| বাংলা | |||
| পালি | অট্ঠকথা | টীকা | অন্ন |
| 1101 পারাজিক পালি 1102 পাচিত্তিয় পালি 1103 মহাবগ্গ পালি (বিনয়) 1104 চূলবগ্গ পালি 1105 পরিবার পালি | 1201 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-১ 1202 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-২ 1203 পাচিত্তিয় অট্ঠকথা 1204 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (বিনয়) 1205 চূলবগ্গ অট্ঠকথা 1206 পরিবার অট্ঠকথা | 1301 সারত্থদীপনী টীকা-১ 1302 সারত্থদীপনী টীকা-২ 1303 সারত্থদীপনী টীকা-৩ | 1401 দ্বেমাতিকাপালি 1402 বিনয়সংগহ অট্ঠকথা 1403 বজিরবুদ্ধি টীকা 1404 বিমতিবিনোদনী টীকা-১ 1405 বিমতিবিনোদনী টীকা-২ 1406 বিনয়ালংকার টীকা-১ 1407 বিনয়ালংকার টীকা-২ 1408 কঙ্খাবিতরণীপুরাণ টীকা 1409 বিনয়বিনিচ্ছয়-উত্তরবিনিচ্ছয় 1410 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-১ 1411 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-২ 1412 পাচিত্যাদিযোজনাপালি 1413 খুদ্ধসিক্খা-মূলসিক্খা 8401 বিসুদ্ধিমগ্গ-১ 8402 বিসুদ্ধিমগ্গ-২ 8403 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-১ 8404 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-২ 8405 বিসুদ্ধিমগ্গ নিদানকথা 8406 দীঘনিকায় (পু-বি) 8407 মজ্ঝিমনিকায় (পু-বি) 8408 সংযুত্তনিকায় (পু-বি) 8409 অঙ্গুত্তরনিকায় (পু-বি) 8410 বিনয়পিটক (পু-বি) 8411 অভিধম্মপিটক (পু-বি) 8412 অট্ঠকথা (পু-বি) 8413 নিরুত্তিদীপনী 8414 পরমত্থদীপনী সংগহমহাটীকাপাঠ 8415 অনুদীপনীপাঠ 8416 পট্ঠানুদ্দেস দীপনীপাঠ 8417 নমক্কারটীকা 8418 মহাপণামপাঠ 8419 লক্খণাতো বুদ্ধথোমনাগাথা 8420 সুতবন্দনা 8421 কমলাঞ্জলি 8422 জিনালংকার 8423 পজ্জমধু 8424 বুদ্ধগুণগাথাবলী 8425 চূলগন্থবংস 8426 মহাবংস 8427 সাসনবংস 8428 কচ্চায়নব্যাকরণং 8429 মোগ্গল্লানব্যাকরণং 8430 সদ্দনীতিপ্পকরণং (পদমালা) 8431 সদ্দনীতিপ্পকরণং (ধাতুমালা) 8432 পদরূপসিদ্ধি 8433 মোগ্গল্লানপঞ্চিকা 8434 পযোগসিদ্ধিপাঠ 8435 বুত্তোদয়পাঠ 8436 অভিধানপ্পদীপিকাপাঠ 8437 অভিধানপ্পদীপিকাটীকা 8438 সুবোধালংকারপাঠ 8439 সুবোধালংকারটীকা 8440 বালাবতার গণ্ঠিপদত্থবিনিচ্ছয়সার 8441 লোকনীতি 8442 সুত্তন্তনীতি 8443 সূরস্সতীনীতি 8444 মহারহনীতি 8445 ধম্মনীতি 8446 কবিদপ্পণনীতি 8447 নীতিমঞ্জরী 8448 নরদক্খদীপনী 8449 চতুরারক্খদীপনী 8450 চাণক্যনীতি 8451 রসবাহিনী 8452 সীমাবিসোধনীপাঠ 8453 বেস্সন্তরগীতি 8454 মোগ্গল্লান বুত্তিবিবরণপঞ্চিকা 8455 থূপবংস 8456 দাঠাবংস 8457 ধাতুপাঠবিলাসিনিয়া 8458 ধাতুবংস 8459 হত্থবনগল্লবিহারবংস 8460 জিনচরিতয় 8461 জিনবংসদীপং 8462 তেলকটাহগাথা 8463 মিলিদটীকা 8464 পদমঞ্জরী 8465 পদসাধনং 8466 সদ্দবিন্দুপকরণং 8467 কচ্চায়নধাতুমঞ্জুসা 8468 সামন্তকূটবণ্ণনা |
| 2101 সীলক্খন্ধবগ্গ পালি 2102 মহাবগ্গ পালি (দীঘ) 2103 পাথিকবগ্গ পালি | 2201 সীলক্খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 2202 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (দীঘ) 2203 পাথিকবগ্গ অট্ঠকথা | 2301 সীলক্খন্ধবগ্গ টীকা 2302 মহাবগ্গ টীকা (দীঘ) 2303 পাথিকবগ্গ টীকা 2304 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-১ 2305 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-২ | |
| 3101 মূলপণ্ণাস পালি 3102 মজ্ঝিমপণ্ণাস পালি 3103 উপরিপণ্ণাস পালি | 3201 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-১ 3202 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-২ 3203 মজ্ঝিমপণ্ণাস অট্ঠকথা 3204 উপরিপণ্ণাস অট্ঠকথা | 3301 মূলপণ্ণাস টীকা 3302 মজ্ঝিমপণ্ণাস টীকা 3303 উপরিপণ্ণাস টীকা | |
| 4101 সগাথাবগ্গ পালি 4102 নিদানবগ্গ পালি 4103 খন্ধবগ্গ পালি 4104 সলায়তনবগ্গ পালি 4105 মহাবগ্গ পালি (সংযুত্ত) | 4201 সগাথাবগ্গ অট্ঠকথা 4202 নিদানবগ্গ অট্ঠকথা 4203 খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 4204 সলায়তনবগ্গ অট্ঠকথা 4205 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (সংযুত্ত) | 4301 সগাথাবগ্গ টীকা 4302 নিদানবগ্গ টীকা 4303 খন্ধবগ্গ টীকা 4304 সলায়তনবগ্গ টীকা 4305 মহাবগ্গ টীকা (সংযুত্ত) | |
| 5101 এককনিপাত পালি 5102 দুকনিপাত পালি 5103 তিকনিপাত পালি 5104 চতুক্কনিপাত পালি 5105 পঞ্চকনিপাত পালি 5106 ছক্কনিপাত পালি 5107 সত্তকনিপাত পালি 5108 অট্ঠকাদিনিপাত পালি 5109 নবকনিপাত পালি 5110 দশকনিপাত পালি 5111 একাদশকনিপাত পালি | 5201 এককনিপাত অট্ঠকথা 5202 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত অট্ঠকথা 5203 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত অট্ঠকথা 5204 অট্ঠকাদিনিপাত অট্ঠকথা | 5301 এককনিপাত টীকা 5302 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত টীকা 5303 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত টীকা 5304 অট্ঠকাদিনিপাত টীকা | |
| 6101 খুদ্ধকপাঠ পালি 6102 ধম্মপদ পালি 6103 উদান পালি 6104 ইতিবুত্তক পালি 6105 সুত্তনিপাত পালি 6106 বিমানবত্থু পালি 6107 পেতবত্থু পালি 6108 থেরগাথা পালি 6109 থেরীগাথা পালি 6110 অপদান পালি-১ 6111 অপদান পালি-২ 6112 বুদ্ধবংস পালি 6113 চরিয়াপিটক পালি 6114 জাতক পালি-১ 6115 জাতক পালি-২ 6116 মহানিদ্দেস পালি 6117 চূলনিদ্দেস পালি 6118 পটিসম্ভিদামগ্গ পালি 6119 নেত্তিপ্পকরণ পালি 6120 মিলিন্দপঞ্হ পালি 6121 পেটকোপদেস পালি | 6201 খুদ্ধকপাঠ অট্ঠকথা 6202 ধম্মপদ অট্ঠকথা-১ 6203 ধম্মপদ অট্ঠকথা-২ 6204 উদান অট্ঠকথা 6205 ইতিবুত্তক অট্ঠকথা 6206 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-১ 6207 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-২ 6208 বিমানবত্থু অট্ঠকথা 6209 পেতবত্থু অট্ঠকথা 6210 থেরগাথা অট্ঠকথা-১ 6211 থেরগাথা অট্ঠকথা-২ 6212 থেরীগাথা অট্ঠকথা 6213 অপদান অট্ঠকথা-১ 6214 অপদান অট্ঠকথা-২ 6215 বুদ্ধবংস অট্ঠকথা 6216 চরিয়াপিটক অট্ঠকথা 6217 জাতক অট্ঠকথা-১ 6218 জাতক অট্ঠকথা-২ 6219 জাতক অট্ঠকথা-৩ 6220 জাতক অট্ঠকথা-৪ 6221 জাতক অট্ঠকথা-৫ 6222 জাতক অট্ঠকথা-৬ 6223 জাতক অট্ঠকথা-৭ 6224 মহানিদ্দেস অট্ঠকথা 6225 চূলনিদ্দেস অট্ঠকথা 6226 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-১ 6227 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-২ 6228 নেত্তিপ্পকরণ অট্ঠকথা | 6301 নেত্তিপ্পকরণ টীকা 6302 নেত্তিবিভাবিনী | |
| 7101 ধম্মসংগণী পালি 7102 বিভঙ্গ পালি 7103 ধাতুকথা পালি 7104 পুগ্গলপঞ্ঞাত্তি পালি 7105 কথাবত্থু পালি 7106 যমক পালি-১ 7107 যমক পালি-২ 7108 যমক পালি-৩ 7109 পট্ঠান পালি-১ 7110 পট্ঠান পালি-২ 7111 পট্ঠান পালি-৩ 7112 পট্ঠান পালি-৪ 7113 পট্ঠান পালি-৫ | 7201 ধম্মসংগণি অট্ঠকথা 7202 সম্মোহবিনোদনী অট্ঠকথা 7203 পঞ্চপকরণ অট্ঠকথা | 7301 ধম্মসংগণী-মূলটীকা 7302 বিভঙ্গ-মূলটীকা 7303 পঞ্চপকরণ-মূলটীকা 7304 ধম্মসংগণী-অনুটীকা 7305 পঞ্চপকরণ-অনুটীকা 7306 অভিধম্মাবতারো-নামরূপপরিচ্ছেদো 7307 অভিধম্মত্থসংগহো 7308 অভিধম্মাবতার-পুরাণটীকা 7309 অভিধম্মমাতিকাপালি | |
| 中文 | |||
| 巴利 | 義註 | 複註 | 藏外典籍 |
| 1101 巴拉基咖(波羅夷) 1102 巴吉帝亞(波逸提) 1103 大品(律藏) 1104 小品 1105 附隨 | 1201 巴拉基咖(波羅夷)義註-1 1202 巴拉基咖(波羅夷)義註-2 1203 巴吉帝亞(波逸提)義註 1204 大品義註(律藏) 1205 小品義註 1206 附隨義註 | 1301 心義燈-1 1302 心義燈-2 1303 心義燈-3 | 1401 疑惑度脫 1402 律攝註釋 1403 金剛智疏 1404 疑難解除疏-1 1405 疑難解除疏-2 1406 律莊嚴疏-1 1407 律莊嚴疏-2 1408 古老解惑疏 1409 律抉擇-上抉擇 1410 律抉擇疏-1 1411 律抉擇疏-2 1412 巴吉帝亞等啟請經 1413 小戒學-根本戒學 8401 清淨道論-1 8402 清淨道論-2 8403 清淨道大複註-1 8404 清淨道大複註-2 8405 清淨道論導論 8406 長部問答 8407 中部問答 8408 相應部問答 8409 增支部問答 8410 律藏問答 8411 論藏問答 8412 義注問答 8413 語言學詮釋手冊 8414 勝義顯揚 8415 隨燈論誦 8416 發趣論燈論 8417 禮敬文 8418 大禮敬文 8419 依相讚佛偈 8420 經讚 8421 蓮花供 8422 勝者莊嚴 8423 語蜜 8424 佛德偈集 8425 小史 8427 佛教史 8426 大史 8429 目犍連文法 8428 迦旃延文法 8430 文法寶鑑(詞幹篇) 8431 文法寶鑑(詞根篇) 8432 詞形成論 8433 目犍連五章 8434 應用成就讀本 8435 音韻論讀本 8436 阿毗曇燈讀本 8437 阿毗曇燈疏 8438 妙莊嚴論讀本 8439 妙莊嚴論疏 8440 初學入門義抉擇精要 8446 詩王智論 8447 智論花鬘 8445 法智論 8444 大羅漢智論 8441 世間智論 8442 經典智論 8443 勇士百智論 8450 考底利耶智論 8448 人眼燈 8449 四護衛燈 8451 妙味之流 8452 界清淨 8453 韋桑達拉頌 8454 目犍連語釋五章 8455 塔史 8456 佛牙史 8457 詞根讀本注釋 8458 舍利史 8459 象頭山寺史 8460 勝者行傳 8461 勝者宗燈 8462 油鍋偈 8463 彌蘭王問疏 8464 詞花鬘 8465 詞成就論 8466 正理滴論 8467 迦旃延詞根注 8468 邊境山注釋 |
| 2101 戒蘊品 2102 大品(長部) 2103 波梨品 | 2201 戒蘊品註義註 2202 大品義註(長部) 2203 波梨品義註 | 2301 戒蘊品疏 2302 大品複註(長部) 2303 波梨品複註 2304 戒蘊品新複註-1 2305 戒蘊品新複註-2 | |
| 3101 根本五十經 3102 中五十經 3103 後五十經 | 3201 根本五十義註-1 3202 根本五十義註-2 3203 中五十義註 3204 後五十義註 | 3301 根本五十經複註 3302 中五十經複註 3303 後五十經複註 | |
| 4101 有偈品 4102 因緣品 4103 蘊品 4104 六處品 4105 大品(相應部) | 4201 有偈品義注 4202 因緣品義注 4203 蘊品義注 4204 六處品義注 4205 大品義注(相應部) | 4301 有偈品複註 4302 因緣品註 4303 蘊品複註 4304 六處品複註 4305 大品複註(相應部) | |
| 5101 一集經 5102 二集經 5103 三集經 5104 四集經 5105 五集經 5106 六集經 5107 七集經 5108 八集等經 5109 九集經 5110 十集經 5111 十一集經 | 5201 一集義註 5202 二、三、四集義註 5203 五、六、七集義註 5204 八、九、十、十一集義註 | 5301 一集複註 5302 二、三、四集複註 5303 五、六、七集複註 5304 八集等複註 | |
| 6101 小誦 6102 法句經 6103 自說 6104 如是語 6105 經集 6106 天宮事 6107 餓鬼事 6108 長老偈 6109 長老尼偈 6110 譬喻-1 6111 譬喻-2 6112 諸佛史 6113 所行藏 6114 本生-1 6115 本生-2 6116 大義釋 6117 小義釋 6118 無礙解道 6119 導論 6120 彌蘭王問 6121 藏釋 | 6201 小誦義注 6202 法句義注-1 6203 法句義注-2 6204 自說義注 6205 如是語義註 6206 經集義注-1 6207 經集義注-2 6208 天宮事義注 6209 餓鬼事義注 6210 長老偈義注-1 6211 長老偈義注-2 6212 長老尼義注 6213 譬喻義注-1 6214 譬喻義注-2 6215 諸佛史義注 6216 所行藏義注 6217 本生義注-1 6218 本生義注-2 6219 本生義注-3 6220 本生義注-4 6221 本生義注-5 6222 本生義注-6 6223 本生義注-7 6224 大義釋義注 6225 小義釋義注 6226 無礙解道義注-1 6227 無礙解道義注-2 6228 導論義注 | 6301 導論複註 6302 導論明解 | |
| 7101 法集論 7102 分別論 7103 界論 7104 人施設論 7105 論事 7106 雙論-1 7107 雙論-2 7108 雙論-3 7109 發趣論-1 7110 發趣論-2 7111 發趣論-3 7112 發趣論-4 7113 發趣論-5 | 7201 法集論義註 7202 分別論義註(迷惑冰消) 7203 五部論義註 | 7301 法集論根本複註 7302 分別論根本複註 7303 五論根本複註 7304 法集論複註 7305 五論複註 7306 阿毘達摩入門 7307 攝阿毘達磨義論 7308 阿毘達摩入門古複註 7309 阿毘達摩論母 | |
| English | |||
| Pali Canon | Commentaries | Sub-commentaries | Other |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
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| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| हिंदी | |||
| पाली कैनन | कमेंट्री | उप-टिप्पणियाँ | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळि 1102 पाचित्तिय पाळि 1103 महावग्ग पाळि (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळि 1105 परिवार पाळि | 1201 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-1 1202 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-2 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-1 1302 सारत्थदीपनी टीका-2 1303 सारत्थदीपनी टीका-3 | 1401 द्वेमातिकापाळि 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-1 1405 विमतिविनोदनी टीका-2 1406 विनयालंकार टीका-1 1407 विनयालंकार टीका-2 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-1 1411 विनयविनिच्छय टीका-2 1412 पाचित्यादियोजनापाळि 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-1 8402 विसुद्धिमग्ग-2 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-1 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-2 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अङ्गुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी सङ्गहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवन्दना 8421 कमलाञ्जलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगन्थवंस 8427 सासनवंस 8426 महावंस 8429 मोग्गल्लानब्याकरणं 8428 कच्चायनब्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपञ्चिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गण्ठिपदत्थविनिच्छयसार 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमञ्जरी 8445 धम्मनीति 8444 महारहनीति 8441 लोकनीति 8442 सुत्तन्तनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8450 चाणक्यनीति 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8451 रसवाहिनी 8452 सीमविसोधनीपाठ 8453 वेस्सन्तरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपञ्चिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमञ्जरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिन्दुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमञ्जुसा 8468 सामन्तकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खन्धवग्ग पाळि 2102 महावग्ग पाळि (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळि | 2201 सीलक्खन्धवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खन्धवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-1 2305 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-2 | |
| 3101 मूलपण्णास पाळि 3102 मज्झिमपण्णास पाळि 3103 उपरिपण्णास पाळि | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-1 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-2 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळि 4102 निदानवग्ग पाळि 4103 खन्धवग्ग पाळि 4104 सळायतनवग्ग पाळि 4105 महावग्ग पाळि (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खन्धवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खन्धवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळि 5102 दुकनिपात पाळि 5103 तिकनिपात पाळि 5104 चतुक्कनिपात पाळि 5105 पञ्चकनिपात पाळि 5106 छक्कनिपात पाळि 5107 सत्तकनिपात पाळि 5108 अट्ठकादिनिपात पाळि 5109 नवकनिपात पाळि 5110 दसकनिपात पाळि 5111 एकादसकनिपात पाळि | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळि 6102 धम्मपद पाळि 6103 उदान पाळि 6104 इतिवुत्तक पाळि 6105 सुत्तनिपात पाळि 6106 विमानवत्थु पाळि 6107 पेतवत्थु पाळि 6108 थेरगाथा पाळि 6109 थेरीगाथा पाळि 6110 अपदान पाळि-1 6111 अपदान पाळि-2 6112 बुद्धवंस पाळि 6113 चरियापिटक पाळि 6114 जातक पाळि-1 6115 जातक पाळि-2 6116 महानिद्देस पाळि 6117 चूळनिद्देस पाळि 6118 पटिसम्भिदामग्ग पाळि 6119 नेत्तिप्पकरण पाळि 6120 मिलिन्दपञ्ह पाळि 6121 पेटकोपदेस पाळि | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-1 6203 धम्मपद अट्ठकथा-2 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-1 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-2 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-1 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-2 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-1 6214 अपदान अट्ठकथा-2 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-1 6218 जातक अट्ठकथा-2 6219 जातक अट्ठकथा-3 6220 जातक अट्ठकथा-4 6221 जातक अट्ठकथा-5 6222 जातक अट्ठकथा-6 6223 जातक अट्ठकथा-7 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-1 6227 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-2 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसङ्गणी पाळि 7102 विभङ्ग पाळि 7103 धातुकथा पाळि 7104 पुग्गलपञ्ञत्ति पाळि 7105 कथावत्थु पाळि 7106 यमक पाळि-1 7107 यमक पाळि-2 7108 यमक पाळि-3 7109 पट्ठान पाळि-1 7110 पट्ठान पाळि-2 7111 पट्ठान पाळि-3 7112 पट्ठान पाळि-4 7113 पट्ठान पाळि-5 | 7201 धम्मसङ्गणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पञ्चपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसङ्गणी-मूलटीका 7302 विभङ्ग-मूलटीका 7303 पञ्चपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसङ्गणी-अनुटीका 7305 पञ्चपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसङ्गहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळि | |
နမော တဿ ဘဂဝတော အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ उन भगवन्, अर्हत्, सम्यक्सम्बुद्ध को नमस्कार। အဘိဓာနပ္ပဒီပိကာ अभिधानप्पदीपिका ဗုဒ္ဓပ္ပဏာမော बुद्ध-प्रणाम ၁. १. တထာဂတော [Pg.1] ယော ကရုဏာကရော ကရော,ပယာတ’မောသဇ္ဇ သုခပ္ပဒံ ပဒံ; အကာ ပရတ္ထံ ကလိသမ္ဘဝေ ဘဝေ,နမာမိ တံ ကေဝလဒုက္ကရံ ကရံ. तथागत, जो करुणा की खान हैं, जिन्होंने मोक्ष रूपी सुखद पद को प्राप्त कर, इस पापमय संसार में दूसरों के हित के लिए अत्यंत कठिन कार्य किए, उन तथागत को मैं नमस्कार करता हूँ। ဓမ္မပ္ပဏာမော धम्म-प्रणाम ၂. २. အပူဇယုံ ယံ မုနိကုဉ္ဇရာ ဇရာ,ရုဇာဒိမုတ္တာ ယဟိမုတ္တရေ တရေ; ဌိတာ တိဝဋ္ဋမ္ဗုနိဓိံ နရာနရာ,တရိံသု တံ ဓမ္မမဃပ္ပဟံ ပဟံ. मुनिश्रेष्ठों ने जिसकी पूजा की, जो जरा और व्याधि आदि से मुक्त है, जिसमें स्थित होकर मनुष्य और अमनुष्य इस संसार-सागर को पार कर गए, उस पाप-नाशक धर्म की मैं वन्दना करता हूँ। သံဃပ္ပဏာမော संघ-प्रणाम ၃. ३. ဂတံ မုနိန္ဒော’ရသသူနုတံ နုတံ,သုပုညခေတ္တံ ဘုဝနေ သုတံ သုတံ; ဂဏမ္ပိ ပါဏီကတသံဝရံ ဝရံ,သဒါ ဂုဏောဃေန နိရန္တရ’န္တရံ. जो मुनीन्द्र के औरस पुत्रों के समान प्रशंसित हैं, जो संसार में अत्यंत प्रसिद्ध उत्तम पुण्यक्षेत्र हैं, जिन्होंने पूर्णतः इन्द्रिय-संयम किया है, उन गुणों के सागर श्रेष्ठ संघ को मैं सदा नमस्कार करता हूँ। ပဋိညာ प्रतिज्ञा ၄. ४. နာမလိင်္ဂေသု ကောသလ္လ, မတ္ထနိစ္ဆယကာရဏံ; ယတော မဟဗ္ဗလံ ဗုဒ္ဓ, ဝစနေ ပါဋဝတ္ထိနံ. नाम और लिंगों में कुशलता अर्थ के निश्चय का कारण है; क्योंकि बुद्ध-वचनों में निपुणता चाहने वालों के लिए यह महान बल है। ၅. ५. နာမလိင်္ဂါနျ’တော [Pg.2] ဗုဒ္ဓ, ဘာသိတဿာ’ရဟာနျ’ဟံ; ဒဿယန္တော ပကာသေဿ, မဘိဓာနပ္ပဒီပိကံ. इसलिए बुद्ध द्वारा भाषित वचनों के योग्य नाम और लिंगों को दिखाते हुए, मैं 'अभिधानप्पदीपिका' को प्रकाशित करूँगा। ပရိဘာသာ परिभाषा ၆. ६. ဘိယျော ရူပန္တရာ သာဟ, စရိယေန စ ကတ္ထစိ; ကွစာ’ ဟစ္စဝိဓာနေန ဉေယျံ ထီပုန္နပုံသကံ. प्रायः शब्द के रूप-परिवर्तन से, कहीं साहचर्य से और कहीं स्पष्ट विधान से स्त्रीलिंग, पुल्लिंग और नपुंसक लिंग को जानना चाहिए। ၇. ७. အဘိန္နလိင်္ဂါနံယေဝ, ဒွန္ဒော စ, လိင်္ဂဝါစကာ; ဂါထာပါဒန္တမဇ္ဈဋ္ဌာ, ပုဗ္ဗံ ယန္တျပရေ ပရံ. समान लिंग वालों का ही द्वन्द्व समास होता है; लिंगवाचक शब्द गाथा के चरणों के अंत, मध्य या आदि में स्थित होकर, कुछ पहले और कुछ बाद में आते हैं। ၈. ८. ပုမိတ္ထိယံ ပဒံ ဒွီသု, သဗ္ဗလိင်္ဂေ စ တီသွိတိ; အဘိဓာနန္တရာရမ္ဘေ, ဉေယျံ တွ’န္တ မထာဒိ စ. 'द्वि' शब्द पुल्लिंग और स्त्रीलिंग के लिए, और 'त्रि' शब्द तीनों लिंगों के लिए प्रयुक्त होता है; अभिधान के आरम्भ और अंत में 'अथ' और 'आदि' शब्दों को जानना चाहिए। ၉. ९. ဘိယျော ပယောဂ မာဂမ္မ, သောဂတေ အာဂမေ ကွစိ; နိဃဏ္ဍု ယုတ္တိ ဉ္စာနီယ, နာမလိင်္ဂံ ကထီယတီတိ. प्रायः प्रयोगों के आधार पर और कहीं बौद्ध आगमों के अनुसार, निघण्टु की पद्धति को अपनाकर यहाँ नाम और लिंग कहे जाते हैं। ၁. သဂ္ဂကဏ္ဍ १. स्वर्ग-काण्ड ၁. १. ဗုဒ္ဓေါ ဒသဗလော သတ္ထာ, သဗ္ဗညူ ဒွိပဒုတ္တမော; မုနိန္ဒော ဘဂဝါ နာထော, စက္ခုမ’င်္ဂီရသော မုနိ. बुद्ध, दशबल, शास्ता, सर्वज्ञ, द्विपदोत्तम, मुनीन्द्र, भगवान, नाथ, चक्षुमान, अंगीरस और मुनि। ၂. २. လောကနာထော’ နဓိဝရော, မဟေသိ စ ဝိနာယကော; သမန္တစက္ခု သုဂတော, ဘူရိပညော စ မာရဇိ. लोकनाथ, अनधिवर, महर्षि, विनायक, समन्तचक्षु, सुगत, भूरिप्रज्ञ और मारजित्। ၃. ३. နရသီဟော နရဝရော, ဓမ္မရာဇာ မဟာမုနိ; ဒေဝဒေဝေါ လောကဂရု, ဓမ္မဿာမီ တထာဂတော. नरसिंह, नरवर, धर्मराज, महामुनि, देवदेव, लोकगुरु, धर्मस्वामी और तथागत। ၄. ४. သယမ္ဘူ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ, ဝရပညော စ နာယကော; ဇိနော, သက္ကော တု သိဒ္ဓတ္ထော, သုဒ္ဓေါဒနိ စ ဂေါတမော. स्वयंभू, सम्यक्सम्बुद्ध, वरप्रज्ञ, नायक, जिन, शाक्य, सिद्धार्थ, शुद्धोदनि और गौतम। ၅. ५. သကျသီဟော တထာ သကျ, မုနိ စာဒိစ္စဗန္ဓု စ; शाक्यसिंह, शाक्यमुनि और आदित्यबन्धु। ၆. ६. မောက္ခော နိရောဓော နိဗ္ဗာနံ, ဒီပေါ တဏှက္ခယော ပရံ; တာဏံ လေဏ မရူပဉ္စ, သန္တံ သစ္စ မနာလယံ. मोक्ष, निरोध, निर्वाण, द्वीप, तृष्णाक्षय, पर, त्राण, लेण, अरूप, शान्त, सत्य और अनालय। ၇. ७. အသင်္ခတံ သိဝ မမတံ သုဒုဒ္ဒသံ,ပရာယဏံ သရဏ မနီတိကံ တထာ; အနာသဝံ ဓုဝ မနိဒဿနာ’ ကတာ,ပလောကိတံ နိပုဏ မနန္တ မက္ခရံ. असंस्कृत, शिव, अमृत, सुदुर्दर्श, परायण, शरण, अनीतिक, अनास्रव, ध्रुव, अनिदर्शन, अकृत, प्रलोकित, निपुण, अनन्त और अक्षर। ၈. ८. ဒုက္ခက္ခယော [Pg.3] ဗျာဗဇ္ဈဉ္စ, ဝိဝဋ္ဋံ ခေမ ကေဝလံ; အပဝဂ္ဂေါ ဝိရာဂေါ စ, ပဏီတ မစ္စုတံ ပဒံ. दुःखक्षय, अव्यापज्झ, विवर्त, क्षेम, केवल, अपवर्ग, विराग, प्रणीत और अच्युत पद। ၉. ९. ယောဂက္ခေမော ပါရ မပိ, မုတ္တိ သန္တိ ဝိသုဒ္ဓိယော; ဝိမုတျ’ သင်္ခတဓာတု, သုဒ္ဓိ နိဗ္ဗုတိယော သိယုံ. योगक्षेम, पार, मुक्ति, शान्ति, विशुद्धि, विमुक्ति, असंस्कृत धातु, शुद्धि और निवृत्ति। ၁၀. १०. ခီဏာသဝေါ တွ’သေက္ခော စ, ဝီတရာဂေါ တထာ’ ရဟာ; ဒေဝလောကော ဒိဝေါ သဂ္ဂေါ,တိဒိဝေါ တိဒသာလယော. क्षीणास्रव, अशैक्ष, वीतराग और अर्हत्। देवलोक, दिव, स्वर्ग, त्रिदिव और त्रिदशालय। ၁၁. ११. တိဒသာ တွ’မရာ ဒေဝါ, ဝိဗုဓာ စ သုဓာသိနော; သုရာ မရူ ဒိဝေါကာ စာ, မတပါ သဂ္ဂဝါသိနော. त्रिदश, अमर, देव, विबुध, सुधाशी, सुर, मरु, दिवौकस, अमृतपा और स्वर्गवासी। ၁၂. १२. နိဇ္ဇရာ’ နိမိသာ ဒိဗ္ဗာ, အပုမေ ဒေဝတာနိ စ ; निर्जर, अनिमिष और दिव्य; 'देवता' शब्द स्त्रीलिंग और नपुंसक लिंग में प्रयुक्त होता है। ၁၃. १३. သိဒ္ဓေါ ဘူတော စ ဂန္ဓဗ္ဗော, ဂုယှကော ယက္ခ ရက္ခသာ; ကုမ္ဘဏ္ဍော စ ပိသာစာ’ဒီ, နိဒ္ဒိဋ္ဌာ ဒေဝယောနိယော. सिद्ध, भूत, गन्धर्व, गुह्यक, यक्ष, राक्षस, कुम्भाण्ड और पिशाच आदि देव-योनियाँ कही गई हैं। ၁၄. १४. ပုဗ္ဗဒေဝါ သုရရိပူ, အသုရာ ဒါနဝါ ပုမေ; တဗ္ဗိသေသာ ပဟာရာဒေါ, သမ္ဗရော ဗလိအာဒယော. पूर्वदेव, सुररिपु, असुर और दानव (पुल्लिंग) हैं; उनके विशेष भेद पहाराद, संबर और बलि आदि हैं। ၁၅. १५. ပိတာမဟော ပိတာ ဗြဟ္မာ, လောကေသော ကမလာသနော; တထာ ဟိရညဂဗ္ဘော စ, သုရဇေဋ္ဌော ပဇာပတိ. पितामह, पिता, ब्रह्मा, लोकेश, कमलासन, हिरण्यगर्भ, सुरजेष्ठ और प्रजापति (ब्रह्मा के नाम हैं)। ၁၆. १६. ဝါသုဒေဝေါ ဟရိ ကဏှော, ကေသဝေါ စက္ကပါဏျ’ထ; မဟိဿရော သိဝေါ သူလီ, ဣဿရော ပသုပတျ’ပိ. वासुदेव, हरि, कण्ह (कृष्ण), केशव और चक्रपाणि; तथा महेश्वर, शिव, शूली, ईश्वर और पशुपति। ၁၇. १७. ဟရော ဝုတ္တော ကုမာရော တု, ခန္ဓော သတ္တိဓရော ဘဝေ; हर (शिव को) कहा गया है; कुमार, स्कन्ध और शक्तिधर (कार्तिकेय के नाम) हैं। ၁၈. १८. သက္ကော ပုရိန္ဒဒေါ ဒေဝ, ရာဇာ ဝဇိရပါဏိ စ; သုဇမ္ပတိ သဟဿက္ခော, မဟိန္ဒော ဝဇိရာဝုဓော. शक्र, पुरिन्दद, देवराज, वज्रपाणि, सुजम्पति, सहस्राक्ष, महेन्द्र और वज्रायुध (इन्द्र के नाम हैं)। ၁၉. १९. ဝါသဝေါ စ ဒသသတ, နယနော တိဒိဝါဓိဘူ; သုရနာထော စ ဝဇိရ, ဟတ္ထော စ ဘူတပတျ’ပိ. वासव, दशशतनयन (सहस्रनेत्र), त्रिदिवाधिभू, सुरनाथ, वज्रहस्त और भूतपति भी (इन्द्र के नाम हैं)। ၂၀. २०. မဃဝါ ကောသိယော ဣန္ဒော, ဝတြဘူ ပါကသာသနော; ဝိဍောဇော ထ သုဇာ တဿ, ဘရိယာ ထ ပုရံ ဘဝေ. मघवा, कोशिय, इन्द्र, वृत्रभू, पाकशासन और विडौज; सुजा उनकी भार्या (पत्नी) है और पुर (उनकी) नगरी है। ၂၁. २१. မသက္ကသာရာ [Pg.4] ဝဿောက, သာရာ စေဝါ’ မရာဝတီ; ဝေဇယန္တော တု ပါသာဒေါ,သုဓမ္မာ တု သဘာ မတာ. मसक्कसारा, वस्सोकसारा और अमरावती (इन्द्र की नगरी के नाम हैं); वैजयन्त (उनका) प्रासाद (महल) है और सुधर्मा (उनकी) सभा मानी गई है। ၂၂. २२. ဝေဇယန္တော ရထော တဿ,ဝုတ္တော မာတလိ သာရထိ; ဧရာဝဏော ဂဇော ပဏ္ဍု, ကမ္ဗလော တု သိလာသနံ. वैजयन्त उनका रथ है, मातलि सारथि कहा गया है; ऐरावण हाथी है और पाण्डुकम्बल (उनका) शिलासन (सिंहासन) है। ၂၃. २३. သုဝီရောစ္စာဒယော ပုတ္တာ, နန္ဒာ ပေါက္ခရဏီ ဘဝေ; နန္ဒနံ မိဿကံ စိတ္တ, လတာ ဖာရုသကံ ဝနာ. सुवीर, उच्च आदि (इन्द्र के) पुत्र हैं, नन्दा पुष्करिणी (पोखरा) है; नन्दन, मिस्सक, चित्तलता और फारुसक (स्वर्ग के) वन हैं। ၂၄. २४. အသနိ ဒွီသု ကုလိသံ, ဝဇိရံ ပုန္နပုံသကေ; အစ္ဆရာယောတ္ထိယံ ဝုတ္တာ, ရမ္ဘာ အလမ္ဗုသာဒယော; ဒေဝိတ္ထိယော ထ ဂန္ဓဗ္ဗာ, ပဉ္စသိခေါတိ အာဒယော. अशनि (दो लिंगों में), कुलिश और वज्र (पुल्लिंग और नपुंसक लिंग में) हैं; अप्सराएँ (स्त्रीलिंग में) रम्भा, अलम्बुसा आदि कही गई हैं; ये देव-स्त्रियाँ हैं और पञ्चशिख आदि गन्धर्व हैं। ၂၅. २५. ဝိမာနော နိတ္ထိယံ ဗျမှံ, ပီယူသံ တွမတံ သုဓာ; သိနေရု မေရု တိဒိဝါ, ဓာရော နေရု သုမေရု စ. विमान (स्त्रीलिंग को छोड़कर) और ब्यम्ह (देवों के आवास) हैं; पीयूष, अमृत और सुधा (अमृत के नाम) हैं; सिनेरु, मेरु, त्रिदिवाधार, नेरु और सुमेरु (मेरु पर्वत के नाम) हैं। ၂၆. २६. ယုဂန္ဓရော ဤသဓရော, ကရဝီကော သုဒဿနော; နေမိန္ဓရော ဝိနတကော, အဿကဏ္ဏော ကုလာစလာ. युगन्धर, ईसधर, करवीक, सुदर्शन, नेमिन्धर, विनतक और अश्वकर्ण—ये कुलाचल (सात पर्वत श्रेणियाँ) हैं। ၂၇. २७. မန္ဒာကိနီ တထာ’ကာသ, ဂင်္ဂါ သုရနဒီ ပျထ; मन्दाकिनी, आकाशगंगा और सुरनदी (देवों की नदी के नाम) हैं। ၂၈. २८. ကောဝိဠာရော တထာ ပါရိ, စ္ဆတ္တကော ပါရိဇာတကော; ကပ္ပရုက္ခော တု သန္တာနာ, ဒယော ဒေဝဒ္ဒုမာ သိယုံ. कोविळार, पारिच्छत्तक, पारिजातक, कप्परुक्ख (कल्पवृक्ष) और सन्तान आदि देववृक्ष हैं। ၂၉. २९. ပါစီ ပတီဈု’ ဒီစိ’တ္ထီ, ပုဗ္ဗ ပစ္ဆိမ ဥတ္တရာ; ဒိသာထ ဒက္ခိဏာ’ ပါစီ, ဝိဒိသာ’နုဒိသာ ဘဝေ. प्राची (पूर्व), प्रतीची (पश्चिम) और उदीची (उत्तर) स्त्रीलिंग में हैं; (इन्हें) पूर्व, पश्चिम और उत्तर (भी कहते हैं); दक्षिण और अवाची (दक्षिण के नाम) हैं; विदिशा और अनुदिशा (कोणों के नाम) हैं। ၃၀. ३०. ဧရာဝတော ပုဏ္ဍရီကော, ဝါမနော ကုမုဒေါ’ ဉ္ဇနော; ပုပ္ဖဒန္တော သဗ္ဗဘုမ္မော, သုပ္ပတီကော ဒိသာဂဇာ. ऐरावत, पुण्डरीक, वामन, कुमुद, अञ्जन, पुष्पदन्त, सार्वभौम और सुप्रतीक—ये (आठ) दिग्गज (दिशाओं के हाथी) हैं। ၃၁. ३१. ဓတရဋ္ဌော စ ဂန္ဓဗ္ဗာ, ဓိပေါ, ကုမ္ဘဏ္ဍသာမိ တု; ဝိရုဠှကော, ဝိရူပက္ခော, တု နာဂါဓိပတီရိတော. धतराष्ट्र गन्धर्वों का अधिपति है, विरूळ्हक कुम्भाण्डों का स्वामी है, और विरूपाक्ष नागों का अधिपति कहा गया है। ၃၂. ३२. ယက္ခာဓိပေါ ဝေဿဝဏော, ကုဝေရော နရဝါဟနော; အဠကာ ဠကမန္ဒာဿ, ပုရီ, ပဟရဏံ ဂဒါ; စတုဒ္ဒိသာန မဓိပါ, ပုဗ္ဗာဒီနံ ကမာ ဣမေ. यक्षों का अधिपति वेस्सवण (वैश्रवण), कुबेर और नरवाहन है; अलका या अलकमन्दा उसकी नगरी है और गदा (उसका) प्रहरण (शस्त्र) है; ये क्रमशः पूर्व आदि चारों दिशाओं के अधिपति हैं। ၃၃. ३३. ဇာတဝေဒေါ [Pg.5] သိခီ ဇောတိ, ပါဝကော ဒဟနော’ နလော; ဟုတာဝဟော’ စ္စိမာ ဓူမ, ကေတွ’ဂ္ဂိ ဂိနိ ဘာနုမာ. जातवेद, शिखी, ज्योति, पावक, दहन, अनल, हुतावह, अर्चिमा, धूमकेतु, अग्नि, गिणि और भानुमा (अग्नि के नाम हैं)। ၃၄. ३४. တေဇော ဓူမသိခေါ ဝါယု, သခေါ စ ကဏှဝတ္တနီ; ဝေဿာနရော ဟုတာသော ထ, သိခါဇာလ’စ္စိ စာပုမေ. तेज, धूमशिख, वायुसख, कृष्णवर्त्मनी, वैश्वानर और हुताश (अग्नि के नाम हैं); शिखा, ज्वाल और अर्चि पुल्लिंग में (ज्वाला के नाम) हैं। ၃၅. ३५. ဝိပ္ဖုလိင်္ဂံ ဖုလိင်္ဂဉ္စ, ဘသ္မာ တု သေဋ္ဌိ ဆာရိကာ; विप्फुलिङ्ग और फुलिङ्ग (चिनगारी के नाम) हैं; भस्म, सेट्ठि और छारिका (राख के नाम) हैं। ၃၆. ३६. ကုက္ကုဠော တု’ဏှဘသ္မသ္မိ, မင်္ဂါရော’လာတ မုမ္မုကံ ; သမိဓာ ဣဓုမံ စေ’ဓော, ဥပါဒါနံ တထိန္ဓနံ. कुक्कुळ उष्ण भस्म (तप्त राख) को कहते हैं; अङ्गार, अलात और मुम्मुक (अंगारे/लुकाठी के नाम) हैं; समिधा, इध्म और एध (ईंधन के नाम) हैं; उपादान और इन्धन भी (ईंधन के नाम) हैं। ၃၇. ३७. အထော’ဘာသော ပကာသော စာ,'လောကော’ဇ္ဇောတာ’တပါ သမာ; မာလုတော ပဝနော ဝါယု, ဝါတော’နိလ သမီရဏာ; ဂန္ဓဝါဟော တထာ ဝါယော, သမီရော စ သဒါဂတိ. ओभास (अवभास), प्रकाश, आलोक, उज्जोत (उद्योत) और आतप समान (अर्थ वाले) हैं; मालुत, पवन, वायु, वात, अनिल, समीरण, गन्धवह, वायो, समीर और सदागति (वायु के नाम हैं)। ၃၈. ३८. ဝါယုဘေဒါ ဣမေ ဆု’ဒ္ဓ, င်္ဂမော စာဓောဂမော တထာ; ကုစ္ဆိဋ္ဌော စ ကောဋ္ဌာသယော, အဿာသင်္ဂါနုသာရိနော. वायु के ये छह भेद हैं—उद्धंगम (ऊपर जाने वाली), अधोगम (नीचे जाने वाली), कुच्छिट्ठ (कुक्षिस्थ/पेट की), कोट्ठासय (कोष्ठस्थ/आंतों की), अस्सास (श्वास) और अङ्गानुसारिणी (अंगों में संचरण करने वाली)। ၃၉. ३९. အထော အပါနံ ပဿာသော,အဿာသော အာန မုစ္စတေ. अपान और प्रश्वास (बाहर निकलने वाली वायु) हैं; अस्सास (आश्वास) और आन (भीतर जाने वाली वायु) कहे जाते हैं। ၄၀. ४०. ဝေဂေါ ဇဝေါ ရယော ခိပ္ပံ, တု သီဃံ တုရိတံ လဟု; အာသု တုဏ္ဏ မရံ စာဝိ, လမ္ဗိတံ တုဝဋံပိ စ. वेग, जव, रय, क्षिप्र, शीघ्र, त्वरित, लघु, आशु, तुण्ण, अर, अविलम्बित और तुवट (ये सब शीघ्रता/वेग के वाचक हैं)। ၄၁. ४१. သတတံ နိစ္စ မဝိရတာ, နာရတ သန္တတ မနဝရတဉ္စ ဓုဝံ; ဘုသ မတိသယော စ ဒဠှံ, တိဗ္ဗေ’ကန္တာ’တိမတ္တ, ဗာဠှာနိ; ခိပ္ပာဒီ ပဏ္ဍကေ ဒဗ္ဗေ, ဒဗ္ဗဂါ တေသု ယေ တိသု. सतत, नित्य, अविरत, अनारत, सन्तत, अनवरत और ध्रुव (निरन्तर के वाचक हैं); भृश, अतिशय, दृढ़, तीव्र, एकान्त, अतिमात्र और बाळ्ह (अत्यधिक के वाचक हैं); क्षिप्र आदि शब्द द्रव्य (विशेष्य) के अनुसार तीनों लिंगों में होते हैं, अन्यथा नपुंसक लिंग में प्रयुक्त होते हैं। ၄၂. ४२. အဝိဂ္ဂဟော တု ကာမော စ, မနောဘူ မဒနော ဘဝေ; အန္တကော ဝသဝတ္တီ စ, ပါပိမာ စ ပဇာပတိ. अविग्रह, काम, मनोभू और मदन (कामदेव के नाम) हैं; अन्तक, वसवत्ती (वशवर्ती), पापिमा और प्रजापति (मार के नाम) हैं। ၄၃. ४३. ပမတ္တဗန္ဓု ကဏှော စ, မာရော နမုစိ, တဿ တု; တဏှာ’ရတီ ရဂါ ဓီတူ, ဟတ္ထီ တု ဂိရိမေခလော. प्रमत्तबन्धु, कण्ह (कृष्ण), मार और नमुचि (मार के नाम) हैं; तण्हा (तृष्णा), अरति और रगा (राग) उसकी पुत्रियाँ हैं; और गिरिमेखल (उसका) हाथी है। ၄၄. ४४. ယမရာဇာ စ ဝေသာယီ, ယမော’ဿ နယနာဝုဓံ; ဝေပစိတ္တိ ပုလောမော စ, ကိမ္ပုရိသော တု ကိန္နရော. यमराज और वैशायी (वैश्रवण), यम का अस्त्र नयनायुध (नेत्र-शस्त्र) है; वेपचित्ति और पुलोम (असुर), तथा किम्पुरुष और किन्नर हैं। ၄၅. ४५. အန္တလိက္ခံ ခ’မာဒိစ္စ, ပထော’ဗ္ဘံ ဂဂန’မ္ဗရံ; ဝေဟာသော စာနိလပထော, အာကာသော နိတ္ထိယံ နဘံ. अन्तरिक्ष, ख, आदित्यपथ, अभ्र, गगन, अम्बर, वेहास, अनिलपथ, आकाश और नभ (ये आकाश के पर्यायवाची हैं)। ၄၆. ४६. ဒေဝေါ [Pg.6] ဝေဟာယသော တာရာ,ပထော သုရပထော အဃံ. देव, विहायस, तारापथ, सुरपथ और अघ (ये भी आकाश के नाम हैं)। ၄၇. ४७. မေဃော ဝလာဟကော ဒေဝေါ, ပဇ္ဇုန္နော’မ္ဗုဓရော ဃနော; ဓာရာဓရော စ ဇီမူတော, ဝါရိဝါဟော တထာ’မ္ဗုဒေါ. मेघ, वलाहक, देव, पर्जन्य, अम्बुधर, घन, धाराधर, जीमूत, वारिवाह और अम्बुद (ये बादल के पर्यायवाची हैं)। ၄၈. ४८. အဗ္ဘံ တီသွထ ဝဿဉ္စ, ဝဿနံ ဝုဋ္ဌိ နာရိယံ; သတေရတာ’က္ခဏာ ဝိဇ္ဇု, ဝိဇ္ဇုတာ စာစိရပ္ပဘာ. अभ्र (तीनों लिंगों में), वर्ष, वर्षण और वृष्टि (स्त्रीलिंग); शतेरता, अक्षण, विज्जु, विद्युता और अचिरप्रभा (ये बिजली के नाम हैं)। ၄၉. ४९. မေဃနာဒေ တု ဓနိတံ, ဂဇ္ဇိတံ ရသိတာဒိ စ; ဣန္ဒာဝုဓံ ဣန္ဒဓနု, ဝါတက္ခိတ္တမ္ဗု သီကရော. मेघनाद, धनित, गर्जित और रसित (बादल की गरज); इन्द्रायुध और इन्द्रधनुष; वायु द्वारा उछाला गया जल 'सीकर' (फुहार) कहलाता है। ၅၀. ५०. အာသာရော ဓာရာ သမ္ပာတော,ကရကာ တု ဃနောပလံ; ဒုဒ္ဒိနံ မေဃစ္ဆန္နာဟေ, ပိဓာနံ တွပဓာရဏံ. आसार और धारासम्पात (मूसलाधार वर्षा); करका और घनोपल (ओले); मेघों से ढका हुआ दिन 'दुर्दिन' है; पिधान और अपधारण (आवरण/ढक्कन) हैं। ၅၁. ५१. တိရောဓာန’န္တရဓာနာ, ပိဓာန ဆာဒနာနိ စ; ဣန္ဒု စန္ဒော စ နက္ခတ္တ, ရာဇာ သောမော နိသာကရော. तिरोधान, अन्तर्धान, पिधान और छादन (ढकने के अर्थ में); इन्दु, चन्द्र, नक्षत्रराज, सोम और निशाकर (ये चन्द्रमा के नाम हैं)। ၅၂. ५२. ဩသဓီသော ဟိမရံသိ, သသင်္ကော စန္ဒိမာ သသီ; သီတရံသိ နိသာနာထော, ဥဠုရာဇာ စ မာ ပုမေ. ओषधीश, हिमरश्मि, शशांक, चन्द्रिमा, शशी, शीतरश्मि, निशानार्थ, उडुराज और 'मा' (पुल्लिंग) (ये भी चन्द्रमा के नाम हैं)। ၅၃. ५३. ကလာ သောဠသမော ဘာဂေါ, ဗိမ္ဗံ တု မဏ္ဍလံ ဘဝေ; အဍ္ဎော တွဒ္ဓေါ ဥပဍ္ဎော စ, ဝါ ခဏ္ဍံ သကလံ ပုမေ. कला (सोलहवाँ भाग), बिम्ब और मण्डल; अड्ड, अद्ध, उपड्ड, खण्ड और शकल (पुल्लिंग) (ये आधे या टुकड़े के अर्थ में हैं)। ၅၄. ५४. အဒ္ဓံ ဝုတ္တံ သမေ ဘာဂေ, ပသာဒေါ တု ပသန္နတာ; ကောမုဒီ စန္ဒိကာ ဇုဏှာ, ကန္တိ သောဘာ ဇုတိ စ္ဆဝိ. समान भाग को 'अद्ध' कहा गया है; प्रसाद और प्रसन्नता; कौमुदी, चन्द्रिका और जुण्हा (चाँदनी); कान्ति, शोभा, द्युति और छवि (ये चमक/सुन्दरता के नाम हैं)। ၅၅. ५५. ကလင်္ကော လဉ္ဆနံ လက္ခံ, အင်္ကော’ဘိညာဏ လက္ခဏံ; စိဟနံ စာပိ သောဘာ တု, ပရမာ သုသမာ ထ စ. कलंक, लांछन, लक्ष, अंक, अभिज्ञान, लक्षण और चिह्न (निशान के नाम); परम शोभा को 'सुषमा' कहते हैं। ၅၆. ५६. သီတံ ဂုဏေ, ဂုဏိလိင်္ဂါ, သီတ သိသိရ သီတလာ; ဟိမံ တုဟိန မုဿာဝေါ, နီဟာရော မဟိကာ ပျထ. गुण के अर्थ में 'शीत' (नपुंसक), विशेषण में शीत, शिशिर और शीतल; हिम, तुहिन, ओश (उस्साव), नीहार और महिका (ये पाले या ओस के नाम हैं)। ၅၇. ५७. နက္ခတ္တံ ဇောတိ ဘံ တာရာ, အပုမေ တာရကော’ဠု စ; नक्षत्र, ज्योति, भ, तारा, तारक और उडु (ये तारों के नाम हैं, 'तारा' स्त्रीलिंग को छोड़कर शेष नपुंसक या पुल्लिंग हैं)। ၅၈. ५८. အဿယုဇော ဘရဏိတ္ထီ, သကတ္တိကာ ရောဟိဏီ ပိစ; မိဂသိရ မဒ္ဒါ စ ပုနဗ္ဗသု, ဖုဿော စာသိလေသ’ပိ. अश्विनी (अस्सयुज), भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य और अश्लेषा। ၅၉. ५९. မာဃာ စ ဖဂ္ဂုနီ ဒွေ စ, ဟတ္ထာ စိတ္တာ စ သွာတိပိ; ဝိသာခါ’ နုရာဓာ ဇေဋ္ဌာ, မူလာ’ သာဠှာ ဒုဝေ တထာ. मघा, दो फाल्गुनी (पूर्वा और उत्तरा), हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल और दो आषाढ़ा (पूर्वा और उत्तरा)। ၆၀. ६०. သဝဏော [Pg.7] စ ဓနိဋ္ဌာ စ, သတဘိသဇော ပုဗ္ဗု’တ္တရဘဒ္ဒပဒါ; ရေဝတျပီတိ ကမတော, သတ္တာဓိကဝီသနက္ခတ္တာ. श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद और उत्तराभाद्रपद, तथा रेवती; इस क्रम से ये सत्ताईस (27) नक्षत्र हैं। ၆၁. ६१. သောဗ္ဘာနု ကထိတော ရာဟု, သူရာဒီ တု နဝဂ္ဂဟာ; ရာသိ မေသာဒိကော ဘဒ္ဒ, ပဒါ ပေါဋ္ဌပဒါ သမာ. स्वर्भानु को राहु कहा गया है, सूर्य आदि नौ ग्रह हैं; मेष आदि राशियाँ हैं; भाद्रपद और प्रोष्ठपद समान (एक ही महीने के नाम) हैं। ၆၂. ६२. အာဒိစ္စော သူရိယော သူရော, သတရံသိ ဒိဝါကရော; ဝေရောစနော ဒိနကရော, ဥဏှရံသိ ပဘင်္ကရော. आदित्य, सूर्य, सूर, शतरश्मि, दिवाकर, वैरोचन, दिनकर, उष्णरश्मि और प्रभाकर (ये सूर्य के नाम हैं)। ၆၃. ६३. အံသုမာလီ ဒိနပတိ, တပနော ရဝိ ဘာနုမာ; ရံသိမာ ဘာကရော ဘာနု, အက္ကော သဟဿရံသိ စ. अंशुमाली, दिनपति, तपन, रवि, भानुमान, रश्मिमान, भाकर, भानु, अर्क और सहस्ररश्मि (ये भी सूर्य के नाम हैं)। ၆၄. ६४. ရံသိ အာဘာ ပဘာ ဒိတ္တိ, ရုစိ ဘာ ဇုတိ ဒီဓိတိ; မရီစိ ဒွီသု ဘာနွံ’သု, မယူခေါ ကိရဏော ကရော. रश्मि, आभा, प्रभा, दीप्ति, रुचि, भा, द्युति, दीधिति, मरीचि (दो लिंगों में), अंशु, मयूख, किरण और कर (ये किरण के पर्यायवाची हैं)। ၆၅. ६५. ပရိဓိ ပရိဝေသော ထ, မရီစိ မိဂတဏှိကာ; သူရဿောဒယတော ပုဗ္ဗု’, ဋ္ဌိတရံသိ သိယာ’ ရုဏော. परिधि और परिवेश (मण्डल/प्रभामण्डल); मरीचिका और मृगतृष्णिका (मृगतृष्णा); सूर्योदय से पूर्व उदित होने वाली रश्मि 'अरुण' कहलाती है। ၆၆. ६६. ကာလော’ဒ္ဓါ သမယော ဝေလာ,တဗ္ဗိသေသာ ခဏာဒယော; ခဏော ဒသစ္ဆရာကာလော,ခဏာ ဒသ လယော ဘဝေ. काल, अध्वा, समय और वेला (समय के नाम); उसके विशेष भेद क्षण आदि हैं; दस अक्षरों (या चुटकियों) के उच्चारण का समय 'क्षण' है, और दस क्षणों का एक 'लय' होता है। ၆၇. ६७. လယာ ဒသ ခဏလယော,မုဟုတ္တော တေ သိယာ ဒသ; ဒသ ခဏမုဟုတ္တော တေ, ဒိဝသော တု အဟံ ဒိနံ. दस लय का एक 'क्षणलय' होता है, और वे (क्षणलय) दस हों तो एक 'मुहूर्त' होता है; दस क्षण-मुहूर्त का एक 'दिवस', 'अह' या 'दिन' होता है। ၆၈. ६८. ပဘာတဉ္စ ဝိဘာတဉ္စ, ပစ္စူသော ကလ္လ မပျထ; အဘိဒေါသော ပဒေါသော ထ,သာယော သဉ္ဈာ ဒိနစ္စယော. प्रभात, विभात, प्रत्यूष और कल्य (प्रातःकाल); अभिदोष, प्रदोष, सायं, संध्या और दिनात्यय (सायंकाल)। ၆၉. ६९. နိသာ စ ရဇနီ ရတ္တိ, တိယာမာ သံဝရီ ဘဝေ; ဇုဏှာ တု စန္ဒိကာယုတ္တာ, တမုဿန္နာ တိမိသိကာ. निशा, रजनी, रात्रि, त्रियामा और शर्वरी (रात के नाम); चाँदनी से युक्त रात 'जुण्हा' (ज्योत्स्ना) है, और घने अन्धकार वाली रात 'तिमिसिका' (तमिस्रा) है। ၇၀. ७०. နိသီထော မဇ္ဈိမာ ရတ္တိ, အဍ္ဎရတ္တော မဟာနိသာ; အန္ဓကာရော တမော နိတ္ထီ, တိမိသံ တိမိရံ မတံ. निशीथ, मध्यरात्रि, अर्धरात्र और महानिशा (आधी रात के नाम); अन्धकार, तम, तिमिस और तिमिर (अँधेरे के नाम)। ၇၁. ७१. စတုရင်္ဂတမံ ဧဝံ, ကာဠပက္ခစတုဒ္ဒသီ; ဝနသဏ္ဍော ဃနော မေဃ, ပဋလံ စာ’ဍ္ဎရတ္တိ စ. कृष्णपक्ष की चतुर्दशी, सघन वनखण्ड, मेघों की घटा और अर्धरात्रि—इन चारों के मिलने से 'चतुरङ्ग-तम' (चार अंगों वाला अन्धकार) होता है। ၇၂. ७२. အန္ဓတမံ [Pg.8] ဃနတမေ, ပဟာရော ယာမ, သညိတော; ပါဋိပဒေါ တု ဒုတိယာ, တတိယာဒီ တိထီ, တာယတိ ပါလေတီတိ တိထိ, တာ+ဣတိ (ဏွာဒိ) ဒွိသု. अत्यधिक घने अन्धकार को 'अन्धतम' कहते हैं; प्रहार को 'याम' भी कहा जाता है; प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया आदि 'तिथि' कहलाती हैं (जो रक्षा करती हैं)। ၇၃. ७३. ပန္နရသီ ပဉ္စဒသီ, ပုဏ္ဏမာသီ တု ပုဏ္ဏမာ; အမာဝသီ ပျမာဝါသီ, ထိယံ ပန္နရသီ’ ပရာ. पन्नरसी, पञ्चदशी, पूर्णमासी और पूर्णिमा (पूर्णिमा के नाम); अमावासी और अमावस्या (अमावस्या के नाम); दूसरी पन्नरसी (कृष्ण पक्ष की) भी स्त्रीलिंग है। ၇၄. ७४. ဃဋိကာ သဋ္ဌျ’ ဟောရတ္တော, ပက္ခော တေ ဒသ ပဉ္စ စ; တေ တု ပုဗ္ဗာပရာ သုက္က,ကာဠာ, မာသော တု တေ ဒုဝေ. साठ घटिका का एक अहोरात्र (दिन-रात) होता है, पन्द्रह दिनों का एक पक्ष होता है; वे (पक्ष) पूर्व और अपर (क्रमशः) शुक्ल और कृष्ण कहलाते हैं, और वे दो (पक्ष) मिलकर एक मास (महीना) होते हैं। ၇၅. ७५. စိတ္တော ဝေသာခ, ဇေဋ္ဌော စာ, သာဠှော ဒွီသု စ သာဝဏော; ပေါဋ္ဌပါဒ’ဿယုဇာ စ, မာသာ ဒွါဒသ ကတ္တိကော. चित्त (चैत्र), वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ (दो), श्रावण, पोट्ठपाद (भाद्रपद), अश्वयुज (आश्विन) और कार्तिक—ये बारह मास हैं। ၇၆. ७६. မာဂသိရော တထာ ဖုဿော, ကမေန မာဃ ဖဂ္ဂုဏာ; ကတ္တိက’ဿယုဇာ မာသာ, ပစ္ဆိမ ပုဗ္ဗကတ္တိကာ. मार्गशीर्ष, पुष्य (पौष), माघ और फाल्गुन (क्रमशः); कार्तिक और अश्वयुज मास को पश्चिम और पूर्व कार्तिक भी कहा जाता है। ၇၇. ७७. သာဝဏော နိက္ခမနီယော,စိတ္တမာသော တု ရမ္မကော. श्रावण मास को 'निक्खमनीय' और चित्त (चैत्र) मास को 'रम्मक' कहा जाता है। ၇၈. ७८. စတုရော စတုရော မာသာ, ကတ္တိကကာဠပက္ခတော; ကမာ ဟေမန္တ ဂိမှာန, ဝဿာနာ ဥတုယော ဒွိသု. कार्तिक के कृष्ण पक्ष से चार-चार मास के क्रम से हेमन्त, ग्रीष्म और वर्षा—ये तीन ऋतुएँ (दो-दो के समूह में) होती हैं। ၇၉. ७९. ဟေမန္တော သိသိရ မုတူ,ဆ ဝါ ဝသန္တော စ ဂိမှ ဝဿာနာ; သရဒေါတိ ကမာ မာသာ, ဒွေ ဒွေ ဝုတ္တာနုသာရေန. अथवा हेमन्त, शिशिर, वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा और शरद—ये छह ऋतुएँ पूर्वोक्त कथन के अनुसार दो-दो मास की होती हैं। ၈၀. ८०. ဥဏှော နိဒါဃော ဂိမှောထ,ဝဿော ဝဿာန ပါဝုသာ; ဥတူဟိ တီဟိ ဝဿာနာ, ဒိကေဟိ ဒက္ခိဏာယနံ. उष्ण, निदाघ और ग्रीष्म (गर्मी के पर्याय हैं); वर्ष, वर्षाण और प्रावृष् (वर्षा के पर्याय हैं); वर्षा आदि तीन ऋतुओं से दक्षिणायन होता है। ၈၁. ८१. ဥတ္တရာယန မညေဟိ, တီဟိ ဝဿာယနဒွယံ; ဝဿ သံဝစ္ဆရာ နိတ္ထီ, သရဒေါ ဟာယနော သမာ. अन्य तीन (ऋतुओं) से उत्तरायण होता है; इन दो आयनों से एक वर्ष होता है। वर्ष, संवत्सर, शरद, हायन और समा—ये वर्ष के नाम हैं। ၈၂. ८२. ကပ္ပက္ခယော တု သံဝဋ္ဋော, ယုဂန္တ ပလယာ အပိ; အလက္ခီ ကာလကဏ္ဏိတ္ထီ, အထ လက္ခီ သိရိ’တ္ထိယံ. कल्पक्षय, संवर्त, युगान्त और प्रलय (कल्प के विनाश के नाम हैं); अलक्ष्मी और कालकर्णी (दुर्भाग्य के नाम हैं); लक्ष्मी और श्री (सौभाग्य/लक्ष्मी के नाम हैं)। ၈၃. ८३. ဒနု ဒါနဝမာတာ ထ, ဒေဝမာတာ ပနာ’ဒိတိ; दनु दानवों की माता है और अदिति देवों की माता है। ၈၄. ८४. ပါပဉ္စ ကိဗ္ဗိသံ ဝေရာ, ဃံ ဒုစ္စရိတ ဒုက္ကဋံ; အပုညာ’ကုသလံ ကဏှံ, ကလုသံ ဒုရိတာ’ဂု စ. पाप, किल्बिष, वेर (वैर), अघ, दुश्चरित, दुष्कृत, अपुण्य, अकुशल, कृष्ण, कलुष, दुरित और आगु—ये पाप के पर्याय हैं। ၈၅. ८५. ကုသလံ [Pg.9] သုကတံ သုက္ကံ, ပုညံ ဓမ္မ မနိတ္ထိယံ; သုစရိတ မထော ဒိဋ္ဌ, ဓမ္မိကံ ဣဟလောကိကံ. कुशल, सुकृत, शुक्ल, पुण्य, धर्म और सुचरित (पुण्य के पर्याय हैं); 'दिट्ठधम्मिक' का अर्थ ऐहलौकिक (इस लोक का) है। ၈၆. ८६. သန္ဒိဋ္ဌိက မထော ပါရ, လောကိကံ သမ္ပရာယိကံ; တက္ကာလံ တု တဒါတွံ စော,တ္တရကာလော တု အာယတိ. सान्दृष्टिक (प्रत्यक्ष); पारलौकिक और साम्परायिक (परलोक के पर्याय हैं); तत्काल और तदात्व (वर्तमान काल के पर्याय हैं); उत्तरकाल और आयति (भविष्य काल के पर्याय हैं)। ၈၇. ८७. ဟာသော’ တ္တမနတာ ပီတိ, ဝိတ္တိ တုဋ္ဌိ စ နာရိယံ; အာနန္ဒော ပမုဒါ’မောဒေါ, သန္တောသော နန္ဒိ သမ္မဒေါ. हास, अत्तमनता (प्रसन्नता), प्रीति, वित्ति, तुष्टि, आनन्द, प्रमुद, आमोद, सन्तोष, नन्दि और सम्मद—ये हर्ष के पर्याय हैं। ၈၈. ८८. ပါမောဇ္ဇဉ္စ ပမောဒေါ ထ, သုခံ သာတဉ္စ ဖာသွ’ထ; ဘဒ္ဒံ သေယျော သုဘံ ခေမံ, ကလျာဏံ မင်္ဂလံ သိဝံ. प्रामोज्य, प्रमोद, सुख, सात और फासु (सुख के पर्याय हैं); भद्र, श्रेय, शुभ, क्षेम, कल्याण, मङ्गल और शिव (कल्याण के पर्याय हैं)। ၈၉. ८९. ဒုက္ခဉ္စ ကသိရံ ကိစ္ဆံ, နီဃော စ ဗျသနံ အဃံ; ဒဗ္ဗေ တု ပါပပုညာနိ, တီသွာကိစ္ဆံ သုခါဒိ စ. दुःख, कसिर, कृच्छ्र, नीघ, व्यसन और अघ (दुःख के पर्याय हैं); पाप और पुण्य द्रव्यवाचक हैं; कृच्छ्र और सुखादि तीनों लिङ्गों में प्रयुक्त होते हैं। ၉၀. ९०. ဘာဂျံ နိယတိ ဘာဂေါ စ, ဘာဂဓေယျံ ဝိဓီ’ရိတော; အထော ဥပ္ပတ္တိ နိဗ္ဗတ္တိ, ဇာတိ ဇနန မုဗ္ဘဝေါ. भाग्य, नियति, भाग, भागधेय और विधि (भाग्य के पर्याय हैं); उत्पत्ति, निर्वृत्ति, जाति, जनन और उद्भव (जन्म के पर्याय हैं)। ၉၁. ९१. နိမိတ္တံ ကာရဏံ ဌာနံ, ပဒံ ဗီဇံ နိဗန္ဓနံ; နိဒါနံ ပဘဝေါ ဟေတု, သမ္ဘဝေါ သေတု ပစ္စယော. निमित्त, कारण, स्थान, पद, बीज, निबन्धन, निदान, प्रभव, हेतु, सम्भव, सेतु और प्रत्यय—ये कारण के पर्याय हैं। ၉၂. ९२. ကာရဏံ ယံ သမာသန္နံ, ပဒဋ္ဌာနန္တိ တံ မတံ; ဇီဝေါ တု ပုရိသော’တ္တာ ထ, ပဓာနံ ပကတိတ္ထိယံ. जो आसन्न (निकटतम) कारण है, उसे 'पदट्ठान' (पदस्थान) माना जाता है; जीव, पुरुष और आत्मा (आत्मा के पर्याय हैं); प्रधान और प्रकृति (प्रकृति के पर्याय हैं)। ၉၃. ९३. ပါဏော သရီရီ ဘူတံ ဝါ, သတ္တော ဒေဟီ စ ပုဂ္ဂလော; ဇီဝေါ ပါဏီ ပဇာ ဇန္တု,ဇနော လောကော တထာဂတော. प्राण, शरीरी, भूत, सत्त्व, देही, पुद्गल, जीव, प्राणी, प्रजा, जन्तु, जन, लोक और तथागत—ये प्राणी या जीव के पर्याय हैं। ၉၄. ९४. ရူပံ သဒ္ဒေါ ဂန္ဓ ရသာ, ဖဿော ဓမ္မော စ ဂေါစရာ; အာလမ္ဗာ ဝိသယာ တေ ဆာ, ရမ္မဏာ လမ္ဗဏာနိ စ. रूप, शब्द, गन्ध, रस, स्पर्श और धर्म—ये छह गोचर (इन्द्रिय विषय) हैं; आलम्ब, विषय, आरम्मण और आलम्बन इनके पर्याय हैं। ၉၅. ९५. သုက္ကော ဂေါရော သိတော’ဒါတာ,ဓဝလော သေတ, ပဏ္ဍရာ; သောဏော တု လောဟိတော ရတ္တော,တမ္ဗ မဉ္ဇိဋ္ဌ ရောဟိတာ. शुक्ल, गौर, सित, अवदात, धवल, श्वेत और पाण्डर (सफेद के पर्याय हैं); शोण, लोहित, रक्त, ताम्र, मञ्जिष्ठ और रोहित (लाल के पर्याय हैं)। ၉၆. ९६. နီလော ကဏှာ’သိတာ ကာဠော,မေစကော သာမ သာမလာ; သိတပီတေတု ပဏ္ဍု’တ္တော, ဤသံပဏ္ဍုတု ဓူသရော. नील, कृष्ण, असित, काल, मेचक, श्याम और श्यामल (काले या नीले के पर्याय हैं); श्वेत-पीत (पीलापन लिए सफेद) को 'पाण्डु' और ईषत् पाण्डु (धुंधले) को 'धूसर' कहते हैं। ၉၇. ९७. အရုဏော [Pg.10] ကိဉ္စိရတ္တော ထ,ပါဋလော သေတလောဟိတော; အထော ပီတော ဟလိဒျာဘော,ပလာသော ဟရိတော ဟရိ. अरुण (थोड़ा लाल), पाटल (श्वेत-रक्त या गुलाबी); पीत और हारिद्याभ (पीले के पर्याय हैं); पलाश, हरित और हरि (हरे के पर्याय हैं)। ၉၈. ९८. ကဠာရော ကပိလော နီလ, ပီတေ ထ ရောစနပ္ပဘေ; ပိင်္ဂေါ ပိသင်္ဂေါ ပျထဝါ, ကဠာရာဒီ တု ပိင်္ဂလေ. कलार और कपिल (नीले-पीले या भूरे के पर्याय हैं); रोचनप्रभ, पिङ्ग और पिशङ्ग (ललिताभ पीले या पिंगल वर्ण के पर्याय हैं)। ၉၉. ९९. ကမ္မာသော သဗလော စိတ္တော,သာဝေါ တု ကဏှပီတကေ; ဝါစ္စလိင်္ဂါ ဂုဏိနျေတေ, ဂုဏေ သုက္ကာဒယော ပုမေ. कल्माष, शबल और चित्र (चितकबरे के पर्याय हैं); साव (कृष्ण-पीत वर्ण); ये गुणवाचक शब्द विशेष्य के अनुसार लिङ्ग बदलते हैं, किन्तु गुण अर्थ में 'शुक्ल' आदि शब्द पुल्लिङ्ग होते हैं। ၁၀၀. १००. နစ္စံ နဋ္ဋဉ္စ နဋနံ, နတ္တနံ လာသနံ ဘဝေ; နစ္စံ တု ဝါဒိတံ ဂီတ, မိတိ နာဋုမိဒံ တယံ. नच्च (नृत्य), नट्ट, नटन, नत्तन और लासन (नृत्य के पर्याय हैं); नृत्य, वादित और गीत—इन तीनों के समूह को 'नाट्य' कहते हैं। ၁၀၁. १०१. နစ္စဋ္ဌာနံ သိယာ ရင်္ဂေါ, ဘိနယော သူစျသူစနံ; အင်္ဂဟာရော’င်္ဂဝိက္ခေပေါ, နဋ္ဋကော နဋကော နဋော. नृत्य के स्थान को 'रङ्ग' (रङ्गमञ्च) कहते हैं; अभिनय (संकेत द्वारा भाव प्रकट करना), अङ्गहार (अङ्गों का विक्षेप या संचालन); नत्तक, नाटक और नट (नर्तक या अभिनेता के पर्याय हैं)। ၁၀၂. १०२. သိင်္ဂါရော ကရုဏော ဝီရ, ဗ္ဘုတ ဟဿ ဘယာနကာ; သန္တော ဗီဘစ္ဆ ရုဒ္ဒါနိ, နဝ နာဋျရသာ ဣမေ. शृङ्गार, करुण, वीर, अद्भुत, हास्य, भयानक, शान्त, वीभत्स और रौद्र—ये नौ नाट्य रस हैं। ၁၀၃. १०३. ပေါသဿ နာရိယံ ပေါသေ, ဣတ္ထိယာ သင်္ဂမံ ပတိ; ယာ ပိဟာ ဧသ သိင်္ဂါရော, ရတိကီဠာဒိကာရဏော. पुरुष की स्त्री के प्रति और स्त्री की पुरुष के प्रति समागम की जो इच्छा है, वह 'शृङ्गार' है, जो रतिक्रीड़ा आदि का कारण है। ၁၀၄. १०४. ဥတ္တမ ပ္ပကတိပ္ပာယော, ဣတ္ထိပုရိသဟေတုကော; သော သမ္ဘောဂေါ ဝိယောဂေါတိ,သိင်္ဂါရော ဒုဝိဓော မတော. उत्तम प्रकृति वाला, स्त्री और पुरुष के निमित्त से होने वाला शृंगार रस 'संभोग' और 'वियोग' के भेद से दो प्रकार का माना गया है। ၁၀၅. १०५. ဘာသိတံ [Pg.11] လပိတံ ဘာသာ, ဝေါဟာရော ဝစနံ ဝစော; ဥတ္တိ ဝါစာ ဂိရာ ဝါဏီ, ဘာရတီ ကထိတာ ဝစီ. भासित, लपित, भाषा, व्यवहार, वचन, वच, उक्ति, वाचा, गिरा, वाणी, भारती, कथिता और वची - ये वाणी के पर्यायवाची हैं। ၁၀၆. १०६. ဧကာချာတော ပဒစယော, သိယာ ဝါကျံသကာရကော; အာမေဍိတန္တိ ဝိညေယျံ, ဒွတ္တိက္ခတ္တု မုဒီရဏံ. एक क्रिया और कारकों से युक्त पदों का समूह 'वाक्य' होता है। दो या तीन बार उच्चारण करने को 'आम्रेडित' समझना चाहिए। ၁၀၇. १०७. ဘယေ ကောဓေ ပသံသာယံ, တုရိတေ ကောတူဟလေ’စ္ဆရေ; ဟာသေ သောကေ ပသာဒေ စ, ကရေ အာမေဍိတံ ဗုဓော. भय, क्रोध, प्रशंसा, शीघ्रता, कौतूहल, आश्चर्य, हास्य, शोक और प्रसन्नता में बुद्धिमान व्यक्ति आम्रेडित (शब्दों की पुनरावृत्ति) करते हैं। ၁၀၈. १०८. ဣရု နာရီ ယဇု သာမ, မိတိ ဝေဒါ တယော သိယုံ; ဧတေ ဧဝ တယီ နာရီ, ဝေဒေါ မန္တော သုတိတ္ထိယံ. ऋक्, यजु और साम - ये तीन वेद हैं। इन्हें ही 'त्रयी' कहा जाता है। वेद, मन्त्र और श्रुति पर्यायवाची हैं। ၁၀၉. १०९. အဋ္ဌကော ဝါမကော ဝါမ, ဒေဝေါ စင်္ဂီရသော ဘဂု; ယမဒဂ္ဂိ စ ဝါသိဋ္ဌော, ဘာရဒွါဇော စ ကဿပေါ; ဝေဿာမိတ္တောတိ မန္တာနံ, ကတ္တာရော ဣသယော ဣမေ. अट्ठक, वामक, वामदेव, अङ्गिरस, भगु, यमदग्गि, वासिष्ठ, भारद्वाज, कस्सप और वेस्सामित्त - ये मन्त्रों के रचयिता ऋषि हैं। ၁၁၀. ११०. ကပ္ပော ဗျာကရဏံ ဇောတိ, သတ္ထံ သိက္ခာ နိရုတ္တိ စ; ဆန္ဒောဝိစိတိ စေတာနိ, ဝေဒင်္ဂါနိ ဝဒန္တိ ဆ. कल्प, व्याकरण, ज्योतिष शास्त्र, शिक्षा, निरुक्ति और छन्दोविचिति - इन छह को वेदाङ्ग कहते हैं। ၁၁၁. १११. ဣတိဟာသော ပုရာဝုတ္တ, ပ္ပဗန္ဓော ဘာရတာဒိကော; နာမပ္ပကာသကံ သတ္ထံ, ရုက္ခာဒီနံ နိဃဏ္ဍု သော. भारत (महाभारत) आदि प्राचीन वृत्तान्तों के प्रबन्ध को 'इतिहास' कहते हैं। वृक्ष आदि के नामों को प्रकाशित करने वाले शास्त्र को 'निघण्टु' कहते हैं। ၁၁၂. ११२. ဝိတဏ္ဍသတ္ထံ ဝိညေယျံ, ယံ တံ လောကာယတံ ဣတိ; ကေဋုဘံ တု ကြိယာကပ္ပ, ဝိကပ္ပော ကဝိနံ ဟိတော. वितण्डा शास्त्र को 'लोकायत' समझना चाहिए। 'केटुभ' क्रियाकल्प (अनुष्ठान विधि) का विधान है जो कवियों के लिए हितकारी है। ၁၁၃. ११३. အာချာယိကောပလဒ္ဓတ္ထာ, ပဗန္ဓကပ္ပနာ ကထာ; ဒဏ္ဍနီတျ’တ္ထသတ္ထသ္မိံ, ဝုတ္တန္တော တု ပဝတ္တိ စ. सत्य अर्थ वाली कथा 'आख्यायिका' है और कल्पित प्रबन्ध 'कथा' है। दण्डनीति और अर्थशास्त्र में 'वृत्तान्त' और 'प्रवृत्ति' शब्द प्रयुक्त होते हैं। ၁၁၄. ११४. သညာ, ချာ, ဝှာ သမညာ စာ, ဘိဓာနံ နာမ မဝှယော; နာမဓေယျာ’ ဓိဝစနံ, ပဋိဝါကျံ တု ဥတ္တရံ. संज्ञा, ख्या, आव्हा, समज्ञा, अभिधान, नाम, आव्हय, नामधेय और अधिवचन - ये नाम के पर्यायवाची हैं। प्रतिवाक्य को 'उत्तर' कहते हैं। ၁၁၅. ११५. ပဉှော တီသွ နုယောဂေါ စ, ပုစ္ဆာ ပျထ နိဒဿနံ; ဥပေါဂ္ဃာတော စ ဒိဋ္ဌန္တော, တထော’ဒါဟရဏံ ဘဝေ. प्रश्न, अनुयोग और पृच्छा - ये पर्यायवाची हैं। निदर्शन, उपोद्घात, दृष्टान्त और उदाहरण - ये भी पर्यायवाची हैं। ၁၁၆. ११६. သမာ သင်္ခေပ သံဟာရာ, သမာသော သင်္ဂဟော ပျထ; သတံ ဓာရယသီ တျာဒျ, ဗ္ဘက္ခာနံ တုစ္ဆဘာသနံ. समा, संक्षेप, संहार, समास और संग्रह - ये संक्षेप के पर्यायवाची हैं। 'तुम सौ (मुद्राएँ) धारते हो' आदि मिथ्या भाषण 'अभ्याख्यान' है। ၁၁၇. ११७. ဝေါဟာရော တု ဝိဝါဒေါ ထ, သပနံ သပထောပိ စ; ယသော သိလောကော ကိတ္တိတ္ထီ,ဃောသနာ တု’စ္စသဒ္ဒနံ. व्यवहार का अर्थ विवाद है। सपन और शपथ पर्यायवाची हैं। यश, श्लोक और कीर्ति - ये प्रसिद्धि के नाम हैं। घोषणा का अर्थ ऊँचा शब्द है। ၁၁၈. ११८. ပဋိဃောသော ပဋိရဝေါ, ထော’ ပညာသော ဝစီမုခံ; ကတ္ထနာ စ သိလာဃာ စ, ဝဏ္ဏနာ စ နုတိ တ္ထုတိ. प्रतिघोष और प्रतिरव (गूँज) पर्यायवाची हैं। उपन्यास को 'वचीमुख' (भूमिका) कहते हैं। कत्थना, श्लाघा, वर्णना, नुति और स्तुति - ये प्रशंसा के पर्यायवाची हैं। ၁၁၉. ११९. ထောမနဉ္စ ပသံသာထ, ကေကာ နာဒေါ သိခဏ္ဍိနံ; ဂဇာနံ ကောဉ္စနာဒေါ ထ,မတာ ဟေသာ ဟယဒ္ဓနိ. थोमन और प्रशंसा पर्यायवाची हैं। मयूरों की ध्वनि 'केका' है, हाथियों की ध्वनि 'कुञ्जनाद' है और घोड़ों की ध्वनि 'हेषा' मानी गई है। ၁၂၀. १२०. ပရိယာယော ဝေဝစနံ, သာကစ္ဆာ တု စ သံကထာ; ဥပဝါဒေါ စု’ပက္ကောသာ, ဝဏ္ဏဝါဒါ’နုဝါဒေါ စ; ဇနဝါဒါ’ပဝါဒါပိ, ပရိဝါဒေါ စ တုလျတ္ထာ. पर्याय और वेवचन पर्यायवाची हैं। साकच्छा और संकथा पर्यायवाची हैं। उपवाद, उपक्कोस, वर्णवाद, अनुवाद, जनवाद, अपवाद और परिवाद - ये सब निन्दा के अर्थ में समान हैं। ၁၂၁. १२१. ခေပေါ [Pg.12] နိန္ဒာ တထာ ကုစ္ဆာ, ဇိဂုစ္ဆာ ဂရဟာ ဘဝေ; နိန္ဒာပုဗ္ဗော ဥပါရမ္ဘော, ပရိဘာသန မုစ္စတေ. खेप, निन्दा, कुत्सा, जुगुप्सा और गरहा - ये निन्दा के पर्यायवाची हैं। निन्दापूर्वक उलाहना देने को 'परिभाषण' कहा जाता है। ၁၂၂. १२२. အဋ္ဌာနရိယဝေါဟာရ, ဝသေန ယာ ပဝတ္တိတာ; အဘိဝါကျံ သိယာ ဝါစာ, သာ ဝီတိက္ကမဒီပနီ. आठ अनार्य व्यवहारों के वश में होकर जो वाणी प्रवृत्त होती है, वह 'अभिवाक्य' है, जो मर्यादा के उल्लंघन को प्रकट करती है। ၁၂၃. १२३. မုဟုံဘာသာ နုလာပေါထ, ပလာပေါ နတ္ထိကာ ဂိရာ; အာဒေါဘာသန မာလာပေါ,ဝိလာပေါ တု ပရိဒ္ဒဝေါ. बार-बार बोलना 'अनुलप' है, व्यर्थ की वाणी 'प्रलाप' है, पहले बोलना 'आलाप' है और रोना-धोना 'विलाप' या 'परिदेव' है। ၁၂၄. १२४. ဝိပ္ပလာပေါ ဝိရောဓောတ္တိ, သန္ဒေသောတ္တိ တု ဝါစိကံ; သမ္ဘာသနံ တု သလ္လာပေါ, ဝိရောဓရဟိတံ မိထု. विरोधाभास युक्त वाणी 'विप्रलाप' है, सन्देश को 'वाचिक' कहते हैं। परस्पर विरोध-रहित बातचीत 'सम्भाषण' या 'सल्लाप' है। ၁၂၅. १२५. ဖရုသံ နိဋ္ဌုရံ ဝါကျံ, မနုညံ ဟဒယင်္ဂမံ; သံကုလံ တု ကိလိဋ္ဌဉ္စ, ပုဗ္ဗာပရဝိရောဓိနီ. कठोर वचन 'परुष' या 'निष्ठुर' है, हृदय को प्रिय लगने वाला वचन 'मनुज्ञ' या 'हृदयङ्गम' है। पूर्वापर विरोध वाली वाणी 'संकुल' या 'क्लिष्ट' है। ၁၂၆. १२६. သမုဒါယတ္ထရဟိတံ, အဗဒ္ဓမိတိ ကိတ္တိတံ; ဝိတထံ တု မုသာ စာထ, ဖရုသာဒီ တိလိင်္ဂိကာ. समुदाय के अर्थ से रहित वाणी 'अबद्ध' कहलाती है। 'वितथ' और 'मुसा' का अर्थ झूठ है। परुष आदि शब्द तीनों लिङ्गों में प्रयुक्त होते हैं। ၁၂၇. १२७. သမ္မာ ဗျယဉ္စာ ဝိတထံ, သစ္စံ တစ္ဆံ ယထာတထံ; တဗ္ဗန္တာ တီသွ လီကံ တွ, သစ္စံ မိစ္ဆာ မုသာ ဗျယံ. सम्मा, अवितथ, सत्य, तच्छ और यथातथ - ये सत्य के पर्यायवाची हैं। अलीक, असत्य, मिथ्या और मुसा - ये असत्य के पर्यायवाची हैं। ၁၂၈. १२८. ရဝေါ နိနာဒေါ နိနဒေါ စ သဒ္ဒေါ,နိဂ္ဃောသ နာဒ ဒ္ဓနယော စ ရာဝေါ; အာရာဝ သံရာဝ ဝိရာဝ ဃောသာ,ရဝါ သုတိတ္ထီ သရ နိဿနာ စ. रव, निनाद, निनद, शब्द, निर्घोष, नाद, ध्वनि, राव, आरावा, संराव, विराव, घोष, रवा, श्रुति, स्वर और निस्साण - ये सब ध्वनि के पर्यायवाची हैं। ၁၂၉. १२९. ဝိဿဋ္ဌ မဉ္ဇု ဝိညေယျာ, သဝနီယာ ဝိသာရိနော; ဗိန္ဒု ဂမ္ဘီရ နိန္နာဒီ, တျေဝ မဋ္ဌင်္ဂိကော သရော. स्पष्ट, मधुर, समझने योग्य, सुनने में सुखद, दूर तक फैलने वाला, सुसम्बद्ध, गम्भीर और गूँजने वाला - ये स्वर के आठ गुण हैं। ၁၃၀. १३०. တိရစ္ဆာနဂတာနဉှိ, ရုတံ ဝဿိတ မုစ္စတေ; ကောလာဟလော ကလဟလော,ဂီတံ ဂါနဉ္စ ဂီတိကာ. पशु-पक्षियों की ध्वनि को 'रुत' या 'वस्सित' कहते हैं। कोलाहल और कलहल पर्यायवाची हैं। गीत, गान और गीतिका - ये गायन के नाम हैं। ၁၃၁. १३१. သရာ သတ္တ တယော ဂါမာ, စေကဝီသတိ မုစ္ဆနာ; တာနာ စေကူနပညာသ, ဣစ္စေတံ သရမဏ္ဍလံ. सात स्वर, तीन ग्राम, इक्कीस मूर्च्छनाएँ और उनचास तान - यह 'स्वरमण्डल' कहलाता है। ၁၃၂. १३२. ဥသဘော ဓေဝတော စေဝ, ဆဇ္ဇ ဂန္ဓာရ မဇ္ဈိမာ; ပဉ္စမော စ နိသာဒေါတိ, သတ္တေ’တေ ဂဒိတာ သရာ. ऋषभ, धैवत, षड्ज, गान्धार, मध्यम, पञ्चम और निषाद - ये सात स्वर कहे गए हैं। ၁၃၃. १३३. နဒန္တိ [Pg.13] ဥသဘံ ဂါဝေါ, တုရဂါ ဓေဝတံ တထာ; ဆဇ္ဇံ မယူရာ ဂန္ဓာရ, မဇာ ကောဉ္စာ စ မဇ္ဈိမံ. गायें ऋषभ स्वर में, घोड़े धैवत में, मयूर षड्ज में, बकरियाँ गान्धार में और क्रौञ्च पक्षी मध्यम स्वर में बोलते हैं। ၁၃၄. १३४. ပဉ္စမံ ပရပုဋ္ဌာဒီ, နိသာဒမ္ပိ စ ဝါရဏာ; ဆဇ္ဇော စ မဇ္ဈိမော ဂါမာ,တယော သာဓာရဏောတိ စ. पंचम (स्वर) को कोयल आदि (की ध्वनि) से और निषाद को हाथी (की ध्वनि) से उत्पन्न माना जाता है; षड्ज और मध्यम दो ग्राम हैं, और तीन साधारण (ग्राम) कहे जाते हैं। ၁၃၅. १३५. သရေသု တေသု ပစ္စေကေ, တိဿော တိဿော ဟိ မုစ္ဆနာ; သိယုံ တထေဝ တာနာနိ, သတ္တ သတ္တေဝ လဗ္ဘရေ. उन (तीन ग्रामों के) प्रत्येक स्वरों में तीन-तीन मूर्छनाएँ होती हैं; उसी प्रकार सात-सात तानें भी प्राप्त होती हैं। ၁၃၆. १३६. တိဿော ဒုဝေ စတဿော စ, စတဿော ကမတော သရေ; တိဿော ဒုဝေ စတဿောတိ, ဒွါဝီသတိ သုတီ သိယုံ. स्वरों में क्रमशः तीन, दो, चार, चार, तीन, दो और चार (श्रुतियाँ होती हैं); इस प्रकार कुल बाईस श्रुतियाँ होती हैं। ၁၃၇. १३७. ဥစ္စတရေ ရဝေ တာရော, ထာဗျတ္တေ မဓုရေ ကလော; ဂမ္ဘီရေ တု ရဝေ မန္ဒော, တာရာဒီ တီသွထော ကလေ; ကာကလီ သုခုမေ ဝုတ္တော,ကြိယာဒိသမတာ လယော. ऊँची ध्वनि में 'तार', स्पष्ट और मधुर ध्वनि में 'कल', और गंभीर ध्वनि में 'मन्द' (स्वर) होता है; तार आदि तीनों लिंगों में होते हैं, सूक्ष्म ध्वनि को 'काकली' कहा जाता है और क्रिया आदि की समानता को 'लय' कहते हैं। ၁၃၈. १३८. ဝီဏာ စ ဝလ္လကီ သတ္တ, တန္တီ သာ ပရိဝါဒိနီ; ပေါက္ခရော ဒေါဏိ ဝီဏာယ,ဥပဝီဏော တု ဝေဌကော. वीणा और वल्लकी (पर्यायवाची हैं), सात तारों वाली वीणा 'परिवादिनी' कहलाती है; वीणा के पात्र (body) को 'पोक्खर' (पुष्कर) या 'दोणी' कहते हैं, और 'उपवीण' को 'वेठक' (वीणा का खोल) कहा जाता है। ၁၃၉. १३९. အာတတဉ္စေဝ ဝိတတ, မာတတဝိတတံ ဃနံ; သုသိရံ စေတိ တူရိယံ, ပဉ္စင်္ဂိက မုဒီရိတံ. आतत, वितत, आतत-वितत, घन और सुषिर - इन पाँच अंगों वाले वाद्यों को 'पञ्चाङ्गिक तूर्य' कहा जाता है। ၁၄၀. १४०. အာတတံ နာမ စမ္မာဝ, နဒ္ဓေသု ဘေရိယာဒိသု; တလေ’ကေကယုတံ ကုမ္ဘ, ထုဏ ဒဒ္ဒရိကာဒိကံ. भेरी आदि वाद्यों में जो एक ओर चमड़े से मढ़े होते हैं, उन्हें 'आतत' कहते हैं; जैसे कुम्भ, थूण और दद्दरिक आदि जिनके एक ही तल पर चमड़ा होता है। ၁၄၁. १४१. ဝိတတံ စော’ဘယတလံ, တူရိယံ မုရဇာဒိကံ; အာတတဝိတတံ သဗ္ဗ, ဝိနဒ္ဓံ ပဏဝါဒိကံ. मुरज आदि वाद्य जिनके दोनों तलों पर चमड़ा मढ़ा होता है, 'वितत' कहलाते हैं; और पणव आदि वाद्य जो पूरी तरह चमड़े से मढ़े होते हैं, 'आतत-वितत' कहलाते हैं। ၁၄၂. १४२. သုသိရံ ဝံသသင်္ခါဒိ, သမ္မတာလာဒိကံ ဃနံ; အာတောဇ္ဇံ တု စ ဝါဒိတ္တံ, ဝါဒိတံ ဝဇ္ဇ မုစ္စတေ. बाँसुरी, शंख आदि 'सुषिर' वाद्य हैं, और सम्मताल (झाँझ) आदि 'घन' वाद्य हैं; आतोद्य, वादित्र, वादित और वाद्य (ये सब वाद्य यंत्रों के नाम) कहे जाते हैं। ၁၄၃. १४३. ဘေရီ (ဘေရိ) ဒုန္ဒုဘိ ဝုတ္တော ထ,မုဒိင်္ဂေါ မုရဇောဿ တု; အာလိင်္ဂ, င်္ကျော, ဒ္ဓကာ ဘေဒါ,တိဏဝေါ တု စ ဍိဏ္ဍိမော. भेरी को दुन्दुभि कहा जाता है, मृदङ्ग और मुरज (पर्यायवाची हैं); आलिङ्ग, अङ्क्य और ऊर्ध्वक इसके भेद हैं, तथा तिणव और डिण्डिम (भी वाद्य विशेष हैं)। ၁၄၄. १४४. အာလမ္ဗရော [Pg.14] တု ပဏဝေါ, ကောဏော ဝီဏာဒိဝါဒနံ; ဒဒ္ဒရီ ပဋဟော ဘေရိ, ပ္ပဘေဒါ မဒ္ဒလာဒယော. आलम्बर और पणव (पर्यायवाची हैं), वीणा आदि बजाने की छड़ी को 'कोण' कहते हैं; दद्दरि, पटह, भेरी के भेद और मद्दल आदि (अन्य वाद्य हैं)। ၁၄၅. १४५. ဇနပ္ပိယေ ဝိမဒ္ဒုဋ္ဌေ, ဂန္ဓေ ပရိမလော ဘဝေ; သော တွာ မောဒေါ ဒူရဂါမီ, ဝိဿန္တာ တီသွိတော ပရံ. लोगों को प्रिय और मर्दन (रगड़ने) से उत्पन्न गंध को 'परिमल' कहते हैं; दूर तक फैलने वाली सुगंध 'आमोद' कहलाती है, और इसके बाद 'विस्सन्ता' (फैलने वाली) शब्द तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၁၄၆. १४६. ဣဋ္ဌဂန္ဓော စ သုရဘိ, သုဂန္ဓော စ သုဂန္ဓိ စ; ပူတိဂန္ဓိ တု ဒုဂ္ဂန္ဓော, ထ ဝိဿံ အာမဂန္ဓိ ယံ. इष्टगंध, सुरभि, सुगंध और सुगन्धि (अच्छी गंध के नाम हैं); दुर्गंध को 'पूतिगन्धि' कहते हैं, और कच्चे मांस जैसी गंध को 'विस्स' या 'आमगन्धि' कहते हैं। ၁၄၇. १४७. ကုင်္ကုမဉ္စေဝ ယဝန, ပုပ္ဖဉ္စ တဂရံ တထာ; တုရုက္ခောတိ စတုဇ္ဇာတိ, ဂန္ဓာ ဧတေ ပကာသိတာ. कुंकुम (केसर), यवनपुष्प (लौंग), तगर और तुरुष्क (पिण्डक) - ये चार प्रकार की गंध (चतुर्जाति गंध) कही गई हैं। ၁၄၈. १४८. ကသာဝေါ နိတ္ထိယံ တိတ္တော, မဓုရော လဝဏော ဣမေ; အမ္ဗိလော ကဋုကော စေတိ, ဆ ရသာ တဗ္ဗတီ တိသု. कषाय (कसैला), तिक्त (कड़वा), मधुर (मीठा), लवण (नमकीन), अम्ल (खट्टा) और कटुक (तीखा) - ये छह रस हैं; 'तद्वती' (उस रस वाला) शब्द तीनों लिंगों में होता है। ၁၄၉. १४९. သိယာ ဖဿော စ ဖောဋ္ဌဗ္ဗော,ဝိသယီ တွက္ခ မိန္ဒြိယံ; နယနံ တွက္ခိ နေတ္တဉ္စ, လောစနံ စ’စ္ဆိ စက္ခု စ. स्पर्श और स्प्रष्टव्य (पर्यायवाची हैं), इन्द्रिय को 'विषयी' और 'अक्ष' कहते हैं; नयन, अक्षि, नेत्र, लोचन, अच्छि और चक्षु (आँख के पर्यायवाची हैं)। ၁၅၀. १५०. သောတံ သဒ္ဒဂ္ဂဟော ကဏ္ဏော, သဝနံ သုတိ နတ္ထု တု; နာသာ စ နာသိကာ ဃာနံ, ဇိဝှာတု ရသနာ ဘဝေ. श्रोत्र, शब्दग्रह, कर्ण, सवन और श्रुति (कान के नाम हैं); नत्थु, नासा, नासिका और घ्राण (नाक के नाम हैं); जिह्वा और रसना (जीभ के नाम हैं)। ၁၅၁. १५१. သရီရံ ဝပု ဂတ္တဉ္စာ, တ္တဘာဝေါ ဗောန္ဒိ ဝိဂ္ဂဟော; ဒေဟံ ဝါ ပုရိသေ ကာယော, ထိယံ တနု ကဠေဝရံ. शरीर, वपु, गात्र, आत्मभाव, बोन्दि और विग्रह (शरीर के नाम हैं); 'देह' और 'काय' पुल्लिंग में, तथा 'तनु' और 'कलेवर' स्त्रीलिंग (और नपुंसक) में प्रयुक्त होते हैं। ၁၅၂. १५२. စိတ္တံ စေတော မနော နိတ္ထီ, ဝိညာဏံ ဟဒယံ တထာ; မာနသံ ဓီ တု ပညာ စ, ဗုဒ္ဓိ မေဓာ မတိ မုတိ. चित्त, चेत, मन (नपुंसक लिंग), विज्ञान, हृदय और मानस (मन के नाम हैं); धी, प्रज्ञा, बुद्धि, मेधा, मति और मुति (बुद्धि के नाम हैं)। ၁၅၃. १५३. ဘူရီ မန္တာ စ ပညာဏံ, ဉာဏံ ဝိဇ္ဇာ စ ယောနိ စ; ပဋိဘာန မမောဟော ထ, ပညာဘေဒါ ဝိပဿနာ. भूरी, मन्ता, प्रज्ञान, ज्ञान, विद्या, योनि, प्रतिभान और अमोह (प्रज्ञा के नाम हैं); 'विपश्यना' प्रज्ञा का एक भेद है। ၁၅၄. १५४. သမ္မာဒိဋ္ဌိ ပဘုတိကာ, ဝီမံသာ တု ဝိစာရဏာ; သမ္ပဇညံ တု နေပက္ကံ, ဝေဒယိတံ တု ဝေဒနာ. सम्यग्दृष्टि आदि (प्रज्ञा के भेद हैं), मीमांसा और विचारणा (पर्यायवाची हैं); सम्प्रजन्य और नैपक्क्य (पर्यायवाची हैं), तथा वेदयित और वेदना (अनुभव के नाम हैं)। ၁၅၅. १५५. တက္ကော ဝိတက္ကော သင်္ကပ္ပော,ပ္ပနော’ ဟာ’ ယု တု ဇီဝိတံ; ဧကဂ္ဂတာ တု သမထော, အဝိက္ခေပေါ သမာဓိ စ. तर्क, वितर्क, संकल्प और अर्पणा (पर्यायवाची हैं); आयु और जीवित (पर्यायवाची हैं); एकाग्रता, शमथ, अविक्षेप और समाधि (पर्यायवाची हैं)। ၁၅၆. १५६. ဥဿာဟာ’ တပ္ပ ပဂ္ဂါဟာ, ဝါယာမော စ ပရက္ကမော; ပဓာနံ ဝီရိယံ စေဟာ, ဥယျာမော စ ဓိတိ တ္ထိယံ. उत्साह, आतप, प्रग्रह, व्यायाम, पराक्रम, प्रधान, वीर्य, ईहा और उद्यम (पुरुषार्थ के नाम हैं); 'धृति' स्त्रीलिंग में (धैर्य का नाम है)। ၁၅၇. १५७. စတ္တာရိ ဝီရိယင်္ဂါနိ, တစဿ စ နဟာရုနော; အဝသိဿန မဋ္ဌိဿ, မံသလောဟိတသုဿနံ. वीर्य के चार अंग हैं: त्वचा, स्नायु और अस्थि का शेष रहना, तथा मांस और लोहित (रक्त) का सूख जाना। ၁၅၈. १५८. ဥဿောဠှီ [Pg.15] တွ ဓိမတ္တေဟာ, သတိ တွ နုဿတိ တ္ထိယ; လဇ္ဇာ ဟိရီ သမာနာ ထ, ဩတ္တပ္ပံ ပါပဘီရုတာ. अत्यधिक उत्साह को 'उस्सोळ्ही' कहते हैं; स्मृति और अनुस्मृति स्त्रीलिंग में (याददाश्त के नाम हैं); लज्जा और ह्री समानार्थक हैं; ओत्तप्प और पापभीरुता (पाप से डरने के नाम हैं)। ၁၅၉. १५९. မဇ္ဈတ္တတာ တု’ပေက္ခာ စ, အဒုက္ခမသုခါ သိယာ; စိတ္တာဘောဂေါ မနက္ကာရော,အဓိမောက္ခော တု နိစ္ဆယော. मध्यस्थता और उपेक्षा (पर्यायवाची हैं), जो न दुःख है न सुख; चित्त का आभोग 'मनस्कार' है, और 'अधिमोक्ष' का अर्थ निश्चय है। ၁၆၀. १६०. ဒယာ’ နုကမ္ပာ ကာရုညံ, ကရုဏာ စ အနုဒ္ဒယာ; ထိယံ ဝေရမဏီ စေဝ, ဝိရတျာ’ ရတိ စာပျထ. दया, अनुकम्पा, कारुण्य, करुणा और अनुदया (पर्यायवाची हैं); विरमणी, विरति और आरति स्त्रीलिंग में (पाप से विरक्त होने के नाम हैं)। ၁၆၁. १६१. တိတိက္ခာ ခန္တိ ခမနံ, ခမာ မေတ္တာ တု မေတျ’ထ; ဒဿနံ ဒိဋ္ဌိ လဒ္ဓိတ္ထီ, သိဒ္ဓန္တော သမယော ဘဝေ. तितिक्षा, क्षान्ति, क्षमण और क्षमा (धैर्य के नाम हैं); मेत्ता और मैत्री (प्रेम के नाम हैं); दर्शन, दृष्टि और लब्धि (स्त्रीलिंग में) तथा सिद्धान्त और समय (मत/विचारधारा के नाम हैं)। ၁၆၂. १६२. တဏှာ စ တသိဏာ ဧဇာ, ဇာလိနီ စ ဝိသတ္တိကာ; ဆန္ဒော ဇဋာ နိကန္တျာ’သာ, သိဗ္ဗိနီ ဘဝနေတ္တိ စ. तृष्णा, तसिणा, एजा, जालिनी, विसत्तिका, छन्द, जटा, निकान्ति, आशा, सिब्बिनी और भवनेत्री (ये सब तृष्णा के नाम हैं)। ၁၆၃. १६३. အဘိဇ္ဈာ ဝနထော ဝါနံ, လောဘော ရာဂေါ စ အာလယော; ပိဟာ မနောရထော ဣစ္ဆာ, ဘိလာသော ကာမ ဒေါဟဠာ; အာကင်္ခါ ရုစိ ဝုတ္တာ သာ, တွဓိကာ လာလသာ ဒွိသု. अभिध्या, वनथ, वान, लोभ, राग और आलय (लोभ के नाम हैं); स्पृहा, मनोरथ, इच्छा, अभिलाष, काम, दोहद, आकांक्षा और रुचि (इच्छा के नाम हैं); अत्यधिक इच्छा को 'लालसा' कहते हैं जो दो लिंगों में होती है। ၁၆၄. १६४. ဝေရံ ဝိရောဓော ဝိဒ္ဒေသော, ဒေါသော စ ပဋိဃဉ္စ ဝါ; ကောဓာ’ ဃာတာ ကောပ ရောသာ,ဗျာပါဒေါ’ နဘိရဒ္ဓိ စ. वैर, विरोध, विद्वेष, दोष, प्रतिघ, क्रोध, आघात, कोप, रोष, व्यापाद और अनभिरद्धि (ये क्रोध के पर्यायवाची हैं)। ၁၆၅. १६५. ဗဒ္ဓဝေရ မုပနာဟော, သိယာ သောကော တု သောစနံ; ရောဒိတံ ကန္ဒိတံ ရုဏ္ဏံ, ပရိဒေဝေါ ပရိဒ္ဒဝေါ. बद्धवैर (गाँठ बाँधना), उपनाह (बैर पालना), शोक, शोचन, रोदन, कन्दित, रुण्ण, परिदेव और परिद्दव। ၁၆၆. १६६. ဘီတိတ္ထိ ဘယ မုတ္တာသော, ဘေရဝံ တု မဟဗ္ဘယံ; भीति, भय, उत्त्रास, भैरव और महाभय। ၁၆၇. १६७. ဘေရဝံ ဘီသနံ ဘီမံ, ဒါရုဏဉ္စ ဘယာနကံ; ဃောရံ ပဋိဘယံ ဘေသ္မံ, ဘယင်္ကရ မိမေ တီသု. भैरव, भीषण, भीम, दारुण, भयानक, घोर, प्रतिभय, भेष्म और भयंकर (ये तीनों लिंगों में प्रयुक्त होते हैं)। ၁၆၈. १६८. ဣဿာ ဥသူယာ မစ္ဆေရံ, တု မစ္ဆရိယ မစ္ဆရံ; မောဟော’ဝိဇ္ဇာ တထာ’ဉာဏံ, မာနော ဝိဓာ စ ဥန္နတိ. ईर्ष्या, असूया, मत्सर, मात्सर्य, मोह, अविद्या, अज्ञान, मान, विधा और उन्नति। ၁၆၉. १६९. ဥဒ္ဓစ္စ မုဒ္ဓဋံ စာထ, တာပေါ ကုက္ကုစ္စမေဝ စ; ပစ္ဆာတာပေါ နုတာပေါ စ, ဝိပ္ပဋိသာရော ပကာသိတော. औद्धत्य, उद्धत, ताप, कुक्कुच्च, पश्चात्ताप, अनुताप और विप्रतिसार कहे गए हैं। ၁၇၀. १७०. မနောဝိလေခ သန္ဒေဟာ, သံသယော စ ကထံကထာ; ဒွေဠှကံ ဝိစိကိစ္ဆာ စ, ကင်္ခါ သင်္ကာ ဝိမတျပိ. मनोविलेख, सन्देह, संशय, कथंकथा, द्वैधुक, विचिकित्सा, काङ्क्षा, शङ्का और विमति। ၁၇၁. १७१. ဂဗ္ဗော [Pg.16] ဘိမာနော’ဟံကာရော, စိန္တာတု ဈာန မုစ္စတေ; နိစ္ဆယော နိဏ္ဏယော ဝုတ္တော, ပဋိညာ တု ပဋိဿဝေါ. गर्व, अभिमान, अहंकार; चिन्ता को ध्यान कहा जाता है; निश्चय को निर्णय और प्रतिज्ञा को प्रतिश्रव कहा गया है। ၁၇၂. १७२. အဝမာနံ တိရက္ကာရော, ပရိဘဝေါ ပျ’ နာဒရော; ပရာဘဝေါ ပျ’ ဝညာ ထ, ဥမ္မာဒေါ စိတ္တဝိဗ္ဘမော. अवमान, तिरस्कार, परिभव, अनादर, पराभव, अवज्ञा; और उन्माद को चित्तविभ्रम कहते हैं। ၁၇၃. १७३. ပေမံ သိနေဟော သ္နေဟော ထ, စိတ္တပီဠာ ဝိသညိတာ; ပမာဒေါ သတိဝေါဿဂ္ဂေါ, ကောတူဟလံ ကုတူဟလံ. प्रेम, स्नेह; चित्तपीड़ा को विसंज्ञिता (बेहोशी) कहते हैं; प्रमाद को स्मृति-त्याग (सतिवोस्सग्ग) और कौतूहल को कुतूहल कहते हैं। ၁၇၄. १७४. ဝိလာသော လလိတံ လီလာ, ဟာဝေါ ဟေဠာ စ ဝိဗ္ဘမော; ဣစ္စာဒိကာ သိယုံ နာရိ, သိင်္ဂါရဘာဝဇာ ကိရိယာ. विलास, ललित, लीला, हाव, हेला और विभ्रम—ये स्त्रियों की श्रृंगार भाव से उत्पन्न क्रियाएँ हैं। ၁၇၅. १७५. ဟသနံ ဟသိတံ ဟာသော, မန္ဒော သော မိဟိတံ သိတံ; အဋ္ဋဟာသော မဟာဟာသော,ရောမဉ္စော လောမဟံသနံ. हसन, हसित, हास; मन्द हास को मिहित और सित कहते हैं; अट्टहास, महाहास; रोमांच और लोमहर्षण। ၁၇၆. १७६. ပရိဟာသော ဒဝေါ ခိဍ္ဍာ, ကေဠိ ကီဠာ စ ကီဠိတံ; နိဒ္ဒါ တု သုပိနံ သောပ္ပံ, မိဒ္ဓဉ္စ ပစလာယိကာ. परिहास, दव, खिड्डा, केलि, क्रीड़ा और क्रीड़ित; निद्रा, सुपित (स्वप्न), सोप्प; मिद्ध और प्रचलायिका (ऊँघना)। ၁၇၇. १७७. ထိယံ နိကတိ ကူဋဉ္စ, ဒမ္ဘော သာဌျဉ္စ ကေတဝံ; သဘာဝေါ တု နိဿဂ္ဂေါ စ, သရူပံ ပကတိတ္ထိယံ. निकृति, कूट, दम्भ, शाठ्य और कैतव (स्त्रीलिंग में); स्वभाव, निसर्ग, सरूप और प्रकृति। ၁၇၈. १७८. သီလဉ္စ လက္ခဏံ ဘာဝေါ,ဥဿဝေါ တု ဆဏော မဟော. शील, लक्षण और भाव; उत्सव, क्षण और मह। ၁၇၉. १७९. ဓာရေန္တော ဇန္တု သသ္နေဟ, မဘိဓာနပ္ပဒီပိကံ; ခုဒ္ဒကာဒျတ္ထဇာတာနိ, သမ္ပဿတိ ယထာသုခံ. जो मनुष्य स्नेहपूर्वक इस अभिधानप्पदीपिका को धारण करता है, वह क्षुद्रक आदि अर्थों के समूहों को सुखपूर्वक समझ लेता है। သဂ္ဂကဏ္ဍော နိဋ္ဌိတော. स्वर्ग-काण्ड समाप्त हुआ। ၂. ဘူကဏ္ဍ २. भू-काण्ड (पृथ्वी काण्ड) ၁. ဘူမိဝဂ္ဂ १. भूमिवर्ग ၁၈၀. १८०. ဝဂ္ဂါ ဘူမိ, ပုရီ, မစ္စ, စတုဗ္ဗဏ္ဏ, ဝနာဒိဟိ; ပါတာလေန စ ဝုစ္စန္တေ, သင်္ဂေါ’ပင်္ဂေဟိ’ဓ’က္ကမာ. यहाँ भूमि, पुरी, मर्त्य (मनुष्य), चतुर्वर्ण, वन आदि और पाताल के वर्गों को उनके अंगों और उपांगों के साथ क्रम से कहा गया है। ၁၈၁. १८१. ဝသုန္ဓရာ ဆမာ ဘူမိ, ပထဝီ မေဒနီ မဟီ; ဥဗ္ဗီ ဝသုမတီ ဂေါ ကု, ဝသုဓာ ဓရဏီ ဓရာ; ပုထဝီ ဇဂတီ ဘူရီ, ဘူ စ ဘူတဓရာ’ ဝနီ. वसुन्धरा, क्षमा, भूमि, पृथ्वी, मेदिनी, मही, उर्वी, वसुमती, गो, कु, वसुधा, धरणी, धरा, पृथिवी, जगती, भूरी, भू, भूतधरा और अवनी (ये पृथ्वी के नाम हैं)। ၁၈၂. १८२. ခါရာ [Pg.17] တု မတ္တိကာ ဦသော, ဦသဝါ တူသရော တိသု; ထလံ ထလီတ္ထီ ဘူဘာဂေ, ထဒ္ဓလူခမှိ ဇင်္ဂလော. खारी मिट्टी को ऊष कहते हैं, ऊषयुक्त भूमि को ऊसर (तीनों लिंगों में) कहते हैं; ऊँचे भू-भाग को थल और थली कहते हैं; कठोर और रूखी भूमि को जांगल कहते हैं। ၁၈၃. १८३. ပုဗ္ဗဝိဒေဟော စာပရ, ဂေါယာနံ ဇမ္ဗုဒီပေါ စ; ဥတ္တရကုရု စေတိ သိယုံ, စတ္တာရောမေ မဟာဒီပါ. पूर्वविदेह, अपरगोयान, जम्बुद्वीप और उत्तरकुरु—ये चार महाद्वीप हैं। ၁၈၄. १८४. ပုမ္ဗဟုတ္တေ ကုရူ သက္ကာ, ကောသလာ မဂဓာ သိဝီ; ကလိင်္ဂါ’ဝန္တိ ပဉ္စာလာ, ဝဇ္ဇီ ဂန္ဓာရ စေတယော. कुरु, शाक्य, कोसल, मगध, शिवि, कलिंग, अवन्ति, पञ्चाल, वज्जी, गन्धार और चेति (ये शब्द पुल्लिंग बहुवचन में प्रयुक्त होते हैं)। ၁၈၅. १८५. ဝင်္ဂါ ဝိဒေဟာ ကမ္ဗောဇာ, မဒ္ဒါ ဘဂ္ဂ’င်္ဂ သီဟဠာ; ကသ္မီရာ ကာသိ ပဏ္ဍဝါဒီ, သိယုံ ဇနပဒန္တရာ. वंग, विदेह, कम्बोज, मद्द, भग्ग, अंग, सिंहल, कश्मीर, काशि और पाण्डव आदि अन्य जनपद हैं। ၁၈၆. १८६. လောကော စ ဘုဝနံ ဝုတ္တံ, ဒေသော တု ဝိသယော ပျထ; မိလက္ခဒေသော ပစ္စန္တော, မဇ္ဈဒေသော တု မဇ္ဈိမော. लोक और भुवन; देश और विषय; म्लेच्छ देश को प्रत्यन्त और मध्य देश को मध्यम कहते हैं। ၁၈၇. १८७. အနူပေါ သလိလပ္ပာယော, ကစ္ဆံ ပုမ နပုံသကေ; သဒ္ဒလော ဟရိတေ ဒေသေ, တိဏေနာ, ဘိနဝေန ဟိ. जल की अधिकता वाले स्थान को अनूप और कच्छ (पुल्लिंग और नपुंसक लिंग में) कहते हैं; नवीन घास से युक्त हरे-भरे स्थान को शाद्वल कहते हैं। ၁၈၈. १८८. နဒျမ္ဗုဇီဝနော ဒေသော, ဝုဋ္ဌိနိပ္ပဇ္ဇသဿကော; ယော နဒီမာတိကော ဒေဝ,မာတိကော စ ကမေန သော. जो देश नदी के जल पर आश्रित हो उसे नदीमातृक और जो वर्षा के जल से उत्पन्न अन्न वाला हो उसे देवमातृक कहते हैं। ၁၈၉. १८९. တီသွနူပါဒျထော စန္ဒ, သူရာဒေါ သဿတီရိတော; ရဋ္ဌံ တု ဝိဇိတဉ္စာထ, ပုရိသေ သေတု အာလိယံ. अनूप आदि, चण्ड, शूर आदि और शाश्वत शब्द तीनों लिंगों में होते हैं; राष्ट्र और विजित; सेतु और आलि (पुल्लिंग में)। ၁၉၀. १९०. ဥပါန္တဘူ ပရိသရော, ဂေါဋ္ဌံ တု ဂေါကုလံ ဝဇော; မဂ္ဂေါ ပန္ထော ပထော အဒ္ဓါ, အဉ္ဇသံ ဝဋုမံ တထာ. समीपवर्ती भूमि को परिसर कहते हैं; गोष्ठ, गोकुल और व्रज; मार्ग, पन्थ, पथ, अध्वा, अञ्जस और वर्त्म (ये मार्ग के नाम हैं)। ၁၉၁. १९१. ပဇ္ဇော, ယနဉ္စ ပဒဝီ, ဝတ္တနီ ပဒ္ဓတိတ္ထိယံ; တဗ္ဘေဒါ ဇင်္ဃ, သကဋ, မဂ္ဂါ တေ စ မဟဒ္ဓနိ. पज्ज, यान, पदवी, वर्तनी और पद्धति - ये मार्ग के नाम हैं। जङ्घामार्ग (पैदल रास्ता), शकटमार्ग (गाड़ी का रास्ता) और महापथ (राजमार्ग) इसके भेद हैं। ၁၉၂. १९२. ဧကပဒျေကပဒိကေ, ကန္တာရော တု စ ဒုဂ္ဂမေ; एकपदी और एकपदिका (पगडंडी); दुर्गम मार्ग को कान्तार कहते हैं। ၁၉၃. १९३. ပဋိမဂ္ဂေါ ပဋိပထော, အဒ္ဓါနံ ဒီဃ မဉ္ဇသံ; သုပ္ပထော တု သုပန္ထော စ, ဥပ္ပထံ တွပထံ ဘဝေ. प्रतिमार्ग और प्रतिपथ (विपरीत मार्ग); लम्बे मार्ग को अध्वान और अञ्जस कहते हैं। सुपथ और सुपन्थ (अच्छा मार्ग); कुपथ और अपथ (गलत मार्ग) होते हैं। ၁၉၄. १९४. ဆတ္တိံသပရမာဏူန, မေကော ဏု စ ဆတ္တိံသ တေ; တဇ္ဇာရီ တာပိ ဆတ္တိံသ, ရထရေဏု ဆတ္တိံသ တေ. छत्तीस परमाणुओं का एक 'अणु' होता है; छत्तीस अणुओं का एक 'तज्जारी' होता है; और छत्तीस तज्जारी का एक 'रथरेणु' होता है। ၁၉၅. १९५. လိက္ခာတာ သတ္တ ဦကာ တာ, ဓညမာသောတိ သတ္တ တေ; သတ္တ င်္ဂုလ’ မမု ဒွိစ္ဆ, ဝိဒတ္ထိ တာ ဒုဝေ သိယုံ. छत्तीस रथरेणु की एक 'लिख्खा' होती है; सात लिख्खा की एक 'ऊका' होती है; सात ऊका का एक 'धान्यमाष' होता है; सात धान्यमाष का एक 'अङ्गुल' होता है; बारह अङ्गुल की एक 'विदत्थि' (बित्ता) होती है। ၁၉၆. १९६. ရတနံ [Pg.18] တာနိ သတ္တေဝ, ယဋ္ဌိ တာ ဝီသတူ သဘံ; ဂါဝုတ မုသဘာသီတိ, ယောဇနံ စတုဂါဝုတံ. दो विदत्थि का एक 'रतन' (हाथ) होता है; सात रतन की एक 'यट्ठि' (लाठी) होती है; बीस यट्ठि का एक 'उसभ' होता है; अस्सी उसभ का एक 'गावुत' (कोस) होता है; और चार गावुत का एक 'योजन' होता है। ၁၉၇. १९७. ဓနုပဉ္စသတံ ကောသော, ကရီသံ စတုရမ္ဗဏံ; အဗ္ဘန္တရံ တု ဟတ္ထာန, မဋ္ဌဝီသ ပမာဏတော. पाँच सौ धनुष का एक 'कोस' होता है; चार अम्मण का एक 'करीस' होता है; और अट्ठाईस हाथ के परिमाण को 'अभ्यन्तर' कहते हैं। ဘူမိဝဂ္ဂေါ နိဋ္ဌိတော. भूमिवर्ग समाप्त हुआ। ၂. ဘူကဏ္ဍ २. भूकाण्ड (पृथ्वी काण्ड)। ၂. ပုရဝဂ္ဂ २. पुरवर्ग (नगर वर्ग)। ၁၉၈. १९८. ပုရံ နဂရ မိတ္ထီ ဝါ, ဌာနီယံ ပုဋဘေဒနံ; ထိယံ တု ရာဇဓာနီ စ, ခန္ဓာဝါရော ဘဝေ ထ စ. पुर, नगर, स्थानीय और पुटभेदन - ये नगर के नाम हैं। राजधानी और स्कन्धावार (छावनी) भी नगर के ही भेद हैं। ၁၉၉. १९९. သာခါနဂရ မညတြ, ယံ တံ မူလပုရာ ပုရံ; ဗာရာဏသီ စ သာဝတ္ထိ, ဝေသာလီ မိထိလာ, ဠဝီ. मूल नगर के अतिरिक्त जो नगर होता है उसे 'शाखानगर' कहते हैं। वाराणसी, सावत्थी, वेसाली, मिथिला और आलवी (प्रसिद्ध नगर हैं)। ၂၀၀. २००. ကောသမ္ဗု, ဇ္ဇေနိယော တက္က, သိလာ စမ္ပာ စ သာဂလံ; သုသုမာရဂိရံ ရာဇ, ဂဟံ ကပိလဝတ္ထု စ. कोसम्बी, उज्जेनी, तक्कसिला, चम्पा, सागल, सुसुमारगिर, राजगह और कपिलवत्थु (भी नगर हैं)। ၂၀၁. २०१. သာကေတ, မိန္ဒပတ္ထဉ္စော, က္ကဋ္ဌာ ပါဋလိပုတ္တကံ; ဇေတုတ္တရဉ္စ သင်္ကဿံ, ကုသိနာရာဒယော ပုရီ. साकेत, इन्दपत्थ, उक्कठ्ठा, पाटलिपुत्त, जेतुत्तर, सङ्कस्स और कुसिनारा आदि नगरियाँ हैं। ၂၀၂. २०२. ရစ္ဆာ စ ဝိသိခါ ဝုတ္တာ, ရထိကာ ဝီထိ စာပျထ; ဗျူဟော ရစ္ဆာ အနိဗ္ဗိဒ္ဓါ, နိဗ္ဗိဒ္ဓါ တု ပထဒ္ဓိ စ. रच्छा, विसिखा, रथिका और वीथि - ये गली के नाम हैं। जो गली आर-पार न हो उसे 'व्यूह' कहते हैं और जो आर-पार हो उसे 'पथद्धि' कहते हैं। ၂၀၃. २०३. စတုက္ကံ စစ္စရေ မဂ္ဂ, သန္ဓိ သိင်္ဃာဋကံ ဘဝေ; ပါကာရော ဝရဏော စာထ, ဥဒါပေါ ဥပကာရိကာ. चतुष्क, चच्चर, मार्गसन्धि और सिङ्घाटक - ये चौराहे के नाम हैं। प्राकार और वरण - ये परकोटे (दीवार) के नाम हैं। उदाप और उपकारिका (अट्टालिका) भी इसके नाम हैं। ၂၀၄. २०४. ကုဋ္ဋံ တု ဘိတ္တိ နာရီ ထ, ဂေါပုရံ ဒွါရကောဋ္ဌကော; ဧသိကာ ဣန္ဒခီလော စ, အဋ္ဋော တွဋ္ဋာလကော ဘဝေ. कुट्ट और भित्ति - ये दीवार के नाम हैं। गोपुर और द्वारकोठक - ये मुख्य द्वार के नाम हैं। एसिका और इन्दखील - ये द्वार के खम्भे हैं। अट्ट और अट्टालक - ये मीनार के नाम हैं। ၂၀၅. २०५. တောရဏံ တု ဗဟိဒွါရံ, ပရိခါတု စ ဒီဃိကာ; မန္ဒိရံ သဒနာ, ဂါရံ, နိကာယော နိလယာ, လယော. तोरण बाहरी द्वार को कहते हैं। परिखा और दीघिका - ये खाई के नाम हैं। मन्दिर, सदन, अगार, निकाय, निलय और आलय - ये घर के नाम हैं। ၂၀၆. २०६. အာဝါသော ဘဝနံ ဝေသ္မံ, နိကေတနံ နိဝေသနံ; ဃရံ ဂဟဉ္စာ, ဝသထော, သရဏဉ္စ ပတိဿယော. आवास, भवन, वेष्म, निकेतन, निवेशन, घर, गृह, आवसथ, शरण और प्रतिश्रय - ये भी घर के नाम हैं। ၂၀၇. २०७. ဩကံ သာလာ ခယော ဝါသော, ထိယံ ကုဋိ ဝသတျ’ပိ; ဂေဟဉ္စာ, နိတ္ထိ သဒုမံ, စေတိယာ, ယတနာနိ တု. ओक, शाला, क्षय, वास, कुटी, वसति, गेह और सदुम - ये घर के नाम हैं। चैत्य और आयतन - ये मन्दिर के नाम हैं। ၂၀၈. २०८. ပါသာဒေါ [Pg.19] စေဝ ယူပေါ ထ, မုဏ္ဍစ္ဆဒေါ စ ဟမ္မိယံ; ယူပေါတု ဂဇကုမ္ဘမှိ, ဟတ္ထိနခေါ ပတိဋ္ဌိတော. प्रासाद, यूप, मुण्डच्छद और हम्मिय - ये महल के नाम हैं। हाथी के मस्तक (कुम्भ) पर स्थित स्तम्भ को 'यूप' और 'हस्तिनख' कहते हैं। ၂၀၉. २०९. သုပဏ္ဏဝင်္ကစ္ဆဒန, မဍ္ဎယောဂေါ သိယာ ထ စ; ဧကကူဋယုတော မာဠော,ပါသာဒေါ စတုရဿကော. गरुड़ के पंख की तरह झुकी हुई छत वाले घर को 'अड्ढयोग' कहते हैं। एक शिखर वाले घर को 'माल' और चौकोर महल को 'प्रासाद' कहते हैं। ၂၁၀. २१०. သဘာယဉ္စ သဘာ စာထ, မဏ္ဍပံ ဝါ ဇနာလယော; အထော အာသနသာလာယံ, ပဋိက္ကမန မီရိတံ. सभाय, सभा, मण्डप और जनालय - ये सभा-भवन के नाम हैं। बैठने की शाला को 'प्रतिक्रमण' (विश्राम गृह) कहा गया है। ၂၁၁. २११. ဇိနဿ ဝါသဘဝန, မိတ္ထီ ဂန္ဓကုဋိ ပျထ; ထိယံ ရသဝတီ ပါက, ဋ္ဌာနဉ္စေဝ မဟာနသံ. बुद्ध के निवास स्थान को 'गन्धकुटी' कहते हैं। रसवती, पाकस्थान और महानस - ये रसोईघर के नाम हैं। ၂၁၂. २१२. အာဝေသနံ သိပ္ပသာလာ, သောဏ္ဍာ တု ပါနမန္ဒိရံ; ဝစ္စဋ္ဌာနံ ဝစ္စကုဋိ, မုနီနံ ဌာန မဿမော. आवेसन और शिल्पशाला - ये कारखाने के नाम हैं। शौण्डा और पानमन्दिर - ये मदिरालय के नाम हैं। वर्चस्थान और वर्चकुटी - ये शौचालय के नाम हैं। मुनियों के स्थान को 'आश्रम' कहते हैं। ၂၁၃. २१३. ပဏျဝိက္ကယသာလာ ကု, အာပဏော ပဏျဝီထိကာ; ဥဒေါသိတော ဘဏ္ဍသာလာ, စင်္ကမနံ တု စင်္ကမော. पण्यविक्रयशाला, आपण और पण्यवीथिका - ये दुकान के नाम हैं। उदोसित और भण्डशाला - ये गोदाम के नाम हैं। चङ्क्रमण और चङ्क्रम - ये टहलने के स्थान के नाम हैं। ၂၁၄. २१४. ဇန္တာဃရံ တွဂ္ဂိသာလာ, ပပါ ပါနီယသာလိကာ; ဂဗ္ဘော ဩဝရကော ဝါသာ, ဂါရံ တု သယနိဂ္ဂဟံ. जन्ताघर और अग्निशाला - ये स्नानगृह (गर्म स्नान) के नाम हैं। प्रपा और पानीयशालिका - ये प्याऊ के नाम हैं। गर्भ और ओवरक - ये भीतरी कमरे के नाम हैं। वासागार और शयनीगृह - ये शयनकक्ष के नाम हैं। ၂၁၅. २१५. ဣတ္ထာဂါရံ တု ဩရောဓော, သုဒ္ဓန္တော’ န္တေပုရမ္ပိ စ; အသဗ္ဗဝိသယဋ္ဌာနံ, ရညံ ကစ္ဆန္တရံ မတံ. इत्थागार, ओरोध, शुद्धान्त और अन्तःपुर - ये रनिवास के नाम हैं। जहाँ सबका प्रवेश न हो, राजाओं के उस स्थान को 'कक्षान्तर' माना गया है। ၂၁၆. २१६. သောပါနော ဝါ’ရောဟဏဉ္စ,နိဿေဏီ သာ, ဓိရောဟိဏီ; ဝါတပါနံ ဂဝက္ခော စ, ဇာလဉ္စ သီဟပဉ္ဇရံ. सोपान और आरोहण - ये सीढ़ी के नाम हैं। निस्सेणी और अधिरोहिणी - ये भी सीढ़ी (निशैनी) के नाम हैं। वातपान, गवाक्ष, जाल और सिंहपञ्जर - ये खिड़की के नाम हैं। ၂၁၇. २१७. အာလောကသန္ဓိ ဝုတ္တော ထ, လင်္ဂီ’တ္ထီ ပလိဃော ဘဝေ; ကပိသီသော, ဂ္ဂလတ္ထမ္ဘော, နိဗ္ဗံ တု ဆဒ္ဒကောဋိယံ. आलोकसन्धि (रोशनदान) कहा गया है। लङ्गी और पलिघ - ये अर्गला (कुण्डी) के नाम हैं। कपिसीस और अग्गलत्थम्भ - ये भी अर्गला के नाम हैं। छत के किनारे को 'निब्ब' कहते हैं। ၂၁၈. २१८. ဆဒနံ ပဋလံ ဆဒ္ဒ, မဇိရံ စစ္စရော, င်္ဂဏံ; ပဃာနော ပဃနာ, လိန္ဒော, ပမုခံ ဒွါရဗန္ဓနံ. छदन, पटल, छद्द (छत); अजिर, चच्चर, अङ्गण (आँगन); पघान, पघन, अलिन्द, पमुख (ओसारा या ड्योढ़ी); द्वारबन्धन (चौखट)। ၂၁၉. २१९. ပိဋ္ဌသံဃာဋကံ ဒွါရ, ဗာဟာ ကူဋံ တု ကဏ္ဏိကာ; ဒွါရဉ္စ ပဋိဟာရော ထ, ဥမ္မာရော ဒေဟနီ, တ္ထိယံ. पिट्ठसंघाटक (द्वार का ढांचा), द्वारबाहा (द्वार की बाजू), कूट और कण्णिका (शिखर या मुंडेर); द्वार और पतिहार (दरवाजा); उम्मार और देहनी (देहली या चौखट का निचला भाग)। ၂၂၀. २२०. ဧဠကော ဣန္ဒခီလော ထ, ထမ္ဘော ထူဏော ပုမိတ္ထိယံ; ပါဋိကာ, ဍ္ဎေန္ဒုပါသာဏေ, ဂိဉ္ဇကာ တု စ ဣဋ္ဌကာ. एळक और इन्दखील (इन्द्रकील या देहली); थम्भ और थूण (खंभा); पाटिका और अद्धेन्दुपासाण (अर्धचन्द्र पत्थर या पायदान); गिञ्जका और इट्टका (ईंट)। ၂၂၁. २२१. ဝလဘိစ္ဆာဒိဒါရုမှိ, ဝင်္ကေ ဂေါပါနသီ, တ္ထိယံ; ကပေါတပါလိကာယံ တု, ဝိဋင်္ကော နိတ္ထိယံ ဘဝေ. वलभि आदि की लकड़ी में, वक्र लकड़ी को गोपानसी (बलेन्डा या कड़ी) कहते हैं; कपोतपालिका (कबूतरों के बैठने का स्थान) को विटङ्क कहते हैं। ၂၂၂. २२२. ကုဉ္စိကာဝိဝရံ [Pg.20] တာဠ, စ္ဆိဂ္ဂလော ပျထ ကုဉ္စိကာ; တာဠော’ဝါပုရဏံ စာထ, ဝေဒိကာ ဝေဒိ ကထျတေ. कुञ्चिकाविवर और तालच्छिग्गल (ताले का छेद); कुञ्चिका, ताल और अवापुरण (चाबी); वेदिका और वेदि (वेदी या चबूतरा) कहे जाते हैं। ၂၂၃. २२३. သံဃာတော ပက္ခပါသော စ, မန္ဒိရင်္ဂါ တုလာ အပိ; ထိယံ သမ္မုဇ္ဇနီ စေဝ, သမ္မဇ္ဇနီ စ သောဓနီ. संघात, पक्खपास और तुला (भवन के अंग या शहतीर); सम्मुज्जनी, सम्मज्जनी और शोधनी (झाड़ू)। ၂၂၄. २२४. သင်္ကဋီရံ တု သင်္ကာရ, ဋ္ဌာနံ သင်္ကာရကူဋကံ; အထော ကစဝရော, က္လာပေါ, သင်္ကာရော စ ကသမ္ဗုပိ. सङ्कटीर, सङ्कारट्ठान और सङ्कारकूटक (कूड़ेदान या कूड़े का ढेर); कचवर, कलाप, सङ्कार और कसम्बु (कूड़ा-करकट)। ၂၂၅. २२५. ဃရာဒိဘူမိ တံ ဝတ္ထု, ဂါမော သံဝသထော ထ သော; ပါကဋော နိဂမော ဘောဂ, မစ္စာဒိဘျော ဓိ တူဒိတော. घर आदि की भूमि 'वत्थु' (वास्तु) है; गाम और संवसथ (गाँव); निगम (कस्बा या बाजार); भोग और अमात्य आदि से युक्त स्थान। ၂၂၆. २२६. သီမာ စ မရိယာဒါ ထ,ဃောသော ဂေါပါလဂါမကောတိ. सीमा और मरियादा (सीमा या मर्यादा); घोस (ग्वालों की बस्ती)। ပုရဝဂ္ဂေါ နိဋ္ဌိတော. पुरवग्गो निट्ठितो (नगर वर्ग समाप्त)। ၃. နရဝဂ္ဂ ३. नरवग्ग (नर वर्ग या मनुष्य वर्ग)। ၂၂၇. २२७. မနုဿော မာနုသော မစ္စော, မာနဝေါ မနုဇော နရော; ပေါသော ပုမာ စ ပုရိသော,ပေါရိသော ပျထ ပဏ္ဍိတော. मनुस्स, मानुस, मच्च, मानव, मनुज, नर, पोस, पुमा, पुरिस और पोरिस (मनुष्य या पुरुष); पण्डित (विद्वान)। ၂၂၈. २२८. ဗုဓော ဝိဒွါ ဝိဘာဝီ စ, သန္တော သပ္ပည ကောဝိဒါ; ဓီမာ သုဓီ ကဝိ ဗျတ္တော, ဝိစက္ခဏော ဝိသာရဒေါ. बुध, विद्वा, विभावो, सन्त, सप्पञ्ञ, कोविद, धीमा, सुधी, कवि, ब्यत्त, विचक्खण और विसारद (बुद्धिमान या विद्वान)। ၂၂၉. २२९. မေဓာဝီ မတိမာ ပညော, ဝိညူ စ ဝိဒူရော ဝိဒူ; ဓီရော ဝိပဿီ ဒေါသညူ, ဗုဒ္ဓေါ စ ဒဗ္ဗ ဝိဒ္ဒသု. मेधावी, मतिमा, पञ्ञो, विञ्ञू, विदुर, विदू, धीर, विपस्सी, दोसञ्ञू, बुद्ध, दब्ब और विद्दसु (मेधावी या ज्ञानी)। ၂၃၀. २३०. ဣတ္ထီ သီမန္တိနီ နာရီ, ထီ ဝဓူ ဝနိတာ, င်္ဂနာ; ပမဒါ သုန္ဒရီ ကန္တာ, ရမဏီ ဒယိတာ, ဗလာ. इत्थी, सीमन्तिनी, नारी, थी, वधू, वनिता, अङ्गना, पमदा, सुन्दरी, कन्ता, रमणी, दयिता और बला (स्त्री या नारी)। ၂၃၁. २३१. မာတုဂါမော စ မဟိလာ, လလနာ ဘီရု ကာမိနီ; ကုမာရိကာ တု ကညာ ထ, ယုဝတီ တရုဏီ ဘဝေ. मातुगाम, महिला, ललना, भीरु और कामिनी (स्त्री); कुमारिका और कञ्ञा (कन्या); युवती और तरुणी (युवती)। ၂၃၂. २३२. မဟေသီ သာဘိသေကာညာ,ဘောဂိနီ ရာဇနာရိယော; ဓဝတ္ထိနီ တု သင်္ကေတံ, ယာတိ ယာ သာ, ဘိသာရိကာ. महेसी (अभिषिक्त रानी), भोगिनी (राजा की अन्य स्त्रियाँ); जो स्त्री स्वयं संकेत स्थल पर जाए, वह अभिसारिका है। ၂၃၃. २३३. ဂဏိကာ [Pg.21] ဝေသိယာ ဝဏ္ဏ, ဒါသီ နဂရသောဘိနီ; ရူပူပဇီဝိနီ ဝေသီ, ကုလဋာ တု စ ဗန္ဓကီ. गणिका, वेसिया, वण्णदासी, नगरसोभिनी, रूपूपजीविनी और वेसी (वेश्या या नगरवधू); कुलटा और बन्धकी (कुलटा या व्यभिचारिणी)। ၂၃၄. २३४. ဝရာရောဟော, တ္တမာ မတ္တ, ကာသိနီ ဝရဝဏ္ဏိနီ; ပတိဗ္ဗတာ တွပိ သတီ, ကုလိတ္ထီ ကုလပါလိကာ. वरारोहा, उत्तमा, मत्तकासिनी और वरवण्णिनी (उत्तम या सुंदर स्त्री); पतिब्बता, सती, कुलित्थी और कुलपालिका (पतिव्रता या सती)। ၂၃၅. २३५. ဝိဓဝါ ပတိသုညာ ထ, ပတိမ္ဗရာ သယမ္ဗရာ; ဝိဇာတာ တု ပသူတာ စ, ဇာတာပစ္စာ ပသူတိကာ. विधवा और पतिसुञ्ञा (विधवा); पतिम्बरा और सयम्बरा (स्वयंवर करने वाली); विजाता, पसूता, जातापच्चा और पसूतिका (प्रसूता या जिसने संतान को जन्म दिया हो)। ၂၃၆. २३६. ဒူတီ သဉ္စာရိကာ ဒါသီ, တု စေဋီ ကုဋဓာရိကာ; ဝါရုဏီ, က္ခဏိကာ တုလျာ, ခတ္တိယာနီ တု ခတ္တိယာ. दूती और सञ्चारिका (दूती); दासी, चेटी और कुटधारिका (दासी या नौकरानी); वारुणी और क्खणिका (समानार्थक); खत्तियानी और खत्तिया (क्षत्रिय स्त्री)। ၂၃၇. २३७. ဒါရော ဇာယာ ကလတ္တဉ္စ, ဃရဏီ ဘရိယာ ပိယာ,ပဇာပတီ စ ဒုတိယာ, သာ ပါဒပရိစာရိကာ. दार, जाया, कलत्त, घरणी, भरिया, पिया, पजापती, दुतिया और पादपरिचारिका (पत्नी या भार्या)। ၂၃၈. २३८. သခီ တွာ’လီ ဝယဿာ ထ, ဇာရီ စေဝါ’တိစာရိနီ; ပုမေ တူ’တု ရဇော ပုပ္ဖံ, ဥတုနီ တု ရဇဿလာ. सखी, आली और वयस्सा (सखी या सहेली); जारी और अतिचारिनी (व्यभिचारिणी); ऋतु, रजो और पुप्फ (रज या मासिक धर्म); ऋतुनी और रजस्सला (रजस्वला)। ၂၃၉. २३९. ပုပ္ဖဝတီ ဂရုဂဗ္ဘာ, ပန္နသတ္တာ စ ဂဗ္ဘိနီ; ဂဗ္ဘာသယော ဇလာဗုပိ, ကလလံ ပုန္နပုံသကေ. पुप्फवती (रजस्वला); गरूगब्भा, पण्णसत्ता और गब्भिनी (गर्भवती); गब्भासय और जलाबु (गर्भाशय); कलल (भ्रूण की प्रथम अवस्था)। ၂၄၀. २४०. ဓဝေါတု သာမိကော ဘတ္တာ, ကန္တော ပတိ ဝရော ပိယော; အထော ပပတိ ဇာရော ထာ,ပစ္စံ ပုတ္တော’တြဇော သုတော. धवो, सामिको, भत्ता, कन्तो, पति, वरो और पियो (पति या स्वामी); पपति और जार (जार या उपपति); पच्च, पुत्त, अत्रज और सुत (पुत्र)। ၂၄၁. २४१. တနုဇော တနယော သူနု, ပုတ္တာဒီ ဓီတရိ’တ္ထိယံ; နာရိယံ ဒုဟိတာ ဓီတာ,သဇာတော တွော’ရသော သုတော. तनुज, तनय और सूनु (पुत्र); स्त्रियों में दुहिता और धीता (पुत्री); ओरस सुत (औरस पुत्र या निज पुत्र)। ၂၄၂. २४२. ဇာယာပတီ ဇနိပတီ, ဇယမ္ပတီ တု ဒမ္ပတီ ; အထ ဝဿဝရော ဝုတ္တော, ပဏ္ဍကော စ နပုံသကံ. जायापती, जनिपती, जयम्पती और दम्पती (पति-पत्नी या दम्पति); वस्सवर, पण्डक और नपुंसक (नपुंसक या हिजड़ा)। ၂၄၃. २४३. ဗန္ဓဝေါ ဗန္ဓု သဇနော, သဂေါတ္တော ဉာတိ ဉာတကော; သာလောဟိတော သပိဏ္ဍော စ,တာတော တု ဇနကော ပိတာ. बन्धवो, बन्धु, सजन, सगोत्त, ञाति, ञातक, सालोहित और सपिण्ड (बन्धु-बान्धव या रिश्तेदार); तात, जनक और पिता (पिता)। ၂၄၄. २४४. အမ္မ, မ္ဗာ ဇနနီ မာတာ, ဇနေတ္တိ ဇနိကာ ဘဝေ; ဥပမာတာ တု ဓာတိ’တ္ထီ,သာလော ဇာယာယ ဘာတိကော. अम्मा, अम्बा, जननी, माता, जनेत्ती और जनिका (माता); उपमाता और धाती (धाय माँ); सालो (साला या पत्नी का भाई)। ၂၄၅. २४५. နနန္ဒာ [Pg.22] သာမိဘဂိနီ, မာတာမဟီ တု အယျိကာ; မာတုလော မာတုဘာတာ,ဿ, မာတုလာနီ ပဇာပတိ. ननन्दा (ननद या पति की बहन); मातामही और अय्यिका (नानी); मातुल (मामा) और मातुलानी (मामी)। ၂၄၆. २४६. ဇာယာပတီနံ ဇနနီ, သဿု ဝုတ္တာထ တပ္ပိတာ; သသုရော ဘာဂိနေယျောတု, ပုတ္တော ဘဂိနိယာ ဘဝေ. पति और पत्नी की माता को 'सास' (sassu) कहा जाता है और उनके पिता को 'ससुर' (sasuro) कहा जाता है। बहन के पुत्र को 'भांजा' (bhāgineyyo) कहते हैं। ၂၄၇. २४७. နတ္တာ ဝုတ္တော ပပုတ္တော ထ, သာမိဘာတာ တု ဒေဝရော; ဓီတုပတိ တု ဇာမာတာ,အယျကော တု ပိတာမဟော. प्रपौत्र (पोते) को 'नत्ता' (nattā) कहा जाता है। पति के भाई को 'देवर' (devaro) कहते हैं। पुत्री के पति को 'जामाता' (jāmātā) और दादा को 'अय्यक' (ayyako) या 'पितामह' (pitāmaho) कहते हैं। ၂၄၈. २४८. မာတုစ္ဆာ မာတုဘဂိနီ, ပိတုစ္ဆာ ဘဂိနီ ပိတု; ပပိတာမဟော ပယျကော,သုဏှာ တု သုဏိသာ ဟုသာ. माता की बहन को 'मातुच्छा' (mātucchā) और पिता की बहन को 'पितुच्छा' (pitucchā) कहते हैं। परदादा को 'पपितामह' (papitāmaho) या 'पय्यक' (payyako) कहते हैं। पुत्रवधू को 'सुण्हा' (suṇhā), 'सुणिसा' (suṇisā) या 'हुसा' (husā) कहते हैं। ၂၄၉. २४९. သောဒရိယော သဂဗ္ဘော စ, သောဒရော သဟဇော ပျထ; မာတာပိတူ တေ ပိတရော, ပုတ္တာ တု ပုတ္တဓီတရော. सगे भाई को 'सोदरिय' (sodariyo), 'सगब्भ' (sagabbho), 'सोदर' (sodaro) या 'सहज' (sahajo) कहते हैं। माता और पिता को 'पितरो' (pitaro) और पुत्र एवं पुत्री को 'पुत्ता' (puttā) कहते हैं। ၂၅၀. २५०. သသုရာ သဿုသသုရာ, ဘာတုဘဂိနီ ဘာတရော; ဗာလတ္တံ ဗာလတာ ဗာလျံ, ယောဗ္ဗညံတု စ ယောဗ္ဗနံ. सास और ससुर को 'ससुरा' (sasurā) या 'सस्सुससुरा' (sassusasurā) कहते हैं। भाई और बहन को 'भातरी' (bhātaro) कहते हैं। बचपन को 'बालत्तं' (bālattaṃ), 'बालता' (bālatā) या 'बाल्यं' (bālyaṃ) और जवानी को 'योब्बञ्ञं' (yobbaññaṃ) या 'योब्बनं' (yobbanaṃ) कहते हैं। ၂၅၁. २५१. သုက္ကာ တု ပလိတံ ကေသာ, ဒယော ထ ဇရတာ ဇရာ; ပုထုကော ပိလ္လကော ဆာပေါ, ကုမာရော ဗာလ ပေါတကာ. सफेद बालों को 'पलित' (palitaṃ) कहते हैं। बुढ़ापे को 'जरता' (jaratā) या 'जरा' (jarā) कहते हैं। बालक को 'पुथुक' (puthuko), 'पिल्लक' (pillako), 'छाप' (chāpo), 'कुमार' (kumāro), 'बाल' (bāla) या 'पोतक' (potakā) कहते हैं। ၂၅၂. २५२. အထု’ တ္တာနသယု’တ္တာန, သေယျကာ ထနပေါပိ စ; पीठ के बल लेटने वाले और स्तनपान करने वाले (शिशु) को 'उत्तानसयी' (uttānasayu), 'उत्तानसेय्यक' (uttānaseyyakā) और 'थनप' (thanapo) कहते हैं। ၂၅၃. २५३. တရုဏော စ ဝယဋ္ဌော စ, ဒဟရော စ ယုဝါ သုသု; မာဏဝေါဒါရကောစာထ, သုကုမာရော သုခေဓိတော. तरुण, युवा और बालक के लिए 'तरुण' (taruṇo), 'वयट्ठ' (vayaṭṭho), 'दहर' (daharo), 'युवा' (yuvā), 'सुसु' (susu), 'माणव' (māṇavo) और 'दारक' (dārako) शब्द हैं। जो सुखपूर्वक पला हो उसे 'सुकुमार' (sukumāro) या 'सुखेधित' (sukhedhito) कहते हैं। ၂၅၄. २५४. မဟလ္လကော စ ဝုဒ္ဓေါ စ, ထေရော ဇိဏ္ဏော စ ဇိဏ္ဏကော; အဂ္ဂဇော ပုဗ္ဗဇော ဇေဋ္ဌော, ကနိယော ကနိဋ္ဌော နုဇော. वृद्ध या बूढ़े को 'महल्लक' (mahallako), 'वुद्ध' (vuddho), 'थेर' (thero), 'जिण्ण' (jiṇṇo) या 'जिण्णक' (jiṇṇako) कहते हैं। बड़े भाई को 'अग्गज' (aggajo), 'पुब्बज' (pubbajo) या 'जेट्ठ' (jeṭṭho) और छोटे भाई को 'कनिय' (kaniyo), 'कनिट्ठ' (kaniṭṭho) या 'अनुज' (anujo) कहते हैं। ၂၅၅. २५५. ဝလိတ္တစော တု ဝလိနော; တီသု’တ္တာနသယာဒယော; झुर्रियों वाली त्वचा वाले को 'वलित्तच' (valittaco) या 'वलिनो' (valino) कहते हैं। 'उत्तानसयी' आदि शब्द तीनों लिंगों में होते हैं। ၂၅၆. २५६. သီသော’တ္တမင်္ဂါနိ သိရော, မုဒ္ဓါ စ မတ္ထကော ဘဝေ; ကေသော တု ကုန္တလော ဝါလော, တ္တမင်္ဂရုဟ မုဒ္ဓဇာ. सिर को 'सीस' (sīsa), 'उत्तमंग' (uttamaṅga), 'सिर' (siro), 'मुद्धा' (muddhā) या 'मत्थक' (matthako) कहते हैं। बालों को 'केस' (keso), 'कुन्तल' (kuntalo), 'वाल' (vālo), 'उत्तमंगरुह' (uttamaṅgaruha) या 'मुद्धज' (muddhajā) कहते हैं। ၂၅၇. २५७. ဓမ္မိလ္လော သံယတာ ကေသာ,ကာကပက္ခော သိခဏ္ဍကော; ပါသော ဟတ္ထော ကေသစယေ; တာပသာနံ တဟိံ ဇဋာ. बंधे हुए या सजे हुए बालों को 'धम्मिल्ल' (dhammillo) कहते हैं। बच्चों के सिर के बालों को 'काकपक्ष' (kākapakkho) या 'सिखण्डक' (sikhaṇḍako) कहते हैं। बालों के समूह के लिए 'पास' (pāso) या 'हत्थ' (hattho) शब्द का प्रयोग होता है और तपस्वियों के बालों को 'जटा' (jaṭā) कहते हैं। ၂၅၈. २५८. ထိယံ ဝေဏီ ပဝေဏီ စ; အထော စူဠာ သိခါ သိယာ; သီမန္တော တု မတော နာရိ, ကေသမဇ္ဈမှိ ပဒ္ဓတိ. स्त्रियों की चोटी को 'वेणी' (veṇī) या 'पवेणी' (paveṇī) कहते हैं। सिर की शिखा को 'चूळा' (cūḷā) या 'सिखा' (sikhā) कहते हैं। स्त्रियों के बालों के बीच की रेखा (मांग) को 'सीमन्त' (sīmanto) कहा जाता है। ၂၅၉. २५९. လောမံ [Pg.23] တနုရုဟံ ရောမံ, ပမှံ ပခုမ မက္ခိဂံ; မဿု ဝုတ္တံ ပုမမုခေ, ဘူ တွိတ္ထီ ဘမုကော ဘမု. शरीर के बालों को 'लोम' (lomaṃ), 'तनुरुह' (tanuruhaṃ) या 'रोम' (romaṃ) कहते हैं। आँखों की पलकों को 'पम्ह' (pamhaṃ) या 'पखुम' (pakhumaṃ) कहते हैं। पुरुष के मुख के बालों को 'मस्सु' (massu - दाढ़ी-मूंछ) और भौंह को 'भू' (bhū), 'भमुक' (bhamuko) या 'भमु' (bhamu) कहते हैं। ၂၆၀. २६०. ဗပ္ပော နေတ္တဇလ’ဿူနိ, နေတ္တတာရာ ကနီနိကာ; ဝဒနံ တု မုခံ တုဏ္ဍံ, ဝတ္တံ လပန မာနနံ. आँसुओं को 'बप्प' (bappo), 'नेत्तजल' (nettajala) या 'अस्सु' (assūni) कहते हैं। आँखों की पुतली को 'नेत्ततारा' (nettatārā) या 'कनीनिका' (kanīnikā) कहते हैं। मुख को 'वदन' (vadanaṃ), 'मुख' (mukhaṃ), 'तुण्ड' (tuṇḍaṃ), 'वत्त' (vattaṃ), 'लपन' (lapanaṃ) या 'आनन' (ānanaṃ) कहते हैं। ၂၆၁. २६१. ဒွိဇော လပနဇော ဒန္တော, ဒသနော ရဒနော ရဒေါ; ဒါဌာ တုဒန္တဘေဒသ္မိံ, အပါင်္ဂေါ တွက္ခိကောဋိသု. दाँत को 'द्विज' (dvijo), 'लपनज' (lapanajo), 'दन्त' (danto), 'दसन' (dasano), 'रदन' (radano) या 'रद' (rado) कहते हैं। दाँतों के एक विशेष प्रकार को 'दाठा' (dāṭhā - दाढ़) और आँखों के कोनों को 'अपांग' (apāṅgo) कहते हैं। ၂၆၂. २६२. ဒန္တာဝရဏ မောဋ္ဌော စာ, ပျ’ဓရော ဒသနစ္ဆဒေါ; ဂဏ္ဍော ကပေါလော ဟနွိတ္ထီ,စုဗုကံ တွ’ ဓရာ အဓော. होंठ को 'दन्तावरण' (dantāvaraṇa), 'ओट्ठ' (oṭṭho), 'अधर' (adharo) या 'दसनच्छद' (dasanacchado) कहते हैं। गाल को 'गण्ड' (gaṇḍo) या 'कपोल' (kapolo) कहते हैं। जबड़े को 'हनु' (hanu) और निचले होंठ के नीचे के भाग को 'चुबुक' (cubukaṃ - ठुड्डी) कहते हैं। ၂၆၃. २६३. ဂလော စ ကဏ္ဌော ဂီဝါ စ, ကန္ဓရာ စ သိရောဓရာ; ကမ္ဗုဂီဝါ တု ယာ ဂီဝါ, သုဝဏ္ဏာလိင်္ဂသန္နိဘာ; အင်္ကိတာ တီဟိ လေခါဟိ, ကမ္ဗုဂီဝါ ထဝါ မတာ. गले या गर्दन को 'गल' (galo), 'कण्ठ' (kaṇṭho), 'गीवा' (gīvā), 'कन्धरा' (kandharā) या 'सिरोधरा' (sirodharā) कहते हैं। जो गर्दन शंख के समान तीन रेखाओं से अंकित और सुंदर हो, उसे 'कम्बुगीवा' (kambugīvā) कहते हैं। ၂၆၄. २६४. အံသော နိတ္ထီ ဘုဇသိရော, ခန္ဓော တဿန္ဓိ ဇတ္တု တံ; ဗာဟုမူလံ တု ကစ္ဆော, ဓော, တွ’ဿ ပဿ မနိတ္ထိယံ. कंधे को 'अंस' (aṃso), 'भुजसिर' (bhujasiro) या 'खन्ध' (khandho) कहते हैं। कंधे की संधि को 'जत्रु' (jattu) कहते हैं। कांख को 'बाहुमूल' (bāhumūlaṃ) या 'कच्छ' (kaccho) कहते हैं और शरीर के बगल के भाग को 'पस्स' (passa) कहते हैं। ၂၆၅. २६५. ဗာဟု ဘုဇာဒွီသု ဗာဟာ, ဟတ္ထော တု ကရ ပါဏယော; မဏိဗန္ဓော ပကောဋ္ဌန္တော, ကပ္ပရော တု ကပေါဏျ’ထ. भुजा को 'बाहु' (bāhu), 'भुजा' (bhujā) या 'बाहा' (bāhā) कहते हैं। हाथ को 'हत्थ' (hattho), 'कर' (kara) या 'पाणि' (pāṇi) कहते हैं। कलाई को 'मणिबन्ध' (maṇibandho), कलाई से कोहनी तक के भाग को 'पकोट्ठ' (pakoṭṭha) और कोहनी को 'कप्पर' (kapparo) या 'कपोणि' (kapoṇi) कहते हैं। ၂၆၆. २६६. မဏိဗန္ဓ ကနိဋ္ဌာနံ, ပါဏိဿ ကရဘော,န္တရံ; ကရသာခါ, င်္ဂုလီ တာ တု, ပဉ္စ, င်္ဂုဋ္ဌော စ တဇ္ဇနီ; မဇ္ဈိမာ နာမိကာ စာပိ, ကနိဋ္ဌာ’တိ ကမာ သိယုံ. कलाई और कनिष्ठा के बीच के भाग को 'करभ' (karabho) कहते हैं। हाथ की शाखाओं को 'अंगुली' (aṅgulī) कहते हैं, जो पाँच हैं: अंगूठा (aṅguṭṭho), तर्जनी (tajjanī), मध्यमा (majjhimā), अनामिका (anāmikā) और कनिष्ठा (kaniṭṭhā)। ၂၆၇. २६७. ပဒေသော တာလဂေါကဏ္ဏာ, ဝိဒတ္ထိ,တ္ထီ ကမာ တတေ; တဇ္ဇနျာဒိယုတေ’င်္ဂုဋ္ဌေ, ပသတော ပါဏိ ကုဉ္စိတော. अंगूठे के साथ तर्जनी, मध्यमा, अनामिका और कनिष्ठा को फैलाने पर क्रमशः 'पदेस' (padeso), 'ताल' (tāla), 'गोकण्ण' (gokaṇṇā) और 'विदत्थि' (vidatthi) माप कहलाते हैं। मुड़े हुए या जुड़े हुए हाथों को 'पसत' (pasato) कहते हैं। ၂၆၈. २६८. ရတနံ ကုက္ကု ဟတ္ထော ထ, ပုမေ ကရပုဋော,ဉ္ဇလိ; ကရဇော တု နခေါ နိတ္ထီ, ခဋကော မုဋ္ဌိ စ ဒွီသု. हाथ की माप को 'रतन' (ratanaṃ), 'कुक्कु' (kukku) या 'हत्थ' (hattho) कहते हैं। जुड़ी हुई हथेलियों को 'करपुट' (karapuṭo) या 'अंजलि' (añjali) कहते हैं। नाखून को 'करज' (karajo) या 'नख' (nakho) और मुट्ठी को 'खटक' (khaṭako) या 'मुट्ठी' (muṭṭhi) कहते हैं। ၂၆၉. २६९. ဗျာမော သဟကရာ ဗာဟု, ဒွေ ပဿဒွယဝိတ္ထတာ; ဥဒ္ဓန္တတ ဘုဇပေါသ, ပ္ပမာဏေ ပေါရိသံ တိသု. दोनों भुजाओं को फैलाने पर जो विस्तार होता है उसे 'व्याम' (byāmo) कहते हैं। ऊपर की ओर हाथ उठाए हुए पुरुष की ऊँचाई की माप को 'पोरिस' (porisaṃ) कहते हैं। ၂၇၀. २७०. ဥရော စ ဟဒယံ စာထ, ထနော ကုစ ပယောဓရာ; စူစုကံ တု ထနဂ္ဂသ္မိံ, ပိဋ္ဌံ တု ပိဋ္ဌိ နာရိယံ. छाती को 'उर' (uro) या 'हृदय' (hadayaṃ) कहते हैं। स्तनों को 'थन' (thano), 'कुच' (kuca) या 'पयोधर' (payodharā) कहते हैं। स्तन के अग्रभाग को 'चूचुक' (cūcukaṃ) और पीठ को 'पिट्ठ' (piṭṭhaṃ) या 'पिट्ठी' (piṭṭhi) कहते हैं। ၂၇၁. २७१. မဇ္ဈော’နိတ္ထီ [Pg.24] ဝိလဂ္ဂေါ စ, မဇ္ဈိမံ ကုစ္ဆိ တု ဒွိသု; ဂဟဏီတ္ထျုဒရံ ဂဗ္ဘော, ကောဋ္ဌောန္တော ကုစ္ဆိသမ္ဘဝေ. कमर को 'मज्झ' (majjho), 'विलग्ग' (vilaggo) या 'मज्झिम' (majjhimaṃ) कहते हैं। पेट को 'कुच्छि' (kucchi), 'उदर' (udaraṃ) या 'गब्भ' (gabbho) कहते हैं। पाचन अंग को 'गहणी' (gahaṇī) और पेट के भीतरी भाग को 'कोट्ठ' (koṭṭha) कहते हैं। ၂၇၂. २७२. ဇဃနံ တု နိတမ္ဗော စ, သောဏီ စ ကဋိ နာရိယံ; အင်္ဂဇာတံ ရဟဿင်္ဂံ, ဝတ္ထဂုယှဉ္စ မေဟနံ. स्त्रियों के नितम्ब या कमर के भाग को 'जघन' (jaghanaṃ), 'नितम्ब' (nitambo), 'सोणी' (soṇī) या 'कटि' (kaṭi) कहते हैं। जननांग को 'अंगजात' (aṅgajātaṃ), 'रहस्सङ्ग' (rahassaṅgaṃ), 'वत्थगुय्ह' (vatthaguyhaṃ) या 'मेहन' (mehanaṃ) कहते हैं। ၂၇၃. २७३. နိမိတ္တဉ္စ ဝရင်္ဂဉ္စ, ဗီဇဉ္စ ဖလမေဝ စ; လိင်္ဂံ အဏ္ဍံ တု ကောသော စ,ယောနိ တွိတ္ထီပုမေဘဂံ. जननांग के लिए 'निमित्त' (nimittañca), 'वरङ्ग' (varaṅgañca), 'बीज' (bījañca), 'फल' (phalameva), 'लिंग' (liṅgaṃ) शब्द हैं। अंडकोष को 'अण्ड' (aṇḍaṃ) या 'कोस' (koso) कहते हैं। स्त्री जननांग को 'योनि' (yoni) या 'भग' (bhagaṃ) कहते हैं। ၂၇၄. २७४. အသုစိ သမ္ဘဝေါ သုက္ကံ, ပါယု တု ပုရိသေ ဂုဒံ; ဝါ ပုမေ ဂူထ ကရီသ, ဝစ္စာနိ စ မလံ ဆကံ. वीर्य को 'असुचि' (asuci), 'सम्भव' (sambhavo) या 'सुक्क' (sukkaṃ) कहते हैं। गुदा को 'पायु' (pāyu) या 'गुद' (gudaṃ) कहते हैं। मल को 'गूथ' (gūtha), 'करीस' (karīsa), 'वच्च' (vacca), 'मल' (malaṃ) या 'छक' (chakaṃ) कहते हैं। ၂၇၅. २७५. ဥစ္စာရော မီဠှ မုက္ကာရော, ပဿာဝေါ မုတ္တ မုစ္စတေ; ပူတိမုတ္တဉ္စ ဂေါမုတ္တေ, ဿာဒီနံ ဆကဏံ မလေ. मल को 'उच्चार' (uccāro), 'मीळ्ह' (mīḷha) या 'उक्कार' (ukkāro) भी कहते हैं। मूत्र को 'पस्साव' (passāvo) या 'मुत्त' (mutta) कहते हैं। गोमूत्र को 'पूतिमुत्त' (pūtimutta) और पशुओं के मल को 'छकण' (chakaṇaṃ) कहते हैं। ၂၇၆. २७६. ဒွီသွဓော နာဘိယာ ဝတ္ထိ, ဥစ္ဆင်္ဂ’င်္ကာ တု’ဘော ပုမေ; ဦရု သတ္ထိ ပုမေ ဦရု, ပဗ္ဗံ တု ဇာဏု ဇဏ္ဏု စ. नाभि के नीचे के दो भाग 'वत्थि' (बस्ति/पेड़ू) कहलाते हैं; 'उच्छङ्ग' और 'अङ्क' पुरुषवाचक शब्द गोद के लिए हैं; 'ऊरु' और 'सत्थि' जांघ के लिए हैं; 'पब्ब', 'जाणु' और 'जण्णु' घुटने के लिए हैं। ၂၇၇. २७७. ဂေါပ္ဖကော ပါဒဂဏ္ဌိပိ, ပုမေ တု ပဏှိ ပါသဏိ; ပါဒဂ္ဂံ ပပဒေါ ပါဒေါ, တု ပဒေါ စရဏဉ္စ ဝါ. 'गोप्फक' और 'पादगण्ठि' टखने के लिए हैं; 'पण्हि' और 'पासणि' (पुल्लिंग) एड़ी के लिए हैं; 'पादग्ग' और 'पपद' प्रपद (पैर का अगला भाग) के लिए हैं; 'पाद', 'पद' और 'चरण' पैर के लिए हैं। ၂၇၈. २७८. အင်္ဂံတွ’ဝယဝေါ ဝုတ္တော, ဖာသုလိကာ တု ဖာသုကာ; ပဏ္ဍကေ အဋ္ဌိ ဓာတွိတ္ထီ, ဂလန္တဋ္ဌိ တု အက္ခကော. 'अङ्ग' और 'अवयव' अंग के लिए कहे गए हैं; 'फासुलिका' और 'फासुका' पसली के लिए हैं; 'अट्ठि' (नपुंसक) और 'धातु' (स्त्रीलिंग) हड्डी के लिए हैं; 'गलन्तट्ठि' और 'अक्खक' हंसली (कंठ की हड्डी) के लिए हैं। ၂၇၉. २७९. ကပ္ပရော တု ကပါလံ ဝါ, ကဏ္ဍရာ တု မဟာသိရာ; ပုမေ နှာရု စိတ္ထီ သိရာ, ဓမနီ ထ ရသဂ္ဂသာ. 'कप्पर' और 'कपाल' कोहनी के लिए हैं; 'कण्डरा' और 'महासिर' बड़ी नस के लिए हैं; 'ण्हारु' (पुल्लिंग) और 'सिरा', 'धमनी' तथा 'रसग्गसा' (स्त्रीलिंग) नस या नाड़ी के लिए हैं। ၂၈၀. २८०. ရသဟရဏျ’ထော မံသ, မာမိသံ ပိသိတံ ဘဝေ; တိလိင်္ဂိကံ တု ဝလ္လူရ, မုတ္တတ္တံ အထ လောဟိတံ. 'रसहरणी' (नाड़ी) और 'मंस', 'आमिस' तथा 'पिसित' मांस के लिए हैं; 'वल्लूर' सूखे मांस के लिए है और 'लोहित' रक्त के लिए है। ၂၈၁. २८१. ရုဓိရံ သောဏိတံ ရတ္တံ, လာလာ ခေဠော ဧလာ ဘဝေ; ပုရိသေ မာယု ပိတ္တဉ္စ, သေမှော နိတ္ထီ သိလေသုမော. 'रुधिर', 'सोणित' और 'रत्त' रक्त के लिए हैं; 'लाला', 'खेळ' और 'एला' लार के लिए हैं; 'मायु' और 'पित्त' (पुल्लिंग) पित्त के लिए हैं; 'सेम्ह' और 'सिलेसमु' (स्त्रीलिंग को छोड़कर) कफ के लिए हैं। ၂၈၂. २८२. ဝသာ ဝိလီနသ္နေဟော ထ, မေဒေါ စေဝ ဝပါ ဘဝေ; အာကပ္ပော ဝေသော နေပစ္ဆံ, မဏ္ဍနံ တု ပသာဓနံ. 'वसा' पिघली हुई चर्बी के लिए है; 'मेद' और 'वपा' चर्बी के लिए हैं; 'आकप्प', 'वेस' और 'नेपच्छ' वेशभूषा के लिए हैं; 'मण्डन' और 'पसाधन' प्रसाधन या सजावट के लिए हैं। ၂၈၃. २८३. ဝိဘူသနံ စာဘရဏံ, အလင်္ကာရော ပိလန္ဓနံ; ကိရီဋ မကုဋာ’နိတ္ထီ, စူဠာမဏိ သိရောမဏိ. 'विभूषण', 'आभरण', 'अलङ्कार' और 'पिलन्धन' आभूषण के लिए हैं; 'किरीट' और 'मकुट' (स्त्रीलिंग को छोड़कर) मुकुट के लिए हैं; 'चूळामणि' और 'सिरोमणि' शिरोमणि के लिए हैं। ၂၈၄. २८४. သိရောဝေဌန [Pg.25] မုဏှီသံ, ကုဏ္ဍလံ ကဏ္ဏဝေဌနံ; ကဏ္ဏိကာ ကဏ္ဏပူရော စ, သိယာ ကဏ္ဏဝိဘူသနံ. 'सिरोवेठन' और 'उण्हीस' पगड़ी के लिए हैं; 'कुण्डल' और 'कण्णवेठन' कान के कुंडल के लिए हैं; 'कण्णिका', 'कण्णपूर' और 'कण्णविभूषण' कान के आभूषण के लिए हैं। ၂၈၅. २८५. ကဏ္ဌဘူသာ တု ဂီဝေယျံ, ဟာရော မုတ္တာဝလိ’တ္ထိယံ; နိယုရော ဝလယော နိတ္ထီ, ကဋကံ ပရိဟာရကံ. 'कण्ठभूसा' और 'गीवेय्य' गले के आभूषण के लिए हैं; 'हार' और 'मुत्तावलि' (स्त्रीलिंग) मोतियों की माला के लिए हैं; 'नियुर', 'वलय' (स्त्रीलिंग को छोड़कर), 'कटक' और 'परिहारक' कंगन के लिए हैं। ၂၈၆. २८६. ကင်္ကဏံ ကရဘူသာ ထ, ကိင်္ကိဏီ ခုဒ္ဒဃဏ္ဋိကာ; အင်္ဂုလီယက မင်္ဂုလျာ, ဘရဏံ, သာက္ခရံ တု တံ. 'कङ्कण' और 'करभूसा' हाथ के कंगन के लिए हैं; 'किङ्किणी' और 'खुद्दघण्टिका' छोटी घंटी (करधनी की घंटी) के लिए हैं; 'अङ्गुलीयक', 'अङ्गुल्याभरण' और 'साक्खर' अंगूठी के लिए हैं। ၂၈၇. २८७. မုဒ္ဒိကာ’င်္ဂုလိမုဒ္ဒါ ထ, ရသနာ မေခလာ ဘဝေ; ကေယူရ မင်္ဂဒဉ္စေဝ, ဗာဟုမူလဝိဘူသနံ. 'मुद्दिका' और 'अङ्गुलिमुद्दा' मुहर वाली अंगूठी के लिए हैं; 'रसना' और 'मेखला' करधनी के लिए हैं; 'केयूर', 'अङ्गद' और 'बाहुमूलविभूषण' बाजूबंद के लिए हैं। ၂၈၈. २८८. ပါဒင်္ဂဒံ တု မဉ္ဇီရော, ပါဒကဋက နူပုရာ; 'पादङ्गद', 'मञ्जीर', 'पादकटक' और 'नूपुर' पायल या नूपुर के लिए हैं। ၂၈၉. २८९. အလင်္ကာရပ္ပဘေဒါ တု, မုခဖုလ္လံ တထော’ဏ္ဏတံ; ဥဂ္ဂတ္ထနံ ဂိင်္ဂမက, မိစ္စေဝမာဒယော သိယုံ. आभूषणों के भेदों में 'मुखफुल्ल', 'उण्णत', 'उग्गत्यन' और 'गिङ्गमक' आदि होते हैं। ၂၉၀. २९०. စေလ မစ္ဆာဒနံ ဝတ္ထံ, ဝါသော ဝသန မံသုကံ; အမ္ဗရဉ္စ ပဋော နိတ္ထီ, ဒုဿံ စောလော စ သာဋကော. 'चेल', 'अच्छ़ादन', 'वत्थ', 'वास', 'वसन', 'अंसुक', 'अम्बर', 'पट' (स्त्रीलिंग को छोड़कर), 'दुस्स', 'चोल' और 'साटक' वस्त्र के लिए हैं। ၂၉၁. २९१. ခေါမံ ဒုကူလံ ကောသေယျံ, ပတ္တုဏ္ဏံ ကမ္ဗလော စ ဝါ; သာဏံ ကောဋမ္ဗုရံ ဘင်္ဂ, န္တျာဒိ ဝတ္ထန္တရံ မတံ. 'खोम' (क्षौम), 'दुकूल', 'कोसेय्य' (रेशमी), 'पत्तुण्ण', 'कम्बल', 'साण' (सन), 'कोटम्बुर' और 'भङ्ग' आदि वस्त्रों के विभिन्न प्रकार माने गए हैं। ၂၉၂. २९२. နိဝါသန န္တရီယာနျ, န္တရမန္တရဝါသကော; ပါဝါရော တု’တ္တရာသင်္ဂေါ, ဥပသံဗျာန မုတ္တရံ. 'निवासन', 'अन्तरीय' और 'अन्तरवासक' अधोवस्त्र (नीचे पहनने वाले वस्त्र) के लिए हैं; 'पावार', 'उत्तरासङ्ग', 'उपसम्ब्यान' और 'उत्तर' ओढ़ने वाले वस्त्र (उत्तरीय) के लिए हैं। ၂၉၃. २९३. ဥတ္တရီယ မထော ဝတ္ထ, မဟတန္တိ မတံ နဝံ; နန္တကံ ကပ္ပဋော ဇိဏ္ဏ, ဝသနံ တု ပဋစ္စရံ. 'उत्तरीय' और 'वत्थ' (वस्त्र); 'महत' नये वस्त्र के लिए माना गया है; 'नन्तक', 'कप्पट', 'जिण्णवसन' और 'पटच्चर' फटे-पुराने वस्त्र (चिथड़े) के लिए हैं। ၂၉၄. २९४. ကဉ္စုကော ဝါရဝါဏံ ဝါ, ထ ဝတ္ထာဝယဝေ ဒသာ; နာလိပဋ္ဋောတိ ကထိတော, ဥတ္တမင်္ဂမှိ ကဉ္စုကော. 'कञ्चुक' और 'वारवाण' अंगरखे या कवच के लिए हैं; 'दसा' वस्त्र के किनारे (दशा) के लिए है; सिर पर धारण किए जाने वाले वस्त्र (पगड़ी) को 'नालिपट्ठ' कहा गया है। ၂၉၅. २९५. အာယာမော ဒီဃတာ ရောဟော,ပရိဏာဟော ဝိသာလတာ. 'आयाम', 'दीघता' और 'रोह' लंबाई के लिए हैं; 'परिणाह' और 'विसालता' चौड़ाई या विस्तार के लिए हैं। ၂၉၆. २९६. အရဟဒ္ဓဇော စ ကာသာယ, ကာသာဝါနိ စ စီဝရံ; မဏ္ဍလံ တု တဒင်္ဂါနိ, ဝိဝဋ္ဋ ကုသိအာဒယော. 'अरहद्धज', 'कासाय', 'कासाव' और 'चीवर' भिक्षु के वस्त्र के लिए हैं; 'मण्डल', 'विवट्ट' और 'कुसि' आदि उसके अंग (भाग) हैं। ၂၉၇. २९७. ဖလ,တ္တစ, ကိမိ, ရောမာ, နျေတာ ဝတ္ထဿ ယောနိယော; ဖာလံ ကပ္ပာသိကံ တီသု, ခေါမာဒီ တု တစဗ္ဘဝါ. फल (कपास), छाल, कीड़े (रेशम) और रोम (ऊन)—ये वस्त्रों की योनियाँ (उत्पत्ति के स्रोत) हैं; 'फाल' और 'कप्पासिक' कपास से बने वस्त्र के लिए हैं; 'खोम' आदि छाल से उत्पन्न वस्त्र हैं। ၂၉၈. २९८. ကောသေယျံ [Pg.26] ကိမိဇံ, ရောမ, မယံ တု ကမ္ဗလံ ဘဝေ; သမာနတ္ထာ ဇဝနိကာ, သာ တိရောကရဏီ ပျထ. 'कोसेय्य' कीड़ों से उत्पन्न (रेशमी) होता है; रोमों से बना वस्त्र 'कम्बल' होता है; 'जवनिका' और 'तिरोकरणी' पर्दे के लिए समानार्थक शब्द हैं। ၂၉၉. २९९. ပုန္နပုံသက မုလ္လောစံ, ဝိတာနံ ဒွယ မီရိတံ; နဟာနဉ္စ သိနာနေ ထော, ဗ္ဗဋ္ဋနု’မ္မဇ္ဇနံ သမံ. 'उल्लोच' और 'वितान' (पुल्लिंग और नपुंसक) चंदोवे के लिए कहे गए हैं; 'नहान' और 'सिनान' स्नान के लिए हैं; 'उब्बट्टन' और 'उम्मज्जन' उबटन या मालिश के लिए समान हैं। ၃၀၀. ३००. ဝိသေသကော တု တိလကော, တျူဘော နိတ္ထီ စ စိတ္တကံ; စန္ဒနော နိတ္ထိယံ ဂန္ဓ, သာရော မလယဇော ပျထ. 'विसेसक', 'तिलक' और 'चित्तक' (स्त्रीलिंग को छोड़कर) तिलक के लिए हैं; 'चन्दन' (स्त्रीलिंग को छोड़कर), 'गन्धसार' और 'मलयज' चंदन के लिए हैं। ၃၀၁. ३०१. ဂေါသီသံ တေလပဏ္ဏိကံ, ပုမေ ဝါ ဟရိစန္ဒနံ; တိလပဏ္ဏီ တု ပတ္တင်္ဂ, ရဉ္ဇနံ ရတ္တစန္ဒနံ. 'गोसीस', 'तेलपण्णिक' और 'हरिचन्दन' (पुल्लिंग) चंदन के प्रकार हैं; 'तिलपण्णी', 'पत्तङ्ग', 'रञ्जन' और 'रत्तचन्दन' लाल चंदन के लिए हैं। ၃၀၂. ३०२. ကာဠာနုသာရီ ကာဠိယံ, လောဟံ တွာ’ဂရု စာ’ဂဠု; ကာဠာဂရုတု ကာဠေ’သ္မိံ, တုရုက္ခောတု စ ပိဏ္ဍကော. 'काळानुसारी' और 'काळिय' काले चंदन के लिए हैं; 'लोह', 'अगरु' और 'अगळु' अगर के लिए हैं; 'काळागरु' काले अगर के लिए है और 'तुरुक्ख' तथा 'पिण्डक' लोबान के लिए हैं। ၃၀၃. ३०३. ကတ္ထူရိကာ မိဂမဒေါ, ကုဋ္ဌံ တု အဇပါလကံ; လဝင်္ဂံ ဒေဝကုသုမံ, ကသ္မီရဇံ တု ကုင်္ကုမံ. 'कत्थूरिका' और 'मिगमद' कस्तूरी के लिए हैं; 'कुट्ठ' और 'अजपालक' कूठ के लिए हैं; 'लवङ्ग' और 'देवकुसुम' लौंग के लिए हैं; 'कस्मीरज' और 'कुङ्कुम' केसर के लिए हैं। ၃၀၄. ३०४. ယက္ခဓူပေါ သဇ္ဇုလသော, တက္ကောလံ တု စ ကောလကံ; ကောသဖလ မထော ဇာတိ, ကောသံ ဇာတိဖလံ ဘဝေ. 'यक्खधूप' और 'सज्जुलस' राल (सर्ज रस) के लिए हैं; 'तक्कोल' और 'कोलक' तक्कोल के लिए हैं; 'कोसफल', 'जातिकोस' और 'जातिफल' जायफल के लिए हैं। ၃၀၅. ३०५. ဃနသာရော သိတဗ္ဘော စ, ကပ္ပူရံ ပုန္နပုံသကေ; အလတ္တကော ယာဝကော စ, လာခါ ဇတု နပုံသကေ. 'घनसार', 'सितब्भ' और 'कप्पूर' (पुल्लिंग और नपुंसक) कपूर के लिए हैं; 'अलत्तक' और 'यावक' महावर के लिए हैं; 'लाखा' और 'जतु' (नपुंसक) लाख के लिए हैं। ၃၀၆. ३०६. သိရိဝါသော တု သရလ, ဒ္ဒဝေါ’ ဉ္ဇနံ တု ကဇ္ဇလံ; ဝါသစုဏ္ဏံ ဝါသယောဂေါ, ဝဏ္ဏကံ တု ဝိလေပနံ. सिरिवास (सरल वृक्ष का रस) सरल है; अंजन काजल है; वासचुर्ण वासयोग है; और वर्णक विलेपन है। ၃၀၇. ३०७. ဂန္ဓမာလျာဒိသင်္ခါရော, ယော တံ ဝါသန မုစ္စတေ; မာလာ မာလျံ ပုပ္ဖဒါမေ, ဘာဝိတံ ဝါသိတံ တိသု. गंध और माला आदि का जो संस्कार है, उसे 'वासन' कहा जाता है; माला और माल्य पुष्पों की माला के लिए हैं; भावित और वासित (तीनों लिंगों में) सुगंधित के लिए हैं। ၃၀၈. ३०८. ဥတ္တံသော သေခရာ’ ဝေဠာ, မုဒ္ဓမာလျေ ဝဋံသကော; သေယျာ စ သယနံ သေနံ, ပလ္လင်္ကော တု စ မဉ္စကော. उत्तंस, शेखर, आवेला और वतंसक सिर की माला के नाम हैं; शय्या, शयन और सेन बिस्तर के लिए हैं; पलंग और मंचक खाट के लिए हैं। ၃၀၉. ३०९. မဉ္စာဓာရော ပဋိပါဒေါ, မဉ္စင်္ဂေ တွဋနီ တ္ထိယံ, मंच का आधार प्रतिपाद (पाया) है; मंच के अंगों में 'अटनी' (ईस) स्त्रीलिंग है। ၃၁၀. ३१०. ကုဠီရပါဒေါ အာဟစ္စ, ပါဒေါ စေဝ မသာရကော; စတ္တာရော ဗုန္ဒိကာဗဒ္ဓေါ, တိမေ မဉ္စန္တရာ သိယုံ. कुलीरपाद, आहच्चपाद, मसारक और बुन्दिकाबद्ध—ये चार प्रकार के मंच (खाट) होते हैं। ၃၁၁. ३११. ဗိဗ္ဗောဟနံ စော’ ပဓာနံ, ပီဌိကာ ပီဌ မာသနံ; ကောစ္ဆံ တု ဘဒ္ဒပီဌေ ထာ, သန္ဒီ ပီဌန္တရေ မတာ. बिब्बोहन और उपधान तकिया हैं; पीठिका, पीठ और आसन बैठने के स्थान हैं; कोच्छ भद्रपीठ (श्रेष्ठ आसन) है और आसन्दी एक अन्य प्रकार का पीठ (बड़ी कुर्सी) माना जाता है। ၃၁၂. ३१२. မဟန္တော [Pg.27] ကောဇဝေါ ဒီဃ,လောမကော ဂေါနကော မတော; ဥဏ္ဏာမယံ တွတ္ထရဏံ, စိတ္တကံ ဝါနစိတ္တကံ. बड़ा कोजव (ऊनी कंबल) और लंबे बालों वाला गोनक माना जाता है; ऊन से बना आस्तरण (बिछौना) चित्तक और वानचित्तक कहलाता है। ၃၁၃. ३१३. ဃနပုပ္ဖံ ပဋလိကာ, သေတံ တု ပဋိကာ ပျထ; ဒွိဒသေကဒသာနျု’ ဒ္ဒ,လောမိ ဧကန္တလောမိနော. घने फूलों वाली पटलिका है; सफेद ऊनी वस्त्र पटिका है; दोनों ओर बालों वाला उद्दलोमी है और एक ओर बालों वाला एकान्तलोमी है। ၃၁၄. ३१४. တဒေဝ သောဠသိတ္ထီနံ, နစ္စယောဂ္ဂဉှိ ကုတ္တကံ; သီဟဗျဂ္ဃာဒိရူပေဟိ, စိတ္တံ ဝိကတိကာ ဘဝေ. सोलह स्त्रियों के नाचने योग्य कुत्तक है; सिंह, व्याघ्र आदि के चित्रों से युक्त विचित्र बिछौना विकतिका होता है। ၃၁၅. ३१५. ကဋ္ဋိဿံ ကောသေယျံ ရတန, ပရိသိဗ္ဗိတ မတ္ထရဏံ ကမာ; ကောသိယကဋ္ဋိဿမယံ, ကောသိယသုတ္တေန ပကတဉ္စ. कट्टिस्स और कौशेय क्रमशः रत्नों से जड़ा हुआ और रेशमी धागे से बना हुआ आस्तरण (बिछौना) है। ၃၁၆. ३१६. ဒီပေါ ပဒီပေါ ပဇ္ဇောတော, ပုမေ တွာဒါသ ဒပ္ပဏာ; ဂေဏ္ဍုကော ကဏ္ဍုကော တာလ, ဝဏ္ဋံ တု ဗီဇနီတ္ထိယံ. दीप, प्रदीप और पज्जोत दीपक के नाम हैं; आदर्श और दर्पण (पुल्लिंग) आईना हैं; गेण्डुक और कण्डुक गेंद हैं; तालवंट और बीजनी (स्त्रीलिंग) पंखा हैं। ၃၁၇. ३१७. စင်္ကောဋကော ကရဏ္ဍော စ, သမုဂ္ဂေါ သမ္ပုဋော ဘဝေ; ဂါမဓမ္မော အသဒ္ဓမ္မော, ဗျဝါယော မေထုနံ ရတိ. चंकोटक, करण्ड, समुग्ग और संपुट डिब्बा या पिटारी हैं; ग्रामधर्म, असद्धर्म, व्यवाय, मैथुन और रति काम-क्रीड़ा के नाम हैं। ၃၁၈. ३१८. ဝိဝါဟော ပယမာ ပါဏိ, ဂ္ဂဟော ပရိဏယော ပျထ; တိဝဂ္ဂေါ ဓမ္မ, ကာမ,တ္ထာ, စတုဝဂ္ဂေါ သမောက္ခကာ. विवाह, पयम, पाणिग्रह और परिणय विवाह के नाम हैं; धर्म, काम और अर्थ 'त्रिवर्ग' हैं; और मोक्ष सहित ये 'चतुर्वर्ग' कहलाते हैं। ၃၁၉. ३१९. ခုဇ္ဇော စ ဂဏ္ဍုလော ရဿ, ဝါမနာ တု လကုဏ္ဍကော; ပင်္ဂုလော ပီဌသပ္ပီ စ, ပင်္ဂု ဆိန္နိရိယာပထော. खुज्ज और गण्डुल कूबड़े के लिए हैं; रस्स, वामन और लकुण्डक बौने के लिए हैं; पंगुल, पीठसप्पी और पंगु लंगड़े (जिसकी चलने की शक्ति नष्ट हो गई हो) के लिए हैं। ၃၂၀. ३२०. ပက္ခော ခဉ္ဇော တု ခေါဏ္ဍော ထ,မူဂေါ သုညဝစော ဘဝေ; ကုဏီ ဟတ္ထာဒိဝင်္ကော စ, ဝလိရော တု စ ကေကရော. पक्ख, खञ्ज और खोण्ड लंगड़े के लिए हैं; मूक और शून्यवच गूँगे के लिए हैं; कुणी हाथ आदि से टेढ़े व्यक्ति के लिए है; और वलिर तथा केकर भेंगे (तिरछी दृष्टि वाले) के लिए हैं। ၃၂၁. ३२१. နိက္ကေသသီသော ခလ္လာဋော,မုဏ္ဍော တု ဘဏ္ဍု မုဏ္ဍိကော; ကာဏော အက္ခီန မေကေန,သုညော အန္ဓော ဒွယေန ထ. बिना बालों वाले सिर वाला खल्लाट (गंजा) है; मुण्ड, भण्डु और मुण्डिक मुँडे हुए सिर वाले के लिए हैं; एक आँख से रहित काण है और दोनों आँखों से रहित अंधा है। ၃၂၂. ३२२. ဗဓိရော သုတိဟီနော ထ, ဂိလာနော ဗျာဓိတာ’တုရာ; ဥမ္မာဒဝတိ ဥမ္မတ္တော, ခုဇ္ဇာဒီ ဝါစ္စလိင်္ဂိကာ. बधिर और श्रुतिहीन बहरे के लिए हैं; ग्लान, व्याधित और आतुर बीमार के लिए हैं; उन्मादयुक्त उन्मत्त (पागल) है; खुज्ज आदि शब्द विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं। ၃၂၃. ३२३. အာတင်္ကော အာမယော ဗျာဓိ, ဂဒေါ ရောဂေါ ရုဇာပိ စ; ဂေလညာကလ္လ မာဗာဓော,သောသော တု စ ခယော သိယာ. आतंक, आमय, व्याधि, गद, रोग, रुजा, गेलञ्ञ, अकल्ल और आबाध बीमारी के नाम हैं; सोस और क्षय तपेदिक (टीबी) के लिए हैं। ၃၂၄. ३२४. ပီနသော [Pg.28] နာသိကာရောဂေါ,ဃာနေ သိင်္ဃာနိကာ ဿဝေါ; ဉေယျံ တွ’ရု ဝဏော နိတ္ထီ, ဖောဋော တု ပိဠကာ ဘဝေ. पीनस नाक का रोग है; नाक से बहने वाला स्राव सिंघाणिका है; अरु और व्रण (नपुंसक लिंग) घाव हैं; और फोट तथा पिळका फुंसी या फोड़ा हैं। ၃၂၅. ३२५. ပုဗ္ဗော ပူယော ထ ရတ္တာတိ, သာရော ပက္ခန္ဒိကာ ပျထ; အပမာရော အပသ္မာရော, ပါဒဖောဋော ဝိပါဒိကာ. पुब्ब और पूय मवाद हैं; रक्तातिसार और पक्खन्दिका पेचिश या दस्त हैं; अपमार और अपस्मार मिर्गी हैं; पादफोट और विपादिका पैरों की बिवाइयाँ हैं। ၃၂၆. ३२६. ဝုဍ္ဎိရောဂေါ တု ဝါတဏ္ဍံ, သီပဒံ ဘာရပါဒတာ; ကဏ္ဍူ ကဏ္ဍူတိ ကဏ္ဍူယာ, ခဇ္ဇု ကဏ္ဍူဝနံ ပျထ. वृद्धिरोग और वातण्ड अंडकोष की वृद्धि हैं; सीपद और भारपादता हाथीपाँव (फीलपाँव) हैं; कण्डू, कण्डूति, कण्डूया, खज्जु और कण्डूवन खुजली के नाम हैं। ၃၂၇. ३२७. ပါမံ ဝိတစ္ဆိကာ ကစ္ဆု, သောထော တု သယထူ’ဒိတော; ဒုန္နာမကဉ္စ အရိသံ, ဆဒ္ဒိကာ ဝမထူ’ဒိတော. पाम, वितच्छिका और कच्छु चर्मरोग (खाज) हैं; सोथ और सयथु सूजन हैं; दुन्नामक और अरिस बवासीर हैं; छद्दिका और वमथु वमन (उल्टी) हैं। ၃၂၈. ३२८. ဒဝထု ပရိတာပေါ ထ, တိလကော တိလကာဠကော; ဝိသူစိကာ ဣတိ မဟာ, ဝိရေကော ထ ဘဂန္ဒလော. दवथु और परिताप जलन या संताप हैं; तिलक और तिलकालक तिल के निशान हैं; विसूचिका हैजा है; विरेक दस्त है और भगन्दर भगन्दर रोग है। ၃၂၉. ३२९. မေဟော ဇရော ကာသ သာသာ, ကုဋ္ဌံ သူလာမယန္တရာ; ဝုတ္တော ဝေဇ္ဇော ဘိသက္ကော စ, ရောဂဟာရီ တိကိစ္ဆကော. मेह (प्रमेह), जर (बुखार), कास (खाँसी), सास (श्वास रोग), कुष्ठ (कोढ़) और शूल अन्य रोग कहे गए हैं; वेज्ज, भिषक्क, रोगहारी और तिकिच्छक वैद्य (चिकित्सक) के नाम हैं। ၃၃၀. ३३०. သလ္လဝေဇ္ဇော သလ္လကတ္တော, တိကိစ္ဆာ တု ပတိကြိယာ; ဘေသဇ္ဇ မဂဒေါ စေဝ, ဘေသဇံ မော’သဓံ ပျထ. सल्ल्वेज्ज और सल्लकत शल्य चिकित्सक (सर्जन) हैं; तिकिच्छा और प्रतिक्रिया चिकित्सा (इलाज) हैं; भेसज्ज, अगद, भेसज और ओसध औषधि (दवाई) के नाम हैं। ၃၃၁. ३३१. ကုသလာ နာမယာ ရောဂျံ,အထ ကလ္လော နိရာမယောတိ, कुशल, अनामय, आरोग्य, कल्ल और निरामय स्वास्थ्य या स्वस्थ होने के नाम हैं। နရဝဂ္ဂေါ နိဋ္ဌိတော. नरवर्ग समाप्त हुआ। ၄. စတုဗ္ဗဏ္ဏဝဂ္ဂ ४. चतुर्वर्ण वर्ग। ခတ္တိယဝဂ္ဂ क्षत्रिय वर्ग। ၃၃၂. ३३२. ကုလံ ဝံသော စ သန္တာနာ, ဘိဇနာ ဂေါတ္တ မနွယော; ထိယံ သန္တတျ ထော ဝဏ္ဏာ, စတ္တာရော ခတ္တိယာဒယော. कुल, वंश, सन्तान, अभिजन, गोत्र, अन्वय और सन्तति (स्त्रीलिंग) परिवार या वंश के नाम हैं; क्षत्रिय आदि चार वर्ण होते हैं। ၃၃၃. ३३३. ကုလီနော သဇ္ဇနော သာဓု,သဘျော စာယျော မဟာကုလော; ရာဇာ ဘူပတိ ဘူပါလော, ပတ္ထိဝေါ စ နရာဓိပေါ. कुलीन, सज्जन, साधु, सभ्य, आर्य और महाकुल (उच्च कुल का); राजा, भूपति, भूपाल, पार्थिव और नराधिप। ၃၃၄. ३३४. ဘူနာထော [Pg.29] ဇဂတိပါလော, ဒိသမ္ပတိ ဇနာဓိပေါ; ရဋ္ဌာဓိပေါ နရဒေဝေါ, ဘူမိပေါ ဘူဘုဇော ပျထ. भूनाथ, जगतीपाल, दिसम्पति, जनाधिप, रट्ठाधिप (राष्ट्राधिप), नरदेव, भूमिप और भूभुज। ၃၃၅. ३३५. ရာဇညော ခတ္တိယော ခတ္တံ, မုဒ္ဓါဘိသိတ္တ ဗာဟုဇာ; သဗ္ဗဘုမ္မော စက္ကဝတ္တီ, ဘူပေါညော မဏ္ဍလိဿရော. राजन्य, खत्तिय (क्षत्रिय), खत्त (क्षत्र), मूर्धाभिषिक्त, बाहुज; सार्वभौम, चक्रवर्ती, अन्य भूप और मण्डलीश्वर। ၃၃၆. ३३६. ပုမေ လိစ္ဆဝိ ဝဇ္ဇီ စ, သကျော တု သာကိယော ထ စ; ဘဒ္ဒကစ္စာနာ ရာဟုလ, မာတာ ဗိမ္ဗာ ယသောဓရာ. पुल्लिंग में लिच्छवि और वज्जी, तथा सवय (शाक्य) और साकिय; भद्दकच्चाना, राहुल-माता, बिम्बा और यशोधरा (एक ही व्यक्ति के नाम)। ၃၃၇. ३३७. ကောဋီနံ ဟေဋ္ဌိမန္တေန, သတံ ယေသံ နိဓာနဂံ; ကဟာပဏာနံ ဒိဝသ, ဝဠဉ္ဇော ဝီသတမ္ဗဏံ. जिनके पास कम से कम सौ करोड़ (कार्षापण) का संचित धन हो और जिनका दैनिक व्यय बीस अम्बण (एक माप) कार्षापण हो। ၃၃၈. ३३८. တေ ခတ္တိယမဟာသာလာ, သီတိ ကောဋိဓနာနိ တု; နိဓာနဂါနိ ဒိဝသ, ဝဠဉ္ဇော စ ဒသမ္ဗဏံ. वे 'क्षत्रिय महासाल' कहलाते हैं, जिनके पास अस्सी करोड़ का संचित धन हो और जिनका दैनिक व्यय दस अम्बण हो। ၃၃၉. ३३९. ယေသံ ဒွိဇမဟာသာလာ, တဒုပဍ္ဎေ နိဓာနဂေ; ဝဠဉ္ဇေ စ ဂဟပတိ, မဟာသာလာ ဓနေ သိယုံ. जिनके पास उसका आधा (चालीस करोड़) संचित धन और (पाँच अम्बण) व्यय हो, वे 'द्विज (ब्राह्मण) महासाल' हैं; और इसी प्रकार 'गृहपति महासाल' के धन के विषय में समझना चाहिए। ၃၄၀. ३४०. မဟာမတ္တော ပဓာနဉ္စ, မတိသဇီဝေါ မန္တိနီ; သဇီဝေါ သစိဝါ, မစ္စော, သေနာနီ တု စမူပတိ. महामात्र, प्रधान, मतिसजीव, मन्त्री, सजीव, सचिव और अमात्य; सेनानी और चमूपति (सेनापति)। ၃၄၁. ३४१. နျာသာဒီနံ ဝိဝါဒါနံ, အက္ခဒဿော ပဒဋ္ဌရိ; ဒေါဝါရိကော ပတီဟာရော, ဒွါရဋ္ဌော ဒွါရပါလကော. धरोहर आदि विवादों का निर्णय करने वाला अक्षदस्स (न्यायाधीश) और पदट्ठरि कहलाता है; दौवारिक, प्रतीहार, द्वारस्थ और द्वारपालक। ၃၄၂. ३४२. အနီကဋ္ဌောတိ ရာဇူနံ, အင်္ဂရက္ခဂဏော မတော; ကဉ္စုကီ သောဝိဒလ္လော စ, အနုဇီဝီ တု သေဝကော. राजाओं के अंगरक्षक समूह को 'अनीकस्थ' माना जाता है; कंचुकी और सौविदल्ल; अनुजीवी और सेवक। ၃၄၃. ३४३. အဇ္ဈက္ခော ဓိကတော စေဝ,ဟေရညိကော တု နိက္ခိကော; သဒေသာနန္တရော သတ္တု, မိတ္တောရာဇာ တတော ပရံ. अध्यक्ष और अधिकृत; हेरण्यिक और निक्खिक (खजांची); अपने देश की सीमा से लगा हुआ राजा 'शत्रु' और उसके आगे वाला 'मित्र' राजा होता है। ၃၄၄. ३४४. အမိတ္တော ရိပု ဝေရီ စ, သပတ္တာ ရာတိ သတွ’ရိ; (သတ္တု+အရိ)ပစ္စတ္ထိကော ပရိပန္ထီ, ပဋိပက္ခာ ဟိတာပရော. अमित्र, रिपु, वैरी, सपत्न, अराति, शत्रु, अरि, प्रत्यर्थिक, परिपन्थी, प्रतिपक्ष और अहितपर (शत्रु के पर्यायवाची)। ၃၄၅. ३४५. ပစ္စာမိတ္တော ဝိပက္ခော စ, ပစ္စနီက ဝိရောဓိနော; ဝိဒ္ဒေသီ စ ဒိသော ဒိဋ္ဌော,ထာ နုရောဓော နုဝတ္တနံ. पच्चामित्त (प्रत्यामित्र), विपक्ष, प्रत्यनीक, विरोधी, विद्वेषी और द्वेष; अनुरोध और अनुवर्तन। ၃၄၆. ३४६. မိတ္တော နိတ္ထီ ဝယဿော စ, သဟာယော သုဟဒေါ သခါ; သမ္ဘတ္တော ဒဠှမိတ္တော ထ, သန္ဒိဋ္ဌော ဒိဋ္ဌမတ္တကော. मित्र (नपुंसक लिंग नहीं), वयस्य, सहाय, सुहृद और सखा; सम्भक्त और दृढमित्र; सन्दिष्ट और दृष्टमात्रक (परिचित)। ၃၄၇. ३४७. စရော စ ဂုဠှပုရိသော, ပထာဝီ ပထိကော’ဒ္ဓဂူ; ဒူတော တု သန္ဒေသဟရော, ဂဏကော တု မုဟုတ္တိကော. चर और गूढ़पुरुष (जासूस); पथावी, पथिक और अध्वगु (यात्री); दूत और सन्देशहर; गणक और मुहूर्तिक (ज्योतिषी)। ၃၄၈. ३४८. လေခကော [Pg.30] လိပိကာရော စ, ဝဏ္ဏော တု အက္ခရော ပျထ; ဘေဒေါ ဒဏ္ဍော သာမ ဒါနာ, နျုပါယာ စတုရော ဣမေ. लेखक और लिपिकार; वर्ण और अक्षर; भेद, दण्ड, साम और दान—ये चार उपाय हैं। ၃၄၉. ३४९. ဥပဇာပေါတု ဘေဒေါ စ, ဒဏ္ဍော တု သာဟသံ ဒမော; उपजाप और भेद; दण्ड, साहस और दम। ၃၅၀. ३५०. သာမျ’ မစ္စော သခါ ကောသော, ဒုဂ္ဂဉ္စ ဝိဇိတံ ဗလံ; ရဇ္ဇင်္ဂါနီတိ သတ္တေတေ, သိယုံ ပကတိယော ပိစ. स्वामी, अमात्य, सखा, कोश, दुर्ग, विजित (राष्ट्र) और बल (सेना)—ये सात 'राज्यांग' और 'प्रकृतियाँ' कहलाती हैं। ၃၅၁. ३५१. ပဘာဝု’ဿာဟ, မန္တာနံ, ဝသာ တိဿော ဟိ သတ္တိယော; ပဘာဝေါ ဒဏ္ဍဇော တေဇော,ပတာပေါ တု စ ကောသဇော. प्रभाव, उत्साह और मन्त्र—ये तीन शक्तियाँ हैं; दण्ड (सेना) से उत्पन्न तेज 'प्रभाव' है और कोश से उत्पन्न तेज 'प्रताप' है। ၃၅၂. ३५२. မန္တော စ မန္တနံ သော တု, စတုက္ကဏ္ဏော ဒွိဂေါစရော; တိဂေါစရော တု ဆက္ကဏ္ဏော, ရဟဿံ ဂုယှ မုစ္စတေ. मन्त्र और मन्त्रणा; दो व्यक्तियों के बीच की मन्त्रणा 'चतुष्कर्ण' और 'द्विगोचर' है; तीन व्यक्तियों के बीच की 'षट्कर्ण' और 'त्रिगोचर' है; रहस्य और गुह्य। ၃၅၃. ३५३. တီသု ဝိဝိတ္တ ဝိဇန, ဆန္နာ, ရဟော ရဟော ဗျယံ; ဝိဿာသော တု စ ဝိဿမ္ဘော,ယုတ္တံ တွော’ပါယိကံ တိသု. विविक्त, विजन और छन्न (तीनों लिंगों में); 'रहो' एक अव्यय है (एकान्त); विश्वास और विस्रम्भ; युक्त और उपायिक (तीनों लिंगों में)। ၃၅၄. ३५४. ဩဝါဒေါ စာနုသိဋ္ဌိတ္ထီ, ပုမဝဇ္ဇေ နုသာသနံ; အာဏာ စ သာသနံ ဉေယျံ, ဥဒ္ဒါနံ တု စ ဗန္ဓနံ. ओवाद (अववाद) और अनुसिट्ठि (स्त्रीलिंग); अनुसासन (पुल्लिंग को छोड़कर); आज्ञा और शासन; उद्दान और बन्धन। ၃၅၅. ३५५. အာဂု ဝုတ္တ မပရာဓော, ကရော တု ဗလိ မုစ္စတေ; ပုဏ္ဏပတ္တော တုဋ္ဌိဒါယော, ဥပဒါ တု စ ပါဘတံ. आगु और अपराध; कर और बलि; पूर्णपात्र और तुष्टिदाय (पुरस्कार); उपदा और पाभृत (भेंट)। ၃၅၆. ३५६. တထော’ပါယန မုက္ကောစော, ပဏ္ဏာကာရော ပဟေဏကံ; သုင်္ကံ တွနိတ္ထီ ဂုမ္ဗာဒိ, ဒေယျေ ထာ’ယော ဓနာဂမော. उपायन, मुक्कोच (रिश्वत), पर्णाकार और प्रहेणक; शुल्क (स्त्रीलिंग नहीं); आय और धनागम। ၃၅၇. ३५७. အာတပတ္တံ တထာ ဆတ္တံ, ရညံ တု ဟေမမာသနံ; သီဟာသနံ အထော ဝါဠ, ဗီဇနီတ္ထီ စ စာမရံ. आतपत्र और छत्र; राजाओं का स्वर्ण-आसन 'सिंहासन' कहलाता है; वालबीजनी (स्त्रीलिंग) और चामर। ၃၅၈. ३५८. ခဂ္ဂေါ စ ဆတ္တ မုဏှီသံ, ပါဒုကာ ဝါလဗီဇနီ; ဣမေ ကကုဓဘဏ္ဍာနိ, ဘဝန္တိ ပဉ္စ ရာဇုနံ. खड्ग, छत्र, उष्णीष, पादुका और वालबीजनी—ये राजाओं के पाँच 'ककुधभण्ड' (राजचिह्न) होते हैं। ၃၅၉. ३५९. ဘဒ္ဒကုမ္ဘော ပုဏ္ဏကုမ္ဘော, ဘိင်္ကာရော ဇလဒါယကော; ဟတ္ထိ,ဿ,ရထ,ပတ္တီ တု, သေနာ ဟိ စတုရင်္ဂိနီ. भद्रकुम्भ और पूर्णकुम्भ; भृंगार (झारी); हाथी, घोड़ा, रथ और पैदल—यह 'चतुरंगिणी सेना' है। ၃၆၀. ३६०. ကုဉ္ဇရော ဝါရဏော ဟတ္ထီ, မာတင်္ဂေါ ဒွိရဒေါ ဂဇော; နာဂေါ ဒွိပေါ ဣဘော ဒန္တီ,ယူထဇေဋ္ဌော တု ယူထပေါ. कुंजर, वारण, हत्थी, मातंग, द्विरद, गज, नाग, द्विप, इभ और दन्ती; यूथ का जेठ (मुखिया) 'यूथप' कहलाता है। ၃၆၁. ३६१. ကာဠာဝက [Pg.31] ဂင်္ဂေယျာ, ပဏ္ဍရ တမ္ဗာ စ ပိင်္ဂလော ဂန္ဓော; မင်္ဂလ ဟေမော’ပေါသထ,ဆဒ္ဒန္တာ ဂဇကုလာနိ ဧတာနိ. कालवक, गंगेय, पाण्डर, तम्ब, पिंगल, गन्ध, मंगल, हेम, उपोसथ और छद्दन्त—ये हाथियों के (दस) कुल हैं। ၃၆၂. ३६२. ကလဘော စေဝ ဘိင်္ကောထ, ပဘိန္နော မတ္တ ဂဇ္ဇိတာ; ဟတ္ထိဃဋာ တု ဂဇတာ, ဟတ္ထီနီ တု ကရေဏုကာ. कलभ और भिंग; प्रभिन्न और मत्त; गर्जिता (हाथी की चिंघाड़); हाथियों का समूह 'हस्तिघटा' और 'गजता' है; हस्तिनी और करेणुका। ၃၆၃. ३६३. ကုမ္ဘော ဟတ္ထိသိရောပိဏ္ဍာ, ကဏ္ဏမူလံ တု စူလိကာ; အာသနံ ခန္ဓဒေသမှိ, ပုစ္ဆမူလံ တု မေစကော. हाथी के मस्तक के पिण्ड को 'कुम्भ' कहते हैं, कान की जड़ को 'चूलिका' कहते हैं; कंधे के स्थान को 'आसन' और पूंछ की जड़ को 'मेचक' कहते हैं। ၃၆၄. ३६४. အာလာန မာဠှကော ထမ္ဘော, နိတ္ထီတု နိဂဠော’န္ဒုကော; သင်္ခလံ တီသွထော ဂဏ္ဍော,ကဋော ဒါနံ တု သော မဒေါ. हाथी को बाँधने के खम्भे को 'आलान', 'आळहक' और 'थम्भ' कहते हैं; पैरों की बेड़ी को 'निगळ' और 'अन्दुक' कहते हैं; 'संखल' (साँकल) तीनों लिंगों में है। हाथी के गण्डस्थल को 'गण्ड' और 'कट' कहते हैं; मद को 'मद' कहते हैं। ၃၆၅. ३६५. သောဏ္ဍော တု ဒွီသု ဟတ္ထော ထ,ကရဂ္ဂံ ပေါက္ခရံ ဘဝေ; မဇ္ဈမှိ ဗန္ဓနံ ကစ္ဆာ, ကပ္ပနော တု ကုထာဒယော. हाथी की सूँड़ को 'सोण्ड' और 'हत्थ' कहते हैं; सूँड़ के अग्रभाग को 'पोक्खर' कहते हैं; मध्य में बाँधने वाली रस्सी को 'कच्छा' और हाथी के झूल आदि साजो-सामान को 'कप्पन' कहते हैं। ၃၆၆. ३६६. ဩပဝယှော ရာဇဝယှော, သဇ္ဇိတော တု စ ကပ္ပိတော; တောမရော နိတ္ထိယံ ပါဒေ, သိယာ ဝိဇ္ဈနကဏ္ဋကော. राजा की सवारी के योग्य हाथी को 'ओपवय्ह' और 'राजवय्ह' कहते हैं; जो सजाया गया हो उसे 'सज्जित' और 'कप्पित' कहते हैं; पैर में चुभाने वाले कांटे को 'तोमर' और 'विज्झनकण्टक' कहते हैं। ၃၆၇. ३६७. တုတ္တံ တု ကဏ္ဏမူလမှိ, မတ္ထကမှိ တု အင်္ကုသော; ဟတ္ထာရောဟော ဟတ္ထိမေဏ္ဍော,ဟတ္ထိပေါ ဟတ္ထိဂေါပကော. कान की जड़ में प्रयुक्त होने वाले अंकुश को 'तुत्त' और मस्तक पर प्रयुक्त होने वाले को 'अङ्कुस' कहते हैं; हाथी के आरोही (महावत) को 'हत्थारोह', 'हत्थिमेण्ड', 'हत्थिप' और 'हत्थिगोपक' कहते हैं। ၃၆၈. ३६८. ဂါမဏီယော တု မာတင်္ဂ, ဟယာဒျာစရိယော ဘဝေ; ဟယော တုရင်္ဂေါ တုရဂေါ,ဝါဟော အဿော စ သိန္ဓဝေါ. हाथियों के नायक को 'गामणीय' और 'मातङ्ग' कहते हैं; घोड़ों आदि के प्रशिक्षक को 'हयाद्याचार्य' कहते हैं; घोड़े को 'हय', 'तुरङ्ग', 'तुरग', 'वाह', 'अस्स' और 'सिन्धव' कहते हैं। ၃၆၉. ३६९. ဘေဒေါ အဿတရော တဿာ,ဇာနိယော တု ကုလီနကော; သုခဝါဟီ ဝိနီတော ထ,ကိသောရော ဟယပေါတကော. घोड़े के एक भेद (खच्चर) को 'अस्सतर' कहते हैं; कुलीन घोड़े को 'जानिय' और 'कुलीनक' कहते हैं; सुखपूर्वक ले जाने वाले शिक्षित घोड़े को 'सुखवाही' और 'विनीत' कहते हैं; घोड़े के बच्चे को 'किसोर' और 'हयपोतक' कहते हैं। ၃၇၀. ३७०. ဃောဋကော တု ခဠုင်္ကော ထ, ဇဝနော စ ဇဝါဓိကော; မုခါဓာနံ ခလီနော ဝါ, ကသာ တွ ဿာဘိတာဠိနီ. साधारण या दुष्ट घोड़े को 'घोटक' और 'खळुङ्क' कहते हैं; तेज दौड़ने वाले को 'जवन' और 'जवाधिक' कहते हैं; घोड़े की लगाम को 'मुखाधान' या 'खलीन' कहते हैं और चाबुक को 'कसा' कहते हैं। ၃၇၁. ३७१. ကုသာ တု နာသရဇ္ဇုမှိ, ဝဠဝါ’ဿာ ခုရော သဖံ; ပုစ္ဆ မနိတ္ထီ နင်္ဂုဋ္ဌံ, ဝါလဟတ္ထော စ ဝါလဓိ. नाक की रस्सी को 'कुसा' कहते हैं; घोड़ी को 'वळवा' कहते हैं; खुर को 'खुर' और 'सफ' कहते हैं; पूंछ को 'पुच्छ', 'नङ्गुट्ठ', 'वालहत्थ' और 'वालधि' कहते हैं। ၃၇၂. ३७२. သန္ဒနော [Pg.32] စ ရထော ဖုဿ, ရထော တု နရဏာယ သော; စမ္မာဝုတော စ ဝေယဂ္ဃော,ဒေပ္ပော ဗျဂ္ဃဿ ဒီပိနော. रथ को 'सन्दन' और 'रथ' कहते हैं; मांगलिक रथ को 'फुस्सरथ' कहते हैं; बाघ की खाल से मढ़े हुए रथ को 'वेयग्घ' और चीते की खाल से मढ़े हुए को 'देप्प' कहते हैं। ၃၇၃. ३७३. သိဝိကာ ယာပျယာနဉ္စာ, နိတ္ထီ တု သကဋော ပျ’နံ ; စက္ကံ ရထင်္ဂ မာချာတံ, တဿန္တော နေမိ နာရိယံ. पालकी को 'सिविका' और 'याप्ययान' कहते हैं; छकड़े को 'सकट' और 'अन' कहते हैं; पहिये को 'चक्क' और 'रथाङ्ग' कहा गया है, उसके घेरे को 'नेमि' कहते हैं। ၃၇၄. ३७४. တမ္မဇ္ဈေ ပိဏ္ဍိကာ နာဘိ, ကုဗ္ဗရော တု ယုဂန္ဓရော; အက္ခဂ္ဂကီလေ အာဏီတ္ထီ, ဝရုထော ရထဂုတျ’ထ. पहिये के मध्य भाग को 'पिण्डिका' और 'नाभि' कहते हैं; जुए के आधार (बम) को 'कुब्बर' और 'युगन्धर' कहते हैं; धुरी की कील को 'आणि' कहते हैं और रथ की रक्षा करने वाले घेरे को 'वरूथ' कहते हैं। ၃၇၅. ३७५. ဓုရော မုခေ ရထဿင်္ဂါ, တွ က္ခော ပက္ခရအာဒယော; ယာနဉ္စ ဝါဟနံ ယောဂ္ဂံ, သဗ္ဗဟတ္ထျာဒိဝါဟနေ. रथ के अग्रभाग को 'धुर' कहते हैं; रथ के अंगों में 'अक्ख' (धुरी) और 'पक्खर' आदि होते हैं; हाथी-घोड़े आदि सभी सवारियों को 'यान', 'वाहन' और 'योग्ग' कहते हैं। ၃၇၆. ३७६. ရထစာရီ တု သူတော စ, ပါဇိတာ စေဝ သာရထီ; ရထာရောဟော စ ရထိကော,ရထီ ယောဓော တု ယော ဘဋော. रथ चलाने वाले को 'रथचारी', 'सूत', 'पाजिता' और 'सारथी' कहते हैं; रथ पर सवार योद्धा को 'रथारोह', 'रथिक' और 'रथी' कहते हैं; योद्धा को 'योध' और 'भट' कहते हैं। ၃၇၇. ३७७. ပဒါတိ ပတ္တီ တု ပုမေ, ပဒဂေါ ပဒိကော မတော; သန္နာဟော ကင်္ကဋော ဝမ္မံ, ကဝစော ဝါ ဥရစ္ဆဒေါ. पैदल सैनिक को 'पदाति', 'पत्ति', 'पदग' और 'पदिक' माना गया है; कवच को 'सन्नाह', 'कङ्कट', 'वम्म', 'कवच' और 'उरच्छद' कहते हैं। ၃၇၈. ३७८. ဇာလိကာ ထ စ သန္နဒ္ဓေါ, သဇ္ဇော စ ဝမ္မိကော ဘဝေ; အာမုက္ကော ပဋိမုက္ကော ထ, ပုရေစာရီ ပုရေစရော. जिरहबख्तर को 'जालिका' कहते हैं; जो कवच पहने हो उसे 'सन्नद्ध', 'सज्ज' और 'वम्मिक' कहते हैं; पहने हुए कवच को 'आमुक्क' और 'पटिमुक्क' कहते हैं; आगे चलने वाले को 'पुरेचारी' और 'पुरेचर' कहते हैं। ၃၇၉. ३७९. ပုဗ္ဗင်္ဂမော ပုရေဂါမီ, မန္ဒဂါမီ တု မန္ထရော; ဇဝနော တုရိတော ဝေဂီ, ဇေတဗ္ဗံ ဇေယျ မုစ္စတေ. आगे जाने वाले को 'पुब्बङ्गमो' और 'पुरेगामी' कहते हैं; धीरे चलने वाले को 'मन्दगामी' और 'मन्थर' कहते हैं; वेगवान को 'जवन', 'तुरित' और 'वेगी' कहते हैं; जिसे जीता जाना चाहिए उसे 'जेतब्ब' और 'जेय्य' कहा जाता है। ၃၈၀. ३८०. သူရ ဝီရာ တု ဝိက္ကန္တော, သဟာယော နုစရော သမာ; သန္နဒ္ဓပ္ပဘုတီ တီသု, ပါထေယျံ တု စ သမ္ဗလံ. वीर को 'सूर', 'वीर' और 'विक्कन्त' कहते हैं; साथी को 'सहाय' और 'अनुचर' कहते हैं; 'सन्नद्ध' आदि शब्द तीनों लिंगों में होते हैं; मार्ग के भोजन को 'पाथेय्य' और 'सम्बल' कहते हैं। ၃၈၁. ३८१. ဝါဟိနီ ဓဇိနီ သေနာ, စမူ စက္ကံ ဗလံ တထာ; အနီကော ဝါ ထ ဝိနျာသော,ဗျူဟော သေနာယ ကထျတေ. सेना को 'वाहिनी', 'धजिनी', 'सेना', 'चमू', 'चक्क', 'बल' और 'अनीक' कहते हैं; सेना की रचना को 'ब्यूह' कहा जाता है। ၃၈၂. ३८२. ဟတ္ထီ ဒွါဒသပေါသော,တိ,ပုရိသော တုရဂေါ, ရထော; စတုပေါသောတိ ဧတေန, လက္ခဏေနာ ဓမန္တတော. बारह पुरुषों के बराबर बल वाले हाथी को 'द्वादसपोस' और चार पुरुषों के बराबर बल वाले घोड़े, रथ और पैदल सैनिक को 'चतुपोस' इस लक्षण से अधम कहा जाता है। ၃၈၃. ३८३. ဟတ္ထာနီကံ ဟယာနီကံ, ရထာနီကံ တယော တယော; ဂဇာဒယော သသတ္ထာ တု, ပတ္တာနီကံ စတုဇ္ဇနာ. हस्ती-सेना, अश्व-सेना और रथ-सेना में तीन-तीन हाथी आदि शस्त्रों सहित होते हैं, और पैदल सेना में चार पुरुष होते हैं। ၃၈၄. ३८४. သဋ္ဌိဝံသကလာပေသု, [Pg.33] ပစ္စေကံ သဋ္ဌိဒဏ္ဍိသု; ဓူလီကတေသု သေနာယ, ယန္တိယာ က္ခောဘနီ တ္ထိယံ. साठ वंश-कलापों में से प्रत्येक में साठ दण्ड होने पर, सेना के धूलि-धूसरित होकर चलने पर उसे 'अक्खोभनी' (अक्षौहिणी) कहते हैं। ၃၈၅. ३८५. သမ္ပတ္တိ သမ္ပဒါ လက္ခီ, သိရီ ဝိပတ္တိ အာပဒါ; အထာ ဝုဓဉ္စ ဟေတိ’တ္ထီ, သတ္ထံ ပဟရဏံ ဘဝေ. समृद्धि को 'सम्पत्ति', 'सम्पदा', 'लक्खी' और 'सिरी' कहते हैं; विपत्ति को 'विपत्ति' और 'आपदा' कहते हैं; हथियार को 'आवुध', 'हेति', 'सत्थ' और 'पहरण' कहते हैं। ၃၈၆. ३८६. မုတ္တာမုတ္တ မမုတ္တဉ္စ, ပါဏိတော မုတ္တမေဝ စ; ယန္တမုတ္တန္တိ သကလံ, အာယုဓံ တံ စတုဗ္ဗိဓံ. आयुध चार प्रकार के होते हैं: मुत्तामुत्त (फेंककर और न फेंककर चलाने वाले), अमुत्त (हाथ में रखकर चलाने वाले), पाणिमुत्त (हाथ से फेंकने वाले) और यन्तमुत्त (यन्त्र से फेंकने वाले)। ၃၈၇. ३८७. မုတ္တာမုတ္တဉ္စ ယဋ္ဌျာဒိ, အမုတ္တံ ဆုရိကာဒိကံ; ပါဏိမုတ္တံ တု သတျာဒိ, ယန္တမုတ္တံ သရာဒိကံ. 'मुत्तामुत्त' लाठी आदि हैं, 'अमुत्त' छुरिका आदि हैं, 'पाणिमुत्त' शक्ति (भाला) आदि हैं और 'यन्तमुत्त' बाण आदि हैं। ၃၈၈. ३८८. ဣဿာသော ဓနု ကောဒဏ္ဍံ, စာပေါ နိတ္ထီ သရာသနံ; အထော ဂုဏော ဇိယာ ဇျာ ထ,သရော ပတ္တိ စ သာယကော. धनुष को 'इस्सासो', 'धनु', 'कोदण्ड', 'चाप' और 'सरासन' कहते हैं; धनुष की डोरी को 'गुण', 'जिया' और 'ज्या' कहते हैं; बाण को 'सर', 'पत्ति' और 'सायक' कहते हैं। ၃၈၉. ३८९. ဝါဏော ကဏ္ဍ မုသု ဒွီသု, ခုရပ္ပော တေဇနာ’သနံ; တူဏီတ္ထိယံ ကလာပေါ စ, တူဏော တူဏီရ ဝါဏဓိ. बाण को 'वाण', 'कण्ड', 'उसु', 'खुरप्प', 'तेजन' और 'असन' भी कहते हैं; तरकश को 'तूणी', 'कलाप', 'तूण', 'तूणीर' और 'वाणधि' कहते हैं। ၃၉၀. ३९०. ပက္ခော တု ဝါဇော ဒိဒ္ဓေါ တု, ဝိသပ္ပိတော သရော ဘဝေ; လက္ခံ ဝေဇ္ဈံ သရဗျဉ္စ, သရာဘျာသော တု’ပါသနံ. बाण के पंख को 'पक्ख' और 'वाज' कहते हैं; विष बुझे बाण को 'दिद्ध' कहते हैं; लक्ष्य को 'लक्ख', 'वेज्झ' और 'सरब्य' कहते हैं; बाण चलाने के अभ्यास को 'उपासन' कहते हैं। ၃၉၁. ३९१. မဏ္ဍလဂ္ဂေါ တု နေတ္တိံသော, အသိ ခဂ္ဂေါ စ သာယကော; ကောသိတ္ထီ တဗ္ဗိဓာနေ ထော, ထရု ခဂ္ဂါဒိမုဋ္ဌိယံ. तलवार को 'मण्डलग्र', 'नेत्तिंस', 'असि', 'खग्ग' और 'सायक' कहते हैं; तलवार की म्यान को 'कोसि' कहते हैं और तलवार की मूठ को 'थरु' कहते हैं। ၃၉၂. ३९२. ခေဋကံ ဖလကံ စမ္မံ, ဣလ္လီ တု ကရပါလိကာ; ဆုရိကာ သတျ’သိပုတ္တီ, လဂုဠော တု စ မုဂ္ဂရော. ढाल को 'खेटक', 'फलक' और 'चम्म' कहते हैं; 'इल्ली' करपालिका है; छुरिका को 'छुरिका', 'सत्ति' और 'असिपुत्ती' कहते हैं; लाठी या गदा को 'लगुळ' और 'मुग्गर' कहते हैं। ၃၉၃. ३९३. သလ္လော နိတ္ထိ သင်္ကု ပုမေ, ဝါသီ တု တစ္ဆနီတ္ထိယံ; ကုဌာရီ တ္ထီဖရသုသော, ဋင်္ကော ပါသာဏဒါရဏော. शल्य (बाण) और शंकु पुल्लिंग हैं; वासी (बसौला) स्त्रीलिंग है; कुठारी और परशु (कुल्हाड़ी) स्त्रीलिंग हैं; टंक पत्थर तोड़ने वाला औजार है। ၃၉၄. ३९४. ကဏယော ဘိန္ဒိဝါဠော စ, စက္ကံ ကုန္တော ဂဒါ တထာ; သတျာ’ဒီ သတ္ထဘေဒါ ထ,ကောဏော’ဿော ကောဋိ နာရိယံ. कणय, भिन्दिपाल, चक्र, कुन्त और गदा; ये शस्त्रों के भेद हैं। कोण, अश्व और कोटि (सिरा) स्त्रीलिंग में होते हैं। ၃၉၅. ३९५. နိယျာနံ ဂမနံ ယာတြာ, ပဋ္ဌာနဉ္စ ဂမော ဂတိ; စုဏ္ဏော ပံသု ရဇော စေဝ, ဓူလီ’တ္ထီ ရေဏု စ ဒွိသု. निर्याण, गमन, यात्रा, प्रस्थान, गम और गति (प्रस्थान के नाम हैं); चूर्ण, पांसु, रज, धूलि और रेणु (धूल के नाम हैं)। ၃၉၆. ३९६. မာဂဓော [Pg.34] မဓုကော ဝုတ္တော, ဝန္ဒီ တု ထုတိပါဌကော; ဝေတာဠိကော ဗောဓကရော,စက္ကိကော တု စ ဃဏ္ဋိကော. मागध, मधुक, वन्दी और स्तुतिपाठक; वैतालिक और बोधकर (जगाने वाले); चक्कि और घण्टिक (घंटा बजाने वाले)। ၃၉၇. ३९७. ကေတု ဓဇော ပဋာကာ စ, ကဒလီ ကေတနံ ပျထ; ယော’ဟံကာရော’ညမညဿ, သာ’ ဟမဟမိကာ ဘဝေ. केतु, ध्वज, पताका, कदली और केतन (ध्वजा के नाम हैं); जो एक-दूसरे के प्रति अहंकार (मैं श्रेष्ठ हूँ) है, वह 'अहमहमिका' कहलाती है। ၃၉၈. ३९८. ဗလံ ထာမော သဟံ သတ္တိ, ဝိက္ကမော တွတိသူရတာ; ရဏေ ဇိတဿ ယံ ပါနံ, ဇယပါနန္တိ တံ မတံ. बल, थाम, सह और शक्ति (शक्ति के नाम हैं); विक्रम और अतिशूरता (वीरता के नाम हैं); युद्ध में जीतने पर जो पान किया जाता है, उसे 'जयपान' कहा जाता है। ၃၉၉. ३९९. သင်္ဂါမော သမ္ပဟာရော စာ, နိတ္ထိယံ သမရံ ရဏံ; အာဇိတ္ထီ အာဟဝေါ ယုဒ္ဓ, မာယောဓနဉ္စ သံယုဂံ. संग्राम, सम्प्रहार, समर, रण, आजि, आहव, युद्ध, आयुधन और संयुग (युद्ध के नाम हैं)। ၄၀၀. ४००. ဘဏ္ဍနံ တု ဝိဝါဒေါ စ, ဝိဂ္ဂဟော ကလဟ မေဓဂါ; မုစ္ဆာ မောဟော ထ ပသယှော,ဗလက္ကာရော ဟဌော ဘဝေ. भण्डन, विवाद, विग्रह, कलह और मेधगा (झगड़े के नाम हैं); मूर्च्छा और मोह; प्रसह्य, बलात्कार और हठ (बल प्रयोग के नाम हैं)। ၄၀၁. ४०१. ဥပ္ပာဒေါ ဘူတဝိကတိ, ယာ သုဘာသုဘသူစိကာ; ဤတိ တွိတ္ထီ အဇညဉ္စ, ဥပသဂ္ဂေါ ဥပဒ္ဒဝေါ. उत्पात और भूतविकृति जो शुभ-अशुभ की सूचक है; ईति, अजन्य, उपसर्ग और उपद्रव (विपत्ति के नाम हैं)। ၄၀၂. ४०२. နိဗ္ဗုဒ္ဓံ မလ္လယုဒ္ဓမှိ, ဇယော တု ဝိဇယော ဘဝေ; ပရာဇယော ရဏေ ဘင်္ဂေါ, ပလာယန မပက္ကမော. मल्लयुद्ध को 'निब्बुद्ध' कहते हैं; जय और विजय; पराजय और रणभंग (हार); पलायन और अपक्रम (भागना)। ၄၀၃. ४०३. မာရဏံ ဟနနံ ဃာတော, နာသနဉ္စ နိသူဒနံ; ဟိံသနံ သရဏံ ဟိံသာ, ဝဓော သသန ဃာတနံ. मारण, हनन, घात, नासन, निसूदन, हिंसन, शरण, हिंसा, वध, ससन और घातन (मारने के नाम हैं)। ၄၀၄. ४०४. မရဏံ ကာလကိရိယာ, ပလယော မစ္စု အစ္စယော; နိဓနော နိတ္ထိယံ နာသော, ကာလော’န္တော စဝနံ ဘဝေ. मरण, कालक्रिया, प्रलय, मृत्यु, अत्यय, निधन, नाश, काल, अन्त और चवन (मृत्यु के नाम हैं)। ၄၀၅. ४०५. တီသု ပေတော ပရေတော စ,မတော ထ စိတကော စိတော; အာဠဟနံ သုသာနဉ္စာ, နိတ္ထိယံ ကုဏပေါ ဆဝေါ. प्रेत, परेत और मृत (मरे हुए के नाम हैं); चितक और चित (चिता); आळहन और सुसान (श्मशान); कुणप और शव (लाश)। ၄၀၆. ४०६. ကဗန္ဓော နိတ္ထိယံ ဒေဟော, သိရောသုညော သဟကြိယော; အထ သိဝထိကာ ဝုတ္တာ, သုသာနသ္မိဉှိ အာမကေ. सिर रहित क्रियाशील देह को 'कबन्ध' कहते हैं; और आम (कच्चे) श्मशान को 'सिवथिका' कहा जाता है। ၄၀၇. ४०७. ဝန္ဒီတ္ထိယံ ကရမရော, ပါဏော တွ’သု ပကာသိတော; ကာရာ တု ဗန္ဓနာဂါရံ, ကာရဏာ တု စ ယာတနာ. वन्दी और करमर (कैदी); प्राण और असु (जीवन); कारा और बन्धनागार (जेल); कारणा और यातना (कष्ट)। ဣတိ ခတ္တိယဝဂ္ဂေါ. इति क्षत्रिय वर्ग। ၄၀၈. ४०८. ဗြဟ္မဗန္ဓု [Pg.35] ဒွိဇော ဝိပ္ပော, ဗြဟ္မာ ဘောဝါဒီ ဗြာဟ္မဏော; သောတ္တိယော ဆန္ဒသော သော ထ,သိဿ’ န္တေဝါသိနော ပုမေ. ब्रह्मबन्धु, द्विज, विप्र, ब्रह्मा, भोवादी और ब्राह्मण; श्रोत्रिय और छन्दस (वेदाभ्यासी); शिष्य और अन्तेवासी (विद्यार्थी)। ၄၀၉. ४०९. ဗြဟ္မစာရီ ဂဟဋ္ဌော စ, ဝနပ္ပတ္ထော စ ဘိက္ခုတိ; ဘဝန္တိ စတ္တာရော ဧတေ, အဿမာ ပုန္နပုံသကေ. ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ और भिक्षु; ये चार आश्रम होते हैं। ၄၁၀. ४१०. စရန္တာ သဟ သီလာဒီ, သဗြဟ္မစာရိနော မိထု; ဥပဇ္ဈာယော ဥပဇ္ဈာ ထာ, စရိယော နိဿယဒါဒိကော. साथ-साथ शील आदि का आचरण करने वाले 'सब्रह्मचारी' कहलाते हैं; उपाध्याय और उपज्झा; आचार्य वह है जो निश्रय (आश्रय) देता है। ၄၁၁. ४११. ဥပနီယာ ထဝါ ပုဗ္ဗံ, ဝေဒ မဇ္ဈာပယေ ဒွိဇော; ယော သင်္ဂံ သရဟဿဉ္စာ, စရိယော ဗြာဟ္မဏေသု သော. जो द्विज उपनयन संस्कार के बाद अंगों और रहस्यों (उपनिषदों) सहित वेदों का अध्यापन कराता है, ब्राह्मणों में उसे 'आचार्य' कहा जाता है। ၄၁၂. ४१२. ပါရမ္ပရိယ မေတိဟျံ, ဥပဒေသော တထေ’တိဟာ; ယာဂေါ တု ကတု ယညော ထ, ဝေဒီတ္ထီ ဘူ ပရိက္ခတာ. पारम्पर्य, ऐतिह्य, उपदेश और इतिहा (परम्परा); याग, क्रतु और यज्ञ; वेदी (यज्ञ भूमि)। ၄၁၃. ४१३. အဿမေဓော စ ပုရိသ, မေဓော စေဝ နိရဂ္ဂဠော; သမ္မာပါသော ဝါဇပေယျ, မိတိ ယာဂါ မဟာ ဣမေ. अश्वमेध, पुरुषमेध, निरर्गल, सम्मापास और वाजपेय; ये महान यज्ञ हैं। ၄၁၄. ४१४. ဣတွိဇော ယာဇကော စာထ,သဘျော သာမာဇိကော ပျထ; ပရိသာ သဘာ သမဇ္ဇာ စ, တထာ သမိတိ သံသဒေါ. ऋत्विज और याजक (यज्ञ कराने वाले); सभ्य और सामाजिक (सभा के सदस्य); परिषद्, सभा, समाज्जा, समिति और संसद् (सभा के नाम हैं)। ၄၁၅. ४१५. စတဿော ပရိသာ ဘိက္ခု, ဘိက္ခုနီ စ ဥပါသကာ; ဥပါသိကာယောတိ ဣမာ, ထဝါ ဋ္ဌ ပရိသာ သိယုံ. भिक्षु, भिक्षुणी, उपासक और उपासिका—ये चार परिषदें हैं; अथवा आठ परिषदें होती हैं। ၄၁၆. ४१६. တာဝတိံသ,ဒွိဇ,က္ခတ္တ,မာရ,ဂ္ဂဟပတိဿ စ; သမဏာနံ ဝသာ စာတု, မဟာရာဇိက, ဗြဟ္မုနံ. तावतिंस, द्विज, क्षत्रिय, मार, गृहपति, श्रमण, चातुमहाराजिक और ब्रह्म (ये आठ परिषदें हैं)। ၄၁၇. ४१७. ဂါယတ္တိပ္ပမုခံ ဆန္ဒံ, စတုဝီသ’က္ခရံ တု ယံ; ဝေဒါန မာဒိဘူတံ သာ, သာဝိတ္တီ တိပဒံ သိယာ. गायत्री आदि छन्दों में जो चौबीस अक्षरों वाला और वेदों का आदिभूत है, वह तीन पदों वाली 'सावित्री' है। ၄၁၈. ४१८. ဟဗျပါကေ စရု မတော, သုဇာ တု ဟောမဒဗ္ဗိယံ; ပရမန္နံ တု ပါယာသော, ဟဗျံ တု ဟဝိ ကထျတေ. हव्य पाक में 'चरु' माना गया है; 'स्रुवा' होम की करछुल है; परमान्न को 'पायस' और हव्य को 'हवि' कहा जाता है। ၄၁၉. ४१९. ယူပေါ ထူဏာယံ နိမ္မန္တျ, ဒါရုမှိ တွ’ရဏီ ဒွိသု; ဂါဟပ္ပစ္စာ’ဟဝနီယော, ဒက္ခိဏဂ္ဂိ တယော’ ဂ္ဂယော. यज्ञ के खम्भे को 'यूप' कहते हैं; अग्नि उत्पन्न करने वाली लकड़ी 'अरणि' है; गार्हपत्य, आहवनीय और दक्षिणाग्नि—ये तीन अग्नियां हैं। ၄၂၀. ४२०. စာဂေါ ဝိဿဇ္ဇနံ ဒါနံ, ဝေါဿဂ္ဂေါ စာပဒေသနံ; ဝိဿာဏနံ ဝိတရဏံ, ဝိဟာယိတာ ပဝဇ္ဇနံ. त्याग, विसर्जन, दान, उत्सर्ग, अपदेशन, विशाणन, वितरण, विहायित और प्रवज्जन (दान के नाम हैं)। ၄၂၁. ४२१. ပဉ္စ [Pg.36] မဟာပရိစ္စာဂေါ, ဝုတ္တော သေဋ္ဌ, ဓနဿ စ; ဝသေန ပုတ္တ ဒါရာနံ, ရဇ္ဇဿ’ င်္ဂါန မေဝ စ. धन, पुत्र, दारा (पत्नी), राज्य और अंगों के त्याग के भेद से पाँच 'महापरित्याग' कहे गए हैं। ၄၂၂. ४२२. အန္နံ ပါနံ ဃရံ ဝတ္ထံ, ယာနံ မာလာ ဝိလေပနံ; ဂန္ဓော သေယျာ ပဒီပေယျံ, ဒါနဝတ္ထူ သိယုံ ဒသ. अन्न, पान (पेय), घर, वस्त्र, वाहन, माला, विलेपन (सुगंधित लेप), गंध, शय्या और प्रदीप (दीपक) - ये दस दान की वस्तुएं होनी चाहिए। ၄၂၃. ४२३. မတတ္ထံ တဒဟေ ဒါနံ, တီသွေတ မုဒ္ဓဒေဟိကံ; ပိတုဒါနံ တု နိဝါပေါ, သဒ္ဓံ တု တံဝ သာတ္ထတော. मृतक के निमित्त उसी दिन दिया गया दान 'और्ध्वदैहिक' कहलाता है; पितरों को दिया गया दान 'निवाप' है और श्रद्धापूर्वक दिया गया वही दान 'श्राद्ध' कहलाता है। ၄၂၄. ४२४. ပုမေ အတိထိ အာဂန္တု, ပါဟုနာ ဝေသိကာ ပျထ; အညတ္ထ ဂန္တု မိစ္ဆန္တော, ဂမိကော ထာ ဂ္ဃ မဂ္ဃိယံ. अतिथि, आगन्तुक, पाहुन और वैशिक (ये पुल्लिंग शब्द हैं); अन्यत्र जाने की इच्छा रखने वाला 'गमिक' कहलाता है और अर्घ्य के योग्य वस्तु 'अर्घ्य' है। ၄၂၅. ४२५. ပဇ္ဇံ ပါဒေါဒကာဒေါ ထ, သတ္တာ’ဂန္တွာဒယော တိသု; အပစိတျ’စ္စနာ ပူဇာ, ပဟာရော ဗလိ မာနနာ. चरणों के जल आदि को 'पाद्य' कहते हैं; आगन्तुक आदि प्राणी तीनों लिंगों में होते हैं; अपचिति, अर्चना, पूजा, उपहार, बलि और मानना पूजा के पर्यायवाची हैं। ၄၂၆. ४२६. နမဿာ တု နမက္ကာရော, ဝန္ဒနာ စာဘိဝါဒနံ; ပတ္ထနာ ပဏိဓာနဉ္စ, ပုရိသေ ပဏိဓီရိတော. नमस्या, नमस्कार, वन्दना और अभिवादन; प्रार्थना और प्रणिधान; पुल्लिंग में 'प्रणिधि' कहा गया है। ၄၂၇. ४२७. အဇ္ဈေသနာ တု သက္ကာရ, ပုဗ္ဗင်္ဂမနိယောဇနံ; सत्कारपूर्वक की गई प्रेरणा 'अध्येषणा' है। ၄၂၈. ४२८. ပရိယေသနာ နွေသနာ, ပရိယေဋ္ဌိ ဂဝေသနာ; ဥပါသနံ တု သုဿူသာ, သာ ပါရိစရိယာ ဘဝေ. पर्येषणा, अन्वेषणा, पर्येष्टि और गवेषणा; उपासना, शुश्रूषा और परिचर्या। ၄၂၉. ४२९. မောန မဘာသနံ တုဏှီ, ဘာဝေါ ထ ပဋိပါဋိ သာ; အနုက္ကမော ပရိယာယော, အနုပုဗ္ဗျ’ပုမေ ကမော. मौन, अभाषण और तूष्णीभाव; परिपाटी, अनुक्रम, पर्याय, आनुपूर्वी और क्रम (पुल्लिंग में)। ၄၃၀. ४३०. တပေါ စ သံယမော သီလံ, နိယမော တု ဝတဉ္စ ဝါ; ဝီတိက္ကမော’ ဇ္ဈစာရော ထ, ဝိဝေကော ပုထုဂတ္တတာ. तप, संयम, शील, नियम और व्रत; व्यतिक्रम और अध्याचार; विवेक और पृथग्भाव। ၄၃၁. ४३१. ခုဒ္ဒါနုခုဒ္ဒကံ အာဘိ, သမာစာရိက မုစ္စတေ; အာဒိဗြဟ္မစရိယံ တု, တဒညံ သီလ မီရိတံ. क्षुद्रानुक्षुद्र (छोटे-मोटे) नियमों को 'आभिसमाचारिक' कहा जाता है; और उससे भिन्न (मुख्य) शील को 'आदिब्रह्मचर्य' कहा गया है। ၄၃၂. ४३२. ယော ပါပေဟိ ဥပါဝတ္တော, ဝါသော သဒ္ဓိံ ဂုဏေဟိ သော; ဥပဝါသောတိ ဝိညေယျော, သဗ္ဗဘောဂဝိဝဇ္ဇိတော. जो पापों से निवृत्त होकर गुणों के साथ निवास करता है और सभी भोगों से वर्जित है, उसे 'उपवास' समझना चाहिए। ၄၃၃. ४३३. တပဿီ ဘိက္ခု သမဏော, ပဗ္ဗဇိတော တပေါဓနော; ဝါစံယမော တု မုနိ စ, တာပသော တု ဣသီ ရိတော. तपस्वी, भिक्षु, श्रमण, प्रव्रजित और तपोधन; वाणी का संयम करने वाला 'मुनि' है और तप करने वाला 'ऋषि' कहा गया है। ၄၃၄. ४३४. ယေသံယတိန္ဒြိယဂဏာ, ယတယော ဝသိနော စ တေ; သာရိပုတ္တော’ပတိဿော တု, ဓမ္မသေနာပတီ ရိတော. जिनकी इन्द्रियाँ वश में हैं वे 'यति' और 'वशी' हैं; सारिपुत्र को 'उपतिस्स' और 'धम्मसेनापति' कहा गया है। ၄၃၅. ४३५. ကောလိတော မောဂ္ဂလ္လာနော ထ,အရိယော ဓိဂတော သိယာ; သောတာပန္နာဒိကာ သေခါ, နရိယော တု ပုထုဇ္ဇနော. मोग्गल्लान को 'कोलित' कहा जाता है; जिसने आर्य सत्य को प्राप्त कर लिया है वह 'आर्य' है; स्रोतापन्न आदि 'शैक्ष' हैं और जो आर्य नहीं है वह 'पृथग्जन' है। ၄၃၆. ४३६. အညာ [Pg.37] တု အရဟတ္တဉ္စ, ထူပေါ တု စေတိယံ ဘဝေ; ဓမ္မဘဏ္ဍာဂါရိကော စ, အာနန္ဒော ဒွေ သမာ ထ စ. 'अज्ञा' का अर्थ अर्हत्व है; स्तूप और चैत्य समान हैं; आनन्द और धम्मभाण्डागारिक ये दो समान नाम हैं। ၄၃၇. ४३७. ဝိသာခါ မိဂါရမာတာ, သုဒတ္တော’ နာထပိဏ္ဍိကော; विशाखा को 'मिगारमाता' और सुदत्त को 'अनाथपिण्डिक' कहा जाता है। ၄၃၈. ४३८. ဘိက္ခုပိ သာမဏေရော စ, သိက္ခမာနာ စ ဘိက္ခုနီ; သာမဏေရီတိ ကထိတာ, ပဉ္စေတေ သဟဓမ္မိကာ. भिक्षु, सामणेर, सिक्खमाना, भिक्षुणी और सामणेरी - ये पाँच 'सहधार्मिक' कहे गए हैं। ၄၃၉. ४३९. ပတ္တော တိစီဝရံ ကာယ, ဗန္ဓနံ ဝါသိ သူစိ စ; ပရိဿာဝန မိစ္စေတေ, ပရိက္ခာရာ’ဋ္ဌ ဘာသိတာ. पात्र, त्रिचीवर, कायबन्धन (कमरबंद), वासी (छुरा), सुई और परिस्त्रावण (छलनी) - ये आठ 'परिष्कार' कहे गए हैं। ၄၄၀. ४४०. သာမဏေရော စ သမဏု, ဒ္ဒေသော စာထ ဒိဂမ္ဗရော; အစေဠကော နိဂဏ္ဌော စ, ဇဋိလော တု ဇဋာဓရော. सामणेर और श्रमणोद्देश; दिगंबर, अचेलक और निगण्ठ; जटिल और जटाधर। ၄၄၁. ४४१. ကုဋီသကာဒိကာ စတု, တ္တိံသ ဒွါသဋ္ဌိ ဒိဋ္ဌိယော; ဣတိ ဆန္နဝုတိ ဧတေ, ပါသဏ္ဍာ သမ္ပကာသိတာ. कुतीसक आदि चौंतीस और बासठ दृष्टियाँ - इस प्रकार ये छियानवे 'पाषण्ड' (मत) प्रकाशित किए गए हैं। ၄၄၂. ४४२. ပဝိတ္တော ပယတော ပူတော, စမ္မံ တု အဇိနံ ပျထ; ဒန္တပေါဏော ဒန္တကဋ္ဌံ, ဝက္ကလော ဝါ တိရီဋကံ. पवित्र, प्रयत और पूत; चर्म और अजिन (मृगछाला); दन्तपोन और दन्तकाष्ठ (दातून); वक्कल और तिरीटक (वल्कल वस्त्र)। ၄၄၃. ४४३. ပတ္တော ပါတိတ္ထိယံနိတ္ထီ, ကမဏ္ဍလု တု ကုဏ္ဍိကာ; အထာလမ္ဗဏဒဏ္ဍသ္မိံ, ကတ္တရယဋ္ဌိ နာရိယံ. पात्र (पुल्लिंग) और पाती (स्त्रीलिंग); कमण्डलु और कुण्डिका; सहारा लेने वाले डंडे को 'कत्तरयष्टि' (स्त्रीलिंग) कहते हैं। ၄၄၄. ४४४. ယံ ဒေဟသာဓနာပေက္ခံ, နိစ္စံ ကမ္မမယံ ယမော; အာဂန္တုသာဓနံ ကမ္မံ, အနိစ္စံ နိယမော ဘဝေ. जो देह-साधन की अपेक्षा रखने वाला नित्य कर्म है वह 'यम' है; और जो आगन्तुक (नैमित्तिक) साधन वाला अनित्य कर्म है वह 'नियम' है। ဣတိ ဗြာဟ္မဏဝဂ္ဂေါ. इति ब्राह्मणवर्ग। ၄၄၅. ४४५. ဝေဿော စ ဝေသိယာနော ထ, ဇီဝနံ ဝုတ္တိ ဇီဝိကာ; အာဇီဝေါ ဝတ္တနံ စာထ, ကသိကမ္မံ ကသိတ္ထိယံ. वैश्य और वैश्यान; जीवन, वृत्ति, जीविका, आजीव और वर्तन; कृषिकर्म और कृषि (स्त्रीलिंग)। ၄၄၆. ४४६. ဝါဏိဇ္ဇဉ္စ ဝဏိဇ္ဇာ ထ, ဂေါရက္ခာ ပသုပါလနံ; ဝေဿဿ ဝုတ္တိယော တိဿော, ဂဟဋ္ဌာ’ဂါရိကာ ဂိဟိ. वाणिज्य और वणिज्या; गोरक्षा और पशुपालन - ये वैश्य की तीन वृत्तियाँ हैं; गृहस्थ, आगारिक और गृही। ၄၄၇. ४४७. ခေတ္တာဇီဝေါ ကဿကော ထ, ခေတ္တံ ကေဒါရ မုစ္စတေ; လေဍ္ဍု’တ္တော မတ္တိကာခဏ္ဍော, ခဏိတ္တိ’တ္ထျ’ဝဒါရဏံ. खेत से आजीविका चलाने वाला 'कस्सक' (कृषक) है; खेत को 'केदार' कहा जाता है; मिट्टी के ढेले को 'लेड्डु' और खोदने के औजार को 'खनित्ती' या 'अवदारण' कहते हैं। ၄၄၈. ४४८. ဒါတ္တံ လဝိတ္တ မသိတံ, ပတောဒေါ တုတ္တ ပါဇနံ; ယောတ္တံ တု ရဇ္ဇု ရသ္မိတ္ထီ, ဖာလော တု ကသကော ဘဝေ. दात्र, लवित्र और असित (हँसिया); प्रतोद, तुत्त और पाजन (पैना); योत्त, रज्जु और रश्मि (रस्सी); फाल और कसक (हल का फल)। ၄၄၉. ४४९. နင်္ဂလဉ္စ ဟလံ သီရော, ဤသာ နင်္ဂလဒဏ္ဍကော; သမ္မာ တု ယုဂကီလသ္မိံ, သီတာ တု ဟလပဒ္ဓတိ. नंगल, हल और सीर; ईषा हल का डंडा है; शम्या जुए की कील है और सीता हल की पद्धति (रेखा) है। ၄၅၀. ४५०. မုဂ္ဂါဒိကေ [Pg.38] ပရဏ္ဏဉ္စ, ပုဗ္ဗဏ္ဏံ သာလိအာဒိကေ; သာလိ ဝီဟိ စ ကုဒြူသော, ဂေါဓုမော ဝရကော ယဝေါ; ကင်္ဂူတိ သတ္တ ဓညာနိ, နီဝါရာဒီ တု တဗ္ဘိဒါ. मूंग आदि को 'परान्न' और शालि आदि को 'पूर्वान्न' कहते हैं; शालि, व्रीहि, कुद्रूस, गोधूम, वरक, यव और कंगु - ये सात धान्य हैं; नीवार आदि उनके भेद हैं। ၄၅၁. ४५१. စဏကော စ ကဠာယော ထ,သိဒ္ဓတ္ထော သာသပေါ ဘဝေ. चना और मटर; सिद्धार्थ और सरसों (ये सरसों के नाम) हैं। ၄၅၂. ४५२. အထ ကင်္ဂု ပိယင်္ဂု’တ္ထီ, ဥမ္မာ တု အတသီ ဘဝေ; ကိဋ္ဌဉ္စ သဿံ ဓညဉ္စ, ဝီဟိ ထမ္ဗကရီ ရိတော. कंगु और प्रियंगु (कंगनी); अलसी और अतसी (तीसी); खेती, शस्य और धान्य (अनाज); धान और थम्बकरी (धान का पौधा) कहे जाते हैं। ၄၅၃. ४५३. ကဏ္ဍော တု နာဠ မထ သော, ပလာလံ နိတ္ထိ နိပ္ဖလော; ဘုသံ ကလိင်္ဂရော စာထ, ထုသော ဓညတ္တစေ ထ စ. काण्ड और नाल (डंठल); पुआल (पराल) निष्फल होता है; भूसा और कलिंगर (भूसा); तुष और धान्यत्वच (अनाज का छिलका) होते हैं। ၄၅၄. ४५४. သေတဋ္ဋိကာ သဿရောဂေါ,ကဏော တု ကုဏ္ဍကော ဘဝေ; ခလော စ ဓညကရဏံ, ထမ္ဗော ဂုမ္ဗော တိဏာဒိနံ. श्वेतटिका (गेरुआ) अनाज का रोग है; कण और कुण्डक (कनकी/चावल का चूर्ण) होते हैं; खलिहान अनाज साफ करने का स्थान है; तृण आदि के समूह को थम्ब और गुम्ब (झाड़ी) कहते हैं। ၄၅၅. ४५५. အယောဂ္ဂေါ မုသလော နိတ္ထီ, ကုလ္လော သုပ္ပ မနိတ္ထိယံ; အထော’ဒ္ဓနဉ္စ စုလ္လိ’တ္ထီ, ကိလဉ္ဇော တု ကဋော ဘဝေ. अयोग और मुसल (मूसल); कुल्ल और सूप (सूप); उद्धन और चुल्ली (चूल्हा); किलञ्ज और कट (चटाई) होते हैं। ၄၅၆. ४५६. ကုမ္ဘီ’တ္ထီ ပိဌရော ကုဏ္ဍံ, ခဠောပျု’က္ခလိ ထာလျု’ခါ; ကောလမ္ဗော စာထ မဏိကံ, ဘာဏကော စ အရဉ္ဇရော. कुम्भी, पिठर, कुण्ड, खलोपी, उक्खली, स्थाली और उखा (ये हाँडी/बर्तन के नाम हैं); कोलम्ब, मणिक, भाणक और अरञ्जर (ये बड़े घड़े/मटके के नाम हैं)। ၄၅၇. ४५७. ဃဋော ဒွီသု ကုဋော နိတ္ထီ, ကုမ္ဘော ကလသ, ဝါရကာ; ကံသော ဘုဉ္ဇနပတ္တော ထာ, မတ္တံ ပတ္တော စ ဘာဇနံ. घट, कुट, कुम्भ, कलश और वारक (ये घड़े के नाम हैं); कंस और भोजनपात्र (काँसे का बर्तन); मत्त, पात्र और भाजन (बर्तन) होते हैं। ၄၅၈. ४५८. အဏ္ဍုပကံ စုမ္ဗဋကံ, သရာဝေါ တု စ မလ္လကော; ပုမေ ကဋစ္ဆုဒဗ္ဗိ’တ္ထီ, ကုသူလော ကောဋ္ဌ မုစ္စတေ. अण्डुपक और चुम्बटक (बिंड़ी/घड़े का आधार); सराव और मल्लक (सकोरा/मिट्टी का पात्र); कटच्छु और दर्वी (कड़छी); कुसूल और कोष्ठ (अनाज का कोठार) कहे जाते हैं। ၄၅၉. ४५९. သာကော အနိတ္ထိယံ ဍာကော, သိင်္ဂီဝေရံတု အဒ္ဒကံ; မဟောသဓံ တု တံ သုက္ခံ, မရိစံ တု စ ကောလကံ. शाक और डाक (साग); शृंगीवेर और अदरक (अदरक); महौषध (सूखी अदरक/सोंठ); मरीच और कोलक (काली मिर्च) होते हैं। ၄၆၀. ४६०. သောဝီရံ ကဉ္ဇိယံ ဝုတ္တံ, အာရနာဠံ ထုသောဒကံ; ဓညမ္ဗိလံ ဗိဠင်္ဂေါ ထ, လဝဏံ လောဏ မုစ္စတေ. सौवीर, काञ्जिक, आरनाल, तुषोदक, धान्याम्ल और बिलंग (ये कांजी के नाम हैं); लवण और लोण (नमक) कहे जाते हैं। ၄၆၁. ४६१. သာမုဒ္ဒံ သိန္ဓဝေါ နိတ္ထီ, ကာဠလောဏံ တု ဥဗ္ဘိဒံ; ဗိဠကံ စေတိ ပဉ္စေတေ, ပဘေဒါ လဝဏဿ ဟိ. सामुद्र, सैन्धव, काललवण, उद्भिद और बिड़क—ये पाँच लवण (नमक) के प्रकार हैं। ၄၆၂. ४६२. ဂုဠော စ ဖာဏိတံ ခဏ္ဍော, မစ္ဆဏ္ဍီ သက္ခရာ ဣတိ; ဣမေ ဥစ္ဆုဝိကာရာ ထ, ဂုဠသ္မိံ ဝိသကဏ္ဋကံ. गुड़, फाणित, खण्ड, मत्स्यण्डी और शर्करा—ये गन्ने के विकार (उत्पाद) हैं; गुड़ की अशुद्धि को विषकण्टक कहते हैं। ၄၆၃. ४६३. လာဇာ [Pg.39] သိယာ’က္ခတံ စာထ, ဓာနာ ဘဋ္ဌယဝေ ဘဝေ; အဗဒ္ဓသတ္တု မန္ထော စ, ပူပါ’ ပူပါ တု ပိဋ္ဌကော. लाजा और अक्षत (खील); भुने हुए जौ को धाना कहते हैं; सत्तू और मन्थ; पूप, अपूप और पिष्टक (मालपुआ/रोटी) होते हैं। ၄၆၄. ४६४. ဘတ္တကာရော သူပကာရော, သူဒေါ အာဠာရိကော တထာ; ဩဒနိကော စ ရသကော, သူပေါ တု ဗျဉ္ဇနံ ဘဝေ. भत्तकार, सूपकार, सूद, आलारिक, ओदनिक और रसक (ये रसोइया के नाम हैं); सूप और व्यंजन (तरकारी/कढ़ी) होते हैं। ၄၆၅. ४६५. ဩဒနော ဝါ ကုရံ ဘတ္တံ, ဘိက္ခာ စာ’န္န မထာ သနံ; အာဟာရော ဘောဇနံ ဃာသော,တရလံ ယာဂု နာရိယံ. ओदन, कूर, भक्त, भिक्षा, अन्न, अशन, आहार, भोजन और घास (ये भोजन/भात के नाम हैं); तरल और यवागू (पेया/पतली लपसी) स्त्रीलिंग हैं। ၄၆၆. ४६६. ခဇ္ဇံ တု ဘောဇ္ဇ လေယျာနိ, ပေယျန္တိ စတုဓာ’သနံ; နိဿာဝေါ စ တထာ’စာမော,အာလောပေါ ကဗဠော ဘဝေ. खाद्य, भोज्य, लेह्य और पेय—ये चार प्रकार के भोजन हैं; निस्साव और आचाम (माँड़); आलोप और कवल (ग्रास/कौर) होते हैं। ၄၆၇. ४६७. မဏ္ဍော နိတ္ထီရသဂ္ဂသ္မိံ, ဝိဃာသော ဘုတ္တသေသကေ; ဝိဃာသာဒေါ စ ဒမကော, ပိပါသာ တု စ တဿနံ. रस के सार को मण्ड कहते हैं; भोजन के अवशेष को विघास (जूठन) कहते हैं; जूठन खाने वाले को विघासाद और दमक कहते हैं; पिपासा और तर्षण (प्यास) हैं। ၄၆၈. ४६८. ခုဒ္ဒါ ဇိဃစ္ဆာ, မံသဿ, ပဋိစ္ဆာဒနိယံ ရသော; ဥဒြေကော စေဝ ဥဂ္ဂါရော, သောဟိစ္စံ တိတ္တိ တပ္ပနံ. क्षुधा और जिघत्सा (भूख); मांस के व्यंजन को प्रतिच्छादनीय कहते हैं; उद्रेक और उद्गार (डकार); सौहित्य, तृप्ति और तर्पण (संतुष्टि) हैं। ၄၆၉. ४६९. ကာမံ တွိဋ္ဌံ နိကာမဉ္စ, ပရိယတ္တံ ယထစ္ဆိတံ; ကယဝိက္ကယိကော သတ္ထ,ဝါဟာ’ ပဏိက ဝါဏိဇာ. काम, इष्ट, निकाम, पर्याप्त और यथेच्छित (इच्छानुसार); क्रय-विक्रय करने वाले को सार्थवाह, आपणिक और वणिज (व्यापारी) कहते हैं। ၄၇၀. ४७०. ဝိက္ကယိကော တု ဝိက္ကေတာ,ကယိကော တု စ ကာယိကော; ဥတ္တမဏ္ဏော စ ဓနိကော, ဓမဏ္ဏော တု ဣဏာယိကော. विक्रय करने वाला विक्रेता; क्रय करने वाला क्रेता (खरीददार); उत्तमर्ण और धनिक (ऋणदाता); अधमर्ण और ऋणायिक (ऋणी/कर्जदार) होते हैं। ၄၇၁. ४७१. ဥဒ္ဓါရော တု ဣဏံ ဝုတ္တံ, မူလံ တု ပါဘတံ ဘဝေ; သစ္စာပနံ သစ္စံကာရော, ဝိက္ကေယျံ ပဏိယျံ တိသု. उद्धार और ऋण (कर्ज); मूल और प्राभृत (मूलधन); सत्यापन और सत्यंकार (बयाना); विक्रेय और पण्य (बेचने योग्य वस्तु) तीनों लिंगों में होते हैं। ၄၇၂. ४७२. ပဋိဒါနံ ပရိဝတ္တော, နျာသော တူ’ပနိဓီ ရိတော; प्रतिदान और परिवर्त (बदला/विनिमय); न्यास और उपनिधि (धरोहर) कहे जाते हैं। ၄၇၃. ४७३. အဋ္ဌာရသန္တာ သင်္ချေယျေ, သင်္ချာ ဧကာဒယော တိသု; သင်္ချာနေ တု စ သင်္ချေယျေ, ဧကတ္တေ ဝီသတာဒယော; ဝဂ္ဂဘေဒေ ဗဟုတ္တေပိ, တာ အာနဝုတိ နာရိယံ. एक से अठारह तक की संख्याएँ विशेष्य के अनुसार तीनों लिंगों में होती हैं; गणना में बीस (वीसति) आदि संख्याएँ एकवचन और स्त्रीलिंग में होती हैं; वर्ग भेद होने पर भी निन्यानवे (आ-नवुति) तक स्त्रीलिंग में ही रहती हैं। ၄၇၄. ४७४. သတံ သဟဿံ နိယုတံ, လက္ခံ ကောဋိ ပကောဋိယော; ကောဋိပကောဋိ နဟုတံ, တထာ နိန္နဟုတမ္ပိ စ. सौ (शत), हजार (सहस्र), नियुत, लाख (लक्ष), कोटि (करोड़), प्रकोटि, कोटिप्रकोटि, नहुत और निनहुत। ၄၇၅. ४७५. အက္ခောဘနီတ္ထိယံ [Pg.40] ဗိန္ဒု, အဗ္ဗုဒဉ္စ နိရဗ္ဗုဒံ; အဟဟံ အဗဗံ စေဝါ, ဋဋံ သောဂန္ဓိ ကုပ္ပလံ. अक्खोभणी (स्त्रीलिंग), बिन्दु, अब्बुद, निरब्बुद, अहह, अबब, अटट, सोगन्धिक और उप्पल। ၄၇၆. ४७६. ကုမုဒံ ပုဏ္ဍရီကဉ္စ, ပဒုမံ ကထာနမ္ပိ စ; မဟာကထာနာ’သင်္ချေယျာ, နိ’စ္စေတာသု သတာဒိ စ. कुमुद, पुण्डरीक, पदुम, कथान, महाकथान और असंख्येय; शत आदि संख्याएँ नित्य (एकवचन) होती हैं। ၄၇၇. ४७७. ကောဋျာဒိကံ ဒသဂုဏံ, သတလက္ခဂုဏံ ကမာ; စတုတ္ထော’ဍ္ဎေန အဍ္ဎုဍ္ဎော,တတိယော ဍ္ဎတိယော တထာ. कोटि आदि संख्याएँ क्रमशः दस गुना और सौ लाख गुना होती हैं; साढ़े तीन को अढुड्ढ और ढाई को अढतिय कहते हैं। ၄၇၈. ४७८. အဍ္ဎတေယျော ဒိယဍ္ဎော တု,ဒိဝဍ္ဎော ဒုတိယော ဘဝေ; တုလာ, ပတ္ထ, င်္ဂုလိ, ဝသာ, တိဓာ မာန မထော သိယာ. अढतेय्य (ढाई); दियड्ढ और दिवड्ढ (डेढ़) होते हैं; तुला (तौल), प्रस्थ (माप) और अंगुलि (लम्बाई)—ये तीन प्रकार के मान (माप) होते हैं। ၄၇၉. ४७९. စတ္တာရော ဝိဟယော ဂုဉ္ဇာ,ဒွေ ဂုဉ္ဇာ မာသကော ဘဝေ; ဒွေ အက္ခာ မာသကာ ပဉ္စ, က္ခာနံ ဓရဏမဋ္ဌကံ. चार वीहि (धान) की एक गुञ्जा होती है; दो गुञ्जा का एक माषक होता है; दो अक्ष का पाँच माषक और आठ अक्ष का एक धरण होता है। ၄၈၀. ४८०. သုဝဏ္ဏော ပဉ္စဓရဏံ, နိက္ခံ တွနိတ္ထိ ပဉ္စ တေ; ပါဒေါ ဘာဂေ စတုတ္ထေ ထ, ဓရဏာနိ ပလံ ဒသ. पाँच धरण का एक सुवर्ण होता है; पाँच सुवर्ण का एक निक्ख होता है; चौथे भाग को पाद कहते हैं; दस धरण का एक पल होता है। ၄၈၁. ४८१. တုလာ ပလသတံ စာထ, ဘာရော ဝီသတိ တာ တုလာ; အထော ကဟာပဏော နိတ္ထီ, ကထျတေ ကရိသာပဏော. सौ पल का एक 'तुला' होता है और बीस तुला का एक 'भार' होता है। 'कहापण' (कार्षापण) नपुंसक लिंग में है, जिसे 'करिसापण' भी कहा जाता है। ၄၈၂. ४८२. ကုဍုဝေါ ပသတော ဧကော,ပတ္ထော တေ စတုရော သိယုံ; အာဠှကော စတုရော ပတ္ထာ, ဒေါဏံ ဝါစတုရာ’ဠှကံ. एक 'कुडुव' एक 'पसत' के बराबर होता है। चार कुडुव का एक 'पत्थ' होता है। चार पत्थ का एक 'आळ्हक' और चार आळ्हक का एक 'दोण' होता है। ၄၈၃. ४८३. မာနိကာ စတုရော ဒေါဏာ, ခါရီတ္ထီ စတုမာနိကာ; ခါရိယော ဝီသ ဝါဟော ထ,သိယာ ကုမ္ဘော ဒသမ္ဗဏံ. चार दोण की एक 'मानिका' होती है और चार मानिका की एक 'खारी' (स्त्रीलिंग) होती है। बीस खारी का एक 'वाह' होता है और दस 'अम्बण' का एक 'कुम्भ' होता है। ၄၈၄. ४८४. အာဠှကော နိတ္ထိယံ တုမ္ဘော, ပတ္ထောတု နာဠိ နာရိယံ; ဝါဟော တု သကဋော စေကာ,ဒသ ဒေါဏာ တု အမ္ဗဏံ. 'आळ्हक' नपुंसक लिंग में 'तुम्भ' कहलाता है और 'पत्थ' स्त्रीलिंग में 'नाळि' कहलाता है। 'वाह' और 'सकट' एक ही हैं। दस दोण का एक 'अम्बण' होता है। ၄၈၅. ४८५. ပဋိဝီသော စ ကောဋ္ဌာသော,အံသော ဘာဂေါ ဓနံ တု သော; ဒဗ္ဗံ ဝိတ္တံ သာပတေယျံ, ဝသွ’တ္ထော ဝိဘဝေါ ဘဝေ. 'पटिवीस', 'कोट्ठास', 'अंस' और 'भाग'—ये हिस्से के पर्यायवाची हैं। 'धन', 'दब्ब', 'वित्त', 'सापतेय्य', 'वसु', 'अत्थ' और 'विभव'—ये धन के पर्यायवाची हैं। ၄၈၆. ४८६. ကောသော [Pg.41] ဟိရညဉ္စ ကတာ, ကတံ ကဉ္စန, ရူပိယံ; ကုပ္ပံ တဒညံ တမ္ဗာဒိ, ရူပိယံ ဒွယ မာဟတံ. 'कोस' और 'हिरञ्ञ' गढ़े हुए सोने (मुद्रा) के नाम हैं। 'कञ्चन' और 'रूपिय' भी धन के रूप हैं। ताँबा आदि अन्य धातुओं को 'कुप्प' कहते हैं। 'रूपिय' दो प्रकार का (आहत और अनाहत) होता है। ၄၈၇. ४८७. သုဝဏ္ဏံ ကနကံ ဇာတ, ရူပံ သောဏ္ဏဉ္စ ကဉ္စနံ; သတ္ထုဝဏ္ဏော ဟရီ ကမ္ဗု, စာရု ဟေမဉ္စ ဟာဋကံ. सुवण्ण, कनक, जातरूप, सोण्ण, कञ्चन, सत्थुवण्ण, हरि, कम्बु, चारु, हेम और हाटक—ये सोने के पर्यायवाची हैं। ၄၈၈. ४८८. တပနိယံ ဟိရညံ တ, ဗ္ဘေဒါ စာမီကရမ္ပိ စ; သာတကုမ္ဘံ တထာ ဇမ္ဗု, နဒံ သိင်္ဂီ စ နာရိယံ. तपनीय, हिरञ्ञ, चामीकर, सातकुम्भ, जम्बुनद और सिङ्गी (स्त्रीलिंग)—ये भी सोने के ही भेद या नाम हैं। ၄၈၉. ४८९. ရူပိယံ ရဇတံ သဇ္ဈု, ရူပီ သဇ္ဈံ အထော ဝသု; ရတနဉ္စ မဏိ ဒွီသု, ပုပ္ဖရာဂါဒီ တဗ္ဘိဒါ. रूपिय, रजत, सज्झु, रूपी, सज्झ और वसु—ये चाँदी के नाम हैं। 'रतन' और 'मणि' (दोनों लिंगों में) रत्न के लिए प्रयुक्त होते हैं, जिसके पुप्फराग (पुखराज) आदि भेद हैं। ၄၉၀. ४९०. သုဝဏ္ဏံ ရဇတံ မုတ္တာ, မဏိ ဝေဠုရိယာနိ စ; ဝဇိရဉ္စ ပဝါဠန္တိ, သတ္တာ’ဟု ရတနာနိ’ မေ. सोना, चाँदी, मोती, मणि, वैदूर्य, हीरा और मूँगा—ये सात रत्न कहे गए हैं। ၄၉၁. ४९१. လောဟိတင်္ကော စ ပဒုမ, ရာဂေါ ရတ္တမဏိ ပျထ; ဝံသဝဏ္ဏော ဝေဠုရိယံ, ပဝါဠံ ဝါ စ ဝိဒ္ဒုမော. लोहितङ्क, पदुमराग और रत्तमिण—ये माणिक्य के नाम हैं। वंसवण्ण और वेळुरिय वैदूर्य के नाम हैं। पवाळ और विद्दुम मूँगे के नाम हैं। ၄၉၂. ४९२. မသာရဂလ္လံ ကဗရမဏိ, အထ မုတ္တာ စ မုတ္တိကံ; ရီတိ တ္ထီ အာရကူဋော ဝါ, အမလံ တွ’ဗ္ဘကံ ဘဝေ. मसारगल्ल और कबरमणि चितकबरी मणि के नाम हैं। मुत्ता और मुत्तिक मोती के नाम हैं। रीति (स्त्रीलिंग) और आरकूट पीतल के नाम हैं। अमल और अब्भक अभ्रक के नाम हैं। ၄၉၃. ४९३. လောဟော နိတ္ထီ အယော ကာဠာ,ယသဉ္စ ပါရဒေါ ရသော; ကာဠတိပု တု သီသဉ္စ, ဟရိတာလံ တု ပီတနံ. लोह (नपुंसक लिंग), अय और काळ—ये लोहे के नाम हैं। यस, पारद और रस—ये पारे के नाम हैं। काळतिपु और सीस—ये सीसे के नाम हैं। हरिताल और पीतन—ये हरिताल के नाम हैं। ၄၉၄. ४९४. စိနပိဋ္ဌဉ္စ သိန္ဒူရံ, အထ တူလော တထာ ပိစု; ခုဒ္ဒဇံ တု မဓု ခုဒ္ဒံ, မဓုစ္ဆိဋ္ဌံ တု သိတ္ထကံ. चीनपिट्ठ और सिन्दूर—ये सिन्दूर के नाम हैं। तूल और पिचु—ये कपास (रुई) के नाम हैं। खुद्दज, मधु और खुद्द—ये शहद के नाम हैं। मधुच्छिट्ठ और सित्थक—ये मोम के नाम हैं। ၄၉၅. ४९५. ဂေါပါလော ဂေါပ ဂေါသင်္ချာ,ဂေါမာ တု ဂေါမိကော ပျထ; ဥသဘော ဗလီဗဒ္ဓေါ စ, ဂေါဏော ဂေါဝသဘော ဝုသော. गोपाल, गोप और गोसङ्ख्य—ये चरवाहे के नाम हैं। गोमा और गोमिक—ये गौ-स्वामी के नाम हैं। उसभ, बलीबद्ध, गोण, गोवसब और वुस—ये बैल के नाम हैं। ၄၉၆. ४९६. ဝုဒ္ဓေါ ဇရဂ္ဂဝေါ သော ထ, ဒမ္မော ဝစ္ဆတရော သမာ; ဓုရဝါဟီ တု ဓောရယှော, ဂေါဝိန္ဒော ဓိကတော ဂဝံ. वृद्ध और जरग्गव—ये बूढ़े बैल के नाम हैं। दम्म और वच्छतर—ये जवान बैल के नाम हैं। धुरवाही और धोरय्ह—ये बोझ ढोने वाले बैल के नाम हैं। गोविन्द—गायों के अध्यक्ष को कहते हैं। ၄၉၇. ४९७. ဝဟော စ ခန္ဓဒေသော ထ, ကကုဓော ကကု ဝုစ္စတေ; အထော ဝိသာဏံ သိင်္ဂဉ္စ, ရတ္တဂါဝီ တု ရောဟိဏီ. वह और खन्धदेस—ये कंधे के भाग हैं। ककुध और ककु—ये कूबड़ के नाम हैं। विसाण और सिङ्ग—ये सींग के नाम हैं। रत्तगावी और रोहिणी—ये लाल गाय के नाम हैं। ၄၉၈. ४९८. ဂါဝီ စ သိင်္ဂိနီ ဂေါ စ, ဝဉ္ဈာ တု ကထျတေ ဝသာ; နဝပ္ပသူတိကာ ဓေနု, ဝစ္ဆကာမာ တု ဝစ္ဆလာ. गावी, सिङ्गिनी और गो—ये गाय के नाम हैं। वञ्झा और वसा—ये बाँझ गाय के नाम हैं। नवप्पसूतिका और धेनु—ये अभी ब्यायी हुई गाय के नाम हैं। वच्छकामा और वच्छला—ये बछड़े से स्नेह करने वाली गाय के नाम हैं। ၄၉၉. ४९९. ဂဂ္ဂရီ [Pg.42] မန္ထနီတ္ထီ ဒွေ, သန္ဒာနံ ဒါမမုစ္စတေ; ဂေါမိဠှော ဂေါမယော နိတ္ထီ, အထော သပ္ပိ ဃတံ ဘဝေ. गग्गरी और मन्थनी (स्त्रीलिंग)—ये मथानी के नाम हैं। सन्दान और दाम—ये रस्सी के नाम हैं। गोमिळ्ह और गोमय (नपुंसक लिंग)—ये गोबर के नाम हैं। सप्पि और घत—ये घी के नाम हैं। ၅၀၀. ५००. နဝုဒ္ဓဋံ တု နောနီတံ, ဒမိမဏ္ဍံ တု မတ္ထု စ,ခီရံ ဒုဒ္ဓံ ပယော ထညံ, တက္ကံ တု မထိတံ ပျထ. नवुद्धट और नोनीत—ये मक्खन के नाम हैं। दधिमण्ड और मत्थु—ये मट्ठे के पानी के नाम हैं। खीर, दुद्ध, पय और थञ्ञ—ये दूध के नाम हैं। तक्क और मथित—ये छाछ के नाम हैं। ၅၀၁. ५०१. ခီရံ ဒဓိ ဃတံ တက္ကံ, နောနီတံ ပဉ္စ ဂေါရသာ; ဥရဗ္ဘော မေဏ္ဍ မေသာ စ, ဥရဏော အဝိ ဧဠကော. दूध, दही, घी, छाछ और मक्खन—ये पाँच गोरस हैं। उरब्भ, मेण्ड, मेस, उरण, अवि और एळक—ये भेड़ के नाम हैं। ၅၀၂. ५०२. ဝဿော တွဇော ဆဂလကော,ဩဋ္ဌော တု ကရဘော ဘဝေ; ဂဒြဘော တု ခရော ဝုတ္တော, ဥရဏီ တု အဇီ အဇာ. वस्स, अज और छगलक—ये बकरे के नाम हैं। ओट्ठ और करभ—ये ऊँट के नाम हैं। गद्रभ और खर—ये गधे के नाम हैं। उरणी, अजी और अजा—ये बकरी के नाम हैं। ဣတိ ဝေဿဝဂ္ဂေါ. इति वेस्स-वग्गो (यहाँ वैश्य वर्ग समाप्त हुआ)। ၅၀၃. ५०३. သုဒ္ဒေါ’န္တဝဏ္ဏော ဝသလော, သံကိဏ္ဏာ မာဂဓာဒယော; မာဂဓော သုဒ္ဒခတ္တာဇော, ဥဂ္ဂေါ သုဒ္ဒါယ ခတ္တဇော. सुद्द, अन्तवण्ण और वसल—ये शूद्र के नाम हैं। मागध आदि संकीर्ण (मिश्रित) जातियाँ हैं। शूद्र पिता और क्षत्रिय माता से उत्पन्न 'मागध' कहलाता है। क्षत्रिय पिता और शूद्र माता से उत्पन्न 'उग्ग' कहलाता है। ၅၀၄. ५०४. ဒွိဇာခတ္တိယဇော သူတော, ကာရုတု သိပ္ပိကောပုမေ; သံဃာတောတု သဇာတီနံ, တေသံ သေဏီ ဒွိသုစ္စတေ. ब्राह्मण पिता और क्षत्रिय माता से उत्पन्न 'सूत' कहलाता है। 'कारु' और 'सिप्पिको' शिल्पकार के नाम हैं। सजातीय लोगों के समूह को 'सङ्घात' और 'सेणी' (श्रेणी) कहा जाता है। ၅၀၅. ५०५. တစ္ဆကော တန္တဝါယော စ, ရဇကော စ နဟာပိတော; ပဉ္စမော စမ္မကာရောတိ, ကာရဝေါ ပဉ္စိမေ သိယုံ. तच्छक (बढ़ई), तन्तवाय (जुलाहा), रजक (धोबी), नहापित (नाई) और पाँचवाँ चम्मकार (चर्मकार)—ये पाँच 'कारव' (शिल्पी) कहलाते हैं। ၅၀၆. ५०६. တစ္ဆကော ဝဍ္ဎကီ မတော, ပလဂဏ္ဍော ထပတျပိ; ရထကာရော ထ သုဝဏ္ဏ, ကာရော နာဠိန္ဓမော ဘဝေ. तच्छक, वड्ढकी, पलगण्ड और थपति—ये बढ़ई के नाम हैं। रथकार (रथ बनाने वाला) और सुवण्णकार तथा नाळिन्धम—ये सुनार के नाम हैं। ၅၀၇. ५०७. တန္တဝါယော ပေသကာရော,မာလာကာရော တု မာလိကော; ကုမ္ဘကာရော ကုလာလော ထ,တုန္နဝါယော စ သူစိကော. तन्तवाय और पेसकार—ये जुलाहे के नाम हैं। मालाकार और मालिक—ये माली के नाम हैं। कुम्भकार और कुलाल—ये कुम्हार के नाम हैं। तुन्नवाय और सूचिक—ये दर्जी के नाम हैं। ၅၀၈. ५०८. စမ္မကာရော ရထကာရော, ကပ္ပကော တု နဟာပိတော; ရင်္ဂါဇီဝေါ စိတ္တကာရော, ပုက္ကုသော ပုပ္ဖဆဍ္ဍကော. चम्मकार और रथकार (चर्मकार); कप्पक और नहापित—ये नाई के नाम हैं। रङ्गाजीव और चित्तकार—ये चित्रकार के नाम हैं। पुक्कुस और पुप्फछड्डक—ये कचरा या फूल साफ करने वाले के नाम हैं। ၅၀၉. ५०९. ဝေနော ဝိလီဝကာရော စ, နဠကာရော သမာ တယော; စုန္ဒကာရော ဘမကာရော,ကမ္မာရော လောဟကာရကော. वेण, विलीवकार और नळकार—ये तीनों टोकरी बनाने वालों के नाम हैं। चुन्दकार और भमकार—ये खरादने वाले के नाम हैं। कम्मार और लोहकारक—ये लुहार के नाम हैं। ၅၁၀. ५१०. နိန္နေဇကော စ ရဇကော, နေတ္တိကော ဥဒဟာရကော; ဝီဏာဝါဒီ ဝေဏိကော ထ, ဥသုကာရော’ သုဝဍ္ဎကီ. 'निन्नेजक' और 'रजक' (धोबी), 'नेत्तिक' (नहर बनाने वाला), 'उदहारक' (पानी ढोने वाला), 'वीणावादी' (वीणा बजाने वाला), 'वेणिक' (बाँसुरी बजाने वाला), 'उसुकार' (बाण बनाने वाला) और 'असुवड्ढकी' (बढ़ई) के पर्यायवाची हैं। ၅၁၁. ५११. ဝေဏုဓမော [Pg.43] ဝေဏဝိကော,ပါဏိဝါဒေါ တု ပါဏိဃော ; ပူပိယော ပူပပဏိယော, သောဏ္ဍိကော မဇ္ဇဝိက္ကယီ. 'वेणुधम' और 'वेणविक' (बाँसुरी बजाने वाला), 'पाणिवाद' और 'पाणिघ' (हाथ से ताल देने वाला), 'पूपिय' और 'पूपपणिय' (मालपुआ बेचने वाला), 'सोण्डिक' और 'मज्जविक्कयी' (शराब बेचने वाला) के नाम हैं। ၅၁၂. ५१२. မာယာ တု သမ္ဗရီ မာယာ, ကာရော တု ဣန္ဒဇာလိကော; 'माया' और 'सम्बरी' (इन्द्रजाल/जादू) के नाम हैं, और उसे करने वाला 'मायाकार' या 'इन्द्रजालिक' (जादूगर) कहलाता है। ၅၁၃. ५१३. ဩရဗ္ဘိကာ သူကရိကာ, မာဂဝိကာ တေ စ သာကုဏိကာ; ဟန္တွာ ဇီဝန္တေ’ဠက, သူကရ, မိဂ, ပက္ခိနော ကမတော. 'ओरब्भिक' (भेड़ मारने वाला), 'सूकरिक' (सूअर मारने वाला), 'मागविक' (हिरण का शिकारी) और 'साकुणिक' (पक्षी पकड़ने वाला) - ये क्रमशः भेड़, सूअर, मृग और पक्षियों को मारकर जीवन यापन करते हैं। ၅၁၄. ५१४. ဝါဂုရိကော ဇာလိကော ထ,ဘာရဝါဟော တု ဘာရိကော; ဝေတနိကော တု ဘတကော, ကမ္မကရော ထ ကိံ ကရော; ဒါသော စ စေဋကော ပေဿော, ဘစ္စော စ ပရိစာရိကော. 'वागुरिक' और 'जालिक' (जाल बिछाने वाला), 'भारवाहो' और 'भारिको' (बोझ ढोने वाला), 'वेतनिक', 'भतक', 'कम्मकर' और 'किंकार' (मजदूर), 'दास', 'चेटक', 'पेस्स', 'भच्च' और 'परिचारिक' (दास/सेवक) के पर्यायवाची हैं। ၅၁၅. ५१५. အန္တောဇာတော ဓနက္ကီတော, ဒါသဗျော’ပဂတော သယံ; ဒါသာ ကရမရာနီတော, စ္စေဝံ တေ စတုဓာ သိယုံ. 'अन्तोजात' (घर में जन्मा), 'धनक्कीत' (धन से खरीदा हुआ), 'दासब्योपगत' (स्वयं दास बना हुआ) और 'करमरानीत' (युद्ध में पकड़ा गया) - इस प्रकार दास चार प्रकार के होते हैं। ၅၁၆. ५१६. အဒါသော တု ဘုဇိဿော ထ,နီစော ဇမ္မော နိဟီနကော; နိက္ကောသဇ္ဇော အကိလာသု,မန္ဒော တု အလသော ပျထ. 'अदास' और 'भुजिस्स' (स्वतंत्र), 'नीच', 'जम्म' और 'निहीक' (नीच/अधम), 'निक्कोसज्ज' और 'अकिलासु' (परिश्रमी), 'मन्द' और 'अलस' (आलसी) के नाम हैं। ၅၁၇. ५१७. သပါကော စေဝ စဏ္ဍာလော, မာတင်္ဂေါ သပစော ဘဝေ; တဗ္ဘေဒါ မိလက္ခဇာတီ, ကိရာတ, သဝရာဒယော. 'सपाक', 'चण्डाल', 'मातंग' और 'सपच' (चाण्डाल) के पर्यायवाची हैं; उनके भेदों में 'मिलक्ख' (म्लेच्छ) जातियाँ जैसे 'किरात', 'शबर' आदि हैं। ၅၁၈. ५१८. နေသာဒေါ လုဒ္ဒကော ဗျာဓော,မိဂဝေါ တု မိဂဗျဓော; သာရမေယျော စ သုနခေါ, သုနော သောဏော စ ကုက္ကုရော. 'नेसाद', 'लुद्दक' और 'ब्याध' (शिकारी), 'मिगव' और 'मिगब्याध' (मृग का शिकारी), 'सारमेय्य', 'सुनख', 'सुन', 'सोण' और 'कुक्कुर' (कुत्ता) के नाम हैं। ၅၁၉. ५१९. သွာနော သုဝါနော သာဠူရော,သူနော သာနော စ သာ ပုမေ; ဥမ္မတ္တာဒိတ မာပန္နော, အဠက္ကောတိ သုနော မတော. 'स्वान', 'सुवान', 'साळूर', 'सून' और 'सान' (कुत्ता) के पर्यायवाची हैं; पागल कुत्ते को 'अलक्क' कहा जाता है। ၅၂၀. ५२०. သာဗန္ဓနံ တု ဂဒ္ဒူလော, ဒီပကော တု စ စေတကော; ဗန္ဓနံ ဂဏ္ဌိ ပါသော ထ, ဝါဂုရာ မိဂဗန္ဓနီ. 'गद्दूल' (कुत्ते को बाँधने की रस्सी), 'दीपक' और 'चेतक' (शिकारी चीता/प्रलोभक पशु), 'बन्धन', 'गण्ठि' और 'पास' (गाँठ/फंदा), 'वागुरा' (मृग बाँधने का जाल) के नाम हैं। ၅၂၁. ५२१. ထိယံ ကုဝေဏီ ကုမီနံ, အာနယော ဇာလ မုစ္စတေ; အာဃာတနံ ဝဓဋ္ဌာနံ, သူနာ တု အဓိကောဋ္ဋနံ. 'कुवेणी', 'कुमीन', 'आनय' और 'जाल' (मछली पकड़ने का जाल), 'आघातन' और 'वधट्ठान' (वध-स्थल), 'सूना' और 'अधिक्कोट्टन' (कसाईखाना) के पर्यायवाची हैं। ၅၂၂. ५२२. တက္ကရော [Pg.44] မောသကော စောရော,ထေနေ’ကာဂါရိကော သမာ; ထေယျဉ္စ စောရိကာ မောသော,ဝေမော ဝါယနဒဏ္ဍကော. 'तक्कर', 'मोसक', 'चोर', 'थेन' और 'एकागारिक' (चोर), 'थेय्य', 'चोरिका' और 'मोस' (चोरी), 'वेम' (जुलाहे का करघा) के नाम हैं। ၅၂၃. ५२३. သုတ္တံ တန္တု ပုမေ တန္တံ, ပေါတ္ထံ လေပျာဒိကမ္မနိ; ပဉ္စာလိကာ ပေါတ္ထလိကာ, ဝတ္ထဒန္တာဒိနိမ္မိတာ. 'सुत्त', 'तन्तु' और 'तन्त' (धागा), 'पोत्थ' (लेप या मिट्टी का काम), 'पञ्चालिका' और 'पोत्थलिका' (कपड़े या हाथीदाँत की बनी गुड़िया) के पर्यायवाची हैं। ၅၂၄. ५२४. ဥဂ္ဃာဋနံ ဃဋီယန္တံ, ကူပမ္ဗုဗ္ဗာဟနံ ဘဝေ; မဉ္ဇူသာ ပေဠာ ပိဋကော, တွိတ္ထိယံ ပစ္ဆိ ပေဋကော. 'उग्घाटन' और 'घटीयन्त' (रहट/कुएँ से पानी निकालने का यंत्र), 'मञ्जूसा', 'पेळा', 'पिटक', 'पच्छि' और 'पेटक' (टोकरी/पिटारी) के नाम हैं। ၅၂၅. ५२५. ဗျာဘင်္ဂီ တွိတ္ထိယံ ကာဇော, သိက္ကာ တွတြာ’ဝလမ္ဗနံ; ဥပါဟနော ဝါ ပါဒု’တ္ထီ, တဗ္ဘေဒါ ပါဒုကာ ပျထ. 'ब्याभंगी' और 'काज' (काँवर), 'सिक्का' (छींका), 'उपाहन', 'पादु' और 'पादुका' (जूता/खड़ाऊँ) के पर्यायवाची हैं। ၅၂၆. ५२६. ဝရတ္တာ ဝဒ္ဓိကာ နဒ္ဓိ, ဘသ္တာ စမ္မပသိဗ္ဗကံ; သောဏ္ဏာဒျာဝတ္တနီ မူသာ,ထ ကူဋံ ဝါ အယောဃနော. 'वरत्ता', 'वद्धिका' और 'नद्धि' (चमड़े का तस्मा), 'भस्ता' और 'चम्मपसिब्बक' (धौंकनी/चमड़े का थैला), 'मूसा' (सोना गलाने की घड़िया), 'कूट' और 'अयोगहन' (लोहे का घन/हथौड़ा) के नाम हैं। ၅၂၇. ५२७. ကမ္မာရဘဏ္ဍာ သဏ္ဍာသော, မုဋ္ဌျာ’ဓိကရဏီတ္ထီယံ; တဗ္ဘသ္တာ ဂဂ္ဂရီ နာရီ, သတ္တံ တု ပိပ္ဖလံ ဘဝေ. 'सण्डासो' (सँड़सी), 'मुट्ठी' और 'अधिकरण' (निहाई), 'गग्गरी' (धौंकनी), 'सत्त' और 'पिप्फल' (कैंची/चाकू) के पर्यायवाची हैं। ၅၂၈. ५२८. သာဏော တု နိကသော ဝုတ္တော,အာရာ တု သူစိဝိဇ္ဈနံ; ခရော စ ကကစော နိတ္ထီ, သိပ္ပံ ကမ္မံ ကလာဒိကံ. 'साण' और 'निकस' (सान/कसौटी), 'आरा' (सूजा), 'खर' और 'ककच' (आरा/करवत), 'सिप्प', 'कम्म' और 'कला' (शिल्प/कला) के नाम हैं। ၅၂၉. ५२९. ပဋိမာ ပဋိဗိမ္ဗဉ္စ, ဗိမ္ဗော ပဋိနိဓီရိတော; တီသု သမော ပဋိဘာဂေါ, သန္နိကာသော သရိက္ခကော. 'पटिमा', 'पटिबिम्ब', 'बिम्ब' और 'पटिनिधि' (प्रतिमा/प्रतिबिंब), 'सम', 'पटिभाग', 'सन्निकास' और 'सरिक्खक' (समान/सदृश) के पर्यायवाची हैं। ၅၃၀. ५३०. သမာနော သဒိသော တုလျော,သင်္ကာသော သန္နိဘော နိဘော; ဩပမ္မ မုပမာနံ စု, ပမာ ဘတိ တု နာရိယံ. 'समान', 'सदिस', 'तुल्य', 'संकास', 'सन्निभ' और 'निभ' (समान), 'ओपम्म', 'उपमान', 'पमा' और 'भाति' (उपमा/तुलना) के नाम हैं। ၅၃၁. ५३१. နိဗ္ဗေသော ဝေတနံ မူလျံ, ဇူတံ တွနိတ္ထိ ကေတဝံ; ဓုတ္တော’က္ခဓုတ္တော ကိတဝေါ, ဇူတကာရ, က္ခဒေဝိနော. 'निब्बेस', 'वेतन' और 'मूल्य' (मजदूरी), 'जूत' और 'केतव' (जुआ), 'धुत्त', 'अक्खधुत्त', 'कितव', 'जूतकार' और 'अक्खदेवि' (जुआरी) के पर्यायवाची हैं। ၅၃၂. ५३२. ပါဋိဘောဂေါတု ပဋိဘူ, အက္ခော တု ပါသကော ဘဝေ; ပုမေဝါ’ ဋ္ဌပဒံ သာရိ, ဖလကေ ထ ပဏော, ဗ္ဘုတော. 'पाटिभोग' और 'पटिभू' (जमानतदार), 'अक्ख' और 'पासक' (पासा), 'अट्ठपद' और 'सारि' (बिसात/मोहरा), 'पण' और 'अब्भुत' (दाँव/बाजी) के नाम हैं। ၅၃၃. ५३३. ကိဏ္ဏံ [Pg.45] တု မဒိရာဗီဇေ, မဓု မဓွာသဝေ မတံ; မဒိရာ ဝါရုဏီ မဇ္ဇံ, သုရာ ဘဝေါ တု မေရယံ. 'किण्ण' (खमीर), 'मधु' और 'मध्वासव' (मदिरा), 'मदिरा', 'वारुणी', 'मज्ज', 'सुरा' और 'मेरय' (शराब/मदिरा) के पर्यायवाची हैं। ၅၃၄. ५३४. သရကော စသကော နိတ္ထီ, အာပါနံ ပါနမဏ္ဍလံ; 'सरक' और 'चसक' (शराब का प्याला), 'आपान' और 'पानमण्डल' (मद्यपान की गोष्ठी) के नाम हैं। ၅၃၅. ५३५. ယေ’တြ ဘူရိပ္ပယောဂတ္တာ, ယောဂိကေကသ္မိ မီရိတာ; လိင်္ဂန္တရေပိ တေ ဉေယျာ, တဒ္ဓမ္မတ္တာ’ညဝုတ္တိယန္တိ. यहाँ जो शब्द अधिक प्रयोग के कारण एक लिंग में कहे गए हैं, उन्हें उनके स्वभाव के अनुसार अन्य लिंगों में भी समझना चाहिए। ဣတိ သုဒ္ဒဝဂ္ဂေါ. इति शूद्रवर्गः (इस प्रकार शूद्र वर्ग समाप्त हुआ)। စတုဗ္ဗဏ္ဏဝဂ္ဂေါ နိဋ္ဌိတော. चतुर्वर्णवर्ग समाप्त (चारों वर्णों का वर्ग समाप्त हुआ)। ၅. အရညဝဂ္ဂ ५. अरण्यवर्ग (वन विभाग) ၅၃၆. ५३६. အရညံ ကာနနံ ဒါယော, ဂဟနံ ဝိပိနံ ဝနံ; အဋဝီ’တ္ထီ မဟာရညံ, တွ, ရညာနီတ္ထိယံ ဘဝေ. 'अरण्य', 'कानन', 'दाय', 'गहन', 'विपिन', 'वन' और 'अटवी' (वन/जंगल) के पर्यायवाची हैं; 'महारण्य' और 'अरण्यानी' बड़े जंगल को कहते हैं। ၅၃၇. ५३७. နဂရာ နာတိဒူရသ္မိံ, သန္တေဟိ ယော ဘိရောပိတော; တရုသဏ္ဍော သ အာရာမော, တထော ပဝန မုစ္စတေ. नगर से बहुत दूर नहीं, सज्जनों द्वारा जो लगाया गया है; वह वृक्षों का समूह 'आराम' कहलाता है, और उसे 'पवन' भी कहा जाता है। ၅၃၈. ५३८. သဗ္ဗသာဓာရဏာ’ရညံ, ရည မုယျာန မုစ္စတေ; ဉေယျံ တဒေဝ ပမဒ, ဝန မန္တေပုရောစိတံ. सबके लिए साधारण (सार्वजनिक) वन 'अरण्य' कहलाता है; राजा का उद्यान 'उय्यान' (उद्यान) कहलाता है; और अन्तःपुर में स्थित वन को 'प्रमदवन' जानना चाहिए। ၅၃၉. ५३९. ပန္တိ ဝီထျာ’ဝလိ သေဏီ, ပါဠိ လေခါ တု ရာဇိ စ; ပါဒပေါ ဝိဋပီ ရုက္ခော, အဂေါ သာလော မဟီရုဟော. पंक्ति, वीथि, आवली, श्रेणी, पालि, लेखा और राजि (ये पंक्ति के नाम हैं); पादप, विटपी, रुक्ख (वृक्ष), अग, साल और महीरुह (ये वृक्ष के नाम हैं)। ၅၄၀. ५४०. ဒုမော တရု ကုဇော သာခီ, ဂစ္ဆော တု ခုဒ္ဒပါဒပေါ; ဖလန္တိ ယေ ဝိနာ ပုပ္ဖံ, တေ ဝုစ္စန္တိ ဝနပ္ပတီ. द्रुम, तरु, कुज और साखी (ये भी वृक्ष के नाम हैं); छोटा वृक्ष 'गच्छ' कहलाता है; जो बिना फूल के फल देते हैं, वे 'वनस्पति' कहे जाते हैं। ၅၄၁. ५४१. ဖလပါကာဝသာနေ ယော,မရတျော သဓိ သာ ဘဝေ; တီသု ဝဉ္စျာ’ဖလာ စာထ, ဖလိနော ဖလဝါ ဖလီ. जो फल पकने के बाद मर जाता है, वह 'ओषधि' है; फलहीन को 'वन्ध्या' या 'अफल' कहते हैं (तीनों लिंगों में); फल वाले को 'फली', 'फलवान' और 'फली' कहते हैं। ၅၄၂. ५४२. သမ္ဖုလ္လိတော တု ဝိကစော, ဖုလ္လော ဝိကသိတော တိသု; သိရော’ဂ္ဂံ သိခရော နိတ္ထီ, သာခါ တု ကထိတာ လတာ. सम्फुल्लित, विकच, फुल्ल और विकसित (ये खिले हुए के नाम हैं); सिर, अग्र और शिखर (ये वृक्ष के ऊपरी भाग के नाम हैं); शाखा को 'शाखा' और 'लता' कहा गया है। ၅၄၃. ५४३. ဒလံ ပလာသံ ဆဒနံ, ပဏ္ဏံ ပတ္တံ ဆဒေါ ပျထ; ပလ္လဝေါ ဝါ ကိသလယံ, နဝုဗ္ဘိန္နေ တု အင်္ကုရော. दल, पलास, छदन, पण्ण (पर्ण), पत्त (पत्र) और छद (ये पत्ते के नाम हैं); पल्लव और किसलय (ये कोमल पत्ते के नाम हैं); नये निकले हुए को 'अंकुर' कहते हैं। ၅၄၄. ५४४. မကုလံ ဝါ ကုဋုမလော, ခါရကော တု စ ဇာလကံ; ကလိကာ ကောရကော နိတ္ထီ, ဝဏ္ဋံ ပုပ္ဖာဒိဗန္ဓနံ. मकुल और कुट्मल (ये कली के नाम हैं); खारिक और जालक (ये भी कली के नाम हैं); कलिका और कोरक (ये भी कली के नाम हैं); फूल आदि के डंठल को 'वण्ट' (वृन्त) कहते हैं। ၅၄၅. ५४५. ပသဝေါ [Pg.46] ကုသုမံ ပုပ္ဖံ, ပရာဂေါ ပုပ္ဖဇော ရဇော; မကရန္ဒော မဓု မတံ, ထဝကော တု စ ဂေါစ္ဆကော. प्रसव, कुसुम और पुप्फ (पुष्प) (ये फूल के नाम हैं); पराग और पुष्पज रज (ये पराग के नाम हैं); मकरन्द और मधु (ये पुष्प-रस के नाम हैं); थवक और गुच्छक (ये गुच्छे के नाम हैं)। ၅၄၆. ५४६. ဖလေ တွာ’မေ သလာဋု’တ္တော,ဖလံ တု ပက္က မုစ္စတေ; စမ္ပက’မ္ဗာဒိကုသုမ, ဖလနာမံ နပုံသကေ. कच्चे फल को 'सलाटु' कहा जाता है; पके हुए को 'फल' कहते हैं; चम्पक, आम आदि के फूल और फल के नाम नपुंसक लिंग में होते हैं। ၅၄၇. ५४७. မလ္လိကာဒီ တု ကုသုမေ, သလိင်္ဂါ ဝီဟယော ဖလေ; ဇမ္ဗူ’တ္ထီ ဇမ္ဗဝံ ဇမ္ဗူ, ဝိဋပေါ ဝိဋဘီ’တ္ထိယံ. मल्लिका आदि फूलों के नाम अपने लिंग के अनुसार होते हैं, और धान आदि फलों के नाम भी; जम्बू (वृक्ष) स्त्रीलिंग है, उसका फल 'जाम्बव' है; विटप और विटभी (शाखा/झाड़ी) स्त्रीलिंग में भी होते हैं। ၅၄၈. ५४८. မူလ မာရဗ္ဘ သာခန္တော, ခန္ဓော ဘာဂေါ တရုဿ ထ; ကောဋရော နိတ္ထိယံ ရုက္ခ, စ္ဆိဒ္ဒေ ကဋ္ဌံ တု ဒါရု စ. जड़ से लेकर शाखा तक वृक्ष का भाग 'स्कन्ध' (तना) कहलाता है; वृक्ष के छेद (खोखल) को 'कोटर' कहते हैं; काष्ठ और दारु (ये लकड़ी के नाम हैं)। ၅၄၉. ५४९. ဗုန္ဒော မူလဉ္စ ပါဒေါ ထ, သင်္ကု’တ္တော ခါဏုနိတ္ထိယံ; ကရဟာဋံ တု ကန္ဒော ထ, ကဠီရော မတ္ထကော ဘဝေ. बुन्द, मूल और पाद (ये जड़ के नाम हैं); खूँटे को 'शंकु' और 'स्थाणु' कहते हैं; कन्द को 'करहाट' और 'कन्द' कहते हैं; (वृक्ष के) मस्तक (कोमल अग्रभाग) को 'करीर' कहते हैं। ၅၅၀. ५५०. ဝလ္လရီ မဉ္ဇရီ နာရီ, ဝလ္လီ တု ကထိတာ လတာ; ထမ္ဘော ဂုမ္ဗော စ အက္ခန္ဓေ, လတာ ဝိရူ ပတာနိနီ. वल्लरी और मञ्जरी (ये मंजरियों के नाम हैं); वल्ली और लता (ये बेल के नाम हैं); बिना तने वाले वृक्ष को 'स्तम्भ' और 'गुल्म' (झाड़ी) कहते हैं; लता, विरूध और प्रतानिनी (ये भी बेल के नाम हैं)। ၅၅၁. ५५१. အဿတ္ထော ဗောဓိ စ ဒွီသု, နိဂြောဓော တု ဝဋော ဘဝေ; ကဗိဋ္ဌော စ ကပိတ္ထော စ, ယညင်္ဂေါ တု ဥဒုမ္ဗရော. अस्सत्थ (पीपल) और बोधि (ये पीपल के नाम हैं); निग्रोध और वट (ये बरगद के नाम हैं); कविट्ठ और कपित्थ (ये कैथ के नाम हैं); यज्ञाङ्ग और उदुम्बर (ये गूलर के नाम हैं)। ၅၅၂. ५५२. ကောဝိဠာရော ယုဂပတ္တော, ဥဒ္ဒါလော ဝါတဃာတကော; ရာဇရုက္ခော ကတမာလီ, န္ဒီဝရော ဗျာဓိဃာတကော. कोविळार और युगपत्र (ये कचनार के नाम हैं); उद्दाल और वातघातक (ये अमलतास के भेद हैं); राजवृक्ष, कृतमाल, इन्दीवर और व्याधिघातक (ये अमलतास के नाम हैं)। ၅၅၃. ५५३. ဒန္တသဌော စ ဇမ္ဘီရော, ဝရဏော တု ကရေရိ စ; ကိံ သုကော ပါလိဘဒ္ဒေါထ, ဝဉ္ဇုလော တု စ ဝေတသော. दन्तशठ और जम्भीर (ये नीम्बू के नाम हैं); वरण और करेरि (ये वरण वृक्ष के नाम हैं); किंशुक और पालिभद्र (ये पलाश के नाम हैं); वञ्जुल और वेतस (ये बेंत के नाम हैं)। ၅၅၄. ५५४. အမ္ဗာဋကောပီတနကော, မဓုကော တု မဓုဒ္ဒုမော; အထော ဂုဠဖလော ပီလု, သောဘဉ္ဇနော စ သိဂ္ဂု စ. अम्बाटक और पीतनक (ये अमड़ा के नाम हैं); मधुक और मधुद्रुम (ये महुआ के नाम हैं); गुळफल और पीलु (ये पीलु वृक्ष के नाम हैं); सोभञ्जन और सिग्गु (ये सहजन के नाम हैं)। ၅၅၅. ५५५. သတ္တပဏ္ဏိ ဆတ္တပဏ္ဏော, တိနိသော တွ တိမုတ္တကော; ကိံ သုကော တု ပလာသော ထ,အရိဋ္ဌော ဖေနိလော ဘဝေ. सप्तपर्णी और छत्रपर्ण (ये सत्तौन के नाम हैं); तिनिस और अतिमुक्तक (ये तिनिस वृक्ष के नाम हैं); किंशुक और पलाश (ये पलाश के नाम हैं); अरिष्ट और फेनिल (ये रीठा के नाम हैं)। ၅၅၆. ५५६. မာလူရ ဗေလုဝါဗိလ္လော, ပုန္နာဂေါ တု စ ကေသရော; သာလဝေါ တု စ လောဒ္ဒေါ ထ, ပိယာလော သန္နကဒ္ဒု စ. मालूर, बेलुव और बिल्ल (ये बेल के नाम हैं); पुन्नाग और केसर (ये पुन्नाग के नाम हैं); सालव और लोद्ध (ये लोध के नाम हैं); पियाल और सन्नकद्दु (ये चिरौंजी के नाम हैं)। ၅၅၇. ५५७. လိကောစကော တထာ’င်္ကောလော,အထ ဂုဂ္ဂုလု ကောသိကော; အမ္ဗော စူတော သဟော တွေသော,သဟကာရော သုဂန္ဓဝါ. लिकोचक और अंकोल (ये अंकोल के नाम हैं); गुग्गुलु और कोशिक (ये गूगल के नाम हैं); अम्ब, चूत, सह, सहकार और सुगन्धवा (ये आम के नाम हैं)। ၅၅၈. ५५८. ပုဏ္ဍရီကော [Pg.47] စ သေတမ္ဗော, သေလု တု ဗဟုဝါရကော; သေပဏ္ဏီ ကာသ္မိရီ စာထ, ကောလီ စ ဗဒရီတ္ထိယံ. पुण्डरीक और श्वेत-आम्र (ये सफेद आम के नाम हैं); सेलु और बहुवारक (ये लसोड़ा के नाम हैं); सेपण्णी और काश्मीरी (ये गम्भारी के नाम हैं); कोली और बदरी (ये बेर के नाम हैं)। ၅၅၉. ५५९. ကောလံ စာနိတ္ထီ ဗဒရော, ပိလက္ခော ပိပ္ပလီ’တ္ထိယံ; ပါဋလီ ကဏှဝန္တာ စ, သာဒုကဏ္ဋော ဝိကင်္ကတော. कोल और बदर (ये बेर के फल के नाम हैं); पिलक्ख और पिप्पली (ये पिलखन के नाम हैं); पाटली और कृष्णवृन्ता (ये पाढ़ल के नाम हैं); स्वादु कण्टक और विकंकत (ये कटाई के नाम हैं)। ၅၆၀. ५६०. တိန္ဒုကော ကာဠက္ခန္ဓော စ, တိမ္ဗရူသက တိမ္ဗရူ; ဧရာဝတော တု နာရင်္ဂေါ, ကုလကော ကာကတိန္ဒုကော. तिन्दुक, कालस्कन्ध, तिम्बरूसक और तिम्बरू (ये तेन्दू के नाम हैं); एरावत और नारङ्ग (ये नारंगी के नाम हैं); कुलक और काकतिन्दुक (ये कुचला के नाम हैं)। ၅၆၁. ५६१. ကဒမ္ဗော ပိယကော နီပေါ, ဘလ္လီ ဘလ္လာတကော တိသု; ဈာဝုကော ပိစုလော စာထ, တိလကော ခုရကော ဘဝေ. कदम्ब, प्रियक और नीप (ये कदम्ब के नाम हैं); भल्ली और भल्लातक (ये भिलावा के नाम हैं); झावुक और पिचुल (ये झाऊ के नाम हैं); तिलक और खुरक (ये तिलक वृक्ष के नाम हैं)। ၅၆၂. ५६२. စိဉ္စာ စ တိန္တိဏီ စာထ, ဂဒ္ဒဘဏ္ဍော ကပီတနော; သာလော’ဿကဏ္ဏော သဇ္ဇော ထ,အဇ္ဇုနော ကကုဓော ဘဝေ. चिञ्चा और तिन्तिणी (ये इमली के नाम हैं); गद्दभाण्ड और कपीतन (ये पारस पीपल के नाम हैं); साल, अश्वकर्ण और सर्ज (ये साल वृक्ष के नाम हैं); अर्जुन और ककुध (ये अर्जुन वृक्ष के नाम हैं)। ၅၆၃. ५६३. နိစုလော မုစလိန္ဒော စ, နီပေါ ထ ပိယကော တထာ; အသနော ပီတသာလော ထ,ဂေါလီသော ဈာဋလော ဘဝေ. निचुल और मुचलिन्द (ये निचुल वृक्ष के नाम हैं); नीप और प्रियक (ये कदम्ब के भेद हैं); असन और पीतसाल (ये असन वृक्ष के नाम हैं); गोलीस और झाटल (ये पाढ़ल के भेद हैं)। ၅၆၄. ५६४. ခီရိကာ ရာဇာယတနံ, ကုမ္ဘီ ကုမုဒိကာ ဘဝေ; ယူပေါ တု ကမုကော စာထ, ပဋ္ဋိ လာခါပသာဒနော. खीरिका और राजायतन (ये खिरनी के नाम हैं); कुम्भी और कुमुदिका (ये कुम्भी वृक्ष के नाम हैं); यूप और कमुक (ये सुपारी के नाम हैं); पट्टी और लाक्षाप्रसादन (ये लोध के भेद हैं)। ၅၆၅. ५६५. ဣင်္ဂုဒီ တာပသတရု, ဘုဇပတ္တော တု အာဘုဇီ; ပိစ္ဆိလာ သိမ္ဗလီ ဒွီသု, ရောစနော ကောဋသိမ္ဗလီ. इङ्गुदी और तापसतरु (ये हिंगोट के नाम हैं); भुजपत्त और आभुजी (ये भोजपत्र के नाम हैं); पिच्छिला और सिम्बली (ये सेमल के नाम हैं); रोचन और कूटसिम्बली (ये सेमल के भेद हैं)। ၅၆၆. ५६६. ပကိရိယော ပူတိကော ထ, ရောဟီ ရောဟိတကော ဘဝေ; ဧရဏ္ဍော တု စ အာမဏ္ဍော, အထ သတ္တုဖလာ သမီ. पकिरिय और पूतिक (ये करंज के नाम हैं); रोही और रोहितक (ये रोहिड़ा के नाम हैं); एरण्ड और आमण्ड (ये अरण्डी के नाम हैं); सक्तुफला और शमी (ये शमी/खेजड़ी के नाम हैं)। ၅၆၇. ५६७. နတ္တမာလော ကရဉ္ဇော ထ, ခဒိရော ဒန္တဓာဝနော; သောမဝက္ကော တု ကဒရော, သလ္လောတု မဒနော ဘဝေ. नक्तमाल और करंज; खदिर और दन्तधावन; सोमवक्क और कदर; शल्य और मदन। ၅၆၈. ५६८. အထာပိ ဣန္ဒသာလော စ, သလ္လကီ ခါရကော သိယာ; ဒေဝဒါရု ဘဒ္ဒဒါရု, စမ္ပေယျော တု စ စမ္ပကော. इन्द्रसाल, सल्लकी और क्षारक; देवदारु और भद्रदारु; चाम्पेय और चम्पक। ၅၆၉. ५६९. ပနသော ကဏ္ဋကိဖလော, အဘယာ တု ဟရီတကီ; အက္ခော ဝိဘီတကော တီသု, အမတာ’မလကီ တိသု. पनस और कण्टकिफल; अभया और हरीतकी; अक्ष और विभीतक; अमृता और आमलकी। ၅၇၀. ५७०. လဗုဇော လိကုစော စာထ, ကဏိကာရော ဒုမုပ္ပလော; နိမ္ဗော’ရိဋ္ဌော ပုစိမန္ဒော, ကရကော တု စ ဒါဠိမော. लबुज और लिकुच; कणिकार और द्रुमुत्पल; निम्ब, अरिष्ट और पुचिमन्द; करक और दाड़िम। ၅၇၁. ५७१. သရလော [Pg.48] ပူတိကဋ္ဌဉ္စ, ကပိလာ တု စ သိံသပါ; သာမာ ပိယင်္ဂု ကင်္ဂုပိ, သိရီသော တု စ ဘဏ္ဍိလော. सरल और पूतिकाष्ठ; कपिला और शिंशपा; शामा, प्रियंगु और कंगु; शिरीष और भण्डिल। ၅၇၂. ५७२. သောဏကော ဒီဃဝန္တော စ,ဝကုလော တု စ ကေသရော; ကာကောဒုမ္ဗရိကာ ဖေဂ္ဂု, နာဂေါ တု နာဂမာလိကာ. शोणक और दीर्घवृन्त; वकुल और केसर; काकोदुम्बरिका और फेग्गु; नाग और नागमालिका। ၅၇၃. ५७३. အသောကော ဝဉ္ဇုလော စာထ, တက္ကာရီ ဝေဇယန္တိကာ; တာပိဉ္ဆော စ တမာလော ထ, ကုဋဇော ဂိရိမလ္လိကာ. अशोक और वञ्जुल; तक्कारी और वैजयन्तिका; तापिञ्छ और तमाल; कुटज और गिरिमल्लिका। ၅၇၄. ५७४. ဣန္ဒယဝေါ ဖလေ တဿာ, ဂ္ဂိမန္ထော ကဏိကာ ဘဝေ; နိဂုဏ္ဌိ’တ္ထီ သိန္ဒုဝါရော, တိဏသုညံ တု မလ္လိကာ. इन्द्रयव (कुटज का फल); अग्निमन्थ और कणिका; निर्गुण्डी और सिन्दुवार; तृणशून्य और मल्लिका। ၅၇၅. ५७५. သေဖာလိကာ နီလိကာ ထ, အပ္ဖောဋာ ဝနမလ္လိကာ; ဗန္ဓုကော ဇယသုမနံ, ဘဏ္ဍိကော ဗန္ဓုဇီဝကော. शेफालिका और नीलिका; आस्फोटा और वनमल्लिका; बन्धुक, जयसुमन, भण्डिक और बन्धुजीवक। ၅၇၆. ५७६. သုမနာ ဇာတိသုမနာ, မာလတီ ဇာတိ ဝဿိကီ; ယူထိကာ မာဂဓီ စာထ, သတ္တလာ နဝမလ္လိကာ. सुमना, जातिसुमना, मालती, जाति और वासन्ती; यूथिका और मागधी; सप्तला और नवमल्लिका। ၅၇၇. ५७७. ဝါသန္တီ,တ္ထီ အတိမုတ္တော, ကရဝီရော’ဿမာရကော; မာတုလုင်္ဂေါ ဗီဇပူရော, ဥမ္မတ္တော တု စ မာတုလော. वासन्ती और अतिमुक्त; करवीर और अश्वमारक; मातुलुङ्ग और बीजपूर; उन्मत्त और मातुल। ၅၇၈. ५७८. ကရမန္ဒော သုသေနော စ, ကုန္ဒံ တု မာဃျ မုစ္စတေ; ဒေဝတာသော တု ဇီမူတော,ထာ’မိလာတော မဟာသဟာ. करमन्द और सुषेण; कुन्द और माघ्य; देवतास और जीमूत; अमिलान और महासहा। ၅၇၉. ५७९. အထော သေရေယျကော ဒါသီ,ကိံ ကိရာတော ကုရဏ္ဋကော; အဇ္ဇုကော သိတပဏ္ဏာသော, သမီရဏော ဖဏိဇ္ဇကော. सैरेयक, दासी, किङ्किरात और कुरण्टक; अर्जक और सितपर्णास; समीरण और फणिज्झक। ၅၈၀. ५८०. ဇပါ တု ဇယသုမနံ, ကရီရော ကကစော ဘဝေ; ရုက္ခာဒနီ စ ဝန္ဒာကာ, စိတ္တကော တွ’ဂ္ဂိသညိတော. जपा और जयसुमन; करीर और कचच; वृक्षादनी और वन्दाका; चित्रक और अग्निसंज्ञित। ၅၈၁. ५८१. အက္ကော ဝိကီရဏော တသ္မိံ,တွ’ ဠက္ကော သေတပုပ္ဖကေ; ပူတိလတာ ဂဠောစီ စ, မုဗ္ဗာ မဓုရသာ ပျထ. अर्क और विकीरण; अलर्क (श्वेत अर्क); पूतिलता और गलोची (गिलोय); मूर्वा और मधुरसा। ၅၈၂. ५८२. ကပိကစ္ဆု ဒုဖဿော ထ, မဉ္ဇိဋ္ဌာ ဝိကသာ ဘဝေ; အမ္ဗဋ္ဌာ စ တထာ ပါဌာ, ကဋုကာ ကဋုရောဟိဏီ. कपिकच्छु और दुःस्पर्श; मञ्जिष्ठा और विकसा; अम्बष्ठा और पाठा; कटुका और कटुरोहिणी। ၅၈၃. ५८३. အပါမဂ္ဂေါ [Pg.49] သေခရိကော, ပိပ္ပလီ မာဂဓီ မတာ; ဂေါကဏ္ဋကော စ သိင်္ဃာဋော, ကောလဝလ္လီ’ဘပိပ္ပလီ. अपामार्ग और शेखरिक; पिप्पली और मागधी; गोकण्टक और शृङ्गाटक; कोलवल्ली और गजपिप्पली। ၅၈၄. ५८४. ဂေါလောမီ တု ဝစာ စာထ, ဂိရိကဏျ’ပရာဇိတာ; သီဟပုစ္ဆီ ပဉှိပဏ္ဏီ, သာလပဏ္ဏီ တု စ’တ္ထိရာ; (စထိရာ). गोलोमी और वचा; गिरिकर्णी और अपराजिता; सिंहपुच्छी और पृष्णिपर्णी; शालपर्णी और स्थिरा। ၅၈၅. ५८५. နိဒိဒ္ဓိကာ တု ဗျဂ္ဃီ စ, အထ နီလီ စ နီလိနီ; ဇိဉ္ဇုကော စေဝ ဂုဉ္ဇာ ထ, သတမူလီ သတာဝရီ. निदिग्धिका और व्याघ्री; नीली और नीलिनी; जिञ्जुक और गुञ्जा; शतमूली और शतावरी। ၅၈၆. ५८६. မဟောသဓံ တွ’တိဝိသာ, ဗာကုစီ သောမဝလ္လိကာ; ဒါဗ္ဗီ ဒါရုဟလိဒ္ဒါ ထ, ဗိဠင်္ဂံ စိတြတဏ္ဍုလာ. महौषध और अतिविषा; बाकुची और सोमवल्लिका; दार्वी और दारुहरिद्रा; विडङ्ग और चित्रतण्डुला। ၅၈၇. ५८७. နုဟီ စေဝ မဟာနာမော, မုဒ္ဒိကာ တု မဓုရသာ; အထာပိ မဓုကံ ယဋ္ဌိ, မဓုကာမဓုယဋ္ဌိကာ. नुही और महानाम; मृद्वीका और मधुरसा; मधुक, यष्टि, मधुका और मधुयष्टिका। ၅၈၈. ५८८. ဝါတိင်္ဂဏော စ ဘဏ္ဍာကီ, ဝါတ္တာကီ ဗြဟတီ ပျထ; နာဂဗလာ စေဝ ဈသာ, လာင်္ဂလီ တု စ သာရဒီ. वातिङ्गण और भण्डाकी; वार्त्ताकी और बृहती; नागबला और झषा; लाङ्गली और शारदी। ၅၈၉. ५८९. ရမ္ဘာ စ ကဒလီ မောစော, ကပ္ပာသီ ဗဒရာ ဘဝေ; နာဂလတာ တု တမ္ဗူလီ, အဂ္ဂိဇာလာ တု ဓာတကီ. रम्भा, कदली और मोच; कर्पासी और बदरा; नागलता और ताम्बूली; अग्निज्वाला और धातकी। ၅၉၀. ५९०. တိဝုတာ တိပုဋာ စာထ, သာမာ ကာဠာ စ ကထျတေ; အထော သိင်္ဂီ စ ဥသဘော, ရေဏုကာ ကပိဠာ ဘဝေ. त्रिवृता, त्रिपुटा, शामा और काला; शृङ्गी और ऋषभ; रेणुका और कपिला। ၅၉၁. ५९१. ဟိရိဝေရဉ္စ ဝါလဉ္စ, ရတ္တဖလာ တု ဗိမ္ဗိကာ; သေလေယျ’ မသ္မပုပ္ဖဉ္စ, ဧလာ တု ဗဟုလာ ဘဝေ. ह्रीवेर और वाल; रक्तफला और बिम्बिका; शैलेय और अश्मपुष्प; एला और बहुला। ၅၉၂. ५९२. ကုဋ္ဌဉ္စ ဗျာဓိ ကထိတော, ဝါနေယျံ တု ကုဋန္နဋံ; ဩသဓိ ဇာတိမတ္တမှိ, ဩသဓံ သဗ္ဗ’ မဇာတိယံ. कुष्ठ और व्याधि; वानेय और कुटन्नट; ओषधि (एक बार फल देने वाली) और औषध (सभी प्रकार की जड़ी-बूटियाँ)। ၅၉၃. ५९३. မူလံ ပတ္တံ ကဠီရ’ဂ္ဂံ, ကန္ဒံ မိဉ္ဇာ ဖလံ တထာ; တစော ပုပ္ဖဉ္စ ဆတ္တန္တိ, သာကံ ဒသဝိဓံ မတံ. मूल, पत्र, करीर, अग्र, कन्द, मज्जा, फल, त्वक् (छाल), पुष्प और छत्रक (मशरूम)—ये दस प्रकार के शाक माने गए हैं। ၅၉၄. ५९४. ပပုန္နာဋော ဧဠဂလော,တဏ္ဍုလေယျော’ပ္ပမာရိသော; ဇီဝန္တိ ဇီဝနီ စာထ, မဓုရကော စ ဇီဝကော. प्रपुन्नाट और एडगज; तण्डुलीय और अल्पमारिष; जीवन्ती और जीवनी; मधुरक और जीवक। ၅၉၅. ५९५. မဟာကန္ဒော စ လသုဏံ, ပလဏ္ဍု တု သုကန္ဒကော; ပဋောလော တိတ္တကော စာထ, ဘိင်္ဂရာဇော စ မက္ကဝေါ. महाकन्द और लहसुन; पलाण्डु और सुकन्दक; पटोल और तिक्तक; भृङ्गराज और मक्कव। ၅၉၆. ५९६. ပုနန္နဝါ [Pg.50] သောထဃာတီ, ဝိတုန္နံ သုနိသဏ္ဏကံ; ကာရဝေလ္လော တု သုသဝီ, တုမ္ဗျာ’လာဗု စ လာဗု သာ. पुनर्नवा और शोथघाती; वितुन्न और सुनिसण्णक; कारवेल्ल और सुसवी; तुम्बी, अलाबू और लाबू। ၅၉၇. ५९७. ဧဠာလုကဉ္စ ကက္ကာရီ, ကုမ္ဘဏ္ဍော တု စ ဝလ္လိဘော; ဣန္ဒဝါရုဏီ ဝိသာလာ, ဝတ္ထုကံ ဝတ္ထုလေယျကော. खीरा, ककड़ी, कुम्हड़ा (कद्दू), इंद्रवारुणी (विशाला) और बथुआ। ၅၉၈. ५९८. မူလကော နိတ္ထိယံ စုစ္စု, တမ္ဗကော စ ကလမ္ဗကော; သာကဘေဒါ ကာသမဒ္ဒ, ဈဇ္ဈရီ ဖဂ္ဂဝါ’ဒယော. मूली, चुच्चु, तम्बक, कलम्ब (करमुआ), कासमर्द (कसौंदी), झज्झरी और फग्गव आदि साग के भेद हैं। ၅၉၉. ५९९. သဒ္ဒလော စေဝ ဒုဗ္ဗာ စ, ဂေါလောမီ သာ သိတာ ဘဝေ; ဂုန္ဒာ စ ဘဒ္ဒမုတ္တဉ္စ, ရသာလော တု’စ္ဆု ဝေဠု တု. दूब (दूर्वा), सफेद दूब (गोलोमी), गुन्दा, नागरमोथा, गन्ना (इक्षु) और बाँस। ၆၀၀. ६००. တစသာရော ဝေဏု ဝံသော, ပဗ္ဗံ တု ဖလု ဂဏ္ဌိသော; ကီစကာ တေ သိယုံ ဝေဏူ, ယေ နဒန္တျာ’နိလဒ္ဓုတာ. बाँस (वेणु, वंश), उसकी गाँठ (पर्व), और हवा से बजने वाले बाँस 'कीचक' कहलाते हैं। ၆၀၁. ६०१. နဠော စ ဓမနော ပေါဋ, ဂလော တု ကာသ မိတ္ထိ န; တေဇနော တု သရော, မူလံ, တူ’ သီရံ ဗီရဏဿ ဟိ. नल (नरकुल), कास, सर (शर), और बीरन घास की जड़ को 'उशीर' (खस) कहते हैं। ၆၀၂. ६०२. ကုသော ဝရဟိသံ ဒဗ္ဗော, ဘူတိဏကံ တု ဘူတိဏံ; ဃာသော တု ယဝသော စာထ,ပူဂေါ တု ကမုကော ဘဝေ. कुश (डाभ), गन्धतृण (भूस्तृण), घास (यवस) और सुपारी का पेड़ (पूग, कमुक)। ၆၀၃. ६०३. တာလော ဝိဘေဒိကာ စာထ, ခဇ္ဇုရီ သိန္ဒိ ဝုစ္စတိ; ताड़ और खजूर (सिन्दी)। ၆၀၄. ६०४. ဟိန္တာလ, တာလ, ခဇ္ဇူရီ, နာလိကေရာ တထေဝ စ; တာလီ စ ကေတကီ နာရီ, ပူဂေါ စ တိဏပါဒပါတိ. हिन्ताल, ताड़, खजूर, नारियल, ताली, केतकी और सुपारी—ये तृण-वृक्ष (एकबीजपत्री) कहलाते हैं। ဣတိ အရညဝဂ္ဂေါ. यहाँ अरण्य-वर्ग समाप्त होता है। ၆. အရညာဒိဝဂ္ဂ ६. अरण्य आदि वर्ग। ၆၀၅. ६०५. ပဗ္ဗတော ဂိရိ သေလော’ဒ္ဒိ, နဂါ’စလ, သိလုစ္စယာ; သိခရီ ဘူဓရောထ ဗ္ဘ, ပါသာဏာ’သ္မော’ပလော သိလာ. पर्वत, गिरि, शैल, अद्रि, नग, अचल, शिलोच्चय, शिखरी, भूधर और पत्थर (पाषाण, अश्म, उपल, शिला)। ၆၀၆. ६०६. ဂိဇ္ဈကူဋော စ ဝေဘာရော, ဝေပုလ္လော’သိဂိလီ နဂါ; ဝိဉ္ဈော ပဏ္ဍဝ ဝင်္ကာဒီ, ပုဗ္ဗသေလော တု စော’ဒယော; မန္ဒရော ပရသေလော’တ္ထော, ဟိမဝါ တု ဟိမာစလော. गृध्रकूट, वैभार, वैपुल्य, ऋषिगिरि, विन्ध्य, पाण्डव, वंक आदि पर्वत; उदयाचल, मन्दर, अस्ताचल और हिमालय। ၆၀၇. ६०७. ဂန္ဓမာဒန ကေလာသ, စိတ္တကူဋ သုဒဿနာ; ကာလကူဋော တိကူဋာ’ဿ, ပတ္ထော တု သာနု နိတ္ထိယံ. गन्धमादन, कैलाश, चित्रकूट, सुदर्शन, कालकूट, त्रिकूट और पहाड़ की चोटी या पठार (सानु)। ၆၀၈. ६०८. ကူဋော [Pg.51] ဝါ သိခရံ သိင်္ဂံ, ပပါတော တု တဋော ဘဝေ; နိတမ္ဗော ကဋကော နိတ္ထီ, နိဇ္ဈရော ပသဝေါ’မ္ဗုနော. शिखर (चोटी), प्रपात (तट), पहाड़ का नितम्ब (कटक) और झरने (निर्झर, सोता)। ၆၀၉. ६०९. ဒရီ’တ္ထီ ကန္ဒရော ဒွီသု, လေဏံ တု ဂဗ္ဘရံ ဂုဟာ; သိလာပေါက္ခရဏီ သောဏ္ဍီ, ကုဉ္ဇံ နိကုဉ္ဇ မိတ္ထိ န. गुफा (दरी, कन्दरा, लयन, गह्वर), शिला-पुष्करणी (सोंडी) और कुंज (निकुंज)। ၆၁၀. ६१०. ဥဒ္ဓ မဓိစ္စကာ သေလ, ဿာသန္နာ ဘူမျု ပစ္စကာ; ပါဒေါ တု’ပန္တသေလော ထ,ဓာတု’တ္တော ဂေရိကာဒိကော. पहाड़ के ऊपर की समतल भूमि (अधित्यका), तराई (उपत्यका), पर्वत का पाद और गेरू आदि खनिज धातु। ဣတိ သေလဝဂ္ဂေါ. यहाँ शैल-वर्ग समाप्त होता है। ၆၁၁. ६११. မိဂိန္ဒော ကေသရီ သီဟော, တရစ္ဆော တု မိဂါဒနော; ဗျဂ္ဃော တု ပုဏ္ဍရီကော ထ, သဒ္ဒူလော ဒီပိနီ’ရိတော. सिंह (मृगेन्द्र, केसरी), लकड़बग्घा (तरक्षु), व्याघ्र (पुण्डरीक, शार्दूल) और तेंदुआ (दीपी)। ၆၁၂. ६१२. အစ္ဆော ဣက္ကော စ ဣဿော တု,ကာဠသီဟော ဣသော ပျထ; ရောဟိသော ရောဟိတော စာထ,ဂေါကဏ္ဏော ဂဏိ ကဏ္ဋကာ. भालू (ऋक्ष), काला सिंह, रोहिस मृग और गोकर्ण (नीलगाय)। ၆၁၃. ६१३. ခဂ္ဂ ခဂ္ဂဝိသာဏာ တု, ပလာသာဒေါ စ ဂဏ္ဍကော; ဗျဂ္ဃာဒိကေ ဝါဠမိဂေါ, သာပဒေါ ထ ပ္လဝင်္ဂမော. गेंडा (खड्ग, गण्डक), हिंसक पशु (व्यालमृग, शवापद) और बन्दर (प्लवंगम)। ၆၁၄. ६१४. မက္ကဋော ဝါနရော သာခါ, မိဂေါ ကပိ ဝလီမုခေါ; ပလဝင်္ဂေါ, ကဏှတုဏ္ဍော,ဂေါနင်္ဂုလော တိ သော မတော. बन्दर (मर्कट, वानर, शाखामृग, कपि, वलीमुख) और लंगूर (गोलांगूल)। ၆၁၅. ६१५. သိင်္ဂါလော ဇမ္ဗုကော ကောတ္ထု, ဘေရဝေါ စ သိဝါ ပျထ; ဗိဠာရော ဗဗ္ဗု မဉ္ဇာရော, ကောကော တု စ ဝကော ဘဝေ. शृगाल (गीदड़), जम्बुक, कोत्थु, भेरुण्ड, गीदड़ी (शिवा), बिल्ली (बिडाल, मार्जार) और भेड़िया (वृक)। ၆၁၆. ६१६. မဟိံသော စ လုလာယော ထ,ဂဝဇော ဂဝယော သမာ; သလ္လော တု သလ္လကော ထာ’ဿ,လောမမှိ သလလံ သလံ. भैंसा (महिष, लुलय), गवय, साही (शल्य, सल्लक) और साही का काँटा। ၆၁၇. ६१७. ဟရိဏော မိဂ သာရင်္ဂါ, မဂေါ အဇိနယောနိ စ; သူကရော တု ဝရောဟော ထ,ပေလကော စ သသော ဘဝေ. हिरण (मृग, सारंग), सुअर (वराह) और खरगोश (शशक)। ၆၁၈. ६१८. ဧဏေယျော [Pg.52] ဧဏီမိဂေါ စ, ပမ္ပဋကော တု ပမ္ပကော; ဝါတမိဂေါ တု စလနီ, မူသိကော တွာ’ခု ဥန္ဒုရော. एणेय मृग, पम्पटक, वातमृग और चूहा (मूषक, आखु, उन्दुरु)। ၆၁၉. ६१९. စမရော ပသဒေါ စေဝ, ကုရုင်္ဂေါ မိဂမာတုကာ; ရုရု ရင်္ကု စ နီကော စ, သရဘာဒီ မိဂန္တရာ. चमरी गाय, चित्तल (पृषत), कुरुंग, मृगमातृका, रुरु, रंकु और शरभ आदि मृगों के भेद। ၆၂၀. ६२०. ပိယကော စမူရု ကဒလီ, မိဂါဒီ စမ္မယောနယော; မိဂါ တု ပသဝေါ သီဟာ, ဒယော သဗ္ဗစတုပ္ပဒါ. पियक, चमूरु, कदली आदि चर्मयोनि मृग हैं; सिंह आदि सभी चौपाये पशु कहलाते हैं। ၆၂၁. ६२१. လူတာ တု လူတိကာ ဥဏ္ဏ, နာဘိ မက္ကဋကော သိယာ; ဝိစ္ဆိကော တွာ’ဠိ ကထိတော, သရဗူ ဃရဂေါဠိကာ. मकड़ी (लूता, उर्णनाभि), बिच्छू (वृश्चिक, अलि) और छिपकली (सरबू, गृहगोलिका)। ၆၂၂. ६२२. ဂေါဓာ ကုဏ္ဍော ပျထော ကဏ္ဏ, ဇလူကာ သတပဒျထ; ကလန္ဒကော ကာဠကာ ထ, နကုလော မင်္ဂုသော ဘဝေ. गोह (गोधा), कनखजूरा (शतपदी), गिलहरी (कलिन्दक) और नेवला (नकुल, मंगुस)। ၆၂၃. ६२३. ကကဏ္ဋကော စ သရဋော, ကီဋော တု ပုဠဝေါ ကိမိ; ပါဏကော စာပျထော ဥစ္စာ,လိင်္ဂေါ လောမသပါဏကော. गिरगिट (ककन्टक, सरट), कीट, कृमि, कीड़ा और रोएँदार कीड़ा (उच्चालिंग)। ၆၂၄. ६२४. ဝိဟင်္ဂေါ ဝိဟဂေါ ပက္ခီ, ဝိဟင်္ဂမ ခဂ’ဏ္ဍဇာ; သကုဏော စ သကုန္တော ဝိ, ပတင်္ဂေါ သကုဏီ ဒွိဇော. विहंग, विहग, पक्षी, विहंगम, खग, अण्डज, शकुन, शकुन्त, पतंग, शकुनी और द्विज - ये पक्षी के नाम हैं। ၆၂၅. ६२५. ဝက္ကင်္ဂေါ ပတ္တယာနော စ, ပတန္တော နီဠဇော ဘဝေ; တဗ္ဘေဒါ ဝဋ္ဋကာ ဇီဝ, ဉ္ဇီဝေါ စကောရ တိတ္တိရာ. वक्रांग, पत्रयान, पतन्त और नीडज - ये भी पक्षी के नाम हैं। उसके भेदों में वट्टका (बटेर), जीवञ्जीव, चकोर और तीतर आते हैं। ၆၂၆. ६२६. သာဠိကာ ကရဝီကော စ, ရဝိဟံသော ကုကုတ္ထကော; ကာရဏ္ဍဝေါ စ ပိလဝေါ, ပေါက္ခရသာတကာ’ဒယော. सारिका (मैना), करवीक (कोयल), रविहंस, कुकुत्थक, कारण्डव, प्लव और पोखर-सातक आदि पक्षियों के प्रकार हैं। ၆၂၇. ६२७. ပတတ္တံ ပေခုဏံ ပတ္တံ, ပက္ခော ပိဉ္ဆံ ဆဒေါ ဂရု; အဏ္ဍံ တု ပက္ခိဗီဇေ ထ, နီဠော နိတ္ထီ ကုလာဝကံ. पतत्र, पेखुण, पत्र, पक्ष, पिच्छ, छद और गरु - ये पंख के नाम हैं। पक्षी के बीज को अण्ड कहते हैं; नीड और कुलावक घोंसले के नाम हैं। ၆၂၈. ६२८. သုပဏ္ဏမာတာ ဝိနတာ, မိထုနံ ထီပုမဒွယံ; ယုဂံ တု ယုဂလံ ဒွန္ဒံ, ယမကံ ယမလံ ယမံ. सुपर्ण (गरुड़) की माता विनता है। स्त्री-पुरुष के जोड़े को मिथुन कहते हैं। युग, युगल, द्वन्द्व, यमक, यमल और यम - ये जोड़े के पर्यायवाची हैं। ၆၂၉. ६२९. သမူဟော ဂဏ သံဃာတာ, သမုဒါယော စ သဉ္စယော; သန္ဒောဟော နိဝဟော ဩဃော, ဝိသရော နိကရော စယော. समूह, गण, संघात, समुदाय, संचय, संदोह, निवह, ओघ, विसर, निकर और चय - ये समूह के नाम हैं। ၆၃၀. ६३०. ကာယော ခန္ဓော သမုဒယော, ဃဋာ သမိတိ သံဟတိ; ရာသိ ပုဉ္ဇော သမဝါယော, ပူဂေါ ဇာတံ ကဒမ္ဗကံ. काय, स्कन्ध, समुदाय, घटा, समिति, संहति, राशि, पुञ्ज, समवाय, पूग, जात और कदम्बक - ये भी समूह के पर्यायवाची हैं। ၆၃၁. ६३१. ဗျူဟော [Pg.53] ဝိတာန ဂုမ္ဗာ စ, ကလာပေါ ဇာလ မဏ္ဍလံ; သမာနာနံ ဂဏော ဝဂ္ဂေါ,သံဃော သတ္ထော တု ဇန္တုနံ. व्यूह, वितान, गुम्ब, कलाप, जाल और मण्डल भी समूह के नाम हैं। समानों के समूह को 'वर्ग' कहते हैं, और प्राणियों के समूह को 'संघ' या 'सार्थ' कहते हैं। ၆၃၂. ६३२. သဇာတိကာနံ တု ကုလံ, နိကာယော တု သဓမ္မိနံ; ယူထော နိတ္ထီ သဇာတိယ, တိရစ္ဆာနာနမုစ္စတေ. सजातीयों के समूह को 'कुल' कहते हैं, समान धर्म वालों के समूह को 'निकाय' और सजातीय तिर्यंचों (पशुओं) के समूह को 'यूथ' कहा जाता है। ၆၃၃. ६३३. သုပဏ္ဏော ဝေနတေယျော စ, ဂရုဠော ဝိဟဂါဓိပေါ; ပရပုဋ္ဌော ပရဘတော, ကုဏာလော ကောကိလော ပိကော. सुपर्ण, वैनतेय, गरुड़ और विहगाधिप - ये गरुड़ के नाम हैं। परपुष्ट, परभृत, कुणाल, कोकिल और पिक - ये कोयल के नाम हैं। ၆၃၄. ६३४. မောရော မယူရော ဝရဟီ, နီလဂီဝ သိခဏ္ဍိနော; ကလာပီ စ သိခီ ကေကီ, စူဠာ တု စ သိခါ ဘဝေ. मोर, मयूर, वरही, नीलग्रीव, शिखण्डी, कलापी, शिखी और केकी - ये मोर के नाम हैं। चूड़ा और शिखा कलगी के नाम हैं। ၆၃၅. ६३५. သိခဏ္ဍော ဝရဟဉ္စေဝ, ကလာပေါ ပိဉ္ဆ မပျထ; စန္ဒကော မေစကော စာထ, ဆပ္ပဒေါ စ မဓုဗ္ဗတော. शिखण्ड, वरह, कलाप और पिच्छ - ये मोर के पंख के नाम हैं। चन्द्रक और मेचक पंख की आँखों को कहते हैं। षट्पद और मधुव्रत भौंरे के नाम हैं। ၆၃၆. ६३६. မဓုလီဟော မဓုကရော, မဓုပေါ ဘမရော အလိ; ပါရာဝတော ကပေါတော စ, ကကုဋော စ ပါရေဝတော. मधुलिह, मधुकर, मधुप, भ्रमर और अलि - ये भौंरे के नाम हैं। पारावत, कपोत, ककुट और पारेवत - ये कबूतर के नाम हैं। ၆၃၇. ६३७. ဂိဇ္ဈော ဂဒ္ဓေါထ ကုလလော, သေနော ဗျဂ္ဃီနသော ပျထ; တဗ္ဘေဒါ သကုဏဂ္ဃိ’တ္ထီ, အာဋော ဒဗ္ဗိမုခဒွိဇော. गिज्झ (गिद्ध), गद्ध और कुलल - ये गिद्ध के नाम हैं। सेन (बाज) और व्याघ्रीनास बाज के नाम हैं। उसके भेदों में शकुनग्घी, आट और दर्बीमुख द्विज आते हैं। ၆၃၈. ६३८. ဥဟုင်္ကာရော ဥလူကော စ, ကောသိယော ဝါယသာရိ စ; ကာကော တွ’ရိဋ္ဌော ဓင်္ကော စ, ဗလိပုဋ္ဌော စ ဝါယသော. उहुंकार, उलूक, कौशिक और वायसारि - ये उल्लू के नाम हैं। काक, अरिष्ट, ढंक, बलिपुष्ट और वायस - ये कौए के नाम हैं। ၆၃၉. ६३९. ကာကောလော ဝနကာကော ထ,လာပေါ လဋုကိကာ ပျထ; ဝါရဏော ဟတ္ထိလိင်္ဂေါ စ, ဟတ္ထိသောဏ္ဍဝိဟင်္ဂမော. काकोल वन-कौआ है। लाप और लटुकिका पक्षी विशेष हैं। वारण, हस्तिलिंग और हस्तिशुण्ड-विहंगम विशाल पक्षियों के नाम हैं। ၆၄၀. ६४०. ဥက္ကုသော ကုရရော ကောလ,ဋ္ဌိပက္ခိမှိ စ ကုက္ကုဟော; သုဝေါ တု ကီရော စ သုကော, တမ္ဗစူဠော တု ကုက္ကုဋော. उक्कुस, कुरर, कोलट्ठि-पक्षी और कुक्कुह - ये जल-पक्षियों के नाम हैं। सुव, कीर और शुक - ये तोते के नाम हैं। ताम्रचूड़ और कुक्कुट - ये मुर्गे के नाम हैं। ၆၄၁. ६४१. ဝနကုက္ကုဋော စ နိဇ္ဇိဝှော, အထ ကောဉ္စာ စ ကုန္တနီ; စက္ကဝါကော တု စက္ကဝှော, သာရင်္ဂေါတု စ စာတကော. वन-कुक्कुट और निर्जिव्ह जंगली मुर्गे के नाम हैं। क्रौञ्च और कुन्तनी बगुले के भेद हैं। चक्रवाक और चक्राह्व चकवा के नाम हैं। सारंग और चातक पपीहे के नाम हैं। ၆၄၂. ६४२. တုလိယော ပက္ခိဗိဠာလော,သတပတ္တော တု သာရသော; ဗကော တု သုက္ကကာကောထ,ဗလာကာ ဝိသကဏ္ဌိကာ. तुलिय और पक्षी-बिडाल चमगादड़ के समान पक्षी हैं। शतपत्र और सारस सारस के नाम हैं। बक और शुक्ल-काक बगुले के नाम हैं। बलाका और विसकण्ठिका छोटी बगुली के नाम हैं। ၆၄၃. ६४३. လောဟပိဋ္ဌော တထာ ကင်္ကော, ခဉ္ဇရီဋော တု ခဉ္ဇနော; ကလဝိင်္ကော တု စာဋကော, ဒိန္ဒိဘော တု ကိကီ ဘဝေ. लोहपृष्ठ और कंक - ये कंक पक्षी के नाम हैं। खञ्जरीट और खञ्जन - ये खंजन पक्षी के नाम हैं। कलविंक और चातक गौरैया के नाम हैं। डिण्डिभ और किकी टिटहरी के नाम हैं। ၆၄၄. ६४४. ကာဒမ္ဗော [Pg.54] ကာဠဟံသောထ, သကုန္တော ဘာသပက္ခိနိ; ဓူမျာဋော တု ကလိင်္ဂေါထ,ဒါတျူဟော ကာဠကဏ္ဌကော. कादम्ब और कालहंस काले हंस के नाम हैं। शकुन्त और भास-पक्षी शिकारी पक्षी हैं। धूम्याट और कलिंग - ये भुजंगा पक्षी के नाम हैं। दात्यूह और कालकण्ठक जल-मुर्गी के नाम हैं। ၆၄၅. ६४५. ခုဒ္ဒါဒီ မက္ခိကာဘေဒါ, ဍံသော ပိင်္ဂလမက္ခိကာ; အာသာဋိကာ မက္ခိကာဏ္ဍံ, ပတင်္ဂေါ သလဘော ဘဝေ. खुद्दा आदि मक्खियों के भेद हैं। दंश और पिंगल-मक्षिका डाँस के नाम हैं। आसाटिका मक्खी के अण्डे को कहते हैं। पतंग और शलभ टिड्डे के नाम हैं। ၆၄၆. ६४६. သူစိမုခေါ စ မကသော, စီရီ တု ဈလ္လိကာ ထ စ; ဇတုကာ ဇိနပတ္တာ ထ, ဟံသော သေတစ္ဆဒေါ ဘဝေ. सूचिमुख और मसक मच्छर के नाम हैं। चीरी और झल्लिका झींगुर के नाम हैं। जतुका और जिनपत्ता चमगादड़ के नाम हैं। हंस और श्वेतच्छद हंस के नाम हैं। ၆၄၇. ६४७. တေ ရာဇဟံသာ ရတ္တေဟိ, ပါဒတုဏ္ဍေဟိ ဘာသိတာ; မလ္လိကာ’ချာ ဓတရဋ္ဌာ, မလီနေဟျ’သိတေဟိ စ. लाल पैर और चोंच वाले हंस 'राजहंस' कहलाते हैं। मलीन और काले पैर-चोंच वाले हंस 'मल्लिकाक्ष' और 'धतराष्ट्र' कहलाते हैं। ၆၄၈. တိရစ္ဆော တု တိရစ္ဆာနော, တိရစ္ဆာနဂတော သိယာတိ. ६४८. तिरच्छ, तिरच्छान और तिरच्छानगत - ये तिर्यंच (पशु-पक्षी) के नाम हैं। ဣတိ အရညာဒိဝဂ္ဂေါ. इस प्रकार अरण्यादि-वर्ग समाप्त हुआ। ၇. ပါတာလဝဂ္ဂ ७. पाताल-वर्ग ၆၄၉. ६४९. အဓောဘုဝနံ ပါတာလံ, နာဂလောကော ရသာတလံ; ရန္ဓံ တု ဝိဝရံ ဆိဒ္ဒံ, ကုဟရံ သုသိရံ ဗိလံ. अधोभुवन, पाताल, नागलोक और रसातल - ये पाताल के नाम हैं। रन्ध्र, विवर, छिद्र, कुहर, सुषिर और बिल - ये छेद या बिल के नाम हैं। ၆၅၀. ६५०. သုသိ’တ္ထီ ဆိဂ္ဂလံ သောဗ္ဘံ, သစ္ဆိဒ္ဒေ သုသိရံ တိသု; ထိယံ တု ကာသု အာဝါဋော, သပ္ပရာဇာ တု ဝါသုကီ. सुषि (स्त्री.), छिग्गल और सोब्भ - ये भी बिल के नाम हैं। छिद्रयुक्त वस्तु को 'सुषिर' कहते हैं। कासु (स्त्री.) और आवाट गड्ढे के नाम हैं। सर्पराज वासुकि है। ၆၅၁. ६५१. အနန္တော နာဂရာဇာ ထ, ဝါဟသော’ဇဂရော ဘဝေ; ဂေါနသော တု တိလိစ္ဆော ထ,ဒေဍ္ဍုဘော ရာဇုလော ဘဝေ. अनन्त नागराज का नाम है। वाहस और अजगर - ये अजगर के नाम हैं। गोनस और तिलिच्छ - ये गोनस सर्प के नाम हैं। डेड्डुभ और राजुल - ये दुमुँही साँप के नाम हैं। ၆၅၂. ६५२. ကမ္ဗလော’ဿတရော မေရု, ပါဒေ နာဂါထ ဓမ္မနီ; သိလုတ္တော ဃရသပ္ပော ထ, နီလသပ္ပော သိလာဘု စ. कम्बलाश्वतर, मेरु, पाद, नाग, धमनी, सिलुत्त, घरसर्प, नीलसर्प और शिलाभु। ၆၅၃. ६५३. အာသိဝိသော ဘုဇင်္ဂေါ’ဟိ, ဘုဇဂေါ စ ဘုဇင်္ဂမော; သရီသပေါ ဖဏီ သပ္ပာ, လဂဒ္ဒါ ဘောဂိ ပန္နဂါ. आशीविष, भुजंग, अहि, भुजग, भुजंगम, सरीसृप, फणी, सर्प, लगद्द, भोगी और पन्नग। ၆၅၄. ६५४. ဒွိဇိဝှော ဥရဂေါ ဝါဠော, ဒီဃော စ ဒီဃပိဋ္ဌိကော; ပါဒူဒရော ဝိသဓရော, ဘောဂေါ တု ဖဏိနော တနု. द्विजिव्ह, उरग, व्याल, दीर्घ, दीर्घपृष्ठिक, पादोदर और विषधर। फणी (साँप) के शरीर को 'भोग' कहते हैं। ၆၅၅. ६५५. အာသီ’တ္ထီ [Pg.55] သပ္ပဒါဌာ ထ, နိမ္မောကော ကဉ္စုကော သမာ; ဝိသံ တွ’နိတ္ထီ ဂရဠံ, တဗ္ဘေဒါ ဝါ ဟလာဟလော. साँप की दाढ़ को 'आसी' कहते हैं। केंचुल को 'निर्मोक' और 'कंचुक' कहते हैं। विष और गरल पर्यायवाची हैं, और हलाहल उसका एक भेद है। ၆၅၆. ६५६. ကာဠကူဋာဒယော စာထ, ဝါဠဂ္ဂါတျ’ဟိတုဏ္ဍိကော; कालकूट आदि (विष के भेद हैं) और सँपेरे को 'व्यालग्राही' तथा 'अहितुण्डिक' कहते हैं। ၆၅၇. ६५७. နိရယော ဒုဂ္ဂတိ’တ္ထီ စ, နရကော, သော မဟာ’ဋ္ဌဓာ; သဉ္ဇီဝေါ ကာဠသုတ္တော စ, မဟာရောရုဝ ရောရုဝါ; ပတာပနော အဝီစိ’တ္ထီ, သံဃာတော တာပနော ဣတိ. निरय, दुर्गति और नरक (पर्यायवाची हैं)। वह आठ प्रकार का है: संजीव, कालसूत्र, महारौरव, रौरव, प्रतापन, अवीचि, संघात और तापन। ၆၅၈. ६५८. ထိယံ ဝေတရဏီ လောဟ, ကုမ္ဘီ တတ္ထ ဇလာသယာ; ကာရဏိကော နိရယပေါ,နေရယိကော တု နာရကော. वहाँ (नरक में) वैतरणी और लोहकुम्भी नामक जलाशय हैं। नरक के रखवाले को 'कारणिक' या 'निरयप' कहते हैं और नारकीय जीव को 'नैरयिक' या 'नारक' कहते हैं। ၆၅၉. ६५९. အဏ္ဏဝေါ သာဂရော သိန္ဓု, သမုဒ္ဒေါ ရတနာကရော; ဇလနိဈု’ ဒဓိ, တဿ, ဘေဒါ ခီရဏ္ဏဝါဒယော. अर्णव, सागर, सिन्धु, समुद्र, रत्नाकर, जलनिधि और उदधि (समुद्र के पर्यायवाची हैं)। क्षीर्णव आदि इसके भेद हैं। ၆၆၀. ६६०. ဝေလာ’ဿ ကူလဒေသော ထ,အာဝဋ္ဋော သလိလဗ္ဘမော; ထေဝေါ တု ဗိန္ဒု ဖုသိတံ, ဘမော တု ဇလနိဂ္ဂမော. समुद्र के तट को 'वेला' कहते हैं। पानी के भँवर को 'आवर्त्त' कहते हैं। बूँद को 'थेव', 'बिन्दु' और 'फुसित' कहते हैं। जल के निकास को 'भ्रम' कहते हैं। ၆၆၁. ६६१. အာပေါ ပယော ဇလံ ဝါရိ, ပါနီယံ သလိလံ ဒကံ; အဏ္ဏော နီရံ ဝနံ ဝါလံ, တောယံ အမ္ဗု’ဒကဉ္စ ကံ. आप, पय, जल, वारि, पानीय, सलिल, दक, अर्ण, नीर, वन, वाल, तोय, अम्बु, उदक और क (ये जल के पर्यायवाची हैं)। ၆၆၂. ६६२. တရင်္ဂေါ စ တထာ ဘင်္ဂေါ, ဦမိ ဝီစိ ပုမိတ္ထိယံ; ဥလ္လောလော တု စ ကလ္လောလော, မဟာဝီစီသု ကထျတေ. तरंग, भंग, ऊर्मि और वीचि (लहर के पर्यायवाची हैं)। बड़ी लहरों को 'उल्लोल' और 'कल्लोल' कहा जाता है। ၆၆၃. ६६३. ဇမ္ဗာလော ကလလံ ပင်္ကော, စိက္ခလ္လံ ကဒ္ဒမော ပျထ; ပုလိနံ ဝါလုကာ ဝဏ္ဏု, မရူ’ရု သိကတာ ဘဝေ. जम्बाल, कलल, पंक, चिक्खल्ल और कर्दम (कीचड़ के पर्यायवाची हैं)। पुलिन, वालुका, वण्णु, मरु, उरु और सिकता (रेत के पर्यायवाची हैं)। ၆၆၄. ६६४. အန္တရီပဉ္စ ဒီပေါ ဝါ, ဇလမဇ္ဈဂတံ ထလံ; တီရံ တု ကူလံ ရောဓဉ္စ, ပတီရဉ္စ တဋံ တိသု. जल के मध्य स्थित स्थल को 'अन्तरीप' या 'द्वीप' कहते हैं। तीर, कूल, रोध, पतीर और तट (किनारे के पर्यायवाची हैं)। ၆၆၅. ६६५. ပါရံ ပရမှိ တီရမှိ, ဩရံ တွ’ပါရ မုစ္စတေ; ဥဠုမ္ပော တု ပ္လဝေါ ကုလ္လော, တရော စ ပစ္စရီ’တ္ထိယံ. दूसरे किनारे को 'पार' और इस किनारे को 'ओर' (अपार) कहा जाता है। उळुम्प, प्लव, कुल्ल, तर और पच्चरी (बेड़े या नाव के पर्यायवाची हैं)। ၆၆၆. ६६६. တရဏီ တရိ နာဝါ စ, ကူပကော တု စ ကုမ္ဘကံ; ပစ္ဆာဗန္ဓော ဂေါဋဝိသော, ကဏ္ဏဓာရော တု နာဝိကော. तरणी, तरि और नावा (नाव के पर्यायवाची हैं)। मस्तूल को 'कूपक' और 'कुम्भक' कहते हैं। नाव के पिछले बंधन को 'पश्चाबन्ध' और 'गोटविस' कहते हैं। मल्लाह को 'कर्णधार' और 'नाविक' कहते हैं। ၆၆၇. ६६७. အရိတ္တံ ကေနိပါတော ထ,ပေါတဝါဟော နိယာမကော; သံယတ္တိကာ တု နာဝါယ, ဝါဏိဇ္ဇမာစရန္တိ ယေ. पतवार को 'अरित्त' और 'केनिपात' कहते हैं। जहाज चलाने वाले को 'पोतवाह' और 'नियामक' कहते हैं। जो नाव से व्यापार करते हैं, उन्हें 'सांयात्रिक' कहते हैं। ၆၆၈. ६६८. နာဝါယ’င်္ဂါ’ [Pg.56] လင်္ကာရော စ, ဝဋာကာရော ဖိယာဒယော; ပေါတော ပဝဟနံ ဝုတ္တံ, ဒေါဏိ တွိ’တ္ထီ တထာ’မ္ဗဏံ. वटाकार और फिया आदि नाव के अंग हैं। जहाज को 'पोत' और 'प्रवहण' कहा जाता है। छोटी नाव को 'दोणी' और 'अम्बण' कहते हैं। ၆၆၉. ६६९. ဂဘီရ နိန္န ဂမ္ဘီရာ, ထော တ္တာနံ တဗ္ဗိပက္ခကေ; အဂါဓံ တွ’တလမ္ဖဿံ, အနစ္ဆော ကလုသာ’ဝိလာ. गभीर, निम्न और गम्भीर (गहरे के पर्यायवाची हैं)। इसके विपरीत उथले को 'उत्तान' कहते हैं। अथाह को 'अगाध' और 'अतलस्पर्श' कहते हैं। गंदे पानी को 'अनच्छ', 'कलुष' और 'आविल' कहते हैं। ၆၇၀. ६७०. အစ္ဆော ပသန္နော ဝိမလော, ဂဘီရပ္ပဘုတီ တိသု; ဓီဝရော မစ္ဆိကော မစ္ဆ, ဗန္ဓ ကေဝဋ္ဋ ဇာလိကာ. स्वच्छ को 'अच्छ', 'प्रसन्न' और 'विमल' कहते हैं। मछुआरे को 'धीवर', 'मच्छिक', 'मत्स्यबन्ध', 'केवट' और 'जालिक' कहते हैं। ၆၇၁. ६७१. မစ္ဆော မီနော ဇလစရော, ပုထုလောမော’မ္ဗုဇော ဈသော; ရောဟိတော မဂ္ဂုရော သိင်္ဂီ, ဗလဇော မုဉ္ဇ ပါဝုသာ. मत्स्य, मीन, जलचर, पृथुलोम, अम्बुज और झष (मछली के पर्यायवाची हैं)। रोहित, मग्गुर, सिंगी, बलज, मुंज और पावुस (मछलियों के प्रकार हैं)। ၆၇၂. ६७२. သတ္တဝင်္ကော သဝင်္ကော စ, နဠမီနော စ ဂဏ္ဍကော; သုသုကာ သဖရီ မစ္ဆ, ပ္ပဘေဒါ မကရာဒယော. सप्तवंक, सवंक, नलमीन, गण्डक, सुसुका और शफरी मछलियों के भेद हैं, जैसे मकर आदि। ၆၇၃. ६७३. မဟာမစ္ဆာ တိမိ တိမိ, င်္ဂလော တိမိရပိင်္ဂလော; အာနန္ဒော တိမိနန္ဒော စ, အဇ္ဈာရောဟော မဟာတိမိ. तिमि, तिमिंगल, तिमिरपिंगल, आनन्द, तिमिनन्द, अध्यारोह और महातिमि—ये महामत्स्य हैं। ၆၇၄. ६७४. ပါသာဏမစ္ဆော ပါဌီနော, ဝင်္ကော တု ဗဠိသော ဘဝေ; သုသုမာရော တု ကုမ္ဘီလော,နက္ကော ကုမ္မော တု ကစ္ဆပေါ. पाषाणमत्स्य और पाठीन (मछलियाँ हैं)। मछली पकड़ने के काँटे को 'बलिश' कहते हैं। घड़ियाल को 'सुसुमार', 'कुम्भील' और 'नक्र' कहते हैं। कछुए को 'कुम्म' और 'कच्छप' कहते हैं। ၆၇၅. ६७५. ကက္ကဋကော ကုဠီရော စ, ဇလူကာ တု စ ရတ္တပါ; မဏ္ဍူကော ဒဒ္ဒုရော ဘေကော; ဂဏ္ဍုပ္ပာဒေါ မဟီလတာ. केकड़े को 'कर्कटक' और 'कुलीर' कहते हैं। जोंक को 'जलुका' और 'रक्तपा' कहते हैं। मेंढक को 'मण्डूक', 'दद्दुर' और 'भेक' कहते हैं। केंचुए को 'गण्डुप्पाद' और 'महीलता' कहते हैं। ၆၇၆. ६७६. အထ သိပ္ပီ စ သုတ္တိ’တ္ထီ, သင်္ခေ တု ကမ္ဗု’နိတ္ထိယံ; ခုဒ္ဒသင်္ချေ သင်္ခနခေါ, ဇလသုတ္တိ စ သမ္ဗုကော. सीपी को 'सिप्पी' और 'सुत्ति' कहते हैं। शंख को 'शंख' और 'कम्बु' कहते हैं। छोटे शंख को 'शंखनख' कहते हैं। जल-शुक्ति और शम्बूक (घोंघे के प्रकार) हैं। ၆၇၇. ६७७. ဇလာသယော ဇလာဓာရော, ဂမ္ဘီရော ရဟဒေါ ထ စ; ဥဒပါနော ပါနကူပေါ, ခါတံ ပေါက္ခရဏီ’တ္ထိယံ. जलाशय और जलाधार (पानी के स्थान हैं)। गहरे कुण्ड को 'रहद' कहते हैं। कुएँ को 'उदपान' और 'पानकूप' कहते हैं। खुदे हुए तालाब को 'खात' और 'पोक्खरणी' कहते हैं। ၆၇၈. ६७८. တဠာကော စ သရော’နိတ္ထီ, ဝါပီ စ သရသီ’တ္ထိယံ; ဒဟော’မ္ဗုဇာကရော စာထ, ပလ္လလံ ခုဒ္ဒကော သရော. तड़ाग, सर, वापी और सरसी (तालाब के पर्यायवाची हैं)। दह और अम्बुजाकर भी इसके नाम हैं। छोटे तालाब को 'पल्वल' कहते हैं। ၆၇၉. ६७९. အနောတတ္တော တထာ ကဏ္ဏ, မုဏ္ဍော စ ရထကာရကော; ဆဒ္ဒန္တော စ ကုဏာလော စ, ဝုတ္တာ မန္ဒာကိနီ’တ္ထိယံ. अनवतप्त, कण्णमुण्ड, रथकारक, छद्दन्त, कुणाल और मन्दाकिनी। ၆၈၀. ६८०. တထာ သီဟပ္ပပါတောတိ, ဧတေ သတ္တ မဟာသရာ; အာဟာဝေါ တု နိပါနဉ္စာ, ခါတံ တု ဒေဝခါတကံ. तथा सिंहप्रपात—ये सात महासरोवर कहे गए हैं। पशुओं के पानी पीने के स्थान को 'आहाव' और 'निपान' कहते हैं। प्राकृतिक रूप से बने गड्ढे को 'देवखातक' कहते हैं। ၆၈၁. ६८१. သဝန္တီ [Pg.57] နိန္နဂါ သိန္ဓု, သရိတာ အာပဂါ နဒီ; ဘာဂီရထီ တု ဂင်္ဂါ ထ, သမ္ဘေဒေါ သိန္ဓုသင်္ဂမော. सवन्ती, निम्नगा, सिन्धु, सरिता, आपगा और नदी (नदी के पर्यायवाची हैं)। गंगा को 'भागीरथी' कहते हैं। नदियों के संगम को 'संभेद' और 'सिन्धुसंगम' कहते हैं। ၆၈၂. ६८२. ဂင်္ဂါ’စိရဝတီ စေဝ, ယမုနာ သရဘူ (သရဗူ ) မဟီ; ဣမာ မဟာနဒီ ပဉ္စ, စန္ဒဘာဂါ သရဿတီ. गंगा, अचिरवती, यमुना, सरभू और मही; ये पाँच महानदियाँ हैं, (तथा) चन्द्रभागा और सरस्वती। ၆၈၃. ६८३. နေရဉ္ဇရာ စ ကာဝေရီ, နမ္မဒါဒီ စ နိန္နဂါ; ဝါရိမဂ္ဂေါ ပဏာလီ’တ္ထီ, ပုမေ စန္ဒနိကာ တု စ. निरंजरा, कावेरी और नर्मदा आदि नदियाँ हैं; जलमार्ग को 'प्रणाली' (स्त्रीलिंग) और 'चन्दनिका' (पुल्लिंग) कहते हैं। ၆၈၄. ६८४. ဇမ္ဗာလီ ဩလိဂလ္လော စ, ဂါမဒွါရမှိ ကာသုယံ; သရောရုဟံ သတပတ္တံ, အရဝိန္ဒဉ္စ ဝါရိဇံ. कीचड़ को 'जम्बाली' और 'ओलिगल्ल' कहते हैं, गाँव के द्वार पर गड्ढे को 'कासु' कहते हैं; 'सरोरुह', 'शतपत्र', 'अरविन्द' और 'वारिज' (कमल के नाम हैं)। ၆၈၅. ६८५. အနိတ္ထီ ပဒုမံ ပင်္ကေ, ရုဟံ နလိန ပေါက္ခရံ; မုဠာလပုပ္ဖံ ကမလံ, ဘိသပုပ္ဖံ ကုသေသယံ. 'पदुम' (नपुंसक लिंग), 'पङ्केरुह', 'नलिन', 'पोक्खर', 'मृणालपुष्प', 'कमल', 'बिसपुष्प' और 'कुशेशय' (कमल के पर्यायवाची हैं)। ၆၈၆. ६८६. ပုဏ္ဍရီကံ သိတံ, ရတ္တံ, ကောကနဒံ ကောကာသကော; ကိဉ္ဇက္ခော ကေသရော နိတ္ထီ, ဒဏ္ဍော တု နာလ မုစ္စတေ. सफेद कमल को 'पुण्डरीक' और लाल कमल को 'कोकनद' या 'कोकासक' कहते हैं; 'किञ्जल्क' और 'केसर' (नपुंसक लिंग) पराग हैं, और डंठल को 'नाल' कहा जाता है। ၆၈၇. ६८७. ဘိသံ မုဠာလော နိတ္ထီ စ, ဗီဇကောသော တု ကဏ္ဏိကာ; ပဒုမာဒိသမူဟေ တု, ဘဝေ သဏ္ဍမနိတ္ထိယံ. 'बिस' और 'मृणाल' (नपुंसक लिंग) कमल की जड़/डंठल हैं, बीजकोष को 'कर्णिका' कहते हैं; कमलों के समूह को 'षण्ड' (नपुंसक लिंग) कहते हैं। ၆၈၈. ६८८. ဥပ္ပလံ ကုဝလယဉ္စ, နီလံ တွိ’န္ဒီဝရံ သိယာ; သေတေတု ကုမုဒဉ္စဿ, ကန္ဒော သာလူက မုစ္စတေ. 'उत्पल' और 'कुवलय' (कमल हैं), नीला कमल 'इन्दीवर' होता है; सफेद कुमुद है और इसके कंद को 'शालूक' कहा जाता है। ၆၈၉. ६८९. သောဂန္ဓိကံ ကလ္လဟာရံ, ဒကသီတလိကံ ပျထ; သေဝါလော နီလိကာ စာထ, ဘိသိနျ’မ္ဗုဇိနီ ဘဝေ. 'सौगन्धिक', 'कल्हार' और 'दकशीतलिक' (कमल के भेद हैं); 'शैवाल' और 'नीलिका' (काई हैं), और कमलिनी को 'बिसिनी' या 'अम्बुजिनी' कहते हैं। ၆၉၀. သေဝါလာ တိလဗီဇဉ္စ, သင်္ခေ စ ပဏကာဒယောတိ. ६९०. शैवाल, तिलबीज और शंख आदि 'पणक' (काई) कहलाते हैं। ဣတိ ပါတာလဝဂ္ဂေါ. इति पातालवर्ग। ဘူကဏ္ဍော ဒုတိယော. द्वितीय भू-काण्ड। ၃. သာမညကဏ္ဍ ३. सामान्य काण्ड। ၁. ဝိသေသျာဓီနဝဂ္ဂ १. विशेष्याधीन वर्ग। ၆၉၁. ६९१. ဝိသေသျာဓီန သံကိဏ္ဏာ, နေကတ္ထေဟျ’ဗျယေဟိ စ; သာ’င်္ဂေါ’ပါင်္ဂေဟိ ကထျန္တေ, ကဏ္ဍေ ဝဂ္ဂါ ဣဟ က္ကမာ. इस काण्ड में विशेष्याधीन, संकीर्ण, अनेकार्थक और अव्यय वर्ग, अंगों और उपांगों के साथ क्रम से कहे जाते हैं। ၆၉၂. ६९२. ဂုဏဒဗ္ဗကြိယာသဒ္ဒါ, [Pg.58] သိယုံ သဗ္ဗေ ဝိသေသနာ; ဝိသေသျာဓီနဘာဝေန, ဝိသေသျသမလိင်္ဂိနော. गुण, द्रव्य और क्रिया के शब्द सभी विशेषण होते हैं; वे विशेष्य के अधीन होने के कारण विशेष्य के समान लिंग वाले होते हैं। ၆၉၃. ६९३. သောဘနံ ရုစိရံ သာဓု, မနုညံ စာရု သုန္ဒရံ; ဝဂ္ဂု မနောရမံ ကန္တံ, ဟာရီ မဉ္ဇု စ ပေသလံ. शोभन, रुचिर, साधु, मनोज्ञ, चारु, सुन्दर, वग्गु, मनोरम, कान्त, हारी, मञ्जु और पेशल। ၆၉၄. ६९४. ဘဒ္ဒံ ဝါမဉ္စ ကလျာဏံ, မနာပံ လဒ္ဓကံ သုဘံ; ဥတ္တမော ပဝရော ဇေဋ္ဌော, ပမုခါ’နုတ္တရော ဝရော. भद्र, वाम, कल्याण, मनाप, लद्धक, शुभ; उत्तम, प्रवर, ज्येष्ठ, प्रमुख, अनुत्तर और वर। ၆၉၅. ६९५. မုချော ပဓာနံ ပါမောက္ခော, ပရ မဂ္ဂည မုတ္တရံ; ပဏီတံ ပရမံ သေယျော, ဂါမဏီ သေဋ္ဌ သတ္တမာ. मुख्य, प्रधान, पामोक्ख, पर, अग्रण्य, उत्तर, प्रणीत, परम, श्रेय, ग्रामणी, श्रेष्ठ और सत्तम। ၆၉၆. ६९६. ဝိသိဋ္ဌာ’ရိယ နာဂေ’ကော, သဘဂ္ဂါ မောက္ခ ပုင်္ဂဝါ; သီဟ ကုဉ္ဇရ သဒ္ဒူလာ, ဒီ တု သမာသဂါ ပုမေ. विशिष्ट, आर्य, नाग, एक, सभाग्ग, मोक्ख, पुङ्गव; सिंह, कुञ्जर और शार्दूल आदि शब्द समास में पुल्लिंग में प्रयुक्त होते हैं। ၆၉၇. ६९७. စိတ္တ’က္ခိ ပီတိဇနန, မဗျာသေက မသေစနံ; ဣဋ္ဌံ တု သုဘဂံ ဟဇ္ဇံ, ဒယိတံ ဝလ္လဘံ ပိယံ. चित्त और आँखों को प्रसन्न करने वाला 'अव्यासेक' या 'असेचन' है; इष्ट, सुभग, हज्ज, दयित, वल्लभ और प्रिय। ၆၉၈. ६९८. တုစ္ဆဉ္စ ရိတ္တကံ သုညံ, အထာ’သာရဉ္စ ဖေဂ္ဂု စ; မေဇ္ဈံ ပူတံ ပဝိတ္တော ထ, အဝိရဒ္ဓေါ အပဏ္ဏကော. तुच्छ, रिक्तक, शून्य, असार और फेग्गु; मेज्झ, पूत, पवित्र; अविरुद्ध और अपण्णक। ၆၉၉. ६९९. ဥက္ကဋ္ဌော စ ပကဋ္ဌော ထ, နိဟီနော ဟီန လာမကာ; ပတိကိဋ္ဌံ နိကိဋ္ဌဉ္စ, ဣတ္တရာ’ဝဇ္ဇ ကုစ္ဆိတာ. उत्कट और प्रकृष्ट; विहीन, हीन, लामक, प्रतिकृष्ट, निकृष्ट, इतर, अवद्य और कुत्सित। ၇၀၀. ७००. အဓမော’မက ဂါရယှာ,မလီနော တု မလီမသော; ဗြဟာ မဟန္တံ ဝိပုလံ, ဝိသာလံ ပုထုလံ ပုထု. अधम, ओमक, गार्ह्य; मलीन और मलीमस; बृहत्, महान्, विपुल, विशाल, पृथुल और पृथु। ၇၀၁. ७०१. ဂရု’ရု ဝိတ္ထိဏ္ဏ မထော, ပီနံ ထူလဉ္စ ပီဝရံ; ထုလ္လဉ္စ ဝဌရဉ္စာ ထ, အာစိတံ နိစိတံ ဘဝေ. गुरु, उरु, विस्तीर्ण; पीन, स्थूल, पीवर, थुल्ल और वठर; आचित और निचित। ၇၀၂. ७०२. သဗ္ဗံ သမတ္တ မခိလံ, နိခိလံ သကလံ တထာ; နိဿေသံ ကသိဏာ’သေသံ, သမဂ္ဂဉ္စ အနူနကံ, सब, समस्त, अखिल, निखिल, सकल, निःशेष, कृत्स्न, अशेष, समग्र और अनूनक। ၇၀၃. ७०३. ဘူရိ ပဟုတံ ပစုရံ, ဘိယျော သမ္ဗဟုလံ ဗဟု; ယေဘုယျံ ဗဟုလံ စာထ, ဗာဟိရံ ပရိဗာဟိရံ. भूरि, प्रभूत, प्रचुर, भूयः, सम्बहुल, बहु, येभुय्य, बहुल; बाह्य और परिबाह्य। ၇၀၄. ७०४. ပရောသတာဒီ တေ, ယေသံ, ပရံ မတ္တံ သတာဒိတော; ပရိတ္တံ သုခုမံ ခုဒ္ဒံ, ထောက မပ္ပံ ကိသံ တနု. परोशतादि वे हैं जिनकी संख्या सौ आदि से अधिक हो; परीत्त, सूक्ष्म, क्षुद्र, थोक, अल्प, कृश और तनु। ၇၀၅. ७०५. စုလ္လံ မတ္တေ’တ္ထိယံ လေသ,လဝါ’ဏုဟိ ကဏော ပုမေ; သမီပံ နိကဋာ’သန္နော, ပကဋ္ဌာ’ဘျာသ သန္တိကံ. चुल्ल (छोटा), 'मात्रा' (स्त्रीलिंग), 'लेश', 'लव', 'अणु' और 'कण' (पुल्लिंग); समीप, निकट, आसन्न, प्रकृष्ट, अभ्यास और सन्तिक। ၇၀၆. ७०६. အဝိဒူရဉ္စ [Pg.59] သာမန္တံ, သန္နိကဋ္ဌ မုပန္တိကံ; သကာသံ အန္တိကံ ဉတ္တံ, ဒူရံ တု ဝိပ္ပကဋ္ဌကံ. अविदूर, सामन्त, सन्निकृष्ट, उपन्तिक, सकाश और अन्तिक; दूर और विप्रकृष्ट। ၇၀၇. ७०७. နိရန္တရံ ဃနံ သန္ဒံ, ဝိရဠံ ပေလဝံ တနု; အထာ ယတံ ဒီဃ မထော, နိတ္တလံ ဝဋ္ဋ ဝဋ္ဋုလံ. निरन्तर, घन, सान्द्र; विरल, पेलव, तनु; आयत, दीर्घ; निस्तल, वृत्त और वर्तुल। ၇၀၈. ७०८. ဥစ္စော တု ဥန္နတော တုင်္ဂေါ, ဥဒဂ္ဂေါ စေဝ ဥစ္ဆိတော; နီစော ရဿော ဝါမနော ထ, အဇိမှော ပဂုဏော ဥဇု. उच्च, उन्नत, तुंग, उदाग्र और उच्छ्रित (ये ऊँचे के पर्यायवाची हैं); नीच, ह्रस्व और वामन (ये छोटे के पर्यायवाची हैं); अजिम्ह, प्रगुण और ऋजु (ये सीधे के पर्यायवाची हैं)। ၇၀၉. ७०९. အဠာရံ ဝေလ္လိတံ ဝင်္ကံ, ကုဋိလံ ဇိမှ ကုဉ္စိတံ; ဓုဝေါ စ သဿတော နိစ္စော, သဒါတန သနန္တနာ. अळार, वेल्लित, वक्र, कुटिल, जिम्ह और कुंचित (ये टेढ़े के पर्यायवाची हैं); ध्रुव, शाश्वत, नित्य, सदातन और सनातन (ये नित्य/स्थायी के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၀. ७१०. ကူဋဋ္ဌော တွေ’ကရူပေန, ကာလဗျာပီ ပကာသိတော; လဟု သလ္လဟုကံ စာထ, သင်္ချာတံ ဂဏိတံ မိတံ. कूटस्थ (एक ही रूप में रहने वाला) और कालव्यापी (ये नित्य के अर्थ में हैं); लघु और सल्लहुक (ये हल्के के पर्यायवाची हैं); संख्यात, गणित और मित (ये गिने हुए या सीमित के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၁. ७११. တိဏှံ တု တိခိဏံ တိဗ္ဗံ, စဏ္ဍံ ဥဂ္ဂံ ခရံ ဘဝေ; ဇင်္ဂမဉ္စ စရဉ္စေဝ, တသံ ဉေယျံ စရာစရံ. तिण्ह, तीक्ष्ण, तीव्र, चण्ड, उग्र और खर (ये तीखे या उग्र के पर्यायवाची हैं); जंगम, चर, त्रस और चराचर (ये गतिशील या प्राणियों के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၂. ७१२. ကမ္ပနံ စလနံ စာထ, အတိရိတ္တော တထာ’ဓိကော; ထာဝရော ဇင်္ဂမာ အညော, လောလံ တု စဉ္စလံ စလံ. कंपन और चलन (ये कांपने/हिलने के पर्यायवाची हैं); अतिरिक्त और अधिक (ये ज्यादा के पर्यायवाची हैं); स्थावर (जंगम से भिन्न/स्थिर); लोल, चंचल और चल (ये चंचल के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၃. ७१३. တရလဉ္စ ပုရာဏော တု, ပုရာတန သနန္တနာ; စိရန္တနော ထ ပစ္စဂ္ဃော, နူတနော’ဘိနဝေါ နဝေါ. तरल (चंचल); पुराण, पुरातन, सनातन और चिरंतन (ये पुराने के पर्यायवाची हैं); प्रत्यग्र, नूतन, अभिनव और नव (ये नये के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၄. ७१४. ကုရူရံ ကဌိနံ ဒဠှံ, နိဋ္ဌုရံ ကက္ခဠံ ဘဝေ; အနိတ္ထျ’န္တော ပရိယန္တော, ပန္တော စ ပစ္ဆိမ’န္တိမာ. क्रूर, कठिन, दृढ़, निष्ठुर और कर्कश (ये कठोर के पर्यायवाची हैं); अंत, पर्यन्त, प्रान्त, पश्चिम और अन्तिम (ये अंत या आखिरी के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၅. ७१५. ဇိဃညံ စရိမံ ပုဗ္ဗံ, တွ’ဂ္ဂံ ပဌမ မာဒိ သော; ပတိရူပေါ နုစ္ဆဝိကံ, အထ မောဃံ နိရတ္ထကံ. जघन्य और चरम (ये अंतिम के पर्यायवाची हैं); पूर्व, अग्र, प्रथम और आदि (ये पहले के पर्यायवाची हैं); प्रतिरूप और अनुच्छविक (ये योग्य/अनुरूप के पर्यायवाची हैं); मोघ और निरर्थक (ये व्यर्थ के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၆. ७१६. ဗျတ္တံ ပုဋ ဉ္စ မုဒု တု, သုကုမာရဉ္စ ကောမလံ; ပစ္စက္ခံ ဣန္ဒြိယဂ္ဂယှံ, အပစ္စက္ခံ အတိန္ဒြိယံ. व्यक्त और स्फुट (ये प्रकट के पर्यायवाची हैं); मृदु, सुकुमार और कोमल (ये कोमल के पर्यायवाची हैं); प्रत्यक्ष और इन्द्रियग्राह्य (ये इन्द्रियों से जानने योग्य के पर्यायवाची हैं); अप्रत्यक्ष और अतीन्द्रिय (ये इन्द्रियों से परे के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၇. ७१७. ဣတရာ’ညတရော ဧကော, အညော ဗဟုဝိဓော တု စ; နာနာရူပေါ စ ဝိဝိဓော, အဗာဓံ တု နိရဂ္ဂလံ. इतर, अन्यतर, एक और अन्य (ये दूसरे या किसी एक के पर्यायवाची हैं); बहुविध, नानारूप और विविध (ये अनेक प्रकार के पर्यायवाची हैं); अबाध और निरर्गल (ये बिना बाधा के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၈. ७१८. အထေ’ကာကီ စ ဧကစ္စော, ဧကော စ ဧကကော သမာ; သာဓာရဏဉ္စ သာမညံ, သမ္ဗာဓော တု စ သံကဋံ. एकाकी, एकच्च, एक और एकक (ये अकेले के पर्यायवाची हैं); साधारण और सामान्य (ये सार्वजनिक के पर्यायवाची हैं); संबाध और संकट (ये संकीर्ण या भीड़भाड़ वाले स्थान के पर्यायवाची हैं)। ၇၁၉. ७१९. ဝါမံ ကဠေဝရံ သဗျံ; အပသဗျံ တု ဒက္ခိဏံ; ပဋိကူလံ တွ’ပသဗျံ, ဂဟနံ ကလိလံ သမာ. वाम और सव्य (ये बाएँ के पर्यायवाची हैं); अपसव्य और दक्षिण (ये दाएँ के पर्यायवाची हैं); प्रतिकूल और अपसव्य (विपरीत); गहन और कलिल (ये घने या दुर्गम के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၀. ७२०. ဥစ္စာဝစံ [Pg.60] ဗဟုဘေဒံ, သံကိဏ္ဏာ’ ကိဏ္ဏ သံကုလာ; ကတဟတ္ထော စ ကုသလော, ပဝီဏာ’ဘိည သိက္ခိတာ. उच्चावच और बहुभेद (ये अनेक प्रकार के पर्यायवाची हैं); संकीर्ण, आकीर्ण और संकुल (ये व्याप्त या मिश्रित के पर्यायवाची हैं); कृतहस्त, कुशल, प्रवीण, अभिज्ञ और शिक्षित (ये निपुण के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၁. ७२१. နိပုဏော စ ပဋု ဆေကော, စာတုရော ဒက္ခ ပေသလာ; ဗာလော ဒတ္တု ဇလော မူဠှော, မန္ဒော ဝိညူ စ ဗာလိသော. निपुण, पटु, छेक, चतुर, दक्ष और पेशल (ये चतुर के पर्यायवाची हैं); बाल, दत्तु, जड, मूढ़, मन्द और बालिश (ये मूर्ख के पर्यायवाची हैं); विञ्ञू (विद्वान)। ၇၂၂. ७२२. ပုညဝါ သုကတီ ဓညော, မဟုဿာဟော မဟာဓိတိ; မဟာတဏှော မဟိစ္ဆော ထ, ဟဒယီ ဟဒယာလု စ. पुण्यवान, सुकृती और धन्य (ये भाग्यशाली/पुण्यशाली के पर्यायवाची हैं); महोत्साही और महाधृति (ये बड़े उत्साह और धैर्य वाले के पर्यायवाची हैं); महातृष्ण और महैच्छ (ये बड़ी इच्छा वाले के पर्यायवाची हैं); हृदयी और दयालु (ये सहृदय के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၃. ७२३. သုမနော ဟဋ္ဌစိတ္တော ထ, ဒုမ္မနော ဝိမနော ပျထ; ဝဒါနိယော ဝဒညူ စ, ဒါနသောဏ္ဍော ဗဟုပ္ပဒေါ. सुमन और हृष्टचित्त (ये प्रसन्न मन वाले के पर्यायवाची हैं); दुर्मन और विमन (ये उदास मन वाले के पर्यायवाची हैं); वदान्य और वदन्य (ये उदार के पर्यायवाची हैं); दानशौण्ड और बहुप्रद (ये बहुत दान देने वाले के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၄. ७२४. ချာတော ပတီတော ပညာတော,ဘိညာတော ပထိတော သုတော,ဝိဿုတော ဝိဒိတော စေဝ, ပသိဒ္ဓေါ ပါကဋော ဘဝေ. ख्यात, प्रतीत, प्रज्ञात, अभिज्ञात, प्रथित, श्रुत, विश्रुत, विदित, प्रसिद्ध और प्रकट (ये प्रसिद्ध या विख्यात के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၅. ७२५. ဣဿရော နာယကော သာမီ, ပတီ’သာ’ဓိပတီ ပဘူ; အယျာ’ဓိပါ’ဓိဘူ နေတာ,ဣဗ္ဘော တွ’ဍ္ဎော တထာ ဓနီ. ईश्वर, नायक, स्वामी, पति, ईश, अधिपति, प्रभु, आर्य, अधिप, अधिभू और नेता (ये स्वामी या शासक के पर्यायवाची हैं); इभ्य, आढ्य और धनी (ये धनवान के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၆. ७२६. ဒါနာရဟော ဒက္ခိဏေယျော, သိနိဒ္ဓေါ တု စ ဝစ္ဆလော; ပရိက္ခကော ကာရဏိကော,အာသတ္တော တု စ တပ္ပရော. दानार्ह और दक्षिणीय (ये दान के योग्य के पर्यायवाची हैं); स्निग्ध और वत्सल (ये स्नेही के पर्यायवाची हैं); परीक्षक और कारणिक (ये जाँच करने वाले के पर्यायवाची हैं); आसक्त और तत्पर (ये लीन रहने वाले के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၇. ७२७. ကာရုဏိကော ဒယာလုပိ, သူရတော ဥဿုကော တု စ; ဣဋ္ဌတ္ထေ ဥယျုတော စာထ, ဒီဃသုတ္တော စိရကြိယော. कारुणिक और दयालु (ये दयावान के पर्यायवाची हैं); सूरत (सुशील) और उत्सुक (ये उत्साही के पर्यायवाची हैं); इष्ट अर्थ में उद्यत; दीर्घसूत्र और चिरक्रिय (ये काम में देरी करने वाले के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၈. ७२८. ပရာဓီနော ပရာယတ္တော, အာယတ္တော တု စ သန္တကော; ပရိဂ္ဂဟော အဓီနော စ, သစ္ဆန္ဒော တု စ သေရိနိ. पराधीन, परायत्त, आयत्त, परिग्रह और अधीन (ये दूसरे के वश में रहने वाले के पर्यायवाची हैं); सन्तका (अपना); स्वच्छन्द और स्वैरिणी (ये अपनी इच्छा से चलने वाले के पर्यायवाची हैं)। ၇၂၉. ७२९. အနိသမ္မကာရီ ဇမ္မော, အတိတဏှော တု လောလုပေါ; ဂိဒ္ဓေါ တု လုဒ္ဓေါ လောလော ထ,ကုဏ္ဌော မန္ဒော ကြိယာသု ဟိ. अविमृश्यकारी (बिना सोचे समझे काम करने वाला) और नीच; अतितृष्ण और लोलुप (ये बहुत लालची के पर्यायवाची हैं); गृद्ध, लुब्ध और लोल (ये लोभी के पर्यायवाची हैं); कुण्ठ और मन्द (ये कार्यों में सुस्त के पर्यायवाची हैं)। ၇၃၀. ७३०. ကာမယိတာ တု ကမိတာ, ကာမနော ကာမိ ကာမုကော; သောဏ္ဍော မတ္တော ဝိဓေယျော တု,အဿဝေါ သုဗ္ဗစော သမာ. कामयिता, कमिता, कामन, कामी और कामुक (ये कामुक व्यक्ति के पर्यायवाची हैं); शौण्ड और मत्त (ये आसक्त या मतवाले के पर्यायवाची हैं); विधेय, आश्रव और सुवच (ये आज्ञाकारी के पर्यायवाची हैं)। ၇၃၁. ७३१. ပဂဗ္ဘော [Pg.61] ပဋိဘာယုတ္တော, ဘီသီလော ဘီရု ဘီရုကော; အဓီရော ကာတရော စာထ,ဟိံသာသီလော စ ဃာတုကော. प्रगल्भ (ढीठ) और प्रतिभायुक्त; भीशील, भीरु और भीरुक (ये डरपोक के पर्यायवाची हैं); अधीर और कातर (ये व्याकुल के पर्यायवाची हैं); हिंसाशील और घातक (ये हिंसक के पर्यायवाची हैं)। ၇၃၂. ७३२. ကောဓနော ရောသနော ကောပီ,စဏ္ဍော တွစ္စန္တကောဓနော; သဟနော ခမနော ခန္တာ, တိတိက္ခဝါ စ ခန္တိမာ. क्रोधन, रोषण और कोपी (ये क्रोधी के पर्यायवाची हैं); चण्ड और अत्यन्तक्रोधन (ये बहुत अधिक क्रोधी के पर्यायवाची हैं); सहन, क्षमण, क्षन्ता, तितिक्षावान और क्षान्तिमान (ये क्षमाशील के पर्यायवाची हैं)। ၇၃၃. ७३३. သဒ္ဓါယုတ္တော တု သဒ္ဓါလု, ဓဇဝါ တု ဓဇာလု စ ; နိဒ္ဒါလု နိဒ္ဒါသီလော ထ, ဘဿရော ဘာသုရော ဘဝေ. श्रद्धायुक्त और श्रद्धालु (ये श्रद्धावान के पर्यायवाची हैं); ध्वजवान और ध्वजालु (ये अभिमानी के पर्यायवाची हैं); निद्रालु और निद्राशील (ये बहुत सोने वाले के पर्यायवाची हैं); भास्वर और भासुर (ये चमकने वाले के पर्यायवाची हैं)। ၇၃၄. ७३४. နဂ္ဂေါ ဒိဂမ္ဗရော’ဝတ္ထော, ဃသ္မရော တု စ ဘက္ခကော; ဧဠမူဂေါ တု ဝတ္တုဉ္စ, သောတုံ စာ’ကုသလော ဘဝေ. नग्न, दिगम्बर और अवस्त्र (ये नंगे के पर्यायवाची हैं); घस्मर और भक्षक (ये बहुत खाने वाले के पर्यायवाची हैं); एडमूक (जो बोलने और सुनने में अक्षम हो)। ၇၃၅. ७३५. မုခရော ဒုမ္မုခါ’ဗဒ္ဓ, မုခါ စာပ္ပိယဝါဒိနိ; ဝါစာလော ဗဟုဂါရယှ, ဝစေ ဝတ္တာ တု သော ဝဒေါ. मुखर, दुर्मुख और अबद्धमुख (ये बहुत बोलने वाले या अपशब्द बोलने वाले के पर्यायवाची हैं); अप्रियवादिनी (कड़वा बोलने वाली); वाचाल (बहुत बोलने वाला); बहुत निन्दनीय वचन बोलने वाला; वक्ता और वद (ये बोलने वाले के पर्यायवाची हैं)। ၇၃၆. ७३६. နိဇော သကော အတ္တနိယော,ဝိမှယော’စ္ဆရိယ’ဗ္ဘုတော; ဝိဟတ္ထော ဗျာကုလော စာထ,အာတတာယီ ဝဓုဒျတော. निज, स्वकीय और आत्मीय (ये अपने के पर्यायवाची हैं); विस्मय, आश्चर्य और अद्भुत (ये आश्चर्य के पर्यायवाची हैं); विहस्त और व्याकुल (ये घबराए हुए के पर्यायवाची हैं); आततायी और वधोद्यत (ये मारने के लिए तैयार व्यक्ति के पर्यायवाची हैं)। ၇၃၇. ७३७. သီသစ္ဆေဇ္ဇမှိ ဝဇ္ဈော ထ, နိကတော စ သဌော’နုဇု; သူစကော ပိသုဏော ကဏ္ဏေ,ဇပေါ ဓုတ္တော တု ဝဉ္စကော. शिरच्छेद के योग्य और वध्य (ये मृत्युदण्ड के योग्य के पर्यायवाची हैं); निकृति (धूर्त), शठ और अनृजु (ये कपटी के पर्यायवाची हैं); सूचक, पिशुन और कर्णजप (ये चुगलखोर के पर्यायवाची हैं); धूर्त और वंचक (ये ठग के पर्यायवाची हैं)। ၇၃၈. ७३८. အနိသမ္မ ဟိ ယော ကိစ္စံ, ပုရိသော ဝဓဗန္ဓနာဒိ မာစရတိ; အဝိနိစ္ဆိတကာရိတ္တာ, သောခလု စပလောတိ ဝိညေယျော. जो मनुष्य बिना विचार किए वध-बन्धन आदि कार्य करता है; बिना निश्चय किए कार्य करने के कारण, उसे 'चपल' (अधैर्यवान) समझना चाहिए। ၇၃၉. ७३९. ခုဒ္ဒေါ ကဒရိယော ထဒ္ဓ, မစ္ဆရီ ကပဏော ပျထ; အကိဉ္စနော ဒလိဒ္ဒေါ စ, ဒီနော နိဒ္ဓန ဒုဂ္ဂတာ. क्षुद्र, कदर्य (कंजूस), स्तब्ध, मत्सरी, कृपण; अकिंचन, दरिद्र, दीन, निर्धन और दुर्गत। ၇၄၀. ७४०. အသမ္ဘာဝိတသမ္ပတ္တံ, ကာကတာလိယ မုစ္စတေ; အထ ယာစနကော အတ္ထီ, ယာစကော စ ဝနိဗ္ဗကော. अप्रत्याशित रूप से प्राप्त होने वाले को 'काकतालीय' कहा जाता है; तथा याचनक, अर्थी, याचक और वनिब्बक (भिक्षुक के पर्यायवाची हैं)। ၇၄၁. ७४१. အဏ္ဍဇာ ပက္ခိသပ္ပာဒီ, နရာဒီ တု ဇလာဗုဇာ; သေဒဇာ ကိမိဍံသာဒီ, ဒေဝါဒီ တွော’ ပပါတိကာ. पक्षी, सर्प आदि अण्डज हैं; मनुष्य आदि जरायुज हैं; कृमि, दंश आदि स्वेदज हैं; और देव आदि औपपातिक हैं। ၇၄၂. ७४२. ဇဏ္ဏုတဂ္ဃော [Pg.62] ဇဏ္ဏုမတ္တော, ကပ္ပော တု ကိဉ္စိဒူနကေ; အန္တဂ္ဂတံ ဘု ပရိယာ, ပန္န မန္တောဂဓော’ဂဓာ. 'जण्णुतग्घ' और 'जण्णुमत्त' (घुटने तक); 'कप्प' का अर्थ है कुछ कम; 'अन्तग्गत', 'परियापन्न', 'अन्तोगध' और 'ओगध' का अर्थ है अन्तर्गत (शामिल)। ၇၄၃. ७४३. ရာဓိတော သာဓိတော စာထ, နိပ္ပက္ကံ ကုထိတံ ဘဝေ; အာပန္နော တွာ’ပဒပ္ပတ္တော, ဝိဝသော တွဝသော ဘဝေ. राधित और साधित; निष्पक्व और कुथित (सड़ा हुआ); आपन्न और आपदप्राप्त; विवश और अवश। ၇၄၄. ७४४. နုဏ္ဏော နုတ္တာ’တ္တ, ခိတ္တာ စေ’, ရိတာ ဝိဒ္ဓါ ထ ကမ္ပိတော; ဓူတော အာဓူတ စလိတာ, နိသိတံ တု စ တေဇိတံ. नुण्ण, नुत्त, खित्त, ईरित (प्रेरित/फेंका हुआ); विद्ध (बिंधा हुआ) और कम्पित; धूत, आधूत, चलित; निसित और तेजित (तेज किया हुआ)। ၇၄၅. ७४५. ပတ္တဗ္ဗံ ဂမ္မ မာပဇ္ဇံ, ပက္ကံ ပရိဏတံ သမာ; ဝေဌိတံ တု ဝလယိတံ, ရုဒ္ဓံ သံဝုတ မာဝုတံ. पत्तब्ब, गम्म, आपज्ज (प्राप्त करने योग्य); पक्व और परिणत (पका हुआ); वेठित और वलयित (लपेटा हुआ); रुद्ध, संवृत और आवृत (ढका हुआ या रोका हुआ)। ၇၄၆. ७४६. ပရိက္ခိတ္တဉ္စ နိဝုတံ, ဝိသဋံ ဝိတ္ထတံ တတံ; လိတ္တော တု ဒိဒ္ဓေါ ဂူဠှော တု,ဂုတ္တော ပုဋ္ဌော တု ပေါသိတော. परिक्खित्त और निवृत (घिरा हुआ); विसट, वित्थत और तत (फैला हुआ); लिप्त और दिद्ध (पुता हुआ); गूढ़ और गुत्त (छिपा हुआ); पुट्ठ और पोसित (पोषित)। ၇၄၇. ७४७. လဇ္ဇိတော ဟီဠိတော စာထ, သနိတံ ဓနိတံ ပျထ; သန္ဒာနိတော သိတော ဗဒ္ဓေါ,ကီလိတော သံယတော ဘဝေ. लज्जित और हीळित (तिरस्कृत); सनित और धनित (ध्वनित); सन्दानित, सित, बद्ध, कीलित और संयत (बँधा हुआ)। ၇၄၈. ७४८. သိဒ္ဓေ နိပ္ဖန္န နိဗ္ဗတ္တာ, ဒါရိတေ ဘိန္န ဘေဒိတာ; ဆန္နော တု ဆာဒိတေ စာထ, ဝိဒ္ဓေ ဆိဒ္ဒိတ ဝေဓိတာ. सिद्ध, निष्पन्न और निब्बत्त (उत्पन्न); दारित, भिन्न और भेदित (फटा हुआ); छन्न और छादित (ढका हुआ); विद्ध, छिद्दित और वेधित (छिदा हुआ)। ၇၄၉. ७४९. အာဟဋော အာဘတာ’နီတာ,ဒန္တော တု ဒမိတော သိယာ; သန္တော တု သမိတော စေဝ,ပုဏ္ဏော တု ပူရိတော ဘဝေ. आहट, आभत और आनीत (लाया हुआ); दान्त और दमित (वश में किया हुआ); सान्त और समित (शान्त); पूर्ण और पूरित (भरा हुआ)। ၇၅၀. ७५०. အပစာယိတော မဟိတော, ပူဇိတာ’ရဟိတော’စ္စိတော; မာနိတော စာ’ပစိတော စ, တစ္ဆိတံ တုတနူကတေ. अपचायित, महित, पूजित, अरहित, अर्चित, मानित और अपचित (सम्मानित); तच्छित (छिला हुआ या पतला किया हुआ)। ၇၅၁. ७५१. သန္တတ္တော ဓူပိတော စောပ,စရိတော တု ဥပါသိတော; ဘဋ္ဌံ တု ဂလိတံ ပန္နံ, စုတဉ္စ ဓံသိတံ ဘဝေ. सन्तप्त और धूपित; चरित और उपासित; भट्ठ, गलित, पन्न, च्युत और ध्वंसित (गिरा हुआ)। ၇၅၂. ७५२. ပီတော ပမုဒိတော ဟဋ္ဌော,မတ္တော တုဋ္ဌော ထ ကန္တိတော; သဉ္ဆိန္နော လူန ဒါတာ ထ,ပသတ္ထော ဝဏ္ဏိတော ထုတော. प्रीत, प्रमुदित, हृष्ट, मत्त और तुष्ट (प्रसन्न); संछिन्न, लून और दात (कटा हुआ); प्रशस्त, वर्णित और थुत (प्रशंसित)। ၇၅၃. ७५३. တိန္တော’လ္လ’ဒ္ဒ [Pg.63] ကိလိန္နော’န္နာ, မဂ္ဂိတံ ပရိယေသိတံ; အနွေသိတံ ဂဝေသိတံ, လဒ္ဓံ တု ပတ္တ မုစ္စတေ. तिन्त, उल्ल, अद्द, क्लिन्न और उन्न (गीला); मग्गित, परियेसित, अन्वेसित और गवेसित (खोजा हुआ); लद्ध और पत्त (प्राप्त)। ၇၅၄. ७५४. ရက္ခိတံ ဂေါပိတံ ဂုတ္တံ, တာတံ ဂေါပါယိတာ’ဝိတာ; ပါလိတံ အထ ဩဿဋ္ဌံ, စတ္တံ ဟီနံ သမုဇ္ဈိတံ. रक्षित, गोपित, गुत्त, तात, गोपायित, अवित और पालित (सुरक्षित); ओस्सट्ठ, चत्त, हीन और समुज्झित (त्यागा हुआ)। ၇၅၅. ७५५. ဘာသိတံ လပိတံ ဝုတ္တာ, ဘိဟိတာ’ချာတ ဇပ္ပိတာ; ဥဒီရိတဉ္စ ကထိတံ, ဂဒိတံ ဘဏိတော’ဒိတာ. भाषित, लपित, वुत्त, अभिहित, आख्यात, जप्पित, उदीरित, कथित, गदित, भणित और उदित (कहा हुआ)। ၇၅၆. ७५६. အဝညာတာ’ဝဂဏိတာ, ပရိဘူတာ’ဝမာနိတာ; ဇိဃစ္ဆိတော တု ခုဒိတော,ဆာတော စေဝ ဗုဘုက္ခိတော. अवज्ञात, अवगणित, परिभूत और अवमानित (तिरस्कृत); जिघच्छित, खुदित, छात और बुभुक्षित (भूखा)। ၇၅၇. ७५७. ဗုဒ္ဓံ ဉာတံ ပဋိပန္နံ, ဝိဒိတာ’ဝဂတံ မတံ; ဂိလိတော ခါဒိတော ဘုတ္တော,ဘက္ခိတော’ဇ္ဈောဟဋာ’သိတာ. बुद्ध, ज्ञात, प्रतिपन्न, विदित, अवगत और मत (जाना हुआ); गिलित, खादित, भुक्त, भक्षित, अज्झोहत और असित (खाया हुआ)। ဣတိ ဝိသေသျာဓီနဝဂ္ဂေါ. इति विशेष्याधीन वर्ग। ၂. သံကိဏ္ဏဝဂ္ဂ २. संकीर्ण वर्ग ၇၅၈. ७५८. ဉေယျံ လိင်္ဂ မိဟ ကွာပိ, ပစ္စယတ္ထဝသေန စ; ကြိယာ တု ကိရိယံ ကမ္မံ,သန္တိ တု သမထော သမော; ဒမော စ ဒမထော ဒန္တိ, ဝတ္တံ တု သုဒ္ဓကမ္မနိ; အထော အာသင်္ဂဝစနံ, တီသု ဝုတ္တံ ပရာယဏံ. यहाँ लिंग को कहीं-कहीं प्रत्यय के अर्थ के अनुसार जानना चाहिए; क्रिया, किरिया और कम्म (कार्य); सन्ति, समथ और सम (शान्ति); दम, दमथ और दन्ति (दमन); शुद्ध कर्म में 'वत्त'; और 'परायण' शब्द तीनों लिंगों में कहा गया है। ၇၅၉. ७५९. ဘေဒေါ ဝိဒါရော ဖုဋနံ, တပ္ပနံ တု စ ပီဏနံ; အက္ကောသန မဘိသင်္ဂေါ,ဘိက္ခာ တု ယာစနာ’တ္ထနာ. भेद, विदार और फुटन (फटना); तप्पन और पीणन (तृप्त करना); अक्कोसन और अभिसंग (आक्रोश/गाली); भिक्खा, याचना और अत्थना (याचना)। ၇၆၀. ७६०. နိန္နိမိတ္တံ ယဒိစ္ဆာ ထာ’, ပုစ္ဆနာ နန္ဒနာနိ စ; သဘာဇန မထော ဉာယော,နယော ဖာတိ တု ဝုဒ္ဓိယံ. निर्निमित्त और यदिच्छा (अचानक); पुच्छना (पूछना) और नन्दना (अभिनन्दन); सभाजन (सम्मान), न्याय और नय (नीति); 'फाति' का अर्थ वृद्धि है। ၇၆၁. ७६१. ကိလမထော ကိလမနံ, ပသဝေါ တု ပသူတိယံ; ဥက္ကံသော တွတိသယော ထ,ဇယော စ ဇယနံ ဇိတိ. क्लमथ और क्लमन (थकान); प्रसव और प्रसूति (जन्म); उक्कंस और अतिशय (उत्कर्ष); जय, जयन और जिति (विजय)। ၇၆၂. ७६२. ဝသော [Pg.64] ကန္တိ, ဗျဓော ဝေဓော,ဂဟော ဂါဟော ဝရော ဝုတိ; ပစာ ပါကော ဟဝေါ ဟုတိ,ဝေဒေါ ဝေဒန မိတ္ထိ ဝါ. वश, कान्ति; व्याध और वेध (बिंधना); गह और गाह (पकड़ना); वर और वुति (वरण); पचा और पाक (पकना); हव और हुति (आह्वान/यज्ञ); वेद और वेदना (स्त्रीलिंग में)। ၇၆၃. ७६३. ဇီရဏံ ဇာနိ တာဏံ တု, ရက္ခဏံ ပမိတိပ္ပမာ; သိလေသော သန္ဓိ စ ခယော,တွပစယော ရဝေါ ရဏော. जीरण और जानि (हानि); ताण और रक्षण (रक्षा); पमिति और पमा (प्रमाण); सिलेष और सन्धि (जोड़); क्षय और अपचय (नाश); रव और रण (ध्वनि)। ၇၆၄. ७६४. နိဂါဒေါ နိဂဒေါ မာဒေါ, မဒေါ ပသိတိ ဗန္ဓနံ; အာကရော တွိင်္ဂိတံ ဣင်္ဂေါ,အထ’တ္ထာပဂမော ဗျယော. निगाद और निगद (कथन); माद और मद (नशा); पसिति (बन्धन); आकार, इङ्गित और इङ्ग (चेष्टा); अर्थापगम और व्यय (खर्च)। ၇၆၅. ७६५. အန္တရာယော စ ပစ္စူဟော,ဝိကာရော တု ဝိကတျ’ပိ; ပဝိသိလေသော ဝိဓုရံ, ဥပဝေသနမာသနံ. अन्तराय और पच्चूह (बाधा); विकार और विकति (विकृति); विष्लेश (वियोग), विधुर (वियोग) और उपवेशन (बैठना) ही आसन है। ၇၆၆. ७६६. အဇ္ဈာသယော အဓိပ္ပာယော, အာသယော စာဘိသန္ဓိ စ; ဘာဝေါ ဓိမုတ္တိ ဆန္ဒော ထ,ဒေါသော အာဒီနဝေါ ဘဝေ. अध्याशय, अभिप्राय, आशय और अभिसन्धि; भाव, अधिमुक्ति और छन्द; दोष और आदीनव (ये समानार्थक हैं)। ၇၆၇. ७६७. အာနိသံသော ဂုဏော စာထ,မဇ္ဈံ ဝေမဇ္ဈ မုစ္စတေ; မဇ္ဈနှိကော တု မဇ္ဈနှော, ဝေမတ္တံ တု စ နာနတာ. आनृशंस और गुण; मध्य और वेमध्य कहे जाते हैं; मध्याह्निक और मध्याह्न; वेमत्त और नानता (विविधता)। ၇၆၈. ७६८. ဝါ ဇာဂရော ဇာဂရိယံ, ပဝါဟော တု ပဝတ္တိ စ; ဗျာသော ပပဉ္စော ဝိတ္ထာရော,ယာမော တု သံယမော ယမော. जागर और जागरिय (जागना); प्रवाह और प्रवृत्ति; व्यास, प्रपञ्च और विस्तार; याम, संयम और यम। ၇၆၉. ७६९. သမ္ဗာဟနံ မဒ္ဒနဉ္စ, ပသရော တု ဝိသပ္ပနံ; သန္ထဝေါ တု ပရိစယော,မေလကော သင်္ဂ သင်္ဂမာ. संवाहन और मर्दन; पसर और विसर्पण; संस्तव और परिचय; मेलक, सङ्ग और सङ्गम। ၇၇၀. ७७०. သန္နိဓိ သန္နိကဋ္ဌမှိ, ဝိနာသော တု အဒဿနံ; လဝေါ ဘိလာဝေါ လဝနံ,ပတ္ထာဝေါ’ဝသရော သမာ. सन्निधि और सन्निकट; विनाश और अदर्शन; लव, भिलाव और लवन (काटना); प्रस्ताव और अवसर समान हैं। ၇၇၁. ७७१. ဩသာနံ [Pg.65] ပရိယောသာနံ, ဥက္ကံသော’တိသယော ဘဝေ ; သန္နိဝေသော စ သဏ္ဌာနံ, အထာ’ဗ္ဘန္တရ မန္တရံ. अवसान और पर्यवसान; उत्कर्ष और अतिशय; सन्निवेश और संस्थान; तथा अभ्यन्तर और अन्तर। ၇၇၂. ७७२. ပါဋိဟီရံ ပါဋိဟေရံ, ပါဋိဟာရိယ မုစ္စတေ; ကိစ္စံ တု ကရဏီယဉ္စ, သင်္ခါရော ဝါသနာ ဘဝေ. पाटीहीर, पाटीहेर और पातिहारिय कहे जाते हैं; कृत्य और करणीय; संस्कार और वासना। ၇၇၃. ७७३. ပဝနံ ပဝ နိပ္ပာဝါ, တသရော သုတ္တဝေဌနံ; သင်္ကမော ဒုဂ္ဂသဉ္စာရော, ပက္ကမော တု ဥပက္ကမော. पवन, पव और निष्पाव (साफ करना); तसर (सूत लपेटने का यंत्र); सङ्कम और दुर्गसञ्चार; प्रक्रम और उपक्रम। ၇၇၄. ७७४. ပါဌော နိပါဌော နိပဌော, ဝိစယော မဂ္ဂနာ ပုမေ; အာလိင်္ဂနံ ပရိဿင်္ဂေါ, သိလေသော ဥပဂူဟနံ. पाठ, निपाठ और निपठ; विचय और मग्गना (खोजना); आलिङ्गन, परिष्वङ्ग, श्लेष और उपगूहन। ၇၇၅. ७७५. အာလောကနဉ္စ နိဇ္ဈာနံ, ဣက္ခဏံ ဒဿနံ ပျထ; ပစ္စာဒေသော နိရသနံ, ပစ္စက္ခာနံ နိရာကတိ. आलोकण, निज्झान, ईक्षण और दर्शन; प्रत्यादेश, निरसन, प्रत्याख्यान और निराकृति। ၇၇၆. ७७६. ဝိပလ္လာသော’ညထာဘာဝေါ, ဗျတ္တယော ဝိပရီယယော; ဝိပရိယာသော’တိက္ကမော, တွ’တိပါတော ဥပစ္စယော. विपल्लास, अन्यथाभाव, व्यत्यय, विपरीत और विपर्यास; अतिक्रम, अतिपात और उपच्चय। ဣတိ သံကိဏ္ဏဝဂ္ဂေါ. इति संकीर्णवग्गो (यहाँ संकीर्ण वर्ग समाप्त हुआ)। ၃. အနေကတ္ထဝဂ္ဂ ३. अनेकार्थ वर्ग। ၇၇၇. ७७७. အနေကတ္ထေ ပဝက္ခာမိ, ဂါထာ’ဒ္ဓပါဒတော ကမာ; ဧတ္ထ လိင်္ဂဝိသေသတ္ထ, မေကဿ ပုနရုတ္တတာ. अब मैं गाथा के आधे चरणों के क्रम से अनेकार्थक शब्दों को कहूँगा; यहाँ लिंग विशेष के अर्थ में एक ही शब्द की पुनरुक्ति हो सकती है। ၇၇၈. ७७८. သမယော သမဝါယေ စ, သမူဟေ ကာရဏေ ခဏေ; ပဋိဝေဓေ သိယာ ကာလေ, ပဟာနေ လာဘ ဒိဋ္ဌိသု. 'समय' शब्द समवाय, समूह, कारण, क्षण, प्रतिवेध, काल, प्रहाण, लाभ और दृष्टि के अर्थ में होता है। ၇၇၉. ७७९. ဝဏ္ဏော သဏ္ဌာန ရူပေသု, ဇာတိ,စ္ဆဝီသု ကာရဏေ; ပမာဏေ စ ပသံသာယံ, အက္ခရေ စ ယသေ ဂုဏေ. 'वर्ण' शब्द संस्थान, रूप, जाति, छवि, कारण, प्रमाण, प्रशंसा, अक्षर, यश और गुण के अर्थ में होता है। ၇၈၀. ७८०. ဥဒ္ဒေသေ ပါတိမောက္ခဿ, ပဏ္ဏတ္တိယ မုပေါသထော; ဥပဝါသေ စ အဋ္ဌင်္ဂေ, ဥပေါသထဒိနေ သိယာ. 'उपोसथ' शब्द पातिमोक्ष के पाठ, प्रज्ञप्ति, उपवास, अष्टाङ्ग और उपोसथ के दिन के अर्थ में होता है। ၇၈၁. ७८१. ရထင်္ဂေ လက္ခဏေ ဓမ္မော, ရစက္ကေ’သွီရိယာပထေ; စက္ကံ သမ္ပတ္တိယံ စက္က, ရတနေ မဏ္ဍလေ ဗလေ. 'चक्र' शब्द रथ के अंग, लक्षण, धर्म, ईर्यापथ, सम्पत्ति, चक्ररत्न, मण्डल और बल के अर्थ में होता है। ၇၈၂. ७८२. ကုလာလဘဏ္ဍေ အာဏာယ, မာယုဓေ ဒါန ရာသိသု; कुलालभाण्ड (कुम्हार का चाक), आज्ञा, आयुध, दान और राशि के अर्थ में भी (चक्र शब्द होता है)। ၇၈၃. ७८३. ဒါနသ္မိံ [Pg.66] ဗြဟ္မစရိယ, မပ္ပမညာသု သာသနေ; မေထုနာရတိယံ ဝေယျာ, ဝစ္စေ သဒါရတုဋ္ဌိယံ; ပဉ္စသီလာ’ရိယမဂ္ဂေါ, ပေါသထင်္ဂ ဓိတီသု စ. दान, ब्रह्मचर्य, अप्रमाण, शासन, मैथुन-विरति, वैयावृत्य, स्वदार-सन्तोष, पञ्चशील, आर्यमार्ग, उपोसथ के अंग और धृति के अर्थ में (धर्म शब्द होता है)। ၇၈၄. ७८४. ဓမ္မော သဘာဝေ ပရိယတ္တိပညာ,ဉာယေသု သစ္စပ္ပကတီသု ပုညေ; ဉေယျေ ဂုဏာ’စာရ သမာဓိသူပိ,နိဿတ္တတာ’ပတ္တိသု ကာရဏာဒေါ. 'धर्म' शब्द स्वभाव, पर्यप्ति, प्रज्ञा, न्याय, सत्य, प्रकृति, पुण्य, ज्ञेय, गुण, आचार, समाधि, निस्सत्त्वता, आपत्ति और कारण आदि के अर्थ में होता है। ၇၈၅. ७८५. အတ္ထော ပယောဇနေ သဒ္ဒါ, ဘိဓေယျေ ဝုဒ္ဓိယံ ဓနေ; ဝတ္ထုမှိ ကာရဏေ နာသေ, ဟိတေ ပစ္ဆိမပဗ္ဗတေ. 'अर्थ' शब्द प्रयोजन, शब्द का अर्थ, वृद्धि, धन, वस्तु, कारण, नाश, हित और अस्ताचल के अर्थ में होता है। ၇၈၆. ७८६. ယေဘုယျတာ’ဗျာမိဿေသု, ဝိသံယောဂေ စ ကေဝလံ; ဒဠှတ္ထေ’နတိရေကေ စာ, နဝသေသမှိ တံ တိသု. 'केवल' शब्द बाहुल्य, अमिश्रित, विसंयोग, दृढ अर्थ, अनतिरेक और निरवशेष के अर्थ में तीनों लिंगों में होता है। ၇၈၇. ७८७. ဂုဏော ပဋလ ရာသီသု, အာနိသံသေ စ ဗန္ဓနေ; အပ္ပဓာနေ စ သီလာဒေါ, သုက္ကာဒိမှိ ဇိယာယ စ. 'गुण' शब्द पटल, राशि, लाभ, बन्धन, अप्रधान, शील आदि, शुक्ल आदि और धनुष की डोरी के अर्थ में होता है। ၇၈၈. ७८८. ရုက္ခာဒေါ ဝိဇ္ဇမာနေ စာ, ရဟန္တေ ခန္ဓပဉ္စကေ; ဘူတော သတ္တ မဟာဘူတာ, မနုဿေသု န နာရိယံ. 'भूत' शब्द वृक्ष आदि, विद्यमान, अर्हत्, पञ्चस्कन्ध, प्राणी, महाभूत और मनुष्यों के अर्थ में होता है, किन्तु स्त्रियों के अर्थ में नहीं। ၇၈၉. ७८९. ဝါစ္စလိင်္ဂေါ အတီတသ္မိံ, ဇာတေ ပတ္တေ သမေ မတော; अतीत, उत्पन्न, प्राप्त और समान के अर्थ में यह विशेष्य के लिंग के अनुसार (वाच्यलिंग) होता है। ၇၉၀. ७९०. သုန္ဒရေ ဒဠှိကမ္မေ စာ, ယာစနေ သမ္ပဋိစ္ဆနေ; သဇ္ဇနေ သမ္ပဟံသာယံ, သာဓွာ’ဘိဓေယျလိင်္ဂိကံ. 'साधु' शब्द सुन्दर, दृढीकरण, याचना, स्वीकार, सज्जन और अत्यधिक प्रसन्नता के अर्थ में विशेष्य के लिंग के अनुसार होता है। ၇၉၁. ७९१. အန္တော နိတ္ထီ သမီပေ စာ, ဝသာနေ ပဒပူရဏေ; ဒေဟာဝယဝေ ကောဋ္ဌာသေ, နာသ သီမာသု လာမကေ. 'अन्त' शब्द (स्त्रीलिंग को छोड़कर) समीप, अवसान, पदपूरण, देह के अवयव, भाग, नाश, सीमा और नीच के अर्थ में होता है। ၇၉၂. ७९२. နိကာယေ သန္ဓိ သာမည, ပ္ပသူတီသု ကုလေ ဘဝေ; ဝိသေသေ သုမနာယဉ္စ, ဇာတိ သင်္ခတလက္ခဏေ. 'जाति' शब्द समूह, सन्धि, सामान्य, जन्म, कुल, उत्पत्ति, विशेष, चमेली और संस्कृत-लक्षण के अर्थ में होता है। ၇၉၃. ७९३. ဘဝဘေဒေ ပတိဋ္ဌာယံ, နိဋ္ဌာ’ဇ္ဈာသယဗုဒ္ဓိသု; ဝါသဋ္ဌာနေ စ ဂမနေ, ဝိသဋတ္တေ ဂတီရိတာ. 'गति' शब्द भव-भेद, प्रतिष्ठा, निष्ठा, अध्याशय, बुद्धि, वासस्थान, गमन और फैलाव के अर्थ में कही गई है। ၇၉၄. ७९४. ဖလေ ဝိပဿနာ ဒိဗ္ဗ, စက္ခု သဗ္ဗညုတာသု စ; ပစ္စဝေက္ခဏဉာဏမှိ, မဂ္ဂေ စ ဉာဏဒဿနံ. फल में विपश्यना, दिव्य चक्षु और सर्वज्ञता में; प्रत्यवेक्षण ज्ञान में, और मार्ग में ज्ञानदर्शन (कहा जाता है)। ၇၉၅. ७९५. ကမ္မာရုဒ္ဓန အင်္ဂါရ, ကပလ္လ ဒီပိကာသု စ; သုဝဏ္ဏကာရမူသာယံ, ဥက္ကာ ဝေဂေ စ ဝါယုနော. लोहार की भट्टी, अंगार, खप्पर और दीपिकाओं में; स्वर्णकार की मूषा (घड़िया) में, उल्का और वायु के वेग में (उक्का शब्द प्रयुक्त होता है)। ၇၉၆. ७९६. ကေသောဟာရဏ, [Pg.67] ဇီဝိတ, ဝုတ္တိသု ဝပနေ စ ဝါပသမကရဏေ; ကထနေ ပမုတ္တဘာဝ, ဇ္ဈေနာဒေါ ဝုတ္တ မပိ တီသု. केश उतारने, जीवन, वृत्ति और बोने (वपन) में, तथा बोने के समान करने में; कथन में, मुक्त भाव में, और ध्यान आदि में भी तीनों लिंगों में कहा गया है। ၇၉၇. ७९७. ဂမနေ ဝိဿုတေ စာ’ဝ, ဓာရိတော’ပစိတေသု စ; အနုယောဂေ ကိလိန္နေ စ, သုတော’ ဘိဓေယျလိင်္ဂိကော. गमन में, विख्यात में, धारण किए हुए और संचित में; अनुयोग में और गीले में, 'सुत' शब्द विशेष्य के लिंग के अनुसार होता है। ၇၉၈. ७९८. သောတဝိညေယျ သတ္ထေသု, သုတံ ပုတ္တေ သုတော သိယာ; श्रोत्र-विज्ञेय (कान से जानने योग्य) और शास्त्रों में 'सुत' (नपुंसक) है, पुत्र के अर्थ में 'सुतो' (पुल्लिंग) होता है। ၇၉၉. ७९९. ကပ္ပော ကာလေ ယုဂေ လေသေ, ပညတ္တိ ပရမာယုသု; သဒိသေ တီသု သမဏ, ဝေါဟာရ ကပ္ပဗိန္ဒုသု; သမန္တတ္ထေ’န္တရကပ္ပာ, ဒိကေ တက္ကေ ဝိဓိမှိ စ. कल्प शब्द काल, युग, लेश (अंश), प्रज्ञप्ति और परमायु में; सदृश (तीनों लिंगों में), श्रमण, व्यवहार और कल्पबिन्दु में; सामर्थ्य अर्थ में, अन्तरकल्प आदि में, तर्क और विधि में प्रयुक्त होता है। ၈၀၀. ८००. နိဗ္ဗာန မဂ္ဂ ဝိရတိ, သပထေ သစ္စဘာသိတေ; တစ္ဆေ စာ’ရိယသစ္စမှိ, ဒိဋ္ဌိယံ သစ္စ မီရိတံ. निर्वाण, मार्ग, विरति, शपथ और सत्य भाषण में; तथ्य (यथार्थ) और आर्यसत्य में, तथा दृष्टि (सम्यक् दृष्टि) में 'सच्च' (सत्य) कहा गया है। ၈၀၁. ८०१. သဉ္ဇာတိဒေသေ ဟေတုမှိ, ဝါသဋ္ဌာနာ’ကရေသု စ; သမောသရဏဋ္ဌာနေ စာ, ယတနံ ပဒပူရဏေ. उत्पत्ति स्थान, हेतु, निवास स्थान और खान (आकर) में; समवसरण स्थान (मिलन स्थल) में और पद-पूरण में 'आयतन' शब्द प्रयुक्त होता है। ၈၀၂. ८०२. အန္တရံ မဇ္ဈ ဝတ္ထ’ည, ခဏော’ကာသော’ဓိ ဟေတုသု; ဗျဝဓာနေ ဝိနဋ္ဌေ စ, ဘေဒေ ဆိဒ္ဒေ မနသျ’ပိ. 'अन्तर' शब्द मध्य, वस्त्र, अन्य, क्षण, अवकाश, अवधि और हेतु में; व्यवधान, विनष्ट, भेद, छिद्र और मन में भी प्रयुक्त होता है। ၈၀၃. ८०३. အာရောဂျေ ကုသလံ ဣဋ္ဌ, ဝိပါကေ ကုသလော တထာ; အနဝဇ္ဇမှိ ဆေကေ စ, ကထိတော ဝါစ္စလိင်္ဂိကော. आरोग्य में 'कुशल' (नपुंसक), इष्ट विपाक में 'कुशलो' (पुल्लिंग); इसी प्रकार अनिन्द्य (निर्दोष) और चतुर के अर्थ में यह विशेष्य के लिंग के अनुसार कहा गया है। ၈၀၄. ८०४. ဒြဝါ’စာရေသု ဝီရိယေ, မဓုရာဒီသု ပါရဒေ; သိင်္ဂါရာဒေါ ဓာတုဘေဒေ, ကိစ္စေ သမ္ပတ္တိယံ ရသော. द्रव, आचार, वीर्य, मधुर आदि (स्वाद), पारद (पारा); शृंगार आदि (रस), धातु-भेद, कृत्य और सम्पत्ति में 'रस' शब्द प्रयुक्त होता है। ၈၀၅. ८०५. ဗောဓိ သဗ္ဗညုတညာဏေ, ရိယမဂ္ဂေ စ နာရိယံ; ပညတ္တိယံ ပုမေ’ ဿတ္ထ, ရုက္ခမှိ ပုရိသိတ္ထိယံ. 'बोधि' शब्द सर्वज्ञता-ज्ञान और आर्यमार्ग के अर्थ में स्त्रीलिंग है; प्रज्ञप्ति के अर्थ में पुल्लिंग है, और अश्वत्थ वृक्ष (पीपल) के अर्थ में पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग दोनों है। ၈၀၆. ८०६. သေဝိတော ယေန ယော နိစ္စံ, တတ္ထာပိ ဝိသယော သိယာ; ရူပါဒိကေ ဇနပဒေ, တထာ ဒေသေ စ ဂေါစရေ. जिसके द्वारा जो नित्य सेवन किया जाता है, उसमें भी 'विषय' शब्द होता है; रूप आदि (इन्द्रिय विषय), जनपद, देश और गोचर (इन्द्रिय क्षेत्र) में भी। ၈၀၇. ८०७. ဘာဝေါ ပဒတ္ထေ သတ္တာယ, မဓိပ္ပာယ ကြိယာသု စ; သဘာဝသ္မိဉ္စ လီလာယံ, ပုရိသိ’တ္ထိန္ဒြိယေသု စ. 'भाव' शब्द पदार्थ, सत्ता, अभिप्राय और क्रियाओं में; स्वभाव, लीला, तथा पुरुषेन्द्रिय और स्त्रीन्द्रिय में प्रयुक्त होता है। ၈၀၈. ८०८. သော ဗန္ဓဝေ’တ္တနိ စ သံ, သော ဓနသ္မိ မနိတ္ထိယံ; သာ ပုမေ သုနခေ ဝုတ္တော, တ္တနိယေ သော တိလိင်္ဂိကော. 'स्व' (स) शब्द बान्धव और आत्मा के अर्थ में पुल्लिंग है, धन के अर्थ में नपुंसक है; 'सा' शब्द कुत्ते के अर्थ में पुल्लिंग है, और 'स्वकीय' (अपना) अर्थ में यह तीनों लिंगों में होता है। ၈၀၉. ८०९. သုဝဏ္ဏံ ကနကေ ဝုတ္တံ, သုဝဏ္ဏော ဂရုဠေ တထာ; ပဉ္စဓရဏမတ္တေ စ, ဆဝိ သမ္ပတ္တိယမ္ပိ စ. 'सुवर्ण' शब्द कनक (सोने) के अर्थ में (नपुंसक) है, गरुड़ के अर्थ में 'सुवर्णो' (पुल्लिंग) है; पाँच धरण की मात्रा में और छवि-सम्पत्ति (सुन्दर वर्ण) में भी प्रयुक्त होता है। ၈၁၀. ८१०. ဝရော [Pg.68] ဒေဝါဒိကာ ဣဋ္ဌေ, ဇာမာတရိ ပတိမှိ စ,ဥတ္တမေ ဝါစ္စလိင်္ဂေါ သော, ဝရံ မန္ဒပ္ပိယေ ဗျယံ. 'वर' शब्द देवादि से प्राप्त इष्ट (वरदान), जामाता (दामाद) और पति के अर्थ में है; उत्तम के अर्थ में यह विशेष्य के लिंग के अनुसार होता है, और 'मन्द प्रिय' के अर्थ में 'वरं' अव्यय है। ၈၁၁. ८११. မကုလေ ဓနရာသိမှိ, သိယာ ကောသ မနိတ္ထိယံ; နေတ္တိံသာဒိ ပိဓာနေ စ, ဓနုပဉ္စသတေပိ စ. कली (मुकुल) और धन-राशि (कोष) के अर्थ में 'कोस' शब्द नपुंसक और पुल्लिंग है; तलवार आदि के म्यान (आवरण) में और पाँच सौ धनुष की दूरी (कोस) में भी। ၈၁၂. ८१२. ပိတာမဟေ ဇိနေ သေဋ္ဌေ, ဗြာဟ္မဏေ စ ပိတူသွပိ; ဗြဟ္မာ ဝုတ္တော တထာ ဗြဟ္မံ, ဝေဒေ တပသိ ဝုစ္စတေ. पितामह (ब्रह्मा), जिन (बुद्ध), श्रेष्ठ, ब्राह्मण और पिताओं में 'ब्रह्मा' (पुल्लिंग) कहा गया है; तथा 'ब्रह्म' (नपुंसक) वेद और तपस्या के अर्थ में कहा जाता है। ၈၁၃. ८१३. ဟတ္ထီနံ မဇ္ဈဗန္ဓေ စ, ပကောဋ္ဌေ ကစ္ဆဗန္ဓနေ; မေခလာယံ မတာ ကစ္ဆာ, ကစ္ဆော ဝုတ္တော လတာယ စ. हाथियों के मध्य-बन्ध (पेटी), प्रकोष्ठ, कच्छ-बन्धन (लाँग लगाना) और मेखला में 'कच्छा' (स्त्रीलिंग) मानी गई है; और लता के अर्थ में 'कच्छो' (पुल्लिंग) कहा गया है। ၈၁၄. ८१४. တထေဝ ဗာဟုမူလမှိ, အနူပမှိ တိဏေပိ စ; उसी प्रकार बगल (काँख), अनूप (जलप्राय देश) और घास के अर्थ में भी (कच्छ शब्द प्रयुक्त होता है)। ၈၁၅. ८१५. ပမာဏံ ဟေတု သတ္ထေသု, မာနေ စ သစ္စဝါဒိနိ; ပမာတရိ စ နိစ္စမှိ, မရိယာဒါယ မုစ္စတေ. 'प्रमाण' शब्द हेतु, शास्त्र, माप और सत्यवादी में; प्रमाता (जानने वाला), नित्य और मर्यादा के अर्थ में कहा जाता है। ၈၁၆. ८१६. သတ္တံ ဒဗ္ဗ’တ္တဘာဝေသု, ပါဏေသု စ ဗလေ, သိယာ ; သတ္တာယဉ္စ, ဇနေသတ္တော, အာသတ္တေ သော တိလိင်္ဂိကော. 'सत्त' (सत्त्व) शब्द द्रव्य, आत्मभाव (शरीर), प्राणियों और बल में होता है; तथा सत्ता के अर्थ में, और 'आसक्त' (लगा हुआ) के अर्थ में यह तीनों लिंगों में होता है। ၈၁၇. ८१७. သေမှာဒေါ ရသရတ္တာဒေါ, မဟာဘူတေ ပဘာဒိကေ; ဓာတု ဒွီသွ’ဋ္ဌိစက္ခာ’ဒိ, ဘွာ’ဒီသု ဂေရိကာဒိသု. श्लेष्म (कफ) आदि, रस-रक्त आदि, महाभूत और प्रभा आदि में; अस्थि, चक्षु आदि, भू-आदि (धातुओं) और गेरू आदि खनिजों में 'धातु' शब्द दोनों (पुल्लिंग-स्त्रीलिंग) लिंगों में होता है। ၈၁၈. ८१८. အမစ္စာဒေါ သဘာဝေ စ, ယောနိယံ ပကတီ’ရိတာ; သတွာဒိသာမျာ’ဝတ္ထာယံ, ပစ္စယာ ပဌမေပိ စ. मन्त्री आदि, स्वभाव और योनि (उत्पत्ति स्थान) में 'प्रकृति' कही गई है; सत्त्व आदि गुणों की साम्यावस्था में, प्रत्यय में और प्रथम के अर्थ में भी। ၈၁၉. ८१९. ပဒံ ဌာနေ ပရိတ္တာဏေ, နိဗ္ဗာနမှိ စ ကာရဏေ; သဒ္ဒေ ဝတ္ထုမှိ ကောဋ္ဌာသေ, ပါဒေ တလ္လဉ္ဆနေ မတံ. 'पद' शब्द स्थान, परित्राण (रक्षा), निर्वाण और कारण में; शब्द, वस्तु, भाग (अंश), पाद (पैर) और उसके चिह्न (पद-चिह्न) में माना गया है। ၈၂၀. ८२०. လောဟမုဂ္ဂရ မေဃေသု, ဃနော, တာလာဒိကေ ဃနံ,; နိရန္တရေ စ ကဌိနေ, ဝါစ္စလိင်္ဂိက မုစ္စတေ. लोह-मुद्गर और मेघों के अर्थ में 'घनो' (पुल्लिंग) है, ताल आदि (वाद्य) के अर्थ में 'घनं' (नपुंसक) है; तथा निरन्तर (सघन) और कठिन के अर्थ में यह विशेष्य के लिंग के अनुसार कहा जाता है। ၈၂၁. ८२१. ခုဒ္ဒါ စ မက္ခိကာဘေဒေ, မဓုမှိ ခုဒ္ဒ, မပ္ပကေ; အဓမေ ကပဏေ စာပိ, ဗဟုမှိ စတူသု တ္တိသု. 'खुद्दा' शब्द मधुमक्खी के भेद में (स्त्रीलिंग) है, मधु (शहद) के अर्थ में 'खुद्द' (नपुंसक) है; अल्प, अधम, कृपण और बहुत के अर्थ में यह तीनों लिंगों में होता है। ၈၂၂. ८२२. တက္ကေ မရဏလိင်္ဂေ စ, အရိဋ္ဌံ အသုဘေ သုဘေ,; အရိဋ္ဌော အာသဝေ ကာကေ, နိမ္ဗေ စ ဖေနိလဒ္ဒုမေ. तक्र (छाछ), मरण-चिह्न, अशुभ और शुभ के अर्थ में 'अरिष्ठ' नपुंसक है; आसव (मदिरा), कौआ, नीम और रीठा के वृक्ष के अर्थ में 'अरिष्ठो' पुल्लिंग है। ၈၂၃. ८२३. မာနဘဏ္ဍေ ပလသတေ, သဒိသတ္တေ တုလာ တထာ; ဂေဟာနံ ဒါရုဗန္ဓတ္ထ, ပီဌိကာယဉ္စ ဒိဿတိ. माप के पात्र (तुला), सौ पल के परिमाण और सादृश्य (समानता) में 'तुला' शब्द है; तथा घरों के काष्ठ-बन्धन के लिए प्रयुक्त पीठिका (शहतीर) में भी देखा जाता है। ၈၂၄. ८२४. မိတ္တကာရေ [Pg.69] လဉ္ဇဒါနေ, ဗလေ ရာသိ ဝိပတ္တိသု ; ယုဒ္ဓေ စေဝ ပဋိညာယံ, သင်္ဂရော သမ္ပကာသိတော. 'सङ्गर' शब्द मित्रता करने, घूस देने, सेना, राशि (ढेर), विपत्तियों, युद्ध और प्रतिज्ञा के अर्थ में प्रकाशित है। ၈၂၅. ८२५. ခန္ဓေ ဘဝေ နိမိတ္တမှိ, ရူပံ ဝဏ္ဏေ စ ပစ္စယေ; သဘာဝ သဒ္ဒ သဏ္ဌာန, ရူပဇ္ဈာန ဝပူသု စ. 'रूप' शब्द स्कन्ध, भव, निमित्त, वर्ण (रंग), प्रत्यय, स्वभाव, शब्द, संस्थान (आकृति), रूपावचर ध्यान और शरीर के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၈၂၆. ८२६. ဝတ္ထု ကိလေသ ကာမေသု, ဣစ္ဆာယံ မဒနေ ရတေ; ကာမော, ကာမံ နိကာမေ, စာ, နုညာယံ ကာမ မဗျယံ. 'काम' शब्द वस्तु-काम, क्लेश-काम, इच्छा, मदन (कामदेव/मद) और रति के अर्थ में है; 'कामं' अव्यय के रूप में निकाम (अभिलाषा) और अनुज्ञा (अनुमति) के अर्थ में है। ၈၂၇. ८२७. ပေါက္ခရံ ပဒုမေ ဒေဟေ, ဝဇ္ဇဘဏ္ဍမုခေပိ စ; သုန္ဒရတ္တေ စ သလိလေ, မာတင်္ဂကရကောဋိယံ. 'पोक्खर' (पुष्कर) शब्द पद्म (कमल), देह, वाद्ययंत्र (नगाड़े) के मुख, सुन्दरता, जल और हाथी की सूँड़ के अग्रभाग के अर्थ में है। ၈၂၈. ८२८. ရာသိနိစ္စလ မာယာသု, ဒမ္ဘာ’သစ္စေသွ’ယောဃနေ; ဂိရိသိင်္ဂမှိ သီရင်္ဂေ, ယန္တေ ကူဋ မနိတ္ထိယံ. 'कूट' शब्द (पुल्लिङ्ग/नपुंसकलिङ्ग) राशि, निश्चलता, माया, दम्भ, असत्य, लोहे के घन, पर्वत के शिखर, हल के अङ्ग और यन्त्र (जाल) के अर्थ में है। ၈၂၉. ८२९. ဝုဒ္ဓိယံ ဇနနေ ကာမ, ဓာတွာဒီမှိ စ ပတ္တိယံ; သတ္တာယဉ္စေဝ သံသာရေ, ဘဝေါ သဿတဒိဋ္ဌိယံ. 'भव' शब्द वृद्धि, जनन (उत्पत्ति), कामधातु आदि, प्राप्ति, सत्ता, संसार और शाश्वत दृष्टि के अर्थ में है। ၈၃၀. ८३०. ပဋိဝါကျော’တ္တရာသင်္ဂေ, သု’တ္တရံ ဥတ္တရော တိသု; သေဋ္ဌေ ဒိသာဒိဘေဒေ စ, ပရသ္မိ မုပရီ’ရိတော. 'उत्तर' शब्द प्रतिवाक्य (उत्तर), उत्तरासङ्ग (चीवर), श्रेष्ठ, उत्तर दिशा, पर (बाद वाला) और ऊपर के अर्थ में कहा गया है। ၈၃၁. ८३१. နေက္ခမ္မံ ပဌမဇ္ဈာနေ, ပဗ္ဗဇ္ဇာယံ ဝိမုတ္တိယံ; ဝိပဿနာယ နိဿေသ, ကုသလမှိ စ ဒိဿတိ. 'नेक्खम्म' (नैष्क्रम्य) शब्द प्रथम ध्यान, प्रव्रज्या, विमुक्ति, विपश्यना और सम्पूर्ण कुशल धर्मों के अर्थ में देखा जाता है। ၈၃၂. ८३२. သင်္ခါရော သင်္ခတေ ပုညာ, ဘိသင်္ခါရာဒိကေပိ စ; ပယောဂေ ကာယသင်္ခါရာ, ဒျ’ဘိသင်္ခရဏေသု စ. 'सङ्खार' (संस्कार) शब्द संस्कृत (कृत), पुण्याभिसंस्कार आदि, प्रयोग, काय-संस्कार और अभिसंस्करण (बनाने की प्रक्रिया) के अर्थ में है। ၈၃၃. ८३३. အာရမ္မဏေ စ သံသဋ္ဌေ, ဝေါကိဏ္ဏေ နိဿယေ တထာ; တဗ္ဘာဝေ စာပျဘိဓေယျ, လိင်္ဂေါ သဟဂတော ဘဝေ. 'सहगत' शब्द आलम्बन, संसृष्ट, प्रकीर्ण (मिश्रित), निश्रय और तद्भाव के अर्थ में विशेषण के रूप में होता है। ၈၃၄. ८३४. တီသု ဆန္နံ ပတိရူပေ, ဆာဒိတေ စ နိဂူဟိတေ; နိဝါသန ပါရုပနေ, ရဟော ပညတ္တိယံ ပုမေ. 'छन्न' शब्द तीनों लिङ्गों में प्रतिरूप (योग्य), आच्छादित और निगूहित (छिपा हुआ) के अर्थ में है; पुल्लिङ्ग में यह निवासना (अधोवस्त्र), पारुपण (उत्तरीय), रहस्य और प्रज्ञप्ति के अर्थ में है। ၈၃၅. ८३५. ဗုဒ္ဓသမန္တစက္ခူသု, စက္ခု ပညာယ မီရိတံ; ဓမ္မစက္ခုမှိ စ မံသ, ဒိဗ္ဗစက္ခုဒွယေသု စ. 'चक्खु' (चक्षु) शब्द बुद्ध-चक्षु, समन्त-चक्षु, प्रज्ञा-चक्षु, धर्म-चक्षु, मांस-चक्षु और दिव्य-चक्षु के अर्थ में कहा गया है। ၈၃၆. ८३६. ဝါစ္စလိင်္ဂေါ အဘိက္ကန္တော, သုန္ဒရမှိ အဘိက္ကမေ; အဘိရူပေ ခယေ ဝုတ္တော, တထေဝ’ဗ္ဘနုမောဒနေ. 'अभिक्कन्त' (अभिक्रान्त) शब्द विशेषण के रूप में सुन्दर, अभिक्रम (आगे बढ़ना), अभिरूप, क्षय (समाप्ति) और अभिनुमोदन के अर्थ में कहा गया है। ၈၃၇. ८३७. ကာရဏေ ဒေသနာယဉ္စ, ဝါရေ ဝေဝစနေပိ စ; ပါကာရသ္မိံ အဝသရေ, ပရိယာယော ကထီယတိ. 'परियाय' (पर्याय) शब्द कारण, देशना, वार (बारी), वेवचन (समानार्थी), प्राकार (घेरा) और अवसर के अर्थ में कहा जाता है। ၈၃၈. ८३८. ဝိညာဏေ [Pg.70] စိတ္တကမ္မေ စ, ဝိစိတ္တေ စိတ္တ မုစ္စတေ; ပညတ္တိ စိတ္တမာသေသု, စိတ္တော, တာရန္တရေ ထိယံ. 'चित्त' शब्द विज्ञान (चेतना), चित्रकर्म और विचित्र के अर्थ में कहा जाता है; 'चित्त' (पुल्लिङ्ग) प्रज्ञप्ति और चैत्र मास के अर्थ में है, और 'चित्ता' (स्त्रीलिङ्ग) नक्षत्र विशेष के अर्थ में है। ၈၃၉. ८३९. သာမံ ဝေဒန္တရေ သာန္တွေ, တံ ပီတေ သာမလေ တိသု; သယမတ္ထေ ဗျယံ သာမံ, သာမာ စ သာရိဝါယပိ. 'साम' शब्द वेद विशेष और सान्त्वना के अर्थ में है; तीनों लिङ्गों में यह पीत और श्याम वर्ण के अर्थ में है; 'सामं' अव्यय स्वयं के अर्थ में है, और 'सामा' सारिवा (अनन्तमूल) के अर्थ में है। ၈၄၀. ८४०. ပုမေ အာစရိယာဒိမှိ, ဂရု မာတာပိတူသွပိ; ဂရု တီသု မဟန္တေ စ, ဒုဇ္ဇရာ’လဟုကေသု စ. 'गरु' (गुरु) शब्द पुल्लिङ्ग में आचार्य और माता-पिता के अर्थ में है; तीनों लिङ्गों में यह महान्, दुर्जर (कठिनाई से पचने वाला) और भारी के अर्थ में है। ၈၄၁. ८४१. အစ္စိတေ ဝိဇ္ဇမာနေ စ, ပသတ္ထေ သစ္စ သာဓုသု; ခိန္နေ စ သမိတေ စေဝ, သန္တောဘိဓေယျလိင်္ဂိကောတိ. 'सन्त' शब्द विशेषण के रूप में पूजित, विद्यमान, प्रशस्त, सत्य, साधु (सज्जन), खिन्न और शान्त के अर्थ में है। ဣတိ ဂါထာအနေကတ္ထဝဂ္ဂေါ. इस प्रकार गाथा-अनेकार्थ वर्ग समाप्त हुआ। ၈၄၂. ८४२. ဒေဝေါ ဝိသုဒ္ဓိဒေဝါ’ဒေါ, မေဃ မစ္စု နဘေသု စ; အထောပိ တရုဏေ သတ္တေ, စောရေပိ မာဏဝေါ ဘဝေ. 'देव' शब्द विशुद्धिदेव (अर्हत्) आदि, मेघ, मृत्यु और आकाश के अर्थ में है; तथा 'माणव' शब्द तरुण प्राणी और चोर के अर्थ में होता है। ၈၄၃. ८४३. အာဒိ ကောဋ္ဌာသ ကောဋီသု, ပုရတော’ဂ္ဂံဝရေ တီသု; ပစ္စနီကော’တ္တမေသွ’ညေ, ပစ္ဆာဘာဂေ ပရော တိသု. 'अग्ग' (अग्र) शब्द आदि, कोष्ठांश (भाग), कोटि (सिरा), सामने और श्रेष्ठ के अर्थ में है; 'पर' शब्द शत्रु, उत्तम, अन्य और पिछले भाग के अर्थ में है। ၈၄၄. ८४४. ယောနိ ကာမ သိရိ’ဿရေ, ဓမ္မု’ယျာမ ယသေ ဘဂံ; ဥဠာရော တီသု ဝိပုလေ, သေဋ္ဌေ စ မဓုရေ သိယာ. 'भग' शब्द योनि, काम, श्री (लक्ष्मी), ऐश्वर्य, धर्म, प्रयत्न और यश के अर्थ में है; 'उळार' (उदार) शब्द तीनों लिङ्गों में विपुल, श्रेष्ठ और मधुर के अर्थ में है। ၈၄၅. ८४५. သမ္ပန္နော တီသု သမ္ပုဏ္ဏေ, မဓုရေ စ သမင်္ဂိနိ; သင်္ခါ တု ဉာဏေ ကောဋ္ဌာသ, ပညတ္တိ ဂဏနေသု စ. 'सम्पन्न' शब्द तीनों लिङ्गों में सम्पूर्ण, मधुर और युक्त (समान्वित) के अर्थ में है; 'सङ्खा' (संख्या) शब्द ज्ञान, भाग, प्रज्ञप्ति और गणना के अर्थ में है। ၈၄၆. ८४६. ဌာနံ ဣဿရိယော’ကာသ, ဟေတူသု ဌိတိယမ္ပိ စ; အထော မာနေ ပကာရေစ, ကောဋ္ဌာသေစ ဝိဓော ဒွိသု. 'ठान' (स्थान) शब्द ऐश्वर्य, अवकाश, हेतु और स्थिति के अर्थ में है; तथा 'विध' शब्द मान (माप), प्रकार और भाग के अर्थ में दो लिङ्गों में है। ၈၄၇. ८४७. ပညော’ပဝါသ ခန္တီသု, ဒမော ဣန္ဒြိယသံဝရေ; ဉာဏေ စ သောမနဿေစ, ဝေဒေါ ဆန္ဒသိ စော’စ္စတေ. 'दम' शब्द प्रज्ञा, उपवास, क्षान्ति और इन्द्रिय-संयम के अर्थ में है; 'वेद' शब्द ज्ञान, सौमनस्य और छन्द (या वेद) के अर्थ में कहा जाता है। ၈၄၈. ८४८. ခန္ဓကောဋ္ဌာသ, ပဿာဝ, မဂ္ဂ, ဟေတူသု ယောနိ သာ ; ကာလေ တု ကူလေ သီမာယံ, ဝေလာ ရာသိမှိ ဘာသိတာ. 'योनि' शब्द स्कन्ध, भाग, प्रस्रव, मार्ग और हेतु के अर्थ में है; 'वेला' शब्द काल, तट, सीमा और राशि के अर्थ में कही गई है। ၈၄၉. ८४९. ဝေါဟာရော သဒ္ဒ ပဏ္ဏတ္တိ, ဝဏိဇ္ဇာ စေတနာသု စ; နာဂေါ တု’ရဂ ဟတ္ထီသု, နာဂရုက္ခေ တထု’တ္တမေ. 'वोहार' (व्यवहार) शब्द शब्द, प्रज्ञप्ति, वाणिज्य और चेतना के अर्थ में है; 'नाग' शब्द सर्प, हाथी, नागवृक्ष और उत्तम पुरुष के अर्थ में है। ၈၅၀. ८५०. သေဋ္ဌာ’သဟာယ သင်္ချာ’ည,တုလျေသွေ’ကောတိလိင်္ဂိကော; ရာဂေ တု မာနသော စိတ္တာ, ရဟတ္တေသု စ မာနသံ. 'एक' शब्द श्रेष्ठ, असहाय (अकेला), संख्या (एक), अन्य और तुल्य के अर्थ में विशेषण है; 'मानस' पुल्लिङ्ग में राग के अर्थ में है, और 'मानसं' नपुंसकलिङ्ग में चित्त और अर्हत्त्व के अर्थ में है। ၈၅၁. ८५१. မူလံ [Pg.71] ဘေ သန္တိကေ မူလ, မူလေ ဟေတုမှိ ပါဘတေ; ရူပါဒျံ’သ ပကဏ္ဍေသု, ခန္ဓော ရာသိ ဂုဏေသု စ. 'मूल' शब्द आधार, समीप, जड़, हेतु और प्राभृत (भेंट/पूँजी) के अर्थ में है; 'खन्ध' (स्कन्ध) शब्द रूपादि अंश, प्रकाण्ड (पेड़ का तना), कन्धा, राशि और गुणों के अर्थ में है। ၈၅၂. ८५२. အာရမ္ဘော ဝီရိယေ ကမ္မေ, အာဒိကမ္မေ ဝိကောပနေ; အထော ဟဒယဝတ္ထုမှိ, စိတ္တေ စ ဟဒယံ ဥရေ. 'आरम्भ' शब्द वीर्य, कर्म, आदिकर्म और विकोपन (क्षोभ) के अर्थ में है; तथा 'हदय' (हृदय) शब्द हृदय-वस्तु, चित्त और वक्ष (छाती) के अर्थ में है। ၈၅၃. ८५३. ပစ္ဆာတာပါ’နုဗန္ဓေသု, ရာဂါဒေါ’နုသယော ဘဝေ; မာတင်္ဂမုဒ္ဓပိဏ္ဍေ တု, ဃဋေ ကုမ္ဘော ဒသမ္ဗဏေ. 'अनुसय' शब्द पश्चाताप, अनुबन्ध और राग आदि के अर्थ में होता है; 'कुम्भ' शब्द हाथी के मस्तक के पिण्ड, घड़े और दस अम्मण के माप के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၈၅၄. ८५४. ပရိဝါရော ပရိဇနေ, ခဂ္ဂကောသေ ပရိစ္ဆဒေ; အာလမ္ဗရော တု သာရမ္ဘေ, ဘေရိဘေဒေ စ ဒိဿတိ. 'परिवार' शब्द परिजन, तलवार की म्यान और परिच्छद के अर्थ में होता है; 'आलम्बर' शब्द गर्व (सारम्भ) और भेरी के एक विशेष प्रकार के अर्थ में देखा जाता है। ၈၅၅. ८५५. ခဏော ကာလဝိသေသေ စ, နိဗျာပါရဋ္ဌိတိမှိ စ; ကုလေ တွ’ဘိဇနော ဝုတ္တော, ဥပ္ပတ္တိဘူမိယမ္ပိ စ. 'क्षण' शब्द काल विशेष और व्यापार रहित स्थिति के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'अभिजन' शब्द कुल और जन्मभूमि के अर्थ में कहा गया है। ၈၅၆. ८५६. အာဟာရော ကဗဠီကာရာ, ဟာရာဒီသု စ ကာရဏေ; ဝိဿာသေ ယာစနာယဉ္စ, ပေမေ စ ပဏယော မတော. 'आहार' शब्द कवलीकार (भोजन), हार आदि और कारण के अर्थ में होता है; 'पणय' शब्द विश्वास, याचना और प्रेम के अर्थ में माना गया है। ၈၅၇. ८५७. ဏာဒေါ သဒ္ဓါ, စီဝရာဒိ, ဟေတွာ’ဓာရေသု ပစ္စယော; ကီဠာ ဒိဗ္ဗဝိဟာရာဒေါ, ဝိဟာရော သုဂတာလယေ. 'प्रत्यय' शब्द ज्ञान, श्रद्धा, चीवर आदि, हेतु और आधार के अर्थ में होता है; 'विहार' शब्द क्रीड़ा, दिव्य विहार आदि और बुद्ध के निवास (मठ) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၈၅၈. ८५८. သမတ္ထနေ မတော စိတ္တေ, ကဂ္ဂတာယံ သမာဓိ စ; ယောဂေါ သင်္ဂတိ ကာမာဒေါ,ဈာနော’ပါယေသု ယုတ္တိယံ. 'समाधि' शब्द समर्थन और चित्त की एकाग्रता के अर्थ में माना गया है; 'योग' शब्द संगति, काम आदि, ध्यान, उपाय और युक्ति के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၈၅၉. ८५९. ဘောဂေါ သပ္ပဖဏ’င်္ဂေသု, ကောဋိလ္လေ ဘုဉ္ဇနေ ဓနေ; ဘူမိဘာဂေ ကိလေသေ စ, မလေ စာ’င်္ဂဏ မုစ္စတေ. 'भोग' शब्द सर्प के फण, कुटिलता, भोजन और धन के अर्थ में होता है; 'अङ्गण' शब्द भूमि के भाग, क्लेश और मल के अर्थ में कहा जाता है। ၈၆၀. ८६०. ဓနာဒိဒပ္ပေ ပညာယ, အဘိမာနော မတော ထ စ; အပဒေသော နိမိတ္တေ စ, ဆလေ စ ကထနေ မတော. 'अभिमान' शब्द धन आदि के गर्व और प्रज्ञा के अर्थ में माना गया है; 'अपदेश' शब्द निमित्त, छल और कथन के अर्थ में माना गया है। ၈၆၁. ८६१. စိတ္တေ ကာယေ သဘာဝေ စ, သော အတ္တာ ပရမ’တ္တနိ; အထ ဂုမ္ဗော စ ထမ္ဗသ္မိံ, သမူဟေ ဗလသဇ္ဇနေ. 'अत्ता' (आत्मा) शब्द चित्त, शरीर, स्वभाव और परमात्मा के अर्थ में होता है; 'गुम्ब' शब्द झाड़ी, समूह और सेना की व्यूह रचना के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၈၆၂. ८६२. အန္တောဃရေ ကုသူလေ စ, ကောဋ္ဌော န္တောကုစ္ဆိယံ ပျထ; သောပါနင်္ဂမှိ ဥဏှီသော, မကုဋေ သီသဝေဌနေ. 'कोठ' शब्द अन्तःगृह, अन्नागार (कोठिला) और पेट के भीतर के अर्थ में होता है; 'उष्णीष' शब्द सीढ़ी के अंग, मुकुट और पगड़ी के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၈၆၃. ८६३. နိယျာသေ သေခရေ ဒွါရေ, နိယျူဟော နာဂဒန္တကေ; အထော သိခဏ္ဍေ တူဏီရေ, ကလာပေါ နိကရေ မတော. 'निर्ह्यूह' शब्द निर्यास, शिखर, द्वार और खूँटी (नागदन्तक) के अर्थ में होता है; 'कलाप' शब्द मोर की पूँछ, तरकश और समूह के अर्थ में माना गया है। ၈၆၄. ८६४. စူဠာ သံယတကေသေသု, မကုဋေ မောဠိ စ ဒွိသု; သင်္ခေါ တွ’နိတ္ထိယံ ကမ္ဗု, နလာဋ’ဋ္ဌီသု ဂေါပ္ဖကေ. 'मौलि' शब्द बँधे हुए बालों (चूड़ा) और मुकुट इन दोनों अर्थों में होता है; 'शङ्ख' शब्द (पुल्लिंग/नपुंसक) शंख, ललाट की हड्डी और टखने के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၈၆၅. ८६५. ပက္ခော [Pg.72] ကာလေ ဗလေ သာဓျေ, သခီ ဝါဇေသု ပင်္ဂုလေ; ဒေသေ’ဏ္ဏဝေ ပုမေ သိန္ဓု, သရိတာယံ သ နာရိယံ. 'पक्ष' शब्द समय (पखवाड़ा), बल, साध्य, मित्र, पंख और पंगु के अर्थ में होता है; 'सिन्धु' शब्द पुल्लिंग में देश और समुद्र के अर्थ में, तथा स्त्रीलिंग में नदी के अर्थ में होता है। ၈၆၆. ८६६. ဂဇေ ကရေဏု ပုရိသေ, သော ဟတ္ထိနိယ မိတ္ထိယံ; ရတနေ ဝဇိရော နိတ္ထီ, မဏိဝေဓိ’န္ဒဟေတိသု. 'करेणु' शब्द पुल्लिंग में हाथी के लिए और स्त्रीलिंग में हथिनी के लिए प्रयुक्त होता है; 'वज्र' शब्द रत्न (हीरा), मणि को छेदने वाला और इन्द्र के शस्त्र के अर्थ में (पुल्लिंग/नपुंसक) होता है। ၈၆၇. ८६७. ဝိသာဏံ တီသု မာတင်္ဂ, ဒန္တေ စ ပသုသိင်္ဂကေ; ကောဋိယံ တု မတော ကောဏော, တထာ ဝါဒိတ္တဝါဒနေ. 'विषाण' शब्द (तीनों लिंगों में) हाथी के दाँत और पशु के सींग के अर्थ में होता है; 'कोण' शब्द कोने और वाद्य यंत्र बजाने के उपकरण के अर्थ में माना गया है। ၈၆၈. ८६८. ဝဏိပ္ပထေ စ နဂရေ, ဝေဒေ စ နိဂမော ထ စ; ဝိဝါဒါဒေါ’ ဓိကရဏံ, သိယာ’ဓာရေ စ ကာရဏေ. 'निगम' शब्द व्यापारिक मार्ग, नगर और वेद के अर्थ में होता है; 'अधिकरण' शब्द विवाद आदि, आधार और कारण के अर्थ में होता है। ၈၆၉. ८६९. ပသုမှိ ဝသုဓာယဉ္စ, ဝါစာဒေါ ဂေါ ပုမိတ္ထိယံ; ဟရိတေ တု သုဝဏ္ဏေ စ, ဝါသုဒေဝေ ဟရီ’ရိတော. 'गो' शब्द पशु, पृथ्वी और वाणी आदि के अर्थ में पुल्लिंग और स्त्रीलिंग में होता है; 'हरि' शब्द हरे रंग, सुवर्ण और वासुदेव के अर्थ में कहा गया है। ၈၇၀. ८७०. အာယတ္တေ ပရိဝါရေ စ, ဘရိယာယံ ပရိဂ္ဂဟော; ဥတ္တံသော တွ’ ဝတံသော စ, ကဏ္ဏပူရေ စ သေခရေ. 'परिग्रह' शब्द अधीन, परिवार और पत्नी के अर्थ में होता है; 'उत्तंस' और 'अवतंस' शब्द कान के आभूषण और शिखर के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। ၈၇၁. ८७१. ဝိဇ္ဇုယံ ဝဇိရေ စေဝါ, သနိ’တ္ထိပုရိသေ ပျထ; ကောဏေ သင်္ချာဝိသေသသ္မိံ, ဥက္ကံသေ ကောဋိ နာရိယံ. 'अशनि' शब्द स्त्रीलिंग और पुल्लिंग में बिजली और वज्र के अर्थ में होता है; 'कोटि' शब्द स्त्रीलिंग में कोने, एक विशेष संख्या (करोड़) और उत्कर्ष के अर्थ में होता है। ၈၇၂. ८७२. စူဠာ ဇာလာ ပဓာန’ဂ္ဂ, မောရစူဠာသု သာ သိခါ; သပ္ပဒါဌာယ မာသီ’တ္ထီ, ဣဋ္ဌဿာ’သီသနာယပိ. 'शिखा' शब्द चूड़ा, ज्वाला, प्रधान, अग्र भाग और मोर की कलगी के अर्थ में होता है; 'आसी' शब्द स्त्रीलिंग में सर्प के दाँत और इष्ट की प्रार्थना (आशीर्वाद) के अर्थ में होता है। ၈၇၃. ८७३. ဝသာ ဝိလီန တေလသ္မိံ, ဝသဂါ ဝဉ္ဈဂါဝိသု; အဘိလာသေ တု ကိရဏေ, အဘိသင်္ဂေ ရုစိ’တ္ထိယံ. 'वसा' शब्द पिघले हुए तेल और वश में रहने वाली बाँझ गाय आदि के अर्थ में होता है; 'रुचि' शब्द स्त्रीलिंग में अभिलाषा, किरण और आसक्ति के अर्थ में होता है। ၈၇၄. ८७४. သညာ သဉ္ဇာနနေ နာမေ, စေတနာယဉ္စ ဒိဿတိ; အံသေ သိပ္ပေ ကလာ ကာလေ, ဘာဂေ စန္ဒဿ သောဠသေ. 'संज्ञा' शब्द पहचान, नाम और चेतना के अर्थ में देखा जाता है; 'कला' शब्द अंश, शिल्प, काल और चन्द्रमा के सोलहवें भाग के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၈၇၅. ८७५. ဗီဇကောသေ ဃရကူဋေ, ကဏ္ဏဘူသာယ ကဏ္ဏိကာ; အာဂါမိကာလေ ဒီဃတ္တေ, ပဘာဝေ စ မတာ’ယတိ. 'कर्णिका' शब्द बीजकोश, घर के शिखर और कान के आभूषण के अर्थ में होता है; 'आयति' शब्द भविष्य काल, लम्बाई और प्रभाव के अर्थ में मानी गई है। ၈၇၆. ८७६. ဥဏ္ဏာ မေသာဒိလောမေ, စ, ဘူမဇ္ဈေ ရောမဓာတုယံ; ဝါရုဏီ တွိတ္ထိယံ ဝုတ္တာ, နဋ္ဋကီ မဒိရာဒိသု. 'ऊर्णा' शब्द भेड़ आदि के रोम और भौंहों के मध्य के रोम के अर्थ में होता है; 'वारुणी' शब्द स्त्रीलिंग में नर्तकी और मदिरा आदि के अर्थ में कही गई है। ၈၇၇. ८७७. ကြိယစိတ္တေ စ ကရဏေ, ကိရိယံ ကမ္မနိ ကြိယာ; သုနိသာယံ တု ကညာယ, ဇာယာယ စ ဝဓူ မတာ. 'क्रिया' शब्द क्रियाचित्त, करण और कर्म के अर्थ में होता है; 'वधू' शब्द पुत्रवधू, कन्या और पत्नी के अर्थ में मानी गई है। ၈၇၈. ८७८. ပမာဏိ’ဿရိယေ မတ္တာ, အက္ခရာဝယဝေ’ပ္ပကေ; သုတ္တံ ပါဝစနေ ရိဋ္ဌေ, တန္တေ တံ သုပိတေ တိသု. 'मात्रा' शब्द प्रमाण, ऐश्वर्य, अक्षर के अवयव और अल्प के अर्थ में होता है; 'सुत्त' (सूत्र) शब्द बुद्ध वचन, अनिष्ट, धागे और सोए हुए के अर्थ में तीनों लिंगों में होता है। ၈၇၉. ८७९. ရာဇလိင်္ဂေါ’သဘင်္ဂေသု, [Pg.73] ရုက္ခေ စ ကကုဒေါ ပျထ; နိမိတ္တ’က္ခရ သူပေသု, ဗျဉ္ဇနံ စိဟနေ ပဒေ. 'ककुद' शब्द राजचिह्न, बैल के कूबड़ और वृक्ष के अर्थ में होता है; 'व्यञ्जन' शब्द निमित्त, अक्षर, सूप (व्यंजन), चिह्न और पद के अर्थ में होता है। ၈၈၀. ८८०. ဝေါဟာရေ ဇေတု မိစ္ဆာယံ, ကီဠာဒေါ စာပိ ဒေဝနံ; ဘရိယာယံ တု ကေဒါရေ, သရီရေ ခေတ္တ မီရိတံ. 'देवन' शब्द व्यवहार, जीतने की इच्छा और क्रीड़ा आदि के अर्थ में होता है; 'खेत्त' (क्षेत्र) शब्द पत्नी, खेत और शरीर के अर्थ में कहा गया है। ၈၈၁. ८८१. သုဿူသာယဉ္စ ဝိညေယျံ, ဣဿာဘျာသေ ပျု’ပါသနံ; သူလံ တု နိတ္ထိယံ ဟေတိ, ဘေဒေ သံကု ရုဇာသု စ. 'उपासन' शब्द सेवा और धनुर्विद्या के अभ्यास के अर्थ में जानना चाहिए; 'सूल' शब्द (पुल्लिंग/नपुंसक) शस्त्र, भेद, शङ्कु और पीड़ा के अर्थ में होता है। ၈၈၂. ८८२. တန္တိ ဝီဏာဂုဏေ, တန္တံ, မုချသိဒ္ဓန္တ တန္တုသု; ရထာဒျင်္ဂေ တု စ ယုဂေါ, ကပ္ပမှိ ယုဂလေ ယုဂံ. 'तन्ति' शब्द वीणा के तार के अर्थ में और 'तन्त' (तन्त्र) शब्द मुख्य सिद्धान्त और धागे के अर्थ में होता है; 'युग' शब्द रथ आदि के अंग (जूआ), कल्प और जोड़े के अर्थ में होता है। ၈၈၃. ८८३. ဣတ္ထိပုပ္ဖေ စ ရေဏုမှိ, ရဇော ပကတိဇေ ဂုဏေ; နျာသပ္ပဏေ တု ဒါနမှိ, နိယျာတန မုဒီရိတံ. 'रजो' शब्द स्त्री-पुष्प (रजस्वला), पराग (रेणु) और प्रकृतिजन्य गुण (रजोगुण) के लिए प्रयुक्त होता है; 'निय्यातन' शब्द धरोहर लौटाने और दान के अर्थ में कहा गया है। ၈၈၄. ८८४. ဂရု’ပါယာ’ဝတာရေသု, တိတ္ထံ ပူတမ္ဗု ဒိဋ္ဌိသု; ပဏ္ဍကေ ဇောတိ နက္ခတ္တ, ရံသီသွ’ဂ္ဂိမှိ ဇောတိ သော. 'तित्थ' (तीर्थ) शब्द गुरु, उपाय, अवतार (घाट), पवित्र जल और दृष्टि (मत) के लिए प्रयुक्त होता है; 'जोति' (ज्योति) शब्द नक्षत्र (नपुंसक लिंग में), किरण और अग्नि (पुल्लिंग में) के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၈၅. ८८५. ကဏ္ဍော နိတ္ထီ သရေ ဒဏ္ဍေ, ဝဂ္ဂေ စာဝသရေ ပျထ; ဥဒ္ဓံဗာဟုဒွယမာနေ, သူရတ္တေပိ စ ပေါရိသံ. 'कण्ड' शब्द (स्त्रीलिंग को छोड़कर) बाण, दण्ड, वर्ग और अवसर के लिए प्रयुक्त होता है; 'पोरिस' शब्द दोनों भुजाओं को ऊपर उठाने की ऊँचाई की माप और शूरवीरता के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၈၆. ८८६. ဥဋ္ဌာနံ ပေါရိသေ’ဟာသု, နိသိန္နာဒျု’ဂ္ဂမေ ပျထ; အနိဿယမဟီဘာဂေ, တွိ’ရီဏံ ဦသရေ သိယာ. 'उट्ठान' (उत्थान) शब्द पुरुषार्थ (प्रयत्न), चेष्टा और बैठने आदि से उठने के लिए प्रयुक्त होता है; 'इरीण' शब्द आश्रयहीन भूमि और ऊसर (बंजर) भूमि के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၈၇. ८८७. အာရာဓနံ သာဓနေ စ, ပတ္တိယံ ပရိတောသနေ; ပဓာနေ တု စ သာနုမှိ, ဝိသာဏေ သိင်္ဂ မုစ္စတေ. 'आराधन' शब्द साधन (सिद्ध करना), प्राप्ति और परितोष (संतुष्ट करना) के लिए प्रयुक्त होता है; 'सिङ्ग' (शृंग) शब्द प्रधान, सानु (पर्वत का शिखर) और सींग के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၈၈. ८८८. ဒိဋ္ဌာ’ဒိမဂ္ဂေ ဉာဏ’က္ခိ, က္ခဏ လဒ္ဓီသု ဒဿနံ; ဟေမေ ပဉ္စသုဝဏ္ဏေ စ, နိက္ခော နိတ္ထီ ပသာဓနေ. 'दस्सन' (दर्शन) शब्द दर्शन-मार्ग, ज्ञान, आँख, क्षण और उपलब्धि (सिद्धांत) के लिए प्रयुक्त होता है; 'निक्ख' (निष्क्र) शब्द (स्त्रीलिंग को छोड़कर) स्वर्ण, पाँच सुवर्ण के भार और आभूषण के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၈၉. ८८९. တိထိဘေဒေ စ သာခါဒိ, ဖဠုမှိ ပဗ္ဗ မုစ္စတေ; နာဂလောကေ တု ပါတာလံ, ဘာသိတံ ဗလဝါမုခေ. 'पब्ब' (पर्व) शब्द तिथि-भेद और शाखा आदि की गाँठ (पोर) के लिए प्रयुक्त होता है; 'पाताल' शब्द नागलोक और बड़वामुख (समुद्र की अग्नि का मुख) के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၀. ८९०. ကာမဇေ ကောပဇေ ဒေါသေ, ဗျသနဉ္စ ဝိပတ္တိယံ; အထော’ပကရဏေ သိဒ္ဓိ, ကာရကေသု စ သာဓနံ. 'ब्यसन' (व्यसन) शब्द काम और क्रोध से उत्पन्न दोष तथा विपत्ति के लिए प्रयुक्त होता है; 'साधन' शब्द उपकरण, सिद्धि और कारकों के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၁. ८९१. တီသွီရိတော ဒါနသီလေ, ဝဒညူ ဝဂ္ဂုဝါဒိနိ; ပုရက္ခတော ဘိသိတ္တေ စ, ပူဇိတေ ပုရတောကတေ. 'वदञ्ञू' (वदान्य) शब्द दानशील और मधुरभाषी के लिए तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है; 'पुरक्खत' (पुरस्कृत) शब्द अभिषिक्त, पूजित और आगे किए गए के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၂. ८९२. မန္ဒော ဘာဂျဝိဟီနေ စာ, ပ္ပကေ မူဠှာ’ပဋူသွပိ; ဝုဒ္ဓိယုတ္တေ သမုန္နဒ္ဓေ, ဥပ္ပန္နေ ဥဿိတံ ဘဝေ. 'मन्द' शब्द भाग्यहीन, अल्प, मूढ़ और अकुशल के लिए प्रयुक्त होता है; 'उस्सित' (उच्छ्रित) शब्द वृद्धि-युक्त, उन्नत (अभिमानी) और उत्पन्न के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၃. ८९३. ရထင်္ဂေ’က္ခော [Pg.74] သုဝဏ္ဏသ္မိံ, ပါသကေ, အက္ခ မိန္ဒြိယေ; သဿတေ စ ဓုဝေါ တီသု, ဓုဝံ တက္ကေ စ နိစ္ဆိတေ. 'अक्ख' (अक्ष) शब्द रथ के अंग (धुरी), सुवर्ण (एक तौल), पासा और इन्द्रिय के लिए प्रयुक्त होता है; 'धुव' (ध्रुव) शब्द शाश्वत (तीनों लिंगों में), तर्क और निश्चित (नपुंसक लिंग में) के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၄. ८९४. ဟရေ သိဝေါ, သိဝံ ဘဒ္ဒ, မောက္ခေသု, ဇမ္ဗုကေ သိဝါ; သေနာယံ သတ္တိယဉ္စေဝ, ထူလတ္တေ စ ဗလံ ဘဝေ. 'सिव' (शिव) शब्द हर (महादेव) के लिए, 'सिवं' कल्याण और मोक्ष के लिए, तथा 'सिवा' सियारिन के लिए प्रयुक्त होता है; 'बल' शब्द सेना, शक्ति और स्थूलता (मोटाई) के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၅. ८९५. သင်္ချာ နရကဘေဒေသု, ပဒုမံ ဝါရိဇေ ပျထ; ဒေဝဘေဒေ ဝသု ပုမေ, ပဏ္ဍကံ ရတနေ ဓနေ. 'पदुम' (पद्म) शब्द एक संख्या, नरक के एक भेद और कमल के लिए प्रयुक्त होता है; 'वसु' शब्द देव-विशेष (पुल्लिंग में), रत्न और धन (नपुंसक लिंग में) के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၆. ८९६. နိဗ္ဗာနံ အတ္ထဂမနေ, အပဝဂ္ဂေ သိယာ ထ စ; သေတမ္ဗုဇေ ပုဏ္ဍရီကံ, ဗျဂ္ဃေ ရုက္ခန္တရေ ပုမေ. 'निब्बान' (निर्वाण) शब्द अस्त होने और मोक्ष के लिए प्रयुक्त होता है; 'पुण्डरीक' शब्द श्वेत कमल, व्याघ्र (बाघ) और वृक्ष-विशेष (पुल्लिंग में) के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၇. ८९७. ဥပဟာရေ ဗလိ ပုမေ, ကရသ္မိံစာ’သုရန္တရေ; သုက္ကံ တု သမ္ဘဝေ, သုက္ကော, ဓဝလေ, ကုသလေ တိသု. 'बलि' शब्द उपहार (भेंट), कर (टैक्स) और असुर-विशेष के लिए पुल्लिंग में प्रयुक्त होता है; 'सुक्क' (शुक्र) शब्द वीर्य (नपुंसक लिंग में), श्वेत और कुशल (पुण्य) के लिए तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၈၉၈. ८९८. ဒါယော ဒါနေ ဝိဘတ္တဗ္ဗ, ဓနေ စ ပိတုနံ ဝနေ ; ပဘုတ္တာ’ယတ္တတာ’ယတ္တာ’, ဘိလာသေသု ဝသော ဘဝေ. 'दाय' शब्द दान, पैतृक धन (विभाज्य धन) और वन के लिए प्रयुक्त होता है; 'वस' (वश) शब्द प्रभुत्व, अधीनता और अभिलाषा के लिए प्रयुक्त होता है। ၈၉၉. ८९९. ပရိဘာသန မက္ကောသေ, နိယမေ ဘာသနေ ထ စ,ဓနမှိ သေဠနံ ယောဓ, သီဟနာဒမှိ ဒိဿတိ. 'परिभासन' शब्द आक्रोश (गाली), नियम और भाषण के लिए प्रयुक्त होता है; 'सेळन' शब्द धन और योद्धा के सिंहनाद के लिए देखा जाता है। ၉၀၀. ९००. ပဘဝေါ ဇာတိဟေတုမှိ, ဌာနေ စာဒျုပလဒ္ဓိယံ; အထော’တု နာရိပုပ္ဖသ္မိံ, ဟေမန္တာဒိမှိ စ ဒွိသု. 'पभव' (प्रभव) शब्द जन्म के हेतु (कारण), स्थान और प्रथम उपलब्धि (उत्पत्ति स्थल) के लिए प्रयुक्त होता है; 'उतु' (ऋतु) शब्द स्त्री-पुष्प (रज) और हेमन्त आदि ऋतुओं के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၀၁. ९०१. ကရဏံ သာဓကတမေ, ကြိယာ ဂတ္တေသု ဣန္ဒြိယေ; တာတော တု ကုဉ္စိကာယဉ္စ, တူရိယင်္ဂေ ဒုမန္တရေ. 'करण' शब्द साधकतम (साधन), क्रिया, शरीर के अंग और इन्द्रिय के लिए प्रयुक्त होता है; 'तात' शब्द कुञ्जी, वाद्ययंत्र के अंग और वृक्ष-विशेष के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၀၂. ९०२. ပုပ္ဖေ ဖလေ စ ပသဝေါ, ဥပ္ပာဒေ ဂဗ္ဘမောစနေ; ဂါယနေ ဂါယကေ အဿေ, ဂန္ဓဗ္ဗော ဒေဝတာန္တရေ. 'पसव' (प्रसव) शब्द पुष्प, फल, उत्पत्ति और गर्भमोचन (जन्म) के लिए प्रयुक्त होता है; 'गन्धब्ब' (गन्धर्व) शब्द गायन, गायक, अश्व और देव-विशेष के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၀၃. ९०३. ဝိနာ ပုပ္ဖံ ဖလဂ္ဂါဟိ, ရုက္ခေ ဝနပ္ပတိ; အာဟတေ ဟေမရဇတေ, ရူပိယံ ရဇတေပိ စ. 'वनप्पति' (वनस्पति) शब्द बिना फूल के फल देने वाले वृक्ष के लिए प्रयुक्त होता है; 'रूपिय' (रूप्य) शब्द आहत (मुद्रित) स्वर्ण-रजत और चाँदी के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၀၄. ९०४. ခဂါဒိဗန္ဓနေ ပါသော, ကေသပုဗ္ဗော စယေ ပျထ; တာရာ’က္ခိမဇ္ဈေ နက္ခတ္တေ, တာရော ဥစ္စတရဿရေ. 'पास' (पाश) शब्द पक्षी आदि को बाँधने के जाल और 'केस' आदि के बाद आने पर समूह के लिए प्रयुक्त होता है; 'तारा' शब्द आँख की पुतली और नक्षत्र के लिए, तथा 'तार' शब्द उच्च स्वर के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၀၅. ९०५. ပတ္တေ စ လောဟဘေဒသ္မိံ, ကံသော စတုကဟာပဏေ; မဇ္ဈိမော ဒေဟမဇ္ဈသ္မိံ, မဇ္ဈဘဝေ စ သော တိသု. 'कंस' (कांस्य) शब्द पात्र (बर्तन), धातु-विशेष (काँसा) और चार कहापण के लिए प्रयुक्त होता है; 'मज्झिम' (मध्यम) शब्द शरीर के मध्य (कमर) और मध्यवर्ती के लिए तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၉၀၆. ९०६. အာဝေသနံဘူတာဝေသေ, သိပ္ပသာလာ ဃရေသု စ; သောဘာ သမ္ပတ္တီသု သိရီ, လက္ခီတ္ထီ ဒေဝတာယ စ. 'आवेसन' (आवेशन) शब्द भूतावेश, शिल्पशाला (कार्यशाला) और घर के लिए प्रयुक्त होता है; 'सिरी' (श्री) शब्द शोभा, सम्पत्ति, लक्ष्मी और स्त्री देवता के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၀၇. ९०७. ကုမာရော [Pg.75] ယုဝရာဇေ စ, ခန္ဒေ ဝုတ္တော သုသုမှိ စ; အထာ’နိတ္ထီ ပဝါဠော စ, မဏိဘေဒေ တထာ’င်္ကုရေ. 'कुमार' शब्द युवराज, स्कन्द (कार्तिकेय) और बालक के लिए प्रयुक्त होता है; 'पवाळ' (प्रवाल) शब्द (स्त्रीलिंग को छोड़कर) मणि-विशेष (मूँगा) और अंकुर के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၀၈. ९०८. ပဏော ဝေတန မူလေသု, ဝေါဟာရေ စ ဓနေ မတော; ပဋိဂ္ဂဟော တု ဂဟဏေ, ကထိတော ဘာဇနန္တရေ. 'पण' शब्द वेतन, मूल्य, व्यवहार (व्यापार) और धन के लिए माना गया है; 'पटिग्गह' (प्रतिग्रह) शब्द ग्रहण करने और पात्र-विशेष (पीकदान आदि) के लिए कहा गया है। ၉၀၉. ९०९. အသုဘေ စ သုဘေ ကမ္မေ, ဘာဂျံ ဝုတ္တံ ဒွယေ ပျထ; ပိပ္ဖလံ တရုဘေဒေ စ, ဝတ္ထစ္ဆေဒနသတ္ထကေ. 'भाग्य' शब्द अशुभ और शुभ दोनों प्रकार के कर्मों के लिए कहा गया है; 'पिप्फल' शब्द वृक्ष-विशेष (पीपल) और वस्त्र काटने के शस्त्र (कैंची) के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၁၀. ९१०. အပဝဂ္ဂေါ ပရိစ္စာဂါ’, ဝသာနေသု ဝိမုတ္တိယံ; လိင်္ဂံ တု အင်္ဂဇာတသ္မိံ, ပုမတ္တာဒိမှိ လက္ခဏေ. 'अपवग्ग' (अपवर्ग) शब्द त्याग, समाप्ति और विमुक्ति (मोक्ष) के लिए प्रयुक्त होता है; 'लिङ्ग' शब्द जननेन्द्रिय, पुंस्त्व आदि (लिंग) और लक्षण (चिह्न) के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၁၁. ९११. စာဂေ သဘာဝေ နိမ္မာနေ, သဂ္ဂေါ ဇ္ဈာယေ ဒိဝေပျထ; ရောဟိတော လောဟိတေ မစ္ဆ, ဘေဒေ စေဝ မိဂန္တရေ. 'सग्ग' (सर्ग) शब्द त्याग, स्वभाव, निर्माण, अध्याय और स्वर्ग के लिए प्रयुक्त होता है; 'रोहित' शब्द लाल रंग, मछली के एक भेद और मृग-विशेष के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၁၂. ९१२. နိဋ္ဌာ နိပ္ဖတ္တိယံ စေဝါ, ဝသာနမှိ အဒဿနေ; ကဏ္ဋကော တု သပတ္တသ္မိံ, ရုက္ခင်္ဂေ လောမဟံသနေ. 'निट्ठा' (निष्ठा) शब्द निष्पत्ति (पूर्णता), समाप्ति और अदर्शन (मृत्यु) के लिए प्रयुक्त होता है; 'कण्टक' शब्द शत्रु, वृक्ष के अंग (काँटा) और रोमांच (रोंगटे खड़े होना) के लिए प्रयुक्त होता है। ၉၁၃. ९१३. မုချော’ပါယေသု ဝဒနေ, အာဒိသ္မိံ မုခ မီရိတံ; ဒဗ္ဗံ ဘဗ္ဗေ ဂုဏာဓာရေ, ဝိတ္တေ စ ဗုဓ ဒါရုသု. 'मुख' शब्द मुख्य, उपाय, मुख (चेहरा) और आदि के अर्थ में कहा गया है। 'दब्ब' (द्रव्य) शब्द भव्य (योग्य), गुणों के आधार, धन और काष्ठ (लकड़ी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၁၄. ९१४. မာနံ ပမာဏေ ပတ္ထာဒေါ, မာနော ဝုတ္တော ဝိဓာယ စ; အထော ပရိဿမေ ဝုတ္တော, ဝါယာမော ဝီရိယေပိ စ. 'मान' शब्द प्रमाण और अभिमान के अर्थ में कहा गया है। 'व्यायाम' शब्द परिश्रम और वीर्य (उत्साह) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၁၅. ९१५. သရောရုဟေ သတပတ္တံ, သတပတ္တော ခဂန္တရေ; ဆိဒ္ဒေ တု ဆိဒ္ဒဝန္တေ စ, သုသိရံ တူရိယန္တရေ. 'शतपत्त' शब्द कमल और पक्षी विशेष के अर्थ में है। 'सुसिर' शब्द छिद्र, छिद्रयुक्त और वाद्य यंत्र विशेष के अर्थ में है। ၉၁၆. ९१६. ဧကသ္မိံ သဒိသေ သန္တေ, သမာနံ ဝါစ္စလိင်္ဂိကံ; အထော ဂါရဝ ဘီတီသု, သံဝေဂေ သမ္ဘမော မတော. 'समान' शब्द एक, सदृश और विद्यमान के अर्थ में (तीनों लिंगों में) प्रयुक्त होता है। 'सम्भ्रम' शब्द गौरव (आदर), भय और संवेग के अर्थ में माना गया है। ၉၁၇. ९१७. ဇုဏှာ စန္ဒပ္ပဘာယဉ္စ, တဒုပေတနိသာယ စ; ဝိမာနံ ဒေဝတာဝါသေ, သတ္တဘူမိဃရမှိ စ. 'जुण्हा' (ज्योत्स्ना) शब्द चन्द्रप्रभा और चाँदनी रात के अर्थ में है। 'विमान' शब्द देवताओं के आवास और सात मंजिला घर के अर्थ में है। ၉၁၈. ९१८. မာသေ ဇေဋ္ဌော, တိဝုဒ္ဓါ’တိ, ပ္ပသတ္ထေသု စ တီသု သော; ဓမ္မေ စ မင်္ဂလေ သေယျော, သော ပသတ္ထတရေ တိသု. 'जेठ' शब्द मास विशेष, अति वृद्ध और प्रशस्त (श्रेष्ठ) के अर्थ में है। 'सेय्य' (श्रेय) शब्द धर्म, मंगल और श्रेष्ठतर के अर्थ में है। ၉၁၉. ९१९. အာဒိစ္စာဒိမှိ ဂဟဏေ, နိဗန္ဓေ စ ဃရေ ဂဟော; ကာစော တု မတ္တိကာဘေဒေ, သိက္ကာယံ နယနာမယေ. 'गह' (ग्रह) शब्द सूर्य आदि के ग्रहण, निबन्ध और घर के अर्थ में है। 'काच' शब्द मृत्तिका विशेष (काँच), शिक्य (छींका) और नेत्र रोग के अर्थ में है। ၉၂၀. ९२०. တီသု ဂါမဏိ သေဋ္ဌသ္မိံ, အဓိပေ ဂါမဇေဋ္ဌကေ; ဗိမ္ဗံ တု ပဋိဗိမ္ဗေ စ, မဏ္ဍလေ ဗိမ္ဗိကာဖလေ. 'गामणी' शब्द श्रेष्ठ, अधिपति और ग्राम-प्रमुख के अर्थ में है। 'बिम्ब' शब्द प्रतिबिम्ब, मण्डल और बिम्बाफल के अर्थ में है। ၉၂၁. ९२१. ဘာဇနာဒိ ပရိက္ခာရေ, ဘဏ္ဍံ မူလဓနေပိ စ; မဂ္ဂေါ တွရိယမဂ္ဂေ စ, သမ္မာဒိဋ္ဌာဒိကေ, ပထေ. 'भण्ड' शब्द पात्र आदि परिष्कार (सामान) और मूलधन के अर्थ में है। 'मग्ग' (मार्ग) शब्द आर्यमार्ग (सम्यग्दृष्टि आदि) और पथ के अर्थ में है। ၉၂၂. ९२२. သမာ [Pg.76] ဝဿေ, သမော ခေဒ, သန္တီသု, သော နိဘေ တိသု; စာပေတွိဿာသ, မုသုနော, ဣဿာသော ခေပကမှိ စ. 'समा' शब्द वर्ष के अर्थ में है। 'सम' शब्द खेद (थकान), शान्ति और सदृश के अर्थ में है। 'इस्सास' शब्द धनुष, बाण और धनुर्धर के अर्थ में है। ၉၂၃. ९२३. ဗာလော တီသွာ’ဒိဝယသာ, သမင်္ဂိနိ အပဏ္ဍိတေ; ရတ္တံ တု သောဏိတေ, တမ္ဗာ, နုရတ္တ, ရဉ္ဇိတေ တိသု. 'बाल' शब्द प्रथम अवस्था (बालक) और मूर्ख के अर्थ में है। 'रत्त' (रक्त) शब्द रक्त (खून), ताम्रवर्ण, अनुरक्त और रंजित के अर्थ में है। ၉၂၄. ९२४. တစေ ကာယေ စ တနွိတ္ထီ, တီသွ’ပ္ပေ ဝိရဠေ ကိသေ; ဥတုဘေဒေ တု သိသိရော, ဟိမေ သော သီတလေ တိသု. 'तनू' शब्द त्वचा, शरीर, स्त्री, अल्प, विरल और कृश के अर्थ में है। 'सिसिर' शब्द ऋतु विशेष, हिम और शीतल के अर्थ में है। ၉၂၅. ९२५. သက္ခရာ ဂုဠဘေဒေ စ, ကထလေပိ စ ဒိဿတိ; အနုဂ္ဂဟေ တု သင်္ခေပေ, ဂဟဏေ သင်္ဂဟော မတော. 'सक्खरा' (शर्करा) शब्द गुड़ के भेद (चीनी) और कंकड़ के अर्थ में देखा जाता है। 'संगह' (संग्रह) शब्द अनुग्रह, संक्षेप और ग्रहण के अर्थ में माना गया है। ၉၂၆. ९२६. ဒက္ခေ စ တိခိဏေ ဗျတ္တေ, ရောဂမုတ္တေ ပဋုတ္တိသု; ရာဇာ တု ခတ္တိယေ ဝုတ္တော, နရနာထေ ပဘုမှိ စ. 'पटु' शब्द दक्ष, तीक्ष्ण, व्यक्त (चतुर) और रोगमुक्त के अर्थ में है। 'राजा' शब्द क्षत्रिय, नरनाथ और प्रभु के अर्थ में कहा गया है। ၉၂၇. ९२७. ခလဉ္စ ဓညကရဏေ, ကက္ကေ နီစေ ခလော ဘဝေ; အထု’ပ္ပာဒေ သမုဒယော, သမူဟေ ပစ္စယေပိ စ. 'खल' शब्द खलिहान, कल्क (मैल) और नीच के अर्थ में होता है। 'समुदय' शब्द उत्पत्ति, समूह और प्रत्यय (कारण) के अर्थ में है। ၉၂၈. ९२८. ဗြဟ္မစာရီ ဂဟဋ္ဌာဒေါ, အဿမော စ တပေါဝနေ; ဘယင်္ကရေ တု ကဌိနေ, ကုရူရော တီသု နိဒ္ဒယေ. 'अस्सम' (आश्रम) शब्द ब्रह्मचारी-गृहस्थ आदि अवस्थाओं और तपोवन के अर्थ में है। 'कुरूर' (क्रूर) शब्द भयंकर, कठिन और निर्दयी के अर्थ में है। ၉၂၉. ९२९. ကနိဋ္ဌော ကနိယော တီသု, အတျပ္ပေ’တိယုဝေ ပျထ; သီဃမှိ လဟု တံ, ဣဋ္ဌ, နိဿာရာ’ဂရုသုတ္တိသု. 'कनिट्ठ' और 'कनिय' शब्द अति अल्प और अति युवा के अर्थ में हैं। 'लहु' (लघु) शब्द शीघ्र, इष्ट, निस्सार, हल्का और लघु स्वर के अर्थ में है। ၉၃၀. ९३०. အဓရော တီသွဓော ဟီနေ, ပုမေ ဒန္တစ္ဆဒေ ပျထ; သုဿုသာ သောတု မိစ္ဆာယ, သာ ပါရိစရိယာယ စ. 'अधर' शब्द अधः (नीचे), हीन और ओष्ठ के अर्थ में है। 'सुस्सूसा' (शुश्रूषा) शब्द सुनने की इच्छा और सेवा के अर्थ में है। ၉၃၁. ९३१. ဟတ္ထော ပါဏိမှိ ရတနေ, ဂဏေ သောဏ္ဍာယ ဘန္တရေ; အာဝါဋေ ဥဒပါနေ စ, ကူပေါ ကုမ္ဘေ စ ဒိဿတိ. 'हत्थ' (हस्त) शब्द हाथ, रति (नाप), गण और हाथी की सूँड़ के अर्थ में है। 'कूप' शब्द गड्ढा, कुआँ और कुम्भ के अर्थ में देखा जाता है। ၉၃၂. ९३२. အာဒေါ ပဓာနေ ပဌမံ, ပမုခဉ္စ တိလိင်္ဂိကံ; ဝဇ္ဇဘေဒေ စ ဝိတ တံ, တံ ဝိတ္ထာရေ တိလိင်္ဂိကံ. 'पठम' (प्रथम) और 'पमुख' (प्रमुख) शब्द आदि और प्रधान के अर्थ में हैं। 'वितत' शब्द वाद्य विशेष और विस्तार के अर्थ में है। ၉၃၃. ९३३. သာရော ဗလေ ထိရံသေ စ, ဥတ္တမေ သော တိလိင်္ဂိကော; ဘာရော တု ခန္ဓဘာရာဒေါ, ဒွိသဟဿပလေပိ စ. 'सार' शब्द बल, स्थिर अंश (मज्जा) और उत्तम के अर्थ में है। 'भार' शब्द स्कन्ध-भार (बोझ) और दो हजार पल के वजन के अर्थ में है। ၉၃၄. ९३४. မန္ဒိရေ ရောဂဘေဒေ စ, ခယော အပစယမှိ စ; ဝါဠော တု သာပဒေ သပ္ပေ, ကုရူရေ သော တိလိင်္ဂိကော. 'खय' (क्षय) शब्द मन्दिर (निवास), रोग विशेष और अपचय (नाश) के अर्थ में है। 'वाळ' (व्याल) शब्द हिंसक पशु, सर्प और क्रूर के अर्थ में है। ၉၃၅. ९३५. သာလော သဇ္ဇဒ္ဒုမေ ရုက္ခေ, သာလာဂေဟေ စ ဒိဿတိ; သောတေ တု သဝနံ ဝုတ္တံ, ယဇနေ သုတိယမ္ပိ စ. 'साल' शब्द साल वृक्ष, वृक्ष और शाला (घर) के अर्थ में देखा जाता है। 'सवन' शब्द कान, यज्ञ और श्रवण के अर्थ में कहा गया है। ၉၃၆. ९३६. တီသု ပတော ပရေတော စ, မတေ စ ပေတယောနိဇေ; ချာတေ တု ဟဋ္ဌေ ဝိညာတေ, ပတီတံ ဝါစ္စလိင်္ဂိကံ. 'पेत' (प्रेत) शब्द मृत और प्रेतयोनि में उत्पन्न के अर्थ में है। 'पतीत' (प्रतीत) शब्द ख्यात, हर्षित और विज्ञात के अर्थ में है। ၉၃၇. ९३७. အဓိပ္ပာယေ [Pg.77] စ အာဓာရေ, အာသယော ကထိတော ထ စ; ပတ္တံ ပက္ခေ ဒလေ, ပတ္တော, ဘာဇနေ သော ဂတေ တိသု. 'आसय' (आशय) शब्द अभिप्राय और आधार के अर्थ में कहा गया है। 'पत्त' (पत्र/पात्र) शब्द पंख, दल (पत्ता), पात्र और प्राप्त (गया हुआ) के अर्थ में है। ၉၃၈. ९३८. ကုသလေ သုကတံ, သုဋ္ဌု, ကတေ စ သုကတော တိသု; တပဿီ တွ’နုကမ္ပာယာ, ရဟေ ဝုတ္တော တပေါဓနေ. 'सुकत' (सुकृत) शब्द कुशल (पुण्य) और सुष्ठु कृत (अच्छी तरह किया हुआ) के अर्थ में है। 'तपस्सी' (तपस्वी) शब्द अनुकम्पा (बेचारा) और तपस्वी (मुनि) के अर्थ में कहा गया है। ၉၃၉. ९३९. တီသု သုရာဒိလောလသ္မိံ, သောဏ္ဍော ဟတ္ထိကရေ ဒွိသု; အဿာဒနေ တု ရသနံ, ဇိဝှာယဉ္စ ဓနိမှိ စ. 'सोण्ड' (शौण्ड) शब्द मदिरा आदि में लोलुप और हाथी की सूँड़ के अर्थ में है। 'रसन' शब्द आस्वादन, जिह्वा और ध्वनि के अर्थ में है। ၉၄၀. ९४०. ပဏီတော တီသု မဓုရေ, ဥတ္တမေ ဝိဟိတေ ပျထ; အဉ္ဇသေ ဝိသိခါယဉ္စ, ပန္တိယံ ဝီထိ နာရိယံ. 'पणीत' (प्रणीत) शब्द मधुर, उत्तम और विहित (रचित) के अर्थ में है। 'वीथि' शब्द मार्ग, गली, पंक्ति और स्त्री के अर्थ में है। ၉၄၁. ९४१. ပါပသ္မိံ ဂဂနေ ဒုက္ခေ, ဗျသနေ စာ’ဃ မုစ္စတေ; သမူဟေ ပဋလံ နေတ္တ, ရောဂေ ဝုတ္တံ ဆဒိမှိ စ. 'अघ' शब्द पाप, आकाश, दुःख और व्यसन के अर्थ में कहा जाता है। 'पटल' शब्द समूह, नेत्र-रोग और छदि (छत/आवरण) के अर्थ में कहा गया है। ၉၄၂. ९४२. သန္ဓိ သံဃဋ္ဋနေ ဝုတ္တော, သန္ဓိ’တ္ထိ ပဋိသန္ဓိယံ; သတ္တန္နံ ပူရဏေ သေဋ္ဌေ, တိသန္တေ သတ္တမော တိသု. 'सन्धि' शब्द संघट्टन (जोड़) और प्रतिसन्धि के अर्थ में कहा गया है। 'सत्तम' (सप्तम) शब्द सात की संख्या को पूरा करने वाला और श्रेष्ठ के अर्थ में है। ၉၄၃. ९४३. ဩဇာ တု ယာပနာယဉ္စ, ဩဇော ဒိတ္တိ ဗလေသု စ; အထော နိသာမနံ ဝုတ္တံ, ဒဿနေ သဝနေပိ စ. 'ओजा' (ojā) शब्द जीवन-निर्वाह (यापन) के अर्थ में, और 'ओज' (ojo) दीप्ति तथा बल के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'निसामन' (nisāmana) शब्द दर्शन और श्रवण के अर्थ में कहा गया है। ၉၄၄. ९४४. ဂဗ္ဘော ကုစ္ဆိဋ္ဌသတ္တေ စ, ကုစ္ဆိ ဩဝရကေသု စ; ခဏ္ဍနေ တွ’ပဒါနဉ္စ, ဣတိဝုတ္တေ စ ကမ္မနိ. 'गब्भ' (gabbho) शब्द कोख में स्थित प्राणी (गर्भ), कोख (कुक्षि) और भीतरी कक्ष (ओवरक) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'अपदान' (apadāna) शब्द खण्डन, इतिवृत्त (कथा) और कर्म के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၄၅. ९४५. စိတ္တကေ ရုက္ခဘေဒေ စ, တိလကော တိလကာဠကေ; သီလာဒေါ ပဋိပတ္တိ’တ္ထီ, ဗောဓေ ပတ္တိ ပဝတ္တိသု. 'तिलक' (tilako) शब्द वृक्ष विशेष और तिल (मस्से) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'पटिपत्ति' (paṭipatti) शब्द शील आदि के अर्थ में स्त्रीलिंग है। 'पत्ति' (patti) शब्द बोध (ज्ञान) और प्रवृत्ति (होने) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၄၆. ९४६. အသုမှိ စ ဗလေ ပါဏော, သတ္တေ ဟဒယဂါ’နိလေ; ဆန္ဒော ဝသေ အဓိပ္ပာယေ, ဝေဒေ’စ္ဆာ’နုဋ္ဌုဘာဒိသု. 'पाण' (pāṇo) शब्द प्राण (असु), बल, प्राणी और हृदय स्थित वायु के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'छन्द' (chando) शब्द वश, अभिप्राय, वेद, इच्छा और अनुष्टुप आदि छन्दों के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၄၇. ९४७. ကာမောဃာဒေါ, သမူဟသ္မိံ, ဩဃောဝေဂေ ဇလဿ စ; ကပါလံ သိရသဋ္ဌိမှိ, ဃဋာဒိ သကလေပိ စ. 'ओघ' (ogho) शब्द कामादि ओघ, समूह और जल के वेग के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'कपाल' (kapālaṃ) शब्द सिर की हड्डी (कपाल) और घड़े आदि के टुकड़ों के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၄၈. ९४८. ဝေဏွာဒိသာခါဇာလသ္မိံ, လဂ္ဂကေသေ ဇဋာ’လယေ; သရဏံ တု ဝဓေ ဂေဟေ, ရက္ခိတသ္မိဉ္စ ရက္ခဏေ. 'जटा' (jaṭā) शब्द बाँस आदि की शाखाओं के समूह, उलझे हुए बाल और घर के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'सरण' (saraṇaṃ) शब्द वध, घर, रक्षित और रक्षण के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၄၉. ९४९. ထိယံ ကန္တာ ပိယေ, ကန္တော, မနုညေ, သော တိလိင်္ဂိကော; ဂဝက္ခေ တု သမူဟေ စ, ဇာလံ မစ္ဆာဒိဗန္ဓနေ. 'कान्ता' (kantā) शब्द प्रिया के अर्थ में स्त्रीलिंग है; 'कान्त' (kanto) शब्द मनोज्ञ के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। 'जाल' (jālaṃ) शब्द गवाक्ष (खिड़की), समूह और मछली आदि पकड़ने के जाल के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၅၀. ९५०. ပုစ္ဆာယံ ဂရဟာယဉ္စာ, နိယမေ ကိံ တိလိင်္ဂိကံ; သသဒ္ဓေ တီသု နိဝါပေ, သဒ္ဓံ, သဒ္ဓါ စ ပစ္စယေ. 'किं' (kiṃ) शब्द प्रश्न, निन्दा और नियम के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। 'सद्ध' (saddhaṃ) शब्द श्रद्धावान के अर्थ में तीनों लिंगों में और पितृदान (निवाप) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'सद्धा' (saddhā) शब्द विश्वास (प्रत्यय) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၅၁. ९५१. ဗီဇံ [Pg.78] ဟေတုမှိ အဋ္ဌိသ္မိံ, အင်္ဂဇာတေ စ ဒိဿတိ; ပုဗ္ဗော ပူယေ’ဂ္ဂတော အာဒေါ,သော ဒိသာဒေါ တိလိင်္ဂိကော. 'बीज' (bījaṃ) शब्द हेतु, गुठली (अस्थि) और जननेन्द्रिय के अर्थ में देखा जाता है। 'पुब्ब' (pubbo) शब्द पीप (पूय) के अर्थ में, और दिशा (पूर्व), अग्र तथा आदि के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၉၅၂. ९५२. ဖလစိတ္တေ ဟေတုကတေ, လာဘေ ဓညာဒိကေ ဖလံ; အာဂမနေ တု ဒီဃာဒိ, နိကာယေသု စ အာဂမော. 'फल' (phalaṃ) शब्द फल-चित्त, हेतु-जन्य कार्य, लाभ और धान्य आदि के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'आगम' (āgamo) शब्द आगमन, दीर्घ आदि (व्याकरण) और निकायों (शास्त्रों) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၅၃. ९५३. သန္တာနော ဒေဝရုက္ခေ စ, ဝုတ္တော သန္တတိယံ ပျထ; ဥတ္တရဝိပရီတေ စ, သေဋ္ဌေ စာ’နုတ္တရံ တိသု. 'सन्तान' (santāno) शब्द कल्पवृक्ष और सन्तति (निरन्तरता) के अर्थ में कहा गया है। 'अनुत्तर' (anuttaraṃ) शब्द उत्तर दिशा के विपरीत (दक्षिण) और श्रेष्ठ के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၉၅၄. ९५४. သတ္တိသမ္ပတ္တိယံ ဝုတ္တော, ကန္တိမတ္တေ စ ဝိက္ကမော; ဆာယာ တု အာတပါဘာဝေ, ပဋိဗိမ္ဗေ ပဘာယ စ. 'विक्रम' (vikkamo) शब्द शक्ति की सम्पन्नता और कान्ति मात्र के अर्थ में कहा गया है। 'छाया' (chāyā) शब्द धूप के अभाव, प्रतिबिम्ब और प्रभा (चमक) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၅၅. ९५५. ဂိမှေ ဃမ္မော နိဒါဃော စ, ဥဏှေ သေဒဇလေ ပျထ; ကပ္ပနံ ကန္တနေ ဝုတ္တံ, ဝိကပ္ပေ သဇ္ဇနေ’တ္ထိယံ. 'घम्म' (ghammo) और 'निदाघ' (nidāgho) शब्द ग्रीष्म ऋतु, उष्णता और पसीने के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। 'कप्पन' (kappanaṃ) शब्द कर्तन (काटने), विकल्प और सज्जा (तैयारी) के अर्थ में स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होता है। ၉၅၆. ९५६. အင်္ဂါ ဒေသေ ဗဟုမှ’င်္ဂံ, အင်္ဂေါ ဒေသေ ဝပုမှ’ တထာ’ဝယဝဟေတုသု; ဒေဝါလယေ စ ထူပသ္မိံ, စေတိယံ စေတိယ’ဒ္ဒုမေ. 'अङ्ग' (aṅgaṃ) शब्द अंग देश (बहुवचन में), शरीर, अवयव और हेतु के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'चेतिय' (cetiyaṃ) शब्द देवालय, स्तूप और पूजनीय वृक्ष के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၅၇. ९५७. သဇ္ဇနော သာဓုပုရိသေ, သဇ္ဇနံ ကပ္ပနေ ပျထ; သုပိနံ သုပိနေ သုတ္တ, ဝိညာဏေ တ မနိတ္ထိယံ. 'सज्जन' (sajjano) शब्द साधु पुरुष के अर्थ में और 'सज्जन' (sajjanaṃ) शब्द सज्जा (तैयारी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'सुपिन' (supinaṃ) शब्द स्वप्न और सुप्त-विज्ञान के अर्थ में नपुंसक लिंग है। ၉၅၈. ९५८. ပစ္စက္ခေ သန္နိဓာနေ စ, သန္နိဓိ ပရိကိတ္တိတော; ဘိယျော ဗဟုတရတ္ထေ သော, ပုနရတ္ထေ’ဗျယံ ဘဝေ. 'सन्निधि' (sannidhi) शब्द प्रत्यक्ष और सामीप्य के अर्थ में कहा गया है। 'भिय्यो' (bhiyyo) शब्द 'बहुत अधिक' के अर्थ में और 'पुनः' के अर्थ में अव्यय होता है। ၉၅၉. ९५९. ဝိသလိတ္တသရေ ဒိဒ္ဓေါ, ဒိဒ္ဓေါ လိတ္တေ တိလိင်္ဂိကော; ဝါသေ ဓူမာဒိသင်္ခါရေ, ဓိဝါသော သမ္ပဋိစ္ဆနေ. 'दिद्ध' (diddho) शब्द विष-लिप्त बाण के अर्थ में, और 'लिप्त' के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। 'अधिवास' (adhivāso) शब्द निवास, धूप आदि से सुगन्धित करने और स्वीकार करने के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၆၀. ९६०. ဝုတ္တော ဝိသာရဒေါ တီသု, သုပ္ပဂဗ္ဘေ စ ပဏ္ဍိတေ; အထ သိတ္ထံ မဓုစ္ဆိဋ္ဌေ, ဝုတ္တံ ဩဒနသမ္ဘဝေ. 'विसारद' (visārado) शब्द अत्यन्त प्रगल्भ (निपुण) और पण्डित के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। 'सित्थ' (sitthaṃ) शब्द मोम और भात के दाने के अर्थ में कहा गया है। ၉၆၁. ९६१. ဒြဝေ ဝဏ္ဏေ ရသဘေဒေ, ကသာယော သုရဘိမှိ စ; အထော ဥဂ္ဂမနံ ဝုတ္တံ, ဥပ္ပတ္တု’ဒ္ဓဂတီသု စ. 'कसाय' (kasāyo) शब्द द्रव, वर्ण, रस-विशेष और सुगन्ध के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'उग्गमन' (uggamanaṃ) शब्द उत्पत्ति और ऊर्ध्वगति के अर्थ में कहा गया है। ၉၆၂. ९६२. လူခေ နိဋ္ဌုရဝါစာယံ, ဖရုသံ ဝါစ္စလိင်္ဂိကံ; ပဝါဟော တွ’မ္ဗုဝေဂေ စ, သန္ဒိဿတိ ပဝတ္တိယံ. 'फरुस' (pharusaṃ) शब्द रूखे और निष्ठुर वाणी के अर्थ में विशेषण के रूप में प्रयुक्त होता है। 'पवाह' (pavāho) शब्द जल के वेग और प्रवृत्ति (निरन्तरता) के अर्थ में देखा जाता है। ၉၆၃. ९६३. နိဿယေ တပ္ပရေ ဣဋ္ဌေ, ပရာယဏပဒံ တိသု; ကဝစေ ဝါရဝါဏေ စ, နိမ္မောကေပိ စ ကဉ္စုကော. 'परायण' (parāyaṇapadaṃ) शब्द आश्रय, तत्पर और इष्ट के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। 'कञ्चुक' (kañcuko) शब्द कवच और साँप की केंचुली के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၆၄. ९६४. လောဟဘေဒေ [Pg.79] မတံ တမ္ဗံ, တမ္ဗော ရတ္တေ တိလိင်္ဂိကော; တီသု တွ’ဝသိတံ ဉာတေ, အဝသာနဂတေ မတံ. 'तम्ब' (tambaṃ) शब्द धातु-विशेष (ताँबा) के अर्थ में, और 'तम्ब' (tambo) लाल रंग के अर्थ में तीनों लिंगों में माना गया है। 'अवसित' (avasitaṃ) शब्द ज्ञात और समाप्त के अर्थ में तीनों लिंगों में माना गया है। ၉၆၅. ९६५. ဗောဓနေ စ ပဒါနေ စ, ဝိညေယျံ ပဋိပါဒနံ; သေလေ နိဇ္ဇလဒေသေ စ, ဒေဝတာသု မရူ’ရိတော. 'पटिपादन' (paṭipādanaṃ) शब्द बोधन (समझाना) और प्रदान करने के अर्थ में जानना चाहिए। 'मरु' (marū) शब्द पर्वत, निर्जल प्रदेश और देवताओं के अर्थ में कहा गया है। ၉၆၆. ९६६. သတ္ထံ အာယုဓ ဂန္ထေသု, လောဟေ, သတ္ထော စ သဉ္စယေ; ဇီဝိကာယံ ဝိဝရဏေ, ဝတ္တနေ ဝုတ္တိ နာရိယံ. 'सत्थ' (satthaṃ) शब्द आयुध (शस्त्र), ग्रन्थ और लोहे के अर्थ में, तथा 'सत्थ' (sattho) समूह (सार्थ) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'वुत्ति' (vutti) शब्द जीविका, विवरण और वर्तन (आचरण) के अर्थ में स्त्रीलिंग है। ၉၆၇. ९६७. ဝီရိယေ သူရဘာဝေ စ, ကထီယတိ ပရက္ကမော; အထ ကမ္ဗု မတော သင်္ခေ, သုဝဏ္ဏေ ဝလယေပိ စ. 'परक्कम' (parakkamo) शब्द वीर्य और शूरता के अर्थ में कहा जाता है। 'कम्बु' (kambu) शब्द शंख, सुवर्ण और कंगन के अर्थ में माना गया है। ၉၆၈. ९६८. သရော ကဏ္ဍေ အကာရာဒေါ, သဒ္ဒေ ဝါပိမှိ’နိတ္ထိယံ; ဒုပ္ဖဿေ တိခိဏေ တီသု, ဂဒြဘေ ကကစေ ခရော. 'सर' (saro) शब्द बाण, अकार आदि स्वर, शब्द और बावड़ी (वापी) के अर्थ में पुल्लिंग/नपुंसक लिंग है। 'खर' (kharo) शब्द दुःस्पर्श (खुरदरा) और तीक्ष्ण के अर्थ में तीनों लिंगों में, तथा गधा और आरी के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၆၉. ९६९. သုရာယု’ပဒ္ဒဝေ ကာမာ, သဝါဒိမှိ စ အာသဝေါ; ဒေဟေ ဝုတ္တော ရထင်္ဂေ စ, စတုရော’ပဓိသူ’ပဓိ. 'आसव' (āsavo) शब्द सुरा, उपद्रव, काम और आस्रव आदि के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'उपधि' (upadhi) शब्द शरीर, रथ के अंग (पहिया) और चार प्रकार की उपधियों के अर्थ में कहा गया है। ၉၇၀. ९७०. ဝတ္ထု’တ္တံ ကာရဏေ ဒဗ္ဗေ, ဘူဘေဒေ ရတနတ္တယေ; ယက္ခော ဒေဝေ မဟာရာဇေ, ကုဝေရာ’နုစရေ နရေ. 'वत्थु' (vatthu) शब्द कारण, द्रव्य, भूमि के प्रकार और रत्नत्रय के अर्थ में कहा गया है। 'यक्ख' (yakkho) शब्द देव, महाराज, कुबेर के अनुचर और मनुष्य के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၇၁. ९७१. ဒါရုက္ခန္ဓေ ပီဌိကာယံ, အာပဏေ ပီဌ မာသနေ; ပရိဝါရေ ပရိက္ခာရော, သမ္ဘာရေ စ ဝိဘူသနေ. 'पीठ' (pīṭhaṃ) शब्द लकड़ी के कुन्दे, पीठिका, दुकान और आसन के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'परिक्खार' (parikkhāro) शब्द परिवार (अनुचर), सम्भार (सामग्री) और विभूषण के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၇၂. ९७२. ဝေါဟာရသ္မိဉ္စ ဌပနေ, ပညတ္တိ’တ္ထီ ပကာသနေ; ပဋိဘာနံ တု ပညာယံ, ဥပဋ္ဌိတ ဂိရာယ စ. 'पञ्ञत्ति' (paññatti) शब्द व्यवहार, स्थापन और प्रकाशन के अर्थ में स्त्रीलिंग है। 'पटिभान' (paṭibhānaṃ) शब्द प्रज्ञा और उपस्थित वाणी (हाजिरजवाबी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၇၃. ९७३. ဝစနာဝယဝေ မူလေ, ကထိတော ဟေတု ကာရဏေ; ဥဒရေ တု တထာ ပါစာ, နလသ္မိံ ဂဟဏီ’တ္ထိယံ. 'हेतु' शब्द का प्रयोग वचन के अवयव (पद), मूल और कारण के अर्थ में होता है; 'गहणी' (स्त्रीलिंग) शब्द का प्रयोग उदर (पेट), पाचक अग्नि और नली (आंत) के अर्थ में होता है। ၉၇၄. ९७४. ပိယော ဘတ္တရိ, ဇာယာယံ, ပိယာ, ဣဋ္ဌေ ပိယော တိသု; ယမရာဇေ တု ယုဂဠေ, သံယမေ စ ယမော ဘဝေ. 'पिय' शब्द पति के लिए, 'पिया' पत्नी के लिए और 'पिय' (तीनों लिंगों में) प्रिय या इष्ट के लिए प्रयुक्त होता है; 'यम' शब्द यमराज, युगल (जोड़ा) और संयम के अर्थ में होता है। ၉၇၅. ९७५. မုဒ္ဒိကဿ စ ပုပ္ဖဿ, ရသေ ခုဒ္ဒေ မဓူ’ရိတံ; ဥလ္လောစေ တု စ ဝိတ္ထာရေ, ဝိတာနံ ပုန္နပုံသကေ. 'मधु' शब्द अंगूर, पुष्प के रस और शहद के अर्थ में कहा गया है; 'वितान' (पुल्लिंग और नपुंसक लिंग) शब्द चंदोवा (उल्लोच) और विस्तार के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၇၆. ९७६. အပဝဂ္ဂေ စ သလိလေ, သုဓာယံ အမတံ မတံ; မောဟေ တု တိမိရေ သင်္ချာ, ဂုဏေ တမ မနိတ္ထိယံ. 'अमत' (अमृत) शब्द मोक्ष (अपवर्ग), जल और सुधा के अर्थ में माना गया है; 'तम' (स्त्रीलिंग को छोड़कर) शब्द मोह, अंधकार और संख्या गुण (तमोगुण) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၇၇. ९७७. ခရေ စာ’ကာရိယေ တီသု, ရသမှိ ပုရိသေ ကဋု; ပဏ္ဍကေ သုကတေ, ပုညံ, မနုညေ ပဝနေ တိသု. 'कटु' शब्द (तीनों लिंगों में) तीक्ष्ण (खर) और अकार्य के अर्थ में, तथा रस और पुरुष के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'पुञ्ञ' (पुण्य) शब्द सुकृत (अच्छे कार्य) के अर्थ में नपुंसक लिंग में, और मनोज्ञ (सुंदर) तथा पवित्र के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၉၇၈. ९७८. ရုက္ခော ဒုမမှိ, ဖရုသာ, သိနိဒ္ဓေသု စ သော တိသု; ဥပ္ပတ္တိယံ တု ဟေတုမှိ, သင်္ဂေ သုက္ကေ စ သမ္ဘဝေါ. 'रुक्ख' शब्द वृक्ष के अर्थ में, और परुष (कठोर) तथा स्निग्ध (चिकना) के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है; 'सम्भव' शब्द उत्पत्ति, हेतु, संग (मेल) और शुक्र के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၇၉. ९७९. နိမိတ္တံ [Pg.80] ကာရဏေ ဝုတ္တံ, အင်္ဂဇာတေ စ လဉ္ဆနေ; အာဒိ သီမာပကာရေသု, သမီပေ’ဝယဝေ မတော. 'निमित्त' शब्द कारण, अंगजात (जननांग) और लक्षण (चिह्न) के अर्थ में कहा गया है; 'आदि' शब्द सीमा, प्रकार, समीप और अवयव के अर्थ में माना गया है। ၉၈၀. ९८०. ဝေဒေ စ မန္တနေ မန္တော, မန္တာ ပညာယ မုစ္စတေ; အနယော ဗျသနေ စေဝ, သန္ဒိဿတိ ဝိပတ္တိယံ. 'मन्त' शब्द वेद और मंत्रणा (सलाह) के अर्थ में प्रयुक्त होता है, 'मन्ता' शब्द प्रज्ञा (बुद्धि) के लिए कहा जाता है; 'अनय' शब्द व्यसन और विपत्ति के अर्थ में देखा जाता है। ၉၈၁. ९८१. အရုဏော ရံသိဘေဒေ စာ, ဗျတ္တရာဂေ စ လောဟိတေ; အနုဗန္ဓော တု ပကတာ, နိဝတ္တေ နဿနက္ခရေ. 'अरुण' शब्द किरणों के भेद, स्पष्ट राग (रंग) और लोहित (लाल) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'अनुबन्ध' शब्द प्रकृत (आरंभ), निवृत्त और नष्ट होने वाले अक्षर (इत् संज्ञक) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၈၂. ९८२. အဝတာရော’ဝတရဏေ, တိတ္ထမှိ ဝိဝရေ ပျထ; အာကာရော ကာရဏေ ဝုတ္တော, သဏ္ဌာနေ ဣင်္ဂိတေပိ စ. 'अवतार' शब्द उतरने (अवतण), तीर्थ (घाट) और विवर (छिद्र) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'आकार' शब्द कारण, संस्थान (बनावट) और इंगित (चेष्टा) के अर्थ में कहा गया है। ၉၈၃. ९८३. သုဒ္ဒိတ္ထိ တနယေ ခတ္တာ, ဥဂ္ဂေါ, တိဗ္ဗမှိ သော တိသု; ပဓာနံ တု မဟာမတ္တေ, ပကတျ’ဂ္ဂ’ဓိတီသု စ. 'खत्ता' शब्द सुपुत्री और पुत्र के अर्थ में, 'उग्ग' शब्द तीव्र के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है; 'पधान' शब्द महामात्र (मंत्री), प्रकृति, अग्र (श्रेष्ठ) और धृति (धैर्य) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၈၄. ९८४. ကလ္လံ ပဘာတေ, နိရောဂ, သဇ္ဇဒက္ခေသု တီသု တံ; ကုဟနာ ကူဋစရိယာယံ, ကုဟနော ကုဟကေ တိသု. 'कल्ल' शब्द प्रभात के अर्थ में, और निरोग, सज्ज (तैयार) तथा दक्ष (चतुर) के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है; 'कुहना' शब्द कूटचर्या (धोखाधड़ी) के अर्थ में और 'कुहन' शब्द कुहक (धोखेबाज) के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၉၈၅. ९८५. ကပေါတော ပက္ခိဘေဒေ စ, ဒိဋ္ဌော ပါရာဝတေ ထ စ; သာရဒေါ သာရဒဗ္ဘူတေ, အပဂဗ္ဘေ မတော တိသု. 'कपोत' शब्द पक्षी विशेष और पारावत (कबूतर) के अर्थ में देखा गया है; 'सारद' शब्द शरद ऋतु में उत्पन्न और अपगल्भ (परिपक्व) के अर्थ में तीनों लिंगों में माना गया है। ၉၈၆. ९८६. တီသု ခရေ စ ကဌိနေ, ကက္ကသော သာဟသပ္ပိယေ ; အကာရိယေ တု ဂုယှင်္ဂေ, စီရေ ကောပီန မုစ္စတေ. 'कक्कस' शब्द खर (तीक्ष्ण), कठिन और साहसप्रिय के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है; 'कोपीन' शब्द अकार्य (अनुचित कार्य), गुह्यांग (जननांग) और चीर (वस्त्र) के अर्थ में कहा जाता है। ၉၈၇. ९८७. မိဂဘေဒေ ပဋာကာယံ, မောစေ စ ကဒလီ’တ္ထိယံ; ဒက္ခိဏာ ဒါနဘေဒသ္မိံ, ဝါမတော’ညမှိ ဒက္ခိဏော. 'कदली' (स्त्रीलिंग) शब्द मृग विशेष, पताका और मोच (केला) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'दक्खिणा' शब्द दान विशेष के अर्थ में, और 'दक्खिण' शब्द वाम (बाएं) से भिन्न (दाएं) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၈၈. ९८८. ဒုတိယာ ဘရိယာယဉ္စ, ဒွိန္နံ ပူရဏိယံ မတာ; အထုပ္ပာဒေ သိယာ ဓူမ, ကေတု ဝေဿာနရေပိ စ. 'दुतिया' शब्द भार्या (पत्नी) और दो की पूरणी (दूसरी) के अर्थ में मानी गई है; 'धूमकेतु' शब्द उत्पात (अशुभ लक्षण) और वैश्वानर (अग्नि) के अर्थ में होता है। ၉၈၉. ९८९. ဘဝနိဂ္ဂမနေ ယာနေ, ဒွါရေ နိဿရဏံ သိယာ; နိယာမကော ပေါတဝါဟေ, တိလိင်္ဂေါ သော နိယန္တရိ. 'निस्सरण' शब्द भव-निर्गमन (संसार से मुक्ति), यान (वाहन) और द्वार के अर्थ में होता है; 'नियामक' शब्द पोतवाह (नाव चलाने वाला) के अर्थ में और नियन्ता (नियंत्रक) के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၉၉၀. ९९०. အပဝဂ္ဂေ ဝိနာသေ စ, နိရောဓော ရောဓနေ ပျထ; ဘယေ ပဋိဘယံ ဝုတ္တံ, တိလိင်္ဂံ တံ ဘယံကရေ. 'निरोध' शब्द मोक्ष (अपवर्ग), विनाश और रोधन (रुकावट) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'पटिभय' शब्द भय के अर्थ में और 'भयंकर' के अर्थ में तीनों लिंगों में कहा गया है। ၉၉၁. ९९१. ပိဋကံ ဘာဇနေ ဝုတ္တံ, တထေဝ ပရိယတ္တိယံ; ဇရာသိထိလစမ္မသ္မိံ, ဥဒရင်္ဂေ မတာ ဝလိ. 'पिटक' शब्द भाजन (पात्र) और उसी प्रकार परियत्ति (बुद्ध वचन) के अर्थ में कहा गया है; 'वलि' शब्द बुढ़ापे से ढीली हुई त्वचा (झुर्री) और उदर के अंग (पेट की सिलवट) के अर्थ में मानी गई है। ၉၉၂. ९९२. ဘိန္နံ ဝိဒါရိတေ’ညသ္မိံ, နိဿိတေ ဝါစ္စလိင်္ဂိကံ; ဥပဇာပေ မတော ဘေဒေါ, ဝိသေသေ စ ဝိဒါရဏေ. 'भिन्न' शब्द विदारित (फटा हुआ), अन्य (दूसरा) और निश्रित (आश्रित) के अर्थ में विशेषण के रूप में प्रयुक्त होता है; 'भेद' शब्द उपजाप (फूट डालना), विशेष और विदारण (फाड़ना) के अर्थ में माना गया है। ၉၉၃. ९९३. မဏ္ဍလံ [Pg.81] ဂါမသန္ဒောဟေ, ဗိမ္ဗေ ပရိဓိရာသိသု; အာဏာယ မာဂမေ လေခေ; သာသနံ အနုသာသနေ. 'मण्डल' शब्द ग्राम-समूह, बिम्ब (मंडल), परिधि और राशि के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'सासन' शब्द आज्ञा, आगम, लेख और अनुशासन के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၉၉၄. ९९४. အဂ္ဂေ တု သိခရံ စာ’ယော, မယဝိဇ္ဈနကဏ္ဋကေ; ဂုဏုက္ကံသေ စ ဝိဘဝေ, သမ္ပတ္တိ စေဝ သမ္ပဒါ. 'सिखर' शब्द अग्र (चोटी) और लोहे के छेदने वाले कांटे (सूजा) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'सम्पत्ति' और 'सम्पदा' शब्द गुणों के उत्कर्ष और विभव (ऐश्वर्य) के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। ၉၉၅. ९९५. ဘူခန္တီသု ခမာ, ယောဂျေ, ဟိတေ သက္ကေ ခမော တိသု; အဒ္ဓေါ ဘာဂေ ပထေ ကာလေ, ဧကံသေ’ဒ္ဓေါ’ဗျယံ ဘဝေ; အထော ကရီသံ ဝစ္စသ္မိံ, ဝုစ္စတေ စတုရမ္ဗဏေ. 'खमा' शब्द पृथ्वी और क्षान्ति (धैर्य) के अर्थ में, तथा 'खम' शब्द योग्य, हित और समर्थ के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है; 'अद्ध' शब्द भाग, पथ और काल के अर्थ में, तथा 'अद्ध' अव्यय के रूप में एकान्त (निश्चित) के अर्थ में होता है; और 'करीस' शब्द विष्ठा (मल) और चार अम्मण (भूमि की माप) के अर्थ में कहा जाता है। ၉၉၆. ९९६. ဥသဘော’သဓ ဂေါ သေဋ္ဌေ, သူ’သဘံ ဝီသယဋ္ဌိယံ; သေတုသ္မိံ တန္တိ ပန္တီသု, နာရိယံ ပါဠိ ကထျတေ. 'उसभ' शब्द औषधि, बैल और श्रेष्ठ के अर्थ में, तथा 'सुसभ' शब्द अट्ठाईस के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'पाळि' शब्द (स्त्रीलिंग में) सेतु (बाँध), तन्ति (डोरी) और पंक्ति के अर्थ में कहा जाता है। ၉၉၇. ९९७. ကဋော ဇယေ’တ္ထိနိမိတ္တေ, ကိလဉ္ဇေ သော ကတေ တိသု; မဟိယံ ဇဂတီ ဝုတ္တာ, မန္ဒိရာလိန္ဒဝတ္ထုမှိ. 'कट' शब्द जय, स्त्री-निमित्त और चटाई के अर्थ में, तथा 'कत' (किया हुआ) के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है; 'जगतो' शब्द पृथ्वी, मन्दिर की आलिन्द (बरामदा) और वास्तु (भूमि) के अर्थ में कही गई है। ၉၉၈. ९९८. ဝိတက္ကေ မထိတေ တက္ကော, တထာ သူစိဖလေ မတော; သုဒဿနံ သက္ကပုရေ, တီသု တံ ဒုဒ္ဒသေ’တရေ. 'तक्क' शब्द वितर्क (तर्क), मथित (छाछ) और उसी प्रकार सूचि-फल के अर्थ में माना गया है; 'सुदस्सन' शब्द शक्रपुर (इन्द्र की नगरी) के अर्थ में, और जो देखने में कठिन न हो (सुदर्शन) उस अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၉၉၉. ९९९. ဒီပေါ’န္တရီပ ပဇ္ဇောတ, ပတိဋ္ဌာ နိဗ္ဗုတီသု စ; ဗဒ္ဓနိဿိတ သေတေသု, တီသု တံ မိဟိတေ သိတံ. 'दीप' शब्द द्वीप, प्रद्योत (दीपक), प्रतिष्ठा और निर्वृत्ति (निर्वाण) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'सित' शब्द बद्ध (बंधा हुआ), निश्रित (आश्रित), श्वेत (सफेद) और स्मित (मुस्कान) के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၁၀၀၀. १०००. ထိယံ ပဇာပတိ ဒါရေ, ဗြဟ္မေ မာရေ သုရေ ပုမေ; ဝါသုဒေဝေ’န္တကေ ကဏှော, သော ပါပေ အသိတေ တိသု. 'पजापति' शब्द स्त्रीलिंग में भार्या (पत्नी) के लिए, और पुल्लिंग में ब्रह्मा, मार तथा देव के लिए प्रयुक्त होता है; 'कण्ह' शब्द वासुदेव और अन्तक (यम) के अर्थ में, तथा पाप और असित (काले) के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၁၀၀၁. १००१. ဥပစာရော ဥပဋ္ဌာနေ, အာသန္နေ အညရောပနေ; သက္ကော ဣန္ဒေ ဇနပဒေ, သာကိယေ, သော ခမေ တိသု. 'उपचार' शब्द उपस्थान (सेवा), आसन्न (समीप) और अन्यारोपण (उपचार/रूपक) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'सक्क' शब्द इन्द्र, जनपद और शाक्य के अर्थ में, तथा क्षम (समर्थ) के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। ၁၀၀၂. १००२. ဝဇ္ဇနေ ပရိဟာရော စ, သက္ကာရေ စေဝ ရက္ခဏေ; သောတာပန္နာဒိကေ အဂ္ဂေ, အရိယော တီသု, ဒွိဇေ ပုမေ. 'परिहार' शब्द वर्जन (त्याग), सत्कार और रक्षण के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'अरिय' शब्द स्रोतापन्न आदि के अर्थ में और अग्र (श्रेष्ठ) के अर्थ में तीनों लिंगों में, तथा द्विज (ब्राह्मण) के अर्थ में पुल्लिंग में प्रयुक्त होता है। ၁၀၀၃. १००३. သုသုကော သုသုမာရေ စ, ဗာလကေ စ ဥလူပိနိ; ဣန္ဒီဝရံ မတံ နီလု, ပ္ပလေ ဥဒ္ဒါလပါဒပေ. 'सुसुक' शब्द मगरमच्छ, बालक और शिशुमार (डॉल्फिन) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'इन्दीवर' शब्द नीलकमल और उद्दाल वृक्ष के अर्थ में माना गया है। ၁၀၀၄. १००४. အသနော ပိယကေ ကဏ္ဍေ, ဘက္ခဏေ ခိပနေ’ သနံ; ယုဂေ’ဓိကာရေ ဝီရိယေ, ပဓာနေ စာ’န္တိကေ ဓုရော. 'असन' शब्द पियक वृक्ष, बाण, भक्षण और फेंकने के अर्थ में है। 'धुर' शब्द जुआ (बैल का), अधिकार, वीर्य (शक्ति), प्रधान और समीप के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၀၅. १००५. ကာဠေ စ ဘက္ခိတေ တီသု, လဝိတ္တေ အသိတော ပုမေ; ပဝါရဏာ ပဋိက္ခေပေ, ကထိတာ’ဇ္ဈေသနာယ စ. 'असित' शब्द काले रंग, खाए हुए और काटे हुए के अर्थ में तीनों लिंगों में प्रयुक्त होता है। 'पवारणा' शब्द निषेध (अस्वीकार) और प्रार्थना (अध्येषणा) के अर्थ में कहा गया है। ၁၀၀၆. १००६. ဥမ္မာရေ [Pg.82] ဧသိကတ္ထမ္ဘေ, ဣန္ဒခီလော မတော ထ စ; ပေါတ္ထကံ မကစိဝတ္ထေ, ဂန္ထေ လေပျာဒိ ကမ္မနိ. 'इन्दखील' शब्द देहली (चौखट) और मुख्य खंभे के अर्थ में माना गया है। 'पोत्थक' शब्द सन के वस्त्र, ग्रन्थ और लेपन आदि के कार्य के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၀၇. १००७. ဓညံ သာလျာဒိကေ ဝုတ္တံ, ဓညော ပုညဝတိ တ္တိသု; ပါဏိ ဟတ္ထေ စ သတ္တေ ဘူ, သဏှကရဏိယံ မတော. 'धञ्ञ' शब्द धान आदि अनाज के लिए कहा गया है और 'धञ्ञ' (भाग्यशाली) शब्द पुण्यवान के अर्थ में तीनों लिंगों में है। 'पाणि' शब्द हाथ, प्राणी और भूमि को समतल करने वाले उपकरण के अर्थ में माना गया है। ၁၀၀၈. १००८. တီသု ပီတံ ဟလိဒျာဘေ, ဟဋ္ဌေ စ ပါယိတေ သိယာ; ဗျူဟော နိဗ္ဗိဒ္ဓရစ္ဆာယံ, ဗလနျာသေ ဂဏေ မတော. 'पीत' शब्द पीले रंग, हर्षित और पिलाए गए के अर्थ में तीनों लिंगों में होता है। 'ब्यूह' शब्द बंद गली, सैन्य रचना और समूह के अर्थ में माना गया है। ၁၀၀၉. १००९. လောဟိတာဒိမှိ လောဘေ စ, ရာဂေါ စ ရဉ္ဇနေ မတော; ပဒရော ဖလကေ ဘင်္ဂေ, ပဝုဒ္ဓ ဒရိယံ ပိစ. 'राग' शब्द लाल आदि रंग, लोभ और रंगने के अर्थ में माना गया है। 'पदर' शब्द तख्ते, टूटने और बड़ी दरार के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၁၀. १०१०. သိင်္ဃာဋကံ ကသေရုဿ, ဖလေ, မဂ္ဂသမာဂမေ; ဗဟုလာယဉ္စ ခေဠမှိ, ဧဠာ, ဒေါသေ’ဠ မီရိတံ. 'सिङ्घाटक' शब्द कशेरु (सिंघाड़ा) के फल और चौरास्ते के अर्थ में है। 'एला' शब्द इलायची और लार के अर्थ में है, तथा 'एल' दोष के अर्थ में कहा गया है। ၁၀၁၁. १०११. အာဓာရော စာ’ဓိကရဏေ, ပတ္တာဓာရေ’ လဝါလကေ; ကာရော’ ဂဘေဒေ သက္ကာရေ, ကာရာ တု ဗန္ဓနာလယေ. 'आधार' शब्द अधिकरण, पात्र के आधार और क्यारी (आलवाल) के अर्थ में है। 'कार' शब्द अंग-भेद और सत्कार के अर्थ में है, तथा 'कारा' जेल के अर्थ में है। ၁၀၁၂. १०१२. ကရကာ မေဃပါသာဏေ, ကရကော ကုဏ္ဍိကာယ စ; ပါပနေ စ ပဒါတိသ္မိံ, ဂမနေ ပတ္တိ နာရိယံ. 'करका' शब्द ओलों के अर्थ में और 'करक' कमंडलु के अर्थ में है। 'पत्ति' शब्द प्राप्ति, पैदल सैनिक और गमन के अर्थ में स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होता है। ၁၀၁၃. १०१३. ဆိဒ္ဒံ ရန္ဓဉ္စ ဝိဝရံ, သုသိရေ ဒူသနေပိ စ; မုတ္တာ တု မုတ္တိကေ, မုတ္တံ, ပဿာဝေ, မုစ္စိတေ တိသု. 'छिद्द' शब्द छेद, विवर, सुषिर और दोष लगाने के अर्थ में है। 'मुत्ता' शब्द मोती के अर्थ में है, और 'मुत्त' शब्द मूत्र तथा मुक्त (छूटे हुए) के अर्थ में तीनों लिंगों में है। ၁၀၁၄. १०१४. နိသေဓေ ဝါရဏံ, ဟတ္ထိ, လိင်္ဂ ဟတ္ထီသု ဝါရဏော; ဒါနံ စာဂေ မဒေ သုဒ္ဓေ, ခဏ္ဍနေ လဝနေ ခယေ. 'वारण' शब्द निषेध के अर्थ में और 'वारण' हाथी के अर्थ में प्रयुक्त होता है। 'दान' शब्द त्याग, मद, शुद्धि, खंडन, कटाई और क्षय के अर्थ में है। ၁၀၁၅. १०१५. မနောတောသေ စ နိဗ္ဗာနေ, တ္ထင်္ဂမေ နိဗ္ဗုတိ’တ္ထိယံ; နေဂမော နိဂမုဗ္ဘူတေ, တထာ’ပဏောပဇီဝိနိ. 'निब्बुति' शब्द मन की संतुष्टि, निर्वाण और अस्त होने के अर्थ में स्त्रीलिंग में है। 'नेगम' शब्द नगर में उत्पन्न और व्यापारी के अर्थ में है। ၁၀၁၆. १०१६. ဟရိတသ္မိဉ္စ ပဏ္ဏေ စ, ပလာသော ကိံ သုကဒ္ဒုမေ; ပကာသော ပါကဋေတီသု, အာလောကသ္မိံ ပုမေ မတော. 'पलास' शब्द हरे रंग, पत्ते और किंशुक वृक्ष के अर्थ में है। 'पकास' शब्द प्रकट के अर्थ में तीनों लिंगों में और प्रकाश के अर्थ में पुल्लिंग में माना गया है। ၁၀၁၇. १०१७. ပက္ကံ ဖလမှိ, တံ နာသု, မ္မုခေ ပရိဏတေ တိသု; ပိဏ္ဍော အာဇီဝနေ ဒေဟေ, ပိဏ္ဍနေ ဂေါဠကေ မတော. 'पक्क' शब्द फल के अर्थ में नपुंसक लिंग में और परिपक्व के अर्थ में तीनों लिंगों में है। 'पिण्ड' शब्द आजीविका, शरीर, पिंड (ढेर) और गोले के अर्थ में माना गया है। ၁၀၁၈. १०१८. ဝဋ္ဋော ပရိဗ္ဗယေ ကမ္မာ, ဒိကေ, သော ဝဋ္ဋုလေ တိသု; ပစ္စာဟာရေ ပဋိဟာရော, ဒွါရေ စ ဒွါရပါလကေ. 'वट्ट' शब्द व्यय और कर्म आदि के अर्थ में तथा 'वट्ट' गोल के अर्थ में तीनों लिंगों में है। 'पटिहार' शब्द प्रत्याहार, द्वार और द्वारपाल के अर्थ में है। ၁၀၁၉. १०१९. နာရိယံ ဘီရု ကထိတာ, ဘီရုကေ သော တိလိင်္ဂိကော; ဝိကဋံ ဂူထမုတ္တာဒေါ, ဝိကဋော ဝိကတေ တိသု. 'भीरु' शब्द स्त्री के अर्थ में और 'भीरु' डरपोक के अर्थ में तीनों लिंगों में कहा गया है। 'विकट' शब्द विष्ठा-मूत्र आदि के अर्थ में और 'विकट' विकृत या विशाल के अर्थ में तीनों लिंगों में है। ၁၀၂၀. १०२०. ဝါမံ [Pg.83] သဗျမှိ, တံ စာရု, ဝိပရီတေသု တီသွ’ထ; သင်္ချာဘေဒေ သရဗျေ စ, စိဟဏေ လက္ခ မုစ္စတေ. 'वाम' शब्द बाएँ, सुंदर और विपरीत के अर्थ में तीनों लिंगों में है। 'लक्ख' शब्द संख्या विशेष (लाख), लक्ष्य और चिह्न के अर्थ में कहा जाता है। ၁၀၂၁. १०२१. သေဏီ’တ္ထီ သမသိပ္ပီနံ, ဂဏေ စာ’ဝလိယံ ပိစ; သုဓာယံ ဓူလိယံ စုဏ္ဏော, စုဏ္ဏဉ္စ ဝါသစုဏ္ဏကေ. 'सेणी' शब्द समान शिल्पियों के समूह और पंक्ति के अर्थ में स्त्रीलिंग में है। 'चुण्ण' शब्द चूना और धूल के अर्थ में पुल्लिंग में, तथा 'चुण्ण' सुगन्धित चूर्ण के अर्थ में है। ၁၀၂၂. १०२२. ဇေတဗ္ဗေ’တိပ္ပသတ္ထေ’တိ, ဝုဒ္ဓေ ဇေယျံ တိသူ’ရိတံ; တက္ကေ တု မထိတံ ဟောတျာ,လောလိတေ မထိတော တိသု. 'जेय्य' शब्द जीतने योग्य, अति प्रशंसित और वृद्ध के अर्थ में तीनों लिंगों में कहा गया है। 'मथित' शब्द मट्ठे के अर्थ में और 'मथित' मथे हुए (हिलाए हुए) के अर्थ में तीनों लिंगों में होता है। ၁၀၂၃. १०२३. အဗ္ဘုတော’စ္ဆရိယေ တီသု, ပဏေ စေဝါ’ဗ္ဘုတော ပုမေ; မေစကော ပုစ္ဆမူလမှိ, ကဏှေပိ မေစကော တိသု. 'अब्भुत' शब्द आश्चर्य के अर्थ में तीनों लिंगों में और दाँव (पण) के अर्थ में पुल्लिंग में है। 'मेचक' शब्द पूँछ की जड़ के अर्थ में और काले रंग के अर्थ में तीनों लिंगों में है। ၁၀၂၄. १०२४. ဝသဝတ္တီ ပုမေ မာရေ, ဝသဝတ္တာပကေ တိသု; သမ္ဘဝေ စာ’သုစိ ပုမေ, အမေဇ္ဈေ တီသု ဒိဿတိ. 'वसवत्ती' शब्द मार (कामदेव) के अर्थ में पुल्लिंग में और वश में करने वाले के अर्थ में तीनों लिंगों में है। 'असुचि' शब्द वीर्य के अर्थ में पुल्लिंग में और अपवित्र के अर्थ में तीनों लिंगों में देखा जाता है। ၁၀၂၅. १०२५. အစ္ဆော ဣက္ကေ ပုမေ ဝုတ္တော, ပသန္နမှိ တိလိင်္ဂိကော; ဗဠိသေ သေလဘေဒေ စ, ဝင်္ကော, သော ကုဋိလေ တိသု. 'अच्छ' शब्द भालू के अर्थ में पुल्लिंग में और निर्मल के अर्थ में तीनों लिंगों में कहा गया है। 'वङ्क' शब्द मछली पकड़ने के काँटे और शिला-विशेष के अर्थ में है, तथा 'वङ्क' टेढ़े के अर्थ में तीनों लिंगों में है। ၁၀၂၆. १०२६. ကုဏပမှိ ဆဝေါ ဉေယျော,လာမကေ သော တိလိင်္ဂိကော; သဗ္ဗသ္မိံ သကလော တီသု, အဒ္ဓမှိ ပုရိသေ သိယာ. 'छव' शब्द शव के अर्थ में और 'छव' नीच के अर्थ में तीनों लिंगों में जानना चाहिए। 'सकल' शब्द सब के अर्थ में तीनों लिंगों में और आधे तथा पुरुष के अर्थ में हो सकता है। ၁၀၂၇. १०२७. စန္ဒဂ္ဂါဟာဒိကေ စေဝု, ပ္ပာဒေါ ဥပ္ပတ္တိယံ ပိစ; ပဒုဿနေ ပဒေါသော စ, ကထိတော သံဝရီမုခေ. 'उप्पाद' शब्द चन्द्रग्रहण आदि और उत्पत्ति के अर्थ में है। 'पदोस' शब्द दूषित होने और प्रदोष काल (शाम) के अर्थ में कहा गया है। ၁၀၂၈. १०२८. ရုဓိရေ လောဟိတံ ဝုတ္တံ, ရတ္တမှိ လောဟိတော တိသု; ဥတ္တမင်္ဂေ ပုမေ မုဒ္ဓါ, မုဒ္ဓေါ မူဠှေ တိလိင်္ဂိကော. 'लोहित' शब्द रक्त के अर्थ में और 'लोहित' लाल रंग के अर्थ में तीनों लिंगों में कहा गया है। 'मुद्धा' शब्द सिर के अर्थ में पुल्लिंग में और 'मुद्ध' मूढ़ के अर्थ में तीनों लिंगों में है। ၁၀၂၉. १०२९. ရဋ္ဌမှိ ဝိဇိတံ ဝုတ္တံ, ဇိတေ စ ဝိဇိတော တိသု; ပရိတ္တံ တု ပရိတ္တာဏေ, ပရိတ္တော တီသု အပ္ပကေ. 'विजित' शब्द राष्ट्र के अर्थ में और 'विजित' जीते हुए के अर्थ में तीनों लिंगों में कहा गया है। 'परित्त' शब्द रक्षा के अर्थ में और 'परित्त' थोड़े के अर्थ में तीनों लिंगों में है। ၁၀၃၀. १०३०. ကုမ္ဘဏ္ဍော ဒေဝဘေဒေ စ, ဒိဿတိ ဝလ္လိဇာတိယံ; စတုတ္ထံသေ ပဒေ ပါဒေါ, ပစ္စန္တသေလရံသိသု. 'कुम्भाण्ड' शब्द देव-विशेष और बेल की जाति (कद्दू) में देखा जाता है। 'पाद' शब्द चतुर्थांश, पैर, पर्वत के निचले भाग और किरण के अर्थ में है। ၁၀၃၁. १०३१. ဝင်္ဂေါ လောဟန္တရေ ဝင်္ဂါ, ဒေသေ ပုမေ ဗဟုမှိ စ; ကမ္မာရဘဏ္ဍဘေဒေ စ, ခဋကေ မုဋ္ဌိ စ ဒွိသု. 'वङ्ग' शब्द राँगा (धातु) और वंग देश के अर्थ में है। 'मुट्ठि' शब्द लोहार के उपकरण-विशेष और मुट्ठी के अर्थ में दो लिंगों में है। ၁၀၃၂. १०३२. အမ္ဗဏံ ဒေါဏိယံ စေ’ကာ, ဒသဒေါဏပ္ပမာဏကေ; အဓိဋ္ဌိတိယ မာဓာရေ, ဌာနေ’ဓိဋ္ဌာန မုစ္စတေ. 'अम्बण' शब्द द्रोणी (नाव या टब) और ग्यारह द्रोण के माप के अर्थ में है। 'अधिट्ठान' शब्द संकल्प, आधार और स्थान के अर्थ में कहा जाता है। ၁၀၃၃. १०३३. ပုမေ မဟေသီ သုဂတေ, ဒေဝိယံ နာရိယံ မတာ; ဥပဒ္ဒဝေ ဥပသဂ္ဂေါ, ဒိဿတိ ပါဒိကေပိ စ. 'महेसी' शब्द पुल्लिंग में बुद्ध (सुगत) के लिए और स्त्रीलिंग में रानी के लिए प्रयुक्त होता है; 'उपसग्ग' शब्द उपद्रव और व्याकरण के उपसर्ग के लिए प्रयुक्त होता है, और 'पादिक' शब्द भी (इन अर्थों में) देखा जाता है। ၁၀၃၄. १०३४. ဝက္ကံ [Pg.84] ကောဋ္ဌာသဘေဒသ္မိံ, ဝက္ကော ဝင်္ကေ တိသု’စ္စတေ; ဝိဇ္ဇာ ဝေဒေ စ သိပ္ပေ စ, တိဝိဇ္ဇာဒေါ စ ဗုဒ္ဓိယံ. 'वक्क' शब्द शरीर के अवयव (वृक्क) के अर्थ में है, और 'वक्क' तीनों लिंगों में टेढ़े के अर्थ में कहा जाता है; 'विज्जा' शब्द वेद, शिल्प और त्रिविद्या आदि बुद्धि के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၃၅. १०३५. သမာဓိမှိ ပုမေ’ကဂ္ဂေါ, နာကုလေ ဝါစ္စလိင်္ဂိကော; ပဇ္ဇံ သိလောကေ, ပဇ္ဇော’ဒ္ဓေ, ပဇ္ဇော ပါဒဟိတေ တိသု. 'एकग्ग' शब्द पुल्लिंग में समाधि के लिए और विशेषण के रूप में व्याकुल न होने (एकाग्र) के अर्थ में है; 'पज्ज' शब्द श्लोक के अर्थ में, 'पज्ज' मार्ग के अर्थ में, और 'पज्ज' तीनों लिंगों में पैरों के लिए हितकारी के अर्थ में है। ၁၀၃၆. १०३६. ကတကော ရုက္ခဘေဒသ္မိံ, ကတကော ကိတ္တိမေ တိသု; ဝိဓေယျေ အဿဝေါ တီသု, ပုဗ္ဗမှီ ပုရိသေ သိယာ. 'कतक' शब्द एक वृक्ष विशेष के अर्थ में है और 'कतक' तीनों लिंगों में कृत्रिम के अर्थ में है; 'अस्सव' शब्द तीनों लिंगों में आज्ञाकारी के अर्थ में और पुल्लिंग में पीप (पुय) के अर्थ में होता है। ၁၀၃၇. १०३७. ကလျာဏေ ကထိတံ ခေမံ, တီသု လဒ္ဓတ္ထရက္ခဏေ; အထော နိယောဇနေ ဝုတ္တံ, ကာရိယေပိ ပယောဇနံ. 'खेम' शब्द कल्याण के अर्थ में और तीनों लिंगों में प्राप्त वस्तु की रक्षा के अर्थ में कहा गया है; और 'पयोजन' शब्द नियोजन (प्रयोजन) और कार्य के अर्थ में कहा गया है। ၁၀၃၈. १०३८. အဿတ္ထော တီသု အဿာသ, ပ္ပတ္တေ, ဗောဓိဒ္ဒုမေ ပုမေ; တီသု လုဒ္ဒေါ ကုရူရေ စ, နေသာဒမှိ ပုမေ သိယာ. 'अस्सत्थ' शब्द तीनों लिंगों में आश्वस्त (सांत्वना प्राप्त) के अर्थ में और पुल्लिंग में बोधिवृक्ष (पीपल) के अर्थ में है; 'लुद्द' शब्द तीनों लिंगों में क्रूर के अर्थ में और पुल्लिंग में शिकारी के अर्थ में होता है। ၁၀၃၉. १०३९. ဝိလဂ္ဂေါ တီသု လဂ္ဂသ္မိံ, ပုမေ မဇ္ဈမှိ ဒိဿတိ; အဍ္ဎော တွနိတ္ထိယံ ဘာဂေ, ဓနိမှိ ဝါစ္စလိင်္ဂိကော. 'विलग्ग' शब्द तीनों लिंगों में लग्न (सटा हुआ) के अर्थ में और पुल्लिंग में कमर के अर्थ में देखा जाता है; 'अड्ढ' शब्द स्त्रीलिंग को छोड़कर (पुल्लिंग और नपुंसक लिंग में) भाग के अर्थ में और विशेषण के रूप में धनी के अर्थ में है। ၁၀၄၀. १०४०. ကဋ္ဌံ ဒါရုမှိ, တံ ကိစ္ဆေ, ဂဟနေ ကသိတေ တိသု; သသန္တာနေ စ ဝိသယေ, ဂေါစရေ’ ဇ္ဈတ္တ မုစ္စတေတိ. 'कट्ठ' शब्द लकड़ी के अर्थ में है, और वही तीनों लिंगों में कष्ट, गहन और कठिन के अर्थ में है; 'अज्झत्त' शब्द अपने संतान (प्रवाह), विषय और गोचर के अर्थ में कहा जाता है। ဣတိ အဒ္ဓါနေကတ္ထဝဂ္ဂေါ. इस प्रकार 'अद्धानेकतत्थवग्गो' (अद्धा-अनेकार्थक वर्ग) समाप्त हुआ। ၁၀၄၁. १०४१. ဘုဝနေ စ ဇနေ လောကော, မောရေတွဂ္ဂိမှိ သော သိခီ; သိလောကော တု ယသေ ပဇ္ဇေ,ရုက္ခေ တု သာမိကေ ဓဝေါ. 'लोक' शब्द भुवन और जन (लोग) के अर्थ में है; 'सिखी' शब्द मोर और अग्नि के अर्थ में है; 'सिलोक' यश और पद्य (श्लोक) के अर्थ में है; और 'धवो' वृक्ष और स्वामी (पति) के अर्थ में है। ၁၀၄၂. १०४२. ဝဋဗျာမေသု နိဂြောဓော, ဓင်္ကော တု ဝါယသေ ဗကေ; ဝါရော တွ’ဝသရာ’ဟေသု, ကုစေတွဗ္ဘေ ပယောဓရော. 'निग्रोध' वटवृक्ष और व्याम (दोनों हाथों को फैलाने की माप) के अर्थ में है; 'धङ्क' कौवे और बगुले के अर्थ में है; 'वार' अवसर और दिन के अर्थ में है; 'पयोधर' स्तन और बादल के अर्थ में है। ၁၀၄၃. १०४३. ဥစ္ဆင်္ဂေ လက္ခဏေ စာ’င်္ကော, ရသ္မိ’တ္ထီ ဇုတိ ရဇ္ဇုသု; ဒိဋ္ဌော’ဘာသေသု အာလောကော,ဗုဒ္ဓေါ တု ပဏ္ဍိတေ ဇိနေ. 'अङ्क' गोद और लक्षण (चिह्न) के अर्थ में है; 'रस्मि' स्त्रीलिंग में दीप्ति (किरण) और रस्सी के अर्थ में है; 'आलोक' दृष्टि और प्रकाश के अर्थ में देखा गया है; 'बुद्ध' विद्वान और जिन (बुद्ध) के अर्थ में है। ၁၀၄၄. १०४४. သူရံ’သူသု ပုမေ ဘာနူ, ဒဏ္ဍော တု မုဂ္ဂရေ ဒမေ; ဒေဝမစ္ဆေသွ’နိမိသော, ပတ္ထော တု မာနသာနုသု. 'भानु' पुल्लिंग में सूर्य और किरण के अर्थ में है; 'दण्ड' मुग्दर (लाठी) और दमन (सजा) के अर्थ में है; 'अनिमिस' देव और मछली के अर्थ में है; 'पत्थ' माप और पठार (पर्वत की समतल भूमि) के अर्थ में है। ၁၀၄၅. १०४५. အာတင်္ကော ရောဂ တာပေသု,မာတင်္ဂေါ သပစေ ဂဇေ; မိဂေါ ပသု ကုရုင်္ဂေသု, ဥလူကိ’န္ဒေသု ကောသိယော. 'आतङ्क' रोग और संताप के अर्थ में है; 'मातङ्ग' चाण्डाल और हाथी के अर्थ में है; 'मिग' पशु और मृग (हिरण) के अर्थ में है; 'कोसिय' उलूक (उल्लू) और इन्द्र के अर्थ में है। ၁၀၄၆. १०४६. ဝိဂ္ဂဟော [Pg.85] ကလဟေ ကာယေ, ပုရိသော မာဏဝ’တ္တသု; ဒါယာဒေါ ဗန္ဓဝေ ပုတ္တေ, သိရေ သီသံ တိပုမှိ စ. 'विग्गह' कलह और शरीर के अर्थ में है; 'पुरिस' मनुष्य और आत्मा के अर्थ में है; 'दायाद' बान्धव (रिश्तेदार) और पुत्र के अर्थ में है; 'सीस' सिर के अर्थ में तीनों लिंगों में है। ၁၀၄၇. १०४७. ဗလိဟတ္ထံ’သူသု ကရော, ဒန္တေ ဝိပ္ပေ’ဏ္ဍဇေ ဒွိဇော; ဝတ္တံ ပဇ္ဇာ’နနာ’စာရေ, ဓညင်္ဂေ သုခုမေ ကဏော. 'कर' बलि (कर/टैक्स), हाथ और किरण के अर्थ में है; 'द्विज' दाँत, विप्र (ब्राह्मण) और पक्षी (अण्डज) के अर्थ में है; 'वत्त' पद्य, मुख और आचार के अर्थ में है; 'कण' धान्य के अंश और सूक्ष्म के अर्थ में है। ၁၀၄၈. १०४८. ထမ္ဘော ထူဏ ဇဠတ္တေသု, သူပေါ ကုမ္မာသ ဗျဉ္ဇနေ; ဂဏ္ဍော ဖောဋေ ကပေါလမှိ, အဂ္ဃော မူလျေ စ ပူဇနေ. 'थम्भो' खंभा और जड़ता के अर्थ में है; 'सूप' कुम्मास (दाल/सूप) और व्यंजन के अर्थ में है; 'गण्ड' फोड़े और कपोल (गाल) के अर्थ में है; 'अग्घ' मूल्य और पूजन के अर्थ में है। ၁၀၄၉. १०४९. ပကာရော တုလျ ဘေဒေသု, သကုန္တော ဘာသပက္ခိသု; ဘာဂျေ ဝိဓိ ဝိဓာနေ စ, သရေ ခဂ္ဂေ စ သာယကော. 'पकार' तुल्य (समान) और भेद (प्रकार) के अर्थ में है; 'सकुन्त' भास (पक्षी विशेष) और पक्षी के अर्थ में है; 'विधि' भाग्य और विधान के अर्थ में है; 'सायक' बाण और खड्ग (तलवार) के अर्थ में है। ၁၀၅၀. १०५०. သာရင်္ဂေါ စာတကေ ဧဏေ, ပတ္တီ တု သရပက္ခိသု; သေဒေ ပါကော ဝိပါကေ ထ,ဘိက္ခုဘေဒေ စယေ ဂဏော. 'सारङ्ग' चातक और एण (मृग) के अर्थ में है; 'पत्ती' बाण और पक्षी के अर्थ में है; 'पाक' पसीना और विपाक (परिणाम) के अर्थ में है; 'गण' भिक्षु-भेद (संघ) और समूह के अर्थ में है। ၁၀၅၁. १०५१. ရာသိ ပုဉ္ဇေ စ မေသာ’ဒေါ,အဿေ လောဏေ စ သိန္ဓဝေါ; သံဝဋ္ဋေ ပလယော နာသေ, ပူဂေါ ကမုကရာသိသု. 'रासि' पुंज (ढेर) और मेष आदि राशियों के अर्थ में है; 'सिन्धव' अश्व और लवण (नमक) के अर्थ में है; 'पलय' संवर्त (प्रलय) और नाश के अर्थ में है; 'पूग' सुपारी और समूह के अर्थ में है। ၁၀၅၂. १०५२. အမတေ တု သုဓာ လေပေ, အဘိချာ နာမ ရံသိသု; သတ္တိ သာမတ္ထိယေ သတ္ထေ, မဟီ နဇ္ဇန္တရေ ဘုဝိ; လီလာ ကြိယာ ဝိလာသေသု,သတ္တေ တု အတြဇေ ပဇာ. 'सुधा' अमृत और लेप (चूना) के अर्थ में है; 'अभिख्या' नाम और किरणों के अर्थ में है; 'सत्ति' सामर्थ्य और शस्त्र (शक्ति) के अर्थ में है; 'मही' नदी के मध्य की भूमि और पृथ्वी के अर्थ में है; 'लीला' क्रिया और विलास के अर्थ में है; 'पजा' (प्रजा) प्राणी और अपनी संतान के अर्थ में है। ၁၀၅၃. १०५३. ဉာဏေ လာဘေ ဥပလဒ္ဓိ, ပဝေဏီ ကုထဝေဏိသု; ပဝတ္တိ ဝုတ္တိ ဝတ္တာသု, ဝေတနေ ဘရဏေ ဘတိ. 'उपलद्धि' ज्ञान और लाभ के अर्थ में है; 'पवेणी' कुथ (कंबल) और वेणी (चोटी/परम्परा) के अर्थ में है; 'पवत्ति' वृत्ति (वृत्तांत) और वार्ता के अर्थ में है; 'भति' वेतन और भरण (पोषण) के अर्थ में है। ၁၀၅၄. १०५४. အာစာရေပိ မရိယာဒါ, ဘူတိ သတ္တာ သမိဒ္ဓိသု; သောပ္ပေ ပမာဒေ တန္ဒီ စ, ယာတြာ ဂမန ဝုတ္တိသု. 'मरियादा' आचार और सीमा के अर्थ में है; 'भूति' सत्ता (अस्तित्व) और समृद्धि के अर्थ में है; 'तन्दी' निद्रा और प्रमाद के अर्थ में है; 'यात्रा' गमन और वृत्ति (आजीविका) के अर्थ में है। ၁၀၅၅. १०५५. နိန္ဒာ ကုစ္ဆာ’ပဝါဒေသု, ကင်္ဂု ဓည ပိယင်္ဂုသု; မောက္ခေသိဝေ သမေသန္တိ, ဝိဘာဂေ ဘတ္တိ သေဝနေ. 'निन्दा' कुत्सा और अपवाद के अर्थ में है; 'कङ्गु' धान्य और प्रियंगु के अर्थ में है; 'सन्ति' मोक्ष, शिव (कल्याण) और शम (शान्ति) के अर्थ में है; 'भत्ति' विभाग और सेवा के अर्थ में है। ၁၀၅၆. १०५६. ဣစ္ဆာယံ ဇုတိယံ ကန္တိ, ရဉ္ဇနေ သူရတေ ရတိ; ဂေဟေ ဝသတိ ဝါသေ ထ, နဒီ သေနာသု ဝါဟိနီ. 'कान्ति' इच्छा और द्युति (चमक) के अर्थ में है; 'रति' अनुरंजन और सुरत (मैथुन) के अर्थ में है; 'वसति' घर और वास के अर्थ में है; 'वाहिनी' नदी और सेना के अर्थ में है। ၁၀၅၇. १०५७. ပတ္ထေ နာဠေ စ နာဠိ’တ္ထီ, ဂဏေ သမိတိ သင်္ဂမေ; တဏှာ လောဘေ ပိပါသာယံ, မဂ္ဂ ဝုတ္တီသု ဝတ္တနီ. 'नाळि' स्त्रीलिंग में प्रस्थ (माप) और नाली (डंठल) के अर्थ में है; 'समिति' गण और संगम (सभा) के अर्थ में है; 'तण्हा' लोभ और पिपासा (प्यास) के अर्थ में है; 'वत्तनी' मार्ग और वृत्ति के अर्थ में है। ၁၀၅၈. १०५८. ပါဏျင်္ဂေ နာဘိ စက္ကန္တေ, ယာစေ ဝိညတ္တိ ဉာပနေ; ဝိတ္တိ တောသေ ဝေဒနာယံ, ဌာနေ တု ဇီဝိတေ ဌိတိ. 'नाभि' हाथ के अंग और चक्र के मध्य भाग के अर्थ में है; 'विञ्ञत्ति' याचना और ज्ञापन (सूचित करना) के अर्थ में है; 'वित्ति' संतोष और वेदना के अर्थ में है; 'ठिति' स्थान और जीवित रहने (आयु) के अर्थ में है। ၁၀၅၉. १०५९. တရင်္ဂေ [Pg.86] စာ’န္တရေ ဝီစိ, ဓီရတ္တေ ဓာရဏေ ဓိတိ; ဘူ ဘူမိယဉ္စ ဘမုကေ, သဒ္ဒေ ဝေဒေ သဝေ သုတိ. 'वीचि' तरंग और अंतर के अर्थ में है; 'धिति' धीरता (धैर्य) और धारण के अर्थ में है; 'भू' भूमि और भौंह के अर्थ में है; 'सुति' शब्द, वेद और स्रवण (सुनना) के अर्थ में है। ၁၀၆၀. १०६०. ဂေါတ္တံ နာမေ စ ဝံသေ ထ, နဂရေ စ ဃရေ ပုရံ; ဩကံ တု နိဿယေ ဂေဟေ, ကုလံ တု ဂေါတ္တရာသိသု. 'गोत्त' नाम और वंश के अर्थ में है; 'पुर' नगर और घर के अर्थ में है; 'ओक' आश्रय और घर के अर्थ में है; 'कुल' गोत्र और समूह के अर्थ में है। ၁၀၆၁. १०६१. ဟေမေ ဝိတ္တေ ဟိရညဉ္စ, ပညာဏံ တွ’င်္က ဝုဒ္ဓိသု; အထာ’မ္ဗရဉ္စ ခေ ဝတ္ထေ, ဂုယှံ လိင်္ဂေ ရဟသျ’ပိ. 'हिरञ्ञ' सुवर्ण और वित्त (धन) के अर्थ में है; 'पञ्ञाण' चिह्न और बुद्धि (या वृद्धि) के अर्थ में है; 'अम्बर' आकाश और वस्त्र के अर्थ में है; 'गुय्ह' लिंग (गुह्यांग) और रहस्य के अर्थ में भी है। ၁၀၆၂. १०६२. တပေါ ဓမ္မေ ဝတေ စေဝ, ပါပေ တွာ’ဂုမှိ ကိဗ္ဗိသံ; ရတနံ မဏိ သေဋ္ဌေသု, ဝဿံ ဟာယန ဝုဋ္ဌိသု. 'तप' शब्द धर्म और व्रत के अर्थ में; 'किब्बिस' शब्द पाप और अपराध के अर्थ में; 'रतन' शब्द मणि और श्रेष्ठ के अर्थ में; 'वस्स' शब्द वर्ष और वर्षा के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၆၃. १०६३. ဝနံ အရည ဝါရီသု, ခီရမှိ တု ဇလေ ပယော; အက္ခရံ လိပိ မောက္ခေသု, မေထူနံ သင်္ဂမေ ရတေ. 'वन' शब्द अरण्य और जल के अर्थ में; 'पय' शब्द दूध और जल के अर्थ में; 'अक्खर' शब्द लिपि और मोक्ष के अर्थ में; 'मेथून' शब्द संगम और रति के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၆၄. १०६४. သောတံ ကဏ္ဏေ ပယောဝေဂေ, ရိဋ္ဌံ ပါပါ’သုဘေသု စ; အာဂု ပါပါ’ပရာဓေသု, ကေတုမှိ စိဟနေ ဓဇော. 'सोत' शब्द कान और जल के वेग के अर्थ में; 'रिट्ठ' शब्द पाप और अशुभ के अर्थ में; 'आगु' शब्द पाप और अपराध के अर्थ में; 'धज' शब्द केतु (ध्वजा) और चिह्न के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၆၅. १०६५. ဂေါပုရံ ဒွါရမတ္တေပိ, မန္ဒိရံ နဂရေ ဃရေ; ဝါစ္စလိင်္ဂါ ပရမိတော, ဗျတ္တော တု ပဏ္ဍိတေ ဖုဋေ. 'गोपुर' शब्द द्वार के अर्थ में; 'मन्दिर' शब्द नगर और घर के अर्थ में; 'ब्यत्त' शब्द पण्डित और स्पष्ट के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၆၆. १०६६. ဝလ္လဘော ဒယိတေ’ဇ္ဈက္ခေ, ဇလေ ထူလော မဟတျပိ; ကုရူရေ ဘေရဝေ ဘီမော,လောလော တု လောလုပေ စလေ. 'वल्लभ' शब्द प्रिय और अध्यक्ष के अर्थ में; 'थूल' शब्द स्थूल (बड़ा) के अर्थ में; 'भीम' शब्द क्रूर और भयानक के अर्थ में; 'लोल' शब्द लोलुप और चंचल के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၆၇. १०६७. ဗီဘစ္ဆော ဝိကတေ ဘီမေ, ကောမလေ တိခိဏေ မုဒု; ဣဋ္ဌေ စ မဓုရေ သာဒု, သာဒုမှိ မဓုရော ပိယေ. 'बीभच्छ' शब्द विकृत और भयानक के अर्थ में; 'मुदु' शब्द कोमल और तीक्ष्ण के अर्थ में; 'सादु' शब्द इष्ट और मधुर के अर्थ में; 'मधुर' शब्द स्वादु और प्रिय के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၆၈. १०६८. သိတေ တု သုဒ္ဓေ ဩဒါတော, ဒွိဇိဝှော သူစကာ’ဟိသု; သက္ကေ သမတ္ထော သမ္ဗန္ဓေ, သမတ္တံ နိဋ္ဌိတာ’ခိလေ. 'ओदात' शब्द श्वेत और शुद्ध के अर्थ में; 'द्विजिह्व' शब्द सूचक (चुगलखोर) और सर्प के अर्थ में; 'सक्क' शब्द समर्थ और सम्बन्ध के अर्थ में; 'समत्त' शब्द समाप्त और सम्पूर्ण के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၆၉. १०६९. သုဒ္ဓေါ ကေဝလ ပူတေသု, ဇိဃညော’န္တာ’ဓမေသု စ; ပေါဏော’ပနတ နိန္နေသု, အည နီစေသု စေ’တရော. 'सुद्ध' शब्द केवल और पवित्र के अर्थ में; 'जिघञ्ञ' शब्द अन्तिम और अधम के अर्थ में; 'पोण' शब्द प्रवण (झुका हुआ) और निम्न के अर्थ में; 'इतर' शब्द अन्य और नीच के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၀. १०७०. သုစိ သုဒ္ဓေ သိတေ ပူတေ, ပေသလော ဒက္ခစာရုသု; အဓမော ကုစ္ဆိတေ ဦနေ, အပ္ပိယေ ပျ’လိကော ဘဝေ. 'सुचि' शब्द शुद्ध, श्वेत और पवित्र के अर्थ में; 'पेसल' शब्द दक्ष और सुन्दर के अर्थ में; 'अधम' शब्द कुत्सित और ऊन (कम) के अर्थ में; 'अलिक' शब्द अप्रिय और असत्य के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၁. १०७१. ဗျာပေ အသုဒ္ဓေ သံကိဏ္ဏော, ဘဗ္ဗံ ယောဂျေ စ ဘာဝိနိ; သုခုမော အပ္ပကာ’ဏူသု, ဝုဒ္ဓေါ ထေရေ စ ပဏ္ဍိတေ. 'संकिण्ण' शब्द व्याप्त और अशुद्ध के अर्थ में; 'भब्ब' शब्द योग्य और भावी के अर्थ में; 'सुखुम' शब्द अल्प और अणु के अर्थ में; 'वुद्ध' शब्द स्थविर और पण्डित के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၂. १०७२. သုဘေ သာဓုမှိ ဘဒ္ဒေါ ထ, တျာ’ဒေါ စ ဝိပုလေ ဗဟု; ဓီရော ဗုဓေ ဓိတိမန္တေ, ဝေလ္လိတံ ကုဋိလေ ဓုတေ. 'भद्द' शब्द शुभ और साधु के अर्थ में; 'बहु' शब्द अति और विपुल के अर्थ में; 'धीर' शब्द बुध (ज्ञानी) और धृतिमान के अर्थ में; 'वेल्लित' शब्द कुटिल और धुत (कंपित) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၃. १०७३. ဝိသဒေါ [Pg.87] ဗျတ္တ သေတေသု, တရုဏော တု ယုဝေ နဝေ; ယောဂ္ဂံ ယာနေ, ခမေ ယောဂ္ဂေါ,ပိဏ္ဍိတံ ဂဏိတေ ဃနေ. 'विसद' शब्द व्यक्त और श्वेत के अर्थ में; 'तरुण' शब्द युवा और नवीन के अर्थ में; 'योग्ग' शब्द यान और क्षम (योग्य) के अर्थ में; 'पिण्डित' शब्द गणित और घन के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၄. १०७४. ဗုဓေ’ဘိဇာတော ကုလဇေ, ဝုဒ္ဓေါ’ရူသု မဟလ္လကော; ကလျာဏံ သုန္ဒရေ စာပိ, ဟိမော တု သီတလေပိ စ. 'अभिजात' शब्द बुध और कुलज के अर्थ में; 'महल्लक' शब्द वृद्ध और विशाल के अर्थ में; 'कल्याण' शब्द सुन्दर के अर्थ में; 'हिम' शब्द शीतल के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၅. १०७५. လောလေ တု သီဃေ စပလော, ဝုတ္တေ ဥဒိတ မုဂ္ဂတေ; အာဒိတ္တေ ဂဗ္ဗိတေ ဒိတ္တော, ပိဋ္ဌံ တု စုဏ္ဏိတေပိ စ. 'चपल' शब्द लोल और शीघ्र के अर्थ में; 'उदित' शब्द उक्त और उद्गत के अर्थ में; 'दित्त' शब्द आदित्य (दीप्त) और गर्वित के अर्थ में; 'पिट्ठ' शब्द चूर्णित के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၆. १०७६. ဝိဂတေ ဝါယိတေ ဝီတံ, ဘာဝိတံ ဝဍ္ဎိတေပိ စ; ဘဇ္ဇိတေ ပတိတေ ဘဋ္ဌော, ပုဋ္ဌော ပုစ္ဆိတ ပေါသိတေ. 'वीत' शब्द विगत और वायित (बुना हुआ) के अर्थ में; 'भावित' शब्द वर्धित के अर्थ में; 'भट्ठ' शब्द भर्जित और पतित के अर्थ में; 'पुट्ठ' शब्द पृच्छित और पोषित के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၇. १०७७. ဇာတော ဘူတေ စယေ ဇာတံ,ပဋိဘာဂေါ သမာ’ရိသု; သူရော ဝီရေ ရဝိသူရေ, ဒုဋ္ဌော ကုဒ္ဓေ စ ဒူသိတေ. 'जात' शब्द भूत (उत्पन्न) के अर्थ में और 'जातं' समूह के अर्थ में; 'पटिभाग' शब्द समान और शत्रु के अर्थ में; 'सूर' शब्द वीर और सूर्य के अर्थ में; 'दुट्ठ' शब्द क्रुद्ध और दूषित के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၈. १०७८. ဒိဋ္ဌော’ရိမှိ’က္ခိတေ ဒိဋ္ဌော,မူဠှေ ပေါတေ စ ဗာလိသော; နိန္ဒာယံ ခေပနေ ခေပေါ, နိယမော နိစ္ဆယေ ဝတေ. 'दिट्ठ' शब्द शत्रु और ईक्षित (देखा हुआ) के अर्थ में; 'बालिस' शब्द मूढ़ और पोत (शावक) के अर्थ में; 'खेप' शब्द निन्दा और क्षेपण के अर्थ में; 'नियम' शब्द निश्चय और व्रत के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၇၉. १०७९. သလာကာယံ ကုသော ဒဗ္ဘေ,ဗာလျာဒေါ တု ခယေ ဝယော; လေပ ဂဗ္ဗေသွ’ဝလေပေါ, အဏ္ဍဇော မီနပက္ခိသု. 'कुस' शब्द शलाका और दर्भ के अर्थ में; 'वय' शब्द बाल्यावस्था और क्षय के अर्थ में; 'अवलेप' शब्द लेप और गर्व के अर्थ में; 'अण्डज' शब्द मछली और पक्षी के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၀. १०८०. ဗိလာလေ နကုလေ ဗဗ္ဗု, မန္ထော မန္ထနသတ္တုသု; ဝါလော ကေသေ’ဿာဒိလောမေ,သံဃာတော ဃာတရာသိသု. 'बब्बु' शब्द बिडाल और नकुल के अर्थ में; 'मन्थ' शब्द मन्थन और शत्रु के अर्थ में; 'वाल' शब्द केश और अश्व आदि के रोम के अर्थ में; 'संघात' शब्द घात और राशि के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၁. १०८१. ဂေါပဂါမေ ရဝေ ဃောသော, သူတော သာရထိဝန္ဒိသု; မာလျံ တု ပုပ္ဖေ တဒ္ဒါမေ, ဝါဟော တု သကဋေ ဟယေ. 'घोस' शब्द गोपग्राम और रव (ध्वनि) के अर्थ में; 'सूत' शब्द सारथि और वन्दी के अर्थ में; 'माल्य' शब्द पुष्प और माला के अर्थ में; 'वाह' शब्द शकट और अश्व के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၂. १०८२. ခယေ’စ္စနေ စာ’ပစယော, ကာလော သမယ မစ္စုသု; ဘေ တာရကာ နေတ္တမဇ္ဈေ, သီမာ’ ဝဓိ, ဋ္ဌိတီသု စ. 'अपचय' शब्द क्षय और अर्चन के अर्थ में; 'काल' शब्द समय और मृत्यु के अर्थ में; 'भ' शब्द तारका और नेत्र के मध्य भाग के अर्थ में; 'सीमा' शब्द अवधि और स्थिति के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၃. १०८३. အာဘောဂေါ ပုဏ္ဏတာ’ဝဇ္ဇေ-သွာ’ဠိ’တ္ထီ သခိ သေတုသု; သတ္တေ ထူလေ တီသု ဒဠှော, လတာ သာခါယ ဝလ္လိယံ. 'आभोग' शब्द पूर्णता और आवर्जन के अर्थ में; 'आलि' शब्द सखी और सेतु के अर्थ में; 'दळ्ह' शब्द सत्त्व और स्थूल के अर्थ में; 'वल्लि' शब्द लता और शाखा के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၄. १०८४. မုတ္တိ’တ္ထီ [Pg.88] မောစနေ မောက္ခေ,ကာယော တု ဒေဟ ရာသိသု; နီစေ ပုထုဇ္ဇနော မူဠှေ, ဘတ္တာ သာမိနိ ဓာရကေ. 'मुत्ति' शब्द मोचन और मोक्ष के अर्थ में; 'काय' शब्द देह और राशि के अर्थ में; 'पुथुज्जन' शब्द नीच और मूढ़ के अर्थ में; 'भत्ता' शब्द स्वामी और धारक के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၅. १०८५. သိခါ, ပိဉ္ဆေသု သိခဏ္ဍော, သတ္တေ တွ’တ္တနိ ပုဂ္ဂလော; သမ္ဗာဓော သံကဋေ ဂုယှေ,နာသေ ခေပေ ပရာဘဝေါ. 'सिखण्ड' शब्द शिखा और पिच्छ के अर्थ में; 'पुग्गल' शब्द सत्त्व और आत्मा के अर्थ में; 'सम्बाध' शब्द संकट और गुह्य के अर्थ में; 'पराभव' शब्द नाश और क्षेप के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၆. १०८६. ဝစ္စော ရူပေ ကရီသေ ထ, ဇုတိ’တ္ထီ ကန္တိရံသိသု; 'वच्च' शब्द रूप और करीष (विष्ठा) के अर्थ में; 'जुति' शब्द कान्ति और रश्मि के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၇. १०८७. လဗ္ဘံ ယုတ္တေ စ လဒ္ဓဗ္ဗေ, ခဏ္ဍေ ပဏ္ဏေ ဒလံ မတံ; သလ္လံ ကဏ္ဍေ သလာကာယံ, သုစိတ္တေ ဓာဝနံ ဂတေ; ဘန္တတ္ထေ ဝိဗ္ဘမော ဟာဝေ, မောဟော’ဝိဇ္ဇာယ မုစ္ဆနေ. 'लब्भ' शब्द युक्त और लब्धव्य के अर्थ में; 'दल' शब्द खण्ड और पर्ण के अर्थ में; 'सल्ल' शब्द काण्ड और शलाका के अर्थ में; 'धावन' शब्द शुचि और गति के अर्थ में; 'विब्भम' शब्द भ्रान्ति और हाव के अर्थ में; 'मोह' शब्द अविद्या और मूर्च्छा के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၈. १०८८. သေဒေါ ဃမ္မဇလေ ပါကေ,ဂေါဠေ ဥစ္ဆုမယေ ဂုဠော; မိတ္တေ သဟာယေ စ သခါ, ဝိဘူ နိစ္စပ္ပဘူသု သော. 'सेद' शब्द घर्मजल (पसीना) और पाक के अर्थ में; 'गुळ' शब्द गोल और इक्षुविकार (गुड़) के अर्थ में; 'सखा' शब्द मित्र और सहाय के अर्थ में; 'विभू' शब्द नित्य और प्रभु के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၈၉. १०८९. ခဂ္ဂေ ကုရူရေ နေတ္တိံသော, ပရသ္မိံ အတြ တီသွ’မု; ကလင်္ကော’င်္ကာ’ပဝါဒေသု,ဒေသေ ဇနပဒေါ ဇနေ. 'नेत्तिंस' शब्द खड्ग और क्रूर के अर्थ में; 'अमु' शब्द पर और अत्र के अर्थ में; 'कलङ्क' शब्द अङ्क और अपवाद के अर्थ में; 'जनपद' शब्द देश और जन के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၀. १०९०. ပဇ္ဇေ ဂါထာ ဝစီဘေဒေ, ဝံသော တွ’နွယဝေဏုသု; ယာနံ ရထာဒေါ ဂမနေ, သရူပသ္မိံ အဓော တလံ. 'पज्ज' शब्द गाथा और वचन के अर्थ में; 'वंस' शब्द अन्वय (वंश) और वेणु (बाँस) के अर्थ में; 'यान' शब्द रथ आदि और गमन के अर्थ में; 'तल' शब्द स्वरूप और अधोभाग के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၁. १०९१. မဇ္ဈော ဝိလဂ္ဂေ ဝေမဇ္ဈေ, ပုပ္ဖံ တု ကုသုမော’တုသု; သီလံ သဘာဝေ သုဗ္ဗတေ, ပုင်္ဂဝေါ ဥသဘေ ဝရေ. 'मज्झ' शब्द विलग्न (कमर) और वेमध्य के अर्थ में; 'पुप्फ' शब्द कुसुम और ऋतु के अर्थ में; 'सील' शब्द स्वभाव और सुव्रत के अर्थ में; 'पुङ्गव' शब्द ऋषभ और वर (श्रेष्ठ) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၂. १०९२. ကောသေ ခဂါဒိဗီဇေ’ဏ္ဍံ, ကုဟရံ ဂဗ္ဘရေ ဗိလေ; နေတ္တိံသေ ဂဏ္ဍကေ ခဂ္ဂေါ, ကဒမ္ဗော တု ဒုမေ စယေ. 'कोस' शब्द म्यान, पक्षी आदि के अण्ड (बीज) के अर्थ में प्रयुक्त होता है; 'कुहर' शब्द गुफा और बिल के अर्थ में; 'खग्ग' शब्द तलवार और गैंडे के अर्थ में; और 'कदम्ब' शब्द वृक्ष और समूह के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၃. १०९३. ဘေ’ဓေနုယံ ရောဟိဏီ’တ္ထီ, ဝရင်္ဂံ ယောနိယံ သိရေ; အက္ကောသေ သပထေ သာပေါ, ပင်္ကံ ပါပေ စ ကဒ္ဒမေ. 'रोहिणी' शब्द नक्षत्र, गाय और स्त्री के अर्थ में; 'वराङ्ग' शब्द योनि और सिर के अर्थ में; 'साप' शब्द आक्रोश (गाली) और शपथ के अर्थ में; तथा 'पङ्क' शब्द पाप और कीचड़ के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၄. १०९४. ဘောဂဝတျု’ရဂေ ဘောဂီ, ဿရော တု သိဝသာမိသု; ဗလေ ပဘာဝေ ဝီရိယံ, တေဇော တေသု စ ဒိတ္တိယံ. 'भोगी' शब्द सर्प और राजा के अर्थ में; 'इस्सर' शब्द शिव और स्वामी के अर्थ में; 'वीरिय' शब्द बल और प्रभाव के अर्थ में; तथा 'तेज' शब्द बल, प्रभाव और दीप्ति (चमक) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၅. १०९५. ဓာရာ သန္တတိ ခဂ္ဂင်္ဂေ, ဝါနံ တဏှာယ သိဗ္ဗနေ; ခတ္တာ သူတေ ပဋိဟာရေ, ဝိတ္တိ ပီဠာသု ဝေဒနာ. 'धारा' शब्द प्रवाह और तलवार की धार के अर्थ में; 'वान' शब्द तृष्णा और सिलाई के अर्थ में; 'खत्ता' शब्द सारथी और द्वारपाल के अर्थ में; तथा 'वेदना' शब्द वृत्ति (प्रसन्नता), पीड़ा और अनुभव के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၆. १०९६. ထိယံ [Pg.89] မတိ’စ္ဆာပညာသု, ပါပေ ယုဒ္ဓေ ရဝေ ရဏော; လဝေါတု ဗိန္ဒု’စ္ဆေဒေသု, ပလာလေ’ တိသယေ ဘုသံ. 'मति' शब्द इच्छा और प्रज्ञा के अर्थ में; 'रण' शब्द पाप, युद्ध और शब्द के अर्थ में; 'लव' शब्द बिन्दु और छेदन के अर्थ में; तथा 'भुस' शब्द पुआल और अतिशय (बहुत अधिक) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၇. १०९७. ဗာဓာ ဒုက္ခေ နိသေဓေ စ, မူလပဒေပိ မာတိကာ; သ္နေဟော တေလေ’ဓိကပ္ပေမေ,ဃရာ’ပေက္ခာသု အာလယော. 'बाधा' शब्द दुःख और निषेध के अर्थ में; 'मातिका' शब्द मूल पाठ के अर्थ में; 'स्नेह' शब्द तेल और प्रेम के अर्थ में; तथा 'आलय' शब्द घर और अपेक्षा (आसक्ति) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၈. १०९८. ကေတုသ္မိံ ကေတနံ ဂေဟေ, ဌာနေ ဘူမိ’တ္ထိယံ ဘုဝိ; လေချေ လေခေါ ရာဇိ လေခါ, ပူဇိတေ ဘဂဝါ ဇိနေ. 'केतन' शब्द ध्वज और घर के अर्थ में; 'भूमि' शब्द स्थान और पृथ्वी के अर्थ में; 'लेख' शब्द लेखन और रेखा के अर्थ में; तथा 'भगवा' शब्द पूजित और जिन (बुद्ध) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၀၉၉. १०९९. ဂဒါ သတ္ထေ ဂဒေါ ရောဂေ, နိသဇ္ဇာ ပီဌေသွာ’သနံ; တထာဂတော ဇိနေ သတ္တေ,စယေ ဒေဟေ သမုဿယော. 'गद' शब्द शस्त्र (गदा) और रोग के अर्थ में; 'आसन' शब्द बैठने और पीठ (चौकी) के अर्थ में; 'तथागत' शब्द जिन और सत्त्व (प्राणी) के अर्थ में; तथा 'समुच्चय' शब्द समूह और देह के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၀. ११००. ဗိလံ ကောဋ္ဌာသ ဆိဒ္ဒေသု, ဝဇ္ဇံ ဒေါသေ စ ဘေရိယံ; ကာလေ ဒီဃဉ္ဇသေ’ဒ္ဓါနံ, အာလိယံ သေတု ကာရဏေ. 'बिल' शब्द भाग और छिद्र के अर्थ में; 'वज्ज' शब्द दोष और भेरी (नगाड़ा) के अर्थ में; 'अद्धान' शब्द काल और लम्बे मार्ग के अर्थ में; तथा 'आलि' शब्द सेतु (बाँध) और कारण के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၁. ११०१. ဩကာသော ကာရဏေ ဒေသေ,သဘာ ဂေဟေ စ သံသဒေ; ယူပေါ ထမ္ဘေ စ ပါသာဒေ, အယနံ ဂမနေ ပထေ. 'ओकास' शब्द कारण और स्थान के अर्थ में; 'सभा' शब्द घर और संसद (परिषद्) के अर्थ में; 'यूप' शब्द खम्भा और प्रासाद के अर्थ में; तथा 'अयन' शब्द गमन और मार्ग के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၂. ११०२. အက္ကော ရုက္ခန္တရေ သူရေ,အဿော ကောဏေ ဟယေပိ စ; အံသော ခန္ဓေ စ ကောဋ္ဌာသေ,ဇာလံ သူသွ’စ္စိ နော ပုမေ. 'अक्क' शब्द एक विशेष वृक्ष और सूर्य के अर्थ में; 'अस्स' शब्द कोण और घोड़े के अर्थ में; 'अंस' शब्द कन्धा और भाग के अर्थ में; तथा 'जाल' शब्द जाल और ज्वाला के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၃. ११०३. နာသာ’သတ္တေသွ’ ဘာဝေါ ထ,အန္န မောဒန ဘုတ္တိသု; ဇီဝံ ပါနေ ဇနေ ဇီဝေါ,ဃာသော တွ’န္နေ စ ဘက္ခဏေ. 'नास' शब्द प्राणियों के अभाव (विनाश) के अर्थ में; 'अन्न' शब्द भात और भोजन के अर्थ में; 'जीव' शब्द प्राण और जन (प्राणी) के अर्थ में; तथा 'घास' शब्द अन्न और भक्षण के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၄. ११०४. ဆဒနေ’စ္ဆာဒနံ ဝတ္ထေ, နိကာယော ဂေဟရာသိသု; အန္နာဒေါ အာမိသံ မံသေ; ဒိက္ခာ တု ယဇနေ’စ္စနေ. 'अच्छादन' शब्द छत और वस्त्र के अर्थ में; 'निकाय' शब्द घर और समूह के अर्थ में; 'आमिस' शब्द अन्न और मांस के अर्थ में; तथा 'दिक्खा' शब्द यज्ञ और अर्चना के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၅. ११०५. ကြိယာယံ ကာရိကာ ပဇ္ဇေ,ကေတု တု စိဟနေ ဓဇေ; ကုသုမံ ထီရဇေ ပုပ္ဖေ, ဝါနရေ တု ဗုဓေ ကဝိ. 'कारिका' शब्द क्रिया और पद्य के अर्थ में; 'केतु' शब्द चिह्न और ध्वज के अर्थ में; 'कुसुम' शब्द रजस्वला और पुष्प के अर्थ में; तथा 'कवि' शब्द वानर और विद्वान के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၆. ११०६. အဓရေ [Pg.90] ခရဘေ ဩဋ္ဌော, လုဒ္ဒေါ တု လုဒ္ဒကေပိ စ; ကလုသံ တွာ’ဝိလေ ပါပေ, ပါပေ ကလိ ပရာဇယေ. 'ओट्ठ' शब्द अधर (नीचे का होंठ) और ऊँट के अर्थ में; 'लुद्द' शब्द क्रूर और शिकारी के अर्थ में; 'कलुस' शब्द गंदा और पाप के अर्थ में; तथा 'कलि' शब्द पाप और पराजय के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၇. ११०७. ကန္တာရော ဝန, ဒုဂ္ဂေသု, စရော စာရမှိ စဉ္စလေ; ဇနာဝါသေ ဂဏေ ဂါမော, စမ္မံ တု ဖလကေ တစေ. 'कान्तार' शब्द वन और दुर्गम मार्ग के अर्थ में; 'चर' शब्द गुप्तचर और चंचल के अर्थ में; 'गाम' शब्द जनवास (गाँव) और समूह के अर्थ में; तथा 'चम्म' शब्द ढाल और त्वचा के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၈. ११०८. အာမောဒေါ ဟာသ ဂန္ဓေသု,စာရု တု ကနကေပိ စ; သတ္တာယံ ဘဝနံ ဂေဟေ, လေသေ တု ခလိတေ ဆလံ. 'आमोद' शब्द हर्ष और सुगन्ध के अर्थ में; 'चारु' शब्द सुन्दर और सुवर्ण के अर्थ में; 'भवन' शब्द सत्ता (होना) और घर के अर्थ में; तथा 'छल' शब्द बहाना और स्खलन (गलती) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၀၉. ११०९. ဝေရံ ပါပေ စ ပဋိဃေ, တစော စမ္မနိ ဝက္ကလေ; ဥစ္စေ’ဓိရောဟေ အာရောဟော, နေတ္တံ ဝတ္ထန္တရ’က္ခိသု. 'वेर' शब्द पाप और प्रतिघ (क्रोध) के अर्थ में; 'तच' शब्द त्वचा और वल्कल (छाल) के अर्थ में; 'आरोह' शब्द ऊँचाई और चढ़ने के अर्थ में; तथा 'नेत्त' शब्द वस्त्र विशेष और आँख के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၀. १११०. ပဋိဟာရေ မုခေ ဒွါရံ, ပေတေ ဉာတေ မတော တိသု; မာသော ပရဏ္ဏ ကာလေသု, နဂ္ဂေါ တွ’စေလကေပိ စ. 'द्वार' शब्द प्रतिहार (दरवाजा) और मुख के अर्थ में; 'मत' शब्द मृत और ज्ञात के अर्थ में; 'मास' शब्द उड़द और महीने के अर्थ में; तथा 'नग्ग' शब्द नग्न (वस्त्रहीन) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၁. ११११. ဒေါသေ ဃာတေ စ ပဋိဃော, မိဂါဒေါ ဆဂလေ ပသု; အရူပေ စာ’ဝှယေ နာမံ, ဒရော ဒရထ ဘီတိသု. 'प्रतिघ' शब्द दोष और घात के अर्थ में; 'पसु' शब्द मृगाद (पशु) और बकरे के अर्थ में; 'नाम' शब्द अरूप और नाम (पुकार) के अर्थ में; तथा 'दर' शब्द दरथ (पीड़ा) और भय के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၂. १११२. ယာစနေ ဘောဇနေ ဘိက္ခာ,ဘာရေ တွ’တိသယေ ဘရော; ဒဗ္ဗိ’န္ဒဇာယာသု သုဇာ, မေဃေ တွ’ဗ္ဘံ ဝိဟာယသေ. 'भिक्खा' शब्द याचना और भोजन के अर्थ में; 'भर' शब्द भार और अतिशय के अर्थ में; 'सुजा' शब्द दर्वी (करछुल) और इन्द्राणी के अर्थ में; तथा 'अब्भ' शब्द मेघ और आकाश के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၃. १११३. မောဒကော ခဇ္ဇဘေဒေပိ, မဏိကေ ရတနေ မဏိ; သေလာ’ရာမေသု မလယော,သဘာဝ’င်္ကေသု လက္ခဏံ. 'मोदक' शब्द खाद्य विशेष (लड्डू) के अर्थ में; 'मणि' शब्द मणिक (घड़ा) और रत्न के अर्थ में; 'मलय' शब्द पर्वत और उद्यान के अर्थ में; तथा 'लक्खण' शब्द स्वभाव और चिह्न के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၄. १११४. ဟဝိ သပ္ပိမှိ ဟောတဗ္ဗေ, သိရော သေဋ္ဌေ စ မုဒ္ဓနိ; ဝိစာရေပိ ဝိဝေကော ထ, သိခရီ ပဗ္ဗတေ ဒုမေ. 'हवि' शब्द घी और हवन योग्य वस्तु के अर्थ में; 'सिर' शब्द श्रेष्ठ और मस्तक के अर्थ में; 'विवेक' शब्द विचार के अर्थ में; तथा 'सिखरी' शब्द पर्वत और वृक्ष के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၅. १११५. ဝေဂေါ ဇဝေ ပဝါဟေ စ, သင်္ကု တု ခိလဟေတိသု; နိဂ္ဂဟီတေ ကဏေ ဗိန္ဒု, ဝရာဟော သူကရေ ဂဇေ. 'वेग' शब्द गति और प्रवाह के अर्थ में; 'सङ्कु' शब्द खूँटा और हेतु के अर्थ में; 'बिन्दु' शब्द निग्गृहीत (अनुस्वार) और कण के अर्थ में; तथा 'वराह' शब्द सूअर और हाथी के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၆. १११६. နေတ္တန္တေ စိတ္တကေ’ပါင်္ဂံ, သိဒ္ဓတ္ထော သာသပေ ဇိနေ; ဟာရော မုတ္တာဂုဏေ ဂါဟေ,ခါရကော မကုဠေ ရသေ. 'अपाङ्ग' शब्द नेत्र के प्रान्त भाग और तिलक के अर्थ में; 'सिद्धत्थ' शब्द सरसों और जिन के अर्थ में; 'हार' शब्द मुक्तावली और ग्रहण करने के अर्थ में; तथा 'खारक' शब्द कली और रस के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၇. १११७. အစ္စယော’ တိက္ကမေ ဒေါသေ,သေလရုက္ခေသွ’ဂေါ နဂေါ; သွပ္ပေ’ဝဓာရဏေ မတ္တံ, အပစိတျ’စ္စနေ ခယေ. 'अच्चय' शब्द अतिक्रमण और दोष के अर्थ में; 'अग' और 'नग' शब्द पर्वत और वृक्ष के अर्थ में; 'मत्त' शब्द अल्प और अवधारण (मात्र) के अर्थ में; तथा 'अपचिति' शब्द अर्चना और क्षय के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၈. १११८. ဆိဒ္ဒေါ’တရဏေသွော’တာရော,ဗြဟ္မေ [Pg.91] စ ဇနကေ ပိတာ; ပိတာမဟော’ယျကေ ဗြဟ္မေ,ပေါတော နာဝါယ ဗာလကေ. 'ओतार' शब्द छिद्र और उतरने के अर्थ में; 'पिता' शब्द ब्रह्मा और जनक के अर्थ में; 'पितामह' शब्द दादा और ब्रह्मा के अर्थ में; तथा 'पोत' शब्द नौका और बालक (शावक) के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၁၉. १११९. ရုက္ခေ ဝဏ္ဏေ သုနေ သောဏော,သဂ္ဂေ တု ဂဂနေ ဒိဝေါ; ဝတ္ထေ ဂန္ဓေ ဃရေ ဝါသော, စုလ္လော ခုဒ္ဒေ စ ဥဒ္ဓနေ. 'सोण' शब्द वृक्ष, वर्ण और कुत्ते के अर्थ में; 'दिव' शब्द स्वर्ग और आकाश के अर्थ में; 'वास' शब्द वस्त्र, गन्ध और घर के अर्थ में; तथा 'चुल्ल' शब्द छोटे और चूल्हे के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၂၀. ११२०. ကဏ္ဏော ကောဏေ စ သဝဏေ,မာလာ ပုပ္ဖေ စ ပန္တိယံ; ဘာဂေါ ဘာဂျေ’ကဒေသေသု,ကုဋ္ဌံ ရောဂေ’ ဇပါလကေ. 'कण्ण' शब्द कोण और कान के अर्थ में; 'माला' शब्द पुष्प और पंक्ति के अर्थ में; 'भाग' शब्द भाग्य और एक अंश के अर्थ में; तथा 'कुट्ठ' शब्द रोग (कुष्ठ) और बकरी पालने वाले के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၂၁. ११२१. သေယျာ သေနာသနေ သေနေ, စုန္ဒဘဏ္ဍမှိ စ’ဗ္ဘမော; ဝတ္ထာဒိလောမံ’သု ကရေ, နိပါတော ပတနေ’ဗျယေ. 'सेय्या' शब्द शय्या (बिस्तर) और सेना के अर्थ में; 'अब्भम' शब्द खराद के औजार के अर्थ में; 'अंसु' शब्द वस्त्र आदि के रोएँ और किरण के अर्थ में; तथा 'निपात' शब्द गिरने और अव्यय के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၂၂. ११२२. သာခါယံ ဝိဋပေါ ထမ္ဘေ, သတ္တု ခဇ္ဇန္တရေ ဒိသေ; သာမိကော ပတိ’ယိရေသု, ပဋ္ဌာနံ ဂတိ ဟေတုသု. 'विटप' शब्द शाखा और खम्भे के अर्थ में है; 'सत्तु' शब्द शत्रु और दिशा के अर्थ में है; 'सामिको' (स्वामी) शब्द पति और ईर (स्वामी) के अर्थ में है; 'पट्ठान' शब्द गति और हेतु के अर्थ में है। ၁၁၂၃. ११२३. ရာဂေ ရင်္ဂေါ နစ္စဋ္ဌာနေ, ပါနံ ပေယျေ စ ပီတိယံ; ဣဏု’က္ခေပေသု ဥဒ္ဓါရော, ဥမ္မာရေ ဧဠကော အဇေ. 'रङ्ग' शब्द राग और नृत्य-स्थान के अर्थ में है; 'पीति' शब्द पान, पेय और प्रीति के अर्थ में है; 'उद्धार' शब्द ऋण-निवारण के अर्थ में है; 'एळक' शब्द देहली (चौखट) और भेड़ के अर्थ में है। ၁၁၂၄. ११२४. ပဟာရော ပေါထနေ ယာမေ,သရဒေါ ဟာယနော’တုသု; ကုဏ္ဍိကာယာ’ဠှကေ တုမ္ဗော,ပလာလော တု ဘုသမှိ စ. 'पहार' शब्द प्रहार और प्रहर के अर्थ में है; 'सरद' शब्द वर्ष और ऋतु के अर्थ में है; 'तुम्ब' शब्द कुण्डिका और आढक (एक माप) के अर्थ में है; 'पलाल' शब्द भूसे के अर्थ में है। ၁၁၂၅. ११२५. မတာ’ဝါဋေ စယေ ကာသု, ပနိသာ ကာရဏေ ရဟော; ကာသော ပေါဋဂလေ ရောဂေ,ဒေါသော ကောဓေ ဂုဏေ’တရေ. 'कासु' शब्द गड्ढे और ढेर के अर्थ में माना गया है; 'पनिसा' शब्द कारण और रहस्य के अर्थ में है; 'कास' शब्द पोठगल (एक घास) और रोग (खांसी) के अर्थ में है; 'दोस' शब्द क्रोध और गुण के विपरीत (दोष) के अर्थ में है। ၁၁၂၆. ११२६. ယုတျ’ဋ္ဋာလ’ဋ္ဋိတေသွ’ဋ္ဋော, ကီဠာယံ ကာနနေ ဒဝေါ; ဥပ္ပတ္တိယံ စော’ပ္ပတနံ, ဥယျာနံ ဂမနေ ဝနေ. 'अट्ट' शब्द युक्ति, अट्टालिका और पीड़ित के अर्थ में है; 'दव' शब्द क्रीड़ा और वन के अर्थ में है; 'उप्पतन' शब्द उत्पत्ति और ऊपर उड़ने के अर्थ में है; 'उय्यान' शब्द गमन और वन (बगीचे) के अर्थ में है। ၁၁၂၇. ११२७. ဝေါကာရော လာမကေ ခန္ဓေ, မူလော’ပဒါသု ပါဘတံ; ဒသာ’ ဝတ္ထာ ပဋန္တေသု, ကာရဏံ ဃာတ, ဟေတုသု. 'वोकार' शब्द नीच और स्कन्ध के अर्थ में है; 'पाभत' शब्द मूल और घूस (उपदा) के अर्थ में है; 'दसा' शब्द अवस्था और वस्त्र के छोर के अर्थ में है; 'कारण' शब्द वध और हेतु के अर्थ में है। ၁၁၂၈. ११२८. ဟတ္ထိဒါနေ [Pg.92] မဒေါ ဂဗ္ဗေ, ဃဋာ ဃဋန ရာသိသု; ဥပဟာရော’ဘိဟာရေပိ, စယော ဗန္ဓန ရာသိသု. 'मद' शब्द हाथी के मद और गर्व के अर्थ में है; 'घटा' शब्द चेष्टा और समूह के अर्थ में है; 'उपहार' शब्द भेंट के अर्थ में भी है; 'चय' शब्द बन्धन और समूह के अर्थ में है। ၁၁၂၉. ११२९. ဂန္ဓော ထောကေ ဃာယနီယေ,စာဂေါ တု ဒါနဟာနိသု; ပါနေ ပမောဒေ ပီတိ’တ္ထီ, ဣဏေ ဂိဝါ ဂလေပိ စ. 'गन्ध' शब्द थोड़े और सूँघने योग्य के अर्थ में है; 'चाग' शब्द दान और त्याग के अर्थ में है; 'पीति' (स्त्रीलिंग) शब्द पान और प्रमोद के अर्थ में है; 'गीवा' शब्द ऋण और गले के अर्थ में है। ၁၁၃၀. ११३०. ပတိဋ္ဌာ နိဿယေ ဌာနေ, ဗလက္ကာရေပိ သာဟသံ; ဘင်္ဂေါ ဘေဒေ ပဋေ ဘင်္ဂံ, ဆတ္တံ တု ဆဝကေပိ စ. 'पतिट्ठा' शब्द आश्रय और स्थान के अर्थ में है; 'साहस' शब्द बलात्कार (बल-प्रयोग) के अर्थ में भी है; 'भङ्ग' शब्द भेद और वस्त्र के अर्थ में है; 'छत्त' शब्द छत्र और शव के अर्थ में भी है। ၁၁၃၁. ११३१. ဉာဏေ ဘုဝိ စ ဘူရိ’တ္တီ, အနင်္ဂေ မဒနော ဒုမေ; ပမာတရိပိ မာတာ ထ, ဝေဌု’ဏီသေသု ဝေဌနံ. 'भूरि' (स्त्रीलिंग) शब्द ज्ञान और पृथ्वी के अर्थ में है; 'मदन' शब्द कामदेव और वृक्ष के अर्थ में है; 'माता' शब्द माता और प्रमाता के अर्थ में है; 'वेठन' शब्द पगड़ी और लपेटने के अर्थ में है। ၁၁၃၂. ११३२. မာရိသော တဏ္ဍုလေယျေ’ယျေ,မောက္ခော နိဗ္ဗာန မုတ္တိသု; ဣန္ဒော’ဓိပတိ သက္ကေသွာ, ရမ္မဏံ ဟေတု ဂေါစရေ. 'मारिस' शब्द तण्डुलेय (एक साग) और आर्य के अर्थ में है; 'मोक्ख' शब्द निर्वाण और मुक्ति के अर्थ में है; 'इन्द' शब्द अधिपति और शक्र के अर्थ में है; 'आरम्मण' शब्द हेतु और विषय (गोचर) के अर्थ में है। ၁၁၃၃. ११३३. အင်္ကေ သဏ္ဌာန မာကာရေ,ခေတ္တေ ဝပ္ပော တဋေပိ စ; သမ္မုတျ’နုညာ ဝေါဟာရေ, သွ’ထ လာဇာသု စာ’က္ခတံ. 'अङ्क' शब्द संस्थान और आकार के अर्थ में है; 'वप्प' शब्द खेत और तट के अर्थ में भी है; 'सम्मुति' शब्द अनुज्ञा और व्यवहार के अर्थ में है; 'अक्खत' शब्द लाजा (खील) के अर्थ में है। ၁၁၃၄. ११३४. သတြံ ယာဂေ သဒါဒါနေ,သောမော တု ဩသဓိ’န္ဒုသု; သံဃာတော ယုဂဂေဟင်္ဂေ, ခါရော ဦသေ စ ဘသ္မနိ. 'सत्र' शब्द यज्ञ और सदादान के अर्थ में है; 'सोम' शब्द ओषधि और चन्द्रमा के अर्थ में है; 'सङ्घात' शब्द युग (जोड़ा) और घर के अंग के अर्थ में है; 'खार' शब्द ऊसर और भस्म के अर्थ में है। ၁၁၃၅. ११३५. အာတာပေါ ဝီရိယေ တာပေ,ဘာဂေ သီမာယ ဩဓိ စာတိ. 'आताप' शब्द वीर्य और ताप के अर्थ में है; 'ओधि' शब्द भाग और सीमा के अर्थ में है। ဣတိ ပါဒါနေကတ္ထဝဂ္ဂေါ. इस प्रकार एक पाद वाले अनेकार्थक शब्दों का वर्ग समाप्त हुआ। အနေကတ္ထဝဂ္ဂေါ နိဋ္ဌိတော. अनेकार्थक वर्ग समाप्त हुआ। ၃. သာမညကဏ္ဍ ३. सामान्य काण्ड ၄. အဗျယဝဂ္ဂ ४. अव्यय वर्ग ၁၁၃၆. ११३६. အဗျယံ ဝုစ္စတေ ဒါနိ, စိရဿံ တု စိရံ တထာ; စိရေန စိရရတ္တာယ, သဟ သဒ္ဓိံ သမံ အမာ. अब अव्यय कहे जाते हैं— 'चिरस्सं', 'चिरं', 'चिरेण' और 'चिररत्ताय' (ये देर तक के अर्थ में हैं); 'सह', 'सद्धिं', 'समं' और 'अमा' (ये साथ के अर्थ में हैं)। ၁၁၃၇. ११३७. ပုနပ္ပုနံ [Pg.93] အဘိဏှဉ္စာ, သကိံ စာ’ဘိက္ခဏံ မုဟုံ; ဝဇ္ဇနေ တု ဝိနာ နာနာ, အန္တရေန ရိတေ ပုထု. 'पुनप्पुनं', 'अभिण्हं', 'सकिं', 'अभिक्खणं' और 'मुहुं' (ये बार-बार के अर्थ में हैं); 'विना', 'नाना', 'अन्तरेण', 'रिते' और 'पुथु' (ये वर्जन/बिना के अर्थ में हैं)। ၁၁၃၈. ११३८. ဗလဝံ သုဋ္ဌု စာ’တီဝါ, တိသယေ ကိမုတ သွ’တိ; အဟော တု ကိံ ကိမူ’ ဒါဟု, ဝိကပ္ပေ ကိမုတော’ဒ စ. 'बलवं', 'सुट्ठु', 'अतीव' और 'अति' (ये अतिशय के अर्थ में हैं); 'किमुत' (और क्या कहना); 'अहो', 'तु', 'किं', 'किमू', 'उदाहु', 'किमुत' और 'उद' (ये विकल्प के अर्थ में हैं)। ၁၁၃၉. ११३९. အဝှာနေ ဘော အရေ အမ္ဘော,ဟမ္ဘော ရေ ဇေ’င်္ဂ အာဝုသော; ဟေ ဟရေ ထ ကထံ ကိံသု, နနု ကစ္စိ နု ကိံ သမာ. 'भो', 'अरे', 'अम्भो', 'हम्भो', 'रे', 'जे', 'अङ्ग', 'आवुसो', 'हे' और 'हरे' (ये आह्वान/सम्बोधन के अर्थ में हैं); 'कथं', 'किंसु', 'ननु', 'कच्चि', 'नु' और 'किं' (ये प्रश्न/समानता के अर्थ में हैं)। ၁၁၄၀. ११४०. အဓုနေ’တရဟီ’ဒါနိ, သမ္ပတိ အညဒတ္ထု တု; တဂ္ဃေ’ ကံသေ သသက္ကဉ္စာ, ဒ္ဓါ ကာမံ ဇာတု ဝေ ဟဝေ. 'अधुना', 'एतरहि', 'इदानि' और 'सम्पति' (ये अब के अर्थ में हैं); 'अञ्ञदत्थु', 'तग्घे', 'एकंसे', 'ससक्कं', 'अद्धा', 'कामं', 'जातु', 'वे' और 'हवे' (ये निश्चय के अर्थ में हैं)। ၁၁၄၁. ११४१. ယာဝတာ တာဝတာ ယာဝ, တာဝ ကိတ္တာဝတာ တထာ; ဧတ္တာဝတာ စ ကီဝေ’တိ, ပရိစ္ဆေဒတ္ထဝါစကာ. 'यावता', 'तावता', 'याव', 'ताव', 'कित्तावता', 'एत्तावता' और 'कीव'—ये परिच्छेद (सीमा/मात्रा) के अर्थ के वाचक हैं। ၁၁၄၂. ११४२. ယထာ တထာ ယထေဝေ’ဝံ, ယထာနာမ ယထာဟိ စ; သေယျထာပျေ’ဝမေဝံ, ဝါ, တထေဝ စ ယထာပိ စ. 'यथा', 'तथा', 'यथेव', 'एवं', 'यथानाम', 'यथाहि', 'सेय्यथापि', 'एवमेवं', 'वा', 'तथेव' और 'यथापि' (ये उपमा/सादृश्य के अर्थ में हैं)। ၁၁၄၃. ११४३. ဧဝမ္ပိ စ သေယျထာပိ, နာမ ယထရိဝါ’ပိ စ; ပဋိဘာဂတ္ထေ ယထာစ, ဝိယ တထရိဝါ’ပိ စ. 'एवम्पि', 'सेय्यथापि', 'नाम', 'यथरिव', 'यथा', 'विय' और 'तथरिव'—ये सादृश्य (उपमा) के अर्थ में हैं। ၁၁၄၄. ११४४. သံ သာမဉ္စ သယံ စာထ, အာမ သာဟု လဟူ’ပိ စ; ဩပါယိကံ ပတိရူပံ, သာဓွေ’ဝံ သမ္ပဋိစ္ဆနေ. 'सं', 'सामं' और 'सयं' (स्वयं के अर्थ में); 'आम', 'साहु', 'लहु', 'ओपायिकं', 'पतिरूपं', 'साधु' और 'एवं' (ये सम्प्रतिच्छन/स्वीकृति के अर्थ में हैं)। ၁၁၄၅. ११४५. ယံ တံ ယတော တတော ယေန,တေနေ’တိ ကာရဏေ သိယုံ; အသာကလျေ တု စန စိ, နိပ္ဖလေ တု မုဓာ ဘဝေ. 'यं', 'तं', 'यतो', 'ततो', 'येन' और 'तेन'—ये कारण के अर्थ में होते हैं; 'चन' और 'चि' असकल (अपूर्णता) के अर्थ में; 'मुधा' निष्फल के अर्थ में होता है। ၁၁၄၆. ११४६. ကဒါစိ ဇာတု တုလျာ’ထ, သဗ္ဗတော စ သမန္တတော; ပရိတော စ သမန္တာပိ, အထ မိစ္ဆာ မုသာ ဘဝေ. 'कदाचि' और 'जातु' समान अर्थ में हैं; 'सब्बतो', 'समन्ततो', 'परितो' और 'समन्ता' (ये चारों ओर के अर्थ में हैं); 'मिच्छा' और 'मुसा' झूठ के अर्थ में होते हैं। ၁၁၄၇. ११४७. နိသေဓေ န အနောမာ’လံ, နဟိ စေတု သစေ ယဒိ; အနုကုလျေ တု သဒ္ဓဉ္စ,နတ္တံ ဒေါသော ဒိဝါ တွ’ဟေ. 'न', 'नो', 'मा', 'अलं' और 'नहि' निषेध के अर्थ में हैं; 'चे', 'सचे' और 'यदि' (यदि के अर्थ में हैं); 'सद्धं' अनुकूलता के अर्थ में है; 'नत्तं' और 'दोसा' रात के अर्थ में हैं; 'दिवा' और 'अह' दिन के अर्थ में हैं। ၁၁၄၈. ११४८. ဤသံ ကိဉ္စိ မနံ အပ္ပေ, သဟသာ တု အတက္ကိတေ; ပုရေ ဂ္ဂတော တု ပုရတော, ပေစ္စာ’မုတြဘဝန္တရေ. 'ईसं', 'किञ्चि', 'मनां' और 'अप्पे' थोड़े के अर्थ में हैं; 'सहसा' अचानक (बिना सोचे) के अर्थ में है; 'पुरे' और 'पुरतो' पहले के अर्थ में हैं; 'पेच्चा' और 'अमुत्र' परलोक या दूसरे जन्म के अर्थ में हैं। ၁၁၄၉. ११४९. အဟော [Pg.94] ဟီ ဝိမှယေ တုဏှီ,တု မောနေ ထာ’ဝိ ပါတု စ; တင်္ခဏေ သဇ္ဇု သပဒိ, ဗလက္ကာရေ ပသယှ စ. 'अहो' और 'ही' विस्मय के अर्थ में हैं; 'तुण्ही' मौन के अर्थ में है; 'आवि' और 'पातु' प्रकट होने के अर्थ में हैं; 'सज्जु' और 'सपदि' उसी क्षण के अर्थ में हैं; और 'पसह्य' बलपूर्वक के अर्थ में है। ၁၁၅၀. ११५०. သုဒံ ခေါ အဿု ယဂ္ဃေ ဝေ,ဟာ’ဒယော ပဒပူရဏေ; အန္တရေန’န္တရာ အန္တော, ဝဿံ နူန စ နိစ္ဆယေ. 'सुदं', 'खो', 'अस्सु', 'यग्घे', 'वे', 'हा' आदि पदपूरण के अर्थ में हैं; 'अन्तरेन', 'अन्तरा' और 'अन्तो' बीच में या भीतर के अर्थ में हैं; 'वस्सं' और 'नून' निश्चय के अर्थ में हैं। ၁၁၅၁. ११५१. အာနန္ဒေ သဉ္စ ဒိဋ္ဌာ ထ, ဝိရောဓကထနေ နနု; ကာမပ္ပဝေဒနေ ကစ္စိ, ဥသူယောပဂမေ’တ္ထု စ. 'आनन्द' हर्ष के अर्थ में, 'सञ्च' और 'दिट्ठा' देखने या हर्ष में, 'ननु' विरोध प्रकट करने में, 'कच्चि' इच्छा निवेदन में और 'अत्थु' ईर्ष्या के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। ၁၁၅၂. ११५२. ဧဝါ’ဝဓာရဏေ ဉေယျံ, ယထာတ္တံ တု ယထာတထံ; နီစံ အပ္ပေ, မဟတျု’စ္စံ, အထ ပါတော ပဂေ သမာ. 'एव' निश्चय (अवधारण) के अर्थ में जानना चाहिए; 'यथात्तं' और 'यथातथं' यथार्थ के अर्थ में; 'नीचं' अल्प के अर्थ में, 'उच्चं' महान के अर्थ में; तथा 'पातो' और 'पगे' प्रातःकाल के अर्थ में समान हैं। ၁၁၅၃. ११५३. နိစ္စေ သဒါ သနံ ပါယော,ဗာဟုလျေ ဗာဟိရံ ဗဟိ; ဗဟိဒ္ဓါ ဗာဟိရာ ဗာဟျေ, သီဃေတု သဏိကံ ဘဝေ. 'सदा' और 'सनं' नित्य के अर्थ में, 'पायो' बाहुल्य के अर्थ में; 'बाहिरं', 'बहि', 'बहिद्धा', 'बाहिरा' और 'बाह्ये' बाहर के अर्थ में; 'सीघं' शीघ्र के अर्थ में और 'सणिकं' धीरे के अर्थ में होता है। ၁၁၅၄. ११५४. အတ္ထံ အဒဿနေ ဒုဋ္ဌု, နိန္ဒာယံ, ဝန္ဒနေ နမော; သမ္မာ သုဋ္ဌု ပသံသာယံ, အထော သတ္တာယ မတ္ထိ စ. 'अत्थं' अदर्शन (अस्त) के अर्थ में, 'दुट्ठु' निंदा में, 'नमो' वंदन में; 'सम्मा' और 'सुट्ठु' प्रशंसा के अर्थ में; और 'अत्थि' सत्ता (होने) के अर्थ में है। ၁၁၅၅. ११५५. သာယံ သာယေ’ဇ္ဇ အတြာ’ဟေ,သုဝေ တု သွေ အနာဂတေ; တတော ပရေ ပရသုဝေ, ဟိယျောတု ဒိဝသေ ဂတေ. 'सायं' सायंकाल के अर्थ में, 'अज्ज' आज के अर्थ में, 'अत्र' और 'अहे' यहाँ के अर्थ में; 'सुवे' और 'स्वे' आने वाले कल के अर्थ में; 'परसुवे' उसके बाद के दिन (परसों) के अर्थ में; और 'हिय्यो' बीते हुए दिन (कल) के अर्थ में है। ၁၁၅၆. ११५६. ယတ္ထ ယတြ ယဟိံစာထ, တတ္ထ တတြ တဟိံတဟံ; အထော ဥဒ္ဓဉ္စ ဥပရိ, ဟေဋ္ဌာ တု စ အဓော သမာ. 'यत्थ', 'यत्र' और 'यहिं' जहाँ के अर्थ में; 'तत्थ', 'तत्र', 'तहिं' और 'तहं' वहाँ के अर्थ में; तथा 'उद्धं' और 'उपरि' ऊपर के अर्थ में, 'हेट्ठा' और 'अधो' नीचे के अर्थ में समान हैं। ၁၁၅၇. ११५७. စောဒနေ ဣင်္ဃ ဟန္ဒာ’ထ, အာရာဒူရာ စ အာရကာ; ပရမ္မုခါ တု စ ရဟော, သမ္မုခါ တွာ’ဝိ ပါတု စ. 'इङ्घ' और 'हन्द' प्रेरणा (चोदन) के अर्थ में; 'आरा', 'दूरा' और 'आरका' दूर के अर्थ में; 'परम्मुखा' और 'रहो' परोक्ष (रहस्य) के अर्थ में; तथा 'सम्मुखा', 'आवि' और 'पातु' प्रत्यक्ष (सामने) के अर्थ में हैं। ၁၁၅၈. ११५८. သံသယတ္ထမှိ အပ္ပေဝ, အပ္ပေဝနာမ နူ’တိ စ; နိဒဿနေ ဣတိ’တ္ထဉ္စ, ဧဝံ, ကိစ္ဆေ ကထဉ္စိ စ. 'अप्पेव', 'अप्पेवनाम' और 'नु' संशय के अर्थ में हैं; 'इति', 'इत्थं' और 'एवं' निदर्शन (उदाहरण) के अर्थ में; और 'कथञ्चि' कठिनाई (कृच्छ्र) के अर्थ में है। ၁၁၅၉. ११५९. ဟာ ခေဒေ သစ္ဆိ ပစ္စက္ခေ,ဓုဝံ ထိရေ’ဝဓာရဏေ; တိရော တု တိရိယံ စာထ, ကုစ္ဆာယံ ဒုဋ္ဌု ကု’စ္စတေ. 'हा' खेद के अर्थ में, 'सच्छि' प्रत्यक्ष के अर्थ में; 'धुवं' स्थिर और निश्चय के अर्थ में; 'तिरो' और 'तिरियं' तिरछा के अर्थ में; और 'दुट्ठु' तथा 'कु' निंदा (कुत्सा) के अर्थ में कहे जाते हैं। ၁၁၆၀. ११६०. သုဝတ္ထိ အာသိဋ္ဌတ္ထမှိ, နိန္ဒာယံ တု ဓီ ကထျတေ; ကုဟိဉ္စနံ ကုဟိံ ကုတြ, ကုတ္ထ ကတ္ထ ကဟံ ကွ ထ. 'सुवत्थि' आशीर्वाद के अर्थ में, 'धी' निंदा के अर्थ में कही जाती है; 'कुहिञ्चनं', 'कुहिं', 'कुत्र', 'कुत्थ', 'कत्थ', 'कहं' और 'क्व' कहाँ के अर्थ में हैं। ၁၁၆၁. ११६१. ဣဟေ’ဓာ’တြ [Pg.95] တု ဧတ္ထာ’တ္ထ,အထ သဗ္ဗတြ သဗ္ဗဓိ; ကဒါ ကုဒါစနံ စာထ, တဒါနိ စ တဒါ သမာ. 'इह', 'इध', 'अत्र', 'एत्थ' और 'अत्थ' यहाँ के अर्थ में; 'सब्बत्र' और 'सब्बधि' सब जगह के अर्थ में; 'कदा' और 'कुदाचनं' कब के अर्थ में; तथा 'तदानि' और 'तदा' तब के अर्थ में समान हैं। ၁၁၆၂. ११६२. အာဒိကမ္မေ ဘုသတ္ထေ စ, သမ္ဘဝေါ’တိဏ္ဏ တိတ္တိသု; နိယောဂိ’ဿရိယ’ပ္ပီတိ, ဒါန ပူဇာ’ဂ္ဂ, သန္တိသု. (उपसर्ग 'प' के अर्थ:) आदि-कर्म (आरंभ), अत्यधिक, संभव (उत्पत्ति), अवतरण, तृप्ति, नियोग, ऐश्वर्य, प्रीति, दान, पूजा, श्रेष्ठता और शान्ति के अर्थ में। ၁၁၆၃. ११६३. ဒဿနေ တပ္ပရေ သင်္ဂေ, ပသံသာ, ဂတိ, သုဒ္ဓိသု; ဟိံသာ, ပကာရန္တော’ဘာဝ, ဝိယောဂါ’ဝယဝေသု စ; ပေါ’ပသဂ္ဂေါ ဒိသာယောဂေ, ပတ္ထနာ, ဓိတိအာဒိသု. दर्शन, तत्परता, संग, प्रशंसा, गति, शुद्धि, हिंसा, प्रकार, अन्तर्भाव, वियोग और अवयव में; 'प' (प्र) उपसर्ग दिशा-योग, प्रार्थना, धैर्य आदि के अर्थ में भी होता है। ၁၁၆၄. ११६४. ပရာသဒ္ဒေါ ပရိဟာနိ, ပရာဇယ ဂတီသု စ; ဘုသတ္ထေ ပဋိလောမတ္ထေ, ဝိက္ကမာ’မသနာဒိသု. 'परा' शब्द हानि, पराजय, गति, अत्यधिक, प्रतिकूल अर्थ, विक्रम और स्पर्श (परामर्श) आदि के अर्थ में प्रयुक्त होता है। ၁၁၆၅. ११६५. နိဿေသာ’ဘာဝ သနျာသ, ဘုသတ္ထ မောက္ခ ရာသိသု; ဂေဟာ’ဒေသော’ပမာဟီန, ပသာဒနိဂ္ဂတာ’စ္စယေ. पूर्णता, अभाव, संन्यास, अत्यधिक, मोक्ष, समूह, घर, आदेश, उपमा, हीनता, प्रसन्नता, निकलना और अतिक्रमण के अर्थ में। ၁၁၆၆. ११६६. ဒဿနော’သာနနိက္ခန္တာ, ဓောဘာဂေသွ’ဝဓာရဏေ; သာမီပျေ ဗန္ဓနေ ဆေက, န္တောဘာဂေါ’ပရတီသု စ. दर्शन, समाप्ति, निकलना, नीचे के भाग में, निश्चय में, सामीप्य, बंधन, चतुरता, भीतरी भाग और विरक्ति (उपरति) के अर्थ में। ၁၁၆၇. ११६७. ပါတုဘာဝေ ဝိယောဂေ စ, နိသေဓာဒေါ နိ ဒိဿတိ; အထော နီဟရဏေ စေဝါ, ဝရဏာဒေါ စ နီ သိယာ. प्रादुर्भाव (प्रकट होना), वियोग और निषेध आदि में 'नि' देखा जाता है; तथा निकालने और रोकने (आवरण) आदि में 'नी' होता है। ၁၁၆၈. ११६८. ဥဒ္ဓကမ္မ ဝိယောဂ တ္တ, လာဘ တိတ္တိ သမိဒ္ဓိသု; ပါတုဘာဝ’စ္စယာဘာဝ, ပဗလတ္တေ ပကာသနေ; ဒက္ခ’ဂ္ဂတာသု ကထနေ, သတ္တိမောက္ခာဒိကေ ဥ စ. ऊर्ध्व कर्म, वियोग, प्राप्ति, लाभ, तृप्ति, समृद्धि, प्रादुर्भाव, अतिक्रमण, अभाव, प्रबलता, प्रकाशन, दक्षता, श्रेष्ठता, कथन, शक्ति और मोक्ष आदि में 'उ' (उद्) उपसर्ग होता है। ၁၁၆၉. ११६९. ဒု ကုစ္ဆိတေ’သဒတ္ထေသု, ဝိရူပတ္တေ ပျ’သောဘနေ; သိယာ’ဘာဝါ’သမိဒ္ဓီသု, ကိစ္ဆေ စာ’နန္ဒနာဒိကေ. 'दु' (दुर्) उपसर्ग निंदित, असत् अर्थ, विरूपता, अशोभन, अभाव, असमृद्धि, कठिनाई और अप्रसन्नता आदि के अर्थ में होता है। ၁၁၇၀. ११७०. သံ သမောဓာန သင်္ခေပ, သမန္တတ္တ သမိဒ္ဓိသု; သမ္မာ ဘုသ သဟ ပ္ပတ္ထာ, ဘိမုခတ္ထေသု သင်္ဂတေ; ဝိဓာနေ ပဘဝေ ပူဇာ, ပုနပ္ပုနကြိယာဒိသု. 'सं' उपसर्ग मिलन, संक्षेप, पूर्णता, समृद्धि, सम्यक्, अत्यधिक, साथ, इच्छा, सम्मुख, संगति, विधान, उत्पत्ति, पूजा और पुनरावृत्ति आदि के अर्थ में होता है। ၁၁၇၁. ११७१. ဝိဝိဓာ’တိသယာ’ဘာဝ, ဘုသတ္တိ’ဿရိယာ’စ္စယေ; ဝိယောဂေ ကလဟေ ပါတု, ဘာဝေ ဘာသေ စ ကုစ္ဆနေ. 'वि' उपसर्ग विविधता, अतिशय, अभाव, अत्यधिक, ऐश्वर्य, अतिक्रमण, वियोग, कलह, प्रादुर्भाव, चमक और निंदा के अर्थ में होता है। ၁၁၇၂. ११७२. ဒူရာ’နဘိမုခတ္တေသု, မောဟာ’နဝဋ္ဌိတီသု စ; ပဓာန ဒက္ခတာ ခေဒ, သဟတ္ထာဒေါ ဝိ ဒိဿတိ. दूर, विमुखता, मोह, अस्थिरता, प्रधानता, दक्षता, खेद और साथ होने आदि के अर्थ में भी 'वि' देखा जाता है। ၁၁၇၃. ११७३. ဝိယောဂေ [Pg.96] ဇာနနေ စာ’ဓော,ဘာဂ နိစ္ဆယ သုဒ္ဓိသု; ဤသဒတ္ထေ ပရိဘဝေ, ဒေသ ဗျာပန ဟာနိသု; ဝစောကြိယာယ ထေယျေ စ, ဉာဏပ္ပတ္တာဒိကေ အဝ. वियोग, ज्ञान, नीचे का भाग, निश्चय, शुद्धि, अल्पता, तिरस्कार, देश, व्याप्ति, हानि, वचन-क्रिया, चोरी और ज्ञान-प्राप्ति आदि में 'अव' उपसर्ग होता है। ၁၁၇၄. ११७४. ပစ္ဆာ ဘုသတ္တ သာဒိသျာ, နုပစ္ဆိန္နာ’နုဝတ္တိသု; ဟီနေ စ တတိယတ္ထာ’ဓော, ဘာဂေသွ’နုဂတေ ဟိတေ; ဒေသေ လက္ခဏ ဝိစ္ဆေ’တ္ထ, မ္ဘူတ ဘာဂါဒိကေ အနု. पीछे, अत्यधिक, सादृश्य, निरंतरता, अनुवर्तन, हीनता, तृतीया का अर्थ, नीचे का भाग, अनुगत, हित, देश, लक्षण, वीप्सा, इत्थंभूत और भाग आदि में 'अनु' होता है। ၁၁၇၅. ११७५. သမန္တတ္ထေ ပရိစ္ဆေဒေ, ပူဇာ’လိင်္ဂန ဝဇ္ဇနေ; ဒေါသက္ခာနေ နိဝါသနာ, ဝညာ’ဓာရေသု ဘောဇနေ; သောက ဗျာပန တတွေသု, လက္ခဏာဒေါ သိယာ ပရိ. चारों ओर, निश्चय, पूजा, आलिंगन, त्याग, दोष-कथन, निवास, वंचना, आधार, भोजन, शोक, व्याप्ति, तत्व और लक्षण आदि में 'परि' होता है। ၁၁၇၆. ११७६. အာဘိမုချ ဝိသိဋ္ဌု’ဒ္ဓ, ကမ္မသာရုပ္ပဝုဒ္ဓိသု; ပူဇာ’ဓိက ကုလာ’သစ္စ, လက္ခဏာဒိမှိ စာပျ’ဘိ. सम्मुख, विशिष्ट, ऊर्ध्व कर्म, अनुरूपता, वृद्धि, पूजा, अधिकता, कुल और लक्षण आदि में 'अभि' उपसर्ग होता है। ၁၁၇၇. ११७७. အဓိကိ’ဿရ, ပါဌာ’ဓိ, ဋ္ဌာန, ပါပုဏနေသွ’ဓိ; နိစ္ဆယေ စောပရိတ္တာ’ဓိ, ဘဝနေ စ ဝိသေသနေ. 'अधि' उपसर्ग अधिकता, स्वामित्व, पाठ, अधिष्ठान, प्राप्ति, निश्चय, ऊपर होना, अभिभव (दबाना) और विशेषण के अर्थ में होता है। ၁၁၇၈. ११७८. ပဋိဒါနနိသေဓေသု, ဝါမာ’ဒါနနိဝတ္တိသု; သာဒိသေ ပဋိနိဓိမှိ, အာဘိမုချဂတီသု စ. 'प्रति' (पाळि: पटि) का प्रयोग प्रतिदान (बदले में देना), निषेध, विपरीत, आदान की निवृत्ति (वापसी), सादृश्य (समानता), प्रतिनिधि (बदला), और अभिमुखता (सामने होना) तथा गति के अर्थ में होता है। ၁၁၇၉. ११७९. ပတိဗောဓေ ပတိဂတေ, တထာ ပုနကြိယာယ စ; သမ္ဘာဝနေ ပဋိစ္စတ္ထေ, ပတီတိ လက္ခဏာဒိကေ; သု သောဘနေ သုခေ သမ္မာ, ဘုသ သုဋ္ဌု သမိဒ္ဓိသု. 'प्रति' का प्रयोग प्रतिबोध (ज्ञान), प्रतिगत (लौटा हुआ), पुन: क्रिया (दोहराना), सम्भावन, प्रतीत्य (कारण), और लक्षण आदि के अर्थ में होता है। 'सु' का प्रयोग शोभन (सुन्दर), सुख, सम्यक् (ठीक), भृश (अत्यधिक), सुष्ठु (भली-भाँति) और समृद्धि के अर्थ में होता है। ၁၁၈၀. ११८०. အာဘိမုချ, သမီပါ’ဒိ, ကမ္မာ’လိင်္ဂန ပတ္တိသု; မရိယာဒု’ဒ္ဓကမ္မိ’စ္ဆာ, ဗန္ဓနာ’ဘိဝိဓီသု အာ. 'आ' का प्रयोग अभिमुखता, सामीप्य, कर्म, आलिंगन, प्राप्ति, मर्यादा, ऊर्ध्वकर्म (ऊपर की क्रिया), इच्छा, बन्धन और अभिविधि (व्याप्ति) के अर्थ में होता है। ၁၁၈၁. ११८१. နိဝါသာ’ဝှာန ဂဟဏ, ကိစ္ဆေ’သတ္ထ နိဝတ္တိသု; အပ္ပသာဒါ’သိ သရဏ, ပတိဋ္ဌာ’ဝိမှယာဒိသု. निवास, आह्वान (बुलाना), ग्रहण, कष्ट, असत्य, निवृत्ति, अप्रसाद (अप्रसन्नता), आशी (आशीर्वाद), शरण, प्रतिष्ठा और विस्मय आदि के अर्थ में भी 'आ' का प्रयोग होता है। ၁၁၈၂. ११८२. အန္တောဘာဝ ဘုသတ္တာ’တိ, သယ ပူဇာသွ’တိက္ကမေ; ဘူတဘာဝေ ပသံသာယံ, ဒဠှတ္ထာဒေါ သိယာ အတိ. 'अति' का प्रयोग अन्तर्भाव, भृशत्व (अत्यधिकता), स्वयम्, पूजा, अतिक्रमण, भूतभाव (सत्यता), प्रशंसा और दृढता आदि के अर्थ में होता है। ၁၁၈၃. ११८३. သမ္ဘာဝနေ စ ဂရဟာ, ပေက္ခာသု စ သမုစ္စယေ; ပဉှေ သံဝရဏေ စေဝ, အာသီသတ္ထေ အပီ’ရိတံ. 'अपि' का प्रयोग सम्भावन, गर्हा (निन्दा), अपेक्षा, समुच्चय (संग्रह), प्रश्न, संवरण (ढकना) और आशी (आशीर्वाद) के अर्थ में कहा गया है। ၁၁၈၄. ११८४. နိဒ္ဒေသေ ဝဇ္ဇနေ ပူဇာ, ပဂတေ ဝါရဏေပိ စ; ပဒုဿနေ စ ဂရဟာ, စောရိကာ’ဒေါ သိယာ အပ. 'अप' का प्रयोग निर्देश, वर्जन (त्याग), पूजा, प्रगत (दूर गया हुआ), वारण (रोकना), प्रदुषण (विकार), गर्हा (निन्दा) और चोरी आदि के अर्थ में होता है। ၁၁၈၅. ११८५. သမီပပူဇာ [Pg.97] သာဒိဿ, ဒေါသက္ခာနော’ပပတ္တိသု; ဘုသတ္တော’ပဂမာ’ဓိကျ, ပုဗ္ဗကမ္မနိဝတ္တိသု; ဂယှာကာရော’ပရိတ္တေသု, ဥပေ’တျ ’နသနာ’ဒိကေ. 'उप' का प्रयोग सामीप्य, पूजा, सादृश्य, दोष-कथन, उपपत्ति (सिद्धि), भृशत्व (अत्यधिकता), उपगम (पास जाना), आधिक्य, पूर्वकर्म की निवृत्ति, ग्रहण का प्रकार, अल्पता और अनशन (उपवास) आदि के अर्थ में होता है। ၁၁၈၆. ११८६. ဧဝံ နိဒဿနာ’ကာရော, ပမာသု သမ္ပဟံသနေ; ဥပဒေသေ စ ဝစန, ပဋိဂ္ဂါဟေ’ဝဓာရဏေ; ဂရဟာယေ’ဒမတ္ထေ စ, ပရိမာနေ စ ပုစ္ဆနေ. 'एवं' का प्रयोग निदर्शन (उदाहरण), आकार (प्रकार), उपमा, सम्प्रहर्षण (अत्यधिक प्रसन्नता), उपदेश, वचन, प्रतिग्रह (स्वीकार), अवधारण (निश्चय), गर्हा (निन्दा), 'यह' अर्थ में, परिमाण और प्रश्न के अर्थ में होता है। ၁၁၈၇. ११८७. သမုစ္စယေ သမာဟာရေ, နွာစယေ စေ’တရီတရေ; ပဒပူရဏမတ္တေ စ, စသဒ္ဒေါ အဝဓာရဏေ. 'च' शब्द का प्रयोग समुच्चय, समाहार, अन्वाचय, इतरेतर (परस्पर), केवल पदपूरण और अवधारण (निश्चय) के अर्थ में होता है। ၁၁၈၈. ११८८. ဣတိ ဟေတုပကာရေသု, အာဒိမှိ စာ’ဝဓာရဏေ; နိဒဿနေ ပဒတ္ထဿ, ဝိပလ္လာသေ သမာပနေ. 'इति' का प्रयोग हेतु (कारण), प्रकार, आदि, अवधारण, निदर्शन (उदाहरण), पदार्थ (शब्द का अर्थ), विपर्यास (विपरीतता) और समापन के अर्थ में होता है। ၁၁၈၉. ११८९. သမုစ္စယေ စော’ပမာယံ, သံသယေ ပဒပူရဏေ; ဝဝတ္ထိတဝိဘာသာယံ, ဝါ’ဝဿဂ္ဂေ ဝိကပ္ပနေ. 'वा' का प्रयोग समुच्चय, उपमा, संशय, पदपूरण, व्यवस्थित विभाषा (निश्चित विकल्प), अवसर्ग (त्याग) और विकल्प के अर्थ में होता है। ၁၁၉၀. ११९०. ဘူသနေ ဝါရဏေ စာ’လံ, ဝုစ္စတေ ပရိယတ္တိယံ; အထော’ထာ’နန္တရာ’ရမ္ဘ, ပဉှေသု ပဒပူရဏေ. 'अलं' का प्रयोग भूषण (सजावट), वारण (निषेध) और पर्याप्ति (सामर्थ्य) के अर्थ में होता है। 'अथो' और 'अथ' का प्रयोग आनन्तर्य (इसके बाद), आरम्भ, प्रश्न और पदपूरण के अर्थ में होता है। ၁၁၉၁. ११९१. ပသံသာဂရဟာသညာ, သီကာရာဒေါ ပိ နာမ ထ; နိစ္ဆယေ စာ’နုမာနသ္မိံ, သိယာ နူန ဝိတက္ကနေ. 'नाम' का प्रयोग प्रशंसा, गर्हा (निन्दा), संज्ञा (नाम) और स्वीकार आदि के अर्थ में होता है। 'नूनं' का प्रयोग निश्चय, अनुमान और वितर्क (सोचना) के अर्थ में होता है। ၁၁၉၂. ११९२. ပုစ္ဆာ’ဝဓာရဏာ’နုညာ, သာန္တွနာ’လပနေ နနု; ဝတေ’ကံသ, ဒယာ, ဟာသ, ခေဒါ’လပန, ဝိမှယေ. 'ननु' का प्रयोग प्रश्न, अवधारण, अनुज्ञा (आज्ञा), सांत्वना और आलापन (सम्बोधन) के अर्थ में होता है। 'वत' का प्रयोग एकान्त (निश्चय), दया, हर्ष, खेद, आलापन और विस्मय के अर्थ में होता है। ၁၁၉၃. ११९३. ဝါကျာရမ္ဘ, ဝိသာဒေသု, ဟန္ဒ ဟာသေ’နုကမ္ပနေ; ယာဝ တု တာဝ သာကလျ, မာနာ’ဝဓျ’ဝဓာရဏေ. 'हन्द' का प्रयोग वाक्यारम्भ, विषाद, हर्ष और अनुकम्पा के अर्थ में होता है। 'याव' और 'ताव' का प्रयोग साकल्य (सम्पूर्णता), मान (परिमाण), अवधि (सीमा) और अवधारण के अर्थ में होता है। ၁၁၉၄. ११९४. ပါစီ, ပုရ, င်္ဂတောတ္ထေသု, ပုရတ္ထာ ပဌမေ ပျထ; ပဗန္ဓေ စ စိရာတီတေ, နိကဋာဂါမိကေ ပုရာ. 'पुरत्था' का प्रयोग प्राची (पूर्व दिशा), आगे गया हुआ और प्रथम के अर्थ में होता है। 'पुरा' का प्रयोग प्रबन्ध (निरन्तरता), चिर-अतीत (बहुत पुराना समय) और निकट भविष्य के अर्थ में होता है। ၁၁၉၅. ११९५. နိသေဓဝါကျာလင်္ကာရာ, ဝဓာရဏပသိဒ္ဓိသု; ခလွာ’သန္နေ တု အဘိတော-ဘိမုခေါ’ဘယတောဒိကေ. 'खलु' का प्रयोग निषेध, वाक्यालंकार, अवधारण और प्रसिद्धि के अर्थ में होता है। 'अभितो' का प्रयोग आसन्न (निकट), अभिमुख और उभयतः (दोनों ओर) आदि के अर्थ में होता है। ၁၁၉၆. ११९६. ကာမံ ယဒျပိသဒ္ဒတ္ထေ, ဧကံသတ္ထေ စ ဒိဿတိ; အထော ပန ဝိသေသသ္မိံ, တထေဝ ပဒပူရဏေ. 'कामं' का प्रयोग 'यद्यपि' के अर्थ में और एकान्त (निश्चय) के अर्थ में देखा जाता है। 'पण' (पन) का प्रयोग विशेष और पदपूरण के अर्थ में होता है। ၁၁၉၇. ११९७. ဟိ [Pg.98] ကာရဏေ ဝိသေသာ’ဝ, ဓာရဏေ ပဒပူရဏေ; တု ဟေတုဝဇ္ဇေ တတ္ထာ’ထ, ကု ပါပေ’သတ္ထ’ကုစ္ဆနေ. 'हि' का प्रयोग कारण, विशेष, अवधारण और पदपूरण के अर्थ में होता है। 'तु' का प्रयोग हेतु को छोड़कर उन्हीं (विशेष आदि) अर्थों में होता है। 'कु' का प्रयोग पाप, बुरा अर्थ और कुत्सा (निन्दा) के अर्थ में होता है। ၁၁၉၈. ११९८. နု သံသယေ စ ပဉှေ ထ, နာနာ’ နေကတ္ထ ဝဇ္ဇနေ; ကိံ တု ပုစ္ဆာဇိဂုစ္ဆာသု, ကံ တု ဝါရိမှိ မုဒ္ဓနိ. 'नु' का प्रयोग संशय और प्रश्न के अर्थ में होता है। 'नाना' का प्रयोग अनेक अर्थ और वर्जन के अर्थ में होता है। 'किं' का प्रयोग प्रश्न और जुगुप्सा (घृणा) के अर्थ में होता है। 'कं' का प्रयोग जल और मस्तक के अर्थ में होता है। ၁၁၉၉. ११९९. အမာ သဟသမီပေ ထ, ဘေဒေ အပ္ပဌမေ ပုန; ကိရာ’နုဿဝါ’ရုစိသု, ဥဒါ’ပျတ္ထေ ဝိကပ္ပနေ. 'अमा' का प्रयोग साथ और समीप के अर्थ में होता है। 'पुन' का प्रयोग भेद और अप्राथम्य (दोबारा) के अर्थ में होता है। 'किर' का प्रयोग अनुश्रव (सुनी-सुनाई बात) और अरुचि के अर्थ में होता है। 'उदाहु' का प्रयोग 'अपि' के अर्थ में और विकल्प के अर्थ में होता है। ၁၂၀၀. १२००. ပတီစီ စရိမေ ပစ္ဆာ, သာမိ တွဒ္ဓေ ဇိဂုစ္ဆနေ; ပကာသေ သမ္ဘဝေ ပါတု,အညောညေ တု ရဟော မိထော. 'पच्छा' का प्रयोग प्रतीची (पश्चिम) और चरम (अन्तिम) के अर्थ में होता है। 'सामि' का प्रयोग आधा और जुगुप्सा के अर्थ में होता है। 'पातु' का प्रयोग प्रकाश और सम्भव के अर्थ में होता है। 'मिथो' का प्रयोग अन्योन्य (परस्पर) और रहस्य (एकान्त) के अर्थ में होता है। ၁၂၀၁. १२०१. ဟာ ခေဒသောကဒုက္ခေသု, ခေဒေ တွ’ဟဟ ဝိမှယေ; ဘိံသာပနေ ဓီ နိန္ဒာယံ, ပိဓာနေ တိရိယံ တိရော. 'हा' का प्रयोग खेद, शोक और दुःख के अर्थ में होता है। 'अहह' का प्रयोग खेद और विस्मय के अर्थ में होता है। 'धी' का प्रयोग डराने और निन्दा के अर्थ में होता है। 'तिरो' का प्रयोग पिधान (ढकना/छिपना) और तिरछा (आड़ा) के अर्थ में होता है। ၁၂၀၂. १२०२. တုန တွာန တဝေ တွာ တုံ, ဓာ သော ထာ က္ခတ္တု, မေဝ စ; တော ထ တြ ဟိဉ္စနံ ဟိံဟံ, ဓိ ဟ ဟိ ဓ ဓုနာ ရဟိ. तुन, त्वान, तवे, त्वा, तुं, धा, सो, था, क्खत्तुं, तो, थ, त्र, हिंचनं, हिंहं, धि, ह, हि, ध, अधुना और तरहि (ये सब अव्यय प्रत्यय और शब्द हैं)। ၁၂၀၃. १२०३. ဒါနိ ဝေါဒါစနံ ဒါဇ္ဇ, ထံ တတ္တံ ဇ္ဈ ဇ္ဇု အာဒယော; သမာသော စာ’ဗျယီဘာဝေါ,ယာဒေသော စာ’ဗျယံ ဘဝေတိ. दानि, व, इदानि, अज्ज, थं, तत्तं, ज्झ, ज्जु आदि; अव्ययीभाव समास और (विभक्ति के स्थान पर होने वाले) आदेश भी अव्यय होते हैं। ဣတိ အဗျယဝဂ္ဂေါ. यहाँ अव्यय-वर्ग समाप्त होता है। သာမညကဏ္ဍော တတိယော. तीसरा सामान्य-काण्ड (समाप्त)। အဘိဓာနပ္ပဒီပိကာ သမတ္တာ. अभिधानप्पदीपिका समाप्त हुई। နိဂမန उपसंहार (निगमन)। ၁. १. သဂ္ဂကဏ္ဍော [Pg.99] စ ဘူကဏ္ဍော, တထာ သာမညကဏ္ဍိတိ; ကဏ္ဍတ္တယာနွိတာ ဧသာ, အဘိဓာနပ္ပဒီပိကာ. स्वर्गकाण्ड, भूकाण्ड और सामान्यकाण्ड—इन तीन काण्डों से युक्त यह 'अभिधानप्पदीपिका' है। ၂. २. တိဒိဝေ မဟိယံ ဘုဇဂါဝသထေ,သကလတ္ထသမဝှယဒီပနိ’ယံ; ဣဟ ယော ကုသလော မတိမာ သ နရော,ပဋု ဟောတိ မဟာမုနိနော ဝစနေ. स्वर्ग, पृथ्वी और नागलोक में स्थित समस्त वस्तुओं के नामों को प्रकाशित करने वाले इस ग्रंथ में जो बुद्धिमान मनुष्य कुशल है, वह महामुनि के वचनों में निपुण होता है। ၃. ३. ပရက္ကမဘုဇော နာမ, ဘူပါလော ဂုဏဘူသနော; လင်္ကာယ မာသိ တေဇဿီ, ဇယီ ကေသရိဝိက္ကမော. पराक्रमभुज नामक राजा, जो गुणों से विभूषित थे, लंका के तेजस्वी, विजयी और सिंह के समान पराक्रमी राजा हुए। ၄. ४. ဝိဘိန္နံ စိရံ ဘိက္ခုသံဃံ နိကာယ-တ္တယသ္မိဉ္စ ကာရေသိ သမ္မာ သမဂ္ဂေ; သဒေဟံ’ဝ နိစ္စာဒရော ဒီဃကာလံ,မဟဂ္ဃေဟိ ရက္ခေသိ ယော ပစ္စယေဟိ. जिन्होंने तीनों निकायों में दीर्घकाल से विभाजित भिक्षु संघ को भली-भांति एकजुट किया और जिन्होंने अपने शरीर के समान ही निरंतर आदर भाव रखते हुए दीर्घकाल तक बहुमूल्य प्रत्ययों से संघ की रक्षा की। ၅. ५. ယေန လင်္ကာ ဝိဟာရေဟိ, ဂါမာ’ရာမပုရီဟိ စ; ကိတ္တိယာ ဝိယ သမ္ဗာဓီ, ကတာ ခေတ္တေဟိ ဝါပိဟိ. जिनके द्वारा लंका विहारों, गाँवों, उद्यानों, नगरों, खेतों और जलाशयों से इस प्रकार भर दी गई, मानो वह उनकी कीर्ति से ही व्याप्त हो। ၆. ६. ယဿာ’သာဓာရဏံ ပတွာ, နုဂ္ဂဟံ သဗ္ဗကာမဒံ; အဟမ္ပိ ဂန္ထကာရတ္တံ, ပတ္တော ဝိဗုဓဂေါစရံ. जिनकी असाधारण और समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली कृपा प्राप्त कर, मैं भी विद्वानों के योग्य ग्रंथकार होने की अवस्था को प्राप्त हुआ हूँ। ၇. ७. ကာရိတေ တေန ပါသာဒ, ဂေါပုရာဒိဝိဘူသိတေ; သဂ္ဂခဏ္ဍေ’ဝ တတ္တောယာ, သယသ္မိံ ပတိဗိမ္ဗိတေ. उनके द्वारा निर्मित महलों, गोपुरों आदि से सुशोभित विहार में, जो अपने जल में प्रतिबिंबित होकर स्वर्ग के एक खंड के समान प्रतीत होता था। ၈. ८. မဟာဇေတဝနာ’ချမှိ, ဝိဟာရေ သာဓုသမ္မတေ; သရောဂါမသမူဟမှိ, ဝသတာ သန္တဝုတ္တိနာ. सज्जनों द्वारा सम्मानित 'महाजेतवन' नामक विहार में, जो सरोग्राम समूह में स्थित है, शान्त आचरण वाले मेरे द्वारा रहते हुए। ၉. ९. သဒ္ဓမ္မဋ္ဌိတိကာမေန, မောဂ္ဂလ္လာနေန ဓီမတာ; ထေရေန ရစိတာ ဧသာ, အဘိဓာနပ္ပဒီပိကာတိ. सद्धर्म की चिरस्थिति की कामना करने वाले बुद्धिमान स्थविर मोग्गल्लान द्वारा यह 'अभिधानप्पदीपिका' रची गई है। | |||
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| 日文 | |||
| パーリ仏典 | 註釈書 | 副註釈書 | その他 |
| 1101 パーラージカ・パーリ 1102 パーチッティヤ・パーリ 1103 マハーヴァッガ・パーリ(ヴィナヤ) 1104 チューラヴァッガ・パーリ 1105 パリヴァーラ・パーリ | 1201 パーラージカカンダ・アッタカター-1 1202 パーラージカカンダ・アッタカター-2 1203 パーチッティヤ・アッタカター 1204 マハーヴァッガ・アッタカター(ヴィナヤ) 1205 チューラヴァッガ・アッタカター 1206 パリヴァーラ・アッタカター | 1301 サーラッタディーパニー・ティーカー-1 1302 サーラッタディーパニー・ティーカー-2 1303 サーラッタディーパニー・ティーカー-3 | 1401 ドヴェマーティカー・パーリ 1402 ヴィナヤサンガハ・アッタカター 1403 ヴァジラブッディ・ティーカー 1404 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-1 1405 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-2 1406 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-1 1407 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-2 1408 カンカーウィタラニープラーナ・ティーカー 1409 ヴィナヤヴィニッチャヤ-ウッタラヴィニッチャヤ 1410 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-1 1411 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-2 1412 パーチッティヤーディヨージャナー・パーリ 1413 クッダシッカー-ムーラシッカー 8401 ヴィスッディマッガ-1 8402 ヴィスッディマッガ-2 8403 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-1 8404 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-2 8405 ヴィスッディマッガ・ニダーナカター 8406 ディーガニカーヤ(プ・ヴィ) 8407 マッジマニカーヤ(プ・ヴィ) 8408 サンユッタニカーヤ(プ・ヴィ) 8409 アングッタラニカーヤ(プ・ヴィ) 8410 ヴィナヤピタカ(プ・ヴィ) 8411 アビダンマピタカ(プ・ヴィ) 8412 アッタカター(プ・ヴィ) 8413 ニルッティディーパニー 8414 パラマッタディーパニー・サンガハマハーティカーパータ 8415 アヌディーパニーパータ 8416 パッターヌッデーサ・ディーパニーパータ 8417 ナマッカラ・ティーカー 8418 マハーパナーマ・パータ 8419 ラッカナート・ブッダトーマナーガーター 8420 スタヴァンダナー 8421 カマラーニャジャリ 8422 ジナランカーラ 8423 パッジャマドゥ 8424 ブッダグナガーター・ヴァリー 8425 チューラガンタヴァンサ 8427 サーサナヴァンサ 8426 マハーヴァンサ 8429 モッガラーナ・ビャーカラナン 8428 カッチャーヤナ・ビャーカラナン 8430 サッダニーティッパカラナン(パダマーラー) 8431 サッダニーティッパカラナン(ダートゥマーラー) 8432 パダルーパシッディ 8433 モッガラーナ・パンチカー 8434 パヨーガシッディ・パータ 8435 ヴットーダヤ・パータ 8436 アビダーナッパディーピカー・パータ 8437 アビダーナッパディーピカー・ティーカー 8438 スボーダーランカーラ・パータ 8439 スボーダーランカーラ・ティーカー 8440 バーラーヴァターラ・ガンティパダッタヴィニッチャヤサーラ 8446 カヴィダッパナニーティ 8447 ニーティマンジャリー 8445 ダンマニーティ 8444 マハーラハニーティ 8441 ローカニーティ 8442 スタンタニーティ 8443 スーラッサティニーティ 8450 チャーナキャニーティ 8448 ナラダッカディーパニー 8449 チャトゥラーラッカディーパニー 8451 ラサヴァーヒニー 8452 シーマヴィソーダニー・パータ 8453 ヴェッサンタラ・ギーティ 8454 モッガラーナ・ヴッティヴィヴァラナパンチカー 8455 トゥーパヴァンサ 8456 ダーターヴァンサ 8457 ダートゥパータヴィラーヴィシニヤー 8458 ダートゥヴァンサ 8459 ハッタヴァナッガラヴィハーラヴァンサ 8460 ジナチャリタヤ 8461 ジナヴァンサディーパン 8462 テーラカターガーター 8463 ミリダ・ティーカー 8464 パダマンジャリー 8465 パダサーダナン 8466 サッダビンドゥパカラナン 8467 カッチャーヤナ・ダートゥマンジューサー 8468 サーマンタクータ・ヴァンナナー |
| 2101 シーラッカンダワッガ・パーリ 2102 マハーワッガ・パーリ(ディーガ) 2103 パーティカワッガ・パーリ | 2201 シーラッカンダワッガ・アッタカター 2202 マハーワッガ・アッタカター(ディーガ) 2203 パーティカワッガ・アッタカター | 2301 シーラッカンダワッガ・ティーカー 2302 マハーワッガ・ティーカー(ディーガ) 2303 パーティカワッガ・ティーカー 2304 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-1 2305 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-2 | |
| 3101 ムーラパンナーサ・パーリ 3102 マッジマパンナーサ・パーリ 3103 ウパリパンナーサ・パーリ | 3201 ムーラパンナーサ・アッタカター-1 3202 ムーラパンナーサ・アッタカター-2 3203 マッジマパンナーサ・アッタカター 3204 ウパリパンナーサ・アッタカター | 3301 ムーラパンナーサ・ティーカー 3302 マッジマパンナーサ・ティーカー 3303 ウパリパンナーサ・ティーカー | |
| 4101 サガーター・ワッガ・パーリ 4102 ニダーナ・ワッガ・パーリ 4103 カンダ・ワッガ・パーリ 4104 サラーヤタナ・ワッガ・パーリ 4105 マハーワッガ・パーリ(サンユッタ) | 4201 サガーター・ワッガ・アッタカター 4202 ニダーナ・ワッガ・アッタカター 4203 カンダ・ワッガ・アッタカター 4204 サラーヤタナ・ワッガ・アッタカター 4205 マハーワッガ・アッタカター(サンユッタ) | 4301 サガーター・ワッガ・ティーカー 4302 ニダーナ・ワッガ・ティーカー 4303 カンダ・ワッガ・ティーカー 4304 サラーヤタナ・ワッガ・ティーカー 4305 マハーワッガ・ティーカー(サンユッタ) | |
| 5101 エーカカニパータ・パーリ 5102 ドゥカニパータ・パーリ 5103 ティカニパータ・パーリ 5104 チャトゥッカニパータ・パーリ 5105 パンチャカニパータ・パーリ 5106 チャッカニパータ・パーリ 5107 サッタカニパータ・パーリ 5108 アッタカーディニパータ・パーリ 5109 ナヴァカニパータ・パーリ 5110 ダサカニパータ・パーリ 5111 エーカーダサカニパータ・パーリ | 5201 エーカカニパータ・アッタカター 5202 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・アッタカター 5203 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・アッタカター 5204 アッタカーディニパータ・アッタカター | 5301 エーカカニパータ・ティーカー 5302 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・ティーカー 5303 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・ティーカー 5304 アッタカーディニパータ・ティーカー | |
| 6101 クッダカパータ・パーリ 6102 ダンマパダ・パーリ 6103 ウダーナ・パーリ 6104 イティヴッタカ・パーリ 6105 スッタニパータ・パーリ 6106 ヴィマーナヴァットゥ・パーリ 6107 ペーヴァットゥ・パーリ 6108 テーラガーター・パーリ 6109 テーリーガーター・パーリ 6110 アパダーナ・パーリ-1 6111 アパダーナ・パーリ-2 6112 ブッダヴァンサ・パーリ 6113 チャリヤーピタカ・パーリ 6114 ジャータカ・パーリ-1 6115 ジャータカ・パーリ-2 6116 マハーニッデーサ・パーリ 6117 チューラニッデーサ・パーリ 6118 パティサンビダーマッガ・パーリ 6119 ネッティッパカラナ・パーリ 6120 ミリンダパンハ・パーリ 6121 ペータコーパデーサ・パーリ | 6201 クッダカパータ・アッタカター 6202 ダンマパダ・アッタカター-1 6203 ダンマパダ・アッタカター-2 6204 ウダーナ・アッタカター 6205 イティヴッタカ・アッタカター 6206 スッタニパータ・アッタカター-1 6207 スッタニパータ・アッタカター-2 6208 ヴィマーナヴァットゥ・アッタカター 6209 ペータヴァットゥ・アッタカター 6210 テーラガーター・アッタカター-1 6211 テーラガーター・アッタカター-2 6212 テーリーガーター・アッタカター 6213 アパダーナ・アッタカター-1 6214 アパダーナ・アッタカター-2 6215 ブッダヴァンサ・アッタカター 6216 チャリヤーピタカ・アッタカター 6217 ジャータカ・アッタカター-1 6218 ジャータカ・アッタカター-2 6219 ジャータカ・アッタカター-3 6220 ジャータカ・アッタカター-4 6221 ジャータカ・アッタカター-5 6222 ジャータカ・アッタカター-6 6223 ジャータカ・アッタカター-7 6224 マハーニッデーサ・アッタカター 6225 チューラニッデーサ・アッタカター 6226 パティサンビダーマッガ・アッタカター-1 6227 パティサンビダーマッガ・アッタカター-2 6228 ネッティッパカラナ・アッタカター | 6301 ネッティッパカラナ・ティーカー 6302 ネッティヴィバーヴィニー | |
| 7101 ダンマサンガニー・パーリ 7102 ヴィバンガ・パーリ 7103 ダートゥカター・パーリ 7104 プッガラパンニャッティ・パーリ 7105 カター・ヴァットゥ・パーリ 7106 ヤマカ・パーリ-1 7107 ヤマカ・パーリ-2 7108 ヤマカ・パーリ-3 7109 パッターナ・パーリ-1 7110 パッターナ・パーリ-2 7111 パッターナ・パーリ-3 7112 パッターナ・パーリ-4 7113 パッターナ・パーリ-5 | 7201 ダンマサンガニ・アッタカター 7202 サンモーハヴィノーダニー・アッタカター 7203 パンチャパカラナ・アッタカター | 7301 ダンマサンガニー・ムーラティーカー 7302 ヴィバンガ・ムーラティーカー 7303 パンチャパカラナ・ムーラティーカー 7304 ダンマサンガニー・アヌティーカー 7305 パンチャパカラナ・アヌティーカー 7306 アビダンマーヴァターロ・ナーマルーパパリッチェード 7307 アビダンマッタ・サンガホ 7308 アビダンマーヴァターラ・プラーナティーカー 7309 アビダンマ・マーティカーパーリ | |
| ខ្មែរ | |||
| ព្រះត្រៃបិដកបាលី | អដ្ឋកថា | ដីកា | ផ្សេងទៀត |
| 1101 បារាជិកបាឡិ 1102 បាចិត្តិយបាឡិ 1103 មហាវគ្គបាឡិ (វិន័យ) 1104 ចូឡវគ្គបាឡិ 1105 បរិវារបាឡិ | 1201 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-១ 1202 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-២ 1203 បាចិត្តិយអដ្ឋកថា 1204 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (វិន័យ) 1205 ចូឡវគ្គអដ្ឋកថា 1206 បរិវារអដ្ឋកថា | 1301 សារត្ថទីបនីដីកា-១ 1302 សារត្ថទីបនីដីកា-២ 1303 សារត្ថទីបនីដីកា-៣ | 1401 ទ្វេមាតិកាបាឡិ 1402 វិនយសង្គហអដ្ឋកថា 1403 វជិរពុទ្ធិដីកា 1404 វិមតិវិនោទនីដីកា-១ 1405 វិមតិវិនោទនីដីកា-២ 1406 វិនយាលង្ការដីកា-១ 1407 វិនយាលង្ការដីកា-២ 1408 កង្ខាវិតរណីបុរាណដីកា 1409 វិនយវិនិច្ឆយ-ឧត្តរវិនិច្ឆយ 1410 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-១ 1411 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-២ 1412 បាចិត្យាទិយោជនាបាឡិ 1413 ខុទ្ទសិក្ខា-មូលសិក្ខា 8401 វិសុទ្ធិមគ្គ-១ 8402 វិសុទ្ធិមគ្គ-២ 8403 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-១ 8404 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-២ 8405 វិសុទ្ធិមគ្គ និទានកថា 8406 ទីឃនិកាយ (បុ-វិ) 8407 មជ្ឈិមនិកាយ (បុ-វិ) 8408 សំយុត្តនិកាយ (បុ-វិ) 8409 អង្គុត្តរនិកាយ (បុ-វិ) 8410 វិនយបិដក (បុ-វិ) 8411 អភិធម្មបិដក (បុ-វិ) 8412 អដ្ឋកថា (បុ-វិ) 8413 និរុត្តិទីបនី 8414 បរមត្ថទីបនី សង្គហមហាដីកាបាឋ 8415 អនុទីបនីបាឋ 8416 បដ្ឋានុទ្ទេស ទីបនីបាឋ 8417 នមក្ការដីកា 8418 មហាបណាមបាឋ 8419 លក្ខណាតោ ពុទ្ធថោមនាគាថា 8420 សុតវន្ទនា 8421 កមលាញ្ជលិ 8422 ជិនាលង្ការ 8423 បជ្ជមធុ 8424 ពុទ្ធគុណគាថាវលី 8425 ចូឡគន្ថវង្ស 8427 សាសនវង្ស 8426 មហាវង្ស 8429 មោគ្គល្លានព្យាករណំ 8428 កច្ចាយនព្យាករណំ 8430 សទ្ទនីតិប្បករណំ (បទមាលា) 8431 សទ្ទនីតិប្បករណំ (ធាតុមាលា) 8432 បទរូបសិទ្ធិ 8433 មោគ្គល្លានបញ្ចិកា 8434 បយោគសិទ្ធិបាឋ 8435 វុត្តោទយបាឋ 8436 អភិធានប្បទីបិកាបាឋ 8437 អភិធានប្បទីបិកាដីកា 8438 សុពោធាលង្ការបាឋ 8439 សុពោធាលង្ការដីកា 8440 បាលាវតារ គណ្ឋិបទត្ថវិនិច្ឆយសារ 8446 កវិទប្បណនីតិ 8447 នីតិមញ្ជរី 8445 ធម្មនីតិ 8444 មហារហនីតិ 8441 លោកនីតិ 8442 សុត្តន្តនីតិ 8443 សូរស្សតិនីតិ 8450 ចាណក្យនីតិ 8448 នរទក្ខទីបនី 8449 ចតុរារក្ខទីបនី 8451 រសវាហិនី 8452 សីមវិសោធនីបាឋ 8453 វេស្សន្តរគីតិ 8454 មោគ្គល្លាន វុត្តិវិវរណបញ្ចិកា 8455 ថូបវង្ស 8456 ទាឋាវង្ស 8457 ធាតុបាឋវិលាសិនិយា 8458 ធាតុវង្ស 8459 ហត្ថវនគល្លវិហារវង្ស 8460 ជិនចរិតយ 8461 ជិនវង្សទីបំ 8462 តេលកដាហគាថា 8463 មិលិទដីកា 8464 បទមញ្ជរី 8465 បទសាធនំ 8466 សទ្ទពិន្ទុបករណំ 8467 កច្ចាយនធាតុមញ្ជុសា 8468 សាមន្តកូដវណ្ណនា |
| 2101 សីលក្ខន្ធវគ្គបាឡិ 2102 មហាវគ្គបាឡិ (ទីឃ) 2103 បាថិកវគ្គបាឡិ | 2201 សីលក្ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 2202 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (ទីឃ) 2203 បាថិកវគ្គអដ្ឋកថា | 2301 សីលក្ខន្ធវគ្គដីកា 2302 មហាវគ្គដីកា (ទីឃ) 2303 បាថិកវគ្គដីកា 2304 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-១ 2305 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-២ | |
| 3101 មូលបណ្ណាសបាឡិ 3102 មជ្ឈិមបណ្ណាសបាឡិ 3103 ឧបរិបណ្ណាសបាឡិ | 3201 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-១ 3202 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-២ 3203 មជ្ឈិមបណ្ណាសអដ្ឋកថា 3204 ឧបរិបណ្ណាសអដ្ឋកថា | 3301 មូលបណ្ណាសដីកា 3302 មជ្ឈិមបណ្ណាសដីកា 3303 ឧបរិបណ្ណាសដីកា | |
| 4101 សគាថាវគ្គបាឡិ 4102 និទានវគ្គបាឡិ 4103 ខន្ធវគ្គបាឡិ 4104 សឡាយតនវគ្គបាឡិ 4105 មហាវគ្គបាឡិ (សំយុត្ត) | 4201 សគាថាវគ្គអដ្ឋកថា 4202 និទានវគ្គអដ្ឋកថា 4203 ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 4204 សឡាយតនវគ្គអដ្ឋកថា 4205 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (សំយុត្ត) | 4301 សគាថាវគ្គដីកា 4302 និទានវគ្គដីកា 4303 ខន្ធវគ្គដីកា 4304 សឡាយតនវគ្គដីកា 4305 មហាវគ្គដីកា (សំយុត្ត) | |
| 5101 ឯកកនិបាតបាឡិ 5102 ទុកនិបាតបាឡិ 5103 តិកនិបាតបាឡិ 5104 ចតុក្កនិបាតបាឡិ 5105 បញ្ចកនិបាតបាឡិ 5106 ឆក្កនិបាតបាឡិ 5107 សត្តកនិបាតបាឡិ 5108 អដ្ឋកាទិនិបាតបាឡិ 5109 នវកនិបាតបាឡិ 5110 ទសកនិបាតបាឡិ 5111 ឯកាទសកនិបាតបាឡិ | 5201 ឯកកនិបាតអដ្ឋកថា 5202 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតអដ្ឋកថា 5203 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតអដ្ឋកថា 5204 អដ្ឋកាទិនិបាតអដ្ឋកថា | 5301 ឯកកនិបាតដីកា 5302 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតដីកា 5303 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតដីកា 5304 អដ្ឋកាទិនិបាតដីកា | |
| 6101 ខុទ្ទកបាឋបាឡិ 6102 ធម្មបទបាឡិ 6103 ឧទានបាឡិ 6104 ឥតិវុត្តកបាឡិ 6105 សុត្តនិបាតបាឡិ 6106 វិមានវត្ថុបាឡិ 6107 បេតវត្ថុបាឡិ 6108 ថេរគាថាបាឡិ 6109 ថេរីគាថាបាឡិ 6110 អបទានបាឡិ-១ 6111 អបទានបាឡិ-២ 6112 ពុទ្ធវង្សបាឡិ 6113 ចរិយាបិដកបាឡិ 6114 ជាតកបាឡិ-១ 6115 ជាតកបាឡិ-២ 6116 មហានិទ្ទេសបាឡិ 6117 ចូឡនិទ្ទេសបាឡិ 6118 បដិសម្ភិទាមគ្គបាឡិ 6119 នេត្តិប្បករណបាឡិ 6120 មិលិន្ទបញ្ហាបាឡិ 6121 បេដកោបទេសបាឡិ | 6201 ខុទ្ទកបាឋអដ្ឋកថា 6202 ធម្មបទអដ្ឋកថា-១ 6203 ធម្មបទអដ្ឋកថា-២ 6204 ឧទានអដ្ឋកថា 6205 ឥតិវុត្តកអដ្ឋកថា 6206 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-១ 6207 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-២ 6208 វិមានវត្ថុអដ្ឋកថា 6209 បេតវត្ថុអដ្ឋកថា 6210 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-១ 6211 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-២ 6212 ថេរីគាថាអដ្ឋកថា 6213 អបទានអដ្ឋកថា-១ 6214 អបទានអដ្ឋកថា-២ 6215 ពុទ្ធវង្សអដ្ឋកថា 6216 ចរិយាបិដកអដ្ឋកថា 6217 ជាតកអដ្ឋកថា-១ 6218 ជាតកអដ្ឋកថា-២ 6219 ជាតកអដ្ឋកថា-៣ 6220 ជាតកអដ្ឋកថា-៤ 6221 ជាតកអដ្ឋកថា-៥ 6222 ជាតកអដ្ឋកថា-៦ 6223 ជាតកអដ្ឋកថា-៧ 6224 មហានិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6225 ចូឡនិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6226 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-១ 6227 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-២ 6228 នេត្តិប្បករណអដ្ឋកថា | 6301 នេត្តិប្បករណដីកា 6302 នេត្តិវិភាវិនី | |
| 7101 ធម្មសង្គណីបាឡិ 7102 វិភង្គបាឡិ 7103 ធាតុកថាបាឡិ 7104 បុគ្គលបញ្ញត្តិបាឡិ 7105 កថាវត្ថុបាឡិ 7106 យមកបាឡិ-១ 7107 យមកបាឡិ-២ 7108 យមកបាឡិ-៣ 7109 បដ្ឋានបាឡិ-១ 7110 បដ្ឋានបាឡិ-២ 7111 បដ្ឋានបាឡិ-៣ 7112 បដ្ឋានបាឡិ-៤ 7113 បដ្ឋានបាឡិ-៥ | 7201 ធម្មសង្គណិអដ្ឋកថា 7202 សម្មោហវិនោទនីអដ្ឋកថា 7203 បញ្ចបករណអដ្ឋកថា | 7301 ធម្មសង្គណី-មូលដីកា 7302 វិភង្គ-មូលដីកា 7303 បញ្ចបករណ-មូលដីកា 7304 ធម្មសង្គណី-អនុដីកា 7305 បញ្ចបករណ-អនុដីកា 7306 អភិធម្មាវតារោ-នាមរូបបរិច្ឆេទោ 7307 អភិធម្មត្ថសង្គហោ 7308 អភិធម្មាវតារ-បុរាណដីកា 7309 អភិធម្មមាតិកាបាឡិ | |
| 한국인 | |||
| 팔리 대장경 | 주석서 | 부주석서 | 기타 |
| 1101 빠라지카 빨리 1102 빠찟띠야 빨리 1103 마하왁가 빨리 (비나야) 1104 출라왁가 빨리 1105 빠리와라 빨리 | 1201 빠라지까깐다 앗타카타-1 1202 빠라지까깐다 앗타카타-2 1203 빠찟띠야 앗타카타 1204 마하왁가 앗타카타 (비나야) 1205 출라왁가 앗타카타 1206 빠리와라 앗타카타 | 1301 사랏타디빠니 띠까-1 1302 사랏타디빠니 띠까-2 1303 사랏타디빠니 띠까-3 | 1401 드베마띠까빨리 1402 위나야상가하 앗타카타 1403 와지라붓디 띠까 1404 위마띠위노다니 띠까-1 1405 위마띠위노다니 띠까-2 1406 위나야랑까라 띠까-1 1407 위나야랑까라 띠까-2 1408 깡카위따라니뿌라나 띠까 1409 위나야위닛차야-웃따라위닛차야 1410 위나야위닛차야 띠까-1 1411 위나야위닛차야 띠까-2 1412 빠찟땨디요자나빨리 1413 쿳닷시카-물라시카 8401 위숟디막가-1 8402 위숟디막가-2 8403 위숟디막가-마하띠까-1 8404 위숟디막가-마하띠까-2 8405 위숟디막가 니다나까타 8406 디가니까야 (뿌-위) 8407 맛지마니까야 (뿌-위) 8408 삼윳따니까야 (뿌-위) 8409 앙굳따라니까야 (뿌-위) 8410 위나야삐따까 (뿌-위) 8411 아비담마삐따까 (뿌-위) 8412 앗타카타 (뿌-위) 8413 니룻띠디빠니 8414 빠라맛타디빠니 상가하마하띠까빠타 8415 아누디빠니빠타 8416 빳타누ㄸ데사 디빠니빠타 8417 나막까라띠까 8418 마하빠나마빠타 8419 락카나또 붓다토마나가타 8420 수타완다나 8421 까말란자리 8422 지나랑까라 8423 빳자마두 8424 붓다구나가타왈리 8425 출라간타왕사 8427 사사나왕사 8426 마하왕사 8429 목갈라나뱌까라낭 8428 깟차야나뱌까라낭 8430 삿다니띠빠까라낭 (빠다말라) 8431 삿다니띠빠까라낭 (다두말라) 8432 빠다루빠싣디 8433 목갈라나빤찌까 8434 빠요가싣디빠타 8435 붇또다야빠타 8436 아비다나빠디피까빠타 8437 아비다나빠디피까띠까 8438 수보다랑까라빠타 8439 수보다랑까라띠까 8440 발라와따라 간티빠닷타위닛차야사라 8446 까위닷빠나니띠 8447 니띠만자리 8445 담마니띠 8444 마하라하니띠 8441 로까니띠 8442 숫딴따니띠 8443 수랏사띠니띠 8450 짜낙야니띠 8448 나라닥카디빠니 8449 짜뚜라락카디빠니 8451 라사와히니 8452 시마위소다니빠타 8453 웨산따라기띠 8454 목갈라나 붇띠위와라나빤찌까 8455 투빠왕사 8456 다타왕사 8457 다두빠타윌라시니야 8458 다두왕사 8459 핟타와나갈라위하라왕사 8460 지나짜리따야 8461 지나왕사디빵 8462 떼라까타하가타 8463 밀리다띠까 8464 빠다만자리 8465 빠다사다낭 8466 삿다빈두빠까라낭 8467 깟차야나다두만주사 8468 사만따꿋타완나나 |
| 2101 실락칸다왁가 빨리 2102 마하왁가 빨리 (디가) 2103 빠티까왁가 빨리 | 2201 실락칸다왁가 앗타카타 2202 마하왁가 앗타카타 (디가) 2203 빠티까왁가 앗타카타 | 2301 실락칸다왁가 띠까 2302 마하왁가 띠까 (디가) 2303 빠티까왁가 띠까 2304 실락칸다왁가-아비나와띠까-1 2305 실락칸다왁가-아비나와띠까-2 | |
| 3101 물라빤나사 빨리 3102 맛지마빤나사 빨리 3103 우빠리빤나사 빨리 | 3201 물라빤나사 앗타카타-1 3202 물라빤나사 앗타카타-2 3203 맛지마빤나사 앗타카타 3204 우빠리빤나사 앗타카타 | 3301 물라빤나사 띠까 3302 맛지마빤나사 띠까 3303 우빠리빤나사 띠까 | |
| 4101 사가타왁가 빨리 4102 니다나왁가 빨리 4103 칸다왁가 빨리 4104 살라야따나왁가 빨리 4105 마하왁가 빨리 (삼윳따) | 4201 사가타왁가 앗타카타 4202 니다나왁가 앗타카타 4203 칸다왁가 앗타카타 4204 살라야따나왁가 앗타카타 4205 마하왁가 앗타카타 (삼윳따) | 4301 사가타왁가 띠까 4302 니다나왁가 띠까 4303 칸다왁가 띠까 4304 살라야따나왁가 띠까 4305 마하왁가 띠까 (삼윳따) | |
| 5101 에까까니빠따 빨리 5102 두까니빠따 빨리 5103 띠까니빠따 빨리 5104 짜뚝까니빠따 빨리 5105 빤짜까니빠따 빨리 5106 착까니빠따 빨리 5107 삿따까니빠따 빨리 5108 앗타까디니빠따 빨리 5109 나와까니빠따 빨리 5110 다사까니빠따 빨리 5111 에까다사까니빠따 빨리 | 5201 에까까니빠따 앗타카타 5202 두까-띠까-짜뚝까니빠따 앗타카타 5203 빤짜까-착까-삿따까니빠따 앗타카타 5204 앗타까디니빠따 앗타카타 | 5301 에까까니빠따 띠까 5302 두까-띠까-짜뚝까니빠따 띠까 5303 빤짜까-착까-삿따까니빠따 띠까 5304 앗타까디니빠따 띠까 | |
| 6101 쿳닥까빠타 빨리 6102 담마빠다 빨리 6103 우다나 빨리 6104 이띠웃따까 빨리 6105 숫따니빠따 빨리 6106 위마나왓투 빨리 6107 베따왓투 빨리 6108 테라가타 빨리 6109 테리가타 빨리 6110 아빠다나 빨리-1 6111 아빠다나 빨리-2 6112 붓다왕사 빨리 6113 짜리야삐따까 빨리 6114 자따까 빨리-1 6115 자따까 빨리-2 6116 마하닷데사 빨리 6117 출라닷데사 빨리 6118 빠티삼비다막가 빨리 6119 넷띠빠까라나 빨리 6120 밀린다빤하 빨리 6121 뻬따꼬빠데사 빨리 | 6201 쿳닥까빠타 앗타카타 6202 담마빠다 앗타카타-1 6203 담마빠다 앗타카타-2 6204 우다나 앗타카타 6205 이띠웃따까 앗타카타 6206 숫따니빠따 앗타카타-1 6207 숫따니빠따 앗타카타-2 6208 위마나왓투 앗타카타 6209 베따왓투 앗타카타 6210 테라가타 앗타카타-1 6211 테라가타 앗타카타-2 6212 테리가타 앗타카타 6213 아빠다나 앗타카타-1 6214 아빠다나 앗타카타-2 6215 붓다왕사 앗타카타 6216 짜리야삐따까 앗타카타 6217 자따까 앗타카타-1 6218 자따까 앗타카타-2 6219 자따까 앗타카타-3 6220 자따까 앗타카타-4 6221 자따까 앗타카타-5 6222 자따까 앗타카타-6 6223 자따까 앗타카타-7 6224 마하닷데사 앗타카타 6225 출라닷데사 앗타카타 6226 빠티삼비다막가 앗타카타-1 6227 빠티삼비다막가 앗타카타-2 6228 넷띠빠까라나 앗타카타 | 6301 넷띠빠까라나 띠까 6302 넷띠위바비니 | |
| 7101 담마상가니 빨리 7102 위방가 빨리 7103 다뚜까타 빨리 7104 뿍갈라빤냣띠 빨리 7105 까타왓투 빨리 7106 야마까 빨리-1 7107 야마까 빨리-2 7108 야마까 빨리-3 7109 빳타나 빨리-1 7110 빳타나 빨리-2 7111 빳타나 빨리-3 7112 빳타나 빨리-4 7113 빳타나 빨리-5 | 7201 담마상가니 앗타카타 7202 삼모하위노다니 앗타카타 7203 빤짜빠까라나 앗타카타 | 7301 담마상가니-물라띠까 7302 위방가-물라띠까 7303 빤짜빠까라나-물라띠까 7304 담마상가니-아누띠까 7305 빤짜빠까라나-아누띠까 7306 아비담마와따로-나마루빠빠릳체도 7307 아비담맛타상가호 7308 아비담마와따라-뿌라나띠까 7309 아비담마마띠까빨리 | |
| ອັກສອນລາວ | |||
| ປາລີ | ອັດຖະກະຖາ | ຏີກາ | ອັນຍາ |
| 1101 ປາຣາຊິກະ ປາລີ 1102 ປາຈິດຕິຍະ ປາລີ 1103 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ວິໄນ) 1104 ຈູລະວັກຄະ ປາລີ 1105 ປະລິວາລະ ປາລີ | 1201 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-1 1202 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-2 1203 ປາຈິດຕິຍະ ອັດຖະກະຖາ 1204 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ວິໄນ) 1205 ຈູລະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 1206 ປະລິວາລະ ອັດຖະກະຖາ | 1301 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-1 1302 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-2 1303 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-3 | 1401 ທເວມາຕິກາປາລີ 1402 ວິນະຍະສັງຄະຫະ ອັດຖະກະຖາ 1403 ວະຊິລະພຸດທິ ຏີກາ 1404 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-1 1405 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-2 1406 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-1 1407 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-2 1408 ກັງຂາວິຕະຣະນີປຸຣານະ ຏີກາ 1409 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ-ອຸຕຕະຣະວິນິດສະຍະ 1410 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-1 1411 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-2 1412 ປາຈິຕະຍາທິໂຍຊະນາປາລີ 1413 ຂຸທະທະສິກຂາ-ມູລະສິກຂາ 8401 ວິສຸດທິມັກຄະ-1 8402 ວິສຸດທິມັກຄະ-2 8403 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-1 8404 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-2 8405 ວິສຸດທິມັກຄະ ນິທານະກະຖາ 8406 ທີຆະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8407 ມັດຊິມະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8408 ສັງຍຸຕຕະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8409 ອັງຄຸຕຕະລະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8410 ວິນະຍະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8411 ອະພິທັມມະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8412 ອັດຖະກະຖາ (ປຸ-ວິ) 8413 ນິລຸຕຕິທີປະນີ 8414 ປະຣະມັດຖະທີປະນີ ສັງຄະຫະມະຫາຏີກາປາຖະ 8415 ອະນຸທີປະນີປາຖະ 8416 ປັດຖານຸທເທສະ ທີປະນີປາຖະ 8417 ນະມັກກາລະຏີກາ 8418 ມະຫາປະຖາມະປາຖະ 8419 ລັກຂະນາໂຕ ພຸດທະຖະມະນາຄາຖາ 8420 ສຸຕະວັນທະນາ 8421 ກະມະລາຍຈະລິ 8422 ຊິນາລັງກາລະ 8423 ປັດຊະມະທຸ 8424 ພຸດທະຄຸນະຄາຖາວະລີ 8425 ຈູລະຄັນຖະວັງສະ 8426 ມະຫາວັງສະ 8427 ສາສະນະວັງສະ 8428 ກັດຈາຍະນະພະຍາກະລະນັງ 8429 ມົກຄັນທານະພະຍາກະລະນັງ 8430 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ປະທະມາລາ) 8431 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ຘາຕຸມາລາ) 8432 ປະທະຣູປະສິດທິ 8433 ໂມຄັນທານະປັນຈິກາ 8434 ປະໂຍຄະສິດທິປາຖະ 8435 ວຸຕະໂທຍະປາຖະ 8436 ອະພິທານະປະປະທີປິກາປາຖະ 8437 ອະພິທານະປະປະທີປິກາຏີກາ 8438 ສຸໂພທາລັງກາລະປາຖະ 8439 ສຸໂພທາລັງກາລະຏີກາ 8440 ພາລາວະຕາລະ ຄັນຖິປະທັດຖະວິນິດສະຍະສາລະ 8441 ໂລກະນີຕິ 8442 ສຸດຕັນຕະນີຕິ 8443 ສູລັດສະຕິນີຕິ 8444 ມະຫາລະຫະນີຕິ 8445 ທັມມະນີຕິ 8446 ກະວິທັບປະຖານີຕິ 8447 ນີຕິມັນຊະລີ 8448 ນະລະທັກຂະທີປະນີ 8449 ຈະຕຸຣາລັກຂະທີປະນີ 8450 ຈານັກຍະນີຕິ 8451 ລະສະວາຫິນີ 8452 ສີມາວິໂສທະນີປາຖະ 8453 ເວສສັນຕະລະຄີຕິ 8454 ໂມຄັນທານະ ວຸຕຕິວິວະລະນະປັນຈິກາ 8455 ຖູປະວັງສະ 8456 ທາຐາວັງສະ 8457 ຘາຕຸປາຖະວິລາສິນີຍາ 8458 ຘາຕຸວັງສະ 8459 ຫັດຖະວະນະຄັນລະວິຫາລະວັງສະ 8460 ຊິນະຈະລິຕະຍະ 8461 ຊິນະວັງສະທີປັງ 8462 ເຕລະກະຕາຫາຄາຖາ 8463 ມິລິທະຏີກາ 8464 ປະທະມັນຊະລີ 8465 ປະທະສາຘະນັງ 8466 ສັດທະພິນທຸປະກະລະນັງ 8467 ກັດຈາຍະນະຘາຕຸມັນຊຸສາ 8468 ສາມັນຕະກູຏະວັນນະນາ |
| 2101 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 2102 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ທີຆະ) 2103 ປາຖິກະວັກຄະ ປາລີ | 2201 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 2202 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ທີຆະ) 2203 ປາຖິກະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ | 2301 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 2302 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ທີຆະ) 2303 ປາຖິກະວັກຄະ ຏີກາ 2304 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-1 2305 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-2 | |
| 3101 ມູລະປັນຍາສະ ປາລີ 3102 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ປາລີ 3103 ອຸປະລິປັນຍາສະ ປາລີ | 3201 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-1 3202 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-2 3203 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ 3204 ອຸປະລິປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ | 3301 ມູລະປັນຍາສະ ຏີກາ 3302 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ຏີກາ 3303 ອຸປະລິປັນຍາສະ ຏີກາ | |
| 4101 ສະຄາຖາວັກຄະ ປາລີ 4102 ນິທານະວັກຄະ ປາລີ 4103 ຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 4104 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ປາລີ 4105 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4201 ສະຄາຖາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4202 ນິທານະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4203 ຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4204 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4205 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4301 ສະຄາຖາວັກຄະ ຏີກາ 4302 ນິທານະວັກຄະ ຏີກາ 4303 ຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 4304 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ຏີກາ 4305 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ສັງຍຸຕຕະ) | |
| 5101 ເອກະກະນິປາຕະ ປາລີ 5102 ທຸກະນິປາຕະ ປາລີ 5103 ຕິກະນິປາຕະ ປາລີ 5104 ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ປາລີ 5105 ປັຈຈະກະນິປາຕະ ປາລີ 5106 ຉັກກະນິປາຕະ ປາລີ 5107 ສັດຕະກະນິປາຕະ ປາລີ 5108 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ປາລີ 5109 ນະວະກະນິປາຕະ ປາລີ 5110 ທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ 5111 ເອກາທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ | 5201 ເອກະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5202 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5203 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5204 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ | 5301 ເອກະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5302 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ຏີກາ 5303 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5304 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ຏີກາ | |
| 6101 ຂຸທະທະກະປາຖະ ປາລີ 6102 ທຳມະປະທະ ປາລີ 6103 ອຸທານະ ປາລີ 6104 ອິຕິວຸຕຕະກະ ປາລີ 6105 ສຸດຕະນິປາຕະ ປາລີ 6106 ວິມານະວັດຖຸ ປາລີ 6107 ເປຕະວັດຖຸ ປາລີ 6108 ເຖລະຄາຖາ ປາລີ 6109 ເຖລີຄາຖາ ປາລີ 6110 ອະປະທານະ ປາລີ-1 6111 ອະປະທານະ ປາລີ-2 6112 ພຸດທະວັງສະ ປາລີ 6113 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ປາລີ 6114 ຊາຕະກະ ປາລີ-1 6115 ຊາຕະກະ ປາລີ-2 6116 ມະຫານິທເທສະ ປາລີ 6117 ຈູລະນິທເທສະ ປາລີ 6118 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ປາລີ 6119 ເນຕຕິປະກະລະນະ ປາລີ 6120 ມິລິນທະປັນຫາ ປາລີ 6121 ເປຏະກົປເທສະ ປາລີ | 6201 ຂຸທະທະກະປາຖະ ອັດຖະກະຖາ 6202 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-1 6203 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-2 6204 ອຸທານະ ອັດຖະກະຖາ 6205 ອິຕິວຸຕຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6206 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-1 6207 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-2 6208 ວິມານະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6209 ເປຕະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6210 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-1 6211 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-2 6212 ເຖລີຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ 6213 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-1 6214 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-2 6215 ພຸດທະວັງສະ ອັດຖະກະຖາ 6216 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6217 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-1 6218 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-2 6219 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-3 6220 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-4 6221 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-5 6222 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-6 6223 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-7 6224 ມະຫານິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6225 ຈູລະນິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6226 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-1 6227 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-2 6228 ເນຕຕິປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 6301 ເນຕຕິປະກະລະນະ ຏີກາ 6302 ເນຕຕິວິພາວິນີ | |
| 7101 ທຳມະສັງຄະນີ ປາລີ 7102 ວິພັງຄະ ປາລີ 7103 ຘາຕຸກະຖາ ປາລີ 7104 ປຸກຄະລະປັນຍັດຕິ ປາລີ 7105 ກະຖາວັດຖຸ ປາລີ 7106 ຍະມະກະ ປາລີ-1 7107 ຍະມະກະ ປາລີ-2 7108 ຍະມະກະ ປາລີ-3 7109 ປັດຖານະ ປາລີ-1 7110 ປັດຖານະ ປາລີ-2 7111 ປັດຖານະ ປາລີ-3 7112 ປັດຖານະ ປາລີ-4 7113 ປັດຖານະ ປາລີ-5 | 7201 ທຳມະສັງຄະນິ ອັດຖະກະຖາ 7202 ສັມໂມຫະວິໂນທະນີ ອັດຖະກະຖາ 7203 ປັຈຈະປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 7301 ທຳມະສັງຄະນີ-ມູລະຏີກາ 7302 ວິພັງຄະ-ມູລະຏີກາ 7303 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ມູລະຏີກາ 7304 ທຳມະສັງຄະນີ-ອະນຸຏີກາ 7305 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ອະນຸຏີກາ 7306 ອະພິທັມມາວະຕາໂຣ-ນາມະຣູປະປະຣິຈເທໂທ 7307 ອະພິທັມມັດຖະສັງຄະໂຫ 7308 ອະພິທັມມາວະຕາລະ-ປຸຣານະຏີກາ 7309 ອະພິທັມມາມາຕິກາປາລີ | |
| मराठी | |||
| पाळी | अट्ठकथा | टीका | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळी 1102 पाचित्तिय पाळी 1103 महावग्ग पाळी (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळी 1105 परिवार पाळी | 1201 पाराजिककंड अट्ठकथा-१ 1202 पाराजिककंड अट्ठकथा-२ 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-१ 1302 सारत्थदीपनी टीका-२ 1303 सारत्थदीपनी टीका-३ | 1401 द्वेमातिकापाळी 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-१ 1405 विमतिविनोदनी टीका-२ 1406 विनयालंकार टीका-१ 1407 विनयालंकार टीका-२ 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-१ 1411 विनयविनिच्छय टीका-२ 1412 पाचित्यादियोजनापाळी 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-१ 8402 विसुद्धिमग्ग-२ 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-१ 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-२ 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अंगुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी संगहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवंदना 8421 कमलांजलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगंथवंस 8426 महावंस 8427 सासनवंस 8428 कच्चायनव्याकरणं 8429 मोग्गल्लानव्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपंचिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गंठिपदत्थविनिच्छयसार 8441 लोकनीति 8442 सुत्तंतनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8444 महारहनीति 8445 धम्मनीति 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमंजरी 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8450 चाणक्यनीति 8451 रसवाहिनी 8452 सीमाविसोधनीपाठ 8453 वेस्संतरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपंचिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमंजरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिंदुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमंजुसा 8468 सामंतकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खंधवग्ग पाळी 2102 महावग्ग पाळी (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळी | 2201 सीलक्खंधवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खंधवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-१ 2305 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-२ | |
| 3101 मूलपण्णास पाळी 3102 मज्झिमपण्णास पाळी 3103 उपरिपण्णास पाळी | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-१ 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-२ 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळी 4102 निदानवग्ग पाळी 4103 खंधवग्ग पाळी 4104 सळायतनवग्ग पाळी 4105 महावग्ग पाळी (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खंधवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खंधवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळी 5102 दुकनिपात पाळी 5103 तिकनिपात पाळी 5104 चतुक्कनिपात पाळी 5105 पंचकनिपात पाळी 5106 छक्कनिपात पाळी 5107 सत्तकनिपात पाळी 5108 अट्ठकादिनिपात पाळी 5109 नवकनिपात पाळी 5110 दसकनिपात पाळी 5111 एकादसकनिपात पाळी | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळी 6102 धम्मपद पाळी 6103 उदान पाळी 6104 इतिवुत्तक पाळी 6105 सुत्तनिपात पाळी 6106 विमानवत्थु पाळी 6107 पेतवत्थु पाळी 6108 थेरगाथा पाळी 6109 थेरीगाथा पाळी 6110 अपदान पाळी-१ 6111 अपदान पाळी-२ 6112 बुद्धवंस पाळी 6113 चरियापिटक पाळी 6114 जातक पाळी-१ 6115 जातक पाळी-२ 6116 महानिद्देस पाळी 6117 चूळनिद्देस पाळी 6118 पटिसंभिदामग्ग पाळी 6119 नेत्तिप्पकरण पाळी 6120 मिलिंदपंह पाळी 6121 पेटकोपदेस पाळी | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-१ 6203 धम्मपद अट्ठकथा-२ 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-१ 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-२ 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-१ 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-२ 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-१ 6214 अपदान अट्ठकथा-२ 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-१ 6218 जातक अट्ठकथा-२ 6219 जातक अट्ठकथा-३ 6220 जातक अट्ठकथा-४ 6221 जातक अट्ठकथा-५ 6222 जातक अट्ठकथा-६ 6223 जातक अट्ठकथा-७ 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-१ 6227 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-२ 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसंगणी पाळी 7102 विभंग पाळी 7103 धातुकथा पाळी 7104 पुग्गलपंयत्ति पाळी 7105 कथावत्थु पाळी 7106 यमक पाळी-१ 7107 यमक पाळी-२ 7108 यमक पाळी-३ 7109 पट्ठान पाळी-१ 7110 पट्ठान पाळी-२ 7111 पट्ठान पाळी-३ 7112 पट्ठान पाळी-४ 7113 पट्ठान पाळी-५ | 7201 धम्मसंगणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पंचपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसंगणी-मूलटीका 7302 विभंग-मूलटीका 7303 पंचपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसंगणी-अनुटीका 7305 पंचपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसंगहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळी | |
| မြန်မာ | |||
| ပါဠိတော် | အဋ္ဌကထာ | ဋီကာ | အခြား |
| 1101 ပါရာဇိက ပါဠိ 1102 ပါစိတ္တိယ ပါဠိ 1103 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဝိနယ) 1104 စူဠဝဂ္ဂ ပါဠိ 1105 ပရိဝါရ ပါဠိ | 1201 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၁ 1202 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၂ 1203 ပါစိတ္တိယ အဋ္ဌကထာ 1204 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဝိနယ) 1205 စူဠဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 1206 ပရိဝါရ အဋ္ဌကထာ | 1301 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၁ 1302 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၂ 1303 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၃ | 1401 ဒွေမာတိကာပါဠိ 1402 ဝိနယသင်္ဂဟ အဋ္ဌကထာ 1403 ဝဇိရဗုဒ္ဓိ ဋီကာ 1404 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၁ 1405 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၂ 1406 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၁ 1407 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၂ 1408 ကင်္ခာဝိတရဏီပုရာဏ ဋီကာ 1409 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ-ဥတ္တရဝိနိစ္ဆယ 1410 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၁ 1411 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၂ 1412 ပါစိတျာဒိယောဇနာပါဠိ 1413 ခုဒ္ဒသိက္ခာ-မူလသိက္ခာ 8401 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၁ 8402 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၂ 8403 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၁ 8404 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၂ 8405 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ နိဒါနကထာ 8406 ဒီဃနိကာယ (ပု-ဝိ) 8407 မဇ္ဈိမနိကာယ (ပု-ဝိ) 8408 သံယုတ္တနိကာယ (ပု-ဝိ) 8409 အင်္ဂုတ္တရနိကာယ (ပု-ဝိ) 8410 ဝိနယပိဋက (ပု-ဝိ) 8411 အဘိဓမ္မပိဋက (ပု-ဝိ) 8412 အဋ္ဌကထာ (ပု-ဝိ) 8413 နိရုတ္တိဒီပနီ 8414 ပရမတ္ထဒီပနီ သင်္ဂဟမဟာဋီကာပါဌ 8415 အနုဒီပနီပါဌ 8416 ပဋ္ဌာနုဒ္ဒေသ ဒီပနီပါဌ 8417 နမက္ကာရဋီကာ 8418 မဟာပဏာမပါဌ 8419 လက္ခဏာတော ဗုဒ္ဓထောမနာဂါထာ 8420 သုတဝန္ဒနာ 8421 ကမလာဉ္ဇလိ 8422 ဇိနာလင်္ကာရ 8423 ပဇ္ဇမဓု 8424 ဗုဒ္ဓဂုဏဂါထာဝလီ 8425 စူဠဂန္ထဝံသ 8427 သာသနဝံသ 8426 မဟာဝံသ 8429 မောဂ္ဂလ္လာနဗျာကရဏံ 8428 ကစ္စာယနဗျာကရဏံ 8430 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) 8431 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ဓါတုမာလာ) 8432 ပဒရူပသိဒ္ဓိ 8433 မောဂလ္လာနပဉ္စိကာ 8434 ပယောဂသိဒ္ဓိပါဌ 8435 ဝုတ္တောဒယပါဌ 8436 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာပါဌ 8437 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာဋီကာ 8438 သုဗောဓါလင်္ကာရပါဌ 8439 သုဗောဓါလင်္ကာရဋီကာ 8440 ဗာလာဝတာရ ဂဏ္ဌိပဒတ္ထဝိနိစ္ဆယသာရ 8446 ကဝိဒပ္ပဏနီတိ 8447 နီတိမဉ္ဇရီ 8445 ဓမ္မနီတိ 8444 မဟာရဟနီတိ 8441 လောကနီတိ 8442 သုတ္တန္တနီတိ 8443 သူရဿတိနီတိ 8450 စာဏကျနီတိ 8448 နရဒက္ခဒီပနီ 8449 စတုရာရက္ခဒီပနီ 8451 ရသဝါဟိနီ 8452 သီမဝိသောဓနီပါဌ 8453 ဝေဿန္တရဂီတိ 8454 မောဂ္ဂလ္လာန ဝုတ္တိဝိဝရဏပဉ္စိကာ 8455 ထူပဝံသ 8456 ဒါဌာဝံသ 8457 ဓါတုပါဌဝိလာသိနိယာ 8458 ဓါတုဝံသ 8459 ဟတ္ထဝနဂလ္လဝိဟာရဝံသ 8460 ဇိနစရိတယ 8461 ဇိနဝံသဒီပံ 8462 တေလကဋာဟဂါထာ 8463 မိလိဒဋီကာ 8464 ပဒမဉ္ဇရီ 8465 ပဒသာဓနံ 8466 သဒ္ဒဗိန္ဒုပကရဏံ 8467 ကစ္စာယနဓါတုမဉ္ဇုသာ 8468 သာမန္တကူဋဝဏ္ဏနာ |
| 2101 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 2102 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဒီဃ) 2103 ပါထိကဝဂ္ဂ ပါဠိ | 2201 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 2202 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဒီဃ) 2203 ပါထိကဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ | 2301 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 2302 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (ဒီဃ) 2303 ပါထိကဝဂ္ဂ ဋီကာ 2304 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၁ 2305 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၂ | |
| 3101 မူလပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3102 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3103 ဥပရိပဏ္ဏာသ ပါဠိ | 3201 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၁ 3202 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၂ 3203 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ 3204 ဥပရိပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ | 3301 မူလပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3302 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3303 ဥပရိပဏ္ဏာသ ဋီကာ | |
| 4101 သဂါထာဝဂ္ဂ ပါဠိ 4102 နိဒါနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4103 ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 4104 သဠာယတနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4105 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (သံယုတ္တ) | 4201 သဂါထာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4202 နိဒါနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4203 ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4204 သဠာယတနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4205 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (သံယုတ္တ) | 4301 သဂါထာဝဂ္ဂ ဋီကာ 4302 နိဒါနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4303 ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 4304 သဠာယတနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4305 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (သံယုတ္တ) | |
| 5101 ဧကကနိပါတ ပါဠိ 5102 ဒုကနိပါတ ပါဠိ 5103 တိကနိပါတ ပါဠိ 5104 စတုက္ကနိပါတ ပါဠိ 5105 ပဉ္စကနိပါတ ပါဠိ 5106 ဆက္ကနိပါတ ပါဠိ 5107 သတ္တကနိပါတ ပါဠိ 5108 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ပါဠိ 5109 နဝကနိပါတ ပါဠိ 5110 ဒသကနိပါတ ပါဠိ 5111 ဧကာဒသကနိပါတ ပါဠိ | 5201 ဧကကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5202 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5203 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5204 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ အဋ္ဌကထာ | 5301 ဧကကနိပါတ ဋီကာ 5302 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ ဋီကာ 5303 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ ဋီကာ 5304 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ဋီကာ | |
| 6101 ခုဒ္ဒကပါဌ ပါဠိ 6102 ဓမ္မပဒ ပါဠိ 6103 ဥဒါန ပါဠိ 6104 ဣတိဝုတ္တက ပါဠိ 6105 သုတ္တနိပါတ ပါဠိ 6106 ဝိမာနဝတ္ထု ပါဠိ 6107 ပေတဝတ္ထု ပါဠိ 6108 ထေရဂါထာ ပါဠိ 6109 ထေရီဂါထာ ပါဠိ 6110 အပဒါန ပါဠိ-၁ 6111 အပဒါန ပါဠိ-၂ 6112 ဗုဒ္ဓဝံသ ပါဠိ 6113 စရိယာပိဋက ပါဠိ 6114 ဇာတက ပါဠိ-၁ 6115 ဇာတက ပါဠိ-၂ 6116 မဟာနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6117 စူဠနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6118 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ ပါဠိ 6119 နေတ္တိပ္ပကရဏ ပါဠိ 6120 မိလိန္ဒပဉှ ပါဠိ 6121 ပေဋကောပဒေသ ပါဠိ | 6201 ခုဒ္ဒကပါဌ အဋ္ဌကထာ 6202 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၁ 6203 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၂ 6204 ဥဒါန အဋ္ဌကထာ 6205 ဣတိဝုတ္တက အဋ္ဌကထာ 6206 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၁ 6207 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၂ 6208 ဝိမာနဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6209 ပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6210 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၁ 6211 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၂ 6212 ထေရီဂါထာ အဋ္ဌကထာ 6213 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၁ 6214 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၂ 6215 ဗုဒ္ဓဝံသ အဋ္ဌကထာ 6216 စရိယာပိဋက အဋ္ဌကထာ 6217 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၁ 6218 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၂ 6219 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၃ 6220 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၄ 6221 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၅ 6222 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၆ 6223 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၇ 6224 မဟာနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6225 စူဠနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6226 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၁ 6227 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၂ 6228 နေတ္တိပ္ပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 6301 နေတ္တိပ္ပကရဏ ဋီကာ 6302 နေတ္တိဝိဘာဝိနီ | |
| 7101 ဓမ္မသင်္ဂဏီ ပါဠိ 7102 ဝိဘင်္ဂ ပါဠိ 7103 ဓါတုကထာ ပါဠိ 7104 ပုဂ္ဂလပညတ္တိ ပါဠိ 7105 ကထာဝတ္ထု ပါဠိ 7106 ယမက ပါဠိ-၁ 7107 ယမက ပါဠိ-၂ 7108 ယမက ပါဠိ-၃ 7109 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၁ 7110 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၂ 7111 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၃ 7112 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၄ 7113 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၅ | 7201 ဓမ္မသင်္ဂဏိ အဋ္ဌကထာ 7202 သမ္မောဟဝိနောဒနီ အဋ္ဌကထာ 7203 ပဉ္စပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 7301 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-မူလဋီကာ 7302 ဝိဘင်္ဂ-မူလဋီကာ 7303 ပဉ္စပကရဏ-မူလဋီကာ 7304 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-အနုဋီကာ 7305 ပဉ္စပကရဏ-အနုဋီကာ 7306 အဘိဓမ္မာဝတာရော-နာမရူပပရိစ္ဆေဒေါ 7307 အဘိဓမ္မတ္ထသင်္ဂဟော 7308 အဘိဓမ္မာဝတာရ-ပုရာဏဋီကာ 7309 အဘိဓမ္မမာတိကာပါဠိ | |
| português | |||
| Páli | Aṭṭhakathā | Ṭīkā | Outro |
| 1101 Ofensas Graves (Pārājika) 1102 Ofensas Leves (Pācittiya) 1103 Grande Seção do Vīnaya (Mahāvagga) 1104 Pequena Seção do Vīnaya (Cūḷavagga) 1105 Apêndice do Vīnaya (Parivāra) | 1201 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 1 1202 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 2 1203 Comentário das Ofensas Leves 1204 Comentário da Grande Seção do Vīnaya 1205 Comentário da Pequena Seção do Vīnaya 1206 Comentário do Apêndice do Vīnaya | 1301 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 1 1302 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 2 1303 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 3 | 1401 Texto das Duas Matrizes 1402 Comentário do Compêndio do Vīnaya 1403 Subcomentário de Vajirabuddhi 1404 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 1 1405 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 2 1406 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 1 1407 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 2 1408 Antigo Subcomentário que Supera Dúvidas 1409 Decisão sobre o Vīnaya e Decisão Superior 1410 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 1 1411 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 2 1412 Texto da Aplicação das Regras 1413 Pequeno Treinamento e Treinamento Fundamental 8401 Caminho da Purificação - Vol. 1 8402 Caminho da Purificação - Vol. 2 8403 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 1 8404 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 2 8405 História da Origem do Caminho da Purificação 8406 Coleção dos Longos Discursos (índice Pāli-Vietnamita) 8407 Coleção dos Discursos Médios (índice Pāli-Vietnamita) 8408 Coleção dos Discursos Agrupados (índice Pāli-Vietnamita) 8409 Coleção dos Discursos Numerados (índice Pāli-Vietnamita) 8410 Cesto da Disciplina (índice Pāli-Vietnamita) 8411 Cesto do Abhidhamma (índice Pāli-Vietnamita) 8412 Comentários (índice Pāli-Vietnamita) 8413 Elucidação da Etimologia 8414 Grande Subcomentário do Compêndio que Elucida o Sentido Supremo 8415 Texto do Subcomentário Elucidativo 8416 Texto Elucidativo sobre a Exposição das Condições 8417 Subcomentário da Saudação 8418 Grande Texto de Saudação 8419 Versos de Louvor a Buda pelos Sinais 8420 Saudação com Recitação 8421 Oferenda de Lótus 8422 Ornamento dos Vencedores 8423 Mel dos Versos 8424 Coleção de Versos sobre as Qualidades de Buda 8425 Pequena Crônica dos Livros 8427 Crônica do Ensinamento 8426 Grande Crônica 8429 Gramática de Moggallāna 8428 Gramática de Kaccāyana 8430 Tratado sobre a Gramática - Série de Palavras 8431 Tratado sobre a Gramática - Série de Raízes 8432 Realização das Formas das Palavras 8433 Comentário de Moggallāna 8434 Texto sobre a Realização da Aplicação 8435 Texto sobre a Origem dos Versos 8436 Texto do Dicionário Iluminado 8437 Subcomentário do Dicionário Iluminado 8438 Texto sobre o Ornamento da Boa Compreensão 8439 Subcomentário do Ornamento da Boa Compreensão 8440 Essência da Decisão sobre os Termos do Glossário de Bālāvatāra 8446 Ética do Poeta 8447 Coleção de Ética 8445 Ética do Dhamma 8444 Grande Ética Secreta 8441 Ética do Mundo 8442 Ética dos Suttas 8443 Ética do Herói 8450 Ética de Cāṇakya 8448 Elucidação sobre os Perigos para os Homens 8449 Elucidação sobre as Quatro Proteções 8451 O Fluxo do Sabor - Histórias Edificantes 8452 Texto sobre a Purificação dos Limites 8453 Canto de Vessantara 8454 Explicação do Comentário de Moggallāna 8455 Crônica das Estupas 8456 Crônica da Relíquia do Dente 8457 O Esplendor da Leitura dos Elementos 8458 Crônica das Relíquias 8459 Crônica do Mosteiro de Hatthavanagalla 8460 História do Vencedor 8461 Ilha da Linhagem dos Vencedores 8462 Versos da Panela de Óleo 8463 Subcomentário de Milinda 8464 Cacho de Flores de Palavras 8465 Realização das Palavras 8466 Tratado sobre os Pontos da Gramática 8467 Coleção de Raízes de Kaccāyana 8468 Descrição do Pico de Sāmantakūṭa |
| 2101 Seção da Moralidade - Dīgha 2102 Grande Seção - Dīgha 2103 Seção de Pāthika - Dīgha | 2201 Comentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2202 Comentário da Grande Seção - Dīgha 2203 Comentário da Seção de Pāthika - Dīgha | 2301 Subcomentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2302 Subcomentário da Grande Seção - Dīgha 2303 Subcomentário da Seção de Pāthika - Dīgha 2304 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 1 2305 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 2 | |
| 3101 Cinquenta Discursos Fundamentais - Majjhima 3102 Cinquenta Discursos Médios - Majjhima 3103 Cinquenta Discursos Superiores - Majjhima | 3201 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 1 3202 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 2 3203 Comentário dos Cinquenta Médios 3204 Comentário dos Cinquenta Superiores | 3301 Subcomentário dos Cinquenta Fundamentais 3302 Subcomentário dos Cinquenta Médios 3303 Subcomentário dos Cinquenta Superiores | |
| 4101 Seção com Versos - Saṃyutta 4102 Seção das Causas - Saṃyutta 4103 Seção dos Agregados - Saṃyutta 4104 Seção das Seis Bases dos Sentidos - Saṃyutta 4105 Grande Seção - Saṃyutta | 4201 Comentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4202 Comentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4203 Comentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4204 Comentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4205 Comentário da Grande Seção - Saṃyutta | 4301 Subcomentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4302 Subcomentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4303 Subcomentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4304 Subcomentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4305 Subcomentário da Grande Seção - Saṃyutta | |
| 5101 Grupos de Um - Aṅguttara 5102 Grupos de Dois - Aṅguttara 5103 Grupos de Três - Aṅguttara 5104 Grupos de Quatro - Aṅguttara 5105 Grupos de Cinco - Aṅguttara 5106 Grupos de Seis - Aṅguttara 5107 Grupos de Sete - Aṅguttara 5108 Grupos de Oito, etc. - Aṅguttara 5109 Grupos de Nove - Aṅguttara 5110 Grupos de Dez - Aṅguttara 5111 Grupos de Onze - Aṅguttara | 5201 Comentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5202 Comentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5203 Comentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5204 Comentário dos Grupos de Oito, etc. | 5301 Subcomentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5302 Subcomentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5303 Subcomentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5304 Subcomentário dos Grupos de Oito, etc. | |
| 6101 Pequena Leitura (Khuddakapāṭha) 6102 Versos do Dhamma (Dhammapada) 6103 Exclamações Inspiradas (Udāna) 6104 Assim Foi Dito (Itivuttaka) 6105 Coleção de Discursos (Suttanipāta) 6106 Histórias das Mansões Celestiais 6107 Histórias dos Fantasmas 6108 Versos dos Monges Anciãos 6109 Versos das Monjas Anciãs 6110 Histórias Passadas - Vol. 1 6111 Histórias Passadas - Vol. 2 6112 História dos Budas (Buddhavaṃsa) 6113 Cesto das Condutas (Cariyāpiṭaka) 6114 Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6115 Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6116 Grande Exposição (Mahāniddesa) 6117 Pequena Exposição (Cūḷaniddesa) 6118 Caminho da Discriminação Analítica 6119 O Guia (Nettippakaraṇa) 6120 As Perguntas de Milinda 6121 Instrução do Cesto (Peṭakopadesa) | 6201 Comentário da Pequena Leitura 6202 Comentário do Dhammapada - Vol. 1 6203 Comentário do Dhammapada - Vol. 2 6204 Comentário do Udāna 6205 Comentário do Itivuttaka 6206 Comentário do Suttanipāta - Vol. 1 6207 Comentário do Suttanipāta - Vol. 2 6208 Comentário das Histórias das Mansões 6209 Comentário das Histórias dos Fantasmas 6210 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 1 6211 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 2 6212 Comentário dos Versos das Monjas 6213 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 1 6214 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 2 6215 Comentário da História dos Budas 6216 Comentário do Cesto das Condutas 6217 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6218 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6219 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 3 6220 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 4 6221 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 5 6222 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 6 6223 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 7 6224 Comentário da Grande Exposição 6225 Comentário da Pequena Exposição 6226 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 1 6227 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 2 6228 Comentário do Guia | 6301 Subcomentário do Guia 6302 Elucidação do Guia | |
| 7101 Enumeração dos Fenômenos (Dhammasaṅgaṇī) 7102 Análise (Vibhaṅga) 7103 Discurso sobre os Elementos (Dhātukathā) 7104 Designação das Pessoas (Puggalapaññatti) 7105 Pontos da Discussão (Kathāvatthu) 7106 O Livro dos Pares - Vol. 1 7107 O Livro dos Pares - Vol. 2 7108 O Livro dos Pares - Vol. 3 7109 Condições de Originação - Vol. 1 7110 Condições de Originação - Vol. 2 7111 Condições de Originação - Vol. 3 7112 Condições de Originação - Vol. 4 7113 Condições de Originação - Vol. 5 | 7201 Comentário da Enumeração dos Fenômenos 7202 Comentário que Dissipa a Confusão 7203 Comentário dos Cinco Tratados | 7301 Subcomentário Principal da Enumeração dos Fenômenos 7302 Subcomentário Principal da Análise 7303 Subcomentário Principal dos Cinco Tratados 7304 Subcomentário Secundário da Enumeração dos Fenômenos 7305 Subcomentário Secundário dos Cinco Tratados 7306 Introdução ao Abhidhamma - Análise de Nome e Forma 7307 Compêndio do Abhidhamma 7308 Antigo Subcomentário da Introdução ao Abhidhamma 7309 Matriz do Abhidhamma | |
| русский | |||
| Палийский канон | Комментарии | Субкомментарии | Другое |
| 1101 Параджика-пали 1102 Пачиттия-пали 1103 Махавагга-пали (Виная) 1104 Чулавагга-пали 1105 Паривара-пали | 1201 Параджиканда-аттхакатха-1 1202 Параджиканда-аттхакатха-2 1203 Пачиттия-аттхакатха 1204 Махавагга-аттхакатха (Виная) 1205 Чулавагга-аттхакатха 1206 Паривара-аттхакатха | 1301 Сараттхадипани-тика-1 1302 Сараттхадипани-тика-2 1303 Сараттхадипани-тика-3 | 1401 Двематика-пали 1402 Винаясангаха-аттхакатха 1403 Ваджирабуддхи-тика 1404 Вимативинодани-тика-1 1405 Вимативинодани-тика-2 1406 Винаяланкара-тика-1 1407 Винаяланкара-тика-2 1408 Канкхавитаранипурана-тика 1409 Винаявиниччая-уттаравиниччая 1410 Винаявиниччая-тика-1 1411 Винаявиниччая-тика-2 1412 Пачиттиядийоджана-пали 1413 Кхуддасиккха-муласиккха 8401 Висуддхимагга-1 8402 Висуддхимагга-2 8403 Висуддхимагга-махатика-1 8404 Висуддхимагга-махатика-2 8405 Висуддхимагга-ниданакатха 8406 Дигханикая (пу-ви) 8407 Мадджхиманикая (пу-ви) 8408 Самъюттаникая (пу-ви) 8409 Ангуттараникая (пу-ви) 8410 Винаяпитака (пу-ви) 8411 Абхидхаммапитака (пу-ви) 8412 Аттхакатха (пу-ви) 8413 Нируттидипани 8414 Параматтхадипани Сангахамахатикапатха 8415 Анудипанипатха 8416 Паттхануддеса дипанипатха 8417 Намаккаратика 8418 Махапанамапатха 8419 Лаккханато буддхатхоманагатха 8420 Сутавандана 8421 Камаланджали 8422 Джиналанкара 8423 Паджамадху 8424 Буддхагунагатхавали 8425 Чулагантхавамса 8427 Сасанавамса 8426 Махавамса 8429 Моггалланабьякарана 8428 Каччаянабьякарана 8430 Садданитиппакарана (падамала) 8431 Садданитиппакарана (дхатумала) 8432 Падарупасиддхи 8433 Могалланапанчика 8434 Пайогасиддхипатха 8435 Вуттодаяпатха 8436 Абхидханаппадипикапатха 8437 Абхидханаппадипикатика 8438 Субодхаланкарапатха 8439 Субодхаланкаратика 8440 Балаватара гантхипадаттхавиниччаясара 8446 Кавидаппананити 8447 Нитиманджари 8445 Дхамманити 8444 Махараханити 8441 Локанити 8442 Суттантанити 8443 Сурассатинити 8450 Чанакьянити 8448 Нарадаккхадипани 8449 Чатурараккхадипани 8451 Расавахини 8452 Симависодханипатха 8453 Вессантарагити 8454 Моггаллана вуттививаранапанчика 8455 Тхупавамса 8456 Датхавамса 8457 Дхатупатхавиласиния 8458 Дхатувамса 8459 Хаттхаванагаллавихаравамса 8460 Джиначаритая 8461 Джинавамсадипа 8462 Телакатахагатха 8463 Милидатика 8464 Падаманджари 8465 Падасадхана 8466 Саддабиндупакарана 8467 Каччаянадхатуманджуса 8468 Самантакутаваннана |
| 2101 Силаккхандхавагга-пали 2102 Махавагга-пали (Дигха) 2103 Патхикавагга-пали | 2201 Силаккхандхавагга-аттхакатха 2202 Махавагга-аттхакатха (Дигха) 2203 Патхикавагга-аттхакатха | 2301 Силаккхандхавагга-тика 2302 Махавагга-тика (Дигха) 2303 Патхикавагга-тика 2304 Силаккхандхавагга-абхинаватика-1 2305 Силаккхандхавагга-абхинаватика-2 | |
| 3101 Мулапаннаса-пали 3102 Мадджхимапаннаса-пали 3103 Упарипаннаса-пали | 3201 Мулапаннаса-аттхакатха-1 3202 Мулапаннаса-аттхакатха-2 3203 Мадджхимапаннаса-аттхакатха 3204 Упарипаннаса-аттхакатха | 3301 Мулапаннаса-тика 3302 Мадджхимапаннаса-тика 3303 Упарипаннаса-тика | |
| 4101 Сагатхавагга-пали 4102 Ниданавагга-пали 4103 Кхандхавагга-пали 4104 Салаятанавагга-пали 4105 Махавагга-пали (Самъютта) | 4201 Сагатхавагга-аттхакатха 4202 Ниданавагга-аттхакатха 4203 Кхандхавагга-аттхакатха 4204 Салаятанавагга-аттхакатха 4205 Махавагга-аттхакатха (Самъютта) | 4301 Сагатхавагга-тика 4302 Ниданавагга-тика 4303 Кхандхавагга-тика 4304 Салаятанавагга-тика 4305 Махавагга-тика (Самъютта) | |
| 5101 Экаканипата-пали 5102 Дуканипата-пали 5103 Тиканипата-пали 5104 Чатукканипата-пали 5105 Панчаканипата-пали 5106 Чхакканипата-пали 5107 Саттаканипата-пали 5108 Аттхакадинипата-пали 5109 Наваканипата-пали 5110 Дасаканипата-пали 5111 Экадасаканипата-пали | 5201 Экаканипата-аттхакатха 5202 Дука-тика-чатукканипата-аттхакатха 5203 Панчака-чхакка-саттаканипата-аттхакатха 5204 Аттхакадинипата-аттхакатха | 5301 Экаканипата-тика 5302 Дука-тика-чатукканипата-тика 5303 Панчака-чхакка-саттаканипата-тика 5304 Аттхакадинипата-тика | |
| 6101 Кхуддакапатха-пали 6102 Дхаммапада-пали 6103 Удана-пали 6104 Итивуттака-пали 6105 Суттанипата-пали 6106 Виманаваттху-пали 6107 Петаваттху-пали 6108 Тхерагатха-пали 6109 Тхеригатха-пали 6110 Ападана-пали-1 6111 Ападана-пали-2 6112 Буддхавамса-пали 6113 Чарияпитака-пали 6114 Джатака-пали-1 6115 Джатака-пали-2 6116 Маханиддеса-пали 6117 Чуланиддеса-пали 6118 Патисамбхидамагга-пали 6119 Неттиппакарана-пали 6120 Милиндапаньха-пали 6121 Петакопадеса-пали | 6201 Кхуддакапатха-аттхакатха 6202 Дхаммапада-аттхакатха-1 6203 Дхаммапада-аттхакатха-2 6204 Удана-аттхакатха 6205 Итивуттака-аттхакатха 6206 Суттанипата-аттхакатха-1 6207 Суттанипата-аттхакатха-2 6208 Виманаваттху-аттхакатха 6209 Петаваттху-аттхакатха 6210 Тхерагатха-аттхакатха-1 6211 Тхерагатха-аттхакатха-2 6212 Тхеригатха-аттхакатха 6213 Ападана-аттхакатха-1 6214 Ападана-аттхакатха-2 6215 Буддхавамса-аттхакатха 6216 Чарияпитака-аттхакатха 6217 Джатака-аттхакатха-1 6218 Джатака-аттхакатха-2 6219 Джатака-аттхакатха-3 6220 Джатака-аттхакатха-4 6221 Джатака-аттхакатха-5 6222 Джатака-аттхакатха-6 6223 Джатака-аттхакатха-7 6224 Маханиддеса-аттхакатха 6225 Чуланиддеса-аттхакатха 6226 Патисамбхидамагга-аттхакатха-1 6227 Патисамбхидамагга-аттхакатха-2 6228 Неттиппакарана-аттхакатха | 6301 Неттиппакарана-тика 6302 Неттивибхавини | |
| 7101 Дхаммасангани-пали 7102 Вибханга-пали 7103 Дхатукатха-пали 7104 Пуггалапаннятти-пали 7105 Катхаваттху-пали 7106 Ямака-пали-1 7107 Ямака-пали-2 7108 Ямака-пали-3 7109 Паттхана-пали-1 7110 Паттхана-пали-2 7111 Паттхана-пали-3 7112 Паттхана-пали-4 7113 Паттхана-пали-5 | 7201 Дхаммасангани-аттхакатха 7202 Саммохивинодани-аттхакатха 7203 Панчапакарана-аттхакатха | 7301 Дхаммасангани-мулатика 7302 Вибханга-мулатика 7303 Панчапакарана-мулатика 7304 Дхаммасангани-анутика 7305 Панчапакарана-анутика 7306 Абхидхаммаватаро-намарупапариччхедо 7307 Абхидхамматтхасангахо 7308 Абхидхаммаватара-пуранатика 7309 Абхидхаммаматика-пали | |
| සිංහල | |||
| පාලි කැනනය | විවරණ | අටුවා | වෙනත් |
| 1101 පාරාජික පාළි 1102 පාචිත්තිය පාළි 1103 මහාවග්ග පාළි (විනය) 1104 චූළවග්ග පාළි 1105 පරිවාර පාළි | 1201 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-1 1202 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-2 1203 පාචිත්තිය අට්ඨකථා 1204 මහාවග්ග අට්ඨකථා (විනය) 1205 චූළවග්ග අට්ඨකථා 1206 පරිවාර අට්ඨකථා | 1301 සාරත්ථදීපනී ටීකා-1 1302 සාරත්ථදීපනී ටීකා-2 1303 සාරත්ථදීපනී ටීකා-3 | 1401 ද්වෙමාතිකාපාළි 1402 විනයසංගහ අට්ඨකථා 1403 වජිරබුද්ධි ටීකා 1404 විමතිවිනෝදනී ටීකා-1 1405 විමතිවිනෝදනී ටීකා-2 1406 විනයාලංකාර ටීකා-1 1407 විනයාලංකාර ටීකා-2 1408 කඞ්ඛාවිතරණීපුරාණ ටීකා 1409 විනයවිනිච්ඡය-උත්තරවිනිච්ඡය 1410 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-1 1411 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-2 1412 පාචිත්යාදියෝජනාපාළි 1413 ඛුද්දසික්ඛා-මූලසික්ඛා 8401 විසුද්ධිමග්ග-1 8402 විසුද්ධිමග්ග-2 8403 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-1 8404 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-2 8405 විසුද්ධිමග්ග නිදානකථා 8406 දීඝනිකාය (පු-වි) 8407 මජ්ඣිමනිකාය (පු-වි) 8408 සංයුත්තනිකාය (පු-වි) 8409 අඞ්ගුත්තරනිකාය (පු-වි) 8410 විනයපිටක (පු-වි) 8411 අභිධම්මපිටක (පු-වි) 8412 අට්ඨකථා (පු-වි) 8413 නිරුත්තිදීපනී 8414 පරමත්ථදීපනී සඞ්ගහමහාටීකාපාඨ 8415 අනුදීපනීපාඨ 8416 පට්ඨානුද්දේස දීපනීපාඨ 8417 නමක්කාරටීකා 8418 මහාපණාමපාඨ 8419 ලක්ඛණාතෝ බුද්ධථෝමනාගාථා 8420 සුතවන්දනා 8421 කමලාඤ්ජලි 8422 ජිනාලඞ්කාර 8423 පජ්ජමධු 8424 බුද්ධගුණගාථාවලී 8425 චූළගන්ථවංස 8427 සාසනවංස 8426 මහාවංස 8429 මොග්ගල්ලානබ්යාකරණං 8428 කච්චායනබ්යාකරණං 8430 සද්දනීතිප්පකරණං (පදමාලා) 8431 සද්දනීතිප්පකරණං (ධාතුමාලා) 8432 පදරූපසිද්ධි 8433 මොග්ගල්ලානපඤ්චිකා 8434 පයෝගසිද්ධිපාඨ 8435 වුත්තෝදයපාඨ 8436 අභිධානප්පදීපිකාපාඨ 8437 අභිධානප්පදීපිකාටීකා 8438 සුබෝධාලඞ්කාරපාඨ 8439 සුබෝධාලඞ්කාරටීකා 8440 බාලාවතාර ගණ්ඨිපදත්ථවිනිච්ඡයසාර 8446 කවිදප්පණනීති 8447 නීතිමඤ්ජරී 8445 ධම්මනීති 8444 මහාරහනීති 8441 ලෝකනීති 8442 සුත්තන්තනීති 8443 සූරස්සතිනීති 8450 චාණක්යනීති 8448 නරදක්ඛදීපනී 8449 චතුරාරක්ඛදීපනී 8451 රසවාහිනී 8452 සීමවිසෝධනීපාඨ 8453 වෙස්සන්තරගීති 8454 මොග්ගල්ලාන වුත්තිවිවරණපඤ්චිකා 8455 ථූපවංස 8456 දාඨාවංස 8457 ධාතුපාඨවිලාසිනියා 8458 ධාතුවංස 8459 හත්ථවනගල්ලවිහාරවංස 8460 ජිනචරිතය 8461 ජිනවංසදීපං 8462 තේලකටාහගාථා 8463 මිලිදටීකා 8464 පදමඤ්ජරී 8465 පදසාධනං 8466 සද්දබින්දුපකරණං 8467 කච්චායනධාතුමඤ්ජුසා 8468 සාමන්තකූටවණ්ණනා |
| 2101 සීලක්ඛන්ධවග්ග පාළි 2102 මහාවග්ග පාළි (දීඝ) 2103 පාථිකවග්ග පාළි | 2201 සීලක්ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 2202 මහාවග්ග අට්ඨකථා (දීඝ) 2203 පාථිකවග්ග අට්ඨකථා | 2301 සීලක්ඛන්ධවග්ග ටීකා 2302 මහාවග්ග ටීකා (දීඝ) 2303 පාථිකවග්ග ටීකා 2304 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-1 2305 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-2 | |
| 3101 මූලපණ්ණාස පාළි 3102 මජ්ඣිමපණ්ණාස පාළි 3103 උපරිපණ්ණාස පාළි | 3201 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-1 3202 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-2 3203 මජ්ඣිමපණ්ණාස අට්ඨකථා 3204 උපරිපණ්ණාස අට්ඨකථා | 3301 මූලපණ්ණාස ටීකා 3302 මජ්ඣිමපණ්ණාස ටීකා 3303 උපරිපණ්ණාස ටීකා | |
| 4101 සගාථාවග්ග පාළි 4102 නිදානවග්ග පාළි 4103 ඛන්ධවග්ග පාළි 4104 සළායතනවග්ග පාළි 4105 මහාවග්ග පාළි (සංයුත්ත) | 4201 සගාථාවග්ග අට්ඨකථා 4202 නිදානවග්ග අට්ඨකථා 4203 ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 4204 සළායතනවග්ග අට්ඨකථා 4205 මහාවග්ග අට්ඨකථා (සංයුත්ත) | 4301 සගාථාවග්ග ටීකා 4302 නිදානවග්ග ටීකා 4303 ඛන්ධවග්ග ටීකා 4304 සළායතනවග්ග ටීකා 4305 මහාවග්ග ටීකා (සංයුත්ත) | |
| 5101 එකකනිපාත පාළි 5102 දුකනිපාත පාළි 5103 තිකනිපාත පාළි 5104 චතුක්කනිපාත පාළි 5105 පඤ්චකනිපාත පාළි 5106 ඡක්කනිපාත පාළි 5107 සත්තකනිපාත පාළි 5108 අට්ඨකාදිනිපාත පාළි 5109 නවකනිපාත පාළි 5110 දසකනිපාත පාළි 5111 එකාදසකනිපාත පාළි | 5201 එකකනිපාත අට්ඨකථා 5202 දුක-තික-චතුක්කනිපාත අට්ඨකථා 5203 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත අට්ඨකථා 5204 අට්ඨකාදිනිපාත අට්ඨකථා | 5301 එකකනිපාත ටීකා 5302 දුක-තික-චතුක්කනිපාත ටීකා 5303 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත ටීකා 5304 අට්ඨකාදිනිපාත ටීකා | |
| 6101 ඛුද්දකපාඨ පාළි 6102 ධම්මපද පාළි 6103 උදාන පාළි 6104 ඉතිවුත්තක පාළි 6105 සුත්තනිපාත පාළි 6106 විමානවත්ථු පාළි 6107 පේතවත්ථු පාළි 6108 ථේරගාථා පාළි 6109 ථේරීගාථා පාළි 6110 අපදාන පාළි-1 6111 අපදාන පාළි-2 6112 බුද්ධවංස පාළි 6113 චරියාපිටක පාළි 6114 ජාතක පාළි-1 6115 ජාතක පාළි-2 6116 මහානිද්දේස පාළි 6117 චූළනිද්දේස පාළි 6118 පටිසම්භිදාමග්ග පාළි 6119 නෙත්තිප්පකරණ පාළි 6120 මිලින්දපඤ්හ පාළි 6121 පේටකෝපදේස පාළි | 6201 ඛුද්දකපාඨ අට්ඨකථා 6202 ධම්මපද අට්ඨකථා-1 6203 ධම්මපද අට්ඨකථා-2 6204 උදාන අට්ඨකථා 6205 ඉතිවුත්තක අට්ඨකථා 6206 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-1 6207 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-2 6208 විමානවත්ථු අට්ඨකථා 6209 පේතවත්ථු අට්ඨකථා 6210 ථේරගාථා අට්ඨකථා-1 6211 ථේරගාථා අට්ඨකථා-2 6212 ථේරීගාථා අට්ඨකථා 6213 අපදාන අට්ඨකථා-1 6214 අපදාන අට්ඨකථා-2 6215 බුද්ධවංස අට්ඨකථා 6216 චරියාපිටක අට්ඨකථා 6217 ජාතක අට්ඨකථා-1 6218 ජාතක අට්ඨකථා-2 6219 ජාතක අට්ඨකථා-3 6220 ජාතක අට්ඨකථා-4 6221 ජාතක අට්ඨකථා-5 6222 ජාතක අට්ඨකථා-6 6223 ජාතක අට්ඨකථා-7 6224 මහානිද්දේස අට්ඨකථා 6225 චූළනිද්දේස අට්ඨකථා 6226 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-1 6227 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-2 6228 නෙත්තිප්පකරණ අට්ඨකථා | 6301 නෙත්තිප්පකරණ ටීකා 6302 නෙත්තිවිභාවිනී | |
| 7101 ධම්මසංගණී පාළි 7102 විභඞ්ග පාළි 7103 ධාතුකථා පාළි 7104 පුග්ගලපඤ්ඤත්ති පාළි 7105 කථාවත්ථු පාළි 7106 යමක පාළි-1 7107 යමක පාළි-2 7108 යමක පාළි-3 7109 පට්ඨාන පාළි-1 7110 පට්ඨාන පාළි-2 7111 පට්ඨාන පාළි-3 7112 පට්ඨාන පාළි-4 7113 පට්ඨාන පාළි-5 | 7201 ධම්මසංගණි අට්ඨකථා 7202 සම්මෝහවිනෝදනී අට්ඨකථා 7203 පඤ්චපකරණ අට්ඨකථා | 7301 ධම්මසංගණී-මූලටීකා 7302 විභඞ්ග-මූලටීකා 7303 පඤ්චපකරණ-මූලටීකා 7304 ධම්මසංගණී-අනුටීකා 7305 පඤ්චපකරණ-අනුටීකා 7306 අභිධම්මාවතාරෝ-නාමරූපපරිච්ඡේදෝ 7307 අභිධම්මත්ථසංගහෝ 7308 අභිධම්මාවතාර-පුරාණටීකා 7309 අභිධම්මමාතිකාපාළි | |
| Español | |||
| El Canon Pali | Los Comentarios | Los Subcomentarios | Otros |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| แบบไทย | |||
| บาลีแคน | ข้อคิดเห็น | คำอธิบายย่อย | อื่น |
| 1101 ปาราชิกปาฬิ 1102 ปาจิตติยปาฬิ 1103 มหาวคฺคปาฬิ (วินัย) 1104 จูฬวคฺคปาฬิ 1105 ปริวารปาฬิ | 1201 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๑ 1202 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๒ 1203 ปาจิตฺติยอฏฺฐกถา 1204 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (วินัย) 1205 จูฬวคฺคอฏฺฐกถา 1206 ปริวารอฏฺฐกถา | 1301 สารตฺถทีปนีฏีกา-๑ 1302 สารตฺถทีปนีฏีกา-๒ 1303 สารตฺถทีปนีฏีกา-๓ | 1401 ทเวมาติกาปาฬิ 1402 วินยสํคหอฏฺฐกถา 1403 วชิรพุทฺธิฏีกา 1404 วิมติวิโนทนีฏีกา-๑ 1405 วิมติวิโนทนีฏีกา-๒ 1406 วินยาลงฺการฏีกา-๑ 1407 วินยาลงฺการฏีกา-๒ 1408 กงฺขาวิตรณีปุราณฏีกา 1409 วินยวินิจฉย-อุตฺตรวินิจฉย 1410 วินยวินิจฉยฏีกา-๑ 1411 วินยวินิจฉยฏีกา-๒ 1412 ปาจิตฺยาทิโยชนาปาฬิ 1413 ขุทฺทสิกฺขา-มูลสิกฺขา 8401 วิสุทฺธิมคฺค-๑ 8402 วิสุทฺธิมคฺค-๒ 8403 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๑ 8404 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๒ 8405 วิสุทฺธิมคฺค-นิทานกถา 8406 ทีฆนิกาย (ปุ-วิ) 8407 มชฺฌิมนิกาย (ปุ-วิ) 8408 สํยุตฺตนิกาย (ปุ-วิ) 8409 องฺคุตฺตรนิกาย (ปุ-วิ) 8410 วินยปิฎก (ปุ-วิ) 8411 อภิธมฺมปิฎก (ปุ-วิ) 8412 อฏฺฐกถา (ปุ-วิ) 8413 นิรุตฺติทีปนี 8414 ปรมตฺถทีปนี สงฺคหมหาฏีกาปาฐ 8415 อนุทีปนีปาฐ 8416 ปฎฺฐานุทฺเทสทีปนีปาฐ 8417 นมกฺการฏีกา 8418 มหาปณามปาฐ 8419 ลกฺขณาโต พุทฺธโถมนาคาถา 8420 สุตวทน 8421 กมลาญฺชลิ 8422 ชินาลงฺการ 8423 ปชฺชมธุ 8424 พุทฺธคุณคาถาวลี 8425 จูฬคนฺถวํส 8427 สาสนวํส 8426 มหาวํส 8429 โมคฺคลฺลานพฺยากรณํ 8428 กจฺจายนพฺยากรณํ 8430 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ปทมาลา) 8431 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ธาตุมาลา) 8432 ปทรูปสิทฺธิ 8433 โมคคฺลานปญฺจิกา 8434 ปโยคสิทฺธิปาฐ 8435 วุตฺโตทยปาฐ 8436 อภิธานปฺปทีปิกาปาฐ 8437 อภิธานปฺปทีปิกาฏีกา 8438 สุโพธาลงฺการปาฐ 8439 สุโพธาลงฺการฏีกา 8440 พาลาวตาร คณฺฐิปทตฺถวินิจฺฉยสาร 8446 กวิทปฺปณนีติ 8447 นีติมญฺชรี 8445 ธมฺมนีติ 8444 มหารหนีติ 8441 โลกนีติ 8442 สุตฺตนฺตนีติ 8443 สูรสฺสตินีติ 8450 จาณกฺยนีติ 8448 นรทกฺขทีปนี 8449 จตุราวรกฺขทีปนี 8451 รสวาหินี 8452 สีมวิโสธนีปาฐ 8453 เวสฺสนฺตรคีติ 8454 โมคฺคลฺลาน วุตฺติวิวรณปญฺจิกา 8455 ถูปวํส 8456 ทาฐาวํส 8457 ธาตุปาฐวิลาสินิยา 8458 ธาตุวํส 8459 หตฺถวนคัลลวิหารวํส 8460 ชนจริตย 8461 ชนวํสทีปํ 8462 เตลกฏาหคาถา 8463 มิลิทฏีกา 8464 ปทมญฺชรี 8465 ปทสาธนํ 8466 สทฺทพินฺทุปกรณํ 8467 กจฺจายนธาตุมญฺชุสา 8468 สามนฺตกูฏวณฺณนา |
| 2101 สีลกฺขนฺธวคฺคปาฬิ 2102 มหาวคฺคปาฬิ (ทีฆ) 2103 ปาถิกวคฺคปาฬิ | 2201 สีลกฺขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 2202 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (ทีฆ) 2203 ปาถิกวคฺคอฏฺฐกถา | 2301 สีลกฺขนฺธวคฺคฏีกา 2302 มหาวคฺคฏีกา (ทีฆ) 2303 ปาถิกวคฺคฏีกา 2304 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๑ 2305 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๒ | |
| 3101 มูลปณฺณาสปาฬิ 3102 มชฺฌิมปณฺณาสปาฬิ 3103 อุปริปณฺณาสปาฬิ | 3201 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๑ 3202 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๒ 3203 มชฺฌิมปณฺณาสอฏฺฐกถา 3204 อุปริปณฺณาสอฏฺฐกถา | 3301 มูลปณฺณาสฏีกา 3302 มชฺฌิมปณฺณาสฏีกา 3303 อุปริปณฺณาสฏีกา | |
| 4101 สคาถาวคฺคปาฬิ 4102 นิทานวคฺคปาฬิ 4103 ขนฺธวคฺคปาฬิ 4104 สฬายตนวคฺคปาฬิ 4105 มหาวคฺคปาฬิ (สํยุตฺต) | 4201 สคาถาวคฺคอฏฺฐกถา 4202 นิทานวคฺคอฏฺฐกถา 4203 ขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 4204 สฬายตนวคฺคอฏฺฐกถา 4205 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (สํยุตฺต) | 4301 สคาถาวคฺคฏีกา 4302 นิทานวคฺคฏีกา 4303 ขนฺธวคฺคฏีกา 4304 สฬายตนวคฺคฏีกา 4305 มหาวคฺคฏีกา (สํยุตฺต) | |
| 5101 เอกกนิปาตปาฬิ 5102 ทุกนิปาตปาฬิ 5103 ติกนิปาตปาฬิ 5104 จตุกฺกนิปาตปาฬิ 5105 ปญฺจกนิปาตปาฬิ 5106 ฉกฺกนิปาตปาฬิ 5107 สตฺตกนิปาตปาฬิ 5108 อฏฺฐกาทินิปาตปาฬิ 5109 นวกนิปาตปาฬิ 5110 ทสกนิปาตปาฬิ 5111 เอกาทสกนิปาตปาฬิ | 5201 เอกกนิปาตอฏฺฐกถา 5202 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตอฏฺฐกถา 5203 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตอฏฺฐกถา 5204 อฏฺฐกาทินิปาตอฏฺฐกถา | 5301 เอกกนิปาตฏีกา 5302 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตฏีกา 5303 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตฏีกา 5304 อฏฺฐกาทินิปาตฏีกา | |
| 6101 ขุทฺทกปาฐปาฬิ 6102 ธมฺมปทปาฬิ 6103 อุทานปาฬิ 6104 อิติวุตฺตกปาฬิ 6105 สุตฺตนิบาตปาฬิ 6106 วิมานวตฺถุปาฬิ 6107 เปตวตฺถุปาฬิ 6108 เถรคาถาปาฬิ 6109 เถรีคาถาปาฬิ 6110 อปทานปาฬิ-๑ 6111 อปทานปาฬิ-๒ 6112 พุทธวงฺสปาฬิ 6113 จริยาปิฏกปาฬิ 6114 ชาตกปาฬิ-๑ 6115 ชาตกปาฬิ-๒ 6116 มหานิทฺเทสปาฬิ 6117 จูฬนิทฺเทสปาฬิ 6118 ปฏิสมฺภิทามคฺคปาฬิ 6119 เนตฺติปฺปกฺรณปาฬิ 6120 มิลินฺทปญฺหาปาฬิ 6121 เปฏโกปเทสปาฬิ | 6201 ขุทฺทกปาฐอฏฺฐกถา 6202 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๑ 6203 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๒ 6204 อุทานอฏฺฐกถา 6205 อิติวุตฺตกอฏฺฐกถา 6206 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๑ 6207 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๒ 6208 วิมานวตฺถุอฏฺฐกถา 6209 เปตวตฺถุอฏฺฐกถา 6210 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๑ 6211 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๒ 6212 เถรีคาถาอฏฺฐกถา 6213 อปทานอฏฺฐกถา-๑ 6214 อปทานอฏฺฐกถา-๒ 6215 พุทธวงฺสอฏฺฐกถา 6216 จริยาปิฏกอฏฺฐกถา 6217 ชาตกอฏฺฐกถา-๑ 6218 ชาตกอฏฺฐกถา-๒ 6219 ชาตกอฏฺฐกถา-๓ 6220 ชาตกอฏฺฐกถา-๔ 6221 ชาตกอฏฺฐกถา-๕ 6222 ชาตกอฏฺฐกถา-๖ 6223 ชาตกอฏฺฐกถา-๗ 6224 มหานิทฺเทสอฏฺฐกถา 6225 จูฬนิทฺเทสอฏฺฐกถา 6226 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๑ 6227 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๒ 6228 เนตฺติปฺปกฺรณอฏฺฐกถา | 6301 เนตฺติปฺปกฺรณฏีกา 6302 เนตฺติวิภาวินี | |
| 7101 ธมฺมสงฺคณีปาฬิ 7102 วิภงฺคปาฬิ 7103 ธาตุกถาปาฬิ 7104 ปุคฺคลปญฺญตฺติปาฬิ 7105 กถาวตฺถุปาฬิ 7106 ยมกปาฬิ-๑ 7107 ยมกปาฬิ-๒ 7108 ยมกปาฬิ-๓ 7109 ปฎฺฐานปาฬิ-๑ 7110 ปฎฺฐานปาฬิ-๒ 7111 ปฎฺฐานปาฬิ-๓ 7112 ปฎฺฐานปาฬิ-๔ 7113 ปฎฺฐานปาฬิ-๕ | 7201 ธมฺมสงฺคณิอฏฺฐกถา 7202 สมฺโมหวินิทนีอฏฺฐกถา 7203 ปญฺจปกรณอฏฺฐกถา | 7301 ธมฺมสงฺคณีมูลฏีกา 7302 วิภงฺคมูลฏีกา 7303 ปญฺจปกรณมูลฏีกา 7304 ธมฺมสงฺคณีอนุฏีกา 7305 ปญฺจปกรณอนุฏีกา 7306 อภิธมฺมาวตาโร-นามรูปปริจฺเฉโท 7307 อภิธมฺมตฺถสงฺคโห 7308 อภิธมฺมาวตาร-ปุราณฏีกา 7309 อภิธมฺมมาติกาปาฬิ | |
| བོད་མི | |||
| པཱ་ལི་གསུང་རབ། | འགྲེལ་བཤད། | འགྲེལ་བཤད་ཕྲན། | གཞན། |
| 1101 ཕ་ར་ཇི་ཀ་པཱ་ལི། 1102 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་པཱ་ལི། 1103 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (ཝི་ན་ཡ) 1104 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 1105 པ་རི་ཝཱ་ར་པཱ་ལི། | 1201 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 1202 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 1203 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1204 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (ཝི་ན་ཡ) 1205 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1206 པ་རི་ཝཱ་ར་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 1301 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1302 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1303 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༣ | 1401 དྭེ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། 1402 ཝི་ན་ཡ་སངྒ་ཧ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1403 ཝ་ཇི་ར་བུད་དྷི་ཊཱི་ཀཱ། 1404 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1405 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1406 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1407 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1408 ཀངྑཱ་ཝི་ཏ་ར་ཎཱི་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 1409 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཨུ་ཏྟ་ར་ཝི་ནི་ཙ་ཡ། 1410 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1411 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1412 པཱ་ཙི་ཏྱཱ་དི་ཡོ་ཇ་ནཱ་པཱ་ལི། 1413 ཁུད་ད་སིཀྑཱ་མཱུ་ལ་སིཀྑཱ། 8401 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༡ 8402 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༢ 8403 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 8404 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 8405 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་ནི་དཱ་ན་ཀ་ཐཱ། 8406 དཱི་གྷ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8407 མཛྷི་མ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8408 སཾ་ཡུཏྟ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8409 ཨངྒུ་ཏྟ་ར་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8410 ཝི་ན་ཡ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8411 ཨ་བྷི་དྷམྨ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8412 ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (པུ་ཝི) 8413 ནི་རུཏྟི་དཱི་པ་ནཱི། 8414 པ་ར་མཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་སངྒ་ཧ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8415 ཨ་ནུ་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8416 པཊྛཱ་ནུདྡེ་ས་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8417 ན་མཀྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8418 མ་ཧཱ་པ་ཎཱ་མ་པཱ་ཋ། 8419 ལཀྑ་ཎཱ་ཏོ་བུདྡྷ་ཐོ་མ་ནཱ་གཱ་ཐཱ། 8420 སུ་ཏ་ཝནྡ་ནཱ། 8421 ཀ་མ་ལཱཉྫ་ལི། 8422 ཇི་ནཱ་ལངྐཱ་ར། 8423 པཛྫ་མ་དྷུ། 8424 བུདྡྷ་གུ་ཎ་གཱ་ཐཱ་ཝ་ལཱི། 8425 ཙཱུ་ལ་གནྠ་ཝཾ་ས། 8427 སཱ་ས་ན་ཝཾ་ས། 8426 མ་ཧཱ་ཝཾ་ས། 8429 མོགྒ་ལླཱ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8428 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8430 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (པ་ད་མཱ་ལཱ) 8431 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (དྷཱ་ཏུ་མཱ་ལཱ) 8432 པ་ད་རཱུ་པ་སིད་དྷི། 8433 མོ་ག་ལླཱ་ན་པཉྩ་ཀཱ། 8434 པ་ཡོ་ག་སིད་དྷི་པཱ་ཋ། 8435 བུཏྟོ་ད་ཡ་པཱ་ཋ། 8436 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8437 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་ཊཱི་ཀཱ། 8438 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་པཱ་ཋ། 8439 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8440 བཱ་ལཱ་ཝ་ཏཱ་ར་གཎྛི་པ་དཏྠ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་སཱ་ར། 8446 ཀ་ཝི་དཔྤ་ཎ་ནཱི་ཏི། 8447 ནཱི་ཏི་མཉྫ་རཱི། 8445 དྷམྨ་ནཱི་ཏི། 8444 མ་ཧཱ་ར་ཧ་ནཱི་ཏི། 8441 ལོ་ཀ་ནཱི་ཏི། 8442 སུཏྟནྟ་ནཱ་ཏི། 8443 སཱུ་རསྶ་ཏི་ནཱི་ཏི། 8450 ཙཱ་ཎཀྱ་ནཱི་ཏི། 8448 ན་ར་དཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8449 ཙ་ཏུ་རཱ་རཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8451 ར་ས་ཝཱ་ཧི་ནཱི། 8452 སཱི་མ་ཝི་སོ་ད་ནཱི་པཱ་ཋ། 8453 ཝེསྶནྟ་ར་གཱི་ཏི། 8454 མོགྒ་ལླཱ་ན་བུཏྟི་ཝི་ཝ་ར་ཎ་པཉྩ་ཀཱ། 8455 ཐཱུ་པ་ཝཾ་ས། 8456 དཱ་ཊྷཱ་ཝཾ་ས། 8457 དྷཱ་ཏུ་པཱ་ཋ་ཝི་ལཱ་སི་ནི་ཡཱ། 8458 དྷཱ་ཏུ་ཝཾ་ས། 8459 ཧཏྠ་ཝ་ན་གལླ་ཝི་ཧཱ་ར་ཝཾ་ས། 8460 ཇི་ན་ཙ་རི་ཏ་ཡ། 8461 ཇི་ན་ཝཾ་ས་དཱི་པཾ། 8462 ཏེ་ལ་ཀ་ཊཱ་ཧ་གཱ་ཐཱ། 8463 མི་ལི་ད་ཊཱི་ཀཱ། 8464 པ་ད་མཉྫ་རཱི། 8465 པ་ད་སཱ་ད་ནཾ། 8466 སདྡ་བིནྡུ་པ་ཀ་ར་ཎཾ། 8467 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་དྷཱ་ཏུ་མཉྫུ་སཱ། 8468 སཱ་མནྟ་ཀཱུ་ཊ་ཝཎྞ་ནཱ། |
| 2101 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 2102 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (དཱི་གྷ) 2103 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་པཱ་ལི། | 2201 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 2202 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (དཱི་གྷ) 2203 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 2301 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2302 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (དཱི་གྷ) 2303 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2304 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 2305 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༢ | |
| 3101 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3102 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3103 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། | 3201 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 3202 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 3203 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 3204 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 3301 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3302 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3303 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 4101 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4102 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4103 ཁནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4104 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4105 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4201 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4202 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4203 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4204 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4205 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4301 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4302 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4303 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4304 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4305 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | |
| 5101 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5102 དུ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5103 ཏི་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5104 ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5105 པཉྩ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5106 ཆཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5107 སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5108 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5109 ན་ཝ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5110 ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5111 ཨེ་ཀཱ་ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། | 5201 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5202 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5203 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5204 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 5301 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5302 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5303 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5304 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 6101 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་པཱ་ལི། 6102 དྷམྨ་པ་ད་པཱ་ལི། 6103 ཨུ་དཱ་ན་པཱ་ལི། 6104 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་པཱ་ལི། 6105 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 6106 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6107 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6108 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6109 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6110 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 6111 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 6112 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་པཱ་ལི། 6113 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་པཱ་ལི། 6114 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 6115 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 6116 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6117 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6118 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་པཱ་ལི། 6119 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་པཱ་ལི། 6120 མི་ལིནྡ་པཉྷ་པཱ་ལི། 6121 པེ་ཊ་ཀོ་པ་དེ་ས་པཱ་ལི། | 6201 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6202 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6203 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6204 ཨུ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6205 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6206 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6207 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6208 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6209 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6210 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6211 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6212 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6213 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6214 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6215 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6216 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6217 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6218 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6219 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༣ 6220 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༤ 6221 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༥ 6222 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༦ 6223 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༧ 6224 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6225 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6226 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6227 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6228 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 6301 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 6302 ནེཏྟི་ཝི་བྷཱི་ནཱི། | |
| 7101 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་པཱ་ལི། 7102 ཝི་བྷངྒ་པཱ་ལི། 7103 དྷཱ་ཏུ་ཀ་ཐཱ་པཱ་ལི། 7104 པུགྒ་ལ་པཉྙཏྟི་པཱ་ལི། 7105 ཀ་ཐཱ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 7106 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 7107 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 7108 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༣ 7109 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 7110 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 7111 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༣ 7112 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༤ 7113 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༥ | 7201 དྷམྨ་སངྒ་ཎི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7202 སམྨོ་ཧ་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7203 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 7301 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7302 ཝི་བྷངྒ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7303 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7304 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7305 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7306 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་རོ་ནཱ་མ་རཱུ་པ་པ་རི་ཙྪེ་དོ། 7307 ཨ་བྷི་དྷམྨཏྠ་སངྒ་ཧོ། 7308 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་ར་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 7309 ཨ་བྷི་དྷམྨ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། | |
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| Kinh điển Pali | Chú giải | Phụ chú giải | Khác |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Tạng Luật) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 1 1202 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 2 1203 Chú Giải Pācittiya 1204 Chú Giải Mahāvagga (Tạng Luật) 1205 Chú Giải Cūḷavagga 1206 Chú Giải Parivāra | 1301 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 1 1302 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 2 1303 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Chú Giải Vinayasaṅgaha 1403 Phụ Chú Giải Vajirabuddhi 1404 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 1 1405 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 2 1406 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 1 1407 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 2 1408 Phụ Chú Giải Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 1 1411 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Thanh Tịnh Đạo - 1 8402 Thanh Tịnh Đạo - 2 8403 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 1 8404 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 2 8405 Lời Tựa Thanh Tịnh Đạo 8406 Trường Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8407 Trung Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8408 Tương Ưng Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8409 Tăng Chi Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8410 Tạng Luật (Vấn Đáp) 8411 Tạng Vi Diệu Pháp (Vấn Đáp) 8412 Chú Giải (Vấn Đáp) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Phụ Chú Giải Namakkāra 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Phụ Chú Giải Abhidhānappadīpikā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Phụ Chú Giải Subodhālaṅkāra 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8444 Mahārahanīti 8445 Dhammanīti 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8450 Cāṇakyanīti 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Phụ Chú Giải Milinda 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Trường Bộ) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2202 Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2203 Chú Giải Pāthikavagga | 2301 Phụ Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2302 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2303 Phụ Chú Giải Pāthikavagga 2304 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 1 2305 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 1 3202 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 2 3203 Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3204 Chú Giải Uparipaṇṇāsa | 3301 Phụ Chú Giải Mūlapaṇṇāsa 3302 Phụ Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3303 Phụ Chú Giải Uparipaṇṇāsa | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Tương Ưng Bộ) | 4201 Chú Giải Sagāthāvagga 4202 Chú Giải Nidānavagga 4203 Chú Giải Khandhavagga 4204 Chú Giải Saḷāyatanavagga 4205 Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | 4301 Phụ Chú Giải Sagāthāvagga 4302 Phụ Chú Giải Nidānavagga 4303 Phụ Chú Giải Khandhavagga 4304 Phụ Chú Giải Saḷāyatanavagga 4305 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Chú Giải Ekakanipāta 5202 Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5203 Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5204 Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | 5301 Phụ Chú Giải Ekakanipāta 5302 Phụ Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5303 Phụ Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5304 Phụ Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi - 1 6111 Apadāna Pāḷi - 2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi - 1 6115 Jātaka Pāḷi - 2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Chú Giải Khuddakapāṭha 6202 Chú Giải Dhammapada - 1 6203 Chú Giải Dhammapada - 2 6204 Chú Giải Udāna 6205 Chú Giải Itivuttaka 6206 Chú Giải Suttanipāta - 1 6207 Chú Giải Suttanipāta - 2 6208 Chú Giải Vimānavatthu 6209 Chú Giải Petavatthu 6210 Chú Giải Theragāthā - 1 6211 Chú Giải Theragāthā - 2 6212 Chú Giải Therīgāthā 6213 Chú Giải Apadāna - 1 6214 Chú Giải Apadāna - 2 6215 Chú Giải Buddhavaṃsa 6216 Chú Giải Cariyāpiṭaka 6217 Chú Giải Jātaka - 1 6218 Chú Giải Jātaka - 2 6219 Chú Giải Jātaka - 3 6220 Chú Giải Jātaka - 4 6221 Chú Giải Jātaka - 5 6222 Chú Giải Jātaka - 6 6223 Chú Giải Jātaka - 7 6224 Chú Giải Mahāniddesa 6225 Chú Giải Cūḷaniddesa 6226 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 1 6227 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 2 6228 Chú Giải Nettippakaraṇa | 6301 Phụ Chú Giải Nettippakaraṇa 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi - 1 7107 Yamaka Pāḷi - 2 7108 Yamaka Pāḷi - 3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi - 1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi - 2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi - 3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi - 4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi - 5 | 7201 Chú Giải Dhammasaṅgaṇi 7202 Chú Giải Sammohavinodanī 7203 Chú Giải Pañcapakaraṇa | 7301 Phụ Chú Giải Gốc Dhammasaṅgaṇī 7302 Phụ Chú Giải Gốc Vibhaṅga 7303 Phụ Chú Giải Gốc Pañcapakaraṇa 7304 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Dhammasaṅgaṇī 7305 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Pañcapakaraṇa 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Phụ Chú Giải Cổ Điển Abhidhammāvatāra 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |