यादी स्त्रियांच्या शृंगारभावापासून उत्पन्न होणाऱ्या क्रिया आहेत. ๑๗๕. १७५. หสนํ หสิตํ หาโส, มนฺโท โส มิหิตํ สิตํ; อฏฺฏหาโส มหาหาโส,โรมญฺโจ โลมหํสนํ. हसण्याला 'हसन', 'हसित' आणि 'हास' म्हणतात. मंद हास्याला 'मिहित' आणि 'सित' (स्मित) म्हणतात. मोठ्याने हसण्याला 'अट्टहास' आणि 'महाहास' म्हणतात. अंगावर काटा येण्याला 'रोमांच' आणि 'लोमहंसन' म्हणतात. ๑๗๖. १७६. ปริหาโส ทโว ขิฑฺฑา, เกฬิ กีฬา จ กีฬิตํ; นิทฺทา ตุ สุปินํ โสปฺปํ, มิทฺธญฺจ ปจลายิกา. थट्टा-मस्करी किंवा खेळाला 'परिहास', 'दव', 'खिड्डा' (क्रीडा), 'केळि', 'कीळा' आणि 'कीळित' म्हणतात. झोपेला 'निद्दा' (निद्रा), 'सुपिन' (स्वप्न) आणि 'सोप्प' (स्वाप) म्हणतात. आळस किंवा डुलकीला 'मिद्ध' आणि 'पचलायिका' म्हणतात. ๑๗๗. १७७. ถิยํ นิกติ กูฏญฺจ, ทมฺโภ สาฐฺยญฺจ เกตวํ; สภาโว ตุ นิสฺสคฺโค จ, สรูปํ ปกติตฺถิยํ. कपट किंवा फसवणुकीला 'निकति' (स्त्रीलिंगी), 'कूट', 'दम्भ', 'साठ्य' (शाठ्य) आणि 'केतव' म्हणतात. स्वभावाला 'सभाव' (स्वभाव), 'निस्सग्ग' (निसर्ग), 'सरूप' आणि 'पकति' (प्रकृती - स्त्रीलिंगी) म्हणतात. ๑๗๘. १७८. สีลญฺจ ลกฺขณํ ภาโว,อุสฺสโว ตุ ฉโณ มโห. चारित्र्य किंवा लक्षणाला 'सील' (शील), 'लक्खण' (लक्षण) आणि 'भाव' म्हणतात. उत्सवाला 'उस्सव' (उत्सव), 'छण' (क्षण) आणि 'मह' म्हणतात. ๑๗๙. १७९. ธาเรนฺโต ชนฺตุ สสฺเนห, มภิธานปฺปทีปิกํ; ขุทฺทกาทฺยตฺถชาตานิ, สมฺปสฺสติ ยถาสุขํ. जो मनुष्य या 'अभिधानप्पदीपिका' ग्रंथाला प्रेमाने धारण करतो (अभ्यास करतो), तो क्षुद्रक (लहान) इत्यादी सर्व पदार्थांचे अर्थ सहजपणे समजून घेतो. สคฺคกณฺโฑ นิฏฺฐิโต. स्वर्गकांड समाप्त झाले. ๒. ภูกณฺฑ २. भूकांड (पृथ्वी विभाग). ๑. ภูมิวคฺค १. भूमिवर्ग. ๑๘๐. १८०. วคฺคา ภูมิ, ปุรี, มจฺจ, จตุพฺพณฺณ, วนาทิหิ; ปาตาเลน จ วุจฺจนฺเต, สงฺโค’ปงฺเคหิ’ธ’กฺกมา. येथे अनुक्रमाने भूमी, पुरी (नगर), मच्च (मनुष्य), चतुब्बण्ण (चार वर्ण), वन इत्यादी आणि पाताळ या वर्गांचे त्यांच्या अंग-उपांगांसह वर्णन केले जाईल. ๑๘๑. १८१. วสุนฺธรา ฉมา ภูมิ, ปถวี เมทนี มหี; อุพฺพี วสุมตี โค กุ, วสุธา ธรณี ธรา; ปุถวี ชคตี ภูรี, ภู จ ภูตธรา’ วนี. वसुंधरा, छमा, भूमी, पठवी, मेदनी, मही, उब्बी, वसुमती, गो, कु, वसुधा, धरणी, धरा, पुथवी, जगती, भूरी, भू, भूतधरा आणि अवनी ही पृथ्वीची नावे आहेत. ๑๘๒. १८२. ขารา [Pg.17] ตุ มตฺติกา อูโส, อูสวา ตูสโร ติสุ; ถลํ ถลีตฺถี ภูภาเค, ถทฺธลูขมฺหิ ชงฺคโล. खारट मातीला 'ऊसो' (खारट जमीन) म्हणतात. खारट जमीन असलेल्या प्रदेशाला 'ऊसव' आणि 'तूसर' म्हणतात. उंच किंवा कोरड्या भूभागाला 'थलं' किंवा 'थली' म्हणतात, तर कठीण व रुक्ष जमिनीला 'जंगल' (जांगल) म्हणतात. ๑๘๓. १८३. ปุพฺพวิเทโห จาปร, โคยานํ ชมฺพุทีโป จ; อุตฺตรกุรุ เจติ สิยุํ, จตฺตาโรเม มหาทีปา. पूर्वविदेह, अपरगोयान, जम्बुदीप आणि उत्तरकुरु हे चार महाद्वीप आहेत. ๑๘๔. १८४. ปุมฺพหุตฺเต กุรู สกฺกา, โกสลา มคธา สิวี; กลิงฺคา’วนฺติ ปญฺจาลา, วชฺชี คนฺธาร เจตโย. कुरु, शाक्य, कोसल, मगध, शिवी, कलिंग, अवंती, पांचाल, वज्जी, गंधार आणि चेती (हे देश किंवा जनपदे बहुवचनात वापरले जातात). ๑๘๕. १८५. วงฺคา วิเทหา กมฺโพชา, มทฺทา ภคฺค’งฺค สีหฬา; กสฺมีรา กาสิ ปณฺฑวาที, สิยุํ ชนปทนฺตรา. वंग, विदेह, कंबोज, मद्द, भग्ग, अंग, सीहळ, काश्मीर, कासी आणि पांडव इत्यादी इतर जनपदे (देश) आहेत. ๑๘๖. १८६. โลโก จ ภุวนํ วุตฺตํ, เทโส ตุ วิสโย ปฺยถ; มิลกฺขเทโส ปจฺจนฺโต, มชฺฌเทโส ตุ มชฺฌิโม. जगाला 'लोको' आणि 'भुवनं' म्हणतात. प्रदेश किंवा देशाला 'देसो' आणि 'विसयो' म्हणतात. म्लेंच्छ (अनायार्ंचा) देश 'मिलक्खदेसो' किंवा 'पच्चंतो' (सीमावर्ती भाग) म्हणून ओळखला जातो, तर मध्यवर्ती भागाला 'मज्झदेसो' किंवा 'मज्झिमो' म्हणतात. ๑๘๗. १८७. อนูโป สลิลปฺปาโย, กจฺฉํ ปุม นปุํสเก; สทฺทโล หริเต เทเส, ติเณนา, ภินเวน หิ. ज्या जमिनीत भरपूर पाणी असते तिला 'अनूपो' म्हणतात, आणि अशा दलदलीच्या जागेला 'कच्छं' (पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी) म्हणतात. ताज्या हिरव्या गवताने व्यापलेल्या भूभागाला 'सद्दलो' म्हणतात. ๑๘๘. १८८. นทฺยมฺพุชีวโน เทโส, วุฏฺฐินิปฺปชฺชสสฺสโก; โย นทีมาติโก เทว,มาติโก จ กเมน โส. नदीच्या पाण्यावर अवलंबून असणाऱ्या सुपीक प्रदेशाला 'नदीमातिको' म्हणतात, आणि पावसाच्या पाण्यावर पिके येणाऱ्या प्रदेशाला अनुक्रमे 'देवमातिको' म्हणतात. ๑๘๙. १८९. ตีสฺวนูปาทฺยโถ จนฺท, สูราโท สสฺสตีริโต; รฏฺฐํ ตุ วิชิตญฺจาถ, ปุริเส เสตุ อาลิยํ. अनूप इत्यादी शब्द तिन्ही लिंगांत वापरले जातात. चंद्र, सूर्य इत्यादींसाठी 'सस्सती' (शाश्वत) हा शब्द वापरला जातो. राज्याला 'रट्ठं' आणि 'विजितं' म्हणतात, तर धरणाला किंवा पुलाला 'सेतु' आणि 'आलि' म्हणतात. ๑๙๐. १९०. อุปานฺตภู ปริสโร, โคฏฺฐํ ตุ โคกุลํ วโช; มคฺโค ปนฺโถ ปโถ อทฺธา, อญฺชสํ วฏุมํ ตถา. नजीकच्या भूभागाला 'परिसरो' किंवा 'उपांतभू' म्हणतात. गोठ्याला 'गोठ्ठं', 'गोकुलं' आणि 'वजो' म्हणतात. रस्त्याला 'मग्गो', 'पंथो', 'पथो', 'अद्धा', 'अंजसं' आणि 'वटुमं' म्हणतात. ๑๙๑. १९१. ปชฺโช, ยนญฺจ ปทวี, วตฺตนี ปทฺธติตฺถิยํ; ตพฺเภทา ชงฺฆ, สกฏ, มคฺคา เต จ มหทฺธนิ. तसेच रस्त्याला 'पज्जो', 'यानं', 'पदवी', 'वत्तनी' आणि 'पद्धति' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात. त्याचे प्रकार म्हणजे पाऊलवाट (जंघमग्गो), बैलगाडीचा रस्ता (सकटमग्गो) आणि महामार्ग (महद्धनि) हे आहेत. ๑๙๒. १९२. เอกปทฺเยกปทิเก, กนฺตาโร ตุ จ ทุคฺคเม; एकाच माणसाला चालता येईल अशा अरुंद वाटेला 'एकपदी' किंवा 'एकpadi' म्हणतात, तर दुर्गम व कठीण मार्गाला 'कांतारो' (कांतार/अरण्य) म्हणतात. ๑๙๓. १९३. ปฏิมคฺโค ปฏิปโถ, อทฺธานํ ทีฆ มญฺชสํ; สุปฺปโถ ตุ สุปนฺโถ จ, อุปฺปถํ ตฺวปถํ ภเว. विरुद्ध दिशेच्या मार्गाला 'पटिमग्गो' किंवा 'पटिपथो' म्हणतात. लांबच्या प्रवासाला किंवा मार्गाला 'अद्धानं' म्हणतात. चांगल्या मार्गाला 'सुप्पथो' किंवा 'सुपंथो' म्हणतात, तर चुकीच्या मार्गाला 'उप्पथं' आणि मार्ग नसलेल्या जागेला 'अपथं' म्हणतात. ๑๙๔. १९४. ฉตฺตึสปรมาณูน, เมโก ณุ จ ฉตฺตึส เต; ตชฺชารี ตาปิ ฉตฺตึส, รถเรณุ ฉตฺตึส เต. ३६ परमाणूंचा एक 'अणू' होतो; ३६ अणूंचा एक 'तज्जारी' होतो; आणि ३६ तज्जारींचा एक 'रथरेणू' होतो. ๑๙๕. १९५. ลิกฺขาตา สตฺต อูกา ตา, ธญฺญมาโสติ สตฺต เต; สตฺต งฺคุล’ มมุ ทฺวิจฺฉ, วิทตฺถิ ตา ทุเว สิยุํ. सात लिक्खांची एक 'ऊका' (जू) होते; सात ऊकांचा एक 'धञ्ञमास' (धान्यमास) होतो; सात धान्यमासांचे एक 'अंगुल' होते; बारा अंगुलांची एक 'विदत्थि' (वीत) होते आणि दोन वितींचा एक हात होतो. ๑๙๖. १९६. รตนํ [Pg.18] ตานิ สตฺเตว, ยฏฺฐิ ตา วีสตู สภํ; คาวุต มุสภาสีติ, โยชนํ จตุคาวุตํ. सात हातांचे एक 'रतन' (रत्न) होते; सात रत्नांची एक 'यट्ठि' (काठी) होते; वीस यट्ठिंचा एक 'उसभ' होतो; ऐंशी उसभांचे एक 'गावुत' (गव्यूत) होते आणि चार गावुतांचे एक 'योजन' होते. ๑๙๗. १९७. ธนุปญฺจสตํ โกโส, กรีสํ จตุรมฺพณํ; อพฺภนฺตรํ ตุ หตฺถาน, มฏฺฐวีส ปมาณโต. पाचशे धनुष्यांचा एक 'कोस' होतो; चार अंबणांचे एक 'करीस' (जमिनीचे माप) होते; आणि 'अब्भंतर' हे अठ्ठावीस हातांच्या मापाचे असते. ภูมิวคฺโค นิฏฺฐิโต. भूमीवर्ग समाप्त झाला. ๒. ภูกณฺฑ २. भूकांड ๒. ปุรวคฺค २. पुरवर्ग ๑๙๘. १९८. ปุรํ นคร มิตฺถี วา, ฐานียํ ปุฏเภทนํ; ถิยํ ตุ ราชธานี จ, ขนฺธาวาโร ภเว ถ จ. शहराला 'पुरं', 'नगरं' (स्त्रीलिंगी किंवा नपुंसकलिंगी), 'ठानीयं' आणि 'पुटभेदनं' म्हणतात. राजधानीला 'राजधानी' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात, तर लष्करी छावणीला 'खंधावारो' म्हणतात. ๑๙๙. १९९. สาขานคร มญฺญตฺร, ยํ ตํ มูลปุรา ปุรํ; พาราณสี จ สาวตฺถิ, เวสาลี มิถิลา, ฬวี. मुख्य शहराव्यतिरिक्त असणाऱ्या उपनगराला 'साखानगरं' म्हणतात. मुख्य शहरांमध्ये बाराणसी, सावत्थी, वेसाली, मिथिला आणि आळवी यांचा समावेश होतो. ๒๐๐. २००. โกสมฺพุ, ชฺเชนิโย ตกฺก, สิลา จมฺปา จ สาคลํ; สุสุมารคิรํ ราช, คหํ กปิลวตฺถุ จ. कोसंबी, उज्जेनी, तक्कसिला, चम्पा, सागल, सुसुमारगिर, राजगह आणि कपिलवत्थु; ๒๐๑. २०१. สาเกต, มินฺทปตฺถญฺโจ, กฺกฏฺฐา ปาฏลิปุตฺตกํ; เชตุตฺตรญฺจ สงฺกสฺสํ, กุสินาราทโย ปุรี. साकेत, इंदपत्थ, उक्कट्ठा, पाटलिपुत्त, जेतुत्तर, संकस्स आणि कुसिनारा इत्यादी शहरे आहेत. ๒๐๒. २०२. รจฺฉา จ วิสิขา วุตฺตา, รถิกา วีถิ จาปฺยถ; พฺยูโห รจฺฉา อนิพฺพิทฺธา, นิพฺพิทฺธา ตุ ปถทฺธิ จ. गल्ली किंवा रस्त्याला 'रच्छा', 'विसिखा', 'रथिका' आणि 'वीथि' म्हणतात. बंद गल्लीला (पुढे मार्ग नसलेल्या) 'ब्यूहो' म्हणतात, तर आरपार जाणाऱ्या खुल्या रस्त्याला 'पथद्धि' म्हणतात. ๒๐๓. २०३. จตุกฺกํ จจฺจเร มคฺค, สนฺธิ สิงฺฆาฏกํ ภเว; ปากาโร วรโณ จาถ, อุทาโป อุปการิกา. चौकाला 'चतुक्कं', 'चच्चरं', 'मग्गसंधि' आणि 'सिंग्घाटकं' म्हणतात. शहराच्या तटबंदीला 'पाकारो' किंवा 'वरणो' म्हणतात, तर तटबंदीवरील बुरुजाला 'उदापो' आणि 'उपकारिका' म्हणतात. ๒๐๔. २०४. กุฏฺฏํ ตุ ภิตฺติ นารี ถ, โคปุรํ ทฺวารโกฏฺฐโก; เอสิกา อินฺทขีโล จ, อฏฺโฏ ตฺวฏฺฏาลโก ภเว. भिंतीला 'कुट्टं' किंवा 'भित्ति' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात. मुख्य प्रवेशद्वाराला 'गोपुरं' किंवा 'द्वारकोट्ठको' म्हणतात. प्रवेशद्वाराजवळील खांबाला 'एसिका' किंवा 'इन्दखीलो' म्हणतात, तर बुरुजाला 'अट्टो' किंवा 'अट्टालको' म्हणतात. ๒๐๕. २०५. โตรณํ ตุ พหิทฺวารํ, ปริขาตุ จ ทีฆิกา; มนฺทิรํ สทนา, คารํ, นิกาโย นิลยา, ลโย. बाहेरच्या प्रवेशद्वाराला किंवा कमानीला 'तोरणं' म्हणतात. खंदकाला 'परिखा' किंवा 'दीघिका' म्हणतात. घराला 'मन्दिरं', 'सदनं', 'अगारं', 'निकायो', 'निलयो' आणि 'लयो' म्हणतात. ๒๐๖. २०६. อาวาโส ภวนํ เวสฺมํ, นิเกตนํ นิเวสนํ; ฆรํ คหญฺจา, วสโถ, สรณญฺจ ปติสฺสโย. तसेच घराला 'आवासो', 'भवनं', 'वेस्मं', 'निकेतनं', 'निवेसनं', 'घरं', 'गहं', 'आवसथो', 'सरणं' आणि 'पतिस्सयो' म्हणतात. ๒๐๗. २०७. โอกํ สาลา ขโย วาโส, ถิยํ กุฏิ วสตฺย’ปิ; เคหญฺจา, นิตฺถิ สทุมํ, เจติยา, ยตนานิ ตุ. घराला 'ओकं', 'साला', 'खयो', 'वासो', 'कुटि' (स्त्रीलिंगी), 'वसति' (स्त्रीलिंगी), 'गेहं' (नपुंसकलिंगी) आणि 'सदुमं' (नपुंसकलिंगी) देखील म्हणतात. पूजनीय स्थानांना 'चेतियं' (चैत्य) आणि 'आयतनं' म्हणतात. ๒๐๘. २०८. ปาสาโท [Pg.19] เจว ยูโป ถ, มุณฺฑจฺฉโท จ หมฺมิยํ; ยูโปตุ คชกุมฺภมฺหิ, หตฺถินโข ปติฏฺฐิโต. भव्य वाड्याला 'पासादो' म्हणतात. खांबाला 'यूपो' म्हणतात. सपाट छताच्या घराला 'muṇḍacchado' किंवा 'हम्मियं' म्हणतात. हत्तीच्या कुंभासारख्या आधारावर उभारलेल्या संरचनेला 'हत्थिनखो' म्हणतात. ๒๐๙. २०९. สุปณฺณวงฺกจฺฉทน, มฑฺฒโยโค สิยา ถ จ; เอกกูฏยุโต มาโฬ,ปาสาโท จตุรสฺสโก. गरुडाच्या पंखासारखे वक्र छप्पर असलेल्या घराला 'अड्ढयोगो' म्हणतात. एकाच शिखराच्या इमारतीला 'माळो' म्हणतात, तर चौकोनी प्रासादाला (वाड्याला) 'पासादो' म्हणतात. ๒๑๐. २१०. สภายญฺจ สภา จาถ, มณฺฑปํ วา ชนาลโย; อโถ อาสนสาลายํ, ปฏิกฺกมน มีริตํ. सभागृहाला 'सभा' (स्त्रीलिंगी) किंवा 'सभं' (नपुंसकलिंगी) म्हणतात. मंडपाला 'मण्डपं' किंवा 'जनालयो' म्हणतात, तर बसण्याच्या सभागृहाला 'पटिक्कमनं' म्हणतात. ๒๑๑. २११. ชินสฺส วาสภวน, มิตฺถี คนฺธกุฏิ ปฺยถ; ถิยํ รสวตี ปาก, ฏฺฐานญฺเจว มหานสํ. जिनांच्या (बुद्धांच्या) निवासगृहाला 'गन्धकुटि' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात. स्वयंपाकघराला 'रसवती' (स्त्रीलिंगी), 'पाकद्वानं' आणि 'महानसं' म्हणतात. ๒๑๒. २१२. อาเวสนํ สิปฺปสาลา, โสณฺฑา ตุ ปานมนฺทิรํ; วจฺจฏฺฐานํ วจฺจกุฏิ, มุนีนํ ฐาน มสฺสโม. कलाशाळेला (कार्यशाळेला) 'आवेसनं' किंवा 'सिप्पसाला' म्हणतात. मद्यशाळेला 'सोण्डा' किंवा 'पानमन्दिरं' म्हणतात. शौचालयाला 'वच्चट्ठानं' किंवा 'वच्चकुटि' म्हणतात, तर मुनींच्या निवासस्थानाला 'अस्समो' (आश्रम) म्हणतात. ๒๑๓. २१३. ปณฺยวิกฺกยสาลา กุ, อาปโณ ปณฺยวีถิกา; อุโทสิโต ภณฺฑสาลา, จงฺกมนํ ตุ จงฺกโม. दुकान किंवा बाजाराला 'आपणो' किंवा 'पण्यवीथिका' म्हणतात. कोठाराला (भांडाराला) 'उदोसितो' किंवा 'भण्डसाला' म्हणतात, तर पायी फिरण्याच्या जागेला (चंक्रमण मार्ग) 'चंकमनं' किंवा 'चंकमो' म्हणतात. ๒๑๔. २१४. ชนฺตาฆรํ ตฺวคฺคิสาลา, ปปา ปานียสาลิกา; คพฺโภ โอวรโก วาสา, คารํ ตุ สยนิคฺคหํ. उष्ण स्नानगृहाला 'जन्ताघरं' किंवा 'अग्गिसाला' म्हणतात. पाणपोईला 'पपा' किंवा 'पानीयसालिका' म्हणतात. शयनकक्षाला (बेडरूम) 'गब्भो', 'ओवरको', 'वासागारं' किंवा 'सयनिग्गहं' म्हणतात. ๒๑๕. २१५. อิตฺถาคารํ ตุ โอโรโธ, สุทฺธนฺโต’ นฺเตปุรมฺปิ จ; อสพฺพวิสยฏฺฐานํ, รญฺญํ กจฺฉนฺตรํ มตํ. राण्यांच्या महालाला (अन्तःपुराला) 'इत्थागारं', 'ओरोधो', 'सुद्धन्तो' किंवा 'अन्तेपुरं' म्हणतात. सर्वांना प्रवेश नसलेल्या राजाच्या खाजगी कक्षाला 'कच्छन्तरं' मानले जाते. ๒๑๖. २१६. โสปาโน วา’โรหณญฺจ,นิสฺเสณี สา, ธิโรหิณี; วาตปานํ ควกฺโข จ, ชาลญฺจ สีหปญฺชรํ. जिन्याला 'सोपानो' किंवा 'आरोहणं' म्हणतात, तर शिडीला 'निस्सेणी' किंवा 'अधिरोहिणी' म्हणतात. खिडकीला 'वातपानं', 'गवक्खो', 'जालं' आणि 'सीहपञ्जरं' म्हणतात. ๒๑๗. २१७. อาโลกสนฺธิ วุตฺโต ถ, ลงฺคี’ตฺถี ปลิโฆ ภเว; กปิสีโส, คฺคลตฺถมฺโภ, นิพฺพํ ตุ ฉทฺทโกฏิยํ. प्रकाश येणाऱ्या छिद्राला 'आलोकसंधि' म्हणतात. दरवाजाच्या अडसराला 'लंगी' (स्त्रीलिंगी) किंवा 'पलिघो' म्हणतात. अडसर बसवण्याच्या खांबाला 'कपिसीसो' किंवा 'अग्गलत्थम्भो' म्हणतात, तर छपराच्या कडेला 'निब्बं' म्हणतात. ๒๑๘. २१८. ฉทนํ ปฏลํ ฉทฺท, มชิรํ จจฺจโร, งฺคณํ; ปฆาโน ปฆนา, ลินฺโท, ปมุขํ ทฺวารพนฺธนํ. छप्पर, आच्छादन (छदन, पटल, छद्द); अंगण, चौक (अजिर, चच्चर, अंगण); ओसरी, पडवी, प्रवेशद्वार (पघान, पघन, अलिन्द, पमुख, द्वारबंधन). ๒๑๙. २१९. ปิฏฺฐสงฺฆาฏกํ ทฺวาร, พาหา กูฏํ ตุ กณฺณิกา; ทฺวารญฺจ ปฏิหาโร ถ, อุมฺมาโร เทหนี, ตฺถิยํ. चौकटीचा वरचा भाग (पिट्ठसंघाटक), दाराचे खांब (द्वारबाहा), शिखर किंवा कर्णिका (कूट, कर्णिका); दरवाजा (द्वार, प्रतिहार), आणि उंबरठा (उम्मार, देहनी - स्त्रीलिंगी). ๒๒๐. २२०. เอฬโก อินฺทขีโล ถ, ถมฺโภ ถูโณ ปุมิตฺถิยํ; ปาฏิกา, ฑฺเฒนฺทุปาสาเณ, คิญฺชกา ตุ จ อิฏฺฐกา. उंबरठ्याचा लाकडी खांब (एळक), इंद्रकील (इन्दखील); खांब (थंभ, थूण - पुल्लिंगी व स्त्रीलिंगी); अर्धचंद्राकृती दगड (पाटिका, अद्धेन्दुपासाण); आणि वीट (गिंजका, इिट्ठका). ๒๒๑. २२१. วลภิจฺฉาทิทารุมฺหิ, วงฺเก โคปานสี, ตฺถิยํ; กโปตปาลิกายํ ตุ, วิฏงฺโก นิตฺถิยํ ภเว. छप्पराचे वक्र लाकूड किंवा वासा (गोपानसी - स्त्रीलिंगी); आणि कबुतरांचे घरटे किंवा सज्जा (कपोतपालिका, विटंक - नपुंसकलिंगी). ๒๒๒. २२२. กุญฺจิกาวิวรํ [Pg.20] ตาฬ, จฺฉิคฺคโล ปฺยถ กุญฺจิกา; ตาโฬ’วาปุรณํ จาถ, เวทิกา เวทิ กถฺยเต. किल्लीचे छिद्र (कुंचिकाविवर, ताळच्छिग्गल); किल्ली (कुंचिका, ताळ, अवापुरण); आणि कठडा किंवा वेदी (वेदिका, वेदी). ๒๒๓. २२३. สงฺฆาโต ปกฺขปาโส จ, มนฺทิรงฺคา ตุลา อปิ; ถิยํ สมฺมุชฺชนี เจว, สมฺมชฺชนี จ โสธนี. तुळई, वासे आणि घराचे इतर लाकडी भाग (संघात, पक्षपास, तुला); आणि झाडू किंवा केरसुणी (संमुज्जनी, संमज्जनी, शोधनी - स्त्रीलिंगी). ๒๒๔. २२४. สงฺกฏีรํ ตุ สงฺการ, ฏฺฐานํ สงฺการกูฏกํ; อโถ กจวโร, กฺลาโป, สงฺกาโร จ กสมฺพุปิ. उकिरडा किंवा कचरा टाकण्याची जागा (संकटीर, संकारट्ठान, संकारकूटक); आणि कचरा, केर (कचवर, कलाप, संकार, कसंबू). ๒๒๕. २२५. ฆราทิภูมิ ตํ วตฺถุ, คาโม สํวสโถ ถ โส; ปากโฏ นิคโม โภค, มจฺจาทิภฺโย ธิ ตูทิโต. घर इत्यादी बांधण्याची जागा म्हणजे वास्तू (वत्थु); गाव किंवा वस्ती (गाम, संवसथ); आणि व्यापारी किंवा श्रीमंत लोकांचे प्रसिद्ध नगर (निगम). ๒๒๖. २२६. สีมา จ มริยาทา ถ,โฆโส โคปาลคามโกติ. सीमा आणि मर्यादा; आणि गोपाळांची वस्ती किंवा पाडा (घोष, गोपाळग्राम). ปุรวคฺโค นิฏฺฐิโต. पुरवर्ग (नगर विभाग) समाप्त झाला. ๓. นรวคฺค ३. नरवर्ग (मनुष्य विभाग). ๒๒๗. २२७. มนุสฺโส มานุโส มจฺโจ, มานโว มนุโช นโร; โปโส ปุมา จ ปุริโส,โปริโส ปฺยถ ปณฺฑิโต. मनुष्य, मानव, मर्त्य, मनुज, नर, पुरुष (मनुस्स, मानुस, मच्च, मानव, मनुज, नर, पोस, पुमा, पुरिस, पोरिस); आणि विद्वान किंवा पंडित (पंडित). ๒๒๘. २२८. พุโธ วิทฺวา วิภาวี จ, สนฺโต สปฺปญฺญ โกวิทา; ธีมา สุธี กวิ พฺยตฺโต, วิจกฺขโณ วิสารโท. ज्ञानी, विद्वान, बुद्धिमान, संत, प्रज्ञावान, कोविद (कुशल), धीमान, सुधी, कवी, चतुर, विचक्षण आणि विशारद. ๒๒๙. २२९. เมธาวี มติมา ปญฺโญ, วิญฺญู จ วิทูโร วิทู; ธีโร วิปสฺสี โทสญฺญู, พุทฺโธ จ ทพฺพ วิทฺทสุ. मेधावी, मतिमान, प्रज्ञावान, विज्ञ, विदूर, विदू (विद्वान), धीर, विपस्सी (विपश्यना करणारा), दोषज्ञ (दोष जाणणारा), बुद्ध, दब्ब आणि विद्दसू (सर्वज्ञ). ๒๓๐. २३०. อิตฺถี สีมนฺตินี นารี, ถี วธู วนิตา, งฺคนา; ปมทา สุนฺทรี กนฺตา, รมณี ทยิตา, พลา. स्त्री, सीमंतिनी, नारी, वधू, वनिता, अंगना, प्रमदा, सुंदरी, कांता, रमणी, दयिता आणि अबला (इत्थी, सीमंतिनी, नारी, थी, वधू, वनिता, अंगना, पमदा, सुंदरी, कांता, रमणी, दयिता, बला). ๒๓๑. २३१. มาตุคาโม จ มหิลา, ลลนา ภีรุ กามินี; กุมาริกา ตุ กญฺญา ถ, ยุวตี ตรุณี ภเว. महिला, ललना, भीरू, कामिनी (मातृग्राम, महिला, ललना, भीरू, कामिनी); मुलगी किंवा कन्या (कुमारिका, कन्या); आणि तरुणी (युवती, तरुणी). ๒๓๒. २३२. มเหสี สาภิเสกาญฺญา,โภคินี ราชนาริโย; ธวตฺถินี ตุ สงฺเกตํ, ยาติ ยา สา, ภิสาริกา. पट्टराणी (महेषी), इतर अभिषिक्त राण्या व भोगिनी (भोगिनी, राजनारी); आणि जी स्त्री पती किंवा प्रियकराला भेटण्यासाठी संकेतास्थळी जाते, तिला 'अभिसारिका' म्हणतात. ๒๓๓. २३३. คณิกา [Pg.21] เวสิยา วณฺณ, ทาสี นครโสภินี; รูปูปชีวินี เวสี, กุลฏา ตุ จ พนฺธกี. गणिका, वेश्या, वर्णदासी, नगरशोभिनी, रूपोपजीविनी (वेसी); आणि व्यभिचारी स्त्री (कुलटा, बंधकी). ๒๓๔. २३४. วราโรโห, ตฺตมา มตฺต, กาสินี วรวณฺณินี; ปติพฺพตา ตฺวปิ สตี, กุลิตฺถี กุลปาลิกา. अत्यंत सुंदर व श्रेष्ठ स्त्री (वरारोहा, उत्तमा, मत्तकासिनी, varavaṇṇinī); आणि पतिव्रता, सती, कुलस्त्री (कुलित्थी, कुलपालिका). ๒๓๕. २३५. วิธวา ปติสุญฺญา ถ, ปติมฺพรา สยมฺพรา; วิชาตา ตุ ปสูตา จ, ชาตาปจฺจา ปสูติกา. विधवा किंवा पती नसलेली स्त्री (विधवा, पतिसुञ्ञा); स्वतः पती निवडणारी (पतिंबरा, सयंबरा); आणि प्रसूती झालेली स्त्री (विजाता, प्रसूता, जातापच्चा, प्रसूतीका). ๒๓๖. २३६. ทูตี สญฺจาริกา ทาสี, ตุ เจฏี กุฏธาริกา; วารุณี, กฺขณิกา ตุลฺยา, ขตฺติยานี ตุ ขตฺติยา. निरोप वाहून नेणारी (दूती, संचारिका); दासी, चेटी, घागर वाहणारी (कुटधारिका); मद्य विकणारी किंवा नर्तकी (वारुणी, क्षणिका); आणि क्षत्रिय स्त्री (खत्तियानी, khattiyā). ๒๓๗. २३७. ทาโร ชายา กลตฺตญฺจ, ฆรณี ภริยา ปิยา,ปชาปตี จ ทุติยา, สา ปาทปริจาริกา. पत्नी, भार्या, जाया, कलत्र, घरणी, प्रिया, प्रजापती, द्वितीया आणि पादपरिचारिका (या सर्व शब्दांचा अर्थ 'पत्नी' असा आहे). ๒๓๘. २३८. สขี ตฺวา’ลี วยสฺสา ถ, ชารี เจวา’ติจารินี; ปุเม ตู’ตุ รโช ปุปฺผํ, อุตุนี ตุ รชสฺสลา. सखी, मैत्रीण (सखी, आली, वयस्सा); व्यभिचारी स्त्री (जारी, अतिचारिणी); मासिक पाळी किंवा रज (ऋतू, रजो, पुप्फ); आणि ऋतुमती स्त्री (ऋतुनी, रजस्सला). ๒๓๙. २३९. ปุปฺผวตี ครุคพฺภา, ปนฺนสตฺตา จ คพฺภินี; คพฺภาสโย ชลาพุปิ, กลลํ ปุนฺนปุํสเก. गर्भवती स्त्री (पुप्फवती, गरूगब्भा, पन्नसत्ता, गब्भिनी); गर्भाशय किंवा जरायु (गब्भासयो, जलाबु); आणि गर्भाची पहिली अवस्था (कलल - नपुंसकलिंगी). ๒๔๐. २४०. ธโวตุ สามิโก ภตฺตา, กนฺโต ปติ วโร ปิโย; อโถ ปปติ ชาโร ถา,ปจฺจํ ปุตฺโต’ตฺรโช สุโต. पती, स्वामी, भर्ता, कांत, वर, प्रिय (धवो, सामिको, भत्ता, कांतो, पती, वरो, पियो); उपपती किंवा जार (पपती, जार); आणि अपत्य किंवा मुलगा (अपच्च, पुत्त, अत्रज, सुत). ๒๔๑. २४१. ตนุโช ตนโย สูนุ, ปุตฺตาที ธีตริ’ตฺถิยํ; นาริยํ ทุหิตา ธีตา,สชาโต ตฺโว’รโส สุโต. मुलगा (तनुज, तनय, सूनू); मुलगी किंवा कन्या (दुहिता, धीता - स्त्रीलिंगी); आणि स्वतःचा औरस पुत्र (सजातो, ओरसो सुतो). ๒๔๒. २४२. ชายาปตี ชนิปตี, ชยมฺปตี ตุ ทมฺปตี ; อถ วสฺสวโร วุตฺโต, ปณฺฑโก จ นปุํสกํ. पती-पत्नी किंवा जोडपे (जायापती, जनिपती, जयम्पती, दंपती); आणि नपुंसक किंवा हिजडा (वस्सवर, पंडक, नपुंसक). ๒๔๓. २४३. พนฺธโว พนฺธุ สชโน, สโคตฺโต ญาติ ญาตโก; สาโลหิโต สปิณฺโฑ จ,ตาโต ตุ ชนโก ปิตา. नातेवाईक, बंधू, सगोत्र, ज्ञाती, सपिंड (बांधव, बंधू, सजन, सगोत्र, ञाती, ञातक, सालोहित, सपिंड); आणि वडील किंवा पिता (तात, जनक, पिता). ๒๔๔. २४४. อมฺม, มฺพา ชนนี มาตา, ชเนตฺติ ชนิกา ภเว; อุปมาตา ตุ ธาติ’ตฺถี,สาโล ชายาย ภาติโก. आई किंवा माता (अम्मा, अम्बा, जननी, माता, जनेत्ती, जनिका); दाई किंवा उपमाता (उपमाता, धात्री - स्त्रीलिंगी); आणि साळा म्हणजे पत्नीचा भाऊ (सालो). ๒๔๕. २४५. นนนฺทา [Pg.22] สามิภคินี, มาตามหี ตุ อยฺยิกา; มาตุโล มาตุภาตา,สฺส, มาตุลานี ปชาปติ. नणंद म्हणजे पतीची बहीण (नणंदा, सामिभगिनी); आईची आई म्हणजे आजी (मातामही, अय्यिका); मामा म्हणजे आईचा भाऊ (मातुलो, मातुभाता); आणि मामी (मातुलानी, प्रजापती). ๒๔๖. २४६. ชายาปตีนํ ชนนี, สสฺสุ วุตฺตาถ ตปฺปิตา; สสุโร ภาคิเนยฺโยตุ, ปุตฺโต ภคินิยา ภเว. पती किंवा पत्नीची आई म्हणजे सासू (सस्सू); पती किंवा पत्नीचे वडील म्हणजे सासरा (ससुरो); आणि बहिणीचा मुलगा म्हणजे भाचा (भागिनेय्य). ๒๔๗. २४७. นตฺตา วุตฺโต ปปุตฺโต ถ, สามิภาตา ตุ เทวโร; ธีตุปติ ตุ ชามาตา,อยฺยโก ตุ ปิตามโห. नातू (नत्ता, प्रपुत्त); दीर म्हणजे पतीचा भाऊ (देवरो); मुलीचा पती म्हणजे जावई (जामात); आणि आजोबा (अय्यको, पितामहो). ๒๔๘. २४८. มาตุจฺฉา มาตุภคินี, ปิตุจฺฉา ภคินี ปิตุ; ปปิตามโห ปยฺยโก,สุณฺหา ตุ สุณิสา หุสา. मावशी म्हणजे आईची बहीण (मातुच्छा, मातुभगिनी); आत्या म्हणजे वडिलांची बहीण (पितुच्छा); पणजोबा (पपितामहो, पय्यको); आणि सून (सुण्हा, सुणिसा, हुसा). ๒๔๙. २४९. โสทริโย สคพฺโภ จ, โสทโร สหโช ปฺยถ; มาตาปิตู เต ปิตโร, ปุตฺตา ตุ ปุตฺตธีตโร. सख्खा भाऊ (सोदरियो, सगब्भो, सोदरो, सहजो); आई-वडील (माता-पिता); आणि मुले-मुली (पुत्त-धीतरो). ๒๕๐. २५०. สสุรา สสฺสุสสุรา, ภาตุภคินี ภาตโร; พาลตฺตํ พาลตา พาลฺยํ, โยพฺพญฺญํตุ จ โยพฺพนํ. सासू-सासरे (ससुरा, सस्सुससुरा); भाऊ-बहीण (भातुभगिनी, भातरो); बालपण (बालत्तं, बालता, बाल्यं); आणि तारुण्य किंवा यौवन (योब्बञ्ञं, योब्बनं). ๒๕๑. २५१. สุกฺกา ตุ ปลิตํ เกสา, ทโย ถ ชรตา ชรา; ปุถุโก ปิลฺลโก ฉาโป, กุมาโร พาล โปตกา. पांढरे किंवा पिकलेले केस (पिलतं); वृद्धत्व किंवा म्हातारपण (जरता, जरा); आणि लहान मूल किंवा प्राण्याचे पिल्लू (पुथुको, पिल्लको, छापो, कुमारो, बाल, पोतका). ๒๕๒. २५२. อถุ’ ตฺตานสยุ’ตฺตาน, เสยฺยกา ถนโปปิ จ; उताणे निजणारे बाळ (उत्तानसय, उत्तानसेय्यक) आणि स्तनपान करणारे बाळ (थनप). ๒๕๓. २५३. ตรุโณ จ วยฏฺโฐ จ, ทหโร จ ยุวา สุสุ; มาณโวทารโกจาถ, สุกุมาโร สุเขธิโต. तरुण, वयात आलेला, लहान मुलगा किंवा शिशु (तरुणो, वयट्ठो, दहरो, युवा, सुसु); मुलगा किंवा बालक (माणवो, दारको); आणि सुकुमार किंवा सुखात वाढलेला (सुकुमारो, सुखेधितो). ๒๕๔. २५४. มหลฺลโก จ วุทฺโธ จ, เถโร ชิณฺโณ จ ชิณฺณโก; อคฺคโช ปุพฺพโช เชฏฺโฐ, กนิโย กนิฏฺโฐ นุโช. वृद्ध, म्हातारा किंवा थेर (महल्लको, वुद्धो, थेरो, जिण्णो, जिण्णको); थोरला भाऊ (अग्रजो, पुब्बजो, जेट्ठो); आणि धाकटा भाऊ (कनियो, किट्ठो, अनुजो). ๒๕๕. २५५. วลิตฺตโจ ตุ วลิโน; ตีสุ’ตฺตานสยาทโย; सुरकुतलेली त्वचा असलेला (वलित्तच, वलिनो); आणि 'उत्तानसय' इत्यादी शब्द तिन्ही लिंगांत वापरले जातात. ๒๕๖. २५६. สีโส’ตฺตมงฺคานิ สิโร, มุทฺธา จ มตฺถโก ภเว; เกโส ตุ กุนฺตโล วาโล, ตฺตมงฺครุห มุทฺธชา. 'सीस' (सीसो), 'उत्तमंग', 'सिर', 'मुद्धा' आणि 'मत्थक' हे डोक्याचे (मस्तकाचे) वाचक शब्द आहेत; तर 'केस', 'कुंतल', 'वाल', 'उत्तमंगरुह' आणि 'मुद्धज' हे केसांचे वाचक शब्द आहेत. ๒๕๗. २५७. ธมฺมิลฺโล สํยตา เกสา,กากปกฺโข สิขณฺฑโก; ปาโส หตฺโถ เกสจเย; ตาปสานํ ตหึ ชฏา. बांधलेल्या केसांना 'धम्मिल्ल' म्हणतात. मुलांच्या बाजूच्या केसांना 'काकपक्ख' आणि 'सिखंडक' म्हणतात. केसांच्या समूहासाठी 'केसपास' किंवा 'केसहत्थ' हे शब्द वापरले जातात; आणि तपस्वी लोकांच्या केसांना 'जटा' म्हणतात. ๒๕๘. २५८. ถิยํ เวณี ปเวณี จ; อโถ จูฬา สิขา สิยา; สีมนฺโต ตุ มโต นาริ, เกสมชฺฌมฺหิ ปทฺธติ. स्त्रियांच्या केसांच्या वेणीला 'वेणी' आणि 'पवेणी' म्हणतात. डोक्यावरील शेंडीला 'चूळा' आणि 'सिखा' म्हणतात. स्त्रियांच्या केसांमधील भांगाला 'सीमंत' म्हणतात. ๒๕๙. २५९. โลมํ [Pg.23] ตนุรุหํ โรมํ, ปมฺหํ ปขุม มกฺขิคํ; มสฺสุ วุตฺตํ ปุมมุเข, ภู ตฺวิตฺถี ภมุโก ภมุ. अंगावरील केसांना 'लोम', 'तनुरुह' आणि 'रोम' म्हणतात. डोळ्यांच्या पापण्यांच्या केसांना 'पम्ह' आणि 'पखुम' म्हणतात. पुरुषाच्या चेहऱ्यावरील केसांना (दाढी-मिशांना) 'मस्सु' म्हणतात; आणि स्त्रियांच्या भिवईला 'भू', 'भमुक' आणि 'भमु' म्हणतात. ๒๖๐. २६०. พปฺโป เนตฺตชล’สฺสูนิ, เนตฺตตารา กนีนิกา; วทนํ ตุ มุขํ ตุณฺฑํ, วตฺตํ ลปน มานนํ. डोळ्यांतील पाण्याला (अश्रूंना) 'बप्प', 'नेत्तजल' आणि 'अस्सु' म्हणतात. डोळ्याच्या बाहुलीला 'नेत्ततारा' आणि 'कनीनिका' म्हणतात. 'वदन', 'मुख', 'तुंड', 'वत्त', 'लपन' आणि 'आनन' हे तोंडाचे (मुखाचे) वाचक शब्द आहेत. ๒๖๑. २६१. ทฺวิโช ลปนโช ทนฺโต, ทสโน รทโน รโท; ทาฐา ตุทนฺตเภทสฺมึ, อปางฺโค ตฺวกฺขิโกฏิสุ. 'द्विज', 'लपनज', 'दंत', 'दसन', 'रदन' आणि 'रद' हे दाताचे वाचक शब्द आहेत. दातांच्या एका प्रकाराला (सुळ्याला किंवा दाढेला) 'दाठा' म्हणतात; आणि डोळ्यांच्या कोपऱ्यांना 'अपांग' म्हणतात. ๒๖๒. २६२. ทนฺตาวรณ โมฏฺโฐ จา, ปฺย’ธโร ทสนจฺฉโท; คณฺโฑ กโปโล หนฺวิตฺถี,จุพุกํ ตฺว’ ธรา อโธ. 'दंतावरण', 'ओट्ठ', 'अधर' आणि 'दसनच्छद' हे ओठांचे वाचक शब्द आहेत. गालाला 'गंड' आणि 'कपोल' म्हणतात. जबड्याला 'हनु' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात; आणि खालच्या ओठाच्या खाली असलेल्या भागाला 'चुबुक' (हनुवटी) म्हणतात. ๒๖๓. २६३. คโล จ กณฺโฐ คีวา จ, กนฺธรา จ สิโรธรา; กมฺพุคีวา ตุ ยา คีวา, สุวณฺณาลิงฺคสนฺนิภา; องฺกิตา ตีหิ เลขาหิ, กมฺพุคีวา ถวา มตา. 'गल', 'कंठ', 'गीवा', 'कंधरा' आणि 'सिरोधरा' हे मानेचे (गळ्याचे) वाचक शब्द आहेत. शंखासारखी सुंदर आणि तीन रेषांनी अंकित असलेल्या मानेला 'कंबुगीवा' म्हणतात. ๒๖๔. २६४. อํโส นิตฺถี ภุชสิโร, ขนฺโธ ตสฺสนฺธิ ชตฺตุ ตํ; พาหุมูลํ ตุ กจฺโฉ, โธ, ตฺว’สฺส ปสฺส มนิตฺถิยํ. खांद्याला 'अंस' (पुल्लिंगी/नपुंसकलिंगी), 'भुजसिर' आणि 'खंध' म्हणतात. खांद्याच्या सांध्याला 'जत्तु' (जत्रू) म्हणतात. काखेला 'बाहुमूल' आणि 'कच्छ' म्हणतात; आणि त्याच्या खालील कुशीला (बाजूला) 'पस्स' (पुल्लिंगी/नपुंसकलिंगी) म्हणतात. ๒๖๕. २६५. พาหุ ภุชาทฺวีสุ พาหา, หตฺโถ ตุ กร ปาณโย; มณิพนฺโธ ปโกฏฺฐนฺโต, กปฺปโร ตุ กโปณฺย’ถ. 'बाहू', 'भुजा' आणि 'बाहा' हे हाताचे (बाहूचे) वाचक शब्द आहेत; तर 'हत्थ', 'कर' आणि 'पाणि' हे हाताचे (हस्ताचे) वाचक शब्द आहेत. मनगटाला 'मणिबंध' म्हणतात, मनगटापासून कोपरापर्यंतच्या भागाला 'पकोट्ठ' म्हणतात; आणि कोपराला 'कप्पर' किंवा 'कपोणि' म्हणतात. ๒๖๖. २६६. มณิพนฺธ กนิฏฺฐานํ, ปาณิสฺส กรโภ,นฺตรํ; กรสาขา, งฺคุลี ตา ตุ, ปญฺจ, งฺคุฏฺโฐ จ ตชฺชนี; มชฺฌิมา นามิกา จาปิ, กนิฏฺฐา’ติ กมา สิยุํ. मनगटापासून करंगळीपर्यंतच्या हाताच्या भागाला 'करभ' म्हणतात. हाताच्या बोटांना 'करसाखा' आणि 'अंगुली' म्हणतात. ती पाच आहेत: 'अंगुठ्ठ' (अंगठा), 'तज्जनी' (तर्जनी), 'मज्झिमा' (मध्यमा), 'अनामिका' आणि 'कनिट्ठा' (करंगळी) अशी त्यांची अनुक्रमे नावे आहेत. ๒๖๗. २६७. ปเทโส ตาลโคกณฺณา, วิทตฺถิ,ตฺถี กมา ตเต; ตชฺชนฺยาทิยุเต’งฺคุฏฺเฐ, ปสโต ปาณิ กุญฺจิโต. अंगठ्याशी तर्जनी इत्यादी बोटे पसरून मोजण्याच्या अंतराला अनुक्रमे 'पदेस' (अंगठा व तर्जनीमधील अंतर), 'ताल' (अंगठा व मध्यमामधील अंतर), 'गोकण्ण' (अंगठा व अनामिकेमधील अंतर) आणि 'विदत्थि' (वीत - अंगठा व करंगळीमधील अंतर) म्हणतात. मिटलेल्या किंवा पसरलेल्या हाताला 'पसत' म्हणतात. ๒๖๘. २६८. รตนํ กุกฺกุ หตฺโถ ถ, ปุเม กรปุโฏ,ญฺชลิ; กรโช ตุ นโข นิตฺถี, ขฏโก มุฏฺฐิ จ ทฺวีสุ. 'रतन', 'कुक्कु' आणि 'हत्थ' हे हाताच्या मापाचे (हाताचे माप) वाचक शब्द आहेत. जोडलेल्या हातांना 'करपुट' आणि 'अंजलि' (पुल्लिंगी) म्हणतात. नखाला 'करज' आणि 'नख' (पुल्लिंगी/नपुंसकलिंगी) म्हणतात; तर मुठीला 'खटक' आणि 'मुट्ठि' म्हणतात. ๒๖๙. २६९. พฺยาโม สหกรา พาหุ, ทฺเว ปสฺสทฺวยวิตฺถตา; อุทฺธนฺตต ภุชโปส, ปฺปมาเณ โปริสํ ติสุ. दोन्ही बाजूला हात पसरल्यावर होणाऱ्या अंतराला 'ब्याम' (व्याम) म्हणतात; आणि दोन्ही हात वर केलेल्या माणसाच्या उंचीच्या प्रमाणाला 'पोरिस' (पुरुष-प्रमाण) म्हणतात. ๒๗๐. २७०. อุโร จ หทยํ จาถ, ถโน กุจ ปโยธรา; จูจุกํ ตุ ถนคฺคสฺมึ, ปิฏฺฐํ ตุ ปิฏฺฐิ นาริยํ. छातीला 'उर' आणि 'हदय' म्हणतात. स्तनाला 'थन', 'कुच' आणि 'पयोधर' म्हणतात. स्तनाग्राला 'चूचुक' म्हणतात; आणि पाठीला 'पिट्ठ' किंवा 'पिट्ठi' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात. ๒๗๑. २७१. มชฺโฌ’นิตฺถี [Pg.24] วิลคฺโค จ, มชฺฌิมํ กุจฺฉิ ตุ ทฺวิสุ; คหณีตฺถฺยุทรํ คพฺโภ, โกฏฺโฐนฺโต กุจฺฉิสมฺภเว. कंबरेला 'मज्झ' (पुल्लिंगी/नपुंसकलिंगी), 'विलग्ग' आणि 'मज्झिम' म्हणतात. पोटाला 'कुच्छि' (पुल्लिंगी/स्त्रीलिंगी) म्हणतात. जठर, उदर किंवा गर्भाशयाला 'गहणी' (स्त्रीलिंगी), 'उदर', 'गब्भ' आणि 'कोट्ठ' म्हणतात. ๒๗๒. २७२. ชฆนํ ตุ นิตมฺโพ จ, โสณี จ กฏิ นาริยํ; องฺคชาตํ รหสฺสงฺคํ, วตฺถคุยฺหญฺจ เมหนํ. नितंबाला 'जघन' आणि 'नितंब' म्हणतात. स्त्रियांच्या कंबरेला 'सोणी' आणि 'कटि' म्हणतात. गुप्तांगाला 'अंगजात', 'रहस्सङ्ग', 'वत्थगुय्ह' आणि 'मेहन' म्हणतात. ๒๗๓. २७३. นิมิตฺตญฺจ วรงฺคญฺจ, พีชญฺจ ผลเมว จ; ลิงฺคํ อณฺฑํ ตุ โกโส จ,โยนิ ตฺวิตฺถีปุเมภคํ. जननेंद्रियाला 'निमित्त', 'वरंग', 'बीज', 'फल' आणि 'लिंग' देखील म्हणतात. अंडकोषाला 'अंड' आणि 'कोस' म्हणतात; तर स्त्रीच्या जननेंद्रियाला 'योनि' (स्त्रीलिंगी) आणि 'भग' (पुल्लिंगी/स्त्रीलिंगी) म्हणतात. ๒๗๔. २७४. อสุจิ สมฺภโว สุกฺกํ, ปายุ ตุ ปุริเส คุทํ; วา ปุเม คูถ กรีส, วจฺจานิ จ มลํ ฉกํ. वीर्याला 'असुचि', 'संभव' आणि 'सुक्क' म्हणतात. गुदद्वाराला 'पायु' आणि 'गुद' म्हणतात. विष्ठेला (मलाला) 'गूथ', 'करीस', 'वच्च', 'मल' आणि 'छक' म्हणतात. ๒๗๕. २७५. อุจฺจาโร มีฬฺห มุกฺกาโร, ปสฺสาโว มุตฺต มุจฺจเต; ปูติมุตฺตญฺจ โคมุตฺเต, สฺสาทีนํ ฉกณํ มเล. विष्ठेला 'उच्चार', 'मीळ्ह' आणि 'उक्कार' देखील म्हणतात. लघवीला 'पस्साव' आणि 'मुत्त' म्हणतात. गोमूत्र इत्यादींना 'पूतिमुत्त' म्हणतात; आणि गाय-बैल इत्यादींच्या विष्ठेला (शेणाला) 'छकण' म्हणतात. ๒๗๖. २७६. ทฺวีสฺวโธ นาภิยา วตฺถิ, อุจฺฉงฺค’งฺกา ตุ’โภ ปุเม; อูรุ สตฺถิ ปุเม อูรุ, ปพฺพํ ตุ ชาณุ ชณฺณุ จ. नाभीच्या (बेंबीच्या) खालच्या भागाला (ओटीपोटाला) 'वत्थि' (बस्ती) म्हणतात. मांडीवर बसण्याच्या जागेला 'उच्छंग' आणि 'अंक' (पुल्लिंगी) म्हणतात. मांडीला 'ऊरु' आणि 'सत्थि' (पुल्लिंगी) म्हणतात; तर गुडघ्याला 'जण्णु', 'जाणु' आणि 'पब्ब' (गुडघ्याचा सांधा) म्हणतात. ๒๗๗. २७७. โคปฺผโก ปาทคณฺฐิปิ, ปุเม ตุ ปณฺหิ ปาสณิ; ปาทคฺคํ ปปโท ปาโท, ตุ ปโท จรณญฺจ วา. पायाच्या घोट्याला 'गोप्फक' आणि 'पादगंठि' म्हणतात. टाचेला 'पण्हि' आणि 'पासणि' (पुल्लिंगी) म्हणतात. पायाच्या पुढच्या भागाला (पंजेला) 'पादग्ग' आणि 'पपद' म्हणतात; तर पायाला 'पाद', 'पद' आणि 'चरण' म्हणतात. ๒๗๘. २७८. องฺคํตฺว’วยโว วุตฺโต, ผาสุลิกา ตุ ผาสุกา; ปณฺฑเก อฏฺฐิ ธาตฺวิตฺถี, คลนฺตฏฺฐิ ตุ อกฺขโก. शरीराच्या भागाला 'अंग' आणि 'अवयव' म्हणतात. बरगडीला 'फासुलिका' आणि 'फासुका' म्हणतात. हाडाला 'अट्ठि' (नपुंसकलिंगी) आणि 'धातु' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात; तर गळ्याच्या हाडाला 'गलंतट्ठि' आणि 'अक्खक' म्हणतात. ๒๗๙. २७९. กปฺปโร ตุ กปาลํ วา, กณฺฑรา ตุ มหาสิรา; ปุเม นฺหารุ จิตฺถี สิรา, ธมนี ถ รสคฺคสา. डोक्याच्या कवटीला 'कप्पर' किंवा 'कपाल' म्हणतात. मोठ्या नसेला 'कंडरा' म्हणतात. स्नायूंना 'न्हाहरु' (पुल्लिंगी) म्हणतात; तर नसांना 'सिरा', 'धमनी' आणि 'रसग्गसा' म्हणतात. ๒๘๐. २८०. รสหรณฺย’โถ มํส, มามิสํ ปิสิตํ ภเว; ติลิงฺคิกํ ตุ วลฺลูร, มุตฺตตฺตํ อถ โลหิตํ. रसवाहिन्यांना 'रसहरणी' म्हणतात. मांसाला 'मंस', 'आमिस' आणि 'पिसित' म्हणतात. सुकलेल्या मांसाला 'वल्लूर' (तिन्ही लिंगांत) म्हणतात; तर रक्ताला 'उत्तत्त' आणि 'लोहित' म्हणतात. ๒๘๑. २८१. รุธิรํ โสณิตํ รตฺตํ, ลาลา เขโฬ เอลา ภเว; ปุริเส มายุ ปิตฺตญฺจ, เสมฺโห นิตฺถี สิเลสุโม. रक्ताला 'रुधिर', 'सोणित' आणि 'रत्त' देखील म्हणतात. लाळेला 'लाला', 'खेळ' आणि 'एला' म्हणतात. पित्ताला 'पित्त' म्हणतात; आणि कफाला 'सेम्ह' आणि 'सिलेसूम' (पुल्लिंगी/नपुंसकलिंगी) म्हणतात. ๒๘๒. २८२. วสา วิลีนสฺเนโห ถ, เมโท เจว วปา ภเว; อากปฺโป เวโส เนปจฺฉํ, มณฺฑนํ ตุ ปสาธนํ. वितळलेल्या चरबीला 'वसा' आणि 'विलीनस्नेह' म्हणतात. मेदाला 'मेद' आणि 'वपा' म्हणतात. पोशाखाला 'आकप्प', 'वेस' आणि 'नेपच्छ' म्हणतात; तर शृंगाराला 'मंडन' आणि 'प्रसाधन' म्हणतात. ๒๘๓. २८३. วิภูสนํ จาภรณํ, อลงฺกาโร ปิลนฺธนํ; กิรีฏ มกุฏา’นิตฺถี, จูฬามณิ สิโรมณิ. 'विभूसन', 'आभरण', 'अलंकार' आणि 'पिलंधन' हे दागिन्यांचे (अलंकारांचे) वाचक शब्द आहेत. मुकुटाला 'किरीट' आणि 'मकुट' (पुल्लिंगी/नपुंसकलिंगी) म्हणतात; तर डोक्यावरील रत्नाला 'चूळामणि' आणि 'सिरोमणि' म्हणतात. ๒๘๔. २८४. สิโรเวฐน [Pg.25] มุณฺหีสํ, กุณฺฑลํ กณฺณเวฐนํ; กณฺณิกา กณฺณปูโร จ, สิยา กณฺณวิภูสนํ. पगडीला (फेट्याला) 'सिरोवेठन' आणि 'उण्हीस' म्हणतात. कानातील कुंडलाला 'कुंडल' आणि 'कण्णवेठन' म्हणतात; तर कानाच्या इतर दागिन्यांना 'कण्णिका', 'कण्णपूर' आणि 'कण्णविभूसन' म्हणतात. ๒๘๕. २८५. กณฺฐภูสา ตุ คีเวยฺยํ, หาโร มุตฺตาวลิ’ตฺถิยํ; นิยุโร วลโย นิตฺถี, กฏกํ ปริหารกํ. गळ्यातील दागिन्याला 'कंठभूसा' आणि 'गीवेय्य' म्हणतात. हाराला 'हार' आणि 'मुत्तावलि' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात. हातातील कड्याला किंवा बांगडीला 'नियुर', 'वलय' (पुल्लिंगी/नपुंसकलिंगी), 'कटक' आणि 'परिहारक' म्हणतात. ๒๘๖. २८६. กงฺกณํ กรภูสา ถ, กิงฺกิณี ขุทฺทฆณฺฏิกา; องฺคุลียก มงฺคุลฺยา, ภรณํ, สากฺขรํ ตุ ตํ. हातातील कड्याला 'कंकण' आणि 'करभूसा' म्हणतात. लहान घंट्यांना (घुंगरांना) 'किंकिणी' आणि 'खुद्दघंटिका' म्हणतात. बोटातील अंगठीला 'अंगुलीयक' म्हणतात; आणि त्यावर नाव कोरलेले असल्यास त्याला 'साक्खर' म्हणतात. ๒๘๗. २८७. มุทฺทิกา’งฺคุลิมุทฺทา ถ, รสนา เมขลา ภเว; เกยูร มงฺคทญฺเจว, พาหุมูลวิภูสนํ. अंगठीला 'मुद्दिका' आणि 'अंगुलिमुद्दार' म्हणतात. कंबरपट्ट्याला 'रसना' आणि 'मेखला' म्हणतात; तर बाहूवरील दागिन्याला (बाजूबंदाला) 'केयूर' आणि 'अंगद' म्हणतात. ๒๘๘. २८८. ปาทงฺคทํ ตุ มญฺชีโร, ปาทกฏก นูปุรา; पायातील पैंजणाला 'पादंगद', 'मंजीर', 'पादकटक' आणि 'नूपुर' म्हणतात. ๒๘๙. २८९. อลงฺการปฺปเภทา ตุ, มุขผุลฺลํ ตโถ’ณฺณตํ; อุคฺคตฺถนํ คิงฺคมก, มิจฺเจวมาทโย สิยุํ. अलंकारांच्या विविध प्रकारांमध्ये 'मुखफुल्ल', 'उन्नत', 'उग्गत्थन' आणि 'गिंगमक' इत्यादींचा समावेश होतो. ๒๙๐. २९०. เจล มจฺฉาทนํ วตฺถํ, วาโส วสน มํสุกํ; อมฺพรญฺจ ปโฏ นิตฺถี, ทุสฺสํ โจโล จ สาฏโก. 'चेल', 'अच्छादन', 'वत्थ', 'वास', 'वसन', 'अंसुक', 'अंबर', 'पट' (पुल्लिंगी/नपुंसकलिंगी), 'दुस्स', 'चोल' आणि 'साटक' हे वस्त्राचे (कपड्याचे) वाचक शब्द आहेत. ๒๙๑. २९१. โขมํ ทุกูลํ โกเสยฺยํ, ปตฺตุณฺณํ กมฺพโล จ วา; สาณํ โกฏมฺพุรํ ภงฺค, นฺตฺยาทิ วตฺถนฺตรํ มตํ. वस्त्रांच्या विविध प्रकारांमध्ये 'खोमी' (तागाचे कापड), 'दुकूल' (बारीक कापड), 'कोसेय्य' (रेशमी कापड), 'पत्तुरण' (लोकरीचे कापड), 'कंबल' (घोंगडी), 'साण' (तागाचे कापड), 'कोटम्बुर' आणि 'भंग' इत्यादींचा समावेश होतो. ๒๙๒. २९२. นิวาสน นฺตรียานฺย, นฺตรมนฺตรวาสโก; ปาวาโร ตุ’ตฺตราสงฺโค, อุปสํพฺยาน มุตฺตรํ. नेसण्याच्या वस्त्राला (अंतर्वस्त्राला) 'निवासन', 'अंतरीय' आणि 'अंतरवासक' म्हणतात; तर पांघरण्याच्या वस्त्राला (उपरण्याला) 'पावार', 'उत्तरासंग', 'उपसंब्यान' आणि 'उत्तर' म्हणतात. ๒๙๓. २९३. อุตฺตรีย มโถ วตฺถ, มหตนฺติ มตํ นวํ; นนฺตกํ กปฺปโฏ ชิณฺณ, วสนํ ตุ ปฏจฺจรํ. उपरणेला 'उत्तरीय' म्हणतात. नवीन वस्त्राला 'महत' म्हणतात; तर जुन्या किंवा फाटलेल्या वस्त्राला (चिंधीला) 'नंतक', 'कप्पट', 'जिण्णवसन' आणि 'पटच्चर' म्हणतात. ๒๙๔. २९४. กญฺจุโก วารวาณํ วา, ถ วตฺถาวยเว ทสา; นาลิปฏฺโฏติ กถิโต, อุตฺตมงฺคมฺหิ กญฺจุโก. अंगरख्याला किंवा कवचाला 'कंचुक' आणि 'वारवाण' म्हणतात. वस्त्राच्या काठाला (झालरला) 'दसा' म्हणतात; आणि डोक्यावर बांधायच्या पगडीला 'नालिपट्ट' म्हणतात. ๒๙๕. २९५. อายาโม ทีฆตา โรโห,ปริณาโห วิสาลตา. 'आयाम', 'दीघता' आणि 'रोह' हे लांबीचे वाचक शब्द आहेत; तर 'परिणाह' आणि 'विसालता' हे रुंदीचे (विशालतेचे) वाचक शब्द आहेत. ๒๙๖. २९६. อรหทฺธโช จ กาสาย, กาสาวานิ จ จีวรํ; มณฺฑลํ ตุ ตทงฺคานิ, วิวฏฺฏ กุสิอาทโย. अरहंतांचा ध्वज म्हणजे कासाय (काषाय वस्त्र) आणि चीवर होय. मंडल, विवट्ट (आडवे शिवण) आणि कुसि (उभे शिवण) इत्यादी त्याचे अवयव (भाग) आहेत. ๒๙๗. २९७. ผล,ตฺตจ, กิมิ, โรมา, นฺเยตา วตฺถสฺส โยนิโย; ผาลํ กปฺปาสิกํ ตีสุ, โขมาที ตุ ตจพฺภวา. फळ (कापूस), झाडाची साल (त्वचा), कीटक (रेशीम) आणि लोकर (केस) हे वस्त्राचे उत्पत्तीचे स्रोत आहेत. कापसापासून बनलेले वस्त्र कापूसजन्य (कार्पासिक) असते, तर खोम (ताग) इत्यादी सालीपासून बनतात. ๒๙๘. २९८. โกเสยฺยํ [Pg.26] กิมิชํ, โรม, มยํ ตุ กมฺพลํ ภเว; สมานตฺถา ชวนิกา, สา ติโรกรณี ปฺยถ. कीटकापासून बनलेले वस्त्र म्हणजे कोशेय (रेशीम) आणि लोकरीपासून बनलेले वस्त्र म्हणजे कंबल (घोंगडी) होय. जवनिका आणि तिरोकरणी हे पडद्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๒๙๙. २९९. ปุนฺนปุํสก มุลฺโลจํ, วิตานํ ทฺวย มีริตํ; นหานญฺจ สินาเน โถ, พฺพฏฺฏนุ’มฺมชฺชนํ สมํ. उल्लोच आणि वितान हे दोन शब्द चांदव्यासाठी (छताच्या पडद्यासाठी) पुल्लिंग व नपुंसकलिंगात वापरले जातात. नहान आणि सिनान (स्नान) हे समानार्थी आहेत, तसेच उब्बट्टन (उटणे लावणे) आणि उम्मज्जन हे दोन्ही समान अर्थाचे आहेत. ๓๐๐. ३००. วิเสสโก ตุ ติลโก, ตฺยูโภ นิตฺถี จ จิตฺตกํ; จนฺทโน นิตฺถิยํ คนฺธ, สาโร มลยโช ปฺยถ. विशेषक, तिलक आणि चित्रक हे कपाळावरील टिळ्याचे समानार्थी शब्द आहेत. चंदन, गंधसार आणि मलयज हे चंदनाचे समानार्थी शब्द असून ते नपुंसकलिंगात वापरले जातात. ๓๐๑. ३०१. โคสีสํ เตลปณฺณิกํ, ปุเม วา หริจนฺทนํ; ติลปณฺณี ตุ ปตฺตงฺค, รญฺชนํ รตฺตจนฺทนํ. गोसीस, तेलपण्णिक आणि हरिचंदन हे चंदनाचे प्रकार आहेत. तिलपर्णी, पत्तंग, रंजन आणि रक्तचंदन हे लाल चंदनाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๐๒. ३०२. กาฬานุสารี กาฬิยํ, โลหํ ตฺวา’ครุ จา’คฬุ; กาฬาครุตุ กาเฬ’สฺมึ, ตุรุกฺโขตุ จ ปิณฺฑโก. काळानुसारी आणि काळिय हे काळ्या अगुरूचे प्रकार आहेत. लोह, अगुरु आणि अगळु हे अगुरूचे समानार्थी आहेत. काळा अगुरु हा काळ्या रंगाचा असतो, तर तुरुक्ख आणि पिंडक हे शिलाजताचे (धुपाचे) समानार्थी आहेत. ๓๐๓. ३०३. กตฺถูริกา มิคมโท, กุฏฺฐํ ตุ อชปาลกํ; ลวงฺคํ เทวกุสุมํ, กสฺมีรชํ ตุ กุงฺกุมํ. कत्थूरिका आणि मृगमद हे कस्तुरीचे समानार्थी आहेत. कुष्ठ आणि अजपालक हे कुष्ठ वनस्पतीचे समानार्थी आहेत. लवंग आणि देवकुसुम हे लवंगाचे समानार्थी आहेत, तर काश्मीरज आणि कुंकुम हे केशराचे समानार्थी आहेत. ๓๐๔. ३०४. ยกฺขธูโป สชฺชุลโส, ตกฺโกลํ ตุ จ โกลกํ; โกสผล มโถ ชาติ, โกสํ ชาติผลํ ภเว. यक्खधूप आणि सज्जुलस हे राळीचे समानार्थी आहेत. तक्कोल आणि कोलक हे तक्कोलाचे समानार्थी आहेत. कोसफल, जातिकोस आणि जातिफल हे जायफळाचे समानार्थी आहेत. ๓๐๕. ३०५. ฆนสาโร สิตพฺโภ จ, กปฺปูรํ ปุนฺนปุํสเก; อลตฺตโก ยาวโก จ, ลาขา ชตุ นปุํสเก. घनसार, सितब्भ आणि कप्पूर (कापूर) हे कापुराचे समानार्थी शब्द असून ते पुल्लिंग व नपुंसकलिंगात वापरले जातात. अलत्तक आणि यावक हे अळत्याचे समानार्थी आहेत, तर लाखा आणि जतु हे लाखेचे समानार्थी आहेत. ๓๐๖. ३०६. สิริวาโส ตุ สรล, ทฺทโว’ ญฺชนํ ตุ กชฺชลํ; วาสจุณฺณํ วาสโยโค, วณฺณกํ ตุ วิเลปนํ. सिरिवास आणि सरलद्भव हे सरळ वृक्षाच्या रसाचे समानार्थी आहेत. अंजन आणि कज्जल हे काजळाचे समानार्थी आहेत. वासचुण्ण आणि वासयोग हे सुगंधी उटण्याचे समानार्थी आहेत, तर वण्णक आणि विलेपन हे सुगंधी लेपाचे समानार्थी आहेत. ๓๐๗. ३०७. คนฺธมาลฺยาทิสงฺขาโร, โย ตํ วาสน มุจฺจเต; มาลา มาลฺยํ ปุปฺผทาเม, ภาวิตํ วาสิตํ ติสุ. गंध, पुष्पमाला इत्यादींनी सुगंधीत करण्याच्या क्रियेला 'वासन' असे म्हणतात. माला, माल्य आणि पुष्पदाम हे फुलांच्या माळेचे समानार्थी आहेत. भावित आणि वासित हे सुगंधीत केलेल्या वस्तूचे समानार्थी शब्द असून ते तिन्ही लिंगांत वापरले जातात. ๓๐๘. ३०८. อุตฺตํโส เสขรา’ เวฬา, มุทฺธมาลฺเย วฏํสโก; เสยฺยา จ สยนํ เสนํ, ปลฺลงฺโก ตุ จ มญฺจโก. उत्तंस, शेखर, आवेळा आणि वटंसक हे डोक्यावर धारण करायच्या फुलांच्या माळेचे (शिरोभूषणाचे) समानार्थी आहेत. सेय्या, सयन आणि सेन हे बिछान्याचे समानार्थी आहेत, तर पल्लंक आणि मंचक हे पलंगाचे समानार्थी आहेत. ๓๐๙. ३०९. มญฺจาธาโร ปฏิปาโท, มญฺจงฺเค ตฺวฏนี ตฺถิยํ, मंचाधार आणि प्रतिपाद हे पलंगाच्या पायाचे समानार्थी आहेत. पलंगाच्या अवयवांमध्ये 'अटनी' (पलंगाची चौकट) हा स्त्रीलिंगी शब्द आहे. ๓๑๐. ३१०. กุฬีรปาโท อาหจฺจ, ปาโท เจว มสารโก; จตฺตาโร พุนฺทิกาพทฺโธ, ติเม มญฺจนฺตรา สิยุํ. कुळीरपाद, आहच्चपाद, मसारक आणि बुंदिकाबद्ध हे पलंगाचे चार प्रकार आहेत. ๓๑๑. ३११. พิพฺโพหนํ โจ’ ปธานํ, ปีฐิกา ปีฐ มาสนํ; โกจฺฉํ ตุ ภทฺทปีเฐ ถา, สนฺที ปีฐนฺตเร มตา. बिब्बोहन आणि उपधान हे उशीचे समानार्थी आहेत. पीठिका, पीठ आणि आसन हे आसनाचे समानार्थी आहेत. कोच्छ आणि भद्रपीठ हे वेताच्या आसनाचे समानार्थी आहेत, तर आसंदी ही एका प्रकारची मोठी खुर्ची मानली जाते. ๓๑๒. ३१२. มหนฺโต [Pg.27] โกชโว ทีฆ,โลมโก โคนโก มโต; อุณฺณามยํ ตฺวตฺถรณํ, จิตฺตกํ วานจิตฺตกํ. मोठा आणि लांब लोकरीचा गालिचा म्हणजे 'कोजव' होय. लांब केस असलेला गालिचा म्हणजे 'गोनक' मानला जातो. लोकरीचे अंथरूण म्हणजे 'उण्णामय' होय, तर विविध रंगांचे विणलेले अंथरूण म्हणजे 'चित्रक' होय. ๓๑๓. ३१३. ฆนปุปฺผํ ปฏลิกา, เสตํ ตุ ปฏิกา ปฺยถ; ทฺวิทเสกทสานฺยุ’ ทฺท,โลมิ เอกนฺตโลมิโน. दाट फुलांची नक्षी असलेला गालिचा म्हणजे 'पटलिका' होय, तर पांढरे लोकरीचे अंथरूण म्हणजे 'पटिका' होय. दोन्ही बाजूंनी केस असलेले अंथरूण म्हणजे 'उद्दलोमी' आणि एकाच बाजूने केस असलेले अंथरूण म्हणजे 'एकंतलोमी' होय. ๓๑๔. ३१४. ตเทว โสฬสิตฺถีนํ, นจฺจโยคฺคญฺหิ กุตฺตกํ; สีหพฺยคฺฆาทิรูเปหิ, จิตฺตํ วิกติกา ภเว. सोळा स्त्रियांनी मिळून नाचण्यायोग्य असे मोठे अंथरूण म्हणजे 'कुत्तक' होय. सिंह, वाघ इत्यादी प्राण्यांच्या चित्रांनी युक्त असलेले अंथरूण म्हणजे 'विकतिका' होय. ๓๑๕. ३१५. กฏฺฏิสฺสํ โกเสยฺยํ รตน, ปริสิพฺพิต มตฺถรณํ กมา; โกสิยกฏฺฏิสฺสมยํ, โกสิยสุตฺเตน ปกตญฺจ. कट्टिस्स (रेशमी व लोकरीचे मिश्रित अंथरूण), कोसेय्य (रेशमी अंथरूण) आणि रत्नांनी मढवलेले अंथरूण हे अनुक्रमे रेशमी धाग्यांनी किंवा कट्टिस्स धाग्यांनी विणलेले असते. ๓๑๖. ३१६. ทีโป ปทีโป ปชฺโชโต, ปุเม ตฺวาทาส ทปฺปณา; เคณฺฑุโก กณฺฑุโก ตาล, วณฺฏํ ตุ พีชนีตฺถิยํ. दीप, प्रदीप आणि पज्जोत हे दिव्याचे समानार्थी आहेत. आदास आणि दप्पण (दर्पण) हे आरशाचे समानार्थी शब्द असून ते पुल्लिंगात वापरले जातात. गेण्डुक आणि कण्डुक हे चेंडूचे समानार्थी आहेत, तर तालवृंत आणि बीजनी हे पंख्याचे समानार्थी शब्द असून ते स्त्रीलिंगात वापरले जातात. ๓๑๗. ३१७. จงฺโกฏโก กรณฺโฑ จ, สมุคฺโค สมฺปุโฏ ภเว; คามธมฺโม อสทฺธมฺโม, พฺยวาโย เมถุนํ รติ. चंकोटक, करंड, समुग्ग आणि संपुट हे करंड्याचे (डब्याचे) समानार्थी आहेत. ग्रामधर्म, असद्धर्म, व्यवाय, मैथुन आणि रती हे मैथुनाचे समानार्थी आहेत. ๓๑๘. ३१८. วิวาโห ปยมา ปาณิ, คฺคโห ปริณโย ปฺยถ; ติวคฺโค ธมฺม, กาม,ตฺถา, จตุวคฺโค สโมกฺขกา. विवाह, पयमा, पाणिग्रह आणि परिणय हे लग्नाचे समानार्थी आहेत. धर्म, अर्थ आणि काम या तिन्हींना 'त्रिवर्ग' म्हणतात, तर मोक्षासह या चौन्हींना 'चतुर्वर्ग' म्हणतात. ๓๑๙. ३१९. ขุชฺโช จ คณฺฑุโล รสฺส, วามนา ตุ ลกุณฺฑโก; ปงฺคุโล ปีฐสปฺปี จ, ปงฺคุ ฉินฺนิริยาปโถ. खुज्ज आणि गंडुल हे कुबड्याचे समानार्थी आहेत. रस्स, वामन आणि लकुंडक हे बुटक्याचे समानार्थी आहेत. पंगुल, पीठसप्पी, pंगु आणि छिन्नइरियापथ हे पांगळ्याचे समानार्थी आहेत. ๓๒๐. ३२०. ปกฺโข ขญฺโช ตุ โขณฺโฑ ถ,มูโค สุญฺญวโจ ภเว; กุณี หตฺถาทิวงฺโก จ, วลิโร ตุ จ เกกโร. पक्ख, खंज आणि खोंड हे लंगड्याचे समानार्थी आहेत. मूग आणि सुञ्ञवच हे मुक्याचे समानार्थी आहेत. कुणी आणि हत्थादिवंक हे हात वाकडा असलेल्याचे समानार्थी आहेत, तर वलिर आणि केकर हे तिरळ्याचे समानार्थी आहेत. ๓๒๑. ३२१. นิกฺเกสสีโส ขลฺลาโฏ,มุณฺโฑ ตุ ภณฺฑุ มุณฺฑิโก; กาโณ อกฺขีน เมเกน,สุญฺโญ อนฺโธ ทฺวเยน ถ. निक्केससीस आणि खल्लाट हे टक्कल असलेल्याचे समानार्थी आहेत. मुंड, भंडु आणि मुंडिक हे मुंडण केलेल्याचे समानार्थी आहेत. एका डोळ्याने अंध असलेला तो 'काण' होय, तर दोन्ही डोळ्यांनी अंध असलेला तो 'अंध' होय. ๓๒๒. ३२२. พธิโร สุติหีโน ถ, คิลาโน พฺยาธิตา’ตุรา; อุมฺมาทวติ อุมฺมตฺโต, ขุชฺชาที วาจฺจลิงฺคิกา. बधिर आणि सुतिहीन हे बहिऱ्याचे समानार्थी आहेत. गेलान, व्याधित आणि आतुर हे आजारी माणसाचे समानार्थी आहेत. उम्मादवती आणि उम्मत्त हे वेड्याचे समानार्थी आहेत. खुज्ज इत्यादी शब्द विशेषण असल्यामुळे तिन्ही लिंगांत चालतात. ๓๒๓. ३२३. อาตงฺโก อามโย พฺยาธิ, คโท โรโค รุชาปิ จ; เคลญฺญากลฺล มาพาโธ,โสโส ตุ จ ขโย สิยา. आतंक, आमय, व्याधी, गद, रोग, रुजा, गेलञ्ञ, अकल्ल आणि आबाध हे आजाराचे (रोगाचे) समानार्थी आहेत. सोस आणि खय (क्षय) हे क्षयरोगाचे समानार्थी आहेत. ๓๒๔. ३२४. ปีนโส [Pg.28] นาสิกาโรโค,ฆาเน สิงฺฆานิกา สฺสโว; เญยฺยํ ตฺว’รุ วโณ นิตฺถี, โผโฏ ตุ ปิฬกา ภเว. पीनस आणि नासिकारोग हे नाकाच्या आजाराचे समानार्थी आहेत. नाकातून वाहणारा स्त्राव म्हणजे 'सिंग्घाणिका' (शेंबूड) होय. अरु आणि वण (व्रण) हे जखमेचे समानार्थी आहेत, तर फोट आणि पिळका हे फोडाचे समानार्थी आहेत. ๓๒๕. ३२५. ปุพฺโพ ปูโย ถ รตฺตาติ, สาโร ปกฺขนฺทิกา ปฺยถ; อปมาโร อปสฺมาโร, ปาทโผโฏ วิปาทิกา. पुब्ब आणि पूय हे पुवाचे समानार्थी आहेत. रक्तातिसार आणि पक्खंदिका हे अतिसाराचे समानार्थी आहेत. अपमार आणि अपस्मार हे फेफऱ्याचे (मिरगीचे) समानार्थी आहेत, तर पादफोट आणि विपादिका हे पायाला पडणाऱ्या भेगांचे समानार्थी आहेत. ๓๒๖. ३२६. วุฑฺฒิโรโค ตุ วาตณฺฑํ, สีปทํ ภารปาทตา; กณฺฑู กณฺฑูติ กณฺฑูยา, ขชฺชุ กณฺฑูวนํ ปฺยถ. वुद्धिराग आणि वातंड हे अंडवृद्धीच्या आजाराचे समानार्थी आहेत. सीपद आणि भारपादता हे हत्तीरोगाचे समानार्थी आहेत. कंडू, कंडूति, कंडूया, खज्जु आणि कंडूवन हे खाजेचे समानार्थी आहेत. ๓๒๗. ३२७. ปามํ วิตจฺฉิกา กจฺฉุ, โสโถ ตุ สยถู’ทิโต; ทุนฺนามกญฺจ อริสํ, ฉทฺทิกา วมถู’ทิโต. पाम, वितच्छिका आणि कच्छु हे खरुजेचे समानार्थी आहेत. सोथ आणि सयथु हे सुजेचे समानार्थी आहेत. दुन्नामक आणि अरिस हे मूळव्याधीचे समानार्थी आहेत, तर चद्दिका आणि वमथु हे उलटीचे समानार्थी आहेत. ๓๒๘. ३२८. ทวถุ ปริตาโป ถ, ติลโก ติลกาฬโก; วิสูจิกา อิติ มหา, วิเรโก ถ ภคนฺทโล. दवथु आणि परिताप हे जळजळीचे समानार्थी आहेत. तिलक आणि तिलकाळक हे त्वचेवरील काळ्या तिळाचे समानार्थी आहेत. विसूचिका म्हणजे पटकी, महाविरेक म्हणजे तीव्र जुलाब आणि भगंदल म्हणजे भगंदर होय. ๓๒๙. ३२९. เมโห ชโร กาส สาสา, กุฏฺฐํ สูลามยนฺตรา; วุตฺโต เวชฺโช ภิสกฺโก จ, โรคหารี ติกิจฺฉโก. प्रमेह, ताप, खोकला, दमा, कुष्ठ आणि पोटदुखी हे इतर आजार आहेत. वेज्ज, भिसक्क, रोगहारी आणि तिकिच्छक हे वैद्याचे समानार्थी आहेत. ๓๓๐. ३३०. สลฺลเวชฺโช สลฺลกตฺโต, ติกิจฺฉา ตุ ปติกฺริยา; เภสชฺช มคโท เจว, เภสชํ โม’สธํ ปฺยถ. सल्लवेज्ज आणि सल्लकत्त हे शस्त्रवैद्याचे समानार्थी आहेत. तिकिच्छा आणि प्रतिक्रिया हे उपचाराचे समानार्थी आहेत. भेसज्ज, अगद, भेसज आणि ओसध हे औषधाचे समानार्थी आहेत. ๓๓๑. ३३१. กุสลา นามยา โรคฺยํ,อถ กลฺโล นิรามโยติ, कुसल, अनामय, आरोग्य, कल्ल आणि निरामय हे निरोगीपणाचे समानार्थी शब्द आहेत. นรวคฺโค นิฏฺฐิโต. नरवर्ग समाप्त झाला. ๔. จตุพฺพณฺณวคฺค ४. चतुर्वर्णवर्ग ขตฺติยวคฺค क्षत्रियवर्ग ๓๓๒. ३३२. กุลํ วํโส จ สนฺตานา, ภิชนา โคตฺต มนฺวโย; ถิยํ สนฺตตฺย โถ วณฺณา, จตฺตาโร ขตฺติยาทโย. कुल, वंश, संतान, अभिजन, गोत्र, अन्वय आणि संतती हे कुळाचे समानार्थी आहेत. क्षत्रिय इत्यादी चार वर्ण आहेत. ๓๓๓. ३३३. กุลีโน สชฺชโน สาธุ,สภฺโย จายฺโย มหากุโล; ราชา ภูปติ ภูปาโล, ปตฺถิโว จ นราธิโป. कुलीन, सज्जन, साधू, सभ्य, आर्य आणि महाकुलीन (हे उच्च कुळातील व्यक्तीचे वाचक शब्द आहेत); राजा, भूपती, भूपाल, पार्थिव आणि नराधिप (हे राजाचे वाचक शब्द आहेत). ๓๓๔. ३३४. ภูนาโถ [Pg.29] ชคติปาโล, ทิสมฺปติ ชนาธิโป; รฏฺฐาธิโป นรเทโว, ภูมิโป ภูภุโช ปฺยถ. भूनाथ, जगतीपाल, दिसंपती (दिशांचा पती), जनाधिप, राष्ट्राधिप, नरदेव, भूमिप आणि भूभुज हे देखील राजाचेच समानार्थी शब्द आहेत. ๓๓๕. ३३५. ราชญฺโญ ขตฺติโย ขตฺตํ, มุทฺธาภิสิตฺต พาหุชา; สพฺพภุมฺโม จกฺกวตฺตี, ภูโปญฺโญ มณฺฑลิสฺสโร. राजन्य, खत्तिय (क्षत्रिय), खत्त, मुद्धाभिसित्त (मूर्धाभिषिक्त) आणि बाहुज हे क्षत्रियाचे शब्द आहेत; सार्वभौम आणि चक्रवर्ती हे चक्रवर्ती राजाचे शब्द आहेत; तर इतर राजांना भूप किंवा मंडलिसर (मंडलेश्वर) म्हणतात. ๓๓๖. ३३६. ปุเม ลิจฺฉวิ วชฺชี จ, สกฺโย ตุ สากิโย ถ จ; ภทฺทกจฺจานา ราหุล, มาตา พิมฺพา ยโสธรา. पुल्लिंगात लिच्छवी, वज्जी, सख्य (शाक्य) आणि साकिय हे शब्द आहेत; तर राहुलमाता, भद्दकच्चाना (भद्रकात्यायनी), बिंबा आणि यशोधरा हे राहुलच्या मातेचे (यशोधरेचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๓๓๗. ३३७. โกฏีนํ เหฏฺฐิมนฺเตน, สตํ เยสํ นิธานคํ; กหาปณานํ ทิวส, วฬญฺโช วีสตมฺพณํ. ज्यांच्या तिजोरीत किमान शंभर कोटी कहापण (कार्षापण) जमा असतात आणि ज्यांचा रोजचा खर्च वीस अंबण (धान्याचे एक माप) असतो... ๓๓๘. ३३८. เต ขตฺติยมหาสาลา, สีติ โกฏิธนานิ ตุ; นิธานคานิ ทิวส, วฬญฺโช จ ทสมฺพณํ. ...त्यांना 'खत्तियमहासाल' (क्षत्रिय महाशाल) म्हणतात, ज्यांच्याकडे ऐंशी कोटी धन तिजोरीत असते आणि रोजचा खर्च दहा अंबण असतो. ๓๓๙. ३३९. เยสํ ทฺวิชมหาสาลา, ตทุปฑฺเฒ นิธานเค; วฬญฺเช จ คหปติ, มหาสาลา ธเน สิยุํ. ज्यांच्याकडे याच्या निम्मे धन तिजोरीत आणि खर्च असतो, ते 'द्विजमहासाल' (ब्राह्मण महाशाल) आणि 'गृहपती महाशाल' (गहपतिमहासाल) म्हणून ओळखले जातात. ๓๔๐. ३४०. มหามตฺโต ปธานญฺจ, มติสชีโว มนฺตินี; สชีโว สจิวา, มจฺโจ, เสนานี ตุ จมูปติ. महामत्त (महामात्र), प्रधान, मतिसजीव, मंत्री, सजीव, सचिव आणि अमच्च (अमात्य) हे मंत्र्यांचे समानार्थी शब्द आहेत; तर सेनानी आणि चमूपती हे सेनापतीचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๔๑. ३४१. นฺยาสาทีนํ วิวาทานํ, อกฺขทสฺโส ปทฏฺฐริ; โทวาริโก ปตีหาโร, ทฺวารฏฺโฐ ทฺวารปาลโก. ठेवी इत्यादी विवादांचा निवाडा करणारा तो 'अक्खदस्स' (अक्षदर्शक/न्यायाधीश) आणि 'पदट्ठरी' होय; तर दोवारिक, पतीहार, द्वारट्ठ आणि द्वारपालक हे द्वारपालाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๔๒. ३४२. อนีกฏฺโฐติ ราชูนํ, องฺครกฺขคโณ มโต; กญฺจุกี โสวิทลฺโล จ, อนุชีวี ตุ เสวโก. राजांच्या अंगरक्षक दलाला 'अनीकट्ठ' (अनीकस्थ) किंवा 'अंगरक्षकगण' मानले जाते; कंचुकी आणि सोविदल्ल हे अंतःपुरातील रक्षकाचे (कंचुकीचे) शब्द आहेत; तर अनुजीवी आणि सेवक हे सेवकाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๔๓. ३४३. อชฺฌกฺโข ธิกโต เจว,เหรญฺญิโก ตุ นิกฺขิโก; สเทสานนฺตโร สตฺตุ, มิตฺโตราชา ตโต ปรํ. अज्झक्ख (अध्यक्ष) आणि अधिकत हे अधीक्षकाचे शब्द आहेत; हेरञ्ञिक (हिरण्यक/खजिनदार) आणि निक्खिक हे कोषाध्यक्षाचे शब्द आहेत; स्वतःच्या देशाच्या सीमेला लागून असलेला राजा हा 'शत्रू' असतो आणि त्याच्या पलीकडचा राजा हा 'मित्र' असतो. ๓๔๔. ३४४. อมิตฺโต ริปุ เวรี จ, สปตฺตา ราติ สตฺว’ริ; (สตฺตุ+อริ)ปจฺจตฺถิโก ปริปนฺถี, ปฏิปกฺขา หิตาปโร. अमित्त (अमित्र), रिपू, वेरी, सपत्त (सपत्न/शत्रू), अराती, सत्तु (शत्रू), अरी, पच्चत्थिक (प्रत्यर्थिक), परिपंथी, प्रतिपक्ष आणि अहितापर हे शत्रूचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๔๕. ३४५. ปจฺจามิตฺโต วิปกฺโข จ, ปจฺจนีก วิโรธิโน; วิทฺเทสี จ ทิโส ทิฏฺโฐ,ถา นุโรโธ นุวตฺตนํ. पच्चामित्त (प्रत्यमित्र), विपक्ष, पच्चनीक (प्रत्यनीक), विरोधी, विद्देसी (विद्वेषी) आणि दिस (द्वेषी) हे शत्रूचे शब्द आहेत; तर अनुरोध आणि अनुवर्तन हे अनुकूलतेचे (अनुसरणाचे) शब्द आहेत. ๓๔๖. ३४६. มิตฺโต นิตฺถี วยสฺโส จ, สหาโย สุหโท สขา; สมฺภตฺโต ทฬฺหมิตฺโต ถ, สนฺทิฏฺโฐ ทิฏฺฐมตฺตโก. मित्त (मित्र - नपुंसकलिंग सोडून), वयस्य, सहाय, सुहद (सुहृद) आणि सखा हे मित्राचे शब्द आहेत; संभत्त (संभक्त) आणि दळहमित्त (दृढमित्र) हे घनिष्ठ मित्राचे शब्द आहेत; तर संदिट्ठ आणि दिट्ठमत्तक हे केवळ परिचिताचे शब्द आहेत. ๓๔๗. ३४७. จโร จ คุฬฺหปุริโส, ปถาวี ปถิโก’ทฺธคู; ทูโต ตุ สนฺเทสหโร, คณโก ตุ มุหุตฺติโก. चर आणि गुळ्हपुरिस (गुप्तहेर) हे हेराचे शब्द आहेत; पथावी, पथिक आणि अद्धगू (अध्वग) हे प्रवाशाचे शब्द आहेत; दूत आणि संदेशहर हे दूताचे शब्द आहेत; तर गणक आणि मुहुत्तिक (मुहूर्त सांगणारा) हे ज्योतिषाचे शब्द आहेत. ๓๔๘. ३४८. เลขโก [Pg.30] ลิปิกาโร จ, วณฺโณ ตุ อกฺขโร ปฺยถ; เภโท ทณฺโฑ สาม ทานา, นฺยุปายา จตุโร อิเม. लेखक आणि लिपिकार हे लिहिणाऱ्याचे शब्द आहेत; वण्ण (वर्ण) आणि अक्खर (अक्षर) हे अक्षराचे शब्द आहेत; भेद, दंड, साम आणि दान हे चार उपाय आहेत. ๓๔๙. ३४९. อุปชาโปตุ เภโท จ, ทณฺโฑ ตุ สาหสํ ทโม; उपजाप आणि भेद हे फुटीचे (भेदनीतीचे) शब्द आहेत; तर दंड, साहस आणि दम हे शिक्षेचे (दंडाचे) शब्द आहेत. ๓๕๐. ३५०. สามฺย’ มจฺโจ สขา โกโส, ทุคฺคญฺจ วิชิตํ พลํ; รชฺชงฺคานีติ สตฺเตเต, สิยุํ ปกติโย ปิจ. स्वामी (राजा), अमच्च (अमात्य), सखा (मित्र), कोस (कोष), दुग्ग (दुर्ग), विजित (राष्ट्र/राज्य) आणि बल (सेना) ही राज्याची सात अंगे किंवा प्रकृती आहेत. ๓๕๑. ३५१. ปภาวุ’สฺสาห, มนฺตานํ, วสา ติสฺโส หิ สตฺติโย; ปภาโว ทณฺฑโช เตโช,ปตาโป ตุ จ โกสโช. प्रभाव, उत्साह आणि मंत्र या तीन शक्ती आहेत; दंडापासून (सैन्यापासून) उत्पन्न होणाऱ्या तेजाला 'प्रभाव' म्हणतात, तर कोषापासून (खजिन्यापासून) उत्पन्न होणाऱ्या तेजाला 'प्रताप' म्हणतात. ๓๕๒. ३५२. มนฺโต จ มนฺตนํ โส ตุ, จตุกฺกณฺโณ ทฺวิโคจโร; ติโคจโร ตุ ฉกฺกณฺโณ, รหสฺสํ คุยฺห มุจฺจเต. मंत (मंत्र) आणि मंतन (मंत्रणा) हे विचारविनिमयाचे शब्द आहेत; दोन व्यक्तींमधील मंत्रणेला 'चतुष्कर्ण' किंवा 'द्विगोचर' म्हणतात; तीन व्यक्तींमधील मंत्रणेला 'त्रिगोचर' किंवा 'षट्कर्ण' म्हणतात; आणि गुप्त गोष्टीला 'रहस्य' किंवा 'गुय्ह' (गुह्य) म्हणतात. ๓๕๓. ३५३. ตีสุ วิวิตฺต วิชน, ฉนฺนา, รโห รโห พฺยยํ; วิสฺสาโส ตุ จ วิสฺสมฺโภ,ยุตฺตํ ตฺโว’ปายิกํ ติสุ. विवित्त (विविक्त), विजन आणि छन्न हे तिन्ही लिंगांत एकांत जागेचे वाचक आहेत; 'रहो' हे अव्यय गुप्ततेचे वाचक आहे; विस्सास (विश्वास) आणि विस्संभ (विस्रंभ) हे विश्वासाचे शब्द आहेत; तर युत्त (युक्त) आणि उपायिक हे तिन्ही लिंगांत योग्यतेचे वाचक आहेत. ๓๕๔. ३५४. โอวาโท จานุสิฏฺฐิตฺถี, ปุมวชฺเช นุสาสนํ; อาณา จ สาสนํ เญยฺยํ, อุทฺทานํ ตุ จ พนฺธนํ. ओवाद (उपदेश) आणि अनुसिट्ठि (अनुशिष्टी - स्त्रीलिंगी) तसेच अनुसासन (अनुशासन - नपुंसकलिंगी) हे उपदेशाचे शब्द आहेत; आणा (आज्ञा) आणि सासन (शासन) हे आज्ञेचे शब्द आहेत; तर उद्दान आणि बंधन हे बांधण्याचे शब्द आहेत. ๓๕๕. ३५५. อาคุ วุตฺต มปราโธ, กโร ตุ พลิ มุจฺจเต; ปุณฺณปตฺโต ตุฏฺฐิทาโย, อุปทา ตุ จ ปาภตํ. आगू आणि अपराध हे अपराधाचे शब्द आहेत; कर आणि बली हे कराचे (महसुलाचे) शब्द आहेत; पुण्णपत्त (पूर्णपात्र) आणि तुट्ठिदाय (तुष्टिदाय) हे आनंदाने दिलेल्या भेटीचे शब्द आहेत; तर उपदा आणि पाभत (प्राभृत) हे भेटीचे (भेटवस्तूचे) शब्द आहेत. ๓๕๖. ३५६. ตโถ’ปายน มุกฺโกโจ, ปณฺณากาโร ปเหณกํ; สุงฺกํ ตฺวนิตฺถี คุมฺพาทิ, เทยฺเย ถา’โย ธนาคโม. तसेच उपायन, मुक्कोच (लाच), पण्णाकार (पर्णकार/भेट) आणि पहेणक हे भेटीचे शब्द आहेत; सुंक (शुल्क - स्त्रीलिंग सोडून) हे जकात नाक्यावरील कराचे नाव आहे; तर आय आणि धनागम हे उत्पन्नाचे (महसुलाचे) शब्द आहेत. ๓๕๗. ३५७. อาตปตฺตํ ตถา ฉตฺตํ, รญฺญํ ตุ เหมมาสนํ; สีหาสนํ อโถ วาฬ, พีชนีตฺถี จ จามรํ. आतपत्त (आतपत्र) आणि छत्त (छत्र) हे छत्रीचे शब्द आहेत; राजाच्या सुवर्ण आसनाला 'हेमासन' किंवा 'सीहासन' (सिंहासन) म्हणतात; तर वाळबीजनी (स्त्रीलिंगी) आणि चामर हे चवरीचे शब्द आहेत. ๓๕๘. ३५८. ขคฺโค จ ฉตฺต มุณฺหีสํ, ปาทุกา วาลพีชนี; อิเม กกุธภณฺฑานิ, ภวนฺติ ปญฺจ ราชุนํ. खग्ग (खड्ग/तलवार), छत्त (छत्र), उण्हीस (उष्णीष/मुकुट), पादुका आणि वाळबीजनी (चवरी) ही राजांची पाच राजचिन्हे (ककुधभांड) आहेत. ๓๕๙. ३५९. ภทฺทกุมฺโภ ปุณฺณกุมฺโภ, ภิงฺกาโร ชลทายโก; หตฺถิ,สฺส,รถ,ปตฺตี ตุ, เสนา หิ จตุรงฺคินี. भद्दकुंभ (भद्रकुंभ) आणि पुण्णकुंभ (पूर्णकुंभ) हे मंगल कलशाचे शब्द आहेत; भिंगार (भृंगार) आणि जलदायक हे पाणी देणाऱ्या पात्राचे शब्द आहेत; हत्ती, घोडे, रथ आणि पायदळ या चार अंगांनी मिळून 'चतुरंगिणी सेना' बनते. ๓๖๐. ३६०. กุญฺชโร วารโณ หตฺถี, มาตงฺโค ทฺวิรโท คโช; นาโค ทฺวิโป อิโภ ทนฺตี,ยูถเชฏฺโฐ ตุ ยูถโป. कुंजर, वारण, हत्ती, मातंग, द्विरद, गज, नाग, द्विप, इभ आणि दंती हे हत्तीचे समानार्थी शब्द आहेत; तर युथजेट्ठ (यूथज्येष्ठ) आणि युथप (यूथप) हे हत्तीच्या कळपाच्या प्रमुखाचे शब्द आहेत. ๓๖๑. ३६१. กาฬาวก [Pg.31] คงฺเคยฺยา, ปณฺฑร ตมฺพา จ ปิงฺคโล คนฺโธ; มงฺคล เหโม’โปสถ,ฉทฺทนฺตา คชกุลานิ เอตานิ. काळावक, गंगेय, पांढर (पांडुर), तांब (ताम्र), पिंगल, गंध, मंगल, हेम, उपोसथ आणि छद्दंत ही हत्तींची दहा कुळे आहेत. ๓๖๒. ३६२. กลโภ เจว ภิงฺโกถ, ปภินฺโน มตฺต คชฺชิตา; หตฺถิฆฏา ตุ คชตา, หตฺถีนี ตุ กเรณุกา. कलभ आणि भिंग हे हत्तीच्या पिल्लाचे शब्द आहेत; प्रभिन्न, मत्त आणि गज्जिता हे मदोन्मत्त हत्तीचे शब्द आहेत; हत्तीघटा आणि गजता हे हत्तींच्या समूहाचे शब्द आहेत; तर हत्तीनी आणि करेणुका हे मादी हत्तीचे (हत्तिणीचे) शब्द आहेत. ๓๖๓. ३६३. กุมฺโภ หตฺถิสิโรปิณฺฑา, กณฺณมูลํ ตุ จูลิกา; อาสนํ ขนฺธเทสมฺหิ, ปุจฺฉมูลํ ตุ เมจโก. कुंभ आणि हत्थिसिरोपिंड हे हत्तीच्या कपाळावरील उंचवट्याचे शब्द आहेत; कर्णमूल आणि चूलिका हे कानाच्या मुळाचे शब्द आहेत; खांद्यावरील भागाला 'आसन' म्हणतात; तर शेपटीच्या मुळाला 'मेचक' म्हणतात. ๓๖๔. ३६४. อาลาน มาฬฺหโก ถมฺโภ, นิตฺถีตุ นิคโฬ’นฺทุโก; สงฺขลํ ตีสฺวโถ คณฺโฑ,กโฏ ทานํ ตุ โส มโท. आलान, आळहक आणि थंभ (स्तंभ) हे हत्तीला बांधण्याच्या खांबाचे शब्द आहेत; निगळ (निगड - स्त्रीलिंग सोडून) आणि अंदुक हे साखळीचे शब्द आहेत; 'संखल' (साखळी) हा शब्द तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; गंड आणि कट हे हत्तीच्या कानशिलाचे शब्द आहेत; तर दान आणि मद हे हत्तीच्या मदाचे शब्द आहेत. ๓๖๕. ३६५. โสณฺโฑ ตุ ทฺวีสุ หตฺโถ ถ,กรคฺคํ โปกฺขรํ ภเว; มชฺฌมฺหิ พนฺธนํ กจฺฉา, กปฺปโน ตุ กุถาทโย. सोंड (दोन लिंगांत) आणि हत्थ (हस्त) हे हत्तीच्या सोंडेचे शब्द आहेत; करग्ग (कराग्र) आणि पोक्खर (पुष्कर) हे सोंडेच्या टोकाचे शब्द आहेत; हत्तीच्या पोटाला बांधायच्या पट्ट्याला 'कच्छा' (कक्षा) म्हणतात; तर कुथ (झूल) इत्यादी सजावटीच्या साहित्याला 'कप्पन' (कल्पना) म्हणतात. ๓๖๖. ३६६. โอปวยฺโห ราชวยฺโห, สชฺชิโต ตุ จ กปฺปิโต; โตมโร นิตฺถิยํ ปาเท, สิยา วิชฺฌนกณฺฏโก. ओपवय्ह (औपवाह्य) आणि राजवय्ह (राजवाह्य) हे राजाच्या वाहनाचे (हत्तीचे) शब्द आहेत; सज्जित आणि कप्पित (कल्पित) हे सजवलेल्या हत्तीचे शब्द आहेत; तोमर हा पायात टोचायचा अंकुश आहे, ज्याला 'विज्झनकंटक' (विद्धनकंटक - स्त्रीलिंग सोडून) देखील म्हणतात. ๓๖๗. ३६७. ตุตฺตํ ตุ กณฺณมูลมฺหิ, มตฺถกมฺหิ ตุ องฺกุโส; หตฺถาโรโห หตฺถิเมณฺโฑ,หตฺถิโป หตฺถิโคปโก. कानाच्या मुळाशी वापरायच्या अंकुशाला 'तुत्त' (तोत्र) म्हणतात, तर डोक्यावर वापरायच्या अंकुशाला 'अंकुश' म्हणतात; हत्थारोह (हस्त्यारोह), हत्थिमेंड, हत्थिप (हस्तिप) आणि हत्थिगोपक हे हत्ती चालवणाऱ्याचे (माहुताचे) शब्द आहेत. ๓๖๘. ३६८. คามณีโย ตุ มาตงฺค, หยาทฺยาจริโย ภเว; หโย ตุรงฺโค ตุรโค,วาโห อสฺโส จ สินฺธโว. गामणीय, मातंगाचार्य आणि हयाचार्य हे हत्ती व घोड्यांचे प्रशिक्षण देणाऱ्या शिक्षकाचे शब्द आहेत; हय, तुरंग, तुरग, वाह, अस्स (अश्व) आणि सिंधव हे घोड्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๓๖๙. ३६९. เภโท อสฺสตโร ตสฺสา,ชานิโย ตุ กุลีนโก; สุขวาหี วินีโต ถ,กิโสโร หยโปตโก. घोड्याच्या एका जातीला 'अस्सतर' (अश्वतर/खच्चर) म्हणतात; कुलीन घोड्याला 'जानिय' (आजानेय) किंवा 'कुलीनक' म्हणतात; सुखद प्रवास देणाऱ्या घोड्याला 'सुखवाही' किंवा 'विनीत' म्हणतात; तर घोड्याच्या पिल्लाला 'किसोर' (किशोर) किंवा 'हयपोतक' म्हणतात. ๓๗๐. ३७०. โฆฏโก ตุ ขฬุงฺโก ถ, ชวโน จ ชวาธิโก; มุขาธานํ ขลีโน วา, กสา ตฺว สฺสาภิตาฬินี. घोटक आणि खळुंक हे निकृष्ट घोड्याचे शब्द आहेत; जवन आणि जवाधिक हे वेगवान घोड्याचे शब्द आहेत; मुखाधान आणि खलीन हे घोड्याच्या लगामाचे शब्द आहेत; तर कशा (चाबूक) आणि अस्साभिताळिनी हे घोड्याला मारायच्या चाबकाचे शब्द आहेत. ๓๗๑. ३७१. กุสา ตุ นาสรชฺชุมฺหิ, วฬวา’สฺสา ขุโร สผํ; ปุจฺฉ มนิตฺถี นงฺคุฏฺฐํ, วาลหตฺโถ จ วาลธิ. नाकातील दोरीला 'कुसा' म्हणतात; मादी घोड्याला 'वळवा' (वडवा) म्हणतात; घोड्याच्या खुराला 'खुर' किंवा 'सफ' (शफ) म्हणतात; तर पुच्छ (नपुंसकलिंग सोडून), नंगुठ्ठ (लांगूल), वालहत्थ आणि वालधी हे शेपटीचे शब्द आहेत. ๓๗๒. ३७२. สนฺทโน [Pg.32] จ รโถ ผุสฺส, รโถ ตุ นรณาย โส; จมฺมาวุโต จ เวยคฺโฆ,เทปฺโป พฺยคฺฆสฺส ทีปิโน. संदन (स्यंदन) आणि रथ हे रथाचे शब्द आहेत; राजा शोधण्यासाठी वापरल्या जाणाऱ्या रथाला 'फुस्सरथ' (पुष्यरथ) म्हणतात; चामड्याने मढवलेल्या रथाला 'चम्मावृत' म्हणतात; वाघाच्या चामड्याने मढवलेल्या रथाला 'वैयग्ध' म्हणतात; तर बिबट्याच्या चामड्याने मढवलेल्या रथाला 'दीप्प' म्हणतात. ๓๗๓. ३७३. สิวิกา ยาปฺยยานญฺจา, นิตฺถี ตุ สกโฏ ปฺย’นํ ; จกฺกํ รถงฺค มาขฺยาตํ, ตสฺสนฺโต เนมิ นาริยํ. शिविका (पालखी) आणि याप्ययान (पालखी); शकट (गाडा) आणि अन (गाडा); चाकाला 'रथांग' (रथाचा अवयव) म्हणतात, आणि त्याच्या बाहेरील कड्याला (घेराला) 'नेमी' म्हणतात. ๓๗๔. ३७४. ตมฺมชฺเฌ ปิณฺฑิกา นาภิ, กุพฺพโร ตุ ยุคนฺธโร; อกฺขคฺคกีเล อาณีตฺถี, วรุโถ รถคุตฺย’ถ. त्याच्या मध्यभागाला 'पिंडिका' किंवा 'नाभी' (चाकाचा कणा/मध्यभाग) म्हणतात; 'कुब्बर' म्हणजे जू (युगंधर); आसाच्या टोकावरील खिळ्याला 'आणी' (स्त्री.) म्हणतात; आणि रथाच्या संरक्षकाला 'वरूथ' म्हणतात. ๓๗๕. ३७५. ธุโร มุเข รถสฺสงฺคา, ตฺว กฺโข ปกฺขรอาทโย; ยานญฺจ วาหนํ โยคฺคํ, สพฺพหตฺถฺยาทิวาหเน. रथाच्या अग्रभागाला 'धुरा' म्हणतात; अक्ष (आस), पक्खर इत्यादी रथाचे अवयव आहेत; हत्ती इत्यादी सर्व वाहनांना 'यान', 'वाहन' आणि 'योग्य' म्हणतात. ๓๗๖. ३७६. รถจารี ตุ สูโต จ, ปาชิตา เจว สารถี; รถาโรโห จ รถิโก,รถี โยโธ ตุ โย ภโฏ. 'रथचारी', 'सूत', 'पाजिता' आणि 'सारथी' म्हणजे रथ हाकणारा (सारथी); 'रथारोह', 'रथिक' आणि 'रथी' म्हणजे रथावर आरूढ होऊन लढणारा योद्धा; आणि 'योद्धा' व 'भट' म्हणजे सैनिक. ๓๗๗. ३७७. ปทาติ ปตฺตี ตุ ปุเม, ปทโค ปทิโก มโต; สนฺนาโห กงฺกโฏ วมฺมํ, กวโจ วา อุรจฺฉโท. 'पदाति', 'पत्ति' (पु.), 'पदग' आणि 'पदिक' म्हणजे पायदळ सैनिक; 'सन्नाह', 'कंकट', 'वम्म' (वर्म), 'कवच' आणि 'उरच्छद' म्हणजे चिलखत (अंगत्राण). ๓๗๘. ३७८. ชาลิกา ถ จ สนฺนทฺโธ, สชฺโช จ วมฺมิโก ภเว; อามุกฺโก ปฏิมุกฺโก ถ, ปุเรจารี ปุเรจโร. 'जालिका' म्हणजे साखळीचे चिलखत; 'सन्नाद्ध', 'सज्ज' आणि 'वम्मिक' म्हणजे चिलखत घातलेला (सज्ज झालेला); 'आमुक्त' आणि 'पटिमुक्त' म्हणजे परिधान केलेले (चिलखत); 'पुरेचारी' आणि 'पुरेचर' म्हणजे पुढे चालणारा (अग्रगामी). ๓๗๙. ३७९. ปุพฺพงฺคโม ปุเรคามี, มนฺทคามี ตุ มนฺถโร; ชวโน ตุริโต เวคี, เชตพฺพํ เชยฺย มุจฺจเต. 'पुब्बंगम' (पूर्वंगम) आणि 'पुरेगामी' म्हणजे पुढे जाणारा; 'मंदगामी' आणि 'मंथर' म्हणजे हळू चालणारा; 'जवन', 'तुरित' आणि 'वेगी' म्हणजे वेगवान; आणि 'जेतब्ब' व 'जेय्य' म्हणजे जिंकण्यायोग्य. ๓๘๐. ३८०. สูร วีรา ตุ วิกฺกนฺโต, สหาโย นุจโร สมา; สนฺนทฺธปฺปภุตี ตีสุ, ปาเถยฺยํ ตุ จ สมฺพลํ. 'शूर', 'वीर' आणि 'विक्कांत' (विक्रांत) म्हणजे पराक्रमी; 'सहाय' आणि 'अनुचर' हे समान अर्थाचे (सहकारी/अनुयायी) आहेत; 'सन्नाद्ध' इत्यादी शब्द तिन्ही लिंगांत चालतात; आणि 'पाथेय्य' व 'संबल' म्हणजे प्रवासातील शिदोरी. ๓๘๑. ३८१. วาหินี ธชินี เสนา, จมู จกฺกํ พลํ ตถา; อนีโก วา ถ วินฺยาโส,พฺยูโห เสนาย กถฺยเต. 'वाहिनी', 'धजिनी', 'सेना', 'चमू', 'चक्क' (चक्र) आणि 'बल' म्हणजे सैन्य; 'अनीक' म्हणजेही सैन्य; आणि सैन्याच्या रचनेला 'ब्यूह' (व्यूह) म्हणतात. ๓๘๒. ३८२. หตฺถี ทฺวาทสโปโส,ติ,ปุริโส ตุรโค, รโถ; จตุโปโสติ เอเตน, ลกฺขเณนา ธมนฺตโต. हत्ती हा बारा पुरुषांनी (सैनिकांनी) युक्त असतो; माणूस, घोडा आणि रथ हे चार पुरुषांनी युक्त असतात; या लक्षणाने सैन्याची विभागणी केली जाते. ๓๘๓. ३८३. หตฺถานีกํ หยานีกํ, รถานีกํ ตโย ตโย; คชาทโย สสตฺถา ตุ, ปตฺตานีกํ จตุชฺชนา. 'हत्तीदल' (हत्थानीक), 'घोडदळ' (हयानीक) आणि 'रथदळ' (रथानीक) या तिन्हींमध्ये प्रत्येकी तीन-तीन सशस्त्र हत्ती इत्यादी असतात; आणि 'पायदळ' (पत्तानीक) चार माणसांचे बनलेले असते. ๓๘๔. ३८४. สฏฺฐิวํสกลาเปสุ, [Pg.33] ปจฺเจกํ สฏฺฐิทณฺฑิสุ; ธูลีกเตสุ เสนาย, ยนฺติยา กฺโขภนี ตฺถิยํ. चालणाऱ्या सैन्यामुळे प्रत्येकी साठ काठ्या असलेले साठ बांबूंचे भारे जर धुळीस मिळाले, तर त्या सैन्याला 'अक्खोभनी' (अक्षौहिणी - स्त्री.) म्हणतात. ๓๘๕. ३८५. สมฺปตฺติ สมฺปทา ลกฺขี, สิรี วิปตฺติ อาปทา; อถา วุธญฺจ เหติ’ตฺถี, สตฺถํ ปหรณํ ภเว. 'संपत्ती', 'संपदा', 'लक्खी' (लक्ष्मी) आणि 'सिरी' (श्री) म्हणजे समृद्धी; 'विपत्ती' आणि 'आपदा' म्हणजे संकट; आणि 'आवुध' (आयुध), 'हेति' (स्त्री.), 'सत्थ' (शस्त्र) आणि 'पेक्षा' (प्रहार करण्याचे साधन) म्हणजे शस्त्र होय. ๓๘๖. ३८६. มุตฺตามุตฺต มมุตฺตญฺจ, ปาณิโต มุตฺตเมว จ; ยนฺตมุตฺตนฺติ สกลํ, อายุธํ ตํ จตุพฺพิธํ. 'मुत्तामुक्त' (फेकले जाणारे व न फेकले जाणारे), 'अमुक्त' (न फेकले जाणारे), 'पाणिमुक्त' (हाताने फेकले जाणारे) आणि 'यंतमुक्त' (यंत्राने फेकले जाणारे) असे सर्व मिळून शस्त्रे चार प्रकारची असतात. ๓๘๗. ३८७. มุตฺตามุตฺตญฺจ ยฏฺฐฺยาทิ, อมุตฺตํ ฉุริกาทิกํ; ปาณิมุตฺตํ ตุ สตฺยาทิ, ยนฺตมุตฺตํ สราทิกํ. लाठी (यठ्ठी) इत्यादी 'मुत्तामुक्त' शस्त्रे आहेत; सुरी (छुरिका) इत्यादी 'अमुक्त' शस्त्रे आहेत; भाला (सत्ती) इत्यादी 'पाणिमुक्त' शस्त्रे आहेत; आणि बाण (सर) इत्यादी 'यंतमुक्त' शस्त्रे आहेत. ๓๘๘. ३८८. อิสฺสาโส ธนุ โกทณฺฑํ, จาโป นิตฺถี สราสนํ; อโถ คุโณ ชิยา ชฺยา ถ,สโร ปตฺติ จ สายโก. 'इस्सास', 'धनु', 'कोदंड', 'चाप' आणि 'सरासन' म्हणजे धनुष्य; 'गुण', 'जिया' आणि 'ज्या' म्हणजे धनुष्याची दोरी (प्रत्यंचा); आणि 'सर' (शर), 'पत्ति' आणि 'सायक' म्हणजे बाण. ๓๘๙. ३८९. วาโณ กณฺฑ มุสุ ทฺวีสุ, ขุรปฺโป เตชนา’สนํ; ตูณีตฺถิยํ กลาโป จ, ตูโณ ตูณีร วาณธิ. 'वाण' (बाण), 'कंड' (कांड), 'उसु' (इषु - दोन्ही लिंगांत), 'खुरप्प', 'तेजन' आणि 'असन' म्हणजे बाण; 'तूणी' (स्त्री.), 'कलाप', 'तूण', 'तूणीर' आणि 'वाणधि' म्हणजे भाता (बाण ठेवण्याचा भाता). ๓๙๐. ३९०. ปกฺโข ตุ วาโช ทิทฺโธ ตุ, วิสปฺปิโต สโร ภเว; ลกฺขํ เวชฺฌํ สรพฺยญฺจ, สราภฺยาโส ตุ’ปาสนํ. 'पक्ख' (पक्ष) आणि 'वाज' म्हणजे बाणाचे पंख; 'दिद्ध' म्हणजे विषारी बाण; 'लक्ख' (लक्ष्य), 'वेज्झ' (वेध्य) आणि 'सरब्य' (शरव्य) म्हणजे नेम (लक्ष्य); आणि बाण मारण्याच्या अभ्यासाला 'उपासन' (धनुर्विद्या सराव) म्हणतात. ๓๙๑. ३९१. มณฺฑลคฺโค ตุ เนตฺตึโส, อสิ ขคฺโค จ สายโก; โกสิตฺถี ตพฺพิธาเน โถ, ถรุ ขคฺคาทิมุฏฺฐิยํ. 'मंडलग्ग', 'नेत्तिंस' (निस्त्रिंश), 'असि', 'खग्ग' (खड्ग) आणि 'सायक' म्हणजे तलवार; तलवारीच्या म्यानाला 'कोसि' (कोश - स्त्री.) म्हणतात; आणि तलवारीच्या मुठीला 'थरु' म्हणतात. ๓๙๒. ३९२. เขฏกํ ผลกํ จมฺมํ, อิลฺลี ตุ กรปาลิกา; ฉุริกา สตฺย’สิปุตฺตี, ลคุโฬ ตุ จ มุคฺคโร. 'खेटक', 'फलक' आणि 'चम्म' (चर्म) म्हणजे ढाल; 'इल्ली' म्हणजे छोटी तलवार (करपालिका); 'छुरिका', 'सत्ती' आणि 'असिपुत्ती' म्हणजे सुरी किंवा कट्यार; आणि 'लगुळ' व 'मुग्गर' (मुद्गर) म्हणजे सोटा किंवा सोटावजा सोटा (गदा). ๓๙๓. ३९३. สลฺโล นิตฺถิ สงฺกุ ปุเม, วาสี ตุ ตจฺฉนีตฺถิยํ; กุฐารี ตฺถีผรสุโส, ฏงฺโก ปาสาณทารโณ. 'सल्ल' (शल्य - नपुं.) आणि 'शंकु' (पु.) म्हणजे भाला किंवा खिळा; 'वासी' (स्त्री.) म्हणजे तासणी (तच्छनी); 'कुठारी' (स्त्री.) आणि 'फरसु' (परशू) म्हणजे कुऱ्हाड; आणि 'टंक' म्हणजे दगड फोडण्याची छिन्नी (पाषाणदारण). ๓๙๔. ३९४. กณโย ภินฺทิวาโฬ จ, จกฺกํ กุนฺโต คทา ตถา; สตฺยา’ที สตฺถเภทา ถ,โกโณ’สฺโส โกฏิ นาริยํ. 'कणय' (कणप), 'भिंदिवाळ' (भिंदिपाल), 'चक्क' (चक्र), 'कुंत' आणि 'गदा' हे शस्त्रांचे प्रकार आहेत; आणि 'कोण', 'अस्स' (अश्रु/कोन) आणि 'कोटि' (स्त्री.) म्हणजे कोपरा किंवा टोक. ๓๙๕. ३९५. นิยฺยานํ คมนํ ยาตฺรา, ปฏฺฐานญฺจ คโม คติ; จุณฺโณ ปํสุ รโช เจว, ธูลี’ตฺถี เรณุ จ ทฺวิสุ. 'निय्यान' (निर्याण), 'गमन', 'यात्रा', 'पट्ठान' (प्रस्थान), 'गम' आणि 'गती' म्हणजे जाणे (प्रयाण); 'चुण्ण' (चूर्ण), 'पंसु' (पांसु), 'रजो' (रज), 'धूली' (स्त्री.) आणि 'रेणु' (दोन्ही लिंगांत) म्हणजे धूळ. ๓๙๖. ३९६. มาคโธ [Pg.34] มธุโก วุตฺโต, วนฺที ตุ ถุติปาฐโก; เวตาฬิโก โพธกโร,จกฺกิโก ตุ จ ฆณฺฏิโก. 'मागध' आणि 'मधुक' म्हणजे भाट; 'वंदी' म्हणजे स्तुतिपाठक; 'वेताळिक' म्हणजे राजाला जागे करणारा (बोधकर); आणि 'चक्किंक' व 'घंटिक' म्हणजे घंटा वाजवणारा. ๓๙๗. ३९७. เกตุ ธโช ปฏากา จ, กทลี เกตนํ ปฺยถ; โย’หํกาโร’ญฺญมญฺญสฺส, สา’ หมหมิกา ภเว. 'केतु', 'धज' (ध्वज), 'पताका', 'कदली' आणि 'केतन' म्हणजे ध्वज (झेंडा); आणि एकमेकांमध्ये असणारी "मी आधी, मी आधी" अशी स्पर्धा किंवा अहंकार याला 'अहमहमिका' म्हणतात. ๓๙๘. ३९८. พลํ ถาโม สหํ สตฺติ, วิกฺกโม ตฺวติสูรตา; รเณ ชิตสฺส ยํ ปานํ, ชยปานนฺติ ตํ มตํ. 'बल', 'थाम' (स्थाम/शक्ती), 'सह' (सहनशक्ती), 'सत्ती' (शक्ती), 'विक्कम' (विक्रम) आणि 'अतिशूरता' म्हणजे सामर्थ्य किंवा पराक्रम; आणि युद्धात विजय मिळवल्यानंतर पिण्याच्या पेयाला 'जयपान' म्हणतात. ๓๙๙. ३९९. สงฺคาโม สมฺปหาโร จา, นิตฺถิยํ สมรํ รณํ; อาชิตฺถี อาหโว ยุทฺธ, มาโยธนญฺจ สํยุคํ. 'संग्राम', 'संपहार', 'समर' (नपुं.), 'रण' (नपुं.), 'आजि' (स्त्री.), 'आहव', 'युद्ध', 'आयोधन' आणि 'संयुग' म्हणजे युद्ध (लढाई). ๔๐๐. ४००. ภณฺฑนํ ตุ วิวาโท จ, วิคฺคโห กลห เมธคา; มุจฺฉา โมโห ถ ปสยฺโห,พลกฺกาโร หโฐ ภเว. 'भंडन', 'विवाद', 'विग्गह' (विग्रह), 'कलह' आणि 'मेधगा' म्हणजे भांडण (कलह); 'मुच्छा' (मूर्च्छा) आणि 'मोह' म्हणजे बेशुद्धी किंवा अज्ञान; आणि 'पसह्य' (प्रसह्य), 'बलात्कार' आणि 'हठ' म्हणजे बळजबरी (हट्ट). ๔๐๑. ४०१. อุปฺปาโท ภูตวิกติ, ยา สุภาสุภสูจิกา; อีติ ตฺวิตฺถี อชญฺญญฺจ, อุปสคฺโค อุปทฺทโว. शुभ किंवा अशुभ दर्शवणाऱ्या निसर्गातील विकृतीला (उत्पाताला) 'उप्पाद' (उत्पात) म्हणतात; आणि 'ईती' (स्त्री.), 'अजञ्ञ' (अजन्य), 'उपसग्ग' (उपसर्ग) आणि 'उपद्दव' (उपद्रव) म्हणजे संकट किंवा विघ्न. ๔๐๒. ४०२. นิพฺพุทฺธํ มลฺลยุทฺธมฺหิ, ชโย ตุ วิชโย ภเว; ปราชโย รเณ ภงฺโค, ปลายน มปกฺกโม. 'निब्बुद्ध' म्हणजे मल्लयुद्ध (कुस्ती); 'जय' आणि 'विजय' म्हणजे विजय; 'पराजय' आणि 'भंग' म्हणजे युद्धात झालेला पराभव; आणि 'पलायन' व 'अपक्कम' (अपक्रम) म्हणजे पळून जाणे. ๔๐๓. ४०३. มารณํ หนนํ ฆาโต, นาสนญฺจ นิสูทนํ; หึสนํ สรณํ หึสา, วโธ สสน ฆาตนํ. 'मारण', 'हनन', 'घात', 'नासन' (नाश करणे), 'निसूदन', 'हिंसन', 'सरण', 'हिंसा', 'वध' आणि 'घातन' म्हणजे मारणे किंवा हत्या करणे. ๔๐๔. ४०४. มรณํ กาลกิริยา, ปลโย มจฺจุ อจฺจโย; นิธโน นิตฺถิยํ นาโส, กาโล’นฺโต จวนํ ภเว. 'मरण', 'कालक्रिया', 'पलय' (प्रलय), 'मच्चु' (मृत्यू), 'अच्चय' (अत्यय), 'निधन' (नपुं.), 'नास' (नाश), 'काल', 'अंत' आणि 'चवन' (च्युती) म्हणजे मृत्यू. ๔๐๕. ४०५. ตีสุ เปโต ปเรโต จ,มโต ถ จิตโก จิโต; อาฬหนํ สุสานญฺจา, นิตฺถิยํ กุณโป ฉโว. 'पेत' (प्रेत), 'पारेत' (परेत) आणि 'मत' (मृत - तिन्ही लिंगांत) म्हणजे मृत व्यक्ती; 'चितक' आणि 'चित' म्हणजे चिता; 'आळहन' (आळाहन - नपुं.) आणि 'सुसान' (स्मशान - नपुं.) म्हणजे स्मशानभूमी; आणि 'कुणप' व 'छव' (शव) म्हणजे प्रेत (शव). ๔๐๖. ४०६. กพนฺโธ นิตฺถิยํ เทโห, สิโรสุญฺโญ สหกฺริโย; อถ สิวถิกา วุตฺตา, สุสานสฺมิญฺหิ อามเก. डोके नसलेल्या परंतु हालचाल करणाऱ्या शरीराला 'कबंध' (नपुं.) म्हणतात; आणि प्रेते न जाळता तशीच टाकून देण्याच्या स्मशानाला 'सिवथिका' (शीवथिका) म्हणतात. ๔๐๗. ४०७. วนฺทีตฺถิยํ กรมโร, ปาโณ ตฺว’สุ ปกาสิโต; การา ตุ พนฺธนาคารํ, การณา ตุ จ ยาตนา. 'बंदी' (स्त्री.) आणि 'करमर' म्हणजे युद्धकैदी; 'पाण' (प्राण) आणि 'असु' म्हणजे प्राण (जीव); 'कारा' म्हणजे तुरुंग (बंधनागार); आणि 'कारणा' म्हणजे यातना (छळ). อิติ ขตฺติยวคฺโค. येथे 'खत्तियवग्गो' (क्षत्रियवर्ग) समाप्त झाला. ๔๐๘. ४०८. พฺรหฺมพนฺธุ [Pg.35] ทฺวิโช วิปฺโป, พฺรหฺมา โภวาที พฺราหฺมโณ; โสตฺติโย ฉนฺทโส โส ถ,สิสฺส’ นฺเตวาสิโน ปุเม. 'ब्रह्मबंधू', 'द्विज', 'विप्प' (विप्र), 'ब्रह्मा', 'भोवादी' आणि 'ब्राह्मण' म्हणजे ब्राह्मण; 'सोत्तिय' (श्रोत्रिय) आणि 'छंदस' म्हणजे वेदाभ्यासी; आणि 'सिस्स' (शिष्य) व 'अंतेवासी' (पु.) म्हणजे शिष्य. ๔๐๙. ४०९. พฺรหฺมจารี คหฏฺโฐ จ, วนปฺปตฺโถ จ ภิกฺขุติ; ภวนฺติ จตฺตาโร เอเต, อสฺสมา ปุนฺนปุํสเก. 'ब्रह्मचारी', 'गहट्ठ' (गृहस्थ), 'वनपत्थ' (वानप्रस्थ) आणि 'भिक्खू' (भिक्षू) हे चार 'आश्रम' (पुं. आणि नपुं.) आहेत. ๔๑๐. ४१०. จรนฺตา สห สีลาที, สพฺรหฺมจาริโน มิถุ; อุปชฺฌาโย อุปชฺฌา ถา, จริโย นิสฺสยทาทิโก. एकत्र राहून शील इत्यादींचे पालन करणाऱ्यांना परस्पर 'सब्रह्मचारी' म्हणतात; 'उपज्झाय' (उपाध्याय) आणि 'उपज्झा' म्हणजे उपाध्याय (दीक्षा देणारे गुरु); आणि 'आचरिय' (आचार्य) म्हणजे निश्रय (आश्रय/मार्गदर्शन) देणारे गुरु. ๔๑๑. ४११. อุปนียา ถวา ปุพฺพํ, เวท มชฺฌาปเย ทฺวิโช; โย สงฺคํ สรหสฺสญฺจา, จริโย พฺราหฺมเณสุ โส. जो द्विज (ब्राह्मण) शिष्याचा उपनयन संस्कार करून त्याला वेदांचे अंग आणि रहस्यांसह अध्ययन करवतो, त्याला ब्राह्मणांमध्ये 'आचार्य' म्हटले जाते. ๔๑๒. ४१२. ปารมฺปริย เมติหฺยํ, อุปเทโส ตเถ’ติหา; ยาโค ตุ กตุ ยญฺโญ ถ, เวทีตฺถี ภู ปริกฺขตา. 'पारंपरिय' (परंपरा), 'इतिह्य' (ऐतिहासिक परंपरा), 'उपदेस' (उपदेश) आणि 'इतिहा' (इतिहास) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'याग', 'कतु' आणि 'यञ्ञ' (यज्ञ) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'वेदी' (यज्ञवेदी) हा स्त्रीलिंगी शब्द असून तो 'भू-परिक्खता' (संस्कारित केलेली भूमी) या अर्थाचा वाचक आहे. ๔๑๓. ४१३. อสฺสเมโธ จ ปุริส, เมโธ เจว นิรคฺคโฬ; สมฺมาปาโส วาชเปยฺย, มิติ ยาคา มหา อิเม. 'अस्समेध' (अश्वमेध), 'पुरिसमेध' (पुरुषमेध), 'निरग्गळ', 'सम्मापास' आणि 'वाजपेय' हे पाच मोठे याग (महायज्ञ) आहेत. ๔๑๔. ४१४. อิตฺวิโช ยาชโก จาถ,สภฺโย สามาชิโก ปฺยถ; ปริสา สภา สมชฺชา จ, ตถา สมิติ สํสโท. 'इत्विज' आणि 'याजक' हे समानार्थी शब्द आहेत. 'सभ्य' आणि 'सामाजीक' (सभेचे सदस्य) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'परिसा' (परिषद), 'सभा', 'समज्जा' (सभा/मेळावा), 'समिती' आणि 'संसद्' हे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๑๕. ४१५. จตสฺโส ปริสา ภิกฺขุ, ภิกฺขุนี จ อุปาสกา; อุปาสิกาโยติ อิมา, ถวา ฏฺฐ ปริสา สิยุํ. भिक्खू, भिक्खुनी, उपासक आणि उपासिका या चार 'परिसा' (चार परिषदा/चतुर्विध संघ) आहेत. तसेच आठ प्रकारच्या परिषदा (अट्ठ परिसा) देखील आहेत. ๔๑๖. ४१६. ตาวตึส,ทฺวิช,กฺขตฺต,มาร,คฺคหปติสฺส จ; สมณานํ วสา จาตุ, มหาราชิก, พฺรหฺมุนํ. (आठ परिषदा याप्रमाणे आहेत:) खत्तिय (क्षत्रिय), द्विज (ब्राह्मण), गहपति (गृहपती), समण (श्रमण), चातुमहाराजिक, तावतिंस, मार आणि ब्रह्मदेव यांच्या परिषदा होत. ๔๑๗. ४१७. คายตฺติปฺปมุขํ ฉนฺทํ, จตุวีส’กฺขรํ ตุ ยํ; เวทาน มาทิภูตํ สา, สาวิตฺตี ติปทํ สิยา. 'गायत्री' प्रमुख असलेले छंद, जे चोवीस अक्षरांचे असते आणि वेदांचे मूळ मानले जाते, त्याला तीन पदांचे 'सावित्ती' (सावित्री) असे म्हणतात. ๔๑๘. ४१८. หพฺยปาเก จรุ มโต, สุชา ตุ โหมทพฺพิยํ; ปรมนฺนํ ตุ ปายาโส, หพฺยํ ตุ หวิ กถฺยเต. यज्ञाच्या अन्नाला 'चरु' म्हणतात. 'सुजा' म्हणजे होम करण्याची पळी (होमदब्बी). 'परमन्ना' म्हणजे 'पायास' (खीर) आणि यज्ञाच्या द्रव्याला 'हब्य' किंवा 'हवि' असे म्हणतात. ๔๑๙. ४१९. ยูโป ถูณายํ นิมฺมนฺตฺย, ทารุมฺหิ ตฺว’รณี ทฺวิสุ; คาหปฺปจฺจา’หวนีโย, ทกฺขิณคฺคิ ตโย’ คฺคโย. यज्ञाच्या खांबाला 'यूप' म्हणतात. अग्नी प्रज्वलित करण्याच्या लाकडाला 'अरणी' म्हणतात. 'गाहपच्च' (गार्हपत्य), 'आहवनीय' आणि 'दक्खिणग्गि' (दक्षिणाग्नी) हे तीन प्रकारचे अग्नी आहेत. ๔๒๐. ४२०. จาโค วิสฺสชฺชนํ ทานํ, โวสฺสคฺโค จาปเทสนํ; วิสฺสาณนํ วิตรณํ, วิหายิตา ปวชฺชนํ. 'चाग' (त्याग), 'विस्सज्जन', 'दान', 'वोस्सग्ग' (उत्सर्ग/त्याग), 'अपदेसन', 'विस्साणन', 'वितरण', 'विहायिता' आणि 'पवज्जन' हे सर्व दानाचे (त्यागाचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๔๒๑. ४२१. ปญฺจ [Pg.36] มหาปริจฺจาโค, วุตฺโต เสฏฺฐ, ธนสฺส จ; วเสน ปุตฺต ทารานํ, รชฺชสฺส’ งฺคาน เมว จ. श्रेष्ठ पुरुषांनी केलेले पाच महान त्याग (पंचमहापरित्याग) हे धन, पुत्र, पत्नी, राज्य आणि स्वतःचे अंग (शरीराचे अवयव/प्राण) यांच्या त्यागाच्या रूपाने सांगितले आहेत. ๔๒๒. ४२२. อนฺนํ ปานํ ฆรํ วตฺถํ, ยานํ มาลา วิเลปนํ; คนฺโธ เสยฺยา ปทีเปยฺยํ, ทานวตฺถู สิยุํ ทส. अन्न, पान (पेय), घर (आवास), वत्थ (वस्त्र), यान (वाहन), माला (पुष्पहार), विलेपन (उटी/चंदन), गंध (सुवासिक द्रव्य), सेय्या (शय्या/बिछाना) आणि पदीपैय्य (दिवा/प्रकाश साधने) या दहा दानवस्तू (दानाचे पदार्थ) आहेत. ๔๒๓. ४२३. มตตฺถํ ตทเห ทานํ, ตีสฺเวต มุทฺธเทหิกํ; ปิตุทานํ ตุ นิวาโป, สทฺธํ ตุ ตํว สาตฺถโต. मृत व्यक्तीच्या उद्देशाने त्या दिवशी दिले जाणारे दान 'उद्धदेहिक' (और्ध्वदैहिक) कहलाते. पितरांना दिले जाणारे दान 'निवाप' (पिंडदान/तर्पण) आहे आणि श्रद्धेने दिले जाणारे दान 'सद्ध' (श्राद्ध) म्हणून ओळखले जाते. ๔๒๔. ४२४. ปุเม อติถิ อาคนฺตุ, ปาหุนา เวสิกา ปฺยถ; อญฺญตฺถ คนฺตุ มิจฺฉนฺโต, คมิโก ถา คฺฆ มคฺฆิยํ. 'अतिथी', 'आगंतू', 'पाहुणा' आणि 'वेसिक' हे अतिथीचे समानार्थी पुल्लिंगी शब्द आहेत. दुसऱ्या ठिकाणी जाऊ इच्छिणाऱ्याला 'गमिक' (प्रवासी) म्हणतात. अतिथीच्या पूजेसाठी दिले जाणारे द्रव्य 'अग्घ' किंवा 'अग्घिय' (अर्घ्य) कहलाते. ๔๒๕. ४२५. ปชฺชํ ปาโททกาโท ถ, สตฺตา’คนฺตฺวาทโย ติสุ; อปจิตฺย’จฺจนา ปูชา, ปหาโร พลิ มานนา. पाया धुण्याच्या पाण्याला 'पज्ज' (पाद्य) म्हणतात. 'अपचिती', 'अच्चना' (अर्चना), 'पूजा', 'पहार' (उपहार), 'बली' आणि 'मानना' (सन्मान) हे पूजेचे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๒๖. ४२६. นมสฺสา ตุ นมกฺกาโร, วนฺทนา จาภิวาทนํ; ปตฺถนา ปณิธานญฺจ, ปุริเส ปณิธีริโต. 'नमस्सा', 'नमक्कार' (नमस्कार), 'वंदना' आणि 'अभिवंदन' हे अभिवादनाचे समानार्थी शब्द आहेत. 'पत्थना' (प्रार्थना), 'पणिधान' आणि पुल्लिंगी 'पणिधी' हे संकल्पाचे (आकांक्षेचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๔๒๗. ४२७. อชฺเฌสนา ตุ สกฺการ, ปุพฺพงฺคมนิโยชนํ; आदरातिथ्यपूर्वक (सत्कारपूर्वक) केलेल्या विनंतीला किंवा नियोजनाला 'अज्झेसना' (अध्येषणा/आदरपूर्वक आमंत्रण) म्हणतात. ๔๒๘. ४२८. ปริเยสนา นฺเวสนา, ปริเยฏฺฐิ คเวสนา; อุปาสนํ ตุ สุสฺสูสา, สา ปาริจริยา ภเว. 'परियेसना' (शोध), 'अन्वेसना', 'परियेट्ठी' आणि 'गवेसना' हे शोधाचे समानार्थी शब्द आहेत. 'उपासना', 'सुस्सूसा' (शुश्रूषा) आणि 'पारिचरिया' (परिचर्या/सेवा) हे सेवेचे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๒๙. ४२९. โมน มภาสนํ ตุณฺหี, ภาโว ถ ปฏิปาฏิ สา; อนุกฺกโม ปริยาโย, อนุปุพฺพฺย’ปุเม กโม. 'मोन' (मौन), 'अभासन' (न बोलणे) आणि 'तुण्हीभाव' (शांत राहणे) हे मौनाचे समानार्थी शब्द आहेत. 'पटिपाटि' (अनुक्रम), 'अनुक्कम' (अनुक्रम), 'परियाय' (पर्याय/क्रम), 'अनुपुब्ब्य' (आनुपूर्व्य) आणि पुल्लिंगी 'कम' (क्रम) हे क्रमाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๓๐. ४३०. ตโป จ สํยโม สีลํ, นิยโม ตุ วตญฺจ วา; วีติกฺกโม’ ชฺฌจาโร ถ, วิเวโก ปุถุคตฺตตา. 'तप', 'संयम', 'सील' (शील), 'नियम' आणि 'वत' (व्रत) हे नैतिक आचरणाचे वाचक आहेत. 'वीतिक्कम' (अतिशयोक्ती/उल्लंघन) आणि 'अज्झाचार' (अतिचार/उल्लंघन) हे उल्लंघनाचे समानार्थी शब्द आहेत. 'विवेको' (विवेक/एकांत) आणि 'पुथुगत्तता' (एकाकीपणा) हे एकांताचे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๓๑. ४३१. ขุทฺทานุขุทฺทกํ อาภิ, สมาจาริก มุจฺจเต; อาทิพฺรหฺมจริยํ ตุ, ตทญฺญํ สีล มีริตํ. लहान-सहान नियमांना 'आभिसमाचारिक' (खुद्दानुखुद्दम - क्षुद्र आणि अनुक्षुद्र शील) म्हटले जाते, तर त्याव्यतिरिक्त इतर मुख्य शीलाला 'आदिब्रह्मचरियक' (मूलभूत शील) म्हटले जाते. ๔๓๒. ४३२. โย ปาเปหิ อุปาวตฺโต, วาโส สทฺธึ คุเณหิ โส; อุปวาโสติ วิญฺเญยฺโย, สพฺพโภควิวชฺชิโต. जो सर्व प्रकारच्या भोगांचा त्याग करून, पापांपासून दूर राहतो आणि गुणांसह (सद्गुणांमध्ये) वास करतो, त्याला 'उपवास' (उपवोस) असे समजावे. ๔๓๓. ४३३. ตปสฺสี ภิกฺขุ สมโณ, ปพฺพชิโต ตโปธโน; วาจํยโม ตุ มุนิ จ, ตาปโส ตุ อิสี ริโต. 'तपस्सी' (तपस्वी), 'भिक्खू', 'समण' (श्रमण), 'पब्बजित' (प्रव्रजित) आणि 'तपोधन' हे समानार्थी शब्द आहेत. 'वाचंयम' (मौन बाळगणारा) आणि 'मुनी' हे समानार्थी शब्द आहेत. 'तापस' आणि 'इसी' (ऋषी) हे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๓๔. ४३४. เยสํยตินฺทฺริยคณา, ยตโย วสิโน จ เต; สาริปุตฺโต’ปติสฺโส ตุ, ธมฺมเสนาปตี ริโต. ज्यांचे इंद्रिय समूह संयमित आहेत त्यांना 'यती' आणि 'वसी' (इंद्रियविजेते) म्हणतात. 'सारिपुत्त', 'उपतिस्स' आणि 'धम्मसेनापती' हे (आयुष्यमान सारिपुत्तांचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๔๓๕. ४३५. โกลิโต โมคฺคลฺลาโน ถ,อริโย ธิคโต สิยา; โสตาปนฺนาทิกา เสขา, นริโย ตุ ปุถุชฺชโน. 'कोलित' आणि 'मोग्गल्लान' हे (आयुष्यमान महामोग्गल्लानांचे) समानार्थी शब्द आहेत. ज्याने आर्य अष्टांगिक मार्ग प्राप्त केला आहे त्याला 'आर्य' म्हणतात. सोतापन्न (स्रोतापन्न) इत्यादींना 'सेख' (शैक्ष) म्हणतात आणि जे आर्य नाहीत त्यांना 'पुथुज्जन' (पृथग्जन/सामान्य लोक) म्हणतात. ๔๓๖. ४३६. อญฺญา [Pg.37] ตุ อรหตฺตญฺจ, ถูโป ตุ เจติยํ ภเว; ธมฺมภณฺฑาคาริโก จ, อานนฺโท ทฺเว สมา ถ จ. 'अञ्ञा' (सर्वोच्च ज्ञान) आणि 'अरहत्त' (अर्हत्त्व) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'थूप' (स्तूप) आणि 'चेतिय' (चैत्य) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'धम्मभण्डागारिक' (धम्मकोशाध्यक्ष) आणि 'आनंद' हे दोन्ही समानार्थी शब्द आहेत. ๔๓๗. ४३७. วิสาขา มิคารมาตา, สุทตฺโต’ นาถปิณฺฑิโก; 'विशाखा' आणि 'मिगारमाता' हे समानार्थी शब्द आहेत. 'सुदत्त' आणि 'अनाथपिंडिक' हे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๓๘. ४३८. ภิกฺขุปิ สามเณโร จ, สิกฺขมานา จ ภิกฺขุนี; สามเณรีติ กถิตา, ปญฺเจเต สหธมฺมิกา. भिक्खू, सामणेर, सिक्खमाना, भिक्खुनी आणि सामणेरी या पाचांना 'सहधम्मिक' (सधर्मी/एकत्र धम्माचरण करणारे) म्हटले जाते. ๔๓๙. ४३९. ปตฺโต ติจีวรํ กาย, พนฺธนํ วาสิ สูจิ จ; ปริสฺสาวน มิจฺเจเต, ปริกฺขารา’ฏฺฐ ภาสิตา. पत्त (भिक्षापात्र), तिचीवर (तीन वस्त्रे), कायबंधन (कमरपट्टा), वासी (वस्तरा), सुची (सुई) आणि परिस्सावन (पाणी गाळण्याचे वस्त्र) या आठ वस्तूंना 'अट्ठ परिक्खार' (अष्टपरिष्कार/आठ उपभोग्य वस्तू) म्हटले जाते. ๔๔๐. ४४०. สามเณโร จ สมณุ, ทฺเทโส จาถ ทิคมฺพโร; อเจฬโก นิคณฺโฐ จ, ชฏิโล ตุ ชฏาธโร. 'सामणेर' आणि 'समणुद्देस' हे समानार्थी शब्द आहेत. 'दिगंबर', 'अचेलक' आणि 'निगण्ठ' (निर्ग्रंथ) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'जटिल' आणि 'जटाधर' हे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๔๑. ४४१. กุฏีสกาทิกา จตุ, ตฺตึส ทฺวาสฏฺฐิ ทิฏฺฐิโย; อิติ ฉนฺนวุติ เอเต, ปาสณฺฑา สมฺปกาสิตา. कुटीसक इत्यादी चौतीस (३४) आणि बासष्ट (६२) चुकीच्या दृष्टी (मिथ्या दृष्टी), असे एकूण शहाण्णव (९६) पाखंडी (विधर्मी पंथ) सांगितले आहेत. ๔๔๒. ४४२. ปวิตฺโต ปยโต ปูโต, จมฺมํ ตุ อชินํ ปฺยถ; ทนฺตโปโณ ทนฺตกฏฺฐํ, วกฺกโล วา ติรีฏกํ. 'पवित्त' (पवित्र), 'पयत' आणि 'पूत' हे शुद्धतेचे समानार्थी शब्द आहेत. 'चम्म' (चामडे) आणि 'अजिन' (मृगचर्म) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'दंतपोण' आणि 'दंतकट्ठ' (दातून/दात घासण्याचे लाकूड) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'वक्कल' (वल्कले) आणि 'तिरीटक' (झाडाच्या सालीचे वस्त्र) हे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๔๓. ४४३. ปตฺโต ปาติตฺถิยํนิตฺถี, กมณฺฑลุ ตุ กุณฺฑิกา; อถาลมฺพณทณฺฑสฺมึ, กตฺตรยฏฺฐิ นาริยํ. 'पत्त' (भिक्षापात्र) हा पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी शब्द आहे, तर 'पाती' हा स्त्रीलिंगी शब्द आहे. 'कमंडलू' आणि 'कुंडिका' हे समानार्थी शब्द आहेत. आधारासाठी वापरल्या जाणाऱ्या काठीला (आलंबनदंड) स्त्रीलिंगात 'कत्तरयट्ठी' (हातकाठी) म्हणतात. ๔๔๔. ४४४. ยํ เทหสาธนาเปกฺขํ, นิจฺจํ กมฺมมยํ ยโม; อาคนฺตุสาธนํ กมฺมํ, อนิจฺจํ นิยโม ภเว. शरीराच्या रक्षणासाठी आवश्यक असणारे जे नित्य कर्म आहे, त्याला 'यम' म्हणतात. बाह्य किंवा आगंतुक साधनांसाठी केले जाणारे जे अनित्य कर्म आहे, त्याला 'नियम' म्हणतात. อิติ พฺราหฺมณวคฺโค. अशा प्रकारे ब्राह्मणवग्गो (ब्राह्मण वर्ग) समाप्त झाला. ๔๔๕. ४४५. เวสฺโส จ เวสิยาโน ถ, ชีวนํ วุตฺติ ชีวิกา; อาชีโว วตฺตนํ จาถ, กสิกมฺมํ กสิตฺถิยํ. 'वेस्स' (वैश्य) आणि 'वेसियान' हे समानार्थी शब्द आहेत. 'जीवन', 'वुत्ति' (वृत्ती), 'जीविका', 'आजीव' आणि 'वत्तन' (वर्तन/उपजीविका) हे उपजीविकेचे समानार्थी शब्द आहेत. शेतीच्या कामाला 'कसिकम्म' (कृषिकर्म) म्हणतात आणि स्त्रीलिंगात त्याला 'कसि' (कृषी) म्हणतात. ๔๔๖. ४४६. วาณิชฺชญฺจ วณิชฺชา ถ, โครกฺขา ปสุปาลนํ; เวสฺสสฺส วุตฺติโย ติสฺโส, คหฏฺฐา’คาริกา คิหิ. 'वाणिज्ज' आणि 'वाणिज्जा' (व्यापार) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'गोरक्खा' (गोरक्षण) आणि 'पसुपालन' (पशुपालन) हे समानार्थी शब्द आहेत. या तिन्ही वैश्यांच्या उपजीविकेच्या पद्धती आहेत. 'गहट्ठ' (गृहस्थ), 'अगारिक' आणि 'गिही' (गृही) हे गृहस्थाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๔๔๗. ४४७. เขตฺตาชีโว กสฺสโก ถ, เขตฺตํ เกทาร มุจฺจเต; เลฑฺฑุ’ตฺโต มตฺติกาขณฺโฑ, ขณิตฺติ’ตฺถฺย’วทารณํ. 'खेत्ताजीव' (शेतीवर जगणारा) आणि 'कस्सक' (शेतकरी) हे समानार्थी शब्द आहेत. 'खेत्त' (शेत) आणि 'केदार' हे समानार्थी शब्द आहेत. मातीच्या ढेकळाला 'लेड्डु' म्हणतात. खणण्याच्या साधनांना (कुदळ/फावडे) स्त्रीलिंगात 'खणित्ती' किंवा 'अवदारण' म्हणतात. ๔๔๘. ४४८. ทาตฺตํ ลวิตฺต มสิตํ, ปโตโท ตุตฺต ปาชนํ; โยตฺตํ ตุ รชฺชุ รสฺมิตฺถี, ผาโล ตุ กสโก ภเว. 'दात्त', 'लवित्त' आणि 'असित' हे विळ्याचे समानार्थी शब्द आहेत. 'पतोद', 'तुत्त' आणि 'पाजन' हे बैलांना हाकण्याच्या आरणीचे (चाबूक/आर) समानार्थी शब्द आहेत. 'योत्त' म्हणजे दोरी (रज्जू/रश्मी - स्त्रीलिंगी). 'फाल' म्हणजे नांगराचा फाळ (कसक). ๔๔๙. ४४९. นงฺคลญฺจ หลํ สีโร, อีสา นงฺคลทณฺฑโก; สมฺมา ตุ ยุคกีลสฺมึ, สีตา ตุ หลปทฺธติ. 'नंगल' (नांगर), 'हल' आणि 'सीर' हे नांगराचे समानार्थी शब्द आहेत. नांगराच्या दांड्याला 'ईसा' म्हणतात. जुवाच्या मेढीला (खिळ्याला) 'सम्मा' म्हणतात आणि नांगराने पडलेल्या रेषेला (तासाला) 'सीता' म्हणतात. ๔๕๐. ४५०. มุคฺคาทิเก [Pg.38] ปรณฺณญฺจ, ปุพฺพณฺณํ สาลิอาทิเก; สาลิ วีหิ จ กุทฺรูโส, โคธุโม วรโก ยโว; กงฺคูติ สตฺต ธญฺญานิ, นีวาราที ตุ ตพฺภิทา. मूग इत्यादी कडधान्यांना 'परण्ण' (परान्न/कडधान्य) म्हणतात आणि शाली (तांदूळ) इत्यादी मुख्य धान्यांना 'पुब्बण्ण' (पूर्वान्न) म्हणतात. शाली, वीही (धान), कुद्रूस (कोद्रू), गोधूम (गहू), वरक, यव (जव) आणि कंगू (राळा) ही सात प्रकारची धान्ये (सत्त धञ्ञानि) आहेत. 'नीवार' (रानटी तांदूळ) इत्यादी त्यांचेच प्रकार आहेत. ๔๕๑. ४५१. จณโก จ กฬาโย ถ,สิทฺธตฺโถ สาสโป ภเว. हरभरा आणि वाटाणा, तसेच पांढरी मोहरी आणि मोहरी (अशी नावे आहेत). ๔๕๒. ४५२. อถ กงฺคุ ปิยงฺคุ’ตฺถี, อุมฺมา ตุ อตสี ภเว; กิฏฺฐญฺจ สสฺสํ ธญฺญญฺจ, วีหิ ถมฺพกรี ริโต. राळा आणि प्रियंगू, तसेच जवस (अळशी); पीक, सस्य आणि धान्य; आणि भाताला 'वीहि' किंवा 'थंबकरी' म्हणतात. ๔๕๓. ४५३. กณฺโฑ ตุ นาฬ มถ โส, ปลาลํ นิตฺถิ นิปฺผโล; ภุสํ กลิงฺคโร จาถ, ถุโส ธญฺญตฺตเจ ถ จ. धान्याचा दांडा किंवा नळ; पेंढा (ज्याला निष्फळ म्हणतात); भुसा आणि कलिंघर; आणि धान्याचे टरफल म्हणजेच तूस होय. ๔๕๔. ४५४. เสตฏฺฏิกา สสฺสโรโค,กโณ ตุ กุณฺฑโก ภเว; ขโล จ ธญฺญกรณํ, ถมฺโพ คุมฺโพ ติณาทินํ. 'सेतट्टिका' म्हणजे पिकाचा रोग (तांबेरा); 'कण' म्हणजे कोंडा; 'खळ' म्हणजे धान्य मळण्याची जागा; आणि गवत इत्यादींच्या समूहाला 'थंब' किंवा 'गुम्ब' (झुडूप) म्हणतात. ๔๕๕. ४५५. อโยคฺโค มุสโล นิตฺถี, กุลฺโล สุปฺป มนิตฺถิยํ; อโถ’ทฺธนญฺจ จุลฺลิ’ตฺถี, กิลญฺโช ตุ กโฏ ภเว. मुसळ; सूप; चूल; आणि चटई (यांची ही नावे आहेत). ๔๕๖. ४५६. กุมฺภี’ตฺถี ปิฐโร กุณฺฑํ, ขโฬปฺยุ’กฺขลิ ถาลฺยุ’ขา; โกลมฺโพ จาถ มณิกํ, ภาณโก จ อรญฺชโร. मडके, कुंडी, उखळ, थाळी, पातेले; आणि रांजण, मोठा माठ, भांडे व डेरा (यांची ही नावे आहेत). ๔๕๗. ४५७. ฆโฏ ทฺวีสุ กุโฏ นิตฺถี, กุมฺโภ กลส, วารกา; กํโส ภุญฺชนปตฺโต ถา, มตฺตํ ปตฺโต จ ภาชนํ. घडा, कुंभ, कलश, तांब्या; जेवणाचे भांडे (कांस्यपात्र); आणि पात्र किंवा भांडे (अशी यांची नावे आहेत). ๔๕๘. ४५८. อณฺฑุปกํ จุมฺพฏกํ, สราโว ตุ จ มลฺลโก; ปุเม กฏจฺฉุทพฺพิ’ตฺถี, กุสูโล โกฏฺฐ มุจฺจเต. चुंबळ; परळ किंवा वाटी; पळी किंवा डाव; आणि कोठी किंवा कणगी (असे म्हटले जाते). ๔๕๙. ४५९. สาโก อนิตฺถิยํ ฑาโก, สิงฺคีเวรํตุ อทฺทกํ; มโหสธํ ตุ ตํ สุกฺขํ, มริจํ ตุ จ โกลกํ. भाजी; आले; सुंठ (वाळलेले आले); आणि मिरी (अशी यांची नावे आहेत). ๔๖๐. ४६०. โสวีรํ กญฺชิยํ วุตฺตํ, อารนาฬํ ถุโสทกํ; ธญฺญมฺพิลํ พิฬงฺโค ถ, ลวณํ โลณ มุจฺจเต. कांजी (ज्याला सोवीर, आरनाळ, थुसोदक, धान्याम्बल आणि बिळंग म्हणतात); आणि मिठाला 'लवण' किंवा 'लोण' म्हटले जाते. ๔๖๑. ४६१. สามุทฺทํ สินฺธโว นิตฺถี, กาฬโลณํ ตุ อุพฺภิทํ; พิฬกํ เจติ ปญฺเจเต, ปเภทา ลวณสฺส หิ. समुद्राचे मीठ, सैंधव मीठ, काळे मीठ, उद्विद मीठ आणि बिड मीठ; हे मिठाचे पाच प्रकार आहेत. ๔๖๒. ४६२. คุโฬ จ ผาณิตํ ขณฺโฑ, มจฺฉณฺฑี สกฺขรา อิติ; อิเม อุจฺฉุวิการา ถ, คุฬสฺมึ วิสกณฺฏกํ. गूळ, काकवी, खांड, साखर आणि खडीसाखर; हे उसाचे विकार (उसापासून बनवलेले पदार्थ) आहेत; आणि गुळातील मळीला 'विषकंटक' म्हणतात. ๔๖๓. ४६३. ลาชา [Pg.39] สิยา’กฺขตํ จาถ, ธานา ภฏฺฐยเว ภเว; อพทฺธสตฺตุ มนฺโถ จ, ปูปา’ ปูปา ตุ ปิฏฺฐโก. लाह्या (अक्षत); भाजलेले यव (धाणा); सातूचे पीठ (मंथ); आणि पिठाचे पदार्थ किंवा अपूप (अनरसा/पोळी) (अशी यांची नावे आहेत). ๔๖๔. ४६४. ภตฺตกาโร สูปกาโร, สูโท อาฬาริโก ตถา; โอทนิโก จ รสโก, สูโป ตุ พฺยญฺชนํ ภเว. आचारी, स्वयंपाकी, रसोइया; आणि वरण किंवा व्यंजने (अशी यांची नावे आहेत). ๔๖๕. ४६५. โอทโน วา กุรํ ภตฺตํ, ภิกฺขา จา’นฺน มถา สนํ; อาหาโร โภชนํ ฆาโส,ตรลํ ยาคุ นาริยํ. भात; भिक्षा, अन्न, भोजन, आहार, घास; आणि पेजेला 'तरल' किंवा 'यागू' म्हणतात. ๔๖๖. ४६६. ขชฺชํ ตุ โภชฺช เลยฺยานิ, เปยฺยนฺติ จตุธา’สนํ; นิสฺสาโว จ ตถา’จาโม,อาโลโป กพโฬ ภเว. खाद्य, भोज्य, लेह्य आणि पेय हे अन्नाचे चार प्रकार आहेत; भाताची पेज (ओसावण); आणि घास किंवा कवळ (अशी यांची नावे आहेत). ๔๖๗. ४६७. มณฺโฑ นิตฺถีรสคฺคสฺมึ, วิฆาโส ภุตฺตเสสเก; วิฆาสาโท จ ทมโก, ปิปาสา ตุ จ ตสฺสนํ. रसाचा उत्तम भाग (मण्ड); उरलेले अन्न (विघास); उरलेले अन्न खाणारा; आणि तहान (तस्सन) (अशी यांची नावे आहेत). ๔๖๘. ४६८. ขุทฺทา ชิฆจฺฉา, มํสสฺส, ปฏิจฺฉาทนิยํ รโส; อุทฺเรโก เจว อุคฺคาโร, โสหิจฺจํ ติตฺติ ตปฺปนํ. भूक; मांसाचा रस; ढेकर; आणि तृप्ती किंवा समाधान (अशी यांची नावे आहेत). ๔๖๙. ४६९. กามํ ตฺวิฏฺฐํ นิกามญฺจ, ปริยตฺตํ ยถจฺฉิตํ; กยวิกฺกยิโก สตฺถ,วาหา’ ปณิก วาณิชา. यथेच्छ, इच्छेनुसार, पुरेसे; आणि खरेदी-विक्री करणारा, सार्थवाह, दुकानदार किंवा व्यापारी (अशी यांची नावे आहेत). ๔๗๐. ४७०. วิกฺกยิโก ตุ วิกฺเกตา,กยิโก ตุ จ กายิโก; อุตฺตมณฺโณ จ ธนิโก, ธมณฺโณ ตุ อิณายิโก. विक्रेता; खरेदीदार; सावकार (धनको); आणि कर्जदार (ऋणको) (असे म्हटले जाते). ๔๗๑. ४७१. อุทฺธาโร ตุ อิณํ วุตฺตํ, มูลํ ตุ ปาภตํ ภเว; สจฺจาปนํ สจฺจํกาโร, วิกฺเกยฺยํ ปณิยฺยํ ติสุ. कर्ज; भांडवल किंवा मूळ किंमत; इसार (बयाणा); आणि विकण्यायोग्य वस्तू (अशी यांची नावे आहेत). ๔๗๒. ४७२. ปฏิทานํ ปริวตฺโต, นฺยาโส ตู’ปนิธี ริโต; अदलाबदल किंवा विनिमय; आणि ठेव किंवा अमानत (असे म्हटले जाते). ๔๗๓. ४७३. อฏฺฐารสนฺตา สงฺขฺเยยฺเย, สงฺขฺยา เอกาทโย ติสุ; สงฺขฺยาเน ตุ จ สงฺขฺเยยฺเย, เอกตฺเต วีสตาทโย; วคฺคเภเท พหุตฺเตปิ, ตา อานวุติ นาริยํ. एक ते अठरा पर्यंतच्या संख्या तिन्ही लिंगांत विशेषण म्हणून वापरल्या जातात; तर वीस इत्यादी संख्या एकवचनात आणि स्त्रीलिंगात (नव्वदपर्यंत) वापरल्या जातात. ๔๗๔. ४७४. สตํ สหสฺสํ นิยุตํ, ลกฺขํ โกฏิ ปโกฏิโย; โกฏิปโกฏิ นหุตํ, ตถา นินฺนหุตมฺปิ จ. शंभर, हजार, नियुत, लाख, कोटी, पकोटी, कोटीपकोटी, नहुत आणि निन्नहुत (या संख्या आहेत). ๔๗๕. ४७५. อกฺโขภนีตฺถิยํ [Pg.40] พินฺทุ, อพฺพุทญฺจ นิรพฺพุทํ; อหหํ อพพํ เจวา, ฏฏํ โสคนฺธิ กุปฺปลํ. अक्षोभिणी, बिंदू, अब्बुद, निरब्बुद, अहह, अबब, अटट, सोगंधिक आणि उप्पल (या संख्या आहेत). ๔๗๖. ४७६. กุมุทํ ปุณฺฑรีกญฺจ, ปทุมํ กถานมฺปิ จ; มหากถานา’สงฺขฺเยยฺยา, นิ’จฺเจตาสุ สตาทิ จ. कुमुद, पुंडरीक, पदुम, कथान, महाकथान आणि असंख्येय (या संख्या आहेत). ๔๗๗. ४७७. โกฏฺยาทิกํ ทสคุณํ, สตลกฺขคุณํ กมา; จตุตฺโถ’ฑฺเฒน อฑฺฒุฑฺโฒ,ตติโย ฑฺฒติโย ตถา. कोटी इत्यादी संख्या अनुक्रमे दहा पटीने वाढतात; साडेतीन; आणि अडीच (असे म्हटले जाते). ๔๗๘. ४७८. อฑฺฒเตยฺโย ทิยฑฺโฒ ตุ,ทิวฑฺโฒ ทุติโย ภเว; ตุลา, ปตฺถ, งฺคุลิ, วสา, ติธา มาน มโถ สิยา. अडीच; दीड; आणि वजन (तुला), माप (प्रस्थ) व लांबी (अंगुल) हे मापनाचे तीन प्रकार आहेत. ๔๗๙. ४७९. จตฺตาโร วิหโย คุญฺชา,ทฺเว คุญฺชา มาสโก ภเว; ทฺเว อกฺขา มาสกา ปญฺจ, กฺขานํ ธรณมฏฺฐกํ. चार भाताचे दाणे म्हणजे एक गुंज; दोन गुंजा म्हणजे एक मासा; पाच मासे म्हणजे दोन अक्ष; आणि आठ अक्ष म्हणजे एक धरण होय. ๔๘๐. ४८०. สุวณฺโณ ปญฺจธรณํ, นิกฺขํ ตฺวนิตฺถิ ปญฺจ เต; ปาโท ภาเค จตุตฺเถ ถ, ธรณานิ ปลํ ทส. पाच धरण म्हणजे एक सुवर्ण; पाच सुवर्ण म्हणजे एक निष्क; चौथा भाग म्हणजे पाद; आणि दहा धरण म्हणजे एक पल होय. ๔๘๑. ४८१. ตุลา ปลสตํ จาถ, ภาโร วีสติ ตา ตุลา; อโถ กหาปโณ นิตฺถี, กถฺยเต กริสาปโณ. शंभर पल म्हणजे एक तुला; वीस तुला म्हणजे एक भार; आणि कार्षापण (नाणे) याला 'कहापण' किंवा 'करिसापण' म्हणतात. ๔๘๒. ४८२. กุฑุโว ปสโต เอโก,ปตฺโถ เต จตุโร สิยุํ; อาฬฺหโก จตุโร ปตฺถา, โทณํ วาจตุรา’ฬฺหกํ. एक कुडव म्हणजे एक पसा; चार कुडव म्हणजे एक प्रस्थ; चार प्रस्थ म्हणजे एक आढक; आणि चार आढक म्हणजे एक द्रोण होय. ๔๘๓. ४८३. มานิกา จตุโร โทณา, ขารีตฺถี จตุมานิกา; ขาริโย วีส วาโห ถ,สิยา กุมฺโภ ทสมฺพณํ. चार द्रोण म्हणजे एक मानिका; चार मानिका म्हणजे एक खारी; वीस खारी म्हणजे एक वाह; आणि दहा अंबण म्हणजे एक कुंभ होय. ๔๘๔. ४८४. อาฬฺหโก นิตฺถิยํ ตุมฺโภ, ปตฺโถตุ นาฬิ นาริยํ; วาโห ตุ สกโฏ เจกา,ทส โทณา ตุ อมฺพณํ. आढकाला 'तुंभ' आणि प्रस्थाला 'नाळी' म्हणतात; वाह म्हणजे एक गाडा; आणि दहा द्रोण म्हणजे एक अंबण होय. ๔๘๕. ४८५. ปฏิวีโส จ โกฏฺฐาโส,อํโส ภาโค ธนํ ตุ โส; ทพฺพํ วิตฺตํ สาปเตยฺยํ, วสฺว’ตฺโถ วิภโว ภเว. हिस्सा, भाग किंवा वाटा; आणि धन, द्रव्य, वित्त, संपत्ती, वैभव (अशी यांची नावे आहेत). ๔๘๖. ४८६. โกโส [Pg.41] หิรญฺญญฺจ กตา, กตํ กญฺจน, รูปิยํ; กุปฺปํ ตทญฺญํ ตมฺพาทิ, รูปิยํ ทฺวย มาหตํ. खजिना; घडवलेले व न घडवलेले सोने; चांदी; तांबे इत्यादी इतर धातू; आणि मुद्रांकित व अमुद्रांकित चांदी (अशी यांची नावे आहेत). ๔๘๗. ४८७. สุวณฺณํ กนกํ ชาต, รูปํ โสณฺณญฺจ กญฺจนํ; สตฺถุวณฺโณ หรี กมฺพุ, จารุ เหมญฺจ หาฏกํ. सुवर्ण, कनक, जातरूप, सोन्या, कांचन, सत्थुवर्ण, हरी, कंबू, चारू, हेम आणि हाटक (ही सोन्याची नावे आहेत). ๔๘๘. ४८८. ตปนิยํ หิรญฺญํ ต, พฺเภทา จามีกรมฺปิ จ; สาตกุมฺภํ ตถา ชมฺพุ, นทํ สิงฺคี จ นาริยํ. तपनीय, हिरण्य, चामीकर, शातकुंभ, जांबूनद आणि शिंगी हे सोन्याचेच प्रकार आहेत. ๔๘๙. ४८९. รูปิยํ รชตํ สชฺฌุ, รูปี สชฺฌํ อโถ วสุ; รตนญฺจ มณิ ทฺวีสุ, ปุปฺผราคาที ตพฺภิทา. चांदी (रजत, सज्झू); रत्न किंवा मणी; आणि पुष्कराज इत्यादी त्याचे प्रकार आहेत. ๔๙๐. ४९०. สุวณฺณํ รชตํ มุตฺตา, มณิ เวฬุริยานิ จ; วชิรญฺจ ปวาฬนฺติ, สตฺตา’หุ รตนานิ’ เม. सोने, चांदी, मोती, मणी, वैडूर्य, हिरा आणि पोवळे; ही सात रत्ने आहेत असे म्हणतात. ๔๙๑. ४९१. โลหิตงฺโก จ ปทุม, ราโค รตฺตมณิ ปฺยถ; วํสวณฺโณ เวฬุริยํ, ปวาฬํ วา จ วิทฺทุโม. लोहितंक, पदुम, राग आणि रक्तमणी (माणिक); वंसवण्ण आणि वेळुरिय (वैडूर्य); पवाळ आणि विद्दुम (पोवळे). ๔๙๒. ४९२. มสารคลฺลํ กพรมณิ, อถ มุตฺตา จ มุตฺติกํ; รีติ ตฺถี อารกูโฏ วา, อมลํ ตฺว’พฺภกํ ภเว. मसारगल्ल आणि कबरमणी (चित्रांकित मणी); मुत्ता आणि मुत्तिक (मोती); रीती आणि आरकूट (पितळ); अमल आणि अब्भक (अभ्रक). ๔๙๓. ४९३. โลโห นิตฺถี อโย กาฬา,ยสญฺจ ปารโท รโส; กาฬติปุ ตุ สีสญฺจ, หริตาลํ ตุ ปีตนํ. लोह, अय आणि काळ (लोखंड); यस, पारद आणि रस (पारा); काळतिपू आणि सीस (शिसं); हरिताल आणि पीतन (हरताळ). ๔๙๔. ४९४. จินปิฏฺฐญฺจ สินฺทูรํ, อถ ตูโล ตถา ปิจุ; ขุทฺทชํ ตุ มธุ ขุทฺทํ, มธุจฺฉิฏฺฐํ ตุ สิตฺถกํ. चीनपिट्ठ आणि सिंदूर (शेंदूर); तूल आणि पिचु (कापूस); खुद्दज, मधु आणि खुद्द (मध); मधुच्छिट्ठ आणि सित्थक (मेण). ๔๙๕. ४९५. โคปาโล โคป โคสงฺขฺยา,โคมา ตุ โคมิโก ปฺยถ; อุสโภ พลีพทฺโธ จ, โคโณ โควสโภ วุโส. गोपाल, गोप, गोसंख्य, गोमा आणि गोमिक (गोपाळ/गुराखी); उसभ, बलीबद्द, goण, गोवषभ आणि वुस (बैल). ๔๙๖. ४९६. วุทฺโธ ชรคฺคโว โส ถ, ทมฺโม วจฺฉตโร สมา; ธุรวาหี ตุ โธรยฺโห, โควินฺโท ธิกโต ควํ. वृद्ध आणि जरग्गव (म्हातारा बैल); दम्म आणि वच्छतर (वळू/शिकवायचा वासरू); धुरवाही आणि धोरय्ह (ओझे वाहणारा बैल); गोविंद (गाईंचा प्रमुख/रक्षक). ๔๙๗. ४९७. วโห จ ขนฺธเทโส ถ, กกุโธ กกุ วุจฺจเต; อโถ วิสาณํ สิงฺคญฺจ, รตฺตคาวี ตุ โรหิณี. वह आणि खन्धदेस (बैलाचा खांदा); ककुध आणि ककु (वशिंड); विसाण आणि सिंग (शिंग); रत्तगावी आणि रोहिणी (तांबडी गाय). ๔๙๘. ४९८. คาวี จ สิงฺคินี โค จ, วญฺฌา ตุ กถฺยเต วสา; นวปฺปสูติกา เธนุ, วจฺฉกามา ตุ วจฺฉลา. गावी, सिंगिनी आणि गो (गाय); वंझा आणि वसा (वांझ गाय); नवप्पसूतिका आणि धेनु (नुकतीच व्यालेली गाय); वच्छकामा आणि वच्छला (वासरावर प्रेम करणारी गाय). ๔๙๙. ४९९. คคฺครี [Pg.42] มนฺถนีตฺถี ทฺเว, สนฺทานํ ทามมุจฺจเต; โคมิฬฺโห โคมโย นิตฺถี, อโถ สปฺปิ ฆตํ ภเว. गग्गरी आणि मन्थनी (ताक घुसळण्याचे भांडे); संदान आणि दाम (बांधण्याची दोरी); गोमिळ्ह आणि गोमय (शेण); सप्पि आणि घत (तूप). ๕๐๐. ५००. นวุทฺธฏํ ตุ โนนีตํ, ทมิมณฺฑํ ตุ มตฺถุ จ,ขีรํ ทุทฺธํ ปโย ถญฺญํ, ตกฺกํ ตุ มถิตํ ปฺยถ. नवुद्धत आणि नोनीत (लोणी); दधिमण्ड आणि मत्थु (ताकाचे पाणी); खीर, दुद्ध, पयो आणि थञ्ञ (दूध); तक्क आणि मथित (ताक). ๕๐๑. ५०१. ขีรํ ทธิ ฆตํ ตกฺกํ, โนนีตํ ปญฺจ โครสา; อุรพฺโภ เมณฺฑ เมสา จ, อุรโณ อวิ เอฬโก. खीर, दधि, घत, तक्क आणि नोनीत हे पाच गोरस आहेत; उरब्भ, मेण्ड, मेस, उरण, अवि आणि एळक (मेंढा/मेंढी). ๕๐๒. ५०२. วสฺโส ตฺวโช ฉคลโก,โอฏฺโฐ ตุ กรโภ ภเว; คทฺรโภ ตุ ขโร วุตฺโต, อุรณี ตุ อชี อชา. वस्स, अज आणि छगलक (बोकड); ओट्ठ आणि करभ (उंट); गद्रभ आणि खर (गाढव); उरणी, अजी आणि अजा (शेळी/मेंढी). อิติ เวสฺสวคฺโค. येथे वेस्स-वग्गो (वैश्य वर्ग) समाप्त झाला. ๕๐๓. ५०३. สุทฺโท’นฺตวณฺโณ วสโล, สํกิณฺณา มาคธาทโย; มาคโธ สุทฺทขตฺตาโช, อุคฺโค สุทฺทาย ขตฺตโช. सुद्द, अन्तवण्ण आणि वसल (शूद्र); मागध इत्यादी संकीर्ण (मिश्र जाती) आहेत; मागध (शूद्र पिता आणि क्षत्रिय माता यांच्यापासून जन्मलेला); उग्ग (क्षत्रिय पिता आणि शूद्र माता यांच्यापासून जन्मलेला). ๕๐๔. ५०४. ทฺวิชาขตฺติยโช สูโต, การุตุ สิปฺปิโกปุเม; สงฺฆาโตตุ สชาตีนํ, เตสํ เสณี ทฺวิสุจฺจเต. द्विज आणि क्षत्रिय यांच्यापासून जन्मलेला तो 'सूत'; कारू आणि सिप्पिको (कारागीर/शिल्पी); एकाच जातीच्या किंवा व्यवसायाच्या लोकांच्या समूहाला 'सेणी' (श्रेणी) म्हटले जाते. ๕๐๕. ५०५. ตจฺฉโก ตนฺตวาโย จ, รชโก จ นหาปิโต; ปญฺจโม จมฺมกาโรติ, การโว ปญฺจิเม สิยุํ. तच्छक (सुतार), तन्तवाय (विणकर), रजक (धोबी), नहापित (न्हावी) आणि पाचवा चम्मकार (चांभार) - हे पाच 'कारू' (मुख्य कारागीर) आहेत. ๕๐๖. ५०६. ตจฺฉโก วฑฺฒกี มโต, ปลคณฺโฑ ถปตฺยปิ; รถกาโร ถ สุวณฺณ, กาโร นาฬินฺธโม ภเว. तच्छक, वड्ढकी, पलगण्ड आणि thपति (सुतार/गवंडी); रथकार (रथ बनवणारा); सुवण्णकार आणि नाळिन्धम (सोनार). ๕๐๗. ५०७. ตนฺตวาโย เปสกาโร,มาลากาโร ตุ มาลิโก; กุมฺภกาโร กุลาโล ถ,ตุนฺนวาโย จ สูจิโก. तन्तवाय आणि पेसकार (विणकर); मालाकार आणि मालिक (माळी); कुम्भकार आणि कुलाल (कुंभार); तुन्नवाय आणि सूचिक (शिंपी). ๕๐๘. ५०८. จมฺมกาโร รถกาโร, กปฺปโก ตุ นหาปิโต; รงฺคาชีโว จิตฺตกาโร, ปุกฺกุโส ปุปฺผฉฑฺฑโก. चम्मकार आणि रथकार (चांभार); कप्पक आणि नहापित (न्हावी); रङ्गाजीव आणि चित्तकार (चित्रकार/रंगारी); पुक्कुस आणि पुप्फछड्डक (कचरा/निर्माल्य टाकणारा, सफाई कामगार). ๕๐๙. ५०९. เวโน วิลีวกาโร จ, นฬกาโร สมา ตโย; จุนฺทกาโร ภมกาโร,กมฺมาโร โลหการโก. वेण, विलीवकार आणि नळकार (बुरुड/बांबूचे काम करणारे); चुन्दकार आणि भमकार (कन्हेर/लेथ कामगार); कम्मार आणि लोहकारक (लोहार). ๕๑๐. ५१०. นินฺเนชโก จ รชโก, เนตฺติโก อุทหารโก; วีณาวาที เวณิโก ถ, อุสุกาโร’ สุวฑฺฒกี. निन्नेजक आणि रजक (धोबी); नेत्तिक आणि उदहारक (पाणी वाहणारा); वीणावादी आणि वेणिक (वीणा वाजवणारा); उसुकार आणि असुवड्ढकी (बाण बनवणारा). ๕๑๑. ५११. เวณุธโม [Pg.43] เวณวิโก,ปาณิวาโท ตุ ปาณิโฆ ; ปูปิโย ปูปปณิโย, โสณฺฑิโก มชฺชวิกฺกยี. वेणुधम आणि वेणविक (बासरी वाजवणारा); पाण्यवाद आणि पाणिघ (टाळ्या वाजवणारा/मृदंग वाजवणारा); पूपिय आणि पूपपणिय (खाद्यपदार्थ/मिठाई विकणारा); सोण्डिक आणि मज्जविक्कयी (दारू विकणारा/कळाल). ๕๑๒. ५१२. มายา ตุ สมฺพรี มายา, กาโร ตุ อินฺทชาลิโก; माया आणि सम्बरी (जादू/भ्रम); मायाकार आणि इन्दजालिक (जादूगार). ๕๑๓. ५१३. โอรพฺภิกา สูกริกา, มาควิกา เต จ สากุณิกา; หนฺตฺวา ชีวนฺเต’ฬก, สูกร, มิค, ปกฺขิโน กมโต. ओरब्भिक, सूकरिक, मागविक आणि साकुणिक हे अनुक्रमे मेंढ्या, डुक्कर, हरिण (वन्य पशू) आणि पक्षी मारून उपजीविका करणारे आहेत. ๕๑๔. ५१४. วาคุริโก ชาลิโก ถ,ภารวาโห ตุ ภาริโก; เวตนิโก ตุ ภตโก, กมฺมกโร ถ กึ กโร; ทาโส จ เจฏโก เปสฺโส, ภจฺโจ จ ปริจาริโก. वागुरिक आणि जालिक (जाळे लावून शिकार करणारे/कोळी); भारवाह आणि भारिक (हमाल/ओझे वाहणारे); वेतनिक, भतक, कम्मकर आणि किङ्कर (मजुरीवर काम करणारे सेवक); दास, चेटक, पेस्स, भच्च आणि परिचारिक (गुलाम/चाकर/सेवक). ๕๑๕. ५१५. อนฺโตชาโต ธนกฺกีโต, ทาสพฺโย’ปคโต สยํ; ทาสา กรมรานีโต, จฺเจวํ เต จตุธา สิยุํ. अन्तोजात (घरात जन्मलेला), धनक्कीत (पैशाने विकत घेतलेला), दासव्योपगत सयम् (स्वतःहून दासत्व पत्करलेला) आणि करमरानीत (युद्धात पकडून आणलेला) - असे हे चार प्रकारचे दास असतात. ๕๑๖. ५१६. อทาโส ตุ ภุชิสฺโส ถ,นีโจ ชมฺโม นิหีนโก; นิกฺโกสชฺโช อกิลาสุ,มนฺโท ตุ อลโส ปฺยถ. अदास आणि भुजिस्स (स्वतंत्र/जो दास नाही); नीच, जम्म आणि निहीणक (नीच/कनिष्ठ); निक्कोसज्ज आणि अकिलासू (उद्योगी/न थकणारा); मन्द आणि अलस (आळशी/मंद). ๕๑๗. ५१७. สปาโก เจว จณฺฑาโล, มาตงฺโค สปโจ ภเว; ตพฺเภทา มิลกฺขชาตี, กิราต, สวราทโย. सपाक, चण्डाल, मातङ्ग आणि सपंच (चांडाल); किराता, सवरादी हे म्लेंच्छ जातींचे (मिलक्खजाती) भेद आहेत. ๕๑๘. ५१८. เนสาโท ลุทฺทโก พฺยาโธ,มิคโว ตุ มิคพฺยโธ; สารเมยฺโย จ สุนโข, สุโน โสโณ จ กุกฺกุโร. नेसाद, luद्दक, ब्याध, मिगव आणि मिगब्याध (पारधी/शिकारी); सारमेय्य, सुनख, सुण, सोण आणि कुक्कुर (कुत्रा). ๕๑๙. ५१९. สฺวาโน สุวาโน สาฬูโร,สูโน สาโน จ สา ปุเม; อุมฺมตฺตาทิต มาปนฺโน, อฬกฺโกติ สุโน มโต. स्वान, सुवान, साळूर, सून, सान आणि सा (कुत्रा); वेडा झालेला कुत्रा 'अळक्क' (पिसाळलेला कुत्रा) म्हणून ओळखला जातो. ๕๒๐. ५२०. สาพนฺธนํ ตุ คทฺทูโล, ทีปโก ตุ จ เจตโก; พนฺธนํ คณฺฐิ ปาโส ถ, วาคุรา มิคพนฺธนี. साबन्धन आणि गद्दूल (कुत्र्याला बांधण्याची साखळी/पट्टा); दीपक आणि चेतक (चित्ता/शिकारी बिबट्या); बन्धन, गण्ठि आणि पास (फास/गाठ); वागुरा आणि मिगबन्धनी (हरणांना पकडण्याचे जाळे). ๕๒๑. ५२१. ถิยํ กุเวณี กุมีนํ, อานโย ชาล มุจฺจเต; อาฆาตนํ วธฏฺฐานํ, สูนา ตุ อธิโกฏฺฏนํ. कुवेणी आणि कुमीन (मासे पकडण्याचे जाळे/साधन); आनय आणि जाल (जाळे); आघातन आणि वधट्ठाण (वधस्तंभ/फाशीची जागा); सूना आणि अधिकोट्टन (कसाईखाना/खाटीकखाना). ๕๒๒. ५२२. ตกฺกโร [Pg.44] โมสโก โจโร,เถเน’กาคาริโก สมา; เถยฺยญฺจ โจริกา โมโส,เวโม วายนทณฺฑโก. तक्कर, मोसक, चोर, थेन आणि एकागारिक (चोर); थेय्य, चोरिका आणि मोस (चोरी); वेम आणि वायनदण्डक (विणकामाचा दांडा/माग). ๕๒๓. ५२३. สุตฺตํ ตนฺตุ ปุเม ตนฺตํ, โปตฺถํ เลปฺยาทิกมฺมนิ; ปญฺจาลิกา โปตฺถลิกา, วตฺถทนฺตาทินิมฺมิตา. सुत्त, तन्तु आणि तन्त (धागा/दोरा); पोत्थ (लेपकाम/मातीचे काम); पञ्चालिका आणि पोत्थलिका (कापड, हस्तिदंत इत्यादींपासून बनवलेली बाहुली). ๕๒๔. ५२४. อุคฺฆาฏนํ ฆฏียนฺตํ, กูปมฺพุพฺพาหนํ ภเว; มญฺชูสา เปฬา ปิฏโก, ตฺวิตฺถิยํ ปจฺฉิ เปฏโก. उग्घाटन आणि घटीयन्त (विहिरीतून पाणी काढण्याचे रहाटयंत्र); मञ्जूसा, पेळा, पिटक, पच्छी आणि पेटक (पेटी/करंडी/टोपली). ๕๒๕. ५२५. พฺยาภงฺคี ตฺวิตฺถิยํ กาโช, สิกฺกา ตฺวตฺรา’วลมฺพนํ; อุปาหโน วา ปาทุ’ตฺถี, ตพฺเภทา ปาทุกา ปฺยถ. ब्याभङ्गी आणि काज (कावड); सिक्का (कावडीची शिकी/टांगण्याचे साधन); उपाहन आणि पादू (पादत्राण/चप्पल); पादुका (लाकडी खडावा). ๕๒๖. ५२६. วรตฺตา วทฺธิกา นทฺธิ, ภสฺตา จมฺมปสิพฺพกํ; โสณฺณาทฺยาวตฺตนี มูสา,ถ กูฏํ วา อโยฆโน. वरत्ता, वद्धिका आणि नद्धि (चामड्याची वादी/दोरी); भस्ता आणि चम्मपसिब्बक (कातड्याची पिशवी/भत); सुवर्णादी वितळवण्याची 'मूसा' (मूस); कूट आणि अयोग्घन (लोखंडी हातोडा/घण). ๕๒๗. ५२७. กมฺมารภณฺฑา สณฺฑาโส, มุฏฺฐฺยา’ธิกรณีตฺถียํ; ตพฺภสฺตา คคฺครี นารี, สตฺตํ ตุ ปิปฺผลํ ภเว. लोहाराची हत्यारे: सण्डासो (सांडशी), मुट्ठि (हातोडी) आणि अधिकरणी (ऐरण); त्याची भाती म्हणजे 'गग्गरी'; सत्त आणि पिप्फल (कात्री/सुरी). ๕๒๘. ५२८. สาโณ ตุ นิกโส วุตฺโต,อารา ตุ สูจิวิชฺฌนํ; ขโร จ กกโจ นิตฺถี, สิปฺปํ กมฺมํ กลาทิกํ. साण आणि निकस (कसोटीचा दगड/शाण); आरा (टोचा/सुई); खर आणि ककच (करवत); सिप्प आणि कम्म (कला/शिल्प/काम). ๕๒๙. ५२९. ปฏิมา ปฏิพิมฺพญฺจ, พิมฺโพ ปฏินิธีริโต; ตีสุ สโม ปฏิภาโค, สนฺนิกาโส สริกฺขโก. पटिमा, पटिबिम्ब, बिम्ब आणि पटिनिधि (प्रतिमा/प्रतिबिंब/मूर्ती); सम, पटिभाग, सन्निकास आणि सरिक्खक (समान/सारखा - तिन्ही लिंगांत). ๕๓๐. ५३०. สมาโน สทิโส ตุลฺโย,สงฺกาโส สนฺนิโภ นิโภ; โอปมฺม มุปมานํ จุ, ปมา ภติ ตุ นาริยํ. समान, सदृश, तुल्य, संकास, सन्निभ आणि निभ हे शब्द 'सारखे' (समान) या अर्थाचे आहेत. ओपम्म (औपम्य), उपमान आणि पमा (प्रमा) हे शब्द 'उपमा' (तुलना) या अर्थाचे आहेत; त्यापैकी 'पमा' हा शब्द स्त्रीलिंगी आहे. ๕๓๑. ५३१. นิพฺเพโส เวตนํ มูลฺยํ, ชูตํ ตฺวนิตฺถิ เกตวํ; ธุตฺโต’กฺขธุตฺโต กิตโว, ชูตการ, กฺขเทวิโน. निब्बेस (मजुरी), वेतन आणि मूल्य हे शब्द 'वेतन' किंवा 'किंमत' या अर्थाचे आहेत. जूत (जुगार) आणि केतव हे शब्द 'जुगार' या अर्थाचे असून 'केतव' हा शब्द स्त्रीलिंगी नाही. धुत्त, अक्खधुत्त, कितव, जुतकार आणि अक्खदेवी हे शब्द 'जुगारी' या अर्थाचे आहेत. ๕๓๒. ५३२. ปาฏิโภโคตุ ปฏิภู, อกฺโข ตุ ปาสโก ภเว; ปุเมวา’ ฏฺฐปทํ สาริ, ผลเก ถ ปโณ, พฺภุโต. पाटिभोग आणि पटिभू हे शब्द 'जामीनदार' या अर्थाचे आहेत. अक्ख आणि पासक हे शब्द 'फासा' या अर्थाचे आहेत. अट्ठपद आणि सारि हे शब्द 'बुद्धिबळ' किंवा 'सारिपाट' या अर्थाचे असून 'अट्ठपद' हा शब्द पुल्लिंगी आहे. फलक म्हणजे 'पट' (बोर्ड) आणि पण व अब्भुत हे शब्द 'पण' (पैज) या अर्थाचे आहेत. ๕๓๓. ५३३. กิณฺณํ [Pg.45] ตุ มทิราพีเช, มธุ มธฺวาสเว มตํ; มทิรา วารุณี มชฺชํ, สุรา ภโว ตุ เมรยํ. किण्ण हा शब्द 'मद्यबीज' (किण्व/यीस्ट) या अर्थाचा आहे. मधु आणि मध्वासव हे शब्द 'मधाची दारू' या अर्थाचे आहेत. मदिरा, वारुणी, मज्ज, सुरा आणि मेरय हे शब्द 'मद्य' (दारू) या अर्थाचे आहेत. ๕๓๔. ५३४. สรโก จสโก นิตฺถี, อาปานํ ปานมณฺฑลํ; सरक आणि चसक हे शब्द 'दारू पिण्याचे पात्र' (प्याला) या अर्थाचे असून 'चसक' हा शब्द स्त्रीलिंगी नाही. आपान आणि पानमण्डल हे शब्द 'मद्यपान गृह' (दारूखाना किंवा मद्यपानाची जागा) या अर्थाचे आहेत. ๕๓๕. ५३५. เย’ตฺร ภูริปฺปโยคตฺตา, โยคิเกกสฺมิ มีริตา; ลิงฺคนฺตเรปิ เต เญยฺยา, ตทฺธมฺมตฺตา’ญฺญวุตฺติยนฺติ. या वर्गात जे शब्द त्यांच्या वारंवार होणाऱ्या प्रयोगामुळे एकाच लिंगात किंवा अर्थात सांगितले आहेत, ते त्यांच्या स्वभावानुसार आणि इतर प्रयोगांनुसार अन्य लिंगात व अर्थातही समजले पाहिजेत. อิติ สุทฺทวคฺโค. येथे 'सुद्दवग्गो' (शूद्रवर्ग) समाप्त झाला. จตุพฺพณฺณวคฺโค นิฏฺฐิโต. 'चतुब्बण्णवग्गो' (चार वर्णांचा वर्ग) समाप्त झाला. ๕. อรญฺญวคฺค ५. अरण्यवग्ग (अरण्य वर्ग) ๕๓๖. ५३६. อรญฺญํ กานนํ ทาโย, คหนํ วิปินํ วนํ; อฏวี’ตฺถี มหารญฺญํ, ตฺว, รญฺญานีตฺถิยํ ภเว. अरञ्ञ (अरण्य), कानन, दाय, गहन, विपिन आणि वन हे शब्द 'जंगल' (वन) या अर्थाचे आहेत. अटवी हा शब्द स्त्रीलिंगी आहे. महारण्य आणि अरञ्ञानी हे शब्द 'मोठे जंगल' या अर्थाचे असून 'अरञ्ञानी' हा शब्द स्त्रीलिंगी आहे. ๕๓๗. ५३७. นครา นาติทูรสฺมึ, สนฺเตหิ โย ภิโรปิโต; ตรุสณฺโฑ ส อาราโม, ตโถ ปวน มุจฺจเต. नगरापासून फार दूर नसलेल्या ठिकाणी सज्जनांनी लावलेल्या वृक्षांच्या समूहाला 'आराम' किंवा 'उपवन' असे म्हटले जाते. ๕๓๘. ५३८. สพฺพสาธารณา’รญฺญํ, รญฺญ มุยฺยาน มุจฺจเต; เญยฺยํ ตเทว ปมท, วน มนฺเตปุโรจิตํ. सर्वांसाठी खुले असलेले किंवा राजाचे जे उद्यान असते त्याला 'उय्यान' (उद्यान) म्हणतात. अंतःपुराच्या (राजवाड्याच्या) जवळ असलेल्या उद्यानाला 'पमदवन' (प्रमदवन) असे समजावे. ๕๓๙. ५३९. ปนฺติ วีถฺยา’วลิ เสณี, ปาฬิ เลขา ตุ ราชิ จ; ปาทโป วิฏปี รุกฺโข, อโค สาโล มหีรุโห. पन्ति (पंक्ती), वीथि, आवलि, सेणि (श्रेणी), पाळि, लेखा आणि राजि हे शब्द 'ओळ' (रांग) या अर्थाचे आहेत. पादप, विटपी, रुक्ख (वृक्ष), अग, साल आणि महीरुह हे शब्द 'झाड' (वृक्ष) या अर्थाचे आहेत. ๕๔๐. ५४०. ทุโม ตรุ กุโช สาขี, คจฺโฉ ตุ ขุทฺทปาทโป; ผลนฺติ เย วินา ปุปฺผํ, เต วุจฺจนฺติ วนปฺปตี. दुम (द्रुम), तरु, कुज आणि साखी हे शब्द 'वृक्ष' या अर्थाचे आहेत. गच्छ हा शब्द 'लहान झाड' (झुडूप) या अर्थाचा आहे. जे वृक्ष फुलांशिवाय फळ देतात, त्यांना 'वनप्पती' (वनस्पती) असे म्हणतात. ๕๔๑. ५४१. ผลปากาวสาเน โย,มรตฺโย สธิ สา ภเว; ตีสุ วญฺจฺยา’ผลา จาถ, ผลิโน ผลวา ผลี. जे झाड फळ पिकल्यानंतर मरून जाते, त्याला 'ओसधी' (औषधी/वार्षिक वनस्पती) म्हणतात. वञ्झा (वांझ) आणि अफला हे शब्द 'फळ न देणारे' या अर्थाचे असून तिन्ही लिंगांत वापरले जातात. फलिन, फलवा आणि फली हे शब्द 'फळ देणारे' (फलवान) या अर्थाचे आहेत. ๕๔๒. ५४२. สมฺผุลฺลิโต ตุ วิกโจ, ผุลฺโล วิกสิโต ติสุ; สิโร’คฺคํ สิขโร นิตฺถี, สาขา ตุ กถิตา ลตา. सम्फुल्लित, विकच, फुल्ल आणि विकसित हे शब्द 'उमलेले' (विकसित) या अर्थाचे असून तिन्ही लिंगांत वापरले जातात. सिर, अग्ग (अग्र) आणि सिखर (शिखर) हे शब्द 'शेंडा' किंवा 'शिखर' या अर्थाचे असून 'सिखर' हा शब्द स्त्रीलिंगी नाही. साखा (शाखा) म्हणजे फांदी आणि लता म्हणजे वेल होय. ๕๔๓. ५४३. ทลํ ปลาสํ ฉทนํ, ปณฺณํ ปตฺตํ ฉโท ปฺยถ; ปลฺลโว วา กิสลยํ, นวุพฺภินฺเน ตุ องฺกุโร. दल, पलास (पळस/पान), छदन, पण्ण (पर्ण), पत्त (पत्र) आणि छद हे शब्द 'पान' या अर्थाचे आहेत. पल्लव आणि किसलय हे शब्द 'कोवळे पान' (पालवी) या अर्थाचे आहेत. नवउब्भिन्न आणि अङ्कुर (अंकुर) हे शब्द 'नवीन फुटलेला अंकुर' या अर्थाचे आहेत. ๕๔๔. ५४४. มกุลํ วา กุฏุมโล, ขารโก ตุ จ ชาลกํ; กลิกา โกรโก นิตฺถี, วณฺฏํ ปุปฺผาทิพนฺธนํ. मकुल आणि कुटुमल हे शब्द 'कळी' या अर्थाचे आहेत. खारकर आणि जालक हे शब्द 'लहान कळी' किंवा 'कोवळे फळ' या अर्थाचे आहेत. कलिका आणि कोरक हे शब्द 'कळी' या अर्थाचे असून 'कोरक' हा शब्द स्त्रीलिंगी नाही. वण्ट म्हणजे 'देठ' (फुलांचे किंवा फळांचे देठ) होय. ๕๔๕. ५४५. ปสโว [Pg.46] กุสุมํ ปุปฺผํ, ปราโค ปุปฺผโช รโช; มกรนฺโท มธุ มตํ, ถวโก ตุ จ โคจฺฉโก. पसव, कुसुम आणि पुप्फ (पुष्प) हे शब्द 'फूल' या अर्थाचे आहेत. पराग आणि पुप्फज रज हे शब्द 'फुलांमधील परागकण' या अर्थाचे आहेत. मकरंद आणि मधु हे शब्द 'फुलांतील मध' (मकरंद) या अर्थाचे आहेत. थवक आणि गोच्छक हे शब्द 'फुलांचा गुच्छ' (तुरा) या अर्थाचे आहेत. ๕๔๖. ५४६. ผเล ตฺวา’เม สลาฏุ’ตฺโต,ผลํ ตุ ปกฺก มุจฺจเต; จมฺปก’มฺพาทิกุสุม, ผลนามํ นปุํสเก. कच्च्या फळाला 'सलाटु' (कैरी/कच्चे फळ) म्हणतात आणि पिकलेल्या फळाला 'पक्क' (पिकलेले फळ) म्हणतात. चम्पक (चाफा), अम्ब (आंबा) इत्यादी फुलांची आणि फळांची नावे नपुंसकलिंगी असतात. ๕๔๗. ५४७. มลฺลิกาที ตุ กุสุเม, สลิงฺคา วีหโย ผเล; ชมฺพู’ตฺถี ชมฺพวํ ชมฺพู, วิฏโป วิฏภี’ตฺถิยํ. मल्लिका (मोगरा) इत्यादी फुलांचे शब्द आपापल्या लिंगात असतात, तसेच व्रीही (धान्य) इत्यादींचे शब्द फळांच्या बाबतीत असतात. जम्बू (जांभळाचे झाड) हा शब्द स्त्रीलिंगी आहे, जांभळाच्या फळाला 'जम्बव' (नपुंसकलिंगी) किंवा 'जम्बू' (स्त्रीलिंगी) म्हणतात. विटप म्हणजे 'झाडाची फांदी' किंवा 'झुडूप' आणि 'विटभी' हा शब्द स्त्रीलिंगी आहे. ๕๔๘. ५४८. มูล มารพฺภ สาขนฺโต, ขนฺโธ ภาโค ตรุสฺส ถ; โกฏโร นิตฺถิยํ รุกฺข, จฺฉิทฺเท กฏฺฐํ ตุ ทารุ จ. मुळापासून फांदीपर्यंतच्या झाडाच्या भागाला 'खन्ध' (खोड) म्हणतात. कोटर म्हणजे 'झाडाची ढोली' असून हा शब्द स्त्रीलिंगी नाही. कट्ठ (काष्ठ) आणि दारु हे शब्द 'लाकूड' या अर्थाचे आहेत. ๕๔๙. ५४९. พุนฺโท มูลญฺจ ปาโท ถ, สงฺกุ’ตฺโต ขาณุนิตฺถิยํ; กรหาฏํ ตุ กนฺโท ถ, กฬีโร มตฺถโก ภเว. बुन्द, मूल आणि पाद हे शब्द 'झाडाचे मूळ' या अर्थाचे आहेत. सङ्कु आणि खाणु (खुंट) हे शब्द 'झाडाचे खोड' किंवा 'खुंट' या अर्थाचे असून 'खाणु' हा शब्द स्त्रीलिंगी नाही. करहाट आणि कन्द हे शब्द 'कंद' (मुळा) या अर्थाचे आहेत. कळीर म्हणजे 'बांबूचा कोवळा कोंब' किंवा 'झाडाचा शेंडा' होय. ๕๕๐. ५५०. วลฺลรี มญฺชรี นารี, วลฺลี ตุ กถิตา ลตา; ถมฺโภ คุมฺโพ จ อกฺขนฺเธ, ลตา วิรู ปตานินี. वल्लरी आणि मञ्जरी हे शब्द स्त्रीलिंगी असून 'मंजिरी' किंवा 'वेल' या अर्थाचे आहेत. वल्ली आणि लता हे शब्द 'वेल' या अर्थाचे आहेत. थम्भ (स्तंभ/खांब) आणि गुम्ब (झुडूप) हे शब्द 'खोड नसलेल्या वनस्पतींच्या समूहा'साठी आहेत. लता, विरू आणि पतानिनी हे शब्द 'पसरणाऱ्या वेली'साठी आहेत. ๕๕๑. ५५१. อสฺสตฺโถ โพธิ จ ทฺวีสุ, นิคฺโรโธ ตุ วโฏ ภเว; กพิฏฺโฐ จ กปิตฺโถ จ, ยญฺญงฺโค ตุ อุทุมฺพโร. अस्सत्थ (अश्वत्थ) आणि बोधि हे शब्द 'पिंपळाचे झाड' या अर्थाचे असून दोन्ही लिंगांत (पुल्लिंगी व स्त्रीलिंगी) वापरले जातात. निग्रोध आणि वट हे शब्द 'वडाचे झाड' या अर्थाचे आहेत. कबिट्ठ आणि कपित्थ हे शब्द 'कवठाचे झाड' या अर्थाचे आहेत. यञ्ञङ्ग (यज्ञांग) आणि उदुम्बर हे शब्द 'उंबराचे झाड' या अर्थाचे आहेत. ๕๕๒. ५५२. โกวิฬาโร ยุคปตฺโต, อุทฺทาโล วาตฆาตโก; ราชรุกฺโข กตมาลี, นฺทีวโร พฺยาธิฆาตโก. कोविळार आणि युगपत्त हे शब्द 'कांचन' या वृक्षाचे आहेत. उद्दाल आणि वातघातक हे शब्द 'बहावा' (अमलतास) या वृक्षाचे आहेत. राजरुक्ख, कतमाली, इन्दीवर आणि ब्याधिघातक हे शब्द 'बहावा' या वृक्षाचेच समानार्थी शब्द आहेत. ๕๕๓. ५५३. ทนฺตสโฐ จ ชมฺภีโร, วรโณ ตุ กเรริ จ; กึ สุโก ปาลิภทฺโทถ, วญฺชุโล ตุ จ เวตโส. दन्तसठ आणि जम्भीर हे शब्द 'लिंबू' किंवा 'जंभिरी लिंबू' या अर्थाचे आहेत. वरण आणि करेरि हे शब्द 'वायवर्णा' (वरुण वृक्ष) या अर्थाचे आहेत. किंसुक आणि पालिभद्द हे शब्द 'पळस' किंवा 'पांगारा' या वृक्षाचे आहेत. वञ्जुल आणि वेतस हे शब्द 'वेत' (वेताचे झाड) या अर्थाचे आहेत. ๕๕๔. ५५४. อมฺพาฏโกปีตนโก, มธุโก ตุ มธุทฺทุโม; อโถ คุฬผโล ปีลุ, โสภญฺชโน จ สิคฺคุ จ. अम्बाटक आणि पीतनक हे शब्द 'अंबाडा' या वृक्षाचे आहेत. मधुक आणि मधुद्दुम हे शब्द 'मोहाचे झाड' या अर्थाचे आहेत. गुळफल आणि पीलू हे शब्द 'पिलू' या वृक्षाचे आहेत. सोभञ्जन आणि सिग्गु हे शब्द 'शेवगा' या वृक्षाचे आहेत. ๕๕๕. ५५५. สตฺตปณฺณิ ฉตฺตปณฺโณ, ตินิโส ตฺว ติมุตฺตโก; กึ สุโก ตุ ปลาโส ถ,อริฏฺโฐ เผนิโล ภเว. सत्तपण्णि आणि छत्तपण्ण हे शब्द 'सप्तपर्णी' या वृक्षाचे आहेत. तिनिस आणि अतिमुत्तक हे शब्द 'तिनिस' (तिवसा) या वृक्षाचे आहेत. किंसुक आणि पलास हे शब्द 'पळस' या वृक्षाचे आहेत. अरिट्ठ आणि फेनिल हे शब्द 'रिठा' या वृक्षाचे आहेत. ๕๕๖. ५५६. มาลูร เพลุวาพิลฺโล, ปุนฺนาโค ตุ จ เกสโร; สาลโว ตุ จ โลทฺโท ถ, ปิยาโล สนฺนกทฺทุ จ. मालूर, बेलुव आणि बिल्ल हे शब्द 'बेल' या वृक्षाचे आहेत. पुन्नाग आणि केसर हे शब्द 'पुन्नाग' या वृक्षाचे आहेत. सालव आणि लोद्द हे शब्द 'लोध्र' या वृक्षाचे आहेत. पियाल आणि सन्नकद्दु हे शब्द 'चारोळी' (पियाळ) या वृक्षाचे आहेत. ๕๕๗. ५५७. ลิโกจโก ตถา’งฺโกโล,อถ คุคฺคุลุ โกสิโก; อมฺโพ จูโต สโห ตฺเวโส,สหกาโร สุคนฺธวา. लिकोचक आणि अङ्कोल हे शब्द 'अंकोल' या वृक्षाचे आहेत. गुग्गुलु आणि कोसिक हे शब्द 'गुग्गुळ' या वृक्षाचे आहेत. अम्ब, चूत, सह, सहकार आणि सुगन्धवा हे शब्द 'आंब्याचे झाड' या अर्थाचे आहेत. ๕๕๘. ५५८. ปุณฺฑรีโก [Pg.47] จ เสตมฺโพ, เสลุ ตุ พหุวารโก; เสปณฺณี กาสฺมิรี จาถ, โกลี จ พทรีตฺถิยํ. पुण्डरीक आणि सेतम्ब हे शब्द 'पांढऱ्या आंब्याचे झाड' या अर्थाचे आहेत. सेलु आणि बहुवारक हे शब्द 'भोकर' या वृक्षाचे आहेत. सेपण्णी आणि कास्मिरी हे शब्द 'शिवण' या वृक्षाचे आहेत. कोली आणि बदरी हे शब्द 'बोरीचे झाड' या अर्थाचे असून 'बदरी' हा शब्द स्त्रीलिंगी आहे. ๕๕๙. ५५९. โกลํ จานิตฺถี พทโร, ปิลกฺโข ปิปฺปลี’ตฺถิยํ; ปาฏลี กณฺหวนฺตา จ, สาทุกณฺโฏ วิกงฺกโต. कोल आणि बदर हे शब्द 'बोर' (फळ) या अर्थाचे असून 'कोल' हा शब्द स्त्रीलिंगी नाही. पिलक्ख आणि पिप्पली हे शब्द 'पिंपरी' या वृक्षाचे असून 'पिप्पली' हा शब्द स्त्रीलिंगी आहे. पाटली आणि कण्हवन्ता हे शब्द 'पाडळ' या वृक्षाचे आहेत. सादुकण्ट आणि विकङ्कत हे शब्द 'काटेरी बहावा' किंवा 'विकंकत' या वृक्षाचे आहेत. ๕๖๐. ५६०. ตินฺทุโก กาฬกฺขนฺโธ จ, ติมฺพรูสก ติมฺพรู; เอราวโต ตุ นารงฺโค, กุลโก กากตินฺทุโก. तिन्दुक, काळक्खन्ध, तिम्बरूसक आणि तिम्बरू हे शब्द 'टेंभुर्णी' (टेंभू) या वृक्षाचे आहेत. एरावत आणि नारङ्ग हे शब्द 'संत्र्याचे झाड' या अर्थाचे आहेत. कुलक आणि काकतिन्दुक हे शब्द 'काजरा' (कुचला) या वृक्षाचे आहेत. ๕๖๑. ५६१. กทมฺโพ ปิยโก นีโป, ภลฺลี ภลฺลาตโก ติสุ; ฌาวุโก ปิจุโล จาถ, ติลโก ขุรโก ภเว. कदम्ब, पियक आणि नीप हे शब्द 'कळंब' (कदंब) या वृक्षाचे आहेत. भल्ली आणि भल्लातक हे शब्द 'बिब्बा' या वृक्षाचे असून तिन्ही लिंगांत वापरले जातात. झावुक आणि पिचल हे शब्द 'झाऊ' या वृक्षाचे आहेत. तिलक आणि खुरक हे शब्द 'तिलक' या वृक्षाचे आहेत. ๕๖๒. ५६२. จิญฺจา จ ตินฺติณี จาถ, คทฺทภณฺโฑ กปีตโน; สาโล’สฺสกณฺโณ สชฺโช ถ,อชฺชุโน กกุโธ ภเว. चिञ्चा आणि तिन्तिणी हे शब्द 'चिंचेचे झाड' या अर्थाचे आहेत. गद्दभण्ड आणि कपीतन हे शब्द 'पारसपिंपळ' या वृक्षाचे आहेत. साल, अस्सकण्ण आणि सज्ज हे शब्द 'साल' या वृक्षाचे आहेत. अज्जुन आणि ककुध हे शब्द 'अर्जुन' या वृक्षाचे आहेत. ๕๖๓. ५६३. นิจุโล มุจลินฺโท จ, นีโป ถ ปิยโก ตถา; อสโน ปีตสาโล ถ,โคลีโส ฌาฏโล ภเว. निचुल आणि मुचलिन्द हे शब्द 'समुद्रफळ' या वृक्षाचे आहेत. नीप आणि पियक हे शब्द 'कदंब' वृक्षाचे आहेत. असन आणि पीतसाल हे शब्द 'असन' (पिळू) या वृक्षाचे आहेत. गोलीस आणि झाटल हे शब्द 'पाडळ' या वृक्षाचे आहेत. ๕๖๔. ५६४. ขีริกา ราชายตนํ, กุมฺภี กุมุทิกา ภเว; ยูโป ตุ กมุโก จาถ, ปฏฺฏิ ลาขาปสาทโน. खीरिका आणि राजायतन हे शब्द 'खिरणी' या वृक्षाचे आहेत. कुम्भी आणि कुमुदिका हे शब्द 'कुंभी' या वृक्षाचे आहेत. यूप आणि कमुक हे शब्द 'सुपारीचे झाड' (पोफळी) या अर्थाचे आहेत. पत्ति आणि लाखापसादन हे शब्द 'लोध्र' या वृक्षाचे आहेत. ๕๖๕. ५६५. อิงฺคุที ตาปสตรุ, ภุชปตฺโต ตุ อาภุชี; ปิจฺฉิลา สิมฺพลี ทฺวีสุ, โรจโน โกฏสิมฺพลี. इङ्गुदी आणि तापसतरु हे शब्द 'हिंगणबेट' (हिंगोट) या वृक्षाचे आहेत. भुजपत्त आणि आभुजी हे शब्द 'भूर्जपत्र' या वृक्षाचे आहेत. पिच्छिला आणि सिम्बली हे शब्द 'शेवरी' (शाल्मली) या वृक्षाचे असून दोन्ही लिंगांत वापरले जातात. रोचन आणि कोटसिम्बली हे शब्द 'काटे शेवरी' या वृक्षाचे आहेत. ๕๖๖. ५६६. ปกิริโย ปูติโก ถ, โรหี โรหิตโก ภเว; เอรณฺโฑ ตุ จ อามณฺโฑ, อถ สตฺตุผลา สมี. पकिरिय आणि पूतिक हे शब्द 'सागरगोटी' या वृक्षाचे आहेत. रोही आणि रोहितक हे शब्द 'रोहिडा' या वृक्षाचे आहेत. एरण्ड आणि आमण्ड हे शब्द 'एरंड' या वनस्पतीचे आहेत. सत्तुफला आणि समी (शमी) हे शब्द 'शमी' या वृक्षाचे आहेत. ๕๖๗. ५६७. นตฺตมาโล กรญฺโช ถ, ขทิโร ทนฺตธาวโน; โสมวกฺโก ตุ กทโร, สลฺโลตุ มทโน ภเว. नक्तमाल आणि करंज (हे करंजाचे पर्याय आहेत); खदिर आणि दंतधावन (हे खैराचे पर्याय आहेत); सोमवक्क आणि कदर (हे पांढऱ्या खैराचे पर्याय आहेत); शल्ल आणि मदन (हे मदनफळाचे पर्याय आहेत). ๕๖๘. ५६८. อถาปิ อินฺทสาโล จ, สลฺลกี ขารโก สิยา; เทวทารุ ภทฺททารุ, จมฺเปยฺโย ตุ จ จมฺปโก. तसेच इंदसाल; सल्लकी आणि खारकी; देवदारु आणि भद्रदारु (हे देवदाराचे पर्याय आहेत); चाफेय्य आणि चंपक (हे चाफ्याचे पर्याय आहेत). ๕๖๙. ५६९. ปนโส กณฺฏกิผโล, อภยา ตุ หรีตกี; อกฺโข วิภีตโก ตีสุ, อมตา’มลกี ติสุ. पणस (फणस) आणि कंटकिफल (हे फणसाचे पर्याय आहेत); अभया आणि हरीतकी (हे हिरड्याचे पर्याय आहेत); अक्ष आणि विभीतक (हे बेहड्याचे पर्याय आहेत); अमृता आणि आमलकी (हे आवळ्याचे पर्याय आहेत). ๕๗๐. ५७०. ลพุโช ลิกุโจ จาถ, กณิกาโร ทุมุปฺปโล; นิมฺโพ’ริฏฺโฐ ปุจิมนฺโท, กรโก ตุ จ ทาฬิโม. लबुज आणि लिकुच (हे वडफळाचे/लकुचाचे पर्याय आहेत); कणिकार आणि दुमुप्पल; निंब, अरिष्ट आणि पुचिमंद (हे कडुनिंबाचे पर्याय आहेत); करक आणि डाळिंब (हे डाळिंबाचे पर्याय आहेत). ๕๗๑. ५७१. สรโล [Pg.48] ปูติกฏฺฐญฺจ, กปิลา ตุ จ สึสปา; สามา ปิยงฺคุ กงฺคุปิ, สิรีโส ตุ จ ภณฺฑิโล. सरळ आणि पूतिकाष्ठ; कपिला आणि शिसवी (शिशपा); शामा, प्रियंगू आणि कांगू; शिरीष आणि भंडिल (हे शिरीषाचे पर्याय आहेत). ๕๗๒. ५७२. โสณโก ทีฆวนฺโต จ,วกุโล ตุ จ เกสโร; กาโกทุมฺพริกา เผคฺคุ, นาโค ตุ นาคมาลิกา. शोणक आणि दीर्घवृंत (हे टेंटूचे पर्याय आहेत); बकुळ आणि केसर (हे बकुळीचे पर्याय आहेत); काकोदुंबरिका आणि फेग्गु (हे रानउंबराचे पर्याय आहेत); नाग आणि नागमालिका (हे नागकेशराचे पर्याय आहेत). ๕๗๓. ५७३. อโสโก วญฺชุโล จาถ, ตกฺการี เวชยนฺติกา; ตาปิญฺโฉ จ ตมาโล ถ, กุฏโช คิริมลฺลิกา. अशोक आणि वंजुळ (हे अशोकाचे पर्याय आहेत); तक्कारी आणि वैजयंतिका (हे ऐरणीचे पर्याय आहेत); तापिंच आणि तमाल (हे तमालपत्राचे पर्याय आहेत); कुटज आणि गिरिमल्लिका (हे कुड्याचे पर्याय आहेत). ๕๗๔. ५७४. อินฺทยโว ผเล ตสฺสา, คฺคิมนฺโถ กณิกา ภเว; นิคุณฺฐิ’ตฺถี สินฺทุวาโร, ติณสุญฺญํ ตุ มลฺลิกา. कुड्याच्या फळाला 'इंद्रजव' म्हणतात; अग्निमनथ आणि कणिका (हे टाकळ्याचे पर्याय आहेत); निर्गुंडी आणि सिंधुवार (हे निर्गुडीचे पर्याय आहेत); तृणशून्य आणि मल्लिका (हे मोगऱ्याचे पर्याय आहेत). ๕๗๕. ५७५. เสผาลิกา นีลิกา ถ, อปฺโผฏา วนมลฺลิกา; พนฺธุโก ชยสุมนํ, ภณฺฑิโก พนฺธุชีวโก. शेफालिका आणि नीलिका (हे पारिजातकाचे पर्याय आहेत); आस्फोटा आणि रानमोगरा; बंधुक, जयसुमन, भंडिक आणि बंधुजीवक (हे दुपारीच्या फुलाचे पर्याय आहेत). ๕๗๖. ५७६. สุมนา ชาติสุมนา, มาลตี ชาติ วสฺสิกี; ยูถิกา มาคธี จาถ, สตฺตลา นวมลฺลิกา. सुमना, जातीसुमना, मालती, जाई आणि वासिका (हे जाईचे पर्याय आहेत); युथिका आणि मागधी (हे जुईचे पर्याय आहेत); सप्तला आणि नवमल्लिका. ๕๗๗. ५७७. วาสนฺตี,ตฺถี อติมุตฺโต, กรวีโร’สฺสมารโก; มาตุลุงฺโค พีชปูโร, อุมฺมตฺโต ตุ จ มาตุโล. वासंती आणि अतिमुक्त (हे माधवीलतेचे पर्याय आहेत); करवीर आणि अश्ममारक (हे कण्हेरीचे पर्याय आहेत); माळुंग आणि बीजपूर (हे महाळुंगाचे पर्याय आहेत); धोत्रा आणि मातुल (हे धोत्र्याचे पर्याय आहेत). ๕๗๘. ५७८. กรมนฺโท สุเสโน จ, กุนฺทํ ตุ มาฆฺย มุจฺจเต; เทวตาโส ตุ ชีมูโต,ถา’มิลาโต มหาสหา. करवंद आणि सुषेण (हे करवंदाचे पर्याय आहेत); कुंद आणि माघ्य (हे कुंदाच्या फुलाचे पर्याय आहेत); देवतास आणि जीमूत; अमिलात आणि महासहा. ๕๗๙. ५७९. อโถ เสเรยฺยโก ทาสี,กึ กิราโต กุรณฺฏโก; อชฺชุโก สิตปณฺณาโส, สมีรโณ ผณิชฺชโก. कोरांटी, दासी, किंकिरात आणि कुरंटक (हे कोरांटीचे पर्याय आहेत); अज्जुका आणि श्वेतपर्णस (हे पांढऱ्या तुळशीचे पर्याय आहेत); समीर आणि फणिज्जक (हे रानतुळशीचे पर्याय आहेत). ๕๘๐. ५८०. ชปา ตุ ชยสุมนํ, กรีโร กกโจ ภเว; รุกฺขาทนี จ วนฺทากา, จิตฺตโก ตฺว’คฺคิสญฺญิโต. जास्वंद आणि जयसुमन (हे जास्वंदीचे पर्याय आहेत); करीर आणि ककच; बांडगूळ आणि वंदाका (हे बांडगुळाचे पर्याय आहेत); चित्रक आणि अग्निसंज्ञित (हे चित्रकाचे पर्याय आहेत). ๕๘๑. ५८१. อกฺโก วิกีรโณ ตสฺมึ,ตฺว’ ฬกฺโก เสตปุปฺผเก; ปูติลตา คโฬจี จ, มุพฺพา มธุรสา ปฺยถ. रुई आणि विकीरण (हे रुईचे पर्याय आहेत), आणि पांढऱ्या फुलांच्या रुईला 'अळक्क' म्हणतात; गुळवेल आणि पूतिलता (हे गुळवेलीचे पर्याय आहेत); मुर्वा आणि मधुरसा (हे मोरवेलीचे पर्याय आहेत). ๕๘๒. ५८२. กปิกจฺฉุ ทุผสฺโส ถ, มญฺชิฏฺฐา วิกสา ภเว; อมฺพฏฺฐา จ ตถา ปาฐา, กฏุกา กฏุโรหิณี. खाजकुइली आणि दुःस्पर्श (हे खाजकुइलीचे पर्याय आहेत); मंजिष्ठा आणि विकसा (हे मंजिष्ठेचे पर्याय आहेत); आंबष्ठा आणि पाठा (हे पाढ्याचे पर्याय आहेत); कटुका आणि कडू रोहिणी (हे कुटकीचे पर्याय आहेत). ๕๘๓. ५८३. อปามคฺโค [Pg.49] เสขริโก, ปิปฺปลี มาคธี มตา; โคกณฺฏโก จ สิงฺฆาโฏ, โกลวลฺลี’ภปิปฺปลี. आघाडा आणि शेखरिक (हे आघाड्याचे पर्याय आहेत); पिंपळी आणि मागधी (हे पिंपळीचे पर्याय आहेत); गोखरु आणि शिंगाडा; कोळवल्ली आणि गजपिंपळी (हे गजपिंपळीचे पर्याय आहेत). ๕๘๔. ५८४. โคโลมี ตุ วจา จาถ, คิริกณฺย’ปราชิตา; สีหปุจฺฉี ปญฺหิปณฺณี, สาลปณฺณี ตุ จ’ตฺถิรา; (จถิรา). गोलोमी आणि वेखंड (हे वेखंडाचे पर्याय आहेत); गोकर्णी आणि अपराजिता (हे गोकर्णीचे पर्याय आहेत); सिंहपुच्छी आणि पिठवण (हे पिठवणीचे पर्याय आहेत); सालवण आणि स्थिरा (हे सालवणीचे पर्याय आहेत). ๕๘๕. ५८५. นิทิทฺธิกา ตุ พฺยคฺฆี จ, อถ นีลี จ นีลินี; ชิญฺชุโก เจว คุญฺชา ถ, สตมูลี สตาวรี. रिंगणी आणि व्याघ्री (हे रिंगणीचे पर्याय आहेत); नीळ आणि नीलिनी (हे निळीचे पर्याय आहेत); गुंज आणि जिंजुक (हे गुंजेचे पर्याय आहेत); शतावरी आणि शतमूली (हे शतावरीचे पर्याय आहेत). ๕๘๖. ५८६. มโหสธํ ตฺว’ติวิสา, พากุจี โสมวลฺลิกา; ทาพฺพี ทารุหลิทฺทา ถ, พิฬงฺคํ จิตฺรตณฺฑุลา. अतिविष आणि महौषध (हे अतिविषाचे पर्याय आहेत); बाकुची आणि सोमवल्ली (हे बाकुचीचे पर्याय आहेत); दारूहळद आणि दावी (हे दारूहळदीचे पर्याय आहेत); वावडिंग आणि चित्रतंडुल (हे वावडिंगाचे पर्याय आहेत). ๕๘๗. ५८७. นุหี เจว มหานาโม, มุทฺทิกา ตุ มธุรสา; อถาปิ มธุกํ ยฏฺฐิ, มธุกามธุยฏฺฐิกา. निवडुंग आणि महानम (हे निवडुंगाचे पर्याय आहेत); द्राक्ष आणि मधुरसा (हे द्राक्षाचे पर्याय आहेत); ज्येष्ठमध, यष्टी, मधुक आणि मधुयष्टी (हे ज्येष्ठमधाचे पर्याय आहेत). ๕๘๘. ५८८. วาติงฺคโณ จ ภณฺฑากี, วาตฺตากี พฺรหตี ปฺยถ; นาคพลา เจว ฌสา, ลางฺคลี ตุ จ สารที. वांगे, भंडाकी, वार्त्ताकी आणि बृहती (हे वांग्याचे व डोरलीचे पर्याय आहेत); नागबला आणि झसा; कळलावी, लांगली आणि शारदी (हे कळलावीचे पर्याय आहेत). ๕๘๙. ५८९. รมฺภา จ กทลี โมโจ, กปฺปาสี พทรา ภเว; นาคลตา ตุ ตมฺพูลี, อคฺคิชาลา ตุ ธาตกี. रंभा, केळी आणि मोच (हे केळीचे पर्याय आहेत); कापूस आणि बोर; नागलता आणि तांबुली (हे विड्याच्या पानाचे पर्याय आहेत); अग्निज्वाला आणि धातकी (हे धायटीचे पर्याय आहेत). ๕๙๐. ५९०. ติวุตา ติปุฏา จาถ, สามา กาฬา จ กถฺยเต; อโถ สิงฺคี จ อุสโภ, เรณุกา กปิฬา ภเว. त्रिवृत, त्रिपुटा, शामा आणि काळा (हे निशोत्तराचे पर्याय आहेत); शृंगी आणि ऋषभ; रेणुका आणि कपिला. ๕๙๑. ५९१. หิริเวรญฺจ วาลญฺจ, รตฺตผลา ตุ พิมฺพิกา; เสเลยฺย’ มสฺมปุปฺผญฺจ, เอลา ตุ พหุลา ภเว. वाळा आणि हिरिवेर (हे वाळ्याचे पर्याय आहेत); तोंडली, बिंबिका आणि रक्तफला (हे तोंडल्याचे पर्याय आहेत); दगडफूल, शैलेय आणि अश्मपुष्प (हे दगडफुलाचे पर्याय आहेत); वेलची, एला आणि बहुला (हे वेलचीचे पर्याय आहेत). ๕๙๒. ५९२. กุฏฺฐญฺจ พฺยาธิ กถิโต, วาเนยฺยํ ตุ กุฏนฺนฏํ; โอสธิ ชาติมตฺตมฺหิ, โอสธํ สพฺพ’ มชาติยํ. कोष्ठ आणि व्याधी (हे कोष्ठाचे पर्याय आहेत); वानेय्य आणि कुटन्नट; केवळ एका जातीच्या वनस्पतीला 'ओषधी' म्हणतात, आणि सर्व प्रकारच्या औषधांना 'औषध' म्हणतात. ๕๙๓. ५९३. มูลํ ปตฺตํ กฬีร’คฺคํ, กนฺทํ มิญฺชา ผลํ ตถา; ตโจ ปุปฺผญฺจ ฉตฺตนฺติ, สากํ ทสวิธํ มตํ. मूळ, पान, कोंब (कळीर), शेंडा (अग्र), कंद, मगज (मिंज), फळ, साल (त्वचा), फूल आणि छत्री (अळिंबी) - हे दहा प्रकारचे शाक (भाज्या) मानले जातात. ๕๙๔. ५९४. ปปุนฺนาโฏ เอฬคโล,ตณฺฑุเลยฺโย’ปฺปมาริโส; ชีวนฺติ ชีวนี จาถ, มธุรโก จ ชีวโก. प्रपुन्नाट आणि एडगज (हे टाकळ्याचे पर्याय आहेत); तांदुळजा, तंडुलीय आणि अल्पमारिष (हे तांदुळजा भाजीचे पर्याय आहेत); जिवंती आणि जीवनी (हे जिवंतीचे पर्याय आहेत); मधुरक आणि जीवक (हे जीवकाचे पर्याय आहेत). ๕๙๕. ५९५. มหากนฺโท จ ลสุณํ, ปลณฺฑุ ตุ สุกนฺทโก; ปโฏโล ติตฺตโก จาถ, ภิงฺคราโช จ มกฺกโว. लसूण आणि महाकंद (हे लसणाचे पर्याय आहेत); कांदा, पलांडू आणि सुकंदक (हे कांद्याचे पर्याय आहेत); पडवळ, पटोल आणि तिक्तक (हे पडवळाचे पर्याय आहेत); माका, भृंगराज आणि मक्कव (हे माक्याचे पर्याय आहेत). ๕๙๖. ५९६. ปุนนฺนวา [Pg.50] โสถฆาตี, วิตุนฺนํ สุนิสณฺณกํ; การเวลฺโล ตุ สุสวี, ตุมฺพฺยา’ลาพุ จ ลาพุ สา. पुनर्नवा आणि सूजघ्न (हे पुनर्नवेचे पर्याय आहेत); वितुन्न आणि सुनिषण्णक (हे चांगेरीचे पर्याय आहेत); कारले, कारवेल्लक आणि सुसवी (हे कारल्याचे पर्याय आहेत); दुधी भोपळा, अलाबु आणि लाबु (हे दुधी भोपळ्याचे पर्याय आहेत). ๕๙๗. ५९७. เอฬาลุกญฺจ กกฺการี, กุมฺภณฺโฑ ตุ จ วลฺลิโภ; อินฺทวารุณี วิสาลา, วตฺถุกํ วตฺถุเลยฺยโก. काकडी, एळालुक आणि कक्कारी (हे काकडीचे पर्याय आहेत); कोहळा, कुष्मांड आणि वल्लीभ (हे कोहळ्याचे पर्याय आहेत); कडू इंद्रावण, इंद्रवारुणी आणि विशाला (हे कडू इंद्रावणाचे पर्याय आहेत); चाकवत, वास्तुक आणि वास्तुलेय्यक (हे चाकवताचे पर्याय आहेत). ๕๙๘. ५९८. มูลโก นิตฺถิยํ จุจฺจุ, ตมฺพโก จ กลมฺพโก; สากเภทา กาสมทฺท, ฌชฺฌรี ผคฺควา’ทโย. मुळा; चुच्चू; तांबक आणि कळंबक; तसेच कासविंदा (कासमर्द), झज्झरी, फग्गव इत्यादी शाकांचे (भाज्यांचे) प्रकार आहेत. ๕๙๙. ५९९. สทฺทโล เจว ทุพฺพา จ, โคโลมี สา สิตา ภเว; คุนฺทา จ ภทฺทมุตฺตญฺจ, รสาโล ตุ’จฺฉุ เวฬุ ตุ. हरळी, दूर्वा आणि शाद्वल (हे हरळीचे पर्याय आहेत), आणि पांढऱ्या हरळीला 'गोलोमी' म्हणतात; गुंदा आणि नागरमोथा (भद्रमुस्त); ऊस आणि रसाळ (हे उसाचे पर्याय आहेत); आणि वेणू (बांबू). ๖๐๐. ६००. ตจสาโร เวณุ วํโส, ปพฺพํ ตุ ผลุ คณฺฐิโส; กีจกา เต สิยุํ เวณู, เย นทนฺตฺยา’นิลทฺธุตา. त्वक्सार, वेणू आणि वंश (हे बांबूचे पर्याय आहेत); पेर, पर्व, फलू आणि गाठ (हे बांबूच्या पेराचे पर्याय आहेत); वाऱ्याच्या वेगाने वाजणाऱ्या बांबूंना 'कीचक' म्हणतात. ๖๐๑. ६०१. นโฬ จ ธมโน โปฏ, คโล ตุ กาส มิตฺถิ น; เตชโน ตุ สโร, มูลํ, ตู’ สีรํ พีรณสฺส หิ. नळ, धमन आणि पोटगल (हे बोरूचे पर्याय आहेत); कास (हा गवत विशेष); सर आणि तेजन (हे बाणाच्या गवताचे पर्याय आहेत); आणि विरण गवताच्या मुळाला 'उशीर' (वाळा) म्हणतात. ๖๐๒. ६०२. กุโส วรหิสํ ทพฺโพ, ภูติณกํ ตุ ภูติณํ; ฆาโส ตุ ยวโส จาถ,ปูโค ตุ กมุโก ภเว. कुश, दर्भ आणि वरहिष (हे कुशाचे पर्याय आहेत); गवती चहा आणि भूस्तृण (हे गवती चहाचे पर्याय आहेत); गवत, घास आणि यवस (हे गवताचे पर्याय आहेत); सुपारी, पूग आणि क्रमुक (हे सुपारीच्या झाडाचे पर्याय आहेत). ๖๐๓. ६०३. ตาโล วิเภทิกา จาถ, ขชฺชุรี สินฺทิ วุจฺจติ; ताड, ताल आणि विभेदिका (हे ताडाच्या झाडाचे पर्याय आहेत); खजूर आणि शिंदी (हे खजुराच्या झाडाचे पर्याय आहेत). ๖๐๔. ६०४. หินฺตาล, ตาล, ขชฺชูรี, นาลิเกรา ตเถว จ; ตาลี จ เกตกี นารี, ปูโค จ ติณปาทปาติ. हिनताल, ताड, खजूर, नारळ, ताली, केतकी (केवडा) आणि सुपारी - या वृक्षांना 'तृणपादप' (एकदल वृक्ष) म्हणतात. อิติ อรญฺญวคฺโค. अशा प्रकारे अरण्यवर्ग समाप्त झाला. ๖. อรญฺญาทิวคฺค ६. अरण्यवर्ग. ๖๐๕. ६०५. ปพฺพโต คิริ เสโล’ทฺทิ, นคา’จล, สิลุจฺจยา; สิขรี ภูธโรถ พฺภ, ปาสาณา’สฺโม’ปโล สิลา. पर्वत, गिरी, सेल (शैल), अद्दि (अद्रि), नग, अचल, सिलुच्चय (शिलोच्चय), शिखरी आणि भूधर हे पर्वताचे समानार्थी शब्द आहेत; तसेच पाषाण, अस्म (अश्म), उपल आणि सिला (शिला) हे दगडाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๐๖. ६०६. คิชฺฌกูโฏ จ เวภาโร, เวปุลฺโล’สิคิลี นคา; วิญฺโฌ ปณฺฑว วงฺกาที, ปุพฺพเสโล ตุ โจ’ทโย; มนฺทโร ปรเสโล’ตฺโถ, หิมวา ตุ หิมาจโล. गिज्झकूट (गृध्रकूट), वेभार, वेपुल्ल, इसिगिली, विंझ (विंध्य), पाण्डव, वंक इत्यादी पर्वत; तसेच पुब्बसेल (पूर्वशैल), उदय, मंदर, परसेल आणि हिमवा (हिमालय) किंवा हिमाचल हे पर्वतांचे प्रकार व नावे आहेत. ๖๐๗. ६०७. คนฺธมาทน เกลาส, จิตฺตกูฏ สุทสฺสนา; กาลกูโฏ ติกูฏา’สฺส, ปตฺโถ ตุ สานุ นิตฺถิยํ. गंधमादन, केलास (कैलास), चित्तकूट, सुदस्सन (सुदर्शन), कालकूट आणि तिकूट हे पर्वत आहेत; तर पठार किंवा पर्वताच्या सपाट भागाला 'पत्थ' आणि 'सानु' म्हणतात. ๖๐๘. ६०८. กูโฏ [Pg.51] วา สิขรํ สิงฺคํ, ปปาโต ตุ ตโฏ ภเว; นิตมฺโพ กฏโก นิตฺถี, นิชฺฌโร ปสโว’มฺพุโน. कूट, शिखर आणि सिंग (शृंग) हे शिखराचे समानार्थी शब्द आहेत; प्रपात आणि तट हे कड्याचे (उताराचे) शब्द आहेत; नितंब आणि कटक हे पर्वताच्या मध्यभागाचे शब्द आहेत; आणि निज्झर (निर्झर) व पसव हे पाण्याच्या प्रवाहाचे (झऱ्याचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๖๐๙. ६०९. ทรี’ตฺถี กนฺทโร ทฺวีสุ, เลณํ ตุ คพฺภรํ คุหา; สิลาโปกฺขรณี โสณฺฑี, กุญฺชํ นิกุญฺช มิตฺถิ น. दरी आणि कंदर हे दरीचे शब्द आहेत; लेण (लेणे), गब्भर (गव्हर) आणि गुहा हे गुहेचे समानार्थी शब्द आहेत; सिलापोक्खरणी (शिलापुष्ककरणी) आणि सोण्डी हे दगडातील नैसर्गिक पाण्याच्या कुंडाचे शब्द आहेत; आणि कुंज व निकुंज हे लताकुंजाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๑๐. ६१०. อุทฺธ มธิจฺจกา เสล, สฺสาสนฺนา ภูมฺยุ ปจฺจกา; ปาโท ตุ’ปนฺตเสโล ถ,ธาตุ’ตฺโต เคริกาทิโก. पर्वताच्या वरच्या सपाट भागाला 'अधिच्चका' (पठार) म्हणतात, पर्वताच्या पायथ्याशी असलेल्या जमिनीला 'उपच्चका' (तळटी) म्हणतात; पर्वताच्या पायथ्याला 'पाद' किंवा 'उपांतसेल' म्हणतात; आणि गेरिक (गैरिक/काव) इत्यादींना 'धातू' म्हणतात. อิติ เสลวคฺโค. येथे पर्वत-वर्ग (सेलवग्गो) समाप्त होतो. ๖๑๑. ६११. มิคินฺโท เกสรี สีโห, ตรจฺโฉ ตุ มิคาทโน; พฺยคฺโฆ ตุ ปุณฺฑรีโก ถ, สทฺทูโล ทีปินี’ริโต. मिगिंद (मृगेन्द्र), केसरी आणि सीह (सिंह) हे सिंहाचे समानार्थी शब्द आहेत; तरच्छ आणि मिगादन हे तरसाचे शब्द आहेत; ब्यग्ध (व्याघ्र), पुंडरीक आणि सद्दूल (शार्दूल) हे वाघाचे शब्द आहेत; आणि दीपी हे बिबट्याचे नाव आहे. ๖๑๒. ६१२. อจฺโฉ อิกฺโก จ อิสฺโส ตุ,กาฬสีโห อิโส ปฺยถ; โรหิโส โรหิโต จาถ,โคกณฺโณ คณิ กณฺฏกา. अच्छ, इक्क आणि इस्स हे अस्वलाचे समानार्थी शब्द आहेत; काळसीह आणि इस हे काळ्या सिंहाचे शब्द आहेत; रोहिस आणि रोहित हे हरिणाच्या जातीचे शब्द आहेत; आणि गोकण्ण (नीलगाय) व गणिकंटक हे प्राण्यांचे प्रकार आहेत. ๖๑๓. ६१३. ขคฺค ขคฺควิสาณา ตุ, ปลาสาโท จ คณฺฑโก; พฺยคฺฆาทิเก วาฬมิโค, สาปโท ถ ปฺลวงฺคโม. खग्ग (खड्ग), खग्गविसाण, पलासाद आणि गंडक हे गेंड्याचे समानार्थी शब्द आहेत; वाघ इत्यादी हिंस्र श्वापदांना 'वाळमिग' (व्याळमृग) आणि 'सापद' (श्वापद) म्हणतात; आणि माकडाला 'प्लवंगम' म्हणतात. ๖๑๔. ६१४. มกฺกโฏ วานโร สาขา, มิโค กปิ วลีมุโข; ปลวงฺโค, กณฺหตุณฺโฑ,โคนงฺคุโล ติ โส มโต. मक्कट (मर्कट), वानर, साखामिग (शाखामृग), कपि, वलीमुख आणि पलवंग हे माकडाचे समानार्थी शब्द आहेत; आणि काळ्या तोंडाच्या माकडाला (लंगूर) 'कण्हतुंड' (कृष्णतुंड) व 'गोनंगुल' म्हणतात. ๖๑๕. ६१५. สิงฺคาโล ชมฺพุโก โกตฺถุ, เภรโว จ สิวา ปฺยถ; พิฬาโร พพฺพุ มญฺชาโร, โกโก ตุ จ วโก ภเว. सिंगाल (शृगाल), जम्बुक, कोत्थु (कोल्हा), भैरव आणि सिवा (शिवा) हे कोल्ह्याचे समानार्थी शब्द आहेत; बिळार (बिडाल), बब्बु आणि मंजार (मांजर) हे मांजराचे शब्द आहेत; आणि कोक व वक (वृक) हे लांडग्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๑๖. ६१६. มหึโส จ ลุลาโย ถ,ควโช ควโย สมา; สลฺโล ตุ สลฺลโก ถา’สฺส,โลมมฺหิ สลลํ สลํ. महिस (महिष) आणि लुलाय हे म्हशीचे समानार्थी शब्द आहेत; गवज आणि गवय हे रानगाईचे शब्द आहेत; सल्ल आणि सल्लकर हे साळूचे (साळिंदर) शब्द आहेत; आणि त्याच्या अंगावरील काट्याला 'सलल' किंवा 'सल' म्हणतात. ๖๑๗. ६१७. หริโณ มิค สารงฺคา, มโค อชินโยนิ จ; สูกโร ตุ วโรโห ถ,เปลโก จ สโส ภเว. हरिण, मिग (मृग), सारंग, मग आणि अजिनयोनी हे हरिणाचे समानार्थी शब्द आहेत; सूकर आणि वराह हे डुकराचे शब्द आहेत; आणि पेलक व सस (शश) हे सशाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๑๘. ६१८. เอเณยฺโย [Pg.52] เอณีมิโค จ, ปมฺปฏโก ตุ ปมฺปโก; วาตมิโค ตุ จลนี, มูสิโก ตฺวา’ขุ อุนฺทุโร. एणेय्य आणि एणीमिग हे काळवीटचे शब्द आहेत; पम्पटक आणि पम्पक हे एका प्रकारच्या हरिणाचे नाव आहे; वातमिग आणि चलनी हे वेगवान हरिणाचे शब्द आहेत; आणि मूसिक (मूषक), आखू व उंदुर (उंदीर) हे उंदराचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๑๙. ६१९. จมโร ปสโท เจว, กุรุงฺโค มิคมาตุกา; รุรุ รงฺกุ จ นีโก จ, สรภาที มิคนฺตรา. चमर (चवरी गाय), पसद (चितळ), कुरुंग आणि मिगमातुका हे हरिणांचे प्रकार आहेत; रुरु, रंकु, नीक आणि सरभ इत्यादी इतर हरिणांच्या जाती आहेत. ๖๒๐. ६२०. ปิยโก จมูรุ กทลี, มิคาที จมฺมโยนโย; มิคา ตุ ปสโว สีหา, ทโย สพฺพจตุปฺปทา. पियक, चमूरू आणि कदली हे चामड्यासाठी प्रसिद्ध असलेले हरिणांचे प्रकार आहेत; मिग (मृग) आणि पसु (पशू) हे प्राण्यांचे सामान्य नाव आहे; सिंह इत्यादी सर्व प्राण्यांना 'चतुष्पाद' (चार पायांचे प्राणी) म्हणतात. ๖๒๑. ६२१. ลูตา ตุ ลูติกา อุณฺณ, นาภิ มกฺกฏโก สิยา; วิจฺฉิโก ตฺวา’ฬิ กถิโต, สรพู ฆรโคฬิกา. लूता, लूतिका, उण्णनाभि आणि मक्कटक हे कोळ्याचे (कोळी कीटक) समानार्थी शब्द आहेत; विच्छिक (वृश्चिक) आणि अळि हे विंचवाचे शब्द आहेत; आणि सरबू व घरगोळिका हे पाळीव पालचे (पाल) समानार्थी शब्द आहेत. ๖๒๒. ६२२. โคธา กุณฺโฑ ปฺยโถ กณฺณ, ชลูกา สตปทฺยถ; กลนฺทโก กาฬกา ถ, นกุโล มงฺคุโส ภเว. गोधा (घोरपड) आणि कुंड हे घोरपडीचे शब्द आहेत; कण्णजलूका (कानगोम) आणि सतपदी (गोम) हे गोमीचे शब्द आहेत; कलंदक आणि काळक हे खारीचे (खारूताई) शब्द आहेत; आणि नकुल व मंगुस (मुंगूस) हे मुंगसाचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๒๓. ६२३. กกณฺฏโก จ สรโฏ, กีโฏ ตุ ปุฬโว กิมิ; ปาณโก จาปฺยโถ อุจฺจา,ลิงฺโค โลมสปาณโก. ककंटक आणि सरट हे सरड्याचे समानार्थी शब्द आहेत; कीटक, पुळव आणि किमी (कृमी) हे किड्याचे शब्द आहेत; पाणक हे लहान जीवाचे नाव आहे; आणि उच्चालिंग व लोमसपाणक हे केसाळ अळीचे (सुरवंट) शब्द आहेत. ๖๒๔. ६२४. วิหงฺโค วิหโค ปกฺขี, วิหงฺคม ขค’ณฺฑชา; สกุโณ จ สกุนฺโต วิ, ปตงฺโค สกุณี ทฺวิโช. विहंग, विहग, पक्खी (पक्षी), विहंगम, खग, अण्डज, सकुण (शकुन), सकुन्त, पतंग, सकुणी आणि द्विज हे सर्व पक्ष्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๒๕. ६२५. วกฺกงฺโค ปตฺตยาโน จ, ปตนฺโต นีฬโช ภเว; ตพฺเภทา วฏฺฏกา ชีว, ญฺชีโว จโกร ติตฺติรา. वक्कंग, पत्तयान, पतंत आणि नीळज हे देखील पक्ष्याचेच शब्द आहेत; त्यांच्या विविध जातींमध्ये वट्टका (लाव्हा पक्षी), जीवंजीव, चकोर आणि तित्तिर (तितर) यांचा समावेश होतो. ๖๒๖. ६२६. สาฬิกา กรวีโก จ, รวิหํโส กุกุตฺถโก; การณฺฑโว จ ปิลโว, โปกฺขรสาตกา’ทโย. साळिका (साळुंखी), करवीक (कोकिळ पक्षी), रविहंस आणि कुकुत्थक; तसेच कारंडव, पिलव आणि पोक्खरसातक (सारस पक्षी) इत्यादी पक्ष्यांचे प्रकार आहेत. ๖๒๗. ६२७. ปตตฺตํ เปขุณํ ปตฺตํ, ปกฺโข ปิญฺฉํ ฉโท ครุ; อณฺฑํ ตุ ปกฺขิพีเช ถ, นีโฬ นิตฺถี กุลาวกํ. पतत्त, पेखुण, पत्त (पत्र), पक्ख (पक्ष), पिंछ (पिच्छ), छद आणि गरु हे पंखाचे (किंवा पिसाचे) समानार्थी शब्द आहेत; अंड आणि पक्खिबीज हे अंड्याचे शब्द आहेत; आणि नीळ (नीड) व कुलावक हे पक्ष्यांच्या घरट्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๒๘. ६२८. สุปณฺณมาตา วินตา, มิถุนํ ถีปุมทฺวยํ; ยุคํ ตุ ยุคลํ ทฺวนฺทํ, ยมกํ ยมลํ ยมํ. सुपर्ण (गरुड) ची माता 'विनता' आहे; स्त्री आणि पुरुषाच्या जोडीला 'मिथुन' किंवा 'थीपुमद्वय' म्हणतात; आणि युग, युगल, द्वंद, यमक, यमल व यम हे जोडीचे (युगुल) समानार्थी शब्द आहेत. ๖๒๙. ६२९. สมูโห คณ สงฺฆาตา, สมุทาโย จ สญฺจโย; สนฺโทโห นิวโห โอโฆ, วิสโร นิกโร จโย. समूह, गण, संघात, समुदाय, संचय, संदोह, निवह, ओघ, विसर, निकर आणि चय हे समूहाचे (किंवा ढिगाचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๖๓๐. ६३०. กาโย ขนฺโธ สมุทโย, ฆฏา สมิติ สํหติ; ราสิ ปุญฺโช สมวาโย, ปูโค ชาตํ กทมฺพกํ. काय, खंध (स्कंध), समुदाय, घटा, समिती, संहती, रासी (राशी), पुंज, समवाय, पूग, जात आणि कदंबक हे देखील समूहाचेच समानार्थी शब्द आहेत. ๖๓๑. ६३१. พฺยูโห [Pg.53] วิตาน คุมฺพา จ, กลาโป ชาล มณฺฑลํ; สมานานํ คโณ วคฺโค,สงฺโฆ สตฺโถ ตุ ชนฺตุนํ. ब्युह (व्यूह), वितान, गुम्ब (गुच्छ), कलाप, जाल आणि मंडल हे समूहाचे शब्द आहेत; समान वस्तू किंवा व्यक्तींच्या समूहाला 'वग्ग' (वर्ग) म्हणतात; आणि प्राण्यांच्या समूहाला 'संघ' किंवा 'सत्थ' (सार्थ/तांडा) म्हणतात. ๖๓๒. ६३२. สชาติกานํ ตุ กุลํ, นิกาโย ตุ สธมฺมินํ; ยูโถ นิตฺถี สชาติย, ติรจฺฉานานมุจฺจเต. एकाच जातीच्या प्राण्यांच्या किंवा व्यक्तींच्या समूहाला 'कुल' म्हणतात; समान धर्म किंवा गुण असलेल्यांच्या समूहाला 'निकाय' म्हणतात; आणि एकाच जातीच्या प्राण्यांच्या (पशूंच्या) कळपाला 'यूथ' म्हणतात. ๖๓๓. ६३३. สุปณฺโณ เวนเตยฺโย จ, ครุโฬ วิหคาธิโป; ปรปุฏฺโฐ ปรภโต, กุณาโล โกกิโล ปิโก. सुपण्ण (सुपर्ण), वेनतेय्य (वैनतेय), गरुळ (गरुड) आणि विहगाधिप हे गरुडाचे समानार्थी शब्द आहेत; आणि परपुट्ठ, परभत, कुणाल, कोकिल व पिक हे कोकिळेचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๓๔. ६३४. โมโร มยูโร วรหี, นีลคีว สิขณฺฑิโน; กลาปี จ สิขี เกกี, จูฬา ตุ จ สิขา ภเว. मोर, मयूर, वरही, नीलगिव (नीलकंठ), सिखण्डी, कलापी, सिखी आणि केकी हे मोराचे समानार्थी शब्द आहेत; आणि मोराच्या डोक्यावरील तुऱ्याला 'चुळा' (चुडा) किंवा 'सिखा' (शिखा) म्हणतात. ๖๓๕. ६३५. สิขณฺโฑ วรหญฺเจว, กลาโป ปิญฺฉ มปฺยถ; จนฺทโก เมจโก จาถ, ฉปฺปโท จ มธุพฺพโต. सिखण्ड, वरह, कलाप आणि पिंछ हे मोराच्या पिसाऱ्याचे समानार्थी शब्द आहेत; चंदक आणि मेचक हे मोराच्या पिसावरील डोळ्यासारख्या भागाचे (चंद्रक) शब्द आहेत; आणि छप्पद (षट्पद) व मधुब्बत (मधुव्रत) हे मधमाशीचे (भ्रमराचे) शब्द आहेत. ๖๓๖. ६३६. มธุลีโห มธุกโร, มธุโป ภมโร อลิ; ปาราวโต กโปโต จ, กกุโฏ จ ปาเรวโต. मंधुलीह, मधुकर, मधुप, भमर (भ्रमर) आणि अलि हे भ्रमराचे (मधमाशीचे) समानार्थी शब्द आहेत; आणि पारावत, कपोत, ककुट व पारेवत हे कबुतराचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๓๗. ६३७. คิชฺโฌ คทฺโธถ กุลโล, เสโน พฺยคฺฆีนโส ปฺยถ; ตพฺเภทา สกุณคฺฆิ’ตฺถี, อาโฏ ทพฺพิมุขทฺวิโช. गिज्झ (गृध्र) आणि गद्ध हे गिधाडाचे शब्द आहेत; कुलल, सेन (शेन/शसक) आणि ब्यग्घीनस हे ससाण्याचे (शिकारी पक्षी) शब्द आहेत; सकुणग्घी ही मादी ससाणा आहे; आणि आट व दब्बिमुख हे चमचासारखी चोच असलेल्या पक्ष्याचे (चमचा चोच) प्रकार आहेत. ๖๓๘. ६३८. อุหุงฺกาโร อุลูโก จ, โกสิโย วายสาริ จ; กาโก ตฺว’ริฏฺโฐ ธงฺโก จ, พลิปุฏฺโฐ จ วายโส. उहुंकार, उलूक, कोसिय (कौशिक) आणि वायसारि हे घुबडाचे समानार्थी शब्द आहेत; आणि काक, अरिट्ठ (अरिष्ट), धंक, बलिपुट्ठ व वायस हे कावळ्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๓๙. ६३९. กาโกโล วนกาโก ถ,ลาโป ลฏุกิกา ปฺยถ; วารโณ หตฺถิลิงฺโค จ, หตฺถิโสณฺฑวิหงฺคโม. काकोल आणि वनकाक हे रानकावळ्याचे शब्द आहेत; लाप आणि लटुकिका हे लाव्हा पक्ष्याचे शब्द आहेत; आणि वारण, हत्थिलिंग व हत्थिसोण्डविहंगम हे हत्तीसारखी सोंड असलेल्या महाकाय पक्ष्याचे प्रकार आहेत. ๖๔๐. ६४०. อุกฺกุโส กุรโร โกล,ฏฺฐิปกฺขิมฺหิ จ กุกฺกุโห; สุโว ตุ กีโร จ สุโก, ตมฺพจูโฬ ตุ กุกฺกุโฏ. उक्कुस आणि कुरर हे कुरर पक्ष्याचे (समुद्री गरुड) शब्द आहेत; कोलट्ठिपक्खी आणि कुक्कुह हे कुक्कुह पक्ष्याचे शब्द आहेत; सुव, कीर आणि सुक (शुक) हे पोपटाचे समानार्थी शब्द आहेत; आणि तम्बचूळ व कुक्कुट हे कोंबड्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๔๑. ६४१. วนกุกฺกุโฏ จ นิชฺชิวฺโห, อถ โกญฺจา จ กุนฺตนี; จกฺกวาโก ตุ จกฺกวฺโห, สารงฺโคตุ จ จาตโก. वनकुक्कुट आणि निज्जीव्ह हे रानकोंबड्याचे शब्द आहेत; कोञ्चा (क्रौंच) आणि कुन्तनी हे क्रौंच पक्ष्याचे शब्द आहेत; चक्कवाक (चक्रवाक) आणि चक्कव्ह हे चक्रवाक पक्ष्याचे शब्द आहेत; आणि सारंग व चातक हे चातक पक्ष्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๔๒. ६४२. ตุลิโย ปกฺขิพิฬาโล,สตปตฺโต ตุ สารโส; พโก ตุ สุกฺกกาโกถ,พลากา วิสกณฺฐิกา. तुलिय आणि पक्खिबिळाल हे वटवाघळाचे शब्द आहेत; सतपत्त आणि सारस हे सारस पक्ष्याचे शब्द आहेत; बक आणि सुक्ककाक हे बगळ्याचे शब्द आहेत; आणि बलाका व विसकंटिका हे पांढऱ्या बगळीचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๔๓. ६४३. โลหปิฏฺโฐ ตถา กงฺโก, ขญฺชรีโฏ ตุ ขญฺชโน; กลวิงฺโก ตุ จาฏโก, ทินฺทิโภ ตุ กิกี ภเว. लोहपिट्ठ आणि कंक हे कंक पक्ष्याचे शब्द आहेत; खंजरीट आणि खंजन हे खंजन पक्ष्याचे शब्द आहेत; कलविंक आणि चाटक हे चिमणीचे शब्द आहेत; आणि दिंडिभ व किकी हे टिटवीचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๔๔. ६४४. กาทมฺโพ [Pg.54] กาฬหํโสถ, สกุนฺโต ภาสปกฺขินิ; ธูมฺยาโฏ ตุ กลิงฺโคถ,ทาตฺยูโห กาฬกณฺฐโก. काळहंस (कादंब, काळहंस); पक्षी (शकुंत, भासपक्खी); भारद्वाज किंवा काळ्या रंगाचा पक्षी (धूम्याट, कलिंग); आणि पाणकोंबडी (दात्युह, काळकंठक). ๖๔๕. ६४५. ขุทฺทาที มกฺขิกาเภทา, ฑํโส ปิงฺคลมกฺขิกา; อาสาฏิกา มกฺขิกาณฺฑํ, ปตงฺโค สลโภ ภเว. लहान माशांचे प्रकार (खुद्दादी); डास किंवा पिंगळमाशी (डंस, पिंगळमक्खिका); माशीचे अंडे (आसाटिका); आणि पतंग किंवा टोळ (पतंगो, सलभो). ๖๔๖. ६४६. สูจิมุโข จ มกโส, จีรี ตุ ฌลฺลิกา ถ จ; ชตุกา ชินปตฺตา ถ, หํโส เสตจฺฉโท ภเว. डास (सूचिमुख, मकस); रातकिडा (चिरी, झल्लिका); वटवाघूळ (जतुका, जिनपत्ता); आणि पांढरा हंस (हंस, सेतच्छद). ๖๔๗. ६४७. เต ราชหํสา รตฺเตหิ, ปาทตุณฺเฑหิ ภาสิตา; มลฺลิกา’ขฺยา ธตรฏฺฐา, มลีเนหฺย’สิเตหิ จ. लाल पाय आणि चोच असलेल्या हंसांना 'राजहंस' म्हणतात; आणि मळकट किंवा काळ्या रंगाच्या हंसांना 'धृतराष्ट्र' व 'मल्लिका' म्हणतात. ๖๔๘. ติรจฺโฉ ตุ ติรจฺฉาโน, ติรจฺฉานคโต สิยาติ. ६४८. प्राण्याला 'तिरच्छ' (तिर्यक), 'तिरच्छान' किंवा 'तिरच्छानगत' असे म्हणतात. อิติ อรญฺญาทิวคฺโค. अशा प्रकारे अरण्य विभाग समाप्त झाला. ๗. ปาตาลวคฺค ७. पाताळवर्ग (पाताळ विभाग). ๖๔๙. ६४९. อโธภุวนํ ปาตาลํ, นาคโลโก รสาตลํ; รนฺธํ ตุ วิวรํ ฉิทฺทํ, กุหรํ สุสิรํ พิลํ. अधोलोक, पाताळ, नागलोक आणि रसातळ (अधोभुवन, पाताळ, नागलोक, रसातळ); आणि छिद्र, विवर, बीळ (रंध, विवर, छिद्र, कुहर, सुसिर, बील). ๖๕๐. ६५०. สุสิ’ตฺถี ฉิคฺคลํ โสพฺภํ, สจฺฉิทฺเท สุสิรํ ติสุ; ถิยํ ตุ กาสุ อาวาโฏ, สปฺปราชา ตุ วาสุกี. खड्डा किंवा छिद्र (सुसी - स्त्रीलिंगी, छिग्गल, सोब्भ); सच्छिद्र (सुसिर - तिन्ही लिंगांत); खड्डा (कासू - स्त्रीलिंगी, आवाटो); आणि सर्पराज वासुकी (सप्पराजा, वासुकी). ๖๕๑. ६५१. อนนฺโต นาคราชา ถ, วาหโส’ชคโร ภเว; โคนโส ตุ ติลิจฺโฉ ถ,เทฑฺฑุโภ ราชุโล ภเว. अनंत नागराज; अजगर (वाहस, अजगर); घोणस (गोणस, तिलिच्छ); आणि दिवड किंवा बिनविषारी साप (डेड्डुभ, राजुल). ๖๕๒. ६५२. กมฺพโล’สฺสตโร เมรุ, ปาเท นาคาถ ธมฺมนี; สิลุตฺโต ฆรสปฺโป ถ, นีลสปฺโป สิลาภุ จ. कंबळ, अस्सतर, मेरु, पाद हे नाग आहेत; तसेच धम्मनी (धामण), सिलुत्त, घरसर्प (घरातील साप), नीलसर्प आणि सिलाभू (हे सापांचे प्रकार आहेत). ๖๕๓. ६५३. อาสิวิโส ภุชงฺโค’หิ, ภุชโค จ ภุชงฺคโม; สรีสโป ผณี สปฺปา, ลคทฺทา โภคิ ปนฺนคา. आसीवीस, भुजंग, अहि, भुजग, भुजंगम, सरीसृप, फणी, सर्प, लगद्द, भोगी आणि पन्नग (हे सर्व सापाचे समानार्थी शब्द आहेत). ๖๕๔. ६५४. ทฺวิชิวฺโห อุรโค วาโฬ, ทีโฆ จ ทีฆปิฏฺฐิโก; ปาทูทโร วิสธโร, โภโค ตุ ผณิโน ตนุ. द्विजिव्ह (दोन जिभा असलेला), उरग, वाळ, दीर्घ, दीर्घपिट्ठिक, पादूदर, विषधर (हे सापाचे समानार्थी शब्द आहेत); आणि 'भोग' म्हणजे फणाधारी सापाचे शरीर होय. ๖๕๕. ६५५. อาสี’ตฺถี [Pg.55] สปฺปทาฐา ถ, นิมฺโมโก กญฺจุโก สมา; วิสํ ตฺว’นิตฺถี ครฬํ, ตพฺเภทา วา หลาหโล. 'आसी' (स्त्रीलिंगी) म्हणजे सापाची दाढ (विषारी दात); 'निम्मोक' आणि 'कंचुक' हे सापाच्या कातीचे समानार्थी शब्द आहेत; 'विस' (नपुंसकलिंगी) आणि 'गरळ' म्हणजे विष, आणि त्याचा एक प्रकार 'हलाहल' आहे. ๖๕๖. ६५६. กาฬกูฏาทโย จาถ, วาฬคฺคาตฺย’หิตุณฺฑิโก; काळकूट इत्यादी (विषाचे प्रकार आहेत); आणि 'वाळग्गाही' व 'अहितुंडिक' म्हणजे गारुडी (साप पकडणारा किंवा खेळवणारा) होय. ๖๕๗. ६५७. นิรโย ทุคฺคติ’ตฺถี จ, นรโก, โส มหา’ฏฺฐธา; สญฺชีโว กาฬสุตฺโต จ, มหาโรรุว โรรุวา; ปตาปโน อวีจิ’ตฺถี, สงฺฆาโต ตาปโน อิติ. 'निरय', 'दुग्गति' (स्त्रीलिंगी) आणि 'नरक' हे नरकाचे समानार्थी शब्द आहेत. तो मुख्यत्वे आठ प्रकारचा आहे: संजीव, काळसुत्त, महारोरुव, रोरुव, पतापन, अवीची (स्त्रीलिंगी), संघात आणि तापन. ๖๕๘. ६५८. ถิยํ เวตรณี โลห, กุมฺภี ตตฺถ ชลาสยา; การณิโก นิรยโป,เนรยิโก ตุ นารโก. तेथील जलाशयांमध्ये 'वेतरणी' (स्त्रीलिंगी) आणि 'लोहकुंभी' यांचा समावेश होतो; 'कारणिक' आणि 'निरयप' म्हणजे यमदूत (नरकाचे रक्षक) आणि 'नेरयिक' व 'नारक' म्हणजे नरकातील प्राणी (नारकी जीव) होत. ๖๕๙. ६५९. อณฺณโว สาคโร สินฺธุ, สมุทฺโท รตนากโร; ชลนิฌุ’ ทธิ, ตสฺส, เภทา ขีรณฺณวาทโย. 'अण्णव', 'सागर', 'सिंधू', 'समुद्र', 'रत्नाकर', 'जलनिधी' आणि 'उदधी' हे समुद्राचे समानार्थी शब्द आहेत; त्याचे क्षीराण्णव (क्षीरसागर) इत्यादी प्रकार आहेत. ๖๖๐. ६६०. เวลา’สฺส กูลเทโส ถ,อาวฏฺโฏ สลิลพฺภโม; เถโว ตุ พินฺทุ ผุสิตํ, ภโม ตุ ชลนิคฺคโม. समुद्राच्या किनारी प्रदेशाला 'वेला' म्हणतात; 'आवट्ट' म्हणजे पाण्याचा भोवरा; 'थेव', 'बिंदू' आणि 'फुसित' म्हणजे पाण्याचा थेंब; आणि 'भम' म्हणजे पाण्याचा निचरा होणारा मार्ग (जलनिर्गम) होय. ๖๖๑. ६६१. อาโป ปโย ชลํ วาริ, ปานียํ สลิลํ ทกํ; อณฺโณ นีรํ วนํ วาลํ, โตยํ อมฺพุ’ทกญฺจ กํ. 'आप', 'पय', 'जल', 'वारि', 'पानीय', 'सलिल', 'दक', 'अण्ण', 'नीर', 'वन', 'वाल', 'तोय', 'अम्बु', 'उदक' आणि 'क' हे पाण्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๖๒. ६६२. ตรงฺโค จ ตถา ภงฺโค, อูมิ วีจิ ปุมิตฺถิยํ; อุลฺโลโล ตุ จ กลฺโลโล, มหาวีจีสุ กถฺยเต. 'तरंग', 'भंग', 'ऊमी' आणि 'वीची' (पुल्लिंगी व स्त्रीलिंगी) हे लाटेचे समानार्थी शब्द आहेत; तर मोठ्या लाटांना 'उल्लोल' आणि 'कल्लोल' म्हटले जाते. ๖๖๓. ६६३. ชมฺพาโล กลลํ ปงฺโก, จิกฺขลฺลํ กทฺทโม ปฺยถ; ปุลินํ วาลุกา วณฺณุ, มรู’รุ สิกตา ภเว. 'जम्बाल', 'कलल', 'पंक', 'चिक्खल्ल' आणि 'कद्दम' हे चिखलाचे समानार्थी शब्द आहेत; तर 'पुलिन', 'वालुका', 'वण्णु', 'मरु', 'उरु' आणि 'सिकता' हे वाळूचे (किंवा वाळवंटाचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๖๖๔. ६६४. อนฺตรีปญฺจ ทีโป วา, ชลมชฺฌคตํ ถลํ; ตีรํ ตุ กูลํ โรธญฺจ, ปตีรญฺจ ตฏํ ติสุ. पाण्याच्या मध्यभागी असलेल्या जमिनीला 'अंतरीप' किंवा 'दीप' (बेट) म्हणतात; आणि 'तीर', 'कूल', 'रोध', 'पतीर' व 'तट' (तिन्ही लिंगांत) हे किनाऱ्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๖๕. ६६५. ปารํ ปรมฺหิ ตีรมฺหิ, โอรํ ตฺว’ปาร มุจฺจเต; อุฬุมฺโป ตุ ปฺลโว กุลฺโล, ตโร จ ปจฺจรี’ตฺถิยํ. पलीकडच्या किनाऱ्याला 'पार' म्हणतात आणि अलीकडच्या किनाऱ्याला 'ओर' (अपार) म्हटले जाते; 'उळुम्प', 'प्लव', 'कुल्ल', 'तर' आणि 'पच्चरी' (स्त्रीलिंगी) हे तराफ्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ๖๖๖. ६६६. ตรณี ตริ นาวา จ, กูปโก ตุ จ กุมฺภกํ; ปจฺฉาพนฺโธ โคฏวิโส, กณฺณธาโร ตุ นาวิโก. 'तरणी', 'तरी' आणि 'नावा' (नाव/होडी) हे नौकेचे समानार्थी शब्द आहेत; 'कूपक' आणि 'कुंभक' म्हणजे डोलकाठी; 'पच्छाबंध' आणि 'गोटविस' म्हणजे सुकाणू; आणि 'कण्णधार' म्हणजे नावाडी (नाविक) होय. ๖๖๗. ६६७. อริตฺตํ เกนิปาโต ถ,โปตวาโห นิยามโก; สํยตฺติกา ตุ นาวาย, วาณิชฺชมาจรนฺติ เย. 'अरित्त' आणि 'केनिपात' म्हणजे वल्हे; 'पोतवाह' आणि 'नियामक' म्हणजे जहाजाचा चालक; आणि जे जहाजाने व्यापार करतात त्यांना 'संयत्तिक' (समुद्री व्यापारी) म्हणतात. ๖๖๘. ६६८. นาวาย’งฺคา’ [Pg.56] ลงฺกาโร จ, วฏากาโร ผิยาทโย; โปโต ปวหนํ วุตฺตํ, โทณิ ตฺวิ’ตฺถี ตถา’มฺพณํ. जहाजाचे अवयव किंवा अलंकार म्हणजे 'वटाकार', 'फिया' इत्यादी होत; 'पोत' आणि 'पवहन' म्हणजे मोठे जहाज; आणि 'दोणी' (स्त्रीलिंगी) व 'अम्बण' म्हणजे लहान होडी (द्रोण) होय. ๖๖๙. ६६९. คภีร นินฺน คมฺภีรา, โถ ตฺตานํ ตพฺพิปกฺขเก; อคาธํ ตฺว’ตลมฺผสฺสํ, อนจฺโฉ กลุสา’วิลา. 'गभीर', 'निम्न' आणि 'गंभीर' म्हणजे खोल; याच्या विरुद्धार्थी शब्द 'उत्तान' (उथळ) हा आहे; 'अगाध' आणि 'अतलमफस्स' म्हणजे अथांग (तळ न लागणारे); आणि 'अनच्छ', 'कलुस' व 'आविल' म्हणजे गढूळ पाणी होय. ๖๗๐. ६७०. อจฺโฉ ปสนฺโน วิมโล, คภีรปฺปภุตี ติสุ; ธีวโร มจฺฉิโก มจฺฉ, พนฺธ เกวฏฺฏ ชาลิกา. 'अच्छ', 'प्रसन्न' आणि 'विमल' म्हणजे स्वच्छ/निर्मळ पाणी; 'गंभीर' इत्यादी शब्द तिन्ही लिंगांत वापरले जातात; 'धीवर', 'मच्छिक', 'मच्छबंध', 'केवट्ट' आणि 'जालिक' हे कोळ्याचे (मासे पकडणाऱ्याचे) समानार्थी शब्द आहेत. ๖๗๑. ६७१. มจฺโฉ มีโน ชลจโร, ปุถุโลโม’มฺพุโช ฌโส; โรหิโต มคฺคุโร สิงฺคี, พลโช มุญฺช ปาวุสา. 'मच्छ', 'मीन', 'जलचर', 'पुथुलोम', 'अम्बुज' आणि 'झस' हे माशाचे समानार्थी शब्द आहेत; तर 'रोहित', 'मग्गुर', 'सिंगी', 'बलज', 'मुंज' आणि 'पावुसा' हे माशांचे विविध प्रकार आहेत. ๖๗๒. ६७२. สตฺตวงฺโก สวงฺโก จ, นฬมีโน จ คณฺฑโก; สุสุกา สผรี มจฺฉ, ปฺปเภทา มกราทโย. 'सत्तवंक', 'सवंक', 'नळमीन', 'गंडक', 'सुसुका', 'सफरी' आणि 'मकर' इत्यादी माशांचे विविध प्रकार व भेद आहेत. ๖๗๓. ६७३. มหามจฺฉา ติมิ ติมิ, งฺคโล ติมิรปิงฺคโล; อานนฺโท ติมินนฺโท จ, อชฺฌาโรโห มหาติมิ. 'तिमी', 'तिमींगल', 'तिमीरपिंगल', 'आनंद', 'तिमीनंद', 'अज्झारोह' आणि 'महातिमी' हे महामच्छ (विशाल मासे) आहेत. ๖๗๔. ६७४. ปาสาณมจฺโฉ ปาฐีโน, วงฺโก ตุ พฬิโส ภเว; สุสุมาโร ตุ กุมฺภีโล,นกฺโก กุมฺโม ตุ กจฺฉโป. 'पासाणमच्छ' आणि 'पाठीन' हे माशांचे प्रकार आहेत; 'वंक' आणि 'बळिस' म्हणजे गळ (मासे पकडण्याचा आकडा); 'सुसुमार', 'कुंभील' आणि 'नक्क' म्हणजे सुसर/मगर; आणि 'कुम्म' व 'कच्छप' म्हणजे कासव होय. ๖๗๕. ६७५. กกฺกฏโก กุฬีโร จ, ชลูกา ตุ จ รตฺตปา; มณฺฑูโก ททฺทุโร เภโก; คณฺฑุปฺปาโท มหีลตา. 'कक्कटक' आणि 'कुळीर' म्हणजे खेकडा; 'जलूका' आणि 'रत्तपा' म्हणजे जळू; 'मंडूक', 'दद्दर' आणि 'भेक' म्हणजे बेडूक; आणि 'गंडुप्पाद' व 'महीलता' म्हणजे गांडूळ होय. ๖๗๖. ६७६. อถ สิปฺปี จ สุตฺติ’ตฺถี, สงฺเข ตุ กมฺพุ’นิตฺถิยํ; ขุทฺทสงฺขฺเย สงฺขนโข, ชลสุตฺติ จ สมฺพุโก. 'सिप्पी' आणि 'सुत्ती' (स्त्रीलिंगी) म्हणजे शिंपला; 'शंख' आणि 'कम्बु' (नपुंसकलिंगी वगळता) म्हणजे शंख; लहान शंखाला 'शंखनख' म्हणतात; आणि 'जलसुत्ती' व 'सम्बुक' म्हणजे गोगलगाय (किंवा शंखधारी जीव) होय. ๖๗๗. ६७७. ชลาสโย ชลาธาโร, คมฺภีโร รหโท ถ จ; อุทปาโน ปานกูโป, ขาตํ โปกฺขรณี’ตฺถิยํ. 'जलाशय' आणि 'जलाधार' हे पाण्याचे साठे आहेत; 'रहद' म्हणजे खोल डोह; 'उदपान' आणि 'पानकूप' म्हणजे विहीर; आणि 'खात' व 'पोक्खरणी' (स्त्रीलिंगी) म्हणजे तळे किंवा पुष्करणी होय. ๖๗๘. ६७८. ตฬาโก จ สโร’นิตฺถี, วาปี จ สรสี’ตฺถิยํ; ทโห’มฺพุชากโร จาถ, ปลฺลลํ ขุทฺทโก สโร. 'तळाक' आणि 'सर' (नपुंसकलिंगी वगळता) म्हणजे तलाव; 'वापी' आणि 'सरसी' (स्त्रीलिंगी) म्हणजे विहीर किंवा सरोवर; 'दह' आणि 'अम्बुजाकर' म्हणजे कमळांचे तळे; आणि 'पल्लल' म्हणजे लहान डबके (किंवा लहान तलाव) होय. ๖๗๙. ६७९. อโนตตฺโต ตถา กณฺณ, มุณฺโฑ จ รถการโก; ฉทฺทนฺโต จ กุณาโล จ, วุตฺตา มนฺทากินี’ตฺถิยํ. 'अनोतत्त', 'कण्णमुण्ड', 'रथकार', 'छद्दन्त', 'कुणाल' आणि 'मंदाकिनी' (स्त्रीलिंगी) असे म्हटले जाते. ๖๘๐. ६८०. ตถา สีหปฺปปาโตติ, เอเต สตฺต มหาสรา; อาหาโว ตุ นิปานญฺจา, ขาตํ ตุ เทวขาตกํ. तसेच 'सीहप्पपात' हे सात महासरोवर (मोठे तलाव) आहेत; 'आहाव' आणि 'निपान' म्हणजे जनावरांना पाणी पिण्याची जागा (पाणपोई/कुंड); आणि 'खात' व 'देवखातक' म्हणजे नैसर्गिक तळे होय. ๖๘๑. ६८१. สวนฺตี [Pg.57] นินฺนคา สินฺธุ, สริตา อาปคา นที; ภาคีรถี ตุ คงฺคา ถ, สมฺเภโท สินฺธุสงฺคโม. 'सवंती', 'निम्नगा', 'सिंधू', 'सरिता', 'आपगा' आणि 'नदी' हे नदीचे समानार्थी शब्द आहेत; 'भागीरथी' आणि 'गंगा' हे गंगेचे समानार्थी शब्द आहेत; आणि 'संभेद' म्हणजे नद्यांचा संगम (सिंधुसंगम) होय. ๖๘๒. ६८२. คงฺคา’จิรวตี เจว, ยมุนา สรภู (สรพู ) มหี; อิมา มหานที ปญฺจ, จนฺทภาคา สรสฺสตี. गंगा, अचिरवती, यमुना, सरभू आणि मही; या पाच महानद्या आहेत, (तसेच) चंद्रभागा आणि सरस्वती. ๖๘๓. ६८३. เนรญฺชรา จ กาเวรี, นมฺมทาที จ นินฺนคา; วาริมคฺโค ปณาลี’ตฺถี, ปุเม จนฺทนิกา ตุ จ. नेरंजरा, कावेरी, नर्मदा इत्यादी नद्या आहेत. पाण्याचा मार्ग (जलमार्ग) आणि पन्हाळी (प्रणालिका) हे स्त्रीलिंगी शब्द आहेत, तर 'चंदनिका' (गढूळ पाण्याचा प्रवाह/नाला) हा पुल्लिंगी शब्द आहे. ๖๘๔. ६८४. ชมฺพาลี โอลิคลฺโล จ, คามทฺวารมฺหิ กาสุยํ; สโรรุหํ สตปตฺตํ, อรวินฺทญฺจ วาริชํ. जम्बाली (चिखलाचा प्रवाह) आणि ओलिगल्ल (गलिच्छ नाला), गावाच्या वेशीवरील खड्डा (कासु); सरोरुह, शतपत्र, अरविंद आणि वारिज (कमळाची नावे). ๖๘๕. ६८५. อนิตฺถี ปทุมํ ปงฺเก, รุหํ นลิน โปกฺขรํ; มุฬาลปุปฺผํ กมลํ, ภิสปุปฺผํ กุเสสยํ. पद्म (नपुंसकलिंगी), पंकेरुह, नलिन, पोखर (पुष्कर), मृणालपुष्प, कमल, बिसपुष्प आणि कुसेशय (हे सर्व कमळाचे समानार्थी शब्द आहेत). ๖๘๖. ६८६. ปุณฺฑรีกํ สิตํ, รตฺตํ, โกกนทํ โกกาสโก; กิญฺชกฺโข เกสโร นิตฺถี, ทณฺโฑ ตุ นาล มุจฺจเต. पुंडरीक (पांढरे कमळ), कोकनद (लाल कमळ) आणि कोकासक; किंजल्क आणि केसर (केशर/परागकण - नपुंसकलिंगी), आणि दांड्याला 'नाल' (कमळदांडा) म्हटले जाते. ๖๘๗. ६८७. ภิสํ มุฬาโล นิตฺถี จ, พีชโกโส ตุ กณฺณิกา; ปทุมาทิสมูเห ตุ, ภเว สณฺฑมนิตฺถิยํ. भिस (कमळ कंद) आणि मृणाल (कमळ देठ - नपुंसकलिंगी), बीजाचा कोष म्हणजे 'कर्णिका' (कमळाची कळी/बीजकोष); आणि कमळांच्या समूहासाठी 'संड' (नपुंसकलिंगी) हा शब्द आहे. ๖๘๘. ६८८. อุปฺปลํ กุวลยญฺจ, นีลํ ตฺวิ’นฺทีวรํ สิยา; เสเตตุ กุมุทญฺจสฺส, กนฺโท สาลูก มุจฺจเต. उत्पल आणि कुवलय (कमळ/कुमुद), निळ्या कमळाला 'इंदीवर' म्हणतात; पांढऱ्या कमळाला 'कुमुद' म्हणतात आणि त्याच्या कंदाला 'शालूक' म्हटले जाते. ๖๘๙. ६८९. โสคนฺธิกํ กลฺลหารํ, ทกสีตลิกํ ปฺยถ; เสวาโล นีลิกา จาถ, ภิสินฺย’มฺพุชินี ภเว. सौगंधिक, कल्हार आणि दकशीतलिक (सुगंधी कमळाचे प्रकार); शेवाळ (सेवाल) आणि नीलिका (शेवाळाचे प्रकार), आणि 'भिसिनी' व 'अंबुजिनी' म्हणजे कमळांचे तळे (कमळिणी). ๖๙๐. เสวาลา ติลพีชญฺจ, สงฺเข จ ปณกาทโยติ. ६९०. शेवाळ, तिळाचे बी, शंख आणि पाणशेवाळ (पणक) इत्यादी. อิติ ปาตาลวคฺโค. येथे 'पाताळवर्ग' समाप्त झाला. ภูกณฺโฑ ทุติโย. दुसरा खंड: 'भूखंड'. ๓. สามญฺญกณฺฑ ३. सामान्यकांड (सामान्य विभाग). ๑. วิเสสฺยาธีนวคฺค १. विशेष्याधीन वर्ग (विशेषणावर आधारित वर्ग). ๖๙๑. ६९१. วิเสสฺยาธีน สํกิณฺณา, เนกตฺเถหฺย’พฺยเยหิ จ; สา’งฺโค’ปางฺเคหิ กถฺยนฺเต, กณฺเฑ วคฺคา อิห กฺกมา. या कांडात (विभागात) विशेष्याधीन, संकीर्ण, अनेकार्थक आणि अव्यय हे वर्ग त्यांच्या अंगा-उपांगांसह क्रमाने सांगितले आहेत. ๖๙๒. ६९२. คุณทพฺพกฺริยาสทฺทา, [Pg.58] สิยุํ สพฺเพ วิเสสนา; วิเสสฺยาธีนภาเวน, วิเสสฺยสมลิงฺคิโน. गुण, द्रव्य आणि क्रिया दर्शवणारे सर्व शब्द 'विशेषण' असतात; विशेष्यावर अवलंबून असल्यामुळे ते विशेष्याप्रमाणेच लिंग धारण करतात. ๖๙๓. ६९३. โสภนํ รุจิรํ สาธุ, มนุญฺญํ จารุ สุนฺทรํ; วคฺคุ มโนรมํ กนฺตํ, หารี มญฺชุ จ เปสลํ. शोभन, रुचिर, साधू, मनुज्ञ (मनोज्ञ), चारू, सुंदर, वग्गु (वल्गु), मनोरम, कांत, हारी, मंजू आणि पेसल (हे सर्व सुंदर किंवा मनमोहक या अर्थाचे शब्द आहेत). ๖๙๔. ६९४. ภทฺทํ วามญฺจ กลฺยาณํ, มนาปํ ลทฺธกํ สุภํ; อุตฺตโม ปวโร เชฏฺโฐ, ปมุขา’นุตฺตโร วโร. भद्र, वाम, कल्याण, मनाप (मनोहर), लद्धक, शुभ (हे चांगल्या अर्थाचे शब्द); आणि उत्तम, प्रवर, जेठ (ज्येष्ठ), प्रमुख, अनुत्तर, वर (हे श्रेष्ठ किंवा मुख्य या अर्थाचे शब्द आहेत). ๖๙๕. ६९५. มุขฺโย ปธานํ ปาโมกฺโข, ปร มคฺคญฺญ มุตฺตรํ; ปณีตํ ปรมํ เสยฺโย, คามณี เสฏฺฐ สตฺตมา. मुख्य, प्रधान, पामोक्ख (प्रमुख), पर, अग्ग (अग्र), अञ्ञ (अन्य/श्रेष्ठ), उत्तर, प्रणीत, परम, सेय्य (श्रेयस), गामणी (ग्रामणी), सेट्ठ (श्रेष्ठ) आणि सत्तम (सर्वोत्तम). ๖๙๖. ६९६. วิสิฏฺฐา’ริย นาเค’โก, สภคฺคา โมกฺข ปุงฺควา; สีห กุญฺชร สทฺทูลา, ที ตุ สมาสคา ปุเม. विशिष्ट, अरिय (आर्य), नाग, एक, सभग्ग, मोक्ख (मुख्य), पुंगव, सिंह, कुंजर आणि सद्दूल (शार्दूल) हे शब्द समासाच्या शेवटी आल्यास 'श्रेष्ठ' या अर्थाने पुल्लिंगात वापरले जातात. ๖๙๗. ६९७. จิตฺต’กฺขิ ปีติชนน, มพฺยาเสก มเสจนํ; อิฏฺฐํ ตุ สุภคํ หชฺชํ, ทยิตํ วลฺลภํ ปิยํ. चित्त आणि डोळ्यांना आनंद देणारे (चित्ताक्षिपीतिजनन), अभ्यासेक, असेचनक (तृप्ती न होणारे/अतिशय सुंदर); आणि इष्ट, सुभग, हज्ज (हृद्य), दयित, वल्लभ, प्रिय (हे आवडत्या किंवा प्रिय गोष्टीचे समानार्थी शब्द आहेत). ๖๙๘. ६९८. ตุจฺฉญฺจ ริตฺตกํ สุญฺญํ, อถา’สารญฺจ เผคฺคุ จ; เมชฺฌํ ปูตํ ปวิตฺโต ถ, อวิรทฺโธ อปณฺณโก. तुच्छ, रित्तक (रिकामा), सुञ्ञ (शून्य); असार, फेग्गु (निःसार); मेज्झ (मेध्य/पवित्र), पूत, पवित्र; आणि अविरुद्ध, अपण्णक (निश्चित/दोषरहित). ๖๙๙. ६९९. อุกฺกฏฺโฐ จ ปกฏฺโฐ ถ, นิหีโน หีน ลามกา; ปติกิฏฺฐํ นิกิฏฺฐญฺจ, อิตฺตรา’วชฺช กุจฺฉิตา. उक्कठ्ठ (उत्कृष्ट) आणि पकठ्ठ (प्रकृष्ट); आणि निहीन, हीन, लामक, प्रतिकिट्ठ (प्रतिकृष्ट), निकिट्ठ (निकृष्ट), इत्तर (इतर/तुच्छ), अवज्ज (अवाच्य/दोषयुक्त) आणि कुच्छित (कुत्सित - हे नीच किंवा हीन या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๐๐. ७००. อธโม’มก คารยฺหา,มลีโน ตุ มลีมโส; พฺรหา มหนฺตํ วิปุลํ, วิสาลํ ปุถุลํ ปุถุ. अधम, ओमक, गारय्ह (गर्हणीय); मलीन आणि मलीमस (मळकट); आणि ब्रहा (बृहत्), महंत (महान), विपुल, विशाल, पुथुल (पृथुल) आणि पुथु (पृथु - हे मोठ्या किंवा विस्तीर्ण या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๐๑. ७०१. ครุ’รุ วิตฺถิณฺณ มโถ, ปีนํ ถูลญฺจ ปีวรํ; ถุลฺลญฺจ วฐรญฺจา ถ, อาจิตํ นิจิตํ ภเว. गरू (गुरू/जड), उरू, वित्थिण्ण (विस्तीर्ण); पीन, थूल (स्थूल), पीवर, थुल्ल आणि वठर (हे जाड किंवा पुष्ट या अर्थाचे शब्द); आणि आचित व निचित (एकत्रित/संचित केलेले). ๗๐๒. ७०२. สพฺพํ สมตฺต มขิลํ, นิขิลํ สกลํ ตถา; นิสฺเสสํ กสิณา’เสสํ, สมคฺคญฺจ อนูนกํ, सब्ब (सर्व), समत्ता (समाप्त/पूर्ण), अखिल, निखिल, सकल, निस्सेस (निःशेष), कसिण (कृत्स्न/संपूर्ण), असेस (अशेष), समग्ग (समग्र) आणि अनूनक (पूर्ण/कमी नसलेले - हे सर्व संपूर्ण या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๐๓. ७०३. ภูริ ปหุตํ ปจุรํ, ภิยฺโย สมฺพหุลํ พหุ; เยภุยฺยํ พหุลํ จาถ, พาหิรํ ปริพาหิรํ. भूरी, पहुत (प्रभूत), प्रचुर, भिय्यो (भूयः/अधिक), संबहुल, बहु, येभुय्य (बहुतांश) आणि बहुल (हे पुष्कळ किंवा अनेक या अर्थाचे शब्द); आणि बाहिर व परिबाहिर (बाह्य/बाहेरचे). ๗๐๔. ७०४. ปโรสตาที เต, เยสํ, ปรํ มตฺตํ สตาทิโต; ปริตฺตํ สุขุมํ ขุทฺทํ, โถก มปฺปํ กิสํ ตนุ. परोसत (शंभराहून अधिक) इत्यादी शब्द; आणि परित्त (मर्यादित/अल्प), सुखुम (सूक्ष्म), खुद्द (क्षुद्र/लहान), थोक (थोडे), अप्प (अल्प), किस (कृश) आणि तनु (बारीक/लहान - हे लहान किंवा थोड्या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๐๕. ७०५. จุลฺลํ มตฺเต’ตฺถิยํ เลส,ลวา’ณุหิ กโณ ปุเม; สมีปํ นิกฏา’สนฺโน, ปกฏฺฐา’ภฺยาส สนฺติกํ. चुल्ल (लहान); लेस (लेश), लव, अणू आणि कण (हे पुल्लिंगी शब्द); आणि समीप, निकट, आसन्न, पकठ्ठ (प्रकृष्ट), अभ्यास आणि संतिक (हे जवळ या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๐๖. ७०६. อวิทูรญฺจ [Pg.59] สามนฺตํ, สนฺนิกฏฺฐ มุปนฺติกํ; สกาสํ อนฺติกํ ญตฺตํ, ทูรํ ตุ วิปฺปกฏฺฐกํ. अवीदूर, सामंत, संनिकठ्ठ (संनिकृष्ट), उपंतिक, सकाश आणि अंतिक (हे जवळ या अर्थाचे शब्द); आणि दूर व विप्पकट्ठक (विप्रकृष्ट - हे दूर या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๐๗. ७०७. นิรนฺตรํ ฆนํ สนฺทํ, วิรฬํ เปลวํ ตนุ; อถา ยตํ ทีฆ มโถ, นิตฺตลํ วฏฺฏ วฏฺฏุลํ. निरंतर, घन, संद (दाट); विरळ, पेलव, तनु (पातळ/नाजूक); आणि आयत, दीघ (दीर्घ/लांब); आणि नित्तल, वट्ट (वर्तुळ) व वट्टुल (गोलाकार). ๗๐๘. ७०८. อุจฺโจ ตุ อุนฺนโต ตุงฺโค, อุทคฺโค เจว อุจฺฉิโต; นีโจ รสฺโส วามโน ถ, อชิมฺโห ปคุโณ อุชุ. उच्च, उन्नत, तुंग, उदग्ग (उदग्र) आणि उच्छित (उच्छ्रित - हे उंच या अर्थाचे शब्द); नीच, रस्स (ऱ्हस्व/लहान) आणि वामन (बुटका); आणि अजिम्ह (सरळ), pगुण (प्रगुण) व उजू (ऋजू/सरळ). ๗๐๙. ७०९. อฬารํ เวลฺลิตํ วงฺกํ, กุฏิลํ ชิมฺห กุญฺจิตํ; ธุโว จ สสฺสโต นิจฺโจ, สทาตน สนนฺตนา. अळार, वेल्लित, वंक (वाकडा), कुटिल, जिम्ह (जिव्हा/वाकडा) आणि कुंचित (हे वाकड्या अर्थाचे शब्द); आणि धुव (ध्रुव), सस्सत (शाश्वत), niच्च (नित्य), सदातन आणि सनातन (हे कायमस्वरूपी किंवा शाश्वत या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๑๐. ७१०. กูฏฏฺโฐ ตฺเว’กรูเปน, กาลพฺยาปี ปกาสิโต; ลหุ สลฺลหุกํ จาถ, สงฺขฺยาตํ คณิตํ มิตํ. कूटट्ठ (कूटस्थ - एकाच रूपात राहणारा), कालव्यापी; लहू (लघु) आणि सल्लहुक (अतिशय हलका); आणि संख्यात, गणित व मित (हे मोजलेले या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๑๑. ७११. ติณฺหํ ตุ ติขิณํ ติพฺพํ, จณฺฑํ อุคฺคํ ขรํ ภเว; ชงฺคมญฺจ จรญฺเจว, ตสํ เญยฺยํ จราจรํ. तिण्ह (तीक्ष्ण), तिखिण, तिब्ब (तीव्र), चंड, उग्ग (उग्र) आणि खर (हे तीक्ष्ण किंवा तीव्र या अर्थाचे शब्द); आणि जंगम, चर, तस (त्रस) व चराचर (हे गतिमान किंवा सजीव या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๑๒. ७१२. กมฺปนํ จลนํ จาถ, อติริตฺโต ตถา’ธิโก; ถาวโร ชงฺคมา อญฺโญ, โลลํ ตุ จญฺจลํ จลํ. कंपन आणि चलन; अतिरित्त (अतिरिक्त) व अधिक; थावर (स्थावर - जंगमच्या विरुद्ध); आणि लोल, चंचल व चल (हे अस्थिर या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๑๓. ७१३. ตรลญฺจ ปุราโณ ตุ, ปุราตน สนนฺตนา; จิรนฺตโน ถ ปจฺจคฺโฆ, นูตโน’ภินโว นโว. तरल; आणि पुराण, पुरातन, सनातन व चिरंतन (हे जुन्या अर्थाचे शब्द); आणि पच्चग्घ (प्रत्यग्र/ताजे), नूतन, अभिनव व नव (हे नवीन या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๑๔. ७१४. กุรูรํ กฐินํ ทฬฺหํ, นิฏฺฐุรํ กกฺขฬํ ภเว; อนิตฺถฺย’นฺโต ปริยนฺโต, ปนฺโต จ ปจฺฉิม’นฺติมา. कुरूर (क्रूर), कठीण, दळ्ह (दृढ), निठ्ठुर (निष्ठुर) आणि कक्खळ (कठोर - हे कठीण किंवा क्रूर या अर्थाचे शब्द); आणि अंत, परियंत (पर्यंत/मर्यादा), पंत (प्रांत/शेवट), पश्चिम आणि अंतिम (हे शेवटच्या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๑๕. ७१५. ชิฆญฺญํ จริมํ ปุพฺพํ, ตฺว’คฺคํ ปฐม มาทิ โส; ปติรูโป นุจฺฉวิกํ, อถ โมฆํ นิรตฺถกํ. जिघञ्ञ (जघन्य/शेवटचा) आणि चरिम (अंतिम); पुब्ब (पूर्व), अग्ग (अग्र), पठम (प्रथम) आणि आदी (हे सुरुवातीच्या अर्थाचे शब्द); प्रतिरूप आणि अनुच्छविक (योग्य/अनुरूप); आणि मोघ व निरर्थक (हे व्यर्थ या अर्थाचे शब्द आहेत). ๗๑๖. ७१६. พฺยตฺตํ ปุฏ ญฺจ มุทุ ตุ, สุกุมารญฺจ โกมลํ; ปจฺจกฺขํ อินฺทฺริยคฺคยฺหํ, อปจฺจกฺขํ อตินฺทฺริยํ. ब्यत्त (व्यक्त) आणि पुट (स्पष्ट); मुदू (मृदू), सुकुमार आणि कोमल; पच्चक्ख (प्रत्यक्ष) व इंद्रियग्गय्ह (इंद्रियग्राह्य); आणि अपच्चक्ख (अप्रत्यक्ष) व अतिंद्रिय. ๗๑๗. ७१७. อิตรา’ญฺญตโร เอโก, อญฺโญ พหุวิโธ ตุ จ; นานารูโป จ วิวิโธ, อพาธํ ตุ นิรคฺคลํ. इतर, अञ्ञतर (अन्यतर), एक आणि अञ्ञ (अन्य); बहुविध, नानारूप आणि विविध; आणि अबाध व निरग्गल (निरर्गल/अडथळामुक्त). ๗๑๘. ७१८. อเถ’กากี จ เอกจฺโจ, เอโก จ เอกโก สมา; สาธารณญฺจ สามญฺญํ, สมฺพาโธ ตุ จ สํกฏํ. एकाकी, एकच्च, एक आणि एकक हे समानार्थी आहेत; साधारण आणि सामान्य (समानार्थी आहेत), तर संबाध आणि संकट (समानार्थी आहेत). ๗๑๙. ७१९. วามํ กเฬวรํ สพฺยํ; อปสพฺยํ ตุ ทกฺขิณํ; ปฏิกูลํ ตฺว’ปสพฺยํ, คหนํ กลิลํ สมา. वाम आणि सव्य म्हणजे डावा; अपसव्य आणि दक्षिण म्हणजे उजवा; प्रतिकूल आणि अपसव्य (विरुद्ध); गहन आणि कलिल हे समान (दाट/दुर्गम) आहेत. ๗๒๐. ७२०. อุจฺจาวจํ [Pg.60] พหุเภทํ, สํกิณฺณา’ กิณฺณ สํกุลา; กตหตฺโถ จ กุสโล, ปวีณา’ภิญฺญ สิกฺขิตา. उच्चावच आणि बहुभेद (विविध प्रकारचे); संकीर्ण, आकीर्ण आणि संकुल (व्याप्त/मिश्रित); कृतहस्त, कुशल, प्रवीण, अभिज्ञ आणि शिक्षित (हे कुशल किंवा निपुण या अर्थाचे आहेत). ๗๒๑. ७२१. นิปุโณ จ ปฏุ เฉโก, จาตุโร ทกฺข เปสลา; พาโล ทตฺตุ ชโล มูฬฺโห, มนฺโท วิญฺญู จ พาลิโส. निपुण, पटू, छेक, चतुर, दक्ष आणि पेशल (हे चतुर/कुशल अर्थाचे आहेत); बाल, दत्तु, जल, मूढ, मंद, अविज्ञ आणि बालिश (हे मूर्ख अर्थाचे आहेत). ๗๒๒. ७२२. ปุญฺญวา สุกตี ธญฺโญ, มหุสฺสาโห มหาธิติ; มหาตณฺโห มหิจฺโฉ ถ, หทยี หทยาลุ จ. पुण्यवान, सुकृती आणि धन्य (भाग्यवान); महोत्साही आणि महाधृती (मोठ्या धैर्याचा); महातृष्ण (महातण्ह) आणि महेच्छ (मोठ्या इच्छेचा); हृदयी आणि दयाळू (सहृदय). ๗๒๓. ७२३. สุมโน หฏฺฐจิตฺโต ถ, ทุมฺมโน วิมโน ปฺยถ; วทานิโย วทญฺญู จ, ทานโสณฺโฑ พหุปฺปโท. सुमन आणि हृष्टचित्त (आनंदी); दुर्मन आणि विमनस्क (उदास); वदान्य, वदंयू, दानशौंड आणि बहुप्रद (उदार दाता). ๗๒๔. ७२४. ขฺยาโต ปตีโต ปญฺญาโต,ภิญฺญาโต ปถิโต สุโต,วิสฺสุโต วิทิโต เจว, ปสิทฺโธ ปากโฏ ภเว. ख्यात, प्रतीत, प्रख्यात (पञ्ञात), अभिज्ञात, पठित, श्रुत (सुत), विश्रुत, विदित, प्रसिद्ध आणि पाकट (प्रकट) हे सर्व प्रसिद्ध या अर्थाचे शब्द आहेत. ๗๒๕. ७२५. อิสฺสโร นายโก สามี, ปตี’สา’ธิปตี ปภู; อยฺยา’ธิปา’ธิภู เนตา,อิพฺโภ ตฺว’ฑฺโฒ ตถา ธนี. ईश्वर, नायक, स्वामी, पती, ईश, अधिपती, प्रभू, अय्य (आर्य), अधिप, अधिभू आणि नेता (हे मालक/प्रमुख अर्थाचे आहेत); इब्भ, आढ्य आणि धनी (हे श्रीमंत अर्थाचे आहेत). ๗๒๖. ७२६. ทานารโห ทกฺขิเณยฺโย, สินิทฺโธ ตุ จ วจฺฉโล; ปริกฺขโก การณิโก,อาสตฺโต ตุ จ ตปฺปโร. दानार्ह आणि दक्षिण्य (दानास पात्र); स्निग्ध आणि वत्सल (प्रेमळ); परीक्षक आणि कारुणिक (कारण शोधणारा/परीक्षक); आसक्त आणि तत्पर (मग्न असणारा). ๗๒๗. ७२७. การุณิโก ทยาลุปิ, สูรโต อุสฺสุโก ตุ จ; อิฏฺฐตฺเถ อุยฺยุโต จาถ, ทีฆสุตฺโต จิรกฺริโย. कारुणिक आणि दयाळू; सुरत (सौम्य) आणि उत्सुक; इष्ट कार्यात उद्युक्त असलेला; दीर्घसूत्री आणि चिरक्रिय (काम रेंगाळत ठेवणारा). ๗๒๘. ७२८. ปราธีโน ปรายตฺโต, อายตฺโต ตุ จ สนฺตโก; ปริคฺคโห อธีโน จ, สจฺฉนฺโท ตุ จ เสรินิ. पराधीन, परायत्त, आयत्त, संतक, परिग्रह आणि अधीन (हे दुसऱ्याच्या ताब्यातील किंवा परावलंबी या अर्थाचे आहेत); स्वच्छंदी आणि स्वैरिणी (हे स्वतंत्र किंवा स्वैराचारी या अर्थाचे आहेत). ๗๒๙. ७२९. อนิสมฺมการี ชมฺโม, อติตณฺโห ตุ โลลุโป; คิทฺโธ ตุ ลุทฺโธ โลโล ถ,กุณฺโฐ มนฺโท กฺริยาสุ หิ. अविचारी (विचार न करता काम करणारा) आणि जम्म (नीच); अतितृष्ण, लोलुप, गृद्ध, लुब्ध आणि लोल (हे अतिशय लोभी या अर्थाचे आहेत); कुंठ आणि क्रियांमध्ये मंद असलेला (हे मंद किंवा अकार्यक्षम अर्थाचे आहेत). ๗๓๐. ७३०. กามยิตา ตุ กมิตา, กามโน กามิ กามุโก; โสณฺโฑ มตฺโต วิเธยฺโย ตุ,อสฺสโว สุพฺพโจ สมา. कामयिता, कमिता, कामन, कामी आणि कामुक (हे कामुक किंवा इच्छिणाऱ्या अर्थाचे आहेत); शौंड आणि मत्त (हे व्यसनी किंवा धुंद अर्थाचे आहेत); विधेय, अस्सव (आज्ञाधारक) आणि सुवच (हे आज्ञाधारक अर्थाचे आहेत). ๗๓๑. ७३१. ปคพฺโภ [Pg.61] ปฏิภายุตฺโต, ภีสีโล ภีรุ ภีรุโก; อธีโร กาตโร จาถ,หึสาสีโล จ ฆาตุโก. प्रगल्भ (धिटाई असलेला) आणि प्रतिभायुक्त; भीशील, भीरू, भीरुक, अधीर आणि कातर (हे भित्रा या अर्थाचे आहेत); हिंसाशील आणि घातुक (हे हिंसक अर्थाचे आहेत). ๗๓๒. ७३२. โกธโน โรสโน โกปี,จณฺโฑ ตฺวจฺจนฺตโกธโน; สหโน ขมโน ขนฺตา, ติติกฺขวา จ ขนฺติมา. क्रोधन, रोषण आणि कोपी (हे क्रोधी अर्थाचे आहेत); चंड आणि अत्यंतक्रोधन (अतिशय रागीट); सहन, खमण, खन्ता, तितिक्षावान आणि क्षंतिमान (हे सहनशील अर्थाचे आहेत). ๗๓๓. ७३३. สทฺธายุตฺโต ตุ สทฺธาลุ, ธชวา ตุ ธชาลุ จ ; นิทฺทาลุ นิทฺทาสีโล ถ, ภสฺสโร ภาสุโร ภเว. श्रद्धावान आणि श्रद्धालु; ध्वजवान आणि ध्वजालू; निद्रालू आणि निद्राशील (झोपाळू); भास्वर आणि भासूर (तेजस्वी). ๗๓๔. ७३४. นคฺโค ทิคมฺพโร’วตฺโถ, ฆสฺมโร ตุ จ ภกฺขโก; เอฬมูโค ตุ วตฺตุญฺจ, โสตุํ จา’กุสโล ภเว. नग्न, दिगंबर आणि अवस्त्र (वस्त्रहीन); घस्मर आणि भक्षक (खादाड); एळमूक म्हणजे जो बोलण्यात आणि ऐकण्यात अकुशल (बधिर व मुका) असतो. ๗๓๕. ७३५. มุขโร ทุมฺมุขา’พทฺธ, มุขา จาปฺปิยวาทินิ; วาจาโล พหุคารยฺห, วเจ วตฺตา ตุ โส วโท. मुखर, दुर्मुख, अबद्धमुख आणि अप्रियवादिनी (हे वाईट किंवा अप्रिय बोलणाऱ्या अर्थाचे आहेत); वाचाळ, बहुगर्ह्यवच (निंद्य बोलणारा) आणि सुवद (हे वाचाळ अर्थाचे आहेत). ๗๓๖. ७३६. นิโช สโก อตฺตนิโย,วิมฺหโย’จฺฉริย’พฺภุโต; วิหตฺโถ พฺยากุโล จาถ,อาตตายี วธุทฺยโต. निज, स्वक आणि आत्पनीय (स्वतःचा); विस्मय, आश्चर्य आणि अद्भुत; विहस्त आणि व्याकुळ; आततायी आणि वधोद्यत (मारण्यास प्रवृत्त झालेला). ๗๓๗. ७३७. สีสจฺเฉชฺชมฺหิ วชฺโฌ ถ, นิกโต จ สโฐ’นุชุ; สูจโก ปิสุโณ กณฺเณ,ชโป ธุตฺโต ตุ วญฺจโก. शिरच्छेदास पात्र असलेला वध्य; निकत (कपटी), शठ आणि अनृजू (कुटिल); सूचक, पिशुन आणि कर्णेजप (चहाडखोर); धूर्त आणि वंचक (फसवणारा). ๗๓๘. ७३८. อนิสมฺม หิ โย กิจฺจํ, ปุริโส วธพนฺธนาทิ มาจรติ; อวินิจฺฉิตการิตฺตา, โสขลุ จปโลติ วิญฺเญยฺโย. जो मनुष्य विचार न करता वध, बंधन इत्यादी कृत्ये करतो, त्या अविचारीपणे कार्य करणाऱ्याला 'चपळ' (घाईगडबडीचा किंवा चंचल) समजावे. ๗๓๙. ७३९. ขุทฺโท กทริโย ถทฺธ, มจฺฉรี กปโณ ปฺยถ; อกิญฺจโน ทลิทฺโท จ, ทีโน นิทฺธน ทุคฺคตา. क्षुद्र, कदर्य (कंजूष), स्तब्ध (कठोर), मत्सरी आणि कृपण (हे कंजूष अर्थाचे आहेत); अकिंचन, दरिद्री, दीन, निर्धन आणि दुर्गत (हे गरीब अर्थाचे आहेत). ๗๔๐. ७४०. อสมฺภาวิตสมฺปตฺตํ, กากตาลิย มุจฺจเต; อถ ยาจนโก อตฺถี, ยาจโก จ วนิพฺพโก. अनपेक्षितपणे प्राप्त झालेल्या गोष्टीला 'काकतालीय' (योगायोग) म्हटले जाते; तसेच याचनक, अर्थी, याचक आणि वनिब्बक (हे याचक किंवा भिकारी या अर्थाचे आहेत). ๗๔๑. ७४१. อณฺฑชา ปกฺขิสปฺปาที, นราที ตุ ชลาพุชา; เสทชา กิมิฑํสาที, เทวาที ตฺโว’ ปปาติกา. पक्षी, सर्प इत्यादी 'अंडज' (अंड्यातून जन्माला येणारे) आहेत; मनुष्य इत्यादी 'जलाबूज' (जरायुज - गर्भाशयातून जन्माला येणारे) आहेत; किडे, डास इत्यादी 'स्वेदज' (घामातून/दमटपणातून जन्माला येणारे) आहेत; आणि देव इत्यादी 'औपपातिक' (स्वयंभू उत्पन्न होणारे) आहेत. ๗๔๒. ७४२. ชณฺณุตคฺโฆ [Pg.62] ชณฺณุมตฺโต, กปฺโป ตุ กิญฺจิทูนเก; อนฺตคฺคตํ ภุ ปริยา, ปนฺน มนฺโตคโธ’คธา. जण्णुतघ्न आणि जण्णुमत्त (गुडघ्याइतका); कल्प म्हणजे थोडा कमी असलेला; अंतर्गत, पर्यापन्न, अंतोगध आणि ओगध (हे समाविष्ट किंवा आत असलेल्या अर्थाचे आहेत). ๗๔๓. ७४३. ราธิโต สาธิโต จาถ, นิปฺปกฺกํ กุถิตํ ภเว; อาปนฺโน ตฺวา’ปทปฺปตฺโต, วิวโส ตฺววโส ภเว. राधित आणि साधित (सिद्ध झालेले); निष्पक्व आणि कुथित (कुजलेले/उकळलेले); आपन्न आणि आपद्प्राप्त (संकटात सापडलेला); विवश आणि अवश (अगतिक/परवश). ๗๔๔. ७४४. นุณฺโณ นุตฺตา’ตฺต, ขิตฺตา เจ’, ริตา วิทฺธา ถ กมฺปิโต; ธูโต อาธูต จลิตา, นิสิตํ ตุ จ เตชิตํ. नुण्ण, नुत्त, आत्त, क्षिप्त आणि ईरित (फेकलेले/प्रेरित केलेले); विद्ध (टोचलेले); कंपित, धूत, आधूत आणि चलित (थरथरणारे/हलवलेले); निशित आणि तेजित (तीक्ष्ण केलेले). ๗๔๕. ७४५. ปตฺตพฺพํ คมฺม มาปชฺชํ, ปกฺกํ ปริณตํ สมา; เวฐิตํ ตุ วลยิตํ, รุทฺธํ สํวุต มาวุตํ. प्राप्तव्य, गम्य आणि आपद्य (मिळवण्याजोगे); पक्व आणि परिणत (पिकलेले/परिपक्व); वेष्टित आणि वलयित (गुंडाळलेले); रुद्ध, संवृत आणि आवृत (रोखलेले/झाकलेले). ๗๔๖. ७४६. ปริกฺขิตฺตญฺจ นิวุตํ, วิสฏํ วิตฺถตํ ตตํ; ลิตฺโต ตุ ทิทฺโธ คูฬฺโห ตุ,คุตฺโต ปุฏฺโฐ ตุ โปสิโต. परिक्षिप्त आणि निवृत (वेढलेले/झाकलेले); विसृत, विस्तृत आणि तत (पसरलेले); लिप्त आणि दिग्ध (माखलेले); गूढ आणि गुप्त (लपवलेले/सुरक्षित); पुष्ट आणि पोषित (पोषण केलेले). ๗๔๗. ७४७. ลชฺชิโต หีฬิโต จาถ, สนิตํ ธนิตํ ปฺยถ; สนฺทานิโต สิโต พทฺโธ,กีลิโต สํยโต ภเว. लज्जित आणि हीळित (लाजलेला/तिरस्कृत); सनित आणि धनित (ध्वनित झालेला); संदानित, सित, बद्ध, कीलित आणि संयत (बांधलेला/नियंत्रित). ๗๔๘. ७४८. สิทฺเธ นิปฺผนฺน นิพฺพตฺตา, ทาริเต ภินฺน เภทิตา; ฉนฺโน ตุ ฉาทิเต จาถ, วิทฺเธ ฉิทฺทิต เวธิตา. सिद्ध, निष्पन्न आणि निर्वृत्त (तयार झालेले/उत्पन्न झालेले); दारित, भिन्न आणि भेदित (फाडलेले/तुकडे केलेले); छन्न आणि छादित (झाकलेले); विद्ध, छिद्रित आणि वेधित (टोचलेले/छिद्र पाडलेले). ๗๔๙. ७४९. อาหโฏ อาภตา’นีตา,ทนฺโต ตุ ทมิโต สิยา; สนฺโต ตุ สมิโต เจว,ปุณฺโณ ตุ ปูริโต ภเว. आहत, आभृत आणि आणित (आणलेले); दांत आणि दमित (संयमित/वश केलेले); शांत आणि शमित (शांत झालेले); पूर्ण आणि पूरित (भरलेले). ๗๕๐. ७५०. อปจายิโต มหิโต, ปูชิตา’รหิโต’จฺจิโต; มานิโต จา’ปจิโต จ, ตจฺฉิตํ ตุตนูกเต. अपचायित, महित, पूजित, अर्हित, अर्चित, मानित आणि अपचित (हे पूजनीय किंवा सन्मानित अर्थाचे आहेत); तच्छित (तक्षित) म्हणजे बारीक किंवा पातळ केलेले. ๗๕๑. ७५१. สนฺตตฺโต ธูปิโต โจป,จริโต ตุ อุปาสิโต; ภฏฺฐํ ตุ คลิตํ ปนฺนํ, จุตญฺจ ธํสิตํ ภเว. संतप्त, धूपित, उपचरित आणि उपासित (हे सेवा केलेले किंवा तप्त अर्थाचे आहेत); भ्रष्ट, गलित, पन्न (पडलेले), च्युत आणि ध्वस्त (हे गळून पडलेले या अर्थाचे आहेत). ๗๕๒. ७५२. ปีโต ปมุทิโต หฏฺโฐ,มตฺโต ตุฏฺโฐ ถ กนฺติโต; สญฺฉินฺโน ลูน ทาตา ถ,ปสตฺโถ วณฺณิโต ถุโต. प्रीत, प्रमुदित, हृष्ट, मत्त (आनंदित), तुष्ट आणि कांतित (हे आनंदी अर्थाचे आहेत); संछिन्न, लून आणि दात (हे कापलेले या अर्थाचे आहेत); प्रशस्त, वर्णित आणि स्तुत (हे स्तुती केलेले या अर्थाचे आहेत). ๗๕๓. ७५३. ตินฺโต’ลฺล’ทฺท [Pg.63] กิลินฺโน’นฺนา, มคฺคิตํ ปริเยสิตํ; อนฺเวสิตํ คเวสิตํ, ลทฺธํ ตุ ปตฺต มุจฺจเต. तिंत, उल्ल, आर्द्र, क्लिन्न आणि उन्न (हे ओले किंवा ओलेचिंब अर्थाचे आहेत); मार्गित, पर्येषित, अन्वेषित आणि गवेषित (हे शोधलेले या अर्थाचे आहेत); लब्ध आणि प्राप्त (हे मिळालेले या अर्थाचे आहेत). ๗๕๔. ७५४. รกฺขิตํ โคปิตํ คุตฺตํ, ตาตํ โคปายิตา’วิตา; ปาลิตํ อถ โอสฺสฏฺฐํ, จตฺตํ หีนํ สมุชฺฌิตํ. रक्षित, गोपित, गुप्त, तात, गोपायित, अवित आणि पालित (हे रक्षण केलेले या अर्थाचे आहेत); ओस्सट्ठ, चत्त (त्यक्त), हीन आणि समुज्झित (हे सोडलेले किंवा त्यागलेले या अर्थाचे आहेत). ๗๕๕. ७५५. ภาสิตํ ลปิตํ วุตฺตา, ภิหิตา’ขฺยาต ชปฺปิตา; อุทีริตญฺจ กถิตํ, คทิตํ ภณิโต’ทิตา. भाषित, लपित, वृत्त (उक्त), अभिहित, आख्यात, जल्पित, उदीरित, कथित, गदित, bhannit आणि उदित हे सर्व बोललेले किंवा सांगितले या अर्थाचे शब्द आहेत. ๗๕๖. ७५६. อวญฺญาตา’วคณิตา, ปริภูตา’วมานิตา; ชิฆจฺฉิโต ตุ ขุทิโต,ฉาโต เจว พุภุกฺขิโต. अवज्ञात, अवगणित, परिभूत आणि अवमानित (हे अपमानित किंवा दुर्लक्षित अर्थाचे आहेत); जिघत्सित, क्षुधित, छात आणि बुभुक्षित (हे भुकेलेला या अर्थाचे आहेत). ๗๕๗. ७५७. พุทฺธํ ญาตํ ปฏิปนฺนํ, วิทิตา’วคตํ มตํ; คิลิโต ขาทิโต ภุตฺโต,ภกฺขิโต’ชฺโฌหฏา’สิตา. बुद्ध (ज्ञात), ज्ञात, प्रतिपन्न, विदित, अवगत आणि मत (हे समजलेले किंवा ज्ञात अर्थाचे आहेत); गिलित, खादित, भुक्त, भक्षित, अज्झोहत (गिळलेले) आणि अशित (हे खाल्लेले या अर्थाचे आहेत). อิติ วิเสสฺยาธีนวคฺโค. अशा प्रकारे विसेसाधीन वर्ग समाप्त झाला. ๒. สํกิณฺณวคฺค २. संकिण्ण वर्ग ๗๕๘. ७५८. เญยฺยํ ลิงฺค มิห กฺวาปิ, ปจฺจยตฺถวเสน จ; กฺริยา ตุ กิริยํ กมฺมํ,สนฺติ ตุ สมโถ สโม; ทโม จ ทมโถ ทนฺติ, วตฺตํ ตุ สุทฺธกมฺมนิ; อโถ อาสงฺควจนํ, ตีสุ วุตฺตํ ปรายณํ. येथे लिंग (व्याकरणिक लिंग) काही ठिकाणी प्रत्ययाच्या अर्थावरून जाणावे. क्रिया, किरिया आणि कम्म (कर्म) हे समानार्थी आहेत. सन्ति, समथ आणि सम हे शांततेचे वाचक आहेत. दम, दमथ आणि दन्ति हे संयमाचे वाचक आहेत; वत्त हे शुद्ध कर्माच्या अर्थात वापरले जाते. तसेच, 'परायण' हा शब्द तिन्ही लिंगांत आसक्ती किंवा आश्रय या अर्थाने वापरला जातो. ๗๕๙. ७५९. เภโท วิทาโร ผุฏนํ, ตปฺปนํ ตุ จ ปีณนํ; อกฺโกสน มภิสงฺโค,ภิกฺขา ตุ ยาจนา’ตฺถนา. भेद, विदार आणि फुटण (विदारण/फुटणे); तप्पण आणि पीणन (तृप्ती/संतोष); अक्कोसन (शिवीगाळ/निंदा) आणि अभिसंग; भिक्खा, याचना आणि अत्थना (मागणी/प्रार्थना) हे समानार्थी आहेत. ๗๖๐. ७६०. นินฺนิมิตฺตํ ยทิจฺฉา ถา’, ปุจฺฉนา นนฺทนานิ จ; สภาชน มโถ ญาโย,นโย ผาติ ตุ วุทฺธิยํ. निन्निमित्त आणि यदिच्छा (आकस्मिक); पुच्छना (विचारणे) आणि नंदना (आनंद); सभाजन (सत्कार/आदर) आणि न्याय; नय आणि फाति हे वृद्धीच्या (वाढ) अर्थात आहेत. ๗๖๑. ७६१. กิลมโถ กิลมนํ, ปสโว ตุ ปสูติยํ; อุกฺกํโส ตฺวติสโย ถ,ชโย จ ชยนํ ชิติ. किलमथ आणि किलमण (थकवा/ग्लानी); पसव हा प्रसूतीच्या (जन्म/उत्पत्ती) अर्थात आहे; उक्कंस आणि अतिसय (उत्कृष्टता/अतिशय); जय, जयन आणि जिती (विजय) हे समानार्थी आहेत. ๗๖๒. ७६२. วโส [Pg.64] กนฺติ, พฺยโธ เวโธ,คโห คาโห วโร วุติ; ปจา ปาโก หโว หุติ,เวโท เวทน มิตฺถิ วา. वस आणि कन्ति (इच्छा/कांती); ब्याध आणि वेध (विंधणे/वेधणे); गह आणि गाह (पकडणे/प्रवेश करणे); वर आणि वुति (वरण/निवड); पचा आणि पाक (शिजणे/परिपक्वता); हव आणि हुति (आवाहन/आहुती); वेद आणि वेदना हे स्त्रीलिंगी शब्द आहेत. ๗๖๓. ७६३. ชีรณํ ชานิ ตาณํ ตุ, รกฺขณํ ปมิติปฺปมา; สิเลโส สนฺธิ จ ขโย,ตฺวปจโย รโว รโณ. जीरण आणि जानि (झीज/हानी); ताण आणि रक्खण (संरक्षण); पमिती आणि पमा (प्रमाण/मोजमाप); सिलेस आणि सन्धि (जोड/संधी); खय आणि अपचय (क्षय/ऱ्हास); रव आणि रण (आवाज/ध्वनी) हे समानार्थी आहेत. ๗๖๔. ७६४. นิคาโท นิคโท มาโท, มโท ปสิติ พนฺธนํ; อากโร ตฺวิงฺคิตํ อิงฺโค,อถ’ตฺถาปคโม พฺยโย. निगाद आणि निगद (भाषण/बोलणे); माद आणि मद (मद/नशा); पसिती आणि बंधन (बांधणे/बंधन); आकार, इंगित आणि इंग (चेष्टा/इशारा); आणि अत्थापगम व ब्यय (व्यय/खर्च/ऱ्हास) हे समानार्थी आहेत. ๗๖๕. ७६५. อนฺตราโย จ ปจฺจูโห,วิกาโร ตุ วิกตฺย’ปิ; ปวิสิเลโส วิธุรํ, อุปเวสนมาสนํ. अंतराय आणि पच्चूह (अडथळा/विघ्न); विकार आणि विकती (बदल/विकृती); पविसीलेस आणि विधुर (वियोग/विरह); उपवेसन आणि आसन (बसणे/आसन) हे समानार्थी आहेत. ๗๖๖. ७६६. อชฺฌาสโย อธิปฺปาโย, อาสโย จาภิสนฺธิ จ; ภาโว ธิมุตฺติ ฉนฺโท ถ,โทโส อาทีนโว ภเว. अज्झासय, अधिप्पाय, आसय आणि अभिसन्धि (आशय/अभिप्राय/हेतू); भाव, अधिमुत्ती आणि छंद (इच्छा/अधिमुक्ती); दोस आणि आदीनव (दोष/दुष्परिणाम) हे समानार्थी आहेत. ๗๖๗. ७६७. อานิสํโส คุโณ จาถ,มชฺฌํ เวมชฺฌ มุจฺจเต; มชฺฌนฺหิโก ตุ มชฺฌนฺโห, เวมตฺตํ ตุ จ นานตา. आनिसंस आणि गुण (फायदा/गुण); मज्झ आणि वेमज्झ (मध्य/मध्यभाग); मज्झन्हिक आणि मज्झन्ह (दुपार/मध्यान्ह); वेमत्त आणि नानता (भिन्नता/विविधता) हे समानार्थी आहेत. ๗๖๘. ७६८. วา ชาคโร ชาคริยํ, ปวาโห ตุ ปวตฺติ จ; พฺยาโส ปปญฺโจ วิตฺถาโร,ยาโม ตุ สํยโม ยโม. जागर आणि जागरिय (जागृत राहणे); पवाह आणि पवित्ती (प्रवाह/प्रवृत्ती); ब्यास, प्रपंच आणि वित्थार (विस्तार/प्रपंच); याम, संयम आणि यम (संयम/नियंत्रण) हे समानार्थी आहेत. ๗๖๙. ७६९. สมฺพาหนํ มทฺทนญฺจ, ปสโร ตุ วิสปฺปนํ; สนฺถโว ตุ ปริจโย,เมลโก สงฺค สงฺคมา. संबाहन आणि मद्दल (मसाज/मर्दन); पसर आणि विसप्पन (प्रसार/पसरणे); संथव आणि परिचय (परिचय/मैत्री); मेलक, संग आणि संगम (मेळावा/एकत्र येणे) हे समानार्थी आहेत. ๗๗๐. ७७०. สนฺนิธิ สนฺนิกฏฺฐมฺหิ, วินาโส ตุ อทสฺสนํ; ลโว ภิลาโว ลวนํ,ปตฺถาโว’วสโร สมา. सन्निधि हा सन्निकठ्ठ (जवळ असणे) या अर्थात आहे; विनास आणि अदस्सन (विनाश/अदृश्य होणे); लव, भिलाव आणि लवन (कापणी/लवण); पत्थाव आणि अवसर (प्रसंग/संधी) हे समानार्थी आहेत. ๗๗๑. ७७१. โอสานํ [Pg.65] ปริโยสานํ, อุกฺกํโส’ติสโย ภเว ; สนฺนิเวโส จ สณฺฐานํ, อถา’พฺภนฺตร มนฺตรํ. ओसान आणि परियोसान (अंत/समाप्ती); उक्कंस आणि अतिसय (उत्कृष्टता/अतिशय); सन्निवेस आणि संठान (रचना/आकार); आणि अब्भन्तर व अन्तर (आत/अंतर्भाग) हे समानार्थी आहेत. ๗๗๒. ७७२. ปาฏิหีรํ ปาฏิเหรํ, ปาฏิหาริย มุจฺจเต; กิจฺจํ ตุ กรณียญฺจ, สงฺขาโร วาสนา ภเว. पाटिहीर, पाटिहेर आणि पाटिहारिय (प्रातिहार्य/चमत्कार) म्हटले जाते; किच्च आणि करणीय (कर्तव्य/कार्य); संखार आणि वासना (संस्कार/वासना) हे समानार्थी आहेत. ๗๗๓. ७७३. ปวนํ ปว นิปฺปาวา, ตสโร สุตฺตเวฐนํ; สงฺกโม ทุคฺคสญฺจาโร, ปกฺกโม ตุ อุปกฺกโม. पवन, पव आणि निप्पाव (पाखडणे/स्वच्छ करणे); तसर आणि सुत्तवेठन (हातमागाचे धोटे/सूत गुंडाळणे); संकम आणि दुग्गसंचार (कठीण मार्ग/पूल); पक्कम आणि उपक्कम (प्रस्थान/उपक्रम) हे समानार्थी आहेत. ๗๗๔. ७७४. ปาโฐ นิปาโฐ นิปโฐ, วิจโย มคฺคนา ปุเม; อาลิงฺคนํ ปริสฺสงฺโค, สิเลโส อุปคูหนํ. पाठ, niपाठ आणि निपठ (वाचन/पठण); विचय आणि मग्गना (शोध/संशोधन) हे पुल्लिंगी शब्द आहेत; आलिंगन, परिस्सङ्ग, सिलेस आणि उपगूहण (आलिंगन देणे/मिठी मारणे) हे समानार्थी आहेत. ๗๗๕. ७७५. อาโลกนญฺจ นิชฺฌานํ, อิกฺขณํ ทสฺสนํ ปฺยถ; ปจฺจาเทโส นิรสนํ, ปจฺจกฺขานํ นิรากติ. आलोकन, निज्झान, इक्खण आणि दस्सन (पाहणे/दर्शन); पच्चादेस, निरसन, पच्चक्खान आणि निराकति (नकार/प्रत्याख्यान) हे समानार्थी आहेत. ๗๗๖. ७७६. วิปลฺลาโส’ญฺญถาภาโว, พฺยตฺตโย วิปรียโย; วิปริยาโส’ติกฺกโม, ตฺว’ติปาโต อุปจฺจโย. विपल्लास, अञ्ञथाभाव, ब्यत्तय आणि विपरीयय (विपर्यास/बदल); विपरियास आणि अतिक्कम (उल्लंघन/अतिक्रमण); अतिपात आणि उपच्चय (अतिपात/अतिक्रमण) हे समानार्थी आहेत. อิติ สํกิณฺณวคฺโค. इति संकिण्ण वर्ग. ๓. อเนกตฺถวคฺค ३. अनेकट्ठ वर्ग ๗๗๗. ७७७. อเนกตฺเถ ปวกฺขามิ, คาถา’ทฺธปาทโต กมา; เอตฺถ ลิงฺควิเสสตฺถ, เมกสฺส ปุนรุตฺตตา. आता मी गाथेच्या अर्ध्या चरणांच्या क्रमाने अनेकार्थक शब्दांचे वर्णन करेन; येथे लिंगाचा विशेष अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी एकाच शब्दाची पुनरुक्ती केली जाऊ शकते. ๗๗๘. ७७८. สมโย สมวาเย จ, สมูเห การเณ ขเณ; ปฏิเวเธ สิยา กาเล, ปหาเน ลาภ ทิฏฺฐิสุ. 'समय' हा शब्द समवाय (संयोग), समूह, कारण, क्षण, पटिवेध (साक्षात्कार), काळ, पहान (त्याग), लाभ आणि दिट्ठि (दृष्टी/मत) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๗๙. ७७९. วณฺโณ สณฺฐาน รูเปสุ, ชาติ,จฺฉวีสุ การเณ; ปมาเณ จ ปสํสายํ, อกฺขเร จ ยเส คุเณ. 'वण्ण' (वर्ण) हा शब्द संठान (आकार), रूप, जाती, छवी (त्वचेचा रंग), कारण, प्रमाण, पसंसा (प्रशंसा), अक्खर (अक्षर), यस (यश) आणि गुण या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๘๐. ७८०. อุทฺเทเส ปาติโมกฺขสฺส, ปณฺณตฺติย มุโปสโถ; อุปวาเส จ อฏฺฐงฺเค, อุโปสถทิเน สิยา. 'उपोसथ' हा शब्द पातिमोक्खाचे पठण (उद्देस), पण्णत्ती (प्रज्ञप्ती/नियम), उपवास, अठ्ठङ्ग (अष्टांग शील) आणि उपोसथ दिवस या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๘๑. ७८१. รถงฺเค ลกฺขเณ ธมฺโม, รจกฺเก’สฺวีริยาปเถ; จกฺกํ สมฺปตฺติยํ จกฺก, รตเน มณฺฑเล พเล. 'चक्क' (चक्र) हा शब्द रथाचे अंग, लक्षण, धम्म (धम्मचक्र), कुंभाराचे चाक, इरियापथ (हालचाली/अवस्था), संपत्ती, चक्क्रतन (चक्ररत्न), मंडल (वर्तुळ) आणि बल (शक्ती) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๘๒. ७८२. กุลาลภณฺเฑ อาณาย, มายุเธ ทาน ราสิสุ; कुंभाराचे भांडे, आज्ञा (आणा), आयुध (शस्त्र), दान आणि राशी (समूह) या अर्थांमध्येही (चक्र हा शब्द वापरला जातो). ๗๘๓. ७८३. ทานสฺมึ [Pg.66] พฺรหฺมจริย, มปฺปมญฺญาสุ สาสเน; เมถุนารติยํ เวยฺยา, วจฺเจ สทารตุฏฺฐิยํ; ปญฺจสีลา’ริยมคฺโค, โปสถงฺค ธิตีสุ จ. दान, ब्रह्मचर्य, अप्पमञ्ञा (अप्रमाण/ब्रह्मविहार), सासन (बुद्धशासन), मैथुन-विरती (मैथुनाचा त्याग), वेय्यावच्च (सेवा/वैयावृत्य), सदा संतुष्ट राहणे (सदारतुट्ठी), पंचशील, अरियमग्ग (आर्य अष्टांगिक मार्ग), उपोसथ अंग आणि धिती (धैर्य) या अर्थांमध्ये (ब्रह्मचर्य हा शब्द वापरला जातो). ๗๘๔. ७८४. ธมฺโม สภาเว ปริยตฺติปญฺญา,ญาเยสุ สจฺจปฺปกตีสุ ปุญฺเญ; เญยฺเย คุณา’จาร สมาธิสูปิ,นิสฺสตฺตตา’ปตฺติสุ การณาโท. 'धम्म' हा शब्द स्वभाव, परियत्ती (धर्मग्रंथ), पञ्ञा (प्रज्ञा), न्याय, सच्च (सत्य), पकती (प्रकृती/निसर्ग), पुञ्ञ (पुण्य), ज्ञेय (जाणून घेण्याजोगे), गुण, आचार, समाधी, निस्सत्तता (जीवविरहितता/अनात्मता), आपत्ती (भिक्खूंचा नियमभंग) आणि कारण इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๘๕. ७८५. อตฺโถ ปโยชเน สทฺทา, ภิเธยฺเย วุทฺธิยํ ธเน; วตฺถุมฺหิ การเณ นาเส, หิเต ปจฺฉิมปพฺพเต. 'अत्थ' (अर्थ) हा शब्द प्रयोजन, शब्दाचा अर्थ, वृद्धी (वाढ), धन, वस्तू, कारण, नाश, हित आणि पश्चिम पर्वत (अस्ताचल) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๘๖. ७८६. เยภุยฺยตา’พฺยามิสฺเสสุ, วิสํโยเค จ เกวลํ; ทฬฺหตฺเถ’นติเรเก จา, นวเสสมฺหิ ตํ ติสุ. 'केवल' हा शब्द बहुतांश (येभुय्यता), अमिश्रित (शुद्ध), विसंयोग (अलिप्तता), दृढ अर्थ (दळ्हत्थ), अनतिरेक (मर्यादित) आणि संपूर्ण (अनवसेस) या अर्थांमध्ये तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๗๘๗. ७८७. คุโณ ปฏล ราสีสุ, อานิสํเส จ พนฺธเน; อปฺปธาเน จ สีลาโท, สุกฺกาทิมฺหิ ชิยาย จ. 'गुण' हा शब्द थर (पटल), राशी (समूह), आनिसंस (फायदा), बंधन (दोरी), अप्रधान (गौण), शील इत्यादी, पांढरा (शुद्ध) इत्यादी आणि धनुष्याची दोरी (जिया) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๘๘. ७८८. รุกฺขาโท วิชฺชมาเน จา, รหนฺเต ขนฺธปญฺจเก; ภูโต สตฺต มหาภูตา, มนุสฺเสสุ น นาริยํ. 'भूत' हा शब्द वृक्ष इत्यादी, विद्यमान (अस्तित्वात असलेले), अरहंत, पंचस्कंध (खन्धपञ्चक), प्राणी (सत्त), महाभूत आणि मनुष्य या अर्थांमध्ये वापरला जातो (हा शब्द स्त्रीलिंगात वापरला जात नाही). ๗๘๙. ७८९. วาจฺจลิงฺโค อตีตสฺมึ, ชาเต ปตฺเต สเม มโต; हा शब्द विशेषण म्हणून भूतकाळ (अतीत), उत्पन्न झालेला (जात), प्राप्त झालेला (पत्त) आणि सत्य/समान (सम) या अर्थांमध्ये मानला गेला आहे. ๗๙๐. ७९०. สุนฺทเร ทฬฺหิกมฺเม จา, ยาจเน สมฺปฏิจฺฉเน; สชฺชเน สมฺปหํสายํ, สาธฺวา’ภิเธยฺยลิงฺคิกํ. 'साधु' हा शब्द सुंदर, दृढीकरण (दळ्हिकम्म), याचना, संपटिच्छन (स्वीकृती), सज्जन आणि संपहंसा (आनंद/प्रशंसा) या अर्थांमध्ये वापरला जातो; हा शब्द विशेषण म्हणून विशेष्याच्या लिंगानुसार बदलतो. ๗๙๑. ७९१. อนฺโต นิตฺถี สมีเป จา, วสาเน ปทปูรเณ; เทหาวยเว โกฏฺฐาเส, นาส สีมาสุ ลามเก. 'अन्त' हा शब्द (स्त्रीलिंग सोडून) जवळ (समीप), समाप्ती (वसान), पदपूरण (गाथेतील पाद पूर्ण करण्यासाठी), शरीराचा अवयव (आतडे), कोठ्ठास (भाग/हिस्सा), नाश, सीमा आणि हलका/कनिष्ठ (लामक) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๙๒. ७९२. นิกาเย สนฺธิ สามญฺญ, ปฺปสูตีสุ กุเล ภเว; วิเสเส สุมนายญฺจ, ชาติ สงฺขตลกฺขเณ. 'जाती' हा शब्द निकाय (समूह), संधी, सामान्यता (सामञ्ञ), प्रसूती (जन्म), कुल, भव (अस्तित्व), विशेष, जाईचे फूल (सुमना) आणि संखतलक्षण (संस्कृत लक्षण - जन्म/उत्पत्ती) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๙๓. ७९३. ภวเภเท ปติฏฺฐายํ, นิฏฺฐา’ชฺฌาสยพุทฺธิสุ; วาสฏฺฐาเน จ คมเน, วิสฏตฺเต คตีริตา. 'गती' हा शब्द भवभेद (पुनर्जन्माची गती), पतिट्ठा (प्रतिष्ठा/आश्रय), निट्ठा (निष्ठा/शेवट), अज्झासय (आशय/हेतू), बुद्धी, वासस्थान (राहण्याचे ठिकाण), गमन (जाणे) आणि विसटत्त (प्रसार/पसरणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๗๙๔. ७९४. ผเล วิปสฺสนา ทิพฺพ, จกฺขุ สพฺพญฺญุตาสุ จ; ปจฺจเวกฺขณญาณมฺหิ, มคฺเค จ ญาณทสฺสนํ. 'ज्ञानदस्सन' (ज्ञानदर्शन) हा शब्द फल, विपश्यना, दिव्यचक्षू, सर्वज्ञता, प्रत्यवेक्षणज्ञान आणि मार्ग या अर्थांनी वापरला जातो. ๗๙๕. ७९५. กมฺมารุทฺธน องฺคาร, กปลฺล ทีปิกาสุ จ; สุวณฺณการมูสายํ, อุกฺกา เวเค จ วายุโน. 'उक्का' (उल्का/मशाल) हा शब्द लोहाराची भट्टी, अंगारा (कोळसा), खापर, मशाल, सोनाराची मुशी आणि वाऱ्याचा वेग या अर्थांनी वापरला जातो. ๗๙๖. ७९६. เกโสหารณ, [Pg.67] ชีวิต, วุตฺติสุ วปเน จ วาปสมกรเณ; กถเน ปมุตฺตภาว, ชฺเฌนาโท วุตฺต มปิ ตีสุ. 'वृत्त' (किंवा वुत्त) हा शब्द केस कापणे (मुंडण), उपजीविका, पेरणे, पेरणी समतल करणे, बोलणे, मुक्त अवस्था आणि ध्यान इत्यादी अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๗๙๗. ७९७. คมเน วิสฺสุเต จา’ว, ธาริโต’ปจิเตสุ จ; อนุโยเค กิลินฺเน จ, สุโต’ ภิเธยฺยลิงฺคิโก. 'सुत' हा शब्द विशेषण म्हणून जाणे, प्रसिद्ध, धारण केलेले, संचित केलेले, अनुयोग (अभ्यास) आणि ओले झालेले या अर्थांनी वापरला जातो. ๗๙๘. ७९८. โสตวิญฺเญยฺย สตฺเถสุ, สุตํ ปุตฺเต สุโต สิยา; 'सुत' (नपुंसकलिंगी) म्हणजे कानाने ऐकलेले किंवा शास्त्र; आणि 'सुत' (पुल्लिंगी) म्हणजे पुत्र (मुलगा) होय. ๗๙๙. ७९९. กปฺโป กาเล ยุเค เลเส, ปญฺญตฺติ ปรมายุสุ; สทิเส ตีสุ สมณ, โวหาร กปฺปพินฺทุสุ; สมนฺตตฺเถ’นฺตรกปฺปา, ทิเก ตกฺเก วิธิมฺหิ จ. 'कप्प' (कल्प) हा शब्द काळ, युग, लेश (निमित्त), प्रज्ञप्ती (संकल्पना), परमायुष्य, सदृश (सारखे - तिन्ही लिंगांत), श्रमण-व्यवहार, कल्पबिंदू, सर्वसमावेशक अर्थ, अंतरकल्प इत्यादी, तर्क आणि विधी (नियम) या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๐๐. ८००. นิพฺพาน มคฺค วิรติ, สปเถ สจฺจภาสิเต; ตจฺเฉ จา’ริยสจฺจมฺหิ, ทิฏฺฐิยํ สจฺจ มีริตํ. 'सच्च' (सत्य) हा शब्द निर्वाण, मार्ग, विरती, शपथ, सत्य भाषण, तथ्य, आर्यसत्य आणि दृष्टी (सम्यक दृष्टी) या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๐๑. ८०१. สญฺชาติเทเส เหตุมฺหิ, วาสฏฺฐานา’กเรสุ จ; สโมสรณฏฺฐาเน จา, ยตนํ ปทปูรเณ. 'आयतन' हा शब्द जन्मस्थान, हेतू (कारण), निवासस्थान, खाण (उत्पत्तीस्थान), संमेलनस्थान (एकत्र यायची जागा) आणि पादपूरण (काव्यातील शब्द भरणे) या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๐๒. ८०२. อนฺตรํ มชฺฌ วตฺถ’ญฺญ, ขโณ’กาโส’ธิ เหตุสุ; พฺยวธาเน วินฏฺเฐ จ, เภเท ฉิทฺเท มนสฺย’ปิ. 'अंतर' हा शब्द मध्य, वस्त्र, अन्य (दुसरे), क्षण, अवकाश (संधी), अवधी (मर्यादा), हेतू, व्यवधान (अडथळा), नष्ट झालेले, भेद, छिद्र आणि मन या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๐๓. ८०३. อาโรคฺเย กุสลํ อิฏฺฐ, วิปาเก กุสโล ตถา; อนวชฺชมฺหิ เฉเก จ, กถิโต วาจฺจลิงฺคิโก. 'कुसल' (नपुंसकलिंगी) म्हणजे आरोग्य किंवा इष्ट विपाक (चांगले फळ); आणि 'कुसल' (विशेषण) म्हणजे अनवद्य (दोषरहित) किंवा चतुर (कुशल/निपुण) होय. ๘๐๔. ८०४. ทฺรวา’จาเรสุ วีริเย, มธุราทีสุ ปารเท; สิงฺคาราโท ธาตุเภเท, กิจฺเจ สมฺปตฺติยํ รโส. 'रस' हा शब्द द्रव, आचार, वीर्य (ऊर्जा), मधुरादी चवी, पारा, शृंगारादी रस, धातूंचे भेद, कृत्य (कार्य) आणि संपत्ती (समृद्धी) या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๐๕. ८०५. โพธิ สพฺพญฺญุตญฺญาเณ, ริยมคฺเค จ นาริยํ; ปญฺญตฺติยํ ปุเม’ สฺสตฺถ, รุกฺขมฺหิ ปุริสิตฺถิยํ. 'बोधी' (स्त्रीलिंगी) म्हणजे सर्वज्ञता-ज्ञान किंवा आर्यमार्ग; 'बोधी' (पुल्लिंगी) म्हणजे प्रज्ञप्ती (संकल्पना); आणि 'बोधी' (पुल्लिंगी व स्त्रीलिंगी) म्हणजे पिंपळाचे झाड (बोधीवृक्ष) होय. ๘๐๖. ८०६. เสวิโต เยน โย นิจฺจํ, ตตฺถาปิ วิสโย สิยา; รูปาทิเก ชนปเท, ตถา เทเส จ โคจเร. 'विषय' हा शब्द ज्याचे सतत सेवन केले जाते ते स्थान, रूपादी पंचविषय, जनपद (प्रांत), देश आणि गोचर (इंद्रियांचे क्षेत्र) या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๐๗. ८०७. ภาโว ปทตฺเถ สตฺตาย, มธิปฺปาย กฺริยาสุ จ; สภาวสฺมิญฺจ ลีลายํ, ปุริสิ’ตฺถินฺทฺริเยสุ จ. 'भाव' हा शब्द पदार्थ, सत्ता (अस्तित्व), अभिप्राय (हेतू), क्रिया, स्वभाव, लीला (विलास), पुरुषेंद्रिय (पुरुषत्व) आणि स्त्रींद्रिय (स्त्रीत्व) या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๐๘. ८०८. โส พนฺธเว’ตฺตนิ จ สํ, โส ธนสฺมิ มนิตฺถิยํ; สา ปุเม สุนเข วุตฺโต, ตฺตนิเย โส ติลิงฺคิโก. 'स' (पुल्लिंगी) म्हणजे बांधव (नातेवाईक) किंवा स्वतः; 'स' (नपुंसकलिंगी) म्हणजे धन; 'सा' (पुल्लिंगी) म्हणजे कुत्रा; आणि 'स' (तिन्ही लिंगांत) म्हणजे स्वतःचे (आत्मीय) होय. ๘๐๙. ८०९. สุวณฺณํ กนเก วุตฺตํ, สุวณฺโณ ครุเฬ ตถา; ปญฺจธรณมตฺเต จ, ฉวิ สมฺปตฺติยมฺปิ จ. 'सुवण्ण' (नपुंसकलिंगी) म्हणजे सोने; आणि 'सुवण्ण' (पुल्लिंगी) म्हणजे गरुड, पाच धरण वजनाचे माप, किंवा त्वचेची कांती (सौंदर्य) होय. ๘๑๐. ८१०. วโร [Pg.68] เทวาทิกา อิฏฺเฐ, ชามาตริ ปติมฺหิ จ,อุตฺตเม วาจฺจลิงฺโค โส, วรํ มนฺทปฺปิเย พฺยยํ. 'वर' (पुल्लिंगी) म्हणजे देवांकडून मिळालेला आशीर्वाद (वरदान), जावई किंवा पती; 'वर' (विशेषण) म्हणजे उत्तम (श्रेष्ठ); आणि 'वरं' (अव्यय) म्हणजे ऐवजी किंवा थोडे प्रिय (पेक्षा बरे) होय. ๘๑๑. ८११. มกุเล ธนราสิมฺหิ, สิยา โกส มนิตฺถิยํ; เนตฺตึสาทิ ปิธาเน จ, ธนุปญฺจสเตปิ จ. 'कोस' (नपुंसकलिंगी वगळता) हा शब्द कळी (मुकुल), धनराशी (खजिना), तलवारीचे म्यान आणि पाचशे धनुष्य अंतराचे माप या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๑๒. ८१२. ปิตามเห ชิเน เสฏฺเฐ, พฺราหฺมเณ จ ปิตูสฺวปิ; พฺรหฺมา วุตฺโต ตถา พฺรหฺมํ, เวเท ตปสิ วุจฺจเต. 'ब्रह्मा' (पुल्लिंगी) हा शब्द पितामह, जिन (बुद्ध), श्रेष्ठ, ब्राह्मण आणि पिता या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'ब्रह्म' (नपुंसकलिंगी) हा शब्द वेद आणि तप या अर्थांनी वापरला जातो. ๘๑๓. ८१३. หตฺถีนํ มชฺฌพนฺเธ จ, ปโกฏฺเฐ กจฺฉพนฺธเน; เมขลายํ มตา กจฺฉา, กจฺโฉ วุตฺโต ลตาย จ. 'कच्छा' (स्त्रीलिंगी) म्हणजे हत्तीच्या पोटाचा पट्टा, मनगट (प्रकोष्ठ), कास घालणे किंवा मेखला (कमरपट्टा); आणि 'कच्छ' (पुल्लिंगी) म्हणजे वेल (लता) किंवा दलदलीची जागा होय. ๘๑๔. ८१४. ตเถว พาหุมูลมฺหิ, อนูปมฺหิ ติเณปิ จ; तसेच बाहुमूल (बगल), अनुपम आणि तृण (गवत) या अर्थांतही. ๘๑๕. ८१५. ปมาณํ เหตุ สตฺเถสุ, มาเน จ สจฺจวาทินิ; ปมาตริ จ นิจฺจมฺหิ, มริยาทาย มุจฺจเต. 'प्रमाण' हा शब्द हेतू, शास्त्र, मान (मापन), सत्यवादी, प्रमाता (जाणणारा), नित्य आणि मर्यादा या अर्थांत वापरला जातो. ๘๑๖. ८१६. สตฺตํ ทพฺพ’ตฺตภาเวสุ, ปาเณสุ จ พเล, สิยา ; สตฺตายญฺจ, ชเนสตฺโต, อาสตฺเต โส ติลิงฺคิโก. 'सत्त्व' (सत्त) हा शब्द द्रव्य, आत्मभाव (शरीर), प्राणी, बल आणि सत्ता (अस्तित्व) या अर्थांत होतो; आणि 'सत्त' (आसक्त) हा शब्द लोकांमध्ये आसक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๘๑๗. ८१७. เสมฺหาโท รสรตฺตาโท, มหาภูเต ปภาทิเก; ธาตุ ทฺวีสฺว’ฏฺฐิจกฺขา’ทิ, ภฺวา’ทีสุ เคริกาทิสุ. 'धातू' हा शब्द कफ इत्यादी (दोष), रस-रक्त इत्यादी (धातू), महाभूत, प्रभा (तेज) इत्यादी, अस्थि-चक्षु इत्यादी इंद्रिये, भू-आदी धातू (व्याकरण) आणि गेरू इत्यादी खनिजांच्या अर्थांत (पुल्लिंग व नपुंसकलिंग या) दोन लिंगांत वापरला जातो. ๘๑๘. ८१८. อมจฺจาโท สภาเว จ, โยนิยํ ปกตี’ริตา; สตฺวาทิสามฺยา’วตฺถายํ, ปจฺจยา ปฐเมปิ จ. 'प्रकृती' हा शब्द अमात्य (मंत्री) इत्यादी, स्वभाव, योनी (उत्पत्तिस्थान), सत्त्व-रज-तम यांची साम्यावस्था, प्रत्यय आणि प्रथम (मूळ कारण) या अर्थांत सांगितला आहे. ๘๑๙. ८१९. ปทํ ฐาเน ปริตฺตาเณ, นิพฺพานมฺหิ จ การเณ; สทฺเท วตฺถุมฺหิ โกฏฺฐาเส, ปาเท ตลฺลญฺฉเน มตํ. 'पद' हा शब्द स्थान, परित्राण (संरक्षण), निर्वाण, कारण, शब्द, वस्तू, हिस्सा (भाग), पाऊल आणि पाऊलखुणा या अर्थांत मानला जातो. ๘๒๐. ८२०. โลหมุคฺคร เมเฆสุ, ฆโน, ตาลาทิเก ฆนํ,; นิรนฺตเร จ กฐิเน, วาจฺจลิงฺคิก มุจฺจเต. 'घन' हा शब्द लोखंडी हातोडा आणि मेघ या अर्थांत पुल्लिंगी; टाळ इत्यादी वाद्यांच्या अर्थांत नपुंसकलिंगी; आणि निरंतर (दाट) व कठीण या अर्थांत तिन्ही लिंगांत (विशेषण म्हणून) वापरला जातो. ๘๒๑. ८२१. ขุทฺทา จ มกฺขิกาเภเท, มธุมฺหิ ขุทฺท, มปฺปเก; อธเม กปเณ จาปิ, พหุมฺหิ จตูสุ ตฺติสุ. 'क्षुद्र' (खुद्द) हा शब्द मधमाशीच्या प्रकारात स्त्रीलिंगी; मधाच्या अर्थांत नपुंसकलिंगी; आणि लहान, अधम, कृपण (कंजूष) व पुष्कळ या चार अर्थांत तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๘๒๒. ८२२. ตกฺเก มรณลิงฺเค จ, อริฏฺฐํ อสุเภ สุเภ,; อริฏฺโฐ อาสเว กาเก, นิมฺเพ จ เผนิลทฺทุเม. 'अरिष्ट' हा शब्द ताक, मरणचिन्ह, अशुभ आणि शुभ या अर्थांत नपुंसकलिंगी; तर आसव (मद्य), कावळा, कडुनिंब आणि रिठा या अर्थांत पुल्लिंगी असतो. ๘๒๓. ८२३. มานภณฺเฑ ปลสเต, สทิสตฺเต ตุลา ตถา; เคหานํ ทารุพนฺธตฺถ, ปีฐิกายญฺจ ทิสฺสติ. 'तुला' हा शब्द वजन करण्याचे साधन (तराजू), शंभर पल वजन, सादृश्य (सारखेपणा) आणि घरांच्या लाकडी संरचनेचा आधार (खांब किंवा पाट) या अर्थांत आढळतो. ๘๒๔. ८२४. มิตฺตกาเร [Pg.69] ลญฺชทาเน, พเล ราสิ วิปตฺติสุ ; ยุทฺเธ เจว ปฏิญฺญายํ, สงฺคโร สมฺปกาสิโต. 'संगर' हा शब्द मैत्री करणे, लाच देणे, बल, राशी, विपत्ती, युद्ध आणि प्रतिज्ञा या अर्थांत स्पष्ट केला आहे. ๘๒๕. ८२५. ขนฺเธ ภเว นิมิตฺตมฺหิ, รูปํ วณฺเณ จ ปจฺจเย; สภาว สทฺท สณฺฐาน, รูปชฺฌาน วปูสุ จ. 'रूप' हा शब्द स्कंध, भव (अस्तित्व), निमित्त, वर्ण (रंग), प्रत्यय, स्वभाव, शब्द, संस्था (आकार), रूपध्यान आणि शरीर या अर्थांत वापरला जातो. ๘๒๖. ८२६. วตฺถุ กิเลส กาเมสุ, อิจฺฉายํ มทเน รเต; กาโม, กามํ นิกาเม, จา, นุญฺญายํ กาม มพฺยยํ. 'काम' हा शब्द वस्तू-काम, क्लेश-काम, इच्छा, मदन (कामदेव) आणि रती (प्रीती) या अर्थांत पुल्लिंगी; तर 'कामं' हे अव्यय अत्यंत इच्छा आणि अनुमती (परवानगी) या अर्थांत वापरले जाते. ๘๒๗. ८२७. โปกฺขรํ ปทุเม เทเห, วชฺชภณฺฑมุเขปิ จ; สุนฺทรตฺเต จ สลิเล, มาตงฺคกรโกฏิยํ. 'पुष्कर' (पोक्खर) हा शब्द कमळ, शरीर, वाद्याचे मुख, सौंदर्य, पाणी आणि हत्तीच्या सोंडेचे टोक या अर्थांत वापरला जातो. ๘๒๘. ८२८. ราสินิจฺจล มายาสุ, ทมฺภา’สจฺเจสฺว’โยฆเน; คิริสิงฺคมฺหิ สีรงฺเค, ยนฺเต กูฏ มนิตฺถิยํ. 'कूट' हा शब्द राशी, निश्चलता, माया (कपट), दंभ, असत्य, लोखंडी हातोडा, पर्वताचे शिखर, naṅgarācā bhāg (नांगराचा भाग) आणि यंत्र या अर्थांत स्त्रीलिंग सोडून (पुल्लिंग व नपुंसकलिंगात) वापरला जातो. ๘๒๙. ८२९. วุทฺธิยํ ชนเน กาม, ธาตฺวาทีมฺหิ จ ปตฺติยํ; สตฺตายญฺเจว สํสาเร, ภโว สสฺสตทิฏฺฐิยํ. 'भव' हा शब्द वृद्धी (वाढ), उत्पत्ती, कामधातू इत्यादी, प्राप्ती, सत्ता (अस्तित्व), संसार आणि शाश्वतदृष्टी या अर्थांत वापरला जातो. ๘๓๐. ८३०. ปฏิวากฺโย’ตฺตราสงฺเค, สุ’ตฺตรํ อุตฺตโร ติสุ; เสฏฺเฐ ทิสาทิเภเท จ, ปรสฺมิ มุปรี’ริโต. 'उत्तर' हा शब्द प्रत्युत्तर आणि उपरणे (उत्तरीय वस्त्र) या अर्थांत नपुंसकलिंगी; तर श्रेष्ठ, दिशाविशेष (उत्तर दिशा), पर (दुसरा) आणि वरचा या अर्थांत तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๘๓๑. ८३१. เนกฺขมฺมํ ปฐมชฺฌาเน, ปพฺพชฺชายํ วิมุตฺติยํ; วิปสฺสนาย นิสฺเสส, กุสลมฺหิ จ ทิสฺสติ. 'नैष्क्रम्य' (नेक्खम्म) हा शब्द प्रथम ध्यान, प्रव्रज्या, विमुक्ती (मुक्ती), विपश्यना आणि संपूर्ण कुशल (पुण्य) या अर्थांत आढळतो. ๘๓๒. ८३२. สงฺขาโร สงฺขเต ปุญฺญา, ภิสงฺขาราทิเกปิ จ; ปโยเค กายสงฺขารา, ทฺย’ภิสงฺขรเณสุ จ. 'संस्कार' (संखार) हा शब्द संस्कृत (उत्पन्न झालेल्या गोष्टी), पुण्याभिसंस्कार इत्यादी, प्रयोग (प्रयत्न) आणि कायसंस्कार इत्यादींच्या अभिसंस्करणात (निर्मितीत) वापरला जातो. ๘๓๓. ८३३. อารมฺมเณ จ สํสฏฺเฐ, โวกิณฺเณ นิสฺสเย ตถา; ตพฺภาเว จาปฺยภิเธยฺย, ลิงฺโค สหคโต ภเว. 'सहगत' हा शब्द आलंबन (विषय), संसृष्ट (एकत्र आलेले), संकीर्ण (मिश्रित), आश्रय आणि तद्भाव (त्या स्वरूपाचा असणे) या अर्थांत विशेष्यलिंगी (विशेषण म्हणून) वापरला जातो. ๘๓๔. ८३४. ตีสุ ฉนฺนํ ปติรูเป, ฉาทิเต จ นิคูหิเต; นิวาสน ปารุปเน, รโห ปญฺญตฺติยํ ปุเม. 'छन्न' हा शब्द अनुरूप, आच्छादित (झाकलेले) आणि गुप्त या अर्थांत तिन्ही लिंगांत; तर नेसण्याचे वस्त्र, पांघरण्याचे वस्त्र, रहस्य आणि प्रज्ञप्ती (संज्ञा) या अर्थांत पुल्लिंगी वापरला जातो. ๘๓๕. ८३५. พุทฺธสมนฺตจกฺขูสุ, จกฺขุ ปญฺญาย มีริตํ; ธมฺมจกฺขุมฺหิ จ มํส, ทิพฺพจกฺขุทฺวเยสุ จ. 'चक्षु' हा शब्द बुद्धचक्षु, समंतचक्षु, प्रज्ञाचक्षु, धम्मचक्षु, मांसचक्षु आणि दिव्यचक्षु या अर्थांत वापरला जातो. ๘๓๖. ८३६. วาจฺจลิงฺโค อภิกฺกนฺโต, สุนฺทรมฺหิ อภิกฺกเม; อภิรูเป ขเย วุตฺโต, ตเถว’พฺภนุโมทเน. 'अभिक्रांत' हा शब्द सुंदर, प्रस्थान (अतिक्रमण), अभिरूप (मनोहर), क्षय (नाश) आणि अनुमोदन या अर्थांत तिन्ही लिंगांत (विशेषण म्हणून) वापरला जातो. ๘๓๗. ८३७. การเณ เทสนายญฺจ, วาเร เววจเนปิ จ; ปาการสฺมึ อวสเร, ปริยาโย กถียติ. 'पर्याय' हा शब्द कारण, देशना (उपदेश), वार (वेळ), वेवचन (समानार्थी शब्द), तट (भिंत) आणि अवसर (संधी) या अर्थांत सांगितला जातो. ๘๓๘. ८३८. วิญฺญาเณ [Pg.70] จิตฺตกมฺเม จ, วิจิตฺเต จิตฺต มุจฺจเต; ปญฺญตฺติ จิตฺตมาเสสุ, จิตฺโต, ตารนฺตเร ถิยํ. 'चित्त' हा शब्द विज्ञान (मन) आणि चित्रकाम या अर्थांत नपुंसकलिंगी; 'चित्र' (चित्त) हा शब्द विविध (रंगबेरंगी) या अर्थांत तिन्ही लिंगांत; 'चित्त' हा शब्द प्रज्ञप्ती आणि चैत्र महिना या अर्थांत पुल्लिंगी; तर 'चित्रा' हा शब्द नक्षत्रविशेष या अर्थांत स्त्रीलिंगी वापरला जातो. ๘๓๙. ८३९. สามํ เวทนฺตเร สานฺตฺเว, ตํ ปีเต สามเล ติสุ; สยมตฺเถ พฺยยํ สามํ, สามา จ สาริวายปิ. 'साम' हा शब्द सामवेद आणि सांत्वन या अर्थांत नपुंसकलिंगी; पिवळा आणि काळा-सावळा या अर्थांत तिन्ही लिंगांत; 'सामं' हे अव्यय स्वतः या अर्थांत; तर 'सामा' हा शब्द सारिवा (अनंतमूळ) वनस्पतीसाठी स्त्रीलिंगी वापरला जातो. ๘๔๐. ८४०. ปุเม อาจริยาทิมฺหิ, ครุ มาตาปิตูสฺวปิ; ครุ ตีสุ มหนฺเต จ, ทุชฺชรา’ลหุเกสุ จ. 'गुरू' हा शब्द आचार्य इत्यादी आणि माता-पिता यांच्या अर्थांत पुल्लिंगी; तर मोठा, पचण्यास जड आणि जड (हलके नसलेले) या अर्थांत तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๘๔๑. ८४१. อจฺจิเต วิชฺชมาเน จ, ปสตฺเถ สจฺจ สาธุสุ; ขินฺเน จ สมิเต เจว, สนฺโตภิเธยฺยลิงฺคิโกติ. 'संत' हा शब्द पूजित, विद्यमान (असलेला), प्रशस्त (उत्कृष्ट), सत्य, साधू, खिन्न आणि शांत या अर्थांत विशेष्यलिंगी (विशेषण म्हणून) वापरला जातो. อิติ คาถาอเนกตฺถวคฺโค. अशा प्रकारे गाथा-अनेकार्थ वर्ग समाप्त झाला. ๘๔๒. ८४२. เทโว วิสุทฺธิเทวา’โท, เมฆ มจฺจุ นเภสุ จ; อโถปิ ตรุเณ สตฺเต, โจเรปิ มาณโว ภเว. 'देव' हा शब्द विशुद्धदेव इत्यादी, मेघ, मृत्यू आणि आकाश या अर्थांत होतो; तसेच 'माणव' हा शब्द तरुण प्राणी आणि चोर या अर्थांत वापरला जातो. ๘๔๓. ८४३. อาทิ โกฏฺฐาส โกฏีสุ, ปุรโต’คฺคํวเร ตีสุ; ปจฺจนีโก’ตฺตเมสฺว’ญฺเญ, ปจฺฉาภาเค ปโร ติสุ. 'अग्र' हा शब्द प्रारंभ, भाग, टोक आणि समोर या अर्थांत नपुंसकलिंगी, तर श्रेष्ठ या अर्थांत तिन्ही लिंगांत होतो; 'पर' हा शब्द शत्रू, उत्तम, अन्य (दुसरा) आणि मागील भाग या अर्थांत तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๘๔๔. ८४४. โยนิ กาม สิริ’สฺสเร, ธมฺมุ’ยฺยาม ยเส ภคํ; อุฬาโร ตีสุ วิปุเล, เสฏฺเฐ จ มธุเร สิยา. 'भग' हा शब्द योनी, काम, श्री (लक्ष्मी), ऐश्वर्य, धर्म, प्रयत्न आणि यश या अर्थांत होतो; 'उदार' (उळार) हा शब्द विशाल, श्रेष्ठ आणि मधुर या अर्थांत तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๘๔๕. ८४५. สมฺปนฺโน ตีสุ สมฺปุณฺเณ, มธุเร จ สมงฺคินิ; สงฺขา ตุ ญาเณ โกฏฺฐาส, ปญฺญตฺติ คณเนสุ จ. 'संपन्न' हा शब्द संपूर्ण, मधुर आणि युक्त या अर्थांत तिन्ही लिंगांत होतो; तर 'संख्या' (संखा) हा शब्द ज्ञान, भाग, प्रज्ञप्ती आणि गणना या अर्थांत वापरला जातो. ๘๔๖. ८४६. ฐานํ อิสฺสริโย’กาส, เหตูสุ ฐิติยมฺปิ จ; อโถ มาเน ปกาเรจ, โกฏฺฐาเสจ วิโธ ทฺวิสุ. 'स्थान' हा शब्द ऐश्वर्य, अवकाश (जागा), हेतू आणि स्थिती या अर्थांत होतो; तर 'विध' हा शब्द मान (प्रमाण), प्रकार आणि भाग या अर्थांत दोन लिंगांत (पुल्लिंग व नपुंसकलिंगात) वापरला जातो. ๘๔๗. ८४७. ปญฺโญ’ปวาส ขนฺตีสุ, ทโม อินฺทฺริยสํวเร; ญาเณ จ โสมนสฺเสจ, เวโท ฉนฺทสิ โจ’จฺจเต. 'दम' हा शब्द प्रज्ञा, उपवास, क्षमा आणि इंद्रियसंयम या अर्थांत होतो; तर 'वेद' हा शब्द ज्ञान, सोमनस्य (आनंद) आणि छंद (वेदग्रंथ) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๔๘. ८४८. ขนฺธโกฏฺฐาส, ปสฺสาว, มคฺค, เหตูสุ โยนิ สา ; กาเล ตุ กูเล สีมายํ, เวลา ราสิมฺหิ ภาสิตา. 'योनी' हा शब्द स्कंध, भाग, प्रसव (जन्म), मार्ग आणि हेतू या अर्थांत होतो; तर 'वेला' हा शब्द काळ, किनारा, सीमा आणि राशी या अर्थांत सांगितला आहे. ๘๔๙. ८४९. โวหาโร สทฺท ปณฺณตฺติ, วณิชฺชา เจตนาสุ จ; นาโค ตุ’รค หตฺถีสุ, นาครุกฺเข ตถุ’ตฺตเม. 'व्यवहार' (वोहार) हा शब्द शब्द, प्रज्ञप्ती, व्यापार आणि चेतना या अर्थांत होतो; तर 'नाग' हा शब्द सर्प, हत्ती, नागवृक्ष आणि उत्तम पुरुष या अर्थांत वापरला जातो. ๘๕๐. ८५०. เสฏฺฐา’สหาย สงฺขฺยา’ญฺญ,ตุลฺเยสฺเว’โกติลิงฺคิโก; ราเค ตุ มานโส จิตฺตา, รหตฺเตสุ จ มานสํ. 'एक' हा शब्द श्रेष्ठ, असहाय (एकटा), संख्याविशेष, अन्य आणि समान या अर्थांत तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; 'मानस' हा शब्द रागाच्या (प्रेमाच्या) अर्थांत पुल्लिंगी, तर चित्त आणि अर्हत्त्व या अर्थांत नपुंसकलिंगी होतो. ๘๕๑. ८५१. มูลํ [Pg.71] เภ สนฺติเก มูล, มูเล เหตุมฺหิ ปาภเต; รูปาทฺยํ’ส ปกณฺเฑสุ, ขนฺโธ ราสิ คุเณสุ จ. 'मूळ' हा शब्द नक्षत्रविशेष (मूळ नक्षत्र), समीप, झाडाचे मूळ, हेतू आणि भेटवस्तू या अर्थांत होतो; तर 'स्कंध' (खंध) हा शब्द रूपादी भाग, झाडाचा बुंधा, समूह (राशी) आणि गुण या अर्थांत वापरला जातो. ๘๕๒. ८५२. อารมฺโภ วีริเย กมฺเม, อาทิกมฺเม วิโกปเน; อโถ หทยวตฺถุมฺหิ, จิตฺเต จ หทยํ อุเร. 'आरंभ' हा शब्द वीर्य (प्रयत्न), कर्म, प्रथम कार्य आणि क्षोभ या अर्थांत होतो; तर 'हृदय' (हदय) हा शब्द हृदयवस्तू, चित्त आणि छाती या अर्थांत वापरला जातो. ๘๕๓. ८५३. ปจฺฉาตาปา’นุพนฺเธสุ, ราคาโท’นุสโย ภเว; มาตงฺคมุทฺธปิณฺเฑ ตุ, ฆเฏ กุมฺโภ ทสมฺพเณ. 'अनुशय' हा शब्द पश्चात्ताप, अनुबंध आणि राग (आसक्ती) इत्यादी अर्थांत होतो; तर 'कुंभ' हा शब्द हत्तीच्या मस्तकावरील उंचवटा, घडा आणि दहा द्रोण मापाचे भांडे या अर्थांत वापरला जातो. ๘๕๔. ८५४. ปริวาโร ปริชเน, ขคฺคโกเส ปริจฺฉเท; อาลมฺพโร ตุ สารมฺเภ, เภริเภเท จ ทิสฺสติ. 'परिवार' हा शब्द सेवकवर्ग, तलवारीचे म्यान आणि आच्छादन या अर्थांत होतो; तर 'आडंबर' (आलंबर) हा शब्द आरंभ (दिखावा) आणि ढोलकीचा प्रकार या अर्थांत आढळतो. ๘๕๕. ८५५. ขโณ กาลวิเสเส จ, นิพฺยาปารฏฺฐิติมฺหิ จ; กุเล ตฺว’ภิชโน วุตฺโต, อุปฺปตฺติภูมิยมฺปิ จ. 'क्षण' हा शब्द विशिष्ट काळ आणि व्यापाराचा अभाव (विश्रांतीची स्थिती) या अर्थांत होतो; तर 'अभिजन' हा शब्द कुळ आणि जन्मभूमी या अर्थांत सांगितला आहे. ๘๕๖. ८५६. อาหาโร กพฬีการา, หาราทีสุ จ การเณ; วิสฺสาเส ยาจนายญฺจ, เปเม จ ปณโย มโต. 'आहार' हा शब्द कवलिकार आहार इत्यादी आणि कारण या अर्थांत होतो; तर 'प्रणय' (पणय) हा शब्द विश्वास, याचना (प्रार्थना) आणि प्रेम या अर्थांत मानला जातो. ๘๕๗. ८५७. ณาโท สทฺธา, จีวราทิ, เหตฺวา’ธาเรสุ ปจฺจโย; กีฬา ทิพฺพวิหาราโท, วิหาโร สุคตาลเย. 'प्रत्यय' हा शब्द ज्ञान, श्रद्धा, चीवर इत्यादी मिळण्याचे कारण आणि आधार या अर्थांत होतो; तर 'विहार' हा शब्द क्रीडा, दिव्यविहार इत्यादी आणि सुगतांचे निवासस्थान (बौद्ध विहार) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๕๘. ८५८. สมตฺถเน มโต จิตฺเต, กคฺคตายํ สมาธิ จ; โยโค สงฺคติ กามาโท,ฌาโน’ปาเยสุ ยุตฺติยํ. 'समाधी' हा शब्द समर्थन आणि चित्ताची एकाग्रता या अर्थांत मानला जातो; तर 'योग' हा शब्द संगती, काम इत्यादी आसक्ती, ध्यान, उपाय आणि युक्ती या अर्थांत वापरला जातो. ๘๕๙. ८५९. โภโค สปฺปผณ’งฺเคสุ, โกฏิลฺเล ภุญฺชเน ธเน; ภูมิภาเค กิเลเส จ, มเล จา’งฺคณ มุจฺจเต. 'भोग' हा शब्द सर्पाचा फणा, वक्रता, उपभोग आणि धन या अर्थांत होतो; तर 'अंगण' हा शब्द भूमीचा भाग, क्लेश आणि मळ या अर्थांत वापरला जातो. ๘๖๐. ८६०. ธนาทิทปฺเป ปญฺญาย, อภิมาโน มโต ถ จ; อปเทโส นิมิตฺเต จ, ฉเล จ กถเน มโต. 'अभिमान' हा शब्द धनादीचा गर्व आणि प्रज्ञा या अर्थांत मानला जातो; तर 'अपदेश' हा शब्द निमित्त, कपट (छल) आणि कथन या अर्थांत मानला जातो. ๘๖๑. ८६१. จิตฺเต กาเย สภาเว จ, โส อตฺตา ปรม’ตฺตนิ; อถ คุมฺโพ จ ถมฺพสฺมึ, สมูเห พลสชฺชเน. 'आत्मा' (अत्ता) हा शब्द चित्त, काय (शरीर), स्वभाव आणि परमात्मा या अर्थांत होतो; तर 'गुल्म' (गुम्ब) हा शब्द झुडूप, समूह, सैन्य आणि सज्जन या अर्थांत वापरला जातो. ๘๖๒. ८६२. อนฺโตฆเร กุสูเล จ, โกฏฺโฐ นฺโตกุจฺฉิยํ ปฺยถ; โสปานงฺคมฺหิ อุณฺหีโส, มกุเฏ สีสเวฐเน. 'कोठ' (कोट्ठ) हा शब्द घराचा आतील भाग, koṭhāra (कोठार) आणि पोटाचा आतील भाग या अर्थांत होतो; तर 'उष्णीष' (उण्हीस) हा शब्द जिन्याचा भाग, मुकुट आणि पगडी या अर्थांत वापरला जातो. ๘๖๓. ८६३. นิยฺยาเส เสขเร ทฺวาเร, นิยฺยูโห นาคทนฺตเก; อโถ สิขณฺเฑ ตูณีเร, กลาโป นิกเร มโต. 'निय्यास' हा शब्द डिंक (झाडाचा रस), मुकुट आणि दरवाजा या अर्थांत वापरला जातो; 'निय्यूह' हा शब्द हत्तीच्या दातासारख्या खुंटीच्या (नागदंतक) अर्थात वापरला जातो; तसेच 'शिखंड' हा शब्द भात्याच्या (बाण ठेवण्याचा भाता) अर्थात आणि 'कलाप' हा शब्द समूहाच्या (निकर) अर्थात मानला जातो. ๘๖๔. ८६४. จูฬา สํยตเกเสสุ, มกุเฏ โมฬิ จ ทฺวิสุ; สงฺโข ตฺว’นิตฺถิยํ กมฺพุ, นลาฏ’ฏฺฐีสุ โคปฺผเก. 'चूळा' हा शब्द बांधलेल्या केसांच्या (शेंडी) अर्थात वापरला जातो; 'मोळि' हा शब्द मुकुट आणि बांधलेलेले केस या दोन्ही अर्थांत वापरला जातो; 'संख' (शंख) हा शब्द नपुंसकलिंग व पुल्लिंगात शंख, कंबु (शंख/कडे), कपाळाचे हाड आणि पायाचा घोटा या अर्थांत मानला जातो. ๘๖๕. ८६५. ปกฺโข [Pg.72] กาเล พเล สาธฺเย, สขี วาเชสุ ปงฺคุเล; เทเส’ณฺณเว ปุเม สินฺธุ, สริตายํ ส นาริยํ. 'पक्ख' (पक्ष) हा शब्द काळ (पंधरवडा), बळ, साध्य, मित्र, पक्ष्यांचे पंख आणि अपंग (पांगळा) या अर्थांत वापरला जातो; 'सिंधु' हा शब्द पुल्लिंगात देश आणि समुद्र या अर्थांत, तर स्त्रीलिंगात नदी या अर्थात वापरला जातो. ๘๖๖. ८६६. คเช กเรณุ ปุริเส, โส หตฺถินิย มิตฺถิยํ; รตเน วชิโร นิตฺถี, มณิเวธิ’นฺทเหติสุ. 'करेणु' हा शब्द पुल्लिंगात नर हत्ती आणि स्त्रीलिंगात मादी हत्ती (हत्तिणी) या अर्थात वापरला जातो; 'वजिर' (वज्र) हा शब्द नपुंसकलिंग व पुल्लिंगात रत्न (हिरा), मणी वेधणारे साधन आणि इंद्राचे शस्त्र या अर्थांत मानला जातो. ๘๖๗. ८६७. วิสาณํ ตีสุ มาตงฺค, ทนฺเต จ ปสุสิงฺคเก; โกฏิยํ ตุ มโต โกโณ, ตถา วาทิตฺตวาทเน. 'विसाण' (विषाण) हा शब्द तिन्ही लिंगांत हत्तीचा सुळा (दांत) आणि प्राण्याचे शिंग या अर्थांत वापरला जातो; 'कोण' हा शब्द टोक (कोटी) तसेच वाद्य वाजवण्याची काठी (गज/दांडू) या अर्थात मानला जातो. ๘๖๘. ८६८. วณิปฺปเถ จ นคเร, เวเท จ นิคโม ถ จ; วิวาทาโท’ ธิกรณํ, สิยา’ธาเร จ การเณ. 'निगम' हा शब्द व्यापारी मार्ग, नगर आणि वेद या अर्थांत वापरला जातो; 'अधिकरण' हा शब्द वादविवाद इत्यादी, आधार आणि कारण या अर्थांत वापरला जातो. ๘๖๙. ८६९. ปสุมฺหิ วสุธายญฺจ, วาจาโท โค ปุมิตฺถิยํ; หริเต ตุ สุวณฺเณ จ, วาสุเทเว หรี’ริโต. 'गो' हा शब्द पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगात पशू (बैल/गाय), पृथ्वी आणि वाणी इत्यादी अर्थांत वापरला जातो; 'हरि' हा शब्द हिरवा रंग, सुवर्ण (सोने) आणि वासुदेव या अर्थांत सांगितला गेला आहे. ๘๗๐. ८७०. อายตฺเต ปริวาเร จ, ภริยายํ ปริคฺคโห; อุตฺตํโส ตฺว’ วตํโส จ, กณฺณปูเร จ เสขเร. 'परिग्गह' (परिग्रह) हा शब्द अधीन (ताब्यात असलेले), परिवार आणि पत्नी या अर्थांत वापरला जातो; 'उत्तंस' आणि 'अवतंस' हे शब्द कानाचे भूषण (कर्णफूल) आणि मुकुट (शिखर) या अर्थांत वापरले जातात. ๘๗๑. ८७१. วิชฺชุยํ วชิเร เจวา, สนิ’ตฺถิปุริเส ปฺยถ; โกเณ สงฺขฺยาวิเสสสฺมึ, อุกฺกํเส โกฏิ นาริยํ. 'अशनि' हा शब्द स्त्रीलिंग आणि पुल्लिंगात वीज आणि वज्र या अर्थांत वापरला जातो; 'कोटि' हा शब्द स्त्रीलिंगात कोपरा (कोन), विशिष्ट संख्या (एक कोटी) आणि उत्कर्ष (श्रेष्ठता) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๗๒. ८७२. จูฬา ชาลา ปธาน’คฺค, โมรจูฬาสุ สา สิขา; สปฺปทาฐาย มาสี’ตฺถี, อิฏฺฐสฺสา’สีสนายปิ. 'सिखा' (शिखा) हा शब्द स्त्रीलिंगात शेंडी (चूडा), ज्वाला, मुख्य/श्रेष्ठ आणि मोराचा तुरा या अर्थांत वापरला जातो; 'आसी' (आशी) हा शब्द स्त्रीलिंगात सापाची दाढ (विषारी दात) आणि इष्ट गोष्टीची प्रार्थना (आशीर्वाद) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๗๓. ८७३. วสา วิลีน เตลสฺมึ, วสคา วญฺฌคาวิสุ; อภิลาเส ตุ กิรเณ, อภิสงฺเค รุจิ’ตฺถิยํ. ‘वसा’ (वसा) हा शब्द वितळलेली चरबी (तेल) आणि वश झालेली किंवा वांझ गाय या अर्थांत वापरला जातो; तर स्त्रीलिंगी ‘रुचि’ हा शब्द अभिलाषा (इच्छा), किरण आणि आसक्ती (अभिसंग) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๗๔. ८७४. สญฺญา สญฺชานเน นาเม, เจตนายญฺจ ทิสฺสติ; อํเส สิปฺเป กลา กาเล, ภาเค จนฺทสฺส โสฬเส. ‘सञ्ञा’ (संज्ञा) हा शब्द ओळखणे (ज्ञान), नाव आणि चेतना (इच्छाशक्ती) या अर्थांत आढळतो; तर ‘कला’ हा शब्द अंश (भाग), शिल्प (कला), काळ आणि चंद्राचा सोळावा भाग या अर्थांत वापरला जातो. ๘๗๕. ८७५. พีชโกเส ฆรกูเฏ, กณฺณภูสาย กณฺณิกา; อาคามิกาเล ทีฆตฺเต, ปภาเว จ มตา’ยติ. ‘कण्णिका’ हा शब्द बीजाचा कोष, घराचे शिखर आणि कानातील आभूषण या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘आयति’ हा शब्द भविष्यकाळ, दीर्घत्व (लांबी) आणि प्रभाव (सामर्थ्य) या अर्थांत मानला जातो. ๘๗๖. ८७६. อุณฺณา เมสาทิโลเม, จ, ภูมชฺเฌ โรมธาตุยํ; วารุณี ตฺวิตฺถิยํ วุตฺตา, นฏฺฏกี มทิราทิสุ. ‘उण्णा’ (लोकर) हा शब्द मेंढी इत्यादींचे केस आणि भुवयांच्या मधील केसांचा पुंजका (रोमधातू) या अर्थांत वापरला जातो; तर स्त्रीलिंगी ‘वारुणी’ हा शब्द नर्तकी आणि मद्य (दारू) इत्यादी अर्थांत सांगितला जातो. ๘๗๗. ८७७. กฺริยจิตฺเต จ กรเณ, กิริยํ กมฺมนิ กฺริยา; สุนิสายํ ตุ กญฺญาย, ชายาย จ วธู มตา. ‘किरिया’ (क्रिया) हा शब्द क्रियाचित्त, करण (साधन) आणि कर्म (कार्य) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘वधू’ हा शब्द सून, कन्या (मुलगी) आणि पत्नी या अर्थांत मानला जातो. ๘๗๘. ८७८. ปมาณิ’สฺสริเย มตฺตา, อกฺขราวยเว’ปฺปเก; สุตฺตํ ปาวจเน ริฏฺเฐ, ตนฺเต ตํ สุปิเต ติสุ. ‘मत्ता’ (मात्रा) हा शब्द प्रमाण, ऐश्वर्य (प्रभुत्व), अक्षराचा अवयव (मात्रा) आणि अल्प (थोडे) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘सुत्त’ (सूत्र) हा शब्द तिन्ही लिंगांत बुद्धवचन (प्रवचन), अनिष्ट (रिठ्ठ), धागा (तंतू) आणि निद्रिस्त (झोपलेला) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๗๙. ८७९. ราชลิงฺโค’สภงฺเคสุ, [Pg.73] รุกฺเข จ กกุโท ปฺยถ; นิมิตฺต’กฺขร สูเปสุ, พฺยญฺชนํ จิหเน ปเท. ‘ककुद’ हा शब्द राजचिन्ह, बैलाचा वशिंड आणि एका विशिष्ट वृक्षाच्या अर्थात वापरला जातो; तर ‘ब्यञ्जन’ (व्यंजन) हा शब्द निमित्त (चिन्ह), अक्षर, सूप (व्यंजन/कढी), लक्षण आणि पद (शब्द) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๘๐. ८८०. โวหาเร เชตุ มิจฺฉายํ, กีฬาโท จาปิ เทวนํ; ภริยายํ ตุ เกทาเร, สรีเร เขตฺต มีริตํ. ‘देवन’ हा शब्द व्यवहार (व्यापार), जिंकण्याची इच्छा आणि क्रीडा (खेळ) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘खेत्त’ (क्षेत्र) हा शब्द पत्नी, शेत (केदार) आणि शरीर या अर्थांत सांगितला जातो. ๘๘๑. ८८१. สุสฺสูสายญฺจ วิญฺเญยฺยํ, อิสฺสาภฺยาเส ปฺยุ’ปาสนํ; สูลํ ตุ นิตฺถิยํ เหติ, เภเท สํกุ รุชาสุ จ. ‘उपासन’ हा शब्द सेवा करण्याची इच्छा (शुश्रूषा) आणि धनुर्विद्येचा अभ्यास या अर्थांत समजला पाहिजे; तर पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी ‘सूल’ (शूळ) हा शब्द शस्त्र, भेद (फाडणे), शंखू (लोखंडी खिळा) आणि वेदना (शूळ उठणे) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๘๒. ८८२. ตนฺติ วีณาคุเณ, ตนฺตํ, มุขฺยสิทฺธนฺต ตนฺตุสุ; รถาทฺยงฺเค ตุ จ ยุโค, กปฺปมฺหิ ยุคเล ยุคํ. ‘तन्ति’ हा शब्द विणेची तार या अर्थात आणि ‘तन्त’ (तंतू) हा शब्द मुख्य सिद्धांत व धागा या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘युग’ हा शब्द रथाचे जू इत्यादी अवयव, कल्प (युगकाळ) आणि जोडी (युगल) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๘๓. ८८३. อิตฺถิปุปฺเผ จ เรณุมฺหิ, รโช ปกติเช คุเณ; นฺยาสปฺปเณ ตุ ทานมฺหิ, นิยฺยาตน มุทีริตํ. ‘रजो’ (रज) हा शब्द स्त्रीचा विटाळ (ऋतुपुष्प), परागकण आणि प्रकृतीपासून उत्पन्न झालेला गुण (रजोगुण) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘निय्यातन’ हा शब्द ठेव सुपूर्द करणे आणि दान देणे या अर्थांत सांगितले आहे. ๘๘๔. ८८४. ครุ’ปายา’วตาเรสุ, ติตฺถํ ปูตมฺพุ ทิฏฺฐิสุ; ปณฺฑเก โชติ นกฺขตฺต, รํสีสฺว’คฺคิมฺหิ โชติ โส. ‘तित्थ’ (तीर्थ) हा शब्द गुरू, उपाय, घाट (पाण्यात उतरण्याची जागा), पवित्र पाणी आणि मत (दृष्टी/पंथ) या अर्थांत वापरला जातो; तर पुल्लिंगी ‘जोति’ (ज्योती) हा शब्द पंडित (विद्वान), नक्षत्र, किरण आणि अग्नी या अर्थांत वापरला जातो. ๘๘๕. ८८५. กณฺโฑ นิตฺถี สเร ทณฺเฑ, วคฺเค จาวสเร ปฺยถ; อุทฺธํพาหุทฺวยมาเน, สูรตฺเตปิ จ โปริสํ. पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी ‘कण्ड’ (कांड) हा शब्द बाण, दांडा, वर्ग (भाग) आणि अवसर (वेळ) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘पोरिस’ (पौरुष) हा शब्द दोन्ही हात वर केलेल्या माणसाच्या उंचीचे माप आणि शूरता (वीरता) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๘๖. ८८६. อุฏฺฐานํ โปริเส’หาสุ, นิสินฺนาทฺยุ’คฺคเม ปฺยถ; อนิสฺสยมหีภาเค, ตฺวิ’รีณํ อูสเร สิยา. ‘उट्ठान’ (उत्थान) हा शब्द मानवी प्रयत्न (उद्योग) आणि बसलेल्या स्थितीतून उठणे या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘इरीण’ हा शब्द निर्जल/पडीक जमीन आणि खारट जमीन (ऊसर) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๘๗. ८८७. อาราธนํ สาธเน จ, ปตฺติยํ ปริโตสเน; ปธาเน ตุ จ สานุมฺหิ, วิสาเณ สิงฺค มุจฺจเต. ‘आराधन’ हा शब्द साधन (सिद्ध करणे), प्राप्ती आणि संतोष देणे (प्रसन्न करणे) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘सिङ्ग’ (शृंग) हा शब्द प्रधान (मुख्य), पर्वताचे शिखर आणि शिंग या अर्थांत म्हटले जाते. ๘๘๘. ८८८. ทิฏฺฐา’ทิมคฺเค ญาณ’กฺขิ, กฺขณ ลทฺธีสุ ทสฺสนํ; เหเม ปญฺจสุวณฺเณ จ, นิกฺโข นิตฺถี ปสาธเน. ‘दस्सन’ (दर्शन) हा शब्द दर्शनादी मार्ग, ज्ञान, डोळा, क्षण आणि प्राप्ती (दृष्टी) या अर्थांत वापरला जातो; तर पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी ‘निक्ख’ (निष्क्र) हा शब्द सोने, पाच सुवर्ण (एक वजन) आणि अलंकार (दागिना) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๘๙. ८८९. ติถิเภเท จ สาขาทิ, ผฬุมฺหิ ปพฺพ มุจฺจเต; นาคโลเก ตุ ปาตาลํ, ภาสิตํ พลวามุเข. ‘पब्ब’ (पर्व) हा शब्द तिथीचा भेद (विशेष तिथी) आणि फांदी इत्यादींचा सांधा (पेर) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘पाताल’ हा शब्द नागलोक आणि वडवानल (समुद्रातील अग्नीचे मुख) या अर्थांत सांगितले आहे. ๘๙๐. ८९०. กามเช โกปเช โทเส, พฺยสนญฺจ วิปตฺติยํ; อโถ’ปกรเณ สิทฺธิ, การเกสุ จ สาธนํ. ‘ब्यसन’ (व्यसन) हा शब्द कामवासना किंवा क्रोधापासून उत्पन्न होणारा दोष आणि विपत्ती (संकट) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘साधन’ हा शब्द उपकरण (साधन), सिद्धी (यश) आणि कारक (व्याकरणातील कारक) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๙๑. ८९१. ตีสฺวีริโต ทานสีเล, วทญฺญู วคฺคุวาทินิ; ปุรกฺขโต ภิสิตฺเต จ, ปูชิเต ปุรโตกเต. तिन्ही लिंगांत ‘वदञ्ञू’ (वदान्य) हा शब्द दानशूर आणि गोड बोलणारा या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘पुरक्खत’ (पुरस्कृत) हा शब्द अभिषिक्त (ज्याचा अभिषेक झाला आहे), पूजित आणि पुढे केलेला या अर्थांत वापरला जातो. ๘๙๒. ८९२. มนฺโท ภาคฺยวิหีเน จา, ปฺปเก มูฬฺหา’ปฏูสฺวปิ; วุทฺธิยุตฺเต สมุนฺนทฺเธ, อุปฺปนฺเน อุสฺสิตํ ภเว. ‘मन्द’ हा शब्द भाग्यहीन, अल्प (थोडे), मूर्ख आणि अकुशल (मंद) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘उस्सित’ (उच्छ्रित) हा शब्द वृद्धियुक्त (वाढलेला), गर्विष्ठ (उन्नत) आणि उत्पन्न झालेला या अर्थांत वापरला जातो. ๘๙๓. ८९३. รถงฺเค’กฺโข [Pg.74] สุวณฺณสฺมึ, ปาสเก, อกฺข มินฺทฺริเย; สสฺสเต จ ธุโว ตีสุ, ธุวํ ตกฺเก จ นิจฺฉิเต. ‘अक्ख’ (अक्ष) हा शब्द रथाचे चाक (अक्ष), सोन्याचे एक वजन, फासा (द्यूताचा खेळ) आणि इंद्रिय या अर्थांत वापरला जातो; तर तिन्ही लिंगांत ‘धुव’ (ध्रुव) हा शब्द शाश्वत या अर्थात आणि ‘धुवं’ हा शब्द तर्क व निश्चित या अर्थांत वापरला जातो. ๘๙๔. ८९४. หเร สิโว, สิวํ ภทฺท, โมกฺเขสุ, ชมฺพุเก สิวา; เสนายํ สตฺติยญฺเจว, ถูลตฺเต จ พลํ ภเว. पुल्लिंगात ‘सिव’ (शिव) हा शब्द हर (महादेव) या अर्थात, नपुंसकलिंगात ‘सिवं’ हा शब्द कल्याण व मोक्ष या अर्थांत आणि स्त्रीलिंगात ‘सिवा’ हा शब्द कोल्हा या अर्थात वापरला जातो; तर ‘बल’ हा शब्द सेना (लष्कर), शक्ती आणि स्थूलत्व (जाडेपणा) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๙๕. ८९५. สงฺขฺยา นรกเภเทสุ, ปทุมํ วาริเช ปฺยถ; เทวเภเท วสุ ปุเม, ปณฺฑกํ รตเน ธเน. ‘पदुम’ (पद्म) हा शब्द एक संख्या, नरकाचा एक प्रकार आणि कमळ या अर्थांत वापरला जातो; तर पुल्लिंगात ‘वसु’ हा शब्द देवाचा एक प्रकार या अर्थात आणि नपुंसकलिंगात रत्न व धन या अर्थांत वापरला जातो. ๘๙๖. ८९६. นิพฺพานํ อตฺถคมเน, อปวคฺเค สิยา ถ จ; เสตมฺพุเช ปุณฺฑรีกํ, พฺยคฺเฆ รุกฺขนฺตเร ปุเม. ‘निब्बान’ (निर्वाण) हा शब्द अस्ताला जाणे (शांत होणे) आणि मोक्ष (अपवर्ग) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘पुण्डरीक’ हा शब्द पांढरे कमळ या अर्थात आणि पुल्लिंगात वाघ व एका विशिष्ट वृक्षाच्या अर्थात वापरला जातो. ๘๙๗. ८९७. อุปหาเร พลิ ปุเม, กรสฺมึจา’สุรนฺตเร; สุกฺกํ ตุ สมฺภเว, สุกฺโก, ธวเล, กุสเล ติสุ. पुल्लिंगात ‘बलि’ हा शब्द उपहार (पूजा/बळी), कर (महसूल) आणि एका असुराच्या अर्थात वापरला जातो; तर नपुंसकलिंगात ‘सुक्कं’ हा शब्द वीर्य (उत्पत्तीचे कारण) या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत ‘सुक्क’ (शुक्ल) हा शब्द पांढरा व कुशल (पुण्य) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๙๘. ८९८. ทาโย ทาเน วิภตฺตพฺพ, ธเน จ ปิตุนํ วเน ; ปภุตฺตา’ยตฺตตา’ยตฺตา’, ภิลาเสสุ วโส ภเว. ‘दायो’ (दाय) हा शब्द दान, वडिलांच्या संपत्तीची वाटणी (वारसाहक्क) आणि वन (जंगल) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘वसो’ (वश) हा शब्द प्रभुत्व (सामर्थ्य), पराधीनता (अधीन असणे) आणि अभिलाषा (इच्छा) या अर्थांत वापरला जातो. ๘๙๙. ८९९. ปริภาสน มกฺโกเส, นิยเม ภาสเน ถ จ,ธนมฺหิ เสฬนํ โยธ, สีหนาทมฺหิ ทิสฺสติ. ‘परिभासन’ हा शब्द शिवीगाळ (आक्रोश), नियम आणि भाषण या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘सेळन’ हा शब्द धन आणि योद्ध्यांची गर्जना (सिंहनाद) या अर्थांत आढळतो. ๙๐๐. ९००. ปภโว ชาติเหตุมฺหิ, ฐาเน จาทฺยุปลทฺธิยํ; อโถ’ตุ นาริปุปฺผสฺมึ, เหมนฺตาทิมฺหิ จ ทฺวิสุ. ‘पभव’ (प्रभव) हा शब्द उत्पत्तीचे कारण आणि प्रथम उगमस्थान या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘उतु’ (ऋतू) हा शब्द स्त्रीचा विटाळ (ऋतुपुष्प) आणि हेमंत इत्यादी ऋतू या दोन्ही अर्थांत वापरला जातो. ๙๐๑. ९०१. กรณํ สาธกตเม, กฺริยา คตฺเตสุ อินฺทฺริเย; ตาโต ตุ กุญฺจิกายญฺจ, ตูริยงฺเค ทุมนฺตเร. ‘करण’ हा शब्द सर्वात प्रभावी साधन (व्याकरणातील करण), क्रिया, शरीराचे अवयव आणि इंद्रिय या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘तात’ हा शब्द किल्ली, वाद्याचा अवयव आणि एका विशिष्ट वृक्षाच्या अर्थात वापरला जातो. ๙๐๒. ९०२. ปุปฺเผ ผเล จ ปสโว, อุปฺปาเท คพฺภโมจเน; คายเน คายเก อสฺเส, คนฺธพฺโพ เทวตานฺตเร. ‘पसव’ (प्रसव) हा शब्द फूल, फळ, उत्पत्ती आणि प्रसूती (गर्भमोचन) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘गन्धब्ब’ (गंधर्व) हा शब्द गायन, गायक, घोडा आणि देवतेचा एक प्रकार या अर्थांत वापरला जातो. ๙๐๓. ९०३. วินา ปุปฺผํ ผลคฺคาหิ, รุกฺเข วนปฺปติ; อาหเต เหมรชเต, รูปิยํ รชเตปิ จ. ‘vanappati’ (वनस्पती) हा शब्द फुलांशिवाय फळ देणाऱ्या वृक्षाच्या अर्थात वापरला जातो; तर ‘रूपिय’ (रुप्य) हा शब्द शिक्का मारलेले सोने व चांदी आणि केवळ चांदी या अर्थांत वापरला जातो. ๙๐๔. ९०४. ขคาทิพนฺธเน ปาโส, เกสปุพฺโพ จเย ปฺยถ; ตารา’กฺขิมชฺเฌ นกฺขตฺเต, ตาโร อุจฺจตรสฺสเร. ‘पास’ (पाश) हा शब्द पक्षी इत्यादींना बांधण्याचा फास आणि ‘केस’ शब्दाच्या पुढे आल्यास केसांचा पुंजका (केशपाश) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘तारा’ हा शब्द डोळ्याची बाहुली व नक्षत्र या अर्थांत आणि ‘तार’ हा शब्द उच्च स्वराच्या अर्थात वापरला जातो. ๙๐๕. ९०५. ปตฺเต จ โลหเภทสฺมึ, กํโส จตุกหาปเณ; มชฺฌิโม เทหมชฺฌสฺมึ, มชฺฌภเว จ โส ติสุ. ‘कंस’ हा शब्द पात्र (भांडे), कांस्य (काशाचा धातू) आणि चार कहापण मूल्याचे नाणे या अर्थांत वापरला जातो; तर तिन्ही लिंगांत ‘मज्झिम’ (मध्यम) हा शब्द शरीराचा मध्यभाग (कमर) आणि मध्यभागी असणारा या अर्थांत वापरला जातो. ๙๐๖. ९०६. อาเวสนํภูตาเวเส, สิปฺปสาลา ฆเรสุ จ; โสภา สมฺปตฺตีสุ สิรี, ลกฺขีตฺถี เทวตาย จ. ‘आवेसन’ (आवेशन) हा शब्द भुताने झपाटणे (भूतावेश), शिल्पशाळा (कार्यशाळा) आणि घर या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘सिरी’ (श्री) हा शब्द शोभा, संपत्ती आणि लक्ष्मी देवी या अर्थांत वापरला जातो. ๙๐๗. ९०७. กุมาโร [Pg.75] ยุวราเช จ, ขนฺเท วุตฺโต สุสุมฺหิ จ; อถา’นิตฺถี ปวาโฬ จ, มณิเภเท ตถา’งฺกุเร. ‘कुमार’ हा शब्द युवराज, स्कंद (कार्तिकेय) आणि लहान मुलगा या अर्थांत वापरला जातो; तर पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी ‘पवाळ’ (प्रवाळ) हा शब्द मण्याचा प्रकार (पोवळे) आणि अंकुर (कोंब) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๐๘. ९०८. ปโณ เวตน มูเลสุ, โวหาเร จ ธเน มโต; ปฏิคฺคโห ตุ คหเณ, กถิโต ภาชนนฺตเร. ‘पणो’ (पण) हा शब्द वेतन (मजुरी), मूल्य (किंमत), व्यापार आणि धन या अर्थांत मानला जातो; तर ‘पटिग्गह’ (प्रतिग्रह) हा शब्द स्वीकार करणे (ग्रहण करणे) आणि थुंकपात्र (एक प्रकारचे भांडे) या अर्थांत सांगितला जातो. ๙๐๙. ९०९. อสุเภ จ สุเภ กมฺเม, ภาคฺยํ วุตฺตํ ทฺวเย ปฺยถ; ปิปฺผลํ ตรุเภเท จ, วตฺถจฺเฉทนสตฺถเก. ‘भाग्य’ हा शब्द अशुभ कर्म आणि शुभ कर्म या दोन्ही अर्थांत वापरला जातो; तर ‘पिप्फल’ (पिंपळ) हा शब्द एका विशिष्ट वृक्षाच्या अर्थात आणि कापड कापण्याचे साधन (कात्री) या अर्थात वापरला जातो. ๙๑๐. ९१०. อปวคฺโค ปริจฺจาคา’, วสาเนสุ วิมุตฺติยํ; ลิงฺคํ ตุ องฺคชาตสฺมึ, ปุมตฺตาทิมฺหิ ลกฺขเณ. ‘अपवग्ग’ (अपवर्ग) हा शब्द त्याग (परित्याग), समाप्ती आणि विमुक्ती (मोक्ष) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘लिङ्ग’ (लिंग) हा शब्द जननेंद्रिय, पुल्लिंग इत्यादी व्याकरणिक लिंग आणि लक्षण (चिन्ह) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๑๑. ९११. จาเค สภาเว นิมฺมาเน, สคฺโค ชฺฌาเย ทิเวปฺยถ; โรหิโต โลหิเต มจฺฉ, เภเท เจว มิคนฺตเร. ‘सग्गो’ (सर्ग) हा शब्द त्याग, स्वभाव, निर्माण (सृष्टी), अध्याय आणि स्वर्ग या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘रोहित’ हा शब्द लाल रंग, माशाचा एक प्रकार आणि हरणाचा एक प्रकार या अर्थांत वापरला जातो. ๙๑๒. ९१२. นิฏฺฐา นิปฺผตฺติยํ เจวา, วสานมฺหิ อทสฺสเน; กณฺฏโก ตุ สปตฺตสฺมึ, รุกฺขงฺเค โลมหํสเน. ‘निट्ठा’ (निष्ठा) हा शब्द निष्पत्ती (पूर्णता), समाप्ती आणि अदृश्य होणे (अदर्शन) या अर्थांत वापरला जातो; तर ‘कण्टक’ (काटा) हा शब्द शत्रू, वृक्षाचा अवयव (काटा) आणि रोमांच उभे राहणे या अर्थांत वापरला जातो. ๙๑๓. ९१३. มุขฺโย’ปาเยสุ วทเน, อาทิสฺมึ มุข มีริตํ; ทพฺพํ ภพฺเพ คุณาธาเร, วิตฺเต จ พุธ ทารุสุ. 'मुख' हा शब्द मुख्य, उपाय, तोंड (वदन) आणि सुरुवातीला (आदि) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'दब्ब' (द्रव्य) हा शब्द योग्य (भव्य), गुणांचा आधार, संपत्ती (वित्त), विद्वान (बुध) आणि लाकूड (दारु) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๑๔. ९१४. มานํ ปมาเณ ปตฺถาโท, มาโน วุตฺโต วิธาย จ; อโถ ปริสฺสเม วุตฺโต, วายาโม วีริเยปิ จ. 'मान' हा शब्द मोजमाप (प्रमाण), प्रस्थ (एक माप), आणि गर्व (मान) तसेच राग या अर्थांनी वापरला जातो; आणि 'वायाम' (व्यायाम) हा शब्द परिश्रम (थकवा) आणि वीर्य (प्रयत्न/ऊर्जा) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๑๕. ९१५. สโรรุเห สตปตฺตํ, สตปตฺโต ขคนฺตเร; ฉิทฺเท ตุ ฉิทฺทวนฺเต จ, สุสิรํ ตูริยนฺตเร. 'सतपत्त' (शतपत्र) हा शब्द कमळ (सरोरुह) आणि एका विशिष्ट पक्ष्यासाठी (खग) वापरला जातो; तर 'सुसिर' (सुषिर) हा शब्द छिद्र, छिद्र असलेले आणि वाद्यांच्या प्रकारासाठी (सुषिर वाद्य) वापरला जातो. ๙๑๖. ९१६. เอกสฺมึ สทิเส สนฺเต, สมานํ วาจฺจลิงฺคิกํ; อโถ คารว ภีตีสุ, สํเวเค สมฺภโม มโต. 'समान' हा शब्द (तिन्ही लिंगांत) एक, सारखा (सदृश) आणि शांत/सत् या अर्थांनी वापरला जातो; तसेच 'सम्भम' (संभ्रम) हा शब्द आदर (गौरव), भीती आणि संवेग (धार्मिक भीती/उत्कंठा) या अर्थांनी मानला जातो. ๙๑๗. ९१७. ชุณฺหา จนฺทปฺปภายญฺจ, ตทุเปตนิสาย จ; วิมานํ เทวตาวาเส, สตฺตภูมิฆรมฺหิ จ. 'जुण्हा' (ज्योत्स्ना) हा शब्द चांदणे (चंद्रप्रकाश) आणि चांदण्या रात्रीसाठी वापरला जातो; तर 'विमान' हा शब्द देवांचे निवासस्थान (देवतावास) आणि सात मजली घरासाठी (प्रासाद) वापरला जातो. ๙๑๘. ९१८. มาเส เชฏฺโฐ, ติวุทฺธา’ติ, ปฺปสตฺเถสุ จ ตีสุ โส; ธมฺเม จ มงฺคเล เสยฺโย, โส ปสตฺถตเร ติสุ. 'जेट्ठ' (ज्येष्ठ) हा शब्द ज्येष्ठ महिना, तीन प्रकारचे वृद्ध (वय, गुण आणि शील यांनी वृद्ध) आणि श्रेष्ठ (प्रशस्त) या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; तर 'सेय्य' (श्रेयस) हा शब्द धम्म, मंगल आणि अधिक श्रेष्ठ (प्रशस्ततर) या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๙๑๙. ९१९. อาทิจฺจาทิมฺหิ คหเณ, นิพนฺเธ จ ฆเร คโห; กาโจ ตุ มตฺติกาเภเท, สิกฺกายํ นยนามเย. 'गह' (ग्रह) हा शब्द सूर्य इत्यादींचे ग्रहण, आग्रह (हट्ट/निबंध) आणि घर या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'काच' हा शब्द मातीचा एक प्रकार, शिंके (सिक्का) आणि डोळ्यांचा आजार (काचबिंदू) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๒๐. ९२०. ตีสุ คามณิ เสฏฺฐสฺมึ, อธิเป คามเชฏฺฐเก; พิมฺพํ ตุ ปฏิพิมฺเพ จ, มณฺฑเล พิมฺพิกาผเล. 'गामणी' (ग्रामणी) हा शब्द श्रेष्ठ, अधिपती आणि गावाचा प्रमुख (गावचा पाटील/जेष्ठ) या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; तर 'बिम्ब' हा शब्द प्रतिबिंब, मंडल (सूर्य-चंद्राचे बिंब) आणि तोंडलीचे फळ (बिंबिकाफल) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๒๑. ९२१. ภาชนาทิ ปริกฺขาเร, ภณฺฑํ มูลธเนปิ จ; มคฺโค ตฺวริยมคฺเค จ, สมฺมาทิฏฺฐาทิเก, ปเถ. 'भण्ड' (भांड/भांडे) हा शब्द भांडी इत्यादी उपकरणे आणि मूळ भांडवल (मूलधन) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'मग्ग' (मार्ग) हा शब्द आर्य अष्टांगिक मार्ग (सम्मादिट्ठि इत्यादी) आणि रस्ता (पथ) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๒๒. ९२२. สมา [Pg.76] วสฺเส, สโม เขท, สนฺตีสุ, โส นิเภ ติสุ; จาเปตฺวิสฺสาส, มุสุโน, อิสฺสาโส เขปกมฺหิ จ. 'समा' हा शब्द वर्षासाठी (वर्ष) वापरला जातो; 'सम' हा शब्द थकवा (खेद), शांती आणि तिन्ही लिंगांत 'सारखा' (सदृश) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'इस्सास' (इष्वास) हा शब्द धनुष्य, बाण आणि धनुर्धारी (फेकणारा) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๒๓. ९२३. พาโล ตีสฺวา’ทิวยสา, สมงฺคินิ อปณฺฑิเต; รตฺตํ ตุ โสณิเต, ตมฺพา, นุรตฺต, รญฺชิเต ติสุ. 'बाल' हा शब्द बालवय (लहान मूल) आणि अज्ञानी (मूर्ख) या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; तर 'रत्त' (रक्त) हा शब्द रक्तासाठी आणि तांबडा (लाल), अनुरक्त (प्रेम असलेला) व रंगवलेला या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๙๒๔. ९२४. ตเจ กาเย จ ตนฺวิตฺถี, ตีสฺว’ปฺเป วิรเฬ กิเส; อุตุเภเท ตุ สิสิโร, หิเม โส สีตเล ติสุ. 'तनु' हा शब्द स्त्रीलिंगात त्वचा आणि शरीर या अर्थांनी वापरला जातो, तर तिन्ही लिंगांत अल्प (कमी), विरळ आणि बारीक (कृश) या अर्थांनी वापरला जातो; 'सिसिर' (शिशिर) हा शब्द हिवाळा (ऋतूचा प्रकार) आणि तिन्ही लिंगांत बर्फ (हिम) व थंड (शीतल) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๒๕. ९२५. สกฺขรา คุฬเภเท จ, กถเลปิ จ ทิสฺสติ; อนุคฺคเห ตุ สงฺเขเป, คหเณ สงฺคโห มโต. 'Sakkharā' (शर्करा/साखर) हा शब्द गुळाचा प्रकार आणि खडे (कण/वाळूचे खडे) या अर्थांनी दिसतो; तर 'सङ्गह' (संग्रह) हा शब्द अनुग्रह (मदत/कल्याण), संक्षेप (थोडक्यात) आणि ग्रहण (एकत्र करणे) या अर्थांनी मानला जातो. ๙๒๖. ९२६. ทกฺเข จ ติขิเณ พฺยตฺเต, โรคมุตฺเต ปฏุตฺติสุ; ราชา ตุ ขตฺติเย วุตฺโต, นรนาเถ ปภุมฺหิ จ. 'पटु' हा शब्द चतुर (दक्ष), तीक्ष्ण, बुद्धिमान (व्यक्त) आणि रोगातून मुक्त झालेला या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; तर 'राजा' हा शब्द क्षत्रिय, मनुष्यांचा स्वामी (नरनाथ) आणि प्रभू (मालक) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๒๗. ९२७. ขลญฺจ ธญฺญกรเณ, กกฺเก นีเจ ขโล ภเว; อถุ’ปฺปาเท สมุทโย, สมูเห ปจฺจเยปิ จ. 'खल' हा शब्द खळे (धान्य मळण्याची जागा), कल्क (लेप/चिखल) आणि नीच (दुष्ट माणूस) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'समुदय' हा शब्द उत्पत्ती (उदय), समूह आणि प्रत्यय (कारण/हेतू) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๒๘. ९२८. พฺรหฺมจารี คหฏฺฐาโท, อสฺสโม จ ตโปวเน; ภยงฺกเร ตุ กฐิเน, กุรูโร ตีสุ นิทฺทเย. 'अस्सम' (आश्रम) हा शब्द ब्रह्मचारी, गृहस्थ इत्यादी अवस्था आणि तपोवनातील आश्रम या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'कुरूर' (क्रूर) हा शब्द भयानक, कठीण आणि निर्दयी या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๙๒๙. ९२९. กนิฏฺโฐ กนิโย ตีสุ, อตฺยปฺเป’ติยุเว ปฺยถ; สีฆมฺหิ ลหุ ตํ, อิฏฺฐ, นิสฺสารา’ครุสุตฺติสุ. 'कनिट्ठ' (कनिष्ठ) आणि 'कनिय' (कनीय) हे शब्द अतिशय लहान आणि अतिशय तरुण या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरले जातात; तर 'लहु' (लघु) हा शब्द वेगासाठी (शीघ्र) आणि तिन्ही लिंगांत इष्ट (प्रिय), निस्सार (सार नसलेले), हलके (अगुरु) आणि सुंदर या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๓๐. ९३०. อธโร ตีสฺวโธ หีเน, ปุเม ทนฺตจฺฉเท ปฺยถ; สุสฺสุสา โสตุ มิจฺฉาย, สา ปาริจริยาย จ. 'अधर' हा शब्द खाली (अधो) आणि हीन (कनिष्ठ) या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो, तसेच पुल्लिंगात ओठ (दंतच्छद) या अर्थाने वापरला जातो; तर 'सुस्सूसा' (शुश्रूषा) हा शब्द ऐकण्याची इच्छा आणि सेवा (परिचर्या) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๓๑. ९३१. หตฺโถ ปาณิมฺหิ รตเน, คเณ โสณฺฑาย ภนฺตเร; อาวาเฏ อุทปาเน จ, กูโป กุมฺเภ จ ทิสฺสติ. 'हत्थ' (हस्त) हा शब्द हात (पाणि), हातभर माप (रतन), समूह (गण), हत्तीची सोंड आणि नक्षत्र (हस्त नक्षत्र) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'कूप' हा शब्द खड्डा (आवाट), विहीर (उदपान) आणि कुंभ (घडा) या अर्थांनी दिसतो. ๙๓๒. ९३२. อาโท ปธาเน ปฐมํ, ปมุขญฺจ ติลิงฺคิกํ; วชฺชเภเท จ วิต ตํ, ตํ วิตฺถาเร ติลิงฺคิกํ. 'पठम' (प्रथम) आणि 'पमुख' (प्रमुख) हे शब्द सुरुवात (आदि) आणि मुख्य (प्रधान) या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरले जातात; तर 'वितत' हा शब्द वाद्याचा एक प्रकार आणि तिन्ही लिंगांत विस्तार (विस्तृत) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๓๓. ९३३. สาโร พเล ถิรํเส จ, อุตฺตเม โส ติลิงฺคิโก; ภาโร ตุ ขนฺธภาราโท, ทฺวิสหสฺสปเลปิ จ. 'सार' हा शब्द बल (शक्ती) आणि कठीण भाग (सारभाग) या अर्थांनी वापरला जातो, तसेच तिन्ही लिंगांत उत्तम या अर्थाने वापरला जातो; तर 'भार' हा शब्द खांद्यावरील ओझे (स्कंधभार इत्यादी) आणि दोन हजार पल (एक वजन) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๓๔. ९३४. มนฺทิเร โรคเภเท จ, ขโย อปจยมฺหิ จ; วาโฬ ตุ สาปเท สปฺเป, กุรูเร โส ติลิงฺคิโก. 'खय' (क्षय) हा शब्द घर (मंदिर), रोगाचा प्रकार (टीबी/क्षयरोग) आणि नाश (ऱ्हास/अपचय) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'वाळ' (व्याल) हा शब्द हिंस्र पशू, साप आणि तिन्ही लिंगांत क्रूर या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๓๕. ९३५. สาโล สชฺชทฺทุเม รุกฺเข, สาลาเคเห จ ทิสฺสติ; โสเต ตุ สวนํ วุตฺตํ, ยชเน สุติยมฺปิ จ. 'साल' (शाल वृक्ष) हा शब्द शाल वृक्षासाठी आणि घरासाठी (शाळा/दालन) वापरला जातो; तर 'सवन' हा शब्द कान (श्रोत्र), यज्ञ (यजन) आणि ऐकणे (श्रुती) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๓๖. ९३६. ตีสุ ปโต ปเรโต จ, มเต จ เปตโยนิเช; ขฺยาเต ตุ หฏฺเฐ วิญฺญาเต, ปตีตํ วาจฺจลิงฺคิกํ. 'पेत' (प्रेत) आणि 'पेत' (प्रेतयोनीतील) हे शब्द मृत आणि प्रेतयोनीत जन्मलेला या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरले जातात; तर 'पतीत' (प्रतीत) हा शब्द प्रसिद्ध (ख्यात), आनंदी (हृष्ट) आणि ज्ञात (समजलेला) या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๙๓๗. ९३७. อธิปฺปาเย [Pg.77] จ อาธาเร, อาสโย กถิโต ถ จ; ปตฺตํ ปกฺเข ทเล, ปตฺโต, ภาชเน โส คเต ติสุ. 'आसय' (आशय) हा शब्द हेतू (अभिप्राय) आणि आधार या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'पत्त' हा शब्द पंख (पक्ष), पान (दल) या अर्थांनी, 'पत्त' (पात्र) हा शब्द भांड्यासाठी आणि 'पत्त' (प्राप्त) हा शब्द तिन्ही लिंगांत गेलेला (प्राप्त झालेला) या अर्थाने वापरला जातो. ๙๓๘. ९३८. กุสเล สุกตํ, สุฏฺฐุ, กเต จ สุกโต ติสุ; ตปสฺสี ตฺว’นุกมฺปายา, รเห วุตฺโต ตโปธเน. 'सुकत' (सुकृत) हा शब्द कुशल (पुण्यकर्म) आणि तिन्ही लिंगांत 'चांगले केलेले' या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'तपस्सी' (तपस्वी) हा शब्द अनुकंपा (दया/दीन) आणि तपस्वी (तपोधन) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๓๙. ९३९. ตีสุ สุราทิโลลสฺมึ, โสณฺโฑ หตฺถิกเร ทฺวิสุ; อสฺสาทเน ตุ รสนํ, ชิวฺหายญฺจ ธนิมฺหิ จ. 'सोण्ड' (शौण्ड) हा शब्द दारू इत्यादींचे व्यसन असलेला या अर्थाने तिन्ही लिंगांत आणि हत्तीच्या सोंडेसाठी दोन लिंगांत वापरला जातो; तर 'रसन' हा शब्द आस्वाद घेणे, जीभ (जिव्हा) आणि ध्वनी या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๐. ९४०. ปณีโต ตีสุ มธุเร, อุตฺตเม วิหิเต ปฺยถ; อญฺชเส วิสิขายญฺจ, ปนฺติยํ วีถิ นาริยํ. 'पणीत' (प्रणीत) हा शब्द गोड (मधुर), उत्कृष्ट (उत्तम) आणि रचलेला (विहित) या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; तर 'वीथि' (वीथी) हा शब्द स्त्रीलिंगात मार्ग, गल्ली (वीथी) आणि ओळ (पंक्ती) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๑. ९४१. ปาปสฺมึ คคเน ทุกฺเข, พฺยสเน จา’ฆ มุจฺจเต; สมูเห ปฏลํ เนตฺต, โรเค วุตฺตํ ฉทิมฺหิ จ. 'अघ' हा शब्द पाप, आकाश (गगन), दुःख आणि संकट (व्यसन) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'पटल' हा शब्द समूह, डोळ्यांचा आजार (पटलरोग) आणि छप्पर (छदि) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๒. ९४२. สนฺธิ สงฺฆฏฺฏเน วุตฺโต, สนฺธิ’ตฺถิ ปฏิสนฺธิยํ; สตฺตนฺนํ ปูรเณ เสฏฺเฐ, ติสนฺเต สตฺตโม ติสุ. 'सन्धि' (संधी) हा शब्द जोडणे (संघट्टन) आणि स्त्रीलिंगात प्रतिसंधी (पुनर्जन्म) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'सत्तम' हा शब्द सातवा (सात पूर्ण करणारा) आणि श्रेष्ठ या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๙๔๓. ९४३. โอชา ตุ ยาปนายญฺจ, โอโช ทิตฺติ พเลสุ จ; อโถ นิสามนํ วุตฺตํ, ทสฺสเน สวเนปิ จ. 'ओजा' हा शब्द पोषणासाठी (यापना) वापरला जातो; 'ओज' हा शब्द तेज (दीप्ती) आणि बल (शक्ती) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'निसामन' हा शब्द पाहणे (दर्शन) आणि ऐकणे (श्रवण) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๔. ९४४. คพฺโภ กุจฺฉิฏฺฐสตฺเต จ, กุจฺฉิ โอวรเกสุ จ; ขณฺฑเน ตฺว’ปทานญฺจ, อิติวุตฺเต จ กมฺมนิ. 'गब्भ' (गर्भ) हा शब्द गर्भातील जीव, पोट (कुक्षी) आणि आतील खोली (ओवरक) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'अपदान' (अवदान/अपदान) हा शब्द तुकडे करणे (खंडन), जीवनचरित्र (इतिवृत्त) आणि कर्म (कार्य) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๕. ९४५. จิตฺตเก รุกฺขเภเท จ, ติลโก ติลกาฬเก; สีลาโท ปฏิปตฺติ’ตฺถี, โพเธ ปตฺติ ปวตฺติสุ. 'तिलक' हा शब्द कपाळावरील टिळा (चित्रक), वृक्षाचा प्रकार आणि तीळ (त्वचेवरील काळा डाग) या अर्थांनी वापरला जातो; 'पटिपत्ति' (प्रतिपत्ती) हा शब्द स्त्रीलिंगात शील इत्यादींचे आचरण या अर्थाने वापरला जातो; तर 'पत्ति' (प्राप्ती/पत्ती) हा शब्द बोध (ज्ञान) आणि प्रवृत्ती (घडणे) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๖. ९४६. อสุมฺหิ จ พเล ปาโณ, สตฺเต หทยคา’นิเล; ฉนฺโท วเส อธิปฺปาเย, เวเท’จฺฉา’นุฏฺฐุภาทิสุ. 'पाण' (प्राण) हा शब्द जीवन (असू), बल, प्राणी (सत्त्व) आणि हृदयातील वायू या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'छन्द' (छंद) हा शब्द वश (इच्छा), अभिप्राय (हेतू), वेद, इच्छा आणि अनुष्टुभ् इत्यादी छंद या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๗. ९४७. กาโมฆาโท, สมูหสฺมึ, โอโฆเวเค ชลสฺส จ; กปาลํ สิรสฏฺฐิมฺหิ, ฆฏาทิ สกเลปิ จ. 'ओघ' हा शब्द काम-ओघ इत्यादी (आसक्तीचा पूर), समूह आणि पाण्याचा वेगवान प्रवाह या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'कपाल' हा शब्द कवटी (डोक्याचे हाड) आणि मातीच्या घड्याचा तुकडा (खापर) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๘. ९४८. เวณฺวาทิสาขาชาลสฺมึ, ลคฺคเกเส ชฏา’ลเย; สรณํ ตุ วเธ เคเห, รกฺขิตสฺมิญฺจ รกฺขเณ. 'जटा' हा शब्द बांबू इत्यादींच्या फांद्यांचे जाळे, जटा (गुंतलेले केस) आणि तृष्णा (आलय/आसक्ती) या अर्थांनी वापरला जातो; तर 'सरण' (शरण) हा शब्द वध (नाश), घर, रक्षिलेले आणि रक्षण (आश्रय) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๔๙. ९४९. ถิยํ กนฺตา ปิเย, กนฺโต, มนุญฺเญ, โส ติลิงฺคิโก; ควกฺเข ตุ สมูเห จ, ชาลํ มจฺฉาทิพนฺธเน. 'कन्ता' (कांता) हा शब्द स्त्रीलिंगात प्रियेसाठी (पत्नी) वापरला जातो, तर 'कन्त' (कांत) हा शब्द तिन्ही लिंगांत मनोहर (मनुज्ञ) या अर्थाने वापरला जातो; 'जाल' (जाळे) हा शब्द खिडकी (गवाक्ष), समूह आणि मासे पकडण्याचे जाळे या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๕๐. ९५०. ปุจฺฉายํ ครหายญฺจา, นิยเม กึ ติลิงฺคิกํ; สสทฺเธ ตีสุ นิวาเป, สทฺธํ, สทฺธา จ ปจฺจเย. 'किं' हा शब्द प्रश्न (पुच्छा), निंदा (गर्हा) आणि नियम या अर्थांनी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; 'सद्ध' (श्राद्ध/श्रद्ध) हा शब्द तिन्ही लिंगांत श्रद्धाळू (श्रद्धा असलेला) आणि श्राद्ध (पितृतर्पण) या अर्थांनी वापरला जातो, तर 'सद्धा' (श्रद्धा) हा शब्द विश्वास (प्रत्यय) या अर्थाने वापरला जातो. ๙๕๑. ९५१. พีชํ [Pg.78] เหตุมฺหิ อฏฺฐิสฺมึ, องฺคชาเต จ ทิสฺสติ; ปุพฺโพ ปูเย’คฺคโต อาโท,โส ทิสาโท ติลิงฺคิโก. 'बीज' हा शब्द हेतू (कारण), बी (अस्थि/आतील कठीण भाग) आणि जननेंद्रिय (अंगजात) या अर्थांनी दिसतो; तर 'पुब्ब' (पूर्व/पूय) हा शब्द पू (पूय) या अर्थाने आणि तिन्ही लिंगांत पुढे (अग्र), सुरुवातीला (आदि) आणि पूर्व दिशा इत्यादी अर्थांनी वापरला जातो. ๙๕๒. ९५२. ผลจิตฺเต เหตุกเต, ลาเภ ธญฺญาทิเก ผลํ; อาคมเน ตุ ทีฆาทิ, นิกาเยสุ จ อาคโม. 'फल' हा शब्द फलचित्त (धम्मातील फलज्ञान), कारणाचे फळ (परिणाम), लाभ आणि धान्य-फळ इत्यादी अर्थांनी वापरला जातो; तर 'आगम' हा शब्द येणे (आगमन), व्याकरणातील दीर्घत्व इत्यादी आदेश आणि निकाय (ग्रंथसमूह) या अर्थांनी वापरला जातो. ๙๕๓. ९५३. สนฺตาโน เทวรุกฺเข จ, วุตฺโต สนฺตติยํ ปฺยถ; อุตฺตรวิปรีเต จ, เสฏฺเฐ จา’นุตฺตรํ ติสุ. 'संतान' हा शब्द कल्पवृक्ष (देववृक्ष) आणि संतती (वंशपरंपरा) या अर्थांत वापरला जातो; 'अनुत्तर' हा शब्द तिन्ही लिंगांत उत्तराच्या विरुद्ध (निरुत्तर), आणि श्रेष्ठ या अर्थांत वापरला जातो. ๙๕๔. ९५४. สตฺติสมฺปตฺติยํ วุตฺโต, กนฺติมตฺเต จ วิกฺกโม; ฉายา ตุ อาตปาภาเว, ปฏิพิมฺเพ ปภาย จ. 'विक्कम' (विक्रम) हा शब्द शक्तीची प्राप्ती आणि कांती (तेजस्वीपणा) या अर्थांत वापरला जातो; 'छाया' हा शब्द उन्हाचा अभाव (सावली), प्रतिबिंब आणि प्रभा (तेज) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๕๕. ९५५. คิมฺเห ฆมฺโม นิทาโฆ จ, อุณฺเห เสทชเล ปฺยถ; กปฺปนํ กนฺตเน วุตฺตํ, วิกปฺเป สชฺชเน’ตฺถิยํ. 'घम्म' (घर्म) आणि 'निदाघ' हे शब्द उन्हाळा, उष्णता आणि घाम या अर्थांत वापरले जातात; 'कप्पन' (कल्पन) हा शब्द स्त्रीलिंगात कापणे, विकल्प (विचार) आणि सजवणे या अर्थांत वापरला जातो. ๙๕๖. ९५६. องฺคา เทเส พหุมฺห’งฺคํ, องฺโค เทเส วปุมฺห’ ตถา’วยวเหตุสุ; เทวาลเย จ ถูปสฺมึ, เจติยํ เจติย’ทฺทุเม. 'अंग' हा शब्द अनेकवचनात 'अंग देश' या अर्थात, तर एकवचनात शरीर, अवयव आणि कारण या अर्थांत वापरला जातो; 'चेतिय' (चैत्य) हा शब्द देवालय, स्तूप आणि पूजनीय वृक्ष (चैत्यवृक्ष) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๕๗. ९५७. สชฺชโน สาธุปุริเส, สชฺชนํ กปฺปเน ปฺยถ; สุปินํ สุปิเน สุตฺต, วิญฺญาเณ ต มนิตฺถิยํ. 'सज्जन' हा शब्द पुल्लिंगात चांगला माणूस (साधुपुरुष) या अर्थात, तर नपुंसकलिंगात सजवणे (कल्पन) या अर्थात वापरला जातो; 'सुपिन' (स्वप्न) हा शब्द नपुंसकलिंग व पुल्लिंगात स्वप्न आणि निद्रिस्त अवस्थेतील विज्ञान (चेतना) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๕๘. ९५८. ปจฺจกฺเข สนฺนิธาเน จ, สนฺนิธิ ปริกิตฺติโต; ภิยฺโย พหุตรตฺเถ โส, ปุนรตฺเถ’พฺยยํ ภเว. 'सन्निधि' हा शब्द प्रत्यक्ष आणि जवळीक (सान्निध्य) या अर्थांत सांगितला गेला आहे; 'भिय्यो' (भूयः) हे अव्यय अधिक (पुष्कळ) आणि पुन्हा या अर्थांत वापरले जाते. ๙๕๙. ९५९. วิสลิตฺตสเร ทิทฺโธ, ทิทฺโธ ลิตฺเต ติลิงฺคิโก; วาเส ธูมาทิสงฺขาเร, ธิวาโส สมฺปฏิจฺฉเน. 'दिद्ध' (दिग्ध) हा शब्द पुल्लिंगात विषारी बाण या अर्थात, आणि तिन्ही लिंगांत माखलेला (लेपित) या अर्थात वापरला जातो; 'अधिवास' हा शब्द निवास, धूपाने सुवासित करणे आणि संमती (स्वीकार) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๖๐. ९६०. วุตฺโต วิสารโท ตีสุ, สุปฺปคพฺเภ จ ปณฺฑิเต; อถ สิตฺถํ มธุจฺฉิฏฺเฐ, วุตฺตํ โอทนสมฺภเว. 'विशारद' हा शब्द तिन्ही लिंगांत अत्यंत प्रगल्भ (आत्मविश्वासू) आणि पंडित (विद्वान) या अर्थांत वापरला जातो; 'सित्थ' (सिक्थ) हा शब्द मेण आणि शिजवलेला भात या अर्थांत वापरला जातो. ๙๖๑. ९६१. ทฺรเว วณฺเณ รสเภเท, กสาโย สุรภิมฺหิ จ; อโถ อุคฺคมนํ วุตฺตํ, อุปฺปตฺตุ’ทฺธคตีสุ จ. 'कसाय' (कषाय) हा शब्द द्रव, रंग, चवीचा प्रकार (तुरट रस) आणि सुवास या अर्थांत वापरला जातो; 'उग्गमन' (उद्गमन) हा शब्द उदय (उत्पत्ती) आणि वर जाणे (ऊर्ध्वगती) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๖๒. ९६२. ลูเข นิฏฺฐุรวาจายํ, ผรุสํ วาจฺจลิงฺคิกํ; ปวาโห ตฺว’มฺพุเวเค จ, สนฺทิสฺสติ ปวตฺติยํ. 'फरुस' (परुष) हा विशेषण शब्द वृक्ष (खरखरीत) आणि कठोर भाषण या अर्थांत वापरला जातो; 'पवाह' (प्रवाह) हा शब्द पाण्याचा वेग आणि प्रवृत्ती (चालू राहणे) या अर्थांत दिसून येतो. ๙๖๓. ९६३. นิสฺสเย ตปฺปเร อิฏฺเฐ, ปรายณปทํ ติสุ; กวเจ วารวาเณ จ, นิมฺโมเกปิ จ กญฺจุโก. 'परायण' हा शब्द तिन्ही लिंगांत आश्रय, तत्पर आणि इष्ट या अर्थांत वापरला जातो; 'कंचुक' हा शब्द कवच, अंगरखा आणि सापाची कात या अर्थांत वापरला जातो. ๙๖๔. ९६४. โลหเภเท [Pg.79] มตํ ตมฺพํ, ตมฺโพ รตฺเต ติลิงฺคิโก; ตีสุ ตฺว’วสิตํ ญาเต, อวสานคเต มตํ. 'तम्ब' (तांबे) हा शब्द धातूच्या प्रकारात (तांबे) नपुंसकलिंगात मानला जातो, आणि 'तम्ब' (तांबडा) हा शब्द तिन्ही लिंगांत लाल रंगाच्या अर्थात वापरला जातो; 'अवसित' हा शब्द तिन्ही लिंगांत ज्ञात (माहित असलेले) आणि समाप्तीला गेलेले (पूर्ण झालेले) या अर्थांत मानला जातो. ๙๖๕. ९६५. โพธเน จ ปทาเน จ, วิญฺเญยฺยํ ปฏิปาทนํ; เสเล นิชฺชลเทเส จ, เทวตาสุ มรู’ริโต. 'प्रतिपादन' हा शब्द समजवणे आणि देणे या अर्थांत जाणावा; 'मरु' हा शब्द पर्वत, निर्जल देश (वाळवंट) आणि देवता या अर्थांत सांगितला गेला आहे. ๙๖๖. ९६६. สตฺถํ อายุธ คนฺเถสุ, โลเห, สตฺโถ จ สญฺจเย; ชีวิกายํ วิวรเณ, วตฺตเน วุตฺติ นาริยํ. 'सत्थ' (शस्त्र/शास्त्र) हा शब्द नपुंसकलिंगात शस्त्र, ग्रंथ आणि लोखंड या अर्थांत वापरला जातो, तर 'सत्थ' (सार्थ/तांडा) हा शब्द पुल्लिंगात समूहाच्या अर्थात वापरला जातो; 'वुत्ति' (वृत्ती) हा शब्द स्त्रीलिंगात उपजीविका, विवरण (स्पष्टीकरण) आणि वर्तन या अर्थांत वापरला जातो. ๙๖๗. ९६७. วีริเย สูรภาเว จ, กถียติ ปรกฺกโม; อถ กมฺพุ มโต สงฺเข, สุวณฺเณ วลเยปิ จ. 'परक्कम' (पराक्रम) हा शब्द वीर्य (उत्साह) आणि शूरता या अर्थांत सांगितला जातो; 'कम्बु' हा शब्द शंख, सुवर्ण (सोने) आणि कडे (वलय) या अर्थांत मानला जातो. ๙๖๘. ९६८. สโร กณฺเฑ อการาโท, สทฺเท วาปิมฺหิ’นิตฺถิยํ; ทุปฺผสฺเส ติขิเณ ตีสุ, คทฺรเภ กกเจ ขโร. 'सर' (स्वर/शर) हा शब्द नपुंसकलिंग व पुल्लिंगात बाण, अ-कार आदि स्वर, आवाज आणि तलाव या अर्थांत वापरला जातो; 'खर' हा शब्द तिन्ही लिंगांत स्पर्श करण्यास कठीण (खरखरीत) आणि तीक्ष्ण या अर्थांत, तर पुल्लिंगात गाढव आणि करवत या अर्थांत वापरला जातो. ๙๖๙. ९६९. สุรายุ’ปทฺทเว กามา, สวาทิมฺหิ จ อาสโว; เทเห วุตฺโต รถงฺเค จ, จตุโร’ปธิสู’ปธิ. 'आसव' हा शब्द मद्य (दारू), उपद्रव, कामवासना आणि स्रवणे (प्रवाह) या अर्थांत वापरला जातो; 'उपधि' हा शब्द शरीर, रथाचे चाक आणि चार प्रकारच्या उपधी (क्लेशोपधी इ.) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๐. ९७०. วตฺถุ’ตฺตํ การเณ ทพฺเพ, ภูเภเท รตนตฺตเย; ยกฺโข เทเว มหาราเช, กุเวรา’นุจเร นเร. 'वत्थु' (वस्तु) हा शब्द कारण, द्रव्य, भूमीचा प्रकार आणि त्रिरत्न या अर्थांत वापरला जातो; 'यक्ख' (यक्ष) हा शब्द देव, महाराज, कुबेराचा सेवक आणि मनुष्य या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๑. ९७१. ทารุกฺขนฺเธ ปีฐิกายํ, อาปเณ ปีฐ มาสเน; ปริวาเร ปริกฺขาโร, สมฺภาเร จ วิภูสเน. 'पीठ' हा शब्द लाकडाचा ओंडका, बैठक (पीठिका), दुकान आणि आसन या अर्थांत वापरला जातो; 'परिक्खार' (परिष्कार) हा शब्द परिवार, सामग्री (अष्टपरिष्कार इ.) आणि अलंकार (शोभा) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๒. ९७२. โวหารสฺมิญฺจ ฐปเน, ปญฺญตฺติ’ตฺถี ปกาสเน; ปฏิภานํ ตุ ปญฺญายํ, อุปฏฺฐิต คิราย จ. 'पञ्ञत्ति' (प्रज्ञप्ती) हा शब्द स्त्रीलिंगात व्यवहार, स्थापना (नियम करणे) आणि प्रकाशन (प्रकट करणे) या अर्थांत वापरला जातो; 'पटिभान' (प्रतिभान) हा शब्द प्रज्ञा (बुद्धी) आणि हजरजबाबीपणा (वक्तृत्व) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๓. ९७३. วจนาวยเว มูเล, กถิโต เหตุ การเณ; อุทเร ตุ ตถา ปาจา, นลสฺมึ คหณี’ตฺถิยํ. 'हेतु' हा शब्द वाक्याचा अवयव, मूळ आणि कारण या अर्थांत सांगितला गेला आहे; 'गहणी' (ग्रहणी) हा शब्द स्त्रीलिंगात उदर (पोट) आणि पाचक अग्नी या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๔. ९७४. ปิโย ภตฺตริ, ชายายํ, ปิยา, อิฏฺเฐ ปิโย ติสุ; ยมราเช ตุ ยุคเฬ, สํยเม จ ยโม ภเว. 'पिय' (प्रिय) हा शब्द पतीच्या अर्थात पुल्लिंगात, पत्नीच्या अर्थात स्त्रीलिंगात ('पिया') आणि प्रिय (इष्ट) या अर्थात तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; 'यम' हा शब्द यमराज, जोडी (युगल) आणि संयम या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๕. ९७५. มุทฺทิกสฺส จ ปุปฺผสฺส, รเส ขุทฺเท มธู’ริตํ; อุลฺโลเจ ตุ จ วิตฺถาเร, วิตานํ ปุนฺนปุํสเก. 'मधु' हा शब्द द्राक्षाचा रस, फुलांचा रस आणि मध या अर्थांत सांगितला गेला आहे; 'वितान' हा शब्द पुल्लिंग व नपुंसकलिंगात छत (चांदवा) आणि विस्तार या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๖. ९७६. อปวคฺเค จ สลิเล, สุธายํ อมตํ มตํ; โมเห ตุ ติมิเร สงฺขฺยา, คุเณ ตม มนิตฺถิยํ. 'अमत' (अमृत) हा शब्द मोक्ष (निर्वाण), पाणी आणि अमृत (सुधा) या अर्थांत मानला जातो; 'तम' हा शब्द नपुंसकलिंग व पुल्लिंगात मोह, अंधार आणि गुणाचा प्रकार (तमोगुण) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๗. ९७७. ขเร จา’การิเย ตีสุ, รสมฺหิ ปุริเส กฏุ; ปณฺฑเก สุกเต, ปุญฺญํ, มนุญฺเญ ปวเน ติสุ. 'कटु' हा शब्द तिन्ही लिंगांत तीव्र (कठोर) आणि अकार्य (न करण्याजोगे काम) या अर्थांत, तर चव (तिखट रस) आणि पुरुष या अर्थांत वापरला जातो; 'पुञ्ञ' (पुण्य) हा शब्द नपुंसकलिंगात सुकृत (चांगले कर्म) या अर्थात, आणि तिन्ही लिंगांत मनोहर व पवित्र या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๘. ९७८. รุกฺโข ทุมมฺหิ, ผรุสา, สินิทฺเธสุ จ โส ติสุ; อุปฺปตฺติยํ ตุ เหตุมฺหิ, สงฺเค สุกฺเก จ สมฺภโว. 'रुक्ख' (वृक्ष) हा शब्द झाडाच्या अर्थात वापरला जातो, आणि 'रूख' (रुक्ष) हा शब्द तिन्ही लिंगांत कठोर आणि तेलकट नसलेल्या (कोरड्या) या अर्थांत वापरला जातो; 'संभव' हा शब्द उत्पत्ती, कारण, संभोग (संग) आणि वीर्य या अर्थांत वापरला जातो. ๙๗๙. ९७९. นิมิตฺตํ [Pg.80] การเณ วุตฺตํ, องฺคชาเต จ ลญฺฉเน; อาทิ สีมาปกาเรสุ, สมีเป’วยเว มโต. 'निमित्त' हा शब्द कारण, जननेंद्रिय आणि चिन्ह या अर्थांत वापरला जातो; 'आदि' हा शब्द प्रारंभ, सीमा, प्रकार, जवळ आणि अवयव या अर्थांत मानला जातो. ๙๘๐. ९८०. เวเท จ มนฺตเน มนฺโต, มนฺตา ปญฺญาย มุจฺจเต; อนโย พฺยสเน เจว, สนฺทิสฺสติ วิปตฺติยํ. 'मन्त' (मंत्र) हा शब्द वेद आणि गुप्त मसलत (मंत्रणा) या अर्थांत वापरला जातो, तर 'मन्ता' हा शब्द प्रज्ञेच्या (बुद्धी) अर्थात वापरला जातो; 'अनय' हा शब्द व्यसन (संकट) आणि विपत्ती या अर्थांत दिसून येतो. ๙๘๑. ९८१. อรุโณ รํสิเภเท จา, พฺยตฺตราเค จ โลหิเต; อนุพนฺโธ ตุ ปกตา, นิวตฺเต นสฺสนกฺขเร. 'अरुण' हा शब्द किरणांचा प्रकार (पहाटेचा प्रकाश), स्पष्ट रंग आणि लाल रंग या अर्थांत वापरला जातो; 'अनुबंध' हा शब्द सतत चालणारे कार्य, परिणाम (अडथळा) आणि लोप पावणारे अक्षर या अर्थांत वापरला जातो. ๙๘๒. ९८२. อวตาโร’วตรเณ, ติตฺถมฺหิ วิวเร ปฺยถ; อากาโร การเณ วุตฺโต, สณฺฐาเน อิงฺคิเตปิ จ. 'अवतार' हा शब्द खाली उतरणे, घाट (तीर्थ) आणि छिद्र (संधी/संधी मिळणे) या अर्थांत वापरला जातो; 'आकार' हा शब्द कारण, ठेवण (संस्थान) आणि चेष्टा (इशारा) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๘๓. ९८३. สุทฺทิตฺถิ ตนเย ขตฺตา, อุคฺโค, ติพฺพมฺหิ โส ติสุ; ปธานํ ตุ มหามตฺเต, ปกตฺย’คฺค’ธิตีสุ จ. 'खत्ता' (क्षत्ता) हा शब्द शूद्र स्त्रीच्या पुत्राच्या अर्थात वापरला जातो; 'उग्ग' (उग्र) हा शब्द तिन्ही लिंगांत तीव्र या अर्थात वापरला जातो; 'पधान' (प्रधान) हा शब्द महामात्र (मंत्री), प्रकृती (स्वभाव), मुख्य आणि धैर्य (प्रयत्न) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๘๔. ९८४. กลฺลํ ปภาเต, นิโรค, สชฺชทกฺเขสุ ตีสุ ตํ; กุหนา กูฏจริยายํ, กุหโน กุหเก ติสุ. 'कल्ल' (कल्य) हा शब्द नपुंसकलिंगात पहाट या अर्थात, आणि तिन्ही लिंगांत निरोगी, सज्ज आणि चतुर या अर्थांत वापरला जातो; 'कुहना' हा शब्द कपटी वर्तनाच्या (ढोंग) अर्थात वापरला जातो, तर 'कुहन' हा शब्द तिन्ही लिंगांत ढोंगी (कपट करणारा) या अर्थात वापरला जातो. ๙๘๕. ९८५. กโปโต ปกฺขิเภเท จ, ทิฏฺโฐ ปาราวเต ถ จ; สารโท สารทพฺภูเต, อปคพฺเภ มโต ติสุ. 'कपोत' हा शब्द एका विशिष्ट पक्ष्यांच्या प्रकारात आणि पारव्याच्या अर्थात वापरला जातो; 'सारद' (शारद) हा शब्द तिन्ही लिंगांत शरद ऋतूत उत्पन्न होणारे आणि अप्रगल्भ (लाजाळू) या अर्थांत मानला जातो. ๙๘๖. ९८६. ตีสุ ขเร จ กฐิเน, กกฺกโส สาหสปฺปิเย ; อการิเย ตุ คุยฺหงฺเค, จีเร โกปีน มุจฺจเต. 'कक्कस' (कर्कश) हा शब्द तिन्ही लिंगांत खरखरीत, कठीण आणि हिंसाप्रिय या अर्थांत वापरला जातो; 'कोपीन' हा शब्द अकार्य (अनुचित कर्म), गुप्तांग आणि वस्त्र (लंगोट) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๘๗. ९८७. มิคเภเท ปฏากายํ, โมเจ จ กทลี’ตฺถิยํ; ทกฺขิณา ทานเภทสฺมึ, วามโต’ญฺญมฺหิ ทกฺขิโณ. 'कदली' हा शब्द स्त्रीलिंगात एका विशिष्ट हरणाचा प्रकार, ध्वज (पताका) आणि केळीचे झाड या अर्थांत वापरला जातो; 'दक्खिणा' (दक्षिणा) हा शब्द दानाच्या प्रकारात वापरला जातो, आणि 'दक्खिण' (दक्षिण) हा शब्द डाव्या बाजूच्या विरुद्ध (उजवी बाजू किंवा दक्षिण दिशा) या अर्थात वापरला जातो. ๙๘๘. ९८८. ทุติยา ภริยายญฺจ, ทฺวินฺนํ ปูรณิยํ มตา; อถุปฺปาเท สิยา ธูม, เกตุ เวสฺสานเรปิ จ. 'दुतिया' (द्वितीया) हा शब्द स्त्रीलिंगात पत्नी आणि दोन या संख्येची पूरक (दुसरी) या अर्थांत मानला जातो; 'धूमकेतु' हा शब्द उत्पात (अपशकुन), धूमकेतू आणि अग्नी या अर्थांत वापरला जातो. ๙๘๙. ९८९. ภวนิคฺคมเน ยาเน, ทฺวาเร นิสฺสรณํ สิยา; นิยามโก โปตวาเห, ติลิงฺโค โส นิยนฺตริ. 'निस्सरण' (निस्सरण) हा शब्द घरातून बाहेर पडणे, वाहन आणि दरवाजा या अर्थांत वापरला जातो; 'नियामक' हा शब्द जहाजाचा चालक (नाविक) या अर्थात, आणि तिन्ही लिंगांत नियंत्रण करणारा (नियंता) या अर्थात वापरला जातो. ๙๙๐. ९९०. อปวคฺเค วินาเส จ, นิโรโธ โรธเน ปฺยถ; ภเย ปฏิภยํ วุตฺตํ, ติลิงฺคํ ตํ ภยํกเร. 'निरोध' हा शब्द मोक्ष (निर्वाण), विनाश आणि अडथळा (कोंडणे) या अर्थांत वापरला जातो; 'पटिभय' (प्रतिभय) हा शब्द भीती या अर्थात, आणि तिन्ही लिंगांत भयानक (भीतीदायक) या अर्थात वापरला जातो. ๙๙๑. ९९१. ปิฏกํ ภาชเน วุตฺตํ, ตเถว ปริยตฺติยํ; ชราสิถิลจมฺมสฺมึ, อุทรงฺเค มตา วลิ. 'पिटक' हा शब्द टोपली (भांडे) आणि बुद्धवचन (परियत्ती/त्रिपिटक) या अर्थांत वापरला जातो; 'वलि' (वली) हा शब्द स्त्रीलिंगात वृद्धत्वामुळे सैल झालेली त्वचा (सुरकुती) आणि पोटावरील घडी (वली) या अर्थांत मानला जातो. ๙๙๒. ९९२. ภินฺนํ วิทาริเต’ญฺญสฺมึ, นิสฺสิเต วาจฺจลิงฺคิกํ; อุปชาเป มโต เภโท, วิเสเส จ วิทารเณ. 'भिन्न' हा विशेषण शब्द पानाचा तुकडा (तुकडे झालेला), दुसरा (वेगळा) आणि आश्रित या अर्थांत वापरला जातो; 'भेद' हा शब्द चुगली (फितुरी निर्माण करणे), फरक (विशेष) आणि फाडणे (तुकडे करणे) या अर्थांत मानला जातो. ๙๙๓. ९९३. มณฺฑลํ [Pg.81] คามสนฺโทเห, พิมฺเพ ปริธิราสิสุ; อาณาย มาคเม เลเข; สาสนํ อนุสาสเน. 'मण्डल' हा शब्द ग्रामसमूह (गावांचा समूह), बिंब, परिधी आणि राशी (समूह) या अर्थांत वापरला जातो; तर 'सासन' (शासन) हा शब्द आज्ञा, आगम (धर्मग्रंथ), लेख (पत्र) आणि अनुशासनात (उपदेशात) वापरला जातो. ๙๙๔. ९९४. อคฺเค ตุ สิขรํ จา’โย, มยวิชฺฌนกณฺฏเก; คุณุกฺกํเส จ วิภเว, สมฺปตฺติ เจว สมฺปทา. 'अग्ग' (अग्र) हा शब्द शिखर, लोखंड आणि वेध घेणारा काटा या अर्थांत वापरला जातो; तर 'संपदा' हा शब्द गुणांची श्रेष्ठता, वैभव आणि संपत्ती या अर्थांत वापरला जातो. ๙๙๕. ९९५. ภูขนฺตีสุ ขมา, โยคฺเย, หิเต สกฺเก ขโม ติสุ; อทฺโธ ภาเค ปเถ กาเล, เอกํเส’ทฺโธ’พฺยยํ ภเว; อโถ กรีสํ วจฺจสฺมึ, วุจฺจเต จตุรมฺพเณ. 'खमा' (क्षमा) हा शब्द पृथ्वी आणि सहनशीलता (खंती) या अर्थांत वापरला जातो; 'खम' हा शब्द योग्य, हितकारक आणि समर्थ या तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. 'अद्ध' हा शब्द भाग, मार्ग आणि काळ या अर्थांत वापरला जातो, तर 'अद्धा' हे अव्यय निश्चित या अर्थात होते. तसेच 'करीस' हा शब्द विष्ठा आणि चार अंबण (एक माप) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๙๖. ९९६. อุสโภ’สธ โค เสฏฺเฐ, สู’สภํ วีสยฏฺฐิยํ; เสตุสฺมึ ตนฺติ ปนฺตีสุ, นาริยํ ปาฬิ กถฺยเต. 'उसभ' (ऋषभ) हा शब्द औषध आणि श्रेष्ठ बैल या अर्थांत वापरला जातो, तसेच वीस यठ्ठी (एक माप) या अर्थातही वापरला जातो; 'पाळि' (पाळी) हा शब्द स्त्रीलिंगात पूल, तंतू (किंवा दोरी) आणि ओळ (पंक्ती) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๙๗. ९९७. กโฏ ชเย’ตฺถินิมิตฺเต, กิลญฺเช โส กเต ติสุ; มหิยํ ชคตี วุตฺตา, มนฺทิราลินฺทวตฺถุมฺหิ. 'कट' हा शब्द विजय, स्त्री-चिन्ह आणि चटई या अर्थांत वापरला जातो, तर 'कट' हा शब्द तिन्ही लिंगांत 'केलेले' (कृत) या अर्थात वापरला जातो; 'जगती' हा शब्द पृथ्वी, मंदिर, ओटा (अलिंद) आणि भूमी (वास्तू) या अर्थांत वापरला जातो. ๙๙๘. ९९८. วิตกฺเก มถิเต ตกฺโก, ตถา สูจิผเล มโต; สุทสฺสนํ สกฺกปุเร, ตีสุ ตํ ทุทฺทเส’ตเร. 'तक्क' (तर्क) हा शब्द विचार (वितर्क), ताक (मथित) आणि सुईच्या फळाच्या अर्थात मानला जातो; 'सुदस्सन' हा शब्द शक्राची नगरी (इंद्रपुरी) या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत जे सहज दिसणारे आहे किंवा याच्या उलट (दुर्दर्श) या अर्थात वापरला जातो. ๙๙๙. ९९९. ทีโป’นฺตรีป ปชฺโชต, ปติฏฺฐา นิพฺพุตีสุ จ; พทฺธนิสฺสิต เสเตสุ, ตีสุ ตํ มิหิเต สิตํ. 'दीप' हा शब्द बेट (अंतरीप), दिवा (प्रद्योत), प्रतिष्ठा (आश्रय) आणि निर्वाण या अर्थांत वापरला जातो; 'सित' हा शब्द तिन्ही लिंगांत बद्ध (बांधलेले), आश्रित, पांढरे आणि स्मित (हास्य) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๐๐. १०००. ถิยํ ปชาปติ ทาเร, พฺรหฺเม มาเร สุเร ปุเม; วาสุเทเว’นฺตเก กณฺโห, โส ปาเป อสิเต ติสุ. 'पजापति' (प्रजापती) हा शब्द स्त्रीलिंगात पत्नी या अर्थात आणि पुल्लिंगात ब्रह्मा, मार व देव या अर्थांत वापरला जातो; 'कण्ह' (कृष्ण) हा शब्द वासुदेव आणि यम (अंतक) या अर्थांत वापरला जातो, तसेच तिन्ही लिंगांत पाप आणि काळे (असित) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๐๑. १००१. อุปจาโร อุปฏฺฐาเน, อาสนฺเน อญฺญโรปเน; สกฺโก อินฺเท ชนปเท, สากิเย, โส ขเม ติสุ. 'उपचार' हा शब्द सेवा (उपस्थान), जवळ असणे (आसन्न) आणि दुसऱ्यावर आरोपण करणे (लाक्षणिक अर्थ) या अर्थांत वापरला जातो; 'सक्क' (शक्र) हा शब्द इंद्र, जनपद आणि शाक्य या अर्थांत वापरला जातो, तसेच तिन्ही लिंगांत समर्थ (क्षम) या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๐๒. १००२. วชฺชเน ปริหาโร จ, สกฺกาเร เจว รกฺขเณ; โสตาปนฺนาทิเก อคฺเค, อริโย ตีสุ, ทฺวิเช ปุเม. 'परिहार' हा शब्द वर्ज्य करणे, सत्कार आणि रक्षण करणे या अर्थांत वापरला जातो; 'अरिय' (आर्य) हा शब्द तिन्ही लिंगांत स्रोतापन्न इत्यादी आणि श्रेष्ठ या अर्थांत वापरला जातो, तर पुल्लिंगात द्विज (ब्राह्मण) या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๐๓. १००३. สุสุโก สุสุมาเร จ, พาลเก จ อุลูปินิ; อินฺทีวรํ มตํ นีลุ, ปฺปเล อุทฺทาลปาทเป. 'सुसुक' (शिशुक) हा शब्द सुसर (शिशुमार), बालक आणि डॉल्फिन (उलूपी) या अर्थांत मानला जातो; 'इंदीवर' हा शब्द नीलकमल आणि बहावा (उद्दालक वृक्ष) या अर्थांत मानला जातो. ๑๐๐๔. १००४. อสโน ปิยเก กณฺเฑ, ภกฺขเณ ขิปเน’ สนํ; ยุเค’ธิกาเร วีริเย, ปธาเน จา’นฺติเก ธุโร. 'असन' हा शब्द असन वृक्ष (पियक) आणि बाण या अर्थांत वापरला जातो, तर 'असन' (नपुंसकलिंगी) हा शब्द खाणे आणि फेकणे या अर्थांत वापरला जातो; 'धुर' हा शब्द जू (युग), अधिकार, वीर्य (ऊर्जा), प्रधान (मुख्य) आणि जवळ या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๐๕. १००५. กาเฬ จ ภกฺขิเต ตีสุ, ลวิตฺเต อสิโต ปุเม; ปวารณา ปฏิกฺเขเป, กถิตา’ชฺเฌสนาย จ. 'असित' हा शब्द तिन्ही लिंगांत काळे आणि खाल्लेले या अर्थांत वापरला जातो, तर पुल्लिंगात विळा (लवित्र) या अर्थात वापरला जातो; 'पवारणा' (प्रवारणा) हा शब्द नकार (प्रतिक्षेप) आणि निमंत्रण (अध्येषणा) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๐๖. १००६. อุมฺมาเร [Pg.82] เอสิกตฺถมฺเภ, อินฺทขีโล มโต ถ จ; โปตฺถกํ มกจิวตฺเถ, คนฺเถ เลปฺยาทิ กมฺมนิ. 'इंदखील' (इंद्रकील) हा शब्द उंबरठा आणि नगरद्वाराचा खांब (एषिकास्तंभ) या अर्थांत मानला जातो; 'पोत्थक' (पुस्तक) हा शब्द तागाचे वस्त्र (मकची वस्त्र), ग्रंथ आणि लेपनकाम (मातीचे किंवा प्लास्टरचे काम) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๐๗. १००७. ธญฺญํ สาลฺยาทิเก วุตฺตํ, ธญฺโญ ปุญฺญวติ ตฺติสุ; ปาณิ หตฺเถ จ สตฺเต ภู, สณฺหกรณิยํ มโต. 'धञ्ञ' (धान्य) हा शब्द शाली (तांदूळ) इत्यादी धान्यांच्या अर्थात वापरला जातो, तर 'धञ्ञ' (धन्य) हा शब्द तिन्ही लिंगांत पुण्यवान या अर्थात वापरला जातो; 'पाणि' हा शब्द हात, प्राणी (सत्त्व), पृथ्वी आणि गुळगुळीत करण्याचे साधन या अर्थांत मानला जातो. ๑๐๐๘. १००८. ตีสุ ปีตํ หลิทฺยาเภ, หฏฺเฐ จ ปายิเต สิยา; พฺยูโห นิพฺพิทฺธรจฺฉายํ, พลนฺยาเส คเณ มโต. 'पीत' हा शब्द तिन्ही लिंगांत हळदीसारखा पिवळा, हर्षित आणि प्यायलेला या अर्थांत वापरला जातो; 'ब्यूह' (व्यूह) हा शब्द बंद गल्ली (निर्विद्ध रथ्या), सैन्याची रचना (बलन्यास) आणि समूह (गण) या अर्थांत मानला जातो. ๑๐๐๙. १००९. โลหิตาทิมฺหิ โลเภ จ, ราโค จ รญฺชเน มโต; ปทโร ผลเก ภงฺเค, ปวุทฺธ ทริยํ ปิจ. 'राग' (रंग/राग) हा शब्द रक्तादी लाल रंग, लोभ आणि रंगवणे या अर्थांत मानला जातो; 'पदर' हा शब्द फळी, भंग (तूट), दरी आणि वाढलेला या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๑๐. १०१०. สิงฺฆาฏกํ กเสรุสฺส, ผเล, มคฺคสมาคเม; พหุลายญฺจ เขฬมฺหิ, เอฬา, โทเส’ฬ มีริตํ. 'सिंघाटक' (शिंगाडा) हा शब्द कशेरूच्या फळाच्या आणि चव्हाट्याच्या (रस्त्यांचा संगम) अर्थात वापरला जातो; 'एळा' (इलायची) हा शब्द वेलची आणि लाळ या अर्थांत वापरला जातो, तर 'एळ' हा शब्द दोषाच्या अर्थात सांगितला आहे. ๑๐๑๑. १०११. อาธาโร จา’ธิกรเณ, ปตฺตาธาเร’ ลวาลเก; กาโร’ คเภเท สกฺกาเร, การา ตุ พนฺธนาลเย. 'आधार' हा शब्द अधिकरण (स्थान), पात्राचा आधार आणि आळे (झाडाचे आळे) या अर्थांत वापरला जातो; 'कार' हा शब्द अवयवभेद आणि सत्कार या अर्थांत वापरला जातो, तर 'कारा' हा शब्द कारागृहाच्या (तुरुंगाच्या) अर्थात वापरला जातो. ๑๐๑๒. १०१२. กรกา เมฆปาสาเณ, กรโก กุณฺฑิกาย จ; ปาปเน จ ปทาติสฺมึ, คมเน ปตฺติ นาริยํ. 'करका' हा शब्द गारा (मेघपाषाण) या अर्थात वापरला जातो, तर 'करक' हा शब्द झारी (कुंडिका) या अर्थात वापरला जातो; 'पत्ति' हा शब्द स्त्रीलिंगात प्राप्ती, पायदळ सैनिक आणि गमन (जाणे) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๑๓. १०१३. ฉิทฺทํ รนฺธญฺจ วิวรํ, สุสิเร ทูสเนปิ จ; มุตฺตา ตุ มุตฺติเก, มุตฺตํ, ปสฺสาเว, มุจฺจิเต ติสุ. 'छिद्द' (छिद्र) हा शब्द रंध्र, विवर, पोकळी (सुषिर) आणि दोष या अर्थांत वापरला जातो; 'मुत्ता' (मुक्ता) हा शब्द मोती या अर्थात वापरला जातो, तर 'मुत्त' (मूत्र) हा शब्द लघवीच्या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत मुक्त (सोडलेले) या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๑๔. १०१४. นิเสเธ วารณํ, หตฺถิ, ลิงฺค หตฺถีสุ วารโณ; ทานํ จาเค มเท สุทฺเธ, ขณฺฑเน ลวเน ขเย. 'वारण' हा शब्द प्रतिबंध (निषेध) या अर्थात वापरला जातो, तर 'वारण' (पुल्लिंगी) हा शब्द हत्ती आणि हत्तीच्या सोंडेच्या अर्थात वापरला जातो; 'दान' हा शब्द त्याग, मद (हत्तीचा मद), शुद्धी, खंडन, कापणे आणि क्षय या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๑๕. १०१५. มโนโตเส จ นิพฺพาเน, ตฺถงฺคเม นิพฺพุติ’ตฺถิยํ; เนคโม นิคมุพฺภูเต, ตถา’ปโณปชีวินิ. 'निब्बुति' (निवृत्ती) हा शब्द स्त्रीलिंगात मनाचे समाधान, निर्वाण आणि अस्त होणे या अर्थांत वापरला जातो; 'नेगम' (नैगम) हा शब्द नगरात राहणारा आणि व्यापारावर उपजीविका करणारा (व्यापारी) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๑๖. १०१६. หริตสฺมิญฺจ ปณฺเณ จ, ปลาโส กึ สุกทฺทุเม; ปกาโส ปากเฏตีสุ, อาโลกสฺมึ ปุเม มโต. 'पलास' (पळस) हा शब्द हिरवा रंग, पान आणि पळसाचा वृक्ष (किंशुक) या अर्थांत वापरला जातो; 'पकास' (प्रकाश) हा शब्द तिन्ही लिंगांत प्रकट या अर्थात आणि पुल्लिंगात उजेड (आलोक) या अर्थात मानला जातो. ๑๐๑๗. १०१७. ปกฺกํ ผลมฺหิ, ตํ นาสุ, มฺมุเข ปริณเต ติสุ; ปิณฺโฑ อาชีวเน เทเห, ปิณฺฑเน โคฬเก มโต. 'पक्क' हा शब्द फळाच्या अर्थात वापरला जातो, तर तिन्ही लिंगांत तो परिपक्व (परिणत) आणि जवळ आलेला या अर्थांत वापरला जातो; 'पिंड' हा शब्द उपजीविका (भिक्षा), शरीर, गोळा करणे आणि गोलक (गोळा) या अर्थांत मानला जातो. ๑๐๑๘. १०१८. วฏฺโฏ ปริพฺพเย กมฺมา, ทิเก, โส วฏฺฏุเล ติสุ; ปจฺจาหาเร ปฏิหาโร, ทฺวาเร จ ทฺวารปาลเก. 'वट्ट' (वर्त) हा शब्द खर्च, कर्म इत्यादी अर्थांत वापरला जातो, तर 'वट्ट' हा शब्द तिन्ही लिंगांत गोल (वर्तुळाकार) या अर्थात वापरला जातो; 'पटिहार' (प्रतिहार) हा शब्द मागे घेणे (प्रत्याहार), द्वार आणि द्वारपाल या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๑๙. १०१९. นาริยํ ภีรุ กถิตา, ภีรุเก โส ติลิงฺคิโก; วิกฏํ คูถมุตฺตาโท, วิกโฏ วิกเต ติสุ. 'भीरु' हा शब्द स्त्रीलिंगात भित्री स्त्री या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत भित्रा या अर्थात वापरला जातो; 'विकट' हा शब्द विष्ठा-मूत्र इत्यादींच्या अर्थात वापरला जातो, तर 'विकट' हा शब्द तिन्ही लिंगांत विकृत (किंवा बदललेला) या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๒๐. १०२०. วามํ [Pg.83] สพฺยมฺหิ, ตํ จารุ, วิปรีเตสุ ตีสฺว’ถ; สงฺขฺยาเภเท สรพฺเย จ, จิหเณ ลกฺข มุจฺจเต. 'वाम' हा शब्द डावा, सुंदर आणि विपरीत या अर्थांत तिन्ही लिंगांत वापरला जातो; 'लक्ख' (लक्ष) हा शब्द संख्याविशेष (एक लाख), निशाणा (शरव्य) आणि चिन्ह या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๒๑. १०२१. เสณี’ตฺถี สมสิปฺปีนํ, คเณ จา’วลิยํ ปิจ; สุธายํ ธูลิยํ จุณฺโณ, จุณฺณญฺจ วาสจุณฺณเก. 'सेणी' (श्रेणी) हा शब्द स्त्रीलिंगात समान कारागिरांचा समूह आणि ओळ (आवली) या अर्थांत वापरला जातो; 'चुण्ण' (चूर्ण) हा शब्द चुना (सुधा) आणि धूळ या अर्थांत वापरला जातो, तर 'चुण्ण' (नपुंसकलिंगी) हा शब्द सुगंधी चूर्णाच्या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๒๒. १०२२. เชตพฺเพ’ติปฺปสตฺเถ’ติ, วุทฺเธ เชยฺยํ ติสู’ริตํ; ตกฺเก ตุ มถิตํ โหตฺยา,โลลิเต มถิโต ติสุ. 'जेय्य' (जेय) हा शब्द तिन्ही लिंगांत जिंकण्यायोग्य, अत्यंत प्रशंसनीय आणि वृद्ध या अर्थांत सांगितला आहे; 'मथित' हा शब्द ताकाच्या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत ढवळलेले (लोलित) या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๒๓. १०२३. อพฺภุโต’จฺฉริเย ตีสุ, ปเณ เจวา’พฺภุโต ปุเม; เมจโก ปุจฺฉมูลมฺหิ, กณฺเหปิ เมจโก ติสุ. 'अब्भुत' (अद्भुत) हा शब्द तिन्ही लिंगांत आश्चर्यकारक या अर्थात आणि पुल्लिंगात पैज (पण) या अर्थात वापरला जातो; 'मेचक' हा शब्द शेपटीचे मूळ या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत काळे या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๒๔. १०२४. วสวตฺตี ปุเม มาเร, วสวตฺตาปเก ติสุ; สมฺภเว จา’สุจิ ปุเม, อเมชฺเฌ ตีสุ ทิสฺสติ. 'वसवत्ती' (वशवर्ती) हा शब्द पुल्लिंगात मार या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत वश करणारा या अर्थात वापरला जातो; 'असुचि' (अशुची) हा शब्द पुल्लिंगात वीर्य (संभव) या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत अपवित्र (अमेध्य) या अर्थात दिसून येतो. ๑๐๒๕. १०२५. อจฺโฉ อิกฺเก ปุเม วุตฺโต, ปสนฺนมฺหิ ติลิงฺคิโก; พฬิเส เสลเภเท จ, วงฺโก, โส กุฏิเล ติสุ. 'अच्छ' हा शब्द पुल्लिंगात अस्वल या अर्थात आणि तिन्ही लिंगांत प्रसन्न (स्वच्छ) या अर्थात वापरला जातो; 'वंक' हा शब्द गळ (मासे पकडण्याचा गळ) आणि दगडाचा प्रकार या अर्थांत वापरला जातो, तर तिन्ही लिंगांत तो वाकडा (कुटिल) या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๒๖. १०२६. กุณปมฺหิ ฉโว เญยฺโย,ลามเก โส ติลิงฺคิโก; สพฺพสฺมึ สกโล ตีสุ, อทฺธมฺหิ ปุริเส สิยา. 'छव' हा शब्द प्रेत (कुणप) या अर्थात जाणावा, तर तिन्ही लिंगांत तो नीच (लामक) या अर्थात वापरला जातो; 'सकल' हा शब्द तिन्ही लिंगांत सर्व या अर्थात आणि पुल्लिंगात अर्धा भाग या अर्थात असू शकतो. ๑๐๒๗. १०२७. จนฺทคฺคาหาทิเก เจวุ, ปฺปาโท อุปฺปตฺติยํ ปิจ; ปทุสฺสเน ปโทโส จ, กถิโต สํวรีมุเข. 'उप्पाद' (उत्पाद) हा शब्द चंद्रग्रहण इत्यादी आणि उत्पत्ती (जन्म) या अर्थांत वापरला जातो; 'पदोस' (प्रदोष) हा शब्द द्वेष (प्रदूषण) आणि संध्याकाळ (रात्रीची सुरुवात) या अर्थांत सांगितला आहे. ๑๐๒๘. १०२८. รุธิเร โลหิตํ วุตฺตํ, รตฺตมฺหิ โลหิโต ติสุ; อุตฺตมงฺเค ปุเม มุทฺธา, มุทฺโธ มูฬฺเห ติลิงฺคิโก. 'लोहित' हा शब्द रक्ताच्या अर्थात वापरला जातो, तर तिन्ही लिंगांत तो लाल या अर्थात वापरला जातो; 'मुद्धा' (मूर्धा) हा शब्द पुल्लिंगात मस्तक (उत्तमांग) या अर्थात वापरला जातो, तर 'मुद्ध' (मुग्ध) हा शब्द तिन्ही लिंगांत मूढ (मूर्ख) या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๒๙. १०२९. รฏฺฐมฺหิ วิชิตํ วุตฺตํ, ชิเต จ วิชิโต ติสุ; ปริตฺตํ ตุ ปริตฺตาเณ, ปริตฺโต ตีสุ อปฺปเก. 'विजित' हा शब्द राष्ट्राच्या (राज्याच्या) अर्थात वापरला जातो, तर तिन्ही लिंगांत तो जिंकलेला या अर्थात वापरला जातो; 'परित्त' हा शब्द संरक्षणाच्या (परित्राण) अर्थात वापरला जातो, तर तिन्ही लिंगांत तो लहान (अल्प) या अर्थात वापरला जातो. ๑๐๓๐. १०३०. กุมฺภณฺโฑ เทวเภเท จ, ทิสฺสติ วลฺลิชาติยํ; จตุตฺถํเส ปเท ปาโท, ปจฺจนฺตเสลรํสิสุ. 'कुंभांड' हा शब्द एका देवतेच्या प्रकारात आणि वेलीच्या प्रकारात (कोहळा) दिसून येतो; 'पाद' हा शब्द चतुर्थांश (पाऊण भाग), पाय (पाऊल), पर्वताचा पायथा आणि प्रकाशाचा किरण या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๓๑. १०३१. วงฺโค โลหนฺตเร วงฺคา, เทเส ปุเม พหุมฺหิ จ; กมฺมารภณฺฑเภเท จ, ขฏเก มุฏฺฐิ จ ทฺวิสุ. 'वंग' हा शब्द एका धातूच्या (कथील) अर्थात आणि पुल्लिंगी बहुवचनात वंग देशाच्या अर्थात वापरला जातो; 'मुट्ठि' (मुष्टी) हा शब्द दोन लिंगांत लोहाराचे हत्यार आणि मूठ या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๓๒. १०३२. อมฺพณํ โทณิยํ เจ’กา, ทสโทณปฺปมาณเก; อธิฏฺฐิติย มาธาเร, ฐาเน’ธิฏฺฐาน มุจฺจเต. 'अंबण' हा शब्द द्रोणी (टब/कुंड) आणि अकरा द्रोण प्रमाणाच्या मापाच्या अर्थात वापरला जातो; 'अधिट्ठान' (अधिष्ठान) हा शब्द दृढ निश्चय (अधिष्ठिती), आधार आणि स्थान या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๓๓. १०३३. ปุเม มเหสี สุคเต, เทวิยํ นาริยํ มตา; อุปทฺทเว อุปสคฺโค, ทิสฺสติ ปาทิเกปิ จ. 'महेसी' (महर्षी/महिषी) हा शब्द पुल्लिंगात सुगत (बुद्ध) यांच्यासाठी, तर स्त्रीलिंगात राणी आणि स्त्री या अर्थांत मानला जातो; 'उपसग्ग' (उपसर्ग) हा शब्द उपद्रव (संकट) आणि व्याकरणातील उपसर्ग (पादिक) या अर्थांत दिसून येतो. ๑๐๓๔. १०३४. วกฺกํ [Pg.84] โกฏฺฐาสเภทสฺมึ, วกฺโก วงฺเก ติสุ’จฺจเต; วิชฺชา เวเท จ สิปฺเป จ, ติวิชฺชาโท จ พุทฺธิยํ. 'वक्क' (vakka) हा शब्द शरीराचा अवयव (मूत्रपिंड) या अर्थी नपुंसकलिंगी आहे, आणि 'वक्क' (vakko) हा शब्द वाकलेला (वक्र) या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. 'विज्जा' (vijjā) हा शब्द वेद, शिल्प (कला) आणि 'त्रिविद्या' (तिविज्जा) इत्यादींमध्ये बुद्धी (ज्ञान) या अर्थी वापरला जातो. ๑๐๓๕. १०३५. สมาธิมฺหิ ปุเม’กคฺโค, นากุเล วาจฺจลิงฺคิโก; ปชฺชํ สิโลเก, ปชฺโช’ทฺเธ, ปชฺโช ปาทหิเต ติสุ. 'एकग्ग' (ekagga) हा शब्द समाधीच्या अर्थी पुल्लिंगी आहे, आणि व्याकुळ नसलेला (शांत) या अर्थी विशेषण (तिन्ही लिंगांत) आहे. 'पज्ज' (pajja) हा शब्द श्लोक (पद्य) या अर्थी नपुंसकलिंगी आहे, मार्ग या अर्थी पुल्लिंगी आहे, आणि पायाला हितकारक या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๑๐๓๖. १०३६. กตโก รุกฺขเภทสฺมึ, กตโก กิตฺติเม ติสุ; วิเธยฺเย อสฺสโว ตีสุ, ปุพฺพมฺหี ปุริเส สิยา. 'कतक' (kataka) हा शब्द एका विशिष्ट वृक्षाच्या (निवळीच्या) अर्थी पुल्लिंगी आहे, आणि कृत्रिम या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. 'अस्सव' (assava) हा शब्द आज्ञाधारक या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो, आणि पूर्वज किंवा पुरुष या अर्थी पुल्लिंगी आहे. ๑๐๓๗. १०३७. กลฺยาเณ กถิตํ เขมํ, ตีสุ ลทฺธตฺถรกฺขเณ; อโถ นิโยชเน วุตฺตํ, การิเยปิ ปโยชนํ. 'खेम' (khema) हा शब्द कल्याण या अर्थी नपुंसकलिंगी आहे, आणि प्राप्त झालेल्या वस्तूचे रक्षण करणे (सुरक्षितता) या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. तसेच 'पयोजन' (payojana) हा शब्द नियुक्ती (काम लावणे) आणि कार्य (उद्देश) या अर्थी वापरला जातो. ๑๐๓๘. १०३८. อสฺสตฺโถ ตีสุ อสฺสาส, ปฺปตฺเต, โพธิทฺทุเม ปุเม; ตีสุ ลุทฺโท กุรูเร จ, เนสาทมฺหิ ปุเม สิยา. 'अस्सत्थ' (assattha) हा शब्द आश्वस्त (आश्वासन मिळालेला) या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो, आणि बोधिवृक्ष (पिंपळ) या अर्थी पुल्लिंगी आहे. 'लुद्द' (ludda) हा शब्द क्रूर या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो, आणि शिकारी (व्याध) या अर्थी पुल्लिंगी आहे. ๑๐๓๙. १०३९. วิลคฺโค ตีสุ ลคฺคสฺมึ, ปุเม มชฺฌมฺหิ ทิสฺสติ; อฑฺโฒ ตฺวนิตฺถิยํ ภาเค, ธนิมฺหิ วาจฺจลิงฺคิโก. 'विलग्ग' (vilagga) हा शब्द अडकलेला या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो, आणि कंबर (मध्यभाग) या अर्थी पुल्लिंगी आहे. 'अड्ढ' (aḍḍha) हा शब्द भाग (हिस्सा) या अर्थी स्त्रीलिंग सोडून (पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी) आहे, आणि श्रीमंत (धनी) या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. ๑๐๔๐. १०४०. กฏฺฐํ ทารุมฺหิ, ตํ กิจฺเฉ, คหเน กสิเต ติสุ; สสนฺตาเน จ วิสเย, โคจเร’ ชฺฌตฺต มุจฺจเตติ. 'कट्ठ' (kaṭṭha) हा शब्द लाकूड या अर्थी नपुंसकलिंगी आहे, आणि कठीण, गहन (दाट) व नांगरलेले या अर्थी तिन्ही लिंगांत वापरला जातो. 'गोचर' (gocara) हा शब्द स्वतःची संतती, विषय आणि अध्यात्म (अंतर्गत ज्ञान) या अर्थी वापरला जातो. อิติ อทฺธาเนกตฺถวคฺโค. अशा प्रकारे 'अद्धानेकतत्थवग्गो' (अर्ध्या श्लोकांचा अनेकार्थ वर्ग) समाप्त झाला. ๑๐๔๑. १०४१. ภุวเน จ ชเน โลโก, โมเรตฺวคฺคิมฺหิ โส สิขี; สิโลโก ตุ ยเส ปชฺเช,รุกฺเข ตุ สามิเก ธโว. 'लोक' (loka) हा शब्द जग (भुवन) आणि लोकसमूह या अर्थी आहे. 'सिखी' (sikhī) हा शब्द मोर आणि अग्नी या अर्थी आहे. 'सिलोक' (siloka) हा शब्द कीर्ती (यश) आणि पद्य (श्लोक) या अर्थी आहे. 'धव' (dhava) हा शब्द वृक्ष आणि पती (स्वामी) या अर्थी आहे. ๑๐๔๒. १०४२. วฏพฺยาเมสุ นิคฺโรโธ, ธงฺโก ตุ วายเส พเก; วาโร ตฺว’วสรา’เหสุ, กุเจตฺวพฺเภ ปโยธโร. 'निग्रोध' (nigrodha) हा शब्द वडाचे झाड आणि व्याम (दोन पसरलेल्या हातांचे माप) या अर्थी आहे. 'धंक' (dhaṅka) हा शब्द कावळा आणि बगळा या अर्थी आहे. 'वार' (vāra) हा शब्द वेळ (अवसर) आणि दिवस या अर्थी आहे. 'पयोधर' (payodhara) हा शब्द स्तन आणि ढग या अर्थी आहे. ๑๐๔๓. १०४३. อุจฺฉงฺเค ลกฺขเณ จา’งฺโก, รสฺมิ’ตฺถี ชุติ รชฺชุสุ; ทิฏฺโฐ’ภาเสสุ อาโลโก,พุทฺโธ ตุ ปณฺฑิเต ชิเน. 'अंक' (aṅka) हा शब्द मांडी आणि लक्षण (चिन्ह) या अर्थी आहे. 'रस्मि' (rasmi) हा शब्द किरण आणि दोरी या अर्थी स्त्रीलिंगी आहे. 'आलोक' (āloka) हा शब्द दृष्टी आणि प्रकाश या अर्थी आहे. 'बुद्ध' (buddha) हा शब्द ज्ञानी (पंडित) आणि जिन (विजेता/बुद्ध) या अर्थी आहे. ๑๐๔๔. १०४४. สูรํ’สูสุ ปุเม ภานู, ทณฺโฑ ตุ มุคฺคเร ทเม; เทวมจฺเฉสฺว’นิมิโส, ปตฺโถ ตุ มานสานุสุ. 'भानू' (bhānu) हा शब्द सूर्य आणि किरण या अर्थी पुल्लिंगी आहे. 'दंड' (daṇḍa) हा शब्द सोटा (मुद्गर) आणि शिक्षा (दमन) या अर्थी आहे. 'अनिमिस' (animisa) हा शब्द देव आणि मासा या अर्थी आहे. 'पत्थ' (pattha) हा शब्द प्रस्थ (एक माप) आणि मनाला अनुकूल या अर्थी आहे. ๑๐๔๕. १०४५. อาตงฺโก โรค ตาเปสุ,มาตงฺโค สปเจ คเช; มิโค ปสุ กุรุงฺเคสุ, อุลูกิ’นฺเทสุ โกสิโย. 'आतंक' (ātaṅka) हा शब्द रोग आणि संताप (दुःख) या अर्थी आहे. 'मातंग' (mātaṅga) हा शब्द चांडाल आणि हत्ती या अर्थी आहे. 'मिग' (miga) हा शब्द पशू आणि हरिण या अर्थी आहे. 'कोसिय' (kosiya) हा शब्द घुबड आणि इंद्र या अर्थी आहे. ๑๐๔๖. १०४६. วิคฺคโห [Pg.85] กลเห กาเย, ปุริโส มาณว’ตฺตสุ; ทายาโท พนฺธเว ปุตฺเต, สิเร สีสํ ติปุมฺหิ จ. 'विग्गह' (viggaha) हा शब्द कलह (भांडण) आणि शरीर या अर्थी आहे. 'पुरिस' (purisa) हा शब्द मनुष्य आणि आत्मा या अर्थी आहे. 'दायाद' (dāyāda) हा शब्द नातेवाईक आणि मुलगा या अर्थी आहे. 'सीस' (sīsa) हा शब्द डोके (शिर) आणि शिसे (धातू) या अर्थी आहे. ๑๐๔๗. १०४७. พลิหตฺถํ’สูสุ กโร, ทนฺเต วิปฺเป’ณฺฑเช ทฺวิโช; วตฺตํ ปชฺชา’นนา’จาเร, ธญฺญงฺเค สุขุเม กโณ. 'कर' (kara) हा शब्द कर (करभार), हात आणि किरण या अर्थी आहे. 'द्विज' (dvija) हा शब्द दात, ब्राह्मण आणि पक्षी या अर्थी आहे. 'वत्त' (vatta) हा शब्द पद्य (वृत्त), तोंड आणि आचार या अर्थी आहे. 'कण' (kaṇa) हा शब्द धान्याचा कण आणि सूक्ष्म भाग या अर्थी आहे. ๑๐๔๘. १०४८. ถมฺโภ ถูณ ชฬตฺเตสุ, สูโป กุมฺมาส พฺยญฺชเน; คณฺโฑ โผเฏ กโปลมฺหิ, อคฺโฆ มูลฺเย จ ปูชเน. 'थंभ' (thambha) हा शब्द खांब आणि जडत्व (स्तब्धता) या अर्थी आहे. 'सूप' (sūpa) हा शब्द वरण आणि व्यंजन या अर्थी आहे. 'गंड' (gaṇḍa) हा शब्द गळू आणि गाल या अर्थी आहे. 'अघ्घ' (aggha) हा शब्द मूल्य (किंमत) आणि पूजा या अर्थी आहे. ๑๐๔๙. १०४९. ปกาโร ตุลฺย เภเทสุ, สกุนฺโต ภาสปกฺขิสุ; ภาคฺเย วิธิ วิธาเน จ, สเร ขคฺเค จ สายโก. 'पकार' (pakāra) हा शब्द सादृश्य आणि भेद (प्रकार) या अर्थी आहे. 'सकुंत' (sakunta) हा शब्द ससाणा आणि पक्षी या अर्थी आहे. 'विधी' (vidhi) हा शब्द भाग्य आणि विधान (नियम) या अर्थी आहे. 'सायक' (sāyaka) हा शब्द बाण आणि तलवार या अर्थी आहे. ๑๐๕๐. १०५०. สารงฺโค จาตเก เอเณ, ปตฺตี ตุ สรปกฺขิสุ; เสเท ปาโก วิปาเก ถ,ภิกฺขุเภเท จเย คโณ. 'सारंग' (sāraṅga) हा शब्द चातक पक्षी आणि हरिण या अर्थी आहे. 'पत्ती' (pattī) हा शब्द बाण आणि पक्षी या अर्थी आहे. 'पाक' (pāka) हा शब्द घाम आणि परिणाम (विपाक) या अर्थी आहे. 'गण' (gaṇa) हा शब्द भिक्खूंचा संघ आणि समूह या अर्थी आहे. ๑๐๕๑. १०५१. ราสิ ปุญฺเช จ เมสา’โท,อสฺเส โลเณ จ สินฺธโว; สํวฏฺเฏ ปลโย นาเส, ปูโค กมุกราสิสุ. 'रासि' (rāsi) हा शब्द ढीग आणि मेष इत्यादी राशी या अर्थी आहे. 'सिंधव' (sindhava) हा शब्द घोडा आणि मीठ या अर्थी आहे. 'पलय' (palaya) हा शब्द संवर्त (युगांत) आणि नाश या अर्थी आहे. 'पूग' (pūga) हा शब्द सुपारीचे झाड आणि समूह या अर्थी आहे. ๑๐๕๒. १०५२. อมเต ตุ สุธา เลเป, อภิขฺยา นาม รํสิสุ; สตฺติ สามตฺถิเย สตฺเถ, มหี นชฺชนฺตเร ภุวิ; ลีลา กฺริยา วิลาเสสุ,สตฺเต ตุ อตฺรเช ปชา. 'सुधा' (sudhā) हा शब्द अमृत आणि चुना या अर्थी आहे. 'अभिख्या' (abhikhyā) हा शब्द नाव आणि किरण या अर्थी आहे. 'सत्ति' (satti) हा शब्द सामर्थ्य (शक्ती) आणि शस्त्र या अर्थी आहे. 'मही' (mahī) हा शब्द नदीचा पात्रातील भाग आणि पृथ्वी या अर्थी आहे. 'लीला' (līlā) हा शब्द क्रिया आणि विलास या अर्थी आहे. 'पजा' (pajā) हा शब्द प्राणी आणि स्वतःचे अपत्य या अर्थी आहे. ๑๐๕๓. १०५३. ญาเณ ลาเภ อุปลทฺธิ, ปเวณี กุถเวณิสุ; ปวตฺติ วุตฺติ วตฺตาสุ, เวตเน ภรเณ ภติ. 'उपलद्धि' (upaladdhi) हा शब्द ज्ञान आणि लाभ या अर्थी आहे. 'पवेणी' (paveṇī) हा शब्द रंगीत घोंगडी आणि वेणी या अर्थी आहे. 'पवत्ति' (pavatti) हा शब्द वृत्ती (व्यवहार) आणि वार्ता (बातमी) या अर्थी आहे. 'भति' (bhati) हा शब्द वेतन आणि भरण-पोषण या अर्थी आहे. ๑๐๕๔. १०५४. อาจาเรปิ มริยาทา, ภูติ สตฺตา สมิทฺธิสุ; โสปฺเป ปมาเท ตนฺที จ, ยาตฺรา คมน วุตฺติสุ. 'मरियादा' (mariyādā) हा शब्द आचार आणि मर्यादा या अर्थी आहे. 'भूति' (bhūti) हा शब्द सत्ता (अस्तित्व) आणि समृद्धी या अर्थी आहे. 'तन्दी' (tandī) हा शब्द झोप आणि आळस या अर्थी आहे. 'यात्रा' (yātrā) हा शब्द गमन (प्रवास) आणि वृत्ती (जीवनयात्रा) या अर्थी आहे. ๑๐๕๕. १०५५. นินฺทา กุจฺฉา’ปวาเทสุ, กงฺคุ ธญฺญ ปิยงฺคุสุ; โมกฺเขสิเว สเมสนฺติ, วิภาเค ภตฺติ เสวเน. 'निंदा' (nindā) हा शब्द कुत्सा आणि अपवाद या अर्थी आहे. 'कंगु' (kaṅgu) हा शब्द धान्य (राळा) आणि प्रियंगू वृक्ष या अर्थी आहे. 'सन्ति' (santi) हा शब्द मोक्ष, शांतता आणि समाप्ती या अर्थी आहे. 'भत्ति' (bhatti) हा शब्द विभाग आणि सेवा (भक्ती) या अर्थी आहे. ๑๐๕๖. १०५६. อิจฺฉายํ ชุติยํ กนฺติ, รญฺชเน สูรเต รติ; เคเห วสติ วาเส ถ, นที เสนาสุ วาหินี. 'कन्ति' (kanti) हा शब्द इच्छा आणि प्रकाश (कांती) या अर्थी आहे. 'रति' (rati) हा शब्द अनुराग आणि संभोग या अर्थी आहे. 'वसति' (vasati) हा शब्द घर आणि निवास या अर्थी आहे. 'वाहिनी' (vāhinī) हा शब्द नदी आणि सेना या अर्थी आहे. ๑๐๕๗. १०५७. ปตฺเถ นาเฬ จ นาฬิ’ตฺถี, คเณ สมิติ สงฺคเม; ตณฺหา โลเภ ปิปาสายํ, มคฺค วุตฺตีสุ วตฺตนี. 'नाळि' (nāḷi) हा शब्द प्रस्थ (एक माप) आणि नळ या अर्थी स्त्रीलिंगी आहे. 'समिति' (samiti) हा शब्द समूह आणि संगम या अर्थी आहे. 'तण्हा' (taṇhā) हा शब्द लोभ आणि तहान या अर्थी आहे. 'वत्तनी' (vattanī) हा शब्द मार्ग आणि वृत्ती या अर्थी आहे. ๑๐๕๘. १०५८. ปาณฺยงฺเค นาภิ จกฺกนฺเต, ยาเจ วิญฺญตฺติ ญาปเน; วิตฺติ โตเส เวทนายํ, ฐาเน ตุ ชีวิเต ฐิติ. 'नाभि' (nābhi) हा शब्द शरीराचा अवयव (नाभी) आणि चाकाचा मध्यभाग या अर्थी आहे. 'विञ्ञत्ति' (viññatti) हा शब्द याचना आणि प्रकटीकरण या अर्थी आहे. 'वित्ति' (vitti) हा शब्द संतोष आणि वेदना या अर्थी आहे. 'ठिति' (ṭhiti) हा शब्द स्थान आणि जीवन या अर्थी आहे. ๑๐๕๙. १०५९. ตรงฺเค [Pg.86] จา’นฺตเร วีจิ, ธีรตฺเต ธารเณ ธิติ; ภู ภูมิยญฺจ ภมุเก, สทฺเท เวเท สเว สุติ. 'वीचि' (vīci) हा शब्द लाट आणि अंतर या अर्थी आहे. 'धिति' (dhiti) हा शब्द धैर्य आणि धारणशक्ती या अर्थी आहे. 'भू' (bhū) हा शब्द भूमी आणि भुवई या अर्थी आहे. 'सुति' (suti) हा शब्द शब्द, वेद आणि प्रवाह या अर्थी आहे. ๑๐๖๐. १०६०. โคตฺตํ นาเม จ วํเส ถ, นคเร จ ฆเร ปุรํ; โอกํ ตุ นิสฺสเย เคเห, กุลํ ตุ โคตฺตราสิสุ. 'गोत्त' (gotta) हा शब्द नाव आणि वंश या अर्थी आहे. 'पुर' (pura) हा शब्द नगर आणि घर या अर्थी आहे. 'ओक' (oka) हा शब्द आश्रय आणि घर या अर्थी आहे. 'कुल' (kula) हा शब्द गोत्र आणि समूह या अर्थी आहे. ๑๐๖๑. १०६१. เหเม วิตฺเต หิรญฺญญฺจ, ปญฺญาณํ ตฺว’งฺก วุทฺธิสุ; อถา’มฺพรญฺจ เข วตฺเถ, คุยฺหํ ลิงฺเค รหสฺย’ปิ. 'हिरञ्ञ' (hirañña) हा शब्द सोने आणि वित्त या अर्थी आहे. 'पञ्ञाण' (paññāṇa) हा शब्द चिन्ह आणि वृद्धी या अर्थी आहे. 'अम्बर' (ambara) हा शब्द आकाश आणि वस्त्र या अर्थी आहे. 'गुय्ह' (guyha) हा शब्द जननेंद्रिय आणि रहस्य या अर्थी आहे. ๑๐๖๒. १०६२. ตโป ธมฺเม วเต เจว, ปาเป ตฺวา’คุมฺหิ กิพฺพิสํ; รตนํ มณิ เสฏฺเฐสุ, วสฺสํ หายน วุฏฺฐิสุ. 'तप' (tapa) हा शब्द धर्म आणि व्रत या अर्थी आहे. 'किब्बिस' (kibbisa) हा शब्द पाप आणि अपराध या अर्थी आहे. 'रतन' (ratana) हा शब्द मणी आणि श्रेष्ठ वस्तू या अर्थी आहे. 'वस्स' (vassa) हा शब्द वर्ष आणि पाऊस या अर्थी आहे. ๑๐๖๓. १०६३. วนํ อรญฺญ วารีสุ, ขีรมฺหิ ตุ ชเล ปโย; อกฺขรํ ลิปิ โมกฺเขสุ, เมถูนํ สงฺคเม รเต. 'वन' (vana) हा शब्द अरण्य आणि पाणी या अर्थी आहे. 'पय' (paya) हा शब्द दूध आणि पाणी या अर्थी आहे. 'अक्खर' (akkhara) हा शब्द लिपी आणि मोक्ष या अर्थी आहे. 'मेथून' (methūna) हा शब्द संभोग आणि रती या अर्थी आहे. ๑๐๖๔. १०६४. โสตํ กณฺเณ ปโยเวเค, ริฏฺฐํ ปาปา’สุเภสุ จ; อาคุ ปาปา’ปราเธสุ, เกตุมฺหิ จิหเน ธโช. 'सोत' (sota) हा शब्द कान आणि पाण्याचा प्रवाह या अर्थी आहे. 'रिट्ठ' (riṭṭha) हा शब्द पाप आणि अशुभ या अर्थी आहे. 'आगु' (āgu) हा शब्द पाप आणि अपराध या अर्थी आहे. 'धज' (dhaja) हा शब्द ध्वज आणि चिन्ह या अर्थी आहे. ๑๐๖๕. १०६५. โคปุรํ ทฺวารมตฺเตปิ, มนฺทิรํ นคเร ฆเร; วาจฺจลิงฺคา ปรมิโต, พฺยตฺโต ตุ ปณฺฑิเต ผุเฏ. 'गोपुर' (gopura) हा शब्द केवळ द्वार या अर्थी आहे. 'मन्दिर' (mandira) हा शब्द नगर आणि घर या अर्थी आहे. 'ब्यत्त' (byatta) हा शब्द ज्ञानी आणि स्पष्ट या अर्थी विशेषण (तिन्ही लिंगांत) आहे. ๑๐๖๖. १०६६. วลฺลโภ ทยิเต’ชฺฌกฺเข, ชเล ถูโล มหตฺยปิ; กุรูเร เภรเว ภีโม,โลโล ตุ โลลุเป จเล. 'वल्लभ' (vallabha) हा शब्द प्रिय आणि अध्यक्ष या अर्थी आहे. 'थूल' (thūla) हा शब्द पाणी आणि मोठे या अर्थी आहे. 'भीम' (bhīma) हा शब्द क्रूर आणि भयानक या अर्थी आहे. 'लोल' (lola) हा शब्द लोभी आणि चंचल या अर्थी आहे. ๑๐๖๗. १०६७. พีภจฺโฉ วิกเต ภีเม, โกมเล ติขิเณ มุทุ; อิฏฺเฐ จ มธุเร สาทุ, สาทุมฺหิ มธุโร ปิเย. 'बीभच्छ' (bībhaccha) हा शब्द विकृत आणि भयानक या अर्थी आहे. 'मुदु' (mudu) हा शब्द कोमल आणि मऊ या अर्थी आहे. 'सादु' (sādu) हा शब्द इष्ट आणि मधुर या अर्थी आहे. 'मधुर' (madhura) हा शब्द गोड आणि प्रिय या अर्थी आहे. ๑๐๖๘. १०६८. สิเต ตุ สุทฺเธ โอทาโต, ทฺวิชิวฺโห สูจกา’หิสุ; สกฺเก สมตฺโถ สมฺพนฺเธ, สมตฺตํ นิฏฺฐิตา’ขิเล. 'ओदात' (odāta) हा शब्द पांढरा आणि शुद्ध या अर्थी आहे. 'द्विजीव्ह' (dvijivha) हा शब्द चहाडखोर आणि साप या अर्थी आहे. 'सक्क' (sakka) हा शब्द समर्थ आणि संबंध या अर्थी आहे. 'समत्त' (samatta) हा शब्द समाप्त आणि संपूर्ण या अर्थी आहे. ๑๐๖๙. १०६९. สุทฺโธ เกวล ปูเตสุ, ชิฆญฺโญ’นฺตา’ธเมสุ จ; โปโณ’ปนต นินฺเนสุ, อญฺญ นีเจสุ เจ’ตโร. 'सुद्ध' (suddha) हा शब्द केवळ आणि पवित्र या अर्थी आहे. 'जिघञ्ञ' (jighañña) हा शब्द शेवटचा आणि अधम या अर्थी आहे. 'पोण' (poṇa) हा शब्द झुकलेला आणि खोल या अर्थी आहे. 'इतर' (itara) हा शब्द अन्य आणि नीच या अर्थी आहे. ๑๐๗๐. १०७०. สุจิ สุทฺเธ สิเต ปูเต, เปสโล ทกฺขจารุสุ; อธโม กุจฺฉิเต อูเน, อปฺปิเย ปฺย’ลิโก ภเว. 'सुचि' (suci) हा शब्द शुद्ध, पांढरा आणि पवित्र या अर्थी आहे. 'पेसल' (pesala) हा शब्द चतुर आणि सुंदर या अर्थी आहे. 'अधम' (adhama) हा शब्द निंद्य आणि कमी या अर्थी आहे. 'अलिक' (alika) हा शब्द अप्रिय आणि खोटे या अर्थी आहे. ๑๐๗๑. १०७१. พฺยาเป อสุทฺเธ สํกิณฺโณ, ภพฺพํ โยคฺเย จ ภาวินิ; สุขุโม อปฺปกา’ณูสุ, วุทฺโธ เถเร จ ปณฺฑิเต. 'संकिण्ण' (saṅkiṇṇa) हा शब्द व्याप्त आणि अशुद्ध या अर्थी आहे. 'भब्ब' (bhabba) हा शब्द योग्य आणि भावी या अर्थी आहे. 'सुखुम' (sukhumo) हा शब्द अल्प आणि सूक्ष्म या अर्थी आहे. 'वुद्ध' (vuddha) हा शब्द वृद्ध (थेर) आणि पंडित या अर्थी आहे. ๑๐๗๒. १०७२. สุเภ สาธุมฺหิ ภทฺโท ถ, ตฺยา’โท จ วิปุเล พหุ; ธีโร พุเธ ธิติมนฺเต, เวลฺลิตํ กุฏิเล ธุเต. 'भद्द' (bhadda) हा शब्द शुभ आणि चांगला या अर्थी आहे. 'बहु' (bahu) हा शब्द वपुिल आणि पुष्कळ या अर्थी आहे. 'धीर' (dhīra) हा शब्द ज्ञानी आणि धैर्यवान या अर्थी आहे. 'वेल्लित' (vellita) हा शब्द वाकडे आणि कंपित या अर्थी आहे. ๑๐๗๓. १०७३. วิสโท [Pg.87] พฺยตฺต เสเตสุ, ตรุโณ ตุ ยุเว นเว; โยคฺคํ ยาเน, ขเม โยคฺโค,ปิณฺฑิตํ คณิเต ฆเน. 'विसद' (visada) हा शब्द स्पष्ट आणि पांढरा या अर्थी आहे. 'तरुण' (taruṇa) हा शब्द तरुण आणि नवीन या अर्थी आहे. 'योग्ग' (yogga) हा शब्द वाहन या अर्थी नपुंसकलिंगी आहे, आणि समर्थ या अर्थी विशेषण आहे. 'पिण्डित' (piṇḍita) हा शब्द गणित केलेले आणि घट्ट या अर्थी आहे. ๑๐๗๔. १०७४. พุเธ’ภิชาโต กุลเช, วุทฺโธ’รูสุ มหลฺลโก; กลฺยาณํ สุนฺทเร จาปิ, หิโม ตุ สีตเลปิ จ. 'अभिजात' (abhijāta) हा शब्द ज्ञानी आणि कुलीन या अर्थी आहे. 'महल्लक' (mahallaka) हा शब्द वृद्ध आणि मोठा या अर्थी आहे. 'कल्याण' (kalyāṇa) हा शब्द सुंदर आणि कल्याणकारी या अर्थी आहे. 'हिम' (hima) हा शब्द बर्फ आणि थंड या अर्थी आहे. ๑๐๗๕. १०७५. โลเล ตุ สีเฆ จปโล, วุตฺเต อุทิต มุคฺคเต; อาทิตฺเต คพฺพิเต ทิตฺโต, ปิฏฺฐํ ตุ จุณฺณิเตปิ จ. 'चपल' (capala) हा शब्द चंचल आणि वेगवान या अर्थी आहे. 'वुत्त' (vutta) हा शब्द बोललेला आणि उत्पन्न झालेला या अर्थी आहे. 'दित्त' (ditta) हा शब्द प्रज्वलित आणि गर्विष्ठ या अर्थी आहे. 'पिट्ठ' (piṭṭha) हा शब्द पीठ (चूर्ण) या अर्थी आहे. ๑๐๗๖. १०७६. วิคเต วายิเต วีตํ, ภาวิตํ วฑฺฒิเตปิ จ; ภชฺชิเต ปติเต ภฏฺโฐ, ปุฏฺโฐ ปุจฺฉิต โปสิเต. 'वीत' (vīta) हा शब्द गेलेला आणि विणलेला या अर्थी आहे. 'भावित' (bhāvita) हा शब्द वाढवलेला आणि भावना केलेला या अर्थी आहे. 'भट्ठ' (bhaṭṭha) हा शब्द भाजलेला आणि पडलेला या अर्थी आहे. 'पुट्ठ' (puṭṭha) हा शब्द विचारलेला आणि पोसलेला या अर्थी आहे. ๑๐๗๗. १०७७. ชาโต ภูเต จเย ชาตํ,ปฏิภาโค สมา’ริสุ; สูโร วีเร รวิสูเร, ทุฏฺโฐ กุทฺเธ จ ทูสิเต. 'जात' (jāta) हा शब्द उत्पन्न झालेला या अर्थी पुल्लिंगी आहे, आणि समूह या अर्थी नपुंसकलिंगी आहे. 'पटिभाग' (paṭibhāga) हा शब्द समान आणि शत्रू या अर्थी आहे. 'सूर' (sūra) हा शब्द वीर, सूर्य आणि शूर या अर्थी आहे. 'दुट्ठ' (duṭṭha) हा शब्द क्रुद्ध आणि दूषित या अर्थी आहे. ๑๐๗๘. १०७८. ทิฏฺโฐ’ริมฺหิ’กฺขิเต ทิฏฺโฐ,มูฬฺเห โปเต จ พาลิโส; นินฺทายํ เขปเน เขโป, นิยโม นิจฺฉเย วเต. 'दिट्ठ' (diṭṭha) हा शब्द शत्रू आणि पाहिलेला या अर्थी आहे. 'बालिस' (bālisa) हा शब्द मूर्ख आणि लहान मूल या अर्थी आहे. 'खेप' (khepa) हा शब्द निंदा आणि घालवणे या अर्थी आहे. 'नियम' (niyama) हा शब्द निश्चय आणि व्रत या अर्थी आहे. ๑๐๗๙. १०७९. สลากายํ กุโส ทพฺเภ,พาลฺยาโท ตุ ขเย วโย; เลป คพฺเพสฺว’วเลโป, อณฺฑโช มีนปกฺขิสุ. 'कुस' (kusa) हा शब्द सळई आणि दर्भ या अर्थी आहे. 'वय' (vaya) हा शब्द वय (अवस्था) आणि क्षय या अर्थी आहे. 'अवलेप' (avalepa) हा शब्द लेप आणि गर्व या अर्थी आहे. 'अण्डज' (aṇḍaja) हा शब्द मासा आणि पक्षी या अर्थी आहे. ๑๐๘๐. १०८०. พิลาเล นกุเล พพฺพุ, มนฺโถ มนฺถนสตฺตุสุ; วาโล เกเส’สฺสาทิโลเม,สงฺฆาโต ฆาตราสิสุ. 'बब्बु' (babbu) हा शब्द मांजर आणि मुंगूस या अर्थी आहे. 'मंथ' (mantha) हा शब्द रवी आणि शत्रू या अर्थी आहे. 'वाल' (vāla) हा शब्द केस आणि घोड्याचे केस या अर्थी आहे. 'संघात' (saṅghāta) हा शब्द प्रहार आणि समूह या अर्थी आहे. ๑๐๘๑. १०८१. โคปคาเม รเว โฆโส, สูโต สารถิวนฺทิสุ; มาลฺยํ ตุ ปุปฺเผ ตทฺทาเม, วาโห ตุ สกเฏ หเย. 'घोस' (ghosa) हा शब्द गोकुळ आणि आवाज या अर्थी आहे. 'सूत' (sūta) हा शब्द सारथी आणि स्तुती करणारा या अर्थी आहे. 'माल्य' (mālya) हा शब्द फूल आणि फुलांची माळ या अर्थी आहे. 'वाह' (vāha) हा शब्द गाडी आणि घोडा या अर्थी आहे. ๑๐๘๒. १०८२. ขเย’จฺจเน จา’ปจโย, กาโล สมย มจฺจุสุ; เภ ตารกา เนตฺตมชฺเฌ, สีมา’ วธิ, ฏฺฐิตีสุ จ. 'अपचय' (apacaya) हा शब्द क्षय आणि पूजा या अर्थी आहे. 'काल' (kāla) हा शब्द वेळ आणि मृत्यू या अर्थी आहे. 'भ' (bha) हा शब्द तारा आणि डोळ्याची बाहुली या अर्थी आहे. 'सीमा' (sīmā) हा शब्द मर्यादा आणि स्थिती या अर्थी आहे. ๑๐๘๓. १०८३. อาโภโค ปุณฺณตา’วชฺเช-สฺวา’ฬิ’ตฺถี สขิ เสตุสุ; สตฺเต ถูเล ตีสุ ทฬฺโห, ลตา สาขาย วลฺลิยํ. 'आभोग' हा शब्द पूर्णता आणि आवर्जन (लक्ष देणे) या अर्थांत वापरला जातो. 'आळि' (स्त्रीलिंगी) हा शब्द सखी (मैत्रीण) आणि सेतू (धरण/पूल) या अर्थांत वापरला जातो. 'दळ्ह' हा शब्द तिन्ही लिंगांत प्राणी (सत्त्व) आणि स्थूल (जाड) या अर्थांत वापरला जातो. 'लता' हा शब्द शाखा (फांदी) आणि वल्ली (वेल) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๘๔. १०८४. มุตฺติ’ตฺถี [Pg.88] โมจเน โมกฺเข,กาโย ตุ เทห ราสิสุ; นีเจ ปุถุชฺชโน มูฬฺเห, ภตฺตา สามินิ ธารเก. 'मुत्ति' (स्त्रीलिंगी) हा शब्द मोचन (सुटका) आणि मोक्ष (मुक्ती) या अर्थांत वापरला जातो. 'काय' हा शब्द देह (शरीर) आणि राशी (समूह) या अर्थांत वापरला जातो. 'पुथुज्जन' हा शब्द नीच आणि मूढ (अज्ञानी) या अर्थांत वापरला जातो. 'भत्ता' हा शब्द स्वामी (मालक) आणि धारक (पोषण करणारा) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๘๕. १०८५. สิขา, ปิญฺเฉสุ สิขณฺโฑ, สตฺเต ตฺว’ตฺตนิ ปุคฺคโล; สมฺพาโธ สํกเฏ คุยฺเห,นาเส เขเป ปราภโว. 'शिखण्ड' हा शब्द शिखा (शेंडी) आणि पिच्छ (पिसे) या अर्थांत वापरला जातो. 'पुग्गल' हा शब्द प्राणी (सत्त्व) आणि आत्मा (व्यक्ति/जीव) या अर्थांत वापरला जातो. 'संबाध' हा शब्द संकट (अरुंद जागा) आणि गुह्य (गुप्तांग) या अर्थांत वापरला जातो. 'पराभव' हा शब्द नाश आणि क्षेप (पराजय/फेकणे) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๘๖. १०८६. วจฺโจ รูเป กรีเส ถ, ชุติ’ตฺถี กนฺติรํสิสุ; 'वच्च' हा शब्द रूप आणि करीष (विष्ठा) या अर्थांत वापरला जातो. 'जुति' (स्त्रीलिंगी) हा शब्द कांती (तेज) आणि रश्मी (किरण) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๘๗. १०८७. ลพฺภํ ยุตฺเต จ ลทฺธพฺเพ, ขณฺเฑ ปณฺเณ ทลํ มตํ; สลฺลํ กณฺเฑ สลากายํ, สุจิตฺเต ธาวนํ คเต; ภนฺตตฺเถ วิพฺภโม หาเว, โมโห’วิชฺชาย มุจฺฉเน. 'लब्भ' हा शब्द योग्य (युक्त) आणि मिळण्याजोगे (लब्धव्य) या अर्थांत मानला जातो. 'दल' हा शब्द खंड (तुकडा) आणि पर्ण (पान) या अर्थांत मानला जातो. 'सल्ल' हा शब्द बाण (कांड) आणि शलाका (काडी) या अर्थांत वापरला जातो. 'धावन' हा शब्द स्वच्छ करणे (सुचित्त) आणि धावणे (गती) या अर्थांत वापरला जातो. 'विब्भम' हा शब्द भ्रम (भ्रान्त) आणि हावभाव या अर्थांत वापरला जातो. 'मोह' हा शब्द अविद्या आणि मूर्च्छा (बेशुद्धी) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๘๘. १०८८. เสโท ฆมฺมชเล ปาเก,โคเฬ อุจฺฉุมเย คุโฬ; มิตฺเต สหาเย จ สขา, วิภู นิจฺจปฺปภูสุ โส. 'सेद' हा शब्द घाम (घर्मजल) आणि पाक (शिजणे) या अर्थांत वापरला जातो. 'गुळ' हा शब्द गोल (गोळा) आणि उसाचा रस (गुळ) या अर्थांत वापरला जातो. 'सखा' हा शब्द मित्र आणि सहाय्यक या अर्थांत वापरला जातो. 'विभू' हा शब्द नित्य आणि प्रभू (समर्थ) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๘๙. १०८९. ขคฺเค กุรูเร เนตฺตึโส, ปรสฺมึ อตฺร ตีสฺว’มุ; กลงฺโก’งฺกา’ปวาเทสุ,เทเส ชนปโท ชเน. 'नेत्तिंस' हा शब्द खड्ग (तलवार) आणि क्रूर या अर्थांत वापरला जातो. 'अमु' हा शब्द तिन्ही लिंगांत पर (दुसरा) आणि अत्र (हा/येथे) या अर्थांत वापरला जातो. 'कलंक' हा शब्द अंक (डाग) आणि अपवाद (निंदा) या अर्थांत वापरला जातो. 'जनपद' हा शब्द देश (प्रदेश) आणि जन (लोक) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๐. १०९०. ปชฺเช คาถา วจีเภเท, วํโส ตฺว’นฺวยเวณุสุ; ยานํ รถาโท คมเน, สรูปสฺมึ อโธ ตลํ. 'पज्ज' हा शब्द गाथा आणि वचनभेद (भाषण प्रकार) या अर्थांत वापरला जातो. 'वंस' हा शब्द वंश (अन्वय) आणि वेणू (बांबू) या अर्थांत वापरला जातो. 'यान' हा शब्द रथ इत्यादी वाहने आणि गमन (जाणे) या अर्थांत वापरला जातो. 'तल' हा शब्द समतल (समान रूप) आणि अधः (खालचा भाग) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๑. १०९१. มชฺโฌ วิลคฺเค เวมชฺเฌ, ปุปฺผํ ตุ กุสุโม’ตุสุ; สีลํ สภาเว สุพฺพเต, ปุงฺคโว อุสเภ วเร. 'मज्झ' हा शब्द कंबर (विलग्न) आणि मध्यभाग (वेमध्य) या अर्थांत वापरला जातो. 'पुप्फ' हा शब्द कुसुम (फूल) आणि ऋतुकळ (मासिक पाळी) या अर्थांत वापरला जातो. 'सील' हा शब्द स्वभाव आणि सुव्रत (सदाचार) या अर्थांत वापरला जातो. 'पुंगव' हा शब्द ऋषभ (बैल) आणि श्रेष्ठ (वर) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๒. १०९२. โกเส ขคาทิพีเช’ณฺฑํ, กุหรํ คพฺภเร พิเล; เนตฺตึเส คณฺฑเก ขคฺโค, กทมฺโพ ตุ ทุเม จเย. 'अण्ड' हा शब्द तलवार इत्यादींचा म्यान (कोश) आणि बीज (अंड) या अर्थांत वापरला जातो. 'कुहर' हा शब्द गह्वर (गुहा) आणि बीळ (छिद्र) या अर्थांत वापरला जातो. 'खग्ग' हा शब्द तलवार (नेत्तिंस) आणि गेंडा (गंडक) या अर्थांत वापरला जातो. 'कदम्ब' हा शब्द वृक्षविशेष (कदंब वृक्ष) आणि समूह (चय) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๓. १०९३. เภ’เธนุยํ โรหิณี’ตฺถี, วรงฺคํ โยนิยํ สิเร; อกฺโกเส สปเถ สาโป, ปงฺกํ ปาเป จ กทฺทเม. 'रोहिणी' (स्त्रीलिंगी) हा शब्द नक्षत्र आणि धेनू (गाय) या अर्थांत वापरला जातो. 'वरंग' हा शब्द योनी आणि शिर (मस्तक) या अर्थांत वापरला जातो. 'साप' हा शब्द आक्रोश (गालीप्रदान) आणि शपथ (शाप) या अर्थांत वापरला जातो. 'पंक' हा शब्द पाप आणि कर्दम (चिखल) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๔. १०९४. โภควตฺยุ’รเค โภคี, สฺสโร ตุ สิวสามิสุ; พเล ปภาเว วีริยํ, เตโช เตสุ จ ทิตฺติยํ. 'भोगी' हा शब्द भोगवती (नागलोक) आणि उरग (सर्प) या अर्थांत वापरला जातो. 'इस्सर' हा शब्द शिव आणि स्वामी (मालक) या अर्थांत वापरला जातो. 'वीरिय' हा शब्द बल आणि प्रभाव या अर्थांत वापरला जातो. 'तेज' हा शब्द बल, प्रभाव आणि दीप्ती (प्रकाश) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๕. १०९५. ธารา สนฺตติ ขคฺคงฺเค, วานํ ตณฺหาย สิพฺพเน; ขตฺตา สูเต ปฏิหาเร, วิตฺติ ปีฬาสุ เวทนา. 'धारा' हा शब्द संतती (परंपरा) आणि तलवारीची धार (खड्गांग) या अर्थांत वापरला जातो. 'वान' हा शब्द तण्हा (तृष्णा) आणि शिवणकाम (सिब्बन) या अर्थांत वापरला जातो. 'खत्ता' हा शब्द सूत (सारथी) आणि प्रतिहार (द्वारपाल) या अर्थांत वापरला जातो. 'वेदना' हा शब्द वृत्ती (उपजीविका) आणि पीडा (दुःख) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๖. १०९६. ถิยํ [Pg.89] มติ’จฺฉาปญฺญาสุ, ปาเป ยุทฺเธ รเว รโณ; ลโวตุ พินฺทุ’จฺเฉเทสุ, ปลาเล’ ติสเย ภุสํ. 'मति' (स्त्रीलिंगी) हा शब्द इच्छा आणि प्रज्ञा (बुद्धी) या अर्थांत वापरला जातो. 'रण' हा शब्द पाप, युद्ध आणि रव (आवाज) या अर्थांत वापरला जातो. 'लव' हा शब्द बिंदू आणि छेद (तुकडा करणे) या अर्थांत वापरला जातो. 'भुस' हा शब्द पलाल (पेंढा) आणि अतिशय (फार जास्त) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๗. १०९७. พาธา ทุกฺเข นิเสเธ จ, มูลปเทปิ มาติกา; สฺเนโห เตเล’ธิกปฺเปเม,ฆรา’เปกฺขาสุ อาลโย. 'बाधा' हा शब्द दुःख आणि निषेध (प्रतिबंध) या अर्थांत वापरला जातो. 'मातिका' हा शब्द मूळपद (मूर्धपद/सूची) आणि जलवाहिनी (कालवा) या अर्थांत वापरला जातो. 'स्नेह' हा शब्द तेल आणि अधिक प्रेम या अर्थांत वापरला जातो. 'आलय' हा शब्द घर आणि अपेक्षा (आसक्ती) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๘. १०९८. เกตุสฺมึ เกตนํ เคเห, ฐาเน ภูมิ’ตฺถิยํ ภุวิ; เลขฺเย เลโข ราชิ เลขา, ปูชิเต ภควา ชิเน. 'केतन' हा शब्द केतू (ध्वज) आणि गृह (घर) या अर्थांत वापरला जातो. 'भूमी' (स्त्रीलिंगी) हा शब्द स्थान आणि भू (जमीन) या अर्थांत वापरला जातो. 'लेख' हा शब्द लेख्य (लिखाण) आणि 'लेखा' हा शब्द राजी (रेघ/ओळ) या अर्थांत वापरला जातो. 'भगवा' हा शब्द पूजित (आदरणीय) आणि जिन (बुद्ध) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๐๙๙. १०९९. คทา สตฺเถ คโท โรเค, นิสชฺชา ปีเฐสฺวา’สนํ; ตถาคโต ชิเน สตฺเต,จเย เทเห สมุสฺสโย. 'गदा' हा शब्द शस्त्र आणि 'गद' हा शब्द रोग या अर्थांत वापरला जातो. 'आसन' हा शब्द निसज्जा (बसणे) आणि पीठ (बैठक) या अर्थांत वापरला जातो. 'तथागत' हा शब्द जिन (बुद्ध) आणि सत्त्व (प्राणी) या अर्थांत वापरला जातो. 'समुस्सर' (समुच्चय) हा शब्द चय (समूह) आणि देह (शरीर) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๐. ११००. พิลํ โกฏฺฐาส ฉิทฺเทสุ, วชฺชํ โทเส จ เภริยํ; กาเล ทีฆญฺชเส’ทฺธานํ, อาลิยํ เสตุ การเณ. 'बीळ' (बिल) हा शब्द कोष्ठास (भाग) आणि छिद्र या अर्थांत वापरला जातो. 'वज्ज' (वर्ज्य/वज्र) हा शब्द दोष आणि भेरी (नगारा) या अर्थांत वापरला जातो. 'अद्धान' हा शब्द काळ आणि दीर्घ मार्ग (लांबचा रस्ता) या अर्थांत वापरला जातो. 'आलिय' हा शब्द सेतू (धरण) आणि कारण या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๑. ११०१. โอกาโส การเณ เทเส,สภา เคเห จ สํสเท; ยูโป ถมฺเภ จ ปาสาเท, อยนํ คมเน ปเถ. 'ओकास' (अवकाश) हा शब्द कारण आणि देश (जागा) या अर्थांत वापरला जातो. 'सभा' हा शब्द गृह (घर) आणि संसद (सभा/बैठक) या अर्थांत वापरला जातो. 'यूप' हा शब्द स्तंभ (खांब) आणि प्रासाद (वाडा) या अर्थांत वापरला जातो. 'अयन' हा शब्द गमन (जाणे) आणि पथ (मार्ग) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๒. ११०२. อกฺโก รุกฺขนฺตเร สูเร,อสฺโส โกเณ หเยปิ จ; อํโส ขนฺเธ จ โกฏฺฐาเส,ชาลํ สูสฺว’จฺจิ โน ปุเม. 'अक्क' (अर्क) हा शब्द वृक्षविशेष (रुईचा वृक्ष) आणि सूर्य या अर्थांत वापरला जातो. 'अस्स' (अश्र/अश्व) हा शब्द कोन आणि घोडा (हय) या अर्थांत वापरला जातो. 'अंस' हा शब्द स्कंध (खांदा) आणि कोष्ठास (भाग) या अर्थांत वापरला जातो. 'जाल' हा शब्द जाळे आणि ज्वाला (अर्चि - नपुंसकलिंगात) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๓. ११०३. นาสา’สตฺเตสฺว’ ภาโว ถ,อนฺน โมทน ภุตฺติสุ; ชีวํ ปาเน ชเน ชีโว,ฆาโส ตฺว’นฺเน จ ภกฺขเณ. 'नास' (नाश) हा शब्द प्राण्यांचा अभाव (विनाश) या अर्थात वापरला जातो. 'अन्न' हा शब्द ओदन (भात) आणि भुत्ती (भोजन) या अर्थांत वापरला जातो. 'जीव' हा शब्द प्राण आणि जन (लोक) या अर्थांत वापरला जातो. 'घास' हा शब्द अन्न आणि भक्षण (खाणे) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๔. ११०४. ฉทเน’จฺฉาทนํ วตฺเถ, นิกาโย เคหราสิสุ; อนฺนาโท อามิสํ มํเส; ทิกฺขา ตุ ยชเน’จฺจเน. 'अच्छादन' हा शब्द छदन (छप्पर) आणि वस्त्र या अर्थांत वापरला जातो. 'निकाय' हा शब्द गृह (घर) आणि राशी (समूह) या अर्थांत वापरला जातो. 'आमिस' (आमिष) हा शब्द अन्न आणि मांस या अर्थांत वापरला जातो. 'दिक्खा' (दीक्षा) हा शब्द यजन (यज्ञ) आणि अर्चन (पूजा) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๕. ११०५. กฺริยายํ การิกา ปชฺเช,เกตุ ตุ จิหเน ธเช; กุสุมํ ถีรเช ปุปฺเผ, วานเร ตุ พุเธ กวิ. 'कारिका' हा शब्द क्रिया आणि पद्य (कविता) या अर्थांत वापरला जातो. 'केतू' हा शब्द चिन्ह आणि ध्वज या अर्थांत वापरला जातो. 'कुसुम' हा शब्द स्त्रीरज (मासिक पाळी) आणि पुष्प (फूल) या अर्थांत वापरला जातो. 'कवि' हा शब्द वानर आणि बुध (विद्वान/कवी) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๖. ११०६. อธเร [Pg.90] ขรเภ โอฏฺโฐ, ลุทฺโท ตุ ลุทฺทเกปิ จ; กลุสํ ตฺวา’วิเล ปาเป, ปาเป กลิ ปราชเย. 'ओट्ठ' (ओठ) हा शब्द अधर (खालचा ओठ) आणि उंट किंवा हत्तीचे पिल्लू (खरभ) या अर्थांत वापरला जातो. 'लुद्द' (लुब्ध) हा शब्द शिकारी (लुब्धक) आणि लोभी या अर्थांत वापरला जातो. 'कलुस' (कलुष) हा शब्द आवील (गढूळ) आणि पाप या अर्थांत वापरला जातो. 'कलि' हा शब्द पाप आणि पराजय या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๗. ११०७. กนฺตาโร วน, ทุคฺเคสุ, จโร จารมฺหิ จญฺจเล; ชนาวาเส คเณ คาโม, จมฺมํ ตุ ผลเก ตเจ. 'कांतार' हा शब्द वन (जंगल) आणि दुर्ग (कठीण मार्ग) या अर्थांत वापरला जातो. 'चर' हा शब्द चार (हेर) आणि चंचल या अर्थांत वापरला जातो. 'गाम' (ग्राम) हा शब्द जनवास (वस्ती) आणि गण (समूह) या अर्थांत वापरला जातो. 'चम्म' (चर्म) हा शब्द फलक (ढाल) आणि त्वचा (कातडी) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๘. ११०८. อาโมโท หาส คนฺเธสุ,จารุ ตุ กนเกปิ จ; สตฺตายํ ภวนํ เคเห, เลเส ตุ ขลิเต ฉลํ. 'आमोद' हा शब्द हास (आनंद) आणि गंध (सुवास) या अर्थांत वापरला जातो. 'चारू' हा शब्द सुंदर आणि कनक (सोने) या अर्थांत वापरला जातो. 'भवन' हा शब्द सत्ता (अस्तित्व) आणि गृह (घर) या अर्थांत वापरला जातो. 'छल' हा शब्द लेश (निमित्त/कपट) आणि स्खलित (चूक) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๐๙. ११०९. เวรํ ปาเป จ ปฏิเฆ, ตโจ จมฺมนิ วกฺกเล; อุจฺเจ’ธิโรเห อาโรโห, เนตฺตํ วตฺถนฺตร’กฺขิสุ. 'वेर' (वैर) हा शब्द पाप आणि प्रतिघ (क्रोध/शत्रुत्व) या अर्थांत वापरला जातो. 'तच' (त्वचा) हा शब्द चर्म (कातडी) आणि वल्कल (झाडाची साल) या अर्थांत वापरला जातो. 'आरोह' हा शब्द उच्च (उंची) आणि अधिरोह (चढणे) या अर्थांत वापरला जातो. 'नेत्त' (नेत्र) हा शब्द वस्त्रविशेष आणि अक्षि (डोळा) या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๑๐. १११०. ปฏิหาเร มุเข ทฺวารํ, เปเต ญาเต มโต ติสุ; มาโส ปรณฺณ กาเลสุ, นคฺโค ตฺว’เจลเกปิ จ. 'द्वार' हा शब्द प्रतिहार (द्वारपाल) आणि मुख (प्रवेशद्वार) या अर्थांत वापरला जातो. 'मत' हा शब्द तिन्ही लिंगांत प्रेत (मरण पावलेला) आणि ज्ञात (समजलेला) या अर्थांत वापरला जातो. 'मास' हा शब्द उडीद (परण्ण) आणि काळ (महिना) या अर्थांत वापरला जातो. 'नग्ग' (नग्न) हा शब्द अचेलक (दिगंबर/वस्त्रहीन) या अर्थात वापरला जातो. ๑๑๑๑. ११११. โทเส ฆาเต จ ปฏิโฆ, มิคาโท ฉคเล ปสุ; อรูเป จา’วฺหเย นามํ, ทโร ทรถ ภีติสุ. 'पटिघ' (प्रतिघ) हा शब्द दोष (क्रोध) आणि घात (मारणे) या अर्थांत वापरला जातो. 'पसु' (पशू) हा शब्द श्वापद (मृगाद) आणि शेळी/बोकड (छगल) या अर्थांत वापरला जातो. 'नाम' हा शब्द अरूप (नामस्कंध) आणि आव्हय (नाव) या अर्थांत वापरला जातो. 'दर' हा शब्द दरथ (चिंता/क्लेश) आणि भीती या अर्थांत वापरला जातो. ๑๑๑๒. १११२. ยาจเน โภชเน ภิกฺขา,ภาเร ตฺว’ติสเย ภโร; ทพฺพิ’นฺทชายาสุ สุชา, เมเฆ ตฺว’พฺภํ วิหายเส. भिक्षा (भिक्खा) हा शब्द याचना आणि भोजन या अर्थी वापरला जातो; भार (भरो) हा शब्द ओझे आणि अतिशय (अधिकता) या अर्थी वापरला जातो; सुजा (सुजा) हा शब्द पळी (दब्बी) आणि इन्द्राची पत्नी (इन्द्रजाया) या अर्थी वापरला जातो; अब्भ (अब्भं) हा शब्द मेघ आणि आकाश (विहायस) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๑๓. १११३. โมทโก ขชฺชเภเทปิ, มณิเก รตเน มณิ; เสลา’ราเมสุ มลโย,สภาว’งฺเกสุ ลกฺขณํ. मोदक (मोदको) हा शब्द एका विशिष्ट खाद्यपदार्थासाठी (खाद्यविशेष) आणि आनंद देणाऱ्यासाठी वापरला जातो; मणी (मणी) हा शब्द पाण्याचे भांडे (मणिक) आणि रत्न या अर्थी वापरला जातो; मलय (मलयो) हा शब्द पर्वत (शैल) आणि उद्यान (आराम) या अर्थी वापरला जातो; लक्षण (लक्खणं) हा शब्द स्वभाव आणि चिन्ह (अङ्क) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๑๔. १११४. หวิ สปฺปิมฺหิ โหตพฺเพ, สิโร เสฏฺเฐ จ มุทฺธนิ; วิจาเรปิ วิเวโก ถ, สิขรี ปพฺพเต ทุเม. हवि (हवि) हा शब्द तूप (सप्पि) आणि यज्ञातील आहुती (होतव्य) या अर्थी वापरला जातो; शिर (सिरो) हा शब्द श्रेष्ठ आणि मस्तक (मुद्धन्) या अर्थी वापरला जातो; विवेक (विवेको) हा शब्द विचार आणि विवेक (भेदज्ञान) या अर्थी वापरला जातो; शिखरी (सिखरी) हा शब्द पर्वत आणि वृक्ष (दुम) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๑๕. १११५. เวโค ชเว ปวาเห จ, สงฺกุ ตุ ขิลเหติสุ; นิคฺคหีเต กเณ พินฺทุ, วราโห สูกเร คเช. वेग (वेगो) हा शब्द गती (जव) आणि प्रवाह या अर्थी वापरला जातो; शङ्कू (सङ्कु) हा शब्द खुंटी (खील) आणि शस्त्र (हेति) या अर्थी वापरला जातो; बिंदू (बिन्दु) हा शब्द अनुस्वार (निग्गहीत) आणि पाण्याचा थेंब (कण) या अर्थी वापरला जातो; वराह (वराहो) हा शब्द डुक्कर (सूकर) आणि हत्ती (गज) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๑๖. १११६. เนตฺตนฺเต จิตฺตเก’ปางฺคํ, สิทฺธตฺโถ สาสเป ชิเน; หาโร มุตฺตาคุเณ คาเห,ขารโก มกุเฬ รเส. अपाङ्ग (अपाङ्गं) हा शब्द डोळ्याचा कोपरा (नेत्रान्त) आणि कपाळावरील टिळा (चित्रक) या अर्थी वापरला जातो; सिद्धार्थ (सिद्धत्थो) हा शब्द मोहरी (सासप) आणि बुद्ध/जिन या अर्थी वापरला जातो; हार (हारो) हा शब्द मोत्यांची माळ (मुक्तागुण) आणि ग्रहण करणे (ग्राह) या अर्थी वापरला जातो; क्षारक (खारको) हा शब्द कळी (मुकुल) आणि रस या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๑๗. १११७. อจฺจโย’ ติกฺกเม โทเส,เสลรุกฺเขสฺว’โค นโค; สฺวปฺเป’วธารเณ มตฺตํ, อปจิตฺย’จฺจเน ขเย. अच्चय (अच्चयो) हा शब्द उल्लंघन (अतिक्रम) आणि दोष या अर्थी वापरला जातो; अग (अगो) आणि नग (नगो) हे शब्द पर्वत (शैल) आणि वृक्ष या अर्थी वापरले जातात; मत्त (मत्तं) हा शब्द अल्प (स्वल्प) आणि मर्यादा (अवधारण) या अर्थी वापरला जातो; अपचिती (अपचिति) हा शब्द पूजा (अर्चन) आणि क्षय (नाश) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๑๘. १११८. ฉิทฺโท’ตรเณสฺโว’ตาโร,พฺรหฺเม [Pg.91] จ ชนเก ปิตา; ปิตามโห’ยฺยเก พฺรหฺเม,โปโต นาวาย พาลเก. ओतार (ओतारो) हा शब्द छिद्र आणि उतरण्याची जागा (अवतरण) या अर्थी वापरला जातो; पिता (पिता) हा शब्द ब्रह्मा आणि जन्मदाता (जनक) या अर्थी वापरला जातो; पितामह (पितामहो) हा शब्द आजोबा (अय्यक) आणि ब्रह्मा या अर्थी वापरला जातो; पोत (पोतो) हा शब्द नौका आणि लहान मूल (बालक) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๑๙. १११९. รุกฺเข วณฺเณ สุเน โสโณ,สคฺเค ตุ คคเน ทิโว; วตฺเถ คนฺเธ ฆเร วาโส, จุลฺโล ขุทฺเท จ อุทฺธเน. सोण (सोणो) हा शब्द वृक्ष, लाल रंग (वर्ण) आणि कुत्रा (शुन) या अर्थी वापरला जातो; दिव (दिवो) हा शब्द स्वर्ग आणि आकाश (गगन) या अर्थी वापरला जातो; वास (वासो) हा शब्द वस्त्र, गंध आणि घर या अर्थी वापरला जातो; चुल्ल (चुल्लो) हा शब्द लहान (क्षुद्र) आणि शेगडी/चूल (उद्धन) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๐. ११२०. กณฺโณ โกเณ จ สวเณ,มาลา ปุปฺเผ จ ปนฺติยํ; ภาโค ภาคฺเย’กเทเสสุ,กุฏฺฐํ โรเค’ ชปาลเก. कण्ण (कण्णो) हा शब्द कोपरा (कोण) आणि कान (श्रवण) या अर्थी वापरला जातो; माला (माला) हा शब्द फूल आणि ओळ (पंक्ती) या अर्थी वापरला जातो; भाग (भागो) हा शब्द भाग्य आणि हिस्सा (एकदेश) या अर्थी वापरला जातो; कुष्ठ (कुट्ठं) हा शब्द रोग (कुष्ठरोग) आणि शेळ्या पाळणारा (अजपालक) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๑. ११२१. เสยฺยา เสนาสเน เสเน, จุนฺทภณฺฑมฺหิ จ’พฺภโม; วตฺถาทิโลมํ’สุ กเร, นิปาโต ปตเน’พฺยเย. शय्या (सेय्या) हा शब्द शयनस्थान (सेनासन) आणि निद्रा या अर्थी वापरला जातो; अब्भम (अब्भमो) हा शब्द खरादीचे यंत्र (चुंदभांड) या अर्थी वापरला जातो; अंशु (अंसु) हा शब्द वस्त्राचा धागा (वस्त्रादिलोम) आणि किरण (कर) या अर्थी वापरला जातो; निपात (निपातो) हा शब्द खाली पडणे (पतन) आणि अव्यय या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๒. ११२२. สาขายํ วิฏโป ถมฺเภ, สตฺตุ ขชฺชนฺตเร ทิเส; สามิโก ปติ’ยิเรสุ, ปฏฺฐานํ คติ เหตุสุ. विटप (विटपो) हा शब्द याचना आणि भोजन या अर्थी वापरला जातो; सत्तु (सत्तु) हा शब्द सातूचे पीठ (खाद्यान्न विशेष) आणि शत्रू (दिस) या अर्थी वापरला जातो; सामी (सामिको) हा शब्द पती आणि स्वामी/मालक (ईश्वर) या अर्थी वापरला जातो; पट्ठान (पट्ठानं) हा शब्द गमन (गती) आणि कारण (हेतू) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๓. ११२३. ราเค รงฺโค นจฺจฏฺฐาเน, ปานํ เปยฺเย จ ปีติยํ; อิณุ’กฺเขเปสุ อุทฺธาโร, อุมฺมาเร เอฬโก อเช. रंग (रङ्गो) हा शब्द राग (प्रेम/आसक्ती) आणि नृत्यगृह (नाट्यगृह) या अर्थी वापरला जातो; पान (पानं) हा शब्द पेय आणि पिण्याची क्रिया किंवा आनंद (प्रीती) या अर्थी वापरला जातो; उद्धार (उद्धारो) हा शब्द कर्ज (ऋण) आणि वर उचलणे (उत्क्षेप) या अर्थी वापरला जातो; एळक (एळको) हा शब्द उंबरठा (उुम्मार) आणि मेंढा (अज) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๔. ११२४. ปหาโร โปถเน ยาเม,สรโท หายโน’ตุสุ; กุณฺฑิกายา’ฬฺหเก ตุมฺโพ,ปลาโล ตุ ภุสมฺหิ จ. प्रहार (पहारो) हा शब्द मारणे (पोथन) आणि प्रहर (याम) या अर्थी वापरला जातो; शरद (सरदो) हा शब्द वर्ष (हायन) आणि शरद ऋतू या अर्थी वापरला जातो; तुंब (तुम्बो) हा शब्द कमंडलू (कुंडिका) आणि आढक (एक माप) या अर्थी वापरला जातो; पलाल (पलालो) हा शब्द पेंढा (भुस) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๕. ११२५. มตา’วาเฏ จเย กาสุ, ปนิสา การเณ รโห; กาโส โปฏคเล โรเค,โทโส โกเธ คุเณ’ตเร. कासू (कासु) हा शब्द खड्डा (अवाट) आणि ढीग (चय) या अर्थी वापरला जातो; पनिसा (पनिसa) हा शब्द कारण आणि एकांत (रहस्य) या अर्थी वापरला जातो; कास (कासो) हा शब्द लव्हाळा/एक प्रकारचे गवत (पोटगल) आणि खोकला (रोग) या अर्थी वापरला जातो; दोष (दोसो) हा शब्द क्रोध आणि अवगुण (गुणेतर) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๖. ११२६. ยุตฺย’ฏฺฏาล’ฏฺฏิเตสฺว’ฏฺโฏ, กีฬายํ กานเน ทโว; อุปฺปตฺติยํ โจ’ปฺปตนํ, อุยฺยานํ คมเน วเน. अट्ट (अट्टो) हा शब्द खटला (युती), बुरुज (अट्टाल) आणि पीडित (अट्टित) या अर्थी वापरला जातो; दव (दवो) हा शब्द क्रीडा आणि वन (कानन) या अर्थी वापरला जातो; उप्पतन (उप्पतनं) हा शब्द उत्पत्ती (जन्म) आणि वर उडणे (उत्पतन) या अर्थी वापरला जातो; उद्यान (उय्यानं) हा शब्द गमन (प्रयाण) आणि वन (बाग) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๗. ११२७. โวกาโร ลามเก ขนฺเธ, มูโล’ปทาสุ ปาภตํ; ทสา’ วตฺถา ปฏนฺเตสุ, การณํ ฆาต, เหตุสุ. वोकार (वोकारो) हा शब्द तुच्छ (लामक) आणि स्कंध (पंचस्कंध) या अर्थी वापरला जातो; पाभत (पाभतं) हा शब्द मूळ (भांडवल) आणि भेटवस्तू (उपदा) या अर्थी वापरला जातो; दशा (दसा) हा शब्द अवस्था आणि वस्त्राची किनार (पटंत) या अर्थी वापरला जातो; कारण (कारणं) हा शब्द वध (घात) आणि हेतू या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๘. ११२८. หตฺถิทาเน [Pg.92] มโท คพฺเพ, ฆฏา ฆฏน ราสิสุ; อุปหาโร’ภิหาเรปิ, จโย พนฺธน ราสิสุ. मद (मदो) हा शब्द हत्तीचा मद (हत्तीचे दान) आणि गर्व या अर्थी वापरला जातो; घटा (घटा) हा शब्द प्रयत्न (घटन) आणि समूह (राशी) या अर्थी वापरला जातो; उपहार (उपहारो) हा शब्द भेटवस्तू (अभिहार) या अर्थी वापरला जातो; चय (चयो) हा शब्द बंधन आणि ढीग (राशी) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๒๙. ११२९. คนฺโธ โถเก ฆายนีเย,จาโค ตุ ทานหานิสุ; ปาเน ปโมเท ปีติ’ตฺถี, อิเณ คิวา คเลปิ จ. गंध (गन्धो) हा शब्द थोडे (थोक) आणि सुवास (घ्राणेंद्रियाने ग्रहण करण्याजोगा) या अर्थी वापरला जातो; त्याग (चागो) हा शब्द दान आणि त्याग (हानी) या अर्थी वापरला जातो; पीती (पीती) हा शब्द पेय (पान) आणि आनंद (प्रमोद) या अर्थी स्त्रीलिंगात वापरला जातो; गिवा (गिवा) हा शब्द कर्ज (ऋण) आणि मान/गळा (गल) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๓๐. ११३०. ปติฏฺฐา นิสฺสเย ฐาเน, พลกฺกาเรปิ สาหสํ; ภงฺโค เภเท ปเฏ ภงฺคํ, ฉตฺตํ ตุ ฉวเกปิ จ. प्रतिष्ठा (पतिट्ठा) हा शब्द आश्रय (निश्रय) आणि स्थान या अर्थी वापरला जातो; साहस (साहसं) हा शब्द बळजबरी (बलात्कार) या अर्थी वापरला जातो; भंग (भङ्गो) हा शब्द नाश (भेद) आणि कापड (पट) या अर्थी वापरला जातो; छत्त (छत्तं) हा शब्द छत्री आणि प्रेत (शवक) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๓๑. ११३१. ญาเณ ภุวิ จ ภูริ’ตฺตี, อนงฺเค มทโน ทุเม; ปมาตริปิ มาตา ถ, เวฐุ’ณีเสสุ เวฐนํ. भूरी (भूरी) हा शब्द ज्ञान आणि पृथ्वी या अर्थी स्त्रीलिंगात वापरला जातो; मदन (मदनो) हा शब्द कामदेव (अनंग) आणि मदनवृक्ष या अर्थी वापरला जातो; माता (माता) हा शब्द मोजणारी (प्रमात्री) आणि आई या अर्थी वापरला जातो; वेठन (वेठनं) हा शब्द पगडी (उष्णीष) आणि वेढणे (वेष्टन) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๓๒. ११३२. มาริโส ตณฺฑุเลยฺเย’ยฺเย,โมกฺโข นิพฺพาน มุตฺติสุ; อินฺโท’ธิปติ สกฺเกสฺวา, รมฺมณํ เหตุ โคจเร. मारिस (मारिसो) हा शब्द तांदुळजा भाजी (तंडुलेय्य) आणि आर्य/पूज्य (अय्य) या अर्थी वापरला जातो; मोक्ष (मोक्खो) हा शब्द निर्वाण आणि मुक्ती या अर्थी वापरला जातो; इंद (इन्दो) हा शब्द अधिपती आणि शक्र (इंद्र) या अर्थी वापरला जातो; आरम्मण (आरम्मणं) हा शब्द हेतू (कारण) आणि गोचर (इंद्रियांचा विषय) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๓๓. ११३३. องฺเก สณฺฐาน มากาเร,เขตฺเต วปฺโป ตเฏปิ จ; สมฺมุตฺย’นุญฺญา โวหาเร, สฺว’ถ ลาชาสุ จา’กฺขตํ. अंक (अङ्के) हा शब्द संस्थान (आकृती) आणि आकार या अर्थी वापरला जातो; वप्प (वप्पो) हा शब्द शेत (क्षेत्र) आणि किनारा (तट) या अर्थी वापरला जातो; सम्मुती (सम्मुति) हा शब्द अनुमती आणि व्यवहार या अर्थी वापरला जातो; अक्षत (अक्खतं) हा शब्द न तुटलेले (अक्षत) आणि लाह्या (लाजा) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๓๔. ११३४. สตฺรํ ยาเค สทาทาเน,โสโม ตุ โอสธิ’นฺทุสุ; สงฺฆาโต ยุคเคหงฺเค, ขาโร อูเส จ ภสฺมนิ. सत्र (सत्रं) हा शब्द यज्ञ आणि निरंतर दान (सदादान) या अर्थी वापरला जातो; सोम (सोमो) हा शब्द औषधी वनस्पती आणि चंद्र (इंदू) या अर्थी वापरला जातो; संघात (सङ्घातो) हा शब्द जोडी (युग) आणि घराचा भाग (गृहांग) या अर्थी वापरला जातो; क्षार (खारो) हा शब्द क्षारट जमीन (ऊष) आणि राख (भस्म) या अर्थी वापरला जातो. ๑๑๓๕. ११३५. อาตาโป วีริเย ตาเป,ภาเค สีมาย โอธิ จาติ. आताप (आतापो) हा शब्द वीर्य (उत्साह/प्रयत्न) आणि ताप (उष्णता) या अर्थी वापरला जातो; ओधी (ओधि) हा शब्द भाग आणि सीमा या अर्थी वापरला जातो. อิติ ปาทาเนกตฺถวคฺโค. अशा प्रकारे पाद-अनेकार्थ वर्ग समाप्त झाला. อเนกตฺถวคฺโค นิฏฺฐิโต. अनेकार्थ वर्ग समाप्त झाला. ๓. สามญฺญกณฺฑ ३. सामान्य काण्ड ๔. อพฺยยวคฺค ४. अव्यय वर्ग ๑๑๓๖. ११३६. อพฺยยํ วุจฺจเต ทานิ, จิรสฺสํ ตุ จิรํ ตถา; จิเรน จิรรตฺตาย, สห สทฺธึ สมํ อมา. आता अव्यये सांगितली जात आहेत: 'चिरस्सं' (cirassaṃ), 'चिरं' (ciraṃ), 'चिरेण' (cirena) आणि 'चिररत्ताय' (cirarattāya) हे दीर्घकाळासाठी वापरले जातात; 'सह' (saha), 'सद्धिं' (saddhiṃ), 'समं' (samaṃ) आणि 'अमा' (amā) हे 'सोबत/एकत्र' या अर्थी वापरले जातात. ๑๑๓๗. ११३७. ปุนปฺปุนํ [Pg.93] อภิณฺหญฺจา, สกึ จา’ภิกฺขณํ มุหุํ; วชฺชเน ตุ วินา นานา, อนฺตเรน ริเต ปุถุ. 'पुनप्पुनं' (punappunaṃ), 'अभिण्हं' (abhiṇhaṃ), 'सकिं' (sakiṃ), 'अभिक्खणं' (abhikkhaṇaṃ) आणि 'मुहुं' (muhuṃ) हे वारंवार किंवा पुन्हा पुन्हा या अर्थी वापरले जातात; 'विना' (vinā), 'नाना' (nānā), 'अन्तरेण' (antarena), 'रिते' (rite) आणि 'पुथु' (puthu) हे वर्जनाच्या (वगळण्याच्या) अर्थी वापरले जातात. ๑๑๓๘. ११३८. พลวํ สุฏฺฐุ จา’ตีวา, ติสเย กิมุต สฺว’ติ; อโห ตุ กึ กิมู’ ทาหุ, วิกปฺเป กิมุโต’ท จ. 'बलवं' (balavaṃ), 'सुट्ठु' (suṭṭhu), 'अतीव' (atīva), 'अतिसय' (atisaya), 'किमुत' (kimuta) आणि 'अति' (ati) हे अतिशयोक्ती किंवा तीव्रतेच्या अर्थी वापरले जातात; 'अहो' (aho), 'तु' (tu), 'किं' (kiṃ), 'किमू' (kimū), 'उदाहू' (udāhu), 'किमुतो' (kimuto) आणि 'उद' (uda) हे विकल्पाच्या (संशयाच्या किंवा पर्यायाच्या) अर्थी वापरले जातात. ๑๑๓๙. ११३९. อวฺหาเน โภ อเร อมฺโภ,หมฺโภ เร เช’งฺค อาวุโส; เห หเร ถ กถํ กึสุ, นนุ กจฺจิ นุ กึ สมา. हाक मारण्याच्या (संबोधनाच्या) अर्थी 'भो' (bho), 'अरे' (are), 'अम्भो' (ambho), 'हम्भो' (hambho), 'रे' (re), 'जे' (je), 'अङ्ग' (aṅga), 'आवुसो' (āvuso), 'हे' (he), 'हरे' (hare) हे शब्द वापरले जातात; तर 'कथं' (kathaṃ), 'किंसु' (kiṃsu), 'ननु' (nanu), 'कच्चि' (kacci), 'नु' (nu), 'किं' (kiṃ) हे प्रश्न विचारण्याच्या अर्थी समान आहेत. ๑๑๔๐. ११४०. อธุเน’ตรหี’ทานิ, สมฺปติ อญฺญทตฺถุ ตุ; ตคฺเฆ’ กํเส สสกฺกญฺจา, ทฺธา กามํ ชาตุ เว หเว. 'अधुना' (adhunā), 'इतरहि' (itarahi), 'इदानि' (idāni) आणि 'सम्पति' (sampati) हे 'आता/या वेळी' या अर्थी वापरले जातात; 'अञ्ञदत्थु' (aññadatthu), 'तग्घे' (tagghe), 'एकंसे' (ekaṃse), 'ससक्कं' (sasakkaṃ), 'अद्धा' (addhā), 'कामं' (kāmaṃ), 'जातु' (jātu), 'वे' (ve) आणि 'हवे' (have) हे निश्चयाच्या अर्थी वापरले जातात. ๑๑๔๑. ११४१. ยาวตา ตาวตา ยาว, ตาว กิตฺตาวตา ตถา; เอตฺตาวตา จ กีเว’ติ, ปริจฺเฉทตฺถวาจกา. 'यावता' (yāvatā), 'तावता' (tāvatā), 'याव' (yāva), 'ताव' (tāva), 'कित्तावता' (kittāvatā), 'एत्तावता' (ettāvatā) आणि 'कीव' (kīva) हे परिच्छेद (मर्यादा किंवा प्रमाण) दर्शवणारे शब्द आहेत. ๑๑๔๒. ११४२. ยถา ตถา ยเถเว’วํ, ยถานาม ยถาหิ จ; เสยฺยถาปฺเย’วเมวํ, วา, ตเถว จ ยถาปิ จ. 'यथा' (yathā), 'तथा' (tathā), 'यथेव' (yatheva), 'एवं' (evaṃ), 'यथानाम' (yathānāma), 'यथाहि' (yathāhi), 'सेय्यथापि' (seyyathāpi), 'एवमेवं' (evamevaṃ), 'वा' (vā), 'तथेव' (tatheva) आणि 'यथापि' (yathāpi) हे शब्द सादृश्यार्थक आहेत. ๑๑๔๓. ११४३. เอวมฺปิ จ เสยฺยถาปิ, นาม ยถริวา’ปิ จ; ปฏิภาคตฺเถ ยถาจ, วิย ตถริวา’ปิ จ. 'एवम्पि' (evampi), 'सेय्यथापि' (seyyathāpi), 'नाम' (nāma), 'यथरिव' (yathariva), 'यथा' (yathā), 'विय' (viya) आणि 'तथरिव' (tathariva) हे शब्द सादृश्य किंवा उपमेच्या (प्रतिभागाच्या) अर्थी वापरले जातात. ๑๑๔๔. ११४४. สํ สามญฺจ สยํ จาถ, อาม สาหุ ลหู’ปิ จ; โอปายิกํ ปติรูปํ, สาธฺเว’วํ สมฺปฏิจฺฉเน. 'सं' (saṃ), 'सामं' (sāmaṃ) आणि 'सयं' (sayaṃ) हे स्वतःच्या अर्थी; तर 'आम' (āma), 'साहु' (sāhu), 'लहु' (lahu), 'ओपायिकं' (opāyikaṃ), 'पतिरूपं' (patirūpaṃ), 'साधु' (sādhu) आणि 'एवं' (evaṃ) हे संमती किंवा स्वीकार (सम्पटिच्छन) दर्शवण्यासाठी वापरले जातात. ๑๑๔๕. ११४५. ยํ ตํ ยโต ตโต เยน,เตเน’ติ การเณ สิยุํ; อสากลฺเย ตุ จน จิ, นิปฺผเล ตุ มุธา ภเว. 'यं' (yaṃ), 'तं' (taṃ), 'यतो' (yato), 'ततो' (tato), 'येन' (yena) आणि 'तेन' (tena) हे कारणाच्या अर्थी वापरले जातात; 'चन' (cana) आणि 'चि' (ci) हे असकलतेच्या (अपूर्णतेच्या) अर्थी; आणि 'मुधा' (mudhā) हे निष्फळतेच्या अर्थी वापरले जाते. ๑๑๔๖. ११४६. กทาจิ ชาตุ ตุลฺยา’ถ, สพฺพโต จ สมนฺตโต; ปริโต จ สมนฺตาปิ, อถ มิจฺฉา มุสา ภเว. 'कदाचि' (kadāci) आणि 'जातु' (jātu) हे समान अर्थी आहेत; 'सब्बतो' (sabbato), 'समन्ततो' (samantato), 'परितो' (parito) आणि 'समन्ता' (samantā) हे सभोवताली या अर्थी आहेत; आणि 'मिच्छा' (micchā) व 'मुसा' (musā) हे असत्य किंवा खोट्या अर्थी आहेत. ๑๑๔๗. ११४७. นิเสเธ น อโนมา’ลํ, นหิ เจตุ สเจ ยทิ; อนุกุลฺเย ตุ สทฺธญฺจ,นตฺตํ โทโส ทิวา ตฺว’เห. निषेधाच्या अर्थी 'न' (na), 'अनो' (ano), 'अलं' (alaṃ) आणि 'नहि' (nahi) हे शब्द वापरले जातात; 'चे' (ce), 'तु' (tu), 'सचे' (sace) आणि 'यदि' (yadi) हे अटीच्या (संकेताच्या) अर्थी; 'सद्धं' (saddhaṃ) हे अनुकूलतेच्या अर्थी; 'नत्तं' (nattaṃ) आणि 'दोसो' (doso) हे रात्रीच्या अर्थी; आणि 'दिवा' (divā) व 'अह' (aha) हे दिवसाच्या अर्थी वापरले जातात. ๑๑๔๘. ११४८. อีสํ กิญฺจิ มนํ อปฺเป, สหสา ตุ อตกฺกิเต; ปุเร คฺคโต ตุ ปุรโต, เปจฺจา’มุตฺรภวนฺตเร. ‘ईसं’, ‘किञ्चि’, ‘मना’ आणि ‘अप्पे’ हे शब्द ‘थोडं’ (अल्प) या अर्थात; ‘सहसा’ हा शब्द ‘अतर्कित’ (अचानक) या अर्थात; ‘पुरे’ आणि ‘पुरतो’ हे शब्द ‘पुढे’ किंवा ‘पूर्वी’ या अर्थात; आणि ‘पेच्चा’, ‘अमुत्र’ व ‘भवान्तरे’ हे शब्द ‘परलोकात’ किंवा ‘दुसऱ्या जन्मात’ या अर्थात वापरले जातात. ๑๑๔๙. ११४९. อโห [Pg.94] หี วิมฺหเย ตุณฺหี,ตุ โมเน ถา’วิ ปาตุ จ; ตงฺขเณ สชฺชุ สปทิ, พลกฺกาเร ปสยฺห จ. ‘अहो’ आणि ‘ही’ हे शब्द ‘विस्मय’ (आश्चर्य) या अर्थात; ‘तुण्ही’ आणि ‘मोने’ हे शब्द ‘मौन’ (शांत राहणे) या अर्थात; ‘आवि’ आणि ‘पातु’ हे शब्द ‘प्रकट’ (दिसणे) या अर्थात; ‘तङ्खणे’, ‘सज्जु’ आणि ‘सपदि’ हे शब्द ‘तत्काळ’ (त्याच क्षणी) या अर्थात; आणि ‘पसह्य’ हा शब्द ‘बळजबरीने’ (ताकदीने) या अर्थात वापरला जातो. ๑๑๕๐. ११५०. สุทํ โข อสฺสุ ยคฺเฆ เว,หา’ทโย ปทปูรเณ; อนฺตเรน’นฺตรา อนฺโต, วสฺสํ นูน จ นิจฺฉเย. ‘सुदं’, ‘खो’, ‘अस्सु’, ‘यग्घे’, ‘वे’ आणि ‘हा’ इत्यादी शब्द ‘पादपूरण’ (वाक्य पूर्ण करण्यासाठी) या अर्थात; ‘अन्तरेंण’, ‘अन्तरा’ आणि ‘अन्तो’ हे शब्द ‘मध्ये’ (आत) या अर्थात; आणि ‘वस्सं’ व ‘नून’ हे शब्द ‘निश्चय’ या अर्थात वापरले जातात. ๑๑๕๑. ११५१. อานนฺเท สญฺจ ทิฏฺฐา ถ, วิโรธกถเน นนุ; กามปฺปเวทเน กจฺจิ, อุสูโยปคเม’ตฺถุ จ. ‘आनंद’ व्यक्त करण्यासाठी ‘दिट्ठा’ आणि ‘थ’ हे शब्द; ‘विरोध दर्शवण्यासाठी’ ‘ननु’ हा शब्द; ‘इच्छा व्यक्त करण्यासाठी’ (चौकशी करण्यासाठी) ‘कच्चि’ हा शब्द; आणि ‘असूया’ (मत्सर) दर्शवण्यासाठी ‘अत्थु’ हा शब्द वापरला जातो. ๑๑๕๒. ११५२. เอวา’วธารเณ เญยฺยํ, ยถาตฺตํ ตุ ยถาตถํ; นีจํ อปฺเป, มหตฺยุ’จฺจํ, อถ ปาโต ปเค สมา. ‘एव’ हा शब्द ‘अवधारण’ (निश्चय/केवळ) या अर्थात जाणावा; ‘यथात्तं’ आणि ‘यथातथं’ हे शब्द ‘यथार्थ’ (जसे आहे तसे) या अर्थात; ‘नीचं’ हा शब्द ‘अल्प’ (कमी/खाली) या अर्थात; ‘उच्चं’ हा शब्द ‘महान’ (मोठे/वर) या अर्थात; आणि ‘पातो’ व ‘पगे’ हे शब्द ‘सकाळ’ (प्रातःकाळ) या समान अर्थात वापरले जातात. ๑๑๕๓. ११५३. นิจฺเจ สทา สนํ ปาโย,พาหุลฺเย พาหิรํ พหิ; พหิทฺธา พาหิรา พาหฺเย, สีเฆตุ สณิกํ ภเว. ‘सदा’ आणि ‘सनं’ हे शब्द ‘नित्य’ (नेहमी) या अर्थात; ‘पायो’ हा शब्द ‘बाहुल्य’ (बहुतेक करून) या अर्थात; ‘बाहिरं’, ‘बहि’, ‘बहिद्धा’, ‘बाहिरा’ आणि ‘बाह्ये’ हे शब्द ‘बाहेर’ या अर्थात; आणि ‘सीघं’ हा शब्द ‘शीघ्र’ (लवकर) व ‘सणिकं’ हा शब्द ‘हळूहळू’ (मंद) या अर्थात वापरला जातो. ๑๑๕๔. ११५४. อตฺถํ อทสฺสเน ทุฏฺฐุ, นินฺทายํ, วนฺทเน นโม; สมฺมา สุฏฺฐุ ปสํสายํ, อโถ สตฺตาย มตฺถิ จ. ‘अत्थं’ हा शब्द ‘अदर्शन’ (अदृश्य होणे/मावळणे) या अर्थात; ‘दुट्ठु’ हा शब्द ‘निंदा’ या अर्थात; ‘नमो’ हा शब्द ‘वंदन’ (नमस्कार) या अर्थात; ‘सम्मा’ आणि ‘सुट्ठु’ हे शब्द ‘प्रशंसा’ (योग्य प्रकारे) या अर्थात; आणि ‘अतो’ व ‘अत्थि’ हे शब्द ‘सत्ता’ (अस्तित्व/असणे) या अर्थात वापरले जातात. ๑๑๕๕. ११५५. สายํ สาเย’ชฺช อตฺรา’เห,สุเว ตุ สฺเว อนาคเต; ตโต ปเร ปรสุเว, หิยฺโยตุ ทิวเส คเต. ‘सायं’ आणि ‘साये’ हे शब्द ‘संध्याकाळ’ या अर्थात; ‘अज्ज’ आणि ‘अहे’ हे शब्द ‘आज’ या अर्थात; ‘सुवे’ आणि ‘स्वे’ हे शब्द ‘उद्या’ (येणारा काळ) या अर्थात; ‘परसुवे’ हा शब्द ‘परवा’ (उद्याच्या नंतरचा दिवस) या अर्थात; आणि ‘हियो’ हा शब्द ‘काल’ (गेलेला दिवस) या अर्थात वापरला जातो. ๑๑๕๖. ११५६. ยตฺถ ยตฺร ยหึจาถ, ตตฺถ ตตฺร ตหึตหํ; อโถ อุทฺธญฺจ อุปริ, เหฏฺฐา ตุ จ อโธ สมา. ‘यत्थ’, ‘यत्र’ आणि ‘यहिं’ हे शब्द ‘जिथे’ या अर्थात; ‘तत्थ’, ‘तत्र’, ‘तहिं’ आणि ‘तहं’ हे शब्द ‘तिथे’ या अर्थात; ‘उद्धं’ आणि ‘उपरि’ हे शब्द ‘वर’ या अर्थात; आणि ‘हेट्ठा’ व ‘अधो’ हे शब्द ‘खाली’ या समान अर्थात वापरले जातात. ๑๑๕๗. ११५७. โจทเน อิงฺฆ หนฺทา’ถ, อาราทูรา จ อารกา; ปรมฺมุขา ตุ จ รโห, สมฺมุขา ตฺวา’วิ ปาตุ จ. ‘इङ्घ’ आणि ‘हन्द’ हे शब्द ‘चोदन’ (प्रेरणा देणे/चला तर) या अर्थात; ‘आरा’, ‘दूरा’ आणि ‘आरका’ हे शब्द ‘दूर’ या अर्थात; ‘परम्मुखा’ आणि ‘रहो’ हे शब्द ‘परोक्ष’ (पाठीमागे/गुप्तपणे) या अर्थात; आणि ‘सम्मुखा’, ‘आवि’ व ‘पातु’ हे शब्द ‘प्रत्यक्ष’ (समोर/प्रकट) या अर्थात वापरले जातात. ๑๑๕๘. ११५८. สํสยตฺถมฺหิ อปฺเปว, อปฺเปวนาม นู’ติ จ; นิทสฺสเน อิติ’ตฺถญฺจ, เอวํ, กิจฺเฉ กถญฺจิ จ. ‘अप्पेव’, ‘अप्पेवनाम’ आणि ‘नु’ हे शब्द ‘संशय’ (शंका/कदाचित) या अर्थात; ‘इति’, ‘इत्थं’ आणि ‘एवं’ हे शब्द ‘निदर्शन’ (अशा प्रकारे/उदाहरणार्थ) या अर्थात; आणि ‘कथञ्चि’ हा शब्द ‘कृच्छ्र’ (कष्टाने/कसाबसा) या अर्थात वापरला जातो. ๑๑๕๙. ११५९. หา เขเท สจฺฉิ ปจฺจกฺเข,ธุวํ ถิเร’วธารเณ; ติโร ตุ ติริยํ จาถ, กุจฺฉายํ ทุฏฺฐุ กุ’จฺจเต. ‘हा’ हा शब्द ‘खेद’ (दुःख) या अर्थात; ‘सच्छि’ हा शब्द ‘प्रत्यक्ष’ (डोळ्यांसमोर) या अर्थात; ‘धुवं’ हा शब्द ‘स्थिर’ (निश्चित/अवधारण) या अर्थात; ‘तिरो’ आणि ‘तिरियं’ हे शब्द ‘तिरपे’ (आडवे/गुप्त) या अर्थात; आणि ‘दुट्ठु’ व ‘कु’ हे शब्द ‘कुत्सा’ (निंदा/वाईट) या अर्थात वापरले जातात. ๑๑๖๐. ११६०. สุวตฺถิ อาสิฏฺฐตฺถมฺหิ, นินฺทายํ ตุ ธี กถฺยเต; กุหิญฺจนํ กุหึ กุตฺร, กุตฺถ กตฺถ กหํ กฺว ถ. ‘सुवत्थि’ हा शब्द ‘आशीर्वाद’ (कल्याण असो) या अर्थात; ‘धी’ हा शब्द ‘निंदा’ (धिक्कार) या अर्थात; आणि ‘कुहिञ्चनं’, ‘कुहिं’, ‘कुत्र’, ‘कुत्थ’, ‘कत्थ’, ‘कहं’ व ‘क्व’ हे शब्द ‘कुठे’ या अर्थात वापरले जातात. ๑๑๖๑. ११६१. อิเห’ธา’ตฺร [Pg.95] ตุ เอตฺถา’ตฺถ,อถ สพฺพตฺร สพฺพธิ; กทา กุทาจนํ จาถ, ตทานิ จ ตทา สมา. ‘इह’, ‘इध’, ‘अत्र’ आणि ‘एत्थ’ हे शब्द ‘येथे’ (या ठिकाणी) या अर्थात; ‘सब्बत्र’ आणि ‘सब्बधि’ हे शब्द ‘सर्वत्र’ या अर्थात; ‘कदा’ आणि ‘कुदाचनं’ हे शब्द ‘केव्हा’ या अर्थात; आणि ‘तदानि’ व ‘तदा’ हे शब्द ‘तेव्हा’ या समान अर्थात वापरले जातात. ๑๑๖๒. ११६२. อาทิกมฺเม ภุสตฺเถ จ, สมฺภโว’ติณฺณ ติตฺติสุ; นิโยคิ’สฺสริย’ปฺปีติ, ทาน ปูชา’คฺค, สนฺติสุ. ‘प’ (प्र) हा उपसर्ग ‘आदिकर्म’ (आरंभ), ‘भूसत्थ’ (अतिशय), ‘संभव’ (उत्पत्ती), ‘ओतिण्ण’ (अवतरण), ‘तित्ति’ (तृप्ती), ‘नियोग’ (नियोजन/आज्ञा), ‘इस्सरिय’ (ऐश्वर्य), ‘अप्पीति’ (अल्प प्रीती), ‘दान’, ‘पूजा’, ‘अग्ग’ (श्रेष्ठ) आणि ‘सन्ति’ (शांती) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๖๓. ११६३. ทสฺสเน ตปฺปเร สงฺเค, ปสํสา, คติ, สุทฺธิสุ; หึสา, ปการนฺโต’ภาว, วิโยคา’วยเวสุ จ; โป’ปสคฺโค ทิสาโยเค, ปตฺถนา, ธิติอาทิสุ. तसेच ‘दस्सन’ (दर्शन), ‘तत्पर’, ‘सङ्ग’ (आसक्ती), ‘पसंसा’ (प्रशंसा), ‘गति’, ‘सुद्धि’ (शुद्धी), ‘हिंसा’, ‘पकार’ (प्रकार), ‘अन्तोभाव’ (अंतर्भाव), ‘वियोग’, ‘अवयव’, ‘दिसायोग’ (दिशा-योग), ‘पत्थना’ (प्रार्थना) आणि ‘धिति’ (धैर्य) इत्यादी अर्थांमध्ये ‘प’ हा उपसर्ग वापरला जातो. ๑๑๖๔. ११६४. ปราสทฺโท ปริหานิ, ปราชย คตีสุ จ; ภุสตฺเถ ปฏิโลมตฺเถ, วิกฺกมา’มสนาทิสุ. ‘परा’ हा शब्द/उपसर्ग ‘परिहानि’ (हानी), ‘पराजय’, ‘गति’, ‘भूसत्थ’ (अतिशय), ‘पटिलोमत्थ’ (प्रतिकूल/उलट), ‘विक्कम’ (पराक्रम) आणि ‘आभसन’ (स्पर्श) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๖๕. ११६५. นิสฺเสสา’ภาว สนฺยาส, ภุสตฺถ โมกฺข ราสิสุ; เคหา’เทโส’ปมาหีน, ปสาทนิคฺคตา’จฺจเย. ‘अप’ हा उपसर्ग ‘निस्सेस’ (पूर्णपणे), ‘अभाव’, ‘संन्यास’, ‘भूसत्थ’ (अतिशय), ‘मोक्ख’ (मोक्ष), ‘रासि’ (समूह), ‘गेह’ (घर), ‘आदेस’ (आदेश), ‘उपमा’, ‘हीन’, ‘पसाद’ (प्रसाद), ‘निग्गत’ (निघून गेलेला) आणि ‘अच्चय’ (अतिक्रमण/नाश) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๖๖. ११६६. ทสฺสโน’สานนิกฺขนฺตา, โธภาเคสฺว’วธารเณ; สามีปฺเย พนฺธเน เฉก, นฺโตภาโค’ปรตีสุ จ. तसेच ‘दस्सन’ (दर्शन), ‘ओसान’ (अवसान/अंत), ‘निक्खन्त’ (निघून गेलेला), ‘अधोभाग’ (खालील भाग), ‘अवधारण’ (निश्चय), ‘सामीप्य’ (जवळ असणे), ‘बन्धन’, ‘छेक’ (चतुर/कुशल), ‘अन्तोभाग’ (अंतर्भाग) आणि ‘उपरति’ (विरक्ती) या अर्थांमध्येही तो वापरला जातो. ๑๑๖๗. ११६७. ปาตุภาเว วิโยเค จ, นิเสธาโท นิ ทิสฺสติ; อโถ นีหรเณ เจวา, วรณาโท จ นี สิยา. ‘नि’ हा उपसर्ग ‘पातुभाव’ (प्रकट होणे), ‘वियोग’ आणि ‘निसेध’ (निषेध) इत्यादी अर्थांमध्ये दिसतो; तसेच ‘नी’ हा उपसर्ग ‘नीहरण’ (बाहेर काढणे) आणि ‘आवरण’ (झाकणे) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๖๘. ११६८. อุทฺธกมฺม วิโยค ตฺต, ลาภ ติตฺติ สมิทฺธิสุ; ปาตุภาว’จฺจยาภาว, ปพลตฺเต ปกาสเน; ทกฺข’คฺคตาสุ กถเน, สตฺติโมกฺขาทิเก อุ จ. ‘उ’ (उद्) हा उपसर्ग ‘उद्धकम्म’ (वरची क्रिया), ‘वियोग’, ‘लाभ’, ‘तित्ति’ (तृप्ती), ‘समिद्धि’ (समृद्धी), ‘पातुभाव’ (प्रकट होणे), ‘अच्चयाभाव’ (अतिक्रमण/अभाव), ‘पबलत्त’ (प्रबळता), ‘पकासन’ (प्रकाशन), ‘दक्ख’ (दक्षता), ‘अग्गता’ (श्रेष्ठता), ‘कथन’, ‘सत्ति’ (शक्ती) आणि ‘मोक्ख’ (मोक्ष) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๖๙. ११६९. ทุ กุจฺฉิเต’สทตฺเถสุ, วิรูปตฺเต ปฺย’โสภเน; สิยา’ภาวา’สมิทฺธีสุ, กิจฺเฉ จา’นนฺทนาทิเก. ‘दु’ (दुर्) हा उपसर्ग ‘कुच्छित’ (निंदनीय), ‘असदत्थ’ (वाईट अर्थ), ‘विरूपत्त’ (कुरूपता), ‘असोभन’ (अशोभनीय), ‘अभाव’, ‘असमिद्धि’ (असमृद्धी), ‘किच्छ’ (कष्ट/कठीण) आणि ‘आनन्दन’ (आनंद नसणे) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๐. ११७०. สํ สโมธาน สงฺเขป, สมนฺตตฺต สมิทฺธิสุ; สมฺมา ภุส สห ปฺปตฺถา, ภิมุขตฺเถสุ สงฺคเต; วิธาเน ปภเว ปูชา, ปุนปฺปุนกฺริยาทิสุ. ‘सं’ हा उपसर्ग ‘समोधान’ (एकत्र आणणे), ‘सङ्खेप’ (संक्षेप), ‘समन्तत्त’ (पूर्णता), ‘समिद्धि’ (समृद्धी), ‘सम्मा’ (योग्य प्रकारे), ‘भूस’ (अतिशय), ‘सह’ (सोबत), ‘पत्था’ (प्रार्थना/इच्छा), ‘अभिमुखत्थ’ (अभिमुखता), ‘सङ्गत’ (सुसंगत), ‘विधान’, ‘पभव’ (उत्पत्ती), ‘पूजा’ आणि ‘पुनप्पुनक्रिया’ (पुन्हा पुन्हा क्रिया करणे) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๑. ११७१. วิวิธา’ติสยา’ภาว, ภุสตฺติ’สฺสริยา’จฺจเย; วิโยเค กลเห ปาตุ, ภาเว ภาเส จ กุจฺฉเน. ‘वि’ हा उपसर्ग ‘विविध’, ‘अतिसय’ (अतिशय), ‘अभाव’, ‘भूसत्ति’ (अतिशयता), ‘इस्सरिय’ (ऐश्वर्य), ‘अच्चय’ (अतिक्रमण), ‘वियोग’, ‘कलह’, ‘पातुभाव’ (प्रकट होणे), ‘भास’ (प्रकाश/भास) आणि ‘कुच्छन’ (निंदा) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๒. ११७२. ทูรา’นภิมุขตฺเตสุ, โมหา’นวฏฺฐิตีสุ จ; ปธาน ทกฺขตา เขท, สหตฺถาโท วิ ทิสฺสติ. तसेच ‘दूर’, ‘अनभिमुखत्त’ (विन्मुखता), ‘मोह’, ‘अनवट्ठिति’ (अस्थिरता), ‘पधान’ (प्रधानता), ‘दक्खता’ (दक्षता), ‘खेद’ आणि ‘सहत्थ’ (सोबत असणे) इत्यादी अर्थांमध्येही ‘वि’ हा उपसर्ग दिसतो. ๑๑๗๓. ११७३. วิโยเค [Pg.96] ชานเน จา’โธ,ภาค นิจฺฉย สุทฺธิสุ; อีสทตฺเถ ปริภเว, เทส พฺยาปน หานิสุ; วโจกฺริยาย เถยฺเย จ, ญาณปฺปตฺตาทิเก อว. ‘अव’ हा उपसर्ग ‘वियोग’, ‘जानन’ (जाणणे), ‘अधोभाग’ (खालील भाग), ‘निच्छय’ (निश्चय), ‘सुद्धि’ (शुद्धी), ‘ईसदत्थ’ (थोडा अर्थ), ‘परिभव’ (पराभव/अपमान), ‘देस’ (देश), ‘ब्यापन’ (व्यापणे), ‘हानि’ (हानी), ‘वचोक्रिया’ (वचनक्रिया), ‘थेय्य’ (चोरी) आणि ‘ञाणप्पत्त’ (ज्ञानप्राप्ती) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๔. ११७४. ปจฺฉา ภุสตฺต สาทิสฺยา, นุปจฺฉินฺนา’นุวตฺติสุ; หีเน จ ตติยตฺถา’โธ, ภาเคสฺว’นุคเต หิเต; เทเส ลกฺขณ วิจฺเฉ’ตฺถ, มฺภูต ภาคาทิเก อนุ. ‘अनु’ हा उपसर्ग ‘पच्छा’ (नंतर), ‘भूसत्त’ (अतिशय), ‘सादिस्य’ (सादृश्य), ‘अनुपच्छिन्न’ (निरंतर), ‘अनुवत्ति’ (अनुवर्तन), ‘हीन’, ‘ततियत्थ’ (तृतीय अर्थ), ‘अधोभाग’ (खालील भाग), ‘अनुगत’ (अनुगत), ‘हित’, ‘देस’ (देश), ‘लक्खण’ (लक्षण), ‘विच्छ’ (वीप्सा/पुनरावृत्ती), ‘इत्थम्भूत’ आणि ‘भाग’ इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๕. ११७५. สมนฺตตฺเถ ปริจฺเฉเท, ปูชา’ลิงฺคน วชฺชเน; โทสกฺขาเน นิวาสนา, วญฺญา’ธาเรสุ โภชเน; โสก พฺยาปน ตตฺเวสุ, ลกฺขณาโท สิยา ปริ. ‘परि’ हा उपसर्ग ‘समन्तत्थ’ (सर्व बाजूंनी), ‘परिच्छेद’ (मर्यादा/विभाग), ‘पूजा’, ‘आलिङ्गन’ (आलिंगन), ‘वज्जन’ (वर्जन/त्याग), ‘दोसक्खान’ (दोष दाखवणे), ‘निवासन’ (निवास), ‘अवञ्ञा’ (अवज्ञा), ‘आधार’, ‘भोजन’, ‘सोक’ (शोक), ‘ब्यापन’ (व्यापणे), ‘तत्व’ आणि ‘लक्खण’ (लक्षण) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๖. ११७६. อาภิมุขฺย วิสิฏฺฐุ’ทฺธ, กมฺมสารุปฺปวุทฺธิสุ; ปูชา’ธิก กุลา’สจฺจ, ลกฺขณาทิมฺหิ จาปฺย’ภิ. ‘अभि’ हा उपसर्ग ‘आभिमुख्य’ (अभिमुखता), ‘विसेट्ठ’ (विशिष्ट), ‘उद्धकम्म’ (वरची क्रिया), ‘सारुप्प’ (सारूप्य/योग्य), ‘वुद्धि’ (वृद्धी), ‘पूजा’, ‘अधिक’, ‘कुल’, ‘असच्च’ (असत्य) आणि ‘लक्खण’ (लक्षण) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๗. ११७७. อธิกิ’สฺสร, ปาฐา’ธิ, ฏฺฐาน, ปาปุณเนสฺว’ธิ; นิจฺฉเย โจปริตฺตา’ธิ, ภวเน จ วิเสสเน. ‘अधि’ हा उपसर्ग ‘अधिक’, ‘इस्सर’ (स्वामी), ‘पाठ’, ‘अधिट्ठान’ (अधिष्ठान), ‘पापुणन’ (प्राप्ती), ‘निच्छय’ (निश्चय), ‘उपरित्त’ (वरचा भाग), ‘अधिभवन’ (अभिभव/पराभूत करणे) आणि ‘विसेसण’ (विशेषण) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๘. ११७८. ปฏิทานนิเสเธสุ, วามา’ทานนิวตฺติสุ; สาทิเส ปฏินิธิมฺหิ, อาภิมุขฺยคตีสุ จ. ‘पटि’ (प्रति) हा उपसर्ग ‘पटिदान’ (परत देणे), ‘निसेध’ (निषेध), ‘वाम’ (विरुद्ध), ‘आदान’ (स्वीकार), ‘निवत्ति’ (निवृत्ती), ‘सादिस’ (सारखेपणा), ‘पटिनिधि’ (प्रतिनिधी) आणि ‘आभिमुख्यगति’ (अभिमुखता/गती) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๗๙. ११७९. ปติโพเธ ปติคเต, ตถา ปุนกฺริยาย จ; สมฺภาวเน ปฏิจฺจตฺเถ, ปตีติ ลกฺขณาทิเก; สุ โสภเน สุเข สมฺมา, ภุส สุฏฺฐุ สมิทฺธิสุ. तसेच ‘पटिबोध’ (जागृती), ‘पटिगत’ (परत जाणे), ‘पुनक्रिया’ (पुन्हा करणे), ‘संभावन’, ‘पटिच्चत्थ’ (प्रतीत्य/अवलंबून असणे), ‘पतीत’ (प्रतीती) आणि ‘लक्खण’ (लक्षण) इत्यादी अर्थांमध्ये; आणि ‘सु’ हा उपसर्ग ‘सोभन’ (सुंदर), ‘सुख’, ‘सम्मा’ (योग्य प्रकारे), ‘भूस’ (अतिशय), ‘सुट्ठु’ (उत्कृष्ट) आणि ‘समिद्धि’ (समृद्धी) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๐. ११८०. อาภิมุขฺย, สมีปา’ทิ, กมฺมา’ลิงฺคน ปตฺติสุ; มริยาทุ’ทฺธกมฺมิ’จฺฉา, พนฺธนา’ภิวิธีสุ อา. ‘आ’ हा उपसर्ग ‘आभिमुख्य’ (अभिमुखता), ‘समीप’ (जवळ), ‘कम्म’ (कर्म), ‘आलिङ्गन’ (आलिंगन), ‘पत्ति’ (प्राप्ती), ‘मरियाद’ (मर्यादा), ‘उद्धकम्म’ (वरची क्रिया), ‘इच्छा’, ‘बन्धन’ आणि ‘अभिविधि’ (अभिव्याप्ती) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๑. ११८१. นิวาสา’วฺหาน คหณ, กิจฺเฉ’สตฺถ นิวตฺติสุ; อปฺปสาทา’สิ สรณ, ปติฏฺฐา’วิมฺหยาทิสุ. तसेच ‘निवास’, ‘आव्हान’ (आवाहन), ‘गहण’ (ग्रहण करणे), ‘किच्छ’ (कष्ट), ‘ईसदत्थ’ (थोडा अर्थ), ‘निवत्ति’ (निवृत्ती), ‘अप्पसाद’ (नाराजी), ‘आसीसरण’ (आशीर्वाद/शरण), ‘पतिट्ठा’ (प्रतिष्ठा/आधार) आणि ‘विम्हय’ (विस्मय) इत्यादी अर्थांमध्येही ‘आ’ हा उपसर्ग वापरला जातो. ๑๑๘๒. ११८२. อนฺโตภาว ภุสตฺตา’ติ, สย ปูชาสฺว’ติกฺกเม; ภูตภาเว ปสํสายํ, ทฬฺหตฺถาโท สิยา อติ. ‘अति’ हा उपसर्ग ‘अन्तोभाव’ (अंतर्भाव), ‘भूसत्त’ (अतिशयता), ‘अतिसय’ (अतिशय), ‘पूजा’, ‘अतिक्कम’ (अतिक्रमण), ‘भूतभाव’ (सत्यता), ‘पसंसा’ (प्रशंसा) आणि ‘दळ्हत्थ’ (दृढता) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๓. ११८३. สมฺภาวเน จ ครหา, เปกฺขาสุ จ สมุจฺจเย; ปญฺเห สํวรเณ เจว, อาสีสตฺเถ อปี’ริตํ. ‘अपि’ हा उपसर्ग/निपात ‘संभावन’, ‘गरहा’ (निंदा), ‘अपेक्खा’ (अपेक्षा), ‘समुच्चय’ (एकत्र करणे), ‘पञ्ह’ (प्रश्न), ‘संवरण’ (झाकणे) आणि ‘आसीसत्थ’ (आशीर्वाद) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๔. ११८४. นิทฺเทเส วชฺชเน ปูชา, ปคเต วารเณปิ จ; ปทุสฺสเน จ ครหา, โจริกา’โท สิยา อป. ‘अप’ हा उपसर्ग ‘निद्देस’ (निर्देश), ‘वज्जन’ (वर्जन/त्याग), ‘पूजा’, ‘पगत’ (गेलेला), ‘वारण’ (रोखणे), ‘पदुस्सन’ (दोष), ‘गरहा’ (निंदा) आणि ‘चोरिका’ (चोरी) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๕. ११८५. สมีปปูชา [Pg.97] สาทิสฺส, โทสกฺขาโน’ปปตฺติสุ; ภุสตฺโต’ปคมา’ธิกฺย, ปุพฺพกมฺมนิวตฺติสุ; คยฺหากาโร’ปริตฺเตสุ, อุเป’ตฺย ’นสนา’ทิเก. ‘उप’ हा उपसर्ग ‘समीप’, ‘पूजा’, ‘सादिस’ (सादृश्य), ‘दोसक्खान’ (दोष दाखवणे), ‘उपपत्ति’ (उत्पत्ती), ‘भूसत्त’ (अतिशयता), ‘उपगम’ (जवळ जाणे), ‘आधिक्य’ (अधिकता), ‘पुब्बकम्म’ (पूर्वकृत्य), ‘निवत्ति’ (निवृत्ती), ‘गय्हाकार’ (स्वीकारणे), ‘उपरित्त’ (वरचा भाग) आणि ‘अनसन’ (उपवास) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๖. ११८६. เอวํ นิทสฺสนา’กาโร, ปมาสุ สมฺปหํสเน; อุปเทเส จ วจน, ปฏิคฺคาเห’วธารเณ; ครหาเย’ทมตฺเถ จ, ปริมาเน จ ปุจฺฉเน. ‘एवं’ हा निपात ‘निदस्सन’ (उदाहरण), ‘आकार’ (प्रकार), ‘उपमा’, ‘सम्पहंसन’ (हर्ष/प्रशंसा), ‘उपदेस’ (उपदेश), ‘वचनपटिग्गाह’ (वचन स्वीकारणे), ‘अवधारण’ (निश्चय), ‘गरहा’ (निंदा), ‘इदमत्थ’ (हा अर्थ), ‘परिमाण’ (प्रमाण) आणि ‘पुच्छन’ (प्रश्न विचारणे) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๗. ११८७. สมุจฺจเย สมาหาเร, นฺวาจเย เจ’ตรีตเร; ปทปูรณมตฺเต จ, จสทฺโท อวธารเณ. ‘च’ हा निपात ‘समुच्चय’, ‘समाहार’, ‘अन्वाचय’, ‘इतरेतर’, ‘पादपूरणमत्त’ (केवळ पादपूरण) आणि ‘अवधारण’ (निश्चय) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๘. ११८८. อิติ เหตุปกาเรสุ, อาทิมฺหิ จา’วธารเณ; นิทสฺสเน ปทตฺถสฺส, วิปลฺลาเส สมาปเน. 'इति' हा शब्द हेतू (कारण), प्रकार, आरंभ, अवधारण (निश्चय), निदर्शन (उदाहरण), पदार्थाचा अर्थ, विपर्यास (उलट पालट) आणि समापन (शेवट) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๘๙. ११८९. สมุจฺจเย โจ’ปมายํ, สํสเย ปทปูรเณ; ววตฺถิตวิภาสายํ, วา’วสฺสคฺเค วิกปฺปเน. 'वा' हा शब्द समुच्चय (एकत्र करणे), उपमा (तुलना), संशय, पदपूरण (वाक्य पूर्ण करणे), व्यवस्थितविभाषा (नियमबद्ध पर्याय), अवसर्ग (त्याग) आणि विकल्पन (पर्याय) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๙๐. ११९०. ภูสเน วารเณ จา’ลํ, วุจฺจเต ปริยตฺติยํ; อโถ’ถา’นนฺตรา’รมฺภ, ปญฺเหสุ ปทปูรเณ. 'अलं' हा शब्द भूषण (अलंकार), वारण (मज्जाव करणे) आणि पर्याप्तता (क्षमता) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. तसेच 'अथो' आणि 'अथ' हे शब्द आनंतर्य (त्यानंतर लगेच), आरंभ, प्रश्न आणि पदपूरण या अर्थांमध्ये वापरले जातात. ๑๑๙๑. ११९१. ปสํสาครหาสญฺญา, สีการาโท ปิ นาม ถ; นิจฺฉเย จา’นุมานสฺมึ, สิยา นูน วิตกฺกเน. 'नाम' हा शब्द प्रशंसा, निंदा (गर्हा), संज्ञा (नाव), स्वीकार इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. तसेच 'नूनं' हा शब्द निश्चय, अनुमान आणि वितर्क (तर्क करणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๙๒. ११९२. ปุจฺฉา’วธารณา’นุญฺญา, สานฺตฺวนา’ลปเน นนุ; วเต’กํส, ทยา, หาส, เขทา’ลปน, วิมฺหเย. 'ननु' हा शब्द प्रश्न (पृच्छा), अवधारण (निश्चय), अनुज्ञा (परवानगी), सांत्वन आणि आलापन (संबोधन) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'वत' हा शब्द निश्चय (एकांश), दया (करुणा), आनंद (हास), खेद, आलापन आणि विस्मय (आश्चर्य) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๙๓. ११९३. วากฺยารมฺภ, วิสาเทสุ, หนฺท หาเส’นุกมฺปเน; ยาว ตุ ตาว สากลฺย, มานา’วธฺย’วธารเณ. 'हन्द' हा शब्द वाक्यारंभ, विषाद (दुःख), आनंद आणि अनुकंपन (दया) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'याव' आणि 'ताव' हे शब्द साकल्य (संपूर्णता), मान (प्रमाण), अवधी (मर्यादा) आणि अवधारण (निश्चय) या अर्थांमध्ये वापरले जातात. ๑๑๙๔. ११९४. ปาจี, ปุร, งฺคโตตฺเถสุ, ปุรตฺถา ปฐเม ปฺยถ; ปพนฺเธ จ จิราตีเต, นิกฏาคามิเก ปุรา. 'पुरत्था' हा शब्द पूर्व दिशा (प्राची), समोर (पुर) आणि प्रथम या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'पुरा' हा शब्द सातत्य (प्रबंध), प्राचीन काळ (चिरातीत) आणि नजीकचा भविष्यकाळ (निकटागामिक) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๙๕. ११९५. นิเสธวากฺยาลงฺการา, วธารณปสิทฺธิสุ; ขลฺวา’สนฺเน ตุ อภิโต-ภิมุโข’ภยโตทิเก. 'खलु' हा शब्द निषेध (मज्जाव), वाक्यालंकार, अवधारण (निश्चय) आणि प्रसिद्धी या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'अभितो' हा शब्द जवळ (आसन्न), समोर (अभिमुख) आणि दोन्ही बाजूला (उभयतो) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๙๖. ११९६. กามํ ยทฺยปิสทฺทตฺเถ, เอกํสตฺเถ จ ทิสฺสติ; อโถ ปน วิเสสสฺมึ, ตเถว ปทปูรเณ. 'कामं' हा शब्द 'जरी' (यद्यपि) आणि निश्चय (एकांश) या अर्थांमध्ये आढळतो. तसेच 'पन' हा शब्द विशेष (भेद) आणि पदपूरण या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๙๗. ११९७. หิ [Pg.98] การเณ วิเสสา’ว, ธารเณ ปทปูรเณ; ตุ เหตุวชฺเช ตตฺถา’ถ, กุ ปาเป’สตฺถ’กุจฺฉเน. 'हि' हा शब्द कारण, विशेष, अवधारण आणि पदपूरण या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'तु' हा शब्द कारण वगळता इतर त्याच अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'कु' हा शब्द पाप (वाईट), असत् (असत्य/अयोग्य) आणि कुत्सा (निंदा) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๙๘. ११९८. นุ สํสเย จ ปญฺเห ถ, นานา’ เนกตฺถ วชฺชเน; กึ ตุ ปุจฺฉาชิคุจฺฉาสุ, กํ ตุ วาริมฺหิ มุทฺธนิ. 'नु' हा शब्द संशय आणि प्रश्नामध्ये वापरला जातो. 'नाना' हा शब्द अनेक अर्थांमध्ये आणि वर्जन (वगळणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'किं' हा शब्द प्रश्न आणि वीट (जुगुप्सा/घृणा) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'कं' हा शब्द पाणी आणि मस्तक (डोके) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๑๙๙. ११९९. อมา สหสมีเป ถ, เภเท อปฺปฐเม ปุน; กิรา’นุสฺสวา’รุจิสุ, อุทา’ปฺยตฺเถ วิกปฺปเน. 'अमा' हा शब्द सोबत (सह) आणि जवळ (समीप) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'पुन' हा शब्द भेद (फरक) आणि अप्रथम (पुन्हा) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'किर' हा शब्द ऐकीव गोष्ट (अनुश्रुत) आणि अरुची या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'उद' हा शब्द 'अपी' (सुद्धा) आणि विकल्पन (पर्याय) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๒๐๐. १२००. ปตีจี จริเม ปจฺฉา, สามิ ตฺวทฺเธ ชิคุจฺฉเน; ปกาเส สมฺภเว ปาตุ,อญฺโญญฺเญ ตุ รโห มิโถ. 'पच्छा' हा शब्द पश्चिम दिशा (प्रतीची) आणि नंतर/शेवटचा (चरिम) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'सामि' हा शब्द अर्धा आणि जुगुप्सा (घृणा) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'पातु' हा शब्द प्रकट होणे (प्रकाश) आणि संभव या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'मिथो' हा शब्द परस्परांमध्ये (अन्योन्य) आणि गुप्त (रहस्य) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๒๐๑. १२०१. หา เขทโสกทุกฺเขสุ, เขเท ตฺว’หห วิมฺหเย; ภึสาปเน ธี นินฺทายํ, ปิธาเน ติริยํ ติโร. 'हा' हा शब्द खेद, शोक आणि दुःख या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'अहह' हा शब्द खेद आणि विस्मय (आश्चर्य) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'धी' हा शब्द भय दाखवणे आणि निंदा या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'तिरो' हा शब्द झाकणे (पिधान) आणि तिरपे (तिर्यक्) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ๑๒๐๒. १२०२. ตุน ตฺวาน ตเว ตฺวา ตุํ, ธา โส ถา กฺขตฺตุ, เมว จ; โต ถ ตฺร หิญฺจนํ หึหํ, ธิ ห หิ ธ ธุนา รหิ. 'तुन', 'त्वान', 'तवे', 'त्वा', 'तुं', 'धा', 'सो', 'था', 'क्खत्तुं', 'एव', 'तो', 'थ', 'त्र', 'हिंचनं', 'हिं', 'हं', 'धि', 'ह', 'हि', 'ध', 'अधुना' आणि 'तरहि' हे देखील अव्यय आहेत. ๑๒๐๓. १२०३. ทานิ โวทาจนํ ทาชฺช, ถํ ตตฺตํ ชฺฌ ชฺชุ อาทโย; สมาโส จา’พฺยยีภาโว,ยาเทโส จา’พฺยยํ ภเวติ. 'दानि', 'व', 'उदाचनं', 'दाज्ज', 'थं', 'तत्तं', 'ज्झ', 'ज्जु' इत्यादी अव्यय आहेत. तसेच अव्ययीभाव समास आणि अव्यय आदेश हे देखील अव्यय मानले जातात. อิติ อพฺยยวคฺโค. अशा प्रकारे अव्ययवर्ग समाप्त झाला. สามญฺญกณฺโฑ ตติโย. तिसरा सामान्यकाण्ड समाप्त झाला. อภิธานปฺปทีปิกา สมตฺตา. अभिधानप्पदीपिका समाप्त झाली. นิคมน उपसंहार (निगमन) ๑. १. สคฺคกณฺโฑ [Pg.99] จ ภูกณฺโฑ, ตถา สามญฺญกณฺฑิติ; กณฺฑตฺตยานฺวิตา เอสา, อภิธานปฺปทีปิกา. ही 'अभिधानप्पदीपिका' स्वर्गकाण्ड, भूकाण्ड आणि सामान्यकाण्ड अशा three काण्डांनी (विभागांनी) युक्त आहे. ๒. २. ติทิเว มหิยํ ภุชคาวสเถ,สกลตฺถสมวฺหยทีปนิ’ยํ; อิห โย กุสโล มติมา ส นโร,ปฏุ โหติ มหามุนิโน วจเน. स्वर्ग, पृथ्वी आणि पाताळ (नागलोक) यांमधील सर्व वस्तूंच्या नावांना प्रकाशित करणाऱ्या या ग्रंथात जो बुद्धिमान मनुष्य कुशल होतो, तो महामुनींच्या (बुद्धांच्या) वचनांमध्ये (उपदेशांमध्ये) निपुण होतो. ๓. ३. ปรกฺกมภุโช นาม, ภูปาโล คุณภูสโน; ลงฺกาย มาสิ เตชสฺสี, ชยี เกสริวิกฺกโม. श्रीलंकेमध्ये गुणांनी विभूषित, तेजस्वी, विजयी आणि सिंहासारखे पराक्रमी असणारे 'परक्कमबाहु' (पराक्रमबाहु) नावाचे राजे होऊन गेले. ๔. ४. วิภินฺนํ จิรํ ภิกฺขุสงฺฆํ นิกาย-ตฺตยสฺมิญฺจ กาเรสิ สมฺมา สมคฺเค; สเทหํ’ว นิจฺจาทโร ทีฆกาลํ,มหคฺเฆหิ รกฺเขสิ โย ปจฺจเยหิ. ज्यांनी दीर्घकाळापासून विभागलेल्या तीनही निकायांमधील भिक्खू संघाला चांगल्या प्रकारे एकत्र (संघटित) केले आणि स्वतःच्या शरीराप्रमाणेच अत्यंत आदराने मौल्यवान प्रत्ययांद्वारे (भोजन, वस्त्र इत्यादींद्वारे) दीर्घकाळ त्यांचे रक्षण केले. ๕. ५. เยน ลงฺกา วิหาเรหิ, คามา’รามปุรีหิ จ; กิตฺติยา วิย สมฺพาธี, กตา เขตฺเตหิ วาปิหิ. ज्यांनी श्रीलंकेला विहार, गावे, आराम (उद्याने), शहरे, शेते आणि तलाव यांनी अशा प्रकारे समृद्ध केले की जणू काही ती त्यांच्या कीर्तीनेच व्यापून गेली होती. ๖. ६. ยสฺสา’สาธารณํ ปตฺวา, นุคฺคหํ สพฺพกามทํ; อหมฺปิ คนฺถการตฺตํ, ปตฺโต วิพุธโคจรํ. ज्यांच्या सर्व इच्छा पूर्ण करणाऱ्या असाधारण अनुग्रहाला प्राप्त करून, मी देखील विद्वानांमध्ये आदरणीय असा ग्रंथकार बनू शकलो. ๗. ७. การิเต เตน ปาสาท, โคปุราทิวิภูสิเต; สคฺคขณฺเฑ’ว ตตฺโตยา, สยสฺมึ ปติพิมฺพิเต. त्यांनी बांधलेल्या, प्रासाद (महाल) आणि गोपुरांनी सुशोभित असलेल्या, आणि स्वतःच्या जलाशयातील पाण्यात प्रतिबिंबित होणाऱ्या स्वर्गाच्या तुकड्यासारख्या दिसणाऱ्या— ๘. ८. มหาเชตวนา’ขฺยมฺหิ, วิหาเร สาธุสมฺมเต; สโรคามสมูหมฺหิ, วสตา สนฺตวุตฺตินา. —सज्जनांनी संमत केलेल्या 'महाजेतवन' नावाच्या विहारात, जो सरोगाम (तलावाचा गाव) समूहामध्ये स्थित आहे, शांत वृत्तीने निवास करणाऱ्या— ๙. ९. สทฺธมฺมฏฺฐิติกาเมน, โมคฺคลฺลาเนน ธีมตา; เถเรน รจิตา เอสา, อภิธานปฺปทีปิกาติ. —सद्धम्माच्या चिरस्थायी अस्तित्वाची इच्छा बाळगणाऱ्या बुद्धिमान 'मोग्गल्लान' थेरांनी ही 'अभिधानप्पदीपिका' रचली आहे. | |||
| မြန်မာ | |||
| ပါဠိတော် | အဋ္ဌကထာ | ဋီကာ | အခြား |
| 1101 ပါရာဇိက ပါဠိ 1102 ပါစိတ္တိယ ပါဠိ 1103 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဝိနယ) 1104 စူဠဝဂ္ဂ ပါဠိ 1105 ပရိဝါရ ပါဠိ | 1201 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၁ 1202 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၂ 1203 ပါစိတ္တိယ အဋ္ဌကထာ 1204 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဝိနယ) 1205 စူဠဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 1206 ပရိဝါရ အဋ္ဌကထာ | 1301 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၁ 1302 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၂ 1303 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၃ | 1401 ဒွေမာတိကာပါဠိ 1402 ဝိနယသင်္ဂဟ အဋ္ဌကထာ 1403 ဝဇိရဗုဒ္ဓိ ဋီကာ 1404 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၁ 1405 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၂ 1406 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၁ 1407 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၂ 1408 ကင်္ခာဝိတရဏီပုရာဏ ဋီကာ 1409 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ-ဥတ္တရဝိနိစ္ဆယ 1410 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၁ 1411 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၂ 1412 ပါစိတျာဒိယောဇနာပါဠိ 1413 ခုဒ္ဒသိက္ခာ-မူလသိက္ခာ 8401 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၁ 8402 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၂ 8403 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၁ 8404 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၂ 8405 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ နိဒါနကထာ 8406 ဒီဃနိကာယ (ပု-ဝိ) 8407 မဇ္ဈိမနိကာယ (ပု-ဝိ) 8408 သံယုတ္တနိကာယ (ပု-ဝိ) 8409 အင်္ဂုတ္တရနိကာယ (ပု-ဝိ) 8410 ဝိနယပိဋက (ပု-ဝိ) 8411 အဘိဓမ္မပိဋက (ပု-ဝိ) 8412 အဋ္ဌကထာ (ပု-ဝိ) 8413 နိရုတ္တိဒီပနီ 8414 ပရမတ္ထဒီပနီ သင်္ဂဟမဟာဋီကာပါဌ 8415 အနုဒီပနီပါဌ 8416 ပဋ္ဌာနုဒ္ဒေသ ဒီပနီပါဌ 8417 နမက္ကာရဋီကာ 8418 မဟာပဏာမပါဌ 8419 လက္ခဏာတော ဗုဒ္ဓထောမနာဂါထာ 8420 သုတဝန္ဒနာ 8421 ကမလာဉ္ဇလိ 8422 ဇိနာလင်္ကာရ 8423 ပဇ္ဇမဓု 8424 ဗုဒ္ဓဂုဏဂါထာဝလီ 8425 စူဠဂန္ထဝံသ 8427 သာသနဝံသ 8426 မဟာဝံသ 8429 မောဂ္ဂလ္လာနဗျာကရဏံ 8428 ကစ္စာယနဗျာကရဏံ 8430 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) 8431 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ဓါတုမာလာ) 8432 ပဒရူပသိဒ္ဓိ 8433 မောဂလ္လာနပဉ္စိကာ 8434 ပယောဂသိဒ္ဓိပါဌ 8435 ဝုတ္တောဒယပါဌ 8436 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာပါဌ 8437 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာဋီကာ 8438 သုဗောဓါလင်္ကာရပါဌ 8439 သုဗောဓါလင်္ကာရဋီကာ 8440 ဗာလာဝတာရ ဂဏ္ဌိပဒတ္ထဝိနိစ္ဆယသာရ 8446 ကဝိဒပ္ပဏနီတိ 8447 နီတိမဉ္ဇရီ 8445 ဓမ္မနီတိ 8444 မဟာရဟနီတိ 8441 လောကနီတိ 8442 သုတ္တန္တနီတိ 8443 သူရဿတိနီတိ 8450 စာဏကျနီတိ 8448 နရဒက္ခဒီပနီ 8449 စတုရာရက္ခဒီပနီ 8451 ရသဝါဟိနီ 8452 သီမဝိသောဓနီပါဌ 8453 ဝေဿန္တရဂီတိ 8454 မောဂ္ဂလ္လာန ဝုတ္တိဝိဝရဏပဉ္စိကာ 8455 ထူပဝံသ 8456 ဒါဌာဝံသ 8457 ဓါတုပါဌဝိလာသိနိယာ 8458 ဓါတုဝံသ 8459 ဟတ္ထဝနဂလ္လဝိဟာရဝံသ 8460 ဇိနစရိတယ 8461 ဇိနဝံသဒီပံ 8462 တေလကဋာဟဂါထာ 8463 မိလိဒဋီကာ 8464 ပဒမဉ္ဇရီ 8465 ပဒသာဓနံ 8466 သဒ္ဒဗိန္ဒုပကရဏံ 8467 ကစ္စာယနဓါတုမဉ္ဇုသာ 8468 သာမန္တကူဋဝဏ္ဏနာ |
| 2101 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 2102 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဒီဃ) 2103 ပါထိကဝဂ္ဂ ပါဠိ | 2201 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 2202 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဒီဃ) 2203 ပါထိကဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ | 2301 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 2302 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (ဒီဃ) 2303 ပါထိကဝဂ္ဂ ဋီကာ 2304 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၁ 2305 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၂ | |
| 3101 မူလပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3102 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3103 ဥပရိပဏ္ဏာသ ပါဠိ | 3201 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၁ 3202 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၂ 3203 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ 3204 ဥပရိပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ | 3301 မူလပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3302 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3303 ဥပရိပဏ္ဏာသ ဋီကာ | |
| 4101 သဂါထာဝဂ္ဂ ပါဠိ 4102 နိဒါနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4103 ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 4104 သဠာယတနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4105 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (သံယုတ္တ) | 4201 သဂါထာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4202 နိဒါနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4203 ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4204 သဠာယတနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4205 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (သံယုတ္တ) | 4301 သဂါထာဝဂ္ဂ ဋီကာ 4302 နိဒါနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4303 ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 4304 သဠာယတနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4305 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (သံယုတ္တ) | |
| 5101 ဧကကနိပါတ ပါဠိ 5102 ဒုကနိပါတ ပါဠိ 5103 တိကနိပါတ ပါဠိ 5104 စတုက္ကနိပါတ ပါဠိ 5105 ပဉ္စကနိပါတ ပါဠိ 5106 ဆက္ကနိပါတ ပါဠိ 5107 သတ္တကနိပါတ ပါဠိ 5108 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ပါဠိ 5109 နဝကနိပါတ ပါဠိ 5110 ဒသကနိပါတ ပါဠိ 5111 ဧကာဒသကနိပါတ ပါဠိ | 5201 ဧကကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5202 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5203 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5204 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ အဋ္ဌကထာ | 5301 ဧကကနိပါတ ဋီကာ 5302 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ ဋီကာ 5303 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ ဋီကာ 5304 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ဋီကာ | |
| 6101 ခုဒ္ဒကပါဌ ပါဠိ 6102 ဓမ္မပဒ ပါဠိ 6103 ဥဒါန ပါဠိ 6104 ဣတိဝုတ္တက ပါဠိ 6105 သုတ္တနိပါတ ပါဠိ 6106 ဝိမာနဝတ္ထု ပါဠိ 6107 ပေတဝတ္ထု ပါဠိ 6108 ထေရဂါထာ ပါဠိ 6109 ထေရီဂါထာ ပါဠိ 6110 အပဒါန ပါဠိ-၁ 6111 အပဒါန ပါဠိ-၂ 6112 ဗုဒ္ဓဝံသ ပါဠိ 6113 စရိယာပိဋက ပါဠိ 6114 ဇာတက ပါဠိ-၁ 6115 ဇာတက ပါဠိ-၂ 6116 မဟာနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6117 စူဠနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6118 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ ပါဠိ 6119 နေတ္တိပ္ပကရဏ ပါဠိ 6120 မိလိန္ဒပဉှ ပါဠိ 6121 ပေဋကောပဒေသ ပါဠိ | 6201 ခုဒ္ဒကပါဌ အဋ္ဌကထာ 6202 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၁ 6203 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၂ 6204 ဥဒါန အဋ္ဌကထာ 6205 ဣတိဝုတ္တက အဋ္ဌကထာ 6206 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၁ 6207 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၂ 6208 ဝိမာနဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6209 ပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6210 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၁ 6211 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၂ 6212 ထေရီဂါထာ အဋ္ဌကထာ 6213 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၁ 6214 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၂ 6215 ဗုဒ္ဓဝံသ အဋ္ဌကထာ 6216 စရိယာပိဋက အဋ္ဌကထာ 6217 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၁ 6218 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၂ 6219 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၃ 6220 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၄ 6221 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၅ 6222 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၆ 6223 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၇ 6224 မဟာနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6225 စူဠနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6226 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၁ 6227 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၂ 6228 နေတ္တိပ္ပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 6301 နေတ္တိပ္ပကရဏ ဋီကာ 6302 နေတ္တိဝိဘာဝိနီ | |
| 7101 ဓမ္မသင်္ဂဏီ ပါဠိ 7102 ဝိဘင်္ဂ ပါဠိ 7103 ဓါတုကထာ ပါဠိ 7104 ပုဂ္ဂလပညတ္တိ ပါဠိ 7105 ကထာဝတ္ထု ပါဠိ 7106 ယမက ပါဠိ-၁ 7107 ယမက ပါဠိ-၂ 7108 ယမက ပါဠိ-၃ 7109 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၁ 7110 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၂ 7111 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၃ 7112 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၄ 7113 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၅ | 7201 ဓမ္မသင်္ဂဏိ အဋ္ဌကထာ 7202 သမ္မောဟဝိနောဒနီ အဋ္ဌကထာ 7203 ပဉ္စပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 7301 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-မူလဋီကာ 7302 ဝိဘင်္ဂ-မူလဋီကာ 7303 ပဉ္စပကရဏ-မူလဋီကာ 7304 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-အနုဋီကာ 7305 ပဉ္စပကရဏ-အနုဋီကာ 7306 အဘိဓမ္မာဝတာရော-နာမရူပပရိစ္ဆေဒေါ 7307 အဘိဓမ္မတ္ထသင်္ဂဟော 7308 အဘိဓမ္မာဝတာရ-ပုရာဏဋီကာ 7309 အဘိဓမ္မမာတိကာပါဠိ | |
| português | |||
| Páli | Aṭṭhakathā | Ṭīkā | Outro |
| 1101 Ofensas Graves (Pārājika) 1102 Ofensas Leves (Pācittiya) 1103 Grande Seção do Vīnaya (Mahāvagga) 1104 Pequena Seção do Vīnaya (Cūḷavagga) 1105 Apêndice do Vīnaya (Parivāra) | 1201 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 1 1202 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 2 1203 Comentário das Ofensas Leves 1204 Comentário da Grande Seção do Vīnaya 1205 Comentário da Pequena Seção do Vīnaya 1206 Comentário do Apêndice do Vīnaya | 1301 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 1 1302 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 2 1303 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 3 | 1401 Texto das Duas Matrizes 1402 Comentário do Compêndio do Vīnaya 1403 Subcomentário de Vajirabuddhi 1404 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 1 1405 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 2 1406 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 1 1407 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 2 1408 Antigo Subcomentário que Supera Dúvidas 1409 Decisão sobre o Vīnaya e Decisão Superior 1410 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 1 1411 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 2 1412 Texto da Aplicação das Regras 1413 Pequeno Treinamento e Treinamento Fundamental 8401 Caminho da Purificação - Vol. 1 8402 Caminho da Purificação - Vol. 2 8403 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 1 8404 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 2 8405 História da Origem do Caminho da Purificação 8406 Coleção dos Longos Discursos (índice Pāli-Vietnamita) 8407 Coleção dos Discursos Médios (índice Pāli-Vietnamita) 8408 Coleção dos Discursos Agrupados (índice Pāli-Vietnamita) 8409 Coleção dos Discursos Numerados (índice Pāli-Vietnamita) 8410 Cesto da Disciplina (índice Pāli-Vietnamita) 8411 Cesto do Abhidhamma (índice Pāli-Vietnamita) 8412 Comentários (índice Pāli-Vietnamita) 8413 Elucidação da Etimologia 8414 Grande Subcomentário do Compêndio que Elucida o Sentido Supremo 8415 Texto do Subcomentário Elucidativo 8416 Texto Elucidativo sobre a Exposição das Condições 8417 Subcomentário da Saudação 8418 Grande Texto de Saudação 8419 Versos de Louvor a Buda pelos Sinais 8420 Saudação com Recitação 8421 Oferenda de Lótus 8422 Ornamento dos Vencedores 8423 Mel dos Versos 8424 Coleção de Versos sobre as Qualidades de Buda 8425 Pequena Crônica dos Livros 8427 Crônica do Ensinamento 8426 Grande Crônica 8429 Gramática de Moggallāna 8428 Gramática de Kaccāyana 8430 Tratado sobre a Gramática - Série de Palavras 8431 Tratado sobre a Gramática - Série de Raízes 8432 Realização das Formas das Palavras 8433 Comentário de Moggallāna 8434 Texto sobre a Realização da Aplicação 8435 Texto sobre a Origem dos Versos 8436 Texto do Dicionário Iluminado 8437 Subcomentário do Dicionário Iluminado 8438 Texto sobre o Ornamento da Boa Compreensão 8439 Subcomentário do Ornamento da Boa Compreensão 8440 Essência da Decisão sobre os Termos do Glossário de Bālāvatāra 8446 Ética do Poeta 8447 Coleção de Ética 8445 Ética do Dhamma 8444 Grande Ética Secreta 8441 Ética do Mundo 8442 Ética dos Suttas 8443 Ética do Herói 8450 Ética de Cāṇakya 8448 Elucidação sobre os Perigos para os Homens 8449 Elucidação sobre as Quatro Proteções 8451 O Fluxo do Sabor - Histórias Edificantes 8452 Texto sobre a Purificação dos Limites 8453 Canto de Vessantara 8454 Explicação do Comentário de Moggallāna 8455 Crônica das Estupas 8456 Crônica da Relíquia do Dente 8457 O Esplendor da Leitura dos Elementos 8458 Crônica das Relíquias 8459 Crônica do Mosteiro de Hatthavanagalla 8460 História do Vencedor 8461 Ilha da Linhagem dos Vencedores 8462 Versos da Panela de Óleo 8463 Subcomentário de Milinda 8464 Cacho de Flores de Palavras 8465 Realização das Palavras 8466 Tratado sobre os Pontos da Gramática 8467 Coleção de Raízes de Kaccāyana 8468 Descrição do Pico de Sāmantakūṭa |
| 2101 Seção da Moralidade - Dīgha 2102 Grande Seção - Dīgha 2103 Seção de Pāthika - Dīgha | 2201 Comentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2202 Comentário da Grande Seção - Dīgha 2203 Comentário da Seção de Pāthika - Dīgha | 2301 Subcomentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2302 Subcomentário da Grande Seção - Dīgha 2303 Subcomentário da Seção de Pāthika - Dīgha 2304 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 1 2305 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 2 | |
| 3101 Cinquenta Discursos Fundamentais - Majjhima 3102 Cinquenta Discursos Médios - Majjhima 3103 Cinquenta Discursos Superiores - Majjhima | 3201 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 1 3202 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 2 3203 Comentário dos Cinquenta Médios 3204 Comentário dos Cinquenta Superiores | 3301 Subcomentário dos Cinquenta Fundamentais 3302 Subcomentário dos Cinquenta Médios 3303 Subcomentário dos Cinquenta Superiores | |
| 4101 Seção com Versos - Saṃyutta 4102 Seção das Causas - Saṃyutta 4103 Seção dos Agregados - Saṃyutta 4104 Seção das Seis Bases dos Sentidos - Saṃyutta 4105 Grande Seção - Saṃyutta | 4201 Comentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4202 Comentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4203 Comentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4204 Comentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4205 Comentário da Grande Seção - Saṃyutta | 4301 Subcomentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4302 Subcomentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4303 Subcomentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4304 Subcomentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4305 Subcomentário da Grande Seção - Saṃyutta | |
| 5101 Grupos de Um - Aṅguttara 5102 Grupos de Dois - Aṅguttara 5103 Grupos de Três - Aṅguttara 5104 Grupos de Quatro - Aṅguttara 5105 Grupos de Cinco - Aṅguttara 5106 Grupos de Seis - Aṅguttara 5107 Grupos de Sete - Aṅguttara 5108 Grupos de Oito, etc. - Aṅguttara 5109 Grupos de Nove - Aṅguttara 5110 Grupos de Dez - Aṅguttara 5111 Grupos de Onze - Aṅguttara | 5201 Comentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5202 Comentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5203 Comentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5204 Comentário dos Grupos de Oito, etc. | 5301 Subcomentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5302 Subcomentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5303 Subcomentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5304 Subcomentário dos Grupos de Oito, etc. | |
| 6101 Pequena Leitura (Khuddakapāṭha) 6102 Versos do Dhamma (Dhammapada) 6103 Exclamações Inspiradas (Udāna) 6104 Assim Foi Dito (Itivuttaka) 6105 Coleção de Discursos (Suttanipāta) 6106 Histórias das Mansões Celestiais 6107 Histórias dos Fantasmas 6108 Versos dos Monges Anciãos 6109 Versos das Monjas Anciãs 6110 Histórias Passadas - Vol. 1 6111 Histórias Passadas - Vol. 2 6112 História dos Budas (Buddhavaṃsa) 6113 Cesto das Condutas (Cariyāpiṭaka) 6114 Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6115 Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6116 Grande Exposição (Mahāniddesa) 6117 Pequena Exposição (Cūḷaniddesa) 6118 Caminho da Discriminação Analítica 6119 O Guia (Nettippakaraṇa) 6120 As Perguntas de Milinda 6121 Instrução do Cesto (Peṭakopadesa) | 6201 Comentário da Pequena Leitura 6202 Comentário do Dhammapada - Vol. 1 6203 Comentário do Dhammapada - Vol. 2 6204 Comentário do Udāna 6205 Comentário do Itivuttaka 6206 Comentário do Suttanipāta - Vol. 1 6207 Comentário do Suttanipāta - Vol. 2 6208 Comentário das Histórias das Mansões 6209 Comentário das Histórias dos Fantasmas 6210 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 1 6211 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 2 6212 Comentário dos Versos das Monjas 6213 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 1 6214 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 2 6215 Comentário da História dos Budas 6216 Comentário do Cesto das Condutas 6217 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6218 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6219 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 3 6220 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 4 6221 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 5 6222 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 6 6223 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 7 6224 Comentário da Grande Exposição 6225 Comentário da Pequena Exposição 6226 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 1 6227 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 2 6228 Comentário do Guia | 6301 Subcomentário do Guia 6302 Elucidação do Guia | |
| 7101 Enumeração dos Fenômenos (Dhammasaṅgaṇī) 7102 Análise (Vibhaṅga) 7103 Discurso sobre os Elementos (Dhātukathā) 7104 Designação das Pessoas (Puggalapaññatti) 7105 Pontos da Discussão (Kathāvatthu) 7106 O Livro dos Pares - Vol. 1 7107 O Livro dos Pares - Vol. 2 7108 O Livro dos Pares - Vol. 3 7109 Condições de Originação - Vol. 1 7110 Condições de Originação - Vol. 2 7111 Condições de Originação - Vol. 3 7112 Condições de Originação - Vol. 4 7113 Condições de Originação - Vol. 5 | 7201 Comentário da Enumeração dos Fenômenos 7202 Comentário que Dissipa a Confusão 7203 Comentário dos Cinco Tratados | 7301 Subcomentário Principal da Enumeração dos Fenômenos 7302 Subcomentário Principal da Análise 7303 Subcomentário Principal dos Cinco Tratados 7304 Subcomentário Secundário da Enumeração dos Fenômenos 7305 Subcomentário Secundário dos Cinco Tratados 7306 Introdução ao Abhidhamma - Análise de Nome e Forma 7307 Compêndio do Abhidhamma 7308 Antigo Subcomentário da Introdução ao Abhidhamma 7309 Matriz do Abhidhamma | |
| русский | |||
| Палийский канон | Комментарии | Субкомментарии | Другое |
| 1101 Параджика-пали 1102 Пачиттия-пали 1103 Махавагга-пали (Виная) 1104 Чулавагга-пали 1105 Паривара-пали | 1201 Параджиканда-аттхакатха-1 1202 Параджиканда-аттхакатха-2 1203 Пачиттия-аттхакатха 1204 Махавагга-аттхакатха (Виная) 1205 Чулавагга-аттхакатха 1206 Паривара-аттхакатха | 1301 Сараттхадипани-тика-1 1302 Сараттхадипани-тика-2 1303 Сараттхадипани-тика-3 | 1401 Двематика-пали 1402 Винаясангаха-аттхакатха 1403 Ваджирабуддхи-тика 1404 Вимативинодани-тика-1 1405 Вимативинодани-тика-2 1406 Винаяланкара-тика-1 1407 Винаяланкара-тика-2 1408 Канкхавитаранипурана-тика 1409 Винаявиниччая-уттаравиниччая 1410 Винаявиниччая-тика-1 1411 Винаявиниччая-тика-2 1412 Пачиттиядийоджана-пали 1413 Кхуддасиккха-муласиккха 8401 Висуддхимагга-1 8402 Висуддхимагга-2 8403 Висуддхимагга-махатика-1 8404 Висуддхимагга-махатика-2 8405 Висуддхимагга-ниданакатха 8406 Дигханикая (пу-ви) 8407 Мадджхиманикая (пу-ви) 8408 Самъюттаникая (пу-ви) 8409 Ангуттараникая (пу-ви) 8410 Винаяпитака (пу-ви) 8411 Абхидхаммапитака (пу-ви) 8412 Аттхакатха (пу-ви) 8413 Нируттидипани 8414 Параматтхадипани Сангахамахатикапатха 8415 Анудипанипатха 8416 Паттхануддеса дипанипатха 8417 Намаккаратика 8418 Махапанамапатха 8419 Лаккханато буддхатхоманагатха 8420 Сутавандана 8421 Камаланджали 8422 Джиналанкара 8423 Паджамадху 8424 Буддхагунагатхавали 8425 Чулагантхавамса 8427 Сасанавамса 8426 Махавамса 8429 Моггалланабьякарана 8428 Каччаянабьякарана 8430 Садданитиппакарана (падамала) 8431 Садданитиппакарана (дхатумала) 8432 Падарупасиддхи 8433 Могалланапанчика 8434 Пайогасиддхипатха 8435 Вуттодаяпатха 8436 Абхидханаппадипикапатха 8437 Абхидханаппадипикатика 8438 Субодхаланкарапатха 8439 Субодхаланкаратика 8440 Балаватара гантхипадаттхавиниччаясара 8446 Кавидаппананити 8447 Нитиманджари 8445 Дхамманити 8444 Махараханити 8441 Локанити 8442 Суттантанити 8443 Сурассатинити 8450 Чанакьянити 8448 Нарадаккхадипани 8449 Чатурараккхадипани 8451 Расавахини 8452 Симависодханипатха 8453 Вессантарагити 8454 Моггаллана вуттививаранапанчика 8455 Тхупавамса 8456 Датхавамса 8457 Дхатупатхавиласиния 8458 Дхатувамса 8459 Хаттхаванагаллавихаравамса 8460 Джиначаритая 8461 Джинавамсадипа 8462 Телакатахагатха 8463 Милидатика 8464 Падаманджари 8465 Падасадхана 8466 Саддабиндупакарана 8467 Каччаянадхатуманджуса 8468 Самантакутаваннана |
| 2101 Силаккхандхавагга-пали 2102 Махавагга-пали (Дигха) 2103 Патхикавагга-пали | 2201 Силаккхандхавагга-аттхакатха 2202 Махавагга-аттхакатха (Дигха) 2203 Патхикавагга-аттхакатха | 2301 Силаккхандхавагга-тика 2302 Махавагга-тика (Дигха) 2303 Патхикавагга-тика 2304 Силаккхандхавагга-абхинаватика-1 2305 Силаккхандхавагга-абхинаватика-2 | |
| 3101 Мулапаннаса-пали 3102 Мадджхимапаннаса-пали 3103 Упарипаннаса-пали | 3201 Мулапаннаса-аттхакатха-1 3202 Мулапаннаса-аттхакатха-2 3203 Мадджхимапаннаса-аттхакатха 3204 Упарипаннаса-аттхакатха | 3301 Мулапаннаса-тика 3302 Мадджхимапаннаса-тика 3303 Упарипаннаса-тика | |
| 4101 Сагатхавагга-пали 4102 Ниданавагга-пали 4103 Кхандхавагга-пали 4104 Салаятанавагга-пали 4105 Махавагга-пали (Самъютта) | 4201 Сагатхавагга-аттхакатха 4202 Ниданавагга-аттхакатха 4203 Кхандхавагга-аттхакатха 4204 Салаятанавагга-аттхакатха 4205 Махавагга-аттхакатха (Самъютта) | 4301 Сагатхавагга-тика 4302 Ниданавагга-тика 4303 Кхандхавагга-тика 4304 Салаятанавагга-тика 4305 Махавагга-тика (Самъютта) | |
| 5101 Экаканипата-пали 5102 Дуканипата-пали 5103 Тиканипата-пали 5104 Чатукканипата-пали 5105 Панчаканипата-пали 5106 Чхакканипата-пали 5107 Саттаканипата-пали 5108 Аттхакадинипата-пали 5109 Наваканипата-пали 5110 Дасаканипата-пали 5111 Экадасаканипата-пали | 5201 Экаканипата-аттхакатха 5202 Дука-тика-чатукканипата-аттхакатха 5203 Панчака-чхакка-саттаканипата-аттхакатха 5204 Аттхакадинипата-аттхакатха | 5301 Экаканипата-тика 5302 Дука-тика-чатукканипата-тика 5303 Панчака-чхакка-саттаканипата-тика 5304 Аттхакадинипата-тика | |
| 6101 Кхуддакапатха-пали 6102 Дхаммапада-пали 6103 Удана-пали 6104 Итивуттака-пали 6105 Суттанипата-пали 6106 Виманаваттху-пали 6107 Петаваттху-пали 6108 Тхерагатха-пали 6109 Тхеригатха-пали 6110 Ападана-пали-1 6111 Ападана-пали-2 6112 Буддхавамса-пали 6113 Чарияпитака-пали 6114 Джатака-пали-1 6115 Джатака-пали-2 6116 Маханиддеса-пали 6117 Чуланиддеса-пали 6118 Патисамбхидамагга-пали 6119 Неттиппакарана-пали 6120 Милиндапаньха-пали 6121 Петакопадеса-пали | 6201 Кхуддакапатха-аттхакатха 6202 Дхаммапада-аттхакатха-1 6203 Дхаммапада-аттхакатха-2 6204 Удана-аттхакатха 6205 Итивуттака-аттхакатха 6206 Суттанипата-аттхакатха-1 6207 Суттанипата-аттхакатха-2 6208 Виманаваттху-аттхакатха 6209 Петаваттху-аттхакатха 6210 Тхерагатха-аттхакатха-1 6211 Тхерагатха-аттхакатха-2 6212 Тхеригатха-аттхакатха 6213 Ападана-аттхакатха-1 6214 Ападана-аттхакатха-2 6215 Буддхавамса-аттхакатха 6216 Чарияпитака-аттхакатха 6217 Джатака-аттхакатха-1 6218 Джатака-аттхакатха-2 6219 Джатака-аттхакатха-3 6220 Джатака-аттхакатха-4 6221 Джатака-аттхакатха-5 6222 Джатака-аттхакатха-6 6223 Джатака-аттхакатха-7 6224 Маханиддеса-аттхакатха 6225 Чуланиддеса-аттхакатха 6226 Патисамбхидамагга-аттхакатха-1 6227 Патисамбхидамагга-аттхакатха-2 6228 Неттиппакарана-аттхакатха | 6301 Неттиппакарана-тика 6302 Неттивибхавини | |
| 7101 Дхаммасангани-пали 7102 Вибханга-пали 7103 Дхатукатха-пали 7104 Пуггалапаннятти-пали 7105 Катхаваттху-пали 7106 Ямака-пали-1 7107 Ямака-пали-2 7108 Ямака-пали-3 7109 Паттхана-пали-1 7110 Паттхана-пали-2 7111 Паттхана-пали-3 7112 Паттхана-пали-4 7113 Паттхана-пали-5 | 7201 Дхаммасангани-аттхакатха 7202 Саммохивинодани-аттхакатха 7203 Панчапакарана-аттхакатха | 7301 Дхаммасангани-мулатика 7302 Вибханга-мулатика 7303 Панчапакарана-мулатика 7304 Дхаммасангани-анутика 7305 Панчапакарана-анутика 7306 Абхидхаммаватаро-намарупапариччхедо 7307 Абхидхамматтхасангахо 7308 Абхидхаммаватара-пуранатика 7309 Абхидхаммаматика-пали | |
| සිංහල | |||
| පාලි කැනනය | විවරණ | අටුවා | වෙනත් |
| 1101 පාරාජික පාළි 1102 පාචිත්තිය පාළි 1103 මහාවග්ග පාළි (විනය) 1104 චූළවග්ග පාළි 1105 පරිවාර පාළි | 1201 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-1 1202 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-2 1203 පාචිත්තිය අට්ඨකථා 1204 මහාවග්ග අට්ඨකථා (විනය) 1205 චූළවග්ග අට්ඨකථා 1206 පරිවාර අට්ඨකථා | 1301 සාරත්ථදීපනී ටීකා-1 1302 සාරත්ථදීපනී ටීකා-2 1303 සාරත්ථදීපනී ටීකා-3 | 1401 ද්වෙමාතිකාපාළි 1402 විනයසංගහ අට්ඨකථා 1403 වජිරබුද්ධි ටීකා 1404 විමතිවිනෝදනී ටීකා-1 1405 විමතිවිනෝදනී ටීකා-2 1406 විනයාලංකාර ටීකා-1 1407 විනයාලංකාර ටීකා-2 1408 කඞ්ඛාවිතරණීපුරාණ ටීකා 1409 විනයවිනිච්ඡය-උත්තරවිනිච්ඡය 1410 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-1 1411 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-2 1412 පාචිත්යාදියෝජනාපාළි 1413 ඛුද්දසික්ඛා-මූලසික්ඛා 8401 විසුද්ධිමග්ග-1 8402 විසුද්ධිමග්ග-2 8403 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-1 8404 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-2 8405 විසුද්ධිමග්ග නිදානකථා 8406 දීඝනිකාය (පු-වි) 8407 මජ්ඣිමනිකාය (පු-වි) 8408 සංයුත්තනිකාය (පු-වි) 8409 අඞ්ගුත්තරනිකාය (පු-වි) 8410 විනයපිටක (පු-වි) 8411 අභිධම්මපිටක (පු-වි) 8412 අට්ඨකථා (පු-වි) 8413 නිරුත්තිදීපනී 8414 පරමත්ථදීපනී සඞ්ගහමහාටීකාපාඨ 8415 අනුදීපනීපාඨ 8416 පට්ඨානුද්දේස දීපනීපාඨ 8417 නමක්කාරටීකා 8418 මහාපණාමපාඨ 8419 ලක්ඛණාතෝ බුද්ධථෝමනාගාථා 8420 සුතවන්දනා 8421 කමලාඤ්ජලි 8422 ජිනාලඞ්කාර 8423 පජ්ජමධු 8424 බුද්ධගුණගාථාවලී 8425 චූළගන්ථවංස 8427 සාසනවංස 8426 මහාවංස 8429 මොග්ගල්ලානබ්යාකරණං 8428 කච්චායනබ්යාකරණං 8430 සද්දනීතිප්පකරණං (පදමාලා) 8431 සද්දනීතිප්පකරණං (ධාතුමාලා) 8432 පදරූපසිද්ධි 8433 මොග්ගල්ලානපඤ්චිකා 8434 පයෝගසිද්ධිපාඨ 8435 වුත්තෝදයපාඨ 8436 අභිධානප්පදීපිකාපාඨ 8437 අභිධානප්පදීපිකාටීකා 8438 සුබෝධාලඞ්කාරපාඨ 8439 සුබෝධාලඞ්කාරටීකා 8440 බාලාවතාර ගණ්ඨිපදත්ථවිනිච්ඡයසාර 8446 කවිදප්පණනීති 8447 නීතිමඤ්ජරී 8445 ධම්මනීති 8444 මහාරහනීති 8441 ලෝකනීති 8442 සුත්තන්තනීති 8443 සූරස්සතිනීති 8450 චාණක්යනීති 8448 නරදක්ඛදීපනී 8449 චතුරාරක්ඛදීපනී 8451 රසවාහිනී 8452 සීමවිසෝධනීපාඨ 8453 වෙස්සන්තරගීති 8454 මොග්ගල්ලාන වුත්තිවිවරණපඤ්චිකා 8455 ථූපවංස 8456 දාඨාවංස 8457 ධාතුපාඨවිලාසිනියා 8458 ධාතුවංස 8459 හත්ථවනගල්ලවිහාරවංස 8460 ජිනචරිතය 8461 ජිනවංසදීපං 8462 තේලකටාහගාථා 8463 මිලිදටීකා 8464 පදමඤ්ජරී 8465 පදසාධනං 8466 සද්දබින්දුපකරණං 8467 කච්චායනධාතුමඤ්ජුසා 8468 සාමන්තකූටවණ්ණනා |
| 2101 සීලක්ඛන්ධවග්ග පාළි 2102 මහාවග්ග පාළි (දීඝ) 2103 පාථිකවග්ග පාළි | 2201 සීලක්ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 2202 මහාවග්ග අට්ඨකථා (දීඝ) 2203 පාථිකවග්ග අට්ඨකථා | 2301 සීලක්ඛන්ධවග්ග ටීකා 2302 මහාවග්ග ටීකා (දීඝ) 2303 පාථිකවග්ග ටීකා 2304 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-1 2305 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-2 | |
| 3101 මූලපණ්ණාස පාළි 3102 මජ්ඣිමපණ්ණාස පාළි 3103 උපරිපණ්ණාස පාළි | 3201 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-1 3202 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-2 3203 මජ්ඣිමපණ්ණාස අට්ඨකථා 3204 උපරිපණ්ණාස අට්ඨකථා | 3301 මූලපණ්ණාස ටීකා 3302 මජ්ඣිමපණ්ණාස ටීකා 3303 උපරිපණ්ණාස ටීකා | |
| 4101 සගාථාවග්ග පාළි 4102 නිදානවග්ග පාළි 4103 ඛන්ධවග්ග පාළි 4104 සළායතනවග්ග පාළි 4105 මහාවග්ග පාළි (සංයුත්ත) | 4201 සගාථාවග්ග අට්ඨකථා 4202 නිදානවග්ග අට්ඨකථා 4203 ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 4204 සළායතනවග්ග අට්ඨකථා 4205 මහාවග්ග අට්ඨකථා (සංයුත්ත) | 4301 සගාථාවග්ග ටීකා 4302 නිදානවග්ග ටීකා 4303 ඛන්ධවග්ග ටීකා 4304 සළායතනවග්ග ටීකා 4305 මහාවග්ග ටීකා (සංයුත්ත) | |
| 5101 එකකනිපාත පාළි 5102 දුකනිපාත පාළි 5103 තිකනිපාත පාළි 5104 චතුක්කනිපාත පාළි 5105 පඤ්චකනිපාත පාළි 5106 ඡක්කනිපාත පාළි 5107 සත්තකනිපාත පාළි 5108 අට්ඨකාදිනිපාත පාළි 5109 නවකනිපාත පාළි 5110 දසකනිපාත පාළි 5111 එකාදසකනිපාත පාළි | 5201 එකකනිපාත අට්ඨකථා 5202 දුක-තික-චතුක්කනිපාත අට්ඨකථා 5203 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත අට්ඨකථා 5204 අට්ඨකාදිනිපාත අට්ඨකථා | 5301 එකකනිපාත ටීකා 5302 දුක-තික-චතුක්කනිපාත ටීකා 5303 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත ටීකා 5304 අට්ඨකාදිනිපාත ටීකා | |
| 6101 ඛුද්දකපාඨ පාළි 6102 ධම්මපද පාළි 6103 උදාන පාළි 6104 ඉතිවුත්තක පාළි 6105 සුත්තනිපාත පාළි 6106 විමානවත්ථු පාළි 6107 පේතවත්ථු පාළි 6108 ථේරගාථා පාළි 6109 ථේරීගාථා පාළි 6110 අපදාන පාළි-1 6111 අපදාන පාළි-2 6112 බුද්ධවංස පාළි 6113 චරියාපිටක පාළි 6114 ජාතක පාළි-1 6115 ජාතක පාළි-2 6116 මහානිද්දේස පාළි 6117 චූළනිද්දේස පාළි 6118 පටිසම්භිදාමග්ග පාළි 6119 නෙත්තිප්පකරණ පාළි 6120 මිලින්දපඤ්හ පාළි 6121 පේටකෝපදේස පාළි | 6201 ඛුද්දකපාඨ අට්ඨකථා 6202 ධම්මපද අට්ඨකථා-1 6203 ධම්මපද අට්ඨකථා-2 6204 උදාන අට්ඨකථා 6205 ඉතිවුත්තක අට්ඨකථා 6206 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-1 6207 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-2 6208 විමානවත්ථු අට්ඨකථා 6209 පේතවත්ථු අට්ඨකථා 6210 ථේරගාථා අට්ඨකථා-1 6211 ථේරගාථා අට්ඨකථා-2 6212 ථේරීගාථා අට්ඨකථා 6213 අපදාන අට්ඨකථා-1 6214 අපදාන අට්ඨකථා-2 6215 බුද්ධවංස අට්ඨකථා 6216 චරියාපිටක අට්ඨකථා 6217 ජාතක අට්ඨකථා-1 6218 ජාතක අට්ඨකථා-2 6219 ජාතක අට්ඨකථා-3 6220 ජාතක අට්ඨකථා-4 6221 ජාතක අට්ඨකථා-5 6222 ජාතක අට්ඨකථා-6 6223 ජාතක අට්ඨකථා-7 6224 මහානිද්දේස අට්ඨකථා 6225 චූළනිද්දේස අට්ඨකථා 6226 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-1 6227 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-2 6228 නෙත්තිප්පකරණ අට්ඨකථා | 6301 නෙත්තිප්පකරණ ටීකා 6302 නෙත්තිවිභාවිනී | |
| 7101 ධම්මසංගණී පාළි 7102 විභඞ්ග පාළි 7103 ධාතුකථා පාළි 7104 පුග්ගලපඤ්ඤත්ති පාළි 7105 කථාවත්ථු පාළි 7106 යමක පාළි-1 7107 යමක පාළි-2 7108 යමක පාළි-3 7109 පට්ඨාන පාළි-1 7110 පට්ඨාන පාළි-2 7111 පට්ඨාන පාළි-3 7112 පට්ඨාන පාළි-4 7113 පට්ඨාන පාළි-5 | 7201 ධම්මසංගණි අට්ඨකථා 7202 සම්මෝහවිනෝදනී අට්ඨකථා 7203 පඤ්චපකරණ අට්ඨකථා | 7301 ධම්මසංගණී-මූලටීකා 7302 විභඞ්ග-මූලටීකා 7303 පඤ්චපකරණ-මූලටීකා 7304 ධම්මසංගණී-අනුටීකා 7305 පඤ්චපකරණ-අනුටීකා 7306 අභිධම්මාවතාරෝ-නාමරූපපරිච්ඡේදෝ 7307 අභිධම්මත්ථසංගහෝ 7308 අභිධම්මාවතාර-පුරාණටීකා 7309 අභිධම්මමාතිකාපාළි | |
| Español | |||
| El Canon Pali | Los Comentarios | Los Subcomentarios | Otros |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| แบบไทย | |||
| บาลีแคน | ข้อคิดเห็น | คำอธิบายย่อย | อื่น |
| 1101 ปาราชิกปาฬิ 1102 ปาจิตติยปาฬิ 1103 มหาวคฺคปาฬิ (วินัย) 1104 จูฬวคฺคปาฬิ 1105 ปริวารปาฬิ | 1201 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๑ 1202 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๒ 1203 ปาจิตฺติยอฏฺฐกถา 1204 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (วินัย) 1205 จูฬวคฺคอฏฺฐกถา 1206 ปริวารอฏฺฐกถา | 1301 สารตฺถทีปนีฏีกา-๑ 1302 สารตฺถทีปนีฏีกา-๒ 1303 สารตฺถทีปนีฏีกา-๓ | 1401 ทเวมาติกาปาฬิ 1402 วินยสํคหอฏฺฐกถา 1403 วชิรพุทฺธิฏีกา 1404 วิมติวิโนทนีฏีกา-๑ 1405 วิมติวิโนทนีฏีกา-๒ 1406 วินยาลงฺการฏีกา-๑ 1407 วินยาลงฺการฏีกา-๒ 1408 กงฺขาวิตรณีปุราณฏีกา 1409 วินยวินิจฉย-อุตฺตรวินิจฉย 1410 วินยวินิจฉยฏีกา-๑ 1411 วินยวินิจฉยฏีกา-๒ 1412 ปาจิตฺยาทิโยชนาปาฬิ 1413 ขุทฺทสิกฺขา-มูลสิกฺขา 8401 วิสุทฺธิมคฺค-๑ 8402 วิสุทฺธิมคฺค-๒ 8403 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๑ 8404 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๒ 8405 วิสุทฺธิมคฺค-นิทานกถา 8406 ทีฆนิกาย (ปุ-วิ) 8407 มชฺฌิมนิกาย (ปุ-วิ) 8408 สํยุตฺตนิกาย (ปุ-วิ) 8409 องฺคุตฺตรนิกาย (ปุ-วิ) 8410 วินยปิฎก (ปุ-วิ) 8411 อภิธมฺมปิฎก (ปุ-วิ) 8412 อฏฺฐกถา (ปุ-วิ) 8413 นิรุตฺติทีปนี 8414 ปรมตฺถทีปนี สงฺคหมหาฏีกาปาฐ 8415 อนุทีปนีปาฐ 8416 ปฎฺฐานุทฺเทสทีปนีปาฐ 8417 นมกฺการฏีกา 8418 มหาปณามปาฐ 8419 ลกฺขณาโต พุทฺธโถมนาคาถา 8420 สุตวทน 8421 กมลาญฺชลิ 8422 ชินาลงฺการ 8423 ปชฺชมธุ 8424 พุทฺธคุณคาถาวลี 8425 จูฬคนฺถวํส 8427 สาสนวํส 8426 มหาวํส 8429 โมคฺคลฺลานพฺยากรณํ 8428 กจฺจายนพฺยากรณํ 8430 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ปทมาลา) 8431 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ธาตุมาลา) 8432 ปทรูปสิทฺธิ 8433 โมคคฺลานปญฺจิกา 8434 ปโยคสิทฺธิปาฐ 8435 วุตฺโตทยปาฐ 8436 อภิธานปฺปทีปิกาปาฐ 8437 อภิธานปฺปทีปิกาฏีกา 8438 สุโพธาลงฺการปาฐ 8439 สุโพธาลงฺการฏีกา 8440 พาลาวตาร คณฺฐิปทตฺถวินิจฺฉยสาร 8446 กวิทปฺปณนีติ 8447 นีติมญฺชรี 8445 ธมฺมนีติ 8444 มหารหนีติ 8441 โลกนีติ 8442 สุตฺตนฺตนีติ 8443 สูรสฺสตินีติ 8450 จาณกฺยนีติ 8448 นรทกฺขทีปนี 8449 จตุราวรกฺขทีปนี 8451 รสวาหินี 8452 สีมวิโสธนีปาฐ 8453 เวสฺสนฺตรคีติ 8454 โมคฺคลฺลาน วุตฺติวิวรณปญฺจิกา 8455 ถูปวํส 8456 ทาฐาวํส 8457 ธาตุปาฐวิลาสินิยา 8458 ธาตุวํส 8459 หตฺถวนคัลลวิหารวํส 8460 ชนจริตย 8461 ชนวํสทีปํ 8462 เตลกฏาหคาถา 8463 มิลิทฏีกา 8464 ปทมญฺชรี 8465 ปทสาธนํ 8466 สทฺทพินฺทุปกรณํ 8467 กจฺจายนธาตุมญฺชุสา 8468 สามนฺตกูฏวณฺณนา |
| 2101 สีลกฺขนฺธวคฺคปาฬิ 2102 มหาวคฺคปาฬิ (ทีฆ) 2103 ปาถิกวคฺคปาฬิ | 2201 สีลกฺขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 2202 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (ทีฆ) 2203 ปาถิกวคฺคอฏฺฐกถา | 2301 สีลกฺขนฺธวคฺคฏีกา 2302 มหาวคฺคฏีกา (ทีฆ) 2303 ปาถิกวคฺคฏีกา 2304 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๑ 2305 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๒ | |
| 3101 มูลปณฺณาสปาฬิ 3102 มชฺฌิมปณฺณาสปาฬิ 3103 อุปริปณฺณาสปาฬิ | 3201 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๑ 3202 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๒ 3203 มชฺฌิมปณฺณาสอฏฺฐกถา 3204 อุปริปณฺณาสอฏฺฐกถา | 3301 มูลปณฺณาสฏีกา 3302 มชฺฌิมปณฺณาสฏีกา 3303 อุปริปณฺณาสฏีกา | |
| 4101 สคาถาวคฺคปาฬิ 4102 นิทานวคฺคปาฬิ 4103 ขนฺธวคฺคปาฬิ 4104 สฬายตนวคฺคปาฬิ 4105 มหาวคฺคปาฬิ (สํยุตฺต) | 4201 สคาถาวคฺคอฏฺฐกถา 4202 นิทานวคฺคอฏฺฐกถา 4203 ขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 4204 สฬายตนวคฺคอฏฺฐกถา 4205 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (สํยุตฺต) | 4301 สคาถาวคฺคฏีกา 4302 นิทานวคฺคฏีกา 4303 ขนฺธวคฺคฏีกา 4304 สฬายตนวคฺคฏีกา 4305 มหาวคฺคฏีกา (สํยุตฺต) | |
| 5101 เอกกนิปาตปาฬิ 5102 ทุกนิปาตปาฬิ 5103 ติกนิปาตปาฬิ 5104 จตุกฺกนิปาตปาฬิ 5105 ปญฺจกนิปาตปาฬิ 5106 ฉกฺกนิปาตปาฬิ 5107 สตฺตกนิปาตปาฬิ 5108 อฏฺฐกาทินิปาตปาฬิ 5109 นวกนิปาตปาฬิ 5110 ทสกนิปาตปาฬิ 5111 เอกาทสกนิปาตปาฬิ | 5201 เอกกนิปาตอฏฺฐกถา 5202 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตอฏฺฐกถา 5203 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตอฏฺฐกถา 5204 อฏฺฐกาทินิปาตอฏฺฐกถา | 5301 เอกกนิปาตฏีกา 5302 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตฏีกา 5303 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตฏีกา 5304 อฏฺฐกาทินิปาตฏีกา | |
| 6101 ขุทฺทกปาฐปาฬิ 6102 ธมฺมปทปาฬิ 6103 อุทานปาฬิ 6104 อิติวุตฺตกปาฬิ 6105 สุตฺตนิบาตปาฬิ 6106 วิมานวตฺถุปาฬิ 6107 เปตวตฺถุปาฬิ 6108 เถรคาถาปาฬิ 6109 เถรีคาถาปาฬิ 6110 อปทานปาฬิ-๑ 6111 อปทานปาฬิ-๒ 6112 พุทธวงฺสปาฬิ 6113 จริยาปิฏกปาฬิ 6114 ชาตกปาฬิ-๑ 6115 ชาตกปาฬิ-๒ 6116 มหานิทฺเทสปาฬิ 6117 จูฬนิทฺเทสปาฬิ 6118 ปฏิสมฺภิทามคฺคปาฬิ 6119 เนตฺติปฺปกฺรณปาฬิ 6120 มิลินฺทปญฺหาปาฬิ 6121 เปฏโกปเทสปาฬิ | 6201 ขุทฺทกปาฐอฏฺฐกถา 6202 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๑ 6203 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๒ 6204 อุทานอฏฺฐกถา 6205 อิติวุตฺตกอฏฺฐกถา 6206 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๑ 6207 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๒ 6208 วิมานวตฺถุอฏฺฐกถา 6209 เปตวตฺถุอฏฺฐกถา 6210 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๑ 6211 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๒ 6212 เถรีคาถาอฏฺฐกถา 6213 อปทานอฏฺฐกถา-๑ 6214 อปทานอฏฺฐกถา-๒ 6215 พุทธวงฺสอฏฺฐกถา 6216 จริยาปิฏกอฏฺฐกถา 6217 ชาตกอฏฺฐกถา-๑ 6218 ชาตกอฏฺฐกถา-๒ 6219 ชาตกอฏฺฐกถา-๓ 6220 ชาตกอฏฺฐกถา-๔ 6221 ชาตกอฏฺฐกถา-๕ 6222 ชาตกอฏฺฐกถา-๖ 6223 ชาตกอฏฺฐกถา-๗ 6224 มหานิทฺเทสอฏฺฐกถา 6225 จูฬนิทฺเทสอฏฺฐกถา 6226 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๑ 6227 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๒ 6228 เนตฺติปฺปกฺรณอฏฺฐกถา | 6301 เนตฺติปฺปกฺรณฏีกา 6302 เนตฺติวิภาวินี | |
| 7101 ธมฺมสงฺคณีปาฬิ 7102 วิภงฺคปาฬิ 7103 ธาตุกถาปาฬิ 7104 ปุคฺคลปญฺญตฺติปาฬิ 7105 กถาวตฺถุปาฬิ 7106 ยมกปาฬิ-๑ 7107 ยมกปาฬิ-๒ 7108 ยมกปาฬิ-๓ 7109 ปฎฺฐานปาฬิ-๑ 7110 ปฎฺฐานปาฬิ-๒ 7111 ปฎฺฐานปาฬิ-๓ 7112 ปฎฺฐานปาฬิ-๔ 7113 ปฎฺฐานปาฬิ-๕ | 7201 ธมฺมสงฺคณิอฏฺฐกถา 7202 สมฺโมหวินิทนีอฏฺฐกถา 7203 ปญฺจปกรณอฏฺฐกถา | 7301 ธมฺมสงฺคณีมูลฏีกา 7302 วิภงฺคมูลฏีกา 7303 ปญฺจปกรณมูลฏีกา 7304 ธมฺมสงฺคณีอนุฏีกา 7305 ปญฺจปกรณอนุฏีกา 7306 อภิธมฺมาวตาโร-นามรูปปริจฺเฉโท 7307 อภิธมฺมตฺถสงฺคโห 7308 อภิธมฺมาวตาร-ปุราณฏีกา 7309 อภิธมฺมมาติกาปาฬิ | |
| བོད་མི | |||
| པཱ་ལི་གསུང་རབ། | འགྲེལ་བཤད། | འགྲེལ་བཤད་ཕྲན། | གཞན། |
| 1101 ཕ་ར་ཇི་ཀ་པཱ་ལི། 1102 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་པཱ་ལི། 1103 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (ཝི་ན་ཡ) 1104 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 1105 པ་རི་ཝཱ་ར་པཱ་ལི། | 1201 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 1202 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 1203 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1204 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (ཝི་ན་ཡ) 1205 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1206 པ་རི་ཝཱ་ར་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 1301 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1302 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1303 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༣ | 1401 དྭེ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། 1402 ཝི་ན་ཡ་སངྒ་ཧ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1403 ཝ་ཇི་ར་བུད་དྷི་ཊཱི་ཀཱ། 1404 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1405 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1406 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1407 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1408 ཀངྑཱ་ཝི་ཏ་ར་ཎཱི་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 1409 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཨུ་ཏྟ་ར་ཝི་ནི་ཙ་ཡ། 1410 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1411 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1412 པཱ་ཙི་ཏྱཱ་དི་ཡོ་ཇ་ནཱ་པཱ་ལི། 1413 ཁུད་ད་སིཀྑཱ་མཱུ་ལ་སིཀྑཱ། 8401 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༡ 8402 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༢ 8403 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 8404 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 8405 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་ནི་དཱ་ན་ཀ་ཐཱ། 8406 དཱི་གྷ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8407 མཛྷི་མ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8408 སཾ་ཡུཏྟ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8409 ཨངྒུ་ཏྟ་ར་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8410 ཝི་ན་ཡ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8411 ཨ་བྷི་དྷམྨ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8412 ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (པུ་ཝི) 8413 ནི་རུཏྟི་དཱི་པ་ནཱི། 8414 པ་ར་མཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་སངྒ་ཧ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8415 ཨ་ནུ་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8416 པཊྛཱ་ནུདྡེ་ས་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8417 ན་མཀྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8418 མ་ཧཱ་པ་ཎཱ་མ་པཱ་ཋ། 8419 ལཀྑ་ཎཱ་ཏོ་བུདྡྷ་ཐོ་མ་ནཱ་གཱ་ཐཱ། 8420 སུ་ཏ་ཝནྡ་ནཱ། 8421 ཀ་མ་ལཱཉྫ་ལི། 8422 ཇི་ནཱ་ལངྐཱ་ར། 8423 པཛྫ་མ་དྷུ། 8424 བུདྡྷ་གུ་ཎ་གཱ་ཐཱ་ཝ་ལཱི། 8425 ཙཱུ་ལ་གནྠ་ཝཾ་ས། 8427 སཱ་ས་ན་ཝཾ་ས། 8426 མ་ཧཱ་ཝཾ་ས། 8429 མོགྒ་ལླཱ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8428 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8430 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (པ་ད་མཱ་ལཱ) 8431 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (དྷཱ་ཏུ་མཱ་ལཱ) 8432 པ་ད་རཱུ་པ་སིད་དྷི། 8433 མོ་ག་ལླཱ་ན་པཉྩ་ཀཱ། 8434 པ་ཡོ་ག་སིད་དྷི་པཱ་ཋ། 8435 བུཏྟོ་ད་ཡ་པཱ་ཋ། 8436 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8437 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་ཊཱི་ཀཱ། 8438 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་པཱ་ཋ། 8439 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8440 བཱ་ལཱ་ཝ་ཏཱ་ར་གཎྛི་པ་དཏྠ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་སཱ་ར། 8446 ཀ་ཝི་དཔྤ་ཎ་ནཱི་ཏི། 8447 ནཱི་ཏི་མཉྫ་རཱི། 8445 དྷམྨ་ནཱི་ཏི། 8444 མ་ཧཱ་ར་ཧ་ནཱི་ཏི། 8441 ལོ་ཀ་ནཱི་ཏི། 8442 སུཏྟནྟ་ནཱ་ཏི། 8443 སཱུ་རསྶ་ཏི་ནཱི་ཏི། 8450 ཙཱ་ཎཀྱ་ནཱི་ཏི། 8448 ན་ར་དཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8449 ཙ་ཏུ་རཱ་རཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8451 ར་ས་ཝཱ་ཧི་ནཱི། 8452 སཱི་མ་ཝི་སོ་ད་ནཱི་པཱ་ཋ། 8453 ཝེསྶནྟ་ར་གཱི་ཏི། 8454 མོགྒ་ལླཱ་ན་བུཏྟི་ཝི་ཝ་ར་ཎ་པཉྩ་ཀཱ། 8455 ཐཱུ་པ་ཝཾ་ས། 8456 དཱ་ཊྷཱ་ཝཾ་ས། 8457 དྷཱ་ཏུ་པཱ་ཋ་ཝི་ལཱ་སི་ནི་ཡཱ། 8458 དྷཱ་ཏུ་ཝཾ་ས། 8459 ཧཏྠ་ཝ་ན་གལླ་ཝི་ཧཱ་ར་ཝཾ་ས། 8460 ཇི་ན་ཙ་རི་ཏ་ཡ། 8461 ཇི་ན་ཝཾ་ས་དཱི་པཾ། 8462 ཏེ་ལ་ཀ་ཊཱ་ཧ་གཱ་ཐཱ། 8463 མི་ལི་ད་ཊཱི་ཀཱ། 8464 པ་ད་མཉྫ་རཱི། 8465 པ་ད་སཱ་ད་ནཾ། 8466 སདྡ་བིནྡུ་པ་ཀ་ར་ཎཾ། 8467 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་དྷཱ་ཏུ་མཉྫུ་སཱ། 8468 སཱ་མནྟ་ཀཱུ་ཊ་ཝཎྞ་ནཱ། |
| 2101 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 2102 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (དཱི་གྷ) 2103 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་པཱ་ལི། | 2201 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 2202 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (དཱི་གྷ) 2203 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 2301 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2302 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (དཱི་གྷ) 2303 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2304 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 2305 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༢ | |
| 3101 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3102 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3103 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། | 3201 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 3202 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 3203 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 3204 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 3301 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3302 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3303 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 4101 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4102 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4103 ཁནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4104 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4105 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4201 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4202 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4203 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4204 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4205 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4301 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4302 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4303 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4304 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4305 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | |
| 5101 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5102 དུ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5103 ཏི་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5104 ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5105 པཉྩ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5106 ཆཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5107 སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5108 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5109 ན་ཝ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5110 ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5111 ཨེ་ཀཱ་ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། | 5201 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5202 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5203 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5204 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 5301 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5302 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5303 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5304 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 6101 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་པཱ་ལི། 6102 དྷམྨ་པ་ད་པཱ་ལི། 6103 ཨུ་དཱ་ན་པཱ་ལི། 6104 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་པཱ་ལི། 6105 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 6106 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6107 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6108 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6109 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6110 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 6111 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 6112 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་པཱ་ལི། 6113 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་པཱ་ལི། 6114 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 6115 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 6116 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6117 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6118 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་པཱ་ལི། 6119 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་པཱ་ལི། 6120 མི་ལིནྡ་པཉྷ་པཱ་ལི། 6121 པེ་ཊ་ཀོ་པ་དེ་ས་པཱ་ལི། | 6201 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6202 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6203 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6204 ཨུ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6205 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6206 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6207 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6208 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6209 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6210 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6211 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6212 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6213 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6214 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6215 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6216 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6217 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6218 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6219 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༣ 6220 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༤ 6221 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༥ 6222 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༦ 6223 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༧ 6224 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6225 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6226 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6227 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6228 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 6301 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 6302 ནེཏྟི་ཝི་བྷཱི་ནཱི། | |
| 7101 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་པཱ་ལི། 7102 ཝི་བྷངྒ་པཱ་ལི། 7103 དྷཱ་ཏུ་ཀ་ཐཱ་པཱ་ལི། 7104 པུགྒ་ལ་པཉྙཏྟི་པཱ་ལི། 7105 ཀ་ཐཱ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 7106 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 7107 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 7108 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༣ 7109 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 7110 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 7111 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༣ 7112 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༤ 7113 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༥ | 7201 དྷམྨ་སངྒ་ཎི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7202 སམྨོ་ཧ་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7203 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 7301 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7302 ཝི་བྷངྒ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7303 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7304 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7305 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7306 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་རོ་ནཱ་མ་རཱུ་པ་པ་རི་ཙྪེ་དོ། 7307 ཨ་བྷི་དྷམྨཏྠ་སངྒ་ཧོ། 7308 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་ར་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 7309 ཨ་བྷི་དྷམྨ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། | |
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| Kinh điển Pali | Chú giải | Phụ chú giải | Khác |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Tạng Luật) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 1 1202 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 2 1203 Chú Giải Pācittiya 1204 Chú Giải Mahāvagga (Tạng Luật) 1205 Chú Giải Cūḷavagga 1206 Chú Giải Parivāra | 1301 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 1 1302 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 2 1303 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Chú Giải Vinayasaṅgaha 1403 Phụ Chú Giải Vajirabuddhi 1404 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 1 1405 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 2 1406 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 1 1407 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 2 1408 Phụ Chú Giải Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 1 1411 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Thanh Tịnh Đạo - 1 8402 Thanh Tịnh Đạo - 2 8403 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 1 8404 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 2 8405 Lời Tựa Thanh Tịnh Đạo 8406 Trường Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8407 Trung Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8408 Tương Ưng Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8409 Tăng Chi Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8410 Tạng Luật (Vấn Đáp) 8411 Tạng Vi Diệu Pháp (Vấn Đáp) 8412 Chú Giải (Vấn Đáp) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Phụ Chú Giải Namakkāra 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Phụ Chú Giải Abhidhānappadīpikā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Phụ Chú Giải Subodhālaṅkāra 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8444 Mahārahanīti 8445 Dhammanīti 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8450 Cāṇakyanīti 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Phụ Chú Giải Milinda 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Trường Bộ) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2202 Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2203 Chú Giải Pāthikavagga | 2301 Phụ Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2302 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2303 Phụ Chú Giải Pāthikavagga 2304 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 1 2305 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 1 3202 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 2 3203 Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3204 Chú Giải Uparipaṇṇāsa | 3301 Phụ Chú Giải Mūlapaṇṇāsa 3302 Phụ Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3303 Phụ Chú Giải Uparipaṇṇāsa | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Tương Ưng Bộ) | 4201 Chú Giải Sagāthāvagga 4202 Chú Giải Nidānavagga 4203 Chú Giải Khandhavagga 4204 Chú Giải Saḷāyatanavagga 4205 Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | 4301 Phụ Chú Giải Sagāthāvagga 4302 Phụ Chú Giải Nidānavagga 4303 Phụ Chú Giải Khandhavagga 4304 Phụ Chú Giải Saḷāyatanavagga 4305 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Chú Giải Ekakanipāta 5202 Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5203 Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5204 Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | 5301 Phụ Chú Giải Ekakanipāta 5302 Phụ Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5303 Phụ Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5304 Phụ Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi - 1 6111 Apadāna Pāḷi - 2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi - 1 6115 Jātaka Pāḷi - 2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Chú Giải Khuddakapāṭha 6202 Chú Giải Dhammapada - 1 6203 Chú Giải Dhammapada - 2 6204 Chú Giải Udāna 6205 Chú Giải Itivuttaka 6206 Chú Giải Suttanipāta - 1 6207 Chú Giải Suttanipāta - 2 6208 Chú Giải Vimānavatthu 6209 Chú Giải Petavatthu 6210 Chú Giải Theragāthā - 1 6211 Chú Giải Theragāthā - 2 6212 Chú Giải Therīgāthā 6213 Chú Giải Apadāna - 1 6214 Chú Giải Apadāna - 2 6215 Chú Giải Buddhavaṃsa 6216 Chú Giải Cariyāpiṭaka 6217 Chú Giải Jātaka - 1 6218 Chú Giải Jātaka - 2 6219 Chú Giải Jātaka - 3 6220 Chú Giải Jātaka - 4 6221 Chú Giải Jātaka - 5 6222 Chú Giải Jātaka - 6 6223 Chú Giải Jātaka - 7 6224 Chú Giải Mahāniddesa 6225 Chú Giải Cūḷaniddesa 6226 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 1 6227 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 2 6228 Chú Giải Nettippakaraṇa | 6301 Phụ Chú Giải Nettippakaraṇa 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi - 1 7107 Yamaka Pāḷi - 2 7108 Yamaka Pāḷi - 3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi - 1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi - 2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi - 3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi - 4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi - 5 | 7201 Chú Giải Dhammasaṅgaṇi 7202 Chú Giải Sammohavinodanī 7203 Chú Giải Pañcapakaraṇa | 7301 Phụ Chú Giải Gốc Dhammasaṅgaṇī 7302 Phụ Chú Giải Gốc Vibhaṅga 7303 Phụ Chú Giải Gốc Pañcapakaraṇa 7304 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Dhammasaṅgaṇī 7305 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Pañcapakaraṇa 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Phụ Chú Giải Cổ Điển Abhidhammāvatāra 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |