| বাংলা | |||
| পালি | অট্ঠকথা | টীকা | অন্ন |
| 1101 পারাজিক পালি 1102 পাচিত্তিয় পালি 1103 মহাবগ্গ পালি (বিনয়) 1104 চূলবগ্গ পালি 1105 পরিবার পালি | 1201 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-১ 1202 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-২ 1203 পাচিত্তিয় অট্ঠকথা 1204 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (বিনয়) 1205 চূলবগ্গ অট্ঠকথা 1206 পরিবার অট্ঠকথা | 1301 সারত্থদীপনী টীকা-১ 1302 সারত্থদীপনী টীকা-২ 1303 সারত্থদীপনী টীকা-৩ | 1401 দ্বেমাতিকাপালি 1402 বিনয়সংগহ অট্ঠকথা 1403 বজিরবুদ্ধি টীকা 1404 বিমতিবিনোদনী টীকা-১ 1405 বিমতিবিনোদনী টীকা-২ 1406 বিনয়ালংকার টীকা-১ 1407 বিনয়ালংকার টীকা-২ 1408 কঙ্খাবিতরণীপুরাণ টীকা 1409 বিনয়বিনিচ্ছয়-উত্তরবিনিচ্ছয় 1410 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-১ 1411 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-২ 1412 পাচিত্যাদিযোজনাপালি 1413 খুদ্ধসিক্খা-মূলসিক্খা 8401 বিসুদ্ধিমগ্গ-১ 8402 বিসুদ্ধিমগ্গ-২ 8403 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-১ 8404 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-২ 8405 বিসুদ্ধিমগ্গ নিদানকথা 8406 দীঘনিকায় (পু-বি) 8407 মজ্ঝিমনিকায় (পু-বি) 8408 সংযুত্তনিকায় (পু-বি) 8409 অঙ্গুত্তরনিকায় (পু-বি) 8410 বিনয়পিটক (পু-বি) 8411 অভিধম্মপিটক (পু-বি) 8412 অট্ঠকথা (পু-বি) 8413 নিরুত্তিদীপনী 8414 পরমত্থদীপনী সংগহমহাটীকাপাঠ 8415 অনুদীপনীপাঠ 8416 পট্ঠানুদ্দেস দীপনীপাঠ 8417 নমক্কারটীকা 8418 মহাপণামপাঠ 8419 লক্খণাতো বুদ্ধথোমনাগাথা 8420 সুতবন্দনা 8421 কমলাঞ্জলি 8422 জিনালংকার 8423 পজ্জমধু 8424 বুদ্ধগুণগাথাবলী 8425 চূলগন্থবংস 8426 মহাবংস 8427 সাসনবংস 8428 কচ্চায়নব্যাকরণং 8429 মোগ্গল্লানব্যাকরণং 8430 সদ্দনীতিপ্পকরণং (পদমালা) 8431 সদ্দনীতিপ্পকরণং (ধাতুমালা) 8432 পদরূপসিদ্ধি 8433 মোগ্গল্লানপঞ্চিকা 8434 পযোগসিদ্ধিপাঠ 8435 বুত্তোদয়পাঠ 8436 অভিধানপ্পদীপিকাপাঠ 8437 অভিধানপ্পদীপিকাটীকা 8438 সুবোধালংকারপাঠ 8439 সুবোধালংকারটীকা 8440 বালাবতার গণ্ঠিপদত্থবিনিচ্ছয়সার 8441 লোকনীতি 8442 সুত্তন্তনীতি 8443 সূরস্সতীনীতি 8444 মহারহনীতি 8445 ধম্মনীতি 8446 কবিদপ্পণনীতি 8447 নীতিমঞ্জরী 8448 নরদক্খদীপনী 8449 চতুরারক্খদীপনী 8450 চাণক্যনীতি 8451 রসবাহিনী 8452 সীমাবিসোধনীপাঠ 8453 বেস্সন্তরগীতি 8454 মোগ্গল্লান বুত্তিবিবরণপঞ্চিকা 8455 থূপবংস 8456 দাঠাবংস 8457 ধাতুপাঠবিলাসিনিয়া 8458 ধাতুবংস 8459 হত্থবনগল্লবিহারবংস 8460 জিনচরিতয় 8461 জিনবংসদীপং 8462 তেলকটাহগাথা 8463 মিলিদটীকা 8464 পদমঞ্জরী 8465 পদসাধনং 8466 সদ্দবিন্দুপকরণং 8467 কচ্চায়নধাতুমঞ্জুসা 8468 সামন্তকূটবণ্ণনা |
| 2101 সীলক্খন্ধবগ্গ পালি 2102 মহাবগ্গ পালি (দীঘ) 2103 পাথিকবগ্গ পালি | 2201 সীলক্খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 2202 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (দীঘ) 2203 পাথিকবগ্গ অট্ঠকথা | 2301 সীলক্খন্ধবগ্গ টীকা 2302 মহাবগ্গ টীকা (দীঘ) 2303 পাথিকবগ্গ টীকা 2304 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-১ 2305 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-২ | |
| 3101 মূলপণ্ণাস পালি 3102 মজ্ঝিমপণ্ণাস পালি 3103 উপরিপণ্ণাস পালি | 3201 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-১ 3202 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-২ 3203 মজ্ঝিমপণ্ণাস অট্ঠকথা 3204 উপরিপণ্ণাস অট্ঠকথা | 3301 মূলপণ্ণাস টীকা 3302 মজ্ঝিমপণ্ণাস টীকা 3303 উপরিপণ্ণাস টীকা | |
| 4101 সগাথাবগ্গ পালি 4102 নিদানবগ্গ পালি 4103 খন্ধবগ্গ পালি 4104 সলায়তনবগ্গ পালি 4105 মহাবগ্গ পালি (সংযুত্ত) | 4201 সগাথাবগ্গ অট্ঠকথা 4202 নিদানবগ্গ অট্ঠকথা 4203 খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 4204 সলায়তনবগ্গ অট্ঠকথা 4205 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (সংযুত্ত) | 4301 সগাথাবগ্গ টীকা 4302 নিদানবগ্গ টীকা 4303 খন্ধবগ্গ টীকা 4304 সলায়তনবগ্গ টীকা 4305 মহাবগ্গ টীকা (সংযুত্ত) | |
| 5101 এককনিপাত পালি 5102 দুকনিপাত পালি 5103 তিকনিপাত পালি 5104 চতুক্কনিপাত পালি 5105 পঞ্চকনিপাত পালি 5106 ছক্কনিপাত পালি 5107 সত্তকনিপাত পালি 5108 অট্ঠকাদিনিপাত পালি 5109 নবকনিপাত পালি 5110 দশকনিপাত পালি 5111 একাদশকনিপাত পালি | 5201 এককনিপাত অট্ঠকথা 5202 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত অট্ঠকথা 5203 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত অট্ঠকথা 5204 অট্ঠকাদিনিপাত অট্ঠকথা | 5301 এককনিপাত টীকা 5302 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত টীকা 5303 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত টীকা 5304 অট্ঠকাদিনিপাত টীকা | |
| 6101 খুদ্ধকপাঠ পালি 6102 ধম্মপদ পালি 6103 উদান পালি 6104 ইতিবুত্তক পালি 6105 সুত্তনিপাত পালি 6106 বিমানবত্থু পালি 6107 পেতবত্থু পালি 6108 থেরগাথা পালি 6109 থেরীগাথা পালি 6110 অপদান পালি-১ 6111 অপদান পালি-২ 6112 বুদ্ধবংস পালি 6113 চরিয়াপিটক পালি 6114 জাতক পালি-১ 6115 জাতক পালি-২ 6116 মহানিদ্দেস পালি 6117 চূলনিদ্দেস পালি 6118 পটিসম্ভিদামগ্গ পালি 6119 নেত্তিপ্পকরণ পালি 6120 মিলিন্দপঞ্হ পালি 6121 পেটকোপদেস পালি | 6201 খুদ্ধকপাঠ অট্ঠকথা 6202 ধম্মপদ অট্ঠকথা-১ 6203 ধম্মপদ অট্ঠকথা-২ 6204 উদান অট্ঠকথা 6205 ইতিবুত্তক অট্ঠকথা 6206 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-১ 6207 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-২ 6208 বিমানবত্থু অট্ঠকথা 6209 পেতবত্থু অট্ঠকথা 6210 থেরগাথা অট্ঠকথা-১ 6211 থেরগাথা অট্ঠকথা-২ 6212 থেরীগাথা অট্ঠকথা 6213 অপদান অট্ঠকথা-১ 6214 অপদান অট্ঠকথা-২ 6215 বুদ্ধবংস অট্ঠকথা 6216 চরিয়াপিটক অট্ঠকথা 6217 জাতক অট্ঠকথা-১ 6218 জাতক অট্ঠকথা-২ 6219 জাতক অট্ঠকথা-৩ 6220 জাতক অট্ঠকথা-৪ 6221 জাতক অট্ঠকথা-৫ 6222 জাতক অট্ঠকথা-৬ 6223 জাতক অট্ঠকথা-৭ 6224 মহানিদ্দেস অট্ঠকথা 6225 চূলনিদ্দেস অট্ঠকথা 6226 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-১ 6227 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-২ 6228 নেত্তিপ্পকরণ অট্ঠকথা | 6301 নেত্তিপ্পকরণ টীকা 6302 নেত্তিবিভাবিনী | |
| 7101 ধম্মসংগণী পালি 7102 বিভঙ্গ পালি 7103 ধাতুকথা পালি 7104 পুগ্গলপঞ্ঞাত্তি পালি 7105 কথাবত্থু পালি 7106 যমক পালি-১ 7107 যমক পালি-২ 7108 যমক পালি-৩ 7109 পট্ঠান পালি-১ 7110 পট্ঠান পালি-২ 7111 পট্ঠান পালি-৩ 7112 পট্ঠান পালি-৪ 7113 পট্ঠান পালি-৫ | 7201 ধম্মসংগণি অট্ঠকথা 7202 সম্মোহবিনোদনী অট্ঠকথা 7203 পঞ্চপকরণ অট্ঠকথা | 7301 ধম্মসংগণী-মূলটীকা 7302 বিভঙ্গ-মূলটীকা 7303 পঞ্চপকরণ-মূলটীকা 7304 ধম্মসংগণী-অনুটীকা 7305 পঞ্চপকরণ-অনুটীকা 7306 অভিধম্মাবতারো-নামরূপপরিচ্ছেদো 7307 অভিধম্মত্থসংগহো 7308 অভিধম্মাবতার-পুরাণটীকা 7309 অভিধম্মমাতিকাপালি | |
| 中文 | |||
| 巴利 | 義註 | 複註 | 藏外典籍 |
| 1101 巴拉基咖(波羅夷) 1102 巴吉帝亞(波逸提) 1103 大品(律藏) 1104 小品 1105 附隨 | 1201 巴拉基咖(波羅夷)義註-1 1202 巴拉基咖(波羅夷)義註-2 1203 巴吉帝亞(波逸提)義註 1204 大品義註(律藏) 1205 小品義註 1206 附隨義註 | 1301 心義燈-1 1302 心義燈-2 1303 心義燈-3 | 1401 疑惑度脫 1402 律攝註釋 1403 金剛智疏 1404 疑難解除疏-1 1405 疑難解除疏-2 1406 律莊嚴疏-1 1407 律莊嚴疏-2 1408 古老解惑疏 1409 律抉擇-上抉擇 1410 律抉擇疏-1 1411 律抉擇疏-2 1412 巴吉帝亞等啟請經 1413 小戒學-根本戒學 8401 清淨道論-1 8402 清淨道論-2 8403 清淨道大複註-1 8404 清淨道大複註-2 8405 清淨道論導論 8406 長部問答 8407 中部問答 8408 相應部問答 8409 增支部問答 8410 律藏問答 8411 論藏問答 8412 義注問答 8413 語言學詮釋手冊 8414 勝義顯揚 8415 隨燈論誦 8416 發趣論燈論 8417 禮敬文 8418 大禮敬文 8419 依相讚佛偈 8420 經讚 8421 蓮花供 8422 勝者莊嚴 8423 語蜜 8424 佛德偈集 8425 小史 8427 佛教史 8426 大史 8429 目犍連文法 8428 迦旃延文法 8430 文法寶鑑(詞幹篇) 8431 文法寶鑑(詞根篇) 8432 詞形成論 8433 目犍連五章 8434 應用成就讀本 8435 音韻論讀本 8436 阿毗曇燈讀本 8437 阿毗曇燈疏 8438 妙莊嚴論讀本 8439 妙莊嚴論疏 8440 初學入門義抉擇精要 8446 詩王智論 8447 智論花鬘 8445 法智論 8444 大羅漢智論 8441 世間智論 8442 經典智論 8443 勇士百智論 8450 考底利耶智論 8448 人眼燈 8449 四護衛燈 8451 妙味之流 8452 界清淨 8453 韋桑達拉頌 8454 目犍連語釋五章 8455 塔史 8456 佛牙史 8457 詞根讀本注釋 8458 舍利史 8459 象頭山寺史 8460 勝者行傳 8461 勝者宗燈 8462 油鍋偈 8463 彌蘭王問疏 8464 詞花鬘 8465 詞成就論 8466 正理滴論 8467 迦旃延詞根注 8468 邊境山注釋 |
| 2101 戒蘊品 2102 大品(長部) 2103 波梨品 | 2201 戒蘊品註義註 2202 大品義註(長部) 2203 波梨品義註 | 2301 戒蘊品疏 2302 大品複註(長部) 2303 波梨品複註 2304 戒蘊品新複註-1 2305 戒蘊品新複註-2 | |
| 3101 根本五十經 3102 中五十經 3103 後五十經 | 3201 根本五十義註-1 3202 根本五十義註-2 3203 中五十義註 3204 後五十義註 | 3301 根本五十經複註 3302 中五十經複註 3303 後五十經複註 | |
| 4101 有偈品 4102 因緣品 4103 蘊品 4104 六處品 4105 大品(相應部) | 4201 有偈品義注 4202 因緣品義注 4203 蘊品義注 4204 六處品義注 4205 大品義注(相應部) | 4301 有偈品複註 4302 因緣品註 4303 蘊品複註 4304 六處品複註 4305 大品複註(相應部) | |
| 5101 一集經 5102 二集經 5103 三集經 5104 四集經 5105 五集經 5106 六集經 5107 七集經 5108 八集等經 5109 九集經 5110 十集經 5111 十一集經 | 5201 一集義註 5202 二、三、四集義註 5203 五、六、七集義註 5204 八、九、十、十一集義註 | 5301 一集複註 5302 二、三、四集複註 5303 五、六、七集複註 5304 八集等複註 | |
| 6101 小誦 6102 法句經 6103 自說 6104 如是語 6105 經集 6106 天宮事 6107 餓鬼事 6108 長老偈 6109 長老尼偈 6110 譬喻-1 6111 譬喻-2 6112 諸佛史 6113 所行藏 6114 本生-1 6115 本生-2 6116 大義釋 6117 小義釋 6118 無礙解道 6119 導論 6120 彌蘭王問 6121 藏釋 | 6201 小誦義注 6202 法句義注-1 6203 法句義注-2 6204 自說義注 6205 如是語義註 6206 經集義注-1 6207 經集義注-2 6208 天宮事義注 6209 餓鬼事義注 6210 長老偈義注-1 6211 長老偈義注-2 6212 長老尼義注 6213 譬喻義注-1 6214 譬喻義注-2 6215 諸佛史義注 6216 所行藏義注 6217 本生義注-1 6218 本生義注-2 6219 本生義注-3 6220 本生義注-4 6221 本生義注-5 6222 本生義注-6 6223 本生義注-7 6224 大義釋義注 6225 小義釋義注 6226 無礙解道義注-1 6227 無礙解道義注-2 6228 導論義注 | 6301 導論複註 6302 導論明解 | |
| 7101 法集論 7102 分別論 7103 界論 7104 人施設論 7105 論事 7106 雙論-1 7107 雙論-2 7108 雙論-3 7109 發趣論-1 7110 發趣論-2 7111 發趣論-3 7112 發趣論-4 7113 發趣論-5 | 7201 法集論義註 7202 分別論義註(迷惑冰消) 7203 五部論義註 | 7301 法集論根本複註 7302 分別論根本複註 7303 五論根本複註 7304 法集論複註 7305 五論複註 7306 阿毘達摩入門 7307 攝阿毘達磨義論 7308 阿毘達摩入門古複註 7309 阿毘達摩論母 | |
| English | |||
| Pali Canon | Commentaries | Sub-commentaries | Other |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| Français | |||
| Canon Pali | Commentaires | Sous-commentaires | Autres |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| Deutsch | |||
| Pali-Kanon | Kommentare | Subkommentare | Sonstige |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| हिंदी | |||
| पाली कैनन | कमेंट्री | उप-टिप्पणियाँ | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळि 1102 पाचित्तिय पाळि 1103 महावग्ग पाळि (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळि 1105 परिवार पाळि | 1201 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-1 1202 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-2 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-1 1302 सारत्थदीपनी टीका-2 1303 सारत्थदीपनी टीका-3 | 1401 द्वेमातिकापाळि 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-1 1405 विमतिविनोदनी टीका-2 1406 विनयालंकार टीका-1 1407 विनयालंकार टीका-2 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-1 1411 विनयविनिच्छय टीका-2 1412 पाचित्यादियोजनापाळि 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-1 8402 विसुद्धिमग्ग-2 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-1 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-2 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अङ्गुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी सङ्गहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवन्दना 8421 कमलाञ्जलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगन्थवंस 8427 सासनवंस 8426 महावंस 8429 मोग्गल्लानब्याकरणं 8428 कच्चायनब्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपञ्चिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गण्ठिपदत्थविनिच्छयसार 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमञ्जरी 8445 धम्मनीति 8444 महारहनीति 8441 लोकनीति 8442 सुत्तन्तनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8450 चाणक्यनीति 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8451 रसवाहिनी 8452 सीमविसोधनीपाठ 8453 वेस्सन्तरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपञ्चिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमञ्जरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिन्दुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमञ्जुसा 8468 सामन्तकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खन्धवग्ग पाळि 2102 महावग्ग पाळि (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळि | 2201 सीलक्खन्धवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खन्धवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-1 2305 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-2 | |
| 3101 मूलपण्णास पाळि 3102 मज्झिमपण्णास पाळि 3103 उपरिपण्णास पाळि | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-1 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-2 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळि 4102 निदानवग्ग पाळि 4103 खन्धवग्ग पाळि 4104 सळायतनवग्ग पाळि 4105 महावग्ग पाळि (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खन्धवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खन्धवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळि 5102 दुकनिपात पाळि 5103 तिकनिपात पाळि 5104 चतुक्कनिपात पाळि 5105 पञ्चकनिपात पाळि 5106 छक्कनिपात पाळि 5107 सत्तकनिपात पाळि 5108 अट्ठकादिनिपात पाळि 5109 नवकनिपात पाळि 5110 दसकनिपात पाळि 5111 एकादसकनिपात पाळि | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळि 6102 धम्मपद पाळि 6103 उदान पाळि 6104 इतिवुत्तक पाळि 6105 सुत्तनिपात पाळि 6106 विमानवत्थु पाळि 6107 पेतवत्थु पाळि 6108 थेरगाथा पाळि 6109 थेरीगाथा पाळि 6110 अपदान पाळि-1 6111 अपदान पाळि-2 6112 बुद्धवंस पाळि 6113 चरियापिटक पाळि 6114 जातक पाळि-1 6115 जातक पाळि-2 6116 महानिद्देस पाळि 6117 चूळनिद्देस पाळि 6118 पटिसम्भिदामग्ग पाळि 6119 नेत्तिप्पकरण पाळि 6120 मिलिन्दपञ्ह पाळि 6121 पेटकोपदेस पाळि | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-1 6203 धम्मपद अट्ठकथा-2 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-1 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-2 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-1 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-2 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-1 6214 अपदान अट्ठकथा-2 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-1 6218 जातक अट्ठकथा-2 6219 जातक अट्ठकथा-3 6220 जातक अट्ठकथा-4 6221 जातक अट्ठकथा-5 6222 जातक अट्ठकथा-6 6223 जातक अट्ठकथा-7 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-1 6227 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-2 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसङ्गणी पाळि 7102 विभङ्ग पाळि 7103 धातुकथा पाळि 7104 पुग्गलपञ्ञत्ति पाळि 7105 कथावत्थु पाळि 7106 यमक पाळि-1 7107 यमक पाळि-2 7108 यमक पाळि-3 7109 पट्ठान पाळि-1 7110 पट्ठान पाळि-2 7111 पट्ठान पाळि-3 7112 पट्ठान पाळि-4 7113 पट्ठान पाळि-5 | 7201 धम्मसङ्गणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पञ्चपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसङ्गणी-मूलटीका 7302 विभङ्ग-मूलटीका 7303 पञ्चपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसङ्गणी-अनुटीका 7305 पञ्चपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसङ्गहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळि | |
| Indonesia | |||
| Kanon Pali | Komentar | Sub-komentar | Lainnya |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| 日文 | |||
| パーリ仏典 | 註釈書 | 副註釈書 | その他 |
| 1101 パーラージカ・パーリ 1102 パーチッティヤ・パーリ 1103 マハーヴァッガ・パーリ(ヴィナヤ) 1104 チューラヴァッガ・パーリ 1105 パリヴァーラ・パーリ | 1201 パーラージカカンダ・アッタカター-1 1202 パーラージカカンダ・アッタカター-2 1203 パーチッティヤ・アッタカター 1204 マハーヴァッガ・アッタカター(ヴィナヤ) 1205 チューラヴァッガ・アッタカター 1206 パリヴァーラ・アッタカター | 1301 サーラッタディーパニー・ティーカー-1 1302 サーラッタディーパニー・ティーカー-2 1303 サーラッタディーパニー・ティーカー-3 | 1401 ドヴェマーティカー・パーリ 1402 ヴィナヤサンガハ・アッタカター 1403 ヴァジラブッディ・ティーカー 1404 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-1 1405 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-2 1406 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-1 1407 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-2 1408 カンカーウィタラニープラーナ・ティーカー 1409 ヴィナヤヴィニッチャヤ-ウッタラヴィニッチャヤ 1410 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-1 1411 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-2 1412 パーチッティヤーディヨージャナー・パーリ 1413 クッダシッカー-ムーラシッカー 8401 ヴィスッディマッガ-1 8402 ヴィスッディマッガ-2 8403 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-1 8404 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-2 8405 ヴィスッディマッガ・ニダーナカター 8406 ディーガニカーヤ(プ・ヴィ) 8407 マッジマニカーヤ(プ・ヴィ) 8408 サンユッタニカーヤ(プ・ヴィ) 8409 アングッタラニカーヤ(プ・ヴィ) 8410 ヴィナヤピタカ(プ・ヴィ) 8411 アビダンマピタカ(プ・ヴィ) 8412 アッタカター(プ・ヴィ) 8413 ニルッティディーパニー 8414 パラマッタディーパニー・サンガハマハーティカーパータ 8415 アヌディーパニーパータ 8416 パッターヌッデーサ・ディーパニーパータ 8417 ナマッカラ・ティーカー 8418 マハーパナーマ・パータ 8419 ラッカナート・ブッダトーマナーガーター 8420 スタヴァンダナー 8421 カマラーニャジャリ 8422 ジナランカーラ 8423 パッジャマドゥ 8424 ブッダグナガーター・ヴァリー 8425 チューラガンタヴァンサ 8427 サーサナヴァンサ 8426 マハーヴァンサ 8429 モッガラーナ・ビャーカラナン 8428 カッチャーヤナ・ビャーカラナン 8430 サッダニーティッパカラナン(パダマーラー) 8431 サッダニーティッパカラナン(ダートゥマーラー) 8432 パダルーパシッディ 8433 モッガラーナ・パンチカー 8434 パヨーガシッディ・パータ 8435 ヴットーダヤ・パータ 8436 アビダーナッパディーピカー・パータ 8437 アビダーナッパディーピカー・ティーカー 8438 スボーダーランカーラ・パータ 8439 スボーダーランカーラ・ティーカー 8440 バーラーヴァターラ・ガンティパダッタヴィニッチャヤサーラ 8446 カヴィダッパナニーティ 8447 ニーティマンジャリー 8445 ダンマニーティ 8444 マハーラハニーティ 8441 ローカニーティ 8442 スタンタニーティ 8443 スーラッサティニーティ 8450 チャーナキャニーティ 8448 ナラダッカディーパニー 8449 チャトゥラーラッカディーパニー 8451 ラサヴァーヒニー 8452 シーマヴィソーダニー・パータ 8453 ヴェッサンタラ・ギーティ 8454 モッガラーナ・ヴッティヴィヴァラナパンチカー 8455 トゥーパヴァンサ 8456 ダーターヴァンサ 8457 ダートゥパータヴィラーヴィシニヤー 8458 ダートゥヴァンサ 8459 ハッタヴァナッガラヴィハーラヴァンサ 8460 ジナチャリタヤ 8461 ジナヴァンサディーパン 8462 テーラカターガーター 8463 ミリダ・ティーカー 8464 パダマンジャリー 8465 パダサーダナン 8466 サッダビンドゥパカラナン 8467 カッチャーヤナ・ダートゥマンジューサー 8468 サーマンタクータ・ヴァンナナー |
| 2101 シーラッカンダワッガ・パーリ 2102 マハーワッガ・パーリ(ディーガ) 2103 パーティカワッガ・パーリ | 2201 シーラッカンダワッガ・アッタカター 2202 マハーワッガ・アッタカター(ディーガ) 2203 パーティカワッガ・アッタカター | 2301 シーラッカンダワッガ・ティーカー 2302 マハーワッガ・ティーカー(ディーガ) 2303 パーティカワッガ・ティーカー 2304 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-1 2305 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-2 | |
| 3101 ムーラパンナーサ・パーリ 3102 マッジマパンナーサ・パーリ 3103 ウパリパンナーサ・パーリ | 3201 ムーラパンナーサ・アッタカター-1 3202 ムーラパンナーサ・アッタカター-2 3203 マッジマパンナーサ・アッタカター 3204 ウパリパンナーサ・アッタカター | 3301 ムーラパンナーサ・ティーカー 3302 マッジマパンナーサ・ティーカー 3303 ウパリパンナーサ・ティーカー | |
| 4101 サガーター・ワッガ・パーリ 4102 ニダーナ・ワッガ・パーリ 4103 カンダ・ワッガ・パーリ 4104 サラーヤタナ・ワッガ・パーリ 4105 マハーワッガ・パーリ(サンユッタ) | 4201 サガーター・ワッガ・アッタカター 4202 ニダーナ・ワッガ・アッタカター 4203 カンダ・ワッガ・アッタカター 4204 サラーヤタナ・ワッガ・アッタカター 4205 マハーワッガ・アッタカター(サンユッタ) | 4301 サガーター・ワッガ・ティーカー 4302 ニダーナ・ワッガ・ティーカー 4303 カンダ・ワッガ・ティーカー 4304 サラーヤタナ・ワッガ・ティーカー 4305 マハーワッガ・ティーカー(サンユッタ) | |
| 5101 エーカカニパータ・パーリ 5102 ドゥカニパータ・パーリ 5103 ティカニパータ・パーリ 5104 チャトゥッカニパータ・パーリ 5105 パンチャカニパータ・パーリ 5106 チャッカニパータ・パーリ 5107 サッタカニパータ・パーリ 5108 アッタカーディニパータ・パーリ 5109 ナヴァカニパータ・パーリ 5110 ダサカニパータ・パーリ 5111 エーカーダサカニパータ・パーリ | 5201 エーカカニパータ・アッタカター 5202 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・アッタカター 5203 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・アッタカター 5204 アッタカーディニパータ・アッタカター | 5301 エーカカニパータ・ティーカー 5302 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・ティーカー 5303 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・ティーカー 5304 アッタカーディニパータ・ティーカー | |
| 6101 クッダカパータ・パーリ 6102 ダンマパダ・パーリ 6103 ウダーナ・パーリ 6104 イティヴッタカ・パーリ 6105 スッタニパータ・パーリ 6106 ヴィマーナヴァットゥ・パーリ 6107 ペーヴァットゥ・パーリ 6108 テーラガーター・パーリ 6109 テーリーガーター・パーリ 6110 アパダーナ・パーリ-1 6111 アパダーナ・パーリ-2 6112 ブッダヴァンサ・パーリ 6113 チャリヤーピタカ・パーリ 6114 ジャータカ・パーリ-1 6115 ジャータカ・パーリ-2 6116 マハーニッデーサ・パーリ 6117 チューラニッデーサ・パーリ 6118 パティサンビダーマッガ・パーリ 6119 ネッティッパカラナ・パーリ 6120 ミリンダパンハ・パーリ 6121 ペータコーパデーサ・パーリ | 6201 クッダカパータ・アッタカター 6202 ダンマパダ・アッタカター-1 6203 ダンマパダ・アッタカター-2 6204 ウダーナ・アッタカター 6205 イティヴッタカ・アッタカター 6206 スッタニパータ・アッタカター-1 6207 スッタニパータ・アッタカター-2 6208 ヴィマーナヴァットゥ・アッタカター 6209 ペータヴァットゥ・アッタカター 6210 テーラガーター・アッタカター-1 6211 テーラガーター・アッタカター-2 6212 テーリーガーター・アッタカター 6213 アパダーナ・アッタカター-1 6214 アパダーナ・アッタカター-2 6215 ブッダヴァンサ・アッタカター 6216 チャリヤーピタカ・アッタカター 6217 ジャータカ・アッタカター-1 6218 ジャータカ・アッタカター-2 6219 ジャータカ・アッタカター-3 6220 ジャータカ・アッタカター-4 6221 ジャータカ・アッタカター-5 6222 ジャータカ・アッタカター-6 6223 ジャータカ・アッタカター-7 6224 マハーニッデーサ・アッタカター 6225 チューラニッデーサ・アッタカター 6226 パティサンビダーマッガ・アッタカター-1 6227 パティサンビダーマッガ・アッタカター-2 6228 ネッティッパカラナ・アッタカター | 6301 ネッティッパカラナ・ティーカー 6302 ネッティヴィバーヴィニー | |
| 7101 ダンマサンガニー・パーリ 7102 ヴィバンガ・パーリ 7103 ダートゥカター・パーリ 7104 プッガラパンニャッティ・パーリ 7105 カター・ヴァットゥ・パーリ 7106 ヤマカ・パーリ-1 7107 ヤマカ・パーリ-2 7108 ヤマカ・パーリ-3 7109 パッターナ・パーリ-1 7110 パッターナ・パーリ-2 7111 パッターナ・パーリ-3 7112 パッターナ・パーリ-4 7113 パッターナ・パーリ-5 | 7201 ダンマサンガニ・アッタカター 7202 サンモーハヴィノーダニー・アッタカター 7203 パンチャパカラナ・アッタカター | 7301 ダンマサンガニー・ムーラティーカー 7302 ヴィバンガ・ムーラティーカー 7303 パンチャパカラナ・ムーラティーカー 7304 ダンマサンガニー・アヌティーカー 7305 パンチャパカラナ・アヌティーカー 7306 アビダンマーヴァターロ・ナーマルーパパリッチェード 7307 アビダンマッタ・サンガホ 7308 アビダンマーヴァターラ・プラーナティーカー 7309 アビダンマ・マーティカーパーリ | |
| ខ្មែរ | |||
| ព្រះត្រៃបិដកបាលី | អដ្ឋកថា | ដីកា | ផ្សេងទៀត |
| 1101 បារាជិកបាឡិ 1102 បាចិត្តិយបាឡិ 1103 មហាវគ្គបាឡិ (វិន័យ) 1104 ចូឡវគ្គបាឡិ 1105 បរិវារបាឡិ | 1201 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-១ 1202 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-២ 1203 បាចិត្តិយអដ្ឋកថា 1204 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (វិន័យ) 1205 ចូឡវគ្គអដ្ឋកថា 1206 បរិវារអដ្ឋកថា | 1301 សារត្ថទីបនីដីកា-១ 1302 សារត្ថទីបនីដីកា-២ 1303 សារត្ថទីបនីដីកា-៣ | 1401 ទ្វេមាតិកាបាឡិ 1402 វិនយសង្គហអដ្ឋកថា 1403 វជិរពុទ្ធិដីកា 1404 វិមតិវិនោទនីដីកា-១ 1405 វិមតិវិនោទនីដីកា-២ 1406 វិនយាលង្ការដីកា-១ 1407 វិនយាលង្ការដីកា-២ 1408 កង្ខាវិតរណីបុរាណដីកា 1409 វិនយវិនិច្ឆយ-ឧត្តរវិនិច្ឆយ 1410 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-១ 1411 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-២ 1412 បាចិត្យាទិយោជនាបាឡិ 1413 ខុទ្ទសិក្ខា-មូលសិក្ខា 8401 វិសុទ្ធិមគ្គ-១ 8402 វិសុទ្ធិមគ្គ-២ 8403 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-១ 8404 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-២ 8405 វិសុទ្ធិមគ្គ និទានកថា 8406 ទីឃនិកាយ (បុ-វិ) 8407 មជ្ឈិមនិកាយ (បុ-វិ) 8408 សំយុត្តនិកាយ (បុ-វិ) 8409 អង្គុត្តរនិកាយ (បុ-វិ) 8410 វិនយបិដក (បុ-វិ) 8411 អភិធម្មបិដក (បុ-វិ) 8412 អដ្ឋកថា (បុ-វិ) 8413 និរុត្តិទីបនី 8414 បរមត្ថទីបនី សង្គហមហាដីកាបាឋ 8415 អនុទីបនីបាឋ 8416 បដ្ឋានុទ្ទេស ទីបនីបាឋ 8417 នមក្ការដីកា 8418 មហាបណាមបាឋ 8419 លក្ខណាតោ ពុទ្ធថោមនាគាថា 8420 សុតវន្ទនា 8421 កមលាញ្ជលិ 8422 ជិនាលង្ការ 8423 បជ្ជមធុ 8424 ពុទ្ធគុណគាថាវលី 8425 ចូឡគន្ថវង្ស 8427 សាសនវង្ស 8426 មហាវង្ស 8429 មោគ្គល្លានព្យាករណំ 8428 កច្ចាយនព្យាករណំ 8430 សទ្ទនីតិប្បករណំ (បទមាលា) 8431 សទ្ទនីតិប្បករណំ (ធាតុមាលា) 8432 បទរូបសិទ្ធិ 8433 មោគ្គល្លានបញ្ចិកា 8434 បយោគសិទ្ធិបាឋ 8435 វុត្តោទយបាឋ 8436 អភិធានប្បទីបិកាបាឋ 8437 អភិធានប្បទីបិកាដីកា 8438 សុពោធាលង្ការបាឋ 8439 សុពោធាលង្ការដីកា 8440 បាលាវតារ គណ្ឋិបទត្ថវិនិច្ឆយសារ 8446 កវិទប្បណនីតិ 8447 នីតិមញ្ជរី 8445 ធម្មនីតិ 8444 មហារហនីតិ 8441 លោកនីតិ 8442 សុត្តន្តនីតិ 8443 សូរស្សតិនីតិ 8450 ចាណក្យនីតិ 8448 នរទក្ខទីបនី 8449 ចតុរារក្ខទីបនី 8451 រសវាហិនី 8452 សីមវិសោធនីបាឋ 8453 វេស្សន្តរគីតិ 8454 មោគ្គល្លាន វុត្តិវិវរណបញ្ចិកា 8455 ថូបវង្ស 8456 ទាឋាវង្ស 8457 ធាតុបាឋវិលាសិនិយា 8458 ធាតុវង្ស 8459 ហត្ថវនគល្លវិហារវង្ស 8460 ជិនចរិតយ 8461 ជិនវង្សទីបំ 8462 តេលកដាហគាថា 8463 មិលិទដីកា 8464 បទមញ្ជរី 8465 បទសាធនំ 8466 សទ្ទពិន្ទុបករណំ 8467 កច្ចាយនធាតុមញ្ជុសា 8468 សាមន្តកូដវណ្ណនា |
| 2101 សីលក្ខន្ធវគ្គបាឡិ 2102 មហាវគ្គបាឡិ (ទីឃ) 2103 បាថិកវគ្គបាឡិ | 2201 សីលក្ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 2202 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (ទីឃ) 2203 បាថិកវគ្គអដ្ឋកថា | 2301 សីលក្ខន្ធវគ្គដីកា 2302 មហាវគ្គដីកា (ទីឃ) 2303 បាថិកវគ្គដីកា 2304 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-១ 2305 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-២ | |
| 3101 មូលបណ្ណាសបាឡិ 3102 មជ្ឈិមបណ្ណាសបាឡិ 3103 ឧបរិបណ្ណាសបាឡិ | 3201 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-១ 3202 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-២ 3203 មជ្ឈិមបណ្ណាសអដ្ឋកថា 3204 ឧបរិបណ្ណាសអដ្ឋកថា | 3301 មូលបណ្ណាសដីកា 3302 មជ្ឈិមបណ្ណាសដីកា 3303 ឧបរិបណ្ណាសដីកា | |
| 4101 សគាថាវគ្គបាឡិ 4102 និទានវគ្គបាឡិ 4103 ខន្ធវគ្គបាឡិ 4104 សឡាយតនវគ្គបាឡិ 4105 មហាវគ្គបាឡិ (សំយុត្ត) | 4201 សគាថាវគ្គអដ្ឋកថា 4202 និទានវគ្គអដ្ឋកថា 4203 ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 4204 សឡាយតនវគ្គអដ្ឋកថា 4205 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (សំយុត្ត) | 4301 សគាថាវគ្គដីកា 4302 និទានវគ្គដីកា 4303 ខន្ធវគ្គដីកា 4304 សឡាយតនវគ្គដីកា 4305 មហាវគ្គដីកា (សំយុត្ត) | |
| 5101 ឯកកនិបាតបាឡិ 5102 ទុកនិបាតបាឡិ 5103 តិកនិបាតបាឡិ 5104 ចតុក្កនិបាតបាឡិ 5105 បញ្ចកនិបាតបាឡិ 5106 ឆក្កនិបាតបាឡិ 5107 សត្តកនិបាតបាឡិ 5108 អដ្ឋកាទិនិបាតបាឡិ 5109 នវកនិបាតបាឡិ 5110 ទសកនិបាតបាឡិ 5111 ឯកាទសកនិបាតបាឡិ | 5201 ឯកកនិបាតអដ្ឋកថា 5202 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតអដ្ឋកថា 5203 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតអដ្ឋកថា 5204 អដ្ឋកាទិនិបាតអដ្ឋកថា | 5301 ឯកកនិបាតដីកា 5302 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតដីកា 5303 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតដីកា 5304 អដ្ឋកាទិនិបាតដីកា | |
| 6101 ខុទ្ទកបាឋបាឡិ 6102 ធម្មបទបាឡិ 6103 ឧទានបាឡិ 6104 ឥតិវុត្តកបាឡិ 6105 សុត្តនិបាតបាឡិ 6106 វិមានវត្ថុបាឡិ 6107 បេតវត្ថុបាឡិ 6108 ថេរគាថាបាឡិ 6109 ថេរីគាថាបាឡិ 6110 អបទានបាឡិ-១ 6111 អបទានបាឡិ-២ 6112 ពុទ្ធវង្សបាឡិ 6113 ចរិយាបិដកបាឡិ 6114 ជាតកបាឡិ-១ 6115 ជាតកបាឡិ-២ 6116 មហានិទ្ទេសបាឡិ 6117 ចូឡនិទ្ទេសបាឡិ 6118 បដិសម្ភិទាមគ្គបាឡិ 6119 នេត្តិប្បករណបាឡិ 6120 មិលិន្ទបញ្ហាបាឡិ 6121 បេដកោបទេសបាឡិ | 6201 ខុទ្ទកបាឋអដ្ឋកថា 6202 ធម្មបទអដ្ឋកថា-១ 6203 ធម្មបទអដ្ឋកថា-២ 6204 ឧទានអដ្ឋកថា 6205 ឥតិវុត្តកអដ្ឋកថា 6206 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-១ 6207 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-២ 6208 វិមានវត្ថុអដ្ឋកថា 6209 បេតវត្ថុអដ្ឋកថា 6210 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-១ 6211 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-២ 6212 ថេរីគាថាអដ្ឋកថា 6213 អបទានអដ្ឋកថា-១ 6214 អបទានអដ្ឋកថា-២ 6215 ពុទ្ធវង្សអដ្ឋកថា 6216 ចរិយាបិដកអដ្ឋកថា 6217 ជាតកអដ្ឋកថា-១ 6218 ជាតកអដ្ឋកថា-២ 6219 ជាតកអដ្ឋកថា-៣ 6220 ជាតកអដ្ឋកថា-៤ 6221 ជាតកអដ្ឋកថា-៥ 6222 ជាតកអដ្ឋកថា-៦ 6223 ជាតកអដ្ឋកថា-៧ 6224 មហានិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6225 ចូឡនិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6226 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-១ 6227 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-២ 6228 នេត្តិប្បករណអដ្ឋកថា | 6301 នេត្តិប្បករណដីកា 6302 នេត្តិវិភាវិនី | |
| 7101 ធម្មសង្គណីបាឡិ 7102 វិភង្គបាឡិ 7103 ធាតុកថាបាឡិ 7104 បុគ្គលបញ្ញត្តិបាឡិ 7105 កថាវត្ថុបាឡិ 7106 យមកបាឡិ-១ 7107 យមកបាឡិ-២ 7108 យមកបាឡិ-៣ 7109 បដ្ឋានបាឡិ-១ 7110 បដ្ឋានបាឡិ-២ 7111 បដ្ឋានបាឡិ-៣ 7112 បដ្ឋានបាឡិ-៤ 7113 បដ្ឋានបាឡិ-៥ | 7201 ធម្មសង្គណិអដ្ឋកថា 7202 សម្មោហវិនោទនីអដ្ឋកថា 7203 បញ្ចបករណអដ្ឋកថា | 7301 ធម្មសង្គណី-មូលដីកា 7302 វិភង្គ-មូលដីកា 7303 បញ្ចបករណ-មូលដីកា 7304 ធម្មសង្គណី-អនុដីកា 7305 បញ្ចបករណ-អនុដីកា 7306 អភិធម្មាវតារោ-នាមរូបបរិច្ឆេទោ 7307 អភិធម្មត្ថសង្គហោ 7308 អភិធម្មាវតារ-បុរាណដីកា 7309 អភិធម្មមាតិកាបាឡិ | |
| 한국인 | |||
| 팔리 대장경 | 주석서 | 부주석서 | 기타 |
| 1101 빠라지카 빨리 1102 빠찟띠야 빨리 1103 마하왁가 빨리 (비나야) 1104 출라왁가 빨리 1105 빠리와라 빨리 | 1201 빠라지까깐다 앗타카타-1 1202 빠라지까깐다 앗타카타-2 1203 빠찟띠야 앗타카타 1204 마하왁가 앗타카타 (비나야) 1205 출라왁가 앗타카타 1206 빠리와라 앗타카타 | 1301 사랏타디빠니 띠까-1 1302 사랏타디빠니 띠까-2 1303 사랏타디빠니 띠까-3 | 1401 드베마띠까빨리 1402 위나야상가하 앗타카타 1403 와지라붓디 띠까 1404 위마띠위노다니 띠까-1 1405 위마띠위노다니 띠까-2 1406 위나야랑까라 띠까-1 1407 위나야랑까라 띠까-2 1408 깡카위따라니뿌라나 띠까 1409 위나야위닛차야-웃따라위닛차야 1410 위나야위닛차야 띠까-1 1411 위나야위닛차야 띠까-2 1412 빠찟땨디요자나빨리 1413 쿳닷시카-물라시카 8401 위숟디막가-1 8402 위숟디막가-2 8403 위숟디막가-마하띠까-1 8404 위숟디막가-마하띠까-2 8405 위숟디막가 니다나까타 8406 디가니까야 (뿌-위) 8407 맛지마니까야 (뿌-위) 8408 삼윳따니까야 (뿌-위) 8409 앙굳따라니까야 (뿌-위) 8410 위나야삐따까 (뿌-위) 8411 아비담마삐따까 (뿌-위) 8412 앗타카타 (뿌-위) 8413 니룻띠디빠니 8414 빠라맛타디빠니 상가하마하띠까빠타 8415 아누디빠니빠타 8416 빳타누ㄸ데사 디빠니빠타 8417 나막까라띠까 8418 마하빠나마빠타 8419 락카나또 붓다토마나가타 8420 수타완다나 8421 까말란자리 8422 지나랑까라 8423 빳자마두 8424 붓다구나가타왈리 8425 출라간타왕사 8427 사사나왕사 8426 마하왕사 8429 목갈라나뱌까라낭 8428 깟차야나뱌까라낭 8430 삿다니띠빠까라낭 (빠다말라) 8431 삿다니띠빠까라낭 (다두말라) 8432 빠다루빠싣디 8433 목갈라나빤찌까 8434 빠요가싣디빠타 8435 붇또다야빠타 8436 아비다나빠디피까빠타 8437 아비다나빠디피까띠까 8438 수보다랑까라빠타 8439 수보다랑까라띠까 8440 발라와따라 간티빠닷타위닛차야사라 8446 까위닷빠나니띠 8447 니띠만자리 8445 담마니띠 8444 마하라하니띠 8441 로까니띠 8442 숫딴따니띠 8443 수랏사띠니띠 8450 짜낙야니띠 8448 나라닥카디빠니 8449 짜뚜라락카디빠니 8451 라사와히니 8452 시마위소다니빠타 8453 웨산따라기띠 8454 목갈라나 붇띠위와라나빤찌까 8455 투빠왕사 8456 다타왕사 8457 다두빠타윌라시니야 8458 다두왕사 8459 핟타와나갈라위하라왕사 8460 지나짜리따야 8461 지나왕사디빵 8462 떼라까타하가타 8463 밀리다띠까 8464 빠다만자리 8465 빠다사다낭 8466 삿다빈두빠까라낭 8467 깟차야나다두만주사 8468 사만따꿋타완나나 |
| 2101 실락칸다왁가 빨리 2102 마하왁가 빨리 (디가) 2103 빠티까왁가 빨리 | 2201 실락칸다왁가 앗타카타 2202 마하왁가 앗타카타 (디가) 2203 빠티까왁가 앗타카타 | 2301 실락칸다왁가 띠까 2302 마하왁가 띠까 (디가) 2303 빠티까왁가 띠까 2304 실락칸다왁가-아비나와띠까-1 2305 실락칸다왁가-아비나와띠까-2 | |
| 3101 물라빤나사 빨리 3102 맛지마빤나사 빨리 3103 우빠리빤나사 빨리 | 3201 물라빤나사 앗타카타-1 3202 물라빤나사 앗타카타-2 3203 맛지마빤나사 앗타카타 3204 우빠리빤나사 앗타카타 | 3301 물라빤나사 띠까 3302 맛지마빤나사 띠까 3303 우빠리빤나사 띠까 | |
| 4101 사가타왁가 빨리 4102 니다나왁가 빨리 4103 칸다왁가 빨리 4104 살라야따나왁가 빨리 4105 마하왁가 빨리 (삼윳따) | 4201 사가타왁가 앗타카타 4202 니다나왁가 앗타카타 4203 칸다왁가 앗타카타 4204 살라야따나왁가 앗타카타 4205 마하왁가 앗타카타 (삼윳따) | 4301 사가타왁가 띠까 4302 니다나왁가 띠까 4303 칸다왁가 띠까 4304 살라야따나왁가 띠까 4305 마하왁가 띠까 (삼윳따) | |
| 5101 에까까니빠따 빨리 5102 두까니빠따 빨리 5103 띠까니빠따 빨리 5104 짜뚝까니빠따 빨리 5105 빤짜까니빠따 빨리 5106 착까니빠따 빨리 5107 삿따까니빠따 빨리 5108 앗타까디니빠따 빨리 5109 나와까니빠따 빨리 5110 다사까니빠따 빨리 5111 에까다사까니빠따 빨리 | 5201 에까까니빠따 앗타카타 5202 두까-띠까-짜뚝까니빠따 앗타카타 5203 빤짜까-착까-삿따까니빠따 앗타카타 5204 앗타까디니빠따 앗타카타 | 5301 에까까니빠따 띠까 5302 두까-띠까-짜뚝까니빠따 띠까 5303 빤짜까-착까-삿따까니빠따 띠까 5304 앗타까디니빠따 띠까 | |
| 6101 쿳닥까빠타 빨리 6102 담마빠다 빨리 6103 우다나 빨리 6104 이띠웃따까 빨리 6105 숫따니빠따 빨리 6106 위마나왓투 빨리 6107 베따왓투 빨리 6108 테라가타 빨리 6109 테리가타 빨리 6110 아빠다나 빨리-1 6111 아빠다나 빨리-2 6112 붓다왕사 빨리 6113 짜리야삐따까 빨리 6114 자따까 빨리-1 6115 자따까 빨리-2 6116 마하닷데사 빨리 6117 출라닷데사 빨리 6118 빠티삼비다막가 빨리 6119 넷띠빠까라나 빨리 6120 밀린다빤하 빨리 6121 뻬따꼬빠데사 빨리 | 6201 쿳닥까빠타 앗타카타 6202 담마빠다 앗타카타-1 6203 담마빠다 앗타카타-2 6204 우다나 앗타카타 6205 이띠웃따까 앗타카타 6206 숫따니빠따 앗타카타-1 6207 숫따니빠따 앗타카타-2 6208 위마나왓투 앗타카타 6209 베따왓투 앗타카타 6210 테라가타 앗타카타-1 6211 테라가타 앗타카타-2 6212 테리가타 앗타카타 6213 아빠다나 앗타카타-1 6214 아빠다나 앗타카타-2 6215 붓다왕사 앗타카타 6216 짜리야삐따까 앗타카타 6217 자따까 앗타카타-1 6218 자따까 앗타카타-2 6219 자따까 앗타카타-3 6220 자따까 앗타카타-4 6221 자따까 앗타카타-5 6222 자따까 앗타카타-6 6223 자따까 앗타카타-7 6224 마하닷데사 앗타카타 6225 출라닷데사 앗타카타 6226 빠티삼비다막가 앗타카타-1 6227 빠티삼비다막가 앗타카타-2 6228 넷띠빠까라나 앗타카타 | 6301 넷띠빠까라나 띠까 6302 넷띠위바비니 | |
| 7101 담마상가니 빨리 7102 위방가 빨리 7103 다뚜까타 빨리 7104 뿍갈라빤냣띠 빨리 7105 까타왓투 빨리 7106 야마까 빨리-1 7107 야마까 빨리-2 7108 야마까 빨리-3 7109 빳타나 빨리-1 7110 빳타나 빨리-2 7111 빳타나 빨리-3 7112 빳타나 빨리-4 7113 빳타나 빨리-5 | 7201 담마상가니 앗타카타 7202 삼모하위노다니 앗타카타 7203 빤짜빠까라나 앗타카타 | 7301 담마상가니-물라띠까 7302 위방가-물라띠까 7303 빤짜빠까라나-물라띠까 7304 담마상가니-아누띠까 7305 빤짜빠까라나-아누띠까 7306 아비담마와따로-나마루빠빠릳체도 7307 아비담맛타상가호 7308 아비담마와따라-뿌라나띠까 7309 아비담마마띠까빨리 | |
| ອັກສອນລາວ | |||
| ປາລີ | ອັດຖະກະຖາ | ຏີກາ | ອັນຍາ |
| 1101 ປາຣາຊິກະ ປາລີ 1102 ປາຈິດຕິຍະ ປາລີ 1103 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ວິໄນ) 1104 ຈູລະວັກຄະ ປາລີ 1105 ປະລິວາລະ ປາລີ | 1201 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-1 1202 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-2 1203 ປາຈິດຕິຍະ ອັດຖະກະຖາ 1204 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ວິໄນ) 1205 ຈູລະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 1206 ປະລິວາລະ ອັດຖະກະຖາ | 1301 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-1 1302 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-2 1303 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-3 | 1401 ທເວມາຕິກາປາລີ 1402 ວິນະຍະສັງຄະຫະ ອັດຖະກະຖາ 1403 ວະຊິລະພຸດທິ ຏີກາ 1404 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-1 1405 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-2 1406 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-1 1407 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-2 1408 ກັງຂາວິຕະຣະນີປຸຣານະ ຏີກາ 1409 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ-ອຸຕຕະຣະວິນິດສະຍະ 1410 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-1 1411 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-2 1412 ປາຈິຕະຍາທິໂຍຊະນາປາລີ 1413 ຂຸທະທະສິກຂາ-ມູລະສິກຂາ 8401 ວິສຸດທິມັກຄະ-1 8402 ວິສຸດທິມັກຄະ-2 8403 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-1 8404 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-2 8405 ວິສຸດທິມັກຄະ ນິທານະກະຖາ 8406 ທີຆະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8407 ມັດຊິມະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8408 ສັງຍຸຕຕະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8409 ອັງຄຸຕຕະລະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8410 ວິນະຍະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8411 ອະພິທັມມະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8412 ອັດຖະກະຖາ (ປຸ-ວິ) 8413 ນິລຸຕຕິທີປະນີ 8414 ປະຣະມັດຖະທີປະນີ ສັງຄະຫະມະຫາຏີກາປາຖະ 8415 ອະນຸທີປະນີປາຖະ 8416 ປັດຖານຸທເທສະ ທີປະນີປາຖະ 8417 ນະມັກກາລະຏີກາ 8418 ມະຫາປະຖາມະປາຖະ 8419 ລັກຂະນາໂຕ ພຸດທະຖະມະນາຄາຖາ 8420 ສຸຕະວັນທະນາ 8421 ກະມະລາຍຈະລິ 8422 ຊິນາລັງກາລະ 8423 ປັດຊະມະທຸ 8424 ພຸດທະຄຸນະຄາຖາວະລີ 8425 ຈູລະຄັນຖະວັງສະ 8426 ມະຫາວັງສະ 8427 ສາສະນະວັງສະ 8428 ກັດຈາຍະນະພະຍາກະລະນັງ 8429 ມົກຄັນທານະພະຍາກະລະນັງ 8430 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ປະທະມາລາ) 8431 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ຘາຕຸມາລາ) 8432 ປະທະຣູປະສິດທິ 8433 ໂມຄັນທານະປັນຈິກາ 8434 ປະໂຍຄະສິດທິປາຖະ 8435 ວຸຕະໂທຍະປາຖະ 8436 ອະພິທານະປະປະທີປິກາປາຖະ 8437 ອະພິທານະປະປະທີປິກາຏີກາ 8438 ສຸໂພທາລັງກາລະປາຖະ 8439 ສຸໂພທາລັງກາລະຏີກາ 8440 ພາລາວະຕາລະ ຄັນຖິປະທັດຖະວິນິດສະຍະສາລະ 8441 ໂລກະນີຕິ 8442 ສຸດຕັນຕະນີຕິ 8443 ສູລັດສະຕິນີຕິ 8444 ມະຫາລະຫະນີຕິ 8445 ທັມມະນີຕິ 8446 ກະວິທັບປະຖານີຕິ 8447 ນີຕິມັນຊະລີ 8448 ນະລະທັກຂະທີປະນີ 8449 ຈະຕຸຣາລັກຂະທີປະນີ 8450 ຈານັກຍະນີຕິ 8451 ລະສະວາຫິນີ 8452 ສີມາວິໂສທະນີປາຖະ 8453 ເວສສັນຕະລະຄີຕິ 8454 ໂມຄັນທານະ ວຸຕຕິວິວະລະນະປັນຈິກາ 8455 ຖູປະວັງສະ 8456 ທາຐາວັງສະ 8457 ຘາຕຸປາຖະວິລາສິນີຍາ 8458 ຘາຕຸວັງສະ 8459 ຫັດຖະວະນະຄັນລະວິຫາລະວັງສະ 8460 ຊິນະຈະລິຕະຍະ 8461 ຊິນະວັງສະທີປັງ 8462 ເຕລະກະຕາຫາຄາຖາ 8463 ມິລິທະຏີກາ 8464 ປະທະມັນຊະລີ 8465 ປະທະສາຘະນັງ 8466 ສັດທະພິນທຸປະກະລະນັງ 8467 ກັດຈາຍະນະຘາຕຸມັນຊຸສາ 8468 ສາມັນຕະກູຏະວັນນະນາ |
| 2101 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 2102 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ທີຆະ) 2103 ປາຖິກະວັກຄະ ປາລີ | 2201 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 2202 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ທີຆະ) 2203 ປາຖິກະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ | 2301 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 2302 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ທີຆະ) 2303 ປາຖິກະວັກຄະ ຏີກາ 2304 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-1 2305 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-2 | |
| 3101 ມູລະປັນຍາສະ ປາລີ 3102 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ປາລີ 3103 ອຸປະລິປັນຍາສະ ປາລີ | 3201 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-1 3202 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-2 3203 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ 3204 ອຸປະລິປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ | 3301 ມູລະປັນຍາສະ ຏີກາ 3302 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ຏີກາ 3303 ອຸປະລິປັນຍາສະ ຏີກາ | |
| 4101 ສະຄາຖາວັກຄະ ປາລີ 4102 ນິທານະວັກຄະ ປາລີ 4103 ຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 4104 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ປາລີ 4105 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4201 ສະຄາຖາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4202 ນິທານະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4203 ຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4204 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4205 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4301 ສະຄາຖາວັກຄະ ຏີກາ 4302 ນິທານະວັກຄະ ຏີກາ 4303 ຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 4304 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ຏີກາ 4305 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ສັງຍຸຕຕະ) | |
| 5101 ເອກະກະນິປາຕະ ປາລີ 5102 ທຸກະນິປາຕະ ປາລີ 5103 ຕິກະນິປາຕະ ປາລີ 5104 ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ປາລີ 5105 ປັຈຈະກະນິປາຕະ ປາລີ 5106 ຉັກກະນິປາຕະ ປາລີ 5107 ສັດຕະກະນິປາຕະ ປາລີ 5108 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ປາລີ 5109 ນະວະກະນິປາຕະ ປາລີ 5110 ທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ 5111 ເອກາທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ | 5201 ເອກະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5202 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5203 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5204 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ | 5301 ເອກະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5302 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ຏີກາ 5303 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5304 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ຏີກາ | |
| 6101 ຂຸທະທະກະປາຖະ ປາລີ 6102 ທຳມະປະທະ ປາລີ 6103 ອຸທານະ ປາລີ 6104 ອິຕິວຸຕຕະກະ ປາລີ 6105 ສຸດຕະນິປາຕະ ປາລີ 6106 ວິມານະວັດຖຸ ປາລີ 6107 ເປຕະວັດຖຸ ປາລີ 6108 ເຖລະຄາຖາ ປາລີ 6109 ເຖລີຄາຖາ ປາລີ 6110 ອະປະທານະ ປາລີ-1 6111 ອະປະທານະ ປາລີ-2 6112 ພຸດທະວັງສະ ປາລີ 6113 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ປາລີ 6114 ຊາຕະກະ ປາລີ-1 6115 ຊາຕະກະ ປາລີ-2 6116 ມະຫານິທເທສະ ປາລີ 6117 ຈູລະນິທເທສະ ປາລີ 6118 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ປາລີ 6119 ເນຕຕິປະກະລະນະ ປາລີ 6120 ມິລິນທະປັນຫາ ປາລີ 6121 ເປຏະກົປເທສະ ປາລີ | 6201 ຂຸທະທະກະປາຖະ ອັດຖະກະຖາ 6202 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-1 6203 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-2 6204 ອຸທານະ ອັດຖະກະຖາ 6205 ອິຕິວຸຕຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6206 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-1 6207 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-2 6208 ວິມານະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6209 ເປຕະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6210 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-1 6211 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-2 6212 ເຖລີຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ 6213 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-1 6214 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-2 6215 ພຸດທະວັງສະ ອັດຖະກະຖາ 6216 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6217 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-1 6218 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-2 6219 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-3 6220 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-4 6221 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-5 6222 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-6 6223 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-7 6224 ມະຫານິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6225 ຈູລະນິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6226 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-1 6227 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-2 6228 ເນຕຕິປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 6301 ເນຕຕິປະກະລະນະ ຏີກາ 6302 ເນຕຕິວິພາວິນີ | |
| 7101 ທຳມະສັງຄະນີ ປາລີ 7102 ວິພັງຄະ ປາລີ 7103 ຘາຕຸກະຖາ ປາລີ 7104 ປຸກຄະລະປັນຍັດຕິ ປາລີ 7105 ກະຖາວັດຖຸ ປາລີ 7106 ຍະມະກະ ປາລີ-1 7107 ຍະມະກະ ປາລີ-2 7108 ຍະມະກະ ປາລີ-3 7109 ປັດຖານະ ປາລີ-1 7110 ປັດຖານະ ປາລີ-2 7111 ປັດຖານະ ປາລີ-3 7112 ປັດຖານະ ປາລີ-4 7113 ປັດຖານະ ປາລີ-5 | 7201 ທຳມະສັງຄະນິ ອັດຖະກະຖາ 7202 ສັມໂມຫະວິໂນທະນີ ອັດຖະກະຖາ 7203 ປັຈຈະປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 7301 ທຳມະສັງຄະນີ-ມູລະຏີກາ 7302 ວິພັງຄະ-ມູລະຏີກາ 7303 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ມູລະຏີກາ 7304 ທຳມະສັງຄະນີ-ອະນຸຏີກາ 7305 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ອະນຸຏີກາ 7306 ອະພິທັມມາວະຕາໂຣ-ນາມະຣູປະປະຣິຈເທໂທ 7307 ອະພິທັມມັດຖະສັງຄະໂຫ 7308 ອະພິທັມມາວະຕາລະ-ປຸຣານະຏີກາ 7309 ອະພິທັມມາມາຕິກາປາລີ | |
| मराठी | |||
| पाळी | अट्ठकथा | टीका | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळी 1102 पाचित्तिय पाळी 1103 महावग्ग पाळी (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळी 1105 परिवार पाळी | 1201 पाराजिककंड अट्ठकथा-१ 1202 पाराजिककंड अट्ठकथा-२ 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-१ 1302 सारत्थदीपनी टीका-२ 1303 सारत्थदीपनी टीका-३ | 1401 द्वेमातिकापाळी 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-१ 1405 विमतिविनोदनी टीका-२ 1406 विनयालंकार टीका-१ 1407 विनयालंकार टीका-२ 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-१ 1411 विनयविनिच्छय टीका-२ 1412 पाचित्यादियोजनापाळी 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-१ 8402 विसुद्धिमग्ग-२ 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-१ 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-२ 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अंगुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी संगहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवंदना 8421 कमलांजलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगंथवंस 8426 महावंस 8427 सासनवंस 8428 कच्चायनव्याकरणं 8429 मोग्गल्लानव्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपंचिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गंठिपदत्थविनिच्छयसार 8441 लोकनीति 8442 सुत्तंतनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8444 महारहनीति 8445 धम्मनीति 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमंजरी 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8450 चाणक्यनीति 8451 रसवाहिनी 8452 सीमाविसोधनीपाठ 8453 वेस्संतरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपंचिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमंजरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिंदुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमंजुसा 8468 सामंतकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खंधवग्ग पाळी 2102 महावग्ग पाळी (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळी | 2201 सीलक्खंधवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खंधवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-१ 2305 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-२ | |
| 3101 मूलपण्णास पाळी 3102 मज्झिमपण्णास पाळी 3103 उपरिपण्णास पाळी | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-१ 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-२ 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळी 4102 निदानवग्ग पाळी 4103 खंधवग्ग पाळी 4104 सळायतनवग्ग पाळी 4105 महावग्ग पाळी (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खंधवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खंधवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळी 5102 दुकनिपात पाळी 5103 तिकनिपात पाळी 5104 चतुक्कनिपात पाळी 5105 पंचकनिपात पाळी 5106 छक्कनिपात पाळी 5107 सत्तकनिपात पाळी 5108 अट्ठकादिनिपात पाळी 5109 नवकनिपात पाळी 5110 दसकनिपात पाळी 5111 एकादसकनिपात पाळी | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळी 6102 धम्मपद पाळी 6103 उदान पाळी 6104 इतिवुत्तक पाळी 6105 सुत्तनिपात पाळी 6106 विमानवत्थु पाळी 6107 पेतवत्थु पाळी 6108 थेरगाथा पाळी 6109 थेरीगाथा पाळी 6110 अपदान पाळी-१ 6111 अपदान पाळी-२ 6112 बुद्धवंस पाळी 6113 चरियापिटक पाळी 6114 जातक पाळी-१ 6115 जातक पाळी-२ 6116 महानिद्देस पाळी 6117 चूळनिद्देस पाळी 6118 पटिसंभिदामग्ग पाळी 6119 नेत्तिप्पकरण पाळी 6120 मिलिंदपंह पाळी 6121 पेटकोपदेस पाळी | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-१ 6203 धम्मपद अट्ठकथा-२ 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-१ 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-२ 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-१ 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-२ 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-१ 6214 अपदान अट्ठकथा-२ 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-१ 6218 जातक अट्ठकथा-२ 6219 जातक अट्ठकथा-३ 6220 जातक अट्ठकथा-४ 6221 जातक अट्ठकथा-५ 6222 जातक अट्ठकथा-६ 6223 जातक अट्ठकथा-७ 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-१ 6227 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-२ 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसंगणी पाळी 7102 विभंग पाळी 7103 धातुकथा पाळी 7104 पुग्गलपंयत्ति पाळी 7105 कथावत्थु पाळी 7106 यमक पाळी-१ 7107 यमक पाळी-२ 7108 यमक पाळी-३ 7109 पट्ठान पाळी-१ 7110 पट्ठान पाळी-२ 7111 पट्ठान पाळी-३ 7112 पट्ठान पाळी-४ 7113 पट्ठान पाळी-५ | 7201 धम्मसंगणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पंचपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसंगणी-मूलटीका 7302 विभंग-मूलटीका 7303 पंचपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसंगणी-अनुटीका 7305 पंचपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसंगहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळी | |
နမော တဿ ဘဂဝတော အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ त्या भगवंत, अर्हत, सम्यक्संबुद्धाला माझा नमस्कार असो. သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ सद्दनीति-प्रकरण ဓာတုမာလာ धातुमाला ၁၅. သရဝဂ္ဂပဉ္စကန္တိက သုဒ္ဓဿရဓာတု १५. सरवग्गपंचकन्तिक शुद्धस्वरधातु ဣတော [Pg.1] ပရံ တု သရတော, ကကာရန္တာဒိဘေဒတော; ဓာတုယော ဓာတုနိပ္ဖန္န-ရူပါနိ ဝိဝိဓာနိ စ. यापुढे स्वरांच्या क्रमाने आणि 'क' कारादी (क-कार अंत असलेल्या) भेदांनुसार, विविध धातू आणि धातूंपासून निष्पन्न होणारी विविध रूपे (सांगितली जातील). သာဋ္ဌကထေ ပိဋကမှိ, ဇိနပါဌေ ယထာဗလံ; နယံ ဥပပရိက္ခိတွာ, သမာသေန ကထေဿ’ဟံ. अट्ठकथांसह त्रिपिटकात आणि जिनपाठात (बुद्धांच्या वचनांत) असलेल्या पद्धतीचे यथाशक्ती परीक्षण करून, मी संक्षेपाने (ते) सांगणार आहे. ဣ ဂတိယံ. ယေသံ ဓာတူနံ ဂတိအတ္ထော, ဗုဒ္ဓိပိ တေသံ အတ္ထော. ပဝတ္တိပါပုဏာနိပိ. တတြ ဂမနံ ဒုဝိဓံ ကာယဂမနံ ဉာဏဂမနဉ္စ. တေသု ကာယဂမနံ နာမ ဣရိယာပထဂမနံ, ဉာဏဂမနံ နာမ ဉာဏုပ္ပတ္တိ, တသ္မာ ပယောဂါနုရူပေန ‘‘ဂစ္ဆတီ’’တိ ပဒဿ ‘‘ဇာနာတီ’’တိပိ အတ္ထော ဘဝတိ, ‘‘ပဝတ္တတီ’’တိပိ အတ္ထော ဘဝတိ, ‘‘ပါပုဏာတီ’’တိပိ အတ္ထော ဘဝတိ, ဣရိယာပထဂမနေန ဂစ္ဆတီတိပိ အတ္ထော ဘဝတိ, ဉာဏဂမနေန ဂစ္ဆတီတိပိ အတ္ထော ဘဝတိ. တထာ ဟိ ‘‘သီဃံ ဂစ္ဆတီ’’တိအာဒီသု ဣရိယာပထဂမနံ ‘‘ဂမန’’န္တိ ဝုစ္စတိ. သုန္ဒရံ နိဗ္ဗာနံ ဂတော. ‘‘ဂတိမာ’’တိအာဒီသု [Pg.2] ပန ဉာဏဂမနံ. ဧဝံ သဗ္ဗေသမ္ပိ ဂတျတ္ထာနံ ဓာတူနံ ယထာပယောဂံ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. 'इ' (धातू) गमन (गती) अर्थात आहे. ज्या धातूंचा अर्थ गती (गमन) आहे, त्यांचा अर्थ बुद्धी (ज्ञान) देखील आहे, तसेच प्रवृत्ती (अस्तित्व/चालू राहणे) आणि प्राप्ती (मिळवणे) देखील आहे. त्यामध्ये गमन दोन प्रकारचे आहे: कायिक गमन (शारीरिक गमन) आणि ज्ञानगमन. त्यापैकी कायिक गमन म्हणजे इरियापथगमन (शारीरिक हालचालींचे गमन) आणि ज्ञानगमन म्हणजे ज्ञानाची उत्पत्ती. म्हणूनच, प्रयोगाच्या (वापराच्या) अनुरूप 'गच्छति' (जातो) या पदाचा अर्थ 'जानाति' (जाणतो) असाही होतो, 'पवत्तति' (प्रवृत्त होतो/चालतो) असाही होतो, आणि 'पापुणाति' (प्राप्त करतो) असाही होतो. इरियापथगमनाने 'गच्छति' (जातो) असाही अर्थ होतो आणि ज्ञानगमनाने 'गच्छति' (जाणतो/जातो) असाही अर्थ होतो. तसेच 'सीघं गच्छति' (वेगाने जातो) इत्यादींमध्ये इरियापथगमनाला 'गमन' म्हटले जाते. 'सुन्दरं निब्बानं गतो' (सुंदर निर्वाणाला गेला). परंतु 'गतिमंत' (गतीमान) इत्यादींमध्ये ज्ञानगमन अभिप्रेत आहे. अशा प्रकारे, गत्यर्थक (गती अर्थ असलेल्या) सर्वच धातूंचा अर्थ त्यांच्या प्रयोगाच्या गरजेनुसार ग्रहण केला पाहिजे. တဿိမာနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ – ဣတိ, ဧတိ, ဥဒေတိ. ကာရိတေ ‘‘ဥဒါယတီ’’တိ ရူပံ ဘဝတိ. ဥဋ္ဌာပေတီတိ ဟိ အတ္ထော, ဒုကာရော အာဂမော. ဥပေတိ, သမုပေတိ, ဝေတိ, အပေတိ, အဝေတိ, အနွေတိ, သမေတိ, အဘိသမေတိ, သမယော, အဘိသမယော, ဤဒိ, ဥဒိ, ဧကောဒိ, ပဏ္ဍိတော, ဣတော, ဥဒိတော, ဥပေတော, သမုပေတော, အနွိတော, အပေတော, သမေတော, ဧတဗ္ဗော, ပစ္စေတဗ္ဗော, ပဋိယမာနော, ပဋိစ္စော, ဧန္တော, အဓိပ္ပေတော, အဓိပ္ပာယော, ပစ္စယော, အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ‘‘ဣတာ, ဣတ’’န္တိအာဒိနာ ယထာရဟံ ဣတ္ထိနပုံသကဝသေနပိ. ပစ္စေတုံ, ဥပေတုံ, သမုပေတုံ, အနွေတုံ, သမေတုံ, အဘိသမေတုံ, ဣစ္စ, ပဋိစ္စ, သမေစ္စ, အဘိသမေစ္စ, အပေစ္စ, ဥပေစ္စ, ပဋိမုခံ ဣတွာ, ဣတွာန, ဥပေတွာ, ဥပေတွာန, ဥပေတုန, အညာနိပိ ဗုဒ္ဓဝစနာနုရူပတော ယောဇေတဗ္ဗာနိ. त्याचे ही रूपे होतात – इति, एति, उदेति. कारित (प्रयोजक) मध्ये 'उदायात' (उदायति) असे रूप होते. 'उट्ठापेति' (उठवतो/जागृत करतो) हाच याचा अर्थ आहे, आणि 'दु' कार हा आगम आहे. उपेति, समुपेति, वेति, अपेति, अवेति, अन्वेति, समेति, अभिसमेति, समयो, अभिसमयो, ईदि, उदि, एकोदि, पण्डितो, इतो, उदितो, उपेतो, समुपेतो, अन्वितो, अपेतो, समेतो, एतब्बो, पच्चेतब्बो, पटियमनो, पटिच्चो, एन्तो, अधिप्रेतो, अधिप्यायो, पच्चयो, आणि इतरही योजावेत. 'इता, इतं' इत्यादींद्वारे योग्यतेनुसार स्त्रीलिंग आणि नपुंसकलिंगाच्या रूपाने देखील. पच्चेतुं, उपेतुं, समुपेतुं, अन्वेतुं, समेतुं, अभिसमेतुं, इच्च, पटिच्च, समेच्च, अभिसमेच्च, अपेच्च, उपेच्च, पटिमुखं इत्वा, इत्वान, उपेत्वा, उपेत्वान, उपेतुन, आणि इतरही बुद्धवचनांच्या अनुरूप योजावेत. ဣတိဣတိ ကြိယာသဒ္ဒေါ, သုတ္တန္တေသု န ဒိဿတိ; ဣဒမေတ္ထ န ဝတ္တဗ္ဗံ, ဒဿနာယေဝ မေ ရုတော. "'इति' हा क्रियावाचक शब्द सूत्रांमध्ये (सुत्तन्तांमध्ये) दिसत नाही" – असे येथे म्हणू नये, कारण माझ्या पाहण्यात (किंवा ऐकण्यात) तो आलेला आहे. ‘‘ဣတာယံ ကောဓရူပေန’’, ဣတိ ပါဠိ ဟိ ဒိဿတိ; အင်္ဂုတ္တရနိကာယမှိ, မုနိနာဟစ္စ ဘာသိတာ; कारण "इतायं कोधरूपेन" अशी पाळी (पाठांतर) अंगुत्तरनिकायमध्ये दिसते, जी मुनींनी (बुद्धांनी) स्वतः भाषिली आहे. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ အင်္ဂုတ္တရနိကာယေ ကောဓံ နိန္ဒန္တေန – कारण भगवंतांनी अंगुत्तरनिकायमध्ये क्रोधाची निंदा करताना असे म्हटले आहे – ‘‘ဣတာယံ ကောဓရူပေန, မစ္စုဝေသော ဂုဟာသယော; တံ ဒမေန သမုစ္ဆိန္ဒေ, ပညာဝီရိယေန ဒိဋ္ဌိယာ’’တိ. "हा क्रोधरूपी मृत्यूचा वेष धारण करून गुहेत (हृदयात) राहणारा आहे; त्याला दमाने (आत्मसंयमाने), प्रज्ञेने, वीर्याने (प्रयत्नाने) आणि सम्यक् दृष्टीने समूळ नष्ट करावे." တတြ ဣတာယန္တိ ဣတိ အယန္တိ ဆေဒေါ. ဣတိဣတိ စ ဂစ္ဆတိ ပဝတ္တတီတိ အတ္ထော. အယံ ပနေတ္ထ သုတ္တပဒတ္ထော – ယော [Pg.3] ဒေါသော လောကေ ‘‘ကောဓော’’တိ လောကိယမဟာဇနေန ဝုစ္စတိ, နာယံ အတ္ထတော ကောဓောတိ ဝတ္တဗ္ဗော. ကိန္တိ ပန ဝတ္တဗ္ဗော, ဧသော ဟိ သရီရသင်္ခါတဂုဟာသယော မစ္စုရာဇာ ဧဝ ကောဓဝသေန ပမဒ္ဒန္တော သတ္တသန္တာနေ ဂစ္ဆတီတိ ဝတ္တဗ္ဗော. တံ ဧဝရူပံ ‘‘မစ္စုရာဇာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ ဗဟုနော ဇနဿ အနတ္ထကရံ ကောဓံ ဟိတကာမော ဒမေန ပညာယ ဝီရိယေန ဒိဋ္ဌိယာ စ ဆိန္ဒေယျာတိ. तेथे 'इतायं' म्हणजे 'इति अयं' असा विग्रह (छेद) आहे. आणि 'इति' म्हणजे 'गच्छति' (जातो) किंवा 'पवत्तति' (प्रवृत्त होतो) असा अर्थ आहे. येथे या सुत्तपदाचा अर्थ असा आहे – ज्या दोषाला जगात लौकिक महाजनांद्वारे 'क्रोध' म्हटले जाते, तो अर्थाच्या दृष्टीने केवळ क्रोधच म्हटला जाऊ नये. तर मग काय म्हटले पाहिजे? तो शरीराच्या रूपात असलेल्या गुहेत राहणारा मृत्यूराजच आहे, जो क्रोधाच्या रूपाने प्राण्यांच्या संतानाला (प्रवाहाला) चिरडत पुढे जातो, असे म्हटले पाहिजे. अशा प्रकारच्या, 'मृत्यूराज' म्हणता येण्याजोग्या आणि बहुसंख्य लोकांचे अनहित करणाऱ्या क्रोधाला, स्वतःचे हित इच्छिणाऱ्याने दमाने (संयमाने), प्रज्ञेने, वीर्याने आणि दृष्टीने (सम्यक् दृष्टीने) नष्ट करावे. ဧတီတိ ဣမဿ ပန အာဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. ‘‘ဧတီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ အာဥပသဂ္ဂေါ သန္ဓိကိစ္စေန ပဋိစ္ဆန္နတ္တာ န ပါကဋော ဝလာဟကာဝတ္ထရိတော ပုဏ္ဏစန္ဒော ဝိယ. တထာ ဟိ ဧတ္ထ အာ ဣတိ ဧတီတိ သန္ဓိဝိဂ္ဂဟော ဘဝတိ, အာကာရဿ စ ဣကာရေန ပရေန သဒ္ဓိံယေဝ ဧကာရာဒေသော. တသ္မာ ‘‘အယံ သော သာရထီ ဧတိ. ဧတု ဝေဿန္တရော ရာဇာ’’တိအာဒီသု ‘‘အာဂစ္ဆတိ, အာဂစ္ဆတူ’’တိအာဒိနာ အတ္ထော ကထေတဗ္ဗော. ဗျာကရဏသတ္ထေပိ ဟိ အာ ဣတိ ဧတီတိ သန္ဓိဝိဂ္ဂဟော ဒိဿတိ, တသ္မာ အယမ္ပိ နီတိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. အထ ဝါ ဣတီတိ ရဿဝသေန ဝုတ္တံ ပဒံ ဂမနံ ဗောဓေတိ, ဧတီတိ ဝုဒ္ဓိဝသေန ဝုတ္တံ ပန ယထာပယောဂံ အာဂမနာဒီနိ. မတ္တာဝသေနပိ ဟိ ပဒါနိ သဝိသေသတ္ထာနိ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? သာသနေ ပဗ္ဗဇိတော, ရဋ္ဌာ ပဗ္ဗာဇိတောတိ. သညောဂါသညောဂဝသေနပိ, တံ ယထာ? ဂါမာ နိဂ္ဂစ္ဆတိ. ယသံ ပေါသော နိဂစ္ဆတိ, တသ္မာ အယမ္ပိ နီတိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – 'एति' याचा अर्थ 'आगच्छति' (येतो) असा आहे. 'एति' यामध्ये 'आ' हा उपसर्ग संधीच्या नियमामुळे झाकलेला असल्याने स्पष्ट दिसत नाही, जसा ढगांनी झाकलेला पूर्ण चंद्र दिसत नाही. कारण येथे 'आ + इति = एति' असा संधी-विग्रह होतो, आणि 'आ' काराचा पुढील 'इ' कारासोबत मिळून 'ए' कार असा एकादेश होतो. म्हणूनच, "अयं सो सारथी एति" (हा तो सारथी येत आहे), "एतु वेस्संतरो राजा" (राजा वेस्सांतर येवो) इत्यादींमध्ये 'आगच्छति' (येतो), 'आगच्छतु' (येवो) इत्यादी प्रकारे अर्थ सांगावा. व्याकरणशास्त्रामध्ये देखील 'आ + इति = एति' असा संधी-विग्रह दिसतो, म्हणून हा नियम देखील चांगल्या प्रकारे मनात ठेवला पाहिजे. किंवा, 'इति' हे र्हस्व स्वराने म्हटलेले पद 'गमन' (जाणे) दर्शवते, तर 'एति' हे वृद्धी (दीर्घ) स्वराने म्हटलेले पद प्रयोगाच्या गरजेनुसार 'आगमन' (येणे) इत्यादी दर्शवते. कारण मात्रांच्या फरकामुळे देखील पदांना विशेष अर्थ प्राप्त होतो. ते कसे? जसे – शासनात 'पब्बजितो' (प्रव्रजित झालेला), आणि राष्ट्रातून 'पब्बाजितो' (हद्दपार केलेला). तसेच संयोग आणि असंयोगाच्या फरकामुळे देखील; ते कसे? जसे – 'गामा निग्गच्छति' (गावातून बाहेर पडतो) आणि 'यसं पोसो निगच्छति' (मनुष्य कीर्तीला प्राप्त होतो). म्हणून हा नियम देखील चांगल्या प्रकारे मनात ठेवला पाहिजे. याविषयी असे म्हटले आहे – ဣ ဂတိယန္တိ ကထိတာ, ဓာတု ဝုဒ္ဓိံ ဂတာ ယဒါ; တဒါ အာဂမနတ္ထဿ, ဝါစိကာ ပါယတော ဝသာ. 'इ' हा धातू गमन (गती) अर्थात सांगितले आहे, जेव्हा तो वृद्धीला प्राप्त होतो (म्हणजे 'ए' होतो), तेव्हा तो बहुधा 'आगमन' (येणे) या अर्थाचा वाचक बनतो. ဣရိယာပထတ္ထတော ဟေ-သာ နိစ္စာဂမဝါစိကာ; ‘‘အယံ သော သာရထီ ဧတိ’’, ဣစ္စာဒေတ္ထ နိဒဿနံ. शारीरिक हालचालींच्या (इरियापथ) अर्थामध्ये हा धातू नेहमी 'आगमन' (येणे) दर्शवणारा असतो; "अयं सो सारथी एति" (हा तो सारथी येत आहे) इत्यादी याचे उदाहरण आहे. အနိရိယာပထတ္ထေန[Pg.4], ဝတ္တနေ ဂမနေပိ စ; အာဂမနေ စ ဟောတီတိ, ဓီမာ လက္ခေယျ တံ ယထာ. शारीरिक हालचालींशिवाय इतर (अनिरियापथ) अर्थामध्ये, हा धातू प्रवृत्ती (चालू राहणे), गमन (जाणे) आणि आगमन (येणे) या अर्थांतही होतो; बुद्धिमान माणसाने ते योग्य प्रकारे ओळखावे. ‘‘ပဋိစ္စ ဖလမေတီ’’တိ, ဧဝမာဒီသု ဝတ္တနေ; ဝုဒ္ဓိပ္ပတ္တာ ဣကာရဝှာ, ဧသာ ဓာတု ပဝတ္တတိ. "पटिच्च फलमेति" (प्रत्यय/कारण अवलंबून फळ उत्पन्न होते) इत्यादींमध्ये प्रवृत्ती (उत्पन्न होणे/चालू राहणे) या अर्थात, वृद्धीला प्राप्त झालेला हा 'इ' कार नावाचा धातू प्रयुक्त होतो. ‘‘အတ္ထမေန္တမှိ သူရိယေ, ဝါဠာ’’ ဣစ္စာဒီသု ပန; ဂတေ, ‘‘ဧတီတိ ဣတီ’’တိ-အာဒိသွာဂမနေ သိယာ. परंतु "अत्थमेन्तमहि सूरिये, वाळा" (सूर्य मावळतीला गेला असता, हिंस्र श्वापद...) इत्यादींमध्ये 'गेला' (गत) या अर्थात, आणि "एतीति इतीति" इत्यादींमध्ये 'आगमन' (येणे) या अर्थात तो असावा. တထာ ဟိ ဤတီတိ အနတ္ထာယ ဧတိ အာဂစ္ဆတီတိ ဤတိ, ဥပဒ္ဒဝေါ, ဣတိ အာဂမနတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အာဟ စ သုတ္တနိပါတဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဧတီတိ ဤတိ, အာဂန္တုကာနံ အကုသလဘာဂီနံ ဗျသနဟေတူနံ ဧတံ အဓိဝစန’’န္တိ. कारण 'ईति' म्हणजे अनहितासाठी जी येते (एति/आगच्छति) ती 'ईति' (आपत्ती/उपद्रव) होय; अशा प्रकारे येथे 'आगमन' हाच अर्थ ग्रहण केला पाहिजे. सुत्तनिपात-अट्ठकथेमध्ये देखील म्हटले आहे – "एति म्हणजे ईति; बाहेरून येणाऱ्या, अकुशल भागाच्या आणि विनाशाच्या कारणांचे हे नाव (अधिवचन) आहे." ဣဒါနိ ယထာရဟံ နိပါတာချာတနာမိကပရိယာပန္နာနံ ဣတိဣတော သဒ္ဒါနမတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ – တတ္ထ ဣတိသဒ္ဒေါ ဟေတုပရိသမာပနာဒိပဒတ္ထ ဝိပရိယာယ ပကာရာဝဓာရဏ နိဒဿနာဒိအနေကတ္ထပ္ပဘေဒေါ. တထာ ဟေသ ‘‘ရုပ္ပတီတိ ခေါ ဘိက္ခဝေ တသ္မာ ရူပန္တိ ဝုစ္စတီ’’တိအာဒီသု ဟေတုအတ္ထေ ဒိဿတိ. ‘‘တသ္မာတိဟ မေ ဘိက္ခဝေ ဓမ္မဒါယာဒါ ဘဝထ, မာ အာမိသဒါယာဒါ. အတ္ထိ မေ တုမှေသု အနုကမ္ပာ, ကိန္တိ မေ သာဝကာ ဓမ္မဒါယာဒါ ဘဝေယျုံ, နော အာမိသဒါယာဒါ’’တိအာဒီသု ပရိသမာပနေ. ‘‘ဣတိ ဝါ ဣတိ ဧဝရူပါ ဝိသူကဒဿနာ ပဋိဝိရတော’’တိအာဒီသု အာဒိအတ္ထော. ‘‘မာဂဏ္ဍိယောတိ တဿ ဗြာဟ္မဏဿ သင်္ခါ သမညာ ပညတ္တိ ဝေါဟာရော နာမံ နာမကမ္မံ နာမဓေယျံ နိရုတ္တိ ဗျဉ္ဇနမဘိလာပေါ’’တိအာဒီသု ပဒတ္ထဝိပရိယာယေ. ‘‘ဣတိ ခေါ ဘိက္ခဝေ သပ္ပဋိဘယော ဗာလော, အပ္ပဋိဘယော ပဏ္ဍိတော. သဥပဒ္ဒဝေါ ဗာလော, အနုပဒ္ဒဝေါ [Pg.5] ပဏ္ဍိတော. သဥပသဂ္ဂေါ ဗာလော, အနုပသဂ္ဂေါ ပဏ္ဍိတော’’တိအာဒီသု ပကာရော. ‘‘အတ္ထိ ဣဒပ္ပစ္စယာ ဇရာမရဏန္တိ ဣတိ ပုဋ္ဌေန သတာ အာဒန္ဒ အတ္ထီတိဿ ဝစနီယံ. ကိံ ပစ္စယာ ဇရာမရဏန္တိ ဣတိ စေ ဝဒေယျ, ဇာတိပစ္စယာ ဇရာမရဏန္တိ ဣစ္စဿ ဝစနီယ’’န္တိအာဒီသု အဝဓာရဏေ. ‘‘အတ္ထီတိ ခေါ ကစ္စာန အယမေကော အန္တော, နတ္ထီတိ ခေါ ကစ္စာန အယံ ဒုတိယော အန္တော’’တိအာဒီသု နိဒဿနေ. နိပါတဝသေနေဝ တေ ပယောဂါ ဂဟေတဗ္ဗာ. ‘‘ဣတာယံ ကောဓရူပေနာ’’တိ ဧတ္ထ ပန အာချာတဝသေန ဂမနေ ဣတိသဒ္ဒေါ ဒိဿတိ. အယမေဝတ္ထော ဣဓာဓိပ္ပေတော, နိပါတတ္ထော ပန န ဣစ္ဆိတဗ္ဗော, ဝိညူနံ အတ္ထဂ္ဂဟဏေ ကောသလ္လုပါဒနတ္ထံ ကေဝလံ အတ္ထုဒ္ဓါရဝသေန အာဂတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣတရော ပန – आता योग्यतेनुसार निपात, आख्यात (क्रियापद) आणि नाम यांच्या अंतर्गत येणाऱ्या ‘इति’ आणि ‘इतो’ या शब्दांचा अर्थ-उद्धार (अर्थ स्पष्टीकरण) केला जात आहे – त्यापैकी ‘इति’ हा शब्द हेतू (कारण), परिसमापन (समाप्ती), इत्यादी, पदार्थाचा विपर्यास (बदल), प्रकार, अवधारण (निश्चय), निदर्शन (उदाहरण) इत्यादी अनेक अर्थांचे भेद दर्शवणारा आहे. जसे की, “रुप्पतीति खो भिक्खवे तस्मा रूपन्ति वुच्चती” (हे भिक्षूंनो, जे रूप पावले जाते म्हणून त्याला रूप म्हणतात) इत्यादींमध्ये तो हेतू (कारण) अर्थामध्ये दिसतो. “तस्मातिह मे भिक्खवे धम्मदायादा भवथ, मा आमिसदायादा. अत्थि मे तुम्हेसु अनुकम्पा, किन्ति मे सावका धम्मदायादा भवेय्युं, नो आमिसदायादा” (म्हणूनच, हे भिक्षूंनो, तुम्ही माझे धम्मदायाद व्हा, आमिषदायाद होऊ नका. माझी तुमच्यावर अनुकंपा आहे, की माझे श्रावक धम्मदायाद व्हावेत, आमिषदायाद नाही) इत्यादींमध्ये परिसमापन (समाप्ती) अर्थात आहे. “इति वा इति एवरूपा विसूकदस्सना पटिविरतो” (अशा प्रकारे किंवा अशा प्रकारे या प्रकारच्या तमाशा पाहण्यापासून विरत असलेला) इत्यादींमध्ये ‘इत्यादी’ (आदि) अर्थ आहे. “मागण्डियोति तस्स ब्राह्मणस्स सङ्खा समञ्ञा पञ्ञत्ति वोहारो नामं नामकम्मं नामधेय्यं निरुत्ति ब्यञ्जनमभिलापो” (मागंडिय हे त्या ब्राह्मणाचे नाव, संज्ञा, प्रज्ञप्ती, व्यवहार, नामकर्म, नामधेय, निरुक्ती, व्यंजन आणि अभिलाप आहे) इत्यादींमध्ये पदार्थाच्या विपर्यासात (पर्यायी अर्थात) आहे. “इति खो भिक्खवे सप्पटिभयो बालो, अप्पटिभयो पण्डितो. सौपद्दवो बालो, अनुपद्दवो पण्डितो. सौपसग्गो बालो, अनुपसग्गो पण्डितो” (अशा प्रकारे, हे भिक्षूंनो, बाल (मूर्ख) हा भययुक्त असतो, पंडित भयरहित असतो. बाल उपद्रवयुक्त असतो, पंडित उपद्रवरहित असतो. बाल उपसर्गयुक्त असतो, पंडित उपसर्गरहित असतो) इत्यादींमध्ये प्रकार अर्थात आहे. “अत्थि इदप्पच्चया जरामरणन्ति इति पुट्ठेन सता आदन्द अत्थीतिस्स वचनीयं. किं पच्चया जरामरणन्ति इति चे वदेय्य, जातिपच्चया जरामरणन्ति इच्चस्स वचनीयं” (या प्रत्ययामुळे (कारणामुळे) जरामरण आहे काय? असे विचारले असता, ‘आहे’ असे उत्तर द्यावे. जरामरण कशामुळे होते? असे विचारल्यास, ‘जातीमुळे (जन्मामुळे) जरामरण होते’ असे उत्तर द्यावे) इत्यादींमध्ये अवधारण (निश्चय) अर्थात आहे. “अत्थीति खो कच्चान अयमेको अन्तो, नत्थीति खो कच्चान अयं दुतियो अन्तो” (हे कच्चान, ‘आहे’ हा एक अंत आहे, ‘नाही’ हा दुसरा अंत आहे) इत्यादींमध्ये निदर्शन (उदाहरण) अर्थात आहे. हे प्रयोग निपाताच्या अर्थानेच ग्रहण केले पाहिजेत. परंतु “इतायं कोधरूपेना” येथे आख्याताच्या (क्रियापदाच्या) अर्थाने ‘गमन’ (जाणे) या अर्थात ‘इति’ शब्द दिसतो. हाच अर्थ येथे अभिप्रेत आहे, निपाताचा अर्थ येथे इच्छित नाही. विद्वानांना अर्थग्रहणात कौशल्य प्राप्त व्हावे म्हणून केवळ अर्थ-उद्धाराच्या दृष्टीने हा येथे आला आहे, असे समजावे. दुसरा (इतो शब्द) तर – ဂတျတ္ထေ စိမသဒ္ဒတ္ထေ, ဣတောသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ; အနွိတော’’တိ ဟိ ဂတျတ္ထေ, ပစ္စတ္တဝစနံ ဘဝေ. ‘इतो’ हा शब्द गमन (जाणे) अर्थात आणि ‘इम’ (हा) शब्दाच्या अर्थात वापरला जातो; ‘अन्वितो’ (अनुसरण केलेला) हा गमन अर्थात प्रथमा विभक्तीचे (पच्चत्तवचन) रूप आहे. ဣမသဒ္ဒဿ အတ္ထမှိ, နိဿက္ကဝစနံ ဘဝေ; ‘‘ဣတော သာ ဒက္ခိဏာ ဒိသာ’’, ဣတိအာဒီသု ပါဠိသု. ‘इम’ शब्दाच्या अर्थात हा पंचमी विभक्तीचे (निस्सक्कवचन) रूप होतो; जसे की पाळीमध्ये “इतो सा दक्खिणा दिसा” (येथून ती दक्षिण दिशा आहे) इत्यादींमध्ये. ဂတျတ္ထော ဣစ္ဆိတော ဧတ္ထ, ဣတရတ္ထော န ဣစ္ဆိတော; အတ္ထုဒ္ဓါရဝသာ ဝုတ္တော, ကောသလ္လတ္ထာယ ဝိညုနံ. येथे गमन अर्थच अभिप्रेत आहे, इतर (दुसरा) अर्थ अभिप्रेत नाही; विद्वानांच्या कौशल्यासाठी केवळ अर्थ-उद्धाराच्या दृष्टीने हा सांगितला आहे. ဣဓ ပန သမယသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရံ သနိဗ္ဗစနံ ဝတ္တဗ္ဗမ္ပိ အဝတွာ ဥပရိ အယဓာတုဝိသယေယေဝ ဝက္ခာမ ဣ ဧ အယဓာတုဝသေန တိဓာတုမယတ္တာ သမယသဒ္ဒဿ. တတြ ဣတီတိ ဣကာရာနန္တရတျန္တပဒဿ စ ‘‘ဧတိ, ဥဒေတီ’’တိအာဒီနဉ္စ ဧကာရာနန္တရတျန္တပဒါနံ အညေသဉ္စ ဧဝရူပါနံ ပဒမာလာ ယထာရဟံ ယေဘုယျေန အတ္တနောပဒါနိ ဝဇ္ဇေတွာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဤဒိသေသု ဟိ ဌာနေသု ဒုက္ကရာ ကြိယာပဒမာလာ. ယသ္မာ ပန ဣမသ္မိံ ပကရဏေ သုကရာ စ ဒုက္ကရာ စ တျန္တပဒမာလာ ဇာနိတဗ္ဗာ[Pg.6], တသ္မာ ဘူဝါဒိဂဏာဒီသု အဋ္ဌသု ဂဏေသု ဝိဟိတေဟိ ဆန္နဝုတိယာ ဝစနေဟိ သဗ္ဗသာဓာရဏံ အသဗ္ဗသာဓာရဏဉ္စ ပဒမာလာနယံ ဗြူမ – परंतु येथे ‘समय’ शब्दाचा अर्थ-उद्धार निरुक्तीसह सांगणे आवश्यक असूनही ते न सांगता, पुढे ‘अय’ धातूच्या संदर्भातच सांगू, कारण ‘इ’ आणि ‘ए’ या ‘अय’ धातूच्या रूपांमुळे ‘समय’ शब्द हा त्रिधातुमय (तीन धातूंनी बनलेला) आहे. तेथे ‘इति’ या इ-कारान्त ‘ति’-प्रत्ययान्त पदाची आणि “एति, उदेति” इत्यादी ए-कारान्त ‘ति’-प्रत्ययान्त पदांची व इतर अशाच प्रकारच्या पदांची पदमाला (रूपांची मालिका) योग्यतेनुसार बहुतांश करून आत्मनेपद वगळून जोडली पाहिजे. कारण अशा ठिकाणी क्रियापदांची मालिका कठीण असते. परंतु या ग्रंथामध्ये सोपी आणि कठीण अशी ‘ति’-प्रत्ययान्त पदांची मालिका जाणून घेणे आवश्यक असल्याने, आम्ही भूवादी इत्यादी आठ गणांमध्ये विहित केलेल्या ९६ वचनांद्वारे सर्वसाधारण आणि असाधारण अशा पदमालेचा नियम सांगतो – အကာရာနန္တရတျန္တ-ပဒါနံ ပန္တိယော ဗုဓော; ဘဝတိ ရုန္ဓတာဒီနံ, ယောဇေ သဗ္ဗတ္ထ သဗ္ဗထာ. विद्वानाने अ-कारान्त ‘ति’-प्रत्ययान्त पदांच्या ओळी (रूपे), जसे की ‘भवति’, ‘रुन्धति’ इत्यादी, सर्व ठिकाणी सर्व प्रकारे जोडाव्यात. ဣတိ ဧတီ’’တိ စေတေသံ, ပဒါနံ ပန ပန္တိယော; သုဒ္ဓဿရပုဗ္ဗကာနံ, ယောဇေ ဝိညူ ယထာရဟံ. परंतु ‘इति’ आणि ‘एति’ या शुद्ध स्वराने सुरू होणाऱ्या पदांच्या ओळी विद्वानाने योग्यतेनुसार जोडाव्यात. အာကာရာနန္တရတျန္တ-ပဒါနဉ္စာပိ ပန္တိယော; ‘‘ယာတိ သုဏာတိ အသ္နာ-တိ’’ ဣစ္စာဒီနံ ယထာရဟံ. आणि आ-कारान्त ‘ति’-प्रत्ययान्त पदांच्या ओळी देखील, जसे की “याति, सुणाति, अस्नाति” इत्यादी, योग्यतेनुसार जोडाव्यात. ဣဝဏ္ဏာနန္တရတျန္တ-ပဒါနမပိ ပါဠိယော; ယောဇေ ‘‘ရုန္ဓိတိ ရုန္ဓီတိ’’-ဣစ္စာဒီနံ ယထာရဟံ. इ-वर्णान्त (इ किंवा ई कारान्त) ‘ति’-प्रत्ययान्त पदांच्या ओळी देखील, जसे की “रुन्धिति, रुन्धीति” इत्यादी, योग्यतेनुसार जोडाव्यात. ဥကာရာနန္တရတျန္တ-သုတိဣတိ ပဒဿ စ; ပေရဏတ္ထေ ပဝတ္တဿ, ယောဇေ မာလံ ယထာရဟံ. उ-कारान्त ‘ति’-प्रत्ययान्त ‘सुति’ या पदाची आणि प्रेरणार्थ (प्रयोजक) अर्थात वापरल्या जाणाऱ्या पदांची मालिका योग्यतेनुसार जोडावी. ဧကာရာနန္တရတျန္တ-ပဒါနမ္ပိ ယထာရဟံ; ‘‘ဇေတိ ရုန္ဓေတိ ကာရေတိ, ကာရာပေတီ’’တိအာဒီနံ. ए-कारान्त ‘ति’-प्रत्ययान्त पदांची देखील, जसे की “जेति, रुन्धेति, कारेति, कारापेति” इत्यादी, योग्यतेनुसार योजना करावी. ဩကာရာနန္တရတျန္တ-ပဒါနမ္ပိ ပဒက္ကမေ; ‘‘ကရောတိ ဘောတိ ဟောတီ’’တိ-အာဒီနံ ယုတ္တိတောဝဒေ; ओ-कारान्त ‘ति’-प्रत्ययान्त पदांच्या पदक्रमात देखील, जसे की “करोति, भोति, होति” इत्यादी, योग्यतेनुसार सांगावे. ဣစ္စေဝံ သတ္တဓာ ဝုတ္တော, ပဒမာလာနယော မယာ; ဣတော မုတ္တော နယော နာမ, နတ္ထိ ကောစိ ကြိယာပဒေ. अशा प्रकारे माझ्याद्वारे सात प्रकारचा पदमालेचा नियम सांगितला गेला आहे; क्रियापदांमध्ये याहून वेगळा दुसरा कोणताही नियम नाही. ‘‘အာဒတ္တေ ကုရုတေ ပေတေ’’, ဣစ္စာဒိ နယဒဿနာ; ယထာရဟံ ယုတ္တိတောတိ, ဝစနံ ဧတ္ထ ဘာသိတံ. “आदत्ते, कुरुते, पेते” इत्यादी नियमांच्या दर्शनावरून, येथे ‘योग्यतेनुसार योग्य आहे’ असे वचन सांगितले आहे. ဣဒါနိ ဣကာရာနန္တရတျန္တပဒဿ ကမော ဝုစ္စတေ – ဣတိ, ဣန္တိ. ဣသိ, ဣထ. ဣမိ, ဣမ. အပရိပုဏ္ဏော ဝတ္တမာနာနယော. ဣတု, ဣန္တု. ဣဟိ, ဣထ. ဣမိ, ဣမ. အပရိပုဏ္ဏော ပဉ္စမီနယော. ဧတ္ထ စ ဣမေသံ ဒွိန္နံ သာသနာနုရူပဘာဝဿ ဣမာနိ သာဓကပဒါနိ [Pg.7] ‘‘ဝေတိ, အပေတိ, အနွေတီ’’တိ. တတ္ထ ဝိ ဣတိ ဝေတိ. ဝိဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော, ဣတိသဒ္ဒေါ ဟေတ္ထ ဂမနံ ဗောဓေတိ. တထာ အပ ဣတိ အပေတိ. အပဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. အနု ဣတိ အနွေတိ. အနုဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. ဂရူ ပန အနု ဧတိ အနွေတီတိ ဝဒန္တိ. တံ – आता इ-कारान्त ‘ति’-प्रत्ययान्त पदाचा क्रम सांगितला जात आहे – इति, इन्ति। इसि, इथ। इमि, इम। हा अपूर्ण वर्तमानकाळ (वत्तमाना) नियम आहे. इतु, इन्तु। इहि, इथ। इमि, इम। हा अपूर्ण पंचमी (आज्ञार्थ) नियम आहे. आणि येथे या दोघांच्या शासनाला (बुद्धवचनाला) अनुरूप असण्याचे सिद्ध करणारे शब्द म्हणजे “वेति, अपेति, अन्वेति” हे आहेत. त्यापैकी ‘वि + इति = वेति’ म्हणजे ‘विगच्छति’ (दूर जातो) असा अर्थ आहे, आणि येथे ‘इति’ शब्द गमन (जाणे) दर्शवतो. तसेच ‘अप + इति = अपेति’ म्हणजे ‘अपगच्छति’ (निघून जातो) असा अर्थ आहे. ‘अनु + इति = अन्वेति’ म्हणजे ‘अनुगच्छति’ (मागोमाग जातो) असा अर्थ आहे. परंतु आचार्य (गुरू) ‘अनु + एति = अन्वेति’ असे म्हणतात. ते – ‘‘ယထာ အာရညကံ နာဂံ, ဒန္တိံ အနွေတိ ဟတ္ထိနီ; ဇေဿန္တံ ဂိရိဒုဂ္ဂေသု, သမေသု ဝိသမေသု စ; ဧဝံ တံ အနုဂစ္ဆာမိ, ပုတ္တေ အာဒါယ ပစ္ဆတော’’တိ. “ज्याप्रमाणे अरण्यातील हत्तीच्या (नाग) मागे, जो पर्वताच्या कठीण दुर्गम भागात, सम आणि विषम मार्गांवर फिरत असतो, हत्तीण (हत्थिनी) त्याचे अनुसरण करते; त्याचप्रमाणे मी माझ्या पुत्रांना मागे घेऊन तुमच्या मागे येत आहे.” ဣမာယ ပါဠိယာ န သမေတိ ‘‘ဇေဿန္တံ အနွေတီ’’တိ ဝစနတော ‘‘အနုဂစ္ဆာမီ’’တိ ဝစနတော စ. တထာ ဟိ ဧတိသဒ္ဒေါ ယတ္ထ စေ ဣရိယာပထဝါစကော, တတ္ထ အာဂမနံယေဝ ဇောတေတိ, န ဂမနံ, တသ္မာ အာဂမနတ္ထဿ အယုတ္တိတော ဂမနတ္ထဿ စ ယုတ္တိတော ဝိ ဣတိအာဒိနာ ဆေဒေါ ဉေယျော. ဧတေသဉ္စ ဣတိသဒ္ဒဝသေန ကတဆေဒါနံ အတ္ထိဘာဝံ ယုတ္တိဘာဝဉ္စ ‘‘ဣတာယံ ကောဓရူပေနာ’’တိ ပါဠိယေဝ သာဓေတိ, တသ္မာယေဝ ‘‘အနု ဣတိ, အနု ဣန္တိ, အနု ဣသီ’’တိအာဒိနာ ‘‘အနွေတီ’’တိအာဒီနံ ဆေဒေ လဗ္ဘမာနနယေန ဝုတ္တပ္ပကာရော ဝတ္တမာနာပဉ္စမီနယော ပရဿပဒဝသေန ဒဿိတော. သတ္တမီရူပါဒီနိ သဗ္ဗထာ အပ္ပသိဒ္ဓါနိ. या पाळी वचनाशी ते जुळत नाही, कारण “जेस्संतं अन्वेति” या वचनामुळे आणि “अनुगच्छामि” या वचनामुळे. कारण ‘एति’ शब्द जेथे इरियापथ (हालचाल) वाचक असतो, तेथे तो ‘आगमन’ (येणे) च दर्शवतो, ‘गमन’ (जाणे) नाही. म्हणून आगमनाचा अर्थ अयोग्य असल्याने आणि गमनाचा अर्थ योग्य असल्याने ‘वि + इति’ इत्यादी प्रकारे विग्रह (छेद) समजावा. आणि ‘इति’ शब्दाच्या आधारे केलेल्या या विग्रहांचे अस्तित्व आणि योग्यता “इतायं कोधरूपेना” ही पाळीच सिद्ध करते. म्हणूनच “अनु इति, अनु इन्ति, अनु इसि” इत्यादी प्रकारे “अन्वेति” इत्यादींच्या विग्रहामध्ये प्राप्त होणाऱ्या नियमानुसार, वर सांगितलेला वर्तमानकाळ आणि पंचमीचा नियम परस्मैपदाच्या रूपाने दर्शवला आहे. सप्तमीची रूपे इत्यादी सर्वथा अनुपलब्ध आहेत (आढळत नाहीत). ဣမာနိ ပန ဘဝိဿန္တိယာ ရူပါနိ, သိတ္တာ တေ လဟုမေဿတိ. ဣဿတိ, ဣဿန္တိ. ဣဿသိ, ဣဿထ. ဣဿာမိ, ဣဿာမ. ဣဿတေ, ဣဿန္တေ. ဣဿသေ, ဣဿဝှေ. ဣဿံ, ဣဿာမှေ. အသဗ္ဗဓာတုကတ္တေပိ သုဒ္ဓဿရတ္တာ ဓာတုဿ ဣကာရာဂမော န လဗ္ဘတိ. ပရိပုဏ္ဏော ဘဝိဿန္တီနယော. परंतु ही भविष्यकाळाची (भविस्सती) रूपे आहेत, जसे की “सित्ता ते लहुमेस्सति” (सिंचन केल्यावर ते तुला हलके होईल). इस्सति, इस्सन्ति। इस्ससि, इस्सथ। इस्सामि, इस्साम। इस्सते, इस्सन्ते। इस्ससे, इस्सव्हे। इस्सं, इस्साम्हे। असर्वधातुकत्व असूनही धातू शुद्ध स्वर असल्यामुळे ‘इ’ काराचा आगम होत नाही. भविष्यकाळाचा नियम पूर्ण झाला। အထ ကာလာတိပတ္တိယာ ရူပါနိ ဘဝန္တိ, ဣဿာ, ဣဿံသု. ဣဿေ, ဣဿထ. ဣဿံ, ဣဿမှာ. ဣဿထ, ဣဿိသု. ဣဿသေ, ဣဿဝှေ. ဣဿံ, ဣဿာမှသေ. ကာလာတိပတ္တိဘာဝေ [Pg.8] စ အသဗ္ဗဓာတုကတ္တေ စ သန္တေပိ သုဒ္ဓဿရတ္တာ ဓာတုဿ အကာရိကာရာဂမော န လဗ္ဘတိ အနေကန္တိကတ္တာ ဝါ အနုပပန္နတ္တာ စ အကာရာဂမော န ဟောတိ. ဒွိန္နဉှေတ္ထ သုဒ္ဓဿရာနံ အနန္တရိကာနံ ဧကတောသန္နိပါတော အနုပပတ္တိ. ပရိပုဏ္ဏော ကာလာတိပတ္တိနယော. त्यानंतर काळातिपत्तीचे (conditional tense) रूपे होतात - इस्सा, इस्संसु. इस्से, इस्सथ. इस्सं, इस्सल्हा. इस्सथ, इस्सिस्सु. इस्ससे, इस्सव्हे. इस्सं, इस्साम्हसे. काळातिपत्ती भाव आणि असब्बधातुकत्व (असार्वधातुकत्व) असतानाही, धातूचा शुद्ध स्वर असल्यामुळे 'अ' किंवा 'इ' काराचा आगम प्राप्त होत नाही, किंवा अनैकांतिकत्वामुळे आणि अनुपपन्नत्वामुळे 'अ' काराचा आगम होत नाही. कारण येथे दोन लागोपाठ येणाऱ्या शुद्ध स्वरांचा एकत्र संयोग होणे अनुपपन्न (अयोग्य) आहे. काळातिपत्तीचा नय (नियम) परिपूर्ण झाला. ဣမသ္မိံ ပန ဌာနေ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ သောတူနံ ပယောဂတ္ထေသု ပရမကောသလ္လဇနနတ္ထံ ‘‘နနု တေ သုတံ ဗြာဟ္မဏ ဘညမာနေ, ဒေဝါ န ဣဿန္တိ ပုရိသပရက္ကမဿာ’’တိ ပါဠိတော နယံ ဂဟေတွာ ဝုတ္တပ္ပကာရေဟိ ဘဝိဿန္တိယာ ရူပေဟိ သဗ္ဗသော သမာနာနိ အသမာနတ္ထာနိ ဝတ္တမာနိကရူပါနိ စ ဤသကံ အညမညံ သမာနာနိ ဘဝိဿန္တီကာလာတိပတ္တီနံ ရူပါနိ စ ပကာသယိဿာမ – ဝတ္တမာနာဝသေန တာဝ ‘‘ဣဿတိ, ဣဿန္တိ. ဣဿသိ, ဣဿထာ’’တိ သဗ္ဗံ ယောဇေတဗ္ဗံ. အတ္ထော ပန ‘‘ဣဿံ ကရောတီ’’တိအာဒိနာ ဝတ္တဗ္ဗော. တသ္မိံယေဝ အတ္ထေ ဘဝိဿန္တီဝသေန ‘‘ဣဿိဿတိ, ဣဿိဿန္တိ. ဣဿိဿသိ, ဣဿိဿထာ’’တိ ပရိပုဏ္ဏံ ယောဇေတဗ္ဗံ. အတ္ထော ပန ‘‘ဣဿံ ကရိဿတီ’’တိအာဒိနာ ဝတ္တဗ္ဗော. ကာလာတိပတ္တိဝသေန ပန ‘‘ဣဿိဿာ, ဣဿိဿံသု. ဣဿိဿေ, ဣဿိဿထာ’’တိ ပရိပုဏ္ဏံ ယောဇေတဗ္ဗံ, အတ္ထော ပန ‘‘ဣဿံ အကရိဿာ’’တိအာဒိနာ ဝတ္တဗ္ဗော. ဓာတွန္တရဝသေန သံသန္ဒနာနယောယံ. परंतु या ठिकाणी, अट्ठकथासहित त्रिपिटक बुद्धवचनामध्ये श्रोत्यांच्या प्रयोगाच्या अर्थांमध्ये परम कौशल्य उत्पन्न करण्यासाठी, 'हे ब्राह्मणा, तू ऐकले नाहीस का की, पुरुषाच्या पराक्रमाचा देव हेवा (ईर्ष्या) करत नाहीत?' या पाळीतील नियमाला ग्रहण करून, सांगितलेल्या प्रकारे भविष्यकाळाच्या रूपांशी सर्वथा समान असणारी पण भिन्न अर्थ असणारी वर्तमानकाळाची रूपे आणि परस्परांशी थोडी समान असणारी भविष्यकाळ व काळातिपत्तीची रूपे आम्ही स्पष्ट करू - प्रथम वर्तमानकाळाच्या नियमाने 'इस्सति, इस्सन्ति. इस्ससि, इस्सथ' असे सर्व जोडावे. परंतु याचा अर्थ 'ईर्ष्या करतो' इत्यादी प्रकारे सांगावा. त्याच अर्थामध्ये भविष्यकाळाच्या नियमाने 'इस्सिस्सति, इस्सिस्सन्ति. इस्सिस्ससि, इस्सिस्सथ' असे परिपूर्ण जोडावे. परंतु याचा अर्थ 'ईर्ष्या करेल' इत्यादी प्रकारे सांगावा. काळातिपत्तीच्या नियमाने 'इस्सिस्सा, इस्सिस्संसु. इस्सिस्से, इस्सिस्सथ' असे परिपूर्ण जोडावे, आणि याचा अर्थ 'ईर्ष्या केली असती' इत्यादी प्रकारे सांगावा. इतर धातूंच्या नियमांनुसार हा तुलनात्मक नियम आहे. ဣဒါနိ ဧကာရာနန္တရတျန္တပဒဿ ကမော ဝုစ္စတေ – आता 'ए' कार शेवटी असणाऱ्या तिङन्त पदांचा क्रम सांगितला जातो - ဧတိ, ဧန္တိ. ဧသိ, ဧထ. ဧမိ, ဧမ. एति, एन्ति. एसि, एथ. एमि, एम. ဧတု, ဧန္တု. ဧဟိ, ဧထ. ဧမိ, ဧမ. एतु, एन्तु. एहि, एथ. एमि, एम. န စ အပ္ပတွာ ဒုက္ခန္တံ, ဝိဿာသံ ဧယျ ပဏ္ဍိတော; နိဝေသနာနိ မာပေတွာ, ဝေဒေဟဿ ယသဿိနော; ယဒါ တေ ပဟိဏိဿာမိ, တဒါ ဧယျာသိ ခတ္တိယ. दुःखाचा अंत गाठल्याशिवाय पंडिताने विश्वास ठेवू नये; यशस्वी विदेहाची निवासस्थाने निर्माण करून, हे क्षत्रिया, जेव्हा मी तुला निरोप पाठवीन, तेव्हा तू यावेस. ဧယျ[Pg.9], ဧယျုံ. ဧယျာသိ, ဧယျာထ. ဧယျာမိ, ဧယျာမ. ဧထ, ဧရံ. ဧထော, ဧယျာဝှော. ဧယျံ, ဧယျာမှေ. एय्य, एय्युं. एय्यासि, एय्याथ. एय्यामि, एय्याम. एथ, एरं. एथो, एय्याव्हो. एय्यं, एय्याम्हे. သော ပုရိသော ဧယျ, တေ ဧယျုံ. တွံ ဧယျာသိ, တုမှေ ဧယျာထ. အဟံ ဧယျာမိ, မယံ ဧယျာမ. သော ပုရိသော ဧထ, တေ ဧရံ. တွံ ဧထော, တုမှေ ဧယျာဝှော. အဟံ ဧယျံ, မယံ ဧယျာမှေ. तो मनुष्य जावा, ते जावेत. तू जावेस, तुम्ही जावे. मी जावे, आम्ही जावे. तो मनुष्य जावा, ते जावेत. तू जावेस, तुम्ही जावे. मी जावे, आम्ही जावे. ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီရူပါနိ သဗ္ဗသော အပ္ပသိဒ္ဓါနိ. परोक्षा (भूतकाळ), हिय्यत्तनी (अद्यतन भूतकाळ) आणि अज्जतनी (सामान्य भूतकाळ) यांची रूपे सर्व प्रकारे समजून घ्यावीत. ဧဿတိ, ဧဿန္တိ. ဧဿသိ, ဧဿထ. ဧဿာမိ, ဧဿာမ. ဧဿတေ, ဧဿန္တေ. ဧဿသေ, ဧဿဝှေ. ဧဿံ, ဧဿာမှေ. एस्सति, एस्सन्ति. एस्ससि, एस्सथ. एस्सामि, एस्साम. एस्सते, एस्सन्ते. एस्ससे, एस्सव्हे. एस्सं, एस्साम्हे. သမ္မောဒမာနာ ဂစ္ဆန္တိ, ဇာလမာဒါယ ပက္ခိနော; ယဒါ တေ ဝိဝဒိဿန္တိ, တဒါ ဧဟိန္တိ မေ ဝသံ. पक्षी जाळे घेऊन आनंदाने एकत्र उडून जातात; परंतु जेव्हा ते आपसात भांडू लागतील, तेव्हा ते माझ्या ताब्यात येतील. ‘‘အဘိဒေါသဂတော ဣဒါနိ ဧဟီ’’တိ ဝစနဒဿနတော အပရာနိပိ ဘဝိဿန္တီရူပါနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. “संध्याकाळ झाली आहे, आता तू ये” या वचनावरून भविष्यकाळाची इतर रूपेही ग्रहण करावीत. ဧဟိတိ, ဧဟိန္တိ. ဧဟိသိ, ဧဟိထ. ဧဟိမိ, ဧဟိမ. ဧဟိတေ, ဧဟိန္တေ. ဧဟိသေ, ဧဟိဝှေ. ဧဟိဿံ, ဧဟိဿာမှေ. एहिति, एहिन्ति. एहिसि, एहिथा. एहिमि, एहिमा. एहिते, एहिन्ते. एहिसे, एहिव्हे. एहिस्सं, एहिस्साम्हे. ဧဿာ, ဧဿံသု. ဧဿေ, ဧဿထ. ဧဿံ ဧဿာမှာ. ဧဿထ, ဧဿိသု. ဧဿသေ, ဧဿဝှေ. ဧဿိံ, ဧဿာမှသေ. एस्सा, एस्संसु. एस्से, एस्सथ. एस्सं, एस्साम्हा. एस्सथ, एस्सिस्सु. एस्ससे, एस्सव्हे. एस्सिं, एस्साम्हसे. အထာပရောပိ ဧကာရာနန္တရတျန္တပဒက္ကမော ဘဝတိ; ဥဒေတိ, ဥဒေန္တိ; ဥဒေသိ, ဥဒေထ; ဥဒေမိ, ဥဒေမ. त्यानंतर 'ए' कार शेवटी असणाऱ्या तिङन्त पदांचा दुसरा क्रम असा होतो - उदेति, उदेन्ति; उदेसि, उदेथ; उदेमि, उदेमा. ဥဒေတု, ဥဒေန္တု. ဥဒေဟိ, ဥဒေထ. ဥဒေမိ, ဥဒေမ, ဥဒါမသေ. उदेतु, उदेन्तु. उदेहि, उदेथ. उदेमि, उदेमा, उदामसे. ဥဒေယျ, ဥဒေယျုံ. သေသံ နေယျံ. ဥဒိဿတိ, ဥဒိဿန္တိ. သေသံ နေယျံ. ဥဒိဿာ, ဥဒိဿံသု. သေသံ နေယျံ. उदेय्य, उदेय्युं. उर्वरित रूपे याचप्रमाणे समजून घ्यावीत. उदिस्सति, उदिस्सन्ति. उर्वरित रूपे याचप्रमाणे समजून घ्यावीत. उदिस्सा, उदिस्संसु. उर्वरित रूपे याचप्रमाणे समजून घ्यावीत. ဣမာနိ သုဒ္ဓဿရဓာတုရူပါနိ. ही शुद्ध स्वर असणाऱ्या धातूंची रूपे आहेत. ကကာရန္တဓာတု क-कारान्त धातू ကု [Pg.10] သဒ္ဒေ ကေ စ. ကောတိ, ကဝတိ, ကာယတိ, ဧဝံ ကတ္တုပဒါနိ ဘဝန္တိ. ကုယျတိ, ကိယျတိ, ဧဝံ ကမ္မပဒါနိ. ကာနနံ, ကဗ္ဗံ, ဇာတကံ, ဧဝံ နာမိကပဒါနိ. ကုတွာ, ကုတွာန, ကဝိတွာ, ကဝိတွာန, ကာဝိတွာ, ကာဝိတွာန, ကာယိတုံ, ဧဝံ အဗျယပဒါနိ. 'कु' हा शब्द आणि ध्वनी या अर्थाचा धातू आहे. कोति, कवति, कायति - अशी कर्तृवाचक पदे होतात. कुय्यति, किय्यति - अशी कर्मवाचक पदे होतात. काननं, कब्बं, जातकं - अशी नामवाचक पदे होतात. कुत्वा, कुत्वान, कवित्वा, कवित्वान, कावित्वा, कावित्वान, कायितुं - अशी अव्यय पदे होतात. တတြ ကာနနန္တိ ဌိတမဇ္ဈနှိကသမယေ ကဝတိ သဒ္ဒံ ကရောတီတိ ကာနနံ, ဝနံ. တထာ ဟိ – त्यामध्ये 'कानन' म्हणजे - दुपारच्या वेळी जेथे पक्षी आवाज (कूजन) करतात, ते कानन म्हणजेच वन होय. जसे की - ‘‘ဌိတေ မဇ္ဈနှိကေ ကာလေ, သန္နိသီဝေသု ပက္ခိသု; သဏတေဝ ဗြဟာရညံ, သာ ရတိ ပဋိဘာတိ မ’’န္တိ “दुपारची वेळ झाली असता, पक्षी शांत बसले असताना, हे महाअरण्य जणू गुंजत आहे; हे दृश्य माझ्या मनाला आनंदित करते.” ဝုတ္တံ. အထ ဝါ ကောကိလမယူရာဒယော ကဝန္တိ သဒ္ဒါယန္တိ ကူဇန္တိ ဧတ္ထာတိ ကာနနံ. မနောဟရတာယ အဝဿံ ကုယျတိ ပဏ္ဍိတေဟီတိ ကဗ္ဗံ. ကာဝိယံ. ကာဝေယျံ. အညတြ ပန ကဝီနံ ဣဒန္တိ ကဗ္ဗန္တိ တဒ္ဓိတဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ကေစိ တု ကာဗျန္တိ သဒ္ဒရူပံ ဣစ္ဆန္တိ, န တံ ပါဝစနေ ပမာဏံ သက္ကဋဘာသာဘာဝတော. သက္ကဋဘာသာတောပိ ဟိ အာစရိယာ နယံ ဂဏှန္တိ. ဇာတံ ဘူတံ အတီတံ ဘဂဝတော စရိယံ, တံ ကီယတိ ကထီယတိ ဧတေနာတိ ဇာတကံ. ဇာတကပါဠိ ဟိ ဣဓ ‘‘ဇာတက’’န္တိ ဝုတ္တာ. အညတြ ပန ဇာတံ ဧဝ ဇာတကန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ဇာတကသဒ္ဒေါ ဒေသနာယမ္ပိ ဝတ္တတိ ‘‘ဣတိဝုတ္တကံ ဇာတကံ အဗ္ဘုတဓမ္မ’’န္တိအာဒီသု. ဇာတိယမ္ပိ ဝတ္တတိ ‘‘ဇာတကံ သမောဓာနေသီ’’တိအာဒီသု. असे म्हटले आहे. किंवा कोकिळा, मोर इत्यादी पक्षी जेथे आवाज करतात, कूजन करतात, ते 'कानन' होय. मनोहर असल्यामुळे पंडितांकडून ज्याची प्रशंसा केली जाते, ते 'कब्बं' (काव्य) होय. यालाच कावियं किंवा कावेय्यं असेही म्हणतात. इतर ठिकाणी कवींचे ते 'कब्बं' (काव्य) असा तद्धित प्रत्ययानुसार अर्थ घ्यावा. काही लोक 'काव्य' (काब्ब्य) असे शब्दरूप मानतात, परंतु ते बुद्धवचनात प्रमाण मानले जात नाही, कारण ती संस्कृत भाषा नाही. आचार्य देखील संस्कृत भाषेतूनच हा नियम घेतात. भगवंतांचे जे भूतकाळातील चरित्र घडले, ज्याचे याद्वारे कथन केले जाते, ते 'जातक' होय. येथे 'जातकपाळी'लाच 'जातक' म्हटले आहे. इतर ठिकाणी 'जात' म्हणजेच 'जातक' असे समजावे. म्हणूनच 'जातक' हा शब्द उपदेशाच्या अर्थातही वापरला जातो, जसे की 'इतिवृत्तक, जातक, अद्भुतधम्म' इत्यादींमध्ये. तसेच हा शब्द जन्माच्या अर्थातही वापरला जातो, जसे की 'जातकाचे संधान केले' इत्यादींमध्ये. ပက္က နီစဂတိယံ. နီစဂမနံ နာမ ဟီနဂမနံ ဟီနပ္ပဝတ္တိ ဝါ. နီစသဒ္ဒေါ ဟိ ဟီနဝါစကော ‘‘နီစေ ကုလေ ပစ္စာဇာတော’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. ပက္ကတိ ကြိယာပဒမေတ္ထ ဒိဿတိ, န နာမိကပဒံ. ယတ္ထ ယတ္ထ နာမိကပဒံ န ဒိဿတိ, တတ္ထ တတ္ထ နာမိကပဒံ ဥပပရိက္ခိတွာ [Pg.11] ဂဟေတဗ္ဗံ. ကြိယာပဒမေဝ ဟိ ဒုဒ္ဒသံ, ကြိယာပဒေ ဝိဇ္ဇမာနေ နာမိကပဒံ နတ္ထီတိ န ဝတ္တဗ္ဗံ, တသ္မာ အန္တမသော ‘‘ပက္ကနံ, တကနံ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ ဘာဝဝါစကာနိ နာမိကပဒါနိ သဗ္ဗာသု ဓာတူသု ယထာရဟံ လဗ္ဘန္တီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. 'पक्क' हा धातू खालच्या दिशेने जाणे (नीचगती) या अर्थात आहे. नीचगमन म्हणजे हीन गमन किंवा हीन प्रवृत्ती होय. 'नीच' हा शब्द हीन या अर्थाचा वाचक आहे, जसे की 'नीच कुळात जन्मलेला' या वाक्यात. येथे 'पक्कति' हे क्रियापद दिसते, नामवाचक पद दिसत नाही. जेथे जेथे नामवाचक पद दिसत नाही, तेथे तेथे नामवाचक पदाचा शोध घेऊन ते ग्रहण करावे. क्रियापद ओळखणे कठीण असते; क्रियापद असताना नामवाचक पद नाही असे म्हणता येत नाही. म्हणून शेवटी 'पक्कनं, तकनं' इत्यादी भाववाचक नामे सर्व धातूंमध्ये योग्यतेनुसार मिळतात, असे समजावे. တက ဟသနေ. ဟသနံ ဟာသော. တကတိ. 'तक' हा धातू हसणे या अर्थात आहे. हसणे म्हणजे हास्य. 'तकटि' (तो हसतो). တကိ ကိစ္ဆဇီဝနေ. ကိစ္ဆဇီဝနံ ကသိရဇီဝနံ. တင်္ကတိ. အာတင်္ကတိ. အာတင်္ကော. အာတင်္ကောတိ ကိစ္ဆဇီဝိတကရော ရောဂေါ, တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘အပ္ပာဗာဓံ အပ္ပာတင်္က’’န္တိ ဣမသ္မိံ ပါဠိပ္ပဒေသေ ဣတိ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏေသုံ ‘‘အာဗာဓောတိ ဝိသဘာဂဝေဒနာ ဝုစ္စတိ, ယာ ဧကဒေသေ ဥပ္ပဇ္ဇိတွာ သကလသရီရံ အယပဋ္ဋေန ဗန္ဓိတွာ ဝိယ ဂဏှာတိ. အာတင်္ကောတိ ကိစ္ဆဇီဝိတကရော ရောဂေါ. အထ ဝါ ယာပေတဗ္ဗရောဂေါ အာတင်္ကော, ဣတရော အာဗာဓော. ခုဒ္ဒကော ဝါ ရောဂေါ အာတင်္ကော, ဗလဝါ အာဗာဓော. ကေစိ ပန ‘အဇ္ဈတ္တသမုဋ္ဌာနော အာဗာဓော, ဗဟိဒ္ဓါသမုဋ္ဌာနော အာတင်္ကော’တိ ဝဒန္တီ’’တိ. 'तकि' (धातू) कष्टदायक जीवनाच्या (किच्छजीवन) अर्थात आहे. कष्टदायक जीवन म्हणजेच कठीण जीवन (कसिरजीवन). तङ्कति, आतङ्कति, आतङ्को. 'आतङ्क' (आतंक) म्हणजे कष्टदायक जीवन निर्माण करणारा रोग. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी "अप्पाबाधं अप्पातङ्कं" (अल्प आजार व अल्प त्रास) या पाळी-प्रदेशात (पाठात) असा अर्थ स्पष्ट केला आहे – "आबाध (आजार) म्हणजे विषम वेदना (विसभागवेदना) म्हटली जाते, जी शरीराच्या एका भागात उत्पन्न होऊन संपूर्ण शरीराला जणू लोखंडी पट्ट्याने बांधल्यासारखे जखडून टाकते. आतंक म्हणजे कष्टदायक जीवन निर्माण करणारा रोग. किंवा, जो रोग सहन करत जगता येतो तो 'आतंक' आणि दुसरा तो 'आबाध'. किंवा लहान रोग म्हणजे 'आतंक' आणि तीव्र रोग म्हणजे 'आबाध'. परंतु काही लोक म्हणतात की, 'अज्झत्त-समुट्ठाण (अंतर्गत कारणांमुळे उत्पन्न होणारा) तो आबाध आणि बाह्य-समुत्थान (बाहेरून उत्पन्न होणारा) तो आतंक' होय." အာတင်္ကော အာမယော ရောဂေါ,ဗျာဓာ’ဗာဓော ဂဒေါ ရုဇာ; အကလ္လဉ္စေဝ ဂေလညံ,နာမံ ရောဂါဘိဓာနကံ. आतंक, आमय, रोग, व्याधी, आबाध, gद, रुजा, अकल्ल आणि गेलञ्ञ (आजारीपण) – ही सर्व रोगाचीच नावे (समानार्थी शब्द) आहेत. သုက ဂတိယံ. သောကတိ, သုကော, သုကီ. တတြ သုကောတိ သုဝေါ. သောကတိ မနာပေန ဂမနေန ဂစ္ဆတီတိ သုကော. တဿ ဘရိယာ သုကီ. 'सुक' (धातू) गमन (गती) अर्थात आहे. सोकति, सुको, सुकी. तेथे 'सुको' म्हणजे पोपट (सुव). जो मनपसंत (मनोहर) गतीने जातो तो 'सुको' (पोपट) होय. त्याची मादी (पत्नी) ती 'सुकी' होय. ဗုက္က ဘဿနေ. ဣဓ ဘဿနံ နာမ သုနခဘဿနံ အဓိပ္ပေတံ ‘‘သုနခေါ ဘဿိတွာ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ, န ‘‘အာဝါသော ဂေါစရံ [Pg.12] ဘဿ’’န္တိအာဒီသု ဝိယ. ဝစနသင်္ခါတံ ဘဿနံ, ဗုက္ကတိ သာ. बुक्क (धातू) भुंकण्याच्या अर्थात आहे. येथे 'भस्सन' (bhassana) म्हणजे कुत्र्याचे भुंकणे अभिप्रेत आहे, जसे 'सुनखो भस्सित्वा' (कुत्रा भुंकून) यामध्ये आहे; 'आवासो गोचरं भस्स' (आवास किंवा गोचर नष्ट होणे) इत्यादींसारखे नाही. वाणीशी संबंधित जे भुंकणे आहे, त्याला 'बुक्कति' असे म्हणतात. ဓက ပဋိဃာတေ ဂတိယဉ္စ. ပဋိဃာတော ပဋိဟနနံ. ဓကတိ. धक (धातू) प्रतिघात (आघात/विरोध) आणि गती (गमन) या अर्थात आहे. प्रतिघात म्हणजे प्रतिहनन (आघात करणे). 'धकति' (असे रूप बनते). စက တိတ္တိပဋိဃာတေသု. တိတ္တိ တပ္ပနံ, ပဋိဃာတံ ပဋိဟနနံဝ. စကတိ. चक (धातू) तृप्ती आणि प्रतिघात या अर्थांमध्ये आहे. तृप्ती म्हणजे तृप्त होणे (तप्पण) आणि प्रतिघात म्हणजे प्रतिहननच (आघात करणेच) होय. 'चकति' (असे रूप बनते). အက ကုဋိလဂတိယံ. အကတိ. ဧတာ ကုအာဒိကာ အကပရိယန္တာ ဓာတုယော ပရဿ ဘာသာတိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. တေသံ မတေ ဧတာ ‘‘တိ အန္တိ, တု အန္တု’’ ဣစ္စာဒီနံယေဝ ဝိသယော. ပါဠိယံ ပန နိယမော နတ္ထိ, တသ္မာ န တံ ဣဓ ပမာဏံ. अक (धातू) कुटिल गती (वाकडी चाल) या अर्थात आहे. 'अकति' (असे रूप बनते). व्याकरणकार म्हणतात की, 'कु' पासून सुरू होणारे आणि 'अक' पर्यंतचे हे धातू परस्मैपद (परस्सपद) आहेत. त्यांच्या मते, हे केवळ 'ति, अन्ति, तु, अन्तु' इत्यादी प्रत्ययांचेच विषय आहेत. परंतु पाळिमध्ये असा नियम नाही, म्हणून ते येथे प्रमाण मानले जात नाही. ဣ အဇ္ဈယနေ. အဇ္ဈယနံ ဥစ္စာရဏံ သိက္ခနံ ဝါ, အယတိ, အဓီယတိ, အဇ္ဈယတိ, အဓီတေ, အဇ္ဈေနံ, အဇ္ဈာယကော. ဒိဗ္ဗံ အဓီယသေ မာယံ. အဓီယန္တိ မဟာရာဇ, ဒိဗ္ဗမာယိဓ ပဏ္ဍိတာ. အဇ္ဈေနမရိယာ ပထဝိံ ဇနိန္ဒာ. တတ္ထ အဇ္ဈာယကောတိ အဇ္ဈယတီတိ အဇ္ဈာယကော, မန္တေ ပရိဝတ္တေတီတိ အတ္ထော. इ (धातू) अध्ययनाच्या अर्थात आहे. अध्ययन म्हणजे उच्चारण किंवा शिकणे होय. 'अयति', 'अधीयति', 'अज्झयति', 'अधीते', 'अज्झेनं', 'अज्झायको' (अशी रूपे बनतात). 'दिब्बं अधीयसे मायं' (तू दिव्य मायेचे अध्ययन करतोस). 'अधीयन्ति महाराज, दिब्बमायिध पण्डिता' (हे महाराज, येथे पंडित लोक दिव्य मायेचे अध्ययन करतात). 'अज्झेनमरिया पथविं जनिन्दा' (अध्ययनाने आर्य पृथ्वीवर राजे होतात). तेथे 'अज्झायको' म्हणजे जो अध्ययन करतो तो 'अज्झायको', म्हणजेच जो मंत्रांचे आवर्तन करतो असा अर्थ आहे. ဥ သဒ္ဒေ. အဝတိ, အဝန္တိ. အဝသိ. ဧတ္ထ ‘‘ယော အာတုမာနံ သယမေဝ ပါဝါ’’တိ ပါဠိ ပပုဗ္ဗဿ ဥဓာတုဿ ပယောဂေါတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ပပုဗ္ဗဿ ဝဒဓာတုဿ ဒကာရလောပပ္ပယောဂေါတိပိ ဝတ္တုံ ယုဇ္ဇတိ. उ (धातू) शब्दाच्या (ध्वनीच्या) अर्थात आहे. 'अवति', 'अवन्ति', 'अवसि' (अशी रूपे बनतात). येथे 'यो आतुमानं सयमेव पावा' ही पाळि 'प' (प्र) उपसर्गपूर्वक 'उ' धातूचा प्रयोग आहे असे समजावे. किंवा 'प' उपसर्गपूर्वक 'वद्' धातूच्या 'द' काराचा लोप होऊन झालेला प्रयोग आहे असे म्हणणेही योग्य ठरेल. ဝင်္က ကောဋိလ္လေ. ဝင်္ကတိ. ဝင်္ကံ. ဝင်္ကသဒ္ဒေါ ဟိ ဝက္ကသဒ္ဒေန သမာနတ္ထော, ဝက္ကသဒ္ဒေါ စ ဝင်္ကသဒ္ဒေန. တထာ ဟိ – वङ्क (धातू) कुटिलतेच्या (वाकडेपणाच्या) अर्थात आहे. 'वङ्कति', 'वङ्कं' (अशी रूपे बनतात). कारण 'वङ्क' शब्द हा 'वक्क' शब्दाशी समान अर्थाचा आहे, आणि 'वक्क' शब्द हा 'वङ्क' शब्दाशी समान अर्थाचा आहे. तसेच - ‘‘ယံ နိဿိတာ ဇဂတိရုဟံ, သွာယံ အဂ္ဂိံ ပမုဉ္စတိ; ဒိသာ ဘဇထ ဝက္ကင်္ဂါ, ဇာတံ သရဏတော ဘယ’’န္တိ. 'ज्या वृक्षाचा आश्रय घेतला होता, तोच आता अग्नी बाहेर टाकत आहे; हे वक्र-अंग असलेल्या (पक्ष्यांनो), दिशांकडे निघून जा, कारण आश्रयापासूनच भय निर्माण झाले आहे.' ပါဠိ [Pg.13] ဒိဿတိ. အယံ ပန ဝက္ကသဒ္ဒေါ သက္ကဋဘာသံ ပတွာ ကကာရရကာရသညောဂက္ခရိကော ဘဝတိ, ဓာတုဘာဝေါ ပနဿ ပေါရာဏေဟိ န ဝုတ္တော, တသ္မာ ကြိယာပဒံ န ဒိဋ္ဌံ. ဣမဿ ပန ဝင်္ကသဒ္ဒဿ ‘‘ဝင်္က ကောဋိလ္လေ’’တိ ဓာတုဘာဝေါ ဝုတ္တော, ‘‘ဝင်္ကတီ’’တိ ကြိယာပဒဉ္စ, ပါဠိယံ တု ‘‘ဝင်္ကတီ’’တိ ကြိယာပဒံ န ဒိဋ္ဌံ, တထာ ဘာဝဝါစကော ဝင်္ကသဒ္ဒေါပိ. ဝါစ္စလိင်္ဂေါ ပန အနေကေသု ဌာနေသု ဒိဋ္ဌော. တတ္တ ဝင်္ကတီတိ ကြိယာပဒံ ပါဠိယံ အဝိဇ္ဇမာနမ္ပိ ဂဟေတဗ္ဗမေဝ နာထတီတိ ကြိယာပဒမိဝ. ဘာဝဝါစကဿ ပန ဝင်္ကသဒ္ဒဿ အတ္ထိတာ နတ္ထိတာ စ ပါဠိအာဒီသု ပုနပ္ပုနံ ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗာ. ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘ယဒိ ဘာဝဝါစကော ဝင်္ကသဒ္ဒေါ နတ္ထိ, ကထံ ‘အဋ္ဌဝင်္ကံ မဏိရတနံ ဥဠာရ’န္တိ ဧတ္ထ သမာသော’’တိ. ဧတ္ထ ပန အဋ္ဌသု ဌာနေသု ဝင်္ကံ အဋ္ဌဝင်္ကံ, န အဋ္ဌဝင်္ကာနိ ယဿာတိ. ဒဗ္ဗဝါစကော ဟိ ဝင်္ကသဒ္ဒေါ, န ဘာဝဝါစကောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. अशी पाळि (गाथा) दिसून येते. परंतु हा 'वक्क' शब्द संस्कृत भाषेत जाऊन 'क' आणि 'र' यांच्या संयोगाने युक्त अक्षर (वक्र) बनतो. प्राचीन आचार्यांनी याचा धातूभाव (धातू असणे) सांगितलेला नाही, म्हणून याचे क्रियापद आढळत नाही. परंतु या 'वङ्क' शब्दाचा 'वङ्क कोिटल्ले' असा धातूभाव आणि 'वङ्कति' असे क्रियापद सांगितले आहे. परंतु पाळिमध्ये 'वङ्कति' हे क्रियापद आढळत नाही, तसेच भाववाचक 'वङ्क' शब्दही आढळत नाही. विशेषण (वाच्चलिंग) म्हणून मात्र तो अनेक ठिकाणी आढळतो. तेथे 'वङ्कति' हे क्रियापद पाळिमध्ये नसले तरी, 'नाथति' या क्रियापदाप्रमाणे ते स्वीकारलेच पाहिजे. भाववाचक 'वङ्क' शब्दाचे अस्तित्व किंवा नास्तित्व पाळि इत्यादींमध्ये वारंवार तपासून पाहिले पाहिजे. येथे काही जण म्हणू शकतात की, 'जर भाववाचक वङ्क शब्द नाही, तर अट्ठवङ्कं मणिरतनं उळारं (आठ कोनांचे श्रेष्ठ मणिरत्न) यामध्ये समास कसा झाला?' येथे आठ ठिकाणी वक्र असणे म्हणजे 'अट्ठवङ्कं' होय, ज्याचे आठ वक्र आहेत असे नाही. कारण 'वङ्क' शब्द हा द्रव्यवाचक आहे, भाववाचक नाही, असे समजावे. ဝင်္ကံ ဝက္ကဉ္စ ကုဋိလံ, ဇိမှဉ္စ ရိမှမနုဇု; ဝင်္ကသဒ္ဒါဒယော ဧတေ, ဝါစ္စလိင်္ဂါ တိလိင်္ဂိကာ. वङ्क, वक्क, kuटिल, जिम्ह, रिम्ह आणि अनूजु (वाकडे) - हे 'वङ्क' इत्यादी शब्द विशेषण (वाच्चलिंग) असून तिन्ही लिंगांत चालणारे आहेत. အထ ဝါ ဝင်္ကသဒ္ဒေါယံ, ‘‘ဝင်္ကဃသ္တာ’’တိအာဒိသု; ဗဠိသေ ဂိရိဘေဒေ စ, ဝတ္တတေ သ ပုမာ တဒါ. किंवा हा 'वङ्क' शब्द 'वङ्कघस्ता' इत्यादींमध्ये गळ (मासे पकडण्याचा गळ) आणि पर्वताचा भेद (दरी) या अर्थांत वापरला जातो, तेव्हा तो पुल्लिंगी असतो. အယဉှိ ‘‘တေ’မေ ဇနာ ဝင်္ကဃသ္တာ သယန္တိ. ယထာပိ မစ္ဆော ဗဠိသံ, ဝင်္ကံ မံသေန ဆာဒိတံ. ဝင်္ကဃသ္တောဝ အမ္ဗုဇော’’တိအာဒီသု ဗဠိသေ ဝတ္တတိ. कारण 'ते'मे जना वङ्कघस्ता सयन्ति' (हे लोक गळाने गिळल्यासारखे पडले आहेत), 'यथापि मच्छो बळिसं, वङ्कं मंसेन छादितं' (ज्याप्रमाणे मासा मांसाने झाकलेल्या वाकड्या गळाला गिळतो), 'वङ्कघस्तोव अम्बुजो' (गळाने गिळलेल्या माशाप्रमाणे) इत्यादींमध्ये हा शब्द 'गळ' (बळिस) या अर्थात वापरला जातो. ဧတ္ထ သိယာ ‘‘နနု စ ဘော ‘ယထာပိ မစ္ဆော ဗဠိသံ, ဝင်္ကံ မံသေန ဆာဒိတ’န္တိ ဧတ္ထ ဝင်္ကသဒ္ဒေါ ဂုဏဝါစကော ဝိသေသနသဒေါ, ယေန ဗဠိသော ဝိသေသိတော, တေန ဝင်္ကံ ကုဋိလံ ဗဠိသန္တိ အတ္ထော ဝိညာယတီ’’တိ? တန္န, ဝင်္ကသဒ္ဒေ အဝုတ္တေပိ ဗဠိသသဘာဝဿ ဝင်္ကတ္တာ ကုဋိလတ္ထော ပါကဋောတိ နတ္ထိ ဝိသေသနသဒ္ဒေန [Pg.14] ပယောဇနံ. ဣဒံ ပန ‘‘ဗဠိသံ ဝင်္က’’န္တိ ဝစနံ ‘‘ဟတ္ထိ နာဂေါ. သရောရုဟံ ပဒုမံ. ဟတ္ထီ စ ကုဉ္ဇရော နာဂေါ’’တိအာဒိဝစနမိဝ ပရိယာယဝစနံ, တသ္မာ ‘‘ဝင်္က’’န္တိ ပဒဿ ‘‘ကုဋိလ’’န္တိ အတ္ထော န ဂဟေတဗ္ဗော. အထ ဝါ ယထာ ‘‘ယထာ အာရညကံ နာဂံ, ဒန္တိံ အနွေတိ ဟတ္ထိနီ’’တိ ဧတ္ထ နာဂသဒ္ဒဿ ဒန္တီသဒ္ဒဿ စ အညမညပရိယာ ယဝစနတ္တေပိ ဒန္တိန္တိ မနောရမဒန္တယုတ္တန္တိ အတ္ထော သံဝဏ္ဏိတော, တထာ ‘‘ဗဠိသံ ဝင်္က’’န္တိ ဣမေသမ္ပိ အညမညံ ပရိယာယဝစနတ္တေပိ ဝင်္ကန္တိ ကုဋိလန္တိ အတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော. ဧဝဉှိ သတိ အတ္ထော သာလရာဇာ ဝိယ သုဖုလ္လိတော ဟောတိ, ဒေသနာ စ ဝိလာသပ္ပတ္တာ, န ပန ‘‘ဝင်္ကံ ဗဠိသ’’န္တိ သဒ္ဒါနံ ဂုဏဂုဏီဝသေန သမာနာဓိကရဏဘာဝေါ ဣစ္ဆိတဗ္ဗော ‘‘ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ ဝေရဉ္ဇာယံ ဝိဟရတီ’’တိအာဒီသု ‘‘ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ’’တိ ဣမေသံ ဝိယ သမာနာဓိကရဏဘာဝဿ အနိစ္ဆိတဗ္ဗတ္တာ. န ဟိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု သမာနာဓိကရဏဘာဝေါ ပေါရာဏေဟိ အနုမတော. येथे अशी शंका येऊ शकते की, 'अहो, 'यथापि मच्छो बळिसं, वङ्कं मंसेन छादितं' यामध्ये 'वङ्क' शब्द हा गुणवाचक विशेषण शब्द आहे, ज्याने 'बळिस' (गळ) विशेषित केला आहे, त्यामुळे 'वङ्क' म्हणजे 'कुटिल (वाकडा) गळ' असा अर्थ समजला जातो का?' तसे नाही, कारण 'वङ्क' शब्द न वापरताही गळाचा स्वभावच वाकडा असल्याने कुटिल अर्थ स्पष्टच आहे, त्यामुळे विशेषण शब्दाची काही गरज नाही. परंतु हे 'बळिसं वङ्कं' असे म्हणणे 'हत्थी नागो' (हत्ती नाग), 'सरोरुहं पदुमं' (कमळ), 'हत्थी च कुञ्जरो नागो' इत्यादी शब्दांप्रमाणे समानार्थी (पर्यायवाचक) शब्द आहे. म्हणून 'वङ्क' या पदाचा अर्थ 'कुटिल' असा घेऊ नये. किंवा जसे 'यथा आरञ्ञकं नागं, दन्तिं अन्वेति हत्थिनी' (जशी हत्तीण अरण्यातील हत्तीच्या मागे जाते) येथे 'नाग' शब्द आणि 'दन्ती' शब्द हे एकमेकांचे समानार्थी असूनही 'दन्ती' म्हणजे 'मनोहर सुळे असलेला' असा अर्थ स्पष्ट केला आहे, तसेच 'बळिसं वङ्कं' हे एकमेकांचे समानार्थी शब्द असूनही 'वङ्क' म्हणजे 'कुटिल' (वाकडा) असा अर्थ सांगावा. असे केल्याने अर्थ हा बहरलेल्या शालवृक्षासारखा सुशोभित होतो आणि उपदेश (देशना) अधिक सुंदर वाटतो. परंतु 'वङ्क' आणि 'बळिस' या शब्दांचा गुण-गुणी भावाने सामानाधिकरण भाव मानू नये, जसे 'बुद्धो भगवा वेरञ्जायं विहरति' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'बुद्धो भगवा' या शब्दांचा सामानाधिकरण भाव मानणे अनपेक्षित आहे. कारण अशा ठिकाणी प्राचीन आचार्यांनी सामानाधिकरण भाव मान्य केलेला नाही. ‘‘ယတ္ထ ဧတာဒိသော သတ္ထာ, လောကေ အပ္ပဋိပုဂ္ဂလော; တထာဂတော ဗလပ္ပတ္တော, သမ္ဗုဒ္ဓေါ ပရိနိဗ္ဗုတော’’တိ, 'जिथे असे शास्ते, जे जगात अद्वितीय (अप्रतिपुद्गल) आहेत; तथागत, बलप्राप्त, सम्यक्संबुद्ध परिनिर्वाण पावले आहेत.' ‘‘ဗုဒ္ဓံ ဗုဒ္ဓံ နိခိလဝိသယံ သုဒ္ဓိယာ ယာဝ သုဒ္ဓိ’’န္တိ စ အာဒီသု ပန အနုမတော. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘ဧတာဒိသော’’တိ စ ‘‘အပ္ပဋိပုဂ္ဂလော’’တိ စ ‘‘တထာဂတော’’တိ စ ‘‘ဗလပ္ပတ္တော’’တိ စ ‘‘သမ္ဗုဒ္ဓေါ’’တိ စ ‘‘ပရိနိဗ္ဗုတော’’တိ စ ဣမာနိ ‘‘သတ္ထာ’’တိ အနေန ပဒေန သမာနာဓိကရဏာနိ. တထာ ‘‘ဗုဒ္ဓံ ဗုဒ္ဓ’’န္တိ ဒွိန္နံ ပဒါနံ ပစ္ဆိမံ ပုရိမေန သမာနာဓိကရဏံ ဘဝတိ. 'बुद्धं बुद्धं निखिलविसयं सुद्धिया याव सुद्धिं' इत्यादींमध्ये मात्र तो (सामानाधिकरण भाव) मान्य आहे. कारण येथे 'एतादिसो' (असे), 'अप्पटिपुग्गलो' (अद्वितीय), 'तथागतो' (तथागत), 'बलप्पत्तो' (बलप्राप्त), 'सम्बुद्धो' (संबुद्ध) आणि 'परिनिब्बुतो' (परिनिर्वृत) ही पदे 'सत्था' (शास्ता) या पदाशी सामानाधिकरण आहेत. तसेच 'बुद्धं बुद्धं' या दोन पदांमध्ये नंतरचे पद आधीच्या पदाशी सामानाधिकरण होते. ဣတိ ‘‘ယထာပိ မစ္ဆော ဗဠိသံ, ဝင်္ကံ မံသေန ဆာဒိတ’’န္တိ ဧတ္ထ ဝင်္ကသဒ္ဒေါ ဗဠိသဿာဘိဓာနန္တရံ, န ဂုဏဝါစကော. ဧဝံ ဝင်္ကသဒ္ဒေါ ဗဠိသေ ဝတ္တတိ. ‘‘ကင်္ကံ ဂစ္ဆာမ ပဗ္ဗတံ. ဒူရေ ဝင်္ကတပဗ္ဗတော’’တိအာဒီသု [Pg.15] ပန ဂိရိဝိသေသေ ဝတ္တတိ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဝင်္ကပဗ္ဗတော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ သုခုစ္စာရဏတ္ထံ နိရုတ္တိနယေန မဇ္ဈေ အနိမိတ္တံ တကာရာဂမံ ကတွာ ‘‘ဝင်္ကတပဗ္ဗတော’’တိ ဝုတ္တံ. အထ ဝါ ဝင်္ကောယေဝ ဝင်္ကတာ, ယထာ ဒေဝေါ ဧဝ ဒေဝတာ. ယထာ စ ဒိသာ ဧဝ ဒိသတာတိ, ဧဝံ တာပစ္စယဝသေန ဝင်္ကတာ စ သာ ပဗ္ဗတော စာတိ ‘‘ဝင်္ကတပဗ္ဗတော’’တိ ဝုတ္တံ, မဇ္ဈေ ရဿဝသေန စေတံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အထ ဝါ ဝင်္ကမဿ သဏ္ဌာနမတ္ထီတိ ဝင်္ကတောတိ မန္တုအတ္ထေ တပစ္စယော, ယထာ ပဗ္ဗမဿ အတ္ထီတိ ပဗ္ဗတောတိ. ဧဝံ ဝင်္ကတော စ သော ပဗ္ဗတော စာတိ ဝင်္ကတပဗ္ဗတော. ‘‘ဝင်္ကပဗ္ဗတော’’ ဣစ္စေဝ ဝါ ပဏ္ဏတ္တိ, ပါဒက္ခရပါရိပူရိယာ ပန ‘‘ဒူရေ ဝင်္ကတပဗ္ဗတော’’တိ ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. अशा प्रकारे, 'ज्याप्रमाणे मासा मांसाने झाकलेल्या वाकड्या गळाला (बाळिस)...' येथे 'वंक' (vaṅka) हा शब्द गळाचे (बाळिस) दुसरे नाव आहे, तो गुणवाचक नाही. अशा प्रकारे 'वंक' शब्द गळाच्या (बाळिस) अर्थात वापरला जातो. 'आम्ही कंक पर्वताकडे जात आहोत. दूर वंकत पर्वत आहे' इत्यादींमध्ये तो एका विशिष्ट पर्वताच्या अर्थात वापरला जातो. आणि येथे 'वंकपर्वत' असे म्हणायचे असताना, सुलभ उच्चारणासाठी निरुक्त पद्धतीनुसार मध्ये विनाकारण 'त' काराचा आगम करून 'वंकतपर्वत' असे म्हटले आहे. अथवा 'वंक' म्हणजेच 'वंकता', जसे 'देव' म्हणजेच 'देवता' आणि जसे 'दिसा' (दिशा) म्हणजेच 'दिसाता' (दिशाता), अशा प्रकारे 'ता' प्रत्ययाच्या प्रभावाने 'वंकता' आणि तो 'पर्वत' मिळून 'वंकतपर्वत' असे म्हटले आहे, आणि मध्ये र्हस्व स्वराच्या प्रभावाने हे समजले पाहिजे. अथवा ज्याचा आकार वक्र (वाकडा) आहे तो 'वंकत' - येथे 'मतुप्' अर्थात 'त' प्रत्यय आहे, जसे ज्याला पर्व (सांधे) आहेत तो 'पर्वत'. अशा प्रकारे जो 'वंकत' आहे आणि तो 'पर्वत' आहे तो 'वंकतपर्वत' होय. 'वंकपर्वत' अशीच ही संज्ञा (पण्णत्ति) आहे, परंतु गाथेचा चरण पूर्ण करण्यासाठी 'दूरे वंकतपब्बतो' असे म्हटले आहे, असे समजले पाहिजे. လောက ဒဿနေ. လောကတိ. လောကော. အာလောကောတိ အညာနိပိ ရူပါနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. စုရာဒိဂဏံ ပန ပတွာ ဣမိဿာ ‘‘လောကေတိ, လောကယတိ, ဩလောကေတိ, ဩလောကယတီ’’တိအာဒိနာ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. လောကောတိ တယော လောကာ သင်္ခါရလောကော သတ္တလောကော ဩကာသလောကောတိ. တတ္ထ ‘‘ဧကော လောကော, သဗ္ဗေ သတ္တာ အာဟာရဋ္ဌိတိကာ’’တိ အာဂတော သင်္ခါရော ဧဝ လောကော သင်္ခါရလောကော. သတ္တာ ဧဝ လောကော သတ္တလောကော. စက္ကဝါဠသင်္ခါတော ဩကာသော ဧဝ လောကော ဩကာသလောကော, ယော ‘‘ဘာဇနလောကော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. တေသု သင်္ခါရော လုဇ္ဇတီတိ လောကောတိ. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ ‘‘လုဇ္ဇတိ ပလုဇ္ဇတီတိ ခေါ ဘိက္ခု တသ္မာ လောကောတိ ဝုစ္စတီ’’တိ. လောကိယတိ ဧတ္ထ ပုညပါပံ တဗ္ဗိပါကော စာတိ သတ္တော လောကော. လောကိယတိ ဝိစိတ္တာကာရတော ဒိဿတီတိ စက္ကဝါဠသင်္ခါတော ဩကာသော လောကော. ယသ္မာ ပန လောကသဒ္ဒေါ သမူဟေပိ ဒိဿတိ, တသ္မာ လောကိယတိ သမုဒါယဝသေန [Pg.16] ပညာပိယတီတိ လောကော, သမူဟောတိ အယမ္ပိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အထ ဝါ လောကောတိ တယော လောကာ ကိလေသလောကော ဘဝလောကော ဣန္ဒြိယလောကောတိ. တေသံ သရူပံ စုရာဒိဂဏေ ကထေဿာမ ဗဟုဝိဓတဉ္စ. ဗဟိဒ္ဓါ ပန ကဝီဟိ ‘‘လောကော တု ဘုဝနေ ဇနေ’’တိ ဧတ္တကမေဝ ဝုတ္တံ. लोक् (loka) धातू पाहणे (दर्शन) या अर्थात आहे. लोकति (पाहतो). लोक (loko). आलोक (प्रकाश) इत्यादी इतर रूपेही ग्रहण करावीत. चुरादिगणात आल्यावर या धातूची 'लोकेति, लोकयति, ओलोकेति, ओलोकयति' इत्यादी रूपे होतात. लोक म्हणजे तीन लोक आहेत: संस्कारलोक (संखारलोक), सत्त्वलोक (सत्तलोक) आणि अवकाशलोक (ओकासलोक). त्यात 'एक लोक आहे, सर्व प्राणी आहारावर टिकून आहेत' या वचनात आलेला संस्कार (संखार) हाच लोक म्हणजे 'संस्कारलोक' होय. प्राणी (सत्त) हाच लोक म्हणजे 'सत्त्वलोक' होय. चक्रवाळ नावाचा अवकाश हाच लोक म्हणजे 'अवकाशलोक' होय, ज्याला 'भाजनलोक' (पात्रलोक) असेही म्हणतात. त्यांच्यामध्ये, संस्कार नष्ट होतो (लज्जति) म्हणून त्याला 'लोक' म्हणतात. कारण भगवंतांनी असे म्हटले आहे की, 'हे भिक्खू, जे नष्ट होते, विरघळते (लुज्जति पलुज्जति), म्हणूनच त्याला लोक असे म्हटले जाते.' येथे ज्याच्याद्वारे पुण्य-पाप आणि त्याचा विपाक पाहिला जातो, तो प्राणी म्हणजे 'सत्त्वलोक' होय. जो विविध रूपांनी पाहिला जातो किंवा दिसतो, तो चक्रवाळ नावाचा अवकाश म्हणजे 'अवकाशलोक' होय. परंतु, ज्याअर्थी 'लोक' शब्द समूहाच्या अर्थातही आढळतो, त्याअर्थी जो समुदाय रूपाने जाणला जातो तो 'लोक' (समूह) हा देखील अर्थ ग्रहण केला पाहिजे. अथवा लोक म्हणजे तीन लोक आहेत: क्लेशलोक (किलेसलोक), भवलोक आणि इंद्रियलोक. त्यांचे स्वरूप आणि विविध प्रकार आम्ही चुरादिगणात सांगू. परंतु बाहेरील कवींनी 'लोक म्हणजे भुवन (विश्व) आणि जन (लोक)' एवढेच म्हटले आहे. သိလောက သံဃာတေ. သံဃာတော ပိဏ္ဍနံ. သိလောကတိ, သိလောကော, သိလောကမနုကဿာမိ. အက္ခရပဒနိယမိတော ဝစနသံဃာတော သိလောကော. သော ပဇ္ဇန္တိ ဝုစ္စတိ, တထာ ဟိ ‘‘သိလောကော ယသဿိ ပဇ္ဇေ’’တိ ကဝယော ဝဒန္တိ. सिलोक् (siloka) धातू एकत्र करणे (संघात/पिंडण) या अर्थात आहे. संघात म्हणजे पिंडण (एकत्र करणे). सिलोकति, सिलोक, 'सिलोकमनुकस्सामि' (मी श्लोकाचे अनुकरण करीन). अक्षर आणि पदांनी नियमबद्ध असलेला शब्दांचा समूह म्हणजे 'सिलोक' (श्लोक) होय. त्याला 'पज्ज' (पद्य) असेही म्हणतात, म्हणूनच कवी म्हणतात की 'सिलोक म्हणजे यशस्वी पद्य होय'. ဒေက ဓေက သဒ္ဒုဿာဟေသု. သဒ္ဒေါ ရဝေါ, ဥဿာဟော ဝါယာမော. ဒေကတိ. ဓေကတိ. देक् (deka) आणि धेक् (dheka) हे धातू आवाज (शब्द) आणि उत्साह (प्रयत्न) या अर्थात आहेत. शब्द म्हणजे आवाज (रव), आणि उत्साह म्हणजे प्रयत्न (वायाम). देकति. धेकति. ရေက သကိ သင်္ကာယံ. ရေကတိ. သင်္ကတိ, တသ္မိံ မေ သင်္ကတေ မနော. သင်္ကာ. रेक् (reka) आणि सक् (saki) हे धातू शंका (संका) घेण्याच्या अर्थात आहेत. रेकति. संकति (शंका घेतो), 'त्याच्याविषयी माझे मन शंका घेते' (तस्मिं मे संकते मनो). संका (शंका). အကိ လက္ခဏေ. အင်္ကတိ, အင်္ကော, သသင်္ကော. अक् (aki) धातू चिन्हांकित करणे (लक्षण) या अर्थात आहे. अंकति (चिन्हांकित करतो), अंक (चिन्ह/मांडी), ससंक (शशंक - चंद्राचे नाव). မကိ မဏ္ဍနေ. မဏ္ဍနံ ဘူသနံ, မင်္ကတိ. मक् (maki) धातू सुशोभित करणे (मंडन) या अर्थात आहे. मंडन म्हणजे विभूषण. मंकति (सुशोभित करतो). ကတ လောလိယေ. လောလဘာဝေါ လောလိယံ ယထာ ဒက္ခိယံ. ကကတိ, ကာကော, ကာကီ. ဧတ္ထ ‘‘ကာကော, ဓင်္ကော, ဝါယသော, ဗလိ, ဘောဇိ, အရိဋ္ဌော’’တိ ဣမာနိ ကာကာဘိဓာနာနိ. कत् (kata) धातू चंचलतेच्या (लोलिय) अर्थात आहे. लोलभाव म्हणजे लोलिय (चंचलता), जसे 'दक्खिय' (दक्षता). ककति, काक (कावळा), काकी (कावळीण). येथे 'काक, धंक, वायस, बलिभोजी, अरिट्ठ' ही कावळ्याची नावे आहेत. ကုက ဝက အာဒါနေ. ကုကတိ, ဝကတိ, ကောကော, ဝကော. ဧတ္ထ ကောကောတိ အရညသုနခေါ. ဝကောတိ ခုဒ္ဒကဝနဒီပိကော, ဗျဂ္ဃောတိပိ ဝဒန္တိ. कुक् (kuka) आणि वक् (vaka) हे धातू ग्रहण करणे (आदान) या अर्थात आहेत. कुकति, वकति, कोक, वक. येथे 'कोक' म्हणजे जंगली कुत्रा (अरण्यशुनक). आणि 'वक' म्हणजे लहान वन-चित्ता (खुद्दकवनदीपिक), काही जण याला वाघ (ब्यग्ध) असेही म्हणतात. ဝက ဒိတ္တိယံ ပဋိဃာတေ စ. ဒိတ္တိ သောဘာ, ဝကတိ. वक् (vaka) धातू चमकणे (दीप्ति) आणि प्रतिकार करणे (प्रतिघात) या अर्थात आहे. दीप्ति म्हणजे शोभा. वकति. ကကိ [Pg.17] ဝကိ သက္က တိက ဋိက သေက ဂတျတ္ထာ. ကင်္ကတိ, ဝင်္ကတိ, သက္ကတိ, နိသက္ကတိ, ပရိသက္ကတိ, ဩသက္ကတိ, ဝဓာယ ပရိသက္ကနံ. ဗိဠာရနိသက္ကမတ္တမ္ပိ. တေကတိ, ဋေကတိ, ဋီကာ သေကတိ. ဧတ္ထ ဋီကာတိ ဋိကိယတိ ဇာနိယတိ သံဝဏ္ဏနာယ အတ္ထော ဧတာယာတိ ဋီကာ. ဧတာ ဣဓာတုအာဒိကာ သေကပရိယန္တာ ဓာတုယော ‘‘အတ္တနောဘာသာ’’တိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. တေသံ မတေ ဧတာ ‘‘တေ အန္တေ, တံ အန္တံ’’ဣစ္စာဒီနံယေဝ ဝိသယော, ပါဝစနေ ပန နိယမော နတ္ထိ. कक् (kaki), वक् (vaki), सक्क (sakka), तिक (tika), टिक (ṭika), सेक् (seka) हे धातू गतीच्या अर्थात आहेत. कंकति, वंकति, सक्कति, निसक्कति, परिसक्कति, ओसक्कति, 'वधाय परिसक्कनं' (वधासाठी फिरणे). 'बिळारनिसक्कमत्तम्पि' (मांजराच्या सरकण्याइतके देखील). तेकति, टेकति, टीका, सेकति. येथे 'टीका' म्हणजे - जिच्याद्वारे स्पष्टीकरणाचा (संवण्णना) अर्थ जाणला जातो (टिकियति जानियति) ती 'टीका' होय. व्याकरणतज्ज्ञ (सद्दसत्थविदू) म्हणतात की, या 'इ' धातूपासून सुरू होऊन 'सेक' पर्यंत संपणाऱ्या धातू 'आत्मनेपदी' (अत्तनोभासा) आहेत. त्यांच्या मते, या धातू केवळ 'ते, अन्ते, तं, अन्तम्' इत्यादी प्रत्ययांचेच विषय आहेत, परंतु बुद्धवचनात (पावचन) असा कोणताही नियम नाही. ဟိက္က အဗျတ္တသဒ္ဒေ. အဗျတ္တသဒ္ဒေါ အဝိဘာဝိတတ္ထသဒ္ဒေါ နိရတ္ထကသဒ္ဒေါ စ. ဟိက္ကတိ, ဟိက္ကတေ. ဣမံ ‘‘ဥဘယတောဘာသာ’’တိ ဝဒန္တိ. ဣဒံ တု ပါဝစနေန သံသန္ဒတိ. ပရဿတ္တနောဘာသာနဉှိ ဓာတူနံ ‘‘ဘဝတိ, ဘဝတေ, ဗာဓတေ, ဗာဓတီ’’တိအာဒိနာ ယေဘုယျေန ဒွိဓာ ဒွိဓာ ရူပါနိ သာသနေ ဒိဿန္တိ. हिक्क् (hikka) धातू अस्पष्ट आवाजाच्या (अव्यक्तशब्द) अर्थात आहे. अव्यक्तशब्द म्हणजे जिचा अर्थ स्पष्ट होत नाही असा शब्द किंवा निरर्थक शब्द. हिक्कति, हिक्कते. याला 'उभयपदी' (उभयतोभासा) म्हणतात. हे मात्र बुद्धवचनाशी (पावचन) सुसंगत आहे. कारण परस्मैपद आणि आत्मनेपद (परस्स-अत्तनोभास) असणाऱ्या धातूंची 'भवति, bhavate, बाधते, बाधति' इत्यादी प्रकारे बहुतांश करून दोन्ही प्रकारची रूपे शासनात (बुद्धशासनात) आढळतात. ဣမာနိ ကကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ही 'क'कारान्त धातूंची रूपे आहेत. ခကာရန္တဓာတု 'ख'कारान्त धातू. ခါ ပကထနေ ချာ စ. ပကထနံ အာစိက္ခနံ ဒေသနံ ဝါ. ခါတိ, သင်္ခါတိ. အာပုဗ္ဗတ္တေ ဝိသဒိသဘာဝေန ခါတျက္ခရဿ ဒွိတ္တံ, အာကာရဿ စ သညောဂပုဗ္ဗတ္တာ ရဿတ္တံ, အက္ခာတိ. အက္ခာသိ ပုရိသုတ္တမော. အက္ခေယျံ တေ အဟံ အယျေ. ဓမ္မော သင်္ခါယတိ. အက္ခာယတိ. အတြ ပန ကကာရလောပေါ. သွာခါတော ဘဂဝတာ ဓမ္မော. သင်္ခါတော. အက္ခာတော. အက္ခာတာရော တထာဂတာ. သင်္ခါတာ သဗ္ဗဓမ္မာနံ ဝိဓုရော. သင်္ခါ, ပဋိသင်္ခါ. ကြိယံ အာကျာတိ ကထေတီတိ အာချာတံ. ကေစိ [Pg.18] ပန ‘‘သွာခါတော’’တိ စ ‘‘သွာက္ချာတော’’တိ စ ‘‘သွာချာတော’’တိ စ ပဒမိစ္ဆန္တိ. တတ္ထ ပစ္ဆိမာနိ သက္ကဋဘာသာတော နယံ ဂဟေတွာ ဝုတ္တာနိ, ဣတရံ ယထာဌိတရူပနိပ္ဖတ္တိဝသေန, အတော ယထာဒဿိတပဒါနိယေဝ ပသတ္ထတရာနိ. တတ္ထ သင်္ခါသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော နီယတေ – သင်္ခါသဒ္ဒေါ ဉာဏကောဋ္ဌာသပညတ္တိဂဏနာသု ဒိဿတိ. ‘‘သင်္ခါယေကံ ပဋိသေဝတီ’’တိအာဒီသု ဟိ ဉာဏေ ဒိဿတိ. ‘‘ပပဉ္စသညာသင်္ခါ သမုဒါစရန္တီ’’တိအာဒီသု ကောဋ္ဌာသေ. ‘‘တေသံ တေသံ ဓမ္မာနံ သင်္ခါ သမညာ’’တိအာဒီသု ပညတ္တိယံ. ‘‘န သုကရံ သင်္ခါတု’’န္တိအာဒီသု ဂဏနာယံ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – खा (khā) आणि ख्या (khyā) हे धातू प्रकथन (स्पष्ट सांगणे) या अर्थात आहेत. प्रकथन म्हणजे सांगणे (आचिक्खण) किंवा उपदेश करणे (देसना). खाति, संखाति. 'आ' उपसर्ग लागल्यावर विसदृश भावामुळे 'खा' या अक्षराचे द्वित्व होते, आणि संयोगाच्या पूर्वी असल्यामुळे 'आ' कार र्हस्व होतो, ज्यामुळे 'अक्खाति' (अक्खाति) रूप बनते. 'अक्खासि पुरिसुत्तमो' (पुरुषोत्तमाने सांगितले). 'अक्खेय्यं ते अहं अय्ये' (हे आर्ये, मी तुला सांगेन). धम्मो संखायति. अक्खायति. येथे मात्र 'क' काराचा लोप होतो. 'स्वाक्खातो भगवता धम्मो' (भगवंतांनी धर्म सुविख्यात/सुस्पष्ट सांगितला आहे). संखातो. अक्खातो. 'अक्खातारो तथागता' (तथागत हे केवळ मार्ग सांगणारे आहेत). 'संखाता सब्बधम्मानं विधुरो' (सर्व धर्मांचे योग्य प्रकारे आकलन करणारा विद्वान). संखा (संख्या/प्रज्ञा), पटिसंखा (प्रतिसंख्या/विचारपूर्वक). जे क्रियेचे कथन करते (आक्याति कथेति) ते 'आख्यात' (क्रियापद) होय. काही जण 'स्वाखातो', 'स्वाक्ख्यातो' आणि 'स्वाख्यातो' अशी पदे इच्छितात. त्यात नंतरची दोन पदे संस्कृत भाषेचा (सक्कठभासा) नियम घेऊन सांगितली आहेत, तर पहिले पद मूळ पाली भाषेच्या रूपसिद्धीनुसार आहे; म्हणून वर दर्शविलेली पदेच अधिक प्रशस्त आहेत. येथे 'संखा' (saṅkhā) शब्दाचा अर्थ स्पष्ट केला जात आहे - 'संखा' शब्द ज्ञान, विभाग (कोठ्ठास), प्रज्ञप्ती (पण्णत्ति) आणि गणना या अर्थांमध्ये आढळतो. 'संखायेकं पटिसेवति' (विचारपूर्वक एकाचे सेवन करतो) इत्यादींमध्ये तो 'ज्ञान' या अर्थात आढळतो. 'पपञ्चसञ्ञासंखा समुदाचरन्ति' (प्रपंच-संज्ञांचे विभाग उद्भवतात) इत्यादींमध्ये तो 'विभाग' (कोठ्ठास) या अर्थात आढळतो. 'तेसं तेसं धम्मानं संखा समञ्ञा' (त्या त्या धर्मांची संज्ञा व नाव) इत्यादींमध्ये तो 'प्रज्ञप्ती' (पण्णत्ति) या अर्थात आढळतो. 'न सुकरं संखातुं' (मोजणे सोपे नाही) इत्यादींमध्ये तो 'गणना' या अर्थात आढळतो. याविषयी असे म्हटले आहे - ‘‘ဉာဏပညတ္တိကောဋ္ဌာသ-ဂဏနာသု ပဒိဿတိ; သင်္ခါသဒ္ဒေါတိ ဒီပေယျ, ဓမ္မဒီပဿ သာသနေ’’တိ. 'संखा' हा शब्द ज्ञान, प्रज्ञप्ती, विभाग आणि गणना या अर्थांमध्ये आढळतो; धर्मदीप असलेल्या भगवंतांच्या शासनात असा याचा अर्थ स्पष्ट करावा. ခိ ခယေ. ခိယနဓမ္မံ ခီယတိ. သာသနာနုရူပေန သရေ ဣကာရဿ ဣယျာဒေသော, ခိယျတိ. ‘‘ခယော, ခံ’’ ဣစ္စပိ ရူပါနိ ဉေယျာနိ. တတ္ထ ခယောတိ ခိယနံ ခယော. အထ ဝါ ခိယန္တိ ကိလေသာ ဧတ္ထာတိ ခယော, မဂ္ဂနိဗ္ဗာနာနိ. ခယသင်္ခါတေန မဂ္ဂေန ပါပုဏိယတ္တာ ဖလမ္ပိ ခယော. ခန္တိ တုစ္ဆံ သုညံ ဝိဝိတ္တံ ရိတ္တံ, ခန္တိ ဝါ အာကာသော. 'खि' धातु क्षय (नाश) होण्याच्या अर्थात आहे. क्षय होण्याच्या स्वभावाचे जे आहे ते क्षीण होते (खीयति). व्याकरणाच्या नियमांनुसार स्वराच्या जागी 'इ' काराचा 'इय्य' आदेश होऊन 'खिय्यति' असे रूप बनते. 'खय', 'खं' इत्यादी रूपे जाणावीत. तेथे 'खय' म्हणजे क्षीण होणे (नाश). किंवा ज्याच्यामध्ये क्लेश क्षीण होतात तो 'खय' म्हणजे मार्ग आणि निर्वाण होय. क्षय संज्ञक मार्गाने प्राप्त होत असल्यामुळे 'फल' देखील 'खय' आहे. 'ख' म्हणजे तुच्छ, शून्य, विविक्त, रिक्त किंवा 'ख' म्हणजे आकाश होय. ခိ နိဝါသေ. ခီယတိ, ခိယျတိ ဝါ. သာသနာနုရူပေန ဣကာရဿ ဤယ ဣယျာဒေသော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အယံ ဒိဝါဒိဂဏေပိ ပက္ခိပိတဗ္ဗော. ခံ ခယံ. အဘိရမဏီယံ ရာဇက္ခယံ. တတ္ထ ခီယတီတိ နိဝသတိ. ခန္တိ စက္ခာဒိဣန္ဒြိယံ စက္ခုဝိညာဏာဒီနံ နိဝါသဋ္ဌေန. ခယန္တိ နိဝေသနံ. ရာဇက္ခယန္တိ ရညော နိဝေသနံ. အတြာယံ ပါဠိ – 'खि' धातु निवास करण्याच्या अर्थात आहे. 'खीयति' किंवा 'खिय्यति' असे रूप बनते. व्याकरणाच्या नियमांनुसार 'इ' काराचा 'ईय' आणि 'इय्य' आदेश समजावा. हा दिवादिगणात देखील समाविष्ट केला पाहिजे. 'खं' म्हणजे 'खय' (निवासस्थान). 'अभिरमणीय राजक्खय' (रमणीय राजवाडा). तेथे 'खीयति' म्हणजे निवास करतो. चक्षुविज्ञानादींचे निवासस्थान असल्यामुळे चक्षु इत्यादी इंद्रियांना 'ख' म्हणतात. 'खय' म्हणजे निवासस्थान. 'राजक्खय' म्हणजे राजाचे निवासस्थान. येथे ही पाळी (गाथा) आहे – ‘‘သစေ [Pg.19] စ အဇ္ဇ ဓာရေသိ, ကုမာရံ စာရုဒဿနံ; ကုသေန ဇာတခတ္တိယံ, သဝဏ္ဏမဏိမေခလံ; ပူဇိတာ ဉာတိသံဃေဟိ, န ဂစ္ဆသိ ယမက္ခယ’’န္တိ. “आणि जर आज तू या सुंदर दिसणाऱ्या कुमाराला धारण करशील, जो कुशापासून जन्मलेला क्षत्रिय आहे, ज्याने सुवर्ण आणि मण्यांची मेखला धारण केली आहे, तर नातेवाईकांच्या समूहाकडून पूजली जाऊन तू यमलोकाला (यमाच्या निवासाला) जाणार नाहीस.” တတ္ထ ယမက္ခယန္တိ ယမနိဝေသနံ. तेथे 'यमक्खय' म्हणजे यमाचे निवासस्थान. ခု သဒ္ဒေ. ခေါတိ ခဝတိ. 'खु' धातु शब्दाच्या (आवाजाच्या) अर्थात आहे. 'खु' पासून 'खवति' असे रूप बनते. ခေ ခါဒနသတ္တာသု. ခါယတိ. ဥန္ဒူရာ ခါယန္တိ. ဝိက္ခာယိတကံ. ဂေါခါယိတကံ. အဿိရီ ဝိယ ခါယတိ. ဒိသာပိ မေ န ပက္ခာယန္တိ. ဧတ္ထာဒိမှိ ကာယတီတိ ခါဒတိ. အထ ဝါ ဥပဋ္ဌာတိ ပညာယတိ. 'खे' धातु खाणे आणि अस्तित्व (किंवा दिसणे) या अर्थात आहे. 'खायति' असे रूप बनते. 'उंदूरा खायन्ति' (उंदीर खातात). 'विक्खायितकं' (प्राण्यांनी खाल्लेले शव). 'गोखायितकं' (गाईने खाल्लेले). 'अस्सिरी विय खायति' (शोभाहीन असल्यासारखे दिसते). 'दिसापि मे न पक्खायन्ति' (मला दिशा देखील स्पष्ट दिसत नाहीत). येथे सुरुवातीच्या उदाहरणांमध्ये 'खायति' म्हणजे खातो. किंवा उपस्थित होते, स्पष्ट दिसते (प्रकट होते). သုခ ဒုက္ခ တကြိယာယံ. တကြိယာတိ သုခဒုက္ခာနံ ဝေဒနာနံ ကြိယာ, သုခနံ ဒုက္ခနန္တိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. အကမ္မကာ ဣမေ ဓာတဝေါ. သုခတိ, ဒုက္ခတိ. သုခံ, ဒုက္ခံ. သုခိတော, ဒုက္ခိတော. သုခံ သာတံ ပီဏနံ, ဒုက္ခံ ဝိဃာတံ အဃံ ကိလေသော. တတ္ထ သုခန္တိ သုခယတီတိ သုခံ. ယဿုပ္ပဇ္ဇတိ, တံ သုခိတံ ကရောတီတိ အတ္ထော. ဒုက္ခန္တိ ဒုက္ခယတီတိ ဒုက္ခံ. ယဿုပ္ပဇ္ဇတိ, တံ ဒုက္ခိတံ ကရောတီတိ အတ္ထော. ဣမာနိ နိဗ္ဗစနာနိ ကာရိတဝသေန ဝုတ္တာနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ အဋ္ဌကထာယံ သုခဒုက္ခသဒ္ဒတ္ထံ ဝဒန္တေဟိ ဂရူဟိ သုခယတိ ဒုက္ခယတိသဒ္ဒါနံ ကမ္မတ္ထမာဒါယ ဝိဝရဏဿ ကတတ္တာ. တထာ ဟိ ‘‘သုခေတိ သုခယတိ, သုခါပေတိ သုခါပယတိ, ဒုက္ခေတိ ဒုက္ခယတိ, ဒုက္ခာပေတိ ဒုက္ခာပယတီ’’တိ ဣမာနိ တေသံ ကာရိတပဒရူပါနိ, အတ္တာနံ သုခေတိ ပီဏေတီတိ စ, သုခယတိ သုခံ, ဒုက္ခယတီတိ ဒုက္ခန္တိ စ, 'सुख' आणि 'दुःख' हे धातु 'तक्रिया' (त्यांच्या क्रियेच्या) अर्थात आहेत. 'तक्रिया' म्हणजे सुख आणि दुःख या वेदनांची क्रिया, म्हणजेच सुखी करणे आणि दुःखी करणे असे म्हटले आहे. हे धातु अकर्मक आहेत. 'सुखति', 'दुःखति' अशी रूपे बनतात. 'सुखं', 'दुःखं', 'सुखितो', 'दुःखितो'. सुख म्हणजे आनंद, तृप्ती; दुःख म्हणजे आघात, पीडा, क्लेश. तेथे 'सुख' म्हणजे जे सुखी करते ते सुख. ज्याला ते उत्पन्न होते, त्याला सुखी करते असा अर्थ आहे. 'दुःख' म्हणजे जे दुःखी करते ते दुःख. ज्याला ते उत्पन्न होते, त्याला दुःखी करते असा अर्थ आहे. ही व्युत्पत्ती कारित (प्रयोजक) रूपाच्या आधारे सांगितली आहे असे समजावे, कारण अट्ठकथेत सुख आणि दुःख या शब्दांचा अर्थ सांगणाऱ्या आचार्यांनी 'सुखयति' आणि 'दुःखयति' या शब्दांच्या कर्मार्थाला घेऊन स्पष्टीकरण केले आहे. तसेच “सुखेति, सुखयति, सुखापेति, सुखापयति, दुक्खेति, दुक्खयति, दुक्खापेति, duक्खापयति” ही त्यांची कारित (प्रयोजक) पदे आहेत, स्वतःला सुखी करतो, तृप्त करतो म्हणून 'सुखयति' ते सुख, आणि दुःखी करतो म्हणून 'दुक्खयति' ते दुःख, ‘‘သစေ [Pg.20] စ ကိမှိစိ ကာလေ,မရဏံ မေ ပုရေ သိယာ; ပုတ္တေ စ မေ ပပုတ္တေ စ,သုခါပေယျ မဟောသဓော’’တိ စ “आणि जर कधी काळी, माझा मृत्यू आधी झाला, तर महौषधाने माझ्या पुत्रांना आणि नातवंडांना सुखी करावे.” ပါဠိအာဒိဒဿနတော. သဒ္ဒသတ္ထေ ပန ဓာတုပါဌသင်္ခေပေ စ ဣမေ ဓာတဝေါ စုရာဒိဂဏေယေဝ ဝုတ္တာ. ‘‘သုခယတိ ဒုက္ခယတီ’’တိ စ အကာရိတာနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ ဣစ္ဆိတာနိ. မယံ တု တေသံ တဗ္ဗစနံ သုဒ္ဓကတ္တရိ စ တာနိ ပဒရူပါနိ န ဣစ္ဆာမ ပါဠိအာဒီဟိ ဝိရုဒ္ဓတ္တာ, တသ္မာယေဝ တေ ဣမသ္မိံ ဘူဝါဒိဂဏေ ဝုတ္တာ. အယဉှိ သုဒ္ဓကတ္တုဝိသယေ အသ္မာကံ ရုစိ ‘‘သုခတီတိ သုခိတော, ဒုက္ခတီတိ ဒုက္ခိတော’’တိ. पाळी इत्यादींमध्ये पाहिल्यामुळे. व्याकरणशास्त्रात आणि धातुपाठाच्या संक्षेपात हे धातु चुरादिगणातच सांगितले आहेत. आणि 'सुखयति', 'दुःखयति' ही अ-कारित (सामान्य) कर्तृवाचक पदे मानली गेली आहेत. परंतु आम्ही त्यांचे ते वचन आणि ती पदरूपे स्वीकारत नाही, कारण ते पाळी इत्यादींशी विरुद्ध आहे. म्हणूनच ते या भूवादिगणात सांगितले आहेत. कारण शुद्ध कर्त्याच्या विषयात आमची संमती अशी आहे की – 'सुखति' म्हणून 'सुखितो' आणि 'दुःखति' म्हणून 'दुःखितो'. နနု စ ဘော ‘‘သုခတိ ဒုက္ခတီ’’တိ ကြိယာပဒါနိ ဗုဒ္ဓဝစနေ န ဒိဿန္တီတိ? သစ္စံ, ဧဝံ သန္တေပိ အဋ္ဌကထာနယဝသေန ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ ဒိဿန္တိယေဝ နာမ. န ဟိ သဗ္ဗထာ သဗ္ဗေသံ ဓာတူနံ ရူပါနိ သာသနေ လောကေ ဝါ လဗ္ဘန္တိ, ဧကစ္စာနိ ပန လဗ္ဘန္တိ, ဧကစ္စာနိ န လဗ္ဘန္တိ. ဧဝံ သန္တေပိ နယဝသေန လဗ္ဘန္တိယေဝ. ‘‘ကပ္ပယဝှော ပတိဿတာ’’တိ ဟိ ဒိဋ္ဌေ ‘‘စရဝှော ဘုဉ္ဇဝှော’’တိအာဒီနိပိ နယဝသေန ဒိဋ္ဌာနိယေဝ နာမ. “अहो! 'सुखति' आणि 'दुःखति' ही क्रियापदे बुद्धवचनात दिसत नाहीत ना?” हे खरे आहे, तरीही अट्ठकथेच्या पद्धतीनुसार ग्रहण करायचे असल्यामुळे ती दिसतातच. कारण सर्व प्रकारे सर्व धातूंची रूपे शासनात (बुद्धवचनात) किंवा लोकात आढळत नाहीत; काही आढळतात, तर काही आढळत नाहीत. असे असले तरी नियमानुसार ती प्राप्त होतातच. कारण 'कप्पयव्हो पतिस्सता' हे रूप पाहिले असता, 'चरव्हो', 'भुञ्जव्हो' इत्यादी रूपे देखील नियमानुसार पाहिलेलीच मानली जातात. တတြ ပနာယံ နယော. ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂါဒီသု ဟိ ‘‘ဧကဒွိယောဇနမတ္တမ္ပိ အဒ္ဓါနံ ဂတဿ ဝါယော ကုပ္ပတိ, ဂတ္တာနိ ဒုက္ခန္တီ’’တိ ဧဝံ ဘူဝါဒိဂဏိကံ အကမ္မကံ သုဒ္ဓကတ္တုဝါစကံ ‘‘ဒုက္ခန္တီ’’တိ ကြိယာပဒံ ဒိဿတိ. တသ္မိံ ဒိဋ္ဌိယေဝ ‘‘သုခတိ, သုခန္တိ. သုခသိ, သုခထ. သုခါမိ, သုခါမာ’’တိအာဒီနိ စ ‘‘ဒုက္ခတိ, ဒုက္ခန္တိ. ဒုက္ခသိ, ဒုက္ခထာ’’တိအာဒီနိစ ဒိဋ္ဌာနိ နာမ ဟောန္တိ ဒိဋ္ဌေန အဒိဋ္ဌဿ တာဒိသဿ အနဝဇ္ဇဿ နယဿ ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ, တသ္မာ ‘‘သုခတီတိ သုခိတော, ဒုက္ခတီတိ ဒုက္ခိတော’’တိ ဘူဝါဒိနယော ဧဝ ဂဟေတဗ္ဗော, န ပန စုရာဒိနယော. အပရမ္ပေတ္ထ နိဗ္ဗစနံ, သုခံ သဉ္ဇာတံ [Pg.21] ဧတဿာတိ သုခိတော, သဉ္ဇာတသုခေါတိ အတ္ထော. ဧသ နယော ဒုက္ခိတောတိ ဧတ္ထာပိ. အထ ဝါ သုခေန ဣတော ပဝတ္တောတိ သုခိတော. ဧသ နယော ‘‘ဒုက္ခိတော’’တိ ဧတ္ထာပိ. ဒုလ္လဘာယံ နီတိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. तेथे हा नियम आहे. कारण विसुद्धिमग्ग इत्यादींमध्ये “एक-दोन योजन अंतर चालून गेल्यावर वायू कुपित होतो आणि शरीराचे अवयव दुखतात (दुक्खन्ति)” असे भूवादिगणीय, अकर्मक क्रियावाचक 'दुक्खन्ति' हे क्रियापद दिसते. ते पाहिले असता 'सुखति, सुखन्ति, सुखसि, सुखथ, सुखामि, सुखाम' इत्यादी आणि 'दुक्खति, duक्खन्ति, duक्खसि, duक्खथ' इत्यादी रूपे देखील पाहिलेलीच मानली जातात, कारण पाहिलेल्या रूपावरून न पाहिलेल्या अशा निर्दोष नियमाचे ग्रहण केले पाहिजे. म्हणून 'सुखति' पासून 'सुखितो' आणि 'दुःखति' पासून 'दुःखितो' हा भूवादिगणाचाच नियम स्वीकारला पाहिजे, चुरादिगणाचा नाही. येथे दुसरी व्युत्पत्ती अशी आहे – ज्याला सुख उत्पन्न झाले आहे तो 'सुखितो' (सुख प्राप्त झालेला). हाच नियम 'दुःखितो' या शब्दालाही लागू होतो. किंवा सुखाने युक्त होऊन जो प्रवृत्त झाला आहे तो 'सुखितो'. हाच नियम 'दुःखितो' या शब्दालाही लागू होतो. हा दुर्मिळ नियम चांगल्या प्रकारे मनात धारण केला पाहिजे. မောက္ခ မုစ္စနေ. အကမ္မကောယံ ဓာတု. မောက္ခတိ. မောက္ခော. ပါတိမောက္ခော. ကာရိတေ ‘‘မောက္ခေတိ, မောက္ခယတိ, မောက္ခာပေတိ, မောက္ခာပယတီ’’တိ ရူပါနိ. ကေစိ ပနိမံ ‘‘မောက္ခ မောစနေ’’တိ ပဌိတွာ စုရာဒိဂဏေ ပက္ခိပန္တိ. တေသံ မတေ ‘‘မောက္ခေတိ, မောက္ခယတီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ ဘဝန္တိ. ဧတာနိ ပါဠိယာ အဋ္ဌကထာယ စ ဝိရုဇ္ဈန္တိ. တထာ ဟိ ‘‘မောက္ခန္တိ မာရဗန္ဓနာ. န မေ သမဏေ မောက္ခသိ. မဟာယညံ ယဇိဿာမ, ဧဝံ မောက္ခာမ ပါပကာ’’တိ ပါဠိယာ ဝိရုဇ္ဈန္တိ. ‘‘ယော နံ ပါတိ ရက္ခတိ, တံ မောက္ခေတိ မောစေတိ အာပါယိကာဒီဟိ ဒုက္ခေဟီတိ ပါတိမောက္ခော’’တိ အဋ္ဌကထာယ စ ဝိရုဇ္ဈန္တိ, တသ္မာ ပါဠိယံ ‘‘မောက္ခေသိ မောက္ခေမာ’’တိ စ အဝတွာ ‘‘မောက္ခသိ, မောက္ခာမာ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုဝါစကံ ဝုတ္တံ, တဉ္စ ခေါ အပါဒါနဝိသယံ ကတွာ. အဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘မောက္ခေတိ, မောစေတီ’’တိ ဟေတုကတ္တုဝါစကံ ဝုတ္တံ, တမ္ပိ အပါဒါနဝိသယံယေဝ ကတွာ. ဧဝံ ဣမဿ ဓာတုနော သုဒ္ဓကတ္တုဝိသယေ အကမ္မကဘာဝေါ ဝိဒိတော, ဟေတုကတ္တုဝိသယေ ဧကကမ္မကဘာဝေါ ဝိဒိတော မုစ ပစ ဆိဒါဒယော ဝိယ. မောက္ခဓာတု ဒွိဂဏိကောတိ စေ? န, အနေကေသု သာဋ္ဌကထေသု ပါဠိပ္ပဒေသေသု ‘‘မောက္ခေတိ, မောက္ခယတီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုရူပါနံ အဒဿနတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. 'मोक्ख' धातु मुक्त होण्याच्या (सुटण्याच्या) अर्थात आहे. हा धातु अकर्मक आहे. 'मोक्खति' असे रूप बनते. 'मोक्खो', 'पातिमोक्खो'. कारित (प्रयोजक) रूपात “मोक्खेति, मोक्खयति, मोक्खापेति, मोक्खापयति” अशी रूपे बनतात. काही लोग याला 'मोक्ख मोचने' (मुक्त करणे) असे वाचून चुरादिगणात समाविष्ट करतात. त्यांच्या मते 'मोक्खेति', 'मोक्खयति' ही शुद्ध कर्तृवाचक पदे होतात. ही रूपे पाळी आणि अट्ठकथेशी विरुद्ध आहेत. कारण “मोक्खन्ति मारबन्धना (मारबंधनातून मुक्त होतात), न मे समणे मोक्खसि (हे श्रमणा, तू माझ्यापासून सुटू शकणार नाहीस), महायञ्ञं यजिस्साम, एवं मोक्खाम पापका (आम्ही महायज्ञ करू, अशा प्रकारे पापापासून मुक्त होऊ)” या पाळी वचनांशी ती विरुद्ध आहेत. तसेच “जो याचे पालन करतो, रक्षण करतो, त्याला अपायकारक इत्यादी दुःखांपासून मुक्त करतो (मोक्खेति मोचेति) म्हणून तो पातिमोक्ख होय” या अट्ठकथेच्या वचनाशी देखील विरुद्ध आहेत. म्हणून पाळीमध्ये 'मोक्खेसि, मोक्खेम' असे न म्हणता 'मोक्खसि, मोक्खाम' असे क्रियावाचक रूप सांगितले आहे, आणि ते अपादान विषयाला धरून आहे. अट्ठकथेत मात्र 'मोक्खेति, मोचेति' असे कारित (प्रयोजक) वाचक रूप सांगितले आहे, ते देखील अपादान विषयाला धरूनच आहे. अशा प्रकारे या धातूचा शुद्ध कर्त्याच्या विषयात अकर्मक भाव आणि हेतुकर्त्याच्या (प्रयोजक) विषयात एककर्मक भाव समजला जातो, जसे 'मुच', 'पच', 'छिद्' इत्यादी धातूंचा असतो. 'मोक्ख' धातु द्विगणिक (दोन गणांचा) आहे का? नाही, कारण अट्ठकथेसह अनेक पाळी प्रदेशांमध्ये 'मोक्खेति, मोक्खयति' ही शुद्ध कर्तृवाचक रूपे आढळत नाहीत, असे समजावे. ကက္ခ ဟသနေ. ကက္ခတိ. 'कक्ख' धातु हसण्याच्या अर्थात आहे. 'कक्खति' असे रूप बनते. ဩခ ရာခ လာခ ဒါခ ဓာခ သောသနာလမတ္ထေသု. ဩခတိ. ရာခတိ. လာခတိ. ဒါခတိ. ဓာခတိ. 'ओख', 'राख', 'लाख', 'दाख', 'धाख' हे धातु शोषण (वाळवणे) आणि अलम् (पुरेसे असणे/शोभणे) या अर्थात आहेत. 'ओखति', 'राखति', 'लाखति', 'दाखति', 'धाखति' अशी रूपे बनतात. သာခ [Pg.22] ဗျာပနေ. သာခတိ. သာခါ. 'साख' (धातू) व्यापणे (पसरणे) या अर्थात आहे. 'साखति' (रूप बनते). 'साखा' (फांदी). ဥခ နခ မခ ရခ လခ ရခိ လခိ ဣခိ ရိခိ ဂတျတ္ထာ. ဥခတိ. နခတိ. မခတိ. ရခတိ. လခတိ. ရင်္ခတိ. လင်္ခတိ. ဣင်္ခတိ. ရိင်္ခတိ. 'उख', 'नख', 'मख', 'रख', 'लख', 'रखि', 'लखि', 'इखि', 'रिखि' (हे धातू) गतीच्या (गमनाच्या) अर्थात आहेत. 'उखति', 'नखति', 'मखति', 'रखति', 'लखति', 'रङ्खति', 'लङ्खति', 'इङ्खति', 'रिङ्खति' (अशी रूपे बनतात). ရက္ခ ပါလနေ. ရက္ခတိ. ရက္ခာ, ရက္ခဏံ, သီလံ ရက္ခိတော ဒေဝဒတ္တော, သီလံ ရက္ခိတံ ဒေဝဒတ္တေန, သီလံ ရက္ခကော ဒေဝဒတ္တော. 'रक्ख' (धातू) पालनाच्या (रक्षण करण्याच्या) अर्थात आहे. 'रक्खति' (रक्षण करतो). 'रक्खा' (रक्षण), 'रक्खणं' (रक्षण करणे), 'सीलं रक्खितो देवदत्तो' (देवदत्ताने शीलाचे रक्षण केले), 'सीलं रक्खितं देवदत्तेन' (देवदत्ताद्वारे शीलाचे रक्षण केले गेले), 'सीलं रक्खको देवदत्तो' (देवदत्त शीलाचे रक्षण करणारा आहे). အက္ခ ဗျတ္တိသင်္ခါတေသု. အက္ခတိ, အက္ခိ, အက္ခံ. 'अक्ख' (धातू) प्रकटीकरण (स्पष्ट करणे) आणि गणना करणे या अर्थात आहे. 'अक्खति' (क्रियापद), 'अक्खि' (डोळा), 'अक्खं' (अक्ष/फासा). နိက္ခ စုမ္ဗနေ. နိက္ခတိ, နိက္ခံ. 'निक्ख' (धातू) चुंबन घेण्याच्या (स्पर्श करण्याच्या) अर्थात आहे. 'निक्खति' (क्रियापद), 'निक्खं' (सोन्याचे नाणे/अलंकार). နက္ခ ဂတိယံ. နက္ခတိ. နက္ခတ္တံ. ဧတ္ထ နက္ခတ္တန္တိ ဧတ္တော ဣတော စာတိ ဝိသမဂတိယာ အဂန္တွာ အတ္တနော ဝီထိယာဝ ဂမနေန နက္ခနံ ဂမနံ တာယတိ ရက္ခတီတိ နက္ခတ္တံ. ပေါရာဏာ ပန ‘‘နက္ခရန္တိ န နဿန္တီတိ နက္ခတ္တာနီ’’တိ ကထယိံသု. ‘‘နက္ခတ္တံ, ဇောတိ, နိရိက္ခံ, ဘံ’’ ဣစ္စေတေ ပရိယာယာ. 'नक्ख' (धातू) गतीच्या अर्थात आहे. 'नक्खति' (क्रियापद). 'नक्खत्तं' (नक्षत्र). येथे 'नक्खत्त' म्हणजे इकडे-तिकडे विषम गतीने न जाता, स्वतःच्याच मार्गाने (कक्षेत) जाण्याद्वारे आपल्या गतीचे रक्षण करते म्हणून ते 'नक्खत्त' (नक्षत्र) होय. प्राचीन आचार्यांनी मात्र असे म्हटले आहे की, "जे नष्ट होत नाहीत (नक्खरन्ति न नस्सन्तीति), ते नक्षत्र (नक्खत्तानि) होत." 'नक्खत्तं', 'जोति', 'निरिक्खं', 'भं' हे याचे समानार्थी शब्द आहेत. ဝေက္ခ ဝေက္ခနေ. ဝေက္ခတိ. 'वेक्ख' (धातू) पाहण्याच्या (निरीक्षण करण्याच्या) अर्थात आहे. 'वेक्खति' (पाहतो). မက္ခ သင်္ခတေ. မက္ခတိ. 'मक्ख' (धातू) संस्कारित करणे (किंवा लेपन करणे) या अर्थात आहे. 'मक्खति' (लेपन करतो). တက္ခ တပနေ. တပနံ သံဝရဏံ. တက္ခတိ. 'तक्ख' (धातू) तपनाच्या अर्थात आहे. तपन म्हणजे संवरण (संयम/रक्षण). 'तक्खति' (क्रियापद). သုက္ခ အနာဒရေ. သုက္ခတိ. 'सुक्ख' (धातू) अनादराच्या (किंवा सुकण्याच्या) अर्थात आहे. 'सुक्खति' (सुकतो). ကခိ ဝခိ မခိ ကင်္ခါယံ. သတ္ထရိ ကင်္ခတိ. ဝင်္ခတိ, မင်္ခတိ. ‘‘ကင်္ခါ ကင်္ခါယနာ ကင်္ခါယိတတ္တံ ဝိမတိ ဝိစိကိစ္ဆာ ဒွေဠှကံ ဒွေဓာပထော သံသယော အနေကံသဂါဟော အာသပ္ပနာ ပရိသပ္ပနာ အပရိယောဂါဟနာ ထမ္ဘိတတ္တံ စိတ္တဿ မနောဝိလေခေါ’’ ဣစ္စေတေ ကင်္ခါပရိယာယာ. ဧတေသု ပန – 'कखि', 'वखि', 'मखि' (हे धातू) शंकेच्या (कांक्षेच्या) अर्थात आहेत. 'सत्थरि कङ्खति' (शास्त्याविषयी/बुद्धांविषयी शंका घेतो). 'वङ्खति', 'मङ्खति' (अशी रूपे बनतात). "कङ्खा (शंका), कङ्खायना (शंका घेणे), कङ्खायितत्तं (शंकाग्रस्तता), विमति (द्विधा मनःस्थिती), विचिकिच्छा (संदेह), द्वेळ्हकं (दुटप्पीपणा), द्वेधापथो (दुहेरी मार्ग), संसयो (संशय), अनेकंसगाहो (अनिश्चित मत), आसप्पना (तगमग), परिसप्पना (भिरभिरणे), अपरियोगाहना (खोलवर न जाणे), थम्भितत्तं चित्तस्स (चित्ताची जडता), मनोविलेखो (मनाचा गोंधळ)" हे 'कङ्खा' (शंका) या शब्दाचे समानार्थी शब्द आहेत. यांपैकी – ဝတ္တန္တိ [Pg.23] လောကဝေါဟာရေ, ‘‘ကင်္ခါ ဝိမတိ သံသယော; ဝိစိကိစ္ဆာ’’တိ ဧတာနိ, နာမာနိယေဝ ပါယတော. लोकव्यवहारात प्रामुख्याने "कङ्खा, विमति, संसयो (संशय) आणि विचिकिच्छा" हेच शब्द बहुतांश करून वापरले जातात. ကခိ ဣစ္စာယံ. ဓနံ ကင်္ခတိ, အဘိကင်္ခတိ, နာဘိကင်္ခါမိ မရဏံ. အဘိကင်္ခိတံ ဓနံ. 'कखि' (धातू) इच्छेच्या अर्थात आहे. 'धनं कङ्खति' (धनाची इच्छा करतो), 'अभिकङ्खति' (तीव्र इच्छा करतो), 'नाभिकङ्खामि मरणं' (मी मरणाची इच्छा करत नाही). 'अभिकङ्खितं धनं' (इच्छिलेले धन). ဒခိ ဓခိ ဃောရဝါသိတေ ကင်္ခါယဉ္စ. ဒင်္ခတိ. ဓင်္ခတိ. 'दखि' आणि 'धखि' (हे धातू) भयानक ओरडणे (घोरवासित) आणि शंका (किंवा इच्छा) या अर्थात आहेत. 'दङ्खति', 'धङ्खति' (अशी रूपे बनतात). ဥက္ခ သေစနေ. ဥက္ခတိ. 'उक्ख' (धातू) सिंचन करण्याच्या (शिंपडण्याच्या) अर्थात आहे. 'उक्खति' (सिंचन करतो). ကခ ဟသနေ. ကခတိ. 'कख' (धातू) हसण्याच्या अर्थात आहे. 'कखति' (हसतो). ဇက္ခ ဘက္ခဏေ စ. ဟသနာနုကဍ္ဎနတ္ထံ စကာရော. ဇက္ခတိ. 'जक्ख' (धातू) भक्षण करण्याच्या (खाण्याच्या) आणि (हसण्याच्या) अर्थात आहे. 'च' हा शब्द हसण्याच्या अर्थाचा समावेश करण्यासाठी आहे. 'जक्खति' (भक्षण करतो/हसतो). လိခ လေခနေ. လိခတိ, သလ္လေခတိ. အတိသလ္လေခတေဝါယံ သမဏော. လေခါ, လေခနံ, လေခကော, လိခိတံ, သလ္လေခပဋိပတ္တိ, ဧတာ ဒခိအာဒိကာ လိခပရိယန္တာ ‘‘ပရဿဘာသာ’’တိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. 'लिख' (धातू) लिहिण्याच्या (लेखन करण्याच्या) अर्थात आहे. 'लिखति' (लिहितो), 'सल्लेखति' (क्लेश दूर करतो/कोरणे). 'अतिसल्लेखतेवायं समणो' (हा श्रमण अत्यंत कडक संलेखन/क्लेश-उन्मूलन करत आहे). 'लेखा' (रेघ/लेखन), 'लेखनं' (लेखन), 'लेखको' (लेखक), 'लिखिंत' (लिहिलेले), 'सल्लेखपटिपत्ति' (क्लेश-उन्मूलनाची प्रतिपत्ती/साधना). व्याकरणकार (सद्दसत्थविदू) म्हणतात की, 'दखि' पासून सुरू होऊन 'लिख' पर्यंत संपणारे हे धातू 'परस्सभासा' (परस्मैपद) आहेत. ဓုက္ခ ဓိက္ခ သန္ဒီပနကိလေသနဇီဝနေသု. ဓုက္ခတိ. ဓိက္ခတိ. သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ပန ‘‘ဓုက္ခတေ ဓိက္ခတေ’’တိ အတ္တနောဘာသံ ဝဒန္တိ. တထာ ဣတော ပရာနိ ရူပါနိပိ. 'धुक्ख' आणि 'धिक्ख' (हे धातू) प्रदीप्त करणे (संदीपन), क्लेश देणे (किलेसन) आणि जगणे (जीवन) या अर्थात आहेत. 'धुक्खति', 'धिक्खति' (अशी रूपे बनतात). परंतु, व्याकरणकार (सद्दसत्थविदू) 'धुक्खते', 'धिक्खते' अशी 'अत्तनोभास' (आत्मनेपद) रूपे सांगतात. याचप्रमाणे यापुढील रूपे देखील समजावीत. ရုက္ခ ဝက္ခ ဝရဏေ. ဝရဏံ သံဝရဏံ. ရုက္ခတိ. ဝက္ခတိ. ရုက္ခော, ဝက္ခော. ဧတ္ထ စ ဝက္ခောတိ ရုက္ခောယေဝ. တထာ ဟိ ‘‘သာဒူနိ ရမဏီယာနိ, သန္တိ ဝက္ခာ အရညဇာ’’တိ ဇာတကပါဌော ဒိဿတိ. ဣမာနိ ပန ရုက္ခဿ နာမာနိ – 'रुक्ख' आणि 'वक्ख' (हे धातू) वरणाच्या अर्थात आहेत. वरण म्हणजे संवरण (झाकणे/रक्षण करणे). 'रुक्खति', 'वक्खति' (अशी रूपे बनतात). 'रुक्खो' (वृक्ष), 'वक्खो' (वृक्ष). येथे 'वक्खो' म्हणजे 'रुक्खो' (वृक्ष) हाच होय. कारण जातक कथेमध्ये "सादूनि रमणीयानि, सन्ति वक्खा अरञ्ञजा" (अरण्यात उगवलेले वृक्ष गोड आणि रमणीय आहेत) असा पाठ आढळतो. वृक्षाची (रुक्खाची) नावे खालीलप्रमाणे आहेत – ‘‘ရုက္ခော မဟီရုဟော ဝက္ခော, ပါဒပေါ ဇဂတီရုဟော; အဂေါ နဂေါ ကုဇော သာခီ, သာလော စ ဝိဋပီ တရု; ဒုမော ဖလီ တု ဖလဝါ, ဂစ္ဆော တု ခုဒ္ဒပါဒပေါ’’တိ. "रुक्खो (वृक्ष), महीरुहो, वक्खो, पादपो, jagatīruho (जगतीरुहो), अगो, नगो, कुजो, साखी, सालो, विटपी, तरु, दुमो, फली, फलवा आणि गच्छो म्हणजे लहान झाड (खुद्दपादपो)." ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘နနု စ သာလသဒ္ဒေန သာလရုက္ခောယေဝ ဝုတ္တော, နာညော ‘သာလာ ဖန္ဒနမာလုဝါ’တိ ပယောဂဒဿနတော, အထ ကိမတ္ထံ သာလသဒ္ဒေန ယော ကောစိ ရုက္ခော [Pg.24] ဝုတ္တော’’တိ? န သာလရုက္ခောယေဝ သာလသဒ္ဒေန ဝုတ္တော, အထ ခေါ သာလရုက္ခေပိ ဝနပ္ပတိဇေဋ္ဌရုက္ခေပိ ယသ္မိံ ကသ္မိဉ္စိ ရုက္ခေပိ ‘‘သာလော’’တိ ဝေါဟာရဿ ဒဿနတော အညေပိ ရုက္ခာ ဝုတ္တာ. တထာ ဟိ သာလရုက္ခောပိ ‘‘သာလော’’တိ ဝုစ္စတိ. ယထာဟ ‘‘သေယျထာပိ ဘိက္ခဝေ ဂါမဿ ဝါ နိဂမဿ ဝါ အဝိဒူရေ မဟန္တံ သာလဝနံ, တဉ္စဿ ဧလဏ္ဍေဟိ သဉ္ဆန္နံ. အန္တရေန ယမကသာလာန’’န္တိ. ဝနပ္ပတိဇေဋ္ဌရုက္ခောပိ. ယထာဟ – यावर काही जण असे म्हणू शकतात की, " 'साल' या शब्दाने केवळ साल वृक्षच (सालरुक्ख) अभिप्रेत आहे, दुसरा कोणताही नाही, कारण 'साला फन्दनमालुवा' असा प्रयोग आढळतो. मग 'साल' या शब्दाने कोणताही वृक्ष का अभिप्रेत धरला गेला आहे?" केवळ साल वृक्षच 'साल' या शब्दाने अभिप्रेत नाही, तर साल वृक्षासाठी, वनातील मुख्य वृक्षासाठी (वनप्पतिजेट्ठरुक्ख) आणि कोणत्याही सामान्य वृक्षासाठी देखील 'सालो' असा व्यवहार (प्रयोग) आढळत असल्यामुळे इतर वृक्षही अभिप्रेत आहेत. कारण साल वृक्षालाही 'सालो' म्हटले जाते. जसे की म्हटले आहे – "हे भिक्खूंनो, समजा एखाद्या गावाच्या किंवा नगराच्या जवळ एक मोठे सालवन (सालांचे जंगल) असेल आणि ते एरंडाच्या झाडांनी वेढलेले असेल... यमकसालांच्या (जोडप्या साल वृक्षांच्या) दरम्यान..." वनातील मुख्य वृक्षालाही (असे म्हटले जाते). जसे की म्हटले आहे – ‘‘တဝေဝ ဒေဝ ဝိဇိတေ, တဝေဝုယျာနဘူမိယာ; ဥဇုဝံသာ မဟာသာလာ, နီလောဘာသာ မနောရမာ’’တိ. "हे देवा (राजन)! तुमच्याच विजितात (राज्यात), तुमच्याच उद्यानभूमीत, सरळ वंशाचे (सरळ वाढणारे), निळसर आभा असलेले आणि मनोरम असे महासाल (मोठे वृक्ष) आहेत." ယော ကောစိ ရုက္ခောပိ. ယထာဟ ‘‘အထ ခေါ တံ ဘိက္ခဝေ မာလုဝဗီဇံ အညတရသ္မိံ သာလမူလေ နိပတေယျာ’’တိ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – कोणताही सामान्य वृक्ष देखील (साल म्हटला जातो). जसे की म्हटले आहे – "त्यानंतर, हे भिक्खूंनो, ते मालुवा (वेल) बी एका विशिष्ट साल वृक्षाच्या मुळाशी (सालमूले) पडेल." यावर हे म्हटले आहे – ‘‘သာလရုက္ခေ ဇေဋ္ဌရုက္ခေ,ယသ္မိံ ကသ္မိဉ္စိ ပါဒပေ; သာလော ဣတိ ရဝေါ သာလာ,သန္ဓာဂါရေ ထိယံ သိယာ’’တိ. "साल वृक्षाच्या अर्थात, मुख्य वृक्षाच्या अर्थात किंवा कोणत्याही वृक्षाच्या अर्थात 'सालो' असा (पुल्लिंगी) शब्द वापरला जातो; आणि 'साला' हा स्त्रीलिंगी शब्द सभागृहाच्या (सन्धागारे) अर्थात वापरला जातो." သိက္ခ ဝိဇ္ဇောပါဒါနေ. သိက္ခတိ. သိက္ခာ, သိက္ခနံ, သိက္ခိတံ သိပ္ပံ, သိက္ခကော, သိက္ခိတော, သေက္ခော, အသေက္ခော. ကကာရလောပေ ‘‘သေခေါ အသေခေါ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. တတ္ထ သိက္ခိတောတိ သဉ္ဇာတသိက္ခော, အသိက္ခီတိ ဝါ သိက္ခိတော, တထာ ဟိ ကတ္တုပ္ပယောဂေါ ဒိဿတိ ‘‘အဟံ ခေါ ပန သုသိက္ခိတော အနဝယော သကေ အာစရိယကေ ကုမ္ဘကာရကမ္မေ’’တိ. 'सिक्ख' (धातू) विद्या ग्रहण करण्याच्या (शिकण्याच्या) अर्थात आहे. 'सिक्खति' (शिकतो/प्रशिक्षण घेतो). 'सिक्खा' (शिक्षण/शीलादींचे शिक्षण), 'सिक्खनं' (शिकणे), 'सिक्खितं सिप्पं' (शिकलेली कला), 'सिक्खको' (शिकणारा/शिक्षक), 'सिक्खितो' (शिक्षित/प्रशिक्षित), 'सेक्खो' (शैक्ष - जो अजून शिकत आहे), 'असेक्खो' (अशैक्ष - ज्याचे शिक्षण पूर्ण झाले आहे). 'क' काराचा लोप झाल्यावर 'सेखो' आणि 'असेखो' अशी रूपे बनतात. त्यामध्ये 'सिक्खितो' म्हणजे ज्याच्यामध्ये शिक्षण उत्पन्न झाले आहे (सञ्जातसिक्खो) किंवा ज्याने शिक्षण घेतले आहे तो 'सिक्खितो' होय. कारण कर्त्याचा प्रयोग असा आढळतो – "मी माझ्या गुरूंच्या कुंभारकामात चांगला प्रशिक्षित (सुसिक्खितो) आणि निष्णात आहे." ဘိက္ခ ယာစနေ. ဘိက္ခတိ. ဘိက္ခု, ဘိက္ခာ, ဘိက္ခနံ, ဘိက္ခကော, ဘိက္ခိတံ ဘောဇနံ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဘိက္ခု ယတိ သမဏော မုနိ ပဗ္ဗဇိတော [Pg.25] အနဂါရော တပဿီ တပေါဓနော’’ ဣစ္စေတာနိ ပရိယာယဝစနာနိ. ဧတေသု သာသနေ ‘‘ဘိက္ခူ’’တိ ဥပသမ္ပန္နော ဝုစ္စတိ. ကဒါစိ ပန ‘‘ဘိက္ခုသတံ ဘောဇေသိ, ဘိက္ခုသဟဿံ ဘောဇေသီ’’တိအာဒီသု သာမဏေရေပိဥပါဒါယ ‘‘ဘိက္ခူ’’တိ ဝေါဟာရော ပဝတ္တတိ, တာပသာပိ စ သမဏသဒ္ဒါဒီဟိ ဝုစ္စန္တိ, ‘‘အဟူ အတီတမဒ္ဓါနေ, သမဏော ခန္တိဒီပနော’’တိအာဒိ ဧတ္ထ နိဒဿနံ. 'भिक्ख' (धातू) याचना करण्याच्या (भिक्षा मागण्याच्या) अर्थात आहे. 'भिक्खति' (भिक्षा मागतो). 'भिक्खु' (भिक्खू), 'भिक्खा' (भिक्षा), 'भिक्खनं' (भिक्षा मागणे), 'भिक्खको' (भिक्षा मागणारा), 'भिक्खितं भोजनं' (भिक्षेत मिळालेले भोजन). येथे "भिक्खु, yati (यति), समणो (श्रमण), मुनि, पब्बजितो (प्रव्रजित), अनगारो (गृहहीन), तपस्सी, तपोधनो" हे समानार्थी शब्द आहेत. यांपैकी बुद्धशासनात 'भिक्खू' हा शब्द उपसंपन्न (दीक्षित) व्यक्तीसाठी वापरला जातो. परंतु कधीकधी "भिक्खुसतं भोजेसि" (शंभर भिक्खूंना भोजन दिले), "भिक्खुसहस्सं भोजेसि" (हजार भिक्खूंना भोजन दिले) इत्यादी वाक्यांमध्ये श्रामणेरांचाही (सामणेर) समावेश करून 'भिक्खू' असा व्यवहार केला जातो. तपस्वी लोकांनाही 'समण' (श्रमण) इत्यादी शब्दांनी संबोधले जाते, जसे की "भूतकाळात खन्तिदीपन नावाचे श्रमण (समणो) होते..." हे याचे उदाहरण आहे. ဒက္ခ ဝုဒ္ဓိယံ သီဃတ္တေ စ. ဒက္ခတိ, ဒက္ခိဏာ, ဒက္ခော. ဒက္ခန္တိ ဝဒ္ဓန္တိ သတ္တာ ဧတာယ ယထာဓိပ္ပေတာဟိ သမ္ပတ္တီဟိ ဣဒ္ဓါ ဝုဒ္ဓါ ဥက္ကံသဂတာ ဟောန္တီတိ ဒက္ခိဏာ, ဒါတဗ္ဗဝတ္ထု. ဒက္ခတိ ကုသလကမ္မေ အညသ္မိဉ္စ ကိစ္စာကိစ္စေ အဒန္ဓတာယ သီဃံ ဂစ္ဆတီတိ ဒက္ခော, ဆေကော, ယော ‘‘ကုသလော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. 'दक्ख' (धातू) वृद्धी (वाढ) आणि शीघ्रता (चपळता) या अर्थात आहे. 'दक्खति' (क्रियापद), 'दक्खिणा' (दान), 'दक्खो' (कुशल/दक्ष). ज्याच्याद्वारे प्राणी वाढतात (वृद्धीस पावतात), म्हणजेच इच्छित संपत्तीने समृद्ध, वृद्ध आणि उन्नत होतात, त्याला 'दक्खिणा' (दान देण्याची वस्तू) म्हणतात. जो कुशल कर्मांमध्ये आणि इतर कर्तव्यांमध्ये आळस न करता वेगाने (शीघ्रतेने) प्रवृत्त होतो, त्याला 'दक्खो' (दक्ष/कुशल), चतुर (छेको) म्हणतात, ज्याला 'कुसलो' (कुशल) असेही म्हटले जाते. ဒိက္ခ မုဏ္ဍိဩပနယနနိယမဗ္ဗတာဒေသေသု. ဒိက္ခဓာတု မုဏ္ဍိယေ, ဥပနယနေ, နိယမေ, ဝတေ, အာဒေသေ စ ပဝတ္တတိ. ဒိက္ခတိ. ဒိက္ခိတော မုဏ္ဍော. ဧတ္ထ သိယာ – နနု စ ဘော သရဘင်္ဂဇာတကေ ‘‘ဂန္ဓော ဣသီနံ စိရဒိက္ခိတာနံ, ကာယာ စုတော ဂစ္ဆတိ မာလုတေနာ’’တိ ဧတသ္မိံ ပဒေသေ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ‘‘စိရဒိက္ခိတာနန္တိ စိရပဗ္ဗဇိတာန’’န္တိ ဝုတ္တံ. န ဟိ တတ္ထ ‘‘စိရမုဏ္ဍာန’’န္တိ ဝုတ္တံ. ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ ဣဓ ‘‘ဒိက္ခဓာတု မုဏ္ဍိယေ ဝုတ္တာ’’တိ? သစ္စံ, တတ္ထ ပန ဒိက္ခိတသဒ္ဒဿ ပဗ္ဗဇိတေ ဝတ္တနတော ‘‘စိရပဗ္ဗဇိတာန’’န္တိ ဝုတ္တံ, န ဓာတုအတ္ထဿ ဝိဘာဝနတ္ထံ. ဣဒ ပန ဓာတုအတ္ထဝိဘာဝနတ္ထံ မုဏ္ဍိယေ ဝုတ္တာ. တာပသာ ဟိ မုဏ္ဍိယတ္ထဝါစကေန ဒိက္ခိတသဒ္ဒေန ဝတ္တုံ ယုတ္တာ. တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ စက္ကဝတ္တိသုတ္တတ္ထဝဏ္ဏနာယံ ‘‘ကေသမဿုံ ဩဟာရေတွာ ကာသာယာနိ ဝတ္ထာနိ အစ္ဆာဒေတွာ’’တိ ဣမိဿာ ပါဠိယာ အတ္ထဝိဝရဏေ ‘‘တာပသပဗ္ဗဇ္ဇံ ပဗ္ဗဇန္တာပိ ဟိ ပဌမံ ကေသမဿုံ ဩဟာရေန္တိ, တတော ပဋ္ဌာယ ပရူဠှကေသေ [Pg.26] ဗန္ဓိတွာ ဝိဝရန္တိ, တေန ဝုတ္တံ ကေသမဿုံ ဩဟာရေတွာ’’တိ ဧဝံ အတ္ထော သံဝဏ္ဏိတော. 'दिक्ख' (dikkha) धातू मुंडण (मुंडिय), उपनयन, नियम, व्रत आणि आदेश या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'दिक्ख' धातू मुंडण, उपनयन, नियम, व्रत आणि आदेश या अर्थांत प्रवृत्त होतो. 'दिक्खति' (दीक्षा घेतो). 'दिक्खितो मुण्डो' (दीक्षित मुंडित). येथे शंका उपस्थित होऊ शकते – "अहो, सरभंग जातकात 'गन्धो इसीनां चिरदिक्खितानं, काया चुतो गच्छति मालुतेना' (दीर्घकाळ दीक्षित असलेल्या ऋषींच्या शरीरातून सुटलेला गंध वाऱ्याने वाहून जातो) या संदर्भात अट्ठकथाचार्यांनी 'चिरदिक्खितानं' म्हणजे 'चिरपब्बजितानं' (दीर्घकाळ प्रव्रजित झालेले) असे म्हटले आहे. तिथे 'चिरमुण्डानं' (दीर्घकाळ मुंडण केलेले) असे म्हटलेले नाही. असे असताना, येथे 'दिक्ख' धातू मुंडण अर्थात का सांगितला आहे? हे सत्य आहे, परंतु तिथे 'दिक्खित' शब्दाचा अर्थ प्रव्रजित असा होत असल्याने 'चिरपब्बजितानं' असे म्हटले आहे, धातूचा मूळ अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी नाही. परंतु येथे धातूचा अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी तो मुंडण अर्थात सांगितला आहे. कारण तापसांना मुंडण अर्थ दर्शवणाऱ्या 'दिक्खित' शब्दाने संबोधित करणे योग्य आहे. तसेच, अट्ठकथाचार्यांनी चक्कवत्तिसुत्त अर्थवर्णनात 'केसमस्सुं ओहारेत्वा कासायानि वत्थानि अच्छादेत्वा' (केश-श्मश्रू काढून आणि काषाय वस्त्रे परिधान करून) या पाळीच्या अर्थविवरणात 'तापसप्रव्रज्या ग्रहण करणारे सुद्धा आधी केश-श्मश्रू काढतात, त्यानंतर वाढलेले केस बांधून ठेवतात, म्हणून केश-श्मश्रू काढून असे म्हटले आहे' अशा प्रकारे अर्थ स्पष्ट केला आहे. ဣက္ခ ဒဿနင်္ကေသု. ဣက္ခတိ, ဥပေက္ခတိ, အပေက္ခတိ. ဥပေက္ခာ, အပေက္ခာ, ပစ္စဝေက္ခဏာ. ကကာရလောပေ ‘‘ဥပေခါ, အပေခါ, ဥပသမ္ပဒါပေခေါ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'इक्ख' (ikkha) धातू दर्शन (पाहणे) आणि अंकन (चिन्हांकित करणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'इक्खति' (पाहतो), 'उपेक्खति' (उपेक्षा करतो/तटस्थ राहतो), 'अपेक्खति' (अपेक्षा करतो). 'उपेक्खा' (उपेक्षा), 'अपेक्खा' (अपेक्षा), 'पच्चवेक्खणा' (प्रत्यवेक्षण/पुनरावलोकन). 'क' काराचा लोप झाल्यास "उपेखा, अपेखा, उपसम्पदापेखो" अशी रूपे बनतात. ဒုက္ခ ဟိံသာဂတီသု. ဒက္ခတိ. ဒက္ခကော. 'दुक्ख' (dukkha) धातू हिंसा आणि गती या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'दक्खति' (पाहतो/जातो). 'दक्खको' (पाहणारा/जाणारा). စိက္ခ စက္ခ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ. စိက္ခတိ, အာစိက္ခတိ, အဗ္ဘာစိက္ခတိ. အာစိက္ခကော. စက္ခတိ, စက္ခု. ဧတ္ထ စက္ခူတိ စက္ခတီတိ စက္ခု, သမဝိသမံ အဘိဗျတ္တံ ဝဒန္တံ ဝိယ ဟောတီတိ အတ္ထော. အထ ဝါ ‘‘သူပံ စက္ခတိ, မဓုံ စက္ခတီ’’တိအာဒီသု ဝိယ ယသ္မာ အဿာဒတ္ထောပိ စက္ခုသဒ္ဒေါ ဘဝတိ, တသ္မာ ‘‘စက္ခတိ ဝိညာဏာဓိဋ္ဌိတံ ရူပံ အဿာဒေန္တံ ဝိယ ဟောတီ’’တိ အဿာဒတ္ထောပိ ဂဟေတဗ္ဗော. ‘‘စက္ခုံ ခေါ မာဂဏ္ဍိယံ ရူပါရာမံ ရူပရတံ ရူပသမ္မုဒိတ’’န္တိ ဟိ ဝုတ္တံ. သတိပိ သောတာဒီနံ သဒ္ဒါရာမတာဒိဘာဝေ နိရူဠှတ္တာ နယနေ ဧဝ စက္ခုသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ ပင်္ကဇာဒိသဒ္ဒါ ဝိယ ပဒုမာဒီသု. 'चिक्ख' (cikkha) आणि 'चक्ख' (cakkha) धातू स्पष्ट वाणी (व्यक्त करणे) या अर्थात वापरले जातात. 'चिक्खति' (सांगतो), 'आचिक्खति' (स्पष्ट करतो/उपदेश करतो), 'अब्भाचिक्खति' (खोटा आरोप करतो). 'आचिक्खको' (सांगणारा/उपदेशक). 'चक्खति' (आस्वाद घेतो/पाहतो), 'चक्खु' (नेत्र/डोळा). येथे 'चक्खु' म्हणजे 'चक्खति' (जे पाहते किंवा आस्वाद घेते ते चक्खु), याचा अर्थ असा की ते सम आणि विषम (चांगले आणि वाईट) स्पष्टपणे सांगत असल्यासारखे असते. अथवा "सूपं चक्खति, मधुं चक्खति" (सूपाचा आस्वाद घेतो, मधाचा आस्वाद घेतो) इत्यादींप्रमाणे ज्या अर्थी 'चक्खु' शब्द आस्वाद घेण्याच्या अर्थातही येतो, त्या अर्थी "चक्खु विज्ञानावर अधिष्ठित होऊन रूपाचा आस्वाद घेत असल्यासारखे होते" असा आस्वादाचा अर्थही घेतला पाहिजे. "चक्खुं खो मागण्डिय रूपारामं रूपरतं रूपसम्मुदितं" (हे मागंदिया, चक्खु रूपाचा आस्वाद घेणारे, रूपात रमणारे आणि रूपातच आनंदित होणारे आहे) असे म्हटले आहे. कान इत्यादी इंद्रिये शब्दादी विषयांमध्ये रमणारी असली, तरी रूढीमुळे 'चक्खु' हा शब्द केवळ डोळ्यासाठीच वापरला जातो, ज्याप्रमाणे 'पंकज' इत्यादी शब्द केवळ कमळासाठीच वापरले जातात. စက္ခ’က္ခိ နယနံ, လောစနံ ဒိဋ္ဌိ ဒဿနံ; ပေက္ခနံ အစ္ဆိ ပမှံ တု, ‘‘ပခုမ’’န္တိ ပဝုစ္စတိ. चक्ख, अक्खि, नयन, लोचन, दिट्ठि, दस्सन, पेक्खण आणि अच्छि हे डोळ्याचे (नेत्राचे) समानार्थी शब्द आहेत; आणि 'पम्ह' याला "पखुम" (पापणी) असे म्हटले जाते. ဧတာ ရုက္ခာဒိကာ စက္ခပရိယန္တာ ‘‘အတ္တနောဘာသာ’’တိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. 'रुक्ख' (rukkha) पासून सुरू होऊन 'चक्ख' (cakkha) पर्यंत संपणारे हे धातू "अत्तनोभासा" (आत्मनेपदी) आहेत, असे व्याकरणकार (शब्दशास्त्रज्ञ) म्हणतात. ခကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ख' कारान्त धातूंची रूपे समाप्त. ဂကာရန္တဓာတု 'ग' कारान्त धातू. ဂု ကရီသုဿဂ္ဂေ. ကရီသုဿဂ္ဂေါ ဝစ္စကရဏံ. ဂဝတိ. ဂေ သဒ္ဒေ. ဂါယတိ. ဂီတံ. 'गु' (gu) धातू मलोत्सर्ग (विष्ठा त्याग करणे) या अर्थात वापरला जातो. मलोत्सर्ग म्हणजे शौच करणे. 'गवति' (मल विसर्जन करतो). 'गे' (ge) धातू ध्वनी (गाणे) या अर्थात वापरला जातो. 'गायति' (गातो). 'गीतं' (गाणे/गीत). ဝဂ္ဂ [Pg.27] ဂတိယံ. ဝဂ္ဂတိ. ဝဂ္ဂေါ, ဝဂ္ဂိတံ. ဧတ္ထ သမုဒါယဝသေန ဝဂ္ဂနံ ပဝတ္တနံ ဝဂ္ဂေါ. ဝဂ္ဂိတန္တိ ဂမနံ. တထာ ဟိ နာဂပေတဝတ္ထုအဋ္ဌကထာယံ ‘‘ယော သော မဇ္ဈေ အဿတရီရထေန စတုဗ္ဘိ ယုတ္တေန သုဝဂ္ဂိတေန. အမှာကံ ပုတ္တော အဟု မဇ္ဈိမော သော, အမစ္ဆရီ ဒါနပတီ ဝိရောစတီ’’တိ ဣမိဿာ ပါဠိယာ အတ္ထံ ဝဒန္တေဟိ ‘‘သုဝဂ္ဂိတေနာတိ သုန္ဒရဂမနေနာ’’တိ. ကိဉ္စိ ဘိယျော ကြိယာပဒမ္ပိ စ ဒိဋ္ဌံ ‘‘ဓုနန္တိ ဝဂ္ဂန္တိ ပဝတ္တန္တိ စမ္ဗရေ’’တိ. 'वग्ग' (vagga) धातू गती (चालणे/धावणे) या अर्थात वापरला जातो. 'वग्गति' (धावतो/चालतो). 'वग्गो' (समूह/वर्ग), 'वग्गितं' (चालणे/गती). येथे समूहाच्या रूपाने प्रवृत्त होणे म्हणजे 'वग्गो' (वर्ग). 'वग्गितं' म्हणजे गमन (चालणे). तसेच, नागपेतवत्थु-अट्ठकथेत "यो सो मज्झे अस्सतरीरथेन चतुब्भि युत्तेन सुवग्गितेन. अम्हाकं पुत्तो अहु मज्झिमो सो, अमच्छरी दानपती विरोचति" (जो चार उत्तम चालणाऱ्या खेचरांच्या रथाच्या मध्यभागी बसला आहे...) या पाळीचा अर्थ सांगताना "सुवग्गितेन म्हणजे सुंदर गमनाने (उत्तम चालीने)" असे म्हटले आहे. काही ठिकाणी क्रियापद म्हणूनही याचा अधिक वापर आढळतो, जसे की "धुनन्ति वग्गन्ति पवत्तन्ति चम्बरे" (ते आकाशात थरथरतात, वेगाने धावतात आणि फिरतात). ရဂိ လဂိ အဂိ ဝဂိ မဂိ ဣဂိ ရိဂိ လိဂိ တဂိ သဂိ ဂမနေ စ. စကာရော ဂတိပေက္ခကော. ရင်္ဂတိ. ရင်္ဂေါ. လင်္ဂတိ. လင်္ဂေါ, လင်္ဂီ. အင်္ဂတိ, အင်္ဂေတိ. အင်္ဂေါ, သမင်္ဂီ, သမင်္ဂိတာ, အင်္ဂံ, အင်္ဂဏံ. ဝင်္ဂတိ. ဝင်္ဂေါ. မင်္ဂတိ. မင်္ဂေါ, ဥပင်္ဂေါ, မင်္ဂလံ. ဣင်္ဂတိ. ဣင်္ဂိတံ. ရိင်္ဂတိ. ရိင်္ဂနံ. လိင်္ဂတိ. လိင်္ဂနံ. ဥလ္လိင်္ဂတိ, ဥလ္လိင်္ဂနံ. တင်္ဂတိ. တင်္ဂနံ. သင်္ဂတိ. သင်္ဂနံ. တတ္ထ အင်္ဂန္တိ ယေသံ ကေသဉ္စိ ဝတ္ထူနံ အဝယဝေါ, သရီရမ္ပိ ကာရဏမ္ပိ စ ဝုစ္စတိ. အင်္ဂဏန္တိ ကတ္ထစိ ကိလေသာ ဝုစ္စန္တိ ‘‘ရာဂေါ အင်္ဂဏ’’န္တိအာဒီသု. ရာဂါဒယော ဟိ အင်္ဂန္တိ ဧတေဟိ တံသမင်္ဂိပုဂ္ဂလာ နိဟီနဘာဝံ ဂစ္ဆန္တီတိ ‘‘အင်္ဂဏာနီ’’တိ ဝုစ္စန္တိ. ကတ္ထစိ မလံ ဝါ ပင်္ကော ဝါ ‘‘တဿေဝ ရဇဿ ဝါ အင်္ဂဏဿ ဝါ ပဟာနာယ ဝါယမတီ’’တိအာဒီသု. အဉ္ဇတိ မက္ခေတီတိ ဟိ အင်္ဂဏံ, မလာဒိ. ကတ္ထစိ တထာရူပေါ ဝိဝဋပ္ပဒေသော ‘‘စေတိယင်္ဂဏံ, ဗောဓိယင်္ဂဏ’’န္တိအာဒီသု. အဉ္ဇတိ တတ္ထ ဌိတံ အတိသုန္ဒရတာယ အဘိဗျဉ္ဇေတီတိ ဟိ အင်္ဂဏံ, ဝိဝဋော ဘူမိပ္ပဒေသော. ဣစ္စေဝံ – 'रगि' (ragi), 'लगि' (lagi), 'अगि' (agi), 'वगि' (vagi), 'मगि' (magi), 'इगि' (igi), 'रिगि' (rigi), 'लिगि' (ligi), 'तगि' (tagi), 'सगि' (sagi) हे धातू गमन (जाणे) या अर्थात वापरले जातात. 'च' कार गतीचा निर्देश करतो. 'रङ्गति' (रंगतो/जातो), 'रङ्गो' (रंग/मंच). 'लङ्गति' (ओलांडतो/जातो), 'लङ्गो', 'लङ्गी'. 'अङ्गति', 'अङ्गेति' (जातो/चिन्हांकित करतो). 'अङ्गो', 'समङ्गी' (युक्त असलेला), 'समङ्गिता' (युक्तता), 'अङ्गं' (अवयव/अंग), 'अङ्गणं' (अंगण/मळ). 'वङ्गति' (वाकडा जातो), 'वङ्गो' (वाकडा). 'मङ्गति' (जातो), 'मङ्गो', 'उपङ्गो' (उपांग), 'मङ्गलं' (मंगल). 'इङ्गति' (हलतो), 'इङ्गितं' (इशारा/चेष्टा). 'रिङ्गति' (रांगतो), 'रिङ्गणं' (रांगणे). 'लिङ्गति' (आलिंगन देतो/चिन्हांकित करतो), 'लिङ्गणं' (लिंग/चिन्ह). 'उल्लिङ्गति' (उल्लेख करतो), 'उल्लिङ्गणं'. 'तङ्गति' (जातो), 'तङ्गणं'. 'सङ्गति' (सोबत जातो/मिळतो), 'सङ्गणं'. त्यापैकी 'अङ्ग' म्हणजे कोणत्याही वस्तूचा अवयव, शरीर किंवा कारण असे म्हटले जाते. 'अङ्गण' हा शब्द काही ठिकाणी क्लेशांसाठी वापरला जातो, जसे की "रागो अङ्गणं" (राग हा मळ/अंगण आहे) इत्यादींमध्ये. राग इत्यादी क्लेशांमुळे त्या क्लेशांनी युक्त असलेले पुद्गल (व्यक्ती) हीन दशेला प्राप्त होतात, म्हणून त्यांना "अङ्गणानी" (मळ) म्हटले जाते. काही ठिकाणी याचा अर्थ धूळ किंवा चिखल असा होतो, जसे की "तस्सेव रजस्स वा अङ्गणस्स वा पहानाय वायमति" (त्याच धुळीचा किंवा मळाचा नाश करण्यासाठी प्रयत्न करतो) इत्यादींमध्ये. 'अञ्जति' (माखणे/लिंपणे) यावरून 'अङ्गण' म्हणजे मळ इत्यादी असा अर्थ होतो. काही ठिकाणी याचा अर्थ मोकळी जागा असा होतो, जसे की "चेतियङ्गणं" (चैत्य-अंगण), "बोधियङ्गणं" (बोधी-अंगण) इत्यादींमध्ये. तिथे असलेली अतिशय सुंदर गोष्ट जी प्रकट करते ती 'अङ्गण' म्हणजे मोकळी जमीन होय. अशा प्रकारे – ရာဂါဒီသု ကိလေသေသု, ပင်္ကေ ကာယမလမှိ စ; ဝိဝဋေ ဘူမိဘာဂေ စ, ‘‘အင်္ဂဏ’’န္တိ ရဝေါ ဂတော. राग इत्यादी क्लेश, चिखल, शरीराचा मळ आणि मोकळी जमीन या अर्थांमध्ये "अङ्गण" (अंगण/मळ) हा शब्द प्रसिद्ध आहे. ယုဂိ [Pg.28] ဇုဂိ ဝဇ္ဇနေ. ယုင်္ဂတိ. ဇုင်္ဂတိ. 'युगि' (yugi) आणि 'जुगि' (jugi) हे धातू वर्जना (त्याग करणे) या अर्थात वापरले जातात. 'युङ्गति' (त्याग करतो), 'जुङ्गति' (निंदा करतो/त्याग करतो). ရဂိ သင်္ကာယံ. ရင်္ဂတိ. 'रगि' (ragi) धातू शंका (संशय) या अर्थात वापरला जातो. 'रङ्गति' (शंका घेतो). လဂ သင်္ဂေစ. စ ကာရော အနန္တရဝုတ္တာပေက္ခကော. လဂတိ. စ ဇတော န ဟောတိ လဂနံ. ဗဠိသေ လဂ္ဂေါ. 'लग' (laga) धातू आसक्ती (चिकटणे) आणि शंका या अर्थात वापरला जातो. 'च' कार आधी सांगितलेल्या अर्थाचा (शंकेचा) निर्देश करतो. 'लगति' (चिकटतो/अडकतो). 'च' कारामुळे 'लगन' (अडकणे) हे संशयाशिवाय होत नाही. 'बळिसे लग्गो' (गळाला अडकलेला मासा). ထဂံ သံဝရဏေ. ထဂတိ. 'थग' (thaga) धातू झाकणे (संवरण करणे) या अर्थात वापरला जातो. 'थगति' (झाकतो/बंद करतो). အဂ္ဂ ကုဋိလဂတိယံ. အဂ္ဂတီတိ အဂ္ဂိ, ကုဋိလံ ဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. 'अग्ग' (agga) धातू वक्र गती (वाकडी चाल) या अर्थात वापरला जातो. 'अग्गति' (वाकडा जातो) यावरून 'अग्गि' (अग्नी) हा शब्द बनतो, कारण अग्नीची गती वक्र (वाकडी) असते. အဂ္ဂိ ဓူမသိခေါ ဇောတိ, ဇာတဝေဒေါ သိခီ ဂိနိ; အဂ္ဂိနိ ဘာဏုမာ တေဇော, ပါဝကော တိဝကော’နလော. अग्गि, धूमसिख, जोति, जातवेद, सिखी, गिनी, अग्गिनी, bhāṇumā, तेजो, पावक, तिवक आणि अनल हे अग्नीचे समानार्थी शब्द आहेत. ဟုတာသနော ဓူမကေတု, ဝေဿာနရော စ အစ္စိမာ; ဃတာသနော ဝါယုသခေါ, ဒဟနော ကဏှဝတ္တနိ. हुतासन, धूमकेतु, वेस्सानर, अच्चिमा, घतासन, वायुसख, दहन आणि कण्हवत्तनी हे देखील अग्नीचे समानार्थी शब्द आहेत. ဧတာ ဂုအာဒိကာ အဂ္ဂပရိယန္တာ ‘‘ပရဿဘာသာ’’တိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. 'गु' (gu) पासून सुरू होऊन 'अग्ग' (agga) पर्यंत संपणारे हे धातू "परस्सभासा" (परस्मैपदी) आहेत, असे व्याकरणकार म्हणतात. ဂါ ဂတိယံ. ဂါတိ. 'गा' (gā) धातू गमन (जाणे) या अर्थात वापरला जातो. 'गाति' (जातो). ဂု သဒ္ဒေ. ဂဝတိ. 'गु' (gu) धातू ध्वनी (शब्द करणे) या अर्थात वापरला जातो. 'गवति' (शब्द करतो). ဂု ဥဂ္ဂမေ. ဥဂ္ဂမော ဥဂ္ဂမနံ ပါကဋတာ. ဂဝတိ. သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ပနိမာသံ ‘‘ဂါတေ ဂဝတေ’’တိ အတ္တနောဘာသတ္တံ ဝဒန္တိ. 'गु' (gu) धातू उद्गमन (वर येणे/प्रकट होणे) या अर्थात वापरला जातो. उद्गमन म्हणजे वर येणे किंवा प्रकट होणे. 'गवति' (प्रकट होतो). व्याकरणकार या धातूंची "गाते, गवते" अशी 'अत्तनोभासा' (आत्मनेपदी) रूपे देखील सांगतात. ဂကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ग' कारान्त धातूंची रूपे समाप्त. ဃကာရန္တဓာတု 'घ' कारान्त धातू. ဃာ ဂန္ဓောပါဒါနေ. ဃာတိ. ဃာနံ. ဂန္ဓံ ဃတွာ. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘ဂန္ဓံ ဃတွာ သတိ မုဋ္ဌာ’’တိ. ဧတိဿာ ပန ဒိဝါဒိဂဏံ ပတ္တာယ ‘‘ဃာယတိ ဃာယိတွာ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'घा' (ghā) धातू गंध ग्रहण करणे (वास घेणे) या अर्थात वापरला जातो. 'घाति' (वास घेतो). 'घानं' (नाक/घ्राणेंद्रिय). 'गन्धं घत्वा' (गंधाचा वास घेऊन). येथे ही पाळी आहे – "गन्धं घत्वा सति मुट्ठा" (गंधाचा वास घेऊन स्मृती नष्ट झाली). परंतु, जेव्हा हा धातू दिवादिगणात जातो, तेव्हा "घायति घायित्वा" अशी रूपे बनतात. ဃု [Pg.29] အဘိဂမနေ. အဘိဂမနံ အဓိဂမနံ. ဃောတိ. 'घु' (ghu) धातू अभिगमन (जवळ जाणे/प्राप्त करणे) या अर्थात वापरला जातो. अभिगमन म्हणजे अधिगमन (प्राप्ती). 'घोति' (प्राप्त करतो/जवळ जातो). ဇဂ္ဃ ဟသနေ. ဇဂ္ဃတိ, သဉ္ဇဂ္ဃတိ. သဉ္ဇဂ္ဃိတ္ထော မယာ သဟ. ဇဂ္ဃိတုမ္ပိ န သောဘတိ. ဇဂ္ဃိတွာ. 'जग्घ' (jaggha) धातू हसणे या अर्थात वापरला जातो. 'जग्घति' (हसतो), 'सञ्जग्घति' (मोठ्याने हसतो/मस्करी करतो). "सञ्जग्घित्थो मया सह" (तू माझ्यासोबत हसलास). "जग्घितुम्पि न सोभति" (हसणे देखील शोभत नाही). 'जग्घित्वा' (हसून). တဂ္ဃ ပါလနေ. တဂ္ဃတိ. 'तग्घ' (taggha) धातू पालन करणे या अर्थात वापरला जातो. 'तग्घति' (पालन करतो). သိဃိ အာဃာနေ. အာဃာနံ ဃာနေန ဂန္ဓာနုဘဝနံ. သိင်္ဃတိ, ဥပသိင်္ဃတိ. ဥပသိင်္ဃိတွာ. အာရာ သိင်္ဃာမိ ဝါရိဇံ. ဧတာ ‘‘ပရဿဘာသာ’’တိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. 'सिघि' (sighi) धातू आघ्राण (वास घेणे) या अर्थात वापरला जातो. आघ्राण म्हणजे नाकाने गंधाचा अनुभव घेणे. 'सिङ्घति' (वास घेतो), 'उपसिङ्घति' (जवळून वास घेतो). 'उपसिङ्घित्वा' (जवळून वास घेऊन). "आरा सिङ्घामि वारिजं" (मी दुरूनच कमळाचा वास घेतो). हे धातू "परस्सभासा" (परस्मैपदी) आहेत, असे व्याकरणकार म्हणतात. ဃု သဒ္ဒေ. ဃောတိ, ဃဝတိ. 'घु' (ghu) धातू ध्वनी (शब्द करणे) या अर्थात वापरला जातो. 'घोति', 'घवति' (शब्द करतो). ရဃိ လဃိ ဂတျက္ခေပေ. ဂတျက္ခေပေါ ဂတိယာ အက္ခေပေါ. ရင်္ဃတိ, လင်္ဃတိ, ဥလ္လင်္ဃတိ. လင်္ဃိတာ, ဥလ္လင်္ဃိကာပီတိ, လင်္ဃိတွာ. ‘रघि’ (raghi) आणि ‘लघि’ (laghi) हे धातू गत्यक्षेप (गतीचा आक्षेप किंवा उडी मारणे) या अर्थात आहेत. गत्यक्षेप म्हणजे गतीचा आक्षेप (वेगवान गती किंवा उल्लंघन). रंघति (धावतो/उडी मारतो), लंघति (ओलांडतो), उल्लंघति (उल्लंघन करतो). ‘लंघिता’ (ओलांडणारा), ‘उल्लंघिका’ (उल्लंघन करणारी) असेही रूप होते, आणि ‘लंघित्वा’ (ओलांडून). မဃိ ကေတဝေ စ. စကာရော ပုဗ္ဗတ္ထာပေက္ခော. မင်္ဃတိ. ‘मघि’ (maghi) धातू कपट (लबाडी) आणि (मागील अर्थाच्या) अपेक्षेने आहे. ‘च’ कार हा मागील अर्थाची अपेक्षा ठेवणारा आहे. मंघति (कपट करतो किंवा गती करतो). ရာဃ လာဃ သာမတ္ထိယေ. ရာဃတိ. လာဃတိ. ‘राघ’ (rāgha) आणि ‘लाघ’ (lāgha) हे धातू सामर्थ्य (क्षमता) या अर्थात आहेत. राघति, लाघति. ဒါဃ အာယာသေ စ. အာယာသော ကိလမနံ. စကာရော သာမတ္ထိယာပေက္ခကော. ဒါဃတိ. နိဒါဃော. ‘दाघ’ (dāgha) धातू आयास (थकवा/कष्ट) आणि (सामर्थ्य) या अर्थात आहे. आयास म्हणजे थकणे (क्लेश). ‘च’ कार हा सामर्थ्य अर्थाची अपेक्षा ठेवणारा आहे. दाघति. निदाघो (उन्हाळा). သိလာဃ ကတ္ထနေ. ကတ္ထနံ ပသံသနံ. သိလာဃတိ. သိလာဃာ. ဗုဒ္ဓဿ သိလာဃတေ. သိလာဃိတွာ. ‘‘အတ္တနောဘာသာ’’တိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. ‘सिलाघ’ (silāgha) धातू कत्थन (प्रशंसा) या अर्थात आहे. कत्थन म्हणजे प्रशंसा (स्तुती). सिलाघति. सिलाघा. बुद्धस्स सिलाघते (बुद्धांची प्रशंसा करतो). सिलाघित्वा (प्रशंसा करून). व्याकरणकार (शब्दशास्त्रज्ञ) याला ‘अत्तनोभासा’ (आत्मनेपद) असे म्हणतात. ဃ ကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ‘घ’ कारान्त धातूंची रूपे. ဣတိ ဘူဝါဒါဂဏေ ကဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ अशा प्रकारे भूवादी गणातील ‘क-वर्गान्त’ धातूंची रूपे သမတ္တာနိ. समाप्त झाली. စကာရန္တဓာတု ‘च’ कारान्त धातू. ဣဒါနိ [Pg.30] စဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ ဝုစ္စန္တေ – आता ‘च-वर्गान्त’ धातूंची रूपे सांगितली जात आहेत – သုစ သောကေ. သောစတိ. သောကော, သောစနာ, သောစံ, သောစန္တော, သောစန္တီ, သောစန္တံ ကုလံ, သောစိတွာ. ‘सुच’ (suca) धातू शोक या अर्थात आहे. सोचति. सोको (शोक), सोचना (शोक करणे), सोचं, सोचन्तो (शोक करणारा), सोचन्ती (शोक करणारी), सोचन्तं कुलं (शोक करणारे कुटुंब), सोचित्वा (शोक करून). ကုစ သဒ္ဒေ တာရေ. တာရသဒ္ဒေါ အစ္စုစ္စသဒ္ဒေါ. ကောစတိ. ဥစ္စသဒ္ဒံ ကရောတီတိ အတ္ထော. ‘कुच’ (kuca) धातू तार स्वरातील आवाजात (मोठ्याने ओरडणे) या अर्थात आहे. तार शब्द म्हणजे अत्यंत उच्च (मोठा) आवाज. कोचति. याचा अर्थ ‘मोठा आवाज करतो’ असा आहे. ကုဉ္စ ကောဋိလ္လ’ပ္ပီဘာဝေသု. ကုဉ္စတိ. ကုဉ္စိကာ, ကုဉ္စိတကေသော. ကုဉ္စိတွာ. ‘कुञ्च’ (kuñca) धातू कौटिल्य (वाकडेपणा) आणि अल्पीभाव (आकुंचन किंवा कमी होणे) या अर्थात आहे. कुञ्चति. कुञ्चिका (किल्ली), कुञ्चितकेसो (कुरळे केस असलेला), कुञ्चितत्वा (वाकवून/आकुंचन करून). လုဉ္စ အပနယနေ. လုဉ္စတိ. လုဉ္စကော, လုဉ္စိတုံ, လုဉ္စိတွာ. ‘लुञ्च’ (luñca) धातू अपनयन (उपटणे/काढून टाकणे) या अर्थात आहे. luñcati. लुञ्चको (उपटणारा), लुञ्चितुं (उपटण्यासाठी), लुञ्चित्वा (उपटून). အဉ္စု ဂတိပူဇနာသု. မဂ္ဂံ အဉ္စတိ. ဗုဒ္ဓံ အဉ္စတိ. ဥဒ္ဓံ အနုဂ္ဂန္တွာ တိရိယံ အဉ္စိတောတိ တိရစ္ဆာနော. ကဋုကဉ္စုကတာ. ‘अञ्चु’ (añcu) धातू गती आणि पूजन (आदर करणे) या अर्थात आहे. मग्गं अञ्चति (मार्गावर चालतो). बुद्धं अञ्चति (बुद्धांचा आदर करतो). वर न जाता आडवे (तिरपे) चालतो म्हणून तो ‘तिरच्छानो’ (प्राणी) होय. कटुकञ्चुकता (कंजूषपणा). ဝဉ္စု စဉ္စု တဉ္စု ဂတိယံ. ဝဉ္စတိ. စဉ္စတိ. တဉ္စတိ. မဉ္စတိ. သန္တိ ပါဒါ အဝဉ္စနာ. အဝဉ္စနာတိ ဝဉ္စိတုံ ဂန္တုံ အသမတ္ထာ. ‘वञ्चु’ (vañcu), ‘चञ्चु’ (cañcu) आणि ‘तञ्चु’ (tañcu) हे धातू गती या अर्थात आहेत. वञ्चति, चञ्चति, तञ्चति, मञ्चति. ‘सन्ति पादा अवञ्चना’ (पाय आहेत पण ते चालत नाहीत). अवाञ्चना म्हणजे चालण्यास (जाण्यास) असमर्थ असलेले. ဂုစု ဂဏေစု ထေယျကရဏေ. ထေနနံ ထေယျံ, စောရိကာ. တဿ ကြိယာ ထေယျကရဏံ. ဂေါစတိ. ဂဏေစတိ. ‘गुचु’ (gucu) आणि ‘गणेचु’ (gaṇecu) हे धातू थेय्यकरण (चोरी करणे) या अर्थात आहेत. थेनन म्हणजे थेय्य, म्हणजेच चोरी. त्याची क्रिया म्हणजे थेय्यकरण होय. गोचति, गणेचति. အစ္စ ပူဇာယံ အစ္စတိ. ဗြဟ္မာသုရသုရစ္စိတော. ‘अच्च’ (acca) धातू पूजेच्या अर्थात आहे. अच्चति. ब्रह्मासुरसुरच्चितो (ब्रह्मा, असुर आणि देवांनी पूजिलेला). တစ္စ ဟိံသာယံ. တစ္စတိ. ‘तच्च’ (tacca) धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. तच्चति. စစ္စ ဇစ္စ ပရိဘာသနဝဇ္ဇနေသု. စစ္စတိ. ဇစ္စတိ. ‘चच्च’ (cacca) आणि ‘जच्च’ (jacca) हे धातू परिभाषण (निंदा) आणि वर्जन (त्याग करणे) या अर्थात आहेत. चच्चति, जच्चति. ကုစ သံပစ္စနကောဋိလ္လပဋိက္ကမဝိလေခနေသု. ကုစတိ, သင်္ကုစတိ. သင်္ကောစော. ‘कुच’ (kuca) धातू संपच्चन (विरोध), कौटिल्य (वाकडेपणा), प्रतिक्रम (मागे हटणे) आणि विलेखन (खरवडणे) या अर्थात आहे. कुचति, संकुचति. संकोचो (संकोच/आकुंचन). တစ သံဝရဏေ. သံဝရဏံ ရက္ခဏံ. တစတိ. တစော. ‘तच’ (taca) धातू संवरण (झाकणे/रक्षण करणे) या अर्थात आहे. संवरण म्हणजे रक्षण करणे. तचति. तचो (त्वचा/साल). ဒိစ [Pg.31] ထုတိယံ. ဒိစတိ. ‘दिच’ (dica) धातू थुती (स्तुती) या अर्थात आहे. दिचति. ကုစ သင်္ကောစနေ. ကောစတိ, သင်္ကောစတိ. သင်္ကောစော. ‘कुच’ (kuca) धातू संकोचन (आकुंचन) या अर्थात आहे. कोचति, संकुचति. संकोचो. ဗျာစ ဗျာဇိကရဏေ. ဗျာဇိကရဏံ ဗျာဇိကြိယာ. ဗျာစတိ. ‘ब्याच’ (byāca) धातू व्याजीकरण (कपट किंवा बहाणा करणे) या अर्थात आहे. व्याजीकरण म्हणजे व्याजीक्रिया (कपटपूर्ण व्यवहार). ब्याचति. ဝစ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ. ဝိယတ္တဿ ဧသာ ဝိယတ္တိ, တိဿံ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ, ဝိယတ္တာယံ ဝါစာယန္တိ အဓိပ္ပာယော. ဝိယတ္တဿ ဟိ ဝဒတော ပုဂ္ဂလဿ ဝသေန ဝါစာ ဝိယတ္တာ နာမ ဝုစ္စတိ. ယထာ ပန ကုစ္ဆိသဒ္ဒတိရစ္ဆာနဂတာဒိသဒ္ဒေါ ‘‘အဗျတ္တသဒ္ဒေါ’’တိ ဝုစ္စတိ, န ဧဝံ ဝစနသင်္ခါတော သဒ္ဒေါ ‘‘အဗျတ္တသဒ္ဒေါ’’တိ ဝုစ္စတိ ဝိညာတတ္ထတ္တာ. ‘‘ဝတ္တိ, ဝစတိ, ဝစန္တိ. ဝစသိ’’ ဣစ္စာဒီနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ. ‘‘ဝါစေတိ, ဝါစေန္တိ’’ ဣစ္စာဒီနိ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ. ‘‘အတ္ထာဘိသမယာ ဓီရော, ပဏ္ဍိတောတိ ပဝုစ္စတိ. ဝုစ္စန္တိ. သန္တော သပ္ပုရိသာ လောကေ, ဒေဝဓမ္မာတိ ဝုစ္စရေ’’ ဣစ္စာဒီနိ ကမ္မပဒါနိ. ဂရူ ပန ဝကာရဿ ဥကာရာဒေသဝသေန ‘‘ဥတ္တံ ဥစ္စတေ ဥစ္စန္တေ’’တိအာဒီနိ ဣစ္ဆန္တိ, တာနိ သာသနေ အပ္ပသိဒ္ဓါနိ, သက္ကဋဘာသာနုလောမာနိ. သာသနသ္မိဉှိ ရကာရာဂမဝိသယေ နိပုဗ္ဗဿေဝ ဝစဿ ဝဿ ဥကာရာဒေသော သိဒ္ဓေါ ‘‘နိရုတ္တိ, နိရုတ္တံ, နေရုတ္တ’’န္တိ. ဝစနံ, ဝါစာ, ဝစော, ဝစီ, ဝုတ္တံ, ပဝုတ္တံ, ဝုစ္စမာနံ, အဓိဝစနံ, ဝတ္တဗ္ဗံ, ဝစနီယံ, ဣမာနိ နာမိကပဒါနိ. ဝတ္တုံ, ဝတ္တဝေ, ဝတွာ, ဝတွာန, ဣမာနိ တုမန္တာဒီနိ ‘‘ပရဿဘာသာ’’တိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. ‘वच’ (vaca) धातू स्पष्ट वाणी या अर्थात आहे. स्पष्ट बोलणाऱ्याची जी स्पष्टता ती ‘वियत्ति’ होय, त्या स्पष्ट वाणीच्या अर्थात हा धातू आहे, असा अभिप्राय आहे. कारण स्पष्ट बोलणाऱ्या व्यक्तीच्या प्रभावाने वाणीला ‘व्यक्त वाणी’ म्हटले जाते. परंतु ज्याप्रमाणे कुत्सित शब्द किंवा प्राण्यांचे आवाज इत्यादींना ‘अव्यक्त शब्द’ म्हटले जाते, त्याप्रमाणे बोलण्याने युक्त असलेल्या शब्दाला ‘अव्यक्त शब्द’ म्हटले जात नाही, कारण त्याचा अर्थ समजतो. ‘वत्ति, वचति, वचन्ति, वचसि’ इत्यादी शुद्ध कर्तृपदे (कर्तरी रूपे) आहेत. ‘वाचेति, वाचेन्ति’ इत्यादी हेतुकर्तृपदे (प्रयोजक रूपे) आहेत. ‘अत्थाभिसमया धीरो, पण्डितोति पवुच्चति’ (अर्थाचा बोध झाल्यामुळे धीर पुरुषाला पंडित म्हटले जाते), ‘वुच्चन्ति’, ‘सन्तो सप्पुरिसा लोके, देवधम्माति वुच्चरे’ (जगातील शांत सत्पुरुषांना देवधम्म म्हटले जाते) इत्यादी कर्मपदे (कर्मणी रूपे) आहेत. परंतु आचार्य (गुरू) ‘व’ काराच्या जागी ‘उ’ कार आदेश करून ‘उत्तं, उच्चते, उच्चन्ते’ इत्यादी रूपे मानतात; ती शासनात (बुद्धवचनात) अमान्य असून संस्कृत भाषेला अनुसरून आहेत. कारण शासनात (बुद्धवचनात) ‘र’ कार आगम विषयामध्ये ‘नि’ उपसर्ग लागलेल्या ‘वच’ धातूच्या ‘व’ काराचा ‘उ’ कार आदेश सिद्ध होतो, जसे की ‘निरुत्ति, निरुत्तं, नेरुत्तं’. वचनं, वाचा, वचो, वची, वुत्तं, पवुत्तं, वुच्चमानं, अधिवचनं, वत्तब्बं, वचनीयं - ही नामिक पदे आहेत. वत्तुं, वत्तवे, वत्वा, वत्वान - ही तुमन्त (कृदन्त) इत्यादी रूपे ‘परस्मैपद’ (परस्सभासा) आहेत, असे व्याकरणकार म्हणतात. တတ္ထ ဝတ္တီတိ ဝဒတိ. အာချာတပဒဉှေတံ. အတ္ထသံဝဏ္ဏကေဟိပိ ‘‘ဝတ္တိ ဧတာယာတိ ဝါစာ’’တိ နိဗ္ဗစနမုဒါဟဋံ. သဒ္ဒသတ္ထေ စ တာဒိသံ အာချာတပဒံ ဒိဋ္ဌံ. ဧတ္ထ ပနေကေ ဝဒန္တိ ‘‘ဝစတိ, ဝစန္တီတိအာဒီနိ ကြိယာပဒရူပါနိ ဗုဒ္ဓဝစနေ အဋ္ဌကထာဋီကာသု သတ္ထေသု စ အနာဂတတ္တာ ဆဍ္ဍေတဗ္ဗာနီ’’တိ. တန္န, ယသ္မာ သာသနေ ‘‘အဝစ, အဝစိံသူ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ စ ‘‘ဝါစေတိ, ဝါစေန္တီ’’တိအာဒီနိ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ စ ဒိဿန္တိ, တသ္မာ [Pg.32] ဗုဒ္ဓဝစနာဒီသု အနာဂတာနိပိ ‘‘ဝစတိ, ဝစန္တီ’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ဝစေယျ, ဝုစ္စတု, ဝုစ္စေယျ. သေသံ သဗ္ဗံ သဗ္ဗတ္ထ ဝိတ္ထာရတော ဂဟေတဗ္ဗံ. त्यामध्ये ‘वत्ति’ म्हणजे बोलतो. हे आख्यातपद (क्रियापद) आहे. अर्थवर्णन करणाऱ्यांनी (टीकाकारांनी) देखील ‘वत्ति एतायाति वाचा’ (ज्याद्वारे बोलले जाते ती वाचा) अशी निरुक्ती दिली आहे. आणि शब्दशास्त्रात (व्याकरणात) असे आख्यातपद पाहिले गेले आहे. येथे काही जण म्हणतात की, ‘वचति, वचन्ति’ इत्यादी क्रियापदांची रूपे बुद्धवचनात, अट्ठकथांमध्ये, टीकांमध्ये आणि शास्त्रांमध्ये आलेली नसल्यामुळे ती सोडून दिली पाहिजेत. ते योग्य नाही, कारण शासनात (बुद्धवचनात) ‘अवच, अवचिंसु’ इत्यादी शुद्ध कर्तृपदे आणि ‘वाचेति, वाचेन्ति’ इत्यादी हेतुकर्तृपदे दिसतात, म्हणून बुद्धवचनात आलेली नसली तरी ‘वचति, वचन्ति’ इत्यादी रूपे स्वीकारली पाहिजेत. वचेय्य, वुच्चतु, वुच्चेय्य. उर्वरित सर्व सर्व ठिकाणी विस्ताराने समजून घ्यावे. ပရောက္ခာရူပါနိ ဝဒါမ – ဝစ, ဝစု. ဝစေ, ဝစိတ္ထ. ဝစံ, ဝစိမှ. ဝစိတ္ထ, ဝစိရေ. ဝစိတ္ထော, ဝစိဝှော. ဝစိံ, ဝစိမှေ. आता परोक्षा (परोक्ष भूतकाळ) रूपे सांगतो – वच, वचु. वचे, वचित्थ. वचं, वचिम्ह. वचित्थ, वचिरे. वचित्थो, वचिव्हो. वचिं, वचिम्हे. ဟိယျတ္တနီရူပါနိ ဝဒါမ – အဝစာ, အဝစူ. အဝစော, အဝစုတ္ထ. အဝေါစံ, အဝစုမှ. အဝစုတ္ထ, အဝစုတ္ထုံ. အဝစသေ, အဝစုဝှံ. အဝစိံ, အဝစမှသေ. आता हिय्यतनी (अनद्यतन भूतकाळ) रूपे सांगतो – अवचा, अवचू. अवचो, अवचुत्थ. अवोचं, अवचुम्ह. अवचुत्थ, अवचुत्थुं. अवचसे, अवचुव्हं. अवचिं, अवचम्हसे. အဇ္ဇတနီရူပါနိ ဝဒါမ – အဝစိ, အဝေါစုံ, အဝစိံသု. အဝေါစော, အဝေါစုတ္ထ. အဝေါစိံ, အဝေါစုမှ. အဝေါစာ, အဝေါစု. အဝစသေ, အဝေါစိဝံ. အဝေါစံ, အဝေါစိမှေ. आता अज्जतनी (सामान्य भूतकाळ) रूपे सांगतो – अवचि, अवोचुं, अवचिंसु. अवोचो, अवोचुत्थ. अवोचिं, अवोचुम्ह. अवोचा, अवोचु. अवचसे, अवोचिवं. अवोचं, अवोचिम्हे. ဘဝိဿန္တီရူပါနိ ဝဒါမ – ဝက္ခတိ, ဝက္ခန္တိ. ဝက္ခသိ, ဝက္ခထ. ဝက္ခာမိ, ဝက္ခာမ. ဝက္ခတေ, ဝက္ခန္တေ. ဝက္ခသေ, ဝက္ခဝှေ. ဝက္ခဿံ ဝက္ခမှေ. आता भविस्सती (भविष्यकाळ) रूपे सांगतो – वक्खति, वक्खन्ति. वक्खसि, वक्खथ. वक्खामि, वक्खाम. वक्खते, वक्खन्ते. वक्खसे, वक्खव्हे. वक्खस्सं, वक्खम्हे. ဣမေသံ ပန ပဒါနံ ‘‘ကထေဿတိ, ကထေဿန္တီ’’တိအာဒိနာ အတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော. ဝက္ခ ရောသေတိ ဓာတုဿ စ ‘‘ဝက္ခတိ, ဝက္ခန္တိ. ဝက္ခသီ’’တိအာဒီနိ ဝတွာ အဝသာနေ ဥတ္တမပုရိသေကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဝက္ခေမီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ. အတ္ထော ပနိမေသံ ‘‘ရောသတိ, ရောသန္တီ’’တိအာဒိနာ ဝတ္တဗ္ဗော. အယံ ဝစဝက္ခဓာတူနံ ဘဝိဿန္တီဝတ္တမာနာဝသေန ရူပသံသန္ဒနာနယော. အပရာနိပိ ဝစဓာတုဿ ဘဝိဿန္တီ သဟိတာနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ – ဝက္ခိဿတိ, ဝက္ခိဿန္တိ. ဝက္ခိဿသိ, ဝက္ခိဿထ. ဝက္ခိဿာမိ, ဝက္ခိဿာမ. ဝက္ခိဿတေ, ဝက္ခိဿန္တေ. ဝက္ခိဿသေ, ဝက္ခိဿဝှေ. ဝက္ခိဿံ, ဝက္ခိဿာမှေ. परंतु या पदांचा अर्थ ‘कथेस्सति, कथेस्सन्ति’ (सांगेल, सांगतील) इत्यादी प्रकारे सांगावा. ‘वक्ख’ (vakkha) हा रोष (रागवणे) अर्थाचा धातू असून, त्याची ‘वक्खति, वक्खन्ति, वक्खसि’ इत्यादी रूपे सांगून शेवटी उत्तम पुरुष एकवचनाच्या ठिकाणी ‘वक्खेमि’ असे म्हणावे. आणि यांचा अर्थ ‘रोसति, रोसन्ति’ (रागवतो, रागवतात) इत्यादी प्रकारे सांगावा. हा ‘वच’ आणि ‘वक्ख’ धातूंच्या भविष्यकाळ आणि वर्तमानकाळाच्या रूपांची तुलना करण्याचा नियम आहे. ‘वच’ धातूची भविष्यकाळाची इतरही रूपे होतात – वक्खिस्सति, वक्खिस्सन्ति. वक्खिस्ससि, वक्खिस्सथ. वक्खिस्सामि, वक्खिस्sam. वक्खिस्सते, वक्खिस्सन्ते. वक्खिस्ससे, वक्खिस्सव्हे. वक्खिस्सं, वक्खिस्साम्हे. အတြာယံ ပါဠိ – या संदर्भात ही पाळी (मूळ पाठ) आहे – ‘‘အဘီတကပ္ပေ စရိတံ, ဌပယိတွာ ဘဝါဘဝေ; ဣမမှိ ကပ္ပေ စရိတံ, ပဝက္ခိဿံ သုဏောဟိ မေ’’တိ. “अभीत कल्पामधील आचरण, आणि वेगवेगळ्या भवांमध्ये केलेले आचरण सोडून; या कल्पामधील आचरण मी सांगेन, ते माझ्याकडून ऐका.” ဂဒြတပဉှေပိ [Pg.33] ‘‘ရာဇာ တုမှေဟိ သဒ္ဓိံ ပဋိသန္ထာရံ ကတွာ ဂဟပတိ ပတိရူပံ အာသနံ ဉတွာ နိသီဒထာတိ ဝက္ခိဿတီ’’တိ ဧဝမာဒိအဋ္ဌကထာပါဌော ဒိဿတိ, တသ္မာယေဝ ဧဒိသီ ပဒမာလာ ရစိတာ. ဝက္ခ ရောသေတိ ဓာတုဿပိ ဘဝိဿန္တီသဟိတာနိ ရူပါနိ ‘‘ဝက္ခိဿတိ, ဝက္ခိဿန္တီ’’တိအာဒီနိ ဘဝန္တိ. အတ္ထော ပနိမေသံ ‘‘ရောသိဿတိ, ရောသိဿန္တီ’’တိအာဒိနာ ဝတ္တဗ္ဗော. အယံ ဝစဝက္ခဓာတူနံ ဘဝိဿန္တီဝသေနေဝ ရူပသံသန္ဒနာနယော. गद्रतप्रश्नात (गद्रतपञ्ह) देखील "राजा तुमच्याशी कुशल विचारपूस करून, हे गृहपती, योग्य आसन जाणून बसा, असे म्हणेल (वक्खिस्सति)" असा अट्ठकथापाठ आढळतो, म्हणूनच अशी पदमाला रचली गेली आहे. "वक्ख रोसेति" (रागवणे) या धातूची देखील भविष्यकाळातील रूपे "वक्खिस्सति, वक्खिस्सन्ति" इत्यादी होतात. परंतु यांचा अर्थ "रोसिस्सति, रोसिस्सन्ति" (रागवेल, रागवतील) इत्यादी असा सांगावा. हा "वच" आणि "वक्ख" धातूंच्या केवळ भविष्यकाळाच्या संदर्भातील रूपांची तुलना करण्याचा नियम आहे. အဝစိဿာ, ဝစိဿာ, အဝစိဿံသု, ဝစိဿံသု. သေသံ သဗ္ဗံ နေယျံ. ဣဓ ပန ဝုတ္တသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရံ ဝတ္တဗ္ဗမ္ပိ အဝတွာ ဥပရိယေဝ ကထေဿာမ ဣတော အတိဝိယ ဝတ္တဗ္ဗဋ္ဌာနတ္တာ. अवचिस्सा, वचिस्सा, अवचिस्संसु, वचिस्संसु. उर्वरित सर्व (रूपे) समजून घ्यावीत. येथे मात्र सांगितलेल्या शब्दाचा अर्थोद्धार सांगण्याजोगा असला तरी तो न सांगता, पुढेच सांगू, कारण येथून पुढे तो अत्यंत सांगण्याजोगा विषय आहे. စု စဝနေ. စဝတိ. ကာရိတေ ‘‘စာဝေတီ’’တိ ရူပံ. ဒေဝကာယာ စုတော. စုတံ ပဒုမံ. စဝိတုံ, စဝိတွာ. "चु" (चु) हा धातू च्युत होणे (नष्ट होणे/मरणे) या अर्थात आहे. चवति (तो च्युत होतो). कारित (प्रयोजक) मध्ये "चावेति" असे रूप बनते. देवकाया चुतो (देवलोकातून च्युत झालेला). चुतं पदुमं (गळून पडलेले कमळ). चवितुं (च्युत होण्यासाठी), चवित्वा (च्युत होऊन). လောစ ဒဿနေ. လောစတိ. လောစနံ. "लोच" (लोच) हा धातू पाहणे या अर्थात आहे. लोचति (तो पाहतो). लोचनं (डोळा). သေစ သေစနေ. သေစတိ. "सेच" (सेच) हा धातू सिंचन करणे (शिंपडणे) या अर्थात आहे. सेचति (तो सिंचन करतो). သစ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ. သစတိ. "सच" (सच) हा धातू स्पष्ट वाणीत बोलणे या अर्थात आहे. सचति (तो स्पष्ट बोलतो). ကစ ဗန္ဓနေ. ကစတိ. "कच" (कच) हा धातू बांधणे या अर्थात आहे. कचति (तो बांधतो). မစ မုစိ ကက္ကနေ. ကက္ကနံ သရီရေ ဥဗ္ဗဋ္ဋနံ. မစတိ. မုဉ္စတိ. မစိ ဓာရဏုစ္ဆာယပူဇနေသု. ဓာရဏံ ဥစ္ဆာယော ပူဇနန္တိ တယော အတ္ထာ. တတ္ထ ဥစ္ဆာယော မလဟရဏံ. မဉ္စတိ. မဉ္စော, မဉ္စနံ. မဉ္စတိ ပုဂ္ဂလံ ဓာရေတီတိ မဉ္စော. "मच" आणि "मुच" हे धातू घासणे/मळणे (कक्कन) या अर्थात आहेत. कक्कन म्हणजे शरीराला उटणे लावणे (चोळणे). मचति, मुञ्चति. "मचि" हा धातू धारण करणे, उच्छाय (मळ दूर करणे) आणि पूजा करणे या तीन अर्थांत आहे. तेथे उच्छाय म्हणजे मळ दूर करणे. मञ्चति. मञ्चो (पलंग), मञ्चनं. जो व्यक्तीला धारण करतो (मञ्चति पुग्गलं धारेतीति) तो मञ्चो (पलंग) होय. ပစ ဗျတ္တိကရဏေ. ပစတိ. ပါကော, ပရိပါကော, ဝိပါကော, ပက္ကံ ဖလံ. "पच" (पच) हा धातू स्पष्ट करणे (किंवा परिपक्व करणे) या अर्थात आहे. पचति (तो शिजवतो/पचवतो). पाको (पाक/स्वयंपाक), परिपाको (परिपक्वता), विपाको (कर्मविपाक/फळ), पक्कं फलं (पिकलेले फळ). ထုစ ပသာဒေ. ထောစတိ. "थुच" (थुच) हा धातू प्रसन्न करणे किंवा स्तुती करणे या अर्थात आहे. थोचति. ဝစ ဝစိ ဒိတ္တိယံ. ဝစတိ. ဝဉ္စတိ. "वच" आणि "वचि" हे धातू चमकणे (दीप्ती) या अर्थात आहेत. वचति, वञ्चति. ရုစ [Pg.34] ဒိတ္တိယံ ရောစနေ စ. ဒိတ္တိ သောဘာ. ရောစနံ ရုစိ. ရောစတိ. ဝေရောစနော. သမဏဿ ရောစတေ သစ္စံ. တဿ တေ သဂ္ဂကာမဿ, ဧကတ္တမုပရောစိတံ. အယဉ္စ ဒိဝါဒိဂဏေ ရုစိအတ္ထံ ဂဟေတွာ ‘‘ရုစ္စတီ’’တိ ရူပံ ဇနေတိ. တေန ‘‘ဂမနံ မယှ ရုစ္စတီ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. စုရာဒိဂဏေ ပန ရုစိအတ္ထံ ဂဟေတွာ ‘‘ရောစေတိ ရောစယတီ’’တိ ရူပါနိ ဇနေတိ. တေန ‘‘ကိံ နု ဇာတိံ န ရောစေသီ’’တိအာဒိကာ ပါဠိယော ဒိဿန္တိ. တေဂဏိကောယံ ဓာတု. "रुच" (रुच) हा धातू चमकणे (दीप्ती) आणि आवडणे (रोचन) या अर्थात आहे. दीप्ती म्हणजे शोभा. रोचन म्हणजे रुची (आवड). रोचति (तो चमकतो/आवडतो). वेरोचनो (सूर्य). "समणस्स रोचते सच्चं" (श्रमणाला सत्य आवडते). "तस्स ते सग्गकामस्स, एकत्तमुपरोचितं" (स्वर्गाची इच्छा करणाऱ्या तुझ्यासाठी, एकांत पसंत केला गेला आहे). आणि हा धातू दिवादिगणात रुची (आवडणे) हा अर्थ घेऊन "रुच्चति" असे रूप निर्माण करतो. त्यामुळे "गमनं मय्ह रुच्चति" (मला जाणे आवडते) अशी पाळी (पाठात) आढळते. चुरादिगणात मात्र रुची अर्थ घेऊन "रोचेति, रोचयति" अशी रूपे निर्माण करतो. त्यामुळे "किं नु जातिं न रोचेसि" (तू जन्माला का पसंत करत नाहीस?) इत्यादी पाळीवचने आढळतात. हा तीन गणांमध्ये चालणारा (तैगणिक) धातू आहे. ပစ သံပါကေ. ပစတိ, ပစန္တိ. သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ပန ‘‘အတ္တနောဘာသာ’’တိ ဝဒန္တိ. "पच" (पच) हा धातू पूर्णपणे शिजवणे (संपाक) या अर्थात आहे. पचति, पचन्ति. व्याकरणतज्ज्ञ मात्र याला "आत्मनोभाषा" (आत्मनेपद) असे म्हणतात. အဉ္စ ဗျယဂတိယံ. ဗျယဂတိ ဝိနာသဂတိ. အဉ္စတိ. "अञ्च" (अञ्च) हा धातू व्ययगती (विनाशगती) या अर्थात आहे. व्ययगती म्हणजे विनाशगती (नाशाकडे जाणे). अञ्चति. ယာစ ယာစနာယံ. ဗြာဟ္မဏော နာဂံ မဏိံ ယာစတိ. နာဂေါ မဏိံ ယာစိတော ဗြာဟ္မဏေန. တေ တံ အဿေ အယာစိသုံ. သော တံ ရထမယာစထ. ဒေဝဒတ္တံ အာယာစတိ. ဧဝံ သုဒ္ဓကတ္တရိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဗြာဟ္မဏော ဗြာဟ္မဏေန နာဂံ မဏိံ ယာစေတိ, ယာစယတိ, ယာစာပေတိ, ယာစာပယတိ. ဧဝံ ဟေတုကတ္တရိ. ရာဇာ ဗြာဟ္မဏေန ဓနံ ယာစိယတိ, ယာစယိယတိ, ယာစာပိယတိ, ယာစာပယိယတိ. ဧဝံ ကမ္မနိ. ယာစံ, ယာစန္တော, ယာစန္တီ, ယာစန္တံ ကုလံ. ယာစမာနော, ယာစမာနာ, ယာစမာနံ ကုလံ. ယာစကော, ယာစနာ, ယာစိတဗ္ဗံ, ယာစိတုံ, ယာစိတွာန, ယာစိတုန, ယာစိယ, ယာစိယာန. ဧဝံ နာမိကပဒါနိ တုမန္တာဒီနိ စ ဘဝန္တိ. "याच" (याच) हा धातू याचना करणे (मागणे) या अर्थात आहे. "ब्राह्मणो नागं मणिं याचति" (ब्राह्मण नागाकडे मण्याची याचना करतो). "नागो मणिं याचितो ब्राह्मणेन" (नागाकडे ब्राह्मणाद्वारे मण्याची याचना केली गेली). "ते तं अस्से अयाचिसुं" (त्यांनी त्याला घोड्यांची याचना केली). "सो तं रथमयाचथ" (त्याने त्या रथाची याचना केली). "देवदत्तं आयाचति" (तो देवदत्ताकडे याचना करतो). अशी कर्तरी रूपे होतात. "ब्राह्मणो ब्राह्मणेन नागं मणिं याचेति, याचयति, याचापेति, याचापयति" (ब्राह्मण दुसऱ्या ब्राह्मणाद्वारे नागाकडे मण्याची याचना करवतो). अशी कारित (प्रयोजक) रूपे होतात. "राजा ब्राह्मणेन धनं याचियति, याचयियति, याचापियति, याचापयियति" (राजाकडून ब्राह्मणाद्वारे धनाची याचना केली जाते). अशी कर्मणी रूपे होतात. याचं, याचन्तो, याचन्ती, याचन्तं कुलं. याचमानो, याचमाना, याचमानं कुलं. याचको, याचना, याचितब्बं, याचितुं, याचित्वान, याचितुन, याचिय, याचियान. अशी नामिक पदे आणि तुमन्त (कृदन्त) इत्यादी रूपे होतात. ပစ ပါကေ. ဩဒနံ ပစတိ. ‘‘ဥဘယတောဘာသာ’’တိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဝဒန္တိ. ယထာ ပန သာသနေ ‘‘ပဏ္ဍိတောတိ ပဝုစ္စတီ’’တိ [Pg.35] ဝစဓာတုဿ ကမ္မနိ ရူပံ ပသိဒ္ဓံ, န တထာ ပစဓာတုဿ. ဧဝံ သန္တေပိ ဂရူ ‘‘တယာ ပစ္စတေ ဩဒနော’’တိ တဿ ကမ္မနိ ရူပံ ဝဒန္တိ. သာသနေ ပန အဝိသေသတော ‘‘ပစ္စတေ’’တိ ဝါ ‘‘ပစ္စတီ’’တိ ဝါ ဝုတ္တဿပိ ပဒဿ အကမ္မကောယေဝ ဒိဝါဒိဂဏိကော ပယောဂေါ ဣစ္ဆိတဗ္ဗော ‘‘ဒေဝဒတ္တော နိရယေ ပစ္စတိ. ယာဝ ပါပံ န ပစ္စတီ’’တိအာဒိဒဿနတော. ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘သယမေဝ ပီယတေ ပါနီယန္တိအာဒိ ဝိယ ဘူဝါဒိဂဏပက္ခိကော ကမ္မကတ္တုပ္ပယောဂေါ ဧသ, တသ္မာ ‘သယမေဝါ’တိ ပဒံ အဇ္ဈာဟရိတွာ ‘သယမေဝ ဒေဝဒတ္တော ပစ္စတီ’တိအာဒိနာ အတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော’’တိ တန္န, ‘‘သယမေဝ ပီယတေ ပါနီယ’’န္တိ ဧတ္ထ ဟိ ပါနီယံ မနုဿာ ပိဝန္တိ, န ပါနီယံ ပါနီယံ ပိဝတိ. မနုဿေဟေဝ တံ ပီယတေ, န သယံ. ဧဝံ ပရဿ ပါနကြိယံ ပဋိစ္စ ကမ္မဘူတမ္ပိ တံ သုကရပါနကြိယာဝသေန သုကရတ္တာ အတ္တနာဝ သိဇ္ဈန္တံ ဝိယ ဟောတီတိ ‘‘သယမေဝ ပီယတေ ပါနီယ’’န္တိ ရူဠှိယာ ပယောဂေါ ကတော. "पच" (पच) हा धातू शिजवणे या अर्थात आहे. "ओदनं पचति" (तो भात शिजवतो). व्याकरणतज्ज्ञ याला "उभयतोभाषा" (उभयपद) असे म्हणतात. परंतु, ज्याप्रमाणे बुद्धशासनात "पण्डितोति पवुच्चति" (पंडित असे म्हटले जाते) असे "वच" धातूचे कर्मणी रूप प्रसिद्ध आहे, तसे "पच" धातूचे नाही. असे असूनही आचार्य "तया पच्चते ओदनो" (तुझ्याकडून भात शिजवला जातो) असे त्याचे कर्मणी रूप सांगतात. बुद्धशासनात मात्र सामान्यतः "पच्चते" किंवा "पच्चति" असे म्हटलेले पद देखील कर्मकर्तरी अर्थानेच दिवादिगणातील प्रयोग म्हणून स्वीकारले पाहिजे, कारण "देवदत्तो niraye पच्चति" (देवदत्त नरकात शिजतो/यातना भोगतो), "याव पापं न पच्चति" (जोपर्यंत पाप पिकत नाही/फळ देत नाही) इत्यादी प्रयोग आढळतात. येथे काही जण कदाचित् म्हणतील की, "सयमेव पीयते पानीयं" (पाणी स्वतःच प्यायले जाते) इत्यादीप्रमाणे हा भूवादिगणाच्या पक्षातील कर्मकर्तरी प्रयोग आहे, म्हणून "सयमेव" (स्वतःच) या पदाचा अध्याहार करून "स्वतःच देवदत्त शिजतो" इत्यादी अर्थ सांगावा. पण ते योग्य नाही. कारण "सयमेव पीयते पानीयं" येथे पाणी लोक पितात, पाणी स्वतः पाण्याला पीत नाही. लोकांद्वारेच ते प्यायले जाते, स्वतःहून नाही. अशा प्रकारे दुसऱ्याच्या पिण्याच्या क्रियेवर अवलंबून असूनही कर्म असलेले ते पाणी, पिण्याच्या सुलभ क्रियेमुळे सुलभतेने स्वतःच सिद्ध होत असल्यासारखे वाटते, म्हणून "सयमेव पीयते पानीयं" असा रूढीने प्रयोग केला जातो. ‘‘သယမေဝ ကဋော ကရိယတေ’’တိ ဧတ္ထာပိ ကဋံ မနုဿာ ကရောန္တိ, န ကဋံ ကဋော ကရောတိ. မနုဿေဟေဝ ကဋော ကရိယတေ, န သယံ. ဧဝံ ပရဿ ကရဏကြိယံ ပဋိစ္စ ကမ္မဘူတောပိ သော သုကရဏ ကြိယာဝသေန သုကရတ္တာ အတ္တနာဝ သိဇ္ဈန္တော ဝိယ ဟောတီတိ ‘‘သယမေဝ ကဋော ကရိယတေ’’တိ ရူဠှိယာ ပယောဂေါ ကတော. "सयमेव कटो करियते" (चटई स्वतःच बनवली जाते) येथे देखील चटई लोक बनवतात, चटई स्वतः चटईला बनवत नाही. लोकांद्वारेच चटई बनवली जाते, स्वतःहून नाही. अशा प्रकारे दुसऱ्याच्या बनवण्याच्या क्रियेवर अवलंबून असूनही कर्म असलेली ती चटई, बनवण्याच्या सुलभ क्रियेमुळे सुलभतेने स्वतःच सिद्ध होत असल्यासारखी वाटते, म्हणून "सयमेव कटो करियते" असा रूढीने प्रयोग केला जातो. ဧတ္ထ ယထာ သယံသဒ္ဒေါ ပါနီယံ ပါနီယေနေဝ ပီယတေ, န အမှေဟိ. ကဋော ကဋေနေဝ ကရိယတေ, န အမှေဟီတိ သကမ္မကဝိသယတ္တာ ပယောဂါနံ အညဿ ကြိယာပဋိသေဓနသင်္ခါတံ အတ္ထဝိသေသံ ဝဒတိ, န တထာ ‘‘ဒေဝဒတ္တော နိရယေ ပစ္စတိ, ကမ္မံ ပစ္စတီ’’တိအာဒီသု တုမှေဟိ အဇ္ဈာဟရိတော သယံသဒ္ဒေါ အတ္ထဝိသေသံ ဝဒတိ အကမ္မကဝိသယတ္တာ ဧတေသံ ပယောဂါနံ. ဧဝံ [Pg.36] ‘‘ဒေဝဒတ္တော’’တိအာဒိကဿ ပစ္စတ္တဝစနဿ အကမ္မကကတ္တုဝါစကတ္တာ ကမ္မရဟိတသုဒ္ဓကတ္တုဝါစကတ္တာ စ ‘‘ပစ္စတီ’’တိ ဣဒံ ဒိဝါဒိဂဏိကရူပန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ပစဓာတု သဒ္ဒသတ္ထေ ဒိဝါဒိဂဏ ဝုတ္တော နတ္ထီတိ စေ? နတ္ထိ ဝါ အတ္ထိ ဝါ, ကိမေတ္ထ သဒ္ဒသတ္ထံ ကရိဿတိ, ပါဠိ ဧဝ ပမာဏံ, တသ္မာ မယံ လောကဝေါဟာရကုသလဿ ဘဂဝတော ပါဠိနယညေဝ ဂဟေတွာ ဣမံ ပစဓာတုံ ဒိဝါဒိဂဏေပိ ပက္ခိပိဿာမ. တထာ ဟိ ဓမ္မပါလာစရိယ အနုရုဒ္ဓါစရိယာဒီဟိ အဘိသင်္ခတာ ဒိဝါဒိဂဏိကပ္ပယောဂါ ဒိဿန္တိ –- येथे ज्याप्रमाणे "सयम्" (स्वतः) हा शब्द "पाणी पाण्यानेच प्यायले जाते, आमच्याद्वारे नाही", "चटई चटईनेच बनवली जाते, आमच्याद्वारे नाही" अशा कर्मकर्तरी विषयाच्या प्रयोगांमुळे दुसऱ्याच्या क्रियेचा निषेध करणारा विशेष अर्थ सांगतो; त्याप्रमाणे "देवदत्तो निरये पच्चति, कम्मं पच्चति" इत्यादींमध्ये तुमच्याद्वारे अध्याहृत केलेला "सयम्" शब्द विशेष अर्थ सांगत नाही, कारण हे प्रयोग केवळ कर्तरी विषयाचे आहेत. अशा प्रकारे "देवदत्तो" इत्यादी प्रथमा विभक्तीचे (पच्चत्तवचन) पद हे कर्मरहित शुद्ध कर्त्याचे वाचक असल्यामुळे "पच्चति" हे दिवादिगणातील रूप आहे असे समजावे. जर व्याकरणशास्त्रात "पच" धातू दिवादिगणात सांगितलेला नाही असे म्हटले, तर? तो असो वा नसो, येथे व्याकरणशास्त्र काय करणार? पाळी (पाळि) हेच प्रमाण आहे. म्हणूनच, आम्ही लोकव्यवहारात कुशल असलेल्या भगवंतांच्या पाळी पद्धतीचाच स्वीकार करून या "पच" धातूला दिवादिगणात देखील समाविष्ट करू. कारण धम्मपालाचार्य, अनुरुद्धाचार्य इत्यादींनी रचलेले दिवादिगणातील प्रयोग आढळतात— ဉာဏယုတ္တဝရံ တတ္ထ, ဒတွာ သန္ဓိံ တိဟေတုကံ; ပစ္ဆာ ပစ္စတိ ပါကာနံ, ပဝတ္တေ အဋ္ဌကေ ဒုဝေ. तेथे ज्ञानयुक्त श्रेष्ठ, तिहेतुक संधी देऊन; नंतर प्रवृत्तीमध्ये आठ (महाविपाकांपैकी) दोन विपाकांसाठी विपाकाला प्राप्त होतो (पच्चति). အသင်္ခါရံ သသင်္ခါရ-ဝိပါကာနိ စ ပစ္စတိ असंखारिक आणि ससंखारिक विपाकांमध्ये देखील तो विपाकाला प्राप्त होतो (पच्चति). ဣစ္စေဝမာဒယော. ဧတ္ထ ပန တေသံ ဣဒမေဝ ပါဠိယာ န သမေတိ. ယေ စုရာဒိဂဏမှိ သကမ္မကဘာဝေန ဘူဝါဒိဂဏေ စ အကမ္မကဘာဝေန ပဝတ္တဿ ဘူဓာတုဿေဝ ဘူဝါဒိဂဏေ ပဝတ္တဿ သကမကဿပိ သတော ဒိဝါဒိဂဏံ ပတွာ အကမ္မကဘူတဿ ပစဓာတုဿ သကမ္မကတ္တမိစ္ဆန္တိ. ဧတဉှိ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ ကုတော လဗ္ဘာ, တသ္မာ ဘဂဝတော ပါဝစနေ သောတူနံ သံသယသမုဂ္ဃာဋတ္ထံ ဧတ္ထ ဣမံ နီတိံ ပဋ္ဌပေမ – इत्यादी. परंतु येथे त्यांचे हेच पाळीशी (पाळि व्याकरणाशी) जुळत नाही. जे चुरादिगणात सकर्मक रूपाने आणि भूवादिगणात अकर्मक रूपाने प्रवृत्त होणाऱ्या 'भू' धातूच्या प्रमाणेच, भूवादिगणात प्रवृत्त होणाऱ्या सकर्मक असलेल्याही 'पच' धातूचे दिवादिगणात आल्यावर अकर्मक झालेल्याचे सकर्मकत्व इच्छितात. हे अट्ठकथासहित त्रिपिटक बुद्धवचनात कोठून मिळणार? म्हणून भगवंतांच्या प्रवचनात (शासनात) श्रोत्यांच्या संशयाचे निर्मूलन करण्यासाठी आम्ही येथे हा नियम प्रस्थापित करतो – ဝိနာပိ ဥပသဂ္ဂေန, ဂဏနာနတ္တယောဂတော; သကမ္မာကမ္မကာ ဟောန္တိ, ဓာတူ ပစဘိဒါဒယော. उपसर्गाशिवाय देखील, गणांच्या भिन्नतेच्या योगाने; पच, भिद इत्यादी धातू सकर्मक आणि अकर्मक होतात. ပုရိသော ဩဒနံ ပစတိ. သ ဘူတပစနိံ ပစိ. ဩဒနော ပစ္စတိ. ကမ္မံ ပစ္စတိ. ဝီဟိသီသံ ပစ္စတိ. ရုက္ခဖလာနိ ပစ္စန္တိ. နာဂေါ ပါကာရံ ဘိန္ဒတိ. တဠာကပါဠိ ဘိဇ္ဇတိ. ဘိဇ္ဇနဓမ္မံ ဘိဇ္ဇတိ. ဧတ္ထ စ သယံသဒ္ဒံ အဇ္ဈာဟရိတွာ ‘‘သယမေဝ ဩဒနော ပစ္စတီ’’တိအာဒိနာ ဝုတ္တေပိ ‘‘ပုရိသော သယမေဝ ပါဏံ ဟနတိ. ဘဂဝါ သယမေဝ [Pg.37] ဉေယျဓမ္မံ အဗုဇ္ဈီ’’တိ ပယောဂေသု ပရဿ အာဏတ္တိသမ္ဘူတဟနနကြိယာပဋိသေဓမိဝ ပရောပဒေသသမ္ဘူတဗုဇ္ဈနကြိယာပဋိသေဓနမိဝ စ အညဿ ကြိယာပဋိသေဓနဝသေန ဝုတ္တတ္တာ ယော သယံသဒ္ဒဝသေန ကမ္မကတ္တုဘာဝပရိကပ္ပော, တံ န ပမာဏံ. သယံသဒ္ဒေါ ဟိ သုဒ္ဓကတ္တုအတ္ထေပိ ဒိဿတိ, န ကေဝလံ ‘‘သယမေဝ ပီယတေ ပါနီယ’’န္တိအာဒီသု ကမ္မတ္ထေယေဝ, တသ္မာ သာသနာနုရူပေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော နယညူဟိ. ‘पुरुष भात शिजवतो’ (पुरिसो ओदनं पचति). ‘त्याने भूतपचनी शिजवली’ (स भूतपचनिं पचि). ‘भात शिजतो’ (ओदनो पच्चति). ‘कर्म शिजते/पक्व होते’ (कम्मं पच्चति). ‘भाताचे कणीस पिकते’ (वीहिसीसं पच्चति). ‘झाडाची फळे पिकतात’ (रुक्खफलानि पच्चन्ति). ‘हत्ती भिंत फोडतो’ (नागो पाकारं भिन्दति). ‘तलावाची भिंत फुटते’ (तळाकपाळि भिज्जति). ‘नाशवंत वस्तू नष्ट होते’ (भिज्जनधम्मं भिज्जति). आणि येथे ‘स्वयं’ (स्वतः) शब्दाचा अध्याहार करून “स्वतःच भात शिजतो” (सयमेव ओदनो पच्चति) इत्यादी म्हटले तरी, “पुरुष स्वतःच प्राणाचा घात करतो” (पुरिसो सयमेव पाणं हनति), “भगवंत स्वतःच ज्ञेय धर्म जाणते झाले” (भगवा सयमेव नेय्यधम्मं अबुज्झि) या प्रयोगांमध्ये दुसऱ्याच्या आज्ञेने होणाऱ्या हनन क्रियेच्या निषेधाप्रमाणे आणि दुसऱ्याच्या उपदेशाने होणाऱ्या बोध क्रियेच्या निषेधाप्रमाणे, अन्य क्रियेच्या निषेधार्थ म्हटल्यामुळे जो ‘स्वयं’ शब्दाच्या आधारे कर्मकर्तृभावाचा कल्पनाविलास केला जातो, तो प्रमाण मानला जाऊ शकत नाही. कारण ‘स्वयं’ शब्द कर्तृअर्थातही दिसतो, केवळ “पाणी स्वतःच प्यायले जाते” (सयमेव पीयते पानीयं) इत्यादी कर्मअर्थातच नाही. म्हणून नय जाणणाऱ्यांनी (व्याकरणतज्ज्ञांनी) शासनाला (बुद्धवचनाला) अनुसरूनच अर्थ ग्रहण केला पाहिजे. ဝိနာပိ ဥပသဂ္ဂေန, ဝိနာပိ စ ဂဏန္တရံ; သကမ္မာကမ္မကာ ဟောန္တိ, အတ္ထတော ဒိဝုအာဒယော. उपसर्गाशिवाय आणि दुसऱ्या गणात न जाताही, अर्थाच्या दृष्टीने 'दिवु' इत्यादी धातू सकर्मक आणि अकर्मक होतात. ကာမဂုဏေဟိ ဒိဗ္ဗတိ. ပစ္စာမိတ္တေ ဒိဗ္ဗတိ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ‘कामगुणांनी क्रीडा करतो’ (कामगुणेहि दिब्बति). ‘शत्रूंवर विजय मिळवतो’ (पच्चामित्ते दिब्बति). इतर प्रयोगही असेच योजावेत. ဂဏန္တရဉ္စောပသဂ္ဂံ, ဝိနာပိ အတ္ထနာနတံ; ပယောဂတော သကမ္မာ စ, အကမ္မာ စ ဂမာဒယော. दुसरा गण आणि उपसर्ग यांच्याशिवाय, अर्थाच्या भिन्नतेविनाही; प्रयोगावरून 'गमु' इत्यादी धातू सकर्मक आणि अकर्मक होतात. ပုရိသော မဂ္ဂံ ဂစ္ဆတိ. ဂမ္ဘီရေသုပိ အတ္ထေသု ဉာဏံ ဂစ္ဆတိ. ဓမ္မံ စရတိ. တတ္ထ တတ္ထ စရတိ. ‘पुरुष मार्गावरून जातो’ (पुरिसो मग्गं गच्छति). ‘गंभीर अर्थांमध्येही ज्ञान जाते (प्रवेश करते)’ (गम्भीरेसुपि अत्थेसु ञाणं गच्छति). ‘धर्माचे आचरण करतो’ (धम्मं चरति). ‘तेथे तेथे फिरतो’ (तत्थ तत्थ चरति). ဂဏန္တရဉ္စောပသဂ္ဂံ, ပယောဂဉ္စတ္ထနာနတံ; ဝိနာပိ တိဝိဓာ ဟောန္တိ, ဒိသာဒီ ရူပဘေဒတော. दुसरा गण, उपसर्ग, प्रयोग आणि अर्थाची भिन्नता यांच्याशिवायही; 'दिस' इत्यादी धातू रूपभेदाने तीन प्रकारचे होतात. ပါသာဒံ ပဿတိ, ပါသာဒံ ဒက္ခတိ ပါသာဒေါ ဒိဿတိ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ‘प्रासाद (वाडा) पाहतो’ (पासादं पस्सति), ‘प्रासाद पाहील’ (पासादं दक्खति), ‘प्रासाद दिसतो’ (पासादो दिस्सति). इतर प्रयोगही असेच योजावेत. သဘာဝတော သကမ္မာ တု, ရုဒဓာတာဒယော မတာ; သဘာဝတော အကမ္မာ စ, နန္ဒဓာတာဒယော မတာ. स्वभावानेच सकर्मक असलेले 'रुद' इत्यादी धातू मानले गेले आहेत; आणि स्वभावानेच अकर्मक असलेले 'नन्द' इत्यादी धातू मानले गेले आहेत. မတံ ဝါ အမ္မ ရောဒန္တိ, ဣဓ နန္ဒတိ ပေစ္စ နန္ဒတိ. ‘किंवा हे आई! मृतासाठी रडतात’ (मतं वा अम्म रोदन्ति), ‘येथे आनंदित होतो, परलोकात आनंदित होतो’ (इध नन्दति पेच्च नन्दति). ဥပသဂ္ဂဝသေနေကေ, သကမ္မာပိ အကမ္မကာ; သမ္ဘဝန္တိ တထေကစ္စေ, အကမ္မာပိ သကမ္မကာ. उपसर्गाच्या प्रभावाने काही सकर्मक धातू देखील अकर्मक होतात; तसेच काही अकर्मक धातू देखील सकर्मक होतात. ဧကစ္စေ [Pg.38] တုပသဂ္ဂေဟိ, သကမ္မာ စ သကမ္မကာ; အကမ္မကာ အကမ္မာ စ, ဧသတ္ထောပေတ္ထ ဒီပိတော; काही धातू उपसर्गांमुळे सकर्मक असूनही सकर्मकच राहतात, आणि अकर्मक असूनही अकर्मकच राहतात, हा अर्थही येथे स्पष्ट केला आहे. ပုရိသော ဂါမာ နိဂ္ဂစ္ဆတိ, ဓနံ အဓိဂစ္ဆတိ, ပုရိသော ပါဏံ အဘိဘဝတိ, ဟိမဝတာ ပဘဝန္တိ မဟာနဒိယော. အညာနိပိ ပယောဂါနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ‘पुरुष गावातून बाहेर पडतो’ (पुरिसो गामा निग्गच्छति), ‘धन प्राप्त करतो’ (धनं अधिगच्छति), ‘पुरुष प्राण्याला पराभूत करतो’ (पुरिसो पाणं अभिभवति), ‘हिमालयातून महानद्या उगम पावतात’ (हिमवता पभवन्ति महानदियो). इतर प्रयोगही असेच योजावेत. တတ္ထ ယဒိ သာသနေ ပစဓာတုဿ ကမ္မနိ ရူပံ သိယာ, ‘‘ပုရိသေန ကမ္မံ ကရိယတီ’’တိ ပယောဂေါ ဝိယ ‘‘ပုရိသေန ဩဒနော ပစိယတီ’’တိ ပယောဂေါ ဣစ္ဆိတဗ္ဗော. ယေ ပန ဂရူ ‘‘တယာ ပစ္စတေ ဩဒနော’’တိအာဒီနိ ဣစ္ဆန္တိ, တေ သဒ္ဒသတ္ထနယံ နိဿာယ ဝဒန္တိ မညေ. ဧဝံ သန္တေပိ ဥပပရိက္ခိတွာ ယုတ္တာနိ စေ, ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ကာရိတေ ‘‘ပုရိသော ပုရိသေန ပုရိသံ ဝါ ဩဒနံ ပါစေတိ, ပါစယတိ, ပါစာပေတိ, ပါစာပယတိ. ပုရိသေန ပုရိသော ဩဒနံ ပါစိယတိ, ပါစယိယတိ, ပါစာပိယတိ, ပါစာပယိယတီ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ‘‘ယထာ ဒဏ္ဍေန ဂေါပါလော, ဂါဝံ ပါစေတိ ဂေါစရ’’န္တိအာဒီသု အညောပိ အတ္ထော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. तेथे जर शासनात (बुद्धवचनात) 'पच' धातूचे कर्मणी रूप असेल, तर “पुरुषाकडून कर्म केले जाते” (पुरिसेन कम्मं करियति) या प्रयोगाप्रमाणे “पुरुषाकडून भात शिजवला जातो” (पुरिसेन ओदनों पचियति) हा प्रयोग स्वीकारला पाहिजे. परंतु जे आचार्य “तुझ्याकडून भात शिजवला जातो” (तया पच्चते ओदनो) इत्यादी प्रयोग स्वीकारतात, ते व्याकरणशास्त्राच्या नियमांचा आश्रय घेऊन बोलतात असे मला वाटते. असे असले तरी, परीक्षण करून जर ते योग्य वाटले, तर ते ग्रहण करावे. प्रयोजक (कारित) रूपात “पुरुष दुसऱ्या पुरुषाकडून किंवा पुरुषाला भात शिजवतो” (पुरिसो पुरिसेन पुरिसं वा ओदनं पाचेति, पाचयति, पाचापेति, पाचापयति) आणि “पुरुषाकडून पुरुषाद्वारे भात शिजवला जातो” (पुरिसेन पुरिसो ओदनं पाचियति, पाचयियति, पाचापियति, पाचापयियति) अशी रूपे होतात. “ज्याप्रमाणे गोपाळ काठीने गाईला गोचराकडे (चरण्याच्या जागेकडे) हाकतो” (यथा दण्डेन गोपालो, गावं पाचेति गोचरं) इत्यादींमध्ये दुसराही अर्थ पाहिला पाहिजे. ပစံ, ပစန္တော, ပစန္တီ, ပစမာနော, ပစမာနာ. ပါတဗ္ဗံ, ပစိတံ, ပစိတဗ္ဗံ, ပစနီယံ, ပစိတုံ, ပစိတွာ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဣမဿ မံသဉ္စ ပါတဗ္ဗ’’န္တိ ပယောဂေါ ဥဒါဟရဏံ. ‘‘ပစတိ, ပစန္တိ. ပစသီ’’တိအာဒိ ပဒက္ကမော သုဗောဓော. ‘पचं’ (शिजवणारा), ‘पचन्तो’ (शिजवणारा), ‘पचन्ती’ (शिजवणारी), ‘पचमानो’ (शिजवणारा), ‘पचमाना’ (शिजवणारी). ‘पातब्बं’ (पिण्यायोग्य/रक्षण करण्यायोग्य), ‘पचितं’ (शिजविलेले), ‘पचितब्बं’ (शिजवण्यायोग्य), ‘पचनीयं’ (शिजवण्यायोग्य), ‘पचितुं’ (शिजवण्यासाठी), ‘पचित्वा’ (शिजवून). आणि येथे “याचे मांस खाण्यायोग्य (किंवा रक्षण करण्यायोग्य) आहे” (इमस्स मंसञ्च पातब्बं) हा प्रयोग उदाहरण आहे. “पचति, पचन्ति, पचसि” इत्यादी पदक्रम सुबोध (समजण्यास सोपा) आहे. သိစ ဃရဏေ. သေစတိ, သေကော, ‘‘ဥဘတောဘာသာ’’တိ ဝဒန္တိ. सिच (सिञ्च्) धातू सिंचन (शिंपडणे) या अर्थात. ‘सेचेति’ (सिंचन करतो), ‘सेको’ (सिंचन). याला ‘उभतोभासा’ (दोन्ही भाषांमध्ये/पदांमध्ये चालणारा) असे म्हणतात. ဣမာနိ စကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ही 'च'कारान्त धातूंची रूपे आहेत. ဆကာရန္တဓာတု छकारान्त धातू ပရဿဘာသာဒိဘာဝံ, သဗ္ဗေသံ ဓာတုနံ ဣတော; ပရံ န ဗျာကရိဿံ သော, သာသနေ ဤရိတော န ဟိ. सर्व धातूंचा परस्मैपद इत्यादी भाव यापुढे मी स्पष्ट करणार नाही, कारण शासनात (बुद्धवचनात) तसे सांगितले गेलेले नाही. ဆု [Pg.39] ဆေဒနေ. ဆောတိ. ဆောတွာန မောဠိံ ဝရဂန္ဓဝါသိတံ. အစ္ဆောစ္ဆုံဝတ ဘော ရုက္ခံ. छु धातू छेदण्याच्या (कापण्याच्या) अर्थात. ‘छोति’ (कापतो). ‘उत्कृष्ट सुवासाने सुवासित केलेली जटा कापून’ (छोत्वान मोळिं वरगन्धवासितं). ‘अरे! त्यांनी खरोखरच झाड कापले’ (अच्छोच्छुंवत भो रुक्खं). မိလေဆ အဝိယတ္တာယံ ဝါစာယံ. မိလေစ္ဆတိ, မိလက္ခု. ပစ္စန္တိမေသု ဇနပဒေသု ပစ္စာဇာတော ဟောတိ မိလက္ခူသု အဝိညာတာရေသု. मिलेछ (म्लेच्छ) धातू अस्पष्ट बोलण्याच्या अर्थात. ‘मिलेच्छति’ (अस्पष्ट बोलतो), ‘मिलक्खु’ (म्लेच्छ/अस्पष्ट बोलणारा). ‘तो सीमावर्ती प्रदेशांतील म्लेंच्छांमध्ये जन्मला आहे, जे (धर्म) जाणत नाहीत’ (पच्चन्तिमेसु जनपदेसु पच्चाजातो होति मिलक्खूसु अविञ्ञातारेसु). ဝဆိ ဣစ္ဆာယံ. ဝဉ္ဆတိ. ဝဉ္ဆိတံ ဓနံ. वछि धातू इच्छेच्या अर्थात. ‘वञ्छति’ (इच्छा करतो). ‘इच्छिलेले धन’ (वञ्छितं धनं). အဆိ အာယာမေ. အဉ္စတိ. ဒီဃံ ဝါ အဉ္ဆန္တော ဒီဃံ အဉ္ဆာမီတိ ပဇာနာတိ. अछि धातू लांबवण्याच्या (ओढण्याच्या) अर्थात. ‘अञ्चति’ (ओढतो). ‘दीर्घ श्वास ओढताना (घेताना), मी दीर्घ श्वास ओढत आहे असे जाणतो’ (दीघं वा अञ्चन्तो दीघं अञ्चामीति पजानाति). ဟုစ္ဆ ကောဋိလ္လေ. ဟုစ္ဆတိ. हुच्छ धातू कुटिलतेच्या (वाकडेपणाच्या) अर्थात. ‘हुच्छति’ (कुटिल होतो/वाकडा होतो). မုစ္ဆ မောဟမုစ္ဆာသု. မုစ္ဆတိ. မုစ္ဆိတော ဝိသဝေဂေန, ဝိသညီ သမပဇ္ဇထ. မုစ္ဆာ, မုစ္ဆိတွာ. मुच्छ धातू मोह आणि मूर्च्छेच्या (बेशुद्धीच्या) अर्थात. ‘मुच्छति’ (मूर्च्छित होतो). ‘विषाच्या वेगाने मूर्च्छित होऊन, तो बेशुद्ध झाला’ (मुच्छितो विसवेगेन, विसञ्ञी समपज्जथ). ‘मुच्छा’ (मूर्च्छा), ‘मुच्छित्वा’ (मूर्च्छित होऊन). ဖုဆ ဝိသရဏေ ဖောဆတိ. फुछ धातू पसरण्याच्या (विस्तारण्याच्या) अर्थात. ‘फोछति’ (पसरतो). ယုဆ ပမာဒေ. ယုစ္ဆတိ. युच्छ धातू प्रमादाच्या (आळसाच्या/दुर्लक्षाच्या) अर्थात. ‘युच्छति’ (प्रमाद करतो). ဥဆိ ဥဉ္ဆေ. ဥဉ္ဆော ပရိယေသနံ. ဥဉ္ဆတိ. ဥဉ္ဆာစရိယာယ ဤဟထ. उछि धातू उञ्छ (धान्य गोळा करणे/भिक्षा मागणे) या अर्थात. ‘उञ्छो’ म्हणजे शोधणे/भिक्षा मिळवणे. ‘उञ्छति’ (धान्य गोळा करतो/भिक्षा मागतो). ‘उञ्छचर्येसाठी (भिक्षेसाठी) प्रयत्न करा’ (उञ्छाचरियाय ईहथ). ဥဆ ပိပါသာယံ. ဥဆတိ. उछ धातू तहानेच्या (तृष्णेच्या) अर्थात. ‘उछति’ (तहानलेला होतो). ပုစ္ဆ ပဉှေ ပုစ္ဆတိ. ပုစ္ဆိတာ, ပုစ္ဆကော, ပုဋ္ဌော, ပုစ္ဆိတော, ပုစ္ဆာ. ဘိက္ခု ဝိနယဓရံ ပဉှံ ပုစ္ဆတိ. ပုစ္ဆိ, ပုစ္ဆိတုံ. ပုစ္ဆိတွာ. ဧတ္ထ စ ပဉ္စဝိဓာ ပုစ္ဆာ အဒိဋ္ဌဇောတနာပုစ္ဆာ ဒိဋ္ဌသံသန္ဒနာပုစ္ဆာ ဝိမတိစ္ဆေဒနာပုစ္ဆာ အနုမတိပုစ္ဆာ ကထေတုကမျတာပုစ္ဆာတိ. တာသံ နာနတ္တံ အဋ္ဌသာလိနိယာဒိတော ဂဟေတဗ္ဗံ. पुच्छ धातू प्रश्न विचारण्याच्या अर्थात. ‘पुच्छति’ (विचारतो). ‘पुच्छिता’ (विचारणारा), ‘पुच्छको’ (विचारणारा), ‘पुट्ठो’ (विचारलेला), ‘पुच्छितो’ (विचारलेला), ‘पुच्छा’ (प्रश्न). ‘भिक्खू विनयधराला प्रश्न विचारतो’ (भिक्खु विनयधरं पञ्हं पुच्छति). ‘पुच्छि’ (विचारले), ‘पुच्छितुं’ (विचारण्यासाठी), ‘पुच्छित्वा’ (विचारून). आणि येथे पाच प्रकारचे प्रश्न आहेत: अदिट्ठजोतनापुच्छा (न पाहिलेले स्पष्ट करण्यासाठी विचारलेला प्रश्न), दिट्ठसंसन्दनापुच्छा (पाहिलेल्याची पडताळणी करण्यासाठी विचारलेला प्रश्न), विमतिच्छेदनापुच्छा (संशयाचे निरसन करण्यासाठी विचारलेला प्रश्न), अनुमतिपुच्छा (संमती मिळवण्यासाठी विचारलेला प्रश्न) आणि कथेतुकाम्यतापुच्छा (सांगण्याच्या इच्छेने विचारलेला प्रश्न). त्यांची भिन्नता अट्ठसालिनी इत्यादी ग्रंथांमधून ग्रहण करावी. ဝိစ္ဆ ဂတိယံ. ဝိစ္ဆတိ. ဝိစ္ဆိကာ. विच्छ धातू गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात. ‘विच्छति’ (जातो). ‘विच्छिका’ (विंचू - गती करणारी). ဝစ္ဆု [Pg.40] ဆေဒနေ. ဝုစ္ဆတိ. ဝုတ္တာ, ဝုတ္တဝါ, ဝုတ္တသိရော. ဝကာရဂတဿ အကာရဿ ဥတ္တံ. वच्छु धातू छेदण्याच्या (कापण्याच्या) अर्थात. ‘वुच्छति’ (कापला जातो). ‘वुत्ता’ (कापलेले/मुंडण केलेले), ‘वुत्तवा’ (ज्याने कापले आहे तो), ‘वुत्तसिरो’ (ज्याचे डोके मुंडण केले आहे तो). येथे 'व' कारामधील 'अ' काराचा 'उ' कार झाला आहे. ဝုတ္တသဒ္ဒေါ ကေသောဟရဏေပိ ဒိဿတိ ‘‘ကာပဋိကော မာဏဝေါ ဒဟရော ဝုတ္တသိရော’’တိအာဒီသု. ဧတ္ထ စ သိရသဒ္ဒေန သိရောရုဟာ ဝုတ္တာ ယထာ မဉ္စသဒ္ဒေန မဉ္စဋ္ဌာ, စက္ခုသဒ္ဒေန စ စက္ခုနိဿိတံ ဝိညာဏံ. ရောပိတေပိ ‘‘ယထာ သာရဒိကံ ဗီဇံ, ခေတ္တေ ဝုတ္တံ ဝိရူဟတီ’’တိအာဒီသု. ကထိတေပိ ‘‘ဝုတ္တမိဒံ ဘဂဝတာ, ဝုတ္တမရဟတာ’’တိအာဒိသု. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – ‘वुत्त’ शब्द केस कापण्याच्या (मुंडण करण्याच्या) अर्थातही दिसतो, जसे की “कापटिक तरुण माणवक मुंडित डोक्याचा आहे” (कापटिको माणवो दहरो वुत्तसिरो) इत्यादींमध्ये. आणि येथे ‘शिर’ शब्दाने डोक्यावरील केस (शिरोरुह) अभिप्रेत आहेत, ज्याप्रमाणे ‘मंच’ शब्दाने मंचावर बसलेले लोक (मंचस्था) आणि ‘चक्षु’ शब्दाने चक्षूवर आश्रित असलेले विज्ञान अभिप्रेत असते. पेरण्याच्या अर्थातही हा शब्द वापरला जातो, जसे की “ज्याप्रमाणे शरद ऋतूतील बीज शेतात पेरले असता उगवते” (यथा सारदिकं बीजं, खेत्ते वुत्तं विरूहति) इत्यादींमध्ये. आणि बोलण्याच्या अर्थातही, जसे की “हे भगवंतांनी म्हटले आहे, अरहंतांनी म्हटले आहे” (वुत्तमिदं भगवता, वुत्तमरहता) इत्यादींमध्ये. याविषयी असे म्हटले जाते – ဝစ္ဆုဝပဝစဝသာ, ဝုတ္တသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ; ကေသောဟာရေ ရောပိတေ စ, ကထိတေ စ ယထာက္ကမန္တိ. ‘वच्छु’, ‘वपु’ आणि ‘वच’ या धातूंपासून अनुक्रमे केस कापण्याच्या (मुंडण करण्याच्या), पेरण्याच्या आणि बोलण्याच्या अर्थात ‘वुत्त’ शब्द प्रवृत्त होतो. အပရော နယော – ဝုတ္တသဒ္ဒေါ ‘‘နော စ ခေါ ပဋိဝုတ္တ’’န္တိအာဒီသု ဝါပသမီကရဏေ ဒိဿတိ. ‘‘ပန္နလောမော ပရဒတ္တဝုတ္တော’’တိအာဒီသု ဇီဝိတဝုတ္တိယံ. ‘‘ပဏ္ဍုပလာသော ဗန္ဓနာ ပဝုတ္တော’’တိအာဒီသု အပဂမေ. ‘‘ဂီတံ ပဝုတ္တံ သမီဟိတ’’န္တိအာဒီသု ပါဝစနဝသေန ပဝတ္တိတေ. လောကေ ပန ‘‘ဝုတ္တော ပါရာယနော’’တိအာဒီသု အဇ္ဈေနေ ဒိဿတိ, အတြိဒံ ဝုစ္စတိ दुसरा प्रकार (असा आहे) – 'वृत्त' (vutta) हा शब्द "नो च खो पटिवुत्तं" (पण प्रत्युत्तर दिले नाही) इत्यादींमध्ये पेरणीनंतर जमीन सपाट करण्याच्या (वापसमीकरण) अर्थात दिसतो. "पन्नलोमो परदत्तवुत्तो" (रोम शांत झालेला, दुसऱ्याने दिलेल्यावर जगणारा) इत्यादींमध्ये जीवनवृत्तीच्या अर्थात. "पण्डुपलासो बन्धना पवुत्तो" (पिवळे पान बंधनातून मुक्त झाले) इत्यादींमध्ये दूर होण्याच्या (अपगम) अर्थात. "गीतं पवुत्तं समीहितं" (गायलेले, प्रवचन केलेले, इच्छित) इत्यादींमध्ये प्रवचनाच्या रूपाने प्रवृत्त करण्याच्या अर्थात. लोकव्यवहारात (लौकिक भाषेत) "वुत्तो पारायनो" इत्यादींमध्ये अध्ययनाच्या (शिकण्याच्या) अर्थात दिसतो, येथे हे म्हटले जाते – ‘‘ဝါပသမီကရဏေ စ, အထော ဇီဝိတဝုတ္တိယံ; အပဂမေ ပါဝစန-ဝသေန စ ပဝတ္တိတေ; အဇ္ဈေနေ စေဝမေတေသု, ဝုတ္တသဒ္ဒေါ ပဒိဿတီ’’တိ. "पेरणीनंतर जमीन सपाट करण्यात (वापसमीकरण), तसेच जीवनवृत्तीमध्ये; दूर होण्यात (मुक्त होण्यात) आणि प्रवचनाच्या रूपाने प्रवृत्त करण्यात; आणि अध्ययनात, या सर्व अर्थांमध्ये 'वृत्त' (vutta) हा शब्द दिसून येतो." အပရောပိ နယော – ဝုတ္တသဒ္ဒေါ သဥပသဂ္ဂေါစ အနုပသဂ္ဂေါ စ ဝပနေ ဝါပသမီကရဏေ ကေသောဟာရေ ဇီဝိတဝုတ္တိယံ ပမုတ္တဘာဝေ [Pg.41] ပါဝစနဝသေန ပဝတ္တိတေ အဇ္ဈေနေ ကထနေတိ ဧဝမာဒီသု ဒိဿတိ. တထာ ဟေသ – आणखी एक प्रकार (असा आहे) – 'वृत्त' (vutta) हा शब्द उपसर्गासह आणि उपसर्गाशिवाय देखील पेरणी करणे, पेरणीनंतर जमीन सपाट करणे, केस कापून टाकणे, जीवनवृत्ती, मुक्त भाव, प्रवचनाच्या रूपाने प्रवृत्त करणे, अध्ययन आणि कथन (बोलणे) इत्यादी अर्थांमध्ये दिसतो. तसेच तो (खालीलप्रमाणे आहे) – ‘‘ဂါဝေါ တဿ ပဇာယန္တိ, ခေတ္တေ ဝုတ္တံ ဝိရူဟတိ; ဝုတ္တာနံ ဖလမသ္နာတိ, ယော မိတ္တာနံ န ဒုဗ္ဘတီ’’တိ "जो मित्रांशी द्रोह करत नाही, त्याच्या गाई प्रसवतात (वाढतात), शेतात पेरलेले उगवते आणि तो पेरलेल्याचे फळ खातो." အာဒီသု ဝပနေ အာဂတော. ‘‘နော စ ခေါ ပဋိဝုတ္တ’’န္တိအာဒီသု အဋ္ဌဒန္တကာဒီဟိ ဝါပသမီကရဏေ. ‘‘ကာပဋိကော မာဏဝေါ ဒဟရော ဝုတ္တသိရော’’တိအာဒီသု ကေသောဟရဏေ. ‘‘ပန္နလောမော ပရဒတ္တဝုတ္တော မိဂဘူတေန စေတသာ ဝိဟရတီ’’တိအာဒီသု ဇီဝိတဝုတ္တိယံ. ‘‘သေယျထာပိ နာမ ပဏ္ဍုပလာသော ဗန္ဓနာ ပဝုတ္တော အဘဗ္ဗော ဟရိတတ္ထာယာ’’တိအာဒီသု ဗန္ဓနတော ပမုတ္တဘာဝေ. ‘‘ယေသမိဒံ ဧတရဟိ ပေါရာဏံ မန္တပဒံ ဂီတံ ပဝုတ္တံ သမီဟိတ’’န္တိအာဒီသု ပါဝစနဘာဝေန ပဝတ္တိတေ. လောကေ ပန ‘‘ဝုတ္တော ဂဏော, ဝုတ္တော ပါရာယနော’’တိအာဒီသု အဇ္ဈေနေ. ‘‘ဝုတ္တံ ခေါ ပနေတံ ဘဂဝတာ, ဓမ္မဒါယာဒါ မေ ဘိက္ခဝေ ဘဝထ, မာ အာမိသဒါယာဒါ’’တိအာဒီသု ကထနေ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – इत्यादींमध्ये (हा शब्द) पेरणीच्या (वपन) अर्थात आला आहे. "नो च खो पटिवुत्तं" इत्यादींमध्ये अष्टदंतक (आठ दातांचे अवजार) इत्यादींद्वारे पेरणीनंतर जमीन सपाट करण्याच्या (वापसमीकरण) अर्थात. "कापटिको माणवो दहरो वुत्तसिरो" (कपटी तरुण माणवक मुंडित डोक्याचा आहे) इत्यादींमध्ये केस कापण्याच्या (केशोहरण) अर्थात. "पन्नलोमो परदत्तवुत्तो मिगभूतेन चेतसा विहरति" (रोम शांत झालेला, दुसऱ्याने दिलेल्यावर जगणारा, हरिणासारख्या चित्ताने विहार करतो) इत्यादींमध्ये जीवनवृत्तीच्या अर्थात. "सेय्यथापि नाम पण्डुपलासो बन्धना पवुत्तो अभब्बो हरितत्थाय" (ज्याप्रमाणे पिवळे पडलेले पान बंधनातून तुटल्यावर पुन्हा हिरवे होण्यास असमर्थ असते) इत्यादींमध्ये बंधनातून मुक्त होण्याच्या अर्थात. "येसमिदं एतरहि पोराणं मन्तपदं गीतं पवुत्तं समीहितं" (ज्यांचे हे प्राचीन मंत्रपद सध्या गायलेले, प्रवचन केलेले, इच्छित आहे) इत्यादींमध्ये प्रवचन रूपाने प्रवृत्त करण्याच्या अर्थात. लोकव्यवहारात "वुत्तो गणो, वुत्तो पारायनो" इत्यादींमध्ये अध्ययनाच्या अर्थात. "वृत्तं खो पनेतं भगवता, धम्मदायादा मे भिक्खवे भवथ, मा आमिसदायादा" ("भिक्खूंनो, तुम्ही माझे धम्मदायाद व्हा, आमिषदायाद होऊ नका, असे भगवंतांनी म्हटले आहे") इत्यादींमध्ये कथनाच्या (बोलण्याच्या) अर्थात. येथे हे म्हटले जाते – ဝပ ဝတု ဝစ္ဆုဝစ-ဓာတူနံ ဝသတော မတော; သောပသဂ္ဂေါ နောပသဂ္ဂေါ, ဝုတ္တသဒ္ဒေါ ယထာရဟံ. "वप, वतु, वच्छु आणि वच या धातूंच्या प्रभावाने, उपसर्गासह किंवा उपसर्गाशिवाय, 'वृत्त' (vutta) हा शब्द यथायोग्य मानला गेला आहे." ဝပနေ စ ဝါပသမီ-ကရဏေ မုဏ္ဍတာယ စ; ဇီဝဝုတျံ ပမုတ္တတ္ထေ, ဝသာ ပါဝစနဿ တု; ပဝတ္တိတေ စ အဇ္ဈေနေ, ကထနေ စာတိ လက္ခယေ; "पेरणीमध्ये, पेरणीनंतर जमीन सपाट करण्यात, मुंडण करण्यात (केस कापण्यात), जीवनवृत्तीमध्ये, मुक्त होण्याच्या अर्थात, प्रवचनाच्या प्रभावाने प्रवृत्त करण्यात, अध्ययनात आणि कथनात (हा शब्द) लक्षित करावा (समजावा)." တစ္ဆ တနုကရဏေ. တစ္ဆတိ. တစ္ဆကော ဒါရုံ. 'तच्छ' (taccha) धातू बारीक करणे (तासणे) या अर्थात आहे. 'तच्छति' (तो तासतो). 'तच्छको दारुं' (सुतार लाकूड तासतो). ဆကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'छ' कारान्त धातूंची रूपे. ဇကာရန္တဓာတု 'ज' कारान्त धातू. ဇိဇယေ. ဇေတိ. ဇယတိ, ပရာဇယတိ. ဓမ္မံ စရန္တော သာမိကံ ပရာဇေတိ. ဓမ္မံ စရန္တော ပရဇ္ဇတိ. ရာဇာနံ ဇယာပေသုံ. ဇယာပေတွာ. ဧတ္ထ ဇယာပေသုန္တိ ‘‘ဇယတု ဘဝ’’န္တိ အာသီသဝစနံ ဝဒိံသူတိ အတ္ထော. ဇယနံ, ဇိတံ, ဇယော, ဝိဇိတံ, ဇိနော, ဇေတာ, ဇေတော, ဇိတော မာရော, မာရံ ဇိတော, ဇိတဝါ, ဇိတာဝီ, ဝိဇိတာဝီ, မာရဇိ, လောကဇိ, ဩဓိဇိနော, အနောဓိဇိနော, ဇိတော. ဝိဇိတော, ဇေတုံ, ဝိဇေတုံ, ဇိတွာ, ဝိဇိတွာ. ဣမဿ ပန ဓာတုဿ ကိယာဒိဂဏံ ပတ္တဿ ‘‘ဇိနာတိ ဇိနိတွာ’’တျာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'जि' (ji) धातू जिंकणे (जय) या अर्थात आहे. 'जेति', 'जयति', 'पराजयति' (जिंकतो, पराभूत करतो). "धम्मं चरन्तो सामिकं पराजेति" (धर्माचे आचरण करणारा स्वामीला पराभूत करतो). "धम्मं चरन्तो परज्जति" (धर्माचे आचरण करणारा पराभूत होतो). "राजानं जयापेसुं" (त्यांनी राजाचा जयजयकार केला). "जयापेत्वा" (जयजयकार करून). येथे 'जयापेसुं' म्हणजे "आपला विजय असो" (जयतु भवं) असे आशिर्वचन बोलले, असा अर्थ आहे. जयनं (जिंकणे), जितं (जिंकलेले), जयो (विजय), विजितं (विशेष जिंकलेले), जिनो (विजेता), जेता (विजेता), जेतो, जितो मारो (मार जिंकला गेला), मारं जितो (माराला जिंकणारा), जितवा (जिंकणारा), जितावी (विजेता), विजितावी, मारजि (मारविजेता), लोकजि (लोकविजेता), ओधिजिनो (मर्यादित विजेता), अनोधिजिनो (अमर्यादित विजेता), जितो, विजितो, जेतुं (जिंकण्यासाठी), विजेतुं, जित्वा (जिंकून), विजित्वा. परंतु या धातूला 'क्रियादिगण' प्राप्त झाल्यावर "जिनाति, जिनित्वा" इत्यादी रूपे होतात. ဇိ အဘိဘဝနေ. ဇေတိ. ဇိနော. ပုဗ္ဗေ ဝိယ ရူပါနိ. ဧတ္ထ စ ‘‘တုမှေဟိ အာနန္ဒ သပ္ပုရိသေဟိ ဝိဇိတံ, ပစ္ဆိမာ ဇနတာသာလိမံသောဒနံ အတိမညိဿတီ’’တိ ပါဠိ အဘိဘဝနတ္ထသာဓကာ. ဧတ္ထ ဟိ ဝိဇိတန္တိ အဓိဘူတန္တိ အတ္ထော. 'जि' (ji) धातू पराभूत करणे (अभिभव) या अर्थात आहे. 'जेति', 'जिनो'. पूर्वीप्रमाणेच रूपे होतात. आणि येथे "तुम्हा सत्पुरुषांनी, हे आनंदा, विजय मिळवला आहे, भावी पिढी तांदूळ आणि मांसाच्या भोजनाला तुच्छ मानेल" ही पाळी (वाक्य) पराभूत करण्याच्या अर्थाची साधक आहे. कारण येथे 'विजितं' म्हणजे 'अधिभूतं' (पराभूत केलेले/वश केलेले) असा अर्थ आहे. ဇု ဂတိယံ. ဧတ္ထ သီဃဂတိ အဓိပ္ပေတာ. ဇဝတိ. ဇဝနံ, ဇဝေါ, ဇဝံ, ဇဝန္တော, ဇဝနစိတ္တံ, ဇဝနပညော, ဇဝနဟံသော. မနောဇဝံ ဂစ္ဆတိ ယေနကာမံ. 'जु' (ju) धातू गती या अर्थात आहे. येथे 'शीघ्रगती' (वेगवान गती) अभिप्रेत आहे. 'जवति' (तो वेगाने धावतो). जवनं (वेगवान धावणे), जवो (वेग), जवं, जवन्तो (धावणारा), जवनचित्तं (जवनचित्त), जवनपञ्ञो (तीव्र बुद्धीचा), जवनहंसो (वेगवान हंस). "मनोजवं गच्छति येनकामं" (मनाच्या वेगाने इच्छेनुसार जातो). ဇေခယေ. ဇီယတိ. ဧကာရဿ ဤယာဒေသော. သာသနာနုရူပေန ‘‘ကိံ မံ ဓနေန ဇီယေထာ’’တိ ဟိ ပါဠိ ဒိဿတိ. သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ပန ‘‘ဇာယတီ’’တိ ရူပံ ဝဒန္တိ. 'जे' (je) धातू क्षय होणे (नाश होणे) या अर्थात आहे. 'जीयति' (क्षय होतो). 'ए' काराचा 'ईय्' (īy) असा आदेश होतो. शासनाच्या (बुद्धवचनाच्या) अनुरूप "मला धनाने काय क्षय होणार?" (किं मं धनेन जीयेथा) अशी पाळी दिसते. परंतु व्याकरणकार 'जायति' असे रूप सांगतात. သဇ္ဇ ဂတိယံ. သဇ္ဇတိ. 'सज्ज' (sajja) धातू गती या अर्थात आहे. 'सज्जति'. ကုဇု ခုဇု ထေယျကရဏေ. ကောဇတိ. ခေါဇတိ. 'कुजु' (kuju) आणि 'खुजु' (khuju) धातू चोरी करणे या अर्थात आहेत. 'कोजति', 'खोजति'. ဝဇ ဂတိယံ. ဓဇ ဓဇိ စ. ဝဇတိ. အဗ္ဗဇတိ. မနုဿတ္တဉ္စ အဗ္ဗဇေ. ဝဇော, ဝဇနံ, ပဝဇနံ, ပဗ္ဗဇ္ဇာ, ပဗ္ဗဇိတော, ပဗ္ဗာဇိတော. 'वज' (vaja) धातू गती या अर्थात आहे. 'धज' (dhaja) आणि 'धजि' (dhaji) देखील (गतीच्या अर्थात आहेत). 'वजति', 'अब्बजति'. "मनुस्सत्तञ्च अब्बजे" (आणि मनुष्यत्वाला प्राप्त व्हावे). वजो (गोठा/मार्ग), वजनं (जाणे), पवजनं (प्रस्थान), पब्बज्जा (प्रव्रज्या), पब्बजितो (प्रव्रजित), पब्बाजितो (प्रव्रजित केलेला/हद्दपार केलेला). သကာ ရဋ္ဌာ ပဗ္ဗာဇိတော, အညံ ဇနပဒံ ဂတော; မဟန္တံ ကောဋ္ဌံ ကယိရာထ, ဒုရုတ္တာနံ နိဓေတဝေ. "स्वतःच्या राष्ट्रातून हद्दपार केलेल्या आणि दुसऱ्या जनपदात गेलेल्या मनुष्याने, वाईट शब्दांचा (दुर्भाषिते) संग्रह करण्यासाठी (सहन करण्यासाठी) मोठा कोठार बनवावा." ဓဇတိ. ဓဇော. ဓဉ္ဇတိ. ဓဉ္ဇနံ. ဧတ္ထ ဓဇောတိ ကေတု. ဓဉ္ဇနန္တိ ဂမနံ. 'धजति', 'धजो'. 'धञ्जति', 'धञ्जनं'. येथे 'धजो' म्हणजे ध्वज (निशाण) आणि 'धञ्जनं' म्हणजे गमन (जाणे). အဇ ခေပနေ စ. ဂတိအပေက္ခကောယေဝ စကာရော. အဇတိ. အဇော. ဧတ္ထ အဇောတိ ဧဠကော. ဣမာနိ ပနဿ ပရိယာယဝစနာနိ ‘‘အဇော ဧဠကော ဥရဗ္ဘော အဝိ မေဏ္ဍော’’တိ. တတ္ထ ဥရဗ္ဘောတိ ဧဠကော, ယော ‘‘အဇော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. အဝီတိ ရတ္တလောမော ဧဠကော. မေဏ္ဍောတိ ကုဋိလသိင်္ဂေါ ဧဠကော. တထာ ဟိ ဇနကဇာတကေ အဇရထတော မေဏ္ဍရထာ ဝိသုံ ဝုတ္တာ. အပိစ အဇေဠကန္တိ အဇတော ဧဠကဿ ဝိသုံ ဝစနတော ဧဠကသဒ္ဒေန မေဏ္ဍောပိ ဂဟေတဗ္ဗော, မဟောသဓဇာတကဋ္ဌကထာယဉှိ မေဏ္ဍေဠကာနံ နိဗ္ဗိသေသတာ ဝုတ္တာတိ. 'अज' (aja) धातू फेकणे (क्षेपण) आणि गतीच्या अर्थात आहे. 'च' कार हा गतीच्या अपेक्षेनेच आहे. 'अजति', 'अजो'. येथे 'अजो' म्हणजे एडका (बकरा). आणि हे त्याचे समानार्थी शब्द आहेत – "अजो, एळको, उरब्भो, अवि, मेण्डो". त्यामध्ये 'उरब्भो' म्हणजे एडका, ज्याला 'अजो' देखील म्हटले जाते. 'अवि' म्हणजे तांबड्या केसांचा एडका. 'मेण्डो' म्हणजे वक्र (वाकड्या) शिंगांचा एडका. तसेच जनकजातकात शेळ्यांच्या रथापेक्षा मेंढ्यांचे रथ वेगळे सांगितले आहेत. शिवाय, 'अजेळकं' (शेळ्या-मेंढ्या) यामध्ये शेळीपेक्षा एडका वेगळा सांगितल्यामुळे 'एळक' शब्दाने मेंढा देखील ग्रहण करावा, कारण महौषधजातक अट्ठकथेत मेंढा आणि एडका यांच्यात कोणताही भेद नाही असे म्हटले आहे. အဇ္ဇ သဇ္ဇ အဇ္ဇနေ. အဇ္ဇနံ အဇ္ဇနကြိယာ. အဇ္ဇတိ. သဇ္ဇတိ. 'अज्ज' (ajja) आणि 'सज्ज' (sajja) धातू मिळवणे (अर्जन करणे) या अर्थात आहेत. 'अज्जनं' म्हणजे मिळवण्याची क्रिया. 'अज्जति', 'सज्जति'. ကဇ္ဇ ဗျထနေ. ဗျထနံ ဟိံသာ. ကဇ္ဇတိ. 'कज्ज' (kajja) धातू पीडा देणे (व्यथन) या अर्थात आहे. 'व्यथन' म्हणजे हिंसा. 'कज्जति'. ခဇ္ဇ မဇ္ဇနေ စ. မဇ္ဇနံ သုဒ္ဓိ. ဗျထနာပေက္ခော စကာရော. ခဇ္ဇတိ. ခဇ္ဇူရော. 'खज्ज' (khajja) धातू शुद्ध करणे (मज्जन) आणि पीडा देण्याच्या अर्थात आहे. 'मज्जन' म्हणजे शुद्धी. 'च' कार हा पीडा देण्याच्या अपेक्षेने आहे. 'खज्जति', 'खज्जुरो' (खजूर). ခဇ မန္ထေ. မန္ထော ဝိလောဠနံ. ခဇတိ. 'खज' (khaja) धातू घुसळणे (मंथन) या अर्थात आहे. 'मंथन' म्हणजे ढवळणे (विलोळन). 'खजति'. ခဇိ ဂတိဝေကလ္လေ. ကိဿ ဘန္တေ အယျော ခဉ္ဇတီတိ. ဥဘော ခဉ္ဇာ. ခဉ္ဇနံ, ခဉ္ဇိတုံ, ခဉ္ဇိတွာ. 'खजि' (khaji) धातू गतीचे वैकल्य (लंगडणे) या अर्थात आहे. "भन्ते! आर्य का लंगडत आहेत?" (किस्स भन्ते अय्यो खञ्जति). "उभो खञ्जा" (दोघेही लंगडे आहेत). खञ्जनं (लंगडणे), खञ्जितुं (लंगडण्यासाठी), खञ्जित्वा (लंगडून). ခဇ ကမ္ပနေ. ခဇတိ. ဧဇာ. ဧတ္ထ စ ဧဇာတိ လာဘာဒိံ ပဋိစ္စ ဧဇတိ ကမ္ပတီတိ ဧဇာ, ဗလဝတဏှာယေတံ နာမံ. 'खज' (khaja) धातू कंप पावणे (कापणे) या अर्थात आहे. 'खजति'. 'एजा'. आणि येथे 'एजा' म्हणजे लाभ इत्यादींच्या कारणाने जी कंप पावते (कापते) ती 'एजा' होय, हे तीव्र तृष्णेचे नाव आहे. ဗုဇ ဝဇိရနိဗ္ဗေသေ. ဝဇိရနိဂ္ဃောသေတိ ကေစိ ဝိဒူ ဝဒန္တိ. ဗောဇတိ. 'बुज' (buja) धातू वज्राचा उपभोग घेणे (वज्रनिर्वेष) या अर्थात आहे. काही विद्वान 'वज्रनिर्घोष' (वज्राचा आवाज) असा अर्थ सांगतात. 'बोजति'. ခိဇ [Pg.44] ကုဇိ ဂုဇိ အဗျတ္တသဒ္ဒေ. ခိဇတိ. ကုဉ္ဇတိ. ဂုဉ္ဇတိ. 'खिज' (khija), 'कुजि' (kuji) आणि 'गुजि' (guji) हे धातू अस्पष्ट आवाज (अव्यक्त शब्द) या अर्थात आहेत. 'खिजति', 'कुञ्जति', 'गुञ्जति'. လဇ လာဇ တဇ္ဇ ဘဿနေ. လဇတိ. လာဇတိ. တဇ္ဇတိ. 'लज' (laja), 'लाज' (lāja) आणि 'तज्ज' (tajja) धातू निंदा करणे (भर्त्सना) या अर्थात आहेत. 'लजति', 'लाजति', 'तज्जति'. လဇိ ဒိတ္တိယဉ္စ. ဘဿနာပေက္ခော စကာရော. လဉ္ဇတိ. တတိယော နယလဉ္ဇကော. လဉ္ဇေတိ ပကာသေတိ သုတ္တတ္ထန္တိ လဉ္ဇကော. 'लजि' (laji) धातू प्रकाशणे (दीप्ती) आणि निंदा करण्याच्या अर्थात आहे. 'च' कार हा निंदा करण्याच्या अपेक्षेने आहे. 'लञ्जति'. तिसरा प्रकार 'नयलञ्जक' आहे. जो सूत्राचा अर्थ प्रकाशित करतो (स्पष्ट करतो) तो 'लञ्जक' होय. ဇဇ ဇဇိ ယုဒ္ဓေ. ယုဇ္ဈနံ ယုဒ္ဓံ. ဇဇတိ. ဇဉ္ဇတိ. 'जज' (jaja) आणि 'जजि' (jaji) धातू युद्ध करणे या अर्थात आहेत. 'युद्ध' म्हणजे युद्ध करण्याची क्रिया. 'जजति', 'जञ्जति'. တုဇ ဟိံသာယံ. တောဇတိ. 'तुज' (tuja) धातू हिंसा करणे या अर्थात आहे. 'तोजति'. တုဇိ ဗလနေ စ. ဗလနံ ဗလနကြိယာ. ဟိံသာပေက္ခကော စကာရော. တုဉ္ဇတိ. 'तुजि' (tuji) धातू बल देणे (बलन) आणि हिंसेच्या अर्थात आहे. 'बलन' म्हणजे बल देण्याची क्रिया. 'च' कार हा हिंसेच्या अपेक्षेने आहे. 'तुञ्जति'. ဂဇ ကုဇိ မုဇိ ဂဇ္ဇ သဒ္ဒတ္ထာ. ဂဇတိ. ကုဉ္ဇတိ. မုဉ္ဇတိ. ဂဇော ဂဇ္ဇတိ, မေဃော ဂဇ္ဇတိ. ယတ္ထ ဒါသော အာမဇာတော, ဌိတော ထုလ္လာနိ ဂဇ္ဇတိ. မဏိ ဂဇ္ဇတိ. ဉာဏဂဇ္ဇနံ ဂဇ္ဇတိ. ဂဇ္ဇိတုံ သမတ္ထော. ဂဇ္ဇိတာ. ဂဇ္ဇိတွာ. တတ္ထ ဂဇောတိ ဟတ္ထီ. ဟတ္ထိဿ ဟိ အနေကာနိ နာမာနိ – 'गज' (gaja), 'कुजि' (kuji), 'मुजि' (muji) आणि 'गज्ज' (gajja) हे धातू आवाज करणे (शब्द) या अर्थात आहेत. 'गजति', 'कुञ्जति', 'मुञ्जति'. 'गजो गज्जति' (हत्ती गर्जना करतो), 'मेघो गज्जति' (मेघ गर्जना करतो). "जिथे घरात जन्मलेला दास उभा राहून मोठ्या बाता मारतो (गर्जना करतो)." 'मणी गर्जना करतो'. 'ज्ञानाची गर्जना करतो'. गर्जना करण्यास समर्थ, गर्जना करणारा, गर्जना करून. त्यामध्ये 'गजो' म्हणजे हत्ती. कारण हत्तीची अनेक नावे आहेत – ဟတ္ထီ နာဂေါ ဂဇော ဒန္တီ, ကုဉ္ဇရော ဝါရဏော ကရီ; မာတင်္ဂေါ ဒွိရဒေါ သဋ္ဌိ-ဟာယနော’နေကပေါ ဣဘော. "हत्ती, नाग, गज, दंती, कुंजर, वारण, करी, मातंग, द्विरद, षष्टिहायन (साठ वर्षांचा), अनेकप आणि इभ." ထမ္ဘော ရမ္မော ဒွိပေါ စေဝ, ဟတ္ထိနီ တု ကရေဏုကာ; ဟတ္ထိပေါတော ဟတ္ထိစ္ဆာပေါ, ဘိင်္ကော စ ကလဘော ဘဝေ. थम्भो (खांब), रम्मो (रमणीय), द्विपो (हत्ती) तसेच हत्तिनी म्हणजे करेणुका; हत्तीचे पिल्लू म्हणजे हत्थिपोतो, हत्थिच्छापो, भिङ्को आणि कलभो होय. စဇ စာဂေ. စဇတိ. ပရိစ္စဇတိ. စာဂေါ. ပရိစ္စာဂေါ. စဇနံ. စဇံ, စဇန္တော. စဇမာနော. ‘चज’ (caja) धातू त्याग करण्याच्या अर्थात आहे. तो त्याग करतो (cajati). तो पूर्णपणे त्याग करतो (pariccajati). त्याग (cāgo). पूर्ण त्याग (pariccāgo). त्याग करणे (cajanaṃ). त्याग करणारा (cajaṃ, cajanto, cajamāno). သန္ဇ သင်္ဂေ. သင်္ဂေါ လဂနံ. သဉ္စတိ. သတ္တော. သဇနံ, သတ္တိ. အာသတ္တိ. သဇိတုံ. သဇိတွာ. ‘सञ्ज’ (sañja) धातू आसक्ती किंवा चिकटून राहण्याच्या अर्थात आहे. ‘सङ्ग’ म्हणजे चिकटणे (laganaṃ). तो आसक्त होतो (sañcati). आसक्त झालेला प्राणी (satto). आसक्ती (sajanaṃ, satti). तीव्र आसक्ती (āsatti). आसक्त होण्यासाठी (sajituṃ). आसक्त होऊन (sajitvā). ဤဇ ဂတိယံ. ဤဇတိ. ‘ईज’ (īja) धातू गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात आहे. तो जातो किंवा गतिमान होतो (ījati). ဘဇိ ဘဇ္ဇနေ. ဘဇ္ဇနံ တာပကရဏံ. တိလာနိ ဘဇ္ဇတိ. ပုရိသေန ဘဇ္ဇမာနာနိ တိလာနိ. ‘भज’ (bhaji) धातू भाजण्याच्या अर्थात आहे. भाजणे म्हणजे उष्णता देणे (tāpakaraṇaṃ). तो तीळ भाजतो (tilāni bhajjati). माणसाद्वारे भाजले जाणारे तीळ (purisena bhajjamānāni tilāni). ဧဇ [Pg.45] ဘေဇ ဘာဇ ဒိတ္တိယံ. ဒိတ္တိ သောဘာ. ဧဇတိ. ဘေဇတိ. ဘာဇတိ. ‘एज’ (eja), ‘भेज’ (bheja) आणि ‘भाज’ (bhāja) हे धातू चमकण्याच्या (दीप्ती) अर्थात आहेत. दीप्ती म्हणजे शोभा किंवा सौंदर्य (ditti sobhā). तो चमकतो (ejati, bhejati, bhājati). တိဇ နိသာနေ, ခမာယဉ္စ. နိသာနံ တိက္ခတာကရဏံ. ခမာ ခန္တိ. တေဇတိ. တိတိက္ခတိ. တေဇနော. တေဇော. တတ္ထ တေဇနောတိ ကဏ္ဍော သရော ဥသု. တေဇောတိ သူရိယော. အထ ဝါ တေဇောတိ တေဇနံ ဥသ္မာ ဥဏှတ္တံ တာပေါ. တေဇောတိ ဝါ အာနုဘာဝေါ ပဘာဝေါ. ‘तिज’ (tija) धातू तीक्ष्ण करणे (nisāna) आणि क्षमा (khamā) या अर्थात आहे. तीक्ष्ण करणे म्हणजे धार लावणे (tikkhatākaraṇaṃ). क्षमा म्हणजे शांती किंवा सहनशीलता (khanti). तो तीक्ष्ण करतो (tejati). तो सहन करतो (titikkhati). बाण (tejano). तेज (tejo). तेथे ‘तेजन’ म्हणजे बाण किंवा तीर (kaṇḍo saro usu). ‘तेज’ म्हणजे सूर्य (sūriyo). किंवा ‘तेज’ म्हणजे उष्णता, गरमपणा किंवा ताप (usmā uṇhattaṃ tāpo). किंवा ‘तेज’ म्हणजे प्रभाव किंवा सामर्थ्य (ānubhāvo pabhāvo). သဉ္ဇ ပရိဿဂ္ဂေ, အာလိင်္ဂနံ ပရိဿဂ္ဂေါ. သဉ္ဇတိ. ‘सञ्ज’ (sañja) धातू आलिंगन देण्याच्या (parissagga) अर्थात आहे. आलिंगन देणे म्हणजे मिठी मारणे (āliṅganaṃ parissaggo). तो आलिंगन देतो (sañjati). ခဇိ ဒါနေ, ဂတိယဉ္စ. ခဉ္ဇတိ. ခဉ္ဇနံ. ‘खज’ (khaji) धातू दान देणे आणि गती (जाणे) या अर्थात आहे. तो लंगडतो किंवा जातो (khañjati). लंगडणे किंवा गती (khañjanaṃ). ရာဇ ဒိတ္တိယံ ဘာဇ စ. ရာဇတိ. ဘာဇတိ. ရာဇာ. ရာဇိနီ. ဝနရာဇိ. ရာဇိတွာ. ဝိရာဇိတွာ. အတြ ဝိညူနမတ္ထဝိဝရဏေ ကောသလ္လဇနနတ္ထံ သိလောကံ ရစယာမ – ‘राज’ (rāja) आणि ‘भाज’ (bhāja) हे धातू चमकण्याच्या (दीप्ती) अर्थात आहेत. तो चमकतो (rājati, bhājati). राजा (rājā). राणी (rājinī). वनराजी (vanarāji). चमकून (rājitvā). विशेष रूपाने चमकून (virājitvā). येथे विद्वानांच्या अर्थ-स्पष्टीकरणासाठी आणि कौशल्य वाढवण्यासाठी आम्ही एक श्लोक रचत आहोत – မ’ဟာ’ရာဇ မဟာရာဇ, မဟာရာဇ မမေဝ’ဟိ; နေ’တဿ ဣတိ ဝတွာန, ဒွေ ဇနာ ကလဟံ ကရုံ. “हे महाराजा! हा माझा साप आहे, हा साप माझाच आहे, याचा नाही,” असे बोलून दोन माणसांनी भांडण केले. ဧတ္ထ စ ပဌမပါဒဿ ဒုတိယပဒေ ‘‘မေ အဟိ မဟီ’’တိ ဆေဒေါ ‘‘ပုတ္တာ မေ အတ္ထိ ပုတ္တာ မတ္ထီ’’တိ ဝိယ. ‘‘မဟိ အရာဇ မဟာရာဇာ’’တိ စ ဆေဒေါ ‘‘ယောပိ အယံ ယောပါယ’’န္တိ ဝိယ. ဧတ္ထ အရာဇသဒ္ဒေါ ‘‘အတိကရမကရာစရိယာ’’တိ ဧတ္ထ အကရီတိ အတ္ထဝါစကော အကရသဒ္ဒေါ ဝိယ အာချာတပရောက္ခာဝိဘတ္တိကော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အရာဇ ဝိရောစီတိ အတ္ထော. အယံ ပန ဂါထာယ ပိဏ္ဍတ္ထော ‘‘မဟာရာဇ မေ အဟိ အရာဇ, မမ ဧဝ အဟိ အရာဇ, န ဧတဿ ဣတိ ဝတွာ ဒွေ အဟိတုဏ္ဍိကဇနာ ကလဟံ ကရိံသူ’’တိ. आणि येथे पहिल्या चरणाच्या दुसऱ्या पदात “मे अहि मही” (me ahi mahī) असा संधिच्छेद होतो, जसे “पुत्ता मे अत्थि” चे “पुत्ता मत्थि” होते. आणि “महि अराज महाराज” (mahi arāja mahārājā) असा संधिच्छेद होतो, जसे “यो पि अयं” चे “योपायं” होते. येथे ‘अराज’ (arāja) हा शब्द “अतिकरमकर्राचरिया” मधील ‘अकरी’ या अर्थाचा वाचक असलेल्या ‘अकर’ शब्दाप्रमाणे आख्यात परोक्ष विभक्तीचा समजावा. ‘अराज’ म्हणजे चमकला किंवा शोभला (virocī) असा अर्थ आहे. या गाथेचा एकत्रित अर्थ असा आहे: “हे महाराजा, माझा साप शोभला (किंवा खेळला), माझाच साप शोभला, याचा नाही, असे म्हणून दोन गारुड्यांनी भांडण केले.” ရန္ဇ ရာဂေ. ဘိက္ခု စီဝရံ ရဇတိ. သတ္တော ရူပါဒီသု ရဉ္ဇတိ. ရဇနံ. ရဇကော. ရာဂေါ. ဝိရာဂေါ. ဟလိဒ္ဒိရာဂေါ. ရာဇာ. ရာဇိနီ. ဣမဿ စ ဒိဝါဒိဂဏံ ပတ္တဿ ‘‘ရဇ္ဇတိ ဝိရဇ္ဇတီ’’တိ ရူပါနိ [Pg.46] ဘဝန္တိ. တတ္ထ ရဇနန္တိ ရဇနဝတ္ထု. ရဇကောတိ ရဇကာရော ဝတ္ထဓောဝနကော. ရာဂေါတိ ရဇ္ဇန္တိ သတ္တာ တေန, သယံ ဝါ ရဉ္ဇတိ, ရဉ္ဇနမတ္တမေဝ ဝါ ဧတန္တိ ရာဂေါ, တဏှာ. ဣမာနိ ပန တဒဘိဓာနာနိ – ‘रञ्ज’ (ranja) धातू रंगाच्या किंवा आसक्तीच्या (राग) अर्थात आहे. भिक्खू चीवर रंगवतो (bhikkhu cīvaraṃ rajati). प्राणी रूप इत्यादींमध्ये आसक्त होतो (satto rūpādīsu rañjati). रंगवणे किंवा रंग (rajanaṃ). धोबी (rajako). राग किंवा आसक्ती (rāgo). विराग किंवा अनासक्ती (virāgo). हळदीचा रंग (haliddirāgo). राजा (rājā). राणी (rājinī). आणि या धातूला दिवादिगणात समाविष्ट केल्यावर “रज्जति, विरज्जति” अशी रूपे बनतात. तेथे ‘रजन’ म्हणजे रंगवण्याचे साधन (rajanavatthu). ‘रजक’ म्हणजे धोबी, कपडे धुणारा (rajakāro vatthadhovanako). ‘राग’ म्हणजे ज्याच्याद्वारे प्राणी आसक्त होतात, किंवा स्वतः आसक्त होतो, या केवळ आसक्त होणे म्हणजे ‘राग’ म्हणजेच तृष्णा (taṇhā) होय. आता त्याची समानार्थी नावे खालीलप्रमाणे आहेत – ရာဂေါ လောဘော တသိဏာ စ, တဏှာ ဧဇာ ဝိသတ္တိကာ; သတ္တိ အာသတ္တိ မုစ္ဆာ စ, လုဗ္ဘိတတ္တဉ္စ လုဗ္ဘနာ. राग (आसक्ती), लोभ, तसिणा (तहान), तृष्णा, एजा (कंप किंवा चंचलता), विसत्तिका (विषारी आसक्ती), सत्ति (आसक्ती), आसत्ति, मुच्छा (मोह), लुब्भितत्त (लोभीपणा) आणि लुब्भना (लोभ). ကာမော နိကာမနာ ဣစ္ဆာ, နိကန္တိ စ နိယန္တိ စ; ဝနဉ္စ ဝနထော စေဝ, အပေက္ခာ ဘဝနေတ္တိ စ. काम (इच्छा), निकामना, इच्छा, निकन्ति, नियन्ति, वन (जंगल किंवा आसक्ती), वनथ (आसक्तीचे जंगल), अपेक्षा आणि भवनेत्ति (भव-तृष्णा). အနုရောဓော စ သာရာဂေါ, သင်္ဂေါ ပင်္ကော စ သိဗ္ဗိနီ; နန္ဒီရာဂေါ အနုနယော, ဂေဓော သဉ္ဇနနီ တထာ; ဇနိကာ ပဏိဓိ စေဝ, အဇ္ဈောသာနန္တိနေကဓာ. अनुरोध, साराग, सङ्ग (आसक्ती), पङ्क (चिखल), सिब्बिनी (शिवण किंवा तृष्णा), नन्दीराग (आनंदयुक्त आसक्ती), अनुनय, गेध (लोभ), तसेच सञ्जननी (उत्पन्न करणारी), जनिका (माता किंवा तृष्णा), पणिधि (प्रणिधान किंवा इच्छा) आणि अज्झोसान (अति-आसक्ती) अशा अनेक प्रकारे (तृष्णेचे वर्णन केले आहे). ဝိရာဂေါတိ မဂ္ဂေါ နိဗ္ဗာနဉ္စ. ရာဇာတိ ပထဝိဿရော. ဧတ္ထ ဓာတုဒွယဝသေန နိဗ္ဗစနာနိ နိယျန္တေ. နာနာသမ္ပတ္တီဟိ ရာဇတိ ဒိဗ္ဗတိ ဝိရောစတီတိ ရာဇာ. ဒါနဉ္စ ပိယဝစနဉ္စ အတ္ထစရိယာ စ သမာနတ္တတာ စာတိ ဣမေဟိ စတူဟိ သင်္ဂဟဝတ္ထူဟိ အတ္တနိ မဟာဇနံ ရဉ္ဇေတီတိပိ ရာဇာ. ရာဇိနီတိ ရာဇဘရိယာ. တေသံ အဘိဓာနာနိ ဝုစ္စန္တေ သဟာဘိဓာနန္တရေဟိ – ‘विराग’ म्हणजे मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) आणि निर्वाण (nibbāna). ‘राजा’ म्हणजे पृथ्वीचा स्वामी (pathavissaro). येथे दोन धातूंच्या आधारे व्युत्पत्ती सांगितली जाते. विविध संपत्तींनी जो चमकतो, क्रीडा करतो किंवा शोभतो तो ‘राजा’ (rājā). तसेच दान, प्रियवचन, अर्थचर्या आणि समानार्थता या चार संग्रहवस्तूंनी (saṅgahavatthu) जो लोकांचे मन स्वतःकडे आकर्षित करतो (रंगवतो), तो देखील ‘राजा’ होय. ‘राजिनी’ म्हणजे राजाची पत्नी. त्यांची इतर समानार्थी नावे खालीलप्रमाणे सांगितली जातात – ရာဇာ ဘူပတိ ဒေဝေါ စ, မနုဇိန္ဒော ဒိသမ္ပတိ; ပတ္ထိဝေါ ဇဂတိပါလော, ဘူဘုဇော ပထဝိဿရော. राजा, भूपति, देव, मनुजिन्द (मनुष्येंद्र), दिसम्पति (दिशांचा पती), पत्थिव (पार्थिव), जगतिपाल, भूभुज आणि पथविस्सर (पृथ्वीचा ईश्वर). ရဋ္ဌာဓိပေါ ဘူမိပါလော, မနုဿိန္ဒော ဇနာဓိပေါ; နရိန္ဒော ခတ္တိယော စေဝ, ခေတ္တဿာမိ ပဘာဝကော. रट्ठाधिप (राष्ट्राधिपती), भूमिपाल, मनुस्सिन्द (मनुष्येंद्र), जनाधिप, नरिन्द (नरेंद्र), खत्तिय (क्षत्रिय), खेत्तसामी (शेताचा किंवा भूमीचा स्वामी) आणि प्रभावक. မုဒ္ဓါဘိသိတ္တော ရာဇာတိ, ကထိတော ဣတရော ပန; ရာဇညော ခတ္တိယော စာတိ, ဝုတ္တော ခတ္တိယဇာတိကော. ज्याचा मस्तकाभिषेक झाला आहे त्याला ‘राजा’ म्हटले जाते, तर इतरांना ‘राजञ्ञ’ (राजन्य) किंवा ‘खत्तिय’ (क्षत्रिय) म्हटले जाते, जे क्षत्रिय जातीचे असतात. မုဒ္ဓါဘိသိတ္တော အနုရာဇာ, ဥပရာဇာတိ ဘာသိတော; စတုဒ္ဒီပီ ရာဇရာဇာ, စက္ကဝတ္တီတိ ဘာသိတော. मस्तकाभिषेक झालेल्या राजाच्या हाताखालील राजाला ‘अनुराजा’ किंवा ‘उपराजा’ म्हटले जाते. चारही द्वीपांवर राज्य करणाऱ्या राजाधिराजाला ‘चक्कवत्ती’ (चक्रवर्ती) म्हटले जाते. ရာဇိနီ [Pg.47] ဥပရီ ဒေဝီ, မဟေသီ ဘူဘုဇင်္ဂနာ; ခတ္တိယာ ရာဇပဒုမီ, ခတ္တိယာနီ စ ခတ္တိယီ; ဣတ္ထာဂါရန္တု ဩရောဓော, ဥပရီတိပိ ဝုစ္စတိ. राजिनी (राणी), उपरी, देवी, महेसी (मुख्य राणी), भूभुजङ्गना (राजाची पत्नी), खत्तिया, राजपदुमी, खत्तियानी आणि खत्तियी; अंतःपुराला ‘ओरोध’ (अवरोध) किंवा ‘उपरी’ असेही म्हटले जाते. ဘဇ သေဝါယံ. ဘဇတိ. ဘဇနာ. သမ္ဘဇနာ. ဘတ္တိ. သမ္ဘတ္တိ. ဘတ္တာ. ‘भज’ (bhaja) धातू सेवा करण्याच्या अर्थात आहे. तो सेवा करतो (bhajati). सेवा किंवा भजन (bhajanā). चांगली सेवा (sambhajanā). भक्ती (bhatti). दृढ भक्ती (sambhatti). भक्त किंवा पती (bhattā). ယဇ ဒေဝပူဇသင်္ဂတကရဏဒါနဓမ္မေသု. ဒေဝပူဇဂ္ဂဟဏေန ဗုဒ္ဓါဒိပူဇာ ဂဟိတာ. သင်္ဂတကရဏံ သမောဓာနကရဏံ. တထာ ဟိ အဓိမုတ္တတ္ထေရဝတ္ထုမှိ ‘‘ယဒတ္ထိ သင်္ဂတံ ကိဉ္စိ, ဘဝေါ ဝါ ယတ္ထ လဗ္ဘတီ’’တိ ဂါထာယံ သင်္ဂတသဒ္ဒေန သမောဓာနံ ဝုတ္တံ. ဒါနံ ပရိစ္စာဂေါ. ဓမ္မော ဈာနသီလာဒိ. ဧတေသွတ္ထေသု ယဇဓာတု ဝတ္တတိ. ပုပ္ဖေဟိ ဗုဒ္ဓံ ယဇတိ. ဒေဝတံ ယဇတိ. ဒေဝမနုဿေဟိ ဘဂဝါ ယဇိယတိ. ဣဇ္ဇတိ. ယိဋ္ဌံ. ယညော. ယာဂေါ. ဓမ္မယာဂေါ. ယဇမာနော သကေ ပုရေ. ယိဋ္ဌုံ, ယဇိတုံ. ပုထုယညံ ယဇိတွာန. သောဠသပရိက္ခာရံ မဟာယညံ ကတ္တုကာမော. ‘यज’ (yaja) धातू देवपूजा, संगतीकरण (एकत्र करणे), दान आणि धर्म या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ‘देवपूजा’ या शब्दाने बुद्ध इत्यादींची पूजा अभिप्रेत आहे. ‘संगतीकरण’ म्हणजे एकत्र करणे (samodhānakaraṇaṃ). जसे की, अधिमूत्त थेर यांच्या कथेत “यदत्थि सङ्गतं kiñci, भवो वा यत्थ लब्भति” या गाथेत ‘सङ्गत’ शब्दाने एकत्र येणे (samodhāna) सांगितले आहे. ‘दान’ म्हणजे त्याग (pariccāgo). ‘धर्म’ म्हणजे ध्यान, शील इत्यादी. या अर्थांमध्ये ‘यज’ धातू चालतो. तो फुलांनी बुद्धांची पूजा करतो (pupphehi buddhaṃ yajati). तो देवतेची पूजा करतो (devataṃ yajati). देव आणि मनुष्यांद्वारे भगवंतांची पूजा केली जाते (devamanussehi bhagavā yajiyati). पूजा केली जाते (ijjati). पूजलेले (yiṭṭhaṃ). यज्ञ (yañño). याग (yāgo). धम्मयाग (dhammayāgo). आपल्या नगरात यज्ञ करणारा (yajamāno sake pure). यज्ञ करण्यासाठी (yiṭṭhuṃ, yajituṃ). मोठा यज्ञ करून (puthuyaññaṃ yajitvāna). सोळा प्रकारच्या साहित्यांनी युक्त महायज्ञ करण्याची इच्छा असणारा (soḷasaparikkhāraṃ mahāyaññaṃ kattukāmo). မဇ္ဇ သံသုဒ္ဓိယံ. မဇ္ဇတိ. ဗာဟိရံ ပရိမဇ္ဇတိ. ဘူမိံ သမ္မဇ္ဇတိ. မဇ္ဇနံ. သမ္မဇ္ဇနီ. ‘मज्ज’ (majja) धातू शुद्धीकरणाच्या अर्थात आहे. तो स्वच्छ करतो (majjati). तो बाहेरील भाग स्वच्छ करतो (bāhiraṃ parimajjati). तो जमीन झाडतो किंवा स्वच्छ करतो (bhūmiṃ sammajjati). स्वच्छ करणे (majjanaṃ). झाडू (sammajjanī). နိဉ္ဇိ သုဒ္ဓိယံ. နိဉ္ဇတိ. ပနိဉ္ဇတိ. နိဉ္ဇိတုံ. ပနိဉ္ဇိတုံ. နိဉ္ဇိတွာ. ပနိဉ္ဇိတွာ. အယံ ပန ပါဠိ ‘‘တတော တွံ မောဂ္ဂလ္လာန ဥဋ္ဌာယာသနာ ဥဒကေန အက္ခီနိ ပနိဉ္ဇိတွာ ဒိသာ အနုလောကေယျာသီ’’တိ. ‘निञ्ज’ (niñji) धातू शुद्धीच्या अर्थात आहे. तो धुतो (niñjati). तो चांगल्या प्रकारे धुतो (paniñjati). धुण्यासाठी (niñjituṃ). चांगल्या प्रकारे धुण्यासाठी (paniñjituṃ). धुवून (niñjitvā). चांगल्या प्रकारे धुवून (paniñjitvā). ही पाळी (वचन) अशी आहे: “त्यानंतर तू, हे मोग्गल्लान, आसनावरून उठून पाण्याने डोळे धुवून दिशांचे अवलोकन करावेस.” နိဇိ အဗျတ္တသဒ္ဒေ. နိဉ္ဇတိ. ‘निज’ (niji) धातू अस्पष्ट आवाजाच्या अर्थात आहे. तो अस्पष्ट आवाज करतो (niñjati). ဘဇ ပါကေ. တိလာနိ ဘဇ္ဇတိ. ဘဇ္ဇမာနာ တိလာနိ စ. ‘भज’ (bhaja) धातू शिजवण्याच्या (किंवा भाजण्याच्या) अर्थात आहे. तो तीळ भाजतो (tilāni bhajjati). आणि भाजले जाणारे तीळ (bhajjamānā tilāni ca). ဥဇု အဇ္ဇဝေ. အဇ္ဇဝံ ဥဇုဘာဝေါ. ဩဇတိ. ဥဇု. ‘उजु’ (uju) धातू सरळपणाच्या (आर्जव) अर्थात आहे. आर्जव म्हणजे सरळपणा (ujubhāvo). तो सरळ होतो किंवा तेजस्वी होतो (ojati). सरळ (uju). သဇ [Pg.48] ဝိဿဂ္ဂပရိဿဇ္ဇနဗ္ဘုက္ကိရဏေသု. သဇတိ. လောကျံ သဇန္တံ ဥဒကံ. ‘सज’ (saja) धातू सोडणे (vissagga), आलिंगन देणे (parissajjana) आणि शिंपडणे (abbhukkiraṇa) या अर्थांमध्ये आहे. तो सोडतो किंवा शिंपडतो (sajati). जगामध्ये शिंपडले जाणारे पाणी (lokyaṃ sajantaṃ udakaṃ). ရုဇ ဘင်္ဂေ. ရုဇတိ. ရုဇာ. ရောဂေါ. ဧတ္ထ ရုဇာတိ ဗျာဓိ ရုဇနဋ္ဌေန. ရောဂေါတိ ရုဇတိ ဘဉ္ဇတိ အင်္ဂပစ္စင်္ဂါနီတိ ရောဂေါ, ဗျာဓိယေဝ, ယော ‘‘အာတင်္ကော’’တိပိ ‘‘အာဗာဓော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. ‘रुज’ (ruja) धातू नष्ट होण्याच्या किंवा मोडण्याच्या (भंग) अर्थात आहे. तो वेदना देतो किंवा नष्ट करतो (rujati). वेदना किंवा रुजा (rujā). रोग (rogo). येथे ‘रुजा’ म्हणजे वेदना देण्याच्या अर्थाने व्याधी (byādhi). ‘रोग’ म्हणजे जो शरीराचे अवयव नष्ट करतो किंवा मोडतो तो रोग, म्हणजेच व्याधी होय, ज्याला ‘आतङ्क’ (ātaṅko) किंवा ‘आबाध’ (ābādho) असेही म्हटले जाते. ဘုဇ ကောဋိလ္လေ. အာဝိပုဗ္ဗော အညတ္ထေသု စ. ဥရဂေါ ဘုဇတိ. အာဘုဇတိ. ဘိက္ခု ပလ္လင်္ကံ အာဘုဇတိ, ဦရုဗဒ္ဓါသနံ ဗန္ဓတီတိ အတ္ထော. မဟာသမုဒ္ဒေါ အာဘုဇတိ, အာဝဋ္ဋတီတိ အတ္ထော. ကေစိ ပန ‘‘ဩသက္ကတီ’’တိ အတ္ထံ ဝဒန္တိ. ‘‘ဝဏ္ဏဒါန’’န္တိ အာဘုဇတိ, မနသိ ကရောတီတိ အတ္ထော. မူလာနိ ဝိဘုဇတီတိ မူလဝိဘုဇော, ရထော. ဧတ္ထ စ ဝိဘုဇတီတိ ဆိန္ဒတိ. ဘောဂေါ. ဘောဂီ. အာဘောဂေါ. အာဘုဇိတွာ. ဧတ္ထ စ ဘောဂေါတိ ဘုဇယတိ ကုဋိလံ ကရိယတီတိ ဘောဂေါ, အဟိသရီရံ. ဘောဂီတိ သပ္ပော. 'भुज' (bhuja) हा धातू 'कुटिलता' (वाकडेपणा) या अर्थात आहे. 'आ' उपसर्ग लागून इतर अर्थांमध्येही होतो. 'उरगो भुजति' (सर्प वाकडा चालतो). 'आभुजति'. 'भिक्खु पल्लङ्कं आभुजति' (भिक्खू मांडी घालतात), याचा अर्थ 'ऊरुबद्धासन' (पद्मासन) घालतात असा आहे. 'महासमुद्दो आभुजति' (महासमुद्र फिरतो/आवर्त होतो), असा अर्थ आहे. काही लोक तर 'ओसक्कति' (मागे सरकणे) असा अर्थ सांगतात. 'वण्णदानं' (वर्णदान) या अर्थी 'आभुजति' म्हणजे 'मनसि करोति' (मनात आणणे/विचार करणे) असा अर्थ आहे. 'मूलाणि विभुजति' (मुळांना छेदतो) म्हणून 'मूलविभुज' म्हणजे रथ. येथे 'विभुजति' म्हणजे छेदणे/कापणे. 'भोगो' (भोग), 'भोगी' (भोगी), 'आभोगो' (आभोग), 'आभुजित्वा' (आभुजित्वा - वाकवून/मांडी घालून). येथे 'भोग' म्हणजे 'भुजयति कुटिलं करियति' (वाकडे केले जाते) म्हणून 'भोग' म्हणजे सर्पाचे शरीर. 'भोगी' म्हणजे सर्प. ရဇိ ဝိဇ္ဈနေ. နာဂေါ ဒန္တေဟိ ဘူမိံ ရဉ္ဇတိ. အာရဉ္ဇတိ. ဧတ္ထ စ ‘‘တထာဂတရဉ္ဇိတံ ဣတိပီ’’တိ နေတ္တိပါဠိ နိဒဿနံ. တဿတ္ထော ‘‘ဣဒံ သိက္ခတ္တယသင်္ဂဟိတံ သာသနဗြဟ္မစရိယံ တထာဂတဂန္ဓဟတ္ထိနော မဟာဝဇိရဉာဏသဗ္ဗညုတညာဏဒန္တေဟိ ရဉ္ဇိတံ အာရဉ္ဇိတံ, တေဘူမကဓမ္မာနံ အာရဉ္ဇနဋ္ဌာနန္တိပိ ဝုစ္စတီ’’တိ. ရဉ္ဇိတန္တိ ဟိ ရဉ္ဇတိ ဝိဇ္ဈတိ ဧတ္ထာတိ ရုဉ္ဇိတံ, ရဉ္ဇနဋ္ဌာနံ. ‘‘ဣဒံ နေသံ ပဒက္ကန္တ’’န္တိအာဒိမှိ ဝိယ ဧတဿ သဒ္ဒဿ သိဒ္ဓိ ဝေဒိတဗ္ဗာ အဓိကရဏတ္ထသမ္ဘဝတော. 'रजि' (raji) हा धातू 'विद्ध करणे' (टोचणे/भेदणे) या अर्थात आहे. 'नागो दन्तेहि भूमिं रञ्जति' (हत्ती दातांनी जमीन विद्ध करतो/खणतो). 'आरञ्जति'. येथे 'तथागतरञ्जितं इतिपि' (तथागतांद्वारे विद्ध केलेले/अंकित केलेले) हे नेत्तिपाळीचे उदाहरण आहे. त्याचा अर्थ असा आहे: 'हे त्रिशिक्षांनी (शील, समाधी, प्रज्ञा) संग्रहित केलेले शासन-ब्रह्मचर्य, तथागतरूपी गंधहत्तीच्या महावज्रज्ञान आणि सर्वज्ञताज्ञानरूपी दातांनी विद्ध (अंकित) केलेले आहे, म्हणून याला तेभूमिक (तीन भूमींमधील) धर्मांचे आरंजनस्थान (विद्ध करण्याचे स्थान) असेही म्हटले जाते.' 'रञ्जित' म्हणजे ज्यामध्ये विद्ध केले जाते ते 'रुञ्जित' किंवा 'रंजनस्थान' (विद्ध करण्याचे स्थान) होय. 'इदं नेसं पदक्कन्तं' (हे त्यांचे पाऊल उमटले आहे) इत्यादी उदाहरणांप्रमाणे या शब्दाची सिद्धी अधिकरण अर्थाच्या संभवामुळे जाणावी. ဝိဇီ ဘယစလနေသု. ဤကာရန္တောယံ ဓာတု, တေနဿ သနိဂ္ဂဟီတာဂမာနိ ရူပါနိ န သန္တိ. ဝေဇတိ. ဝေဂေါ. ဓမ္မသံဝေဂေါ. သံဝိဂေါ ဝေဂေန ပလာယိ. နဒီဝေဂေါ. ဦမိဝေဂေါ[Pg.49], ဝါတဝေဂေါ. ဧတ္ထ ဓမ္မသံဝေဂေါတိ သဟောတ္တပ္ပံ ဉာဏံ. ‘‘ဝေဂေါ, ဇဝေါ, ရယော’’တိ ဣမေ ဧကတ္ထာ. ဒိဝါဒိဂဏံ ပန ပတ္တဿ ‘‘ဝိဇ္ဇတိ သံဝိဇ္ဇတိ ဥဗ္ဗိဇ္ဇတီ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ ဒွိဂဏိကတ္တာ. 'विजी' (vijī) हा धातू 'भय' (भीती) आणि 'चलन' (कंपन/वेग) या अर्थांमध्ये आहे. हा ई-कारान्त धातू आहे, त्यामुळे याची अनुस्वार-आगम असलेली रूपे होत नाहीत. 'वेवति' (किंवा वेजति - थरथरणे/घाबरणे), 'वेगो' (वेग), 'धम्मसंवेगो' (धर्मसंवेग). 'संविगो वेगेन पलायि' (संविग्न होऊन वेगाने पळाला). ' नदीवेगो' (नदीचा वेग), 'ऊमिवेगो' (लाटांचा वेग), 'वातवेगो' (वाऱ्याचा वेग). येथे 'धम्मसंवेग' म्हणजे ओत्तप्प (पापाची भीती) युक्त ज्ञान होय. 'वेगो', 'जवो', 'रयो' हे एकाच अर्थाचे शब्द आहेत. दिवादिगणात गेल्यावर द्विगणिकत्वामुळे 'विज्जति', 'संविज्जति', 'उब्विज्जति' अशी रूपे होतात. လဇ္ဇ လဇ္ဇနေ. လဇ္ဇတိ. လဇ္ဇာ. လဇ္ဇာတိ ဟိရီ. ယာ ‘‘ဝိရိဠနာ’’တိပိ ဝုစ္စတိ. 'लज्ज' (lajja) हा धातू 'लज्जा वाटणे' (लाजणे) या अर्थात आहे. 'लज्जति' (लाजतो/लाजते). 'लज्जा' (लाज). 'लज्जा' म्हणजे 'हिरी' (पापाची लाज), जिला 'विरिळना' (संकोच/लाज) असेही म्हटले जाते. ဝဠဇိ ပရိဘောဂေ. ဝဠဉ္ဇတိ. 'वळजि' (vaḷaji) हा धातू 'परिभोग' (वापरणे/उपभोग घेणे) या अर्थात आहे. 'वळञ्जति' (वापरतो/उपभोग घेतो). ကုဇ္ဇ အဓောမုခီကရဏေ. ကုဇ္ဇတိ. နိကုဇ္ဇတိ. ဥက္ကုဇ္ဇတိ. ပဋိကုဇ္ဇတိ. နိကုဇ္ဇိတံ ဝါ ဥက္ကုဇ္ဇေယျ. အညိဿာ ပါတိယာ ပဋိကုဇ္ဇတိ. အဝကုဇ္ဇော နိပဇ္ဇဟံ. တတ္ထ ကုဇ္ဇတိ နိကုဇ္ဇတီတိ ဣမာနိ ‘‘စရတိ ဝိစရတီ’’တိ ပဒါနိ ဝိယ သမာနတ္ထာနိ, အဓောမုခံ ကရောတီတိ ဟိ အတ္ထော. ဥက္ကုဇ္ဇတီတိ ဥပရိမုခံ ကရောတိ. ပဋိကုဇ္ဇတီတိ မုခေ မုခံ ဌပေတိ. 'कुज्ज' (kujja) हा धातू 'अधोमुख करणे' (पालथे घालणे/खाली तोंड करणे) या अर्थात आहे. 'कुज्जति', 'निकुज्जति', 'उक्कुज्जति', 'पटिकुज्जति'. 'निकुज्जितं वा उक्कुज्जेय्य' (पालथे घातलेले उताणे करावे). 'अञ्ञिस्सा पातिया पटिकुज्जति' (दुसऱ्या पात्रावर पालथे घालतो). 'अवकुज्जो निपज्जहं' (पालथा निजलेला). तेथे 'कुज्जति' आणि 'निकुज्जति' ही पदे 'चरति' आणि 'विचरति' या पदांप्रमाणे समान अर्थाची आहेत, कारण 'अधोमुख करणे' (पालथे घालणे) हाच त्यांचा अर्थ आहे. 'उक्कुज्जति' म्हणजे वर तोंड करणे (उताणे करणे). 'पटिकुज्जति' म्हणजे तोंडावर तोंड ठेवणे (झाकणे). မုဇ္ဇ ဩသီဒနေ. မုဇ္ဇတိ. နိမုဇ္ဇတိ. နိမုဂ္ဂေါ. ဥမ္မုဂ္ဂေါ. 'मुज्ज' (mujja) हा धातू 'ओसीदन' (बुडणे/खाली जाणे) या अर्थात आहे. 'मुज्जति' (बुडतो). 'निमुज्जति' (डुबकी मारतो). 'निमुग्गो' (बुडालेला/मग्न). 'उम्मुग्गो' (वर आलेला). ဩပုဇိ ဝိလိမ္ပနေ. ဂေါမယေန ပထဝိံ ဩပုဉ္ဇတိ. 'ओपुजि' (opuji) हा धातू 'विलेपन' (सारवणे/लेपणे) या अर्थात आहे. 'गोमयेन पथविं ओपुञ्जति' (शेणाने जमीन सारवतो). ဇကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ज' कारान्त धातूंची रूपे समाप्त झाली. ဈကာရန္တဓာတု 'झ' कारान्त धातू. ဈေ စိန္တာယံ. ဈာယတိ, နိဇ္ဈာယတိ, ဥပနိဇ္ဈာယတိ, ဥဇ္ဈာယတိ, သဇ္ဈာယတိ. ဈာနံ, နိဇ္ဈာနံ, ဥပနိဇ္ဈာနံ, ဥဇ္ဈာယနံ, သဇ္ဈာယနံ. နိဇ္ဈတ္တိ. ဥပဇ္ဈာ, ဥပဇ္ဈာယော. ဈာယီ, အဇ္ဈာယကော. 'झे' (jhe) हा धातू 'चिंता' (चिंतन/ध्यान करणे) या अर्थात आहे. 'झायति' (ध्यान करतो), 'निज्झायति' (निरीक्षण करतो/चिंतन करतो), 'उपनिज्झायति' (जवळून चिंतन करतो), 'उज्झायति' (दोष शोधतो/नाराजी व्यक्त करतो), 'सज्झायति' (सज्झाय करतो/पाठ करतो). 'झानं' (ध्यान), 'निज्झानं' (चिंतन/निश्चय), 'उपनिज्झानं' (जवळून चिंतन), 'उज्झायनं' (दोष शोधणे/नाराजी), 'सज्झायनं' (सज्झाय/सराव). 'निज्झत्ति' (समजूत/निश्चय). 'उपज्झा' (उपाध्याय), 'उपज्झायो' (उपाध्याय). 'झायी' (ध्यानी), 'अज्झायको' (अध्यायक/वेदाभ्यासी). တတ္ထ ဈာယနန္တိ ဒုဝိဓံ ဈာယနံ သောဘနမသောဘနဉ္စ. တေသု သောဘနံ ‘‘ဈာယီ တပတိ ဗြာဟ္မဏော. ဈာယာမိ [Pg.50] အကုတောဘယော’’တိအာဒီသု ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အသောဘနံ ပန ‘‘တတ္ထ တတ္ထ ဈာယန္တော နိသီဒိ. အဓောမုခေါ ပဇ္ဈာယန္တော နိသီဒီ’’တိအာဒီသု ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဈာယီတိ အာရမ္မဏူပနိဇ္ဈာနေန ဝါ လက္ခဏူပနိဇ္ဈာနေန ဝါ ဈာယနသီလော စိန္တနသီလော. ဈာယီ ဈာနဝါတိ အတ္ထော. အဇ္ဈာယကောတိ ဣဒံ ‘‘န ဒါနိမေ ဈာယန္တိ, န ဒါနိမေ ဈာယန္တီတိ ခေါ ဝါသေဋ္ဌ အဇ္ဈာယကာ အဇ္ဈာယကာတွေဝ တတိယံ အက္ခရံ ဥပနိဗ္ဗတ္တ’’န္တိ ဧဝံ ပဌမကပ္ပိကကာလေ ဈာနဝိရဟိတာနံ ဗြာဟ္မဏာနံ ဂရဟဝစနံ ဥပ္ပန္နံ, ဣဒါနိ ပန တံ အဇ္ဈာယတီတိ အဇ္ဈာယကော, မန္တေ ပရိဝတ္တေတီတိ ဣမိနာ အတ္ထေန ပသံသာဝစနံ ကတွာ ဝေါဟရန္တီတိ. အယံ ပနတ္ထော ‘‘အဓိပုဗ္ဗဿ ဣ အဇ္ဈယနေ’’တိ ဓာတုဿ ဝသေန ဂဟေတဗ္ဗော. ဧဝံ အဓိပုဗ္ဗဿ ဣဓာတုဿ ဝသေန ဣမဿ ဓာတုဿ အတ္ထပရိဝတ္တနံ ဘဝတိ. ယံ သန္ဓာယ ‘‘အဇ္ဈာယကော မန္တဓရော’’တိ ဝုတ္တံ. तेथे 'झायन' (ध्यान/चिंतन) हे दोन प्रकारचे आहे - शोभन (चांगले) आणि अशोभन (वाईट). त्यापैकी शोभन ध्यान 'झायी तपति ब्राह्मणो' (ध्यानी ब्राह्मण तेजस्वी दिसतो), 'झायामि अकुतोभयो' (मी निर्भयपणे ध्यान करतो) इत्यादींमध्ये पाहावे. अशोभन ध्यान 'तत्थ तत्थ झायन्तो निसीदि' (तो तिथे तिथे चिंता करत बसला), 'अधोमुखो पज्झायन्तो निसीदि' (खाली तोंड करून चिंता करत बसला) इत्यादींमध्ये पाहावे. 'झायी' म्हणजे आलंबन-उपनिध्यान किंवा लक्षण-उपनिध्यानाने ध्यान करण्याचा स्वभाव असलेला, चिंतनशील. 'झायी' म्हणजे 'ध्यानवान' असा अर्थ आहे. 'अज्झायक' (अध्यायक) हा शब्द 'हे वासेठ्ठ! आता हे ध्यान करत नाहीत, आता हे ध्यान करत नाहीत, म्हणून अज्झायक (अध्यायक - ध्यान न करणारे) हे तिसरे अक्षर (नाव) उत्पन्न झाले' अशा प्रकारे प्रथम कल्पकाळातील ध्यानरहित ब्राह्मणांच्या निंदेचे वचन म्हणून उत्पन्न झाला होता; परंतु आता 'तो अध्ययन करतो म्हणून अज्झायक' किंवा 'मंत्रांचे पठण करतो' या अर्थाने प्रशंसनीय वचन मानून व्यवहार केला जातो. हा अर्थ 'अधि' उपसर्गपूर्वक 'इ' (अध्ययन करणे) या धातूच्या आधारे घेतला पाहिजे. अशा प्रकारे 'अधि' उपसर्गपूर्वक 'इ' धातूच्या प्रभावाने या धातूच्या अर्थात परिवर्तन होते. ज्याला उद्देशून 'ajjhāyako mantadharo' (अध्यायक मंत्र धारण करणारा असतो) असे म्हटले आहे. ဈေ ဒိတ္တိယံ. ဒီပေါ ဈာယတိ, ဒါရူနိ ဈာယန္တိ. ဧတ္ထ ဈာယတီတိ ဇလတိ. ဈာယနဇလနသဒ္ဒါ ဟိ ဧကတ္ထာ. 'झे' (jhe) हा धातू 'दीप्ती' (जळणे/प्रकाशणे) या अर्थात आहे. 'दीपो झायति' (दिवा जळतो), 'दारूनि झायन्ति' (लाकडे जळतात). येथे 'झायति' म्हणजे 'जलति' (जळणे). 'झायन' आणि 'जलन' हे शब्द एकाच अर्थाचे आहेत. ဇဇ္ဈ ပရိဘာသနတဇ္ဇနေသု. ဇဇ္ဈတိ. 'जज्झ' (jajjha) हा धातू 'परिभाषण' (निंदा करणे/गालीप्रदान) आणि 'तर्जन' (धमकावणे) या अर्थांमध्ये आहे. 'जज्झति' (निंदा करतो/धमकावतो). ဥဇ္ဈ ဥဿဂ္ဂေ. ဥဿဂ္ဂေါ ဆဍ္ဍနံ. ဥဇ္ဈတိ. ဥဇ္ဈိတံ. 'उज्झ' (ujjha) हा धातू 'उत्सर्ग' (त्याग करणे/टाकून देणे) या अर्थात आहे. 'उत्सर्ग' म्हणजे टाकून देणे. 'उज्झति' (त्यागतो/टाकून देतो). 'उज्झितं' (त्यागलेले/टाकलेले). ဈကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'झ' कारान्त धातूंची रूपे समाप्त झाली. ဉကာရန္တဓာတု 'ञ' कारान्त धातू. ဉာ အဝဗောဓနေ. ‘‘ဉာတိ, ဉန္တိ, ဉာသိ. ဉာတု, ဉန္တု. ဉေယျ, ဉေယျု’’န္တိအာဒီနိ ယထာပါဝစနံ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ဉာတိ, ဉာတကော, အညော, ဉတ္တံ, ဉတ္တိ, ပညတ္တိ, ဝိညတ္တိ, သညတ္တိ, သညာ, သညာဏံ, ပညာ, ပညာဏံ, ဉာဏံ, ဝိညာဏံ. 'ञा' (ñā) हा धातू 'अवबोधन' (जाणणे/ज्ञान होणे) या अर्थात आहे. 'ञाति', 'ञन्ति', 'ञासि', 'ञातु', 'ञन्तु', 'ञेय्य', 'ञेय्युं' इत्यादी रूपे बुद्धवचनानुसार ग्रहण करावीत. 'ञाति' (ज्ञाती/नातेवाईक), 'ञातको' (नातेवाईक), 'अञ्ञो' (अज्ञ/दुसरा), 'ञत्तं' (ज्ञान/ज्ञात भाव), 'ञत्ति' (ज्ञप्ति/घोषणा), 'पञ्ञत्ति' (प्रज्ञप्ती/नियम), 'विञ्ञत्ति' (विज्ञप्ती/इशारा), 'सञ्ञत्ति' (संज्ञप्ती/समजूत), 'सञ्ञा' (संज्ञा), 'सञ्ञाणं' (संज्ञान/चिन्ह), 'पञ्ञा' (प्रज्ञा), 'पञ्ञाणं' (प्रज्ञान), 'ञाणं' (ज्ञान), 'विञ्ञाणं' (विज्ञान). တတ္ထ [Pg.51] ဉာတီတိ ဇာနာတိ. ပုန ဉာတီတိ ဗန္ဓု. သော ဟိ ‘‘အယံ အမှာက’’န္တိ ဉာတဗ္ဗဋ္ဌေန ဉာတီတိ. ဧဝံ ဉာတကော. အညောတိ ဒိဋ္ဌဓမ္မိကာဒယော အတ္ထေ န ဉာတိ န ဇာနာတီတိ အညော, အဝိဒွါ ဗာလောတိ အတ္ထော. ဉတ္တန္တိ ဇာနနဘာဝေါ. ‘‘ယာဝဒေဝ အနတ္ထာယ, ဉတ္တံ ဗာလဿ ဇာယတီ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. သညာဏန္တိ စိဟနံ. ကာရိတေ ‘‘ဉာပေတိ သညာပေတိ ဝိညာပယတီ’’တိအာဒီနိ ဘဝန္တိ. ယသ္မာ ပန ‘‘အညာတိ ပဋိဝိဇ္ဈတိ. အတ္တတ္ထံ ဝါ ပရတ္ထံ ဝါ ဉဿတိ. အနညာတညဿာမီတိန္ဒြိယံ. ဧကစ္စေ နဗ္ဘညံသု, ဧကစ္စေ အဗ္ဘညံသူ’’တိ ပါဠိယော ဒိဿန္တိ, တသ္မာ ဉာတီတိအာဒီနိ အာချာတိကပဒါနိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ ဟောန္တိ နယဝသေန. တထာ ဟိ အညာတီတိ ဧတ္ထ အာဣတိ ဥပသဂ္ဂေါ, သော ပရဿက္ခရဿ သညောဂုစ္စာရဏိစ္ဆာယ ရဿံ ကတွာ နိဒ္ဒိဋ္ဌော. ဉာတီတိ သာသနေ အာချာတိကပဒံ ဒိဋ္ဌံ, တသ္မာယေဝ ‘‘ဉာတိ, ဉန္တိ. ဉာသီ’’တိအာဒိနာ ပဒမာလာကရဏေ နတ္ထေဝ ဒေါသော. तेथे 'ञाति' म्हणजे जाणतो. पुन्हा 'ञाति' म्हणजे बंधू (नातेवाईक). कारण 'अयं अम्हाकं' (हा आमचा आहे) अशा प्रकारे जाणण्यायोग्य असल्यामुळे तो 'ज्ञाती' (नातेवाईक) होय. याचप्रमाणे 'ञातको' (नातेवाईक). 'अञ्ञो' (अज्ञ/दुसरा) म्हणजे जो ऐहिक इत्यादी अर्थांना जाणत नाही तो 'अज्ञ', म्हणजेच अज्ञानी किंवा बाल (मूर्ख) असा अर्थ आहे. 'ञत्तं' म्हणजे जाणण्याचा भाव (ज्ञान). 'यावदेव अनत्थाय, ञत्तं बालस्स जायति' (मूर्खाचे ज्ञान केवळ त्याच्या अनर्थासाठीच उत्पन्न होते) हे पाळीचे उदाहरण आहे. 'सञ्ञाणं' म्हणजे चिन्ह. प्रयोजक (कारित) रूपात 'ञापेति' (जाणवून देतो), 'सञ्ञापेति' (समजावतो), 'विञ्ञापयति' (विज्ञप्त करतो) इत्यादी रूपे होतात. परंतु ज्याअर्थी 'अञ्ञाति पटिविज्झति' (जाणतो, प्रतिवेध करतो), 'अत्तत्थं वा परत्थं वा ञस्सति' (स्वतःचा किंवा दुसऱ्याचा अर्थ जाणेल), 'अनञ्ञातञ्ञस्सामीतिन्द्रियं' (अनज्ञात-ज्ञास्यामीन्द्रिय), 'एकच्चे नब्भञ्ञंसु, एकच्चे अब्भञ्ञंसु' (काहींनी जाणले नाही, काहींनी जाणले) इत्यादी पाळी वचने आढळतात, त्याअर्थी 'ञाति' इत्यादी क्रियापदे नियमानुसार सिद्धच आहेत. कारण 'अञ्ञाति' यामध्ये 'आ' हा उपसर्ग आहे, जो पुढील अक्षराच्या संयोगाच्या उच्चारणाच्या इच्छेने र्हस्व करून दर्शविला आहे. शासनात (बुद्धवचनात) 'ञाति' हे क्रियापद आढळते, म्हणूनच 'ञाति, ञन्ति, ञासि' इत्यादी रूपांनी पदमाला (धातू रूपे) तयार करण्यात कोणताही दोष नाही. ဉာ မာရဏတောသနနိသာနေသု. မာရဏံ ဇီဝိတိန္ဒြိယုပစ္ဆေဒကရဏံ. တောသနံ တုဋ္ဌိ. နိသာနံ တိက္ခတာ. ဉတ္တိ. မနုညံ. ပညတ္တိ. 'ञा' (ñā) हा धातू 'मारण' (मारणे), 'तोषण' (संतुष्ट करणे) आणि 'निसान' (तीक्ष्ण करणे) या अर्थांमध्ये आहे. 'मारण' म्हणजे जीवितेंद्रियाचा उच्छेद करणे. 'तोषण' म्हणजे तुष्टी (संतोष). 'निसान' म्हणजे तीक्ष्णता. 'ञत्ति' (ज्ञप्ति), 'मनुञ्ञं' (मनोज्ञ/सुंदर), 'पञ्ञत्ति' (प्रज्ञप्ती). ဧတ္ထ ဉတ္တီတိ မာရေတီတိ ဝါ တောသေတီတိ ဝါ နိသေတီတိ ဝါ အတ္ထော. အယဉ္စ ဉတ္တိသဒ္ဒေါ ‘‘ဝတ္တိ ဧတာယာတိ ဝါစာ’’တိ ဧတ္ထ ဝတ္တိသဒ္ဒေါ ဝိယ အာချာတိကပဒန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. တထာ အာဒတ္တေတိ ဧတ္ထ ဝိဘတ္တိဘူတဿ တေသဒ္ဒဿ ဝိယ ဝိဘတ္တိဘူတဿ တိသဒ္ဒဿ သညောဂဘာဝေါ စ ဓာတုအန္တဿရဿ ရဿတ္တဉ္စ. မနုညန္တိ မနံ အာဘုသော ဉေတိ တောသေတီတိ မနုညံ. အယမတ္ထော မနသဒ္ဒူပပဒဿ အာပုဗ္ဗဿိမဿ ဉာဓာတုဿ ဝသေန ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ပညတ္တီတိ နာနပ္ပကာရတော ပဝတ္တိနိဝါရဏေန အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဉတ္တိ [Pg.52] မာရဏံ ပညတ္တိ. အထ ဝါ ဓမ္မံ သုဏန္တာနံ ဓမ္မဒေသနာယ စိတ္တေ အနေကဝိဓေန သောမနဿုပ္ပာဒနံ. အတိခိဏဗုဒ္ဓီနံ အနေကဝိဓေန ဉာဏတိခိဏကရဏဉ္စ ပညတ္တိ နာမ, တထာ သောတူနံ စိတ္တတောသနေန စိတ္တနိသာနေန စ ပညာပနံ ပညတ္တီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. येथे 'ज्ञप्ति' (ñatti) म्हणजे मारणे, किंवा संतुष्ट करणे, किंवा तीक्ष्ण करणे असा अर्थ आहे. आणि हा 'ज्ञप्ति' शब्द "वत्ति एतायाति वाचा" (ज्याद्वारे बोलले जाते ती वाणी) यातील 'वत्ति' शब्दाप्रमाणे आख्यातपद (क्रियापद) समजावा. तसेच 'आदत्ते' यामध्ये जसा विभक्तीरूप 'ते' शब्दाचा संयोगभाव आणि धातूच्या अंतिम स्वराचा र्हस्वभाव होतो, तसाच येथे विभक्तीरूप 'ति' शब्दाचा संयोगभाव आणि धातूच्या अंतिम स्वराचा र्हस्वभाव होतो. 'मनुज्ञ' (manuñña) म्हणजे मनाला अत्यंत संतुष्ट करणारे ते मनुज्ञ. हा अर्थ 'मन' शब्द उपपद असताना 'आ' पूर्व असलेल्या 'ज्ञा' धातूच्या योगाने समजावा. 'प्रज्ञप्ति' (paññatti) म्हणजे विविध प्रकारे प्रवृत्ती रोखून अकुशल धर्मांचा नाश (मरण) करणे ती प्रज्ञप्ति होय. अथवा, धर्म ऐकणाऱ्यांच्या मनात धर्मदेशनेद्वारे अनेक प्रकारे सोमनस्य (आनंद) उत्पन्न करणे. अतिशय तीक्ष्ण बुद्धी असलेल्यांच्या ज्ञानाला अनेक प्रकारे तीक्ष्ण करणे म्हणजे 'प्रज्ञप्ति' होय, तसेच श्रोत्यांच्या चित्ताला संतुष्ट करून आणि चित्ताला तीक्ष्ण करून प्रज्ञापित करणे (जाणवून देणे) ही 'प्रज्ञप्ति' समजावी. ဣတိ ဘူဝါဒိဂဏေ စဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ अशा प्रकारे भूवादिगणातील च-वर्गान्त धातुरूपे သမတ္တာနိ. समाप्त झाली. ဋကာရန္တဓာတု ट-कारान्त धातू ဣဒါနိ ဋဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ ဝုစ္စန္တေ – आता ट-वर्गान्त धातुरूपे सांगितली जातात – သောဋု ဂဗ္ဗေ. ဂဗ္ဗံ ဒဗ္ဗနံ. သောဋတိ. सोठु (soṭu) - गर्वाने वागणे. गर्व म्हणजे दंभ करणे. सोठति (soṭati). ယောဋု သမ္ဗန္ဓေ. ယောဋတိ. योठु (yoṭu) - संबंध जोडणे. योठति (yoṭati). မေဋု မိလေဋု ဥမ္မာဒေ. မေဋတိ. မိလေဋတိ. मेठु (meṭu), मिळेठु (mileṭu) - उन्माद (वेडेपणा). मेठति (meṭati). मिळेठति (mileṭati). ကဋ ဝဿာဝရဏေသု. ကဋတိ. कट (kaṭa) - वर्षा (पाऊस) किंवा आवरण (झाकणे). कटति (kaṭati). သဋ ပရိဘာသနေ. သဋတိ. सट (saṭa) - निंदा करणे. सटति (saṭati). လဋ ဗာလျေ စ. ပုဗ္ဗာပေက္ခာယ စကာရော. လဋတိ. လာဋော. लट (laṭa) - बालपणात आणि. 'च' कार हा पूर्व अपेक्षेने आहे. लटति (laṭati). लाटो (lāṭo). သဋ ရုဇာဝိသရဏဂတျာဝသာနေသု. ရုဇာ ပီဠာ. ဝိသရဏံ ဝိပ္ဖရဏံ. ဂတျာဝသာနံ ဂတိယာ အဝသာနံ ဩသာနံ အဘာဝကရဏံ, နိသီဒနန္တိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. သဋတိ. သာဋော ဝုစ္စတိ သာဋကော. सट (saṭa) - रोग (रुजा), विसरण (पसरणे) आणि गतीच्या अंतात. रुजा म्हणजे पीडा. विसरण म्हणजे विस्फुरण (पसरणे). गतीचा अंत म्हणजे गतीचा अवसान, अंत, अभाव करणे, म्हणजेच बसणे असे म्हटले आहे. सटति (saṭati). साटो (sāṭo) याला साटको (sāṭako) असे म्हणतात. ဝဋ ဝေဓနေ. ဝဋတိ. ဝဋော. ဝါဋော. वट (vaṭa) - वेधणे. वटति (vaṭati). वटो (vaṭo). वाटो (vāṭo). ခိဋ ဥတ္တာသနေ. ခေဋတိ, အာခေဋကော, ခေဋော, ဥက္ခေဋိတော, သမုက္ခေဋိတော. खिट (khiṭa) - भयभीत करणे. खेटति (kheṭati), आखेटको (ākheṭako), खेटो (kheṭo), उक्खेटितो (ukkheṭito), समुक्खेटितो (samukkheṭito). သိဋ အနာဒရေ. သေဋတိ. सिट (siṭa) - अनादर करणे. सेटति (seṭati). ဇဋ [Pg.53] ဃဋ သံဃာတေ. ဇဋတိ. ဇဋာ, ဇဋိလော, ဇဋီ. အန္တောဇဋာ ဗဟိဇဋာ, ဇဋာယ ဇဋိတာ ပဇာ. ကာရိတေ ‘‘သော ဣမံ ဝိဇဋယေ ဇဋံ. အရဟတ္တမဂ္ဂက္ခဏေ ဝိဇဋေတိ နာမာ’’တိ ပယောဂေါ. जट (jaṭa), घट (ghaṭa) - एकत्र येणे (संघात). जटति (jaṭati). जटा (jaṭā), जटिलो (jaṭilo), जटी (jaṭī). 'अंतर्जटा बाह्यजटा, जटेने गुंफलेली ही प्रजा'. प्रयोजक (कारित) रूपात - "तो या जटेला सोडवतो" (सो इमं विजटये जटं). अर्हत्त्वमार्गाच्या क्षणी "विजटेति" (जटा सोडवतो) असा प्रयोग होतो. ဘဋ ဘတ္တိယံ. ဘဋတိ. ဘဋော. ဝေတနံ ဘဋကော ယထာ. भट (bhaṭa) - भरण-पोषण करणे (भक्ती/सेवा). भटति (bhaṭati). भटो (bhaṭo). जसे वेतन घेणारा भटको (bhaṭako). တဋ ဥဿယေ. ဥဿယော အာရောဟော ဥဗ္ဗေဓော. တဋတိ. တဋော, ဂိရိတဋော, နဒီတဋော, တဋီ, တဋံ. तट (taṭa) - उंची (उच्छ्रय). उच्छ्रय म्हणजे चढण किंवा उंची. तटति (taṭati). तटो (taṭo), गिरितटो (giritaṭo), नदीतटो (nadītaṭo), तटी (taṭī), तटं (taṭaṃ). ခဋ ကံသေ. ခဋတိ. ခဋော. खट (khaṭa) - कांस्य (काशाचे भांडे). खटति (khaṭati). खटो (khaṭo). နဋ နတိယံ. နဋတိ. နဋော, နာဋကံ. नट (naṭa) - नमन करणे (नृत्य करणे). नटति (naṭati). नटो (naṭo), नाटकं (nāṭakaṃ). ပိဋ သဒ္ဒသံဃာဋေသု. ပေဋတိ. ပေဋကော, ပိဋကံ. ပိဋကသဒ္ဒေါ ‘‘မာ ပိဋကသမ္ပဒါနေနာ’’တိအာဒီသု ပရိယတ္တိယံ ဒိဿတိ. ‘‘အထ ပုရိသော အာဂစ္ဆေယျ ကုဒါလပိဋကံ အာဒါယာ’’တိအာဒီသု ယသ္မိံ ကိသ္မိဉ္စိ ဘာဇနေ. पिट (piṭa) - शब्द आणि संघात (एकत्र करणे). पेटति (peṭati). पेटको (peṭako), पिटकं (piṭakaṃ). 'पिटक' शब्द "मा पिटकसम्पदानेन" इत्यादींमध्ये पर्यत्ती (बुद्धवचन) या अर्थी दिसतो. "अथ पुरिसो आगच्छेय्य कुदालपिटकं आदाय" इत्यादींमध्ये कोणत्याही पात्राच्या (टोपलीच्या) अर्थी दिसतो. ဟဋ ဒိတ္တိယံ. ဟဋတိ. ဟာဋကံ, ဟဋကံ. ယံ ဇာတရူပံ ဟဋကန္တိ ဝုစ္စတိ. हट (haṭa) - दीप्ती (चमकणे). हटति (haṭati). हाटकं (hāṭakaṃ), हटकं (haṭakaṃ). जे सुवर्ण असते त्याला 'हाटक' किंवा 'हटक' असे म्हटले जाते. သဋ အဝယဝေ. သဋတိ. सट (saṭa) - अवयव (भाग करणे). सटति (saṭati). လုဋ ဝိလောဌနေ. လောဋတိ. लुट (luṭa) - लोळणे (विलोठन). लोठति (loṭati). စိဋ ပေသနေ. စေဋတိ. စေဋကော. चिट (ciṭa) - पाठवणे (प्रेषण). चेटति (ceṭati). चेटको (ceṭako). ဝိဋ သဒ္ဒေ. ဝေဋတိ. ဝေဋကော. विट (viṭa) - शब्द करणे. वेटति (veṭati). वेटको (veṭako). အဋ ပဋ ဣဋ ကိဋ ကဋ ဂတိယံ. အဋတိ. ပဋတိ. ဧဋတိ. ကေဋတိ. ကဋတိ. ပဋော ဣစ္စေဝ နာမိကပဒံ ဒိဋ္ဌံ. ပဋတိ ဇိဏ္ဏဘာဝံ [Pg.54] ဂစ္ဆတီတိ ပဋော. ပဋောတိ ဝတ္ထံ. ဝတ္ထဿ ဟိ အနေကာနိ နာမာနိ – अट (aṭa), पट (paṭa), इट (iṭa), किट (kiṭa), कट (kaṭa) - गती (जाणे). अटति (aṭati). पटति (paṭati). एटति (eṭati). केटति (keṭati). कटति (kaṭati). 'पटो' (paṭo) हे नामपद पाहिले जाते. 'पटति जिण्णभावं गच्छतीति पटो' (जे जीर्ण होते ते पट). पट म्हणजे वस्त्र. वस्त्राची अनेक नावे आहेत – ပဋော စောဠော သာဋကော စ, ဝါသော ဝသနမံသုကံ; ဒုဿမစ္ဆာဒနံ ဝတ္ထံ, စေလံ ဝသနိ အမ္ဗရံ. पट (paṭo), चोळ (coḷo), साटक (sāṭako), वास (vāso), वसन (vasanaṃ), अंशुक (aṃsukaṃ), दुस्स (dussaṃ), आच्छादन (acchādanaṃ), वत्थ (vatthaṃ), चेल (celaṃ), वसनि (vasani), अम्बर (ambaraṃ) [ही वस्त्राची नावे आहेत]. မုဋ ပမဒ္ဒနေ. မောဋတိ. मुट (muṭa) - चिरडणे (प्रमर्दन). मोठति (moṭati). စုဋ အပ္ပီဘာဝေ. စောဋတိ. चुट (cuṭa) - कमी होणे (अल्पीभाव). चोटति (coṭati). ဝဋိ ဝိဘာဇနေ. ဝဋတိ. ဝဏ္ဋော. वटि (vaṭi) - विभाजन करणे. वटति (vaṭati). वण्टो (vaṇṭo - देठ). ရုဋိ လုဋိ ထေယျေ. ရုဏ္ဋတိ. လုဏ္ဋတိ. ရုဏ္ဋကော. လုဏ္ဋကော. रुठि (ruṭi), लुठि (luṭi) - चोरी करणे (स्तेय). रुण्ठति (ruṇṭati). लुण्ठति (luṇṭati). रुण्ठको (ruṇṭako). लुण्ठको (luṇṭako). ဖုဋ ဝိသရဏေ ဖောဋတိ. ဖောဋော. फुट (phuṭa) - पसरणे (विसरण). फोटति (phoṭati). फोटो (phoṭo). စေဋ စေဋာယံ. စေဋတိ. စေဋကော. चेट (ceṭa) - चेष्टा करणे (क्रियाशील असणे). चेटति (ceṭati). चेटको (ceṭako). ဃုဋ ပရိဝတ္တနေ. ဃောဋတိ. घुट (ghuṭa) - फिरणे (परिवर्तन). घोटति (ghoṭati). ရုဋ လုဋ ပဋိဃာတေ. ရောဋတိ. လောဋတိ. रुठ (ruṭa), लुठ (luṭa) - प्रतिघात (विरोध करणे). रोठति (roṭati). लोठति (loṭati). ဃဋ စေတာယံ. ဃဋတိ. ဃဋော. ဃဋော ဝုစ္စတိ ကုမ္ဘော. ဣမာနိ တဒဘိဓာနာနိ – घट (ghaṭa) - चेष्टा करणे (प्रयत्न करणे). घटति (ghaṭati). घटो (ghaṭo). घटाला 'कुंभ' (घडा) असे म्हणतात. त्याची नावे खालीलप्रमाणे आहेत – ဃဋော ကုမ္ဘော ဃဋီ ကုမ္ဘီ, တုဏ္ဍိကိရော တု ဥက္ခလီ; မဟန္တဘာဇနံ စာဋိ, အတိခုဒ္ဒံ ကုဋ္ဋံ ဘဝေ; घटो (ghaṭo), कुम्भो (kumbho), घटी (ghaṭī), कुम्भी (kumbhī), तुण्डिकिरो (tuṇḍikiro), उक्खली (ukkhalī); मोठे भांडे म्हणजे चाटी (cāṭi), आणि अतिशय लहान भांडे म्हणजे कुट्टं (kuṭṭaṃ) होय. စဋ ဘဋ ပရိဘာသနေ ဒေဋ စ. စဋတိ. ဘဋတိ. ဒေဋတိ. चट (caṭa), भट (bhaṭa) - निंदा करणे (भाषण करणे) आणि देट (deṭa) सुद्धा. चटति (caṭati). भटति (bhaṭati). देटति (deṭati). ကုဋ ကောဋိလ္လေ. ကုဋတိ. ပဋိကုဋတိ. कुट (kuṭa) - कुटिलता (वाकडेपणा). कुटति (kuṭati). पटिकुटति (paṭikuṭati). ပုဋ သံကိလေသနေ. ပုဋတိ. पुट (puṭa) - संक्लेश (मळणे/दूषित करणे). पुटति (puṭati). စုဋ ဆုဋ ကုဋ ဆေဒနေ. စုဋတိ. ဆုဋတိ. ကုဋတိ. चुट (cuṭa), छुट (chuṭa), कुट (kuṭa) - छेदणे (कापणे). चुटति (cuṭati). छुटति (chuṭati). कुटति (kuṭati). ဖုဋ ဝိကသနေ. ဖုဋတိ. फुट (phuṭa) - विकसित होणे (फुलणे). फुटति (phuṭati). မုဋ အဂ္ဂိသဒ္ဒပက္ခေပမဒ္ဒနေသု. မုဋတိ. मुट (muṭa) - अग्नीचा आवाज, फेकणे आणि चिरडणे या अर्थांमध्ये. मुटति (muṭati). တုဋ ကလဟကမ္မနိ. တုဋတိ. तुट (tuṭa) - भांडण करणे (कलहकर्म). तुटति (tuṭati). ဃုဋ ပဋိဃာတေ. ဃုဋတိ. ဃောဋကော. घुट (ghuṭa) - प्रतिघात (विरोध). घुटति (ghuṭati). घोटको (ghoṭako). ဋကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ट-कारान्त धातुरूपे समाप्त झाली. ဌကာရန္တဓာတု ठ-कारान्त धातू ဌာ [Pg.55] ဂတိနိဝတ္တိယံ. ဂတိနိဝတ္တိ ဥပ္ပဇ္ဇမာနဿ ဂမနဿုပစ္ဆေဒေါ. ဌာတိ, ဌန္တိ. တိဋ္ဌတိ. ပတိဋ္ဌာတိ. အဓိဋ္ဌာတိ. အဓိဋ္ဌေတိ. သဏ္ဌာတိ. သဏ္ဌဟတိ. အဓိဋ္ဌဟတိ. ဥပဋ္ဌဟတိ. ဌာတု. တိဋ္ဌတု. တိဋ္ဌေယျ. အဋ္ဌ, အဋ္ဌု. အဋ္ဌာ, အဋ္ဌူ, အဋ္ဌာသိ, အဋ္ဌံသု. ယာဝဿ ကာယော ဌဿတိ. တိဋ္ဌိဿတိ. ဥပဿုတိ တိဋ္ဌိဿထ. အဋ္ဌိဿာ, အဋ္ဌိဿံသု. အတိဋ္ဌိဿာ, အတိဋ္ဌိဿံသု. ဌာတုံ, ဥပဋ္ဌာတုံ. ဥပဋ္ဌဟိတုံ. အဓိဋ္ဌာတုံ. အဓိဋ္ဌဟိတုံ. ဌတွာ, အဓိဋ္ဌိတွာ. ဥပဋ္ဌဟိတွာ, အဓိဋ္ဌဟိတွာ. ဌာနံ, ဌိတိ, သဏ္ဌိတိ, အဝဋ္ဌိတိ. သဏ္ဌာနံ, ပဋ္ဌာနံ. ဥပဋ္ဌာကော, ဌိတော. ပဗ္ဗတဋ္ဌော ဘူမဋ္ဌော. ဥပဋ္ဌဟံ ဣစ္စာဒီနိ. ठा (ṭhā) - गती थांबवणे (गतीची निवृत्ती). गतीची निवृत्ती म्हणजे उत्पन्न होणाऱ्या गमनाचा (जाण्याचा) उच्छेद (थांबणे). ठाति (ṭhāti), ठन्ति (ṭhanti). तिट्ठति (tiṭṭhati). पतिट्ठति (patiṭṭhāti). अधिट्ठाहति (adhiṭṭhāti). अधिट्ठेति (adhiṭṭheti). सण्ठाति (saṇṭhāti). सण्ठहति (saṇṭhahati). अधिट्ठहति (adhiṭṭhahati). उपट्ठहति (upaṭṭhahati). ठातु (ṭhātu). तिट्ठतु (tiṭṭhatu). तिट्ठेय्य (tiṭṭheyya). अट्ठ (aṭṭha), अट्ठु (aṭṭhu). अट्ठि (aṭṭhā), अट्ठू (aṭṭhū), अट्ठासि (aṭṭhāsi), अट्ठंसु (aṭṭhaṃsu). 'यावस्स कायो ठस्सति' (जोपर्यंत शरीर राहील). तिट्ठिस्सति (tiṭṭhissati). 'उपस्सुति तिट्ठिस्सथ' (तुम्ही ऐकत उभे राहाल). अट्ठिस्सा (aṭṭhissā), अट्ठिस्संग्सु (aṭṭhissaṃsu). अतिट्ठिस्सा (atiṭṭhissā), अतिट्ठिस्संग्सु (atiṭṭhissaṃsu). ठातुं (ṭhātuṃ), उपट्ठातुं (upaṭṭhātuṃ). उपट्ठहितुं (upaṭṭhahituṃ). अधिट्ठातुं (adhiṭṭhātuṃ). अधिट्ठहितुं (adhiṭṭhahituṃ). ठत्वा (ṭhatvā), अधिट्ठित्वा (adhiṭṭhitvā). उपट्ठहित्वा (upaṭṭhahitvā), अधिट्ठहित्वा (adhiṭṭhahitvā). ठानं (ṭhānaṃ), ठिति (ṭhiti), सण्ठिति (saṇṭhiti), अवट्ठिति (avaṭṭhiti). सण्ठानं (saṇṭhānaṃ), पट्ठानं (paṭṭhānaṃ). उपट्ठाको (upaṭṭhāko), ठितो (ṭhito). पब्बतट्ठो (pabbataṭṭho - पर्वतावर राहणारा), भूमट्ठो (bhūmaṭṭho - भूमीवर राहणारा). उपट्ठहं (upaṭṭhahaṃ) इत्यादी रूपे होतात. တတ္ထ ဌာနသဒ္ဒေါ ဣဿရိယဌိတိခဏကာရဏေသု ဒိဿတိ. ‘‘ကိံ ပနာယသ္မာ ဒေဝါနမိန္ဒော ကမ္မံ ကတွာ ဣမံ ဌာနံ ပတ္တော’’တိအာဒီသု ဟိ ဣဿရိယေ ဒိဿတိ. ‘‘ဌာနကုသလော ဟောတိ အက္ခဏဝေဓီ’’တိအာဒီသု ဌိတိယံ. ‘‘ဌာနသောပေတံ တထာဂတံ ပဋိဘာတီ’’တိအာဒီသု ခဏေ. ‘‘ဌာနဉ္စ ဌာနသော ဉတွာ အဋ္ဌာနဉ္စ အဋ္ဌာနသော’’တိအာဒီသု ကာရဏေ. ကာရဏဉှိ ယသ္မာ တတ္ထ ဖလံ တိဋ္ဌတိ တဒါယတ္တဝုတ္တိဘာဝေန, တသ္မာ ဌာနန္တိ ဝုစ္စတိ. त्यामध्ये 'स्थान' (ṭhāna) शब्द ऐश्वर्य (अधिकार), स्थिती, क्षण आणि कारण या अर्थांमध्ये दिसतो. "किं पनायस्मा देवानामिन्दो कम्मं कत्वा इमं ठानं पत्तो" (आयुष्यमान देवांचा राजा इंद्र कोणते कर्म करून या स्थानाला प्राप्त झाला?) इत्यादींमध्ये तो ऐश्वर्य (अधिकार) या अर्थी दिसतो. "ठानकुसलो होति अक्खणवेधी" (तो स्थानात कुशल आणि अचूक वेध घेणारा असतो) इत्यादींमध्ये स्थिती या अर्थी. "ठानसोपेतं तथागतं पटिभाति" (तथागतांना योग्य क्षणी स्फुरते) इत्यादींमध्ये क्षण या अर्थी. "ठानञ्च ठानसो ञत्वा अट्ठानञ्च अट्ठानसो" (कारण योग्य कारणाने आणि अकारण अकारणाने जाणून) इत्यादींमध्ये कारण या अर्थी. कारण म्हणजे ज्याच्यावर फळ अवलंबून असते, म्हणून त्याला 'स्थान' असे म्हटले जाते. ဣဿရိယေ ဌိတိယဉ္စ, ခဏသ္မိမ္ပိ စ ကာရဏေ; စတူသွတ္ထေသု ဧတေသု, ဌာနသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတီတိ. ऐश्वर्य (आधिपत्य), स्थिती (स्थैर्य), क्षण आणि कारण या चार अर्थांमध्ये 'ठान' (स्थान) हा शब्द वापरला जातो. ဌေ သဒ္ဒသင်္ကာတေသု. ဌီယတိ. 'ठे' धातू शब्द किंवा आवाजाच्या अर्थात. 'ठीयति' (तो आवाज करतो). ဌေ ဝေဌနေ. ဌာယတိ. 'ठे' धातू वेढण्याच्या (वेष्टन) अर्थात. 'ठायति' (तो वेढतो). ပဌ [Pg.56] ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ. ဓမ္မံ ပဌတိ. ပါဌော, နက္ခတ္တပါဌကော, သော ဟောရပါဌကံ ပုစ္ဆိ. သဗ္ဗပါဌီ ဘဝိဿတိ. ပဌိတုံ, ပဌိတဝေ, ပဌိတွာ, ပဌိတွာန, ပဌိတုန, ပဌိယ, ပဌိယာန. 'पठ' धातू स्पष्ट वाणीच्या अर्थात. 'धम्मं पठति' (तो धम्माचे पठण करतो). 'पाठो' (पाठ), 'नक्खत्तपाठको' (नक्षत्र वाचक/ज्योतिषी), 'सो होरापाठकं पुच्छि' (त्याने ज्योतिषाला विचारले). 'सब्बपाठी भविस्सति' (तो सर्व पाठांचा ज्ञाता होईल). 'पठितुं', 'पठितवे', 'पठित्वा', 'पठित्वान', 'पठितुन', 'पठिय', 'पठियान' (ही पठ् धातूची कृदन्त रूपे आहेत). ဧဝံဝိဓံ တုံပစ္စယန္တာဒိဝိဘာဂံ သဗ္ဗတ္ထ ယထာရဟံ ဝတ္တုကာမာပိ ဂန္ထ ဝိတ္ထာရဘယေန န ဝဒါမ. အဝုတ္တောပိ ဤဒိသော ဝိဘာဂေါ နယာနုသာရေန ယထာသမ္ဘဝံ သဗ္ဗတ္ထ ယောဇေတဗ္ဗော. ယတ္ထ ပန ပါဠိနိဒဿနာဒိဝိသေသော ဣစ္ဆိတဗ္ဗော ဟောတိ, တတ္ထေဝေတံ ဒဿေဿာမ. अशा प्रकारचा 'तुं' प्रत्ययादींचा विभाग सर्व ठिकाणी योग्यतेनुसार सांगण्याची इच्छा असूनही, ग्रंथाच्या विस्ताराच्या भयाने आम्ही तो सांगत नाही. न सांगितलेला देखील असा विभाग नियमानुसार शक्यतेनुसार सर्व ठिकाणी योजावा. परंतु, जेथे पाळी उदाहरणादी विशेष आवश्यक असतील, तेथेच आम्ही ते दाखवू. ဝဌ ထူလိယေ. ဝဌတိ. ဝဌရော. ဝဌရောတိ ထူလဃနသရီရသ္မိံ ဝတ္တဗ္ဗဝစနံ. တထာ ဟိ ဝိနယဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဝဌရောတိ ထူလော, ထူလော စ ဃနသရီရော စာယံ ဘိက္ခူတိ ဝုတ္တံ ဟောတီ’’တိ ဝုတ္တံ. 'वठ' धातू स्थूलतेच्या (जाडेपणाच्या) अर्थात. 'वठति'. 'वठरो'. 'वठरो' हा शब्द स्थूल आणि घट्ट शरीरासाठी वापरला जाणारा शब्द आहे. तसेच विनय अट्ठकथेत म्हटले आहे - 'वठरो म्हणजे स्थूल, आणि हा भिक्खू स्थूल व घट्ट शरीराचा आहे, असे म्हटले आहे'. မဌ နိဝါသေ. မဌတိ. မဌော. 'मठ' धातू निवासाच्या (राहण्याच्या) अर्थात. 'मठति'. 'मठो' (मठ/निवास). ကဌ ကိစ္ဆဇီဝနေ. ကဌတိ. ကဌော. 'कठ' धातू कठीण उपजीविकेच्या (कष्टमय जीवनाच्या) अर्थात. 'कठति'. 'कठो'. ရဌ ပရိဘာသနေ. ရဌတိ. 'रठ' धातू निंदा किंवा भाषणाच्या अर्थात. 'रठति'. သာဌ ဗလက္ကာရေ. ဗလက္ကာရော နာမ အတ္တနော ဗလေန ယထာဇ္ဈာသယံ ဒဗ္ဗလဿ အဘိဘဝနံ. သာဌတိ. သာဌော. 'साठ' धातू बळजबरीच्या (बलात्काराच्या) अर्थात. बळजबरी म्हणजे स्वतःच्या बळाने आपल्या इच्छेनुसार दुर्बलाचा पराभव करणे. 'साठति'. 'साठो'. ဥဌ ရုဌ လုဌ ဥပဃာတေ. ဩဌတိ. ရောဌတိ. လောဌတိ. 'उठ', 'रुठ', 'लुठ' हे धातू उपघाताच्या (इजा किंवा नाशाच्या) अर्थात. 'ओठति', 'रोठति', 'लोठति'. ပိဌ ဟိံသာသံကိလေသေသု. ပေဌတိ. ပိဌရော. 'पिठ' धातू हिंसा आणि संक्लेशाच्या (मलीनतेच्या) अर्थात. 'पेठति'. 'पिठरो' (भांडे/घडा). သဌ ကေတဝေ စ. ပုဗ္ဗတ္ထေသု စကာရော. သဌတိ. သဌော သဌောတိ ကေရာဋိကော ဝုစ္စတိ. 'सठ' धातू कपटाच्या (धूर्ततेच्या) अर्थात आणि 'च' कारामुळे मागील अर्थांमध्येही. 'सठति'. 'सठो' - सठ म्हणजे कपटी किंवा धूर्त माणसाला म्हटले जाते. သုဌ ဂတိပဋိဃာတေ. ဂမနပဋိဟနနံ ဂတိပဋိဃာတော. သောဌတိ. 'सुठ' धातू गतीच्या रोधाच्या (गती अडवण्याच्या) अर्थात. जाणे अडवणे म्हणजे गतीचा रोध होय. 'सोठति'. ကုဌိ လုဌိ အာလဿိယေ စ. စကာရော ပုဗ္ဗတ္ထေ စ. ကုဏ္ဌတိ. ကုဏ္ဌော. လုဏ္ဌတိ. လုဏ္ဌော. 'कुठि', 'लुठि' हे धातू आळसाच्या अर्थात आणि 'च' कारामुळे मागील अर्थातही. 'कुण्ठति', 'कुण्ठो', 'लुण्ठति', 'लुण्ठो'. သုဌိ [Pg.57] သောသနေ. သုဏ္ဌတိ. 'सुठि' धातू सुकवण्याच्या (शोषण) अर्थात. 'सुण्ठति'. ရုဌိ လုဌိ အဌိ ဂတိယံ. ရုဏ္ဌတိ. လုဏ္ဌတိ. အဏ္ဌတိ. 'रुठि', 'लुठि', 'अठि' हे धातू गतीच्या (गमनाच्या) अर्थात. 'रुण्ठति', 'लुण्ठति', 'अण्ठति'. ဝေဌ ဝေဌနေ. ဝေဌတိ, နိဗ္ဗေဌတိ. ဝေဌနံ, နိဗ္ဗေဌနံ. 'वेठ' धातू वेढण्याच्या (वेष्टन) अर्थात. 'वेठति' (तो वेढतो), 'निब्बेठति' (तो उलगडतो). 'वेठनं' (वेढणे), 'निब्बेठनं' (उलगडणे). ဝဌိ ဧကစရိယာယံ. ဝဏ္ဌတိ. 'वठि' धातू एकटे राहण्याच्या (एकचर्या) अर्थात. 'वण्ठति'. မဌ ကုဌိ သောကေ. မဌတိ. ကုဏ္ဌတိ. 'मठ', 'कुठि' हे धातू शोकाच्या (दुःखाच्या) अर्थात. 'मठति', 'कुण्ठति'. ဧဌ ဟေဌ ဝိဗာဓာယံ. ဧဌတိ. ဟေဌတိ. ဝိဟေဌတိ. ဝိဟေဌနံ. 'एठ', 'हेठ' हे धातू पीडा देण्याच्या (बाधा पोहचवण्याच्या) अर्थात. 'एठति', 'हेठति', 'विहेठति' (तो त्रास देतो), 'विहेठनं' (त्रास देणे/पीडा). လုဌ ပဋိဃာတေ. လောဌတိ. 'लुठ' धातू प्रतिघाताच्या (अडथळा किंवा क्रोधाच्या) अर्थात. 'लोठति'. ပဌ ဝိချာနေ. ပဌတိ. 'पठ' धातू व्याख्यान करण्याच्या (स्पष्ट सांगण्याच्या) अर्थात. 'पठति'. လုဌ သံကိလေသေ. လောဌတိ. 'लुठ' धातू संक्लेशाच्या (मलीनतेच्या) अर्थात. 'लोठति'. ဌကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ठकारान्त धातूंची रूपे. ဍကာရန္တဓာတု डकारान्त धातू. ဍိ ဝိဟာယသဂတိယံ ဂမနမတ္တေ စ. ဍေတိ, ဍယတိ. ဍေမာနော. ဥစ္စေ သကုဏ ဍေမာန. ယေ မံ ပုရေ ပစ္စုဍ္ဍေန္တိ. 'डि' धातू आकाशात उडण्याच्या (विहायसगती) आणि केवळ गमनाच्या (जाण्याच्या) अर्थात. 'डेति', 'डयति'. 'डेमानो' (उडणारा). 'उच्चे सकुण डेमान' (हे उंच उडणाऱ्या पक्षा!). 'ये मं पुरे पच्चुड्डेन्ति' (जे पूर्वी माझ्या समोर उडून आले). ဍိ ခိပနုဍ္ဍနေသု. ဍေတိ. ဥဍ္ဍေတိ. 'डि' धातू फेकण्याच्या आणि वर उडण्याच्या अर्थात. 'डेति', 'उड्डेति'. ဣတော ဗဟိဒ္ဓါ ပါသဏ္ဍာ, ဒိဋ္ဌီသု ပသီဒန္တိ တေ; န တေသံ ဓမ္မံ ရောစေမိ, န တေ ဓမ္မဿ ကောဝိဒါ. या (शासना)बाहेरचे पाखंडी (परधर्मीय) आपापल्या दृष्टींमध्ये (मतांमध्ये) प्रसन्न होतात; मला त्यांचा धम्म आवडत नाही आणि ते धम्मामध्ये कुशलही नाहीत. ဧတ္ထ စ ပါသဏ္ဍာတိ ပါသံ ဍေန္တီတိ ပါသဏ္ဍာ, သတ္တာနံ စိတ္တေသု ဒိဋ္ဌိပါသံ ခိပန္တီတိ အတ္ထော. အထ ဝါ တဏှာပါသံ ဒိဋ္ဌိပါသဉ္စ ဍေန္တိ ဥဍ္ဍေန္တီတိ ပါသဏ္ဍာ. आणि येथे 'पाखंडी' (पासण्ड) म्हणजे जे पाश (फास) फेकतात ते पाखंडी, म्हणजेच प्राण्यांच्या चित्तामध्ये दृष्टीचा पाश (मतांचा फास) फेकतात असा अर्थ आहे. अथवा, जे तण्हापाश (तृष्णेचा फास) आणि दिठ्ठिपाश (दृष्टीचा फास) फेकतात किंवा वर उचलतात, ते पाखंडी होत. မုဍိ [Pg.58] ကဏ္ဍနေ. မုဏ္ဍတိ. ကုမာရံ မုဏ္ဍိံသု. မုဏ္ဍော. मुडि (धातू) मुंडण करणे (केस कापणे) या अर्थात. मुण्डति (तो मुंडण करतो). कुमारं मुण्डिंसु (त्यांनी मुलाचे मुंडण केले). मुण्डो (मुंडण केलेला/बोडका). စုဍ္ဍ ဟာဝကရဏေ. စုဍ္ဍတိ. चुड्ड (धातू) हावभाव करणे या अर्थात. चुड्डति. အဍ္ဍ အဘိယောဂေ. အဍ္ဍတိ. अड्ड (धातू) अभियोग (प्रयत्न किंवा आरोप) या अर्थात. अड्डति. ဂဍိ ဝဒနေကဒေသေ. ဂဏ္ဍတိ. ဂဏ္ဍော. गडि (धातू) चेहऱ्याचा एक भाग (गाल किंवा गळू) या अर्थात. गण्डति. गण्डो (गाल किंवा गळू). ဟုဍိ ပိဍိ သံဃာတေ. ဟုဏ္ဍတိ. ပိဏ္ဍတိ. ပိဏ္ဍော. हुडि आणि पिडि (धातू) संघात (एकत्र करणे किंवा गोळा करणे) या अर्थात. हुण्डति. पिण्डति. पिण्डो (पिंड/गोळा). ဟိဍိ ဂတိယံ. ဟိဏ္ဍတိ, အာဟိဏ္ဍတိ. हिडि (धातू) गती (भटकणे किंवा फिरणे) या अर्थात. हिण्डति, आहिण्डति. ကုဍိ ဒါဟေ. ကုဏ္ဍတိ. ကုဏ္ဍော. कुडि (धातू) दाह (जळणे) या अर्थात. कुण्डति. कुण्डो (कुंड/भांडे). ဝဍိ မဍိ ဝေဌနေ. ဝဏ္ဍတိ. မဏ္ဍတိ. မဏ္ဍလံ. वडि आणि मडि (धातू) वेढणे (गुंडाळणे) या अर्थात. वण्डति. मण्डति. मण्डलं (मंडळ/वर्तुळ). ဘဍိ ပရိဘာသနေ. ဘဏ္ဍတိ. ဘဏ္ဍနံ. ဘဏ္ဍော. भडि (धातू) शिवीगाळ करणे किंवा भांडणे या अर्थात. भण्डति. भण्डनं (भांडण). भण्डो (भांड/भांडण करणारा). မဍိ မဇ္ဇနေ. မဏ္ဍတိ. မဏ္ဍနံ. मडि (धातू) सुशोभित करणे (किंवा स्नान/स्वच्छ करणे) या अर्थात. मण्डति. मण्डनं (सुशोभन/अलंकार). တုဍိ တောဠနေ. တုဏ္ဍတိ. တုဏ္ဍော. တုဏ္ဍေနာဒါယ ဂစ္ဆေယျ. तुडि (धातू) तोलणे (किंवा चोचीने उचलणे) या अर्थात. तुण्डति. तुण्डो (चोच). तुण्डेनादाय गच्छेय्य (चोचीने पकडून निघून जावा). ဘုဍိ ဘရဏေ. ဘုဏ္ဍတိ. भुडि (धातू) भरण (पोषण करणे किंवा भरणे) या अर्थात. भुण्डति. စဍိ ကောပေ. စဏ္ဍတိ. စဏ္ဍော. စဏ္ဍာလော, စဏ္ဍိက္ကံ. चडि (धातू) कोप (राग) या अर्थात. चण्डति. चण्डो (क्रोधित/उग्र). चण्डालो (चांडाल), चण्डिक्कं (उग्रता/क्रोध). သဍိ ရုဇာယံ. သဏ္ဍတိ. သဏ္ဍော. सडि (धातू) रुजा (वेदना किंवा रोग) या अर्थात. सण्डति. सण्डो (समूह/वृषभ). တဍိ တာဠနေ. တဏ္ဍတိ. ဝိတဏ္ဍာ. तडि (धातू) ताडन (मारणे) या अर्थात. तण्डति. वितण्डा (वितंडवाद). ပဍိ ဂတိယံ. ပဏ္ဍတိ. ပဏ္ဍာ, ပဏ္ဍိတော. ဧတ္ထ ပဏ္ဍာတိ ပညာ. သာ ဟိ သုခုမေသုပိ အတ္ထေသု ပဏ္ဍတိ ဂစ္ဆတိ ဒုက္ခာဒီနံ ပီဠနာဒိကမ္ပိ အာကာရံ ဇာနာတီတိ ‘‘ပဏ္ဍာ’’တိ ဝုစ္စတိ. ပဏ္ဍိတောတိ ပဏ္ဍာယ ဣတော ဂတော ပဝတ္တောတိ ပဏ္ဍိတော. အထ ဝါ သဉ္ဇာတာ ပဏ္ဍာ ဧတဿာတိ ပဏ္ဍိတော. ပဏ္ဍတိ ဉာဏဂတိယာ ဂစ္ဆတီတိပိ ပဏ္ဍိတော. တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာယံ [Pg.59] ဝုတ္တံ ‘‘ပဏ္ဍန္တီတိ ပဏ္ဍိတာ. သန္ဒိဋ္ဌိကသမ္ပရာယိကတ္ထေသု ဉာဏဂတိယာ ဂစ္ဆန္တီတိ အတ္ထော’’တိ. पडि (धातू) गती (जाणे किंवा जाणणे) या अर्थात. पणण्डति. पण्डा, पण्डितो. येथे 'पण्डा' म्हणजे प्रज्ञा (बुद्धी). कारण ती सूक्ष्म अर्थांमध्येही गती करते (प्रवेश करते) आणि दुःखादींच्या पीडादायक स्वरूपाला जाणते, म्हणून तिला 'पण्डा' म्हटले जाते. 'पण्डित' म्हणजे जो या प्रज्ञेच्या साहाय्याने पुढे गेला आहे किंवा प्रवृत्त झाला आहे तो 'पण्डित'. अथवा, ज्याच्यामध्ये प्रज्ञा उत्पन्न झाली आहे तो 'पण्डित'. जो ज्ञानरूपी गतीने जातो तोही 'पण्डित'. म्हणूनच अट्ठकथेत (टीकेत) म्हटले आहे - 'जे गती करतात (जाणतात) ते पण्डित. इहलोकातील आणि परलोकातील अर्थांमध्ये ज्ञानरूपी गतीने जाणारे, असा याचा अर्थ आहे'. ဂဍိ မဒေ. ဂဏ္ဍတိ. गडि (धातू) मद (गर्व किंवा नशा) या अर्थात. गण्डति. ခဍိ မန္ထေ. ခဏ္ဍတိ. ခဏ္ဍိတော, ခဏ္ဍော. खडि (धातू) मंथन (वळणे किंवा तुकडे करणे) या अर्थात. खण्डति. खण्डितो (तुकडे केलेला), खण्डो (तुकडा). လဍိ ဇိဝှာမထနေ. လဏ္ဍတိ. လဏ္ဍော. लडि (धातू) जिभेचे मंथन करणे (जीभ हलवणे किंवा बोलणे) या अर्थात. लण्डति. लण्डो (लेंड/विष्ठा). ဍကာရန္တဓာတုရူပါနိ. डकारान्त धातूंची रूपे. ဍကာရန္တဓာတု डकारान्त धातू. ဝဍ္ဎ ဝဍ္ဎနေ. ဝဍ္ဎတိ. သိရိဝဍ္ဎကော, ဓနဝဍ္ဎကော, ဝဍ္ဎိတော, ဗုဍ္ဎော. ဧတ္ထ စ ဝကာရဿ ဗကာရော, အကာရဿ စုကာရော. वड्ढ (धातू) वाढवणे (वृद्धी करणे) या अर्थात. वड्ढति. सिरिवड्ढको (श्रीवर्धन करणारा), धनवड्ढको (धन वाढवणारा), वड्ढितो (वाढलेला), बुड्ढो (वृद्ध). आणि येथे 'व' काराचा 'ब' कार आणि 'अ' काराचा 'उ' कार होतो. ကဍ္ဎ အာကဍ္ဎနေ. ကဍ္ဎတိ, အာကဍ္ဎတိ, နိကဍ္ဎတိ. အကာမာ ပရိကဍ္ဎန္တိ, ဥလူကညေဝ ဝါယသာ. कड्ढ (धातू) ओढणे (आकर्षण करणे) या अर्थात. कड्ढति, आकड्ढति, निकड्ढति. 'अकामा परिकड्ढन्ति, उलूकञ्ञेव वायसा' (इच्छा नसतानाही ते त्याला ओढतात, जसे कावळे घुबडाला ओढतात). ဣမာနိ ဎကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ही ढकारान्त धातूंची रूपे आहेत. ဏကာရန္တဓာတု णकारान्त धातू. အဏ ရဏ ဝဏ ဘဏ မဏ ကဏ သဒ္ဒေ. အဏတိ. အဏကော ဗြာဟ္မဏော. ရဏတိ. ရဏံ. ဝဏတိ. ဝါဏကော. ဘဏတိ. ဘာဏကော. မဏတိ. မဏိကော. ကဏတိ. ကာဏော. တတ္ထ ဗြာဟ္မဏောတိ ဗြဟ္မံ အဏတီတိ ဗြာဟ္မဏော, မန္တေ သဇ္ဈာယတီတိ အတ္ထော. အက္ခရစိန္တကာ ပန ‘‘ဗြဟ္မုနော အပစ္စံ ဗြာဟ္မဏော’’တိ ဝဒန္တိ. အရိယာ ပန ဗာဟိတပါပတ္တာ ဗြာဟ္မဏောတိ. अण, रण, वण, भण, मण, कण (धातू) शब्द (आवाज करणे) या अर्थात. अणति. अणको, ब्राह्मणो. रणति. रणं. वणति. वाणको. भणति (तो बोलतो). भाणको (पाठक/प्रवचनकार). मणति. मणिको. कणति. काणो (एका डोळ्याने आंधळा). त्यामध्ये 'ब्राह्मण' म्हणजे जो ब्रह्माचे (मंत्रांचे) उच्चारण करतो तो 'ब्राह्मण', म्हणजेच मंत्रांचा स्वाध्याय करतो असा अर्थ आहे. व्याकरणकार (अक्षरचिंतक) मात्र 'ब्रह्मदेवाचे अपत्य म्हणजे ब्राह्मण' असे म्हणतात. परंतु आर्य पापांचा त्याग केल्यामुळे (बाहितपापत्वामुळे) त्याला 'ब्राह्मण' म्हणतात. ဗြာဟ္မဏော [Pg.60] သောတ္တိယော ဝိပ္ပော, ဘောဝါဒီ ဗြဟ္မဗန္ဓု စ; ဗြဟ္မသူနု ဒွိဇော ဗြဟ္မာ, ကမလာသနသူနု စ; ब्राह्मणो, सोत्तियो (श्रोत्रिय), vippo (विप्र), भोवादी, ब्रह्मबन्धु, ब्रह्मसूनु, द्विजो, ब्रह्मा आणि कमलासनसूनु (हे ब्राह्मणाचे समानार्थी शब्द आहेत). ရဏသဒ္ဒေါ ‘‘သရဏာ ဓမ္မာ အရဏာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသု ကိလေသေသု ဝတ္တတိ. ကိလေသာ ဟိ ရဏန္တိ ကန္ဒန္တိ ဧတေဟီတိ ရဏာတိ ဝုစ္စန္တိ. 'रण' हा शब्द 'सरणा धम्मा अरणा धम्मा' इत्यादी वाक्यांमध्ये क्लेशांच्या (विकारांच्या) अर्थात वापरला जातो. कारण क्लेश हे ओरडतात (आक्रोश करतात) किंवा ज्यांच्यामुळे प्राणी आक्रोश करतात, म्हणून त्यांना 'रण' म्हटले जाते. ‘‘ဓနုဂ္ဂဟော အသဒိသော, ရာဇပုတ္တော မဟဗ္ဗလော; သဗ္ဗာမိတ္တေ ရဏံ ကတွာ, သံယမံ အဇ္ဈုပါဂမီ’’တိ 'अतुलनीय धनुर्धारी, महाबली राजकुमार, सर्व शत्रूंशी युद्ध करून (रणं कत्वा) संयमाला प्राप्त झाला' - ဧတ္ထ ယုဒ္ဓေ ဝတ္တတိ. ရဏံ ကတွာတိ ဟိ ယုဒ္ဓံ ကတွာတိ အတ္ထော. ‘‘တိဏဉ္စ ကဋ္ဌဉ္စ ရဏံ ကရောန္တာ, ဓာဝိံသု တေ အဋ္ဌဒိသာ သမန္တတော’’တိ ဧတ္ထ စုဏ္ဏဝိစုဏ္ဏကရဏေ ဝတ္တတိ. ရဏံ ကရောန္တာတိ ဟိ စုဏ္ဏဝိစုဏ္ဏံ ကရောန္တာတိ အတ္ထော. ဧဝံ အတ္ထဝိဝရဏမ္ပိ သဒ္ဒသင်္ခါတမတ္ထံ အန္တောယေဝ ကတွာ အဓိပ္ပာယတ္ထဝသေန ကတံ, န ဓာတုနာနတ္ထဝသေနာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အထ ဝါ ဓာတူနမတ္ထာတိသယယောဂေါပိ ဘဝတိ, တေန ဧဝံ အတ္ထဝိဝရဏံ ကတန္တိပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. येथे हा शब्द युद्धाच्या अर्थात वापरला आहे. 'रणं कत्वा' म्हणजे 'युद्ध करून' असा अर्थ आहे. 'गवत आणि लाकूड यांचे चूर्ण करत (रणं करोन्ता) ते सर्व बाजूंनी आठही दिशांना धावले' या वाक्यात हा शब्द चूर्ण करण्याच्या (तुकडे करण्याच्या) अर्थात वापरला आहे. 'रणं करोन्ता' म्हणजे 'चूर्ण करत' असा अर्थ आहे. अशा प्रकारे, हा अर्थ-स्पष्टीकरण देखील शब्दाच्या मूळ अर्थाला अंतर्भूत ठेवून अभिप्रेत अर्थानुसार केले आहे, केवळ धातूच्या विविध अर्थांमुळे नाही, असे समजले पाहिजे. अथवा, धातूंच्या अर्थांचा अतिशय योग (अतिव्याप्ती) देखील होतो, त्यामुळे असे अर्थ-स्पष्टीकरण केले जाते, असेही समजले पाहिजे. ဘဏ ဘဏနေ. ပရိတ္တံ ဘဏတိ, ဝစနံ ဘဏတိ. ဒီဃဘာဏကော, ပိယဘာဏီ, ဘာဏဝါရော. ဧတ္ထ ဘာဏဝါရောတိ – भण (धातू) भणन (बोलणे किंवा पाठ करणे) या अर्थात. परित्तं भणति (परित्त पाठ करतो), वचनं भणति (वचन बोलतो). दीघभाणको (दीघनिकायचा पाठ करणारा), पियभाणी (प्रिय बोलणारा), भाणवारो (पाठ-विभाग). येथे 'भाणवार' म्हणजे - ‘‘အဋ္ဌက္ခရာ ဧကပဒံ, ဧကာ ဂါထာ စတုပ္ပဒံ; ဂါထာ စေကာမတော ဂန္ထော, ဂန္ထော ဗာတ္တိံသတက္ခရော; 'आठ अक्षरांचे एक पद होते, चार पदांची एक गाथा होते. एक गाथा म्हणजे एक ग्रंथ-एकक मानला जातो, आणि एका ग्रंथात बत्तीस अक्षरे असतात; ဗာတ္တိံသက္ခရဂန္ထာနံ, ပညာသံ ဒွိသတံ ပန; ဘာဏဝါရော မတော ဧကော, သွဋ္ဌက္ခရသဟဿကော’’တိ. बत्तीस अक्षरांच्या अशा अडीचशे (२५०) ग्रंथांचा मिळून एक 'भाणवार' मानला जातो, ज्यामध्ये आठ हजार अक्षरे असतात' - ဧဝံ အဋ္ဌက္ခရသဟဿပရိမာဏော ပါဌော ဝုစ္စတိ. अशा प्रकारे, आठ हजार अक्षरांच्या परिमाणाचा (प्रमाणाचा) जो पाठ असतो, त्याला 'भाणवार' म्हटले जाते. ဩဏံ အပနယနေ. ဩဏတိ. ओण (धातू) दूर करणे (किंवा खाली वाकणे) या अर्थात. ओणति. သောဏ ဝဏ္ဏဂတီသု. သောဏတိ, သောဏော. सोण (धातू) वर्ण (रंग) आणि गती या अर्थात. सोणति. सोणो (तांबडा रंग किंवा कुत्रा). သောဏ [Pg.61] သိလောဏ သံဃာတေ. သောဏတိ. သိလောဏတိ. सोण आणि सिलोण (धातू) संघात (एकत्र करणे) या अर्थात. सोणति. सिलोणति. ဃိဏိ ဃုဏိ ဃဏိ ဂဟဏေ. ဃိဏ္ဏတိ. ဃုဏ္ဏတိ. ဃဏ္ဏတိ. घिणि, घुणि आणि घणि (धातू) ग्रहण (पकडणे किंवा स्वीकारणे) या अर्थात. घिण्णति. घुण्णति. घण्णति. ဃုဏ ဃုဏ္ဏ ဂမနေ. ဃောဏတိ. ဃုဏ္ဏတိ. घुण आणि घुण्ण (धातू) गमन (जाणे) या अर्थात. घोणति. घुण्णति. ပဏ ဗျဝဟာရေ, ထုတိယဉ္စ. ပဏတိ ဝါဏိဇော, ဝေါဟာရံ ကရောတိ ဣစ္စတ္ထော. သဒ္ဓေါ ဗုဒ္ဓံ ပဏတိ, ထောမယတိ ဣစ္စတ္ထော, အာပဏံ, သာပဏော ဂါမော. पण (धातू) व्यवहार (व्यापार) आणि स्तुती या अर्थात. पणति वाणिजो (व्यापारी व्यापार करतो) असा याचा अर्थ आहे. सद्धो बुद्धं पणति (श्रद्धाळू बुद्ध भगवंतांची स्तुती करतो) म्हणजेच गुणगान करतो असा याचा अर्थ आहे. आपणं (बाजार/दुकान), सापणो गामो (दुकान असलेला गाव). ဂဏ ရဏ ဂတိယံ. ဂဏတိ. ရဏတိ. 'गण', 'रण' हे धातू गतीच्या (गमनाच्या) अर्थात. 'गणति', 'रणति'. စဏ သဏ ဒါနေ. စဏတိ. သဏတိ. 'चण', 'सण' हे धातू दानाच्या (देण्याच्या) अर्थात. 'चणति', 'सणति'. ဖဏ ဂတိယံ. ဖဏတိ. ဖဏံ. 'फण' धातू गतीच्या अर्थात. 'फणति'. 'फणं' (फणा). ဝေဏု ဉာဏစိန္တာနိသာမနေသု. ဝေဏတိ. 'वेणु' (किंवा वेण) धातू ज्ञान, विचार आणि अवधानाच्या (ऐकण्याच्या) अर्थात. 'वेणति'. ပီဏ ပီဏနေ. ပီဏနံ ပရိပုဏ္ဏတာ. ပီဏတိ. ပီဏော ဒိဝါ န ဘုဉ္ဇတိ, ပီဏောရက္ခံသဗာဟု. 'पीण' धातू तृप्त करण्याच्या (पुष्ट करण्याच्या) अर्थात. 'पीणन' म्हणजे परिपूर्णता. 'पीणति'. 'पीणो दिवा न भुञ्जति' (पुष्ट मनुष्य दिवसा जेवत नाही), 'पीणोरक्खंसबाहु' (राक्षसासारखे पुष्ट बाहू असलेला). မိဏ ဟိံသာယံ. မိဏတိ. 'मिण' धातू हिंसेच्या अर्थात. 'मिणति'. ဒုဏ ဂတိယဉ္စ. ဟိံသာပေက္ခကော စကာရော. ဒုဏတိ. 'दुण' धातू गतीच्या आणि 'च' कारामुळे हिंसेच्याही अर्थात. 'दुणति'. သဏ အဗျတ္တသဒ္ဒေ. သဏတိ. သဏတေဝ ဗြဟ္မာရညံ. သဏတေဝါတိ နဒတိ ဝိယ. 'सण' धातू अस्पष्ट आवाजाच्या अर्थात. 'सणति'. 'सणतेव ब्रह्मारञ्ञं' (ब्रह्म-अरण्य गुंजत आहे). 'सणतेव' म्हणजे गर्जना करण्यासारखे (नाद करण्यासारखे). တုဏ ကောဋိလ္လေ. တောဏတိ. 'तुण' धातू कुटिलतेच्या (वाकडेपणाच्या) अर्थात. 'तोणति'. ပုဏ နိပုဏေ. ပုဏတိ, နိပုဏတိ. နိပုဏဓမ္မော. ဧတ္ထ စ နိပုဏသဏှသုခုမသဒ္ဒါ ဝေဝစနသဒ္ဒါ ကုသလဆေကဒက္ခသဒ္ဒါ ဝိယာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. 'पुण' धातू निपुणतेच्या (कुशलतेच्या) अर्थात. 'पुणति', 'निपुणति'. 'निपुणधम्मो' (निपुण धम्म). आणि येथे 'निपुण', 'सण्ह' (मृदू) आणि 'सुखुम' (सूक्ष्म) हे शब्द 'कुसल' (कुशल), 'छेक' (चतुर) आणि 'दक्ख' (दक्ष) या शब्दांप्रमाणेच समानार्थी शब्द आहेत असे समजावे. မုဏ ပဋိညာဏေ. မုဏတိ. 'मुण' धातू प्रतिज्ञा किंवा प्रतिज्ञानाच्या (स्वीकृतीच्या) अर्थात. 'मुणति'. ကုဏ သဒ္ဒေါပကရဏေ. ကောဏတိ. 'कुण' धातू आवाजाच्या किंवा नादाच्या साधनांच्या अर्थात. 'कोणति'. စုဏ [Pg.62] ဆေဒနေ. စောဏတိ. 'चुण' धातू छेदनाच्या (कापण्याच्या) अर्थात. 'चोणति'. မဏ စာဂေ. ဝေရံ မဏတီတိ ဝေရမဏိ. 'मण' धातू त्यागाच्या अर्थात. 'वेरं मणतीति वेरमणी' (वैराचा त्याग करणे म्हणजे वेरमणी/विरती होय). ဖုဏ ဝိကိရဏေ ဝိဓုနနေ စ. ဖုဏတိ. အင်္ဂါရကာသုံ အပရေ ဖုဏန္တိ. 'फुण' धातू विखुरण्याच्या (विकिरण) आणि झटकण्याच्या (विधूनन) अर्थात. 'फुणति'. 'अङ्गारकासुं अपरे फुणन्ति' (इतर लोक निखाऱ्यांच्या खड्ड्याला विखुरतात). ဣမာနိ ဏကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ही णकारान्त धातूंची रूपे आहेत. ဣတိ ဘူဝါဒိဂဏေ ဋဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ अशा प्रकारे भूवादी गणातील ट-वर्गीय (ट, ठ, ड, ढ, ण) धातूंची रूपे သမတ္တာနိ. समाप्त झाली. တကာရန္တဓာတု तकारान्त धातू. အထ တဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ ဝုစ္စန္တေ – आता त-वर्गीय (त, थ, द, ध, न) धातूंची रूपे सांगितली जात आहेत - တေ ပါလနေ. ပါလနံ ရက္ခဏံ. တာယတိ. တာဏံ, ဂေါတ္တံ, နက္ခတ္တံ. အဃဿ တာတာ. ကိစ္ဆေနာဓိဂတာ ဘောဂါ, တေ တာတော ဝိဓမိ ဓမံ. တတ္ထ ဂေါတ္တန္တိ ဂံ တာယတီတိ ဂေါတ္တံ. ‘‘ဂေါတမော ကဿပေါ’’တိ ဟိ အာဒိနာ ပဝတ္တမာနံ ဂံ ဝစနံ ဗုဒ္ဓိဉ္စ တာယတိ ဧကံသိကဝိသယတာယ ရက္ခတီတိ ဂေါတ္တံ. ယထာ ဟိ ဗုဒ္ဓိ အာရမ္မဏဘူတေန အတ္ထေန ဝိနာ န ဝတ္တတိ, တထာ အဘိဓာနံ အဘိဓေယျဘူတေန, တသ္မာ သော ဂေါတ္တသင်္ခါတော အတ္ထော တာနိ တာယတိ ရက္ခတီတိ ဝုစ္စတိ. ကော ပန သောတိ? အညကုလပရမ္ပရာသာဓာရဏံ တဿ ကုလဿ အာဒိပုရိသသမ္မုဒိတံ တံကုလပရိယာပန္နသာဓာရဏံ သာမညရူပံ. 'ते' (te) धातु पालनामध्ये (रक्षणात) आहे. पालन म्हणजे रक्षण. 'तायति' (रक्षण करतो). 'ताणं' (शरण/रक्षण), 'गोत्तं' (गोत्र), 'नक्खत्तं' (नक्षत्र). 'अघस्स ताता' (पापापासून रक्षण करणारे). 'किच्छेनाधिगता भोगा, ते तातो विधमि धमं' (कष्टाने प्राप्त केलेले भोग, त्या पित्याने फुंकून नष्ट केले). त्यामध्ये 'गोत्तं' (गोत्र) म्हणजे 'गं' (वाणी/बुद्धी) चे जे रक्षण करते ते 'गोत्र' होय. "गोतमो कस्सपो" इत्यादी रूपाने प्रवृत्त होणारी 'गं' म्हणजे वाणी आणि बुद्धीचे जे एकांतिक विषयभावाने रक्षण करते, ते 'गोत्र' होय. कारण जशी बुद्धी ही आलंबनभूत अर्थाशिवाय प्रवृत्त होत नाही, तसेच अभिधान (नाव) हे अभिधेय (अर्था) शिवाय प्रवृत्त होत नाही, म्हणून तो गोत्रसंज्ञक अर्थ त्यांचे रक्षण करतो असे म्हटले जाते. तो (गोत्र) म्हणजे काय? इतर कुलपरंपरेला साधारण असणारे, त्या कुलाच्या आदिपुरुषापासून उत्पन्न झालेले आणि त्या कुलात समाविष्ट असणारे साधारण सामान्य रूप होय. နက္ခတ္တန္တိ ဝိသမဂတိယာ အဂန္တွာ အတ္တနော ဝီထိယာဝ ဂမနေန နက္ခနံ ဂမနံ တာယတိ ရက္ခတီတိ နက္ခတ္တံ, တံ ပန အဿယုဇာဒိဝသေန သတ္တဝီသတိဝိဓံ ဟောတိ. တထာ ဟိ အဿယုဇော [Pg.63] ဘရဏီ ကတ္တိကာ ရောဟဏီ မိဂသိရော အဒ္ဒါ ပုနဗ္ဗသု ဖုဿော အဿလိသော မာဃော ပုဗ္ဗဖဂ္ဂုဏီ ဥတ္တရဖဂ္ဂုဏီ ဟတ္ထော စိတ္တံ သွာတိ ဝိသာခါ အနုရာဓာ ဇေဋ္ဌာ မူလံ ပုဗ္ဗာသဠှံ ဥတ္တရာသဠှံ သာဝဏံ ဓနသိဋ္ဌာ သတဘိသတ္တံ ပုဗ္ဗဘဒ္ဒပဒံ ဥတ္တရဘဒ္ဒပဒံ ရေဝတီ စာတိ သတ္တဝီသတိ နက္ခတ္တာနိ. တာနိ ပန အတ္တနော ဂမနဋ္ဌာနံ ဤသကမ္ပိ န ဝိဇဟန္တိ ကိဉ္စိ သီဃံ ကိဉ္စိ ဒန္ဓံ, ကဒါစိ သီဃံ, ကဒါစိ ဒန္ဓံ, ဧတ္တော ဣတော စာတိ ဧဝံ ဝိသမဂတိယာ အဂန္တွာ ယန္တစက္ကေ ပဋိပါဋိယာ ယောဇိတာနိ ဝိယ သမပ္ပမာဏဂတိယာ အတ္တနော ဝီထိယာဝ ဂစ္ဆန္တာနိ မဏ္ဍလာကာရေန သိနေရုံ ပရိဝတ္တန္တိ. ဧဝံ ဣမာနိ နက္ခနံ ဂမနံ တာယန္တိ ရက္ခန္တီတိ နက္ခတ္တာနီတိ ဝုစ္စန္တိ. ပေါရာဏာ ပန ခရဓာတုဝသေန ‘‘နက္ခရန္တိ န နဿန္တီတိ နက္ခတ္တာနီ’’တိ အာဝေါစုံ, ‘‘နက္ခတ္တံ ဇောတိ ရိက္ခံ တံ’’ ဣစ္စေတာနိ နက္ခတ္တတာရကာနံ နာမာနိ. ‘‘ဥဠု တာရာ တာရကာ’’တိ ဣမာနိ ပန သဗ္ဗာသမ္ပိ တာရကာနံ သာဓာရဏနာမာနိ. ဩသဓီတိ ပန တာရကာဝိသေသဿ နာမံ. 'नक्खत्तं' (नक्षत्र) म्हणजे विषम गतीने न जाता आपल्याच मार्गाने (वीथीने) जाण्याद्वारे 'नक्खन' (गमन/चालणे) चे जे रक्षण करते ते 'नक्षत्र' होय. ते अश्विनी इत्यादींच्या भेदाने सत्तावीस प्रकारचे असते. जसे की - अस्सयुज (अश्विनी), भरणी, कत्तिका (कृत्तिका), रोहिणी, मिगसिर (मृगशीर्ष), अद्दा (आर्द्रा), पुनब्बसु (पुनर्वसू), फुस्स (पुष्य), अस्सलीस (आश्लेषा), माघ (मघा), पुब्बफग्गुणी (पूर्वाफाल्गुनी), उत्तरफग्गुणी (उत्तराफाल्गुनी), हत्थ (हस्त), चित्त (चित्रा), स्वाती, विशाखा, अनुराधा, जेट्ठा (ज्येष्ठा), मूल (मूळ), पुब्बासळ्ह (पूर्वाषाढा), उत्तरासळ्ह (उत्तराषाढा), सावण (श्रावण), धनिठ्ठा (धनिष्ठा), सतभिसत्त (शतभिषा), पुब्बभद्दपद (पूर्वाभाद्रपदा), उत्तरभद्दपद (उत्तराभाद्रपदा) आणि रेवती - ही सत्तावीस नक्षत्रे आहेत. ती आपल्या गमनाच्या स्थानाला थोडेही सोडत नाहीत; काही जलद, काही मंद, कधी जलद, कधी मंद, इकडून तिकडे अशा विषम गतीने न जाता, यंत्रचक्रात क्रमाने जोडल्याप्रमाणे समान गतीने आपल्याच मार्गाने जात वर्तुळाकारात सुमेरू पर्वताची प्रदक्षिणा करतात. अशा प्रकारे ही 'नक्खन' म्हणजे गमनाचे रक्षण करतात म्हणून त्यांना 'नक्षत्रे' (नक्खत्तानि) असे म्हणतात. प्राचीन आचार्यांनी मात्र 'खर' धातूवरून "नक्खरन्ति न नस्सन्तीति नक्खत्तानि" (जे क्षीण होत नाहीत, नष्ट होत नाहीत ते नक्षत्र) असे म्हटले आहे. "नक्खत्तं, जोति, रिक्खं, तं" ही नक्षत्रांच्या ताऱ्यांची नावे आहेत. "उळु, तारा, तारका" ही सर्वच ताऱ्यांची सामान्य नावे आहेत. 'ओसधी' हे एका विशिष्ट ताऱ्याचे नाव आहे. စိတိ သညာဏေ. သညာဏံ စိဟနံ လက္ခဏကရဏံ. စေတတိ. စိဟနံ ကရောတီတိ အတ္ထော. ဤကာရန္တဝသေန ဝုတ္တတ္တာ အသ္မာ ဓာတုတော သကိ သင်္ကာယန္တိ ဓာတုတော ဝိယ နိဂ္ဂဟီတာဂမော န ဟောတိ. ဧသ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု. 'चिति' (citi) धातु संज्ञान (चिन्ह किंवा लक्षण करणे) या अर्थात आहे. संज्ञान म्हणजे चिन्ह किंवा लक्षण करणे. 'चेतति' (cetati) म्हणजे चिन्ह करतो असा अर्थ आहे. ईकारान्त रूपाने सांगितल्यामुळे या धातूपासून 'सकि' आणि 'सङ्कायति' धातूंप्रमाणे निग्गहीत (अनुस्वार) चा आगम होत नाही. इतरही अशाच ठिकाणी हाच नियम लागू होतो. ပတ ဂတိယံ. ပတတိ. ပပတတိ ပပါတံ, ပပတေယျဟံ. ပါပတ္တံ နိရယံ ဘုသံ. အဟံသဒ္ဒေန ယောဇေတဗ္ဗံ, ပါပတ္တံ ပပတိတောသ္မီတိ အတ္ထော. ပါပတ္ထ နိရယံ ဘုသံ, သောကုမာရောတိ ယောဇေတဗ္ဗံ, ပါပတ္ထ ပပတိတောတိ အတ္ထော. ပရောက္ခာပဒဉှိဧတံ ဒွယံ. ‘‘ပါဝဒံ ပါဝဒါ’’တိအာဒီသု ဝိယ ဥပသဂ္ဂပဒဿ ဒီဃဘာဝေါ, တတော အံသဒ္ဒဿ တ္တံအာဒေသော, အသဒ္ဒဿ စ တ္ထာဒေသော ဘဝတိ. အစိန္တေယျော ဟိ ပါဠိနယော. 'पत' (pata) धातु गती या अर्थात आहे. 'पतति' (पडतो/जातो). 'पपतति' (पडतो), 'पपातं' (कडा/घळ), 'पपतेय्यहं' (मी पडावे). 'पापत्तं nirayaṃ bhusaṃ' (मी अत्यंत तीव्र नरकात पडलो). येथे 'अहं' (मी) शब्दाशी संबंध जोडला पाहिजे, 'पापत्तं' म्हणजे 'मी पडलो आहे' असा अर्थ आहे. 'पापत्थ nirayaṃ bhusaṃ' (तुम्ही अत्यंत तीव्र नरकात पडलात), येथे 'सुकुमार' (सॉकुमारो) शब्दाशी संबंध जोडला पाहिजे, 'पापत्थ' म्हणजे 'तुम्ही पडलात' असा अर्थ आहे. कारण हे दोन्ही परोक्ष (भूतकाळाचे) पद आहेत. "पावदं पावदा" इत्यादींप्रमाणे उपसर्ग पदाचा दीर्घभाव होतो, त्यानंतर 'अं' शब्दाचा 'त्तं' आदेश आणि 'अ' शब्दाचा 'त्थ' आदेश होतो. कारण पाळी भाषेचा नियम अचिंत्य आहे. အတ [Pg.64] သာတစ္စဂမနေ. သာတစ္စဂမနံ နိရန္တရဂမနံ. အတတိ. ယသ္မာ ပန အတဓာတု သာတစ္စဂမနတ္ထဝါစိကာ, တသ္မာ ဘဝါဘဝံ ဓာဝန္တော ဇာတိဇရာဗျာဓိမရဏာဒိဘေဒံ အနေကဝိဟိတံ သံသာရဒုက္ခံ အတတိ သတတံ ဂစ္ဆတိ ပါပုဏာတိ အဓိဂစ္ဆတီတိ အတ္တာတိပိ နိဗ္ဗစနမိစ္ဆိတဗ္ဗံ. အတ္ထန္တရဝသေန ပန ‘‘အာဟိတော အဟံမာနော ဧတ္ထာတိ အတ္တာ, အတ္တဘာဝေါ’’တိ စ ‘‘သုခဒုက္ခံ အဒတိ အနုဘဝတီတိ အတ္တာ’’တိ စ ‘‘အတ္တမနောတိ ပီတိသောမနဿေန ဂဟိတမနော’’တိ စ အတ္ထော ဒဋ္ဌဗ္ဗော, ယတ္ထ ယတ္ထ ယထာ ယထာ အတ္ထော လဗ္ဘတိ, တတ္ထ တတ္ထ တထာ တထာ အတ္ထဿ ဂဟေတဗ္ဗတောတိ. 'अत' (ata) धातु सातत्यपूर्ण गती (निरंतर गमन) या अर्थात आहे. 'अतति' (निरंतर जातो). ज्याअर्थी 'अत' धातु सातत्यपूर्ण गतीच्या अर्थाचा वाचक आहे, त्याअर्थी भव-अभावात (पुनर्जन्मात) धावणारा, जन्म, जरा, व्याधी, मरण इत्यादी भेदांनी युक्त अशा अनेक प्रकारच्या संसारदुःखाला 'अतति' म्हणजे सतत प्राप्त करतो, मिळवतो, म्हणून त्याला 'अत्ता' (आत्मा/स्व) असेही निरुक्तीच्या नियमाने मानले पाहिजे. इतर अर्थांच्या भेदाने मात्र - "ज्यामध्ये अहंभाव (मी-पणा) स्थापित केला जातो तो 'अत्ता' (आत्मा/आत्मभाव)" आणि "जो सुख-दुःखाचा 'अदति' म्हणजे अनुभव घेतो तो 'अत्ता'" आणि "अत्तमनो म्हणजे प्रीती व सोमनस्याने (आनंदाने) युक्त मन असलेला" असा अर्थ समजला पाहिजे. जेथे जेथे जसा जसा अर्थ प्राप्त होतो, तेथे तेथे तसा तसा अर्थ ग्रहण केला पाहिजे. စုတ အာသေစနေ ခရဏေ စ. စောတတိ. 'चुत' (cuta) धातु सिंचन करणे (आसेचन) आणि गळणे (झरणे/क्षरण) या अर्थात आहे. 'चोतति' (cotati - गळतो/सिंचन करतो). အတိ ဗန္ဓနေ. အန္တတိ. အန္တံ. အန္တိယတိဗန္ဓိယတိ အန္တဂုဏေနာတိ အန္တံ. ဣဓ အန္တ သဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ ‘‘အန္တံ အန္တဂုဏံ ဥဒရိယ’’န္တိ ဧတ္ထ ဒွတ္တိံသာကာရန္တောဂဓံ ကုဏပန္တံ အန္တံ နာမ. ‘‘ကာယဗန္ဓနဿ အန္တော ဇီရတိ. ဟရိတန္တံ ဝါ’’တိ ဧတ္ထ အန္တိမမရိယာဒန္တော အန္တော နာမ. ‘‘အန္တမိဒံ ဘိက္ခဝေ ဇီဝိကာန’’န္တိ ဧတ္ထ လာမကန္တော. ‘‘သက္ကာယော ဧကော အန္တော’’တိ ဧတ္ထ ကောဋ္ဌာသန္တော. ‘‘ဧသေဝန္တော ဒုက္ခဿ သပ္ပစ္စယသင်္ခယာ’’တိ ဧတ္ထ ကောဋန္တော. ဣစ္စေဝံ – 'अति' (ati) धातु बांधणे या अर्थात आहे. 'अन्तति' (बांधतो). 'अन्तं' (आतडे/अंत). जे अंतगुणाने (आतड्याच्या वेढ्याने) बांधले जाते ते 'अन्तं' (आतडे) होय. येथे 'अन्त' शब्दाच्या अर्थाचा विस्तार सांगितला जात आहे - "अन्तं अन्तगुणं उदरियं" (आतडे, आतड्याचे वेढे, जठर) यामध्ये बत्तीस प्रकारच्या शरीराच्या अवयवांमध्ये समाविष्ट असलेले कुणप-अन्त (घाणेरडे आतडे) हे 'अन्त' नावाचे आहे. "कायबंधनाचा अन्त (शेवट) जीर्ण होतो. किंवा हिरवा अन्त" येथे अंतिम मर्यादा असलेला 'अन्त' (शेवट) नावाचा आहे. "अन्तमिदं भिक्खवे जीविकानं" (हे भिक्खूंनो, उपजीविकांमध्ये हे निकृष्ट आहे) येथे 'अन्त' म्हणजे लामक (निकृष्ट/कनिष्ठ) अर्थ आहे. "सक्कायो एको अन्तो" (सत्काय हा एक भाग आहे) येथे 'अन्त' म्हणजे कोठ्ठहास (भाग/पक्ष) अर्थ आहे. "एसेवन्तो दुक्खस्स सप्पच्चयसङ्खया" (हाच प्रत्ययांच्या क्षयाने दुःखाचा अंत आहे) येथे 'अन्त' म्हणजे कोटी (शेवटची सीमा/कोटी) अर्थ आहे. अशा प्रकारे - ကုဏပန္တံ [Pg.65] အန္တိမဉ္စ, မရိယာဒေါ စ လာမကံ; ကောဋ္ဌာသော ကောဋိ’မေ အတ္ထော, အန္တသဒ္ဒေန ဘာသိတာ. कुणप-अन्त (घाणेरडे आतडे), अंतिम (शेवट), मर्यादा, लामक (निकृष्ट), कोठ्ठहास (भाग) आणि कोटी (सीमा) - हे अर्थ 'अन्त' शब्दाने सांगितले आहेत. ကိတ နိဝါသေ ရောဂါပနယနေ စ. ကေတတိ. သာကေတံ န ဂရံ, နိကေတော, နိကေတံ ပါဝိသိ. အာမောဒမာနော ဂစ္ဆတိ သန္နိကေတံ. တိကိစ္ဆတိ, စိကိစ္ဆတိ, စိကိစ္ဆာ, စိကိစ္ဆကော. တတ္ထ သာကေတန္တိ သာယံ ဂဟိတဝသနဋ္ဌာနတ္တာ သာကေတံ, ယံသဒ္ဒလောပေါ. 'कित' (kita) धातु निवास करणे आणि रोग दूर करणे (रोगापनयन) या अर्थात आहे. 'केतति' (ketati). 'साकेतं' नगर, 'निकेतो' (निवास), 'निकेतं पाविसि' (घरात प्रवेश केला). 'आमोदमानो गच्छति सन्निकेतं' (आनंदित होऊन घराकडे जातो). 'तिकिच्छति' (उपचार करतो), 'चिकिच्छति' (उपचार करतो), 'चिकिच्छा' (वैद्यकीय उपचार/चिकित्सा), 'चिकिच्छको' (वैद्य/चिकित्सक). त्यामध्ये 'साकेत' म्हणजे संध्याकाळी राहण्याचे स्थान ग्रहण केल्यामुळे 'साकेत' असे म्हटले जाते, येथे 'यं' शब्दाचा लोप झाला आहे. ယတ ပတိယတနေ. ပတိယတနံ ဝါယာမကရဏံ. ယတတိ. ယတိ, ယတဝါ, ပယတနံ, အာယတနံ, လောကာယတံ. ဧတ္ထ အာယတနန္တိ အာယတနတော အာယတနံ, စက္ခုရူပါဒီနိ. ဧတာနိ ဟိ တံဒွါရာရမ္မဏစိတ္တစေတသိကာ ဓမ္မာ သေန သေန အနုဘဝနာဒိကိစ္စေန အာယတန္တိ ဥဋ္ဌဟန္တိ ဃဋန္တိ ဝါယမန္တိ ဧတေသူတိ ‘‘အာယတနာနီ’’တိ ဝုစ္စန္တိ. ဧတ္ထ ပန နီတနုဓာတူနံ ဝသေနပိ အာယတနသဒ္ဒတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော သိယာ, သော ဥတ္တရိ အာဝိဘဝိဿတိ. 'यत' (yata) धातु प्रयत्न करणे (पतियतन) या अर्थात आहे. पतियतन म्हणजे व्यायाम (प्रयत्न) करणे. 'यतति' (प्रयत्न करतो). 'यति' (संयमी/साधू), 'यतवा' (प्रयत्नशील), 'पयतनं' (प्रयत्न), 'आयतनं' (आयतन), 'लोकायतं' (लोकायत). येथे 'आयतन' म्हणजे आयतन (विस्तार/स्थान) पासून आयतन, जसे चक्षु-रूप इत्यादी. कारण हे त्या त्या द्वाराच्या आणि आलंबनाच्या चित्त आणि चैतसिक धर्म आपापल्या अनुभव इत्यादी कार्याने 'आयतन' म्हणजे उत्पन्न होतात, घटतात किंवा प्रयत्न करतात, म्हणून त्यांना 'आयतन' (आयतनानी) असे म्हणतात. येथे 'नी' आणि 'तनु' धातूंच्या आधारे देखील 'आयतन' शब्दाचा अर्थ सांगितला जाऊ शकतो, तो पुढे स्पष्ट होईल. အာယတနသဒ္ဒေါ နိဝါသဋ္ဌာနေ အာကရေ သမောသရဏဋ္ဌာနေ သဉ္ဇာတိဒေသေ ကာရဏေ စ. တထာ ဟိ ‘‘လောကေ ဣဿရာယတနံ ဝါသုဒေဝါယတန’’န္တိအာဒီသု နိဝါသဋ္ဌာနေ အာယတနသဒ္ဒေါ ဝတ္တတိ. ‘‘သုဝဏ္ဏာယတနံ ရဇတာယတန’’န္တိအာဒီသု အာကရေ. သာသနေ ပန ‘‘မနောရမေ အာယတနေ, သေဝန္တိ နံ ဝိဟင်္ဂမာ’’တိအာဒီသု သမောသရဏဋ္ဌာနေ. ‘‘ဒက္ခိဏာပထော ဂုန္နံ အာယတန’’န္တိအာဒီသု သဉ္ဇာတိဒေသေ. ‘‘တတြ တတြေဝ သက္ခိဘဗ္ဗတံ ပါပုဏာတိ သတိ သတိအာယတနေ’’တိအာဒီသု ကာရဏေ ဝတ္တတီတိ [Pg.66] ဝေဒိတဗ္ဗော. သော စ နာနာပဝတ္တိနိမိတ္တဝသေန ဂဟေတဗ္ဗော. 'आयतन' शब्द निवासस्थान, खाण (आकर), समवसरण स्थान (एकत्र येण्याचे स्थान), उत्पत्तीचे स्थान (संजात देश) आणि कारण या अर्थांमध्ये वापरला जातो. जसे की, "लोके इस्सरायतनं वासुदेवायतनं" इत्यादींमध्ये निवासस्थान या अर्थात 'आयतन' शब्द वापरला जातो. "सुवण्णायतनं रजतायतनं" इत्यादींमध्ये खाण (आकर) या अर्थात. बुद्धशासनात मात्र "मनोरमे आयतने, सेवन्ति नं विहङ्गमा" इत्यादींमध्ये समवसरण स्थान (एकत्र येण्याचे स्थान) या अर्थात. "दक्खिणापथो गुन्नं आयतनं" इत्यादींमध्ये उत्पत्तीचे स्थान या अर्थात. "तत्र तत्रेव सक्खिभब्बतं पापुणाति सति सतिआयतने" इत्यादींमध्ये कारण या अर्थात वापरला जातो, असे जाणावे. आणि तो विविध प्रवृत्तीच्या निमित्ताने ग्रहण केला पाहिजे. နိဝါသေ အာကာရေ စေဝ, ဇာတိဒေသေ စ ကာရဏေ; သမောသရဏဋ္ဌာနေ စ, အာယတနရဝေါ ဂတော. निवासस्थान, खाण (आकार), उत्पत्तीचे स्थान (जाती देश), कारण आणि समवसरण स्थान (एकत्र येण्याचे स्थान) या अर्थांमध्ये 'आयतन' हा शब्द प्रसिद्ध आहे. လောကာယတံ နာမ ‘‘သဗ္ဗံ ဥစ္ဆိဋ္ဌံ, သဗ္ဗံ နုစ္ဆိဋ္ဌံ. သေတော ကာကော, ကာဠော ဗကော ဣမိနာ စ ဣမိနာ စ ကာရဏေနာ’’တိ ဧဝမာဒိနိရတ္ထကကာရဏပဋိသံယုတ္တံ တိတ္ထိယသတ္ထံ, ယံ လောကေ ‘‘ဝိတဏ္ဍသတ္ထ’’န္တိ ဝုစ္စတိ, ယဉ္စ သန္ဓာယ ဗောဓိသတ္တော အသမဓုရော ဝိဓုရပဏ္ဍိတော ‘‘န သေဝေ လောကာယတိကံ, နေတံ ပညာယ ဝဍ္ဎန’’န္တိ အာဟ. အာယတိံ ဟိတံ တေန လောကော န ယတတိ န ဤဟတီတိ လောကာယတံ, ကိန္တံ? ဝိတဏ္ဍသတ္ထံ. တဉှိ ဂန္ထံ နိဿာယ သတ္တာ ပုညကြိယာယ စိတ္တမ္ပိ န ဥပ္ပာဒေန္တိ. အညတ္ထာပိ ဟိ ဧဝံ ဝုတ္တံ ‘‘လောကာယတသိပ္ပန္တိ ‘ကာကော သေတော, အဋ္ဌီနံ သေတတ္တာ, ဗလာကာ ရတ္တာ, လောဟိတဿ ရတ္တတ္တာ’တိ ဧဝမာဒိနယပ္ပဝတ္တံ ပရလောကနိဗ္ဗာနာနံ ပဋိသေဓကံ ဝိတဏ္ဍသတ္ထသိပ္ပ’’န္တိ. लोकायत म्हणजे 'सर्व उच्छिष्ट आहे, सर्व अनुच्छिष्ट आहे. कावळा पांढरा आहे, बगळा काळा आहे, या आणि या कारणामुळे' अशा प्रकारच्या निरर्थक कारणांशी संबंधित असलेले तीर्थिक शास्त्र (पाखंडी शास्त्र) होय, ज्याला जगात 'वितंडशास्त्र' म्हटले जाते. आणि ज्याचा संदर्भ घेऊन अद्वितीय अशा विधुरपंडित बोधिसत्त्वांनी म्हटले होते: 'लोकायताचे सेवन करू नये, कारण हे प्रज्ञेची वृद्धी करणारे नाही.' ज्याच्याद्वारे लोक भविष्यातील हितासाठी प्रयत्न करत नाहीत किंवा इच्छा करत नाहीत, ते लोकायत होय. ते काय आहे? वितंडशास्त्र. कारण त्या ग्रंथाचा आश्रय घेऊन प्राणी पुण्यकर्मासाठी चित्तही उत्पन्न करत नाहीत. इतर ठिकाणीही असे म्हटले आहे: 'लोकायताचे शिल्प म्हणजे—कावळा पांढरा असतो कारण हाडे पांढरी असतात, बगळा लाल असतो कारण रक्त लाल असते—अशा प्रकारे चालणारे, परलोक आणि निर्वाणाचा निषेध करणारे वितंडशास्त्र-शिल्प होय.' ယုတ ဇုတ ဘာသနေ. ဘာသနံ ဥဒီရဏံ. ယောတတိ. ဇောတတိ. युत (युत्) आणि जुत (जुत्) हे धातू भाषणाच्या (उच्चारणाच्या) अर्थात आहेत. भाषण म्हणजे उच्चारण. योतति, जोतति. ဇုတဒိတ္တိယံ. ဇောတတိ, ဝိဇ္ဇောတတိ. ဇုတိ, ဇောတိ. ကာရိတေ ‘‘ဇောတေတိ, ဇောတယိတွာန သဒ္ဓမ္မ’’န္တိ ပယောဂါ. ဧတ္ထ စ ဇုတီတိ အာလောကော သိရိ ဝါ. ဇောတီတိ ပတာပေါ. အထ ဝါ ဇောတီတိ စန္ဒာဒီနိ. ဝုတ္တမ္ပိ စေတ သိရိမာဝိမာန ဝတ္ထုအဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဇောတီတိ စန္ဒိမသူရိယနက္ခတ္တတာရကာနံ သာဓာရဏနာမ’’န္တိ. အထ ဝါ ‘‘ဇောတိ ဇောတိပရာယဏော’’တိ ဝစနတော ယော ကောစိ ဇောတတိ ခတ္တိယကုလာဒီသု ဇာတတ္တာ စ ရူပသောဘာယုတ္တတ္တာ စ, သော ‘‘ဇောတီ’’တိ ဝုစ္စတိ. जुत (जुत्) हा दीप्ती (चमकणे) या अर्थात आहे. जोतति (तो चमकतो), विज्जोतति (तो विशेष चमकतो). जुति, जोति (दीप्ती/प्रकाश). प्रयोजक रूपात (कारित) 'जोतेति' (तो प्रकाशित करतो), 'जोतयित्वान सद्धम्मं' (सद्धम्माला प्रकाशित करून) असे प्रयोग आहेत. येथे 'जुति' म्हणजे प्रकाश किंवा शोभा (श्री). 'जोति' म्हणजे प्रताप. किंवा 'जोति' म्हणजे चंद्र इत्यादी. सिरिमाविमानवत्थुच्या अट्ठकथेतही असे म्हटले आहे: 'जोति हे चंद्र, सूर्य, नक्षत्र आणि ताऱ्यांचे साधे (साधारण) नाव आहे.' किंवा 'जोति जोतिपरायणो' (जो प्रकाशाकडून प्रकाशाकडे जाणारा आहे) या वचनावरून, जो कोणी क्षत्रियकुळ इत्यादींमध्ये जन्मल्यामुळे आणि रूपसौंदर्याने युक्त असल्यामुळे चमकतो, त्याला 'जोति' म्हटले जाते. သိတ [Pg.67] ဝဏ္ဏော. သိတဓာတု သေတဝဏ္ဏေ ဝတ္တတိ. ကိဉ္စာပေတ္ထ ဝဏ္ဏသာမညံ ဝုတ္တံ, တထာပိ ဣဓ နီလပီတာဒီသု သေတဝဏ္ဏောယေဝ ဂဟေတဗ္ဗော ပယောဂဒဿနဝသေန. သေတတိ. သေတံ ဝတ္ထံ. ဝါစ္စလိင်္ဂတ္တာ ပန သေတသဒ္ဒေါ တိလိင်္ဂေါ ဂဟေတဗ္ဗော. सित म्हणजे वर्ण (रंग). सित धातू श्वेत (पांढऱ्या) वर्णाच्या अर्थात वापरला जातो. जरी येथे सामान्य वर्णाचा उल्लेख केला असला, तरी प्रयोगाच्या दर्शनानुसार येथे निळ्या, पिवळ्या इत्यादींऐवजी केवळ श्वेत (पांढरा) वर्णच ग्रहण केला पाहिजे. सेतति (तो पांढरा होतो). सेतं वत्थं (पांढरे वस्त्र). विशेष्यलिंगी (वाच्यलिंगी) असल्यामुळे 'सेत' हा शब्द तिन्ही लिंगांत ग्रहण करावा. သေတံ သိတံ သုစိ သုက္ကံ, ပဏ္ဍရံ ဓဝလမ္ပိ စ; အကဏှံ ဂေါရမောဒါတံ, သေတနာမာနိ ဟောန္တိ ဟိ. सेतं, सितं, सुचि, सुक्कं, पंडरं, धवलं, अकण्हं, गोरं आणि ओदातं—ही सर्व पांढऱ्या रंगाची (श्वेत रंगाची) नावे आहेत. ဝတု ဝတ္တနေ. ဝတ္တတိ, ပဝတ္တတိ, သံဝတ္တတိ, အနုဝတ္တတိ, ပရိဝတ္တတိ. ပဝတ္တံ. वतु (वत्) हा धातू वर्तनाच्या (अस्तित्वात असणे/फिरणे) अर्थात आहे. वत्तति (तो वर्ततो/चालतो), पवत्तति (तो प्रवृत्त होतो), संवत्तति (तो संवर्तित होतो), अनुवत्तति (तो अनुवर्तन करतो), परिवत्तति (तो परिवर्तन करतो). पवत्तं (प्रवृत्त/प्रवृत्ती). ကိလောတ အဒ္ဒဘာဝေ. အဒ္ဒဘာဝေါ တိန္တဘာဝေါ. ကိလောတတိ, ပကိလောတတိ, တေမေတီတိ အတ္ထော. ကာရိတေ ပကိလောတေတိ, ပကိလောတယတိ. ဥဏှောဒကသ္မိံ ပကိလောတယိတွာ, တေမေတွာတိ အတ္ထော. किलोत (किलोत्) हा धातू आर्द्रभावाच्या (ओले होण्याच्या) अर्थात आहे. आर्द्रभाव म्हणजे ओले असणे. किलोतति, पकिलोतति—याचा अर्थ 'तो ओला करतो/भिजवतो' असा आहे. प्रयोजक रूपात 'पकिलोतेति', 'पकिलोतयति' असे होते. 'उण्होदकस्मिं पकिलोतयित्वा' म्हणजे गरम पाण्यात भिजवून (ओले करून) असा अर्थ आहे. ဝတ ယာစနေ. ဝတတိ. वत (वत्) हा धातू याचना करण्याच्या (मागण्याच्या) अर्थात आहे. वतति (तो याचना करतो). ကိတ ဉာဏေ. ကေတတိ. ကေတနံ, ကေတကော, သင်္ကေတော. कित (कित्) हा धातू ज्ञानाच्या अर्थात आहे. केतति (तो जाणतो). केतनं (ध्वज/घर), केतको (केतकी), संकेतो (संकेत). ကတိ သုတ္တဇနနေ. သုတ္တံ ကန္တတိ. कति (कत्) हा धातू सूत तयार करण्याच्या (कातण्याच्या) अर्थात आहे. सुत्तं कन्तति (तो सूत काततो). ကတိ ဆေဒနေ. မံသံ ကန္တတိ, ဝိကန္တတိ, အယောကန္တော. သလ္လကန္တော မဟာဝီရော. မာ နော အဇ္ဇ ဝိကန္တိံသု, ရညော သူဒါ မဟာနသေ. कति (कत्) हा धातू छेदनाच्या (कापण्याच्या) अर्थात आहे. मंसं कन्तति (तो मांस कापतो), विकन्तति (तो विशेष कापतो), अयोकन्तो (लोहचुंबक/लोखंड कापणारा). सल्लकन्तो महावीरो (शल्यचिकित्सक महावीर). 'मा नो अज्ज विकन्तिंसु, रञ्ञो सूदा महानसे' (राजाच्या स्वयंपाकघरातील आचाऱ्यांनी आज आम्हास कापू नये). စတီ ဟိံသာဂန္ဓေသု. ဤကာရန္တတ္တာ ဣမသ္မာ နိဂ္ဂဟီတာဂမော န ဟောတိ. စတတိ. चती (चत्) हा धातू हिंसा आणि गंध (वास घेणे/सूचकता) या अर्थांत आहे. ई-कारान्त असल्यामुळे या धातूमध्ये निग्गहीत (अनुस्वार) आगम होत नाही. चतति (तो हिंसा करतो/वास घेतो). တကာရန္တဓာတုရူပါနိ. त-कारान्त धातूंची रूपे. ထကာရန္တဓာတု थ-कारान्त धातू. ထာ [Pg.68] ဂတိနိဝတ္တိယံ. ထာတိ. အဝတ္ထာ, ဝဝတ္ထာနံ, ဝဝတ္ထိတံ, ဝနထော. ‘‘ဆေတွာ ဝနံ ဝနထဉ္စာ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ မဟန္တာ ရုက္ခာ ဝနံ နာမ, ခုဒ္ဒကာ ပန တသ္မိံ ဝနေ ဌိတတ္တာ ဝနထော နာမ ဝုစ္စန္တိ. था (ठा) हा धातू गतीच्या निवृत्तीच्या (थांबण्याच्या) अर्थात आहे. ठाति (तो थांबतो). अवस्था, ववत्थानं (व्यवस्थापन/निश्चय), ववत्थितं (व्यवस्थित/निश्चित), वनथो (जंगल/तृष्णा). 'छेत्वा वनं वनथञ्च' (वन आणि वनथ कापून) येथे मोठे वृक्ष म्हणजे 'वन' होय, आणि त्या वनात असलेले लहान वृक्ष (किंवा झुडपे) 'वनथ' म्हटले जातात. ထု ထုတိယံ. ထဝတိ, အဘိတ္ထဝတိ. ထဝနာ, အဘိတ္ထဝနာ, ထုတိ, အဘိတ္ထုတိ. थु (थु) हा धातू स्तुतीच्या अर्थात आहे. thवति (तो स्तुती करतो), अभित्थवति (तो पूर्णपणे स्तुती करतो). थवना (स्तुती), अभित्थवना (विशेष स्तुती), थुति (स्तुती), अभित्थुति (विशेष स्तुती). ယဒိ ဟိ ရူပိနီ သိယာ, ပညာ မေ ဝသုမတီ န သမေယျ; အနောမဒဿိဿ ဘဂဝတော, ဖလမေတံ ဉာဏထဝနာယ. जर माझी प्रज्ञा रूपवान (मूर्तिमंत) असती, तर ही पृथ्वी देखील तिच्या समान होऊ शकली नसती; हे अनोमदस्सी भगवंतांच्या ज्ञान-स्तुतीचे फळ आहे. တေဟိ ထုတိပ္ပသတ္ထော သော, ယေနိဒံ ထဝိတံ ဉာဏံ, ဗုဒ္ဓသေဋ္ဌော စ ထောမိတော. တတြ ထဝနာတိ ပသံသနာ. ပသံသာယ ဟိ အနေကာနိ နာမာနိ. त्यांच्याद्वारे तो स्तुतीने प्रशंसित आहे, ज्याने हे ज्ञान स्तुत केले आहे आणि बुद्धश्रेष्ठांची प्रशंसा केली आहे. तेथे 'थवना' म्हणजे प्रशंसा होय. कारण प्रशंसेची अनेक नावे आहेत. ထဝနာ စ ပသံသာ စ, သိလာဃာ ဝဏ္ဏနာ ထုတိ; ပနုတိ ထောမနာ ဝဏ္ဏော, ကတ္ထနာ ဂုဏကိတ္တနံ; थवना, पसंसा (प्रशंसा), सिलाघा, वण्णना, थुति, पनुति, थोमना, वण्णो, कत्थना आणि गुणकित्तनं (ही प्रशंसेची नावे आहेत). ထေ သဒ္ဒသံဃာတေသု. ထီယတိ, ပတိတ္ထီယတိ. ထီ. အတြိမာ ပါဠိယော – အဘိသဇ္ဇတိ ကုပ္ပတိ ဗျာပဇ္ဇတိ ပတိတ္ထီယတိ, ကောပဉ္စ ဒေါသဉ္စ အပ္ပစ္စယဉ္စ ပါတုကရောတိ. ထိယော နံ ပရိဘာသိံသူတိ. တတြ ‘‘ထီယတိ ပတိတ္ထီယတီ’’တိမာနိ ဧကာရဿီယာဒေသဝသေန သမ္ဘူတာနိ. ထီယတိ သံဃာတံ ဂစ္ဆတိ ဂဗ္ဘော ဧတိဿာတိ ထီ. အာစရိယာ ပန ဣတ္ထီသဒ္ဒဿေဝ ဧဝံ နိဗ္ဗစနံ ဝဒန္တိ, န ထီသဒ္ဒဿ. थे (थे) हा धातू शब्द आणि संघात (एकत्र येणे) या अर्थांत आहे. थीयति (तो एकत्र येतो/स्तब्ध होतो), पतिट्ठीयति (तो प्रति-स्तब्ध होतो). थी. येथे या पाळी (वचने) आहेत—'अभिसज्जति कुप्पति ब्यापज्जति पतिट्ठीयति, कोपञ्च दोसञ्च अप्पच्चयञ्च पातुकरोति' (तो आसक्त होतो, क्रुद्ध होतो, बिघडतो, स्तब्ध होतो, आणि राग, द्वेष व असंतोष प्रकट करतो). 'थियो नं परिभासिंसु' (स्त्रियांनी त्याची निर्भत्सना केली). तेथे 'थीयति पतिट्ठीयति' ही रूपे 'ए' काराच्या जागी 'ई' आदेश झाल्यामुळे निर्माण झाली आहेत. 'थीयति संघातं गच्छति गब्भो एतिस्साति थी' (जिच्यामध्ये गर्भ एकत्र येतो किंवा स्थिर होतो, ती 'थी' होय). परंतु आचार्य 'इत्थी' शब्दाचीच अशी व्युत्पत्ती सांगतात, 'थी' शब्दाची नाही. ဂဗ္ဘော ထီယတိ ဧတိဿာ, ဣတိ ထီ ဣတိ နော ရုစိ; ဂဗ္ဘော ထီယတိ ဧတိဿာ, ဣတိ ဣတ္ထီတိ အာစရိယာ. 'जिच्यामध्ये गर्भ स्थिर होतो (एकत्र येतो) ती थी' हे आम्हाला मान्य नाही; 'जिच्यामध्ये गर्भ स्थिर होतो ती इत्थी' असे आचार्य म्हणतात. တေသံ သုဒုက္ကရောဝါဒေ, ‘‘ဣတ္ထီ’’တိ ပဒသမ္ဘဝေါ; အယံ ဝိနိစ္ဆယော ပတ္တော, နိစ္ဆယံ ဘော သုဏာထ မေ. त्यांच्या अत्यंत कठीण उपदेशात 'इत्थी' या पदाची उत्पत्ती कशी झाली, याविषयीचा हा निर्णय प्राप्त झाला आहे. हे महाशयांनो, माझा हा निश्चय ऐका. ထီသဒ္ဒေန [Pg.69] သမာနတ္ထော, ဣတ္ထီသဒ္ဒေါ ယတော တတော; ထီသဒ္ဒေ လဗ္ဘမာနတ္ထံ, ဣတ္ထီသဒ္ဒမှိ ရောပိယ. ज्या अर्थी 'इत्थी' शब्द 'थी' शब्दाशी समान अर्थाचा आहे, त्या अर्थी 'थी' शब्दात मिळणारा अर्थ 'इत्थी' शब्दात आरोपित करून— အပ္ပာနံ ဗဟုတာ ဉာယေ, ဂဟိတေ သတိ ယုဇ္ဇတိ; တထာ ဟိ ‘‘ဒွေ ဒုဝေ, တဏှာ, တသိဏာ’’တိ နိဒဿနံ. अल्पाचे बहुत्वात परिवर्तन होण्याच्या नियमाने ग्रहण केले असता ते योग्य ठरते; जसे की 'द्वे' चे 'दुवे' आणि 'तण्हा' चे 'तसिणा' हे उदाहरण आहे. အထ ဝါ ပန ‘‘ဣတ္ထီ’’တိ-ဣဒံ ဝဏ္ဏာဂမာဒိတော; နိရုတ္တိလက္ခဏေနာပိ, သိဇ္ဈတီတိ ပကာသယေ. किंवा 'इत्थी' हा शब्द वर्णागम (अक्षराचा आगम) इत्यादींद्वारे निरुक्त-लक्षणाने देखील सिद्ध होतो, असे स्पष्ट करावे. ဣစ္ဆတီတိ နရေ ဣတ္ထီ, ဣစ္ဆာပေတီတိ ဝါ ပန; ဣဒံ နိဗ္ဗစနဉ္စာပိ ဉေယျံ နိဗ္ဗစနတ္ထိနာ. जी पुरुषांची इच्छा करते ती 'इत्थी', किंवा जी पुरुषांना इच्छा करायला लावते ती 'इत्थी'; व्युत्पत्तीची इच्छा करणाऱ्याने हे देखील निर्वचन जाणावे. အတြိမာနိ ဣတ္ထီနမဘိဓာနာနိ – येथे स्त्रियांची ही नावे (समानार्थी शब्द) आहेत— ဣတ္ထီ ထီ ဝနိတာ နာရီ, အဗလာ ဘီရု သုန္ဒရီ; ကန္တာ သီမနိနီ မာတု-ဂါမော ပိယာ စ ကာမိနီ. इत्थी, थी, वनिता, नारी, अबला, भीरु, सुन्दरी, कन्ता, सीमनिनी, मातुगामो, पिया आणि कामिनी (ही स्त्रियांची नावे आहेत). ရမဏီ ပမဒါ ဒယိတာ, လလနာ မဟိလာ’င်္ဂနာ; တာသံယေဝ စ နာမာနိ, အဝတ္ထာတော ဣမာနိပိ. रमणी, प्रमदा, दयिता, ललना, महिला आणि अंगना; ही सर्व तिचीच नावे आहेत, आणि ही देखील तिच्या अवस्थेनुसार (वयानुसार) होतात. ဂေါရီ စ ဒါရိကာ ကညာ, ကုမာရီ စ ကုမာရိကာ; ယုဝတီ တရုဏီ မာဏ-ဝိကာ ထေရီ မဟလ္လိကာ. गोरी, दारिका, कञ्ञा, कुमारी, कुमारिका, युवती, तरुणी, माणविका, थेरी आणि महल्लिका. တထာ ဟိ အဋ္ဌဝဿိကာ ဂေါရီတိပိ ဒါရိကာတိပိ ဝုစ္စတိ. ဒသဝဿိကာ ကညာတိ ဝုစ္စတိ. အနိဗ္ဗိဒ္ဓါ ဝါ ယောဗ္ဗနိတ္ထီ ကညာတိ ဝုစ္စတိ. ဒွါဒသဝဿိကာ ကုမာရီတိပိ ဝုစ္စတိ ကုမာရိကာတိပိ. အထော ဇရံ အပ္ပတ္တာ ယုဝတီတိပိ တရုဏီတိပိ မာဏဝိကာတိပိ ဝုစ္စတိ. ဇရံ ပတ္တာ ပန ထေရီတိပိ မဟလ္လိကာတိပိ ဝုစ္စတိ. ပုရိသေသုပိ အယံ နယော ယထာရဟံ ဝေဒိတဗ္ဗော. तसेच, आठ वर्षांच्या मुलीला ‘गोरी’ किंवा ‘दारिका’ असे म्हटले जाते. दहा वर्षांच्या मुलीला ‘कञ्ञा’ म्हटले जाते. किंवा जिचे कान टोचलेले नाहीत अशा तरुण स्त्रीला ‘कञ्ञा’ म्हटले जाते. बारा वर्षांच्या मुलीला ‘कुमारी’ किंवा ‘कुमारिका’ असे म्हटले जाते. तसेच, वृद्धत्वाप्रत न पोहोचलेल्या स्त्रीला ‘युवती’, ‘तरुणी’ किंवा ‘माणविका’ म्हटले जाते. वृद्धत्वाला पोहोचलेल्या स्त्रीला ‘थेरी’ किंवा ‘महल्लिका’ म्हटले जाते. पुरुषांच्या बाबतीतही हाच नियम योग्यतेनुसार समजून घ्यावा. ကိဉ္စာပေတ္ထ ဧဝံ နိယမော ဝုတ္တော, တထာပိ ကတ္ထစိ အနိယမဝသေနပိ ဝေါဟာရော ပဝတ္တတိ. တထာ ဟိ ‘‘ရာဇာ ကုမာရမာဒါယ, ရာဇပုတ္တီ စ ဒါရိက’’န္တိ စ ‘‘အစ္ဆာ ကဏှာဇိနံ ကည’’န္တိ စ ဣမာသံ ဒွိန္နံ ပါဠီနံ ဝသေန ယာ ဣတ္ထီ ဒါရိကာသဒ္ဒေန ဝတ္တဗ္ဗာ, သာ ကညာသဒ္ဒေနပိ ဝတ္တဗ္ဗာ ဇာတာ. ယာပိ [Pg.70] စ ကညာသဒ္ဒေန ဝတ္တဗ္ဗာ, သာပိ ဒါရိကာသဒ္ဒေန ဝတ္တဗ္ဗာ ဇာတာ. တထာ ‘‘ရာဇာ ကုမာရမာဒါယ, ရာဇပုတ္တီ စ ဒါရိက’’န္တိ စ ‘‘ကုမာရိယေ ဥပသေနိယေ, နိစ္စံ နိဂဠမဏ္ဍိတေ’’တိ စ ဣမာသံ ပန ပါဠီနံ ဝသေန ယာ ဣတ္ထီ ဒါရိကာသဒေန ဝတ္တဗ္ဗာ, သာ ကုမာရိကာသဒ္ဒေနပိ ဝတ္တဗ္ဗာ ဇာတာ. ယာ စ ပန ကုမာရီသဒ္ဒေန ဝတ္တဗ္ဗာ, သာပိ ဒါရိကာသဒ္ဒေန ဝတ္တဗ္ဗာ ဇာတာ. အပိစေတ္ထ ‘‘ရာဇကညာ ရုစာ နာမာ’’တိ စ ‘‘တတော မဒ္ဒိမ္ပိ နှာပေသုံ, သိဝိကညာ သမာဂတာ’’တိ စ ဣမာသံ ဒွိန္နံ ပါဠီနံ ဒဿနတော ယာ အနိဗ္ဗိဒ္ဓါ ဝါ ဟောတု နိဗ္ဗိဒ္ဓါ ဝါ, ယာဝ ဇရံ န ပါပုဏာတိ, တာဝ သာ ကညာယေဝ နာမာတိပိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. जरी येथे असा नियम सांगितला असला, तरी काही ठिकाणी अनियंत्रितपणे व्यवहार चालतो. जसे की, ‘राजा कुमारमादाय, राजपुत्ती च दारिकं’ आणि ‘अच्छा कण्हाजिनं कञ्ञं’ या दोन पाळी वचनांच्या आधारे, ज्या स्त्रीला ‘दारिका’ या शब्दाने संबोधले पाहिजे, तिला ‘कञ्ञा’ या शब्दानेही संबोधले गेले आहे. आणि जिला ‘कञ्ञा’ या शब्दाने संबोधले पाहिजे, तिला ‘दारिका’ या शब्दानेही संबोधले गेले आहे. तसेच, ‘राजा कुमारमादाय, राजपुत्ती च दारिकं’ आणि ‘कुमारीये उपसेनीये, निच्चं निगळमण्डिते’ या पाळी वचनांच्या आधारे, ज्या स्त्रीला ‘दारिका’ या शब्दाने संबोधले पाहिजे, तिला ‘कुमारिका’ या शब्दानेही संबोधले गेले आहे. आणि जिला ‘कुमारी’ या शब्दाने संबोधले पाहिजे, तिला ‘दारिका’ या शब्दानेही संबोधले गेले आहे. शिवाय, ‘राजकञ्ञा रुचा नामा’ आणि ‘ततो मद्दिम्पि न्हापेसुं, सिविकञ्ञा समागता’ या दोन पाळी वचनांच्या दर्शनावरून, ती कान टोचलेली असो वा नसो, जोपर्यंत ती वृद्धत्वाला पोहोचत नाही, तोपर्यंत तिला ‘कञ्ञा’ असेच म्हटले जाते, हे समजून घ्यावे. ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ – ယံ တုမှေဟိ ‘‘အဋ္ဌဝဿိကာ ဂေါရီတိပိ ဒါရိကာတိပိ ဝုစ္စတီ’’တိ ဝုတ္တံ, ဧတသ္မိံ ပန ဝစနေ ‘‘ယဒါဟံ ဒါရကော ဟောမိ, ဇာတိယာ အဋ္ဌဝဿိကော’’တိ ဝစနတော အဋ္ဌဝဿော ဒါရကော ဟောတု, ‘‘တတ္ထဒ္ဒသကုမာရံ သော, ရမမာနံ သကေ ပုရေ’’တိ ပါဠိယံ ပန ပုတ္တဒါရေဟိ သံဝဒ္ဓေါ ဝေဿန္တရမဟာရာဇာ ကထံ ‘‘ကုမာရော’’တိ ဝတ္တုံ ယုဇ္ဇိဿတိ ဒွါဒသဝဿာတိက္ကန္တတ္တာ? ယုဇ္ဇတေဝ ဘဂဝတော ဣစ္ဆာဝသေန. ဘဂဝါ ဟိ ဓမ္မိဿရတ္တာ ဝေါဟာရကုသလတာယ စ ယံ ယံ ဝေနေယျဇနာနုရူပံ ဒေသနံ ဒေသေတုံ ဣစ္ဆတိ, တံ တံ ဒေသေတိ ဧဝ, တသ္မာ ဘဂဝတာ တဿ မာတာပိတူနံ အတ္ထိတံ သန္ဓာယ ကုမာရပရိဟာရေန ဝဒ္ဓိတတ္တဉ္စ ဧဝံ ဒေသနာ ကတာ. တထာ ဟိ အာယသ္မာ ကုမာရကဿပေါ ကုမာရပရိဟာရေန ဝဒ္ဓိတတ္တာ မဟလ္လကောပိ သမာနော ကုမာရကဿပေါတွေဝ ဝေါဟရိယတိ. ‘‘န ဝါယံ ကုမာရကော မတ္တမညာသီ’’တိ ဧတ္ထ ပန သိရသ္မိံ ပလိတေသု ဇာတေသုပိ အာယသ္မန္တံ အာနန္ဒံ အာယသ္မာ မဟာကဿပေါ တသ္မိံ ထေရေ အဓိမတ္တဝိဿာသော [Pg.71] ဟုတွာ ကောမာရဝါဒေန ဩဝဒန္တော ကုမာရကောတိ အဝေါစာတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. ဥဒါနဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘သတ္တာ ဇာတဒိဝသတော ပဋ္ဌာယ ယာဝ ပဉ္စဒသဝဿံ, တာဝ ကုမာရကာ, ဗာလာတိ စ ဝုစ္စန္တိ, တတော ပရံ ဝီသတိဝဿာနိ ယုဝါနော’’တိ ဝုတ္တံ. येथे काही जण म्हणू शकतील – तुम्ही जे म्हटले की ‘आठ वर्षांच्या मुलीला गोरी किंवा दारिका म्हटले जाते’, या विधानानुसार ‘जेव्हा मी जन्माने आठ वर्षांचा बालक (दारक) होतो’ या वचनावरून आठ वर्षांचा मुलगा ‘दारक’ असो; परंतु ‘तेथे त्याने आपल्या नगरात क्रीडा करणाऱ्या कुमाराला पाहिले’ या पाळी वचनात, मुले आणि पत्नीसह वाढलेल्या वेस्सन्तर महाराजांना, बारा वर्षांचे वय ओलांडले असल्यामुळे ‘कुमार’ म्हणणे कसे योग्य ठरेल? भगवंतांच्या इच्छेनुसार ते योग्यच ठरते. कारण भगवान हे धम्माचे स्वामी आणि व्यवहारकुशल असल्यामुळे, विनेय (उपदेश देण्यास योग्य) जनांच्या अनुरूप जो जो उपदेश देण्याची इच्छा करतात, तो तो उपदेश देतातच. म्हणूनच भगवंतांनी त्यांच्या मातापित्यांचे अस्तित्व आणि कुमाराप्रमाणे त्यांचे संगोपन झाले असल्याचा विचार करून असा उपदेश केला आहे. तसेच, आयुष्यमान कुमारकस्सप हे वृद्ध झाले असतानाही, कुमाराप्रमाणे संगोपन झाल्यामुळे त्यांना ‘कुमारकस्सप’ असेच म्हटले जात असे. ‘हा कुमार मर्यादा जाणत नाही’ या वाक्यात, डोक्यावर पांढरे केस आले असतानाही, आयुष्यमान महाकस्सप यांनी त्या थेरांवर (आयुष्यमान आनंदांवर) अत्यंत विश्वास असल्यामुळे, त्यांना तरुण समजून उपदेश करताना ‘कुमारक’ असे म्हटले, असे समजून घ्यावे. उदान-अट्ठकथेत मात्र असे म्हटले आहे की – ‘प्राणी जन्माच्या दिवसापासून पंधरा वर्षांपर्यंत कुमार आणि बाल म्हटले जातात, त्यानंतर वीस वर्षांपर्यंत ते तरुण (युवान) म्हटले जातात.’ မန္ထ မတ္ထ ဝိလောဠနေ. မန္ထတိ. မန္ထဉ္စ မဓုပိဏ္ဍိကဉ္စ အာဒါယ. အဘိမတ္ထတိ ဒုမ္မေဓံ ဝဇိရံဝမှမယံ မဏိံ. သိနေရုံ မတ္ထံ ကတွာ. ‘मन्थ्’ आणि ‘मत्थ्’ धातू ढवळणे (विलोडन) या अर्थात आहेत. ‘मन्थति’ (तो ढवळतो/मंथन करतो). ‘मंथ (मंथन केलेले अन्न) आणि मधुपिंड घेऊन’ (मन्थञ्च मधुपिण्डिकञ्च आदाय). ‘वज्र मूर्खाचा नाश करते, जसे पाषाणमय मणीचा’ (अभिमन्थति दुम्मेधं वजिरं व अम्ममयं मणिं). ‘सिनेरूला (मेरू पर्वताला) रवी (मंथनदंड) करून’ (सिनेरुं मत्थं कत्वा). ကုထိ ပုထိ လုထိ ဟိံသာသံကိလေသေသု. ကုန္ထတိ. ကုန္ထော, ကုန္ထကိပိလ္လိကံ. ဒိသွာန ပတိတံ သာမံ, ပုတ္တကံ ပံသုကုန္ထိတံ. ပုန္ထတိ. လုန္ထတိ. ‘कुथ्’, ‘पुथ्’ आणि ‘लुथ्’ हे धातू हिंसा आणि संक्लेश (मलीन होणे किंवा सडणे) या अर्थात आहेत. ‘कुन्थति’. ‘कुन्थो’ (लहान कीटक), ‘कुन्थकिपिल्लिकं’ (मुंग्या आणि लहान कीटक). ‘धूळ आणि कीटकांनी माखलेल्या, खाली पडलेल्या प्रिय पुत्र सामा याला पाहून’ (दिस्वाना पतितं सामं, पुत्तकं पंसुकुन्थितं). ‘पुन्थति’. ‘लुन्थति’. နာထ ယာစနောပတာပိဿရိယာသီသာသု. နာထဓာတု ယာစနေ ဥပတာပေ ဣဿရိယေ အာသီသနေ စာတိ စတူသွတ္ထေသု ဝတ္တတိ. တေနာဟု ပေါရာဏာ ‘‘နာထတီတိ နာထော, ဝေနေယျာနံ ဟိတသုခံ အာသီသတိ ပတ္ထေတိ, ပရသန္တာနဂတံ ဝါ ကိလေသဗျသနံ ဥပတာပေတိ, ‘‘သာဓု ဘိက္ခဝေ ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခေယျာ’တိအာဒိနာ တံ တံ ဟိတပဋိပတ္တိံ ယာစတီတိ အတ္ထော, ပရမေန စိတ္တိဿရိယေန သမန္နာဂတော သဗ္ဗသတ္တေ ဝါ ဂုဏေဟိ ဤသတိ အဘိဘဝတီတိ ပရမိဿရော ဘဂဝါ ‘နာထော’တိ ဝုစ္စတီတိ နာထတီတိ နာထော’’တိ. သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ပန တေသု စတူသု အတ္ထေသု နာထ နာဓ ဣတိ ဓာတုဒွယံ ပဌန္တိ. အတ္တနောဘာသတ္တာ ပန တဿ ‘‘နာထတေ နာဓတေ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ‘नाथ्’ धातू याचना (मागणे), उपताप (ताप देणे/नष्ट करणे), ऐश्वर्य (प्रभुत्व) आणि आशिष (इच्छा करणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ‘नाथ्’ धातू याचना, उपताप, ऐश्वर्य आणि आशिष या चार अर्थांमध्ये वर्ततो. म्हणूनच प्राचीन आचार्य म्हणतात – ‘जो इच्छा करतो तो नाथ (नाथतीति नाथो), म्हणजेच तो विनेय (उपदेश देण्यास योग्य) लोकांच्या हित आणि सुखाची इच्छा करतो, प्रार्थना करतो; किंवा इतरांच्या संतानातील (चित्तप्रवाहातील) क्लेशरूपी संकटांना नष्ट करतो (ताप देतो); किंवा “भिक्खूंनो, भिक्खूने वेळोवेळी स्वतःच्या आत्मसंपत्तीचे सिंहावलोकन करावे” इत्यादी उपदेशांद्वारे त्या त्या हितकारक आचरणाची याचना करतो; किंवा परम चित्त-ऐश्वर्याने संपन्न असल्यामुळे सर्व प्राण्यांवर किंवा आपल्या गुणांनी शासन करतो (अभिभूत करतो), म्हणून परमेश्वर (परम ऐश्वर्यवान) भगवान यांना “नाथ” म्हटले जाते, अशा प्रकारे जो याचना करतो/इच्छा करतो/शासन करतो तो नाथ होय.’ व्याकरणकार मात्र या चार अर्थांमध्ये ‘नाथ’ आणि ‘नाध’ असे दोन धातू वाचतात. आत्मनेपद असल्यामुळे त्याची ‘नाथते’ आणि ‘नाधते’ अशी रूपे होतात. ဧတ္ထ သိယာ ‘‘ယဒိ ယာစနတ္ထေန နာထတီတိ နာထော, ဧဝံ သန္တေ ယော ကောစိ ယာစကော ဒလိဒ္ဒေါ, သော ဧဝ နာထော [Pg.72] သိယာ. ယော ပန အယာစကော သမိဒ္ဓေါ, သော န နာထတိ န ယာစတီတိ အနာထော သိယာ’’တိ? န, နာထသဒ္ဒေါ ဟိ ယာစနတ္ထာဒီသု ပဝတ္တမာနော လောကသင်္ကေတဝသေန ဥတ္တမပုရိသေသု နိရူဠှော, ဘဂဝါ စ ဥတ္တမေသု သာတိသယံ ဥတ္တမော, တေန တံ တံ ဟိတပဋိပတ္တိံ ယာစတီတိ နာထသဒ္ဒဿတ္ထော ဝုတ္တော. အနာထသဒ္ဒေါ ပန ဣတ္တရဇနေသု နိရူဠှော, သော စ ခေါ ‘‘န နာထောတိ အနာထော. နတ္ထိ နာထော ဧတဿာတိ ဝါ အနာထော’’တိ ဒဗ္ဗပဋိသေဓဝသေန, န ပန ‘‘န နာထတိ န ယာစတီတိ အနာထော’’တိ ဓာတုအတ္ထပဋိသေဓဝသေန. ယော ဟိ အညဿ သရဏံ ဂတိ ပတိဋ္ဌာ ဟောတိ, သော နာထော, ယော စ အညဿ သရဏံ ဂတိ ပတိဋ္ဌာ န ဟောတိ, နာပိ အတ္တနော အညော သရဏံ ဂတိ ပတိဋ္ဌာ ဟောတိ, သော အနာထောတိ ဝုစ္စတိ သင်္ကေတဝသေန. တထာ ဟိ ‘‘သင်္ကေတဝစနံ သစ္စံ, လောကသမ္မုတိကာရဏ’’န္တိ ဝုတ္တံ. ဣမဿ ပနတ္ထဿ အာဝိဘာဝတ္ထံ ဣမသ္မိံ ဌာနေ ‘‘လောကနာထော တုဝံ ဧကော, သရဏံ သဗ္ဗပါဏိန’’န္တိ စ ‘‘အနာထာနံ ဘဝံ နာထော’’တိ စ – येथे अशी शंका येऊ शकते – ‘जर याचना करण्याच्या अर्थाने जो याचना करतो तो नाथ असेल, तर मग कोणताही गरीब याचक (भिकारी) हाच नाथ ठरेल. आणि जो याचना न करणारा समृद्ध व्यक्ती आहे, तो याचना करत नाही म्हणून अनाथ ठरेल काय?’ असे नाही, कारण ‘नाथ’ हा शब्द याचना इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जात असला, तरी लोकसंकेतानुसार (रूढीनुसार) तो उत्तम पुरुषांसाठीच रूढ झाला आहे; आणि भगवान हे उत्तमांमध्येही सर्वश्रेष्ठ उत्तम आहेत, म्हणून त्या त्या हितकारक आचरणाची याचना करतात या अर्थाने ‘नाथ’ शब्दाचा अर्थ सांगितला आहे. ‘अनाथ’ हा शब्द मात्र सामान्य लोकांमध्ये रूढ आहे, आणि तो ‘जो नाथ (रक्षक) नाही तो अनाथ’ किंवा ‘ज्याला कोणी नाथ (रक्षक) नाही तो अनाथ’ अशा द्रव्य-प्रतिषेधाच्या (वस्तूच्या अभावाच्या) अर्थाने रूढ आहे; ‘जो याचना करत नाही तो अनाथ’ अशा धातूच्या अर्थाच्या प्रतिषेधाने नाही. कारण जो दुसऱ्याचा आश्रय, गती आणि प्रतिष्ठा (आधार) असतो, तो ‘नाथ’ होय; आणि जो दुसऱ्याचा आश्रय, गती आणि प्रतिष्ठा नसतो, तसेच ज्याला स्वतःसाठी दुसरा कोणी आश्रय, गती आणि प्रतिष्ठा नसतो, त्याला संकेतानुसार ‘अनाथ’ म्हटले जाते. म्हणूनच म्हटले आहे – ‘संकेतवचन हे सत्य आहे, जे लोकसंमतीचे कारण आहे.’ हाच अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी या ठिकाणी ‘तुम्ही एकटेच लोकनाथ आहात, सर्व प्राण्यांचे शरण आहात’ आणि ‘अनाथांचे आपण नाथ आहात’ आणि – ‘‘ဧဝါဟံ စိန္တယိတွာန, နေကကောဋိသတံ ဓနံ; နာထာနာထာနံ ဒတွာန, ဟိမဝန္တမုပါဂမိ’’န္တိ စ ‘असा विचार करून, मी शेकडो कोटींचे धन सनाथ आणि अनाथांना देऊन हिमालयात निघून गेलो’ – असे म्हटले आहे. ပါဠိယော နိဒဿနာနိ ဘဝန္တိ. ယသ္မာ ပန သာသနေ စ လောကေ စ ယာစကော ‘‘နာထော’’တိ န ဝုစ္စတိ, အယာစကော စ ‘‘အနာထော’’တိ. လောကဿ ပန သရဏံ ‘‘နာထော’’တိ ဝုစ္စတိ. ယဿ သရဏံ န ဝိဇ္ဇတိ, သော ‘‘အနာထော’’တိ ဝုစ္စတိ, တထာ သမိဒ္ဓေါ ‘‘နာထော’’တိ ဝုစ္စတိ, အသမိဒ္ဓေါ ‘‘အနာထော’’တိ. တသ္မာ ပညဝတာ သဗ္ဗေသု ဌာနေသု ဓာတုအတ္ထမတ္တေန လောကသမညံ အနတိဓာဝိတွာ ယထာနုရူပံ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အယဉ္စ နီတိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. पाळी (मूळ पाळीचे संदर्भ) ही उदाहरणे आहेत. कारण शासनात (बुद्धशासनात) आणि लोकात याचक (मागणी करणारा) याला "नाथ" म्हटले जात नाही, आणि अयाचक (न मागणारा) याला "अनाथ" म्हटले जात नाही. परंतु जगाचा जो आश्रय (शरण) आहे, त्याला "नाथ" म्हटले जाते. ज्याला आश्रय नाही, त्याला "अनाथ" म्हटले जाते. तसेच समृद्ध व्यक्तीला "नाथ" म्हटले जाते आणि असमृद्ध (गरीब) व्यक्तीला "अनाथ" म्हटले जाते. म्हणून प्रज्ञावंताने सर्व ठिकाणी केवळ धातूच्या अर्थावरच न राहता, लोकव्यवहाराचे उल्लंघन न करता योग्य अर्थ ग्रहण केला पाहिजे. आणि हा नियम चांगल्या प्रकारे मनात ठेवला पाहिजे. ဝိထု [Pg.73] ယာစနေ. ဝေထတိ. 'विथु' (vithu) हा धातू याचना करणे (मागणे) या अर्थात आहे. 'वेथति' (vethati - तो याचना करतो) असे रूप बनते. သထ သေဌိလ္လေ. သထတိ. သထလော ဟိ ပရိဗ္ဗာဇော, ဘိယျော အာကိရတေ ရဇံ. သိဌိလောတိပိ ပါဠိ ဒိဿတိ. တဒါ ဌိကာရော မုဒ္ဓဇော ဂဟေတဗ္ဗော. 'सथ' (satha) हा धातू शिथिलतेच्या (सैलपणाच्या) अर्थात आहे. 'सथति' (sathati - तो शिथिल होतो) असे रूप बनते. "सथलो हि परिब्बाजो, भिय्यो आकिरते रजं" (शिथिल झालेला परिव्राजक अधिक प्रमाणात धूळ/मळ अंगावर ओढून घेतो). पाळीमध्ये 'सिथिलो' (siṭhilo) असाही पाठ आढळतो. तेव्हा 'ठ' हा मूर्धन्य वर्ण ग्रहण करावा. ကထိ ကောဋိလ္လေ. ကန္ထတိ. 'कथि' (kathi) हा धातू कुटिलतेच्या (वाकडेपणाच्या) अर्थात आहे. 'कन्थति' (kanthati) असे रूप बनते. ကတ္ထ သိလာဃာယံ. ကတ္ထတိ, ဝိကတ္ထတိ. ကတ္ထနာ, ဝိကတ္ထနာ. တတ္ထ ကတ္ထတီတိ ပသံသတိ. ဝိကတ္ထတီတိ ဝိရူပံ ကတ္ထတိ အဘူတဝတ္ထုဒီပနတော. ဧတ္ထ စ ‘‘ဗဟုမ္ပိ သော ဝိကတ္ထေယျ, အညံ ဇနပဒံ ဂတော’’တိ စ ‘‘ဣဓေကစ္စော ကတ္ထီ ဟောတိ ဝိကတ္ထီ, သော ကတ္ထတိ ‘အဟမသ္မိ သီလသမ္ပန္နောတိ ဝါ ဝတ္တသမ္ပန္နောတိ ဝါ ဝိကတ္ထတီ’တိ’’ စ အာဒယော ပယောဂါ. 'कत्थ' (kattha) हा धातू प्रशंसा करण्याच्या अर्थात आहे. 'कत्थति' (katthati), 'विकत्थति' (vikatthati) अशी रूपे बनतात. 'कत्थना' (katthanā), 'विकत्थना' (vikatthanā) हे नाम बनते. तेथे 'कत्थति' म्हणजे प्रशंसा करतो. 'विकत्थति' म्हणजे असत्य गोष्टींचे प्रदर्शन करून विकृतपणे स्वतःची स्तुती करतो. आणि येथे "बहुम्पि सो विकत्थेय्य, अञ्ञं जनपदं गतो" (दुसऱ्या देशात गेल्यावर तो खूप बढाया मारू शकतो) आणि "इधेकच्चो कत्थी होति विकत्थी, सो कत्थति 'अहमस्मि सीलसम्पन्नोति वा वत्तसम्पन्नोति वा विकत्थती'ति" (येथे कोणी बढाया मारणारा, स्वतःची स्तुती करणारा असतो, तो बढाया मारतो की 'मी शीलसंपन्न आहे किंवा व्रतसंपन्न आहे' अशी स्वतःची स्तुती करतो) इत्यादी प्रयोग आहेत. ဗျထ ဒုက္ခဘယစလနေသု. ဗျထတိ. ဘန္တာ ဗျထိတမာနသာ. တတော ကုမာရာဗျထိတာ, သုတွာ လုဒ္ဒဿ ဘာသိတံ. ဣတ္ထေတံ ဒွယံ စလဉ္စေဝ ဗျထဉ္စ. 'ब्यथ' (byatha) हा धातू दुःख, भय आणि कंप पावणे (चालणे/थरथरणे) या अर्थांत आहे. 'ब्यथति' (byathati) असे रूप बनते. "भन्ता ब्यथितमानसा" (भ्रमित आणि व्यथित मनाचे). "ततो कुमाराब्यथिता, सुत्वा लुद्दस्स भासितं" (त्यानंतर व्याधाचे बोलणे ऐकून ते राजकुमार व्यथित झाले नाहीत). येथे हे दोन्ही म्हणजे 'चल' (कंप पावणे) आणि 'व्यथा' (दुःख) दर्शवितात. သုထ ကုထ ကထ ဟိံသာယံ. သောထတိ. ကောထတိ. ကထတိ. 'सुथ' (sutha), 'कुथ' (kutha) आणि 'कथ' (katha) हे धातू हिंसेच्या अर्थात आहेत. 'सोथति' (sothati), 'कोथति' (kothati), 'कथति' (kathati) अशी रूपे बनतात. ပထ ဂတိယံ. ပထတိ. ပထော. ပထောတိ မဂ္ဂေါ. သော ဒုဝိဓော မဟာဇနေန ပဒသာ ပဋိပဇ္ဇိတဗ္ဗော ပကတိမဂ္ဂေါ စ ပဏ္ဍိတေဟိနိဗ္ဗာနတ္ထိကေဟိ ပဋိပဇ္ဇိတဗ္ဗော ပဋိပဒါသင်္ခါတော အရိယမဂ္ဂေါ စာတိ. တတ္ထ ပကတိမဂ္ဂေါ ဥပ္ပန္နကိစ္စာကိစ္စေဟိ ဇနေဟိ ပထိယတိ ဂစ္ဆိယတီတိ ပထော, ပဋိပဒါ ပန အမတမဟာပုရံ ဂန္တုကာမေဟိ ကုလပုတ္တေဟိ သဒ္ဓါပါထေယျံ ဂဟေတွာ ပထိယတိ ပဋိပဇ္ဇိယတီတိ ပထော. အထ ဝါ ပါထေတိ ကာရကံ ပုဂ္ဂလံ ဂမေတိ နိဗ္ဗာနံ သမ္ပာပေတီတိ ဝါ ပထော[Pg.74], ပဋိပဒါယေဝ. မဂ္ဂါဘိဓာနံ စုရာဒိဂဏေ မဂ္ဂဓာတုကထနဋ္ဌာနေ ကထေဿာမ. 'पथ' (patha) हा धातू गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात आहे. 'पथति' (pathati) असे रूप बनते. 'पथो' (patho) म्हणजे मार्ग. तो दोन प्रकारचा आहे - सामान्य लोकांनी पायी चालण्याचा 'प्राकृत मार्ग' (साधा रस्ता) आणि निर्वाणाची इच्छा करणाऱ्या पंडितांनी आचरावयाचा प्रतिपदेच्या स्वरूपातील 'आर्यमार्ग'. तेथे प्राकृत मार्ग म्हणजे विविध कामांसाठी लोकांद्वारे चालला जातो (पथियति) म्हणून तो 'पथ' होय. तर प्रतिपदा म्हणजे अमृतमय महापुरात (निर्वाणनगरात) जाण्याची इच्छा असणाऱ्या कुलपुत्रांनी श्रद्धारूपी पाथेय (शिदोरी) घेऊन ज्याचे आचरण केले जाते (पथियति), म्हणून तो 'पथ' होय. अथवा जो साधक पुद्गलाला निर्वाणाप्रत पोहोचवतो तो 'पथ' म्हणजेच प्रतिपदा होय. 'मार्ग' या शब्दाचे स्पष्टीकरण चुरादिगणात 'मग्ग' धातूच्या विवेचनाच्या वेळी करू. ကထ နိပ္ပာကေ. ကထတိ. 'कथ' (katha) हा धातू शिजवणे किंवा पिकवणे (निप्पाक) या अर्थात आहे. 'कथति' (kathati) असे रूप बनते. မထ ဝိလောထနေ. မထတိ. 'मथ' (matha) हा धातू घुसळणे किंवा विलोडन करणे या अर्थात आहे. 'मथति' (mathati) असे रूप बनते. ပေါထ ပရိယာယနဘာဝေ. ပေါထတိ. ပေါထကော. ပေါထေတီတိ အယံ စုရာဒိဂဏေပိ ဝတ္တတိ. တေန ‘‘သမန္တာ အနုပရိယေယျုံ, နိပ္ပောထေန္တာ စတုဒ္ဒိသာ’’တိ ပယောဂေါ ဒိဿတိ. 'पोथ' (potha) हा धातू आलटून-पालटून मारणे किंवा प्रहार करणे या अर्थात आहे. 'पोथति' (pothati) असे रूप बनते. 'पोथको' (pothako) हे नाम बनते. 'पोथेति' (potheti) हा धातू चुरादिगणातही चालतो. त्यामुळे "समन्ता अनुपरियेय्युं, निप्पोथेन्ता चतुद्दिसा" (चारही बाजूंनी वेढून, चारी दिशांना प्रहार करत) असा प्रयोग आढळतो. ဂေါတ္ထ ဝံသေ. ဂေါတ္ထတိ. ဂေါတ္ထုလော, ဂေါတ္ထု. 'गोत्थ' (gottha) हा धातू वंशाच्या अर्थात आहे. 'गोत्थति' (gotthati) असे रूप बनते. 'गोत्थुलो' (gotthulo), 'गोत्थु' (gotthu) ही नामे बनतात. ပုထု ဝိတ္ထာရေ. ပေါထတိ. ပုထဝီ. 'पुथु' (puthu) हा धातू विस्ताराच्या अर्थात आहे. 'पोथति' (pothati) असे रूप बनते. 'पुथवी' (puthavī - पृथ्वी) हे नाम बनते. ထကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'थ' कारान्त धातूंची रूपे समाप्त झाली. ဒကာရန္တဓာတု 'द' कारान्त धातू. ဒါ ဒါနေ. အာပုဗ္ဗော ဂဟဏေ. သဒ္ဓေါ ဒါနံ ဒဒါတိ ဒေတိ, သီလံ အာဒဒါတိ အာဒေတိ. ဣမာနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ တဒ္ဒီပကတ္တာ. သဒ္ဓေါ အဿဒ္ဓံ ဒါနံ ဒါပေတိ, သီလံ အာဒပေတိ, သမာဒပေတိ. ယေ ဓမ္မမေဝါဒပယန္တိ သန္တော. ဣမာနိ ကာရိတပဒါနိ ဟေတုကတ္တုပဒါနီတိ စ ဝုစ္စန္တိ တဒ္ဒီပကတ္တာ. သဒ္ဓေန ဒါနံ ဒီယတိ, သီလံ အာဒီယတိ, သမာဒီယတိ, ဣမာနိ ကမ္မပဒါနိ တဒ္ဒီပကတ္တာ. အယဉ္စ ဒါ ဒါနေတိ ဓာတု သာသနာနုရူပသုတိဝသေန ဒိဝါဒိဂဏံ ပတွာ သုပနကြိယံ ဝဒန္တော ‘‘ဒါယတိ နိဒ္ဒါယတိ နိဒ္ဒါ’’တိ သနာမပဒါနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ ဇနယတိ. ဒါနမဝခဏ္ဍနဉ္စ ဝဒန္တော ‘‘ဒိယတိ ဒါနံ ဒါတ္တ’’န္တိ သနာမပဒါနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ ဇနယတိ. သုဒ္ဓိံဝဒန္တော ‘‘ဒါယတိ ဝေဒါယတိ ဝေါဒါန’’န္တိ သနာမပဒါနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ ဇနယတိ, ဣမသ္မိံ ပန ဘူဝါဒိဂဏေ ဒါနံ ဝဒန္တော အာပုဗ္ဗဝသေန ဂဟဏဉ္စ [Pg.75] ဝဒန္တော ‘‘ဒဒါတိ ဒေတိ အာဒဒါတိ အာဒေတိ ဒါနံ အာဒါန’’န္တိ သနာမပဒါနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ ဇနယတိ. တထာ ကုစ္ဆိတဂမနံ ဝဒန္တော ‘‘ဒါတိ သုဒ္ဒါတိ သုဒ္ဒေါ သုဒ္ဒီ’’တိ သနာမပဒါနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ ဇနယတီတိ အယံ ဝိသေသော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ယထာ စေတ္ထ, ဧဝမညတြာပိ ယထာသမ္ဘဝံ ဝိသေသော ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗော နယညူဟိ. 'दा' (dā) हा धातू दान देण्याच्या अर्थात आहे. 'आ' उपसर्ग लागल्यास तो ग्रहण करण्याच्या अर्थात होतो. जसे - "सद्धो दानं ददाति देति" (श्रद्धावान मनुष्य दान देतो), "सीलं आददाति आदेति" (शील ग्रहण करतो). हे त्याचे दर्शक असल्यामुळे ही शुद्ध कर्तृपदे आहेत. "सद्धो अस्सद्धं दानं दापेति, सीलं आदापेति, समादापेति" (श्रद्धावान मनुष्य अश्रद्धावानाला दान देववतो, शील ग्रहण करावयास लावतो, समादृत करावयास लावतो). "ये धम्ममेवादापयन्ति सन्तो" (जे संत धर्माचेच ग्रहण करावयास लावतात). हे त्याचे दर्शक असल्यामुळे यांना कारितपदे किंवा हेतुकर्तृपदे असे म्हटले जाते. "सद्धेन दानं दीयति, सीलं आदीयति, समादीयति" (श्रद्धावानाद्वारे दान दिले जाते, शील ग्रहण केले जाते, समादृत केले जाते), हे त्याचे दर्शक असल्यामुळे ही कर्मपदे आहेत. आणि हा 'दा' (दान देणे) धातू शासनाच्या (बुद्धवचनाच्या) सूत्रांच्या अनुषंगाने दिवादिगणात जाऊन झोपण्याची क्रिया दर्शवताना "दायति, niद्दायति, निद्दा" (तो झोपतो, निद्रा घेतो, निद्रा) अशी नामांसह शुद्ध कर्तृपदे निर्माण करतो. दान आणि खंडन (तुकडे करणे) दर्शवताना "दियति, दानं, दात्तं" अशी नामांसह शुद्ध कर्तृपदे निर्माण करतो. शुद्धी दर्शवताना "दायति, वेदायति, वोदानं" (तो शुद्ध करतो, शुद्ध होतो, शुद्धी) अशी नामांसह शुद्ध कर्तृपदे निर्माण करतो. परंतु या भ्वादिगणात दान दर्शवताना आणि 'आ' उपसर्गाच्या योगाने ग्रहण करणे दर्शवताना "ददाति, देति, आददाति, आदेति, दानं, आदानं" अशी नामांसह शुद्ध कर्तृपदे निर्माण करतो. तसेच कुत्सित गमन दर्शवताना "दाति, सुद्दाति, सुद्दो, सुद्दी" अशी नामांसह शुद्ध कर्तृपदे निर्माण करतो, हा विशेष जाणावा. ज्याप्रमाणे येथे हा विशेष आहे, त्याचप्रमाणे इतर ठिकाणीही नियम जाणणाऱ्यांनी शक्यतेनुसार विशेष तपासून पाहावा. ဣဒါနိဿ နာမပဒါနိ တုမန္တာဒီနိ ဗြူမ. ‘‘ဒါနံ, ဒေယျံ, ဒါတဗ္ဗံ, ဗြဟ္မဒေယျံ, ဒိန္နံ, ဒါယကော, ဒါယိကာ, ဒက္ခိဏာ’’ ဣစ္စာဒီနိ, ‘‘ဒါတုံ, ပဒါတုံ, ဒါတဝေ, ပဒါတဝေ, ဒတွာ, ဒတွာန, ဒဒါတုန, ဒဒိတွာ, ဒဒိတွာန, ဒဒိယ, ဒဇ္ဇာ, ဒဒိယာန, အာဒါတုံ, အာဒါယ, အာဒိယ’’ ဣစ္စာဒီနိ စ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. आता आपण याचे 'तुमुन्' प्रत्ययान्त इत्यादी नामपदे सांगू. "दानं, देय्यं, दातब्बं, ब्रह्मदेय्यं, दिन्नं, दायको, दायिका, दक्खिणा" इत्यादी नामे, आणि "दातुं, पदातुं, दातवे, पदातवे, दत्वा, दत्वान, ददातुन, ददित्वा, ददित्वान, ददिय, दज्जा, ददियान, आदातुं, आदाय, आदिय" इत्यादी कृदन्त रूपे जोडावीत. တတ္ထ ဒါနန္တိ ဒါတဗ္ဗံ, ဒဒန္တိ ဧတေနာတိ အတ္ထေ န ဒေယျဓမ္မော ဒါနစေတနာ စ ဝုစ္စတိ. ကသ္မာ ပန တတ္ထ ဒိန္နသဒ္ဒေါယေဝ ကထိယတိ, န ဒတ္တသဒ္ဒေါတိ? အကထနေ ကာရဏမတ္ထိ. ‘‘ဒါနံ ဒိန္န’’န္တိအာဒီသု ဟိ ဒိန္နသဒ္ဒဋ္ဌာနေ ဒတ္တသဒ္ဒေါ န ဒိဿတိ, တသ္မာ န ကထိယတိ. तेथे 'दान' म्हणजे जे दिले पाहिजे ते, किंवा 'ज्याद्वारे देतात' या अर्थाने देयधर्म (दानाच्या वस्तू) आणि दानचेतना यांना 'दान' म्हटले जाते. परंतु तेथे केवळ 'दिन्न' (दिलेले) हाच शब्द का सांगितला जातो, 'दत्त' हा शब्द का नाही? न सांगण्यामागे कारण आहे. कारण "दानं दिन्नं" (दान दिले) इत्यादींमध्ये 'दिन्न' शब्दाच्या जागी 'दत्त' शब्द आढळत नाही, म्हणून तो सांगितला जात नाही. ဂုဏဘူတော ဒတ္တသဒ္ဒေါ, န ဒိဋ္ဌော ဇိနဘာသိတေ; ‘‘မနသာ ဒါနံ မယာ ဒိန္နံ’’, ဣတိ ဒိန္နပဒံ ဝိယ. जिनांच्या (बुद्धांच्या) वचनात 'दत्त' हा शब्द स्वतंत्र विशेषण (गुणभूत) म्हणून आढळत नाही; जसे "मनसा दानं मया दिन्नं" (मी मनाने दान दिले) या वाक्यात 'दिन्न' हे पद आढळते, तसे 'दत्त' पद आढळत नाही. ‘‘ဒေဝဒတ္တော ယညဒတ္တော, ဒတ္တော’’ ဣတိ စ အာဒိကော; ပဏ္ဏတ္တိဝစနေ ဒိဋ္ဌော, သမာသဗျာသတော ပန. "देवदत्त, यज्ञदत्त, दत्त" इत्यादी शब्द केवळ संज्ञेच्या (नावाच्या) रूपात (पण्णत्तिवचन) आढळतात, जे समास किंवा विग्रहाच्या स्वरूपात असतात. တသ္မာ ‘‘ဒေဝဒတ္တော’’တိအာဒီသု ‘‘ဒေဝေန ဒိန္နော’’တိ သမာသံ ကတွာ ပဏ္ဏတ္တိဝစနတ္တာ ဒိန္နသဒ္ဒဿ ဒတ္တာဒေသော ကာတဗ္ဗော သာသနာနုရူပေန. ဥပရိ ဟိ ‘‘ဒိန္နဿ ဒတ္တော ကွစိ ပဏ္ဏတ္တိယ’’န္တိ လက္ခဏံ ပဿိဿထ. အယမေဝ ဟိ သာသနေ နီတိ အဝိလင်္ဃနီယာ. ဣဒံ ပနေတ္ထ ဝဝတ္ထာနံ – म्हणून "देवदत्त" इत्यादी शब्दांमध्ये "देवेन दिन्नो" (देवाकडून दिले गेलेले) असा समास करून, संज्ञावाचक शब्द असल्यामुळे शासनाच्या (बुद्धवचनाच्या) नियमांनुसार 'दिन्न' शब्दाच्या जागी 'दत्त' असा आदेश करावा. कारण पुढे आपण "दिन्नस्स दत्तो क्वचि पण्णत्तियं" (संज्ञेमध्ये काही ठिकाणी 'दिन्न' च्या जागी 'दत्त' होतो) हा नियम पाहाल. शासनात हाच नियम अनुल्लंघनीय आहे. याविषयीची व्यवस्था खालीलप्रमाणे आहे - သက္ကဋေ ဒတ္တသဒ္ဒေါဝ, ဒိန္နသဒ္ဒေါ န ဒိဿတိ; ဗျာသမှိ ဒိန္နသဒ္ဒေါဝ, ဒတ္တသဒ္ဒေါ န ပါဠိယံ. संस्कृतमध्ये केवळ 'दत्त' हाच शब्द आढळतो, 'दिन्न' शब्द आढळत नाही; तर पाळीमध्ये विग्रहाच्या वेळी केवळ 'दिन्न' हाच शब्द आढळतो, 'दत्त' शब्द आढळत नाही. ‘‘မနသာ [Pg.76] ဒါနံ မယာ ဒိန္နံ, ဒါနံ ဒိန္နော’’တိအာဒိသု; ‘‘ဓမ္မဒိန္နာ မဟာမာယာ’’, ဣစ္စာဒီသု စ ပါဠိသု. "मनसा दानं मया दिन्नं, दानं दिन्नो" इत्यादी वाक्यांमध्ये आणि "धम्मदिन्ना, महामाया" इत्यादी पाळी वचनांमध्ये ('दिन्न' शब्दच आढळतो). ဣတိ ဗျာသသမာသာနံ, ဝသာ ဒွေဓာ ပဝတ္တတိ; ဒိန္နသဒ္ဒေါတိ ဒီပေယျ, န သော သက္ကဋဘာသိတေ. अशा प्रकारे विग्रह आणि समास यांच्या प्रभावाने 'दिन्न' हा शब्द दोन प्रकारे प्रवृत्त होतो, हे स्पष्ट करावे; परंतु संस्कृत भाषेत तो (दिन्न शब्द) आढळत नाही. ဂုဏဘူတော ဒတ္တသဒ္ဒေါ, အသမာသမှိ ကေဝလော; န ဒိဿတိ မုနိမတေ, ဒိန္နသဒ္ဒေါဝ ကေဝလော. मुनींच्या (बुद्धांच्या) मतात (वचनात) समासरहित असलेला केवळ स्वतंत्र 'दत्त' हा शब्द विशेषण म्हणून आढळत नाही, तर केवळ 'दिन्न' हाच शब्द आढळतो. တေနေဝ ဒိန္နသဒ္ဒဿ, ဒတ္တာဒေသော ကတော မယာ; ‘‘ဒတ္တံ သိရပ္ပဒါန’’န္တိ, ကဝယော ပန အဗြဝုံ. त्यामुळेच मी 'दिन्न' शब्दाच्या जागी 'दत्त' असा आदेश केला आहे; परंतु कवींनी "दत्तं सिरप्पदानं" (मस्तक दान दिले) असे म्हटले आहे. ဧဒိသော ပါဠိယံ နတ္ထိ, နယော တသ္မာ န သော ဝရော; ‘‘ဒတ္တော’’တိ ဘူရိဒတ္တဿ, သညာ ပဏ္ဏတ္တိယံ ဂတာ. असा प्रयोग पाळीमध्ये आढळत नाही, म्हणून तो नियम श्रेष्ठ नाही; 'दत्त' हा शब्द 'भूरिदत्त' या नावाच्या संज्ञेमध्ये (पण्णत्ति) रूढ झाला आहे. ‘‘ဗြဟ္မဒတ္တော ဗုဒ္ဓဒတ္တော, ဒတ္တော’’ ဣတိ ဟိ သာသနေ; ပဏ္ဏတ္တိယံ ဒတ္တသဒ္ဒေါ, အသမာသသမာသိကော. शासनात (बुद्धशासनात) 'ब्रह्मदत्त', 'बुद्धदत्त' आणि 'दत्त' असे प्रयोग आढळतात. प्रज्ञप्तीमध्ये (संज्ञेमध्ये) 'दत्त' हा शब्द असमस्त (समास नसलेला) आणि समस्त (समास असलेला) अशा दोन्ही प्रकारे वापरला जातो. ‘‘ပရဒတ္တဘောဇန’’န္တိ, ဧဝမာဒီသု ပါဠိသု; သမာသေ ဂုဏဘူတောယံ, ဒတ္တသဒ္ဒေါ ပတိဋ္ဌိတော. तसेच, 'परदत्तभोजन' (दुसऱ्याने दिलेले भोजन) इत्यादी पाळी वचनांमध्ये, समासामध्ये हा 'दत्त' शब्द गौण (विशेषण) म्हणून प्रस्थापित झाला आहे. ‘‘မနသာ ဒါနံ မယာ ဒိန္နံ, ဒါနံ ဒိန္နော’’တိအာဒိသု; ဂုဏဘူတော ဒိန္နသဒ္ဒေါ, အသမာသမှိ ဒိဿတိ. 'मनसा दानं मया दिन्नं' (माझ्याद्वारे मनाने दान दिले गेले), 'दानं दिन्नो' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'दिन्न' हा शब्द असमस्त (समास नसलेल्या) रूपात गौण (विशेषण) म्हणून दिसून येतो. ‘‘ဒိန္နာဒါယီ ဓမ္မဒိန္နာ’’, ဣစ္စေဝမာဒီသု ပန; သမာသေ ဂုဏပဏ္ဏတ္တိ-ဘာဝေနေသ ပဒိဿတိ. परंतु, 'दिन्नादायी' (दिलेले ग्रहण करणारा), 'धम्मदिन्ना' इत्यादी शब्दांमध्ये समासात हा शब्द गौण प्रज्ञप्ती (गुणप्रज्ञप्ती) रूपात दिसून येतो. ကောစိ [Pg.77] ပန သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဂရု ဧဝံ သဒ္ဒရစနမကာသိ – परंतु, व्याकरण जाणणाऱ्या एका आचार्यांनी (गुरूंनी) अशा प्रकारे शब्दांची रचना केली आहे – ‘‘ယဿင်္ကုရေဟိ ဇိမုတမ္ဗုဇလောဒိတေဟိ,ဝါတေရိတေဟိ ပတိတေဟိ သုဏေဟိ တေဟိ. 'ज्याच्या अंकुरांनी, जे मेघांप्रमाणे आणि कमलांप्रमाणे शोभणारे आहेत, वाऱ्याने हलविलेले, गळून पडलेले आणि अत्यंत सुंदर आहेत. ဇေနန္တစီဝရမသောဘထ ဗြဟ္မဒတ္တံ,ဝန္ဒာမိ တံ စလဒလံ ဝရဗောဓိရုက္ခ’’န္တိ. ज्यांच्याद्वारे जिनांचे (बुद्धांचे) अंतर्वस्त्र (चीवर) ब्रह्मदत्त (ब्रह्मदेवाने दिलेले किंवा अत्यंत श्रेष्ठ) म्हणून शोभून दिसले, त्या हलणाऱ्या पानांच्या श्रेष्ठ बोधिवृक्षाला मी वंदन करतो.' ဧတ္ထ စ ဗြဟ္မဒတ္တန္တိ ဣဒံ သက္ကဋဘာသာတော နယံ ဂဟေတွာ ဝုတ္တံ, န ပါဠိတော. ပါဠိနယဉှိပတွာ ‘‘ဗြဟ္မဒတ္တိယ’’န္တိ ဝါ ‘‘ဗြဟ္မဒိန္န’’န္တိ ဝါ ‘‘ဒေဝဒတ္တိယ’’န္တိ ဝါ ‘‘ဒေဝဒိန္န’’န္တိ ဝါ ရူပေန ဘဝိတဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ‘‘ဗောဓိသတ္တော စ မဒ္ဒီ စ သမ္မောဒမာနာ သက္ကဒတ္တိယေ အဿမေ ဝသိံသူ’’တိ ပါဠိနယာနုရူပေါ အဋ္ဌကထာပါဌော ဒိဿတိ. တသ္မာ ဧတ္ထေဝံ ဝဒါမ – येथे 'ब्रह्मदत्त' हा शब्द संस्कृत भाषेचा नियम घेऊन वापरला गेला आहे, पाळी भाषेचा नाही. कारण पाळीच्या नियमानुसार 'ब्रह्मदत्तिय' किंवा 'ब्रह्मदिन्न' किंवा 'देवदत्तिय' किंवा 'देवदिन्न' असे रूप असायला हवे. तसेच, 'बोधिसत्त आणि मद्दी आनंदाने शक्राने दिलेल्या (सक्कदत्तिय) आश्रमात राहिले' असा पाळी नियमाला अनुसरून असलेला अट्ठकथा-पाठ दिसून येतो. म्हणून आम्ही येथे असे म्हणतो – ‘‘ဒတ္တသဒ္ဒဿ ဌာနမှိ, ‘‘ဒတ္တိယ’’န္တိ ရဝေါ ဂတော; ဒေဝဒတ္တိယပတ္တော စ, အဿမော သက္ကဒတ္တိယော’’တိ. 'दत्त' शब्दाच्या जागी 'दत्तिय' असा शब्दप्रयोग रूढ आहे; जसे की 'देवदत्तियपत्त' (देवदत्ताने दिलेले पात्र) आणि 'सक्कदत्तिय अस्सम' (शक्राने दिलेला आश्रम).' အယံ နီတိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. အတြ ပန ပရိပုဏ္ဏာပရိပုဏ္ဏဝသေန ယထာရဟံ ပဒက္ကမော ဘဝတိ. हा नियम चांगल्या प्रकारे मनात ठेवला पाहिजे. येथे पूर्ण आणि अपूर्णतेच्या आधारे योग्य तो पदक्रम (शब्दांचा क्रम) होतो. ဒဒါတိ, ဒဒန္တိ. ဒဒါသိ, ဒဒါထ. ဒဒါမိ, ဒဒါမ. ဒဒါတု, ဒဒန္တု. ဒဒါဟိ, ဒဒါထ. ဒဒါမိ, ဒဒါမ, ဒဒါမသေ. ဒဒေယျ, ဒဒေ, ဒဇ္ဇာ. ဒဇ္ဇာ သပ္ပုရိသော ဒါနံ. ဒဒေယျုံ, ဒဇ္ဇုံ. ပိတာ မာတာ စ တေ ဒဇ္ဇုံ. ဒဒေယျာသိ, ဒဇ္ဇာသိ, ဒဇ္ဇေသိ ဣစ္စပိ. ဒဇ္ဇာသိ အဘယံ မမ. မာတရံ ကေန ဒေါသေန, ဒဇ္ဇာသိ ဒကရက္ခိနော. သီလဝန္တေသု ဒဇ္ဇေသိ, ဒါနံ မဒ္ဒိ ယထာရဟံ. ဒဒေယျာထ, ဒဇ္ဇာထ. ဒဒေယျာမိ, ဒဇ္ဇာမိ, ဒဒေယျာမ, ဒဇ္ဇာမ. ဒဒေထ, ဒဒေရံ. ဒဒေထော, ဒဒေယျာဝှော, ဒဇ္ဇာဝှော. ဒဒေယျံ, ဒဇ္ဇံ. နေဝ ဒဇ္ဇံ မဟောသဓံ. ဒဒေယျာမှေ, ဒဇ္ဇာမှေ. အယမသ္မာကံ ခန္တိ. ဂရူနံ ပန ခန္တိ အညထာ ဘဝတိ. တထာ ဟိ – ददाति, ददन्ति। ददासि, ददाथ। ददामि, ददाम। ददातु, ददन्तु। ददाहि, ददाथ। ददामि, ददाम, ददामसे। ददेय्य, ददे, दज्जा। 'दज्जा सप्पुरिसो दानं' (सत्पुरुषाने दान द्यावे)। ददेय्युं, दज्जुं। 'पिता माता च ते दज्जुं' (तुझे माता आणि पिता तुला देवोत)। ददेय्यासि, दज्जासि, दज्जेसि इत्यादी। 'दज्जासि अभयं मम' (तू मला अभय दे). 'मातरं केन दोसेन, दज्जासि दकरक्खिनो' (कोणत्या दोषासाठी तू आईला जलराक्षसाला देत आहेस?). 'सीलवन्तेसु दज्जेसि, दानं मद्दी यथारहं' (मद्दीने शीलवानांना योग्यतेनुसार दान दिले). ददेय्याथ, दज्जाथ। ददेय्यामि, दज्जामि, ददेय्यामा, दज्जाम। ददेथ, ददेरं। ददेथो, ददेय्याव्हो, दज्जाव्हो। ददेय्यं, दज्जं। 'नेव दज्जं महोसधं' (मी महौषधाला कधीही देणार नाही)। ददेय्याम्हे, दज्जाम्हे। हे आमचे मत (खन्ति) आहे. परंतु आचार्यांचे (गुरूंचे) मत वेगळे आहे. कारण की – ဂရူ ‘‘ဒဇ္ဇတိ ဒဇ္ဇန္တိ’’, ဣတိအာဒိနယေန တု; အဋ္ဌန္နမ္ပိ ဝိဘတ္တီနံ, ဝသေနာဟု ပဒက္ကမံ. आचार्य (गुरू) मात्र 'दज्जति, दज्जन्ति' इत्यादी पद्धतीने आठही विभक्तींच्या आधारे पदक्रम सांगतात. ပါဠိံ ဥပပရိက္ခိတွာ, တဉ္စေ ယုဇ္ဇတိ ဂဏှထ; န ဟိ သဗ္ဗပ္ပကာရေန, ပါဠိယော ပဋိဘန္တိ နော. पाळी (वचनांचे) नीट परीक्षण करून, जर ते योग्य वाटले तरच त्याचा स्वीकार करावा; कारण सर्व प्रकारे पाळीचे ज्ञान आम्हाला स्पष्ट होत नाही. တတ္ထ [Pg.78] အသ္မာကံ ခန္တိယာ ‘‘ဒဇ္ဇာ ဒဇ္ဇ’’န္တိအာဒီနိ ယျကာရသဟိတေယေဝ သတ္တမိယာ ပဒရူပေ သိဇ္ဈန္တိ. ‘‘ဒဇ္ဇာ သပ္ပုရိသော ဒါန’’န္တိ ဧတ္ထ ဟိ ‘‘ဒဇ္ဇာ ဣဒံ ‘‘ဒဒေယျာ’’တိ ပဒရူပံ ပတိဋ္ဌပေတွာ ယျကာရေ ပရေ သရလောပံ ကတွာ တတော တိဏ္ဏံ ဗျဉ္ဇနာနံ သံယောဂဉ္စ တီသုသညောဂဗျဉ္ဇနေသု ဒွိန္နံ သရူပါနမေကဿ လောပဉ္စ ဒျကာရသညောဂဿ စ ဇကာရဒွယံ ကတွာ တတော ဒီဃဝသေနုစ္စာရိတဗ္ဗတ္တာ အနိမိတ္တံ ဒီဃဘာဝံ ကတွာ နိပ္ဖဇ္ဇတိ. ဧဝံ သာသနဿာနုရူပေါ ဝဏ္ဏသန္ဓိ ဘဝတိ. ဒုဝိဓော ဟိ သန္ဓိ ပဒသန္ဓိ ဝဏ္ဏသန္ဓီတိ. တေသု ယတ္ထ ပဒစ္ဆေဒေါ လဗ္ဘတိ, သော ပဒသန္ဓိ. ယထာ? တတြာယံ. ယတ္ထ ပန န လဗ္ဘတိ, သော ဝဏ္ဏသန္ဓိ. ယထာ? အတြဇော. ယထာ စ သုဂတော, ယထာ စ ပဒ္ဓါနိ. ဧဝံ ဒုဝိဓေသု သန္ဓီသု ‘‘ဒဇ္ဇာ’’တိ အယံ ဝဏ္ဏသန္ဓိ ဧဝ. त्यामध्ये आमच्या मते 'दज्जा, दज्ज' इत्यादी रूपे 'य्य' कारासह सप्तमी विभक्तीमध्येच (विध्यर्थात) सिद्ध होतात. 'दज्जा सप्पुरिसो दानं' येथे 'दज्जा' हे रूप 'ददेय्या' या पदावरून सिद्ध होते. 'य्य' कार पुढे असताना स्वराचा लोप (सरलोप) करून, त्यानंतर तीन व्यंजनांचा संयोग होतो, आणि तीन संयुक्त व्यंजनांपैकी दोन समान व्यंजनांपैकी एकाचा लोप होतो, आणि 'द्य' या संयुक्त व्यंजनाच्या जागी द्वित्व 'ज्ज' होऊन, दीर्घ उच्चारणामुळे अकारण दीर्घत्व येऊन हे रूप सिद्ध होते. अशा प्रकारे शासनाला (बुद्धशासनाला) अनुकूल असा वर्णसंधी होतो. संधी दोन प्रकारचा असतो – पदसंधी आणि वर्णसंधी. त्यापैकी जेथे पदच्छेद (शब्दांचे विभाजन) करता येतो, तो पदसंधी होय. जसे की – 'तत्रायं' (तत्र + अयं). परंतु जेथे पदच्छेद करता येत नाही, तो वर्णसंधी होय. जसे की – 'अत्रजो'. आणि जसे 'सुगतो', जसे 'पद्धानि'. अशा दोन प्रकारच्या संधींमध्ये 'दज्जा' हा केवळ वर्णसंधीच आहे. အပရောပိ ရူပနယော ဘဝတိ တွာပစ္စယန္တဝသေန – 'त्वा' प्रत्ययाच्या (त्वा-पच्चय) आधारे आणखी एक रूपसिद्धीचा नियम खालीलप्रमाणे आहे – ‘‘အယံ သော ဣန္ဒကော ယက္ခော, ဒဇ္ဇာ ဒါနံ ပရိတ္တကံ; အတိရောစတိ အမှေဟိ, စန္ဒော တာရဂဏေ ယထာ’’တိ 'हा तो इन्दक यक्ष आहे, ज्याने थोडेसे दान देऊन (दज्जा), तो आमच्यापेक्षा अधिक शोभून दिसतो, जसा ताऱ्यांच्या समुदायात चंद्र शोभतो.' ဒဿနတော. ဧတ္ထ ဟိ ဒဇ္ဇာတိ ဒတွာတိ အတ္ထော. ဣဒံ ပန ဒတွာသဒ္ဒေန သမာနတ္ထံ ‘‘ဒဒိယျ’’ ဣတိ ပဒရူပံ ပတိဋ္ဌပေတွာ ယျကာရေ ပရေ သရလောပံ ကတွာ သညောဂေသု သရူပလောပဉ္စ တတော ဒျကာရသညောဂဿ ဇ္ဇကာရဒွယံ ဒီဃတ္တဉ္စ ကတွာ နိပ္ဖဇ္ဇတိ. असे दिसून येते. येथे 'दज्जा' म्हणजे 'दत्वा' (दान देऊन) असा अर्थ आहे. 'दत्वा' या शब्दाशी समान अर्थ असलेला हा शब्द 'ददिय्य' हे रूप प्रस्थापित करून, 'य्य' कार पुढे असताना स्वराचा लोप करून, संयुक्त व्यंजनांमधील समान वर्णाचा लोप करून, 'द्य' या संयुक्त व्यंजनाच्या जागी द्वित्व 'ज्ज' आणि दीर्घत्व करून सिद्ध होतो. အထာပရောပိ ရူပနယော ဘဝတိ ကမ္မနိ ယပစ္စယဝသေန. တထာ ဟိ ‘‘ပေတာနံ ဒက္ခိဏံ ဒဇ္ဇာ’’တိ စ ‘‘ဒက္ခိဏာ ဒဇ္ဇာ’’တိ စ ဒွေ ပါဌာ ဒိဿန္တိ. တတ္ထ ပစ္ဆိမဿ ဒဇ္ဇာတိ ဒါတဗ္ဗာတိ အတ္ထော ကမ္မနိ ယပစ္စယဝသေန. ဣဓ ပန ဒါဓာတုတော ယပစ္စယံ ကတွာ ဓာတုဿ ဒွိတ္တဉ္စ ပုဗ္ဗဿ ရဿတ္တဉ္စ တတော ယကာရေ ပရေ [Pg.79] သရလောပံ သညောဂဘာဝဉ္စ ဇ္ဇကာရဒွယဉ္စ ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တာ အာပစ္စယာဒိဉ္စ ကတွာ ‘‘ဒဇ္ဇာ’’တိ နိပ္ဖဇ္ဇတိ. ဧဝံ ‘‘ဒဇ္ဇာ ဒဒေယျာ’’တိ စ ‘‘ဒဇ္ဇာ ဒဒိယျ ဒတွာ’’တိ စ ‘‘ဒဇ္ဇာ ဒါတဗ္ဗာ’’တိ စ ဧတာနိ ပစ္စေကံ ပရိယာယဝစနာနိ ဘဝန္တိ. ‘‘ဒဇ္ဇုံ. ဒဇ္ဇာသိ, ဒဇ္ဇာထ. ဒဇ္ဇာမိ, ဒဇ္ဇာမ. ဒဇ္ဇာဝှော, ဒဇ္ဇ’’န္တိ ဧတာနိပိ ‘‘ဒဒေယျုံ ဒဒေယျာသီ’’တိအာဒိနာ ပဒရူပါနိ ပတိဋ္ဌပေတွာ ယျကာရေ ပရေ သရလောပံ သညောဂေသု သရူပလောပံ ဒျကာရသမညောဂဿ ဇ္ဇကာရဒွယဉ္စ ကတွာ နိပ္ဖဇ္ဇန္တိ. ဧတေသု ဒဇ္ဇာသီတိ ယံ ရူပံ တဿာဝယဝဿ အာကာရဿ ဧကာရံ ကတွာ အပရမ္ပိ ‘‘ဒဇ္ဇေသီ’’တိ ရူပံ ဘဝတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧသ နယော အညတြာပိ ယထာသမ္ဘဝံ ယောဇေတဗ္ဗော. आता कर्मणी 'य' प्रत्ययाच्या (कम्मनि य-पच्चय) आधारे आणखी एक रूपसिद्धीचा नियम आहे. जसे की, 'पेतानं दक्खिणं दज्जा' आणि 'दक्खिणा दज्जा' असे दोन पाठ दिसून येतात. त्यापैकी नंतरच्या 'दज्जा' चा अर्थ कर्मणी 'य' प्रत्ययाच्या नियमानुसार 'दातब्बा' (दिली पाहिजे) असा आहे. येथे 'दा' धातूला 'य' प्रत्यय लावून, धातूचे द्वित्व करून, पूर्व स्वराला र्हस्व करून, त्यानंतर 'य' कार पुढे असताना स्वराचा लोप, संयोगभाव आणि द्वित्व 'ज्ज' करून, तसेच स्त्रीलिंगी असल्यामुळे 'आ' प्रत्यय इत्यादी लावून 'दज्जा' हे रूप सिद्ध होते. अशा प्रकारे 'दज्जा = ददेय्या', 'दज्जा = ददिय्य = दत्वा' आणि 'दज्जा = दातब्बा' हे प्रत्येक पर्यायी शब्द आहेत. 'दज्जुं, दज्जासि, दज्जाथ, दज्जामि, दज्जाम, दज्जाव्हो, दज्जं' ही रूपे देखील 'ददेय्युं, ददेय्यासि' इत्यादी रूपे प्रस्थापित करून, 'य्य' कार पुढे असताना स्वराचा लोप, संयुक्त व्यंजनांमधील समान वर्णाचा लोप आणि 'द्य' या संयुक्त व्यंजनाच्या जागी द्वित्व 'ज्ज' करून सिद्ध होतात. यापैकी 'दज्जासि' या रूपामध्ये त्याच्या अवयवातील 'आ' काराचा 'ए' कार करून 'दज्जेसि' हे दुसरे रूप देखील बनते, असे समजले पाहिजे. हा नियम इतर ठिकाणीही यथासंभव लागू केला पाहिजे. အစိန္တေယျာနုဘာဝဿ ဟိ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ ပါဠိနယော အစိန္တေယျောယေဝ ဟောတိ, ဂမ္ဘီရော ဒုက္ခောဂါဠှော, န ယေန ကေနစိ လက္ခဏေန သာဓေတဗ္ဗော, ယထာတန္တိ ဝိရစိတေဟေဝ လက္ခဏေဟိ သာဓေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘ခတ္တိယာ တိတ္ထိယာ စေတိယာနီ’’တိအာဒီသု ယကာရေ ပရေ သရလောပေါ ဘဝတိ, တေန ‘‘အထေတ္ထေကသတံ ခတျာ. ဧဝမ္ပိ တိတ္ထျာ ပုထုသော ဝဒန္တိ. အာရာမရုက္ခစေတျာနီ’’တိ ပယောဂါ ဒိဿန္တိ. တထာ ‘‘သာကစ္ဆတိ တစ္ဆ’’န္တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘သဟ ကထယတီ’’တိဝါ ‘‘သံကထယတီ’’တိ ဝါ ‘‘တထျ’’န္တိ စ ပဒရူပံ ပတိဋ္ဌပေတွာ သဟသဒ္ဒဿ ဟကာရလောပံ, သံသဒ္ဒေ စ နိဂ္ဂဟီတလောပံ ကတွာ သကာရဂတဿ သရဿ ဒီဃံ ကတွာ ယကာရေ ပရေ သရလောပံ ကတွာ တတော ထျကာရသညောဂဿ စ္ဆယုဂံ ကတွာ ဝိသဘာဂသညောဂေ ဧကော ဧကဿ သဘာဂတ္တမာပဇ္ဇတိ. တေန ‘‘သာကစ္ဆတိ တစ္ဆ’’န္တိ ရူပါနိ သိဇ္ဈန္တိ. တထာ ဟိ ‘‘အညမညံ သာကစ္ဆိံသု. ကာလေန ဓမ္မသာကစ္ဆာ. ဘူတံ တစ္ဆံ. ယထာတထိယံ ဝိဒိတွာပိ ဓမ္မံ, သမ္မာ သော လောကေ ပရိဗ္ဗဇေယျာ’’တိ [Pg.80] သဝိကပါနိ ပယောဂါနိ ဒိဿန္တိ. ‘‘နဇ္ဇာ’’တိအာဒီသုပိ ‘‘နဒိယာ’’တိအာဒီနိ ပဒရူပါနိ ပတိဋ္ဌပေတွာ ဝဏ္ဏသန္ဓိဝသေန ယကာရေ ပရေ လောပဝိဓိ လဗ္ဘတိယေဝ. ဝိဝိဓော ဟိ သာသနာနုကူလော ရူပနိပ္ဖာဒနုပါယော, ဥပရိ စ ဧတေသံ သာဓနတ္ထံ ‘‘သရလောပေါ ယမနရာဒီသူ’’တိအာဒီနိ လက္ခဏာနိ ဘဝိဿန္တိ. တတ္ထ – अचिंत्य प्रभाव असलेल्या सम्यक्संबुद्धांची पाळिनयी (व्याकरण पद्धत) अचिंत्यच असते, ती गंभीर आणि अवगाहन करण्यास कठीण असते. ती कोणत्याही सामान्य लक्षणाने (व्याकरण नियमाने) सिद्ध करता येत नाही, तर परंपरेने रचलेल्या लक्षणांनीच सिद्ध केली पाहिजे. तसेच, "खत्तिया तित्थिया चेतियानी" इत्यादींमध्ये 'य' कार पुढे असताना स्वराचा लोप होतो, त्यामुळे "अथेत्थेकसतं खत्या. एवम्पि तित्थ्या पुथुसो वदन्ति. आरामरुक्खचेत्यानी" असे प्रयोग दिसतात. तसेच "साकच्छति तच्छं" यामध्ये देखील "सह कथयति" किंवा "सं कथयति" किंवा "तथ्यं" असे पदरूप प्रस्थापित करून, 'सह' शब्दातील 'ह' काराचा लोप करून, आणि 'सं' शब्दातील निग्गहीताचा (अनुस्वाराचा) लोप करून, 'स' कारामधील स्वराला दीर्घ करून, 'य' कार पुढे असताना स्वराचा लोप करून, त्यानंतर 'थ्य' कार संयोगाचा 'च्छ' कार करून, विसभाग संयोगात एकाचा दुसऱ्याशी सभागभाव (समानता) प्राप्त होतो. त्याने "साकच्छति तच्छं" ही रूपे सिद्ध होतात. तसेच "अञ्ञमञ्ञं साकच्छिंसु. कालेन धम्मसाकच्छा. भूतं तच्छं. यथातथियं विदित्वापि धम्मं, सम्मा सो लोके परिब्बजेय्या" हे विविध प्रयोग दिसतात. "नज्जा" इत्यादींमध्ये देखील "नदिया" इत्यादी पदरूपे प्रस्थापित करून वर्णसंधीनुसार 'य' कार पुढे असताना लोपविधी प्राप्त होतोच. बुद्धशासनाला अनुकूल असे रूप सिद्ध करण्याचे विविध उपाय आहेत, आणि पुढे यांच्या सिद्धीसाठी "सरलोपो यमनरादीसू" इत्यादी लक्षणे (नियम) येतील. त्यामध्ये - ‘‘ဒဇ္ဇာ ဒဇ္ဇု’’န္တိအာဒီနိ, သတ္တမီနံ ဝသေန မေ; ဝုတ္တာနိ ယောဂိရာဇဿ, သာသနတ္ထံ မဟေသိနော. "दज्जा, दज्जु" इत्यादी रूपे, मी महर्षी योगिराजांच्या (बुद्धांच्या) शासनाच्या (उपदेशाच्या) कल्याणासाठी सप्तमी विभक्तीच्या (विधी-लिङ् लकार) अर्थाने सांगितली आहेत. အတြိဒံ ဝတ္တဗ္ဗံ, ကိဉ္စာပိ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ‘‘မာတရံ တေန ဒေါသေန, ဒဇ္ဇာဟံ ဒကရက္ခိနော’’တိ ဧတ္ထ ဒဇ္ဇန္တိ ပဒဿ ‘‘ဒမ္မီ’’တိ ဝတ္တမာနာဝသေန ဝိဝရဏံ ကတံ, တထာပိ သတ္တမီပယောဂေါယေဝ. အာစရိယာ ဟိ ‘‘သတ္တမီပယောဂေါ အယ’’န္တိ ဇာနန္တာပိ ‘‘ကဒါစိ အညေ ပရိကပ္ပတ္ထမ္ပိ ဂဏှေယျု’’န္တိ အာသင်္ကာယ ဧဝံ ဝိဝရဏမကံသု. တထာ ကိဉ္စာပိ တေဟိ ‘‘အနာပရာဓကမ္မန္တံ, န ဒဇ္ဇံ ဒကရက္ခိနော’’တိ ဧတ္ထ န ဒဇ္ဇန္တိ ပဒဿ ‘‘နာဟံ ဒကရက္ခဿ ဒဿာမီ’’တိ ဘဝိဿန္တီဝသေန ဝိဝရဏံ ကတံ, တထာပိ သတ္တမီပယောဂေါယေဝ, အနာဂတံ ပန ပဋိစ္စ ဝတ္တဗ္ဗတ္ထတ္တာ ဧဝံ ဝိဝရဏံ ကတံ. ‘‘နေဝ ဒဇ္ဇံ မဟောသဓ’’န္တိ ဧတ္ထ ပန ‘‘န တွေဝ ဒဒေယျ’’န္တိ သတ္တမီပယောဂဝသေနေဝ ဝိဝရဏံ ကတန္တိ. ဧဝံ ဒဇ္ဇံပဒဿ ဝိနိစ္ဆယော ဝေဒိတဗ္ဗော. येथे हे सांगणे आवश्यक आहे की, जरी अट्ठकथाचार्यांनी "मातरं तेन दोसेन, दज्जाहं दकरक्खिनो" यामध्ये 'दज्जा' या पदाचे "दम्मी" (मी देतो) अशा वर्तमानकाळाच्या अर्थाने विवरण केले आहे, तरीही हा सप्तमीचाच प्रयोग आहे. कारण आचार्य "हा सप्तमीचा प्रयोग आहे" हे जाणत असूनही, "कदाचित इतर लोक याचा अर्थ संशयार्थक (परिकल्पार्थ) घेतील" या शंकेने त्यांनी असे विवरण केले. तसेच, जरी त्यांनी "अनापराधकम्मन्तं, न दज्जं दकरक्खिनो" यामध्ये 'न दज्जं' या पदाचे "नाहं दकरक्खस्स दस्सामि" (मी जलरक्षकाला देणार नाही) अशा भविष्यकाळाच्या अर्थाने विवरण केले आहे, तरीही हा सप्तमीचाच प्रयोग आहे; परंतु भविष्याला अनुसरून सांगायचा अर्थ असल्यामुळे त्यांनी असे विवरण केले. "नेव दज्जं महोसधं" यामध्ये मात्र "न त्वेव ददेय्य" (देऊ नये) अशा सप्तमी प्रयोगाच्या अर्थानेच विवरण केले आहे. अशा प्रकारे 'दज्जं' या पदाचा निर्णय समजून घ्यावा. ဣဒါနိ ပရောက္ခာဒိဝသေန ပဒက္ကမော ကထိယတိ. ‘‘ဒဒ, ဒဒူ. ဒဒူ’’တိ စ ဣဒံ ‘‘နာရဒေါ ဣတိ နာမေန, ကဿပေါ ဣတိ မံ ဝိဒူ’’တိအာဒီသု ဝိဒူသဒ္ဒေန သမံ. ဒဒေ, ဒဒိတ္ထ, ဒဒံ, ဒဒိမှ. ဒဒိတ္ထ, ဒဒိရေ. ဒဒိတ္ထော, ဒဒိဝှော. आता परोक्षा (परोक्ष भूतकाळ) इत्यादींच्या क्रमाने पदांचा क्रम सांगितला जात आहे. "दद, ददू. ददू" हे "नारदो इति नामेन, कस्सपो इति मं विदू" इत्यादींमधील 'विदू' शब्दासारखेच आहे. ददे, ददित्थ, ददं, ददिम्ह. ददित्थ, ददिरे. ददित्ठो, ददिव्हो. ဧတ္ထ စ ဒဒိတ္ထောတိ ဣဒံ ‘‘သဉ္ဇဂ္ဃိတ္ထော မယာ သဟ. မာ ကိသိတ္ထော မယာ ဝိနာ. မာ နံ ကလလေ အက္ကမိတ္ထော’’တိအာဒီသု ‘‘သဉ္ဇဂ္ဃိတ္ထော’’တိအာဒီဟိ [Pg.81] သမံ. ဣမိနာ နယေန သဗ္ဗတ္ထ လဗ္ဘမာနဝသေန သဒိသတာ ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗာ. ဒဒံ, ဒဒိမှေ. ပရောက္ခာသဟိဘရူပါနိ. आणि येथे 'ददित्ठो' हे "सञ्जग्घित्ठो मया सह. मा किसित्ठो मया विना. मा नं कलले अक्कमित्ठो" इत्यादींमधील "सञ्जग्घित्ठो" इत्यादींसारखेच आहे. या पद्धतीने सर्व ठिकाणी उपलब्ध होणाऱ्या रूपांनुसार समानतेचे परीक्षण करावे. ददं, ददिम्हे. ही परोक्षा विभक्तीची रूपे आहेत. အဒဒါ, အဒဒူ. အဒဒေ, အဒဒတ္ထ. အဒဒံ, အဒဒမှ. အဒဒတ္ထ, အဒဒတ္ထုံ. အဒဒသေ, အဒဒဝှံ. အဒဒိံ အဒဒမှသေ. ဣတိ အနကာရပုဗ္ဗမ္ပိ ရူပံ ဂဟေတဗ္ဗံ ‘‘ယေသံ နော န ဒဒမှသေ’’တိ ဒဿနတော. ဟိယျတ္တနီသဟိတရူပါနိ. अददा, अददू. अददे, अददत्थ. अददं, अददम्ह. अददत्थ, अददत्थुं. अददसे, अददव्हं. अददिं, अददम्हसे. अशा प्रकारे 'अ' कार पूर्व नसलेले रूप देखील "येसं नो न ददम्हसे" या प्रयोगाच्या दर्शनावरून ग्रहण करावे. ही हिय्यत्तनी (ह्यस्तन भूतकाळ) युक्त रूपे आहेत. အဒဒိ, အဒဒုံ, အဒဒိံသု. အဒဒေါ, အဒဒိတ္ထ. အဒဒိံ, အဒဒိမှာ. အဒဒါ, အဒဒူ. အဒဒသေ, အဒဒိဝှံ. အဒဒံ, အဒဒိမှေ. အဇ္ဇတနီသဟိတရူပါနိ. अददि, अददुं, अददिंसु. अददो, अददित्थ. अददिं, अददिम्हा. अददा, अददू. अददसे, अददिव्हं. अददं, अददिम्हे. ही अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) युक्त रूपे आहेत. ‘‘ဒဒိဿတိ, ဒဒိဿန္တိ’’ ဣစ္စာဒိ သဗ္ဗံ နေယျံ. ဘဝိဿန္တီသဟိတရူပါနိ. "ददिस्सति, ददिस्सन्ति" इत्यादी सर्व रूपे जाणून घ्यावीत. ही भविस्सती (भविष्यकाळ) युक्त रूपे आहेत. ‘‘အဒဒိသာ, ဒဒိဿာ, အဒဒိဿံသု, ဒဒိဿံသု’’ ဣစ္စာဒိ စ သဗ္ဗံ နေယျံ. ကာလာတိပတ္တိသဟိတရူပါနိ. "अददिसा, ददिस्सा, अददिस्संसु, ददिस्संसु" इत्यादी सर्व रूपे जाणून घ्यावीत. ही कालातिपत्ती (क्रियातिपत्ती) युक्त रूपे आहेत. အပရာနိပိ ဝတ္တမာနာဒိသဟိတရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဒေတိ, ဒေန္တိ. ဒေသိ, ဒေထ. ဒေမိ, ဒမ္မိ, ဒေမ, ဒမ္မ. ဒေတု, ဒေန္တု. ဒေဟိ, ဒေထ. ဒေမိ, ဒမ္မိ, ဒေမ, ဒမ္မ. အတ္တနောပဒါနိ အပ္ပသိဒ္ဓါနိ. သတ္တမီနယော စ ပရောက္ခာနယော စ အပ္ပသိဒ္ဓေါ. ဟိယုတ္တနီနယော ပန အဇ္ဇတနီနယော စ ကောစိ ကောစိ ပသိဒ္ဓေါ ပါဠိယံ အာဂတတ္တာ, သက္ကာ စ ‘‘အဒါ, အဒူ, အဒေါ, အဒ’’န္တိအာဒိနာ ယောဇေတုံ. တထာ ဟိ နယော ဒိဿတိ. အဒါ ဒါနံ ပုရိန္ဒဒေါ. ဝရဉ္စေမေ အဒေါ သက္က. ဗြာဟ္မဏာနံ အဒံ ဂဇံ. အဒါသိမေ. အဒံသု တေ မမောကာသံ. အဒါသိံ ဗြာဟ္မဏေ တဒါတိ. ‘‘ဒဿတိ, ဒဿန္တိ’’ ဣစ္စာဒိ သဗ္ဗံ နေယျံ. ‘‘အဒဿာ, ဒဿာ, အဒဿံသု, ဒဿံသု, ဒဿိံသု’’ ဣစ္စာဒိ စ သဗ္ဗံ နေယျံ. इतरही वर्तमानकाळ इत्यादींनी युक्त रूपे होतात. देति, देन्ति. देसि, देथ. देमि, दम्मि, देम, दम्म. देतु, देन्तु. देहि, देथ. देमि, दम्मि, देम, दम्म. आत्मनेपदाची रूपे देखील योजावीत. सप्तमीचा नियम आणि परोक्षाचा नियम देखील योजावा. परंतु हिय्यत्तनीचा नियम आणि अज्जतनीचा नियम पाळिमध्ये काही काही ठिकाणी प्रसिद्ध रूपाने आल्यामुळे "अदा, अदू, अदो, अदं" इत्यादी प्रकारे योजना करता येते. कारण तसा नियम दिसतो. "अदा दानं पुरिन्ददो. वरञ्चेमे अदो सक्क. ब्राह्मणानं अदं गजं. अदासिमे. अदंसु ते ममोकासं. अदासिं ब्राह्मणे तदा" असे. "दस्सति, दस्सन्ति" इत्यादी सर्व रूपे जाणून घ्यावीत. "अदस्सा, दस्सा, अदस्संसु, दस्संसु, दस्सिंसु" इत्यादी सर्व रूपे जाणून घ्यावीत. တထာ [Pg.82] အာဒဒါတိ, အာဒဒန္တိ. အာဒဒါသိ, အာဒဒါထ. အာဒဒါမိ, အာဒဒါမ. ကစ္စာယနမတေ ‘‘အာဒတ္တေ’’တိ အတ္တနောပဒံ ဝုတ္တံ. ဧဝံ ‘‘အာဒဒါတု, အာဒဒေယျ’’ ဣစ္စာဒိ သဗ္ဗံ နေယျံ. အာဒေတု အာဒေယျ ဣစ္စာဒိ ယထာရဟံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဧဝမေဝ စ ‘‘ဒါပေတိ, အာဒါပေတီ’’တိအာဒီနိပိ ယထာရဟံ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. तसेच आददाति, आददन्ति. आददासि, आददाथ. आददामि, आददाम. कच्चायनाच्या मते "आदत्ते" हे आत्मनेपद सांगितले आहे. याप्रमाणे "आददातु, आददेय्य" इत्यादी सर्व रूपे जाणून घ्यावीत. आदेतु, आदेय्य इत्यादींची योग्यतेनुसार योजना करावी. याचप्रमाणे "दापेति, आदापेति" इत्यादींची देखील योग्यतेनुसार योजना करावी. ဒါကုစ္ဆိတေ ဂမနေ. ဒါတိ. သုဒ္ဒါတိ. သုဒ္ဒေါ, သုဒ္ဒီ. တတ္ထ သုဒ္ဒေါတိ သုဒ္ဒါတီတိ သုဒ္ဒေါ, ပရပေါထနာဒိလုဒ္ဒါစာရကမ္မုနာ ဒါရုကမ္မာဒိခုဒ္ဒါစာရကမ္မုနာ စ လဟုံ လဟုံ ကုစ္ဆိတံ ဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. တထာ ဟိ သု ဣတိ သီဃတ္ထေ နိပါတော, ဒါ ဣတိ ဂရဟတ္ထော ဓာတု ကုစ္ဆိတဂတိဝါစကတ္တာ. သုဒ္ဒဿ ဘရိယာ သုဒ္ဒီ. 'दा' धातू निंदित गमनाच्या (जाण्याच्या) अर्थात आहे. दाति. सुद्दाति. सुद्दो, सुद्दी. त्यामध्ये 'सुद्दो' म्हणजे जो 'सुद्दाति' तो 'सुद्दो' (शूद्र) होय; दुसऱ्याला पीडा देणे इत्यादी क्रूर आचरणाच्या कर्माने आणि लाकडाचे काम इत्यादी क्षुद्र आचरणाच्या कर्माने जो वेगाने निंदित गतीला प्राप्त होतो, असा अर्थ आहे. कारण 'सु' हा वेगाच्या अर्थातील निपात आहे, आणि 'दा' हा निंदेच्या अर्थातील धातू निंदित गतीचा वाचक असल्यामुळे आहे. सुद्द्याची (शूद्राची) पत्नी ती 'सुद्दी' (शूद्रा) होय. ဒု ဂတိယံ. ဒဝတိ. ဒုမော. ဧတ္ထ စ ဒဝတိ ဂစ္ဆတိ မူလက္ခန္ဓသာခါဝိဋပပတ္တပလ္လဝပုပ္ဖဖလေဟိ ဝုဒ္ဓိံ ဝိရူဠှိံ ဝေပုလ္လံ ပါပုဏာတီတိ ဒုမော. 'दु' धातू गतीच्या अर्थात आहे. दवति. दुमो. आणि येथे 'दवति' म्हणजे जो गमन करतो, मूळ, खोड, फांद्या, उपफांद्या, पाने, पालवी, फुले आणि फळांनी वृद्धी, वाढ आणि विशालतेला प्राप्त होतो, तो 'दुमो' (वृक्ष) होय. ဒေသောဓနေ. သောဓနံ ပရိယောဒါပနံ. ဒါယတိ. ဒါယနံ. ယထာ ဂါယတိ, ဂါယနံ. ဒါယိတုံ, ဒါယိတွာ, ဓာတာဝယဝဿေကာရဿ အာယာဒေသော. ‘‘ဒါတုံ, ဒတွာ’’ ဣစ္စပိ ရူပါနိ. 'दे' धातू शोधनाच्या (स्वच्छ करण्याच्या) अर्थात आहे. शोधन म्हणजे पूर्णपणे स्वच्छ करणे. दायति. दायनं. जसे गायति, गायनं. दायितुं, दायित्वा, धातूच्या अवयव असलेल्या 'ए' काराचा 'आय्' आदेश होतो. "दातुं, दत्वा" इत्यादी रूपे होतात. တတြ ဒါတုန္တိ သောဓေတုံ. ဒတွာတိ သောဓေတွာတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘ဗာလော အဗျတ္တော နပ္ပဋိဗလော အနုယုဉ္ဇိယမာနော အနုယောဂံ ဒါတု’’န္တိ ဧတ္ထ ဒါတုန္တိ ပဒဿ သောဓေတုန္တိ အတ္ထော. ကေစိ ‘‘ဒါနတ္ထ’’န္တိ အတ္ထံ ဝဒန္တိ, တံ န ယုတ္တံ. န ဟိ ယော ပရေဟိ အနုယုဉ္ဇိယတိ, သော အနုယောဂံ ဒေတိ နာမာတိ. တသ္မာ ‘‘အာစရိယဿ အနုယောဂံ ဒတွာ ဗာရာဏသိံ ပစ္စာဂစ္ဆီ’’တိအာဒီသုပိ အနုယောဂံ ဒတွာတိ အနုယောဂံ သောဓေတွာတိ အတ္ထောယေဝ ဂဟေတဗ္ဗော. တထာ [Pg.83] ဟိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ‘‘အနုယောဂဒါပနတ္ထ’’န္တိ ဧတသ္မိံ ပဒေသေ ဧသောယေဝတ္ထော ဝိဘာဝိတော. ကထံ? အနုယောဂဒါပနတ္ထန္တိ အနုယောဂံ သောဓာပေတုံ. ဝိမဒ္ဒက္ခမဉှိ သီဟနာဒံ နဒန္တော အတ္ထတော အနုယောဂံ သောဓေတိ နာမ, အနုယုဉ္ဇန္တော စ နံ သောဓာပေတိ နာမာတိ. ဣဒမ္ပိ စ တေဟိ ဝုတ္တံ. ဒါတုန္တိ သောဓေတုံ. ကေစိ ‘‘ဒါနတ္ထ’’န္တိ အတ္ထံ ဝဒန္တိ, တံ န ယုတ္တံ. န ဟိ ယော သီဟနာဒံ နဒတိ, သော ဧဝ တတ္ထ အနုယောဂံ ဒေတီတိ. သမန္တပဋ္ဌာနမဟာပကရဏ သံဝဏ္ဏနာယမ္ပိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ‘‘ဒါနံ ဒတွာတိ တံ စေတနံ ပရိယောဒါပေတွာ’’တိ သောဓနတ္ထော ဝုတ္တော. ဒုလ္လဘာ အယံ နီတိ သာဓုကံ စိတ္တေ ဌပေတဗ္ဗာ. तेथे 'दातुं' (dātuṃ) म्हणजे 'शोधेतुं' (sodhetuṃ - शुद्ध करणे/स्पष्ट करणे). 'दत्वा' (datvā) म्हणजे 'शोधेत्वा' (sodhetvā - शुद्ध करून) असा अर्थ घ्यावा. कारण, 'बालो अब्यत्तो नप्पटिबलो अनुयुञ्जियमानो अनुयोगं दातुं' (मूर्ख, अडाणी, असमर्थ मनुष्य विचारला असता उत्तर देण्यास/स्पष्ट करण्यास असमर्थ असतो) येथे 'दातुं' या पदाचा अर्थ 'शोधेतुं' (स्पष्ट करणे) असा आहे. काही लोक याचा अर्थ 'दान देणे' (dānatthaṃ) असा सांगतात, पण ते योग्य नाही. कारण ज्याला इतरांकडून विचारले जाते, तो 'अनुयोग' (प्रश्न/अभ्यास) देतो असे नाही. म्हणून, 'आचरियस्स अनुयोगं दत्वा बाराणसिं पच्चागच्छि' (आचार्यांकडे अभ्यास स्पष्ट करून/परीक्षा देऊन वाराणसीला परत आला) इत्यादी ठिकाणी देखील 'अनुयोगं दत्वा' म्हणजे 'अनुयोगं सोधेत्वा' (अभ्यास स्पष्ट करून/शुद्ध करून) असाच अर्थ घ्यावा. तसेच पूर्वाचार्यांनी 'अनुयोगदापनत्थं' या पदात हाच अर्थ स्पष्ट केला आहे. कसा? 'अनुयोगदापनत्थं' म्हणजे 'अनुयोगं सोधापेतुं' (अभ्यास स्पष्ट करून घेणे/शुद्ध करून घेणे). कारण, आक्षेपांना सहन करणारी सिंहगर्जना करणारा मनुष्य अर्थाच्या दृष्टीने 'अनुयोग' स्पष्ट करतो आणि विचारणारा तो स्पष्ट करून घेतो. हे देखील त्यांनी सांगितले आहे: 'दातुं' म्हणजे 'शोधेतुं'. काही लोक 'दान देणे' असा अर्थ सांगतात, ते योग्य नाही. कारण जो सिंहगर्जना करतो, तोच तेथे अनुयोग (प्रश्न) देतो असे नाही. 'समन्तपट्ठानमहापकरण संवण्णना' (महापट्टण अट्ठकथा) मध्ये देखील पूर्वाचार्यांनी 'दानं दत्वा' म्हणजे 'तं चेतनं परियोदापेत्वा' (त्या चेतनेला अत्यंत शुद्ध करून) असा शुद्धीकरणाचा अर्थ सांगितला आहे. हा नियम दुर्मिळ आहे, तो मनात चांगल्या प्रकारे ठसवावा. ဒေ ပါလနေ. ဒီယတိ. ဒါနံ, ဥဒ္ဒါနံ ဒါယိတုံ, ဒါယိတွာ. တတ္ထ ဒါနန္တိ ဒုဂ္ဂတိတော ဒါယတိ ရက္ခတီတိ ဒါနံ, ဒါနစေတနာ. ဥဒ္ဒါနန္တိ ဝုတ္တဿ အတ္ထဿ ဝက္ခမာနဿ ဝါ ဝိပ္ပကိဏ္ဏဘာဝေန နဿိတုံ အဒတွာ ဥဒ္ဓံ ဒါနံ ရက္ခဏံ ဥဒ္ဒါနံ, သင်္ဂဟဝစနန္တိ အတ္ထော. အထ ဝါ ဥဒ္ဒါနန္တိ ပစ္ဆုဒ္ဒါနာဒိကံ ဥဒ္ဒါနံ. 'दे' (de) धातू रक्षण करणे (पालने) या अर्थात आहे. 'दीयति' (dīyati). 'दानं' (dānaṃ), 'उद्दानं' (uddānaṃ), 'दायितुं' (dāyituṃ), 'दायित्वा' (dāyitvā). तेथे 'दान' म्हणजे दुर्गतीपासून रक्षण करते (दायति रक्खति) म्हणून 'दान', म्हणजेच दानचेतना. 'उद्दान' म्हणजे सांगितलेल्या किंवा सांगण्यात येणाऱ्या अर्थाला विखुरलेल्या अवस्थेमुळे नष्ट होऊ न देता वर धरून ठेवणे, रक्षण करणे म्हणजे 'उद्दान', म्हणजेच संग्रहवचन (संक्षिप्त संग्रह) असा अर्थ आहे. किंवा 'उद्दान' म्हणजे पश्चाद्-उद्दान (pacchuddāna) इत्यादी उद्दान (अनुक्रमणिका/संग्रह). ခါဒ ဘက္ခနေ. ခါဒတိ. ခါဒိကာ, ခါဒနံ, အညမညခါဒိကာ. ပုဗ္ဗဖလခါဒိကာ, ခဇ္ဇံ, ခါဒနီယံ, ခန္ဓာ. 'खाद' (khāda) धातू भक्षण करणे (भक्खने) या अर्थात आहे. 'खादति' (khādati). 'खादिका' (khādikā), 'खादनं' (khādanaṃ), 'अञ्ञमञ्ञखादिका' (एकमेकांना खाणे). 'पुब्बफलखादिका' (पहिले फळ खाणे), 'खज्जं' (खाद्य), 'खादनीयं' (खाण्यायोग्य), 'खन्धा' (स्कंध). တတ္ထ ခဇ္ဇန္တိ ပူဝေါ. ခါဒနီယန္တိ ပူဝဖလာဖလာဒိ. ‘‘ခါဒနီယံ ဝါ ဘောဇနီယံ ဝါ’’တိ ဝိသုံ ဘောဇနီယဿ ဝစနတော ခါဒနံ နာမ ခဇ္ဇဿ ဝါ ခါဒနီယဿ ဝါ ဘက္ခနံ. အပိစ ဟိံသာပိ ‘‘ခါဒန’’န္တိ ဝုစ္စတိ. ဇာတိဇရာဗျာဓိဒုက္ခာဒီဟိ ခဇ္ဇန္တီတိ ခန္ဓာ, ရူပဝေဒနာသညာသင်္ခါရဝိညာဏာနိ. ‘‘စီဝရာနိ နဿန္တိပိ ဍယှန္တိပိ ဥန္ဒူရေဟိပိ ခဇ္ဇန္တီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ ခဇ္ဇန္တိ သဒ္ဒေါ ကမ္မတ္ထော. तेथे 'खज्जं' (khajjaṃ) म्हणजे पिष्टमय पदार्थ (पुवो - केक/रोटी). 'खादनीयं' (khādanīyaṃ) म्हणजे फळे, कंदमुळे इत्यादी. 'खादनीयं वा भोजनीयं वा' (खादनीय किंवा भोजनीय) यामध्ये 'भोजनीय' शब्दाचा वेगळा उल्लेख असल्यामुळे, 'खादन' म्हणजे खाद्य किंवा खादनीय पदार्थांचे भक्षण करणे होय. शिवाय, हिंसेला देखील 'खादन' म्हटले जाते. जन्म, जरा, व्याधी, दुःख इत्यादींद्वारे जे खाल्ले जातात (पीडित केले जातात) ते 'स्कंध' (खन्धा) होत, म्हणजेच रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार आणि विज्ञान. 'चीवरे नष्ट होतात, जळतात आणि उंदरांद्वारे देखील खाल्ली जातात' (चीवराणि नस्सन्तिपि डय्हन्तिपि उन्दूरेहिपि खज्जन्ति) या वाक्याप्रमाणे येथे 'खज्जन्ति' (खाल्ले जातात) हा शब्द कर्मभाव (कर्मवाच्य) अर्थात आहे. ဗဒ [Pg.84] ထေရိယေ. ထိရဘာဝေါ ထေရိယံ, ယထာ ဒက္ခိယံ. ဗဒတိ. ဗဒရီ, ဗဒရံ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – 'बद' (bada) धातू स्थैर्य (थेरिय - theriya) या अर्थात आहे. स्थिर भाव म्हणजे स्थैर्य (थेरिय), जसे 'दक्खिय' (दक्षता). 'बदति' (badati). 'बदरी' (badarī), 'बदरं' (badaraṃ - बोर). याविषयी हे म्हटले आहे – ကက္ကန္ဓု ဗဒရီ ကောလီ, ကောလံ ကုလဝမိစ္စပိ; တေနိလံ ဗဒရဉ္စာတိ, နာမံ ရုက္ခဿ ကောလိယာတိ. 'कक्कन्धु' (kakkandhu), 'बदरी' (badarī), 'कोली' (kolī), 'कोलं' (kolaṃ), 'कुलवम्' (kulavam) आणि 'तेनिलं' (tenilaṃ) व 'बदरं' (badaraṃ) ही कोली (बोरीच्या) वृक्षाची नावे आहेत. ခဒ ဓိတိဟိံသာသု စ. ထေရိယာပေက္ခာယ စကာရော. ခဒတိ. ခဒိရော. 'खद' (khada) धातू धैर्य (धृति) आणि हिंसा या अर्थात देखील आहे. 'च' (ca) हा शब्द 'थेरिय' (स्थैर्य) या अर्थाच्या अपेक्षेने आहे. 'खदति' (khadati). 'खदिरो' (khadiro - खैर). ဂဒ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ. ဂဒတိ. အာဂဒနံ, တထော အာဂဒေါ ဧတဿာတိ တထာဂတော. သုဋ္ဌု ဂဒတီတိ သုဂဒေါ. 'गद' (gada) धातू स्पष्ट वाणी (वियत्तियं वाचायं) या अर्थात आहे. 'गदति' (gadati). 'आगदनं' (āgadanaṃ - बोलणे), ज्यांचे बोलणे (आगद) तथ्य (तथ) आहे ते 'तथागत' (tathāgato). जे उत्तम प्रकारे बोलतात ते 'सुगद' (sugado). ရဒ ဝိလေခနေ. ရဒတိ. ရဒနော, ရဒေါ, ဒါဌာရဒေါ. အတြ ရဒနောတိ ဒန္တော. 'रद' (rada) धातू खोदणे/लेखन करणे (विलेखने) या अर्थात आहे. 'रदति' (radati). 'रदनो' (radano), 'रदो' (rado), 'दाठारदो' (dāṭhārado - सुळे असलेला). येथे 'रदन' म्हणजे दात. နဒ အဗျတ္တသဒ္ဒေ. သီဟော နဒတိ, ပဏဒတိ. နာဒေါ, နဒီ. ပဗ္ဗတေသု ဝနာဒီသု နဒတီတိ နဒီ. နဒ ဣ ဣတိ ဓာတုဒွယဝသေန ပန ‘‘နဒန္တီ ဂစ္ဆတီတိ နဒီ’’တိပိ နိဗ္ဗစနံ ဝဒန္တိ. 'नद' (nada) धातू अस्पष्ट आवाजाच्या (अब्ब्यत्तसद्दे) अर्थात आहे. 'सीहो नदति' (सिंह गर्जना करतो), 'पणदति' (panadati). 'नादो' (nādo - नाद/आवाज), 'नदी' (nadī). जी पर्वतांमध्ये, वनांमध्ये आवाज करत वाहते ती 'नदी'. 'नद' आणि 'इ' या दोन धातूंच्या संयोगाने 'नदन्ती गच्छतीति नदी' (आवाज करत जाणारी ती नदी) अशी देखील व्युत्पत्ती सांगतात. ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ ယာ ပနေသာ ‘‘နဒ အဗျတ္တသဒ္ဒေ’တိ ဓာတု တုမှေဟိ ဝုတ္တာ, သာ ကိံနိစ္စမဗျတ္တသဒ္ဒေယေဝ ဝတ္တတိ, ဥဒါဟု ကတ္ထစိ ဝိယတ္တိယမ္ပိ ဝါစာယံ ဝတ္တတီ’’တိ? နိစ္စမဗျတ္တသဒ္ဒေယေဝ ဝတ္တတီတိ. ယဇ္ဇေဝံ ‘‘သီဟော နဒတီ’’တိအာဒီသု တိရစ္ဆာနဂတာဒိသဒ္ဒဘာဝေန အဝိဘာဝိတတ္ထတာယ နဒသဒ္ဒေါ အဗျတ္တသဒ္ဒေါ ဟောတု, ‘‘သီဟော ဝိယ အယံ ပုရိသော နဒတီ’’တိအာဒီသု ပန မနုဿဘာသာပိ အဗျတ္တသဒ္ဒေါ သိယာတိ? တန္န ဝိယတ္တာပိ သမာနာ မနုဿဘာသာ သီဟော ဝိယာတိ ဧဝံ သမုပေက္ခာဝသေန သီဟပဒတ္ထဿာပေက္ခနတော နဒသဒ္ဒေန နိဒ္ဒိသိယတိ[Pg.85], န ပုရိသာပေက္ခနဝသေန. ယထာ ဟိ ဝလာဟကူပမာဝသေန ကထိတံ, ‘‘ကထဉ္စ ပုဂ္ဂလော ဂဇ္ဇိတာ စ ဝဿိတာ စ ဟောတီ’’တိ ပါဠိယံ ဂဇ္ဇနံ ဝဿနဉ္စ ပုဂ္ဂလေ အလဗ္ဘမာနမ္ပိ ဝလာဟကဿ ဂဇ္ဇနဝဿနသဒိသတာယ ဘာသနကရဏကြိယာယူပလဗ္ဘနတော ဝတ္တဗ္ဗမေဝ ဟောတိ, ဧဝမေဝ နိဗ္ဘယဘာဝေန သီဟနာဒသဒိသိယာ ဝါစာယ နိစ္ဆရဏတော သီဟော ဝိယ နဒတီတိ အဝိဘာဝိတတ္ထဝန္တေန နဒသဒ္ဒေန မနုဿဘာသာပိ နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗာ ဟောတိ. येथे काही लोक विचारू शकतात की, 'तुम्ही सांगितलेला 'नद अव्यत्तशब्दे' (अस्पष्ट आवाजात) हा धातू नेहमी अस्पष्ट आवाजासाठीच वापरला जातो की कधी स्पष्ट वाणीसाठी देखील वापरला जातो?' उत्तर: तो नेहमी अस्पष्ट आवाजासाठीच वापरला जातो. जर असे असेल, तर 'सीहो नदति' (सिंह गर्जना करतो) इत्यादी वाक्यांमध्ये प्राण्यांच्या आवाजाच्या स्वरूपात अर्थ स्पष्ट न झाल्यामुळे 'नद' शब्द अस्पष्ट आवाज मानला जाऊ शकतो, परंतु 'हा मनुष्य सिंहासारखा गर्जना करतो (नदति)' इत्यादी वाक्यांमध्ये मानवी भाषा देखील अस्पष्ट आवाज ठरेल का? तसे नाही. मानवी भाषा स्पष्ट असली तरी, 'सिंहासारखा' अशा उपमेच्या दृष्टीने सिंह या पदाच्या अर्थाच्या अपेक्षेने 'नद' शब्दाने ती दर्शवली जाते, मनुष्याच्या अपेक्षेने नाही. जसे ढगाच्या उपमेने (वलाहक उपमा) पाळीमध्ये म्हटले आहे की, 'मनुष्य गर्जना करणारा आणि वर्षाव करणारा कसा होतो?' येथे गर्जना आणि वर्षाव मनुष्यामध्ये प्रत्यक्ष नसले तरी, ढगाच्या गर्जना व वर्षावासारख्या त्याच्या बोलण्याच्या क्रियेमुळे ते बोलणे योग्यच ठरते. त्याचप्रमाणे, निर्भयपणे सिंहगर्जनेसारखी वाणी बाहेर पडत असल्यामुळे 'सिंहासारखा गर्जना करतो' अशा प्रकारे अस्पष्ट अर्थ असणाऱ्या 'नद' शब्दाने मानवी भाषा देखील दर्शवली जाते. ဧတ္ထ စ အမ္ဗဖလူပမာဒယောပိ အာဟရိတွာ ဒဿေတဗ္ဗာ. န ဟိ ပက္ကာမကတာဒီနိ ပုဂ္ဂလေသု ဝိဇ္ဇန္တိ, အထ ခေါ အမ္ဗဖလာဒီသု ဧဝ ဝိဇ္ဇန္တိ, ဧဝံ သန္တေပိ ဘဂဝတာ အညေနာကာရေန သဒိသတ္တံ ဝိဘာဝေတုံ အမ္ဗဖလူပမာဒယော ဝုတ္တာ, ဧဝမေဝ နဒသဒ္ဒေါ အဗျတ္တသဒ္ဒဘာဝေန တိရစ္ဆာနဂတသဒ္ဒါဒီသု ဧဝ ဝတ္တဗ္ဗောပိ အတ္ထန္တရဝိဘာဝနတ္ထံ ‘‘သီဟော ဝိယ နဒတီ’’တိအာဒီသု မနုဿဘာသာယမ္ပိ ရူဠှိယာ ဝုတ္တော, န သဘာဝတော. တထာ ဟိ သဘာဝတော နဒသဒ္ဒေနပိ ဝဿိတသဒ္ဒါဒီဟိပိ မနုဿဘာသာ နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗာ န ဟောတီတိ. ယဒိ ဧဝံ – आणि येथे आंब्याच्या फळाची उपमा (अम्बफलूपमा) इत्यादी उदाहरणे देऊन स्पष्ट केले पाहिजे. कारण पिकलेले किंवा कच्चे असणे इत्यादी गुण मनुष्यांमध्ये नसतात, तर ते आंब्याच्या फळांमध्येच असतात. असे असूनही भगवंतांनी दुसऱ्या प्रकारे समानता स्पष्ट करण्यासाठी आंब्याच्या फळाची उपमा इत्यादी सांगितले आहे. त्याचप्रमाणे, 'नद' शब्द अस्पष्ट आवाजाच्या स्वरूपात प्राण्यांच्या आवाजासाठीच वापरला पाहिजे, तरीही दुसरा अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी 'सिंहासारखा गर्जना करतो' इत्यादी वाक्यांमध्ये मानवी भाषेसाठी देखील तो रूढीने वापरला गेला आहे, स्वभावाने नाही. कारण स्वभावाने 'नद' शब्दाने किंवा 'वस्सित' (प्राण्यांचा ओरडणे) इत्यादी शब्दांनी मानवी भाषा दर्शवली जात नाही. जर असे असेल तर – ‘‘သုဝိဇာနံ သိင်္ဂါလာနံ, သကုဏာနဉ္စ ဝဿိတံ; မနုဿဝဿိတံ ရာဇ, ဒုဗ္ဗိဇာနတရံ တတော’’တိ “हे राजा! कोल्ह्यांचे आणि पक्ष्यांचे ओरडणे (वस्सितं) ओळखणे सोपे आहे; परंतु मनुष्याचे ओरडणे (बोलणे/वर्तन) त्यापेक्षाही अधिक कठीण आहे.” ဧတ္ထ ကသ္မာ ဝဿိတသဒ္ဒေန မနုဿဘာသာ နိဒ္ဒိသိယတီတိ? သစ္စံ မနုဿဘာသာပိ ဝဿိတသဒ္ဒေန နိဒ္ဒိဋ္ဌာ ဒိဿတိ, ဧဝံ သန္တေပိ သာ ‘‘သုဝိဇာနံ သိင်္ဂါလာနံ, သကုဏာနဉ္စ ဝဿိတ’’န္တိ ဝဿိတသဒ္ဒဝသေန ပယောဂဿ ဝစနတော တဒနုရူပံ နိဒ္ဒိသိတုံ အရဟတီတိ မန္တွာ ဝဿိတသဒ္ဒသဒိသီ နိဒ္ဒိဋ္ဌာ. န ဟိ ‘‘မနုဿော ဝဿတီ’’တိအာဒိနာ ဝိသုံ ပယောဂါ ဒိဿန္တိ, ‘‘သကုဏော ဝဿတိ, ကူဇတီ’’တိအာဒိနာ ပန ပယောဂါ ဒိဿန္တိ, တသ္မာ ‘‘သင်္ဂါမံ ဩတရိတွာန, သီဟနာဒံ နဒိ ကုသော’’တိအာဒီသု ဝိယ ယထာရဟံ [Pg.86] အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဧဝံ နဒဓာတု သဘာဝတော အဗျတ္တသဒ္ဒေယေဝ ဟောတိ, န ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. येथे 'वस्सित' (vassita) शब्दाने मानवी भाषा का दर्शवली आहे? हे खरे आहे की मानवी भाषा देखील 'वस्सित' शब्दाने दर्शवलेली दिसते, तरीही 'सुविजानं सिङ्गालानं, सकुळानञ्च वस्सितं' या वाक्यात 'वस्सित' शब्दाच्या प्रयोगामुळे, त्याला अनुरूप दर्शवणे योग्य आहे असे मानून 'वस्सित' शब्दासारखी ती दर्शवली आहे. कारण 'मनुष्य ओरडतो (वस्सति)' असे स्वतंत्र प्रयोग आढळत नाहीत, तर 'पक्षी ओरडतो (वस्सति), कूजन करतो (कूजति)' असे प्रयोग आढळतात. म्हणून, 'संग्रामात उतरून कुसाने सिंहगर्जना केली' (सङ्गामं ओतरित्वान, सीहनादं नदि कुसो) इत्यादी वाक्यांप्रमाणे योग्य तो अर्थ घ्यावा. अशा प्रकारे, 'नद' धातू स्वभावाने अस्पष्ट आवाजासाठीच असतो, स्पष्ट वाणीसाठी नाही, असे जाणावे. အဒ္ဒ ဂတိယံ ယာစနေ စ. အဒ္ဒတိ. 'अद्द' (adda) धातू गती आणि याचना (मागणे) या अर्थात आहे. 'अद्दति' (addati). နဒ္ဒ ဂဒ္ဒ သဒ္ဒေ. နဒ္ဒတိ. ဂဒ္ဒတိ. 'नद्द' (nadda) आणि 'गद्द' (gadda) धातू आवाजाच्या (सद्दे) अर्थात आहेत. 'नद्दति' (naddati), 'गद्दति' (gaddati). တဒ္ဒ ဟိံသာယံ. တဒ္ဒတိ. 'तद्द' (tadda) धातू हिंसेच्या (हिंसायं) अर्थात आहे. 'तद्दति' (taddati). ကဒ္ဒ ကုစ္ဆိတေ သဒ္ဒေ. ကဒ္ဒတိ. ကဒ္ဒမော. 'कद्द' (kadda) धातू निंद्य/वाईट आवाजाच्या (कुच्छिते सद्दे) अर्थात आहे. 'कद्दति' (kaddati). 'कद्दमो' (kaddamo - चिखल). ခဒ္ဒ ဒံသနေ. ဒံသနမိဟ ဒန္တသုကတကတ္တိကာ ကြိယာ အဘိဓီယတေ. သဘာဝတ္တာ ဓာတုယာ သာဓနပ္ပယောဂသမဝါယီ. ခဒ္ဒတိ. 'खद्द' (धातू) दंसन (चावणे/खाणे) या अर्थात आहे. येथे 'दंसन' म्हणजे दातांनी चांगल्या प्रकारे केलेली क्रिया (चावण्याची क्रिया) म्हटली जाते. धातूच्या स्वभावामुळे साधनांच्या (दातांच्या) प्रयोगाचा समवाय (संबंध) होतो. 'खद्दति' (तो चावतो/खातो). အဒိ ဗန္ဓနေ. အန္ဒတိ. အန္ဒု. အန္ဒုသဒ္ဒေါပနေတ္ထ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ဂဟေတဗ္ဗော ပါဠိယံ ဣတ္ထိလိင်္ဂပ္ပယောဂဒဿနတော ‘‘သေယျထာပိ ဝါသေဋ္ဌ အယံ အစိရဝတီ နဒီ ပူရာ ဥဒကဿ သမတိတ္တိကာ ကာကပေယျာ, အထ ပုရိသော အာဂစ္ဆေယျ ပါရတ္ထိကော ပါရဂဝေသီ ပါရဂါမီ ပါရံ တရိတုကာမော, သော ဩရိမတီရေ ဒဠှာယ အန္ဒုယာ ပစ္ဆာဗာဟံ ဂါဠှဗန္ဓနဗန္ဓော’’တိ. တတြ အန္ဒူတိ ယံ ကိဉ္စိ ဗန္ဓနံ ဝါ. ‘‘ယထာ အန္ဒုဃရေ ပုရိသော’’တိ ဟိ ဝုတ္တံ. ဗန္ဓနဝိသေသော ဝါ, ‘‘အန္ဒုဗန္ဓနာဒီနိ ဆိန္ဒိတွာ ပလာယိံသူ’’တိ ဟိ ဝုတ္တံ. အပိစ အန္ဒနဋ္ဌေန ဗန္ဓနဋ္ဌေန အန္ဒု ဝိယာတိပိ အန္ဒု, ပဉ္စ ကာမဂုဏာ. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ ‘‘ဣမေ ခေါ ဝါသေဋ္ဌ ပဉ္စ ကာမဂုဏာ အရိယဿ ဝိနယေ အန္ဒူတိပိ ဗန္ဓနန္တိပိ ဝုစ္စန္တီ’’တိ. နိဂ္ဂဟီတာဂမဝသေနာယံ ဓာတု ဝုတ္တာ. ကတ္ထစိ ပန ဝိဂတနိဂ္ဂဟီတာဂမောပိ ဟောတိ, တံ ယထာ? ‘‘အဝိဇ္ဇာ ဘိက္ခဝေ ပုဗ္ဗင်္ဂမာ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ သမာပတ္တိယာ အနွဒေဝ အဟိရိက’’န္တိ ပါဠိ. ဧတ္ထ အနုအန္ဒတိ အနုဗန္ဓတီတိ အနွဒိ. အနွဒိ ဧဝ အနွဒေဝါတိ ကိတဝိဂ္ဂဟော သန္ဓိဝိဂ္ဂဟော စ [Pg.87] ဝေဒိတဗ္ဗော. တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘အနွဒေဝါတိ အနုဗန္ဓမာနမေဝါ’’တိ ဝုတ္တံ, တံ အဝိဇ္ဇမဟိရိကံ အနုဗန္ဓမာနမေဝ ဟောတီတိ အတ္ထော. 'अदि' (धातू) बंधन (बांधणे) या अर्थात आहे. 'अन्दति' (तो बांधतो). 'अन्दु' (साखळी/बेडी). येथे 'अन्दु' हा शब्द स्त्रीलिंगी मानला पाहिजे, कारण पाळीमध्ये त्याचा स्त्रीलिंगी प्रयोग दिसून येतो: "जसे की, वासेठ्ठ, ही अचिरवती नदी पाण्याने काठोकाठ भरलेली आहे की कावळ्यालाही सहज पाणी पिता यावे, आणि एखादा पलीकडे जाऊ इच्छिणारा, पलीकडचा किनारा शोधणारा, पलीकडे जाण्याची इच्छा असणारा माणूस आला, आणि तो या तीरावर मजबूत साखळीने (अन्दुया) पाठीमागे हात बांधून घट्ट बांधला गेला असेल..." तेथे 'अन्दू' म्हणजे कोणतेही बंधन किंवा बेडी होय. कारण "जसा तुरुंगात (अन्दुघरे) माणूस" असे म्हटले आहे. किंवा विशिष्ट प्रकारचे बंधन, कारण "साखळ्या व बंधने तोडून ते पळून गेले" असे म्हटले आहे. शिवाय, बांधण्याच्या अर्थाने 'अन्दु' सारखे जे आहे ते 'अन्दु' म्हणजेच पाच कामगुण (पंच कामगुणा) होत. भगवानांनी म्हटलेच आहे: "वासेठ्ठ, हे पाच कामगुण आर्यांच्या विनयात 'अन्दु' (बेडी) आणि 'बंधन' असेही म्हटले जातात." हा धातू निग्गहीत (अनुस्वार) आगम होऊन सांगितला आहे. परंतु काही ठिकाणी निग्गहीत आगम नसलेलाही असतो, तो कसा? "भिक्खूहो, अकुशल धर्मांच्या प्राप्तीसाठी अविद्या ही अग्रगामी आहे, आणि तिच्या पाठोपाठ (अन्वदेव) अहिरिक (निर्लज्जपणा) येतो" ही पाळी आहे. येथे 'अनुअन्दति' म्हणजे 'अनुबन्धति' (पाठोपाठ बांधणे) यावरून 'अन्वदि' बनतो. 'अन्वदि' म्हणजेच 'अन्वदेव' असा कृत्-विग्रह आणि संधि-विग्रह समजला पाहिजे. म्हणूनच अट्ठकथेत म्हटले आहे: "अन्वदेव म्हणजे पाठोपाठ येणारेच (अनुबन्धमानमेव)", याचा अर्थ असा की ती अविद्या अहिरिकाच्या पाठोपाठ येणारीच असते. ဣဒိ ပရမိဿရိယေ ဣန္ဒတိ. ဣန္ဒနံ, ဣန္ဒော. 'इदि' (धातू) परम ऐश्वर्य (सर्वोच्च प्रभुत्व) या अर्थात आहे. 'इन्दति' (तो प्रभुत्व गाजवतो). 'इन्दनं' (प्रभुत्व गाजवणे), 'इन्दो' (इंद्र/स्वामी). ဧတ္ထ ဣန္ဒောတိ အဓိပတိဘူတော ယော ကောစိ. သော ဟိ ဣန္ဒတိ ပရေသု ဣဿရိယံ ပါပုဏာတီတိ ဣန္ဒောတိ ဝုစ္စတိ. အပိစ ဣန္ဒောတိ သက္ကော. သက္ကဿ ဟိ အနေကာနိ နာမာနိ – येथे 'इन्दो' म्हणजे अधिपती (स्वामी) झालेला कोणताही प्राणी. कारण तो इतरांवर प्रभुत्व गाजवतो, ऐश्वर्य प्राप्त करतो, म्हणून त्याला 'इन्दो' म्हटले जाते. शिवाय, 'इन्दो' म्हणजे सक्क (शक्र/इंद्र) होय. सक्काची अनेक नावे आहेत – သက္ကော ပုရိန္ဒဒေါ ဣန္ဒော, ဝတြဘူ ပါကသာသနော; သဟဿနေတ္တော မဃဝါ, ဒေဝရာဇာ သုဇမ္ပတိ. सक्क (शक्र), पुरिन्दद, इन्द (इंद्र), वत्रभू, पाकसासन; सहस्सनेत्त (सहस्रनेत्र), मघवा, देवराजा, सुजम्पति (सुजाचा पती). သဟဿက္ခော ဒသသတ-လောစနော ဝဇိရာဝုဓော; ဟူတပတိ မဟိန္ဒော စ, ကောသိယော ဒေဝကုဉ္ဇရော. सहस्सक्ख (सहस्राक्ष), दससत-लोचन (हजार डोळे असलेला), वजिरावुध (वज्रायुध धारण करणारा); हूतपति, महिन्द (महेंद्र), कोसिय (कौशिक) आणि देवकुञ्जर (देवांमध्ये श्रेष्ठ). သုရာဓိပေါ သုရနာထော, ဝါသဝေါ တိဒိဝါဓိဘူ; ဇမ္ဗာရိ စေဝ ဝဇိရ-ဟတ္ထော အသုရသာသနော; ဂန္ဓရာဇာ ဒေဝိန္ဒော, သုရိန္ဒော အသုရာဘိဘူတိ. सुराधिप, सुरनाथ, वासव, तिदिवाधिभू (त्रयस्त्रिंश स्वर्गाचा स्वामी); जम्बारि, वजिरहत्थ (हातात वज्र असलेला), असुरसासन (असुरांवर शासन करणारा); गन्धराजा, देविन्द (देवांचा इंद्र), सुरिन्द आणि असुराभिभू (असुरांना पराभूत करणारा). ဧဝံ အနေကာနိ နာမာနိ. ဧကောပိ ဟိ အတ္ထော အနေကသဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တတာယ အနေကနာမော. တေနာဟ ဘဂဝါ – अशी अनेक नावे आहेत. कारण एकच अर्थ (वस्तू) शब्दांच्या प्रवृत्तीच्या अनेक कारणांमुळे (सद्दप्पवत्तिनिमित्त) अनेक नावांनी ओळखला जातो. म्हणूनच भगवानांनी म्हटले आहे – သက္ကော မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒော ပုဗ္ဗေ မနုဿဘူတော သမာနော မဃော နာမ မာဏဝေါ အဟောသိ, တသ္မာ ‘‘မဃဝါ’’တိ ဝုစ္စတိ. သက္ကော မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒော ပုဗ္ဗေ မနုဿဘူတော သမာနော ပုရေ ဒါနံ အဒါသိ, တသ္မာ ‘‘ပုရိန္ဒဒေါ’’တိ ဝုစ္စတိ. သက္ကော မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒော ပုဗ္ဗေ မနုဿဘူတော သမာနော သက္ကစ္စံ ဒါနံ အဒါသိ, တသ္မာ ‘‘သက္ကော’’တိ ဝုစ္စတိ. သက္ကော မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒော ပုဗ္ဗေ မနုဿဘူတော သမာနော အာဝါသံ အဒါသိ, တသ္မာ ‘‘ဝါသဝေါ’’တိ ဝုစ္စတိ. သက္ကော မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒော သဟဿံ အတ္ထာနံ မုဟုတ္တေန [Pg.88] စိန္တေတိ, တသ္မာ ‘‘သဟဿက္ခော’’တိ ဝုစ္စတိ. သက္ကဿ မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒဿ သုဇာ နာမ အသုရကညာ ပဇာပတိ, တသ္မာ ‘‘သုဇမ္ပတီ’’တိ ဝုစ္စတိ. သက္ကော မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒော ဒေဝါနံ တာဝတိံသာနံ ဣဿရိယာဓိပစ္စံ ရဇ္ဇံ ကာရေတိ, တသ္မာ ‘‘ဒေဝါနမိန္ဒော’’တိ ဝုစ္စတီတိ. "महाली, देवांचा राजा सक्क पूर्वजन्मी मनुष्य असताना 'मघ' नावाचा तरुण होता, म्हणून त्याला 'मघवा' म्हटले जाते. महाली, देवांचा राजा सक्क पूर्वजन्मी मनुष्य असताना त्याने नगरात (किंवा आधी) दान दिले होते, म्हणून त्याला 'पुरिन्दद' म्हटले जाते. महाली, देवांचा राजा सक्क पूर्वजन्मी मनुष्य असताना त्याने आदरपूर्वक (सक्कच्चं) दान दिले होते, म्हणून त्याला 'सक्क' म्हटले जाते. महाली, देवांचा राजा सक्क पूर्वजन्मी मनुष्य असताना त्याने निवासस्थान (आवास) दिले होते, म्हणून त्याला 'वासव' म्हटले जाते. महाली, देवांचा राजा सक्क एका क्षणात हजार गोष्टींचा विचार करतो, म्हणून त्याला 'सहस्सक्ख' (सहस्राक्ष) म्हटले जाते. महाली, देवांचा राजा सक्क याची पत्नी (पजापति) 'सुजा' नावाची असुरकन्या आहे, म्हणून त्याला 'सुजम्पति' म्हटले जाते. महाली, देवांचा राजा सक्क तावतिंस (त्रयस्त्रिंश) देवांवर आधिपत्य व राज्य करतो, म्हणून त्याला 'देवानामिन्य' (देवांचा राजा) म्हटले जाते." ဧဝမေကဿာပိ အတ္ထဿ အနေကာနိ သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တာနိ ဒိဿန္တိ. अशा प्रकारे, एकाच अर्थासाठी (वस्तूसाठी) शब्दांच्या प्रवृत्तीची अनेक कारणे (सद्दप्पवत्तिनिमित्त) दिसून येतात. တထာ ဟိ ယေန ပဝတ္တိနိမိတ္တေန တာဝတိံသာဓိပတိမှိ ဣန္ဒသဒ္ဒေါ ပဝတ္တော, န တေန တတ္ထ သက္ကာဒိသဒ္ဒါ ပဝတ္တာ, အထ ခေါ အညေန. တထာ ယေန သမ္မာဒိဋ္ဌိယံ ပညာသဒ္ဒေါ ပဝတ္တော, န တေန တတ္ထ ဝိဇ္ဇာဒိသဒ္ဒါ. ယေန သမ္ပယုတ္တဓမ္မာနံ ပုဗ္ဗင်္ဂမဘာဝေန ဥပ္ပန္နဓမ္မသ္မိံ စိတ္တသဒ္ဒေါ ပဝတ္တော, န တေန တတ္ထ ဝိညာဏာဒိသဒ္ဒါ. န ဟိ ဝိနာ ကေနစိ ပဝတ္တိနိမိတ္တေန သဒ္ဒေါ ပဝတ္တတီတိ. ဧကောပိ အတ္ထော သမ္မုတျတ္ထော စ ပရမတ္ထော စ အနေကသဒ္ဒပ္ပဝ္တ္တိနိမိတ္တတာယ အနေကနာမောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. तसेच, ज्या प्रवृत्तीच्या कारणामुळे तावतिंसच्या अधिपतीसाठी 'इन्द' शब्द प्रवृत्त झाला आहे, त्या कारणाने तेथे 'सक्क' इत्यादी शब्द प्रवृत्त झाले नाहीत, तर दुसऱ्या कारणाने झाले आहेत. तसेच, ज्या कारणाने सम्यक् दृष्टीमध्ये (सम्मादिट्ठि) 'पञ्ञा' (प्रज्ञा) शब्द प्रवृत्त झाला आहे, त्या कारणाने तेथे 'विज्जा' (विद्या) इत्यादी शब्द प्रवृत्त झाले नाहीत. ज्या कारणाने संप्रयुक्त धर्मांच्या (सहयोगी मानसिक घटकांच्या) अग्रगामी असण्याने उत्पन्न झालेल्या धर्मामध्ये 'चित्त' शब्द प्रवृत्त झाला आहे, त्या कारणाने तेथे 'विञ्ञाण' (विज्ञान) इत्यादी शब्द प्रवृत्त झाले नाहीत. कारण कोणत्याही प्रवृत्तीच्या कारणाशिवाय शब्द प्रवृत्त होत नाही. म्हणून, एकच अर्थ—मग तो संवृति-अर्थ (सम्मतियत्थ - व्यावहारिक सत्य) असो वा परमार्थ-अर्थ (परमत्थ) असो—शब्दांच्या प्रवृत्तीच्या अनेक कारणांमुळे अनेक नावांनी युक्त असतो, असे समजले पाहिजे. ဧတ္ထ သိယာ ‘‘နာမာနီတိ ဝဒထ, ကိံ နာမံ နာမာ’’တိ. ဝုစ္စတေ – ဤဒိသေ ဌာနေ အတ္ထေသု သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တံ ‘‘နာမ’’န္တိ ဂဟိတံ, ယံ ‘‘လိင်္ဂ’’န္တိပိ ဝုစ္စတိ. တထာ ဟိ ‘‘နာမ’’န္တိ စ ‘‘လိင်္ဂ’’န္တိ စ သဒ္ဒေါပိ ဝုစ္စတိ, ‘‘အညံ သောဘနံ နာမံ ပရိယေသိဿာမိ. လိင်္ဂဉ္စ နိပ္ပဇ္ဇတေ’’တိအာဒီသု ဝိယ. အသဘာဝဓမ္မဘူတံ နာမပညတ္တိသင်္ခါတံ အတ္ထေသု သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တမ္ပိ ဝုစ္စတိ ‘‘နာမဂေါတ္တံ န ဇီရတိ. သတလိင်္ဂေါ’’တိအာဒီသု ဝိယ. ဣတိ နာမသဒ္ဒေနပိ လိင်္ဂသဒ္ဒေနပိ သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တဿ ကထနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တဉ္စ နာမ လောကသင်္ကေတသိဒ္ဓေါ တံတံဝစနတ္ထနိယတော သာမညာကာရဝိသေသောတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. သော ဧဝံဘူတောယေဝ သာမညာကာရဝိသေသော နာမ ပညတ္တီတိ ပုဗ္ဗာစရိယာ ဝဒန္တိ[Pg.89]. သော ဟိ တသ္မိံ တသ္မိံ အတ္ထေ သဒ္ဒံ နာမေတိ တဿ တဿ အတ္ထဿ နာမသညံ ကရောတီတိ နာမံ, ပကာရေဟိ ဉာပနတော ပညတ္တိ စ. သဝိညတ္တိဝိကာရဿ ပန သဒ္ဒဿ သမ္မုတိပရမတ္ထသစ္စာနံ ပကာရေဟိ ဉာပနတော ပညတ္တိဘာဝေ ဝတ္တဗ္ဗမေဝ နတ္ထိ. သဒ္ဒဿေဝ ဟိ ဧကန္တေန ပညတ္တိဘာဝေါ ဣစ္ဆိတဗ္ဗော ‘‘နိရုတ္တိပဋိသမ္ဘိဒါ ပရိတ္တာရမ္မဏာ’’တိ စ ‘‘နိရုတ္တိပဋိသမ္ဘိဒါ ပစ္စုပ္ပန္နာရမ္မဏာ’’တိ စ ‘‘နိရုတ္တိပဋိသမ္ဘိဒါ ဗဟိဒ္ဓါရမ္မဏာ’’တိ စ ပါဠိဒဿနတော. ဣဓ ပန သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တာဓိကာရတ္တာ နာမဝသေန အတ္ထော ပကာသိတော. ဧဝံ အနေကဝိဓဿ သာမညာကာရဝိသေသောတိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ဂဟိတဿ နာမပညတ္တိသင်္ခါတဿ သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တဿ ဝသေန ဧကောပိ ဉေယျတ္ထော အနေကလိင်္ဂေါတိ ဂဟေတဗ္ဗော. တေနာဟ အာယသ္မာ သုဟေမန္တော ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေါ – येथे अशी शंका येऊ शकते: "तुम्ही 'नावे' असे म्हणता, पण 'नाम' म्हणजे काय?" उत्तर दिले जाते – अशा ठिकाणी अर्थांमधील शब्दांच्या प्रवृत्तीच्या कारणाला (सद्दप्पवत्तिनिमित्त) 'नाम' मानले गेले आहे, ज्याला 'लिंग' (चिन्ह) असेही म्हणतात. कारण 'नाम' आणि 'लिंग' हे शब्द स्वतः शब्दासाठीही वापरले जातात, जसे की "मी दुसरे एखादे सुंदर नाव (नाम) शोधेन. आणि लिंग (चिन्ह) सिद्ध होते" इत्यादींमध्ये. स्वभाव-धर्म नसलेले (अस्वभावधर्मभूत) आणि नाम-प्रज्ञप्ती (नामपञ्ञत्ति) म्हणून ओळखले जाणारे अर्थांमधील शब्दांच्या प्रवृत्तीचे कारणही 'नाम' किंवा 'लिंग' म्हटले जाते, जसे की "नाम आणि गोत्र (नामगोत्त) कधी नष्ट होत नाही. शंभर लिंगे (सतिलिंगो) असलेला" इत्यादींमध्ये. अशा प्रकारे, 'नाम' शब्दाने आणि 'लिंग' शब्दानेही शब्दांच्या प्रवृत्तीच्या कारणाचे कथन समजले पाहिजे. आणि शब्दांच्या प्रवृत्तीचे कारण असलेले 'नाम' हे लोकसंकेताने सिद्ध झालेले, त्या त्या शब्दाच्या अर्थाशी संबंधित असलेले विशिष्ट सामान्य लक्षण (सामञ्ञाकारविसेस) मानले पाहिजे. प्राचीन आचार्य (पुब्बाचरिय) म्हणतात की, अशा प्रकारचा विशिष्ट सामान्य लक्षण म्हणजेच 'नाम-प्रज्ञप्ती' होय. कारण ते त्या त्या अर्थामध्ये शब्दाला झुकवते (नामेति) आणि त्या त्या अर्थाची नाम-संज्ञा तयार करते, म्हणून ते 'नाम' आहे; आणि विविध प्रकारे ज्ञान करून देणारे असल्यामुळे ते 'प्रज्ञप्ती' (पञ्ञत्ति) आहे. परंतु, विज्ञाप्तीचा विकार असलेल्या शब्दाच्या बाबतीत, तो संवृति (व्यावहारिक) आणि परमार्थ सत्याचे विविध प्रकारे ज्ञान करून देतो, म्हणून तो प्रज्ञप्ती-रूप आहे याबद्दल काही सांगण्याची गरजच नाही. कारण शब्दाचाच प्रज्ञप्ती-भाव निश्चितपणे स्वीकारला पाहिजे, जसे की पाळी पाठात दिसून येते: "निरुक्ति-पटिसम्भिदा (भाषेचे विश्लेषण ज्ञान) परीत्त-आरम्मण (मर्यादित विषय) असलेली असते", "निरुक्ति-पटिसम्भिदा वर्तमान-आरम्मण असलेली असते" आणि "निरुक्ति-पटिसम्भिदा बहिद्धा-आरम्मण (बाह्य विषय) असलेली असते". परंतु येथे शब्दांच्या प्रवृत्तीच्या कारणाचा अधिकार असल्यामुळे 'नाम' या रूपाने अर्थ स्पष्ट केला आहे. अशा प्रकारे, प्राचीन आचार्यांनी स्वीकारलेल्या विविध प्रकारच्या विशिष्ट सामान्य लक्षणांच्या म्हणजेच नाम-प्रज्ञप्ती संज्ञेच्या शब्दांच्या प्रवृत्तीच्या कारणावरून, एकच ज्ञेय अर्थ (ज्ञेय वस्तू) अनेक लिंगांनी (चिन्हांनी) युक्त मानला पाहिजे. म्हणूनच प्रभिन्नपटिसम्भिदा (भेदक ज्ञान) प्राप्त आयुष्यमान सुहेमन्त यांनी म्हटले आहे – ‘‘သတလိင်္ဂဿ အတ္ထဿ, သတလက္ခဏဓာရိနော; ဧကင်္ဂဒဿီ ဒုမ္မေဓော, သတဒဿီဝ ပဏ္ဍိတော’’တိ. "शंभर लिंगे (चिन्हे) असलेल्या आणि शंभर लक्षणे धारण करणाऱ्या अर्थाचा (वस्तूचा) मूर्ख माणूस केवळ एकच भाग पाहतो (एक अंग पाहणारा मूर्ख ठरतो), तर पंडित माणूस शंभर (सर्व) अंगांनी पाहणारा असतो." ဧဝံ သဗ္ဗာဘိဓာနေသုပိ ဣမိနာ နယေန ယထာရဟံ အတ္ထော ဝိဘာဝေတဗ္ဗော နယညူဟိ. अशा प्रकारे, सर्वच अभिधानांमध्ये (नावांमध्ये) पद्धती जाणणाऱ्यांनी (नयज्ञ लोकांनी) याच पद्धतीने योग्य प्रकारे अर्थ स्पष्ट केला पाहिजे. ဝိဒိ အဝယဝေ. ဝိန္ဒတိ. ယဒိ အဘိဓာနမတ္ထိ, ‘‘ဝိန္ဒော’’တိ ဒိဿတိ. ယထာ ကဏ္ဍတိ. ကဏ္ဍော. विदि अवयव (अवयव करणे/भाग करणे) या अर्थात. विन्दति (मिळवतो/जाणतो). जर संज्ञा असेल, तर 'विन्दो' असे दिसते. जसे कण्डति (खाजवतो/वेगळे करतो). कण्डो (काण्ड/भाग). ခိဒိ အဝယဝေတိ စန္ဒဝိဒုနော ဝဒန္တိ. တေသံ မတေ ‘‘ခိန္ဒတီ’’တိ ရူပံ. खिदि अवयव (भाग करणे) या अर्थात, असे चन्द्राचे अनुयायी (चान्द्र व्याकरणकार) म्हणतात. त्यांच्या मते 'खिन्दति' असे रूप होते. နိဒိ ကုစ္ဆာယံ. ကုစ္ဆာသဒ္ဒေါ ဂရဟတ္ထော. နိန္ဒတိ. နိန္ဒာ. निदि कुत्सा (निंदा/धिक्कार) या अर्थात. 'कुत्सा' हा शब्द निंदा किंवा निर्भर्त्सना या अर्थाचा वाचक आहे. निन्दति (निंदा करतो). निन्दा (निंदा). ပေါရာဏမေတံ အတုလ, နေတံ အဇ္ဇတနာမိဝ; နိန္ဒန္တိ တုဏှိမာသီနံ, နိန္ဒန္တိ ဗဟုဘာဏိနံ; မိတဘာဏိမ္ပိ နိန္ဒန္တိ, နတ္ထိ လောကေ အနိန္ဒိတော. हे अतुला! हा सनातन नियम आहे, हा केवळ आजचाच नाही; शांत बसलेल्याचीही निंदा करतात, खूप बोलणाऱ्याचीही निंदा करतात आणि मोजकेच बोलणाऱ्याचीही निंदा करतात. या जगात असा कोणीही नाही ज्याची निंदा केली जात नाही. အဝဏ္ဏော [Pg.90] အဂုဏော နိန္ဒာ, ဂရဟာ အယသောပိ စ; အသိလောကော အကိတ္တိ စ, အသိလာဃာ စ အတ္ထုတိ. अवण्ण (अपकीर्ती), अगुण (दोष), निंदा, गरहा (निर्भर्त्सना), अयस (अपयश), असिलोक (बदनामी), अकित्ती (अपकीर्ती), असिलाघा (अस्तुती) आणि अत्थुति (अस्तुती) हे समानार्थी शब्द आहेत. နန္ဒ သမိဒ္ဓိယံ. အကမ္မိကာ ဓာတု. နန္ဒတိ ပုတ္တေဟိ ပုတ္တိမာ. နန္ဒာယ နုန မရဏေန. နန္ဒသိ သိရိဝါဟန. နန္ဒနံ ဝနံ. အဘိသဒ္ဒယောဂေ ပနာယံ သကမ္မကောပိ. အဘိနန္ဒန္တိ အာဂတံ နာဘိနန္ဒန္တိ မရဏံ. नन्द समृद्धी (आनंद/समृद्धी) या अर्थात. हा अकर्मक धातू आहे. 'नन्दति पुत्तेहि पुत्तिमा' (पुत्रवान मनुष्य पुत्रांमुळे आनंदित होतो). 'नन्दाया नुन मरणेन' (नक्कीच नंदाच्या मृत्यूने...). 'नन्दसि सिरिवाहना' (हे सिरिवाहन! तू आनंदित होतोस). 'नन्दनं वनं' (नंदन वन). परंतु 'अभि' उपसर्ग जोडल्यास हा सकर्मकही होतो. 'अभिनन्दन्ति आगतं' (आलेल्याचे स्वागत/अभिनंदन करतात), 'नाभिनन्दन्ति मरणं' (मृत्यूचे स्वागत करत नाहीत). သိရီဝ ရူပိနိံ ဒိသွာ, နန္ဒိတံ အာသိ တံ ကုလံ; တေန နန္ဒာတိ မေ နာမံ, သုန္ဒရံ ပဝရံ အဟု. मूर्तिमंत लक्ष्मीप्रमाणे (श्री) तिला पाहून ते कुटुंब आनंदित झाले; म्हणूनच माझे 'नंदा' हे नाव सुंदर आणि श्रेष्ठ झाले. ရမ္မံ ဝေဠုဝနံ ယေန, န ဒိဋ္ဌံ သုဂတာလယံ; န တေန နန္ဒနံ ဒိဋ္ဌံ, ဣတိ မညေ မဟေသယံ. ज्यांनी सुगतांचे (बुद्धांचे) निवासस्थान असलेले रमणीय वेळुवन पाहिले नाही, त्यांनी नंदनवन पाहिले नाही, असे मी मानतो, हे महर्षी! ယေန ဝေဠုဝနံ ဒိဋ္ဌံ, နရနန္ဒနနန္ဒနံ; သုဒိဋ္ဌံ နန္ဒနံ တေန, အမရိန္ဒသုနန္ဒနံ. ज्यांनी मनुष्यांना आनंद देणारे वेळुवन पाहिले आहे, त्यांनी देवराज इंद्राला आनंद देणारे नंदनवन उत्तम प्रकारे पाहिले आहे. စဒိ ဟိလာဒနေ ဒိတ္တိယဉ္စ. ဟိလာဒနံ သုခနံ. ဒိတ္တိ သောဘာ. စန္ဒတိ. စန္ဒနော, စန္ဒော. चदि हिलादन (आनंदित करणे) आणि दित्ती (प्रकाशणे/शोभणे) या अर्थात. 'हिलादन' म्हणजे सुख देणे. 'दित्ती' म्हणजे शोभा. चन्दति (आनंदित करतो/प्रकाशतो). चन्दनो (चंदन), चन्दो (चंद्र). ဧတ္ထ စ စန္ဒနဿပိ အနေကာနိ နာမာနိ – စန္ဒနံ, ဂန္ဓသာရော, မလယဇော, သုဝဏ္ဏစန္ဒနံ, ဟရိစန္ဒနံ, ရတ္တစန္ဒနံ, ဂေါသီတစန္ဒနံ. စန္ဒယတိ ဟိလာဒယတိ သီတဂုဏသမင်္ဂိတာယ သတ္တာနံ ပလိဠာဟံ ဝူပသမေန္တံ သုခံ ဥပ္ပာဒေတီတိ စန္ဒနံ. စန္ဒောတိ သောမော, သောပိ စန္ဒယတိ ဟိလာဒယတိ သီတဂုဏသမ္ပတ္တိယာ အတ္တနော ပဘာယ သတ္တာနံ ပရိဠာဟံ ဝူပသမေန္တော သုခံ ဥပ္ပာဒေတီတိ စန္ဒောတိ ဝုစ္စတိ. အထ ဝါ စန္ဒတိ ဒိဗ္ဗတိ သိရိယာ ဝိရောစတီတိ စန္ဒော. အာဂမဋ္ဌကထာသု ပန ‘‘ဆန္ဒံ ဇနေတီတိ စန္ဒော’’တိ ဝုတ္တံ. တဿာပိ အနေကာနိ နာမာနိ – आणि येथे चंदनाचीही अनेक नावे आहेत – चंदन, गंधसार, मलयज, सुवण्णचंदन (सुवर्णचंदन), हरिचंदन, रत्तचंदन (रक्तचंदन), गोसीतचंदन (गोशीतचंदन). जे आपल्या शीतल गुणाने प्राण्यांचा दाह शांत करून त्यांना आनंदित करते (चन्दयति/हिलादयति) आणि सुख उत्पन्न करते, ते 'चंदन' होय. 'चन्दो' म्हणजे सोम (चंद्र); तो देखील आपल्या शीतल गुणाने आणि स्वतःच्या प्रकाशाने प्राण्यांचा दाह शांत करून त्यांना आनंदित करतो आणि सुख उत्पन्न करतो, म्हणून त्याला 'चन्दो' (चंद्र) म्हटले जाते. किंवा, जो आपल्या सौंदर्याने प्रकाशतो (चन्दति/दिब्बति) आणि शोभून दिसतो, तो 'चन्दो' होय. आगम-अट्ठकथांमध्ये (टीकांमध्ये) मात्र 'जो छंद (इच्छा) उत्पन्न करतो तो चंद्र' (छन्दं जनेतीति चन्दो) असे म्हटले आहे. त्याचीही अनेक नावे आहेत – စန္ဒော [Pg.91] နက္ခတ္တရာဇာ စ, ဣန္ဒု သောမော နိသာကရော; စန္ဒိမာ မာ နိသာနာထော, ဩသဓီ သော နိသာပတိ. चन्दो (चंद्र), नक्खत्तराजा (नक्षत्रराज), इन्दु, सोमो (सोम), निसाकरो (निशाकर), चन्दिमा (चंद्रमा), मा, niसानाथो (निशानाथ), ओसधी (औषधीपती), सो, निसापति (निशापती). ဥဠုရာဇာ သသင်္ကော စ, ဟိမရံသိ သသီပိ စ; ဒွိဇရာဇာ သသဓရော, တာရာပတိ ဟိမံသု စ. उळूराजा (नक्षत्रराज), ससङ्को (शशांक), हिमरंसि (हिम रश्मी), ससी (शशी), द्विजराजा, ससधरो (शशधर), तारापति (तारापती) आणि हिमंसु (हिमांशू). ကုမုဒဗန္ဓဝေါ စေဝ, မိဂင်္ကော စ ကလာနိဓိ; သုဓံ သုဓိ ဓူပိ ယူပ-ရသ္မိ စေဝ ခမာကရော; နက္ခတ္တေသော စ ရဇနီ-ကရော သုဗ္ဘံသု ဧဝ စ. कुमुदबन्धवो (कुमुदबंधू), मिगङ्को (मृगांक), कलानिधि (कलानिधी), सुधं, सुधि, धूपी, यूप-रस्मि, खमाकरो (क्षमाकर), नक्खत्तेसो (नक्षत्रेश), रजनी-करो (रजनीकर) आणि सुब्भंसु (शुभ्रांशू). တဒိ စေတာယံ. တန္ဒတိ. တန္ဒီ. तदि आळस (तन्द्री/ग्लानी) या अर्थात. तन्दति (आळस करतो). तन्दी (आळस/तन्द्री). ကဒိ ကလဒိ အဝှာနေ ရောဒနေ စ. ကန္ဒတိ, ပက္ကန္ဒတိ. ပက္ကန္ဒုံ, ကန္ဒန္တော, ကလန္ဒကော. कदि आणि कलदि आव्हान (हाक मारणे) आणि रोदन (रडणे) या अर्थात. कन्दति (रडतो/ओरडतो), पक्कन्दति (आक्रोश करतो). पक्कन्दुं (त्यांनी आक्रोश केला), कन्दन्तो (रडणारा), कलन्दको (खार/ओरडणारा). ကလိဒိ ပရိဒေဝနေ. ကလိန္ဒတိ. कलिदि परिदेवन (विलाप करणे) या अर्थात. कलिन्दति (विलाप करतो). ခေါဒ ပဋိဃာတေ. ခေါဒတိ. खोद प्रतिघात (आघात करणे/अडथळा आणणे) या अर्थात. खोदति (आघात करतो/अडवतो). ခန္ဒ ဂတိသောသနေသု. ခန္ဒတိ. ခန္ဒော. ခန္ဒော နာမ ဧကော ဒေဝေါ, ယော ‘‘ကုမာရော သတ္တိဓရော’’တိ စ ဝုစ္စတိ. खन्द गती (जाणे) आणि सोसन (सुकवणे/नाश करणे) या अर्थात. khन्दति (जातो/सुकवतो). खन्दो (स्कंद). 'खन्दो' नावाचा एक देव आहे, ज्याला 'कुमारो सत्तिधरो' (शक्ती/भाला धारण करणारा कुमार) असेही म्हटले जाते. ခုဒိ အာပဝနေ. ခုန္ဒတိ. खुदि आपवन (कंपन करणे/पवित्र करणे) या अर्थात. खुन्दति (कंपित करतो/पवित्र करतो). သိဒိ သီတိယေ. သီတိယံ သီတိဘာဝေါ. သိန္ဒတိ. သောသိန္ဒော, သောတတ္တော. सिदि शीतलता (थंड होणे) या अर्थात. 'शीतलता' म्हणजे थंड होण्याची अवस्था (शीतीभाव). सिन्दति (थंड होतो). सोसिन्दो (अतिशय थंड), सोतत्तो (अतिशय तप्त). ဝန္ဒ အဘိဝါဒနထုတီသု. ဝန္ဒတိ, အဘိဝန္ဒတိ. အဘိဝန္ဒနာ, ဝန္ဒနံ, ဝန္ဒကော. वन्द अभिवादन (नमस्कार करणे) आणि थुति (स्तुती करणे) या अर्थात. वन्दति (वंदन करतो), अभिवन्दति (अभिवादन करतो). अभिवन्दना (अभिवादन), वन्दनं (वंदन), वन्दको (वंदन करणारा). ဧတ္ထ ပန ဝန္ဒတီတိ ပဒဿ နမဿတိ ထောမေတိ ဝါတိ အတ္ထော. တထာ ဟိ သုတ္တန္တဋီကာကာရော ‘‘ဝန္ဒေတိ ဝန္ဒာမိ ထောမေမိ ဝါ’’တိ အာဟ. येथे 'वन्दति' या शब्दाचा अर्थ 'नमस्सति' (नमस्कार करतो) किंवा 'थोमेति' (स्तुती करतो) असा आहे. म्हणूनच सुत्तन्त-टीकाकारांनी 'वन्देति म्हणजे मी वंदन करतो किंवा स्तुती करतो' (वन्देति वन्दामि थोमेमि वा) असे म्हटले आहे. ဘဒိ ကလ္လာဏေ သောခိယေ စ. ကလ္လာဏံ ကလျာဏံ, သောခိယံ သုခိနော ဘာဝေါ, သုခမိစ္စေဝတ္ထော. ဘန္ဒတိ. ဘန္ဒကော, ဘဒ္ဒေါ, ဘဒြော. भदि कल्याण (मंगल) आणि सोखिय (सुख) या अर्थात. 'कल्लाण' म्हणजे कल्याण, 'सोखिय' म्हणजे सुखी असण्याची अवस्था, म्हणजेच सुख. भन्दति (कल्याण करतो/सुखी होतो). भन्दको, भद्दो (भद्र/मंगल), भद्रो (भद्र). မဒိ [Pg.92] ထုတိမောဒမဒသုပနဂတီသု. မန္ဒတိ. မန္ဒော. मदि थुति (स्तुती), मोद (आनंद), मद (मत्तता), सुपन (झोपणे) आणि गती (जाणे) या अर्थात. मन्दति (स्तुती करतो/आनंदित होतो/झोपतो/जातो). मन्दो (मंद/मूर्ख/बालक). ဧတ္ထ ပန မန္ဒောတိ အညာဏီပိ ဗာလဒါရကောပိ ဝုစ္စတိ. တတ္ထ အညာဏီ မန္ဒတိ အညာဏဘာဝေန အပ္ပသံသိတဗ္ဗမ္ပိ ပုဂ္ဂလံ ထောမေတီတိ မန္ဒော. မန္ဒတိ အမောဒိတဗ္ဗဋ္ဌာနေပိ မောဒတီတိ မန္ဒော. မန္ဒတိ ဒါနသီလာဒိပုညကြိယာသု ပမဇ္ဇတီတိ မန္ဒော. မန္ဒတိ အတ္တနော စ ပရေသဉ္စ ဟိတာဟိတံ အစိန္တေန္တော ခါဒနီယဘောဇနီယာဒီဟိ အတ္တနော ကာယံ သဉ္ဇာတမေဒံ ကုရုမာနော သုပတီတိ မန္ဒော. မန္ဒတိ အယုတ္တံ ပရေသံ ကြိယံ ဒိဋ္ဌာနုဂတိအာပဇ္ဇနေန ဂစ္ဆတိ ဂဏှာတီတိ မန္ဒော. အထ ဝါ မန္ဒတိ ပုနပ္ပုနံ ပဋိသန္ဓိဂ္ဂဟဏဝသေန ဂဗ္ဘံ ဂစ္ဆတီတိ မန္ဒော. ဝုတ္တဉှိ ဘဂဝတာ ‘‘ပုနပ္ပုနံ ဂဗ္ဘမုပေတိ မန္ဒော’’တိ. ဗာလဒါရကော ပန မန္ဒတိ ယုတ္တာယုတ္တမဇာနန္တော ဥတ္တာနသေယျံပရိဝတ္တနသေယျံ ဝါ သုပတီတိ မန္ဒော. တထာ ဟိ – येथे 'मन्दो' (मंद) हा अज्ञानी माणसाला आणि लहान बालकालाही म्हटले जाते. त्यापैकी, अज्ञानी मनुष्य आपल्या अज्ञानामुळे स्तुतीस अपात्र असलेल्या व्यक्तीचीही स्तुती करतो (मन्दति), म्हणून तो 'मन्दो' होय. जो आनंद न मानण्याच्या ठिकाणीही आनंद मानतो (मन्दति), तो 'मन्दो' होय. जो दान, शील इत्यादी पुण्यकर्मांमध्ये प्रमाद (आळस) करतो (मन्दति), तो 'मन्दो' होय. जो स्वतःच्या आणि इतरांच्या हिता-अहिताचा विचार न करता, खाण्या-पिण्याच्या पदार्थांनी स्वतःचे शरीर चरबीयुक्त करून झोपून राहतो (मन्दति), तो 'मन्दो' होय. जो इतरांच्या अयोग्य कृत्यांचे अंधानुकरण करून त्यांचे अनुसरण करतो (मन्दति), तो 'मन्दो' होय. किंवा, जो वारंवार प्रतिसंधी (पुनर्जन्म) घेण्याच्या स्वरूपात गर्भात जातो (मन्दति), तो 'मन्दो' होय. कारण भगवंतांनी म्हटले आहे – 'मूर्ख मनुष्य (मन्दो) वारंवार गर्भात प्रवेश करतो' (पुनप्पुनं गब्भमुपेति मन्दो). लहान बालक मात्र योग्य-अयोग्य न जाणता, उताणे निजून किंवा कुशीवर वळून झोपतो (मन्दति), म्हणून तो 'मन्दो' होय. जसे की – ‘‘နောနီတသုခုမာလံ မံ, ဇာတပလ္လဝကောမလံ; မန္ဒံ ဥတ္တာနသယနံ, ပိသာစဘယတဇ္ဇိတာ. लोण्यासारखा सुकुमार, नुकत्याच उगवलेल्या पालवीसारखा कोमल, उताणा निजलेला असा मी बालक (मन्दं), पिशाचाच्या भयाने भयभीत होऊन... ပါဒမူလေ မဟေသိဿ, သာယေသုံ ဒီနမာနသာ; ဣဒံ ဒဒါမ တေ နာထ, သရဏံ ဟောဟိ နာယကာ’’တိ महर्षींच्या (बुद्धांच्या) चरणकमळांशी दीन मनाने निजले आणि म्हणाले, 'हे नाथा! आम्ही हे आपल्याला अर्पण करतो, हे नायका! आपण आमचे शरण व्हा.' ဝုတ္တံ, ဣတိ ဥတ္တာနသယနတော ပဋ္ဌာယ ယာဝ မန္ဒဒသကံ, တာဝ ‘‘မန္ဒော’’တိ ‘‘ဒါရကော’’တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အပ္ပတ္ထဝါစကောပိ ပန မန္ဒသဒ္ဒေါ ဟောတိ, သော ပါဋိပဒိကတ္တာ ဣဓ နာဓိပ္ပေတော, အထ ဝါ မန္ဒတိ အပ္ပဘာဝေန ဂစ္ဆတိ ပဝတ္တတီတိ နိပ္ဖန္နပါဋိပဒိကဝသေနပိ ဂဟေတဗ္ဗော. असे म्हटले आहे. अशा प्रकारे, उताणे निजण्यापासून ते 'मंद-दशक' (बालपणीचे पहिले दहा वर्षे) पर्यंतच्या काळातील व्यक्तीला 'मन्दो' किंवा 'दारको' (बालक) समजावे. 'मन्द' हा शब्द 'अल्प' (कमी) या अर्थाचा वाचकही असतो, परंतु तो प्रातिपदिक (मूळ शब्द) म्हणून येथे अभिप्रेत नाही; किंवा 'जो अल्प प्रभावाने चालतो किंवा प्रवृत्त होतो' (मन्दति) या व्युत्पत्तीनुसार सिद्ध झालेल्या प्रातिपदिकानुसार तो ग्रहण करावा. မုဒ ဟာသေ. ဟသနံ ဟာသော တုဋ္ဌိ. မောဒတိ, ပမောဒတိ. သမ္မောဒတိ. သမ္မောဒကော. သမ္မောဒမာနာ ဂစ္ဆန္တိ မုဒိတာ. မုဒါ. मुद हास (हसणे/आनंद) या अर्थात. 'हसन' म्हणजे हास्य किंवा तुष्टी (संतोष). मोदति (आनंदित होतो), पमोदति (अतिशय आनंदित होतो). सम्मोदति (परस्पर आनंद व्यक्त करतो/संभाषण करतो). सम्मोदको (आनंद देणारा/संभाषण करणारा). 'सम्मोदमाना गच्छन्ति' (ते परस्परांशी आनंदपूर्वक बोलत जातात). मुदिता (सहानुभूतीपूर्वक आनंद). मुदा (आनंद). ဟဒ [Pg.93] ကရီသောဿဂ္ဂေ. ကရီသောဿဂ္ဂေါ နာမ ကရီသဿ ဩဿဇ္ဇနံ ဝိဿဇ္ဇနံ. ဟဒတိ. ဥဟဒတိ. ဟဒနော. हद करीसोस्सग्ग (मलविसर्जन करणे) या अर्थात. 'करीसोस्सग्ग' म्हणजे मलाचे उत्सर्जन किंवा विसर्जन करणे. हदति (मलविसर्जन करतो). उहदति (वर मलविसर्जन करतो). हदनो (मलविसर्जन). ဧတ္ထ စ ‘‘ယေသံ နော သန္ထတေ ဒါရကာ ဥဟဒန္တိပိ ဥမ္မိဟန္တိပီ’’တိ အယံ ပါဠိ နိဒဿနံ, တတြ ဥဟဒန္တိပီတိ ဝစ္စမ္ပိ ကရောန္တိ. ဥမ္မိဟန္တိပီတိ ပဿာဝမ္ပိ ကရောန္တိ. ပစ္ဆိမပဒဿတ္ထော မိဟ သေစနေတိ ဓာတုဝသေန ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အယံ ပန စုရာဒိဂဏေပိ ဝတ္တတိ ဒွိဂဏိကတ္တာ. ဣမသ္မိဉှိ ဌာနေ ‘‘မုတ္တေတိ ဩဟဒေတိ စာ’’တိ စရိယာပိဋကပါဠိပ္ပဒေသော နိဒဿနံ. တတ္ထ မုတ္တေတီတိ ပဿာဝံ ကရောတိ. ဩဟဒေတီတိ ကရီသံ ဝိဿဇ္ဇေတိ. आणि येथे 'येसं नो सन्थते दारका उहदन्तिपि उम्मिहन्तिपि' (ज्यांच्या अंथरुणावर मुले मलविसर्जनही करतात आणि मूत्रविसर्जनही करतात) हे पाळी (पाळि) उदाहरण आहे. तेथे 'उहदन्तिपि' म्हणजे मलविसर्जनही करतात. 'उम्मिहन्तिपि' म्हणजे मूत्रविसर्जनही करतात. शेवटच्या शब्दाचा अर्थ 'मिह सेचने' (सिंचन करणे/लघवी करणे) या धातूवरून समजून घ्यावा. हा धातू दोन गणांमध्ये (द्विगणिक) येत असल्यामुळे चुरादि गणातही चालतो. या संदर्भात 'मुत्तेति ओहदेति चा' (लघवी करतो आणि शौचास करतो) हा चरियापिटकातील पाळी पाठ उदाहरण आहे. तेथे 'मुत्तेति' म्हणजे मूत्रविसर्जन करतो आणि 'ओहदेति' म्हणजे मलविसर्जन करतो. ဥဒ မောဒေ ကီဠာယဉ္စ. ဥဒတိ. ဥဒါနံ. ဥဒဂ္ဂေါ. उद मोद (आनंद) आणि कीळा (क्रीडा/खेळ) या अर्थात. उदति (आनंदित होतो/खेळतो). उदानं (उदान/उत्स्फूर्त उद्गार). उदग्गो (उदग्र/आनंदित/उत्फुल्ल). တတ္ထ ဥဒါနန္တိ ကေနဋ္ဌေန ဥဒါနံ? ဥဒါနနဋ္ဌေန. ကိမိဒံ ဥဒါနနံ နာမ? ပီဘိဝေဂသမုဋ္ဌာပိတော ဥဒါဟာရော. ယထာ ဟိ ယံ တေလာဒိ မိနိတဗ္ဗဝတ္ထု မာနံဂဟေတုံ န သက္ကောတိ, ဝိဿန္ဒိတွာ ဂစ္ဆတိ, တံ ‘‘အဝသေကော’’တိ ဝုစ္စတိ. ယဉ္စ ဇလံ တဠာကံ ဂဟေတုံ န သက္ကောတိ, အဇ္ဈောတ္ထရိတွာ ဂစ္ဆတိ, တံ ‘‘ဩဃော’’တိ ဝုစ္စတိ, ဧဝမေဝ ယံ ပီတိဝေဂသမုဋ္ဌာပိတံ ဝိတက္ကဝိပ္ဖာရံ ဟဒယံ သန္ဓာရေတုံ န သက္ကောတိ, သော အဓိကော ဟုတွာ အန္တော အသဏ္ဌဟိတွာ ဝစီဒွါရေန နိက္ခမန္တော ပဋိဂ္ဂါဟကနိရပေက္ခော ဥဒါဟာရဝိသေသော ‘‘ဥဒါန’’န္တိ ဝုစ္စတိ. ဥဒဂ္ဂေါတိ သဉ္ဇာတသောမနဿော. तेथे 'उदान' म्हणजे कोणत्या अर्थाने उदान? उदानन (उद्गार काढणे) या अर्थाने. हे 'उदानन' म्हणजे काय? प्रीतीच्या वेगाने निर्माण झालेला उद्गार. ज्याप्रमाणे तेल इत्यादी मोजण्याचे पदार्थ मोजपात्र सामावून घेऊ शकत नाही आणि ते ओसंडून वाहते, त्याला 'अवसेक' (ओसंडणे) म्हटले जाते. आणि जे पाणी तलाव सामावून घेऊ शकत नाही, ते ओसंडून वाहून जाते, त्याला 'ओघ' (पूर) म्हटले जाते; त्याचप्रमाणे प्रीतीच्या वेगाने उत्पन्न झालेला विचारांचा विस्तार जेव्हा हृदय धारण करू शकत नाही, तेव्हा तो अधिक होऊन आत न मावता, वाणीच्या द्वाराने बाहेर पडणारा आणि ऐकणाऱ्याची अपेक्षा न ठेवणारा विशिष्ट उद्गार म्हणजे 'उदान' म्हटला जातो. 'उदग्ग' म्हणजे उत्पन्न झालेला आनंद (सोमनस्य) असलेला. ကုဒ ခုဒ ဂုဒ ကီဠာယမေဝ. ကောဒတိ. ခေါဒတိ. ဂေါဒတိ. कुद्, खुद्, गुद् हे धातू क्रीडा (खेळणे) याच अर्थात आहेत. कोदति. खोदति. गोदति. သူဒ ပဂ္ဃရဏေ. သူဒတိ. သုတ္တံ. သူဒေါ. ရညော သူဒါ မဟာနသေ. सूद् हा धातू पाझरणे (गळणे) या अर्थात आहे. सूदति. सुत्तं. सूदो. 'रञ्ञो सूदा महानसे' (राजाचे स्वयंपाकी स्वयंपाकघरात आहेत). ဧတ္ထ [Pg.94] စ သုတ္တန္တိ သူဒတိ ဓေနု ဝိယ ခီရံ အတ္ထေ ပဂ္ဃရာပေတီတိ သုတ္တံ, တေပိဋကံ ဗုဒ္ဓဝစနံ. သကမ္မိကဓာတုတ္တာ ပန ‘‘ပဂ္ဃရာပေတီ’’တိ ကာရိတဝသေန အတ္ထော ကထေတုံ လဗ္ဘတိ. တထာ ဟိ ‘‘ကရောတီ’’တိ ပဒဿ ‘‘နိပ္ဖာဒေတီ’’တိ အတ္ထော ကထေတုံ လဗ္ဘတိ. သူဒေါတိ ဘတ္တကာရော. ယော ‘‘အာဠာရိကော, ဩဒနိကော, သူပကာရော, ရသကော’’တိ စ ဝုစ္စတိ. သူဒတိ ‘‘ဧဝဉ္စေဝဉ္စ ကတေ ခါဒနီယံ ဝါ ဘောဇနီယံ ဝါ သုဂန္ဓံ မနာပံ သုရသဉ္စ ဘဝိဿတီ’’တိ ရန္ဓနကြိယာယ သုကုသလတာယ ရသံ ပဂ္ဃရာပေတိ အဘိနိဗ္ဗတ္တေတီတိ သူဒေါ. आणि येथे 'सुत्त' म्हणजे - ज्याप्रमाणे गाय दूध पाझरते, त्याप्रमाणे जे अर्थाला पाझरवते (प्रकट करते) ते 'सुत्त' (सूत्र) होय, म्हणजेच त्रिपिटक बुद्धवचन. हा सकर्मक धातू असल्यामुळे 'पाझरवते' (paggharāpeti) असा प्रयोजक (कारित) अर्थ सांगता येतो. कारण 'करोति' या पदाचा 'निष्पन्न करतो' असा अर्थ सांगता येतो. 'सूद' म्हणजे आचारी (स्वयंपाकी). ज्याला 'आळारिक, ओदनिक, सूपकार, रसक' असेही म्हटले जाते. 'असे आणि असे केले असता खाण्याचे किंवा भोज्य अन्न सुगंधी, मनपसंत आणि स्वादिष्ट होईल' अशा प्रकारे स्वयंपाकाच्या क्रियेतील कौशल्यामुळे जो रस पाझरवून आणतो (उत्पन्न करतो), तो 'सूद' (आचारी) होय. ရဟဒ အဗျတ္တသဒ္ဒေ. ရဟဒတိ. ရဟဒေါ. रहद् हा धातू अव्यक्त आवाजात (अस्पष्ट ध्वनी) आहे. रहदति. रहदो (तलाव). ဟိလာဒိ သုခေ စ. စကာရော ပုဗ္ဗတ္ထာပေက္ခကော. ဟိလာဒတိ. ဟိလာဒနံ, ဟိလာဒေါ, မေတ္တာသဟာယကတသတ္တမဟာဟိလာဒေါ. हिलाद् इत्यादी धातू सुखाच्या अर्थात आणि (मागील अर्थाच्या अपेक्षेने) आहेत. 'च' कार हा पूर्व अर्थाची अपेक्षा ठेवणारा आहे. हिलादति. हिलादनं, हिलादो, 'मेत्तासहाइकतसत्तमहाहिलादो' (मैत्रीने साहाय्य केलेल्या प्राण्याचा मोठा आनंद). သဒ္ဒ ကုစ္ဆိတေ သဒ္ဒေ. သဒ္ဒတိ. सद्द् हा धातू निंदित आवाजात (कुत्सित ध्वनी) आहे. सद्दति. မိဒ သ္နေဟေ. သ္နေဟော နာမ ဝသာသင်္ခါတော သ္နေဟော ပီတိသ္နေဟောတိ ဒုဝိဓော. ဣဓ ပန ဝသာသင်္ခါတော သ္နေဟော အဓိပ္ပေတော, မေဒတိ မေဒေါ. मिद् हा धातू स्नेहाच्या (स्निग्धता/प्रेम) अर्थात आहे. स्नेह हा 'वसा' (चरबी) नावाचा स्नेह आणि 'प्रीती' (प्रेम) नावाचा स्नेह असा दोन प्रकारचा आहे. परंतु येथे 'वसा' नावाचा स्नेह अभिप्रेत आहे. मेदति, मेदो (चरबी). ဧတ္ထ စ မေဒတီတိ မေဒသဟိတော ဘဝတိ အယံ ပုရိသောတိ အတ္ထော. မေဒေါ နာမ ထူလဿ သကလသရီရံ ဖရိတွာ ကိသဿ ဇင်္ဃမံသာဒီနိ နိဿာယ ဌိတော ပတ္ထိန္နသိနေဟော, သော ဝဏ္ဏေန ဟလိဒ္ဒိဝဏ္ဏော ဟောတိ. ကာရိတေ ‘‘မေဒေတိ မေဒယတီ’’တိ ရူပါနိ. တထာ ဟိ ‘‘တေ ဣမံ ကာယံ ဗလံ ဂါဟေန္တိ နာမ ဗြူဟေန္တိ နာမ မေဒေန္တိ နာမာ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. တတ္ထ မေဒေန္တီတိ သဉ္ဇာတမေဒံ ကရောန္တီတိ အတ္ထော. ဣမိဿာ ပန ဓာတုယာ ဒိဝါဒိဂဏံ ပတ္တာယ ပီတိသိနေဟတ္ထေ ‘‘မေဇ္ဇတီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုရူပံ ဘဝတိ. စုရာဒိဂဏံ ပန [Pg.95] ပတ္တာယ ‘‘မေဒေတိ မေဒယတီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုရူပါနိ ဘဝန္တီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. आणि येथे 'मेदति' म्हणजे 'हा मनुष्य मेदाने (चरबीने) युक्त होतो' असा अर्थ आहे. 'मेद' म्हणजे स्थूल व्यक्तीच्या संपूर्ण शरीरात पसरून आणि कृश (बारीक) व्यक्तीच्या जंघांच्या (पिढऱ्यांच्या) मांसाचा आश्रय घेऊन असलेला घट्ट स्नेह (चरबी), तो रंगाने हळदीच्या रंगाचा (पिवळा) असतो. प्रयोजक (कारित) रूपात 'मेदेति, मेदयति' अशी रूपे होतात. कारण 'ते इमं कायं बलं गाहेन्ति नाम ब्रूहेन्ति नाम मेदेन्ति नाम' (ते या शरीराला बलवान करतात, वाढवतात आणि मेदयुक्त करतात) असे पाळीत आढळते. तेथे 'मेदेन्ति' म्हणजे मेदयुक्त करतात असा अर्थ आहे. परंतु या धातूला दिवादिगण प्राप्त झाल्यावर प्रीति-स्नेह अर्थात 'मेज्जति' असे क्रियापद रूप होते. आणि चुरादिगण प्राप्त झाल्यावर 'मेदेति, मेदयति' अशी क्रियापद रूपे होतात, असे समजावे. သိဒ မောစနေ. သိဒတိ. သေဒေါ. सिद् हा धातू मोचन (मुक्त करणे/घाम गाळणे) या अर्थात आहे. सिदति. सेदो (घाम). သန္ဒ ပသဝနေ. ပသဝနံ သန္ဒနံ အဝိစ္ဆေဒပ္ပဝတ္တိ. သန္ဒတိ ဥဒကံ. မဟန္တော ပုညာဘိသန္ဒော. सन्द् हा धातू प्रसव (वाहणे/उत्पन्न होणे) या अर्थात आहे. प्रसव म्हणजे वाहणे, अखंड प्रवृत्ती. 'सन्दति उदकं' (पाणी वाहते). 'महन्तो पुञ्ञाभिसन्दो' (मोठा पुण्याचा प्रवाह). ဧတ္ထ စ ပုညာဘိသန္ဒောတိ ပုညပ္ပဝါဟော, ပုညနဒီတိပိ ဝတ္တုံ ယုဇ္ဇတိ. आणि येथे 'पुण्याभिसंद' म्हणजे पुण्याचा प्रवाह, याला 'पुण्यनदी' असेही म्हणणे योग्य आहे. မဒ္ဒ မဒ္ဒနေ. မဒ္ဒဘိ, ပမဒ္ဒတိ. မာရသေနပ္ပမဒ္ဒနော. ကဏ္ဋကံ မဒ္ဒတိ. मद्द् हा धातू मर्दन (चिरडणे/दडपून टाकणे) या अर्थात आहे. मद्दति, पमद्दति. 'मारसेनप्पमद्दनो' (मारसेनेचे मर्दन करणारा). 'कण्टकं मद्दति' (काट्याला चिरडतो). ကဒိ ဝေလမ္ဗေ. ဝိလမ္ဗဘာဝေါ ဝေလမ္ဗော. ကန္ဒတိ. कद् इ हा धातू विलंब (रडणे/विलंब करणे) या अर्थात आहे. विलंब भाव म्हणजे वेळ लावणे. कन्दति. ကဒ အဝှာနေ ရောဒနေ စ. ကဒတိ. कद् हा धातू आव्हान (बोलवणे) आणि रोदन (रडणे) या अर्थात आहे. कदति. ခဒိ ဥဇ္ဈနေ. ဆန္ဒတိ. खद् इ हा धातू उज्झन (त्याग करणे) या अर्थात आहे. खन्दति (किंवा छन्दति). သဒ သာဒနေ. သဒတိ. အဿာဒေါ. सद् हा धातू सादन (आस्वाद घेणे/थकणे) या अर्थात आहे. सदति. अस्सादो (आस्वाद). သီဒ ဝိသရဏဂတျာဝသာနေသု. ဝိသရဏံ ဝိပ္ဖရဏံ. ဂတျာဝသာနံ ဂမနဿ အဝသာနံ ဩသာနံ အဘာဝကရဏံ, နိသီဒနန္တိ အတ္ထော. သီဒတိ, လာဗူနိ သီဒန္တိ. သံသီဒတိ, ဩသီဒတိ, ပသီဒတိ, ဝိပ္ပသီဒတိ. ပသာဒေါ. ပသန္နော. ဝိပ္ပသန္နော. ပသာဒကော. ပသာဒိတော. ပါသာဒေါ. ဩသီဒါပကော. ကုသီတော. အာသီနော. နိသိန္နော. နိသိန္နကော. သန္နိသီဝေသု ပက္ခိသု. နိသီဒနံ, နိသိန္နံ. နိသဇ္ဇာ. ဂေါနိသာဒေါ, ဥပနိသာ. သီဒေတိ. သီဒယတိ. သီဒါပေတိ. သီဒါပယတိ. ပသာဒေတိ. နိသီဒိတုံ. နိသီဒါပေတုံ, နိသာဒေတုံ, နိသီဒါပေတိ, နိသီဒါပေတွာ. ဥစ္ဆင်္ဂေ မံ နိသာဒေတွာ, ပိတာ အတ္ထာနုသာသတိ. နိသီဒိတွာတိပိ ပါဌော. နိသီဒိတွာ. နိသီဒိတွာန. နိသီဒိတုန[Pg.96]. နိသီဒိယ. နိသီဒိယာန. သံသီဒိတွာ. အဝသီဒိတွာ. ဩသီဒိတွာ. सीद् हा धातू विसरण (पसरणे), गती आणि अवसान (थांबणे/नाश होणे) या अर्थांमध्ये आहे. विसरण म्हणजे विस्तार (विप्फरण). गत्यवसान म्हणजे गमनाचा अंत, अवसान, अभाव करणे, म्हणजेच 'निसीदन' (बसणे) असा अर्थ आहे. सीदति, 'लाबूनि सीदन्ति' (भोपळे बुडतात). संसीदति, ओसीदति, पसीदति, विप्पसीदति. पसादो. पसन्नो. विप्पसन्नो. पसादको. पसादितो. पासादो. ओसीदापको. कुसीतो. आसीनो. निसिन्नो. निसिन्नको. 'सन्निसीवेसु पक्खीसु' (पक्षी शांत बसले असता). निसीदनं, निसिन्नं. निसज्जा. गोनिसादो, उपनिसा. सीदेति. सीदयति. सीदापेति. सीदापयति. पसादेति. निसीदितुं. निसीदापेतुं, निसादेतुं, निसीदापेति, निसीदापेत्वा. 'उच्छङ्गे मं निसादेत्वा, पिता अत्थानुसासति' (मला मांडीवर बसवून पिता हितोपदेश करतो). 'निसीदित्वा' असाही पाठ आहे. निसीदित्वा. निसीदित्वान. निसीदितुन. निसीदिय. निसीदियान. संसीदित्वा. अवसीदित्वा. ओसीदित्वा. တတ္ထ ကုသီတောတိ ဝီရိယေနာဓိဂန္တဗ္ဗဿ အတ္ထဿ အလာဘတော ကုစ္ဆိတေနာကာရေန သီဒတီတိ ကုသီတော. အထ ဝါ သယမ္ပိ ကုစ္ဆိတေနာကာရေန သီဒတိ အညေပိ သီဒါပေတိ တံ နိဿာယ အညေသံ သီဒနဿ သမ္ဘဝတောတိ ကုသီတော. တထာ ဟိ ဝုတ္တံ – तेथे 'कुसीत' (आळशी) म्हणजे - वीर्याने (प्रयत्नाने) प्राप्त करावयाच्या अर्थाचा लाभ न झाल्यामुळे जो निंद्य रीतीने खचून जातो (सीदति), तो 'कुसीत' होय. अथवा जो स्वतःही निंद्य रीतीने खचतो आणि इतरांनाही खचवतो, त्याच्या आश्रयाने इतरांचेही खचणे (अधोगती) संभवत असल्यामुळे तो 'कुसीत' होय. कारण असे म्हटले आहे - ‘‘ပရိတ္တံ ကဋ္ဌမာရူယှ, ယထာ သီဒေ မဟဏ္ဏဝေ; ဧဝံ ကုသီတမာဂမ္မ, သာဓဇီဝီပိ သီဒတီ’’တိ; 'ज्याप्रमाणे लहान लाकडाचा आश्रय घेऊन मनुष्य महासागरात बुडतो, त्याचप्रमाणे आळशी माणसाचा आश्रय घेऊन चांगल्या प्रकारे जगणारा मनुष्यही बुडतो (नाश पावतो).' ကုသီတောတိ စေတ္ထ ဒဿ တတ္တံ ‘‘သုဂတော’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ ‘‘သတသ္မီတိ ဟောတီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ စ. တထာ ဟိ သီဒတီတိ သတံ, အနိစ္စဿေတံ အဓိဝစနံ. ဣမိနာ ဥစ္ဆေဒဒိဋ္ဌိ ဝုတ္တာ. သတဣတိ စေတ္ထ အဝိဘတ္တိကော နိဒ္ဒေသော. သန္နိသီဝေသူတိ ပရိဿမဝိနောဒနတ္ထံ သဗ္ဗသော နိသီဒန္တေသု, ဝိဿမမာနေသူတိ အတ္ထော, ဒကာရဿ ဝကာရံ ကတွာ နိဒ္ဒေသော. နိသီဒနန္တိ နိသီဒနကြိယာ. မဉ္စပီဌာဒိကံ ဝါ အာသနံ. တဉှိ နိသီဒန္တိ ဧတ္ထာတိ နိသီဒနန္တိ ဝုစ္စတိ. နိသိန္နန္တိ နိသီဒနကြိယာ ဧဝ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဂတေ ဌိတေ နိသိန္နေ သုတ္တေ ဇာဂရိတေ ဘာသိတေ တုဏှီဘာဝေ သမ္ပဇာနကာရီ ဟောတိ. မာတုဂါမေန သဒ္ဓိံ ရဟော မညေ တယာ နိသိန္နန္တိ ကုက္ကုစ္စံ ဥပဒဟတီတိအာဒီသု စဿ ပယောဂေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. ဧတ္ထ ဟိ ဂမနံ ဂဘံ, ဌာနံ ဌိတံ, နိသီဒနံ နိသန္နံ, သုပနံ သုတ္တံ, ဇာဂရဏံ ဇာဂရိတံ, ဘာသနံ ဘာသိတန္တိ ဝုစ္စတိ. နိသဇ္ဇာတိ နိသီဒနာ. ဂေါနိသာဒေါတိ ဂေါနိသဇ္ဇနာ. ဥပနိသာတိ ဥပနိသီဒတိ ဖလံ ဧတ္ထာတိ ဥပနိသာ, ကာရဏံ. နိသာဒေတုန္တိ နိသီဒါပေတုံ. နိသာဒေတွာတိ နိသီဒါပေတွာ. आणि येथे 'कुसीत' यामध्ये 'द' काराचा 'त' कार झाला आहे, ज्याप्रमाणे 'सुगत' यामध्ये किंवा 'सतस्मीति होति' यामध्ये होतो. कारण 'सीदति' (नाश पावतो) ते 'सतं' होय, हे अनित्याचेच नाव आहे. याद्वारे उच्छेददृष्टी सांगितली आहे. 'सत' हा येथे विभक्तीरहित निर्देश आहे. 'सन्निसीवेसु' म्हणजे थकवा दूर करण्यासाठी पूर्णपणे बसलेले असता, म्हणजेच विश्रांती घेत असता असा अर्थ आहे; येथे 'द' काराचा 'व' कार करून निर्देश केला आहे. 'निसीदन' म्हणजे बसण्याची क्रिया. किंवा मंचक, पीठ (पाट) इत्यादी आसन. कारण 'येथे बसतात' म्हणून त्याला 'निसीदन' म्हटले जाते. 'निसिन्न' म्हणजे बसण्याची क्रियाच होय. परंतु येथे 'चालताना, उभे असताना, बसलेले असताना, निजलेले असताना, जागे असताना, बोलताना, मौन असताना सजग राहतो. स्त्रीसोबत एकांतात तुझ्याकडून बसले गेले असावे, अशी शंका उत्पन्न करतो' इत्यादींमध्ये याचा प्रयोग समजून घ्यावा. कारण येथे जाणे म्हणजे 'गत', उभे राहणे म्हणजे 'ठित', बसणे म्हणजे 'nisiṇṇa' (निसिन्न), निजणे म्हणजे 'सुत्त', जागी असणे म्हणजे 'जागरित', बोलणे म्हणजे 'भासित' असे म्हटले जाते. 'निसज्जा' म्हणजे बसणे. 'गोनिसादो' म्हणजे गाईंचे बसणे. 'उपनिसा' म्हणजे ज्याच्यावर फळ प्राप्त होते (आश्रय घेतात) ती 'उपनिसा', म्हणजेच कारण. 'निसादेतुं' म्हणजे बसवण्यासाठी. 'निसादेत्वा' म्हणजे बसवून. ဘာဝေ [Pg.97] နပုံသကော ဉေယျော, နိသိန္နန္တိ ရဝေါ ပန; ဝါစ္စလိင်္ဂေါ တိလိင်္ဂေါ သော, ဂတာဒီသုပျယံ နယော. भावार्थात नपुंसकलिंगी समजावे, परंतु 'निसिन्न' हा शब्द विशेष्यलिंगी (तिन्ही लिंगांत चालणारा) आहे; 'गत' इत्यादी शब्दांच्या बाबतीतही हाच नियम आहे. စဒ ယာစနေ. ယာစနံ အဇ္ဈေသနံ. စဒတိ. चद् हा धातू याचना (मागणे/विनंती करणे) या अर्थात आहे. याचना म्हणजे प्रार्थना (अज्झेसना). चदति. မိဒ မေဒ မေဓာဟိံသာသု. မိဒတိ. မေဒတိ. मिद्, मेद् हे धातू मेधा (बुद्धी) आणि हिंसा या अर्थांमध्ये आहेत. मिदति. मेदति. နိဒ နေဒ ကုစ္ဆာသန္နိကရိသေသု. ကုစ္ဆာ ဂရဟာ. သန္နိကရိသံ ဝေါဟာရဝိသေသော. နိဒတိ. နေဒတိ. निद्, नेद् हे धातू कुत्सा (निंदा) आणि संनिकर्ष (जवळ आणणे/विशिष्ट व्यवहार) या अर्थांमध्ये आहेत. कुत्सा म्हणजे निंदा. संनिकर्ष म्हणजे विशिष्ट व्यवहार. निदति. नेदति. ဗုန္ဒိ နိသာနေ. နိသာနံ တေဇနံ တိက္ခတာ. ဗုန္ဒတိ. ဗောန္ဒိ. बुन्द् इ हा धातू निसान (तीक्ष्ण करणे/तेजस्वी करणे) या अर्थात आहे. निसान म्हणजे तीक्ष्णता. बुन्दति. बोन्दि (शरीर). ဧတ္ထ စ ဗောန္ဒီတိ သရီရံ. တဉှိ ဗုန္ဒာနိ တိက္ခာနိ ပိသုဏဖရုသဝါစာဒီနိ ဝါ ပညာဝီရိယာဒီနိ ဝါ ဧတ္ထ သန္တီတိ ဗောန္ဒီတိ ဝုစ္စတိ, သညောဂပရတ္တေပိ ဥကာရဿောကာရာဒေသော, ပါပကလျာဏဇနဝသေနေသ အတ္ထော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ဗောန္ဒိသဒ္ဒဿ သရီရဝါစကတာ ပန – आणि येथे 'बोन्दी' म्हणजे शरीर होय. कारण येथे तीक्ष्ण 'बुन्द' म्हणजे चहाडी, कठोर वचन इत्यादी किंवा प्रज्ञा, वीर्य इत्यादी असतात, म्हणून याला 'बोन्दी' असे म्हटले जाते. संयोग पर असताना देखील 'उ' काराचा 'ओ' कार आदेश होतो. पाप आणि कल्याणकारी (पुण्यवान) लोकांच्या संदर्भाने हा अर्थ समजला पाहिजे. 'बोन्दी' शब्दाची शरीरवाचकता तर — ‘‘နာဟံ ပုန န စ ပုန, န စာပိ အပုနပ္ပုနံ; ဟတ္ထိဗောန္ဒိံ ပဝေက္ခာမိ, တထာ ဟိ ဘယတဇ္ဇိတော’’တိအာဒီသု "मी पुन्हा नाही, आणि पुन्हा नाही, आणि वारंवार देखील नाही, हत्तीच्या शरीरात प्रवेश करीन, कारण मी भयाने भयभीत झालो आहे" इत्यादींमध्ये (पाहिली पाहिजे). ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. ဣမာနိဿ နာမာနိ – पाहिली पाहिजे. याची ही नावे आहेत — ကာယော ဒေဟံ သရီရဉ္စ, ဝပု ဗိမ္ဗဉ္စ ဝိဂ္ဂဟံ; ဗောန္ဒိ ဂတ္တံ တနု စေဝ, အတ္တဘာဝေါ တထူပဓိ; သမုဿယောတိ စေတာနိ, ဒေဟနာမာနိ ဟောန္တိ ဟိ. काय, देह, शरीर, वपु, बिंब, विग्रह, बोन्दी, गात्र, तनू, अत्तभाव, तसेच उपधी आणि समुच्छय ही देहाची (शरीराची) नावे आहेत. ဝဒ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ. ဝဒတိ, ဝဇ္ဇတိ. ဝဒေတိ, ဩဝဒတိ, ဩဝဒေတိ, ပဋိဝဒတိ. အဘိဝဒတိ, အနုဝဒတိ, ဥပဝဒတိ, အပဝဒတိ. နိဝဒတိ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. တတ္ထ ‘‘ဝဇ္ဇန္တု ဘောန္တော အမ္မ’’န္တိ ပါဠိဒဿနတော ဝဇ္ဇတီတိ ပဒံ ဝုတ္တံ. ကေစိ ပန ဂရူ ‘‘ဝဇ္ဇေတီ’’တိ ရူပံ ဣစ္ဆန္တိ, တံ ဥပပရိက္ခိတွာ ယုတ္တဉ္စေ ဂဟေတဗ္ဗံ, ‘‘ဥပါသကော ဘိက္ခုံ ဝဒေတိ. တေန ယောဂေန ဇနကာယံ, ဩဝဒေတိ မဟာမုနီ’’တိ စ ဒဿနတော ဝဒေတိ ဩဝဒေတီတိ စ ဝုတ္တံ. သဗ္ဗာနေတာနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ. 'वद्' धातू स्पष्ट वाणीच्या अर्थात आहे. वदति, वज्जति. वदेति, ओवदति, ओवदेति, पटिवदति. अभिवदति, अनुवदति, उपवदति, अपवदति, निवदति. इतर रूपे देखील योजावीत. त्यामध्ये "वज्जन्तु भोन्तो अम्म" (हे पूज्य आई, बोला/वाजवा) या पाळी प्रयोगावरून 'वज्जति' हे पद म्हटले आहे. परंतु काही आचार्य 'वज्जेति' असे रूप इच्छितात, त्याची परीक्षा करून योग्य असल्यास ते स्वीकारावे. "उपासक भिक्खूला बोलतो. त्या योगाने महामुनी जनसमुदायाला उपदेश करतात" अशा प्रयोगावरून 'वदेति' आणि 'ओवदेति' असे म्हटले आहे. ही सर्व कर्तृवाच्य (शुद्धकर्तृपद) रूपे आहेत. ဩဝါဒေတိ[Pg.98], ဝါဒယတိ, ဝါဒါပေတိ, ဝါဒါပယတိ. ဝဇ္ဇေန္တော, ဝဇ္ဇယန္တော, ဣမာနိ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ. ओवादेति, वादयति, वादापेति, वादापयति. वज्जेन्तो, वज्जयन्तो, ही प्रयोजक कर्तृपदे (हेतुकर्तृपदे) आहेत. ကမ္မေ ‘‘ဝဒိယတိ, ဩဝဒိယတိ, ဝဇ္ဇိယတိ. ဝဒိယမာနော, ဝဇ္ဇမာနော, ဩဝဒိယမာနော, ဩဝဇ္ဇမာနော န ကရောတိ သာသနံ’’ ဣစ္စာဒီနိ ဘဝန္တိ. ‘‘ဝါဒေါ, ဩဝါဒေါ, ပဋိဝါဒေါ, ပဝါဒေါ, အဘိဝါဒနံ, အနုဝါဒေါ, ဥပဝါဒေါ, အပဝါဒေါ, ဝိဝါဒေါ, နိဝါဒနံ, ဝဇ္ဇံ, ဝဒနံ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ နာမိကပဒါနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. कर्मणी प्रयोगात "वदियति, ओवदियति, वज्जियति. वदियमानो, वज्जमानो, ओवदियमानो, ओवज्जमानो न करोति सासनं" (उपदेश केला जात असताना देखील शासनाचे पालन करत नाही) इत्यादी रूपे होतात. "वादो, ओवादो, पटिवादो, पवादो, अभिवादनं, अनुवादो, उपवादो, अपवादो, विवादो, निवादनं, वज्जं, वदनं" इत्यादी नामपदे योजावीत. ‘‘ဝဒိတုံ, ဝဒိတွာ, ဝိဝဒိတွာ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ စ တုမန္တာဒီနိ ပဒါနိ. "वदितुं, वदित्वा, विवदित्वा" इत्यादी 'तुमुन्' आणि 'त्वा' प्रत्ययान्त पदे आहेत. တတ္ထ ဝါဒေါတိ ကထာ. ဝဒိတဗ္ဗံ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ ဝဇ္ဇံ, ကိံ တံ? ဝစနံ. ဧတေန သစ္စဝဇ္ဇေန, သမင်္ဂိနီ သာမိကေန ဟောမီတိ ဧတ္ထ ဟိ ဝစနံ ‘‘ဝဇ္ဇ’’န္တိ ဝုစ္စတိ. ဝဒန္တိ ဧတေနာတိ ဝဒနံ, မုခံ. မုခဿ ဟိ ဣမာနိ နာမာနိ – त्यामध्ये 'वाद' म्हणजे कथा (भाषण/चर्चा). जे बोलले पाहिजे, सांगितले पाहिजे ते 'वज्ज' होय. ते काय आहे? वचन (शब्द). "या सत्य वचनाने मी पतीशी युक्त होईन" येथे वचनाला 'वज्ज' असे म्हटले आहे. ज्याच्याद्वारे बोलतात ते 'वदन' म्हणजे मुख (तोंड). मुखाची ही नावे आहेत — ဝဒနံ လပနံ တုဏ္ဍံ, မုခ မဿဉ္စ အာနနံ; သူကရာဒိမုခံ တုဏ္ဍ-မိတိ ဉေယျံ ဝိသေသတော. वदन, लपन, तुंड, मुख, आस्य आणि आनन; डुकराचे इत्यादींचे मुख विशेषतः 'तुंड' म्हणून जाणावे. တတြ ဝဒတီတိ ပိတာ ပုတ္တံ ဝဒတိ. အပိစ ဝဒတီတိ ဘေရီ ဝဒတိ, နာဒံ မုဉ္စတီတိ အတ္ထော. ဧသ နယော ဝဇ္ဇတီတိ ဧတ္ထာပိ. त्यामध्ये 'वदति' म्हणजे पिता पुत्राला बोलतो. तसेच 'वदति' म्हणजे भेरी (नगारा) वाजते, नाद (ध्वनी) सोडते असा अर्थ आहे. हाच नियम 'वज्जति' यामध्ये देखील लागू होतो. တတြာယံ ပဒမာလာ, ဝဒတိ, ဝဒန္တိ. ဝဒသိ, ဝဒထ. ဝဒါမိ, ဝဒါမ. ဝဒတေ, ဝဒန္တေ. ဝဒသေ, ဝဒဝှေ. ဝဒေ, ဝဒမှေ. त्यामध्ये ही पदमाला (रूपमाला) आहे: वदति, वदन्ति; वदसि, वदथ; वदामि, वदाम; वदते, वदन्ते; वदसे, वदव्हे; वदे, वदम्हे. ဝဒတု, ဝဒန္တု. ဝဒါဟိ, ဝဒ, ဝဒထ. ဝဒါမိ, ဝဒါမ. ဝဒတံ, ဝဒန္တံ. ဝဒဿု, ဝဒဝှော. ဝဒေ, ဝဒါမသေ. वदतु, वदन्तु; वदाहि, वद, वदथ; वदामि, वदाम; वदतं, वदन्तं; वदस्सु, वदव्हो; वदे, वदामसे. ဝဇ္ဇတိ, ဝဇ္ဇန္တိ. ဝဇ္ဇသိ, ဝဇ္ဇထ. ဝဇ္ဇာမိ, ဝဇ္ဇာမ. ဝဇ္ဇတေ, ဝဇ္ဇန္တေ. ဝဇ္ဇသေ, ဝဇ္ဇဝှေ. ဝဇ္ဇေ, ဝဇ္ဇမှေ. वज्जति, वज्जन्ति; वज्जसि, वज्जथ; वज्जामि, वज्जाम; वज्जते, vajjante; वज्जसे, वज्जव्हे; वज्जे, वज्जम्हे. ဝဇ္ဇတု[Pg.99], ဝဇ္ဇန္တု. ဝဇ္ဇာဟိ, ဝဇ္ဇ, ဝဇ္ဇထ. ဝဇ္ဇာမိ, ဝဇ္ဇာမ. ဝဇ္ဇတံ, ဝဇ္ဇန္တံ. ဝဇ္ဇဿု, ဝဇ္ဇဝှော. ဝဇ္ဇေ, ဝဇ္ဇာမှသေ. ဣမာ ဒွေ ပဒမာလာ ဝဒဓာတုဿ ဝဇ္ဇာဒေသဝသေန ဝုတ္တာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အတြာယံ သုခုမတ္ထဝိနိစ္ဆယော, ‘‘မာနုဿကာ စ ဒိဗ္ဗာ စ, တူရိယာ ဝဇ္ဇန္တိ တာဝဒေ’’တိ ပါဠိ. ဧတ္ထ ဝဇ္ဇန္တီတိ ဣဒံ သုဒ္ဓကတ္တုပဒံ တဒ္ဒီပကတ္တာ. ကိံ ဝိယ? वज्जतु, वज्जन्तु; वज्जाहि, वज्ज, वज्जथ; वज्जामि, वज्जाम; वज्जतं, वज्जन्तं; वज्जस्सु, वज्जव्हो; वज्जे, वज्जाम्हसे. या दोन पदमाला 'वद्' धातूच्या 'वज्ज' आदेशाच्या नियमाने सांगितल्या आहेत असे जाणावे. येथे हा सूक्ष्म अर्थ-निर्णय आहे: "मानवी आणि दिव्य वाद्ये त्याच वेळी वाजतात" ही पाळी आहे. येथे 'वज्जन्ति' हे शुद्धकर्तृपद आहे, कारण ते त्याला प्रकाशित करते. कशासारखे? ‘‘ဥဒီရယန္တု သင်္ခပဏဝါ, ဝဒန္တု ဧကပေါက္ခရာ; နဒန္တု ဘေဤ သန္နဒ္ဓါ, ဝဂ္ဂူ ဝဒန္တု ဒုန္ဒုဘီ’’တိ "शंख आणि पणव वाजवावेत, एकपोक्खर वाजवावेत, सज्ज झालेल्या भेरींनी नाद करावा, आणि मधुर दुंदुभी वाजवाव्यात." ဧတ္ထ ‘‘ဥဒီရယန္တု ဝဒန္တု’’အာဒီနိ ဝိယ. တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဝဇ္ဇန္တီတိ ဝဇ္ဇိံသူတိ အတီတဝစနေ ဝတ္တမာနဝစနံ ဝေဒိတဗ္ဗ’’န္တိ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေန ဝိဝရဏံ ကတံ, တသ္မာ ဤဒိသေသု ဌာနေသု ဝဒဓာတုဿ ဝဇ္ဇာဒေသော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. येथे "उदीरयन्तु वदन्तु" इत्यादींसारखे. तसेच अट्ठकथेत "वज्जन्ति म्हणजे वज्जियुं (वाजले) अशा भूतकाळाच्या अर्थात वर्तमानकाळाचे वचन जाणावे" असे शुद्धकर्तृपदाचे विवरण केले आहे, म्हणून अशा ठिकाणी 'वद्' धातूचा 'वज्ज' आदेश जाणावा. ‘‘သင်္ခါ စ ပဏဝါ စေဝ, အထောပိ ဒိဏ္ဍိမာ ဗဟူ; အန္တလိက္ခမှိ ဝဇ္ဇန္တိ, ဒိသွာနစ္ဆေရကံ နဘေ’’တိ "शंख, पणव आणि अनेक डिंडिम, आकाशातील आश्चर्य पाहून अंतरीक्षात वाजतात (वाजविली जातात)." ဧတ္ထ ပန ဝဇ္ဇန္တီတိ ဟေတုကတ္တုပဒံ တဒ္ဒီပကတ္တာ. တဉ္စ ခေါ ဝဏ္ဏသန္ဓိဝိသယတ္တာ ဝါဒယန္တီတိ ကာရိတပဒရူပေန သိဒ္ဓံ. တထာ ဟိ ‘‘ဝါဒယန္တီ’’တိ ပဒရူပံ ပတိဋ္ဌပေတွာ ယကာရေ ပရေ သရလောပေါ ကတော, ဒျကာရသညောဂဿ ဇ္ဇကာရဒွယံ ပုဗ္ဗက္ခရဿ ရဿတ္တဉ္စ ဘဝတိ. တေနာဟ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဝဇ္ဇန္တီတိ ဝါဒယန္တီ’’တိ ဟေတုကတ္တုဝသေန ဝိဝရဏံ. တထာ ဟိ ‘‘ဒေဝတာ နဘေ အစ္ဆေရကံ ဘဂဝတော ယမကပါဋိဟာရိယံ ဒိသွာ အန္တလိက္ခေ ဧတာနိ သင်္ခပဏဝါဒီနိ တူရိယာနိ ဝါဒယန္တီ’’တိ ဟေတုကတ္တုဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော ဘဝတိ, တသ္မာ ဤဒိသေသု ဌာနေသု ဝဒဿ ဝဇ္ဇာဒေသော န ဘဝတိ. येथे मात्र 'वज्जन्ति' हे प्रयोजक कर्तृपद (हेतुकर्तृपद) आहे, कारण ते त्याला प्रकाशित करते. आणि ते वर्णसंधीच्या विषयामुळे 'वादयन्ति' या प्रयोजक (कारित) पदाच्या रूपाने सिद्ध होते. तसेच 'वादयन्ति' हे पदरूप प्रस्थापित करून, 'य' कार पर असताना स्वराचा लोप केला जातो, 'द्य' कार संयोगाचा द्वित्व 'ज्ज' कार होतो आणि पूर्व अक्षराला र्हस्वत्व प्राप्त होते. म्हणूनच अट्ठकथेत "वज्जन्ति म्हणजे वादयन्ति (वाजवितात)" असे प्रयोजक विवरण केले आहे. तसेच "देवता आकाशात भगवंतांचे यमकप्रातिहार्य पाहून अंतरीक्षात हे शंख, पणव इत्यादी वाद्ये वाजवितात" असा प्रयोजक अर्थ ग्रहण करावा लागतो, म्हणून अशा ठिकाणी 'वद्' धातूचा 'वज्ज' आदेश होत नाही. ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘အန္တလိက္ခမှိ ဝဇ္ဇန္တိ, ဒိသွာနစ္ဆေရကံ နဘေ’’တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘ဝဇ္ဇန္တီ’’တိ ပဒံ သုဒ္ဓကတ္တုပဒမေဝ, န ဟေတုကတ္တုပဒံ [Pg.100] ‘‘ဝဇ္ဇန္တီတိ ဝါဒယန္တီ’’တိ ဝိဝရဏေ ကတေပိ, တထာ ဟိ ‘‘ယေ ကေစိမေ ဒိဋ္ဌိပရိဗ္ဗသာနာ, ‘‘ဣဒမေဝ သစ္စ’န္တိ ဝိဝါဒယန္တီ’’တိ စ ‘‘ဧဝမ္ပိ ဝိဂ္ဂယှ ဝိဝါဒယန္တီ’’တိ စ ဧဝမာဒီသု ဝဒန္တိပဒေန သမာနတ္ထံ ‘‘ဝါဒယန္တီ’’တိ ပဒဉ္စ သာသနေ ဒိဋ္ဌ’’န္တိ? တန္န, ‘‘ဒိသွာ’’တိ ဒဿနကြိယာဝစနတော. န ဟိ သင်္ခပဏဝါဒီနံ ပါဋိဟာရိယာဒိဒဿနံ ဥပပဇ္ဇတိ ဒဿနစိတ္တဿ အဘာဝတောတိ. သစ္စံ, တထာပိ – येथे काही जण म्हणू शकतात की, "आकाशातील आश्चर्य पाहून अंतरीक्षात वाजतात" येथे देखील 'वज्जन्ति' हे पद शुद्धकर्तृपदच आहे, प्रयोजक कर्तृपद नाही, जरी "वज्जन्ति म्हणजे वादयन्ति" असे विवरण केले असले तरी. कारण "जे कोणी या मतामध्ये राहणारे आहेत, 'हेच सत्य आहे' असा विवाद करतात" आणि "अशा प्रकारे देखील कलह करून विवाद करतात" इत्यादींमध्ये 'वदन्ति' पदाच्या समान अर्थाने 'वादयन्ति' हे पद बुद्धवचनात पाहिले गेले आहे? ते योग्य नाही, कारण "दिस्वा" (पाहून) हा दर्शन-क्रियावाचक शब्द आहे. कारण शंख, पणव इत्यादी अचेतन वाद्यांना प्रातिहार्य इत्यादींचे दर्शन घडणे शक्य नाही, कारण त्यांच्यात दर्शनचित्त (पाहण्याची चेतना) नसते. हे सत्य आहे, तरी देखील — ‘‘ရာဒန္တေ ဒါရကေ ဒိသွာ, ဥဗ္ဗိဒ္ဓါ ဝိပုလာ ဒုမာ; သယမေဝေါနမိတွာန, ဥပဂစ္ဆန္တိ ဒါရကေ’’တိ "रडणाऱ्या बालकांना पाहून, उंच आणि मोठे वृक्ष स्वतःच वाकून बालकांजवळ जातात." ဧတ္ထ ဝိယ ဥပစရိတတ္တာ ဥပပဇ္ဇတေဝ ဒဿနဝစနံ. တသ္မာ ‘‘ဝဇ္ဇန္တီတိ ဝါဒယန္တီ’’တိ ဝိဝရဏံ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေန ကတန္တိ? တန္န, ဟေဋ္ဌာ – येथे ज्याप्रमाणे उपचाराने (लाक्षणिक अर्थाने) दर्शनवचन योग्य ठरते, त्याप्रमाणेच तेथेही घडते. म्हणून "वज्जन्ति म्हणजे वादयन्ति" हे विवरण शुद्धकर्तृपदाचे विवरण केले आहे काय? ते योग्य नाही, कारण खालीलप्रमाणे — ‘‘သင်္ဂီတိယော စ ဝတ္တန္တိ, အမ္ဗရေ အနိလဉ္ဇသေ; စမ္မနဒ္ဓါနိ ဝါဒေန္တိ, ဒိသွာနစ္ဆေရကံ နဘေ’’တိ "आणि वायूच्या मार्गावर (आकाशात) संगीत चालते, आकाशातील आश्चर्य पाहून चर्मबद्ध वाद्ये वाजवितात." ဣမိန္နာ ဂါထာယ ‘‘ဝါဒေန္တီတိ ဝါဒယန္တိ ဒေဝတာ’’တိ သပါဌသေသဿ အတ္ထဝိဝရဏဿ ဟေတုကတ္တုဝသေန ကတတ္တာ. အထာပိ ဝဒေယျုံ ‘‘သင်္ခါ စ ပဏဝါ စေဝ, အထောပိ ဒိဏ္ဍိမာ ဗဟူ’တိ ပစ္စတ္တဝစနဝသေန ဝုတ္တတ္တာ ဝဇ္ဇန္တီတိ ပဒံ ကမ္မဝါစကပဒ’’န္တိ စေ? တမ္ပိ န, ကမ္မဝသေန ဝိဝရဏဿ အကတတ္တာ, ကတ္တုဝသေန ပန ကတတ္တာတိ နိဋ္ဌမေတ္ထ ဂန္တဗ္ဗံ. या गाथेमध्ये 'वादेन्ति म्हणजे देव वाजवतात' (vādentīti vādayanti devatā) अशा उर्वरित पाठासह अर्थाचे स्पष्टीकरण प्रयोजक (हेतुकर्तृक) रूपाने केले गेले असल्यामुळे. तसेच जर असे म्हटले की, 'शंख आणि पणव, तसेच अनेक दिंडिम' (saṅkhā ca paṇavā ceva, athopi diṇḍimā bahū) असे प्रथमा विभक्तीच्या (पच्चत्तवचन) रूपाने म्हटले असल्यामुळे 'वज्जन्ति' (vajjanti) हे पद कर्मवाचक पद आहे, तर? ते देखील योग्य नाही, कारण कर्मानुसार स्पष्टीकरण केलेले नसून, कर्तृवाचक (किच्च) रूपाने केले गेले आहे, असा येथे निष्कर्ष काढावा. အယမေတ္ထ ဝိနိစ္ဆယော ဝေဒိတဗ္ဗော. ဒွိဂဏိကော ဝဒဓာတု ဘူဝါဒိဂဏိကော စ စုရာဒိဂဏိကော စ. သော ဟိ ဘူဝါဒိဂဏေ ဝတ္တန္တော ‘‘ဝဒတိ ဝဇ္ဇတီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုရူပါနိ ဇနေတွာ ‘‘ဝါဒေတိ, ဝါဒယတိ, ဝါဒါပေတိ, ဝါဒါပယတီ’’တိ စတ္တာရိ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ ဇနေတိ, စုရာဒိဂဏေ ပန ‘‘ဝါဒေတိ, ဝါဒယတီ’’တိ [Pg.101] သုဒ္ဓကတ္တုရူပါနိ ဇနေတွာ ‘‘ဝါဒါပေတိ, ဝါဒါပယတီ’’တိ စ ဒွေ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ ဇနေတိ, တသ္မာ သာသနေ ‘‘ဝါဒေန္တိ ဝါဒယန္တီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ ဒိဿန္တိ. ‘‘ဝဒေယျ, ဝဒေယျုံ’’ ဣစ္စာဒိ သဗ္ဗံ နေယျံ. ‘‘ဝဇ္ဇေယျ, ဝဇ္ဇေယျုံ’’ ဣစ္စာဒိ စ သဗ္ဗံ နေယျံ ဝဇ္ဇာဒေသဝသေန. येथे हा निर्णय समजून घ्यावा. 'वद्' (vad) धातू हा दोन गणांमधील आहे - भूवादिगणीय आणि चुरादिगणीय. तो भूवादिगणामध्ये असताना 'वदति, वज्जति' अशी कर्तृरूपे निर्माण करून 'वादेति, वादयति, वादापेति, वादापयति' अशी चार प्रयोजक (हेतुकर्तृक) रूपे निर्माण करतो; तर चुरादिगणामध्ये 'वादेति, वादयति' अशी कर्तृरूपे निर्माण करून 'वादापेति, वादापयति' अशी दोन प्रयोजक रूपे निर्माण करतो. त्यामुळे शासनात (बुद्धवचनात) 'वादेन्ति, वादयन्ति' ही शुद्ध कर्तृपदे दिसतात. 'वदेय्य, वदेय्युं' इत्यादी सर्व रूपे समजून घ्यावीत. तसेच 'वज्जेय्य, वज्जेय्युं' इत्यादी सर्व रूपे 'वज्ज' आदेशाच्या नियमाने समजून घ्यावीत. အထ ဝါ ဝဒေယျ, ဝဒေယျုံ, ဝဇ္ဇုံ. ပိတာ မာတာ စ တေ ဒဇ္ဇုန္တိ ပဒမိဝ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဝဇ္ဇုံ ဝါ တေ န ဝါ ဝဇ္ဇုံ, နတ္ထိ နာသာယ ရူဟနာ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. ဝဒေယျုံ ဝါန ဝဒေယျုံဝါတိ အတ္ထော. ဝဒေယျာသိ, ဝဇ္ဇာသိ, ဝဇ္ဇေသိ ဣစ္စပိ. ဝုတ္တော ဝဇ္ဇာသိ ဝန္ဒနံ. ဝဇ္ဇေသိ ခေါ တွံ ဝါမူရံ. ဝဒေယျာထ, ဝဇ္ဇာထ. အမ္မံ အရောဂံ ဝဇ္ဇာထ. ဝဒေယျာမိ, ဝဇ္ဇာမိ, ဝဒေယျာမ, ဝဇ္ဇာမ. ဝဒေထ, ဝဒေရံ. ဝဒေထော, ဝဒေယျာဝှော, ဝဇ္ဇာဝှော. ဝဒေယျံ, ဝဇ္ဇံ, ဝဒေယျာမှေ, ဝဇ္ဇာမှေ. ပုဗ္ဗေ ဝိယ ဣဓာပိ ယကာရေ ပရေ သရလောပေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အညာနိပိ ဥပပရိက္ခိတွာ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. किंवा 'वदेय्य, वदेय्युं, वज्जुं' अशी रूपे होतात. जसे 'पिता माता च ते दज्जुं' या पदाप्रमाणे. आणि येथे 'वज्जुं वा ते न वा वज्जुं, नत्थि नासाय रूहना' (त्यांनी बोलावे किंवा बोलू नये, नाकाची वाढ होत नाही) हे पाळीचे उदाहरण आहे. याचा अर्थ 'त्यांनी बोलावे किंवा बोलू नये' असा आहे. 'वदेय्यासि, वज्जासि, वज्जेसि' इत्यादी. जसे 'वुत्तो वज्जासि वन्दनं', 'वज्जेसि खो त्वं वामूरं'. 'वदेय्याथ, वज्जाथ' जसे 'अम्मं अरोगं वज्जाथ'. 'वदेय्यामि, वज्जामि, वदेय्याम, वज्जाम'. 'वदेथ, वदेरं'. 'वदेथो, वदेय्याव्हो, वज्जाव्हो'. 'वदेय्यं, वज्जं, वदेय्याम्हे, वज्जाम्हे'. पूर्वीप्रमाणे येथेही 'य' कार नंतर असताना स्वराचा लोप होतो असे पाहावे. इतर रूपे देखील नीट तपासून ग्रहण करावीत. ဣဒါနိ ပရောက္ခာဒိရူပါနိ ကထယာမ. ဝဒ, ပါဝဒ, ယထာ ဗဘုဝ. ဒကာရလောပေ ‘‘ပါဝ’’ ဣတိပိ ရူပံ ဘဝတိ, ‘‘ပဋိပံ ဝဒေဟိ ဘဒ္ဒန္တေ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ပဋိပ’’န္တိ ပဒံ ဝိယ. တထာ ဟိ ‘‘ယော အာတုမာနံ သယမေဝ ပါဝ’’ ဣတိ ပါဠိ ဒိဿတိ. ဧတ္ထ ပသဒ္ဒေါ ဥပသဂ္ဂေါ ဒီဃံ ကတွာ ဝုတ္တော ‘‘ပါဝဒတိ ပါဝစန’’န္တိအာဒီသု ဝိယ, ပါဝါတိ စ ဣဒံ အတီတဝစနံ, အဋ္ဌကထာယံ ပန အတီတဝစနံ ဣဒန္တိ ဇာနန္တောပိ ဂရု ဝတ္တမာနဝစနဝသေန ‘‘ပါဝါတိ ဝဒတီ’’တိ ဝိဝရဏမကာသိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု ကာလဝိပလ္လာသဝသေန အတ္ထဿ ဝတ္တဗ္ဗတ္တာ. आता आपण परोक्षा (भूतकाळ) इत्यादींची रूपे सांगू. 'वद, पावद', जसे 'बभूव' होते. 'द' काराचा लोप झाल्यावर 'पाव' असेही रूप बनते, जसे 'पटिपं वदेहि भद्दन्ते' येथे 'पटिपं' हे पद आहे. तसेच 'यो आतुमानं सयमेव पाव' अशी पाळी (मूळ पाठ) दिसते. येथे 'प' (प्र) हा उपसर्ग 'पावदति, पावचनं' इत्यादींप्रमाणे दीर्घ करून वापरला आहे. 'पाव' हे भूतकाळाचे रूप आहे, परंतु अट्ठकथेमध्ये हे भूतकाळाचे रूप आहे हे माहीत असूनही, आचार्यांनी वर्तमानकाळाच्या रूपाने 'पाव म्हणजे बोलतो (वदति)' असे स्पष्टीकरण केले आहे, कारण अशा ठिकाणी काळाच्या व्यत्यासामुळे (कालविपर्यास) अर्थ सांगावा लागतो. အာယသ္မာပိ စ သာရိပုတ္တော နိဒ္ဒေသေ ‘‘ယော အာတုမာနံ သယမေဝ ပါဝါ’’တိ ပဒံ နိက္ခိပိတွာ အာတုမာ ဝုစ္စတိ အတ္တာ, သယမေဝ ပါဝါတိ သယမေဝ အတ္တာနံ ပါဝဒတိ, ‘‘အဟမသ္မိ [Pg.102] သီလသမ္ပန္နော’’တိ ဝါ ‘‘ဝတသမ္ပန္နော’’တိ ဝါတိ ဝတ္တမာနဝစနေန အတ္ထံ နိဒ္ဒိသိ. အထ ဝါ ပါဝါတိ ဣဒံ န ကေဝလံ ဝဒဓာတုဝသေနေဝ နိပ္ဖန္နံ, အထ ခေါ ဥဓာတုဝသေနပိ. တထာ ဟိ ဣဒံ ပပုဗ္ဗဿ ဥသဒ္ဒေ ဣတိ ဓာတုဿ ပယောဂေ ဥကာရဿ ဩကာရာဒေသံ ကတွာ တတော ပရောက္ခာဘူတေ အကာရေ ပရေ ဩကာရဿ အာဝါဒေသံ တတော စ သန္ဓိကိစ္စံ ကတွာ သိဇ္ဈတိ, တသ္မာ ဥဓာတုဿ ဝဒဓာတုယာ သမာနတ္ထတ္တာ တန္နိပ္ဖန္နရူပဿ စ ဝဒဓာတုယာ နိပ္ဖန္နရူပေန သမာနရူပတ္တာ ‘‘သယမေဝ အတ္တာနံ ပါဝဒတီ’’တိ ဝဒဓာတုဝသေန နိဒ္ဒိသီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. आयुष्यमान सारिपुत्तांनी देखील निद्देसामध्ये 'यो आतुमानं सयमेव पावा' हे पद ठेवून, 'आतुमा' म्हणजे 'आत्मा' (स्वतः) असे म्हटले आहे; 'सयमेव पावा' म्हणजे 'स्वतःच स्वतःची प्रशंसा करतो (पावदति)', जसे 'मी शीलसंपन्न आहे' किंवा 'व्रतसंपन्न आहे' अशा वर्तमानकाळाच्या शब्दांनी अर्थ स्पष्ट केला आहे. किंवा 'पावा' हे केवळ 'वद्' धातूपासूनच सिद्ध झालेले नाही, तर 'उ' (u) धातूपासूनही सिद्ध झाले आहे. तसेच, 'प' उपसर्गपूर्वक 'उ' (शब्दे) या धातूच्या प्रयोगात 'उ' काराचा 'ओ' कार आदेश करून, त्यानंतर परोक्षा भूतकाळातील 'अ' कार नंतर असताना 'ओ' काराचा 'आव' आदेश करून आणि त्यानंतर संधीचे कार्य करून हे सिद्ध होते. त्यामुळे 'उ' धातूचा अर्थ 'वद्' धातूसारखाच असल्यामुळे आणि त्यापासून सिद्ध झालेले रूप 'वद्' धातूच्या रूपासारखेच असल्यामुळे, 'स्वतःच स्वतःची प्रशंसा करतो (पावदति)' असे 'वद्' धातूच्या रूपाने स्पष्ट केले आहे, असे समजावे. ဣဒါနိ ဝိစ္ဆိန္နာ ပဒမာလာ ဃဋီယတိ. ဝဒ, ဝဒုံ. ဝဒေ, ဝဒိတ္ထ, ဝဒံ, ဝဒိမှ. ဝဒိတ္ထ, ဝဒိရေ. ဝဒိတ္ထော, ဝဒိဝှော. ဝဒိံ, ဝဒိမှေ. ပါဝဒ, ပါဝ ဣစ္စပိ. ပါဝဒု. ပါဝဒေ, ပါဝဒိတ္ထ. ပါဝဒံ, ပါဝဒိမှ. ပါဝဒိတ္ထ, ပါဝဒိရေ. ပါဝဒိတ္ထော, ပါဝဒိဝှော. ပါဝဒိံ, ပါဝဒိမှေ. တထာ ‘‘ဝဇ္ဇ, ဝဇ္ဇု’’ ဣစ္စာဒီနိ ပရောက္ခာရူပါနိ. आता विखुरलेली पदमाला (रूपावली) जोडली जात आहे. 'वद, वदुं. वदे, वदित्थ, वदं, वदिम्ह. वदित्थ, वदिरे. वदित्थो, वदिव्हो. वदिं, वदिम्हे'. 'पावद, पाव' इत्यादी. 'पावदु. पावदे, पावदित्थ. पावदं, पावदिम्ह. पावदित्थ, पावदिरे. पावदित्थो, पावदिव्हो. पावदिं, पावदिम्हे'. तसेच 'वज्ज, वज्जु' इत्यादी परोक्षा (भूतकाळाची) रूपे आहेत. ‘‘အဝဒါ, အဝဒူ. အဝဇ္ဇာ, အဝဇ္ဇူ’’ ဣစ္စာဒီနိ ဟိယျတ္တနီရူပါနိ. 'अवदा, avadū. अवज्जा, avajjū' इत्यादी हिय्यत्तनी (ह्यस्तन भूतकाळाची) रूपे आहेत. ‘‘အဝဒိ, ဝဒိ, အဝဒုံ, ဝဒုံ, အဝဒိံသု, ဝဒိံသု. အဝဇ္ဇိ, ဝဇ္ဇိ’’ ဣစ္စာဒီနိ အဇ္ဇတနီရူပါနိ. 'अवदि, वदि, अवदुं, वदुं, अवदिंसु, वदिंसु. अवज्जि, वज्जि' इत्यादी अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळाची) रूपे आहेत. ‘‘ဝဒိဿတိ, ဝဒိဿန္တိ. ဝဇ္ဇိဿတိ, ဝဇ္ဇိဿန္တိ’’ ဣစ္စာဒီနိ ဘဝိဿန္တီရူပါနိ. 'वदिस्सति, वदिस्सन्ति. वज्जिस्सति, वज्जिस्सन्ति' इत्यादी भविस्सती (भविष्यकाळाची) रूपे आहेत. ‘‘အဝဒိဿာ, ဝဒိဿာ, အဝဇ္ဇိဿာ, ဝဇ္ဇိဿာ’’ ဣစ္စာဒီနိ ကာလာတိပတ္တိရူပါနိ. သေသာနိ သဗ္ဗာနိပိ ယထာသမ္ဘဝံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗာနိ. ယာ ပနေတ္ထ ဝဒဓာတု ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ ဝုတ္တာ, သာ ကတ္ထစိ ‘‘ဝဒန္တံ ဧကပေါက္ခရာ. ဘေရိဝါဒကော’’တိအာဒီသု အဗျတ္တသဒ္ဒေပိ ဝတ္တတိ ဥပစရိတဝသေနာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. 'अवदिस्सा, वदिस्सा, अवज्जिस्सा, वज्जिस्सा' इत्यादी कालातिपत्ती (क्रियातिपत्ती) रूपे आहेत. उर्वरित सर्व रूपे आवश्यकतेनुसार सविस्तर जाणावीत. येथे जो 'वद्' धातू स्पष्ट वाणीच्या अर्थाने सांगितला आहे, तो काही ठिकाणी 'वदन्तं एकपोक्खरा', 'भेरिवादको' इत्यादींमध्ये उपचाराने (लाक्षणिक अर्थाने) अव्यक्त आवाजाच्या अर्थाने देखील वापरला जातो, असे समजावे. ဝိဒ [Pg.103] ဉာဏေ. ဉာဏံ ဇာနနံ. ဝိဒတိ. ဝေဒေါ. ဝိဒူ. ကာရိတေ ‘‘ဝေဒေတိ. ဝေဒယတိ. သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ပဝေဒေတိ. ဝေဒယန္တိ စ တေ တုဋ္ဌိံ, ဒေဝါ မာနုသကာ ဥဘော’’တိ ပယောဂါ. တတ္ထ ပဝေဒေတီတိ ဗောဓေတိ ဉာပေတိ ပကာသေတိ. ဝေဒေါတိ ဝိဒတိ သုခုမမ္ပိ ကာရဏံ အာဇာနာတီတိ ဝေဒေါ, ပညာယေတံ နာမံ. ‘‘ဝေဒေဟမုနီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ဉာဏံ ဝေဒေါတိ ဝုစ္စတိ. ဝေဒေါတိ ဝါ ဝေဒဂန္ထဿပိ နာမံ ဝိဒန္တိ ဇာနန္တိ ဧတေန ဥစ္စာရိတမတ္တေန တဒါဓာရံ ပုဂ္ဂလံ ‘‘ဗြာဟ္မဏော အယ’’န္တိ, ဝိဒန္တိ ဝါ ဧတေန ဗြာဟ္မဏာ အတ္တနာ ကတ္တဗ္ဗကိစ္စန္တိ ဝေဒေါ. သော ပန ဣရုဝေဒယဇုဝေဒသာမဝေဒဝသေန တိဝိဓော. အာထဗ္ဗဏဝေဒံ ပန ပဏီတဇ္ဈာသယာ န သိက္ခန္တိ ပရူပဃာတသဟိတတ္တာ. တသ္မာ ပါဠိယံ ‘‘တိဏ္ဏံ ဝေဒါနံ ပါရဂူ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧတေယေဝ ‘‘ဆန္ဒော, မန္တော, သုတီ’’တိ စ ဝုစ္စန္တိ. 'विद्' (vid) धातू ज्ञान (जाणणे) या अर्थी आहे. ज्ञान म्हणजे जाणणे. 'विदति' (तो जाणतो). 'वेदो' (वेद). 'विदू' (विद्वान). प्रयोजक (कारित) रूपात 'वेदेति, वेदयति' असे प्रयोग होतात. जसे: 'सयं अभिञ्ञा सच्छिकत्वा पवेदेति' (स्वतः अभिज्ञा प्राप्त करून, साक्षात करून प्रवेदित करतो/जाणवून देतो) आणि 'वेदयन्ति च ते तुट्ठिं, देवा मानुसका उभो' (देव आणि मानव दोघेही आनंद व्यक्त करतात). तेथे 'पवेदेति' म्हणजे बोध करतो, जाणवून देतो, प्रकाशित करतो. 'वेद' म्हणजे जो सूक्ष्म कारण देखील जाणतो तो 'वेद' होय, हे प्रज्ञेचे नाव आहे. 'विदेहमुनी' येथे ज्ञानाला 'वेद' म्हटले आहे. किंवा 'वेद' हे वेदग्रंथाचे देखील नाव आहे, ज्याच्या केवळ उच्चारणाने त्या आधारावर 'हा ब्राह्मण आहे' असे लोक जाणतात, किंवा ज्याच्याद्वारे ब्राह्मण स्वतःचे कर्तव्यकर्म जाणतात, तो 'वेद' होय. तो ऋग्वेद, यजुर्वेद आणि सामवेद या रूपाने तीन प्रकारचा आहे. परंतु अथर्ववेदाचे अध्ययन श्रेष्ठ विचारसरणीचे लोक करत नाहीत, कारण तो इतरांना इजा पोहचवण्याशी (अभिचार कर्म) संबंधित आहे. म्हणून पाळीमध्ये 'तिण्णं वेदानं पारगू' (तीन वेदांमध्ये पारंगत) असे म्हटले आहे. यांनाच 'छन्द, मन्त (मंत्र), सुति (श्रुती)' असेही म्हणतात. ပညာယံ တုဋ္ဌိယံ ဝေဒေ, ဝေဒသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ; ပါဝကေပိ စ သော ဒိဋ္ဌော, ဇာတသဒ္ဒပုရေစရော; प्रज्ञा, तुष्टी (आनंद) आणि वेद (ज्ञान/ग्रंथ) या अर्थांमध्ये 'वेद' शब्द प्रवृत्त होतो; तसेच अग्नीच्या अर्थात देखील तो 'जात' शब्दाच्या आधी लागून (जातवेद) वापरलेला दिसतो; ပစ္ဆာနုဂေ ဇာတသဒ္ဒေ, သတိ တုဋ္ဌဇနေပိ စ; ‘‘ဝေဒဂူ သဗ္ဗဓမ္မေ’’တိ ဧတ္ထာပိ ဝိဒိတေသု စ. आणि 'जात' शब्द नंतर आल्यावर (वेदजात) आनंदित झालेल्या लोकांच्या अर्थात वापरला जातो; तसेच 'वेदगू सब्बधम्मे' (सर्व धर्मांना जाणणारा) येथे 'वेद' शब्द 'जाणलेल्या' (विदित) गोष्टींच्या अर्थात वापरला आहे. ဝိဒူတိ ပဏ္ဍိတမနုဿော. သော ဟိ ယထာသဘာဝတော ကမ္မဉ္စ ဖလဉ္စ ကုသလာဒိဘေဒေ စ ဓမ္မေ ဝိဒတီတိ ‘‘ဝိဒူ’’တိ ဝုစ္စတိ. 'विदू' म्हणजे पंडित (विद्वान) मनुष्य. कारण तो स्वभावतः कर्म आणि त्याचे फळ, तसेच कुशल इत्यादी भेदांनी युक्त असणाऱ्या धर्मांना (गोष्टींना) जाणतो, म्हणून त्याला 'विदू' असे म्हणतात. ရုဒ အဿုဝိမောစနေ, သကမ္မိကဝသေနိမိဿာ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ရောဒတိ, ရုဒတိ ဣစ္စပိ. ရုဏ္ဏံ. ရုဒိတံ. ရောဒနံ. ရောဒန္တော. ရောဒမာနော. ရောဒန္တီ. ရောဒမာနာ. ရုဒမုခါ. ရုဒံ. ရုဒန္တော. 'रुद्' (rud) धातू अश्रू ढाळणे (रडणे) या अर्थी आहे, येथे अकर्मक रूपाने याचा अर्थ घ्यावा. 'रोदति, रुदति' इत्यादी. 'रुण्णं' (रडलेला), 'रुदितं' (रडणे), 'रोदनं' (रडणे), 'रोदन्तो' (रडणारा), 'रोदमानो' (रडणारा), 'रोदन्ती' (रडणारी), 'रोदमाना' (रडणारी), 'रुदमुखा' (रडवेला चेहरा असलेला), 'रुदं' (रडत असताना), 'रुदन्तो' (रडणारा). တတ္ထ [Pg.104] ရောဒတီတိ ကိံ ရောဒတိ? မတံ ပုတ္တံ ဝါ ဘာတရံ ဝါ ရောဒတိ. တတြာယံ ပါဠိ ‘‘နာဟံ ဘန္တေ ဧတံ ရောဒါမိ, ယံ မံ ဘန္တေ ဘဂဝါ ဧဝမာဟ’’. အယံ ပနေတ္ထ အတ္ထော – ‘‘ယံ မံ ဘန္တေ ဘဂဝါ ဧဝမာဟ, အဟံ ဧတံ ဘဂဝတော ဗျာကရဏံ န ပရောဒါမိ န ပရိဒေဝါမိ န အနုတ္ထုနာမီ’တိ ဧဝံ သကမ္မိကဝသေနတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော, န အဿုမုဉ္စနမတ္တေန. तेथे 'रोदति' (रडतो) म्हणजे काय रडतो? मृत पुत्रासाठी किंवा भावासाठी रडतो. तेथे हा पाळी पाठ आहे – "भंते, भगवान मला जे असे म्हणाले, त्याबद्दल मी रडत नाही." येथे हा अर्थ आहे – "भंते, भगवान मला जे असे म्हणाले, मी भगवंतांच्या त्या व्याकरणावर (स्पष्टीकरणावर) शोक करत नाही, विलाप करत नाही, अनुताप करत नाही." अशा प्रकारे सकर्मक अर्थ समजून घ्यावा, केवळ अश्रू ढाळणे एवढाच नाही. ‘မတံ ဝါ အမ္မ ရောဒန္တိ, ယော ဝါ ဇီဝံ န ဒိဿတိ; ဇီဝန္တံ အမ္မ ပဿန္တိ, ကသ္မာ မံ အမ္မ ရောဒသီ’တိ "आई, जे मृत झाले आहेत किंवा जे जिवंत दिसत नाहीत, त्यांच्यासाठी लोक रडतात; आई, तू तर मला जिवंत पाहत आहेस, मग माझ्यासाठी का रडत आहेस?" အယဉ္စေတ္ထ ပယောဂေါ’’တိ ဣဒမဋ္ဌကထာဝစနံ. ဣဒံ ပန ဋီကာဝစနံ – ‘‘ယထာ သကမ္မကာ ဓာတုသဒ္ဒါ အတ္ထဝိသေသဝသေန အကမ္မကာ ဟောန္တိ ‘ဝိဗုဒ္ဓေါ ပုရိသော ဝိဗုဒ္ဓေါ ကမလသဏ္ဍော’တိ, ဧဝံ အတ္ထဝိသေသဝသေန အကမ္မကာပိ သကမ္မကာ ဟောန္တီတိ ဒဿေတုံ ‘န ပရိဒေဝါမိ န အနုတ္ထုနာမီ’တိ အာဟ. အနုတ္ထုနသဒ္ဒေါ သကမ္မကဝသေန ပယုဇ္ဇတိ ‘ပုရာဏာနိ အနုတ္ထုန’န္တိအာဒီသု. အယဉ္စေတ္ထ ပယောဂေါတိ ဣမိနာ ဂါထာယ အနုတ္ထုနနံ ရုဒနံ အဓိပ္ပေတန္တိ ဒဿေတီ’’တိ. "आणि हा येथे प्रयोग आहे" हे अट्ठकथा वचन आहे. हे तर टीका वचन आहे – "जसे अकर्मक धातू शब्द अर्थविशेषाने सकर्मक होतात, जसे 'विबुद्धो पुरिसो' (जागृत पुरुष), 'विबुद्धो कमलसण्डो' (विकसित कमळसमूह), त्याचप्रमाणे अर्थविशेषाने अकर्मक देखील सकर्मक होतात हे दर्शवण्यासाठी 'न परिदेवामि न अनुत्थुनामि' असे म्हटले आहे. 'अनुत्थुन' शब्द सकर्मक रूपाने वापरला जातो, जसे 'पुराणानि अनुत्थुनं' (पूर्वीच्या गोष्टींचा अनुताप करणे) इत्यादींमध्ये. 'आणि हा येथे प्रयोग आहे' याने या गाथेमध्ये अनुत्थुनन (अनुताप करणे) हे रडणे अभिप्रेत आहे, हे दर्शवले जाते." ဒလိဒ္ဒ ဒုဂ္ဂတိယံ. ဒုက္ခဿ ဂတိ ပတိဋ္ဌာတိ ဒုဂ္ဂတီတိ အယံ အတ္ထော ‘‘အပါယံ ဒုဂ္ဂတိံဝိနိပါတံ နိရယံ ဥပပဇ္ဇတီ’’တိအာဒီသု ယုဇ္ဇတိ, ဣဓ ပန ဣဒံ အတ္ထံ အဂ္ဂဟေတွာ အညော အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ကထံ ဒုဂ္ဂတီတိ? ဒုက္ခေန ကိစ္ဆေန ဂတိ ဂမနံ အန္နပါနာဒိလာဘော ဒုဂ္ဂတီတိ. ဒလိဒ္ဒတိ. ဒလိဒ္ဒေါ, ဒလိဒ္ဒီ, ဒါလိဒ္ဒိယံ. တတ္ထ ဒလိဒ္ဒတီတိ သဗ္ဗံ ဣစ္ဆိတိစ္ဆိတံ ပရံ ယာစိတွာ ဧဝ ဒုက္ခေန အဓိဂစ္ဆတိ, န အယာစိတွာတိ အတ္ထော. ဒုလိဒ္ဒေါတိ ဒုဂ္ဂတမနုဿော. ဒလိဒ္ဒီတိ ဒုဂ္ဂတာ နာရီ. ဒလိဒ္ဒဿ ဘာဝေါ ဒါလိဒ္ဒိယံ. ဧတ္ထ စ သဗ္ဗမေဝ ‘‘ဒလိဒ္ဒတီ’’တိ လောကိကပ္ပယောဂဒဿနတော ‘‘ဒလိဒ္ဒတီ’’တိ ကြိယာပဒံ ဝိဘာဝိတံ. သာသနေ ပန [Pg.105] တံ ကြိယာပဒံ န အာဂတံ, ‘‘ဒလိဒ္ဒေါ ဒလိဒ္ဒီ’’တိ နာမပဒါနိယေဝ အာဂတာနိ. အနာဂတမ္ပိ တံ ‘‘နာထတီ’’တိ ပဒမိဝ သာသနာနုလောမတ္တာ ဂဟေတဗ္ဗမေဝ. ဂရူ ပန ကစ္စာယနမတဝသေန ဒလ ဒုဂ္ဂတိမှီတိ ဒုဂ္ဂတိဝါစကဒလဓာတုတော ဣဒ္ဒပစ္စယံ ကတွာ ‘‘ဒလိဒ္ဒေါ’’တိ နာမပဒံ ဒဿေသုံ. दलिद्द (धातू) दुर्गत्यामध्ये (दुर्गती अर्थात). "दुःखाची गती किंवा प्रतिष्ठा म्हणजे दुर्गती" हा अर्थ "अपाय, दुर्गती, विनिपात, निरय (नरक) मध्ये उत्पन्न होतो" इत्यादींमध्ये योग्य ठरतो, परंतु येथे हा अर्थ न घेता दुसरा अर्थ घेतला पाहिजे. दुर्गती म्हणजे काय? दुःखाने, कष्टाने गती (गमन) किंवा अन्न-पानादींचा लाभ होणे म्हणजे दुर्गती होय. 'दलिद्दति' (तो दरिद्री होतो). दलिद्द् (दरिद्री पुरुष), दलिद्दी (दरिद्री स्त्री), दालिद्दियं (दारिद्र्य). तेथे 'दलिद्दति' म्हणजे सर्व काही इच्छित वस्तू दुसऱ्याकडे याचना करूनच दुःखाने प्राप्त करतो, न मागता नाही, असा अर्थ आहे. दलिद्द् म्हणजे दुर्गतीला प्राप्त झालेला मनुष्य (दरिद्री मनुष्य). दलिद्दी म्हणजे दुर्गतीला प्राप्त झालेली स्त्री (दरिद्री स्त्री). दरिद्र्याचा भाव म्हणजे 'दालिद्दियं' (दारिद्र्य). आणि येथे सर्व काही 'दलिद्दति' या लौकिक प्रयोगाच्या दर्शनावरून 'दलिद्दति' हे क्रियापद स्पष्ट केले आहे. परंतु शासनात (बुद्धवचनात) ते क्रियापद आलेले नाही, केवळ 'दलिद्द्', 'दलिद्दी' ही नामपदेच आली आहेत. आलेले नसले तरी, 'नाथति' या पदाप्रमाणे शासनाला अनुकूल असल्यामुळे ते ग्रहण करावेच. परंतु आचार्यांनी कच्चायन मतानुसार 'दल दुग्गतिम्हि' या दुर्गतीवाचक 'दल' धातूपासून 'इद्द' प्रत्यय लावून 'दलिद्द्' हे नामपद दर्शवले आहे. တုဒ ဗျထနေ. တုဒတိ, ဝိတုဒတိ. ကမ္မနိ ‘‘တုဇ္ဇတိ, ဝိတုဇ္ဇမာနော, ဝေဒနာဘိဘုန္နော’’တိ ရူပါနိ. तुद (धातू) व्यथेमध्ये (पीडा देणे/दुःख देणे अर्थात). तुदति (तो पीडा देतो), वितुदति (तो विशेष पीडा देतो). कर्मणी प्रयोगात 'तुज्जति' (पीडित केला जातो), 'वितुज्जमानो' (पीडित केला जात असलेला), 'वेदनाभिभुन्नो' (वेदनेने ग्रासलेला) अशी रूपे होतात. တုဒန္တိ ဝါစာဟိ ဇနာ အသညတာ,သရေဟိ သင်္ဂါမဂတံဝ ကုဉ္ဇရံ; သုတွာန ဝါကျံ ဖရုသံ ဥဒီရိတံ,အဓိဝါသယေ ဘိက္ခု အဒုဋ္ဌစိတ္တော; "असंयत लोक वाचेने (शब्दांनी) तशाच प्रकारे टोचतात (पीडा देतात), जसे युद्धभूमीवर गेलेल्या हत्तीला बाणांनी टोचले जाते; उच्चारलेले कठोर वचन ऐकूनही, भिक्खूने द्वेषरहित चित्ताने ते सहन करावे." နုဒ ပေရဏေ. ပေရဏံ စုဏ္ဏိကရဏံ ပိသနံ, နုဒတိ, ပနုဒတိ. ပနုဒနံ. नुद (धातू) प्रेरणेमध्ये (दूर करणे/प्रेरित करणे अर्थात). प्रेरणा म्हणजे चूर्ण करणे, दळणे (किंवा दूर ढकलणे). नुदति (तो दूर करतो), पनुदति (तो पूर्णपणे दूर करतो). पनुदनं (दूर करणे). ဝိဒိ လာဘေ. ဝိန္ဒတိ. ဥဋ္ဌာတာ ဝိန္ဒတေ ဓနံ. ဂေါဝိန္ဒော. विदि (धातू) लाभामध्ये (मिळवणे अर्थात). विन्दति (तो प्राप्त करतो). "उद्योगी (प्रयत्नशील) मनुष्य धन प्राप्त करतो." गोविन्दो (गोविंद). ခဒိ ပရိဃာတေ. ပရိဃာတံ သမန္တတော ဟနနံ. ခန္ဒတိ. खदि (धातू) परिघातामध्ये (नाश करणे/प्रहार करणे अर्थात). परिघात म्हणजे चहूबाजूंनी मारणे किंवा नाश करणे. खन्दति (तो नाश करतो/तुकडे करतो). ဒကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'द' कारान्त धातूंची रूपे. ဓကာရန္တဓာတု 'ध' कारान्त धातू. ဓာ ဓာရဏေ. ဒဓာတိ, ဝိဒဓာတိ. ယံ ပဏ္ဍိတော နိပုဏံ သံဝိဓေတိ. နိဓိံ နိဓေတိ. နိဓိ နာမ နိဓီယတိ. တာဝ သုနိဟိတော သန္တော. ယတော နိဓိံ ပရိဟရိ. နိဒဟတိ. ကုဟိံ ဒေဝ နိဒဟာမိ. ပရိဒဟတိ. ယော ဝတ္တံ ပရိဒဟိဿတိ. ဓဿတိ. ပရိဓဿတိ. ဗာလောတိ ပရံ ပဒဟတိ. သကျာ ခေါ အမ္ဗဋ္ဌ ရာဇာနံ [Pg.106] ဥက္ကာကံ ပိတာမဟံ ဒဟန္တိ. သဒ္ဒဟတိ တထာဂတဿ ဗောဓိံ. သဒ္ဓါ, သဒ္ဒဟနာ, သဒ္ဓါတဗ္ဗံ, သဒ္ဒဟိတဗ္ဗံ, သဒ္ဓါယိကော, ပစ္စယိကော. သဒ္ဓေယျဝစသာ ဥပါသိကာ. သဒ္ဒဟိတုံ, သဒ္ဒဟိတွာ. ဝိသေသာဓာနံ. သောတာဝဓာနံ. သောတံ ဩဒဟတိ. ဩဟိတသောတော. သောတံ ဩဒဟိတွာ. မစ္စုဓေယျံ, မာရဓေယျံ, နာမဓေယျံ, ဓာတု, ဓာတာ, ဝိဓာတာ. ဝိဓိ. အဘိဓာနံ, အဘိဓေယျံ, နိဓာနဝတီ ဝါစာ, အာဓာနဂါဟီ, သန္ဓိ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. धा (धातू) धारण करण्यामध्ये (धारण करणे/ठेवणे अर्थात). दधाति (तो धारण करतो), विदधाति (तो विधान करतो/व्यवस्था करतो). "ज्याला पंडित निपुणतेने व्यवस्थित करतो." निधी (ठेव) ठेवतो. निधी म्हणजे जो ठेवला जातो. "तोपर्यंत चांगल्या प्रकारे ठेवलेला असताना." "ज्यामुळे निधीचे रक्षण केले." निदहति (तो ठेवतो/पुरतो). "हे देवा, मी कोठे ठेवू (पुरू)?" परिदहति (तो परिधान करतो). "जो वस्त्र परिधान करेल." धस्सति (तो धारण करेल/ठेवेल). परिधस्सति (तो परिधान करेल). "मूर्ख मनुष्य दुसऱ्याला पराभूत करतो (किंवा प्रयत्न करतो)." "हे अंबट्ठ, शाक्य खरोखरच राजा उक्काक या आपल्या पूर्वजाला मानतात (किंवा स्थापित करतात)." "तथागतांच्या बोधीवर श्रद्धा ठेवतो." श्रद्धा, श्रद्धान (श्रद्धा ठेवणे), श्रद्धा ठेवण्यायोग्य, श्रद्धा ठेवण्यासारखे, श्रद्धाळू, विश्वासू. विश्वासार्ह वचन असलेली उपासिका. श्रद्धा ठेवण्यासाठी, श्रद्धा ठेवून. विशेषाधान (विशेष रीतीने ठेवणे). श्रोतावधान (कान देणे/लक्षपूर्वक ऐकणे). कान देतो (लक्षपूर्वक ऐकतो). एकाग्रचित्त होऊन ऐकणारा (कान दिलेला). कान देऊन (लक्षपूर्वक ऐकून). मृत्युधेय (मृत्यूचे साम्राज्य), मारधेय (माराचे साम्राज्य), नामधेय (नाव), धातू, धाता (धारण करणारा), विधाता (व्यवस्था करणारा). विधी. अभिधान (नाव/शब्दकोश), अभिधेय (वाच्य/अर्थ), निधानवती वाचा (अर्थपूर्ण किंवा सुरक्षित वाणी), आधानग्राही (हट्टी/पकडून ठेवणारा), संधी. इतरही (रूपे) योजावीत. ဝိပုဗ္ဗော ဓာ ကရောတျတ္ထေ, အဘိပုဗ္ဗော တု ဘာသနေ; နျာသံပုဗ္ဗော ယထာယောဂံ, နျာသာရောပနသန္ဓိသု. 'वि' उपसर्गपूर्वक 'धा' धातू 'करणे' या अर्थात होतो, तर 'अभि' उपसर्गपूर्वक 'धा' धातू 'बोलणे' या अर्थात होतो; आणि 'नि' (न्यास) उपसर्गपूर्वक 'धा' धातू योग्यतेनुसार ठेवणे, आरोपण करणे आणि संधी या अर्थांमध्ये होतो. ဣမသ္မာ ပန ဓာဓာတုတော ပုဗ္ဗဿ အပိ ဣစ္စုပသဂ္ဂဿ အကာရော ကွစိ နိစ္စံ လောပံ ပပ္ပောတိ, ကွစိ နိစ္စံ လောပံ န ပပ္ပောတိ. အတြ လောပေါ ဝုစ္စတေ, ဒွါရံ ပိဒဟတိ, ဒွါရံ ပိဒဟန္တော, ပိဒဟိတုံ, ပိဒဟိတွာ, ဧဝံ အကာရလောပေါ ဘဝတိ. ဒွါရံ အပိဒဟိတွာ, ဧဝံ အကာရလောပေါ န ဘဝတိ. ဧတ္ထ ဟိ အကာရော အပိဥပသဂ္ဂဿ အဝယဝေါ န ဟောတိ. ကိန္တိ စေ? ပဋိသေဓတ္ထဝါစကော နိပါတောယေဝ, ဥပသဂ္ဂါဝယဝေါ ပန အဒဿနံ ဂတော, အယံ နိစ္စာလောပေါ. ဧဝံ ဓာဓာတုတော ပုဗ္ဗဿ အပိ ဣစ္စုပသဂ္ဂဿ အကာရော ကွစိ နိစ္စံ လောပံ ပပ္ပောတိ, ကွစိ နိစ္စံ လောပံ န ပပ္ပောတိ. ဣဒံ အစ္ဆရိယံ ဣဒံ အဗ္ဘုတံ. ယတြ ဟိ နာမ ဘဂဝတော ပါဝစနေ ဧဝရူပပေါပိ နယော သန္ဒိဿတိ ဝိညူနံ ဟဒယဝိမှာပနကရော, ယော ဧကသ္မိံယေဝ ဓာတုမှိ ဧကသ္မိံယေဝ ဥပသဂ္ဂေ ဧကသ္မိံယေဝတ္ထေ ကွစိ လောပါလောပဝသေန ဝိဘဇိတုံ လဗ္ဘတိ. ဣဒါနိ မယံ သောတူနံ ပရမကောသလ္လဇနနတ္ထံ တဒုဘယမ္ပိ အာကာရံ ဧကဇ္ဈံ ကရောန္တာ တဒါကာရဝတိံ ဇိနဝရပါဠိံ အာနယာမ – या 'धा' धातूच्या पूर्वी असलेल्या 'अपि' या उपसर्गातील 'अ' काराचा कधी नित्य लोप होतो, तर कधी नित्य लोप होत नाही. येथे लोप सांगितला जातो, जसे – 'द्वारं पिदहति' (दरवाजा बंद करतो), 'द्वारं पिदहन्तो' (दरवाजा बंद करत असताना), 'पिदहितुं' (बंद करण्यासाठी), 'पिदहित्वा' (बंद करून), अशा प्रकारे 'अ' काराचा लोप होतो. 'द्वारं अपिदहित्वा' (दरवाजा बंद न करता), अशा प्रकारे 'अ' काराचा लोप होत नाही. कारण येथे 'अ' कार हा 'अपि' उपसर्गाचा अवयव नाही. मग काय आहे? तो निषेधार्थक निपातच आहे, आणि उपसर्गाचा अवयव तर अदृश्य झाला आहे, हा नित्य लोप आहे. अशा प्रकारे 'धा' धातूच्या पूर्वी असलेल्या 'अपि' या उपसर्गातील 'अ' काराचा कधी नित्य लोप होतो, तर कधी नित्य लोप होत नाही. हे आश्चर्यकारक आहे, हे अद्भुत आहे! कारण भगवंतांच्या प्रवचनात (बुद्धवचनात) विद्वानांच्या हृदयाला विस्मित करणारी अशी पद्धतही दिसून येते, जिथे एकाच धातूमध्ये, एकाच उपसर्गात आणि एकाच अर्थात कधी लोप होणे आणि कधी लोप न होणे यानुसार विभागणी करता येते. आता आम्ही श्रोत्यांच्या परम कौशल्यासाठी त्या दोन्ही रूपांना एकत्र करून, त्या रूपांनी युक्त अशी श्रेष्ठ जिनांची (बुद्धांची) पाळी (गाथा) सादर करतो – ‘‘ဂင်္ဂံ [Pg.107] မေ ပိဒဟိဿန္တိ, န တံ သက္ကောမိ ဗြာဟ္မဏ; အပိဓေတုံ မဟာသိန္ဓုံ, တံ ကထံ သော ဘဝိဿတိ; န တေ သက္ကောမိ အက္ခာတုံ, အတ္ထံ ဓမ္မဉ္စ ပုစ္ဆိတော. "हे ब्राह्मणा, ते माझ्यासाठी गंगा बंद करतील (अडवतील), पण मी महासागराला बंद करण्यास समर्थ नाही, मग त्याचे काय होईल? विचारले असता, मी तुला अर्थ आणि धर्म सांगण्यास समर्थ नाही." စိတ္တတ္ထသာဓနိံ ဧတံ, ဂါထံ သမ္ဘဝဇာတကေ; ပညာသမ္ဘဝမိစ္ဆန္တော, ကရေ စိတ္တေ သုမေဓသော’’တိ. "चित्ताचा अर्थ साधणारी ही गाथा संभव जातकामध्ये आहे; प्रज्ञेचा विकास इच्छिणाऱ्या बुद्धिमान मनुष्याने आपल्या चित्तात याचे चिंतन करावे." ဓု ဂတိထေရိယေသု. ဂတိ ဂမနံ, ထေရိယံ ထိရဘာဝေါ. ဓဝတိ. ဓုဝံ. धु (धातू) गती आणि स्थैर्य या अर्थांमध्ये. गती म्हणजे गमन (चालणे), स्थैर्य म्हणजे स्थिर भाव. धवति (तो धावतो). धुवं (ध्रुव/निश्चित). ဧတ္ထ စ ဓုဝန္တိ ထိရံ. ‘‘နိစ္စော ဓုဝေါ သဿတော အဝိပရိဏာမဓမ္မော’’တိအာဒီသု ဝိယ, တသ္မာ ဓုဝန္တိ ထိရံ ကိဉ္စိ ဓမ္မဇာတံ. အထ ဝါ ဓုဝန္တိ ဣဒံ ဂတိထေရိယတ္ထဝသေန နိဗ္ဗာနဿေဝ အဓိဝစနံ ဘဝိတုမရဟတိ. တဉှိ ဇာတိဇရာဗျာဓိမရဏသောကာဒိတော မုစ္စိတုကာမေဟိ ဓဝိတဗ္ဗံ ဂန္တဗ္ဗန္တိ ဓုဝံ, ဥပ္ပာဒဝယာဘာဝေန ဝါ နိစ္စသဘာဝတ္တာ ဓဝတိ ထိရံ သဿတံ ဘဝတီတိ ဓုဝံ. ယဉှိ သန္ဓာယ ဘဂဝတာ ‘‘ဓုဝဉ္စ ဝေါ ဘိက္ခဝေ ဒေသေဿာမိ ဓုဝဂါမိနိဉ္စ ပဋိပဒ’’န္တိ ဝုတ္တံ. ဓုဝသဒ္ဒေါ ‘‘ဝစနံ ဓုဝသဿတ’’န္တိ ဧတ္ထ ထိရေ ဝတ္တတိ. ‘‘ဓုဝဉ္စ ဘိက္ခဝေ ဒေသေဿာမီ’’တိ ဧတ္ထ နိဗ္ဗာနေ. ‘‘ဓုဝံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဝိဿသီ’’တိ ဧတ္ထ ပန ဧကံသေ နိပါတပဒဘာဝေန ဝတ္တတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. येथे 'धुव' (ध्रुव) म्हणजे स्थिर. 'निच्चो धुवो सस्सतो अविपरिणामधम्मो' (नित्य, ध्रुव, शाश्वत, अपरिवर्तनशील स्वभाव असलेला) इत्यादी वाक्यांप्रमाणे, म्हणून 'धुव' म्हणजे कोणतीही स्थिर गोष्ट किंवा धर्म होय. अथवा 'धुव' हा शब्द गमन (जाणे) किंवा स्थैर्य या अर्थाने 'निब्बान' (निर्वाण) याचेच एक नाव (अधिवचन) असू शकतो. कारण, जन्म, जरा, व्याधी, मरण, शोक इत्यादींपासून मुक्त होऊ इच्छिणाऱ्यांनी ज्याच्याकडे धावले पाहिजे किंवा गेले पाहिजे, ते 'धुव' (ध्रुव/निश्चित स्थान) आहे; किंवा उत्पाद (उत्पत्ती) आणि व्यय (विनाश) नसल्यामुळे नित्य स्वभाव असल्यामुळे जे स्थिर व शाश्वत राहते, ते 'धुव' होय. ज्याच्या संदर्भात भगवंतांनी म्हटले आहे: 'भिक्खूहो, मी तुम्हांला ध्रुव (नित्य/निर्वाण) आणि ध्रुवाकडे नेणारा मार्ग (धुवगामिनी पटिपदा) उपदेशीन.' 'धुव' हा शब्द 'वचनं धुवसस्सतं' (वचन ध्रुव आणि शाश्वत आहे) येथे 'स्थिर' या अर्थात वापरला आहे. 'धुवञ्च भिक्खवे देसेस्सामि' येथे तो 'निब्बान' (निर्वाण) या अर्थात आहे. तर 'धुवं बुद्धो भविस्ससि' (तू निश्चितच बुद्ध होशील) येथे तो 'निश्चितच' (एकंसे) या अर्थात निपात (अव्यय) म्हणून वापरला गेला आहे, असे समजावे. ဓူ ဝိဓူနနေ. ဦကာရဿ ဦဝတ္တံ. ဓူဝတိ. ဓူဝိတာ, ဓူဝိတဗ္ဗံ. ရဿတ္တေ ‘‘ဓုတော, ဓုတဝါ’’ ဣစ္စပိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'धू' धातू कंपित करणे किंवा झटकणे (विधूनन) या अर्थात आहे. 'ऊ' काराचा 'ऊव' होतो. 'धुवति' (तो झटकतो/कंपित करतो). 'धुविता', 'धुवितब्बं'. र्हस्व झाल्यावर 'धुतो', 'धुतवा' इत्यादी रूपे बनतात. ဓေ ပါနေ. ဓယတိ, ဓီယတိ. ဓေန. 'धे' धातू पिणे (पान) या अर्थात आहे. 'धयति', 'धीयति'. 'धेन' (असे रूप बनते). ဧတ္ထ စ ဓေနူတိ ဓယတိ ပိဝတိ ဣတော ခီရံ ပေါတကောတိ ဓေနု, ‘‘ဂေါဓေနု, အဿဓေနု, မိဂဓေနူ’’တိ ဓေနုသဒ္ဒေါ သာမညဝသေန သပေါတိကာသု တိရစ္ဆာနဂတိတ္ထီသု ဝတ္တတိ, ဧဝံ သန္တေပိ ယေဘုယျေန ဂါဝိယံ ဝတ္တတိ. တထာ ဟိ ‘‘သတ္တ ဓေနုသတေ ဒတွာ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. येथे 'धेनु' म्हणजे - जिच्यापासून पिल्लू दूध पिते (धयति/पिती) ती 'धेनु' होय. 'गोधेनु' (गाय), 'अस्सधेनु' (घोडी), 'मिगधेनु' (हरिणी) इत्यादी शब्दांमध्ये 'धेनु' हा शब्द सामान्यतः पिल्लू असलेल्या कोणत्याही तिर्यक योनीतील (प्राण्यांमधील) मादीसाठी वापरला जातो. असे असले तरी, या शब्दाचा वापर बहुतांश करून गाईसाठीच होतो. म्हणूनच पाळीमध्ये 'सत्त धेनुसते दत्वा' (सातशे धेनु देऊन) असा प्रयोग आढळतो. သိဓု [Pg.108] ဂတိယံ သေဓတိ, နိသေဓတိ, ပဋိသေဓတိ. သိဒ္ဓေါ, ပသိဒ္ဓေါ, နိသိဒ္ဓေါ, ပဋိသိဒ္ဓေါ, ပဋိသေဓိတော, ပဋိသေဓကော, ပဋိသေဓော, ပဋိသေဓိတုံ, ပဋိသေဓိတွာ. ဣဓ အစိန္တေယျဗလတ္တာ ဥပသဂ္ဂါနံ တံယောဂေ သိဓုဓာတုဿ နာနပ္ပကာရာ အတ္ထာ သမ္ဘဝန္တိ, အညေသမ္ပိ ဧဝမေဝ. 'सिधु' धातू गमन (गती) या अर्थात आहे. 'सेधति' (तो जातो/रोखतो), 'निसेधति', 'पटिसेधति'. 'सिद्धो', 'पसिद्धो', 'निसिद्धो', 'पटिसिद्धो', 'पटिसेधितो', 'पटिसेधको', 'पटिसेधो', 'पटिसेधितुं', 'पटिसेधित्वा'. येथे उपसर्गांच्या अचिंत्य शक्तीमुळे त्यांच्या योगाने 'सिधु' धातूचे विविध अर्थ संभवतात, आणि इतर धातूंच्या बाबतीतही असेच होते. သိဓု သတ္ထေ မင်္ဂလျေ စ. သတ္ထံ သာသနံ, မင်္ဂလျံ ပါပဝိနာသနံ ဝုဒ္ဓိကာရဏံ ဝါ. သေဓတိ. သိဒ္ဓေါ, ပသိဒ္ဓေါ, ပသိဒ္ဓိ. 'सिधु' धातू शास्त्र (अनुशासन) आणि मांगल्य या अर्थात आहे. 'सत्थं' म्हणजे शासन (बुद्धवचन/उपदेश), 'मांगल्य' म्हणजे पापाचा विनाश किंवा वृद्धीचे कारण होय. 'सेधति'. 'सिद्धो', 'पसिद्धो', 'पसिद्धि' (अशी रूपे बनतात). ဒဓ ဓာရဏေ. ဇနဿ တုဋ္ဌိံ ဒဓတေတိ ဒဓိ. ဓကာရဿ ဟကာရတ္တေ ‘‘ဒဟတီ’’တိ ရူပံ. အယံ ဣတ္ထီ ဣမံ ဣတ္ထိံ အယျိကံ ဒဟတိ. ဣမေ ပုရိသာ ဣမံ ပုရိသံ ပိတာမဟံ ဒဟန္တိ. စိတ္တံ သမာဒဟာတဗ္ဗံ. သမာဒဟံ စိတ္တံ. 'दध' धातू धारण करणे या अर्थात आहे. लोकांचे समाधान धारण करते म्हणून ते 'दधि' (दही). 'ध' काराचा 'ह' कार झाल्यावर 'दहति' असे रूप बनते. 'अयं इत्थी इमं इत्थिं अय्यिकं दहति' (ही स्त्री या स्त्रीला आजी मानते/धारण करते). 'इमे पुरिसा इमं पुरिसं पितामहं दहन्ति' (हे पुरुष या पुरुषाला आजोबा मानतात). 'चित्तं समादहातब्बं' (चित्त समाहित केले पाहिजे). 'समादहं चित्तं' (समाहित होत असलेले चित्त). ဧဓ ဝုဒ္ဓိယံ လာဘေ စ. ဧဓတိ. ဧဓော, သုခေဓိတော. ဂမ္ဘီရေ ဂါဓမေဓတိ. 'एध' धातू वृद्धी (वाढ) आणि लाभ या अर्थात आहे. 'एधति'. 'एधो', 'सुखेधितो'. 'गम्भीरे गाधमेधति' (गंभीर पाण्यात तळ शोधतो/मिळवतो). ဧတ္ထ စ ဧဓောတိ ဧဓတိ. ဝဍ္ဎတိ ဧတေန ပါဝကောတိ ဧဓော. ဣန္ဒနံ, ဥပါဒါနံ. သုခေဓိတောတိ သုခေန ဧဓိတော, သုခသံဝဍ္ဎိတောတိ အတ္ထော. ဂါဓမေဓတီတိ ဂါဓံ ပတိဋ္ဌိတံ ဧဓတိ လဘတိ. येथे 'एधो' म्हणजे जो वाढतो (एधति). ज्याच्याद्वारे अग्नी वाढतो (वड्ढति) ते 'एधो' म्हणजे इंधन किंवा उपादान होय. 'सुखेधितो' म्हणजे सुखाने वाढलेला (सुखसंवड्ढितो) असा अर्थ आहे. 'गाधमेधति' म्हणजे तळ किंवा प्रतिष्ठा प्राप्त करतो (एधति/लभति). ဗဒ္ဓ သံဟရိသေ. သံဟရိသော ဝိနိဗဒ္ဓကြိယာ. ဗဒ္ဓတိ, ဝိနိဗဒ္ဓတိ. ဝိနိဗဒ္ဓါ. 'बद्ध' धातू संहर्ष (परस्पर संबंध किंवा बांधणे) या अर्थात आहे. संहर्ष म्हणजे परस्परांशी बांधण्याची क्रिया. 'बद्धति', 'विनिबद्धति'. 'विनिबद्धा' (अशी रूपे बनतात). ဂါဓ ပတိဋ္ဌာနိဿယဂန္ဓေသု. ဂါဓတိ. ဂါဓံ ကတ္တာ. ဂမ္ဘီရတော အဂါဓံ. 'गाध' धातू प्रतिष्ठा (तळ मिळणे), आश्रय आणि गंध या अर्थात आहे. 'गाधति'. 'गाधं कत्ता' (तळ शोधणारा). 'गम्भीरतो अगाधं' (खोल असल्यामुळे अथांग/तळ नसलेले). ဗာဓ ဝိလောဠနေ ဗာဓတိ, ဝိဗာဓတိ. အာဗာဓော. အာဗာဓတိ စိတ္တံ ဝိလောဠေတီတိ အာဗာဓော. 'बाध' धातू विलोडन (पीडा देणे/अस्वस्थ करणे) या अर्थात आहे. 'बाधति', 'विबाधति'. 'आबाधो' (आजार/व्याधी). जो चित्ताला पीडित करतो किंवा अस्वस्थ करतो, तो 'आबाधो' होय. နာဓ [Pg.109] ယာစနာဒီသု. နာဓတိ. နာဓနံ. 'नाध' धातू याचना (मागणी) इत्यादी अर्थांत आहे. 'नाधति'. 'नाधनं' (अशी रूपे बनतात). ဗန္ဓ ဗန္ဓနေ ဗန္ဓတိ. ဗန္ဓနကော, ဗန္ဓော, ဗန္ဓာပိတော, ပဋိဗန္ဓော, ဗန္ဓနံ, ဗန္ဓော, သမ္ဗန္ဓနံ, သမ္ဗန္ဓော, ပဗန္ဓော, ဗန္ဓု. 'बन्ध' धातू बांधणे (बंधन) या अर्थात आहे. 'बन्धति'. 'बन्धनको', 'बन्धो', 'बन्धापितो', 'पटिबन्धो', 'बन्धनां', 'बन्धो', 'सम्बन्धनां', 'सम्बन्धो', 'पबन्धो', 'बन्धु' (अशी रूपे बनतात). တတ္ထ ဗန္ဓနန္တိ ဗန္ဓန္တိ သတ္တေ ဧတေနာတိ ဗန္ဓနံ, သင်္ခလိကာဒိ. ‘‘အယံ အမှာကံ ဝံသော’’တိ သမ္ဗန္ဓိတဗ္ဗဋ္ဌေန ဗန္ဓု, ထေရဂါထာသံဝဏ္ဏနာယံ ပန ‘‘ပေမဗန္ဓနေန ဗန္ဓူ’’တိ ဝုတ္တံ. त्यात 'बंधन' म्हणजे - ज्याच्याद्वारे प्राण्यांना बांधले जाते ते 'बंधन' होय, जसे की साखळी इत्यादी. 'हा आमचा वंश आहे' अशा प्रकारे संबंध जोडण्याच्या अर्थाने 'बंधु' हा शब्द वापरला जातो, परंतु थेरगाथा अट्ठकथेत (थेरगाथा संवण्णना) 'प्रेमबंधनाने बांधलेला तो बंधू' असे म्हटले आहे. ဒဓိ အသီဃစာရေ. အသီဃစာရော အသီဃပ္ပဝတ္တိ. ဒန္ဓတိ. ဒန္ဓော, ဒန္ဓပညော. ယော ဒန္ဓကာလေ တရတိ, တရဏီယေ စ ဒန္ဓတိ. 'दधि' धातू मंद गती (अशीघचार - हळूहळू चालणे किंवा प्रवृत्ती) या अर्थात आहे. 'दन्धति' (तो रेंगाळतो/हळू करतो). 'दन्धो' (मंद), 'दन्धपञ्ञो' (मंदबुद्धी). 'यो दन्धकाले तरति, तरणीये च दन्धति' (जो रेंगाळण्याच्या वेळी घाई करतो आणि घाई करण्याच्या वेळी रेंगाळतो). ဝဒ္ဓ ဝဒ္ဓနေ. ဝဒ္ဓတိ. ဝဒ္ဓိ, ဝုဒ္ဓိ, ဝဒ္ဓေါ, ဝုဒ္ဓေါ, ဇာတိဝုဒ္ဓေါ, ဂုဏဝုဒ္ဓေါ, ဝယောဝုဒ္ဓေါ. 'वड्ढ' धातू वाढणे (वर्धन) या अर्थात आहे. 'वड्ढति'. 'वड्ढि', 'वुद्धि', 'वड्ढो', 'वुद्धो' (वृद्ध/मोठा), 'जातिवुद्धो' (जातीने मोठा), 'गुणवुद्धो' (गुणाने मोठा), 'वयोवुद्धो' (वयाने मोठा). ယေ ဝုဒ္ဓမပစာယန္တိ, နရာ ဓမ္မဿ ကောဝိဒါ; ဒိဋ္ဌေဝ ဓမ္မေ ပါသံသာ, သမ္ပရာယေ စ သုဂ္ဂတိံ. जे मनुष्य धर्माचे जाणकार (कोविद) आहेत आणि वृद्धांचा (वयोवृद्धांचा/गुणाने मोठ्यांचा) आदर करतात; ते याच जन्मात (दिट्ठेव धम्मे) प्रशंसेस पात्र ठरतात आणि परलोकात (सम्पराये) सुगती प्राप्त करतात. သဓု သဒ္ဒကုစ္ဆိယံ. သဓတိ. 'साधु' धातू शब्द करणे किंवा गर्भाशयात असणे (शब्दकुच्छी) या अर्थात आहे. 'साधतिं'. ပိဠဓိ အလင်္ကာရေ. ပိဠန္ဓတိ. ပိဠန္ဓနံ. 'पिळधि' धातू अलंकार (दागिने घालणे/सजवणे) या अर्थात आहे. 'पिळन्धति'. 'पिळन्धनं' (अलंकार/दागिना). ပိဠန္ဓနမလင်္ကာရော, မဏ္ဍနဉ္စ ဝိဘူသနံ; ပသာဓနဉ္စာဘရဏံ, ပရိယာယာ ဣမေ မတာ. 'पिळन्धनं' (दागिना), 'अलंकारो' (अलंकार), 'मण्डनं' (सजावट), 'विभूसनं' (विभूषण), 'पसाधनं' (प्रसाधन) आणि 'आभरणं' (आभरण) हे सर्व एकाच अर्थाचे (पर्यायवाची) शब्द मानले जातात. မေဓ ဟိံသာယံ သင်္ဂမေ စ. မေဓတိ. မေဓာ, မေဓာဝီ. အတြ မေဓာတိ အသနိ ဝိယ သိလုစ္စယေ ကိလေသေ မေဓတိ ဟိံသတီတိ မေဓာ. မေဓတိ ဝါ သိရိယာ သီလာဒီဟိ စ သပ္ပုရိသဓမ္မေဟိ သဟ ဂစ္ဆတိ န ဧကိကာ ဟုတွာ တိဋ္ဌတီတိ မေဓာ, ပညာယေတံ နာမံ. တထာ ဟိ – 'मेध' धातू हिंसा आणि संगम (एकत्र येणे) या अर्थात आहे. 'मेधति'. 'मेधा', 'मेधावी'. येथे 'मेधा' म्हणजे - जशी वीज पर्वतावर आदळते, त्याप्रमाणे जी क्लेशांचा नाश (हिंसा) करते, ती 'मेधा' होय. अथवा जी शोभा (सिरी), शील इत्यादी सत्पुरुष धर्मांसोबत जाते (संगम करते), कधीही एकटी राहत नाही, ती 'मेधा' होय. हे 'प्रज्ञा' (पञ्ञा) चेच एक नाव आहे. कारण असे म्हटले आहे की - ‘‘ပညာ [Pg.110] ဟိ သေဋ္ဌာ ကုသလာ ဝဒန္တိ,နက္ခတ္တရာဇာရိဝ တာရကာနံ; သီလံ သိရီ စာပိ သတဉ္စ ဓမ္မော,အနွာယိကာ ပညဝတော ဘဝန္တီ’’တိ “कुशल (ज्ञानी) लोक प्रज्ञेलाच सर्वश्रेष्ठ मानतात, ज्याप्रमाणे ताऱ्यांमध्ये चंद्र (नक्षत्रराज) श्रेष्ठ असतो; शील, शोभा (श्री) आणि सत्पुरुषांचे धर्म हे सर्व प्रज्ञावंताचे अनुगामी (मागोमाग जाणारे) असतात.” ဝုတ္တံ. မေဓာဝီတိ ဓမ္မောဇပညာယ စ သမန္နာဂတော ပုဂ္ဂလော. असे म्हटले आहे. 'मेधावी' म्हणजे धर्मरसाच्या प्रज्ञेने (धम्मोजपञ्ञा) युक्त असलेली व्यक्ती होय. သဓု မဓု ဥန္ဒေ. သဓတိ. မဓတိ. မဓု. 'साधु' आणि 'मधु' हे धातू ओले करणे किंवा क्लेदयुक्त करणे (उन्द) या अर्थात आहेत. 'साधति', 'मधति'. 'मधु' (मध/गोड). ဗုဓ ဗောဓနေ. ဗောဓတိ. ဗုဒ္ဓေါ. အဘိသမ္ဗုဒ္ဓါနော. သမ္ဗုဒ္ဓံ. အသမ္ဗုဒ္ဓံ. ဗောဓိ. ဒိဝါဒိဂဏေပိ အယံ ဒိဿတိ. တတြဟိ ‘‘ဗုဇ္ဈတီ’’တိ ရူပံ, ဣဓ ပန ‘‘ဗောဓတီ’’တိ ရူပံ. ‘‘ယော နိန္ဒံ အပဗောဓတီ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. ကာရိတေ ပန ‘‘ဗောဓေတိ’’ ဣစ္စာဒီနိ. 'बुध' धातू जाणणे किंवा जागृत होणे (बोधन) या अर्थात आहे. 'बोधति'. 'बुद्धो' (बुद्ध), 'अभिसम्बुद्धानो', 'सम्बुद्धं', 'असम्बुद्धं', 'बोधि'. हा धातू दिवादिगणातही आढळतो. तेथे 'बुज्झति' असे रूप बनते, परंतु येथे 'बोधति' असे रूप बनते. पाळीमध्ये 'यो निन्दं अपबोधति' (जो निंदेला दूर करतो) असा प्रयोग आढळतो. प्रयोजक (कारित) रूपात 'बोधेति' इत्यादी रूपे बनतात. ယုဓ သမ္ပဟာရေ. ယောဓတိ. ယောဓော. ယောဓေထ မာရံ ပညာဝုဓေန. ယုဒ္ဓံ. စရဏာယုဓော, စရဏာဝုဓော ဝါ. အာဝုဓံ. ဒိဝါဒိဂဏိကဿ ပနဿ ‘‘ယုဇ္ဈတီ’’တိ ရူပံ. 'युध' धातू प्रहार करणे किंवा युद्ध करणे (संप्रहार) या अर्थात आहे. 'योधति'. 'योधो' (योद्धा). 'योधेथ मारं पञ्ञावुधेन' (प्रज्ञारूपी शस्त्राने माराशी युद्ध करावे). 'युद्धं'. 'चरणायुधो' किंवा 'चरणावुधो' (पाय हेच ज्याचे शस्त्र आहे असा, उदा. कोंबडा). 'आवुधं' (शस्त्र). दिवादिगणातील या धातूचे रूप 'युज्झति' असे बनते. ဒီဓိ ဒိတ္တိဝေဓနေသု. ဒီဓတိ. ဒီဓိတိ. ဧတ္ထ စ ဒီဓိတီတိ ရသ္မိ. အနေကာနိ ဟိ ရသ္မိနာမာနိ. 'दीधि' धातू दीप्ती (प्रकाशणे) आणि वेधन (भेदणे) या अर्थात आहे. 'दीधति'. 'दीधिति'. येथे 'दीधिति' म्हणजे किरण (रश्मी). किरणांची अनेक नावे आहेत. ရသ္မိ အာဘာ ပဘာ ရံသိ, ဒိတ္တိ ဘာ ရုစိ ဒီဓိတိ; မရီစိ ဇုတိ ဘာဏွ’သု, မယူခေါ ကိရဏော ကရော; နာဂဓာမော စ အာလောကော, ဣစ္စေတေ ရသ္မိဝါစကာ. 'रस्मि' (रश्मी), 'आभा', 'पभा' (प्रभा), 'रंसि' (रश्मी), 'दित्ति' (दीप्ती), 'भा', 'रुचि', 'दीधिति', 'मरीचि', 'जुति' (द्युती), 'भाण्वसु' (भाणू/अंशू), 'मयूखो', 'किरणो', 'करो', 'नागधामो' आणि 'आलोको' हे सर्व किरणाचे वाचक (समानार्थी) शब्द आहेत. စကာရန္တရူပါနိ. चकारान्त रूपे. နကာရန္တဓာတု नकारान्त धातू. နီ နယေ. နေတိ, နယတိ, ဝိနေတိ. ဝိနေယျ ဟဒယေ ဒရံ. အာနေတိ. အာနယတိ. နေတာ. ဝိနေတာ. နာယကော. နေယျော[Pg.111]. ဝေနေယျော. ဝေနယိကော. ဝိနီတော ပုရိသော. နီယမာနေ ပိသာစေန, ကိန္နု တာတ ဥဒိက္ခတိ. နီယန္တော. နေတ္တံ. နေတ္တိ. ဘဝနေတ္တိ သမူဟတာ. နေတ္တိကော. ဥဒကဉှိ နယန္တိ နေတ္တိကာ. နေတ္တာ. နေတ္တေ ဥဇုံ ဂတေ သတိ. နယော. ဝိနယော. အာယတနံ. နေတုံ. ဝိနေတုံ. နေတွာ. ဝိနေတွာ ဣစ္စာဒီနိ. 'नी' धातू नेणे किंवा मार्गदर्शन करणे (नयन) या अर्थात आहे. 'नेति', 'नयति', 'विनेति'. 'विनेय्य हृदये दरं' (हृदयातील भीती दूर करून). 'आनेति', 'आनयति'. 'नेता', 'विनेता'. 'नायको'. 'नेय्यो' (नेण्यायोग्य/मार्गदर्शन करण्यायोग्य). 'वेनेय्यो' (विनीत होण्यास योग्य). 'वेनयिको' (विनय जाणणारा). 'विनीतो पुरिसो' (विनीत पुरुष). 'नीयमाने पिसाचेन, किन्नु तात उदिक्खति' (पिशाचाद्वारे नेले जात असताना, हे तात, तू काय पाहत आहेस?). 'नीयन्तो'. 'नेत्तं' (नेत्र/डोळा). 'नेत्ती' (तृष्णा/मार्गदर्शक). 'भवनित्ती समूहिता' (भवतृष्णा समूळ नष्ट झाली). 'नेत्तिको' (पाणी नेणारा/पाटाचे पाणी वळवणारा). 'उदकञ्हि नयन्ति नेत्तिका' (पाणी वळवणारे पाणी नेतात). 'नेत्ता' (मार्गदर्शक/डोळा). 'नेत्ते उजुं गते सति' (डोळे सरळ गेले असता). 'नयो' (नय/पद्धत). 'विनयो' (विनय). 'आयतनं' (आयतन). 'नेतुं', 'विनेतुं'. 'नेत्वा', 'विनेत्वा' इत्यादी रूपे बनतात. တတ္ထ နေတ္တန္တိ သမဝိသမံ ဒဿေန္တံ အတ္တဘာဝံ နေတီတိ နေတ္တံ, စက္ခု. နေတ္တီတိ နေန္တိ ဧတာယ သတ္တေတိ နေတ္တိ, ရဇ္ဇု. ဘဝနေတ္တီတိ ဘဝရဇ္ဇု, တဏှာယေတံ နာမံ. တာယ ဟိ သတ္တာ ဂေါဏာ ဝိယ ဂီဝါယ ဗန္ဓိတွာ တံ တံ ဘဝံ နိယျန္တိ, တသ္မာ ဘဝနေတ္တီတိ ဝုစ္စတိ. နေတ္တိကာတိ ကဿကာ. နေတ္တာတိ ဂဝဇေဋ္ဌကော ယူထပတိ. နယောတိ နယနံ ဂမနံ နယော, ပါဠိဂတိ. အထ ဝါ တတ္ထ တတ္ထ နေတဗ္ဗောတိ နယော, သဒိသဘာဝေန နေတဗ္ဗာကာရော. နီယတီတိ နယော, တထတ္တနယာဒိ. နီယတိ ဧတေနာတိ နယော, အန္တဒွယဝိဝဇ္ဇနနယာဒိ. तेथे 'नेत्त' (नेत्र) म्हणजे सम आणि विषम दाखविणाऱ्या आत्मभावाला (शरीराला) जे नेते (मार्गदर्शन करते) ते 'नेत्त' म्हणजेच चक्षु (डोळा). 'नेत्ती' म्हणजे जिच्याद्वारे प्राण्यांना नेले जाते ती 'नेत्ती' म्हणजेच दोरी (रज्जू). 'भवनेट्टी' म्हणजे भवरज्जू (संसाराची दोरी), हे तृष्णेचे नाव आहे. कारण तिच्याद्वारे प्राणी, बैलांना गळ्याला बांधल्याप्रमाणे बांधून, त्या त्या भवामध्ये नेले जातात, म्हणून तिला 'भवनेट्टी' असे म्हणतात. 'नेत्तिका' म्हणजे शेतकरी (पाटाने पाणी नेणारे). 'नेत्ता' म्हणजे बैलांचा प्रमुख किंवा कळपाचा नायक (यूथपती). 'नय' म्हणजे नेणे, गमन करणे, हा 'नय' म्हणजेच पाळीगती (पाठाची गती). अथवा त्या त्या ठिकाणी जे नेण्यायोग्य आहे तो 'नय' होय, म्हणजेच सदृश भावाने नेण्याचा प्रकार. ज्याद्वारे नेले जाते तो 'नय' होय, जसे की तथत्तानय इत्यादी. ज्या साधनाद्वारे नेले जाते तो 'नय' होय, जसे की दोन्ही टोकांचे वर्जन करणारा नय (अंतद्वयविवज्जननय) इत्यादी. တထာ ဟိ ဆဗ္ဗိဓော နယော တထတ္တနယော ပတ္တိနယော ဒေသနာနယော အန္တဒွယဝိဝဇ္ဇနနယော အစိန္တေယျနယော အဓိပ္ပာယနယောတိ. တေသု တထတ္တနယော အန္တဒွယဝိဝဇ္ဇနနယေန နီယတိ, ပတ္တိနယော အစိန္တေယျနယေန, ဒေသနာနယော အဓိပ္ပာယနယေန နီယတိ. ဧတ္ထာဒိမှိ တိဝိဓော နယော ကမ္မသာဓနေန နီယတီတိ ‘‘နယော’’တိ ဝုစ္စတိ, ပစ္ဆိမော ပန တိဝိဓော နယော ကရဏသာဓနေန နီယတိ ဧတေန တထတ္တာဒိနယတ္တယမိတိ ‘‘နယော’’တိ ဝုစ္စတိ. ဣမသ္မိံ အတ္ထေ ပပဉ္စိယမာနေ ဂန္ထဝိတ္ထာရော သိယာတိ ဝိတ္ထာရော န ဒဿိတော. तसेच नय सहा प्रकारचा आहे: तथत्तानय, पत्तिनय, देसनानय, अंतद्वयविवज्जननय, अचिन्तेय्यनय आणि अधिप्पायनय. त्यांच्यामध्ये तथत्तानय हा अंतद्वयविवज्जननयाने नेला जातो, पत्तिनय हा अचिन्तेय्यनयाने, आणि देसनानय हा अधिप्पायनयाने नेला जातो. येथे सुरुवातीचे तीन नय कर्मसाधनाने नेले जातात म्हणून त्यांना 'नय' म्हटले जाते, तर नंतरचे तीन नय करणसाधनाने नेले जातात, ज्याद्वारे तथत्ता इत्यादी तीन नय नेले जातात, म्हणून त्यांना 'नय' म्हटले जाते. या अर्थाचा विस्तार केल्यास ग्रंथाचा विस्तार होईल, म्हणून येथे विस्तार दाखविलेला नाही. အပရောပိ [Pg.112] စတုဗ္ဗိဓော နယော ဧကတ္တနယော နာနတ္တနယော အဗျာပါရနယော ဧဝံဓမ္မတာနယောတိ. दुसराही चार प्रकारचा नय आहे: एकत्तानय, नानत्तानय, अब्यापारनय आणि एवंधम्मतानय. ဝိနေတိ သတ္တေ ဧတ္ထ, ဧတေနာတိ ဝါ ဝိနယော. ကာယဝါစာနံ ဝိနယနတောပိ ဝိနယော. အာယတနန္တိ အနမတဂ္ဂေ သံသာရေ ပဝတ္တံ အတီဝ အာယတံ သံသာရဒုက္ခံ ယာဝ န နိဝတ္တတိ, တာဝ နယတေဝ ပဝတ္တတေဝါတိ အာယတနံ. यात प्राण्यांचे नियमन केले जाते किंवा याच्याद्वारे केले जाते म्हणून तो 'विनय' होय. काय आणि वाचेचे नियमन (विनयन) करण्यावरूनही तो 'विनय' होय. 'आयतन' म्हणजे अनादी (अनमतग्ग) संसारात चालणारे अत्यंत दीर्घ (आयत) संसारदुःख जोपर्यंत निवृत्त होत नाही, तोपर्यंत ते चालतच राहते (नयते) किंवा प्रवृत्तच राहते, म्हणून ते 'आयतन' होय. အယံ ပနေတ္ထ အတ္ထုဒ္ဓါရော. ‘‘အာယတနန္တိ အဿာနံ ကမ္ဗောဇော အာယတနံ, ဂုန္နံ ဒက္ခိဏာပထော အာယတန’’န္တိ ဧတ္ထ သဉ္ဇာတိဋ္ဌာနံ အာယအနံ နာမ. ‘‘မနောရမေ အာယတနေ, သေဝန္တိ နံ ဝိဟင်္ဂမာ. येथे हा अर्थाचा उद्धार (स्पष्टीकरण) आहे: 'आयतन म्हणजे घोड्यांचे कंबोज हे आयतन आहे, गाईंचे दक्षिणापथ हे आयतन आहे' येथे उत्पत्तीचे स्थान (संजातिट्ठान) म्हणजे 'आयतन' होय. 'मनोरम आयतनात (स्थानात) पक्षी त्याचा आश्रय घेतात. ဆာယံ ဆာယတ္ထိနော ယန္တိ, ဖလတ္ထံ ဖလဘောဇိနော’’တိ ဧတ္ထ သမောသရဏဋ္ဌာနံ. ‘‘ပဉ္စိမာနိ ဘိက္ခဝေ ဝိမုတ္တာယတနာနီ’’တိ ဧတ္ထ ကာရဏံ. အညေပိ ပန ပယောဂါ ယတ ပတိယတနေတိ ဧတ္ထ ပကာသိတာ. सावलीच्या इच्छेने सावलीकडे जातात, फळांच्या आहारासाठी फळ खाणारे जातात' येथे एकत्र येण्याचे स्थान (समोसरणट्ठाण) म्हणजे आयतन होय. 'भिक्खूहो, ही पाच विमुक्तीची आयतने (विमुत्तायतने) आहेत' येथे कारण म्हणजे आयतन होय. इतरही प्रयोग 'यत पतियतन' यामध्ये प्रकाशित केले आहेत. နီ ပါပနေ. နေတိ, နယတိ. နယနံ. 'नी' धातू प्रापण (नेणे) या अर्थात आहे. नेति, नयति. नयन. နု ထုတိယံ. နောတိ, နဝတိ. နုတော. 'नु' धातू स्तुती या अर्थात आहे. नोति, नवति. नुतो. ထန ပန ဓန သဒ္ဒေ. ထနတိ. ပနတိ. ဓနတိ. 'थन', 'पन', 'धन' हे धातू शब्द (ध्वनी) या अर्थात आहेत. थनति. पनति. धनति. ကန ဒိတ္တိကန္တီသု. ကနတိ. ကညာ. ကနကံ. 'कन' धातू दीप्ती (चमक) आणि कांती (शोभा) या अर्थात आहे. कनति. कञ्ञा (कन्या). कनकं (कनक/सोने). ဧတ္ထ စ ယောဗ္ဗနိဘာဝေ ဌိတတ္တာ ရူပဝိလာသေန ကနတိ ဒိပ္ပတိ ဝိရောစတီတိ ကညာ. အထ ဝါ ကနိယတိ ကာမိယဘိ အဘိပတ္ထိယတိ ပုရိသေဟီတိပိ ကညာ, ယောဗ္ဗနိတ္ထီ. ကနကန္တိ ကနတိ, ကနီယတီတိ ဝါ ကနကံ, သုဝဏ္ဏံ. သုဝဏ္ဏဿ ဟိ အနေကာနိ နာမာနိ. आणि येथे यौवनावस्थेत असल्यामुळे रूपविलासाने जी चमकते, या यौवनावस्थेत दीप्यमान होते, शोभून दिसते ती 'कञ्ञा' (कन्या) होय. अथवा पुरुषांद्वारे जिची इच्छा केली जाते, प्रार्थना केली जाते ती 'कञ्ञा' म्हणजेच युवती (यौवनस्त्री) होय. 'कनक' म्हणजे जे चमकते किंवा ज्याची इच्छा केली जाते ते 'कनक' म्हणजेच सुवर्ण (सोने). सुवर्णाची अनेक नावे आहेत. သုဝဏ္ဏံ ကနကံ ဟေမံ, ကဉ္စနံ ဟဋကမ္ပိ စ; ဇာတရူပံ တပနီယံ, ဝဏ္ဏံ တဗ္ဘေဒကာ ပန; ဇမ္ဗုနဒံ သိင်္ဂိကဉ္စ, စာမိကရန္တိ ဘာသိတာ. सुवण्ण (सुवर्ण), कनक, हेम, कञ्चन (कांचन) आणि हाटक; जातरूप, तपनीय, वर्ण आणि त्याचे भेद असणारे; जाम्बूनद, सिंगी आणि चामीकर अशी (सोन्याची नावे) म्हटली गेली आहेत. ဝန [Pg.113] သန သမ္ဘတ္တိယံ. ဝနတိ. ဝနံ. သနတိ. 'वन', 'सन' हे धातू संभक्ती (सेवा/आश्रय/इच्छा) या अर्थात आहेत. वनति. वनं (वन/जंगल). सनति. တတ္ထ ဝနန္တိ. တံ သမ္ဘဇန္တိ မယူရကောကိလာဒယော သတ္တာတိ ဝနံ, အရညံ. ဝနတိ သမ္ဘဇတိ သံကိလေသပုဂ္ဂလန္တိ ဝနံ, တဏှာ. तेथे 'वन' म्हणजे: ज्याचा मोर, कोकिळा इत्यादी प्राणी आश्रय घेतात (संभजन करतात) ते 'वन' म्हणजेच अरण्य (जंगल). जे संक्लेशयुक्त पुद्गलाचा (व्यक्तीचा) आश्रय घेते (संभजन करते) ते 'वन' म्हणजेच तृष्णा (तण्हा). မန အဗ္ဘာသေ. မနတိ. မနော. 'मन' धातू अभ्यास (पुनरावृत्ती/मनन) या अर्थात आहे. मनति. मनो (मन). မာန ဝီမံသာယံ, ဝီမံသတိ. ဝီမံသာ. 'मान' धातू मीमांसा (विचार/परीक्षण) या अर्थात आहे, वीमंसति. वीमंसा (मीमांसा). ဇန သုန သဒ္ဒေ. ဇနတိ. သုနတိ. 'जन', 'सुन' हे धातू शब्द (ध्वनी) या अर्थात आहेत. जनति. सुनति. ဧတ္ထ စ ‘‘ကသ္မာ တေ ဧကော ဘုဇော ဇနတိ, ဧကော တေ န ဇနတီ ဘုဇော’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ ဇနတီတိ သုနတိ သဒ္ဒံ ကရောတိ. येथे 'तुझा एक हात का वाजतो (ध्वनी करतो) आणि तुझा दुसरा हात का वाजत नाही?' हे पाळीचे उदाहरण आहे. तेथे 'जनति' म्हणजे ऐकतो किंवा शब्द (ध्वनी) करतो. ခနု အဝဒါရဏေ ခနတိ. သုခံ. ဒုက္ခံ. ခတော အာဝါဋော. 'खनु' धातू अवदारण (खणणे) या अर्थात आहे, खनति. सुखं (सुख). दुक्खं (दुःख). खतो (खणलेला) आवाटो (खड्डा). တတ္ထ သုခန္တိ သုဋ္ဌု ဒုက္ခံ ခနတီတိ သုခံ. ဒုဋ္ဌု ခနတိ ကာယိကစေတသိကသုခန္တိ ဒုက္ခံ. အညမညပဋိပက္ခာ ဟိ ဧတေ ဓမ္မာ. ဒွိဓာ စိတ္တံ ခနတီတိ ဝါ ဒုက္ခံ. စုရာဒိဂဏဝသေန ပန ‘‘သုခယတီတိ သုခံ, ဒုက္ခယတီတိ ဒုက္ခ’’န္တိ နိဗ္ဗစနာနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. သမာသပအဝသေန ‘‘သုကရံ ခမဿာတိ သုခံ, ဒုက္ကရံ ခမဿာတိ ဒုက္ခ’’န္တိ နိဗ္ဗစနာနိပိ ဝိဝိဓာ ဟိ သဒ္ဒါနံ ဗျုပ္ပတ္တိ ပဝတ္တိ နိမိတ္တဉ္စ. तेथे 'सुख' म्हणजे जे दुःखाला चांगल्या प्रकारे खणून काढते (नष्ट करते) ते 'सुख'. जे कायिक आणि चैतसिक सुखाला वाईट प्रकारे खणून काढते (नष्ट करते) ते 'दुःख'. कारण हे धर्म एकमेकांचे विरोधी आहेत. अथवा जे चित्ताला दोन प्रकारे खणते (पीडित करते) ते 'दुःख'. चुरादिगणाच्या नियमानुसार 'जे सुखी करते ते सुख, जे दुःखी करते ते दुःख' अशी व्युत्पत्ती घ्यावी. समासाच्या नियमानुसार 'ज्याचे सहन करणे सोपे आहे ते सुख, ज्याचे सहन करणे कठीण आहे ते दुःख' अशा व्युत्पत्ती देखील घ्याव्यात, कारण शब्दांची व्युत्पत्ती, प्रवृत्ती आणि निमित्त विविध प्रकारचे असते. ဒါန အဝခဏ္ဍနေ. ဒါနတိ. အပဒါနံ. 'दान' धातू अवखंडन (तुकडे करणे) या अर्थात आहे. दानति. अपदानं (अपदान/चरित्र). သာန တေဇနေ. တေဇနံ နိသာနံ. သာနတိ. 'सान' धातू तेजन (तीक्ष्ण करणे/धार लावणे) या अर्थात आहे. तेजन म्हणजे धार लावणे (निसान). सानति. ဟန ဟိံသာဂတီသု. ဧတ္ထ ပန ဟိံသာဝစနေန ဖရုသာယ ဝါစာယ ပီဠနဉ္စ ဒဏ္ဍာဒီဟိ ပဟရဏဉ္စ ဂဟိတံ, တသ္မာ ဟန ဟိံသာပဟရဏဂတီသူတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘ရာဇာနော စောရံ ဂဟေတွာ ဟနေယျုံ ဝါ ဗန္ဓေယျုံ ဝါ’’တိ. ပါဌဿ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏေန္တေဟိ ‘‘ဟနေယျုန္တိ ပေါထေယျုဉ္စေဝ ဆိန္ဒေယျုဉ္စာ’’တိ [Pg.114] ဝုတ္တံ. ဧတ္ထ စ ဆေဒနံ နာမ ဟတ္ထပါဒါဒိဆေဒနံ ဝါ သီသစ္ဆေဒဝသေန မာရဏံ ဝါ. ဟနဿ ဝဓာဒေသော ဃာတာဒေသော စ ဘဝတိ, ဟန္တိ ဟနတိ, ဟနန္တိ. ဟနသိ, ဟနထ. သေသံ သဗ္ဗံ နေယျံ. 'हन' धातू हिंसा आणि गती या अर्थांमध्ये आहे. येथे 'हिंसा' या शब्दाने कठोर वाणीने पीडा देणे आणि दंडादींनी प्रहार करणे हे घेतले आहे, म्हणून 'हन' धातूचा अर्थ हिंसा, प्रहार आणि गती असा घ्यावा. तसेच 'राजे चोराला पकडून मारतील (हनेय्युं) किंवा बांधतील' या पाठाचा अर्थ स्पष्ट करताना 'हनेय्युं म्हणजे मारहाण करतील आणि अंगच्छेद करतील' असे म्हटले आहे. येथे 'छेदन' म्हणजे हात-पाय इत्यादी कापणे किंवा शिरच्छेदाद्वारे मारणे होय. 'हन' धातूचा 'वध' आणि 'घात' असा आदेश होतो; हन्ति, hनति, हनन्ति. हनसि, हनथ. उर्वरित सर्व समजून घ्यावे. ဟိံသာဒယော စတ္တာရော အတ္ထာ လဗ္ဘန္တိ. ‘‘ဟန္တိ ဟတ္ထေဟိ ပါဒေဟီ’’တိ ဧတ္ထ ပန ဟန္တီတိ ပဟရတီတိ အတ္ထော. ‘‘ကုဒ္ဓေါ ဟိ ပိတရံ ဟန္တိ. ဝိက္ကောသမာနာ တိဗ္ဗာဟိ, ဟန္တိ နေသံ ဝရံ ဝရ’’န္တိ. ဧတ္ထ ဟန္တီတိ မာရေန္တီတိ အတ္ထော. ‘‘ဝဓတိ, ဝဓေတိ, ဃာတေတိ’’ ဣစ္စပိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. တတ္ထ ‘‘ဝဓတိ န ရောဒတိ, အာပတ္တိ ဒုက္ကဋဿ. အတ္တာနံ ဝဓိတွာ ဝဓိတွာ ရောဒတီ’’တိအာဒီသု ဝဓော ပဟရဏံ. ပါဏံ ဝဓေတိ. ပါဏဝဓော. ‘‘ဧသ ဝဓော ခဏ္ဍဟာလဿ. သတ္တေ ဃာတေတီ’’တိ စ အာဒီသု ဝဓော မာရဏံ. हिंसा इत्यादी चार अर्थ प्राप्त होतात. 'हात आणि पायांनी मारतो (हन्ति)' येथे 'हन्ति' चा अर्थ प्रहार करतो असा आहे. 'क्रोधित झालेला पित्याला मारतो (हन्ति). आक्रोश करणाऱ्या तीव्र वेदनांनी त्यांच्यातील श्रेष्ठांना मारतो (हन्ति)' येथे 'हन्ति' चा अर्थ मारून टाकणे (वध करणे) असा आहे. 'वधति, वधेति, घातेति' इत्यादी रूपे होतात. त्यामध्ये 'मारहाण करतो पण रडत नाही, तर दुक्कट आपत्ती होते. स्वतःला मारहाण करून करून रडतो' इत्यादींमध्ये 'वध' म्हणजे प्रहार करणे होय. प्राणाचा वध करतो तो 'प्राणवध'. 'हा खंडहालाचा वध आहे. प्राण्यांना मारतो (घातेति)' इत्यादींमध्ये 'वध' म्हणजे मारून टाकणे (मरण) होय. ‘‘ဥပါဟနံ, ဝဓူ’’တိ စ ဧတ္ထ ဟနဝဓသဒ္ဒတ္ထောဂမနံ. ‘‘ပုရိသံ ဟနတိ. သီတံ ဥဏှံ ပဋိဟနတိ’’ ဣစ္စာဒီနိ ကတ္တုပဒါနိ. ဒေဝဒတ္တော ယညဒတ္တေန ဟညတိ. တတော ဝါတာတပေ ဃောရေ, သဉ္ဇာတေ ပဋိဟညတိ. ပစ္စတ္တဝစနဿေကာရတ္တံ, ယထာ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ’’တိ. ဝိဟာရေနာတိ ပဒံ သမ္ဗန္ဓိတဗ္ဗံ, ဣစ္စာဒီနိ ကမ္မပဒါနိ. ဟန္တာ. ဟတော. ဝဓကော. ဝဓူ. အာဃာတော. ဥပဃာတော. ဃာတကော. ပဋိဃော. သံဃော. ဗျဂ္ဃော. သကုဏဂ္ဃိ. ဟန္တုံ, ဟနိတုံ, ဟန္တွာ, ဟနိတွာ. ဝဇ္ဈေတွာ, ဝဓိတွာ ဣစ္စာဒီနိ သနာမိကာနိ တုမန္တာဒိပဒါနိ. 'उपाहन' (पादत्राण) आणि 'वधू' येथे 'हन' आणि 'वध' शब्दांचा अर्थ गमन (जाणे) असा आहे. 'पुरुषाला मारतो. थंडी आणि उष्णतेचा प्रतिकार करतो (पटिहन्ति)' इत्यादी कर्तृपदे आहेत. देवदत्त यज्ञदत्ताकडून मारला जातो. त्यानंतर तीव्र वारा आणि उन्हाचा प्रादुर्भाव झाल्यावर तो बाधित होतो (पटिहञ्ञति). प्रथमा विभक्तीचे एकारत्व होते, जसे 'vanappagumbe' (वनप्पगुम्बे) मध्ये. 'विहारेन' या पदाशी संबंध जोडला पाहिजे, इत्यादी कर्मपदे आहेत. हन्ता (मारणारा), हतो (मारलेला), वधको (वधक), वधू, आघातो, उपघातो, घातको, पटिघो (प्रतिघ), संघो (संघ), ब्यग्घो (व्याघ्र), सकुणग्घि (शिकारी पक्षी). हन्तुं, हनितुं, हन्त्वा, हनित्वा, वज्झेत्वा, वधित्वा इत्यादी नामयुक्त तुमन्त (हेत्वर्थक कृदन्त) इत्यादी पदे आहेत. တတ္ထ ဥပါဟနန္တိ တံ တံ ဌာနံ ဥပဟနန္တိ ဥပဂစ္ဆန္တိ တတော စ အာဟနန္တိ အာဂစ္ဆန္တိ ဧတေနာတိ ဥပါဟနံ. ဝဓူတိ ကိလေသဝသေန သုနခမ္ပိ ဥပဂမနသီလာတိ ဝဓူ, သဗ္ဗာသံ ဣတ္ထီနံ [Pg.115] သာဓာရဏမေတံ. အထ ဝါ ဝဓူတိ သုဏိသာ. တထာ ဟိ ‘‘တေန ဟိ ဝဓု ယဒါ ဥတုနီ အဟောသိ, ပုပ္ဖံ တေ ဥပ္ပန္နံ, အထ မေ အာရောစေယျာသီ’’တိ ဧတ္ထ ဝဓူတိ သုဏိသာ ဝုစ္စတိ. သာ ပန ‘‘အယံ နော ပုတ္တဿ ဘရိယာ’’တိ သဿုသသုရေဟိ အဓိဂန္တဗ္ဗာ ဇာနိတဗ္ဗာတိ ဝဓူတိ ဝုစ္စတိ. ဂတျတ္ထာနံ ကတ္ထစိ ဗုဒ္ဓိယတ္ထကထနတော အယမတ္ထော လဗ္ဘတေဝ. ‘‘သုဏှာ, သုဏိသာ, ဝဓူ’’ ဣစ္စေတေ ပရိယာယာ. သံဃောတိ ဘိက္ခုသမူဟော. သမဂ္ဂံ ကမ္မံ သမုပဂစ္ဆတီတိ သံဃော, သုဋ္ဌု ဝါ ကိလေသေ ဟန္တိ တေန တေန မဂ္ဂါသိနာ မာရေတီတိပိ သံဃော, ပုထုဇ္ဇနာရိယဝသေန ဝုတ္တာနေတာနိ. ဝိဝိဓေ သတ္တေ အာဟနတိ ဘုသော ဃာတေတီတိ ဗျဂ္ဃော. သော ဧဝ ‘‘ဝိယဂ္ဃော, ဝဂ္ဃော’’တိ စ ဝုစ္စတိ. အပရမ္ပိ ပုဏ္ဍရီကောတိ တဿ နာမံ. ဒုဗ္ဗလေ သကုဏေ ဟန္တီတိ သကုဏဂ္ဃိ, သေနော, အယံ ပန ဟနဓာတု ဒိဝါဒိဂဏေ ‘‘ပဋိဟညတီ’’တိ အကမ္မကံ ကတ္တုပဒံ ဇနေတိ. တထာ ဟိ ‘‘ဗုဒ္ဓဿ ဘဂဝတော ဝေါဟာရော လောကိယေ သောတေ ပဋိဟညတီ’’တိအာဒိကာ ပါဠိယော ဒိဿန္တိ. तेथे ‘उपाहन’ (जोडा/पादत्राण) म्हणजे ज्याच्याद्वारे त्या त्या ठिकाणी जातात (उपहनन्ति - उपगच्छन्ति) आणि तेथून परत येतात (आहनन्ति - आगच्छन्ति), ते ‘उपाहन’ होय. ‘वधू’ म्हणजे क्लेशांच्या वशतेमुळे कुत्र्याकडेही जाण्याचा स्वभाव असणारी ती ‘वधू’ होय, हे सर्व स्त्रियांसाठी सामान्य आहे. अथवा ‘वधू’ म्हणजे सून (पुत्रवधू). तसेच, ‘म्हणूनच हे वधू! जेव्हा तू ऋतुमती झालीस, तुला पुष्प (मासिक पाळी) आले, तेव्हा मला सांग’ येथे ‘वधू’ शब्दाने सून म्हटली आहे. ती ‘ही आमच्या पुत्राची पत्नी आहे’ अशी सासू-सासऱ्यांनी जाणावी (अधिगन्तब्बा - जानितब्बा) म्हणून तिला ‘वधू’ म्हटले जाते. गत्यर्थक धातूंचा काही ठिकाणी ज्ञानार्थ (बुद्धी) असा अर्थ सांगितल्यामुळे हा अर्थ प्राप्त होतोच. ‘सुण्हा, सुणिसा, वधू’ हे पर्यायी शब्द आहेत. ‘संघ’ म्हणजे भिक्खूंचा समूह. जो समग्र (एकत्रित) कर्माला प्राप्त होतो तो ‘संघ’ होय, किंवा जो क्लेशांचा चांगल्या प्रकारे नाश करतो, त्या त्या मार्ग-खड्गाने (मग्गसिना) मारतो तोही ‘संघ’ होय; हे पृथग्जन आणि आर्य यांच्या भेदाने सांगितले आहे. जो विविध प्राण्यांना मारतो, अत्यंत हिंसा करतो तो ‘ब्याग्ध’ (व्याघ्र/वाघ). त्यालाच ‘वियग्ध’ आणि ‘वग्ध’ असेही म्हणतात. दुसरे ‘पुंडरीक’ हे त्याचे नाव आहे. जो दुर्बळ पक्ष्यांना मारतो तो ‘सकुणग्घि’ (शिकारी पक्षी/ससाणा), ‘सेन’ (बाज पक्षी). हा ‘हन्’ धातू दिवादिगणात ‘पटिहञ्ञति’ असे अकर्मक कर्तृपद निर्माण करतो. तसेच ‘बुद्ध भगवंतांचे बोलणे लौकिक कानांवर आदळते (पटिहञ्ञति)’ इत्यादी पाळी वचने आढळतात. အန ပါဏနေ. ပါဏနံ သသနံ. အနတိ. အာနံ, ပါနံ. ‘‘တတ္ထ အာနန္တိ အဿာသော. ပါနန္တိ ပဿာသော. ဧတေသု အဿာသောတိ ဗဟိ နိက္ခမနဝါတော. ပဿာသောတိ အန္တော ပဝိသနဝါတော’’တိ ဝိနယဋ္ဌကထာယံ ဝုတ္တံ, သုတ္တန္တဋ္ဌကထာသု ပန ဥပ္ပဋိပါဋိယာ အာဂတံ. တတ္ထ ယသ္မာ သဗ္ဗေသမ္ပိ ဂဗ္ဘသေယျကာနံ မာတုကုစ္ဆိတော နိက္ခမနကာလေ ပဌမံ အဗ္ဘန္တရဝါတော ဗဟိ နိက္ခမတိ, ပစ္ဆာ ဗာဟိရဝါတော သုခုမံ ရဇံ ဂဟေတွာ အဗ္ဘန္တရံ ပဝိသန္တော တာလုံ အာဟစ္စ နိဗ္ဗာယတိ, တသ္မာ ဝိနယဋ္ဌကထာယံ ‘‘အဿာသောတိ ဗဟိ နိက္ခမနဝါတော, ပဿာသောတိ အန္တော ပဝိသနဝါတော’’တိ ဝုတ္တံ. ဧတေသု [Pg.116] ဒွီသု နယေသု ဝိနယနယေန အန္တော ဥဋ္ဌိတသသနံ အဿာသော, ဗဟိ ဥဋ္ဌိတသသနံ ပဿာသော. သုတ္တန္တနယေန ပန ဗဟိ ဥဋ္ဌဟိတွာပိ အန္တော သသနတော အဿာသော. အန္တော ဥဋ္ဌဟိတွာပိ ဗဟိ သသနတော ပဿာသော. အယမေဝ စ နယော ‘‘အဿာသာဒိမဇ္ဈပရိယောသာနံ သတိယာ အနုဂစ္ဆတော အဇ္ဈတ္တံ ဝိက္ခေပဂတေန စိတ္တေန ကာယောပိ စိတ္တမ္ပိ သာရဒ္ဓါ စ ဟောန္တိ ဣဉ္ဇိတာ စ ဖန္ဒိတာ စာ’’တိ, ‘‘ပဿာသာဒိမဇ္ဈပရိယောသာနံ သတိယာ အနုဂစ္ဆတော ဗဟိဒ္ဓါ ဝိက္ခေပဂတေန စိတ္တေန ကာယောပိ စိတ္တမ္ပိ သာရဒ္ဓါ စ ဟောန္တိ ဣဉ္ဇိတာ စ ဖန္ဒိတာ စာ’’တိ ဣမာယ ပါဠိယာ သမေတီတိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ‘अन्’ धातू श्वासोच्छ्वासाच्या (पाणन) अर्थात आहे. ‘पाणन’ म्हणजे श्वास घेणे. ‘अनति’ (तो श्वास घेतो). ‘आन’ आणि ‘पान’. ‘त्यात आन म्हणजे अस्सास (उच्छ्वास) आणि पान म्हणजे पस्सास (श्वास). यांपैकी अस्सास म्हणजे बाहेर पडणारा वायू आणि पस्सास म्हणजे आत प्रवेश करणारा वायू’ असे विनय-अट्ठकथेत म्हटले आहे; परंतु सुत्तंत-अट्ठकथांमध्ये याच्या उलट आले आहे. तेथे, कारण सर्वच गर्भवासी जीवांच्या मातांच्या उदरातून बाहेर पडण्याच्या वेळी प्रथम आतील वायू बाहेर पडतो, आणि नंतर बाहेरील वायू सूक्ष्म धुलिकण घेऊन आत प्रवेश करतो व टाळूला स्पर्श करून शांत होतो, म्हणून विनय-अट्ठकथेत ‘अस्सास म्हणजे बाहेर पडणारा वायू आणि पस्सास म्हणजे आत प्रवेश करणारा वायू’ असे म्हटले आहे. या दोन्ही पद्धतींमध्ये, विनय पद्धतीनुसार आतून निर्माण होणारा श्वास म्हणजे ‘अस्सास’ आणि बाहेरून निर्माण होणारा श्वास म्हणजे ‘पस्सास’ होय. परंतु सुत्तंत पद्धतीनुसार, बाहेरून निर्माण होऊन आत श्वास घेण्याला ‘अस्सास’ म्हणतात आणि आतून निर्माण होऊन बाहेर श्वास सोडण्याला ‘पस्सास’ म्हणतात. हाच नियम ‘अस्सासच्या आदि, मध्य आणि अंताचे स्मृतीने अनुगमन करणाऱ्या, अध्यात्मिक विक्षेप पावलेल्या चित्तामुळे काया आणि चित्त दोन्ही उत्तेजित, कंपित आणि चंचल होतात’ आणि ‘पस्सासच्या आदि, मध्य आणि अंताचे स्मृतीने अनुगमन करणाऱ्या, बाह्य विक्षेप पावलेल्या चित्तामुळे काया आणि चित्त दोन्ही उत्तेजित, कंपित आणि चंचल होतात’ या पाळी वचनाशी सुसंगत आहे, असे जाणावे. ဓန ဓညေ. ဓနနံ ဓညံ, သိရိပုညပညာနံ သမ္ပဒါတိ အတ္ထော. ဓာတုအတ္ထော ဟိ ယေဘုယျေန ဘာဝဝသေန ကထိယတိ ဌပေတွာ ဝက္ကရုက္ခတစေတိ ဧဝမာဒိပ္ပဘေဒံ. ယထာ ဘာဝတ္ထေ ဝတ္တမာနေန ယပစ္စယေန သဒ္ဓိံ နကာရဿ ယျကာရံ ကတွာ ထေနနံ ထေယျန္တိ ဝုစ္စတိ, ဧဝမိဓ ယပစ္စယေန သဒ္ဓိံ နကာရဿ ညကာရံ ကတွာ ဓနနံ ဓညန္တိ ဝုစ္စတိ. ဓနိနော ဝါ ဘာဝေါ ဓညံ, တသ္မိံ ဓညေ. ဓန္တိ, ဓနတိ. ဓနိတံ. ဓညံ. ယသ္မာ ပန ဓညသဒ္ဒေန သိရိပုညပညာသမ္ပဒါ ဂဟိတာ, တသ္မာ ‘‘ဓညပုညလက္ခဏသမ္ပန္နံ ပုတ္တံ ဝိဇာယီ’’တိအာဒီသု ဓညသဒ္ဒေန သိရိပညာဝ ဂဟေတဗ္ဗာ ပုညဿ ဝိသုံ ဝစနတော. ‘धन्’ धातू धान्याच्या (धञ्ञ) अर्थात आहे. ‘धनन’ म्हणजे धान्य, याचा अर्थ ‘श्री (समृद्धी), पुण्य आणि प्रज्ञा यांची संपदा’ असा आहे. धातूचा अर्थ बहुधा भाववाचक रूपाने सांगितला जातो, ‘वक्क’, ‘रुक्ख’, ‘तच’ इत्यादी भेद वगळता. ज्याप्रमाणे भावार्थात वर्तमान असलेल्या ‘य’ प्रत्ययासोबत ‘न’ काराचा ‘य्य’ कार करून ‘थेनन’ चे ‘थेय्य’ (चोरी) असे म्हटले जाते, त्याचप्रमाणे येथे ‘य’ प्रत्ययासोबत ‘न’ काराचा ‘ञ्ञ’ कार करून ‘धनन’ चे ‘धञ्ञ’ (धान्य/भाग्यवान) असे म्हटले जाते. किंवा धनवानाचा भाव म्हणजे ‘धञ्ञ’, त्या धान्यामध्ये. ‘धन्ति’, ‘धनति’. ‘धनितं’. ‘धञ्ञं’. परंतु ज्या अर्थी ‘धञ्ञ’ शब्दाने श्री, पुण्य आणि प्रज्ञा यांची संपदा घेतली जाते, त्या अर्थी ‘धान्य-पुण्य-लक्षण-संपन्न पुत्राला जन्म दिला’ इत्यादी वाक्यांमध्ये ‘धञ्ञ’ शब्दाने केवळ ‘श्री-प्रज्ञा’च ग्रहण करावी, कारण ‘पुण्य’ हा शब्द स्वतंत्रपणे आला आहे. ‘‘နဒတော ပရိသာယန္တေ, ဝါဒိတဗ္ဗပဟာရိနော; ယေ တေ ဒက္ခန္တိ ဝဒနံ, ဓညာ တေ နရပုင်္ဂဝ. “हे नरपुंगवा (मनुष्यांमध्ये श्रेष्ठ)! परिषदेच्या मध्यभागी गर्जना करणाऱ्या आणि वाजवण्यास योग्य अशा वाद्यांवर प्रहार करणाऱ्या (वाजवणाऱ्या) आपले जे मुख पाहतील, ते खरोखरच भाग्यवान (धञ्ञा) आहेत. ဒီဃင်္ဂုလီ တမ္ဗနခေ, သုဘေ အာယတပဏှိကေ; ယေ ပါဒေ ပဏမိဿန္တိ, တေပိ ဓညာ ဂုဏန္ဓရ. हे गुणधरा! लांब बोटे, तांबडे नख आणि सुंदर व लांब टाचा असलेल्या आपल्या ज्या चरणांना जे वंदन करतील, तेही भाग्यवान (धञ्ञा) आहेत. မဓုရာနိ ပဟဋ္ဌာနိ, ဒေါသဂ္ဃာနိ ဟိတာနိ စ; ယေတေဝါကျာနိ သောဿန္တိ, တေပိ ဓညာနရုတ္တမာ’’တိ आणि जे आपले मधुर, आनंददायी, दोषांचा नाश करणारे आणि हितकारक असे वचन ऐकतील, ते नरोत्तमा! तेही भाग्यवान (धञ्ञा) आहेत.” ဧဝမာဒီသု [Pg.117] ပန ဓညသဒ္ဒေန ပုညသမ္ပဒါ ဂဟေတဗ္ဗာ, ပုညသမ္ပဒါယ ဝါ သဒ္ဓိံ သိရိပညာသမ္ပဒါပိ ဂဟေတဗ္ဗာ. ဣဒမေတ္ထ နိဗ္ဗစနံ ‘‘ဓညံ သိရိပုညပညာသမ္ပဒါ ဧတေသံ အတ္ထီတိ ဓညာ’’တိ. ‘‘ဓညံ မင်္ဂလသမ္မတ’’န္တိ ဧတ္ထ တု ‘‘ဥတ္တမရတနံ ဣဒ’’န္တိ ဓနာယိတဗ္ဗံ သဒ္ဓါယိတဗ္ဗန္တိ ဓညံ, သိရိသမ္ပန္နံ ပုညသမ္ပန္နံ ပညာသမ္ပန္နန္တိပိ အတ္ထော ယုဇ္ဇတိ. ‘‘ဓညံ ဓနံ ရဇတံ ဇာတရူပ’’န္တိ စ အာဒီသု ‘‘နတ္ထိ ဓညသမံ ဓန’’န္တိ ဝစနတော ဓနာယိတဗ္ဗန္တိ ဓညံ, ကိံ တံ? ပုဗ္ဗဏ္ဏံ. အပိစ ဩသဓိဝိသေသောပိ ဓညန္တိ ဝုစ္စတိ. ဓနသဒ္ဒဿ စ ပန သမာသဝသေန ‘‘အဓနော, နိဒ္ဓနော’’တိ စ နတ္ထိ ဓနံ ဧတဿာတိ အတ္ထေန ဒလိဒ္ဒပုဂ္ဂလော ဝုစ္စတိ. ‘‘နိဓနံ ယာတီ’’တိဧတ္ထ တု ကမ္ပနတ္ထဝါစကဿ ဓူဓာတုဿ ဝသေန ဝိနာသော နိဓနန္တိ ဝုစ္စတီတိ. अशा इत्यादी ठिकाणी ‘धञ्ञ’ शब्दाने पुण्यसंपदा ग्रहण करावी, किंवा पुण्यसंपदेसोबत श्री-प्रज्ञा-संपदाही ग्रहण करावी. याचे येथे निर्वचन (व्युत्पत्ती) असे आहे - ‘ज्यांच्याकडे धान्य (श्री, पुण्य आणि प्रज्ञा यांची संपदा) आहे, ते धान्यवान (धञ्ञा) होत’. ‘धान्य हे मंगळ मानले गेले आहे’ येथे मात्र ‘हे उत्तम रत्न आहे’ म्हणून ज्याची इच्छा करावी, ज्याच्यावर श्रद्धा ठेवावी ते ‘धञ्ञ’ होय; तसेच श्रीसंपन्न, पुण्यसंपन्न आणि प्रज्ञासंपन्न असाही अर्थ योग्य ठरतो. ‘धान्य, धन, चांदी, सोने’ इत्यादींमध्ये ‘धान्यासारखे दुसरे धन नाही’ या वचनानुसार ज्याची इच्छा केली जाते ते ‘धञ्ञ’ होय. ते काय? पूर्वान्न (धान्य). शिवाय, विशिष्ट औषधी वनस्पतीलाही ‘धञ्ञ’ (धान्य) म्हटले जाते. आणि ‘धन’ शब्दाच्या समासामुळे ‘अधन’, ‘निर्धन’ म्हणजे ‘ज्याला धन नाही तो’ या अर्थाने दरिद्री मनुष्य म्हटला जातो. ‘निधनं याति’ (नाश पावतो) येथे मात्र कंपन अर्थाचा वाचक असलेल्या ‘धू’ धातूच्या प्रभावामुळे ‘निधन’ म्हणजे विनाश असे म्हटले जाते. မုန ဂတိယံ. မုနတိ. ‘मुन्’ धातू गतीच्या अर्थात आहे. ‘मुनति’ (तो जातो/जाणतो). စိနေ မညနာယံ. အလုတ္တန္တောယံ ဓာတု, ယထာ ဂိလေ, ယထာ စ မိလေ. စိနာယတိ, ဩစိနာယတိ. ‘‘သဗ္ဗော တံ ဇနော ဩစိနာယတူ’’တိ ဣဒမေတ္ထ ပါဠိ နိဒဿနံ. ဩစိနာယတတိ အဝမညတူတိ. ‘चिने’ धातू मानण्याच्या (विचार करण्याच्या) अर्थात आहे. हा अलुप्त-अंत असलेला धातू आहे, जसे ‘गिले’ आणि ‘मिले’. ‘चिनायति’, ‘ओचिनायति’. ‘सर्व लोकांनी त्याचा अनादर करावा (ओचिनायतु)’ हे येथे पाळीचे उदाहरण आहे. ‘ओचिनायति’ म्हणजे अनादर करणे (अवमञ्ञतु). ဣတိ ဘူဝါဒိဂဏေ တဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ अशा प्रकारे भूवादिगणातील ‘त-वर्ग’ अंत असणारे धातुरूप သမတ္တာနိ. समाप्त झाले. ပကာရန္တဓာတု ‘प-कार’ अंत असणारे धातू ဣဒါနိ ပဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ ဝုစ္စန္တေ – आता ‘प-वर्ग’ अंत असणारे धातुरूप सांगितले जात आहेत – ပါ ပါနေ. ပါနံ ပိဝနံ. ‘‘ပါတိ, ပါန္တိ. ပါတု, ပါန္တု’’ ဣစ္စာဒိ ယထာရဟံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ‘पा’ धातू पिण्याच्या (पान) अर्थात आहे. ‘पान’ म्हणजे पिणे. ‘पाति, पान्ति। पातु, पान्तु’ इत्यादी रूपे योग्यतेनुसार योजावीत. ခိပ္ပံ ဂီဝံ ပသာရေဟိ, န တေ ဒဿာမိ ဇီဝိတံ; အယဉှိတေ မယာ ရူဠှော, သရော ပါဿတိ လောဟိတန္တိ. “त्वरेने तुझी मान पुढे कर, मी तुला जीवन देणार नाही; कारण माझ्याद्वारे सोडलेला हा बाण तुझे रक्त पिईल.” အတြ [Pg.118] ဟိ ပါဿတီတိ ပိဝိဿတိ. ‘‘ပါဿတိ, ပါဿန္တိ. ပါဿသိ, ပါဿထ. ပါဿာမိ, ပါဿာမ’’ ဣစ္စာဒိနာ, ‘‘အပဿာ, အပဿံသု’’ ဣစ္စာဒိနာ စ နယေန သေသံ သဗ္ဗံ ယောဇေတဗ္ဗံ နယညူဟိ. ကော ဟိ သမတ္ထော သဗ္ဗာနိ ဗုဒ္ဓဝစနသာဂရေ ဝိစိတြာနိ ဝိပ္ပကိဏ္ဏရူပန္တရရတနာနိ ဥဒ္ဓရိတွာ ဒဿေတုံ, တသ္မာ သဗ္ဗာသုပိ ဓာတူသု သင်္ခေပေန ဂဟဏူပါယမတ္တမေဝ ဒဿိတံ. ပိဝတိ, ပိဝန္တိ. ပိဝံ, ပိဝန္တော, ပိဝမာနော, ပိဝံ ဘာဂိရသောဒကံ. ကာရိတေ ကုမာရံ ခီရံ ပါယေတိ. မုဟုတ္တံ တဏှာသမနံ, ခီရံ တွံ ပါယိတော မယာ. ကမ္မေ ပီယတိ, ပီတံ. တုမာဒီသု ‘‘ပါတုံ, ပိဝိတုံ, ပိတွာ, ပိဝိတွာ, ပါယေတွာ’’ ဣစ္စာဒီနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. အညေသုပိ ဌာနေသု ပါဠိနယာနုရူပေန သဒ္ဒရူပါနိ ဧဝမေဝ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. येथे 'पास्सति' (pāssati) म्हणजे 'पिईल' (pivissati). 'पास्सति, पास्सन्ति। पास्ससि, पास्सथ। पास्सामि, पास्साम' इत्यादी रूपांनी, आणि 'अपस्सा, अपस्संसु' इत्यादी रूपांच्या पद्धतीने इतर सर्व रूपे व्याकरणतज्ज्ञांनी जुळवून घ्यावीत. बुद्धवचनरूपी महासागरात विखुरलेली विविध प्रकारची रूपरूपी रत्ने बाहेर काढून दाखवण्यास कोण समर्थ आहे? म्हणूनच सर्व धातूंमध्ये संक्षेपाने केवळ ग्रहण करण्याची पद्धत (नियम) दाखवली आहे. 'पिवति, पिवन्ति' (पितो, पितात). 'पिवं, पिवन्तो, पिवमानो' (पिणारा), 'पिवं भागिरसोदकं' (भागीरथीचे पाणी पिणारा). प्रयोजक (कारित) मध्ये 'कुमारं खीरं पायेति' (मुलाला दूध पाजतो). 'मुहुत्तं तण्हासमनां, खीरं त्वं पायितो मया' (काही काळ तहान शमवण्यासाठी, मी तुला दूध पाजले आहे). कर्मणी प्रयोगात 'पीयति' (पिले जाते), 'पीतं' (पिलेले). 'तुम्' इत्यादी प्रत्ययांमध्ये 'पातुं, पिवितुं, पित्वा, पिवित्वा, पायेत्वा' इत्यादी रूपे जोडावीत. इतर ठिकाणीही पाळि पद्धतीनुसार शब्दांची रूपे याचप्रमाणे जुळवावीत. ပါ ရက္ခဏေ. ပါတိ. နိပါတိ. ပိတာ, ဂေါပေါ. 'पा' (pā) धातू रक्षण करण्याच्या अर्थात. 'पाति' (रक्षण करतो). 'निपाति'. 'पिता' (वडील), 'गोपो' (गोपाळ/रक्षक). ပါ ပူရဏေ. ပါတိ, ဝိပ္ပာတိ. ဝိပ္ပော. 'पा' (pā) धातू पूर्ण करण्याच्या (भरण्याच्या) अर्थात. 'पाति', 'विप्पाति'. 'विप्पो' (ब्राह्मण/पूर्ण करणारा). ဝိပ္ပောတိ ဗြာဟ္မဏော. သော ဟိ ဝိပ္ပေတိ ပူရေတိ ဝိသိဋ္ဌေန ဝေဒုစ္စာရဏာဒိနာ အတ္တနော ဗြာဟ္မဏကမ္မေန လောကဿ အဇ္ဈာသယံ အတ္တနော စ ဟဒယေ ဝေဒါနီတိ ဝိပ္ပောတိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဇာတော ဝိပ္ပကုလေ အဟ’’န္တိ ဧတ္ထ ဟိ ဗြာဟ္မဏော ‘‘ဝိပ္ပော’’တိ ဝုစ္စတိ. တဿ ကုလံ ဝိပ္ပကုလန္တိ. ब्राह्मणाला 'विप्पो' म्हणतात. कारण तो विशिष्ट वेदोच्चारण इत्यादी आपल्या ब्राह्मणकर्माने लोकांचे मन आणि स्वतःच्या हृदयात वेदांना भरतो (पूर्ण करतो), म्हणून त्याला 'विप्पो' म्हटले जाते. 'जातो विप्पकुले अहं' (मी विप्रकुलात जन्मलो) येथे ब्राह्मणाला 'विप्पो' म्हटले आहे. त्याचे कुल म्हणजे 'विप्पकुल' (विप्रकुल) होय. ပူ ပဝနေ. ပဝတိ. ပုတ္တော, ပုညံ. ဧတ္ထ ပုတ္တောတိ အတ္တနော ကုလံ ပဝတိ သောဓေတီတိ ပုတ္တော. ကိယာဒိဂဏံ ပန ပတွာ ‘‘ပုနာတီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ. 'पू' (pū) धातू पवित्र करण्याच्या (शुद्ध करण्याच्या) अर्थात. 'पवति' (पवित्र करतो). 'पुत्तो' (पुत्र), 'पुञ्ञं' (पुण्य). येथे 'पुत्तो' म्हणजे जो आपल्या कुलाला पवित्र करतो (शुद्ध करतो) तो पुत्र. क्रियादिगणात गेल्यावर 'पुनाति' असे म्हणावे. ပုတ္တော’တြဇော သုတော သူနု,တနုဇော တနယော’ရသော; ပုတ္တနတ္တာဒယော စာထ,အပစ္စန္တိ ပဝုစ္စရေ. पुत्र, अत्रज (आत्मज), सुत, सूनू, तनुज, तनय, ओरस (औरस); तसेच पुत्र-नातू इत्यादींना 'अपच्च' (अपत्य) असे म्हटले जाते. ဣတ္ထိလိင်္ဂမှိ [Pg.119] ဝတ္တဗ္ဗေ, ပုတ္တီတိ အတြဇာတိ စ; ဝတ္တဗ္ဗံ သေသဋ္ဌာနေသု, ယထာရဟမုဒီရယေ; ပါဠိယဉှိ အတြဇာတိ, ဣတ္ထီ ပုတ္တီ ကထိယတိ; स्त्रीलिंगात सांगायचे असल्यास 'पुत्ती' आणि 'अत्रजा' असे म्हणावे. इतर ठिकाणी योग्यतेनुसार प्रयोग करावा. कारण पाळिमध्ये 'अत्रजा' आणि 'पुत्ती' हे शब्द स्त्रीवाचक (मुलगी) म्हणून सांगितले जातात. ဧတ္ထ ပန – येथे पुन्हा - ‘‘တတော ဒွေ သတ္တရတ္တဿ, ဝေဒေဟဿတြဇာ ပိယာ; ရာဇကညာ ရုစာ နာမ, ဓာတိမာတရမဗြဝီ’’တိ 'त्यानंतर चौदा दिवसांनी (दोन आठवड्यांनी), विदेहाची प्रिय कन्या (अत्रजा), रुचा नावाची राजकन्या आपल्या धायमातेला म्हणाली' - အယံ ပါဠိ နိဒဿနံ. ‘‘ပုတ္တီ, ဓီတာ, ဒုဟိတာ, အတ္တဇာ’’တိ ဣစ္စေတေ ပရိယာယာ. ဧဝံ အတြဇာတိ ဣတ္ထိဝါစကဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဒဿနတော သုတသဒ္ဒါဒီသုပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂနယော လဗ္ဘမာနာလဗ္ဘမာနဝသေန ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗော. တထာ ဟိ လောကေ ‘‘ဝေဿော, သုဒ္ဒေါ, နရော, ကိံပုရိသော’’ ဣစ္စာဒီနံ ယုဂဠဘာဝေန ‘‘ဝေဿီ, သုဒ္ဒီ, နာရီ, ကိံပုရိသီ’’တိအာဒီနိ ဣတ္ထိဝါစကာနိ လိင်္ဂါနိ ဒိဿန္တိ. ‘‘ပုရိသော ပုမာ’’ ဣစ္စာဒီနံ ပန ယုဂဠဘာဝေန ဣတ္ထိဝါစကာနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ န ဒိဿန္တိ. ပုညန္တိ ဧတ္ထ ပန အတ္တနော ကာရကံ ပဝတိ သောဓေတီတိ ပုညံ. ကိယာဒိဂဏံ ပန ပတွာ ပုနာတီတိ ပုညန္တိ ဝတ္တဗ္ဗံ. हे पाळिचे उदाहरण आहे. 'पुत्ती, धीता, दुहिता, अत्तजा' हे तिचे समानार्थी शब्द आहेत. अशा प्रकारे 'अत्रजा' या स्त्रीवाचक स्त्रीलिंगी शब्दाच्या दर्शनावरून 'सुत' इत्यादी शब्दांमध्येही स्त्रीलिंगी रूप मिळण्याच्या किंवा न मिळण्याच्या शक्यतेनुसार तपास केला पाहिजे. जसे की जगात 'वेस्सो' (वैश्य), 'सुद्दो' (शूद्र), 'नरो' (नर), 'किम्पुरिसो' (किंपुरुष) इत्यादींच्या जोडीने 'वेस्सी', 'सुद्दी', 'नारी', 'किम्पुरिसी' इत्यादी स्त्रीवाचक लिंगे दिसतात. परंतु 'पुरिसो', 'पुमा' इत्यादींच्या जोडीने स्त्रीवाचक स्त्रीलिंगी रूपे दिसत नाहीत. 'पुञ्ञं' (पुण्य) या शब्दात, जो स्वतःच्या कर्त्याला पवित्र करतो (शुद्ध करतो) ते पुण्य होय. क्रियादिगणात गेल्यावर 'पुनाति' वरून 'पुञ्ञं' असे म्हणावे. အညော အတ္ထောပိ ဝတ္တဗ္ဗော, နိရုတ္တိလက္ခဏဿိတော; တသ္မာ နိဗ္ဗစနံ ဉေယျံ, ဇနပူဇာဒိတော ဣဓ. निरुक्तीच्या (व्युत्पत्तीच्या) लक्षणावर आधारित दुसरा अर्थही सांगितला पाहिजे; म्हणून येथे लोकांच्या पूजेवरून (आदरावरून) याची व्युत्पत्ती समजून घ्यावी. ပရံ ပုဇ္ဇဘဝံ ဇနေတီတိ ပုညံ. သဒါ ပူဇိတံ ဝါ ဇနေတီတိ ပုညံ. ဇနံ အတ္တကာရံ ပုနာတီတိ ပုညံ. အသေသံ အပုညံ ပုနာတီတိ ပုညံ. जे इतरांमध्ये पूजनीय भाव निर्माण करते ते पुण्य होय. किंवा जे नेहमी पूजनीय स्थिती निर्माण करते ते पुण्य होय. जे स्वतः कर्म करणाऱ्या माणसाला पवित्र करते ते पुण्य होय. जे संपूर्ण अपुण्याला (पापाला) नष्ट/शुद्ध करते ते पुण्य होय. ကလျာဏံ ကုသလံ ပုညံ, သုဘမိစ္စေဝ နိဒ္ဒိသေ; ကမ္မဿ ကုသလဿာဓိ-ဝစနံ ဝစနေ ပဋု. कल्याण, कुशल, पुण्य, शुभ असे निर्देश करावेत; कुशल कर्माचे हे समानार्थी शब्द बोलण्यात चतुर असलेल्यांनी वापरावेत. ပေ ဂတိယံ. ပေတိ, ပေန္တိ. ပေသိ, ပေထ. ဣဓ ဘိက္ခဝေ ဧကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ပေဟီတိ ဝုတ္တော ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ပစ္ဆတော ပဋိသက္ကတိ, ပိဋ္ဌိတော ရထံ ပဋိဝတ္တေတိ. ဥမ္မဂ္ဂံ ဂဏှာတိ, ဥဗ္ဗဋုမံ ရထံ ကရောတိ. 'पे' (pe) धातू गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात. 'पेति, पेन्ति'। 'पेसि, पेथ'। 'भिक्खूहो, येथे एखादा अविनीत घोडा (अस्सखळुंको) 'जा' (पेहीति) असे म्हटल्यावर, चाबकाने मारलेला आणि सारथीने प्रेरित केलेला असता, मागे हटतो, पाठीमागून रथ उलटवतो, चुकीचा मार्ग धरतो आणि रथाला चुकीच्या मार्गावर नेतो.' ပေ [Pg.120] ဝုဒ္ဓိယံ ပယတိ. ပါယော, အပါယော. ဧတ္ထ အပါယောတိ နတ္ထိ ပါယော ဝုဒ္ဓိ ဧတ္ထာတိ အပါယော. အယဓာတုဝသေနပိ အတ္ထော နေတဗ္ဗော, အယတော ဝုဒ္ဓိတော, သုခတော ဝါ အပေတောတိ အပါယော, နိရယတိရစ္ဆာနယောနိပေတ္တိဝိသယအသုရကာယာ. 'पे' (pe) धातू वृद्धीच्या (वाढीच्या) अर्थात 'पयति' (वाढतो). 'पायो' (वृद्धी), 'अपायो' (अपाय). येथे 'अपाय' म्हणजे जेथे वृद्धी (कल्याण) नाही तो अपाय होय. 'अय' धातूच्या अर्थानुसारही अर्थ लावला पाहिजे; 'अय' म्हणजे वृद्धी किंवा सुखापासून जो दूर गेला आहे तो अपाय होय, जसे की - निरय (नरक), तिरच्छानयोनी (प्राणीयोनी), पेत्तिविसय (प्रेतलोक) आणि असुरकाय (असुरलोक). ပေ သောသနေ. ပါယတိ, ပယတိ ဝါ. နိပကော. ဧတ္ထ နိပကော နိပယတိ ဝိသောသေတိ ပဋိပက္ခံ, တတော ဝါ အတ္တာနံ နိပါတိ ရက္ခတီတိ နိပကော, သမ္ပဇာနော. 'पे' (pe) धातू शोषून घेण्याच्या (वाळवण्याच्या/नष्ट करण्याच्या) अर्थात. 'पायति' किंवा 'पयति'. 'निपको' (बुद्धिमान/जागरूक). येथे 'निपको' म्हणजे जो प्रतिपक्षाला (क्लेशांना) शोषून घेतो (नष्ट करतो), किंवा त्यापासून स्वतःचे रक्षण करतो तो 'निपको' (जागरूक/संप्रजन्ययुक्त) होय. ဂုပ ရက္ခဏေ. ဂေါပတိ. ဂေါပကော. 'गुप' (gupa) धातू रक्षण करण्याच्या अर्थात. 'गोपति' (रक्षण करतो). 'गोपको' (रक्षक). နဂရံ ယထာ ပစ္စန္တံ, ဂုတ္တံ သာန္တရဗာဟိရံ. ज्याप्रमाणे सीमेवरील नगर आतून आणि बाहेरून सुरक्षित ठेवलेले असते, ဧဝံ ဂေါပေထ အတ္တာနံ, ခဏော ဝေ မာ ဥပစ္စဂါ. त्याचप्रमाणे स्वतःचे रक्षण करावे, क्षण (संधी) वाया जाऊ देऊ नये. ဂေါပေထာတိ ဂေါပေယျ ရက္ခေယျ. 'गोपेथ' (gopetha) म्हणजे रक्षण करावे ('गोपेय्य', 'रक्खेय्य'). ဝပ သန္တာနေ. ဝပတိ. 'वप' (vapa) धातू संतती किंवा पसरवण्याच्या अर्थात. 'वपति' (पेरतो/पसरवतो). သပ သမဝါယေ. သပတိ. 'सप' (sapa) धातू समूहाच्या (एकत्र येण्याच्या) अर्थात. 'सपति' (एकत्र येतो/मिळतो). စုပ မန္ဒဂတိယံ. စောပတိ. 'चुप' (cupa) धातू मंद गतीच्या अर्थात. 'चोपति' (हळूहळू हलतो/चालतो). တုပ ဟိံသာယံ. တောပတိ. တုပ္ပတိ. 'तुप' (tupa) धातू हिंसेच्या (इजा करण्याच्या) अर्थात. 'तोपति', 'तुप्पति'. ဂုပ ဂေါပနဇိဂုစ္ဆနေသု. ဂေါပတိ, ဇိဂုစ္ဆတိ. ဇိဂုစ္ဆံ, ဇိဂုစ္ဆမာနော. ဇေဂုစ္ဆီ. ဇိဂုစ္ဆိတွာ ဣစ္စာဒီနိ. 'गुप' (gupa) धातू रक्षण आणि घृणा (जुगुप्सा) करण्याच्या अर्थात. 'गोपति' (रक्षण करतो), 'जिगुच्छति' (घृणा करतो). 'जिगुच्छं', 'जिगुच्छमानो' (घृणा करणारा). 'जेगुच्छी' (घृणा करणारा). 'जिगुच्छित्वा' (घृणा करून) इत्यादी. ကပု ဟိံသာတက္ကလဂန္ဓေသု. ကပ္ပတိ. ကပ္ပူရော. 'कपु' (kapu) धातू हिंसा, तर्क आणि सुगंधाच्या अर्थात. 'कप्पति'. 'कप्पूरो' (कापूर). ကပု သာမတ္ထိယေ. ဣဒံ အမှာကံ ကပ္ပတိ. နေတံ အမှေသု ကပ္ပတိ. 'कपु' (kapu) धातू सामर्थ्य (योग्य असणे) या अर्थात. 'इदं अम्हाकं कप्पति' (हे आमच्यासाठी योग्य/विहित आहे). 'नेतं अम्हेसु कप्पति' (हे आमच्यामध्ये योग्य नाही). ကပ ကရုဏာယံ. ကပတိ. ကပဏော, ကာပညံ. တတ္ထ ကပတီတိ ကရုဏာယတိ, ကာပညန္တိ ကပဏဘာဝေါ. 'कप' (kapa) धातू करुणेच्या अर्थात. 'कपति' (करुणा करतो). 'कपणो' (दीन/गरीब), 'कापञ्ञं' (दीनता). तेथे 'कपति' म्हणजे करुणा करतो, 'कापञ्ञं' म्हणजे दीनता (गरीब अवस्था). သပ [Pg.121] အက္ကောသေ. သပတိ. သပထော, အဘိသပထော, အဘိသပိတော, သပနကော. 'सप' (sapa) धातू शिवीगाळ (आक्रोश) करण्याच्या अर्थात. 'सपति' (शाप देतो/शिवीगाळ करतो). 'सपथो' (शपथ), 'अभिसपथो', 'अभिसपितो', 'सपनको'. ဝပ ဗီဇနိက္ခေပေ. ဗီဇံ ဝပတိ. ဝါပကော. ဝါပိတံ ဓညံ. ဝုတ္တံ ဗီဇံ ပုရိသေန. ဗီဇံ ဝပ္ပတိ. ဝပ္ပမင်္ဂလံ. 'वप' (vapa) धातू बी पेरण्याच्या अर्थात. 'बीजं वपति' (बी पेरतो). 'वापको' (पेरणारा). 'वापितं धञ्ञं' (पेरलेले धान्य). 'वुत्तं बीजं पुरिसेन' (माणसाने बी पेरले). 'बीजं वप्पति' (बी पेरले जाते). 'वप्पमंगलं' (वप्पमंगल/पेरणीचा उत्सव). သုပ သယနေ. သုပတိ. သုခံ သုပန္တိ မုနယော, ယေ ဣတ္ထီသု န ဗဇ္ဈရေ. သုတ္တော ပုရိသော, သုပနံ, သုတ္တံ. 'सुप' (supa) धातू झोपण्याच्या (शयन) अर्थात. 'सुपति' (झोपतो). 'सुखं सुपन्ति मुनयो, ye इत्थीसु न बज्झरे' (मुनी सुखाने झोपतात, जे स्त्रियांमध्ये बद्ध होत नाहीत). 'सुत्तो पुरिसो' (झोपलेला माणूस), 'सुपनं' (झोपणे), 'सुत्तं' (झोपलेले). ခိပ ပေရဏေ. ပေရဏံ စုဏ္ဏိကရဏံ ပိသနံ. ခေပတိ. ခေပကော. 'खिप' (khipa) धातू प्रेरणेच्या (चूर्ण करणे/दळणे) अर्थात. 'खेपति'. 'खेपको' (फेकणारा/प्रेरित करणारा). ခိပ အဗျတ္တသဒ္ဒေ. ခိပတိ. ခိပိတသဒ္ဒေါ. ယဒါ စ ဓမ္မံ ဒေသေန္တော, ခိပိ လောကဂ္ဂနာယကော. 'खिप' (khipa) धातू अस्पष्ट आवाजाच्या (शिंकण्याच्या) अर्थात. 'खिपति' (शिंकतो). 'खिपितसद्दो' (शिंकण्याचा आवाज). 'यदा च धम्मं देसेन्तो, खिपि लोग्गनायको' (आणि जेव्हा धम्मदेशना करताना लोकनायक बुद्धांनी शिंक दिली). ခိပ ဆဍ္ဍနော. ခိပတိ, ဥက္ခိပတိ, ဝိက္ခိပတိ, အဝခိပတိ, သံခိပတိ. ခိတ္တံ, ဥက္ခိတ္တံ, ပက္ခိတ္တံ, ဝိက္ခိတ္တံ ဣစ္စာဒီနိ. 'खिप' (khipa) धातू टाकून देण्याच्या (फेकण्याच्या) अर्थात. 'खिपति' (फेकतो), 'उक्खिपति' (वर फेकतो), 'विक्खिपति' (विखुरतो), 'अवखिपति' (खाली फेकतो), 'संखिपति' (संक्षिप्त करतो). 'खित्तं' (फेकलेले), 'उक्खित्तं' (वर फेकलेले), 'पक्खित्तं' (आत टाकलेले), 'विक्खित्तं' (विखुरलेले) इत्यादी. ဩပ နိဋ္ဌုဘနေ. နိဋ္ဌုဘနံ ခေဠပါတနံ. ဩပတိ. ဩသဓံ သင်္ခရိတွာ မုခေ ခေဠံ ဩပိ. 'ओप' (opa) धातू थुंकण्याच्या (लाळ टाकण्याच्या) अर्थात. 'ओपति'. 'ओसधं सङ्खरित्वा मुखे खेळं ओपि' (औषध तयार करून तोंडात थुंकी टाकली). လိပိ ဥပလေပေ. လေပတိ. လိတ္တံ ပရမေန တေဇသာ. 'लिप' (lipi) धातू लेपन करण्याच्या अर्थात. 'लेपति' (लेप लावतो). 'लित्तं परमेन तेजसा' (परम तेजाने लिप्त झालेले). ခိပိ ဂတိယံ. ခိမ္ပတိ. 'खिपि' (khipi) धातू गतीच्या अर्थात. 'खिम्पति'. ဍိပ ခေပေ. ဍေပတိ. 'डिप' (ḍipa) धातू फेकण्याच्या अर्थात. 'डेपति'. နိဒပိ နိဒမ္ပနေ. နိဒမ္ပနံ နာမ သဿရုက္ခာဒီသု ဝီဟိသီသံ ဝါ ဝရကသီသံ ဝါ အစ္ဆိန္ဒိတွာ ခုဒ္ဒကသာခံ ဝါ အဘဉ္ဇိတွာ ယထာဌိတမေဝ ဟတ္ထေန ဂဟေတွာ အာကဍ္ဎိတွာ ဗီဇမတ္တဿေဝ ဝါ ပဏ္ဏမတ္တဿေဝ ဝါ ဂဟဏံ. ပုရိသော ဝီဟိသီသံ နိဒမ္ပတိ, ရုက္ခပတ္တံ နိဒမ္ပတိ. နိဒမ္ပကော, နိဒမ္ပိတံ, နိဒမ္ပိတုံ, နိဒမ္ပိတွာ. 'निदप' (nidapi) धातू उपटण्याच्या/काढण्याच्या (निदंपन) अर्थात. 'निदंपन' म्हणजे धान्य, झाडे इत्यादींमधील भाताचे कणीस किंवा वरकाचे कणीस न तोडता, किंवा लहान फांदी न मोडता, जसे आहे तसेच हाताने पकडून, ओढून केवळ बी किंवा केवळ पाने काढणे होय. 'पुरिसो वीहिसीसं निदम्पति' (माणूस भाताचे कणीस उपटतो/काढतो), 'रुक्खपत्तं निदम्पति' (झाडाचे पान काढतो). 'निदम्पको', 'निदम्पितं', 'निदम्पितुं', 'निदम्पित्वा'. တပ [Pg.122] ဒိတ္တိယံ. ဒိတ္တိ ဝိရောစနံ. ဒိဝါ တပတိအာဒိစ္စော. 'तप' (tapa) धातू प्रकाशाच्या (तळपण्याच्या) अर्थात. 'दित्ती' म्हणजे प्रकाशणे (तळपणे). 'दिवा तपति आदिच्चो' (दिवसा सूर्य तळपतो). တပ ဥဗ္ဗေဂေ. ဥဗ္ဗေဂေါ ဥတြာသော ဘီရုတာ. တပတိ, ဥတ္တပတိ. ဩတ္တပ္ပံ, ဩတ္တပ္ပိယံ ဓနံ. 'तप' (tapa) धातू उद्वेगाच्या (भयाच्या) अर्थात. 'उद्वेग' म्हणजे भीती, घबराट. 'तपति', 'उत्तपति'. 'ओत्तप्पं' (पापभीरुता/नैतिक भीती), 'ओत्तप्पियं धनं' (पापभीरुतारूपी धन). တပ ဓူပ သန္တာပေ. တပတိ. တပေါဓနံ, အာတာပေါ. အာတာပီ. အာတပံ. ဓူပတိ, သန္ဓူပနော, ကမ္မေ တာပိယတိ. ဓူပိယတိ. ဘာဝေ တာပနံ, တာပေါ, ပရိတာပေါ, သန္တာပေါ. ဓူပနံ. 'तप्' (tapa) आणि 'धूप्' (dhūpa) हे धातू संताप (तापणे, उष्णता किंवा क्लेश) या अर्थात आहेत. 'तपति' (तो तापतो/तप करतो). 'तपोधनं' (तपोधन), 'आतापो' (आताप/उष्णता), 'आतापी' (आतापी/उद्योगी), 'आतपं' (आतप/ऊन). 'धूपति' (धूर निघतो/धूप घालतो), 'संधूपनो' (संधूपन). कर्मणी प्रयोगात 'तापीयति' (तापवले जाते) आणि 'धुपीयति' (धूपित केले जाते) अशी रूपे होतात. भाववाचकात 'तापनं' (तापन), 'तापो' (ताप), 'परितापो' (परिताप), 'संतापो' (संताप) आणि 'धूपनं' (धूपन) अशी रूपे होतात. ပကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'प' कारान्त धातूंची रूपे. ဖကာရန္တဓာတု 'फ' कारान्त धातू. ပုပ္ဖ ဝိကသနေ. အကမ္မကော စာယံ သကမ္မကော စ. ပုပ္ဖတိ. ပုပ္ဖံ, ပုပ္ဖနံ, ပုပ္ဖိတော, ပုပ္ဖိတုံ, ပုပ္ဖိတွာ. ပုပ္ဖန္တိ ပုပ္ဖိနော ဒုမာ. ထလဇာ ဒကဇာ ပုပ္ဖာ, သဗ္ဗေ ပုပ္ဖန္တိ တာဝဒေ. မဉ္ဇူသကော နာမ ရုက္ခော ယတ္တကာနိ ဥဒကေ ဝါ ထလေ ဝါ ပုပ္ဖာနိ, သဗ္ဗာနိ ပုပ္ဖတိ. 'पुप्फ' (puppha) धातू विकसने (फुलणे/उमलणे) या अर्थात आहे. हा धातू अकर्मक आणि सकर्मक दोन्ही आहे. 'पुप्फति' (फुलतो). 'पुप्फं' (फूल), 'पुप्फनं' (फुलणे), 'पुप्फितो' (फुललेला), 'पुप्फितुं' (फुलण्यासाठी), 'पुप्फित्वा' (फुलून). "पुप्फन्ति पुप्फिनो दुमा" (फुलणारे वृक्ष फुलतात). "थलजा दकजा पुप्फा, सब्बे पुप्फन्ति तावदे" (जमिनीवर उत्पन्न होणारी आणि पाण्यात उत्पन्न होणारी सर्व फुले त्याच वेळी फुलतात). "मंजूसक नावाचा वृक्ष, पाण्यात किंवा जमिनीवर जितकी फुले असतात, ती सर्व फुलवतो (किंवा ती सर्व फुलतात)." တုဖ ဟိံသာယံ. တောဖတိ. 'तुफ्' (tupha) धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. 'तोफति' (तो हिंसा करतो). ဒဖ ဒဖိ ဝပ္ဖ ဂတိယံ. ဒဖတိ. ဒမ္ဖတိ. ဝပ္ဖတိ. 'दफ्' (dapha), 'दफि' (daphi) आणि 'वप्फ्' (vappha) हे धातू गतीच्या (गमनाच्या) अर्थात आहेत. 'दफति', 'दम्फति', 'वप्फति'. ဒိဖ ကထနယုဒ္ဓနိန္ဒာဟိံသာဒါနေသု. ဒေဖတိ. ဒေဖော. 'दिफ्' (dipha) धातू कथन (बोलणे), युद्ध, निंदा, हिंसा आणि दान या अर्थांमध्ये आहे. 'देफति', 'देफो'. တဖ တိတ္တိယံ. တိတ္တိ တပ္ပနံ, တဖတိ. 'तफ्' (tapha) धातू तृप्तीच्या (तृप्त होण्याच्या) अर्थात आहे. तृप्ती म्हणजे तर्पण (तृप्त होणे). 'तफति' (तो तृप्त होतो). ဒုဖ ဥပက္ကိလေသေ. ဥပက္ကိလိဿနံ ဥပက္ကိလေသော. ဒေါဖတိ. 'दुफ्' (dupha) धातू उपक्लेशाच्या (मळकट किंवा क्लेशित होण्याच्या) अर्थात आहे. उपक्लिष्ट होणे म्हणजे उपक्लेश. 'दोफति'. ဂုဖ ဂန္ထေ. ဂန္ထော ဂန္ထိကရဏံ. ဂေါဖတိ. 'गुफ्' (gupha) धातू ग्रंथाच्या (गुंफण्याच्या/बांधण्याच्या) अर्थात आहे. ग्रंथ म्हणजे ग्रंथीकरण (गुंफणे). 'गोफति'. ဖကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'फ' कारान्त धातूंची रूपे. ဗကာရန္တဓာတု 'ब' कारान्त धातू. ဘဗ္ဗ [Pg.123] ဟိံသာယံ. ဘဗ္ဗတိ. ဘဗ္ဗော. 'भब्ब्' (bhabba) धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. 'भब्बति', 'भब्बो'. ပဗ္ဗ ဝဗ္ဗ မဗ္ဗ ကဗ္ဗ ခဗ္ဗ ဂဗ္ဗ သဗ္ဗ စဗ္ဗ ဂတိယံ. ပဗ္ဗတိ. ဝဗ္ဗတိ. မဗ္ဗတိ. ကဗ္ဗတိ. ခဗ္ဗတိ. ဂဗ္ဗတိ. သဗ္ဗတိ. စဗ္ဗတိ. 'पब्ब्' (pabba), 'वब्ब्' (vabba), 'मब्ब्' (mabba), 'कब्ब्' (kabba), 'खब्ब्' (khabba), 'गब्ब्' (gabba), 'सब्ब्' (sabba) आणि 'चब्ब्' (cabba) हे धातू गतीच्या (गमनाच्या) अर्थात आहेत. 'पब्बति', 'वब्बति', 'मब्बति', 'कब्बति', 'खब्बति', 'गब्बति', 'सब्बति', 'चब्बति'. အဗ္ဗ သဗ္ဗ ဟိံသာယဉ္စ. ဂတျာပေက္ခာယ စကာရော. အဗ္ဗတိ. သဗ္ဗတိ. 'अब्ब्' (abba) आणि 'सब्ब्' (sabba) हे धातू हिंसेच्या अर्थात देखील आहेत. 'च' कार हा गतीच्या अपेक्षेने (गती आणि हिंसा दोन्ही अर्थांसाठी) आहे. 'अब्बति', 'सब्बति'. ကုဗိ အစ္ဆာဒနေ. ကုဗ္ဗတိ. 'कुबि' (kubi) धातू आच्छादनाच्या (झाकण्याच्या) अर्थात आहे. 'कुब्बति'. လုဗိ တုဗိ အဒ္ဒနေ. လုမ္ဗတိ. တုမ္ဗတိ. လုမ္ဗိနီဝနံ. ဥဒကတုမ္ဗော. အထောပိ ဒွေ စ တုမ္ဗာနိ. 'लुबि' (lubi) आणि 'तुबि' (tubi) हे धातू अर्दनाच्या (पीडा देणे/हिंसा करणे) अर्थात आहेत. 'लुम्बति', 'तुम्बति'. 'लुम्बिनीवनं' (लुंबिनी वन), 'उदकतुम्बो' (पाण्याचा तांब्या/घडा), "अथोपि द्वे च तुम्बानि" (आणि दोन पात्रे/तुंबे देखील). စုဗိ ဝဒနသံယောဂေ. ပုတ္တံ မုဒ္ဓနိ စုမ္ဗတိ. မုခေ စုမ္ဗတိ. ဧတ္ထ သိယာ ‘‘ယဒိ ဝဒနသံယောဂေ စုဗိဓာတု ဝတ္တတိ, ကထံ အမ္ဗုဓရဗိန္ဒုစုမ္ဗိတကူဋောတိ ဧတ္ထ အဝဒနေ အဝိညာဏကေ ပဗ္ဗတကူဋေ အမ္ဗုဓရဗိန္ဒူနံ စုမ္ဗနံ ဝုတ္တ’’န္တိ? သစ္စံ, တံ ပန စုမ္ဗနာကာရသဒိသေနာကာရေန သမ္ဘဝံ စေတသိ ဌပေတွာ ဝုတ္တံ, ယထာ အဒဿနသမ္ဘဝေပိ ဒဿနသဒိသေနာကာရေန သမ္ဘူတတ္တာ ‘‘ရောဒန္တေ ဒါရကေ ဒိသွာ, ဥဗ္ဗိဒ္ဓါ ဝိပုလာ ဒုမာ’’တိ အစက္ခုကာနမ္ပိ ရုက္ခာနံ ဒဿနံ ဝုတ္တံ, ဧဝမိဓာပိ စုမ္ဗနာကာရသဒိသေနာကာရေန သမ္ဘူတတ္တာ အဝဒနာနမ္ပိ အမ္ဗုဓရဗိန္ဒူနံ စုမ္ဗနံ ဝုတ္တံ. သဘာဝတော ပန အဝိညာဏကာနံ ဒဿနစုမ္ဗနာဒီနိ စ နတ္ထိ, သဝိညာဏကာနံယေဝ တာနိ ဟောန္တီတိ. အယံ နယော ကမု ပဒဝိက္ခေပေတိအာဒီသုပိ နေတဗ္ဗော. 'चुबि' (cubi) धातू वदनसंयोगाच्या (मुखाचा स्पर्श/चुंबन घेणे) अर्थात आहे. 'पुत्तं मुद्धनि चुम्बति' (पुत्राच्या मस्तकाचे चुंबन घेतो). 'मुखे चुम्बति' (मुखाचे चुंबन घेतो). येथे अशी शंका येऊ शकते की, "जर 'चुबि' धातू वदनसंयोगाच्या अर्थात वापरला जातो, तर 'अम्बुधरबिन्दुचुम्बितकूटो' (मेघांच्या थेंबांनी चुंबन घेतलेले पर्वतशिखर) यामध्ये मुख नसलेल्या आणि अचेतन (अविज्ञाणक) पर्वतशिखरावर मेघांच्या थेंबांचे चुंबन कसे म्हटले गेले आहे?" हे सत्य आहे, परंतु ते चुंबनाच्या आकारासारख्या (स्पर्शासारख्या) आकाराची मनात कल्पना करून म्हटले गेले आहे. जसे की, पाहणे शक्य नसतानाही पाहण्यासारख्या क्रियेच्या अस्तित्वामुळे "रोदन्ते दारके दिस्वा, उब्बिद्धा विपुला दुमा" (रडणाऱ्या मुलांना पाहून, उंच आणि विशाल वृक्ष...) असे डोळे नसलेल्या वृक्षांचेही पाहणे म्हटले गेले आहे, तसेच येथेही चुंबनासारख्या क्रियेच्या अस्तित्वामुळे मुख नसलेल्या मेघांच्या थेंबांचेही चुंबन घेणे म्हटले गेले आहे. परंतु स्वभावतः अचेतन (अविज्ञाणक) वस्तूंचे पाहणे, चुंबन घेणे इत्यादी क्रिया नसतात, त्या केवळ सचेतन (सविज्ञाणक) प्राण्यांच्याच असतात. हाच नियम 'कमु पदविक्खेपे' (पाऊल टाकणे) इत्यादी धातूंमध्येही लागू केला पाहिजे. ဥဗ္ဗိ တုဗ္ဗိ ထုဗ္ဗိ ဒုဗ္ဗိ ဓုဗ္ဗိ ဟိံသတ္ထာ. ဥဗ္ဗတိ. တုဗ္ဗတိ. ထုဗ္ဗတိ. ဒုဗ္ဗတိ. ဒုဗ္ဗာ. ဓုဗ္ဗတိ. ဧတ္ထ ဒုဗ္ဗာတိ ဒဗ္ဗတိဏံ, ယံ ‘‘တိရိယာ နာမ တိဏဇာတီ’’တိ ပါဠိယံ အာဂတံ. ဧတ္ထ စ ဒုဗ္ဗာတိ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ, ဒဗ္ဗန္တိ နပုံသကလိင်္ဂန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. 'उब्बि' (ubbi), 'तुब्बि' (tubbi), 'थुब्बि' (thubbi), 'दुब्बि' (dubbi) आणि 'धुब्बि' (dhubbi) हे धातू हिंसेच्या अर्थात आहेत. 'उब्बति', 'तुब्बति', 'थुब्बति', 'दुब्बति', 'दुब्बा', 'धुब्बति'. येथे 'दुब्बा' म्हणजे दूर्वा (दूर्वा गवत), जे पाळीमध्ये "तिरिया नावाचे गवत" म्हणून आले आहे. आणि येथे 'दुब्बा' हा स्त्रीलिंगी शब्द आहे आणि 'दब्बं' हा नपुंसकलिंगी शब्द आहे, असे समजावे. မုဗ္ဗိ [Pg.124] ဗန္ဓနေ. မုဗ္ဗတိ. 'मुब्बि' (mubbi) धातू बंधनाच्या (बांधण्याच्या) अर्थात आहे. 'मुब्बति'. ကုဗ္ဗိ ဥဂ္ဂမေ. ကုဗ္ဗတိ. 'कुब्बि' (kubbi) धातू उद्गमाच्या (वर येण्याच्या/उत्पन्न होण्याच्या) अर्थात आहे. 'कुब्बति'. ပုဗ္ဗ ပဗ္ဗ သဗ္ဗ ပူရဏေ. ပုဗ္ဗတိ. ပဗ္ဗတိ. သဗ္ဗတိ. ဧတ္တ သိယာ ‘‘နနု ဘော ပုဗ္ဗသဗ္ဗသဒ္ဒါ သဗ္ဗနာမာနိ, ကသ္မာ ပနေတေ ဓာတုစိန္တာယံ ဂဟိတာ’’တိ? ဝုစ္စတေ – သဗ္ဗနာမေသု စ တုမန္တာဒိဝိရဟိတေသု စ နိပါတေသု ဥပသဂ္ဂေသု စ ဓာတုစိန္တာ နာမ နတ္ထိ, ဣမာနိ ပန သဗ္ဗနာမာနိ န ဟောန္တိ. ကေဝလံ သုတိသာမညေန သဗ္ဗနာမာနိ ဝိယ ဥပဋ္ဌဟန္တိ, တေန တေ တဗ္ဘာဝမုတ္တတ္တာ ဓာတုစိန္တာယံ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ဂဟိတာ ‘‘ပုဗ္ဗတိ သဗ္ဗတီ’’တိ ပယောဂဒဿနတောတိ. ယဒိ ဧဝံ ကသ္မာ ဗုဒ္ဓဝစနေ ဧတာနိ ရူပါနိ န သန္တီတိ? အနာဂမနဘာဝေန န သန္တိ, န အဝိဇ္ဇမာနဘာဝေန. ကိဉ္စာပိ ဗုဒ္ဓဝစနေသု ဧတာနိ ရူပါနိ န သန္တိ, တထာပိ ပေါရာဏေဟိ အနုမတာ ပုရာဏဘာသာတိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ, ယထာ ‘‘နာထတီတိ နာထော’’တိ ဧတ္ထ ‘‘နာထတီ’’တိ ရူပံ ဗုဒ္ဓဝစနေ အဝိဇ္ဇမာနမ္ပိ ဂဟေတဗ္ဗံ ဟောတိ, ဧဝံ ဣမာနိပိ. တသ္မာ ဝေါဟာရေသု ဝိညူနံ ကောသလ္လတ္ထာယ သာသနေ အဝိဇ္ဇမာနာပိ သာသနာနုရူပါ လောကိကပ္ပယောဂါ ဂဟေတဗ္ဗာတိ ‘‘ပုဗ္ဗတိ သဗ္ဗတီ’’တိ ရူပါနိ ဂဟိတာနိ. ဧသ နယော အညေသုပိ ဌာနေသု ဝေဒိတဗ္ဗော. 'पुब्ब्' (pubba), 'पब्ब्' (pabba) आणि 'सब्ब्' (sabba) हे धातू पूरणाच्या (पूर्ण करण्याच्या) अर्थात आहेत. 'पुब्बति', 'पब्बति', 'सब्बति'. येथे अशी शंका येऊ शकते की, "अहो, 'पुब्ब' आणि 'सब्ब' हे शब्द तर सर्वनामे आहेत, मग त्यांचा धातूंच्या विचारात का समावेश केला गेला आहे?" उत्तर दिले जाते की – सर्वनामांमध्ये, 'तुमुन्' इत्यादी प्रत्यय नसलेल्या अव्ययांमध्ये (निपातांमध्ये) आणि उपसर्गांमध्ये धातूचा विचार नसतो, परंतु हे शब्द येथे सर्वनामे नाहीत. केवळ ऐकण्याच्या साधर्म्यामुळे ते सर्वनामांसारखे भासतात, म्हणून त्या सर्वनामभावापासून मुक्त असल्यामुळे पूर्वाचार्यांनी 'पुब्बति', 'सब्बति' अशा प्रयोगांच्या दर्शनासाठी धातूंच्या विचारात त्यांचा स्वीकार केला आहे. जर असे आहे, तर बुद्धवचनात ही रूपे का आढळत नाहीत? ती बुद्धवचनात न आल्यामुळे (अनुपस्थितीमुळे) नाहीत, अस्तित्वात नसल्यामुळे (अविद्यमानतेमुळे) नाहीत. जरी बुद्धवचनात ही रूपे नसली, तरी ती प्राचीन आचार्यांनी संमत केलेली प्राचीन भाषा म्हणून स्वीकारली पाहिजेत. जसे की, "नाथतीति नाथो" (जो याचना करतो तो नाथ) यामध्ये 'नाथति' हे रूप बुद्धवचनात नसले तरी स्वीकारले जाते, तसेच ही रूपेही स्वीकारली पाहिजेत. म्हणून व्यवहारात विद्वानांच्या कौशल्यासाठी, शासनात (बुद्धशासनात) नसलेले परंतु शासनाला अनुकूल असलेले लौकिक प्रयोग स्वीकारले पाहिजेत, म्हणूनच 'पुब्बति', 'सब्बति' ही रूपे घेतली आहेत. हाच नियम इतर ठिकाणीही समजून घ्यावा. စမ္ဗ အဒနေ. စမ္ဗတိ. 'चम्ब्' (camba) धातू अदनाच्या (खाण्याच्या) अर्थात आहे. 'चम्बति'. ကဗ္ဗ ခဗ္ဗ ဂဗ္ဗ ဒဗ္ဗေ. ဒဗ္ဗော အဟင်္ကာရော. ကဗ္ဗတိ. ခဗ္ဗတိ. ဂဗ္ဗတိ. 'कब्ब्' (kabba), 'खब्ब्' (khabba) आणि 'गब्ब्' (gabba) हे धातू दब्बाच्या (अहंकार/गर्वाच्या) अर्थात आहेत. 'दब्बो' म्हणजे अहंकार. 'कब्बति', 'खब्बति', 'गब्बति'. အဗိ ဒဗိ သဒ္ဒေ. အမ္ဗတိ. အမ္ဗာ, အမ္ဗု. ဒမ္ဗတိ. 'अबि' (abi) आणि 'दबि' (dabi) हे धातू शब्दाच्या (आवाज करण्याच्या) अर्थात आहेत. 'अम्बति'. 'अम्बा' (माता), 'अम्बु' (पाणी). 'दम्बति'. လဗိ အဝသံသနေ. အဝသံသနံ အဝလမ္ဗနံ. လမ္ဗတိ, ဝိလမ္ဗတိ, ဗျာလမ္ဗတိ. နီစေ စော’လမ္ဗတေ သူရိယော. အာလမ္ဗတိ[Pg.125]. အာလမ္ဗနံ, တဒါလမ္ဗနံ, တဒါလမ္ဗဏံ, တဒါလမ္ဗံ ဝါ. လာဗု. အလာဗု ဝါ, အကာရော ဟိ တဗ္ဘာဝေ. 'लबि' (labi) धातू अवशंसनाच्या (खाली लटकण्याच्या/अवलंबन करण्याच्या) अर्थात आहे. अवशंसन म्हणजे अवलंबन. 'लम्बति', 'विलम्बति', 'ब्यालम्बति'. "नीचे चोलम्बते सूरियो" (सूर्य खाली लटकतो/मावळतो). 'आलम्बति'. 'आलम्बनं' (आलंबन/विषय), 'तदालम्बनं', 'तदालम्बणं' किंवा 'तदालम्बं'. 'लाबू' किंवा 'अलाबु' (भोपळा), येथे 'अ' कार हा त्याच्याच भावात (तद्भावात) आहे. ဗကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ब' कारान्त धातूंची रूपे. ဘကာရန္တဓာတု 'भ' कारान्त धातू. ဘာ ဒိတ္တိယံ. စန္ဒော ဘာတိ, ပဉှာ မံ ပဋိဘာတိ. ရတ္တိ ဝိဘာတိ. ဘာဏု, ပဋိဘာနံ. ဝိဘာတာ ရတ္တိ. 'भा' (bhā) धातू दीप्तीच्या (प्रकाशण्याच्या) अर्थात आहे. 'चन्दो भाति' (चंद्र प्रकाशतो), 'पञ्हा मं पटिभाति' (प्रश्न मला सुचतो/प्रतिभासित होतो). 'रत्ति विभाति' (रात्र प्रकाशते/संपते). 'भाणू' (सूर्य), 'पटिभानं' (प्रतिभा). 'विभाता रत्ति' (प्रकाशलेली रात्र/पहाट). ဘီ ဘယေ. ဘာယတိ. ဘယံ, ဘယာနကော, ဘီမော, ဘီမသေနော, ဘီရု, ဘီရုကော, ဘီရုကဇာတိကော. ကာရိတေ ‘‘ဘာယေတိ, ဘာယယတိ, ဘာယာပေတိ, ဘာယာပယတီ’’တိ ရူပါနိ. 'भी' (bhī) धातू भया च्या (भीती वाटण्याच्या) अर्थात आहे. 'भायति' (तो भितो). 'भयं' (भय), 'भयानको' (भयानक), 'भीमो' (भीम), 'भीमसेनो' (भीमसेन), 'भीरु' (भीरू/भित्रा), 'भीरुको' (भित्रा), 'भीरुकजातिको' (स्वभावाने भित्रा). प्रयोजक रूपात 'भायेति', 'भाययति', 'भायापेति', 'भायापयति' अशी रूपे होतात. သဘု သမ္ဘု ဟိံသာယံ. သဘတိ. သမ္ဘတိ. 'सभु' (sabhu) आणि 'सम्भु' (sambhu) हे धातू हिंसेच्या अर्थात आहेत. 'सभति', 'सम्भति'. သုမ္ဘ ဘာသနေ စ. စကာရော ဟိံသာပေက္ခကော. သုမ္ဘတိ. သုမ္ဘော. ကုသုမ္ဘော. 'सुम्भ' (sumbha) धातू भाषणाच्या (बोलण्याच्या/प्रकाशण्याच्या) अर्थात देखील आहे. 'च' कार हा हिंसेच्या अपेक्षेने (भाषण आणि हिंसा दोन्ही अर्थांसाठी) आहे. 'सुम्भति', 'सुम्भो', 'कुसुम्भो'. ဧတ္ထ သုမ္ဘောတိ အာဝါဋော. ‘‘သုမ္ဘံ နိက္ခနာဟီ’’တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. ကုသုမ္ဘောတိ ခုဒ္ဒကအာဝါဋော, ‘‘ပဗ္ဗတကန္ဒရပဒရသာခါပရိပူရာ ကုသုမ္ဘေ ပရိပူရေန္တီ’’တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. येथे 'सुम्भो' म्हणजे खड्डा (आवाट). "सुम्भं निक्खनाहि" (खड्डा खण) हे येथे उदाहरण आहे. 'कुसुम्भो' म्हणजे लहान खड्डा, "पब्बतकन्दरपदरसाखापरिपूरा कुसुम्भे परिपूरेन्ति" (पर्वतांच्या गुहा, दऱ्या आणि ओढे वाहून लहान खड्डे भरून काढतात) हे येथे उदाहरण आहे. အဗ္ဘ ဝဗ္ဘ မဗ္ဘ ဂတိယံ. အဗ္ဘတိ. အဗ္ဘော. ဝဗ္ဘတိ. မဗ္ဘတိ. 'अब्भ' (abbha), 'वब्भ' (vabbha) आणि 'मब्भ' (mabbha) हे धातू गतीच्या (गमनाच्या) अर्थात आहेत. 'अब्भति'. 'अब्भो' (ढग). 'वब्भति', 'मब्भति'. ဧတ္ထ အဗ္ဘောတိ မေဃော. သော ဟိ အဗ္ဘတိ အနေကသတပဋလော ဟုတွာ ဂစ္ဆတီတိ ‘‘အဗ္ဘော’’တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဝိဇ္ဇုမာလီ သတက္ကကူ’’တိ ဝုတ္တံ. သတက္ကကူတိ စ အနေကသတပဋလော. ဧတ္ထ စ အဗ္ဘသဒ္ဒေါ တိလိင်္ဂိကော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. တထာ [Pg.126] ဟိ အယံ ‘‘အဗ္ဘုဋ္ဌိတောဝ သ ယာတိ, သ ဂစ္ဆံ န နိဝတ္တတီ’’တိ ဧတ္ထ ပုလ္လိင်္ဂေါ. ‘‘အဗ္ဘာ, မဟိကာ, ဓူမော, ရဇော, ရာဟူ’’တိ ဧတ္ထ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ. ‘‘အဗ္ဘာနိ စန္ဒမဏ္ဍလံ ဆာဒေန္တီ’’တိ ဧတ္ထ နပုံသကလိင်္ဂေါ. येथे 'अब्भो' म्हणजे मेघ (ढग). कारण तो अनेक शेकडो थरांचा (पटलांचा) होऊन जातो (अब्भति), म्हणून त्याला 'अब्भो' असे म्हणतात. "विज्जुमाली सतक्ककू" (विजांची माळ असलेला आणि शेकडो शिखरे/थर असलेला) असे म्हटले आहे. 'सतक्ककू' म्हणजे अनेक शेकडो थरांचा. आणि येथे 'अब्भ' शब्द तिन्ही लिंगांत (त्रिलिंगी) समजावा. जसे की, "अब्भुट्ठितोव स याति, स गच्छं न निवत्तति" (ढग वर उठून जातो, तो जाताना मागे फिरत नाही) यामध्ये तो पुल्लिंगी आहे. "अब्भा, महिका, धूमो, रजो, राहू" (ढग, धुके, धूर, धूळ, राहू) यामध्ये तो स्त्रीलिंगी ('अब्भा') आहे. "अब्भानि चन्दमण्डलं छादेन्ति" (ढग चंद्रमंडळाला झाकून टाकतात) यामध्ये तो नपुंसकलिंगी ('अब्भानि') आहे. ဣမာနိ ပန မေဃဿ နာမာနိ – आणि ही मेघाची (ढगाची) नावे आहेत – မေဃော ဝလာဟကော လင်္ဃိ, ဇီမူတော အမ္ဗုဒေါ ဃနော; ဓာရာဓရော အမ္ဗုဓရော, ပဇ္ဇုန္နော ဟိမဂဗ္ဘကော. मेघो, वलाहको, लङ्घी, जीमूतो, अम्बुदो, घनो; धाराधरो, अम्बुधरो, पज्जुन्नो, हिमगब्भको. ယဘ မေထုနေ. မိထုနဿ ဇနဒွယဿ ဣဒံ ကမ္မံ မေထူနံ, တသ္မိံ မေထုနေ ယဘဓာတု ဝတ္တတိ. ယဘတိ. ယာဘဿံ. 'यभ' (yabha) धातू मैथुन (लैंगिक संबंध) या अर्थात वापरला जातो. दोन व्यक्तींच्या (मिथुन) या क्रियेला 'मैथुन' म्हणतात, त्या मैथुन अर्थात 'यभ' धातू चालतो. 'यभति' (तो मैथुन करतो), 'याभस्सं' (मैथुन क्रिया). ဧတ္ထ စ ‘‘မေထုန’’န္တိ ဧသာ သဗ္ဘိဝါစာ, လဇ္ဇာသမ္ပန္နေဟိ ပုဂ္ဂလေဟိ ဝတ္တဗ္ဗဘာသာဘာဝတော. တထာ ဟိ ‘‘မေထုနော ဓမ္မော န ပဋိသေဝိတဗ္ဗော’’တိ စ ‘‘န မေ ရာဇာ သခါ ဟောတိ, န ရာဇာ ဟောတိ မေထုနော’’တိ စ သောဘနေ ဝါစာဝိသယေ အယံ ဘာသာ အာဂတာ. ‘‘ယဘတီ’’တိအာဒိကာ ပန ဘာသာ ‘‘သိခရဏီ’’တိအာဒိကာ ဘာသာ ဝိယ အသမ္ဘိဝါစာ. န ဟိ ဟိရောတ္တပ္ပသမ္ပန္နော လောကိယဇနောပိ ဤဒိသိံ ဝါစံ ဘာသတိ. ဧဝံ သန္တေပိ အဓိမတ္တုက္ကံသဂတဟိရောတ္တပ္ပောပိ ဘဂဝါ မဟာကရုဏာယ သဉ္စောဒိတဟဒယော လောကာနုကမ္ပာယ ပရိသမဇ္ဈေ အဘာသိ. အဟော တထာဂတဿ မဟာကရုဏာတိ. आणि येथे 'मैथुन' हा सभ्य शब्द (सब्भिवाचा) आहे, कारण लज्जाशील व्यक्तींद्वारे बोलली जाणारी ही भाषा आहे. तसेच 'मैथुनो धम्मो न पटिसेवितब्बो' (मैथुन धर्माचे सेवन करू नये) आणि 'न मे राजा सखा होति, न राजा होति मेथुनो' (राजा माझा मित्र नाही आणि राजा माझा जोडीदार नाही) अशा प्रकारे सुंदर वचनव्यवहारात ही भाषा आली आहे. परंतु 'यभति' इत्यादी भाषा 'सिखरिणी' इत्यादी भाषेप्रमाणे असभ्य भाषा (असब्भिवाचा) आहे. कारण लज्जा आणि भय (हिरोत्तप्प) यांनी युक्त असलेला सामान्य संसारी माणूसही अशी भाषा बोलत नाही. असे असूनही, अत्यंत उत्कृष्ट लज्जा आणि भय (हिरोत्तप्प) असणारे भगवान, महाकरुणेने प्रेरित होऊन जगावरील अनुकंपेपोटी परिषदेच्या (सभेच्या) मध्यभागी असे बोलले. अहो! तथागतांची महाकरुणा! ဣမာနိ ပန မေထုနဓမ္မဿ နာမာနိ – ही मैथुनधर्माची (मैथुन क्रियेची) नावे आहेत – သံဝေသနံ နိဒ္ဓုဝနံ, မေထုနံ သူရတံ ရတံ; ဗျထယော ဂါမဓမ္မော စ, ယာဘဿံ မောဟနံ ရတိ. संवेसन, निद्धुवन, मैथुन, सुरत, रत, ब्यथय, गामधम्म (ग्रामधर्म), याभस्स, मोहन आणि रती. အသဒ္ဓမ္မော စ ဝသလ-ဓမ္မော မီဠှသုခမ္ပိ စ; ဒွယံဒွယသမာပတ္တိ, ဒွန္ဒော ဂမ္မော’ဒကန္တိကော. असद्धम्म (असद्धर्म), वसलधम्म (वृषलधर्म), मीळ्हसुख (मळसुख), द्वयंद्वयसमापत्ती, द्वंद्व, गम्म (ग्राम्य) आणि उदकांतिक. သိဘ ဝိဘ ကတ္ထနေ. သိဘတိ. ဝိဘတိ. 'सिभ' (sibha) आणि 'विभ' (vibha) हे धातू बढाई मारणे (कत्थन) या अर्थात वापरले जातात. सिभति, विभति. ဒေဘ [Pg.127] အဘိ ဒဘိ သဒ္ဒေ. ဒေဘတိ. အမ္ဘတိ. အမ္ဘော. ဒမ္ဘတိ. 'देभ' (debha), 'अभि' (abhi) आणि 'दभि' (dabhi) हे धातू आवाजाच्या (सद्द) अर्थात वापरले जातात. देभति, अंभति, अंभो, दंभति. ဧတ္ထ စ အမ္ဘော ဝုစ္စတိ ဥဒကံ. တဉှိ နိဇ္ဇီဝမ္ပိ သမာနံ ဩဃကာလာဒီသု ဝိဿန္ဒမာနံ အမ္ဘတိ သဒ္ဒံ ကရောတီတိ အမ္ဘောတိ ဝုစ္စတိ. आणि येथे 'अंभो' म्हणजे पाणी (उदक) म्हटले जाते. कारण ते निर्जीव असूनही पूर इत्यादी काळात वाहताना 'अंभति' असा आवाज करते, म्हणून त्याला 'अंभो' म्हटले जाते. ဣမာနိဿ နာမာနိ – ही याची (पाण्याची) नावे आहेत – ပါနီယံ ဥဒကံ တောယံ, ဇလံ ပါတော စ အမ္ဗု စ; ဒကံ ကံ သလိလံ ဝါရိ, အာပေါ အမ္ဘော ပပမ္ပိ စ. पानीय, उदक, तोय, जल, पात, अम्बु, दक, कं, सलिल, वारि, आपो, अंभो आणि प्रपा. နီရဉ္စ ကေပုကံ ပါနိ, အမတံ ဧလမေဝ စ,အာပေါနာမာနိ ဧတာနိ, အာဂတာနိ တတော တတော. नीर, केपुक, पानि, अमत (अमृत) आणि एल. ही पाण्याची (आपो) नावे ठिकठिकाणच्या प्रयोगांतून आली आहेत. ဧတ္ထ စ ‘‘ဝါလဂ္ဂေသု စ ကေပုကေ. ပိဝိတဉ္စ တေသံ ဘုသံ ဟောတိ ပါနီ’’တိအာဒယော ပယောဂါ ဒဿေတဗ္ဗာ. आणि येथे 'वालग्गेसु च केपुके' आणि 'पिवितञ्च तेसं भुसं होति पानी' इत्यादी प्रयोग दाखवले पाहिजेत. ထဘိ ခဘိ ပဋိဗဒ္ဓေ ထမ္ဘတိ, ဝိတ္ထမ္ဘတိ. ခမ္ဘတိ, ဝိက္ခမ္ဘတိ. ထမ္ဘော. ထဒ္ဓေါ, ဥပတ္ထမ္ဘော. ဥပတ္ထမ္ဘိနီ. ဝိက္ခမ္ဘော. ဝိက္ခမ္ဘိတကိလေသော. 'थभि' (thabhi) आणि 'खभि' (khabhi) हे धातू अडथळा किंवा बंध (पटिबद्ध) या अर्थात वापरले जातात. थंभति, वित्थंभति. खंभति, विक्खंभति. थंभो (खांब/स्तंभ), थद्धो (स्तब्ध/कठोर), उपत्थंभो (आधार/उपस्तंभ), उपत्थंभिनी, विक्खंभो (विक्षंभ/दडपशाही), विक्खंभितकिलेसो (दडपून टाकलेले क्लेश). ဇဘ ဇဘိ ဂတ္တဝိနာမေ. ဇဘတိ. ဇမ္ဘတိ, ဝိဇမ္ဘတိ. ဝိဇမ္ဘနံ, ဝိဇမ္ဘိတာ. ဝိဇမ္ဘန္တော, ဝိဇမ္ဘမာနော, ဝိဇမ္ဘိတော. 'जभ' (jabha) आणि 'जभि' (jabhi) हे धातू आळस देणे किंवा अंग ताणणे (गत्तविनाम) या अर्थात वापरले जातात. जभति, जंभति, विजंभति. विजंभनं (जांभई देणे/अंग ताणणे), विजंभिता, विजंभंतो, विजंभमानो, विजंभितो. သဗ္ဘ ကထနေ. သဗ္ဘတိ. 'सब्भ' (sabbha) धातू बोलणे (कथन) या अर्थात वापरला जातो. सब्भति. ဝဗ္ဘ ဘောဇနေ. ဝဗ္ဘတိ. 'वब्भ' (vabbha) धातू भोजन करणे (खाणे) या अर्थात वापरला जातो. वब्भति. ဂဗ္ဘ ဓာရဏေ. ဂဗ္ဘတိ. ဂဗ္ဘော. 'गब्भ' (gabbha) धातू धारण करणे या अर्थात वापरला जातो. गब्भति, गब्भो (गर्भ/गर्भाशय/खोली). ဧတ္ထ ဂဗ္ဘောတိ မာတုကုစ္ဆိပိ ဝုစ္စတိ ကုစ္ဆိဂတပုတ္တောပိ. တထာ ဟိ ‘‘ယမေကရတ္တိံ ပဌမံ, ဂဗ္ဘေ ဝသတိ မာဏဝေါ’’တိ ဧတ္ထ မာတုကုစ္ဆိ ‘‘ဂဗ္ဘော’’တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဂဗ္ဘော မေ ဒေဝ ပတိဋ္ဌိတော. ဂဗ္ဘော စ ပတိတော ဆမာ’’တိ စ ဧတ္ထ ပန ကုစ္ဆိဂတပုတ္တော. အပိစ ဂဗ္ဘောတိ အာဝါသဝိသေသော. ‘‘ဂဗ္ဘံ [Pg.128] ပဝိဋ္ဌော’’တိအာဒီသု ဟိ ဩဝရကော ‘‘ဂဗ္ဘော’’တိ ဝုစ္စတိ. येथे 'गब्भ' (गर्भ) म्हणजे मातेचे गर्भाशय (मातुकुच्छि) देखील म्हटले जाते आणि गर्भातील मूल (कुच्छिगतपुत्त) देखील. जसे की, 'यमेकरत्तिं पठमं, गब्भे वसति माणवो' (माणवक पहिल्या एका रात्रीसाठी गर्भात राहतो) येथे मातेच्या गर्भाशयाला 'गब्भ' म्हटले आहे. 'गब्भो मे देव पतिट्ठितो' (हे देवा, माझा गर्भ प्रस्थापित झाला आहे) आणि 'गब्भो च पतितो छमा' (आणि गर्भ जमिनीवर पडला) येथे गर्भातील मूल अभिप्रेत आहे. शिवाय, 'गब्भ' म्हणजे एक विशिष्ट निवासस्थान (खोली) देखील आहे. 'गब्भं पविट्ठो' (खोलीत प्रवेश केला) इत्यादींमध्ये आतील खोलीला (ओवरक) 'गब्भ' म्हटले जाते. ရဘ ရာဘဿေ. အာပုဗ္ဗော ရဘ ဟိံသာကရဏဝါယမနေသု. ရာဘဿံ ရာဘသဘာဝေါ. တံသမင်္ဂိနော ပန ပါဠိယံ ‘‘စဏ္ဍာ ရုဒ္ဓါ ရဘသာ’’တိ ဧဝံ အာဂတာ. 'रभ' (rabha) धातू वेगाने किंवा हिंसेने काम करणे (राभस्य) या अर्थात वापरला जातो. 'आ' उपसर्ग लागून (आरभ) हा धातू हिंसा करणे आणि प्रयत्न करणे या अर्थात वापरला जातो. 'राभस्सं' म्हणजे उग्रता किंवा वेगवान भाव (राभसभाव). त्या गुणाने युक्त असलेल्या व्यक्तींसाठी पाळीमध्ये 'चण्डा रुद्धा रभसा' (उग्र, क्रूर आणि वेगवान) असे आले आहे. တတ္ထ ရဘသာတိ ကရဏုတ္တရိယာ. ရဘတိ, အာရဘတိ, သမာရဘတိ, အာရမ္ဘတိ. ရဘသော. အာရမ္ဘော. သမာရမ္ဘော, အာရဘန္တော. သမာရဘန္တော. အာရဒ္ဓံ မေ ဝီရိယံ. သာရမ္ဘံ. အနာရမ္ဘံ. သာရမ္ဘော တေ န ဝိဇ္ဇတိ. ပကာရဏာရမ္ဘော. ဝီရိယာရမ္ဘော. အာရဘိတုံ. အာရဘိတွာ. အာရဗ္ဘ. तेथे 'रभसा' म्हणजे कार्यात अतिशय तत्पर असणारे (करणुत्तरीया). रभति, आरभति, समारभति, आरंभति. रभसो. आरंभो. समारंभो, आरभंतो. समारभंतो. आरद्धं मे वीरियं (माझा वीर्य/प्रयत्न सुरू झाला आहे). सारंभं (सक्रोध/सहिंस). अनारंभं. सारंभो ते न विज्जति (तुझ्यात क्रोध/हिंसा आढळत नाही). पकारणारंभो (प्रकरणाचा आरंभ). वीरियारंभो (वीर्यारंभ/प्रयत्नाचा आरंभ). आरभितुं, आरभित्वा, आरब्भ. ဧတ္ထ ဝီရိယာရမ္ဘောတိ ဝီရိယသင်္ခါတော အာရမ္ဘော. အာရမ္ဘသဒ္ဒေါ ကမ္မေ အာပတ္တိယံ ကြိယာယ ဝီရိယေ ဟိံသာယ ဝိကောပနေတိ အနေကေသု အတ္ထေသု အာဂတော. येथे 'वीरियारंभो' म्हणजे वीर्य (प्रयत्न) नावाचा आरंभ होय. 'आरंभ' शब्द कर्म, आपत्ती (नियमभंग), क्रिया, वीर्य (प्रयत्न), हिंसा आणि विकोपन (नाश/अडथळा) अशा अनेक अर्थांमध्ये आला आहे. ‘‘ယံ ကိဉ္စိ ဒုက္ခံ သမ္ဘောဘိ, သဗ္ဗံ အာရမ္ဘပစ္စယာ; အာရမ္ဘာနံ နိရောဓေန, နတ္ထိ ဒုက္ခဿ သမ္ဘဝေါ’’တိ 'जे काही दुःख उत्पन्न होते, ते सर्व आरंभाच्या (कर्माच्या) प्रत्ययाने (कारणाने) होते; आरंभाच्या निरोधाने दुःखाची उत्पत्ती होत नाही.' ဧတ္ထ ဟိ ကမ္မံ အာရမ္ဘောတိ အာဂတံ. ‘‘အာရမ္ဘတိ စ ဝိပ္ပဋိသာရီ စ ဟောတီ’’တိ ဧတ္ထ အာပတ္တိ. ‘‘မဟာယညာ မဟာရမ္ဘာ, န တေ ဟောန္တိ မဟပ္ဖလ္လာ’’တိ ဧတ္ထ ယူပုဿာပနာဒိကြိယာ. ‘‘အာရမ္ဘထ နိက္ကမထ, ယုဉ္ဇထ ဗုဒ္ဓသာသနေ’’တိ ဧတ္ထ ဝီရိယံ. ‘‘သမဏံ ဂေါတမံ ဥဒ္ဒိဿ ပါဏံ အာရမ္ဘန္တီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိံသာ. ‘‘ဗီဇဂါမဘူတဂါမသမာရမ္ဘာ ပဋိဝိရတော ဟောတီ’’တိ ဧတ္ထ ဆေဒနဘဉ္ဇနာဒိကံ ဝိကောပနံ. ဣစ္စေဝံ – येथे 'आरंभ' म्हणजे कर्म असा अर्थ आला आहे. 'आरंभति च विप्पटिसारी च होति' (तो गुन्हा करतो आणि पश्चात्ताप करतो) येथे 'आपत्ती' (नियमभंग) असा अर्थ आहे. 'महायञ्ञा महारंभा, न ते होन्ति महप्फला' (मोठे यज्ञ आणि मोठे आरंभ, ते महाफळ देणारे नसतात) येथे यूप (यज्ञस्तंभ) उभारणे इत्यादी क्रिया अभिप्रेत आहेत. 'आरंभथ निक्कमथ, युञ्जथ बुद्धसासने' (आरंभ करा, बाहेर पडा, बुद्धशासनात युक्त व्हा) येथे 'वीर्य' (प्रयत्न) असा अर्थ आहे. 'समणं गोतमं उद्दिस्स पाणं आरंभन्ति' (श्रमण गोतमांच्या उद्देशाने प्राण्यांची हिंसा करतात) येथे 'हिंसा' असा अर्थ आहे. 'बीजगामभूतगामसमारंभा पटिविरतो होति' (बीजसमूह आणि वनस्पतीसमूहाच्या विनाशापासून तो अलिप्त राहतो) येथे तोडणे, मोडणे इत्यादी 'विकोपन' (नुकसान करणे) अभिप्रेत आहे. अशा प्रकारे – ကမ္မေ [Pg.129] အာပတ္တိယဉ္စေဝ, ဝီရိယေ ဟိံသာကြိယာသု စ; ဝိကောပနေ စ အာရမ္ဘ-သဒ္ဒေါ ဟောတီတိ နိဒ္ဒိသေ; कर्म, आपत्ती, वीर्य, हिंसा, क्रिया आणि विकोपन (नाश) या अर्थांमध्ये 'आरंभ' शब्द वापरला जातो, असे निर्देश करावेत. လဘ လာဘေ. လဘတိ, လဗ္ဘတိ. လာဘော, လဒ္ဓံ, အလတ္ထ, အလတ္ထုံ. 'लभ' (labha) धातू मिळणे किंवा लाभ होणे (लाभ) या अर्थात वापरला जातो. लभति, लब्भति. लाभो, लद्धं, अलत्थ, अलत्थुं. သုဘ ဒိတ္တိယံ. သောဘတိ. သောဘာ, သောဘနံ, သောဘိတော. 'सुभ' (subha) धातू शोभून दिसणे किंवा चमकणे (दित्ती) या अर्थात वापरला जातो. सोभति. सोभा, सोभनं, सोभितो. ခုဘ သဉ္စလနေ. ခေါဘတိ, သင်္ခေါဘတိ. ဟတ္ထိနာဂေ ပဒိန္နမှိ, ခုဗ္ဘိတ္ထ နဂရံ တဒါ. ခေါဘာ, သင်္ခေါဘော. 'खुभ' (khubha) धातू हलणे किंवा क्षुब्ध होणे (संचलन) या अर्थात वापरला जातो. खोभति, संखोभति. 'हत्थिनागे पदिन्नम्हि, खुब्भित्थ नगरं तदा' (जेव्हा हत्ती दान दिला गेला, तेव्हा नगर क्षुब्ध झाले). खोभा, संखोभो. နဘ တုဘ ဟိံသာယံ. နဘတိ. တုဘတိ. 'नभ' (nabha) आणि 'तुभ' (tubha) हे धातू हिंसा करणे या अर्थात वापरले जातात. नभति, तुभति. သမ္ဘ ဝိဿာသေ. သမ္ဘတိ. သမ္ဘတ္တိ, သမ္ဘတ္တော. 'संभ' (sambha) धातू विश्वास ठेवणे (विस्सास) या अर्थात वापरला जातो. संभति. संभत्ति, संभत्तो. လုဘ ဝိမောဟနေ. လောဘတိ, ပလောဘတိ. ထုလ္လကုမာရီပလောဘနံ. ကာရိတေ ပန ‘‘လောဘေတိ, ပလောဘေတိ, ပလောဘေတွာ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဒိဝါဒိဂဏံ ပန ပတွာ ဂိဒ္ဓိယတ္ထေ ‘‘လုဗ္ဘတီ’’တိ ရူပံ ဘဝတိ. 'लुभ' (lubha) धातू मोहात पाडणे किंवा प्रलोभित करणे (विमोहन) या अर्थात वापरला जातो. लोभति, पलोभति. 'थुल्लकुमारीपलोभनं' (तरुण मुलीला प्रलोभित करणे). प्रयोजक (कारित) रूपात 'लोभेति, पलोभेति, पलोभेत्वा' अशी रूपे होतात. दिवादिगणात गेल्यावर लोभ धरण्याच्या (गिद्धि) अर्थात 'लुब्भति' असे रूप होते. ဒဘိ ဂန္ထနေ. ဒမ္ဘတိ. ဒမ္ဘနံ. 'दभि' (dabhi) धातू गुंफणे किंवा बांधणे (गंथन) या अर्थात वापरला जातो. दंभति. दंभनं. ရုဘိ နိဝါရဏေ. ရုမ္ဘတိ, သန္နိရုမ္ဘတိ. သန္နိရုမ္ဘော, သန္နိရုမ္ဘိတွာ. 'रुभि' (rubhi) धातू रोखणे किंवा अडवणे (निवारण) या अर्थात वापरला जातो. रुंभति, संनिरुंभति. संनिरुंभो, संनिरुंभित्वा. ဥဘ ဥဗ္ဘ ဥမ္ဘ ပူရဏေ. ဥဘတိ. ဥဗ္ဘတိ. ဥမ္ဘတိ. ဥဘနာ. ဥဗ္ဘနာ. ဥမ္ဘနာ. ဩဘော. ကေဋုဘံ. ဥဗ္ဘံ. ကုမ္ဘော. ကုမ္ဘီ. ကာရိတေ ‘‘ဩဘေတိ. ဥဗ္ဘေတိ. ဥမ္ဘေတီ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'उभ' (ubha), 'उब्भ' (ubbha) आणि 'उम्भ' (umbha) हे धातू भरून काढणे (पूरण) या अर्थात वापरले जातात. उभति, उब्भति, उम्भति. उभना, उब्भना, उम्भना. ओभो, केटुभं, उब्भं, कुंभो, कुंभी. प्रयोजक (कारित) रूपात 'ओभेति, उब्भेति, उम्भेति' अशी रूपे होतात. တတ္ထ ကေဋုဘန္တိ ကြိယာကပ္ပဝိကပ္ပော ကဝီနံ ဥပကာရိယသတ္ထံ. ဣဒံ ပနေတ္ထ နိဗ္ဗစနံ ကိဋေတိ ဂမေတိ ကြိယာဒိဝိဘာဂံ, တံ ဝါ အနဝသေသပရိယာဒါနတော ကေဋေန္တော ဂမေန္တော ဩဘေတိ ပူရေတီတိ ကေဋုတံ ကိဋဥဘဓာတုဝသေန. ဥဗ္ဘတိ ဥဗ္ဘေတိ [Pg.130] ပူရေတီတိ ဥဗ္ဘံ, ပူရဏန္တိ အတ္ထော. စရိယာပိဋကေပိ ဟိ ဤဒိသီ သဒ္ဒဂတိ ဒိဿတိ, တံ ယထာ? ‘‘မဟာဒါနံ ပဝတ္တေသိ, အစ္စုဗ္ဘံ သာဂရူပမ’’န္တိ. တတ္ထ စ အစ္စုဗ္ဘန္တိ အတိဝိယ ယာစကာနံ အဇ္ဈာသယံ ပူရဏံ. အက္ခုမ္ဘန္တိပိ ပါဌော. ကုမ္ဘောတိ ကံ ဝုစ္စတိ ဥဒကံ, တေန ဥဗ္ဘေတဗ္ဗောတိ ကုမ္ဘော, သော ဧဝ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ကုမ္ဘီ. ဧတ္ထ စ ‘‘ကုမ္ဘီ ဓောဝတိ ဩနတော’’တိ ပယောဂေါ. तेथे 'केटुभं' म्हणजे कवींना उपयुक्त असणारे क्रियाकल्प-विकल्पाचे शास्त्र (काव्यशास्त्र/विधीशास्त्र) होय. याची व्युत्पत्ती अशी आहे – 'किटति' म्हणजे क्रिया इत्यादींचे वर्गीकरण स्पष्ट करतो, किंवा ते पूर्णपणे व्यापून (ओभेति/पूरेति) स्पष्ट करतो म्हणून 'किट' आणि 'उभ' धातूंच्या योगाने 'केटुतं' बनते. 'उब्भति' किंवा 'उब्भेति' म्हणजे भरणे, म्हणून 'उब्भं' म्हणजे भरणे (पूरण) असा अर्थ आहे. चरियापिटकातही अशी शब्दरचना आढळते, जसे की – 'महादानं पवत्तेसि, अच्चुब्भं सागरूपमं' (त्याने समुद्रासारखे अत्यंत तृप्त करणारे/भरून काढणारे महादान दिले). तेथे 'अच्चुब्भं' म्हणजे याचकांच्या इच्छेची अत्यंत तृप्ती करणे (पूर्ण करणे) होय. 'अक्खुंभन्ति' असाही पाठ आढळतो. 'कुंभो' (घडा) – 'कं' म्हणजे पाणी म्हटले जाते, ज्याच्याद्वारे ते भरले जाते तो 'कुंभो', आणि तोच स्त्रीलिंगी रूपात 'कुंभी' होतो. येथे 'कुंभी धोवति ओनतो' (वाकून घडा धुते) असा प्रयोग आहे. ကုမ္ဘသဒ္ဒေါ ဃဋေ ဟတ္ထိ-သိရောပိဏ္ဍေ ဒသမ္ဗဏေ; ပဝတ္တတီတိ ဝိညေယျော, ဝိညုနာ နယဒဿိနာ. कुंभ हा शब्द घट (मातीचा घडा), हत्तीच्या मस्तकाचा उंचवटा (हत्ती-शिरोपिंड) आणि दहा छिद्रे (किंवा दहा व्रण) या अर्थांमध्ये वापरला जातो; हे नय (पद्धती) जाणणाऱ्या विद्वानाने समजून घ्यावे. ဘကာရန္တဓာတုရူပါနိ. भ-कारान्त धातूंची रूपे. မကာရန္တဓာတု म-कारान्त धातू. မာ မာနေ သဒ္ဒေ စ. မာတိ. မာတာ. ဧတ္ထ မာတာတိ ဇနိကာ ဝါ စူဠမာတာ ဝါ မဟာမာတာ ဝါ. मा (mā) हा धातू मोजणे (मान) आणि आवाज (शब्द) या अर्थांत आहे. 'माति' (māti), 'माता' (mātā). येथे 'माता' म्हणजे जन्मदात्री (जनिका) किंवा लहान आई (चुळमाता - मावशी/काकी) किंवा मोठी आई (महामाता) होय. မူ ဗန္ဓနေ. မဝတိ. ကိယာဒိဂဏဿ ပနဿ ‘‘မုနာတီ’’တိ ရူပံ. मू (mū) हा धातू बांधणे (बंधन) या अर्थात आहे. 'मवति' (mavati). क्रियादिगणाचा (कियादिगण) असल्यास याचे रूप 'मुनाति' (munāti) असे होते. မေ ပဋိဒါနအာဒါနေသု. မေတိ, မယတိ. မေဓာ. मे (me) हा धातू देवाणघेवाण (प्रतिदान आणि आदान) या अर्थांत आहे. 'मेति' (meti), 'मयति' (mayati). 'मेधा' (medhā). ဧတ္ထ မေဓာတိ ပညာ. သာ ဟိ သုခုမမ္ပိ အတ္ထံ ဓမ္မဉ္စ ခိပ္ပမေဝ မေတိ စ ဓာရေတိ စာတိ မေဓာတိ ဝုစ္စတိ. ဧတ္ထ ပန မေတီတိ ဂဏှာတိ. တထာ ဟိ အဋ္ဌသာလိနိယံ ဝုတ္တံ ‘‘အသနိ ဝိယ သိလုစ္စယေ ကိလေသေ မေဓတိ ဟိံသတီတိ မေဓာ, ခိပ္ပံ ဂဟဏဓာရဏဋ္ဌေန ဝါ မေဓာ’’တိ. သင်္ဂမတ္ထဝါစကဿ ပန မေဓဓာတုဿ ဝသေန မေဓတိ သီလသမာဓိအာဒီဟိ သဒ္ဓမ္မေဟိ သိရိယာ စ သင်္ဂစ္ဆတီတိ မေဓာတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – येथे 'मेधा' म्हणजे प्रज्ञा (paññā). ती सूक्ष्म अर्थ आणि धम्म देखील अत्यंत वेगाने ग्रहण करते (मेति) आणि धारण करते (धारेति), म्हणून तिला 'मेधा' म्हटले जाते. येथे 'मेति' म्हणजे ग्रहण करणे (गण्हाति). तसे अट्ठसालिनीमध्ये म्हटले आहे: 'ज्याप्रमाणे पर्वतावर पडणारी वीज, त्याप्रमाणे जी क्लेशांचा नाश करते (मेधति/हिंसति) ती 'मेधा' होय, किंवा वेगाने ग्रहण व धारण करण्याच्या अर्थाने ती 'मेधा' होय.' संघटन (संगम) अर्थाचा वाचक असलेल्या 'मेध' धातूच्या संदर्भाने, जी शील, समाधी इत्यादी सद्धम्मांशी आणि समृद्धीशी (सिरि) जोडली जाते, ती 'मेधा' असा अर्थ घ्यावा. याविषयी असे म्हटले आहे – ‘‘ဒွိဓာတုယေကဓာတုယာ[Pg.131], ဒွိရတ္ထဝတိယာပိ စ; မေဓာသဒ္ဒဿ နိပ္ဖတ္တိံ, ဇညာ သုဂတသာသနေ’’တိ. 'सुगत शासनात (बुद्धांच्या शिकवणीत) दोन धातूंपासून किंवा एका धातूपासून, आणि दोन अर्थांनी देखील 'मेधा' शब्दाची उत्पत्ती जाणावी.' ဩမာ သာမတ္ထိယေ. သာမတ္ထိယံ သမတ္ထဘာဝေါ. အလုတ္တန္တောယံ ဓာတု, ဩမာတိ, ဩမန္တိ. ओमा (omā) हा धातू सामर्थ्य (सामत्थिय) या अर्थात आहे. सामर्थ्य म्हणजे समर्थ असणे (समत्थभावो). हा धातू लोप न पावणारा (अलुत्तन्त) आहे, 'ओमाति' (omāti), 'ओमान्ति' (omanti). အတြာယံ ပါဠိ ‘‘ဩမာတိ ဘန္တေ ဘဂဝါ ဣဒ္ဓိယာ မနောမယေန ကာယေန ဗြဟ္မလောကံ ဥပသင်္ကမိတု’’န္တိ. တတ္ထ ဩမာတီတိ ပဟောတိ သက္ကောတိ. यावर ही पाळी (पाठांतर) आहे: 'भन्ते, भगवान आपल्या ऋद्धीने (iddhiyā) मनोमय कायेने ब्रह्मलोकात जाण्यास समर्थ (ओमाति) आहेत काय?' तेथे 'ओमाति' म्हणजे समर्थ असणे (पहोति), शक्य असणे (सक्कोति). တိမု အဒ္ဒဘာဝေ. အဒ္ဒဘာဝေါ တိန္တဘာဝေါ. တေမတိ. တိန္တော, တေမိယော. တေမိတုကာမာ တေမိံသု. तिमु (timu) हा धातू ओलेपणा (अद्दभाव) या अर्थात आहे. अद्दभाव म्हणजे ओलेणे (तिन्तभाव). 'तेमति' (temati). 'तिन्तो' (tinto), 'तेमियो' (temiyo). 'तेमितुकामा' (temitukāmā), 'तेमिसु' (temiṃsu). ဧတ္ထ တေမိယောတိ ဧဝံနာမကော ကာသိရညော ပုတ္တော ဗောဓိသတ္တော. သော ဟိ ရညော စေဝ မဟာဇနဿ စ ဟဒယံ တေမေန္တော အဒ္ဒဘာဝံ ပါပေန္တော သီတလဘာဝံ ဇနေန္တော ဇာတောတိ ‘‘တေမိယော’’တိ ဝုစ္စတိ. येथे 'तेमियो' (temiyo) हे नाव काशीच्या राजाचा पुत्र असलेल्या बोधिसत्त्वाचे आहे. कारण ते राजाच्या आणि महाजनतेच्या (लोकांच्या) हृदयाला आर्द्र (तेमेन्तो - मऊ/आनंदित) करत, त्यांना ओलेपणा (सौम्यता) प्राप्त करून देत आणि शीतलता निर्माण करत जन्माला आले, म्हणून त्यांना 'तेमियो' असे म्हटले जाते. နိတမိ ကိလမနေ. နိတမ္မတိ. ဟဒယံ ဒယှတေ နိတမ္မာမိ. नि-तमि (ni-tami) हा धातू थकणे किंवा ग्लानी येणे (किलमन) या अर्थात आहे. 'नितम्मति' (nitammati). 'हृदय जळत आहे, मी ग्लानी पावत आहे (नितम्मामि).' စမု ဆမု ဇပု ဈမု ဥမု ဇိမု အဒနေ. စမတိ. စမူ. စမူတိ သေနာ. ဆမတိ. ဇမတိ. ဈမတိ. ဥမတိ. ဇေမတိ. चमु (camu), छमु (chamu), जपु (japu), झमु (jhamu), उमु (umu), जिमु (jimu) हे धातू खाणे (अदन) या अर्थात आहेत. 'चमति' (camati). 'चमू' (camū). 'चमू' म्हणजे सेना. 'छमति' (chamati). 'जमति' (jamati). 'झमति' (jhamati). 'उमति' (umati). 'जेमति' (jemati). ကမု ပဒဝိက္ခေပေ. ပဒဝိက္ခေပေါ ပဒသာ ဂမနံ. ဣဒံ ပန ဝေါဟာရသီသမတ္တံ ဝစနံ, တသ္မာ ‘‘နာဿ ကာယေ အဂ္ဂိ ဝါ ဝိသံ ဝါ သတ္ထံ ဝါ ကမတီ’’တိအာဒီသု အပဒဝိက္ခေပတ္ထောပိ ဂဟေတဗ္ဗော. ကမတိ. စင်္ကမတိ, အတိက္ကမတိ. အဘိက္ကမတိ. ပဋိက္ကမတိ. ပက္ကမတိ. ပရက္ကမတိ. ဝိက္ကမတိ. နိက္ကမတိ. သင်္ကမတိ. သင်္ကမနံ. သင်္ကန္တိ. ကမနံ. စင်္ကမနံ. အတိက္ကမော. အဘိက္ကမော. ပဋိက္ကမော. ပက္ကမော. ဝိက္ကမော. နိက္ကမော. အတိက္ကန္တော ပုရိသော. အဘိက္ကန္တာ ရတ္တိ. နိက္ခမတိ. အဘိနိက္ခမတိ. ကာရိတေ [Pg.132] နိက္ခာမေတိ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ယသ္မာ ပနာယံ ဓာတု စုရာဒိဂဏံ ပတွာ ဣစ္ဆာကန္တိ ယတ္ထေသု ဝတ္တတိ, တသ္မာ တေပိ အတ္ထေ ဥပသဂ္ဂဝိသေသိတေ ကတွာ ဣဓ အဘိက္ကန္တသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရံ ဝတ္တဗ္ဗမ္ပိ အဝတွာ ဥပရိ စုရာဒိဂဏေယေဝ ကထေဿာမ. कमु (kamu) हा धातू पाऊल टाकणे (पदविक्खेप) या अर्थात आहे. पदविक्खेप म्हणजे पायाने चालणे. परंतु हे केवळ व्यवहारातील मुख्य वचन आहे, म्हणून 'त्याच्या शरीरावर अग्नी, विष किंवा शस्त्र प्रभाव पाडत नाही (कमति)' इत्यादी वाक्यांमध्ये पाऊल टाकण्याव्यतिरिक्त इतर अर्थ देखील घ्यावा. 'कमति' (kamati). 'चङ्कमति' (caṅkamati - ये-जा करणे), 'अतिक्कमति' (atikkamati - ओलांडणे). 'अभिक्कमति' (abhikkamati - पुढे जाणे). 'पटिक्कमति' (paṭikkamati - मागे फिरणे). 'पक्कमति' (pakkamati - निघून जाणे). 'परक्कमति' (parakkamati - पराक्रम करणे/प्रयत्न करणे). 'विक्कमति' (vikkamati - पाऊल टाकणे/पराक्रम करणे). 'निक्कमति' (nikkamati - बाहेर पडणे). 'सङ्कमति' (saṅkamati - संक्रमण करणे). 'सङ्कमनं' (saṅkamanaṃ - संक्रमण/पूल). 'सङ्कन्ति' (saṅkanti - संक्रमण). 'कमनं' (kamanaṃ - चालणे). 'चङ्कमनं' (caṅkamanaṃ - चंक्रमण/फिरण्याची जागा). 'अतिक्कमो' (atikkamo - उल्लंघन). 'अभिक्कमो' (abhikkamo - पुढे जाणे). 'पटिक्कमो' (paṭikkamo - माघार). 'पक्कमो' (pakkamo - प्रस्थान). 'विक्कमो' (vikkamo - पराक्रम). 'निक्कमो' (nikkamo - निष्क्रमण). 'अतिक्कन्तो पुरिसो' (अतिक्रांत झालेला मनुष्य). 'अभिक्कन्ता रत्ति' (रात्र संपत आलेली किंवा सुंदर रात्र). 'निक्खमति' (nikkhamati - बाहेर पडणे). 'अभिनिक्खमति' (abhinikkhamati - महाभिनिष्क्रमण करणे). प्रयोजक रूपात (कारित) 'निक्खामेति' (nikkhāmeti) असे होते. इतर रूपे देखील अशीच जोडावीत. परंतु, जेव्हा हा धातू चुरादिगणात जातो, तेव्हा तो इच्छा आणि कांती (चकाकी/सौंदर्य) या अर्थांत वापरला जातो, म्हणून उपसर्गांच्या वैशिष्ट्यामुळे ते अर्थ येथे 'अभिक्कान्त' शब्दाच्या अर्थ-स्पष्टीकरणासह सांगणे आवश्यक असले तरी, ते येथे न सांगता पुढे चुरादिगणातच सांगू. ယမု ဥပရမေ. ဥပရမော ဝိရမနံ. ယမဘိ. ယမော. ‘‘ပရေ စ န ဝိဇာနန္တိ, မယမေတ္ထ ယမာမသေ’’တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. တတ္ထ ယမာမသေတိ ဥပရမာမ, နဿာမ, မရာမာတိ အတ္ထော. यमु (yamu) हा धातू थांबणे (उपरम) या अर्थात आहे. उपरम म्हणजे विरती किंवा थांबणे (विरमन). 'यमभि' (yamabhi). 'यमो' (yamo). 'इतर लोक हे जाणत नाहीत की, आपण येथे नष्ट होणार आहोत (यमामसे)' हे याचे उदाहरण आहे. तेथे 'यमामसे' (yamāmase) म्हणजे आपण थांबतो (उपरमाम), नष्ट होतो (नस्साम), किंवा मरतो (मराम) असा अर्थ आहे. နမ ဗဟုတ္တေ သဒ္ဒေ. ဗဟုတ္တော သဒ္ဒေါ နာမ ဥဂ္ဂတသဒ္ဒေါ. နမတိ. नम (nama) हा धातू मोठ्या आवाजात (बहुत्ते सद्दे) या अर्थात आहे. बहुत्त शब्द म्हणजे मोठा किंवा वर उठलेला आवाज (उग्गतसद्do). 'नमति' (namati). အမ ဒမ ဟမ္မ မိမ ဆမ ဂတိမှိ. အမတိ. ဒမတိ. ဟမ္မတိ. မိမတိ. ဆမတိ. ဆမာ. अम (ama), दम (dama), हम्म (hamma), मिम (mima), छम (chama) हे धातू गती (गति) या अर्थात आहेत. 'अमति' (amati). 'दमति' (damati). 'हम्मति' (hammati). 'मिमति' (mimati). 'छमति' (chamati). 'छमा' (chamā). ဆမာတိ ပထဝီ. ဆမာသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော, ‘‘န ဆမာယံ နိသီဒိတွာ အာသနေ နိသိန္နဿ အဂိလာနဿ ဓမ္မံ ဒေသေဿာမီတိ သိက္ခာ ကရဏီယာ’’တိ စ ‘‘ဆမာယံ ပရိဝတ္တာမိ ဝါရိစရောဝ ဃမ္မေ’’တိ စ ပယောဂဒဿနတော. သော စ ခေါ သတ္တဟိ အဋ္ဌဟိ ဝါ ဝိဘတ္တီဟိ ဒွီသု စ ဝစနေသု ယောဇေတဗ္ဗော. ဆမန္တိ ဂစ္ဆန္တိ ဧတ္ထာတိ ဆမာ. 'छमा' (chamā) म्हणजे पृथ्वी (पथवी). 'छमा' शब्द स्त्रीलिंगी समजावा, कारण 'मी जमिनीवर बसून, आसनावर बसलेल्या निरोगी व्यक्तीला धम्म देशना करणार नाही, असा नियम पाळला पाहिजे' आणि 'मी उन्हात माशासारखा जमिनीवर लोळत आहे' अशा प्रयोगांवरून हे दिसून येते. आणि तो सात किंवा आठ विभक्तींमध्ये आणि दोन्ही वचनांमध्ये योजला जावा. ज्याच्यावर लोक चालतात (छमन्ति/गच्छन्ति) ती 'छमा' होय. ဓမ သဒ္ဒဂ္ဂိသံ ယောဂေသု. ဓမဓာတု သဒ္ဒေ စ မုခဝါတေန သဒ္ဓိံ အဂ္ဂိသံယောဂေ စ ဝတ္တတိ. တတ္ထ ပဌမတ္ထေ ‘‘သင်္ခံ ဓမတိ. သင်္ခဓမကော. ဘေရိံ ဓမတိ. ဘေရိဓမကော. ဓမေ ဓမေ နာတိဓမေ’’တိ ပယောဂေါ. ဒုတိယတ္ထေ ‘‘အဂ္ဂိံ ဓမတိ. သမုဋ္ဌာပေတိ အတ္တာနံ, အဏုံ အဂ္ဂိံဝ သန္ဓမ’’န္တိ ပယောဂေါ. धम (dhama) हा धातू आवाज आणि अग्नीचा संयोग (सद्दग्गिसंयोग) या अर्थांत आहे. 'धम' धातू आवाजाच्या अर्थात आणि मुखाच्या हवेने अग्नी पेटवण्याच्या (अग्नीशी संयोग करण्याच्या) अर्थात वापरला जातो. तेथे पहिल्या अर्थात: 'शंख वाजवतो (सङ्खं धमति). शंख वाजवणारा (सङ्खधमको). भेरी वाजवतो (भेरिं धमति). भेरी वाजवणारा (भेरिधमको). वाजव, वाजव, पण जास्त वाजवू नकोस (धमे धमे नातिधमे)' असा प्रयोग होतो. दुसऱ्या अर्थात: 'अग्नी फुंकतो/पेटवतो (अग्गिं धमति). स्वतःला जागृत करतो, लहान अग्नी फुंकून पेटवल्याप्रमाणे (समुट्ठापेति अत्तानं, अणं अग्गिं व संधमं)' असा प्रयोग होतो. ဘာမ ကောဓေ. ဘာမတိ. भाम (bhāma) हा धातू क्रोधाच्या (कोध) अर्थात आहे. 'भामति' (bhāmati). နမု [Pg.133] နမနေ. နမတိ. နမော. နတံ, နမနံ. နတိ. နမံ. နမမာနော. နမန္တော. နမိတော. နာမံ. နာမိတံ. နမိတုံ. နတွာ, နတွာန. နမိတွာ, နမိတွာန, နမိတုန. ကာရိတေ ‘‘နာမေတိ, နာမယတိ. နာမေတွာ. နာမယိတွာ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. တတြ ဟိ ‘‘နမတိ နမိတွာ’’တိ ဧဝံပကာရာနိ ပဒါနိ နမနတ္ထေ ဝန္ဒနာယဉ္စ ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ, ‘‘နမော နတွာ’’တိ ဧဝံပကာရာနိ ပန ဝန္ဒနာယမေဝ. အတြာယမုပလက္ခဏမတ္တာ ပယောဂရစနာ – नमु (namu) हा धातू नम्र होणे किंवा वाकणे (नमन) या अर्थात आहे. 'नमति' (namati). 'नमो' (namo). 'नतं' (nataṃ), 'नमनं' (namanaṃ). 'नति' (nati). 'नमं' (namaṃ). 'नममानो' (namamāno). 'नमन्तो' (namanto). 'नमितो' (namito). 'नामं' (nāmaṃ). 'नामितं' (nāmitaṃ). 'नमितुं' (namituṃ). 'नत्वा' (natvā), 'नत्वान' (natvāna). 'नमित्वा' (namitvā), 'नमित्वान' (namitvāna), 'नमितुन' (namituna). प्रयोजक रूपात (कारित) 'नामेति' (nāmeti), 'नामयति' (nāmayati), 'नामेत्वा' (nāmetvā), 'नामयित्वा' (nāmayitvā) अशी रूपे होतात. तेथे 'नमति', 'नमित्वा' यांसारखे शब्द वाकणे आणि वंदन करणे या दोन्ही अर्थांत पाहिले पाहिजेत, तर 'नमो', 'नत्वा' यांसारखे शब्द केवळ वंदनाच्याच अर्थात वापरले जातात. यावर उदाहरणादाखल ही वाक्यरचना आहे – ရုက္ခော ဖလီ ဖလဘာရဂရုတာယ နမိတွာန ဘိဇ္ဇတိ; ဝုဒ္ဓေါ ဇရာဇဇ္ဇရတာယ နမတိ နမိတွာ ဂစ္ဆတိ; သဒ္ဓေါ ဗုဒ္ဓံ နမတိ နမိတွာ ဂစ္ဆတိ; နမော ဗုဒ္ဓဿ သတ္ထာရံ နတွာန အဂမာသီတိ; फळांनी लगडलेले झाड फळांच्या वजनाने वाकून (नमित्वान) मोडते; वृद्ध मनुष्य म्हातारपणामुळे वाकतो (नमति) आणि वाकून (नमित्वा) चालतो; श्रद्धावान मनुष्य बुद्धांना वंदन करतो (नमति) आणि वंदन करून (नमित्वा) जातो; बुद्धांना नमस्कार असो (नमो बुद्धस्स), शास्त्याला वंदन करून (नत्वान) तो गेला; ဧတ္ထ နမောတိ ပဒံ နိပါတေသုပိ လဗ္ဘတိ. တေန ဟိ ပစ္စတ္တောပယောဂဝစနာနိ အဘိန္နရူပါနိ ဒိဿန္တိ ‘‘ဒေဝရာဇ နမော တျတ္ထု. နမော ကတွာ မဟေသိနော’’တိ. ဥပသဂ္ဂေဟိပိ အယံ ယောဇေတဗ္ဗာ ‘‘ပဏမတိ, ပဏာမော, ဥဏ္ဏမတိ, ဥဏ္ဏတိ’’ ဣစ္စာဒိနာ. येथे 'नमो' हा शब्द अव्ययांमध्ये (निपात) देखील आढळतो. त्यामुळे प्रथमा आणि द्वितीया विभक्तीची रूपे एकसारखीच दिसतात: 'हे देवराज, तुला नमस्कार असो (नमो त्यत्थु). महर्षींना नमस्कार करून (नमो कत्वा महेसिनो)'. उपसर्गांसह देखील हा धातू जोडला जाऊ शकतो, जसे की 'पणमति' (paṇamati), 'पणामो' (paṇāmo), 'उण्णमति' (uṇṇamati), 'उण्णति' (uṇṇati) इत्यादी. ခမု သဟနေ. ခမတိ. ခန္တိ. ခမော, ခမနံ, ဧဝံ ဘာဝေ. ကတ္တရိ ပန ‘‘ခန္တာ. ခမိတာ. ခမော ဟောတိ သီတဿပိ ဥဏှဿပီ’’တိ ပယောဂါ. खमु (khamu) हा धातू सहन करणे (सहन) या अर्थात आहे. 'खमति' (khamati). 'खन्ति' (khanti - क्षमा). भाववाचक नामात 'खमो' (khamo), 'खमनं' (khamanaṃ) अशी रूपे होतात. परंतु कर्तरी प्रयोगात (कत्तरि) 'खन्ता' (khantā), 'खमिता' (khamitā), 'तो थंडी आणि उष्णता देखील सहन करणारा (खमो) असतो' असे प्रयोग होतात. သမ အဒဿနေ. သမတိ, ဝူပသမတိ အဂ္ဂိ. सम (sama) हा धातू अदृश्य होणे किंवा शांत होणे (अदस्सन) या अर्थात आहे. 'समति' (samati), अग्नी शांत होतो (वूपसमति अग्गि). ယမ ပရိဝေသနေ. ယမတိ. ယမော. ယမရာဇာ. यम (yama) हा धातू वाढणे किंवा वाढून देणे (परिवेसण) या अर्थात आहे. 'यमति' (yamati). 'यमो' (yamo). 'यमराजा' (yamarājā). သမ သဒ္ဒေ. သမတိ. सम (sama) हा धातू आवाजाच्या (सद्द) अर्थात आहे. 'समति' (samati). သမ ထမ ဝေလမ္ဗေ. သမတိ. ထမတိ. सम (sama), थम (thama) हे धातू विलंब करणे (वेलम्ब) या अर्थात आहेत. 'समति' (samati). 'थमति' (thamati). ဝါယမ ဤဟာယံ. ဝါယမတိ. ဝါယာမော. वायम (vāyama) हा धातू प्रयत्न करणे (ईहा) या अर्थात आहे. 'वायमति' (vāyamati). 'वायामो' (vāyāmo - व्यायाम/प्रयत्न). ဂမု [Pg.134] ဂတိယံ. ဂစ္ဆတိ. ဂမကော. ဂတော. ဂတိ. ဂမနံ. ကာရိတေ ‘‘ဂမေတိ, ဂမယတိ, ဂစ္ဆာပေတီ’’တိအာဒီနိ ဘဝန္တိ. गमु (gamu) हा धातू जाणे (गति) या अर्थात आहे. 'गच्छति' (gacchati). 'गमको' (gamako). 'गतो' (gato). 'गति' (gati). 'गमनं' (gamanaṃ). प्रयोजक रूपात (कारित) 'गमेति' (gameti), 'गमयति' (gamayati), 'गच्छापेति' (gacchāpeti) इत्यादी रूपे होतात. ရမု ကီဠာယံ. ရမတိ. ဝိရမတိ. ပဋိဝိရမတိ. ဥပရမတိ. အာရတိ. ဝိရတိ. ပဋိဝိရတိ. ဥပရတိ. ဝေရမဏိ. ဝိရမဏံ. ရတိ. ရမဏံ. ရတော. အာရတော ဝိရတော ပဋိဝိရတော. ဥပရတော, ဥပရမော. အာရာမော. रमु (ramu) हा धातू क्रीडा करणे किंवा रममाण होणे (कीळा) या अर्थात आहे. 'रमति' (ramati). 'विरमति' (viramati - विरक्त होणे/थांबणे). 'पटिविरमति' (paṭiviramati - पूर्णपणे विरक्त होणे). 'उपरमति' (uparamati - थांबणे). 'आरति' (ārati - विरती). 'विरति' (virati - विरती). 'पटिविरति' (paṭivirati - प्रतिविरती). 'उपरति' (uparati - उपरती). 'वेरमणी' (veramaṇi - विरती/नियम). 'विरमणं' (viramaṇaṃ - विरती). 'रति' (rati - प्रीती/आवड). 'रमणं' (ramaṇaṃ - रमणे). 'रतो' (rato - रमलेला). 'आरतो' (ārato), 'विरतो' (virato), 'पटिविरतो' (paṭivirato). 'उपरतो' (uparato), 'उपरमो' (uparamo). 'आरामो' (ārāmo - विहार/बाग). ဝမု ဥဂ္ဂိရဏေ. ဝမတိ. ဝမထု. ဝမ္မိကော. वमु (vamu) हा धातू ओकणे किंवा बाहेर टाकणे (उग्गिरणा) या अर्थात आहे. 'वमति' (vamati). 'वमथु' (vamathu - उलटी). 'वम्मिको' (vammiko - वारूळ). ဓီရတ္ထု တံ ဝိသံ ဝန္တံ, ယမဟံ ဇီဝိတကာရဏာ; ဝန္တံ ပစ္စာဝမိဿာမိ, မတံ မေ ဇီဝိတာ ဝရံ. त्या ओकलेल्या विषाला धिक्कार असो, जे मी केवळ जगण्याच्या कारणासाठी पुन्हा प्राशन करीन (खाईन); अशा जगण्यापेक्षा मला मरणच अधिक श्रेयस्कर आहे. တတ္ထ ဝမ္မိကောတိ ဝမတီတိ, ဝန္တကောတိ, ဝန္တုဿယောတိ, ဝန္တသိနေဟသမ္ဗန္ဓောတိ ဝမ္မိကော. သော ဟိ အဟိနကုလဥန္ဒူရဃရဂေါဠိကာဒယော နာနပ္ပကာရေ ပါဏကေ ဝမတီတိ ဝမ္မိကော. ဥပစိကာဟိ ဝန္တကောတိ ဝမ္မိကော. ဥပစိကာဟိ ဝမိတွာ မုခတုဏ္ဍကေန ဥက္ခိတ္တပံသုစုဏ္ဏေန ကဋိပ္ပမာဏေနပိ ပေါရိသပ္ပမာဏေနပိ ဥဿိတောတိ ဝမ္မိကော. ဥပစိကာဟိ ဝန္တခေဠသိနေဟေန အာဗဒ္ဓတာယ သတ္တသတ္တာဟံ ဒေဝေ ဝဿန္တေပိ န ဝိပ္ပကိရယတိ, နိဒါဃေပိ တတော ပံသုမုဋ္ဌိံ ဂဟေတွာ တသ္မိံ မုဋ္ဌိနာ ပီဠိယမာနေ သိနေဟောဝ နိက္ခမတိ, ဧဝံ ဝန္တသိနေဟသမ္ဗန္ဓောတိ ဝမ္မိကော. तेथे 'वम्मिको' (वारूळ) म्हणजे जे ओकते (वमतीति), जे ओकलेले आहे (वन्तकोति), जे ओकलेला ढीग आहे (वन्तुस्सयोति), जे ओकलेल्या स्नेहाने (चिकट द्रवाने) संबद्ध आहे (वन्तसिनेहसम्बन्धोति) ते वारूळ होय. कारण ते साप, मुंगूस, उंदीर, पाल इत्यादी विविध प्रकारच्या प्राण्यांना बाहेर ओकते (बाहेर काढते), म्हणून ते 'वम्मिको' आहे. वाळवीने ओकलेले असल्यामुळे ते 'वम्मिको' आहे. वाळवीने ओकून आपल्या मुखतुंडाने (तोंडाने) बाहेर टाकलेल्या मातीच्या कणांनी कंबरेच्या किंवा माणसाच्या उंचीएवढे उंच केलेले असल्यामुळे ते 'वम्मिको' आहे. वाळवीच्या ओकलेल्या लाळेच्या स्नेहाने (चिकटपणाने) ते अशा प्रकारे बांधलेले असते की, सात आठवडे पाऊस पडला तरी ते विखुरले जात नाही, आणि उन्हाळ्यातही त्यातून मूठभर माती घेऊन ती मुठीत दाबल्यास त्यातून स्नेह (ओलावा) बाहेर पडतो, अशा प्रकारे ओकलेल्या स्नेहाने संबद्ध असल्यामुळे ते 'वम्मिको' (वारूळ) म्हटले जाते. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဘဂဝါ, ဟိမဝါ’’တိအာဒီနိ ပဒါနိ န ကေဝလံ ဝန္တုပစ္စယဝသေနေဝ နိပ္ဖာဒေတဗ္ဗာနိ, အထ ခေါ ဝမုဓာတုဝသေနပိ နိပ္ဖာဒေတဗ္ဗာနိ, တေနာဟ ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂကာရကော ‘‘ယသ္မာ ပန တီသု ဘဝေသု တဏှာသင်္ခါတံ ဂမနမနေန ဝန္တံ, တသ္မာ ‘‘ဘဝေသု ဝန္တဂမနော’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ဘဝသဒ္ဒတော ဘကာရံ, ဂမနသဒ္ဒတော ဂကာရံ, ဝန္တသဒ္ဒတော ဝကာရဉ္စ ဒီဃံ ကတွာ အာဒါယ ဘဂဝါတိ ဝုစ္စတိ, ယထာ လောကေ ‘မေဟနဿ [Pg.135] ခဿ မာလာ’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ မေခလာ’’တိ ဝဒတာ နိရုတ္တိနယေန သဒ္ဒသိဒ္ဓိ ဒဿိတာ. येथे 'भगवा', 'हिमवा' इत्यादी शब्द केवळ 'वन्तु' प्रत्ययाच्या आधारेच सिद्ध केले जाऊ नयेत, तर 'वमु' धातूच्या (ओकणे/त्याग करणे) आधारेही सिद्ध केले जावेत. म्हणूनच विशुद्धिमार्गाच्या कर्त्यांनी म्हटले आहे: 'ज्याअर्थी त्यांनी तीन भवांमध्ये (अस्तित्वाच्या तीन लोकांमध्ये) तृष्णारूपी गमनाचा (संसारगमनाचा) त्याग केला आहे (ओकून टाकला आहे), म्हणून 'भवेसु वन्तगमनो' (भवांमध्ये गमन ओकलेला/त्यागलेला) असे म्हणावयाचे असताना, 'भव' शब्दातील 'भ'कार, 'गमन' शब्दातील 'ग'कार आणि 'वन्त' शब्दातील 'व'कार घेऊन, त्याला दीर्घ करून 'भगवा' असे म्हटले जाते. जसे लोकव्यवहारात 'मेहनस्स खस्स माला' असे म्हणावयाचे असताना 'मेखला' असे म्हटले जाते.' अशा प्रकारे निरुक्तीच्या नियमाने शब्दाची सिद्धी दाखविली आहे. ဧတ္ထ, သိယာ ‘‘ဝိသမမိဒံ နိဒဿနံ, ယေန ‘မေဟနဿ ခဿ မာလာ’တိ ဧတ္ထ မေကာရခကာရလာကာရာနံ ကမတော ဂဟဏံ ဒိဿတိ, ‘‘ဘဝေသု ဝန္တဂမနော’တိ ဧတ္ထ ပန ဘကာရဝကာရဂကာရာနံ ကမတော ဂဟဏံ န ဒိဿတီ’’တိ? သစ္စံ, ဣဓ ပန ‘‘အဂ္ဂါဟိတော, ဝိဇ္ဇာစရဏသမ္ပန္နော’’တိအာဒီသု ဝိယ ဂုဏသဒ္ဒဿ ပရနိပါတဝသေန ‘‘ဘဝေသု ဂမနဝန္တော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေပိ ဧဝမဝတွာ သဒ္ဒသတ္ထေ ယေဘုယျေန ဂုဏသဒ္ဒါနံ ပုဗ္ဗနိပါတဘွဿ ဣစ္ဆိတတ္တာ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူနံ ကေသဉ္စ ဝိညူနံ မနံ တောသေတုံ ‘‘ဘဂဝါ’’တိ ပဒေ အက္ခရက္ကမံ အနပေက္ခိတွာ အတ္ထမတ္တနိဒဿနဝသေန ‘‘အာဟိတဂ္ဂိ, သမ္ပန္နဝိဇ္ဇာစရဏော’’တိအာဒီနိ ဝိယ ပုဗ္ဗနိပါတဝသေန ‘‘ဘဝေသု ဝန္တဂမနော’’တိ ဝုတ္တံ. ဤဒိသသ္မိဉှိ ဌာနေ ‘‘အာဟိတဂ္ဂီ’’တိ ဝါ ‘‘အဂ္ဂါဟိတော’’တိ ဝါ ‘‘ဆိန္နဟတ္ထော’’တိ ဝါ ‘‘ဟတ္ထစ္ဆိန္နော’’တိ ဝါ ပဒေသု ယထာ တထာ ဌိတေသုပိ အတ္ထဿ အယုတ္တိ နာမ နတ္ထိ အညမညံ သမာနတ္ထတ္တာ တေသံ သဒ္ဒါနံ. येथे अशी शंका घेतली जाऊ शकते की, 'हे उदाहरण विसंगत आहे, कारण 'मेहनस्स खस्स माला' यामध्ये मे-कार, ख-कार आणि ला-कार यांचे क्रमाने ग्रहण दिसते, परंतु 'भवेसु वन्तगमनो' यामध्ये भ-कार, व-कार आणि ग-कार यांचे क्रमाने ग्रहण दिसत नाही?' हे सत्य आहे, परंतु येथे 'अग्गाहितो', 'विज्जाचरणसम्पन्नो' इत्यादी शब्दांप्रमाणे गुणवाचक शब्दाच्या परनिपातामुळे (नंतर येण्यामुळे) 'भवेसु गमनवन्तो' असे म्हणावयाचे असतानाही तसे न म्हणता, व्याकरणशास्त्रामध्ये बहुधा गुणवाचक शब्दांचा पूर्वनिपात (आधी येणे) इच्छित असल्यामुळे, व्याकरणतज्ज्ञ आणि काही विद्वानांच्या मनाचे समाधान करण्यासाठी 'भगवा' या पदामध्ये अक्षरांच्या क्रमाची अपेक्षा न करता, केवळ अर्थाचे दिग्दर्शन करण्यासाठी 'आहितग्गि', 'सम्पन्नविज्जाचरणो' इत्यादी शब्दांप्रमाणे पूर्वनिपाताच्या नियमाने 'भवेसु वन्तगमनो' असे म्हटले आहे. कारण अशा ठिकाणी 'आहितग्गी' किंवा 'अग्गाहितो' अथवा 'छिन्नहत्थो' किंवा 'हत्थच्छिन्नो' या शब्दांमध्ये ते कसेही ठेवले तरी अर्थाची विसंगती होत नाही, कारण त्या शब्दांचा अर्थ एकमेकांशी समानच असतो. ဝေဒဇာတောတိအာဒီသု ပန ဌာနေသု အတ္ထေဝါတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧဝံ ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂေ ‘‘ဘဂဝါ’’တိ ပဒဿ ဝမုဓာတုဝသေနပိ နိပ္ဖတ္တိ ဒဿိတာ, တဋ္ဋီကာယမ္ပိ စ ဒဿိတာ ‘‘ဘဂေ ဝမီတိ ဘဂဝါ. ဘာဂေ ဝမီတိ ဘဂဝါ’’တိ. နိဗ္ဗစနံ ပန ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗံ – ဘဂသင်္ခါတံ သိရိံ ဣဿရိယံ ယသဉ္စ ဝမိ ဥဂ္ဂိရိ ခေဠပိဏ္ဍံ ဝိယ အနပေက္ခော ဆဍ္ဍယီတိ ဘဂဝါ. အထ ဝါ ဘာနိ နာမ နက္ခတ္တာနိ, တေဟိ သမံ ဂစ္ဆန္တိ ပဝတ္တန္တီတိ ဘဂါ, သိနေရုယုဂန္ဓရဥတ္တရကုရုဟိမဝန္တာဒိဘာဇနလောကာ, ဝိသေသသန္နိဿယသောဘာကပ္ပဋ္ဌိယဘာဝတော. တေပိ ဘဂဝါ ဝမိ တန္နိဝါသိသတ္တာဝါသသမတိက္ကမနတော တပ္ပဋိဗဒ္ဓဆန္ဒရာဂပ္ပဟာနေန ပဇဟီတိ ဘဂဝါ. 'वेदजातो' इत्यादी ठिकाणीही असाच अर्थ समजला पाहिजे. अशा प्रकारे विशुद्धिमार्गामध्ये 'भगवा' या शब्दाची सिद्धी 'वमु' धातूच्या आधारेही दाखविली आहे, आणि त्याच्या टीकेमध्येही 'भगे वमीति भगवा। भागे वमीति भगवा' (ज्याने भग ओकले तो भगवा; ज्याने भाग ओकले तो भगवा) अशी दाखविली आहे. त्याची व्युत्पत्ती अशी समजली पाहिजे – 'भग' नावाचे ऐश्वर्य, यश आणि कीर्ती यांना ज्यांनी लाळेच्या गोळ्याप्रमाणे निरपेक्षपणे ओकून टाकले (त्याग केला), म्हणून ते 'भगवा' होत. अथवा, 'भा' म्हणजे नक्षत्रे, त्यांच्यासोबत जे फिरतात ते 'भगा' म्हणजे सिनेरु, युगंधर, उत्तरकुरु, हिमवंत इत्यादी भाजनलोक (भौतिक जग) होत, कारण ते विशेष सौंदर्याचे आश्रयस्थान आहेत. भगवंतांनी त्यांचाही त्याग केला (ओकून टाकले), तेथील रहिवाशांच्या निवासस्थानांचे अतिक्रमण करून आणि त्यांच्याशी संबंधित छंद-राग (आसक्ती) नष्ट करून त्यांचा त्याग केला, म्हणून ते 'भगवा' होत. စက္ကဝတ္တိသိရိံ [Pg.136] ယသ္မာ, ယသံ ဣဿရိယံ သုခံ; ပဟာသိ လောကစိတ္တဉ္စ, သုဂတော ဘဂဝါ တတော. ज्याअर्थी त्यांनी चक्रवर्तीचे ऐश्वर्य, यश, सत्ता, सुख आणि लौकिक चित्त यांचा त्याग केला, म्हणूनच ते सुगत 'भगवा' म्हटले जातात. တထာ ခန္ဓာယတနဓာတာဒိဘေဒေ ဓမ္မကောဋ္ဌာသေ သဗ္ဗံ ပပဉ္စ သဗ္ဗံ ယောဂံ သဗ္ဗံ ဂန္ထံ သဗ္ဗံ သံယောဇနံ သမုစ္ဆိန္ဒိတွာ အမတံ ဓာတုံ သမဓိဂစ္ဆန္တော ဝမိ ဥဂ္ဂိရိ အနပေက္ခော ဆဍ္ဍယိ န ပစ္စာဝမီတိ ဘဂဝါ. အထ ဝါ သဗ္ဗေပိ ကုသလာကုသလေ သာဝဇ္ဇာနဝဇ္ဇေ ဟီနပ္ပဏီတေ ကဏှသုက္ကသပ္ပဋိဘာဂေ ဓမ္မေ အရိယမဂ္ဂဉာဏမုခေန ဝမိ ဥဂ္ဂိရိ အနပေက္ခော ပရိစ္စဇိ ပဇဟီတိ ဘဂဝါ. त्याचप्रमाणे स्कंध, आयतन, धातू इत्यादी भेदांनी युक्त असलेल्या धर्मसमूहातील सर्व प्रपंच, सर्व योग, सर्व ग्रंथ (गाठी) आणि सर्व संयोजने पूर्णपणे छिन्नभिन्न करून, अमृत धातूचा (निर्वाणाचा) लाभ घेताना ज्यांनी त्या सर्वांना ओकून टाकले, बाहेर काढले, निरपेक्षपणे सोडून दिले आणि पुन्हा कधीही ग्रहण केले नाही, म्हणून ते 'भगवा' होत. अथवा, सर्व कुशल-अकुशल, सदोष-निर्दोष, हीन-प्रणीत, कृष्ण-शुक्ल (काळे-पांढरे) विरोधी धर्मांना ज्यांनी आर्यमार्ग-ज्ञानाच्या मुखाने ओकून टाकले, बाहेर काढले, निरपेक्षपणे त्यागले आणि सोडून दिले, म्हणून ते 'भगवा' होत. ခန္ဓာယတနဓာတာဒီ, ဓမ္မဘေဒါ မဟေသိနာ; ကဏှသုက္ကာ ယတော ဝန္တာ, တတောပိ ဗဂဝါ မတော. ज्याअर्थी महामुनींनी (महर्षींनी) स्कंध, आयतन, धातू इत्यादी धर्मभेद आणि कृष्ण-शुक्ल धर्म ओकून टाकले आहेत, त्याअर्थीही ते 'भगवा' मानले जातात. ဇာတကဋ္ဌကထာယံ ပန ဟိမဝါတိ ပဒဿ ဝမုဓာတုဝသေနပိ နိပ္ဖတ္တိ ဒဿိတာ. တထာ ဟိ သမ္ဘဝဇာတကဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဟိမဝါတိ ဟိမပါတသမယေ ဟိမယုတ္တောတိ ဟိမဝါ. ဂိမှကာလေ ဟိမံ ဝမတီတိ ဟိမဝါ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧဝံ ဇာတကဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဟိမဝါ’’တိ ပဒဿ ဝမုဓာတုဝသေနပိ နိပ္ဖတ္တိ ဒဿိတာ, အယံ နယော ဤဒိသေသု ဌာနေသုပိ နေတဗ္ဗော. ‘‘ဂုဏဝါဂဏဝါ’’တိအာဒီသု ပန န နေတဗ္ဗော. ယဒိ နယေယျ, ‘‘ဂုဏဝါ ဂဏဝါ’’တိ ပဒါနံ ‘‘နိဂ္ဂုဏော ပရိဟီနဂုဏော’’တိ ဧဝမာဒိအတ္ထော ဘဝေယျ, တသ္မာ အယံ နယော သဗ္ဗတ္ထပိ န နေတဗ္ဗော. ဧတ္ထ သိယာ ‘‘ယဒိ ‘‘ဘဂဝါ’တိအာဒိပဒါနံ ဝမုဓာတုဝသေန နိပ္ဖတ္တိ ဟောတိ, ကထံ ‘‘ဘဂဝန္တော, ဘဂဝန္တ’’န္တိအာဒီနိ သိဇ္ဈန္တီ’’တိ? ယထာ ‘‘ဘဂဝါ’’တိ ပဒံ နိရုတ္တိနယေန သိဇ္ဈတိ, တထာ တာနိပိ တေနေဝ သိဇ္ဈန္တိ. အစိန္တေယျော ဟိ နိရုတ္တိနယော ကေဝလံ အတ္ထယုတ္တိပဋိဗန္ဓမတ္တောဝ, အတ္ထယုတ္တိယံ သတိ နိပ္ဖာဒေတုမသက္ကုဏေယျာနိပိ ရူပါနိ အနေနေဝ သိဇ္ဈန္တိ. ဧတ္ထ စ [Pg.137] ယံ နိရုတ္တိလက္ခဏံ အာဟရိတွာ ဒဿေတဗ္ဗံ သိယာ, တံ ဥပရိ ရူပနိပ္ဖာဒနာဓိကာရေ ဥဒါဟရဏေဟိ သဒ္ဓိံ ပကာသေဿာမ. जातक-अट्ठकथेमध्ये 'हिमवा' या शब्दाची सिद्धी 'वमु' धातूच्या आधारेही दाखविली आहे. जसे की, संभवजातक-अट्ठकथेमध्ये म्हटले आहे: 'हिमवा म्हणजे – हिमवृष्टीच्या वेळी हिमाने युक्त असतो म्हणून हिमवा. उन्हाळ्यात हिम (बर्फ) ओकतो (वितळवून बाहेर टाकतो) म्हणून हिमवा.' अशा प्रकारे जातक-अट्ठकथेमध्ये 'हिमवा' शब्दाची सिद्धी 'वमु' धातूच्या आधारे दाखविली आहे, हा नियम अशा प्रकारच्या इतर ठिकाणीही लागू केला पाहिजे. परंतु 'गुणवा', 'गणवा' इत्यादी शब्दांमध्ये हा नियम लागू करू नये. जर लागू केला, तर 'गुणवा', 'गणवा' या शब्दांचा अर्थ 'निर्गुणी', 'गुणहीन' असा होईल, म्हणून हा नियम सर्वत्र लागू करू नये. येथे अशी शंका येऊ शकते की, 'जर 'भगवा' इत्यादी शब्दांची सिद्धी 'वमु' धातूच्या आधारे होते, तर 'भगवन्तो', 'भगवन्तं' इत्यादी रूपे कशी सिद्ध होतात?' ज्याप्रमाणे 'भगवा' हा शब्द निरुक्तीच्या नियमाने सिद्ध होतो, त्याचप्रमाणे ती रूपेही त्याच नियमाने सिद्ध होतात. कारण निरुक्तीचा नियम अचिंत्य आहे, तो केवळ अर्थाच्या सुसंगतीशी संबंधित आहे; अर्थाची सुसंगती असेल तर एरवी सिद्ध न होऊ शकणारी रूपेही या नियमाने सिद्ध होतात. आणि येथे जो निरुक्तीचा नियम उद्धृत करून दाखवायचा आहे, तो आम्ही पुढे रूपसिद्धीच्या अधिकारामध्ये उदाहरणांसह स्पष्ट करू. ဣဓ သာရမတေ မုနိရာဇမတေ,ပရမံ ပဋုတံ သုဇနော ပိဟယံ; ဝိပုလတ္ထဓရံ ဓနိနီတိမိမံ,သတတံ ဘဇတံ မတိသုဒ္ဓကရံ. येथे, मुनिराजांच्या (बुद्धांच्या) या सारभूत मतामध्ये (शासनात), परम कौशल्याची इच्छा करणाऱ्या सज्जन माणसाने, वस्तृतः विपुल अर्थ धारण करणाऱ्या आणि बुद्धीला शुद्ध करणाऱ्या या 'धनिनीती'चे (व्याकरणशास्त्राचे) सतत सेवन (अभ्यास) करावे. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညုနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त असलेल्या त्रिपिटकातील वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ...कौशल्यासाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' ग्रंथातील... သရဝဂ္ဂပဉ္စကန္တိကော နာမ ဓာတုဝိဘာဂေါ ...'सरवग्गपञ्चकन्तिको' (पाच स्वरवर्गांच्या शेवटी असलेला) नावाचा धातू-विभाग... ပန္နရသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. ...पंधरावा परिच्छेद समाप्त झाला. ၁၆. ဘူဝါဒိဂဏိကပရိစ္ဆေဒ १६. भूवादिगणीक परिच्छेद (भूवादि गणाचा परिच्छेद). ဣတော ပရံ အဝဂ္ဂန္တာ, မိဿကာ စေဝ ဓာတုယော; ဝက္ခာမိ ဓာတုဘေဒါဒိ-ကုသလဿ မတာနုဂါ. यानंतर, धातूंच्या भेदांमध्ये कुशल असलेल्या विद्वानांच्या मतानुसार, मी अवर्गान्त (वर्गाच्या शेवटी नसलेले) आणि मिश्रक (मिश्र) धातूंचे वर्णन करीन. ယကာရန္တဓာတု य-कारान्त धातू (य अक्षराने शेवट होणारे धातू). ယာ ဂတိပါပုဏေသု. ယာတိ, ယန္တိ. ယာတု, ယန္တု. ယေယျ, ယေယျုံ, အနုပရိယေယျုံ. ယထာသမ္ဘဝံ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ယန္တော ပုရိသော. ယန္တီ ဣတ္ထီ. ယန္တံ ကုလံ. ယာနံ, ဥပယာနံ, ဥယျာနံ ဣစ္စာဒီနိ. ဒိဝါဒိဂဏိကဿ ပနဿ ‘‘ယာယတိ, ယာယန္တီ’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. या (धातू) गती (जाणे) आणि प्राप्ती (मिळवणे) या अर्थांत आहे. याति, यन्ति. यातु, यन्तु. येय्य, येय्युं, अनुपरियेय्युं. यथासंभव पदमाला (रूपावली) योजावी. यन्तो पुरिसो (जाणारा पुरुष). यन्ती इत्थी (जाणारी स्त्री). यन्तं कुलं (जाणारे कूळ). यानं, उपयानं, उय्यानं इत्यादी. दिवादिगणीय धातूचे तर 'यायति, यायन्ति' इत्यादी रूपे होतात. တတြ ယာနန္တိအာဒီသု ယန္တိ ဧတေနာတိ ယာနံ, ရထသကဋာဒိ. ဥပယန္တိ ဧတေန ဣဿရဿ ဝါ ပိယမနာပဿ ဝါ သန္တိကံ ဂစ္ဆန္တီတိ ဥပယာနံ, ပဏ္ဏာကာရံ. ‘‘ဥပယာနာနိ မေ ဒဇ္ဇုံ, ရာဇပုတ္တ တယိ ဂတေ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ပဏ္ဏာကာရာနိ ‘‘ဥပယာနာနီ’’တိ [Pg.138] ဝုစ္စန္တိ. သမ္ပန္နဒဿနီယပုပ္ဖဖလာဒိတာယ ဥဒ္ဓံ ဩလောကေန္တာ ယန္တိ ဂစ္ဆန္တိ ဧတ္ထာတိ ဥယျာနံ. त्यात 'यान' इत्यादी शब्दांमध्ये - ज्याच्याद्वारे जातात ते 'यान' (वाहन), जसे की रथ, गाडी इत्यादी. ज्याच्याद्वारे (लोक) स्वामीच्या किंवा प्रिय व मनपसंत व्यक्तीच्या जवळ जातात ते 'उपयान' म्हणजे भेटवस्तू. 'हे राजपुत्रा, तू गेल्यावर ते मला भेटवस्तू (उपयानानि) देतील' येथे भेटवस्तूंना 'उपयानानि' म्हटले आहे. समृद्ध आणि दर्शनीय फुले, फळे इत्यादींमुळे वर पाहत लोक जेथे जातात ते 'उय्यान' (उद्यान) होय. ဗျာ ဥမ္မီသနေ. ဗျာတိ, ဗျန္တိ. ဗျာသိ, ဗျာထ. ဗျာမိ, ဗျာမ. ယထာသမ္ဘဝံ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. တတြ ပနာယံ ပါဠိ ‘‘ယာဝ ဗျာတိ နိမ္မီသတိ, တတြာပိ ရသတိဗ္ဗယော’’တိ. တတ္ထ ယာဝ ဗျာတီတိ ယာဝ ဥမ္မီသတိ, ပုရာဏဘာသာ ဧသာ, အယဉှိ ယသ္မိံ ကာလေ ဗောဓိသတ္တော စူဠဗောဓိပရိဗ္ဗာဇကော အဟောသိ, တသ္မိံ ကာလေ မနုဿာနံ ဝေါဟာရော. ब्या (धातू) डोळे उघडणे (उन्मीलन) या अर्थात आहे. ब्याति, ब्यन्ति. ब्यासि, ब्याथ. ब्यामी, ब्याम. यथासंभव पदमाला योजावी. त्यात ही पालि (वचन) आहे - 'याव ब्याति निम्मीसति, तत्रापि रसतिब्बयो' (जोपर्यंत डोळे उघडतो आणि मिटतो, तोपर्यंत तिथे रसाचा तीव्र अनुभव असतो). तेथे 'याव ब्याति' म्हणजे 'जोपर्यंत डोळे उघडतो'. ही जुनी भाषा आहे, कारण ज्या काळात बोधिसत्व चूळबोधी परिव्राजक होते, त्या काळातील हा मानवी व्यवहार (भाषा) आहे. ယု မိဿနေ ဂတိယဉ္စ. ယောတိ, ယဝတိ. အာယု, ယောနိ. यु (धातू) मिश्रण करणे आणि गती या अर्थांत आहे. योति, यवति. आयु, योनि. တတ္ထ ‘‘အာယူ’’တိ အာသဒ္ဒေါ ဥပသဂ္ဂေါ. အာယဝန္တိ မိဿီဘဝန္တိ သတ္တာ ဧတေနာတိ အာယု. အထ ဝါ အာယဝန္တိ အာဂစ္ဆန္တိ ပဝတ္တန္တိ တသ္မိံ သတိ အရူပဓမ္မာတိ အာယု. တထာ ဟိ အဋ္ဌသာလိနိယံ ဝုတ္တံ ‘‘အာယဝနဋ္ဌေန အာယု. တသ္မိဉှိ သတိ အရူပဓမ္မာ အာယဝန္တိ အာဂစ္ဆန္တိ ပဝတ္တန္တိ, တသ္မာ အာယူတိ ဝုစ္စတီ’’တိ. ‘‘အာယု, ဇီဝိတံ, ပါဏော’’ ဣစ္စေတေ ပရိယာယာ လောကဝေါဟာရဝသေန. အဘိဓမ္မဝသေန ပန ‘‘ဌိတိ ယပနာ ယာပနာ ဇီဝိတိန္ဒြိယံ’’ ဣစ္စေတေပိ တေဟေဝ သဒ္ဓိံ ပရိယာယာ. ယောနီတိ အဏ္ဍဇာဒီနံ အဏ္ဍဇာဒီဟိ သဒ္ဓိံ ယာယ မိဿီဘာဝေါ ဟောတိ, သာ ယောနိ. ဣဒံ ပနေတ္ထ နိဗ္ဗစနံ ‘‘ယဝန္တိ ဧတ္ထ သတ္တာ ဧကဇာတိသမနွယေန အညမညံ မိဿကာ ဟောန္တီတိ ယောနိ’’ ဣတိ. ဧတ္ထ စ ယောနိသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော နီယတေ. ယောနီတိ ခန္ဓကောဋ္ဌာသဿပိ ကာရဏဿပိ ပဿာဝမဂ္ဂဿပိ နာမံ. ‘‘စတဿော နာဂယောနိယော. စတဿော သုပဏ္ဏယောနိယော’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ခန္ဓကောဋ္ဌာသော ယောနိ နာမ. ‘‘ယောနိ [Pg.139] ဟေသာ ဘူမိဇ ဖလဿ အဓိဂမာယာ’’တိ ဧတ္ထ ကာရဏံ. ‘‘န စာဟံ ဗြာဟ္မဏံ ဗြူမိ, ယောနိဇံ မတ္တိသမ္ဘဝ’’န္တိ ဧတ္ထ ပဿာဝမဂ္ဂေါ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – त्यात 'आयु' या शब्दात 'आ' हा उपसर्ग आहे. ज्याच्याद्वारे प्राणी मिश्रित (एकत्र) होतात ते 'आयु'. किंवा, जे अस्तित्वात असताना अरूप धर्म (चित्त-चैतसिक) येतात आणि प्रवृत्त होतात ते 'आयु'. तसेच अट्ठसालिनीमध्ये म्हटले आहे - 'आयवन (प्रवृत्ती/मिश्रण) या अर्थाने आयु आहे. कारण ते अस्तित्वात असताना अरूप धर्म येतात आणि प्रवृत्त होतात, म्हणून त्याला आयु म्हटले जाते.' 'आयु, जीवित, प्राण' हे लोकव्यवहारानुसार समानार्थी शब्द आहेत. अभिधम्मानुसार तर 'ठिति (स्थिती), यपना (यापन), यापना, जीवितिन्द्रिय' हे देखील त्यांच्यासोबतच समानार्थी शब्द आहेत. 'योनि' म्हणजे अंडज इत्यादी प्राण्यांचे अंडज इत्यादींसोबत ज्याच्याद्वारे मिश्रण होते ती योनी. येथे हा निर्वचन (व्युत्पत्ती) आहे - 'ज्यामध्ये प्राणी एकाच जातीच्या संबंधाने परस्परांशी मिश्रित होतात ती योनी होय.' आणि येथे 'योनि' शब्दाचा अर्थ-उद्धार (विविध अर्थ) केला जात आहे. 'योनि' हे स्कंध-कोष्ठाचे (स्कंध-समूहाचे), कारणाचे आणि प्रसूती-मार्गाचे (योनीचे) देखील नाव आहे. 'चतस्सो नागयोनियो, चतस्सो supaṇṇayoniyo' (चार नागयोनी, चार सुपर्णयोनी) येथे स्कंध-कोष्ठाला 'योनि' म्हटले आहे. 'योनि हेसा भूमिज फलस्स अधिगमाय' (हे भूमिज, फळ प्राप्तीचे हे कारण आहे) येथे 'योनि' म्हणजे कारण. 'न चाहं ब्राह्मणं ब्रूमि, योनिजं मत्तिसंभवं' (मी केवळ योनीतून जन्मलेल्या किंवा मातेपासून उत्पन्न झालेल्याला ब्राह्मण म्हणत नाही) येथे 'योनि' म्हणजे प्रसूती-मार्ग (योनी). याविषयी हे म्हटले आहे - ခန္ဓာနဉ္စာပိ ကောဋ္ဌာသေ, မုတ္တမဂ္ဂေ စ ကာရဏေ; ဣမေသု တီသု အတ္ထေသု, ယောနိသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. स्कंधांचा कोष्ठ (समूह), मूत्रमार्ग (प्रसूती-मार्ग) आणि कारण - या तीन अर्थांमध्ये 'योनि' शब्द प्रवृत्त होतो. ဗျေ သံဝရဏေ. ဗျာယတိ. ब्ये (धातू) संवरण (झाकणे/रक्षण करणे) या अर्थात आहे. ब्यायति. ဗျေ ပဝတ္တိယံ. ဗျေတိ သဟဗျော. ब्ये (धातू) प्रवृत्ती (चालणे/अस्तित्वात असणे) या अर्थात आहे. ब्येति, सहब्यो. ဧတ္ထ သဟဗျောတိ သဟ ဗျေတိ သဟ ပဝတ္တတီတိ သဟဗျော, သဟာယော, ဧကဘဝူပဂေါ ဝါ. တထာ ဟိ ‘‘တာဝတိံသာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပန္နော’’တိအာဒီသု ဧကဘဝူပဂေါ ‘‘သဟဗျော’’တိ ဝုစ္စတိ. येथे 'सहब्यो' म्हणजे जो सोबत चालतो किंवा सोबत प्रवृत्त होतो तो 'सहब्यो' (सहचारी), मित्र किंवा एकाच भवात उत्पन्न झालेला. तसेच 'तावतंस देवांच्या सहवासात (सहब्यतं) उत्पन्न झाला' इत्यादी वाक्यांमध्ये एकाच भवात उत्पन्न झालेल्याला 'सहब्यो' म्हटले आहे. ဟယ ဂတိယံ. ဟယတိ. ဟယော. ဟယောတိ အဿော. သော ဟိ ဟယတိ သီဃံ ဂစ္ဆတီတိ ဟယောတိ ဝုစ္စတိ. ဣမာနိ ပနဿ နာမာနိ – हय (धातू) गती या अर्थात आहे. हयति. हयो. 'हयो' म्हणजे घोडा. कारण तो वेगाने जातो (हयति), म्हणून त्याला 'हयो' म्हटले जाते. ही त्याची नावे आहेत - အဿော တုရင်္ဂေါ တုရဂေါ, ဝါဇီ ဝါဟော ဟယောပိ စ; တဗ္ဘေဒါ သိန္ဓဝေါ စေဝ, ဂေါဇော အဿတရောပိ စ. अस्सो (अश्व), तुरङ्गो (तुरंग), तुरगो (तुरग), वाजी, वाहो (वाह) आणि हयो (हय); त्याचे भेद म्हणजे सिन्धवो (सिंधू देशातील घोडा), गोजो आणि अस्सतरो (खेचर) हे आहेत. ကာရဏာကာရဏညူ တု, အာဇာနီယော ဟယုတ္တမော; ဃောဋကော တု ခဠုင်္ကဿော, ဝဠဝေါတိ စ ဝုစ္စတိ; အဿပေါတော ကိသောရောတိ, ခဠုင်္ကောတိပိ ဝုစ္စတိ; योग्य आणि अयोग्य जाणणारा उत्तम घोडा 'आजानीय' (आजानेय) होय. दुष्ट किंवा आळशी घोड्याला 'घोटको' किंवा 'खळुङ्कस्सो' म्हटले जाते, आणि घोडीला 'वळवा' म्हटले जाते. घोड्याच्या पिल्लाला 'किसोरो' (किशोर) आणि 'खळुङ्को' देखील म्हटले जाते. ဟရိယ ဂတိဂေလညေသု. ဟရိယတိ. हरिय (धातू) गती आणि आजारपण (ग्लानी) या अर्थांत आहे. हरियति. အယ ဝယ ပယ မယ တယ စယ ရယ ဂတိယံ. အယတိ. ဝယတိ. ပယတိ. မယတိ. တယတိ. စယတိ. ရယတိ. အယော, သမယော, ဝယော, ပယော, ရယော. မယတယစယဓာတူနံ နာမိကပဒါနိ ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗာနိ. अय, वय, पय, मय, तय, चय, रय (धातू) गती या अर्थात आहेत. अयति. वयति. पयति. मयति. तयति. चयति. रयति. अयो, समयो, वयो, पयो, रयो. मय, तय, चय धातूंच्या नामरूपांची परीक्षा करावी. တတ္ထ [Pg.140] အယောတိ ကာဠလောဟံ, အယတိ နာနာကမ္မာရကိစ္စေသု ဥပယောဂံ ဂစ္ဆတီတိ အယော. ဝယောတိ ပဌမဝယာဒိအာယုကောဋ္ဌာသော, ဝယတိ ပရိဟာနိံ ဂစ္ဆတီတိ ဝယော. ပယောတိ ခီရဿပိ ဥဒကဿပိ နာမံ, ပယတိ ဇနေန ပါတဗ္ဗဘာဝံ ဂစ္ဆတီတိ ပယော. ရယောတိ ဝေဂေါ, ယော ‘‘ဇဝေါ’’တိပိ ဝုစ္စတိ, တသ္မာ ရယနံ ဇဝနံ ရယော. ဧတ္ထ သမယသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ အဟ နိဗ္ဗစနေန. သမယသဒ္ဒေါ – त्यात 'अयो' म्हणजे काळे लोखंड (लोह); जे लोहाराच्या विविध कामांमध्ये उपयोगात आणले जाते ते 'अयो'. 'वयो' म्हणजे प्रथम वय इत्यादी आयुष्याचे भाग; जे क्षयाकडे जाते ते 'वयो' (वय). 'पयो' हे दूध आणि पाणी या दोन्हीचे नाव आहे; जे लोकांद्वारे पिण्यायोग्य स्थितीला प्राप्त होते ते 'पयो'. 'रयो' म्हणजे वेग, ज्याला 'जवो' (जवा) देखील म्हटले जाते, म्हणून वेगाने जाणे म्हणजे 'रयो'. येथे 'समयो' शब्दाचा अर्थ-उद्धार (विविध अर्थ) उदाहरणांद्वारे सांगितला जात आहे. 'समय' शब्द - သမဝါယေ ခဏေ ကာလေ, သမယေ ဟေတုဒိဋ္ဌိသု; ပဋိလာဘေ ပဟာနေ စ, ပဋိဝေဓေ စ ဒိဿတိ. समवाय (समूह/एकत्र येणे), क्षण, काळ, समय (सिद्धांत), हेतू, दृष्टी (मत), प्रतिलाभ (प्राप्ती), प्रहाण (त्याग) आणि प्रतिवेध (साक्षात्कार) या अर्थांमध्ये 'समय' शब्द दिसून येतो. တထာ ဟိ ‘‘အပ္ပေဝ နာမ သွေပိ ဥပသင်္ကမေယျာမ ကာလဉ္စ သမယဉ္စ ဥပါဒါယာ’’တိ ဧဝမာဒီသု သမဝါယော အတ္ထော. ‘‘ဧကောဝ ခေါ ဘိက္ခဝေ ခဏော စ သမယော စ ဗြဟ္မစရိယဝါသာယာ’’တိအာဒီသု ခဏော. ‘‘ဥဏှသမယော ပရိဠာဟသမယော’’တိအာဒီသု ကာလော. ‘‘မဟာသမယော ပဝနသ္မိ’’န္တိအာဒီသု သမူဟော. ‘‘သမယောပိ ခေါ တေ ဘဒ္ဒါလိ အပ္ပဋိဝိဒ္ဓေါ အဟောသီ’’တိအာဒီသု ဟေတု. ‘‘တေန သမယေန ဥဂ္ဂါဟမာနော ပရိဗ္ဗာဇကော သမဏမုဏ္ဍိကာပုတ္တော သမယပ္ပဝါဒကေ တိန္ဒုကာစီရေ ဧကသာလကေ မလ္လိကာယ အာရာမေ ပဋိဝသတီ’’တိအာဒီသု ဒိဋ္ဌိ. तसेच 'कदाचित आपण उद्याही काळ आणि समय (अनुकूल परिस्थिती) पाहून जाऊ' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'समवाय' (एकत्र येणे/अनुकूलता) हा अर्थ आहे. 'भिक्खूंनो, ब्रह्मचर्य वासासाठी एकच क्षण आणि समय आहे' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'क्षण' हा अर्थ आहे. 'उन्हाचा समय, दाहकतेचा समय' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'काळ' हा अर्थ आहे. 'वनात महासमय (मोठा समूह) आहे' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'समूह' हा अर्थ आहे. 'हे भद्द्ली, तुझ्याकडून तो समय (हेतू/कारण) देखील प्रतिवेध (समजला) गेला नाही' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'हेतू' हा अर्थ आहे. 'त्या समयाला उग्गाहमान परिव्राजक, जो समणमुंडिकापुत्राचा मुलगा होता, समयप्रवादक (सिद्धांतांविषयी चर्चा करणाऱ्या) तिन्दुकाचीर नावाच्या मल्लिकाच्या एका शालेय आरामात राहत होता' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'दृष्टी' (मत/सिद्धांत) हा अर्थ आहे. ‘‘ဒိဋ္ဌေ ဓမ္မေ စ ယော အတ္ထော, ယော စတ္ထော သမ္ပရာယိကော; အတ္ထာဘိသမယာ ဓီရော, ပဏ္ဍိတောတိ ပဝုစ္စတီ’’တိ 'या जन्मात जो अर्थ (कल्याण) आहे, आणि जो परलोकात अर्थ आहे; त्या अर्थाच्या अभिसमयामुळे (प्राप्तीमुळे) धीर पुरुषाला पंडित म्हटले जाते' - အာဒီသု [Pg.141] ပဋိလာဘော. ‘‘သမ္မာ မာနာဘိသမယာ အန္တမကာသိ ဒုက္ခဿာ’’တိအာဒီသု ပဟာနံ. ‘‘ဒုက္ခဿ ပီဠနဋ္ဌော သင်္ခတဋ္ဌော သန္တာပဋ္ဌော အဘိသမယဋ္ဌော’’တိအာဒီသု ပဋိဝေဓော. ဧတ္ထ စ ဥပသဂ္ဂါနံ ဇောတကမတ္တတ္တာ တဿ တဿ အတ္ထဿ ဝါစကော သမယသဒ္ဒေါ ဧဝါတိ သမယသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရေပိ သဥပသဂ္ဂေါ အဘိသမယသဒ္ဒေါ ဝုတ္တော. इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रतिलाभ' (प्राप्ती) हा अर्थ आहे. 'मानाचा सम्यक अभिसमय (त्याग) केल्यामुळे दुःखाचा अंत केला' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रहाण' (त्याग) हा अर्थ आहे. 'दुःखाचा पीडन अर्थ, संस्कृत अर्थ, संताप अर्थ, अभिसमय अर्थ' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रतिवेध' (साक्षात्कार) हा अर्थ आहे. आणि येथे उपसर्गांचे केवळ द्योतकत्व असल्यामुळे त्या त्या अर्थाचा वाचक 'समय' शब्दच आहे, म्हणून 'समय' शब्दाच्या अर्थ-उद्धारात उपसर्गयुक्त 'अभिसमय' शब्द देखील सांगितला आहे. တတ္ထ သဟကာရီကာရဏတာယ သန္နိဇ္ဈံ သမေတိ သမဝေတီတိ သမယော, သမဝါယော. သမေတိ သမာဂစ္ဆတိ မဂ္ဂဗြဟ္မစရိယံ ဧတ္ထ တဒါဓာရပုဂ္ဂလောတိ သမယော, ခဏော. သမေန္တိ ဧတ္ထ, ဧတေန ဝါ သင်္ဂစ္ဆန္တိ ဓမ္မာ သဟဇာတဓမ္မေဟိ ဥပ္ပာဒါဒီဟိ ဝါတိ သမယော, ကာလော. ဓမ္မပ္ပဝတ္တိမတ္တတာယ အတ္ထတော အဘူတောပိ ဟိ ကာလော ဓမ္မပ္ပဝတ္တိယာ အဓိကရဏံ ကရဏံ ဝိယ စ ပရိကပ္ပနာမတ္တသိဒ္ဓေန ရူပေန ဝေါဟရိယတီတိ. သမံ, သဟ ဝါ အဝယဝါနံ အယနံ ပဝတ္တိ အဝဋ္ဌာနန္တိ သမယော, သမူဟော, ယထာ ‘‘သမုဒါယော’’တိ. အဝယဝသဟာဝဋ္ဌာနမေဝ ဟိ သမူဟော. ပစ္စယန္တရသမာဂမေ ဧတိ ဖလံ ဧတသ္မာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ ပဝတ္တတိ စာတိ သမယော, ဟေတု, ယထာ ‘‘သမုဒယော’’တိ. သမေတိ သံယောဇနဘာဝတော သမ္ဗန္ဓာ ဧတိ အတ္တနော ဝိသယေ ပဝတ္တတိ, ဒဠှဂ္ဂဟဏဘာဝတော ဝါ သံယုတ္တာ အယန္တိ ပဝတ္တန္တိ သတ္တာ ယထာဘိနိဝေသံ ဧတေနာတိ သမယော, ဒိဋ္ဌိ. ဒိဋ္ဌိသံယောဇနေန ဟိ သတ္တာ အတိဝိယ ဗဇ္ဈန္တိ. သမိတိ သင်္ဂတိ သမောဓာနန္တိ သမယော, ပဋိလာဘော. သမဿ နိရောဓဿ ယာနံ, သမ္မာ ဝါ ယာနံ အပဂမော အပ္ပဝတ္တီတိ သမယော, ပဟာနံ. ဉာဏေန အဘိမုခံ သမ္မာ ဧတဗ္ဗော အဓိဂန္တဗ္ဗောတိ သမယော, ဓမ္မာနံ အဝိပရီတော သဘာဝေါ, အဘိမုခဘာဝေန သမ္မာ ဧတိ ဂစ္ဆတိ ဗုဇ္ဈတီတိ သမယော. ယထာဘူတသဘာဝါဝဗောဓော. ဧဝံ တသ္မိံ တသ္မိံ အတ္ထေ သမယသဒ္ဒဿ ပဝတ္တိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. तेथे सहकारी कारणांच्या एकत्र येण्याने जे सिद्ध होते, समेट घडून येतो, तो 'समय' म्हणजे 'समवाय' (एकत्र येणे) होय. जेथे मार्ग-ब्रह्मचर्य आणि त्याचा आधार असलेला पुद्गल (व्यक्ती) एकत्र येतात, तो 'समय' म्हणजे 'क्षण' (अनुकूल वेळ) होय. जेथे किंवा ज्याच्याद्वारे धर्म (मानसिक व भौतिक घटक) हे सहजात धर्मांशी (उत्पत्ती इत्यादींशी) एकत्र येतात, तो 'समय' म्हणजे 'काळ' होय. कारण केवळ धर्मांच्या प्रवृत्तीमुळे वास्तविक पाहता काळ अस्तित्वात नसला, तरी धर्मांच्या प्रवृत्तीचे अधिकरण (स्थान) किंवा कारण असल्यासारखे केवळ कल्पनेने सिद्ध झालेल्या रूपाने व्यवहारात आणले जाते. अवयवांचे समान किंवा एकत्र गमन (प्रवृत्ती किंवा राहणे) म्हणजे 'समय' म्हणजेच 'समूह' होय, जसे की 'समुदाय'. अवयवांचे एकत्र राहणे म्हणजेच समूह होय. इतर प्रत्ययांच्या (कारणांच्या) मिलाफातून जे फळ प्राप्त होते, ज्याच्यापासून उत्पन्न होते आणि प्रवृत्त होते, तो 'समय' म्हणजे 'हेतू' (कारण) होय, जसे की 'समुदय'. संयोजनाच्या (बंधनाच्या) भावामुळे किंवा संबंधामुळे जे स्वतःच्या विषयात प्रवृत्त होते, किंवा दृढ पकडीमुळे संयुक्त होऊन प्राणी ज्याच्याद्वारे आपापल्या अभिनिवेशानुसार (आग्रहानुसार) प्रवृत्त होतात, तो 'समय' म्हणजे 'दृष्टी' (चुकीचा दृष्टिकोन) होय. कारण दृष्टीच्या संयोजनाने प्राणी अत्यंत घट्ट बांधले जातात. 'समिती' म्हणजे संगती किंवा एकत्र येणे, तो 'समय' म्हणजे 'प्रतिलाभ' (प्राप्ती) होय. शमाकडे (निरोधाकडे) जाणे, किंवा सम्यक गमन, अपगम (दूर जाणे) किंवा अप्रवृत्ती म्हणजे 'समय' म्हणजेच 'प्रहाण' (त्याग) होय. ज्ञानाने ज्याच्या सन्मुख सम्यकपणे जावे, जे प्राप्त करावे, तो 'समय' म्हणजे धर्मांचा अविपरीत (यथार्थ) स्वभाव होय; सन्मुख भावाने सम्यकपणे जाणणे किंवा समजणे म्हणजे 'समय' होय, म्हणजेच यथाभूत स्वभावाचा बोध. अशा प्रकारे त्या त्या अर्थामध्ये 'समय' शब्दाचा प्रयोग समजून घ्यावा. နနု [Pg.142] စ အတ္ထမတ္တံ ပတိ သဒ္ဒါ အဘိနိဝိသန္တီတိ န ဧကေန သဒ္ဒေန အနေကေ အတ္ထာ အဘိဓီယန္တီတိ? သစ္စမေတံ သဒ္ဒဝိသေသေ အပေက္ခိတေ. သဒ္ဒဝိသေသေ ဟိ အပေက္ခမာနေ ဧကေန သဒ္ဒေန အနေကတ္ထာဘိဓာနံ န သမ္ဘဝတိ. န ဟိ ယော ကာလတ္ထော သမယသဒ္ဒေါ, သောယေဝ သမူဟာဒိအတ္ထံ ဝဒတိ. ဧတ္ထ ပန တေသံ တေသံ အတ္ထာနံ သမယ သဒ္ဒဝစနီယတာ သာမညမုပါဒါယ အနေကတ္ထတာ သမယသဒ္ဒဿ ဝုတ္တာ. ဧဝံ သဗ္ဗတ္ထ အတ္ထုဒ္ဓါရေ အဓိပ္ပာယော ဝေဒိတဗ္ဗော. पण शब्द हे केवळ अर्थाच्याच प्रति प्रवृत्त होतात, तर मग एका शब्दाने अनेक अर्थ कसे सांगितले जाऊ शकतात? हे खरे आहे, जेव्हा विशिष्ट शब्दाची अपेक्षा असते. कारण विशिष्ट शब्दाची अपेक्षा असताना एका शब्दाने अनेक अर्थ सांगणे शक्य नसते. जो 'समय' शब्द काळाच्या अर्थाचा वाचक आहे, तोच समूहादी अर्थ सांगू शकत नाही. परंतु येथे त्या त्या अर्थांना 'समय' शब्दाने सांगण्याची सामान्यता (समानता) लक्षात घेऊन 'समय' शब्दाची अनेक अर्थकता सांगितली आहे. अशा प्रकारे सर्व ठिकाणी अर्थाचा उलगडा करण्याचा अभिप्राय समजून घ्यावा. ဣတော ယာတော အယတော စ, နိပ္ဖတ္တိံ သမုဒီရယေ; ဝိညူ သမယသဒ္ဒဿ, သမဝါယာဒိဝါစိနော. विद्वानांनी 'इ' धातू, 'या' धातू आणि 'अय्' धातू यांच्यापासून समवाय इत्यादी अर्थांचा वाचक असलेल्या 'समय' शब्दाची निष्पत्ती सांगावी. ဣတော ယာတော အယတော စ, သမာနတ္ထေဟိ ဓာတုဟိ; ဧဝံ သမာနရူပါနိ, ဘဝန္တီတိ စ ဤရယေ. 'इ', 'या' आणि 'अय्' या समान अर्थ असलेल्या धातूंपासून अशा प्रकारे समान रूपे (शब्दरूपे) तयार होतात, असेही सांगावे. နယ ရက္ခဏေ စ. စကာရော ဂတိပေက္ခကော. နယတိ. နယော. နယောတိ နယနံ ဂမနန္တိ နယော, ပါဠိဂတိ. နယန္တိ ဝါ ရက္ခန္တိ အတ္ထံ ဧတေနာတိ နယော, တထတ္တနယာဒိ. 'नय्' (नय) धातू रक्षण आणि गमन या अर्थात आहे. 'च' कार गतीची अपेक्षा करतो. 'नयति' (नेतो). 'नय'. 'नय' म्हणजे नेणे किंवा गमन करणे, ही पाळीची गती (पद्धत) आहे. किंवा ज्याच्याद्वारे अर्थाचे नयन (मार्गदर्शन) करतात किंवा रक्षण करतात, तो 'नय' होय, जसे की तथत्ता-नय (तथतेचा मार्ग) इत्यादी. ဒယ ဒါနဂတိဟိံသာဒါနရက္ခာသု. ဒယတိ. ဒယာ. 'दय्' (दय) धातू दान, गती, हिंसा, ग्रहण आणि रक्षण या अर्थांमध्ये आहे. 'दयति' (दया करतो/देतो/जातो). 'दया'. ဒယာတိ မေတ္တာပိ ဝုစ္စတိ ကရုဏာပိ. ‘‘ဒယာပန္နော’’တိ ဧတ္ထ ဟိ မေတ္တာ ‘‘ဒယာ’’တိ, မေတ္တစိတ္တတံ အာပန္နောတိ ဟိ အတ္ထော. ‘‘အဒယာပန္နော’’တိ ဧတ္ထ ပန ကရုဏာ ‘‘ဒယာ’’တိ ဝုစ္စတိ. နိက္ကရုဏတံ အာပန္နောတိ ဟိ အတ္ထော. ဧဝံ ဒယာသဒ္ဒဿ မေတ္တာကရုဏာသု ပဝတ္တိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. တထာ ဟိ အဘိဓမ္မဋီကာယံ ဝုတ္တံ ‘‘ဒယာသဒ္ဒေါ ယတ္ထ ယတ္ထ ပဝတ္တတိ, တတ္ထ တတ္ထ အဓိပ္ပာယဝသေန ယောဇေတဗ္ဗော. ဒယာသဒ္ဒေါ ဟိ အနုရက္ခဏတ္ထံ အန္တောနီတံ ကတွာ ပဝတ္တမာနော မေတ္တာယ စ ကရုဏာယ စ ပဝတ္တတီ’’တိ. 'दया' म्हणजे मैत्री देखील म्हटले जाते आणि करुणा देखील. कारण 'दयाpanno' (दयेने युक्त) येथे मैत्रीला 'दया' म्हटले आहे, कारण त्याचा अर्थ 'मैत्रीपूर्ण चित्ताने युक्त' असा आहे. परंतु 'अदयापन्नो' (दयेने रहित) येथे करुणेला 'दया' म्हटले आहे, कारण त्याचा अर्थ 'करुणारहित झालेला' असा आहे. अशा प्रकारे 'दया' शब्दाचा प्रयोग मैत्री आणि करुणा या दोन्ही अर्थांमध्ये समजून घ्यावा. म्हणूनच अभिधम्मटीकेमध्ये म्हटले आहे - 'दया शब्द जिथे जिथे प्रवृत्त होतो, तिथे तिथे अभिप्रायानुसार त्याचा अर्थ लावावा. कारण दया शब्द रक्षणाचा अर्थ अंतर्भूत करून प्रवृत्त होत असताना मैत्री आणि करुणा या दोन्ही अर्थांमध्ये प्रवृत्त होतो.' ဝစနတ္ထော ပနေတ္ထ ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗော – ဒယတိ ဒဒါတိ သတ္တာနံ အဘယံ ဧတာယာတိ ဒယာ. ဒယတိ ဂစ္ဆတိ ဝိဘာဂံ အကတွာ [Pg.143] ပါပကလျာဏဇနေသု သမံ ဝတ္တတိ, သီတေန သမံ ဖရန္တံ ရဇောမလဉ္စ ပဝါဟေန္တံ ဥဒကမိဝါတိပိ ဒယာ, မေတ္တာ. ဒယတိ ဝါ ဟိံသတိ ကာရုဏိကံ ယာဝ ယထာဓိပ္ပေတံ ပရဿ ဟိတနိပ္ဖတ္တိံ န ပါပုဏာတိ, တာဝါတိ ဒယာ. ဒယတိ အနုဂ္ဂဏှာတိ ပါပဇနမ္ပိ သဇ္ဇနော ဧတာယာတိပိ ဒယာ. ဒယတိ အတ္တနော သုခမ္ပိ ပဟာယ ခေဒံ ဂဏှာတိ သဇ္ဇနော ဧတာယာတိ ဒယာ. ဒယန္တိ ဂဏှန္တိ ဧတာယ မဟာဗောဓိသတ္တာ ဗုဒ္ဓဘာဝါယ အဘိနီဟာရကရဏကာလေ ဟတ္ထဂတမ္ပိ အရဟတ္တဖလံ ဆဍ္ဍေတွာ သံသာရသာဂရတော သတ္တေ သမုဒ္ဓရိတုကာမာ အနဿာသကရံ အတိဘယာနကံ မဟန္တံ သံသာရဒုက္ခံ, ပစ္ဆိမဘဝေ စ သဟ အမတဓာတုပဋိလာဘေန အနေကဂုဏသမလင်္ကတံ သဗ္ဗညုတညာဏဉ္စာတိပိ ဒယာ, ကရုဏာ. ကရုဏာမူလကာ ဟိ သဗ္ဗေ ဗုဒ္ဓဂုဏာ. येथे शब्दाचा अर्थ असा समजून घ्यावा - जिच्याद्वारे प्राण्यांना अभय दिले जाते (दयति ददाति), ती 'दया' होय. जी भेदभाव न करता प्रवृत्त होते, पापी आणि कल्याणकारी लोकांमध्ये समानतेने वागते, जसे की थंडपणाने सर्वांना व्यापणारे आणि धुळीचा मळ वाहून नेणारे पाणी असते, ती 'दया' म्हणजे 'मैत्री' होय. किंवा जोपर्यंत दुसऱ्याच्या हिताची सिद्धी होत नाही, तोपर्यंत जी कारुणिक व्यक्तीला व्याकुळ करते (हिंसा करते), ती 'दया' होय. जिच्याद्वारे सज्जन पुरुष पापी लोकांवरही अनुग्रह करतो, ती 'दया' होय. जिच्याद्वारे सज्जन पुरुष स्वतःच्या सुखाचाही त्याग करून दुःख पत्करतो, ती 'दया' होय. जिच्याद्वारे महाबोधिसत्व बुद्धत्वासाठी अभिनिहार (संकल्प) करताना, हातात आलेले अर्हत्त्वफळही सोडून देऊन, प्राण्यांना संसारसागरातून उद्धार करण्याच्या इच्छेने, अत्यंत भयानक आणि अश्वासक अशा महान संसारदुःखाला स्वीकारतात, आणि अंतिम जन्मात अमृतधातूच्या (निर्वाणाच्या) प्राप्तीसह अनेक गुणांनी सुशोभित अशा सर्वज्ञता-ज्ञानाला स्वीकारतात, ती 'दया' म्हणजे 'करुणा' होय. कारण बुद्धांचे सर्व गुण हे करुणामूलकच असतात. အပရော နယော – ဒယန္တိ အနုရက္ခန္တိ သတ္တေ ဧတာယ, သယံ ဝါ အနုဒယတိ, အနုဒယမတ္တမေဝ ဝါ ဧတန္တိ ဒယာ, မေတ္တာ စေဝ ကရုဏာ စ. ကိဉ္စိ ပယောဂမေတ္ထ ကထယာမ ‘‘သေယျထာပိ ဂဟပတိ ဂိဇ္ဈော ဝါ ကင်္ကော ဝါ ကုလလော ဝါ မံသပေသိံ အာဒါယ ဒယေယျ. ပုတ္တေသု မဒ္ဒီ ဒယေသိ, သဿုယာ သသုရမှိ စ. ဒယိတဗ္ဗော ရထေသဘ’’. တတ္ထ ဒယေယျာတိ ဥပ္ပတိတွာ ဂစ္ဆေယျ, ဂတျတ္ထဝသေနေတံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဒယေသီတိ မေတ္တစိတ္တံ ကရေယျာသိ. ဒယိတဗ္ဗောတိ ပိယာယိတဗ္ဗော. ဥဘယမ္ပေတံ ဝိဝရဏံ ရက္ခဏတ္ထံ အန္တောဂဓံ ကတွာ အဓိပ္ပာယတ္ထဝသေန ကတန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. दुसरा नय (पद्धत) - जिच्याद्वारे प्राण्यांचे रक्षण करतात, किंवा जी स्वतः अनुकंपा करते, किंवा जी केवळ अनुकंपारूपच आहे, ती 'दया' म्हणजे मैत्री आणि करुणा दोन्ही होय. येथे काही प्रयोग (उदाहरणे) सांगू या - 'हे गृहपती, जसे एखादा गिधाड, कंक (एक पक्षी) किंवा घार मांसाचा तुकडा घेऊन उडून जाईल (दयेय्य)'. 'मद्दीने पुत्रांवर, सासूवर आणि सासऱ्यावर दया केली (दयेसि)'. 'हे रथेसभ (रथांमध्ये श्रेष्ठ), दया करावी (दयितब्बो)'. तेथे 'दयेय्य' म्हणजे उडून जावे, हे गतीच्या अर्थाने समजून घ्यावे. 'दयेसि' म्हणजे मैत्रीचे चित्त करावे. 'दयितब्बो' म्हणजे प्रिय मानावे (प्रेम करावे). हे दोन्ही स्पष्टीकरण रक्षणाचा अर्थ अंतर्भूत करून अभिप्रायाच्या अर्थानुसार केले आहे, असे समजून घ्यावे. ဦယီ တန္တသန္တာနေ. ဦယတိ. ဦတော, ဦတဝါ. 'ऊयी' (ऊय्) धातू विणणे किंवा तंतूंच्या विस्ताराच्या अर्थात आहे. 'ऊयति' (विणतो). 'ऊतो' (विणलेला), 'ऊतवा' (विणणारा). ပူယီ ဝိသရဏေ ဒုဂ္ဂန္ဓေ စ. ပူယတိ. ပူတော, ပူတဝါ. ပူတိမစ္ဆံ ကုသဂ္ဂေန, ယော နရော ဥပနယှတိ. 'पूयी' (पूय्) धातू दुर्गंधी पसरवणे आणि कुजणे या अर्थात आहे. 'पूयति' (कुजतो/दुर्गंधी सुटते). 'पूतो' (कुजलेला), 'पूतवा' (कुजलेला असलेला). 'जो मनुष्य कुशाच्या (गवताच्या) टोकाने सडलेला मासा बांधतो...' ကနုယီ [Pg.144] သဒ္ဒေ. ကနုယတိ. ကနုတော, ကနုတဝါ. 'कनुयी' (कनुय्) धातू शब्दाच्या (आवाजाच्या) अर्थात आहे. 'कनुयति' (आवाज करतो). 'कनुतो' (आवाज केलेला), 'कनुतवा' (आवाज करणारा). ခမာယ ဝိဓူနနေ. ခမာယတိ. ခမာတော, ခမာတဝါ. 'खमा' धातू कंप पावणे किंवा झटकणे या अर्थात आहे. 'खमायति' (झटकतो/कंप पावतो). 'खमातो' (झटकलेला), 'खमातवा' (झटकणारा). ဖာယိ ပါယိ ဝုဒ္ဓိယံ. ဖာယတိ. ဖီတော, ဖတဝါ. 'फायी' आणि 'पायी' धातू वृद्धीच्या (वाढीच्या) अर्थात आहेत. 'फायति' (वाढतो). 'फीतो' (समृद्ध/वाढलेला), 'फतवा' (वाढलेला असलेला). တတ္ထ တတဝန္တုပစ္စယာ, ယကာရလောပေါ, ဓာတွန္တဿ သရဿ ဣကာရာဒေသော စ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ဧသ နယော ‘‘ပူတော ပူတဝါ’’တိအာဒီသုပိ ယထာသမ္ဘဝံ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ပါယတိ. ပါယော. အပါယော. ဧတ္ထ စ နတ္ထိ ပါယော ဝုဒ္ဓိ ဧတ္ထာတိ အပါယော. အထ ဝါ ပန အယတော သုခတော အပေတောတိ အပါယောတိပိ နိဗ္ဗစနီယံ. အပါယောတိ စ နိရယော တိရစ္ဆာနယောနိ ပေတ္တိဝိသယော အသုရကာယောတိ စတ္တာရော အပါယာ. तेथे 'त' आणि 'तवन्तु' प्रत्यय लागल्याने, 'य' काराचा लोप आणि धातूच्या शेवटी असलेल्या स्वराचा 'इ' कार आदेश समजून घ्यावा. हाच नियम 'पूतो पूतवा' इत्यादींमध्येही यथासंभव समजून घ्यावा. 'पायति' (वाढतो). 'पायो' (वृद्धी/वाढ). 'अपाय'. आणि येथे ज्याच्यामध्ये 'पाय' म्हणजे वृद्धी नाही, तो 'अपाय' होय. किंवा 'अय' म्हणजे सुखापासून जो दूर गेला आहे, तो 'अपाय' होय, अशी व्युत्पत्ती आहे. 'अपाय' म्हणजे निरय (नरक), tiracchānayoni (प्राणीयोनी), pettivisayo (प्रेतलोक) आणि asurakāyo (असुरलोक) हे चार अपाय होत. တာယု သန္တာနပါလနေသု. တာယတိ. တာယနံ. ဒိဝါဒိဂဏေ ပန တာ ပါလနေတိ ဓာတုံ ပဿထ, တဿ ‘‘တာယတိ တာဏ’’န္တိ ရူပါနိ. ဥဘယေသံ ကြိယာပဒံ သမံ. အကာရယကာရပစ္စယမတ္တေနေဝ နာနတ္တံ, နာမိကပဒါနိ ပန ဝိသဒိသာနိ ‘‘တာယနံ, တာဏ’’န္တိ. 'तायु' (ताय्) धातू विस्तार आणि रक्षण या अर्थांमध्ये आहे. 'तायति' (रक्षण करतो/विस्तार करतो). 'तायनं' (रक्षण/विस्तार). परंतु दिवादिगणामध्ये 'ता' धातू रक्षणाच्या अर्थात पाहावा, त्याची 'तायति', 'ताणं' अशी रूपे होतात. दोन्हीचे क्रियापद समान आहे. केवळ 'अ' कार आणि 'य' कार प्रत्ययामुळेच भिन्नता आहे, परंतु नामपदे (प्रातिपदिके) 'तायनं' आणि 'ताणं' अशी भिन्न आहेत. စာယု ပူဇာနိသာမနေသု. ပူဇာ ပူဇနာ. နိသာမနံ ဩလောကနံ သဝနဉ္စ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဣင်္ဃ မဒ္ဒိ နိသာမေဟိ. နိသာမယထ သာဓဝေါ’’တိ စ အာဒီသု ဟိ ဩလောကနသဝနာနိ နိသာမနသဒ္ဒေန ဝုတ္တာနိ. အပိစ ဉာဏေန ဥပပရိက္ခဏမ္ပိ နိသာမနမေဝါတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. စာယတိ, အပစာယတိ. အနဂါရေ ပဗ္ဗဇိတေ, အပစေ ဗြဟ္မစာရိယေ. ယေ ဝုဒ္ဓမပစာယန္တိ. အပစိတိံ ဒဿေတိ. နိစ္စံ ဝုဒ္ဓါပစာယိနော. 'चायु' (धातू) हा पूजा आणि अवलोकन/श्रवण (निसामन) या अर्थांत वापरला जातो. पूजा म्हणजे पूजना (आदर करणे). 'निसामन' म्हणजे अवलोकन (पाहणे) आणि श्रवण (ऐकणे) असे म्हटले जाते. 'इङ्घ मद्दी निसामेही' (हे मद्दी, ऐक/अवलोकन कर) आणि 'निसामयथ साधवो' (हे सज्जनहो, ऐका) इत्यादींमध्ये अवलोकन आणि श्रवण या अर्थांनी 'निसामन' शब्द वापरला गेला आहे. तसेच ज्ञानाने परीक्षण करणे यालाही 'निसामन'च समजावे. 'चायति' (तो आदर करतो), 'अपचायति' (तो सन्मान करतो). 'अनगारे पब्बजिते, अपचे ब्रह्मचारिये' (घर नसलेल्या प्रव्रजितांचा आणि ब्रह्मचाऱ्यांचा आदर करावा). 'ये वुड्ढमपचायन्ति' (जे वृद्धांचा आदर करतात). 'अपचितिं दस्सेति' (तो आदर दर्शवतो). 'निच्चं वुड्ढापचायिनो' (नेहमी वृद्धांचा आदर करणारे). ယကာရန္တဓာတုရူပါနိ. य-कारान्त धातूंची रूपे. ရကာရန္တဓာတု र-कारान्त धातू. ရာ [Pg.145] အာဒါနေ. ရာတိ. 'रा' (धातू) ग्रहण करणे (आदान) या अर्थी. 'राति' (तो ग्रहण करतो). ရိ သန္တာနေ. ရေတိ. ရေဏု. ရေဏူတိ ရဇော. 'रि' (धातू) विस्तार/संतती (संतान) या अर्थी. 'रेति'. 'रेणु'. 'रेणु' म्हणजे धूळ (रज). ရု ဂတိယံ ရောသနေ စ. ရဝတိ, ဝိရဝတိ. 'रु' (धातू) गती आणि राग (रोसन) या अर्थी. 'रवति' (तो आवाज करतो), 'विरवति' (तो ओरडतो). ရု သဒ္ဒေ. ရောတိ, ရဝတိ. ရဝေါ, ဥပရဝေါ. ရုတမနုညံ ရုစိယာ စ ပိဋ္ဌိ. ရုတန္တိ ရဝနံ ရုတံ, သဒ္ဒေါ. 'रु' (धातू) शब्द (आवाज) या अर्थी. 'रोति', 'रवति'. 'रवो' (आवाज), 'उपरवो'. 'रुतमनुञ्ञं रुचिया च पिट्ठि'. 'रुत' म्हणजे ओरडणे, आवाज (सद्द). ရေ သဒ္ဒေ. ရာယတိ. ရာ. ရတ္တိ. ဧတ္ထ စ ရာတိ သဒ္ဒေါ. ရတ္တီတိ နိသာသင်္ခါတော သတ္တာနံ သဒ္ဒဿ ဝူပသမကာလော. ရာ တိယျတိ ဥစ္ဆိဇ္ဇတိ ဧတ္ထာတိ ရတ္တိ. 'रे' (धातू) शब्द या अर्थी. 'रायति'. 'रा'. 'रत्ति' (रात्र). आणि येथे 'राति' हा शब्द आहे. 'रत्ति' (रात्र) म्हणजे निशा म्हणून ओळखला जाणारा, प्राण्यांच्या आवाजाचा शांत होण्याचा काळ. 'रा' (शब्द) जेथे नष्ट होतो (उच्छिद्यते) ती 'रत्ति' (रात्र) होय. ဗြူ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ. အပိ ဟန္တွာ ဟတော ဗြူတိ. 'ब्रू' (धातू) स्पष्ट वाणी (व्यक्ती) या अर्थी. 'अपि हन्त्वा हतो ब्रूति' (मारूनही मारला गेला असे म्हणतो). ဗြဝီတိ, ဗြုန္တိ. ဗြူသိ, ဗြူထ. ဗြူမိ, ဗြူမ. ဗြူတေ, ဗြုဝန္တေ. ဗြူသေ, ဗြုဝှေ. ဗြုဝေ, ဗြုမှေ. 'ब्रवीति', 'ब्रुन्ति'. 'ब्रूसि', 'ब्रूथ'. 'ब्रूमि', 'ब्रूम'. 'ब्रूते', 'ब्रुवन्ते'. 'ब्रूसे', 'ब्रुव्हे'. 'ब्रुवे', 'ब्रुम्हे'. ဗြူတု, ဗြုဝိတု, ဗြုဝန္တု. ဗြူဟိ, ဗြူထ. ဗြူမိ, ဗြူမ. ဗြူတံ, ဗြုဝန္တံ. 'ब्रूतु', 'ब्रुवितु', 'ब्रुवन्तु'. 'ब्रूhi', 'ब्रूथ'. 'ब्रूमि', 'ब्रूम'. 'ब्रूतं', 'ब्रुवन्तं'. ဧတ္ထ စ အမ္ဗဋ္ဌသုတ္တေ ‘‘ပုန ဘဝံ ဂေါတမော ဗြုဝိတူ’’တိ ပါဠိဒဿနတော ‘‘ဗြုဝိတူ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧဝံ သဗ္ဗတ္ထာပိ ဥပပရိက္ခိတွာ နယော ဂဟေတဗ္ဗော. आणि येथे अम्बट्ठसुत्तात 'पुन भवं गोतमो ब्रुवितू' (पुन्हा आदरणीय गौतम म्हणोत) या पाळी पाठावरून 'ब्रुवितू' असे म्हटले आहे. अशा प्रकारे सर्व ठिकाणी परीक्षण करून नियम समजून घ्यावा. ဗြုဝေယျ, ဗြုဝေ, ဗြုဝေယျုံ. ဗြုဝေယျာသိ, ဗြုဝေယျာထ. ဗြုဝေယျာမိ, ဗြုဝေယျာမ. ဗြုဝေထ, ဗြုဝေရံ. ဗြုဝေထော, ဗြုဝေယျာဝှော. ဗြုဝေယျံ. ဗြုဝေယျာမှေ. 'ब्रुवेय्य', 'ब्रुवे', 'ब्रुवेय्युं'. 'ब्रुवेय्यासि', 'ब्रुवेय्याथ'. 'ब्रुवेय्यामि', 'ब्रुवेय्याम'. 'ब्रुवेथ', 'ब्रुवेरं'. 'ब्रुवेथो', 'ब्रुवेय्याव्हो'. 'ब्रुवेय्यं'. 'ब्रुवेय्याम्हे'. ပဗြူတိ. အနုဗြူတိ. ပဗြူတု, အနုဗြူတု. ပဗြုဝေယျ, အနုဗြုဝေယျ. ဧဝံ သဗ္ဗတ္ထ ပအနုဥပသဂ္ဂေဟိပိ ယထာသမ္ဘဝံ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. 'पब्रूति'. 'अनुब्रूति'. 'पब्रूतु', 'अनुब्रूतु'. 'पब्रुवेय्य', 'अनुब्रुवेय्य'. अशा प्रकारे सर्व ठिकाणी 'प', 'अनु' इत्यादी उपसर्गांसह योग्यतेनुसार पदमाला (रूपावली) जोडावी. အာဟ, အာဟု. ဗြဝေ, ဗြဝိတ္ထ, ဗြဝိရေ. ဗြဝိတ္ထော, ဗြဝိဝှော. ဗြဝိံ, ဗြဝိမှေ. ပရောက္ခာဝသေန ဝုတ္တာနိ. 'आह', 'आहु'. 'ब्रवे', 'ब्रवित्थ', 'ब्रविरे'. 'ब्रवित्थो', 'ब्रविव्हो'. 'ब्रविं', 'ब्रविम्हे'. ही परोक्ष (भूतकाळ) विभक्तीच्या अर्थाने म्हटलेली रूपे आहेत. အဗြဝါ[Pg.146], အဗြဝူ. အဗြဝေါ, အဗြဝတ္ထ. အဗြဝံ, အဗြဝမှာ. အဗြဝတ္ထ, အဗြဝတ္ထုံ. အဗြဝသေ, အဗြဝှံ. အဗြဝိံ, အဗြဝိမှသေ. ဟိယျတ္တနီဝသေန ဝုတ္တာနိ. 'अब्रवा', 'अब्रवू'. 'अब्रवो', 'अब्रवत्थ'. 'अब्रवं', 'अब्रवम्हा'. 'अब्रवत्थ', 'अब्रवत्थुं'. 'अब्रवसे', 'अब्रव्हं'. 'अब्रविं', 'अब्रविम्हसे'. ही हिय्यत्तनी (कालचा भूतकाळ) विभक्तीच्या अर्थाने म्हटलेली रूपे आहेत. အဗြဝိ, အဗြဝုံ. အဗြဝေါ, အဗြဝိတ္ထ. အဗြဝိံ, အဗြဝိမှာ. အဗြဝါ, အဗြဝူ. အဗြဝသေ, အဗြဝိဝှံ. အဗြဝံ, အဗြဝိမှေ. အဇ္ဇတနီဝသေန ဝုတ္တာနိ. 'अब्रवि', 'अब्रवुं'. 'अब्रवो', 'अब्रवित्थ'. 'अब्रविं', 'अब्रविम्हा'. 'अब्रवा', 'अब्रवू'. 'अब्रवसे', 'अब्रविव्हं'. 'अब्रवं', 'अब्रविम्हे'. ही अज्जतनी (आजचा/सामान्य भूतकाळ) विभक्तीच्या अर्थाने म्हटलेली रूपे आहेत. ဗြုဝိဿတိ, ဗြုဝိဿန္တိ. အဗြဝိဿာ, အဗြဝိဿံသု. သေသံ သဗ္ဗံ နေတဗ္ဗံ. ကမ္မပဒံ အပ္ပသိဒ္ဓံ. သစေ ပန သိယာ, ‘‘ဗြူယတီ’’တိ သိယာ ‘‘လုယတိ, လူယတီ’’တိ ပဒါနိ ဝိယ. 'ब्रुविस्सति', 'ब्रुविस्सन्ति'. 'अब्रविस्सा', 'अब्रविस्संसु'. उर्वरित सर्व रूपे अशीच बनवावीत. कर्मपद दिसत नाही. परंतु जर कर्मपद असेल, तर 'लुयति, लूयति' या पदांप्रमाणे 'ब्रूयति' असे रूप होईल. ဇီရ ဗြူဟနေ. ဗြူဟနံ ဝဍ္ဎနံ. ဇီရတိ. ဇီရံ. ဇီရမာနော. ဇီရဏံ. အပ္ပဿုတာယံ ပုရိသော, ဗလိဗဒ္ဒေါဝ ဇီရတိ. 'जीर' (धातू) वृद्धी (ब्रूहण) या अर्थी. ब्रूहण म्हणजे वाढणे (वड्ढन). 'जीरति' (तो वृद्ध होतो/झिजतो). 'जीरं'. 'जीरमानो'. 'जीरणं'. 'अप्पस्सुतायं पुरिसो, बलिबद्दोव जीरति' (हा अल्पश्रुत मनुष्य बैलाप्रमाणेच वृद्ध होतो/झिजतो). ပူရ ပူရဏေ. ပူရတိ. ပူရတောဝ မဟောဒဓိ. သဗ္ဗေ ပူရေန္တု သင်္ကပ္ပာ. ပူရိတုံ, ပူရိတွာ, ပူရံ, ပူရိတံ. ပုဏ္ဏံ, ပရိပုဏ္ဏံ. သမ္ပုဏ္ဏံ, ပူရဏံ. ပူရဏော ကဿပေါ. ကာရိတေ ‘‘ပါရမိယော ပူရေတိ, ပူရယတိ, ပူရာပေတိ, ပူရာပယတိ. ပူရေတွာ, ပူရယိတွာ, ပူရာပေတွာ, ပူရာပယိတွာ, ပရိပူရေတွာ’’ ဣစ္စာဒီနိ ဘဝန္တိ. 'पूर' (धातू) पूर्ण करणे (पूरण) या अर्थी. 'पूरति' (तो भरतो). 'पूरतोव महोदधि' (महासागर भरतोच). 'सब्बे पूरेन्तु सङ्कप्पा' (सर्व संकल्प पूर्ण होवोत). 'पूरितुं', 'पूरित्वा', 'पूरं', 'पूरितं'. 'पुण्णं' (पूर्ण), 'परिपुण्णं'. 'सम्पुण्णं', 'पूरणं'. 'पूरणो कस्सपो' (पूरण कस्सप). प्रयोजक (कारित) रूपात 'पारमियो पूरेति' (पारमिता पूर्ण करतो), 'पूरयति', 'पूरापेति', 'पूरापयति'. 'पूरेत्वा', 'पूरयित्वा', 'पूरापेत्वा', 'पूरापयित्वा', 'परिपूरेत्वा' इत्यादी रूपे होतात. ဃောရ ဂတိပဋိဃာတေ. ဂတိပဋိဃာတံ ဂတိပဋိဟနနံ. ဃောရတိ. 'घोर' (धातू) गतीचा अडथळा (गतिप्रतिघात) या अर्थी. गतिप्रतिघात म्हणजे गती रोखणे. 'घोरति'. ဓောရ ဂတိစာတုရိယေ. ဂတိစာတုရိယံ ဂတိဆေကဘာဝေါ. ဓောရေတိ. 'धोर' (धातू) गतीमधील चतुरता (गतिचातुर्य) या अर्थी. गतिचातुर्य म्हणजे गतीमधील चतुरपणा. 'धोरेति'. သရ ဂတိယံ. သရတိ, ဝိသရတိ, ဥဿရတိ. ဥဿာရဏာ. သရော. သံသာရော ဣစ္စာဒီနိ. တတ္ထ သရောတိ ရဟဒေါ. သံသာရောတိ ဝဋ္ဋံ, ယော ‘‘ဘဝေါ’’တိပိ ဝုစ္စတိ. 'सर' (धातू) गती या अर्थी. 'सरति' (तो सरकतो/जातो), 'विसरति', 'उस्सरति'. 'उस्सारणा'. 'सरो'. 'संसारो' इत्यादी. तेथे 'सरो' म्हणजे तलाव (रहद). 'संसारो' म्हणजे चक्र (वट्ट), ज्याला 'भव' असेही म्हटले जाते. စရ စရဏေ. စရတိ, ဝိစရတိ, အနုစရတိ, သဉ္စရတိ. 'चर' (धातू) आचरण करणे (चरण) या अर्थी. 'चरति' (तो आचरण करतो/चालतो), 'विचरति', 'अनुचरति', 'सञ्चरति'. စရ [Pg.147] ဂတိဘက္ခနေသု. စရတိ, ဝိစရတိ, အနုစရတိ, သဉ္စရတိ, ပဋိစရတိ. စရိယာ. စရိတာ. စာရော. ဝိစာရော. အနုဝိစာရော. ဥပဝိစာရော. စရဏံ. စာရကော. ဩစရကော. ဗြဟ္မစရိယံ ဣစ္စာဒီနိ. 'चर' (धातू) गमन आणि भक्षण या अर्थी. 'चरति', 'विचरति', 'अनुचरति', 'सञ्चरति', 'पटिचरति'. 'चरिया' (चर्या), 'चरिता'. 'चारो'. 'विचारो'. 'अनुविचारो'. 'उपविचारो'. 'चरणं'. 'चारको'. 'ओचरको'. 'ब्रह्मचरियं' (ब्रह्मचर्य) इत्यादी. တတ္ထ စရတီတိ ဂစ္ဆတိ, ဘက္ခတိ ဝါ. တထာ ဟိ စရန္တိ ပဒဿ ဂစ္ဆန္တော ခါဒန္တော စာတိ အတ္ထံ ဝဒန္တိ ဂရူ. ပဋိစရတီတိ ပဋိစ္ဆာဒေတိ. စာရကောတိ တံပဝေသိတာနံ သတ္တာနံ သုခံ စရတိ ဘက္ခတီတိ စာရကော, ရောဓော. ဩစရကောတိ အဓောစာရီ. ဗြဟ္မစရိယန္တိ ဒါနမ္ပိ ဝေယျာဝစ္စမ္ပိ သိက္ခာပဒမ္ပိ ဗြဟ္မဝိဟာရောပိ ဓမ္မဒေသနာပိ မေထုနဝိရတိပိ သဒါရသန္တောသောပိ ဥပေါသထောပိ အရိယမဂ္ဂေါပိ သကလံ သာသနမ္ပိ အဇ္ဈာသယောပိ ဝုစ္စတိ. तेथे 'चरति' म्हणजे जातो किंवा भक्षण करतो. म्हणूनच 'चरन्ति' या पदाचा अर्थ 'जाणारा आणि खाणारा' असा गुरुजन सांगतात. 'पटिचरति' म्हणजे झाकणे/लपवणे. 'चारको' म्हणजे त्यात प्रवेश केलेल्या प्राण्यांचे सुख हरण करतो किंवा भक्षण करतो तो 'चारक' (तुरुंग/अडथळा). 'ओचरको' म्हणजे गुप्तहेर (अधोचारी). 'ब्रह्मचर्य' या शब्दाने दान, वैयावृत्य (सेवा), शिक्षापद (शील), ब्रह्मविहार, धम्मदेशना, मैथुनविरती, सदा-संतोष (स्वपत्नीसंतोष), उपोसथ, आर्यमार्ग, संपूर्ण शासन (बुद्धवचन) आणि आशय (अभिप्राय) देखील अभिप्रेत आहे. ကိန္တေ ဝတံ ကိံ ပန ဗြဟ္မစရိယံ,ကိဿ သုစိဏ္ဏဿ အယံ ဝိပါကော; ဣဒ္ဓိဇုတိဗလဝီရိယူပပတ္တိ,ဣဒဉ္စ တေ နာဂ မဟာဝိမာနံ. तुमचे व्रत कोणते होते? आणि कोणते ब्रह्मचर्य होते? कोणत्या चांगल्या आचरणाचा हा विपाक (फळ) आहे? ज्यामुळे तुम्हाला ही ऋद्धी, द्युती (तेज), बल, वीर्य आणि हे विशाल विमान प्राप्त झाले आहे, हे नागा? အဟဉ္စ ဘရိယာ စ မနုဿလောကေ,သဒ္ဓါ ဥဘော ဒါနပတီ အဟုမှာ; ဩပါနဘူတံ မေ ဃရံ တဒါသိ,သန္တပ္ပိတာ သမဏဗြာဟ္မဏာ စ. मी आणि माझी पत्नी मनुष्यलोकात असताना, आम्हा दोघांमध्ये श्रद्धा होती आणि आम्ही दानशूर होतो. माझे घर विहिरीसारखे (सर्वांसाठी खुले) होते, आणि तेथे श्रमण व ब्राह्मण तृप्त केले जात असत. တံ မေ ဝတံ တံ ပန ဗြဟ္မစရိယံ,တဿ သုစိဏ္ဏဿ အယံ ဝိပါကော; ဣဒ္ဓိဇုတိဗလဝီရိယူပပတ္တိ,ဣဒဉ္စ မေ ဓီရ မဟာဝိမာန’’န္တိ तेच माझे व्रत होते आणि तेच माझे ब्रह्मचर्य होते. त्याच सुचरित कर्माचा हा विपाक आहे, ज्यामुळे मला ही ऋद्धी, द्युती, बल, वीर्य आणि हे विशाल विमान प्राप्त झाले आहे, हे धीर पुरुषा! ဣမသ္မိဉှိ ပုဏ္ဏကဇာတကေ ဒါနံ ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တံ. या पुण्णक जातकामध्ये दानाला 'ब्रह्मचर्य' असे म्हटले आहे. ‘‘ကေန [Pg.148] ပါဏိ ကာမဒဒေါ, ကေန ပါဏိ မဓုဿဝေါ; ကေန တေ ဗြဟ္မစရိယေန, ပုညံ ပါဏိမှိ ဣဇ္ဈတိ. कोणत्या कर्माने तुमचा हात इच्छा पूर्ण करणारा झाला आहे? कोणत्या कर्माने तुमच्या हातातून मध स्रवतो? कोणत्या ब्रह्मचर्याने तुमच्या हातात हे पुण्य फलद्रूप झाले आहे? တေန ပါဏိ ကာမဒဒေါ, တေန ပါဏိ မဓုဿဝေါ; တေန မေ ဗြဟ္မစရိယေန, ပုညံ ပါဏိမှိ ဣဇ္ဈတီ’’တိ त्या कर्माने माझा हात इच्छा पूर्ण करणारा झाला आहे, त्या कर्माने माझ्या हातातून मध स्रवतो. त्या माझ्या ब्रह्मचर्याने माझ्या हातात हे पुण्य फलद्रूप झाले आहे. ဣမသ္မိံ အင်္ကုရပေတဝတ္ထုမှိ ဝေယျာဝစ္စံ ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တံ. ‘‘ဣဒံ ခေါ တံ ဘိက္ခဝေ တိတ္တိရိယံ နာမ ဗြဟ္မစရိယံ အဟောသီ’’တိ ဣမသ္မိံ တိတ္တိရဇာတကေ သိက္ခာပဒံ ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တံ. ‘‘တံ ခေါ ပန ပဉ္စသိခ ဗြဟ္မစရိယံ နေဝ နိဗ္ဗိဒါယ န ဝိရာဂါယ…ပေ… ယာဝဒေဝ ဗြဟ္မလောကူပပတ္တိယာ’’တိ ဣမသ္မိံ မဟာဂေါဝိန္ဒသုတ္တေ ဗြဟ္မဝိဟာရာ ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တာ. ‘‘ဧကသ္မိံ ဗြဟ္မစရိယသ္မိံ, သဟဿံ မစ္စုဟာယိနော’’တိ ဧတ္ထ ဓမ္မဒေသနာ ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တာ. ‘‘ပရေ အဗြဟ္မစာရီ ဘဝိဿန္တိ, မယမေတ္ထ ဗြဟ္မစာရိနော ဘဝိဿာမာ’’တိ သလ္လေခသုတ္တေ မေထုနဝိရတိ ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တာ. या अङ्कुरपेतवत्थूमध्ये वैयावृत्य (सेवा) याला 'ब्रह्मचर्य' म्हटले आहे. 'भिक्खूहो, हेच ते तित्तिरिय नावाचे ब्रह्मचर्य होते' या तित्तिर जातकामध्ये शिक्षापदाला 'ब्रह्मचर्य' म्हटले आहे. 'हे पंचशिखा, ते ब्रह्मचर्य निर्वेदासाठी नाही, विरागासाठी नाही... केवळ ब्रह्मलोक प्राप्तीसाठीच आहे' या महागोविंद सुत्तात ब्रह्मविहारांना 'ब्रह्मचर्य' म्हटले आहे. 'एका ब्रह्मचर्यामध्ये हजारो मृत्यूला मागे टाकणारे असतात' येथे धम्मदेशनेला 'ब्रह्मचर्य' म्हटले आहे. 'इतर लोक अब्रह्मचारी होतील, पण आम्ही येथे ब्रह्मचारी राहू' या सल्लेख सुत्तात मैथुनविरतीला 'ब्रह्मचर्य' म्हटले आहे. မယဉ္စ ဘရိယာ နာတိက္ကမာမ,အမှေ စ ဘရိယာ နာတိက္ကမန္တိ; အညတြ တာဟ ဗြဟ္မစရိယံ စရာမ; တသ္မာ ဟိ အမှံ ဒဟရာ န မီယရေ’’တိ आम्ही आमच्या पत्नीचे उल्लंघन करत नाही आणि आमच्या पत्न्या आमचे उल्लंघन करत नाहीत. त्याशिवाय आम्ही ब्रह्मचर्य पाळतो; म्हणूनच आमचे तरुण (मुले) अकाली मरत नाहीत. မဟာဓမ္မပါလဇာတကေ သဒါရသန္တောသော ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တော. महाधम्मपालजातकात स्वतःच्या पत्नीविषयी संतुष्ट असण्याला (सदारसंतोष) "ब्रह्मचर्य" म्हटले आहे. ဟီနေန ဗြဟ္မစရိယေန, ခတ္တိယေ ဥပပဇ္ဇတိ; မဇ္ဈိမေန စ ဒေဝေသု, ဥတ္တမေန ဝိသုဇ္ဈတီ’’တိ "हीन ब्रह्मचर्याने क्षत्रियकुळात जन्म मिळतो, मध्यम ब्रह्मचर्याने देवांमध्ये जन्म मिळतो आणि उत्तम ब्रह्मचर्याने मनुष्य विशुद्ध होतो." ဧဝံ နိမိဇာတကေ အဝီတိက္ကမဝသေန ကတော ဥပေါသထော ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တော. ‘‘ဣဒံ ခေါ ပန ပဉ္စသိခ ဗြဟ္မစရိယံ ဧကန္တနိဗ္ဗိဒါယ ဝိရာဂါယ…ပေ… အယမေဝ အရိယော အဋ္ဌင်္ဂိကော မဂ္ဂေါ’’တိ [Pg.149] မဟာဂေါဝိန္ဒသုတ္တသ္မိံယေဝ အရိယမဂ္ဂေါ ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တော. ‘‘တယိဒံ ဗြဟ္မစရိယံ ဣဒ္ဓဉ္စေဝ ဖီတဉ္စ ဝိတ္ထာရိကံ ဗာဟုဇညံ ပုထုဘူတံ ယာဝဒေဝ မနုဿေဟိ သုပ္ပကာသိတ’’န္တိ ပါသာဒိကသုတ္တေ သိက္ခတ္တယသင်္ဂဟံ သကလံ သာသနံ ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တံ. अशा प्रकारे, निमिजातकात (नियम किंवा शीलांचे) उल्लंघन न करण्याच्या स्वरूपात पाळलेल्या उपोसथाला "ब्रह्मचर्य" म्हटले आहे. "हे पंचशिखा! हे ब्रह्मचर्य एकांत निर्वेदासाठी (वैराग्यासाठी), विरागासाठी... पे... हाच आर्य अष्टांगिक मार्ग आहे" असे महागोविंदसुत्तात आर्यमार्गालाच "ब्रह्मचर्य" म्हटले आहे. "हे ब्रह्मचर्य समृद्ध, संपन्न, विस्तृत, बहुजनप्रिय, सर्वत्र पसरलेले आणि मनुष्यांमध्ये चांगल्या प्रकारे प्रकाशित झालेले आहे" असे पासादिकसुत्तात त्रिशिक्षांच्या संग्रहरूप संपूर्ण शासनाला (बुद्धांच्या शिकवणीला) "ब्रह्मचर्य" म्हटले आहे. ‘‘အပိ အတရမာနာနံ, ဖလာသာဝ သမိဇ္ဈတိ; ဝိပက္ကဗြဟ္မစရိယောသ္မိ, ဧဝံ ဇာနာဟိ ဂါမဏီ’’တိ "घाई न करणाऱ्यांची देखील फळाची आशा पूर्ण होते; माझे ब्रह्मचर्य परिपक्व झाले आहे, हे ग्रामणी! तू असे जाण." ဧတ္ထ အဇ္ဈာသယော ‘‘ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိ ဝုတ္တော. ဣစ္စေဝံ – येथे अध्याशयाला (उच्च हेतूला/संकल्पाला) "ब्रह्मचर्य" म्हटले आहे. अशा प्रकारे – ဒါနံ ဝေယျာဝဋိယဉ္စ, သိက္ခာ ဗြဟ္မဝိဟာရကာ; ဓမ္မက္ခာနံ မေထုနတာ-ဝိရတိ စ ဥပေါသထော. दान, वैयावृत्य (सेवा), शिक्षा (शील-प्रशिक्षण), ब्रह्मविहार, धम्मोपदेश (धम्मकथन), मैथुनापासून विरती आणि उपोसथ. သဒါရေသု စ သန္တောသော, အရိယမဂ္ဂေါ စ သာသနံ; အဇ္ဈာသယော စိမေ ဗြဟ္မ-စရိယသဒ္ဒေန ဝုစ္စရေ. स्वतःच्या पत्नीविषयी संतोष, आर्यमार्ग, बुद्धशासन आणि अध्याशय (उच्च हेतू) – हे सर्व 'ब्रह्मचर्य' या शब्दाने सांगितले जातात. ဟုရ ကောဋိလ္လေ. ဟုရတိ. 'हुर' (धातू) कुटिलतेच्या (वाकडेपणाच्या) अर्थात आहे. 'हुरति' (तो कुटिल होतो/वाकतो). သရ သဒ္ဒေါပတာပေသု. သရတိ. သရော, သရဏံ. 'सर' (धातू) शब्द (आवाज) आणि उपताप (पीडा देणे/तप्त करणे) या अर्थांमध्ये आहे. 'सरति'. 'सरो' (बाण/स्वर), 'सरणम्' (शरण). ဧတ္ထ စ သရောတိ သဒ္ဒေါပိ ဝုစ္စတိ ဥသုပိ. သရဏန္တိ သရတိ ဥပတာပေတိ ဟိံသတိ သရဏဂတာနံ တေနေဝ သရဏဂမနေန ဘယံ သန္တာပံ ဒုက္ခံ ဒုဂ္ဂတိံ ပရိကိလေသဉ္စာတိ သရဏံ, ဗုဒ္ဓါဒိရတနတ္တယံ. အထ ဝါ သဒ္ဓါ ပသန္နာ မနုဿာ ‘‘အမှာကံ သရဏမိဒ’’န္တိ သရန္တိ စိန္တေန္တိ, တံ တတ္ထ စ ဝါစံ နိစ္ဆရန္တိ ဂစ္ဆန္တိ စာတိပိ သရဏံ. आणि येथे 'सरो' म्हणजे शब्द (आवाज) देखील म्हटले जाते आणि बाण (उसु) देखील. 'शरण' (सरणम्) म्हणजे जे शरण आलेल्यांच्या भय, संताप, दुःख, दुर्गती आणि क्लेशांना त्या शरण जाण्यानेच नष्ट करते, पीडित करते किंवा हिंसेत बदलते, ते 'शरण' होय; म्हणजेच बुद्ध इत्यादी त्रिरत्न. किंवा, श्रद्धावान व प्रसन्न झालेले मनुष्य "हे आमचे शरण आहे" असे स्मरण करतात, चिंतन करतात, आणि त्याविषयी वाणी उच्चारतात व तिथे जातात, म्हणूनही ते 'शरण' आहे. သရ စိန္တာယံ. သရတိ, သုသရတိ ဣစ္စပိ ပယောဂေါ. အပ္ပက္ခရာနဉှိ ဗဟုဘာဝေါ အညထာဘာဝေါ စ ဟောတိ, ယထာ ‘‘ဒွေ, ဒုဝေ, တဏှာ တသိဏာ, ပမှံ, ပခုမ’’န္တိ. အနုဿရတိ, ပဋိဿရတိ. သရန္တိ ဧတာယ သတ္တာ, သယံ ဝါ သရတိ, သရဏမတ္တမေဝ ဝါ ဧတန္တိ သတိ. အနုဿတိ, ပဋိဿတိ. သရတီတိ သတော. ပုနပ္ပုနံ သရတီတိ ပဋိဿတော. 'सर' (धातू) चिंतनाच्या (स्मरणाच्या) अर्थात आहे. 'सरति', 'सुसरति' असा प्रयोग होतो. कमी अक्षरे असलेल्या शब्दांचे बहुविध रूप आणि परिवर्तन होते, जसे की "द्वे, दुवे; तण्हा, तसिणा; पम्हं, पखुमं". 'अनुस्सरति' (अनुस्मरण करतो), 'पटिस्सरति' (प्रतिस्मरण करतो). ज्याच्याद्वारे प्राणी स्मरण करतात, किंवा जे स्वतः स्मरण करते, किंवा जे केवळ स्मरणमात्र आहे, ती 'सति' (स्मृती) होय. 'अनुस्सति' (अनुस्मृती), 'पटिस्सति' (प्रतिस्मृती). जो स्मरण करतो तो 'सतो' (स्मृतिमान). जो वारंवार स्मरण करतो तो 'पटिस्सतो' (प्रतिस्मृतिमान). ဒွရ [Pg.150] သံဝရဏေ. သံဝရဏံ ရက္ခဏာ. ဒွရတိ. ဒွါရံ. ဒွိသဒ္ဒူပပဒအရဓာတုဝသေနပိ ဣဒံ ရူပံ သိဇ္ဈတိ. တတြိမာနိ နိဗ္ဗစနာနိ – ဒွရန္တိ သံဝရန္တိ ရက္ခန္တိ ဧတေနာတိ ဒွါရံ, အထ ဝါ ဒွေ ကဝါဋာ အရန္တိ ဂစ္ဆန္တိ ပဝတ္တန္တိ ဧတ္ထာတိပိ ဒွါရန္တိ. ဂေဟဒွါရမ္ပိ ကာယဒွါရာဒီနိပိ ဥပါယောပိ ဒွါရန္တိ ဝုစ္စတိ. ပါဠိယံ တု ‘‘ဒွါရံ ဒွါရာ’’တိ စ ဣတ္ထိနပုံသကဝသေန ဒွါရသဒ္ဒေါ ဝုတ္တော. တထာ ဟိ ‘‘ဒွါရမ္ပိ သုရက္ခိတံ ဟောတီ’’တိ စ ‘‘ဒွါရာပေသာ’’တိ စ တဿ ဒွိလိင်္ဂတာ ဝုတ္တာ. 'दवर' (धातू) संवरणाच्या (बंद करण्याच्या) अर्थात आहे. संवरण म्हणजे रक्षण करणे. 'दवरति'. 'द्वारं' (द्वार/दरवाजा). 'द्वि' या शब्दाच्या उपपदासह 'अर' धातूच्या योगाने देखील हे रूप सिद्ध होते. त्याविषयी ही व्युत्पत्ती आहे – ज्याच्याद्वारे बंद करतात किंवा रक्षण करतात ते 'द्वार'; अथवा जेथे दोन कवाडे (दारे) फिरतात, जातात किंवा कार्य करतात ते 'द्वार'. घराचे द्वार, कायद्वार (शरीरद्वार) इत्यादी आणि उपायाला देखील 'द्वार' म्हटले जाते. पाळीमध्ये 'द्वार' शब्द स्त्रीलिंग आणि नपुंसकलिंग या दोन्ही रूपांत "द्वारं" आणि "द्वारा" असा वापरला जातो. जसे की "द्वारम्पि सुरक्खितं होति" आणि "द्वारापेसा" यावरून त्याचे द्विलिंगत्व स्पष्ट होते. ဂရ ဃရ သေစနေ. ဂရတိ. ဃရတိ. ဃရံ. 'गर' आणि 'घर' (धातू) सिंचनाच्या (शिंपडण्याच्या) अर्थात आहेत. 'गरति'. 'घरति'. 'घरं' (घर). ဓူရ ဟုစ္ဆနေ. ဟုစ္ဆန ကောဋိလ္လံ. ဓူရတိ. 'धूर' (धातू) हुच्छनाच्या (कुटिलतेच्या/वाकडेपणाच्या) अर्थात आहे. हुच्छन म्हणजे कुटिलता. 'धूरति'. တရ ပ္လဝနသရဏေသု. တရတိ. တရဏံ. တိတ္ထံ. တိဏ္ဏော. ဥတ္တိဏ္ဏော. ဩတိဏ္ဏော ဣစ္စာဒီနိ. တတ္ထ တရဏံ ဝုစ္စတိ နာဝါ, တရတိ ဥဒကပိဋ္ဌေ ပ္လဝတိ, တရန္တိ ဥတ္တရန္တိ ဝါ နဒိံ ဧတေနာတိ အတ္ထေန. 'तर' (धातू) प्लवन (पोहणे/तरंगणे) आणि सरण (पार करणे/जाणे) या अर्थांमध्ये आहे. 'तरति'. 'तरणं'. 'तित्थं' (तीर्थ/घाट). 'तिण्णो' (पार झालेला). 'उत्तिण्णो' (पार गेलेला). 'ओतिण्णो' (उतरलेला) इत्यादी. तेथे 'तरण' म्हणजे नौका (नाव) म्हटले जाते, कारण ती पाण्याच्या पृष्ठभागावर तरंगते (प्लवति), या अर्थाने किंवा ज्याच्याद्वारे नदी पार करतात (तरन्ति किंवा उत्तरन्ति) या अर्थाने. နာဝါ ပ္လဝေါ တရံ ပေါတော, တရဏံ ဥတ္တရံ တထာ; ဇလယာနန္တိ ဧတာနိ, နာဝါနာမာနိ ဟောန္တိ တု. "नावा (नौका), प्लव, तर, पोत, तरण, उत्तर आणि जलयान – ही सर्व नौकेचीच नावे आहेत." တရ သမ္ဘမေ. သမ္ဘမော အနဝဋ္ဌာနံ. တရတိ. တရိတော. တုရင်္ဂေါ. 'तर' (धातू) संभ्रमाच्या (घाईच्या/चंचलतेच्या) अर्थात आहे. संभ्रम म्हणजे अनवस्थान (अस्थिरता). 'तरति'. 'तरितो'. 'तुरङ्गो' (घोडा). ဧတ္ထ စ ‘‘သော မာသခေတ္တံ တရိတော အဝါသရိ’’န္တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ တရိတောတိ တုရိတော သမ္ဘမန္တော. အဝါသရိန္တိ ဥပဂစ္ဆိံ ဥပဝိသိံ ဝါ. आणि येथे "सो मासखेत्तं तरितो अवासरि" (तो उडदाच्या शेतात घाईघाईने शिरला) हे पाळीचे उदाहरण आहे. तेथे 'तरितो' म्हणजे घाई केलेला (तुरितो), संभ्रमित झालेला (सम्भमन्तो). 'अवासरि' म्हणजे जवळ गेला (उपगच्छि) किंवा प्रवेश केला/बसला (उपविसि). ဇရ ရောဂေ. ဧတ္ထ ဇရရောဂေါယေဝ ‘‘ရောဂေါ’’တိ အဓိပ္ပေတော ပယောဂဝသေန. ဇရသဒ္ဒဿ ဟိ ဇရရောဂေ ပဝတ္တနိယမနတ္ထံ ‘‘ရောဂေ’’တိ ဝုတ္တံ. တေန အညော ရောဂေါ ဣဓ ရောဂသဒ္ဒေန န ဝုစ္စတိ. ဇရတိ. ဇရော. သဇ္ဇရော. ပဇ္ဇရရောဂေါ. ဇရေန ပီဠိတာ မနုဿာ. ယတ္ထ တု အယံ ဝယောဟာနိဝါစကော[Pg.151], တတ္ထ ပယောဂေ ‘‘ဇီရတိ, ဇရာ’’တိ စဿ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'जर' (धातू) रोगाच्या अर्थात आहे. येथे प्रयोगाच्या अनुसार 'जरा-रोग' (वृद्धत्वाचा आजार) हाच 'रोग' या शब्दाने अभिप्रेत आहे. 'जर' शब्दाची जरा-रोगामध्येच प्रवृत्ती मर्यादित करण्यासाठी "रोगे" असे म्हटले आहे. त्यामुळे इतर रोगांना येथे 'रोग' शब्दाने म्हटले जात नाही. 'जरति'. 'जरो' (ताप/ज्वर). 'सज्जरो'. 'पज्जररोगो' (दाहज्वर). ज्वराने (किंवा वृद्धत्वाने) पीडित झालेले मनुष्य. परंतु जेथे हा शब्द वयोवृद्धतेचा (वय कमी होण्याचा) वाचक असतो, तेथे प्रयोगात "जीरति" आणि "जरा" अशी त्याची रूपे होतात. ဒရ ဘယေ. ဒရတိ. ဒရီ. ‘‘ဗီလာသယာ ဒရီသယာ’’တိ နိဒဿနံ. တတ္ထ ဒရီတိ ဘာယိတဗ္ဗဋ္ဌေန ဒရီ. 'दर' (धातू) भयाचा (भीतीच्या) अर्थात आहे. 'दरति'. 'दरी' (गुहा). "बीलासया दरीसया" (बिळात राहणारे, दरीत राहणारे) हे उदाहरण आहे. तेथे 'दरी' म्हणजे भीती वाटण्याच्या ठिकाणाच्या अर्थाने 'दरी' म्हटले आहे. ဒရ အာဒရာနာဒရေသု. ဒရတိ, အာဒရတိ, အနာဒရတိ. အာဒရော, အနာဒရော. 'दर' (धातू) आदर आणि अनादर या अर्थांमध्ये आहे. 'दरति', 'आदरति', 'अनादरति'. 'आदरो' (आदर), 'अनादरो' (अनादर). ဧတ္ထ စ ဒရတီတိ ဒရံ ကရောတီတိ စ အနာဒရံ ကရောတီတိ စ အတ္ထော. ယထာ ဟိ အာရကာသဒ္ဒေါ ဒူရာသန္နဝါစကော, တထာယမ္ပိ ဒရဓာတု အာဒရာနာဒရဝါစကော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ဒရသဒ္ဒေါ စ ကာယဒရထေ စိတ္တဒရထေ ကိလေသဒရထေ စ ဝတ္တတိ. အယဉှိ – आणि येथे 'दरति' म्हणजे 'आदर करतो' आणि 'अनादर करतो' असा अर्थ आहे. ज्याप्रमाणे 'आरक' शब्द दूर आणि जवळ या दोन्ही अर्थांचा वाचक आहे, त्याचप्रमाणे हा 'दर' धातू देखील आदर आणि अनादर या दोन्ही अर्थांचा वाचक समजला पाहिजे. तसेच 'दर' शब्द काय-दर (शारीरिक क्लेश), चित्त-दर (मानसिक क्लेश) आणि क्लेश-दर (विकारांचे क्लेश) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. जसे की – အာဒိတ္တံ ဝတ မံ သန္တံ, ဃတသိတ္တံဝ ပါဝကံ; ဝါရိနာ ဝိယ ဩသိဉ္စိ, သဗ္ဗံ နိဗ္ဗာပယေ ဒရ’’န္တိ "तूप ओतलेल्या अग्नीप्रमाणे जळणाऱ्या मला, पाण्याने शिंपडावे त्याप्रमाणे शिंपडून माझे सर्व क्लेश (दर) शांत केले." ဧတ္ထ ကာယဒရထေ စိတ္တဒရထေ စ ဝတ္တတိ. ‘‘ဝီတဒ္ဒရော ဝီတသောကော ဝီတသလ္လော, သယံ အဘိညာယ အဘာသိ ဗုဒ္ဓေါ’’တိ ဧတ္ထ ပန ကိလေသဒရထေ ဝတ္တတိ. ဝီတဒ္ဒရောတိ ဟိ အဂ္ဂမဂ္ဂေန သဗ္ဗကိလေသာနံ သမုစ္ဆိန္နတ္တာ ဝိဂတကိလေသဒရထောတိ အတ္ထော. येथे हा शब्द शारीरिक क्लेश आणि मानसिक क्लेश या अर्थांमध्ये वापरला आहे. "क्लेशरहित (वीतद्दर), शोकरहित, शल्यरहित होऊन बुद्धांनी स्वतः अभिज्ञा प्राप्त करून धम्म उपदेशिला" येथे मात्र हा शब्द क्लेश-दराच्या (विकारांच्या क्लेशाच्या) अर्थात वापरला आहे. 'वीतद्दर' म्हणजे अग्र मार्गाने (अर्हत मार्गाने) सर्व क्लेशांचा समूळ उच्छेद केल्यामुळे ज्यांचे क्लेश नष्ट झाले आहेत असा अर्थ आहे. နရ နယနေ. နရတိ. နရော, နာရီ. 'नर' (धातू) नयनाच्या (मार्ग दाखवण्याच्या/नेण्याच्या) अर्थात आहे. 'नरति'. 'नरो' (नर/पुरुष), 'नारी' (स्त्री). ဧတ္ထ နရောတိ ပုရိသော. သော ဟိ နရတိ နေတီတိ နရော. ယထာ ပဌမပကတိဘူတော သတ္တော ဒတရာယ ပကတိယာ သေဋ္ဌဋ္ဌေန ပုရိ ဥစ္စာဋ္ဌာနေ သေတိ ပဝတ္တတီတိ ပုရိသောတိ ဝုစ္စတိ, ဧဝံ နယနဋ္ဌေန နရောတိ ဝုစ္စတိ. ပုတ္တဘာတုဘူတောပိ ဟိ ပုဂ္ဂလော မာတုဇေဋ္ဌဘဂိနီနံ နေတုဋ္ဌာနေ တိဋ္ဌတိ, ပဂေဝ ဣတရော ဣတရာသံ. နာရီတိ နရေန ယောဂတော, နရဿာယန္တိ ဝါ နာရီ. အပရမ္ပေတ္ထ နရသဒ္ဒဿ နိဗ္ဗစနံ, နရိယတိ သကေန [Pg.152] ကမ္မေန နိယျတီတိ နရော, သတ္တော မနုဿော ဝါ. ‘‘ကမ္မေန နိယျတေဩ လောကော’’တိ ဟိ ဝုတ္တံ. တတ္ထ နရသဒ္ဒဿ တာဝ ပုရိသဝစနေ ‘‘နရာ စ အထ နာရိယော’’တိ နိဒဿနံ. သတ္တမနုဿဝစနေ ပန ‘‘ဗုဒ္ဓေါ အယံ ဧဒိသကော နရုတ္တမော. အာမောဒိတာ နရမရူ’’တိ စ နိဒဿနံ, တသ္မာ ‘‘နရောတိ ပုရိသော, နရောတိ သတ္တော, နရောတိ မနုဿော’’တိ တတ္ထ တတ္ထ ယထာသမ္ဘဝံ အတ္ထော သံဝဏ္ဏေတဗ္ဗော. येथे 'नरो' म्हणजे पुरुष. तो मार्ग दाखवतो (नेतो) म्हणून 'नरो' (नर) म्हटला जातो. ज्याप्रमाणे प्रथम प्रकृती असलेला प्राणी अधिक दृढ प्रकृतीमुळे श्रेष्ठत्वाच्या अर्थाने उच्च स्थानावर (पुरी) राहतो म्हणून त्याला 'पुरिसो' (पुरुष) म्हटले जाते, त्याचप्रमाणे मार्ग दाखवण्याच्या (नेण्याच्या) अर्थाने त्याला 'नरो' म्हटले जाते. कारण मुलगा किंवा भाऊ असलेला व्यक्ती देखील आई आणि मोठ्या बहिणीसाठी मार्गदर्शकाच्या (नेत्याच्या) स्थानी असतो, मग इतरांचा इतर स्त्रियांशी काय संबंध! 'नारी' म्हणजे नराशी (पुरुषाशी) युक्त असल्यामुळे किंवा नराची (पुरुषाची) असल्यामुळे ती 'नारी'. येथे 'नर' शब्दाची दुसरी व्युत्पत्ती अशी आहे – जो स्वतःच्या कर्माने नेला जातो (नरीयति/प्रेरित केला जातो) तो 'नरो' (प्राणी किंवा मनुष्य) होय. कारण "जग कर्माने नेले जाते" (कम्मेन निय्यति लोको) असे म्हटले आहे. तेथे 'नर' शब्दाचा पुरुष या अर्थातील प्रयोगासाठी "नरा च अथ नारियो" (पुरुष आणि स्त्रिया) हे उदाहरण आहे. प्राणी किंवा मनुष्य या अर्थातील प्रयोगासाठी "बुद्धो अयं एदिसको नरुत्तमो। आमोदिता नरमरू" (असे हे बुद्ध नरोत्तम आहेत. मनुष्य आणि देव हर्षित झाले) हे उदाहरण आहे. म्हणून "नरो म्हणजे पुरुष, नरो म्हणजे प्राणी, नरो म्हणजे मनुष्य" असा त्या त्या ठिकाणी योग्यतेनुसार अर्थ स्पष्ट केला पाहिजे. ဟရ ဟရဏေ. ဟရဏံ ပဝတ္တနံ. ဟရတိ. သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ. ဝိဟာသိ. ဝိဟံသု. ဝိဟရိဿတိ. အပ္ပမတ္တော ဝိဟိဿတိ. ဝေါဟရတိ. သံဝေါဟရတိ. သဗ္ဗော ဟရတိ ဝါ. ရူပိယသံဝေါဟာရော, ရူပိယသဗ္ဗောဟာရော ဝါ. ပါဋိဟာရိယံ. ပီတိပါမောဇ္ဇဟာရော. ဝိဟာရော. ဝေါဟာရော. အဘိဟာရော. စိတ္တံ အဘိနီဟရတိ. သာသနေ ဝိဟရံ, ဝိဟရန္တော, ဝိဟရမာနော. ဝိဟာတဗ္ဗံ, ဝိဟရိတုံ. ဝိဟရိတွာ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. 'हर' (हृ) धातू हरण (घेऊन जाणे/प्रवृत्त करणे) या अर्थात. हरण म्हणजे प्रवृत्त करणे (चालवणे). 'हरति' (तो हरण करतो/नेतो). 'सावत्थियं विहरति' (श्रावस्तीमध्ये विहार करतात). 'विहासि' (विहार केला). 'विहंसु' (त्यांनी विहार केला). 'विहरिस्सति' (विहार करतील). 'अप्पमत्तो विहिस्सति' (अप्रमत्त होऊन विहार करतील). 'वोहरति' (व्यवहार करतो). 'संवोहरति' (संव्यवहार करतो). किंवा 'सब्बो हरति' (सर्व हरण करतो). 'रूपियसंवोहारो' किंवा 'रूपियसब्बोहारो' (रुपयाचा/नाण्यांचा संव्यवहार). 'पाटिहारियं' (प्रातिहार्य). 'पीतिपामोज्जहारो' (प्रीती आणि प्रामोद्याचे वहन करणारा). 'विहारो' (विहार). 'वोहारो' (व्यवहार). 'अभिहारो' (अभिहार/भेट). 'चित्तं अभिनीहरति' (चित्त बाहेर काढतो/एकाग्र करतो). 'सासने विहरं, विहरन्तो, विहरमानो' (शासनात विहार करणारा). 'विहातब्बं, विहरितुं' (विहार करावा, विहार करण्यासाठी). 'विहरित्वा' (विहार करून). इतर रूपांचीही अशीच योजना करावी. တတ္ထ ပါဋိဟာရိယန္တိ သမာဟိတေ စိတ္တေ ဝိဂတူပက္ကိလေသေ ကတကိစ္စေန ပစ္ဆာ ဟရိတဗ္ဗံ ပဝတ္တေတဗ္ဗန္တိ ပါဋိဟာရိယံ. ပဋီတိ ဟိ အယံ သဒ္ဒေါ ‘‘ပစ္ဆာ’’တိ ဧတဿ အတ္ထံ ဗောဓေတိ ‘‘တသ္မိံ ပဋိပဝိဋ္ဌမှိ, အညော အာဂဉ္ဆိ ဗြာဟ္မဏော’’တိအာဒီသု ဝိယ. ဝိဟာရောတိ ဌာနနိသဇ္ဇာဒိနာ ဝိဟရန္တိ ဧတ္ထာတိ ဝိဟာရော, ဘိက္ခူနံ အာဝါသော. ဝိဟရဏံ ဝါ ဝိဟာရော, ဝိဟရဏကြိယာ. ဝေါဟာရောတိ ဗျဝဟာရောပိ ပဏ္ဏတ္တိပိ ဝစနမ္ပိ စေတနာပိ. တတ္ထ त्यात 'पाटिहारियं' (प्रातिहार्य) म्हणजे समाहित (एकाग्र) चित्त असताना, उपक्किलेस (मळभ/क्लेश) दूर झाल्यावर, कर्तव्य पूर्ण करून नंतर जे हरण करावे किंवा प्रवृत्त करावे ते 'प्रातिहार्य' होय. कारण 'पटि' हा शब्द 'पच्छा' (नंतर) या अर्थाचा बोध करतो, जसे की 'तस्मिं पटिपविट्ठम्हि, अञ्ञो आगञ्छि ब्राह्मणो' (त्याच्या नंतर प्रवेश केल्यावर दुसरा ब्राह्मण आला) इत्यादींमध्ये. 'विहार' म्हणजे ज्या ठिकाणी उभे राहणे, बसणे इत्यादींद्वारे विहार करतात तो 'विहार' होय, म्हणजेच भिक्खूंचा निवासस्थान. किंवा विहार करणे म्हणजे 'विहार' (विहार करण्याची क्रिया) होय. 'वोहार' (व्यवहार) म्हणजे व्यवहारही, प्रज्ञप्तीही (संज्ञा), वचनही आणि चेतनाही होय. त्यात - ယော ဟိ ကောစိ မနုဿေသု, ဝေါဟာရံ ဥပဇီဝတိ; ဧဝံ ဝါသေဋ္ဌ ဇာနာတိ, ဝါဏိဇော သော နဗြာဟ္မဏော’’တိ. “मनुष्यांमध्ये जो कोणी व्यापारावर (व्यवहारावर) उपजीविका करतो, हे वासेठ्ठ! त्याला तू 'व्यापारी' (वाणिज) म्हणून ओळख, तो ब्राह्मण नव्हे.” အယံ [Pg.153] ဗျဝဟာရဝေါဟာရော နာမ. ‘‘သင်္ခါ သမညာ ပညတ္တိ ဝေါဟာရော’’တိ အယံ ပဏ္ဏတ္တိဝေါဟာရော နာမ. တထာ တထာ ဝေါဟရန္တိ ပရာမသန္တီတိ အယံ ဝစနဝေါဟာရော နာမ. ‘‘အဋ္ဌ အရိယဝေါဟာရာ, အဋ္ဌ အနရိယဝေါဟာရာ’’တိ အယံ စေတနာဝေါဟာရော နာမ. ဣစ္စေဝံ – याला 'व्यवहार-व्यवहार' (व्यापारविषयक व्यवहार) असे म्हणतात. 'संज्ञा, समज्ञा, प्रज्ञप्ती, व्यवहार' याला 'प्रज्ञप्ती-व्यवहार' (संज्ञात्मक व्यवहार) असे म्हणतात. ज्या ज्या प्रकारे बोलतात किंवा निर्देश करतात, त्याला 'वचन-व्यवहार' (भाषिक व्यवहार) असे म्हणतात. 'आठ आर्य व्यवहार, आठ अनार्य व्यवहार' याला 'चेतना-व्यवहार' (मानसिक व्यवहार) असे म्हणतात. अशा प्रकारे - ဗျဝဟာရေ ဝစနေ စ, ပဏ္ဏတ္တိစေတနာသု စ; ဝေါဟာရသဒ္ဒေါ စတူသု, ဣမေသွတ္ထေသု ဒိဿတိ. व्यापार (व्यवहार), वचन, प्रज्ञप्ती आणि चेतना या चार अर्थांमध्ये 'वोहार' (व्यवहार) हा शब्द दिसून येतो. ဟရ အပနယနေ. အပနယနံ နီဟရဏံ. ဒေါသံ ဟရတိ. နီဟရတိ. နီဟာရော, ပရိဟရတိ. ပရိဟာရော. ရဇောဟရဏံ. သဗ္ဗဒေါသဟရော ဓမ္မော. ဘဂဝတော စ သာသနဿ စ ပဋိပက္ခေ တိတ္ထိယေ ဟရတီတိ ပါဋိဟာရိယံ. မတ္တာဝဏ္ဏဘေဒေနေတ္ထ ‘‘ပါဋိဟေရံ ပါဋိဟီရံ ပါဋိဟာရိယ’’န္တိ တီဏိ ပဒရူပါနိ, ဘဝန္တိ. 'हर' धातू अपनयन (दूर करणे) या अर्थात. अपनयन म्हणजे बाहेर काढणे (नष्ट करणे). 'दोसं हरति' (दोष दूर करतो). 'नीहरति' (बाहेर काढतो). 'नीहारो' (बाहेर काढणे), 'परिहरति' (परिहार करतो/टाळतो). 'परिहारो' (परिहार/बचाव). 'रजोहरणं' (धूळ साफ करणारे वस्त्र/रजोहरण). 'सब्बदोसहो धम्मो' (सर्व दोष दूर करणारा धर्म). भगवान आणि त्यांच्या शासनाच्या विरोधी असलेल्या तीर्थिकांना (परधर्मीयांना) पराभूत करतो (दूर करतो) म्हणून ते 'पाटिहारियं' (प्रातिहार्य) होय. मात्रा आणि वर्णांच्या भेदाने येथे 'पाटिहेरं', 'पाटिहीरं' आणि 'पाटिहारियं' अशी तीन पदे (रूपे) होतात. ဟရ အာဒါနေ. အဒိန္နံ ဟရတိ. ဟရိဿတိ. ဟာဟိတိ ဣစ္စပ. ‘‘ခရာဇိနံ ပရ သုဉ္စ, ခါရိကာဇဉ္စ ဟာဟိတီ’’တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. အာဟရတိ, အဝဟရတိ, သံဟရတိ, အပဟရတိ, ဥပဟရတိ, ပဟရတိ, သမ္ပဟရတိ, သမာဟရတိ. မနောဟရော ပါသာဒေါ. ပရဿဟရဏံ. အာဟာရော, အဝဟာရော, သံဟာရော, ဥပဟာရော, သမ္ပဟာရော, သမာဟာရော. ဟရိယျတိ, အာဟရိယျတိ. အာဟရိယျန္တိ. အာဟဋံ, ဟရိတုံ, အာဟရိတုံ, အာဟရိတွာ, အာဟရိတွာန. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. 'हर' धातू आदान (स्वीकारणे/घेणे) या अर्थात. 'अदिन्नं हरति' (न दिलेले घेतो/चोरी करतो). 'हरिस्सति' (घेईल). 'हाहिति' हे देखील रूप होते. 'खराजिनं पर सुञ्च, खारिकाजञ्च हाहिति' (गाढवाचे चामडे मागे सोडून तो खांद्यावरील कावड वाहून नेईल) हे याचे उदाहरण आहे. 'आहरति' (आणतो), 'अवहरति' (अपहरण करतो), 'संहरति' (एकत्र करतो), 'अपहरति' (अपहरण करतो), 'उपहरति' (भेट देतो), 'पहरति' (प्रहार करतो), 'सम्पहरति' (प्रहार करतो), 'समाहरति' (एकत्र करतो). 'मनोहोरो पासादो' (मनोहर महाल). 'परस्सहरणं' (दुसऱ्याचे हरण करणे). 'आहारो' (आहार), 'अवहारो' (अपहार), 'संहारो' (संहार/संक्षेप), 'उपहारो' (भेट), 'सम्पहारो' (प्रहार/युद्ध), 'समाहारो' (समुदाय/एकत्रीकरण). 'हरिय्यति' (हरण केले जाते), 'आहरिय्यति' (आणले जाते). 'आहरिय्यन्ति' (आणले जातात). 'आहटं' (आणलेले), 'हरितुं' (हरण करण्यासाठी), 'आहरितुं' (आणण्यासाठी), 'आहरित्वा', 'आहरित्वान' (आणून). इतर रूपांचीही अशीच योजना करावी. ဓရ ဓရဏေ. ဓရဏံ ဝိဇ္ဇမာနတာ. ဓရတိ. ဓရတေ သတ္ထုသာသနံ. 'धर' धातू धरण (धारण करणे/अस्तित्वात असणे) या अर्थात. धरण म्हणजे विद्यमानता (अस्तित्व असणे). 'धरति' (अस्तित्वात आहे/धारण करतो). 'धरते सत्थुसासनं' (शास्त्यांचे शासन टिकून आहे). ဓရ အဝိဒ္ဓံသနေ. နိဗ္ဗာနံ နိစ္စံ ဓရတိ. 'धर' धातू अविद्धंसन (नाश न होणे/शाश्वत राहणे) या अर्थात. 'निब्बानं निच्चं धरति' (निर्वाण नेहमी शाश्वत राहते). ခရ ခယေ. ခရတိ. ခရဏံ. နက္ခရန္တိ န ခိယျန္တီတိ အက္ခရာနိ. နက္ခရန္တိ န နဿန္တီတိ နက္ခတ္တာနီတိ ပေါရာဏာ. 'खर' धातू क्षय (नाश होणे) या अर्थात. 'खरति' (नाश पावतो). 'खरणं' (नाश होणे). जे क्षय पावत नाहीत (नक्खरन्ति) आणि नष्ट होत नाहीत (न खिय्यन्ति), ते 'अक्खराणि' (अक्षरे) होत. जे क्षय पावत नाहीत आणि नष्ट होत नाहीत, ती 'नक्खत्तानि' (नक्षत्रे) होत, असे प्राचीन आचार्य म्हणतात. ဇာဂရနိဒ္ဒက္ခယေ [Pg.154] ဇာဂရတိ. ဇာဂရော, ဇာဂရဏံ, ဇာဂရံ. ဒီဃာ ဇာဂရတော ရတ္တိ. ဇာဂရမာနော. အယဉ္စ ဓာတု တနာဒိဂဏံ ပတွာ ‘‘ဇာဂရောတိ, ပဋိဇာဂရောတီ’’တိ ရူပါနိ ဇနေတိ. 'जागर' धातू निद्राक्षय (जागे राहणे) या अर्थात. 'जागरति' (जागा राहतो). 'जागरो', 'जागरणं', 'जागरं' (जागृती/जागे राहणे). 'दीघा जागरतो रत्ति' (जागणाऱ्यासाठी रात्र दीर्घ असते). 'जागरमानो' (जागा राहणारा). आणि हा धातू तनादिगणात जाऊन 'जागरोति', 'पटिजागरोति' अशी रूपे तयार करतो. ဤရ ဝစနေ ဂတိကမ္ပနေသု စ. ဤရတိ. ဤရိတံ. ဧရိတံ. သမီရဏော. ဇိနေရိတော ဓမ္မော. ကုပ္ပန္တိ ဝါတဿပိ ဧရိတဿ. 'ईर' धातू वचन (बोलणे), गती आणि कंपन (हलणे) या अर्थांमध्ये. 'ईरति' (बोलतो/हलतो). 'ईरितं' (बोललेले/हलायलेले). 'एरितं' (प्रेरित केलेले/हलवलेले). 'समीरणो' (वारा). 'जिनेरितो धम्मो' (जिनांनी - बुद्धांनी - उपदेशिलेला धर्म). 'कुप्पन्ति वातस्सपि एरितस्स' (वाऱ्याने हलविल्यावरही ते क्षुब्ध होतात). တတ္ထ သမီရဏောတိ ဝါတော. သော ဟိ သမီရတိ ဝါယတိ, သမီရေတိ စ ရုက္ခသာခါပဏ္ဏာဒီနိ သုဋ္ဌု ကမ္ပေတီတိ ‘‘သမီရဏော’’တိ ဝုစ္စတိ. त्यात 'समीरण' म्हणजे वारा. कारण तो वाहतो (समीरति) आणि झाडांच्या फांद्या, पाने इत्यादींना चांगल्या प्रकारे कंपित करतो (समीरेति), म्हणून त्याला 'समीरण' असे म्हणतात. ဟရေ လဇ္ဇာယံ. အလုတ္တန္တောယမေကာရန္တော ဓာတု, ဂိလေ ပီတိက္ခယေတိ ဓာတု ဝိယ. ဟရာယတိ. ဟရာယနံ. အဋ္ဋီယာမိ ဟရာယာမိ. 'हरे' धातू लज्जा (लाज वाटणे) या अर्थात. हा 'ए'कारान्त धातू लुप्त न होणारा आहे, जसे की 'गिले पीतिक्खये' (गिळणे आणि पिण्याचा क्षय होणे) या अर्थातील धातू आहे. 'हरायति' (लाज वाटणे). 'हरायनं' (लाज वाटण्याची क्रिया). 'अट्टीयामि हरायामि' (मी पीडित होतो आणि लज्जित होतो). ဧတ္ထ ဟရာယတီတိ လဇ္ဇတိ, ဟိရိံ ကရောတီတိ အတ္ထော. येथे 'हरायति' म्हणजे लाजतो, 'हिरी' (लाज) बाळगतो असा अर्थ आहे. ပရ ပါလနပူရဏေသု. ‘‘ပရတိ, ပရမော’’တိမဿ ရူပါနိ, နရ နယနေတိ ဓာတုဿ ‘‘နရတိ နရော’’တိ ရူပါနိ ဝိယ. 'पर' धातू पालन आणि पूरण (पूर्ण करणे) या अर्थांमध्ये. 'परति', 'परमो' ही याची रूपे आहेत, जसे 'नर नयने' (नेणे) या धातूची 'नरति', 'नरो' अशी रूपे होतात. တတ္ထ ပရတီတိ ပါလေတိ, ပူရတိ ဝါ. သုဒ္ဓကတ္တုဝသေနိဒံ ပဒံ ဝုတ္တံ. ဟေတုကတ္တုဝသေန ဟိ ‘‘ပါရေတိ ပါရယတီ’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ပရမောတိ ပါလကော ပူရကော ဝါ. ဧတ္ထ စ ‘‘ပါရမီ’’တိ ပဒံ ဧတဿတ္ထဿ သာဓကံ. တထာ ဟိ ပါရမီတိ ပရတိ, ပါရေတိ စာတိ ပရမော, ဒါနာဒီနံ ဂုဏာနံ ပါလကော ပူရကော စ မဟာဗောဓိသတ္တော. ပရမဿ ဣဒံ, ပရမဿ ဝါ ဘာဝေါ, ကမ္မံ ဝါ ပါရမီ, ဒါနာဒိကြိယာ. ဂရူဟိ ပန ‘‘ပူရေတီတိ ပရမော, ဒါနာဒီနံ ဂုဏာနံ ပူရကော ပါလကော စာ’’တိ ဝုတ္တံ, တံ ဝီမံသိတဗံ. त्यात 'परति' म्हणजे पालन करतो किंवा पूर्ण करतो. हे पद शुद्ध कर्तृवाचक अर्थाने सांगितले आहे. प्रयोजक (हेतु) अर्थात 'पारेति', 'पारयति' इत्यादी रूपे होतात. 'परम' म्हणजे पालक किंवा पूरक. आणि येथे 'पारमी' (पारमिता) हे पद या अर्थाचे साधक आहे. कारण 'पारमी' म्हणजे जो पालन करतो (परति) आणि पूर्ण करतो (पारेति) तो 'परम' होय, म्हणजेच दानादी गुणांचे पालन करणारा आणि पूर्ण करणारा महाबोधिसत्व. परमाचे हे, किंवा परमाचा भाव किंवा कर्म म्हणजे 'पारमी' (पारमिता), जसे की दानादी क्रिया. परंतु आचार्यांनी 'जो पूर्ण करतो तो परम, दानादी गुणांचा पूरक आणि पालक' असे म्हटले आहे, त्याचा विचार केला पाहिजे. ဝရ ဝရဏေ. ဝရတိ. ဝါရဏော, ဝရုဏော. 'वर' धातू वरण (निवडणे/रोखणे) या अर्थात. 'वरति' (निवडतो/रोखतो). 'वारणो' (हत्ती/रोखणारा), 'वरुणो' (वरुण देव). ဂိရ [Pg.155] နိဂ္ဂိရဏော. နိဂ္ဂိရဏံ ပဂ္ဃရဏံ. ဂိရတိ, ဂိရိ. 'गिर' धातू निग्गिरणा (गिळणे/बाहेर टाकणे) या अर्थात. निग्गिरणा म्हणजे पाझरणे (बाहेर पडणे). 'गिरति' (गिळतो/बाहेर टाकतो), 'गिरी' (पर्वत). ဧတ္ထ ဂိရီတိ ပဗ္ဗတာ, ယော ‘သေလော’’တိအာဒီဟိ အနေကေဟိ နာမေဟိ ကထိယတိ. သော ဟိ သန္ဓိသင်္ခါတေဟိ ပဗ္ဗေဟိ စိတတ္တာ ပဗ္ဗမဿ အတ္ထီတိ ပဗ္ဗတော. ဟိမဝမနာဒိဝသေန ဇလဿ သာရဘူတာနံ ဘေသဇ္ဇာဒိဝတ္ထူနဉ္စ ဂိရဏတော ဂိရီတိ ဝုစ္စတိ. येथे 'गिरी' म्हणजे पर्वत, ज्याला 'सेल' (शैल) इत्यादी अनेक नावांनी संबोधले जाते. कारण तो सांधे (संधी) म्हटल्या जाणाऱ्या पर्वानी (पायऱ्यांनी/भागांनी) युक्त असल्यामुळे त्याला 'पब्बत' (पर्वत) म्हणतात. हिमवान इत्यादींच्या माध्यमातून पाणी आणि सारभूत औषधी इत्यादी वस्तू बाहेर टाकल्यामुळे त्याला 'गिरी' असे म्हणतात. ဣမာနိ ပနဿ နာမာနိ – आणि ही त्याची नावे आहेत - ပဗ္ဗတော အစလော သေလော, နဂေါ ဂိရိ မဟီဓရော; အဒ္ဒိ သိလုစ္စယော စာတိ, ဂိရိပဏ္ဏတ္တိယော ဣမာ. पब्बत (पर्वत), अचल, सेल (शैल), नग, गिरी, महीधर, अद्दि (अद्रि) आणि सिलुच्चय (शिलोच्चय) - या गिरीच्या (पर्वताच्या) संज्ञा आहेत. သုရ ဣဿရိယဒိတ္တီသု. သုရတိ. သုရော, အသုရော. 'सुर' धातू ऐश्वर्य आणि दीप्ती (तेज) या अर्थांमध्ये. 'सुरति' (ऐश्वर्य भोगतो/चमकतो). 'सुरो' (देव), 'असुरो' (असुर). တတြ သရောတိ သုရတိ ဤသတိ ဒေဝိဿရိယံ ပါပုဏာတိ ဝိရောစတိ စာတိ သုရော. သုန္ဒရာ ရာ ဝါစာ အဿာတိ ဝါ သုရော, ဒေဝေါ. ဒေဝါဘိဓာနာနိ ဒိဝါဒိဂဏေ ပကာသေဿာမ. အသုရောတိ ဒေဝေါ ဝိယ န သုရတိ န ဤသတိ န ဝိရောစတိ စာတိ အသုရော. သုရာနံ ဝါ ပဋိပက္ခော မိတ္တပဋိပက္ခာ အမိတ္တာ ဝိယာတိ အသုရော, ဒါနဝေါ, ယော ‘‘ပုဗ္ဗဒေဝေါ’’တိပိ ဝုစ္စတိ. တထာ ဟိ ကုမ္ဘဇာတကေ ဝုတ္တံ – त्यात 'सुर' म्हणजे जो ऐश्वर्य भोगतो (सुरति), शासन करतो (ईसति), देवांचे ऐश्वर्य प्राप्त करतो आणि चमकतो (विरोचति) तो 'सुर' (देव) होय. किंवा ज्याची वाणी सुंदर (सुन्दरा रा) आहे तो 'सुर' म्हणजे देव. देवांची नावे आम्ही दिवादिगणात स्पष्ट करू. 'असुर' म्हणजे जो देवाप्रमाणे ऐश्वर्य भोगत नाही, शासन करत नाही आणि चमकत नाही तो 'असुर' होय. किंवा सुरांचा (देवांचा) जो शत्रू (प्रतिपक्ष) आहे, जसे मित्राचा शत्रू अमित्र असतो, तसा तो 'असुर' किंवा दानव होय, ज्याला 'पुब्बदेव' (पूर्वदेव) असेही म्हणतात. जसे की कुंभजातकात म्हटले आहे - ‘‘ယံ ဝေ ပိဝိတွာ ပုဗ္ဗဒေဝါ ပမတ္တာ,တိဒိဝါ စုတာ သဿတိယာ သမာယာ; တံ တာဒိသံ မဇ္ဇမိမံ နိရတ္ထံ,ဇာနံ မဟာရာဇ ကထံ ပိဝေယျာ’’တိ. “जे पिऊन पूर्वदेव (असुर) प्रमत्त (बेसावध) झाले आणि त्रिदश (स्वर्गातून) कायमचे च्युत झाले; हे महाराज! असे ते निरर्थक मद्य जाणूनबुजून कोणी कसे प्यावे?” သဂါထာဝဂ္ဂသံဝဏ္ဏနာယံ ပန ‘‘န သုရံ ပိဝိမှ, န သုရံ ပိဝိမှာ’တိ အာဟံသု, တတော ပဋ္ဌာယ အသုရာ နာမ ဇာတာ’’တိ ဝုတ္တံ. परंतु सगाथावग्ग-अट्ठकथेत (सगाथावग्गसंवण्णना) म्हटले आहे की, 'आम्ही सुरा (मद्य) पिणार नाही, आम्ही सुरा पिणार नाही' असे ते म्हणाले, तेव्हापासून त्यांना 'असुर' असे नाव पडले. ဣမာနိ [Pg.156] တဒဘိဓာနာနိ – ही त्यांची (असुरांची) नावे आहेत - အသုရော ပုဗ္ဗဒေဝေါ စ, ဒါနဝေါ ဒေဝတာရိ တု; နာမာနိ အသုရာနန္တိ, ဣမာနိ နိဒ္ဒိသေ ဝိဒူ. असुर, पुब्बदेव (पूर्वदेव), दानव आणि देवतारि (देवांचे शत्रू) - विद्वानांनी ही असुरांची नावे सांगावीत. ပါကော ဣတိ တု ယံ နာမံ, ဧကဿ အသုရဿ တု; ပဏ္ဏတ္တီတိပိ ဧကစ္စေ, ဂရဝေါ ပန အဗြဝုံ. परंतु 'पाको' (पाक) हे जे नाव आहे, ते एका असुराचे नाव आहे; काही आचार्यांच्या मते ही एक संज्ञा आहे, असे गुरूंनी सांगितले आहे. ကုရ သဒ္ဒေ အက္ကောသေ စ. ကုရတိ. ကုရရော, ကုရရီ. ကုမ္မော, ကုမ္မီ. 'कुर' धातू शब्द (आवाज करणे) आणि आक्रोश (शिवीगाळ करणे) या अर्थांमध्ये. 'कुरति' (आवाज करतो). 'कुररो', 'कुररी' (कुरर पक्षी - नर आणि मादी). 'कुम्मो', 'कुम्मी' (कासव - नर आणि मादी). ခုရ ဆေဒနေ ဝိလေခနေ စ. ခုရတိ. ခုရော. 'खुर' धातू छेदन (कापणे) आणि विलेखन (खरवडणे/लिहिणे) या अर्थांमध्ये. 'खुरति' (कापतो). 'खुरो' (खुर/वस्तरा). မုရ သံဝေဌနေ. မုရတိ. မုရော, မောရော. 'मुर' (धातू) वेढणे (गुंडाळणे) या अर्थात. मुरति (वेढतो). मुरो, मोरो. ဃုရ အဘိမတ္တ သဒ္ဒေသု. ဃုရတိ. ဃောရော. 'घुर' (धातू) गर्जना करणे किंवा विशिष्ट आवाज करणे या अर्थात. घुरति (गर्जना करतो). घोरो. ပုရ အဂ္ဂဂမနေ. အဂ္ဂဂမနံ နာမ ပဓာနဂမနံ, ပဌမမေဝ ဂမနံ ဝါ. ပုရတိ. ပုရံ, ပုရီ. အဝါပုရတိ. အဝါပုရေတံ အမတဿ ဒွါရံ. အဝါပုရဏံ အာဒါယ ဂစ္ဆတိ. 'पुर' (धातू) पुढे जाणे (अग्रगमन) या अर्थात. अग्रगमन म्हणजे मुख्य गमन (प्रधानगमन) किंवा सर्वात पहिले जाणे. पुरति (पुढे जातो). पुरं, पुरी (नगर). अवापुरति (उघडतो). 'अवापुरेतं अमतस्स द्वारं' (अमृताचे - निर्वाणाचे दार उघडावे). अवापुरणं (किल्ली) घेऊन जातो. တတ္ထ ပုရန္တိ ရာဇဓာနီ. တထာ ဟိ ‘‘နဂရံ ပုရံ ပုရီ ရာဇဓာနီ’’တိ ဧတေ ပရိယာယာ. ‘‘ဧသော အာဠာရိကော ပေါသော, ကုမာရီ ပုရမန္တရေ’’တိအာဒီသု ပန ဂေဟံ ‘‘ပုရ’’န္တိ ဝုစ္စတိ. ပဓာနတာယ ပုရတော ပုရတော ဂမနေန ဂန္တဗ္ဗန္တိ ပုရံ, ရာဇဓာနီ စေဝ ဂေဟဉ္စ. အဝါပုရဏန္တိ အဝါပုရန္တိ ဝိဝရန္တိ ဒွါရံ ဧတေနာတိ အဝါပုရဏံ, ယံ ‘‘ကုဉ္စိကာ’’တိပိ ‘‘တာဠော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. အဝါပုရတီတိအာဒီသု အဝ အာဣစ္စုဘော ဥပသဂ္ဂါတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. तेथे 'पुरं' म्हणजे राजधानी. कारण, "नगरं, पुरं, पुरी, राजधानी" हे समानार्थी शब्द आहेत. परंतु, "एसो आळारिको पोसो, कुमारी पुरमन्तरे" इत्यादींमध्ये घराला 'पुर' म्हटले आहे. प्रधानतेमुळे पुढे पुढे जाऊन पोहोचण्याचे ठिकाण म्हणजे 'पुर' (राजधानी आणि घर दोन्ही). 'अवापुरण' म्हणजे ज्याच्याद्वारे दार उघडतात (विवरन्ति) ते 'अवापुरण' (किल्ली), ज्याला 'कुंचिका' किंवा 'ताळो' (किल्ली/कुलूप) असेही म्हणतात. 'अवापुरति' इत्यादी शब्दांमध्ये 'अव' आणि 'आ' हे दोन्ही उपसर्ग आहेत, असे समजावे. ဖရ ဖရဏေ. ဖရဏံ နာမ ဗျာပနံ ဂမနံ ဝါ. သမံ ဖရတိ သီတေန. အာဟာရတ္ထံ ဖရတိ. ဖရဏံ. 'फर' (धातू) पसरणे (स्फुरण/व्यापणे) या अर्थात. 'फरण' म्हणजे व्यापणे किंवा गमन करणे. थंडीने समान रीतीने व्यापतो (समं फरति सीतेन). आहारासाठी पसरतो. फरणं (व्यापणे). ဂရ ဥဂ္ဂမေ. ဂရတိ. ဂရု. 'गर' (धातू) वर उठणे (उद्गम) या अर्थात. गरति (वर उठतो). गरु (गुरु/आदरणीय). ဂရူတိ [Pg.157] မာတာပိတာဒယော ဂါရဝယုတ္တပုဂ္ဂလာ. တေ ဟိ ဂရန္တိ ဥဂ္ဂစ္ဆန္တိ ဥဂ္ဂတာ ပါကဋာ ဟောန္တီတိ ဂရူတိ ဝုစ္စန္တိ. အပိစ ပါသာဏစ္ဆတ္တံ ဝိယ ဘာရိယဋ္ဌေန ဂရူတိ ဝုစ္စန္တိ. ဂရုသဒ္ဒေါ ‘‘ဣဒမာသနံ အတြ ဘဝံ နိသီဒတု, ဘဝဉှိ မေ အညတရော ဂရူန’’န္တိ ဧတ္ထ မာတာပိတူသု ဒိဿတိ. ‘‘သနရာမရလောကဂရု’’န္တိ ဧတ္ထ သဗ္ဗလောကာစရိယေ သဗ္ဗညုမှိ. အပိစ ဂရုသဒ္ဒေါ အညေသွတ္ထေသုပိ ဒိဿတိ. သဗ္ဗမေတံ ဧကတော ကတွာ အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – 'गरू' म्हणजे माता-पिता इत्यादी आदरणीय व्यक्ती (गौरवयुक्त पुद्गल). कारण ते वर उठतात (गरन्ति), उन्नत होतात आणि प्रसिद्ध (उग्गता पाकटा) होतात, म्हणून त्यांना 'गरू' म्हटले जाते. शिवाय, दगडाच्या छत्रीप्रमाणे भारदस्त (वजनदार) असल्यामुळे त्यांना 'गरू' म्हणतात. 'गरु' हा शब्द "इदमासनं अत्र भवं निसीदतु, भवञ्हि मे अञ्ञतरो गरूनं" (या आसनावर आपण बसावे, कारण आपण माझ्या आदरणीयांपैकी एक आहात) येथे माता-पित्यांच्या संदर्भात दिसतो. "सनरामरलोकगरु" (देव आणि मनुष्यांसह संपूर्ण जगाचे गुरु) येथे संपूर्ण जगाचे आचार्य असलेल्या सर्वज्ञ (बुद्धां) साठी हा शब्द वापरला आहे. शिवाय, 'गरु' शब्द इतर अर्थांमध्येही आढळतो. हे सर्व एकत्र करून येथे असे म्हटले आहे – မာတာပိတာစရိယေသု, ဒုဇ္ဇရေ အလဟုမှိ စ; မဟန္တေ စုဂ္ဂတေ စေဝ, နိဆေကာဒိကရေသု စ; တထာ ဝဏ္ဏဝိသေသေသု, ဂရုသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. माता-पिता आणि आचार्य यांच्यामध्ये, पचण्यास कठीण (दुज्जर) आणि जड (अलहु) मध्ये; महान आणि उन्नत (उग्गत) मध्ये, तसेच कुशल (निछेक) इत्यादींमध्ये; त्याचप्रमाणे विशिष्ट स्वरांमध्ये (दीर्घ स्वरांमध्ये) 'गरु' शब्द वापरला जातो. ကေစိ ပနာစရိယာ ‘‘ဂရု ဂရူ’’တိ စ ဒွိဓာ ဂဟေတွာ ဘာရိယဝါစကတ္တေ ဂရုသဒ္ဒေါ ဌိတော. အာစရိယဝါစကတ္တေ ပန ဂုရုသဒ္ဒေါတိ ဝဒန္တိ, တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ. ပါဠိဝိသယေ ဟိ သဗ္ဗေသမ္ပိ ယထာဝုတ္တာနံ အတ္ထာနံ ဝါစကတ္တေ ဂရုသဒ္ဒေါယေဝ ဣစ္ဆိတဗ္ဗော, အကာရဿ အာကာရဘာဝေ ‘‘ဂါရဝ’’န္တိ သဝုဒ္ဓိကဿ တဒ္ဓိတန္တပဒဿ ဒဿနတော. သက္ကဋဘာသာဝိသယေ ပန ဂုရုသဒ္ဒေါယေဝ ဣစ္ဆိတဗ္ဗော, ဥကာရဿ ဝုဒ္ဓိဘာဝေ အညထာ တဒ္ဓိတန္တပဒဿ ဒဿနတော. परंतु काही आचार्य 'गरु' आणि 'गरू' असे दोन प्रकार मानून, जड (भारदस्त) या अर्थासाठी 'गरु' शब्द आणि आचार्य (शिक्षक) या अर्थासाठी 'गुरु' शब्द आहे असे म्हणतात; ते स्वीकारू नये. कारण पालि भाषेच्या क्षेत्रात वर उल्लेखिलेल्या सर्व अर्थांसाठी 'गरु' हाच शब्द स्वीकारला पाहिजे, कारण 'अ' चा 'आ' होऊन वृद्धीसह 'गारव' (आदर) हे तद्धित रूप पाहायला मिळते. संस्कृत भाषेच्या क्षेत्रात मात्र 'गुरु' हाच शब्द स्वीकारला पाहिजे, कारण तेथे 'उ' ची वृद्धी होऊन (गौरव) तद्धित रूप वेगळ्या प्रकारे पाहायला मिळते. မရ ပါဏစာဂေ. မရတိ. မတ္တုံ. မရိတွာ. ဟေတုကတ္တရိ ‘‘ပုရိသော ပုရိသံ မာရေတိ, မာရယတိ. ပုရိသော ပုရိသေန ပုရိသံ မာရာပေတိ, မာရာပယတိ. ပုရိသော ပုရိသံ မာရေတုံ မာရေတွာ’’ ဣစ္စာဒီနိ ရူပါနိ. မစ္စော. မရု. မရဏံ, မစ္စု. မဋ္ဋု. မာရော. 'मर' (धातू) प्राण त्यागणे (मरणे) या अर्थात. मरति (मरतो). मत्तं (मरण्यासाठी). मरित्वा (मरून). प्रयोजक कर्तरी प्रयोगात (हेतुकर्तरि) – "पुरिसो पुरिसं मारेति, मारयति" (माणूस माणसाला मारतो). "पुरिसो पुरिसेन पुरिसं मारापेति, मारापयति" (माणूस माणसाकरवी माणसाला मारवतो). "पुरिसो पुरिसं मारेतुं मारेत्वा" (माणूस माणसाला मारण्यासाठी, मारून) इत्यादी रूपे होतात. मच्चो (मर्त्य/मनुष्य). मरु (देव). मरणं, मच्चु (मृत्यू). मट्टु (मृत्यू). मारो (मार). တတ္ထ မတ္တုန္တိ မရိတုံ. တထာ ဟိ အလီနသတ္တုဇာတကေ ‘‘ယော မတ္တုမိစ္ဆေ ပိတုနော ပမောက္ခာ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. မစ္စောတိ မရိတဗ္ဗသဘာဝတာယ ‘‘မစ္စော’’တိ လဒ္ဓနာမော သတ္တော[Pg.158]. မရူတိ ဒီဃာယုကောပိ သမာနော မရဏသီလောတိ မရု, ဒေဝေါ. မရဏန္တိ စုတိ. तेथे 'मत्तुं' म्हणजे 'मरितुं' (मरण्यासाठी). कारण अलीनसत्तु जातकामध्ये "यो मत्तुमिच्छे पितुनो पमोक्खा" (जो वडिलांच्या सुटकेसाठी मरण्याची इच्छा करतो) असा पालि पाठ आढळतो. 'मच्चो' (मर्त्य) म्हणजे मरणशील स्वभावाचा असल्यामुळे 'मच्चो' हे नाव मिळालेला प्राणी. 'मरु' म्हणजे दीर्घायुषी असूनही मरणशील असलेला देव. 'मरणं' म्हणजे च्युती (मृत्यू/देहपात). မရဏံ အန္တကော မစ္စု, ဟိန္ဒံ ကာလော စ မဋ္ဋု စ; နိက္ခေပေါ စုတိ စေတာနိ, နာမာနိ မရဏဿ ဝေ. मरण, अंतक, मच्चु, हिंद, काल, मट्टु, निक्खेप (देह ठेवणे) आणि च्युती ही खरोखर मरणाची नावे आहेत. မာရောတိ သတ္တာနံ ကုသလံ မာရေတီတိ မာရော, ကာမဒေဝေါ. 'मारो' (मार) म्हणजे जो प्राण्यांच्या कुशल धर्माचा नाश करतो (मारतो) तो 'मार', म्हणजेच कामदेव. ဣမာနိဿ နာမာနိ – ही त्याची नावे आहेत – မာရော နမုစိ ကဏှော စ, ဝသဝတ္တိ ပဇာပတိ; ပမတ္တဗန္ဓု မဒ္ဒနော, ပါပိမာ ဒဗ္ဗကောပိ စ; ကန္ဒပ္ပော စ ရတိပတိ, ကာမော စ ကုသုမာယုဓော. मार, नमुची, कण्ण (कृष्ण/काळा), वसवत्ती, प्रजापती, पमत्तबंधू (प्रमत्तबंधू), मद्दल (मर्दन करणारा), पापिमा (पापी), दब्बक, कंदर्प, रतीपती, काम आणि कुसुमायुध. အညေ အညာနိပိ နာမာနိ ဝဒန္တိ, တာနိ သာသနာနုလောမာနိ န ဟောန္တီတိ ဣဓ န ဒဿိတာနိ. အဋ္ဌကထာသု ပန ‘‘မာရော, နမုစိ, ကဏှော, ပမတ္တဗန္ဓူ’’တိ စတ္တာရောဝ နာမာနိ အာဂတာနိ. इतर लोक इतरही नावे सांगतात, परंतु ती शासनाला (बुद्ध शासनाला) अनुकूल नसल्यामुळे येथे दर्शविलेली नाहीत. अट्ठकथांमध्ये (टीकांमध्ये) मात्र "मार, नमुची, कण्ण, पमत्तबंधू" ही चारच नावे आली आहेत. ဧတ္ထ စ မာရောတိ ဒေဝပုတ္တမာရေန သဒ္ဓိံ ပဉ္စ မာရာ ကိလေသမာရော ခန္ဓမာရော အဘိသင်္ခါရမာရော မစ္စုမာရော ဒေဝပုတ္တမာရောတိ. आणि येथे 'मार' म्हणजे देवपुत्त-मारासह पाच मार आहेत: किलेसमारा (क्लेशमार), खंधमारा (स्कंधमार), अभिसंखारमारा (अभिसंस्कारमार), मच्चुमारा (मृत्यूमार) आणि देवपुत्तमारा (देवपुत्रमार). ဓရ အဝတ္ထာနေ. ဓရတိ. 'धर' (धातू) राहणे (अवस्थापन/धारण करणे) या अर्थात. धरति (धारण करतो/राहतो). ဘရ ပေါသနေ. ဘရတိ. ဘရိတော, ဘတ္တာ. 'भर' (धातू) पोषण करणे या अर्थात. भरति (पोषण करतो). भरितो, भत्ता (भर्ता/पती). ထရ သန္ထရဏေ. ထရတိ, သန္ထရတိ. သန္ထရဏံ. 'थर' (धातू) पसरणे (संस्तरण) या अर्थात. थरति, संथरति (पसरतो). संथरणं (पसरणे/आच्छादन). ဒရ ဝိဒါရဏေ. ဘူမိံ ဒရတိ. ကုဒါလော. 'दर' (धातू) फाडणे (विदारण करणे/खणणे) या अर्थात. भूमिं दरति (जमीन खणतो). कुदालो (कुदळ). ဒရ ဒါဟေ. ကာယော ဒရတိ. ဒရော, ဒရထော. 'दर' (धातू) जळजळणे (दाह/ताप) या अर्थात. कायो दरति (शरीर जळजळते/तपते). दरो, दरथो (भय/क्लेश). တိရ အဓောဂတိယံ. တိရတိ. တိရစ္ဆာနော, တိရစ္ဆာ ဝါ. 'तिर' (धातू) अधोगती किंवा आडवे जाणे या अर्थात. तिरति (आडवा जातो). तिरच्छानो किंवा तिरच्छा (तिर्यक प्राणी/पशू). အရ ဂတိယံ. အရတိ. အတ္ထံ, အတ္ထော, ဥတု. 'अर' (धातू) गमन करणे या अर्थात. अरति (जातो). अत्थं (अस्त/निर्वाण), अत्थो (अर्थ/हित), उतु (ऋतू). ဧတ္ထ [Pg.159] အတ္ထံ ဝုစ္စတိ နိဗ္ဗာနံ. တံ တံ သတ္တကိစ္စံ အရတိ ဝတ္တေတီတိ ဥတု. येथे 'अत्थं' म्हणजे निर्वाण म्हटले आहे. प्राण्यांच्या त्या त्या कर्तव्याला जे गतिमान करते (प्रवृत्त करते), ते 'उतु' (ऋतू). ရကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'र' कारान्त धातूंची रूपे. လကာရန္တဓာတု 'ल' कारान्त धातू. လာ အာဒါနေ. လာတိ. လာနံ, ဂရုဠော, သီဟဠော, ရာဟုလော, ကုသလံ, ဗာလော, မဟလ္လကော, မဟလ္လိကာ. 'ला' (धातू) ग्रहण करणे (घेणे) या अर्थात. लाति (घेतो). लानं (ग्रहण करणे), गरुळो (गरुड), सीहळो (सिंहल), राहुलो (राहुल), कुसलं (कुशल), बालो (बाल/मूर्ख), महल्लको (वृद्ध पुरुष), महल्लिका (वृद्ध स्त्री). တတြ ဂရုဠောတိ ဂရုံ လာတိ အာဒဒါတိ ဂဏှာတီတိ ဂရုဠော, ယော ‘‘သုပဏ္ဏော, ဒိဇာဓိပေါ, နာဂါရိ, ကရောဋီ’’တိ စ ဝုစ္စတိ. သီဟဠောတိ သီဟံ လာတိ အာဒဒါတိ ဂဏှာတီတိ သီဟဠော, ပုဗ္ဗပုရိသော. တဗ္ဗံသေ ဇာတာ ဧတရဟိ သဗ္ဗေပိ သီဟဠာ နာမ ဇာတာ. तेथे 'गरुळो' (गरुड) म्हणजे जो जड भार उचलतो (लाति/आददाति/गण्हाति), ज्याला "सुपण्ण" (सुपर्ण), "दिजाधिपो" (पक्ष्यांचा राजा), "नागारी" (नागांचा शत्रू), "करोटी" असेही म्हणतात. 'सीहळो' म्हणजे सिंहाला पकडणारा (सिंह घेणारा), पूर्वज पुरुष. त्यांच्या वंशात जन्मलेले सध्याचे सर्व लोक 'सीहळ' (सिंहली) या नावाने ओळखले जातात. ရာဟုလောတိအာဒီသု ပန ရာဟု ဝိယ လာတိ ဂဏှာတီတိ ရာဟုလော, ကော သော? သိက္ခာကာမော အာယသ္မာ ရာဟုလဘဒ္ဒေါ ဗုဒ္ဓပုတ္တော. တဿ ဟိ ဇာတဒိဝသေ သုဒ္ဓေါဒနမဟာရာဇာ ‘‘ပုတ္တဿ မေ တုဋ္ဌိံ နိဝေဒေထာ’’တိ ဥယျာနေ ကီဠန္တဿ ဗောဓိသတ္တဿ သာသနံ ပဟိဏိ. ဗောဓိသတ္တော တံ သုတွာ ‘‘ရာဟု ဇာတော ဗန္ဓနံ ဇာတ’’န္တိ အာဟ. ပုတ္တဿ ဟိ ဇာယနံ ရာဟုဂ္ဂဟော ဝိယ ဟောတိ. တဏှာကိလိဿနတာပါဒနတော ဗာဠှေန စ သင်္ခလိကာဒိဗန္ဓနေန ဗန္ဓံ ဝိယ ဟောတိ မုစ္စိတုံ အပ္ပဒါနတောတိ ‘‘ရာဟု ဇာတော ဗန္ဓနံ ဇာတ’’န္တိ အာဟ. ရာဇာ ‘‘ကိံ မေ ပုတ္တော အဝစာ’’တိ ပုစ္ဆိတွာ တံ ဝစနံ သုတွာ ‘‘ဣတော ပဋ္ဌာယ မေ နတ္တာ ‘ရာဟုလော’ တွေဝ ဟောတူ’’တိ အာဟ, တတော ပဋ္ဌာယ ကုမာရော ရာဟုလော နာမ ဇာတော. परंतु 'राहुलो' इत्यादी शब्दांमध्ये, जो राहू प्रमाणे ग्रहण करतो (पकडतो) तो 'राहुलो'. तो कोण? शिक्षणाची आवड असणारे, आयुष्यमान राहुलभद्र बुद्धपुत्र. त्यांच्या जन्माच्या दिवशी शुद्धोदन महाराजांनी बागेत क्रीडा करत असलेल्या बोधिसत्तांना "माझ्या पुत्राला आनंदाची बातमी सांगा" असा संदेश पाठवला. बोधिसत्तांनी ते ऐकून, "राहू जन्मला, बंधन जन्मले" असे म्हटले. पुत्राचा जन्म हा राहूच्या ग्रहणासारखा (राहुग्गह) असतो. तृष्णेमुळे क्लेश आणि ताप उत्पन्न होत असल्यामुळे आणि सुटकेची संधी न देणाऱ्या साखळदंडासारख्या घट्ट बंधनासारखा असल्यामुळे त्यांनी "राहू जन्मला, बंधन जन्मले" असे म्हटले. राजाने "माझा पुत्र काय म्हणाला?" असे विचारून ते शब्द ऐकले आणि "आजपासून माझ्या नातवाचे नाव 'राहुलो' असेच असावे" असे म्हटले, तेव्हापासून त्या कुमाराचे नाव 'राहुलो' (राहुल) असे पडले. မဟာပဒါနသုတ္တဋီကာယဉှိ [Pg.160] ‘‘ရာဟု ဇာတော’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ရာဟူတိ ရာဟုဂ္ဂဟော’’တိ ဝုတ္တံ, တံ ပန ‘‘ရာဟုလော’’တိ ဝစနဿတ္ထံ ပါကဋံ ကာတုံ အဓိပ္ပာယတ္ထဝသေန ဝုတ္တံ. န ဟိ ကေဝလော ‘‘ရာဟူ’’တိ သဒ္ဒေါ ‘‘ရာဟုဂ္ဂဟော’’တိ အတ္ထံ ဝဒတိ, အထ ခေါ ဇာတသဒ္ဒသမ္ဗန္ဓံ လဘိတွာ ဝဒတိ. တထာ ဟိ ‘‘ရာဟု ဇာတော’’တိ ဗောဓိသတ္တေန ဝုတ္တဝစနဿ ‘‘ရာဟုဂ္ဂဟော ဇာတော’’တိ အတ္ထ္ौ ဘဝတိ, တသ္မာ သုဒ္ဓေါဒနမဟာရာဇာ ‘‘မမ နတ္တာ ရာဟု ဝိယ လာတီတိ ရာဟုလောတိ ဝတ္တဗ္ဗော’’တိ စိန္တေတွာ ‘‘ရာဟုလောတွေဝ ဟောတူ’’တိ အာဟာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. महापदानसुत्त टीकेमध्ये "राहू जातो" या संदर्भात "राहू म्हणजे राहुग्गह (राहूचे ग्रहण)" असे म्हटले आहे, परंतु ते 'राहुलो' या शब्दाचा अर्थ स्पष्ट करण्याच्या हेतूने म्हटले आहे. केवळ 'राहू' हा शब्द 'राहुग्गह' असा अर्थ दर्शवत नाही, तर 'जातो' (जन्मलेला/झालेला) या शब्दाशी संबंध आल्यावरच तो हा अर्थ दर्शवतो. म्हणूनच, बोधिसत्तांनी म्हटलेल्या "राहू जातो" या वाक्याचा अर्थ "राहूचे ग्रहण झाले" असा होतो, म्हणून शुद्धोदन महाराजांनी "माझा नातू राहू प्रमाणे ग्रहण करतो, म्हणून त्याला 'राहुलो' म्हटले पाहिजे" असा विचार करून "त्याचे नाव 'राहुलो' असेच असावे" असे म्हटले, असे समजावे. ကေစိ ပန ‘‘ရာဟုလော ဇာတော ဗန္ဓနံ ဇာတ’’န္တိ ပဌန္တိ, ကတ္ထစိ ပေါတ္ထကေ စ လိခန္တိ, တံ န သုန္ဒရံ, အတ္ထဿ အယုတ္တိတော ဋီကာယ စ သဒ္ဓိံဝိရောစတော. န ဟိ ‘‘ရာဟုလော’’တိ ကုမာရဿ နာမံ ပဌမံ ဥပ္ပန္နံ, ပစ္ဆာယေဝ ပန ဥပ္ပန္နံ အယျကေန ဒိန္နတ္တာ, တသ္မာ တဒါ ဗောဓိသတ္တေန ‘‘ရာဟုလော ဇာတော’’တိ ဝတ္တုံ န ယုဇ္ဇတိ. ယထာ ဟိ အနဘိသိတ္တေ အရာဇိနိ ပုဂ္ဂလေ ‘‘မဟာရာဇာ’’တိ ဝေါဟာရော နပ္ပဝတ္တတိ. ဋီကာယဉ္စ ‘‘ရာဟူတိ ရာဟုဂ္ဂဟော’’တိ ဝုတ္တံ. အထာပိ တေသံ သိယာ ‘‘ရာဟုလော ဇာတော ဗန္ဓနံ ဇာတ’’န္တိ ပဒဿ ဝိဇ္ဇမာနတ္တာ ဧဝ ဋီကာယံ ‘‘ရာဟုဂ္ဂဟော’’တိ ဘာဝဝသေန လာသဒ္ဒေန သမာနတ္ထော အာဒါနတ္ထော ဂဟသဒ္ဒေါ ဝုတ္တောတိ ဧဝမ္ပိ နုပပဇ္ဇတိ, ‘‘ရာဟုလာနံ ဇာတံ ဗန္ဓနံ ဇာတ’’န္တိ ပါဌဿ ဝတ္တဗ္ဗတ္တာ. ရာဟုလောတိ ဟိ ဣဒံ ပဒံ ‘‘သီဟဠော’’တိ ပဒံ ဝိယ ဒဗ္ဗဝါစကံ, န ကဒါစိပိ ဘာဝဝါစကံ, တသ္မာ ‘‘ရာဟုလော ဇာတော ဗန္ဓနံ ဇာတ’’န္တိ ဧတံ ဧကစ္စေဟိ ဒုရောပိတံ ပါဌံ အဂ္ဂဟေတွာ ‘‘ရာဟု ဇာတော ဗန္ဓနံ ဇာတ’’န္တိ အယမေဝ ပါဌော ဂဟေတဗ္ဗော, သာရတော စ ပစ္စေတဗ္ဗော သုပရိသုဒ္ဓေသု အနေကေသု ပေါတ္ထကေသု ဒိဋ္ဌတ္တာ, ပေါရာဏေဟိ စ ဂမ္ဘီရသုခုမဉာဏေဟိ အာစရိယပစာရိယေဟိ ပဌိတတ္တာ. काही लोक तर 'राहुलो जातो बंधनं जातं' असा पाठ वाचतात आणि काही पुस्तकांमध्ये तसे लिहितात, परंतु ते योग्य नाही; कारण ते अर्थाशी सुसंगत नाही आणि टीकेशी विसंगत आहे. कारण 'राहूल' हे कुमाराचे नाव आधीच उत्पन्न झाले नव्हते, तर नंतर आजोबांनी दिल्यामुळे ते प्राप्त झाले होते, म्हणून त्या वेळी बोधिसत्त्वांनी 'राहूल जन्मला' असे म्हणणे योग्य ठरत नाही. ज्याप्रमाणे राज्याभिषेक न झालेल्या, राजा नसलेल्या व्यक्तीला 'महाराज' असे संबोधले जात नाही. आणि टीकेमध्ये 'राहूति राहुग्गहो' (राहू म्हणजे राहूचे ग्रहण) असे म्हटले आहे. जरी त्यांचे असे मत असेल की 'राहुलो जातो बंधनं जातं' या पदाच्या अस्तित्वामुळेच टीकेमध्ये 'राहुग्गहो' असा भाववाचक अर्थाने 'ला' शब्दाशी समान अर्थ असलेला, ग्रहण करणे या अर्थाचा 'गह' शब्द वापरला आहे, तरीही हे जुळत नाही, कारण अशा वेळी 'राहुलानं जातं बंधनं जातं' असा पाठ असायला हवा होता. कारण 'राहूल' हा शब्द 'सीहळ' (सिंहल) या शब्दाप्रमाणे द्रव्यवाचक आहे, तो कधीही भाववाचक नाही. म्हणून 'राहुलो जातो बंधनं जातं' हा काही लोकांनी चुकीच्या पद्धतीने प्रस्थापित केलेला पाठ न स्वीकारता, 'राहु जातो बंधनं जातं' हाच पाठ स्वीकारला पाहिजे आणि तोच खरा मानला पाहिजे; कारण अनेक अत्यंत शुद्ध हस्तलिखितांमध्ये तोच आढळतो आणि गंभीर व सूक्ष्म ज्ञान असणाऱ्या प्राचीन आचार्यांच्या परंपरेने तोच वाचला आहे. အယံ [Pg.161] ပနေတ္ထ သာဓိပ္ပာယာ အတ္ထပ္ပကာသနာ – ရာဟု ဇာတောတိ ဗောဓိသတ္တော ပုတ္တဿ ဇာတသာသနံ သုတွာ သံဝေဂပ္ပတ္တော ‘‘ဣဒါနိ မမ ရာဟု ဇာတော’’တိ ဝဒတိ, မုစ္စိတုံ အပ္ပဒါနဝသေန မမ ဂဟဏတ္ထံ ရာဟု ဥပ္ပန္နောတိ ဟိ အတ္ထော. ဗန္ဓနံ ဇာတန္တိ ဣမိနာ ‘‘မမ ဗန္ဓနံ ဇာတ’’န္တိ ဝဒတိ. တထာ ဟိ ဋီကာယံ ဝုတ္တံ ‘‘ရာဟူတိ ရာဟုဂ္ဂဟော’’တိ. တတ္ထ ရာဟုဂ္ဂဟောတိ ဂဏှာတီတိ ဂဟော, ရာဟု ဧဝ ဂဟော ရာဟုဂ္ဂဟော, မမ ဂါဟကော ရာဟု ဇာတောတိ အတ္ထော. အထ ဝါ ဂဟဏံ ဂဟော, ရာဟုနော ဂဟော ရာဟုဂ္ဂဟော, ရာဟုဂ္ဂဟဏံ မမ ဇာတန္တိ အတ္ထော. ပုတ္တော ဟိ ရာဟုသဒိသော. ပိတာ စန္ဒသဒိသော ပုတ္တရာဟုနာ ဂဟိတတ္တာ. येथे अभिप्रेत असलेला अर्थ स्पष्ट करणे असे आहे – 'राहू जन्मला' म्हणजे बोधिसत्त्वांनी पुत्राच्या जन्माची बातमी ऐकून संवेग प्राप्त झाल्यावर 'आता माझा राहू जन्मला' असे म्हटले. मुक्त न होण्याच्या कारणाने मला पकडण्यासाठी राहू उत्पन्न झाला आहे, असा याचा अर्थ आहे. 'बंधन निर्माण झाले' याने ते 'माझे बंधन निर्माण झाले' असे म्हणतात. तसेच टीकेमध्ये म्हटले आहे – 'राहूति राहुग्गहो' (राहू म्हणजे राहूचे ग्रहण). तेथे 'राहुग्गहो' म्हणजे जो पकडतो तो 'गह' (ग्रह), राहू हाच ग्रह म्हणजे 'राहुग्गहो', म्हणजेच 'मला पकडणारा राहू जन्मला' असा अर्थ आहे. किंवा 'गह' म्हणजे ग्रहण करणे, राहूचे ग्रहण म्हणजे 'राहुग्गहो', म्हणजेच 'माझे राहूने ग्रहण केले' असा अर्थ आहे. कारण पुत्र हा राहूसारखा आहे आणि पिता हा पुत्ररूपी राहूने ग्रसल्या गेल्यामुळे चंद्रासारखा आहे. ဧကစ္စေ ပန ‘‘ရာဟုလောတွေဝ ဟောတူ’’တိ ဣမံ ပဒေသံ ဒိသွာ ‘‘ရာဟု ဇာတော’’တိ ဝုတ္တေ ဣမိနာ န သမေတိ, ‘‘ရာဟုလော ဇာတော’’တိ ဝုတ္တေယေဝ ပန သမေတီတိ မညမာနာ ဧဝံ ပါဌံ ပဌန္တိ လိခန္တိ စ, တသ္မာ သော အနုပပရိက္ခိတွာ ပဌိတော ဒုရောပိတော ပါဌော န ဂဟေတဗ္ဗော, ယထာဝုတ္တော ပေါရာဏကော ပေါရာဏာစရိယေဟိ အဘိမတော ပါဌောယေဝ အာယသ္မန္တေဟိ ဂဟေတဗ္ဗော အတ္ထဿ ယုတ္တိတော, ဋီကာယ စ သဒ္ဓိံ အဝိရောဓတောတိ. परंतु काही लोक 'राहुलोत्वेव होतू' (राहूलच असो) हा पाठ पाहून, 'राहू जन्मला' असे म्हटल्यास याच्याशी मेळ बसत नाही, तर 'राहूल जन्मला' असे म्हटल्यासच मेळ बसतो, असे मानून तसा पाठ वाचतात आणि लिहितात. म्हणून, कसलीही परीक्षा न करता वाचलेला तो चुकीचा प्रस्थापित केलेला पाठ स्वीकारू नये. अर्थाच्या सुसंगततेमुळे आणि टीकेशी विरोध नसल्यामुळे, आयुष्मंतांनी प्राचीन आचार्यांना संमत असलेला वर उल्लेखिलेला प्राचीन पाठच स्वीकारला पाहिजे. တတ္ထ ကုသလန္တိ ကုစ္ဆိတာနံ ပါပဓမ္မာနံ သာနတော တနုကရဏတော ဉာဏံ ကုသံ နာမ, တေန ကုသေန လာတဗ္ဗံ ပဝတ္တေတဗ္ဗန္တိ ကုသလံ. ဗာလောတိ ဒိဋ္ဌဓမ္မိကသမ္ပရာယိကသင်္ခါတေ ဒွေ အနတ္ထေ ဒေဝဒတ္တကောကာလိကာဒယော ဝိယ လာတိ အာဒဒါတီတိ ဗာလော. ဣမာနိ ပန တံနာမာနိ – त्यात 'कुसल' (कुशल) म्हणजे – निंदनीय पापधर्मांचा नाश केल्यामुळे किंवा त्यांना क्षीण केल्यामुळे ज्ञानाला 'कुस' म्हणतात, त्या 'कुसा'ने (ज्ञानाने) जे ग्रहण केले पाहिजे किंवा आचरले पाहिजे ते 'कुसल' होय. 'बाल' (मूर्ख) म्हणजे – देवदत्त आणि कोकालिक इत्यादींप्रमाणे या जन्मातील आणि परलोकातील अशा दोन्ही अनर्थांना जो ग्रहण करतो किंवा स्वीकारतो तो 'बाल' होय. त्याची नावे खालीलप्रमाणे आहेत – ဗာလော အဝိဒွါ အညော စ, အညာဏီ အဝိစက္ခဏော; အပဏ္ဍိတော အကုသလော, ဒုမ္မေဓော ကုမတိ ဇဠော. बाल (मूर्ख), अविद्वा (अज्ञानी), अञ्ञू (अजाण), अञ्ञाणी (अज्ञानी), अविचक्खणो (अविचक्षण/विवेकहीन), अपंडितो (अपंडित), अकुसलो (अकुशल), दुम्मेधो (दुर्बुद्धी), कुमती (कुमती) आणि जळो (जड/मतिमंद). ဧဠမူဂေါ [Pg.162] စ နိပ္ပညော, ဒုမ္မေဓီ အဝိဒူ မဂေါ; အဝိညူ အန္ဓဗာလော စ, ဒုပ္ပညော စ အဝိဒ္ဒသု. एळमूगो (मुका-बहिरा/मूर्ख), निप्पञ्ञो (प्रज्ञाहीन), दुम्मेधी (दुर्बुद्धी), अविदू (अज्ञानी), मगो (पशूसमान), अविञ्ञू (अविज्ञ), अंधबालो (अंधमूर्ख), दुप्पञ्ञो (दुष्प्रज्ञ) आणि अविद्दसू (अविद्वान). မဟလ္လကောတိ မဟတ္တံ လာတိ ဂဏှာတီတိ မဟလ္လကော, ဇိဏ္ဏပုရိသော. ဣမာနိဿ နာမာနိ – ‘महल्लक’ म्हणजे – जो मोठेपण (वृद्धत्व) ग्रहण करतो तो ‘महल्लक’ म्हणजेच वृद्ध मनुष्य. त्याची नावे खालीलप्रमाणे आहेत – ဇိဏ္ဏော မဟလ္လကော ဝုဒ္ဓေါ, ဗုဒ္ဓေါ ဝုဍ္ဎော စ ကတ္တရော; ထေရော စာတိ ဣမေ သဒ္ဒါ, ဇိဏ္ဏပညတ္တိယော သိယုံ. जिण्णो (जीर्ण), महल्लको (वृद्ध), वुद्धो (वृद्ध), बुद्धो (बुद्ध - येथे वृद्ध या अर्थाने), वुड्ढो (वृद्ध), कत्तरो (जर्जर/अशक्त) आणि थेरो (स्थवीर) हे शब्द वृद्ध व्यक्तीचे वाचक आहेत. တထာ ဟိ – तसेच – ‘‘ဒုရေ အပဿံ ထေရောဝ, စက္ခုံ ယာစိတုမာဂတော’’; ဧဝမာဒီသု ဒဋ္ဌဗ္ဗော, ထေရသဒ္ဒေါ မဟလ္လကေ. “दूरचे न दिसणाऱ्या वृद्धाप्रमाणे, तो डोळे मागण्यासाठी आला”; इत्यादी ठिकाणी ‘थेर’ हा शब्द वृद्ध या अर्थाने पाहावा. ဣမာနိ ပန နာမာနိ ဣတ္ထိယာ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဝတ္တဗ္ဗာနိ – आता हीच नावे स्त्रीसाठी स्त्रीलिंगी रूपाने खालीलप्रमाणे म्हणावीत – ဇိဏ္ဏာ မဟလ္လိကာ ဝုဒ္ဓီ, ဗုဒ္ဓီ ဝုဍ္ဎီ စ ကတ္တရာ; ထေရီ စာတိ ဣမေ သဒ္ဒါ, နာမံ ဇိဏ္ဏာယ ဣတ္ထိယာ; जिण्णा (जीर्ण), महल्लिका (वृद्धा), वुद्धी (वृद्धा), बुद्धी (वृद्धा), वुड्ढी (वृद्धा), कत्तरा (जर्जर) आणि थेरी (स्थविरा) हे शब्द वृद्ध स्त्रीची नावे आहेत. ဒလ ဖလ ဝိသရဏေ. ဒလတိ. ဖလတိ. ဒလိတော ရုက္ခော. ဖလိတော ဘူမိဘာဂေါ. ‘दल’ आणि ‘फल’ हे धातू विदीर्ण होणे किंवा विकसित होणे या अर्थात आहेत. दलति (विदीर्ण होते/विकसित होते). फलति (फलद्रूप होते/विकसित होते). दलितो रुक्खो (विदीर्ण झालेला वृक्ष). फलितो भूमिभागो (विकसित झालेला किंवा फळांनी बहरलेला भूभाग). အလ ဘူသနေ. အလတိ. အလင်္ကာရော, အလင်္ကတော, အလင်္ကတံ. ‘‘သာလင်္ကာနနယောဂေပိ, သာလင်္ကာနနဝဇ္ဇိတာ’’တိ ဣမိဿဉှိ ကဝီနံ ကဗ္ဗရစနာယံ အလင်္ကသဒ္ဒေါ ဘူသနဝိသေသံ ဝဒတိ. ကေစိ ပနေတ္ထ အလ ဘူသနပရိယာပနဝါရနေသူတိ ဓာတုံ ပဌန္တိ, ‘‘အလတီ’’တိ စ ရူပံ ဣစ္ဆန္တိ. မယံ ပန အလဓာတုဿ ပရိယတ္တိနိဝါရဏတ္ထဝါစကတ္တံ န ဣစ္ဆာမ ပယောဂါဒဿနတော. နိပါတဘူတော ပန အလံသဒ္ဒေါ ပရိယတ္တိနိဝါရဏတ္ထဝါစကော ဒိဿတိ ‘‘အလမေတံ သဗ္ဗံ. အလံ မေ တေန ရဇ္ဇေနာ’’တိအာဒီသု. ‘अल’ धातू भूषणाच्या (अलंकार करण्याच्या) अर्थात आहे. अलति. अलंकारो (अलंकार), अलंकतो (अलंकृत - पुरुष), अलंकतं (अलंकृत - नपुंसकलिंगी). “सालंकाणनयोगेपि, सालंकाणनवज्जिता” या कवींच्या काव्यरचनेत ‘अलंकार’ हा शब्द विशिष्ट भूषणाचा वाचक आहे. येथे काही लोक ‘अल’ धातू भूषण, पर्याप्ति (समाप्ती) आणि निवारण या अर्थांमध्ये वाचतात आणि ‘अलति’ असे रूप मानतात. परंतु, प्रयोगात (वापरात) आढळत नसल्यामुळे आम्ही ‘अल’ धातूला पर्याप्ति आणि निवारण या अर्थांचा वाचक मानत नाही. परंतु, निपात असलेला ‘अलं’ हा शब्द पर्याप्ति आणि निवारण या अर्थांचा वाचक असलेला आढळतो, जसे की – “अलमेतं सब्बं” (हे सर्व पुरेसे आहे), “अलं मे तेन रज्जेन” (मला त्या राज्याची काही गरज नाही/पुरे झाले ते राज्य) इत्यादींमध्ये. မီလ နိမေလနေ. မီလတိ, နိမီလတိ, ဥမ္မီလတိ. နိမီလနံ. ‘मील’ धातू डोळे मिटण्याच्या (निमीलन) अर्थात आहे. मीलति (डोळे मिटतो), निमीलति (डोळे मिटतो), उम्मीलति (डोळे उघडतो). निमीलनं (डोळे मिटणे). ဗိလ ပတိတ္ထမ္ဘေ. ဗိလတိ. ‘बिल’ धातू आधार देणे किंवा रोखणे (प्रतिष्टंभ) या अर्थात आहे. बिलति. နီလ [Pg.163] ဝဏ္ဏေ. နီလဝတ္ထံ. ‘नील’ धातू रंगाच्या (विशेषतः निळ्या रंगाच्या) अर्थात आहे. नीलवत्थं (निळे वस्त्र). သီလ သမာဓိမှိ. သီလတိ. သီလံ, သီလနံ. ‘सील’ धातू समाधी किंवा एकाग्रतेच्या (तसेच चारित्र्य/शील राखण्याच्या) अर्थात आहे. सीलति. सीलं (शील), सीलनं (शील राखणे/आचरण करणे). ဧတ္ထ သီလန္တိ သီလနဋ္ဌေန သီလံ. ဝုတ္တဉှေတံ ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂေ ‘‘သီလန္တိ ကေနဋ္ဌေန သီလံ? သီလနဋ္ဌေန သီလံ, ကိမိဒံ သီလနံ နာမ? သမာဓာနံ ဝါ ကာယကမ္မာဒီနံ သုသီလျဝသေန အဝိပ္ပကိဏ္ဏတာတိ အတ္ထော. ဥပဓာရဏံ ဝါ ကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ပတိဋ္ဌာနဝသေန အာဓာရဘာဝေါတိ အတ္ထော. ဧတဒေဝ ဟိ ဧတ္ထ အတ္ထဒွယံ သဒ္ဒလက္ခဏဝိဒူ အနုဇာနန္တိ. အညေ ပန ‘သိရဋ္ဌော သီလဋ္ဌော, သီတလဋ္ဌော သီလဋ္ဌော’တိ ဧဝမာဒိနာ နယေနေတ္ထ အတ္ထံ ဝဏ္ဏေန္တီ’’တိ. တတ္ထ ‘‘အတ္ထဒွယံ သဒ္ဒလက္ခဏ ဝိဒူ အနုဇာနန္တီ’’တိ ဣဒံ ‘‘သီလ သမာဓိမှိ သီလ ဥပဓာရဏေ’’တိ ဒွိဂဏိကဿ သီလဓာတုဿ အတ္ထေ သန္ဓာယ ဝုတ္တံ. ဣမဿ ဟိ စုရာဒိဂဏံ ပတ္တဿ ဥပဓာရဏေ ‘‘သီလေတိ, သီလယတီ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ, ဥပဓာရေတီတိပိ တေသံ အတ္ထော. ဣဓ ပန ဘူဝါဒိဂဏိကတ္တာ သမာဓာနတ္ထေ ‘‘သီလတီ’’တိ ရူပံ ဘဝတိ, သမာဓိယတီတိ တဿ အတ္ထော. ပုနပိ ဧတ္ထ သောတူနံ သုခဂ္ဂဟဏတ္ထံ နိဗ္ဗစနာနိ ဝုစ္စန္တေ. သီလတိ သမာဓိယတိ ကာယကမ္မာဒီနံ သုသီလျဝသေန န ဝိပ္ပကိရတီတိ သီလံ. အထ ဝါ သီလန္တိ သမာဒဟန္တိ စိတ္တံ ဧတေနာတိ သီလံ. ဣမာနိ ဘူဝါဒိဂဏိကဝသေန နိဗ္ဗစနာနိ. စုရာဒိဂဏိကဝသေန ပန သီလေတိ ကုသလေ ဓမ္မေ ဥပဓာရေတိ ပတိဋ္ဌာဘာဝေန ဘုသော ဓာရေတီတိ သီလံ. သီလေန္တိ ဝါ ဧတေန ကုသလေ ဓမ္မေ ဥပဓာရေန္တိ ဘုသော ဓာရေန္တိ သာဓဝေါတိ သီလန္တိ နိဗ္ဗစနာနိ. येथे 'शील' म्हणजे शीलनाच्या (आचरणाच्या) अर्थाने शील होय. विसुद्धिमग्गमध्ये असे म्हटले आहे की - 'शील कोणत्या अर्थाने शील आहे? शीलनाच्या अर्थाने शील आहे. हे शीलन म्हणजे काय? कायकर्म इत्यादींचे सुशीलतापूर्वक असंमिश्र (अविप्रकीर्ण) राहणे म्हणजेच 'समाधान' (एकाग्रता) असा अर्थ आहे. किंवा कुशल धर्मांचे प्रतिष्ठेच्या (पाया) रूपाने आधारभूत असणे म्हणजेच 'उपधारण' असा अर्थ आहे. व्याकरणकार येथे याच दोन अर्थांना मान्यता देतात. इतर काही जण मात्र 'शिरोऽर्थ (श्रेष्ठ अर्थ) हाच शीलार्थ आहे, शीतलार्थ (शांतता) हाच शीलार्थ आहे' अशा प्रकारे येथे अर्थाचे वर्णन करतात.' त्यात 'व्याकरणकार दोन अर्थांना मान्यता देतात' हे 'शील समाधीमध्ये, शील उपधारणामध्ये' या दोन गणांतील 'शील' धातूच्या अर्थाला अनुसरून म्हटले आहे. कारण जेव्हा हा धातू चुरादिगणात येतो, तेव्हा उपधारण अर्थामध्ये 'सीलेति' (sīleti), 'सीलयति' (sīlayati) अशी रूपे होतात, आणि त्यांचा अर्थ 'उपधारण करतो' (धारण करतो) असाही होतो. परंतु येथे भूवादिगणातील असल्यामुळे समाधान अर्थामध्ये 'सीलति' (sīlati) असे रूप होते, आणि त्याचा अर्थ 'समाहित होतो' असा आहे. पुन्हा येथे श्रोत्यांच्या सुलभ आकलनासाठी व्युत्पत्ती सांगितली जात आहे: 'सीलति' म्हणजे समाहित होतो, कायकर्म इत्यादींच्या सुशीलतापूर्वक विखुरत नाही ते 'शील' होय. अथवा, ज्याच्याद्वारे चित्त समाहित (एकाग्र) केले जाते ते 'शील' होय. या भूवादिगणाच्या अनुसार व्युत्पत्ती आहेत. चुरादिगणाच्या अनुसार मात्र, जे कुशल धर्मांचे 'शीलन' करते, म्हणजेच उपधारण करते, आधारभूत होऊन दृढपणे धारण करते ते 'शील' होय. किंवा ज्याच्याद्वारे सत्पुरुष कुशल धर्मांचे उपधारण करतात, दृढपणे धारण करतात ते 'शील' होय, अशा व्युत्पत्ती आहेत. ကိလ ဗန္ဓေ. ကိလတိ. ကိလံ. किल (kila) धातू बांधण्याच्या अर्थात. किलति (kilati). कील (kīlaṃ - पाचर/खूंटी). ကူလ အာဝရဏေ. ကုလတိ. ကူလံ. ဝဟေ ရုက္ခေ ပကူလဇေ. ကူလံ ဗန္ဓတိ. နဒီကူလေ ဝသာမဟံ. ကူလတိ အာဝရတိ ဥဒကံ ဗဟိ နိက္ခမိတုံ န ဒေတီတိ ကူလံ. कूल (kūla) धातू आवरण (रोखणे/वेढणे) या अर्थात. कुलति (kulati). कूल (kūlaṃ - काठ/किनारा). प्रवाहातील किंवा काठावर उगवलेल्या वृक्षांमध्ये. काठ बांधतो. आम्ही नदीकाठी राहतो. 'कूलति' म्हणजे रोखतो, पाणी बाहेर जाण्यापासून रोखतो म्हणून ते 'कूल' (काठ) होय. သူလ [Pg.164] ရုဇာယံ. သူလတိ. သူလံ. ကဏ္ဏသူလံ န ဇနေတိ. सूल (sūla) धातू वेदना (रुजा) या अर्थात. सूलति (sūlati). शूल (sūlaṃ - वेदना/शूळ). कानदुखी (कर्णशूळ) उत्पन्न करत नाही. တူလ နိက္ကရီသေ. နိက္ကရီသံ နာမ ကရီသမတ္တေနပိ အမိနေတဗ္ဗတော လဟုဘာဝေါယေဝ. တူလတိ. တူလံ ဘဋ္ဌံဝ မာလုတော. तूल (tūla) धातू हलकेपणा (निकरीष) या अर्थात. 'निकरीष' म्हणजे अगदी थोड्या वजनानेही मोजता न येण्याजोगा हलकेपणाच होय. तूलति (tūlati). वाऱ्याने उडविलेल्या कापसाप्रमाणे (तूलं). ပုလ သံဃာတေ. ပုလတိ. ပဉ္စပုလိ. पुल (pula) धातू समूहाच्या (संघात) अर्थात. पुलति (pulati). पंचपुली (पाच पेंढ्यांचा समूह). မူလ ပတိဋ္ဌာယံ မူလတိ. မူလံ. မူလသဒ္ဒေါ ‘‘မူလာနိ ဥဒ္ဓရေယျ အန္တမသော ဥဿီရနာဠိမတ္တာနိပီ’’တိအာဒီသု မူလမူလေ ဒိဿတိ. ‘‘လောဘော အကုသလမူလ’’န္တိအာဒီသု အသာဓာရဏဟေတုမှိ. ‘‘ယာဝမဇ္ဈနှိကေ ကာလေ ဆာယာ ဖရတိ, နိဝါတေ ပဏ္ဏာနိ ပတန္တိ, ဧတ္တာဝတာ ရုက္ခမူလ’’န္တိအာဒီသု သမီပေ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – मूल (mūla) धातू प्रतिष्ठेच्या (पाया/मूळ) अर्थात. मूलति (mūlati). मूळ (mūlaṃ). 'मूल' शब्द 'मुळासकट उपटून टाकावे, अगदी वाळ्याच्या मुळांइतकेही' इत्यादी वाक्यांमध्ये मुख्य मुळाच्या अर्थात दिसतो. 'लोभ हे अकुशल मूळ आहे' इत्यादी वाक्यांमध्ये असाधारण कारणाच्या (हेतूच्या) अर्थात. 'दुपारच्या वेळेपर्यंत सावली पसरते, वारा नसताना पाने पडतात, एवढ्या अंतराला वृक्षमुळ (वृक्षाच्या जवळ) म्हणतात' इत्यादी वाक्यांमध्ये समीप (जवळ) या अर्थात. याविषयी असे म्हटले आहे - မူလမူလေ မူလသဒ္ဒေါ, ပဒိဿတိ တထေဝ စ; အသာဓာရဏဟေတုမှိ, သမီပမှိ စ ဝတ္တတိ. 'मूल' शब्द मुख्य मुळाच्या अर्थात, तसेच असाधारण कारणाच्या अर्थात आणि समीप (जवळ) या अर्थातही वापरला जातो. ဖလ နိဗ္ဗတ္တိယံ. ရုက္ခော ဖလတိ. ရုက္ခဖလာနိ ဘုဉ္ဇန္တာ. မဟပ္ဖလံ မဟာနိသံသံ. သောတာပတ္တိဖလံ. တတ္ထ ဖလန္တိ မဟာနိဗ္ဗတ္တိကံ. फल (phala) धातू उत्पत्तीच्या (निष्पत्ती) अर्थात. वृक्ष फलद्रूप होतो (फळ देतो). वृक्षाची फळे खाणारे. महाफल, महान आनिशंस (फायदा). स्रोतापत्ती फल. तेथे 'फल' म्हणजे महान उत्पत्ती देणारे. ဖလ ဘေဒေ. ဖလတိ. မုဒ္ဓါ တေ ဖလတု သတ္တဓာ. ပါဒါ ဖလိံသု. တတ္ထ ဖလတူတိ ဘဇ္ဇိတု. फल (phala) धातू भेदण्याच्या (तुकडे होणे/फाटणे) अर्थात. फलति (phalati). तुझे मस्तक सात तुकड्यांत फाटो. पाय फाटले (भेगा पडल्या). तेथे 'फलतु' म्हणजे भंग पावो (तुकडे होवो). ဖလ အဗျတ္တသဒ္ဒေ. အသနီ ဖလတိ. ဒွေမေ ဘိက္ခဝေ အသနိယာ ဖလန္တိယာ န သန္တသန္တိ. ဖလန္တိယာတိ သဒ္ဒံ ကရောန္တိယာ. फल (phala) धातू स्पष्ट आवाजाच्या (अव्यक्त शब्द) अर्थात. वीज कडकडते (असनी फलति). 'भिक्खूहो, वीज कडकडत असताना हे दोघे घाबरत नाहीत.' 'फलंतिया' म्हणजे आवाज करत असताना. စုလ္လ ဟာဝကရဏေ. ဟာဝကရဏံ ဝိလာသကရဏံ. စုလ္လတိ. चुल्ल (culla) धातू हावभाव (विलास करणे) करण्याच्या अर्थात. हावकरण म्हणजे विलास करणे. चुल्लति (cullati). ဖုလ္လ [Pg.165] ဝိကသနဘေဒေသု. ဖုလ္လတိ. ဖုလ္လံ. ဖုလ္လိတော ကိံသုကော. သုဖုလ္လိတမရဝိန္ဒဝနံ. फुल्ल (phulla) धातू उमलणे (विकसन) आणि भेदणे या अर्थांत. फुल्लति (phullati). फुल्ल (phullaṃ - उमललेले). उमललेला पळस (किंशुक). उत्तम प्रकारे उमललेले कमळवन (अरविंदवन). အသီတိဟတ္ထမုဗ္ဗေဓော, ဒီပင်္ကရော မဟာမုနိ; သောဘတိ ဒီပရုက္ခောဝ, သာလရာဇာဝ ဖုလ္လိတော. ऐंशी हात उंचीचे, महामुनी दीपंकर बुद्ध, दीपवृक्षाप्रमाणे किंवा उमललेल्या शालवृक्षाप्रमाणे शोभून दिसतात. ခဏ္ဍဖုလ္လပဋိသင်္ခရဏံ. खंडित आणि पडझड झालेल्या भागांची दुरुस्ती (खंडफुल्ल प्रतिसंकरण). စိလ္လ သေဌိလ္လေ. သိဌိလဘာဝေါ သေဌိလ္လံ. စိလ္လတိ. चिल्ल (cilla) धातू शिथिलतेच्या (सैलपणा) अर्थात. शिथिल भाव म्हणजे शिथिलता. चिल्लति (cillati). ဝေလု စေလု ကေလု ခေလု ပေလု ဗေလု သေလု သလ တိလ ဂတိယံ. ဝေလတိ. စေလတိ. ကေလတိ. ခေလတိ. ပေလတိ. ဗေလတိ. သေလတိ. သလတိ. တိလတိ. စေလံ, ဗေလကော. ဧတ္ထ စေလန္တိ ဝတ္ထံ. ပေလကောတိ သသော. वेल (vela), चेल (cela), केल (kela), खेल (khela), पेल (pela), बेल (bela), सेल (sela), सल (sala), तिल (tila) हे धातू गतीच्या अर्थात. वेलति (velati). चेलति (celati). केलति (kelati). खेलति (khelati). पेलति (pelati). बेलति (belati). सेलति (selati). सलति (salati). तिलति (tilati). चेल (celaṃ), बेलक (belako). येथे 'चेल' म्हणजे वस्त्र. 'पेलक' म्हणजे ससा. ခလ စလနေ. ခလတိ. ခလော. ခလောတိ ဒုဇ္ဇနော အသာဓု အသပ္ပုရိသော ပါပဇနော. खल (khala) धातू कंप पावण्याच्या (चलन) अर्थात. खलति (khalati). खल (khalo). 'खल' म्हणजे दुर्जन, असाधू, असत्पुरुष, पापी माणूस. ခလ သဉ္စိနနေ. ခလတိ. ခလံ. ခလန္တိ ဝီဟိဋ္ဌပနောကာသဘူတံ ဘူမိမဏ္ဍလံ. တဉှိ ခလန္တိ သဉ္စိနန္တိ ရာသိံ ကရောန္တိ ဧတ္ထ ဓညာနီတိ ခလန္တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ခလံ သာလံ ပသုံ ခေတ္တံ, ဂန္တာ စဿ အဘိက္ခဏ’’န္တိ ပယောဂေါ. खल (khala) धातू गोळा करण्याच्या (संचयन) अर्थात. खलति (khalati). खळ (khalaṃ - खळे). 'खळ' म्हणजे भात (धान्य) ठेवण्याची जागा असलेले भूमंडळ. कारण तेथे धान्याचे संचयन करतात, रास करतात, म्हणून त्याला 'खळ' म्हणतात. 'खळे, शाळा, पशू, शेत येथे वारंवार जाणारा असावा' असा प्रयोग आहे. ဂိလ အဇ္ဈောဟရဏေ. ဂိလတိ. ဂိလမက္ခံ ပုရိသော န ဗုဇ္ဈတိ. गिल (gila) धातू गिळण्याच्या (अध्यवहरण) अर्थात. | गिलति (gilati). गिळलेला फासा माणसाला समजत नाही. ဂလ အဒနေ. ဂလတိ. ဂလော. ဂလန္တိ အဒန္တိ အဇ္ဈောဟရန္တိ ဧတေနာတိ ဂလော. ဂလောတိ ဂီဝါ ဝုစ္စတိ. गल (gala) धातू खाण्याच्या (अदन) अर्थात. गलति (galati). गळा (galo). ज्याच्याद्वारे खातात, गिळतात तो 'गल' (गळा) होय. 'गल' म्हणजे मान (ग्रीवा) असेही म्हटले जाते. သလ သလ္လ အာသုဂတိယံ. အာသုဂတိ သီဃဂမနံ. သလတိ. သလ္လတိ. သလ္လံ. ဧတ္ထ စ ‘‘သလ္လံ ဥသု သရော သလ္လော ကဏ္ဍော တေဇနော’’တိ ပရိယာယာ ဧတေ. सल (sala), सल्ल (salla) हे धातू जलद गतीच्या (आशुगती) अर्थात. आशुगती म्हणजे जलद गमन. सलति (salati). सल्लति (sallati). शल्य (sallaṃ - बाण). आणि येथे 'सल्ल, उषु, शर, शल्य, कांड, तेजन' हे त्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ခေါလ ဂတိပဋိဃာတေ. ခေါလတိ. खोल (khola) धातू गती रोखण्याच्या (गतिप्रतिघात) अर्थात. खोलति (kholati). ဂိလေ [Pg.166] ပီတိက္ခယေ. ဂိလာယတိ. ဂိလာနော, ဂေလညံ. ဂိလာနောတိ အကလ္လကော. ဝိနယေပိ ဟိ ဝုတ္တံ ‘‘နာဟံ အကလ္လကော’’တိ. အဋ္ဌကထာယဉ္စ ‘‘နာဟံ အကလ္လကောတိ နာဟံ ဂိလာနော’’တိ ဝုတ္တံ. गिल (gila) धातू शक्ती क्षीण होण्याच्या (प्रीतीक्षय) अर्थात. गिलायति (gilāyati). गिलान (gilāno - आजारी), गेलञ्ञ (gelaññaṃ - आजारपण). 'गिलान' म्हणजे अस्वस्थ (अकल्लको). विनयातही म्हटले आहे - 'मी अस्वस्थ नाही.' आणि अट्ठकथेत म्हटले आहे - 'मी अस्वस्थ नाही म्हणजे मी आजारी नाही.' မိလေ ဂတ္တဝိနာမေ. မိလာယတိ. မိလာယနော, မိလာယန္တော, မိလာယမာနော. मिल (mila) धातू शरीराच्या अवयवांच्या वाकण्याच्या (गात्रविनाम/कोमेजणे) अर्थात. मिलायति (milāyati). कोमेजणे, कोमेजणारा, कोमेजणारा. ကေလေ မမာယနေ. မမာယနံ တဏှာဒိဋ္ဌိဝသေန ‘‘မမ ဣဒ’’န္တိ ဂဟဏံ. ကေလာယတိ. တွံ ကံ ကေလာယတိ. केल (kela) धातू ममत्वाच्या (ममायन) अर्थात. 'ममायन' म्हणजे तृष्णा आणि दृष्टीच्या प्रभावाने 'हे माझे आहे' असे ग्रहण करणे. केलायति (kelāyati). तू कोणावर ममत्व करतोस? သလ စလနေ သံဝရဏေ စ, ဝလ ဝလ္လ စလနေ စ. သံဝရဏာပေက္ခာယံ စကာရော. သလတိ. ကုသလံ. ဝလတိ. ဝလ္လတိ. ဝလ္လူရော. सल (sala) धातू कंप पावणे (चलन) आणि संवरण (रोखणे) या अर्थांत, आणि वल (vala), वल्ल (valla) हे धातू कंप पावण्याच्या अर्थात. संवरणाची अपेक्षा असल्यामुळे 'च' कार वापरला आहे. सलति (salati). कुशल (kusalaṃ). वलति (valati). वल्लति (vallati). वल्लूर (vallūro - सुकवलेले मांस). တတ္ထ ကုသလန္တိ ကုစ္ဆိတေ ပါပဓမ္မေ သလယတိ စလယတိ ကမ္ပေတိ ဝိဒ္ဓံသေတီတိ ကုသလံ. ကုစ္ဆိတံ အပါယဒွါရံ သလန္တိ သံဝရန္တိ ပိဒဟန္တိ သာဓဝေါ ဧတေနာတိ ကုသလံ. ဝလ္လန္တိ သံဝရန္တိ ရက္ခန္တိ ဣတော ကာကသေနာဒယော သတ္တေ အခါဒနတ္ထာယာတိ ဝလ္လူရော. त्यात 'कुशल' म्हणजे - जे निंद्य अशा पापदर्मांना कंपित करते, नष्ट करते ते 'कुशल' होय. किंवा ज्याच्याद्वारे सत्पुरुष निंद्य अशा अपायद्वारांना (नरकद्वारांना) रोखतात, बंद करतात ते 'कुशल' होय. कावळे इत्यादी पक्षी खाऊ नयेत म्हणून ज्याचे रक्षण (संवरण) करतात ते 'वल्लूर' (सुकवलेले मांस) होय. မလ မလ္လ ဓာရဏေ. မလတိ. မလံ. မလ္လတိ. မလ္လော. मल (mala), मल्ल (malla) हे धातू धारण करण्याच्या अर्थात. मलति (malati). मल (malaṃ - मळ). मल्लति (mallati). मल्ल (mallo - पैलवान). ဘလ ဘလ္လ ပရိဘာသနဟိံသာဒါနေသု. ဘလတိ. ဘလ္လတိ. भल (bhala), भल्ल (bhalla) हे धातू निंदा करणे (परिभाषण), हिंसा करणे आणि देणे या अर्थांत. भलति (bhalati). भल्लति (bhallati). ကလ သင်္ချာနေ. ကလတိ. ကလာ, ကာလော. कल (kala) धातू मोजण्याच्या (संख्यान) अर्थात. कलति (kalati). कला (kalā), काळ (kālo). ဧတ္ထ ကလာတိ သောဠသဘာဂါဒိဘာဂေါ. ကာလောတိ ‘‘ဧတ္တကော အတ္က္ကန္တော’’တိအာဒိနာ ကလိတဗ္ဗော သင်္ခါတဗ္ဗောတိ ကာလော, ပုဗ္ဗဏှာဒိသမယော. येथे 'कला' म्हणजे सोळावा भाग इत्यादी भाग. 'काळ' म्हणजे 'एवढा वेळ निघून गेला' इत्यादी प्रकारे मोजला जाणारा, म्हणून तो 'काळ' (वेळ) होय, जसे की पूर्वाह्न (सकाळ) इत्यादी वेळ. ကလ္လ အသဒ္ဒေ. အသဒ္ဒေါ. နိဿဒ္ဒေါ. ကလ္လတိ. कल्ल (kalla) धातू अस्पष्ट आवाजाच्या (अशब्द/निशब्द) अर्थात. अशब्द म्हणजे निशब्द. कल्लति (kallati). ဇလ ဒိတ္တိယံ. ဇလတိ. ဇလံ, ဇလန္တော, ပဇ္ဇလန္တော, ဇလမာနော. जल (jala) धातू चमकण्याच्या (दीप्ती) अर्थात. जलति (jalati). जल (jalaṃ - पाणी), जळणारा (जलंतो), प्रज्वलित होणारा (पज्जलंतो), जळणारा (जलमानो). ကော [Pg.167] ဧတိ သိရိယာ ဇလံ. ဇလံဝ ယသသာ အဋ္ဌာ, ဒေဝဒတ္တောတိ မေ သုတံ. သဒ္ဓမ္မပဇ္ဇောတော ဇလိတော. शोभेने (श्रीमंत होऊन) कोण पाण्याकडे जातो? देवदत्त यशाने पाण्याच्या प्रवाहाप्रमाणे उभा राहिला, असे मी ऐकले आहे. सद्धर्माचा दिवा प्रज्वलित झाला. ဟုလ စလနေ. ဟုလတိ. ဟလော. ဟလောတိ ဖာလော, သော ဟိ ဟောလေတိ ဘူမိံ ဘိန္ဒန္တော မတ္တိကခဏ္ဍံ စာလေတီတိ ‘‘ဟလော’’တိ ဝုစ္စတိ ဥကာရဿ အကာရံ ကတွာ. 'हुल' (धातू) हलणे या अर्थात. हुलति. हलो. 'हलो' म्हणजे नांगर (फाळ), कारण तो जमीन फोडून मातीचे ढेकूळ हलवतो (होलेति), म्हणून 'उ' काराचा 'अ' कार करून त्याला 'हलो' असे म्हटले जाते. စလ ကမ္ပနေ. စလတိ. စလိတော, အစလော. မဟန္တော ဘူမိစာလော. စလနံ, စာလော. 'चल' (धातू) कंपन करणे या अर्थात. चलति. चलितो (हललेला), अचलो (स्थिर). मोठा भूकंप (महंतो भूमिचालो). चलनं (हलणे), चालो (कंपन). ဇလ ဓညေ. ဇလတိ. ဇလံ. 'जल' (धातू) धान्याच्या अर्थात. जलति. जलं (पाणी). ဋလ ဋုလ ဝေလမ္ဗေ. ဋလတိ. ဋုလတိ. 'टल', 'टुल' (धातू) विलंब करणे या अर्थात. टलति. टुलति. ထလ ဌာနေ. ထလတိ. ထလော. ထလောတိ နိရုဒကပ္ပဒေသော. ပဗ္ဗဇ္ဇာနိဗ္ဗာနေသုပိ တံသဒိသတ္တာ တဗ္ဗောဟာရော. ယထာ ဟိ လောကေ ဥဒကောဃေန အနောတ္ထရဏဋ္ဌာနံ ‘‘ထလော’’တိ ဝုစ္စတိ, ဧဝံ ကိလေသောဃေန အနောတ္ထရဏီယတ္တာ ပဗ္ဗဇ္ဇာ နိဗ္ဗာနဉ္စ ‘‘ထလော’’တိ ဝုစ္စတိ, ‘‘တိဏ္ဏော ပါရင်္ဂတော ထလေ တိဋ္ဌတိ ဗြာဟ္မဏော’’တိ ဟိ ဝုတ္တံ. 'थल' (धातू) स्थानाच्या अर्थात. थलति. थलो. 'थलो' म्हणजे पाण्याचा अभाव असलेला प्रदेश (कोरडी जमीन). प्रव्रज्या (पब्बज्जा) आणि निर्वाण (निब्बान) यांच्यातही तशाच समानतेमुळे हाच शब्द वापरला जातो. कारण ज्याप्रमाणे जगात पाण्याच्या प्रवाहाने (पुराने) न बुडणाऱ्या ठिकाणाला 'थलो' (कोरडी जमीन) म्हटले जाते, त्याचप्रमाणे क्लेशांच्या प्रवाहाने न बुडणारे असल्यामुळे प्रव्रज्या आणि निर्वाणाला 'थलो' म्हटले जाते. कारण असे म्हटले आहे की, "पार गेलेला, पार पावलेला ब्राह्मण कोरड्या जमिनीवर (थले) उभा राहतो." ဖာလ ဝိလေခနေ. ဖာလတိ ဘူမိံ ဝိလေခတိ ဘိန္ဒတီတိ ဖာလော. 'फाल' (धातू) जमीन खोदणे या अर्थात. जो जमीन खोदतो, फाडतो किंवा भेदतो तो 'फालो' (नांगराचा फाळ) होय. နလ ဂန္ထေ. နလတိ. 'नल' (धातू) बांधणे या अर्थात. नलति. ဗလ ပါဏနေ. ဣဟ ပါဏနံ ဇီဝနံ သသနဉ္စ. ဗလတိ. ဗလံ, ဗာလော. 'बल' (धातू) प्राण धारण करणे (जगणे) या अर्थात. येथे 'पाणन' म्हणजे जीवन आणि श्वासोच्छ्वास होय. बलति. बलं (बल), बालो (बाल/मूर्ख). ဧတ္ထ ဗလန္တိ ဇီဝိတံ ကပ္ပေန္တိ ဧတေနာတိ ဗလံ, ကာယဗလဘောဂဗလာဒိကံ ဗလံ. အထ ဝါ ဗလန္တိ သမ္မာဇီဝနံ ဇီဝန္တိ ဧတေနာတိ ဗလံ, သဒ္ဓါဒိကံ ဗလံ. အာဂမဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘အဿဒ္ဓိယေ န ကမ္ပတီတိ သဒ္ဓါဗလ’’န္တိအာဒိ ဝုတ္တံ, တံ ဒဠှဋ္ဌေန ဗလန္တိ ဝတ္တဗ္ဗာနံ သဒ္ဓါဒီနံ အကမ္ပနဘာဝဒဿနတ္ထံ ဝုတ္တန္တိ [Pg.168] ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အထ ဝါ ဓာတူနံ အတ္ထာတိသယယောဂတော အဿဒ္ဓိယာဒီနံ အဘိဘဝနေန သဒ္ဓါဒိဗလာနံ အဘိဘဝနတ္ထောပိ ဂဟေတဗ္ဗော ‘‘အဗလာ နံ ဗလိယန္တီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. ဗာလောတိ ဗလတိ အဿသတိ စေဝ ပဿသတိ စာတိ ဗာလော, အဿသိတပဿသိတမတ္တေန ဇီဝတိ, န သေဋ္ဌေန ပညာဇီဝိတေနာတိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာယံ ဝုတ္တံ ‘‘ဗလန္တီတိ ဗာလာ, အဿသိတပဿသိတမတ္တေန ဇီဝန္တိ, န ပညာဇီဝိတေနာတိ အတ္ထော’’တိ. ပညာဇီဝိနောယေဝ ဟိ ဇီဝိတံ သေဋ္ဌံ နာမ. တေနာဟ ဘဂဝါ ‘‘ပညာဇီဝိံ ဇီဝိတမာဟု သေဋ္ဌ’’န္တိ. येथे ज्याच्याद्वारे जीवन व्यतीत करतात ते 'बलं' (बल) होय, जसे की कायबल (शारीरिक शक्ती), भोगबल इत्यादी. किंवा ज्याच्याद्वारे सम्यक जीवन जगतात ते 'बलं' होय, जसे की श्रद्धा इत्यादी बल (श्रद्धाबल). आगम-अट्ठकथेमध्ये (टीकेमध्ये) "अश्रद्धेमुळे जे कंपित होत नाही ते श्रद्धाबल होय" इत्यादी जे म्हटले आहे, ते दृढतेच्या अर्थाने 'बल' म्हटल्या जाणाऱ्या श्रद्धा इत्यादींच्या अकंपनभावाचे (अविचलतेचे) दर्शन घडवण्यासाठी म्हटले आहे असे समजावे. किंवा धातूंच्या अतिशय अर्थाच्या योगाने अश्रद्धा इत्यादींचा पराभव करून श्रद्धा इत्यादी बलांच्या पराभव करण्याच्या अर्थानेही ते ग्रहण करावे, जसे की "अबल लोक त्याला बळजबरी करतात" (अवला नं बलियन्ति) यामध्ये आहे. 'बालो' (मूर्ख/अज्ञानी) म्हणजे जो केवळ श्वास घेतो आणि सोडतो तो 'बालो' होय; तो केवळ श्वासोच्छ्वासाच्या बळावर जगतो, श्रेष्ठ अशा प्रज्ञाजीवनाने (ज्ञानाच्या जीवनाने) नाही, असा याचा अर्थ आहे. कारण अट्ठकथेमध्ये म्हटले आहे: "जे केवळ श्वास घेतात ते 'बाला' (मूर्ख) होत, ते केवळ श्वासोच्छ्वासाने जगतात, प्रज्ञाजीवनाने नाही, असा अर्थ आहे." कारण प्रज्ञावंताचेच जीवन खरोखर श्रेष्ठ मानले जाते. म्हणूनच भगवंतांनी म्हटले आहे: "प्रज्ञावंताचे जीवन हेच श्रेष्ठ जीवन आहे असे म्हणतात." ပုလ မဟတ္တေ. ပုလတိ. ဝိပုလံ. 'पुल' (धातू) मोठेपणा या अर्थात. पुलति. विपुलं (विपुल). ကုလ သင်္ခါနေ ဗန္ဓုမှိ စ. ကောလတိ. ကုလံ, ကောလော. 'कुल' (धातू) मोजणे आणि नातेवाईक या अर्थात. कोलति. कुलं (कुळ), कोलो. သလ ဂမနေ. သလတိ. 'सल' (धातू) जाणे या अर्थात. सलति. ကိလ ပီတိယ ကီဠနေသု. ပီတဿ ဘာဝေါ ပီတိယံ ယထာ ဒက္ခိယံ. ကီဠနံ ကီဠာယေဝ. ကိလတိ. 'किल' (धातू) प्रीती आणि क्रीडा या अर्थात. प्रसन्नतेचा भाव म्हणजे 'पीतियं' (प्रीती), जसे 'दक्खियं' (दक्षता). 'कीळनं' म्हणजे क्रीडाच. किलति. ဣလ ကမ္ပနေ. ဣလတိ. ဧလံ, ဧလာ. ဧတ္ထ ဧလံ ဝုစ္စတိ ဒေါသော. ကေနဋ္ဌေန? ကမ္ပနဋ္ဌေန. ဒေါသောတိ စေတ္ထ အဂုဏော ဝေဒိတဗ္ဗော, န ပဋိဃော. ‘‘နေလင်္ဂေါ သေတပစ္ဆာဒေါ’’တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. 'इल' (धातू) कंपन करणे या अर्थात. इलति. एलं, एला. येथे 'एलं' म्हणजे दोष म्हटला जातो. कोणत्या अर्थाने? कंपनाच्या अर्थाने. आणि येथे 'दोष' म्हणजे अवगुण समजावा, द्वेष (पटिघ) नव्हे. "नेळंगो सेतपच्छादो" (दोषरहित, पांढरे वस्त्र पांघरलेला) हे याचे उदाहरण आहे. အပိစ ဧလံ ဝုစ္စတိ ဥဒကံ. တထာ ဟိ ‘‘ဧလမ္ဗုဇံ ကဏ္ဋကိံ ဝါရိဇံ ယထာ’’တိ ဣမိဿာ ပါဠိယာ အတ္ထံ နိဒ္ဒိသန္တော အာယသ္မာ သာရိပုတ္တော ‘‘ဧလံ ဝုစ္စတိ ဥဒက’’န္တိ အာဟ. ဧလာတိ လာလာ ဝုစ္စတိ ‘‘ဧလမူဂေါ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. အပိစ ဧလာတိ ခေဠော ဝုစ္စတိ ‘‘သုတွာ နေလပတိံ ဝါစံ, ဝါဠာ ပန္ထာ အပက္ကမု’’န္တိ ဧတ္ထ ဝိယ. ဧတ္ထ နေလပတိံ ဝါစန္တိ ခေဠဗိန္ဒုနိပါတဝိရဟိတံ [Pg.169] ဝစနန္တိ အတ္ထော. လာလာခေဠဝါစကဿ တု ဧလာသဒ္ဒဿ အညံ ပဝတ္တိနိမိတ္တံ ပရိယေသိတဗ္ဗံ. အနေကပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တာ ဟိ သဒ္ဒါ. ကိံ ဝါ အညေန ပဝတ္တိနိမိတ္တေန, ဣလ ကမ္ပနေတိ ဧဝံ ဝုတ္တံ ကမ္ပနံ ဧဝ လာလာခေဠဝါစကဿ ဧလာသဒ္ဒဿ ပဝတ္တိနိမိတ္တံ, တသ္မာ ဣလန္တိ ဇိဂုစ္ဆိတဗ္ဗဘာဝေန ကမ္ပေန္တိ ဟဒယစလနံ ပါပုဏန္တိ ဇနာ ဧတ္ထာတိ ဧလာတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. သမာနပဝတ္တိနိမိတ္တာယေဝ ဟိ သဒ္ဒါ လောကသင်္ကေတဝသေန နာနာပဒတ္ထဝါစကာပိ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? ဟိနောတိ ဂစ္ဆတီတိ ဟေတု, သပ္ပတိ ဂစ္ဆတီတိ သပ္ပော, ဂစ္ဆတီတိ ဂေါတိ. တထာ အသမာနပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တာယေဝ သမာနပဒတ္ထဝါစကာပိ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? ရဉ္စတီတိ ရာဇာ, ဘူမိံ ပါလေတီတိ ဘူမိပါလော, နရေ ဣန္ဒတီတိ နရိန္ဒောတိ. ဧသ နယော သဗ္ဗတ္ထာပိ ဝိဘာဝေတဗ္ဗော. तसेच 'एलं' म्हणजे पाणी देखील म्हटले जाते. कारण "ज्याप्रमाणे पाण्यातून उत्पन्न झालेले कमळ (एलम्बुजं) काटेरी असते..." या पाळी वचनाचा अर्थ स्पष्ट करताना आयुष्यमान सारिपुत्तांनी "एलं म्हणजे पाणी म्हटले जाते" असे सांगितले आहे. 'एला' म्हणजे लाळ असेही म्हटले जाते, जसे की 'एलमूगो' (लाळ गळणारा मुका) यामध्ये आहे. तसेच 'एला' म्हणजे थुंकी देखील म्हटले जाते, जसे की "नेळपतिं वाचं (थुंकीरहित वाणी) ऐकून हिंस्र प्राणी मार्गावरून दूर झाले" यामध्ये आहे. येथे 'नेळपतिं वाचं' म्हणजे थुंकीचे थेंब न उडता बोललेले वचन असा अर्थ आहे. लाळ आणि थुंकी वाचक असलेल्या 'एला' शब्दाचे इतर प्रवृत्ती-निमित्त (व्युत्पत्तीचे कारण) शोधले पाहिजे. कारण शब्दांचे अनेक प्रवृत्ती-निमित्त असतात. किंवा इतर प्रवृत्ती-निमित्ताची काय गरज? 'इल कंपने' (कंपन करणे) यावरून सांगितलेले कंपन हेच लाळ आणि थुंकी वाचक 'एला' शब्दाचे प्रवृत्ती-निमित्त आहे. म्हणून 'इलन्ति' म्हणजे ज्याच्यामुळे लोक घृणास्पद भावनेने कंपित होतात (हृदय हलते), ती 'एला' (लाळ/थुंकी) असा अर्थ घ्यावा. कारण समान प्रवृत्ती-निमित्त असलेले शब्द देखील लोकसंकेतानुसार वेगवेगळ्या पदार्थांचे वाचक असतात. ते कसे? जसे की, 'हिनोति' (जातो) म्हणून 'हेतु', 'सप्पति' (सरपटत जातो) म्हणून 'सप्पो' (सर्प), 'गच्छति' (जाते) म्हणून 'गो' (गाय). त्याचप्रमाणे, असमान प्रवृत्ती-निमित्त असलेले शब्द देखील समान पदार्थांचे वाचक असतात. ते कसे? जसे की, 'रञ्चति' (रंजन करतो) म्हणून 'राजा', 'भूमिं पालेति' (भूमीचे पालन करतो) म्हणून 'भूमिपालो', 'नरे इन्देति' (नरांमध्ये श्रेष्ठ) म्हणून 'नरिन्दो'. हाच नियम सर्वत्र समजून घ्यावा. ဣလ ဂတိယံ. ဣလတိ. 'इल' (धातू) गतीच्या अर्थात. इलति. ဟိလ ဟာဝကရဏေ. ဟေလတိ. 'हिल' (धातू) हावभाव करण्याच्या अर्थात. हेलति. သိလ ဥဉ္ဆေ. သိလတိ. 'सिल' (धातू) उंछवृत्ती (धान्य गोळा करणे) या अर्थात. सिलति. တိလ သိနေဟနေ. တိလတိ. တိလံ, တေလံ, တိလော. 'तिल' (धातू) स्नेह (तेलकटपणा) या अर्थात. तिलति. तिलं (तीळ), तेलं (तेल), तिलो (तीळ वनस्पती). စိလ ဝသနေ. စိလတိ. 'चिल' (धातू) वस्त्र परिधान करणे या अर्थात. चिलति. ဝလ ဝိလာသနေ. ဝလတိ. 'वल' (धातू) विलास या अर्थात. वलति. ပိလ ဂဟဏေ. ပိလတိ. 'पिल' (धातू) ग्रहण करणे या अर्थात. pिलति. မိလ သိနေဟနေ. မိလတိ. 'मिल' (धातू) स्नेह या अर्थात. मिलति. ဖုလ သဉ္စလေ ဖရဏေ စ. ဖုလတိ. 'फुल' (धातू) हलणे आणि पसरणे या अर्थात. फुलति. လကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ल' कारान्त धातूंची रूपे. ဝကာရန္တဓာတု 'व' कारान्त धातू. ဝါ [Pg.170] ဂတိဂန္ဓနေသု. ဝါတိ. ဝါတော. 'वा' (धातू) गती आणि गंध या अर्थात. वाति (वाहतो). वातो (वारा). ဝီ ပဇနကန္တိ အသနခါဒန ဂတီသု. ပဇနံ စလနံ. ကန္တိ အဘိရုစိ. အသနံ ဘတ္တပရိဘောဂေါ. ခါဒနံ ပူဝါဒိဘက္ခနံ. ဂတိ ဂမနံ. ဝေတိ. 'वी' (धातू) प्रजन (कंपन), कांती (अभिरुची), असन (भोजन), खादन (खाणे) आणि गती (जाणे) या अर्थात. 'पजनं' म्हणजे कंपन (हलणे), 'कन्ति' म्हणजे अभिरुची (आवड), 'असनं' म्हणजे भाताचा उपभोग (भोजन), 'खादनं' म्हणजे पुऱ्या इत्यादी खाणे, 'गति' म्हणजे गमन (जाणे). वेति. ဝေ တန္တသန္တာနေ. ဝါယတိ. တန္တဝါယော. 'वे' (धातू) धागा विणणे (तंतूंचा विस्तार करणे) या अर्थात. वायति (विणतो). तंतवायो (विणकर). ဝေ သောသနေ. ဝါယတိ. 'वे' (धातू) सुकवणे या अर्थात. वायति. ဓိဝု ခိဝု နိဒဿနေ. ဓေဝတိ. ခေဝတိ. 'धिवु', 'खिवु' (धातू) निर्देश करणे या अर्थात. धेवति. खेवति. ထိဝု ဒိတ္တိယံ. ထေဝတိ. မဓုမဓုကာ ထေဝန္တိ. 'थिवु' (धातू) दीप्ती (चमकणे) या अर्थात. थेवति. मधुमधुका थेवन्ति (मध आणि मधाचे थेंब चमकतात). ဇီဝ ပါဏဓာရဏေ. ဇီဝတိ. ဇီဝိတံ, ဇီဝေါ, ဇီဝိကာ. အတ္ထိ နော ဇီဝိကာ ဒေဝ, သာ စ ယာဒိသကီဒိသာ. ဇီဝိတံ ကပ္ပေတိ. 'जीव' (धातू) प्राण धारण करणे (जगणे) या अर्थात. जीवति (जगतो). जीवितं (जीवन), जीवो (जीव), जीविका (उपजीविका). "हे देवा, आमची उपजीविका आहे, आणि ती जशी काही आहे तशी आहे." जीवितं कप्पेति (जीवन व्यतीत करतो). ပိဝ မိဝ တိဝ နိဝ ထူလိယေ. ပိဝတိ. ပိဝရော. မိဝတိ. တိဝတိ. နိဝတိ. 'पिव', 'मिव', 'तिव', 'निव' (धातू) स्थूलता या अर्थात. पिवति. पिवरो. मिवति. तिवति. निवति. ဧတ္ထ စ ပိဝရောတိ ကစ္ဆပေါ, ယော ကောစိ ဝါ ထူလသရီရော. တထာ ဟိ ‘‘ပိဝရော ကစ္ဆပေ ထူလေ’’တိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ဝုတ္တံ. आणि येथे 'पिवरो' म्हणजे कासव किंवा जो कोणी स्थूल शरीराचा आहे तो होय. कारण पूर्वाचार्यांनी म्हटले आहे: "पिवरो हा शब्द कासव आणि स्थूल या अर्थात वापरला जातो." အဝ ပါလနေ. အဝတိ. ဗုဒ္ဓေါ မမ အဝတံ. 'अव' (धातू) रक्षण करणे या अर्थात. अवति (रक्षण करतो). बुद्धो माझे रक्षण करोत. ဘဝ ဂတိယံ. သဝတိ. 'भव' (धातू) गतीच्या अर्थात. सवति. ကဝ ဝဏ္ဏေ. ကဝတိ. 'कव' (धातू) वर्णन करणे या अर्थात. कवति. ခိဝု မဒေ. ခိဝတိ. 'खिवु' (धातू) मद (मत्त होणे) या अर्थात. खिवति. ဓောဝု ဓောဝနေ. ဓောဝတိ. 'धोवु' (धातू) धुणे या अर्थात. धोवति (धुतो). ဒေဝု [Pg.171] ဒေဝ ဒေဝနေ. ဒေဝတိ အာဒေဝတိ, ပရိဒေဝတိ, အာဒေဝေါ, ပရိဒေဝေါ, အာဒေဝနာ, ပရိဒေဝနာ, အာဒေဝိတတ္တံ, ပရိဒေဝိတတ္တံ. 'देवु' (devu) धातू 'देवने' (विलाप करणे/शोक करणे) या अर्थात आहे. देवति, आदेवति, परिदेवति, आदेवो, परिदेवो, आदेवना, परिदेवना, आदेवितत्तं, परिदेवितत्तं. သေဝု ကေဝု ခေဝု ဂေဝု ဂိလေဝု မေဝု မိလေဝု သေစနေ. သေဝတိ. ကေဝတိ. ခေဝတိ. ဂေဝတိ. ဂိလေဝတိ. မေဝတိ မိလေဝတိ. 'सेवु', 'केवु', 'खेवु', 'गेवु', 'गिलेवु', 'मेवु', 'मिलेवु' हे धातू 'सेचने' (सिंचन करणे/शिंपडणे) या अर्थात आहेत. सेवति, केवति, खेवति, गेवति, गिलेवति, मेवति, मिलेवति. ဒေဝု ပ္လုတဂတိယံ. ပ္လုတဂတိ ပရိပ္လုတဂမနံ. ဒေဝတိ. 'देवु' (devu) धातू 'प्लुतगती' (उड्या मारत जाणे) या अर्थात आहे. प्लुतगती म्हणजे चहुबाजूने उड्या मारत जाणे. देवति. ဓာတု ဂတိသုဒ္ဓိယံ. ဓာဝတိ, ဝိဓာဝတိ. အာဓာဝတိ, ပရိဓာဝတိ. ဓာဝကော. 'धातु' (dhātu) धातू 'गती' आणि 'शुद्धी' या अर्थात आहे. धावति, विधावति, आधावति, परिधावति, धावको. စိဝု အာဒါနသံဝရေသု. စိဝတိ. 'चिवु' (civu) धातू 'आदान' (ग्रहण करणे) आणि 'संवर' (संयम राखणे) या अर्थात आहे. चिवति. စေဝိ စေတနာတုလျေ. စေဝတိ. 'चेवि' (cevi) धातू 'चेतना' (विचार करणे) आणि 'तुलना' (तुलना करणे) या अर्थात आहे. चेवति. ဝကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'व' कारान्त धातूंची रूपे. သကာရန္တဓာတု 'स' कारान्त धातू. သာ ပါကေ. သာတိ. 'सा' (sā) धातू 'पाके' (पक्व होणे) या अर्थात आहे. साति. သိ သေဝါယံ. သေဝတိ. သေဝနာ, သေဝကော, သေဝိတော, သိဝေါ, သိဝံ. 'सि' (si) धातू 'सेवा' (सेवा करणे) या अर्थात आहे. सेवति. सेवना, सेवको, सेवितो, सिवो, सिवं. နိဟီယတိ ပုရိသော နိဟီနသေဝီ,န စ ဟာယေထ ကဒါစိ တုလျသေဝီ; သေဋ္ဌမုပဂမံ ဥဒေတိ ခိပ္ပံ,တသ္မာ အတ္တနော ဥတ္တရိတရံ ဘဇေထ; "हीन लोकांची सेवा करणारा मनुष्य अधोगतीला जातो, समान लोकांची सेवा करणारा कधीही नष्ट होत नाही; श्रेष्ठ लोकांच्या जवळ जाणारा लवकरच प्रगती करतो, म्हणून स्वतःपेक्षा श्रेष्ठ असलेल्यांची संगत करावी." သိ ဂတိဗုဒ္ဓီသု. သေတိ, အတိသေတိ. အတိသိတုံ, အတိသိတွာ, သေတု. 'सि' (si) धातू 'गती' आणि 'बुद्धी' (ज्ञान) या अर्थात आहे. सेति, अतिसेति. अतिसितुं, अतिसित्वा, सेतु. သီ [Pg.172] သယေ. သယော သုပနံ. သေတိ. သယတိ. သေနံ. သယနံ. 'सी' (sī) धातू 'शयन' (झोपणे) या अर्थात आहे. 'सयो' म्हणजे झोपणे. सेति, सयति. सेनं, सयनं. သု ဂတိယံ. သဝတိ. ပသဝတိ. ပသုတော, သုတော. 'सु' (su) धातू 'गती' या अर्थात आहे. सवति, पसवति. पसुतो, सुतो. ဧတ္ထ သုတောတိ ဒူတော, ‘‘ဝိတ္တိဉှိ မံ ဝိန္ဒတိ သုတ ဒိသွာ’’တိ ‘‘ဒေဝသုတော စ မာတလီ’’တိ စ ဣမာနိ တတ္ထ ပယောဂါနိ. येथे 'सुतो' म्हणजे दूत, "वित्तं हि मं विन्दति सुत दिस्वा" (दूताला पाहून मला आनंद मिळतो) आणि "देवसुतो च मातली" (आणि देवाचा दूत मातली) हे त्याचे तेथील प्रयोग आहेत. သု သဝနေ. သဝနံ သန္ဒနံ. သဝတိ. အာသဝေါ. 'सु' (su) धातू 'सवने' (वाहणे) या अर्थात आहे. 'सवनं' म्हणजे वाहणे. सवति. आसवो. သူ ပသဝေ. ပသဝေါ ဇနနံ. သဝတိ, ပသဝတိ. သုတ္တံ. 'सू' (sū) धातू 'प्रसव' (जन्म देणे) या अर्थात आहे. 'पसवो' म्हणजे जन्म देणे. सवति, पसवति. सुत्तं. ဧတ္ထ ပန သုတ္တန္တိ အတ္ထေ သဝတိ ဇနေတီတိ သုတ္တံ, တေပိဋကံ ဗုဒ္ဓဝစနံ, တဒညမ္ပိ ဝါ ဟတ္ထိသုတ္တာဒိ သုတ္တံ. येथे 'सुत्तं' (सूत्र) म्हणजे जे अर्थाला प्रसवते (उत्पन्न करते) ते 'सुत्तं' होय, जसे की त्रिपिटकातील बुद्धवचन, किंवा त्याव्यतिरिक्त हत्ती-सूत्र इत्यादी सूत्रे. သူ ပါဏဂဗ္ဘဝိမောစနေသု. သူတိ. ပသူတိ. ပသူတော. 'सू' (sū) धातू 'प्राणी आणि गर्भाची सुटका करणे' (प्रसूती) या अर्थात आहे. सूति, पसूति, पसूतो. သု ပေရဏေ. သုတိ. 'सु' (su) धातू 'प्रेरणा देणे' या अर्थात आहे. सुति. သေ ခယေ. သီယတိ. ဧကာရဿီယာဒေသော. 'से' (se) धातू 'क्षय' (नाश होणे) या अर्थात आहे. सीयति. येथे 'ए' काराचा 'सीय' असा आदेश होतो. သေ ပါကေ. သေတိ. 'से' (se) धातू 'पाके' (पक्व होणे) या अर्थात आहे. सेति. သေ ဂတိယံ. သေတိ. သေတု. 'से' (se) धातू 'गती' या अर्थात आहे. सेति. सेतु. ဟိံသ ဟိံသာယံ. ဟိံသတိ. ဟိံသကော, ဟိံသနာ, ဟိံသာ. 'हिंस' (hiṃsa) धातू 'हिंसा' (इजा करणे) या अर्थात आहे. हिंसति. हिंसको, हिंसना, हिंसा. ဣဿ ဣဿာယံ. ဣဿတိ. ပုရိသပရက္ကမဿ ဒေဝါ န ဣဿန္တိ. ဣဿာ, ဣဿာယနာ. 'इस्स' (issa) धातू 'ईर्ष्या' (मत्सर करणे) या अर्थात आहे. इस्सति. पुरुषाच्या पराक्रमाचा देव मत्सर करत नाहीत. इस्सा, इस्सायना. နမဿ ဝန္ဒနာနတိယံ. ဝန္ဒနာနတိ နာမ ဝန္ဒနာသင်္ခါတံ နမနံ, သကမ္မကောယေဝါယံ ဓာတု, န နမုဓာတု ဝိယ သကမ္မကော စေဝ အကမ္မကော စ. နမဿတိ. 'नमस्स' (namassa) धातू 'वंदना' आणि 'नती' (नम्र होणे) या अर्थात आहे. वंदना-नती म्हणजे वंदनेने युक्त असलेले नमन. हा धातू केवळ सकर्मकच आहे, 'नमु' धातूसारखा सकर्मक आणि अकर्मक दोन्ही नाही. नमस्सति. ဃုသ သဒ္ဒေ. ဃုသတိ, ဃောသတိ. ပဋိဃောသော, နိဂ္ဃောသော, ဝစီဃောသော. 'घुस' (ghusa) धातू 'शब्द' (आवाज करणे) या अर्थात आहे. घुसति, घोसति. पटिघोसो, निग्घोसो, वचीघोसो. စုသ [Pg.173] ပါနေ. စုသတိ. 'चुस' (cusa) धातू 'पाने' (चोखणे) या अर्थात आहे. चुसति. ပုသ ဗုဒ္ဓိယံ. ပုသတိ. ပေါသော. သမ္ပီဠေ မမ ပေါသနံ. ပေါသနန္တိ ဝဍ္ဎနံ. 'पुस' (pusa) धातू 'बुद्धी' (पोषण करणे/वाढवणे) या अर्थात आहे. पुसति. पोसो. "संपीळे मम पोसनं". 'पोसनं' म्हणजे वाढवणे. မုသ ထေယျေ. ထေနနံ ထေယျံ စောရိကာ. မုသတိ. ဒုဒ္ဒိက္ခော စက္ခုမုသနော. မုသလော. 'मुस' (musa) धातू 'थेय्य' (चोरी करणे) या अर्थात आहे. 'थेननं' आणि 'थेय्यं' म्हणजे चोरी. musati. दुद्दिक्खो चक्खुमुसनो. मुसलो. ပုသ ပသဝေ. ပုသတိ. 'पुस' (pusa) धातू 'प्रसव' (जन्म देणे) या अर्थात आहे. पुसति. ဝါသိ ဘူသ အလင်္ကာရေ. ဝါသတိ. ဘူသတိ, ဝိဘူသတိ. ဘူသနံ, ဝိဘူသနံ. 'वासि' आणि 'भूस' हे धातू 'अलंकार' (सजवणे) या अर्थात आहेत. वासति. भूसति, विभूसति. भूसनं, विभूसनं. ဥသ ရုဇာယံ. ဥသတိ. 'उस' (usa) धातू 'रुजा' (वेदना) या अर्थात आहे. usati. ဣသ ဥစ္ဆေ. ဧသတိ. ဣသိ. 'इस' (isa) धातू 'उच्छ' (शोधणे) या अर्थात आहे. एसति. इसि. ဧတ္ထ ပန သီလာဒယော ဂုဏေ ဧသန္တီတိ ဣသယော, ဗုဒ္ဓါဒယော အရိယာ တာပသပဗ္ဗဇ္ဇာယ စ ပဗ္ဗဇိတာ နရာ. ‘‘ဣသိ တာပသော ဇဋိလော ဇဋီ ဇဋာဓရော’’တိ ဧတေ တာပသပရိယာယာ. येथे जे शील इत्यादी गुणांचा शोध घेतात ते 'इसयो' (ऋषी) होत, जसे की बुद्ध इत्यादी आर्य आणि तापस प्रव्रज्येने प्रव्रजित झालेले मनुष्य. 'इसि, तापसो, जटिलो, जटी, जटाधरो' हे तापसाचे समानार्थी शब्द आहेत. ကသ ဝိလေခနေ. ကသတိ, ကဿတိ. ကဿကော, အာကာသော. 'कस' (kasa) धातू 'विलेखन' (नांगरणे) या अर्थात आहे. कसति, कस्सति. कस्सको, आकासो. ဧတ္ထ ကဿကောတိ ကသိကာရကော. အာကာသောတိ နဘံ. တဉှိ န ကဿတီတိ အာကာသော. ကသိတုံ ဝိလေခိတုံ န သက္ကာတိ အတ္ထော. ဣမာနိ တဒဘိဓာနာနိ – येथे 'कस्सको' म्हणजे शेती करणारा. 'आकासो' म्हणजे नभ (आकाश). कारण ते नांगरले जात नाही म्हणून ते 'आकासो' होय. नांगरता किंवा खरवडता येत नाही असा याचा अर्थ आहे. त्याची नावे खालीलप्रमाणे आहेत – အာကာသော အမ္ဗရံ အဗ္ဘံ, အန္တလိက္ခ’မဃံ နဘံ; ဝေဟာသော ဂဂနံ ဒေဝေါ, ခ’မာဒိစ္စပထောပိ စ. आकासो, अम्बरं, अब्भं, अन्तलिक्खं, अघं, नभं, वेहासो, गगनं, देवो, खं, आणि आदिच्चपथो. တာရာပထော စ နက္ခတ္တ-ပထော ရဝိပထောပိ စ; ဝေဟာယသံ ဝါယုပထော, အပထော အနိလဉ္ဇသံ. तारापथो, नक्खत्तपथो, रविपथो, वेहायसं, वायुपथो, अपथो, आणि अनिलंजसं. ကသ [Pg.174] သိသ ဇသ ဈသ ဝသ မသ ဒိသ ဇုသ ယုသ ဟိံသတ္ထာ. ကသတိ. သိသတိ. ဇသတိ. ဈသတိ. ဝသတိ. မသတိ. မသကော. ဩမသတိ, ဩမသဝါဒေါ. ဒိသတိ. ဇုသတိ. ယူသတိ. 'कस', 'सिस', 'जस', 'झस', 'वस', 'मस', 'दिस', 'जुस', 'युस' हे धातू 'हिंसा' या अर्थात आहेत. कसति, सिसति, जसति, झसति, वसति, मसति. मसको. ओमसति, ओमसवादो. दिसति, जुसति, यूसति. တတ္ထ ဩမသတီတိ ဝိဇ္ဈတိ. ဩမသဝါဒေါတိ ပရေသံ သူစိယာ ဝိယ ဝိဇ္ဈနဝါဒေါ. မသကောတိ မကသော. तेथे 'ओमसति' म्हणजे टोचणे. 'ओमसवादो' म्हणजे इतरांना सुईने टोचल्याप्रमाणे बोलणे. 'मसको' म्हणजे डास. ဘဿ ဘဿနေ. ဘဿန္တိ ကထနံ ဝုစ္စတိ ‘‘အာဝါသော ဂေါစရော ဘဿံ. ဘဿကာရက’’န္တိအာဒီသု ဝိယ. ဘဿတိ. ဘဋ္ဌံ. ဘဋ္ဌန္တိ ဘာသိတံ, ဝစနန္တိ အတ္ထော. ဧတ္ထ ပန – 'भस्स' धातू बोलण्याच्या अर्थात आहे. 'भस्स' म्हणजे बोलणे (कथन) म्हटले जाते, जसे की 'आवासो गोचरो भस्सं, भस्सकारको' इत्यादींमध्ये. 'भस्सति' (तो बोलतो). 'भट्ठं'. 'भट्ठं' म्हणजे बोललेले किंवा वचन असा अर्थ आहे. आणि येथे तर - ‘‘သုဘာသိတာ အတ္ထဝတီ, ဂါထာယော တေ မဟာမုနိ; နိဇ္ဈတ္တောမှိ သုဘဋ္ဌေန, တွဉ္စ မေ သရဏံ ဘဝါ’’တိ “हे महामुनी! आपल्या गाथा सुभाषित (सुंदर रीतीने बोललेल्या) आणि अर्थपूर्ण आहेत. मी आपल्या सुभाषित वचनाने संतुष्ट झालो आहे, आणि आपण माझे शरण व्हावे.” ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ နိဇ္ဈတ္တောတိ နိဇ္ဈာပိတော ဓမ္မောဇပညာယ ပညတ္တိဂတော အမှိ. သုဘဋ္ဌေနာတိ သုဘာသိတေန. हे पाळीचे उदाहरण आहे. तेथे 'निज्झत्तो' म्हणजे धर्माच्या ओजाच्या प्रज्ञेने समजवलेला, प्रज्ञप्तीला प्राप्त झालेला मी आहे. 'सुभट्ठेन' म्हणजे सुभाषिताने (सुंदर वचनाने). ဇိသု နိသု ဝိသု မိသု ဝဿ သေစနေ. ဇေသတိ. နေသတိ. ဝေသတိ. မေသတိ. ဒေဝေါ ဝဿတိ. 'जिसु', 'निसु', 'विसु', 'मिसु' आणि 'वस्स' हे धातू सिंचन करण्याच्या अर्थात आहेत. 'जेसति', 'नेसति', 'वेसति', 'मेसति'. 'देवो वस्सति' (पाऊस पडतो). မရိသု သဟနေ စ. စကာရော သေစနာပေက္ခကော. မရိသတိ. 'मरिसु' धातू सहन करण्याच्या आणि (सिंचन करण्याच्या) अर्थात आहे. 'च' कार सिंचनाच्या अपेक्षेने आहे. 'मरिसति'. ပုသ ပေါသနေ. ပေါသတိ. ပေါသော. ကမ္မစိတ္တဥတုအာဟိအာရေဟိ ပေါသိယတီတိ ပေါသော. ‘‘အညေပိ ဒေဝေါ ပေါသေတီ’’တိ ဒဿနတော ပန စုရာဒိဂဏေပိ ဣမံ ဓာတုံ ဝက္ခာမ. 'पुस' धातू पोषण करण्याच्या अर्थात आहे. 'पोसति'. 'पोसो'. कर्म, चित्त, ऋतु आणि आहार यांच्याद्वारे ज्याचे पोषण केले जाते, तो 'पोसो' होय. 'देव इतरांचेही पोषण करतो' (अञ्ञेपि देवो पोसेति) अशा दर्शनामुळे चुरादि गणातही आम्ही या धातूचा उल्लेख करू. ပိသု သိလိသု ပုသု ပလုသု ဥသု ဥပဒါဟေ. ပေသတိ. သိလေသတိ. သိလေသော. ပေါသတိ. ပလောသတိ. ဩသတိ. ဥသု. 'पिसु', 'सिलिसु', 'पुसु', 'पलुसु' आणि 'उसु' हे धातू दाह होण्याच्या (जळण्याच्या) अर्थात आहेत. 'पेसति', 'सिलेसति', 'सिलेसो', 'पोसति', 'पलोसति', 'ओसति', 'उसु'. ဃသု သံဟရိသေ. သံဟရိသော သံဃဋ္ဋနံ. ဃဿတိ. 'घसु' धातू संघर्षाच्या (घासण्याच्या) अर्थात आहे. 'संहरिसो' म्हणजे संघट्टन (परस्पर घर्षण). 'घस्सति'. ဟသု အာလိင်္ဂေ. အာလိင်္ဂေါ ဥပဂူဟနံ. ဟဿတိ. 'हसु' धातू आलिंगन देण्याच्या अर्थात आहे. 'आलिंगो' म्हणजे आलिंगन देणे (मिठी मारणे). 'हस्सति'. ဟသ [Pg.175] ဟသနေ. ဟသတိ. အဿာ ဟသန္တိ, အာဇာနီယာ ဟသန္တိ, ပဟသတိ, ဥဟသတိ. ကာရိတေ ‘‘ဟာသေတိ’’ဣစ္စာဒိ, ဥဟသိယမာနော, ဟာသော, ပဟာသော, ဟသနံ, ပဟသနံ, ဟသိတံ. ဟကာရလောပေန မန္ဒဟသနံ ‘‘သိတ’’န္တိ ဝုစ္စတိ ‘‘သိတံ ပါတွာကာသီ’’တိအာဒီသု. 'हस' धातू हसण्याच्या अर्थात आहे. 'हसति'. 'अस्सा हसन्ति' (घोडे खिंकाळतात), 'आजानीया हसन्ति' (उत्कृष्ट घोडे खिंकाळतात), 'पहसति', 'उहसति'. प्रयोजक रूपात 'हासेति' इत्यादी रूपे होतात, जसे की 'उहसियमानो', 'हासो', 'पहासो', 'हसनं', 'पहसनं', 'हसितं'. 'ह' काराचा लोप होऊन मंदहास्याला 'सितं' असे म्हटले जाते, जसे की 'सितं पात्वाकासि' (त्यांनी मंदहास्य प्रकट केले) इत्यादींमध्ये. တတ္ထ ဥဟသတီတိ အဝဟသတိ. ဥဒသိယမာနောတိ အဝဟသိယမာနော. တတြာယံ ပါဠိ ‘‘ဣဓ ဘိက္ခုံ အရညဂတံ ဝါ ရုက္ခမူလဂတံ ဝါ သုညာဂါရဂတံ ဝါ မာတုဂါမော ဥပသင်္ကမိတွာ ဥဟသတိ’’ ဣတိ စ ‘‘သော မာတုဂါမေန ဥဟသိယမာနော’’ ဣတိ စ. ဟာသောတိ ဟသနံ ဝါ သောမနဿံ ဝါ ‘‘ဟာသော မေ ဥပပဇ္ဇထာ’’တိအာဒီသု ဝိယ. तेथे 'उहसति' म्हणजे उपहास करणे. 'उहसियमानो' (पाठात उदसियमानो) म्हणजे उपहास केला जाणारा. त्याविषयी ही पाळी आहे: 'येथे अरण्यात गेलेल्या, किंवा वृक्षाच्या मुळाशी गेलेल्या, किंवा शून्य घरात गेलेल्या भिक्खूजवळ स्त्री येऊन त्याचा उपहास करते' आणि 'तो स्त्रीकडून उपहास केला जात असताना' असे. 'हासो' म्हणजे हसणे किंवा सौमनस्य (आनंद), जसे की 'हासो मे उपपज्जथा' (माझ्या मनात आनंद निर्माण झाला) इत्यादींमध्ये. တုသ ဟသ ဟိသ ရသ သဒ္ဒေ. တုသတိ, ဟသတိ, ဟိသတိ, ရသတိ, ရသိတံ. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘ဘေရိယော သဗ္ဗာ ဝဇ္ဇန္တု, ဝီဏာ သဗ္ဗာ ရသန္တု တာ’’ ဣတိ. 'तुस', 'हस', 'हिस' आणि 'रस' हे धातू आवाजाच्या (शब्दाच्या) अर्थात आहेत. 'तुसति', 'हसति', 'हिसति', 'रसति', 'रसितं'. याविषयी ही पाळी आहे: 'सर्व भेरी वाजवाव्यात आणि त्या सर्व विणांनी नाद करावा' अशी. ရသ အဿာဒနေ. ရသတိ. ရသော. 'रस' धातू आस्वाद घेण्याच्या (चव घेण्याच्या) अर्थात आहे. 'रसति'. 'रसो'. ရသ အဿာဒသိနေဟေသု. ရသတိ. ရသော. 'रस' धातू आस्वाद आणि स्नेह (प्रेम) यांच्या अर्थात आहे. 'रसति'. 'रसो'. ရသ ဟာနိယံ. ရသတိ. ရသနံ, ရသော. 'रस' धातू हानीच्या (ऱ्हासाच्या) अर्थात आहे. 'रसति'. 'रसनं', 'रसो'. အတြာယံ ပါဠိ – याविषयी ही पाळी आहे - ‘‘နဟေဝ ဌိတ နာ’သီနံ, န သယာနံ န ပဒ္ဓဂုံ; ယာဝ ဗျာတိ နိမီသတိ, တတြာပိ ရသတိဗ္ဗယော’’တိ. “उभे राहिलेल्याला नाही, बसलेल्याला नाही, झोपलेल्याला नाही आणि चालणाऱ्यालाही नाही; डोळ्यांची पापणी लवते तेवढ्या वेळातही हे वय क्षीण होत जाते.” တတ္ထ ရသတိဗ္ဗယောတိ သော သော ဝယော ရသတိ ပရိဟာယတိ, န ဝဍ္ဎတီတိ အတ္ထော. तेथे 'रसतिय्बयो' म्हणजे ते ते वय क्षीण होते (ऱ्हास पावते), वाढत नाही असा अर्थ आहे. လသ သိလေသနကီဠနေသု. လသတိ. လာသော. လသီ စ တေ နိပ္ပလိတာ. လသိ ဝုစ္စတိ မတ္ထလုင်္ဂံ. နိပ္ပလိတာတိ နိက္ခန္တာ. 'लस' धातू चिकटणे आणि क्रीडा करणे यांच्या अर्थात आहे. 'लसति'. 'लासो'. 'लसी च ते निप्पलिता' (आणि तुझी लसी बाहेर पडली). 'लसी' म्हणजे मेंदू (मस्तुलुंग) म्हटले जाते. 'निप्पलिता' म्हणजे बाहेर पडलेली. နိသ [Pg.176] သမာဓိမှိ. သမာဓိ သမာဓာနံ စိတ္တေကဂ္ဂတာ. နေသတိ. 'निस' धातू समाधीच्या अर्थात आहे. समाधी म्हणजे समाधान, चित्ताची एकाग्रता होय. 'नेसति'. မိသ မသ သဒ္ဒေ ရောသေ စ. မေသတိ. မသတိ. မေသော. မသကော. 'मिस' आणि 'मस' हे धातू आवाजाच्या आणि क्रोधाच्या अर्थात आहेत. 'मेसति', 'मसति'. 'मेसो', 'मसको'. ပိသိ ပေသု ဂတိယံ. ပိသတိ. ပေသတိ. 'पिसि' आणि 'पेसु' हे धातू गतीच्या अर्थात आहेत. 'पिसति', 'पेसति'. သသု ဟိံသာယံ. သသတိ. သတ္ထံ. သတ္ထံ ဝုစ္စတိ အသိ. 'ससु' धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. 'ससति'. 'सत्थं'. 'सत्थं' म्हणजे तलवार म्हटले जाते. သံသ ထုတိယဉ္စ. စကာရော ဟိံသာပေက္ခာယ. သံသတိ, ပသံသတိ. ပသံသာ, ပသံသနာ. ပသတ္ထော ဘဂဝါ. ပသံသမာနော, ပသံသိတော, ပသံသကော, ပသံသိတဗ္ဗော, ပသံသနီယော, ပါသံသော, ပသံသိတွာ ဣစ္စာဒီနိ. 'संस' धातू स्तुती करण्याच्या आणि (हिंसेच्या) अर्थात आहे. 'च' कार हिंसेच्या अपेक्षेने आहे. 'संसति', 'पसंसति'. 'पसंसा', 'पसंसना'. 'पसत्थो भगवा' (प्रशंसित भगवान). 'पसंसमानो', 'पसंसितो', 'पसंसको', 'पसंसितब्बो', 'पसंसनीयो', 'पासंसो', 'पसंसितत्वा' इत्यादी. ဒိသ ပေက္ခနေ. ဧတိဿာ ပန နာနာရူပါနိ ဘဝန္တိ – ‘‘ဒိဿတိ ပဒိဿတိ’’ ဣစ္စာဒိ အကမ္မကံ. ‘‘ပဿတိ ဒက္ခတိ’’ဣစ္စာဒိ သကမ္မကံ. 'दिस' धातू पाहण्याच्या अर्थात आहे. याचे विविध रूपे होतात - 'दिस्सति, पदिस्सति' इत्यादी अकर्मक रूपे आहेत. 'पस्सति, दक्खति' इत्यादी सकर्मक रूपे आहेत. ဒိဿတု, ပဿတု, ဒက္ခတု. ဒိဿေယျ, ပဿေယျ, ဒက္ခေယျ. ဒိဿေ, ပဿေ, ဒက္ခေ. ဒိဿ, ပဿ, ဒက္ခ. အဒိဿာ, အပဿာ. အဒ္ဒါ သီဒန္တရေ နဂေ. အဒ္ဒက္ခာ, အဒ္ဒက္ခုံ, အဒဿုံ. အဒဿိ, အပဿိ, အဒက္ခိ. दिस्सतु, पस्सतु, दक्खतु. दिस्सेय्य, पस्सेय्य, दक्खेय्य. दिस्से, पस्से, दक्खे. दिस्स, पस्स, दक्ख. अदिस्सा, अपस्सा. 'अद्दा सीदन्तरे नगे' (त्याने सीदंतर पर्वतांमध्ये पाहिले). अद्दक्खा, अद्दक्खुं, अदस्सुं. अदस्सि, अपस्सि, अदक्खि. ဒဿိဿတိ, ပဿိဿတိ, ဒက္ခိဿတိ. အဒဿိဿာ, အပဿိဿာ, ဒက္ခိဿာ. ဧဝံ ဝတ္တမာနပဉ္စမိယာဒိဝသေန ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗာနိ. ကာရိတေ ‘‘ဒဿေတိ ဒဿယတီ’’တိ ရူပါနိ. ကမ္မေ ‘‘ပဿိယတိ’’ ဣစ္စာဒီနိ. दस्सिस्सति, पस्सिस्सति, दक्खिस्सति. अदस्सिस्सा, अपस्सिस्सा, दक्खिस्सा. अशा प्रकारे वर्तमानकाळ, पंचमी इत्यादींच्या नियमांनुसार विस्तार करावा. प्रयोजक रूपात 'दस्सेति', 'दस्सयति' अशी रूपे होतात. कर्मणी प्रयोगात 'पस्सियति' इत्यादी रूपे होतात. ဒိသာ. ပဿော. ပဿံ. ပဿိတာ. ဒဿေတာ. ဒဿနံ. ဝိပဿနာ, ဉာဏဒဿနန္တိ နာမိကပဒါနိ. တဒတ္ထေ ပန တုမတ္ထေ စ ‘‘ဒက္ခိတာယေ’’တိ ရူပံ. ‘‘အာဂတာမှ ဣမံ ဓမ္မသမယံ, ဒက္ခိတာယေ အပရာဇိတသံဃ’’န္တိ ဟိ ပါဠိ. ဣမသ္မိံ ပန ပါဠိပ္ပဒေသေ ‘‘ဒက္ခိတာယေ’’တိ ဣဒံ တဒတ္ထေ တုမတ္ထေ ဝါ စတုတ္ထိယာ ရူပံ. တထာ [Pg.177] ဟိ ဒက္ခိတာယေတိ ဣမဿ ဒဿနတ္ထာယာတိ ဝါ ပဿိတုန္တိ ဝါ အတ္ထော ယောဇေတဗ္ဗော. ဒိသာတိအာဒီသု ပန ပုရတ္ထိမာဒိဘေဒါပိ ဒိသာတိ ဝုစ္စတိ. ယထာဟ – 'दिसा', 'पस्सो', 'पस्सं', 'पस्सिता', 'दस्सेता', 'दस्सनं', 'विपस्सना', 'ञाणदस्सनं' ही नामरूपे (नामिक पदे) आहेत. आणि तदर्थी किंवा 'तुमुन्' प्रत्ययाच्या अर्थी 'दक्खिताये' असे रूप होते. कारण 'आगताम्ह इमं धम्मसमयं, दक्खिताये अपराजितसंघं' (आम्ही या धर्मसभेला अपराजित संघाचे दर्शन घेण्यासाठी आलो आहोत) अशी पाळी आहे. या पाळीच्या भागात 'दक्खिताये' हे तदर्थी किंवा तुमुन्-अर्थी चतुर्थीचे रूप आहे. कारण 'दक्खिताये' याचा अर्थ 'दर्शनासाठी' किंवा 'पाहण्यासाठी' असा लावला पाहिजे. 'दिसा' इत्यादींमध्ये पूर्व इत्यादी दिशांच्या भेदालाही 'दिसा' (दिशा) म्हटले जाते. जसे म्हटले आहे - ‘‘ဒိသာ စတဿော ဝိဒိသာ စတဿော,ဥဒ္ဓံ အဓော ဒသ ဒိသတာ ဣမာယော; ကတမံ ဒိသံ တိဋ္ဌတိ နာဂရာဇာ,ယမဒ္ဒသာ သုပိနေ ဆဗ္ဗိသာဏ’’န္တိ. “चार मुख्य दिशा आणि चार उपदिशा, वर आणि खाली मिळून या दहा दिशा आहेत; तो नागराज कोणत्या दिशेला उभा आहे, ज्याला तू स्वप्नात सहा सुळ्यांचा पाहिले होते?” မာတာပိတာဒယောပိ. ယထာဟ – माता-पिता इत्यादींनाही (दिशा म्हटले जाते). जसे म्हटले आहे - ‘‘မာတာပိတာ ဒိသာ ပုဗ္ဗာ, အာစရိယာ ဒက္ခိဏာ ဒိသာ; ပုတ္တဒါရာ ဒိသာ ပစ္ဆာ, မိတ္တာမစ္စာ စ ဥတ္တရာ; “माता-पिता ही पूर्व दिशा आहेत, आचार्य ही दक्षिण दिशा आहेत; पुत्र आणि पत्नी ही पश्चिम दिशा आहेत, मित्र आणि अमात्य ही उत्तर दिशा आहेत; ဒါသကမ္မကရာ ဟေဋ္ဌာ, ဥဒ္ဓံ သမဏဗြာဟ္မဏာ; ဧတာ ဒိသာ နမဿေယျ, အလမတ္တော ကုလေ ဂိဟီ’’တိ; दास आणि कामगार ही खालची दिशा आहेत, श्रमण आणि ब्राह्मण ही वरची दिशा आहेत; कुळातील समर्थ गृहस्थाने या दिशांना नमस्कार करावा.” ပစ္စယဒါယကာပိ. ယထာဟ – ‘‘အဂါရိနော အန္နဒပါနဝတ္ထဒါ, အဝှာယိကာ နမ္ပိ ဒိသံ ဝဒန္တီ’’တိ. प्रत्ययदायक (दान देणारे) यांनाही (दिशा म्हटले जाते). जसे म्हटले आहे - 'अन्न, पान आणि वस्त्र देणारे गृहस्थ, जे बोलावणारे आहेत, त्यांनाही दिशा म्हणतात.' နိဗ္ဗာနမ္ပိ. ယထာဟ – निर्वाणालाही (दिशा म्हटले जाते). जसे म्हटले आहे - ‘‘ဧတာဒိသာ ပရမာ သေတကေတု,ယံ ပတွာ နိဒ္ဒုက္ခာ သုခိနော ဘဝန္တီ’’တိ; “हे श्वेतकेतू! ही अशी परम दिशा आहे, ज्याला प्राप्त करून लोक दुःखमुक्त आणि सुखी होतात.” ဧဝံ ဒိသာသဒ္ဒေန ဝုစ္စမာနံ အတ္ထရူပံ ဉတွာ ဣဒါနိဿ နိဗ္ဗစနမေဝံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဒိဿတိ စန္ဒာဝဋ္ဋနာဒိဝသေန ‘‘အယံ ပုရိမာ အယံ ပစ္ဆိမာ’’တိအာဒိနာ နာနပ္ပကာရတော ပညာယတီတိ ဒိသာ, ပုရတ္ထိမဒိသာဒယော. တထာ ‘‘ဣမေ အမှာကံ ဂရုဋ္ဌာန’န္တိအာဒိနာ ပဿိတဗ္ဗာတိ ဒိသာ, မာတာပိတာဒယော. ဒိဿန္တိ သကာယ ပုညကြိယာယ ဣမေ ဒါယကာတိ ပညာယန္တီတိ ဒိသာ, ပစ္စယဒါယကာ. ဒိဿတိ ဥပ္ပာဒဝယာဘာဝေန နိစ္စဓမ္မတ္တာ သဗ္ဗကာလမ္ပိ ဝိဇ္ဇတီတိ ဒိသာ, နိဗ္ဗာနံ. ပဿောတိ ကာရဏာကာရဏံ [Pg.178] ပဿတီတိ ပဿော. ဧဝံ ပဿတီတိ ပဿံ. အတြာယံ ပါဠိ – अशा प्रकारे 'दिसा' शब्दाने व्यक्त होणारा अर्थ जाणून, आता त्याची व्युत्पत्ती या प्रकारे पाहिली पाहिजे. चंद्र-सूर्याचे फिरणे इत्यादींच्या आधारे 'ही पूर्व, ही पश्चिम' इत्यादी विविध प्रकारे जी दिसते (जाणली जाते) ती 'दिसा' (दिशा), जसे की पूर्व दिशा इत्यादी. तसेच 'हे आमचे पूज्य स्थान आहेत' इत्यादी भावनेने ज्यांच्याकडे पाहिले पाहिजे ते 'दिसा', जसे की माता-पिता इत्यादी. आपल्या पुण्यक्रियेमुळे हे दायक (दाते) म्हणून दिसतात (जाणले जातात) ते 'दिसा', जसे की प्रत्ययदायक. उत्पाद आणि व्यय नसल्यामुळे, नित्य धर्म असल्याने जे सर्वकाळ विद्यमान दिसते ते 'दिसा', म्हणजे निर्वाण. 'पस्सो' म्हणजे जो कारण आणि अकारण पाहतो तो 'पस्सो'. अशा प्रकारे जो पाहतो तो 'पस्सं'. याविषयी ही पाळी आहे - ‘‘ပဿတိ ပဿော ပဿန္တံ, အပဿန္တမ္ပိ ပဿတိ; အပဿန္တော အပဿန္တံ, ပဿန္တမ္ပိ န ပဿတီ’’တိ. “पाहणारा (ज्ञानी) पाहणाऱ्याला पाहतो, आणि न पाहणाऱ्यालाही पाहतो; न पाहणारा (अज्ञानी) न पाहणाऱ्याला पाहत नाही, आणि पाहणाऱ्यालाही पाहत नाही.” ပဿတီတိ ပဿိတာ. ဒဿေတီတိ ဒဿိတာ. ဒဿနန္တိ ဒဿနကြိယာ. အပိစ ဒဿနန္တိ စက္ခုဝိညာဏံ. တဉှိ ရူပါရမ္မဏံ ပဿတီတိ ဒဿနန္တိ ဝုစ္စတိ. တထာ ‘‘ဒဿနေန ပဟာတဗ္ဗာ ဓမ္မာ’’တိ ဝစနတော ဒဿနံ နာမ သောတာပတ္တိမဂ္ဂေါ. ကသ္မာ သောတာပတ္တိမဂ္ဂေါ ဒဿနံ? ပဌမံ နိဗ္ဗာနဒဿနတော. နနု ဂေါတြဘူ ပဌမတရံ ပဿတီတိ? နော န ပဿတိ, ဒိသွာ ကတ္တဗ္ဗကိစ္စံ ပန န ကရောတိ သံယောဇနာနံ အပ္ပဟာနတော, တသ္မာ ‘‘ပဿတီ’’တိ န ဝတ္တဗ္ဗော. ယတ္ထ ကတ္ထစိ ရာဇာနံ ဒိသွာပိ ပဏ္ဏာကာရံ ဒတွာ ကိစ္စနိပ္ဖတ္တိယာ အဒိဋ္ဌတ္တာ အဇ္ဇာပိ ရာဇာနံ န ပဿာမီတိ ဝဒန္တော ဂါမဝါသီ နိဒဿနံ. जो पाहतो तो 'पस्सिता' (पाहणारा). जो दाखवतो तो 'दस्सिता' (दाखवणारा). 'दस्सन' म्हणजे पाहण्याची क्रिया. तसेच 'दस्सन' म्हणजे चक्षुविज्ञान (डोळ्यांचे विज्ञान) होय. कारण ते रूपाच्या आरम्मणाला (विषयाला) पाहते, म्हणून त्याला 'दस्सन' असे म्हणतात. तसेच 'दस्सनेन पहातब्बा धम्मा' (दर्शनाने नष्ट करण्यायोग्य धर्म) या वचनावरून 'दस्सन' म्हणजे 'सोतापत्तिमग्ग' (स्रोतापत्ती मार्ग) होय. सोतापत्तिमग्ग याला 'दस्सन' का म्हणतात? कारण तो पहिल्यांदा निर्वाणाचे दर्शन घडवतो. पण 'गोत्रभू' (गोत्रभू ज्ञान) आधी पाहत नाही का? असे नाही की तो पाहत नाही, परंतु पाहूनही तो (संयोजनांचा नाश न केल्यामुळे) कर्तव्य कर्म करत नाही, म्हणून त्याला 'पाहतो' असे म्हटले जात नाही. जसे की, एखाद्या गावकऱ्याने राजाला पाहिले तरी, त्याला भेटवस्तू देऊन आपले काम पूर्ण न झाल्यामुळे 'मी अजूनही राजाला पाहिले नाही' असे म्हणणे, हे याचे उदाहरण आहे. ဝိပဿနာတိ အနိစ္စာဒိဝသေန ခန္ဓာနံ ဝိပဿနကံ ဉာဏံ. ဉာဏဒဿနန္တိ ဒိဗ္ဗစက္ခုပိ ဝိပဿနာပိ မဂ္ဂေါပိ ဖလမ္ပိ ပစ္စဝေက္ခဏဉာဏမ္ပိ သဗ္ဗညုတညာဏမ္ပိ ဝုစ္စတိ. ‘‘အပ္ပမတ္တော သမာနော ဉာဏဒဿနံ အာရာဓေတီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ဒိဗ္ဗစက္ခု ဉာဏဒဿနံ နာမ. ‘‘ဉာဏဒဿနာယ စိတ္တံ အဘိနီဟရတိ အဘိနိန္နာမေတီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိပဿနာဉာဏံ. ‘‘အဘဗ္ဗာ တေ ဉာဏဒဿနာယ အနုတ္တရာယ သမ္ဗောဓာယာ’’တိ ဧတ္ထ မဂ္ဂေါ, ‘‘အယမညော ဥတ္တရိမနုဿဓမ္မော အလမရိယဉာဏဒဿနဝိသေသော အဓိဂတော ဖာသုဝိဟာရော’’တိ ဧတ္ထ ဖလဉာဏံ. ‘‘ဉာဏဉ္စ ပန မေ ဒဿနံ ဥဒပါဒိ, အကုပ္ပာ မေ စေတောဝိမုတ္တိ, အယမန္တိမာ ဇာတိ, နတ္ထိ ဒါနိ ပုနဗ္ဘဝေါ’’တိ ဧတ္ထ ပစ္စဝေက္ခဏဉာဏံ. ‘‘ဉာဏဉ္စ [Pg.179] ပန မေ ဒဿနံ ဥဒပါဒိ သတ္တာဟကာလင်္ကတော အာဠာရော ကာလာမော’’တိ ဧတ္ထ သဗ္ဗညုတညာဏံ. ဧတ္ထေတံ ဘဝတိ – 'विपस्सना' म्हणजे अनित्यता इत्यादींच्या आधारे स्कंधांचे विपश्यना करणारे ज्ञान. 'ञाणदस्सन' (ज्ञानदर्शन) म्हणजे दिव्यचक्षू, विपश्यना, मार्ग, फल, प्रत्यवेक्षण ज्ञान आणि सर्वज्ञता ज्ञान यांनाही म्हटले जाते. 'अप्पमत्तो समानो ञाणदस्सनं आराधति' (अप्रमत्त राहून ज्ञानदर्शन प्राप्त करतो) येथे दिव्यचक्षूला 'ञाणदस्सन' म्हटले आहे. 'ञाणदस्सनाय चित्तं अभिनीहरati अभिनिन्नामेति' (ज्ञानदर्शनासाठी चित्त एकाग्र करतो, वळवतो) येथे 'विपस्सनाञाण' (विपश्यना ज्ञान) अभिप्रेत आहे. 'अभब्बा ते ञाणदस्सनाय अनुत्तराय संबोधाय' (ते अनुत्तर संबोधीच्या ज्ञानदर्शनासाठी असमर्थ आहेत) येथे 'मग्ग' (मार्ग), 'अय मञ्ञो उत्तरिमनुस्सधम्मो अलमरियञाणदस्सनविसेसो अधिगतो फासुविहारो' (हा दुसरा उत्तरमनुष्यधर्म, श्रेष्ठ आर्यज्ञानदर्शनविशेष प्राप्त झाला आहे, जो सुखाचा विहार आहे) येथे 'फलञाण' (फलज्ञान) अभिप्रेत आहे. 'ञाणञ्च पन मे दस्सनं उदपादि, अकुप्पा मे चेतोविमुत्ति, अयमन्तिमा जाति, नत्थि दानि पुनब्भवो' (माझ्यामध्ये ज्ञान आणि दर्शन उत्पन्न झाले, माझी चेतोविमुक्ती अचल आहे, हा अंतिम जन्म आहे, आता पुनर्जन्म नाही) येथे 'पच्चवेक्खणञाण' (प्रत्यवेक्षण ज्ञान) अभिप्रेत आहे. 'ञाणञ्च पन मे दस्सनं उदपादि सत्ताहकालङ्कतो आळारो कालामो' (माझ्यामध्ये ज्ञान आणि दर्शन उत्पन्न झाले की, आळार कालामाचा सात दिवसांपूर्वी मृत्यू झाला आहे) येथे 'सब्बञ्ञुतञाण' (सर्वज्ञता ज्ञान) अभिप्रेत आहे. या संदर्भात हे म्हटले आहे - ‘‘ဒိဗ္ဗစက္ခုပိ မဂ္ဂေါပိ, ဖလဉ္စာပိ ဝိပဿနာ; ပစ္စဝေက္ခဏဉာဏမ္ပိ, ဉာဏံ သဗ္ဗညုတာပိ စ; ဉာဏဒဿနသဒ္ဒေန, ဣမေ အတ္ထာ ပဝုစ္စရေ’’တိ. “दिव्यचक्षू, मार्ग, फल, विपश्यना, प्रत्यवेक्षण ज्ञान आणि सर्वज्ञता ज्ञान; या सर्व अर्थांना 'ञाणदस्सन' या शब्दाने सांगितले जाते.” ဒံသ ဒံသနေ. ဒံသတိ, ဝိဒံသတိ. ဒန္တော. ကာရိတေ အာလောကံ ဝိဒံသေတိ. 'दंस' धातू पाहण्याच्या अर्थात. 'दंसति' (तो पाहतो), 'विदंसति' (तो दाखवतो). 'दन्तो' (दंत/नियंत्रित). प्रयोजक रूपात (णिजन्त) 'आलोकं विदंसेति' (प्रकाश दाखवतो). ဧသ ဗုဒ္ဓိယံ. ဧသတိ. 'एस' धातू बुद्धीच्या (जाणण्याच्या) अर्थात. 'एसति' (तो जाणतो/शोधतो). သံသ ကထနေ. သံသတိ. ယော မေ သံသေ မဟာနာဂံ. 'संस' धातू सांगण्याच्या (कथनाच्या) अर्थात. 'संसति' (तो सांगतो). 'यो मे संसे महानागं' (जो मला महानागाविषयी सांगेल). ကိလိသ ဗာဓနေ. ကိလိသတိ. ကိလေသော. 'किलिस' धातू पीडा देण्याच्या (बाधण्याच्या) अर्थात. 'किलिसति' (तो पीडित होतो). 'किलेसो' (क्लेश). ဧတ္ထ ဗာဓနဋ္ဌေန ရာဂါဒယောပိ ‘‘ကိလေသာ’’တိ ဝုစ္စန္တိ ဒုက္ခမ္ပိ. ဧတေသု ဒုက္ခဝသေန – येथे पीडा देण्याच्या अर्थाने राग (आसक्ती) इत्यादींना आणि दुःखालाही 'किलेसा' (क्लेश) म्हटले जाते. यांपैकी दुःखाच्या अर्थाने - ‘‘ဣဒဉ္စ ပစ္စယံ လဒ္ဓါ, ပုဗ္ဗေ ကိလေသမတ္တနော; အာနန္ဒိယံ ဝိစရိံသု, ရမဏီယေ ဂိရိဗ္ဗဇေ’’တိ “आणि हे कारण मिळवून, पूर्वी स्वतःच्या क्लेशांमुळे (दुःखामुळे), ते रमणीय गिरिव्रजामध्ये आनंदाने विहरत होते.” ပယောဂေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. ဒိဝါဒိဂဏံ ပန ပတ္တဿ ‘‘ကိလိဿတီ’’တိ ရူပံ. असा प्रयोग जाणावा. दिवादिगणात आल्यावर 'किलिस्सति' असे रूप बनते. ဝသ သိနေဟနေ. ဝသတိ. ဝသာ. 'वस' धातू स्नेह (चकाकी/तेलकटपणा) या अर्थात. 'वसति' (तो स्नेहयुक्त होतो). 'वसा' (चरबी/मेद). ဧတ္ထ စ ဝသာ နာမ ဝိလီနသိနေဟော. သာ ဝဏ္ဏတော နာဠိကေရတေလဝဏ္ဏာ. အာစာမေ အာသိတ္တတေလဝဏ္ဏာတိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. आणि येथे 'वसा' म्हणजे वितळलेली चरबी (मेद). ती रंगाने नारळाच्या तेलासारखी असते. भाताच्या पेजेवर टाकलेल्या तेलाच्या रंगासारखी असते, असेही म्हणणे योग्य ठरेल. ဤသ ဟိံသာဂတိဒဿနေသု. ဤသတိ. ဤသော. 'ईस' धातू हिंसा, गती आणि दर्शन या अर्थांत. 'ईसति' (तो हिंसा करतो/जातो/पाहतो). 'ईसो' (स्वामी/ईश). ဘာသဗျတ္တာယံ ဝါစာယံ. ဘာသတိ. ဘာသာ, ဘာသိတံ, ဘာတာ. ပရိဘာသတိ. ပရိဘာသာ, ပရိဘာသကော. 'भास' धातू स्पष्ट वाणीच्या अर्थात. 'भासति' (तो बोलतो). 'भासा' (भाषा), 'भासितं' (भाषित/वचन), 'भाता' (भाऊ). 'परिभासति' (तो निंदा करतो/धमकावतो). 'परिभासा' (निंदा/धमकी), 'परिभासको' (निंदा करणारा). တတြ [Pg.180] ဘာသန္တိ အတ္ထံ ဧတာယာတိ ဘာသာ, မာဂဓဘာသာဒိ. ဘာသိတန္တိ ဝစနံ. ဝစနတ္ထော ဟိ ဘာသိတသဒ္ဒေါ နိစ္စံ နပုံသကလိင်္ဂေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ယထာ ‘‘သုတွာ လုဒ္ဒဿ ဘာသိတ’’န္တိ. ဝါစ္စလိင်္ဂေါ ပန ဘာသိတသဒ္ဒေါ တိလိင်္ဂေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ယထာ ‘‘ဘာသိတော ဓမ္မော, ဘာသိတံ စတုသစ္စံ, ဘာသိတာ ဝါစာ’’တိ. ပုဗ္ဗေ ဘာသတီတိ ဘာတာ, ဇေဋ္ဌဘာတာတိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. သော ဟိ ပုဗ္ဗေ ဇာတတ္တာ ဧဝံ ဝတ္တုံလဘတိ. ကိဉ္စာပိ ဘာတုသဒ္ဒေါ ‘‘ဘာတိကသတံ, သတ္တဘာတရော. ဘာတရံ ကေန ဒေါသေန, ဒုဇ္ဇာသိ ဒကရက္ခိနော’’တိအာဒီသု ဇေဋ္ဌကနိဋ္ဌဘာတူသု ဝတ္တတိ, တထာပိ ယေဘုယျေန ဇေဋ္ဌကေ နိရူဋ္ဌော, ‘‘ဘာတာ’’တိ ဟိ ဝုတ္တေ ဇေဋ္ဌဘာတာတိ ဝိညာယတိ, တသ္မာ ကတ္ထစိ ဌာနေ ‘‘ကနိဋ္ဌဘာတာ’’တိ ဝိသေသေတွာ ဝုတ္တံ. त्यामध्ये, जिच्याद्वारे अर्थ स्पष्ट केला जातो ती 'भासा' (भाषा), जसे की मागधभाषा इत्यादी. 'भासितं' म्हणजे वचन. वचनाच्या अर्थातील 'भासित' शब्द नेहमी नपुंसकलिंगी समजावा. जसे की, 'सुत्वा लुद्दस्स भासितं' (पारध्याचे बोलणे ऐकून). विशेषण म्हणून वापरलेला 'भासित' शब्द तिन्ही लिंगांत समजावा. जसे की, 'भासितो धम्मो' (सांगितलेला धर्म), 'भासितं चतुसच्चं' (सांगितलेले चार आर्यसत्य), 'भासिता वाचा' (सांगितलेली वाणी). जो आधी बोलतो तो 'भाता' (भाऊ), म्हणजे 'जेठ्ठभाता' (मोठा भाऊ) असे म्हटले जाते. कारण तो आधी जन्मल्यामुळे असे म्हणण्यास पात्र ठरतो. जरी 'भातु' शब्द 'भातिकसतं' (शंभर भाऊ), 'सत्तभातारो' (सात भाऊ), 'भातरं केन दोसेन, दुज्जासि दकरक्खिनो' (हे जलराक्षसा, कोणत्या दोषाने भावाला...) इत्यादींमध्ये मोठ्या आणि लहान भावांसाठी वापरला जात असला, तरीही तो प्रामुख्याने मोठ्या भावासाठी रूढ आहे. कारण 'भाता' असे म्हटले असता 'मोठा भाऊ' असाच अर्थ समजला जातो, म्हणूनच काही ठिकाणी 'कनिठ्ठभाता' (लहान भाऊ) असा विशेष उल्लेख केला जातो. နနု စ ဘော ကတ္ထစိ ‘‘ဇေဋ္ဌဘာတာ’’တိ ဝိသေသေတွာ ဝုတ္တန္တိ? သစ္စံ, တံ ပန ဘာတာသဒ္ဒဿ ကနိဋ္ဌေပိ ဝတ္တနတော ပါကဋီကရဏတ္ထံ ‘‘ဇေဋ္ဌဘာတာ’’တိ ဝုတ္တံ. ယထာ ဟိ ဟရိဏေသု ဝတ္တမာနဿ မိဂသဒ္ဒဿ ကဒါစိ အဝသေသစတုပ္ပဒေသုပိ ဝတ္တနတော ‘‘ဟရိဏမိဂေါ’’တိ ဝိသေသေတွာ ဝါစံ ဘာသန္တိ, ဧဝံ သမ္ပဒမိဒံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ယထာ စ ဂေါဟတ္ထိမဟိံသအစ္ဆသူကရသသဗိဠာရာဒီသု သာမညဝသေန မိဂသဒ္ဒေ ဝတ္တမာနေပိ ‘‘မိဂစမ္မံ မိဂမံသ’’န္တိ အာဂတဋ္ဌာနေ ‘‘ဟရိဏဿာ’’တိ ဝိသေသနသဒ္ဒံ ဝိနာပိ ‘‘ဟရိဏမိဂစမ္မံ ဟရိဏမိဂမံသ’’န္တိ ဝိသေသတ္ထာဓိဂမော ဟောတိ, ဧတ္ထ န ဂေါဟတ္ထိအာဒီနံ စမ္မံ ဝါ မံသံ ဝါ ဝိညာယတိ. တထာ ‘‘မိဂမံသံ ခါဒန္တီ’’တိ ဝစနဿ ဂေါဟတ္ထိအာဒီနံ မံသံ ခါဒန္တီတိ အတ္ထော န သမ္ဘဝတိ, ဧဝမေဝ ကတ္ထစိ ဝိနာပိ ဇေဋ္ဌကဣတိ ဝိသေသနသဒ္ဒံ ‘‘ဘာတာ’’တိ ဝုတ္တေယေဝ ‘‘ဇေဋ္ဌကဘာတာ’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတီတိ. နနု စ ဘော ‘‘မိဂစမ္မံ, မိဂမံသ’’န္တိ ဧတ္ထ စမ္မမံသသဒ္ဒေဟေဝ [Pg.181] ဝိသေသတ္ထာဓိဂမော ဟောတီတိ? န ဟောတိ, မိဂသဒ္ဒဿ ဣဝ စမ္မမံသသဒ္ဒါနံ သာမညဝသေန ဝတ္တနတော, ဧဝဉ္စ သတိ ကေန ဝိသေသတ္ထာဓိဂမော ဟောတီတိ စေ? လောကသင်္ကေတဝသေန, တထာ ဟိ မိဂသဒ္ဒေ စ စမ္မသဒ္ဒါဒီသု စ သာမညဝသေန ဝတ္တမာနေသုပိ လောကသင်္ကေတေန ပရိစ္ဆိန္နတ္တာ ဂေါဟတ္ထိအာဒီနံ စမ္မာဒီနိ န ဉာယန္တိ လောကေန, အထ ခေါ ဟရိဏစမ္မာဒီနိယေဝ ဉာယန္တိ. ‘‘သင်္ကေတဝစနံ သစ္စံ, လောကသမ္မုတိ ကာရဏ’’န္တိ ဟိ ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. पण मग काही ठिकाणी 'जेठ्ठभाता' (मोठा भाऊ) असा विशेष उल्लेख का केला आहे? हे खरे आहे, परंतु 'भाता' हा शब्द लहान भावासाठीही वापरला जात असल्यामुळे, तो स्पष्ट करण्यासाठी 'जेठ्ठभाता' असे म्हटले आहे. जसे की, हरणांसाठी वापरला जाणारा 'मिग' (मृग/प्राणी) शब्द कधीकधी इतर चौपाया प्राण्यांसाठीही वापरला जात असल्यामुळे 'हरिणमिगो' (हरिण-मृग) असा विशेष उल्लेख करून बोलतात, तसेच हे देखील समजून घ्यावे. आणि जसे गाय, हत्ती, म्हैस, अस्वल, डुक्कर, ससा, मांजर इत्यादींसाठी सामान्यपणे 'मिग' शब्द वापरला जात असला, तरी 'मिगचम्मं मिगमंसं' (मृगचर्म, मृगमांस) अशा आलेल्या ठिकाणी 'हरिणस्स' (हरणाचे) या विशेषणाशिवाय देखील 'हरिणमिगचम्मं हरिणमिगमंसं' असा विशेष अर्थ प्राप्त होतो; येथे गाय, हत्ती इत्यादींचे चामडे किंवा मांस अभिप्रेत नसते. तसेच 'मिगमंसं खादन्ति' (मृगमांस खातात) या वाक्याचा अर्थ गाय, हत्ती इत्यादींचे मांस खातात असा होत नाही. त्याचप्रमाणे, काही ठिकाणी 'जेठ्ठक' (मोठा) या विशेषणाशिवाय केवळ 'भाता' म्हटले तरी 'जेठ्ठकभाता' (मोठा भाऊ) असाच अर्थ समजला जातो. पण मग 'मिगचम्मं, मिगमंसं' येथे 'चर्म' आणि 'मांस' या शब्दांमुळेच विशेष अर्थ प्राप्त होतो का? नाही, कारण 'मिग' शब्दाप्रमाणेच 'चर्म' आणि 'मांस' हे शब्दही सामान्य अर्थाने वापरले जातात. मग असे असेल तर विशेष अर्थ कशामुळे प्राप्त होतो? लोकसंकेतामुळे (लोकरूढीमुळे). कारण 'मिग' शब्द आणि 'चर्म' इत्यादी शब्द सामान्य अर्थाने वापरले जात असले, तरी लोकसंकेताने ते मर्यादित केल्यामुळे लोकांकडून गाय, हत्ती इत्यादींचे चामडे समजले जात नाही, तर केवळ हरणाचे चामडे इत्यादीच समजले जाते. कारण 'संकेतवचनं सच्चं, लोकसम्मुति कारणं' (संकेतवचन हे सत्य आहे आणि लोकसंकेत हे त्याचे कारण आहे) असे म्हटले आहे, हे लक्षात घ्यावे. ဂိလေသု အနွိစ္ဆာယံ. ပုနပ္ပုနံ ဣစ္ဆာ အနွိစ္ဆာ. ဂိလေသတိ. 'गिलेसु' धातू वारंवार इच्छा करण्याच्या (अनुइच्छा) अर्थात. वारंवार इच्छा करणे म्हणजे 'अन्विच्छा'. 'गिलेसति' (तो वारंवार इच्छा करतो). ယေသု ပယတနေ. ယေသတိ. 'येसु' धातू प्रयत्नाच्या अर्थात. 'येसति' (तो प्रयत्न करतो). ဇေသု နေသု ဧသု ဟေသု ဂတိယံ. ဇေသတိ. နေသတိ. ဧသတိ. ဟေသတိ. ဓာတွန္တဿ ပန သညောဂဝသေန ‘‘ဇေဿတိ, နေဿတီ’’တိအာဒီနိပိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ဇေဿမာနော. ဇေဿံ, ဇေဿန္တော. ဧတ္ထ စ – 'जेसु', 'नेसु', 'एसु', 'हेसु' धातू गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात. 'जेसति', 'नेसति', 'एसति', 'हेसति'. धातूच्या शेवटी संयोगामुळे 'जेस्सति', 'नेस्सति' इत्यादी रूपेही घेतली पाहिजेत. 'जेस्समानो', 'जेस्सं', 'जेस्सन्तो'. आणि येथे - ‘‘ယထာ အာရညကံ နာဂံ, ဒန္တိံ အနွေတိ ဟတ္ထိနီ; ဇေဿန္တံ ဂိရိဒုဂ္ဂေသု, သမေသု ဝိသမေသု စာ’’တိ “ज्याप्रमाणे हत्तीण अरण्यातील वश केलेल्या हत्तीच्या मागे जाते; जो डोंगराळ दुर्गम भागात, सम आणि विषम मार्गांवरून जात असतो.” ပါဠိ နိဒဿနံ. हे पाळी भाषेतील उदाहरण आहे. ဒေသု ဟေသု အဗျတ္တသဒ္ဒေ. ဒေသတိ. ဟေသတိ. 'देसु', 'हेसु' धातू अस्पष्ट आवाजाच्या (अव्यक्त शब्दाच्या) अर्थात. 'देसति', 'हेसति' (तो अस्पष्ट आवाज करतो). ကာသ သဒ္ဒကုစ္ဆာယံ. ကာသတိ, ဥက္ကာသတိ. ကာသော. ကာသံ သာသံ ဒရံ ဗလျံ, ခီဏမေဓော နိဂစ္ဆတိ. 'कास' धातू खोकण्याच्या किंवा आवाजाच्या अर्थात. 'कासति' (तो खोकतो), 'उक्कासति' (तो खाकरणारा/खोकणारा). 'कासो' (खोकला). 'कासं सासं दरं बल्यं, खीणमेधो निगच्छति' (ज्याची बुद्धी क्षीण झाली आहे, तो खोकला, श्वास लागणे, भीती आणि दुर्बलता प्राप्त करतो). ကာသု ဘာသု ဒိတ္တိယံ. ဒိတ္တီတိ ပါကဋတာ, ဝိရာဇနတာ ဝါ. ကာသတိ, ပကာသတိ. ပကာသတိ တေဇော. ဒူရေ သန္တော ပကာသေန္တိ. ဘာသတိ. ပဘာသတိ မိဒံ ဗျမှံ. ပကာသော. ကာသု ဩဘာသော. 'कासु' आणि 'भासु' हे धातू दीप्ती (चमकणे/प्रकाशणे) या अर्थात आहेत. 'दीप्ती' म्हणजे प्रकटता किंवा शोभा (विराजमानता). 'कासति' (तो चमकतो), 'पकासति' (तो प्रकाशित होतो). 'पकासति तेजो' (तेज प्रकाशित होते). 'दूरे सन्तो पकासेन्ति' (सत्पुरुष दूरवरूनही प्रकाशित होतात). 'भासति' (तो चमकतो). 'पभासति मिदं ब्यम्हं' (हे विमान प्रकाशित होत आहे). 'पकासो' (प्रकाश). 'कासु' म्हणजे 'ओभासो' (अवभास/प्रकाश). တတြ [Pg.182] ပကာသတီတိ ပကာသော, ပါကဋော ဟောတီတိ အတ္ထော. တုစ္ဆဘာဝေန ပုဉ္ဇဘာဝေန ဝါ ကာသတိ ပကာသတိ ပါကဋာ ဟောတီတိ ကာသု. ‘‘ကာသု’’ ဣတိ အာဝါဋောပိ ဝုစ္စတိ ရာသိပိ. तेथे 'पकासति' (प्रकाशित होतो) म्हणजे 'पकासो' (प्रकाश), प्रकट होतो असा अर्थ आहे. शून्यभावाने (तुच्छभावाने) किंवा पुंजभावाने (राशीच्या रूपाने) जे चमकते, प्रकाशित होते, प्रकट होते, त्याला 'कासु' म्हणतात. 'कासु' या शब्दाने खड्डा (आवाट) देखील म्हटला जातो आणि रास (पुंज) देखील म्हटली जाते. ‘‘ကိံနု သန္တရမာနောဝ, ကာသုံ ခနသိ သာရထိ; ပုဋ္ဌော မေ သမ္မ အက္ခာဟိ, ကိံကာသုယာ ကရိဿသီ’’တိ "हे सारथी, तू एवढ्या घाईघाईने खड्डा (कासुं) का खणत आहेस? माझ्या विचारण्यावरून, हे मित्रा, मला नीट सांग, तू या खड्ड्याचे काय करणार आहेस?" ဧတ္ထ ဟိ အာဝါဋော ကာသု နာမ. ‘‘အင်္ဂါရကာသုံ အပရေ ဖုဏန္တိ, နရာ ရုဒန္တာ ပရိဒဍ္ဎဂတ္တာ’’တိ ဧတ္ထ ရာသိ. ကာရိတေ – ပကာသေတီတိ ပကာသကော. ဩဘာသေတီတိ ဩဘာသကော. ကမ္မေ ပကာသိယတီတိ ပကာသိတော. ဧဝံ ဘာသိတော. ဘာဝေ – ကာသနာ. သင်္ကာသနာ. ပကာသနာ. တုမန္တာဒိတ္တေ ‘‘ပကာသိတုံ, ပကာသေတုံ, ဩဘာသိတုံ, ဩဘာသေတုံ. ပကာသိတွာ, ပကာသေတွာ, ဩဘာသိတွာ, ဩဘာသေတွာ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. တဒ္ဓိတေ ဘာသု ဧတဿ အတ္ထီတိ ဘာသုရော, ပဘဿရော ယော ကောစိ. ဘာသုရောတိ ဝါ ကေသရသီဟော. ဣမသ္မိံ အတ္ထေ ဘာသုသဒ္ဒေါ ‘‘ရာဇ ဒိတ္တိယ’’န္တိ ဧတ္ထ ရာဇသဒ္ဒေါ ဝိယ ဝိရာဇနဝါစကော သိယာ, တသ္မာ ရူပသိရိယာ ဝိရာဇနသမ္ပန္နတာယ ဘာသု ဝိရာဇနတာ ဧတဿ အတ္ထီတိ ဘာသုရောတိ နိဗ္ဗစနံ ဉေယျံ. येथे खड्ड्याला (आवाट) 'कासु' असे म्हटले आहे. "इतर लोक निखाऱ्यांच्या राशीवर (अङ्गारकासुं) पडतात, ते मनुष्य रडत असतात आणि त्यांचे शरीर होरपळलेले असते" - येथे 'कासु' म्हणजे रास (पुंज) आहे. प्रयोजक (कारित) मध्ये - 'पकासेति' (तो प्रकाशित करतो) म्हणून 'पकासको' (प्रकाशक). 'ओभासेति' (तो अवभासित करतो) म्हणून 'ओभासको' (अवभासक). कर्मणी प्रयोगात - 'पकासियति' (प्रकाशित केले जाते) म्हणून 'पकासितो' (प्रकाशित). याचप्रमाणे 'भासितो'. भाववाचकात - 'कासना' (प्रकटीकरण), 'सङ्कासना' (संकीर्तन/प्रकटीकरण), 'पकासना' (प्रकाशन). तुमुन् प्रत्यय इत्यादी लागल्यावर 'पकासितुं', 'पकासेतुं', 'ओभासितुं', 'ओभासेतुं' आणि क्त्वा प्रत्यय लागल्यावर 'पकासित्वा', 'पकासेत्वा', 'ओभासित्वा', 'ओभासेत्वा' अशी रूपे होतात. तद्धित प्रत्ययात - 'भासु' (दीप्ती) ज्याच्याजवळ आहे तो 'भासुरो' (तेजस्वी), किंवा जो कोणी 'पभस्सरो' (अतिशय चमकदार) आहे. किंवा 'भासुरो' म्हणजे आयाळ असलेला सिंह (केसरसिंह). या अर्थामध्ये 'भासु' हा शब्द, "राज दित्तियं" या सूत्रातील 'राज' शब्दाप्रमाणे शोभा (विराजन) वाचक असावा, म्हणून रूपसौंदर्याच्या शोभेने संपन्न असल्यामुळे 'भासु' (शोभा/विराजन) ज्याच्याजवळ आहे तो 'भासुरो' अशी व्युत्पत्ती जाणावी. နာသု ရာသု သဒ္ဒေ. နာသတိ. ရာသတိ. နာသာ, နာသိကာ. 'नासु' आणि 'रासु' हे धातू आवाजाच्या (शब्दाच्या) अर्थात आहेत. 'नासति' (तो आवाज करतो), 'रासति' (तो ओरडतो). 'नासा' (नाक/सोंड), 'नासिका' (नाक). တတြ နာသာတိ ဟတ္ထိသောဏ္ဍာပိ နာသာတိ ဝုစ္စတိ ‘‘သစေ မံ နာဂနာသူရူ, ဩလောကေယျ ပဘာဝတီ’’တိအာဒီသု ဝိယ. မနုဿာဒီနံ နာသိကာပိ နာသာတိ ဝုစ္စတိ ‘‘ယော တေ ဟတ္ထေ စ ပါဒေ စ, ကဏ္ဏနာသဉ္စ ဆေဒယီ’’တိအာဒီသု ဝိယ. နာသန္တိ အဗျတ္တသဒ္ဒံ ကရောန္တိ ဧတာယာတိ နာသာ. နာသာ ဧဝ နာသိကာ. ယတ္ထ နိဗ္ဗစနံ န ဝဒါမ, တတ္ထ တံ သုဝိညေယျတ္တာ အပ္ပသိဒ္ဓတ္တာ [Pg.183] ဝါ န ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ, အဝုတ္တမ္ပိ ပယောဂဝိစက္ခဏေဟိ ဥပပရိက္ခိတွာ ယောဇေတဗ္ဗံ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – तेथे 'नासा' म्हणजे हत्तीची सोंड देखील म्हटली जाते, जसे की "जर हत्तीच्या सोंडेसारख्या मांड्या असणारी प्रभावती माझ्याकडे पाहेल..." इत्यादींमध्ये. मनुष्यांचे नाक देखील 'नासा' म्हटले जाते, जसे की "ज्याने तुझे हात, पाय आणि कान-नाक (कण्णनासं) कापले..." इत्यादींमध्ये. ज्याच्याद्वारे 'नासन्ति' म्हणजे अस्पष्ट आवाज करतात, ती 'नासा' (नाक). 'नासा' म्हणजेच 'नासिका'. जिथे आम्ही व्युत्पत्ती सांगत नाही, तिथे ती सहज समजण्यासारखी असल्यामुळे किंवा इतर कारणांमुळे सांगितलेली नाही असे समजावे; न सांगितलेले देखील प्रयोगात कुशल असणाऱ्यांनी नीट विचार करून योजावे. याविषयी असे म्हटले आहे - နာသာ သောဏ္ဍာ ကရော ဟတ္ထော,ဟတ္ထိဒဗ္ဗေ သမာ မတာ; နာသာ စ နာသိကာ စ ဒွေ,နရာဒီသု သမာ မတာ’’တိ. "हत्तीच्या बाबतीत 'नासा', 'सोण्डा', 'करो' आणि 'हत्थो' हे शब्द समान अर्थाचे मानले गेले आहेत; आणि मनुष्यांच्या बाबतीत 'नासा' आणि 'नासिका' हे दोन्ही शब्द समान अर्थाचे मानले गेले आहेत." နသ ကောဋိလ္လေ. နသတိ. 'नस' हा धातू कुटिलतेच्या (वाकडेपणाच्या) अर्थात आहे. 'नसति' (तो वाकडा होतो). ဘိသိ ဘယေ. ဘိံသတိ. ဘိံသနကော. တဒါသိ ယံ ဘိံသနကံ. ဘေသ္မာကာယော. 'भिसि' हा धातू भया च्या अर्थात आहे. 'भिंसति' (तो घाबरतो/भय निर्माण करतो). 'भिंसनको' (भयानक). 'तदासि यं भिंसनकं' (तेव्हा जे भयानक होते). 'भेस्माकायो' (भयानक शरीर असलेला). အာသိသိ ဣစ္ဆာယံ. အာပုဗ္ဗော သိသိ ဣစ္ဆာယံ ဝတ္တတိ. အာသိသတိ. အာသိသတေဝ ပုရိသော. အာသိသနာ. အာသိသတ္တံ. အာသိသန္တော, အာသိသမာနော, အာသမာနော. ‘‘သုဂ္ဂတိမာသမာနာ’’တိ ပါဠိ ဧတ္ထ နိဒဿနံ. 'आसिसि' हा धातू इच्छेच्या अर्थात आहे. 'आ' उपसर्गपूर्वक 'सिसि' धातू इच्छेच्या अर्थात वापरला जातो. 'आसिसति' (तो इच्छा करतो). 'आसिसतेव पुरिसो' (मनुष्य इच्छाच करतो). 'आसिसना' (इच्छा/आकांक्षा), 'आसिसत्तं' (इच्छुक असणे). 'आसिसन्तो', 'आसिसमानो', 'आसमानो' (इच्छा करणारा). "सुग्गतिमासमाना" (सुगतीची इच्छा करणारे) ही पालि येथील उदाहरण आहे. ဂသု အဒနေ. ဂသတိ. 'गसु' हा धातू खाण्याच्या (भक्षणाच्या) अर्थात आहे. 'गसति' (तो गिळतो/खातो). ဃုသီ ကန္တိကရဏေ. ဤကာရန္တောယံ, တေန ဣတော န နိဂ္ဂဟီတာဂမော. ဃုသတိ. 'घुसी' हा धातू कांती (शोभा/तेज) निर्माण करण्याच्या अर्थात आहे. हा ई-कारान्त धातू आहे, त्यामुळे याला अनुस्वार (निग्गहीत) आगम होत नाही. 'घुसति' (तो शोभून दिसतो). ပံသု ဘံသု အဝသံသနေ. ပံသတိ. ဘံသတိ. 'पंसु' आणि 'भंसु' हे धातू खाली पडण्याच्या (पतन होण्याच्या) अर्थात आहेत. 'पंसति' (तो खाली पडतो), 'भंसति' (तो घसरतो/पडतो). ဓံသု ဂတိယံ. ဓံသတိ. ရဇော နုဒ္ဓံသတိ ဥဒ္ဓံ. 'धंसु' हा धातू गतीच्या अर्थात आहे. 'धंसति' (तो नष्ट होतो/जातो). 'रजो नुद्धंसति उद्धं' (धूळ वर उडत नाही). ပသ ဝိတ္ထာရေ. ပသတိ. ပသု. 'पस' हा धातू विस्ताराच्या अर्थात आहे. 'पसति' (तो विस्तार करतो). 'पसु' (पशू - जो विस्तार करतो किंवा पसरतो). ကုသ အဝှာနေ ရောဒနေ စ. ကောသတိ, ပက္ကောသတိ. ပက္ကောသကော, ပက္ကောသိတော, ပက္ကောသနံ. 'कुस' हा धातू बोलावणे (आवाहन) आणि रडणे या अर्थात आहे. 'कोसति' (तो ओरडतो), 'पक्कोसति' (तो बोलावतो). 'पक्कोसको' (बोलावणारा), 'पक्कोसितो' (बोलावलेला), 'पक्कोसनं' (बोलावणे). ကဿ ဂတိယံ. ကဿတိ, ပရိကဿတိ. ပဋိကဿတိ. မူလာယ ပဋိကဿေယျ. ပဋိကဿေယျာတိ အာကဍ္ဎေယျ, မူလာပတ္တိယံယေဝ ပတိဋ္ဌာပေယျာတိ အတ္ထော. 'कस्स' हा धातू गतीच्या अर्थात आहे. 'कस्सति' (तो ओढतो/जातो), 'परिकस्सति' (तो चहूबाजूंनी ओढतो). 'पटिकस्सति' (तो मागे ओढतो). 'मूलाय पटिकस्सेय्य' (मूळ आपत्तीकडे मागे ओढावे). 'पटिकस्सेय्य' म्हणजे मागे ओढावे, मूळ आपत्तीमध्येच पुन्हा प्रस्थापित करावे असा अर्थ आहे. အသ [Pg.184] ဒိတျာဒါနေသု စ. စကာရော ဂတိပေက္ခကော. အသတိ. 'अस' हा धातू दीप्ती (चमकणे) आणि ग्रहण करणे (आदान) या अर्थात आहे. 'च' कार गतीची अपेक्षा ठेवणारा आहे. 'असति' (तो चमकतो/ग्रहण करतो/जातो). ဒိသ အာဒါနသံဝရဏေသု. ဒိဿတိ ပုရိသော. 'दिस' हा धातू ग्रहण करणे आणि झाकणे (संवरण) या अर्थात आहे. 'दिस्सति पुरिसो' (मनुष्य दिसतो/दिसून येतो). ဒါသု ဒါနေ. ဒါသတိ. 'दासु' हा धातू दानाच्या (देण्याच्या) अर्थात आहे. 'दासति' (तो देतो). ရောသ ဘယေ. ရောသတိ. ရောသကော. 'रोस' हा धातू भया च्या अर्थात आहे. 'रोसति' (तो रागावतो/भयभीत करतो). 'रोसको' (क्रोधित करणारा/भयभीत करणारा). ဘေသု စလနေ. ဘေသတိ. 'भेसु' हा धातू कंपनाच्या (हलण्याच्या) अर्थात आहे. 'भेसति' (तो कंप पावतो). ပသ ဗာဓနဖဿနေသု. ပသတိ. ပါသော, နာဂပါသော, ဟတ္ထပါသော. 'पस' हा धातू बांधणे (बाधन) आणि स्पर्श करणे या अर्थात आहे. 'पसति' (तो बांधतो/स्पर्श करतो). 'पासो' (फास/पाश), 'नागपासो' (नागपाश), 'हत्थपासो' (हातभर अंतर/हस्तपाश). လသ ကန္တိယံ. လသတိ, အဘိလသတိ, ဝိလသတိ. လာသော, ဝိလာသော, ဝိလသနံ. 'लस' हा धातू कांती (शोभा/इच्छा) या अर्थात आहे. 'लसति' (तो चमकतो/शोभतो), 'अभिलसति' (तो इच्छा करतो), 'विलसति' (तो विलास करतो). 'लासो' (नृत्य/विलास), 'विलासो' (विलास), 'विलसनं' (चमकणे/विलास करणे). စသ ဘက္ခဏေ. စသတိ. 'चस' हा धातू भक्षणाच्या (खाण्याच्या) अर्थात आहे. 'चसति' (तो खातो). ကသ ဟိံသာယံ. ကသတိ. 'कस' हा धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. 'कसति' (तो हिंसा करतो/त्रास देतो). တိသ တိတ္တိယံ. တိတ္တိ တပ္ပနံ ပရိပုဏ္ဏတာ သုဟိတတာ. တိသတိ. တိတ္တိ. 'तिस' हा धातू तृप्तीच्या अर्थात आहे. 'तित्ती' म्हणजे तृप्ती, परिपूर्णता, सुहितता (पूर्ण समाधान). 'तिसति' (तो तृप्त होतो). 'तित्ती' (तृप्ती). ဝသ နိဝါသေ. ဝသတိ, ဝသိယတိ, ဝစ္ဆတိ. ဝတ္ထု, ဝတ္ထံ, ပရိဝါသော, နိဝါသော, အာဝါသော, ဥပဝါသော, ဥပေါသထော, ဝိပ္ပဝါသော, စိရပ္ပဝါသီ, စိရပ္ပဝုတ္ထော, ဝသိတွာ, ဝတ္တုံ, ဝသိတုံ ဣစ္စာဒီနိ. 'वस' हा धातू निवासाच्या (राहण्याच्या) अर्थात आहे. 'वसति' (तो राहतो), 'वसियति' (राहिले जाते), 'वच्छति' (तो राहील). 'वत्थु' (वस्तू/वास्तू), 'वत्थं' (वस्त्र), 'परिवासो' (परिवस/प्रायश्चित्त काळ), 'निवासो' (निवास), 'आवासो' (आवास), 'उपवासो' (उपवास), 'उपोसथो' (उपोशथ), 'विप्पवासो' (प्रवास/दूर राहणे), 'चिरप्पवासी' (दीर्घकाळ प्रवासात असलेला), 'चिरप्पवुत्थो' (दीर्घकाळ राहिलेला), 'वसित्वा' (राहून), 'वत्तुं' (राहण्यासाठी), 'वसितुं' (राहण्यासाठी) इत्यादी रूपे होतात. အတြ ဥပဝါသောတိ အန္နေန ဝဇ္ဇိတော ဝါသော ဥပဝါသော. ဥပေါသထောတိ ဥပဝသန္တိ ဧတ္ထာတိ ဥပေါသထော, ဥပဝသန္တိ သီလေန ဝါ အနသနေန ဝါ ဥပေတာ ဟုတွာ ဝသန္တီတိ အတ္ထော. အယံ ပနေတ္ထ အတ္ထုဒ္ဓါရော – ‘‘အာယာမာဝုသော ကပ္ပိန ဥပေါသထံ ဂမိဿာမာ’’တိအာဒီသု ပါတိမောက္ခုဒ္ဒေသော [Pg.185] ဥပေါသထော. ‘‘ဧဝံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ခေါ ဝိသာခေ ဥပေါသထော ဥပဝုတ္ထော’’တိအာဒီသု သီလံ. ‘‘သုဒ္ဓဿ ဝေ သဒါ ဖဂ္ဂု, သုဒ္ဓဿုပေါသထော သဒါ’’တိအာဒီသု ဥပဝါသော. ‘‘ဥပေါသထော နာမ နာဂရာဇာ’’တိအာဒီသု ပညတ္တိ. ‘‘န ဘိက္ခဝေ တဒဟုပေါသထေ သဘိက္ခုကာ အာဝါသာ’’တိအာဒီသု ဥပဝသိတဗ္ဗဒိဝသောတိ. येथे 'उपवासो' म्हणजे अन्नाचा त्याग करून राहणे हा उपवास होय. 'उपोसथो' म्हणजे ज्या दिवशी उपवास करतात तो उपोसथ; म्हणजेच शील किंवा उपवासाने युक्त होऊन राहतात असा अर्थ आहे. येथे हा अर्थ-संग्रह आहे - "या, आयुष्यमान कप्पिन, आपण उपोसथाला जाऊ या" इत्यादींमध्ये पातिमोक्खाचे पठण हा 'उपोसथ' आहे. "हे विशाखे, अशा प्रकारे आठ अंगांनी युक्त असलेला उपोसथ पाळला जातो" इत्यादींमध्ये शील हा 'उपोसथ' आहे. "शुद्ध माणसासाठी नेहमीच फाल्गुनी (पवित्र दिवस) असतो, शुद्ध माणसासाठी नेहमीच उपोसथ असतो" इत्यादींमध्ये उपवास हा 'उपोसथ' आहे. "उपोसथ नावाचा नागराज" इत्यादींमध्ये संज्ञा (नाव) हा 'उपोसथ' आहे. "हे भिक्खूंनो, त्या उपोसथाच्या दिवशी भिक्खूंनी युक्त नसलेले आवास..." इत्यादींमध्ये उपोसथ पाळण्याचा दिवस हा 'उपोसथ' आहे. ဝသ ကန္တိယံ. ဝစ္ဆတိ. ဇိနဝစ္ဆယော. 'वस' हा धातू कांती (शोभा/इच्छा) या अर्थात आहे. 'वच्छति' (तो इच्छा करतो/शोभतो). 'जिनवच्छयो' (जिनांची इच्छा/जिनांचे तेज). သသ သုသနေ. သသတိ. သသော. 'सस' हा धातू झोपण्याच्या (शयन करण्याच्या) अर्थात आहे. 'ससति' (तो झोपतो). 'ससो' (ससा - जो झोपतो). သသ ပါဏနေ. သသတိ. သတောဝ အဿသတိ, သတောဝ ပဿသတိ. သသော, သသနံ. အဿာသော ပဿာသော အဿသန္တော ပဿသန္တော. 'सस' हा धातू प्राणापानाच्या (श्वासोच्छ्वासाच्या) अर्थात आहे. 'ससति' (तो श्वास घेतो). 'सतोव अस्ससति, सतोव पस्ससति' (स्मृतिमान राहूनच तो श्वास घेतो, स्मृतिमान राहूनच तो श्वास सोडतो). 'ससो' (श्वास), 'ससनं' (श्वास घेणे). 'अस्सासो' (श्वास घेणे/आश्वास), 'पस्सासो' (श्वास सोडणे/प्रश्वास), 'अस्ससन्तो' (श्वास घेणारा), 'पस्ससन्तो' (श्वास सोडणारा). အသ ဘုဝိ. အတ္ထိ. အသ. 'अस' हा धातू असण्याच्या (अस्तित्वाच्या) अर्थात आहे. 'अत्थि' (आहे). 'अस' (असावे). ဧတ္ထ အတ္ထီတိ အာချာတပဒံ. န အတ္ထိ ခီရာ ဗြာဟ္မဏီ. အတ္ထိတာ, အတ္ထိဘာဝေါ, ‘‘ယံ ကိဉ္စိ ရတနံ အတ္ထီ’’တိအာဒီသု ဝိယ နိပါတပဒံ. တသ္မာ အတ္ထီတိ ပဒံ အာချာတနိပါတဝသေန ဒုဝိဓန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. အသဣတိ အဝိဘတ္တိကံ နာမိကပဒံ. ဧတ္ထ စ ‘‘အသသ္မီတိ ဟောတီ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ အတ္ထီတိ အသ, နိစ္စဿေတံ အဓိဝစနံ. ဣမိနာ သဿတဒိဋ္ဌိ ဝုတ္တာ. येथे 'अत्थि' हे क्रियापद (आख्यातपद) आहे. "ब्राह्मणीकडे दूध नाही (न अत्थि)" इत्यादींमध्ये. 'अत्थिता' (अस्तित्व), 'अत्थिभावो' (अस्तित्वभाव), "जे काही रत्न आहे (अत्थि)" इत्यादींमध्ये हे अव्यय (निपातपद) आहे. म्हणून 'अत्थि' हे पद क्रियापद आणि अव्यय अशा दोन प्रकारे आहे असे जाणावे. 'अस' हे विभक्ती नसलेले नामपद आहे. आणि येथे "अस्स्मीति होति" (मी आहे असे होते) ही पालि याचे उदाहरण आहे. तेथे 'अत्थि' म्हणजे 'अस' (अस्तित्व), हे नित्याचे (शाश्वताचे) नाव आहे. याद्वारे शाश्वतदृष्टी (सस्सतदिट्ठि) सांगितली आहे. တတြာယံ ပဒမာလာ – ‘‘အတ္ထိ, သန္တိ. အသိ, အတ္ထ. အသ္မိ, အသ္မ, အမှိ, အမှ’’ ဣစ္စေတာနိ ပသိဒ္ဓါနိ. ‘‘အတ္ထု, သန္တု. အာဟိ, အတ္ထ. အသ္မိ, အသ္မ အမှိ, အမှ’’ ဣစ္စေတာနိ စ, ‘‘သိယာ, အဿ, သိယုံ, အဿု, သိယံသု. အဿ, အဿထ. သိယံ, အဿ, အဿာမ’’ ဣစ္စေတာနိ စ ပသိဒ္ဓါနိ. तेथे ही पदमाला (रूपांची मालिका) आहे - "अत्थि, सन्ति (आहे, आहेत). असि, अत्थ (तू आहेस, तुम्ही आहात). अस्मि, अस्म, अम्हि, अम्ह (मी आहे, आम्ही आहोत)" ही रूपे प्रसिद्ध आहेत. "अत्थु, सन्तु (असो, असोत). आहि, अत्थ (तू अस, तुम्ही असा). अस्मि, अस्म, अम्हि, अम्ह (मी असो, आम्ही असू)" ही रूपे आणि "सिया, अस्स, सियं, अस्सु, सियंसु. अस्स, अस्सथ. सियं, अस्स, अस्साम" ही रूपे प्रसिद्ध आहेत. ဧတ္ထ ပန ‘‘တေသဉ္စ ခေါ ဘိက္ခဝေ သမဂ္ဂါနံ သမ္မောဒမာနာနံ…ပေ… သိယံသု ဒွေ ဘိက္ခူ အဘိဓမ္မေ နာနာဝါဒါ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ[Pg.186]. တတ္ထ သိယံသူတိ ဘဝေယျုံ. အဘိဓမ္မေတိ ဝိသိဋ္ဌေ ဓမ္မေ. येथे "हे भिक्खूंनो, ते एकोप्याने आणि आनंदाने राहत असताना... (पे)... अभिधम्मामध्ये दोन भिक्खू भिन्न मत असणारे असू शकतील (सियंसु)" ही पालि याचे उदाहरण आहे. तेथे 'सियंसु' म्हणजे 'भवेय्युं' (असू शकतील). 'अभिधम्मे' म्हणजे विशिष्ट धम्मामध्ये (उत्कृष्ट धम्मामध्ये). ဣဒါနိ သိယာသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ပဘေဒေါ စ ဝုစ္စတေ. သိယာတိ ဧကံသေ စ ဝိကပ္ပနေ စ ‘‘ပထဝီဓာတု သိယာ အဇ္ဈတ္တိကာ, သိယာ ဗာဟိရာ’’တိ ဧကံသေ. ‘‘သိယာ အညတရဿ ဘိက္ခုနော အာပတ္တိဝီတိက္ကမော’’တိ ဝိကပ္ပနေ. आता 'सिया' शब्दाचा अर्थ-संग्रह आणि त्याचे भेद सांगितले जात आहेत. 'सिया' हा शब्द निश्चिततेच्या (एकांश) आणि विकल्पाच्या (संशय/पर्याय) अर्थात वापरला जातो. "पृथ्वीधातू ही अंतर्गत असू शकते (सिया), किंवा बाह्य असू शकते" - येथे निश्चिततेच्या अर्थात आहे. "कदाचित (सिया) एखाद्या भिक्खूकडून आपत्तीचे उल्लंघन होऊ शकते" - येथे विकल्पाच्या अर्थात आहे. သိယာတိ ဧကမာရချာတပဒံ, ဧကမဗျယပဒံ. အာချာတတ္တေ ဧကဝစနန္တံ, အဗျယတ္တေ ယထာပါဝစနံ. ‘‘ပုတ္တာ မတ္ထိ ဓနာ မတ္ထီ’’တိ ဧတ္ထ အတ္ထီတိ အဗျယပဒမိဝ ဧကဝစနန္တမ္ပိ ဗဟုဝစနန္တမ္ပိ ဘဝတိ. တဿာချာတတ္တေ ပယောဂေါဝိဒိတောဝ. အဗျယတ္တေ ပန ‘‘သုခံ န သုခသဟဂတံ, သိယာ ပီတိသဟဂတ’’န္တိ ‘‘ဣမေ ဓမ္မာ သိယာ ပရိတ္တာရမ္မဏာ’’တိ စ ဧကဝစနဗဟုဝစနပ္ပယောဂါ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ ဓာတုယာ ကိစ္စံ နတ္ထိ. ပရောက္ခာယံ ‘‘ဣတိဟ အသ ဣတိဟ အသာ’’တိ ဒဿနတော အသ ဣတိ ပဒံ ဂဟေတဗ္ဗံ. ဟိယျတ္တနီရူပါနိ အပ္ပသိဒ္ဓါနိ. အဇ္ဇတနိယာ ပန ‘‘အာသိ, အာသိံသု, အာသုံ. အာသိ, အာသိတ္ထ. အာသိံ, အာသိမှာ’’ ဣစ္စေတာနိ ပသိဒ္ဓါနိ. ဘဝိဿန္တိယာ ‘‘ဘဝိဿတိ, ဘဝိဿန္တိ’’ ဣစ္စာဒီနိ. ကာလာတိပတ္တိယာ ‘‘အဘဝိဿာ, အဘဝိဿံသု’’ ဣစ္စာဒီနိ ဘဝန္တိ. 'सिया' (siyā) हे एक आख्यातपद (क्रियापद) आणि एक अव्ययपद आहे. आख्यात रूपात ते एकवचनान्त असते, तर अव्यय रूपात ते वचनाच्या नियमांच्या पलीकडे (यथापावचन) असते. "पुत्ता मत्थि धना मत्थि" (पुत्र माझे आहेत, धन माझे आहे) येथे 'अत्थि' या अव्ययपदाप्रमाणे ते एकवचनान्त आणि बहुवचनान्त दोन्ही होते. त्याचे आख्यात रूप प्रयोगावरून ओळखले जाते. अव्यय रूपात मात्र "सुखं न सुखसहगतं, सिया पीतिसहगतं" (सुख हे सुखसहगत नाही, कदाचित ते प्रीतिसहगत असू शकते) आणि "इमे धम्मा सिया परित्तारम्मणा" (हे धर्म कदाचित परीत्तारम्मण असू शकतात) असे एकवचन आणि बहुवचनाचे प्रयोग जाणावेत. येथे धातूचे कार्य नाही. परोक्ष भूतकाळात "इतिह अस इतिह अस" या प्रयोगावरून 'अस' हे पद घ्यावे. ह्यस्तन भूतकाळाची (हिय्यत्तनी) रूपे दिली आहेत. अद्यतन भूतकाळात (अज्जतनी) मात्र "आसि, आसिंसु, आसुं. आसि, आसित्थ. आसिं, आसिम्हा" ही रूपे प्रसिद्ध आहेत. भविष्यकाळात "भविस्सति, भविस्सन्ति" इत्यादी रूपे होतात. कालातिपत्तीमध्ये "अभविस्सा, अभविस्सं सु" इत्यादी रूपे होतात. သာသ အနုသိဋ္ဌိယံ. သာသတိ, အနုသာသတိ. ကမ္မန္တံ ဝေါ သာသတိ, သာသနံ, အနုသာသနံ, အနုသာသနီ, အနုသိဋ္ဌိ, သတ္ထာ, သတ္ထံ, အနုသာသကော, အနုသာသိကာ. 'सास' (sāsa) धातू अनुशिष्टीत (उपदेश/शासनात) वापरला जातो. सासति (तो उपदेश करतो), अनुसासति (तो अनुशास करतो). 'कम्मन्तं वो सासति' (तो तुमच्या कर्माचे नियमन करतो), सासनं (शासन/उपदेश), अनुसासनं (अनुशासन), अनुसासनी (अनुशासणी), अनुसिट्ठि (अनुशिष्टी), सत्था (शास्ता/गुरु), सत्थं (शास्त्र), अनुसासको (अनुशासक), अनुसासिका (अनुशासिका). တတြ သာသနန္တိ အဓိသီလာဒိသိက္ခတ္တယသင်္ဂဟိတသာသနံ, ပရိယတ္တိပဋိပတ္တိပဋိဝေဓသင်္ခါတံ ဝါ သာသနံ. တဉှိ သာသတိ ဧတေန, ဧတ္ထ ဝါတိ ‘‘သာသန’’န္တိ ပဝုစ္စတိ. အပိစ သာသနန္တိ ‘‘ရညော [Pg.187] သာသနံ ပေသေတီ’’တိအာဒီသု ဝိယ ပါပေတဗ္ဗဝစနံ. တထာ သာသနန္တိ ဩဝါဒေါ, ယော ‘‘အနုသာသနီ’’တိ စ, ‘‘အနုသိဋ္ဌီ’’တိ စ ဝုစ္စတိ. သတ္ထာတိ တိဝိဓယာနမုခေန သဒေဝကံ လောကံ သာသတီတိ သတ္ထာ, ဒိဋ္ဌဓမ္မိကသမ္ပရာယိကပရမတ္ထေဟိ ယထာရဟံ သတ္တေ အနုသာသတီတိ အတ္ထော. သတ္ထန္တိ သဒ္ဒေ စ အတ္ထေ စ သာသတိ အာစိက္ခတိ ဧတေနာတိ သတ္ထံ. ကိံတံ? ဗျာကရဏံ. त्यात 'सासनं' (शासन) म्हणजे अधिशील इत्यादी तीन शिक्षांनी (त्रिशिक्षा) युक्त असलेले शासन, किंवा परियत्ति (अभ्यास), पटिपत्ति (आचरण) आणि पटिवेध (साक्षात्कार) या रूपाने ओळखले जाणारे शासन होय. ज्याच्याद्वारे किंवा ज्यामध्ये उपदेश केला जातो, त्याला 'सासनं' असे म्हटले जाते. शिवाय, 'सासनं' म्हणजे "राजाचा संदेश पाठवतो" इत्यादी वाक्यांप्रमाणे पोहोचवायचा संदेश (निरोप) असाही अर्थ होतो. तसेच 'सासनं' म्हणजे ओवाद (उपदेश), ज्याला 'अनुसासनी' आणि 'अनुसिट्ठि' असेही म्हणतात. 'सत्था' (शास्ता) म्हणजे त्रिविध यानांच्या (मार्गांच्या) माध्यमातून देवलोकासह संपूर्ण जगाला उपदेश करणारे ते 'शास्ता' होत; ते इहलोक, परलोक आणि परमार्थ या दृष्टीने प्राण्यांना योग्य तो उपदेश करतात, असा अर्थ आहे. 'सत्थं' (शास्त्र) म्हणजे ज्याच्याद्वारे शब्द आणि अर्थ यांचे नियमन केले जाते किंवा सांगितले जाते ते शास्त्र होय. ते काय आहे? व्याकरण. ဤသ ဣဿရိယေ. ဣဿရိယံ ဣဿရဘာဝေါ. ဤသတိ. ဝင်္ဂီသော, ဇနပဒေသော, မနုဇေသော. 'ईस' (īsa) धातू ऐश्वर्यात (प्रभुत्वात) वापरला जातो. इस्सरियं म्हणजे ईश्वरभाव (प्रभुत्व). ईसति (तो प्रभुत्व गाजवतो). वङ्गीसो (वंगीश), जनपदेसो (जनपदेश), मनुजेसो (मनुजेश). တတြ ဝင်္ဂီသောတိ ဝါစာယ ဤသော ဣဿရောတိ ဝင်္ဂီသော. ကော သော? အာယသ္မာ ဝင်္ဂီသော အရဟာ. အာဟ စ သယမေဝ – त्यात 'वङ्गीसो' म्हणजे जो वाचेचा ईश (स्वामी) किंवा प्रभू आहे तो वंगीश होय. तो कोण आहे? आयुष्यमान वंगीश अरहंत. त्यांनी स्वतःच म्हटले आहे – ‘‘ဝင်္ဂေ ဇာတောတိ ဝင်္ဂီသော, ဝစနေ ဣဿရောတိ စ; ‘ဝင်္ဂီသော’ ဣတိ မေ နာမံ, အဘဝီ လောကသမ္မတ’’န္တိ; "वंग देशात जन्मल्यामुळे 'वंगीश' आणि वचनाचा स्वामी असल्यामुळे 'वंगीश'; 'वंगीश' हे माझे नाव जगात संमत (प्रसिद्ध) झाले." အာသ ဥပဝေသနေ. ဥပဝေသနံ နိသီဒနံ ‘‘အာသနေ ဥပဝိဋ္ဌော သံဃော’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. အာသတိ. အစ္ဆတိ. အာသီနော. အာသနံ. ဥပါသတိ. ဥပါသကော. 'आस' (āsa) धातू उपवेशनात (बसण्यात) वापरला जातो. उपवेशन म्हणजे बसणे, जसे की "आसनावर संघ बसला आहे" यामध्ये. आसति (तो बसतो). अच्छति (तो बसतो). आसीनो (बसलेला). आसनं (आसन). उपासति (तो उपासना करतो/जवळ बसतो). उपासको (उपासक). တတ္ထ အာသနန္တိ အာသတိ နိသီဒတိ ဧတ္ထာတိ အာသနံ, ယံ ကိဉ္စိ နိသီဒနယောဂ္ဂံ မဉ္စပီဌာဒိ. त्यात 'आसनं' म्हणजे ज्याच्यावर बसले जाते ते आसन, जसे की मंचक (खाट), पीठ (पाट) इत्यादी बसण्यास योग्य असलेली कोणतीही वस्तू. ကသီ ဂတိသောသနေသု. ဤကာရန္တောယံ ဓာတု, တေနိတော န နိဂ္ဂဟီတာဂမော. ကသတိ. 'कसी' (kasī) धातू गती आणि शोषणात (सुकवण्यात) वापरला जातो. हा ईकारान्त धातू आहे, त्यामुळे यापासून निग्गहीत (अनुस्वार) चा आगम होत नाही. कसति (तो नांगरतो/कर्षण करतो). နိသီ စုမ္ဗနေ. နိသတိ. 'निसी' (nisī) धातू चुंबनात वापरला जातो. निसति (तो चुंबन घेतो). ဒိသီ အပ္ပီတိယံ. ဓမ္မံ ဒေဿတိ. ဒိသော. ဒိဋ္ဌော. ဒေဿီ. ဒေဿော. ဒေဿိယော. 'दिसी' (disī) धातू अप्रीतीत (द्वेषात) वापरला जातो. धम्मं देस्सति (तो धर्माचा द्वेष करतो). दिसो (शत्रू), दिट्ठो (शत्रू), देस्सी (द्वेष करणारा), देस्सो (द्वेषपात्र), देस्सियो (द्वेषपात्र). တတြ ဒိသောတိ စ ဒိဋ္ဌောတိ စ ပစ္စာမိတ္တဿာဓိဝစနမေတံ. သော ဟိ ပရေ ဒေဿတိ နပ္ပိယာယတိ, ပရေဟိ ဝါ ဒေဿိယတိ ပိယော [Pg.188] န ကရိယတီတိ ‘‘ဒိသော’’တိ စ ‘‘ဒိဋ္ဌော’’တိ စ ဝုစ္စတိ. အထ ဝါ ဒိသောတိ စောရော ဝါပစ္စာမိတ္တော ဝါ. ဒိဋ္ဌောတိ ပစ္စာမိတ္တောယေဝ. အတြိမေ ပယောဂါ – त्यात 'दिसो' आणि 'दिट्ठो' हे वैऱ्याचे (शत्रूचे) समानार्थी शब्द आहेत. कारण तो इतरांचा द्वेष करतो, त्यांच्यावर प्रेम करत नाही, किंवा इतरांद्वारे त्याचा द्वेष केला जातो, त्याला प्रिय मानले जात नाही, म्हणून त्याला "दिसो" आणि "दिट्ठो" असे म्हटले जाते. अथवा 'दिसो' म्हणजे चोर किंवा शत्रू. 'दिट्ठो' म्हणजे केवळ शत्रूच. या संदर्भात हे प्रयोग आहेत – ‘‘ဒိသော ဒိသံ ယံ တံ ကယိရာ, ဝေရီ ဝါ ပန ဝေရိနံ; မိစ္ဆာပဏိဟိတံ စိတ္တံ, ပါပိယော နံ တတော ကရေ’’တိ စ. "शत्रू शत्रूचे जे काही अहित करील, किंवा वैरी वैऱ्याचे जे काही अहित करील; चुकीच्या मार्गावर लावलेले मन माणसाचे त्याहूनही अधिक वाईट (नुकसान) करते." ‘‘ဒိသာ ဟိ မေ ဓမ္မကထံ သုဏန္တူ’’တိ စ, ‘‘ဒိသာ ဟိ မေ တေ မနုဿေ ဘဇန္တု ယေ ဓမ္မမေဝါဒပယန္တိ သန္တော’’တိ စ, "माझे शत्रू माझी धम्मकथा ऐकोत" आणि "माझे शत्रू त्या माणसांची संगत करोत जे संत पुरुष केवळ धम्माचाच उपदेश करतात." ‘‘ယဿေတေ စတုရော ဓမ္မာ, ဝါနရိန္ဒ ယထာ တဝ; သစ္စံ ဓမ္မော ဓိတိ စာဂေါ, ဒိဋ္ဌံ သော အတိဝတ္တတီ’’တိ စ. "हे वानरेंद्रा! ज्याच्याकडे तुझ्यासारखे हे चार धर्म (गुण) आहेत – सत्य, धम्म (कर्तव्य), धृती (धैर्य) आणि त्याग, तो शत्रूला पार करून जातो (त्याच्यावर मात करतो)." ဒေဿီတိ ဒေဿနသီလော အပ္ပိယာယနသီလောတိ ဒေဿီ. ‘‘ဓမ္မကာမော ဘဝံ ဟောတိ, ဓမ္မဒေဿီ ပရာဘဝေါ’’တိ ဣဒမေတ္ထ ပယောဂနိဒဿနံ. ဒေဿောတိ အပ္ပိယော, တထာ ဒေဿိယောတိ. ဧတ္ထ စ – 'देस्सी' म्हणजे द्वेष करण्याचा स्वभाव असलेला, अप्रीती बाळगणारा तो देस्सी. "धम्माची इच्छा करणारा प्रगती करतो, धम्माचा द्वेष करणारा अधोगतीला (पराभवाला) जातो" हे येथे प्रयोगाचे उदाहरण आहे. 'देस्सो' म्हणजे अप्रिय, तसेच 'देस्सियो' म्हणजेही अप्रिय. आणि येथे – ‘‘န မေ ဒေဿာ ဥဘော ပုတ္တာ, မဒ္ဒီဒေဝီ န ဒေဿိယာ; သဗ္ဗညုတံ ပိယံ မယှံ, တသ္မာ ပိယေ အဒါသဟ’’န္တိ စ, "मला माझे दोन्ही पुत्र अप्रिय नाहीत, मद्दीदेवीही अप्रिय नाही; मला सर्वज्ञता (बुद्धत्व) प्रिय आहे, म्हणूनच मी माझ्या प्रियांना दान दिले." ‘‘န မေ သာ ဗြာဟ္မဏီ ဒေဿာ, နပိ မေ ဗလံ န ဝိဇ္ဇတီ’’တိ စ, "ती ब्राह्मणी मला अप्रिय नाही, आणि माझ्याकडे बळ नाही असेही नाही." ‘‘မာတာ ပိတာ န မေ ဒေဿာ, နပိ ဒေဿံ မဟာယသံ; သဗ္ဗညုတံ ပိယံ မယှံ, တသ္မာ ဝတမဓိဋ္ဌဟိ’’န္တိ စ "मला माता-पिता अप्रिय नाहीत, आणि हे महान यशही अप्रिय नाही; मला सर्वज्ञता प्रिय आहे, म्हणूनच मी या व्रताचे अधिष्ठान केले." ပယောဂါ. သဗ္ဗတ္ထ မေတိ စ မယှန္တိ စ သာမိဝစနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. हे प्रयोग आहेत. सर्व ठिकाणी 'मे' आणि 'मय्हं' हे षष्ठी विभक्तीचे (संबंधवाचक) शब्द समजावेत. ဣမာနိ ပန ပစ္စာမိတ္တဿ နာမာနိ – आता ही वैऱ्याची (शत्रूची) नावे आहेत – ‘‘ပစ္စမိတ္တော ရိပု ဒိဋ္ဌော, ဒိသော ဝေရီ စ သတွ’ရိ; အမိတ္တော စ သပတ္တော စ, ဧဝံ ပဏ္ဏတ္တိကာရိသူ’’တိ. "पच्चमित्तो (प्रत्यमित्र), रिपु, दिट्ठो, दिसो, वेरी, सत्तू, अरी, अमित्तो आणि सपत्तो; संज्ञा निर्माण करणाऱ्या ग्रंथांमध्ये ही शत्रूची नावे दिली आहेत." ဧသု ဂတိယံ. ဧသတိ. 'एसु' (esu) धातू गतीत वापरला जातो. एसति (तो शोधतो/जातो). ဘဿ [Pg.189] ဘဿနဒိတ္တီသု. ဘဿနံ ဝစနံ. ဒိတ္တိ သောဘာ. ဘဿတိ. ဘဿံ, ပဘဿရံ. 'भस्स' (bhassa) धातू भाषणात (बोलण्यात) आणि दीप्तीत (शोभेत) वापरला जातो. भाषण म्हणजे वचन (बोलणे). दीप्ती म्हणजे शोभा. भस्सति (तो बोलतो/शोभतो). भस्सं (भाषण), पभस्सरं (प्रभास्वर/अतिशय तेजस्वी). ဓိသ သဒ္ဒေ. ဓိသတိ. 'धिस' (dhisa) धातू शब्दात (आवाजात) वापरला जातो. धिसति (तो शब्द करतो). ဒိသ အတိသဇ္ဇနေ. ဒိသတိ, ဥပဒိသတိ, သန္ဒိသတိ, နိဒ္ဒိသတိ, ပစ္စာဒိသတိ, ပဋိသန္ဒိသတိ, ဥဒ္ဒိသတိ. ဒေသော, ဥဒ္ဒေသော ဣစ္စာဒီနိ. 'दिस' (disa) धातू अतिसर्जनात (दानात/निर्देशात) वापरला जातो. दिसति (तो निर्देश करतो), उपदिसति (तो उपदेश करतो), संदिसति (तो संदेश देतो), निद्दिसति (तो निर्देश करतो), पच्चादिसति (तो नाकारतो), पटिसन्दिसति (तो प्रति-निर्देश करतो), उद्दिसति (तो उद्देश करतो). देसो (देश/प्रदेश), उद्देसो (उद्देश/पाठ) इत्यादी. ပိသု အဝယဝေ. ပိသတိ. 'पिस' (pisu) धातू अवयवात (तुकडे करण्यात/पिष्ट करण्यात) वापरला जातो. पिसति (तो वाटतो/पिष्ट करतो). ဣသိ ဂတိယံ. ဣသတိ. 'इसि' (isi) धातू गतीत वापरला जातो. इसति (तो जातो). ဖုသ သမ္ဖဿေ. ဖုသတိ. ဖဿော, ဖုသနာ, သမ္ဖုသနာ, သမ္ဖုသိတတ္တံ. ဧဝရူပေါ ကာယသမ္ဖဿော အဟောသိ. ဖောဋ္ဌဗ္ဗံ, ဖုသိတံ. ဒေဝေါ စ ဧကမေကံ ဖုသာယတိ. ဖုဋ္ဌုံ, ဖုသိတုံ, ဖုသိတွာ, ဖုသိတွာန, ဖုသိယ, ဖုသိယာန. ဖုဿ ဖုဿ ဗျန္တိံ ကရောတိ. 'फुस' (phusa) धातू संस्पर्शात (स्पर्शात) वापरला जातो. फुसति (तो स्पर्श करतो). फस्सो (स्पर्श), फुसना (स्पर्श करणे), संफुसना (सम्यक् स्पर्श करणे), संफुसितत्तं (स्पर्श झालेली अवस्था). "अशा प्रकारचा कायसंस्पर्श (शारीरिक स्पर्श) झाला." फोट्ठब्बं (स्पर्शविषय), फुसितं (स्पर्श केलेले). "देव (पाऊस) एकेक थेंब स्पर्श करतो (पडतो)." फुट्टुं, फुसितुं (स्पर्श करण्यासाठी), फुसित्वा, फुसित्वाना, phusiya, phusiyāna (स्पर्श करून). "स्पर्श करून करून तो नष्ट करतो." တတြ ဖဿောတိ အာရမ္မဏံ ဖုသန္တိ ဧတေန, သယံ ဝါ ဖုသတိ, ဖုသနမတ္တမေဝ ဝါ ဧတန္တိ ဖဿော, အာရမ္မဏေ ဖုသနလက္ခဏော ဓမ္မော. त्यात 'फस्सो' (स्पर्श) म्हणजे ज्याच्याद्वारे आलंबनाला (विषयाला) स्पर्श केला जातो, किंवा जे स्वतः स्पर्श करते, किंवा जे केवळ स्पर्श करणे मात्र आहे तो 'स्पर्श' होय; आलंबनाला स्पर्श करणे हे लक्षण असलेला हा एक धर्म (मानसिक घटक) आहे. ရုသ ရိသ ဟိံသာယံ. ရောသတိ. ရိသတိ. ပုရိသော. 'रुस' (rusa) आणि 'रिस' (risa) धातू हिंसेत वापरले जातात. रोसति (तो रागवतो/हिंसा करतो). रिसति (तो इजा करतो). पुरिसो (पुरुष). ဧတ္ထ စ ‘‘ပုံ ဝုစ္စတိ နိရယော, တံ ရိသတီတိ ပုရိသော’’တိ အာစရိယာ ဝဒန္တိ. आणि येथे आचार्य म्हणतात की, "'पुं' म्हणजे नरक, जो त्यात जातो (किंवा ज्याची तिथे हिंसा होते) तो 'पुरिसो' (पुरुष) होय." ရိသ ဂတိယံ. ရေသတိ. 'रिस' (risa) धातू गतीत वापरला जातो. रेसति (तो आवाज करतो/जातो). ဝိသ ပဝေသနေ. ဝိသတိ, ပဝိသတိ. ပဝေသော, ပဝေသနံ, နိဝေသနံ, ပဝိသံ. ဧတ္ထ နိဝေသနံ ဝုစ္စတိ ဂေဟံ. 'वीस' (visa) धातू प्रवेशात वापरला जातो. विसति, पविसति (तो प्रवेश करतो). पवेसो (प्रवेश), पवेसनं (प्रवेश करणे), निवेसनं (निवास/घर), पविसं (प्रवेश करणारा). येथे 'निवेसनं' म्हणजे घर असे म्हटले जाते. မသ အာမသနေ. မသတိ, အာမသတိ, ပရာမသတိ. ပရာမာသော, ပရာမသနံ. 'मस' (masa) धातू आमर्शनात (स्पर्शात/पकडण्यात) वापरला जातो. मसति, आमसति (तो स्पर्श करतो), परामसति (तो चुकीच्या पद्धतीने ग्रहण करतो). परामानो (परामर्श/आसक्ती), परामसनं (स्पर्श करणे/पकडणे). ဧတ္ထ [Pg.190] ပရာမာသောတိ ပရတော အာမသတီတိ ပရာမာသော, အနိစ္စာဒိဓမ္မေ နိစ္စာဒိဝသေန ဂဏှာတီတိ အတ္ထော. ‘‘ပရာမာသော မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိ ကုမ္မဂ္ဂေါ မိစ္ဆာပထော’’တိအာဒီနိ ဗဟူနိ ဝေဝစနပဒါနိ အဘိဓမ္မတော ဂဟေတဗ္ဗာနိ. येथे 'पaramāso' (परामर्श) म्हणजे जो विपरीतपणे ग्रहण करतो तो परामर्श होय; अनित्य इत्यादी धर्मांना नित्य इत्यादी रूपाने ग्रहण करणे असा याचा अर्थ आहे. "परामर्श म्हणजे मिथ्यादृष्टी, कुमार्ग, मिथ्यापथ" इत्यादी अनेक समानार्थी शब्द अभिधम्मातून घ्यावेत. ဣသု ဣစ္ဆာယံ. ဣစ္ဆတိ, သမ္ပဋိစ္ဆတိ. သမ္ပဋိစ္ဆနံ, ဣစ္ဆာ, အဘိစ္ဆာ, ဣစ္ဆံ, ဣစ္ဆမာနော. 'इसु' (isu) धातू इच्छेत वापरला जातो. इच्छति (तो इच्छा करतो), संपटिच्छति (तो स्वीकार करतो). संपटिच्छनं (स्वीकार करणे), इच्छा (इच्छा), अभिच्छा (तीव्र इच्छा), इच्छं (इच्छा करणारा), इच्छमानो (इच्छा बाळगणारा). ဝေသု ဒါနေ. ဝေစ္ဆတိ, ပဝေစ္ဆတိ, ပဝေစ္ဆေတိ. ပဝေစ္ဆံ, ပဝေစ္ဆန္တော. 'वेसु' (vesu) धातू दानात वापरला जातो. वेच्छति, पवेच्छति, पवेच्छेति (तो दान देतो). पवेच्छं (दान देणारा), पवेच्छन्तो (दान देत असताना). နိသ ဗဒ္ဓါယံ. ဗဒ္ဓါတိ ဝိနိဗဒ္ဓေါ, အဟင်္ကာရဿေတံ အဓိဝစနံ. နိသတိ. 'निस' (nisa) धातू बंधनात (बद्धतेत) वापरला जातो. 'बद्धा' म्हणजे विनिबद्ध (गुंतलेला), हा अहंकाराचाच एक समानार्थी शब्द आहे. निसति (तो बांधतो/बद्ध होतो). ဇုသိ ပီတိသေဝနေသု. ဇောသတိ. 'जुसि' (jusi) धातू प्रीती (आनंद) आणि सेवन करणे या अर्थात वापरला जातो. जोसति. ဣသ ပရိယေသနေ. ဧသတိ. ဣသိ, ဣဋ္ဌံ, အနိဋ္ဌံ, ဧသံ, ဧသမာနော. ‘इस्’ (धातू) शोधण्याच्या अर्थात आहे. ‘एसति’ (शोधतो). ‘इसि’ (ऋषी), ‘इट्ठं’ (इष्ट), ‘अनिट्ठं’ (अनिष्ट), ‘एसं’ (शोधणारा), ‘एसमानो’ (शोधत असलेला). သံကသေ အစ္ဆနေ. အစ္ဆနံ နိသီဒနံ. သင်္ကသာယတိ. ‘संकस्’ (धातू) बसण्याच्या अर्थात आहे. ‘अच्छनं’ म्हणजे बसणे (निसीदनं). ‘संकसायति’. သကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ‘स’ कारान्त धातूंची रूपे. ဟကာရန္တဓာတု ‘ह’ कारान्त धातू. ဟာ စာဂေ. ဇဟတိ, ဝိဇဟတိ. ဝိဇဟနံ, ဇဟိတုံ, ဇဟာတဝေ, ဇဟိတွာ, ဇဟာယ. ‘हा’ (धातू) त्यागाच्या अर्थात आहे. ‘जहति’, ‘विजहति’ (त्यागतो). ‘विजहनं’ (त्याग करणे), ‘जहितुं’ (त्याग करण्यासाठी), ‘जहातवे’ (त्याग करण्यासाठी), ‘जहित्वा’ (त्याग करून), ‘जहाय’ (त्याग करून). မှီ ဤသံဟသနေ. မှယတေ, ဥမှယတေ ဝိမှယတေ. ‘म्ही’ (धातू) मंद हास्य करण्याच्या अर्थात आहे. ‘म्हयते’, ‘उम्हयते’, ‘विम्हयते’. တတ္ထ မှယတေတိ သိတံ ကရောတိ. ဥမှယတေတိ ပဟဋ္ဌာကာရံ ဒဿေတိ. ဝိမှယတေတိ ဝိမှယနံ ကရောတိ. တတြာယံ ပါဠိ ‘‘န နံ ဥမှယတေ ဒိသွာ. ပေက္ခိတေန မှိတေန စ. မှိတပုဗ္ဗံဝ [Pg.191] ဘာသတိ. ယဒါ ဥမှယမာနာ မံ, ရာဇပုတ္တီ ဥဒိက္ခတိ. ဥမှာပေယျ ပဘာဝတီ. ပမှာပေယျ ပဘာဝတီ’’တိ. तेथे ‘म्हयते’ म्हणजे मंद हास्य करतो. ‘उम्हयते’ म्हणजे प्रसन्नतेचा भाव दर्शवतो. ‘विम्हयते’ म्हणजे आश्चर्य व्यक्त करतो. त्याविषयी ही पाळी (पाठांतर) आहे: “तिला पाहून तो हसत नाही, केवळ दृष्टीने आणि मंद हास्याने. तो पूर्वी हसल्यासारखाच बोलतो. जेव्हा ती राजपुत्री माझ्याकडे प्रसन्नतेने पाहत असे, तेव्हा प्रभावती मला हसवायची (उम्हापेय्य), प्रभावती मला अत्यंत आनंदित करायची (पम्हापेय्य).” တတ္ထ ဥမှယမာနာတိ ပဟဋ္ဌာကာရံ ဒဿေတွာ ဟသမာနာ. ဥမှာပေယျာတိ သိတဝသေန ပဟံသေယျ. ပမှာပေယျာတိ မဟာဟသိတဝသေန ပရိဟာသေယျ. तेथे ‘उम्हयमाना’ म्हणजे प्रसन्नतेचा भाव दर्शवून हसणारी. ‘उम्हापेय्य’ म्हणजे मंद हास्याने आनंदित करणारी. ‘पम्हापेय्य’ म्हणजे मोठ्या हास्याने परिहास करणारी. ဟု ဒါနေ. ဟဝတိ. ဟုတိ. ‘हु’ (धातू) दानाच्या अर्थात आहे. ‘हवति’. ‘हुति’. ဟု ပသဇ္ဇကရဏေ. ပသဇ္ဇကရဏံ ပကာရေန သဇ္ဇနကြိယာ. ဟဝတိ. ဟုတော, ဟုတဝါ, ဟုတာဝီ, အာဟုတိ. ‘हु’ (धातू) सज्ज करण्याच्या अर्थात आहे. ‘पसज्जकरण’ म्हणजे विशेष प्रकारे सज्ज करण्याची क्रिया. ‘हवति’. ‘हुतो’, ‘हुतवा’, ‘हुतावी’, ‘आहुति’. ဟူ သတ္တာယံ. ဟောတိ, ဟောန္တိ. ဟောသိ, ဟောထ. ဟောမိ, ဟောမ. ပဟောတိ, ပဟောန္တိ. ပဟူတံ, ပဟူတာ, ကုတော ပဟူတာ ကလဟာ ဝိဝါဒါ. ဟောန္တော, ဟောန္တာ, ဟောန္တံ, ပဟောန္တော. ပစ္ဆာသမဏေန ဟောတဗ္ဗံ. ဟောတုံ ဟောတုယေ, ပဟောတုံ, ဟုတွာန. ဝတ္တမာနာဝိဘတ္တိရူပါဒီနိ. ဧတ္ထ ပသိဒ္ဓရူပါနေဝ ဂဟိတာနိ. ‘हू’ (धातू) अस्तित्वाच्या अर्थात आहे. ‘होति’, ‘होन्ति’. ‘होसि’, ‘होथ’. ‘होमि’, ‘होम’. ‘पहोति’, ‘पहोन्ति’. ‘पहूतं’, ‘पहूता’ (उदा. ‘कुतो पहूता कलहा विवादा’ - कलह आणि विवाद कोठून उत्पन्न होतात?). ‘होन्तो’, ‘होन्ता’, ‘होन्तं’, ‘पहोन्तो’. ‘पच्छासमणेन होतब्बं’ (मागे चालणाऱ्या श्रमणाने असावे). ‘होतुं’, ‘होतुये’, ‘पहोतुं’, ‘हुत्वान’. ही वर्तमानकाळाच्या विभक्तीची रूपे इत्यादी आहेत. येथे केवळ प्रसिद्ध रूपेच घेतली आहेत. ဟောတု, ဟောန္တု. ဟောသိ, ဟောထ. ဟောမိ, ဟောမ. ပဉ္စမီဝိဘတ္တိရူပါနိ. ဧတ္ထာပိ ပသိဒ္ဓရူပါနေဝ ဂဟိတာနိ. ‘होतु’, ‘होन्तु’. ‘होसि’, ‘होथ’. ‘होमि’, ‘होम’. ही पंचमी विभक्तीची (आज्ञार्थ) रूपे आहेत. येथेही केवळ प्रसिद्ध रूपेच घेतली आहेत. ဟုဝေယျ, ဟုဝေယျုံ. ဟုဝေယျာသိ, ဟုဝေယျာထ. ဟုဝေယျာမိ, ဟုဝေယျာမ. ဟုဝေထ, ဟုဝေရံ. ဟုဝေထော, ဟုဝေယျာဝှော. ဟုဝေယျံ, ဟုဝေယျာမှေ. သတ္တမိယာ ရူပါနိ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဥပကော အာဇီဝကော ‘ဟုဝေယျ ပါဝုသော’တိ ဝတွာ သီသံ ဩကမ္ပေတွာ ဥမ္မဂ္ဂံ ဂဟေတွာ ပက္ကမီ’’တိ ပါဠိယံ ဟုဝေယျာတိ ပဒဿ ဒဿနတော နယဝသေန ‘ဟုဝေယျ, ဟုဝေယျု’’န္တိအာဒီနိ ဝုတ္တာနိ. ဟုပေယျာတိပိ ပါဌော ဒိဿတိ, ယထာ ပစ္စပေက္ခဏာ. တဗ္ဗသေန ‘‘ဟုပေယျ, ဟုပေယျုံ[Pg.192]. ဟုပေယျာသီ’’တိအာဒိနာ ဝကာရဿ ပကာရာဒေသဘူတာနိ ရူပါနိပိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ‘हुवेय्य’, ‘हुवेय्युं’. ‘हुवेय्यासि’, ‘हुवेय्याथ’. ‘हुवेय्यामि’, ‘हुवेय्यामा’. ‘हुवेथ’, ‘हुवेरं’. ‘हुवेथो’, ‘हुवेय्याव्हो’. ‘हुवेय्यं’, ‘हुवेय्याम्हे’. ही सप्तमी विभक्तीची (विध्यर्थ) रूपे आहेत. येथे पाळीमध्ये “उपको आजीवको ‘हुवेय्य पावुसो’ti वत्वा सीसं ओकम्पेत्वा उम्मग्गं गहेत्वा पक्कमी” (उपका आजीवकाने ‘असे असू शकते, आवुसो’ असे म्हणून, डोके हलवून, दुसरा मार्ग धरून निघून गेला) या प्रयोगावरून ‘हुवेय्य, huveyyuं’ इत्यादी रूपे सांगितली आहेत. ‘हुपेय्य’ असाही पाठ आढळतो, जसे ‘पच्चवेक्खणा’ मध्ये. त्यानुसार ‘व’ काराचा ‘प’ कार आदेश होऊन ‘हुपेय्य’, ‘हुपेय्युं’, ‘हुपेय्यासि’ इत्यादी रूपेही ग्रहण करावीत. အပရော နယော – ဟေယျ, ဟေယျုံ. ဟေယျာသိ, ဟေယျာထ. ဟေယျာမိ, ဟေယျာမ. ဟေထ, ဟေရံ. ဟေထော, ဟေယျာဝှော. ဟေယျံ, ဟေယျာမှေ. ဣမာနိ အဋ္ဌကထာနယေန ဂဟိတရူပါနိ. ဧတ္ထ ပန ‘‘န စ ဥပ္ပာဒေါ ဟောတိ. သစေ ဟေယျ, ဥပ္ပာဒဿာပိ ဥပ္ပာဒေါ ပါပုဏေယျာ’’တိ ဣဒမ္ပိ နိဒဿနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. दुसरा प्रकार – ‘हेय्य’, ‘हेय्युं’. ‘हेय्यासि’, ‘हेय्याथ’. ‘हेय्यामि’, ‘हेय्यामा’. ‘हेथ’, ‘हेरं’. ‘हेथो’, ‘हेय्याव्हो’. ‘हेय्यं’, ‘हेय्याम्हे’. ही अट्टकथा पद्धतीनुसार घेतलेली रूपे आहेत. येथे “न च उप्पादो होति. सचे हेय्य, उप्पादस्सापि उप्पादो पापुणेय्या” (आणि उत्पत्ती होत नाही. जर ती असती, तर उत्पत्तीचीही उत्पत्ती झाली असती) हे उदाहरणही पाहावे. ဟုဝ, ဟုဝု. ဟုဝေ, ဟုဝိတ္ထ. ဟုဝံ, ဟုဝိမှ. ဟုဝိတ္ထ, ဟောထ ဣစ္စပိ သညောဂတကာရလောပေန အဟောသီတိ အတ္ထော. တထာဟိ ‘‘ကသိရာ ဇီဝိကာ ဟောထာ’’တိ ပဒဿတ္ထံ ဝဏ္ဏေန္တေဟိ ‘‘ဒုက္ခာ နော ဇီဝိကာ အဟောသီ’’တိ အတ္ထော ဝုတ္တော. ဟုဝိရေ. ဟုဝိတ္ထော, ဟုဝိဝှော. ဟုဝိံ, ဟုဝိမှေ. ပရောက္ခာယ ရူပါနိ. ‘हुव’, ‘हुवु’. ‘हुवे’, ‘हुवित्थ’. ‘हुवं’, ‘हुविम्ह’. ‘हुवित्थ’, ‘होथ’ इत्यादींमध्ये संयोग त-काराचा लोप होऊन ‘अहोसि’ (झाला) असा अर्थ होतो. जसे की “कसिरा जीविका होथा” या पदाचा अर्थ स्पष्ट करताना “दुक्खा नो जीविका अहोसि” (आमचे जीवन कठीण/दुःखद झाले) असा अर्थ सांगितला आहे. ‘हुविरे’. ‘हुवित्थो’, ‘हुविव्हो’. ‘हुविं’, ‘हुविम्हे’. ही परोक्ष भूतकाळाची (परोक्खा) रूपे आहेत. အဟုဝါ, အဟုဝူ. အဟုဝေါ, အဟုဝတ္ထ. အဟုဝံ, အဟုဝမှ. အဟုဝတ္ထ, အဟုဝတ္ထုံ. အဟုဝသေ, အဟုဝဝှံ. အဟုဝိံ, အဟုဝမှသေ. ဟိယျတ္တနီရူပါနိ. ‘अहुवा’, ‘अहुवू’. ‘अहुवो’, ‘अहुवत्थ’. ‘अहुवं’, ‘अहुवम्ह’. ‘अहुवत्थ’, ‘अहुवत्थुं’. ‘अहुवसे’, ‘अहुवव्हं’. ‘अहुविं’, ‘अहुवम्हसे’. ही हिय्यत्तनी (भूतकाळाची) रूपे आहेत. ဧတ္ထ အဟုဝမှသေတိ မယံ ဘဝမှသေတိ အတ္ထော. ‘‘အကရမှသ တေ ကိစ္စံ, ယံ ဗလံ အဟုဝမှသေ’’တိ ပါဠိယံ ပန ‘‘အဟုဝ အမှသေ’’ ဣတိ ဝါ ပဒစ္ဆေဒေါ ကာတဗ္ဗော ‘‘အဟု အမှသေ’’တိ ဝါ. ပစ္ဆိမနယေ ဝကာရာဂမော ‘‘အဟုဝါ’’တိ စ ‘‘အဟူ’’တိ စ ဒွိန္နမ္ပိ အဟောသီတိ အတ္ထော. အမှန္တိ အမှာကံ. သေတိ နိပါတမတ္တံ. ဣဒံ ဝုတ္တံ ဟောတိ – အမှာကံ ယံ ဗလံ အဟောသိ, မယံ တေန ဗလေန တဝ ကိစ္စံ အကရမှာတိ. येथे ‘अहुवम्हसे’ म्हणजे ‘आम्ही झालो’ असा अर्थ आहे. परंतु “अकरम्हस ते किच्चं, यं बलं अहुवम्हसे” या पाळीमध्ये “अहुव अम्हसे” किंवा “अहु अम्हसे” असा पदच्छेद करावा. नंतरच्या पद्धतीनुसार ‘व’ काराचा आगम होऊन ‘अहुवा’ आणि ‘अहू’ या दोन्हीचा अर्थ ‘अहोसि’ (झाला) असा होतो. ‘अम्हं’ म्हणजे ‘आमचे’. ‘से’ हा केवळ निपात आहे. याचा अर्थ असा आहे – आमचे जे बळ होते, आम्ही त्या बळाने तुझे कार्य केले. အဟောသိ, အဟုံ, အဟေသုံ. အဟုဝေါ, အဟုဝိတ္ထ. အဟောသိတ္ထဣစ္စပိ. အဟောသိံ, အဟုဝါသိံ ဣစ္စပိ, အဟောသိမှာ, အဟုမှာ[Pg.193]. အဟုဝါ, အဟုဝု, အဟုဝသေ, အဟုဝိဝှံ. အဟုဝံ, အဟုံ ဣစ္စပိ. အဟုဝိမှေ. အဇ္ဇတနိယာ ရူပါနိ. ‘अहोसि’, ‘अहुं’, ‘अहेसुं’. ‘अहुवो’, ‘अहुवत्थ’. ‘अहोसित्थ’ असेही. ‘अहोसिं’, ‘अहुवासिं’ इत्यादी, ‘अहोसिम्हा’, ‘अहुम्हा’. ‘अहुवा’, ‘अहुवु’, ‘अहुवसे’, ‘अहुविव्हं’. ‘अहुवं’, ‘अहुं’ इत्यादी. ‘अहुविम्हे’. ही अज्जतनी (भूतकाळाची) रूपे आहेत. ဧတ္ထ ‘‘အဟံ ကေဝဋ္ဋဂါမသ္မိံ, အဟုံ ကေဝဋ္ဋဒါရကော’’တိ ဒဿနတော ‘‘အဟု’’န္တိ ဝုတ္တံ, အဟောသိန္တိ အတ္ထော. ‘‘အဟံ ဘဒန္တေ အဟုဝါသိံ ပုဗ္ဗေ သုမေဓနာမဿ ဇိနဿ သာဝကော’’တိ ဒဿနတော ‘‘အဟုဝါသိ’’န္တိ ဣစ္စေဝတ္ထော. တထာ ဟိ အနေကဝဏ္ဏဝိမာနဝတ္ထုအဋ္ဌကထာယံ ဣမိဿာ ပါဠိယာ အတ္ထံ ဝဏ္ဏေန္တေဟိ အဟုဝါသိန္တိ အဟောသိန္တိ အတ္ထော ပကာသိတော. येथे “अहं केवट्टगामस्मिं, अहुं केवट्टदारको” (मी केवर्तगामात कोळ्याचा मुलगा होतो) या प्रयोगावरून ‘अहुं’ असे म्हटले आहे, ज्याचा अर्थ ‘अहोसिं’ (होतो) असा आहे. “अहं भदन्ते अहुवासिं पुब्बे सुमेधनामस्स जिनस्स सावको” (भदन्त, मी पूर्वी सुमेध नावाच्या जिनांच्या [बुद्धांच्या] श्रावक होतो) या प्रयोगावरून ‘अहुवासिं’ असाच अर्थ आहे. तसेच अनेकवर्णविमानवस्तूच्या अट्टकथेत या पाळीचा अर्थ स्पष्ट करताना ‘अहुवासिं’ म्हणजे ‘अहोसिं’ (होतो) असा अर्थ प्रकट केला आहे. ‘‘ဟေဿတိ, ဟေဟိဿတိ, ဟေဟိတိ, ဟောဟိတီ’’တိ ဣမာနိ စတ္တာရိ ဘဝိဿန္တိယာ မာတိကာပဒါနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. ‘हेस्सति’, ‘हेहिस्सति’, ‘हेहिति’, ‘होहिति’ ही चार भविष्यकाळाची (भविस्सन्ती) मूळ पदे समजावीत. ဣဒါနိ တာနိ ဝိဘဇိဿာမိ – ဟေဿာတိ, ဟေဿန္တိ. ဟေဿသိ, ဟေဿထ. ဟေဿာမိ, ဟေဿာမ. ဟေဿတေ, ဟေဿန္တေ. ဟေဿသေ, ဟေဿဝှေ. ဟေဿံ, ဟေဿာမှေ. ဣမာနိ ‘‘အနာဂတမှိ အဒ္ဓါနေ, ဟေဿာမ သမ္မုခါ ဣမ’’န္တိ ဒဿနတော ဝုတ္တာနိ. आता मी त्यांचे वर्गीकरण करतो – ‘हेस्सति’, ‘हेस्सन्ति’. ‘हेस्ससि’, ‘हेस्सथ’. ‘हेस्सामि’, ‘हेस्साम’. ‘हेस्सते’, ‘हेस्सन्ते’. ‘हेस्ससे’, ‘हेस्सव्हे’. ‘हेस्सं’, ‘हेस्साम्हे’. ही रूपे “अनागतम्हि अद्धाने, हेस्साम सम्मुखा इमं” (भविष्यात आम्ही याच्या समोर असू) या प्रयोगावरून सांगितली आहेत. ဟေဟိဿတိ, ဟေဟိဿန္တိ. ဟေဟိဿသိ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ‘हेहिस्सति’, ‘हेहिस्सन्ति’. ‘हेहिस्ससि’. उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ဟောဟိဿတိ, ဟောဟိဿန္တိ. ဟောဟိဿသိ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ‘होहिस्सति’, ‘होहिस्सन्ति’. ‘होहिस्ससि’. उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ဟေဟိတိ, ဟေဟိန္တိ. ဟေဟိသိ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ‘हेहिति’, ‘हेहिन्ति’. ‘हेहिसि’. उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ဟောဟိတိ, ဟောဟိန္တိ. ဟောဟိသိ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဘဝိဿန္တိယာ ရူပါနိ. ‘होहिति’, ‘होहिन्ति’. ‘होहिसि’. उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ही भविष्यकाळाची रूपे आहेत. အဟုဝိဿာ, အဟုဝိဿံသု. အဟုဝိဿသေ, အဟုဝိဿထ. အဟုဝိဿံ, အဟုဝိဿမှာ. အဟုဝိဿထ, အဟုဝိဿိသု. အဟုဝိဿသေ[Pg.194], အဟုဝိဿဝှေ. အဟုဝိဿိံ, အဟုဝိဿာမှသေ. ကာလာတိပတ္တိရူပါနိ. ‘अहुविस्सा’, ‘अहुविस्संसु’. ‘अहुविस्ससे’, ‘अहुविस्सथ’. ‘अहुविस्सं’, ‘अहुविस्सम्हा’. ‘अहुविस्सथ’, ‘अहुविस्सिसु’. ‘अहुविस्ससे’, ‘अहुविस्सव्हे’. ‘अहुविस्सिं’, ‘अहुविस्साम्हसे’. ही कालातिपत्ती (अतिभूतकाळाची/संकेतार्थाची) रूपे आहेत. ဝှေ အဝှာယနေ ဗဒ္ဓါယံ သဒ္ဒေ စ. အဝှာယနံ ပက္ကောသနံ. ဗဒ္ဓါတိ အဟင်္ကာရော, ဃဋ္ဋနံ ဝါ သာရမ္ဘကရဏံ ဝါ. သဒ္ဒေါ ရဝေါ. ဝှေတိ, ဝှာယတိ, အဝှေတိ, အဝှာယတိ, အဝှာသိ ဣစ္စပိ. ကစ္စာယနော မာဏဝကောသ္မိ ရာဇ, အနူနနာမော ဣတိ မဝှယန္တိ. အာသဒ္ဒေါ ဥပသဂ္ဂေါဝ, သော သညောဂပရတ္တာ ရဿော ဇာတော. အဝှိတော. အနဝှိတော တတော အာဂါ. အဝှာ, အဝှာယနာ. ဝါရဏဝှယနာ ရုက္ခာ. ကာမဝှေ ဝိသယေ. ကုမာရော စန္ဒသဝှယော. ‘व्हे’ (धातू) बोलावणे (अव्हायन), अहंकार/संघर्ष (बद्धा) आणि आवाज (सद्द) या अर्थात आहे. ‘अव्हायन’ म्हणजे बोलावणे (पक्कोसन). ‘बद्धा’ म्हणजे अहंकार किंवा संघर्ष किंवा स्पर्धा करणे. ‘सद्द’ म्हणजे आवाज (रव). ‘व्हेति’, ‘व्हायाति’, ‘अव्हेति’, ‘अव्हायाति’, ‘अव्हासि’ इत्यादी. “कच्चायनो माणवकोस्मि राज, अनूननामो इति मव्हयन्ति” (हे राजा, मी कच्चायन नावाचा तरुण आहे, मला या नावाने बोलावतात). ‘आ’ शब्द हा उपसर्गच आहे, तो संयोगाच्या नंतर असल्यामुळे र्हस्व झाला आहे. ‘अव्हितो’. ‘अनव्हितो ततो आगा’ (न बोलावता तेथून आला). ‘अव्हा’, ‘अव्हायना’. ‘वारणव्हयना रुक्खा’ (वारण नावाचे वृक्ष). ‘कामव्हे विसये’ (काम नावाच्या विषयात). ‘कुमारो चन्दसव्हयो’ (चंद्र नावाचा कुमार). ‘‘သတ္တတန္တိံ သုမဓုရံ,ရာမဏေယျံ အဝါစယိံ; သော မံ ရင်္ဂမှိ အဝှေတိ,သရဏံ မေ ဟောဟိ ကောသိယာ’’တိ. “सत्तर तारांची अत्यंत मधुर आणि रमणीय वीणा मी वाजवली; तो मला रंगमंचावर आव्हान देतो (अव्हेति), हे कोसीय, तू माझे शरण हो.” ဧတ္ထ အဝှေတီတိ သာရမ္ဘဝသေန အတ္တနော ဝိသယံ ဒဿေတုံ သံဃဋ္ဋတီတိ အတ္ထော. ‘‘သမာဂတေ ဧကသတံ သမဂ္ဂေ, အဝှေတ္ထ ယက္ခော အဝိကမ္ပမာနော’’တိ ဧတ္ထာပိ သာရမ္ဘဝသေန ဃဋ္ဋနံ အဝှာယနံ နာမ. येथे ‘अव्हेति’ म्हणजे स्पर्धेच्या भावनेने स्वतःचा विषय दर्शवण्यासाठी संघर्ष करतो असा अर्थ आहे. “समागते एकसतं समग्गे, अव्हेत्थ यक्खो अविकम्पमानो” (एकत्र आलेल्या एकशे एक जणांमध्ये, तो यक्ष न डगमगता आव्हान देत होता) येथेही स्पर्धेच्या भावनेने संघर्ष करणे यालाच ‘अव्हायन’ म्हटले आहे. ‘‘တတ္ထ နစ္စန္တိ ဂါယန္တိ, အဝှာယန္တိ ဝရာဝရံ; အစ္ဆရာ ဝိယ ဒေဝေသု, နာရိယော သမလင်္ကတာ’’တိ “तेथे सुशोभित झालेल्या स्त्रिया, देवांमध्ये अप्सरांप्रमाणे, नाचतात, गातात आणि एकमेकींना बोलावतात.” ဧတ္ထ ပန အဝှာယန္တိ ဝရာဝရန္တိ ဝရတော ဝရံ နစ္စဉ္စ ဂီတဉ္စ ကရောန္တိယော သာရမ္ဘံ ကရောန္တီတိ အတ္ထော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. येथे 'अव्हायन्ति वरावरं' (avhāyanti varāvaraṃ) याचा अर्थ असा समजावा की, एकापेक्षा एक सरस नृत्य आणि गायन करत त्या स्पर्धा (किंवा उत्साह) निर्माण करतात. ပဉှ ပုစ္ဆာယံ. ဘိက္ခု ဂရုံ ပဉှံ ပဉှတိ. ပဉှော. အယံ ပန ပါဠိ ‘‘ပရိပုစ္ဆတိ ပရိပဉှတိ ဣဒံ ဘန္တေ ကထံ ဣမဿ ကော အတ္ထော’’တိ. ပဉှသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂဝသေန ဂဟေတဗ္ဗော. ‘‘ပဉှော မံ [Pg.195] ပဋိဘာတိ, တံ သုဏာ’’တိ ယေဘုယျေန ပုလ္လိင်္ဂပ္ပယောဂဒဿနတော. ကတ္ထစိ ပန ဣတ္ထိလိင်္ဂေါပိ ဘဝတိ နပုံသကလိင်္ဂေါပိ. တထာ ဟိ ‘‘ပဉှာ မေသာ ကုသလေဟိ စိန္တိတာ. ကောဏ္ဍည ပဉှာနိ ဝိယာကရောဟီ’’တိ တဒ္ဒီပိကာ ပါဠိယော ဒိဿန္တိ, လိင်္ဂဝိပလ္လာသော ဝါ တတ္ထ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. 'पञ्ह' (pañha) हा धातू विचारण्याच्या अर्थात आहे. भिक्खू गंभीर प्रश्न विचारतात. 'पञ्हो' (प्रश्न). ही पाळी (मूळ पाठ) अशी आहे: 'भन्ते, हे कसे? याचा काय अर्थ आहे?' असे विचारतात, उलटून विचारतात. 'पञ्ह' हा शब्द पुल्लिंगी मानला पाहिजे, कारण 'पञ्हो मं पटिभाति, तं सुणा' (मला प्रश्न सुचत आहे, तो ऐका) यावरून बहुतांश पुल्लिंगी प्रयोग दिसून येतात. परंतु काही ठिकाणी तो स्त्रीलिंगी किंवा नपुंसकलिंगी देखील होतो. जसे की, 'पञ्हा मेसा कुसलेहि चिन्तिता' (हा प्रश्न कुशल लोकांनी विचार केला आहे) आणि 'कोण्डञ्ञ पञ्हानि वियाकरोहि' (हे कोंडण्य, प्रश्नांचे स्पष्टीकरण करा) असे स्पष्ट करणारे पाळी पाठ आढळतात, किंवा तेथे लिंगविपर्यास (लिंगाचा बदल) समजावा. ပဉှ ဣစ္ဆာယံ. ပဉှတိ. ပဉှော. ဧတ္ထ စ ပဉှောတိ ဉာတုံ ဣစ္ဆိတော အတ္ထော. ဣဒံ ပနေတ္ထ နိဗ္ဗစနံ ပဉှိယတိ ဉာတုံ ဣစ္ဆိယတိ သောတိ ပဉှောတိ. တထာ ဟိ ဝုတ္တံ ‘‘ဝိဿဇ္ဇိတမှိ ပဉှေ’’တိ ဣမိဿာ နေတ္တိပါဠိယာ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏေန္တေန ‘‘ပဉှေတိ ဉာတုံ ဣစ္ဆိတေ အတ္ထေ’’တိ. 'पञ्ह' (pañha) हा धातू इच्छेच्या अर्थात आहे. पञ्हति, पञ्हो. आणि येथे 'पञ्हो' म्हणजे जाणण्याची इच्छा असलेला अर्थ. याची व्युत्पत्ती अशी आहे: 'पञ्हियति' म्हणजे ज्याची जाणण्याची इच्छा केली जाते, तो 'पञ्हो' (प्रश्न). तसेच 'विस्सज्जितम्हि पञ्हे' (प्रश्नाचे उत्तर दिले असता) या नेत्तिपाळीच्या अर्थाचे स्पष्टीकरण करताना म्हटले आहे: 'पञ्ह' म्हणजे जाणण्याची इच्छा असलेला अर्थ. မိဟ သေစနေ. မိဟတိ, ဥမ္မိဟတိ. မေဃော, မေဟနံ. 'मिह' (miha) हा धातू सिंचन करण्याच्या (किंवा मूत्रविसर्जन करण्याच्या) अर्थात आहे. मिहति, उम्मिहति. मेघो (ढग), मेहनं. တတ္ထ ဥမ္မိဟတီတိ ပဿာဝံ ကရောတိ. မေဃောတိ မိဟတိ သိဉ္စတိ လောကံ ဝဿဓာရာဟီတိ မေဃော, ပဇ္ဇုန္နော. မေဟနန္တိ ဣတ္ထီနံ ဂုယှဋ္ဌာနံ. तेथे 'उम्मिहति' म्हणजे लघवी करणे. 'मेघो' म्हणजे जो पावसाच्या धारांनी जगाचे सिंचन करतो तो मेघ (ढग), पर्जन्य. 'मेहनं' म्हणजे स्त्रियांचे गुह्यस्थान. ဒဟ ဘသ္မီကရဏေ ဓာရဏေ စ. အာဂါရာနိ အဂ္ဂိ ဒဟတိ. အယံ ပုရိသော ဣမံ ဣတ္ထိံ အယျိကံ ဒဟတိ, မမ အယျိကာတိ ဓာရေတီတိ အတ္ထော. ဣမဿ ပုရိသဿ အယံ ဣတ္ထီ အယျိကာ ဟောတီတိ အဓိပ္ပာယော. အတြ ပနာယံ ပါဠိ ‘‘သကျာ ခေါ အမ္ဗဋ္ဌ ရာဇာနံ ဥက္ကာကံ ပိတာမဟံ ဒဟန္တီ’’တိ. အဂ္ဂိနာ ဒဍ္ဎံ ဂေဟံ, ဒယှတိ, ဒယှမာနံ. ဒဿ ဍာဒေသေ ‘‘ဍဟတီ’’တိ ရူပံ. ‘‘ဍဟန္တံ ဗာလမနွေတိ, ဘသ္မာဆန္နောဝ ပါဝကော’’တိအာဒယော ပယောဂါ ဧတ္ထ နိဒဿနာနိ ဘဝန္တိ. 'दह' (daha) हा धातू भस्म करण्याच्या (जाळण्याच्या) आणि धारण करण्याच्या अर्थात आहे. अग्नी घरांना जाळतो. 'हा पुरुष या स्त्रीला आजी मानतो', म्हणजे 'माझी आजी' म्हणून धारण करतो, असा अर्थ आहे. या पुरुषाची ही स्त्री आजी आहे, असा अभिप्राय आहे. येथे ही पाळी (मूळ पाठ) आहे: 'हे अंबठ्ठ, शाक्य राजे उक्काक राजाला आपले आजोबा मानतात (दहन्ति).' अग्नीने जळलेले घर, जळते, जळणारे. 'द' च्या जागी 'ड' आदेश होऊन 'डहति' (ḍahati) असे रूप बनते. 'राखेने झाकलेल्या अग्नीप्रमाणे, जळणारा (अग्नी) मूर्खाच्या पाठीमागे लागतो' इत्यादी प्रयोग येथे उदाहरणे आहेत. စဟ ပရိသက္ကနေ. စဟတိ. 'चह' (caha) हा धातू फिरण्याच्या (किंवा प्रयत्न करण्याच्या) अर्थात आहे. चहति. ရဟ စာဂေ. ရဟတိ. ရဟော, ရဟိတော. 'रह' (raha) हा धातू त्यागाच्या अर्थात आहे. रहति. रहो (एकांत/गुप्त), रहितो (रहित). ရဟိ ဂတိယံ. ရဟတိ. ရဟော, ရဟံ. 'रहि' (rahi) हा धातू गतीच्या अर्थात आहे. रहति. रहो, रहं. ဒဟိ [Pg.196] ဗဟိ ဝုဒ္ဓိယံ. ဒဟတိ. ဗဟတိ. 'दहि' (dahi) आणि 'बहि' (bahi) हे धातू वृद्धीच्या (वाढण्याच्या) अर्थात आहेत. दहति, बहति. ဗဟိ သဒ္ဓေ စ. စကာရော ဝုဒ္ဓါပေက္ခော. ဗဟတိ. 'बहि' (bahi) हा धातू श्रद्धेच्या अर्थातही आहे. 'च' कार हा वृद्धीच्या अपेक्षेने आहे. बहति. တုဟိ ဒုဟိ အဒ္ဒနေ. တုဟတိ. ဒုဟတိ. 'तुहि' (tuhi) आणि 'दुहि' (duhi) हे धातू पीडा देण्याच्या (किंवा प्रवासाच्या) अर्थात आहेत. तुहति, दुहति. အရဟ မဟ ပူဇာယံ. အရဟတိ. အရဟံ, အရဟာ. မဟတိ. 'अरह' (araha) आणि 'मह' (maha) हे धातू पूजेच्या (आदर करण्याच्या) अर्थात आहेत. अरहति. अरहं, अरहा (अर्हत). महति. မဟနံ, မဟော. ဝိဟာရမဟော. စေတိယမဟော. महनं, महो (उत्सव/पूजा). विहारमहो (विहार उत्सव), चेतियमहो (चैत्य उत्सव). တတြ နိက္ကိလေသတ္တာ ဧကန္တဒက္ခိဏေယျဘာဝေန အတ္တနော ကတပူဇာသက္ကာရာဒီနံ မဟပ္ဖလဘာဝကရဏေန အရဟဏီယော ပူဇနီယောတိ အရဟာ, ခီဏာသဝေါ. तेथे निष्क्लेश (क्लेशरहित) असल्यामुळे, अत्यंत दक्षिणेय (दान देण्यास योग्य) भावाने, स्वतःला केलेल्या पूजा-सत्कारादींना महाफलदायी बनवणारे असल्यामुळे, जे आदरणीय आणि पूजनीय आहेत, ते 'अरहा' (अर्हत), म्हणजेच क्षीणासव (ज्यांचे आसव नष्ट झाले आहेत असे) होत. ဤဟ စေတာယံ. ဤဟတိ. ဤဟာ. ဤဟာ ဝုစ္စတိ ဝီရိယံ. 'ईह' (īha) हा धातू चेष्टा किंवा प्रयत्नाच्या अर्थात आहे. ईहति. ईहा. ईहा म्हणजे वीर्य (प्रयत्न) म्हटले जाते. ဝဟ မဟ ဗုဒ္ဓိယံ. ဝဟတိ, မဟတိ. 'वह' (vaha) आणि 'मह' (maha) हे धातू बुद्धीच्या (जाणण्याच्या) अर्थात आहेत. वहति, महति. အဟိ ပိလဟိ ဂတိယံ. အဟတိ. ပိလဟတိ, အဟိ. 'अहि' (ahi) आणि 'पिलहि' (pilahi) हे धातू गतीच्या अर्थात आहेत. अहति. पिलहति, अहि. ဧတ္ထ စ အဟီတိ နိပ္ပာဒေါပိ သမာနော အဟတိ ဂစ္ဆတိ ဂန္တုံ သက္ကောတီတိ အဟိ. आणि येथे 'अहि' हा शब्द निष्पन्न झाला तरी, जो 'अहति' म्हणजे जातो, जाण्यास समर्थ असतो, तो 'अहि' (सर्प) होय. ဂရဟ ကလဟ ကုစ္ဆနေ. ဂရဟတိ. ဂရဟာ, ကလဟတိ, ကလဟော. 'गरह' (garaha) आणि 'कलह' (kalaha) हे धातू निंदेच्या अर्थात आहेत. गरहति. गरहा (निंदा), कलहति, कलहो (भांडण). ဝရဟ ဝလဟ ပဓာနိယေ ပရိဘာသနဟိံသာဒါနေသု စ. ဝရဟတိ. ဝလဟတိ. ဝရာဟော. 'वरह' (varaha) आणि 'वलह' (valaha) हे धातू श्रेष्ठत्व, निंदा, हिंसा आणि ग्रहण करण्याच्या अर्थात आहेत. वरहति. वलहति. वराहो. ဧတ္ထ စ ဝရာဟောတိ သူကရောပိ ဟတ္ထီပိ ဝုစ္စတိ. တထာ ဟိ ‘‘ဧနေယျာ စ ဝရာဟာ စ. မဟာဝရာဟောဝ နိဝါပပုဋ္ဌော’’တိအာဒီသု သူကရော ‘‘ဝရာဟော’’တိ နာမေန ဝုစ္စတိ. ‘‘မဟာဝရာဟဿ နဒီသု ဇဂ္ဂတော, ဘိသံ ဃသမာနဿာ’’တိအာဒီသု ပန ဟတ္ထီ ‘‘ဝရာဟော’’တိ နာမေန ဝုစ္စတိ. မဟာဝရာဟဿာတိ ဟိ မဟာဟတ္ထိနောတိ အတ္ထော. आणि येथे 'वराहो' म्हणजे डुकरालाही (सूकर) आणि हत्तीलाही म्हटले जाते. जसे की, 'एनेय्या च वराहा च' (हरणे आणि डुकरे) आणि 'महावराहोव निवापपुट्ठो' (चांगले खायला घालून पुष्ट केलेल्या मोठ्या डुकराप्रमाणे) इत्यादींमध्ये डुकराला 'वराहो' या नावाने संबोधले आहे. परंतु 'महावराहास्य नदीसु जग्गतो, भिसं घसमानस्स' (नद्यांमध्ये फिरणाऱ्या आणि कमळाचे कंद खाणाऱ्या महावराहाचा...) इत्यादींमध्ये हत्तीला 'वराहो' या नावाने संबोधले आहे. कारण 'महावराहाचा' याचा अर्थ 'मोठ्या हत्तीचा' असा आहे. ဝေဟု ဇေဟု ဝါဟု ပယတနေ. ဝေဟတိ, ဇေဟတိ. ဝါဟတိ. ဝါဟနော. 'वेहु' (vehu), 'जेहु' (jehu) आणि 'वाहु' (vāhu) हे धातू प्रयत्नाच्या अर्थात आहेत. वेहति, जेहति. वाहति. वाहनो. ဝါဟနော [Pg.197] ဝုစ္စတိ အဿော. သော ဟိ ဝါဟန္တိ သင်္ဂါမာဒီသု ကိစ္စေ ဥပ္ပန္နေ ပယတန္တိ ဝီရိယံ ကရောန္တိ, ဧတေနာတိ ဝါဟနောတိ ဝုစ္စတိ. 'वाहनो' म्हणजे घोडा म्हटला जातो. कारण तो वाहून नेतो, युद्धादी कार्ये उद्भवली असता प्रयत्न करतो, पराक्रम करतो, म्हणून त्याला 'वाहन' असे म्हणतात. ဒါဟု နိဒ္ဒက္ခယေ. ဒါဟတိ. 'दाहु' (dāhu) हा धातू निद्रेचा क्षय करण्याच्या (जागे होण्याच्या) अर्थात आहे. दाहति. ဦဟ ဝိတက္ကေ. ဦဟတိ, အာယူဟတိ, ဝိယူဟတိ, ဗျူဟတိ အပေါဟတိ. ဦဟနံ, အာယူဟနံ, ဗျူဟော, အပေါဟော. 'ऊह' (ūha) हा धातू वितर्काच्या (विचाराच्या) अर्थात आहे. ऊहति, आयूहति, वियूहति, ब्यूहति, अपोहति. ऊहनं, आयूहनं, ब्यूहो, अपोहो. တတ္ထ ဦဟတီတိ ဝိတက္ကေတိ, အာယူဟတီတိ ဝါယမတိ, ဝိယူဟတီတိ ပံသုံ ဥဒ္ဓရတိ. ဧဝံ ဗျူဟတီတိ ဧတ္ထာပိ. အပေါဟတီတိ ဆဍ္ဍေတိ, အထ ဝါ ဝိဝေစေတိ. तेथे 'ऊहति' म्हणजे वितर्क (विचार) करतो, 'आयूहति' म्हणजे प्रयत्न करतो, 'वियूहति' म्हणजे माती उपसतो. याचप्रमाणे 'ब्यूहति' यातही समजावे. 'अपोहति' म्हणजे टाकून देतो किंवा विवेक (पृथक्करण) करतो. ဂါဟု ဝိလောဠနေ. ဂါဟတိ. ဂါဟော, စန္ဒဂ္ဂါဟော, သူရိယဂ္ဂါဟော, နက္ခတ္တဂ္ဂါဟော. 'गाहु' (gāhu) हा धातू घुसळण्याच्या (किंवा ढवळण्याच्या) अर्थात आहे. गाहति. गाहो, चन्दग्गाहो (चंद्रग्रहण), सूरियग्गाहो (सूर्यग्रहण), नक्खत्तग्गाहो (नक्षत्रग्रहण). ဂဟ ဂဟဏေ. ဂဟတိ, ပဂ္ဂဟတိ. အာဟုတိံပဂ္ဂဟိဿာမိ. ပဂ္ဂဟော, ပဂ္ဂါဟော. 'गह' (gaha) हा धातू ग्रहण करण्याच्या अर्थात आहे. गहति, पग्गहति. 'आहुतिं पग्गहिस्सामि' (मी आहुती ग्रहण करीन/अर्पण करीन). पग्गहो, पग्गाहो. ပဂ္ဂဟောတိ ပတ္တော. ပဂ္ဂါဟောတိ ဝီရိယံ. 'पग्गहो' म्हणजे पात्र (भिक्षापात्र). 'पग्गाहो' म्हणजे वीर्य (प्रयत्न). သဟ ပရိသဟနေ. ပရိသဟနံ ခန္တိ. သဟတိ. သဟော, အသဟော, အသယှော. 'सह' (saha) हा धातू सहन करण्याच्या अर्थात आहे. सहन करणे म्हणजे क्षंती (क्षमा/सहनशीलता). सहति. सहो, असहो, असय्हो (असह्य). ရုဟ စမ္မနိ ပါတုဘာဝေ. ရုဟတိ. ရုက္ခော. 'रुह' (ruha) हा धातू प्रगट होण्याच्या (किंवा वाढण्याच्या) अर्थात आहे. रुहति. रुक्खो (वृक्ष). မာတု မာနေ. မာဟတိ. 'मातु' (mātu) हा धातू मोजण्याच्या (किंवा मानाच्या) अर्थात आहे. माहति. ဂုဟူ သံဝရဏေ. ဂုဟတိ နိဂ္ဂုဟတိ. ဂုဟော, ဂုယှကော. 'गुहू' (guhū) हा धातू झाकण्याच्या (गुप्त ठेवण्याच्या) अर्थात आहे. गुहति, निग्गुहति. गुहो (गुहा), गुय्हको. ဝဟ ပါပုဏေ. ဝဟတိ. ဝါရိဝဟော. 'वह' (vaha) हा धातू पोहोचवण्याच्या (किंवा वाहून नेण्याच्या) अर्थात आहे. वहति. वारिवहो (जलप्रवाह). ဒုဟ ပပူရဏေ. ဒုဟတိ, ဒေါဟတိ. ဒုယှမာနာ ဂါဝီ. 'दुह' (duha) हा धातू पूर्ण भरण्याच्या (किंवा दूध काढण्याच्या) अर्थात आहे. दुहति, दोहति. दुय्हमाना गावी (दूध काढली जाणारी गाय). ဒိဟ ဥပစယေ. ဒေဟတိ. ဒေဟော. ဒေဟောတိ သရီရံ. 'दिह' (diha) हा धातू उपचय (वाढ किंवा संचय) करण्याच्या अर्थात आहे. देहति. देहो. देहो म्हणजे शरीर. လိဟ [Pg.198] အဿာဒနေ. လေဟတိ, ပလေဟတိ. လေဟနီယံ. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘သုနခါ ဟိမဿ ပလိဟိံသု ပါဒေ’’တိ. အယံ ပနတ္ထော – သုနခါ ဣမဿ ကုမာရဿ ပါဒတလေ အတ္တနော ဇိဝှာယ ပလိဟိံသူတိ. 'लिह' (liha) हा धातू आस्वाद घेण्याच्या (चाटण्याच्या) अर्थात आहे. लेहति, पलेहति. लेहनीयं (चाटण्यायोग्य). येथे ही पाळी (मूळ पाठ) आहे: 'सुनखा हिंस्स पलिहिंसु पादे' (कुत्र्यांनी याच्या पायांना चाटले). याचा अर्थ असा आहे - कुत्र्यांनी या कुमाराच्या तळपायांना आपल्या जिभेने चाटले. ဩဟ စာဂေ. ဩဟတိ. သဗ္ဗမနတ္ထံ အပေါဟတိ. အပေါဟော. 'ओह' (oha) हा धातू त्यागाच्या अर्थात आहे. ओहति. 'सब्बमनत्थं अपोहति' (सर्व अनर्थ दूर करतो). अपोहो. ဗြဟ္မ ဥဂ္ဂမေ. ဗြဟတိ. ဗြဟာ. ‘ब्रह्’ धातू उगवणे (वाढणे) या अर्थात आहे. ब्रहति. ब्रहा. ဒဟ ထဟ ဟိံသတ္ထာ. ဒဟတိ. ထဟတိ. ‘दह्’ आणि ‘थह्’ धातू हिंसेच्या अर्थात आहेत. दहति. थहति. ဗြူဟ ဝဍ္ဎနေ. ဥပရူပရိ ဗြူဟတီတိ ဗြဟ္မာ. ကာရိတေ ‘‘ဝိဝေကမနုဗြူဟေတုံ ဝဋ္ဋတီ’’တိ ပယောဂေါ. ‘ब्रूह्’ धातू वाढण्याच्या अर्थात आहे. जो उत्तरोत्तर वाढतो तो ‘ब्रह्मा’. प्रयोजक रूपात (कारिते) “विवेकमनुब्रूहेतुं वट्टति” (विवेकाची वृद्धी करणे योग्य आहे) असा प्रयोग होतो. ဗြဟ္မာတိ တေဟိ တေဟိ ဂုဏဝိသေသေဟိ ဗြူဟိတောတိ ဗြဟ္မာ. ဗြဟ္မာတိ မဟာဗြဟ္မာပိ ဝုစ္စတိ တထာဂတောပိ ဗြာဟ္မဏောပိ မာတာပိတရောပိ သေဋ္ဌမ္ပိ. ‘‘သဟဿော ဗြဟ္မာ ဒွိသဟဿော ဗြဟ္မာ’’တိအာဒီသု ဟိ မဟာဗြဟ္မာ ‘‘ဗြဟ္မာ’’တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဗြဟ္မာတိ ခေါ ဘိက္ခဝေ တထာဂတဿေတံ အဓိဝစန’’န္တိ ဧတ္ထ တထာဂတော. ‘ब्रह्मा’ म्हणजे त्या त्या विशिष्ट गुणांनी जो वृद्धिंगत झाला आहे तो ब्रह्मा होय. ‘ब्रह्मा’ असे महाब्रह्मा, तथागत, ब्राह्मण, माता-पिता आणि श्रेष्ठ यांनाही म्हटले जाते. “सहस्सो ब्रह्मा द्विसहस्सो ब्रह्मा” इत्यादींमध्ये महाब्रह्माला ‘ब्रह्मा’ म्हटले आहे. “ब्रह्माति खो भिक्खवे तथागतस्सेतं अधिवचनं” (हे भिक्खूंनो, ‘ब्रह्मा’ हे तथागतांचेच नाव आहे) येथे तथागतांना (ब्रह्मा म्हटले आहे). ‘‘တမောနုဒေါ ဗုဒ္ဓေါ သမန္တစက္ခု,လောကန္တဂူ သဗ္ဗဘဝါတိဝတ္တော; အနာသဝေါ သဗ္ဗဒုက္ခပ္ပဟီနော,သစ္စဝှယော ဗြဟ္မေ ဥပါသိတော မေ’’တိ “अंधकार दूर करणारे, समंतचक्षू (सर्वदर्शी) बुद्ध, लोकांतगू (लोकाच्या अंतापर्यंत गेलेले), सर्व भावांचे (अस्तित्वांचे) अतिक्रमण केलेले, अनासव (आसवरहित), सर्व दुःखांचा त्याग केलेले, सत्य नावाचे ब्रह्मा (श्रेष्ठ) माझ्याकडून पूजिले गेले आहेत.” ဧတ္ထ ဗြာဟ္မဏော. ‘‘ဗြဟ္မာတိ မာတာပိတရော, ပုဗ္ဗာစရိယာတိ ဝုစ္စရေ’’တိ ဧတ္ထ မာတာပိတရော. ‘‘ဗြဟ္မစက္ကံ ပဝတ္တေတီ’’တိ ဧတ္ထ သေဋ္ဌံ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – येथे ब्राह्मण (श्रेष्ठ पुरुष). “ब्रह्माति मातापितरो, पुब्बाचरियाति वुच्चरे” (माता-पिता हे ब्रह्मा आहेत, त्यांना पूर्व आचार्य म्हटले जाते) येथे माता-पिता. “ब्रह्मचक्कं पवत्तेति” (ब्रह्मचक्र प्रवर्तित करतात) येथे श्रेष्ठ. याविषयी असे म्हटले आहे – ‘‘မဟာဗြဟ္မနိ [Pg.199] ဝိပ္ပေ စ, အထော မာတာပိတူသု စ; တထာဂတေ စ သေဋ္ဌေ စ, ဗြဟ္မသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတီ’’တိ. “महाब्रह्मा, विप्र (ब्राह्मण), तसेच माता-पिता, तथागत आणि श्रेष्ठ यांच्यासाठी ‘ब्रह्म’ हा शब्द वापरला जातो.” အပရော နယော – ဗြဟ္မာတိ တိဝိဓာ ဗြဟ္မာနော သမ္မုတိဗြဟ္မာနော ဥပပတ္တိဗြဟ္မာနော ဝိသုဒ္ဓိဗြဟ္မာနောတိ. दुसरा प्रकार असा – ब्रह्मा तीन प्रकारचे असतात: संमुति-ब्रह्मा (लोकमान्य ब्रह्मा), उपपत्ति-ब्रह्मा (उत्पत्तीने झालेले ब्रह्मा) आणि विशुद्धि-ब्रह्मा (विशुद्धीने झालेले ब्रह्मा). ‘‘သမ္ပန္နံ သာလိကေဒါရံ, သုဝါ ဘုဉ္ဇန္တိ ကောသိယ; ပဋိဝေဒေမိ တေ ဗြဟ္မေ, န နေ ဝါရေတုမုဿဟေ,ပရိဗ္ဗဇ မဟာဗြဟ္မေ, ပစန္တညေပိ ပါဏိနော’’တိ စ “हे कोसिय! शालीचे (तांदळाचे) शेत पिकले आहे, पोपट ते खात आहेत; हे ब्रह्मा! मी तुला कळवतो, मी त्यांना रोखू शकत नाही. हे महाब्रह्मा! निघून जा, इतर प्राणीही शिजवून खात आहेत.” ဧဝမာဒီသု ဟိ ဗြဟ္မသဒ္ဒေန သမ္မုတိဗြဟ္မာနော ဝုတ္တာ. अशा इत्यादी वाक्यांमध्ये ‘ब्रह्म’ शब्दाने संमुति-ब्रह्मा (लोकमान्य ब्रह्मा) सांगितले गेले आहेत. ‘‘အပါရုတာ တေသံ အမတဿ ဒွါရာ,ယေ သောတဝန္တော ပမုဉ္စန္တု သဒ္ဓံ; ဝိဟိံသသညီ ပဂုဏံ န ဘာသိံ,ဓမ္မံ ပဏီတံ မနုဇေသု ဗြဟ္မေ, “त्यांच्यासाठी अमृताचे (निर्वाणाचे) दरवाजे उघडे आहेत, ज्यांना कान आहेत त्यांनी आपली श्रद्धा प्रकट करावी. हे ब्रह्मा! त्रासाच्या भीतीने मी मानवांमध्ये या उत्तम आणि सुस्पष्ट धम्माचा उपदेश केला नव्हता.” အထ ခေါ ဗြဟ္မာ သဟမ္ပတီ’’တိ စ ဧဝမာဒီသု ဗြဟ္မသဒ္ဒေန ဥပပတ္တိဗြဟ္မာ. ‘‘ဗြဟ္မစက္ကံ ပဝတ္တေတီ’’တိအာဒိဝစနတော ဗြဟ္မန္တိ အရိယဓမ္မော ဝုစ္စတိ. တတော နိဗ္ဗတ္တာ အဝိသေသေန သဗ္ဗေပိ အရိယာ ဝိသုဒ္ဓိဗြဟ္မာနော နာမ ပရမတ္ထဗြဟ္မတာယ. ဝိသေသတော ပန ‘‘ဗြဟ္မာတိ ခေါ ဘိက္ခဝေ တထာဂတဿေတံ အဓိဝစန’’န္တိ ဝစနတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဥတ္တမဗြဟ္မာ နာမ သဒေဝကေ လောကေ ဗြဟ္မဘူတေဟိ ဂုဏေဟိ ဥက္ကံသပါရမိပ္ပတ္တိတော. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – “त्यानंतर ब्रह्मा सहम्पती...” इत्यादी वाक्यांमध्ये ‘ब्रह्म’ शब्दाने उपपत्ति-ब्रह्मा अभिप्रेत आहे. “ब्रह्मचक्कं पवत्तेति” (ब्रह्मचक्र प्रवर्तित करतात) इत्यादी वचनांवरून ‘ब्रह्म’ म्हणजे आर्यधम्म म्हटला जातो. त्यापासून उत्पन्न झालेले सर्वच आर्य (अरिहंत) विनाभेद परमार्थ-ब्रह्मत्वामुळे ‘विशुद्धि-ब्रह्मा’ या नावाने ओळखले जातात. परंतु विशेषतः “ब्रह्माति खो भिक्खवे तथागतस्सेतं अधिवचनं” या वचनानुसार, सम्यक्संबुद्ध हे देवलोकासहित संपूर्ण जगात ब्रह्मरूप गुणांच्या उत्कृष्ट पारमितेप्रत पोहोचल्यामुळे ‘उत्तम-ब्रह्मा’ म्हणून ओळखले जातात. याविषयी असे म्हटले आहे – ‘‘သမ္မုတိယုပပတ္တီနံ, ဝိသုဒ္ဓီနံ ဝသေန စ; ဗြဟ္မာနော တိဝိဓာ ဟောန္တိ, ဥတ္တမေန စတုဗ္ဗိဓာ’’တိ. “संमुति (लोकमान्य), उपपत्ति (उत्पत्तीने झालेले) आणि विशुद्धि (विशुद्धीने झालेले) यांच्या भेदाने ब्रह्मा तीन प्रकारचे असतात; आणि उत्तम-ब्रह्मा मिळून ते चार प्रकारचे होतात.” ဓိမှ [Pg.200] နိဋ္ဌုဘနေ. ဓိမှေတိ. ‘‘ပဋိဝါမဂတံ သလ္လံ, ပဿ ဓိမှာမိ လောဟိတ’’န္တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. ‘धिम्ह्’ धातू थुंकण्याच्या (बाहेर टाकण्याच्या) अर्थात आहे. धिम्हेति. “उलट्या दिशेने गेलेला बाण पहा, मी रक्त थुंकत आहे (धिम्हामि लोहितं)” हे पालि उदाहरण आहे. တတ္ထ ဓိမှာမီတိ နိဋ္ဌုဘာမီတိ အတ္ထော. तेथे ‘धिम्हामि’ म्हणजे ‘निट्ठुभामि’ (मी थुंकतो) असा अर्थ आहे. ဟကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ह-कारान्त धातूंची रूपे. ဠကာရန္တဓာတု Ḷ अ-कारान्त धातू ဗိဠ အက္ကောသေ. ဗေဠတိ. ဗိဠာရော. ‘बिळ्’ धातू शिवीगाळ करणे (आक्रोश) या अर्थात आहे. बेळति. बिळारो (मांजर). ကီဠ ဝိဟာရေ. ကီဠတိ. ကီဠာ. ‘कीळ्’ धातू क्रीडा करणे (विहार) या अर्थात आहे. कीळति. कीळा (क्रीडा). အဠ ဥဂ္ဂမေ. အဠတိ. ဝါဠော. ‘अळ्’ धातू उगवणे (वाढणे) या अर्थात आहे. अळति. वाळो (हिंस्र श्वापद किंवा सर्प). လဠ ဝိလာသေ. လဠတိ. လဠိတော အဿော. ‘लळ्’ धातू विलास करणे या अर्थात आहे. लळति. लळितो अस्सो (विलास करणारा घोडा). ကဠ မဒေ ကက္ကဿေ စ. ကက္ကဿံ ကဿသိယံ ဖရုသဘာဝေါ. ကဠတိ. ‘कळ्’ धातू मद (मत्तता) आणि कर्कशता (कठोरता) या अर्थात आहे. कर्कशता म्हणजे कठोर भाव (परुसभाव). कळति. တုဠ တောဠနေ. တောဠတိ. ‘तुळ्’ धातू तोलणे (वजन करणे) या अर्थात आहे. तोळति. ဟုဠ ဟောဠ ဂတိယံ. ဟုဠတိ. ဟောဠတိ. ‘हुळ्’ आणि ‘होळ्’ धातू गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात आहेत. हुळति. होळति. ရောဠ အနာဒရေ. ရောဠတိ. ‘रोळ्’ धातू अनादर करणे या अर्थात आहे. रोळति. လောဠ ဥမ္မာဒေ. လောယတိ. ‘लोळ्’ धातू उन्माद (वेडेपणा) या अर्थात आहे. लोयति. ဟေဠ ဟောဠ အနာဒရေ. ဟေဠတိ. ဟောဠတိ. ‘हेळ्’ आणि ‘होळ्’ धातू अनादर करणे या अर्थात आहेत. हेळति. होळति. ဝါဠ အာလပေ. ဝါဠတိ. ‘वाळ्’ धातू बोलणे (आलाप करणे) या अर्थात आहे. वाळति. ဒါဠ ဓာဠ ဝိသရဏေ. ဒါဠတိ. ဓာဠတိ. ‘दाळ्’ आणि ‘धाळ्’ धातू पसरणे (विखुरणे) या अर्थात आहेत. दाळति. dhāळति. ဟဠ သိလာဃာယံ. ဟဠတိ. ‘हळ्’ धातू प्रशंसा करणे या अर्थात आहे. हळति. ဟီဠ အနာဒရေ. ဟီဠတိ. ဟီဠာ, ဟီဠိကော, ဟီဠိတော. ‘हीळ्’ धातू अनादर करणे या अर्थात आहे. हीळति. हीळा, हीळिको, हीळितो. ကဠ [Pg.201] သေစနေ. ကဠတိ. ကဠနံ. ‘कळ्’ धातू सिंचन करणे या अर्थात आहे. कळति. कळनं. ဟေဠ ဝေဌနေ. ဟေဠတိ. ‘हेळ्’ धातू वेढणे (वेष्टन करणे) या अर्थात आहे. हेळति. ဤဠ ထုတိယံ. ဤဠတိ. ‘ईळ्’ धातू स्तुती करणे या अर्थात आहे. ईळति. ဇုဠ ဂတိယံ. ဇုဠတိ, ဇောဠတိ. ‘जुळ्’ धातू गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात आहे. जुळति, जोळति. ပုဠ မုဠ သုခနေ. ပုဠတိ. မုဠတိ. ‘पुळ्’ आणि ‘मुळ्’ धातू सुखाच्या (आनंदाच्या) अर्थात आहेत. पुळति. मुळति. ဂုဠ ရက္ခာယံ. ဂုဠတိ. ဂုဠော. ‘गुळ्’ धातू रक्षण करणे या अर्थात आहे. गुळति. गुळो. ဇုဠ ဗန္ဓနေ. ဇုဠတိ. ‘जुळ्’ धातू बांधणे या अर्थात आहे. जुळति. ကုဠ ဃသနေ. ကုဠတိ. ‘कुळ्’ धातू घासणे (किंवा खाणे) या अर्थात आहे. कुळति. ခုဠ ဗာလျေ စ. စကာရော ဃသနာပေက္ခကော. ခုဠတိ. ‘खुळ्’ धातू बालपण आणि घासणे (खाणे) या अर्थात आहे. ‘च’ कार घासण्याच्या (खाण्याच्या) अपेक्षेने आहे. खुळति. သုဠ ဗုဠ သံဝရဏေ. သုဠတိ. ဗုဠတိ. सुळ, बुळ संवरणात (संवरण करणे/झाकणे). सुळति. बुळति. ပုဠ သံဃာတေ. ပုဠတိ. ပုဠိနံ. पुळ संघात (एकत्र करणे/समूह करणे) या अर्थात. पुळति. पुळिनं (वाळूचा किनारा/वाळूचा ढीग). သဠ အဗျတ္တသဒ္ဒေ. သဠတိ. သာဠိကော, သာဠိကာ. सळ अव्यक्त शब्दात (अस्पष्ट आवाज करणे). सळति. साळिको, साळिका (साळुंकी पक्षी). ‘‘ဥသဘောဝ မဟီ နဒတိ,မိဂရာဇာဝ ကူဇတိ; သုသုမာရောဝ သဠတိ,ကိံ ဝိပါကော ဘဝိဿတီ’’တိ နိဒဿနံ; “बैलाप्रमाणे पृथ्वीवर गर्जना करतो, मृगराज (सिंहा) प्रमाणे ओरडतो; सुंसाराप्रमाणे (मगरीप्रमाणे) सळसळ करतो (पाण्यात आवाज करतो), याचा काय विपाक (परिणाम) होईल?” हे उदाहरण आहे. ဣမာနိ ဠကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ही 'ळ' कारान्त धातूंची रूपे आहेत. ဣတိ ဘူဝါဒိဂဏေ အဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ သမတ္တာနိ. ဧတ္တာဝတာ သဗ္ဗာပိ ဘူဝါဒိဂဏေ ဓာတုယော ပကာသိတာ. अशा प्रकारे भूवादि गणातील अवर्गान्त (वर्गाबाहेरील व्यंजनांनी शेवट होणारे) धातूंची रूपे समाप्त झाली. एवढ्याने भूवादि गणातील सर्वच धातू प्रकाशित (स्पष्ट) झाले आहेत. ဣဒါနိ ဘူဝါဒိဂဏိကဓာတူနံယေဝ ကာစိ အသမာနသုတိကာ, ကာစိ အသမာနန္တိကာ. တာသု ကာစိ သမာနတ္ထဝသေန သမောဓာနေတွာ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ဝုတ္တာ, တာယေဝ ဓာတုယော ဧကဒေသေန ရူပဝိဘာဝနာဒီဟိ သဒ္ဓိံ ပကာသယိဿာမ. တံ ယထာ? आता भूवादि गणातीलच काही धातू असमान ध्वनीचे (उच्चाराचे) आहेत, तर काही असमान शेवटाचे (अन्ताचे) आहेत. त्यांपैकी काही धातू समान अर्थाच्या आधारे एकत्रित करून पूर्वाचार्यांनी सांगितले आहेत, तेच धातू आम्ही अंशतः रूपविभावन (रूपांचे स्पष्टीकरण) इत्यादींसह प्रकाशित करू. ते कसे? ဟူ [Pg.202] ဘူ သတ္တာယံ ဟောတိ, ဘဝတိ. ပဟောတိ, ပဘဝတိ. ဟုဝေယျ ပါဝုသော. သစေ ဥပ္ပာဒေါ ဟေယျ. အဇေသိ ယက္ခော နရဝီရသေဋ္ဌံ, တတ္ထပ္ပနာဒေါ တုမုလော ဗဟူဝ. အမ္ဗာ’ယံ အဟုဝါ ပုရေ. အဟု ရာဇာ ဝိဒေဟာနံ. ပဟူတံ မေ ဓနံ သက္က. ပဟူတမရိယော ပကရောတိ ပုညံ. ပဟူတဝိတ္တော ပုရိသော. ပဟူတဇိဝှော ဘဂဝါ. ပိယပ္ပဘူတာ ကလဟာ ဝိဝါဒါ. ပစ္ဆာသမဏေန ဟောတဗ္ဗံ. ဘဝိတဗ္ဗံ. ဟောတုံ, ဟေတုယေ, ဘဝိတုံ. ဟုတွာ, ဟုတွာန. ဘဝိတွာ, ဘဝိတွာန. सत्तेच्या (अस्तित्वाच्या) अर्थात 'हू' आणि 'भू' धातूंचे 'होति' (hoti) आणि 'भवति' (bhavati) असे होते. 'पहोति' (pahoti), 'पभवति' (pabhavati). 'हुवेय्य आवुसो' (हे मित्रा, असे असावे). 'सचे उप्पादो हेय्य' (जर उत्पत्ती झाली असती). 'अजेसि यक्खो नरवीरसेट्ठं, तत्थप्पनादो तुमुलो बहूव' (यक्षाने नरवीरांमध्ये श्रेष्ठ असलेल्याला जिंकले, तेथे मोठा कोलाहल झाला). 'अम्बाऽयं अहुवा पुरे' (ही पूर्वी माता होती). 'अहु राजा विदेहानं' (विदेहांचा राजा होता). 'पहूतं मे धनं सक्क' (हे शक्रा, माझ्याजवळ भरपूर धन आहे). 'पहूतमरियो पकरोति पुञ्ञं' (आर्य भरपूर पुण्य करतो). 'पहूतवित्तो पुरिसो' (भरपूर संपत्ती असलेला मनुष्य). 'पहूतजिव्हो भगवा' (भगवान विस्तीर्ण जिभेचे आहेत). 'पियप्पभूता कलहा विवादा' (प्रिय गोष्टींपासून कलह आणि विवाद निर्माण होतात). 'पच्छासमणेन होतब्बं' (पश्चात-श्रमण/अनुगामी श्रमण व्हावे). 'भवितब्बं' (व्हावे/असावे). 'होतुं', 'हेतुये', 'भवितुं' (होण्यासाठी). 'हुत्वा', 'हुत्वान' (होऊन). 'भवित्वा', 'भवित्वान' (होऊन). ဧတ္ထ ပန ‘‘အတ္ထိ ဟေဟိတိ သော မဂ္ဂေါ, န သော သက္ကာ န ဟေတုယေ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ နဟေတုယေတိ အဘဝိတုံ. ဟူဓာတုတော တုံပစ္စယဿ တဝေပစ္စယဿ ဝါ တုယေ အာဒေသော, ဦကာရဿ စ ဧကာရာဒေသော ကတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အထ ဝါ ဟေတုဘာဝါယ န န သက္ကာတိပိ အတ္ထော. အယံ ပနတ္ထော ဣဓ နာဓိပ္ပေတော, ပုရိမောယေဝတ္ထော အဓိပ္ပေတော ဟောတိဿ ဓာတုနော ပယောဂဘာဝါယ ဥဒါဟရိတပဒဿတ္ထဘာဝတော. တတ္ထ ပဟောတီတိ ဣဒံ ဝတ္ထံ ဝိပုလဘာဝေန စီဝရံ ကာတုံ ပဟောတိ, နော နပ္ပဟောတိ. ပဟောတီတိ ဝါ ပုရိသော အရယော ဇေတုံ သက္ကောတိ. အထ ဝါ ပဟောတီတိ ဟောတိ. ပဘဝတီတိ သန္ဒတိ. ပဟူတန္တိ ဝိပုလံ, မဟန္တန္တိ အတ္ထော. ပဟူတဝိတ္တောတိ ဝိပုလဝိတ္တော မဟဒ္ဓနော. ပဟူတဇိဝှောတိ သုပုထုလသုဒီဃသုမုဒုကဇိဝှော, ပိယပ္ပဘူတာတိ ပိယတော နိဗ္ဗတ္တာ. येथे “अत्थि हेहिति सो मग्गो, न सो सक्का न हेतुये” (तो मार्ग असेल, तो न होणे शक्य नाही) हे पाळी उदाहरण आहे. तेथे 'नहेतुये' म्हणजे 'अभवितुं' (न होणे). 'हू' धातूपासून 'तुं' प्रत्यय किंवा 'तवे' प्रत्ययाच्या जागी 'तुये' असा आदेश होतो आणि 'ऊ' काराचा 'ए' कार असा आदेश होतो, असे समजावे. किंवा, 'हेतुभावासाठी अशक्य नाही' असाही अर्थ होतो. परंतु हा अर्थ येथे अभिप्रेत नाही, पूर्वीचाच अर्थ अभिप्रेत आहे, कारण 'हु' धातूच्या प्रयोगासाठी उदाहरणात दिलेल्या शब्दाचा तोच अर्थ होतो. तेथे 'पहोति' म्हणजे: हे वस्त्र विपुल असल्यामुळे चीवर बनवण्यासाठी पुरेसे आहे (पहोति), अपुरे नाही (नो नप्पहोति). किंवा 'पहोति' म्हणजे मनुष्य शत्रूंना जिंकण्यास समर्थ होतो. किंवा 'पहोति' म्हणजे 'होति' (होतो). 'पभवति' म्हणजे वाहते (सन्दति) किंवा उत्पन्न होते. 'पहूतं' म्हणजे विपुल, मोठे असा अर्थ आहे. 'पहूतवित्तो' म्हणजे विपुल संपत्ती असलेला, महाधनी. 'पहूताजिव्हो' म्हणजे अत्यंत विस्तीर्ण, अत्यंत लांब आणि अत्यंत मऊ जीभ असलेले (भगवान). 'पियप्पभूता' म्हणजे प्रियापासून (आवडत्या गोष्टीपासून) उत्पन्न झालेले. ဂမု သပ္ပ ဂတိယံ. ဂစ္ဆတိ, ဂမတိ, ဃမ္မတိ, အာဂစ္ဆတိ, ဥဂ္ဂစ္ဆတိ, အတိဂစ္ဆတိ, ပဋိဂစ္ဆတိ, အဝဂစ္ဆတိ, အဓိဂစ္ဆတိ, အနုဂစ္ဆတိ, ဥပဂစ္ဆတိ, အပဂစ္ဆတိ, ဝိဂစ္ဆတိ, နိဂစ္ဆတိ, နိဂ္ဂစ္ဆတိ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ‘‘သမုဂ္ဂစ္ဆတီ’’တိအာဒိနာ ဥပသဂ္ဂဒွယဝသေနပိ [Pg.203] ယထာသမ္ဘဝံ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. သပ္ပတိ, သံသပ္ပတိ, ပရိသပ္ပတိ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात 'गमु' आणि 'सप्प' हे धातू आहेत. गच्छति, गमति, घम्मति (जातो), आगच्छति (येतो), उग्गच्छति (वर जातो/उदय पावतो), अतिगच्छति (ओलांडून जातो), पटिगच्छति (परत जातो), अवगच्छति (समजतो), अधिगच्छति (प्राप्त करतो/जाणतो), अनुगच्छति (मागोमाग जातो), उपगच्छति (जवळ जातो), अपगच्छति (दूर जातो), विगच्छति (नष्ट होतो/दूर जातो), निगच्छति (प्राप्त करतो), निग्गच्छति (बाहेर पडतो). इतरही जोडले जावेत. 'समुग्गच्छति' इत्यादींप्रमाणे दोन उपसर्गांच्या योगाने देखील यथासंभव जोडले जावेत. सप्पति (सरपटतो/जातो), संसप्पति (सरपटत जातो), परिसप्पति (भोवती सरपटतो). इतरही जोडले जावेत. တတ္ထ ဂမတီတိ ဂစ္ဆတိ. ကာရိတေ ‘‘ဒေဝဒတ္တံ ဂမေတိ ဂမယတီ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ‘‘အပါယံ ဂမေတီတိ အပါယဂမနီယ’’န္တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. စုရာဒိဂဏံ ပတ္တဿ အာပုဗ္ဗဿ ဣမဿ ‘‘အာဂမေတိ, အာဂမယတိ, အာဂမေန္တော, အာဂမယမာနော’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုရူပါနိ ဘဝန္တိ. तेथे 'गमति' म्हणजे 'गच्छति' (जातो). प्रयोजक (कारित) रूपात “देवदत्तं गमेति, गमयति” (देवदत्ताला पाठवतो) अशी रूपे होतात. “अपायं गमेतीति अपायगमनीयं” (जो अपायाप्रत नेतो तो अपायगमनीय) हे येथे उदाहरण आहे. चुरादि गणात गेलेल्या आणि 'आ' उपसर्ग पूर्व असलेल्या या धातूची “आगमेति, आगमयति, आगमेन्तो, आगमयामानो” अशी क्रियापदरूपे होतात. တတ္ထ အာဂမေတီတိ မုဟုတ္တံ အဓိဝါသေတီတိ အတ္ထော. ဃမ္မတီတိ ဂစ္ဆတိ. အာဂစ္ဆတီတိ အာယာတိ. ဥဂ္ဂစ္ဆတီတိ ဥယျာတိ ဥဒ္ဓံ ဂစ္ဆတိ. အတိဂစ္ဆတီတိ အတိက္ကမိတွာ ဂစ္ဆတိ. ပဋိဂစ္ဆတီတိ ပုန ဂစ္ဆတိ. အဝဂစ္ဆတီတိ ဇာနာတိ. အဓိဂစ္ဆတီတိ လဘတိ ဇာနာတိ ဝါ. အနုဂစ္ဆတီတိ ပစ္ဆတော ဂစ္ဆတိ. ဥပဂစ္ဆတီတိ သမီပံ ဂစ္ဆတိ. အပဂစ္ဆတီတိ အပေတိ. ဝိဂစ္ဆတီတိ ဝိဂမတိ. နိဂစ္ဆတီတိ လဘတိ. ‘‘ယသံ ပေါသော နိဂစ္ဆတီ’’တိ ဣဒံ နိဒဿနံ. နိဂ္ဂစ္ဆတီတိ နိက္ခမတိ. သပ္ပတီတိ ဂစ္ဆတိ. သံသပ္ပတီတိ သံသရန္တော ဂစ္ဆတိ. ပရိသပ္ပတီတိ သမန္တတော ဂစ္ဆတိ. तेथे 'आगमेति' म्हणजे क्षणभर वाट पाहतो (मुहुत्तं अधिवासेति) असा अर्थ आहे. 'घम्मति' म्हणजे जातो (गच्छति). 'आगच्छति' म्हणजे येतो (आयाति). 'उग्गच्छति' म्हणजे वर जातो/उदय पावतो (उय्याति उद्धं गच्छति). 'अतिगच्छति' म्हणजे ओलांडून जातो (अतिक्कमित्वा गच्छति). 'पटिगच्छति' म्हणजे पुन्हा जातो (पुन गच्छति). 'अवगच्छति' म्हणजे जाणतो (जानाति). 'अधिगच्छति' म्हणजे प्राप्त करतो किंवा जाणतो (लभति जानाति वा). 'अनुगच्छति' म्हणजे मागोमाग जातो (पच्छतो गच्छति). 'उपगच्छति' म्हणजे जवळ जातो (समीपं गच्छति). 'अपगच्छति' म्हणजे दूर जातो (अपेति). 'विगच्छति' म्हणजे नष्ट होतो/दूर जातो (विगमति). 'निगच्छति' म्हणजे प्राप्त करतो (लभति). “यसं पोसो निगच्छति” (मनुष्य कीर्ती प्राप्त करतो) हे याचे उदाहरण आहे. 'निग्गच्छति' म्हणजे बाहेर पडतो (निक्खमति). 'सप्पति' म्हणजे जातो (गच्छति). 'संसप्पति' म्हणजे सरपटत/भटकत जातो (संसरन्तो गच्छति). 'परिसप्पति' म्हणजे चहूबाजूंनी सरपटतो/जातो (समन्ततो गच्छति). ဣဒါနိ ပန ဝိညူနံ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ ပရမကောသလ္လဇနနတ္ထံ သပ္ပယောဂံ ပဒမာလံ ကထယာမ. သေယျထိဒံ? သော ဂစ္ဆတိ, တေ ဂစ္ဆန္တိ, ဂစ္ဆရေ. တွံ ဂစ္ဆသိ, တုမှေ ဂစ္ဆထ. အဟံ ဂစ္ဆာမိ, မယံ ဂစ္ဆာမ. သော ဂစ္ဆတေ, တေ ဂစ္ဆန္တေ. တွံ ဂစ္ဆသေ, တုမှေ ဂစ္ဆဝှေ. အဟံ ဂစ္ဆေ, မယံ ဂစ္ဆာမှေ. ဝတ္တမာနာယ ရူပါနိ. आता विद्वानांना (सुज्ञांना) अट्ठकथांसह असलेल्या तिपिटक बुद्धवचनात परम कौशल्य प्राप्त व्हावे म्हणून, प्रयोगासहित पदमाला (रूपावली) सांगतो. ती अशी: सो गच्छति (तो जातो), ते गच्छन्ति, गच्छरे (ते जातात). त्वं गच्छसि (तू जातोस), तुम्हे गच्छथ (तुम्ही जाता). अहं गच्छामि (मी जातो), मयं गच्छाम (आम्ही जातो). सो गच्छते, ते गच्छन्ते. त्वं गच्छसे, तुम्हे गच्छव्हे. अहं गच्छे, मयं गच्छाम्हे. ही वर्तमानकाळाची (वत्तमानाची) रूपे आहेत. သော ဂစ္ဆတု, တေ ဂစ္ဆန္တု. တွံ ဂစ္ဆာဟိ, ဂစ္ဆ, ဂစ္ဆဿု, တုမှေ ဂစ္ဆထ. အဟံ ဂစ္ဆာမိ, မယံ ဂစ္ဆာမ. သော ဂစ္ဆတံ, တေ ဂစ္ဆန္တံ. တွံ ဂစ္ဆဿု, တုမှေ ဂစ္ဆဝှော. အဟံ ဂစ္ဆေ, မယံ ဂစ္ဆာမသေ. ပဉ္စမိယာ ရူပါနိ. सो गच्छतु (तो जावो), ते गच्छन्तु (ते जावोत). त्वं गच्छाहि, गच्छ, गच्छस्सु (तू जा), तुम्हे गच्छथ (तुम्ही जा). अहं गच्छामि (मी जाऊ), मयं गच्छाम (आम्ही जाऊ). सो गच्छतं, ते गच्छन्तं. त्वं गच्छस्सु, तुम्हे गच्छव्हो. अहं गच्छे, मयं गच्छामसे. ही पंचमीची (आज्ञार्थ/Pañcamī ची) रूपे आहेत. သော [Pg.204] ဂစ္ဆေယျ, ဂစ္ဆေ, တေ ဂစ္ဆေယျုံ. တွံ ဂစ္ဆေယျာသိ, တုမှေ ဂစ္ဆေယျာထ. အဟံ ဂစ္ဆေယျာမိ, မယံ ဂစ္ဆေယျာမ, ဂစ္ဆေမု. သော ဂစ္ဆေထ, တေ ဂစ္ဆေရံ. တွံ ဂစ္ဆေထော, တုမှေ ဂစ္ဆေယျာဝှော. အဟံ ဂစ္ဆေယျံ, မယံ ဂစ္ဆေယျာမှေ. သတ္တမိယာ ရူပါနိ. सो गच्छेय्य, गच्छे (त्याने जावे), ते गच्छेय्युं (त्यांनी जावे). त्वं गच्छेय्यासि (तू जावेस), तुम्हे गच्छेय्याथ (तुम्ही जावे). अहं गच्छेय्यामि (मी जावे), मयं गच्छेय्याम, गच्छेमु (आम्ही जावे). सो गच्छेथ, ते गच्छेरं. त्वं गच्छेथो, तुम्हे गच्छेय्याव्हो. अहं गच्छेय्यं, मयं गच्छेय्याम्हे. ही सप्तमीची (विध्यर्थ/Sattamī ची) रूपे आहेत. သော ဂစ္ဆ, တေ ဂစ္ဆု. တွံ ဂစ္ဆေ, တုမှေ ဂစ္ဆိတ္ထ, ဂဉ္ဆိတ္ထ. အဟံ ဂစ္ဆံ, မယံ ဂစ္ဆိမှ, ဂဉ္ဆိမှ. သော ဂစ္ဆိတ္ထ, ဂဉ္ဆိတ္ထ, တေ ဂစ္ဆိရေ. တွံ ဂစ္ဆိတ္ထော, တုမှေ ဂစ္ဆိဝှော. အဟံ ဂစ္ဆိံ, ဂဉ္ဆိံ, မယံ ဂစ္ဆိမှေ. ပရောက္ခာယ ရူပါနိ. सो गच्छ, ते गच्छु. त्वं गच्छे, तुम्हे गच्छित्थ, गञ्चित्थ. अहं गच्छं, मयं गच्छिम्ह, गञ्चिम्ह. सो गच्छित्थ, गञ्चित्थ, ते गच्छिरे. त्वं गच्छित्तो, तुम्हे गच्छिव्हो. अहं गच्छिं, गञ्चिं, मयं गच्छिम्हे. ही परोक्षाची (परोक्खा - परोक्ष भूतकाळाची) रूपे आहेत. သော အဂစ္ဆာ, တေ အဂစ္ဆူ. တွံ အဂစ္ဆေ, တုမှေ အဂစ္ဆထ. အဟံ အဂစ္ဆံ, မယံ အဂစ္ဆမှာ. သော အဂစ္ဆထ, တေ အဂစ္ဆတ္ထုံ. တွံ အဂစ္ဆသေ, တုမှေ အဂစ္ဆိဝှံ. အဟံ အဂစ္ဆံ, မယံ အဂစ္ဆိမှေ. အဇ္ဇတနိယာ ရူပါနိ. सो अगच्छा, ते अगच्छू. त्वं अगच्छे, तुम्हे अगच्छथ. अहं अगच्छं, मयं अगच्छम्हा. सो अगच्छथ, ते अगच्छत्थुं. त्वं अगच्छसे, तुम्हे अगच्छिव्हं. अहं अगच्छं, मयं अगच्छिम्हे. ही अद्यतनीची (अज्जतनी - सामान्य भूतकाळाची) रूपे आहेत. သော ဂစ္ဆိဿတိ, တေ ဂစ္ဆိဿန္တိ. တွံ ဂစ္ဆိဿသိ, တုမှေ ဂစ္ဆိဿထ. အဟံ ဂစ္ဆိဿာမိ, မယံ ဂစ္ဆိဿာမ. သော ဂစ္ဆိဿတေ, တေ ဂစ္ဆိဿန္တေ. တွံ ဂစ္ဆိဿသေ, တုမှေ ဂစ္ဆိဿဝှေ. အဟံ ဂစ္ဆိဿံ, မယံ ဂစ္ဆိဿာမှေ. ဘဝိဿန္တိယာ ရူပါနိ. सो गच्छिस्सति (तो जाईल), ते गच्छिस्सन्ति (ते जातील). त्वं गच्छिस्ससि (तू जाशील), तुम्हे गच्छिस्सथ (तुम्ही जाल). अहं गच्छिस्सामि (मी जाईन), मयं गच्छिस्साम (आम्ही जाऊ). सो गच्छिस्सते, ते गच्छिस्सन्ते. त्वं गच्छिस्ससे, तुम्हे गच्छिस्सव्हे. अहं गच्छिस्सं, मयं गच्छिस्साम्हे. ही भविष्यत्काळाची (भविस्सतीची) रूपे आहेत. သော အဂစ္ဆိဿာ, တေ အဂစ္ဆိဿံသု. တွံ အဂစ္ဆိဿေ, တုမှေ အဂစ္ဆိဿထ. အဟံ အဂစ္ဆိဿံ, မယံ အဂစ္ဆိဿာမှာ. သော အဂစ္ဆိဿထ, တေ အဂစ္ဆိဿိသု. တွံ အဂစ္ဆိဿသေ, တုမှေ အဂစ္ဆိဿဝှေ. အဟံ အဂစ္ဆိဿံ, မယံ အဂစ္ဆိဿာမှသေ. ကာလာတိပတ္တိယာ ရူပါနိ. सो अगच्छिस्सा, ते अगच्छिस्सं सु. त्वं अगच्छिस्से, तुम्हे अगच्छिस्सथ. अहं अगच्छिस्सं, मयं अगच्छिस्साम्हा. सो अगच्छिस्सथ, ते अगच्छिस्सिसु. त्वं अगच्छिस्ससे, तुम्हे अगच्छिस्सव्हे. अहं अगच्छिस्सं, मयं अगच्छिस्सामसे. ही कालातिपत्तीची (काळाचा अतिपात दर्शवणाऱ्या रूपांची) रूपे आहेत. တတ္ထ အဇ္ဇတနိယာ ကာလာတိပတ္တိယာ စ အကာရာဂမံ သဗ္ဗေသု ပုရိသေသု သဗ္ဗေသု ဝစနေသု လဗ္ဘမာနမ္ပိ သာသနေ အနိယတံ ဟုတွာ လဗ္ဘတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ‘‘အဂစ္ဆိ, ဂစ္ဆိ, အဂစ္ဆိဿာ, ဂစ္ဆိဿာ’’တိအာဒိနာ ဒွေ ဒွေ ရူပါနိ ဒိဿန္တိ. ဂမတိ, ဂမန္တိ. ဂမတု, ဂမန္တု. ဂမေယျ. ဂမေယျုံ. သေသံ သဗ္ဗံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. त्यामध्ये अद्यतनी (भूतकाळ) आणि कालातिपत्ती (संकेतार्थ) मध्ये 'अ'-काराचा आगम सर्व पुरुषांमध्ये आणि सर्व वचनांमध्ये प्राप्त होत असला तरी, बुद्धशासनात (व्याकरणात) तो अनियत (अनिवार्य नसलेला/वैकल्पिक) होऊन प्राप्त होतो, असे समजावे. तसेच, "अगच्छि, गच्छि, अगच्छिस्सा, गच्छिस्सा" इत्यादी दोन-दोन रूपे दिसून येतात. गमति, गमन्ति। गमतु, गमन्तु। गमेय्य, गमेय्युं। उर्वरित सर्व सविस्तर जाणावे. ဣဒါနိ [Pg.205] ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီသု ဝိသေသော ဝုစ္စတေ – သော ပုရိသော မဂ္ဂံ ဂ, သာ ဣတ္ထီ ဃရ’မာဂ. တေ မဂ္ဂံ ဂု, တာ ဃရ’မာဂု. ဧကာရဿ အကာရာဒေသံ တွံ မဂ္ဂံ ဂ, တွံ ဃရ’’မာဂ. တုမှေ မဂ္ဂံ ဂုတ္ထ, တုမှေ ဃရ’မာဂုတ္ထ. အဟံ မဂ္ဂံ ဂံ, အဟံ ဃရ’မာဂံ. အဟံ တံ ပုရိသံ အနွဂံ, မယံ မဂ္ဂံ ဂုမှ, မယံ ဃရံ အာဂုမှ, မယံ တံ ပုရိသံ အနွဂုမှ. အယံ တာဝ ပရောက္ခာယ ဝိသေသော. आता परोक्षा, हिय्यत्तनी आणि अद्यतनी यांमधील विशेष नियम सांगितले जात आहेत – तो पुरुष मार्गाने गेला (सो पुरिसो मग्गं ग), ती स्त्री घरी आली (सा इत्थी घरं आग). ते मार्गाने गेले (ते मग्गं गु), त्या घरी आल्या (ता घरं आगु). 'ए' काराच्या जागी 'अ' कार आदेश होऊन – तू मार्गाने गेलास (त्वं मग्गं ग), तू घरी आलास (त्वं घरं आग). तुम्ही मार्गाने गेलात (तुम्हे मग्गं गुत्थ), तुम्ही घरी आलात (तुम्हे घरं आगुत्थ). मी मार्गाने गेलो (अहं मग्गं गं), मी घरी आलो (अहं घरं आगं). मी त्या पुरुषाच्या मागे गेलो (अहं तं पुरिसं अन्वगं), आम्ही मार्गाने गेलो (मयं मग्गं गुम्ह), आम्ही घरी आलो (मयं घरं आगुम्ह), आम्ही त्या पुरुषाच्या मागे गेलो (मयं तं पुरिसं अन्वगुम्ह). हा तर परोक्षेचा विशेष नियम आहे. ‘‘သော မဂ္ဂံ အဂမာ, တေ မဂ္ဂံ အဂမူ’’ ဣစ္စာဒိ ဟိယျတ္တနိယာ ရူပံ. ‘‘သော အဂမိ, တေ အဂမုံ, တေ ဂုံ’’ ဣစ္စာဒိ အဇ္ဇတနိယာ ရူပံ. "सो मग्गं अगमा (तो मार्गाने गेला), ते मग्गं अगमू (ते मार्गाने गेले)" इत्यादी हिय्यत्तनीची रूपे आहेत. "सो अगमि (तो गेला), ते अगमुं (ते गेले), ते गुं (ते गेले)" इत्यादी अद्यतनीची रूपे आहेत. ဣဒါနိ တေသံ ပဒရူပါနိ ပါကဋီကရဏတ္ထံ ကိဉ္စိ သုတ္တံ ကထယာမ – ‘‘သောပါဂါ သမိတိံ ဝနံ. အထေတ္ထ ပဉ္စမော အာဂါ. အာဂုံ ဒေဝါ ယသဿိနော. မာဟံ ကာကောဝ ဒုမ္မေဓော, ကာမာနံ ဝသမနွဂံ. အဂမာ ရာဇဂဟံ ဗုဒ္ဓေါ. ဝင်္ကံ အဂမု ပဗ္ဗတံ. ဗြာဟ္မဏာ ဥပဂစ္ဆု မ’’န္တိ ဧဝမာဒီနိ ဘဝန္တိ. आता त्या पदरूपांना स्पष्ट करण्यासाठी काही सूत्रांचे (वचनांचे) कथन करतो – "सो उपागा समितिंग वनं" (तो वनातील सभेमध्ये आला), "अथ एत्थ पञ्चमो आगा" (त्यानंतर येथे पाचवा आला), "आगुं देवा यसस्सिनो" (यशस्वी देव आले), "माहं काकोव दुम्मेधो, कामानं वसमन्वगं" (मी दुर्बुद्धी कावळ्याप्रमाणे कामाच्या आहारी गेलो), "अगमा राजगहं बुद्धो" (बुद्ध राजगृहाला गेले), "वङ्कं अगमु पब्बतं" (ते वंक पर्वतावर गेले), "ब्राह्मणा उपगच्छु मं" (ब्राह्मण माझ्याकडे आले) इत्यादी उदाहरणे आहेत. ဂ ဂု ဂ ဂုတ္ထ ဂံ ဂုမှ, အဂု အဂမု အဂမုံ; အဂမာ’ဂမိ ဂစ္ဆန္တိ, အာဒိဘေဒံ မနေ ကရေ. ग, गु, ग, गुत्थ, गं, गुम्ह, अगु, अगमु, अगमुं; अगमा, अगमि, गच्छन्ति इत्यादी भेद मनात ठेवावेत. ဣဒါနိ နာမိကပဒါနိ ဝုစ္စန္တေ – ဂတော, ဂန္တာ, ဂစ္ဆံ, ဂစ္ဆန္တီ, ဂစ္ဆန္တံ ကုလံ, သဟဂတံ, ဂတိ, ဂမနံ, ဂမော, အာဂမော, အဝဂမော, ဂန္တဗ္ဗံ, ဂမနီယံ, ဂမ္မံ, ဂမ္မမာနံ, ဂမိယမာနံ, ဂေါ, မာတုဂါမော, ဟိင်္ဂု, ဇဂု, ဣန္ဒဂူ, မေဓဂေါ ဣစ္စာဒီနိ, ကာရိတေ – ဂစ္ဆာပေတိ, ဂစ္ဆာပယတိ, ဂစ္ဆေတိ, ဂစ္ဆယတိ, ဂမ္မေတိ. ကမ္မေ – ဂမ္မတိ, ဂမိယတိ, အဓိဂမ္မတိ, အဓိဂမိယတိ. တုမန္တာဒိတ္တေ ‘‘ဂန္တုံ, ဂမိတုံ, ဂန္တွာ, ဂန္တွာန, ဂမိတွာ, ဂမိတွာန, ဂမိယ, ဂမိယာန, ဂမ္မ, အာဂမ္မ, အာဂန္တွာ, အဓိဂမ္မ, အဓိဂန္တွာ’’ ဣစ္စာဒီနိ[Pg.206]. သပ္ပဓာတုဿ ပန ‘‘သပ္ပော, သပ္ပိနီ, ပီဌသပ္ပီ, သပ္ပိ’’ ဣစ္စာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. आता नामिक पदे सांगितली जात आहेत – गतो, गन्ता, गच्छं, गच्छन्ती, गच्छन्तं कुलं, सहगतं, गति, गमनं, गमो, आगमो, अवगमो, गन्तब्बं, गमनीयं, गम्मं, गम्ममानं, गमियमानं, गो, मातुगामो, हिङ्गु, जगु, इन्दगू, मेधगो इत्यादी. कारित (प्रयोजक) मध्ये – गच्छापेति, गच्छापयति, गच्छेति, गच्छayati, गम्मेति. कर्मणि मध्ये – गम्मति, गमियति, अधिगम्मति, अधिगमियति. तुमुन्-प्रत्ययान्त इत्यादींमध्ये – "गन्तुं, गमितुं, गन्त्वा, गन्त्वान, गमित्वा, गमित्वान, गमिय, गमियान, गम्म, आगम्म, आगन्त्वा, अधिगम्म, अधिगन्त्वा" इत्यादी. 'सप्प' धातूची तर "सप्पो, सप्पिनी, पीठसप्पी, सप्पि" इत्यादी रूपे होतात. တတ္ထ သဟဂတသဒ္ဒေါ တဗ္ဘာဝေ ဝေါကိဏ္ဏေ နိဿယေ အာရမ္မဏေ သံသဋ္ဌေတိ ဣမေသု အတ္ထေသု ဒိဿတိ. တတ္ထ ‘‘ယာယံ တဏှာ ပေါနောဗ္ဘဝိကာ နန္ဒိရာဂသဟဂတာ’’တိ တဗ္ဘာဝေ ဝေဒိတဗ္ဗော, နန္ဒိရာဂဘူတာတိ အတ္ထော. ‘‘ယာယံ ဘိက္ခဝေ ဝီမံသာ ကောသဇ္ဇသဟဂတာ ကောသဇ္ဇသမ္ပယုတ္တာ’’တိ ဝေါကိဏ္ဏေ ဝေဒိတဗ္ဗော, အန္တရန္တရာ ဥပ္ပဇ္ဇမာနေန ကောသဇ္ဇေန ဝေါကိဏ္ဏာတိ အယမေတ္ထ အတ္ထော. ‘‘အဋ္ဌိကသညာသဟဂတံ သတိသမ္ဗောဇ္ဈင်္ဂံ ဘာဝေတီ’’တိ နိဿယေ ဝေဒိတဗ္ဗော, အဋ္ဌိကသညံ နိဿာယ အဋ္ဌိကသညံ ဘာဝေတွာ ပဋိလဒ္ဓန္တိ အတ္ထော. ‘‘လာဘီ ဟောတိ ရူပသဟဂတာနံ ဝါ သမာပတ္တီနံ အရူပသဟဂတာနံ ဝါ’’တိ အာရမ္မဏေ, ရူပါရူပါရမ္မဏာနန္တိ အတ္ထော. ‘‘ဣဒံ သုခံ ဣမာယ ပီတိယာ သဟဂတံ သဟဇာတံ သမ္ပယုတ္တ’’န္တိ သံသဋ္ဌေ, ဣမိဿာ ပီတိယာ သံသဋ္ဌန္တိ အတ္ထော. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – त्यामध्ये 'सहगत' हा शब्द तद्भाव (त्या भावाने युक्त), वोकिण्ण (मिश्रित), निस्सय (आश्रय), आरम्मण (आलंबन) आणि संसट्ठ (संसृष्ट) या पाच अर्थांमध्ये दिसून येतो. त्यामध्ये "यायं तण्हा पोनोब्भविका नन्दिरागसहगता" (जी ही पुनरुत्पत्ती करणारी तृष्णा, नंदी आणि रागाने युक्त आहे) येथे 'तद्भाव' अर्थ समजावा, म्हणजेच 'नंदी आणि रागरूप झालेली' असा अर्थ आहे. "यायं भिक्खवे वीमंसा कोसज्जसहगता कोसज्जसम्पयुत्ता" (हे भिक्खूहो, जी ही मीमांसा आळसाने युक्त आणि आळसाने संप्रयुक्त आहे) येथे 'वोकिण्ण' (मिश्रित) अर्थ समजावा, म्हणजेच 'मध्ये-मध्ये उत्पन्न होणाऱ्या आळसाने मिश्रित' असा येथे अर्थ आहे. "अट्ठिकसञ्ञासहगतं सतिसम्बोज्झङ्गं भावेति" (अस्थिसंज्ञेने युक्त स्मृतिसंबोध्यंगाची भावना करतो) येथे 'निस्सय' (आश्रय) अर्थ समजावा, म्हणजेच 'अस्थिसंज्ञेचा आश्रय घेऊन, अस्थिसंज्ञेची भावना करून प्राप्त केलेले' असा अर्थ आहे. "लाभी होति रूपसहगतानं वा समापत्तीनं अरूपसहगतानं वा" (रूपयुक्त किंवा अरूपयुक्त समापत्तींचा लाभ घेणारा होतो) येथे 'आरम्मण' (आलंबन) अर्थ समजावा, म्हणजेच 'रूप आणि अरूप आलंबन असणाऱ्या' असा अर्थ आहे. "इदं सुखं इमाय पीतिया सहगतं सहजातं सम्पयुत्तं" (हे सुख या प्रीतीशी सहगत, सहजात आणि संप्रयुक्त आहे) येथे 'संसट्ठ' (संसृष्ट) अर्थ समजावा, म्हणजेच 'या प्रीतीशी संसृष्ट' असा अर्थ आहे. या संदर्भात असे म्हटले आहे – တဗ္ဘာဝေ စေဝ ဝေါကိဏ္ဏေ, နိဿယာရမ္မဏေသု စ; သံသဋ္ဌေ စ သဟဂတ-သဒ္ဒေါ ဒိဿတိ ပဉ္စသု; तद्भाव, वोकिण्ण (मिश्रित), निस्सय (आश्रय), आरम्मण (आलंबन) आणि संसट्ठ (संसृष्ट) या पाच अर्थांमध्ये 'सहगत' शब्द दिसून येतो. ဂတီတိ ဂတိဂတိ နိဗ္ဗတ္တိဂဘိ အဇ္ဈာသယဂတိ ဝိဘဝဂတိ နိပ္ဖတ္တိဂတိ ဉာဏဂတီတိ ဗဟုဝိဓာ ဂတိ နာမ. 'गती' म्हणजे गतिगती, निब्बत्तिगती (उत्पत्ती गती), अज्झासयगती (अध्याशय गती), विभवगती, निप्फत्तिगती (निष्पत्ती गती) आणि जाणगती (ज्ञानगती) अशी बहुविध गती होय. တတ္ထ ‘‘တံ ဂတိံ ပေစ္စ ဂစ္ဆာမီ’’တိ စ ‘‘ယဿ ဂတိံ န ဇာနန္တိ, ဒေဝါ ဂန္ဓဗ္ဗမာနုသာ’’တိ စ အယံ ဂတိဂတိနာမ. ‘‘ဣမေသံ [Pg.207] ခေါ အဟံ ဘိက္ခူနံ သီလဝန္တာနံ နေဝ ဇာနာမိ ဂတိံဝါ အဂတိံဝါ’’တိ အယံ နိဗ္ဗတ္တိဂတိ နာမ. ‘‘ဧဝံ ခေါ တေ အဟံ ဗြဟ္မေ ဂတိဉ္စ ဇာနာမိ ဇုတိဉ္စ ဇာနာမီ’’တိ အယံ အဇ္ဈာသယဂတိ နာမ. ‘‘ဝိဘဝေါ ဂတိ ဓမ္မာနံ, နိဗ္ဗာနံ အရဟတော ဂတီ’’တိ အယံ ဝိဘဝဂတိ နာမ. ‘‘ဒွေ ဂတိယော ဘဝန္တိ အနညာ’’တိ အယံ နိပ္ဖတ္တိဂတိ နာမ. ‘‘တံ တတ္ထ ဂတိမာ ဓိဘိမာ’’တိ စ ‘‘သုန္ဒရံ နိဗ္ဗာနံ ဂတော’’တိ စ အယံ ဉာဏဂတိ နာမ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – त्यामध्ये "तं गतिं पेच्च गच्छामि" (मृत्यूनंतर मी त्या गतीला प्राप्त होईन) आणि "यस्स गतिं न जानन्ति, देवा गन्धब्बमानुसा" (ज्याची गती देव, गंधर्व आणि मनुष्य जाणत नाहीत) ही 'गतिगती' होय. "इमेसं खो अहं भिक्खूनं सीलवन्तानं नेव जानामि गतिंवा अगतिंवा" (या शीलवान भिक्खूंची गती किंवा अगती मी जाणत नाही) ही 'निब्बत्तिगती' (उत्पत्ती गती) होय. "एवं खो ते अहं ब्रह्मे गतिञ्च जानामि जुतिञ्च जानामि" (हे ब्रह्मा, अशा प्रकारे मी तुझी गती आणि तुझी द्युती जाणतो) ही 'अज्झासयगती' (अध्याशय गती) होय. "विभवो गति धम्मानं, निब्बानं अरहतो गती" (धर्मांचा विनाश ही गती आहे, आणि निर्वाण ही अरहंताची गती आहे) ही 'विभवगती' होय. "द्वे गतियो भवन्ति अनञ्ञा" (दोन गती निश्चित असतात) ही 'निप्फत्तिगती' (निष्पत्ती गती) होय. "तं तत्थ गतिमा धिभिमा" आणि "सुन्दरं निब्बानं गतो" (तो सुंदर निर्वाणाला गेला) ही 'जाणगती' (ज्ञानगती) होय. या संदर्भात असे म्हटले आहे – ဂတိဂတျဉ္စ နိဗ္ဗတျံ, ဝိဘဝဇ္ဈာသယေသု စ; နိပ္ဖတ္တိယဉ္စ ဉာဏေ စ, ဂတိသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. गतिगती, निब्बत्ति (उत्पत्ती), विभव, अज्झासय (अध्याशय), निप्फत्ति (निष्पत्ती) आणि ज्ञान या अर्थांमध्ये 'गती' शब्द प्रवृत्त होतो. ဂစ္ဆတီတိ ဂေါ. မာတုယာ သမဘာဝံ မိဿီဘာဝဉ္စ ဂစ္ဆတိ ပါပုဏာတီတိ မာတုဂါမော. ရောဂံ ဟိံသန္တံ ဂစ္ဆတီတိ ဟိင်္ဂု. जो जातो तो 'गो'. जो मातेच्या समभावाला आणि संसर्गाला प्राप्त होतो, तो 'मातुगामो' (स्त्रीवर्ग). जो रोगाचा नाश करत जातो, तो 'हिङ्गु' (हिंग). ဣမာနိ တဿ နာမာနိ ही त्याची नावे आहेत: ဟိင်္ဂု ဟိင်္ဂုဇတုစ္စေဝ, တထာ ဟိင်္ဂုသိပါဋိကာ; ဟိင်္ဂုဇာတီတိ ကထိတာ, ဝိနယဋ္ဌကထာယ ဟိ. विनयअट्ठकथेमध्ये 'हिङ्गु', 'हिङ्गुजतु', तसेच 'हिङ्गुसिपाटिका' आणि 'हिङ्गुजाती' अशी नावे सांगितली आहेत. ဇဂူတိ စုတိတော ဇာတိံ ဂစ္ဆတီတိ ဇဂု. ဣန္ဒြိယေန ဂစ္ဆတီတိ ဣန္ဒဂူ. အထ ဝါ ဣန္ဒဘူတေန ကမ္မုနာ ဂစ္ဆတီတိ ဣန္ဒဂု. ‘‘ဟိန္ဒဂူ’’တိပိ ပါဠိ. တတ္ထ ဟိန္ဒန္တိ မရဏံ. တံ ဂစ္ဆတီတိ ဟိန္ဒဂူ. သဗ္ဗမေတံ သတ္တာဓိဝစနံ, လိင်္ဂတော ပုလ္လိင်္ဂံ. မေဓဂေါတိ အတ္တနော နိဿယဉ္စ ပရဉ္စ မေဓမာနော ဟိံသမာနော ဂစ္ဆတိ ပဝတ္တတီတိ မေဓဂေါ, ကလဟော. ‘‘တတော သမ္မန္တိ မေဓဂါ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ကလဟော မေဓဂသဒ္ဒေန ဘဂဝတာ ဝုတ္တော. ဂမိတွာတိ ဧတ္ထ – 'जगु' म्हणजे जो च्युतीपासून (मरणापासून) जन्माकडे जातो तो 'जगु'. जो इंद्रियाने जातो तो 'इन्दगू'. किंवा जो इंद्रभूत (प्रधान) कर्माने जातो तो 'इन्दगु'. पाळीमध्ये 'हिन्दगू' असाही पाठ आहे. त्यामध्ये 'हिन्द' म्हणजे मरण; त्या मरणाकडे जो जातो तो 'हिन्दगू'. हे सर्व प्राण्यांचे वाचक शब्द आहेत आणि लिंगाच्या दृष्टीने पुल्लिंगी आहेत. 'मेधगो' म्हणजे जो स्वतःच्या आश्रयाला आणि दुसऱ्याला इजा (हिंसा) करत चालतो तो 'मेधगो', म्हणजेच कलह (भांडण). "ततो सम्मन्ति मेधगा" (त्यानंतर कलह शांत होतात) येथे भगवंतांनी 'मेधग' शब्दाने कलहाचाच उल्लेख केला आहे. 'गमित्वा' या संदर्भात – ‘‘ဣသိဝှယံ ဂမိတွာန, ဝိနိတွာ ပဉ္စဝဂ္ဂိယေ; တတော ဝိနေသိ ဘဂဝါ, ဂန္တွာ ဂန္တွာ တဟိံ တဟိ’’န္တိ "ऋषिपतन (इसिपतन) येथे जाऊन आणि पंचवर्गीय भिक्खूंना विनीत (दीक्षित) करून, त्यानंतर भगवंतांनी तिथे तिथे जाऊन (इतर लोकांना) विनीत केले." အယံ [Pg.208] ပါဠိ နိဒဿနံ. သပ္ပောတိ သပ္ပတီတိ သပ္ပော, သံသပ္ပန္တော ဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. တေနာဟ အာယသ္မာ သာရိပုတ္တော ‘‘ယော ကာမေ ပရိဝဇ္ဇေတိ, သပ္ပဿေဝ ပဒါသိရော’’တိ ဣမိဿာ ပါဠိယာ နိဒ္ဒေသေ ‘‘သပ္ပော ဝုစ္စတိ အဟိ. ကေနဋ္ဌေန သပ္ပော? သံသပ္ပန္တော ဂစ္ဆတီတိ သပ္ပော. ဘုဇန္တော ဂစ္ဆတီတိ ဘုဇဂေါ. ဥရေန ဂစ္ဆတီတိ ဥရဂေါ. ပန္နသိရော ဂစ္ဆတီတိ ပန္နဂေါ. သရီရေန သပ္ပတီတိ သရီသပေါ. ဗိလေ သယတီတိ ဗိလာသယော. ဒါဌာ တဿ အာဝုဓောတိ ဒါဌာဝုဓော. ဝိသံ တဿဃောရန္တိ ဃောရဝိသော. ဇိဝှာ တဿ ဒုဝိဓာတိ ဒုဇိဝှော. ဒွီဟိ ဇိဝှာဟိ ရသံ သာယတီတိ ဒွိရသညူ’’တိ. သပ္ပိနီတိ ဥရဂီ. ပီဌသပ္ပီတိ ပီဌေန သပ္ပတိ ဂစ္ဆတီတိ ပီဌသပ္ပီ, ပင်္ဂုဠော. သပ္ပီတိ ယော န ပရိဘုဉ္ဇတိ, တဿ ဗလာယုဝဍ္ဎနတ္ထံ သပ္ပတိ ဂစ္ဆတိ ပဝတ္တတီတိ သပ္ပိ, ဃတံ. हे पाळीचे (मूळ पाठाचे) उदाहरण आहे. 'सप्पति' (सरपटतो) म्हणून तो 'सप्पो' (सर्प/साप), म्हणजेच सरपटत जाणारा असा अर्थ आहे. म्हणूनच आयुष्यमान सारिपुत्त म्हणाले आहेत— 'जो कामांचा (इच्छांचा) त्याग करतो, जसे सापाच्या डोक्याला पाय देणे टाळतो' या पाळीच्या निर्देशात (स्पष्टीकरणात) म्हटले आहे: 'सप्पो' म्हणजे 'अहि' (साप). कोणत्या अर्थाने 'सप्पो'? सरपटत जातो म्हणून 'सप्पो'. वाकडा-तिकडा (भुजंग) जातो म्हणून 'भुजगो'. छातीने (उराने) चालतो म्हणून 'उरगो'. डोके खाली करून चालतो म्हणून 'पन्नगो'. शरीराने सरपटतो म्हणून 'सरीसपो'. बिळात राहतो (शयन करतो) म्हणून 'बिलासयो'. दाढा हेच ज्याचे शस्त्र आहे तो 'दाठावुधो'. ज्याचे विष भयंकर आहे तो 'घोरविसो'. ज्याची जीभ दुभंगलेली (दोन प्रकारची) आहे तो 'दुजिव्हो'. दोन जिभांनी चव घेतो म्हणून 'द्विरसञ्ञू' (द्विरसज्ञ). 'सप्पिनी' म्हणजे मादी साप (नागीण). 'पीठसप्पी' म्हणजे पाटा किंवा पीठाच्या (आधाराने) सरपटत जाणारा, म्हणजेच 'पंगु' (अपंग). 'सप्पी' म्हणजे जो (सहजासहजी) उपभोगत नाही, परंतु त्याच्या बल आणि आयुष्याच्या वृद्धीसाठी जो प्रवृत्त होतो (जातो) तो 'सप्पी' म्हणजेच तूप (घृत). သက္က ဋေက လင်္ဃ ဂတျတ္တာ. သက္ကတိ, နိသက္ကတိ, ပရိသက္ကတိ. နိသက္ကော, ပရိသက္ကနံ. ဋေကတိ. ဋီကာ. လင်္ဃတိ, ဥလ္လင်္ဃတိ, ဩလင်္ဃတိ, လင်္ဃကော, ဥလ္လင်္ဃိကာ ပီတိ. 'सक्क', 'टेक', 'लङ्घ' हे धातू गतीच्या अर्थात आहेत. सक्कति (जातो/सरकतो), निसक्कति (बाहेर पडतो), परिसक्कति (सभोवताली फिरतो). निसक्को (बाहेर पडणे), परिसक्कनं (सभोवताली फिरणे). टेकति (जातो/टीका करतो). टीका. लङ्घति (उडी मारतो/ओलांडतो), उल्लङ्घति (उल्लंघन करतो), ओलङ्घति (खाली उडी मारतो), लङ्घको (उडी मारणारा), उल्लङ्घिका पीति (उल्लंघन करणारी प्रीती/अतिशय आनंद). ကေ ရေ ဂေ သဒ္ဒေ. ကာယတိ. ရာယတိ. ဂါယတိ. ဇာတကံ. ရာ. ဂီတံ. ကာယိတုံ. ရာယိတုံ, ဂါယိတုံ. ကာယိတွာ. ရာယိတွာ. ဂါယိတွာ. 'के', 'रे', 'गे' हे धातू आवाजाच्या (शब्दाच्या) अर्थात आहेत. कायति (ध्वनी करतो/बोलतो). रायति (ओरडतो/ध्वनी करतो). गायति (गातो). जातकं (जातक). रा (आवाज). गीतं (गीत). कायितुं (बोलण्यासाठी). रायितुं, गायितुं (ओरडण्यासाठी, गाण्यासाठी). कायित्वा (बोलून). रायित्वा (ओरडून). गायित्वा (गाऊन). တတ္ထ ဇာတကန္တိ ဇာတံ ဘူတံ အတီတံ အတ္တနော စရိတံ ကာယတိ ကထေတိ ဘဂဝါ ဧတေနာတိ ဇာတကံ. ဇာတကပါဠိ ဟိ ဣဓ ဇာတကန္တိ ဝုတ္တံ. အညတြ ပန ဇာတံ ဧဝံ ဇာတကန္တိ ဂဟေတဗ္ဗာ. တထာ ဟိ ဇာတကသဒ္ဒေါ ပရိယတ္တိယမ္ပိ ဝတ္တတိ ‘‘ဣတိဝုတ္တကံ ဇာတကံ အဗ္ဘုတဓမ္မ’’န္တိအာဒီသု, ဇာတိယမ္ပိ ဝတ္တတိ ‘‘ဇာတကံ သမောဓာနေသီ’’တိအာဒီသု. ရာ ဝုစ္စတိ သဒ္ဒေါ. ဂီတန္တိ ဂါယနံ. तेथे 'जातक' म्हणजे— ज्याद्वारे भगवान स्वतःचे झालेले, घडून गेलेले, भूतकाळातील चरित्र 'कायति' म्हणजे सांगतात (कथन करतात), ते 'जातक' होय. येथे 'जातकपाळी'लाच 'जातक' म्हटले आहे. इतर ठिकाणी मात्र 'जातं' (झालेले) म्हणजेच 'जातक' असे समजावे. तसेच 'जातक' हा शब्द परियत्तीमध्ये (बुद्धवचनात) देखील वापरला जातो, जसे की 'इतिवृत्तक, जातक, अब्भुतधम्म' इत्यादींमध्ये; आणि जन्माच्या अर्थातही वापरला जातो, जसे की 'जातकं समोधानेसि' (जातकाचा मेळ घातला) इत्यादींमध्ये. 'रा' म्हणजे शब्द (आवाज) म्हटला जातो. 'गीतं' म्हणजे गायन. ခေ [Pg.209] ဇေ သေ ခယေ. ခါယတိ. ဇာယတိ. သာယတိ. ခယံ ဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. 'खे', 'जे', 'से' हे धातू क्षय (नाश) होण्याच्या अर्थात आहेत. खायति. जायति. सायति. (या सर्वांचा) 'क्षयाला जाणे' (नाश पावणे) असा अर्थ आहे. ဧတ္ထ ပန သိယာ ‘‘နနု စ ဘော ခါယတီတိ ပဒဿ ခါဒတီတိ ဝါ ပညာယတီတိ ဝါ အတ္ထော ဘဝတိ, တထာ ဇာယတီတိ ပဒဿ နိဗ္ဗတ္တတီတိ အတ္ထော, သာယတီတိ ပဒဿ ရသံ အဿာဒေတီတိ အတ္ထော, ဧဝံ သန္တေ ဘော ကသ္မာ ဣဓ ဧဝံ အတ္ထော တုမှေဟိ ကထိယတီ’’တိ? သစ္စံ, ဓာတူနန္တု အနေကတ္ထတ္တာ ဧဝံ အတ္ထော ကထေတုံ လဗ္ဘတိ. တထာ ဟိ ‘‘အပ္ပဿုတာယံ ပုရိသော, ဗလိဗဒ္ဒေါဝ ဇီရတီ’’တိ ဧတ္ထ ဇီရတီတိ အယံ သဒ္ဒေါ ဇရံ ပါပုဏာတီတိ အတ္ထံ အဝတွာ ဝဍ္ဎတီတိ အတ္ထမေဝ ဝဒတိ, ဧဝံ သမ္ပဒမိဒံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. परंतु येथे अशी शंका येऊ शकते की, 'अहो, 'खायति' या पदाचा अर्थ 'खातो' किंवा 'दिसतो/प्रकट होतो' असा होतो; तसेच 'जायति' या पदाचा अर्थ 'उत्पन्न होतो' असा होतो; आणि 'सायति' या पदाचा अर्थ 'चव घेतो' असा होतो; असे असताना, अहो, तुम्ही येथे असा (क्षय होण्याचा) अर्थ का सांगत आहात?' हे सत्य आहे, परंतु धातूंचे अनेक अर्थ असल्यामुळे असा अर्थ सांगता येतो. जसे की, 'अप्पस्सुतायं पुरिसो, बलिबद्दोव जीरति' (हा अल्पश्रुत मनुष्य बैलाप्रमाणे जीर्ण होतो/वाढतो) येथे 'जीरति' हा शब्द 'वृद्धत्व प्राप्त करतो' हा अर्थ न सांगता 'वाढतो' (केवळ शरीराने वाढतो) हाच अर्थ सांगतो, त्याचप्रमाणे हे देखील समजले पाहिजे. ဂု ဃု ကု ဥ သဒ္ဒေ. ဂဝတိ. ဃဝတိ. ကဝတိ. အဝတိ. 'गु', 'घु', 'कु', 'उ' हे धातू आवाजाच्या (शब्दाच्या) अर्थात आहेत. गवति. घवति. कवति. अवति. ခု ရု ကု သဒ္ဒေ. ခေါတိ. ရောတိ. ကောတိ. 'खु', 'रु', 'कु' हे धातू आवाजाच्या (शब्दाच्या) अर्थात आहेत. खोति. रोति. कोति. စု ဇု ပု ပ္လု ဂါ သေ ဂတိယံ. စဝတိ. ဇဝတိ. ပဝတိ. ပ္လဝတိ. ဂါတိ. သေတိ. စဝနံ, စုတိ. ဇဝနံ, ဇဝေါ. ပဝနံ, ပ္လဝနံ. ဂါနံ. သေတု. ပေါတော. ပ္လဝေါ. 'चु', 'जु', 'पु', 'प्लु', 'गा', 'से' हे धातू गतीच्या (जाण्याच्या) अर्थात आहेत. चवति (च्युत होतो/मरण पावतो). जवति (वेगाने जातो). पवति (वाहतो/जातो). प्लवति (पोहतो/तरंगतो). गाति (जातो). सेति (झोपतो/जातो). चवनं, चुति (च्युती/मृत्यू). जवनं, जवो (वेग/वेगवान गती). पवनं, प्लवनं (पोहणे/तरंगणे). गानं (गमन/जाणे). सेतु (पूल). पोतो (नाव/जहाज). प्लवो (नाव/तरफा). ဧတ္ထ ဂါနန္တိ ဂမနံ. ပေါတောတိ ပဝတိ ဂစ္ဆတိ ဥဒကေ ဧတေနာတိ ပေါတော, နာဝါ. တထာ ပ္လဝတိ န သီဒတီတိ ပ္လဝေါ, နာဝါ ဧဝ. ‘‘ဘိန္နပ္လဝေါ သာဂရဿေဝ မဇ္ဈေ’’တိ ဟိ ဇာတကပါဠိ ဒိဿတိ. ‘‘နာဝါ, ပေါတော, ပ္လဝေါ, ဇလယာနံ, တရဏ’’န္တိ နာဝါဘိဓာနာနိ. येथे 'गानं' म्हणजे गमन (जाणे). 'पोतो' म्हणजे ज्याच्याद्वारे पाण्यात 'पवति' म्हणजे गमन केले जाते (प्रवास केला जातो) ती 'पोतो' म्हणजेच नौका (नाव). तसेच जो 'प्लवति' म्हणजे बुडत नाही तो 'प्लवो' म्हणजेच नौकाच होय. कारण जातकपाळीमध्ये 'भिन्नप्लवो सागरस्सेव मज्झे' (समुद्राच्या मध्यभागी फुटलेल्या नौकेप्रमाणे) असे आढळते. 'नावा, पोतो, प्लवो, जलयानं, तरणं' ही नौकेची (नावेची) नावे (समानार्थी शब्द) आहेत. ဓေ ထေ သဒ္ဒသံဃာတေသု. ဓာယတိ. ထာယတိ. ဘာဝေ – ဓိယတိ, ထိယတိ. ဣတ္ထီ. ထီ. 'धे', 'थे' हे धातू आवाज आणि समूहाच्या अर्थात आहेत. धायति. थायति. भावार्थात – धियति, थियति. इत्थी (स्त्री). थी (स्त्री). ဒေ တေ ပါလနေ. ဒါယတိ. ဒယာ. တာဏံ. 'दे', 'ते' हे धातू रक्षणाच्या अर्थात आहेत. दायति. दया. ताणं (त्राण/रक्षण). ရာ လာ အာဒါနေ. ရာတိ. လာတိ. 'रा', 'ला' हे धातू ग्रहण करण्याच्या (घेण्याच्या) अर्थात आहेत. राति. लाति. အတိ အဒိ ဗန္ဓနေ. အန္တတိ. အန္ဒတိ. အန္တံ. အန္ဒု. 'अति', 'अदि' हे धातू बांधण्याच्या अर्थात आहेत. अन्तति. अन्दति. अन्त (आतडे/मर्यादा). अन्दु (साखळी/बेडी). ဇုတသုဘ [Pg.210] ရုစ ဒိတ္တိယံ. ဇောတတိ. သောဘတိ. ရောစတိ, ဝိရောစတိ. 'जुत', 'सुभ', 'रुच' हे धातू दीप्तीच्या (प्रकाशाच्या/शोभेच्या) अर्थात आहेत. जोतति (प्रकाशतो). सोभति (शोभतो). रोचति, विरोचति (आवडतो, विशेष शोभतो). အက အဂ ကုဋိလာယံ ဂတိယံ. အကတိ. အဂတိ. 'अक', 'अग' हे धातू वक्र (वाकड्या) गतीच्या अर्थात आहेत. अकति. अगति. နာထ နာဓ ယာစနောပတာပိဿရိယာသီသာသု. နာထတိ. နာဓတိ. 'नाथ', 'नाध' हे धातू याचना (मागणी), उपताप (त्रास देणे), ऐश्वर्य (प्रभुत्व) आणि आशिष (इच्छा) या अर्थांमध्ये आहेत. नाथति. नाधति. သလ ဟုလ စလ ကမ္ပနေ. သလတိ. ဟုလတိ. စလတိ. ကုသလံ. 'सल', 'हुल', 'चल' हे धातू कंपनाच्या (थरथरण्याच्या/हलण्याच्या) अर्थात आहेत. salati. hulati. calati. कुसलं (कुशल). ဧတ္ထ စ ကုစ္ဆိတေ ပါပကေ ဓမ္မေ သလယတီတိ ကုသလံ, ဟေတုကတ္တုဝသေနိဒံ နိဗ္ဗစနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. တထာ ဟိ အဋ္ဌသာလိနိယံ ‘‘ကုစ္ဆိတေ ပါပကေ ဓမ္မေ သလယန္တိ စလယန္တိ ကမ္ပေန္တိ ဝိဒ္ဓံသေန္တီတိ ကုသလာ’’တိ ဟေတုကတ္တုဝသေန အတ္ထော ကထိတော. ဣဒံ သလဓာတုဝသေန ကုသလသဒ္ဒဿ နိဗ္ဗစနံ. အညေသမ္ပိ ဓာတူနံ ဝသေန ကုသလသဒ္ဒဿ နိဗ္ဗစနံ ဘဝတိ. တထာ ဟိ အဋ္ဌသာလိနိယံ အညာနိပိ နိဗ္ဗစနာနိ ဒဿိတာနိ. ကထံ? ‘‘ကုစ္ဆိတေန ဝါ အာကာရေန သယန္တီတိ ကုသာ, တေ အကုသလဓမ္မသင်္ခါတေ ကုသေ လုနန္တိ ဆိန္ဒန္တီတိ ကုသလာ. ကုစ္ဆိတာနံ ဝါ သာနတော တနုကရဏတော ဉာဏံ ကုသံ နာမ, တေန ကုသေန လာတဗ္ဗာတိ ကုသလာ, ဂဟေတဗ္ဗာ ပဝတ္တေတဗ္ဗာတိ အတ္ထော. ယထာ ဝါ ကုသာ ဥဘယဘာဂဂတံ ဟတ္ထပ္ပဒေသံ လုနန္တိ, ဧဝမိမေပိ ဥပ္ပန္နာနုပ္ပန္နဘာဝေန ဥဘယဘာဂဂတံ ကိလေသပက္ခံ လုနန္တိ, တသ္မာ ကုသာ ဝိယ လုနန္တီတိပိ ကုသလာ’’တိ. ဧဝံ အညာနိပိ နိဗ္ဗစနာနိ ဒဿိတာနိ. တတြ ‘‘ဓမ္မာ’’ ဣတိ ပဒါပေက္ခံ ကတွာ တဒနုရူပလိင်္ဂဝစနဝသေန ‘‘ကုသလာ’’တိ နိဒ္ဒေသော ကတော, ဣဓ ပန သာမညနိဒ္ဒေသဝသေန ‘‘ကုသလ’’န္တိ နပုံသကေကဝစနနိဒ္ဒေသော အမှေဟိ ကတော. ပုညဝါစကော ဟိ ကုသလသဒ္ဒေါ အာရောဂျဝါစကော စ ဧကန္တေန နပုံသကလိင်္ဂေါ, ဣတရတ္ထဝါစကော ပန တိလိင်္ဂိကော, ယထာ ကုသလော ဖဿော, ကုသလာ ဝေဒနာ. ကုသလံ စိတ္တန္တိ. ကုသလသဒ္ဒေါ [Pg.211] ဣမသ္မိံ ဘူဝါဒိဂဏေ လာဓာတုသလဓာတုဝသေန နိပ္ဖတ္တိံ ဂတောတိ ဝေဒိတဗ္ဗော. ဣတိ ဘူဝါဒိဂဏေ သမောဓာနဂတဓာတုယော သမတ္တာ. आणि येथे, जे निंद्य, पापी धर्मांना 'सलयति' म्हणजे कंपित करतात (नष्ट करतात) ते 'कुसलं' (कुशल) होय; हे प्रयोजक कर्तृत्वाच्या (हेतुकर्तृत्वाच्या) दृष्टीने व्युत्पत्तीचे लक्षण समजले पाहिजे. तसेच 'अट्ठसालिनी'मध्ये म्हटले आहे— 'जे निंद्य, पापी धर्मांना कंपित करतात, हलवतात, थरथरवून सोडतात, नष्ट करतात ते कुशल होत' असा प्रयोजक अर्थ सांगितला आहे. ही 'सल' धातूच्या आधारे 'कुशल' शब्दाची व्युत्पत्ती आहे. इतर धातूंच्या आधारेही 'कुशल' शब्दाची व्युत्पत्ती होते. तसेच 'अट्ठसालिनी'मध्ये इतरही व्युत्पत्ती दाखवल्या आहेत. कशा प्रकारे? 'जे निंद्य किंवा वाईट रीतीने शयन करतात (पडून राहतात) ते 'कुस' (अकुशल धर्म) होत; त्या अकुशल धर्म नावाच्या कुसांना जे 'लुनन्ति' म्हणजे कापतात, नष्ट करतात ते 'कुसला' (कुशल) होत. किंवा निंद्य गोष्टींचे 'सान' म्हणजे क्षीण (कमी) करण्यामुळे ज्ञानाला 'कुस' म्हणतात; त्या कुसाने (ज्ञानाने) जे ग्रहण केले पाहिजे ते 'कुसला' (कुशल), म्हणजेच ग्रहण करण्यायोग्य किंवा प्रवृत्त करण्यायोग्य असा अर्थ आहे. किंवा ज्याप्रमाणे 'कुस' (दर्भ/कुश नावाचे गवत) दोन्ही बाजूंनी हाताला कापते, त्याचप्रमाणे हे (कुशल धर्म) देखील उत्पन्न झालेल्या आणि उत्पन्न न झालेल्या दोन्ही प्रकारच्या क्लेशपक्षाला कापतात, म्हणून कुशाप्रमाणे कापतात म्हणूनही 'कुसला' (कुशल) होत.' अशा प्रकारे इतरही व्युत्पत्ती दाखवल्या आहेत. तेथे 'धम्मा' (धर्म) या पदाची अपेक्षा ठेवून, त्यानुसार लिंग व वचनाच्या आधारे 'कुसला' (पुल्लिंगी बहुवचन) असा निर्देश केला आहे, परंतु येथे सामान्य निर्देशानुसार आम्ही 'कुसलं' असा नपुंसकलिंगी एकवचनी निर्देश केला आहे. कारण पुण्यवाचक आणि आरोग्यवाचक असलेला 'कुसल' शब्द निश्चितपणे नपुंसकलिंगी असतो, परंतु इतर अर्थांचा वाचक असलेला शब्द तिन्ही लिंगांत चालतो; जसे की— 'कुसलो फस्सो' (कुशल स्पर्श), 'कुसला वेदना' (कुशल वेदना), 'कुसलं चित्तं' (कुशल चित्त). 'कुसल' शब्द या भूवादी गणात 'ला' धातू आणि 'सल' धातूच्या आधारे निष्पन्न झाला आहे, असे समजावे. अशा प्रकारे भूवादी गणातील एकत्रित केलेले धातू समाप्त झाले. ဣစ္စေဝံ – अशा प्रकारे – ဝိတ္ထာရတော စ သင်္ခေပါ, ဘူဝါဒီနံ ဂဏော မယာ; ယော ဝိဘတ္တော သဥဒ္ဒေသော, သနိဒ္ဒေသော ယထာရဟံ. माझ्याद्वारे भूवादी गणाचे सविस्तर आणि संक्षेपाने, उद्देशासह (सूत्रांसह) आणि निर्देशानुसार (उदाहरणांसह) योग्य प्रकारे वर्गीकरण केले गेले आहे. ဥပသဂ္ဂနိပါတေဟိ, နာနာအတ္ထယုတေဟိ စ; ယောဇေတွာန ပဒါနေတ္ထ, ဒဿိတာနိ ဝိသုံ ဝိသုံ. विविध अर्थांनी युक्त असलेल्या उपसर्ग आणि निपातांशी जोडून, येथील पदे वेगवेगळी करून दाखवली आहेत. ပါဠိနိဒဿနာဒီဟိ, ဒဿိတာနိ သဟေဝ တု; တျာဒျန္တာနိ စ ရူပါနိ, သျာနျန္တာနိ စ သဗ္ဗသော. पाळीच्या (मूळ पाठाच्या) उदाहरणांसह, 'ति-आदी' (क्रियापद) प्रत्ययांनी युक्त रूपे आणि 'सि-आदी' (नाम) प्रत्ययांनी युक्त रूपे सर्व प्रकारे दाखवली आहेत. ပဒါနံ သဒိသတ္တဉ္စ, တထာ ဝိသဒိသတ္တနံ; စောဒနာပရိဟာရေဟိ, သဟိတော စတ္ထနိစ္ဆယော. पदांचे साधर्म्य (सारखेपणा) आणि वैधर्म्य (वेगळेपणा), तसेच आक्षेप आणि त्यांचे परिहार (शंका-समाधान) यांसह अर्थाचा निश्चय केला आहे. အတ္ထုဒ္ဓါရော’ဘိဓာနဉ္စ, လိင်္ဂတ္တယဝိမိဿနံ; အဘိဓေယျကလိင်္ဂေသု, သဝိသေသပဒါနိ စ. अर्थाचा उद्धार (स्पष्टीकरण), संज्ञा (नावे), तिन्ही लिंगांचे मिश्रण आणि विशेष्य व लिंगांमधील विशेष पदे (दाखवली आहेत). နာနာပဒဗဟုပ္ပဒ-သမောဓာနဉ္စ ဒဿိတံ; ရူဠှီသဒ္ဒါဒယော စေဝ, သုဝိဘတ္တာ အနာကုလာ. विविध पदे आणि अनेक पदांचे एकत्रीकरण (समास) दाखवले आहे, तसेच रूढ शब्द इत्यादींचे स्पष्ट आणि गोंधळरहित वर्गीकरण केले आहे. သဗ္ဗနာမံ သဗ္ဗနာမ-သဒိသာနိ ပဒါနိ စ; နာနာပဒေဟိ ယောဇေတုံ, ဒဿိတာနိ ယထာရဟံ. सर्वनाम आणि सर्वनामासारखे शब्द, विविध शब्दांशी जोडण्यासाठी, योग्यतेनुसार (यथायोग्य) दाखवले गेले आहेत. တုမန္တာနိ စ ရူပါနိ, တွာဒျန္တာနိ စ ဝိညူနံ; ပိဋကေ ပါဋဝတ္ထာယ, သဗ္ဗမေတံ ပကာသိတံ. आणि 'तुम्' प्रत्ययान्त (तुमुन्-प्रत्ययान्त) रूपे आणि 'त्वा' प्रत्ययान्त रूपे, विद्वानांच्या पिटकातील प्राविण्यासाठी, हे सर्व प्रकाशित केले गेले आहे. ယေ သဒ္ဒနီတိမှိ ဣမံ ဝိဘာဂံ,ဇာနန္တိ သမ္မာ မုနိသာသနေ တေ; အတ္ထေသု သဗ္ဗေသုပိ ဝီတကင်္ခါ,အစ္ဆမ္ဘိနော သီဟသမာ ဘဝန္တိ. जे या 'सद्दनीति' मधील या विभागाला मुनींच्या (बुद्धांच्या) शासनात चांगल्या प्रकारे जाणतात, ते सर्व अर्थांविषयी शंकारहित होऊन, सिंहाप्रमाणे निर्भय बनतात. ဝိဘူတဘုတဂ္ဂသယမ္ဘုစက္ကေ[Pg.212],သုဘူတဘူရိံ ဝဒတာ နရာနံ; ယော သဒ္ဒနီတိမှိ ဘုဝါဒိကဏ္ဍော,ဝုတ္တော မယာ တံ ဘဇထတ္ထကာမော. ज्यांने प्राण्यांमध्ये श्रेष्ठ अशा स्वयंभूच्या चक्रात (धम्मचक्रात) मनुष्यांना विपुल सत्याचा उपदेश केला आहे, त्या 'सद्दनीति' मधील माझ्याद्वारे सांगितलेल्या 'भुवादि-कांडा'चे कल्याण इच्छिणाऱ्यांनी सेवन (अभ्यास) करावे. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकातील वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ...कौशल्यासाठी (प्राविण्यासाठी) रचलेल्या 'सद्दनीति' ग्रंथात... ပန္နရသဟိ ပရိစ္ဆေဒေဟိ မဏ္ဍိတော ဘူဝါဒိဂဏော နာမ ...पंधरा परिच्छेदांनी (अध्यायांनी) सुशोभित असलेला 'भुवादिगण' नावाचा... သောဠသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. सोळावा परिच्छेद. ၁၇. ရုဓာဒိဆက္က १७. रुधादि-षट्क (रुधादि सहा धातूंचा समूह). ရုဓာဒိဂဏိက रुधादिगणीय (रुधादि गणाशी संबंधित). ဣတော ပရံ ပဝက္ခာမိ, ရုဓာဒိကဂဏာဒယော; သာသနဿောပကာရာယ, ဂဏေ တု ဆဗ္ဗိဓေ ကထံ. यानंतर, शासनाच्या (बुद्धशासनाच्या) उपकारासाठी, मी रुधादि गणादींविषयी सांगेन की सहा प्रकारच्या गणांचे स्वरूप कसे आहे. ရုဓိ အာဝရဏေ. ရုဓိဓာတု အာဝရဏေ ဝတ္တတိ. ဧတ္ထ အာဝရဏံ နာမ ပိဒဟနံ ဝါ ပရိရုန္ဓနံ ဝါ ပလိဗုဒ္ဓနံ ဝါ ဟရိတုံ ဝါ အပ္ပဒါနံ, သဗ္ဗမေတံ ဝဋ္ဋတိ. ရုန္ဓတိ, ရုန္ဓိတိ, ရုန္ဓီတိ, ရုန္ဓေတိ, အဝရုန္ဓေတိ. ကမ္မနိ – မဂ္ဂေါ ပုရိသေန ရုန္ဓိယတိ. ရောဓော, ဩရောဓော, ဝိရောဓော, ပဋိဝိရောဓော, ဝိရုဒ္ဓေါ, ပဋိဝိရုဒ္ဓေါ, ပရိရုဒ္ဓေါ. ရုန္ဓိတုံ, ပရိရုန္ဓိတုံ. ရုန္ဓိတွာ. ပရိရုန္ဓိတွာ. 'रुध्' (धातू) आवरण (रोखणे/झाकणे) या अर्थात आहे. 'रुध्' धातू आवरण अर्थात वापरला जातो. येथे 'आवरण' म्हणजे झाकणे, किंवा रोखणे, किंवा अडथळा आणणे, किंवा घेऊन जाण्यास न देणे, हे सर्व अर्थ लागू होतात. रुन्धति, रुन्धिति, रुन्धीति, रुन्धेति, अवरुन्धेति. कर्मणी प्रयोगात – 'मग्गो पुरिसेन रुन्धियति' (माणसाकडून रस्ता अडवला जातो). रोध, ओरोध, विरोध, पटिविरोध, विरुद्ध, पटिविरुद्ध, परिरुद्ध. रुन्धितुं, परिरुन्धितुं. रुन्धित्वा, परिरुन्धित्वा. တတြ ရောဓောတိ စာရကော. သော ဟိ ရုန္ဓတိ ပဝေသိတာနံ ကုရူရကမ္မန္တာနံ သတ္တာနံ ဂမနံ အာဝရတီတိ ရောဓောတိ ဝုစ္စတိ. ဩရောဓောတိ ရာဇုဗ္ဗရီ, သာ ပန ယထာကာမစာရံ စရိတုံ အပ္ပဒါနေန ဩရုန္ဓိယတိ အဝရုန္ဓိယတီတိ ဩရောဓော. ဝိရောဓောတိ အနနုကူလတာ. ပဋိဝိရောဓောတိ ပုနပ္ပုနံ အနနုကူလတာ. ဝိရုဒ္ဓေါတိ ဝိရောဓံ အာပန္နော. ပဋိဝိရုဒ္ဓေါတိ ပဋိသတ္တုဘာဝေန [Pg.213] ဝိရောဓံ အာပန္နော. ပရိရုဒ္ဓေါတိ ဂဟဏတ္ထာယ သမ္ပရိဝါရိတော. ဝုတ္တဉှိ ‘‘ယထာ အရီဟိ ပရိရုဒ္ဓေါ, ဝိဇ္ဇန္တေ ဂမနေ ပထေ’’တိ. အဝရုဒ္ဓေါတိ ပဗ္ဗာဇိတော. त्यापैकी 'रोध' म्हणजे कारागृह (तुरुंग). कारण ते आत टाकलेल्या क्रूर कर्म करणाऱ्या प्राण्यांचे जाणे रोखते (त्यांच्या गमनावर आवरण घालते), म्हणून त्याला 'रोध' असे म्हणतात. 'ओरोध' म्हणजे अंतःपूर (राण्यांचे निवासस्थान); ती (राणी) आपल्या इच्छेनुसार फिरण्यास प्रतिबंध केल्यामुळे अडवून ठेवली जाते, म्हणून 'ओरोध'. 'विरोध' म्हणजे अनुकूल नसणे (प्रतिकूलता). 'पटिविरोध' म्हणजे वारंवार अनुकूल नसणे. 'विरुद्ध' म्हणजे विरोधाला प्राप्त झालेला. 'पटिविरुद्ध' म्हणजे शत्रूभावाने विरोधाला प्राप्त झालेला. 'परिरुद्ध' म्हणजे पकडण्यासाठी चहूबाजूंनी वेढलेला. कारण असे म्हटले आहे – 'ज्याप्रमाणे शत्रूंनी वेढलेला, जाण्याचा मार्ग असतानाही...'. 'अवरुद्ध' म्हणजे हद्दपार केलेला (निर्वासित केलेला). မုစ မောစနေ. မိဂံ ဗန္ဓနာ မုဉ္စတိ. မုဉ္စနံ, မောစနံ. ဒုက္ခပ္ပမောစနံ, မောစော. 'मुच्' (धातू) मोचन (मुक्त करणे) या अर्थात आहे. 'मिगं बन्धना मुञ्चति' (तो हरणाला बंधनातून मुक्त करतो). मुञ्चन, मोचन, दुक्खप्पमोचन (दुःखातून मुक्ती), मोच. မောစောတိ စေတ္ထ အဋ္ဌိကကဒလီရုက္ခော. မုဉ္စိတုံ. မုဉ္စိတွာ. ကာရိတေ ‘‘မောစေတိ, မောစေတုံ, မောစေတွာ’’တိအာဒီနိ. आणि येथे 'मोच' म्हणजे बिया असलेले केळीचे झाड. मुञ्चितुं, मुञ्चित्वा. प्रयोजक (कारित) रूपात – 'मोचेति, मोचेतुं, मोचेत्वा' इत्यादी. ရိစ ဝိရေစနေ. ရိဉ္စတိ. ရိဉ္စနံ, ဝိရေစနံ, ဝိရေကော, ဝိရေစကော. ရိဉ္စိတုံ. ရိဉ္စိတွာ. 'रिच्' (धातू) विरेचन (साफ करणे/रिकामे करणे) या अर्थात आहे. रिञ्चति. रिञ्चन, विरेचन, विरेक, विरेचक. रिञ्चितुं, रिञ्चित्वा. သိစ ပဂ္ဃရဏေ. ဥဒကေန ဘူမိံ သိဉ္စတိ. ပုတ္တံ ရဇ္ဇေ အဘိသိဉ္စိ. အဘိသေကော. မုဒ္ဓါဘိသိတ္တော ခတ္တိယော. သိဉ္စ ဘိက္ခု ဣမံ နာဝံ, သိတ္တာ တေ လဟုမေဿတိ. သိတ္တဋ္ဌာနံ. သိဉ္စိတုံ. သိဉ္စိတွာ. 'सिच्' (धातू) प्रघरण (सिंचन करणे/शिंपडणे) या अर्थात आहे. 'उदकेन भूमिं siञ्चति' (तो पाण्याने जमीन सिंचन करतो/शिंपडतो). 'पुत्तं रज्जे अभिसिञ्चि' (त्याने पुत्राचा राज्यावर अभिषेक केला). अभिषेक. 'मुद्धाभिसित्त' (मूर्धाभिषिक्त) क्षत्रिय. 'हे भिक्खू, या नौकेतील पाणी उपस (सिंचन कर), रिकामी झाल्यावर ती तुझ्यासाठी हलकी होईल.' सिंचन केलेले स्थान (सित्तट्ठान). सिञ्चितुं, सिञ्चित्वा. ယုဇ ယောဂေ. ယုဉ္ဇတိ, အနုယုဉ္ဇတိ. ကမ္မနိ ‘‘ယုဉ္ဇိယတီ’’တိ ရူပါနိ. ကေစိ ‘‘ယုဉ္ဇတေ’’တိ ဣစ္ဆန္တိ. ယုဉ္ဇနံ, သံယောဂေါ, အနုယောဂေါ, ဘာဝနာနုယုတ္တော, သညောဂေါ, သညောဇနံ, အတ္ထယောဇနာ. ဒီဃံ သန္တဿ ယောဇနံ. ယုဉ္ဇိတုံ, အနုယုဉ္ဇိတုံ. အနုယုဉ္ဇိတွာ. ယောဇေတိ. တတ္ထ သံယောဇနန္တိ ဗန္ဓနံ ကာမရာဂါဒိ. ယောဇနန္တိ – 'युज्' (धातू) योग (जोडणे/युक्त होणे) या अर्थात आहे. युञ्जति, अनुयुञ्जति. कर्मणी प्रयोगात 'युञ्जियति' अशी रूपे होतात. काही जण 'युञ्जते' असे मानतात. युञ्जन, संयोग, अनुयोग, भावनानुयुत्त (भावनेत/ध्यानात मग्न असलेला), सञ्ञोग, सञ्ञोजन (संयोजन/बंधन), अत्थयोजना (अर्थ लावणे). 'थकलेल्या माणसाला योजन (अंतर) लांब वाटते.' युञ्जितुं, अनुयुञ्जितुं, अनुयुञ्जित्वा, योजेति. तेथे 'सञ्ञोजन' म्हणजे कामराग इत्यादींचे बंधन. 'योजन' म्हणजे – ဝိဒတ္ထိ ဒွါဒသင်္ဂုလျော, တဒွယံ ရတနံ မတံ; သတ္တရတနိကာ ယဋ္ဌိ, ဥသဘံ ဝီသယဋ္ဌိကံ; ဂါဝုတံ ဥသဘာသီတိ, ယောဇနံ စတုဂါဝုတံ. बारा अंगुळे म्हणजे एक वितस्त (विण); त्याच्या दुप्पट म्हणजे एक रतना (हात) मानले जाते; सात रतना (हात) म्हणजे एक यठ्ठि (काठी); वीस यठ्ठि म्हणजे एक उसभ; ऐंशी उसभ म्हणजे एक गावुत आणि चार गावुत म्हणजे एक योजन होय. ဘုဇ ပါလနဗျဝဟရဏေသု. ပါလနံ ရက္ခဏံ. ဗျဝဟရဏံ အဇ္ဈောဟရဏံ. ဘုဉ္ဇတိ, ပရိဘုဉ္ဇတိ, သံဘုဉ္ဇတိ. ဒါသပရိဘောဂေန ပရိဘုဉ္ဇိ. ကာရိတေ ‘‘ဘောဇေတိ ဘောဇယတီ’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ. ဘောဇနံ, သမ္ဘောဂေါ, မဟိဘုဇော, ဂါမဘောဇကော[Pg.214], ဥပဘောဂေါ, ပရိဘောဂေါ. ဘုတ္တော ဩဒနော ဘဝတာ. သစေ ဘုတ္တော ဘဝေယျာဟံ. ဩဒနံ ဘုတ္တော ဘုတ္တဝါ ဘုတ္တာဝီ. တုမန္တာဒိတ္တေ ‘‘ဘုဉ္ဇိတုံ, ပရိဘုဉ္ဇိတုံ, ဘောဇေတုံ, ဘောဇယိတုံ, ဘုဉ္ဇိတွာ, ဘုဉ္ဇိတွာန, ဘုဉ္ဇိယ, ဘုဉ္ဇိယာန, ဘောဇေတွာ, ဘောဇေတွာန, ဘောဇယိတွာ, ဘောဇယိတွာန’’ ဣစ္စာဒီနိ ပရိသဒ္ဒါဒီဟိ ဝိသေသိတဗ္ဗာနိ. 'भुज्' (धातू) पालन (रक्षण करणे) आणि व्यवहार (उपभोग घेणे/खाणे) या अर्थांमध्ये आहे. 'पालन' म्हणजे रक्षण करणे. 'व्यवहार' म्हणजे गिळणे/खाणे. भुञ्जति, परिभुञ्जति, सम्भुञ्जति. 'दासपरिभोगेन परिभुञ्जि' (त्याने दासाच्या उपभोगाप्रमाणे उपभोग घेतला). प्रयोजक (कारित) रूपात – 'भोजेति, भोजयति' इत्यादी रूपे होतात. भोजन, सम्भोग, महिभुज (राजा), गामभोजक (ग्रामप्रमुख), उपभोग, परिभोग. 'भुत्तो ओदनो भवता' (आपल्याद्वारे भात खाल्ला गेला). 'सचे भुत्तो भवेय्याहं' (जर मी जेवलो असतो). भात खाल्लेला – 'ओदनं भुत्तो', 'भुत्तवा', 'भुत्तावी'. 'तुमुन्' इत्यादी प्रत्ययांमध्ये – 'भुञ्जितुं, परिभुञ्जितुं, भोजेतुं, भोजयितुं, भुञ्जित्वा, भुञ्जित्वान, भुञ्जिय, भुञ्जियान, भोजेत्वा, भोजेत्वान, भोजयित्वा, भोजयित्वान' इत्यादी रूपे 'परि' इत्यादी उपसर्गांद्वारे विशेषित केली जावीत. တတြ ဘုဉ္ဇတီတိ ဘတ္တံ ဘုဉ္ဇတိ, ဘောဇနီယံ ဘုဉ္ဇတိ. တထာ ဟိ ‘‘ခါဒနီယံ ဝါ ဘောဇနီယံ ဝါ ခါဒတိ ဝါ ဘုဉ္ဇတိ ဝါ’’တိအာဒိ ဝုတ္တံ. အပိစ ကဒါစိ ခါဒနီယေပိ ‘‘ဘုဉ္ဇတီ’’တိ ဝေါဟာရော ဒိဿတိ. ‘‘ဖလာနိ ခုဒ္ဒကပ္ပာနိ, ဘုဉ္ဇ ရာဇ ဝရာဝရ’’န္တိ ဟိ ဝုတ္တံ. ပရိဘုဉ္ဇတီတိ စီဝရံ ပရိဘုဉ္ဇတိ, ပိဏ္ဍပါတံ ပရိဘုဉ္ဇတိ, ဂိလာနပစ္စယဘေသဇ္ဇပရိက္ခာရံ ပရိဘုဉ္ဇတိ, ပဋိသေဝတီတိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. တေနေဝ စ ပဋိသေဝတီတိ ပရိဘုဉ္ဇတီတိ အတ္ထော သံဝဏ္ဏိယတိ. အပိစ ‘‘ကာမေ ဘုဉ္ဇတီ’’တိ စ ‘‘ပဉ္စကာမဂုဏေ ပရိဘုဉ္ဇတီ’’တိ စ ဒဿနတော ပန ဘုဉ္ဇနပရိဘုဉ္ဇနသဒ္ဒါ ပဋိသေဝနတ္ထေန ကတ္ထစိ သမာနတ္ထာပိ ဟောန္တီတိ အဝဂန္တဗ္ဗာ. သံဘုဉ္ဇတီတိ သမ္ဘောဂံ ကရောတိ, ဧကတော ဝါသံ ကရောတီတိ အတ္ထော. ဧတ္ထ သိယာ ‘‘နနု စ ဘော အတြ ဘုဇဓာတု ပါလနဗျဝဟရဏေသု ဝုတ္တော, သော ကထံ ဧတ္တကေသုပိ အတ္ထေသု ဝတ္တတီ’’တိ? ဝတ္တတေဝ, အနေကတ္ထာ ဟိ ဓာတဝေါ, တေ ဥပသဂ္ဂသဟာယေ လဘိတွာပိ အနေကတ္ထတရာဝ ဟောန္တိ. ဣတော ပဋ္ဌာယ တုမန္တာဒီနိ ရူပါနိ န ဝက္ခာမ. ယတ္ထ ပန ဝိသေသော ဒိဿတိ, တတ္ထ ဝက္ခာမ. त्यापैकी 'भुञ्जति' म्हणजे भात खातो, भोजन (मऊ अन्न) खातो. कारण असे म्हटले आहे – 'खाद्य किंवा भोज्य खातो किंवा उपभोगतो' इत्यादी. शिवाय, कधीकधी खाण्याच्या पदार्थांच्या (खाद्याच्या) बाबतीतही 'भुञ्जति' असा प्रयोग दिसतो. कारण असे म्हटले आहे – 'हे राजा, लहान-मोठी फळे खा (भुञ्ज).' 'परिभुञ्जति' म्हणजे चीवराचा उपभोग घेतो, पिंडपाताचा उपभोग घेतो, आजारी माणसाच्या औषध-साहित्याचा उपभोग घेतो; म्हणजेच तो त्याचे सेवन करतो (पटिसेवति). म्हणूनच 'परिभुञ्जति' चा अर्थ 'सेवन करतो' (पटिसेवति) असा स्पष्ट केला जातो. शिवाय, 'कामांचा उपभोग घेतो' (कामे भुञ्जति) आणि 'पंचकामगुणांचा उपभोग घेतो' (पञ्चकामगुणे परिभुञ्जति) असे पाहिल्यावरून हे समजले पाहिजे की, 'भुञ्जन' आणि 'परिभुञ्जन' हे शब्द सेवन करण्याच्या अर्थात काही ठिकाणी समान अर्थाचेही असतात. 'सम्भुञ्जति' म्हणजे एकत्र उपभोग घेतो किंवा एकत्र राहतो, असा अर्थ आहे. येथे शंका येऊ शकते की – 'अहो, येथे भुज् धातू तर पालन आणि व्यवहार (खाणे) या अर्थांमध्ये सांगितला आहे, मग तो एवढ्या सर्व अर्थांमध्ये कसा काय वापरला जातो?' तो वापरला जातोच, कारण धातू अनेक अर्थांचे असतात; आणि उपसर्गांचे सहाय्य मिळाल्यावर तर ते आणखीनच अनेक अर्थांचे होतात. येथून पुढे आम्ही 'तुमुन्' इत्यादी रूपे सांगणार नाही. परंतु जेथे काही विशेष दिसेल, तेथे सांगू. ကတိ ဆေဒနေ. ကန္တတိ, ဝိကန္တတိ. သလ္လကတ္တော. 'कत्' (धातू) छेदन (कापणे) या अर्थात आहे. कन्तति, विकन्तति. 'सल्लकत्तो' (शल्यचिकित्सक/सर्जन). ဘိဒိ ဝိဒါရဏေ. ဘိန္ဒတိ. အနာဂတတ္ထေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဘေဇ္ဇိဿတိ, ဘိန္ဒိဿတီ’’တိ ဒွိဓာ ဘဝန္တိ ရူပါနိ. ပါပကေ အကုသလေ ဓမ္မေ ဘိန္ဒတီတိ ဘိက္ခု. တေနာဟ – 'भिद्' (धातू) विदारण (फाडणे/फोडणे) या अर्थात आहे. भिन्दति. भविष्यकाळ सांगायचा असल्यास 'भेज्जिस्सति' आणि 'भिन्दिस्सति' अशी दोन प्रकारची रूपे होतात. जो पापयुक्त अकुशल धर्मांचा भेद करतो (नाश करतो), तो 'भिक्खू' होय. म्हणूनच म्हटले आहे – ‘‘န [Pg.215] တေန ဘိက္ခု သော ဟောတိ, ယာဝတာ ဘိက္ခတေ ပရေ; ဝိသံ ဓမ္မံ သမာဒါယ, ဘိက္ခု ဟောတိ န တာဝတာ. 'केवळ दुसऱ्यांकडे भिक्षा मागतो म्हणून कोणी भिक्खू होत नाही; विषारी (अधार्मिक) धर्माचे आचरण करून माणूस भिक्खू बनत नाही.' ယောဓ ပုညဉ္စ ပါပဉ္စ, ဗာဟိတွာ ဗြဟ္မစရိယံ; သင်္ခါယ လောကေ စရတိ, သဝေ ‘ဘိက္ခူ’တိ ဝုစ္စတီ’’တိ. 'जो येथे पुण्य आणि पाप या दोन्हीच्या पलीकडे जाऊन, ब्रह्मचर्याचे पालन करतो आणि विचारपूर्वक जगात वावरतो, त्यालाच खरोखर भिक्खू म्हटले जाते.' ဣဒဉ္စ ခီဏာသဝံ သန္ဓာယ ဝုတ္တံ, သေက္ခပုထုဇ္ဇနသမဏာပိ ယထာသမ္ဘဝံ ‘‘ဘိက္ခူ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗတံ ပါပုဏန္တိယေဝ. သံဃံ ဘိန္ဒတီတိ သံဃဘေဒကော. ဒေဝဒတ္တေန သံဃော ဘိန္နော,. ဘိန္ဒိယတီတိ ဘိန္နောတိ ဟိ နိဗ္ဗစနံ. န တေ ကဋ္ဌာနိ ဘိန္နာနိ. ဘိန္ဒတီတိ ဘေတ္တာ. आणि हे खीणासवांना (अर्हतांना) उद्देशून म्हटले आहे, परंतु सेक्ख (शैक्ष) आणि पुथुज्जन (पृथग्जन) श्रमण देखील यथासंभव 'भिक्खू' म्हणवून घेण्यास पात्र ठरतातच. जो संघाचा भेद करतो तो 'संघभेदक' होय. देवदत्ताने संघ भेदला (संघात फूट पाडली). 'भिन्दियति' (जे भेदले जाते) ते 'भिन्न' होय, अशी याची व्युत्पत्ती आहे. 'त्यांनी लाकडे फोडली नाहीत.' जो भेद करतो तो 'भेत्ता' (भेदणारा) होय. ဆိဒိ ဒွေဓာကရဏေ. ဆိန္ဒတီတိ ဆေဒကော, ဧဝံ ဆေတ္တာ. ကေသေ ဆေတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. ဆိန္ဒိယတီတိ ဆိန္နော. ဆိန္နောပိ ရုက္ခော ပုနဒေဝ ရူဟတိ. ဣဒံ ပန ဘိဒိဆိဒိဒွယံ ဒိဝါဒိဂဏံ ပတွာ ‘‘ဘိဇ္ဇတိ ဆိဇ္ဇတီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုဝါစကံ ရူပဒွယံ ဇနေတိ, တသ္မာ ‘‘ဘိဇ္ဇတီတိ ဘိန္နော’’တိအာဒိနာ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေနပိ နိဗ္ဗစနံ ကာတဗ္ဗံ. 'छिदि' धातू द्विधाकरण (दोन भाग करणे/कापणे) या अर्थात आहे. जो कापतो तो 'छेदक' किंवा 'छेत्ता' होय. केस कापणे योग्य आहे. जे कापले जाते ते 'छिन्न' होय. कापलेले झाड देखील पुन्हा उगवते. परंतु हे 'भिदि' आणि 'छिदि' हे दोन्ही धातू दिवादिगणात जाऊन 'भिज्जति, छिज्जति' अशी क्रियावाचक दोन रूपे तयार करतात, म्हणून 'भिज्जति म्हणून भिन्न' इत्यादी प्रकारे शुद्ध कर्तृवाचक अर्थाने देखील व्युत्पत्ती केली पाहिजे. တဒိ ဟိံသာနာဒရေသု. တန္ဒတိ. တန္ဒီ, တဒ္ဒု. တဒ္ဒတိ ကစ္ဆု. 'तदि' धातू हिंसा आणि अनादर या अर्थांमध्ये आहे. तन्दति. तन्दी (आळस), तद्दु (खाज/त्वचारोग). तद्दति कच्छु (खाज सुटते). ဥဒိ ပသဝကိလေဒနေသု. ပသဝနံ သန္ဒနံ. ကိလေဒနံ တိန္ဒတာ. ဥန္ဒတိ. ဥန္ဒူရော, သမုဒ္ဒေါ. 'उदि' धातू प्रसव (वाहणे/उत्पन्न करणे) आणि क्लेदन (ओले करणे) या अर्थांमध्ये आहे. प्रसव म्हणजे वाहणे (संदन). क्लेदन म्हणजे ओले होणे (तिन्दता). उन्दति (ओले करतो). उन्दूरो (उंदीर), समुद्दो (समुद्र). ဝိဒ လာဘေ. ဝိန္ဒတိ. ဂေါဝိန္ဒော, ဝိတ္တိ. ဧတ္ထ ဝိတ္တီတိ အနုဘဝနံ, ဝေဒနာ ဝါ. 'विद' धातू लाभ या अर्थात आहे. विन्दति (प्राप्त करतो). गोविन्दो (गोविंद), वित्ती (वृत्ती/अनुभूती). येथे 'वित्ती' म्हणजे अनुभव घेणे किंवा वेदना होय. ဝိဒ တုဋ္ဌိယံ. ဝိန္ဒတိ, နိဗ္ဗိန္ဒတိ. နိဗ္ဗိန္ဒနံ. ဝိရဇ္ဇတိ. နိဗ္ဗိန္ဒော ကာမရတိယာ. ဝိတ္တိ, ဝိတ္တံ, ဝေဒေါ. လဘတိ အတ္ထဝေဒံ ဓမ္မဝေဒံ. 'विद' धातू तुष्टी (संतोष) या अर्थात आहे. विन्दति (संतोष पावतो), निब्बिन्दति (कंटाळतो/वैराग्य पावतो). निब्बिन्दनं (वैराग्य). विरज्जति (विरक्त होतो). कामरतीपासून निब्बिन्द (वैराग्य). वित्ती, वित्तं (वित्त/धन), वेदो (वेद/ज्ञान). अर्थवेद आणि धम्मवेद प्राप्त करतो. ဧတ္ထ ဝိတ္တီတိ သောမနဿံ. ‘‘ဝိတ္တိ ဟိ မံ ဝိန္ဒတိ သုတ ဒိသွာ’’တိ ဟိ ဝုတ္တံ. ဝိတ္တန္တိ ဝိတ္တိဇနနတ္တာ ဝိတ္တသင်္ခါတံ ဓနံ. ဝေဒေါတိ [Pg.216] ဂန္ထောပိ ဉာဏမ္ပိ သောမနဿမ္ပိ ဝုစ္စတိ. ‘‘တိဏ္ဏံ ဝေဒါနံ ပါရဂူ’’တိအာဒီသု ဟိ ဂန္ထော ‘‘ဝေဒေါ’’တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဗြာဟ္မဏံ ဝေဒဂုမဘိဇညာ အကိဉ္စနံ ကာမဘဝေ အသတ္တ’’န္တိအာဒီသု ဉာဏံ. ‘‘ယေ ဝေဒဇာတာ ဝိစရန္တိ လောကေ’’တိအာဒီသု သောမနဿံ. येथे 'वित्ती' म्हणजे सोमनस्य (आनंद). कारण 'पुत्राला पाहून मला आनंद (वित्ती) प्राप्त होतो' असे म्हटले आहे. 'वित्त' म्हणजे आनंद उत्पन्न करणारे असल्यामुळे वित्ताने मोजले जाणारे धन. 'वेद' म्हणजे ग्रंथ, ज्ञान आणि सोमनस्य (आनंद) देखील म्हटले जाते. 'तीन वेदांचा पारगामी' इत्यादींमध्ये ग्रंथ या अर्थाने 'वेद' म्हटले आहे. 'अकिंचन आणि कामभवात असक्त नसलेल्या ब्राह्मणाला वेदगू (ज्ञानवान) जाणावे' इत्यादींमध्ये ज्ञान या अर्थाने. 'जे जगात वेदजात (आनंदित होऊन) वावरतात' इत्यादींमध्ये सोमनस्य (आनंद) या अर्थाने. ဝေဒဂန္ထေ စ ဉာဏေ စ, သောမနဿေ စ ဝတ္တတိ; ဝေဒသဒ္ဒေါ ဣမံ နာနာ-ဓာတုတော သမုဒီရယေ. 'वेद' शब्द ग्रंथ, ज्ञान आणि सोमनस्य (आनंद) या अर्थांमध्ये वापरला जातो; हा 'वेद' शब्द वेगवेगळ्या धातूंपासून उत्पन्न होतो असे म्हणावे. လိပ လိမ္ပနေ. လိမ္ပတိ, လိမ္ပကော. အဝလေပေါ. အဝလေပေါတိ အဟင်္ကာရော. 'लिप' धातू लिंपन (लेप लावणे) या अर्थात आहे. लिम्पति (लेप लावतो), लिम्पको (लेप लावणारा). अवलेपो (अवलेप). अवलेप म्हणजे अहंकार. လုပ အစ္ဆေဒနေ. လုမ္ပတိ. ဝိလုမ္ပကော, ဝိလုတ္တော ဝိလောပေါ. 'लुप' धातू उच्छेदन (लुटणे/कापून टाकणे) या अर्थात आहे. लुम्पति (लुटतो). विलुम्पको (लुटणारा), विलुत्तो (लुटलेला), विलोपो (विलोपन/लूट). ဝိလုမ္ပတေဝ ပုရိသော, ယာဝဿ ဥပကပ္ပတိ; ယဒါ စညေ ဝိလုမ္ပန္တိ, သော ဝိလုတ္တော ဝိလုမ္ပတီတိ. माणूस तोपर्यंतच लुटतो, जोपर्यंत त्याला ते अनुकूल असते; परंतु जेव्हा इतर त्याला लुटतात, तेव्हा तो स्वतः लुटला गेलेला (विलुत्तो) असूनही लुटतो. ပိသ စုဏ္ဏနေ. ပိံသတိ. ပိသကော. ပိသုဏာ ဝါစာ. အာဂမဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘အတ္တနော ပိယဘာဝံ ပရဿ စ သုညဘာဝံ ယာယ ဝါစာယ ဘာသတိ, သာ ပိသုဏာ ဝါစာ’’တိ ဝုတ္တံ, တံ နိရုတ္တိလက္ခဏေန ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. 'पिस' धातू चूर्ण करणे (दळणे/बारीक करणे) या अर्थात आहे. पिंसति (दळतो/बारीक करतो). पिसको (पिशाच/दळणारा). पिसुणा वाचा (चुगली/कडू वाणी). आगम-अट्ठकथेत (टीकेत) म्हटले आहे की, 'ज्या वाणीने स्वतःची प्रियता आणि दुसऱ्याची शून्यता (तुच्छता) भासविली जाते, ती पिसुणा वाचा (चुगली) होय', हे निरुक्तीच्या लक्षणाने म्हटले आहे असे समजावे. ဟိသိ ဝိဟိံသာယံ. ဟိံသတိ, ဝိဟိံသတိ. ဟိံသကော. 'हिसि' धातू विहिंसा (हिंसा करणे) या अर्थात आहे. हिंसति, विहिंसति (हिंसा करतो). हिंसको (हिंसक). အဟိံသကောတိ မေ နာမံ, ဟိံသကဿ ပုရေ သတော; အဇ္ဇာဟံ သစ္စနာမောမှိ, န နံ ဟိံသာမိ ကိဉ္စနံ. 'पूर्वी हिंसक असतानाही माझे नाव अहिंसक होते; आज मी खऱ्या नावाचा झालो आहे, मी कोणाचीही अजिबात हिंसा करत नाही.' ဟိံသိတဗ္ဗံ ကိံသတီတိ သီဟော. အာဒိအန္တက္ခရဝိပလ္လာသဝသေန သဒ္ဒသိဒ္ဓိ, ယထာ ‘‘ကန္တနဋ္ဌေန တက္က’’န္တိ. ဝိဟေသကော, ဝိဟေသနံ. जो हिंसेला पात्र असणाऱ्यांना मारतो (किंसति) तो 'सीहो' (सिंह) होय. पहिल्या आणि शेवटच्या अक्षरांच्या विपर्यासाने (बदलाने) या शब्दाची सिद्धी होते, जसे 'कंतन' अर्थाने 'तक्क' (ताक) शब्द सिद्ध होतो. विहेसको (त्रास देणारा), विहेसनं (त्रास देणे). သုမ္ဘ [Pg.217] ပဟာရေ. ယော နော ဂါဝေါဝ သုမ္ဘတိ. ပရိသုမ္ဘတိ. သုမ္ဘောတိ. အတြိမေ ပါဠိတော ပယောဂါ – 'सुम्भ' धातू प्रहार करणे या अर्थात आहे. 'जो आमच्या बैलाप्रमाणे प्रहार करतो'. परिसुम्भति (चहूबाजूंनी प्रहार करतो). सुम्भोति. येथे पाळीतील हे प्रयोग आहेत – ‘‘သံသုမ္ဘမာနာ အတ္တာနံ, ကာလမာဂမယာမသေ’’တိ စ, 'स्वतःवर प्रहार करत (दुःख सहन करत) आम्ही काळाची वाट पाहत आहोत' आणि, ‘‘ကေသဂ္ဂဟဏမုက္ခေပါ, ဘူမျာ စ ပရိသုမ္ဘနာ; ဒတွာ စ နော ပက္ကမတိ, ဗဟုဒုက္ခံ အနပ္ပက’’န္တိ စ, 'केस पकडून उचलणे आणि जमिनीवर आपटणे (परिसुम्भन); आणि आम्हाला पुष्कळ व मोठे दुःख देऊन तो निघून जातो' आणि, ‘‘ဘူမိံ သုမ္ဘာမိ ဝေဂသာ’’တိ စ. 'मी वेगाने जमिनीवर प्रहार करतो (आपटतो)' आणि. အညတ္ထ ပန အညာပိ ဝုတ္တာ. တာ ဣဓ အနုပပတ္တိတော န ဝုတ္တာ. ကေစေတ္ထ မညေယျုံ, ယထာ ဘူဝါဒိဂဏေ ‘‘သကိ သင်္ကာယံ ခဇိ ဂတိဝေကလ္လေ’’တိအာဒီနံ ဓာတူနံ ပဋိလဒ္ဓဝဂ္ဂန္တဘာဝဿ နိဂ္ဂဟီတာဂမဿ ဝသေန ‘‘သင်္ကတိ ခဉ္ဇတီ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ, တထာ ဣမသ္မိံ ရုဓာဒိဂဏေ ‘‘မုစ မောစနေ ကတိ ဆေဒနေ’’တိအာဒီနံ ဓာတူနံ ပဋိလဒ္ဓဝဂ္ဂန္တဘာဝဿ နိဂ္ဂဟီတာဂမဿ ဝသေန ‘‘မုဉ္စတိ ကန္တတီ’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဧဝံ သန္တေ ကော ဣမေသံ တေသဉ္စ ဝိသေသောတိ? ဧတ္ထ ဝုစ္စတေ – ယေ ဘူဝါဒိဂဏသ္မိံ အနေကဿရာ အသံယောဂန္တာ ဣကာရန္တဝသေန နိဒ္ဒိဋ္ဌာ, တေ အာချာတတ္တဉ္စ နာမိကတ္တဉ္စ ပတွာ သုဒ္ဓကတ္တုဟေတုကတ္တုဝိသယေသု ဧကန္တတော နိဂ္ဂဟီတာဂမေန နိပ္ဖန္နရူပါ ဘဝန္တိ, န ကတ္ထစိပိ တေသံ ဝိနာ နိဂ္ဂဟီတာဂမေန ရူပပ္ပဝတ္တိ ဒိဿတိ. တံ ယထာ? သင်္ကတိ, သင်္ကာ, ခဉ္ဇတိ, ခဉ္ဇော ဣစ္စာဒိ. အယံ အနေကဿရာနံ ဣကာရန္တဝသေန နိဒ္ဒိဋ္ဌာနံ ဘူဝါဒိဂဏိကာနံ ဝိသေသော. इतर ठिकाणी इतरही (व्युत्पत्ती) सांगितल्या आहेत. त्या येथे अप्रस्तुत असल्यामुळे सांगितल्या नाहीत. येथे काही जण असे मानू शकतात की, ज्याप्रमाणे भूवादिगणात 'सकि संकायं, खजि गतिवेकल्ले' इत्यादी धातूंच्या वर्गातील शेवटच्या वर्णाचा लाभ झाल्यामुळे आणि निग्गहीत (अनुस्वार) आगम झाल्यामुळे 'संकति, खञ्जति' अशी रूपे होतात, त्याचप्रमाणे या रुधादिगणात 'मुच मोचने, कति छेदने' इत्यादी धातूंच्या वर्गातील शेवटच्या वर्णाचा लाभ झाल्यामुळे आणि निग्गहीत आगम झाल्यामुळे 'मुञ्चति, कन्तति' इत्यादी रूपे होतात. असे असताना या दोन्हीमध्ये काय फरक आहे? यावर सांगितले जाते – जे भूवादिगणात अनेक स्वर असणारे, असंयोगान्त आणि इकारान्त रूपाने निर्दिष्ट केले आहेत, ते आख्यात (क्रियापद) आणि नाम रूप प्राप्त करून शुद्ध कर्ता व हेतुकर्ता यांच्या विषयात निश्चितपणे निग्गहीत आगमाने निष्पन्न रूपे होतात. निग्गहीत आगमाशिवाय त्यांची रूपप्रवृत्ती कुठेही दिसत नाही. ती कशी? संकति, संका, खञ्जति, खञ्जो इत्यादी. हा अनेक स्वर असणाऱ्या आणि इकारान्त रूपाने निर्दिष्ट केलेल्या भूवादिगणीय धातूंचा विशेष फरक आहे. ယေ စ ရုဓာဒိဂဏသ္မိံ အနေကဿရာ အသံယောဂန္တွာ အကာရန္တဝသေန ဝါ ဥကာရန္တဝသေန ဝါ နိဒ္ဒိဋ္ဌာ, တေ အာချာတတ္တံ ပတွာ သုဒ္ဓကတ္တုဝိသယေယေဝ ဧကန္တတော နိဂ္ဂဟီတာဂမေန နိပ္ဖန္နရူပါ ဘဝန္တိ, န ဟေတုကတ္တုဝိသယေ. နာမိကတ္တံ ပန သဟနိဂ္ဂဟီတာဂမေန ဝိနာ စ နိဂ္ဂဟီတာဂမေန နိပ္ဖန္နရူပါ ဘဝန္တိ. ယတ္ထ [Pg.218] ဝိနာ နိဂ္ဂဟီတာဂမေန နိပ္ဖန္နရူပါ, တတ္ထ သသံယောဂရူပါယေဝ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? မုဉ္စတိ, မုဉ္စာပေတိ, မောစေတိ, မောစာပေတိ. ဆိန္ဒာပေတိ. ဆေဒေတိ, ဆေဒါပေတိ. ဆိန္ဒနံ, ဆေဒေါ. မုဉ္စနံ, မောစနံ. ကန္တတိ, ကန္တနံ, သလ္လကတ္တော. ပိဋ္ဌိမံသာနိ အတ္တနော, သာမံ ဥက္ကစ္စ ခါဒသိ ဣစ္စာဒီနိ. တတ္ထ ဥက္ကစ္စာတိ ဥက္ကန္တိတွာ, ဆိန္ဒိတွာတိ အတ္ထော. आणि जे रुधादिगणामध्ये अनेक स्वर असलेले, असंयोगान्त (संयोग नसलेले) अकारान्त किंवा उकारान्त रूपाने निर्दिष्ट केले आहेत, ते आख्यात (क्रियापद) भाव प्राप्त करून केवळ शुद्धकर्तृविषयातच निश्चितपणे निग्गहीत (अनुस्वार) आगमाने सिद्ध रूप होतात, हेतुकर्तृविषयात नाही. नामिक भाव प्राप्त झाल्यावर मात्र निग्गहीत आगमासह आणि निग्गहीत आगमाशिवाय सिद्ध रूप होतात. जेथे निग्गहीत आगमाशिवाय सिद्ध रूप होतात, तेथे ते संयोगयुक्त रूपाचेच असतात. ते कसे? जसे की - मुञ्चति (मुक्त करतो), मुञ्चापेति (मुक्त करवतो), मोचेति (मुक्त करतो), मोचापेति (मुक्त करवतो). छिन्दापेति (तोडवतो). छेदेति (तोडतो), छेदापेति (तोडवतो). छिन्दनं (तोडणे), छेदो (छेद/तोडणे). मुञ्चनं (मुक्त करणे), मोचनं (मुक्त करणे). कन्तति (कापतो), कन्तनं (कापणे), सल्लकत्तो (शल्यचिकित्सक). 'पिट्ठिमंसानि अत्तनो, सामं उक्कच्च खादसि' (स्वतःच्या पाठीचे मांस स्वतः कापून खातोस) इत्यादी. तेथे 'उक्कच्च' म्हणजे 'उक्कन्तित्वा' (कापून, तोडून) असा अर्थ आहे. နနု စ ဘော ဧဝံ သန္တေ အာချာတနာမိကဘာဝံ ပတွာ သုဒ္ဓကတ္တုဟေတုကတ္တုဝိသယေသု ဧကန္တတော ပဋိလဒ္ဓနိဂ္ဂဟီတာဂမေဟိ သကိ ခဇိ အာဒီဟိယေဝ ရုဓာဒိဂဏိကေဟိ ဘဝိတဗ္ဗံ, န ပန မုစဆိဒိအာဒီဟီတိ? တန္န, မုစဆိဒိအာဒီဟိယေဝ ရုဓာဒိဂဏိကေဟိ ဘဝိတဗ္ဗံ ရုစဓာတုယာ သမာနဂတိကတ္တာ, တထာ ဟိ ယထာ ‘‘ရုန္ဓိဿ, ရုန္ဓယတိ, ရုန္ဓာပေတိ, ရုန္ဓနံ, ရောဓော, ဝိရောဓော’’တိအာဒီသု နိဂ္ဂဟီတာဂမာနိဂ္ဂဟီတာဂမဝသေန ဒွိပ္ပကာရာနိ ရူပါနိ ဒိဿန္တိ, တထာ မုစဆိဒိအာဒီနမ္ပီတိ. अहो! जर असे असेल, तर आख्यात आणि नामिक भाव प्राप्त करून शुद्धकर्तृ व हेतुकर्तृ विषयात निश्चितपणे निग्गहीत आगम प्राप्त झालेल्या 'सकि', 'खजि' इत्यादी रुधादिगणीय धातूंचेच रूप असावे, 'मुच', 'छिदि' इत्यादींचे नाही का? तसे नाही, 'मुच', 'छिदि' इत्यादी रुधादिगणीय धातूंचेच रूप असावे, कारण त्यांची गती (प्रवृत्ती) 'रुच' धातूसारखीच आहे. तसेच, जसे 'रुन्धिस्स, रुन्धयति, रुन्धापेति, रुन्धनं, रोधो, विरोधो' इत्यादींमध्ये निग्गहीत आगम आणि अनिग्गहीत आगमाच्या भेदाने दोन प्रकारची रूपे दिसतात, तसेच 'मुच', 'छिदि' इत्यादींचीही दिसतात. နနု ကစ္စာယနေ နိဂ္ဂဟီတာဂမဿ နိစ္စဝိဓာနတ္ထံ ‘‘ရုဓာဒိတော နိဂ္ဂဟီတပုဗ္ဗဉ္စာ’’တိ လက္ခဏံ ဝုတ္တန္တိ? သစ္စံ, တံ ပန ကြိယာပဒတ္တံ သန္ဓာယ ဝုတ္တံ. ယဒိ စ နာမိကပဒတ္တမ္ပိ သန္ဓာယ ဝုတ္တံ ဘဝေယျ, ‘‘ဝိရောဓော’’တိအာဒီနံ ဒဿနတော ဝါသဒ္ဒံ ပက္ခိပိတွာ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ, န စ ဝါသဒ္ဒံ ပက္ခိပိတွာ ဝုတ္တံ, တေန ဉာယတိ ကြိယာပဒတ္တံယေဝ သန္ဓာယ ဝုတ္တန္တိ. कच्चायनात निग्गहीत आगमाच्या नित्य विधानासाठी 'रुधादितो निग्गहीतपुब्बञ्च' हे लक्षण (सूत्र) सांगितले आहे ना? सत्य आहे, परंतु ते क्रियापदभावाला अनुसरून सांगितले आहे. जर नामिकपदभावालाही अनुसरून सांगितले असते, तर 'विरोधो' इत्यादींच्या दर्शनामुळे 'वा' (विकल्प) शब्द टाकून सांगावे लागले असते, आणि 'वा' शब्द टाकून सांगितले नाही, यावरून हे समजते की ते केवळ क्रियापदभावालाच अनुसरून सांगितले आहे. နနု စ ဘော ဧဝံ သန္တေ သကိခဇိအာဒီနံ နိစ္စံ သနိဂ္ဂဟီတာဂမကြိယာပဒတ္တံယေဝ သန္ဓာယ ‘‘ရုဓာဒိတော နိဂ္ဂဟီတပုဗ္ဗဉ္စာ’’တိ ဣဒံ ဝုတ္တန္တိ သက္ကာ မန္တုန္တိ? န သက္ကာ, သကိခဇိအာဒီနံ ရုဓဓာတုယာ အသမာနဂတိကတ္တာ နာမိကတ္တေ ဒွိပ္ပကာရဿ အသမ္ဘဝတော. တထာ ဟိ ယေသံ ယာ နာမိကတ္တေ နိဂ္ဂဟီတာဂမာနိဂ္ဂဟီတာဂမဝသေန ဒွိပ္ပကာရဝန္တတာ, သာ [Pg.219] ဧဝ တေသံ ရုဓာဒိဂဏဘာဝဿ လက္ခဏံ. တဉ္စ သကိခဇိအာဒီနံ နတ္ထိ. ‘‘သင်္ကာ ခဉ္ဇော’’တိအာဒိနာ ဟိ နာမတ္တေ ဧကောယေဝ ပကာရော ဒိဿတိ သနိဂ္ဂဟီတာဂမော, ‘‘ကမု ပဒဝိက္ခေပေ’’ဣစ္စာဒီနံ ပန ‘‘ကမော, ကမနံ, စင်္ကမော, စင်္ကမန’’န္တိအာဒိနာ နာမိကတ္တေ ဒွိပ္ပကာရဝန္တတာသမ္ဘဝေပိ နိဂ္ဂဟီတာဂမဿ အဗ္ဘာသဝိသယေ ပဝတ္တတ္တာ သာ ဒွိပ္ပကာရဝန္တတာ ရုဓာဒိဂဏဘာဝဿ လက္ခဏံ န ဟောတိ, တသ္မာ အဗ္ဘာသဝိသယေ ပဝတ္တံ နိဂ္ဂဟီတာဂမံ ဝဇ္ဇေတွာ ယာ ဒွိပ္ပကာရဝန္တတာ, သာယေဝ ရုဓာဒိဂဏိကဘာဝဿ လက္ခဏန္တိ သန္နိဋ္ဌာနံ ကာတဗ္ဗံ. အယံ နယော အတီဝ သုခုမော သမ္မာ မနသိ ကာတဗ္ဗော. अहो! जर असे असेल, तर 'सङ्ख' (saṅkha), 'खञ्ज' (khañja) इत्यादींच्या बाबतीत नेहमी सनिग्गहीत-आगम (अनुस्वारयुक्त आगम) क्रियापद असणे लक्षात घेऊनच 'रुधादितो निग्गहीतपुब्बञ्च' (रुधादि धातूंमध्ये पूर्वी निग्गहीत/अनुस्वार होतो) असे म्हटले गेले आहे, असा विचार करणे शक्य आहे काय? नाही, हे शक्य नाही; कारण 'सङ्ख', 'खञ्ज' इत्यादींचा 'रुध' धातूशी समान मार्ग (समान स्वभाव) नसल्यामुळे नामरूपात दोन प्रकार असणे असंभव आहे. कारण ज्यांच्या बाबतीत नामरूपात निग्गहीत-आगम आणि अनिग्गहीत-आगम या भेदाने दोन प्रकार असणे, हेच त्यांचे 'रुधादिगण' असण्याचे लक्षण आहे. आणि ते 'सङ्ख', 'खञ्ज' इत्यादींच्या बाबतीत नाही. कारण 'सङ्का' (शंका), 'खञ्जो' (लंगडा) इत्यादी नामांच्या बाबतीत केवळ एकच प्रकार (सनिग्गहीत-आगम असलेला) दिसून येतो. परंतु 'कमु पदविक्खेपे' (पाऊल टाकणे या अर्थी 'कमु' धातू) इत्यादींच्या बाबतीत 'कमो', 'कमनं', 'चङ्कमो', 'चङ्कमनं' इत्यादी रूपांद्वारे नामरूपात दोन प्रकार असणे शक्य असले, तरी निग्गहीत-आगमाचा अभ्यास-विषयात (द्वित्व विषयात) प्रवृत्त झाल्यामुळे, ती द्विरूपता 'रुधादिगण' असण्याचे लक्षण ठरत नाही. म्हणून, अभ्यास-विषयात प्रवृत्त झालेल्या निग्गहीत-आगमाला वगळून जी द्विरूपता उरते, तीच 'रुधादिगण' असण्याचे लक्षण आहे, असा निष्कर्ष काढला पाहिजे. हा नियम अत्यंत सूक्ष्म आहे, तो चांगल्या प्रकारे मनात धारण केला पाहिजे. ရုဓာဒီ ဧတ္တကာ ဒိဋ္ဌာ, ဓာတဝေါ မေ ယထာဗလံ; သုတ္တေသွညေပိ ပေက္ခိတွာ, ဂဏှဝှော အတ္ထယုတ္တိတောတိ. माझ्या क्षमतेनुसार 'रुधादि' इत्यादी धातू एवढेच पाहिले गेले आहेत; सूत्रांमध्ये इतरही धातू पाहून अर्थाशी सुसंगत असे ग्रहण करावे. ဒုဓာဒိဂဏောယံ. हा दुधादिगण होय. ဒိဝါဒိဂဏိက दिवादिगण. ဒိဝု ကီဠာဝိဇိဂိသာဗျဝဟာရဇုတိထုတိကန္တိဂတိသတ္တီသု. ဧတ္ထ စ ကီဠာတိ လဠနာ, ဝိဟာရော ဝါ. လဠနာတိ စ လဠိတာနုဘဝနဝသေန ရမဏံ. ဝိဟာရော ဣရိယာပထပရိဝတ္တနာဒိနာ ဝတ္တနံ. ဝိဇိဂိသာတိ ဝိဇယိစ္ဆာ. ဗျဝဟာရောတိ ဝေါဟာရော. ဇုတီတိ သောဘာ. ထုတီတိ ထောမနာ. ကန္တီတိ ကမနီယတာ. ဂတီတိ ဂမနံ. သတ္တီတိ သာမတ္ထိယံ. ဣမေသု အတ္ထေသု ဒိဝုဓာတု ဝတ္တတိ. ဒိဗ္ဗတိ. ဒေဝေါ. ဒေဝီ. ဒေဝတာ. 'दिवु' (divu) धातू क्रीडा (खेळणे), विजिगीषा (जिंकण्याची इच्छा), व्यवहार (व्यापार/व्यवहार), द्युती (शोभा/प्रकाश), थुती (स्तुती), कांती (कमनीयता/सौंदर्य), गती (गमन) आणि शक्ती (सामर्थ्य) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. येथे 'क्रीडा' म्हणजे लळना (विलास) किंवा विहार होय. 'लळना' म्हणजे विलासाचा अनुभव घेत रममाण होणे. 'विहार' म्हणजे इरियापथ (चालणे, उभे राहणे इत्यादी शारीरिक अवस्था) बदलून वावरणे. 'विजिगीषा' म्हणजे विजयाची इच्छा. 'व्यवहार' म्हणजे वोहार (लोकव्यवहार). 'द्युती' म्हणजे शोभा. 'थुती' म्हणजे थोमना (स्तुती). 'कांती' म्हणजे कमनीयता. 'गती' म्हणजे गमन (जाणे). 'शक्ती' म्हणजे सामर्थ्य. या अर्थांमध्ये 'दिवु' धातू प्रवृत्त होतो. उदा. दिब्बति (तो खेळतो/चमकतो). देवो (देव). देवी. देवता. ဧတ္ထ ဒေဝေါတိ တိဝိဓာ ဒေဝါ သမ္မုတိဒေဝါ ဥပပတ္တိဒေဝါ ဝိသုဒ္ဓိဒေဝါတိ. တေသု မဟာသမ္မတကာလတော ပဋ္ဌာယ လောကေန ‘‘ဒေဝါ’’တိ သမ္မတတ္တာ ရာဇရာဇကုမာရာဒယော သမ္မုတိဒေဝါ [Pg.220] နာမ. ဒေဝလောကေ ဥပပန္နာ ဥပပတ္တိဒေဝါ နာမ. ခီဏာသဝါ ဝိသုဒ္ဓိဒေဝါ နာမ. ဝုတ္တမ္ပိ စေတံ ‘‘သမ္မုတိဒေဝါ နာမ ရာဇာနော ဒေဝိယော ကုမာရာ. ဥပပတ္တိဒေဝါ နာမ ဘုမ္မဒေဝေ ဥပါဒါယ တဒုတ္တရိဒေဝါ. ဝိသုဒ္ဓိဒေဝါ နာမ ဗုဒ္ဓပစ္စေကဗုဒ္ဓခီဏာသဝါ’’တိ. येथे 'देव' म्हणजे तीन प्रकारचे देव आहेत: संमुतिदेव (संमतीने मानलेले देव), उपपत्तिदेव (उत्पत्तीने झालेले देव) आणि विशुद्धिदेव (विशुद्ध देव). त्यांपैकी, महासंमत काळापासून लोकांनी 'देव' म्हणून स्वीकारल्यामुळे राजे, राजकुमार इत्यादींना 'संमुतिदेव' म्हणतात. देवललोकात उत्पन्न झालेल्यांना 'उपपत्तिदेव' म्हणतात. क्षीणासव (ज्यांचे आसव नष्ट झाले आहेत असे अर्हत) हे 'विशुद्धिदेव' होत. म्हणूनच असे म्हटले आहे - 'संमुतिदेव म्हणजे राजे, राण्या आणि राजकुमार. उपपत्तिदेव म्हणजे भूमदेवांना धरून त्यांच्यावरील सर्व देव. विशुद्धिदेव म्हणजे बुद्ध, प्रत्येकबुद्ध आणि क्षीणासव (अर्हत) होत.' ဣဒံ ပနေတ္ထ နိဗ္ဗစနံ – ဒိဗ္ဗန္တိ ကာမဂုဏဈာနာဘိညာစိတ္တိဿရိယာဒီဟိ ကီဠန္တိ, တေသု ဝါ ဝိဟရန္တီတိ ဒေဝါ. ဒိဗ္ဗန္တိ ယထာဘိလာသိတံ ဝိသယံ အပ္ပဋိဃာတေန ဂစ္ဆန္တီတိ ဒေဝါ. ဒိဗ္ဗန္တိ ယထိစ္ဆိတနိပ္ဖာဒနေ သက္ကောန္တီတိ ဒေဝါ. အထ ဝါ တံတံဗျသနနိတ္ထရဏတ္ထိကေဟိ သရဏံ ပရာယဏန္တိ ဒေဝနီယာ အဘိတ္ထဝနီယာတိ ဒေဝါ. သောဘာဝိသေသယောဂေန ကမနီယာတိ ဝါ ဒေဝါ. या शब्दाची व्युत्पत्ती अशी आहे – 'दिब्बन्ति' म्हणजे जे कामगुण, ध्यान, अभिज्ञा, चित्त आणि ऐश्वर्य इत्यादींद्वारे क्रीडा करतात किंवा त्यांमध्ये विहार करतात, ते 'देवा' (देव) होत. 'दिब्बन्ति' म्हणजे जे इच्छित विषयाकडे कोणत्याही अडथळ्याशिवाय जातात, ते 'देवा' होत. 'दिब्बन्ति' म्हणजे जे इच्छेनुसार कार्य पूर्ण करण्यास समर्थ असतात, ते 'देवा' होत. अथवा, विविध संकटांतून पार पडू इच्छिणाऱ्यांसाठी जे शरण आणि परायण आहेत, म्हणून जे पूजनीय (देवनीय) आणि स्तुतीस पात्र (अभित्थवनीय) आहेत, ते 'देवा' होत. किंवा, विशेष शोभेने युक्त असल्यामुळे जे कमनीय (आकर्षक) आहेत, ते 'देवा' होत. ဧတ္ထ စ ထုတိကန္တိ အတ္ထာ ကမ္မသာဓနဝသေန ဒဋ္ဌဗ္ဗာ, ကီဠာဒယော ဆ အတ္ထာ ကတ္တုသာဓနဝသေန. ကေစိ ပန ‘‘ဒိဝု ကီဠာဝိဇိဂိသာဗျဝဟာရဇုတိထုတိဂတီသူ’’တိ ပဌန္တိ. ကေစိ ‘‘ဂတီ’’တိ ပဒံ ဝိဟာယ ‘‘ဇုတိထုတီသူ’’တိ ပဌန္တိ. ကေစိ ‘‘ထုတီ’’တိ ပဒံ ဝိဟာယ ‘‘ဇုတိဂတီသူ’’တိ ပဌန္တိ, ကေစိ ပန ဒိဝုဓာတုံ ‘‘သတ္တိထုတိက’’န္တိအတ္ထေပိ ဣစ္ဆန္တိ. တေနာဟ အဘိဓမ္မဿ အနုဋီကာကာရော ‘‘ဒေဝသဒ္ဒေါ ယထာ ကီဠာဝိဇိဂိသာဝေါဟာရဇုတိဂတိအတ္ထော, ဧဝံ သတ္တိအဘိတ္ထဝကမနတ္ထောပိ ဟောတိ ဓာတုသဒ္ဒါနံ အနေကတ္ထဘာဝတော’’တိအာဒိ. येथे 'थुति' (स्तुती) आणि 'कन्ति' (कांती) हे अर्थ कर्मसाधन रूपाने पाहावेत, आणि क्रीडा इत्यादी सहा अर्थ कर्तृसाधन रूपाने पाहावेत. काही व्याकरणकार 'दिवु कीळाविजिगीसाव्यवहारजुतिथुतिगतीसु' असा पाठ वाचतात. काही जण 'गती' हा शब्द वगळून 'जुतिथुतीसु' असा पाठ वाचतात. काही जण 'थुती' हा शब्द वगळून 'जुतिगतीसु' असा पाठ वाचतात, तर काही जण 'दिवु' धातूचा 'शक्ती' आणि 'थुति-कन्ति' या अर्थांमध्येही स्वीकार करतात. म्हणूनच अभिधम्माच्या अनुटीकाकारांनी म्हटले आहे – 'जसा देव शब्दाचा अर्थ क्रीडा, विजिगीषा, वोहार (व्यवहार), द्युती आणि गती असा होतो, तसाच धातूंच्या अनेक अर्थांमुळे शक्ती, अभित्थव (स्तुती) आणि कमन (इच्छा/कांती) असाही होतो' इत्यादी. ဣဒံ ပန ယထာဝုတ္တေသု သမ္မုတိဒေဝါဒီသု ပစ္စေကံ နိဗ္ဗစနံ – ဒိဗ္ဗန္တိ ကီဠန္တိ အတ္တနော ဝိသယေ ဣဿရိယံ ကရောန္တီတိ ဒေဝါ, ရာဇာနော. ဒိဗ္ဗန္တိ ကီဠန္တိ ပဉ္စဟိ ကာမဂုဏေဟိ, ပဋိပက္ခေ ဝါ ဝိဇေတုံ ဣစ္ဆန္တိ, ဝေါဟရန္တိ စ လောကဿ ယုတ္တာယုတ္တံ, ဇောတန္တိ ပရမာယ သရီရဇုတိယာ, ထောမိယန္တိ တဗ္ဘာဝတ္ထိကေဟိ, ကာမိယန္တိ ဒဋ္ဌုံ သောတုဉ္စ [Pg.221] သောဘာဝိသေသယောဂေန, ဂစ္ဆန္တိ စ ယထိစ္ဆိတဋ္ဌာနံ အပ္ပဋိဟတဂမနေန, သက္ကောန္တိ စ အာနုဘာဝသမ္ပတ္တိယာ တံတံကိစ္စံ နိပ္ဖာဒေတုန္တိ ဒေဝါ, စာတုမဟာရာဇိကာဒယော. ကီဠန္တိ ပရမာယ ဈာနကီဠာယ, ဝိဇေတုံ ဣစ္ဆန္တိ ပဋိပက္ခံ, ပရမသုခုမဉာဏဝိသေသဝိသယံ အတ္ထဉ္စ ဝေါဟရန္တိ, ဇောတန္တိ သဗ္ဗကိလေသဒေါသကလုသာဘာဝါ ပရမဝိသုဒ္ဓါယ ဉာဏဇုတိယာ, ထောမိယန္တိ စ ဝိညာတသဘာဝေဟိ ပရမနိမ္မလဂုဏဝိသေသယောဂတော, ကာမိယန္တိ စ အနုတ္တရပုညက္ခေတ္တတာယ ဒဋ္ဌုံ သောတုံ ပူဇိတုဉ္စ, ဂစ္ဆန္တိ စ အမတမဟာနိဗ္ဗာနံ အပစ္စာဂမနီယာယ ဂတိယာ, သက္ကောန္တိ စ စိတ္တာစာရံ ဉတွာ တေ တေ သတ္တေ ဟိတေ နိယောဇေတုံ အမတမဟာနိဗ္ဗာနသုခေ စ ပတိဋ္ဌာပေတုန္တိ ဒေဝါ, ဝိသုဒ္ဓိဒေဝါ. आता वर उल्लेखिलेल्या संमुतिदेव इत्यादींचे स्वतंत्रपणे स्पष्टीकरण (व्युत्पत्ती) खालीलप्रमाणे आहे – जे आपल्या क्षेत्रात क्रीडा करतात आणि ऐश्वर्य गाजवतात, ते 'देवा' म्हणजे राजे होत. जे पाच कामगुणांमध्ये क्रीडा करतात, शत्रूंवर विजय मिळवण्याची इच्छा ठेवतात, लोकांच्या योग्य-अयोग्य गोष्टींचा व्यवहार करतात, शरीराच्या उत्कृष्ट तेजाने चमकतात, देवत्व इच्छिणाऱ्यांकडून स्तुती मिळवतात, विशेष शोभेमुळे पाहण्याची व ऐकण्याची इच्छा निर्माण करतात, कोणत्याही अडथळ्याशिवाय इच्छित स्थळी जातात आणि आपल्या प्रभावाच्या समृद्धीने ती ती कार्ये पूर्ण करण्यास समर्थ असतात, ते 'देवा' म्हणजे चातुमहाराजिका इत्यादी देव होत. जे उत्कृष्ट ध्यानरूपी क्रीडेमध्ये रमतात, क्लेशादी शत्रूंवर विजय मिळवण्याची इच्छा ठेवतात, अत्यंत सूक्ष्म अशा विशेष ज्ञानविषयक अर्थाचा व्यवहार (प्रकटीकरण) करतात, सर्व क्लेश, दोष आणि मळ नसल्यामुळे अत्यंत विशुद्ध अशा ज्ञानतेजाने चमकतात, स्वभाव जाणणाऱ्यांकडून अत्यंत निर्मळ अशा विशेष गुणांमुळे स्तुती मिळवतात, अनुत्तर पुण्यक्षेत्र असल्यामुळे पाहण्याची, ऐकण्याची व पूजा करण्याची इच्छा निर्माण करतात, कधीही परत न येणाऱ्या गतीने अमृत महानिर्वाणाप्रत जातात आणि प्राण्यांच्या चित्ताची प्रवृत्ती जाणून त्यांना हिताच्या कार्यात जोडण्यास व अमृत महानिर्वाण सुखात प्रतिष्ठित करण्यास समर्थ असतात, ते 'देवा' म्हणजे विशुद्धिदेव होत. ဒေဝသဒ္ဒ ‘‘ဝိဒ္ဓေ ဝိဂတဝလာဟကေ ဒေဝေ’’တိအာဒီသု အဇဋာကာသေ အာဂတော. ‘‘ဒေဝေါ စ ထောကံ ထောကံ ဖုသာယတီ’’တိအာဒီသု မေဃေ. ‘‘အယဉှိ ဒေဝ ကုမာရော’’တိအာဒီသု ခတ္တိယေ. ‘‘အဟံ ဒေဝ သကလဇမ္ဗုဒီပေ အညဿ ရညော သန္တိကေ ကိဉ္စိ ဘယံ န ပဿာမီ’’တိအာဒီသု ဣဿရပုဂ္ဂလေ. ‘‘ပဉ္စဟိ ကာမဂုဏေဟိ သမပ္ပိတော သမင်္ဂီဘူတော ပရိစာရေတိ ဒေဝေါ မညေ’’တိအာဒီသု ဥပပတ္တိဒေဝေ. ‘‘ဒေဝါတိဒေဝံ နရဒမ္မသာရထိ’’န္တိအာဒီသု ဝိသုဒ္ဓိဒေဝေ အာဂတော. 'देव' शब्द 'विद्धे विगत्तवलाहके देवे' (ढग विरघळलेल्या स्वच्छ आकाशात) इत्यादी वाक्यांमध्ये 'आकाश' या अर्थाने आला आहे. 'देवो च थोकं थोकं फुसायति' (मेघ थोडा-थोडा बरसत आहे) इत्यादी वाक्यांमध्ये 'मेघ' (ढग/पाऊस) या अर्थाने आला आहे. 'अयञ्हि देव कुमारो' (हे देवा! हा कुमार...) इत्यादी वाक्यांमध्ये 'क्षत्रिय' (राजे) या अर्थाने आला आहे. 'अहं देव सकलजम्बुदीपे अञ्ञस्स रञ्ञो सन्तिके kiञ्चि भयं न पस्सामि' (हे देवा! मी संपूर्ण जंबूद्गीपात इतर कोणत्याही राजाकडून काहीही भीती पाहत नाही) इत्यादी वाक्यांमध्ये 'ऐश्वर्यशाली व्यक्ती' (स्वामी/राजे) या अर्थाने आला आहे. 'पञ्चहि कामगुणेहि समप्पितो समङ्गीभूतो परिचारेति देवो मञ्ञे' (पाच कामगुणांनी युक्त होऊन क्रीडा करतो, जणू काही देवच) इत्यादी वाक्यांमध्ये 'उपपत्तिदेव' या अर्थाने आला आहे. 'देवातिदेवं नरदम्मसारथिं' (देवांचेही देव, मानवांचे दमन करणारे सारथी) इत्यादी वाक्यांमध्ये 'विशुद्धिदेव' (बुद्ध) या अर्थाने आला आहे. ဒေဝီတိ ရာဇဘရိယာပိ ဒေဝဓီတာပိ ‘‘ဒေဝီ’’တိ ဝုစ္စတိ. ဒေဝဿ ဘရိယာတိ ဟိ ဒေဝီ, သာပိ အတ္ထတော ‘‘ဒိဗ္ဗတီတိ ဒေဝီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗာ, ယထာ ‘‘ဘိက္ခတီတိ ဘိက္ခုနီ’’တိ. တထာ ဟိ ဝုတ္တံ ဝိမာနဝတ္ထုအဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဒိဗ္ဗတိ အတ္တနော ပုညိဒ္ဓိယာ ကီဠတီတိ ဒေဝီ’’တိ. 'देवी' म्हणजे राजाची पत्नी आणि देवकन्या यांनाही 'देवी' म्हटले जाते. देवाच्या पत्नीला 'देवी' म्हणतात, तिचा अर्थही 'जी क्रीडा करते ती देवी' (दिब्बतीति देवी) असाच सांगितला पाहिजे, जसे 'जी भिक्षा मागते ती भिक्षुणी' (भिक्खतीति भिक्खुनी). म्हणूनच विमानवस्तूच्या अट्ठकथेत म्हटले आहे – 'जी आपल्या पुण्य-ऋद्धीने क्रीडा करते, ती देवी होय' (दिब्बति अत्तनो पुञ्ञिद्धिया कीळतीति देवी). ဒေဝတာတိ [Pg.222] ဒေဝပုတ္တောပိ ဗြဟ္မာပိ ဒေဝဓီတာပိ. ‘‘အထ ခေါ အညတရာ ဒေဝတာ အဘိက္ကန္တာယ ရုတ္တိယာ အဘိက္ကန္တဝဏ္ဏာ’’တိအာဒီသု ဟိ ဒေဝပုတ္တော ‘‘ဒေဝတာ’’တိ ဝုတ္တော ‘‘ဒေဝေါယေဝ ဒေဝတာ’’တိ ကတွာ, တထာ ‘‘တာ ဒေဝတာ သတ္တသတာ ဥဠာရာ, ဗြဟ္မာ ဝိမာနာ အဘိနိက္ခမိတွာ’’တိအာဒီသု ဗြဟ္မာနော. 'देवता' म्हणजे देवपुत्र, ब्रह्मा आणि देवकन्या देखील होय. 'अथ खो अञ्ञतरा देवता अभिक्kन्ताय रुत्तिया अभिक्kन्तवण्णा' (त्यानंतर रात्रीच्या प्रहरात एक अतिशय तेजस्वी देवता...) इत्यादी वाक्यांमध्ये देवपुत्रालाच 'देवता' म्हटले आहे, कारण 'जो देव आहे तोच देवता' असे मानले जाते. तसेच 'ता देवता सत्तसता उळारा, ब्रह्मा विमाना अभिनिक्खमित्वा' (त्या सातशे भव्य देवता, ब्रह्मलोकातून बाहेर पडून...) इत्यादी वाक्यांमध्ये ब्रह्मांना 'देवता' म्हटले आहे. ‘‘အဘိက္ကန္တေန ဝဏ္ဏေန, ယာ တွံ တိဋ္ဌသိ ဒေဝတေ; ဩဘာသေန္တီ ဒိသာ သဗ္ဗာ, ဩသဓီ ဝိယ တာရကာ’’တိ- 'हे देवते! ओषधी (शुक्र) ताऱ्याप्रमाणे सर्व दिशा प्रकाशित करत, तू अत्यंत तेजस्वी रूपाने उभी आहेस' - အာဒီသု ဒေဝဓီတာ. सुरुवातीला 'देवधीता' (देवपुत्री) असा शब्द आहे. ဣမာနိ ဥပပတ္တိဒေဝါနံ နာမာနိ – ही उपपत्तिदेवांची (उत्पत्ती झालेल्या देवांची) नावे आहेत – ဒေဝေါ သုရော စ ဝိဗုဓော, နိဇ္ဇရော အမရော မရု; သုဓာသီ တိဒသော သဂ္ဂ-ဝါသီ အနိမိသောပိ စ; ဒိဝေါကော’မတပါယီ စ, သဂ္ဂဋ္ဌော ဒေဝတာနိ စ. देव, सुर, विबुध, निज्जर (निर्जर), अमर, मरु, सुधासी (सुधा खाणारा), तिदस (त्रिदश), सग्गवासी (स्वर्गवासी), अनिमिस (अनिमिष - डोळे न मिटणारा), दिवोक (दिवौकस), अमतपायी (अमृत पिणारा), सग्गट्ठ (स्वर्गस्थ) आणि देवता. ခိ ခယေ. ခိယတိ. ခယော. ခိယနံ. ရာဂက္ခယော. 'खि' (धातू) क्षय (नाश) होण्याच्या अर्थात. 'खीयति' (नाश पावतो). 'खयो' (क्षय/नाश). 'खीयणं' (नाश होणे). 'रागक्खयो' (रागाचा/आसक्तीचा क्षय). ခိ နိဝါသေ ကောဓဟိံသာသု စ. ခိယတိ. န ဂစ္ဆသိ ယမက္ခယံ. နာဂဒါနေန ခိယန္တိ. 'खि' (धातू) निवास (राहणे), क्रोध आणि हिंसा या अर्थांमध्येही आहे. 'खीयति' (राहतो). 'न गच्छसि यमक्खयं' (तू यमाच्या निवासाला जात नाहीस). 'नागदानेन खीयन्ति' (हत्तींच्या दानामुळे ते क्रुद्ध होतात किंवा हिंसा करतात). တတ္ထ ခိယတီတိ နိဝသတိ. ယမက္ခယန္တိ ယမနိဝေသနံ. ခိယန္တီတိ ကုဇ္ဈန္တိ ဟိံသန္တိ ဝါ. तेथे, 'खीयति' म्हणजे राहतो (निवास करतो). 'यमक्खयं' म्हणजे यमाचे निवासस्थान. 'खीयन्ति' म्हणजे रागवतात किंवा हिंसा करतात. ဃာ ဂန္ဓောပါဒါနေ. ဃာယတီတိ ဃာနံ. ဃာနေန ဂန္ဓံ ဃာယိတုံ ဃာယိတွာ. 'घा' (धातू) गंध ग्रहण करण्याच्या (वास घेण्याच्या) अर्थात. 'घायति' (वास घेतो) म्हणून 'घानं' (नाक). नाकाने गंधाचा वास घेण्यासाठी, वास घेऊन. ရုစ ရောစနေ. ရောစနံ ရုစိ. ဘတ္တံ မေ ရုစ္စတိ. ဘတ္တမ္ပိတဿ န ရုစ္စတိ. ပဗ္ဗဇ္ဇာ မမ ရုစ္စတိ. ရုစ္စိတုံ, ရုစ္စိတွာ. ကေစိ ပန ဣမသ္မိံ ဒိဝါဒိဂဏေ ‘‘ရုစ ဒိတ္တိမှီ’’တိ ပဌန္တိ. တံ န ယုတ္တံ ကတ္ထစိပိ ဒိတ္တိသင်္ခါတသောဘနတ္ထဝါစကဿ [Pg.223] ရုစဓာတုနော ‘‘ရုစ္စတီ’’တိ ရူပါဘာဝတော. တသ္မာ ဧဝံ သလ္လက္ခေတဗ္ဗံ, ဒိတ္တိရုစီနံ ဝါစကော ရုစဓာတု ဘုဝါဒိဂဏိကော. တဿ ဟိ ‘‘ရောစတိ, ဝိရောစတိ. ဧကတ္တမုပရောစိတ’’န္တိ ရူပါနိယေဝ ဘဝန္တိ, န ‘‘ရုစ္စတီ’’တိ ရူပံ. ရုစိယာယေဝ ဝါစကော ပန ဒိဝါဒိဂဏိကောပိ ဟောတိ စုရာဒိဂဏိကောပိ. တဿ ဟိ ဒိဝါဒိဂဏိကကာလေ ‘‘ဂမနံ မယှံ ရုစ္စတီ’’တိ ရူပံ. စုရာဒိဂဏိကကာလေ ‘‘ကိံ နု ဇာတိံ န ရောစေသီ’’တိ ရူပံ. အာပုဗ္ဗော စေ အာစိက္ခနေ ဝတ္တတိ, ‘‘အာရောစေတိ, အာရောစယတီ’’တိ ရူပါနိ ဒိဿန္တိ. 'रुच' (धातू) आवडण्याच्या (रोचन) अर्थात. आवडणे म्हणजे 'रुचि'. 'भत्तं मे रुच्चति' (मला अन्न आवडते). 'भत्तम्पि तस्स न रुच्चति' (त्याला अन्नही आवडत नाही). 'पब्बज्जा मम रुच्चति' (मला प्रव्रज्या आवडते). आवडण्यासाठी, आवडल्यामुळे. परंतु काही लोक या दिवादि गणात 'रुच दित्तिम्हि' (रुच धातू प्रकाशाच्या अर्थात) असा पाठ वाचतात. ते योग्य नाही, कारण कुठेही प्रकाश किंवा शोभा या अर्थाचा वाचक असलेल्या 'रुच' धातूचे 'रुच्चति' असे रूप आढळत नाही. म्हणून हे लक्षात घेतले पाहिजे की, प्रकाश आणि आवड दर्शवणारा 'रुच' धातू हा भ्वादि गणातील आहे. कारण त्याची 'रोचति, विरोचति, एकत्तमुपरोचितं' अशीच रूपे होतात, 'रुच्चति' असे रूप होत नाही. केवळ आवडीचा वाचक असलेला धातू दिवादि गणातील आणि चुरादि गणातीलही असतो. दिवादि गणाच्या वेळी त्याचे 'गमनं मय्हं रुच्चति' (माझे जाणे मला आवडते) असे रूप होते. चुरादि गणाच्या वेळी 'किं नु जातिं न रोचेसि' (तू जन्माची आवड का धरत नाहीस?) असे रूप होते. जर 'आ' उपसर्ग आधी असेल तर तो सांगण्याच्या अर्थात वापरला जातो, आणि 'आरोचेति, आरोचयति' अशी रूपे दिसतात. မုစ မောက္ခေ. ဒုက္ခတော မုစ္စတိ. သဒ္ဓါယ အဓိမုစ္စတိ. မုတ္တိ, ဝိမုတ္တိ, အဓိမုတ္တိ, မုစ္စမာနော. 'मुच' (धातू) मोक्षाच्या (मुक्त होण्याच्या) अर्थात. 'दुक्खतो मुच्चति' (दुःखातून मुक्त होतो). 'सद्धाय अधिमुच्चति' (श्रद्धेने अधिमुक्त/दृढनिश्चयी होतो). 'मुत्ति' (मुक्ती), 'विमुत्ति' (विमुक्ती), 'अधिमुत्ति' (अधिमुक्ती/दृढ श्रद्धा), 'मुच्चमानो' (मुक्त होत असलेला). ဥစ သမဝါယေ. ဥစ္စတိ. ဩကော, ဦကာ, ဥက္ကာ. 'उच' (धातू) समवायाच्या (एकत्र येण्याच्या/संबंधाच्या) अर्थात. 'उच्चति' (म्हटले जाते/एकत्र येते). 'ओको' (पाणी किंवा निवासस्थान), 'ऊका' (उवा), 'उक्का' (मशाल). ဩကောတိ ဥဒကမ္ပိ အာဝါသောပိ. ‘‘ဩကပုဏ္ဏေဟိ စီဝရေဟီ’’တိ စ, ‘‘ဝါရိဇောဝ ထလေ ခိတ္တော, ဩကမောကတမုဗ္ဘတော’’တိ စေတ္ထ ပယောဂေါ. ဦကာတိ သီသေ နိဗ္ဗတ္တကိမိဝိသေသော. 'ओको' म्हणजे पाणी आणि निवासस्थान देखील. 'ओकपुण्णेहि चीवरेहि' (पाण्याने भरलेल्या चीवरांसह) आणि 'वारिजोव thale खित्तो, ओकमोकतमुब्भतो' (जसे जमिनीवर फेकलेला मासा त्याच्या पाण्याच्या निवासस्थानातून बाहेर काढला जातो) हे येथे याचे प्रयोग आहेत. ဥက္ကာတိ ဒီပိကာဒယော ဝုစ္စန္တိ. ‘‘ဥက္ကာသု ဓာရိယမာနာသူ’’တိ ဟိ အာဂတဋ္ဌာနေ ဒီပိကာ ‘‘ဥက္ကာ’’တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဥက္ကံ ဗန္ဓေယျ, ဥက္ကံ ဗန္ဓိတွာ, ဥက္ကာမုခံ အာလိမ္ပေယျာ’’တိ အာဂတဋ္ဌာနေ အင်္ဂါရကပလ္လံ. ‘‘ကမ္မာရာနံ ယထာ ဥက္ကာ, အန္တော ဈာယတိ နော ဗဟီ’’တိ အာဂတဋ္ဌာနေ ကမ္မာရုဒ္ဓနံ. ‘‘ဧဝံ ဝိပါကော ဥက္ကာပါတော ဘဝိဿတီ’’တိ အာဂတဋ္ဌာနေ ဝါတဝေဂေါ ‘‘ဥက္ကာ’’တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘သဏ္ဍာသေန ဇာတရူပံ [Pg.224] ဂဟေတွာ ဥက္ကာမုခေ ပက္ခိပေယျာ’’တိ အာဂတဋ္ဌာနေ သုဝဏ္ဏကာရာနံ မူသာ ‘‘ဥက္ကာ’’တိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ဣစ္စေဝံ – 'उक्का' म्हणजे मशाल इत्यादी म्हटले जाते. कारण 'उक्कासु धारियमानासु' (मशाली धरल्या जात असताना) या आलेल्या ठिकाणी मशालीला 'उक्का' म्हटले आहे. 'उक्कं बन्धेय्य, उक्कं बन्धित्वा, उक्कामुखं आलिम्पेय्य' (मशाल बांधावी, मशाल बांधून, मशालीचे तोंड पेटवावे) या आलेल्या ठिकाणी 'कोळशाचे भांडे' (अंगारकपल्ल) असा अर्थ आहे. 'कम्मारानं यथा उक्का, अन्तो झायति नो बही' (लोहाराच्या भट्टीप्रमाणे, ती आत जळते, बाहेर नाही) या आलेल्या ठिकाणी 'लोहाराची भट्टी' (कम्मारुद्धन) असा अर्थ आहे. 'एवं विपाको उक्कापातो भविस्सति' (अशा प्रकारे विपाक उल्कापात होईल) या आलेल्या ठिकाणी वायूचा वेग (वातवेग) याला 'उक्का' म्हटले आहे. 'सण्डासेन जातरूपं गहेत्वा उक्कामुखे पक्खिपेय्य' (चिमट्याने सोने पकडून मुशीच्या तोंडात टाकावे) या आलेल्या ठिकाणी सोनारांची 'मूस' (मूष) म्हणजे 'उक्का' असे समजले पाहिजे. अशा प्रकारे – ဒီပိကာဝါတဝေဂေသု, ကမ္မာရာနဉ္စ ဥဒ္ဓနေ; မူသာယမ္ပိ စ အင်္ဂါရ-ကပလ္လေ စာတိ ပဉ္စသု; ဝိသယေသု ပနေတေသု, ဥက္ကာသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ; मशाल, वायूचा वेग, लोहाराची भट्टी, मूस (मूष) आणि कोळशाचे भांडे या पाच विषयांमध्ये (अर्थांमध्ये) 'उक्का' हा शब्द वापरला जातो. ဆေ ဆေဒနေ. ဆိယတိ, ဆိယန္တိ. အဝစ္ဆိတံ, အဝစ္ဆာတံ. ဆေတွာန မောဠိံ ဝရဂန္ဓဝါသိတံ. 'छे' (धातू) छेद घेण्याच्या (कापण्याच्या) अर्थात. 'छीयति' (कापले जाते), 'छीयन्ति' (कापले जातात). 'अवच्छितं', 'अवच्छातं' (कापलेले). 'छेत्वान मोळिं वरगन्धवासितं' (उत्कृष्ट सुगंधाने सुवासित असलेली जटा कापून). သဇ သင်္ဂေ. သင်္ဂေါ လဂနံ. သဇ္ဇတိ. သဇ္ဇနံ, သဇ္ဇိတော, သတ္တော. 'सज' (धातू) आसक्तीच्या (सङ्ग) अर्थात. आसक्ती म्हणजे चिकटणे (लगन). 'सज्जति' (आसक्त होतो/चिकटतो). 'सज्जनं' (आसक्त होणे), 'सज्जितो' (आसक्त झालेला), 'सत्तो' (प्राणी/आसक्त). ယုဇ သမာဓိမှိ. သမာဓာနံ သမာဓိ, ကာယကမ္မာဒီနံ သမ္မာပယောဂဝသေန အဝိပ္ပကိဏ္ဏတာတိ အတ္ထော. ယုဇ္ဇတိ. ယောဂေါ, ယောဂီ. 'युज' (धातू) समाधीच्या अर्थात. समाधी म्हणजे चित्ताची एकाग्रता (समाधान), म्हणजेच कायिक कर्म इत्यादींच्या योग्य प्रयोगामुळे विखुरलेले नसणे असा अर्थ आहे. 'युज्जति' (योग्य ठरतो/जोडला जातो). 'योगो' (योग/प्रयत्न), 'योगी' (प्रयत्न करणारा/योगी). ဧတ္ထ ယောဂေါတိ ဝီရိယံ. တဉှိ – येथे 'योगो' म्हणजे वीर्य (प्रयत्न) होय. कारण ते – ‘‘ဝါယမေထေဝ ပုရိသော, န နိဗ္ဗိန္ဒေယျ ပဏ္ဍိတော; ပဿာမိ ဝေါ’ဟ’မတ္တာနံ, ယထာ ဣစ္ဆိံ တထာ အဟု’’န္တိ 'माणसाने प्रयत्नच केला पाहिजे, पंडिताने खचून जाऊ नये; मी स्वतःला पाहतो, जशी मी इच्छा केली होती, तसेच झाले.' ဝစနတော အဝဿံ ကာတုံ ယုဇ္ဇတိ ဥပပဇ္ဇတီတိ ယောဂေါတိ ဝုစ္စတိ. या वचनावरून, जे अवश्य करणे योग्य आहे आणि जुळणारे आहे, त्याला 'योगो' असे म्हटले जाते. ရန္ဇ ရာဂေ. ရဇ္ဇတိ. ဝိရဇ္ဇတိ. ရဇ္ဇမာနော, ရဇ္ဇံ, ရဇ္ဇန္တော, ရာဂေါ, ဝိရာဂေါ, ရဇ္ဇနံ, ဝိရဇ္ဇနံ, ရဇနီယံ. ဥပသဂ္ဂဝသေန အညော အတ္ထော ဘဝတိ. သမှာ ရဋ္ဌာ နိရဇ္ဇတိ, အတ္တနော ရဋ္ဌာ နိဂ္ဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. 'रंज' (धातू) रागाच्या (आसक्ती/रंगण्याच्या) अर्थात. 'रज्जति' (आसक्त होतो). 'विरज्जति' (विराग पावतो). 'रज्जमानो' (आसक्त होत असलेला), 'रज्जं' (राज्य/आसक्ती), 'रज्जन्तो' (आसक्त होणारा), 'रागो' (राग/आसक्ती), 'विरागो' (विराग/अनासक्ती), 'रज्जनं' (आसक्त होणे), 'विरज्जनं' (विराग होणे), 'रजनीयं' (आकर्षक/आसक्ती निर्माण करणारे). उपसर्गाच्या प्रभावाने दुसरा अर्थ होतो. 'सम्हा रट्ठा निरज्जति' म्हणजे आपल्या स्वतःच्या राज्यातून बाहेर पडतो (निघून जातो) असा अर्थ आहे. တတ္ထ ဝိရာဂေါတိ ဝိရဇ္ဇန္တိ ဧတ္ထ သံကိလေသဓမ္မာတိ ဝိရာဂေါ, နိဗ္ဗာနံ မဂ္ဂေါ စ. तेथे, 'विरागो' म्हणजे ज्यामध्ये संक्लेश धर्म (मलीन करणारे धर्म) नष्ट होतात तो 'विराग' होय, म्हणजेच निर्वाण आणि मार्ग. ဝိဇီ ဘယစလနေသု. ဝိဇ္ဇတိ, သံဝိဇ္ဇတိ. သံဝေဂေါ, သံဝေဇနီယံ. ဥဗ္ဗိဇ္ဇတိ. ဥဗ္ဗေဂေါ, ဥဗ္ဗိဂ္ဂဟဒယော. 'विजी' (धातू) भय आणि कंप पावण्याच्या (थरथरण्याच्या) अर्थात. 'विज्जति', 'संविज्जति' (थरथरतो/घाबरतो). 'संवेगो' (संवेग/धार्मिक संवेग), 'संवेजनीयं' (संवेग निर्माण करणारे). 'उब्बिज्जति' (उद्विग्न होतो/घाबरतो). 'उब्बेगो' (उद्वेग/भय), 'उब्बिग्गहदयो' (उद्विग्न/घाबरलेले हृदय असलेला). လုဇ [Pg.225] ဝိနာသေ. လုဇ္ဇတီတိ လောကော. လောပေါ, လုတ္တိ, လုဇ္ဇနံ, လုတ္တော. 'लुज' (धातू) विनाशाच्या (नाशाच्या) अर्थात. 'लुज्जति' (नाश पावतो/भंगतो) म्हणून त्याला 'लोको' (लोक/जग) म्हणतात. 'लोपो' (लोप), 'लुत्ति' (लोप होणे), 'लुज्जनं' (भंगणे/नाश पावणे), 'लुत्तो' (लोप पावलेला). ဌာ ဂတိနိဝတ္တိယံ. ဌာယတိ. ဌာယီ, ဌိတိ, ဌာနံ, ဌိတော, တတြဋ္ဌော, တိဋ္ဌံ, ကပ္ပဋ္ဌာယီ, အာသဘဋ္ဌာနဋ္ဌာယီ. 'ठा' (धातू) गती थांबण्याच्या (स्थिर होण्याच्या) अर्थात. 'ठायति' (थांबतो/उभा राहतो). 'ठायी' (स्थिर राहणारा), 'ठिति' (स्थिती), 'ठानं' (स्थान), 'ठितो' (उभा असलेला), 'तत्रट्ठो' (तेथे असलेला), 'तिट्ठं' (उभा राहणारा), 'कप्पट्ठायी' (कल्पभर टिकणारा), 'आसभट्ठानट्ठायी' (श्रेष्ठ स्थानावर राहणारा). ‘‘သုခံ သယာမိ ဌာယာမိ, သုခံ ကပ္ပေမိ ဇီဝိတံ; အဟတ္ထပါသော မာရဿ, အဟော သတ္ထာနုကမ္ပကော’’တိ 'मी सुखाने झोपतो, सुखाने उभा राहतो (राहतो), सुखाने माझे जीवन घालवतो; माराच्या जाळ्याबाहेर असलेला, अहा! शास्ता (बुद्ध) किती दयाळू आहेत!' ပါဠိ နိဒဿနံ. လာပံ ဂေါစရဋ္ဌာယိနန္တိ စ. တတ္ထ ဌာယာမီတိ တိဋ္ဌာမိ. हे पाळी भाषेतील उदाहरण आहे. आणि 'लापं गोचरट्ठायिनं' (आपल्या चरण्याच्या जागेत राहणारा लावा पक्षी) हे देखील. तेथे 'ठायामि' म्हणजे 'तिट्ठामि' (मी उभा राहतो/राहतो). ဍိဂတိယံ. ဍိယတိ. ဍေမာနော. ဍိနော ဝါ. ‘‘ဥစ္စေ သကုဏ ဍေမာန, ပတ္တယာန ဝိဟင်္ဂမ. ဝဇ္ဇေသိ ခေါ တွံ ဝါမူရု’’န္တိ နိဒဿနံ. 'डि' (धातू) गतीच्या (उडण्याच्या) अर्थात. 'डीयति' (उडतो). 'डेमानो' (उडत असलेला). किंवा 'डीनो' (उडलेला). 'उच्चे सकु ण डेमान, पत्तयान विहङ्गम। वज्जेसि खो त्वं वामूरु' (हे उंच उडणाऱ्या पक्षा, पंखांनी उडणाऱ्या विहंगमा! तू जात आहेस...) हे याचे उदाहरण आहे. ဧတ္ထ ဍိယတီတိ ဍေမာနောတိ နိဗ္ဗစနံ ဂဟေတဗ္ဗံ. येथे 'डीयति' म्हणजे 'डेमानो' (उडणारा) अशी व्युत्पत्ती घेतली पाहिजे. တာ ပါလနေ. တာယတိ. အဃဿ တာတာ. သော နူန ကပဏော တာတော, စိရံ ရုဇ္ဇတိ အဿမေ. တာဏံ, ပရိတ္တံ, ဂေါတ္တံ. တွံ ခေါသိ ဥပါသက ကတကလျာဏော ကတဘီရုတ္တာဏော. 'ता' (धातू) पालनाच्या (रक्षण करण्याच्या) अर्थात. 'तायति' (रक्षण करतो). 'अघस्स ताता' (पापापासून/दुःखापासून रक्षण करणारे). 'सो नून कपणो तातो, चिरं रुज्जति अस्समे' (तो बिचारा वडील/रक्षक नक्कीच आश्रमात दीर्घकाळ आजारी आहे). 'ताणं' (त्राण/रक्षण), 'परित्तं' (परित्त/संरक्षण), 'गोत्तं' (गोत्र/रक्षण). 'त्वं खोसि उपासक कतकल्याणो कतभीरुत्ताणो' (हे उपासका, तू कल्याण केले आहेस आणि भयापासून रक्षण केले आहेस). တတြ ပရိတ္တန္တိ မဟာတေဇဝန္တတာယ သမန္တတော သတ္တာနံ ဘယံ ဥပဒ္ဒဝံ ဥပသဂ္ဂဉ္စ တာယတိ ရက္ခတီတိ ပရိတ္တံ, ဂံ တာယတီတိ ဂေါတ္တံ. तेथे, 'परित्त' म्हणजे महातेजस्वी असल्यामुळे जे सर्व बाजूंनी प्राण्यांचे भय, उपद्रव आणि संकटांपासून रक्षण करते (तायति/रक्खति) ते 'परित्त' होय. गायीचे किंवा पृथ्वीचे (गं) रक्षण करते ते 'गोत्तं' (गोत्र). နတ ဂတ္တဝိနာမေ. ဂတ္တဝိနာမော ဂတ္တဝိက္ခေပေါ. နစ္စတိ. နစ္စံ. နိဂဏ္ဌော နာဋပုတ္တော. 'नत' (धातू) शरीराचे अवयव वाकवण्याच्या (गात्रविनाम) अर्थात. शरीराचे अवयव वाकवणे म्हणजेच अवयवांची हालचाल करणे (गात्रविक्षेप). 'नच्चति' (नाचतो). 'नच्चं' (नृत्य). 'निगण्ठो नाटपुत्तो' (निगंठ नातपुत्त/नर्तकाचा मुलगा). ဒါ သောဓနေ. ဒါယတိ. ဒါနံ. အနုယောဂဒါပနတ္ထံ. အနုယောဂံ ဒတွာ. ဒါနံ ဒတွာ. 'दा' (धातू) शोधनाच्या (स्वच्छ करण्याच्या/कापण्याच्या) अर्थात. 'दायति' (स्वच्छ करतो/कापतो). 'दानं' (दान). 'अनुयोगदापनत्थं' (अभ्यास/प्रयत्न करवून घेण्यासाठी). 'अनुयोगं दत्वा' (अभ्यास देऊन). 'दानं दत्वा' (दान देऊन). ဒါ [Pg.226] သုပနေ. ဒါယတိ. နိဒ္ဒါယတိ. နိဒ္ဒါယနံ, နိဒ္ဒါယမာနော, နိဒ္ဒါယန္တော. 'दा' (धातू) झोपण्याच्या (सुपन) अर्थात. 'दायति' (झोपतो). 'निद्दायति' (झोपतो). 'निद्दायणं' (झोपणे), 'निद्दायमानो' (झोपलेला), 'निद्दायन्तो' (झोपत असलेला). ဒါဒါနေ. ပုရိသော ဒါနံ ဒါယတိ. အာပုဗ္ဗော ဂဟဏေ. အဒိန္နံ အာဒိယတိ. သီလံ သမာဒိယတိ. ကမ္မေ – ပုရိသေန ဒါနံ ဒီယတိ, အဒိန္နံ အာဒိယတိ. ကာရိတေ – အာဒပေတိ, သမာဒပေတိ, အာဒပယတိ, သမာဒပယတိ, ယေ ဓမ္မမေဝါဒပယန္တိ သန္တော. 'दा' (धातू) देण्याच्या (दान) अर्थात. 'पुरिसो दानं दायति' (माणूस दान देतो). 'आ' उपसर्ग आधी असल्यास ग्रहण करण्याच्या (घेण्याच्या) अर्थात होतो. 'अदिन्नं आदियति' (न दिलेले घेतो). 'सीलं समादियति' (शीलाचे समादान करतो/शील ग्रहण करतो). कर्मणी प्रयोगात (कम्मे) – 'पुरिसेन दानं दीयति' (माणसाद्वारे दान दिले जाते), 'अदिन्नं आदियति' (न दिलेले घेतले जाते). प्रयोजक प्रयोगात (कारिते) – 'आदापेति', 'समादापेति', 'आदापयति', 'समादापयति' (घेण्यास लावतो, समादान करण्यास लावतो), 'ye धम्ममेवादापयन्ति सन्तो' (जे संत केवळ धम्माचेच समादान करवून घेतात). ဒါ အဝခဏ္ဍနေ. ဒိယတိ, ဒိယန္တိ. ပရိတ္တံ. 'दा' (धातू) तुकडे करण्याच्या (अवखंडन) अर्थात. 'दीयति' (तुकडे केले जातात), 'दीयन्ति' (तुकडे केले जातात). 'परित्तं' (अल्प/मर्यादित). ဧတ္ထ စ ပရိတ္တန္တိ သမန္တတော ခဏ္ဍိတတ္တာ ပရိတ္တံ. အပ္ပမတ္တကဉှိ ဂေါမယပိဏ္ဍံ ပရိတ္တန္တိ ဝုစ္စတိ. တသ္မာ ပရိတ္တန္တိ အပ္ပကဿ နာမံ ကာမာဝစရဿ စ ဓမ္မဿ အပ္ပေသက္ခတ္တာ. आणि येथे 'परित्त' म्हणजे सर्व बाजूंनी खंडित (तुकडे) केल्यामुळे ते 'परित्त' होय. कारण शेणाचा लहान गोळा 'परित्त' म्हटला जातो. म्हणून 'परित्त' हे अल्प (कमी) गोष्टीचे नाव आहे आणि कामावचर धम्माचे नाव आहे कारण त्याचा प्रभाव मर्यादित असतो. ဒါ သုဒ္ဓိယံ. ဒါယတိ. ဝေါဒါယတိ. ဝေါဒါနံ. အကမ္မကောယံ ဓာတု. တထာ ဟိ ‘‘ဝေါဒါယတိ သုဇ္ဈတိ ဧတေနာတိ ဝေါဒါနံ, သမထဝိပဿနာ’’တိ နေတ္တိသံဝဏ္ဏနာယံ ဝုတ္တံ. 'दा' (धातू) शुद्धीच्या (पवित्रतेच्या) अर्थात. 'दायति' (शुद्ध करतो). 'वोदायति' (शुद्ध होतो). 'वोदानं' (शुद्धीकरण). हा धातू अकर्मक आहे. म्हणूनच नेत्ति-अट्ठकथेत (नेत्तिसंवरण्णना) म्हटले आहे की – 'वोदायति सुज्झति एतेनाति वोदानं, समथविपस्सना' (ज्याद्वारे शुद्ध होतो ते 'वोदान' होय, म्हणजेच शमथ आणि विपश्यना). ဒီ ခယေ. ဒီယတေ. ဒီနော, အာဒီနဝေါ. 'दी' (धातू) क्षय (नाश) होण्याच्या अर्थात. 'दीयते' (क्षय पावतो). 'दीनो' (दीन/दुबळा), 'आदीनवो' (आदीनव/दोष/धोका). တတြ ဒီနောတိ ပရိက္ခီဏဉာတိဓနာဒိဘာဝေန ဒုက္ခိတော. အာဒီနဝေါတိအာဒီနံ ဒုက္ခံ ဝါတိ အဓိဂစ္ဆတိ ဧတေနာတိအာဒီနဝေါ, ဒေါသော. तेथे 'दीन' म्हणजे नातेवाईक, धन इत्यादी नष्ट झाल्यामुळे दुःखी झालेला. 'आदीनव' म्हणजे ज्याच्याद्वारे दीनता किंवा दुःख प्राप्त होते तो 'आदीनव' (दोष) होय. ဒု ပရိတာပေ. ဒုယတေ. ဒုနော, ဒူတော. 'दु' (धातू) संतापाच्या (दुःखाच्या) अर्थात आहे. 'दुयते' (तो दुःखी होतो). 'दुनो', 'दूतो' (हे त्याचे रूप आहेत). ဘိဒိ ဘိဇ္ဇနေ. ဘိဇ္ဇနဓမ္မံ ဘိဇ္ဇတိ. ဘိဇ္ဇတီတိ ဘိန္နော. ဘိဇ္ဇနံ ဘေဒေါ. 'भिदि' (धातू) भेदण्याच्या (तुटण्याच्या) अर्थात आहे. भेदण्याच्या स्वभावाचे जे आहे ते तुटते (भिज्जति). जे तुटते ते 'भिन्न' होय. तुटणे म्हणजे 'भेद' होय. ဆိဒိ ဆိဇ္ဇနေ. သုတ္တံ ဆိဇ္ဇတိ. ဆိဇ္ဇတီတိ ဆိန္နော. ဧဝံ ဆိဒ္ဒံ. ဆိဇ္ဇနံ ဆေဒေါ. 'छिदि' (धातू) कापण्याच्या (तुटण्याच्या) अर्थात आहे. सुताचा धागा तुटतो (छिज्जति). जे तुटते ते 'छिन्न' होय. याचप्रमाणे 'छिद्र' हा शब्द बनतो. कापले जाणे म्हणजे 'छेद' होय. ခိဒိ [Pg.227] ဒီနိယေ. ဒီနဘာဝေါ ဒီနိယံ, ယထာ ဒက္ခိယံ. ခိဇ္ဇတိ, ခိန္နော, အခိန္နမတိ, ခေဒေါ, ခေဒင်္ဂတော လောကဟိတာယ နာထော. 'खिदि' (धातू) दीनतेच्या अर्थात आहे. दीन भाव म्हणजे 'दीन्य', जसे 'दाक्षिण्य'. 'खिज्जति' (तो खिन्न होतो), 'खिन्न', 'अखिन्नमती' (खिन्न न होणारी बुद्धी असलेला), 'खेद', आणि 'खेदाङ्गतो लोकहिताय नाथो' (जगाच्या कल्याणासाठी नाथांनी (बुद्धांनी) शारीरिक कष्ट पत्करले). ဧတ္ထ ခေဒင်္ဂတောတိ ကာယိကဒုက္ခသင်္ခါတံ ပရိဿမံ ပတ္တော, ဒုက္ခမနုဘဝီတိ အတ္ထော. येथे 'खेदाङ्गतो' म्हणजे शारीरिक दुःखरूप परिश्रमाला प्राप्त झालेला, म्हणजेच दुःख अनुभवणारा, असा अर्थ आहे. ပဒ ဂတိယံ. ပဇ္ဇတိ. မဂ္ဂံ ပဋိပဇ္ဇတိ. ပဋိပတ္တိံ ပဋိပဇ္ဇတိ. အဒ္ဓါနမဂ္ဂပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ, ဖလသမာပတ္တိံ သမာပဇ္ဇတိ. အာပတ္တိံ အာပဇ္ဇတိ. အကမ္မကမ္ပိ ဘဝတိ, တေသံ အဓမ္မော အာပဇ္ဇတိ, ပဇ္ဇော, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇော, သမ္ပဒါယော. 'पद' (धातू) गतीच्या (गमनाच्या) अर्थात आहे. 'पज्जति' (तो प्राप्त करतो/जातो). 'मग्गं पटिपज्जति' (मार्गावर चालतो). 'पटिपत्तिं पटिपज्जति' (प्रतिपत्तीचे म्हणजेच आचरणाचे पालन करतो). 'अद्धानमग्गप्पटिपन्नो होति' (दीर्घ मार्गावर चालणारा होतो), 'फलसमापत्तिं समापज्जति' (फलसमापत्तीला प्राप्त होतो). 'आपत्तिं आपज्जति' (आपत्तीला म्हणजेच नियमाच्या उल्लंघनाला प्राप्त होतो). हा धातू अकर्मक देखील होतो, जसे 'तेसं अधम्मो आपज्जति' (त्यांच्यामध्ये अधर्म उत्पन्न होतो). 'पज्ज' (मार्ग), 'ब्याग्धपज्ज', 'संपदाय' (हे शब्द यापासून बनतात). ဧတ္ထ စ ပဇ္ဇောတိ မဂ္ဂေါ. ဗျဂ္ဃပဇ္ဇေ သဒ္ဒုလပထေ ဇာတောတိ ဗျဂ္ဃပဇ္ဇော, ဧဝံနာမကော ကုလပုတ္တော. သမ္ပဒိယတိ ဉာပိယတိ ဓမ္မော ဧတေနာတိ သမ္ပဒါယော, အက္ခာတာ. आणि येथे 'पज्ज' म्हणजे मार्ग होय. व्याघ्रपथावर (वाघांच्या मार्गावर) जन्मलेला म्हणून 'ब्याग्धपज्ज' (व्याघ्रपज्ज), या नावाचा कुलपुत्र. ज्याच्याद्वारे धम्म प्रतिपादित केला जातो किंवा जाणवला जातो तो 'संपदाय' (संप्रदाय) म्हणजेच उपदेशक (अक्खाता) होय. ဝိဒ သတ္တာယံ. သတ္တာ ဝိဇ္ဇမာနာကာရော. ဝိဇ္ဇတိ, သံဝိဇ္ဇတိ. ဇာတဝေဒေါ, ဝိဇ္ဇာ, အဝိဇ္ဇာ, ဝိဒိတော. 'विद' (धातू) सत्तेच्या (अस्तित्वाच्या) अर्थात आहे. सत्ता म्हणजे अस्तित्वात असणे होय. 'विज्जति' (अस्तित्वात आहे), 'संविज्जति' (विद्यमान आहे). 'जातवेदो' (अग्नी), 'विज्जा' (विद्या), 'अविज्जा' (अविद्या), 'विदितो' (विदित/ज्ञात) हे शब्द यापासून बनतात. တတ္ထ ဇာတဝေဒေါတိ အဂ္ဂိ. သော ဟိ ဇာတောဝ ဝေဒယတိ ဓူမဇာလုဋ္ဌာနေန ပညာယတိ, တသ္မာ ဇာတဝေဒေါတိ ဝုစ္စတိ. ဝိဇ္ဇာတိ ဓမ္မာနံ သဘာဝံ ဝိဒိတံ ကရောတီတိ ဝိဇ္ဇာ, ဉာဏံ. အဝိဇ္ဇာတိ ခန္ဓာနံ ရာသဋ္ဌံ, အာယတနာနံ အာယတနဋ္ဌံ, ဓာတူနံ သုညဋ္ဌံ, သစ္စာနံ တထဋ္ဌံ, ဣန္ဒြိယာနံ အဓိပတိယဋ္ဌံ အဝိဒိတံ ကရောတီတိ အဝိဇ္ဇာ. ဒုက္ခာဒီနံ ပီဠနာဒိဝသေန ဝုတ္တံ စတုဗ္ဗိဓံ အတ္ထံ အဝိဒိတံ ကရောတီတိ အဝိဇ္ဇာ, မောဟော. तेथे 'जातवेदो' म्हणजे अग्नी. कारण तो उत्पन्न होताच धुराच्या शिखा उठवून स्वतःचे अस्तित्व प्रकट करतो, म्हणून त्याला 'जातवेदो' म्हटले जाते. 'विज्जा' (विद्या) म्हणजे जी धम्मांचा (गोष्टींचा) स्वभाव प्रकट (विदित) करते ती 'विज्जा' म्हणजेच ज्ञान होय. 'अविज्जा' (अविद्या) म्हणजे जी स्कंधांचा समूह-अर्थ, आयतनांचा आयतन-अर्थ, धातूंचा शून्य-अर्थ, सत्यांचा यथार्थ-अर्थ आणि इंद्रियांचा अधिपती-अर्थ अज्ञात (अविदित) ठेवते ती 'अविज्जा' होय. जी दुःखादींच्या पीडा देण्याच्या स्वभावावरून सांगितलेला चार प्रकारचा अर्थ अज्ञात ठेवते ती 'अविज्जा' म्हणजेच मोह होय. မဒ ဥမ္မာဒေ. ဥမ္မာဒေါ နာမ မုယှ နံ ဝါ သတိဝိပ္ပဝါသော ဝါ စိတ္တဝိက္ခေပေါ ဝါ. မဇ္ဇတိ, ပမဇ္ဇတိ. မတ္တော, သုရာမဒမတ္တော. မတ္တော အဟံ မဟာရာဇ. ပုတ္တမံသာနိ ခါဒယိံ. မတ္တဟတ္ထီ, ပမတ္တော, ဥမ္မတ္တော. 'मद' (धातू) उन्मादाच्या अर्थात आहे. उन्माद म्हणजे संभ्रमित होणे किंवा स्मृतीचा नाश होणे किंवा चित्ताचा विक्षेप होणे होय. 'मज्जति' (तो मद्यधुंद होतो), 'पमज्जति' (तो प्रमाद करतो). 'मत्त' (धुंद), 'सुरामदमत्त' (मद्याच्या नशेने धुंद झालेला). 'हे महाराज, मी मत्त (वेडा) झालो होतो, म्हणून मी माझ्या पुत्राचे मांस खाल्ले.' 'मत्तहत्ती' (मदोनमत्त हत्ती), 'पमत्त' (प्रमत्त/असावध), 'उम्मत्त' (उन्मत्त/वेडा) हे शब्द यापासून बनतात. အပ္ပမာဒေါ [Pg.228] အမတံ ပဒံ, ပမာဒေါ မစ္စုနော ပဒံ; အပ္ပမတ္တာ န မိယျန္တိ, ယေ ပမတ္တာ ယထာ မတာ. अप्रमाद (जागरूकता) हे अमृताचे (निर्वाणाचे) स्थान आहे, प्रमाद (असावधपणा) हे मृत्यूचे स्थान आहे; जे अप्रमत्त (जागरूक) असतात ते मरत नाहीत, आणि जे प्रमत्त (असावध) असतात ते मृतसमानच आहेत. မိဒ သိနေဟနေ. မေဇ္ဇတိ. မေတ္တာ, မေတ္တိ, မိတ္တံ, မိတ္တော. 'मिद' (धातू) स्नेहाच्या (प्रेमाच्या) अर्थात आहे. 'मेज्जति' (तो स्नेह करतो). 'मेत्ता' (मैत्री), 'मेत्ती' (मैत्री), 'मित्तं' (मित्र), 'मित्तो' (मित्र) हे शब्द यापासून बनतात. အန္တရဓာ အဒဿနေ. အန္တရပုဗ္ဗော ဓာဓာတု ဝိဇ္ဇမာနဿ ဝတ္ထုနော အဒဿနေ ဝတ္တတိ. အန္တရဓာယတိ. အန္တရဓာနံ, အန္တရဓာယန္တော. သာ ဒေဝတာ အန္တရဟိတာ. အန္တရာပိဓာယတိ. 'अंतर्-धा' (धातू) अदृश्य होण्याच्या अर्थात आहे. 'अंतर्' पूर्वपद असलेला 'धा' धातू विद्यमान वस्तूच्या अदृश्य होण्याच्या अर्थात वापरला जातो. 'अंतराधायति' (तो अदृश्य होतो). 'अंतर्धान' (अदृश्य होणे), 'अंतराधायंतो' (अदृश्य होणारा). 'ती देवता अंतर्धान पावली' (अदृश्य झाली). 'अंतरापिधायति' (तो झाकला जातो/अदृश्य होतो) हे शब्द यापासून बनतात. ဗုဓ အဝဂမနေ. အဝဂမနံ ဇာနနံ. ဗုဇ္ဈတိ, ဗုဒ္ဓေါ, ဗုဒ္ဓိ, ဗုဒ္ဓံ, ဗောဓော, ဗောဓိ. ဗုဇ္ဈိတာ သစ္စာနိ. သကလံ ဗုဒ္ဓေါ, ဗုဒ္ဓဝါ, ဝိဗောဓေတိ, ဗောဓေတာ, ဗုဒ္ဓေါ, ဝိဗုဒ္ဓေါ ဣစ္စာဒီနိ. 'बुध' (धातू) अवगमनाच्या (जाणून घेण्याच्या) अर्थात आहे. अवगमन म्हणजे जाणून घेणे होय. 'बुज्झति' (तो जाणतो), 'बुद्धो' (बुद्ध), 'बुद्धी' (बुद्धि), 'बुद्धं' (ज्ञात), 'बोधो' (बोध), 'बोधी' (बोधि). 'बुज्झिता सच्चानि' (सत्यांना जाणणारा). सर्व काही जाणणारा म्हणून 'बुद्ध', 'बुद्धवा' (बुद्धवान्), 'विबोधेति' (तो जागृत करतो), 'बोधेता' (जागृत करणारा), 'बुद्ध', 'विबुद्ध' इत्यादी शब्द यापासून बनतात. တတြ ဗုဒ္ဓေါတိ ဗုဇ္ဈိတာ သစ္စာနီတိ ဗုဒ္ဓေါ, ဗောဓေတာ ပဇာယာတိ ဗုဒ္ဓေါ. အထ ဝါ ပါရမိတာပရိဘာဝိတာယ ပညာယ သဗ္ဗမ္ပိ ဉေယျံ အဗုဇ္ဈီတိ ဗုဒ္ဓေါ. ကေစိ ပန ကမ္မေနပိ ဗုဒ္ဓသဒ္ဒဿ သိဒ္ဓံ ဣစ္ဆန္တာ ဧဝံ နိဗ္ဗစနံ ကရောန္တိ ‘‘သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဝတ သော ဘဂဝါတိ အဓိဂတဂုဏဝိသေသေဟိ ခီဏာသဝေဟိ ဗုဇ္ဈိတဗ္ဗောတိ ဗုဒ္ဓေါ’’တိ. ဝိတ္ထာရော ပန နိဒ္ဒေသေ ဝုတ္တနယေန ဂဟေတဗ္ဗော. ဗုဒ္ဓီတိ ဗုဇ္ဈတီတိ ဗုဒ္ဓိ. ဧဝံ ဗုဒ္ဓံ ဗောဓော ဗောဓိ စ. အထ ဝါ ဗုဇ္ဈနံ ဗုဒ္ဓိ. ဧဝံ ဗောဓော ဗောဓိ စ, သဗ္ဗမေတံ ပညာယာဓိဝစနံ. तेथे 'बुद्ध' म्हणजे सत्यांना जाणणारा म्हणून 'बुद्ध', आणि प्रजेला (लोकांना) जागृत करणारा म्हणून 'बुद्ध'. किंवा पारमितांनी परिपक्व झालेल्या प्रज्ञेने सर्व ज्ञेय (जाणून घेण्याजोगे) जाणले म्हणून 'बुद्ध'. परंतु काही लोक कर्मभावात देखील 'बुद्ध' शब्दाची सिद्धी मानून अशी व्युत्पत्ती करतात की, 'ते भगवान खरोखर सम्यक्संबुद्ध आहेत, कारण प्राप्त केलेल्या विशेष गुणांनी युक्त अशा क्षीणासवांद्वारे (अर्हतांद्वारे) ते जाणले जाण्यास योग्य आहेत म्हणून 'बुद्ध' होत.' याचा सविस्तर अर्थ 'निद्देस' मध्ये सांगितलेल्या पद्धतीने ग्रहण करावा. 'बुद्धी' म्हणजे ज्याच्याद्वारे जाणले जाते ती 'बुद्धी'. याचप्रमाणे 'बुद्धं', 'बोध' आणि 'बोधी' हे शब्द आहेत. किंवा जाणून घेणे म्हणजे 'बुद्धी'. याचप्रमाणे 'बोध' आणि 'बोधी' देखील आहेत; हे सर्व प्रज्ञेचेच समानार्थी शब्द आहेत. ဣဒါနိ ဗောဓိသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရံ ဝဒါမ. ဗောဓီတိ ဟိ ရုက္ခောပိ မဂ္ဂေါပိ သဗ္ဗညုတညာဏမ္ပိ နိဗ္ဗာနမ္ပိ ဧဝံပဏ္ဏတ္တိကော ပုဂ္ဂလောပိ ဝုစ္စတိ, တထာ ဟိ ‘‘ဗောဓိရုက္ခမူလေ ပဌမာဘိသမ္ဗုဒ္ဓေါ’’တိ စ, ‘‘အန္တရာ စ ဗောဓိံ အန္တရာ စ ဂယ’’န္တိ စ အာဂတဋ္ဌာနေ ရုက္ခော ဗောဓီတိ ဝုစ္စတိ. ‘‘စတူသု မဂ္ဂေသု ဉာဏ’’န္တိ [Pg.229] အာဂတဋ္ဌာနေ မဂ္ဂေါ. ‘‘ပပ္ပောတိ ဗောဓိံ ဝရဘူရိ သုမေဓသော’’တိ အာဂတဋ္ဌာနေ သဗ္ဗညုတညာဏံ. ‘‘ပတွာန ဗောဓိံ အမတံ အသင်္ခတ’’န္တိ အာဂတဋ္ဌာနေ နိဗ္ဗာနံ. ‘‘ဗောဓိ ဘန္တေ ရာဇကုမာရော ဘဂဝတော ပါဒေ သိရသာ ဝန္ဒတီ’’တိ ‘‘အရိယသာဝကော ဗောဓီတိ ဝုစ္စတီ’’တိ စ အာဂတဋ္ဌာနေ ဧဝံပဏ္ဏတ္တိကော ပုဂ္ဂလော. आता आपण 'बोधी' शब्दाच्या अर्थाचे विश्लेषण करूया. कारण 'बोधी' या शब्दाने वृक्ष, मार्ग, सर्वज्ञता-ज्ञान, निर्वाण आणि अशा संज्ञेचा पुद्गल (व्यक्ती) देखील दर्शवला जातो. जसे की, 'बोधीवृक्षाच्या मुळाशी प्रथम अभिसंबुद्ध झाले' आणि 'बोधी आणि गया यांच्या दरम्यान' अशा आलेल्या ठिकाणी वृक्षाला 'बोधी' म्हटले आहे. 'चार मार्गांचे ज्ञान' अशा आलेल्या ठिकाणी 'बोधी' म्हणजे मार्ग होय. 'उत्कृष्ट बुद्धी असलेला (सुमेधस) बोधीला प्राप्त करतो' अशा आलेल्या ठिकाणी 'बोधी' म्हणजे सर्वज्ञता-ज्ञान होय. 'अमृत आणि असंस्कृत अशा बोधीला प्राप्त करून' अशा आलेल्या ठिकाणी 'बोधी' म्हणजे निर्वाण होय. 'भंते, बोधी नावाचा राजकुमार भगवंतांच्या चरणी डोके ठेवून वंदन करतो' आणि 'आर्यश्रावकाला बोधी म्हटले जाते' अशा आलेल्या ठिकाणी अशा संज्ञेचा पुद्गल (व्यक्ती) अभिप्रेत आहे. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – याविषयी असे म्हटले जाते – ရုက္ခေ မဂ္ဂေ စ နိဗ္ဗာနေ, ဉာဏေ သဗ္ဗညုတာယ စ; တထာ ပဏ္ဏတ္တိယဉ္စေဝ, ဗောဓိသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. वृक्ष, मार्ग, निर्वाण, सर्वज्ञता-ज्ञान आणि तसेच संज्ञेच्या (प्रज्ञप्तीच्या) बाबतीत देखील 'बोधी' शब्द प्रवृत्त होतो (वापरला जातो). ဗုဇ္ဈတီတိ ဗုဇ္ဈိတာ, ဗောဓေတီတိ ဗောဓေတာ. जो जाणतो तो 'बुज्झिता' (जाणणारा), जो जागृत करतो तो 'बोधेता' (जागृत करणारा) होय. ဧတ္ထ စ ကောစိ ပယောဂေါ တုမန္တာဒီနိ စ ရူပါနိ ဝုစ္စန္တေ – ‘‘ဂုယှမတ္ထမသမ္ဗုဒ္ဓံ, သမ္ဗောဓယတိ ယော နရော. ပရံ သမ္ဗုဒ္ဓုမရဟတိ. ဗုဇ္ဈိတုံ, ဗုဒ္ဓုံ, ဗုဇ္ဈိတွာ, ဗုဇ္ဈိတွာန, ဗုဇ္ဈိတုန, ဗုဒ္ဓိယ, ဗုဒ္ဓိယာန, ဗုဒ္ဓါ, ဗုဒ္ဓါန’’ ဣတိ ဘဝန္တိ. आणि येथे काही प्रयोग आणि 'तुमुन्' इत्यादी प्रत्ययांची रूपे सांगितली जातात – 'जो मनुष्य गुप्त आणि न समजलेल्या गोष्टीचा बोध करून देतो, तो दुसऱ्याला समजून घेण्यास (संबुद्ध होण्यास) पात्र ठरतो.' 'बुज्झितुं', 'बुद्धुं', 'बुज्झित्वा', 'बुज्झित्वान', 'बुज्झितुन', 'बुद्धिय', 'बुद्धियान', 'बुद्धा', 'बुद्धान' अशी रूपे होतात. တတြ အသမ္ဗုဒ္ဓန္တိ ပရေဟိ အညာတံ, ‘‘အသမ္ဗောဓ’’န္တိပိ ပါဌော, ပရေသံ ဗောဓေတုံ အယုတ္တန္တိ အတ္ထော. သမ္ဗုဒ္ဓုန္တိ သံဗုဇ္ဈိတုံ. ဗုဒ္ဓါတိ ဗုဇ္ဈိတွာ, ဧဝံ ဗုဒ္ဓါနာတိ ဧတ္ထာပိ. तेथे 'असबुद्धं' म्हणजे इतरांनी न जाणलेले. 'असबोधं' असाही पाठ आढळतो, ज्याचा अर्थ 'इतरांना बोध करून देण्यास अयोग्य' असा आहे. 'संबुद्धुं' म्हणजे सम्यक प्रकारे जाणून घेण्यासाठी (संबुज्झितुं). 'बुद्धा' म्हणजे जाणून घेऊन (बुज्झित्वा), याचप्रमाणे 'बुद्धान' या शब्दाचा अर्थ देखील तोच आहे. ကေစိ ပန ‘‘နာမရူပပရိစ္ဆေဒေ ‘ဗောဓိမဂ္ဂေန ဗုဓွာ’တိ စ, ‘‘ဗုဓွာ ဗောဓိတလေ ယမာဟ သုဂတော’တိ စ ဓကာရဝကာရသညောဂဝတော ပဒဿ ဒဿနတော တွာပစ္စယန္တဘာဝတော စ ဓကာရဝကာရသံယောဂဝသေန ‘‘ဗုဓွာ’’တိ ပဒသိဒ္ဓိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗာ’’တိ ဝဒန္တိ, တံ တာဒိသဿ ပဒရူပဿ ဗုဒ္ဓဝစနေ အဒဿနတော စ, ဗုဒ္ဓဝစနဿ အနနုကူလတာယ စ, ပရိသုဒ္ဓေ စ ပေါရာဏပေါတ္ထကေ [Pg.230] ဝကာရသံယောဂဝိဂတဿ ‘‘ဗောဓိမဂ္ဂေန ဗုဒ္ဓါ’’တိစ, ‘‘ဗုဒ္ဓါ ဗောဓိတလေ’’တိ စ ပဒဿ ဒဿနတော န ဂဟေတဗ္ဗံ. တထာ ဟိ န တာဒိသော ပါဌော ဗုဒ္ဓဝစနဿ အနုကူလော ဟောတီတိ. န ဟိ ဗုဒ္ဓဝစနေ ဝဿသတမ္ပိ ဝဿသဟဿမ္ပိ ပရိယေသန္တာ တာဒိသံ ဝကာရဓကာရသညောဂပဒံ ပဿိဿန္တိ. ဧဝံ ‘‘ဗုဓွာ’’တိ ပဒရူပဿ ဗုဒ္ဓဝစနဿ အနနုကူလတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. တဉှိ သက္ကဋဂန္ထေ ကတပရိစယဘာဝေန ဝဉ္စိတေဟိ ဝိဒူဟိ ဣစ္ဆိတံ, န သဒ္ဓမ္မနီတိဝိဒူဟိ. ဧတ္ထ ဣမာနိ နိဒဿနပဒါနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ – परंतु काही लोक असे म्हणतात की, 'नामरूपपरिच्छेदात 'बोधिमग्गेन बुध्वा' आणि 'बुध्वा बोधितले यमाह सुगतो' अशा प्रकारे 'ध' आणि 'व' यांच्या संयोगाने युक्त शब्द दिसत असल्यामुळे आणि 'त्वा' प्रत्ययाचा अंत असल्यामुळे, 'ध' आणि 'व' च्या संयोगाने 'बुध्वा' अशी पदसिद्धी मानली पाहिजे.' परंतु तशा प्रकारच्या पदाचे रूप बुद्धवचनात दिसत नसल्यामुळे, ते बुद्धवचनाशी सुसंगत नसल्यामुळे, आणि शुद्ध अशा प्राचीन हस्तलिखितांमध्ये 'व' च्या संयोगाशिवाय 'बोधिमग्गेन बुद्धा' आणि 'बुद्धा बोधितले' असे शब्द दिसत असल्यामुळे, ते स्वीकारू नये. कारण तसा पाठ बुद्धवचनाशी सुसंगत नाही. बुद्धवचनात शंभर वर्षे किंवा हजार वर्षे शोधले तरी तसा 'व' आणि 'ध' च्या संयोगाचा शब्द कोणालाही आढळणार नाही. अशा प्रकारे 'बुध्वा' या पदाची बुद्धवचनाशी असणारी असंगतता समजून घेतली पाहिजे. कारण ते रूप संस्कृत ग्रंथांच्या परिचयामुळे प्रभावित झालेल्या विद्वानांनी मानलेले आहे, सद्धम्मनीतीच्या जाणकारांनी नाही. येथे ही उदाहरणे समजून घ्यावीत – ကော မံ ဝိဒ္ဓါ နိလီယတိ. လဒ္ဓါ မစ္စော ယဒိစ္ဆတိ. လဒ္ဓါန ပုဗ္ဗာပရိယံ ဝိသေသံ, အဒဿနံ မစ္စုရာဇဿ ဂစ္ဆေ. मला मारून (बाण मारून) कोण लपतो आहे? मर्त्य (मनुष्य) जे इच्छितो ते प्राप्त करतो. पूर्व आणि उत्तर (आधीचे आणि नंतरचे) वैशिष्ट्य प्राप्त करून, त्याने मृत्यूराजाच्या अदृश्यतेप्रत (जिथे मृत्यूराजा पाहू शकत नाही तिथे) जावे. ဥမ္မာဒန္တိမဟံ ဒိဋ္ဌာ, အာမုက္ကမဏိကုဏ္ဍလံ; န သုပါမိ ဒိဝါရတ္တိံ, သဟဿံဝ ပရာဇိတော’’တိ; मण्यांचे कुंडल धारण केलेल्या उम्मादन्तीला पाहून, हजार (कार्षापण) हरलेल्या माणसाप्रमाणे मी दिवस-रात्र झोपू शकत नाही. တတ္ထ ဝိဒ္ဓါတိ ဝိဇ္ဈိတွာ. လဒ္ဓါတိ လဘိတွာ. လဒ္ဓါနာတိ လဘိတွာန. ဒိဋ္ဌာတိ ဒိသွာ. ဣတိ ‘‘ဝိဒ္ဓါ လဒ္ဓါ လဒ္ဓါန ဒိဋ္ဌာ’’တိ ပဒါနိ တွာပစ္စယေန သဒ္ဓိံ ဂတာနိပိ သညောဂဝသေန ဝကာရပဋိဗဒ္ဓါနိ န ဟောန္တိ, တသ္မာ ‘‘ဗုဒ္ဓါ ဗုဒ္ဓါန’’ ဣစ္စေတာနိပိ ‘‘လဒ္ဓါ လဒ္ဓါန’’ ဣစ္စာဒီနိ ဝိယ ပရိဟီနဝကာရသညောဂါနိ ဧဝ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ယေ ‘‘ဗုဓွာ’’တိ ရူပံ ဣစ္ဆန္တိ ပဌန္တိ စ, မညေ တေ တွာပစ္စယော ဝဉ္စေတိ, တေန တေ ဝဉ္စနံ ပါပုဏန္တိ, တသ္မာ တာဒိသံ ရူပံ အဂ္ဂဟေတွာ ယော သဒ္ဒနီတိယံ သဒ္ဒဝိနိစ္ဆယော ဝုတ္တော, သောယေဝ အာယသ္မန္တေဟိ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗော. तेथे 'विद्धा' (viddhā) म्हणजे 'विज्झित्वा' (विंधून/मारून). 'लद्धा' (laddhā) म्हणजे 'लभित्वा' (प्राप्त करून). 'लद्धान' (laddhāna) म्हणजे 'लभित्वान'. 'दिट्ठा' (diṭṭhā) म्हणजे 'दिस्वा' (पाहून). अशा प्रकारे 'विद्धा, लद्धा, Lद्धान, दिट्ठा' हे शब्द 'त्वा' प्रत्ययासोबत आलेले असले तरी, संयोगामुळे ते 'व' काराशी बद्ध होत नाहीत. म्हणूनच 'बुद्धा, बुद्धान' हे शब्द देखील 'लद्धा, लद्धान' इत्यादींप्रमाणे 'व' कार विरहित संयोगाचेच मानले पाहिजेत. जे 'बुध्वा' (budhvā) असे रूप इच्छितात आणि वाचतात, मला वाटते की 'त्वा' प्रत्यय त्यांना फसवितो आणि त्यामुळे ते फसवणूक पत्करतात. म्हणून तसले रूप न स्वीकारता, सद्दनीतीमध्ये जो शब्द-निश्चय सांगितला आहे, तोच आयुष्यमानांनी (पूज्य भिक्खूंनी) सारभूत म्हणून स्वीकारला पाहिजे. ဗုဓ ဗောဓနေ. သကမ္မကာကမ္မကောယံ ဓာတု. တထာ ဟိ ဗောဓနသဒ္ဒုစ္စာရဏေန ဇာနနံ ဝိကသနံ နိဒ္ဒက္ခယော စ ဂဟိတော, တသ္မာ ‘‘ဗုဓ ဉာဏေ, ဗုဓ ဝိကသနေ, ဗုဓ နိဒ္ဒက္ခယေ’’တိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ဗုဇ္ဈတိ ဘဂဝါ, ဓမ္မေ ဗုဇ္ဈတိ, ပဗုဇ္ဈတိ, ပဒုမံ ဗုဇ္ဈတိ. ပုရိသော ဗုဒ္ဓေါ, ပဗုဒ္ဓေါ, ဗောဓတိ, ပဗောဓတိ ဣစ္စာဒီနိ. 'बुध' (budha) हा धातू बोध (जाणणे/जागृत होणे) या अर्थी आहे. हा धातू सकर्मक आणि अकर्मक दोन्ही आहे. कारण 'बोधन' या शब्दाच्या उच्चारणाने ज्ञान, विकसन (उमलणे) आणि निद्रेचा क्षय (जागृती) हे ग्रहण केले जाते; म्हणूनच 'बुध ज्ञाने (ज्ञानासाठी), बुध विकसने (उमलण्यासाठी), बुध निद्दक्खये (निद्राक्षयासाठी)' असे म्हटले जाते. भगवान जाणतात (बुज्झति), धर्माला जाणतात, प्रबुद्ध होतात (पबुज्झति), कमळ उमलते (बुज्झति). मनुष्य बुद्ध (बुद्धो - जागृत), प्रबुद्ध (पबुद्धो), जाणतो (बोधति), प्रबोधित होतो (पबोधति) इत्यादी. သံဓာ [Pg.231] သန္ဓိမှိ. သံပုဗ္ဗော ဓာဓာတု သန္ဓိမှိ ဝတ္တတိ. နေဝဿ မဒ္ဒီ ဘာကုဋိ, န သန္ဓိယတိ န ရောဒတိ. န သန္ဓိယတီတိ ဣဒံ အညေဟိ ပကရဏေဟိ အသာဓာရဏံ ဒိဝါဒိရူပံ. 'सं-धा' (saṃ-dhā) हा धातू संधिसंबंधी (जोडणे/जुळणे) या अर्थी आहे. 'सं' उपसर्गपूर्वक 'धा' धातू संधिसंबंधी वापरला जातो. 'मद्दी (मद्री) कपाळावर आठी घालत नाही, जुळवून घेत नाही (किंवा शांत होत नाही) आणि रडतही नाही.' 'न संधियति' (na sandhiyati) हे इतर ग्रंथांपेक्षा वेगळे असे दिवादिगणाचे असाधारण रूप आहे. ဓနု ယာစနေ. မာတာ ဟိ တဝ ဣရန္ဓတိ, ဝိဓရဿ ဟဒယံ ဓနိယျတိ. ဣဒမ္ပိ အသာဓာရဏံ ဒိဝါဒိရူပံ. 'धनु' (dhanu) हा धातू याचना करणे (मागणी करणे) या अर्थी आहे. 'कारण तुझी आई इरंधती, विधुराचे हृदय याचिते (मागते).' हे देखील दिवादिगणाचे एक असाधारण रूप आहे. ဓီ အနာဒရေ. ဓီယတေ. ဓီနော. 'धी' (dhī) हा धातू अनादर (तिरस्कार) या अर्थी आहे. धीयते (dhīyate), धीनो (dhīno). ယုဓ သမ္ပဟာရေ. ယုဇ္ဈတိ. ယောဓော, ယုဒ္ဓံ, စရဏာယုဓော, ယကာရဿ ဝကာရဘာဝေ ‘‘အာဝုဓ’’န္တိ ရူပံ. တတြ စရဏာယုဓောတိ ကုက္ကုဋော. 'युध' (yudha) हा धातू प्रहार करणे (युद्ध करणे) या अर्थी आहे. युज्झति (yujjhati). योधो (yodho - योद्धा), युद्धं (yuddhaṃ - युद्ध), चरणायुधो (caraṇāyudho - पायांचे शस्त्र असलेला), 'य' काराचा 'व' कार झाल्यावर 'आवुध' (āvudha - शस्त्र) असे रूप बनते. तेथे 'चरणायुध' म्हणजे कोंबडा. ကုဓ ကောပေ. ကုဇ္ဈတိ. ကောဓော, ကုဇ္ဈနာ, ကုဇ္ဈိတတ္တံ. ကုဒ္ဓေါ အတ္ထံ န ဇာနာတိ, ကုဒ္ဓေါ ဓမ္မံ န ပဿတိ. 'कुध' (kudha) हा धातू कोप (राग) या अर्थी आहे. कुज्झति (kujjhati). कोधो (kodho - क्रोध), कुज्झना (kujjhanā - रागवणे), कुज्झितत्तं (kujjhitattaṃ - क्रोधावस्था). 'क्रोधी मनुष्य अर्थ (हित) जाणत नाही, क्रोधी मनुष्य धम्माला पाहत नाही.' သုဓ သောစေယျေ. သောစေယျံ သုစိဘာဝေါ. သုဇ္ဈတိ. သုဒ္ဓိ, ဝိသုဒ္ဓိ, သုဇ္ဈနံ, သုဒ္ဓေါ, ဝိသုဒ္ဓေါ, ပရိသုဒ္ဓေါ. ကာရိတေ ‘‘သောဓေတိ, သောဓကော’’ ဣစ္စာဒီနိ. 'सुध' (sudha) हा धातू शुचितेच्या (पवित्रतेच्या) अर्थी आहे. शुचिता म्हणजे शुद्धभाव. सुज्झति (sujjhati). सुद्धि (suddhi - शुद्धी), विसुद्धि (visuddhi - विशुद्धी), सुज्झन (sujjhanaṃ - शुद्ध होणे), सुद्धो (suddho - शुद्ध), विसुद्धो (visuddho - विशुद्ध), परिसुद्धो (parisuddho - परिशुद्ध). प्रयोजक (कारित) रूपात 'सोधेति' (sodheti - शुद्ध करतो), 'सोधको' (sodhako - शुद्ध करणारा) इत्यादी रूपे होतात. သိဓု သံရာဓနေ. သိဇ္ဈတိ. သိဒ္ဓိ. 'सिधु' (sidhu) हा धातू संराधन (सिद्धी/यश मिळवणे) या अर्थी आहे. सिज्झति (sijjhati). सिद्धि (siddhi). ရဓ ဟိံသာယံ. ရဇ္ဈတိ, ဝိရဇ္ဈတိ, အပရဇ္ဈတိ. အပရာဓော. 'राध' (radha) हा धातू हिंसेच्या (इजा करण्याच्या) अर्थी आहे. रज्झति (rajjhati), विरज्झति (virajjhati), अपरज्झति (aparajjhati). अपराधो (aparādho - अपराध). ရာဓ သာဓ သံသိဒ္ဓိယံ. ရာဓယတိ, သာဓယတိ. အာရာဓနံ, သာဓနံ. သပရဟိတံ သာဓေတီတိ သာဓု, သပ္ပုရိသော. အစ္စန္တံ သာဓေတဗ္ဗန္တိ သာဓု, လဒ္ဓကံ သုန္ဒရံ ဒါနသီလာဒိ. 'राध' (rādha) आणि 'साध' (sādha) हे धातू संसिद्धी (पूर्ण यश/सिद्धी) या अर्थी आहेत. राधयति (rādhayati), साधयति (sādhayati). आराधनं (ārādhanaṃ), साधनं (sādhanaṃ). जो स्वतःचे आणि इतरांचे हित साधतो तो 'साधू' (sādhu - सज्जन), सत्पुरुष (sappuriso). जे अत्यंत साधले पाहिजे (आचरले पाहिजे) ते 'साधू' (उत्कृष्ट), जसे की दान, शील इत्यादी सुंदर गोष्टी. ဝိဓ ဝိဇ္ဈနေ. ဝိဇ္ဈတိ. ပဋိဝိဇ္ဈတိ. ခဏ ဝိဒ္ဓ, ဝိဓု, ဝိဇ္ဈနကော, ဝိဒ္ဓေါ, ပဋိဝိဒ္ဓေါ, ဝိဇ္ဈနံ, ဝေဓော, ပဋိဝေဓော, ဝိဇ္ဈိတွာ, ဝိဒ္ဓါ, ဝိဒ္ဓါန. ကော မံ ဝိဒ္ဓါ နိလီယတိ. 'विध' (vidha) हा धातू विंधणे (बाण मारणे/भेदणे) या अर्थी आहे. विज्झति (vijjhati). पटिविज्झति (paṭivijjhati - भेदून जाणणे/साक्षात्कार करणे). खण विद्ध, विधु, विज्झनको, विद्धो, पटिविद्धो, विज्झनं, वेधो, पटिवेधो, विज्झित्वा, विद्धा, विद्धान. 'मला मारून कोण लपतो आहे?' ဣဓ ဝုဒ္ဓိယံ. ဣဇ္ဈတိ, သမိဇ္ဈတိ. ဣဒ္ဓိ, ဣဇ္ဈနံ, သမိဇ္ဈနံ, ဣဒ္ဓေါ. တတ္ထ ဣဒ္ဓီတိ ဣဇ္ဈနံ ဣဒ္ဓိ. ဣဇ္ဈန္တိ ဝါ သတ္တာ ဧတာယ ဣဒ္ဓါ ဝုဒ္ဓါ ဥက္ကံသဂတာ ဟောန္တီတိ ဣဒ္ဓိ. 'इध' (idha) हा धातू वृद्धी (वाढ/समृद्धी) या अर्थी आहे. इज्झति (ijjhati), समिज्झति (samijjhati). इद्धि (iddhi - ऋद्धी/यश), इज्झन (ijjhanaṃ), समिज्झन (samijjhanaṃ), इद्धो (iddho). तेथे 'इद्धि' म्हणजे यश किंवा सिद्धी. किंवा ज्याच्याद्वारे प्राणी समृद्ध होतात, वाढतात आणि उत्कर्षाला पोहोचतात, ती 'इद्धि' होय. ဂိဓု [Pg.232] အဘိကင်္ခါယံ. ဂိဇ္ဈတိ, ဂိဇ္ဈော. ဂဒ္ဓေါ. ဂဒ္ဓဗာဓိပုဗ္ဗော. ကာမဂိဒ္ဓေါ န ဇာနာသိ. ဂေဓော. 'गिधु' (gidhu) हा धातू अभिकांक्षा (तीव्र इच्छा/लोभ) या अर्थी आहे. गिज्झति (gijjhati), गिज्झो (gijjho - गिधाड). गद्धो (gaddho). गद्धबाधिपुब्बो. 'कामासक्त (कामलोभी) माणसा, तू जाणत नाहीस.' गेधो (gedho - लोभ). ရုဓိ အာဝရဏေ. ရုဇ္ဈတိ, ဝိရုဇ္ဈတိ, ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ. ဝိရောဓကော, ဝိရုဒ္ဓေါ. ရောဓော, ဝိရောဓော, ပဋိဝိရောဓော, အနုဝိရောဓော. 'रुधि' (rudhi) हा धातू आवरण (अडथळा आणणे/रोखणे) या अर्थी आहे. रुज्झति (rujjhati), विरुज्झति (virujjhati), पटिविरज्झति (paṭivirujjhati). विरोधको (virodhako), विरुद्धो (viruddho). रोधो (rodho), विरोधो (virodho), पटिविरोधो (paṭivirodho), अनुविरोधो (anuvirodho). အနုဝိဓာ အနုကရဏေ. အနုဝိပုဗ္ဗော ဓာဓာတု အနုကြိယာယံ ဝတ္တတိ. ပုရိသော အညဿ ပုရိသဿ ကြိယံ အနုဝိဓီယတိ တတြာယံ ပါဠိ – 'अनु-विधा' (anu-vidhā) हा धातू अनुकरण (नक्कल करणे) या अर्थी आहे. 'अनु-वि' उपसर्गपूर्वक 'धा' धातू अनुकरणात वापरला जातो. एक मनुष्य दुसऱ्या मनुष्याच्या क्रियेचे अनुकरण करतो, त्याविषयी हा पाळि पाठ आहे – ဒူသိတော ဂိရိဒတ္တေန, ဟယော သာမဿ ပဏ္ဍဝေါ; ပေါရာဏံ ပကတိံ ဟိတွာ, တဿေဝါနုဝိဓီယတီ’’တိ. गिरिदत्ताने बिघडवलेला, साम राजाचा पांढरा घोडा (पांडव), आपला जुना स्वभाव सोडून त्याचेच अनुकरण करतो आहे. ဣဒမ္ပိ အသာဓာရဏံ ဒိဝါဒိရူပံ. हे देखील दिवादिगणाचे एक असाधारण रूप आहे. အနုရုဓ ကာမေ. ကာမော ဣစ္ဆာ. အနုပုဗ္ဗော ရုဓဓာတု ဣစ္ဆာယံ ဝတ္တတိ. အနုရုဒ္ဓေါ, အနုရောဓော. အနုသ္မာတိ ကိံ ဝိရောဓော. 'अनु-रुध' (anu-rudha) हा धातू काम (इच्छा) या अर्थी आहे. काम म्हणजे इच्छा. 'अनु' उपसर्गपूर्वक 'रुध' धातू इच्छेच्या अर्थी वापरला जातो. अनुरुद्धो (anuruddho), अनुरोधो (anurodho). 'अनुस्मा' म्हणजे काय विरोध आहे? တတ္ထ အနုရုဒ္ဓေါတိ အနုရုဇ္ဈတိ ပဏီတံ ပဏီတံ ဝတ္ထုံ ကာမေတီတိ အနုရုဒ္ဓေါ. အနုရောဓောတိ အနုကူလတာ. အယံ ပါဠိ ‘‘သော ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အနုရုဇ္ဈတိ, အလာဘေ ပဋိဝိရုဇ္ဈတီ’’တိ. तेथे 'अनुरुद्ध' (anuruddho) म्हणजे जो अनुकूल होतो, जो उत्तम-उत्तम वस्तूंची इच्छा करतो तो अनुरुद्ध. 'अनुरोध' (anurodho) म्हणजे अनुकूलता. हा पाळि पाठ असा आहे – 'तो मिळालेल्या लाभाने अनुकूल (आनंदी) होतो आणि लाभ न मिळाल्यास प्रतिकूल (नाराज) होतो.' ဗျဓ တာဠနေ. ဗျဇ္ဈတိ. ဗျာဓော. ဗျာဓောတိ လုဒ္ဓေါ. တံ တံ မိဂံ ဗျဇ္ဈတိ တာဠေတိ ဟိံသတီတိ ဗျာဓော. 'ब्यध' (byadha) हा धातू ताडन करणे (मारणे/प्रहार करणे) या अर्थी आहे. ब्यज्झति (byajjhati). ब्याधो (byādho - शिकारी). ब्याध म्हणजे शिकारी (लुद्धक). जो त्या त्या हरणाला मारतो, प्रहार करतो, हिंसा करतो तो 'ब्याध' (शिकारी) होय. ဂုဓ ပရိဝေဌနေ. ဂုဇ္ဈတိ. ဂေါဓာ. 'गुध' (gudha) हा धातू वेढणे (गुंडाळणे) या अर्थी आहे. गुज्झति (gujjhati). गोधा (godhā - घोरपड). မန ဉာဏေ. မညတိ, အဝမညတိ, အတိမညတိ. သေယျာဒိဝသေန မညတီတိ မာနော. ‘‘မညနာ, မညိတတ္တံ, မာနော, အဟင်္ကာရော, ဥန္နတိ, ကေတု, ပဂ္ဂဟော, အဝလေပေါ’’တိ ပရိယာယာ. 'मन' (mana) हा धातू ज्ञान (जाणणे/विचार करणे) या अर्थी आहे. मञ्ञति (maññati - मानतो/विचार करतो), अवमञ्ञति (avamaññati - अपमान करतो), अतिमञ्ञति (atimaññati - अतिमान करतो). 'मी श्रेष्ठ आहे' इत्यादी विचाराने मानणे म्हणजे 'मान' (māno - अहंकार) होय. 'मञ्ञना (कल्पना/अहंकार), मञ्ञितत्तं (अहंकारी वृत्ती), मानो (मान), अहङ्कारो (अहंकार), उन्नति (उन्नती/गर्व), केतु (ध्वज/अभिमान), पग्गहो (उद्धटपणा), अवलेपो (लेप/गर्व)' हे त्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ဇန [Pg.233] ဇနနေ. သကမ္မကောယံ ဓာတု. ‘‘ဇညတီ’’တိမဿ ရူပံ, ကရောတီတိ အတ္ထော. ကာရိတေ – ဇနေသိ ဖုဿတီ မမံ. ဇနယတိ, သုခံ ဇနေတိ, ဇနယတီတိ ဇနကော, ပိတာ, ယော ကောစိ ဝါ နိဗ္ဗတ္တေတာ. ပုထု ကိလေသေ ဇနေတီတိ ပုထုဇ္ဇနော. တတ္ထ ‘‘ဇနေတိ ဇနယတီ’’တိ ရူပါနိ စုရာဒိဂဏံ ပတွာ သုဒ္ဓကတ္တုရူပါနိ ဘဝန္တိ. ကရောတီတိ ဟိ တေသံ အတ္ထော. ဟေတုကတ္တုဝသေနပိ တဒတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော ‘‘နိဗ္ဗတ္တေတီ’’တိ. 'जन' (jana) हा धातू उत्पन्न करणे (जन्म देणे) या अर्थी आहे. हा सकर्मक धातू आहे. 'जञ्ञति' (jaññati) हे त्याचे रूप असून त्याचा अर्थ 'करतो' असा आहे. प्रयोजक (कारित) रूपात – 'जनेसि फुस्सती ममं'. जनयति (janayati), सुखं जनेति (सुख उत्पन्न करतो), जो उत्पन्न करतो तो 'जनको' (जनक - पिता) किंवा जो कोणी उत्पन्न करणारा आहे. जो अनेक क्लेशांना उत्पन्न करतो तो 'पुथुज्जन' (पृथग्जन - सामान्य माणूस). तेथे 'जनेति, जनयति' ही रूपे चुरादिगणात जाऊन प्रयोजक रूपे बनतात. कारण त्यांचा अर्थ 'करतो' असा आहे. हेतुकर्तृत्वाच्या दृष्टीनेही त्याचा अर्थ 'उत्पन्न करतो' असाच सांगितला पाहिजे. ဇနီ ပါတုဘာဝေ. ဤကာရန္တောယံ အကမ္မကော ဓာတု, ဝိပုဗ္ဗော စေ, သကမ္မကော. ပုတ္တော ဇာယတိ, ဇာတော. ပုထု ကိလေသာ ဇာယန္တိ ဧတ္ထာတိ ပုထုဇ္ဇနော. ဇနနံ ဇာတိ, ‘‘သဉ္ဇာတိ, နိဗ္ဗတ္တိ, အဘိနိဗ္ဗတ္တိ, ခန္ဓာနံ ပါတုဘာဝေါ’’တိ ပရိယာယာ. ဣတ္ထီ ပုတ္တံ ဝိဇာယတိ, ဣတ္ထီ ပုတ္တံ ဝိဇာတာ. သော ပုရိသော ဝိဇာတမာတုယာပိ အမနာပေါ. ဥပဝိဇညာ ဣတ္ထီ. ကာရိတေ ‘‘ဇာပေတိ, ဇာပယတိ. အတ္ထဇာပိကာ ပညာ’’တိ ရူပါနိ. 'जनी' (janī) हा ई-कारान्त अकर्मक धातू प्रादुर्भाव (प्रकट होणे/जन्म घेणे) या अर्थी आहे, आणि जर 'वि' उपसर्ग लागला तर तो सकर्मक होतो. मुलगा जन्म घेतो (जायति), जन्मलेला (जातो). ज्याच्यामध्ये अनेक क्लेश जन्म घेतात तो 'पुथुज्जन' (पृथग्जन). जन्म घेणे म्हणजे 'जाती' (जन्म); 'सञ्जाती (उत्पत्ती), निब्बत्ती (उत्पन्न होणे), अभिनिब्बत्ती (पुनर्जन्म), खन्धानं पातुभावो (स्कंधांचा प्रादुर्भाव)' हे त्याचे समानार्थी शब्द आहेत. स्त्री पुत्राला जन्म देते (विजायति), स्त्रीने पुत्राला जन्म दिला (विजाता). तो मनुष्य जन्म देणाऱ्या मातेलाही अप्रिय असतो. प्रसूती जवळ आलेली स्त्री (उपविजञ्ञा). प्रयोजक रूपात 'जापेति, जापयति. अत्थजापिका पञ्ञा' (हित उत्पन्न करणारी प्रज्ञा) अशी रूपे होतात. ဟန ဟိံသာယံ. ဣဓ ဟိံသာဝစနေန ဃဋ္ဋနံ ဂဟေတဗ္ဗံ. သဒ္ဒေါ သောတမှိ ဟညတိ. ပဋိဟညတိ. ဗုဒ္ဓဿ ဘဂဝတော ဝေါဟာရော လောကိလေ သောတေ ပဋိဟညတိ. ဣမာနိ ကတ္တုပဒါနိ. ဘူဝါဒိဂဏံ ပန ပတွာ ‘‘လောဟေန ဝေ ဟညတိ ဇာတရူပံ, န ဇာတရူပေန ဟနန္တိ လောဟ’’န္တိ ပါဠိယံ ‘‘ဟညတီ’’တိ ပဒံ ကမ္မပဒံ, ဇာတရူပံ လောဟေန ကမ္မာရေဟိ ဟညတီတိ အတ္ထော. ‘‘ဟနန္တီ’’တိ ပဒံ ကတ္တုပဒံ, လောဟံ ဇာတရူပေန ကမ္မာရာ ဟနန္တီတိ ဟိ အတ္ထော. ဧတ္ထ ဟနနံ ပဟရဏန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ. 'हन' (hana) हा धातू हिंसेच्या अर्थी आहे. येथे 'हिंसा' या शब्दाने आघात (स्पर्श/धडकणे) असा अर्थ घ्यावा. शब्द कानावर आदळतो (हञ्ञति). प्रतिहत होतो (पटिहञ्ञति - आदळून परततो). बुद्ध भगवंतांचे प्रवचन (वचन) लौकिक कानांवर आदळते. ही कर्तृवाचक पदे आहेत. परंतु भूवादिगणात गेल्यावर, पाळि साहित्यातील 'लोहेन वे हञ्ञति जातरूपं, न जातरूपेन हनन्ति लोहं' (लोखंडाने सोन्यावर प्रहार केला जातो, सोन्याने लोखंडावर प्रहार करत नाहीत) या गाथेत 'हञ्ञति' (haññati) हे कर्मवाचक पद आहे, ज्याचा अर्थ 'सोन्यावर लोखंडाने सुवर्णाकारांद्वारे (लोहारांद्वारे) प्रहार केला जातो' असा आहे. 'हनन्ति' (hananti) हे कर्तृवाचक पद आहे, कारण 'सुवर्णकार सोन्याने लोखंडावर प्रहार करतात' असा त्याचा अर्थ आहे. येथे 'हनन' म्हणजे प्रहार करणे असा अर्थ घ्यावा. ရူပ ရုပ္ပနေ. ရုပ္ပနံ ကုပ္ပနံ ဃဋ္ဋနံ ပီဠနံ. ရုပ္ပတိ. ရူပံ, ရုပ္ပနံ. ဣမဿ ပန ‘‘ရူပ ရူပကြိယာယ’’န္တိ စုရာဒိဂဏေ ဌိတဿ ‘‘ရူပေတိ ရူပယတီ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'रूप' धातू 'रुप्पन' (विकार पावणे) या अर्थात आहे. 'रुप्पन' म्हणजे क्षोभ पावणे, आघात होणे, पीडित होणे. 'रुप्पति' (विकार पावतो). 'रूपं', 'रुप्पनं'. परंतु, 'चुरादि' गणात असलेल्या 'रूप रूपक्रियायम्' (रूप क्रिया करणे या अर्थी) या धातूची 'रूपेति', 'रूपयति' अशी रूपे होतात. တတ္ထ [Pg.234] ရူပန္တိ ကေနဋ္ဌေန ရူပံ? ရုပ္ပနဋ္ဌေန ရူပံ. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ ‘‘ကိဉ္စ ဘိက္ခဝေ ရူပံ? ရုပ္ပတီတိ ခေါ ဘိက္ခဝေ တသ္မာ ‘ရူပ’န္တိ ဝုစ္စတိ. ကေန ရုပ္ပတိ? သီတေနပိ ရုပ္ပတိ, ဥဏှေနပိ ရုပ္ပတိ, ဇိဃစ္ဆာယပိ ရုပ္ပတိ, ပိပါသာယပိ ရုပ္ပတိ, ဍံသမကသဝါတာတပသရီသပသမ္ဖဿေနပိ ရုပ္ပတိ, ရုပ္ပတီတိ ခေါ ဘိက္ခဝေ တသ္မာ ‘ရုပ’န္တိ ဝုစ္စတီ’’တိ. त्यात 'रूप' हे कोणत्या अर्थाने 'रूप' आहे? 'रुप्पन' (विकार पावणे/बाधित होणे) या अर्थाने रूप आहे. भगवंतांनी असे म्हटलेच आहे - "आणि भिक्खूहो, रूप म्हणजे काय? भिक्खूहो, ते विकार पावते (बाधित होते), म्हणून त्याला 'रूप' असे म्हटले जाते. कशाने विकार पावते? थंडीनेही विकार पावते, उष्णतेनेही विकार पावते, भुकेनेही विकार पावते, तहानेनेही विकार पावते, डास, माश्या, वारा, ऊन आणि सरपटणाऱ्या प्राण्यांच्या स्पर्शानेही विकार पावते. भिक्खूहो, ते विकार पावते (बाधित होते), म्हणून त्याला 'रूप' असे म्हटले जाते." တတ္ထ ရုပ္ပတီတိ ကုပ္ပတိ ဃဋ္ဋိယတိ ပီဠိယတိ, ဘိဇ္ဇတီတိ အတ္ထော. ဘိဇ္ဇတီတိ ဝိကာရံ အာပဇ္ဇတိ, ဝိကာရာပတ္တိ စ သီတာဒိသန္နိပါတေ ဝိသဒိသရူပပ္ပဝတ္တိယေဝ. ဧတ္ထ စ ကုပ္ပတီတိ ဧတေန ကတ္တုအတ္ထေ ရူပပဒသိဒ္ဓိံ ဒဿေတိ, ဃဋ္ဋိယတိ ပီဠိယတီတိ ဧတေဟိ ကမ္မတ္ထေ. ကောပါဒိကြိယာယေဝ ဟိ ရုပ္ပနကြိယာတိ, သော ပန ကတ္တုဘူတော ကမ္မဘူတော စ အတ္ထော ဘိဇ္ဇမာနော နာမ ဟောတီတိ ဣမဿ အတ္ထဿ ဒဿနတ္ထံ ‘‘ဘိဇ္ဇတီတိ အတ္ထော’’တိ ဝုတ္တံ. येथे 'रुप्पति' (विकार पावतो) म्हणजे क्षोभ पावतो (कुप्पति), आघात पावतो (घट्टियति), पीडित होतो (पीळियति); 'नष्ट होतो/बदलतो' (भिज्जति) असा अर्थ आहे. 'भिज्जति' म्हणजे विकार पावतो, आणि थंडी इत्यादींच्या संपर्कात विजातीय रूपाची उत्पत्ती होणे म्हणजेच विकार पावणे होय. आणि येथे 'कुप्पति' याने कर्त्याच्या अर्थात 'रूप' पदाची सिद्धी दर्शविली आहे, 'घट्टियति' व 'पीळियति' याने कर्माच्या अर्थात. कारण क्षोभ इत्यादी क्रिया हीच 'रुप्पन' (विकार) क्रिया आहे, आणि तो कर्ता बनलेला किंवा कर्म बनलेला अर्थ नष्ट होणारा (बदलणारा) असतो, हा अर्थ दर्शविण्यासाठी "भिज्जति इति अत्थो" (नष्ट होतो असा अर्थ आहे) असे म्हटले आहे. အထ ဝါ ရုပ္ပတီတိ ရူပန္တိ ကမ္မကတ္တုတ္ထေ ရူပပဒသိဒ္ဓိ ဝုတ္တာ. ဝိကာရော ဟိ ရုပ္ပနန္တိ ဝုစ္စတိ, တေနေဝ ဘိဇ္ဇတီတိ အတ္ထောတိ ကမ္မကတ္တုတ္ထေန ဘိဇ္ဇတီတိ သဒ္ဒေန အတ္ထံ ဒဿေတိ. တတ္ထ ယဒါ ကမ္မတ္ထေ ‘‘ရုပ္ပတီ’’တိ ပဒံ, တဒါ ‘‘သီတေနာ’’တိအာဒိ ကတ္တုအတ္ထေ ကရဏဝစနံ. ယဒါ ပန ‘‘ရုပ္ပတီ’’တိ ပဒံ ကတ္တုအတ္ထေ ကမ္မကတ္တုအတ္ထေ ဝါ, တဒါ ဟေတုမှိ ကရဏဝစနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. किंवा 'रुप्पति इति रूपं' (जे विकार पावते ते रूप) याद्वारे कर्मकर्त्याच्या अर्थात 'रूप' पदाची सिद्धी सांगितली आहे. कारण विकारालाच 'रुप्पन' असे म्हणतात, म्हणूनच 'भिज्जति इति अत्थो' (नष्ट होतो असा अर्थ आहे) याने कर्मकर्त्याच्या अर्थातील 'भिज्जति' या शब्दाने अर्थ दर्शविला आहे. त्यामध्ये जेव्हा 'रुप्पति' हे पद कर्माच्या अर्थात असते, तेव्हा 'सीतेन' (थंडीने) इत्यादी कर्त्याच्या अर्थात तृतीया विभक्ती (करणवचन) असते. परंतु जेव्हा 'रुप्पति' हे पद कर्त्याच्या किंवा कर्मकर्त्याच्या अर्थात असते, तेव्हा तृतीया विभक्ती ही हेतूच्या (कारणाच्या) अर्थात समजली पाहिजे. ရူပသဒ္ဒေါ ခန္ဓ ဘဝ နိမိတ္တ ပစ္စယ သရီရ ဝဏ္ဏသဏ္ဌာနာဒီသု အတ္ထေသု ဝတ္တတိ. အယဉှိ ‘‘ယံ ကိဉ္စိ ရူပံ အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္န’’န္တိ ဧတ္ထ ရူပက္ခန္ဓေ ဝတ္တတိ. ‘‘ရူပူပပတ္တိယာ မဂ္ဂံ ဘာဝေတီ’’တိ ဧတ္ထ ရူပဘဝေ. ‘‘အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဗဟိဒ္ဓါရူပါနိ ပဿတီ’’တိ [Pg.235] ဧတ္ထ ကသိဏနိမိတ္တေ. ‘‘သရူပါ ဘိက္ခဝေ ဥပ္ပဇ္ဇန္တိ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ, နော အရူပါ’’တိ ဧတ္ထ ပစ္စယေ. ‘‘အာကာသော ပရိဝါရိတော ရူပန္တွေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆတီ’’တိ ဧတ္ထ သရီရေ. ‘‘စက္ခုဉ္စ ပဋိစ္စ ရူပေ စ ဥပ္ပဇ္ဇတိ စက္ခုဝိညာဏ’’န္တိ ဧတ္ထ ဝဏ္ဏေ. ‘‘ရူပပ္ပမာဏော ရူပပ္ပသန္နော’’တိ ဧတ္ထ သဏ္ဌာနေ. ဣစ္စေဝံ – 'रूप' हा शब्द स्कंध, भव, निमित्त, प्रत्यय (कारण), शरीर, वर्ण (रंग/दृश्य) आणि संस्थान (आकार) इत्यादी अर्थांमध्ये वापरला जातो. जसे की, "जे काही रूप भूत, भविष्य किंवा वर्तमान काळातील आहे" येथे तो 'रूपस्कंधा'च्या अर्थात वापरला आहे. "रूपभवात उत्पन्न होण्यासाठी मार्गाची भावना करतो" येथे 'रूपभवा'च्या अर्थात. "अध्यात्मिकदृष्ट्या अरूपसंज्ञी असलेला बाहेर रूपांना पाहतो" येथे 'कसिण-निमित्ता'च्या अर्थात. "भिक्खूहो, सप्रत्यय (कारणासह) पापकारक अकुशल धर्म उत्पन्न होतात, अप्रत्यय (कारणाशिवाय) नाही" येथे 'प्रत्यय' (कारण) या अर्थात. "परिवेष्टित (वेढलेला) आकाश 'रूप' म्हणूनच ओळखला जातो" येथे 'शरीर' या अर्थात. "डोळा आणि रूपांना अनुसरून चक्षुविज्ञान उत्पन्न होते" येथे 'वर्ण' (रंग/दृश्य रूप) या अर्थात. "रूपाचे प्रमाण मानणारा, रूपावर प्रसन्न होणारा" येथे 'संस्थान' (आकार) या अर्थात. अशा प्रकारे – ခန္ဓေ ဘဝေ နိမိတ္တေ စ, သရီရေ ပစ္စယေပိ စ; ဝဏ္ဏေ သဏ္ဌာနအာဒိမှိ, ရူပသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. स्कंध, भव, निमित्त, शरीर, प्रत्यय (कारण), वर्ण (रंग) आणि संस्थान (आकार) इत्यादी अर्थांमध्ये 'रूप' शब्द वापरला जातो. ကုပ ကောပေ. ကုပ္ပတိ. ကုပ္ပန္တိ ဝါတဿပိ ဧရိတဿ. ကောပေါ, ပကောပေါ. ဝစီပကောပံ ရက္ခေယျ. 'कुप्' धातू 'कोप' (क्रोध/क्षोभ) या अर्थात आहे. 'कुप्पति' (क्रोधित होतो/क्षोभ पावतो). 'कुप्पन्ति वातस्सपि एरितस्स' (वाहणाऱ्या वाऱ्यानेही ते क्षोभ पावतात). 'कोपो', 'पकोपो' (क्रोध, प्रकोप). 'वचीपकोपं रक्खेय्य' (वाणीच्या प्रकोपापासून स्वतःचे रक्षण करावे). တပ သန္တာပေ. တပ္ပတိ, သန္တပ္ပတိ. သန္တာပေါ. 'तप्' धातू 'संताप' (उष्णता/तप्त होणे) या अर्थात आहे. 'तप्पति', 'संतप्पति' (तप्त होतो, संताप पावतो). 'संतापो' (संताप/उष्णता). တပ ပီဏနေ. တပ္ပတိ. တပ္ပနံ. 'तप्' धातू 'पीणन' (तृप्त करणे/प्रसन्न करणे) या अर्थात आहे. 'तप्पति' (तृप्त होतो). 'तप्पणं' (तृप्ती). ဒပ ဟာသေ. ဒပ္ပတိ. 'दप्' धातू 'हास' (हसणे/आनंद/गर्व) या अर्थात आहे. 'दप्पति' (हसतो/गर्व करतो). ဒီပ ဒိတ္တိယံ. ဒိပ္ပတိ. ဒီပေါ. 'दीप्' धातू 'दित्ति' (दीप्ती/प्रकाशणे) या अर्थात आहे. 'दिप्पति' (प्रकाशतो). 'दीपो' (दिवा/दीप). လုပ အဒဿနေ. လုပ္ပနံ, လောပေါ, လုတ္တိ. 'लुप्' धातू 'अदस्सन' (अदर्शन/लोप पावणे) या अर्थात आहे. 'लुप्पनं', 'लोपो', 'लुत्ति' (लोप पावणे, लोप, लुप्त होणे). ခိပ ပေရဏေ. ခိပ္ပတိ. ခိပ္ပံ. 'खिप्' धातू 'पेरण' (फेकणे/प्रेरित करणे) या अर्थात आहे. 'खिप्पति' (फेकले जाते). 'खिप्पं' (शीघ्र/लवकर). လုဘ ဂိဒ္ဓိယံ. လုဗ္ဘတိ. အတ္တနောယေဝ ဇဏ္ဏုကံ ဩလုဗ္ဘ တိဋ္ဌတိ. လုဗ္ဘနံ, လောဘော, လုဗ္ဘိတွာ, လုဗ္ဘိတွာန, လုဗ္ဘိယ, လုဗ္ဘိယာန, ဩလုဗ္ဘိတွာ, ဩလုဗ္ဘိတွာန, ဩလုဗ္ဘိယ, ဩလုဗ္ဘိယာန, လုဗ္ဘိတုံ, ဩလုဗ္ဘိတုံ. 'लुभ्' धातू 'गिद्धि' (लोभ/आसक्ती) या अर्थात आहे. 'लुब्भति' (लोभ धरतो/आसक्त होतो). 'अत्तनोयेव जण्णुकं ओलुब्भ तिट्ठति' (स्वतःच्याच गुडघ्यावर विसंबून/टेकून उभा राहतो). 'लुब्भनं', 'लोभो', 'लुब्भित्वा', 'लुब्भित्वान', 'लुब्भिय', 'लुब्भियान', 'ओलुब्भित्वा', 'ओलुब्भित्वान', 'ओलुब्भिय', 'ओलुब्भियान', 'लुब्भितुं', 'ओलुब्भितुं'. တတ္ထ လောဘောတိ လုဗ္ဘန္တိ တေန သတ္တာ, သယံ ဝါ လုဗ္ဘတိ, လုဗ္ဘနမတ္တမေဝ ဝါ တန္တိ လောဘော. ဧတ္ထ ပန ‘‘လောဘော လုဗ္ဘနာ [Pg.236] လုဗ္ဘိတတ္တံ ရာဂေါ တဏှာ တသိဏာ မုစ္ဆာ ဧဇာ ဝနံ ဝနထော’’ ဣစ္စာဒီနိ လောဘဿ ဗဟုနာမာနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. त्यामध्ये 'लोभ' म्हणजे ज्याच्याद्वारे प्राणी लोभ धरतात, किंवा तो स्वतः लोभ धरतो, किंवा केवळ लोभ धरण्याची क्रिया म्हणजे 'लोभ' होय. आणि येथे 'लोभ', 'लुब्भना' (लोभ करणे), 'लुब्भितत्तं' (लोभीपणा), 'राग' (आसक्ती), 'तण्हा' (तृष्णा), 'तसिणा' (तहान/लालसा), 'मुच्छा' (मूर्च्छा/मोह), 'एजा' (कंप/इच्छा), 'वनं' (वन/इच्छा), 'वनथो' (जंगल/इच्छा) इत्यादी लोभाची अनेक नावे आहेत असे समजावे. ခုဘ သဉ္စလနေ. ခုဗ္ဘတိ, သံခုဗ္ဘတိ. ခုဗ္ဘိတ္ထနဂရံ. သင်္ခေါဘော. ကာရိတေ – ခေါဘေတိ, ခေါဘယတိ. 'खुभ्' धातू 'संचलने' (क्षोभ पावणे/हलणे) या अर्थात आहे. 'खुब्भति', 'संखुब्भति' (क्षोभ पावतो, अत्यंत क्षोभ पावतो). 'खुब्भित्थनगरं' (नगर क्षोभित झाले/खळबळले). 'संखोभो' (संक्षोभ/खळबळ). प्रयोजक (कारित) रूपात – 'खोभेति', 'खोभयति'. သမု ဥပသမေ. စိတ္တံ သမ္မတိ, ဥပသမ္မတိ, ဝူပသမ္မတိ, သမဏော, သန္တိ, သန္တော. 'समु' धातू 'उपशम' (शांत होणे) या अर्थात आहे. 'चित्तं सम्मति', 'उपसम्मति', 'वूपसम्मति' (चित्त शांत होते, उपशमित होते, पूर्णपणे शांत होते). 'समणो' (श्रमण), 'सन्ति' (शांती), 'सन्तो' (शांत). ဧတ္ထ သမဏောတိ သမ္မတိ သန္တစိတ္တော ဘဝတီတိ သမဏော. ကာရိတဝသေန ပန ကိလေသေ သမေတိ ဥပသမေတီတိ သမဏောတိ နိဗ္ဗစနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ‘‘ယံ သမေတီတိ ဣဒံ အရိယံ. သမယတီတိဓ သတ္တာန’’န္တိ ဒွေ ကာရိတရူပါနိ. येथे 'श्रमण' (समण) म्हणजे जो शांत होतो, शांत चित्ताचा होतो, तो 'श्रमण' होय. परंतु प्रयोजक (कारित) अर्थाने जो क्लेशांना शांत करतो, उपशमित करतो, तो 'श्रमण' अशी याची व्युत्पत्ती समजली पाहिजे. कारण "जो शांत करतो म्हणून हा आर्य आहे, येथे प्राण्यांच्या (क्लेशांना) शांत करतो" अशी दोन प्रयोजक रूपे आहेत. သမု ခေဒေ နိရောဓေ စ. ခေဒေါ. ကိလမနံ. နိရောဓော အဘာဝဂမနံ. အဒ္ဓါနမဂ္ဂပ္ပဋိပန္နဿ ကာယော သမ္မတိ. အဂ္ဂိ သမ္မတိ. သန္တော. 'समु' धातू 'खेद' (थकवा) आणि 'निरोध' (नष्ट होणे/शांत होणे) या अर्थातही आहे. 'खेदा'चा अर्थ थकणे (किलमनं) असा आहे. 'निरोध' म्हणजे अभाव होणे (अभावगमन). "लांबच्या मार्गाने प्रवास करणाऱ्याचा काय (शरीर) थकतो (सम्मति)." "अग्नी शांत होतो (सम्मति)." 'सन्तो' (थकलेला/शांत झालेला). သန္တသဒ္ဒေါ ‘‘ဒီဃံ သန္တဿ ယောဇန’’န္တိအာဒီသု ကိလန္တဘာဝေ အာဂတော. ‘‘အယဉ္စ ဝိတက္ကော အယဉ္စ ဝိစာရော သန္တာ ဟောန္တိ သမိတာ’’တိအာဒီသု နိရုဒ္ဓဘာဝေ. ‘‘အဓိဂတော ခေါ မျာယံ ဓမ္မော ဂမ္ဘီရော ဒုဒ္ဒသော ဒုရနုဗောဓော သန္တော ပဏီတော’’တိအာဒီသု သန္တဉာဏဂေါစရတာယံ. ‘‘ဥပသန္တဿ သဒါ သတီမတော’’တိအာဒီသု ကိလေသဝူပသမေ. ‘‘သန္တော ဟဝေ သဗ္ဘိ ပဝေဒယန္တီ’’တိအာဒီသု သာဓူသု. ‘‘ပဉ္စိမေ ဘိက္ခဝေ မဟာစောရာ သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနာ’’တိအာဒီသု အတ္ထိဘာဝေ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – 'संत' (सन्त) शब्द "थकलेल्या माणसाला योजन लांब वाटते" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'थकलेल्या' (क्लांत) भावात आला आहे. "हा वितर्क आणि हा विचार शांत (निरुद्ध) व उपशमित होतात" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'निरुद्ध' (नष्ट/शांत) भावात. "मी प्राप्त केलेला हा धम्म गंभीर, दुर्दर्श, दुरनुबोध, शांत आणि प्रणीत आहे" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'शांत ज्ञानाचा विषय' या अर्थात. "नेहमी स्मृतिमान असणाऱ्या उपशांताचा" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'क्लेशांच्या उपशमा'च्या अर्थात. "सत्पुरुष (संत) खरोखरच सज्जनांना प्रकट करतात" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'सज्जन' (साधू) या अर्थात. "भिक्खूहो, हे पाच महाचोर अस्तित्वात आहेत" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'अस्तित्व' (असणे) या अर्थात आला आहे. याविषयी असे म्हटले आहे – ‘‘ကိလန္တတ္တေ [Pg.237] နိရုဒ္ဓတ္တေ, သန္တဓီဂေါစရတ္တနေ; ကိလေသူပသမေ စေဝ, အတ္ထိဘာဝေ စ သာဓုသု; ဣမေသု ဆသု ဌာနေသု, သန္တသဒ္ဒေါ ပနာဂတော’’တိ. "थकलेपण, निरुद्धता (शांत होणे), शांत बुद्धीचा विषय असणे, क्लेशांचा उपशम, अस्तित्व आणि सज्जन; या सहा स्थानांमध्ये 'संत' शब्द आला आहे." ဒမု ဒမနေ. ဒမ္မတိ. ဒန္တော, ဒမော, ဒမနံ. ကာရိတေ ‘‘စိတ္တံ ဒမေတိ, ဒမယတီ’’တိ ရူပါနိ. 'दमु' धातू 'दमन' (दमन करणे/संयम राखणे) या अर्थात आहे. 'दम्मति' (दमित होतो/संयमित होतो). 'दन्तो', 'दमो', 'दमनं' (दमित/संयमित, दम/संयम, दमन). प्रयोजक (कारित) रूपात "चित्तं दमेति, दमयति" (चित्ताचे दमन करतो) अशी रूपे होतात. တတ္ထ ဒမောတိ ဣန္ဒြိယသံဝရာဒီနံ ဧတံ နာမံ. ‘‘သစ္စေန ဒန္တော ဒမသာ ဥပေတော. ဝေဒန္တဂူ ဝုသိတဗြဟ္မစရိယော’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ဣန္ဒြိယသံဝရော ‘‘ဒမော’’တိ ဝုတ္တော. ‘‘ယဒိ သစ္စာ ဒမာ စာဂါ, ခန္တျာ ဘိယျောဓ ဝိဇ္ဇတီ’’တိ ဧတ္ထ ပညာ ‘‘ဒမော’’တိ ဝုတ္တာ. ‘‘ဒါနေန ဒမေန သံယမေန သစ္စဝဇ္ဇေနာ’’တိ ဧတ္ထ ဥပေါသထကမ္မံ ‘‘ဒမော’’တိ ဝုတ္တံ. ‘‘ဒမုပသမေနာ’’တိ ဧတ္ထ ခန္တိ ‘‘ဒမော’’တိ ဝုတ္တာ. ဣစ္စေဝံ – त्यामध्ये 'दम' हे इंद्रियसंयम इत्यादींचे नाव आहे. "सत्याने दमित आणि दमाने (संयमाने) युक्त, वेदांतगू (ज्ञानाचा पारगामी) आणि ब्रह्मचर्य पूर्ण केलेला" येथे इंद्रियसंयमाला 'दम' म्हटले आहे. "जर सत्य, दम (संयम), त्याग आणि क्षमा यापेक्षा अधिक काही असेल" येथे प्रज्ञेला 'दम' म्हटले आहे. "दानाने, दमाने, संयमाने आणि सत्यवचनाने" येथे उपोसथ कर्माला 'दम' म्हटले आहे. "दम आणि उपशमाने" येथे क्षमेला 'दम' म्हटले आहे. अशा प्रकारे – ‘‘ဣန္ဒြိယသံဝရော ပညာ, ခန္တိ စာပိ ဥပေါသထော; ဣမေ အတ္ထာ ပဝုစ္စန္တိ, ဒမသဒ္ဒေန သာသနေ’’တိ. "इंद्रियसंयम, प्रज्ञा, क्षमा आणि उपोसथ; हे अर्थ शासनात (बुद्ध शासनात) 'दम' शब्दाने सांगितले जातात." ယာ ဂတိပါပုဏေသု. ယာယတိ, ယာယန္တိ. ပရိယာယော. ယာယမာနော မဟာရာဇာ, အဒ္ဒါ သီဒန္တရေ နဂေ. ယာယန္တော. ယာယန္တမနုယာယတိ. ယာတာနုယာယီ. ယာယိတုံ, ယာယိတွာ ဣစ္စာဒီနိ. 'या' धातू 'गति' (जाणे) आणि 'पापुण' (प्राप्त करणे) या अर्थात आहे. 'यायति', 'यायन्ति' (जातो, जातात). 'परियायो' (पर्याय/पद्धत). 'यायमानो महाराजा, अद्दा सीदन्तरे नगे' (जाताना महाराजांनी सीदंतर पर्वताला पाहिले). 'यायन्तो' (जाणारा). 'यायन्तमनुयायति' (जाणाऱ्याच्या मागे जातो). 'यातानुयायी' (गेलेल्यांच्या मागे जाणारा). 'यायितुं', 'यायित्वा' इत्यादी. ဧတ္ထ ပရိယာယသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ, ပရိယာယသဒ္ဒေါ ဝါရဒေသနာကာရဏေသု သမန္တတော ဂန္တဗ္ဗဋ္ဌာနေ စ သဒိသေ စ ဝတ္တတိ. ‘‘ကဿ နု ခေါ အာနန္ဒ အဇ္ဇ ပရိယာယော ဘိက္ခုနိယော ဩဝဒိတု’’န္တိအာဒီသု ဟိ ဝါရေ ဝတ္တတိ. ‘‘မဓုပိဏ္ဍိကပရိယာယောတိနံ ဓာရေဟီ’’တိအာဒီသု ဒေသနာယံ. ‘‘ဣမိနာပိ ခေါ တေ ရာဇည ပရိယာယေန ဧဝံ ဟောတူ’’တိအာဒီသု [Pg.238] ကာရဏေ. ‘‘ပရိယာယပထော’’တိအာဒီသု သမန္တတော ဂန္တဗ္ဗဋ္ဌာနေ. ‘‘ကောပသဒ္ဒေါ ခေါဘပရိယာယော’’တိအာဒီသု သဒိသေ ဝတ္တတိ. ဣစ္စေဝံ – येथे 'परियाय' (pariyāya) शब्दाचा अर्थ स्पष्ट केला जात आहे. 'परियाय' हा शब्द वार (वेळ/क्रम), देसना (उपदेश), कारण, सर्व बाजूंनी जाण्याचे ठिकाण (मार्ग) आणि सदृश (समान) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'कस्स नु खो आनन्द अज्ज परियायो भिक्खुनियो ओवदितुं' (हे आनंदा, आज भिक्खुनींना उपदेश देण्याची कोणाची वेळ/पाळी आहे?) इत्यादी वाक्यांमध्ये तो 'वार' (वेळ/क्रम) या अर्थाने वापरला जातो. 'मधुपिण्डिकपरियायोति नं धारेहि' (याला मधुपिंडिक उपदेश म्हणून लक्षात ठेव) इत्यादी वाक्यांमध्ये तो 'देसना' (उपदेश) या अर्थाने वापरला जातो. 'इमिनापि खो ते राजञ्ञ परियायेन एवं होतु' (हे राजा, याही कारणाने तुझ्यासाठी असेच असो) इत्यादी वाक्यांमध्ये तो 'कारण' या अर्थाने वापरला जातो. 'परियायपथो' इत्यादी वाक्यांमध्ये तो 'सर्व बाजूंनी जाण्याचे ठिकाण' (मार्ग) या अर्थाने वापरला जातो. 'को पसद्दो खोभपरियायो' (कोप शब्द हा क्षोभाचा समानार्थी आहे) इत्यादी वाक्यांमध्ये तो 'सदृश' (समान) या अर्थाने वापरला जातो. अशा प्रकारे - ပရိယာယရဝေါ ဝါရ-ဒေသနာကာရဏေသု စ; သမန္တတောဝ ဂန္တဗ္ဗ-ဋ္ဌာနေ စ သဒိသေ သိယာ. 'परियाय' हा शब्द वार (क्रम), देसना (उपदेश), कारण, सर्व बाजूंनी जाण्याचे ठिकाण (मार्ग) आणि सदृश (समान) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. ရိ ဝသနေ. ရိယတိ. रि (ri) - वास करणे (राहणे) या अर्थात. रियति (riyati). ဝိလီ ဝိလီနဘာဝေ. သပ္ပိ ဝိလီယတိ. ကာရိတေ ဝိလာပယတိ. विली (vilī) - विरघळणे (विलीन होणे) या अर्थात. सप्पि विलीयति (तूप विरघळते). प्रयोजक (Kārite) मध्ये - विलापयति (vilāpayati - विरघळवतो). ဝါ ဂတိဂန္ဓနေသု. ဝါယတိ. ဝါယော, ဝါတော. वा (vā) - गती (वाहणे) आणि गंध पसरवणे या अर्थात. वायति (vāyati - वाहतो/सुगंध पसरवतो). वायो (vāyo), वातो (vāto - वारा). သိဝု တန္တသန္တာနေ. သိဗ္ဗတိ, သံသိဗ္ဗတိ. သိဗ္ဗံ, သိဗ္ဗန္တော. ကာရိတေ – သိဗ္ဗေတိ, သိဗ္ဗယတိ, သိဗ္ဗာပေတိ, သိဗ္ဗာပယတိ. सिवु (sivu) - धागा जोडणे (शिवणे) या अर्थात. सिब्बति (sibbati), संसिब्बति (saṃsibbati). सिब्बं (sibbaṃ), सिब्बन्तो (sibbanto). प्रयोजक (Kārite) मध्ये - सिब्बेति (sibbeti), सिब्बयति (sibbayati), सिब्बापेति (sibbāpeti), सिब्बापयति (sibbāpayati). သိဝု ဂတိသောသနေသု. သိဗ္ဗတိ. सिवु (sivu) - गती आणि कोरडे करणे (शोषण) या अर्थात. सिब्बति (sibbati). ဓိဝု ခိဝု နိဒဿနေ. ဓိဗ္ဗတိ. ခိဗ္ဗတိ. धिवु (dhivu), खिवु (khivu) - निर्देश करणे (दाखवणे) या अर्थात. धिब्बति (dhibbati), खिब्बति (khibbati). သာ တနုကရဏေ. သိယတိ, သိယန္တိ. सा (sā) - बारीक करणे (कमी करणे) या अर्थात. सियति (siyati), सियन्ति (siyanti). သာ အန္တကမ္မနိ. သိယတိ အနဝသေသတော မာနံ သိယတိ သမုစ္ဆိန္ဒတီတိ အဂ္ဂမဂ္ဂေါ မာနသန္တိ ဟိ ဝုတ္တံ. सा (sā) - अंत करणे (समाप्त करणे) या अर्थात. सियति (siyati) म्हणजे पूर्णपणे नष्ट करणे; मान (अहंकार) नष्ट करतो, समूळ उपटून टाकतो म्हणून अग्र मार्ग (अर्हत मार्ग) हा 'मानसंत' (मानाचा अंत करणारा) म्हटला गेला आहे. သာ အဿာဒနေ. ရသံ သာယတိ. သာယိတံ, သာယနံ. सा (sā) - आस्वाद घेणे (चाखणे) या अर्थात. रसं सायति (रसाचा आस्वाद घेतो). सायितं (sāyitaṃ), सायनं (sāyanaṃ). သိ ပါဏိပ္ပသဝေ. သူယတိ, ပသူယတိ. ပသူတာ ဂါဝီ. सि (si) - प्राण्यांना जन्म देणे (प्रसव) या अर्थात. सूयति (sūyati), पसूयति (pasūyati). पसूता गावी (प्रसूत झालेली गाय). ကုသု ဟရဏဒိတ္တီသု. ကုသယတိ. कुसु (kusu) - हरण करणे (घेऊन जाणे) आणि चमकणे (दीप्ती) या अर्थात. कुसयति (kusayati). သိလိသ အာလိင်္ဂနေ. သိလိဿတိ. သိလေသော. सिलिस (silisa) - आलिंगन देणे (मिठी मारणे) या अर्थात. सिलिस्सति (silissati). सिलेसो (sileso - श्लेष/आलिंगन). ကိလိသ ဥပတာပေ. ကိလိဿတိ, သံကိလိဿတိ. ကိလေသော, သံကိလေသော. ဣကာရလောပေ က္လိဿတိ က္လေသော [Pg.239] ဣစ္စာဒီနိ. အပိစ မလီနတာပိ ကိလိသသဒ္ဒေန ဝုစ္စတိ, ကိလိဋ္ဌဝတ္ထံ ပရိဒဟတိ. ‘‘စိတ္တေန သံကိလိဋ္ဌေန, သံကိလိဿန္တိ မာဏဝါ’’တိအာဒီသု ဓာတူနံ အနေကတ္ထတာယ. किलिस (kilisa) - पीडा देणे (तप्त करणे/मलीन होणे) या अर्थात. किलिस्सति (kilissati), संकिलिस्सति (saṃkilissati). किलेसो (kileso - क्लेश), संकिलेसो (saṃkileso). 'इ' कारचा लोप झाल्यावर 'क्लिस्सति' (klissati), 'क्लेसो' (kleso) इत्यादी रूपे होतात. तसेच मलीनता देखील 'किलिस' शब्दाने दर्शविली जाते, जसे की 'किलिट्ठवत्थं परिदहति' (मलीन वस्त्र परिधान करतो). 'चित्तेन संकिलिट्ठेन, संकिलिस्सन्ति माणवा' (चित्त मलीन झाल्यामुळे प्राणी मलीन होतात) इत्यादी वाक्यांमध्ये धातूंच्या अनेक अर्थांमुळे हा प्रयोग होतो. မသ အပ္ပီဘာဝေ ခမာယဉ္စ. မဿတိ. मस (masa) - अल्प होणे आणि क्षमा करणे या अर्थात. मस्सति (massati). လီသ အပ္ပီဘာဝေ. လိဿတိ. လေသော. ‘‘လိသ လေသနေ’’တိပိ ပဌန္တိ အာစရိယာ. लीस (līsa) - अल्प होणे या अर्थात. लिस्सति (lissati). लेसो (leso). आचार्य 'लिस लेसने' (lisa lesane - लिस हा लेश/अल्प करणे या अर्थात) असाही पाठ वाचतात. တသ ပိပါသာယံ. တဿတိ, ပရိတဿတိ. ပရိတဿနာ, တသိဏာ, တသိတော. तस (tasa) - तहान लागणे (तृष्णा/व्याकुळ होणे) या अर्थात. तस्सति (tassati), परितस्सति (paritassati). परितस्सना (paritassanā), तसिणा (tasiṇā - तृष्णा), तसितो (tasito). ဒုသ ဒေါသနေ. ဒုဿတိ. ဒေါသော, ဒေါသနံ, ဒေါသိတော. दुस (dusa) - दूषित होणे (द्वेष करणे) या अर्थात. दुस्सति (dussati). दोसो (doso), दोसनं (dosanaṃ), दोसितो (dosito). ဒုသ အပ္ပီတိယံ. ဒုဿတိ, ပဒုဿတိ. ဒေါသော, ပဒေါသော, ဒုဋ္ဌော, ပဒုဋ္ဌော, ဒူသကော, ဒူသိတော, ဒူသနာ. दुस (dusa) - अप्रिय वाटणे (द्वेष करणे) या अर्थात. दुस्सति (dussati), पदुस्सति (padussati). दोसो (doso), पदोसो (padoso), दुट्ठो (duṭṭho), पदुट्ठो (paduṭṭho), दूसको (dūsako), दूसितो (dūsito), दूसना (dūsanā). အသု ခေပေ. ခေပေါ ခိပနံ. အဿတိ. နိရဿတိအာဒိယတိ စ ဓမ္မံ. ဣဿာသော. असु (asu) - फेकणे (क्षेप) या अर्थात. क्षेप म्हणजे फेकणे. अस्सति (assati). निरस्सति (nirassati - फेकून देतो/त्याग करतो) आणि धम्माचा स्वीकार करतो. इस्सासो (issāso - धनुर्धारी). ဧတ္ထ စ နိရဿတီတိ ဆဍ္ဍေတိ သတ္ထာရံ တထာ ဓမ္မက္ခာနာဒီနိ. ဣဿာသောတိ ဥသုံ အဿတိ ခိပတီတိ ဣဿာသော, ဓနုဂ္ဂဟော. येथे 'निरस्सति' म्हणजे शास्त्याला (बुद्धांना) तसेच धम्म-उपदेशाला सोडून देणे (फेकून देणे). 'इस्सासो' म्हणजे जो बाण (उसुं) फेकतो (अस्सति) तो 'इस्सासो' म्हणजेच धनुर्धारी (धनुग्गहो). ယသု ပယတနေ. ယဿတိ. နိယသကမ္မံ. यसु (yasu) - प्रयत्न करणे या अर्थात. यस्सति (yassati). नियसकम्मं (niyasakammaṃ - नियसकर्म). ဧတ္ထ စ ယေန ဝိနယကမ္မေန ‘‘နိဿာယ တေ ဝတ္ထဗ္ဗ’’န္တိ နိယဿိယတိ ဘဇာပိယတီတိ နိယသော ဗာလံ, တံ နိယသကမ္မံ နာမ. ‘‘ကရောဟိ မေ ယက္ခ နိယသကမ္မ’’န္တိ ဧတ္ထ ပန နိဂ္ဂဟကမ္မံ နိယသကမ္မံ နာမ. येथे ज्या विनयकर्माने 'तुला (दुसऱ्याच्या) आश्रयाने राहावे लागेल' असे सांगून अज्ञानी भिक्खूला परावलंबी केले जाते (निसर्ग दिला जातो), त्याला 'नियसकर्म' म्हणतात. 'करोहि मे यक्ख नियसकम्मं' (हे यक्षा, माझ्यासाठी नियसकर्म कर) येथे मात्र 'नियसकर्म' म्हणजे निग्रहकर्म (शिक्षा/दमन) असा अर्थ आहे. ဘဿ ဘဿနေ. ဘဿတိ. ဘဿံ, ဘဿကာရကော. भस्स (bhassa) - बोलणे (भाषण करणे) या अर्थात. भस्सति (bhassati). भस्सं (bhassaṃ - संभाषण), भस्सकारको (bhassakārako - बोलणारा). ဝသ သဒ္ဒေ. သကုဏော ဝဿတိ. အဓမော မိဂဇာတာနံ, သိင်္ဂါလော တာတ ဝဿတိ. မဏ္ဍူကော ဝဿတိ. वस (vasa) - आवाज करणे या अर्थात. सकुळो वस्सति (पक्षी ओरडतो). 'अधमो मिगजातानं, सिंगालो तात वस्सति' (हे तात, पशूंमध्ये अधम असलेला कोल्हा ओरडतो). मण्डूको वस्सति (बेडूक डराव-डराव करतो). နသ [Pg.240] အဒဿနေ. နဿနဓမ္မံ နဿတိ. ပနဿတိ. ဝိနဿတိ. နဿ ဝသလိ, စရ ပိရေ ဝိနဿ. နဋ္ဌော, ဝိနဋ္ဌော. ကာရိတေ – နာသေတိ, နာသယတိ. नस (nasa) - अदृश्य होणे (नष्ट होणे) या अर्थात. नस्सनधम्मं nस्सति (नाशवंत नष्ट होते). पनस्सति (panassati), विनस्सति (vinassati). 'नस्स वसलि, चर पिरे विनस्स' (हे दासी, नष्ट हो/चालती हो, अरे दुष्टा, नष्ट हो). नट्ठो (naṭṭho), विनट्ठो (vinaṭṭho). प्रयोजक (Kārite) मध्ये - नासेति (nāseti), नासयति (nāsayati). သုသ သောသနေ. ပဏ္ဏံ သုဿတိ. ကာရိတေ – ဝါတော ပဏ္ဏံ သောသေတိ, သောသယတိ. ကမ္မေ – ဝါတေန ပဏ္ဏံ သောသိယတိ. ဘာဝေ ကြိယာပဒမပ္ပသိဒ္ဓံ. သောသော, သုက္ခံ ကဋ္ဌံ. သုဿံ, သုဿန္တော. သုဿမာနော ဒဟဒေါ. सुस (susa) - सुकणे (शोषण) या अर्थात. पण्णं सुस्सति (पान सुकते). प्रयोजक (Kārite) मध्ये - वातो पण्णं सोसेति, सोसयति (वारा पान सुकवतो). कर्मभाव (Kamme) मध्ये - वातेन पण्णं सोसियति (वाऱ्याने पान सुकवले जाते). भाववाच्य मध्ये क्रियापद अप्रसिद्ध आहे. सोसो (soso - शोष), सुक्खं कट्ठं (सुके लाकूड). सुस्सं (sussaṃ), सुस्सन्तो (sussanto). सुस्समानो दहदो (आटत असलेला तलाव). တုသ တုဋ္ဌိယံ. တုဿတိ, သန္တုဿတိ. သန္တုဋ္ဌိ, သန္တောသော, တောသနံ, တုဋ္ဌဗ္ဗံ, တုဿိတဗ္ဗံ, တုသိတာ. ကာရိတေ ‘‘တောသေတိ’’ ဣစ္စာဒီနိ. तुस (tusa) - संतुष्ट होणे (आनंदी होणे) या अर्थात. तुस्सति (tussati), सन्तुस्सति (santussati). सन्तुट्ठि (santuṭṭhi), सन्तोसो (santoso), तोसनं (tosanaṃ), तुट्ठब्बं (tuṭṭhabbaṃ), तुस्सितब्बं (tussitabbaṃ), तुसिता (tusitā - तुषित देवलोक). प्रयोजक (Kārite) मध्ये 'तोसेति' (toseti) इत्यादी रूपे होतात. ဟာ ပရိဟာနိယံ. ဟာယတိ, ပရိဟာယတိ. ဟာယန္တိ တတ္ထ ဝဠဝါ. ဘာဝေ ‘‘ဘယံ ဝါ ဆမ္ဘိတတ္တံ ဝါ လောမဟံသော ဝါ, သော ပဟီယိဿတီ’’တိ စ ‘‘ရာဂေါ ပဟီယတီ’’တိ စ ရူပံ. ကမ္မေ ကြိယာပဒမပ္ပသိဒ္ဓံ. ‘‘ရာဂေါ ပဟီယတီ’’တိ ဣဒံ ပန ‘‘ဟာ စာဂေ’’တိ ဝုတ္တဿ ဘူဝါဒိဂဏိကဓာတုဿ ရူပံ ‘‘ရာဂံ ပဇဟတီ’’တိ ကတ္တုပဒဿ ဒဿနတော. हा (hā) - कमी होणे (ऱ्हास होणे) या अर्थात. हायति (hāyati), परिहायति (parihāyati). 'हायन्ति तत्थ वळवा' (तेथे घोडी क्षीण होतात). भाववाच्य मध्ये 'भयं वा छम्भितत्तं वा लोमहंसो वा, सो पहीयिस्सति' (भय, थरकाप किंवा अंगावर काटा येणे, ते नष्ट होईल) आणि 'रागो पहीयति' (राग नष्ट होतो) अशी रूपे होतात. कर्मवाच्य मध्ये क्रियापद अप्रसिद्ध आहे. 'रागो पहीयति' हे रूप मात्र 'हा चागे' (त्याग करणे) या अर्थातील भूवादिगणीय धातूचे रूप आहे, कारण 'रागं पजहति' (रागाचा त्याग करतो) या कर्तृपदाच्या दर्शनामुळे. နဟ ဗန္ဓနေ. နယှတိ. ဥပနယှတိ. သန္နယှတိ. သန္နာဟော. သန္နဒ္ဓေါ. नह (naha) - बांधणे या अर्थात. नय्हति (nayhati). उपनय्हति (upanayhati - वैर बांधणे). सन्नय्हति (sannayhati - सज्ज होणे/कवच घालणे). सन्नाहो (sannāho - चिलखत/तयारी), सन्नद्धो (sannaddho - सज्ज झालेला). မုဟ ဝေစိတ္တေ. မုယှတိ, သမ္မုယှတိ, ပမုယှတိ. မောဟော, ပမောဟော. မူဠှော. မောမူဟော ပုရိသော. မောမူဟံ စိတ္တံ. ကာရိတေ – မောဟေတိ. ပမောဟကော. ဧတ္ထ စ မောမူဟောတိ အဝိသဒတာယ မောမူဟော, မဟာမူဠှောတိ အတ္ထော. मुह (muha) - मोहित होणे (चित्तभ्रम होणे) या अर्थात. मुय्हति (muyhati), सम्मुय्हति (sammuyhati), पमुय्हति (pamuyhati). मोहो (moho), पमोहो (pamoho). मूळ्हो (mūḷho - मोहित/मूर्ख). मोमूहो पुरिसो (अतिशय मोहित/मूर्ख मनुष्य). मोमूहं चित्तं (अतिशय मोहित चित्त). प्रयोजक (Kārite) मध्ये - मोहेति (moheti). पमोहको (pamohako). येथे 'मोमूह' म्हणजे स्पष्टता नसल्यामुळे अत्यंत मोहित झालेला, म्हणजेच 'महामूळ्ह' (अतिशय मूर्ख) असा अर्थ आहे. သဟ သုဟ သတ္တိယံ. သယှတိ. သုယှတိ. सह (saha), सुह (suha) - सहन करणे (शक्ती असणे) या अर्थात. सय्हति (sayhati), सुय्हति (suyhati). နှာ [Pg.241] သောစေယျေ. နှာယတိ, အပ္ပက္ခရာနံ ဗဟုဘာဝေ နဟာယတိ. နဟာယိတွာ, နှာယိတွာ. နဟာနံ, နှာနံ. သီသံ နှာတော. ဧတ္ထ စ သီသံ နှာတောတိ သီသံ ဓောဝိတွာ နှာတောတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော ပေါရာဏေဟိ အနုမတတ္တာ. न्हा (nhā) - शुद्ध करणे (स्नान करणे) या अर्थात. न्हायति (nhāyati), अल्प अक्षरांच्या जागी बहुभावामुळे 'नहायति' (nahāyati) असे होते. नहायित्वा (nahāyitvā), न्हायित्वा (nhāyitvā). नहानं (nahānaṃ), न्हानं (nhānaṃ - स्नान). सीसं न्हातो (डोक्यावरून स्नान केलेला). येथे 'सीसं न्हातो' म्हणजे डोके धुवून स्नान केलेला असा अर्थ प्राचीन आचार्यांच्या संमतीमुळे घेतला पाहिजे. သိနိဟ ပီတိယံ. သိနိယှတိ. သိနေဟကော, သိနေဟိတော, သိနိဒ္ဓေါ. ပုတ္တေ သိနေဟော အဇာယထ. ဣကာရလောပေန သ္နေဟော. တထာ ဟိ ‘‘နိသ္နေဟမဘိကင်္ခါမီ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. सिनिह (siniha) - प्रेम करणे (स्नेह) या अर्थात. सिनिय्हति (siniyhati). सिनेहको (sinehako), सिनेहितो (sinehito), सिनिद्धो (siniddho - स्निग्ध/प्रेमाळ). 'पुत्ते सिनेहो अजायथ' (पुत्रावर प्रेम निर्माण झाले). 'इ' कारचा लोप होऊन 'स्नेहो' (sneho) असे रूप होते. म्हणूनच 'निस्नेहमभिकङ्खामि' (मी स्नेहरहित होण्याची आकांक्षा करतो) असा पालि पाठ आढळतो. ဝိရိဠ လဇ္ဇာယံ စောဒနေ စ. ဝိရိဠိတော. လဇ္ဇာဝသေန အတ္ထော ပသိဒ္ဓေါ, န စောဒနာဝသေန. တထာ ဟိ ‘‘ဝိရိဠိတောတိ လဇ္ဇိတော’’တိ အတ္ထသံဝဏ္ဏကာ ဂရူ ဝဒန္တိ ‘‘လဇ္ဇနာကာရပ္ပတ္တော’’တိ စ. विरिळ (viriḷa) - लाजणे आणि प्रेरित करणे (चोदना) या अर्थात. विरिळितो (viriḷito). लाजेच्या संदर्भात हा अर्थ प्रसिद्ध आहे, प्रेरणेच्या संदर्भात नाही. म्हणूनच अर्थ स्पष्ट करणारे पूज्य आचार्य म्हणतात की, 'विरिळितो म्हणजे लज्जित झालेला' आणि 'लाजण्याची अवस्था प्राप्त झालेला'. ဒိဝါဒီ ဧတ္တကာ ဒိဋ္ဌာ, ဓာတဝေါ မေ ယထာဗလံ; သုတ္တေသွညေပိ ပေက္ခိတွာ, ဂဏှဝှော အတ္ထယုတ္တိတောတိ. दिवादि गणाचे एवढे धातू मी माझ्या बुद्धीनुसार पाहिले आहेत; सूत्रांमध्ये इतर धातूही पाहून योग्य अर्थानुसार त्यांचा स्वीकार करावा. ဒိဝါဒိဂဏောယံ. हा दिवादि गण आहे. သွာဒိဂဏိက स्वादि गणीय သု သဝနေ. ‘‘သုဏောတိ, သုဏာတိ. သုဏိံသု. ပဋိဿုဏိ, ပဋိဿုဏိံသု. အဿောသိ, အဿောသုံ. ပစ္စဿောသိ, ပစ္စဿောသုံ’’ ဣစ္စာဒီနိ, ‘‘သုဏိဿတိ, သောဿတိ’’ ဣစ္စာဒီနိ စ ဘဝန္တိ. အဗ္ဘာသဝိသယေ ‘‘သုဿူသတိ, သုဿူသာ’’ ဣစ္စာဒီနိ. အနဗ္ဘာသဝိသယေ – သာဝကော, သောတော, သုဏံ, သုဏန္တော, သုဏမာနော, သုယျမာနော, သဝနံ, သုတံ. အသုယိတ္ထာတိ ဝါ သုတံ. သုတဝါ, သောတံ, သောဏော, သုဏိတုံ, သောတုံ. သုဏိတွာ, သုဏိယ, သုဏိယာန, သုတွာ, သုတွာန. ကာရိတေ – သာဝေတိ, သာဝယတိ. ကမ္မေ – သဒ္ဒေါ သုယျတိ, သူယတိ စ. ဘာဝေ ပဒရူပမပ္ပသိဒ္ဓံ. सु (su) - ऐकणे (श्रवण) या अर्थात. 'सुणोति' (suṇoti), 'सुणाति' (suṇāti). 'सुणिंसु' (suṇiṃsu). 'पटिस्सुणि' (paṭissuṇi), 'पटिस्सुणिंसु' (paṭissuṇiṃsu). 'अस्सोसि' (assosi), 'अस्सोसुं' (assosuṃ). 'पच्चस्सोसि' (paccassosi), 'पच्चस्सोसुं' (paccassosuṃ) इत्यादी, आणि 'सुणिस्सति' (suṇissati), 'सोस्सति' (sossati) इत्यादी रूपे होतात. द्वित्व (Abbhāsa) च्या विषयात 'सुस्सूसति' (sussūsati - ऐकण्याची इच्छा करतो), 'सुस्सूसा' (sussūsā - शुश्रूषा/सेवा) इत्यादी रूपे होतात. अ-द्वित्व विषयात - सावको (sāvako - श्रावक), सोतो (soto - श्रोता), सुणं (suṇaṃ), सुणन्तो (suṇanto), सुणमानो (suṇamāno), सुय्यमानो (suyyamāno), सवनं (savanaṃ - श्रवण), सुतं (sutaṃ - ऐकलेले). 'असुयित्था' या अर्थाने देखील 'सुतं' होते. सुतवा (sutavā - बहुश्रुत), सोतं (sotaṃ - कान), सोणो (soṇo), सुणितुं (suṇituṃ), सोतुं (sotuṃ). सुणित्वा (suṇitvā), सुणिय (suṇiya), सुणियान (suṇiyāna), सुत्वा (sutvā), सुत्वान (sutvāna). प्रयोजक (Kārite) मध्ये - सावेति (sāveti), सावयति (sāvayati). कर्मवाच्य (Kamme) मध्ये - 'सद्दो सुय्यति' (saddo suyyati - शब्द ऐकू येतो), 'सूयति' (sūyati) च. भाववाच्य मध्ये क्रियापदाचे रूप अप्रसिद्ध आहे. တတ္ထ [Pg.242] သာဝကောတိ အန္တေဝါသိကော, သော ဒုဝိဓော အာဂတပ္ဖလော အနာဂတပ္ဖလော စ, တတ္ထ အာဂတပ္ဖလော သဝနန္တေ အရိယာယ ဇာတိယာ ဇာတောတိ ‘‘သာဝကော’’တိ ဝုစ္စတိ, ဣတရော ဂရူနံ ဩဝါဒံ သုဏာတီတိ ‘‘သာဝကော’’တိ. သာဝကော, အန္တေဝါသိကော, သိဿောတိ ပရိယာယာ. त्यामध्ये 'श्रावक' म्हणजे अंतेवासिक (जवळ राहणारा शिष्य) होय. तो दोन प्रकारचा असतो: आगतफल (फल प्राप्त झालेला) आणि अनागतफल (फल प्राप्त न झालेला). त्यामध्ये, ऐकल्यानंतर आर्य कुळात जन्मलेला असल्यामुळे आगतफलाला 'श्रावक' म्हटले जाते; तर दुसरा (अनागतफल) गुरूंचा उपदेश ऐकतो म्हणून त्याला 'श्रावक' म्हटले जाते. श्रावक, अंतेवासिक आणि शिष्य हे समानार्थी शब्द आहेत. ဧတ္ထ သုတသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရံ ဝဒါမ သဒ္ဓိံ သောတသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရေန. သုတသဒ္ဒေါ သဥပသဂ္ဂေါ အနုပသဂ္ဂေါ စ အနုပပဒေန, သုတသဒ္ဒေါ စ – येथे आम्ही 'सोत' (sota) शब्दाच्या अर्थ स्पष्टीकरणासोबतच 'सुत' (suta) शब्दाचा अर्थ स्पष्ट करतो. 'सुत' शब्द उपसर्गासह, उपसर्गाशिवाय आणि उपपदाशिवाय देखील असतो – ဂမနေ ဝိဿုတေ တိန္တေ, နိယောဂေါ’ပစိတေပိ စ; သဒ္ဒေ စ သောတဒွါရာနု-သာရဉာတေသု ဒိဿတိ. गमन (जाणे), प्रसिद्ध (विख्यात), ओले झालेले, नियोग (नियोजित करणे) आणि उपचित (संचित करणे); तसेच शब्द आणि श्रोत्रद्वाराच्या (कानाच्या) माध्यमातून जाणलेले (ऐकलेले) या अर्थांमध्ये 'सुत' शब्द दिसून येतो. တထာ ဟိ ‘‘သေနာယ ပသုတော’’တိအာဒီသု ဂစ္ဆန္တောတိ အတ္ထော. ‘‘သုတဓမ္မဿ ပဿတော’’တိအာဒီသု ဝိဿုတဓမ္မဿာတိ အတ္ထော. ‘‘အဝဿုတာ အဝဿုတဿ ပုရိသပုဂ္ဂလဿာ’’တိအာဒီသု တိန္တဿာတိ အတ္ထော. ‘‘ယေ ဈာနပ္ပသုတာ ဓီရာ’’တိအာဒီသု အနုယုတ္တာတိ အတ္ထော. ‘‘တုမှေဟိ ပုညံ ပသုတံ အနပ္ပက’’န္တိအာဒီသု ဥပစိတန္တိ အတ္ထော. ‘‘ဒိဋ္ဌံ သုတံ မုတံ ဝိညာတ’’န္တိအာဒီသု သဒ္ဒေါတိ အတ္ထော. ‘‘ဗဟုဿုတော ဟောတိ သုတဓရော သုတသန္နိစယော’’တိအာဒီသု သောတဒွါရာနုသာရဝိညာတဓမ္မဓရောတိ အတ္ထော. तसेच, जसे की 'सेनाय पसुतो' (सैन्याकडे जाणारा) इत्यादींमध्ये 'जाणारा' असा अर्थ आहे. 'सुतधम्मस्स पस्सतो' इत्यादींमध्ये 'प्रसिद्ध धम्माचा' असा अर्थ आहे. 'अवस्सुता अवस्सुतस्स पुरिसपुग्गलस्स' इत्यादींमध्ये 'ओल्या झालेल्या' (आसक्त झालेल्या) असा अर्थ आहे. 'ये झानप्पसुता धीरा' इत्यादींमध्ये 'मग्न' (अनुयुक्त) असा अर्थ आहे. 'तुम्हेहि puññaṃ पसुतं अनप्पकं' इत्यादींमध्ये 'उपचित' (संचित केलेले) असा अर्थ आहे. 'दिट्ठं सुतं मुतं विञ्ञातं' इत्यादींमध्ये 'शब्द' (ऐकलेला) असा अर्थ आहे. 'बहुस्सुतो होति सुतधरो सुतसन्निचयो' इत्यादींमध्ये 'श्रोत्रद्वाराच्या माध्यमातून जाणलेल्या धम्माला धारण करणारा' असा अर्थ आहे. သောတသဒ္ဒေါပိ အနေကတ္ထပ္ပဘေဒေါ. တထာ ဟေသ – 'सोत' (sota) शब्द देखील अनेक अर्थांचे भेद असणारा आहे. तो याप्रमाणे आहे – မံသဝိညာဏဉာဏေသု, တဏှာဒီသု စ ဒိဿတိ; ဓာရာယံ အရိယမဂ္ဂေ, စိတ္တသန္တတိယမ္ပိ စ. मांस-श्रोत्र (भौतिक कान), श्रोत्र-विज्ञान, ज्ञान-श्रोत्र, तृष्णा इत्यादींमध्ये; तसेच पाण्याचा प्रवाह, आर्य मार्ग आणि चित्तसंततीमध्येही तो (सोत शब्द) दिसून येतो. ‘‘သောတာယတနံ[Pg.243], သောတဓာတု, သောတိန္ဒြိယ’’န္တိအာဒီသု သောတသဒ္ဒေါ မံသသောတေ ဒိဿတိ, ‘‘သောတေန သဒ္ဒံ သုတွာ’’တိအာဒီသု သောတဝိညာဏေ. ‘‘ဒိဗ္ဗာယ သောတဓာတုယာ’’တိအာဒီသု ဉာဏသောတေ. ‘‘ယာနိ သောတာနိ လောကသ္မိန္တိ, ယာနိ ဧတာနိ သောတာနိ မယာ ကိတ္တိတာနိ ပကိတ္တိတာနိ အာစိက္ခိတာနိ ဒေသိတာနိ ပညပိတာနိ ပဋ္ဌပိတာနိ ဝိဝရိတာနိ ဝိဘတ္တာနိ ဥတ္တာနီကတာနိ ပကာသိတာနိ. သေယျထိဒံ? တဏှာသောတော ဒိဋ္ဌိသောတော ကိလေသသောတော ဒုစ္စရိတသောတော အဝိဇ္ဇာသောတော’’တိအာဒီသု ပဉ္စသု ဓမ္မေသု. ‘‘အဒ္ဒသာ ခေါ ဘဂဝါ မဟန္တံ ဒါရုက္ခန္ဓံ ဂင်္ဂါယ နဒိယာ သောတေန ဝုယှမာန’’န္တိအာဒီသု ဥဒကဓာရာယံ. ‘‘အရိယဿေတံ အာဝုသော အဋ္ဌင်္ဂိကဿ မဂ္ဂဿ အဓိဝစနံ, ယဒိဒံ သောတော’’တိအာဒီသု အရိယမဂ္ဂေ. ‘‘ပုရိသဿ စ ဝိညာဏသောတံ ပဇာနာတိ ဥဘယတော အဗ္ဗောစ္ဆိန္နံ ဣဓလောကေ ပတိဋ္ဌိတဉ္စ ပရလောကေ ပတိဋ္ဌိတဉ္စာ’’တိအာဒီသု စိတ္တသန္တတိယန္တိ. 'सोतायतनं, सोतधातु, सोतिन्द्रियं' इत्यादींमध्ये 'सोत' शब्द मांस-श्रोत्रासाठी (भौतिक कानासाठी) वापरला गेला आहे; 'सोतेन सद्दं सुत्वा' (कानाने शब्द ऐकून) इत्यादींमध्ये 'श्रोत्र-विज्ञाना'साठी; 'दिब्बाय सोतधातुया' (दिव्य श्रोत्रधातूने) इत्यादींमध्ये 'ज्ञान-श्रोत्रा'साठी; 'जगामध्ये जे प्रवाह (सोत) आहेत, जे प्रवाह माझ्याद्वारे कीर्तित, प्रकीर्तित, आख्यात, देशित, प्रज्ञापित, प्रस्थापित, विवृत, विभक्त, उत्तानीकृत आणि प्रकाशित केले गेले आहेत. ते कोणते? तृष्णा-प्रवाह, दृष्टी-प्रवाह, क्लेश-प्रवाह, दुश्चरित-प्रवाह आणि अविद्या-प्रवाह' इत्यादींमध्ये पाच धर्मांसाठी; 'भगवंतांनी गंगेच्या नदीच्या प्रवाहाने वाहून जाणारा एक मोठा लाकडाचा ओंडका पाहिला' इत्यादींमध्ये 'पाण्याच्या प्रवाहा'साठी; 'हे आवुसो! 'सोत' (प्रवाह) हे या आर्य अष्टांगिक मार्गाचेच नाव आहे' इत्यादींमध्ये 'आर्य मार्गा'साठी; आणि 'तो त्या व्यक्तीचा विज्ञान-प्रवाह दोन्ही बाजूंनी अखंड असलेला, या लोकात प्रतिष्ठित असलेला आणि परलोकात प्रतिष्ठित असलेला जाणतो' इत्यादींमध्ये 'चित्तसंतती'साठी (विज्ञानाच्या प्रवाहासाठी) वापरला आहे. သောဏောတိ သုနခေါ. သော ဟိ သာမိကဿ ဝစနံ သုဏာတီတိ သောဏောတိ ဝုစ္စတိ. 'सोण' (soṇa) म्हणजे कुत्रा होय. कारण तो मालकाचे बोलणे (वचन) ऐकतो, म्हणून त्याला 'सोण' म्हटले जाते. ဣမာနိ တဒဘိဓာနာနိ – ही त्याची नावे (समानार्थी शब्द) आहेत – သုနခေါ သာရမေယျော စ, သုဏော သူနော စ ကုက္ကုရော; သောဏော သွာနော သုဝါနော စ, သာဠုရော မိဂဒံသနော. सुनख, सारमेय, सुण, सून, कुक्कुर, सोण, स्वान, suvan, साळुर आणि मृगदंशन. သာ သုနိဓာတိ’မေ သဒ္ဒါ, ပုမာနေသု ပဝတ္တရေ; သုနခီ ကုက္ကုရီ သီ’တိ, ဣမေ ဣတ္ထီသု ဝတ္တရေ. 'सा', 'सुनिधी' इत्यादी शब्द पुल्लिंगात वापरले जातात; तर 'सुनखी', 'कुक्कुरी' आणि 'सी' हे शब्द स्त्रीलिंगात वापरले जातात. သုနခါ သာရမေယျာတိ, အာဒိ ဗဟုဝစော ပန; ပဝတ္တတိ ပုမိတ္ထီသု, အညတြာပိ အယံ နယော; परंतु 'सुनखा', 'सारमेय्या' इत्यादी अनेकवचनी रूपे पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंग दोन्हीमध्ये वापरली जातात; इतर ठिकाणीही हाच नियम लागू होतो. ကုက္ကုရောတိ [Pg.244] အယံ တတ္ထ, ဗာလကာလေ ရဝေန ဝေ; မဟလ္လကေပိ သုနခေ, ရူဠှိယာ သမ္ပဝတ္တတိ. त्यामध्ये 'कुक्कुर' हा शब्द बालपणीच्या आवाजामुळे पडला असला, तरी रूढीने तो मोठ्या कुत्र्यासाठी देखील वापरला जातो. တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာစရိယာ ကုက္ကုရဇာတကေ ‘‘ယေ ကုက္ကုရာ ရာဇကုလမှိ ဝဍ္ဎာ, ကောလေယျကာ ဝဏ္ဏဗလူပပန္နာ’’တိဣမသ္မိံပဒေသေ ဧဝမတ္ထံ ဝဏ္ဏယိံသု ‘‘ယေ ကုက္ကုရာတိ ယေ သုနခါ. ယထာ ဟိ တရုဏောပိ ပဿာဝေါ ပူတိမုတ္တန္တိ တဒဟုဇာတောပိ သိင်္ဂါလော ‘‘ဇရသိင်္ဂါလော’တိ, ကောမလာပိ ဂဠာစီလတာ ‘ပူတိလတာ’တိ, သုဝဏ္ဏဝဏ္ဏောပိ ကာယော ‘ပူတိကာယော’တိ ဝုစ္စတိ, ဧဝမေဝ ဝဿသတိကောပိ သုနခေါ ‘ကုက္ကုရော’တိ ဝုစ္စတိ, တသ္မာ မဟလ္လကာ ကာယူပပန္နာပိ တေ ‘ကုက္ကုရာ’တွေဝ ဝုတ္တာ’’တိ. तसेच, अट्ठकथाचार्यांनी 'कुक्कुर जातका'मध्ये 'ye kukkurā rājakulamhi vaḍḍhā, koleyyakā vaṇṇabalūpapannā' या गाथेच्या भागावर असा अर्थ स्पष्ट केला आहे: 'ye kukkurā' म्हणजे जे कुत्रे. ज्याप्रमाणे ताजे मूत्र देखील 'पूतीमूत्र' म्हटले जाते, त्याच दिवशी जन्मलेला कोल्हा देखील 'जरसिंघाल' (वृद्ध कोल्हा) म्हटला जातो, कोमल असलेली गुळवेल देखील 'पूतीलता' म्हटली जाते, सुवर्णवर्णाचा शरीर देखील 'पूतीकाय' म्हटले जाते, त्याचप्रमाणे शंभर वर्षांचा कुत्रा देखील 'कुक्कुर' म्हटला जातो. म्हणून, शरीराने मोठे असूनही त्यांना 'कुक्कुर' असेच म्हटले गेले आहे. ကိ ဟိံသာယံ. ကိဏောတိ, ကိဏာတိ, ကိဏန္တိ. 'कि' (ki) धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. (त्याची रूपे) किणोति, किणाति, किणन्ति अशी होतात. သက သာမတ္ထိယေ. သမတ္ထဘာဝေါ သာမတ္ထိယံ, ယထာ ဒက္ခိယံ. သက္ကုဏာတိ, သက္ကုဏန္တိ. အသက္ခိ. သက္ခိဿတိ. သက္ကော. သက္ကီ. 'सक' (saka) धातू सामर्थ्याच्या अर्थात आहे. समर्थ असण्याचा भाव म्हणजे सामर्थ्य, जसे 'दक्खिय' (दक्षता). (त्याची रूपे) सक्कुणाति, सक्कुणन्ति, असक्खि, सक्खिस्सति, सक्को, सक्की अशी होतात. ဧတ္ထ သက္ကောတိ ဒေဝရာဇာ. သော ဟိ ပရဟိတံ သကဟိတဉ္စ ကာတုံ သက္ကုဏာတီတိ သက္ကော. အပိစ သကျကုလဇာတော ယော ကောစိပိ. တထာ ဟိ ‘‘အထ ခေါ မဟာနာမော သက္ကော’’တိအာဒိ ဝုတ္တံ. ‘‘ဘဂဝန္တဉ္စ ပိင်္ဂိယော မံ သက္က သမုဒ္ဓရာဟီတိ အာလပိ. သကျာ ဝတ ဘော ကုမာရာ ပရမသကျာ ဝတ ဘော ကုမာရာ’’တိ ဝစနမုပါဒါယ သဗ္ဗေပိ သကျကုလေ ဇာတာ ‘‘သကျာ’’တိ စ ‘‘သာကိယာ’’တိ စ ‘‘သက္ကာ’’တိ စ ဝုစ္စန္တိ. ဧတ္ထ သွာဒိတ္တေပိ အနေကဿရဓာတုတော ဧကောဝ ဥဏာပစ္စယော ဟောတိ, န ဏု ဏာပစ္စယာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. येथे 'सक्क' (sakka) म्हणजे देवराज (शक्र) होय. कारण तो परहित आणि स्वहित करण्यास समर्थ आहे, म्हणून त्याला 'सक्क' म्हणतात. शिवाय, शाक्य कुळात जन्मलेला कोणताही व्यक्ती. तसेच 'अथ खो महानामो सक्को' इत्यादी म्हटले आहे. आणि पिंगियाने भगवंतांना 'हे शाक्य (सक्क)! माझा उद्धार करा' अशी हाक मारली. 'अरे, हे कुमार खरोखरच शाक्य आहेत, हे कुमार परम शाक्य आहेत' या वचनाचा आधार घेऊन, शाक्य कुळात जन्मलेल्या सर्वांनाच 'सक्य', 'साकिय' आणि 'सक्क' म्हटले जाते. येथे स्वादि गणात असूनही, अनेक स्वर असणाऱ्या धातूपासून एकच 'उणा' प्रत्यय होतो, 'णु' किंवा 'णा' प्रत्यय होत नाही, असे समजावे. ခီ [Pg.245] ခယေ. ခီဏောတိ. ခီဏာတိ. ခီဏာ ဇာတိ. ခီဏော. အယောဂါ ဘူရိသင်္ခယော. 'खी' (khī) धातू क्षय होण्याच्या अर्थात आहे. (त्याची रूपे) खिणोति, खिणाति अशी होतात. 'खिणा जाती' (जन्म नष्ट झाला), 'खिणो' (नष्ट झालेला). 'अयोगा भूरीसंखयो' (प्रयत्नाशिवाय बुद्धीचा क्षय होतो). ဂေ သဒ္ဒေ. ဂိဏောတိ, ဂိဏာတိ. 'गे' (ge) धातू शब्दाच्या अर्थात आहे. (त्याची रूपे) गिणोति, गिणाति अशी होतात. စိ စယေ. ဏကာရဿ နကာရတ္တံ. ပါကာရံ စိနောတိ. စိတံ ကုသလံ. စေတော ပုဂ္ဂလော. 'चि' (ci) धातू संचय करण्याच्या अर्थात आहे. येथे 'ण' काराचा 'न' कार होतो. 'पाकारं चिनोति' (भिंत बांधतो), 'चितं कुसलं' (संचित केलेले कुशल), 'चेतो पुग्गलो' (जाणणारा व्यक्ती). ရု ဥပတာပေ. ရုဏောတိ, ရုဏာတိ. 'रु' (ru) धातू उपतापाच्या (पीडेच्या) अर्थात आहे. (त्याची रूपे) रुणोति, रुणाति अशी होतात. ရာဓ သာဓ သံသိဒ္ဓိယံ. ရာဓုဏာတိ. သာဓုဏာတိ. ရာဓနံ. အာရာဓနံ. သာဓနံ. 'राध' (rādha) आणि 'साध' (sādha) धातू संसिद्धीच्या (पूर्णत्वाच्या) अर्थात आहेत. (त्यांची रूपे) राधुणाति, साघुणाति अशी होतात. राधनं, आराधनं, साधनं (हे त्यांचे शब्द आहेत). ပီ ပီတိယံ. ပီဏောတိ, ပီဏာတိ. ပီတိ, ပိယော. 'पी' (pī) धातू प्रीतीच्या (आनंदाच्या) अर्थात आहे. (त्याची रूपे) पीणोति, पीणाति अशी होतात. पीति (प्रीती), पियो (प्रिय) हे शब्द यापासून बनतात. အပ ပါပုဏေ သမ္ဘု စ. ပါပုဏောတိ, ပါပုဏာတိ. ပတ္တော. သဗ္ဗညုတံ သတ္ထာ ပတ္တော. သမ္ပတ္တော ယမသာဓနံ. သမ္ဘုဏာတိ, န ကိဉ္စိ အတ္ထံ အဘိသမ္ဘုဏာတိ. သမ္ဘုဏန္တော, အဘိသမ္ဘုဏမာနော. 'अप' (apa) धातू प्राप्त करण्याच्या अर्थात आहे आणि 'संभू' (sambhu) देखील याच अर्थात आहे. (त्याची रूपे) पापुणोति, पापुणाति अशी होतात. 'पत्तो' (प्राप्त झालेला), जसे 'सब्बञ्ञुतं सत्था पत्तो' (शास्त्यांनी सर्वज्ञता प्राप्त केली), 'सम्पत्तो यमसाधनं' (यमलोकाला प्राप्त झालेला). 'संभुणाति', जसे 'न किञ्चि अत्थं अभिसम्भुणाति' (काहीही अर्थ प्राप्त करत नाही). संभुणंतो, अभिसंभुणमानो (प्राप्त करणारा). တတ္ထ ပတ္တောတိ ပသဒ္ဒေါ ဥပသဂ္ဂေါ ‘‘ပပ္ပောတီ’’တိ ဧတ္ထ ပသဒ္ဒေါ ဝိယ. တထာ ဟိ ‘‘ပတ္တော’’တိ ဧတ္ထ ပါပုဏီတိ အတ္ထေ ပပုဗ္ဗဿ အပဓာတုဿ ပကာရေ လုတ္တေ တပစ္စယဿ ဒွိဘာဝေါ ဘဝတိ. တတ္ထ န အဘိသမ္ဘုဏာတီတိ န သမ္ပာပုဏာတိ, န သာဓေတီတိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. त्यामध्ये 'पत्तो' (patto) या शब्दात 'प' हा उपसर्ग आहे, जसे 'पप्पोति' (pappoti) मध्ये 'प' उपसर्ग आहे. तसेच 'पत्तो' यामध्ये 'प्राप्त केले' या अर्थात 'प' पूर्व असलेल्या 'अप' धातूच्या 'प' काराचा लोप होऊन 'त' प्रत्ययाचे द्वित्व होते. त्यामध्ये 'न अभिसम्भुणाति' म्हणजे 'प्राप्त करत नाही' किंवा 'साध्य करत नाही' असे म्हटले आहे. ခိပ ခေပေ. ခိပုဏာတိ. ခိပ္ပံ. ခိပ္ပန္တိ မစ္ဆပဉ္ဇရော. 'खिप' (khipa) धातू फेकण्याच्या अर्थात आहे. (त्याचे रूप) खिपुणाति असे होते. 'खिप्पं' (शीघ्र), आणि 'खिप्पं' म्हणजे माशांचे जाळे देखील होय. အာပ ဗျာပနေ. အာပုဏာတိ. အာပေါ. 'आप' (āpa) धातू व्यापण्याच्या अर्थात आहे. (त्याचे रूप) आपुणाति असे होते. 'आपो' (पाणी/आपोधातू) हा शब्द यापासून बनतो. မိ ပက္ခေပနေ. မိနောတိ. မိတ္တော. 'मि' (mi) धातू प्रक्षेपणाच्या (स्थापना करण्याच्या) अर्थात आहे. (त्याचे रूप) मिनोति असे होते. 'मित्त' (मित्र) हा शब्द यापासून बनतो. ဧတ္ထ စ သဗ္ဗဂုယှေသု နိမိယတိ ပက္ခိပိယတီတိ မိတ္တော. ‘‘မိတ္တော ဟဝေ သတ္တပဒေန ဟောတီ’’တိ ဝစနံ ပန ဝေါဟာရဝသေန ဝုတ္တံ, န အတ္ထဝသေန. ဝုစ္စေယျ စေ, ယော ကောစိ အဝိဿာသိကော [Pg.246] အတ္တနော ပဋိဝိရုဒ္ဓေါပိ စ မိတ္တော နာမ ဘဝေယျ, န စေဝံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧဝဉ္စ ပန ဒဋ္ဌဗ္ဗံ ‘‘သတ္တပဒဝီတိဟာရမတ္တေနပိ သဟ ဂစ္ဆန္တော သဟ ဂစ္ဆန္တဿ ပိယဝါစာနိစ္ဆာရဏေန အညမညံ အာလာပသလ္လာပကရဏမတ္တေန မိတ္တော နာမ ဟောတီတိ ဝတ္တဗ္ဗံ. ကိံကာရဏာ? ဒဠှဝိဿာသော မိတ္တော နာမ န ဘဝေယျာတိ မိတ္တဿ ဂုဏပသံသာဝသေန ဧဝံ ဝုတ္တ’’န္တိ. आणि येथे सर्व गुप्त गोष्टींमध्ये ज्याच्यावर विश्वास टाकला जातो (किंवा ज्याच्यामध्ये गुप्त गोष्टी ठेवल्या जातात) तो 'मित्र' होय. परंतु 'मित्र खरोखर सात पावले एकत्र चालल्याने होतो' हे वचन व्यवहाराच्या दृष्टीने म्हटले आहे, वास्तविक अर्थाच्या दृष्टीने नाही. जर असे मानले, तर कोणताही अविश्वासू आणि स्वतःचा विरोधी असलेला व्यक्ती देखील मित्र ठरेल, पण असे समजू नये. तर याकडे असे पाहिले पाहिजे की, 'केवळ सात पावले एकत्र चालताना, सोबत चालणाऱ्या व्यक्तीशी प्रिय बोलण्याने आणि परस्परांशी संवाद साधण्याने तो मित्र होतो' असे म्हटले पाहिजे. कारण काय? दृढ विश्वास असलेलाच मित्र होऊ शकतो, म्हणून मित्राच्या गुणांची प्रशंसा करण्यासाठी असे म्हटले गेले आहे. ဝု သံဝရဏေ. ဝုဏောတိ, ဝုဏာတိ, သံဝုဏောတိ, သံဝုဏာတိ. ပဏ္ဍိတော သီလသံဝုတော. 'वु' (धातू) संवरण (संयम राखणे/झाकणे) या अर्थात. वुणोति, वुणाति, संवुणोति, संवुणाति. 'पण्डितो सीलसंवुतो' (शीलसंयत असलेला पंडित). သု အဘိသဝေ. အဘိသဝေါ နာမ ပီဠနံ မန္ထနံ သန္ဓာနံ သိနှာနံ ဝါ. သုဏောတိ, သုဏာတိ. 'सु' (धातू) अभिषव (पिळणे, घुसळणे, सांधणे किंवा वाहणे) या अर्थात. अभिषव म्हणजे पिळणे, घुसळणे, सांधणे किंवा वाहणे होय. सुणोति, सुणाति. သိ ဗန္ဓနေ. သိနောတိ. 'सि' (धातू) बंधन (बांधणे) या अर्थात. सिनोति. သိ နိသာနေ. သိဏောတိ, သိဏာတိ. နိသိတသတ္ထံ. 'सि' (धातू) निसान (तीक्ष्ण करणे/धार लावणे) या अर्थात. सिणोति, siणाति. 'निसितसत्थं' (तीक्ष्ण केलेले शस्त्र). န ဟိ နူနာယံ သာ ခုဇ္ဇာ, လဘတိ ဇိဝှာယ ဆေဒနံ; သုနိသိတေန သတ္ထေန, ဧဝံ ဒုဗ္ဘာသိတံ ဘဏံ; "नक्कीच ही कुबडी स्त्री अशा प्रकारे दुर्भाषण बोलल्यामुळे, चांगल्या प्रकारे तीक्ष्ण केलेल्या शस्त्राने आपल्या जिभेचे कापले जाणे प्राप्त करेल." ဧတ္ထ ဘဏန္တိ ဘဏန္တီ. येथे 'भणन्ति' किंवा 'भणन्ती' असे म्हणतात. ဝုသ ပါဂဗ္ဗိယေ. ပါဂဗ္ဗိယံ နာမ ကာယဝါစာမနေဟိ ပဂဗ္ဗဘာဝေါ. ဝုသုဏာတိ. 'वुस' (धातू) प्रगल्भता (धिटाई/उद्धटपणा) या अर्थात. प्रगल्भता (पागब्भिय) म्हणजे काय, वाचा आणि मनाने उद्धट असणे होय. वुसुणाति. အသု ဗျာပနေ. အသုဏာတိ. အဿု. 'असु' (धातू) व्यापन (पसरणे/व्यापून टाकणे) या अर्थात. असुणाति. अस्सु. ဟိ ဂတိဗုဒ္ဓီသု ဥပတာပေ စ. ဟိနောတိ. 'हि' (धातू) गती, बुद्धी (ज्ञान) आणि उपताप (पीडा देणे) या अर्थात. हिनोति. ဧတ္ထ ပန အသမာနန္တတ္တေပိ သမာနတ္ထာနံ သမောဓာနံ ဝုစ္စတိ. परंतु येथे, भिन्न अंत (शेवट) असूनही समान अर्थ असलेल्यांचे संधान (एकत्रीकरण) सांगितले जाते. တိက တိဂ သဃ ဒိက္ခ ကိဝိ စိရိ ဇိရိ ဒါသ ဒု ဟိံသာယံ. တိကုဏာတိ. တိဂုဏာတိ. သဃုဏာတိ. ဒိက္ခုဏာတိ. ကိဝုဏာတိ[Pg.247]. စိရုဏာတိ. ဇိရုဏာတိ. ဒါသုဏာတိ. ဒုဏောတိ, ဒုဏာတီတိ ရူပါနိ ဟိံသာဝါစကာနိ ဘဝန္တိ. 'तिक', 'तिग', 'सघ', 'दिक्ख', 'किवि', 'चिरि', 'जिरि', 'दास', 'दु' (हे धातू) हिंसा (पीडा देणे/इजा करणे) या अर्थात आहेत. तिकुणाति, तिगुणाति, सघुणाति, दिक्खुणाति, किवुणाति, चिरुणाति, जिरुणाति, दासुणाति, दुणोति, दुणाति ही रूपे हिंसावाचक आहेत. သုဝါဒီ ဧတ္တကာ ဒိဋ္ဌာ, ဓာတဝေါ မေ ယထာဗလံ; သုတ္တေသွညေပိ ပေက္ခိတွာ, ဂဏဝှော အတ္ထယုတ္တိတော. "माझ्या शक्तीनुसार स्वादि गणाचे एवढे धातू पाहिले गेले आहेत; सूत्रांमध्ये (सुत्तांमध्ये) इतर धातूही पाहून अर्थाच्या योग्यतेनुसार त्यांचे वर्गीकरण करावे." သွာဒိဂဏောယံ. हा स्वादिगण आहे. ကိယာဒိဂဏိက कियादिगण. ကီ ဒဗ္ဗဝိနိမယေ. ဒဗ္ဗဝိနိမယော ကယဝိက္ကယဝသေန ဘဏ္ဍဿ ပရိဝတ္တနံ. ကိဏာတိ, ကိဏန္တိ. ဝိက္ကိဏာတိ, ဝိက္ကိဏန္တိ. ကေတုံ, ကိဏိတုံ. ဝိက္ကေတုံ, ဝိက္ကိဏိတုံ. ကိဏိတွာ, ဝိက္ကိဏိတွာ. ကီတံ ဘဏ္ဍံ. ကယော, ဝိက္ကယော. ဝိက္ကိဏေယျ ဟနေယျ ဝါ. 'की' (धातू) द्रव्यविनिमय (वस्तूंची देवाणघेवाण) या अर्थात. द्रव्यविनिमय म्हणजे खरेदी-विक्रीच्या माध्यमातून वस्तूंची अदलाबदल करणे होय. किणाति, किणन्ति (खरेदी करतो, खरेदी करतात). विक्किणाति, विक्किणन्ति (विक्री करतो, विक्री करतात). केतुं, किणितुं (खरेदी करण्यासाठी). विक्केतुं, विक्किणितुं (विक्री करण्यासाठी). किणित्वा, विक्किणित्वा (खरेदी करून, विक्री करून). कीतं भण्डं (खरेदी केलेले सामान/वस्तू). कयो, विक्कयो (खरेदी, विक्री). विक्किणेय्य हनेय्य वा (विकून टाकावे किंवा नष्ट करावे/मारून टाकावे). ခိ ဂတိယံ. ခိဏာတိ. အတိခိဏော သရော. ခံ, ခါနိ. နကာရဿ ဏကာရတ္တံ. 'खि' (धातू) गती या अर्थात. खिणाति. 'अतिखिणो सरो' (अतिशय वेगाने गेलेला बाण). खं, खानि. 'न' काराचा 'ण' कार होणे. တတ္ထ ခိဏာတီတိ ဂစ္ဆတိ. အတိခိနောတိ အတိဂတော. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘သေန္တိ စာပါတိခိဏာဝ, ပုရာဏာနိ အနုတ္ထုန’’န္တိ. တတ္ထ စာပါတိခိဏာ’တိ စာပတော အတိခိဏာ အတိဂတာ. အဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘စာပါတိခိဏာတိ စာပတော အတိခိဏာ စာပါ ဝိနိမုတ္တာတိ အတ္ထော’’တိ ပဒတ္ထဝိဝရဏံ ကတံ, တမ္ပိ ဂတတ္ထညေဝ သန္ဓာယ အဓိပ္ပာယတ္ထဝသေန ကတန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. တတြ ခန္တိ သဂ္ဂေါ. သော ဟိ ကတပုညေဟိ ဂန္တဗ္ဗတ္တာ ‘‘ခ’’န္တိ ဝုစ္စတိ. ခါနီတိ သဂ္ဂါ. तेथे 'खिणाति' म्हणजे जातो. 'अतिखिणो' म्हणजे निघून गेलेला (अतिगत). येथे ही पाळि (पाठांतर) आहे - "सेन्ति चापातिखिणाव, पुराणानि अनुत्थुनन्ति" (ते धनुष्यातून सुटलेल्या बाणाप्रमाणे पडून राहतात आणि जुन्या गोष्टींबद्दल शोक करतात). तेथे 'चापातिखिणा' म्हणजे धनुष्यातून निघून गेलेले (अतिगत). परंतु अट्ठकथेत (टीकेत) "चापातिखिणा म्हणजे धनुष्यातून सुटलेले, धनुष्यातून मुक्त झालेले असा अर्थ आहे" असे शब्दांचे स्पष्टीकरण केले आहे, ते देखील गतीच्या अर्थालाच लक्षात घेऊन अभिप्रेत अर्थाने केले आहे असे समजावे. तेथे 'ख' म्हणजे स्वर्ग. कारण तो पुण्यवान लोकांनी जाण्यायोग्य असल्यामुळे त्याला 'ख' म्हटले जाते. 'खानि' म्हणजे स्वर्ग (अनेकवचन). စိ စယေ. ပုညံ စိနာတိ. ပါကာရံ စိနာတိ. ပါရမိယော ဝိစိနာတိ, ဝိစိနတိ စ. ပုပ္ဖံ ဩစိနာတိ, ဩစိနတိ ဝါ. ပစိနာတိ. ပစိနိတွာ. စိတံ ကုသလံ. စယော သဉ္စယော. စိတော ပါကာရော. စိနာတီတိ စေတော, ဣဋ္ဌကဝဍ္ဎကီ. ယော သတ္တော ပုညသဉ္စယော[Pg.248]. ‘‘သဉ္စယော ရာသိ သမူဟော ပိဏ္ဍော ဂဏော သံဃော ကဒမ္ဗော ဝဂ္ဂေါ ကရော ဃဋာ’’ဣစ္စေဝမာဒယော ပရိယာယာ. 'चि' (धातू) चय (एकत्र करणे/संचय करणे/बांधणे) या अर्थात. पुञ्ञं चिनाति (पुण्य संचित करतो). पाकारं चिनाति (भिंत बांधतो). पारमियो विचिनाति, विचिनति च (पारमितांचा संचय करतो किंवा शोध घेतो). पुप्फं ओचिनाति, ओचिनति वा (फुले गोळा करतो/तोडतो). पचिनाति (एकत्र करतो). पचिनित्वा (एकत्र करून). चितं कुसलं (संचित केलेले कुशल). चयो, सञ्चयो (संचय, ढीग). चितो पाकारो (बांधलेली भिंत). 'चिनाति' म्हणून 'चेतो' म्हणजे विटांचा गवंडी (बांधकाम करणारा). जो प्राणी पुण्याचा संचय करतो. "सञ्चयो, रासि, समूहो, पिण्डो, गणो, सङ्घो, कदम्बो, वग्गो, करो, घटा" इत्यादी त्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ဇိ ဇယေ. ဇိနာတိ, ဝိဇိနာတိ, ဇိနိယတိ. ဇေတာ, ဇိနော. ဇိတော မာရော. မာရံ ဇိတော. ဇိတဝါ, ဇိတာဝီ, ဇိတဗ္ဗော, ဇေယျော, ဇယနံ, ဇိတံ, ဝိဇိတံ, ဇယော, ပရာဇယနံ, ပရာဇယော. ယဿ ဇိတံ နာဝဇီယတိ. ဇိတမဿ နောယာတိ ကောစိ လောကေ. ဇယော ဟိ ဗုဒ္ဓဿ သိရီမတော အယံ, မာရဿ စ ပါပိမတော ပရာဇယော. 'जि' (धातू) जय (जिंकणे) या अर्थात. जिनाति, विजिनाति, जिनियति (जिंकतो, विशेष रूपाने जिंकतो, जिंकला जातो). जेता, जिनो (जिंकणारा, जिन). जितो मारो (मार जिंकला गेला). मारं जितो (माराला जिंकले). जितवा, जितावी, जितब्बो, जेय्यो, जयनं, जितं, विजितं, जयो, पराजयनं, पराजयो. 'यस्स जितं नावजीयति' (ज्याचा विजय पराजयात बदलता येत नाही). 'जितमस्स नोयाति कोचि लोके' (या जगात कोणीही त्याच्या विजयाला पराभूत करू शकत नाही). 'जयो हि बुद्धस्स सिरीमतो अयं, मारस्स च पापिमतो पराजयो' (हा खरोखरच श्रीमान बुद्धांचा विजय आहे आणि पापी माराचा पराजय आहे). တတ္ထ ဇေတာတိ ဇိနာတီတိ ဇေတာ, ယော ကောစိ ပုဂ္ဂလော. အဇိနီတိ ဇိနော, သဗ္ဗညူ ဓမ္မရာဇာ. ကိံ သော အဇိနိ? ပါပကေ အကုသလေ ဓမ္မေ မာရာဒိအရယော စ. ဣတိ ပါပကေ အကုသလေ ဓမ္မေ မာရာဒယော စ အရယော အဇိနီတိ ဇိနော. ဝုတ္တမ္ပိ စေတံ – तेथे 'जेता' म्हणजे जो जिंकतो तो कोणताही पुद्गल (व्यक्ति). 'अजिनी' (ज्याने जिंकले) तो 'जिन' म्हणजे सर्वज्ञ धम्मराज होय. त्यांनी काय जिंकले? पापी अकुशल धम्म आणि मारासारखे शत्रू. अशा प्रकारे पापी अकुशल धम्म आणि मारासारख्या शत्रूंना जिंकले म्हणून ते 'जिन' होत. हे असेही म्हटले गेले आहे - ‘‘မာဒိသာ ဝေ ဇိနာ ဟောန္တိ, ယေ ပတ္တာ အာသဝက္ခယံ; ဇိတာ မေ ပါပကာ ဓမ္မာ, တသ္မာဟံ ဥပက ဇိနော’’တိ, "माझ्यासारखेच ते जिन (विजेते) असतात, ज्यांनी आसवांचा क्षय (आसवक्खय) प्राप्त केला आहे; मी पापी धम्मांना जिंकले आहे, म्हणून हे उपक! मी जिन आहे." ‘‘တထာဂတော ဘိက္ခဝေ အဘိဘူ အနဘိဘူတော’’တိ စ. आणि "भिक्खूहो! तथागत हे सर्वांना पराभूत करणारे (अभिभू) असून स्वतः कोणाकडूनही पराभूत न झालेले (अनभिभूत) आहेत." ဇိနသဒ္ဒေါ ဟိ ကေဝလော သဗ္ဗညုမှိ ပဝတ္တတိ, သောပပဒေါ ပန ပစ္စေကဗုဒ္ဓါဒီသု တမှိ စ ယထာရဟံ ပဝတ္တတိ. ‘‘ပစ္စေကဇိနော, ဩဓိဇိနော, အနောဓိဇိနော, ဝိပါကဇိနော, အဝိပါကဇိနော’’တိ ဣမာနေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. कारण केवळ 'जिन' हा शब्द सर्वज्ञांच्या (बुद्धांच्या) बाबतीत वापरला जातो, परंतु उपपदासह (विशेषणासह) तो प्रत्येकबुद्ध इत्यादींच्या बाबतीत आणि त्यांच्यासाठी योग्यतेनुसार वापरला जातो. "पच्चेकजिनो, ओधिजिनो, अनोधिजिनो, विपाकजिनो, अविपाकजिनो" ही येथील उदाहरणे आहेत. ဇိ ဇာနိယံ. ဇိနာတိ, န ဇိနာတိ န ဇာပယေ, ဇိနော ရထဿံ မဏိကုဏ္ဍလေ စ, ပုတ္တေ စ ဒါရေ စ တထေဝ ဇိနော. ဇိနော ဓနဉ္စ ဒါသေ စ. 'जि' (धातू) जानी (हानी/नुकसान होणे) या अर्थात. जिनाति (हानी करतो/गमावतो). 'न जिनाति न जापये' (गमावत नाही आणि गमावण्यास कारणीभूत ठरत नाही). 'जिनो रथस्सं मणिकुण्डले च, पुत्ते च दारे च तथेव जिनो. जिनो धनञ्च दासे च' (रथ आणि घोडा, मणिकुंडल गमावलेला, तसेच मुले आणि पत्नी गमावलेला. धन आणि दास गमावलेला). ဉာ [Pg.249] အဝဗောဓနေ. ဇာနာတိ, ဉာယတိ, နာယတိ. အနိမိတ္တာ န နာယရေ. ဇညာ သော ယဒိ ဟာပယေ. မာ မံ ဇညူတိ ဣစ္ဆတိ. ‘‘ဣမေ အမှာက’’န္တိ ဉာတဗ္ဗဋ္ဌေန ဉာတိ, ဉာတကော. ဉာတိမိတ္တာ သုဟဇ္ဇာ စ. ဉာတကော နော နိသိန္နောတိ. ဉာတဗ္ဗံ ဉေယျံ, သင်္ခါရဝိကာရလက္ခဏနိဗ္ဗာနပညတ္တိဓမ္မာ. ဤဒိသေသု ဌာနေသု ဉေယျသဒ္ဒေါ ဧကန္တေန နပုံသကော, ဝါစ္စလိင်္ဂတ္တေ သဗ္ဗလိင်္ဂိကော, ယထာ? ဉေယျော ဖဿော. ဉေယျာ ဝေဒနာ. ဉေယျံ စိတ္တံ. ဉေယျော ပုရိသော, ဉေယျာ ဣတ္ထီ, ဉေယျံ ဓနန္တိ စ. 'ञा' (धातू) अवबोधन (जाणणे/ज्ञान होणे) या अर्थात. जानाति, ञायति, नायति. 'अनिमित्ता न नायरे' (निमित्त नसलेले जाणले जात नाहीत). 'जञ्ञा सो यदि हापये' (जर तो हानी करत असेल तर जाणावे). 'मा मं जञ्ञूति इच्छति' (मला कोणी जाणू नये अशी इच्छा करतो). "हे आमचे आहेत" या जाणण्याच्या अर्थाने 'ञाति' (नातेवाईक), 'ञातको' म्हटले जाते. 'ञातिमित्ता सुहज्जा च' (नातेवाईक, मित्र आणि सुहृद). 'ञातको नो निसिन्नोति' (आमचा नातेवाईक बसला आहे). जाणण्यायोग्य ते 'ञेय्य' (ज्ञेय) होय, जसे की - संखारा (संस्कार), विकार, लक्षण, निब्बान (निर्वाण) आणि पण्ञत्ति (प्रज्ञप्ती) धम्म. अशा ठिकाणी 'ञेय्य' शब्द निश्चितपणे नपुंसकलिंगी असतो, परंतु विशेषण (वाच्यलिंग) म्हणून तो सर्व लिंगांत वापरला जातो, जसे की - ञेय्यो फस्सो (ज्ञेय स्पर्श - पुल्लिंग), ञेय्या वेदना (ज्ञेय वेदना - स्त्रीलिंग), ञेय्यं चित्तं (ज्ञेय चित्त - नपुंसकलिंग). ञेय्यो पुरिसो (ज्ञेय पुरुष), ञेय्या इत्थी (ज्ञेय स्त्री), ञेय्यं धनं (ज्ञेय धन) इत्यादी. ထု အဘိတ္ထဝေ. ထုနာတိ. အဘိတ္ထုနာတိ. ထုတိ, အဘိတ္ထုတိ. ထဝနာ, အဘိတ္ထဝနာ, ထုတော, အဘိတ္ထုတော. 'थु' (धातू) अभित्थव (स्तुती करणे) या अर्थात. थुनाति, अभित्थुनाति (स्तुती करतो, विशेष स्तुती करतो). थुति, अभित्थुति (स्तुती, विशेष स्तुती). थवना, अभित्थवना, thuto, अभित्थुतो (स्तुती करणे, विशेष स्तुती करणे, स्तुती केलेला, विशेष स्तुती केलेला). ထု နိတ္ထုနနေ. ထုနာတိ. 'थु' (धातू) नित्थुनन (कण्हणे/शोक करणे) या अर्थात. थुनाति (कण्हतो/शोक करतो). ဥဋ္ဌေဟိ ရေဝတေ သုပါပဓမ္မေ,အပါရုတဒွါရေ အဒါနသီလေ; နေဿာမ တံ ယတ္ထ ထုနန္တိ ဒုဂ္ဂတာ,သမပ္ပိတာ နေရယိကာ ဒုက္ခေန; ပုရာဏာနိ အနုတ္ထုန’’န္တိ စ ပယောဂေါ. "उठ रेवती! अत्यंत पापी स्वभावाच्या, उघड्या दारांच्या (नरकाच्या दारांच्या), दान न देणाऱ्या शीलहीन स्त्री! आम्ही तुला तिथे घेऊन जाऊ जिथे दुःखाने ग्रासलेले, नरकात पडलेले दुर्गती प्राप्त लोक शोक करतात (कण्हतात);" आणि "पुराणानि अनुत्थुनन्ति" (जुन्या गोष्टींबद्दल शोक करतात) असा प्रयोग आहे. ဒု ဟိံသာယံ. ဒုနာတိ. မိတ္တဒ္ဒု. ဒုမော. 'दु' (धातू) हिंसा (पीडा देणे/इजा करणे) या अर्थात. दुनाति. मित्तद्दु (मित्राचा द्रोह करणारा/मित्राला पीडा देणारा). दुमो (वृक्ष). ဧတ္ထ မိတ္တဒ္ဒူတိ မိတ္တံ ဒုနာတိ ဟိံသတိ ဒုဗ္ဘတီတိ မိတ္တဒ္ဒု. အတြ ‘‘ဝေဒါ န တာဏာယ ဘဝန္တိ တဿ, မိတ္တဒ္ဒုနော ဘူနဟုနော နရဿာ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. ဒုမောတိ ဒုနိယတိ ဂေဟသမ္ဘာရာဒိအတ္ထာယ ဟိံသိယတိ ဆိန္ဒိယတိ, ပဏ္ဏပုပ္ဖာဒိအတ္ထိကေဟိ ဝါ ပဏ္ဏပုပ္ဖာဒိဟရဏေန ပီဠိယတီတိ ဒုမော. येथे 'मित्तद्दु' म्हणजे जो मित्राला पीडा देतो, त्याची हिंसा करतो किंवा त्याचा द्रोह करतो तो 'मित्तद्दु' (मित्रद्रोही) होय. येथे "वेदा न ताणाय भवन्ति तस्स, मित्तद्दुणो भूनहुणो नरस्स" (मित्राचा द्रोह करणाऱ्या आणि भ्रूणहत्या करणाऱ्या माणसाचे वेद रक्षण करू शकत नाहीत) हे पाळि उदाहरण आहे. 'दुमो' (वृक्ष) म्हणजे घराचे साहित्य इत्यादींसाठी ज्याची हिंसा केली जाते, ज्याला तोडले जाते, किंवा पाने आणि फुले इच्छिणाऱ्यांकडून पाने-फुले तोडून ज्याला पीडा दिली जाते तो 'दुमो' होय. ဓူ ကမ္ပနေ. ဓုနာတိ. ဓူမော, ဓောနာ, ဓောနော, ဓုတော. ဓုနန္တော ဝါကစီရာနိ, ဂစ္ဆာမိ အမ္ဗရေ တဒါ. 'धू' (धातू) कंपन (हलवणे/कापणे) या अर्थात. धुनाति (हलवतो/झटकतो). धूमो, धोना, धोनो, धुतो. "धुणन्तो वाकचीरानि, गच्छामि अम्बरे तदा" (तेव्हा वल्कले झटकत मी आकाशात जातो). တတ္ထ [Pg.250] ဓူမောတိ ဓုနာတိ ကမ္ပတီတိ ဓူမော. ဓူမသဒ္ဒေါ ကောဓေ တဏှာယ ဝိတက္ကေ ပဉ္စသု ကာမဂုဏေသု ဓမ္မဒေသနာယံ ပကတိဓူမေတိ ဣမေသု အတ္ထေသု ဝတ္တတိ. ‘‘ကောဓော ဓူမော ဘသ္မာနိ မောသဝဇ္ဇ’’န္တိ ဧတ္ထ ဟိ ကောဓေ ဝတ္တတိ. ‘‘ဣစ္ဆာ ဓူမာယိတော သဒါ’’တိ ဧတ္ထ တဏှာယံ. ‘‘တေန ခေါ ပန သမယေန အညတရော ဘိက္ခု ဘဂဝတော အဝိဒူရေ ဓူမာယန္တော နိသိန္နော ဟောတီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိတက္ကေ. तेथे 'धूमो' (धूर) म्हणजे जो हलतो/कंप पावतो तो 'धूमो' होय. 'धूम' शब्द क्रोध, तण्हा (तृष्णा), वितक्क (विचार), पाच कामगुण, धम्मदेसना (धम्मोपदेश) आणि नैसर्गिक धूर या अर्थांमध्ये वापरला जातो. "कोधो धूमो भस्मानि मोसवज्जं" (क्रोध हा धूर आहे, असत्य ही राख आहे) येथे तो क्रोधाच्या अर्थात वापरला आहे. "इच्छा धूमायितो सदा" (इच्छा नेहमी धूर सोडत असते) येथे तो तृष्णेच्या अर्थात आहे. "तेन खो पन समयेन अञ्ञतरो भिक्खु भगवतो अविदूरे धूमायन्तो निसिन्नो होति" (त्या वेळी एक भिक्खू भगवंतांच्या जवळच विचारमग्न/धूर सोडत बसला होता) येथे तो वितक्काच्या (विचाराच्या) अर्थात आहे. ‘‘ပင်္ကော စ ကာမာ ပလိပေါ စ ကာမာ,ဘယဉ္စ မေတံ တိမုလံ ပဝုတ္တံ; ရဇော စ ဓူမော စ မယာ ပကာသိတော,ဟိတွာ တုဝံ ပဗ္ဗဇ ဗြဟ္မဒတ္တာ’’တိ "काम (इंद्रियसुख) हा चिखल आहे, काम हा दलदल आहे, आणि हे मोठे भय सांगितले गेले आहे; धूळ आणि धूर माझ्याद्वारे प्रकट केले गेले आहेत, हे ब्रह्मदत्ता! तू त्यांचा त्याग करून प्रव्रजित हो." ဧတ္ထ ပဉ္စသု ကာမဂုဏေသု. ‘‘ဓူမံ ကတ္တာ ဟောတီ’’တိ ဧတ္ထ ဓမ္မဒေသနာယံ. ‘‘ဓဇော ရထဿ ပညာနော, ဓူမော ပညာနမဂ္ဂိနော’’တိ ဧတ္ထ ပကတိဓူမေ. ဣစ္စေဝံ – येथे पाच कामगुणांच्या अर्थात आहे. "धूमं कत्ता होति" (तो धूर निर्माण करणारा होतो) येथे धम्मदेसनेच्या (धम्मोपदेशाच्या) अर्थात आहे. "धजो रथस्स पञ्ञानो, धूमो पञ्ञानमग्गिनो" (ध्वज ही रथाची ओळख आहे, धूर ही अग्नीची ओळख आहे) येथे नैसर्गिक धुराच्या अर्थात आहे. अशा प्रकारे - ကောဓတဏှာဝိတက္ကေသု, ပဉ္စကာမဂုဏေသု စ; ဒေသနာယဉ္စ ပကတိ-ဓူမေ ဓူမော ပဝတ္တတိ. क्रोध, तण्हा (तृष्णा) आणि वितक्क यांच्यामध्ये, तसेच पाच कामगुणांमध्ये, देशनेमध्ये आणि नैसर्गिक धूमामध्ये धूर प्रवृत्त होतो (उत्पन्न होतो). ဓောနာတိ ပညာ. ဝုတ္တဉှေတံ နိဒ္ဒေသေ ‘‘ဓောနာ ဝုစ္စတိ ပညာ, ယာ ပညာ ပဇာနနာ သမ္မာဒိဋ္ဌိ, ကိံကာရဏာ ဓောနာတိ ဝုစ္စတိ ပညာ? ယံ တာယ ပညာယ ကာယဒုစ္စရိတံ ဓုတဉ္စ ဓောတဉ္စ သန္ဓောတဉ္စ နိဒ္ဓေါတဉ္စ, ဝစီဒုစ္စရိတံ မနောဒုစ္စရိတံ ဓုတဉ္စ ဓောတဉ္စ သန္ဓောတဉ္စ နိဒ္ဓေါတဉ္စ. တံကာရဏာ ဓောနာ ဝုစ္စတိ ပညာ. အထ ဝါ သမ္မာဒိဋ္ဌိ မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိံ ဓုတာ စ ဓောတာ စ သန္ဓောတာ စ နိဒ္ဓေါတာ စ, တံကာရဏာ ဓောနာ ဝုစ္စတိ ပညာ’’တိ. ‘‘ဓောနဿ ဟိ နတ္ထိ ကုဟိဉ္စိ လောကေ, ပကပ္ပိတာ ဒိဋ္ဌိ ဘဝါဘဝေသူ’’တိ အယမေတ္ထ ပါဠိ နိဒဿနံ[Pg.251]. အတြ ဓောနာ အဿ အတ္ထီတိ ဓောနော, တဿ ဓောနဿာတိ နိဗ္ဗစနံ. ဓာတူနမနေကတ္ထတာယ ဓူဓာတု ကမ္ပနတ္ထေပိ ဓောဝနတ္ထေပိ ဝတ္တတိ. 'धोना' म्हणजे प्रज्ञा. कारण निर्देशामध्ये (निद्देस) असे म्हटले आहे की— 'प्रज्ञेला धोना म्हटले जाते; जी प्रज्ञा, प्रजानन (विशेष ज्ञान) आणि सम्मादिट्ठि (सम्यक् दृष्टी) आहे. कोणत्या कारणाने प्रज्ञेला धोना म्हटले जाते? कारण त्या प्रज्ञेद्वारे कायदुच्चरित (शारीरिक दुष्कृत्य) धुतले गेले आहे, स्वच्छ केले गेले आहे, पूर्णपणे धुतले गेले आहे आणि धुवून काढले गेले आहे; तसेच वचीदुच्चरित (वाचिक दुष्कृत्य) आणि मनोदुच्चरित (मानसिक दुष्कृत्य) धुतले गेले आहे, स्वच्छ केले गेले आहे, पूर्णपणे धुतले गेले आहे आणि धुवून काढले गेले आहे. त्या कारणाने प्रज्ञेला धोना म्हटले जाते. अथवा, सम्मादिट्ठिने मिच्छादिट्ठिला (मिथ्या दृष्टीला) धुतले आहे, स्वच्छ केले आहे, पूर्णपणे धुतले आहे आणि धुवून काढले आहे, त्या कारणाने प्रज्ञेला धोना म्हटले जाते.' 'या जगात कुठेही धोन (शुद्ध पुरुष) साठी भव आणि अभवामध्ये कल्पित केलेली कोणतीही दृष्टी नसते'— हे येथे पाळीचे उदाहरण आहे. येथे 'ज्याला धोना (प्रज्ञा) आहे तो धोन' अशी 'धोनस्स' ची व्युत्पत्ती (निरुक्ती) आहे. धातूंच्या अनेक अर्थांमुळे 'धू' धातू कंपनाच्या अर्थात आणि धुण्याच्या अर्थातही वापरला जातो. မုန ဉာဏေ. မုနာတိ. မောနံ, မုနိ. ဣမသ္မိံ ဌာနေ ဓာတုယာ အာချာတတ္တေ ဧကန္တေန အန္တလောပေါ ဘဝတိ. သောဘိတတ္ထေရဂါထာယံ ပန အနာဂတဝစနေ ဥကာရဿ ဝုဒ္ဓိဝသေန ‘‘အဟံ မောနေန မောနိဿ’’န္တိ ရူပန္တရဉ္စ ဒိဿတိ. တတ္ထ မောနိဿန္တိ ဇာနိဿံ. နာမတ္တေ အန္တလောပေါ န ဟောတိ. တတ္ထ မောနန္တိ ကိဉ္စာပိ ‘‘န မောနေန မုနိ ဟောတီ’’တိ ဧတ္ထ တုဏှီဘာဝေါ ‘‘မောန’’န္တိ ဝုစ္စတိ, တထာပိ ဣဓ ‘‘ဉာဏေ’’တိ ဝစနတော န သော အဓိပ္ပေတော, ဉာဏမေဝါဓိပ္ပေတံ, တသ္မာ မောနေယျပဋိပဒါသင်္ခါတံ မဂ္ဂဉာဏမောနမ္ပိ ဂဟေတဗ္ဗံ. မုနီတိ မုနာတိ ဇာနာတိ ဟိတာဟိတံ ပရိစ္ဆိန္ဒတီတိ မုနိ. အထ ဝါ ခန္ဓာဒိလောကေ တုလံ အာရောပေတွာ မိနန္တော ဝိယ ‘‘ဣမေ အဇ္ဈတ္တိကာ ခန္ဓာ, ဣမေ ဗာဟိရာ’’တိအာဒိနာ နယေန ဣမေ ဥဘော အတ္ထေ မုနာတီတိ မုနိ. တေနာဟ ဘဂဝါ – 'मुन' धातू ज्ञानाच्या अर्थात आहे. 'मुनाति' (जाणतो). 'मोनं' (ज्ञान/मौन), 'मुनि'. या ठिकाणी धातूचे आख्यात रूप (क्रियापद) होताना निश्चितपणे अंत्यलोप होतो. परंतु सोभित थेर गाथेमध्ये भविष्यकाळात 'उ' काराच्या वृद्धीमुळे 'अहं मोनेन मोनिस्सं' (मी ज्ञानाने जाणीन) असे रूपान्तरही दिसते. तेथे 'मोनिस्सं' म्हणजे 'जाणीन'. नाम रूपात अंत्यलोप होत नाही. तेथे 'मोन' म्हणजे जरी 'न मोनेन मुनि होति' (केवळ मौनाने कोणी मुनी होत नाही) या गाथेत मौन राहण्याला (तुष्णीभाव) 'मोन' म्हटले गेले असले, तरीही येथे 'ज्ञानाच्या' अर्थात असल्यामुळे तो (तुष्णीभाव) अभिप्रेत नाही, तर ज्ञानच अभिप्रेत आहे; म्हणून मोनेय्य-पटिपदा (मुनीची प्रतिपदा) म्हणून ओळखले जाणारे मग्गञाण (मार्गज्ञान) रूपी 'मोन' देखील ग्रहण केले पाहिजे. 'मुनि' म्हणजे जो जाणतो, हित आणि अहित यांचा निवाडा करतो, तो मुनी होय. अथवा, खंध (स्कंध) इत्यादी लोकांमध्ये तराजूत तोलल्याप्रमाणे 'हे आध्यात्मिक स्कंध आहेत, हे बाह्य आहेत' इत्यादी पद्धतीने या दोन्ही अर्थांना जो जाणतो, तो मुनी होय. म्हणूनच भगवान म्हणाले— ‘‘န မောနေန မုနိ ဟောတိ, မူဠှရူပေါ အဝိဒ္ဒသု; ယော စ တုလံဝ ပဂ္ဂယှ, ဝရမာဒါယ ပဏ္ဍိတော. केवळ मौन पाळल्याने कोणी मुनी होत नाही, जर तो मूढ आणि अज्ञानी असेल. परंतु जो पंडित तराजू हातात धरल्याप्रमाणे चांगल्या गोष्टींचे ग्रहण करतो, ပါပါနိ ပရိဝဇ္ဇေတိ, သ မုနိ တေန သော မုနိ; ယော မုနာတိ ဥဘော လောကေ, မုနိ တေန ပဝုစ္စတီ’’တိ. आणि पापांचा त्याग करतो, तो मुनी आहे; त्या कारणाने तो मुनी होय. जो दोन्ही लोकांचे मापन करतो (जाणतो), त्या कारणाने त्याला 'मुनी' म्हटले जाते. အပရာပေတ္ထ ဘဝတိ အတ္ထဝိဘာဝနာ. မုနီတိ မောနံ ဝုစ္စတိ ဉာဏံ, ကာယမောနေယျာဒီသု ဝါ အညတရံ, တေန သမန္နာဂတတ္တာ ပုဂ္ဂလော ‘‘မုနီ’’တိ ဝုစ္စတိ. သော ပနေသ အဂါရိယမုနိ အနဂါရိယမုနိ သေက္ခမုနိ အသေက္ခမုနိ ပစ္စေကမုနိ မုနိမုနီတိ အနေကဝိဓော[Pg.252]. တတ္ထ အဂါရိယမုနီတိ ဂိဟိပိ အာဂတဖလော ဝိညာတသာသနော. အနဂါရိယမုနီတိ တထာရူပေါဝ ပဗ္ဗဇိတော. သေက္ခမုနီတိ သတ္တ သေက္ခာ. အသေက္ခမုနီတိ ခီဏာသဝေါ. ပစ္စေကမုနီတိ ပစ္စေကဗုဒ္ဓေါ. မုနိမုနီတိ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ. တထာ ဟိ အာယသ္မာပိ သာရိပုတ္တော အာဟ ‘‘မုနီတိ ဝုစ္စတိ တထာဂတော အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ’’တိ. येथे आणखी एक अर्थ-स्पष्टीकरण आहे. 'मुनी' म्हणजे 'मोन' ज्याला ज्ञान म्हटले जाते, किंवा कायमोनेय्य (शारीरिक मुनीत्व) इत्यादींपैकी एक; त्याने युक्त असल्यामुळे व्यक्तीला (पुद्गलाला) 'मुनी' म्हटले जाते. तो मुनी अनेक प्रकारचा असतो: अगारियमुनी (गृहस्थ मुनी), अनगारियमुनी (गृहत्यागी मुनी), सेक्खमुनी (शैक्ष मुनी), असेक्खमुनी (अशैक्ष मुनी), पच्चेकमुनी (प्रत्येकबुद्ध मुनी) आणि मुनिमुनी (मुनींचा मुनी). त्यापैकी, 'अगारियमुनी' म्हणजे असा गृहस्थ ज्याने फल प्राप्त केले आहे आणि जो शासनाला (बुद्धांच्या शिकवणीला) जाणतो. 'अनगारियमुनी' म्हणजे तशाच प्रकारचा प्रव्रजित (दीक्षित भिक्खू). 'सेक्खमुनी' म्हणजे सात प्रकारचे शैक्ष (आर्य मार्गस्थ). 'असेक्खमुनी' म्हणजे खीणासव (अरहंत). 'पच्चेकमुनी' म्हणजे पच्चेकबुद्ध (प्रत्येकबुद्ध). 'मुनिमुनी' म्हणजे सम्मासम्बुद्ध (सम्यक् सम्बुद्ध). म्हणूनच आयुष्यमान सारिपुत्त देखील म्हणाले— 'मुनी म्हणजे तथागत, अरहंत, सम्मासम्बुद्ध यांना म्हटले जाते.' ပူ ပဝနေ. ပဝနံ သောဓနံ. ပုနာတိ. ပုညံ, ပုတ္တော, ဒန္တပေါဏံ. 'पू' धातू पवनाच्या (पवित्र करण्याच्या) अर्थात आहे. पवन म्हणजे शोधन (स्वच्छ करणे). 'पुनाति' (पवित्र करतो/स्वच्छ करतो). 'पुञ्ञ' (पुण्य), 'पुत्त' (पुत्र), 'दन्तपोण' (दंतकाष्ठ/दातून). ဧတ္ထ စ ပုညန္တိ အတ္တနော ကာရကံ ပုနာတိ သောဓေတီတိ ပုညံ. အထ ဝါ ယတ္ထ သယံ ဥပ္ပန္နံ တံသန္တာနံ ပုနာတိ ဝိသောဓေတီတိ ပုညံ. ကိန္တံ? သုစရိတံ ကုသလကမ္မံ. သကမ္မိကတ္တာ ဓာတုဿ ကာရိတဝသေန အတ္ထဝိဝရဏံ လဗ္ဘတိ. ပုတ္တောတိ အတ္တနော ကုလံ ပုနာတိ သောဓေတီတိ ပုတ္တော. ဧဝဉ္စ သတိ ဟီနဇစ္စာနံ စဏ္ဍာလာဒီနံ ပုတ္တော နာမ န ဘဝေယျာတိ န ဝတ္တဗ္ဗံ သဒ္ဒါနမတ္ထကထနဿ နာနပ္ပကာရေန ပဝတ္တိတော, တသ္မာ အတ္တနော ပိတု ဟဒယံ ပူရေတီတိ ပုတ္တောတိ ဧဝမာဒိနာပိ နိဗ္ဗစနံ ဂဟေတဗ္ဗမေဝ. နာနာဓာတုဝသေနပိ ဟိ ပဒါနိ သိဒ္ဓိံ သမုပဂစ္ဆန္တိ. आणि येथे 'पुण्य' म्हणजे जे आपल्या कर्त्याला पवित्र करते, स्वच्छ करते ते पुण्य होय. अथवा, जिथे स्वतः उत्पन्न होते, त्या चित्त-संततीला जे पवित्र करते, विशेष रूपाने स्वच्छ करते ते पुण्य होय. ते काय आहे? सुचरित (सदाचार) आणि कुशल कर्म. धातूच्या सकर्मकतेमुळे प्रयोजक रूपाने अर्थाचे स्पष्टीकरण मिळते. 'पुत्र' म्हणजे जो आपल्या कुळाला पवित्र करतो, स्वच्छ करतो तो पुत्र होय. आणि असे असताना, हीन जातीच्या चंडालादी लोकांना 'पुत्र' नसावा असे म्हणता येत नाही, कारण शब्दांच्या अर्थाचे स्पष्टीकरण विविध प्रकारे प्रवृत्त होते; म्हणून 'जो आपल्या पित्याचे हृदय आनंदित करतो (भरून काढतो) तो पुत्र' अशीही व्युत्पत्ती ग्रहण केली पाहिजे. कारण विविध धातूंच्या आधारे देखील पदांची सिद्धी होत असते. ပုတ္တော စ နာမ အတြဇော ခေတြဇော အန္တေဝါသိကော ဒိန္နကောတိ စတုဗ္ဗိဓော. တတ္ထ အတ္တာနံ ပဋိစ္စ ဇာတော အတြဇော နာမ. သယနပီဌေ ပလ္လင်္ကေ ဥရေတိ ဧဝမာဒီသု နိဗ္ဗတ္တော ခေတြဇော နာမ. သန္တိကေ သိပ္ပုဂ္ဂဏှနကော အန္တေဝါသိကော နာမ. ပေါသာပနတ္ထာယ ဒိန္နော ဒိန္နကော နာမ ဒန္တပေါဏန္တိ ဒန္တေ ပုနန္တိ ဝိသောဓေန္တိ ဧတေနာတိ ဒန္တပေါဏံ, ဒန္တကဋ္ဌံ. आणि पुत्र हा अत्रज (स्वतःपासून जन्मलेला), क्षेत्रज, अंतेवासिक (शिष्य) आणि दिन्नक (दत्तक) अशा चार प्रकारचा असतो. त्यापैकी, स्वतःच्या आधारे जन्मलेला तो 'अत्रज' होय. शयनपीठ, पलंग, छाती इत्यादींवरून उत्पन्न झालेला तो 'क्षेत्रज' होय. जवळ राहून शिल्प (विद्या) शिकणारा तो 'अंतेवासिक' होय. पालनासाठी दिलेला तो 'दिन्नक' होय. 'दन्तपोण' म्हणजे ज्याच्याद्वारे दात स्वच्छ केले जातात, पवित्र केले जातात ते दन्तपोण, म्हणजेच दंतकाष्ठ (दातून). ပီ တပ္ပနကန္တီသု. ပိဏာတီတိ ပီတိ. ဧတ္ထ စ ပီတီတိ ပီဏနံ ပီတိ, တပ္ပနံ ကန္တီတိ စ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ဣဒံ ဘာဝဝသေန နိဗ္ဗစနံ. ဣဒံ [Pg.253] ပန ဟေတုကတ္တုဝသေန ပိဏယတီတိ ပီတိ, တပ္ပေတီတိ အတ္ထော. 'पी' धातू तर्पण (तृप्ती) आणि कांती (प्रियता) या अर्थात आहे. 'पिणाति' (तृप्त करतो) म्हणून ती 'पीति' (प्रीती/आनंद) होय. आणि येथे 'पीति' म्हणजे तृप्त करणे, समाधान देणे आणि प्रिय वाटणे असे म्हटले आहे. हे भाववाचक अर्थाने व्युत्पत्ती आहे. परंतु हे प्रयोजक अर्थाने 'पिणयति' म्हणजे 'पीति', ज्याचा अर्थ 'तृप्त करतो' असा आहे. သာ ပနေသာ ခုဒ္ဒကာပီတိ ခဏိကာပီတိ ဩက္ကန္တိကာပီတိ ဥဗ္ဗေဂါပီတိ ဖရဏာပီတီတိ ပဉ္စဝိဓာ ဟောတိ. တတ္ထ ခုဒ္ဒကာပီတိ သရီရေ လောမဟံသနမတ္တမေဝ ကာတုံ သက္ကောတိ. ခဏိကာပီတိ ခဏေ ခဏေ ဝိဇ္ဇုပ္ပာဒသဒိသာ ဟောတိ. ဩက္ကန္တိကာပီတိ သမုဒ္ဒတီရံ ဝီစိ ဝိယ ကာယံ ဩက္ကမိတွာ ဩက္ကမိတွာ ဘိဇ္ဇတိ. ဥဗ္ဗေဂါပီတိ ဗလဝတီ ဟောတိ ကာယံ ဥဒ္ဓဂ္ဂံ ကတွာ အာကာသေ လင်္ဃာပနပ္ပမာဏာ ဟောတိ. ဖရဏာပီတိယာ ပန ဥပ္ပန္နာယ သကလသရီရံ ဓမိတွာ ပူရိတဝတ္ထိ ဝိယ မဟတာ ဥဒကောဃေန ပက္ခန္ဒပဗ္ဗတကုစ္ဆိ ဝိယ စ အနုပရိဖုဋံ ဟောတိ, ဧဝံ ပဉ္စဝိဓာ ပီတိ, သာ သမ္ပိယာယနလက္ခဏတ္တာ ‘‘ပိဏာတီ’’တိ ပီတီတိ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေနပိ ဝတ္တုံ ယုဇ္ဇတိ. ဧတ္ထ ‘‘ပိယာယတိ, ပိတာ, ပိယော, ပေမော’’တိအာဒီနိ ပီဓာတုယာ ဧဝ ရူပါနိ. တတ္ထ ‘‘ပုတ္တံ ပိယာယတီတိ ပိတာ’’တိ ဝဒန္တိ. ပိယာယိတဗ္ဗောတိ ပိယော. ပေမနံ ပေမော. ती पीति पाच प्रकारची असते: खुद्दका पीति (लहान पीति), khणिका पीति (क्षणिक पीति), ओक्कन्तिका पीति (लहरींसारखी पीति), उब्बेगा पीति (उद्वेग पीति) आणि फरणा पीति (व्यापक पीति). त्यापैकी, 'खुद्दका पीति' शरीरावर केवळ रोमांच उभे करण्यास समर्थ असते. 'खणिका पीति' क्षणाक्षणाला विजेच्या चमकासारखी असते. 'ओक्कन्तिका पीति' समुद्राच्या लाटांप्रमाणे शरीरावर वारंवार आदळून विरघळते. 'उब्बेगा पीति' अत्यंत बलवान असते, ती शरीराला वर उचलून आकाशात झेप घेण्यास प्रवृत्त करते. आणि 'फरणा पीति' उत्पन्न झाली असता, संपूर्ण शरीराला व्यापून टाकते, जसे हवेने भरलेली पिशवी किंवा पाण्याच्या मोठ्या प्रवाहाने भरलेली पर्वताची गुहा पूर्णपणे व्यापली जाते. अशी ही पाच प्रकारची पीति आहे. ती प्रिय वाटण्याच्या लक्षणाची असल्यामुळे 'पिणाति' (तृप्त करते) म्हणून 'पीति' असे शुद्ध कर्त्याच्या अर्थाने देखील म्हणणे योग्य आहे. येथे 'पियायति' (प्रेम करतो), 'पिता' (वडील), 'पियो' (प्रिय), 'पेमो' (प्रेम) इत्यादी 'पी' धातूचीच रूपे आहेत. त्यापैकी, 'जो पुत्रावर प्रेम करतो तो पिता' असे म्हणतात. जो प्रेम करण्यास योग्य आहे तो 'पियो' (प्रिय). प्रेम करणे म्हणजे 'पेमो' (प्रेम). မာ ပရိမာဏေ. မိနာတိ. မာနံ, ပရိမာဏံ, မတ္တံ, မတ္တာ, မနော, ဝိမာနံ, မိနိတဗ္ဗံ, မေတဗ္ဗံ, ဆာယာ မေတဗ္ဗာ. ဤဒိသေသု ဌာနေသု အနီယပစ္စယော န လဗ္ဘတိ. 'मा' धातू परिमाणाच्या (मोजण्याच्या) अर्थात आहे. 'मिनाति' (मोजतो). 'मानं' (मोजमाप), 'परिमाणं', 'मत्तं' (मोजलेले), 'मत्ता' (प्रमाण), 'मनो' (मन), 'विमानं', 'मिनितब्बं' (मोजण्यायोग्य), 'मेtब्बं' (मोजण्यायोग्य), 'छाया मेतब्बा' (छाया मोजण्यायोग्य आहे). अशा ठिकाणी 'अनीय' प्रत्यय मिळत नाही. ဧတ္ထ မနောတိ ဧကာယ နာဠိယာ ဧကာယ စ တုလာယ မိနမာနော ဝိယ အာရမ္မဏံ မိနာတိ ပရိစ္ဆိန္ဒတီတိ မနော. ဝိသေသတော မိနိယတေ ပရိစ္ဆိန္ဒိယတေတိ ဝိမာနံ, ဒေဝါနံ ပုညဗလေန နိဗ္ဗတ္တဗျမှံ ဒေဝနိကေတံ. ယံ ဝိမာနံ ဥပသောဘိတံ, ပဘာသတိမိဒံ ဗျမှန္တိ စ အာဒိနာ ထောမိယတိ. आणि येथे 'मन' म्हणजे जणू काही एका मापाने किंवा एका तराजूने मोजल्याप्रमाणे जे आरम्मणाला (विषयाला) मोजते, निश्चित करते ते मन होय. जे विशेष रूपाने मोजले जाते, निश्चित केले जाते ते 'विमान' होय, जे देवांच्या पुण्यबलाने उत्पन्न झालेले देवांचे निवासस्थान (देवगृह) आहे. 'जे विमान सुशोभित आहे, हे गृह प्रकाशमान आहे' इत्यादी शब्दांनी ज्याची स्तुती केली जाते. မီ ဟိံသာယံ. မိနာတိ. မီနော, ကုမီနံ. 'मी' धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. 'मिनाति' (हिंसा करतो/नष्ट करतो). 'मीनो' (मासा), 'कुमीनं' (मासे पकडण्याचे जाळे). ဧတ္ထ [Pg.254] မီနောတိ မစ္ဆော. မစ္ဆဿ ဟိ ‘‘မီနော မစ္ဆော အမ္ဗုဇော ဝါရိဇော ဝါရိစရော’’တိ အနေကာနိ နာမာနိ. ဝိသေသနာမာနိ ပန ‘‘အမရော ခလိသော စန္ဒကုလော ကန္ဒဖလိ ဣန္ဒဖလိ ဣန္ဒဝလော ကုလိသော ဝါမိ ကုင်္ကုတလော ကဏ္ဍိကော သကုလော မင်္ဂုရော သိင်္ဂီ သတဝင်္ကော ရောဟိတော ပါဌီနော ကာဏော သဝင်္ကော ပါဝုသော’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ, ‘‘တိမိ တိမိင်္ဂလော’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ စ ဘဝန္တိ. ကုမီနန္တိ ကုစ္ဆိတေနာကာရေန မစ္ဆေ မိနန္တိ ဟိံသန္တိ ဧတေနာတိ ကုမီနံ, မစ္ဆဗန္ဓနပဉ္ဇရော. သော ပန ပါဠိယံ ကုမီနသဒ္ဒေန ဝုစ္စတိ. တထာ ဟိ – येथे 'मीनो' म्हणजे मासा. माशाची 'मीनो, मच्छो, अम्बुजो, वारिजो, वारिचरो' अशी अनेक नावे आहेत. विशेष नावे तर 'अमरो, खलिसो, चन्दकुलो, कन्द्फली, इन्द्फली, इन्दवलो, कुलिसो, वामी, कुङ्कुतलो, कण्डिको, सकुलो, मङ्गुरो, सिङ्गी, सतवङ्को, रोहितो, पाठीनो, काणो, सवङ्को, पावुसो' इत्यादी आणि 'तिमि, तिमिङ्गलो' इत्यादी आहेत. 'कुमीन' म्हणजे ज्याच्याद्वारे वाईट पद्धतीने माशांना मारतात (हिंसा करतात) ते 'कुमीन' (मासे पकडण्याचा पिंजरा) होय. तो पाळीमध्ये 'कुमीन' या शब्दाने म्हटला जातो. जसे की - ‘‘ဝါရိဇဿေဝ မေ သတော, ဗန္ဓဿ ကုမိနာမုခေ; အက္ကောသတိ ပဟရတိ, ပိယေ ပုတ္တေ အပဿတော’’တိ "कुमीनाच्या (पिंजऱ्याच्या) मुखात अडकलेल्या माशाप्रमाणेच, प्रिय पुत्रांना न पाहता, तो आक्रोश करतो आणि प्रहार करतो." ပါဠိ ဒိဿတိ. अशी पाळी दिसून येते. မူ ဗန္ဓနေ. မုနာတိ. မုနိ. 'मू' (mū) धातू बांधण्याच्या अर्थात आहे. मुनाति (munāti). मुनि (muni). ဧတ္ထ မုနီတိ အတ္တနော စိတ္တံ မုနာတိ မဝတိ ဗန္ဓတိ ရာဂဒေါသာဒိဝသံ ဂန္တုံ န ဒေတီတိ မုနိ. येथे 'मुनी' म्हणजे जो आपल्या चित्ताला बांधतो, नियंत्रित करतो आणि राग-द्वेष इत्यादींच्या आहारी जाऊ देत नाही, तो 'मुनी' होय. ရိ ဂတိဒေသနေသု. ရိကာတိ. ရေဏု. နကာရဿ ဏတ္တံ. 'रि' (ri) धातू गती आणि उपदेशाच्या अर्थात आहे. रिकाति (rikāti). रेणु (reṇu). 'न' काराचा 'ण' कार होतो. လီ သိလေသေ. လိနာတိ, နိလိနာတိ. လီနံ, သလ္လီနံ, ပဋိသလ္လာနံ. 'ली' (lī) धातू चिकटण्याच्या (संश्लेषण) अर्थात आहे. लिनाति (lināti), निलिनाति (nilināti). लीनं (līnaṃ), सल्लीनं (sallīnaṃ), पटिसल्लानं (paṭisallānaṃ - एकांतवास). ဝီ တန္တသန္တာနေ. ဝတ္ထံ ဝိနာတိ. ဣမိနာ သုတ္တေန စီဝရံ ဝိနာဟိ. ကမ္မေ – ဣဒံ ခေါ အာဝုသော စီဝရံ မံ ဥဒ္ဒိဿ ဝိယျတိ. ဝီတံ. သုဝီတံ. အပ္ပကံ ဟောတိ ဝေတဗ္ဗံ. ကာရိတေ ‘‘ဝါယာပေတိ, တန္တဝါယေဟိ စီဝရံ ဝါယာပေဿာမာ’တိ စီဝရံ ဝါယာပေသုံ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ ဘဝန္တိ. 'वी' (vī) धातू विणण्याच्या (तंतू विस्तारण्याच्या) अर्थात आहे. वत्थं विनाति (वस्त्र विणतो). 'इमिना सुत्तेन चीवरं विनाहि' (या सुताने चीवर विण). कर्मणी प्रयोगात - "इदं खो आवुसो चीवरं मं उद्दिस्स विय्यति" (हे आवुसो, हे चीवर माझ्यासाठी विणले जात आहे). वीतं (विणलेले). सुवीतं (चांगले विणलेले). 'अप्पकं होति वेतब्बं' (विणायचे थोडेच आहे). प्रयोजक रूपात - "वायापेति" (विणायला लावतो), "तंतूवायांकडून (विणकरांकडून) चीवर विणवून घेऊ या, असे म्हणून त्यांनी चीवर विणवून घेतले" इत्यादी रूपे होतात. ဝီ ဟိံသာယံ. ဝိနာတိ. ဝေဏု. ဝေဏူတိ ဝံသော. 'वी' (vī) धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. विनाति (vināti). वेणु (veṇu). वेणू म्हणजे बांबू (वंश). လူ [Pg.255] ဆေဒနေ. လုနာတိ. လောဏံ, ကုသလံ, ဗာလော, လူတော. 'लू' (lū) धातू कापण्याच्या (छेदन) अर्थात आहे. लुनाति (lunāti). लोणं (loṇaṃ), कुसलं (kusalaṃ), बालो (bālo), लूतो (lūto). ဧတ္ထ စ လောဏန္တိ လုနာတိ ဝီတရသဘာဝံ ဝိနာသေတိ သရသဘာဝံ ကရောတီတိ လောဏံ, လဝဏံ. ကုသော ဝိယ ဟတ္ထပ္ပဒေသံ အကုသလဓမ္မေ လုနာတီတိ ကုသလံ, အနဝဇ္ဇဣဋ္ဌဝိပါကလက္ခဏော ဓမ္မော. ဒိဋ္ဌဓမ္မိကသမ္ပရာယိကေ ဒွေ အတ္ထေ လုနာတီတိ ဗာလော, အဝိဒွါ. လူတောတိ မက္ကဋကော ဝုစ္စတိ. တဿ ဟိ သုတ္တံ ‘‘လူတသုတ္တ’’န္တိ ဝဒန္တိ. ယူသံ ပါတုံ ပဋင်္ဂမက္ခိကာဒီနံ ဇီဝိတံ လုနာတီတိ လူတော. येथे 'लोण' म्हणजे जे नीरसपणा नष्ट करते आणि चवदार बनवते ते 'लोण' (लवण/मीठ) होय. जसा कुश (दर्भ) हाताला कापतो, तसे जे अकुशल धर्मांना कापते ते 'कुशल' होय; जे दोषरहित (अनवद्य) आणि इष्ट विपाक देणारे लक्षण असलेला धर्म आहे. जो ऐहिक आणि पारलौकिक या दोन्ही हितांचा नाश करतो (कापतो) तो 'बाल' (अज्ञानी) होय. 'लूत' म्हणजे कोळी (मकडी) म्हटले जाते. कारण त्याच्या धाग्याला 'लूत-सुत्त' म्हणतात. रस पिण्यासाठी जो पतंग, माश्या इत्यादींचे जीवन नष्ट करतो (कापतो) तो 'लूत' होय. သိ ဗန္ဓနေ. သိနာတိ. သီမာ, သီသံ. 'सि' (si) धातू बांधण्याच्या अर्थात आहे. सिनाति (sināti). सीमा (sīmā), सीसं (sīsaṃ - डोके). ဧတ္ထ သီမာတိ သိနီယတေ သမဂ္ဂေန သံဃေန ကမ္မဝါစာယ ဗန္ဓိယတေတိ သီမာ. သာ ဒုဝိဓာ ဗဒ္ဓသီမာ အဗဒ္ဓသီမာတိ. တာသု အဗဒ္ဓသီမာ မရိယာဒကရဏဝသေန ‘‘သီမာ’’တိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. သိနာတိ ဗန္ဓတိ ကေသေ မောဠိကရဏဝသေန ဧတ္ထာတိ သီသံ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. येथे 'सीमा' म्हणजे जी समग्र संघाने कर्मवाचेद्वारे बांधली जाते ती 'सीमा' होय. ती दोन प्रकारची आहे - बद्धसीमा आणि अबद्धसीमा. त्यापैकी अबद्धसीमा ही मर्यादा ठरवण्याच्या दृष्टीने 'सीमा' म्हणून जाणावी. ज्याच्यावर केसांचा अंबाडा बांधला जातो ते 'सीस' (डोके) होय. इतर उदाहरणेही अशीच योजावीत. သာ ပါကေ. သိနာတိ. 'सा' (sā) धातू शिजवण्याच्या (पाक) अर्थात आहे. सिनाति (sināti). သု ဟိံသာယံ. သုဏာတိ. ပရသု. ပရံ သုဏန္တိ ဟိံသန္တိ ဧတေနာတိ ပရသု. 'सु' (su) धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. सुणाति (suṇāti). परसु (parasu - कुऱ्हाड). ज्याच्याद्वारे शत्रूला (दुसऱ्याला) मारतात (हिंसा करतात) ती 'परसू' होय. အသ ဘောဇနေ. ဝုတ္တာနံ ဖလမသ္နာတိ. အသနံ. 'अस' (asa) धातू भोजनाच्या अर्थात आहे. 'वुत्तानं फलमस्नाति' (पेरलेल्याचे फळ खातो). असनं (asanaṃ). ဧတ္ထ အသနန္တိ အာဟာရော. သော ဟိ အသိယတိ ဘုဉ္ဇိယတီတိ ‘‘အသန’’န္တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘အသ္နာထ ခါဒထ ပိဝထာ’’တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. येथे 'असन' म्हणजे आहार. कारण तो खाल्ला जातो, भोगला जातो म्हणून त्याला 'असन' म्हणतात. "अस्नाथ खादथ पिवथ" (खा, भक्षण करा, प्या) हे याचे येथे उदाहरण आहे. ကိလိသ ဝိဗာဓနေ. ကိလိသ္နာတိ. ကိလေသော. 'किलिस' (kilisa) धातू पीडा देण्याच्या (विबाधन) अर्थात आहे. किलिसनाति (kilisnāti). किलेसो (kileso - क्लेश). ဧတ္ထ စ ကိလေသောတိ ရာဂါဒယောပိ ဒုက္ခမ္ပိ ဝုစ္စတိ. आणि येथे 'किलेस' (क्लेश) म्हणजे राग इत्यादी आणि दुःख देखील म्हटले जाते. ဥဒ္ဓသ ဥဉ္ဆေ. ဥဉ္ဆော ပရိယေသနံ. ဥဒ္ဓသ္နာတိ. 'उद्धस' (uddhasa) धातू उंछ (धान्य गोळा करणे/शोधणे) अर्थात आहे. उंछो म्हणजे शोधणे (परियेसनं). उद्धसनाति (uddhasnāti). ဣသ [Pg.256] အဘိက္ခဏေ. ဣသ္နာတိ. 'इस' (isa) धातू वारंवार करण्याच्या (अभिक्षण) अर्थात आहे. इस्नाति (isnāti). ဝိသ ဝိပ္ပယောဂေ. ဝိသ္နာတိ. ဝိသံ. 'विस' (visa) धातू वियोगाच्या (विप्रयोग) अर्थात आहे. विस्नाति (visnāti). विसं (visaṃ - विष). ပုသ သိနေဟသဝနပူရဏေသု. ပုသ္နာတိ. 'पुस' (pusa) धातू स्नेह (प्रेम), पाझरणे आणि पूर्ण करणे या अर्थात आहे. पुस्नाति (pusnāti). ပုသ ပေါသနေ. ပုသ္နာတိ. 'पुस' (pusa) धातू पोषणाच्या अर्थात आहे. पुस्नाति (pusnāti). မုသ ထေယျေ. မုသ္နာတိ. မုသလော. 'मुस' (musa) धातू चोरीच्या (स्तेय) अर्थात आहे. मुस्नाति (musnāti). मुसलो (musalo - मुसळ). ကိယာဒီ ဧတ္တကာ ဒိဋ္ဌာ, ဓာတဝေါ မေ ယထာဗလံ; သုတ္တေသွညေပိ ပေက္ခိတွာ, ဂဏှဝှော အတ္ထယုတ္တိတော. माझ्या क्षमतेनुसार क्रियादी गणाचे एवढे धातू पाहिले गेले आहेत; सूत्रांमध्ये इतर धातू देखील पाहून, अर्थाच्या योग्यतेनुसार ते ग्रहण करावेत. သာသနာ လောကတော စေတေ,ဒဿိတာ တေသု လောကတော; သာသနဿောပကာရာယ,ဝုတ္တာ တဒနုရူပကာ. हे धातू बुद्धशासनातून आणि लोकव्यवहारातून दाखवले गेले आहेत; त्यापैकी लोकव्यवहारातील धातू शासनाच्या उपकारासाठी त्याच्याशी सुसंगत असे सांगितले गेले आहेत. ကိယာဒိဂဏောယံ. हा क्रियादी गण होय. ဂဟာဒိဂဏိက गहादी गण. ဣဒါနိ ဂဟာဒိဂဏော ဝုစ္စတေ. ဧတ္ထေကေ ဧဝံ မညန္တိ. आता गहादी गण सांगितला जात आहे. येथे काही जण असे मानतात. ဂဟာဒီနံ ဂဏော နာမ, ပစ္စေကံ နုပလဗ္ဘတိ; အထမေကော ဂဟဓာတု, ဂဟာဒီနံ ဂဏော သိယာ. गहादी नावाचा गण स्वतंत्रपणे आढळत नाही; केवळ एक 'गह' धातूच गहादी गण असू शकतो. ယတော ပ္ပဏှာ ပရာ ဟေယျုံ, ဓာတုတော ဇိနသာသနေ; တေပိ အညေ န ဝိဇ္ဇန္တိ, အညတြ ဂဟဓာတုယာ. कारण बुद्धशासनात ज्या धातूंपासून 'प्प' आणि 'ण्हा' प्रत्यय लागतात, ते इतर धातू 'गह' धातूशिवाय आढळत नाहीत. ဣတိ စိန္တာယ ဧကစ္စေ, ဂဟဓာတုံ ကိယာဒိနံ; ပက္ခိပိံသု ဂဏေ ဧဝံ, န ဝဒိံသု ဂဟာဒိကံ. असा विचार करून काही जणांनी 'गह' धातूला क्रियादी गणातच समाविष्ट केले आणि अशा प्रकारे गहादी गणाचा स्वतंत्र उल्लेख केला नाही. န တေသံ ဂဟဏံ ဓီရော, ဂဏှေယျ သုဝိစက္ခဏော; ယတော ကစ္စာယနေ ဝုတ္တော, ဂဟာဒီနံ ဂဏော ဝိသုံ. बुद्धिमान आणि चतुर व्यक्तीने त्यांचे हे मत स्वीकारू नये; कारण कच्चायनामध्ये गहादी गण स्वतंत्रपणे सांगितला आहे. ‘‘ဂဟာဒိတော ပ္ပဏှာ’’ ဣတိ, လက္ခဏံ ဝဒတာ ဟိ သော; ကစ္စာယနေန ဂရုနာ, ဒဿိတော နနု သာသနေ. "गहादितो प्पण्हा" असे लक्षण सांगताना, आदरणीय कच्चायनांनी व्याकरणात तो स्वतंत्रपणे दर्शवला आहे की नाही? (नक्कीच दर्शवला आहे). သစေ [Pg.257] ဝိသုံ ဂဟာဒီနံ, ဂဏော နာမ န လဗ္ဘတိ; ဂဟာဒိဒီပကေ သုတ္တေ, ဟိတွာန ဗာဟိရံ ဣဒံ. जर गहादी नावाचा स्वतंत्र गण आढळत नसेल, तर गहादी दर्शवणाऱ्या सूत्रात हे बाह्य रूप सोडून; ‘‘ဂဟတော ပ္ပဏှာ’’ ဣစ္စေဝ, ဝတ္တဗ္ဗံ အထ ဝါ ပန; ‘‘ကိယာဒိတော နာပ္ပဏှာ’’တိ, ကာတဗ္ဗံ ဧကလက္ခဏံ. "गहतो प्पण्हा" असेच म्हणावे लागले असते, किंवा मग "क्रियादितो नाप्पण्हा" असे एकच लक्षण करावे लागले असते. ယသ္မာ တထာ န ဝုတ္တဉ္စ, န ကတဉ္စေကလက္ခဏံ; တသ္မာ အယံ ဝိသုံယေဝ, ဂဏော ဣစ္စေဝ ဉာယတိ. ज्याअर्थी तसे म्हटले गेले नाही आणि तसे एकच लक्षणही केले गेले नाही, त्याअर्थी हा स्वतंत्रच गण आहे, असे समजले जाते. ‘‘သရာ သရေ လောပ’’မိတိ-အာဒီနိ လက္ခဏာနိဝ; ဂမ္ဘီရံ လက္ခဏံ ဧတံ, ဒုဇ္ဇာနံ တက္ကဂါဟိနာ. "सरा सरे लोपं" इत्यादी लक्षणांप्रमाणे हे लक्षण अत्यंत गंभीर आहे, जे केवळ तर्काचा आधार घेणाऱ्यांना समजणे कठीण आहे. ဥသာဒယောပိ သန္ဓာယ, အာဒိဂ္ဂဟော ကတော တဟိံ; တထာ ဟိ ‘‘ဥဏှာပေတီ’’တိ, အာဒိရူပါနိ ဒိဿရေ. 'उस' इत्यादी धातूंना लक्षात घेऊन तेथे 'आदि' ग्रहण केले गेले आहे; कारण "उण्हापेति" इत्यादी रूपे दिसून येतात. ဣဒါနိ ပါကဋံ ကတွာ, အာဒိသဒ္ဒဖလံ အဟံ; သပ္ပယောဂံ ဂဟာဒီနံ, ဂဏံ ဝက္ခာမိ မေ သုဏ. आता स्पष्ट करून, 'आदि' शब्दाचे फळ (अर्थ) आणि प्रयोगासहित 'गह' इत्यादी धातूंचा समूह मी सांगतो, तो माझ्याकडून ऐका. ဂဟ ဥပါဒါနေ. ဥပါဒါနံ ဂဟဏံ, န ကိလေသုပါဒါနံ. ဥပသဒ္ဒေါ ဟေတ္ထ န ကိဉ္စိ အတ္ထဝိသေသံ ဝဒတိ. အထ ဝါ ကာယေန စိတ္တေန ဝါ ဥပဂန္တွာ အာဒါနံ ဂဟဏံ ဥပါဒါနန္တိ သမီပတ္ထော ဥပသဒ္ဒေါ. ကတ္ထစိ ဟိ ဥပသဒ္ဒေါ အာဒါနသဒ္ဒသဟိတော ဒဠှဂ္ဂဟဏေ ဝတ္တတိ ‘‘ကာမုပါဒါန’’န္တိအာဒီသု. ဣဓ ပန ဒဠှဂ္ဂဟဏံ ဝါ ဟောတု သိထိလဂ္ဂဟဏံ ဝါ, ယံ ကိဉ္စိ ဂဟဏံ ဥပါဒါနမေဝ, တသ္မာ ဂဟဓာတု ဂဟဏေ ဝတ္တတီတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဃေပ္ပတိ, ဂဏှာတိ ဝါ. ပရိဂ္ဂဏှာတိ, ပဋိဂ္ဂဏှာတိ, အဓိဂဏှာတိ, ပဂ္ဂဏှာတိ, နိဂ္ဂဏှာတိ. ပဓာနဂဏှနကော. ဂဏှိတုံ, ဥဂ္ဂဏှိတုံ. ဂဏှိတွာ, ဥဂ္ဂဏှိတွာ. အညထာပိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. အဟံ ဇာလိံ ဂဟေဿာမိ. ဂဟေတုံ. ဂဟေတွာ. ဥဂ္ဂါဟကော, သင်္ဂါဟကော, အဇ္ဈောဂါဠှော. ကာရိတေ ‘‘ဂဏှာပေတိ, ဂဏှာပယတိ, အညတရံ သတိပဋ္ဌာနံ ဥဂ္ဂဏှာပေန္တိ, သဒ္ဓိံ အမစ္စသဟဿေန ဂဏှာပေတွာ. ဥပဇ္ဈံ ဂါဟာပေတဗ္ဗော. ဥပဇ္ဈံ ဂါဟာပေတွာ[Pg.258]. ဂါဟေတိ, ဂါဟယတိ, ဂါဟာပေဿတိ. ဂါဟာပယန္တိ သဗ္ဘာဝံ. ဂါဟကော, ဂါဟေတွာ’’ ဣစ္စာဒီနိ. ကမ္မနိ – ဂယှတိ, သင်္ဂယှတိ, ဂဏှိယတိ ဝါ. တထာ ဟိ ‘‘ဂဏှိယန္တိ ဥဂ္ဂဏှိယန္တီ’’တိ နိဒ္ဒေသပါဠိ ဒိဿတိ. ‘‘ဂေဟံ, ဂါဟော, ပရိဂ္ဂဟော, သင်္ဂါဟကော, သင်္ဂဟေတာ’’ ဣစ္စာဒီနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. 'गह' (gaha) हा धातू उपादान (ग्रहण करणे) या अर्थात आहे. उपादान म्हणजे ग्रहण करणे, क्लेश-उपादान नव्हे. येथे 'उप' हा उपसर्ग कोणताही विशेष अर्थ दर्शवत नाही. किंवा शरीराने अथवा चित्ताने जवळ जाऊन जे ग्रहण करणे (आदान) होते, त्याला 'उपादान' म्हणतात, येथे 'उप' हा उपसर्ग समीपतेच्या अर्थात आहे. काही ठिकाणी 'उप' हा उपसर्ग 'आदान' शब्दासोबत दृढ ग्रहणाच्या (घट्ट पकडण्याच्या) अर्थात वापरला जातो, जसे की 'कामुपादान' (कामोपादान) इत्यादींमध्ये. परंतु येथे दृढ ग्रहण असो वा शिथिल ग्रहण, कोणतेही ग्रहण हे उपादानच आहे, म्हणून 'गह' धातू ग्रहण करण्याच्या अर्थात वापरला जातो, असा अर्थ घ्यावा. 'घेप्पति' (घेतो), किंवा 'गण्हाति' (पकडतो). 'परिगण्हाति' (सर्व बाजूंनी ग्रहण करतो), 'पटिगण्हाति' (स्वीकारतो), 'अधिगण्हाति' (अधिग्रहण करतो), 'पगण्हाति' (प्रयत्नपूर्वक पकडतो), 'निगण्हाति' (निग्रह करतो). 'पधानगण्हनको' (मुख्य ग्रहण करणारा). 'गण्हितुं' (ग्रहण करण्यासाठी), 'उग्गण्हितुं' (शिकण्यासाठी/ग्रहण करण्यासाठी). 'गण्हित्वा' (ग्रहण करून), 'उग्गण्हित्वा' (शिकून/ग्रहण करून). इतर रूपेही होतात: 'अहं जालिं गहेस्सामि' (मी जाळे पकडेन). 'गहेतुं' (पकडण्यासाठी). 'गहेत्वा' (पकडून). 'उग्गाहको' (शिकणारा/ग्रहण करणारा), 'सङ्गाहको' (संग्रह करणारा), 'अज्झोगाळ्हो' (प्रवेश केलेला). प्रयोजक (कारित) रूपात: 'गण्हापेति, गण्हापयति' (पकडवायला लावतो), 'अञ्ञतरं सतिपट्ठानं उग्गण्हापेन्ति' (दुसरे एखादे स्मृतिप्रस्थान शिकवायला लावतात), 'सद्धिं अमच्चसहस्सेन गण्हापेत्वा' (हजार अमात्यांसह पकडायला लावून). 'उपज्झं गाहापेतब्बो' (उपाध्यायाला ग्रहण करायला लावावे). 'उपज्झं गाहापेत्वा' (उपाध्यायाला ग्रहण करायला लावून). 'गाहेति, गाहयति, गाहापेस्सति'. 'गाहापयन्ति सब्भावं'. 'गाहको, गाहेत्वा' इत्यादी. कर्मणी प्रयोगात (कम्यनि) - 'गय्हति' (घेतले जाते), 'सङ्गय्हति' (संग्रहित केले जाते) किंवा 'गण्हियति' (घेतले जाते). तसेच 'गण्हियन्ति उग्गण्हियन्ति' अशी निर्देशपाळी (व्याकरण निर्देश) दिसते. 'गेहं' (घर), 'गाहो' (ग्रह), 'परिग्गहो' (परिग्रह), 'सङ्गाहको' (संग्राहक), 'सङ्गहेता' (संग्रह करणारा) इत्यादी रूपे जोडावीत. တတြ အကာရာနန္တရတျန္တပဒါနံ ‘‘ဃေပ္ပတိ, ဃေပ္ပန္တိ. ဃေပ္ပသီ’’တိ စ ‘‘ဂဏှတိ, ဂဏှန္တိ. ဂဏှသီ’’တိ စ အာဒိနာ နယေန သဗ္ဗာသု ဝိဘတ္တီသု သဗ္ဗထာ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. အာကာရေကာရာနန္တရတျန္တပဒါနံ ‘‘ဂဏှာတိ ဂဏှာပေတီ’’တိအာဒိနာ ယထာသမ္ဘဝံ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ ဝဇ္ဇေတဗ္ဗဋ္ဌာနံ ဝဇ္ဇေတွာ. त्यात, 'अ' कारानंतर येणाऱ्या 'ति' प्रत्ययाने संपणाऱ्या पदांची 'घेप्पति, gheppanti, gheppasi' आणि 'गण्हति, gaṇhanti, gaṇhasi' इत्यादी पद्धतीने सर्व विभक्तींमध्ये सर्व प्रकारे पदमाला (रूपे) जोडावी. 'आ' कार आणि 'इ' कारानंतर येणाऱ्या 'ति' प्रत्ययाने संपणाऱ्या पदांची 'गण्हाति, गण्हापेति' इत्यादी रूपांनुसार, वर्ज्य असणारी ठिकाणे वर्ज्य करून, शक्यतेनुसार पदमाला जोडावी. ဣမာနိ ပန ပသိဒ္ဓါနိ ကာနိစိ အဇ္ဇတနီရူပါနိ ‘‘အဂ္ဂဟီ မတ္တိကာပတ္တံ. အဂ္ဂဟုံ, အဂ္ဂဟိံသု, အဂ္ဂဟေသု’’န္တိ. ဘဝိဿန္တီအာဒီသု ဂဟေဿတိ, ဂဟေဿန္တိ. သေသံ ပရိပုဏ္ဏံ ကာတဗ္ဗံ. အဂ္ဂဟိဿာ, အဂ္ဂဟိဿံသု. သေသံ ပရိပုဏ္ဏံ ကာတဗ္ဗံ. तसेच, ही काही प्रसिद्ध अद्यतनी (भूतकाळाची) रूपे आहेत: 'अग्गही मत्तिकापत्तं' (त्याने मातीचे पात्र घेतले). 'अग्गहुं, अग्गहिंसु, अग्गहेसुं'. भविष्यकाळ इत्यादींमध्ये 'गहेस्सति, गहेस्सन्ति'. उर्वरित रूपे पूर्ण करावीत. 'अग्गहिस्सा, अग्गहिस्संसु'. उर्वरित रूपे पूर्ण करावीत. ဥသ ဒါဟေ. ဒါဟော ဥဏှံ. ဥသတိ ဒဟတီတိ ဥဏှံ. ဥဏှသဒ္ဒေါ ‘‘ဥဏှံ ဘတ္တံ ဘုဉ္ဇတီ’’တိအာဒီသု ဒဗ္ဗမပေက္ခတိ, ‘‘သီတံ ဥဏှံ ပဋိဟနတီ’’တိအာဒီသု ပန ဂုဏံ ဥဏှဘာဝဿ ဣစ္ဆိတတ္တာ. ဥဏှဘာဝေါ ဟိ သီတဘာဝေါ စ ဂုဏော. 'उस' (usa) हा धातू दाह (उष्णता/जळणे) या अर्थात आहे. दाह म्हणजे उष्णता. जे जळते किंवा उष्ण करते ते 'उष्ण' (uṇhaṃ). 'उष्णं भत्तं भुञ्जति' (तो गरम भात खातो) इत्यादी वाक्यांमध्ये 'उष्ण' हा शब्द द्रव्याची (वस्तूची) अपेक्षा करतो, परंतु 'सीतं उण्हं पटिहनति' (थंडी उष्णतेला नष्ट करते) इत्यादी वाक्यांमध्ये तो गुणाची अपेक्षा करतो, कारण तेथे उष्णभावाची इच्छा असते. कारण उष्णभाव आणि शीतभाव हे गुण आहेत. တသ ဝိပါသာယံ. တဏှာ. ကေနဋ္ဌေန တဏှာ? တဿတိ ပရိတဿတီတိ အတ္ထေန. 'तस' (tasa) हा धातू तहान (पिपासा) या अर्थात आहे. 'तण्हा' (तृष्णा). कोणत्या अर्थाने 'तण्हा' म्हणतात? 'तस्सति परितस्सति' (तहान लागते किंवा व्याकुळ होतो) या अर्थाने. ဇုသိ ပီတိသေဝနေသု. ဇုဏှော သမယော. ကာဠေ ဝါ ယဒိ ဝါ ဇုဏှေ, ယဒါ ဝါယတိ မာလုတော. 'जुसि' (jusi) हा धातू प्रीती आणि सेवन या अर्थांमध्ये आहे. 'जुण्हो समयो' (चांदण्याचा काळ/शुक्लपक्ष). 'काळे वा यदि वा जुण्हे, यदा वायति मालुतो' (काळोखात असो वा चांदण्यात, जेव्हा वारा वाहतो). တတ္ထ ဇုဏှောတိ ဇောသေတိ လောကဿ ပီတိံသောမနဿဉ္စ ဥပ္ပာဒေတီတိ ဇုဏှော. तेथे 'जुण्हो' म्हणजे जो लोकांमध्ये प्रीती आणि सोमनस्य (आनंद) उत्पन्न करतो, म्हणून तो 'जुण्हो' (चांदणे/शुक्लपक्ष). ဇုတ [Pg.259] ဒိတ္တိယံ. ဇုဏှာ ရတ္တိ. ဇောတတိ သယံ နိပ္ပဘာပိ သမာနာ စန္ဒတာရကပ္ပဘာသေနပိ ဒိဗ္ဗတိ ဝိရောစတိ သပ္ပဘာ ဟောတီတိ ဇုဏှာ. 'जुत' (juta) हा धातू दीप्ती (चमकणे) या अर्थात आहे. 'जुण्हा रत्ति' (चांदणी रात्र). जी स्वतः प्रभाहीन असूनही चंद्र आणि ताऱ्यांच्या प्रकाशाने चमकते, विशेष शोभून दिसते आणि सप्रभ (तेजस्वी) होते, ती 'जुण्हा' (चांदणी रात्र). သာ တနုကရဏေ. သဏှဝါစာ. သိယတိ တနုကရိယတိ, န ဖရုသဘာဝေန ကက္ကသာ ကရိယတီတိ သဏှာ. 'सा' (sā) हा धातू बारीक करणे (तनुकरण) या अर्थात आहे. 'सण्हवाचा' (मृदू वाणी). जी बारीक केली जाते, कठोर भावाने कर्कश केली जात नाही, ती 'सण्हा' (मृदू/सूक्ष्म). သော အန္တကမ္မနိ. သဏှံ, ဉာဏံ. သိယတိ သယံ သုခုမဘာဝေန အတိသုခုမမ္ပိ အတ္ထံ အန္တံ ကရောတိ နိပ္ဖတ္တိံ ပါပေတီတိ သဏှံ. 'सो' (so) हा धातू अंतकर्म (समाप्ती/निश्चिती) या अर्थात आहे. 'सण्हं' (सूक्ष्म), 'ञाणं' (ज्ञान). जे स्वतः सूक्ष्म भावाने अतिशय सूक्ष्म अर्थाचाही अंत करते (निश्चिती करते) किंवा त्याला पूर्णत्वास नेते, ते 'सण्हं' (सूक्ष्म ज्ञान). တိဇ နိသာနေ. နိသာနံ တိက္ခတာ. တိဏှော ပရသု. တိတိက္ခတီတိ တိဏှော. 'तिज' (tija) हा धातू तीक्ष्ण करणे (निसान) या अर्थात आहे. निसान म्हणजे तीक्ष्णता. 'तिण्हो परसु' (तीक्ष्ण कुऱ्हाड). जो सहन करतो (किंवा तीक्ष्ण असतो) तो 'तिण्हो' (तीक्ष्ण). သိ သေဝါယံ. အတ္တနော ဟိတမာသီသန္တေဟိ သေဝိယတေတိ သိပ္ပံ, ယံ ကိဉ္စိ ဇီဝိတဟေတု သိက္ခိတဗ္ဗံ သိပ္ပာယတနံ. အပိစ သိပ္ပန္တိ အဋ္ဌာရသ မဟာသိပ္ပာနိ – သုတိ သူရမတိ ဗျာကရဏံ ဆန္ဒောဝိစိတိ နိရုတ္တိ ဇောတိသတ္ထံ သိက္ခာ မောက္ခဉာဏံ ကြိယာဝိဓိ ဓနုဗ္ဗေဒေါ ဟတ္ထိသိက္ခာ ကာမတန္တံ အဿလက္ခဏံ ပုရာဏံ ဣတိဟာသော နီတိ တက္ကော ဝေဇ္ဇကဉ္စာတိ. 'सि' (si) हा धातू सेवा या अर्थात आहे. स्वतःचे हित इच्छिणाऱ्यांकडून ज्याचे सेवन केले जाते ते 'सिप्पं' (शिल्प/कला), जे काही उपजीविकेसाठी शिकण्यासारखे शिल्पस्थान (कौशल्य) आहे. तसेच 'शिल्प' म्हणजे अठरा महाशिल्पे (कला) आहेत - श्रुती (वेद/ऐकणे), शूरमती (युद्धकला/बुद्धिमत्ता), व्याकरण, छंदोविचिती (छंदशास्त्र), निरुक्ती, ज्योतिषशास्त्र, शिक्षा (उच्चारणशास्त्र), मोक्षज्ञान, क्रियाविधी (कर्मकांड/विधी), धनुर्वेद (धनुर्विद्या), हत्ती-शिक्षण (गजविद्या), कामतंत्र, अश्वलक्षण (घोडे ओळखण्याची विद्या), पुराण, इतिहास, नीती, तर्क आणि वैद्यकशास्त्र. ကု ကုစ္ဆာယံ. ကုစ္ဆာ ဂရဟာ. ကဏှာ ဓမ္မာ. ကဏှော ပုရိသော. 'कु' (ku) हा धातू कुत्सा (निंदा) या अर्थात आहे. कुत्सा म्हणजे निंदा. 'कण्हा धम्मा' (कृष्ण/काळे धर्म - अकुशल धर्म). 'कण्हो पुरिसो' (काळा माणूस). တတ္ထ ကဏှာတိ အပဘဿရဘာဝကရဏတ္တာ ပဏ္ဍိတေဟိ ကုစ္ဆိတဗ္ဗာ ဂရဟိတဗ္ဗာတိ ကဏှာ, အကုသလဓမ္မာ. ကာဠဝဏ္ဏတ္တာ သုဝဏ္ဏဝဏ္ဏာဒိကံ ဥပနိဓာယ ကုစ္ဆိတဗ္ဗော နိန္ဒိတဗ္ဗောတိ ကဏှော, ကာဠဝဏ္ဏော. ဝုတ္တမ္ပိ စေတံ – तेथे 'कण्हा' म्हणजे प्रभाहीन (तेजहीन) भाव निर्माण करत असल्यामुळे पंडितांकडून निंदा करण्यास योग्य, म्हणून 'कण्हा' (कृष्ण/काळे) म्हणजेच अकुशल धर्म. काळ्या रंगाचा असल्यामुळे, सुवर्ण रंगाशी तुलना करता निंदा करण्यास योग्य, म्हणून 'कण्हो' म्हणजे काळ्या रंगाचा. हे असेही म्हटले आहे - ‘‘ကဏှော ဝတာယံ ပုရိသော, ကဏှံ ဘုဉ္ဇတိ ဘောဇနံ; ကဏှေ ဘူမိပ္ပဒေသသ္မိံ, န မယှံ မနသော ပိယော’’တိ စ, 'हा माणूस खरोखरच काळा आहे, तो काळे भोजन करतो; काळ्या भूमीच्या प्रदेशात राहणारा हा मला मनापासून आवडत नाही' आणि, ‘‘န [Pg.260] ကဏှော တစသာ ဟောတိ,အန္တောသာရော ဟိ ဗြာဟ္မဏော; ယသ္မိံ ပါပါနိ ကမ္မာနိ,သ ဝေ ကဏှော သုဇမ္ပတီ’’တိ စ. 'केवळ त्वचेने कोणी काळा (कृष्ण) होत नाही, कारण अंतःकरणाने श्रेष्ठ असलेलाच खरा ब्राह्मण (श्रेष्ठ पुरुष) असतो; ज्याच्यामध्ये पापकर्मे असतात, तोच खरोखर काळा (अपवित्र) असतो, हे सुजंपती (इंद्रा)!' आणि, ဣစ္စေဝံ – अशा प्रकारे - ဂဟာဒိကေ ဓာတုဂဏေ, သန္ဓာယ တသိအာဒယော; အာဒိဂ္ဂဟော ကတော ပ္ပဏှာ, ဂဟာဒီသု ယထာရဟံ. 'गह' इत्यादी धातूंच्या समूहात, 'तस' इत्यादी धातूंचा विचार करून, 'गह' इत्यादींमध्ये योग्यतेनुसार 'ण्हा' प्रत्ययाचा 'आदि' (सुरुवात) म्हणून स्वीकार केला गेला आहे. ဂဟတော ဓာတုတော ဟိ ပ္ပော,အာချာတတ္တေဝဒိဿတိ; အာချာတတ္တေ စ နာမတ္တေ, ဏှာသဒ္ဒေါ ဥသတော တထာ. कारण 'गह' धातूपासून 'प्प' प्रत्यय केवळ आख्यात (क्रियापद) रूपातच दिसतो; आणि 'ण्हा' शब्द आख्यात रूपात तसेच नाम रूपातही दिसतो, तसेच 'उस' धातूपासूनही. ဥသဂဟေဟိ အညသ္မာ, နာမတ္တေဝ ဒုဝေ မတာ; ဧဝံ ဝိသေသတော ဉေယျော, ဂဟာဒိဂဏနိစ္ဆယော. 'उस' आणि 'गह' या धातूंव्यतिरिक्त इतरांपासून नाम रूपातच हे दोन प्रत्यय मानले गेले आहेत; अशा प्रकारे 'गहादि' गणाचा निश्चय विशेष रूपाने जाणून घ्यावा. ဧတ္ထ ပန ကိဉ္စာပိ သာသနေ ‘‘တဏှာယတီ’’တိ ကြိယာပဒမ္ပိ ဒိဿတိ, တထာပိ တဿ ‘‘ပဗ္ဗတာယတိ, မေတ္တာယတီ’’တိအာဒီနိ ဝိယ နာမသ္မာ ဝိဟိတဿ အာယပစ္စယဿ ဝသေန သိဒ္ဓတ္တာ ကြိယာပဒတ္တေပိ ဏှာပစ္စယော မုချတော လဗ္ဘတီတိ န သက္ကာ ဝတ္တုံ. ‘‘တဏှာယတီ’’တိ ဟိ ဣဒံ ဏှာပစ္စယဝတာ တသဓာတုတော နိပ္ဖန္နတဏှာသဒ္ဒသ္မာ ပရဿ အာယပစ္စယဿ ဝသေန နိပ္ဖန္နံ. တထာ ကိဉ္စာပိ ရူပိယသံဝေါဟာရသိက္ခာပဒဝဏ္ဏနာယံ ‘‘ဝါသိဖလံ တာပေတွာ ဥဒကံ ဝါ ခီရံ ဝါ ဥဏှာပေတီ’’တိ ဣမသ္မိံ ပဒေသေ ‘‘ဥဏှာပေတီ’’တိ ဟေတုကတ္တုဝါစကံ ကြိယာပဒံ ဒိဿတိ, တထာပိ တဿ ဏှာပစ္စယဝတာ ဥသဓာတုတော နိပ္ဖန္နဥဏှာသဒ္ဒတော ဝိဟိတဿ ကာရိတသညဿ ဏာပေပစ္စယဿ ဝသေန နိပ္ဖန္နတ္တာ ကြိယာပဒတ္တေပိ ဏှာပစ္စယော မုချတော လဗ္ဘတီတိ န သက္ကာ ဝတ္တုံ. ‘‘ဥဏှာပေတီ’’တိ ဣဒံ ဝုတ္တပ္ပကာရဥဏှာသဒ္ဒတော ဏာပေပစ္စယဝသေန နိပ္ဖန္နံ, ဧတသ္မိံ ဒိဋ္ဌေ ‘‘ဥဏှာပယတီ’’တိ ပဒမ္ပိ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ. परंतु येथे जरी शासनात (बुद्धवचनात) 'तण्हायति' (तृष्णा करतो) असे क्रियापदही दिसत असले, तरी 'पब्बतायति, मेत्तायति' इत्यादींप्रमाणे नामापासून विहित केलेल्या 'आय' प्रत्ययामुळे ते सिद्ध होत असल्याने, क्रियापद रूपातही 'ण्हा' प्रत्यय मुख्यत्वे मिळतो असे म्हणता येत नाही. कारण 'तण्हायति' हे 'ण्हा' प्रत्यययुक्त 'तस' धातूपासून निष्पन्न झालेल्या 'तण्हा' शब्दाच्या पुढे 'आय' प्रत्यय लागल्यामुळे निष्पन्न झाले आहे. तसेच, जरी रुपियसंविहार सिक्खापदाच्या (रुपयांच्या व्यवहारासंबंधीच्या शिकवणुकीच्या) वर्णनात 'वासिफलं तापेत्वा उदकं वा खीरं वा उण्हापेति' (कुऱ्हाडीचे पाते तापवून पाणी किंवा दूध गरम करतो) या वाक्यात 'उण्हापेति' (गरम करतो) हे प्रयोजक (causative) क्रियापद दिसत असले, तरी 'ण्हा' प्रत्यययुक्त 'उस' धातूपासून निष्पन्न झालेल्या 'उण्ह' शब्दापासून विहित केलेल्या कारितसंज्ञक 'णापे' प्रत्ययामुळे ते निष्पन्न झाले असल्याने, क्रियापद रूपातही 'ण्हा' प्रत्यय मुख्यत्वे मिळतो असे म्हणता येत नाही. 'उण्हापेति' हे वर सांगितलेल्या प्रकारच्या 'उण्ह' शब्दापासून 'णापे' प्रत्ययाच्या योगाने निष्पन्न झाले आहे, हे पाहिले असता 'उण्हापयति' हे पदही पाहिलेलेच (सिद्धच) होते. ကိဉ္စ [Pg.261] ဘိယျော ဝိနယဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဥဏှာပေတီ’’တိ ကာရိတပဒဿ ဒိဋ္ဌတ္တာယေဝ ‘‘ဥဏှတီ’’တိ ကတ္တုပဒမ္ပိ နယတော ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ ကတ္တုကာရိတပဒါနံ ဧကဓာတုမှိ ဥပလဗ္ဘမာနတ္တာ, ယထာ? ဂဏှတိ, ဂဏှာပေတိ, ဂစ္ဆတိ, ဂစ္ဆာပေတီတိ, တသ္မာ ‘‘ဥသ ဒါဟေ’’တိ ဓာတုဿ ‘‘ဥဏှတီ’’တိ ရူပံ ဥပလဗ္ဘတီတိ မန္တွာ ‘‘ဥဏှတီတိ ဥဏှ’’န္တိ နိဗ္ဗစနံ ကာတဗ္ဗံ. ဣတိ ပ္ပပစ္စယော ဂဟတော စ အညတော စ ဧကဓာ လဗ္ဘတိ, ဏှာပစ္စယော ပန ဂဟတော ဥသတော စ ဒွိဓာ အညတော ဧကဓာ လဗ္ဘတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ကိဉ္စာပေတ္ထ ဧဝံ နိယမော ဝုတ္တော, တထာပိ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ အညာနိပိ ဧကေကဿ ဓာတုဿ နာမိကပဒါနိ ဒွေ ဒွေ ကြိယာပဒါနိ ဝိစိနိတဗ္ဗာနိ. ယေန ပန ဗုဒ္ဓဝစနာနုရူပေန နယေန ဂဟာဒိဂဏေ အာဒိသဒ္ဒေန တသဓာတာဒယော အမှေဟိ ဂဟိတာ, ဣမသ္မာ နယာ အညော နယော ပသတ္ထတရော နတ္ထိ, အယမေဝ ပသတ္ထတရော, တသ္မာ အယံ နီတိ သာသနဋ္ဌိတိယာ အာယသ္မန္တေဟိ သာဓုကံ ဓာရေတဗ္ဗာ ဝါစေတဗ္ဗာ စ. आणखी काय, विनय-अट्ठकथेमध्ये 'उण्हापेति' (uṇhāpeti) हे कारित रूप (प्रयोजक रूप) दिसत असल्यामुळेच, 'उण्हति' (uṇhati) हे कर्तृपदही न्यायाने सिद्धच होते, कारण कर्तृ आणि कारित रूपे एकाच धातूमध्ये आढळतात. जसे की? गण्हति-गण्हापेति, गच्छति-गच्छापेति. म्हणून 'उस दाहे' (दाह अर्थातील उस् धातू) या धातूचे 'उण्हति' हे रूप आढळते असे मानून 'उण्हतीति उण्हं' अशी व्युत्पत्ती करावी. अशा प्रकारे 'प्प' प्रत्यय 'गह' धातूपासून आणि इतरांपासून एक प्रकारे मिळतो, तर 'ण्हा' प्रत्यय 'गह' आणि 'उस' धातूपासून दोन प्रकारे आणि इतरांपासून एक प्रकारे मिळतो, असे समजावे. जरी येथे असा नियम सांगितला असला, तरी अट्ठकथासहित त्रिपिटक बुद्धवचनात इतरही प्रत्येक धातूची नामपदे आणि दोन-दोन क्रियापदे शोधली पाहिजेत. ज्या बुद्धवचनाला अनुसरून असलेल्या पद्धतीने आम्ही 'गहादि' गणात 'आदि' शब्दाने 'तस' इत्यादी धातू घेतले आहेत, या पद्धतीपेक्षा दुसरी कोणतीही पद्धत अधिक श्रेष्ठ नाही, हीच पद्धत अत्यंत श्रेष्ठ आहे. म्हणून, शासनाच्या (धम्माच्या) चिरस्थायीसाठी आयुष्यमानांनी ही पद्धत चांगल्या प्रकारे धारण करावी आणि शिकवावी. ဂဟာဒီ ဧတ္တကာ ဒိဋ္ဌာ, ဓာတဝေါ မေ ယထာဗလံ; သုတ္တေသွညေပိ ပေက္ခိတွာ, ဂဏှဝှော အတ္ထယုတ္တိတော. माझ्या यथाशक्तीनुसार 'गहादि' इत्यादी धातू एवढे पाहिले गेले आहेत; सूत्तांमध्ये इतरही धातू पाहून अर्थाच्या योग्यतेनुसार ते ग्रहण करावेत. ဂဟာဒိဂဏောယံ. हा 'गहादि' गण समाप्त झाला. တနာဒိဂဏိက तनादि गण တနု ဝိတ္ထာရေ. တနောတိ. အာယတနံ, တနု. ကမ္မနိ ‘‘တနိယျတိ, တနိယျန္တိ. ဝိတနိယျတီ’’တိ ရူပါနိ. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘ယထာ ဟိ အာသဘံ စမ္မံ, ပထဗျာ ဝိတနိယျတီ’’တိ. ဂရူ ပန ‘‘ပတာယတေ, ပတညတီ’’တိ ရူပါနိ ဝဒန္တိ. တနိတုံ, တနိတွာန. တုမန္တာဒိရူပါနိ. 'तनु' धातू विस्तार करणे या अर्थात. 'तनोति' (विस्तार करतो). 'आयतनं', 'तनु'. कर्मणी प्रयोगात 'तनिय्यति, तनिय्यन्ति, वितनिय्यति' अशी रूपे होतात. येथे ही पाळी (वचन) आहे - 'यथा हि आसभं चम्मं, पथब्या वितनिय्यति' (जसे बैलाचे चामडे पृथ्वीवर पसरवले जाते). परंतु आचार्य 'पतायते, पतञ्ञति' अशी रूपे सांगतात. 'तनितुं', 'तनित्वान' ही तुमुन्-प्रत्ययान्त इत्यादी रूपे आहेत. တတ္ထ [Pg.262] အာယတနန္တိ အာယဘူတေ ဓမ္မေ တနောတိ ဝိတ္ထာရေတီတိ အာယတနံ. တနူတိ သရီရံ. တဉှိ ကလလတော ပဋ္ဌာယ ကမ္မာဒီဟိ ယထာသမ္ဘဝံ တနိယျတိ ဝိတ္ထာရိယတိ မဟတ္တံ ပါပိယတီတိ ‘‘တနူ’’တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘တနု ဝပု သရီရံ ပုံ ကာယော ဒေဟော’’တိအာဒယော သရီရဝါစကာ သဒ္ဒါ. သရီရံ ခန္ဓပဉ္စကံ. ယဉှိ မဟာဇနော သရီရန္တိ ဝဒတိ, တံ ပရမတ္ထတော ခန္ဓပဉ္စကမတ္တမေဝ, န တတော အတ္တာ ဝါ အတ္တနိယံ ဝါ ဥပလဗ္ဘတိ. ‘‘ကာမရာဂဗျာပါဒါနံ တနုတ္တကရံ သကဒါဂါမိမဂ္ဂစိတ္တ’’န္တိအာဒီသု ပန တနုသဒ္ဒေါ အပ္ပတ္ထဝါစကော, အပ္ပတ္ထဝါစကဿ စ တဿ ကြိယာပဒံ န ပဿာမ, တသ္မာ နိပါတပဒေန တေန ဘဝိတဗ္ဗံ. တနုသဒ္ဒေါ နိပါတပဒန္တိ ဝုတ္တဋ္ဌာနမ္ပိ န ပဿာမ, နိစ္ဆယေန ပန အနိပ္ဖန္နပါဋိပဒိကောတိ ဂဟေတဗ္ဗော. त्यात 'आयतन' म्हणजे जे उत्पत्तीच्या कारणीभूत असलेल्या (आयभूत) धर्मांचा विस्तार करते (तनोति) ते आयतन होय. 'तनु' म्हणजे शरीर. कारण ते 'कलल' (गर्भाची पहिली अवस्था) पासून सुरू होऊन कर्मादींद्वारे यथासंभव विस्तारले जाते, वाढवले जाते आणि मोठे केले जाते, म्हणून त्याला 'तनु' म्हटले जाते. 'तनु, वपु, सरीरं, puṃ, कायो, देहो' इत्यादी शरीराचे वाचक शब्द आहेत. शरीर म्हणजे पंचस्कंध होय. ज्याला सामान्य लोक 'शरीर' म्हणतात, ते परमार्थतः केवळ पंचस्कंधच आहे, त्याव्यतिरिक्त तिथे 'आत्मा' किंवा 'आत्मीय' काहीही आढळत नाही. परंतु 'कामरागव्यापादांनां तनुत्तकरं सकदागामिमग्गचित्तं' इत्यादींमध्ये 'तनु' हा शब्द 'अल्प' (कमी) या अर्थाचा वाचक आहे, आणि त्या अल्पवाचक शब्दाचे क्रियापद आपल्याला दिसत नाही, म्हणून तो निपात शब्द असावा. 'तनु' शब्द निपात शब्द आहे असे सांगितलेले स्थानही आपल्याला आढळत नाही, परंतु निश्चितपणे तो अनिष्पन्न प्रातिपदिक (मूळ शब्द) म्हणून ग्रहण करावा. တနောတိ, တနောန္တိ. တနောသိ, တနောထ. တနောမိ, တနောမ. တနုတေ, တနုန္တေ. တနုသေ, တနုသေ, တနုဝှေ. တနေ, တနုမှေ. သေသံ ယထာသမ္ဘဝံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. तनोति, तनॉन्ति. तनोसि, तनोथ. तनोमि, तनोम. तनुते, तनुन्ते. तनुसे, तनुसे (तनुव्हे). तने, तनुम्हे. उर्वरित रूपे यथासंभव विस्ताराने जाणावीत. တနောတု, တနောန္တု. တနေယျ, တနေ, တနေယျုံ. ဝိတန, ဝိတနု. အတနာ, အတနု. အမ္မာယ ပတနု ကေသာ. အတနိ, အတနိံသု. တနိဿတိ, တနိဿန္တိ. အတနိဿာ, အတနိဿံသု. ကမ္မနိ ‘‘တနိယျတိ, တနိယျန္တိ. တနိယျသီ’’တိအာဒိနာ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. तनोतु, तनॉन्तु. तनेय्य, तने, तनेय्युं. वितन, वितनु. अतना, अतनु. 'अम्माय पतनु केसा' (आईचे केस विरळ झाले). अतनि, अतनिंसु. तनिस्सति, तनिस्सन्ति. अतनिस्सा, अतनिस्संग्सु. कर्मणी प्रयोगात 'तनिय्यति, तनिय्यन्ति, तनिय्यसि' इत्यादी प्रकारे विस्तार करावा. သက သတ္တိယံ. သတ္တိ သမတ္ထဘာဝေါ. သက္ကောတိ သက္ကော. ဝိညာပေတုံ အသက္ခိ. သက္ခိဿသိ. သက္ခတိ. တွမ္ပိ အမ္မ ပဗ္ဗဇိတုံ သက္ခိဿသိ. သက္ကတေ ဇရာယ ပဋိကမ္မံ ကာတုန္တိ ပါဠိ. 'सक' धातू शक्ती (सामर्थ्य) या अर्थात. शक्ती म्हणजे सामर्थ्यभाव. 'सक्कोति' (समर्थ होतो), 'सक्को' (शक्य/समर्थ). 'विञ्ञापेतुं असक्खि' (समजावून सांगण्यास असमर्थ झाला). 'सक्खिस्ससि' (तू समर्थ होशील). 'सक्खति' (तो समर्थ होईल). 'त्वम्पि अम्म पब्बजितुं सक्खिस्ससि' (हे आई, तू देखील प्रव्रजित होण्यास समर्थ होशील). 'सक्कते जराय पटिकम्मं कातुं' (वृद्धत्वाचा प्रतिकार करणे शक्य आहे) अशी पाळी (वचन) आहे. တတ္ထ [Pg.263] သက္ကောတိ ဒေဝရာဇာ. သော ဟိ အတ္ထာနံ သဟဿမ္ပိ မုဟုတ္တေန စိန္တနသမတ္ထတာယ သပရဟိတံ ကာတုံ သက္ကောတီတိ ‘‘သက္ကော’’တိ ဝုစ္စတိ. အညတြ ပန ဓာတူနံ အဝိသယေ တဒ္ဓိတဝသေန သက္ကစ္စံ ဒါနံ အဒါသီတိ သက္ကောတိ ဧဝမ္ပိ အတ္ထံ ဂဟေတွာ သက္ကသဒ္ဒေါ နိရုတ္တိနယေန သာဓေတဗ္ဗော. ဝုတ္တဉှိ ဘဂဝတာ ‘‘သက္ကော မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒော ပုဗ္ဗေ မနုဿဘူတော သမာနော သက္ကစ္စံ ဒါနံ အဒါသိ, တသ္မာ ‘သက္ကော’တိ ဝုစ္စတီ’’တိ. သက္ကောန္တော. သက္ကောန္တီ. သက္ကောန္တံ ကုလံ. त्यात 'सक्को' म्हणजे देवराज (शक्र). कारण तो एका क्षणात हजारो गोष्टींचा विचार करण्यास समर्थ असल्यामुळे स्वतःचे आणि इतरांचे कल्याण करण्यास समर्थ होतो, म्हणून त्याला 'सक्को' (शक्र) म्हटले जाते. इतर ठिकाणी, धातूंच्या विषयाव्यतिरिक्त, तद्धित प्रत्ययाच्या नियमाने 'सक्कच्चं दानं अदासि' (आदरपूर्वक दान दिले) म्हणून 'सक्को' असाही अर्थ घेऊन 'सक्क' शब्दाची निरुक्तीच्या नियमाने सिद्धी करावी. कारण भगवंतांनी म्हटले आहे - 'महाली, देवांचा राजा इंद्र पूर्वी मनुष्य असताना त्याने आदरपूर्वक (सक्कच्चं) दान दिले होते, म्हणून त्याला 'सक्को' (शक्र) म्हटले जाते.' सक्कोन्तो, सक्कोन्ती, सक्कोन्तं कुलं. ခုဏု ခိဏု ဟိံသာယံ. ခုဏောတိ. ခိဏောတိ. 'खुणु' आणि 'खिणु' धातू हिंसा करणे या अर्थात. 'खुणोति', 'खिणोति'. ဣဏု ဂတိယံ. ဣဏောတိ. ဣဏံ ဣဏာယိကော. 'इणु' धातू गती (जाणे) या अर्थात. 'इणोति'. 'इणं' (ऋण/कर्ज), 'इणायिको' (ऋणको/कर्जदार). တိဏု အဒနေ. တိဏောတိ. တိဏံ. ဧတ္ထ တိဏန္တိ ယဝသံ. တဉှိ တိဏိယတေ တိဏဘက္ခေဟိ ဂေါဏာဒီဟိ အဒိယတေ ခါဒိယတေတိ တိဏံ. 'तिणु' धातू खाणे या अर्थात. 'तिणोति'. 'तिणं' (गवत). येथे 'तिण' म्हणजे चारा (गवत). कारण ते 'तिणियते' म्हणजे गवत खाणाऱ्या बैलादी प्राण्यांद्वारे खाल्ले जाते, म्हणून त्याला 'तिण' (गवत) म्हणतात. ဃိဏု ဒိတ္တိယံ. ဃိဏောတိ. 'घिणु' धातू दीप्ती (प्रकाशणे/चमकणे) या अर्थात. 'घिणोति'. ဟနု အပနယနေ. အပနယနံ အနာလာပကရဏံ နိဗ္ဗစနတာကရဏံ. ဟနောတိ. ဟနုတေ. 'हनु' धातू दूर करणे (अपणयन) या अर्थात. अपणयन म्हणजे न बोलणे किंवा दूर करणे. 'हनोति', 'हनुते'. ပနု ဒါနေ ပနောတိ. ပနုတေ. 'पणु' धातू दान देणे या अर्थात. 'पणोति', 'पणुते'. မနု ဗောဓနေ. မနောတိ. မနုတေ. မနော. မနံ. မာနသံ. မနုဿော. မာနဝေါ. မာဏဝေါ. 'मनु' धातू जाणणे (बोधन) या अर्थात. 'मनोति', 'मनुते'. 'मनो' (मन), 'मनं', 'मानसं', 'मनुस्सो' (मनुष्य), 'मानवो', 'माणवो'. ဧတ္ထ မနောတိ မနုတေ ဗုဇ္ဈတီတိ မနော, ဧဝံ မနံ. ဣမေသံ ပန ဒွိန္နံ မနသဒ္ဒါနံ ‘‘ယသ္မိံ မနော နိဝိသတိ. သန္တံ တဿ မနံ ဟောတီ’’တိအာဒီသု ပုန္နပုံသကလိင်္ဂတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. မာနသန္တိ ရာဂေါပိ စိတ္တမ္ပိ အရဟတ္တမ္ပိ. ‘‘အန္တလိက္ခစရော ပါသော, ယွာယံ [Pg.264] စရတိ မာနသော’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ရာဂေါ မာနသံ. ‘‘စိတ္တံ မနော မာနသ’’န္တိ ဧတ္ထ စိတ္တံ. ‘‘အပ္ပတ္တမာနသော သေက္ခော, ကာလံ ကယိရာ ဇနေ သုတော’’တိ ဧတ္ထ အရဟတ္တံ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – येथे 'मनो' म्हणजे जे जाणते (मनुते), बोध प्राप्त करते ते मन होय, तसेच 'मनं' देखील. परंतु या दोन्ही 'मन' शब्दांचे 'यस्मिं मनो निविसति' (ज्यामध्ये मन स्थिर होते) आणि 'सन्तं तस्स मनं होति' (त्याचे मन शांत होते) इत्यादींमध्ये अनुक्रमे पुल्लिंगी आणि नपुंसकलिंगी असणे पाहावे. 'मानसं' म्हणजे राग (आसक्ती) देखील, चित्त देखील आणि अर्हत्त्व देखील. 'अन्तलिक्खचरो पासो, य्वायं चरति मानसो' (हा जो अंतरीक्षामध्ये फिरणारा पाश आहे, जो मनामध्ये/आसक्तीमध्ये फिरतो) येथे 'मानसं' म्हणजे राग (आसक्ती) आहे. 'चित्तं मनो मानसं' येथे 'मानसं' म्हणजे चित्त आहे. 'अप्पत्तमानसो सेक्खो, कालं कयिरा जने सुतो' (ज्याला अजून अर्हत्त्व प्राप्त झाले नाही असा शैक्ष भिक्खू...) येथे 'मानसं' म्हणजे अर्हत्त्व आहे. याविषयी हे म्हटले आहे - ရာဂေါ စိတ္တံ အရဟတ္တဉ္စ, ‘‘မာနသ’’န္တိ သမီရိတံ; သတ္ထုနော သာသနေ ပါပ-သာသနေ’ခိလသာသနေ. शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) शासनात, पापरहित शासनात आणि संपूर्ण शासनात राग, चित्त आणि अर्हत्त्व या तिन्हींना 'मानसं' असे म्हटले गेले आहे. တတ္ထ သမ္ပယုတ္တမနသိ ဘဝေါတိ ရာဂေါ မာနသော. မနော ဧဝ မာနသန္တိ ကတွာ စိတ္တံ မာနသံ. အနဝသေသတော မာနံ သိယတိ သမုစ္ဆိန္ဒတီတိ အဂ္ဂမဂ္ဂေါ မာနသံ. တန္နိဗ္ဗတ္တတ္တာ ပန အရဟတ္တဿ မာနသတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. မနူတိ သတ္တော. ‘‘ယေန စက္ခုပသာဒေန, ရူပါနိ မနု ပဿတီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ‘‘မနူ’’တိ သတ္တော ဝုတ္တော. အထ ဝါ မနူတိ ပဌမကပ္ပိကကာလေ မနုဿာနံ မာတာပိဘုဋ္ဌာနေ ဌိတော မနုနာမကော ပုရိသော, ယော သာသနေ ‘‘မဟာသမ္မတရာဇာ’’တိ ဝုတ္တော. သော ဟိ သကလလောကဿ ဟိတံ ကာတုံ မနုတေ ဇာနာတီတိ ‘‘မနူ’’တိ ဝုစ္စတိ. ယထာဗလံ အတ္တနော ဟိတံ မနုတေ ဇာနာတီတိ မနုဿော, မနဿ ဝါ ဥဿန္နတ္တာ မနုဿော. အထ ဝါ ဝုတ္တပ္ပကာရဿ မနုနော အပစ္စံ မနုဿော. ဧဝံ မာနဝေါ မာဏဝေါ စ, နကာရဿ ဟိ ဏကာရေ ကတေ ‘‘မာဏဝေါ’’တိ ရူပံ သိဇ္ဈတိ. ကေစိ ပနာဟု ‘‘ဒန္တဇနကာရသဟိတော မာနဝသဒ္ဒေါ သဗ္ဗသတ္တသာဓာရဏဝစနော, မုဒ္ဓဇဏကာရသဟိတော ပန မာဏဝသဒ္ဒေါ ကုစ္ဆိတမူဠှာပစ္စဝစနော’’တိ, တံ ဝီမံသိတွာ ယုတ္တဉ္စေ, ဂဟေတဗ္ဗံ, န ပနေတ္ထ ဝတ္တဗ္ဗံ ‘‘မာဏဝသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရဝစနေ ဣဒံ ဝစနံ ဝိရုဇ္ဈတီ’’တိ အန္တရသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရေ အန္တရအန္တရိကာသဒ္ဒါနမ္ပိ အာဟရဏဿ ဒဿနတော. तेथे संप्रयुक्त मनात असणारा भाव म्हणजे 'राग' हा 'मानसो' (मानसिक) आहे. मन हेच मानस आहे, असे मानून चित्ताला 'मानसं' म्हटले आहे. जो पूर्णपणे मानाचा (अहंकाराचा) उच्छेद करतो, तो अग्र मार्ग (अर्हत मार्ग) 'मानसं' आहे. त्यापासून उत्पन्न झाल्यामुळे अर्हतत्वाला 'मानसतत्व' (मानसतता) समजावे. 'मनु' म्हणजे प्राणी (सत्त्व). "ज्या चक्षुप्रसादाने प्राणी रूपांना पाहतो" येथे 'मनु' शब्दाने प्राणी (सत्त्व) म्हटला आहे. किंवा 'मनु' म्हणजे प्रथम कल्पकाळात मनुष्यांच्या माता-पित्यांच्या स्थानी असलेला 'मनु' नावाचा पुरुष, ज्याला शासनात (बुद्धशासनात) 'महासंमत राजा' म्हटले आहे. कारण तो संपूर्ण जगाचे हित करण्याचे विचार करतो (जाणतो), म्हणून त्याला 'मनु' म्हटले जाते. आपल्या बलानुसार स्वतःचे हित जो विचार करतो (जाणतो) तो 'मनुष्य' (मनुस्सो), किंवा मनाच्या प्रगल्भतेमुळे (उत्कटतेमुळे) तो 'मनुष्य' होय. किंवा पूर्वोक्त मनूची संतती म्हणजे 'मनुष्य' होय. याचप्रमाणे 'मानव' (माणवो) आणि 'माणव' (मणावो) शब्द बनतात; 'न' काराचा 'ण' कार केल्यावर 'माणवो' हे रूप सिद्ध होते. काही आचार्य म्हणतात की, "दंत्य 'न' कारयुक्त 'मानव' शब्द सर्व प्राण्यांसाठी साधारण वाचक आहे, तर मूर्धन्य 'ण' कारयुक्त 'माणव' शब्द निंदित किंवा अज्ञानी संततीचा वाचक आहे." त्याची परीक्षा करून जर ते योग्य असेल तर ते स्वीकारावे. येथे "माणव शब्दाच्या अर्थ-उद्धार (स्पष्टीकरण) कथनात हे वचन विरुद्ध ठरते" असे म्हणू नये, कारण 'अंतर' शब्दाच्या अर्थ-उद्धारात 'अंतर' आणि 'अंतरिका' शब्दांचेही उदाहरण दिले जाते. တတြ [Pg.265] ပနာယံ ဝီမံသနာ – စူဠကမ္မဝိဘင်္ဂသုတ္တသ္မိဉှိ ‘‘သုဘော မာဏဝေါတောဒေယျပုတ္တော’’တိ ဣမသ္မိံ ပဒေသေ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ‘‘သုဘောတိ သော ကိရ ဒဿနီယော အဟောသိ ပါသာဒိကော, တေနဿ အင်္ဂသုဘတာယ ‘သုဘော’တွေဝ နာမံ အကံသု. ‘မာဏဝေါ’တိ ပန တံ တရုဏကာလေ ဝေါဟရိံသု, သော မဟလ္လကကာလေပိ တေနေဝ ဝေါဟာရေန ဝေါဟရိယတီ’’တိ ဧဝံ မုဒ္ဓဇဏကာရဿ မာဏဝသဒ္ဒဿ အတ္ထော ပကာသိတော, တဋ္ဋီကာယမ္ပိ ဂရူဟိ ‘‘ယံ အပစ္စံ ကုစ္ဆိတံ မုဒ္ဓံ ဝါ, တတ္ထ လောကေ မာဏဝဝေါဟာရော, ယေဘုယျေန စ သတ္တာ ဒဟရကာလေ မုဒ္ဓဓာတုကာ ဟောန္တီတိ ဝုတ္တံ ‘တရုဏကာလေ ဝေါဟရိံသူ’’တိ, ဧဝံ မုဒ္ဓဇဏကာရဿ မာဏဝသဒ္ဒဿ အတ္ထော ပကာသိတော. ဣဒါနိ မာဏဝသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဘဝတိ, မာဏဝေါတိ သတ္တောပိ စောရောပိ တရုဏောပိ ဝုစ္စတိ. ‘‘စောဒိတာ ဒေဝဒူတေဟိ, ယေ ပမဇ္ဇန္တိ မာဏဝါ’’တိအာဒီသု ဟိ သတ္တော ‘‘မာဏဝေါ’’တိ ဝုတ္တော. ‘‘မာဏဝေဟိ သဟ ဂစ္ဆန္တိ ကတကမ္မေဟိပိ အကတကမ္မေဟိပီ’’တိအာဒီသု စောရော. ‘‘အမ္ဗဋ္ဌော မာဏဝေါ’’တိအာဒီသု တရုဏော ‘‘မာဏဝေါ’’တိ ဝုတ္တော. यावर ही परीक्षा (विचार) आहे - चूलकम्मविभंगसुत्तात "सुभ माणव तोदेय्यपुत्त" या संदर्भात अट्ठकथाचार्यांनी म्हटले आहे की, "सुभ हा दर्शनीय आणि प्रसन्न करणारा होता, म्हणून त्याच्या अंगाच्या सुंदरतेमुळे त्याचे नाव 'सुभ' असे ठेवले गेले. परंतु त्याच्या तरुण वयात त्याला 'माणव' असे संबोधले जात असे, आणि वृद्धपकाळातही त्याला त्याच नावाने संबोधले गेले." अशा प्रकारे मूर्धन्य 'ण' कारयुक्त 'माणव' शब्दाचा अर्थ स्पष्ट केला आहे. त्याच्या टीकेमध्येही गुरूंनी म्हटले आहे की, "जी संतती निंदित किंवा अज्ञानी असते, तिच्यासाठी जगात 'माणव' हा व्यवहार होतो, आणि बहुतांश प्राणी बालपणात अज्ञानी स्वभावाचे असतात, म्हणून 'तरुण वयात संबोधले जात असे' असे म्हटले आहे." अशा प्रकारे मूर्धन्य 'ण' कारयुक्त 'माणव' शब्दाचा अर्थ स्पष्ट केला आहे. आता 'माणव' शब्दाचा अर्थ-उद्धार (विविध अर्थ) असा होतो - 'माणव' शब्दाने प्राणी, चोर आणि तरुण या तिन्हींचा बोध होतो. "देवदूतांनी प्रेरित केलेले जे माणव (प्राणी) प्रमाद करतात..." इत्यादींमध्ये 'माणव' शब्दाने प्राणी (सत्त्व) अभिप्रेत आहे. "केलेल्या आणि न केलेल्या कर्मांसह चोरांच्या (माणवांच्या) सोबत जातात..." इत्यादींमध्ये 'माणव' म्हणजे चोर होय. "अम्बट्ठ माणव" इत्यादींमध्ये 'माणव' शब्दाने तरुण अभिप्रेत आहे. အပ္ပ ပါပုဏေ. အပ္ပောတိ. အာပေါ. 'अप्प' हा धातू प्राप्त करणे (पापुणे) या अर्थात आहे. 'अप्पोति' (प्राप्त करतो). 'आपो' (पाणी/आप-धातू). ဧတ္ထ အာပေါတိ အပ္ပောတိ တံ တံ ဌာနံ ဝိဿရတီတိ အာပေါ. येथे 'आपो' म्हणजे जो त्या त्या ठिकाणी पसरतो (व्याप्त करतो) तो 'आपो' (जल) होय. မာ ပရိမာဏေ. မိနောတိ. ဥပမာ, ဥပမာနံ, ဝိမာနံ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. 'मा' हा धातू परिमाण (मोजणे) या अर्थात आहे. 'मिनोति' (मोजतो). उपमा, उपमान, विमान. इतरही (शब्द) योजावेत. ဧတ္ထ စ ယာ အစ္စန္တံ န မိနောတိ န ဝိစ္ဆိန္ဒတိ, သာ မာနဿ သမီပေ ဝတ္တတီတိ ဥပမာ ယထာ ‘‘ဂေါဏော ဝိယ ဂဝဇော’’တိ. ဥပမာနန္တိ [Pg.266] ဥပမာ ဧဝ. တထာ ဟိ ‘‘ဝီတောပမာနမပ္ပမာဏမနာထနာထ’’န္တိ. ဧတ္ထ ဝီတောပမာနန္တိ ဣမဿ ဝီတောပမံ, နိရုပမန္တိ အတ္ထော. အထ ဝါ ဥပမာနန္တိ ဥပမေတဗ္ဗာကာရော ‘‘သီဟော ဝိယ ဘဂဝါ’’တိ. ဧတ္ထ ဟိ သီဟော ဥပမာ, ဘဂဝါ ဥပမေယျော တေဇောပရက္ကမာဒီဟိ ဥပမေတဗ္ဗတ္တာ, တေဇောပရက္ကမာဒယော ဥပမေတဗ္ဗာကာရော. ဧတ္ထ ပန သာတိသယတ္တာ ကိဉ္စာပိ သီဟဿ တေဇာဒီဟိ ဘဂဝတော တေဇာဒိဥပမေတဗ္ဗာကာရော နတ္ထိ, တထာပိ ဟီနူပမာဝသေန ‘‘သီဟော ဝိယ ဘဂဝါ’’တိ ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဝိမာနန္တိ ဥတုသမုဋ္ဌာနတ္တေပိ ကမ္မပစ္စယဥတုသမုဋ္ဌာနတ္တာ ကမ္မေန ဝိသေသတော မိနိယတိ ပရိစ္ဆိန္ဒိယတီတိ ဝိမာနံ. आणि येथे जी अत्यंत मोजत नाही किंवा खंडित करत नाही, ती मापनाच्या (मोजण्याच्या) जवळ असते म्हणून ती 'उपमा' होय; जसे की "बैलासारखा रानबैल (गवय)". 'उपमान' म्हणजे उपमाच होय. तसेच "वीतोपमानमप्पमाणमनाथनाथं" (उपमारहित, अमर्याद, अनाथांचे नाथ). येथे 'वीतोपमानं' याचा अर्थ 'वीतोपम' म्हणजेच 'निरुपम' (ज्याला उपमा नाही असा) असा आहे. किंवा 'उपमान' म्हणजे उपमेय आकार (सादृश्य); जसे की "सिंहासारखे भगवान". येथे 'सिंह' ही उपमा आहे, 'भगवान' हे उपमेय आहेत कारण त्यांचे तेज, पराक्रम इत्यादींशी सादृश्य केले जाते, आणि तेज, पराक्रम इत्यादी उपमेय आकार (गुणधर्म) आहेत. येथे अतिशय श्रेष्ठत्वामुळे जरी सिंहाच्या तेजाशी भगवंतांच्या तेजाची तुलना होऊ शकत नाही, तरीही हीन उपमेच्या (कनिष्ठ उपमेच्या) स्वरूपात "सिंहासारखे भगवान" असे म्हटले आहे, असे समजावे. 'विमान' म्हणजे ऋतूमुळे उत्पन्न होणारे असले तरी, कर्मप्रत्यय आणि ऋतूमुळे उत्पन्न झाल्यामुळे कर्माद्वारे विशेष रूपाने जे मोजले (निश्चित केले) जाते, ते 'विमान' होय. ကရ ကရဏေ. ‘‘ကရောတိ, ကယိရတိ, ကုဗ္ဗတိ, ကြုဗ္ဗတိ, ပကရောတိ, ဥပကရောတိ, အပကရောတိ, ပဋိကရောတိ, နိရာကရောတိ, ပဋိသင်္ခရောတိ, အဘိသင်္ခရောတိ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ ကတ္တရိ ဘဝန္တိ. ကမ္မေ ပါဠိနယဝသေန ဣကာရာဂမဋ္ဌာနေ ယကာရဿ ဒွေဘာဝေါ. တသ္မိံယေဝဌာနေ ရယကာရာနံ ဝိပရိယာယေ သတိ န ဒွေဘာဝေါ. တထာ ဤကာရာဂမဋ္ဌာနေ ‘‘ကရိယျတိ, ကယိရတိ, ကရီယတိ, ကယျတိ, ပကရီယတိ, ပကရိယျတိ, ပဋိသင်္ခရိယျတိ, အဘိသင်္ခရိယျတိ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ ကမ္မနိ ဘဝန္တိ. 'कर' हा धातू करणे (करणे) या अर्थात आहे. "करोति, कयिरति, कुब्बति, क्रुब्बति, पकरोति, उपकरोति, अपकरोति, पटिकरोति, निराकरोति, पटिसंखरोति, अभिसंखरोति" इत्यादी रूपे कर्तरी प्रयोगात होतात. कर्मणी प्रयोगात पालि नियमानुसार 'इ' कार आगमाच्या जागी 'य' काराचे द्वित्व होते. त्याच ठिकाणी 'र' आणि 'य' कारांचा विपर्यास (क्रम बदलणे) झाल्यास द्वित्व होत नाही. तसेच 'ई' कार आगमाच्या जागी "करिय्यति, कयिरति, करीयति, कय्यति, पकरीयति, पकरिय्यति, पटिसंखरिय्यति, अभिसंखरिय्यति" इत्यादी रूपे कर्मणी प्रयोगात होतात. ဧတ္ထ စ ကယိရတီတိ ပဒံ ဒွီသု ဌာနေသု ဒိဿတိ ကတ္တရိ ကမ္မေ စ. တေသ ကတ္တုဝသေန ‘‘ပုရိသော ကမ္မံ ကယိရတီ’’တိ ယောဇေတဗ္ဗံ, ကမ္မဝသေန ပန အယံ ပါဠိ ‘‘ကုဋိ မေ ကယိရတိ အဒေသိတဝတ္ထုကာ’’တိ. တတ္ထ စ ကတ္တုဝသေန ဝုတ္တံ ကတ္တုပဒံ ယိရပစ္စယေန သိဒ္ဓံ. ကမ္မဝသေန ပန ဝုတ္တံ ကမ္မပဒံ ဣကာရာဂမဿ အာဒိအန္တဘူတာနံ ရယကာရာနံ ဝိပရိယာယေနာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ‘‘ကာရေတိ, ကာရယတိ, ကာရာပေတိ, ကာရာပယတီ’’တိ စတ္တာရိ ကာရိတရူပါနိ, ယာနိ ‘‘ဟေတုကတ္တုရူပါနီ’’တိ ဝုစ္စန္တိ တဒ္ဒီပကတ္တာ. आणि येथे 'कयिरति' हे पद कर्तरी आणि कर्मणी या दोन्ही प्रयोगांत दिसते. त्यापैकी कर्तरी प्रयोगात "पुरिसो कम्मं कयिरति" (पुरुष कर्म करतो) अशी योजना करावी. कर्मणी प्रयोगात ही पालि अशी आहे - "कुटि मे कयिरति अदेसितवत्थुका" (माझ्यासाठी अनिर्दिष्ट जागेवर कुटी बनवली जात आहे). आणि तेथे कर्तरी प्रयोगात सांगितलेले कर्तृपद 'यिर' प्रत्ययाने सिद्ध होते. कर्मणी प्रयोगात सांगितलेले कर्मपद 'इ' कार आगमाच्या आदि आणि अंत असलेल्या 'र' व 'य' कारांच्या विपर्यासाने (व्यत्ययाने) सिद्ध होते, असे समजावे. "कारेति, कारयति, कारापेति, कारापयति" ही चार कारित (प्रयोजक) रूपे आहेत, ज्यांना हेतू-कर्ता रूपे (प्रयोजक कर्तृरूपे) म्हटले जाते, कारण ती त्या अर्थाचे द्योतक आहेत. ဣဒါနိ [Pg.267] ပန ပဒမာလာ ဝတ္တဗ္ဗာ, တတြ ပဌမံ ‘‘ကုဗ္ဗတီ’’တိ ပဒဿေဝ ပဒမာလံ ယောဇေဿာမ သဗ္ဗာသု ဝိဘတ္တီသု ဧကာကာရေန ယောဇေတဗ္ဗတ္တာ. ‘‘ကရောတီ’’တိ ဩကာရာနန္တရတျန္တပဒဿ ပန ‘‘ကာရေတီ’’တိ ဧကာရာနန္တရတျန္တပဒဿ စ ပဒမာလံ ယထာသမ္ဘဝံ ပစ္ဆာ ယောဇေဿာမ ဧကာကာရေန အယောဇေတဗ္ဗတ္တာ. आता पदमाला (रूपावली) सांगितली पाहिजे. त्यामध्ये प्रथम 'कुब्बति' या पदाचीच पदमाला योजू, कारण सर्व विभक्तींमध्ये ते एकाच प्रकारे योजले जाते. परंतु 'करोति' या ओ-कारान्त तिङन्त पदाची आणि 'कारेति' या ए-कारान्त तिङन्त पदाची पदमाला एकाच प्रकारे योजता येत नसल्यामुळे, यथासंभव नंतर योजू. တတြ ကုဗ္ဗတိ, ကုဗ္ဗန္တိ. ကုဗ္ဗသိ, ကုဗ္ဗထ. ကုဗ္ဗာမိ, ကုဗ္ဗာမ. ကုဗ္ဗတေ, ကုဗ္ဗန္တေ. ကုဗ္ဗသေ, ကုဗ္ဗဝှေ. ကုဗ္ဗေ, ကုဗ္ဗမှေ. ဝတ္တမာနာဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. तेथे कुब्बति, कुब्बन्ति। कुब्बसि, कुब्बथ। कुब्बा मि, कुब्बा म। कुब्बते, कुब्बन्ते। कुब्बसे, कुब्बव्हे। कुब्बे, कुब्बम्हे। ही वर्तमानकाळाच्या (वत्तमाना विभक्तीच्या) अनुसार सांगितलेली रूपे आहेत. ပဉ္စမိယာဒီနံ ဝသေန ပန ကုဗ္ဗတု, ကုဗ္ဗန္တု. ကုဗ္ဗေယျ, ကုဗ္ဗေယျုံ. သေသံ ‘‘ဘဝတိ, ဘဝန္တီ’’တိ ဝုတ္တနယာနုသာရေန သဗ္ဗတ္ထ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. पंचमी (आज्ञार्थ) इत्यादींच्या अनुसार - कुब्बतु, कुब्बन्तु। कुब्बेय्य, कुब्बेय्युं। उर्वरित रूपे "भवति, भवन्ति" या सांगितलेल्या नियमानुसार सर्वत्र सविस्तर जाणावीत. ‘‘ကရိယတီ’’တိအာဒီနိပိ အ ကာရာနန္တရတျန္တပဒါနိ ဧဝမေဝ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဧတ္ထ စ ‘‘ကုဗ္ဗတိ, ကုဗ္ဗန္တိ. ကုဗ္ဗသီ’’တိအာဒိနာ ဝုတ္တာ အယံ ပဒမာလာ ပါဠိနယဒဿနတော ဧဒိသီ ဝုတ္တာ. သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ပန သာသနိကာ သဒ္ဒသတ္ထေယေဝ အာဒရံ ကတွာ ‘‘ကုဗ္ဗတိ, ကုဗ္ဗသီ’’တိ ဧဝံပကာရာနိ ရူပါနိ ပါဠိယံ နတ္ထီတိ မညန္တာ န ဣစ္ဆန္တိ. တေဟိ သဒ္ဒသတ္ထေ ဝိယ ပါဠိယမ္ပိ ‘‘အသန္တော နာနုကုဗ္ဗန္တီ’’တိအာဒီသု ဩကာရပစ္စယဿာဒေသဘူတော ဥကာရော သရေယေဝ ပရေ ဝကာရံ ပပ္ပောတီတိ မညမာနာ ‘‘ကုဗ္ဗန္တိ, ကုဗ္ဗန္တေ’’တိအာဒီနိယေဝ ရူပါနိ ဣစ္ဆန္တိ, ပရသရဿာဘာဝတော ‘‘ကုဗ္ဗတိ, ကုဗ္ဗသီ’’တိအာဒီနိ ပါဠိယံ နတ္ထီတိ န ဣစ္ဆန္တိ. မယံ ပန ပါဠိနယဒဿနတော တာနိ ရူပါနိ ဣစ္ဆာမ. အတြ သောတာရာနံ ကင်္ခါဝိနောဒနတ္ထံ ကိဉ္စိ ပါဠိနယံ ဝဒါမ – ‘‘သီလဝန္တော န ကုဗ္ဗန္တိ, ဗာလော သီလာနိ ကုဗ္ဗတီ’’တိ စ, ‘‘ကသ္မာ ဘဝံ ဝိဇနမရညနိဿိတော, တပေါ ဣဓ ကြုဗ္ဗတီ’’တိ စ, ‘‘ဖရုသာဟိ ဝါစာဟိ ပကြုဗ္ဗမာနော’’တိ စ. ဤဒိသေသု ပန ဌာနေသု အကာရာဂမော ကာတဗ္ဗော[Pg.268]. အစိန္တေယျော ဟိ ပါဠိနယော, ယေဘုယျေန သဒ္ဒသတ္ထနယဝိဒူရော စ. တထာ ဟိ ယထာ ‘‘အဂ္ဂိနိံ သမ္ပဇ္ဇလိတံ ပဝိသန္တီ’’တိ ပါဠိဂတိဒဿနတော ‘‘အဂ္ဂိနိ, အဂ္ဂိနီ, အဂ္ဂိနယော. အဂ္ဂိနိံ, အဂ္ဂိနီ, အဂ္ဂိနယော. အဂ္ဂိနိနာ’’တိ ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ ဟောတိ, ဧဝမေဝ ‘‘ဗာလော သီလာနိ ကုဗ္ဗတီ’’တိ ပါဠိဂတိဒဿနတော ‘‘ကုဗ္ဗတိ, ကုဗ္ဗန္တိ. ကုဗ္ဗသီ’’တိ ပဒမာလာပိ ယောဇေတဗ္ဗာဝ. “करियती” इत्यादी अ-कारान्त आणि अति-अन्त पदे देखील याचप्रमाणे योजावीत. आणि येथे “कुब्बति, कुब्बन्ति, कुब्बसि” इत्यादी रूपांनी सांगितलेली ही पदमाला पाळी नियमाच्या दृष्टीने अशीच सांगितली आहे. परंतु, व्याकरण जाणणारे बौद्ध विद्वान केवळ व्याकरणाचाच आदर करून “कुब्बति, कुब्बसि” अशा प्रकारची रूपे पाळीमध्ये नाहीत असे मानून ती स्वीकारत नाहीत. ते व्याकरणाप्रमाणे पाळीमध्ये देखील “असन्तो नानुकुब्बन्ति” इत्यादींमध्ये ‘ओ’ कार प्रत्ययाचा आदेश असलेला ‘उ’ कार स्वराच्या पुढे असताना ‘व’ कार बनतो असे मानून “कुब्बन्ति, कुब्बन्ते” इत्यादी रूपेच स्वीकारतात, आणि पर-स्वराच्या अभावामुळे “कुब्बति, कुब्बसि” इत्यादी रूपे पाळीमध्ये नाहीत असे मानून ती स्वीकारत नाहीत. परंतु, आम्ही पाळी नियमाच्या दृष्टीने ती रूपे स्वीकारतो. येथे श्रोत्यांच्या शंकेचे निरसन करण्यासाठी आम्ही काही पाळी नियम सांगतो – “सीलवन्तो न कुब्बन्ति, बालो सीलानि कुब्बति” (शीलवान करत नाहीत, बाल/मूर्ख शीलांचे आचरण करतो) आणि “कस्मा भवं विजनमरण्ञनिस्सितो, तपो इध क्रुब्बति” (आपण निर्जन अरण्याचा आश्रय घेऊन येथे तप का करत आहात?) आणि “फरुसाहि वाचाहि पक्रुब्बमानो” (कठोर शब्दांनी करत असताना). अशा ठिकाणी मात्र ‘अ’ काराचा आगम केला पाहिजे. कारण पाळीचा नियम अचिंत्य आहे आणि तो बहुतांश करून व्याकरण शास्त्राच्या नियमापेक्षा वेगळा आहे. तसेच, ज्याप्रमाणे “अग्गिनिं सम्पज्जलितं पविसन्ति” या पाळी प्रयोगावरून “अग्गिनि, अग्गिनी, अग्गिनयो। अग्गिनिं, अग्गिनी, अग्गिनयो। अग्गिनिना” अशी पदमाला तयार करावी लागते, त्याचप्रमाणे “बालो सीलानि कुब्बति” या पाळी प्रयोगावरून “कुब्बति, कुब्बन्ति, कुब्बसि” अशी पदमाला देखील योजावीच लागेल. ယထာ စ ‘‘ဗဟုမ္ပေတံ အသဗ္ဘိ ဇာတဝေဒါ’’တိ ပါဠိဂတိဒဿနတော ‘‘သန္တော သဗ္ဘီဟိ သဒ္ဓိံ သတံ ဓမ္မော န ဇရံ ဥပေတီတိ ပဝေဒယန္တီ’’တိ အဋ္ဌကထာဂတိဒဿနတော စ ‘‘သဗ္ဘိ, သဗ္ဘီ, သဗ္ဘယော. သဗ္ဘိံ, သဗ္ဘီ, သဗ္ဘယော. သဗ္ဘိနာ’’တိ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ ဟောတိ, ဧဝမေဝ ‘‘ဗာလော သီလာနိ ကုဗ္ဗတီ’’တိ ပါဠိဂတိဒဿနတော ‘‘ကုဗ္ဗတိ, ကုဗ္ဗန္တိ. ကုဗ္ဗသီ’’တိ ပဒမာလာပိ ယောဇေတဗ္ဗာဝ. တထာ ‘‘ကြုဗ္ဗတိ, ကြုဗ္ဗန္တိ. ကြုဗ္ဗသီ’’တိအာဒိ သဗ္ဗံ သဗ္ဗတ္ထ ယောဇေတဗ္ဗံ. आणि ज्याप्रमाणे “बहुम्पेतं असब्भि जातवेदा” या पाळी प्रयोगावरून आणि “सन्तो सब्भीहि सद्धिं सतं धम्मो न जरं उपेतीति पवेदयन्ति” या अट्ठकथा प्रयोगावरून “सब्भि, सब्भी, सब्भयो। सब्भिं, सब्भी, सब्भयो। सब्भिना” अशी पदमाला योजावी लागते, त्याचप्रमाणे “बालो सीलानि कुब्बति” या पाळी प्रयोगावरून “कुब्बति, कुब्बन्ति, कुब्बसि” अशी पदमाला देखील योजावीच लागेल. तसेच “क्रुब्बति, krुब्बन्ति, क्रुब्बसि” इत्यादी सर्व रूपे सर्वत्र योजावीत. ဣဒါနိ ယထာပဋိညာတာ ပဒမာလာ အနုပ္ပတ္တာ. ကရောတိ, ကရောန္တိ. ကရောသိ, ကရောထ. ကရောမိ, ကုမ္မိ, ကရောမ, ကုမ္မ. ကုရုတေ, ကုဗ္ဗန္တေ. ကုရုသေ, ကုရုဝှေ. ကရေ, ကရုမှေ. ဝတ္တမာနာဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. आता प्रतिज्ञा केल्याप्रमाणे पदमाला प्राप्त झाली आहे. करोति, करोन्ति. करोसि, करोथ. करोमि, कुम्मि, करोम, कुम्म. कुरुते, कुब्बन्ते. कुरुसे, कुरुव्हे. करे, करुम्हे. ही वर्तमानकाळाच्या (वत्तमाना) दृष्टीने सांगितलेली रूपे आहेत. ကရောတု, ကုရုတု, ကရောန္တု. ကရောဟိ, ကရောထ. ကရောမိ, ကုမ္မိ, ကရောမ, ကုမ္မ. ကုရုတံ, ကုဗ္ဗန္တံ. ကရဿု, ကုရုဿု, ကုရုဝှော. ကရေ, ကုဗ္ဗာမသေ. ပဉ္စမီဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. करोतु, कुरुतु, करोन्तु. करोहि, करोथ. करोमि, कुम्मि, करोम, कुम्म. कुरुतं, कुब्बन्तं. करस्सु, कुरुस्सु, कुरुव्हो. करे, कुब्बामसे. ही पंचमी विभक्तीच्या (आज्ञार्थ/पंचमी) दृष्टीने सांगितलेली रूपे आहेत. ဧတ္ထ ပန ကောစိ ဝဒေယျ – येथे कोणी असे म्हणू शकेल – ‘‘န နော ဝိဝါဟော နာဂေဟိ, ကတပုဗ္ဗော ကုဒါစနံ; တံ ဝိဝါဟံ အသံယုတ္တံ, ကထံ အမှေ ကရောမသေ’’တိ “नागांशी आमचा विवाह कधीही झालेला नाही; तो अयोग्य विवाह आम्ही कसा करावा (करोमसे)?” ပါဠိဒဿနတော [Pg.269] ‘‘ကရောမသေ’’တိ ပဒံ ကသ္မာ ဣဓ န ဝုတ္တံ, နနု ကရဓာတုတော ပရံ ဩကာရံ ပဋိစ္စ အာမသေဝစနဿာဝယဝဘူတော အာကာရော လောပံ ပပ္ပောတီတိ? တန္န, ‘‘ကရောမသေ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘အာမသေ’’တိ ဝစနဿ အဘာဝတော မဝစနဿ သဗ္ဘာဝတော. ဧတ္ထ ဟိ သေကာရော အာဂမော, တသ္မာ ‘‘ကရောမာ’’တိ ဝတ္တမာနာဝစနဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော, န ပန ပဉ္စမီဝစနဝသေန. ဧဝံဘူတော စ သေကာရော ကတ္ထစိ နာမိကပဒတော ပရော ဟောတိ ‘‘ယေ ကေစိ ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂတာသေ. ယံ ဗလံ အဟုဝမှသေ’’တိအာဒီသု. ကတ္ထစိ ပနာချာတိကပဒတော သာဒေသနိရာဒေသဝသေန – पाळी प्रयोगावरून “करोमसे” हे पद येथे का सांगितले नाही? ‘कर’ धातूच्या पुढे ‘ओ’ कार आल्यामुळे ‘आमसे’ प्रत्ययाचा अवयव असलेला ‘आ’ कार लोप पावतो की काय? तसे नाही, “करोमसे” येथे “आमसे” प्रत्ययाचा अभाव असून ‘म’ प्रत्ययाचे अस्तित्व आहे. येथे ‘से’ कार हा आगम आहे, म्हणून “करोमा” या वर्तमानकाळाच्या वचनानुसार अर्थ घ्यावा, पंचमी विभक्तीच्या वचनानुसार नाही. आणि अशा प्रकारचा ‘से’ कार काही ठिकाणी नामपदाच्या पुढे येतो, जसे की “ये केचि बुद्धं सरणं गतासे”, “यं बलं अहुवम्हसे” इत्यादींमध्ये. तर काही ठिकाणी आख्यात पदाच्या (क्रियापदाच्या) पुढे ‘स’ च्या आदेश किंवा निरादेश रूपाने येतो – ‘‘အကရမှသ တေ ကိစ္စံ; ဩက္ကန္တာမသိ ဘူတာနိ; သုတံ နေတံ အဘိဏှသော, တသ္မာ ဧဝံ ဝဒေမသေ’’တိ “आम्ही तुझे कार्य केले (अकरम्हस); प्राणी उत्पन्न झाले आहेत (ओक्कन्तामसि); हे आम्ही वारंवार ऐकले आहे, म्हणून आम्ही असे बोलतो (वदेमसे)” – အာဒီသု. इत्यादींमध्ये. ကရေယျ, ကရေယျုံ. ကရေယျာသိ, ကရေယျာထ. ကရေယျာမိ, ကရေယျာမ. ကုဗ္ဗေထ, ကုဗ္ဗေရံ. ကုဗ္ဗေထော, ကုဗ္ဗေယျဝှော. ကရေယျံ, ကရေ, ကရေယျာမှေ. သတ္တမီဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. करेय्य, करेय्युं. करेय्यासि, करेय्याथ. करेय्यामि, करेय्याम. कुब्बेथ, कुब्बेरं. कुब्बेथो, कुब्बेय्यव्हो. करेय्यं, करे, करेय्याम्हे. ही सप्तमी विभक्तीच्या (विध्यर्थ/सत्तमी) दृष्टीने सांगितलेली रूपे आहेत. ကရ, ကရု. ကရေ, ကရိတ္ထ. ကရံ, ကရိမှ. ကရိတ္ထ, ကရိရေ. ကရိတ္ထော, ကရိဝှော. ကရိံ, ကရိမှေ. ပရောက္ခာဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. कर, करु. करे, करित्थ. करं, करिम्ह. करित्थ, करिरे. करित्तो, करिव्हो. करिं, करिम्हे. ही परोक्षा विभक्तीच्या (परोक्खा/भूतकाळ) दृष्टीने सांगितलेली रूपे आहेत. ဧတ္ထ ကရာတိ ပုရိသော ကမ္မံ ကရီတိ ပဌမပုရိသယောဇနာယ ယောဇေတဗ္ဗံ. ‘‘အာဂုံ ကရ မဟာရာဇ, အကရံ ကမ္မဒုက္ကဋ’’န္တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘မဟာရာဇ ဘဝံ အာဂုံ ကရီ’’တိ ပဌမပုရိသယောဇနာယ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဧဝဉှိ သတိ အယံ ပယောဂေါ ‘‘မညေ ဘဝံ ပတ္ထယတိ, ရညော ဘရိယံ ပတိဗ္ဗတ’’န္တိအာဒယော ဝိယ ပဌမပုရိသပ္ပယောဂေါ ဘဝတိ. येथे “करा” म्हणजे “पुरुष कर्म करतो (करी)” अशा प्रथम पुरुष योजनेनुसार योजना करावी. “आगुं कर महाराज, अकरं कम्मदुक्कटं” येथे देखील “महाराज, आपण अपराध केला (करी)” अशा प्रथम पुरुष योजनेनुसार योजना करावी. असे असल्यास हा प्रयोग “मञ्ञे भवं पत्थयति, रञ्ञो भरियं पतिब्बतं” इत्यादींप्रमाणे प्रथम पुरुषाचा प्रयोग होतो. ဇာတကဋ္ဌကထာယံ [Pg.270] ပန မဇ္ဈိမပုရိသပ္ပယောဂေါ ဝုတ္တော ‘‘အာဂုံ ကရာတိ မဟာရာဇ တွံ မဟာပရာဓံ မဟာပါပံ ကရိ. ဒုက္ကဋန္တိ ယံ ကတံ ဒုက္ကဋံ ဟောတိ,တံ လာမကံ ကမ္မံ အကရ’’န္တိ, တသ္မာ ဇာတကဋ္ဌကထာဝသေနာပိ ကဒါစိ ကရဣတိ စ ကရီတိ စ အကရန္တိ စ မဇ္ဈိမပုရိသပ္ပယောဂေါ ဘဝတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ယေဘုယျဝသေန ပန ‘‘ပုရိသော ကမ္မံ ကရ, ပုရိသော ကမ္မံ ကရိ, အဟံ ကမ္မံ အကရ’’န္တိ ပဌမုတ္တမပုရိသပ္ပယောဂေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ဧတ္ထ စ ကရဣတိ ယထာဝုတ္တဝိဘတ္တိဝသေန, ကရီတိ အဇ္ဇတနီဝသေန, အကရန္တိ ဟိယျတ္တနီဝသေန ဝုတ္တံ. တတ္ထ ‘‘ကရိတ္ထော’’တိ ပဒံ ‘‘အညံ ဘတ္တာရံ ပရိယေသ, မာ ကိသိတ္ထော မယာ ဝိနာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ကိသိတ္ထော’’တိ ပဒေန သမံ ပရောက္ခာယတ္တနောပဒမဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနဝသေန, ဧဒိသော ပန နယော အညတြာပိ ယထာသမ္ဘဝံ ယောဇေတဗ္ဗော. परंतु जातक-अट्ठकथेमध्ये मध्यम पुरुषाचा प्रयोग सांगितला आहे – “आगुं करा म्हणजे हे महाराज, तू मोठा अपराध, मोठे पाप केलेस (करी). दुक्कटं म्हणजे जे दुष्कृत्य केले आहे, ते वाईट कर्म केलेस (अकर).” म्हणून जातक-अट्ठकथेच्या अनुसार देखील कधीकधी ‘करा’, ‘करी’ आणि ‘अकर’ हे मध्यम पुरुषाचे प्रयोग होतात असे समजावे. परंतु बहुतांश करून “पुरिसो कम्मं कर” (पुरुषाने कर्म केले – प्रथम पुरुष), “पुरिसो कम्मं करि” (पुरुषाने कर्म केले – प्रथम पुरुष), “अहं कम्मं अकरं” (मी कर्म केले – उत्तम पुरुष) असा प्रथम आणि उत्तम पुरुषाचा प्रयोग समजावा. आणि येथे ‘करा’ हे वर सांगितलेल्या विभक्तीनुसार, ‘करी’ हे अज्जतनी (नजीकचा भूतकाळ) नुसार आणि ‘अकर’ हे हिय्यतनी (कालचा भूतकाळ) नुसार सांगितले आहे. तेथे “करित्तो” हे पद “अञ्ञं भत्तारं परियेस, मा किसित्तो मया विना” (दुसऱ्या पतीचा शोध घे, माझ्याशिवाय कृश होऊ नकोस) येथील “किसित्तो” या पदाप्रमाणे परोक्षा आणि हिय्यतनी मध्यम पुरुष एकवचनाच्या रूपाने योजले आहे, आणि असा नियम इतरत्र देखील यथासंभव योजावा. အကာ, အကရာ, အကရ ဣတိ ရဿပါဌောပိ. အကရု. ဧတ္ထ ‘‘သဗ္ဗာရိဝိဇယံ အကာ’’တိ ပဒံ နိဒဿနံ. အကရာတိ ပုရိသော ကမ္မံ အကာသီတိ အတီတကြိယာဝါစကော ပဌမပုရိသပ္ပယောဂေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘ရဇ္ဇဿ ကိရ သော ဘီတော, အကရာ အာလယေ ဗဟူ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. ‘‘မာ မေတံ အကရာ ကမ္မံ, မာ မေ ဥဒကမာဟရီ’’တိ ဧတ္ထ ပန သန္တေပိ အတီတဝါစကပဋ္ဌမပုရိသပ္ပယောဂဘာဝေ မာသဒ္ဒယောဂတော ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိယော ပဉ္စမီဝိဘတ္တိအတ္ထေ အနုတ္တကာလိကာ ဟုတွာ ‘‘တွံ မာ ကရောသိ, မာ အာဟရသီ’’တိ မဇ္ဈိမပုရိသပ္ပယောဂါရဟာ ဘဝန္တိ. अका, अकरा, अकर असा र्हस्व पाठ देखील आहे. अकरु. येथे “सब्बारिविजयं अका” (सर्व शत्रूंवर विजय मिळवला) हे पद उदाहरण आहे. ‘अकरा’ म्हणजे “पुरुषाने कर्म केले (अकासि)” असा भूतकाळ दर्शवणारा प्रथम पुरुषाचा प्रयोग समजावा. कारण “रज्जस्स किर सो भीतो, अकरा आलये बहू” (राज्याला घाबरून त्याने अनेक निवासस्थाने बनवली) अशी पाळी आढळते. “मा मेतं अकरा कम्मं, मा मे उदकमाहरी” (माझ्यासाठी हे कर्म करू नकोस, माझ्यासाठी पाणी आणू नकोस) येथे भूतकाळ दर्शवणारा प्रथम पुरुषाचा प्रयोग असला तरी, ‘मा’ शब्दाच्या योगामुळे हिय्यतनी आणि अज्जतनी विभक्ती पंचमी विभक्तीच्या अर्थात वर्तमानकालीन (अनुकूल काळाची) होऊन “त्वं मा करोसि, मा आहरसि” (तू करू नकोस, आणू नकोस) अशा मध्यम पुरुषाच्या प्रयोगास योग्य ठरतात. ကိဉ္စ ဘိယျော ‘‘ဇရာဓမ္မံ မာ ဇီရီတိ အလဗ္ဘနေယျံ ဌာန’’န္တိအာဒီသုပိ သန္တေပိ အတီတဝါစကပဌမပုရိသပ္ပယောဂဘာဝေ မာသဒ္ဒယောဂတော အဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိပဉ္စမီဝိဘတ္တိအတ္ထေ အနုတ္တကာလိကာ ဟုတွာ ‘‘မာ ဇီရတူ’’တိအာဒိနာ ပဌမပုရိသပ္ပယောဂါရဟာ [Pg.271] ဘဝန္တိ. တေနာဟု အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘ဇရာဓမ္မံ မာ ဇီရီတိ ယံ မယှံ ဇရာသဘာဝံ, တံ မာ ဇီရိတု. ဧသ နယော သေသေသုပီ’’တိ. ယံ ပနမှေဟိ ‘‘အကရ ဣတိ ရဿပါဌောပီ’’တိ ဝုတ္တံ, တဿ ‘‘အတိကရ’မကရာ’စရိယ, မယှမ္ပေတံ န ရုစ္စတီ’’တိ ဣမာယ ပါဠိယာ ဝသေန အတ္ထိတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. တဿာယမတ္ထော ‘‘အာစရိယ ဘဝံ အတိက္ကန္တကရဏံ အကရာ’’တိ ပဌမပုရိသဝသေန ဂဟေတဗ္ဗော. အပိစ ‘‘ဘဝ’’န္တိ ဝတ္တဗ္ဗေ အတ္ထေ ‘‘တွ’’န္တိ ဝစနံ ဝတ္တဗ္ဗမေဝါတိ အဓိပ္ပာယဝသေန ‘‘အာစရိယ တွံ အတိက္ကန္တကရဏံ ကရောသီ’’တိ ယောဇနာပိ ကာတဗ္ဗာဝ. आणखी काय, 'जराधम्मं मा जीरि' (जरास्वभावाचे जीर्ण होऊ नये) हे अप्राप्य स्थान आहे, इत्यादींमध्ये भूतकाळवाचक प्रथमपुरुष प्रयोगाचा भाव असतानाही, 'मा' शब्दाच्या योगामुळे अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) विभक्ती आणि पंचमी विभक्तीच्या अर्थात काळ-मर्यादेशिवाय 'मा जीरतु' (जीर्ण होऊ नये) इत्यादी रूपाने प्रथमपुरुष प्रयोगास योग्य होतात. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी म्हटले आहे - 'जराधम्मं मा जीरि म्हणजे माझा जो जरास्वभाव आहे, तो जीर्ण होऊ नये. हाच नियम इतरांच्या बाबतीतही लागू होतो.' आणि आम्ही जे 'अकर असा र्हस्व पाठ देखील आहे' असे म्हटले आहे, त्याचे अस्तित्व 'अतिकर'मकर'आचरिय, मय्हम्पेतं न रुच्चति' या पाळीच्या आधारे समजून घ्यावे. त्याचा हा अर्थ आहे - 'हे आचार्या, आपण अतिशय कृत्य केले आहे' असा प्रथमपुरुषाच्या अर्थाने घ्यावा. शिवाय, 'भवं' (आपण) असे म्हणण्याच्या अर्थात 'त्वं' (तू) हा शब्द वापरला पाहिजे, या अभिप्रायाने 'हे आचार्या, तू अतिशय कृत्य करत आहेस' अशी योजना देखील करावी. အကရော, အကတ္ထ, အကရောထ. အကရံ, အကံ, အကရမှ, အကမှ. ဧတ္ထ ‘‘သံဝဍ္ဎယိတွာ ပုဠိနံ, အကံ ပုဠိနစေတိယ’’န္တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. အကတ္ထ, အကတ္ထုံ. အကုရုသေ, အကရဝှံ. အကရိံ, အကရံ, အကရမှသေ. ဟိယျတ္တနီဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. अकरो, अकत्थ, अकरोथ. अकरं, अकं, अकरम्ह, अकम्ह. येथे 'संवड्ढयित्वा पुळिनं, अकं पुळिनचेतियं' (वाळू गोळा करून, मी वाळूचे चेत्य बनवले) हे पाळीचे उदाहरण आहे. अकत्थ, अकत्थुं. अकुरुसे, अकरव्हं. अकरिं, अकरं, अकरम्हसे. ही हिय्यतनी (ह्यस्तन भूतकाळ) च्या नियमाने सांगितलेली रूपे आहेत. ဧတ္ထ စ ပဉ္စဝိဓော သေကာရော အာဟရိတွာ ဒဿေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ ပဉ္စဝိဓော သေကာရော ပဒါဝယဝ အပဒါဝယဝအနေကန္တပဒါဝယဝ သောသဒ္ဒတ္ထ အာဒေသဝသေန. တတ္ထ ပဒါဝယဝေါ သေကာရော ‘‘တွံ ကမ္မံ ကုရုသေ, တွံ အတ္ထကုသလော အဘဝသေ’’တိအာဒီသု ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အပဒါဝယဝေါ ပန ‘‘တသ္မာ ဧဝံ ဝဒေမသေ. မူလာ အကုသလာ သမူဟတာသေ’’တိအာဒီသု ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အနေကန္တပဒါဝယဝေါ ‘‘အရောဂါ စ ဘဝါမသေ. မဏိံ တာတ ဂဏှာမသေ’’အာဒီသု ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ဧတ္ထ ဟိ သေကာရော ယဒိ ပဉ္စမီဝိဘတ္တိယံ အာမသေဝစနဿာဝယဝေါ, တဒါ ပဉ္စမီဝိဘတ္တိယုတ္တာနံ ပတ္ထနာသီသနတ္ထာနံ ‘‘ဘဝါမသေ, ဂဏှာမသေ’’တိ ပဒါနံ အဝယဝေါ ဟောတိ. ယဒိ ပန အာဂမော, ပဉ္စမီဝိဘတ္တိယုတ္တာနံ ပတ္ထနာသီသနတ္ထာနံ ‘‘ဘဝါမ, ဂဏှာမာ’’တိ ပဒါနံ အဝယဝေါ န ဟောတိ, ဧဝံ ‘‘ဘဝါမသေ’’တိအာဒီသု [Pg.272] သေကာရဿ အနေကန္တပဒါဝယဝတ္တံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. သောသဒ္ဒတ္ထော ‘‘ဧသေသေ ဧကေ ဧကဋ္ဌေ’’တိ ဧတ္ထ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ဧသေသေတိ ဣမဿ ဟိ ‘‘ဧသောသော ဧကော ဧကဋ္ဌော’’တိ အတ္ထော. အာဒေသော ‘‘အကရမှသ တေ ကိစ္စ’’န္တိ ဧတ္ထ, ‘‘ဩက္ကန္တာမသိ ဘူတာနီ’’တိ စေတ္ထ ဒဋ္ဌဗ္ဗော ဧကာရဿ အကာရိကာရာဒေသကရဏဝသေန. တတ္ထ ‘‘အကရမှသ တေ ကိစ္စ’’န္တိ ဣမဿ ‘‘အကရမှသေ တေ ကိစ္စ’’န္တိ အတ္ထော. ‘‘အကရမှသေ’’တိ စေတ္ထ သစေ သေကာရော အာဂမော, တဒါ ‘‘ကရမှာ’’တိ ပဒံ ဟိယျတ္တနီပရဿပဒေ ဥတ္တမပုရိသဗဟုဝစနန္တံ. သစေ ပန မှသေဝစနဿာဝယဝေါ, တဒါ ‘‘အကရမှသေ’’တိ ပဒံ ဟိယျတ္တနီအတ္တနောပဒေ ဥတ္တမပုရိသဗဟုဝစနန္တံ. ဧဝံ ပဉ္စဝိဓော သေကာရော ဘဝတီတိ အဝဂန္တဗ္ဗံ. येथे पाच प्रकारचा 'से-कार' (से हा वर्ण) आणून दाखवला पाहिजे. तो असा की, पदावयव, अपदावयव, अनैकांतिकपदावयव, 'सो' शब्दाचा अर्थ आणि आदेश या भेदांमुळे पाच प्रकारचा 'से-कार' होतो. त्यापैकी पदावयव 'से-कार' हा 'त्वं कम्मं कुरुसे, त्वं अत्थकुसलो अभवसे' इत्यादींमध्ये पाहावा. अपदावयव 'से-कार' हा 'तस्मा एवं वदेमसे. मूला अकुसला समूहत असे' इत्यादींमध्ये पाहावा. अनैकांतिकपदावयव 'से-कार' हा 'अरोगा च भवामसे. मणिं तात गण्हामसे' इत्यादींमध्ये पाहावा. येथे जर 'से-कार' हा पंचमी विभक्तीतील 'आमसे' वचनाचा अवयव असेल, तर पंचमी विभक्तीने युक्त असलेल्या प्रार्थना आणि आशीर्वाद अर्थाच्या 'भवामसे, गण्हामसे' या पदांचा अवयव होतो. पण जर तो आगम असेल, तर पंचमी विभक्तीने युक्त असलेल्या प्रार्थना आणि आशीर्वाद अर्थाच्या 'भवाम, गण्हामा' या पदांचा अवयव होत नाही; अशा प्रकारे 'भवामसे' इत्यादींमध्ये 'से-कारा'चे अनैकांतिकपदावयवत्व समजून घ्यावे. 'सो' शब्दाचा अर्थ 'एसेसे एके एकट्ठे' येथे पाहावा. कारण 'एसेसे' याचा अर्थ 'एसो सो एको एकट्ठो' (तो हा एकच अर्थ असलेला) असा आहे. आदेश 'अकरम्हस ते किच्चं' येथे आणि 'ओक्कन्तामसि भूतानि' येथे पाहावा, कारण येथे 'ए-कारा'चा 'अ-कार' आणि 'इ-कार' असा आदेश केला आहे. त्यापैकी 'अकरम्हस ते किच्चं' याचा अर्थ 'अकरम्हसे ते किच्चं' असा आहे. 'अकरम्हसे' येथे जर 'से-कार' आगम असेल, तर 'करम्हा' हे पद हिय्यतनी परस्मैपद उत्तमपुरुष बहुवचनाचे रूप होते. पण जर तो 'म्हसे' वचनाचा अवयव असेल, तर 'अकरम्हसे' हे पद हिय्यतनी आत्मनेपद उत्तमपुरुष बहुवचनाचे रूप होते. अशा प्रकारे पाच प्रकारचा 'से-कार' होतो, हे समजून घ्यावे. အကရိ, ကရိ, အကာသိ, အကရုံ, အကရိံသု, အကံသု, အကံသုံ. အကရော, အကရိတ္ထ, အကာသိတ္ထ. अकरि, करि, अकासि, अकरुं, अकरिंसु, अकंसु, अकंसुं. अकरो, अकरित्थ, अकासित्थ. ဧတ္ထ စ အကရောတိ တွံ အကရောတိ ယောဇေတဗ္ဗံ. ‘‘အကရော’’ ဣတိ ဟိ ပဒံ ‘‘ဝရဉ္စေ မေ အဒေါ သက္ကာ’’တိ ဧတ္ထ မဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနတ္ထံ ‘‘အဒေါ’’တိ ပဒမိဝ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ ပါဠိယံ အဝိဇ္ဇမာနတ္တေပိ နယဝသေန ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ. ဂရူ ပန ‘‘အကရော’’တိ ဝုတ္တဋ္ဌာနေ ‘‘အကာသီ’’တိ မဇ္ဈိမပုရိသဝစနံ ဣစ္ဆန္တိ. တာဒိသဉှိ ပဒံ ယေဘုယျေန ပဌမပုရိသဝစနမေဝ ဟောတိ. တထာ ဟိ ‘‘အဒါသိ မေ, အကာသိ မေ’’တိ ပဌမပုရိသပါဠိယော ဗဟူ သန္ဒိဿန္တိ. ‘‘မာကာသိ မုခသာ ပါပံ, မာ ခေါ သူကရမုခေါ အဟူ’’တိအာဒီသု ပန မာသဒ္ဒယောဂတော ‘‘တွံ ပါပံ မာ အကာသိ, မာ သူကရမုခေါ အဟောသီ’’တိ ပဒယောဇနာ ကာတဗ္ဗာ ဟောတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. येथे 'अकरो' या पदाची 'त्वं अकरो' (तू केलेस) अशी योजना करावी. कारण 'अकरो' हे पद 'वरंचे मे अदो सक्का' येथे मध्यमपुरुष एकवचनाच्या अर्थातील 'अदो' या पदाप्रमाणे पाहावे, कारण पाळीमध्ये ते विद्यमान नसले तरी नियमानुसार ते ग्रहण केले जाते. परंतु आचार्य 'अकरो' असे म्हटलेल्या ठिकाणी 'अकासि' हे मध्यमपुरुषाचे वचन इच्छितात. कारण तसे पद बहुधा प्रथमपुरुषाचेच वचन असते. तसेच 'अदासि मे, अकासि me' (त्याने मला दिले, त्याने माझ्यासाठी केले) अशा प्रथमपुरुषाच्या अनेक पाळी आढळतात. परंतु 'माकासि मुखसा पापं, मा खो सूकरमुखो अहू' इत्यादींमध्ये 'मा' शब्दाच्या योगामुळे 'त्वं पापं मा अकासि, मा सूकरमुखो अहोषि' (तू मुखाने पाप करू नकोस, तू डुकराच्या तोंडाचा होऊ नकोस) अशी पदयोजना करावी लागते, असे पाहावे. အကရိံ[Pg.273], ကရိံ, အကာသိံ, အကရိမှ, ကရိမှ, အကာသိမှ. အကရာ, အကရူ. အကရုသေ, အကရိဝှံ. အကရံ, အကရိမှေ. အဇ္ဇတနီဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. अकरिं, करिं, अकासिं, अकरिम्ह, करिम्ह, अकासिम्ह. अकरा, अकरू. अकुरुसे, अकरिव्हं. अकरं, अकरिम्हे. ही अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) च्या नियमाने सांगितलेली रूपे आहेत. ကရိဿတိ, ကရိဿန္တိ. ကရိဿသိ, ကရိဿထ. ကရိဿာမိ, ကရိဿာမ. ကရိဿတေ, ကရိဿန္တေ. ကရိဿသေ, ကရိဿဝှေ. ကရိဿံ, ကဿံ ဣစ္စပိ. တထာ ဟိ ပါဠိ ဒိဿတိ ‘‘ကဿံ ပုရိသကာရိယ’’န္တိ. ကရိဿမှေ. တထာ ကာဟတိ, ကာဟန္တိ. ကာဟသိ, ကာဟထ. ကာဟာမိ, ကာဟာမ. ကာဟိတိ, ကာဟိန္တိ. ကာဟိသိ ဣစ္စေဝမာဒိနာ ယထာသမ္ဘဝံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဘဝိဿန္တီဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. करिस्सति, करिस्सन्ति. करिस्ससि, करिस्सथ. करिस्सामि, करिस्साम. करिस्सते, करिस्सन्ते. करिस्ससे, करिस्सव्हे. करिस्सं, कस्सं इत्यादी. तसेच पाळीमध्ये 'कस्सं पुरिसकारियं' (मी पुरुषाचे कर्तव्य करीन) असे दिसते. करिस्सम्हे. तसेच काहति, काहन्ति. काहसि, काहथ. काहामि, काहाम. काहिति, काहिन्ति. काहिसि इत्यादी प्रकारे यथासंभव योजना करावी. ही भविस्सती (भविष्यकाळ) च्या नियमाने सांगितलेली रूपे आहेत. အကရိဿာ, အကရိဿ, အကရိဿံသူတိ သေသံ သဗ္ဗံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ကာလာတိပတ္တိဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. अकरिस्सा, अकरिस्स, अकरिस्संस्ु - याप्रमाणे उर्वरित सर्व योजना करावी. ही कालातिपत्ती (क्रियातिपत्ती भूतकाळ) च्या नियमाने सांगितलेली रूपे आहेत. ကယိရတိ, ကယိရန္တိ. ကယိရသိ, ကယိရာထ. ကယိရာမိ, ကယိရာမ. ကယိရတေ. သေသံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဝတ္တမာနာဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. कयिरति, कयिरन्ति. कयिरसि, कयिराथ. कयिरामि, कयिराम. कयिरते. उर्वरित योजना करावी. ही वत्तमाना (वर्तमानकाळ) च्या नियमाने सांगितलेली रूपे आहेत. ကယိရတု, ကယိရန္တု. သေသံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ပဉ္စမီဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. कयिरतु, कयिरन्तु. उर्वरित योजना करावी. ही पंचमी (आज्ञार्थ/विद्यार्थ) च्या नियमाने सांगितलेली रूपे आहेत. ကယိရာ, ကုယိရာ. ကယိရုံ. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘ကုမ္ဘိမှိပ’ဉ္ဇလိံ ကုယိရာ, စာတဉ္စာပိ ပဒက္ခိဏ’’န္တိ. တတ္ထ ကုမ္ဘိမှိပိ အဉ္ဇလိန္တိ ဆေဒေါ. ကယိရာသိ, ကယိရာထ. ကယိရာမိ, ကယိရာမ. ကယိရေထ, ကယိရေရံ. ကယိရေထော, ကယိရာဝှော. ကယိရံ, ကယိရာမှေ. သတ္တမီဝသေန ဝုတ္တရူပါနိ. कयिरा, कुयिरा. कयिरुं. येथे ही पाळी आहे - 'कुम्भिम्हिप'ञ्जलिं कुयिरा, चातञ्चापि पदक्खिणं'. तेथे 'कुम्भिम्हि अपि अञ्जलिं' असा संधिच्छेद आहे. कयिरासि, कयिराथ. कयिरामि, कयिराम. कयिरेथ, कयिरेरं. कयिरेथो, कयिराव्हो. कयिरं, कयिराम्हे. ही सत्तमी (विध्यर्थ) च्या नियमाने सांगितलेली रूपे आहेत. တတ္ထ ကယိရာတိ ဣဒံ ‘‘ပုညဉ္စေ ပုရိသော ကယိရာ’’တိ ဒဿနတော ပဌမပုရိသဝသေန ယောဇေတဗ္ဗံ, ‘‘အဓမ္မံ သာရထိ ကယိရာ’’တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘သာရထိ ဘဝံ အဓမ္မံ ကရေယျာ’’တိ [Pg.274] ပဌမပုရိသဝသေန ယောဇေတဗ္ဗံ, န မဇ္ဈိမပုရိသဝသေန. အထ ဝါ ‘‘ကယိရာသီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ သိကာရလောပံ ကတွာ ‘‘ကယိရာ’’တိ မဇ္ဈိမပုရိသဝစနံ ဝုတ္တန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ. त्यापैकी 'कयिरा' हे 'पुञ्ञञ्चे पुरिसो कयिरा' (जर माणसाने पुण्य केले तर) या उदाहरणावरून प्रथमपुरुषाच्या नियमाने योजावे, 'अधम्मं सारथि कयिरा' येथे देखील 'सारथि भवं अधम्मं करेय्या' (सारथीने अधर्म करू नये) या प्रथमपुरुषाच्या नियमाने ग्रहण करावे, मध्यमपुरुषाच्या नियमाने नाही. किंवा 'कयिरासि' असे म्हणायचे असताना 'स-कारा'चा लोप करून 'कयिरा' हे मध्यमपुरुषाचे वचन म्हटले आहे, असे ग्रहण करावे. ဧတ္ထ ပန သိယာ – ယထာ ‘‘ပုတ္တံ လဘေထ ဝရဒ’’န္တိ ပါဠိယံ ‘‘လဘေထာ’’တိ ဣမဿ ပဒဿ ‘‘သဗ္ဘိရေဝ သမာသေထ, သဗ္ဘိ ကုဗ္ဗေထ သန္ထဝ’’န္တိအာဒီသု ‘‘သမာသေထာ’’တိအာဒီနံ ဝိယ ပဌမပုရိသဝသေန အတ္ထံ အဂ္ဂဟေတွာ ပုရိသဝိပလ္လာသံ ကတွာ ‘‘လဘေယျ’’န္တိ ဥတ္တမပုရိသဝသေနတ္ထော အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ဂဟိတော, တထာ တုမှေဟိပိ ‘‘အဓမ္မံ သာရထိ ကယိရာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ကယိရာ’’တိ ပဒဿ ပုရိသဝိပလ္လာသံ ကတွာ ‘‘ကရေယျာသီ’’တိ မဇ္ဈိမပုရိသဝသေနတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော, အဋ္ဌကထာစရိယေဟိပိ ‘‘ကရေယျာသီ’’တိ တဒတ္ထော ဝုတ္တောတိ? သစ္စံ, ဧဝံ သန္တေပိ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ဝေါဟာရတ္ထေသု ပရမကောသလ္လသမန္နာဂတတ္တာ ‘‘တွ’’န္တိ ဝတ္တဗ္ဗေ အတ္ထေ ဘဝံသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ, ‘‘ဘဝ’’န္တိ ဝတ္တဗ္ဗေ အတ္ထေ တွံသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတီတိ စိန္တေတွာ အဓိပ္ပာယတ္ထဝသေန ‘‘ကရေယျာသီ’’တိ အတ္ထော ဝုတ္တော, န ပုရိသဝိပလ္လာသဝသေန. တထာ ဟိ ‘‘ပုတ္တံ လဘေထ ဝရဒ’’န္တိ ဣမဿ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘လဘေထာ’’တိ ဥလ္လိင်္ဂိတွာ ‘‘လဘေယျ’’န္တိ ပုရိသဝိပလ္လာသဝသေန ဝိဝရဏံ ကတံ. ‘‘အဓမ္မံ သာရထိ ကယိရာ’’တိ ဣမဿ ပန အဋ္ဌကထာယံ ‘‘ကယိရာ’’တိ ဥလ္လိင်္ဂိတွာ ‘‘ကရေယျာသီ’’တိ ဝိဝရဏံ ကတံ, တသ္မာ ‘‘အဓမ္မံ သာရထိ ကယိရာ’’တိ ဧတ္ထ ပုရိသဝိပလ္လာသော န စိန္တေတဗ္ဗော. အထ ဝါ ယထာ ‘‘ပုတ္တံ လဘေထ ဝရဒ’’န္တိ ဧတ္ထ စ ‘‘ကာယေ ရဇော န လိမ္ပေထာ’’တိအာဒီသု ဧထဝစနံ ဂဟိတံ, ဧဝံ ဧထဝစနံ အဂ္ဂဟေတွာ ‘‘လဘေ အထာ’’တိ ပဒစ္ဆေဒေါ ကရဏီယော. ဧဝဉှိ သတိ ပုရိသဝိပလ္လာသေန ကိစ္စံ နတ္ထိ. တတ္ထ လဘေတိ သတ္တမိယာ [Pg.275] ဥတ္တမပုရိသဝစနံ ‘‘ဝဇ္ဈဉ္စာပိ ပမောစယေ’’တိ ပဒမိဝ. အထာတိ အဓိကာရန္တရေ နိပါတော ပဒပူရဏေ ဝါ. ဧတ္ထ စ အဓိကာရန္တရဝသေန အပရမ္ပိ ဝရံ ပုတ္တံ လဘေယျန္တိ အတ္ထော. ယသ္မာ ပနေတ္ထ ဒွိန္နမတ္ထာနံ ဥပ္ပတ္တိ ဒိဿတိ, ယသ္မာ စေတေသု ဒွီသု ဒုဇ္ဇာနော ဘဂဝတော အဓိပ္ပာယော, တသ္မာ ဒွေပိ အတ္ထာ ဂဟေတဗ္ဗာဝ. येथे अशी शंका उपस्थित होऊ शकते की - ज्याप्रमाणे पाळी भाषेतील "पुत्तं लभेथ वरदं" (वर देणाऱ्याकडून पुत्र प्राप्त करावा) या गाथेतील "लभेथ" या पदाचा अर्थ, "सब्भिरेव समासेथ, सब्भि कुब्बेथ सन्थवं" (सज्जनांसोबतच बसावे, सज्जनांसोबतच मैत्री करावी) इत्यादी गाथांमधील "समासेथ" इत्यादी पदांप्रमाणे प्रथम पुरुषाच्या (तृतीय पुरुषाच्या) अर्थाने न घेता, पुरुष-विपर्यास (पुरुष बदल) करून "लभेय्यं" (मी प्राप्त करावे) असा उत्तम पुरुषाच्या अर्थाने अट्ठकथाचार्यांनी घेतला आहे; त्याचप्रमाणे तुम्ही सुद्धा "अधम्मं सारथि कयिरा" (हे सारथी, अधर्म करू नकोस) येथे "कयिरा" या पदाचा पुरुष-विपर्यास करून "करेय्यासि" (तू करावा/करशील) असा मध्यम पुरुषाच्या अर्थाने अर्थ सांगावा, आणि अट्ठकथाचार्यांनी सुद्धा "करेय्यासि" असाच त्याचा अर्थ सांगितला आहे काय? हे सत्य आहे, तरीही अट्ठकथाचार्यांनी व्यावहारिक अर्थांमध्ये परम कौशल्य प्राप्त केलेले असल्यामुळे, "त्वं" (तू) असे म्हणावयाच्या ठिकाणी "भवं" (आपण) हा शब्द वापरला जातो, आणि "भवं" (आपण) म्हणावयाच्या ठिकाणी "त्वं" (तू) हा शब्द वापरला जातो, असा विचार करून अभिप्रायाच्या अर्थानुसार "करेय्यासि" असा अर्थ सांगितला आहे, पुरुष-विपर्यासाच्या कारणाने नाही. कारण, "पुत्तं लभेथ वरदं" याच्या अट्ठकथेमध्ये "लभेथ" असा उल्लेख करून "लभेय्यं" असा पुरुष-विपर्यासाने खुलासा केला आहे. परंतु "अधम्मं सारथि कयिरा" याच्या अट्ठकथेमध्ये "कयिरा" असा उल्लेख करून "करेय्यासि" असा खुलासा केला आहे, म्हणून "अधम्मं सारथि कयिरा" येथे पुरुष-विपर्यासाचा विचार करू नये. अथवा, ज्याप्रमाणे "पुत्तं लभेथ वरदं" येथे आणि "काये रजो न लिम्पेथ" इत्यादींमध्ये 'एथ' (ethavacanaṃ) हे वचन घेतले आहे, त्याप्रमाणे 'एथ' वचन न घेता "लभे अथ" असा पदच्छेद करावा. असे केल्यास पुरुष-विपर्यासाची काही गरज उरत नाही. तेथे "लभे" हे सप्तमी विभक्तीचे उत्तम पुरुषाचे रूप आहे, जसे "वज्झञ्चापि पमोचये" या पदातील 'पमोचये' हे रूप आहे. "अथ" हा दुसऱ्या प्रसंगातील निपात आहे किंवा केवळ पदपूर्तीसाठी आहे. आणि येथे दुसऱ्या प्रसंगानुसार "मी आणखी एक श्रेष्ठ पुत्र प्राप्त करावा" असा अर्थ होतो. कारण येथे दोन्ही अर्थांची उत्पत्ती दिसून येते, आणि या दोन्ही अर्थांपैकी भगवंतांचा नेमका अभिप्राय कोणता हे जाणून घेणे कठीण असल्यामुळे, हे दोन्हीही अर्थ ग्रहण केले पाहिजेत. ဧတ္ထ ပန ကိဉ္စာပိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသော ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော ဝစနဝိပလ္လာသော ကာလဝိပလ္လာသော ပုရိသဝိပလ္လာသော အက္ခရဝိပလ္လာသောတိ ဆဗ္ဗိဓော ဝိပလ္လာသော အာဟရိတွာ ဒဿေတဗ္ဗော, တထာပိ သော ဥပရိ အာဝိဘဝိဿတီတိ န ဒဿိတော. တတြ ကယိရာထာတိ ပဒံ သတ္တမိယာ ပရဿပဒဝသေန အတ္တနောပဒဝသေန စ ဒွိဓာ ဘိဇ္ဇတိ, တထာ မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနဝသေန ပဌမပုရိသေကဝစနဝသေန စ. တထာ ဟိ ‘‘ယထာ ပုညာနိ ကယိရာထ, ဒဒန္တာ အပရာပရ’’န္တိ ဧတ္ထ ‘‘ကယိရာထာ’’တိ ဣဒံ သတ္တမိယာ ပရဿပဒဝသေန မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနဝသေန စ ဝုတ္တံ. ယထာနုရူပံ ပုညာနိ ကရေယျာထယေဝါတိ ဟိ အတ္ထော. ‘‘ကယိရာထ ဓီရော ပုညာနီ’’တိ ဧတ္ထ ပန ‘‘ကယိရာထာ’’တိ ဣဒံ သတ္တမိယာ အတ္တနောပဒဝသေန ပဌမပုရိသေကဝစနဝသေန စ ဝုတ္တံ. ကရေယျာတိ ဟိ အတ္ထော. ဣဓ ပရောက္ခာဒိဝသေန ယိရပစ္စယသဟိတာနိ ရူပါနိ ယေဘုယျေန သာသနေ အပ္ပသိဒ္ဓါနီတိ န ဒဿိတာနိ. येथे जरी लिंग-विपर्यास, विभक्ती-विपर्यास, वचन-विपर्यास, काळ-विपर्यास, पुरुष-विपर्यास आणि अक्षर-विपर्यास असा सहा प्रकारचा विपर्यास (बदल) उदाहरणांसह दाखवायला हवा होता, तरीही तो पुढे स्पष्ट होणार असल्यामुळे येथे दाखवला नाही. त्यामध्ये "कयिराथ" हे पद सप्तमी विभक्तीच्या परस्मैपद आणि आत्मनेपद या दोन्ही रूपांनी दोन प्रकारे विभागले जाते; तसेच मध्यम पुरुष बहुवचन आणि प्रथम पुरुष एकवचन या रूपांनीही विभागले जाते. कारण, "यथा पुञ्ञानि कयिराथ, ददन्ता अपरापरं" (ज्याप्रमाणे वारंवार दान देत पुण्य करावे) येथे "कयिराथ" हे सप्तमी विभक्तीच्या परस्मैपदाच्या मध्यम पुरुष बहुवचनाच्या रूपात सांगितले आहे. "तुम्ही योग्यतेनुसार पुण्यच करावे" असा याचा अर्थ आहे. परंतु "कयिराथ धीरो पुञ्ञानि" (धैर्यवानाने पुण्य करावे) येथे "कयिराथ" हे सप्तमी विभक्तीच्या आत्मनेपदाच्या प्रथम पुरुष एकवचनाच्या रूपात सांगितले आहे. "त्याने करावे" असा याचा अर्थ आहे. येथे परोक्षा (भूतकाल) इत्यादींच्या द्वारे 'यिर' प्रत्ययाने युक्त असलेली रूपे बहुतांश करून शासनात (बुद्धवचनात) उपयोगात आणली जात नसल्यामुळे ती दाखवली नाहीत. အတ္တနော ဖလံ ကရောတီတိ ကာရဏံ. ကရောတီတိ ကတ္တာ, ဧဝံ ကာရကော ကာရကံ ဝါ. ဧတ္ထ ဟိ ကာရကသဒ္ဒေါ ယတ္ထ ကတ္တုကာရကကမ္မကာရကာဒိဝါစကော, တတ္ထ ပုလ္လိင်္ဂေါပိ ဟောတိ, ယေဘုယျေန နပုံသကလိင်္ဂေါပိ. ယတ္ထ ပန ရဇတကာရကမ္မကာရလောဟကာရာဒိဝါစကော, တတ္ထ ပုလ္လိင်္ဂေါ ဧဝ. ကာရာပေတီတိ ကာရာပကော. ကရံ, ကုဗ္ဗံ, ကြုဗ္ဗံ, ကရောန္တော, ကုဗ္ဗန္တော, ကုဗ္ဗာနော, ကုရုမာနော, ပကြုံဗ္ဗမာနော[Pg.276]. ကာရိကာ, ကာရာပိကာ. ကရောန္တီ, ကုဗ္ဗန္တီ. ကာရကံ ကုလံ. ကာရာပကံ, ကရောန္တံ, ကုဗ္ဗန္တံ, ကုရုမာနံ. သင်္ခါရော, ပရိက္ခာရော, ပရိက္ခတော, ပုရက္ခတော, ကရဏံ, ကြိယာ. အက္ခရစိန္တကာ ပန ‘‘ကြိယာ’’ ဣစ္စပိ ပဒမိစ္ဆန္တိ. ဧတ္ထ ကြိယာသဒ္ဒေါ ကိဉ္စာပိ ‘‘အဖလာ ဟောတိ အကြုဗ္ဗတော’’တိအာဒီသု ကကာရရကာရသံယောဂဝန္တာနိ ပဒါနိ ဒိဿန္တိ, တထာပိ က္လေသသဒ္ဒေါ ဝိယ ပါဠိယံ န ဒိဿတိ, အဒိဿမာနောပိ သော အဋ္ဌကထာစရိယာဒီဟိ ဂရူဟိ ဂဟိတတ္တာ ဂဟေတဗ္ဗောဝ. တထာ ဟိ ‘‘ကြိယာကြိယာပတ္တိဝိဘာဂဒေသကော’’တိအာဒိကာ သဒ္ဒရစနာ ဒိဿတိ. जे स्वतःचे फळ निर्माण करते ते 'कारण' होय. जो करतो तो 'कर्ता', अशा प्रकारे 'कारको' (पुल्लिंगी) किंवा 'कारकं' (नपुंसकलिंगी) शब्द बनतो. येथे 'कारक' शब्द जेथे कर्तृकारक, कर्मकारक इत्यादींचा वाचक असतो, तेथे तो पुल्लिंगी देखील असतो आणि बहुतांश करून नपुंसकलिंगी देखील असतो. परंतु जेथे तो सुवर्णकार, चर्मकार, लोहकार इत्यादींचा वाचक असतो, तेथे तो केवळ पुल्लिंगीच असतो. जो करवून घेतो तो 'कारापको' (करवून घेणारा). करं, कुब्बं, क्रुब्बं, करन्तो, कुब्बन्तो, कुब्बानो, कुरुमानो, पक्रुम्बमानो (हे सर्व 'करणारा' या अर्थाचे कृदन्त शब्द आहेत). कारिका, कारापिका (स्त्रीलिंगी रूपे). करन्ती, कुब्बन्ती. कारकं कुलं (करणारे कुल - नपुंसकलिंगी). कारापकं, करन्तं, कुब्बन्तं, कुरुमानं. सङ्खारो (संस्कार), परिक्खारो (परिष्कार/उपकरण), परिक्खतो (वेढलेला), पुरक्खतो (सन्मानित/पुढे केलेला), करणं (करण), क्रिया. व्याकरणकार (अक्षरचिंतक) मात्र 'क्रिया' अशा पदाची इच्छा करतात (हे पद स्वीकारतात). येथे 'क्रिया' शब्द, जरी "अफला होति अक्रुब्बतो" (न करणाऱ्याचे कर्म निष्फळ होते) इत्यादींमध्ये 'क' आणि 'र' च्या संयोगाने युक्त असलेली पदे दिसत असली, तरी 'क्लेस' (क्लेश) शब्दाप्रमाणे पाळीमध्ये थेट दिसत नाही; तरीही तो दिसत नसला तरी अट्ठकथाचार्यांसारख्या आदरणीय गुरूंनी स्वीकारलेला असल्यामुळे तो स्वीकारलाच पाहिजे. कारण "क्रियाक्रियापत्तिविभागदेसको" (क्रिया आणि क्रियापत्तीच्या विभागाचा उपदेश करणारा) अशी शब्दरचना दिसून येते. ကာတုံ, ကတ္တုံ. ကာတဝေ, ကာရေတုံ. ကတွာ, ကတွာန, ကာတုန, ကရိတွာ, ကရိတွာန, ကစ္စ, အဓိကစ္စ, ကရိယ, ကရိယာန, ပုရက္ခိတွာ, ကာရေတွာ. အညာနိပိ တုမန္တာဒီနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. कातुं, कत्तुं (करण्यासाठी). कातवे, कारेतुं (करवून घेण्यासाठी). कत्वा, कत्वान, कातुन, करित्वा, करित्वान, कच्च, अधिकच्च, करिय, करियान, पुरक्खित्वा, कारेत्वा (हे सर्व 'करून' किंवा 'करवून' या अर्थाचे पूर्वकालवाचक धातुसाधित अव्यय आहेत). इतरही 'तुमुन्' (तुं-प्रत्ययान्त) इत्यादी प्रत्यय जोडावेत. တတြ ကစ္စာတိ ကတွာ. အဓိကစ္စာတိ အဓိကံ ကတွာ. အက္ခရစိန္တကာ ပန သဒ္ဒသတ္ထနယံ နိဿာယ ‘‘အဓိကိစ္စ’’ ဣတိ ရူပံ ဣစ္ဆန္တိ, မယံ ပနေတာဒိသံ ရူပံ ပါဠိယာ အနုကူလံ န ဟောတီတိ န ဣစ္ဆာမ. တထာ ဟိ ထေရိကာဂါထာယံ ဂေါတမိယာ ပရိနိဗ္ဗာနဝစနေ ‘‘ပဒက္ခိဏံ ကစ္စ နိပစ္စ ပါဒေ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. တတ္ထ ဟိ ပဒက္ခိဏံ ကတွာတိ အတ္ထော. ကစ္စာတိ ပဒဿ ဒဿနေန အဓိကစ္စာတိ ပဒမ္ပိ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ, ဧသ နယော အညတြာပိ ယထာရဟံ ဝေဒိတဗ္ဗော. त्यामध्ये "कच्च" म्हणजे 'करून' (कत्वा). "अधिकच्च" म्हणजे 'अधिक करून' (अधिकं कत्वा). व्याकरणकार (अक्षरचिंतक) मात्र व्याकरणशास्त्राच्या नियमांचा आधार घेऊन "अधिकिच्च" अशा रूपाची इच्छा करतात (ते स्वीकारतात), परंतु आम्ही असे रूप पाळी भाषेला अनुकूल नसल्यामुळे ते स्वीकारत नाही. कारण थेरीगाथेमध्ये महाप्रजापती गोतमी यांच्या परिनिर्वाण प्रसंगाच्या वचनात "पदक्खिणं कच्च निपच्च पादे" अशी पाळी रचना आढळते. तेथे "प्रदक्षिणा करून" (पदक्खिणं कत्वा) असाच अर्थ आहे. "कच्च" या पदाच्या दर्शनाने "अधिकच्च" हे पद देखील सिद्धच होते, हाच नियम इतर ठिकाणीही योग्यतेनुसार समजून घ्यावा. ဣဒါနိ ကရောတိဿ ဓာတုဿ အပ္ပမတ္တကံ အတ္ထာတိသယယောဂံ ကထယာမ – တဏှင်္ကရော. ကာရဏာ. ဖရုသာဟိ ဝါစာဟိ ပကြုဗ္ဗမာနော. သန္တေ န ကုရုတေ ပိယန္တိ. आता आपण 'करोति' (कृ) धातूच्या काही विशेष अर्थांच्या प्रयोगांविषयी सांगू या - तण्हङ्करो (तृष्णा नष्ट करणारा), कारणा (हिंसा करणे), फरुसाहि वाचाही पक्रुम्बमानो (कठोर शब्दांनी पीडा देणे/हिंसा करणे), सन्ते न कुरुते पियं (सज्जनांना प्रिय मानत नाही). တတြ [Pg.277] တဏှင်္ကရောတိ ဝေနေယျာနံ တဏှံ လောဘံ ကရောတိ ဟိံသတီတိ တဏှင်္ကရော. အထ ဝါ ရူပကာယဓမ္မကာယသမ္ပတ္တိယာ အတ္တနိ သကလလောကဿ တဏှံ သိနေဟံ ကရောတိ ဇနေတီတိ တဏှင်္ကရော. ကာရဏာတိ ဟိံသနာ. ပကြုဗ္ဗမာနောတိ ဟိံသမာနော. သန္တေ န ကုရုတေ ပိယန္တိ သပ္ပုရိသေ အတ္တနော ပိယေ ဣဋ္ဌေ ကန္တေ မနာပေ န ကရောတီတိ အတ္ထော. အထ ဝါ ပိယံ ပိယာယမာနော တုဿမာနော မောဒမာနော သန္တေ န ကုရုတေ န သေဝတီတိ အတ္ထော. ယထာ ‘‘ရာဇာနံ သေဝတီ’’တိ ဧတသ္မိံ အတ္ထေ ရာဇာနံ ပိယံ ကုရုတေတိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ မန္တေန္တိ, ဒုလ္လဘာယံ နီတိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. त्यामध्ये "तण्हङ्करो" म्हणजे विनेय जनांची (उपदेश देण्यास योग्य लोकांची) तृष्णा किंवा लोभ नष्ट करतो (करोति = हिंसति/नष्ट करतो), म्हणून तो 'तण्हङ्करो' (तृष्णा नष्ट करणारा - बुद्ध) होय. अथवा, आपल्या रूपकाय आणि धम्मकाय यांच्या समृद्धीने संपूर्ण जगामध्ये स्वतःविषयी तृष्णा म्हणजे स्नेह निर्माण करतो (जनयति), म्हणून तो 'तण्हङ्करो' होय. "कारणा" म्हणजे हिंसा करणे. "पक्रुम्बमानो" म्हणजे हिंसा करणारा (पीडा देणारा). "सन्ते न कुरुते पियं" म्हणजे सज्जनांना आपले प्रिय, इष्ट, कांत किंवा मनपसंत करत नाही (त्यांच्याशी जवळीक साधत नाही) असा अर्थ आहे. अथवा, प्रिय गोष्टीची इच्छा करणारा, संतुष्ट होणारा आणि आनंदित होणारा मनुष्य सज्जनांची सेवा करत नाही (सज्जनांचा सहवास करत नाही) असा अर्थ आहे. ज्याप्रमाणे "राजाची सेवा करतो" या अर्थामध्ये "राजाला प्रिय करतो" असे व्याकरणकार मानतात, हा दुर्मिळ नियम चांगल्या प्रकारे मनात धारण केला पाहिजे. ဧတ္ထ စ ပရိက္ခာရသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော နီယတေ, ‘‘ပရိက္ခာရောတိ သတ္တဟိ နဂရပရိက္ခာရေဟိ သုပရိက္ခိတ္တံ ဟောတီ’’တိအာဒီသု ပရိဝါရော ဝုစ္စတိ. ‘‘ရထော သေတပရိက္ခာရော, ဈာနက္ခော စက္ကဝီရိယော’’တိအာဒီသု အလင်္ကာရော. ‘‘ယေ စိမေ ပဗ္ဗဇိတေန ဇီဝိတပရိက္ခာရာ သမုဒါနေတဗ္ဗာ’’တိအာဒီသု သမ္ဘာရော. ဧတ္ထေတဉှိ ဝုစ္စတိ – आणि येथे 'परिक्खार' (परिष्कार/साधन) शब्दाचा अर्थ स्पष्ट केला जात आहे - 'परिक्खारोति सत्तहि नगरपरिक्खारेहि सुपरिक्खित्तं होती' (सात नगर-परिष्कारांनी चांगल्या प्रकारे वेढलेले असते) इत्यादींमध्ये 'परिवारा'ला (परिवृत असणे) परिक्खार म्हटले आहे. 'रथो सेतपरिक्खारो, झानक्खो चक्कवीरियो' (पांढऱ्या परिष्काराने युक्त रथ, ध्यानरूपी अक्ष आणि वीर्यरूपी चाके असलेला) इत्यादींमध्ये 'अलंकारा'ला परिक्खार म्हटले आहे. 'ये चिमे पब्बजितेन जीवितपरिक्खारा समुदानेतब्बा' (प्रव्रजिताने जे हे जीवनोपयोगी परिष्कार गोळा केले पाहिजेत) इत्यादींमध्ये 'संभारा'ला (साहित्याला) परिक्खार म्हटले आहे. येथेच हे म्हटले आहे - သာသနညူဟိ ဝိညူဟိ, ပရိက္ခာရောတိ သာသနေ; ပရိဝါရော အလင်္ကာရော, သမ္ဘာရော စ ပဝုစ္စတိ. शासनाचा बोध असणाऱ्या विद्वानांद्वारे शासनात 'परिक्खार' हा परिवार, अलंकार आणि संभार (साहित्य) असा म्हटला जातो. ဇာဂရ နိဒ္ဒက္ခယေ. ဇာဂရောတိ. ဇာဂရံ. ဒီဃာ ဇာဂရတော ရတ္တိ. जागर (जागे राहणे) हा निद्राक्षय (झोप नष्ट होणे) या अर्थात आहे. जागोरोति (जागा राहतो). जागरं (जागणे). 'दीघा जागरतो रत्ति' (जागणाऱ्यासाठी रात्र दीर्घ असते). တနာဒီ ဧတ္တကာ ဒိဋ္ဌာ, ဓာတဝေါ မေ ယထာဗလံ; သုတ္တေသွညေပိ ပေက္ခိတွာ, ဂဏှဝှော အတ္ထယုတ္တိတောတိ. तनावैरे (तनादिगणाचे) एवढे धातू माझ्या यथाशक्तीनुसार पाहिले गेले आहेत; इतर सूत्रांमध्येही पाहून अर्थयुक्त ग्रहण करावे. တနာဒိဂဏောယံ. हा तनादिगण आहे. ရုဓာဒိဆက္ကံ [Pg.278] ဝိဝိဓတ္ထသာရံ,မတိင်္ကရံ ဝိညုဇနာဓိရာမံ; ဥဠာရဆန္ဒေဟိ သုသေဝနီယံ,သုဝဏ္ဏဟံသေဟိ သုစိံဝ ဌာနံ. विविध अर्थांचे सार असलेला, बुद्धी वाढवणारा, विद्वानांना आनंद देणारा, उदार छंदांनी सुसेव्य असलेला हा रुधादिषट्क (रुधादि सहा वर्ग), सुवर्णहंसांनी पवित्र स्थानाचे सेवन करावे तसा सेवनीय आहे. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसहित नऊ अंगांच्या त्रिपिटकाच्या वचनपद्धतींमध्ये विद्वानांच्या ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ရုဓာဒိဆက္ကံ कुशलतेसाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' ग्रंथातील रुधादिषट्क နာမ नावाचा သတ္တရသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. सतरावा परिच्छेद समाप्त. ၁၈. စုရာဒိဂဏပရိဒီပန १८. चुरादिगण-प्रदीपन (चुरादिगणाचे स्पष्टीकरण) ဣတော ပရံ ပဝက္ခာမိ, ပစုရတ္ထဟိတက္ကရံ; စုရာဒိကဂဏနာမံ, နာမတော အဋ္ဌမံ ဂဏံ. यानंतर मी विपुल अर्थ आणि हितकारक अक्षरांनी युक्त, नावावरून आठवा असलेला 'चुरादिगण' सांगेन. စုရ ထေယျေ. ထေနနံ ထေယျံ, စောရိကာတိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. တသ္မိံ ထေယျေ စုရဓ္တု ဝတ္တတိ. စောရေတိ, စောရယတိ, စောရော, စောရီ, စောရိကာ, စောရေတု, စောရယိတုံ, စောရေတွာ, စောရယိတွာ. ကတ္တုတ္ထေသု ဏေဏယတာ စုရာဒိဂဏလက္ခဏံ. ကာရိတေ – စောရာပေတိ, စောရာပယတိ, စောရာပေတုံ, စောရာပယိတုံ, စောရာပေတွာ, စောရာပယိတွာ. ကမ္မေဓနံ စောရေဟိ စောရိယတိ, စောရိတံ ဓနံ. ဧသ နယော သဗ္ဗတ္ထ. चुर (चुर्) धातू थेय्य (चोरी करणे) या अर्थात आहे. थेननं म्हणजे थेय्यं, ज्याला चोरिका (चोरी) म्हटले जाते. त्या चोरीच्या अर्थात चुर धातू वर्ततो. चोरेति, चोरयति (चोरी करतो), चोरो (चोर - पु.), चोरी (चोर - स्त्री.), चोरिका (चोरी), चोरेतु, चोरयितुं (चोरी करण्यासाठी), चोरेत्वा, चोरयित्वा (चोरी करून). कर्तृवाच्य अर्थांमध्ये 'णे' आणि 'णय' प्रत्यय लागणे हे चुरादिगणाचे लक्षण आहे. कारित (प्रयोजक) रूपात - चोरापेति, चोरापयति (चोरी करवतो), चोरापेतुं, चोरापयितुं (चोरी करवण्यासाठी), चोरापेत्वा, चोरापयित्वा (चोरी करवून). कर्मणी प्रयोगात - चोरांकडून धन चोरले जाते, चोरलेले धन. हाच नियम सर्वत्र लागू होतो. ကကာရန္တဓာတု ककारान्त धातू လောက ဒဿနေ. လောကေတိ, လောကယတိ, ဩလောကေတိ, ဩလောကယတိ, ဥလ္လောကေတိ, ဥလ္လောကယတိ, အပလောကေတိ, အပလောကယတိ, အာလောကေတိ, အာလောကယတိ, ဝိလောကေတိ, ဝိလောကယတိ. လောကော, အာလောကော, လောကနံ, ဩလောကနံ, ဥလ္လောကနံ, အာလောကနံ, ဝိလောကနံ, အပလောကနံ, အဝလောကနံ. ဩလောကေတုံ, ဩလောကယိတုံ, ဩလောကေတွာ, ဩလောကယိတွာ. ကာရိတေ ပန ‘‘ဩလောကာပေတိ, ဩလောကာပယတိ, ဩလောကာပေတုံ, ဩလောကာပယိတုံ, ဩလောကာပေတွာ[Pg.279], ဩလောကာပယိတွာ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဧသ နယော သဗ္ဗတ္ထာပိ. लोक (लोक्) धातू दर्शन (पाहणे) या अर्थात आहे. लोकेति, लोकयति (पाहतो), ओलोकेति, ओलोकयति (खाली पाहतो/अवलोकन करतो), उल्लोकेति, उल्लोकयति (वर पाहतो), अपलोकेति, अपलोकयति (परवानगी घेतो/निरोप घेतो), आलोकेति, आलोकयति (समोर पाहतो/आलोकित करतो), विलोकेति, विलोकयति (पाहतो/निरीक्षण करतो). लोको (लोक/जग), आलोको (प्रकाश), लोकनं (पाहणे), ओलोकनं (अवलोकन करणे), उल्लोकनं (वर पाहणे), आलोकनं (समोर पाहणे), विलोकनं (निरीक्षण करणे), अपलोकनं (परवानगी घेणे), अवलोकनं (अवलोकन करणे). ओलोकेतुं, ओलोकयितुं (पाहण्यासाठी), ओलोकेत्वा, ओलोकयित्वा (पाहून). कारित (प्रयोजक) रूपात मात्र 'ओलोकापेति, ओलोकापयति, ओलोकापेतुं, ओलोकापयितुं, ओलोकापेत्वा, ओलोकापयित्वा' इत्यादी रूपे जोडावीत. हाच नियम सर्वत्र लागू होतो. တတ္ထ လောကောတိ တယော လောကာ သင်္ခါရလောကော သတ္တလောကော ဩကာသလောကောတိ. တတ္ထ ‘‘ဧကော လောကော သဗ္ဗေ သတ္တာ အာဟာရဋ္ဌိတိကာ’’တိ အာဂတဋ္ဌာနေ သင်္ခါရလောကော ဝေဒိတဗ္ဗော. ‘‘သဿတော လောကော’တိ ဝါ ‘အသဿတော လောကော’တိ ဝါ’’တိ အာဂတဋ္ဌာနေ သတ္တလောကော. तेथे 'लोक' म्हणजे तीन लोक आहेत - संस्कारलोक, सत्त्वलोक आणि अवकाशलोक. त्यापैकी 'एको लोको सब्बे सत्ता आहारट्ठितिका' (एक लोक म्हणजे सर्व प्राणी आहारावर टिकून आहेत) या आलेल्या ठिकाणी 'संस्कारलोक' समजावा. 'सस्सतो लोको' (लोक शाश्वत आहे) किंवा 'असस्सतो लोको' (लोक अशाश्वत आहे) या आलेल्या ठिकाणी 'सत्त्वलोक' समजावा. ‘‘ယာဝတာ စန္ဒိမသူရိယာ ပရိဟရန္တိ,ဒိသာ ဘန္တိ ဝိရောစမာနာ; တာဝ သဟဿဓာ လောကော,ဧတ္ထ တေ ဝတ္တတေ ဝသော’’တိ “जोपर्यंत चंद्र आणि सूर्य फिरतात, आणि दिशा प्रकाशमान होऊन चमकतात, तोपर्यंत हजार पटीने असलेला हा लोक (विश्व) आहे, येथे तुझा अधिकार चालतो.” အာဂတဋ္ဌာနေ ဩကာသလောကော. या आलेल्या ठिकाणी 'अवकाशलोक' समजावा. အထ ဝါ လောကောတိ တိဝိဓော လောကော ကိလေသလောကော ဘဝလောကော ဣန္ဒြိယလောကောတိ. တတ္ထ ရာဂါဒိကိလေသဗဟုလတာယ ကာမာဝစရသတ္တာ ကိလေသလောကော. ဈာနာဘိညာပရိဗုဒ္ဓိယာ ရူပါဝစရသတ္တာ ဘဝလောကော. အာနေဉ္ဇသမာဓိဗဟုလတာယ ဝိသဒိန္ဒြိယတ္တာ အရူပါဝစရသတ္တာ ဣန္ဒြိယလောကော. အထ ဝါ ကိလိဿနံ ကိလေသော, ဝိပါကဒုက္ခန္တိ အတ္ထော. တသ္မာ ဒုက္ခဗဟုလတာယ အပါယေသု သတ္တာ ကိလေသလောကော. တဒညေ သတ္တာ သမ္ပတ္တိဘဝဘာဝတော ဘဝလောကော. တတ္ထ ယေ ဝိမုတ္တိပရိပါစကေဟိ ဣန္ဒြိယေဟိ သမန္နာဂတာ သတ္တာ, သော ဣန္ဒြိယလောကောတိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. अथवा 'लोक' हा तीन प्रकारचा आहे - क्लेशलोक, भवलोक आणि इंद्रियलोक. त्यापैकी राग (आसक्ती) इत्यादी क्लेशांच्या बहुलतेमुळे कामावचर प्राणी हे 'क्लेशलोक' आहेत. ध्यान आणि अभिज्ञा यांच्या जागृतीमुळे रूपावचर प्राणी हे 'भवलोक' आहेत. आणेञ्ज (अचल) समाधीच्या बहुलतेमुळे आणि स्पष्ट इंद्रियांमुळे अरूपावचर प्राणी हे 'इंद्रियलोक' आहेत. अथवा क्लेश म्हणजे क्लेशयुक्त होणे, ज्याचा अर्थ विपाकदुःख (परिणामी दुःख) असा आहे. म्हणून दुःखाच्या बहुलतेमुळे अपाय (दुर्गती) मधील प्राणी हे 'क्लेशलोक' आहेत. त्यांच्याव्यतिरिक्त इतर प्राणी संपत्ती आणि भवाच्या अस्तित्वामुळे 'भवलोक' आहेत. त्यामध्ये जे विमुक्तीला परिपक्व करणाऱ्या इंद्रियांनी युक्त प्राणी आहेत, तो 'इंद्रियलोक' समजावा. ဇာတကဋ္ဌကထာယံ ပန – जातक-अट्ठकथेत मात्र - ‘‘သင်္ခါရလောကော သတ္တလောကော ဩကာသလောကော ခန္ဓလောကော အာယတနလောကော ဓာတုလောကောတိ [Pg.280] အနေကဝိဓော လောကော. ဧတ္ထ ‘ဧကော လောကော သဗ္ဗေ သတ္တာ အာဟာရဋ္ဌိတိကာ…ပေ… အဋ္ဌာရသ လောကာ အဋ္ဌာရသ ဓာတုယော’တိ ဧတ္ထ သင်္ခါရလောကော ဝုတ္တော. ခန္ဓလောကာဒယော တဒန္တောဂဓာယေဝ. ‘အယံ လောကော ပရော လောကော ဗြဟ္မလောကော သဒေဝကော’တိအာဒီသု ပန သတ္တလောကော ဝုတ္တော. ‘ယာဝတာ စန္ဒိမသူရိယာ ပရိဟရန္တိ, ဒိသာ ဘန္တိ ဝိရောစမာနာ. တာဝ သဟဿဓာ လောကော, ဧတ္ထ တေဝတ္တတေ ဝသော’တိ ဧတ္ထ ဩကာသလောကော ဝုတ္တော’’တိ ဝုတ္တံ. “संस्कारलोक, सत्त्वलोक, अवकाशलोक, स्कंधलोक, आयतनलोक आणि धातूलोक असा अनेक प्रकारचा लोक आहे. येथे 'एको लोको सब्बे सत्ता आहारट्ठितिका...पे... अट्ठारस लोका अट्ठारस धातुयो' (एक लोक म्हणजे सर्व प्राणी आहारावर टिकून आहेत...पे... अठरा लोक म्हणजे अठरा धातू) यामध्ये 'संस्कारलोक' सांगितला आहे. स्कंधलोक इत्यादींचा त्यातच अंतर्भाव होतो. 'अयं लोको परो लोको ब्रह्मलोको सदेवको' (हा लोक, परलोक, देवांसह ब्रह्मलोक) इत्यादींमध्ये 'सत्त्वलोक' सांगितला आहे. 'यावता चन्दिमसूरिया परिहरन्ति, दिसा भन्ति विरोचमाना। ताव सहस्सधा लोको, एत्थ तेvअत्तते वसो' यामध्ये 'अवकाशलोक' सांगितला आहे,” असे म्हटले आहे. အတ္ထတော ပန ဣန္ဒြိယဗဒ္ဓါနံ ခန္ဓာနံ သမူဟော သန္တာနော စ သတ္တလောကော, ရူပါဒီသု သတ္တဝိသတ္တတာယ သတ္တော, လောကိယတိ ဧတ္ထ ကုသလာကုသလံ တဗ္ဗိပါကော စာတိ. အနိန္ဒြိယဗဒ္ဓါနံ ရူပါနံ သမူဟော သန္တာနော စ ဩကာသလောကော, လောကိယန္တိ ဧတ္ထ တသာ ထာဝရာ စ, တေသဉ္စ ဩကာသဘူတောတိ, တဒါဓာရဏတာယ ဟေသ ‘‘ဘာဇနလောကော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. ဒုဝိဓောပိ စေသ ရူပါဒိဓမ္မေ ဥပါဒါယ ပညတ္တတ္တာ ဥပါဒါပညတ္တိဘူတော အပရမတ္ထသဘာဝေါ သပ္ပစ္စယေ ပန ရူပါရူပဓမ္မေ ဥပါဒါယ ပညတ္တတ္တာ တဒုဘယဿာပိ ဥပါဒါနာနံ ဝသေန ပရိယာယတော ပစ္စယာယတ္တဝုတ္တိတာ ဥပစရိတဗ္ဗာ, တဒုဘယေ ခန္ဓာ သင်္ခါရလောကော, ပစ္စယေဟိ သင်္ခရိယန္တိ, လုဇ္ဇန္တိ ပလုဇ္ဇန္တိ စာတိ ဧတ္ထ ပစ္စယာယတ္တဝုတ္တိတာယ မဂ္ဂဖလဓမ္မာနမ္ပိ သတိပိ လုဇ္ဇနပလုဇ္ဇနတ္တေ တေဘူမိကဓမ္မာနံယေဝ ‘‘လောကော’’တိ အဓိပ္ပေတတ္တာ နတ္ထိ လောကတာပဇ္ဇနံ. တထာ ဟိ တေ ‘‘လောကုတ္တရာ’’တိ ဝုတ္တာ. अर्थाच्या दृष्टीने मात्र, इंद्रियांशी बद्ध असलेल्या स्कंधांचा समूह आणि प्रवाह म्हणजे 'सत्त्वलोक' होय; रूप इत्यादींमध्ये आसक्त (सत्त-विसत्त) असल्यामुळे त्याला 'सत्त्व' म्हणतात, आणि येथे कुशल-अकुशल व त्याचा विपाक (परिणाम) पाहिला जातो (लोकियति) म्हणून तो लोक आहे. इंद्रियांशी बद्ध नसलेल्या रूपांचा समूह आणि प्रवाह म्हणजे 'अवकाशलोक' होय; येथे त्रस (चल) आणि स्थावर (अचल) प्राणी राहतात आणि तो त्यांच्यासाठी अवकाश (स्थान) स्वरूप आहे, त्याच्या आधारभूततेमुळे याला 'भाजनलोक' (पात्ररूप लोक) असेही म्हणतात. हे दोन्ही प्रकार रूप इत्यादी धर्मांवर अवलंबून प्रज्ञप्त (प्रकट) केल्यामुळे 'उपादा-प्रज्ञप्ति' स्वरूप आणि अपरमार्थ-स्वभाव (काल्पनिक) आहेत. परंतु सप्रत्यय (कारणांसह) रूप आणि अरूप धर्मांवर अवलंबून प्रज्ञप्त केल्यामुळे, त्या दोन्हीच्या उपादानाच्या (ग्रहणाच्या) वशाने पर्यायाने प्रत्ययाधीन (कारणावर अवलंबून असणारी) वृत्ती मानली पाहिजे. त्या दोन्हीमधील स्कंध म्हणजे 'संस्कारलोक' होय, कारण ते प्रत्ययांद्वारे (कारणांद्वारे) संस्कृत (निर्मित) होतात, नष्ट होतात (लुज्जन्ति) आणि पूर्णपणे नष्ट होतात (पलुज्जन्ति). येथे प्रत्ययाधीन वृत्तीमुळे मार्ग आणि फल धर्मांचा नाश व विनाश होत असला, तरी केवळ त्रिभूमिक (तीन भूमींमधील) धर्मांनाच 'लोक' म्हणून अभिप्रेत धरल्यामुळे, त्यांच्यात लोकत्व येत नाही. म्हणूनच त्यांना 'लोकोत्तर' (लोकाच्या पलीकडचे) म्हटले गेले आहे. အာလောကောတိ ရသ္မိ, အာလောကေန္တိ ဧတေန ဘုသော ပဿန္တိ ဇနာ စက္ခုဝိညာဏံ ဝါတိ အာလောကော. ဩလောကနန္တိ [Pg.281] ဟေဋ္ဌာ ပေက္ခနံ. ဝိလောကနန္တိ ဥဒ္ဓံ ပေက္ခနံ. အာလောကနန္တိ ပုရတော ပေက္ခနံ. ဝိလောကနန္တိ ဒွီသု ပဿေသု ပေက္ခနံ, ဝိဝိဓာ ဝါ ပေက္ခနံ. အပလောကနန္တိ ‘‘သံဃံ အပလောကေတွာ’’တိအာဒီသု ဝိယ ဇာနာပနံ. အဝလောကနန္တိ ‘‘နာဂါဝလောကိတံ အဝလောကေတွာ’’တိအာဒီသု ဝိယ ပုရိမကာယံ ပရိဝတ္တေတွာ ပေက္ခနံ. ‘‘အာလောကိတေ ဝိလောကိတေ သမ္ပဇာနကာရီ ဟောတီ’’တိ ဧတ္ထာပိ ဘာဝဝသေန အာလောကနံ အာလောကိတံ ဝိလောကနံ ဝိလောကိတန္တိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. 'आलोक' म्हणजे किरण (प्रकाश); ज्याच्याद्वारे लोक स्पष्टपणे पाहतात किंवा जे चक्षुर्विज्ञान आहे, तो 'आलोक' होय. 'ओलोकन' म्हणजे खाली पाहणे. 'विलोकन' म्हणजे वर पाहणे. 'आलोकन' म्हणजे समोर पाहणे. 'विलोकान' म्हणजे दोन्ही बाजूंना पाहणे किंवा विविध प्रकारे पाहणे. 'अपलोकन' म्हणजे 'संघं अपलोकेत्वा' (संघाला कळवून/परवानगी घेऊन) इत्यादींप्रमाणे कळवणे. 'अवलोकन' म्हणजे 'नागावलोकितं अवलोकेत्वा' (हत्तीप्रमाणे वळून पाहून) इत्यादींप्रमाणे शरीराचा पुढचा भाग वळवून पाहणे. 'आलोकिते विलोकिते सम्पजानकारी होती' (समोर पाहताना आणि आजूबाजूला पाहताना सजग राहतो) येथेही भाववाचक अर्थाने आलोकन म्हणजे आलोकित आणि विलोकन म्हणजे विलोकित असा अर्थ घ्यावा. ထက ပဋိဃာတေ. ထကေတိ, ထကယတိ ဒွါရံ ပုရိသော. थक (थक्) धातू प्रतिघात (बंद करणे/अडवणे) या अर्थात आहे. 'थकेति, थकयति द्वारं पुरिसो' (माणूस दार बंद करतो). တက္က ဝိတက္ကေ. တက္ကေတိ, ဝိတက္ကေတိ, ဝိတက္ကယတိ. တက္ကော, ဝိတက္ကော, ဝိတက္ကိတာ. तक्क (तक्क्) धातू वितर्क (विचार करणे) या अर्थात आहे. तक्केति, वितक्केति, वितक्कयति (विचार करतो). तक्को (तर्क), वितक्को (वितर्क), वितक्किता (विचार करणारा). တတ္ထ တက္ကနံ တက္ကော, ဦဟနန္တိ ဝုတ္တံ ဟောတိ, ဧဝံ ဝိတက္ကော. အထ ဝါ ဝိတက္ကေန္တိ ဧတေန, သယံ ဝါ ဝိတက္ကေတိ, ဝိတက္ကနမတ္တမေဝ ဝါ ဧတန္တိ ဝိတက္ကော. ‘‘တက္ကော, ဝိတက္ကော, အပ္ပနာ, ဗျပ္ပနာ, စေတသော အဘိနိရောပနာ’’တိ အဘိဓမ္မေ ပရိယာယသဒ္ဒါ ဝုတ္တာ. ဝိတက္ကေတီတိ ဝိတက္ကိတာ, ပုဂ္ဂလော. ‘‘အဝိတက္ကိတာ မစ္စုမုပဗ္ဗဇန္တီ’’တိ ပါဠိ. तेथे तर्क करणे म्हणजे 'तक्क' (तर्क), विचार करणे (ऊहन) असे म्हटले आहे, अशा प्रकारे 'वितक्क' (वितर्क) होतो. अथवा ज्याच्याद्वारे विचार करतात, किंवा स्वतः विचार करतात, किंवा केवळ विचार करण्याची क्रिया म्हणजे 'वितक्क' होय. अभिधम्मात “तक्को, वितक्को, अप्पना, ब्यप्पना, चेतसो अभिनिरोपना” (तर्क, वितर्क, अर्पणा, व्यर्पणा, चित्ताचे अभिनिरोपण) हे पर्यायी शब्द सांगितले आहेत. जो विचार करतो तो 'वितक्किता' (विचार करणारा), म्हणजेच पुग्गल (व्यक्ती). “अवितक्किता मच्चुमुपब्बजन्ती” (विचार न करणारे मृत्यूच्या स्वाधीन होतात) अशी पाळी आहे. အကိ လက္ခဏေ. လက္ခဏံ သညာဏံ, သဉ္ဇာနနကာရဏန္တိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. အတြိဒံ သလ္လက္ခိတဗ္ဗံ. ယေ ဣမသ္မိံ စုရာဒိဂဏေ အနေကဿရာ အသံယောဂန္တာ ဣကာရာနုဗန္ဓဝသေန နိဒ္ဒိဋ္ဌာ ဓာတဝေါ, တေ ဧဝံဝုတ္တေဟိ ဣမေဟိ တီဟိ လက္ခဏေဟိ သမန္နာဂတာ အာချာတတ္တံ နာမိကတ္တဉ္စ ပါပုဏန္တာ ဧကန္တတော နိဂ္ဂဟီတာဂမေန နိပ္ဖန္နရူပါယေဝ ဘဝန္တိ, န ကတ္ထစိပိ ဝိဂတနိဂ္ဂဟီတာဂမရူပါနိ ဘဝန္တိ. အင်္ကေတိ, အင်္ကယတိ. အင်္ကနံ, အင်္ကော[Pg.282]. သမာသေ ပန ‘‘သသင်္ကော, စက္ကင်္ကိတစရဏော’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'अकि' हा धातू लक्षण (चिन्हांकित करणे) या अर्थात आहे. लक्षण म्हणजे संज्ञा (चिन्ह), ओळखण्याचे कारण असे म्हटले आहे. येथे हे लक्षात घेतले पाहिजे की, या चुरादिगणात जे अनेक स्वर असणारे, असंयोगान्त आणि 'इ' कार अनुबंधाने निर्देशित केलेले धातू आहेत, ते वर सांगितलेल्या या तीन लक्षणांनी युक्त होऊन आख्यात (क्रियापद) आणि नाम रूप प्राप्त करताना निश्चितपणे निग्गहीत (अनुस्वार) आगमानेच सिद्ध रूप बनतात, कुठेही निग्गहीत आगम नसलेली रूपे होत नाहीत. जसे - अङ्केति, अङ्कयति (अंकेति, अंकयति). अङ्कनं (अंकन), अङ्को (अंक). समासात मात्र “ससङ्को” (सशंक), “चक्कङ्कितचरणो” (चक्रांकितचरण) इत्यादी रूपे होतात. သက္က ဝက္က ဘာသနေ. သက္ကေတိ, သက္ကယတိ. ဝက္ကေတိ, ဝက္ကယတိ. 'सक्क' आणि 'वक्क' हे धातू भाषण (बोलणे) या अर्थात आहेत. सक्केति, सक्कयति. वक्केति, वक्कयति. နက္က ဝက္က နာသနေ. နက္ကေတိ, နက္ကယတိ. ဝက္ကေတိ, ဝက္ကယတိ. 'नक्क' आणि 'वक्क' हे धातू नाशन (नाश करणे) या अर्थात आहेत. नक्केति, नक्कतयि. वक्केति, वक्कयति. စက္က စုက္က ဗျထနေ. စက္ကေတိ, စက္ကယတိ. စုက္ကေတိ, စုက္ကယတိ. စက္ကံ. စက္ကန္တိ ကေနဋ္ဌေန စက္ကံ? စက္ကေတိ ဗျထတိ ဟိံသတီတိ အတ္ထေန စက္ကံ. စက္ကသဒ္ဒေါ – 'चक्क' आणि 'चुक्क' हे धातू व्यथन (पीडा देणे/हिंसा करणे) या अर्थात आहेत. चक्केति, चक्कयति. चुक्केति, चुक्कयति. चक्कं (चक्र). 'चक्क' हे कोणत्या अर्थाने 'चक्क' (चक्र) आहे? जे व्यथित करते, हिंसा करते या अर्थाने 'चक्क' आहे. 'चक्क' हा शब्द - သမ္ပတ္တိယံ လက္ခဏေ စ, ရထင်္ဂေ ဣရိယာပထေ; ဒါနေ ရတ္နဓမ္မခုရ-စက္ကာဒီသု ပဒိဿတိ; संपत्ती (समृद्धी), लक्षण, रथाचे अंग (चाक), इरियापथ (चर्या), दान, रत्नचक्र, धम्मचक्र, खुरचक्र इत्यादी अर्थांमध्ये दिसून येतो. ‘‘စတ္တာရိမာနိ ဘိက္ခဝေ စက္ကာနိ ယေဟိ သမန္နာဂတာနံ ဒေဝမနုဿာန’’န္တိအာဒီသု ဟိ အယံ သမ္ပတ္တိယံ ဒိဿတိ. ‘‘ပါဒတလေသု စက္ကာနိ ဇာတာနီ’’တိ ဧတ္ထ လက္ခဏေ. ‘‘စက္ကံဝ ဝဟတော ပဒ’’န္တိ ဧတ္ထ ရထင်္ဂေ. ‘‘စတုစက္ကံ နဝဒွါရ’’န္တိ ဧတ္ထ ဣရိယာပထေ. ‘‘ဒဒ ဘုဉ္ဇ စ မာ စပ္ပမာဒေါ, စက္ကံ ဝတ္တဿု ပါဏိန’’န္တိ ဧတ္ထ ဒါနေ. ‘‘ဒိဗ္ဗံ စက္ကရတနံ ပါတုရဟောသီ’’တိ ဧတ္ထ ရတနစက္ကေ. ‘‘မယာ ပဝတ္တိတံ စက္က’’န္တိ ဧတ္ထ ဓမ္မစက္ကေ. ‘‘ဣစ္ဆာဟတဿ ပေါသဿ, စက္ကံ ဘမတိ မတ္ထကေ’’တိ ဧတ္ထ ခုရစက္ကေ. ‘‘ခုရပရိယန္တေန စေပိ စက္ကေနာ’’တိ ဧတ္ထ ပဟရဏစက္ကေ. ‘‘အသနိဝိစက္က’’န္တိ ဧတ္ထ အသနိမဏ္ဍလေတိ. “भिक्खूहो, ही चार चक्रे (संपत्ती) आहेत, ज्यांनी युक्त असलेल्या देव आणि मनुष्यांना...” इत्यादी वाक्यांमध्ये हा शब्द 'संपत्ती' या अर्थात दिसतो. “पावलांच्या तळव्यांवर चक्रे उत्पन्न झाली आहेत” येथे 'लक्षण' या अर्थात. “वाहून नेणाऱ्याच्या पावलांमागे चाकाप्रमाणे” येथे 'रथाचे अंग' (चाक) या अर्थात. “चार चक्रे आणि नऊ द्वारे असलेले” येथे 'इरियापथ' (शरीर/चर्या) या अर्थात. “दान दे, उपभोग घे, आळस करू नकोस, प्राण्यांसाठी दानचक्र फिरव” येथे 'दान' या अर्थात. “दिव्य चक्ररत्न प्रकट झाले” येथे 'रत्नचक्र' या अर्थात. “माझ्याद्वारे प्रवर्तित केलेले चक्र” येथे 'धम्मचक्र' या अर्थात. “इच्छेने ग्रस्त असलेल्या माणसाच्या डोक्यावर चक्र फिरते” येथे 'खुरचक्र' (तीक्ष्ण चक्र) या अर्थात. “जरी खुरपऱ्यांत (तीक्ष्ण कडा असलेल्या) चक्राने...” येथे 'प्रहार करण्याचे चक्र' (शस्त्र) या अर्थात. “असनिविचक्कं” येथे 'विजेचे मंडल' या अर्थात आहे. တကိ [Pg.283] ဗန္ဓနေ. တင်္ကေတိ, တင်္ကယတိ. 'तकि' हा धातू बंधन (बांधणे) या अर्थात आहे. तङ्केति, तङ्कयति. အက္က ထဝနေ. ထဝနံ ထုတိ. အက္ကေတိ, အက္ကယတိ. အက္ကော. အက္ကောတိ သူရိယော. သော ဟိ မဟာဇုတိတာယ အက္ကိယတိ အဘိတ္ထဝိယတိ တပ္ပသန္နေဟိ ဇနေဟီတိ အက္ကော. တထာ ဟိ တဿ ‘‘နတ္ထိ သူရိယသမာ အာဘာ. ဥဒေတယံ စက္ခုမာ ဧကရာဇာ’’တိအာဒိနာ အဘိက္ခုတိ ဒိဿတိ. 'अक्क' हा धातू थवन (स्तुती करणे) या अर्थात आहे. थवन म्हणजे स्तुती. अक्केति, अक्कयति. अक्को (अर्क). 'अक्को' म्हणजे सूर्य. तो आपल्या महातेजामुळे प्रसन्न झालेल्या लोकांद्वारे 'अक्कीयती' (स्तुतिला पात्र ठरतो) म्हणून तो 'अक्को' आहे. तसेच त्याची “सूर्यासारखी आभा (तेज) नाही. हा चक्षुमान एकराज उदित होत आहे” इत्यादींद्वारे विशेष स्तुती दिसून येते. ဟိက္က ဟိံသာယံ. ဟိက္ကေတိ, ဟိက္ကယတိ. 'हिक्क' हा धातू हिंसा (पीडा देणे) या अर्थात आहे. हिक्केति, हिक्कयति. နိက္က ပရိမာဏေ. နိက္ကေတိ, နိက္ကယတိ. 'निक्क' हा धातू परिमाण (मोजमाप) या अर्थात आहे. निक्केति, nिक्कयति. ဗုက္က ဘဿနေ. ဧတ္ထ သုနခဘဿနံ ဘဿနန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ, န ဝါစာသင်္ခါတံ ဘဿနံ. ဗုက္ကေတိ, ဗုက္ကယတိ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဗုက္ကယတိ သာ စောရေ’’ ဣတိ လောကိယပ္ပယောဂေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. ဘူဝါဒိဂဏေ ပန ‘‘ဗုက္ကတိ သာ’’တိ ရူပံ ဘဝတိ. အညော တု ‘‘ဗုက္က ပရိဘာသနေ’’ ဣတိ ပဌတိ, ဧဝံ ပဌန္တေပိ သုနခဘဿနမေဝါဓိပ္ပေတံ. 'बुक्क' हा धातू भस्सन (भुंकणे) या अर्थात आहे. येथे कुत्र्याचे भुंकणे हेच 'भस्सन' म्हणून घ्यावे, वाणीने केलेले संभाषण नव्हे. बुक्केति, बुक्कयति. येथे “बुक्कयति सा चोरे” (ती कुत्री चोरांवर भुंकते) हा लौकिक प्रयोग समजावा. भूवादिगणात मात्र “बुक्कति सा” असे रूप होते. इतर कोणी “बुक्क परिभासने” (बुक्क हा निर्भर्त्सना करणे या अर्थात) असा पाठ वाचतात, असा पाठ वाचला तरी कुत्र्याचे भुंकणे हाच अर्थ अभिप्रेत आहे. ဒက လက အဿာဒနေ. ဒကေတိ, ဒကယတိ. လကေတိ, လကယတိ. 'दक' आणि 'लक' हे धातू आस्वादन (चव घेणे) या अर्थात आहेत. दकेति, दकयति. लकेति, लकयति. တက္က လောက ဘာသာယံ. တက္ကေတိ, တက္ကယတိ. လောကေတိ, လောကယတိ. 'तक्क' आणि 'लोक' हे धातू भाषा (बोलणे/प्रकाशणे) या अर्थात आहेत. तक्केति, तक्कयति. लोकेति, लोकयति. စိက သိက အာမသနေ. စိကေတိ, စိကယတိ. သိကေတိ, သိကယတိ. 'चिक' आणि 'सिक' हे धातू आमसन (स्पर्श करणे/परामर्श घेणे) या अर्थात आहेत. चिकेति, चिकयति. सिकेति, सिकयति. ကကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ककारान्त धातूंची रूपे समाप्त. ခကာရန္တဓာတု खकारान्त धातू လက္ခ ဒဿနင်္ကေသု. ဒဿနံ ပဿနံ. အင်္ကော လဉ္ဇနံ. လက္ခေတိ, လက္ခယတိ. သလ္လက္ခေတိ, သလ္လက္ခယတိ. လက္ခံ ဝိဇ္ဈတိ ဥသုနာ, လက္ခံ ကရောတိ. 'लक्ख' हा धातू दस्सन (दर्शन/पाहणे) आणि अंक (चिन्हांकित करणे) या अर्थांमध्ये आहे. दस्सन म्हणजे पाहणे. अंक म्हणजे लांछन (चिन्ह लावणे). लक्खेति, लक्खयति. सल्लक्खेति, सल्लक्खयति. “लक्खं विज्झति उसुना” (बाणाने लक्ष्याचा वेध घेतो), “लक्खं करोति” (लक्ष्य करतो). ဂင်္ဂါယ [Pg.284] ဝါလုကာ ခီယေ, ဥဒကံ ခီယေ မဟဏ္ဏဝေ; မဟိယာ မတ္တိကာ ခီယေ, လက္ခေ န မမ ဗုဒ္ဓိယာ. गंगेची वाळू संपू शकते, महासागरातील पाणी संपू शकते, पृथ्वीवरील माती संपू शकते, परंतु माझ्या बुद्धीचे लक्ष्य (ज्ञानविषय) संपू शकत नाही. ကပ္ပလက္ခဏံ. ဂေါလက္ခဏံ. ဣတ္ထိလက္ခဏံ. ဓမ္မာနံ လက္ခဏံ. သလ္လက္ခနာ. ဥပလက္ခနာ. ပစ္စုပလက္ခနာ. လက္ခဓာတုယာ ယုပစ္စယန္တာယ သမာဒိပုဗ္ဗာနံ ရူပါနံ နကာရော ဒန္တဇော. कप्पलक्खणं (कल्पाचे लक्षण), golक्खणं (गाईचे लक्षण), इत्थिलक्खणं (स्त्रीचे लक्षण), धम्मानं लक्खणं (धर्मांचे लक्षण). सल्लक्खना (संलक्षण), उपलक्खना (उपलक्षण), पच्चुपलक्खना (प्रत्युपलक्षण). 'लक्ख' धातूला 'यु' प्रत्यय लागून 'सम' इत्यादी पूर्वपदांसह बनणाऱ्या रूपांमधील 'न' कार दंतव्य असतो. ဘက္ခ အဒနေ. ဘက္ခေတိ, ဘက္ခယတိ. ဘက္ခော နော လဒ္ဓေါ. ဘက္ခယန္တိ မိဂါဓမာ. ဘူဝါဒိဂဏေ ပန ‘‘ဘက္ခတီ’’တိ ရူပံ. 'भक्ख' हा धातू अदन (खाणे) या अर्थात आहे. भक्खेति, भक्खयति. “भक्खो नो लद्धो” (आम्हाला भक्ष्य मिळाले नाही). “भक्खयन्ति मिगाधमा” (अधम प्राणी भक्षण करतात). भूवादिगणात मात्र “भक्खति” असे रूप होते. နက္ခ သမ္ဗန္ဓေ. နက္ခေတိ, နက္ခယတိ. 'नक्ख' हा धातू संबंध (जोडणे) या अर्थात आहे. नक्खेति, नक्खयति. မက္ခ မက္ခနေ. မက္ခေတိ, မက္ခယတိ. မက္ခော, မက္ခီ. တတ္ထ မက္ခောတိ ပရေဟိ ကတဂုဏံ မက္ခေတိ ပိသတီတိ မက္ခော, ဂုဏဓံသနာ. ‘‘မက္ခံ အသဟမာနော’’တိ ဧတ္ထ ပန အတ္တနိ ပရေဟိ ကတံ အဝမညနံ မက္ခောတိ ဝုစ္စတိ. 'मक्ख' हा धातू मक्खन (माखणे/पुसून टाकणे) या अर्थात आहे. मक्खेति, मक्खयति. मक्खो (गुण माखणारा/कृतघ्न), मक्खी. तेथे 'मक्खो' म्हणजे इतरांनी केलेले उपकार जो माखतो (पुसून टाकतो), नष्ट करतो तो 'मक्खो' (गुणनाशक) होय. “मक्खं असहमानो” (अपमान सहन न करणारा) येथे मात्र स्वतःवर इतरांनी केलेल्या अवमानाला 'मक्ख' म्हटले आहे. ယက္ခ ပူဇာယံ. ယက္ခေတိ, ယက္ခယတိ. ယက္ခော. ယက္ခောတိ မဟာနုဘာဝေါ သတ္တော. တထာ ဟိ ‘‘ပုစ္ဆာမိ တံ မဟာယက္ခ, သဗ္ဗဘူတာနမိဿရာ’’တိ ဧတ္ထ သက္ကော ဒေဝရာဇာ ‘‘ယက္ခော’’တိ ဝုတ္တော. အထ ဝါ ယက္ခောတိ ယက္ခယောနိယံ နိဗ္ဗတ္တသတ္တော. သဗ္ဗေပိ ဝါ သတ္တာ ‘‘ယက္ခာ’’တိ ဝုစ္စန္တိ. ‘‘ပရမယက္ခဝိသုဒ္ဓိံ ပညာပေန္တီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ယက္ခသဒ္ဒေါ သတ္တေ ဝတ္တတိ. တထာ ဟိ ယက္ခောပိ သတ္တောပိ ဒေဝေါပိ သက္ကောပိ ခီဏာသဝေါပိ ယက္ခောယေဝ နာမ, မဟာနုဘာဝတာယ ယက္ခိယတိ သရဏဂတေဟိ ဇနေဟိ နာနာပစ္စယေဟိ နာနာဗလီဟိ စ ပူဇိယတီတိ ယက္ခော. 'यक्ख' हा धातू पूजा (पूजणे) या अर्थात आहे. यक्केति, यक्खयति. यक्खो (यक्ष). 'यक्खो' म्हणजे महानुभाव (मोठ्या प्रभावाचा) प्राणी. तसेच “मी तुला विचारतो, हे महायक्ष, सर्व प्राण्यांच्या ईश्वरा!” येथे देवराज सक्क (शक्र) यांना 'यक्ख' म्हटले आहे. अथवा 'यक्ख' म्हणजे यक्षयोनीत उत्पन्न झालेला प्राणी. किंवा सर्वच प्राण्यांना 'यक्ख' म्हटले जाते. “परम यक्षविशुद्धी प्रज्ञापित करतात” येथे 'यक्ख' शब्द प्राण्यांसाठी वापरला आहे. कारण यक्ष असो, प्राणी असो, देव असो, सक्क असो किंवा खीणासव (क्षीणास्रव/अर्हत) असो, तो 'यक्ख'च होय; कारण आपल्या महानुभावामुळे (प्रभावामुळे) शरण आलेल्या लोकांद्वारे विविध प्रत्ययांनी (साधनांनी) आणि विविध बळींनी (पूजेने) तो पूजला जातो (यक्खीयती), म्हणून तो 'यक्खो' आहे. သတ္တေ ဒေဝေ စ သက္ကေ စ, ခီဏာသဝေ စ ရက္ခသေ; ပဉ္စသွေတေသု အတ္ထေသု, ယက္ခသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. प्राणी, देव, सक्क (शक्र), खीणासव (अर्हत) आणि राक्षस, या पाच अर्थांमध्ये 'यक्ख' शब्द वापरला जातो. လက္ခ [Pg.285] အာလောစနေ. လက္ခေတိ, လက္ခယတိ. လက္ခံ ဝိဇ္ဈတိ ဥသုနာ. 'लक्ख' हा धातू आलोचन (पाहणे/लक्ष्य करणे) या अर्थात आहे. लक्खेति, लक्खयति. “लक्खं विज्झति उसुना” (बाणाने लक्ष्याचा वेध घेतो). မောက္ခ အာသနေ. မောက္ခေတိ, မောက္ခယတိ. 'मोक्ख' हा धातू आसन (मुक्त करणे/सोडणे) या अर्थात आहे. मोक्खेति, मोक्खयति. ရုက္ခ ဖာရုဿေ. ဖာရုဿံ ဖရုသဘာဝေါ. ရုက္ခေတိ, ရုက္ခယတိ. သမာသေ ‘‘ရုက္ခကေသော, အတိရုက္ခဝစနော’’တိ ရူပါနိ. ဧတ္ထ စ ‘‘သမဏော အယံ ပါပေါ အတိရုက္ခဝါစော’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ အတိရုက္ခဝါစောတိ အတိဖရုသဝစနောတိ အတ္ထော. 'रुक्ख' हा धातू फारुस्स (परुषता/कठोरता) या अर्थात आहे. फारुस्स म्हणजे कठोर भाव. रुक्खेति, रुक्खयति. समासात “रुक्खकेसो” (कठोर केस असलेला), “अतिरुक्खवचनो” (अतिशय कठोर बोलणारा) अशी रूपे होतात. येथे “समणो अयं पापो अतिरुक्खवाचो” (हा पापी श्रमण अत्यंत कठोर बोलणारा आहे) हे पाळी उदाहरण आहे. तेथे 'अतिरुक्खवाचो' म्हणजे अत्यंत कठोर वचन बोलणारा असा अर्थ आहे. ခကာရန္တဓာတုရူပါနိ. खकारान्त धातूंची रूपे समाप्त. ဂကာရန္တဓာတု गकारान्त धातू လိင်္ဂ စိတ္တီကရဏေ. စိတ္တီကရဏံ ဝိစိတြဘာဝကရဏံ. လိင်္ဂေတိ, လိင်္ဂယတိ, လိင်္ဂံ. ဧတ္ထ လိင်္ဂံ နာမ ဒီဃရဿကိသထူလပရိမဏ္ဍလာဒိဘေဒံ သဏ္ဌာနန္တိ ဂဟဏေ အတီဝ ယုဇ္ဇတိ. တဉှိ နာနပ္ပကာရေဟိ ဝိစိတြံ ဟောတိ, လိင်္ဂီယတိ ဝိစိတ္တံ ကရိယတိ အဝိဇ္ဇာတဏှာကမ္မေဟိ ဥတုနာ ဝါ စုဏ္ဏာဒီဟိ ဝါ သရီရမိတိ လိင်္ဂံ, အဇ္ဈတ္တသန္တာနတိဏရုက္ခာဒိကုဏ္ဍလကရဏ္ဍကာဒီသု ပဝတ္တသဏ္ဌာနဝသေနေတံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. လိင်္ဂသဒ္ဒေါ သဒ္ဒေ သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တေ ဣတ္ထိဗျဉ္ဇနေ ပုရိသဗျဉ္ဇနေ သညာဏေ အာကာရေ စာတိ ဣမေသု အတ္ထေသု ဒိဿတိ. အယဉှိ ‘‘ရုက္ခောတိ ဝစနံ လိင်္ဂ’’န္တိ ဧတ္ထ သဒ္ဒေ ဒိဿတိ. ‘‘သတလိင်္ဂဿ အတ္ထဿာ’’တိ ဧတ္ထ သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိနိမိတ္တေ. ‘‘တေန ခေါ ပန သမယေန အညတရဿ ဘိက္ခုနော ဣတ္ထိလိင်္ဂံ ပါတုဘဝတီ’’တိ ဧတ္ထ ဣတ္ထိဗျဉ္ဇနေ. ‘‘ပုရိသလိင်္ဂနိမိတ္တကုတ္တာကပ္ပာန’’န္တိ ဧတ္ထ ပုရိသဗျဉ္ဇနေ. ‘‘တေန လိင်္ဂေန ဇာနာမ, ဓုဝံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဝိဿတီ’’တိ ဧတ္ထ သညာဏေ[Pg.286]. ‘‘တေဟိ လိင်္ဂေဟိ တေဟိ နိမိတ္တေဟိ တေဟိ အာကာရေဟိ အာဂန္တုကဘာဝေါ ဇာနိတဗ္ဗော ‘‘အာဂန္တုကာ ဣမေ’’တိ ဧတ္ထ အာကာရေ ဒိဿတိ. "लिंग" (liṅga) हे "चित्तीकरण" (cittīkaraṇa - विविध रूप देणे) या अर्थात आहे. चित्तीकरण म्हणजे विचित्रभाव करणे (विविधता आणणे). 'लिंगेति', 'लिंगयति' यापासून 'लिंग' (liṅgaṃ) हा शब्द बनतो. येथे 'लिंग' म्हणजे दीर्घ (लांब), रस्स (लहान), किस (बारीक), थूल (जाड), परिमंडळ (गोलाकार) इत्यादी भेदांचे 'संस्थान' (आकार/रचना) असे ग्रहण करणे अत्यंत योग्य ठरते. कारण ते विविध प्रकारे विचित्र (विविध) असते. अविद्या, तृष्णा आणि कर्म यांच्याद्वारे किंवा ऋतूद्वारे अथवा चूर्ण इत्यादींद्वारे शरीराला 'लिंगीयति' (विचित्र/चिन्हांकित केले जाते) म्हणून ते 'लिंग' होय. हे अध्यात्मसंतान (अंतर्गत प्रवाह), गवत, वृक्ष इत्यादी आणि कुंडल, करंडक इत्यादींमध्ये असलेल्या आकाराच्या स्वरूपात पाहावे. 'लिंग' हा शब्द शब्द (ध्वनी), शब्दाच्या प्रवृत्तीचे निमित्त (कारण), स्त्री-व्यंजन (स्त्री जननेंद्रिय/चिन्ह), पुरुष-व्यंजन (पुरुष जननेंद्रिय/चिन्ह), संज्ञा (चिन्ह/लक्षण) आणि आकार (स्वरूप) या अर्थांमध्ये दिसून येतो. जसे की, "रुक्खो (वृक्ष) हा शब्द लिंग आहे" येथे तो 'शब्द' या अर्थात दिसतो. "शंभर लिंगांच्या अर्थाचा" येथे तो 'शब्दाच्या प्रवृत्तीचे निमित्त' या अर्थात आहे. "त्या वेळी एका भिक्खूच्या शरीरावर स्त्री-लिंग (स्त्रीचे चिन्ह) प्रकट झाले" येथे तो 'स्त्री-व्यंजन' या अर्थात आहे. "पुरुष-लिंग, निमित्त, कुत्त (हावभाव) आणि आकल्प (वेष)" येथे तो 'पुरुष-व्यंजन' या अर्थात आहे. "त्या लिंगावरून (चिन्हावरून) आम्ही जाणतो की, ते नक्कीच बुद्ध होतील" येथे तो 'संज्ञा' (चिन्ह) या अर्थात आहे. "त्या लिंगांनी, त्या निमित्तांनी, त्या आकारांनी त्यांचा आगंतुक भाव (पाहुणे असणे) ओळखावा की 'हे आगंतुक आहेत'" येथे तो 'आकार' या अर्थात दिसतो. သဒ္ဒေ စ တန္နိမိတ္တေ စ, ကာဋကောဋစိကာယ စ; လက္ခဏေ စေဝ အာကာရေ, လိင်္ဂသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. शब्द, त्याचे निमित्त (कारण), स्त्री-पुरुष जननेंद्रिय (व्यंजन), लक्षण आणि आकार या अर्थांमध्ये 'लिंग' हा शब्द प्रवृत्त होतो. မဂ အနွေသနေ. မဂေတိ, မဂယတိ. မိဂေါ, မဂေါ, မဂေါ, မဂယမာနော. मग् (maga) धातू अन्वेषण (शोध घेणे) या अर्थात आहे. 'मगेति', 'मगयति' यापासून 'मिगो' (migo), 'मगो' (mago), 'मगो' (mago), 'मगयमानो' (magayamāno) हे शब्द बनतात. ဧတ္ထ စ ‘‘ယထာ ဗိဠာရော မူသိကံ မဂယမာနော’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. ‘‘မိဂေါ’’တိ စ ‘‘မဂေါ’’တိ စ စတုပ္ပဒေါ ပဝုစ္စတိ. ဧတ္ထ မိဂေါတိ မဂယတိ ဣတော စိတော ဂေါစရံ အနွေသတိ ပရိယေသတီတိ မိဂေါ. ဧဝံ မဂေါ. ဧတ္ထ ဝိသေသတော ဟရိဏ မိဂေါ မိဂေါ နာမ. သာမညတော ပန အဝသေသာပိ စတုပ္ပဒါ ‘‘မိဂေါ’’ ဣစ္စေဝ ဝုစ္စန္တိ. တထာ ဟိ သုသီမဇာတကေ ‘‘ကာဠာ မိဂါ သေတဒန္တာ တဝ ဣမေ, ပရောသဟဿံ ဟေမဇာလာဘိသဉ္ဆန္နာ’’တိ ဧတသ္မိံ ပါဠိပ္ပဒေသေ ဟတ္ထိနောပိ မိဂသဒ္ဒေန ဝုတ္တာ ‘‘ကာဠမိဂါ’’တိ. အထ ဝါ မဂိယတိ ဇီဝိတကပ္ပနတ္ထာယ မံသာဒီဟိ အတ္ထိကေဟိ လုဒ္ဒေဟိ အနွေသိယတိ ပရိယေသိယတီတိ မိဂေါ, အရညဇာတာ သသပသဒဟရိဏေဏေယျာဒယော စတုပ္ပာဒါ, ဧဝံ မဂေါ. ‘‘အတ္ထံ န လဘတေ မဂေါ’’တိ ဧတ္ထ ပန မဂေါ ဝိယာတိ မဂေါ, ဗာလောတိ အတ္ထော. येथे 'जसे मांजर उंदराचा शोध घेते' (yathā biḷāro mūsikaṃ magayamāno) हे पाळी भाषेतील उदाहरण आहे. 'मिगो' आणि 'मगो' हे शब्द चौपाया प्राण्यांसाठी (चतुष्पाद) वापरले जातात. येथे 'मिगो' म्हणजे जो इकडेतिकडे आपल्या भक्ष्याचा (गोचराचा) शोध घेतो, तो 'मिगो' होय. याचप्रमाणे 'मगो' देखील आहे. येथे विशेषतः हरिण या प्राण्याला 'मिगो' (मृग) म्हटले जाते. परंतु सामान्यतः इतर चौपाया प्राण्यांनाही 'मिगो' असेच म्हटले जाते. जसे की, सुसीम जातकामध्ये 'हे तुझे काळे मृग (हत्ती) पांढऱ्या दातांचे आहेत, जे हजारो सुवर्णजाळ्यांनी झाकलेले आहेत' या पाळी उताऱ्यात हत्तींनाही 'मिगो' शब्दाने 'काळा मृग' (काळे हत्ती) असे म्हटले आहे. अथवा, शिकारी लोकांद्वारे आपल्या उपजीविकेसाठी मांसाच्या इच्छेने ज्याचा शोध घेतला जातो, तो 'मिगो' होय; जसे की जंगलात राहणारे ससे, हरिण, काळवीट इत्यादी चौपाया प्राणी. याचप्रमाणे 'मगो' देखील आहे. 'मूर्ख मनुष्य अर्थ (हित) प्राप्त करत नाही' (atthaṃ na labhate mago) या वाक्यात 'मगो' म्हणजे मूर्ख (बाल) असा अर्थ आहे. မဂ္ဂ ဂဝေသနေ. မဂ္ဂေတိ, မဂ္ဂယတိ. မဂ္ဂေါ, မဂ္ဂနံ. मग्ग् (magga) धातू गवेषण (शोध घेणे) या अर्थात आहे. 'मग्गेति', 'मग्गयति' यापासून 'मग्गो' (maggo - मार्ग), 'मग्गनं' (magganaṃ - शोधणे) हे शब्द बनतात. ဧတ္ထ စ မဂ္ဂေါတိ ပဋိပဒါယ စ ပကတိမဂ္ဂဿ စ ဥပါယဿ စ အဓိဝစနံ. ‘‘မဟာဝိဟာရဝါသီနံ, ဝါစနာမဂ္ဂနိဿိတ’’န္တိအာဒီသု ပန ကထာပဗန္ဓောပိ ‘‘မဂ္ဂေါ’’တိ ဝုစ္စတိ. တတြ ပဋိပဒါ ဧကန္တတော ဇာတိဇရာဗျာဓိဒုက္ခာဒီဟိ ပီဠိတေဟိ သတ္တေဟိ ဒုက္ခက္ခယံ နိဗ္ဗာနံ ပါပုဏတ္ထာယ မဂ္ဂိတဗ္ဗော ဂဝေသိတဗ္ဗောတိ မဂ္ဂေါ. ပကတိမဂ္ဂေါ [Pg.287] ပန မဂ္ဂမူဠှေဟိ မဂ္ဂိတဗ္ဗောတိ မဂ္ဂေါ. ပကတိမဂ္ဂမူဠှေဟိ စ ပဋိပဒါသင်္ခါတာရိယမဂ္ဂမူဠှာ ဧဝ ဗဟဝေါ သန္တိ. ပကတိမဂ္ဂေါ ဟိ ကဒါစိ ဧဝ အဒ္ဓိကာနံ မုယှတိ, ‘‘ဧသ မဂ္ဂေါ’’တိ နာယကာ န ဒုလ္လဘာ. အရိယမဂ္ဂေါ ပန သဗ္ဗဒါယေဝ သဗ္ဗလောကဿ မုယှတိ, နာယကာ ပရမဒုလ္လဘာ. တသ္မာ သော ဧဝ အဝိဇ္ဇာသမ္မူဠှေဟိ မဂ္ဂိတဗ္ဗောတိ မဂ္ဂေါ. အညေသံ ပန ဒွိန္နံ ဓာတူနံ ဝသေနပိ အတ္ထံ ဝဒန္တိ ဂရူ ‘‘ကိလေသေ မာရေန္တော ဂစ္ဆတီတိ မဂ္ဂေါ’’တိ. တံ တံ ကိစ္စံ ဟိတံ ဝါ နိပ္ဖာဒေတုကာမေဟိ မဂ္ဂိယတိ ဂဝေသိယတီတိ မဂ္ဂေါ, ဥပါယော. မဂ္ဂသဒ္ဒေါ ဟိ ‘‘အဘိဓမ္မကထာမဂ္ဂံ, ဒေဝါနံ သမ္ပဝတ္တယီ’’တိ ဧတ္ထ ဥပါယေပိ ဝတ္တတိ. တထာ ဟိ အဘိဓမ္မဋီကာယံ ‘‘မဂ္ဂေါတိ ဥပါယော, ခန္ဓာယတနာဒီနံ ကုသလာဒီနဉ္စ ဓမ္မာနံ အဝဗောဓဿ သစ္စပ္ပဋိဝေဓဿေဝ ဝါ ဥပါယဘာဝတော အဘိဓမ္မကထာမဂ္ဂေါ’’တိ ဝုတ္တော, ပဗန္ဓော ဝါ ‘‘မဂ္ဂေါ’’တိ ဝုစ္စတိ. သော ဟိ ဒီဃတ္တာ မဂ္ဂေါ ဝိယာတိ မဂ္ဂေါ, တသ္မာ အဘိဓမ္မကထာပဗန္ဓော အဘိဓမ္မကထာမဂ္ဂေါတိ ဝုတ္တော. ဣဒါနိ ပကတိပဋိပဒါမဂ္ဂါနံ နာမာနိ ကထယာမ. တေသု ပကတိမဂ္ဂဿ – येथे 'मग्गो' (मार्ग) हा शब्द प्रतिपदा (आचरण/मार्ग), प्रकृती मार्ग (साधारण रस्ता) आणि उपाय यांचा वाचक (समानार्थी) आहे. 'महाविहारवासीयांच्या वाचनामार्गावर आधारित' इत्यादी वाक्यांमध्ये कथाप्रबंधालाही 'मग्गो' म्हटले जाते. त्यामध्ये, जन्म, जरा, व्याधी आणि दुःख इत्यादींनी पीडित असलेल्या प्राण्यांनी दुःखाचा क्षय करून निर्वाण प्राप्त करण्यासाठी ज्याचा शोध घेतला पाहिजे, तो 'मग्गो' (प्रतिपदा मार्ग) होय. प्रकृती मार्ग (साधारण रस्ता) म्हणजे जो रस्ता चुकलेल्या प्रवाशांनी शोधायचा असतो, तो 'मग्गो' होय. आणि रस्ता चुकलेल्या प्रवाशांपेक्षा प्रतिपदा नावाचा आर्यमार्ग चुकलेले लोकच अधिक आहेत. कारण प्रकृती मार्ग कधीतरीच प्रवाशांना चुकवतो आणि 'हा मार्ग आहे' असे सांगणारे मार्गदर्शक सहज मिळतात. परंतु आर्यमार्ग हा नेहमीच संपूर्ण जगाला चुकवतो (भ्रमित करतो) आणि त्याचे मार्गदर्शक (बुद्ध) अत्यंत दुर्मिळ असतात. म्हणून अविद्येने मोहित झालेल्यांनी ज्याचा शोध घेतला पाहिजे, तो 'मग्गो' (आर्यमार्ग) होय. इतर दोन धातूंच्या आधारे आचार्य असाही अर्थ सांगतात की, 'जो क्लेशांना मारत जातो, तो मार्ग (मग्गो) होय.' ज्यांना आपले हित किंवा कार्य साध्य करायचे आहे, त्यांच्याद्वारे ज्याचा शोध घेतला जातो, तो 'मग्गो' म्हणजे उपाय होय. 'मग्गो' हा शब्द 'देवांना अभिधम्म कथेचा मार्ग प्रवृत्त केला' या वाक्यात 'उपाय' या अर्थातही वापरला जातो. तसेच अभिधम्मटीकेमध्ये म्हटले आहे की, 'मग्गो म्हणजे उपाय; स्कंध, आयतन इत्यादी आणि कुशल इत्यादी धर्मांच्या आकलनाचा किंवा सत्य साक्षात्काराचा उपाय असल्यामुळे त्याला अभिधम्मकथामार्ग म्हटले आहे', किंवा प्रबंधाला 'मग्गो' म्हटले जाते. तो लांब असल्यामुळे मार्गासारखा असतो, म्हणून अभिधम्मकथाप्रबंधाला 'अभिधम्मकथामार्ग' म्हटले आहे. आता आपण प्रकृती मार्ग आणि प्रतिपदा मार्ग यांच्या नावांची चर्चा करू. त्यापैकी प्रकृती मार्गाची नावे खालीलप्रमाणे आहेत – ‘‘မဂ္ဂေါ ပန္ထော ပထော ပဇ္ဇော, အဉ္ဈသံ ဝဋုမာ’ယနံ; အဒ္ဓါန’မဒ္ဓါ ပဒဝီ, ဝတ္တနိ စေဝ သန္တတီ’’တိ 'मग्गो' (मार्ग), 'पंथो' (पंथ), 'पथो' (पथ), 'पज्जो' (पद्य), 'अंजसं' (अंजस), 'वटुमं' (वाट), 'अयनं' (अयन), 'अद्धानं' (अध्वान), 'अद्धा' (अध्वा), 'पदवी' (पदवी), 'वत्तनी' (वर्तनी) आणि 'संतती' (संतती) ही नावे आहेत. ဣမာနိ နာမာနိ. ပဋိပဒါမဂ္ဂဿ ပန – ही (प्रकृती मार्गाची) नावे आहेत. तर प्रतिपदा मार्गाची (नावे खालीलप्रमाणे आहेत) – ‘‘မဂ္ဂေါ ပန္ထော ပထော ပဇ္ဇော, အဉ္ဇသံ ဝဋုမာ’ယနံ; နာဝ ဥတ္တရ သေတု စ, ကုလ္လော စ ဘိသိ သင်္ကမော’’တိ 'मग्गो' (मार्ग), 'पंथो' (पंथ), 'पथो' (पथ), 'पज्जो' (पद्य), 'अंजसं' (अंजस), 'वटुमं' (वाट), 'अयनं' (अयन), 'नावा' (नाव/नौका), 'उत्तरं' (तारक/पार करणारा), 'सेतु' (सेतू/पूल), 'कुल्लो' (तराफा), 'भिसि' (तट्टा) आणि 'संकमो' (संक्रम/साकव) ही नावे आहेत. အနေကာနိ နာမာနိ. ဧတ္ထ ပန ကေစိ ‘‘နာဝါတိအာဒီနိ ပကတိမဂ္ဂဿ နာမာနီ’’တိ ဝဒန္တိ, တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ, ပကတိမဂ္ဂဿ ကိသ္မိဉ္စိပိ ပါဠိပ္ပဒေသေ ‘‘နာဝါ’’တိအာဒီဟိ ပဒေဟိ ဝုတ္တဋ္ဌာနာဘာဝတော, အဘိဓာနသတ္ထေသု စ ‘‘နာဝါ’’ ဣစ္စာဒိကာနံ တဒဘိဓာနာနံ အနာဂတတ္တာ. अशी अनेक नावे आहेत. येथे काही लोक म्हणतात की 'नावा' (नाव) इत्यादी प्रकृती मार्गाची (साधारण रस्त्याची) नावे आहेत, परंतु ते स्वीकारू नये. कारण पाळी साहित्यात कोणत्याही ठिकाणी प्रकृती मार्गासाठी 'नावा' इत्यादी शब्दांचा वापर केलेला आढळत नाही, आणि अभिधानशास्त्रात (कोशग्रंथात) देखील 'नावा' इत्यादी शब्दांचा त्या अर्थाने उल्लेख आलेला नाही. အယံ [Pg.288] ပနေတ္ထ ဝစနတ္ထော – နာဝါဝိယာတိ နာဝါ, ဥတ္တရန္တိ ဧတေနာတိ ဥတ္တရံ, နာဝါယေဝ ဥတ္တရန္တိ. အယဉှိ နာဝါပရိယာယော ‘‘တရံ, တရဏံ, ပေါတော, ပ္လဝေါ’’တိ. ဣမေပိ တံပရိယာယာယေဝ. ဥတ္တရံ ဝိယာတိ ဥတ္တရံ. သေတု ဝိယာတိ သေတု. ကုလ္လော ဝိယာတိ ကုလ္လော. ဘိသိ ဝိယာတိ ဘိသိ. သင်္ကမော ဝိယ, သင်္ကမန္တိ ဝါ ဧတေနာတိ သင်္ကမော, သဗ္ဗမေတံ အရိယမဂ္ဂဿေဝ နာမံ, န ပကတိမဂ္ဂဿ. တထာ ဟိ ‘‘ဓမ္မနာဝံ သမာရူယှ, သန္တာရေဿံ သဒေဝက’’န္တိ စ, ‘‘ဓမ္မသေတုံ ဒဠှံ ကတွာ, နိဗ္ဗုတော သော နရာသဘော’’တိ စ, ‘‘ကုလ္လော’တိ ခေါ ဘိက္ခဝေ အရိယမဂ္ဂဿေတံ အဓိဝစန’’န္တိ စ ဧဝမာဒိနာ တတ္ထ တတ္ထ ဘဂဝတာ အရိယမဂ္ဂေါ ‘‘နာဝါ’’တိအာဒီဟိ အနေကေဟိ နာမေဟိ ဝုတ္တော. အဋ္ဌကထာစရိယေဟိပိ သုတ္တနိပါတဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဗဒ္ဓါ ဘိသိ သုသင်္ခတာ ဘဂဝါ’’တိ ဧတသ္မိံ ပဒေသေ ဧဝံ အတ္ထသံဝဏ္ဏနာ ကတာ ‘‘ဘိသီတိ ပတ္ထရိတွာ ပုထုလံ ကတွာ ဗဒ္ဓါ ‘ကုလ္လာ’တိ ဝုစ္စတိ လောကေ, အရိယဿ ဝိနယေ ပန အရိယမဂ္ဂေါ’တိ. येथे शब्दांचा अर्थ असा आहे – जी नावेसारखी (नौकेसारखी) असते ती 'नावा' (नाव), ज्याच्याद्वारे पार केले जाते ते 'उत्तरं' (तारक), म्हणजेच नाव हेच पार पाडणारे साधन आहे. 'नावा' या शब्दाचे समानार्थी शब्द 'तरं', 'तरणं', 'पोतो', 'प्लवो' हे आहेत. हे देखील त्याचेच समानार्थी आहेत. जे उत्तर (पार पाडणारे) सारखे असते ते 'उत्तरं'. जे सेतूसारखे (पुलासारखे) असते तो 'सेतु'. जो कुल्लासारखा (तराफ्यासारखा) असतो तो 'कुल्लो'. जो भिसिसारखा (तट्ट्यासारखा) असतो ती 'भिसि'. जो संक्रमासारखा (साकवासारखा) असतो किंवा ज्याच्याद्वारे लोक पार जातात तो 'संकमो' (संक्रम). हे सर्व केवळ आर्यमार्गाचेच नाव आहे, प्रकृती मार्गाचे नाही. तसेच, 'धम्मरूपी नौकेवर आरूढ होऊन मी देवलोकासह सर्वांना पार करीन', 'धम्मरूपी सेतू मजबूत करून तो नरश्रेष्ठ निर्वाण पावला', आणि 'हे भिक्खूंनो, कुल्लो (तराफा) हे आर्यमार्गाचेच नाव आहे' इत्यादी वाक्यांद्वारे भगवंतांनी ठिकठिकाणी आर्यमार्गाला 'नावा' इत्यादी अनेक नावांनी संबोधले आहे. अट्ठकथाचार्यांनी देखील सुत्तनिपात अट्ठकथेमध्ये 'बद्धा bhisi सुसंखता भगवा' या पाठावर अशी अर्थ-स्पष्टता केली आहे की – 'लोकात पसरवून आणि रुंद करून बांधलेल्या तराफ्याला भिसि (कुल्ला) म्हटले जाते, परंतु आर्यांच्या विनयात (शासनात) 'भिसि' म्हणजे आर्यमार्ग होय.' ‘မဂ္ဂေါ ပဇ္ဇော ပထော ပန္ထော, အဉ္ဇသံ ဝဋုမာ’ယနံ; နာဝါ ဥတ္တရ သေတု စ, ကုလ္လော စ ဘိသိ သင်္ကမော; အဒ္ဓါနံ ပဘဝေါ’စ္စေဝ, တတ္ထ တတ္ထ ပကာသိတော’’တိ. 'मग्गो' (मार्ग), 'पज्जो' (पद्य), 'पथो' (पथ), 'पंथो' (पंथ), 'अंजसं' (अंजस), 'वटुमं' (वाट), 'अयनं' (अयन), 'नावा' (नाव), 'उत्तरं' (तारक), 'सेतु' (सेतू), 'कुल्लो' (तराफा), 'भिसि' (तट्टा), 'संकमो' (संक्रम), 'अद्धानं' (अध्वान) आणि 'प्रभव' हे शब्द ठिकठिकाणी (मार्गाचे वाचक म्हणून) प्रकाशित केले आहेत. ဧဝံ အာစရိယေဟိ ကတာယ အတ္ထသံဝဏ္ဏနာယ ဒဿနတော စ ‘‘နာဝါတိအာဒီနိပိ ပကတိမဂ္ဂဿ နာမာနီ’’တိ ဝစနံ န ဂဟေတဗ္ဗံ, ယထာဝုတ္တမေဝ ဝစနံ ဂဟေတဗ္ဗံ. अशा प्रकारे आचार्यांनी केलेल्या अर्थ-वर्णनावरून आणि दर्शनावरून 'नावा' इत्यादी देखील नैसर्गिक मार्गाची नावे आहेत, असे वचन स्वीकारू नये, तर जसे सांगितले आहे तसेच वचन स्वीकारावे. ကောစိ ပနေတ္ထ ဧဝံ ဝဒေယျ ‘‘ဓမ္မသေတုံ ဒဠှံ ကတွာ’တိ ဧတ္ထ ‘ဓမ္မသေတုန္တိ မဂ္ဂသေတု’န္တိ ဝစနတော ဓမ္မသဒ္ဒေါ မဂ္ဂေ ဝတ္တတိ, န သေတုသဒ္ဒေါ’’တိ. တန္န, ဓမ္မသဒ္ဒေါ ဝိယ သေတုသဒ္ဒေါပိ မဂ္ဂေ ဝတ္တတီတိ သေတု ဝိယာတိ သေတု, ဓမ္မော ဧဝ သေတု ဓမ္မသေတူတိ အတ္ထဝသေန, ဧသ နယော အညတြာပိ. အပရမ္ပိ ဝဒေယျ [Pg.289] ‘‘နနု ဗြဟ္မဇာလသုတ္တန္တဋ္ဌကထာယံ ‘ဒက္ခိဏုတ္တရေန ဗောဓိမဏ္ဍံ ပဝိသိတွာ အဿတ္ထဒုမရာဇာနံ ပဒက္ခိဏံ ကတွာ ပုဗ္ဗုတ္တရဘာဂေ ဌိတော’တိ ဣမသ္မိံ ဌာနေ ဒက္ခိဏုတ္တရသဒ္ဒေန ဒက္ခိဏော မဂ္ဂေါ ဝုတ္တော’’တိ. န, အနေကေသု ပါဠိပ္ပဒေသေသု အဋ္ဌကထာပဒေသေသု စ အဘိဓာနသတ္ထေသု စ မဂ္ဂဝါစကဿ ဥတ္တရသဒ္ဒဿ အနာဂတတ္တာ, တသ္မာ တတ္ထ ဧဝမတ္ထော ဒဋ္ဌဗ္ဗော ‘‘ဒက္ခိဏဒိသတော ဂန္တဗ္ဗော ဥတ္တရဒိသာဘာဂေါ ဒက္ခိဏုတ္တရောတိ ဝုစ္စတိ, ဧဝံဘူတေန ဒက္ခိဏုတ္တရေန ဗောဓိမဏ္ဍပဝိသနံ သန္ဓာယ ဒက္ခိဏုတ္တရေန ဗောဓိမဏ္ဍံ ပဝိသိတွာတိ ဝုတ္တ’’န္တိ. အထ ဝါ ဒက္ခိဏုတ္တရေနာတိ ဒက္ခိဏပစ္ဆိမုတ္တရေန, ဧတ္ထ အာဒိအဝသာနဂ္ဂဟဏေန မဇ္ဈဿပိ ဂဟဏံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧဝံ ဂဟဏံယေဝ ဟိ ယံ ဇာတကနိဒါနေ ဝုတ္တံ ‘‘ဗောဓိသတ္တော တိဏံ ဂဟေတွာ ဗောဓိမဏ္ဍံ အာရူယှ ဒက္ခိဏဒိသာဘာဂေ ဥတ္တရာဘိမုခေါ အဋ္ဌာသိ, တသ္မိံ ခဏေ ဒက္ခိဏစက္ကဝါဠံ ဩသီဒိတွာ ဟေဋ္ဌာ အဝီစိသမ္ပတ္တံ ဝိယ အဟောသိ, ဥတ္တရစက္ကဝါဠံ ဥလ္လင်္ဃိတွာ ဥပရိ ဘဝဂ္ဂပ္ပတ္တံ ဝိယ အဟောသိ, ဗောဓိသတ္တော ဣဒံ သမ္ဗောဓိပါပုဏဋ္ဌာနံ န ဘဝတိ မညေတိ ပဒက္ခိဏံ ကရောန္တော ပစ္ဆိမဒိသာဘာဂံ ဂန္တွာ ပုရတ္ထာဘိမုခေါ အဋ္ဌာသီ’’တိအာဒိ, တေန သမေတိ. အထာပိ ဝဒေယျ ‘‘ယဒိ ဥတ္တရသဒ္ဒေါ ဒိသာဝါစကော, ဧဝဉ္စ သတိ ‘‘ဒက္ခိဏုတ္တရေနာ’’တိ ဧနယောဂံ အဝတွာ ‘‘ဒက္ခိဏုတ္တရာယာ’’တိ အာယယောဂေါ ဝတ္တဗ္ဗော’’တိ. တန္န, ဒိသာဝါစကဿပိ သဒ္ဒဿ ‘‘ဥတ္တရေန နဒီ သီတာ, ဂမ္ဘီရာ ဒုရတိက္ကမာ’’တိ ဧနယောဂဝသေန ဝစနတော. အပိစ ဒိသာဘာဂံ သန္ဓာယ ‘‘ဒက္ခိဏုတ္တရေနာ’’တိ ဝစနံ ဝုတ္တံ. ဒိသာဘာဂေါ ဟိ ဒိသာ ဧဝါတိ နိဋ္ဌမေတ္ထာဝဂန္တဗ္ဗံ. येथे कोणी असे म्हणू शकेल की, 'धम्मसेतुं दळ्हं कत्वा' (धम्मरूपी पूल मजबूत करून) यामध्ये 'धम्मसेतु म्हणजे मार्गसेतु (मार्गरूपी पूल)' अशा वचनामुळे 'धम्म' शब्द मार्गाच्या अर्थात वापरला जातो, 'सेतु' शब्द नाही. हे योग्य नाही, कारण 'धम्म' शब्दाप्रमाणे 'सेतु' शब्दही मार्गाच्या अर्थात वापरला जातो. 'सेतु सारखा तो सेतु' आणि 'धम्म हाच सेतु तो धम्मसेतु' या अर्थानुसार, हाच नियम इतर ठिकाणीही लागू होतो. आणखी कोणी असे म्हणू शकेल की, 'ब्रह्मजालसुत्तन्त-अट्ठकथा' मध्ये 'दक्खिणुत्तरेण बोधिमण्डं पविसित्वा अस्सत्थदुमराजानं पदक्खिणं कत्वा पुब्बुत्तरभागे ठितो' (दक्षिण-उत्तरेकडून बोधिमंडळात प्रवेश करून, अश्वत्थ वृक्षाला प्रदक्षिणा घालून ईशान्य भागात उभे राहिले) या ठिकाणी 'दक्खिणुत्तर' शब्दाने 'दक्षिण मार्ग' असा अर्थ सांगितला आहे. नाही, कारण अनेक पालि संदर्भांमध्ये, अट्ठकथांच्या संदर्भांमध्ये आणि अभिधानशास्त्रांमध्ये (कोशग्रंथांमध्ये) 'उत्तर' शब्द मार्गाचा वाचक म्हणून आलेला नाही. म्हणून तेथे असा अर्थ समजला पाहिजे की, 'दक्षिण दिशेकडून जाण्याचा उत्तर दिशेचा भाग म्हणजे दक्खिणुत्तर' असे म्हटले जाते. अशा प्रकारच्या दक्षिण-उत्तर मार्गाने बोधिमंडळात प्रवेश करण्याच्या संदर्भाने 'दक्खिणुत्तरेण बोधिमण्डं पविसित्वा' असे म्हटले आहे. अथवा 'दक्खिणुत्तरेण' म्हणजे दक्षिण-पश्चिम-उत्तर (नैऋत्य-वायव्य-उत्तर) असा अर्थ होतो. येथे आदि (सुरुवात) आणि अवसान (शेवट) यांच्या ग्रहणाने मधल्या भागाचेही ग्रहण (समावेश) समजले पाहिजे. अशा प्रकारे ग्रहण करणे हे जातकनिदानात जे म्हटले आहे, त्याच्याशी सुसंगत आहे: 'बोधिसत्त्व तृण (गवत) घेऊन बोधिमंडळावर चढले आणि दक्षिण दिशेच्या भागात उत्तरेकडे तोंड करून उभे राहिले. त्या क्षणी दक्षिण चक्रवाळ खाली खचून खाली अवीची (नरक) पर्यंत पोहोचल्यासारखे झाले आणि उत्तर चक्रवाळ वर उचलले जाऊन वर भवग्ग (भवाग्र) पर्यंत पोहोचल्यासारखे झाले. बोधिसत्त्वांनी विचार केला की, हे संबोधी प्राप्त करण्याचे स्थान नाही असे वाटते, म्हणून प्रदक्षिणा घालत ते पश्चिम दिशेच्या भागात गेले आणि पूर्वेकडे तोंड करून उभे राहिले' इत्यादी. या विधानाशी हे सुसंगत आहे. जर कोणी असे म्हणेल की, 'जर उत्तर शब्द दिशावाचक आहे, तर असे असताना 'दक्खिणुत्तरेण' असा 'एन' प्रत्यय न वापरता 'दक्खिणुत्तराय' असा 'आय' प्रत्यय वापरायला हवा होता.' हे योग्य नाही, कारण दिशावाचक शब्दाचाही 'उत्तरेण नदी सीता, गम्भीरा दुरतिक्कमा' (उत्तरेकडे सीता नदी आहे, जी खोल आणि पार करण्यास कठीण आहे) याप्रमाणे 'एन' प्रत्ययाच्या योगाने प्रयोग होतो. शिवाय, दिशाभागाच्या संदर्भाने 'दक्खिणुत्तरेण' असे वचन म्हटले आहे. दिशाभाग म्हणजेच दिशा होय, असा येथे निष्कर्ष काढला पाहिजे। ဂကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ग-कारान्त धातूंची रूपे. ဃကာရန္တဓာတု घ-कारान्त धातू. လိဃိ [Pg.290] ဘာသနေ. လင်္ဃေတိ, လင်္ဃယတိ. ဧတာနိ ဗုဒ္ဓဝစနေ အပ္ပသိဒ္ဓါနိပိ လောကိကပ္ပယောဂဒဿနဝသေန အာဂတာနိ. သာသနသ္မိဉှိ ဘူဝါဒိဂဏစုရာဒိဂဏပရိယာပန္နဿ ဂတျတ္ထဝါစကဥလ္လင်္ဃနတ္ထပရိဒီပကဿ ဓာတုဿ ရူပံ အတီဝ ပသိဒ္ဓံ. लिघि भाषणात (बोलण्याच्या अर्थात). लङ्घेति, लङ्घयति. जरी ही बुद्धवचनात आढळत नसली तरी लौकिक प्रयोगाच्या दर्शनानुसार आलेली आहेत. कारण शासनात (बुद्धशासनात) भूवादिगण आणि चुरादिगण अंतर्गत येणाऱ्या, गत्यर्थक आणि उल्लंघनाचा अर्थ दर्शवणाऱ्या धातूचे रूप अत्यंत प्रसिद्ध आहे. လင်္ဃ လင်္ဃနေ. လင်္ဃေတိ, လင်္ဃယတိ. लङ्घ उल्लंघनाच्या (ओलांडण्याच्या) अर्थात. लङ्घेति, लङ्घयति. ‘‘အတိကရ’မကရာ’စရိယ, မယှမ္ပေတံ န ရုစ္စတိ; စတုတ္ထေ လင်္ဃယိတွာန, ပဉ္စမိယမ္ပိ အာဝုတော’’တိ 'हे आचार्या, तुम्ही अतिशय कठीण काम केले आहे, मला हे आवडत नाही; हे मित्रा, चौथ्या (तलवारीवरून) उडी मारून (उल्लंघन करून) पाचव्या तलवारीवरही (उडी मारली)' असे. ဣမသ္မိံ သတ္တိလင်္ဃနဇာတကေ စုရာဒိဂဏပရိယာပန္နဿ ဂတျတ္ထဝါစကဿ ဥလ္လင်္ဃနတ္ထပရိဒီပကဿ လင်္ဃဓာတုဿ ‘‘လင်္ဃယိတွာ, လင်္ဃယိတွာနာ’’တိ ရူပေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ‘‘လင်္ဃေတိ, လင်္ဃယတီ’’တိ ရူပါနိ ဒိဋ္ဌာနိ ဧဝ ဟောန္တိ. ဘာသတ္ထဝါစကဿ ပန တထာရူပါနိ ရူပါနိ န ဒိဋ္ဌာနိ, ဧဝံ သန္တေပိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ဒီဃဒဿီဟိ အဘိမတတ္တာ ဘာသတ္ထဝါစိကာပိ လင်္ဃဓာတု အတ္ထီတိ ဂဟေတဗ္ဗာ, ဧဝံ သဗ္ဗေသုပိ ဘူဝါဒိဂဏာဒီသု သာသနေ အပ္ပသိဒ္ဓါနမ္ပိ ရူပါနံ သာသနာနုကူလာနံ ဂဟဏံ ဝေဒိတဗ္ဗံ, အနနုကူလာနဉ္စ အပ္ပသိဒ္ဓါနံ ဆဍ္ဍနံ. या सत्तिलङ्घन जातकामध्ये चुरादिगण अंतर्गत येणाऱ्या, गत्यर्थक आणि उल्लंघनाचा अर्थ दर्शवणाऱ्या 'लङ्घ' धातूचे 'लङ्घयित्वा, लङ्घयित्वान' ही रूपे दिसतातच, तसेच 'लङ्घेति, Lङ्घयति' ही रूपे देखील दिसतात. परंतु भाषणाच्या (बोलण्याच्या) अर्थाचे तशा प्रकारचे रूप आढळत नाही. असे असले तरी, दीर्घद्रष्ट्या पूर्वाचार्यांनी मान्य केल्यामुळे भाषणाचा अर्थ सांगणारा 'लङ्घ' धातू देखील आहे, असे मानले पाहिजे. अशा प्रकारे सर्व भूवादिगणादींमध्ये शासनात (बुद्धशासनात) न आढळणाऱ्या रूपांचेही शासनाला अनुकूल असल्यास ग्रहण करावे आणि जे अनुकूल नसतील अशा न आढळणाऱ्या रूपांचा त्याग करावा, असे समजले पाहिजे. အဃ ပါပကရဏေ. အဃေတိ, အဃယတိ. အဃံ, အဃော, အနဃော. अघ पाप करण्याच्या अर्थात. अघेति, अघयति. अघं, अघो, अनघो. တတ္ထ အဃန္တိ ဒုက္ခံ. ‘‘အဃန္တံ ပဋိသေဝိဿံ. ဝနေ ဝါဠမိဂါကိဏ္ဏေ. ခဂ္ဂဒီပိနိသေဝိတေ’’တိ ဣဒံ နိဒဿနံ. အဃောတိ ကိလေသော. တေန အဃေန အရဟာ အနဃော. တတ္ထ အဃယန္တိ ပါပံ ကရောန္တိ သတ္တာ ဧတေနာတိ အဃံ, ကိန္တံ? ဒုက္ခံ, ဧဝံ အဃော. နနု စ သပ္ပုရိသာ ဒုက္ခဟေတုပိ ကိလေသဟေတုပိ စ အတ္တနော သုခတ္ထာယ ပါပံ န ကရောန္တိ. တထာ ဟိ – त्यामध्ये 'अघ' म्हणजे दुःख. 'हिंस्र श्वापदांनी भरलेल्या आणि गेंडा व बिबट्यांनी वास्तव्य केलेल्या वनात मी त्या दुःखाचा (अघाचा) सामना करीन' हे याचे उदाहरण आहे. 'अघ' म्हणजे क्लेश. त्या अघापासून (क्लेशापासून) मुक्त असल्यामुळे अर्हत हे 'अनघ' (क्लेशरहित) असतात. तेथे 'अघयन्ति' म्हणजे प्राणी ज्याच्याद्वारे पाप करतात ते 'अघ' होय. ते काय आहे? दुःख, तसेच क्लेश (अघो). परंतु सत्पुरुष दुःखाच्या कारणाने किंवा क्लेशाच्या कारणाने देखील स्वतःच्या सुखासाठी पाप करत नाहीत. कारण असे म्हटले आहे की - ‘‘န [Pg.291] ပဏ္ဍိတာ အတ္တသုခဿ ဟေတု,ပါပါနိ ကမ္မာနိ သမာစရန္တိ; ဒုက္ခေန ဖုဋ္ဌာ ခလိတာပိ သန္တာ,ဆန္ဒာ စ ဒေါသာ န ဇဟန္တိ ဓမ္မ’’န္တိ 'पंडित (ज्ञानी लोक) स्वतःच्या सुखासाठी पाप कर्मे करत नाहीत; दुःखाने पीडित किंवा स्खलित झाले तरीही संत (सत्पुरुष) छंद (आसक्ती) आणि द्वेषामुळे धम्माचा त्याग करत नाहीत' असे. ဝုတ္တံ. ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ ‘‘အဃ ပါပကရဏေ’’တိ ဓာတု စ ‘‘အဃယန္တိ ပါပံ ကရောန္တိ သတ္တာ ဧတေနာတိ အဃ’’န္တိအာဒိဝစနဉ္စ ဝုတ္တန္တိ? သစ္စံ, ယေဘုယျေန ပန သတ္တာ ဒုက္ခာဒိဟေတု ပါပကမ္မံ ကရောန္တိ, ဧတေသု သပ္ပုရိသာ ဧဝ န ကရောန္တိ, ဣတရေ ကရောန္တိ. ဧဝံ ပါပကရဏဿ ဟိ ဒုက္ခံ ကိလေသော စ ဟေတု. တထာ ဟိ – असे म्हटले आहे. असे असताना 'अघ पाप करण्याच्या अर्थात' हा धातू आणि 'प्राणी ज्याच्याद्वारे पाप करतात ते अघ होय' इत्यादी वचन का म्हटले आहे? हे सत्य आहे, परंतु बहुतांश प्राणी दुःखादी कारणांमुळे पाप कर्म करतात; त्यांच्यामध्ये केवळ सत्पुरुषच पाप करत नाहीत, इतर करतात. अशा प्रकारे पाप करण्यामागे दुःख आणि क्लेश हेच कारण आहे. कारण असे म्हटले आहे की - သုခီပိ ဟေကေ န ကရောန္တိ ပါပံ,အဝဏ္ဏသံသဂ္ဂဘယာ ပုနေကေ; ပဟူ သမာနော ဝိပုလတ္ထစိန္တီ,ကိံကာရဏာ မေ န ကရောသိ ဒုက္ခ’’န္တိ 'काही लोक सुखी असतानाही पाप करत नाहीत, तर काही लोक अपकीर्ती आणि वाईट संगतीच्या भयाने पाप करत नाहीत; हे समर्थ आणि विपुल हिताचा विचार करणाऱ्या (राजा), तू मला कोणत्या कारणाने दुःख देत आहेस?' असे. ဝုတ္တံ. အယဉှိ ဂါထာ ဒုက္ခဟေတုပိ သတ္တာ ပါပံ ကရောန္တီတိ ဧတမတ္ထံ ဒီပေတိ. ‘‘ကုဒ္ဓေါ ဟိ ပိတရံ ဟန္တိ, ကုဒ္ဓေါ ဟန္တိ သမာတရ’’န္တိ အယံ ပန ကိလေသဟေတုပိ ပါပံ ကရောန္တီတိ ဧတမတ္ထံ ဒီပေတိ, တသ္မာ အမှေဟိ ‘‘အဃ ပါပကရဏေ’’တိအာဒိဝစနံ ဝုတ္တံ. असे म्हटले आहे. ही गाथा 'प्राणी दुःखाच्या कारणाने देखील पाप करतात' हा अर्थ स्पष्ट करते. 'क्रोधाने अंध झालेला मनुष्य पित्याचा वध करतो, क्रोधाने अंध झालेला मनुष्य मातेचा वध करतो' हे वचन 'प्राणी क्लेशाच्या कारणाने देखील पाप करतात' हा अर्थ स्पष्ट करते. म्हणून आम्ही 'अघ पाप करण्याच्या अर्थात' इत्यादी वचन म्हटले आहे. ဃကာရန္တဓာတုရူပါနိ. घ-कारान्त धातूंची रूपे. စကာရန္တဓာတု च-कारान्त धातू. လောစ ဒဿနေ. လောစေတိ, လောစယတိ. လောစနံ. ရူပါရမ္မဏံ လောစယတိ ပဿတီတိ လောစနံ, စက္ခု. लोच दर्शनाच्या (पाहण्याच्या) अर्थात. लोचेति, लोचयति. लोचनं. जे रूपाचे (दृश्याचे) दर्शन घडवते किंवा पाहते ते 'लोचन' म्हणजे चक्षु (डोळा). ကိစိ မဒ္ဒနေ. ကိဉ္စေတိ, ကိဉ္စယတိ. ကိဉ္စနံ, အကိဉ္စနော. किचि मर्दनाच्या (दडपण्याच्या/पीडा देण्याच्या) अर्थात. किञ्चेति, किञ्चयति. किञ्चनं, अकिञ्चनो. တတ္ထ [Pg.292] ကိဉ္စနန္တိ ပလိဗောဓော. ကိဉ္စေတိ သတ္တေ မဒ္ဒတီတိ ကိဉ္စနံ. ကိဉ္စနသဒ္ဒေါ မဒ္ဒနတ္ထေ ဝတ္တတိ. မနုဿာ ဟိ ဝီဟိံ မဒ္ဒန္တာ ဂေါဏံ ‘‘ကိဉ္စေဟိ ကာပိလ, ကိဉ္စေဟိ ကာပိလာ’’တိ ဝဒန္တိ. त्यामध्ये 'किञ्चन' म्हणजे अडथळा (पळिबोध). जे प्राण्यांना दडपते (पीडा देते) ते 'किञ्चन' होय. 'किञ्चन' शब्द मर्दनाच्या अर्थात वापरला जातो. कारण लोक भाताची मळणी करताना बैलाला 'हे कपिला (तांबड्या बैला), मळणी कर (किञ्चेहि), हे कपिला मळणी कर' असे म्हणतात. ပစိ ဝိတ္ထာရေ. ပဉ္စေတိ, ပဉ္စယတိ. ပပဉ္စေတိ, ပပဉ္စယတိ. ပပဉ္စာ. पचि विस्ताराच्या अर्थात. पञ्चेति, पञ्चयति. प्रपञ्चेति, प्रपञ्चयति. प्रपञ्चा (प्रपंच). ဧတ္ထ ပပဉ္စာတိ တဏှာမာနဒိဋ္ဌိယော. ဧတာ ဟိ အတ္တနိဿိတာနံ သတ္တာနံ သံသာရံ ပပဉ္စေန္တိ ဝိတ္ထိန္နံ ကရောန္တီတိ ပပဉ္စာတိ ဝုစ္စန္တိ. အထ ဝါ ပပဉ္စေန္တိ ယတ္ထ သယံ ဥပ္ပန္နာ တံသန္တာနံ ဝိတ္ထာရေန္တိ စိရံ ဌပေန္တီတိ ပပဉ္စာ. လောကိယာ ပန ‘‘အမှာကံ တုမှေဟိ သဒ္ဓိံ ကထေန္တာနံ ပပဉ္စော ဟောတီ’’တိအာဒီနိ ဝဒန္တာ ကာလဿ စိရဘာဝံ ပပဉ္စောတိ ဝဒန္တိ, သာသနေ ပန ဒွယမ္ပိ လဗ္ဘတိ. येथे 'पपञ्च' (प्रपंच) म्हणजे तण्हा (तृष्णा), मान (अहंकार) आणि दिट्ठि (दृष्टी/मिथ्यादृष्टी) होय. कारण हे स्वतःवर अवलंबून असणाऱ्या प्राण्यांच्या संसाराला प्रपंचित (विस्तारित) करतात, विस्तृत करतात, म्हणून त्यांना 'पपञ्च' असे म्हटले जाते. अथवा, जेथे स्वतः उत्पन्न होतात, त्या संतानला (चित्तसंततीला) विस्तारित करतात आणि दीर्घकाळ टिकवून ठेवतात, म्हणून ते 'पपञ्च' होत. परंतु, लौकिक लोक 'तुमच्याशी बोलताना आमचा प्रपंच (विलंब) होतो' इत्यादी बोलताना काळाच्या दीर्घत्वाला 'प्रपंच' म्हणतात, परंतु शासनात (बुद्धशासनात) दोन्ही अर्थ प्राप्त होतात. သိစ္စ ကုဍ္ဍနေ. သိစ္စေတိ, သိစ္စယတိ. सिच्च् (धातू) सिंचन करणे (शिंपडणे) या अर्थात. सिच्चेति, सिच्चयति. ဝဉ္စု ပလမ္ဘနေ. ပလမ္ဘနံ ဥပလာပနံ. ဝဉ္စေတိ, ဝဉ္စယတိ. ဝဉ္စကော, ဝဉ္စနံ. ဘူဝါဒိဂဏေ ပန ဝဉ္စဓာတု ဂတျတ္ထေ ဝတ္တတိ. ‘‘သန္တိ ပါဒါ အဝဉ္စနာ’’တိ ဟိ ပါဠိ वञ्चु (धातू) फसवणे (ठकवणे) या अर्थात. 'पलम्भन' म्हणजे फसवणूक (मनधरणी). वञ्चेति, वञ्चयति. वञ्चको (फसवणारा), वञ्चनम् (फसवणूक). परंतु भूवादि गणात 'वञ्च्' धातू गती (गमन) या अर्थात वर्ततो. कारण 'सन्ति पादा अवञ्चना' (पाय आहेत पण ते चालत नाहीत) असे पाळीमध्ये आहे. စစ္စ အဇ္ဈယနေ. စစ္စေတိ, စစ္စယတိ. चच्च् (धातू) अध्ययन करणे (अभ्यास करणे) या अर्थात. चच्चेति, चच्चयति. စု စဝနေ. စာဝေတိ, စာဝယတိ. အညော ‘‘စု သဟနေ’’ ဣတိ ဗြုတေ. စာဝေတိ, စာဝယတိ, သဟတီတိ အတ္ထော. चु (धातू) च्युत होणे (पतन होणे/दूर करणे) या अर्थात. चावेति, चावयति. दुसरा कोणी 'चु सहने' (सहन करणे या अर्थात) असे म्हणतो. चावेति, चावयति, सहन करतो असा अर्थ आहे. အဉ္စု ဝိသေသနေ. အဉ္စေတိ, အဉ္စယတိ. अञ्चु (धातू) विशेष करणे या अर्थात. अञ्चेति, अञ्चयति. လောစ ဘာသာယံ. လောစေတိ, လောစယတိ. လောစနံ, လောစယတိ သမဝိသမံ အာစိက္ခန္တံ ဝိယ ဘဝတီတိ လောစနံ, စက္ခု. लोच् (धातू) बोलणे (किंवा प्रकाशणे) या अर्थात. लोचेति, लोचयति. लोचनम्; जे सम आणि विषम दाखवल्यासारखे करते, म्हणून ते 'लोचन' म्हणजेच चक्खु (डोळा) होय. ရစ ပတိယတနေ. ရစေတိ, ရစယတိ. ရစနာ, ဝိရစိတံ, ကေသရစနာ, ဂါထာရစနာ. रच् (धातू) तयार करणे (रचना करणे) या अर्थात. रचेति, रचयति. रचना, विरचित, केसरचना (केसांची रचना), गाथारचना. သူစ [Pg.293] ပေသုညေ. ပိသုဏဘာဝေါ ပေသုညံ. သူစေတိ, သူစယတိ. သူစကော. सूच् (धातू) चुगली करणे या अर्थात. पिसुणभाव (चुगलखोरपणा) म्हणजेच 'पेसुञ्ञ' (चुगली) होय. सूचेति, सूचयति. सूचको (चुगलखोर/माहिती देणारा). ပစ္စ သံယမနေ. ပစ္စေတိ, ပစ္စယတိ. पच्च् (धातू) संयमन करणे (नियंत्रण करणे) या अर्थात. पच्चेति, पच्चयति. ရိစ ဝိယောဇနသမ္ပဇ္ဇနေသု. ရေစေတိ, ရေစယတိ. သေဋ္ဌိပုတ္တံ ဝိရေစေယျ. ဝိရေစေတိ, ဝိရေစယတိ. ဝိရေစကော, ဝိရေစနံ. रिच् (धातू) वियोग करणे (वेगळे करणे) आणि रेचन करणे (जुलाब देणे) या अर्थात. रेचेति, रेचयति. 'सेट्ठिपुत्तं विरेचेय्य' (श्रेष्ठीपुत्राला जुलाब द्यावा). विरेचेति, विरेचयति. विरेचको (रेचक), विरेचनम् (जुलाब/रेचन). ဝစ ဘာသနေ. ဝစေတိ, ဝစယတိ. ဘူဝါဒိဂဏေပိ အယံ ဝတ္တတိ. တဒါ တဿာ ‘‘ဝတ္တိ, ဝစတိ, အဝေါစ, အဝေါစု’’န္တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ကာရိတေ ပန ‘‘အန္တေဝါသိကံ ဓမ္မံ ဝါစေတိ, ဝါစယတီ’’တိ ရူပါနိ. ဝတ္တုံ, ဝတ္တဝေ, ဝတွာ, ဝုတ္တံ, ဝုစ္စတိ. वच् (धातू) बोलणे या अर्थात. वचेति, वचयति. हा भूवादि गणातही वर्ततो. तेव्हा त्याची 'वत्ति, वचति, अवोच, अवोचुं' इत्यादी रूपे होतात. परंतु कारित (प्रयोजक) मध्ये 'अन्तेवासिकं धम्मं वाचेति, वाचयति' (शिष्याला धम्म शिकवतो) अशी रूपे होतात. वत्तुं, वत्तवे, वत्वा, वृत्तं, वुच्चति. အစ္စ ပူဇာယံ. အစ္စေတိ, အစ္စယတိ. ဗြဟ္မာသုရသုရစ္စိတော. अच्च् (धातू) पूजा करणे या अर्थात. अच्चेति, अच्चयति. 'ब्रह्मासुरसुरच्चितो' (ब्रह्मा, असुर आणि देवांद्वारे पूजलेला). သူစ ဂန္ဓနေ. သုစေတိ, သူစယတိ. သူစကော, သုတ္တံ. सूच् (धातू) गुंफणे (किंवा सूचित करणे) या अर्थात. सुचेति, सूचयति. सूचको, सुत्तं (सूत्र). ဧတ္ထ စ အတ္တတ္ထပရတ္ထာဒိဘေဒေ အတ္ထေ သူစေတီတိ သုတ္တံ. တေပိဋကံ ဗုဒ္ဓဝစနံ. आणि येथे स्वतःचे हित (अत्तत्थ), दुसऱ्याचे हित (परत्थ) इत्यादी भेदांचे अर्थ जे सूचित करते, ते 'सुत्त' (सूत्र) होय. त्रिपिटकातील बुद्धवचन. ကစ ဒိတ္တိယံ. ကစ္စေတိ, ကစ္စယတိ. ကစ္စော. कच् (धातू) चमकणे (दीप्ती) या अर्थात. कच्चेति, कच्चयति. कच्चो. ဧတ္ထ ကစ္စောတိ ရူပသမ္ပတ္တိယာ ကစ္စေတိ ဒိဗ္ဗတိ ဝိရောစတီတိ ကစ္စော, ဧဝံနာမကော အာဒိပုရိသော, တဗ္ဗံသေ ဇာတာ ပုရိသာ ‘‘ကစ္စာနာ’’တိပိ ‘‘ကစ္စာယနာ’’တိပိ ‘‘ကာတိယာနာ’’တိပိ ဝုစ္စန္တိ, ဣတ္ထိယော ပန ‘‘ကစ္စာနီ’’တိပိ ‘‘ကစ္စာယနီ’’တိပိ ‘‘ကာတိယာနီ’’တိပိ ဝုစ္စန္တိ. येथे 'कच्च' म्हणजे जो रूपसंपत्तीने चमकतो, क्रीडा करतो, शोभून दिसतो तो 'कच्च' होय. या नावाचा एक आदिपुरुष होता, त्याच्या वंशात जन्मलेल्या पुरुषांना 'कच्चान', 'कच्चायन' किंवा 'कातियान' असे म्हटले जाते, तर स्त्रियांना 'कच्चानी', 'कच्चायनी' किंवा 'कातियानी' असे म्हटले जाते. စကာရန္တဓာတုရူပါနိ. चकारान्त धातूंची रूपे. ဆကာရန္တဓာတု छकारान्त धातू. မိလေဆ [Pg.294] အဗျတ္တာယံ ဝါစာယံ. မိလေစ္ဆေတိ, မိလေစ္ဆယတိ. မိလက္ခု. मिलेछ् (धातू) अव्यक्त (अस्पष्ट) वाणी या अर्थात. मिलेच्छेति, मिलेच्छयति. मिलक्खु (म्लेच्छ). ဧတ္ထ မိလက္ခူတိ မိလေစ္ဆေတိ အဗျတ္တဝါစံ ဘာသတီတိ မိလက္ခု. येथे 'मिलक्खु' म्हणजे जो अस्पष्ट बोलतो, अव्यक्त वाणी बोलतो तो 'मिलक्खु' होय. ကုစ္ဆ အဝက္ခေပေ. အဝက္ခေပေါ အဓောခိပနံ. ကုစ္ဆေတိ, ကုစ္ဆယတိ. कुच्छ् (धातू) खाली फेकणे (किंवा निंदा करणे) या अर्थात. 'अवक्खेप' म्हणजे खाली फेकणे. कुच्छेति, कुच्छयति. ဝိစ္ဆ ဘာသာယံ. ဝိစ္ဆေတိ, ဝိစ္ဆယတိ. विच्छ् (धातू) बोलणे या अर्थात. विच्छेति, विच्छयति. ဆကာရန္တဓာတုရူပါနိ. छकारान्त धातूंची रूपे. ဇကာရန္တဓာတု जकारान्त धातू. ဝဇ္ဇ ဝဇ္ဇနေ. ဝဇ္ဇေတိ, ဝဇ္ဇယတိ. ပရိဝဇ္ဇနကော. ဝဇ္ဇိတော သီလဝန္တေဟိ, ကထံ ဘိက္ခု ကရိဿသီတိ. वज्ज (धातू) त्याग करणे (वर्जन करणे) या अर्थात. वज्जेति, वज्जयति. परिवज्जनको (पूर्णपणे टाळणारा). 'वज्जितो शीलवन्तेहि, कथं भिक्खु करिस्ससि' (शीलवंतांनी त्याग केलेला, हे भिक्खू, तू कसा करशील?). တုဇ္ဇ ဗလပါလနေသု. တုဇ္ဇေတိ, တုဇ္ဇယတိ. तुज्ज (धातू) शक्ती आणि पालन करणे या अर्थात. तुज्जेति, तुज्जयति. တုဇိ ပိဇိ ဟိံသာဗလဒါနနိကေတနေသု. နိကေတနံ နိဝါသော. တုဉ္ဇေတိ, တုဉ္ဇယတိ. ပိဉ္ဇေတိ. ပိဉ္ဇယတိ. तुजि, पिजि (धातू) हिंसा, शक्ती, दान आणि निवास या अर्थात. 'निकेतन' म्हणजे निवास. तुञ्जेति, तुञ्जयति. पिञ्जेति, पिञ्जयति. ခဇိ ကိစ္ဆဇီဝနေ. ခဉ္ဇေတိ, ခဉ္ဇယတိ. ခဉ္ဇော. खजि (धातू) कष्टाने जगणे (लंगडणे) या अर्थात. खञ्जेति, खञ्जयति. खञ्जो (लंगडा). ခဇိ ရက္ခဏေ. တာဒိသာနိယေဝ ရူပါနိ. ဘူဝါဒိဂဏေ ‘‘ခဇိ ဂတိဝေကလ္လေတိ ဣမိဿာ ‘‘ခဉ္ဇတီ’’တိ ရူပံ. खजि (धातू) रक्षण करणे या अर्थात. तशीच रूपे होतात. भूवादि गणात 'खजि गतिवैकल्य' (लंगडणे) या अर्थात असणाऱ्या या धातूचे 'खञ्जति' असे रूप होते. ပူဇ ပူဇာယံ. ပူဇေတိ, ပူဇယတိ. ပူဇာ. ဧသာဝ ပူဇနာ သေယျော. ပူဇကော, ပူဇိတော, ပူဇနီယော, ပူဇနေယျော, ပူဇေတဗ္ဗော, ပုဇ္ဇော. पूज (धातू) पूजा करणे या अर्थात. पूजेति, पूजयति. पूजा. 'एसाव पूजना सेय्यो' (हीच पूजा श्रेष्ठ आहे). पूजको, पूजितो, पूजनीयो, पूजनेय्यो, पूजेतब्बो, पुज्जो. ဂဇ [Pg.295] မဒ္ဒနသဒ္ဒေသု. ဂဇေတိ, ဂဇယတိ. ဂဇော. गज (धातू) मर्दन करणे आणि शब्द करणे (गर्जना करणे) या अर्थात. गजेति, गजयति. गजो (हत्ती). တိဇ နိသာနေ. တေဇေတိ, တေဇယတိ. तिज (धातू) तीक्ष्ण करणे (तेजस्वी करणे) या अर्थात. तेजेति, तेजयति. ဝဇ မဂ္ဂနသင်္ခါရေသု. ဝဇေတိ, ဝဇယတိ. वज (धातू) मार्ग शोधणे आणि संस्कार करणे या अर्थात. वजेति, वजयति. တဇ္ဇ သန္တဇ္ဇနေ. တဇ္ဇေတိ, တဇ္ဇယတိ. သန္တဇ္ဇေတိ, သန္တဇ္ဇယတိ. သန္တဇ္ဇိတော. तज्ज (धातू) धमकावणे (घाबरवणे) या अर्थात. तज्जेति, तज्जयति. सन्तज्जेति, सन्तज्जयति. सन्तज्जितो (धमकावलेला). အဇ္ဇ ပဋိသဇ္ဇနေ. အဇ္ဇေတိ, အဇ္ဇယတိ. अज्ज (धातू) मिळवणे (अर्जन करणे) या अर्थात. अज्जेति, अज्जयति. သဇ္ဇ သဇ္ဇနေ. သဇ္ဇေတိ, သဇ္ဇယတိ ဒါနံ. ဂမနသဇ္ဇော ဟုတွာ. सज्ज (धातू) सज्ज करणे (तयार करणे) या अर्थात. सज्जेति, सज्जयति दानं (दान सज्ज करतो). 'गमनसज्जो हुत्वा' (जाण्यासाठी सज्ज होऊन). ဘဇ ဝိဿာသေ. ဘဇေတိ, ဘဇယတိ. ဘူဝါဒိဂဏေ ပန ‘‘ဘဇတီ’’တိ ရူပံ, ဘတ္တိ, သမ္ဘတ္တိ. भज (धातू) विश्वास ठेवणे (सेवा करणे) या अर्थात. भजेति, भजयति. परंतु भूवादि गणात 'भजति' असे रूप होते, भत्ति (भक्ती), सम्भत्ति (संभक्ती). တုဇိ ပိဇိ လုဇိ ဘဇိ ဘာသာယံ. တုဉ္ဇေတိ, တုဉ္ဇယတိ. ပိဉ္ဇေတိ, ပိဉ္ဇယတိ. လုဉ္ဇေတိ, လုဉ္ဇယတိ. ဘဉ္ဇေတိ, ဘဉ္ဇယတိ. ကထေတီတိ အတ္ထော. तुजि, पिजि, luजि, भजि (धातू) बोलणे या अर्थात. तुञ्जेति, तुञ्जयति. पिञ्जेति, पिञ्जयति. लुञ्जेति, luञ्जयति. भञ्जेति, भञ्जयति. बोलतो असा अर्थ आहे. ရုဇ ဟိံသာယံ. ရောဇေတိ, ရောဇယတိ. ရောဂေါ. रुज (धातू) पीडा देणे (हिंसा) या अर्थात. रोजेति, रोजयति. रोगो (रोग). ဘာဇ ပုထကမ္မနိ. ပုထကမ္မံ ပုထက္ကရဏံ, ဝိသုံ ကြိယာတိ အတ္ထော. ဘာဇေတိ, ဘာဇယတိ. ဝိဘာဇေတိ, ဝိဘာဇယတိ. ဝိဘတ္တိ. भाज् (धातू) पृथक्कर्मामध्ये (वेगळे करण्याच्या अर्थात). पृथक्कर्म म्हणजे पृथक्करण करणे, वेगळे करण्याची क्रिया असा अर्थ आहे. भाजेति, भाजयति. विभाजेति, विभाजयति. विभक्ति. သဘာဇ သီတိသေဝနေသု. သဘာဇေတိ, သဘာဇယတိ. सभाज् (धातू) प्रीती आणि सेवा करण्याच्या अर्थात. सभाजेति, सभाजयति. လဇ ပကာသနေ. လဇေတိ, လဇယတိ. လာဇာ. लज् (धातू) प्रकाशने (प्रकट करण्याच्या अर्थात). लाजेति, लाजयति. लाजा (लाह्या). ယုဇ သံယမနေ. သံပုဗ္ဗော ဗန္ဓနေ. ယောဇေတိ, ယောဇယတိ. သံယောဇေတိ, သံယောဇယတိ. သံယောဇနံ. युज् (धातू) संयमनाच्या अर्थात. 'सं' उपसर्ग लागल्यास बंधनाच्या अर्थात. योजेति, योजयति. संयोजेति, संयोजयति. संयोजनं (संयोजन). မဇ္ဇ သောစေယျာလင်္ကာရေသု. မဇ္ဇေတိ, မဇ္ဇယတိ. သမ္မဇ္ဇေတိ, သမ္မဇ္ဇယတိ. သမ္မဇ္ဇာ. मज्ज् (धातू) स्वच्छता आणि अलंकाराच्या अर्थात. मज्जेति, मज्जयति. सम्मज्जेति, सम्मज्जयति. सम्मज्जा (झाडू मारणे/स्वच्छता). ဘာဇ [Pg.296] ဘာဇနဒါနေသု. ဘာဇေတိ, ဘာဇယတိ. ကထံ ဝေဿန္တရော ပုတ္တော, ဂဇံ ဘာဇေတိ သဉ္စယ. भाज् (धातू) विभागणी आणि दानाच्या अर्थात. भाजेति, भाजयति. 'हे संचय! वेस्सन्तर पुत्राने हत्तीचे दान कसे केले?' ဇကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ज-कारान्त धातूंची रूपे. ဈဉန္တာ အပ္ပသိဒ္ဓါ. သဒ္ဒသတ္ထေ ပန ‘‘ဉာ နိယောဇနေ’’တိ ပဌန္တိ, ရူပံ ပန ဗုဒ္ဓဝစနာနုကူလံ န ဘဝတိ, တသ္မာ န ဒဿိတံ အမှေဟိ. झ आणि ञ कारान्त धातू. व्याकरणशास्त्रामध्ये (सद्दसत्थ) तर 'ञा नियोजने' असा पाठ वाचतात, परंतु हे रूप बुद्धवचनाच्या अनुकूल नाही, म्हणून आम्ही ते दाखवले नाही. ဋကာရန္တဓာတု ट-कारान्त धातू. ဃဋ္ဋ ဃဋ္ဋနေ. ဃဋ္ဋနံ ဝါယာမကရဏံ. ဃဋ္ဋေတိ, ဃဋ္ဋယတိ. ဧတ္ထ တု ‘‘ဃဋ္ဋေသိ, ဃဋ္ဋေသိ, ကိံကာရဏာ ဃဋ္ဋေသိ, အဟံ တံ ဇာနာမီ’’တိ နိဒဿနံ. घट्ट् (धातू) घट्टन (स्पर्श करणे/आघात करणे) या अर्थात. घट्टन म्हणजे प्रयत्न करणे. घट्टेति, घट्टयति. येथे 'तू स्पर्श केलास, स्पर्श केलास, कोणत्या कारणाने स्पर्श केलास? मी तुला ओळखतो' हे उदाहरण आहे. ဃဋ သံဃာတေ. ပုဗ္ဗေ ဝိယ ကြိယာပဒါနိ, နာမိကတ္တေ ‘‘ဃဋော, ဃဋာ’’တိ ရူပါနိ. ဧတ္ထ ဂဋောတိ ပါနီယဃဋော. ဃဋာတိ သမူဟော ‘‘မစ္ဆဃဋာ’’တိအာဒီသု ဝိယ. घट् (धातू) संघात (एकत्र येणे/समूह) या अर्थात. पूर्वीप्रमाणेच क्रियापदे होतात, नाम रूपात 'घटो, घटा' अशी रूपे होतात. येथे 'घटो' म्हणजे पाण्याचा घडा. 'घटा' म्हणजे समूह, जसे की 'मच्छघटा' (माशांचा समूह) इत्यादींमध्ये. ဃဋ္ဋ စလနေ. ဃဋ္ဋေတိ, ဃဋ္ဋယတိ. घट्ट् (धातू) चलन (हालचाल करणे) या अर्थात. घट्टेति, घट्टयति. နဋ အဝသန္ဒနေ. အဝသန္ဒနံ ဂတ္တဝိက္ခေပေါ. နဋေတိ, နဋယတိ. नट् (धातू) अवसंदन (अंगविक्षेप/नृत्य) या अर्थात. अवसंदन म्हणजे शरीराची हालचाल (अंगविक्षेप). नटेति, नटयति. စုဋ ဆုဋ ကုဋ္ဋ ဆေဒနေ. စုဋေတိ, စုဋယတိ. ဆုဋေတိ, ဆုဋယတိ. ကုဋ္ဋေတိ, ကုဋ္ဋယတိ. चुट्, छुट्, कुट्ट् (धातू) छेदन (कापणे/तुकडे करणे) या अर्थात. चुटेति, चुटयति. छुटेति, छुटयति. कुट्टेति, kuट्टयति. ပုဋ္ဋ စဋ္ဋ အပ္ပဘာဝေ. ပုဋ္ဋေတိ, ပုဋ္ဋယတိ. စုဋ္ဋေတိ, စုဋ္ဋယတိ, အပ္ပံ ဘဝတီတိ အတ္ထော. पुट्ट्, चट्ट् (धातू) अल्पभावात (कमी होणे) या अर्थात. पुट्टेति, पुट्टयति. चुट्टेति, चुट्टयति, 'कमी होते' असा अर्थ आहे. မုဋ သဉ္စုဏ္ဏနေ. မောဋေတိ, မောဋယတိ. मुट् (धातू) संचूर्णन (बारीक करणे/चक्काचूर करणे) या अर्थात. मोटेति, मोटयति. အဋ္ဋ သုဋ္ဋ အနာဒရေ. အဋ္ဋေတိ, အဋ္ဋယတိ. သုဋ္ဋေတိ, သုဋ္ဋယတိ. अट्ट्, सुट्ट् (धातू) अनादर करण्याच्या अर्थात. अट्टेति, अट्टयति. सुट्टेति, सुट्टयति. ခဋ္ဋ [Pg.297] သံဝရဏေ ခဋ္ဋေတိ, ခဋ္ဋယတိ. खट्ट् (धातू) संवरण (झाकणे/नियंत्रण करणे) या अर्थात. खट्टेति, खट्टयति. သဋ္ဋ ဟိံသာဗလဒါနနိကေတနေသု. သဋ္ဋေတိ, သဋ္ဋယတိ. सट्ट् (धातू) हिंसा, बल देणे आणि निवास (निकेतन) या अर्थात. सट्टेति, सट्टयति. တုဝဋ္ဋ နိပဇ္ဇာယံ. တုဝဋ္ဋေတိ, တုဝဋ္ဋယတိ. ဆဗ္ဗဂ္ဂိယာ ဘိက္ခူ ဧကမဉ္စေ တုဝဋ္ဋေန္တိ. तुवट्ट् (धातू) निजणे/झोपणे या अर्थात. तुवट्टेति, तुवट्टयति. 'षड्वर्गीय भिक्खू एकाच मंचावर (खाटेवर) झोपतात.' ဆဋ္ဋ ဆဋ္ဋနေ. ဆဋ္ဋေတိ, ဆဋ္ဋယတိ. အတြာယံ ပါဠိ – သစေ သော ဆဋ္ဋေတိ, ဣစ္စေတံ ကုသလံ. နောစေ ဆဋ္ဋေတိ, ပဉ္စဟင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု ရူပိယဆဋ္ဋကော သမ္မန္နိတဗ္ဗော. छट्ट् (धातू) फेकून देणे (छट्टन) या अर्थात. छट्टेति, छट्टयति. येथे ही पाळी (बुद्धवचन) आहे – 'जर तो फेकून देतो, तर हे चांगले आहे. जर फेकून देत नाही, तर पाच अंगांनी युक्त भिक्खूला चांदी फेकून देणारा म्हणून नियुक्त केले जावे.' ပုဋ ဟိံသာယံ. ပေါဋေတိ, ပေါဋယတိ. पुट् (धातू) हिंसेच्या अर्थात. पोटेति, पोटयति. ကီဋ ဗန္ဓေ. ဗန္ဓော ဗန္ဓနံ. ကီဋေတိ, ကီဋယတိ. ကီဋော. कीट् (धातू) बंधनाच्या अर्थात. बंध म्हणजे बंधन. कीटेति, कीटयति. कीटो (कीटक). စုဋိ ဆေဒနေ. စုဏ္ဋေတိ, စုဏ္ဋယတိ. चुटि (धातू) छेदनाच्या (कापण्याच्या) अर्थात. चुण्टेति, चुण्टयति. လုဋိ ထေယျေ. လုဏ္ဋေတိ, လုဏ္ဋယတိ. लुटि (धातू) चोरीच्या (स्तेय) अर्थात. लुण्टेति, लुण्टयति. ကူဋ အပ္ပသာဒေ. ကူဋေတိ, ကူဋယတိ. ကူဋံ ရဇတံ. ကူဋာ ဂါဝီ. ကုဋတာပသော. कूट् (धातू) अप्रसाद (असमाधान/खोटेपणा) या अर्थात. कूटेति, कूटयति. कूटं रजतं (खोटे चांदी). कूटा गावी (कपटी गाय). कुटतापसो (कपटी तापस). စုဋ ပုဋ ဖုဋ ဝိဘေဒေ. စုဋေတိ, စုဋယတိ. ပေါဋေတိ, ပေါဋယတိ. ဖောဋေတိ, ဖောဋယတိ. အင်္ဂုလိယော ဖောဋေသုံ. चुट्, पुट्, फुट् (धातू) विभेदन (फोडणे/विभक्त करणे) या अर्थात. चुटेति, चुटयति. पोटेति, पोटयति. फोटेति, फोटयति. 'त्यांनी बोटे मोडली (फोडली).' ဃဋ သံဃာဋေ ဟန္တျတ္ထေ စ. ဃဋေတိ, ဃဋယတိ. घट् (धातू) संघात (एकत्र करणे) आणि मारणे या अर्थात. घटेति, घटयति. ပဋ ပုဋ လုဋ ဃဋ ဃဋိ ဘာသာယံ. ပါဋေတိ, ပါဋယတိ. ပေါဋေတိ, ပေါဋယတိ. လောဋေတိ, လောဋယတိ. ဃာဋေတိ, ဃာဋယတိ. ဃဏ္ဋေတိ, ဃဏ္ဋယတိ. पट्, पुट्, लुट्, घट्, घटि (धातू) भाषणाच्या (बोलण्याच्या) अर्थात. पाटेति, पाटयति. पोटेति, पोटयति. लोटेति, लोटयति. घाटेति, घाटयति. घण्टेति, घण्टयति. ပဋ ဝဋ ဂန္ထေ. ပဋေတိ, ပဋယတိ. ဝဋေတိ, ဝဋယတိ. पट्, वट् (धातू) ग्रंथन (बांधणे/गुंफणे) या अर्थात. पाटेति, पाटयति. वटेति, वटयति. ခေဋ ဘက္ခဏေ. ခေဋေတိ, ခေဋယတိ. खेट् (धातू) भक्षण करण्याच्या अर्थात. खेटेति, खेटयति. ခေါဋ ခေပေ. ခေါဋေတိ, ခေါဋယတိ. खोट् (धातू) क्षेप (फेकणे/निंदा करणे) या अर्थात. खोटेति, खोटयति. ကုဋိ ဒါဟေ. ကုဋေတိ, ကုဋယတိ. कुटि (धातू) दाह (जळणे) या अर्थात. कुटेति, कुटयति. ယုဋ သံသဂ္ဂေ. ယောဋေတိ, ယောဋယတိ. युट् (धातू) संसर्ग (एकत्र येणे) या अर्थात. योटेति, योटयति. ဝဋ ဝိဘဇနေ. ဝဋေတိ, ဝဋယတိ. वट् (धातू) विभाजन करण्याच्या अर्थात. वटेति, वटयति. ဋကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ट-कारान्त धातूंची रूपे. ဌကာရန္တဓာတု ठ-कारान्त धातू. သဌ [Pg.298] သင်္ခါရဂတီသု. သဌေတိ, သဌယတိ. सठ् (धातू) संस्कार आणि गतीच्या अर्थात. सठेति, सठयति. သုဌ အာလသိယေ. သောဌေတိ, သောဌယတိ. सुठ् (धातू) आळसाच्या अर्थात. सोठेति, सोठयति. သုဌိ သောသနေ. သုဏ္ဌေတိ, သုဏ္ဌယတိ. सुठि (धातू) शोषणाच्या (वाळवण्याच्या) अर्थात. सुण्ठेति, सुण्ठयति. သဌ သိလာဃာယံ. သဌေတိ, သဌယတိ. 'सठ्' (धातू) हा स्तुती (प्रशंसा) करण्याच्या अर्थात आहे. सठेति, सठयति (अशी रूपे होतात). သဌ အသမ္မာဘာသနေ. သဌေတိ. သဌယတိ, သဌော. 'सठ्' (धातू) हा अयोग्य भाषणाच्या (असत्य बोलण्याच्या) अर्थात आहे. सठेति, सठयति, सठो (अशी रूपे होतात). ဧတ္ထ သဌောတိ ကေရာဋိကော. သဌယတီတိ သဌော, န သမ္မာ ဘာသတီတိ အတ္ထော. येथे 'सठो' म्हणजे कपटी (धूर्त). 'सठयति' म्हणजे जो धूर्तपणा करतो तो 'सठो' (कपटी), जो योग्य प्रकारे बोलत नाही असा याचा अर्थ आहे. သဌ ကေတဝေ. ရူပံ တာဒိသမေဝ. 'सठ्' (धातू) हा कपट (धूर्तता) या अर्थात आहे. रूपे तशीच (पूर्वीसारखीच) होतात. ‘‘သုဒဿံ ဝဇ္ဇမညေသံ, အတ္တနော ပန ဒုဒ္ဒသံ…ပေ…အတ္တနော ပန ဆာဒေတိ, ကလိံဝ ကိတဝါသဌော’’တိ. "दुसऱ्यांचे दोष सहज दिसतात, परंतु स्वतःचे दोष दिसणे कठीण आहे... परंतु स्वतःचे दोष तो लपवतो, ज्याप्रमाणे कपटी जुगारी (कितावा) आपला वाईट डाव लपवतो." ဧတ္ထ သာကုဏိကော ‘‘ကိတဝါ’’တိ ဝုတ္တော. တဿ ဣဒံ ကေတဝံ, တသ္မိံ ကေတဝေ အယံ ဓာတု ဝတ္တတီတိ အတ္ထော. येथे पक्षी पकडणाऱ्याला (पारध्याला) 'कितावा' असे म्हटले आहे. त्याचे हे कपट (केतव) आहे, त्या कपटाच्या अर्थात हा धातू वापरला जातो असा अर्थ आहे. ကဌိ သောကေ. ကဏ္ဌေတိ, ကဏ္ဌယတိ. 'कठ्' (धातू) हा शोकाच्या अर्थात आहे. कण्ठेति, कण्ठयति (अशी रूपे होतात). ဌကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ठ' कारान्त धातूंची रूपे. ဍကာရန္တဓာတု 'ड' कारान्त धातू. ပဋိ ပရိဟာသေ. ပဏ္ဍေတိ, ပဏ္ဍယတိ. ဥပ္ပဏ္ဍေတိ, ဥပ္ပဏ္ဍယတိ. မနုဿာနံ နံ ဘိက္ခုနိံ ဥပ္ပဏ္ဍိံသု. 'पट्' (धातू) हा परिहासाच्या (उपहासाच्या) अर्थात आहे. पण्डेति, पण्डयति, उप्पण्डेति, उप्पण्डयति (अशी रूपे होतात). लोकांनी त्या भिक्खुणीचा उपहास केला. လဍိ ဥက္ခေပေ. လဏ္ဍေတိ, လဏ္ဍယတိ. 'लड्' (धातू) हा वर फेकण्याच्या (उचलण्याच्या) अर्थात आहे. लण्डेति, लण्डयति (अशी रूपे होतात). ခဍိ ကဍိ ဆေဒေ. ခဏ္ဍေတိ, ခဏ္ဍယတိ. ကဏ္ဍေတိ, ကဏ္ဍယတိ. ခဏ္ဍော, ကဏ္ဍော. 'खड्' आणि 'कड्' (धातू) हे छेदनाच्या (तुकडे करण्याच्या) अर्थात आहेत. खण्डेति, खण्डयति, कण्डेति, कण्डयति, खण्डो, कण्डो (अशी रूपे होतात). ပိဍိ [Pg.299] သံဃာတေ. ပိဏ္ဍေတိ, ပိဏ္ဍယတိ. ပိဏ္ဍော. 'पिड्' (धातू) हा संघाताच्या (एकत्र करण्याच्या) अर्थात आहे. पिण्डेति, piṇḍayati, पिण्डो (अशी रूपे होतात). ဧတ္ထ စ ပိဏ္ဍောတိ သမူဟသင်္ခါတော ကလာပေါပိ ‘‘စောဠံ ပိဏ္ဍော ရတိ ခိဍ္ဍာ’’တိ ဧတ္ထ ဝုတ္တော အာဟာရသင်္ခါတော ပိဏ္ဍောပိ ပိဏ္ဍောယေဝ. येथे 'पिण्डो' म्हणजे समूहाचा वाचक असलेला 'कलाप' (समुदाय) देखील आहे, जसे "चोळं पिण्डो रति खिळ्ळा" (वस्त्र, अन्न, रती, क्रीडा) यामध्ये म्हटले आहे, आणि आहाराचा वाचक असलेला 'पिण्ड' (अन्नाचा घास) देखील 'पिण्ड'च आहे. ကုဍိ ဝေဓနေ. ကုဏ္ဍေတိ, ကုဏ္ဍယတိ. ကုဏ္ဍလံ. 'कुड्' (धातू) हा वेधनाच्या (वेढण्याच्या किंवा छिद्र करण्याच्या) अर्थात आहे. कुण्डेति, कुण्डयति, कुण्डलं (अशी रूपे होतात). မဍိ ဘူသာယံ ဟသနေ စ. မဏ္ဍေတိ, မဏ္ဍယတိ. မဏ္ဍော, မဏ္ဍနံ, မဏ္ဍိတော. 'मड्' (धातू) हा सुशोभित करणे (सजवणे) आणि हसणे या अर्थात आहे. मण्डेति, मण्डयति, मण्डो, मण्डनं, मण्डितो (अशी रूपे होतात). ဘဍိ ကလျာဏေ. ကလျာဏံ ကလျာဏတာ. ဘဏ္ဍေတိ, ဘဏ္ဍယတိ. ဘဏ္ဍော. 'भड्' (धातू) हा कल्याणाच्या (कल्याणतेच्या) अर्थात आहे. भण्डेति, भण्डayati, भण्डो (अशी रूपे होतात). ဧတ္ထ စ ဘဏ္ဍောတိ ဓနံ, အလင်္ကာရော ဝါ. ‘‘ဘဏ္ဍံ ဂဏှာတိ. သမလင်္ကရိတွာ ဘဏ္ဍေနာ’’တိ စ အာဒီသု ဝိယ. येथे 'भण्डो' म्हणजे धन किंवा अलंकार होय. जसे "भण्डं गण्हाति" (वस्तू/धन घेतो) किंवा "समलङ्करित्वा भण्डेन" (अलंकाराने सुशोभित करून) इत्यादी उदाहरणांमध्ये आहे. ဒဏ္ဍ ဒဏ္ဍဝိနိပါတေ. ဒဏ္ဍေတိ, ဒဏ္ဍယတိ. ဒဏ္ဍော. 'दण्ड्' (धातू) हा दण्ड देण्याच्या (शिक्षा करण्याच्या) अर्थात आहे. दण्डेति, दण्डयति, दण्डो (अशी रूपे होतात). ဆဍ္ဍ ဆဍ္ဍနေ. ဆဍ္ဍေတိ, ဆဍ္ဍယတိ. ဆဍ္ဍနကော. ဆဍ္ဍိယတိ, ဆဍ္ဍိတော. ဆဍ္ဍိတုံ, ဆဍ္ဍယိတုံ, ဆဍ္ဍေတွာ, ဆဍ္ဍယိတွာ. 'छड्ड्' (धातू) हा टाकून देण्याच्या अर्थात आहे. छड्डेति, छड्डयति, छड्डनको, छड्डियति, छड्डितो, छड्डितुं, छड्डयितुं, छड्डित्वा, छड्डयित्वा (अशी रूपे होतात). ဍကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ड' कारान्त धातूंची रूपे. ဎကာရန္တဓာတု 'ढ' कारान्त धातू. ဝဍ္ဎ အာကိရဏေ. ကံသပါတိယာ ပါယာသံ ဝဍ္ဎေတိ, ဝဍ္ဎယတိ. ဘတ္တံ ဝဍ္ဎေတွာ အဒါသိ. 'वड्dh' (धातू) हा वाढण्याच्या (वाढून देण्याच्या) अर्थात आहे. काशाच्या थाळीत खीर वाढतो (वड्ढेति, वड्ढयति). भात वाढून दिला. ဣမာနိ ဎကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ही 'ढ' कारान्त धातूंची रूपे आहेत. ဏကာရန္တဓာတု 'ण' कारान्त धातू. ဝဏ္ဏ ဝဏ္ဏကြိယာဝိတ္ထာရဂုဏဝစနေသု. ဝဏ္ဏော ပသံသာ. ကြိယာ ကရဏံ. ဝိတ္ထာရော ဝိတ္ထိန္နတာ. ဂုဏော သီလာဒိဓမ္မော. ဝစနံ [Pg.300] ဝါစာ. ဝဏ္ဏေတိ, ဝဏ္ဏယတိ. ဝဏ္ဏော, ဝဏ္ဏံ, သုဝဏ္ဏံ, သံဝဏ္ဏနာ. 'वण्ण्' (धातू) हा वर्ण (रंग), क्रिया, विस्तार, गुण आणि वचन या अर्थांमध्ये आहे. 'वण्णो' म्हणजे प्रशंसा. 'क्रिया' म्हणजे करणे. 'विस्तारो' म्हणजे विस्तीर्णता. 'गुणो' म्हणजे शीलादी धर्म. 'वचनं' म्हणजे वाणी. वण्णेति, वण्णयति, वण्णो, वण्णं, सुवण्णं, संवण्णना (अशी रूपे होतात). ဝဏ္ဏသဒ္ဒေါ ဆဝိထုတိကုလဝဂ္ဂကာရဏသဏ္ဌာနပမာဏရူပါယတနာဒီသု ဒိဿတိ. တတ္ထ ‘‘သုဝဏ္ဏဝဏ္ဏောသိ ဘဂဝါ’’တိ ဧဝမာဒီသု ဆဝိယံ. ‘‘ကဒါ သညူဠှာ ပန တေ ဂဟပတိ သမဏဿ ဂေါတမဿ ဝဏ္ဏာ’’တိ ဧဝမာဒီသု ထုတိယံ. ‘‘စတ္တာရောမေ ဘော ဂေါတမ ဝဏ္ဏာ’’တိဧဝမာဒီသု ကုလဝဂ္ဂေ. ‘‘အထ ကေန နု ဝဏ္ဏေန, ဂန္ဓထေနောတိ ဝုစ္စတီ’’တိ ဧဝမာဒီသု ကာရဏေ. ‘‘မဟန္တံ ဟတ္ထိရာဇဝဏ္ဏံ အဘိနိမ္မိနိတွာ’’တိဧဝမာဒီသု သဏ္ဌာနေ. ‘‘တယော ပတ္တဿ ဝဏ္ဏာ’’တိ ဧဝမာဒီသု ပမာဏေ. ‘‘ဝဏ္ဏော ဂန္ဓော ရသော ဩဇာ’’တိ ဧဝမာဒီသု ရူပါယတနေတိ. 'वण्ण' (वर्ण) शब्द त्वचा, स्तुती, कुल/वर्ग, कारण, आकार (संस्थान), प्रमाण आणि रूपायतन इत्यादी अर्थांमध्ये आढळतो. त्यामध्ये "सुवण्णवण्णोसि भगवा" (भगवान सुवर्णवर्णाचे आहेत) इत्यादींमध्ये 'त्वचा' या अर्थात आहे. "कदा सञ्ञूळ्हा पन ते gahapati समणस्स गोतमस्स वण्णा" (हे गृहपती, श्रमण गोतमांची प्रशंसा तुम्ही कधी ऐकली आहे का?) इत्यादींमध्ये 'स्तुती' या अर्थात आहे. "चत्तारोमे भो गोतम वण्णा" (हे गोतमा, हे चार वर्ण आहेत) इत्यादींमध्ये 'कुल/वर्ग' या अर्थात आहे. "अथ केन नु वण्णेन, गन्धथेनोति वुच्चती" (तर मग कोणत्या कारणाने मला गंधचोर म्हटले जात आहे?) इत्यादींमध्ये 'कारण' या अर्थात आहे. "महन्तं हत्थिराजवण्णं अभिनिम्मिणित्वा" (मोठ्या हत्तीराजाचा आकार धारण करून) इत्यादींमध्ये 'आकार' या अर्थात आहे. "तयो पत्तस्स वण्णा" (पात्राचे तीन प्रमाण आहेत) इत्यादींमध्ये 'प्रमाण' या अर्थात आहे. "वण्णो गन्धो रसो ओजा" (वर्ण, गंध, रस, ओज) इत्यादींमध्ये 'रूपायतन' या अर्थात आहे. တတ္ထ ဆဝိယန္တိ ဆဝိဂတာ ဝဏ္ဏဓာတု ဧဝ ‘‘သုဝဏ္ဏဝဏ္ဏော’’တိ ဧတ္ထ ဝဏ္ဏဂ္ဂဟဏေန ဂဟိတာတိ အပရေ. ဝဏ္ဏနံ ကိတ္တိယာ ဥဂ္ဃောသနန္တိ ဝဏ္ဏော, ထုတိ. ဝဏ္ဏိယတိ အသင်္ကရတော ဝဝတ္ထပိယတီတိ ဝဏ္ဏော, ကုလဝဂ္ဂေါ. ဝဏ္ဏိယတိ ဖလံ ဧတေန ယထာသဘာဝတော ဝိဘာဝိယတီတိ ဝဏ္ဏော, ကာရဏံ, ဝဏ္ဏံ ဒီဃရဿာဒိဝသေန သဏ္ဌဟနန္တိ ဝဏ္ဏော, သဏ္ဌာနံ. ဝဏ္ဏိယတိ အဍ္ဎမဟန္တာဒိဝသေန ပမိယတီတိ ဝဏ္ဏော, ပမာဏံ. ဝဏ္ဏေတိ ဝိကာရမာပဇ္ဇမာနံ ဟဒယင်္ဂတဘာဝံ ပကာသေတီတိ ဝဏ္ဏော, ရူပါယတနံ. ဧဝံ တေန တေန ပဝတ္တိနိမိတ္တေန ဝဏ္ဏသဒ္ဒဿ တသ္မိံ တသ္မိံ အတ္ထေ ပဝတ္တိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. त्यामध्ये 'त्वचेच्या' अर्थात त्वचेचा रंग हाच "सुवण्णवण्णो" यामध्ये 'वण्ण' शब्दाने घेतला आहे, असे इतर म्हणतात. कीर्तीची घोषणा करणे म्हणजे 'वण्ण' (स्तुती). संकर न करता व्यवस्थापित केले जाते म्हणून 'वण्ण' म्हणजे कुल/वर्ग. ज्याच्याद्वारे फळ त्याच्या स्वभावानुसार स्पष्ट केले जाते ते 'वण्ण' म्हणजे कारण. दीर्घ, र्हस्व इत्यादीनुसार जे आकार घेते ते 'वण्ण' म्हणजे आकार (संस्थान). अर्धा, मोठा इत्यादीनुसार जे मोजले जाते ते 'वण्ण' म्हणजे प्रमाण. विकाराला प्राप्त होऊन मनातील भाव जो प्रकट करतो तो 'वण्ण' म्हणजे रूपायतन. अशा प्रकारे त्या त्या प्रवृत्तीच्या निमित्ताने 'वण्ण' शब्दाची त्या त्या अर्थातील प्रवृत्ती जाणावी. အပရမ္ပိ [Pg.301] ဝဏ္ဏသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရံ ဝဒါမ. ဝဏ္ဏသဒ္ဒေါ သဏ္ဌာနဇာတိ ရူပါယတနကာရဏပမာဏဂုဏပသံသာဇာတရူပပုဠိနက္ခရာဒီသု ဒိဿတိ. အယဉှိ ‘‘မဟန္တံ သပ္ပရာဇဝဏ္ဏံ အဘိနိမ္မိနိတွာ’’တိအာဒီသု သဏ္ဌာနေ ဒိဿတိ, ‘‘ဗြာဟ္မဏောဝ သေဋ္ဌော ဝဏ္ဏော, ဟီနော အညော ဝဏ္ဏော’’တိအာဒီသု ဇာတိယံ. ‘‘ပရမာယ ဝဏ္ဏပေါက္ခရတာယ သမန္နာဂတော’’တိအာဒီသု ရူပါယတနေ. आम्ही 'वण्ण' शब्दाचा दुसराही अर्थविस्तार सांगतो. 'वण्ण' शब्द आकार (संस्थान), जाती, रूपायतन, कारण, प्रमाण, गुण, प्रशंसा, सुवर्ण (जातरूप), वाळू (पुळिन), अक्षर इत्यादी अर्थांमध्ये आढळतो. हा शब्द "महन्तं सप्पराजवण्णं अभिनिम्मिणित्वा" (मोठ्या सर्पराजाचा आकार धारण करून) इत्यादींमध्ये 'आकार' या अर्थात दिसतो; "ब्राह्मणोव सेट्ठो वण्णो, हीनो अञ्ञो वण्णो" (ब्राह्मणच श्रेष्ठ वर्ण आहे, इतर वर्ण हीन आहेत) इत्यादींमध्ये 'जाती' या अर्थात; "परमाय वण्णपोक्खरताय समन्नागतो" (परम वर्णसौंदर्याने युक्त) इत्यादींमध्ये 'रूपायतन' या अर्थात. ‘‘န ဟရာမိ န ဘဉ္ဇာမိ, အာရာ သိင်္ဃာမိ ဝါရိဇံ; အထ ကေန နု ဝဏ္ဏေန, ဂန္ဓထေနောတိ ဝုစ္စတီ’’တိ "मी (कमळ) हरण करत नाही, तोडत नाही, लांबूनच फक्त त्या जलातील कमळाचा सुवास घेतो; तरी मग कोणत्या कारणाने मला गंधचोर म्हटले जात आहे?" အာဒီသု ကာရဏေ. ‘‘တယော ပတ္တဿ ဝဏ္ဏာ’’တိအာဒီသု ပမာဏေ. ‘‘ကဒါ သညူဠှာ ပန တေ ဂဟပတိ သမဏဿ ဂေါတမဿ ဝဏ္ဏာ’’တိအာဒီသု ဂုဏေ. ‘‘ဝဏ္ဏာရဟဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတီ’’တိအာဒီသု ပသံသာယံ. ‘‘ဝဏ္ဏံ အဉ္ဇနဝဏ္ဏေန, ကာလိင်္ဂမှိ ဝနိမှသေ’’တိ ဧတ္ထ ဇာတရူပေ. ‘‘အကိလာသုနော ဝဏ္ဏပထေ ခဏန္တာ’’တိ ဧတ္ထ ပုဠိနေ. ‘‘ဝဏ္ဏာဂမော ဝဏ္ဏဝိပရိယာယော’’တိအာဒီသု အက္ခရေ ဒိဿတိ. ဣစ္စေဝံ သဗ္ဗထာပိ – इत्यादींमध्ये 'कारण' या अर्थात. "तयो पत्तस्स वण्णा" इत्यादींमध्ये 'प्रमाण' या अर्थात. "कदा सञ्ञूळ्हा पन ते..." इत्यादींमध्ये 'गुण' या अर्थात. "वण्णारहस्स वण्णं भासति" (प्रशंसेस पात्र असलेल्याची प्रशंसा करतो) इत्यादींमध्ये 'प्रशंसा' या अर्थात. "वण्णं अञ्जनवण्णेन..." येथे 'सुवर्ण' (जातरूप) या अर्थात. "अकिलासुनो वण्णपथे खणन्ता" (आळस न करता वाळवंटात खोदणारे) येथे 'वाळू' (पुळिन) या अर्थात. "वण्णागमो वण्णविपरियायो" (वर्णागम, वर्णविपर्यय) इत्यादींमध्ये 'अक्षर' या अर्थात दिसतो. अशा प्रकारे सर्व प्रकारे - ဆဝိယံ ထုတိယံ ဟေမေ, ကုလဝဂ္ဂေ စ ကာရဏေ; သဏ္ဌာနေ စ ပမာဏေ စ, ရူပါယတနဇာတိသု; ဂုဏက္ခရေသု ပုဠိနေ, ဝဏ္ဏသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ; त्वचा, स्तुती, सुवर्ण, कुल/वर्ग, कारण, आकार (संस्थान), प्रमाण, रूपायतन, जाती, गुण, अक्षर आणि वाळू (पुळिन) या अर्थांमध्ये 'वण्ण' शब्द प्रवृत्त होतो. သုဝဏ္ဏသဒ္ဒေါ ဆဝိသမ္ပတ္တိဂရုဠဇာတရူပေသု အာဂတော. အယဉှိ ‘‘သုဝဏ္ဏေ ဒုဗ္ဗဏ္ဏေ, သုဂတေ ဒုဂ္ဂတေ’’တိ, ‘‘သုဝဏ္ဏတာ သုဿရတာ’’တိ [Pg.302] စ ဧဝမာဒီသု ဆဝိသမ္ပတ္တိယံ အာဂတော. ‘‘ကာကံ သုဝဏ္ဏာ ပရိဝါရယန္တီ’’တိအာဒီသု ဂရုဠေ. ‘‘သုဝဏ္ဏဝဏ္ဏော ကဉ္စနသန္နိဘတ္တစော’’တိအာဒီသု ဇာတရူပေတိ. 'सुवण्ण' शब्द त्वचासंपत्ती (सुंदर त्वचा), गरुड आणि सुवर्ण (जातरूप) या अर्थांमध्ये आला आहे. हा शब्द "सुवण्णे दुब्बण्णे, सुगते दुग्गते" किंवा "सुवण्णता सुस्सरता" इत्यादींमध्ये 'त्वचासंपत्ती' या अर्थात आला आहे. "काकं सुवण्णा परिवारयन्ति" (कावळ्याला गरुड वेढतात) इत्यादींमध्ये 'गरुड' या अर्थात. "सुवण्णवण्णो कञ्चनसन्निभत्तचो" (सुवर्णवर्ण, सोन्यासारखी त्वचा असलेला) इत्यादींमध्ये 'सुवर्ण' (जातरूप) या अर्थात. ပုဏ သံဃာတေ. ပုဏေတိ, ပုဏယတိ. 'पुण्' (धातू) हा संघाताच्या (एकत्र करण्याच्या) अर्थात आहे. पुणेति, पुणयति (अशी रूपे होतात). စုဏ သင်္ကောစနေ. စုဏေတိ, စုဏယတိ. 'चुण्' (धातू) हा संकोचनाच्या अर्थात आहे. चुणेति, चुणयति (अशी रूपे होतात). စုဏ္ဏ ပေရဏေ. စုဏ္ဏေတိ, စုဏ္ဏယတိ. စုဏ္ဏံ. စုဏ္ဏဝိစုဏ္ဏံ ကရောတိ. 'चुण्ण्' (धातू) हा प्रेरणेच्या अर्थात आहे. चुण्णेति, चुण्णयति, चुण्णं (अशी रूपे होतात). 'चुण्णविचुण्णं करोति' (चूर्ण-विचूर्ण करतो). သဏ ဒါနေ. သဏေတိ, သဏယတိ. 'सण्' (धातू) हा दानाच्या अर्थात आहे. सणेति, सणयति (अशी रूपे होतात). ကုဏ သင်္ကောစနေ. ကုဏေတိ, ကုဏယတိ. ကုဏော. ကုဏဟတ္ထော. ဟတ္ထေန ကုဏီ. 'कुण्' (धातू) हा संकोचनाच्या अर्थात आहे. कुणेति, kuṇayati, कुणो, कुणहत्थो, हत्थेन कुणी (अशी रूपे होतात). တူဏ ပူရဏေ. တူဏေတိ, တူဏယတိ. တူဏီ. 'तूण्' (धातू) हा भरण्याच्या अर्थात आहे. तूणेति, तूणयति, तूणी (अशी रूपे होतात). ဧတ္ထ တူဏီတိ သရကလာပေါ. သာ ဟိ တူဏေန္တိ ပူရေန္တိ သရေ ဧတ္ထာတိ တူဏီ. येथे 'तूणी' म्हणजे बाणांचा भाता होय. कारण ज्यामध्ये बाण भरले जातात, ती 'तूणी' (भाता) होय. ဘူဏ ဘာသာယံ. ဘူဏေတိ, ဘူဏယတိ. भूण (bhūṇa) - बोलणे या अर्थात. भूणेति (bhūṇeti), भूणयति (bhūṇayati). ကဏ နိမီလနေ. ကာဏေတိ, ကာဏယတိ. ကာဏော. कण (kaṇa) - डोळे मिटणे किंवा अंध होणे या अर्थात. काणेति (kāṇeti), काणयति (kāṇayati). काणो (kāṇo - एका डोळ्याने आंधळा). ဧတ္ထ ကာဏောတိ ဧကေန ဝါ ဒွီဟိ ဝါ အက္ခီဟိ ပရိဟီနက္ခိ. အဋ္ဌကထာစရိယာ ပန ‘‘ကာဏော နာမ ဧကက္ခိနာ ကာဏော, အန္ဓော နာမ ဥဘယက္ခိကာဏော’’တိ ဝဒန္တိ, တံ ကာဏန္ဓသဒ္ဒါနံ ဧကတ္ထသန္နိပါတေ ယုဇ္ဇတိ. ဣတရထာ ကာဏကစ္ဆပေါပမသုတ္တေ ဝုတ္တော ကစ္ဆပေါ ဧကသ္မိံ ကာဏော သိယာ, ဧကက္ခိကာဏော စ ပန ပုရိသော ‘‘အန္ဓော’’တိ န ဝတ္တဗ္ဗော သိယာ, တသ္မာ တေသမယုဂဠတ္တေ ဧကေကဿ ယထာသမ္ဘဝံ ဒွိန္နံ ဒွိန္နမာကာရာနံ ဝါစကတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. တထာ ဟိ ကောသလသံယုတ္တဋ္ဌကထာယံ ‘‘ကာဏောတိ ဧကစ္ဆိကာဏော ဝါ [Pg.303] ဥဘယစ္ဆိကာဏော ဝါ’’တိ ဝုတ္တံ. အထ ဝါ ‘‘ဩဝဒေယျာနုသာသေယျာ’’တိ ဧတ္ထ ဩဝါဒါနုသာသနာနံ ဝိယ သဝိသေသတာ အဝိသေသတာ စ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. येथे 'काणो' (kāṇo) म्हणजे एका किंवा दोन्ही डोळ्यांनी दृष्टीहीन असलेला. परंतु अट्ठकथाचार्य (अट्ठकथांचे आचार्य) म्हणतात की, 'काणो म्हणजे एका डोळ्याने आंधळा आणि अंध म्हणजे दोन्ही डोळ्यांनी आंधळा', हे 'काण' आणि 'अंध' या शब्दांच्या एकाच अर्थाने एकत्र येण्याच्या संदर्भात योग्य ठरते. अन्यथा, 'काणकच्छपोपम सुत्ता'मध्ये (काणा कासव उपमा सुत्तात) सांगितलेला कासव एका डोळ्याने काणा असावा, आणि एका डोळ्याने काणा असलेल्या माणसाला 'अंध' म्हटले जाऊ नये. म्हणून, त्यांच्या जोडीच्या अभावामुळे, प्रत्येकासाठी यथासंभव दोन-दोन प्रकारांचे वाचकत्व समजले पाहिजे. तसेच कोसलसंयुत्त अट्ठकथेत म्हटले आहे की, 'काणो म्हणजे एका डोळ्याने काणा किंवा दोन्ही डोळ्यांनी काणा'. किंवा 'ओवदेय्य अनुसासेय्य' (उपदेश करावा आणि अनुशासून मार्गदर्शन करावे) येथे उपदेश आणि अनुशासन यांच्याप्रमाणेच विशेषत्व आणि सामान्यत्व समजले पाहिजे. ဂဏ သင်္ချာနေ. ဂဏေတိ, ဂဏယတိ. ဂဏနာ, ဂဏော. गण (gaṇa) - मोजणे (संख्या मोजणे) या अर्थात. गणेति (gaṇeti), गणयति (gaṇayati). गणना (gaṇanā), गणो (gaṇo - समूह). ဧတ္ထ ဂဏနာတိ သင်္ချာ. ဂဏောတိ ဘိက္ခုသမူဟော. ယေသံ ဝါ ကေသဉ္စိ သမူဟော. သမူဟဿ စ အနေကာနိ နာမာနိ. သေယျထိဒံ – येथे 'गणना' म्हणजे संख्या. 'गणो' म्हणजे भिक्खूंचा समूह किंवा इतर कोणत्याही गोष्टींचा समूह. समूहाची अनेक नावे आहेत, जसे की – သံဃော ဂဏော သမူဟော စ,ခန္ဓော သန္နိစယော စယော; သမုစ္စယော စ နိစယော,ဝဂ္ဂေါ ပူဂေါ စ ရာသိ စ. संघो (संघ), गणो (गण), समूहो (समूह), खन्धो (स्कंध), सन्निचयो (संचय), चयो (चय), समुच्चयो (समुच्चय), निचयो (निचय), वग्गो (वर्ग), पूगो (पूग) आणि रासि (राशी). ကာယော နိကာယော နိကရော,ကဒမ္ဗော ဝိသရော ဃဋာ; သမုဒါယော စ သန္ဒေဟော,သံဃာတော သမယော ကရော. कायो (काय), निकायो (निकाय), निकरो (निकर), कदम्बो (कदंब), विसरो (विसर), घटा (घटा), समुदायो (समुदाय), सन्देहो (संदेह), सङ्घातो (संघात), समयो (समय) आणि करो (कर). ဩဃော ပုဉ္ဇော ကလာပေါ စ,ပိဏ္ဍော ဇာလဉ္စ မဏ္ဍလံ; သဏ္ဍော ပဝါဟော ဣစ္စေတေ,သမူဟတ္ထာဘိဓာယကာတိ. ओघो (ओघ), पुञ्जो (पुंज), कलापो (कलाप), पिण्डो (पिंड), जालं (जाल), मण्डलं (मंडल), sण्डो (संड) आणि प्रवाहो (प्रवाह) - हे सर्व समूहाचा अर्थ दर्शवणारे शब्द आहेत. ကိဉ္စာပိ ဧတေ သံဃဂဏသမူဟာဒယော သဒ္ဒါ သမူဟတ္ထဝါစကာ, တထာပိ သံဃဂဏသဒ္ဒါယေဝ ဝိနာပိ ဝိသေသကပဒေန ဘိက္ခုသမူဟေ ဝတ္တန္တိ, နာညေ, အညေ ပန သံဃဂဏသဒ္ဒေဟိ သဒ္ဓိံ အညမညဉ္စ ကဒါစိ သမာနတ္ထဝိသယာ ဟောန္တိ, ကဒါစိ အသမာနတ္ထဝိသယာ, တသ္မာ ယထာပါဝစနံ အသမ္မုယှန္တေန ယောဇေတဗ္ဗာ. ‘‘ဧကော, ဒွေ’’တိအာဒိနာ ဂဏေတဗ္ဗောတိ ဂဏော. जरी हे संघ, गण, समूह इत्यादी शब्द समूहाचा अर्थ दर्शवणारे असले, तरीही 'संघ' आणि 'गण' हे शब्द कोणत्याही विशेषण पदाशिवाय केवळ भिक्खूंच्या समूहासाठीच वापरले जातात, इतरांसाठी नाही. इतर शब्द मात्र संघ आणि गण या शब्दांसोबत कधी समान अर्थाचे विषय होतात, तर कधी असमान अर्थाचे विषय होतात. म्हणून, बुद्धवचनानुसार गोंधळात न पडता त्यांचे योजन केले पाहिजे. 'एक, दोन' इत्यादी प्रकारे मोजले जावे म्हणून तो 'गणो' (गण) होय. ကဏ္ဏ [Pg.304] သဝနေ. ကဏ္ဏေတိ, ကဏ္ဏယတိ. ကဏ္ဏော. ကဏ္ဏယန္တိ သဒ္ဒံ သုဏန္တိ ဧတေနာတိ ကဏ္ဏော, ယော လောကေ ‘‘သဝနံ, သောတ’’န္တိ စ ဝုစ္စတိ. कण्ण (kaṇṇa) - ऐकणे या अर्थात. कण्णेति (kaṇṇeti), कण्णयति (kaṇṇayati). कण्णो (kaṇṇo - कान). ज्याच्याद्वारे शब्द ऐकतात तो 'कण्णो' (कान) होय, ज्याला जगात 'सवनं' (श्रवण) आणि 'सोतं' (श्रोत्र) असेही म्हटले जाते. ကုဏ ဂုဏ အာမန္တနေ. ကုဏေတိ, ကုဏယတိ. ဂုဏေတိ, ဂုဏယတိ. ဂုဏော. ဂေါဏော. कुण (kuṇa) आणि गुण (guṇa) - आमंत्रित करणे किंवा बोलावणे या अर्थात. कुणेति (kuṇeti), कुणयति (kuṇayati). गुणेति (guṇeti), गुणयति (guṇayati). गुणो (guṇo), गोणो (goṇo). ဧတ္ထ ဂုဏောတိ သီလာဒယော ဓမ္မာ, ကေနဋ္ဌေန တေ ဂုဏာ. ဂေါဏာပိယတိ အာမန္တာပိယတိ အတ္တနိ ပတိဋ္ဌိတော ပုဂ္ဂလော ဒဋ္ဌုံ သောတုံ ပူဇိတုဉ္စ ဣစ္ဆန္တေဟိ ဇနေဟီတိ ဂုဏော. ဧတ္ထ ကိဉ္စာပိ သီလာဒိဓမ္မာနံ အာမန္တာပနံ နတ္ထိ, တထာပိ တံဟေတုအာမန္တနံ နိမန္တနဉ္စ တေယေဝ ကရောန္တိ နာမာတိ ဧဝံ ဝုတ္တံ. တထာ ဟိ – येथे 'गुणो' म्हणजे शील इत्यादी धर्म. कोणत्या अर्थाने ते गुण आहेत? स्वतःमध्ये (शीलादी गुणांमध्ये) प्रतिष्ठित असलेल्या व्यक्तीला पाहण्याची, ऐकण्याची आणि तिची पूजा करण्याची इच्छा असणाऱ्या लोकांद्वारे तो आमंत्रित केला जातो (बोलावला जातो), म्हणून तो 'गुणो' होय. येथे जरी शील इत्यादी धर्मांचे स्वतःहून आमंत्रित करणे नसले, तरी त्यांच्यामुळेच आमंत्रण आणि निमंत्रण दिले जाते, म्हणून असे म्हटले आहे. तसेच म्हटले आहे की – ‘‘ယထာပိ ခေတ္တသမ္ပန္နေ,ဗီဇံ အပ္ပမ္ပိ ရောပိတံ; သမ္မာ ဓာရံ ပဝဿန္တေ,ဖလံ တောသေတိ ကဿက’’န္တိ “ज्याप्रमाणे सुपीक शेतात पेरलेले थोडेसे बी देखील, योग्य प्रकारे पाऊस पडल्यास, शेतकऱ्याला फळाने संतुष्ट करते.” ဧတ္ထ ကဿကဿ တုဋ္ဌိဥပ္ပတ္တိကာရဏတ္တာ ဟေတုဝသေန နိစ္စေတနဿပိ ဖလဿ တောသနံ ဝုတ္တံ, ဧဝမိဓာပိ အာမန္တာပနကာရဏတ္တာ ဧဝံ ဝုတ္တံ. အညေ ပန ‘‘ဂုဉ္ဇန္တေ အဗျယန္တေ ဣတိ ဂုဏာ’’တိ အတ္ထံ ဝဒန္တိ. တဒနုရူပံ ပန ဓာတုသဒ္ဒံ န ပဿာမ, ‘‘ဂုဏ အာမန္တနေ’’ ဣစ္စေဝ ပဿာမ, ဝိစာရေတွာ ဂဟေတဗ္ဗံ. येथे शेतकऱ्याच्या आनंदाच्या उत्पत्तीचे कारण असल्यामुळे, हेतूच्या रूपाने अचेतन फळाचेही 'संतुष्ट करणे' असे म्हटले आहे; त्याचप्रमाणे येथेही आमंत्रित करण्याचे कारण असल्यामुळे असे म्हटले आहे. इतर काही जण 'जे गुंजतात (आवाज करतात) किंवा अव्यय राहतात ते गुण' असा अर्थ सांगतात. परंतु, त्याला अनुरूप असा धातूचा शब्द आम्हाला आढळत नाही, आम्हाला केवळ 'गुण आमंतने' (आमंत्रित करणे या अर्थात गुण धातू) असाच आढळतो, म्हणून विचार करूनच याचा स्वीकार करावा. ဝဏ ဂတ္တဝိစုဏ္ဏနေ. ဝဏေတိ, ဝဏယတိ. ဝဏော. वण (vaṇa) - शरीराला छिन्नविच्छिन्न करणे या अर्थात. वणेति (vaṇeti), वणयति (vaṇayati). वणो (vaṇo - जखम). ဧတ္ထ ဝဏောတိ အရု. သာ ဟိ သရီရံ ဝဏယတိ ဝိစုဏ္ဏေတိ ဆိဒ္ဒါဝဆိဒ္ဒံ ကရောတီတိ ဝဏောတိ ဝုစ္စတိ. येथे 'वणो' म्हणजे जखम (व्रण). कारण ती शरीराला छिन्नविच्छिन्न करते, त्याचे तुकडे करते आणि त्याला छिद्रयुक्त करते, म्हणून तिला 'वणो' (जखम) म्हटले जाते. ပဏ္ဏ ဟရိတေ. ပဏ္ဏေတိ, ပဏ္ဏယတိ. တာလပဏ္ဏံ. သူပေယျပဏ္ဏံ. पण्ण (paṇṇa) - हिरवे असणे या अर्थात. पण्णेति (paṇṇeti), पण्णयति (paṇṇayati). तालपण्णं (ताडपत्र), सूपेय्यपण्णं (भाजीचे पान). ဧတ္ထ [Pg.305] စ ဟရိတဘာဝဝိဂတေပိ ဝတ္ထုသ္မိံ ပဏ္ဏဘာဝေါ ရူဠှိတော ပဝတ္တောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ‘‘ပဏ္ဏံ, ပတ္တံ, ပလာသော, ဒလံ’’ ဣစ္စေတေ သမာနတ္ထာ. आणि येथे हिरवेपणा नष्ट झाल्यावरही त्या वस्तूमध्ये 'पण्ण' (पान) हा भाव रूढीने प्रचलित झाला आहे, असे समजले पाहिजे. 'पण्णं' (पर्ण), 'पत्तं' (पत्र), 'पलासो' (पळस/पान), 'दलं' (दल) हे सर्व समान अर्थाचे शब्द आहेत. ပဏ ဗျဝဟာရေ. ပဏေတိ, ပဏယတိ. ရာဇာ စ ဒဏ္ဍံ ဂရုကံ ပဏေတိ. पण (paṇa) - व्यवहार करणे किंवा शिक्षा देणे या अर्थात. पणेति (paṇeti), पणयति (paṇayati). 'राजा च दण्डं गरुकं पणेति' (आणि राजा कठोर शिक्षा सुनावतो). ဣမာနိ ဏကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ही 'ण'कारान्त धातूंची रूपे आहेत. တကာရန္တဓာတု 'त'कारान्त धातू စိန္တ စိန္တာယံ. စိန္တေတိ, စိန္တယတိ. စိတ္တံ, စိန္တာ, စိန္တနာ, စိန္တနကော. ကာရိတေ ‘‘စိန္တာပေတိ, စိန္တာပယတီ’’တိ ရူပါနိ. चिन्त (cinta) - विचार करणे या अर्थात. चिन्तेति (cinteti), चिन्तयति (cintayati). चित्तं (चित्त), चिन्ता (चिंता), चिन्तना (चिंतन), चिन्तनको (चिंतन करणारा). प्रयोजक (णिच्) रूपात 'चिन्तापेति' (cintāpeti), 'चिन्तापयति' (cintāpayati) अशी रूपे होतात. တတ္ထ စိတ္တန္တိ အာရမ္မဏံ စိန္တေတီတိ စိတ္တံ, ဝိဇာနာတီတိ အတ္ထော, သဗ္ဗစိတ္တသာဓာရဏဝသေနေတံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧတ္ထ သိယာ – ကသ္မာ ‘‘အာရမ္မဏံ စိန္တေတီတိ စိတ္တ’’န္တိ ဝတွာပိ ‘‘ဝိဇာနာတီတိ အတ္ထော’’တိ ဝုတ္တံ, နနု စိန္တနဝိဇာနနာ နာနာသဘာဝါ. န ဟိ ‘‘စိန္တေတီ’’တိ ပဒဿ ‘‘ဝိဇာနာတီ’’တိ အတ္ထော သမ္ဘဝတိ, ဒုပ္ပညဿ ဟိ နာနပ္ပကာရေဟိ စိန္တယတောပိ သုခုမတ္ထာဓိဂမော န ဟောတီတိ? သစ္စံ, ‘‘ဝိဇာနာတီ’’တိ ဣဒံ ပဒံ စိတ္တဿ သညာပညာကိစ္စေဟိ ဝိသိဋ္ဌဝိသယဂ္ဂဟဏံ ဒီပေတုံ ဝုတ္တံ သဗ္ဗစိတ္တသာဓာရဏတ္တာ စိတ္တသဒ္ဒဿ. ယဉှိ ဓမ္မဇာတံ ‘‘စိတ္တ’’န္တိ ဝုစ္စတိ, တဒေဝ ဝိညာဏံ, တသ္မာ ဝိဇာနနတ္ထံ ဂဟေတွာ သညာပညာကိစ္စာဝိသိဋ္ဌဝိသယဂ္ဂဟဏံ ဒီပေတုံ ‘‘ဝိဇာနာတီ’’တိ ဝုတ္တံ. त्यामध्ये 'चित्तं' म्हणजे जे आलंबनाचा (विषयाचा) विचार करते ते चित्त होय, 'जाणून घेते' असा याचा अर्थ आहे; हे सर्व चित्तांच्या सामान्य स्वरूपाच्या संदर्भात समजले पाहिजे. येथे शंका येऊ शकते की – 'जे आलंबनाचा विचार करते ते चित्त' असे म्हणूनही पुन्हा 'जाणून घेते असा अर्थ आहे' असे का म्हटले गेले? विचार करणे आणि जाणून घेणे हे दोन्ही भिन्न स्वभावाचे आहेत ना? 'विचार करतो' या शब्दाचा अर्थ 'जाणून घेतो' असा असणे शक्य नाही, कारण मंदबुद्धीचा माणूस अनेक प्रकारे विचार करत असला तरी त्याला सूक्ष्म अर्थाचे आकलन होत नाही? हे सत्य आहे, 'जाणून घेते' हे पद चित्ताच्या संज्ञा आणि प्रज्ञा यांच्या कार्यापेक्षा वेगळे असे विशिष्ट विषयाचे ग्रहण स्पष्ट करण्यासाठी म्हटले आहे, कारण 'चित्त' हा शब्द सर्व चित्तांसाठी सामान्य आहे. जो धर्म स्वभावतः 'चित्त' म्हणून ओळखला जातो, तोच 'विञ्ञाण' (विज्ञान/विज्ञाण) देखील आहे. म्हणून, जाणून घेण्याचा अर्थ घेऊन, संज्ञा आणि प्रज्ञा यांच्या कार्यापेक्षा वेगळे असे विशिष्ट विषयाचे ग्रहण स्पष्ट करण्यासाठी 'जाणून घेते' असे म्हटले आहे. ဣဒါနိ အညဂဏိကဓာတုဝသေနပိ နိဗ္ဗစနံ ပကာသယာမ – သဗ္ဗေသု စိတ္တေသု ယံ လောကိယကုသလာကုသလမဟာကြိယစိတ္တံ, တံ ဇဝနဝီထိဝသေန အတ္တနော သန္တာနံ စိနောတီတိ စိတ္တံ, ဝိပါကံ ကမ္မကိလေသေဟိ စိတန္တိ စိတ္တံ, ဣဒံ စိဓာတုဝသေန နိဗ္ဗစနံ. ယံ ကိဉ္စိ လောကေ ဝိစိတ္တံ သိပ္ပဇာတံ, သဗ္ဗဿ တဿ [Pg.306] စိတ္တေနေဝ ကရဏတော စိတ္တေတိ ဝိစိတ္တေတိ ဝိစိတ္တံ ကရိယတိ ဧတေနာတိ စိတ္တံ, စိတ္တကရဏတာယ စိတ္တန္တိ ဝုတ္တံ ဟောတိ, ဣဒံ စိတ္တဓာတုဝသေန နိဗ္ဗစနံ. စိတ္တတာယ စိတ္တံ, ဣဒံ ပါဋိပဒိကဝသေန နိဗ္ဗစနံ. တေနာဟု အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘သဗ္ဗမ္ပိ ယထာနုရူပတော စိတ္တတာယ စိတ္တံ, စိတ္တကရဏတာယ စိတ္တန္တိ ဧဝမေတ္ထ အတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော’’တိ. आता आम्ही इतर गणांतील धातूंच्या आधारेही व्युत्पत्ती स्पष्ट करतो – सर्व चित्तांमध्ये जे लौकिक कुशल, अकुशल आणि महाक्रिया चित्त आहे, ते जवनवीथीच्या (जवन प्रक्रियेच्या) द्वारे स्वतःच्या प्रवाहाला संचित करते म्हणून ते 'चित्त' होय; विपाकाला (कर्तव्याच्या फळाला) कर्म आणि क्लेशांद्वारे संचित करते म्हणून ते 'चित्त' होय, ही 'चि' (ci) धातूच्या आधारे केलेली व्युत्पत्ती आहे. जगात जे काही विविध प्रकारचे शिल्प (कला) आहे, ते सर्व चित्ताद्वारेच निर्माण केले जात असल्यामुळे, जे चित्रविचित्र करते, ज्याच्याद्वारे विविध गोष्टी केल्या जातात ते 'चित्त' होय; चित्रविचित्र करण्याच्या (विविधता निर्माण करण्याच्या) गुणधर्मामुळे त्याला 'चित्त' म्हटले गेले आहे, ही 'चित्त' (citta) धातूच्या आधारे केलेली व्युत्पत्ती आहे. विविधतेमुळे ते 'चित्त' आहे, ही प्रातिपदिक (मूळ शब्द) आधारे केलेली व्युत्पत्ती आहे. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी म्हटले आहे की – 'सर्व काही योग्यतेनुसार विविधतेमुळे चित्त आहे, आणि विविधता निर्माण करण्याच्या गुणधर्मामुळे चित्त आहे, असा येथे अर्थ समजला पाहिजे.' ဧတ္ထ ဟိ စိတ္တဿ သရာဂသဒေါသာဒိဘေဒဘိန္နတ္တာ သမ္ပယုတ္တဘူမိအာရမ္မဏဟီနမဇ္ဈိမပဏီတာဓိပတီနံ ဝသေန စိတ္တဿ စိတ္တတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ကိဉ္စာပိ ဧကဿ စိတ္တဿ ဧဝံ ဝိစိတ္တတာ နတ္ထိ, တထာပိ ဝိစိတ္တာနံ အန္တောဂဓတ္တာ သမုဒါယဝေါဟာရေန အဝယဝေါပိ ‘‘စိတ္တ’’န္တိ ဝုစ္စတိ, ယထာ ပဗ္ဗတနဒီသမုဒ္ဒါဒိဧကဒေသေသု ဒိဋ္ဌေသု ပဗ္ဗတာဒယော ဒိဋ္ဌာတိ ဝုစ္စန္တိ. တေနာဟု အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘ကာမဉ္စေတ္ထ ဧကမေဝ ဧဝံ စိတ္တံ န ဟောတိ, စိတ္တာနံ ပန အန္တောဂဓတ္တာ ဧတေသု ယံ ကိဉ္စိ ဧကမ္ပိ စိတ္တတာယ ‘စိတ္တ’န္တိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတီ’’တိ. येथे चित्ताच्या सराग-सदोष (रागयुक्त, द्वेषयुक्त) इत्यादी भेदांमुळे भिन्न असल्यामुळे, संप्रयुक्त भूमी, आलंबन (आरम्मण), हीन, मध्यम, प्रणीत आणि अधिपती यांच्या वशाने चित्ताची 'चित्तता' (चित्त असणे) जाणून घ्यावी. जरी एकाच चित्तामध्ये अशी विचित्रता (विविधता) नसते, तरीही विविध चित्तांचा त्यात अंतर्भाव असल्यामुळे, समूहाच्या व्यवहाराने त्याच्या एका अवयवाला (भागाला) देखील 'चित्त' असे म्हटले जाते; जसे की पर्वत, नदी, समुद्र इत्यादींच्या एका भागाला पाहिले असता 'पर्वत इत्यादी पाहिले' असे म्हटले जाते. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी म्हटले आहे - 'जरी येथे अशा प्रकारे एकच चित्त नसते, तरीही चित्तांचा अंतर्भाव असल्यामुळे, यांपैकी कोणत्याही एकालाही चित्तत्वामुळे 'चित्त' म्हणणे योग्यच आहे.' ဧတ္ထ စ ဝုတ္တပ္ပကာရာနမတ္ထာနံ ဝိနိစ္ဆယော ဗဝတိ. ကထံ? ယသ္မာ ယတ္ထ ယတ္ထ ယထာ ယထာ အတ္ထော လဗ္ဘတိ, တတ္ထ တတ္ထ တထာ တထာ ဂဟေတဗ္ဗော. တသ္မာ ယံ အာသေဝနပစ္စယဘာဝေန စိနောတိ, ယဉ္စ ကမ္မုနာ အဘိသင်္ခတတ္တာ စိတံ, တံ တေန ကာရဏေန စိတ္တန္တိ ဝုတ္တံ. ယံ ပန တထာ န ဟောတိ, တံ ပရိတ္တကြိယဒွယံ အန္တိမဇဝနဉ္စ လဗ္ဘမာနစိန္တနဝိစိတ္တတာဒိဝသေန စိတ္တန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ, ဟသိတုပ္ပာဒေါ ပန အညဇဝနဂတိကောယေဝါတိ. आणि येथे सांगितलेल्या प्रकारच्या अर्थांचा निश्चय होतो. कसा? कारण जिथे जिथे जसा जसा अर्थ प्राप्त होतो, तिथे तिथे तसा तसा तो ग्रहण केला पाहिजे. म्हणून, जे आसेवनप्रत्ययभावाने (पुनरावृत्तीच्या प्रभावाने) संचय करते, आणि जे कर्माद्वारे अभिसंस्कृत (निर्मित) झाल्यामुळे संचित (चित) आहे, त्याला त्या कारणाने 'चित्त' म्हटले गेले आहे. परंतु जे तसे नसते, ते परीत्त-क्रियाद्वय (दोन लहान क्रियाचित्ते) आणि अंतिम जवन हे प्राप्त होणाऱ्या चिंतन-विचित्रता इत्यादींच्या वशाने 'चित्त' म्हणून जाणावे; हसितुत्पाद (हसविणारे चित्त) तर इतर जवनांच्या गतीचेच आहे. ဣမာနိ စိတ္တဿ နာမာနိ – ही चित्ताची नावे आहेत – စိတ္တံ မနော မာနသဉ္စ, ဝိညာဏံ ဟဒယံ မနံ; နာမာနေတာနိ ဝေါဟာရ-ပထေ ဝတ္တန္တိ ပါယတော. चित्त, मन, मानस, विज्ञान (विञ्ञाण), हृदय आणि मनस्; ही नावे सामान्यतः व्यवहाराच्या मार्गात वापरली जातात. စိတ္တသဒ္ဒေါ [Pg.307] ပညတ္တိယံ ဝိညာဏေ ဝိစိတ္တေ စိတ္တကမ္မေ အစ္ဆရိယေတိ ဧဝမာဒီသု အတ္ထေသု ဒိဿတိ. အယဉှိ ‘‘စိတ္တော ဂဟပတိ. စိတ္တမာသော’’တိအာဒီသု ပညတ္တိယံ ဒိဿတိ. ‘‘စိတ္တံ မနော မာနသ’’န္တိအာဒီသု ဝိညာဏေ. ‘‘ဝိစိတ္တဝတ္ထာဘရဏာ’’တိအာဒီသု ဝိစိတ္တေ. ‘‘ဒိဋ္ဌံ ဝေါ ဘိက္ခဝေ စရဏံ နာမ စိတ္တ’’န္တိအာဒီသု စိတ္တကမ္မေ. ‘‘ဣင်္ဃ မဒ္ဒိ နိသာမေဟိ, စိတ္တရူပံဝ ဒိဿတီ’’တိအာဒီသု အစ္ဆရိယေတိ. 'चित्त' हा शब्द प्रज्ञप्ती (नाव/संकल्पना), विज्ञान, विचित्र (विविध), चित्रकर्म (कलाकृती) आणि आश्चर्य इत्यादी अर्थांमध्ये दिसून येतो. जसे की, 'चित्त गृहपती' (चित्तो गहपति), 'चित्त मास' (चित्तमासो - चैत्र महिना) इत्यादींमध्ये तो प्रज्ञप्तीमध्ये दिसतो. 'चित्तं मनो मानसं' इत्यादींमध्ये विज्ञानात दिसतो. 'विचित्र वस्त्र आणि आभूषणे' (विचित्तवत्थाभरणा) इत्यादींमध्ये विचित्र या अर्थात दिसतो. 'भिक्खूहो, तुम्ही चरण नावाचे चित्र (चित्त) पाहिले आहे का?' इत्यादींमध्ये चित्रकर्माच्या अर्थात दिसतो. 'हे मद्दी, जरा पाहा, हे आश्चर्यकारक रूपासारखे दिसत आहे' इत्यादींमध्ये आश्चर्याच्या अर्थात दिसतो. စိတ သဉ္စေတနေ. စေတေတိ, စေတယတိ. ရတ္တော ခေါ ဗြာဟ္မဏ ရာဂေန အဘိဘူတော အတ္တဗျာဗာဓာယပိ စေတေတိ, ပရဗျာဗာဓာယပိ စေတေတိ, ဥဘယဗျာဗာဓာယပိ စေတေတိ. အာကင်္ခတိ စေတယတိ, တံ နိသေဓ ဇုတိန္ဓရ. စေတနာ, သဉ္စေတနာ. စေတယိတံ, စေတေတွာ, စေတယိတွာ. သဉ္စိစ္စ ပါဏံ ဇီဝိတာ ဝေါရောပေတိ. 'चित' धातू संचेतन (विचार करणे/चेतना करणे) या अर्थात आहे. 'चेतेति, चेतयति' (तो विचार करतो/चेतवतो). 'हे ब्राह्मणा, रागाने अभिभूत झालेला मनुष्य स्वतःच्या नुकसानीचाही विचार करतो, दुसऱ्याच्या नुकसानीचाही विचार करतो आणि दोघांच्याही नुकसानीचा विचार करतो.' 'इच्छा करतो, विचार करतो, हे द्युतिंधर (तेजस्वी), त्याला रोख.' चेतना, संचेतना. चेतयित (विचार केलेले), चेतेत्वा, चेतयित्वा (विचार करून). 'जाणूनबुजून (सञ्चिच्च) प्राण्याला जीवितापासून वंचित करतो.' တတ္ထ စေတနာတိ စေတယတီတိ စေတနာ, သဒ္ဓိံ အတ္တနာ သမ္ပယုတ္တဓမ္မေ အာရမ္မဏေ အဘိသန္ဒဟတီတိ အတ္ထော. သဉ္စေတနာတိ ဥပသဂ္ဂဝသေန ပဒံ ဝဍ္ဎိတံ. စေတယိတန္တိ စေတနာကာရော. သဉ္စိစ္စာတိ သယံ ဉတွာ, စေစ္စ အဘိဝိတရိတွာတိ အတ္ထော. ဣမာနိ စေတနာယ နာမာနိ – तेथे 'चेतना' म्हणजे जी चेतवते (विचार करते) ती चेतना; स्वतःसोबत संप्रयुक्त असलेल्या धर्मांना आलंबनावर (आरम्मणावर) जोडते, असा याचा अर्थ आहे. 'संचेतना' हे उपसर्गाच्या योगाने पद वाढवले गेले आहे. 'चेतयित' म्हणजे चेतनेचा आकार (प्रकार). 'सञ्चिच्च' म्हणजे स्वतः जाणून, विचारपूर्वक किंवा जाणूनबुजून असा अर्थ आहे. ही चेतनेची नावे आहेत – သဉ္စေတနာ စေတယိတံ, စေတနာ ကမ္မမေဝ စ; ကမ္မဉှိ ‘‘စေတနာ’’ တွေဝ, ဇိနေနာဟစ္စ ဘာသိတံ. संचेतना, चेतयित, चेतना आणि कर्म; कारण जिनांनी (बुद्धांनी) स्वतः 'चेतना म्हणजेच कर्म' असे सांगितले आहे. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘စေတနာဟံ ဘိက္ခဝေ ကမ္မံ ဝဒါမိ, စေတယိတွာ ကမ္မံ ကရောတိ ကာယေန ဝါစာယ မနသာ’’တိ. याविषयी ही पाळी (वचन) आहे - 'भिक्खूहो, मी चेतनेलाच कर्म म्हणतो. विचार करून (चेतवून) मनुष्य कायेने, वाचेने आणि मनाने कर्म करतो.' မန္တ [Pg.308] ဂုတ္တဘာသနေ. မန္တေတိ, မန္တယတိ, နိမန္တေတိ, နိမန္တယတိ, အာမန္တေတိ, အာမန္တယတိ. ဇနာ သင်္ဂမ္မ မန္တေန္တိ, မန္တယန္တိ, မန္တယိံသု ရဟောဂတာ. နိမန္တယိတ္ထ ရာဇာနံ. အာမန္တယိတ္ထ ဒေဝိန္ဒော, ဝိသုကမ္မံ မဟိဒ္ဓိကံ. မန္တာ, မန္တော. ကာရိတေ ‘‘မန္တာပေတိ, မန္တာပယတီ’’တိ ရူပါနိ. 'मन्त' धातू गुप्त भाषणाच्या (गुपित बोलण्याच्या) अर्थात आहे. 'मन्तेति, mन्तयति' (तो गुप्त सल्लामसलत करतो), 'निमन्तेति, निमन्तयति' (तो आमंत्रित करतो), 'आमन्तेति, आमन्तयति' (तो संबोधित करतो/बोलावतो). 'लोक एकत्र येऊन गुप्त सल्लामसलत करतात, त्यांनी एकांतात सल्लामसलत केली.' 'राजाला आमंत्रित केले.' 'देवेंद्राने महाऋद्धीवान विसुकम्माला (विश्वकर्माला) आमंत्रित केले/बोलावले.' मन्ता, मन्तो. प्रयोजक (कारित) रूपात 'मन्तापेति, मन्तापयति' अशी रूपे होतात. ဧတ္ထ မန္တာတိ ပညာ, ‘‘ဂဝေသနသညာ’’တိပိ ဝဒန္တိ. မန္တောတိ ဂုတ္တဘာသနံ. ‘‘ဥပဿုတိကာပိ သုဏန္တိ မန္တံ, တသ္မာ ဟိ မန္တော ခိပ္ပမုပေတိ ဘေဒ’’န္တိ ဧတ္ထ ဟိ ဂုတ္တဘာသနံ ‘‘မန္တော’’တိ ဝုစ္စတိ. အပိစ မန္တောတိ ဆဠင်္ဂမန္တော. ဝုတ္တဉ္စ ‘‘ယေ မန္တံ ပရိဝတ္တေန္တိ, ဆဠင်္ဂံ ဗြဟ္မစိန္တိတ’’န္တိ. ဧတ္ထ သိက္ခာ နိရုတ္တိ ကပ္ပ ဗျာကရဏ ဇောတိသတ္ထ ဆန္ဒောဝိစိတိဝသေန မန္တော ‘‘ဆဠင်္ဂေါ’’တိ ဝေဒိတဗ္ဗော. ဧတာနိ ဧဝ ဆ ‘‘ဝေဒင်္ဂါနီ’’တိ ဝုစ္စန္တိ. ဝေဒေါ ဧဝ ဟိ ‘‘မန္တော, သုတီ’’တိ စ ဝုတ္တော. အထ ဝါ မန္တောတိ ဝေဒါဒိဝိဇ္ဇာ. येथे 'मन्ता' म्हणजे प्रज्ञा, याला 'गवेषणासंज्ञा' असेही म्हणतात. 'मन्तो' म्हणजे गुप्त भाषण (गुपित). 'चोरीछुपे ऐकणारेही गुप्त सल्लामसलत ऐकतात, म्हणूनच गुप्त सल्लामसलत (मंत) लवकरच उघड होते' येथे गुप्त भाषणाला 'मंत' म्हटले आहे. तसेच 'मंत' म्हणजे षडंगमंत्र (सहा अंगांचा मंत्र). आणि म्हटले आहे - 'जे मंत्राचे आवर्तन करतात, जे ब्रह्मचिंतित षडंग आहे.' येथे शिक्षा, निरुक्त, कल्प, व्याकरण, ज्योतिषशास्त्र आणि छंदोविचिती यांच्या वशाने मंत्राला 'षडंग' (सहा अंगे असलेला) जाणावे. यांनाच सहा 'वेदांगे' असे म्हणतात. वेदच 'मंत' आणि 'श्रुती' (सुती) म्हणूनही सांगितले गेले आहेत. किंवा 'मंत' म्हणजे वेदादी विद्या होय. ယန္တ သင်္ကောစနေ. ယန္တေတိ, ယန္တယတိ. ယန္တံ, တေလယန္တံ ယထာစက္ကံ, ဧဝံ ကမ္ပတိ မေဒနီ. 'यन्त' धातू संकोचन (नियंत्रण/आकुंचन) या अर्थात आहे. 'यन्तेति, यन्तयति'. 'यंत्र, जसे तेलाचे यंत्र चक्राप्रमाणे फिरते, तशी ही पृथ्वी कंपित होते.' သတ္တ ဂတိယံ. သတ္တေတိ, သတ္တယတိ. 'सत्त' धातू गती या अर्थात आहे. 'सत्तेति, सत्तयति'. သန္တ အာမပ္ပယောဂေ. အာမပ္ပယောဂေါ နာမ ဥဿန္နကြိယာ. သန္တေတိ, သန္တယတိ. 'sन्त' धातू आमप्रयोगाच्या अर्थात आहे. आमप्रयोग म्हणजे तीव्र किंवा निरंतर क्रिया. 'सन्तेति, सन्तयति'. ကိတ္တ သံသန္ဒနေ. ကိတ္တေတိ, ကိတ္တယတိ. ‘‘ယေ ဝေါဟံ ကိတ္တယိဿာမိ, ဂိရာဟိ အနုပုဗ္ဗသော. ကိတ္တနာ ပရိကိတ္တနာ’’တိအာဒီသု ပန ကတ္ထနာ ‘‘ကိတ္တနာ’’တိ ဝုစ္စတိ. 'कित्त' धातू संसंदन (संकीर्तन/प्रशंसा/एकत्र करणे) या अर्थात आहे. 'कित्तेति, कित्तयति'. 'ज्यांची मी अनुक्रमाने वाणीने प्रशंसा (कीर्तन) करीन. कीर्तना, परिकीर्तना' इत्यादींमध्ये तर कथनाला (प्रशंसेला) 'कीर्तना' म्हटले जाते. တန္တ ကုဋုမ္ဗဓာရဏေ. တန္တေတိ, တန္တယတိ. သတန္တော, သပ္ပဓာနောတိ အတ္ထော. 'तन्त' धातू कुटुंबधारणाच्या (कुटुंबाचे पालनपोषण करण्याच्या) अर्थात आहे. 'तन्तेति, तन्तयति'. 'सतंतो' म्हणजे जो प्रधान (मुख्य) आहे असा अर्थ आहे. ယတ [Pg.309] နိကာရောပကာရေသု. ယတေတိ, ယတယတိ. နီတော စ ပဋိဒါနေ, ယတဓာတု နိဥပသဂ္ဂတော ပရော ပဋိဒါနေ ဝတ္တတိ, နိယျာတေတိ, နိယျာတယတိ. တကာရဿ ပန ဒကာရတ္တေ ကတေ ‘‘နိယျာဒေတိ, နိယျာဒယတိ. ရထံ နိယျာဒယိတွာန, အဏဏော ဧဟိ သာရထီ’’တိ ရူပါနိ. 'यत' धातू निकार (अपमान/नाश) आणि उपकार या अर्थांमध्ये आहे. 'यतेति, यतयति'. आणि 'नी' धातू प्रतिदानात (परत देण्यात) वापरला जातो, 'यत' धातू 'नि' उपसर्गाच्या पुढे आल्यावर प्रतिदानाच्या अर्थात वापरला जातो, जसे की 'निय्यातेति, निय्यातयति'. 'त' काराचा 'द' कार झाल्यावर 'निय्यादेति, निय्यादयति' अशी रूपे होतात. जसे की - 'हे सारथी, रथ परत देऊन (निय्यादयित्वान) ऋणमुक्त होऊन ये.' ဝတု ဘာသာယံ. ဝတ္တေတိ, ဝတ္တယတိ. 'वतु' धातू भाषणाच्या (बोलण्याच्या) अर्थात आहे. 'वत्तेति, वत्तयति'. ပတ ဂတိယံ. ပတေတိ, ပတယတိ. 'पत' धातू गती (पडणे/जाणे) या अर्थात आहे. 'पतेति, पतयति'. ဝါတ ဂတိသုခသေဝနေသု. ဂတိ သုခံ သေဝနန္တိ တယော အတ္ထာ. တတ္ထ သုခနံ သုခံ. ဝါတေတိ, ဝါတယတိ. ဝါတော, ဝါတပုပ္ဖံ. စီဝရဿ အနုဝါတော. 'वात' धातू गती, सुख आणि सेवन या तीन अर्थांमध्ये आहे. तेथे सुखी करणे म्हणजे सुख होय. 'वातेति, वातयति'. वात (वारा), वातपुष्प. चीवराचा अनुवात (काठ/पट्टी). ကေတ အာမန္တနေ. ကေတေတိ, ကေတယတိ. ကေတကော. 'केत' धातू आमंत्रण (बोलावणे) या अर्थात आहे. 'केतेति, केतयति'. केतक (केवडा). သတ္တ သန္တာနကြိယာယံ. သန္တာနကြိယာ နာမ ပဗန္ဓကြိယာ အဝိစ္ဆေဒကရဏံ. သတ္တေတိ, သတ္တယတိ. သတ္တော. 'सत्त' धातू संतानक्रियेच्या (प्रवाहाच्या/सातत्याच्या क्रियेच्या) अर्थात आहे. संतानक्रिया म्हणजे प्रबंधक्रिया (सातत्य राखणे) किंवा अविच्छेद (खंड न पडू देणे). 'सत्तेति, सत्तयति'. सत्त (प्राणी/सत्त्व). ‘‘ကိန္နု သန္တရမာနောဝ, လာယိတွာ ဟရိတံ တိဏံ; ခါဒ ခါဒါတိ လပသိ, ဂတသတ္တံ ဇရဂ္ဂဝ’’န္တိ 'हिरवे गवत कापून, एवढ्या घाईघाईने तू या गतप्राण (मृत) म्हाताऱ्या बैलाला 'खा, खा' असे काय म्हणून बोलत आहेस?' ပါဠိယံ ပန ‘‘ဂတသတ္တံ ဇရဂ္ဂဝ’’န္တိ ပါဌဿ ‘‘ဝိဂတဇီဝိတံ ဇိဏ္ဏဂေါဏ’’န္တိ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏေသုံ. ဣမိနာ သတ္တသဒ္ဒဿ ဇီဝိတဝစနံ ဝိယ ဒိဿတိ, ‘‘န သုကရာ ဥဉ္ဆေန ပဂ္ဂဟေန ယာပေတု’’န္တိ ဧတ္ထ ပဂ္ဂဟသဒ္ဒဿ ပတ္တကထနံ ဝိယ. သုဋ္ဌု ဝိစာရေတဗ္ဗံ. पाळीमध्ये (पाठात) 'गतसत्तं जरग्गवं' या पाठाचा अर्थ 'विगतजीवितं जिण्णगोणं' (ज्याचे जीवन निघून गेले आहे असा म्हातारा बैल) असा वर्णिला आहे. यावरून 'सत्त' शब्दाचा अर्थ 'जीवित' (प्राण) असा असल्याचे दिसते, जसे की 'न सुकरा उञ्छेन पग्गहेन यापेतुं' येथे 'पग्गह' शब्दाचा अर्थ 'पात्र' असा सांगितले गेल्यासारखे आहे. यावर चांगला विचार केला पाहिजे. သုတ္တ အဝမောစနေ. သုတ္တေတိ, သုတ္တယတိ. 'सुत्त' धातू अवमोचन (मुक्त करणे/सोडवणे) या अर्थात आहे. 'सुत्तेति, सुत्तयति'. မုတ္တ ပသဝနေ. မုတ္တေတိ, မုတ္တယတိ. ဩမုတ္တေတိ, ဩမုတ္တယတိ. မုတ္တံ. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘မုတ္တေတိ ဩဟဒေတိ စာ’’တိ. တတ္ထ မုတ္တေတီတိ ပဿာဝံ ကရောတိ. ဩဟဒေတီတိ ကရီသံ ဝိဿဇ္ဇေတိ. ကာရိတေ ‘‘မုတ္တာပေတိ, မုတ္တာပယတီ’’တိ ရူပါနိ. 'मुत्त' धातू प्रसवण (उत्सर्जन/मूत्रविसर्जन) या अर्थात आहे. 'मुत्तेति, मुत्तयति'. 'ओमुत्तेति, ओमुत्तयति'. मुत्त (मूत्र). याविषयी ही पाळी आहे - 'मुत्तेति ओहदेति चा' (तो मूत्रविसर्जन करतो आणि मलोत्सर्जन करतो). तेथे 'मुत्तेति' म्हणजे लघवी (लघूशंका) करतो. 'ओहदेति' म्हणजे विष्ठा (मलोत्सर्जन) विसर्जित करतो. प्रयोजक (कारित) रूपात 'मुत्तापेति, मुत्तापयति' अशी रूपे होतात. ကတ္တရ [Pg.310] သေထိလ္လေ. ကတ္တရေတိ, ကတ္တရယတိ. ကတ္တရော. ကတ္တရဒဏ္ဍော, ကတ္တရသုပ္ပံ. 'कत्तर' धातू शैथिल्य (शिथिलता/कमकुवतपणा) या अर्थात आहे. 'कत्तरेति, कत्तरयति'. कत्तरो (कमकुवत/वृद्ध). कत्तरदण्ड (वृद्धाची काठी), कत्तरसुप्प (जुने/शिथिल सूप). တတ္ထ ကတ္တရောတိ ဇိဏ္ဏော. မဟလ္လကောတိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ကေနဋ္ဌေန? ကတ္တရယတိ အင်္ဂါနံ သိထိလဘာဝေန သိထိလော ဘဝတီတိ အတ္ထေန. ကတ္တရဒဏ္ဍောတိ ကတ္တရေဟိ ဇိဏ္ဏမနုဿေဟိ ဧကန္တတော ဂဟေတဗ္ဗတာယ ကတ္တရာနံ ဒဏ္ဍော ကတ္တရဒဏ္ဍော. တေနာဟု အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘ကတ္တရဒဏ္ဍောတိ ဇိဏ္ဏကာလေ ဂဟေတဗ္ဗဒဏ္ဍော’’တိ. ကတ္တရသုပ္ပန္တိ ဇိဏ္ဏသုပ္ပံ. ကတ္တရဉ္စ တံ သုပ္ပဉ္စာတိ ကတ္တရသုပ္ပန္တိ သမာသော. तेथे 'कत्तर' म्हणजे जीर्ण (वृद्ध). 'महल्लक' (म्हातारा) असे म्हटले आहे. कोणत्या अर्थाने? अवयवांच्या शिथिलतेमुळे जो शिथिल होतो, या अर्थाने. 'कत्तरदण्ड' म्हणजे जीर्ण (वृद्ध) माणसांनी निश्चितपणे हातात धरण्यायोग्य असल्यामुळे वृद्धांची काठी म्हणजे 'कत्तरदण्ड' होय. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी म्हटले आहे - 'कत्तरदण्ड म्हणजे वृद्धपकाळात हातात धरण्याची काठी'. 'कत्तरसुप्प' म्हणजे जीर्ण सूप. 'कत्तर' आणि 'सूप' यांचा 'कत्तरसुप्प' असा समास होतो. စိတ္တ စိတ္တကရဏေ, ကဒါစိ ဒဿနေပိ. စိတ္တကရဏံ ဝိစိတ္တဘာဝကရဏံ. စိတ္တေတိ, စိတ္တယတိ. စိတ္တံ. चित्त (धातू) चित्रित करणे (विविध करणे) या अर्थात, कधीकधी पाहणे या अर्थातही. 'चित्तकरण' म्हणजे विचित्र (विविध) करणे. चित्तेति, चित्तयति. चित्तं. တကာရန္တဓာတုရူပါနိ. तकारान्त धातूंची रूपे. ထကာရန္တဓာတု थकारान्त धातू. ကထ ကထနေ. ကထေတိ, ကထယတိ. ဓမ္မံ သာကစ္ဆတိ. သာကစ္ဆာ, ကထာ, ပရိကထာ, အဋ္ဌကထာ. कथ (धातू) सांगणे (कथन करणे) या अर्थात. कथेति, कथयति. 'धम्मं साकच्छति' (धम्माची चर्चा करतो). साकच्छा (चर्चा), कथा, परिकथा, अट्ठकथा (अर्थकथा). တတ္ထ သာကစ္ဆတီတိ သဟ ကထယတိ. အတ္ထော ကထိယတိ ဧတာယာတိ အဋ္ဌကထာ, တ္ထကာရဿ ဋ္ဌကာရတ္တံ. तेथे 'साकच्छति' म्हणजे एकत्र बोलणे (चर्चा करणे). जिच्याद्वारे अर्थ सांगितला जातो ती 'अट्ठकथा' होय, येथे 'त्थ' काराचा 'ट्ठ' कार झाला आहे. ယာယ’တ္ထမဘိဝဏ္ဏေန္တိ, ဗျဉ္ဇနတ္ထပဒါနုဂံ; နိဒါနဝတ္ထုသမ္ဗန္ဓံ, ဧသာ အဋ္ဌကထာ မတာ. जिच्याद्वारे व्यंजने, अर्थ आणि पदांचे अनुसरण करून, निदान (कारण) आणि वस्तूच्या (कथेच्या) संबंधासह अर्थाचे वर्णन केले जाते, ती 'अट्ठकथा' मानली जाते. ‘‘အဋ္ဌကထာ’’တိ စ ‘‘အတ္ထသံဝဏ္ဏနာ’’တိ စ နိန္နာနာကရဏံ. 'अट्ठकथा' आणि 'अत्थसंवण्णना' (अर्थवर्णन) यात काहीही भेद नाही (दोन्ही एकच आहेत). ပထိ ဂတိယံ. ပန္ထေန္တိ, ပန္ထယန္တိ. ပန္ထော. ဘူဝါဒိဂဏေ ‘‘ပထ ဂတိယ’’န္တိ အကာရန္တဝသေန ကထိတဿ ‘‘ပထတိ, ပထော’’တိ [Pg.311] နိဂ္ဂဟီတာဂမဝဇ္ဇိတာနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ, ဣဓ ပန ဣကာရန္တဝသေန ကထိတဿ သနိဂ္ဂဟီတာဂမာနိ ရူပါနိ နိစ္စံ ဘဝန္တီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. पथि (धातू) गती या अर्थात. पन्थेन्ति, पन्थयन्ति. पन्थो (मार्ग). भूवादि गणात 'पथ गतिया' अशा अकारान्त रूपाने सांगितलेल्या धातूची 'पथति, पतो' अशी निग्गहीत (अनुस्वार) आगम नसलेली रूपे होतात, परंतु येथे इकारान्त रूपाने सांगितलेल्या धातूची निग्गहीत आगमासह रूपे नेहमी होतात, असे समजावे. ပုတ္ထ အာဒရာနာဒရေသု. ပုတ္ထေတိ, ပုတ္ထယတိ. पुत्थ (धातू) आदर आणि अनादर या अर्थात. पुत्थेति, पुत्थयति. မုတ္ထ သံဃာတေ. မုတ္ထေတိ, မုတ္ထယတိ. मुत्थ (धातू) संघात (एकत्र करणे) या अर्थात. मुत्थेति, मुत्थयति. ဝတ္ထ အဒ္ဒနေ. ဝတ္ထေတိ, ဝတ္ထယတိ. वत्थ (धातू) अद्दन (पीडा देणे/हिंसा) या अर्थात. वत्थेति, वत्थयति. ပုထ ဘာသာယံ. ပေါထေတိ, ပေါထယတိ. ကထေတီတိ အတ္ထော. पुथ (धातू) बोलणे या अर्थात. पोथेति, पोथयति. बोलतो असा अर्थ आहे. ပုထ ပဟာရေ. ပေါထေတိ, ပေါထယတိ. ကုမာရေ ပေါထေတွာ အဂမာသိ. पुथ (धातू) प्रहार करणे (मारणे) या अर्थात. पोथेति, पोथयति. 'कुमारे पोथेत्वा अगमासि' (मुलांना मारून तो निघून गेला). ကထ ဝါကျပဗန္ဓေ. ကထေတိ, ကထယတိ. ကထာ. कथ (धातू) वाक्यरचना (भाषण प्रबंध) या अर्थात. कथेति, कथयति. कथा. သထ ဒုဗ္ဗလျေ. သထေတိ, သထယတိ. सथ (सथ्) धातू दौर्बल्य (कमकुवत होणे) या अर्थात आहे. सथेति, सथयति. အတ္ထ ပတ္ထ ယာစနာယံ. အတ္ထေတိ, အတ္ထယတိ. အတ္ထော. ပတ္ထေတိ, ပတ္ထယတိ. ပတ္ထနာ. ပဋိပက္ခံ အတ္ထယန္တိ ဣစ္ဆန္တီတိ ပစ္စတ္ထိကာ. अत्थ (अत्थ्) आणि पत्थ (पत्थ्) धातू याचना (मागणी करणे/इच्छा करणे) या अर्थात आहेत. अत्थेति, अत्थयति. अत्थो (अर्थ/गरज). पत्थेति, पत्थयति (प्रार्थना करतो/इच्छा करतो). पत्थना (प्रार्थना/इच्छा). जे प्रतिपक्षाची (शत्रूची) इच्छा करतात, त्यांना 'पच्चत्थिक' (शत्रू/विरोधी) म्हणतात. ထောမ သိလာဃာယံ. ထောမေတိ, ထောမယတိ. ထောမနာ. थोम (थोम्) धातू श्लाघा (स्तुती करणे) या अर्थात आहे. थोमेति, थोमयति (स्तुती करतो). थोमना (स्तुती). ကာထ ဟိံသာယံ. ကာထေတိ, ကာထယတိ. काथ (काथ्) धातू हिंसा (इजा करणे) या अर्थात आहे. काथेति, काथयति. သထ ဗန္ဓနေ. သထေတိ, သထယတိ. सथ (सथ्) धातू बंधन (बांधणे) या अर्थात आहे. सथेति, सथयति. သန္ထ ဂန္ထ သန္ထမ္ဘေ. သန္ထေတိ, သန္ထယတိ. ဂန္ထေတိ, ဂန္ထယတိ. ဂန္ထော. सन्थ (सन्थ्) आणि गन्थ (गन्थ्) धातू संस्तंभ (स्तंभित करणे/घट्ट बांधणे) या अर्थात आहेत. सन्थेति, सन्थयति. गन्थेति, गन्थयति (ग्रंथित करतो/बांधतो). गन्थो (ग्रंथ/गाठ). ထကာရန္တဓာတုရူပါနိ. थकारान्त धातूंची रूपे. ဒကာရန္တဓာတု दकारान्त धातू ဟဒ [Pg.312] ကရီသုဿဂ္ဂေ. ကရီသုဿဂ္ဂေါ ကရီသဿ ဥဿဂ္ဂေါ ဝိဿဇ္ဇနံ. ဟဒေတိ, ဟဒယတိ. ဩဟဒေတိ, ဩဟဒယတိ. हद (हद्) धातू करीसोत्सर्ग (मलविसर्जन करणे) या अर्थात आहे. करीसोत्सर्ग म्हणजे करीसाचा (मलाचा) उत्सर्ग किंवा विसर्जन करणे. हदेति, हदयति (मलविसर्जन करतो). ओहदेति, ओहदयति (घाण करतो/मल विसर्जन करतो). ဝိဒ လာဘေ. ဣမသ္မိံ ဌာနေ လာဘော နာမ အနုဘဝနံ, တသ္မာ ဝိဒဓာတု အနုဘဝနေ ဝတ္တတီတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. သုခံ ဝေဒနံ ဝေဒေတိ. ဒုက္ခံ ဝေဒနံ ဝေဒေတိ. ဝေဒယတိ. ဝေဒနာ, ဝိတ္တိ. ဝေဒယိတံ. သုခံ ဝေဒနံ ဝေဒယမာနော. विद (विद्) धातू लाभ (प्राप्ती) या अर्थात आहे. या ठिकाणी लाभ म्हणजे अनुभव घेणे, म्हणून 'विद' धातू अनुभवाच्या अर्थात वर्ततो असा अर्थ घ्यावा. 'सुखं वेदनं वेदेति' (सुखद वेदनेचा अनुभव घेतो). 'दुक्खं वेदनं वेदेति' (दुःखद वेदनेचा अनुभव घेतो). वेदयति. वेदना (अनुभूती), वित्ती (जाणीव/आनंद). वेदयितं (अनुभवलेले). 'सुखं वेदनं वेदयमानो' (सुखद वेदनेचा अनुभव घेणारा). ကုဒိ အနတဘာသနေ. ကုန္ဒေတိ, ကုန္ဒယတိ. कुदि (कुद्) धातू अनृतभाषण (खोटे बोलणे) या अर्थात आहे. कुन्देति, कुन्दयति. မိဒ သိနေဟနေ. အတြ သိနေဟော နာမ ပီတိ. မေဒေတိ, မေဒယတိ. मिद (मिद्) धातू स्नेह (प्रेम/स्नेहन) या अर्थात आहे. येथे स्नेह म्हणजे प्रीती (प्रेम). मेदेति, मेदयति. ဆဒ သံဝရဏေ. ဂေဟံ ဆာဒေတိ, ဆာဒယတိ. ဒေါသံ ဆာဒေတိ, ဆာဒယတိ. ပဋိစ္ဆာဒေတိ, ပဋိစ္ဆာဒယတိ. ဆတ္တံ. ဆန္နာ ကုဋိ. छद (छद्) धातू संवरण (झाकणे/आच्छादित करणे) या अर्थात आहे. 'गेहं छादेति, छादयति' (घर झाकतो/छप्पर घालतो). 'दोसं छादेति, छादयति' (दोष झाकतो). पटिच्छादेति, पटिच्छादयति (पूर्णपणे झाकतो). छत्तं (छत्र/छत्री). छन्ना कुटि (झाकलेली कुटी). တတြ ဆတ္တန္တိ အာတပတ္တံ. အာတပံ ဆာဒေတီတိ ဆတ္တံ. ပဋိစ္ဆာဒိယတေတိ ဆန္နာ. तेथे 'छत्तं' म्हणजे आतपत्र (उन्हापासून संरक्षण करणारे छत्र). जे उन्हापासून (आतपापासून) संरक्षण करते (झाकते) ते छत्र होय. जे झाकले जाते ते 'छन्ना' (झाकलेली). စုဒ သဉ္စောဒနေ အာဏတ္တိယဉ္စ. စောဒေတိ, စောဒယတိ. စောဒကော, စုဒိတကော, စောဒနာ. အာနန္ဒော ဗုဒ္ဓစောဒိတော. चुद (चुद्) धातू संचोदन (प्रेरित करणे) आणि आज्ञा देणे या अर्थात आहे. चोदेति, चोदयति (प्रेरित करतो/चोदित करतो). चोदको (प्रेरक/चोदक), चुदितको (प्रेरित केलेला), चोदना (प्रेरणा/चोदना). 'आनन्दो बुद्धचोदितो' (बुद्धांद्वारे प्रेरित झालेले आनंद). တတြ စောဒနာတိ စာလနာ. စာလနာတိ ဒေါသာရောပနာတိ အတ္ထော. तेथे 'चोदना' म्हणजे चालना (हलवणे/प्रेरित करणे). चालना म्हणजे दोषांचे आरोपण करणे असा अर्थ आहे. ဆဒ္ဒ ဝမနေ. ဆဒ္ဒေတိ, ဆဒ္ဒယတိ. छड्ड (छड्ड्) धातू वमन (उलटी करणे/टाकून देणे) या अर्थात आहे. छड्डेति, छड्डयति. မဒ ဝိတ္တိယောဂေ. မဒေတိ, မဒယတိ. मद (मद्) धातू वित्तीयोग (आनंद किंवा मदाचा योग) या अर्थात आहे. मदेति, मदयति. ဝိဒ စေဟနာချာနနိဝါသေသု. စေဟနာ သညာဏံ. အာချာနံ ကထနံ. နိဝါသော နိဝသနံ. ဝေဒေတိ, ဝေဒယတိ. ပဋိဝေဒေတိ, ပဋိဝေဒယတိ. ပဋိဝေဒယာမိ တေ မဟာရာဇ. विद (विद्) धातू चेहना (संज्ञा/ज्ञान), आख्यान (सांगणे) आणि निवास (राहणे) या अर्थांमध्ये आहे. चेहना म्हणजे संज्ञान (ओळख/ज्ञान). आख्यान म्हणजे कथन (सांगणे). निवास म्हणजे निवसन (राहणे). वेदेति, वेदयति (जाणवतो/सांगतो). पटिवेदेति, पटिवेदयति (निवेदन करतो/कळवतो). 'पटिवेदयामि ते महाराज' (महाराज, मी आपल्याला निवेदन करतो). သဒ္ဒ [Pg.313] သဒ္ဒနေ. သဒ္ဒေတိ, သဒ္ဒယတိ. ဝိသဒ္ဒေတိ, ဝိသဒ္ဒယတိ. သဒ္ဒေါ, သဒ္ဒိတော. ဒီဃတ္တေ ‘‘သဒ္ဒါယတီ’’တိ ရူပံ. सद्द (सद्द्) धातू शब्दन (आवाज करणे/बोलवणे) या अर्थात आहे. सद्देति, सद्दयति (आवाज करतो/बोलवतो). विसद्देति, विसद्दयति (विशेष आवाज करतो). सद्धो (शब्द/आवाज), सद्दितो (शब्दांकित/आवाज केलेला). दीर्घत्व आल्यावर 'सद्दायति' असे रूप होते. ဧတ္ထ စ ‘‘မံ သဒ္ဒါယတီတိ သညာယ ဝေဂေန ဥဒကေ ပတီ’’တိ အဋ္ဌကထာပါဌော နိဒဿနံ, ဣဒံ ‘‘ပဗ္ဗတာယတီ’’တိ ရူပံ ဝိယ ဓာတုဝသေန နိပ္ဖန္နံ န ဟောတီတိ န ဝတ္တဗ္ဗံ, ဓာတုဝသေန နိပ္ဖန္နံယေဝါတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. သဒ္ဒေါတိ သဒ္ဒိယတီတိ သဒ္ဒေါ, ယထာဝုစ္စတီတိ ဝစနံ. အထ ဝါ သဒ္ဒိယတိ အတ္ထော အနေနာတိ သဒ္ဒေါ. ဂရဝေါ ပန ‘‘သပ္ပတီတိ သဒ္ဒေါ. ဥဒီရိယတိ အဘိလပိယတီတိ အတ္ထော’’တိ ဝဒန္တိ. သူဒ အာသေစနေ. သူဒေတိ, သူဒယတိ. သူဒေါ. သူဒေါတိ ဘတ္တကာရကော, ယော ‘‘ရသကော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. ကန္ဒ သာတစ္စေ. သာတစ္စံ သတတဘာဝေါ နိရန္တရဘာဝေါ. ကန္ဒေတိ, ကန္ဒယတိ. မုဒ သံသဂ္ဂေ. ဧကတောကရဏံ သံသဂ္ဂေါ. မောဒေတိ, မောဒယတိ သတ္တူနိ သပ္ပိနာ. နဒ ဘာသာယံ. နာဒေတိ, နာဒယတိ. ဟေတုကတ္တုရူပါနီတိ န ဝတ္တဗ္ဗာနိ ပါဠိဒဿနတော ‘‘သီဟော စ သီဟနာဒေန, ဒဒ္ဒရံ အဘိနာဒယီ’’တိ. အညတြာပိ သံသယော န ကာတဗ္ဗော. ဣမသ္မိံ စုရာဒိဂဏေ ဟေတုကတ္တုရူပသဒိသာနမ္ပိ သုဒ္ဓကတ္တုရူပါနံ သန္ဒိဿနတော. नद (nada) हा धातू भाषणात (बोलण्यात) वापरला जातो. 'नादेति' (nādeti), 'नादयति' (nādayati) ही रूपे बनतात. पाळी साहित्यातील 'सीहो च सीहनादेन, दद्दरं अभिनादयी' (सिंह आणि सिंहनादाने, दद्दर पर्वताला त्याने गुंजवून सोडले) या दर्शनावरून ही प्रयोजक (हेतुकर्तृ) रूपे आहेत असे म्हणू नये. इतर ठिकाणीही संशय घेऊ नये. कारण या चुरादि गणात प्रयोजक रूपांसारखी दिसणारी रूपे देखील प्रयोजक नसतानाही आढळतात. သဒ အဿာဒနေ. သာဒေတိ, သာဒယတိ. အဿာဒေတိ, အဿာဒယတိ. ဧတ္ထ အာဥပသဂ္ဂေါ ရဿဝသေန ဌိတော. सद (sada) हा धातू आस्वाद घेण्याच्या (assādana) अर्थात आहे. 'सादेति' (sādeti), 'सादयति' (sādayati) ही रूपे बनतात. 'अस्सादेति' (assādeti), 'अस्सादयति' (assādayati) ही रूपे होतात. येथे 'आ' (ā) हा उपसर्ग र्हस्व (ऱ्हस्व) रूपाने स्थित आहे. ဂဒ ဒေဝသဒ္ဒေ. ဒေဝသဒ္ဒေါ ဝုစ္စတိ မေဃသဒ္ဒေါ. ဂဒေတိ, ဂဒယတိ. गद (gada) हा धातू देवशब्दाच्या (meghasadda) अर्थात आहे. देवशब्द म्हणजे ढगांचा आवाज (मेघशब्द) असे म्हटले जाते. 'गदेति' (gadeti), 'गदयति' (gadayati) ही रूपे बनतात. ပဒ [Pg.314] ဂတိယံ. ပဒေတိ, ပဒယတိ. ပဒံ. ဣမိဿာ ဒိဝါဒိဂဏေ ‘‘ပဇ္ဇတီ’’တိ ရူပံ ဘဝတိ, ဣဓ ပန ဤဒိသာနိ. पद (pada) हा धातू गतीच्या (gati) अर्थात आहे. 'पदेति' (padeti), 'पदयति' (padayati) ही रूपे बनतात. 'पदं' (padaṃ) हे नाम बनते. या धातूचे दिवादि गणात 'पज्जति' (pajjati) असे रूप होते, परंतु येथे (चुरादि गणात) अशी (पदेति, पदयति) रूपे होतात. ဆိဒ္ဒ ကဏ္ဏဘေဒေ. ဆိဒ္ဒေတိ, ဆိဒ္ဒယတိ. ဆိဒ္ဒံ. छिद्द (chidda) हा धातू कान टोचण्याच्या (kaṇṇabheda) अर्थात आहे. 'छिद्देति' (chiddeti), 'छिद्दयति' (chiddayati) ही रूपे बनतात. 'छिद्दं' (chiddaṃ) हे नाम बनते. ဆိဒ ဒွေဓာကရဏေ. နနု ဘော ယော စတုဓာ ဝါ ပဉ္စဓာ ဝါ အနေကသတဓာ ဝါ ဆိန္ဒတိ, တဿ တံ ဆေဒနံ ဒွေဓာကရဏံ နာမ န ဟောတိ, ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ သာမညေန အဝတွာ ‘‘ဒွေဓာကရဏေ’’တိ ဒွိဓာ ဂဟဏံ ကတန္တိ? ဒွိဓာကရဏံ နာမ န ဟောတီတိ န ဝတ္တဗ္ဗံ, အနေကသတဓာ ဆေဒနမ္ပိ ဒွိဓာကရဏံယေဝ. အပရဿ ဟိ အပရဿ ဆိန္နကောဋ္ဌာသဿ ပုဗ္ဗေန ဧကေန ကောဋ္ဌာသေန သဒ္ဓိံ အပေက္ခနဝသေန ဒွိဓာကရဏံ ဟောတိယေဝ. ဆေဒေတိ, ဆေဒယတိ. छिद् (chida) हा धातू दोन भाग करण्याच्या (dvedhākaraṇa) अर्थात आहे. शंका: 'अहो! जो चार, पाच किंवा अनेक शेकडो भाग करतो, त्याचे ते छेदणे दोन भाग करणे (द्विधाकरण) ठरत नाही. असे असताना, सामान्यपणे न सांगता 'द्वेधाकरणे' (दोन भाग करणे) असे विशिष्ट ग्रहण का केले आहे?' उत्तर: 'दोन भाग करणे होत नाही' असे म्हणू नये, कारण अनेक शेकडो भाग करणे देखील दोन भाग करणेच आहे. कारण कापलेल्या प्रत्येक नवीन भागाची आधीच्या एका भागाशी तुलना केली असता, ते दोन भाग करणेच ठरते. 'छेदेति' (chedeti), 'छेदयति' (chedayati) ही रूपे बनतात. ယော တေ ဟတ္ထေ စ ပါဒေ စ, ကဏ္ဏနာသဉ္စ ဆေဒယိ; တဿ ကုဇ္ဈ မဟာဝီရ, မာ ရဋ္ဌံ ဝိနဿ ဣဒံ; ज्याने तुमचे हात आणि पाय, तसेच कान आणि नाक कापले; हे महावीरा! तुम्ही त्याच्यावर रागवा, जेणेकरून हे राष्ट्र नष्ट होणार नाही. ယော မေ ဟတ္ထေ စ ပါဒေ စ, ကဏ္ဏနာသဉ္စ ဆေဒယိ; စိရံ ဇီဝတု သော ရာဇာ, န ဟိ ကုဇ္ဈန္တိ မာဒိသာတိ. ज्याने माझे हात आणि पाय, तसेच कान आणि नाक कापले; तो राजा दीर्घायुषी होवो, कारण माझ्यासारखे लोक कधीही रागवत नाहीत. ဆဒ အပဝါရဏေ. ဆာဒေတိ, ဆာဒယတိ. ဆတ္တံ. ပုရိသဿ ဘတ္တံ ဆာဒယတိ. छद (chada) हा धातू झाकण्याच्या (apavāraṇa) अर्थात आहे. 'छादेति' (chādeti), 'छादयति' (chādayati) ही रूपे बनतात. 'छत्तं' (chattaṃ - छत्री) हे नाम बनते. 'पुरिसस्स भत्तं छादेति' (तो माणसाचे अन्न झाकतो). ဤဒီ သန္ဒီပနေ. ဤဒေတိ, ဤဒယတိ. ဤကာရန္တဝသေန နိဒ္ဒိဋ္ဌတ္တာ သနိဂ္ဂဟီတာဂမာနိ ရူပါနိ န ဘဝန္တိ. ईदी (īdī) हा धातू स्पष्ट करण्याच्या (sandīpana) अर्थात आहे. 'ईदेति' (īdeti), 'ईदयति' (īdayati) ही रूपे बनतात. 'ई' कारान्त म्हणून निर्देश केल्यामुळे अनुस्वार आगम (saniggahītāgama) असलेली रूपे होत नाहीत. အဒ္ဒ ဟိံသာယံ. အဒ္ဒေတိ, အဒ္ဒယတိ. अद्द (adda) हा धातू हिंसेच्या अर्थात आहे. 'अद्देति' (addeti), 'अद्दयति' (addayati) ही रूपे बनतात. ဝဒ ဘာသာယံ. ဝါဒေတိ, ဝါဒယတိ. ဝါဒေါ. वद (vada) हा धातू भाषणाच्या (बोलण्याच्या) अर्थात आहे. 'वादेति' (vādeti), 'वादयति' (vādayati) ही रूपे बनतात. 'वादो' (vādo) हे नाम बनते. တတ္ထ ‘‘ဝါဒေတိ, ဝါဒယတီ’’တိ ဣမေသံ ‘‘ဝဒတီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေနေဝ အတ္ထော ဒဋ္ဌဗ္ဗော, န ဟေတုကတ္တုဝသေန. တထာ ဟိ ‘‘သင်္ကေတံ ကတွာ ဝိသံဝါဒေတိ. ဩဝဒေယျာနုသာသေယျ. ဣဒမေဝ သစ္စန္တိ စ ဝါဒယန္တိ. အဝိသံဝါဒကော လောကဿာ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုဒီပကပါဠိနယာ ဒိဿန္တိ[Pg.315], သဒ္ဒသတ္ထေ စ ‘‘ဝါဒယတီ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒံ ဒိဿတိ. တတ္ထ ဝိသံဝါဒေတီတိ မုသာ ဝဒေတိ, အထ ဝါ ဝိပ္ပလမ္ဘေတိ, ဝါဒေါတိ ဝစနံ. ‘‘ဝါဒေါ ဇပ္ပော ဝိတဏ္ဍာ’’တိ ဧဝံဝိဓာသု တီသု ကထာသု ဝါဒသင်္ခါတာ ကထာ. ‘‘ဝါဒါပေတိ, ဝါဒါပယတီ’’တိ ဒွေယေဝ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ ဘဝန္တိ. तेथे 'वादेति, वादयति' यांचा अर्थ 'वदति' (बोलतो) या शुद्धकर्तृ (suddhakattu) रूपाप्रमाणेच समजावा, प्रयोजक (hetukattari) रूपाप्रमाणे नाही. कारण 'सङ्केतं कत्वा विसंवादेति' (संकेत करून फसवितो), 'ओवदेय्यानुसासेय्य' (उपदेश व अनुशासने करावीत), 'इदमेव सच्चन्ति च वादयन्ति' (हेच सत्य आहे असे ते म्हणतात), 'अविसंवादको लोकस्स' (जगाला न फसवणारा) इत्यादी प्रयोजक अर्थ स्पष्ट करणाऱ्या पाळी पद्धती आढळतात, आणि व्याकरणशास्त्रातही 'वादयति' हे शुद्धकर्तृ पद दिसते. तेथे 'विसंवादेति' म्हणजे खोटे बोलतो किंवा फसवितो. 'वाद' म्हणजे वचन. 'वादो जप्पो वितण्डा' अशा प्रकारच्या तीन कथांमध्ये 'वाद' संज्ञक कथा होय. 'वादापेति, वादापयति' ही दोनच प्रयोजक (हेतुकर्तृ) रूपे होतात. ဆဒီ ဣစ္ဆာယံ. ဤကာရန္တောယံ ဓာတု, တသ္မာ သနိဂ္ဂဟီတာဂမာနိဿ ရူပါနိ န ဘဝန္တိ. ပုရိသဿ ဘတ္တံ ဆာဒေတိ, ဆာဒယတိ, ရုစ္စတီတိ အတ္ထော. ပုရိသဿ ဘတ္တံ ဆာဒယမာနံ တိဋ္ဌတိ ဆာဒေန္တံ ဝါ. छदी (chadī) हा धातू इच्छेच्या अर्थात आहे. हा 'ई' कारान्त धातू आहे, म्हणून याची अनुस्वार आगम असलेली रूपे होत नाहीत. 'पुरिसस्स भत्तं छादेति, छादयति' याचा अर्थ 'त्याला अन्न आवडते' (ruccati) असा आहे. 'पुरिसस्स भत्तं छादयमानं तिट्ठति छादेन्तं वा' (माणसाला अन्न आवडत राहते). ဝဒီ အဘိဝါဒနထုတီသု. အယမ္ပိ ဤကာရန္တော ဓာတု, တသ္မာ ဣမဿပိ သနိဂ္ဂဟီတာဂမာနိ ရူပါနိ န ဘဝန္တိ. ဝါဒေတိ, ဝါဒယတိ, ဝန္ဒတိ, ထောမေတိ ဝါတိ အတ္ထော. ဣမာနိ အနုပသဂ္ဂါနိ ရူပါနိ. သဒ္ဒသတ္ထေပိ စ ‘‘ဝါဒယတီ’’တိ အနုပသဂ္ဂဝန္ဒနထုတိအတ္ထံ ပဒံ ဝုတ္တံ, သာသနေ ပန ‘‘အဘိဝါဒေတိ, အဘိဝါဒယတိ, အဘိဝါဒနံ, ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ’’တိအာဒီနိ သောပသဂ္ဂါနိ ရူပါနိ ဒိဿန္တိ. वदी (vadī) हा धातू अभिवादन आणि स्तुती या अर्थांमध्ये आहे. हा देखील 'ई' कारान्त धातू आहे, म्हणून याचीही अनुस्वार आगम असलेली रूपे होत नाहीत. 'वादेति, वादयति' म्हणजे वंदन करतो (vandati) किंवा स्तुती करतो (thometi) असा अर्थ आहे. ही उपसर्ग नसलेली (अनुपसर्ग) रूपे आहेत. व्याकरणशास्त्रातही 'वादयति' हे उपसर्ग नसलेले पद वंदन आणि स्तुती या अर्थात सांगितले आहे, परंतु शासनात (बुद्धवचनात) 'अभिवादेति, अभिवादायति, अभिवादनं, भगवन्तं अभिवादेत्वा' इत्यादी उपसर्गासहित (सोपसर्ग) रूपे आढळतात. တတ္ထ အဘိဝါဒေတွာတိ ဝန္ဒိတွာ, ထောမေတွာ ဝါ, အယမသ္မာကံ ရုစိ. အာဂမဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘အဘိဝါဒေတွာတိ ‘သုခီ အရောဂေါ ဟောတူ’တိ ဝဒါပေတွာ, ဝန္ဒန္တော ဟိ အတ္ထတော ဧဝံ ဝဒါပေတိ နာမာ’’တိ ဟေတုကတ္တုဝသေန အဘိဝါဒနသဒ္ဒတ္ထော ဝုတ္တော, အမှေဟိ ပန ဝန္ဒနသဒ္ဒံ သဒ္ဒသတ္ထနယမဂ္ဂဟေတွာ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေန အတ္ထော ကထိတော. အဘိဝါဒနဉှိ ဝန္ဒနံယေဝ, န ဝဒါပနံ အဘိသဒ္ဒေန သမ္ဗန္ဓိတတ္တာ ‘‘အဘိဝါဒနသီလိဿာ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. ဣဒဉှိ ‘‘အဘိဝါဒါပနသီလိဿာ’’တိ န ဝုတ္တံ. ယဒိ စ သဒ္ဒသတ္ထေ ဝဒါပနမဓိပ္ပေတံ သိယာ, ‘‘ဝဒီ ဝဒါပနထုတီသူ’’တိ နိဿန္ဒေဟဝစနံ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ[Pg.316], ဧဝဉ္စ န ဝုတ္တံ, ဧဝံ ပန ဝုတ္တံ ‘‘ဝဒီ အဘိဝါဒနထုတီသူ’’တိ, တေန ဝဒါပနမနဓိပ္ပေတန္တိ ဉာယတိ. तेथे 'अभिवादेत्वा' म्हणजे वंदन करून किंवा स्तुती करून, हे आमचे मत आहे. परंतु आगम-अट्ठकथेत 'अभिवादेत्वा म्हणजे 'सुखी व निरोगी व्हा' असे बोलवून (वदवून), कारण वंदन करणारा अर्थाच्या दृष्टीने असे वदवून घेतो' असा प्रयोजक (हेतुकर्तृ) अभिवादन शब्दाचा अर्थ सांगितला आहे. परंतु आम्ही वंदन शब्दाला व्याकरणशास्त्राच्या नियमानुसार घेऊन शुद्धकर्तृ अर्थ सांगितला आहे. कारण 'अभिवादन' म्हणजे वंदनच होय, वदवून घेणे (प्रयोजक) नव्हे, कारण 'अभि' शब्दाशी संबंध असल्यामुळे, जसे 'अभिवादनसीलस्स' यामध्ये आहे. येथे 'अभिवादापनसीलस्स' असे म्हटलेले नाही. जर व्याकरणशास्त्रात 'वदवून घेणे' (प्रयोजक) अभिप्रेत असते, तर 'वदी वदापनथुतीसु' असे संशयरहित वचन सांगितले असते, परंतु तसे म्हटलेले नाही, तर 'वदी अभिवादनथुतीसु' असे म्हटले आहे, यावरून 'वदवून घेणे' अभिप्रेत नाही हे समजते. အထာပိ သိယာ ‘‘ကဿစိ ဝုဒ္ဓေန ဝိသိဋ္ဌံ ဝဒါပနံ အဘိဝါဒန’’န္တိ, ဧဝမ္ပိ နုပပဇ္ဇတိ ကာရိတဝသေန ဓာတုအတ္ထဿ အကထေတဗ္ဗတော. တထာ ဟိ ‘‘ပစ ပါကေ, ဆိဒိ ဒွိဓာကရဏေ’’တိအာဒိနာ ဘာဝဝသေန အတ္ထပ္ပကာသနမတ္တေယေဝ ‘‘ပစတိ, ပစ္စတိ, ပါစေတိ. ဆိန္ဒတိ, ဆိဇ္ဇတိ, ဆေဒါပေတီ’’တိအာဒီနိ သကမ္မကာနိ စေဝ အကမ္မကာနိ စ သကာရိတာနိ စ ရူပါနိ နိပ္ဖဇ္ဇန္တိ, န စ တဒတ္ထာယ ဝိသုံ ဝိသုံ ဓာတုနိဒ္ဒေသော ကရိယတိ. တသ္မာ ‘‘ဝဒီ အဘိဝါဒနထုတီသူ’’တိ ဧတ္ထ ကာရိတဝသေန ဓာတုအတ္ထော ကထိတောတိပိ ဝတ္တုံ န သက္ကာ ကြိယာသဘာဝတ္တာ ဓာတူနံ. ယထာ ပန ‘‘တက္ကေတိ, ဝိတက္ကေတိ. တက္ကော, ဝိတက္ကော’’တိအာဒီနိ သမာနတ္ထာနိ, တထာ ‘‘ဝါဒေတိ, အဘိဝါဒေတီ’’တိအာဒီနိ သမာနတ္ထာနိ. အတော သဒ္ဒသတ္ထေပိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူဟိ ‘‘တက္က ဝိတက္ကေ, ဝဒီ အဘိဝါဒနထုတီသူ’’တိအာဒီနံ ဓာတူနံ ‘‘တက္ကယတိ, ဝါဒယတီ’’တိအာဒီနိ အနုပသဂ္ဂါနိယေဝ ရူပါနိ ဒဿိတာနိ, တာနိ စ ခေါ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိယေဝ, န ဟေတုကတ္တုပဒါနိ, တသ္မာ ‘‘အဘိဝါဒနထုတီသူ’’တိ ဧတဿ ‘‘ဝဒါပနထုတီသူ’’တိ အတ္ထော နုပပဇ္ဇတိ. जरी असे म्हटले की 'कोणा वृद्धाकडून विशिष्ट प्रकारे वदवून घेणे म्हणजे अभिवादन होय', तरीही हे योग्य ठरत नाही, कारण प्रयोजक (कारित) भावामुळे धातूचा अर्थ तसा सांगता येत नाही. कारण 'पच पाके, छिदि द्विधाकरणे' इत्यादींद्वारे केवळ भाव रूपाने अर्थ प्रकट केल्यावरच 'पचति, पच्चति, पाचेति' आणि 'छिन्दति, छिज्जति, छेदापेति' इत्यादी कर्तरी, कर्मणी आणि प्रयोजक रूपे सिद्ध होतात, आणि त्या अर्थासाठी स्वतंत्रपणे धातूचा निर्देश केला जात नाही. म्हणून 'वदी अभिवादनथुतीसु' येथे प्रयोजक भावामुळे धातूचा अर्थ सांगितला आहे असे म्हणता येत नाही, कारण धातूंचा स्वभाव क्रिया दर्शवणे हाच आहे. ज्याप्रमाणे 'तक्केति, वितक्केति' आणि 'तक्को, वितक्को' इत्यादी समान अर्थाचे आहेत, त्याचप्रमाणे 'वादेति, अभिवादेति' इत्यादी समान अर्थाचे आहेत. म्हणूनच व्याकरणशास्त्रातही व्याकरणकारांनी 'तक्क वितक्के, वदी अभिवादनथुतीसु' इत्यादी धातूंची 'तक्कयति, वादयति' अशी उपसर्ग नसलेलीच रूपे दाखवली आहेत, आणि ती केवळ शुद्धकर्तृ पदेच आहेत, प्रयोजक पदे नाहीत. म्हणून 'अभिवादनथुतीसु' याचा अर्थ 'वदापनथुतीसु' (वदवून घेणे व स्तुती करणे) असा लावणे अयोग्य आहे. ကိဉ္စ ဘိယျော – ‘‘အဘိဝါဒေတိ, အဘိဝါဒယတိ. အဘိဝါဒေတွာ, အဘိဝါဒယိတွာ’’တိအာဒီနိ သမာနတ္ထာနိ, ဏေဏယမတ္တေန ဟိ သဝိသေသာနိ. ယဒိ ‘‘အဘိဝါဒေတွာ’’တိ ဣမဿ ပဒဿ ‘‘သုခီ အရောဂေါ ဟောတူ’တိ ဝဒါပေတွာ’’တိ အတ္ထော သိယာ, ‘‘သိရသာ အဘိဝါဒယိ’’န္တိ ဧတ္ထ ‘‘သိရသာ’’တိ ပဒံ န ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ ဝဒါပနေန အသမ္ဗန္ဓတ္တာ. ယသ္မာ ဝုတ္တံ တံ ပဒံ, တေန ဉာယတိ ‘‘အဘိဝါဒေတွာ’’တိအာဒီသု ဝဒါပနတ္ထော န ဣစ္ဆိတဗ္ဗော, ဝန္ဒနတ္ထော ဣစ္ဆိတဗ္ဗော ထောမနတ္ထော စ. ယသ္မာ ဘူဝါဒိဂဏေ ‘‘ဝန္ဒ အဘိဝါဒါနထုတီသူ’’တိ ဣမဿ ဓာတုဿ ‘‘ဝန္ဒတီ’’တိ [Pg.317] ပဒရူပဿ ‘‘အဘိဝန္ဒတိ, ထောမေတိ စာ’’တိ အတ္ထောယေဝ ဣစ္ဆိတဗ္ဗော, န ဝဒါပနတ္ထော. တထာ ဟိ ‘‘ဝန္ဒေ သုဂတံ ဂတိဝိမုတ္တ’’န္တိ ပဒါနမတ္ထံ ဝဒန္တေန ဋီကာစရိယေနပိ ‘‘ဝန္ဒေတိ ဝန္ဒာမိ, ထောမေမိ စာ’’တိ ဝန္ဒနထောမနတ္ထောယေဝ ဒဿိတော, န အဘိဝါဒနသဒ္ဒတ္ထံ ပဋိစ္စ ဝဒါပနတ္ထော, တသ္မာ ‘‘အဘိဝါဒေတွာ’’တိ ဧတ္ထာပိ ဝန္ဒနထောမနတ္ထာယေဝ ဣစ္ဆိတဗ္ဗာ, န ဝဒါပနတ္ထော. आणखी काय – 'अभिव्यादेति, अभिव्यादयति' (अभिवादन करतो). 'अभिव्यादेत्वा, अभिव्यादयित्वा' (अभिवादन करून) इत्यादी समान अर्थाचे शब्द आहेत, कारण ते केवळ 'णे' आणि 'णय' प्रत्ययांमुळेच थोडे भिन्न आहेत. जर 'अभिव्यादेत्वा' या शब्दाचा अर्थ 'सुखी व निरोगी व्हा' असे म्हणायला लावणे (वदापेत्वा) असा असता, तर 'शिरसा अभिव्यादयि' (डोक्याने अभिवादन केले) यामध्ये 'शिरसा' (डोक्याने) हा शब्द वापरण्याची गरज नसती, कारण म्हणायला लावण्याशी त्याचा काही संबंध नाही. ज्याअर्थी तो शब्द वापरला आहे, त्यावरून हे समजते की 'अभिव्यादेत्वा' इत्यादी शब्दांमध्ये 'म्हणायला लावणे' हा अर्थ अपेक्षित नसून, 'वंदन करणे' आणि 'स्तुती करणे' हाच अर्थ अपेक्षित आहे. कारण भूवादिगणातील 'वन्द अभिवादनथुतीसु' या धातूच्या 'वन्दति' या क्रियापदाचा अर्थ 'अभिवादन करतो आणि स्तुती करतो' असाच अपेक्षित आहे, 'म्हणायला लावणे' असा नाही. तसेच 'वन्दे सुगतं गतिविमुत्तं' या शब्दांचा अर्थ सांगताना टीकाकारांनीही 'वन्दे म्हणजे वंदन करतो आणि स्तुती करतो' असा वंदन व स्तुतीचाच अर्थ दर्शवला आहे, अभिवादन शब्दाच्या आधारे 'म्हणायला लावणे' असा अर्थ घेतलेला नाही. म्हणून 'अभिव्यादेत्वा' येथेही वंदन आणि स्तुती हेच अर्थ अपेक्षित धरले पाहिजेत, 'म्हणायला लावणे' हा अर्थ नाही. အထာပိ သိယာ ‘‘ဝန္ဒေ’တိ ပဒေ ကာရိတပစ္စယော နတ္ထိ, ‘အဘိဝါဒေတွာ’တိ ဣမသ္မိံ ပန အတ္ထိ, တသ္မာ တတ္ထ ဝဒါပနတ္ထော န လဗ္ဘတိ, ဣဓ ပန လဗ္ဘတီ’’တိ. တန္န, ‘‘ကရောတီ’’တိသုဒ္ဓကတ္တုပဒဿပိ ‘‘နိပ္ဖာဒေတီ’’တိ ဟေတုကတ္တုပဒဝသေန ဝိဝရဏဿ ဝိယ ‘‘ဝန္ဒေ’’တိ ပဒဿပိ ‘‘သုခီ အရောဂေါ ဟောတူ’တိ ဝဒါပေတွာ’’တိ ဝိဝရဏဿ ဝတ္တဗ္ဗတ္တာ. ‘‘အဘိဝါဒေတွာ’’တိ ဣဒဉ္စ ‘‘ဝန္ဒေ’’တိ ပဒမိဝ ကာရိတပစ္စယန္တံ န ဟောတိ. ကသ္မာတိ စေ? ယသ္မာ ‘‘စိန္တေတိ, စိန္တယတိ. မန္တေတိ, မန္တယတီ’’တိအာဒီနံ စုရာဒိဂဏိကာနံ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနံ ‘‘စိန္တာပေတိ, စိန္တာပယတီ’’တိအာဒီနိယေဝ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ ဒိဿန္တိ, တသ္မာ ယဒိ ဟေတုကတ္တုပဒံ အဓိပ္ပေတံ သိယာ, ‘‘အဘိဝါဒါပေတွာ’’တိ ဝါ ‘‘အဘိဝါဒါပယိတွာ’’တိ ဝါ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ, ယသ္မာ ပနေဝံ န ဝုတ္တံ, တသ္မာ တံ ကာရိတပစ္စယန္တံ န ဟောတီတိ သိဒ္ဓံ. असेही असू शकते की, 'वन्दे' या शब्दात कारित (प्रयोजक) प्रत्यय नाही, परंतु 'अभिव्यादेत्वा' यामध्ये तो आहे, म्हणून तिथे 'म्हणायला लावणे' हा अर्थ मिळत नाही, पण येथे मिळतो. ते योग्य नाही, कारण 'करोति' (करतो) या शुद्ध कर्तृपदाचे 'निप्फादेति' (निष्पन्न करतो) या हेतुकर्तृपदाच्या (प्रयोजक) स्वरूपात स्पष्टीकरण दिल्याप्रमाणे, 'वन्दे' या शब्दाचेही 'सुखी व निरोगी व्हा असे म्हणायला लावून' असे स्पष्टीकरण द्यावे लागेल. आणि 'अभिव्यादेत्वा' हा शब्द 'वन्दे' या शब्दाप्रमाणे कारित प्रत्ययाने संपणारा (प्रयोजक) नाही. ते कशामुळे? कारण 'चिन्तेति, चिन्तयति; मन्तेति, मन्तयति' इत्यादी चुरादिगणातील शुद्ध कर्तृपदांची 'चिन्तापेति, चिन्तापयति' इत्यादी हेतुकर्तृपदेच (प्रयोजक रूपे) दिसतात. म्हणून जर हेतुकर्तृपद (प्रयोजक रूप) अभिप्रेत असते, तर 'अभिव्यादापेत्वा' किंवा 'अभिव्यादापयित्वा' असे म्हणावे लागले असते. परंतु तसे म्हटलेले नसल्यामुळे, तो शब्द कारित प्रत्ययाने संपणारा (प्रयोजक) नाही हे सिद्ध होते. ဣမဿတ္ထဿ အာဝိဘာဝတ္ထံ ဣမသ္မိံ ဌာနေ သာဋ္ဌကထံ ဝိဓုရဇာတကပ္ပဒေသံ ဝဒါမ. हा अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी आपण या ठिकाणी अट्ठकथेसह विधुरजातकाचा संदर्भ सांगू या. ‘‘ကထံ နော အဘိဝါဒေယျ, အဘိဝါဒါပယေထ ဝေ; ယံ နရော ဟန္တုမိစ္ဆေယျ, တံ ကမ္မံ နုပပဇ္ဇတီ’’တိ ‘ज्या माणसाला मारण्याची इच्छा असेल, त्याला तो कसा बरे अभिवादन करेल किंवा स्वतःला अभिवादन करायला लावेल? ते कर्म घडून येत नाही.’ အယံ တာဝ ဇာတကပါဠိ. အယံ ပန အဋ္ဌကထာပါဌော ‘‘ယဉှိ နရော ဟန္တုမိစ္ဆေယျ, သော တံ ကထံ နု အဘိဝါဒေယျ, ကထံ ဝါ [Pg.318] တေန အတ္တာနံ အဘိဝါဒါပယေထ ဝေ. တဿ ဟိ တံ ကမ္မံ န ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ. တတ္ထ ပါဠိယံ အဘိဝါဒေယျာတိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒံ တဗ္ဗာစကတ္တာ. အဘိဝါဒါပယေထ ဝေတိ ဟေတုကတ္တုပဒံ တဗ္ဗာစကတ္တာ. ဧဝံ ဝိဘာဂံ ပန ဉတွာ ပါဠိယာ အဋ္ဋကထာယ စ အဓိပ္ပာယော ဂဟေတဗ္ဗော ‘‘နရော ယံ ပုဂ္ဂလံ ဟန္တုံ ဣစ္ဆေယျ, သော ဟန္တာ တံ ဝဇ္ဈံ ပုဂ္ဂလံ ကထံ နု အဘိဝါဒေယျ, သော ဝါ ဟန္တာ, တေန ဝဇ္ဈေန မံ ဝန္ဒာဟီတိ အတ္တာနံ ကထံ ဝန္ဒာပေယျာ’’တိ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ရာဇာနော စောရံ သုနခေဟိပိ ခါဒါပေန္တီ’’တိအာဒီသု ဝိယ ကရဏဝသေန ‘‘တေန ဝဇ္ဈေနာ’’တိ ပဒံ ယောဇိတံ, အတ္ထော ပန ‘‘တံ ဝဇ္ဈ’’န္တိ ဥပယောဂဝစနဝသေန ဒဋ္ဌဗ္ဗော ဒွိကမ္မကတ္တာ သကာရိတပစ္စယဿ သကမ္မကဓာတုယာတိ. နနု ဧဝံ သန္တေ ‘‘အဋ္ဌကထာစရိယာ ပဿိတဗ္ဗံ န ပဿန္တိ, အတိတ္ထေ ပက္ခန္ဒန္တီ’’တိ တေသံ ဒေါသော ဟောတီတိ? န ဟောတိ, သုဏာထ အသ္မာကံ သောဓနံ, တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ‘‘အဘိဝါဒေတွာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဝဒီ အဘိဝါဒနထုတီသူ’’တိ ဓာတုယာ အတ္ထမဂ္ဂဟေတွာ ဝေါဟာရဝိသယေ ကောသလ္လသမန္နာဂတတ္တာ သဏှသုခုမမတ္ထံ သောတူနံ ဗောဓေတုံ ‘‘ဝဒ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယ’’န္တိ ဓာတုယေဝတ္ထံ ဂဟေတွာ ကာရိတပစ္စယပရိကပ္ပနေန ကာရိတတ္ထမာဒါယ ‘‘အဘိဝါဒေတွာတိ ‘သုခီ အရောဂေါ ဟောတူ’တိ ဝဒါပေတွာ, ဝန္ဒန္တော ဟိ အတ္ထတော ဧဝံ ဝဒါပေတိ နာမာ’’တိ ဟေတုကတ္တုဝသေန အဘိဝါဒနသဒ္ဒတ္ထော ဝုတ္တောတိ န ကောစိ တေသံ ဒေါသော. ပူဇာရဟာ ဟိ တေ အာယသ္မန္တော, နမောယေဝ တေသံ ကရောမ, ဣဒမ္ပိ ဌာနံ သုခုမံ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗံ. ဧဝဉှိ ကရောတော ပညာ ဝဍ္ဎတီတိ. ही तर जातकपाळी आहे. आणि हा अट्ठकथापाठ आहे: 'ज्या माणसाला मारण्याची इच्छा असेल, तो त्याला कसा बरे अभिवादन करेल, किंवा त्याच्याकडून स्वतःला कसे बरे अभिवादन करायला लावेल? कारण त्याचे ते कर्म घडून येत नाही.' तेथे पाळीमध्ये 'अभिव्यादेय्य' हे शुद्ध कर्तृपद आहे कारण ते त्याचे वाचक आहे. 'अभिव्यादापयेथ वे' हे हेतुकर्तृपद (प्रयोजक रूप) आहे कारण ते त्याचे वाचक आहे. असा विभाग जाणून पाळी आणि अट्ठकथेचा अभिप्राय असा घ्यावा: 'माणूस ज्या व्यक्तीला मारू इच्छितो, तो मारणारा त्या वधार्ह व्यक्तीला कसा बरे अभिवादन करेल, किंवा तो मारणारा त्या वधार्ह व्यक्तीकडून 'मला वंदन कर' असे म्हणून स्वतःला कसे वंदन करायला लावेल?' येथे 'राजे चोराला कुत्र्यांकडूनही खाववायला लावतात' इत्यादी वाक्यांप्रमाणे करण अर्थाने 'तेन वज्झेन' (त्या वधार्ह व्यक्तीकडून) हा शब्द जोडला आहे, परंतु अर्थ 'तं वज्झं' (त्या वधार्ह व्यक्तीला) असा द्वितीया विभक्तीच्या (उपयोगवचन) अर्थाने पाहावा, कारण प्रयोजक प्रत्यय असलेल्या सकर्मक धातूचे दोन कर्मे असतात. पण असे असल्यास 'अट्ठकथाचार्यांना जे पाहायचे ते दिसत नाही, ते अयोग्य ठिकाणी प्रवेश करतात' असा त्यांचा दोष होतो का? नाही होत, आमचे स्पष्टीकरण ऐका. कारण अट्ठकथाचार्यांनी 'अभिव्यादेत्वा' येथे 'वदि अभिवादनथुतीसु' या धातूचा अर्थ न घेता, व्यावहारिक भाषेतील कौशल्याने युक्त असल्यामुळे श्रोत्यांना सूक्ष्म अर्थ समजावून सांगण्यासाठी 'वद वियत्तियं वाचायं' (स्पष्ट बोलणे) या धातूचाच अर्थ घेऊन, कारित (प्रयोजक) प्रत्ययाची कल्पना करून आणि प्रयोजक अर्थ स्वीकारून 'अभिव्यादेत्वा म्हणजे सुखी व निरोगी व्हा असे म्हणायला लावून, कारण वंदन करणारा प्रत्यक्षात अशा प्रकारे म्हणायलाच लावतो' अशा प्रयोजक अर्थाने अभिवादन शब्दाचा अर्थ सांगितला आहे, त्यामुळे त्यांचा कोणताही दोष नाही. ते पूजनीय आयुष्यमान आहेत, आम्ही त्यांना नमस्कारच करतो. हे स्थानही सूक्ष्म असून चांगल्या प्रकारे मनात ठेवले पाहिजे. असे केल्याने प्रज्ञा वाढते. ဒကာရန္တဓာတုရူပါနိ. द-कारान्त धातूंची रूपे. ဓကာရန္တဓာတု ध-कारान्त धातू. ရန္ဓ [Pg.319] ပါကေ. သူဒေါ ဘတ္တံ ရန္ဓေတိ, ရန္ဓယတိ. ကာကံ သောကာယ ရန္ဓေဟိ. ရန္ဓကော. သူဒေန ဩဒနော ရန္ဓိယတိ. ရန္ဓိတော. ရန္ဓနံ. ပုရိသော သူဒံ သူဒေန ဝါ ဩဒနံ ရန္ဓာပေတိ, ရန္ဓာပယတိ. ရန္ဓေတုံ, ရန္ဓယိတုံ. ရန္ဓိတွာ, ရန္ဓယိတွာ, ရန္ဓိယ ဣစ္စာဒီနိ. 'रन्ध' शिजवणे या अर्थी. आचारी भात शिजवतो (रन्धेति, रन्धयति). कावळ्याला शोकासाठी शिजव (रन्धेहि). शिजवणारा (रन्धको). आचाऱ्याकडून भात शिजवला जातो (रन्धियति). शिजवलेला (रन्धितो). शिजवणे (रन्धनं). माणूस आचाऱ्याकडून किंवा आचाऱ्याद्वारे भात शिजवून घेतो (रन्धापेति, रन्धापयति). शिजवण्यासाठी (रन्धेतुं, रन्धयितुं). शिजवून (रन्धित्वा, रन्धयित्वा, रन्धिय) इत्यादी. ဓူ ကမ္ပနေ. ဓာဝေတိ, ဓာဝယတိ. 'धू' कंप पावणे (थरथरणे) या अर्थी. धावेति, धावयति. ဂန္ဓ သူစနေ အဒ္ဒနေ စ. သူစနံ. ပကာသနံ. အဒ္ဒနံ ပရိပ္လုတာ. ဂန္ဓေတိ, ဂန္ဓယတိ, ဂန္ဓော. 'गन्ध' सूचित करणे आणि आद्र करणे (ओले करणे) या अर्थी. सूचन (सूचित करणे). प्रकाशन (प्रकट करणे). अद्दन म्हणजे ओले करणे. गन्धेति, गन्धयति, गन्धो. ဧတ္ထ ဂန္ဓောတိ ဂန္ဓေတိ အတ္တနော ဝတ္ထုံ သူစယတိ ပကာသေတီတိ ဂန္ဓော. ပဋိစ္ဆန္နံ ဝါ ပုပ္ဖဖလာဒိံ ‘‘ဣဒမေတ္ထ အတ္ထီ’’တိ ပေသုညံ ဥပသံဟရန္တော ဝိယ ပကာသေတီတိ ဂန္ဓော. ဂမုဓရဓာတုဒွယဝသေနပိ ဂန္ဓသဒ္ဒတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော ‘‘ဂစ္ဆန္တော ဓရိယတီတိ ဂန္ဓော’’ ဣတိ, အာဟ စ ‘‘ဂစ္ဆန္တော ဓရိယတီတိ ဂန္ဓော, သူစနတောပိ ဝါ’’တိ. ဂန္ဓသဒ္ဒေါ စ ‘‘ဥပ္ပလဂန္ဓထေနော’’တိ ဧတ္ထ ဆေဒနေ ဝတ္တတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. येथे 'गन्ध' म्हणजे जो आपल्या वस्तूला सूचित करतो, प्रकट करतो तो गंध होय. किंवा लपलेल्या फुले-फळे इत्यादींना 'हे येथे आहे' असे चहाडी (माहिती) आणून दिल्याप्रमाणे प्रकट करतो तो गंध होय. 'गमु' आणि 'धर' या दोन्ही धातूंच्या आधारेही गंध शब्दाचा अर्थ सांगितला पाहिजे की 'जो जात असताना धारण केला जातो तो गंध होय', आणि म्हटलेही आहे: 'जो जात असताना धारण केला जातो तो गंध होय, किंवा सूचित करण्यावरूनही'. आणि 'उप्पलंगन्धथेनो' (कमळाचा गंध चोरणारा) यामध्ये 'गन्ध' शब्द छेदून टाकणे (काढून घेणे) या अर्थी वापरला आहे असे पाहावे. ဝဓ သံယမေ. ဝဓေတိ, ဝဓယတိ. 'वध' संयम राखणे या अर्थी. वधेति, वधयति. ဗုဓိ ဟိံသာယံ. ဗုန္ဓေတိ, ဗုန္ဓယတိ. ပလိဗုန္ဓေတိ, ပလိဗုန္ဓယတိ. ပလိဗောဓော, ပရိသဒ္ဒေါ ဥပသဂ္ဂေါ, သော ဝိကာရဝသေန အညထာ ဇာတော. တတ္ထ ပလိဗောဓောတိ အာဝါသပလိဗောဓာဒိ. အပိစ ပလိဗောဓောတိ တဏှာမာနဒိဋ္ဌိတ္တယဉ္စ. 'बुधि' हिंसा करणे या अर्थी. बुन्धेति, बुन्धयति. पलिबुन्धेति, पलिबुन्धयति. पलिबोधो, 'परि' हा उपसर्ग आहे, तो विकाराने (बदलाने) वेगळा झाला आहे. तेथे 'पलिबोध' म्हणजे आवास-पलिबोध (निवासस्थानाची आसक्ती) इत्यादी. तसेच 'पलिबोध' म्हणजे तृष्णा, मान आणि दृष्टी हे त्रय होय. ဝဒ္ဓ ဆေဒနပူရဏေသု. ဝဒ္ဓေတိ, ဝဒ္ဓယတိ. ဝဒ္ဓကီ. ဝဒ္ဓကီတိ ဂဟကာရကော. 'वद्ध' छेदणे आणि पूर्ण करणे या अर्थी. वद्धेति, वद्धयति. वद्धकी. वद्धकी म्हणजे घर बांधणारा (सुतार). ဂဒ္ဓ အဘိကင်္ခါယံ. ဂဒ္ဓေတိ, ဂဒ္ဓယတိ. ဂဒ္ဓေါ. ဂဒ္ဓေါတိ ဂိဇ္ဈော. ‘‘ဂဒ္ဓဗာဓိပုဗ္ဗော’’တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. 'गद्ध' तीव्र इच्छा करणे या अर्थी. गद्धेति, gaddhayati. गद्धो. गद्ध म्हणजे गिधाड. 'गद्धबाधिपुब्बो' हे येथे उदाहरण आहे. သဓု [Pg.320] ပဟံသနေ. သဓေတိ, သဓယတိ. 'साधु' आनंदित करणे या अर्थी. साधेति, साधयति. ဝဒ္ဓ ဘာသာယံ. ဝဒ္ဓေတိ, ဝဒ္ဓယတိ. 'वद्ध' बोलणे या अर्थी. वद्धेति, वद्धयति. အန္ဓ ဒိဋ္ဌူပသံဟာရေ. ဒိဋ္ဌူပသံဟာရော နာမ စက္ခုသညိတာယ ဒိဋ္ဌိယာ ဥပသံဟာရော အပနယနံ ဝိနာသော ဝါ. စက္ခု ဟိ ပဿန္တိ ဧတာယာတိ ဒိဋ္ဌီတိ ဝုစ္စတိ. ယံ သန္ဓာယ အဋ္ဌကထာသု ‘‘သသမ္ဘာရစက္ခုနော သေတမဏ္ဍလပရိက္ခိတ္တဿ ကဏှမဏ္ဍလဿ မဇ္ဈေ အဘိမုခံ ဌိတာနံ သရီရသဏ္ဌာနုပ္ပတ္တိဒေသဘူတေ ဒိဋ္ဌိမဏ္ဍလေ’’တိ ဝုတ္တံ. ဋီကာယမ္ပိ စ ‘‘ဒိဋ္ဌိမဏ္ဍလေတိ အဘိမုခဋ္ဌိတာနံ သရီရသဏ္ဌာနုပ္ပတ္တိဒေသဘူတေ စက္ခုသညိတာယ ဒိဋ္ဌိယာ မဏ္ဍလေ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧဝံဘူတာယ ဒိဋ္ဌိယာ ဥပသံဟာရေ အန္ဓဓာတု ဝတ္တတိ. အန္ဓေတိ, အန္ဓယတိ. စက္ခူနိ အန္ဓယိံသု, အန္ဓော. အန္ဓောတိ အန္ဓေတီတိ အန္ဓော. ဒွိန္နံ စက္ခူနံ ဧကဿ ဝါ ဝသေန နဋ္ဌနယနော, ဧဝမိဓ အန္ဓဓာတု ဝုတ္တော. ကစ္စာယနေ ပန ‘‘ခါဒါမဂမာနံ ခန္ဓန္ဓဂန္ဓာ’’တိ ဝစနေန အမဓာတုဿ အန္ဓာဒေသကရဏဝသေန ရူပနိပ္ဖတ္တိ ဒဿိတာ. 'अन्ध' (अंध करणे/दृष्टी नाहीशी करणे) हा धातू 'दिट्ठूपसंहार' (दृष्टीचा नाश किंवा नाहीशी करणे) या अर्थात वापरला जातो. 'दिट्ठूपसंहार' म्हणजे चक्षुसंज्ञक दृष्टीचा उपसंहार, काढून टाकणे किंवा विनाश होय. कारण ज्याच्याद्वारे पाहतात त्याला 'चक्षु' (दृष्टी) असे म्हणतात. ज्याला उद्देशून अट्ठकथांमध्ये म्हटले आहे की, "ससंभारचक्षूच्या श्वेतमंडळाने वेढलेल्या कृष्णमंडळाच्या मध्यभागी, समोर उभ्या असलेल्या शरीराच्या आकाराच्या उत्पत्तीचे स्थान असलेल्या दृष्टीमंडळात." टीकेमध्येही म्हटले आहे की, "दृष्टीमंडळात म्हणजे समोर उभ्या असलेल्या शरीराच्या आकाराच्या उत्पत्तीचे स्थान असलेल्या चक्षुसंज्ञक दृष्टीच्या मंडळात." अशा प्रकारच्या दृष्टीच्या उपसंहारात (नाशात) 'अन्ध' धातू वापरला जातो. 'अन्धेति', 'अन्धयति' (अंध करतो). डोळे अंध केले, तो 'अन्ध' (अंधळा). 'अन्ध' म्हणजे जो अंध करतो तो अंध. दोन्ही डोळ्यांपैकी किंवा एका डोळ्याच्या दृष्टीचा नाश झाल्यामुळे ज्याचे डोळे नष्ट झाले आहेत, अशा अर्थाने येथे 'अन्ध' धातू सांगितला आहे. कच्चायनात मात्र "खादामगमानं खन्धन्धगन्धा" या वचनाने 'अम' धातूच्या जागी 'अन्ध' आदेश करण्याच्या नियमाने रूपाची सिद्धी दर्शविली आहे. ဗဓ ဗန္ဓနေ. မိဂံ ဗာဓေတိ, ဗာဓယတိ. ဗဒ္ဓေါ မိဂေါ, ဗဒ္ဓေါသိ မာရပါသေန. 'बाध' (बाध) हा धातू 'बन्धन' (बांधणे) या अर्थात वापरला जातो. 'मिगं बाधेति', 'बाधयति' (हरणाला बांधतो). 'बद्धो मिगो' (बांधलेले हरण), 'बद्धोसि मारपासेन' (तू मारपाशाने बांधला गेला आहेस). တတ္ထ ဗာဓေတီတိ ဗန္ဓတီတိ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဧဝံ ဗာဓယတီတိ ဧတ္ထာပိ. တထာ ဟိ ‘‘ဝါတံ ဇာလေန ဗာဓေသိ, ယော အနိစ္ဆန္တိမိစ္ဆသီ’’တိ ဧတ္ထ ဗာဓေသီတိ ဗန္ဓသီတိ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေန အတ္ထော. ဘူဝါဒိဂဏေ ပန ‘‘ဗာဓ ဗဒ္ဓါယ’’န္တိ ဗာဓဓာတုဿ ဝသေန ‘‘ဗာဓတီ’’တိ ကတ္တုပဒံ ‘‘ဗာဓေတိ, ဗာဓယတီ’’တိ ဟေတုကတ္တုပဒံ ဘဝတိ. ဗဒ္ဓေါတိ ဗာဓိယတေ ဗန္ဓိယတေ သောတိ ဗဒ္ဓေါ. तेथे 'बाधेति' म्हणजे 'बन्धति' (बांधतो) असा शुद्ध कर्तरी अर्थ घ्यावा. तसेच 'बाधयति' येथेही हाच अर्थ घ्यावा. तसेच "वातं जालेन बाधेसि, यो अनिच्छन्तिमिच्छसि" (जो न इच्छिणाऱ्याची इच्छा करतो, तो वाऱ्याला जाळ्याने बांधतो) येथे 'बाधेसि' म्हणजे 'बन्धसि' (बांधतोस) असा शुद्ध कर्तरी अर्थ आहे. भूवादिगणात मात्र "बाध बद्धायं" या सूत्राने 'बाध' धातूच्या योगाने 'बाधति' हे कर्तृपद आणि 'बाधेति, बाधयति' हे हेतुकर्तृपद (प्रयोजक) बनते. 'बद्धो' म्हणजे जो बांधला जातो तो 'बद्ध' होय. ဓကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ध'कारान्त धातूंची रूपे समाप्त. နကာရန္တဓာတု 'न'कारान्त धातू. မာန [Pg.321] ပူဇာယံ ပေမနေ ဝီမံသာယံ. မာနေတိ, မာနယတိ. မာတာ. ဝိမာနေတိ, ဝိမာနယတိ, ပဋိမာနေတိ, ပဋိမာနယတိ. မာနနာ, သမ္မာနနာ, ဝိမာနနာ, ဝိမာနံ, ဝိမာနနံ, မာနိတော. 'मान' (मान देणे) हा धातू 'पूजा' (आदर करणे), 'पेमन' (प्रेम करणे) आणि 'वीमंसा' (विचार/परीक्षा करणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'मानेति', 'मानयति' (मान देतो/आदर करतो). 'माता'. 'विमानेति', 'विमानयति' (अपमान करतो), 'पटिमानेति', 'पटिमानयति' (प्रतीक्षा करतो/आदर करतो). 'मानना' (आदर), 'सम्मानना' (सन्मान), 'विमानना' (अपमान), 'विमानं' (विमान), 'विमाननं' (अपमान करणे), 'मानितो' (मानित/आदर केलेला). အမာနနာ ယတ္ထ သန္တော, သန္တာနံ ဝါ ဝိမာနနာ; ဟီနသမ္မာနနာ ဝါပိ, န တတ္ထ ဝသတိံ ဝသေ. जिथे सज्जनांचा आदर होत नाही, किंवा सज्जनांचा अपमान होतो, अथवा हीन (कमी) दर्जाचा सन्मान मिळतो, तिथे माणसाने राहू नये (वस्ती करू नये). ဝီမံသတိ, ဝီမံသာ, ဝီမံသိယတီတိ ဝီမံသိယမာနော. ဝီမံသန္တော. 'वीमंसति' (विचार करतो/परीक्षा करतो), 'वीमंसा' (मीमांसा/परीक्षा), 'वीमंसियति' म्हणून 'वीमंसियमानो' (ज्याची परीक्षा केली जात आहे तो). 'वीमंसन्तो' (परीक्षा करणारा). တတ္ထ မာနေတီတိ ပူဇေတိ, အဋ္ဌကထာသု ပန ‘‘မာနေန္တီ’’တိ ဧတသ္မိံ ဌာနေ အယမတ္ထော ဒဿိတော ‘‘မာနေန္တီတိ မနေန ပိယာယန္တိ. ပူဇေန္တီတိ ပစ္စယေဟိ ပူဇေန္တီ’’တိ. သော ဝေဝစနတ္ထပ္ပကာသနဝသေန ဝုတ္တောတိ ဂဟေတဗ္ဗော. မာနနပူဇနသဒ္ဒါ ဟိ ပရိယာယသဒ္ဒတ္တာ ဝေဝစနသဒ္ဒါ ဧဝ. ဝိမာနေတီတိ အဝမညတိ. ဝိမာနန္တိ သောဘာဝိသေသယောဂတော ဝိသိဋ္ဌမာနိယတာယ ဝိမာနံ, ဝိသေသတော မာနေတဗ္ဗန္တိ ဟိ ဝိမာနံ, ဒေဝါနံ ဝသနဋ္ဌာနဘူတံ ဗျမှံ. तेथे 'मानेति' म्हणजे 'पूजेति' (पूजा करतो/आदर करतो). अट्ठकथांमध्ये मात्र 'मानेन्ति' या ठिकाणी असा अर्थ दर्शविला आहे की, "'मानेन्ति' म्हणजे मनाने प्रिय मानतात. 'पूजेन्ति' म्हणजे प्रत्ययांनी (साधनांनी) पूजा करतात." तो समानार्थी शब्दांचा अर्थ प्रकट करण्यासाठी सांगितला आहे असे समजावे. कारण 'मानन' आणि 'पूजन' हे शब्द पर्यायी शब्द असल्याने समानार्थीच आहेत. 'विमानेति' म्हणजे 'अवमञ्ञति' (अपमान करतो). 'विमानं' म्हणजे विशेष शोभेच्या योगाने विशिष्ट प्रकारे मानले जाणारे ते 'विमान' होय, कारण ज्याचा विशेष रूपाने आदर केला पाहिजे ते 'विमान' होय, जे देवांचे निवासस्थान असलेले देवविमान (व्योम) आहे. မန ထမ္ဘေ. ထမ္ဘော စိတ္တဿ ထဒ္ဓတာ. မာနေတိ, မာနယတိ. မာနော. 'मन' (स्तंभित होणे/ताठरणे) हा धातू 'थम्भ' (स्तंभ/मनाचा ताठरपणा) या अर्थात वापरला जातो. 'थम्भो' म्हणजे मनाचा ताठरपणा (अहंकार). 'मानेति', 'मानयति' (अहंकार करतो). 'मानो' (अभिमान/अहंकार). ထန ဒေဝသဒ္ဒေ. ဒေဝသဒ္ဒေါ မေဃသဒ္ဒေါ, ထနေတိ, ထနယတိ. 'थन' (गर्जना करणे) हा धातू 'देवसद्द' (देवाचा आवाज/मेघाचा आवाज) या अर्थात वापरला जातो. 'देवसद्द' म्हणजे मेघाचा (ढगांचा) आवाज. 'थनेति', 'थनयति' (गर्जना करतो). ယထာပိ မေဃော ထနယံ, ဝိဇ္ဇုမာလီ သတက္ကကု. ज्याप्रमाणे शंभर शिखरे असलेला, विजेची माळ धारण केलेला मेघ गर्जना करत... ထလံ နိန္နဉ္စ ပူရေတိ, အဘိဝဿံ ဝသုန္ဓရံ. ...आणि पृथ्वीवर वर्षाव करत कोरडी जमीन आणि सखल भाग पाण्याने भरून टाकतो. ယထာ ပါဝုသကော မေဃော, ထနယန္တော သဝိဇ္ဇုကော. ज्याप्रमाणे पावसाळ्यातील मेघ विजेसह गर्जना करत... ဦန ပရိဟာနိယံ. ဦနေတိ, ဦနယတိ. ဦနော လောကော. 'ऊन' (कमी होणे) हा धातू 'परिहानि' (ऱ्हास/कमी होणे) या अर्थात वापरला जातो. 'ऊनेति', 'ऊनयति' (कमी करतो). 'ऊनो लोको' (हा लोक अपूर्ण/कमी आहे). ဓန သဒ္ဒေ. ဓနေတိ, ဓနယတိ, ဓနိယျတိ. ဓနိ, ဓနံ. 'धन' (ध्वनी करणे) हा धातू 'सद्द' (शब्द/ध्वनी) या अर्थात वापरला जातो. 'धनेति', 'धनयति', 'धनिय्यति' (ध्वनी करतो). 'धनि' (ध्वनी), 'धनं' (धन/संपत्ती). တတ္ထ [Pg.322] ဓနီတိ သဒ္ဒေါ. ဓနန္တိ သန္တကံ, တဉှိ မမ ဣဒန္တိ ဓနာယိတဗ္ဗံ သဒ္ဒါယိတဗ္ဗန္တိ ဓနန္တိ. အယံ ပန ဓာတု ဣစ္ဆာယမ္ပိ ဝတ္တတိ. ‘‘မာတာ ဟိ တဝ ဣရန္ဓတိ, ဝိဓူရဿ ဟဒယံ ဓနိယျတီ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ ဓနိယျတီတိ ပတ္ထေတိ ဣစ္ဆတိ. तेथे 'धनि' म्हणजे शब्द (ध्वनी). 'धनं' म्हणजे स्वतःची संपत्ती, कारण "हे माझे आहे" अशा प्रकारे ज्याची इच्छा केली जाते किंवा ज्याचा शब्द केला जातो, ते 'धन' होय. हा धातू 'इच्छा' या अर्थातही वापरला जातो. "माता हि तव इरन्धति, विधूरस्स हदयं धनिय्यति" (हे इरंधती, तुझी आई विधुराच्या हृदयाची इच्छा करते) हे पाळीतील उदाहरण आहे. तेथे 'धनिय्यति' म्हणजे प्रार्थना करतो किंवा इच्छा करतो. ထေန စောရိယေ. စောရဿ ဘာဝေါ စောရိယံ. ယထာ သူရိယံ, ယထာ စ ဒက္ခိယံ. ထေနေတိ, ထေနယတိ. ထေနော, ထေနေတွာ. 'थेन' (चोरी करणे) हा धातू 'चोरिय' (चोरी) या अर्थात वापरला जातो. चोराचा भाव म्हणजे चोरी. ज्याप्रमाणे 'सूरियं' (सूर्याचा भाव) आणि 'दक्खियं' (दक्षिणेचा भाव). 'थेनेति', 'थेनयति' (चोरी करतो). 'थेनो' (चोर), 'थेनेत्वा' (चोरी करून). တနု သဒ္ဒေါပတာပေသု. တာနေတိ, တာနယတိ. ဣဓာယံ သဝုဒ္ဓိကာ. တနာဒိဂဏေ ဝိတ္ထာရတ္ထဝသေန ‘‘တနောတိ, တနုတေ’’တိ အဝုဒ္ဓိကာ. 'तनु' (विस्तार करणे/ध्वनी करणे) हा धातू 'सद्द' (शब्द/ध्वनी) आणि 'उपताप' (ताप देणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'तानेति', 'तानयति' (विस्तार करतो/ध्वनी करतो). येथे ही वृद्धीसहित रूपे आहेत. तनादिगणात मात्र विस्ताराच्या अर्थाने 'तनोति, तनुते' ही वृद्धीरहित रूपे होतात. တဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ. 'त'वर्गान्त धातूंची रूपे समाप्त. ပကာရန္တဓာတု 'प'कारान्त धातू. ဉပ တောသနနိသာနေသု. ဉာပေတိ, ဉာပယတိ, ပညာပေတိ, ပညာပယတိ, ပညတ္တိ. 'ञप' (जाणून घेणे/संतुष्ट करणे) हा धातू 'तोसन' (संतुष्ट करणे) आणि 'निसान' (तीक्ष्ण करणे/जाणून घेणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'ञापेति', 'ञापयति' (जाणवतो/संतुष्ट करतो), 'पञ्ञापेति', 'पञ्ञापयति' (प्रज्ञापित करतो/मांडतो), 'पञ्ञत्ति' (प्रज्ञप्ती). ဧတ္ထ စ နိဒ္ဒေသေ ‘‘ပညာပေတီ’’တိ ပဒံ နိဒဿနံ. တတ္ထ ပညာပေတီတိ ကတနိဗ္ဗစနေဟိ ဝါကျာဝယဝေဟိ ဝိတ္ထာရဝသေန နိရဝသေသတော ဒေသိတေဟိ ဝေနေယျာနံ စိတ္တပရိတောသနံ ဗုဒ္ဓိနိသာနဉ္စ ကရောတီတိ အတ္ထော. ပပုဗ္ဗော နိက္ခိပနေ. အာသနံ ပညာပေတိ, ပညာပယတိ. ‘‘အာသနံ ပညပေတီ’’တိ ရဿတ္တမ္ပိ ဒိဿတိ. အမတဿ ဒွါရံ ပညပေတိ, ပညာ. ကာရိတေ ‘‘ပုရိသော ပုရိသေန အာသနံ ပညပါပေတီ’’တိ ဧကမေဝ ပဒံ. တာနိ ‘‘ပညာပေတိ, ပညာပယတီ’’တိ ရူပါနိ ယဒါ ‘‘ဉာ အဝဗောဓနေ’’တိ ဣမိဿာ ရူပါနိ သိယုံ, တဒါ [Pg.323] ဟေတုကတ္တုရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဧတ္ထ ပန သုဒ္ဓကတ္တုရူပါနိ တဗ္ဗာစကတ္တာ. आणि येथे निर्देशात 'पञ्ञापेति' हे पद उदाहरण आहे. तेथे 'पञ्ञापेति' म्हणजे केलेल्या व्युत्पत्तींनी आणि वाक्याच्या अवयवांनी विस्ताराने पूर्णपणे उपदेश केलेल्या विनेय (शिष्य) लोकांच्या मनाचे परितोषण (संतोष) आणि बुद्धीचे तीक्ष्णीकरण करतो असा अर्थ आहे. 'प' उपसर्ग लागल्यास 'निक्खिपन' (ठेवणे/मांडणे) या अर्थात होतो. 'आसनं पञ्ञापेति', 'पञ्ञापयति' (आसन मांडतो). "आसनं पञ्ञपेति" असे र्हस्व रूपही दिसते. 'अमतस्स द्वारं पञ्ञापेति' (अमृताचे द्वार उघडतो/प्रज्ञापित करतो), 'पञ्ञा' (प्रज्ञा). प्रयोजक (कारित) रूपात "पुरिसो पुरिसेन आसनं पञ्ञापेति" (माणूस माणसाकडून आसन मांडवून घेतो) असे एकच पद बनते. ती 'पञ्ञापेति, पञ्ञापयति' ही रूपे जेव्हा 'ञा अवबोधने' (जाणणे) या धातूची रूपे असतात, तेव्हा ती प्रयोजक (कारित) रूपे होतात. येथे मात्र ती प्रयोजक रूपेच आहेत कारण ती त्याचाच बोध करून देतात. လပ ဝိယတ္တိယံ ဝါစာယံ. လပေတိ, လပယတိ. လာပေါ, လပနံ, အာလာပေါ, သလ္လာပေါ, ကထာသလ္လာပေါ, လပိတံ. 'लप' (बोलणे) हा धातू 'वियत्ति' (स्पष्ट वाणी) या अर्थात वापरला जातो. 'लपेति', 'लपयति' (बोलतो). 'लापो' (भाषण), 'लपनं' (बोलणे), 'आलापो' (आलाप/संभाषण), 'सल्लापो' (संवाद), 'कथासल्लापो' (कथा-संवाद), 'लपितं' (बोललेले). ဗျပ ဒါဟေ. ဈာပေတိ, ဈာပယတိ. ဈတ္တော, ဈာနံ. 'ब्यप' (जळणे/जाळणे) हा धातू 'दाह' (जळणे) या अर्थात वापरला जातो. 'झापेति', 'झापयति' (जाळतो). 'झत्तो' (दग्ध झालेला), 'झानं' (ध्यान). တတ္ထ ဈတ္တောတိ ခုဒ္ဒါပရေတော ပါစနဂ္ဂိနာ ဈာပိတောတိ ဈတ္တော, ‘‘ဈတ္တာ အဿု ကိလန္တာ’’တိ စ ပါဠိ. ဈာနန္တိ နီဝရဏဓမ္မေ ဈာပေတီတိ ဈာနံ, သဝုဒ္ဓိကံ. ကာရိတေ ပန – ဈာပါပေတိ, ဈာပါပယတိ. तेथे 'झत्तो' म्हणजे भुकेने व्याकुळ झालेला आणि पचनशक्तीच्या अग्नीने जळालेला तो 'झत्तो' होय. "झत्ता अस्सु किलन्ता" (ते जळालेले आणि थकलेले होते) असे पाळी वचन आहे. 'झानं' (ध्यान) म्हणजे जे नीवरण धर्मांना जाळून टाकते ते 'झानं' होय, हे वृद्धीसहित रूप आहे. प्रयोजक (कारित) रूपात मात्र - 'झापापेति', 'झापापयति' (जळवून घेतो) अशी रूपे होतात. ရူပ ရူပကြိယာယံ. ရူပကြိယာ နာမ ပကာသနကြိယာ. ရူပေတိ, ရူပယတိ. ရူပံ. 'रूप' (रूप देणे/प्रकट करणे) हा धातू 'रूपक्रिया' (रूप देण्याची क्रिया) या अर्थात वापरला जातो. 'रूपक्रिया' म्हणजे प्रकाशन क्रिया (प्रकट करण्याची क्रिया). 'रुपेति', 'रुपयति' (रूप देतो/प्रकट करतो). 'रूपं' (रूप). တတ္ထ ရူပန္တိ ရူပယတီတိ ရူပံ. ဝဏ္ဏဝိကာရံ အာပဇ္ဇမာနံ ဟဒယင်္ဂတဘာဝံ ပကာသေတီတိ အတ္ထော. ဒိဝါဒိဂဏေ ပနာယံ ‘‘ရူပံ ရုပ္ပနေ’’တိ ဘိဇ္ဇနာဒိအတ္ထံ ဂဟေတွာ ဌိတာ. तेथे 'रूपं' म्हणजे जे रूप धारण करते (प्रकट होते) ते 'रूप' होय. रंगातील बदल प्राप्त करून मनातील भाव प्रकट करतो असा याचा अर्थ आहे. दिवादिगणात मात्र हा धातू 'रूपं रुप्पने' या सूत्राने नष्ट होणे किंवा पीडित होणे इत्यादी अर्थ घेऊन राहिला आहे. ကပ္ပ ဝိဓိမှိ. ဝိဓိ ကြိယာ. သီဟသေယျံ ကပ္ပေတိ. ကပ္ပယတိ. မောရော ဝါသမကပ္ပယိ. သီဟသေယျံ ပကပ္ပေန္တံ, ဗုဒ္ဓံ ဝန္ဒာမိ ဂေါတမံ. 'कप्प' (कल्पना करणे/नियम करणे) हा धातू 'विधि' (नियम/क्रिया) या अर्थात वापरला जातो. 'विधि' म्हणजे क्रिया. 'सीहसेय्यं कप्पेति', 'कप्पयति' (सिंहशयन करतो/सिंहशय्येचा विधी करतो). 'मोरो वासमकप्पयि' (मोराने आपले वास्तव्य केले). "सिंहशयन करणाऱ्या गौतम बुद्धांना मी वंदन करतो." ကပ္ပ ဝိတက္ကေ ဝိဓိမှိ ဆေဒနေ စ. ကပ္ပေတိ, ကပ္ပယတိ, မောရော ဝါသမကပ္ပယိ. ကပ္ပိတမဿု. ပကပ္ပေတိ, ပကပ္ပယတိ. သင်္ကပ္ပေတိ, သင်္ကပ္ပယတိ. ကပ္ပော, သင်္ကပ္ပော, ဝိကပ္ပော. ကပ္ပသမဏော ဣစ္စာဒီနိ. 'कप्प' हा धातू 'वितक्क' (वितर्क/विचार), 'विधि' (नियम/क्रिया) आणि 'छेदन' (कापणे) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 'कप्पेति', 'कप्पयति' (विचार करतो/विधी करतो/कापतो). 'मोरो वासमकप्पयि' (मोराने आपले वास्तव्य केले). 'कप्पितमस्सु' (दाढी-मिशा कापलेला). 'पकप्पेति', 'पकप्पयति' (प्रकल्पना करतो). 'सङ्कप्पेति', 'सङ्कप्पयति' (संकल्प करतो). 'कप्पो' (कल्प), 'सङ्कप्पो' (संकल्प), 'विकप्पो' (विकल्प). 'कप्पसमणो' (कल्पश्रमण) इत्यादी रूपे होतात. တတ္ထ ကပ္ပောတိ ပရိစ္ဆေဒဝသေန ကပ္ပိယတီတိ ကပ္ပော. သင်္ကပ္ပောတိ သင်္ကပ္ပနံ. ဝိကပ္ပောတိ ဝိဝိဓာ ကပ္ပနံ, အတ္ထဿ အနေကန္တိကဘာဝေါ. ဣဓ ကပ္ပသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဘဝတိ. तेथे 'कप्पो' म्हणजे जो मर्यादेच्या (परिच्छेदाच्या) आधारे कल्पिला जातो तो 'कल्प' होय. 'सङ्कप्पो' म्हणजे संकल्प करणे. 'विकप्पो' म्हणजे विविध प्रकारची कल्पना करणे, किंवा अर्थाची अनिश्चितता होय. येथे 'कप्प' शब्दाचा अर्थ उद्धृत केला आहे. ကပ္ပသဒ္ဒေါ [Pg.324] အဘိသဒ္ဒဟနဝေါဟာရကာလပညတ္တိဆေဒနဝိကပ္ပလေသသမန္တဘာဝါဒိအနေကတ္ထော. တထာ ဟိဿ ‘‘ဩကပ္ပနီယမေတံ ဘောတော ဂေါတမဿ, ယထာ တံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿာ’’တိ ဧဝမာဒီသု အဘိသဒ္ဒဟနမတ္ထော. ‘‘အနုဇာနာမိ ဘိက္ခဝေ ပဉ္စဟိ သမဏကပ္ပေဟိ ဖလံ ပရိဘုဉ္ဇိတု’’န္တိ ဧဝမာဒီသု ဝေါဟာရော. ‘‘ယေန သုဒံ နိစ္စကပ္ပံ ဝိဟရာမီ’’တိ ဧဝမာဒီသု ကာလော. ‘‘ဣစ္စာယသ္မာ ကပ္ပော’’တိ ဧဝမာဒီသု ပညတ္တိ. ‘‘အလင်္ကတော ကပ္ပိတကေသမဿူ’’တိ ဧဝမာဒီသု ဆေဒနံ. ‘‘ကပ္ပတိ ဒွင်္ဂုလကပ္ပော’’တိ ဧဝမာဒီသု ဝိကပ္ပော. ‘‘အတ္ထိ ကပ္ပော နိပဇ္ဇိတု’’န္တိ ဧဝမာဒီသု လေသော. ‘‘ကေဝလကပ္ပံ ဝေဠုဝနံ ဩဘာသေတွာ’’တိ ဧဝမာဒီသု သမန္တဘာဝေါ. အထ ဝါ ကပ္ပသဒ္ဒေါ သဥပသဂ္ဂေါ အနုပသဂ္ဂေါ စ ဝိတက္ကဝိဓာနပဋိဘာဂပညတ္တိကာလပရမာယုဝေါဟာရသမန္တဘာဝါဘိသဒ္ဒဟန ဆေဒန ဝိနိယောဂ ဝိနယ ကြိယာ လေသန္တရ ကပ္ပတဏှာဒိဋ္ဌိအသင်္ချေယျကပ္ပမဟာကပ္ပာဒီသု ဒိဿတိ. တထာ ဟေသ ‘‘နေက္ခမ္မသင်္ကပ္ပော အဗျာပါဒသင်္ကပ္ပော’’တိအာဒီသု ဝိတက္ကေ အာဂတော. ‘‘စီဝရေ ဝိကပ္ပံ အာပဇ္ဇေယျာ’’တိအာဒီသု ဝိဓာနေ, အဓိကဝိဓာနံ အာပဇ္ဇေယျာတိ ဟိ အတ္ထော. ‘‘သတ္ထုကပ္ပေန ဝတ ဘော သာဝကေန သဒ္ဓိံ မန္တယမာနာ န ဇာနိမှာ’’တိအာဒီသု ပဋိဘာဂေ, သတ္ထုသဒိသေနာတိ အယဉှိ တတ္ထ အတ္ထော. ‘‘ဣစ္စာယသ္မာ ကပ္ပော’’တိအာဒီသု ပညတ္တိယံ. ‘‘ယေန [Pg.325] သုဒံ နိစ္စကပ္ပံ ဝိဟရာမီ’’တိအာဒီသု ကာလေ. ‘‘အာကင်္ခမာနော အာနန္ဒ တထာဂတော ကပ္ပံ ဝါတိဋ္ဌေယျ ကပ္ပာဝသေသံ ဝါ’’တိအာဒီသု ပရမာယုမှိ. အာယုကပ္ပော ဟိ ဣဓ ‘‘ကပ္ပော’’တိ အဓိပ္ပေတော. ‘‘အနုဇာနာမိ ဘိက္ခဝေ ပဉ္စဟိ သမဏကပ္ပေဟိ ဖလံ ပရိဘုဉ္ဇိတု’’န္တိအာဒီသု သမဏဝေါဟာရေ. ‘‘ကေဝလကပ္ပံ ဝေဠုဝနံ ဩဘာသေတွာ’’တိအာဒီသု သမန္တဘာဝေ. ‘‘သဒ္ဓါသဒ္ဒဟနာ ဩကပ္ပနာ အဘိပ္ပသာဒေါ’’တိအာဒီသု အဘိသဒ္ဒဟနေ, သဒ္ဓါယန္တိ အတ္ထော. ‘‘အလင်္ကတော ကပ္ပိတကေသမဿူ’’တိအာဒီသု ဆေဒနေ. ‘‘ဧဝမေဝ ဣတော ဒိန္နံ, ပေတာနံ ဥပကပ္ပတီ’’တိအာဒီသု ဝိနိယောဂေ. ‘‘ကပ္ပကတေန အကပ္ပကတံ သံသိဗ္ဗိတံ ဟောတီ’’တိအာဒီသု ဝိနယကြိယာယံ. ‘‘အတ္ထိ ကပ္ပော နိပဇ္ဇိတုံ, ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’’တိအာဒီသု လေသေ. ‘‘အာပါယိကော နေရယိကော, ကပ္ပဋ္ဌော သံဃဘေဒကော, ကပ္ပံ နိရယမှိ ပစ္စတီ’’တိ စ အာဒီသု အန္တရကပ္ပေ. ‘‘န ကပ္ပယန္တိ န ပုရက္ခရောန္တိ,ဓမ္မာပိ တေသံ န ပဋိစ္ဆိတာသေ; န ဗြာဟ္မဏော သီလဝတေန နေယျော,ပါရင်္ဂတော န စ ပစ္စေတိ တာဒီ’’တိ အာဒီသု တဏှာဒိဋ္ဌီသု. တထာ ဟိ ဝုတ္တံ နိဒ္ဒေသေ ‘‘ကပ္ပောတိ ဥဒ္ဒါနတော ဒွေ ကပ္ပာ တဏှာကပ္ပော ဒိဋ္ဌိကပ္ပော’’တိ. ‘‘အနေကေပိ သံဝဋ္ဋကပ္ပေ အနေကေပိ ဝိဝဋ္ဋကပ္ပေ’’တိအာဒီသု အသင်္ချေယျကပ္ပေ[Pg.326]. ‘‘စတ္တာရိမာနိ ဘိက္ခဝေ ကပ္ပဿ အသင်္ချေယျာနီ’’တိအာဒီသု မဟာကပ္ပေ. ဣစ္စေဝံ – ဝိတက္ကေ စ ဝိဓာနေ စ, ပဋိဘာဂေ တထေဝ စ; ပညတ္တိယံ တထာ ကာလေ, ပရမာယုမှိ စ ဆေဒနေ. သမန္တဘာဝေ ဝေါဟာရေ, အဘိသဒ္ဒဟနေပိ စ; ဝိနိယောဂေ စ ဝိနယ-ကြိယာယံ လေသကေပိ စ. ဝိကပ္ပန္တရကပ္ပေသု, တဏှာဒိဋ္ဌိသွသင်္ခယေ; ကပ္ပေ စ ဧဝမာဒီသု, ကပ္ပသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. ကပိ ဂတိယံ. ကမ္ပေတိ, ကမ္ပယတိ, ဂစ္ဆတီတိ အတ္ထော. ဣမာနိ စလနတ္ထေ ပဝတ္တဟေတုကတ္တုရူပသဒိသာနိ ဘဝန္တိ. စလနတ္ထေ ဟိ ‘‘ကမ္ပ ကမ္ပနေ’’တိ ဓာတုယာ ‘‘ကမ္ပတီ’’တိ အကမ္မကသုဒ္ဓကတ္တုရူပံ. ‘‘ကမ္ပေတီ’’တိအာဒီနိ သကမ္မကာနိ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ ‘‘ဣဒမ္ပိ ဒုတိယံ သလ္လံ, ကမ္ပေတိ ဟဒယံ မမာ’’တိ အကမ္မကာယ ဓာတုယာ သကမ္မကရူပဒဿနတော. ခပိ ခန္တိယံ. ခမ္ပေတိ, ခမ္ပယတိ. ထူပ သမုဿယေ. သမုဿယော အာရောဟော ဥဗ္ဗေဓော. ထူပေတိ, ထူပယတိ. ထူပေါ, ထူပိကာ. တပ ခယေ. တပေတိ, တပယတိ. ဥပ ပဇ္ဇနေ. ဥပေတိ, ဥပယတိ. စပ ကက္ကနေ. စပေတိ, စပယတိ. သုပ္ပ မာနေ. သုပ္ပေတိ, သုပ္ပယတိ. ဍပ ဍိပ သံဃာတေ. ဍာပေတိ. ဍာပယတိ. ဍေပေတိ, ဍေပယတိ. ကပ [Pg.327] အဝကမ္ပနေ. ကပေတိ, ကပယတိ. ကပဏော. ကပဏောတိ ကရုဏာယိတဗ္ဗော. အညတ္ထ ပန ‘‘ကပ္ပတီ’’တိ ရူပံ ဝဒန္တိ. ဂုပ ကုပ ဓူပ ဘာသာယံ. ဂေါပေတိ, ဂေါပယတိ. ကောပေတိ, ကောပယတိ. ဓူပေတိ, ဓူပယတိ. ကိပ ဒုဗ္ဗလ္လေ. ကိပေတိ, ကိပယတိ. ခေပ ပေရဏေ. ပေရဏံ စုဏ္ဏိကရဏံ, ခေပေတိ, ခေပယတိ. တပ ပီဏနေ. တပေတိ, တပယတိ. အာပု လမ္ဗနေ. အာပေတိ, အာပယတိ. အာပေါ. တပ ဒါဟေ. တပေတိ, တပယတိ. တပေါ, တာပေါ. အာတာပေါ, သန္တာပေါ. ကာရိတေ – တာပေတိ, တာပယတိ. တတ္ထ တပေါတိ အကုသလာနံ တာပနဋ္ဌေန တပေါ, သီလံ. ဩပထပ ထပနေ. ဩပေတိ, ဩပယတိ. န တေသံ ကောဋ္ဌေ ဩပေန္တိ. ထပေတိ, ထပယတိ. ထပိတော. ထပယိတွာ ပဋိစ္ဆဒံ ဝဝဋ္ဌပေတိ. ဝေါဋ္ဌဗ္ဗနံ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဝိ အဝ ထပေတိ, ဝိ အဝ ထပန’’န္တိ ဆေဒေါ. ဧတ္ထ ပုရိမေ သရလောပေါ ထဿ ဌတ္တံ ဝိသဒိသဘာဝေန ဒွိတ္တဉ္စ. ပစ္ဆိမေ ပန သရလောပေါ, အဝဿ ဩကာရတ္တံ, ထဿ ဌတ္တံ, ပဿ ဝတ္တံ, ဝဿ ဒွိတ္တံ, ဝကာရဒွယဿ စ ဗကာရဒွယံ ဘဝတိ. ဝေါဋ္ဌဗ္ဗနန္တိ စ ဗျဝတ္ထာပကစိတ္တဿ နာမံ. နကာရလောပေ ‘‘ဝေါဋ္ဌဗ္ဗ’’န္တိ အပရမ္ပိ ရူပံ ဘဝတိ. မာပ မာပနေ. ပဏ္ဏသာလံ မာပေတိ, မာပယတိ. ယော ပါဏမတိမာပေတိ, ပဏ္ဏသာလာ သုမာပိတာ. ယပ ယာပနေ. ယာပနံ ပဝတ္တနံ. တေန သော တတ္ထ ယာပေတိ. ယာပယတိ. ယာပနာ. တတ္ထ [Pg.328] ယာပေတီတိ ဣဒံ ယာဓာတုဿ ပယောဂတ္တေ သတိ ကာရိတပဒံ ဘဝတိ. တထာ ဟိ ‘‘ဥယျာပေန္တိ နာမာ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. ပကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ဖကာရန္တာဓာတုရူပါနိ အပ္ပသိဒ္ဓါနိ. ဗကာရန္တဓာတု သမ္ဗ သမ္ဗန္ဓေ. သမ္ဗန္ဓော ဒဠှဗန္ဓနံ. သမ္ဗေတိ, သမ္ဗယတိ. သမ္ဗလံ. သဗိ မဏ္ဍလေ. မဏ္ဍလံ ပရိမဏ္ဍလတာ. ရူပံ တာဒိသမေဝ. ကုဗိ အစ္ဆာဒနေ. ကုမ္ဗေတိ, ကုမ္ဗယတိ. လုဗိ ဒုဗိ အဒ္ဒနေ. အဒ္ဒနံ ဟိံသာ. လုမ္ဗေတိ, လုမ္ဗယတိ. ဒုမ္ဗေတိ, ဒုမ္ဗယတိ. 'लुबि' आणि 'दुबि' हे 'अद्दन' (हिंसा) या अर्थात आहेत. 'अद्दन' म्हणजे हिंसा. लुम्बेति, लुम्बयति. दुम्बेति, दुम्बयति. ပုဗ္ဗ နိကေတနေ. နိကေတနံ နိဝါသော. ပုဗ္ဗေတိ, ပုဗ္ဗယတိ. 'पुब्ब' हे 'निकेतन' (निवास) या अर्थात आहे. 'निकेतन' म्हणजे निवास. पुब्बेति, पुब्बयति. ဂဗ္ဗ မာနေ. မာနော အဟံကာရော. ဂဗ္ဗေတိ, ဂဗ္ဗယတိ. ဂဗ္ဗနံ, ဂဗ္ဗိတော. တတ္ထ ဂဗ္ဗတီတိ န သင်္ကုစတိ. 'गब्ब' हे 'मान' (अहंकार) या अर्थात आहे. 'मान' म्हणजे अहंकार. गब्बेति, गब्बयति. गब्बनं, गब्बितो. तेथे 'गब्बति' म्हणजे संकोच न करणे (संकोच करत नाही). ဗကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ब'कारान्त धातूंची रूपे. ဘကာရန္တဓာတု 'भ'कारान्त धातू. ဘူ ပတ္တိယံ. ပတ္တိ ပါပနံ. သကမ္မိကာ ဓာတု. ဘာဝေတိ, ဘာဝယတိ. ပဘာဝေတိ, ပဘာဝယတိ. ဣတ္ထမ္ဘူတော. စက္ခုဘူတော, ဉာဏဘူတော, ဓမ္မဘူတော, ဗြဟ္မဘူတော. 'भू' हा 'पत्ति' (प्राप्ती) या अर्थात आहे. 'पत्ति' म्हणजे प्राप्त करणे. हा सकर्मक धातू आहे. भावेति, भावयति. प्रभावेति, प्रभावयति. इत्थंभूतो. चक्खुभूतो, ञाणभूतो, धम्मभूतो, ब्रह्मभूतो. တတ္ထ [Pg.329] ဘာဝေတီတိ ပုရိသော ဂစ္ဆန္တံ ပုရိသမနုဂစ္ဆန္တော ပါပုဏာတီတိ အတ္ထော. ဧသ နယော သေသကြိယာပဒေသုပိ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဘာဝေတီ’’တိအာဒီနိ ယတ္ထ သစေ ‘‘ဘူ သတ္တာယ’’န္တိ ဓာတုယာ ရူပါနိ ဟောန္တိ, တတ္ထ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ နာမ ဟောန္တိ. ‘‘ဘာဝေတိ ကုသလံ ဓမ္မ’’န္တိအာဒီနေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. ဘာဝေတီတိ ဟိ ဝဍ္ဎေတီတိ အတ္ထော. ဣဓ ပန သုဒ္ဓကတ္တုရူပတ္တာ ပါပုဏာတီတိ အတ္ထော. ဣတ္ထမ္ဘူတောတိ ဣမံ ပကာရံ ဘူတော ပတ္တော. ‘‘စက္ခုဘူတော’’တိအာဒီနိ ပန ‘‘ဘူ သတ္တာယံ, ဘူ ပတ္တိယ’’န္တိ ဒွိဂဏိကာနံ ဒွိန္နံ ဓာတူနံ ဝသေန အဋ္ဌကထာဋီကာနယနိဿိတံ အတ္ထံ ပကာသယိဿာမ အာဂမိကာနံ ကောသလ္လတ္ထာယ. တတ္ထ စက္ခုဘူတောတိ ယထာ စက္ခု သတ္တာနံ ဒဿနတ္ထံ ပရိဏေတိ, ဧဝံ လောကဿ ယာထာဝဒဿနသာဓနတော ဒဿနကိစ္စပရိဏာယကဋ္ဌေန စက္ခုဘူတော. အထ ဝါ စက္ခု ဝိယ ဘူတောတိပိ စက္ခုဘူတော. ပညာစက္ခုမယတ္တာ ဝါ သယမ္ဘူဉာဏေန ပညာစက္ခုံ ဘူတော ပတ္တောတိ စက္ခုဘူတော. ဝိဒိတကရဏဋ္ဌေန ဉာဏဘူတော, အသာဓာရဏံ ဝါ ဉာဏံ ဘူတော ပတ္တောတိ ဉာဏဘူတော, အဝိပရီတသဘာဝဋ္ဌေန, ပရိယတ္တိဓမ္မပ္ပဝတ္တနတော ဝါ ဟဒယေန စိန္တေတွာ ဝါစာယ နိစ္ဆာရိတဓမ္မမယောတိ ဓမ္မဘူတော. ဗောဓိပက္ခိယဓမ္မေဟိ ဝါ ဥပ္ပန္နတ္တာ လောကဿ စ တဒုပ္ပာဒနတော အနညသာဓာရဏံ ဝါ ဓမ္မံ ဘူတော ပတ္တောတိ ဓမ္မဘူတော. သေဋ္ဌဋ္ဌေန ဗြဟ္မဘူတော. အထ ဝါ ဗြဟ္မံ ဝုစ္စတိ မဂ္ဂေါ တေန ဥပ္ပန္နတ္တာ လောကဿ စ တဒုပ္ပာဒနတ္တာ, တဉ္စ သယမ္ဘူဉာဏေန ဘူတော ပတ္တောတိ ဗြဟ္မဘူတော. ဧဝံ ဒွိန္နံ ဓာတူနံ ဝသေန ဝုတ္တော အတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော. तेथे 'भावेति' म्हणजे एखादा मनुष्य चालणाऱ्या मनुष्याचा पाठलाग करून त्याला गाठतो (प्राप्त करतो), असा अर्थ आहे. हाच नियम उर्वरित क्रियापदांनाही लागू होतो. आणि येथे 'भावेति' इत्यादी रूपे जर 'भू सत्तायम्' (अस्तित्व) या धातूची असतील, तर ती प्रयोजक (कारित) रूपे असतात. "भावेति कुसलं धम्मं" (कुशल धर्माची भावना करतो/वाढवतो) इत्यादी येथे उदाहरणे आहेत. कारण 'भावेति' म्हणजे 'वाढवणे' (वर्धन करणे) असा अर्थ आहे. परंतु येथे प्रयोजक रूप असल्यामुळे 'प्राप्त करणे' असा अर्थ आहे. 'इत्थंभूतो' म्हणजे या प्रकाराला प्राप्त झालेला. परंतु 'चक्खुभूतो' इत्यादी शब्दांचा अर्थ 'भू सत्तायम्' आणि 'भू पत्ति' या दोन वेगवेगळ्या गणांतील धातूंच्या आधारे, आगम (परंपरागत ज्ञान) जाणणाऱ्यांच्या कौशल्यासाठी, अट्ठकथा आणि टीकांच्या पद्धतीनुसार स्पष्ट करू. त्यामध्ये 'चक्खुभूतो' म्हणजे ज्याप्रमाणे डोळा प्राण्यांना पाहण्यासाठी मार्गदर्शन करतो, त्याचप्रमाणे जगाला यथार्थ दर्शनाचे साधन असल्यामुळे, दर्शनकार्याचे नेतृत्व करण्याच्या अर्थाने ते 'चक्खुभूत' (नेत्ररूप) आहेत. किंवा डोळ्यासारखे झाले आहेत म्हणूनही 'चक्खुभूत'. किंवा प्रज्ञाचक्षूमय असल्यामुळे, स्वयंभू ज्ञानाने प्रज्ञाचक्षूला प्राप्त झाले आहेत म्हणून 'चक्खुभूत'. (सर्व काही) ज्ञात करून देण्याच्या अर्थाने 'ञाणभूत' (ज्ञानरूप), किंवा असाधारण ज्ञानाला प्राप्त झाले आहेत म्हणून 'ञाणभूत'. अविपरीत (यथार्थ) स्वभावाच्या अर्थाने, किंवा परियत्ति धर्माचे प्रवर्तन केल्यामुळे, हृदयात चिंतन करून वाणीने उच्चारलेल्या धर्ममय असल्यामुळे 'धम्मभूत' (धर्मरूप). किंवा बोधिपक्षीय धर्मांमुळे उत्पन्न झाल्यामुळे आणि जगामध्ये ते उत्पन्न करत असल्यामुळे, असाधारण धर्माला प्राप्त झाले आहेत म्हणून 'धम्मभूत'. श्रेष्ठत्वाच्या अर्थाने 'ब्रह्मभूत' (श्रेष्ठरूप). किंवा 'ब्रह्म' म्हणजे मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) म्हटले जाते, त्याद्वारे उत्पन्न झाल्यामुळे आणि जगामध्ये ते उत्पन्न करत असल्यामुळे, आणि स्वयंभू ज्ञानाने त्याला प्राप्त झाले आहेत म्हणून 'ब्रह्मभूत'. अशा प्रकारे दोन धातूंच्या आधारे सांगितलेला अर्थ समजून घ्यावा. အပရာနိ စေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. ‘‘တာတာ မယံ မဟလ္လကာ သုဒ္ဓေါဒနမဟာရာဇပုတ္တံ ဗုဒ္ဓဘူတံ သမ္ဘာဝေယျာမ ဝါ နော ဝါ, တုမှေ တဿ သာသနေ ပဗ္ဗဇေယျာထာ’’တိ စ ‘‘အထ [Pg.330] ခေါ ထေရာ ဘိက္ခူ အာယသ္မန္တံ ရေဝတံ သဟဇာတိယံ သမ္ဘာဝိံသူ’’တိ စာတိ. အညာနိပိ ပနေတ္ထ ‘‘မနုဿဘူတော, ဒေဝဘူတော’’တိအာဒီနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. တထာ ဟိ သံသာရမောစကပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာယံ ‘‘မနုဿဘူတာတိမနုဿေသု ဇာတာ, မနုဿဘာဝံ ဝါ ပတ္တာ’’တိ အတ္ထော သံဝဏ္ဏိတော. आणि येथे इतरही उदाहरणे समजून घ्यावीत. "मुलांनो, आम्ही वृद्ध झालो आहोत, शुद्धोदन महाराजांच्या पुत्राला, जे बुद्ध झाले आहेत (बुद्धभूत), आम्ही भेटू शकू की नाही (माहीत नाही), तुम्ही त्यांच्या शासनात प्रव्रजित व्हावे" आणि "त्यानंतर थेर भिक्खूंनी आयुष्मान रेवतांना सहजाती येथे सन्मानित केले (भेटले)." येथे इतरही 'मनुस्सभूतो' (मनुष्य झालेला), 'देवभूतो' (देव झालेला) इत्यादी शब्द योजावेत. कारण संसारमोचक पेतवत्थुच्या अट्ठकथेमध्ये "मनुस्सभूता म्हणजे मनुष्यांमध्ये जन्मलेली, किंवा मनुष्यभावाला प्राप्त झालेली" असा अर्थ वर्णन केला आहे. ဘူ အဝကမ္ပနေ. အယမ္ပိ သကမ္မကော. ဘာဝေတိ, ဘာဝယတိ. မနောဘာဝနီယာ ဘိက္ခူ. 'भू' हा 'अवकंपन' (अनुकंपा/दया) या अर्थात आहे. हा देखील सकर्मक आहे. भावेति, भावयति. मनोभावनीया भिक्खू. ဧတ္ထ စ ဘာဝေတီတိ အနုကမ္ပတိ ပုတ္တံ ဝါ ဘာတရံ ဝါ ယံကိဉ္စိ. မနောဘာဝနီယာတိ ‘‘ဒီဃာယုကာ ဟောန္တု ဘဒန္တာ အရောဂါ အဗျာပဇ္ဇာ’’တိ ဧဝမာဒိနာ ဘာဝေတဗ္ဗာ အနုကမ္ပိတဗ္ဗာတိ မနောဘာဝနီယာ. အညတ္ထ ပန မနောဘာဝနီယာတိ မနောဝဍ္ဎနကာတိ အတ္ထော. ယေသု ဟိ ဒိဋ္ဌေသု မနော ဝဍ္ဎတိ, ‘‘တေ မနောဘာဝနီယာ’’တိ ဝုစ္စန္တိ. आणि येथे 'भावेति' म्हणजे पुत्रावर, भावावर किंवा इतर कोणावरही अनुकंपा (दया) करणे. 'मनोभावनीया' म्हणजे "भदन्त दीर्घायुषी होवोत, निरोगी होवोत, उपद्रवरहित होवोत" इत्यादी प्रकारे भावना करावी, अनुकंपा करावी असे, म्हणून 'मनोभावनीया'. परंतु इतर ठिकाणी 'मनोभावनीया' म्हणजे मनाचा विकास करणारे (मन वाढवणारे) असा अर्थ आहे. कारण ज्यांना पाहिल्याने मन प्रसन्न होते (वाढते), त्यांना 'मनोभावनीया' असे म्हणतात. လဘ အာဘဏ္ဍနေ. လဘေတိ, လဘယတိ. 'लभ' हा 'आभंडण' (भूषण/प्राप्ती) या अर्थात आहे. लभेति, लभयति. ဇဘိ နာသနေ. ဇမ္ဘေတိ, ဇမ္ဘယတိ. 'जभि' हा 'नासन' (नाश करणे/जांभई देणे) या अर्थात आहे. जम्भेति, जम्भयति. လာဘ ပေသနေ. လာဘေတိ, လာဘယတိ. ‘‘လဘ လာဘေတိ ဓာတုဿ ရူပါနိ စေ, ကာရိတရူပါနိ ဘဝန္တိ. 'लाभ' हा 'पेसन' (प्रेषण/पाठवणे) या अर्थात आहे. लाभेति, लाभयति. जर 'लभ' धातूची 'लाभेति' अशी रूपे असतील, तर ती प्रयोजक (कारित) रूपे होतात. ဒဘီ ဘယေ. ဤကာရန္တာယံ ဓာတု, တေန သနိဂ္ဂဟီတာဂမာနိ ရူပါနိ န ဘဝန္တိ. ဒဘေတိ, ဒဘယတိ. 'दभी' हा 'भय' (भीती) या अर्थात आहे. हा ई-कारान्त धातू आहे, त्यामुळे अनुस्वार-आगम (निग्गहीत-आगम) असलेली रूपे होत नाहीत. दभेति, दभयति. ဒူဘ သန္ထမ္ဘေ. ဒူဘေတိ, ဒူဘယတိ. 'दूभ' हा 'संथम्भ' (स्तंभन/रोखणे) या अर्थात आहे. दूभेति, दूभयति. ဝမ္ဘ ဝိဒ္ဓံသနေ. ဝမ္ဘေတိ, ဝမ္ဘယတိ. ဝမ္ဘနာ. ဆဗ္ဗဂ္ဂိယာ ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ ဝမ္ဘေန္တိ. 'वम्भ' हा 'विद्धंसन' (नाश करणे/निंदा करणे) या अर्थात आहे. वम्भेति, वम्भयति. वम्भना. छब्बग्गिय (षड्वर्गीय) भिक्खू भिक्खूची निंदा करतात. ဘကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'भ'कारान्त धातूंची रूपे. မကာရန္တဓာတု 'म'कारान्त धातू. အာတေန [Pg.331] စမု ဓောဝနေ. အာပုဗ္ဗော စမုဓာတု ဓောဝနေ ဝတ္တတိ. အာစမေတိ, အာစမယတိ. အာစမနကုမ္ဘီ. 'आ' उपसर्ग लागलेला 'चमु' धातू 'धोवन' (धुणे/आचमन करणे) या अर्थात आहे. 'आ' पूर्वपद असलेला 'चमु' धातू धुण्याच्या अर्थात वापरला जातो. आचमेति, आचमयति. आचमनकुम्भी (हात-पाय धुण्यासाठी पाण्याचा घडा). ဧတ္ထ ပန ‘‘တတော ဟိ သော အာစမယိတွာ လိစ္ဆဝီ, ထေရဿ ဒတွာ ယုဂါနိ အဋ္ဌာ’’တိ အပ္ပသက္ကာရပေတဝတ္ထုပါဠိပ္ပဒေသော နိဒဿနံ. တတ္ထ အာစမယိတွာတိ ဟတ္ထပါဒဓောဝနပုဗ္ဗကံ မုခံ ဝိက္ခာလေတွာ. အယံ ပန ဓာတု ဘူဝါဒိဂဏိကတ္တေ ‘‘စမတီ’’တိ ဘက္ခနတ္ထံ ဂဟေတွာ တိဋ္ဌတိ. आणि येथे "त्यानंतर त्या लिच्छवीने आचमन करून (हात-पाय धुवून), थेरांना वस्त्रजोडी देऊन तो उभा राहिला" हा अप्पसक्कार पेतवत्थु पाळीचा भाग उदाहरण आहे. तेथे 'आचमयित्वा' म्हणजे हात-पाय धुवून तोंड स्वच्छ करणे. परंतु हा धातू भूवादि गणाचा असताना 'चमति' या रूपाने 'भक्षण करणे' (खाणे) या अर्थात वापरला जातो. ကမု ဣစ္ဆာကန္တီသု. ကာမေတိ, ကာမယတိ. ကာမော, ကန္တိ, နိကန္တိ, ကာမနာ, ကာမယမာနော,ကာမေန္တော, အဘိက္ကန္တံ. အဘိက္ကန္တဝဏ္ဏာ. 'कमु' हा 'इच्छा' आणि 'कन्ति' (प्रीती/चकाकी) या अर्थात आहे. कामेति, कामयति. कामो, कन्ति, निकन्ति, कामना, कामयमानो, कामेन्तो, अभिक्कन्तं. अभिक्कन्तवण्णा. ဧတ္ထ စ ကာမောတိ ရူပါဒိဝိသယံ ကာမေတီတိ ကာမော. ကာမိယတီတိ ဝါ ကာမော, ကိလေသကာမဝတ္ထုကာမဝသေနေတံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ကိလေသော ဟိ တေဘူမကဝဋ္ဋသင်္ခါတဉ္စ ဝတ္ထု ‘‘ကာမော’’တိ ဝုစ္စတိ. မာရောပိ ဝါ ဒေဝပုတ္တော ‘‘ကာမော’’တိ ဝုစ္စတိ. သော ဟိ အစ္စန္တကဏှဓမ္မသမင်္ဂိတာယ ပပဉ္စသမတိက္ကန္တေပိ ဗုဒ္ဓပစ္စေကဗုဒ္ဓဗုဒ္ဓသာဝကေ အတ္တနော ဝသေ ဌပေတုံ ကာမေတီတိ ‘‘ကာမော’’တိ ဝုစ္စတိ. आणि येथे 'काम' म्हणजे रूप इत्यादी विषयांची इच्छा करतो म्हणून 'काम'. किंवा ज्याची इच्छा केली जाते तो 'काम'; हे क्लेशकाम आणि वत्थुकाम (वस्तुकाम) यांच्या संदर्भात समजून घ्यावे. कारण क्लेश आणि त्रिभूमक वट्ट (संसारचक्र) संज्ञक वस्तू यांना 'काम' म्हटले जाते. किंवा मार देवपुत्रालाही 'काम' म्हटले जाते. कारण तो अत्यंत कृष्णधर्माने (पापधर्माने) युक्त असल्यामुळे, प्रपंचाचे उल्लंघन केलेल्या बुद्ध, प्रत्येकबुद्ध आणि बुद्धश्रावकांनाही आपल्या वशमध्ये ठेवण्याची इच्छा करतो, म्हणून त्याला 'काम' म्हटले जाते. ဝုတ္တဉ္စေတံ ပေါရာဏကဝိရစနာယံ – आणि प्राचीन कवींच्या रचनेत असे म्हटले आहे – ‘‘ဝန္ဒေ ဝန္ဒေဟမဿတ္ထံ, ယတ္ထ သန္တဇ္ဇိတော ဇိတော; ကာမော ကာမောဃတိဏ္ဏေန, ဗုဒ္ဓေန ဝသတာ သတာ’’တိ; "मी त्या अश्वत्थ (बोधी) वृक्षाला वंदन करतो, वंदन करतो, जेथे काम-ओघाला (इच्छेच्या प्रवाहाला) पार केलेल्या, तेथे वास करणाऱ्या भगवान बुद्धांनी भयभीत झालेल्या कामाचा (माराचा) पराभव केला." ဣမာနိ ပနဿ နာမာနိ – आणि ही त्याची नावे आहेत – ကာမော နမုစိ ကဏှော စ, ဝသဝတ္တီ ပဇာပတိ; ပမတ္တဗန္ဓု မဒနော, ပါပိမာ ဒမ္မကောပိ စ; ကန္ဒပ္ပော စ ရတိပတိ, မာရော စ ကုသုမာယုဓော; कामो, नमुचि, कण्हो, वसवत्ती, प्रजापति, पमत्तबन्धु, मदनो, पापिमा, दम्मको, कन्दर्पो, रतिपति, मारो आणि कुसुमायुधो. အညေ [Pg.332] အညာနိပိ ဝဒန္တိ. တာနိ သာသနာနုလောမာနိ န ဟောန္တီတိ ဣဓ န ဒဿိတာနိ. အဋ္ဌကထာသု ပန ‘‘မာရော, နမုစိ, ကဏှော, ပမတ္တဗန္ဓူ’’တိ စတ္တာရိယေဝ နာမာနိ အာဂတာနိ. इतर लोक इतरही नावे सांगतात. ती शासनाला (बुद्धवचनाला) अनुकूल नसल्यामुळे येथे दाखवलेली नाहीत. परंतु अट्ठकथांमध्ये "मारो, नमुचि, कण्हो, पमत्तबन्धु" ही चारच नावे आली आहेत. ဣဒါနိ အဘိက္ကန္တသဒ္ဒဿ ဘူဝါဒိဂဏေ ‘‘ကမု ပဒဝိက္ခေပေ’’တိ ဝေါဟာရသီသေန ဝုတ္တဿ ကမုဓာတုဿ ဝသေန ဣဓ စ ‘‘ကမု ဣစ္ဆာကန္တီသူ’’တိ ဝုတ္တဿ ကမုဓာတုဿ ဝသေန အတ္ထုဒ္ဓါရံ ကထယာမ. အဘိက္ကန္တသဒ္ဒေါ ခယသုန္ဒရာဘိရူပအဗ္ဘနုမောဒနေသု ဒိဿတိ. ‘‘အဘိက္ကန္တာ ဘန္တေ ရတ္တိ, နိက္ခန္တော ပဌမော ယာမော, စိရနိသိန္နော ဘိက္ခုသံဃော’’တိအာဒီသု ခယေ ဒိဿတိ. ‘‘အယံ ဣမေသံ စတုန္နံ ပုဂ္ဂလာနံ အဘိက္ကန္တတရော စ ပဏီတတရော စာ’’တိအာဒီသု သုန္ဒရေ. ‘‘ကော မေ ဝန္ဒတိ ပါဒါနိ, ဣဒ္ဓိယာ ယသသာ ဇလံ; အဘိက္ကန္တေန ဝဏ္ဏေန, သဗ္ဗာ ဩဘာသယံ ဒိသာ’’တိ အာဒီသု အဘိရူပေ. ‘‘အဘိက္ကန္တံ ဘန္တေ’’တိအာဒီသု အဗ္ဘနုမောဒနေ. ဣစ္စေဝံ – ခယသ္မိံ သုန္ဒရေ စေဝ, အထော အဗ္ဘနုမောဒနေ; အဘိရူပေ အဘိက္ကန္တ-သဒ္ဒေါ ဒိဿတိ သာသနေ. ထောမ သိလာဃာယံ. သိလာဃာ ပသံသာ. ထောမေတိ, ထောမယတိ. ထောမိတော, ထောမနာ. ယမ အပရိဝေသနေ. ယမေတိ, ယမယတိ. ယမော. သမ [Pg.333] ဝိတက္ကေ. သာမေတိ, သာမယတိ. သမာ. နိသာမေတိ, နိသာမယတိ. နိသာမနံ. ပဋိသာမေတိ, ပဋိသာမယတိ. ပဋိသာမနံ. တတ္ထ သမာတိ သံဝစ္ဆရော, သော ‘‘သမာ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဝုစ္စတိ. ‘‘ယော ယဇေထ သတံ သမ’’န္တိ ဧတ္ထ ဟိ သမာသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ, ဥပယောဂဝသေန ပန ‘‘သမ’’န္တိ ဝုတ္တော. ဣမာနိ သံဝစ္ဆရဿ နာမာနိ ‘‘သံဝစ္ဆရော, ဝစ္ဆရော, သမာ, ဟာယနော, သရဒေါ, ဝဿော’’တိအာဒီနိ ဘဝန္တိ. နိသာမေတီတိ ဝိတက္ကေတိ ဥပဓာရေတိ. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘ဣင်္ဃ မဒ္ဒိ နိသာမေဟိ, နိဂ္ဃောသော ယာဒိသော ဝနေ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ နိသာမေဟီတိ ဝိတက္ကေဟိ ဥပဓာရေဟီတိ အတ္ထော. ပဋိသာမေတီတိ ဘဏ္ဍံ ဂုတ္တဋ္ဌာနေ နိက္ခိပတိ. သမ အာလောစနေ. အာလောစနံ ပေက္ခနံ. သာမေတိ, သာမယတိ. နိသာမနံ. ဧတ္ထ ပန နိသာမေတီတိ ပေက္ခတိ ဩလောကေတိ. တထာ ဟိ ‘‘ဣင်္ဃ မဒ္ဒိ နိသာမေဟိ, စိတ္တံ ရူပံဝ ဒိဿတီ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. တတ္ထ ဟိ နိသာမေဟီတိ ဩလောကေဟီတိ အတ္ထော. ဓာတူနမတ္ထာတိသယေန ယောဂေါတိ ဝစနတော ပန ဥပသဂ္ဂယောဂတော ဝါ သဝနေပိ အယံ ဝတ္တတိ. တထာ ဟိ ‘‘တတော ကဏှာဇိနာယာပိ, နိသာမေဟိ ရထေသဘာ’’တိအာဒိကာ ပါဠိယော ဒိဿန္တိ. တတ္ထ နိသာမေဟီတိ သုဏောဟီတိ အတ္ထော. အမ ရောဂေ. အမေတိ, အမယတိ. အန္ဓော. ဗိလင်္ကပါဒေါ အန္ဓနခေါ. တတ္ထ အန္ဓောတိ နဋ္ဌနယနော ဝုစ္စတိ. အန္ဓနခေါတိ ပူတိနခေါ. ဥဘယထာပိ သရောဂတ္တံ သူစိတံ. ဘာမ [Pg.334] ကောဓေ. ဘာမေတိ, ဘာမယတိ. 'भाम' धातू क्रोधाच्या (रागाच्या) अर्थात आहे. 'भामेति', 'भामयति' (अशी रूपे होतात). ဂေါမ ဥပလေပနေ. ဂေါမေတိ, ဂေါမယတိ. 'गोम' धातू उपलेपनाच्या (सारवण्याच्या किंवा लेप देण्याच्या) अर्थात आहे. 'गोमेति', 'गोमयति' (अशी रूपे होतात). သာမ သွာန္တနေ အာမန္တနေ. သွာန္တနံ သာမပ္ပယောဂေါ. အာမန္တနံ အဝှာယနံ ပက္ကောသနံ. သာမေတိ, သာမယတိ. 'साम' धातू सांत्वन (शांत करणे) आणि आमंत्रण (बोलवणे) या अर्थात आहे. सांत्वन म्हणजे सामप्रयोग (सामोपचाराचा वापर). आमंत्रण म्हणजे आव्हान (हाक मारणे) किंवा पाचारण करणे (बोलावणे). 'सामेति', 'सामयति' (अशी रूपे होतात). သင်္ဂါမ ယုဒ္ဓေ. သင်္ဂါမေတိ, သင်္ဂါမယတိ. ဒွေ ရာဇာနော သင်္ဂါမေသုံ. သင်္ဂါမော. အာတော ဂမု ဤသမဓိဝါသနေ. အာဂမေတိ, အာဂမယတိ, ကာမာဝစရဓမ္မေ နိဿာယ ရူပါရူပဓမ္မော သမုဒါဂမေတိ, သမုဒါဂမယတိ. ဥပါသကော ဓမ္မသဝနန္တရာယံ အနိစ္ဆန္တော ‘‘အာဂမေထ အာဂမေထာ’’တိ အာဟ. သမုဒါဂမနံ, အာဂမနံ. အာဂမေန္တော, အာဂမယမာနော. 'संगाम' धातू युद्धाच्या अर्थात आहे. 'संगा मेति', 'संगामयति' (अशी रूपे होतात). 'द्वे राजानो संगा मेसुं' म्हणजे दोन राजांनी युद्ध केले. 'संगामो' (युद्ध). 'आ' उपसर्गपूर्वक 'गमु' धातू हा थोड्या प्रमाणात वाट पाहणे किंवा सहन करणे (ईषदधिवान) या अर्थात आहे. 'आगमेति', 'आगमयति' (अशी रूपे होतात). कामावचर धर्मांचा आश्रय घेऊन रूप आणि अरूप धर्म उत्पन्न होतात (समुदागमेति, समुदागमयति). धम्मश्रवणात अडथळा येऊ नये अशी इच्छा करणाऱ्या उपासकाने "वाट पाहा, वाट पाहा" (आगमेथ आगमेथा) असे म्हटले. 'समुदागमनं' (उत्पत्ती/प्राप्ती), 'आगमनं' (येणे/वाट पाहणे). 'आगमंतो', 'आगमयमानो' (वाट पाहत असताना/येत असताना). တတြ အာဂမေတီတိ ဤသကံ အဓိဝါသေတိ. သမုဒါဂမေတီတိ သမ္ပဝတ္တတိ. ဘူဝါဒိဂဏေ ‘‘ဂမယတီ’’တိ ဟေတုကတ္တုဝသေန ဝုတ္တံ, ဣဓ ပန ဥပသဂ္ဂနိပါတပုဗ္ဗကာနိ ကတွာ ‘‘အာဂမေတီ’’တိအာဒီနိ သုဒ္ဓကတ္တုဝသေန ဝုတ္တာနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. तेथे 'आगमेति' म्हणजे थोडी प्रतीक्षा करणे. 'समुदागमेति' म्हणजे प्रवृत्त होणे. भूवादिगणात 'गमयति' हे हेतुकर्तरी (प्रयोजक) मध्ये सांगितले आहे, परंतु येथे उपसर्ग आणि निपात पूर्व ठेवून 'आगमेति' इत्यादी शुद्धकर्तरी मध्ये सांगितले आहे, असे समजावे. မကာရန္တဓာတုရူပါနိ. म-कारान्त धातूंची रूपे. ဣတိ စု ရာဒိဂဏေ ပဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ अशा प्रकारे चुरादिगणातील पवर्गान्त धातूंची रूपे... သမတ္တာနိ. समाप्त झाली. ယကာရန္တဓာတု य-कारान्त धातू. ယု ဇိဂုစ္ဆာယံ. ယာဝေတိ, ယာဝယတိ. ယဝေါ. यु (धातू) जुगुप्सा (घृणा) अर्थात. यावेति, यावयति. यवो. ဗျယ ခယေ. ဗျယေတိ, ဗျယယတိ. အဗျယီဘာဝေါ. ब्यय (धातू) क्षय (नाश) अर्थात. ब्ययेति, ब्यययति. अब्ययीभावो. ဗျယ စိတ္တသမုဿဂ္ဂေ. တာဒိသံယေဝ ရူပံ. ब्यय (धातू) चित्त-उत्सर्जनात (चित्त सोडून देणे). तसेच रूप होते. ယကာရန္တဓာတုရူပါနိ. य-कारान्त धातूंची रूपे. ရကာရန္တဓာတု र-कारान्त धातू. ပရ ဂတိယံ. ပရေတိ, ပရယတိ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဣတိ ခေါ အာနန္ဒ ကုသလာနိ သီလာနိ အနုပုဗ္ဗေန အဂ္ဂါယ ပရေန္တီ’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထ အဂ္ဂါယ ပရေန္တီတိ အရဟတ္တတ္ထာယ ဂစ္ဆန္တိ. पर (धातू) गती (जाणे) अर्थात. परेति, परयति. आणि येथे 'इति खो आनंद कुसलानि सीलानि अनुपुब्बेन अग्गाय परेंति' (हे आनंदा, कुशल शील अनुक्रमाने अग्रपदाकडे जातात) हे पाळीचे उदाहरण आहे. तेथे 'अग्गाय परेंति' म्हणजे अर्हत्त्वासाठी जातात. ဂရ ဥဂ္ဂမေ. ဂရေတိ, ဂရယတိ. ဂရု. गर (धातू) उद्गम (वर येणे) अर्थात. गरेति, गरयति. गरु. စရ အသံသယေ. စရေတိ, စရယတိ. चर (धातू) असंशय (निश्चितता) अर्थात. चरेति, चरयति. ပူရိ အပ္ပာယနေ. ပူရေတိ, ပူရယတိ. पूरि (धातू) तृप्ती (किंवा वृद्धी) अर्थात. पुरेति, पुरयति. ဝရ ဣစ္ဆာယံ. ဝရေတိ, ဝရယတိ. ဝရော, ဝရံ, ဝရန္တော. ဧတေ ဝရာနံ စတုရော ဝရေမိ. ဧတံ သက္က ဝရံ ဝရေ. वर (धातू) इच्छा अर्थात. वरेति, वरयति. वरो, वरं, वरंतो. 'एते वरानं चतुरो वरेमि' (मी या वरांपैकी चार वर मागतो). 'एतं सक्क वरं वरे' (हे शक्रा, हा वर मागावा). တတ္ထ ဝရောတိ ဝရိယတေ ဝရိတဗ္ဗောတိ ဝရော. ဝရန္တိ ဝရေတီတိ ဝရံ, ဣစ္ဆန္တော ပတ္ထေန္တောတိ အတ္ထော. तेथे 'वरो' म्हणजे ज्याची निवड केली जाते किंवा जे निवडण्यायोग्य आहे तो 'वरो'. 'वरं' म्हणजे जो निवडतो (किंवा इच्छा करतो) तो 'वरं', म्हणजेच इच्छा करणारा, प्रार्थना करणारा असा अर्थ आहे. ‘‘မဟာမဟာရဟံ သကျ-မုနိ နီဝရဏာ ရဏာ; မုတ္တံ မုတ္တံ သုဒဿနံ, ဝန္ဒေ ဗောဓိဝရံ ဝရ’’န္တိ जसे की, 'महामहारहं सक्य-मुनि नीवरणा रणा; मुत्तं मुत्तं सुदस्सनं, वन्दे बोधिवरं वरं' (अतिशय पूजनीय, नीवरण आणि क्लेशांपासून मुक्त, परम मुक्त, सुंदर दर्शन असणाऱ्या शाक्यमुनींच्या श्रेष्ठ बोधिवृक्षाला मी वंदन करतो). ပုရာဏကဝိရစနာယံ ‘‘ဝရ’’န္တိ ပဒဿ ဝိယ. ဧဝံ ဝရေတီတိ ဝရန္တော. ဝရေတိ ဝရေမိ ဣစ္ဆာမိ ယာစာမိ. ကာရိတေ ‘‘ပဝါရေတီ’’တိ ရူပံ, ဣစ္ဆာပေတီတိ အတ္ထော. နိသေဓနတ္ထေ ပနိဒံ ကာရိတံ န ဟောတိ. प्राचीन कवींच्या रचनेतील 'वरं' या शब्दाप्रमाणे. अशा प्रकारे जो निवडतो (इच्छा करतो) तो 'वरंतो'. 'वरेति' किंवा 'वरेमि' म्हणजे मी इच्छा करतो, मी याचना करतो. प्रयोजक (कारित) मध्ये 'पवारेति' असे रूप होते, ज्याचा अर्थ 'इच्छा करवणे' असा होतो. परंतु निषेध अर्थात हे प्रयोजक रूप होत नाही. သရ အက္ခေပေ. သရေတိ, သရယတိ. သရော. သရောတိ သဒ္ဒေါ. सर (धातू) आक्षेप (फेकणे किंवा आवाज करणे) अर्थात. सरेति, सरयति. सरो. 'सरो' म्हणजे शब्द (आवाज). သာရ ဒုဗ္ဗလျေ. သာရေတိ, သာရယတိ. ဒုဗ္ဗလော ဘဝတီတိ အတ္ထော. सार (धातू) दुर्बलता अर्थात. सारेति, सारयति. दुर्बल होतो असा अर्थ आहे. ကုမာရ ကီဠာယံ. ကုမာရေတိ, ကုမာရယတိ. ကုမာရော, ကုမာရကော. ကုမာရီ, ကုမာရိကာ. कुमार (धातू) क्रीडा (खेळणे) अर्थात. कुमारेति, कुमारायति. कुमारो, कुमारको. कुमारी, कुमारिका. ဧတ္ထ [Pg.336] ကုမာရယတိ တတ္ထ တတ္ထ ကီဠတီတိ ကုမာရော. သော ဧဝ အတိဒဟရတ္တာ ကုမာရကော. ဧသ နယော ဣတရတြာပိ. येथे जो 'कुमारायति' म्हणजे ठिकठिकाणी खेळतो तो 'कुमारो'. तोच अतिशय लहान असल्यामुळे 'कुमारको' (म्हटला जातो). हाच नियम इतर ठिकाणीही लागू होतो. သူရ ဝီရ ဝိက္ကန္တိယံ. ဝိက္ကန္တိ ဝိက္ကမနံ. သူရေတိ, သူရယတိ. ဝီရေတိ, ဝီရယတိ. သူရော, ဝီရော. သာသနိကေဟိ ပန သဒ္ဓမ္မဝိဒူဟိ ဧဝံ ဓာတုသဘာဝါနမ္ပိ သူရဝီရသဒ္ဒါနံ နိဗ္ဗစနံ န ဒဿိတံ, ကေဝလံ ပန တတ္ထ တတ္ထ ‘‘သူရောတိ ဝိသိဋ္ဌဥရော’’တိ စ ‘‘မဟာဝီရောတိ မဟာဝိက္ကန္တော’’တိ စ ‘‘ဝီရောတိ ဝီရိယဝါ’’တိ စ အတ္ထဝိဝရဏမတ္တမေဝ ဒဿိတံ. सूर, वीर (धातू) पराक्रम (विक्रांती) अर्थात. विक्रांती म्हणजे पराक्रम गाजवणे. सूरेति, सूरयति. वीरेति, वीरयति. सूरो, वीरो. परंतु शासनातील (बुद्ध शासनातील) सद्धम्म जाणणाऱ्यांनी अशा धातूंच्या स्वभावाच्या 'सूर' आणि 'वीर' शब्दांची व्युत्पत्ती (निरुक्ती) दाखवलेली नाही, तर केवळ ठिकठिकाणी 'सूरो म्हणजे विशिष्ट छाती असलेला (पराक्रमी)' आणि 'महावीरो म्हणजे महान पराक्रमी' आणि 'वीरो म्हणजे वीर्यवान (उत्साही)' असा केवळ अर्थाचा खुलासाच दाखवला आहे. ပါရ တီရ ကမ္မသမ္ပတ္တိယံ. ကမ္မသမ္ပတ္တိ နာမ ကမ္မဿ ပရိသမာပနံ နိဋ္ဌာပနံ. ပါရေတိ, ပါရယတိ. တီရေတိ, တီရယတိ. ပါရံ. တီရံ. ဝိက္ကမာမိ န ပါရေမိ, ဘူမိံ သုမ္ဘာမိ ဝေဂသာ. တံ ကိစ္စံ တီရေတွာ ဂတော. သန္တီရဏံ, တီရဏပရိညာတိ စ အာဒီနိ ဧတ္ထ ဒဿေတဗ္ဗာနိ. 'पार' आणि 'तीर' हे धातू कार्यसिद्धीच्या (कम्यसंपत्तीच्या) अर्थात वापरले जातात. 'कम्यसंपत्ती' म्हणजे कर्माची समाप्ती किंवा पूर्णता होय. पारेति, पारयति. तीरेति, तीरयति. पार, तीर. "मी पराक्रम करतो पण पार पाडू शकत नाही, वेगाने जमिनीवर आदळतो." "ते कार्य पूर्ण करून गेला." 'संतीरण' (तपासणी) आणि 'तीरणपरिञ्ञा' (निर्णय-परिज्ञा) इत्यादी येथे दर्शविले पाहिजेत. တတ္ထ န ပါရေမီတိ ဆိန္ဒိတုံ န သက္ကောမီတိ အတ္ထော. तेथे 'न पारेमि' (पार पाडू शकत नाही) याचा अर्थ "छिन्न (किंवा नष्ट) करू शकत नाही" असा आहे. ဤရ ခေပနေ. ဤရေတိ, ဤရယတိ. 'ईर' धातू फेकण्याच्या (क्षेपणाच्या) अर्थात आहे. ईरेति, ईरयति. ဇရ ဝယောဟာနိမှိ. ဇရေတိ, ဇရယတိ. ဇရာ. ပါဠိယံ ပန ‘‘ဇီရတီ’’တိ ပါဌော. 'जर' धातू वयाच्या हानीच्या (वयोवृद्धतेच्या) अर्थात आहे. जरेति, जरयति. जरा. पाळिमध्ये मात्र "जीरति" असा पाठ आहे. ဝရ အာဝရဏေ. ဝါရေတိ, ဝါရယတိ. နိဝါရေတိ, နိဝါရယတိ. နိဝါရေတာ. ပရိဝါရေတိ, ပရိဝါရယတိ. ပရိဝါရော. ပဝါရေတိ, ပဝါရယတိ. ပဝါရဏံ. ပဝါရဏန္တိ နိသေဓနံ ဝါ ကာမျဒါနံ ဝါ. 'वर' धातू रोखण्याच्या (आवरणाच्या) अर्थात आहे. वारेति, वारयति. निवारेति, निवारयति. निवारक. परिवारेति, परिवारयति. परिवार. पवारेति, पवारयति. पवारणा. 'पवारणा' म्हणजे निषेध करणे किंवा इच्छित दान देणे होय. ဓရ ဓာရဏေ. ဓာရေတိ, ဓာရယတိ. အာဓာရော, အာဓာရကော, ဓမ္မော ဣစ္စာဒီနိ. 'धर' धातू धारण करण्याच्या अर्थात आहे. धारेति, धारयति. आधार, धारक, धम्म इत्यादी. တတ္ထ ဓမ္မောတိ အနေကဝိဓေသု ဓမ္မေသု လောကုတ္တရော ဥပ္ပာဒိတော သစ္ဆိကတော စ စတူသု အပါယေသု သံသာရေ ဝါ [Pg.337] သတ္တေ အပတမာနေ ဓာရေတီတိ ဓမ္မော. အထ ဝါ သောတာပန္နာဒီဟိ အရိယေဟိ ဓာရိယတိ, နု ပုထုဇ္ဇနေဟီတိပိ ဓမ္မော. စတုဘူမိကော ပန သကလက္ခဏံ ဓာရေတီတိ ဓမ္မော. ကက္ခဠတ္တာဒိနာ ဖုသနာဒိနာ သန္တိအာဒိနာ သကသကဘာဝေန ပဏ္ဍိတေဟိ ဓာရိယတိ သလ္လက္ခိယတီတိပိ ဓမ္မော. တေပိဋကော ပန ပါဠိဓမ္မော သကတ္ထပရတ္ထာဒိဘေဧ အတ္ထေ ဓာရေတီတိ ဓမ္မော. ကေစိ တု ဝိဒူ ‘‘ပါပကေ အကုသလေ ဓမ္မေ ဓုနာတိ ကမ္ပေတိ ဝိဒ္ဓံသေတီတိ ဓမ္မော’’တိ ဓူဓာတုဝသေနပိ နိဗ္ဗစနံ ဝဒန္တိ, တံ မဂ္ဂဓမ္မေ အတီဝ ယုဇ္ဇတိ, ဖလနိဗ္ဗာနပရိယတ္တိဓမ္မေသု ပန ပရိယာယေန ယုဇ္ဇတိ. तेथे 'धम्म' म्हणजे अनेक प्रकारच्या धम्मांमध्ये, जो लोकोत्तर धम्म उत्पन्न आणि साक्षात्कृत केला जातो, तो प्राण्यांना चार अपायांमध्ये किंवा संसारात पडण्यापासून धारण करतो (वाचवतो), म्हणून तो 'धम्म' होय. अथवा, जो सोतापन्न इत्यादी आर्यांद्वारे धारण केला जातो, पृथग्जनांद्वारे नाही, म्हणूनही तो 'धम्म' होय. चार भूमींचा धम्म स्वतःचे लक्षण धारण करतो, म्हणून तो 'धम्म' होय. कठीणपणा, स्पर्श, शांतता इत्यादी स्वतःच्या स्वभावाने पंडितांद्वारे जो धारण केला जातो किंवा ओळखला जातो, म्हणूनही तो 'धम्म' होय. त्रिपिटक रूपी पाळिधम्म स्वतःचा अर्थ आणि दुसऱ्याचा अर्थ (स्वार्थ-परार्थ) इत्यादी अर्थांना धारण करतो, म्हणून तो 'धम्म' होय. काही विद्वान तर "जो पापी अकुशल धम्मांना धुवून टाकतो, कंपित करतो, नष्ट करतो तो धम्म होय" अशी 'धू' धातूवरूनही व्युत्पत्ती सांगतात; ती मार्गधम्माच्या बाबतीत अत्यंत योग्य ठरते, परंतु फल, निर्वाण आणि परियत्ति धम्मांच्या बाबतीत ती पर्यायाने योग्य ठरते. ဓမ္မသဒ္ဒေါ ပရိယတ္တိဟေတုဂုဏနိဿတ္တနိဇ္ဇီဝတာဒီသု ဒိဿတိ. အယဉှိ ‘‘ဓမ္မံ ပရိယာပုဏာတိ သုတ္တံ ဂေယျ’’န္တိအာဒီသု ပရိယတ္တိယံ ဒိဿတိ. ‘‘ဟေတုမှိ ဉာဏံ ဓမ္မပဋိသမ္ဘိဒါ’’တိအာဒီသု ဟေတုမှိ. 'धम्म' शब्द परियत्ति (बुद्धवचन), हेतू, गुण, निस्सत्त (जीव नसणे) आणि निर्जीवता इत्यादी अर्थांमध्ये दिसून येतो. कारण हा "धम्माचा अभ्यास करतो, सुत्त, गेय..." इत्यादी वाक्यांमध्ये 'परियत्ति' या अर्थात दिसतो. "हेतूचे ज्ञान म्हणजे धम्मपटिसंभिदा" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'हेतू' या अर्थात दिसतो. ‘‘န ဟိ ဓမ္မော အဓမ္မော စ, ဥဘော သမဝိပါကိနော; အဓမ္မော နိရယံ နေတိ, ဓမ္မော ပါပေတိ သုဂ္ဂတိ’’န္တိ "धम्म आणि अधम्म हे दोन्ही समान विपाकाचे (परिणामाचे) नसतात; अधम्म नरकात नेतो, तर धम्म सुगतीला पोहोचवतो." အာဒီသု ဂုဏေ. ‘‘တသ္မိံ ခေါ ပန သမယေ ဓမ္မာ ဟောန္တိ. ဓမ္မေသု ဓမ္မာနုပဿီ ဝိဟရတီ’’တိအာဒီသု နိဿတ္တနိဇ္ဇီဝတာယံ. इत्यादी वाक्यांमध्ये 'गुण' या अर्थात. "त्या वेळी धम्म असतात" किंवा "धम्मांमध्ये धम्मानुपस्सी होऊन विहरतो" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'निस्सत्त' (जीव नसणे) आणि 'निर्जीवता' या अर्थात. အထ ဝါ ဓမ္မသဒ္ဒေါ သဘာဝပညာပုညပညတ္တိအာပတ္တိပရိယတ္တိနိဿတ္တနိဇ္ဇီဝတာဝိကာရဂုဏပစ္စ- ယပစ္စယုပ္ပန္နာဒီသု ဒိဿတိ. အယဉှိ ‘‘ကုသလာ ဓမ္မာ အကုသလာ ဓမ္မာ အဗျာကတာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသု သဘာဝေ ဒိဿတိ. अथवा 'धम्म' शब्द स्वभाव, प्रज्ञा, पुण्य, प्रज्ञप्ती, आपत्ती, परियत्ति, niस्सत्त-निर्जीवता, विकार, गुण, प्रत्यय (कारण) आणि प्रत्ययोत्पन्न इत्यादी अर्थांमध्ये दिसून येतो. कारण हा "कुशल धम्म, अकुशल धम्म, अव्याकृत धम्म" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'स्वभाव' या अर्थात दिसतो. ယဿေတေ [Pg.338] စတုရော ဓမ္မာ, သဒ္ဓဿ ဃရမေသိနော; သစ္စံ ဓမ္မော ဓိတိ စာဂေါ, သ ဝေ ပေစ္စ န သောစတီ’’တိ "ज्या श्रद्धाळू गृहस्थाकडे हे चार धम्म असतात - सत्य, धम्म (प्रज्ञा), धृती आणि त्याग, तो मृत्यूनंतर शोक करत नाही." အာဒီသု ပညာယံ. इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रज्ञा' या अर्थात. ‘‘န ဟိ ဓမ္မော အဓမ္မော စ, ဥဘော သမဝိပါကိနော; အဓမ္မော နိရယံ နေတိ, ဓမ္မော ပါပေတိ သုဂ္ဂတိ’’န္တိအာဒီသု "धम्म आणि अधम्म हे दोन्ही समान विपाकाचे नसतात; अधम्म नरकात नेतो, तर धम्म सुगतीला पोहोचवतो" इत्यादी वाक्यांमध्ये... ပုညေ. ‘‘ပညတ္တိဓမ္မာ, နိရုတ္တိဓမ္မာ, အဓိဝစနာဓမ္မာ’’တိအာဒီသု ပညတ္တိယံ. ‘‘ပါရာဇိကာ ဓမ္မာ, သံဃာဒိသေသာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသု အာပတ္တိယံ. ‘‘ဣဓ ဘိက္ခု ဓမ္မံ ဇာနာတိ သုတ္တံ ဂေယျံ ဝေယျာကရဏ’’န္တိအာဒီသု ပရိယတ္တိယံ. ‘‘တသ္မိံ ခေါ ပန သမယေ ဓမ္မာ ဟောန္တိ. ဓမ္မေသု ဓမ္မာနုပဿီ ဝိဟရတီ’’တိအာဒီသု နိဿတ္တနိဇ္ဇီဝတာယံ. ‘‘ဇာတိဓမ္မာ ဇရာဓမ္မာ မရဏဓမ္မာ’’တိအာဒီသု ဝိကာရေ. ‘‘ဆန္နံ ဗုဒ္ဓဓမ္မာန’’န္တိအာဒီသု ဂုဏေ. ‘‘ဟေတုမှိ ဉာဏံ ဓမ္မပဋိသမ္ဘိဒါ’’တိအာဒီသု ပစ္စယေ. ‘‘ဌိတာဝသာ ဓာတု ဓမ္မဋ္ဌိတတာ ဓမ္မနိယာမတာ’’တိအာဒီသု ပစ္စယုပ္ပန္နေ. 'पुण्य' या अर्थात. "प्रज्ञप्ती धम्म, निरुक्ती धम्म, अधिवचन धम्म" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रज्ञप्ती' या अर्थात. "पाराजिका धम्म, संघादिसेसा धम्म" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'आपत्ती' या अर्थात. "येथे भिक्खू धम्म जाणतो - सुत्त, गेय, वेय्याकरण..." इत्यादी वाक्यांमध्ये 'परियत्ति' या अर्थात. "त्या वेळी धम्म असतात", "धम्मांमध्ये धम्मानुपस्सी होऊन विहरतो" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'निस्सत्त' आणि 'निर्जीवता' या अर्थात. "जातिधम्म, जराधम्म, मरणधम्म" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'विकार' (स्वभाव) या अर्थात. "सहा बुद्धधम्मांचे" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'गुण' या अर्थात. "हेतूचे ज्ञान म्हणजे धम्मपटिसंभिदा" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रत्यय' (कारण) या अर्थात. "ती धातू स्थितच आहे, धम्मस्थितता, धम्मनियमता" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रत्ययोत्पन्न' या अर्थात. အထ ဝါ ဓမ္မသဒ္ဒေါ ပရိယတ္တိသစ္စသမာဓိပညာပကတိပုညာပတ္တိဉေယျာဒီသု ဗဟူသု အတ္ထေသု ဒိဋ္ဌပ္ပယောဂေါ. တထာ ဟိ ‘‘ဣဓ ဘိက္ခု ဓမ္မံ ပရိယာပုဏာတီ’’တိအာဒီသု ပရိယတ္တိယံ ဒိဿတိ. ‘‘ဒိဋ္ဌဓမ္မော ပတ္တဓမ္မော’’တိအာဒီသု သစ္စေ. ‘‘ဧဝံဓမ္မာ တေ ဘဂဝန္တော အဟေသု’’န္တိအာဒီသု သမာဓိမှိ. ‘‘သစ္စံ ဓမ္မော ဓိတိ စာဂေါ’’တိ ဧဝမာဒီသု ပညာယံ. ‘‘ဇာတိဓမ္မာနံ ဘိက္ခဝေ သတ္တာန’’န္တိ ဧဝမာဒီသု ပကတိယံ. ‘‘ဓမ္မော ဟဝေ ရက္ခတိ ဓမ္မစာရိ’’န္တိ ဧဝမာဒီသု ပုညေ. ‘‘စတ္တာရော ပါရာဇိကာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသု [Pg.339] အာပတ္တိယံ. ‘‘ကုသလာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသု ဉေယျေ. ဧဝံ ဓမ္မသဒ္ဒပ္ပဝတ္တိဝိသယာ ဝိဝိဓာ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ဒဿိတာ, တတ္ထ တတ္ထ ပန အာဒိသဒ္ဒေန ယုတ္တိဝိသယာဒယော စ အတ္ထာ ဂဟေတဗ္ဗာ. တထာ ဟိ ဓမ္မသဒ္ဒေါ – अथवा 'धम्म' शब्दाचा प्रयोग परियत्ति, सत्य, समाधी, प्रज्ञा, प्रकृती (स्वभाव), पुण्य, आपत्ती, ज्ञेय इत्यादी अनेक अर्थांमध्ये पाहिलेला आहे. जसे की, "येथे भिक्खू धम्माचा अभ्यास करतो" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'परियत्ति' या अर्थात दिसतो. "ज्याने धम्म पाहिला आहे, धम्म प्राप्त केला आहे" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'सत्य' या अर्थात. "ते भगवान अशा धम्माचे होते" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'समाधी' या अर्थात. "सत्य, धम्म, धृती, त्याग" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रज्ञा' या अर्थात. "हे भिक्खूंनो, जन्मस्वभाव असणाऱ्या प्राण्यांचे..." इत्यादी वाक्यांमध्ये 'प्रकृती' (स्वभाव) या अर्थात. "धम्मचार्याचे धम्मच रक्षण करतो" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'पुण्य' या अर्थात. "चार पाराजिका धम्म" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'आपत्ती' या अर्थात. "कुशल धम्म" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'ज्ञेय' या अर्थात. अशा प्रकारे 'धम्म' शब्दाच्या प्रवृत्तीचे विविध विषय अट्ठकथाचार्यांनी दर्शविले आहेत, आणि त्या त्या ठिकाणी 'आदि' शब्दाने युक्ती, विषय इत्यादी अर्थही ग्रहण केले पाहिजेत. जसे की, 'धम्म' शब्द - ‘‘နေသ ဓမ္မော မဟာရာဇ, ယံ တွံ ဂစ္ဆေယျ ဧကကော; အဟမ္ပိ တေန ဂစ္ဆာမိ, ယေန ဂစ္ဆသိ ခတ္တိယာ’’တိ "हे महाराज, आपण एकटेच जाणे हा धम्म (योग्य मार्ग) नाही; हे क्षत्रिया, ज्या मार्गाने आपण जात आहात, त्याच मार्गाने मीही जाईन." အာဒီသု ယုတ္တိယံ ဝတ္တတိ. ‘‘မနဉ္စ ပဋိစ္စ ဓမ္မေ စ ဥပ္ပဇ္ဇတိ မနောဝိညာဏ’’န္တိအာဒီသု ဝိသယေ. ‘‘သတဉ္စ ဓမ္မော န ဇရံ ဥပေတီ’’တိ ဧတ္ထ နိဗ္ဗာနေ ဝတ္တတိ. တတြ ယာ နိဿတ္တတာ, သာ ဧဝ နိဇ္ဇီဝတာ. ယော စ ဟေတု, သော ဧဝ ပစ္စယော. इत्यादी वाक्यांमध्ये 'युक्ती' या अर्थात वापरला जातो. "मन आणि धम्मांना अनुसरून मनोविज्ञानाची उत्पत्ती होते" इत्यादी वाक्यांमध्ये 'विषय' (आलंबन) या अर्थात. "सत्पुरुषांचा धम्म कधीही वृद्धत्वाला प्राप्त होत नाही" येथे 'निर्वाण' या अर्थात वापरला जातो. तेथे जी 'निस्सत्तता' (जीव नसणे) आहे, तीच 'निर्जीवता' आहे. आणि जो 'हेतू' आहे, तोच 'प्रत्यय' (कारण) आहे. ဣစ္စေဝံ – अशा प्रकारे - ပရိယတ္တိပစ္စယေသု, ဂုဏေ နိဿတ္တတာယ စ; သဘာဝေ စေဝ ပညာယံ, ပုညေ ပညတ္တိယမ္ပိ စ. परियत्ति, प्रत्यय, गुण, निस्सत्तता, स्वभाव, प्रज्ञा, पुण्य आणि प्रज्ञप्तीमध्येही. အာပတ္တိယံ ဝိကာရေ စ, ပစ္စယုပ္ပန္နကေပိ စ; သစ္စသမာဓိပကတိ-ဉေယျေသု ယုတ္တိယမ္ပိ စ; ဝိသယေ စေဝ နိဗ္ဗာနေ, ဓမ္မသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. आपत्ती, विकार, प्रत्ययोत्पन्न, सत्य, समाधी, प्रकृती, ज्ञेय, युक्ती, विषय आणि निर्वाणामध्ये 'धम्म' शब्द प्रवृत्त होतो. ကေစိ ပန ဓမ္မသဒ္ဒဿ ပဝတ္တိဝိသယာနံ ဒသဓာဝ ပရိစ္ဆေဒံ ဝဒန္တိ. काही लोक तर 'धम्म' शब्दाच्या प्रवृत्तीच्या विषयांचे केवळ दहा प्रकारे वर्गीकरण सांगतात. ဉေယျမဂ္ဂေ စ နိဗ္ဗာနေ, သဘာဝေ အထ ဇာတိယံ; မနေ ဝိသယပုညေသု, ဘာဝေ ပါဝစနေပိ စ; ဣမေသု ဒသသွတ္ထေသု, ဓမ္မသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. ज्ञेय, मार्ग, निर्वाण, स्वभाव, जन्म (जाती), मन, विषय, पुण्य, भाव आणि प्रवचन (पावचन) या दहा अर्थांमध्ये 'धम्म' शब्द प्रवृत्त होतो. တတြ အတ္ထုဒ္ဓါရောတိ သမာနသဒ္ဒဝစနီယာနံ အတ္ထာနံ ဥဒ္ဓရဏံ အတ္ထုဒ္ဓါရော. तेथे 'अत्थुद्धार' (अर्थोद्धार) म्हणजे समान शब्दांनी व्यक्त होणाऱ्या अर्थांचे प्रकटीकरण (उद्धरण) करणे होय. ရကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'र' कारान्त धातूंची रूपे. လကာရန္တဓာတု 'ल' कारान्त धातू. ပါလ [Pg.340] ရက္ခဏေ. ‘‘ရက္ခဏံ, တာဏံ, ဂေါပနံ, အဝနံ, ပါလနံ, ရက္ခာ, ရက္ခဏာ, ဂုတ္တိ’’ ဣစ္စေတေ ပရိယာယာ. ပါလေတိ, ပါလယတိ. ပါလကော, ဗုဒ္ဓပါလော. အမ္ဗပါလီ ဂဏိကာ. သမော ဘဝတု ပါလိနာ. ပါလိတော, ပါလနံ, ပါဠိ. 'पाल' धातू रक्षणाच्या अर्थात आहे. "रक्षण, त्राण, गोपन, अवन, पालन, रक्षा, रक्षणा, गुत्ती (गुप्ती)" हे याचे समानार्थी शब्द आहेत. पालेति, पालयति. पालक, बुद्धपाल. अंबपाली गणिका. "पालकासोबत समान असो." पालित, पालन, पाळि. ဧတ္ထ ပါဠီတိ အတ္ထံ ပါလေတီတိ ပါဠိ, လဿ ဠတ္တံ. အထ ဝါ အန္တောဒကံ ရက္ခဏဋ္ဌေန မဟတော တဠာကဿ ထိရာ မဟတီတိ ပါဠိ ဝိယာတိ ပါဠိ, ပရိယတ္တိဓမ္မော. အပရော နယော ပကဋ္ဌာနံ ဥက္ကဋ္ဌာနံ သီလာဒိအတ္ထာနံ ဗောဓနတော သဘာဝနိရုတ္တိဘာဝတော ဗုဒ္ဓါဒီဟိ ဘာသိတတ္တာ စ ပကဋ္ဌာနံ ဝစနပ္ပဗန္ဓာနံ အာဠီတိ ပါဠိ. येथे 'पाळि' म्हणजे जी अर्थाचे पालन (रक्षण) करते ती 'पाळि', येथे 'ल' चा 'ळ' झाला आहे. किंवा, आतल्या पाण्याचे रक्षण करण्याच्या अर्थाने मोठ्या तलावाची जी मजबूत आणि मोठी 'पाळ' (तट) असते, त्याप्रमाणे जी आहे ती 'पाळि' म्हणजेच 'परियत्तिधम्म' (बुद्धवचन) होय. दुसरा प्रकार असा की, श्रेष्ठ आणि उत्कृष्ट अशा शील इत्यादी अर्थांचे बोध करून देणारी असल्यामुळे, स्वभाव-निरुक्तीच्या (नैसर्गिक भाषेच्या) स्वरूपात असल्यामुळे आणि बुद्ध इत्यादींनी भाषिलेली असल्यामुळे, श्रेष्ठ अशा वचन-प्रबंधांची (वाक्यांच्या रचनांची) जी 'आळि' (पंक्ती) आहे, ती 'पाळि' होय. ပါဠိသဒ္ဒေါ ပါဠိဓမ္မေ, တဠာကပါဠိယမ္ပိ စ; ဒိဿတေ ပန္တိယဉ္စေဝ, ဣတိ ဉေယျံ ဝိဇာနတာ. 'पाळि' हा शब्द पाळिधम्मामध्ये (परियत्तिधम्मामध्ये), तलावाच्या पाळीमध्ये (तटावर) आणि पंक्तीमध्ये (ओळीमध्ये) देखील दिसून येतो, असे सुज्ञांनी जाणावे. အယဉှိ ‘‘ပါဠိယာ အတ္ထမုပပရိက္ခန္တီ’’တိအာဒီသု ပရိယတ္တိဓမ္မသင်္ခါတေ ပါဠိဓမ္မေ ဒိဿတိ. ‘‘မဟတော တဠာကဿ ပါဠီ’’တိအာဒီသု တဠာကပါဠိယံ. ‘‘ပါဠိယာ နိသီဒိံသူ’’တိအာဒီသု ပန္တိယံ, ပဋိပါဋိယာ နိသီဒိံသူတိ အတ္ထော. ဣမသ္မိံ ပနတ္ထေ ဓာတုယာ ကိစ္စံ နတ္ထိ. ပါဋိပဒိကော ဟိ ပန္တိဝါစကော ပါဠိသဒ္ဒေါ. कारण हा शब्द 'पाळिया अत्थमुपपरिक्खन्ति' (पाळीच्या अर्थाची परीक्षा करतात) इत्यादी वाक्यांमध्ये 'परियत्तिधम्म' म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या पाळिधम्मामध्ये दिसून येतो. 'महतो तळाकस्स पाळि' (मोठ्या तलावाची पाळ) इत्यादींमध्ये तलावाच्या पाळीच्या अर्थात. 'पाळिया निसीदिंसु' (पंक्तीमध्ये बसले) इत्यादींमध्ये पंक्तीच्या अर्थात, म्हणजेच 'क्रमाने बसले' असा अर्थ आहे. परंतु या अर्थामध्ये धातूचे काही कार्य नाही. कारण पंक्तीवाचक 'पाळि' हा शब्द प्रातिपदिक (मूळ नाम) आहे. တိလ သိနေဟနေ. တေလေတိ, တေလယတိ. တေလံ, တိလော, တိလံ. 'तिल' (tila) धातू स्नेह (स्निग्धता/तेल लावणे) या अर्थात आहे. 'तेलेति', 'तेलयति' (तो तेल लावतो/स्निग्ध करतो). 'तेल' (तेल), 'तिलो' (तीळ वनस्पती), 'तिल' (तीळ दाणा). တတ္ထ တိလောတိ တိလဂစ္ဆော. တိလန္တိ တပ္ဖလံ. တတော ပန နိက္ခန္တော သိနေဟော တေလံ. သော ဟိ ‘‘တိလာနံ ဣဒန္တိ တေလ’’န္တိ ဝုစ္စတိ. ယဒိ ဧဝံ ‘‘သာသပတေလ’’န္တိအာဒိဝစနံ န ယုဇ္ဇေယျာတိ? နော န ယုဇ္ဇတိ, ‘‘တိလသိနေဟနေ’’တိ ဧဝံ ဝုတ္တာယ တိလဓာတုယာ သာမညတော ယဿ [Pg.341] ကဿစိ သိနေဟဿ ဝစနတော. တေန ‘‘သာသပတေလံ, မဓုကတေလ’’န္တိအာဒယော သာသနေ ပယောဂါ ဒိဿန္တိ. မယံ ပန တိလဓာတုဝသေန နိပ္ဖန္နာနံ တိလဂစ္ဆတပ္ဖလဝါစကာနံ ‘‘တိလော, တိလ’’န္တိ သဒ္ဒရူပါနံ ပကာသနမုခေန ‘‘တိလာနံ ဣဒန္တိ တေလ’’န္တိ ဝဒါမ, န ပန တေန ဝစနေန သာသပါဒီနံ သိနေဟဿ အတေလတ္တံ ဝဒါမ. အထ ကိဉ္စရဟီတိ စေ? တဒ္ဓိတဝိဓာနေ ဝိညုနံ ကောသလ္လတ္ထံ တိလသဒ္ဒံ ပဋိစ္စ ‘‘တိလာနံ ဣဒန္တိ တေလ’’န္တိ ဝဒါမ. သိနေဟသင်္ခါတဿ သာသပါဒီနံ တေလဿ ဝစနံ န ဇဟာမ, တသ္မာ ဥဒါဟရဏပ္ပကာသနေ ‘‘တိလော, တိလံ, တေလ’’န္တိ အဝတွာ ‘‘တေလံ, တိလော, တိလ’’န္တိ အမှေဟိ ဝုတ္တံ. ဣဒဉှိ ဝစနံ တေလဿ သာမညတော သိနေဟေ ပဝတ္တိံ ဒီပေတိ. တေနေဝ စ သာသနေ ‘‘တိလတေလံ, သာသပတေလ’’န္တိအာဒိနာ ဝိသေသဝစနမ္ပိ ဒိဿတီတိ နိဋ္ဌမေတ္ထာဝဂန္တဗ္ဗံ. အပိစ တေလသဒ္ဒေါ ယေဘုယျေန တိလတေလေ ဝတ္တတိ, ယထာ မိဂသဒ္ဒေါ ဟရိဏမိဂေတိပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. त्यामध्ये 'तिलो' म्हणजे तिळाचे झाड. 'तिल' म्हणजे त्याचे फळ (तीळ दाणा). आणि त्यापासून निघालेला स्नेह (स्निग्ध पदार्थ) म्हणजे 'तेल'. कारण त्याला 'तिळाचे ते तेल' असे म्हटले जाते. जर असे असेल, तर 'सासपतेल' (मोहरीचे तेल) इत्यादी शब्दप्रयोग योग्य ठरणार नाहीत का? नाही, ते अयोग्य नाही; कारण 'तिल सिनेहने' अशा प्रकारे सांगितलेल्या 'तिल' धातूद्वारे सामान्यतः कोणत्याही स्नेहाचा (तेलाचा) बोध होतो. म्हणूनच शासनात (बुद्धवचनात) 'सासपतेल' (मोहरीचे तेल), 'मधुकतेल' (महुआचे तेल) इत्यादी प्रयोग दिसून येतात. परंतु आम्ही 'तिल' धातूपासून निष्पन्न झालेल्या, तिळाचे झाड आणि त्याचे फळ दर्शवणाऱ्या 'तिलो', 'तिल' या शब्दरूपांच्या स्पष्टीकरणाद्वारे 'तिळाचे ते तेल' असे म्हणतो; पण त्या बोलण्याने मोहरी इत्यादींच्या स्नेहाला 'तेल' न म्हणणे असे आमचे मत नाही. तर मग काय आहे? तद्धित विधीमध्ये विद्वानांच्या कौशल्यासाठी 'तिल' शब्दाचा आश्रय घेऊन 'तिळाचे ते तेल' असे आम्ही म्हणतो. स्नेह म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या मोहरी इत्यादींच्या तेलाचा वाचक शब्द आम्ही सोडत नाही, म्हणूनच उदाहरणांच्या स्पष्टीकरणात 'तिलो, तिल, तेल' असे न म्हणता आम्ही 'तेल, tilo, तिल' असे म्हटले आहे. कारण हे वचन 'तेल' शब्दाची सामान्यतः स्नेहामध्ये (स्निग्ध पदार्थात) असणारी प्रवृत्ती दर्शवते. म्हणूनच शासनात 'तिलतेल' (तिळाचे तेल), 'सासपतेल' (मोहरीचे तेल) इत्यादी विशेष शब्दप्रयोगही दिसून येतात, असा निष्कर्ष येथे समजून घ्यावा. शिवाय, 'तेल' हा शब्द प्रामुख्याने तिळाच्या तेलासाठी वापरला जातो, ज्याप्रमाणे 'मृग' (प्राणी) हा शब्द प्रामुख्याने हरिण या प्राण्यासाठी वापरला जातो, असे पाहावे. ဇလ အပဝါရဏေ. ဇာလေတိ, ဇာလယတိ. ဇာလံ, ဇာလာ. ဇာလန္တိ မစ္ဆဇာလံ. ဇာလာတိ အဂ္ဂိဇာလာ. 'जल' (jala) धातू अपवारण (झाकणे/वेढणे) या अर्थात आहे. 'जालेति', 'जालयति' (तो जाळे पसरवतो/वेढतो). 'जाल' (जाळे), 'जाला' (ज्वाला). 'जाल' म्हणजे माशांचे जाळे (मत्स्यजाल). 'जाला' म्हणजे अग्नीची ज्वाला (अग्निज्वाला). ခလ သောစေယျေ. သောစေယျံ သုစိဘာဝေါ. ခါလေတိ, ခါလယတိ. ပက္ခာလေတိ, ပက္ခာလယတိ. 'खल' (khala) धातू शौच (स्वच्छता/शुद्धीकरण) या अर्थात आहे. शौच म्हणजे शुद्ध भाव (स्वच्छता). 'खालेति', 'खालयति' (तो धुतो/स्वच्छ करतो). 'पक्खालेति', 'पक्खालयति' (तो प्रक्षालन करतो/चांगला धुतो). တလ ပတိဋ္ဌာယံ. တာလေတိ, တာလယတိ. တာလော, တလံ. 'तल' (tala) धातू प्रतिष्ठा (प्रतिष्ठापन/आधार देणे) या अर्थात आहे. 'तालेति', 'तालयति' (तो आधार देतो/प्रतिष्ठित करतो). 'तालो' (ताडाचे झाड), 'तल' (तळ/पृष्ठभाग). ဧတ္ထ တာလောတိ တိဏရာဇရုက္ခော. တလန္တိ ပါဏိတလဘူမိတလာဒိ. တဉှိ တာလယတိ ပတိဋ္ဌာတိ ဧတ္ထ ဝတ္ထုဇာတန္တိ တလံ. येथे 'तालो' म्हणजे तृणराज वृक्ष (ताडाचे झाड). 'तल' म्हणजे तळहात (पाणितल), भूमीचा पृष्ठभाग (भूमितल) इत्यादी. कारण ते आधार देते किंवा त्यावर वस्तूंची उत्पत्ती प्रतिष्ठित होते, म्हणून त्याला 'तल' (तळ) म्हणतात. တုလ ဥမ္မာနေ. တောလေတိ, တောလယတိ. 'तुल' (tula) धातू उन्मान (तोलणे/मापन करणे) या अर्थात आहे. 'तोलेति', 'तोलयति' (तो तोलतो/मोजतो). ဒုလ [Pg.342] ဥက္ခေပေ. ဥက္ခေပေါ ဥဒ္ဓံ ခိပနံ. ဒေါလေတိ, ဒေါလယတိ. ဒေါလာ. 'दुल' (dula) धातू उत्क्षेप (वर फेकणे/झुलवणे) या अर्थात आहे. उत्क्षेप म्हणजे वर फेकणे. 'दोलेति', 'दोलयति' (तो झुलवतो). 'दोला' (पाळणा/झुला). ဧတ္ထ စ ဒေါလိယတိ ဥက္ခိပိယတိ ယတ္ထ နိပန္နော ဒါရကော, ယထာနိပန္နကော ဝါတိ ဒေါလာ. आणि येथे ज्यामध्ये निजलेले मूल झुलवले जाते किंवा वर उचलले जाते, त्या निजण्याच्या साधनाला 'दोला' (पाळणा) म्हणतात. ဝုလ နိမ္မဇ္ဇနေ. ဝေါလေတိ, ဝေါယလတိ. 'वुल' (vula) धातू निमज्जन (बुडवणे) या अर्थात आहे. 'वोलेति', 'वोयलति' (तो बुडवतो). မီလ နိမီလနေ. မီလေတိ, မီလယတိ. မီလနံ, ဥမ္မီလနံ, နိမီလနံ. 'मील' (mīla) धातू निमीलन (डोळे मिटणे) या अर्थात आहे. 'मीलेति', 'मीलयति' (तो डोळे मिटतो). 'मीलन' (मिटणे), 'उम्मीलन' (डोळे उघडणे), 'निमीलन' (डोळे मिटणे). မူလ ရောဟနေ. မူလေတိ, မူလယတိ. မူလံ. ဧသာ ဟိ ယဒါ ပတိဋ္ဌာယံ ဝတ္တတိ, တဒါ ဘူဝါဒိဂဏိကာ, ‘‘မူလတီ’’တိ စဿာ ရူပံ. 'मूल' (mūla) धातू रोहण (रुजणे/उगवणे) या अर्थात आहे. 'मूलेति', 'मूलयति' (तो रुजवतो/उगवतो). 'मूल' (मूळ). कारण जेव्हा हा धातू प्रतिष्ठा (स्थिर राहणे) या अर्थात वापरला जातो, तेव्हा तो भ्वादिगणीय असतो आणि त्याचे रूप 'मूलति' असे होते. တတ္ထ မူလန္တိ မူလယတိ ရူဟတိ ရုက္ခာဒိ ဧတေနာတိ မူလံ. အထ ဝါ မူလယတိ ဆိန္နောပိ ကောစိ ဧတေန အစ္ဆိန္နေန ပုနဒေဝ ရူဟတီတိ မူလံ. ဝုတ္တဉှိ – त्यामध्ये 'मूल' म्हणजे ज्याच्याद्वारे वृक्ष इत्यादी उगवतात (रुजतात), ते 'मूल' (मूळ) होय. किंवा, वृक्ष कापला गेला तरीही ज्याच्या न कापल्या गेलेल्या भागामुळे तो पुन्हा उगवतो, ते 'मूल' (मूळ) होय. कारण असे म्हटले आहे की - ‘‘ယထာပိ မူလေ အနုပဒ္ဒဝေ ဒဠှေ,ဆိန္နောပိ ရုက္ခော ပုနဒေဝ ရူဟတိ; ဧဝမ္ပိ တဏှာနုသယေ အနူဟတေ,နိဗ္ဗတ္တတိ ဒုက္ခမိဒံ ပုနပ္ပုန’’န္တိ; “ज्याप्रमाणे मूळ सुरक्षित आणि मजबूत असेल, तर कापलेला वृक्षही पुन्हा उगवतो; त्याचप्रमाणे तृष्णेचा अनुशय (सुप्त वासना) नष्ट न केल्यास, हे दुःख पुन्हा पुन्हा उत्पन्न होत राहते.” မူလသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဟေဋ္ဌာ ဘူဝါဒိဂဏေ ဝုတ္တော. 'मूल' शब्दाचा अर्थ-उद्धार (अर्थाचे स्पष्टीकरण) खाली भ्वादिगणामध्ये सांगितला आहे. ကလ ပိလ ခေပေ. ကာလေတိ, ကာလယတိ. ကာလော. ပိလေတိ, ပိလယတိ. 'कल' (kala) आणि 'पिल' (pila) हे धातू क्षेप (फेकणे/नष्ट करणे/वेळ घालवणे) या अर्थात आहेत. 'कालेति', 'कालयति' (तो घालवतो/नष्ट करतो). 'कालो' (काळ/वेळ/मृत्यू). 'पिलेति', 'पिलयति' (तो फेकतो/घालवतो). ဧတ္ထ ကာလောတိ သမယောပိ မစ္စုပိ. တတြ သမယော တေသံ တေသံ သတ္တာနံ အာယုံ ကာလယတိ ခေပေတိ ဒိဝသေ ဒိဝသေ အပ္ပံ အပ္ပံ ကရောတီတိ ကာလောတိ ဝုစ္စတိ. ဝုတ္တမ္ပိ စေတံ – येथे 'कालो' म्हणजे समय (वेळ) आणि मृत्यू देखील. त्यामध्ये समय (वेळ) हा त्या त्या प्राण्यांचे आयुष्य घालवतो, संपवतो, दिवसेंदिवस कमी कमी करतो, म्हणून त्याला 'काळ' (कालो) म्हटले जाते. हे असे म्हटलेही आहे - ‘‘ကာလော ဃသတိ ဘူတာနိ, သဗ္ဗာနေဝ သဟတ္တနာ; ယော စ ကာလဃသော ဘူတော, သဘူတပစနိံပစီ’’တိ. “काळ सर्व प्राण्यांना स्वतःसह गिळंकृत करतो; आणि जो काळाला गिळंकृत करणारा (अर्हत) आहे, त्याने प्राण्यांना शिजवणाऱ्या (काळाला) शिजवले आहे (नष्ट केले आहे).” မစ္စု [Pg.343] ပန ကာလယတိ တေသံ တေသံ သတ္တာနံ ဇီဝိတံ ခေပေတိ သမုစ္ဆေဒဝသေန နာသေတီတိ ကာလောတိ ဝုစ္စတိ. တေနာဟု အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘ကာလောတိ မစ္စု. ကာလယတိ သတ္တာနံ ဇီဝိတံ နာသေတီတိ ကာလော. ကာလေန မစ္စုနာ ကတော နာသိတောတိ ကာလကတော’’တိ. ‘‘မရဏံ ဟိန္ဒံ မစ္စု မဋ္ဋု စုတိ ကာလော အန္တကော နိက္ခေပေါ’’တိ မရဏဿာဘိဓာနာနိ. परंतु मृत्यू हा त्या त्या प्राण्यांचे जीवन संपवतो, समूळ नष्ट करतो, म्हणून त्याला 'काळ' (कालो) म्हटले जाते. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी म्हटले आहे - 'काळ म्हणजे मृत्यू. जो प्राण्यांचे जीवन संपवतो, नष्ट करतो तो काळ. काळाने म्हणजेच मृत्यूने ज्याचा नाश केला तो कालकतो (मरण पावलेला).' 'मरणं, हिंदं, मच्चु, मट्टु, चुति, कालो, अंतको, निक्खेपो' ही मरणाची (मृत्यूची) नावे आहेत. သုလ္လ သဇ္ဇနေ. သုလ္လေတိ, သုလ္လယတိ. 'सुल्ल' (sulla) धातू सज्जन (तयार करणे/सजवणे) या अर्थात आहे. 'सुल्लेति', 'सुल्लयति' (तो सजवतो/तयार करतो). ဣလ ပေရဏေ. ဣလေတိ, ဣလယတိ. 'इल' (ila) धातू प्रेरण (प्रेरणा देणे/चालवणे) या अर्थात आहे. 'इलेति', 'इलयति' (तो प्रेरित करतो/चालवतो). ဝလ ဘရဏေ. ဝါလေတိ, ဝါလယတိ. ဝါလော. 'वल' (vala) धातू भरण (भरणपोषण करणे/धारण करणे) या अर्थात आहे. 'वालेति', 'वालयति' (तो भरणपोषण करतो/धारण करतो). 'वालो' (केस/केसांचा झुबका/वाल). လလ ဣစ္ဆာယံ. လလေတိ, လလယတိ. 'लल' (lala) धातू इच्छा (इच्छा करणे/विलास करणे) या अर्थात आहे. 'ललेति', 'ललयति' (तो इच्छा करतो/विलास करतो). ဒလ ဝိဒါရဏေ. ဒါလေတိ, ဒါလယတိ, ပဒါလေတိ, ပဒါလယတိ. ကုဒါလော. 'दल' (dala) धातू विदारण (फाडणे/भेदणे) या अर्थात आहे. 'दालेति', 'दालयति', 'पदालेति', 'पदालयति' (तो फाडतो/भेदतो/नष्ट करतो). 'कुदालो' (कुदळ). ကလ ဂတိသင်္ချာနေသု. ကာလေတိ, ကာလယတိ. ကာလော, ကလာ. ကလာတိ အဝယဝေါ. သာ ဟိ ကာလယိတဗ္ဗာ သင်္ခါယိတဗ္ဗာတိ ကလာ. 'कल' (kala) धातू गती आणि संख्यान (मोजणे) या अर्थांत आहे. 'कालेति', 'कालयति' (तो गती करतो/मोजतो). 'कालो' (काळ), 'कला' (कला). 'कला' म्हणजे अवयव (भाग). कारण तिचे आकलन केले जाते किंवा ती मोजली जाते, म्हणून ती 'कला' होय. သီလ ဥပဓာရဏေ. ဥပဓာရဏံ ဘုသော ဓာရဏံ, ပတိဋ္ဌာဝသေန အာဓာရဘာဝေါ. သီလေတိ, သီလယတိ. သီလံ, သီလနံ. 'सील' (sīla) धातू उपधारण (धारण करणे) या अर्थात आहे. उपधारण म्हणजे दृढपणे धारण करणे, प्रतिष्ठेच्या रूपाने आधारभूत असणे. 'सीलेति', 'सीलयति' (तो धारण करतो/आचरण करतो). 'सीलं' (शील), 'सीलनं' (शीलन/आचरण). ဧတ္ထ သီလန္တိ သီလေတိ ဥပဓာရေတိ တံသမင်္ဂီပုဂ္ဂလံ အပါယေသု ဥပ္ပတ္တိနိဝါရဏဝသေန ဘုသော ဓာရေတီတိ သီလံ. အထ ဝါသီလိယတိ ဥပစာရိယတိ သပ္ပုရိသေဟိ ဟဒယမံသန္တရံ ဥပနေတွာ ဓာရိယတီတိ သီလံ. သီလနန္တိ ဘူဝါဒိဂဏေ အဝိပ္ပကိဏ္ဏတာသင်္ခါတံ သမာဓာနံ ဝုစ္စတိ. တတ္ထ ‘‘သီလတီ’’တိ ရူပံ, ဣဓ ပန အာဓာရဘာဝသင်္ခါတံ ဥပဓာရဏံ ဝုစ္စတိ. ဧတ္ထ စ ‘‘သီလေတိ, သီလယတီ’’တိ ရူပါနိ. အဋ္ဌကထာသု ဟိ ‘‘ကုသလာနံ ဓမ္မာနံ [Pg.344] ပတိဋ္ဌာဝသေန အာဓာရဘာဝေါ ဥပဓာရဏ’’န္တိ ဝုတ္တော. येथे 'सीलं' (शील) म्हणजे जे धारण करते, उपधारण करते, त्या शीलयुक्त पुद्गलाला (व्यक्तीला) अपायांमध्ये (दुर्गतीमध्ये) उत्पन्न होण्यापासून रोखून दृढपणे धारण करते, ते 'शील' होय. किंवा, सत्पुरुषांद्वारे ज्याचे आचरण केले जाते, जे हृदयाच्या गाभ्यात ठेवून धारण केले जाते, ते 'शील' होय. भ्वादिगणामध्ये 'सीलनं' म्हणजे अविक्षिप्तता (एकाग्रता) म्हणून ओळखले जाणारे समाधान (चित्ताची स्थिरता) म्हटले जाते. तेथे 'सीलति' असे रूप होते, परंतु येथे आधारभूत असणे या अर्थाने 'उपधारण' म्हटले आहे. आणि येथे 'सीलेति', 'सीलयति' अशी रूपे होतात. कारण अट्ठकथांमध्ये 'कुशल धर्मांच्या प्रतिष्ठेच्या रूपाने आधारभूत असणे म्हणजे उपधारण होय' असे म्हटले आहे. ဝေလ ကာလောပဒေသေ. ဝေလေတိ, ဝေလယတိ. ဝေလာ. ကေစိ ‘‘ဝေလ ဣတိ ဓာတုသဒ္ဒေါ န ဟောတီ’’တိ ဝဒန္တိ, တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ, ပေါရာဏေဟိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူဟိ ‘‘ဝေလယတီ’’တိ ရူပဿ ဒဿိတတ္တာ. 'वेल' (vela) धातू कालोपदेश (वेळ दर्शवणे/मर्यादा निश्चित करणे) या अर्थात आहे. 'वेलेति', 'वेलयति' (तो वेळ दर्शवतो/मर्यादा ठरवतो). 'वेला' (वेळ/मर्यादा/किनारा). काही लोक 'वेल हा धातू शब्द नाही' असे म्हणतात, ते स्वीकारू नये; कारण प्राचीन व्याकरणकारांनी 'वेलयति' हे रूप दाखवले आहे. ပလ မူလ လဝနပဝနေသု. လဝနံ ဆေဒနံ, ပဝနံ သောဓနံ. ပါလေတိ, ပါလယတိ. ပလံ. ပလံ နာမ မာနဝိသေသော. လောကဿ ဝိမတိံ ပါလေတိ လုနာတိ သောဓေတိ စာတိ ပလံ. မူလေတိ, မူလယတိ. သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ပန ‘‘မူလယတိ ကေဒါရံ, မူလယတိ ဓည’’န္တိ ပယောဂံ ဝဒန္တိ. पल् आणि मूल् हे धातू लवन (कापणे/छेदणे) आणि पवन (शुद्ध करणे) या अर्थांमध्ये आहेत. लवन म्हणजे छेदणे, पवन म्हणजे शोधन (शुद्ध करणे). पालेति, पालयति. पल. 'पल' हे एका विशिष्ट मापाचे नाव आहे. जे लोकांच्या संशयाचे रक्षण करते, छेदन करते आणि शोधन करते, ते 'पल' होय. मूलेति, मूलयति. शब्दशास्त्रज्ञ (व्याकरणकार) मात्र 'मूलायति केदारं' (शेताची मशागत करतो), 'मूलायति धञ्ञं' (धान्य गोळा करतो) असा प्रयोग सांगतात. ထူလ ပရိဗြူဟနေ. ပရိဗြူဟနံ ဝဍ္ဎနံ. ထူလေတိ, ထူလယတိ. ထူလော ပုရိသော. ထူလာ ဇဝေန ဟာယန္တိ. थूल् धातू परिपरिब्रूहण (वाढवणे/पुष्ट करणे) या अर्थात आहे. परिब्रूहण म्हणजे वर्धन (वाढवणे). थूलेति, थूलयति. थूलो पुरिसो (स्थूल माणूस). थूला जवेन हायन्ति (स्थूल प्राणी वेगाने धावण्यात मागे पडतात). ပလ ဂတိယံ. ပလေတိ, ပလယတိ. အတ္ထံ ပလေတိ န ဥပေတိ သင်္ခံ. ပလေတိ ရသမာဒါယ. ယထာ သုတ္တဂုဠံ ယတ္တကေဟိ သုတ္တေဟိ ဝေဌိတံ, တတ္တကေဟိ ဧဝ ပလယတိ. पल् धातू गती (जाणे) या अर्थात आहे. पालेति, पालयति. 'अत्थं पालेति न उपेति सङ्खं' (अस्ताला जातो, संख्येत येत नाही). 'पालेति रसमादाय' (रस घेऊन निघून जातो). 'यथा सुत्तगुळं यत्तकेहि सुत्तेhi वेठितं, तत्तकेहि एव पालयति' (ज्याप्रमाणे दोऱ्याचा गोळा जितक्या दोऱ्यांनी वेढलेला असतो, तितक्याच दोऱ्यांनी तो उलगडतो/निघून जातो). စိင်္ဂုလ ပရိဗ္ဘမနေ. စိင်္ဂုလေတိ, စိင်္ဂုလယတိ. စိင်္ဂုလယိတွာ. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘ယာဝတိကာ အဘိသင်္ခါရဿ ဂတိ, တာဝတိကံ ဂန္တွာ စိင်္ဂုလယိတွာ ဘူမိယံ ပပတီ’’တိ. တတ္ထ စိင်္ဂုလယိတွာတိ ပရိဗ္ဘမိတွာ. चिङ्गुल् धातू परिभ्रमण (गरगर फिरणे) या अर्थात आहे. चिङ्गुलेति, चिङ्गुलयति. चिङ्गुलयित्वा. येथे हे पाळीवचन आहे: 'यावतिका अभिसङ्खारस्स गति, तावतिकं गन्त्वा चिङ्गुलयित्वा भूमियं पपती' (अभिसंस्काराची जितकी गती असते, तितके जाऊन, गरगर फिरून जमिनीवर पडतो). तेथे 'चिङ्गुलयित्वा' म्हणजे परिभ्रमण करून (गरगर फिरून). လကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'ल' कारान्त धातूंची रूपे. ဝကာရန္တဓာတု 'व' कारान्त धातू. ဒိဝု ပရိကူဇနေ. ပရိကူဇနံ ဂဇ္ဇနံ. ဒေဝေတိ, ဒေဝယတိ. ဒေဝေါ စ ပရိဒေဝိတွာ. ဒေဝေါတိ မေဃော. दिवु धातू परिकूजन (गर्जना करणे) या अर्थात आहे. परिकूजन म्हणजे गर्जना करणे. देवेति, देवयति. 'देवो च परिदेवित्वा'. 'देवो' म्हणजे मेघ (ढग). ဒိဝု [Pg.345] အဒ္ဒနေ. အဒ္ဒနံ ဂန္ဓပိသနန္တိ ဝဒန္တိ. ဒေဝေတိ, ဒေဝယတိ. दिवु धातू अद्दन या अर्थात आहे. अद्दन म्हणजे गंध वाटणे (पिसणे) असे म्हणतात. देवेति, देवयति. စိဝ ဘာသာယံ. စိဝေတိ, စိဝယတိ. चिव् धातू भाषा (बोलणे) या अर्थात आहे. चिवेति, चिवयति. ဝကာရန္တဓာတုရူပါနိ. 'व' कारान्त धातूंची रूपे. သကာရန္တဓာတု 'स' कारान्त धातू. ပုသ ပေါသနေ. ပေါသေတိ, ပေါသယတိ. ဣမာနိ ရူပါနိ ကိဉ္စာပိ ဘူဝါဒိဂဏိကံ ‘‘ပေါသေတီ’’တိ ရူပံ ပဋိစ္စ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ ဝိယ ဒိဿန္တိ, တထာပိ ‘‘အညေပိ ဒေဝေါ ပေါသေတီ’’တိအာဒိကဿ စုရာဒိဂဏိကရူပဿ ဒဿနတော သုဒ္ဓကတ္တုဝသေန ဝုတ္တာနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဥဘိန္နံ ပန ကာရိတဋ္ဌာနေ ‘‘ပေါသာပေတိ, ပေါသာပယတီ’’တိ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗာနိ. पुस् धातू पोषण करणे या अर्थात आहे. पोसेति, पोसयति. ही रूपे जरी भ्वादिगणीय 'पोसेति' या रूपाच्या आधारे प्रयोजक (हेतुकर्तृ) रूपांसारखी दिसत असली, तरीही 'अञ्ञेपि देवो पोसेति' (इतरांचेही देव पोषण करतो) इत्यादी चुरादिगणीय रूपांच्या दर्शनावरून ती शुद्ध कर्त्याच्या अर्थात (शुद्धकर्तृ) म्हटली आहेत असे समजावे. परंतु दोन्हीच्या प्रयोजक (कारित) अर्थात 'पोसापेति, poसापयति' अशी प्रयोजक रूपे मानली पाहिजेत. ပေသ ပဋိဟရဏေ. ပေသေတိ, ပေသယတိ. पेस् धातू पटिहरण (पाठवणे/प्रेषण करणे) या अर्थात आहे. पेसेति, पेसयति. ပိသ ဗလပါဏနေသု. ပိသေတိ, ပိသယတိ. पिस् धातू बल आणि प्राणन (जीवन जगणे) या अर्थात आहे. पिसेति, पिसयति. ပသိ နာသနေ. ပံသေတိ, ပံသယတိ. पसि धातू नाशन (नाश करणे/दूषित करणे) या अर्थात आहे. पंसेति, पंसयति. ဇသိ ရက္ခဏေ. ဇံသေတိ, ဇံသယတိ. जसि धातू रक्षण करणे या अर्थात आहे. जंसेति, जंसयति. သိလေသ သိလေသနေ. သိလေသေတိ, သိလေသယတိ. သိလေသော. सिलेस धातू सिलेसन (चिकटवणे/श्लेषण) या अर्थात आहे. सिलेसेति, सिलेसयति. सिलेसो. လူသ ဟိံသာယံ. လူသေတိ, လူသယတိ. लूस् धातू हिंसा करणे या अर्थात आहे. लूसेति, लूसयति. ပုန္သ အဘိမဒ္ဒနေ. နကာရော နိဂ္ဂဟီတတ္ထံ. ပုံသေတိ, ပုံသယတိ. နပုံသကော. ဓာတုနကာရဿ လောပေ ‘‘ပေါသော’’ ဣစ္စပိ ရူပံ. पुन्स् धातू अभिमर्दन (मर्दन करणे/दडपून टाकणे) या अर्थात आहे. 'न' कार हा अनुस्वारासाठी (निग्गहीत) आहे. पुंसेति, पुंसयति. नपुंसको. धातूच्या 'न' काराचा लोप झाल्यावर 'पोसो' असे रूप बनते. တတ္ထ န ပုံသကောတိ ဣတ္ထိဘာဝပုမ္ဘာဝရဟိတော ပုဂ္ဂလော. သော ဟိ ပုရိသော ဝိယ သာတိသယံ ပစ္စာမိတ္တေ န ပုံသေတိ အဘိမဒ္ဒနံ [Pg.346] ကာတုံ န သက္ကောတီတိ နပုံသကောတိ ဝုစ္စတိ. ကေစိ ပန ‘‘န ပုမာ, န ဣတ္ထီ’’တိ နပုံသကောတိ ဝစနတ္ထံ ဝဒန္တိ. တထာ ဟိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ တံ ပုဂ္ဂလံ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန နပုံသကန္တိ ဝဒန္တိ. तेथे 'नपुंसक' म्हणजे स्त्रीभाव आणि पुरुषभावापासून रहित असलेली व्यक्ती. कारण तो पुरुषाप्रमाणे शत्रूंना अत्यंतिकपणे दडपून टाकू (मर्दन करू) शकत नाही, म्हणून त्याला 'नपुंसक' म्हटले जाते. काही जण मात्र 'ना पुरुष, ना स्त्री' असा 'नपुंसक' शब्दाचा अर्थ सांगतात. तसेच व्याकरणकार त्या व्यक्तीला नपुंसकलिंगाच्या आधारे 'नपुंसक' असे म्हणतात. ဓူသ ကန္တိကရဏေ. ဓူသေတိ, ဓူသယတိ. धूस धातू कांती करणे (शोभा वाढवणे) या अर्थात आहे. धूसेति, धूसयति. ရုသ ရောသနေ. ရောသနံ ကောပကရဏံ. ရောသေတိ, ရောသယတိ. ရောသော. ရောသောတိ ကောဓော. रुस् धातू रोसन (राग येणे/क्रोध करणे) या अर्थात आहे. रोसन म्हणजे क्रोध करणे. रोसेति, रोसयति. रोसो. 'रोसो' म्हणजे क्रोध. ဗျုသ ဥဿဂ္ဂေ. ဗျောသေတိ, ဗျောသယတိ. ब्युस् धातू उत्सर्ग (त्याग करणे) या अर्थात आहे. ब्योसेति, ब्योसयति. ဇသ ဟိံသာယံ. ဇာသေတိ, ဇာသယတိ. जस् धातू हिंसा करणे या अर्थात आहे. जासेति, जासयति. ဒံသ ဒံသနေ. ဒံသေတိ, ဒံသယတိ. ဒံသနော. ဒံသနောတိ ဒန္တော. ဒံသန္တိ ခါဒနီယံ ဝါ ဘောဇနီယံ ဝါ ဧတေနာတိ ဒံသနော. दंस् धातू दंशन (चावणे) या अर्थात आहे. दंसेति, दंसयति. दंसनो. 'दंसनो' म्हणजे दात. ज्याच्याद्वारे खाण्याचे किंवा भोजनाचे पदार्थ चावले जातात, तो 'दंसनो' होय. ဒသိ ဒဿနေ စ. စကာရော ဒံသနံ အပေက္ခတိ. ဒံသေတိ, ဒံသယတိ. ဝိဒံသေတိ, ဝိဒံသယတိ သူရိယော အာလောကံ. दसि धातू दर्शन (दिसणे) आणि दंशन या अर्थात आहे. 'च' कार दंशनाची अपेक्षा करतो. दंसेति, दंसयति. 'विदंसेति, विदंसयति सूरियो आलोकं' (सूर्य प्रकाश दाखवतो). တဿ သန္တဇ္ဇနေ. တဿေတိ, တဿယတိ ပုရိသော စောရေ. तस्स् धातू संतर्जन (धमकावणे/घाबरवणे) या अर्थात आहे. 'तस्सेति, तस्सयति पुरिसो चोरे' (माणूस चोरांना घाबरवतो). ဝဿု သတ္တိဗန္ဓနေ. သတ္တိဗန္ဓနံ သမတ္ထတာကရဏံ. ဝဿေတိ, ဝဿယတိ. वस्सु धातू शक्तिबंधन (समर्थ करणे) या अर्थात आहे. शक्तिबंधन म्हणजे समर्थ करणे. वस्सेति, वस्सयति. ဇသ တာဠနေ. တာဠနံ ပဟရဏံ. ဇာသေတိ, ဇာသယတိ. जस् धातू ताडन (मारणे) या अर्थात आहे. ताडन म्हणजे प्रहार करणे. जासेति, जासयति. ပသ ဗန္ဓနေ. ပါသေတိ, ပါသယတိ. ပါသော. ပါသန္တိ ဗန္ဓန္တိ သတ္တေ ဧတေနာတိ ပါသော, သကုဏပါသာဒိ. पस् धातू बंधन (बांधणे) या अर्थात आहे. पासेति, पासयति. पासो. ज्याच्याद्वारे प्राण्यांना बांधतात तो 'पासो' (फास) होय, जसे की पक्षी पकडण्याचा फास इत्यादी. ဃုသိ ဝိသဒ္ဒနေ. ဝိသဒ္ဒနံ ဥဂ္ဃောသနံ. ဃောသေတိ, ဃောသယတိ. ဃောသော. घुसि धातू विसद्दन (घोषणा करणे) या अर्थात आहे. विसद्दन म्हणजे उद्घोषणा करणे. घोसेति, घोसयति. घोसो. လသ သိလျယောဂေ. သိလျယောဂေါ လာသိယံ နာဋကနာဋနံ ရေစကဒါနံ. လာသေတိ, လာသယတိ. လာသေန္တော, လာသေန္တီ[Pg.347]. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘ဝါဒေန္တိယာပိ လာသေန္တိ, နစ္စန္တိယာပိ လာသေန္တိ, လာသေန္တိယာပိ နစ္စန္တီ’’တိ. တတ္ထ လာသေန္တီတိ ယာ ဥပ္လဝမာနာ ဝိယ ဥဋ္ဌဟိတွာ လာသိယနာဋကံ နာဋေန္တိ, ရေစကံ ဒေန္တိ. लस् धातू शिल्ययोग (नृत्य/नाट्य) या अर्थात आहे. शिल्ययोग म्हणजे लास्य (नृत्य), नाटक करणे आणि रेचक (नृत्यातील हालचाली) देणे. लासेति, लासयति. लासेन्तो, लासेन्ती. येथे हे पाळीवचन आहे: 'वादेन्तियापि लासेन्ति, नच्चन्तियापि लासेन्ति, लासेन्तियापि नच्चन्ति' (वाजवतानाही नाचवतात, नाचतानाही नाचवतात, नाचवतानाही नाचतात). तेथे 'लासेन्ती' म्हणजे ज्या तरंगल्यासारख्या उठून लास्यनाटक करतात, रेचक देतात. ဘူသ အလင်္ကာရေ. ဘူသေတိ, ဘူသယတိ. ဝိဘူသေတိ, ဝိဘူသယတိ. ဘူသနံ, ဝိဘူသနံ. भूस् धातू अलंकार (सजवणे) या अर्थात आहे. भूसेति, भूसयति. विभूसेति, विभूसयति. भूषणं, विभूषणं. ဝသ သိနေဟနဆေဒါဝဟရဏေသု. အဝဟရဏံ စောရိကာယ ဂဟဏံ. ဝါသေတိ, ဝါသယတိ. ဝသာ. वस् धातू स्नेहन, छेद आणि अपहरण (चोरी करणे) या अर्थांमध्ये आहे. अपहरण म्हणजे चोरीने घेणे. वासेति, वासयति. वसा. တာသ ဝါရဏေ. ဝါရဏံ နိဝါရဏံ. တာသေတိ, တာသယတိ. तास् धातू वारण (निवारण करणे/रोखणे) या अर्थात आहे. वारण म्हणजे निवारण करणे. तासेति, तासयति. ဓသ ဥဉ္ဆေ. ဓာသေတိ, ဓာသယတိ. धस् धातू उंछ (धान्य गोळा करणे) या अर्थात आहे. धासेति, धासयति. ဘသ ဂဟဏေ. ဘာသေတိ, ဘာသယတိ. भस् धातू ग्रहण (पकडणे) या अर्थात आहे. भासेति, भासयति. ပုသ ဓာရဏေ. ပေါသေတိ, ပေါသယတိ, အာဘရဏံ ဓာရေတီတိ အတ္ထော. पुस् धातू धारण करणे या अर्थात आहे. पोसेति, पोसयति; आभूषण धारण करतो असा अर्थ आहे. တုသိ ပိသိ ကုသိ ဒသိ ဘာသာယံ. တုံသေတိ, တုံသယတိ. ပိံသေတိ, ပိံသယတိ. ကုံသေတိ, ကုံသယတိ. ဒံသေတိ, ဒံသယတိ. तुसि, पिसि, कुसि आणि दसि हे धातू भाषा (बोलणे) या अर्थात आहेत. तुंसेति, तुंसयति. पिंसेति, पिंसयति. कुंसेति, कुंसयति. दंेसेति, दंसयति. ခုသိ အက္ကောသနေ. ခုံသေတိ, ခုံသယတိ. ခုံသနာ. खुसि धातू अक्कोसन (आक्रोश करणे/निंदा करणे) या अर्थात आहे. खुंसेति, खुंसयति. खुंसना. ဂဝေသ မဂ္ဂနေ. ဂဝေသေတိ, ဂဝေသယတိ. ဂဝေသကော, ဂဝေသိတော, ဂဝေသနာ, ဂဝေဋ္ဌိ. 'गवेस' धातू शोधण्याच्या (मार्गण्याच्या) अर्थात. गवेसेति, गवेसयति. गवेसको (शोधक), गवेसितो (शोधलेला), गवेसना (शोध), गवेिट्ठि (शोध). ဝါသ ဥပသေဝါယံ. ဝါသေတိ, ဝါသယတိ. ဝါသော, အာဝါသော. 'वास' धातू उपसेवा (वास करणे किंवा सुवासित करणे) या अर्थात. वासेति, वासयति. वासो (निवास), आवासो (आवास/निवासस्थान). ဟိသိ ဟိံသာယံ. ဟိံသေတိ, ဟိံသယတိ. 'हिसि' धातू हिंसेच्या अर्थात. हिंसेति, हिंसयति. နိဝါသ အစ္ဆာဒနေ. ဝတ္ထံ နိဝါသေတိ, နိဝါသယတိ. ပုဗ္ဗဏှသမယံ နိဝါသေတွာ. 'निवास' धातू आच्छादनाच्या (वस्त्र परिधान करण्याच्या) अर्थात. वत्थं निवासेति, निवासयति (वस्त्र परिधान करतो). पुब्बण्हसमयं निवासेत्वा (सकाळच्या वेळी वस्त्र परिधान करून). အံသ [Pg.348] သံဃာတေ. အံသေတိ, အံသယတိ. အံသော, အံသာ. 'अंस' धातू संघात (एकत्र करणे किंवा आघात करणे) या अर्थात. अंसेति, अंसयति. अंसो, अंसा. ဧတ္ထ စ အံသောတိ ကောဋ္ဌာသောပိ ခန္ဓောပိ ဝုစ္စတိ. အံသာတိ အရိသရောဂေါ. आणि येथे 'अंस' म्हणजे हिस्सा (भाग) आणि खांदा (स्कंध) देखील म्हटले जाते. 'अंसा' म्हणजे मूळव्याध (अर्शरोग). မိသ သဇ္ဇနေ. မေသေတိ, မေသယတိ. 'मिस' धातू सज्जन (सजवणे किंवा तयार करणे) या अर्थात. मेसेति, मेसयति. ရသ အဿာဒနေ. ရသေတိ, ရသယတိ. ရသော. ရသိယတေ အဿာဒိယတေ ဇနေဟီတိ ရသော. 'रस' धातू आस्वादाच्या (चव घेण्याच्या) अर्थात. रसेति, रसयति. रसो. 'रसियते अस्सादियते जनेहीति रसो' (लोकांद्वारे ज्याचा आस्वाद घेतला जातो, तो 'रस' होय). ရသ သိနေဟနေ. ရသေတိ, ရသယတိ. ရသော. 'रस' धातू स्नेहनाच्या (प्रेम किंवा स्निग्धतेच्या) अर्थात. रसेति, रसयति. रसो. တတ္ထ ရသေတီတိ သိနေဟတိ. ရသောတိ သိနေဟော, သိနေဟသမ္ဗန္ဓော သာမဂ္ဂိရသောတိ ဝုစ္စတိ, ယံ သန္ဓာယ ဗြာဟ္မဏာ ဘဂဝန္တံ ‘‘အရသရူပေါ သမဏော ဂေါတမော’’တိ အဝေါစုံ. तेथे 'रसेति' म्हणजे स्नेह (प्रेम) करणे. 'रसो' म्हणजे स्नेह (प्रेम), स्नेहसंबंधाला 'सामग्गीरसो' (एकतेचा रस) असे म्हटले जाते, ज्याचा संदर्भ देऊन ब्राह्मणांनी भगवंतांना "श्रमण गौतम हे अरसरूप (आसक्ती नसलेले) आहेत" असे म्हटले होते. သိယ အသဗ္ဗပ္ပယောဂေ. သေသေတိ, သေသယတိ. သေသော. ဝိပုဗ္ဗော အတိသယေ, ဝိပုဗ္ဗော အတိသယေ, ဝိပုဗ္ဗော သိသဓာတု အတိသယေ ဝတ္တတိ, ဝိသေသေတိ, ဝိသေသယတိ. ဝိသေသော, ဝိသိဋ္ဌော, ဝိသေသနံ. 'सिय' धातू असब्बप्पयोग (अपूर्ण प्रयोग किंवा उरलेला भाग) या अर्थात. सेसेति, सेसयति. सेसो (उर्वरित/शेष). 'वि' उपसर्ग लागून अतिशयाच्या (उत्कृष्टतेच्या) अर्थात, 'वि' उपसर्ग लागून अतिशयाच्या अर्थात, 'वि' उपसर्ग लागलेला 'सिस' धातू अतिशयाच्या अर्थात वर्ततो; विसेसेति, विसेसयति. विसेसो (विशेष), विसिट्ठो (विशिष्ट), विसेसणं (विशेषण). မိဿ သမ္မိဿေ. မိဿေတိ, မိဿယတိ. သမ္မိဿေတိ, သမ္မိဿယတိ. မိဿော, မိဿော, မိဿိတော, သမ္မိဿိတော, သမ္မိဿော ဣစ္စာဒီနိ. အလမ္ဗုသာဇာတကေ မိဿာတိ ဣတ္ထီနံ ဝတ္တဗ္ဗနာမံ, ပုရိသေဟိ သဒ္ဓိံ သမ္မိဿနတာယ. 'मिस्स' धातू संमिश्रणाच्या (एकत्र करण्याच्या) अर्थात. मिस्सेति, मिस्सयति. संमिस्सेति, संमिस्सयति. मिस्सो, मिस्सो, मिस्सितो, संमिस्सितो, संमिस्सो इत्यादी. अलम्बुसा जातकामध्ये 'मिस्सा' हे स्त्रियांना संबोधण्याचे नाव आहे, पुरुषांसोबत संमिश्रण (एकत्र राहणे) होत असल्यामुळे. ဇုသ ပရိတက္ကနေ. ဇောသေတိ, ဇောသယတိ. 'जुस' धातू परितक्कन (विचार करणे किंवा तर्क करणे) या अर्थात. जोसेति, जोसयति. မသ ပဟာသနေ. မသေတိ, မသယတိ. 'मस' धातू पहासन (प्रकाशन किंवा हास्य) या अर्थात. मासेति, मासयति. မရိသ တိတိက္ခာယံ. မရိသေတိ. မရိသယတိ. 'मरिस' धातू तितिक्षा (सहनशीलता/क्षमा) या अर्थात. मरिसेति, मरिसयति. ပိသ ပေသနေ. ပေသေတိ, ပေသယတိ. ပေသကော, ပေသိတော. 'पिस' धातू पेसण (पाठवणे किंवा दळणे) या अर्थात. पेसेति, पेसयति. पेसकॊ (पाठवणारा), पेसितो (पाठवलेला). ဃုသ [Pg.349] သဒ္ဒေ. ဃောသေတိ, ဃောသယတိ. ဥဂ္ဃောသယုံ ဗောဓိမဏ္ဍေ ပမောဒိတာ. ဃောသော. 'घुस' धातू शब्दाच्या (आवाजाच्या) अर्थात. घोसेति, घोसयति. 'उग्घोसयुं बोधिमण्डे पमोदिता' (बोधिमंडळावर आनंदित होऊन त्यांनी उद्घोषणा केली). घोसो (घोष/आवाज). ဒိသီ ဥစ္စာရဏေ. ဒေသေတိ, ဒေသယတိ. ဒေသကော, ဒေသေတာ, ဒေသိတော, ဒေသနာ. 'दिसी' धातू उच्चारणाच्या (उपदेश करण्याच्या) अर्थात. देसेति, देसयति. देसको (उपदेशक), देसेता (उपदेश करणारा), देसितो (उपदेशिलेला), देसना (धम्मदेशना). ဝသ အစ္ဆာဒနေ. ဝါသေတိ, ဝါသယတိ. နိဝါသေတိ, နိဝါသယတိ. ဝတ္ထံ. 'वस' धातू आच्छादनाच्या (वस्त्र परिधान करण्याच्या) अर्थात. वासेति, वासयति. निवासेति, निवासयति. वत्थं (वस्त्र). သကာရန္တဓာတုရူပါနိ. स-कारान्त धातूंची रूपे. ဟကာရန္တဓာတု ह-कारान्त धातू. အရဟ ပူဇာယံ. အရဟေတိ, အရဟယတိ. အရဟာ, အရဟံ. ‘‘အရဟာ, ခီဏာသဝေါ, အသေက္ခော’’တိ အရဟတော နာမာနိ. 'अरह' धातू पूजेच्या (आदराच्या) अर्थात. अरहेति, अरहयति. अरहा, अरहं. "अरहा, खीणआसवो, असेक्खो" ही अरहंतांची नावे आहेत. သိနေဟ သိနေဟနေ. သိနေဟေတိ, သိနေဟယတိ. 'सिनेह' धातू स्नेहनाच्या (प्रेम किंवा स्निग्धतेच्या) अर्थात. सिनेहेति, सिनेहयति. ဝရဟ ဟိံသာယံ. ဝရဟေတိ, ဝရဟယတိ. ဝရာဟော. 'वरह' धातू हिंसेच्या अर्थात. वरहेति, वरहयति. वराहो. ဝရာဟောတိ သူကရောပိ ဟတ္ထီပိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဧဏေယျာ စ ဝရာဟာ စာ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ သူကရော ‘‘ဝရာဟော’’တိ ဝုတ္တော, ‘‘မဟာဝရာဟဿ…ပေ… နဒီသု ဇဂ္ဂတော’’တိ ဧတ္ထ ပန ဟတ္ထီ ‘‘ဝရာဟော’’တိ. 'वराहो' म्हणजे डुकरालाही आणि हत्तीलाही म्हटले जाते. “एणेय्या च वराहा चा” येथे डुकराला 'वराहो' म्हटले आहे, तर “महावराहस्स...पे... नदीसु जग्गतो” येथे हत्तीला 'वराहो' म्हटले आहे. ရဟ စာဂေ. ရဟေတိ, ရဟယတိ. 'रह' धातू त्यागाच्या अर्थात. रहेति, रहयति. စဟ ပရိကတ္ထနေ. စဟေတိ, စဟယတိ. 'चह' धातू परिकत्थन (बढाई मारणे किंवा स्तुती करणे) या अर्थात. चहेति, चहयति. မဟ ပူဇာယံ. မဟေတိ, မဟယတိ. မဟိတော ရာဇာ မဟာရာဇာ. ဝိဟာရမဟော, စေတိယမဟော. 'मह' धातू पूजेच्या (उत्सवाच्या/आदराच्या) अर्थात. महेति, mahayati. महितो राजा महाराजा (पूजनीय राजा तो महाराज). विहारमहो (विहार उत्सव), चेतियमहो (चैत्य उत्सव). ပိဟ ဣစ္ဆာယံ. ပိဟေတိ, ပိဟယတိ. ပိဟာ, ပိဟာလု, အပိဟော, ပိဟနီယာ ဝိဘူတိယော. 'पिह' धातू इच्छेच्या (आकांक्षेच्या) अर्थात. पिहेति, पिहयति. पिहा (इच्छा), पिहालू (इच्छुक), अपिहो (इच्छारहित), पिहनीया विभूतियो (इच्छिण्यायोग्य ऐश्वर्य). ကုဟ [Pg.350] ဝိမှာပနေ. ကုဟေတိ, ကုဟယတိ. ကုဟကော. ကုဟယတိ လောကဝိမှာပနံ ကရောတီတိ ကုဟကော. ကုဟနာ. 'कुह' धातू विम्हापन (आश्चर्यचकित करणे किंवा फसवणे) या अर्थात. कुहेति, कुहयति. कुहको. 'कुहयति लोकविम्हापनं करोतीति कुहको' (जो लोकांना आश्चर्यचकित करतो किंवा फसवतो तो 'कुहको' होय). कुहना (फसवणूक/ढोंग). သဟ ပရိသဟနေ. ပရိသဟနံ ခန္တိ. သဟေတိ, သဟယတိ. သဟနံ. ဘူဝါဒိဂဏိကဿ ပနဿ ‘‘သဟတီ’’တိ ရူပံ. 'सह' धातू परिसहन (सहन करणे) या अर्थात. परिसहन म्हणजे खंती (क्षमा/सहनशीलता). सहेति, सहयति. सहनं. भूवादिगणीय धातूचे रूप मात्र 'सहति' असे होते. ဂရဟ ဝိနိန္ဒနေ. ဂရဟေတိ, ဂရဟယတိ. ဂရဟာ. ဘူဝါဒိဂဏိကဿ ပနဿ ‘‘ဂရဟတီ’’တိ ရူပံ. 'गरह' धातू विनिंदन (निंदा करणे) या अर्थात. गरहेति, गरहयति. गरहा (निंदा). भूवादिगणीय धातूचे रूप मात्र 'गरहति' असे होते. ဟကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ह-कारान्त धातूंची रूपे. ဠကာရန္တဓာတု Ḷ ळ-कारान्त धातू. တဠ တာဠနေ. တာဠေတိ, တာဠယတိ. ပတာဠေတိ, ပတာဠယတိ. တာဠံ. တာဠန္တိ ကံသတာဠာဒိ. 'तळ' धातू ताळन (वाजवणे किंवा मारणे) या अर्थात. ताळेति, ताळयति. पताळेति, पताळयति. ताळं. 'ताळं' म्हणजे कांस्यताल (झांज) इत्यादी. တဠ အာဃာတေ. ပုဗ္ဗေ ဝိယ ရူပါနိ. 'तळ' धातू आघाताच्या अर्थात. पूर्वीप्रमाणेच रूपे होतात. ခဠ ဘေဒေ. ခဠေတိ, ခဠယတိ. 'खळ' धातू भेदाच्या (विभाजनाच्या) अर्थात. खळेति, खळयति. ဣဠ ထဝနေ. ဣဠေတိ, ဣဠယတိ. 'इळ' धातू थवन (स्तुती करणे) या अर्थात. इळेति, इळयति. ဇုဠ ပေရဏေ. ဇောဠေတိ, ဇောဠယတိ. 'जुळ' धातू पेरण (प्रेरित करणे किंवा पाठवणे) या अर्थात. जोळेति, जोळयति. ပီဠ အဝဂါဟနေ. ပီဠေတိ, ပီဠယတိ. နိပ္ပီဠေတိ, နိပ္ပီဠယတိ. ပီဠနကော, ပီဠိတော, ပီဠာ, ပီဠနံ, နိပ္ပီဠနကော. 'पीळ' धातू अवगाहन (दाबणे किंवा पिडणे) या अर्थात. पीळेति, पीळयति. निप्पीळेति, nippyālayati. पीळनको, पीळितो, पीळा, पीळनं, निप्पीळनको. လဠ ဥပသေဝါယံ. လာဠေတိ, လာဠယတိ. ဥပလာဠေတိ, ဥပလာဠယတိ. ဘူဝါဒိဂဏဋ္ဌာယ ပန ဝိလာသနတ္ထေ ဝတ္တမာနာယ ဧတိဿာ ‘‘လဠတီ’’တိ ရူပံ. लळ (laḷa) हा धातू उपसेवा (लाड करणे किंवा प्रेम करणे) या अर्थात आहे. 'लाळेति' (lāḷeti), 'लाळयति' (lāḷayati). 'उपलाळेति' (upalāḷeti), 'उपलाळयति' (upalāḷayati). परंतु, भूवादिगणात विलास (क्रीडा किंवा शोभा) या अर्थात वर्तमान असताना, याचे 'लळति' (laḷati) असे रूप होते. သိဠ သေဠနေ. သေဠေတိ, သေဠယတိ. သေဠေန္တော. ဧတ္ထ သေဠေတီတိ သေဠိတသဒ္ဒံ ကရောတိ. सिळ (siḷa) हा धातू सेळन (आवाज करणे किंवा शिट्टी वाजवणे) या अर्थात आहे. 'सेळेति' (seḷeti), 'सेळयति' (seḷayati). 'सेळेन्तो' (seḷento). येथे 'सेळेति' म्हणजे 'सेळित' (शिट्टीचा) आवाज करतो. အဝဂ္ဂန္တဓာတုရူပါနိ. अवर्गान्त धातूंची रूपे. စုရာဒီ [Pg.351] ဧတ္တကာ ဒိဋ္ဌာ, ဓာတဝေါ မေ ယထာဗလံ; သုတ္တေသွညေပိ ပေက္ခိတွာ, ဂဏှဝှော အတ္ထယုတ္တိတော. माझ्या क्षमतेनुसार चुरादिगणातील एवढे धातू पाहिले गेले आहेत; सूत्रांमध्ये इतरही धातू पाहून अर्थाच्या योग्यतेनुसार ते ग्रहण करावेत. စုရပမုခဂဏော မေ သာသနတ္ထံ ပဝုတ္တော,သုပစုရဟိတကာမော တမ္ပိ သိက္ခေယျ ဓီရော; သုပစုရနယပါဌေ သတ္ထုနော တဉှိ သိက္ခံ,ပိယုသမိဝ မနုညံ အတ္ထသာရံ လဘေထ. शासनाच्या (बुद्धवचनाच्या) अर्थासाठी मी चुरादि प्रमुख गणांचे वर्णन केले आहे, अत्यंत विपुल कल्याणाची इच्छा करणाऱ्या धीर पुरुषाने त्याचे अध्ययन करावे; शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) विपुल नयपाठातील त्या शिक्षणाचे अध्ययन करून, मनुष्याने अमृतासारखा मनोहर अर्थसार प्राप्त करावा. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ कौशल्यासाठी (नैपुण्यासाठी) रचलेल्या 'सद्दनीति' ग्रंथातील... စုရာဒိဂဏပရိဒီပနော အဋ္ဌာရသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. चुरादिगण स्पष्ट करणारा अठरावा परिच्छेद समाप्त. ၁၉. သဗ္ဗဂဏဝိနိစ္ဆယ १९. सर्वगणविनिश्चय (सर्व गणांचा निर्णय) ဣတော ပရံ ပဝက္ခာမိ, သဗ္ဗဂဏဝိနိစ္ဆယံ; သောတူနံ ပဋုဘာဝတ္ထံ, ပရမေ ပိဋကတ္တယေ. यानंतर, ऐकणाऱ्यांच्या (अभ्यासकांच्या) परम त्रिपिटकातील नैपुण्यासाठी, मी सर्व गणांचा निर्णय (सब्बगणविनिच्छय) सांगेन. ပစ္စယာဒိဝိဘာဂေဟိ, နယေဟိ ဝိဝိဓေဟိ တံ; သုခဂ္ဂါဟာယ သောတူနံ, သုဏာထ မမ ဘာသတော. प्रत्यय इत्यादींच्या विभागांद्वारे आणि विविध पद्धतींनी (नयांनी), ऐकणाऱ्यांना सहज समजण्यासाठी, मी सांगत असलेले ते तुम्ही ऐका. တတ္ထ ပဌမော ဘူဝါဒိဂဏော, ဒုတိယော ရုဓာဒိဂဏော, တတိယော ဒိဝါဒိဂဏော, စတုတ္ထော သွာဒိဂုဏော, ပဉ္စမော ကိယာဒိဂဏော, ဆဋ္ဌော ဂဟာဒိဂဏော, သတ္တမော တနာဒိဂဏော, အဋ္ဌမော စုရာဒိဂဏော, ဣမသ္မိံ ဘဂဝတော ပါဝစနေ အဋ္ဌဝိဓာ ဓာတုဂဏာ ဘဝန္တိ. ဧတေသု ဝိကရဏပစ္စယဝသေန – त्यात पहिला भूवादिगण, दुसरा रुधादिगण, तिसरा दिवादिगण, चौथा स्वादिगण, पाचवा कियादिगण (क्यादिगण), सहावा गहादिगण, सातवा तनादिगण आणि आठवा चुरादिगण; भगवंतांच्या या प्रवचनात (शासनात) आठ प्रकारचे धातूंचे गण आहेत. या गणांमध्ये विकरण प्रत्ययांच्या अनुसार – ဘူဝါဒိတော အကာရော စ, သာနုသာရော ရုဓာဒိတော; အကာရော စေဝိဝဏ္ဏော စ, ဧကာရောကာရမေဝ စ. भूवादिगणापासून 'अ'कार, रुधादिगणापासून अनुस्वारासह 'अ'कार, तसेच 'इ'वर्ण (इ, ई), 'ए'कार आणि 'ओ'कार प्रत्यय होतात. ယပစ္စယော ဒိဝါဒိမှာ, ဏု ဏာ ဥဏာ သုဝါဒိတော; ကျာဒိတော ပန နာယေဝ, ပ္ပဏှာ ပန ဂဟာဒိတော. दिवादिगणापासून 'य' प्रत्यय, स्वादिगणापासून 'णु', 'णा', 'उणा' प्रत्यय; क्यादिगणापासून केवळ 'ना' प्रत्यय, आणि गहादिगणापासून 'प्पण्ह' प्रत्यय होतो. ဩယိရာ [Pg.352] တု တနာဒိမှာ, ဏေ ဏယာ စ စုရာဒိတော; အဂ္ဂဟိတဂ္ဂဟဏေန, ပစ္စယာ ဒသ ပဉ္စ စ. तनादिगणापासून 'ओ' आणि 'यिर' प्रत्यय, तर चुरादिगणापासून 'णे' आणि 'णय' प्रत्यय होतात; न घेतलेल्यांच्या ग्रहणाने (एकूण) पंधरा प्रत्यय होतात. ဟိယျတ္တနီ သတ္တမီ စ, ဝတ္တမာနာ စ ပဉ္စမီ; စတဿေတာ ပဝုစ္စန္တိ, သဗ္ဗဓာတုကနာမိကာ. हिय्यत्तनी (भूतकाल), सप्तमी (विध्यर्थ), वर्तमाना (वर्तमानकाल) आणि पंचमी (आज्ञार्थ); या चार विभक्तींना 'सब्बधातुक' (सार्वधातुक) म्हटले जाते. ဧတေသု ဝိသယေသွေဝ, အကာရော သုဒ္ဓကတ္တရိ; အညတြ ခ ဆ သာဒီဟိ, သဟာပိ စုပလဗ္ဘတိ. या विषयांमध्येच (सब्बधातुक विभक्तींमध्ये) 'अ'काराचा मध्ये लोप होतो; 'ख', 'छ', 'स' इत्यादींशिवाय इतर ठिकाणी तो (विकरण प्रत्यय) मिळतो. ‘‘ဘဝတိ ဟောတိ သမ္ဘောတိ, ဇေတိ ဇယတိ ကီယတိ; ဍေတိ ယာတိ ဣတိ ဧတိ, အဝတိ ကောတိ သင်္ကတိ. 'भवति', 'होति', 'सम्भोति', 'जेति', 'जयति', 'कीयति'; 'डेति', 'याति', 'एति', 'अवति', 'कोति', 'सङ्कति'. ဘိက္ခတိ ပိဝတိ ပါတိ, ဝဒေတိ ဝဒတိ’’ ဣတိ; ဘူဝါဒိဓာတုရူပါနိ, ဘဝန္တီတိ ပကာသယေ. 'भिक्खति', 'पिवति', 'पाति', 'वदेति', 'वदति' अशी भूवादिगणातील धातूंची रूपे होतात, असे स्पष्ट करावे. ရူပံ ‘‘ရုန္ဓတိ ရုန္ဓီတိ, ရုန္ဓေတိ ပုန ရုန္ဓိတိ; သုမ္ဘောတိ’’စ္စာဒီရူပါနိ, ရုဓာဒီန္တိ ဒီပယေ. 'रुन्धति', 'रुन्धीति', 'रुन्धेति', पुन्हा 'रुन्धिति'; 'सुम्भोति' इत्यादी रूपे रुधादिगणाची आहेत, असे दर्शवावे. ‘‘ဒိဗ္ဗတိ သိဗ္ဗတိ စေဝ, ယုဇ္ဇတိ ဝိဇ္ဇတိ တထာ; ဃာယတိ ဟာယတိ’’စ္စာဒိ, ရူပမာဟု ဒိဝါဒိနံ. 'दिब्बति', 'सिब्बति', तसेच 'युज्जति', 'विज्जति'; 'घायति', 'हायति' इत्यादी दिवादिगणाची रूपे आहेत असे म्हणतात. ‘‘သုဏောတိ စ သုဏာတိ စ, ဝုဏောတိ စ ဝုဏာတိ စ; ပါပုဏာတိ ဟိနောတီ’’တိ, အာဒိရူပံ သုဝါဒိနံ. 'सुणोति', 'सुणाति', 'वुणोति', 'वुणाति'; 'पापुणाति', 'हिनोति' इत्यादी स्वादिगणाची रूपे आहेत. ‘‘ကိနာတိ စ ဇိနာတိ စ, ဓုနာတိ စ မုနာတိ စ; အသ္နာတိ’’စ္စာဒိရူပဉ္စ, ကျာဒီနန္တိ ဝိဘာဝယေ. 'किनाति', 'जिनाति', 'धुनाति', 'मुनाति'; 'अस्नाति' इत्यादी रूपे क्यादिगणाची आहेत, असे जाणावे. ‘‘ဃေပ္ပတိ ပဋိဂ္ဂဏှာတိ, သဏှဉ္စ သဏှကောတိ စ; ကဏှံ တဏှာ စ တိဏှုဏှ’’-မိစ္စာဒိ စ ဂဟာဒိနံ. 'घेप्पति', 'पटिग्गण्हाति', 'सण्ह' आणि 'सण्हकोति'; 'कण्ह', 'तण्हा', 'तिण्ह', 'उण्ह' इत्यादी गहादिगणाची रूपे आहेत. ‘‘တနောတိ စ ကရောတိ စ, ကယိရတိ သနောတိ စ; သက္ကောတ’ပ္ပောတိ ပပ္ပောတိ’’-စ္စာဒိရူပံ တနာဒိနံ. 'तनोति', 'करोति', 'कयिरति', 'सनोति'; 'सक्कोति', 'अप्पोति', 'पप्पोति' इत्यादी रूपे तनादिगणाची आहेत. ‘‘စောရေတိ စောရယန္တေ စ, စိန္တေတိ စိန္တယန္တိ စ; မန္တေတိ’’စ္စာဒိကဉ္စာပိ, ရူပမာဟု စုရာဒိနံ. 'चोरेति', 'चोरयन्ते', 'चिन्तेति', 'चिन्तयन्ति'; 'मन्तेति' इत्यादी रूपे चुरादिगणाची आहेत असे म्हणतात. ဝိကရဏဝသေနေဝံ, ရူပဘေဒေါ ပကာသိတော; ဓာတူနံ ဓာတုဘေဒါဒိ-ကုသလဿ မတာနုဂေါ. अशा प्रकारे, विकरण प्रत्ययांच्या आधारे रूपांमधील भेद स्पष्ट केला आहे; जो धातूंच्या आणि धातूंच्या भेदांविषयी कुशल असलेल्या विद्वानांच्या मतानुसार आहे. ကိရိယာယ [Pg.353] ဓာရဏတော, ဓာတဝေါ ဧကဓာ မတာ; ဒွိဓာပိ စ ပဝုစ္စန္တိ, သကမ္မာကမ္မတော ပန. क्रियेचे धारण करत असल्यामुळे धातू एकाच प्रकारचे मानले जातात; परंतु सकर्मक आणि अकर्मक असण्याच्या आधारे ते दोन प्रकारचे देखील सांगितले जातात. တတ္ထ သကမ္မကာ နာမ, ဂမိဘက္ခာဒယာ သိယုံ; ဌာသာဒယော အကမ္မာ စ, ဥပသဂ္ဂံ ဝိနာ ဝဒေ; त्यात 'गमि' (जाणे), 'भक्ख' (खाणे) इत्यादी धातू सकर्मक (सकम्मक) आहेत; आणि उपसर्गाशिवाय 'ठा' (थांबणे), 'स' (शयन करणे) इत्यादी धातू अकर्मक (अकम्मक) आहेत असे म्हणावे. သကမ္မကကမ္မဘူတော, ဒိဝု ဣစ္စာဒယော ပုန; ဂဟေတွာန တိဓာ ဟောန္တိ, ဧဝဉ္စာပိ ဝိဘာဝယေ. पुन्हा, 'दिवु' इत्यादी धातू सकर्मक आणि अकर्मक दोन्ही रूपांत ग्रहण करून तीन प्रकारचे होतात, असे देखील जाणावे. သကမ္မကေ ဒွိဓာ ဘိတွာ, ဧကကမ္မဒွိကမ္မတော; အကမ္မကေဟိ သဒ္ဓိံ တေ, တိဝိဓာပိ ဘဝန္တိ ဟိ. सकर्मक धातूंचे एककर्मक आणि द्विकर्मक असे दोन भेद करून, अकर्मक धातूंसह ते तीन प्रकारचे होतात. အကမ္မကာ ရုတာယေဝ, ဧကကမ္မာ ဂမာဒယော; ဟောန္တိ ဒွိကမ္မကာ နာမ, ဒုဟိကရဝဟာဒယော. केवळ 'रु' (आवाज करणे) इत्यादी अकर्मक आहेत, 'गमु' इत्यादी एककर्मक आहेत; आणि 'दुह' (दूध काढणे), 'कर' (करणे), 'वह' (वाहून नेणे) इत्यादी द्विकर्मक आहेत. သကမ္မာကမ္မကတ္တမှိ, ဓာတူနမုပသဂ္ဂတော; နိယမော နတ္ထိ သော တသ္မာ, န မယာ ဧတ္ထ ဝုစ္စတိ. धातूंच्या सकर्मक किंवा अकर्मक असण्यामध्ये उपसर्गामुळे कोणताही निश्चित नियम राहत नाही, म्हणून मी येथे त्याचे वर्णन करत नाही. ဧကဋ္ဌာနာ ဂမိစ္စာဒီ, ဒွိဋ္ဌာနာ ဘူပစာဒယော; တိဋ္ဌာနာ သွာဒယော ဧဝံ, ဌာနတောပိ တိဓာ မတာ. स्थानभेदाने देखील ते तीन प्रकारचे मानले जातात; जसे 'गमु' इत्यादी एकस्थानी, 'भू', 'पच' इत्यादी द्विस्थानी, आणि 'सु' इत्यादी त्रिस्थानी आहेत. ဂုပါဒယော နိယောဂေန, အာချာတတ္တေ သဝုဒ္ဓိကာ; ဝစ တုရာဒယော န ဟိ, ဝုဒ္ဓိကာ ကာရိတံ ဝိနာ; आख्यात (क्रियापद) रूपात 'गुप' इत्यादी धातू नियमाने वृद्धियुक्त होतात; परंतु 'वच', 'तुर' इत्यादी धातू कारित (प्रयोजक) प्रत्ययाशिवाय वृद्धियुक्त होत नाहीत. ခိ ဇိ ဣစ္စာဒယော ဓာတူ, သဝုဒ္ဓါဝုဒ္ဓိကာ မတာ; ဣတိ ဝုဒ္ဓိဝသေနာပိ, တိဝိဓော ဓာတုသင်္ဂဟော. ‘खि’, ‘जि’ इत्यादी धातू वृद्धियुक्त आणि वृद्धिरहित दोन्ही मानले जातात; अशा प्रकारे वृद्धीच्या आधारे देखील धातूंचा संग्रह तीन प्रकारचा आहे. အလုတ္တဝိကရဏာ စ, လုတ္တဝိကရဏာ တထာ; လုတ္တာလုတ္တဝိကရဏာ, ဧဝမ္ပိ တိဝိဓာ သိယုံ. तसेच, विकरण प्रत्ययाचा लोप न होणारे (अलुप्तविकरण), विकरण प्रत्ययाचा लोप होणारे (लुप्तविकरण) आणि विकरण प्रत्ययाचा लोप होणारे व न होणारे (लुप्तालुप्तविकरण) असेही तीन प्रकारचे धातू असतात. တတြာလုတ္တဝိကရဏာ, ဂမိ ရုဓိ ဒိဝါဒယော; ပါ ဘာဒယော ဇိနိစ္စာဒီ, ကမတော ဣတရေ သိယုံ. त्यात 'गमि', 'रुधि', 'दिवा' इत्यादी अलुप्तविकरण आहेत; 'पा', 'भा' इत्यादी आणि 'जि' इत्यादी अनुक्रमे इतर (लुप्तविकरण आणि लुप्तालुप्तविकरण) आहेत. သုဒ္ဓဿရာ ဧကဿရာ, တထာနေကဿရာတိ စ; တိဓာ ဘဝန္တိ ယုယာတာ-ပါဘာလာဒီ ကရာဒယော. शुद्धस्वरयुक्त, एकस्वरयुक्त आणि अनेकस्वरयुक्त असेही तीन प्रकारचे धातू असतात; जसे 'यु', 'या', 'ता', 'पा', 'भा' इत्यादी आणि 'कर' इत्यादी. စတုဓာဒိနယော စာပိ, လဗ္ဘမာနဝသေန စ; ဂဟေတဗ္ဗော နယညူဟိ, ယထာဝုတ္တာနုသာရတော. नय जाणणाऱ्यांनी (पद्धती समजणाऱ्यांनी) वर सांगितलेल्या पद्धतीनुसार उपलब्धतेच्या आधारे चार प्रकार इत्यादींचे नियम देखील ग्रहण करावेत. ပုန [Pg.354] သုဒ္ဓဿရာ ဓာတူ, ဧကဿရာ စ သတ္တဓာ; အာဣဝဏ္ဏဥဝဏ္ဏန္တ-ဧဩန္တဝသာ မတာ. पुन्हा शुद्ध स्वर असणारे धातू आणि एकाक्षरी धातू सात प्रकारचे मानले जातात; जे आ-वर्ण, इ-वर्ण, उ-वर्ण, ए आणि ओ यांनी अंत होणारे आहेत. အဝဏ္ဏိဝဏ္ဏုဝဏ္ဏန္တေ-ကာရန္တာနံ ဝသေန ဝေ; အနေကဿရဓာတူ စ, သတ္တဓာဝ ပကိတ္တိတာ. अ-वर्ण, इ-वर्ण, उ-वर्ण आणि ए-कारान्त यांच्याद्वारे अनेकाक्षरी धातू देखील सात प्रकारचेच सांगितले आहेत. ဧဝံ ပန္နရသဓာပိ, ဓာတူနမိဓ သင်္ဂဟော; တပ္ပဘေဒံ ပကာသေယျုံ, ဣဥဣစ္စာဒိနာ ဝိဒူ. अशा प्रकारे येथे धातूंचा पंधरा प्रकारांनी संग्रह केला आहे; विद्वान लोक 'इ, उ' इत्यादींद्वारे त्यांचे भेद प्रकट करतात. တတြ ‘‘ဣဂတိယံ, ဣ အဇ္ဈယနေ, ဥ သဒ္ဒေ’’ ဣစ္စေတေ သုဒ္ဓဿရာ ဓာတဝေါ. ယာ ရာ လာ ဣစ္စာဒယော ဧကဿရာ အာကာရန္တာ. ခိဇိနိဣစ္စာဒယော ဧကဿရာ ဣကာရန္တာ. ပီဣစ္စာဒယော ဧကဿရာ ဤကာရန္တာ. ခု ဒု ကု ဣစ္စာဒယော ဧကဿရာ ဥကာရန္တာ, ဘူ ဟူ ဣစ္စာဒယော ဧကဿရာ ဦကာရန္တာ. ခေ ဇေ သေ ဣစ္စာဒယော ဧကဿရာ ဧကာရန္တာ. သော ဣစ္စာဒယော ဧကဿရာ ဩကာရန္တာ. तेथे 'इ गती अर्थात, इ अध्ययनात, उ शब्दात' हे शुद्ध स्वर असणारे धातू आहेत. या, रा, ला इत्यादी एकाक्षरी आ-कारान्त आहेत. खिजिनि इत्यादी एकाक्षरी इ-कारान्त आहेत. पी इत्यादी एकाक्षरी ई-कारान्त आहेत. खु, दु, कु इत्यादी एकाक्षरी उ-कारान्त आहेत, भू, हू इत्यादी एकाक्षरी ऊ-कारान्त आहेत. खे, जे, से इत्यादी एकाक्षरी ए-कारान्त आहेत. सो इत्यादी एकाक्षरी ओ-कारान्त आहेत. ကရ ပစ သင်္ဂါမ ဣစ္စာဒယော အနေကဿရာ အကာရန္တာ, ဩမာဣစ္စာဒယော အနေကဿရာ အာကာရန္တာ, သကိ ဣစ္စာဒယော အနေကဿရာ ဣကာရန္တာ. စက္ခီ ဣစ္စာဒယော အနေကဿရာ ဤကာရန္တာ. အန္ဓုဣစ္စာဒယော အနေကဿရာ ဥကာရန္တာ. ကက္ခူ ဣစ္စာဒယော အနေကဿရာ ဦကာရန္တာ. ဂိလေ မိလေ ဣစ္စာဒယော အနေကဿရာ ဧကာရန္တာတိ ဧဝံ ပန္နရသဝိဓေန ဓာတုသင်္ဂဟော. कर, पच, संगाम इत्यादी अनेकाक्षरी अ-कारान्त आहेत, ओमा इत्यादी अनेकाक्षरी आ-कारान्त आहेत, सकि इत्यादी अनेकाक्षरी इ-कारान्त आहेत. चक्खी इत्यादी अनेकाक्षरी ई-कारान्त आहेत. अन्धु इत्यादी अनेकाक्षरी उ-कारान्त आहेत. कक्खू इत्यादी अनेकाक्षरी ऊ-कारान्त आहेत. गिले, मिले इत्यादी अनेकाक्षरी ए-कारान्त आहेत; अशा प्रकारे पंधरा प्रकारांनी धातूंचा संग्रह होतो. အထ တေတ္တိံသဝိဓေနပိ ဓာတုသင်္ဂဟော ဘဝတိ. ကထံ? आता तेहेतीस प्रकारांनी देखील धातूंचा संग्रह होतो. तो कसा? ဓာတူ သုဒ္ဓဿရာ စေဝ, ပုန စေကဿရာပိ စ; ကကာရန္တာ ခကာရန္တာ, ဂန္တာ ဃန္တာ စ ဓာတဝေါ. धातू शुद्ध स्वर असणारे, तसेच एकाक्षरी देखील, आणि क-कारान्त, kh-कारान्त, ग-कारान्त व घ-कारान्त धातू. စကာရန္တာ ဆကာရန္တာ, ဇန္တာ ဈန္တာ စ ဉန္တကာ; ဋကာရန္တာ ဌကာရန္တာ, ဍန္တာ ဎန္တာ စ ဏန္တကာ. च-कारान्त, छ-कारान्त, ज-कारान्त, झ-कारान्त आणि ञ-कारान्त; ट-कारान्त, ठ-कारान्त, ड-कारान्त, ढ-कारान्त आणि ण-कारान्त. တန္တာ စေဝ တထာ ထန္တာ, ဒန္တာ ဓန္တာ စ နန္တကာ; ပန္တာ ဖန္တာ ဗကာရန္တာ, ဘန္တာ မန္တာ စ ယန္တကာ. त-कारान्त तसेच थ-कारान्त, द-कारान्त, ध-कारान्त आणि न-कारान्त; प-कारान्त, फ-कारान्त, ब-कारान्त, भ-कारान्त, म-कारान्त आणि य-कारान्त. ရန္တာ [Pg.355] လန္တာ ဝကာရန္တာ, သန္တာ ဟန္တာ စ ဠန္တကာ; ဣတိ တေတ္တိံသဓာ ဉေယျော, ဓာတူနမိဓ သင်္ဂဟော. र-कारान्त, ल-कारान्त, व-कारान्त, स-कारान्त, ह-कारान्त आणि ळ-कारान्त; अशा प्रकारे येथे धातूंचा तेहेतीस प्रकारांनी संग्रह समजावा. မတေ သတ္ထုဿ ဎဏဠာ, ပဒါဒိမှိ န ဒိဿရေ; တေနေကဿရဓာတူသု, ဎဏဠာ န ကထီယရေ. शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) मतात शब्दाच्या सुरुवातीला ढ, ण, ळ हे वर्ण दिसत नाहीत; त्यामुळे एकाक्षरी धातूंमध्ये ढ, ण, ळ हे सांगितले जात नाहीत. ဣကာရန္တတိကာရန္တ-ဝသေန တု ယထာရဟံ; နာမံ သမ္ဘောတိ ဓာတူနံ, ဣတိပ္ပစ္စယယောဂတော. इ-कारान्त आणि ति-कारान्त यांच्याद्वारे योग्यतेनुसार 'इति' प्रत्ययाच्या योगाने धातूंचे नाव सिद्ध होते. ပစိဘိက္ခိဆိဒိခါဒိ, ကရောတိ ဘဝတိ ဂမိ; ဂတိဂစ္ဆတိဟောတီတိ, အာဒိဝေါဟာရမုဒ္ဓရေ. पचि, भिक्खि, छिदि, खादि, करोति, भवति, गमि; गती, गच्छति, होति इत्यादी व्यवहार (संज्ञा) उद्धृत करावेत. ဧဝံ တေတ္တိံသဘေဒေဟိ ဂဟိတေသု နိခိလေသု ဓာတူသု – अशा प्रकारे तेहेतीस भेदांनी सर्व धातू ग्रहण केले असता - သဟဟိံသဤဟဝသာ, သီဟသဒ္ဒဂတိံ ဝဒေ; သဟနတော ဟနနတော, သီဟောတိ ဟိ ဂရူ ဝဒုံ. सहन करणे, हिंसा करणे आणि चेष्टा (प्रयत्न) करणे या अर्थांवरून 'सीह' (सिंह) शब्दाची उत्पत्ती सांगावी; कारण सहन करण्यावरून आणि हनन करण्यावरून पूजनीय आचार्य त्याला 'सीह' म्हणतात. တထာ ဟိ သီဟော ဝါတာတပါဒိပရိဿယမ္ပိ သဟတိ, ‘‘ကိံ မေ ဗဟူဟိ ဃာဋိတေဟီ’’တိ အတ္တနော ဂေါစရတ္ထာယ ခုဒ္ဒကေ ပါဏေ အဂဏှန္တော, ‘‘မာဟံ ခုဒ္ဒကေ ပါဏေ ဝိသမဂတေ သံဃာတံ အာပါဒေသီ’’တိ အနုဒ္ဒယဝသေန သဟိတဗ္ဗေ ခုဒ္ဒကသတ္တေပိ သဟတိ. ဟိံသိတဗ္ဗေ ပန ကာယူပပန္နေ သူကရမဟိံသာဒယော သတ္တေ ဟိံသတိ, တသ္မာပိ ‘‘သီဟော’’တိ ဝုစ္စတိ. ယထာ ပန ကန္တနဋ္ဌေန အာဒိအန္တဝိပလ္လာသတော တက္ကံ ဝုစ္စတိ, ဧဝံ ဟိံသနဋ္ဌေနပိ သီဟောတိ ဝေဒိတဗ္ဗော. အထ ဝါ သဗ္ဗိရိယာပထေသု ဒဠှဝီရိယတ္တာ သုဋ္ဌု ဤဟတီတိ သီဟော. ဝုတ္တဉှိ – तसेच सिंह वारा, ऊन इत्यादी संकटांना देखील सहन करतो, 'मला अनेक प्राण्यांना मारून काय करायचे आहे?' असे म्हणून स्वतःच्या आहारासाठी लहान प्राण्यांना न पकडता, 'मी संकटात सापडलेल्या लहान प्राण्यांचा संहार करू नये' अशा दयेपोटी सहन करण्यायोग्य लहान प्राण्यांना देखील अभय देतो (सहन करतो). परंतु हिंसेला पात्र असणाऱ्या, समोर आलेल्या डुक्कर, म्हैस इत्यादी प्राण्यांची तो हिंसा करतो, म्हणूनही त्याला 'सीह' (सिंह) म्हटले जाते. ज्याप्रमाणे कापण्याच्या अर्थावरून आद्य आणि अंत वर्णांच्या विपर्यासाने (उलटपालट करून) 'तक्क' (तक्र/ताक) म्हटले जाते, त्याचप्रमाणे हिंसेच्या अर्थावरून 'सीह' (हिंस -> सीह) असे समजावे. किंवा सर्व इरियापथांमध्ये (हालचालींमध्ये) दृढ वीर्यामुळे (उत्साहामुळे) तो चांगला प्रयत्न करतो म्हणून तो 'सीह' आहे. कारण म्हटले आहे - ‘‘ယထာ သီဟော မိဂရာဇာ, နိသဇ္ဇဋ္ဌာနစင်္ကမေ; အလီနဝီရိယော ဟောတိ, ပဂ္ဂဟိတမနော သဒါ’’တိ. 'ज्याप्रमाणे श्वापदांचा राजा सिंह बसण्याच्या, उभे राहण्याच्या आणि चंक्रमण करण्याच्या ठिकाणी नेहमी आळस नसलेला (उत्साही) आणि दृढ मनाचा असतो.' အပရော နယော – दुसरा प्रकार - သဟနာ စ ဟိံသနာ စ, တထာ သီဃဇဝတ္တတော; သီဟော ဣစ္စပိ ဘာသေယျ, သကျသီဟဿ သာသနေ. सहन करणे, हनन करणे आणि वेगाने धावणे यांमुळे शाक्यसिंहाच्या (बुद्धांच्या) शासनात त्याला 'सीह' (सिंह) असेच म्हणावे. ဝုတ္တဉှိ [Pg.356] သုတ္တနိပါတဋ္ဌကထာယံ ‘‘သဟရာ စ ဟနနာ စ သီဃဇဝတ္တာ စ သီဟော’’တိ. कारण सुत्तनिपात अट्ठकथेत म्हटले आहे - 'सहन करणे, हनन करणे आणि वेगाने धावणे यांमुळे तो सीह (सिंह) आहे.' ဣဒါနိ တဒတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ, သီဟသဒ္ဒေါ ‘‘သီဟော ဘိက္ခဝေ မိဂရာဇာ’’တိအာဒီသု မိဂရာဇေ အာဂတော. ‘‘အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမီ’’တိအာဒီသု ပညတ္တိယံ. ‘‘သီဟောတိ ခေါ ဘိက္ခဝေ တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿာ’’တိအာဒီသု တထာဂတေ. တတ္ထ တထာဂတေ သဒိသကပ္ပနာယ အာဂတော. आता त्याचा अर्थ उद्धृत केला जात आहे, 'भिक्खूहो, सिंह हा श्वापदांचा राजा आहे' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'सीह' शब्द श्वापदांच्या राजासाठी (सिंहासाठी) आला आहे. 'त्यानंतर सिंह सेनापती जेथे भगवान होते तेथे गेले' इत्यादी वाक्यांमध्ये तो संज्ञेसाठी (नावासाठी) आला आहे. 'भिक्खूहो, सीह हे अर्हत सम्यक्संबुद्ध तथागतांचेच नाव (अधिवचन) आहे' इत्यादी वाक्यांमध्ये तो तथागतांसाठी आला आहे. तेथे तथागतांसाठी तो सादृश्याच्या कल्पनेने (उपमेने) आला आहे. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – या संदर्भात हे म्हटले आहे - သီဟေ ပညတ္တိယဉ္စာပိ, ဗုဒ္ဓေ အပ္ပဋိပုဂ္ဂလေ; ဣမေသု တီသု အတ္ထေသု, သီဟသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. सिंह (प्राणी), प्रज्ञप्ती (संज्ञा) आणि अद्वितीय पुद्गल असलेले बुद्ध; या तीन अर्थांमध्ये 'सिंह' हा शब्द वापरला जातो. ရူပိရုပ္ပတိဓာတူဟိ, ရူပသဒ္ဒဂတိံ ဝဒေ; ‘‘ရူပယတိ ရုပ္ပတီ’’တိ, ဝတွာ နိဗ္ဗစနဒွယံ. 'रूपि' आणि 'रुप्पति' या धातूंवरून 'रूप' या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी. 'रूपयति' (रूप धारण करतो) आणि 'रुप्पति' (पीडित होतो) असे म्हणून दोन व्युत्पत्ती सांगाव्यात. ဝုတ္တဉှေတံ ဂရူဟိ ‘‘ရူပယတီတိ ရူပံ, ဝဏ္ဏဝိကာရံ အာပဇ္ဇမာနံ ဟဒယင်္ဂတဘာဝံ ပကာသေတီတိ အတ္ထော’’တိ. ဝုတ္တမ္ပိ စေတံ ‘‘ရူပန္တိ ကေနဋ္ဌေန ရူပံ? ရုပ္ပနဋ္ဌေနာ’’တိ. ဘဂဝတာ ပနေတံ ဝုတ္တံ ‘‘ကိဉ္စ ဘိက္ခဝေ ရူပံ ဝဒေထ, ရုပ္ပတီတိ ခေါ ဘိက္ခဝေ တသ္မာ ရူပန္တိ ဝုစ္စတိ. ကေန ရုပ္ပတိ, သီတေနပိ ရုပ္ပတီ’’တိ ဝိတ္ထာရော. အတ္ထုဒ္ဓါရော ပနဿ ဟေဋ္ဌာ ဝုတ္တောဝ. आचार्यांनी म्हटले आहे की, 'रूपयति इति रूपं' म्हणजे जो रंगात बदल घडवून आणून मनातील भाव प्रकट करतो, तो रूप होय. असेही म्हटले आहे की, 'रूप' कोणत्या अर्थाने रूप आहे? 'रुप्पन' (पीडित होणे किंवा बदलणे) या अर्थाने. भगवंतांनी देखील म्हटले आहे, 'भिक्खूहो, तुम्ही कशाला रूप म्हणता? जे पीडित होते (बदलते), भिक्खूहो, म्हणून त्याला रूप म्हटले जाते. कशाने पीडित होते? थंडीनेही पीडित होते...' इत्यादी सविस्तर. याचा अर्थाचा उलगडा खाली आधीच केला आहे. ပသဝတေမနတ္ထေန, ဓာတုနာ ဥဒိနာ ပန; သမုဒ္ဒသဒ္ဒနိပ္ဖတ္တိံ, ဝဒေယျ မတိမာ နရော. बुद्धिमान मनुष्याने 'पसवत' (उत्पन्न करणे) या अर्थातील धातूपासून आणि 'उद' (पाणी) या शब्दापासून 'समुद्र' या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी. ဧတ္ထ [Pg.357] ဟိ သမုဒ္ဒေါတိ အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယဗ္ဘုတဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတတ္တာ သမုဒ္ဒတိ အတ္တသန္နိဿိတာနံ မစ္ဆမကရာဒီနံ ပီတိသောမနဿံ ပသဝတိ ဇနေတီတိ သမုဒ္ဒေါ. အယမသ္မာကံ ခန္တိ. အဋ္ဌကထာစရိယာ ပန ‘‘သမုဒ္ဒနဋ္ဌေန သမုဒ္ဒေါ, ကိလေဒနဋ္ဌေန တေနမနဋ္ဌေနာတိ ဝုတ္တံ ဟောတီ’’တိ ဝဒန္တိ. မိလိန္ဒပဉှေ ပန အာယသ္မာ နာဂသေနော ‘‘ဘန္တေ နာဂသေန သမုဒ္ဒေါ သမုဒ္ဒေါတိ ဝုစ္စတိ, ကေန ကာရဏေန အာပံ ဥဒကံ သမုဒ္ဒေါတိ ဝုစ္စတီ’’တိ မိလိန္ဒေန ရညာ ပုဋ္ဌော အာဟ ‘‘ယတ္တကံ မဟာရာဇ ဥဒကံ, တတ္တကံ လောဏံ, ယတ္တကံ လောဏံ, တတ္တကံ ဥဒကံ, ဥဒကသမတ္တာ သမုဒ္ဒေါတိ ဝုစ္စတီ’’တိ. တဒါ ရညာ မိလိန္ဒေန ‘‘ကလ္လောသိ ဘန္တေ နာဂသေနာ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧတ္ထ ဟိ သမံ ဥဒကေန လောဏံ ဧတ္ထာတိ သမုဒ္ဒေါတိ နိဗ္ဗစနံ ဝေဒိတဗ္ဗံ ‘‘နီလောဒ’’န္တိအာဒီသု ဝိယ. တတ္ထ ဘဒန္တနာဂသေနမတဉ္စ အမှာကံ မတဉ္စ ပကတိသမုဒ္ဒံ သန္ဓာယ ဝုတ္တတ္တာ န ဝိရုဇ္ဈတိ, အဋ္ဌကထာစရိယာနံ မတမ္ပိ ‘‘တဏှာသမုဒ္ဒေါ’’တိ စ ‘‘သမုဒ္ဒေါပေသော’’တိ စ အာဂတာနိ သမုဒ္ဒသရိက္ခကာနိ စ တဏှာစက္ခုသောတာဒီနိ သန္ဓာယ ဝုတ္တတ္တာ န ဝိရုဇ္ဈတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. येथे 'समुद्र' म्हणजे आठ आश्चर्यकारक व अद्भुत गुणांनी युक्त असल्यामुळे, तो स्वतःमध्ये राहणाऱ्या मासे, मकर इत्यादी प्राण्यांमध्ये प्रीती व सोमनस्य 'पसवति' (उत्पन्न करतो), म्हणून तो 'समुद्र' होय. हे आमचे मत आहे. परंतु अट्ठकथाचार्य म्हणतात, 'समुद्दन' (एकत्र करणे किंवा ओले करणे) या अर्थाने, क्लेदन (ओले करणे) या अर्थाने आणि तेमन (भिजवणे) या अर्थाने समुद्र म्हटले जाते. मिलिंदप्रश्नात मात्र आयुष्यमान नागसेनांना राजा मिलिंदाने विचारले, 'भंते नागसेन, समुद्राला समुद्र का म्हणतात? कोणत्या कारणाने पाण्याला समुद्र म्हटले जाते?' तेव्हा नागसेन म्हणाले, 'महाराज, जेवढे पाणी आहे, तेवढेच मीठ आहे; जेवढे मीठ आहे, तेवढेच पाणी आहे. पाण्याच्या समानतेमुळे (उदक-समतेमुळे) त्याला समुद्र म्हटले जाते.' तेव्हा राजा मिलिंदाने 'भंते नागसेन, आपण योग्य बोललात' असे म्हटले. येथे 'सम' (समान) आणि 'उदक' (पाणी) यावरून 'समुद्र' अशी व्युत्पत्ती समजावी, जसे 'नीलोद' इत्यादी शब्दांमध्ये होते. तेथे भदंत नागसेनांचे मत आणि आमचे मत हे नैसर्गिक समुद्राला उद्देशून असल्यामुळे त्यात कोणताही विरोध नाही. अट्ठकथाचार्यांचे मत देखील 'तण्हा-समुद्र' (तृष्णा-समुद्र) आणि 'समुद्रोपेश' इत्यादी ठिकाणी आलेल्या समुद्रासारख्या तृष्णा, चक्षु, श्रोत्र इत्यादींना उद्देशून असल्यामुळे त्यातही विरोध नाही, असे समजावे. ခါဒဓာတုဝသာ စာပိ, ခနုဓာတုဝသေန ဝါ; ခနိတော ဝါပိ ဓာတုမှာ, ဓာတော ခံပုဗ္ဗတောပိ ဝါ; ခန္ဓသဒ္ဒဿ နိပ္ဖတ္တိံ, သဒ္ဒက္ခန္ဓဝိဒူ ဝဒေ. 'खाद्' धातूच्या प्रभावाने किंवा 'खन्' धातूच्या प्रभावाने, अथवा 'खन्' धातूपासून किंवा 'ख' पूर्वपदावरून 'स्कंध' (खन्ध) या शब्दाची उत्पत्ती शब्दस्कंधाचे जाणकार सांगतात. တတ္ထ ‘‘သံခိတ္တေန ပဉ္စုပါဒါနက္ခန္ဓာပိ ဒုက္ခာ’’တိ ဝစနတော သယမ္ပိ ဒုက္ခဓမ္မောယေဝ သမာနော ဇာတိဇရာဗျာဓိမရဏဒုက္ခာဒီဟိ အနေကေဟိ ဒုက္ခေဟိ ခဇ္ဇတိ ခါဒိယတီတိ ခန္ဓော, တေဟေဝ ဒုက္ခေဟိ ခညတိ အဝဒါရိယတီတိပိ ခန္ဓော, ခနိယတိ ပရိခညတီတိပိ ခန္ဓော, အတ္တေန ဝါ အတ္တနိယေန ဝါ တုစ္ဆတ္တာ ခံ သုညာကာရံ ဓာရေတီတိပိ ခန္ဓော, ရူပက္ခန္ဓာဒိ. အတ္ထုဒ္ဓါရတော ပန – त्यामध्ये, 'थोडक्यात सांगायचे तर पाच उपादानस्कंध देखील दुःखकारक आहेत' या वचनावरून, स्वतः देखील दुःखस्वरूप असतानाच, जन्म, जरा, व्याधी, मरण इत्यादी अनेक दुःखांद्वारे जो खाल्ला जातो (पीडित केला जातो), तो 'स्कंध' होय. त्याच दुःखांद्वारे जो विदीर्ण (नष्ट) केला जातो, म्हणूनही तो 'स्कंध' होय. जो खणला जातो (नष्ट केला जातो), म्हणूनही तो 'स्कंध' होय. आत्मा किंवा आत्मीय भावाने शून्य (तुच्छ) असल्यामुळे जो 'ख' म्हणजे शून्याकार धारण करतो, म्हणूनही तो 'स्कंध' होय, जसे की रूपस्कंध इत्यादी. अर्थाच्या स्पष्टीकरणाच्या दृष्टीने तर - ခန္ဓသဒ္ဒေါ [Pg.358] ရာသိဂုဏ-ပဏ္ဏတ္တီသု စ ရူဠှိယံ; ကောဋ္ဌာသေ စေဝ အံသေ စ, ဝတ္တတီတိ ဝိဘာဝယေ. 'स्कंध' हा शब्द राशी (समूह), गुण, प्रज्ञप्ती (संकल्पना), रूढी (प्रचलित अर्थ), तसेच भाग (कोष्ठास) आणि अंश (खांदा) या अर्थांमध्ये वापरला जातो, असे जाणावे. ဝုတ္တဉှေတံ သမ္မောဟဝိနောဒနိယံ ဝိဘင်္ဂဋ္ဌကထာယံ – ခန္ဓသဒ္ဒေါ သမ္ဗဟုလေသု ဌာနေသု နိပတတိ ရာသိမှိ ဂုဏေ ပဏ္ဏတ္တိယံ ရူဠှိယန္တိ. ‘‘သေယျထာပိ ဘိက္ခဝေ မဟာသမုဒ္ဒေ န သုကရံ ဥဒကဿ ပမာဏံ ဂဟေတုံ ‘‘ဧတ္တကာနိ ဥဒကာဠှကာနီ’တိ ဝါ ‘ဧတ္တကာနိ ဥဒကာဠှကသတာနီ’တိ ဝါ ‘ဧတ္တကာနိ ဥဒကာဠှကသဟဿာနီ’တိ ဝါ ‘ဧတ္တကာနိ ဥဒကာဠှကသတသဟဿာနီ’တိ ဝါ, အထ ခေါ အသင်္ချေယျော အပ္ပမေယျော မဟာဥဒကက္ခန္ဓောတွေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆတီ’’တိအာဒီသု ဟိ ရာသိတော ခန္ဓော နာမ. န ဟိ ပရိတ္တကံ ဥဒကံ ဥဒကက္ခန္ဓောတိ ဝုစ္စတိ, ဗဟုကမေဝ ဝုစ္စတိ, တထာ န ပရိတ္တကံ ရဇော ရဇက္ခန္ဓော, န အပ္ပမတ္တကာ ဂါဝေါ ဂဝက္ခန္ဓော, န အပ္ပမတ္တကံ ဗလံ ဗလက္ခန္ဓော, န အပ္ပမတ္တကံ ပုညံ ပုညက္ခန္ဓောတိ ဝုစ္စတိ. ဗဟုကမေဝ ဟိ ရဇော ရဇက္ခန္ဓော, ဗဟုကာ စ ဂဝါဒယော ဂဝက္ခန္ဓော, ဗလက္ခန္ဓော, ပုညက္ခန္ဓောတိ ဝုစ္စန္တိ. ‘‘သီလက္ခန္ဓော သမာဓိက္ခန္ဓော’’တိအာဒီသု ပန ဂုဏတော ခန္ဓော နာမ. ‘‘အဒ္ဒသာ ခါ ဘဂဝါ မဟန္တံ ဒါရုက္ခန္ဓံ ဂင်္ဂါယ နဒိယာ သောတေန ဝုယှမာန’’န္တိ ဧတ္ထ ပဏ္ဏတ္တိတော ခန္ဓော နာမ. ‘‘ယံ စိတ္တံ မနော မာနသံ…ပေ… ဝိညာဏံ ဝိညာဏက္ခန္ဓော’’တိအာဒီသု ရူဠှီတော ခန္ဓော နာမ. သွာယမိဓ ရာသိတော အဓိပ္ပေတော. အယဉှိ ခန္ဓဋ္ဌော နာမ ပိဏ္ဍဋ္ဌော ပူဂဋ္ဌော ဃဋဋ္ဌော ရာသဋ္ဌော, တသ္မာ ရာသိလက္ခဏာ ခန္ဓာတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ကောဋ္ဌာသဋ္ဌာတိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. လောကသ္မိဉှိ ဣဏံ ဂဟေတွာ စောဒိယမာနာ ‘‘ဒွီဟိ ခန္ဓေဟိ ဒဿာမ, တီဟိ ခန္ဓေဟိ ဒဿာမာ’’တိ [Pg.359] ဝဒန္တိ. ဣတိ ကောဋ္ဌာသလက္ခဏာ ခန္ဓာတိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. ဧဝမေတ္ထ ‘‘ရူပက္ခန္ဓောတိ ရူပရာသိ ရူပကောဋ္ဌာသော, ဝေဒနာက္ခန္ဓောတိ ဝေဒနာရာသိ ဝေဒနာကောဋ္ဌာသော’’တိ ဣမိနာ နယေန အတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော. ‘‘ခန္ဓေ ဘာရံ. ခန္ဓတော ဩတာရေတိ, မဟာဟနုသဘက္ခန္ဓော’’တိအာဒီသု ပန အံသော ‘‘ခန္ဓော’’တိ ဝုစ္စတိ. विभंग-अट्ठकथा असलेल्या 'सम्मोहविनोदनी' मध्ये हे म्हटले आहे - 'स्कंध' हा शब्द अनेक ठिकाणी राशी, गुण, प्रज्ञप्ती आणि रूढी या अर्थांमध्ये येतो. 'हे भिक्खूहो, ज्याप्रमाणे महासागरातील पाण्याचे प्रमाण मोजणे सोपे नाही की, 'इतके आढक (एक माप) पाणी आहे' किंवा 'इतके शेकडो आढक पाणी आहे' किंवा 'इतके हजारो आढक पाणी आहे' किंवा 'इतके लाखो आढक पाणी आहे', तर तो केवळ असंख्य, अप्रमेय असा 'महा-उदक-स्कंध' (पाण्याचा मोठा संचय/राशी) म्हणूनच ओळखला जातो,' इत्यादी वाक्यांमध्ये राशीच्या अर्थाने 'स्कंध' शब्द आला आहे. कारण थोड्याशा पाण्याला 'उदकस्कंध' म्हटले जात नाही, तर पुष्कळ पाण्यालाच म्हटले जाते. त्याचप्रमाणे थोड्याशा धुळीला 'रजस्कंध' म्हटले जात नाही, थोड्याशा गाईंना 'गोस्कंध' म्हटले जात नाही, थोड्याशा बलाला 'बलस्कंध' म्हटले जात नाही, आणि थोड्याशा पुण्याला 'पुण्यस्कंध' म्हटले जात नाही. तर पुष्कळ धुळीलाच 'रजस्कंध' आणि पुष्कळ गाई इत्यादींना 'गोस्कंध', 'बलस्कंध', 'पुण्यस्कंध' असे म्हटले जाते. 'शीलस्कंध, समाधीस्कंध' इत्यादींमध्ये गुणांच्या अर्थाने 'स्कंध' शब्द आला आहे. 'भगवंतांनी गंगेच्या प्रवाहामध्ये वाहून जाणारा एक मोठा लाकडाचा ओंडका (दारुस्कंध) पाहिला' यामध्ये प्रज्ञप्तीच्या (संकल्पनेच्या) अर्थाने 'स्कंध' शब्द आला आहे. 'जे चित्त, मन, मानस...पे... विज्ञान आहे, तो विज्ञानस्कंध होय' इत्यादींमध्ये रूढीच्या अर्थाने 'स्कंध' शब्द आला आहे. येथे (या संदर्भात) तो राशी (समूह) या अर्थाने अभिप्रेत आहे. कारण हा स्कंधाचा अर्थ म्हणजे पिंडाचा (गोळ्याचा) अर्थ, समूहाचा अर्थ, घटकाचा अर्थ, राशीचा अर्थ आहे; म्हणून राशीचे लक्षण केलेले ते 'स्कंध' आहेत असे जाणावे. त्याला 'भाग' (कोष्ठास) या अर्थानेही म्हणणे योग्य आहे. कारण लोकव्यवहारात कर्ज घेऊन विचारणा केली असता लोक म्हणतात, 'आम्ही दोन हप्त्यांत (भागांत) देऊ, तीन हप्त्यांत (भागांत) देऊ.' अशा प्रकारे, भागाचे लक्षण केलेले ते 'स्कंध' आहेत असे म्हणणे देखील योग्य आहे. अशा प्रकारे येथे, 'रूपस्कंध म्हणजे रूपाची राशी, रूपाचा भाग; वेदनास्कंध म्हणजे वेदनेची राशी, वेदनेचा भाग' या पद्धतीने अर्थ समजून घ्यावा. 'खांद्यावर ओझे, खांद्यावरून खाली उतरवणे, मोठ्या जबड्याच्या बैलाचा खांदा' इत्यादींमध्ये 'अंश' (खांदा) या अर्थाने 'स्कंध' शब्द वापरला जातो. အာပုဗ္ဗယတတော စာပိ, အာယူပပဒတော ပုန; တနုတော တနိတော ဝါပိ, အာယတနရဝေါ ဂတော. 'आ' पूर्वपद आणि 'यत' धातूवरून, तसेच 'आय' उपपद आणि 'तनु' (विस्तार करणे) किंवा 'तनि' धातूवरून 'आयतन' हा शब्द सिद्ध झाला आहे. ဝုတ္တမ္ပိ စေတံ – အာယတနတော, အာယာနံ ဝါ တနနတော, အာယတဿ စ နယနတော အာယတနန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. စက္ခု ရူပါဒီသု ဟိ တံတံဒွါရာရမ္မဏာ စိတ္တစေတသိကာ ဓမ္မာ သေန သေန အနုဘဝနာဒိကိစ္စေန အာယတန္တိ ဥဋ္ဌဟန္တိ ဃဋန္တိ ဝါယမန္တီတိ ဝါ ဝုတ္တံ ဟောတိ. တေ စ ပန အာယဘူတေ ဓမ္မေ ဧတာနိ တနန္တိ ဝိတ္ထာရေန္တီတိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ဣဒဉ္စ အနမတဂ္ဂေ သံသာရေ ပဝတ္တံ အတီဝ အာယတံ သံသာရဒုက္ခံ ယာဝ န နိဝတ္တတိ, တာဝ နယန္တိ, ပဝတ္တယန္တီတိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ဣတိ သဗ္ဗေပိမေ ဓမ္မာ အာယတနတော, အာယာနံ ဝါ တနနတော, အာယတဿ စ နယနတော အာယတနန္တိ ဝုစ္စန္တိ. हे देखील म्हटले आहे - आयतन असल्यामुळे, किंवा आयांचा (उत्पत्तीचा) विस्तार (तणन) करत असल्यामुळे, आणि दीर्घकाळापर्यंत (आयताचा) नेणारा (नयन) असल्यामुळे त्याला 'आयतन' असे जाणावे. कारण चक्षू, रूप इत्यादींमध्ये त्या त्या द्वारांच्या आणि आलंबनांच्या द्वारे चित्त आणि चैतसिक धर्म आपापल्या अनुभव घेण्याच्या इत्यादी कृत्यांद्वारे प्रयत्नशील होतात (आयतन्ति), म्हणजेच उत्पन्न होतात, घटतात किंवा प्रयत्न करतात, असे म्हटले आहे. आणि ते पुन्हा उत्पत्तीरूप (आयभूत) धर्मांचा विस्तार करतात (तणन्ति), असे म्हटले आहे. आणि या अनादी संसारात चालत आलेले अत्यंत दीर्घ (आयत) असे संसारदुःख जोपर्यंत थांबत नाही, तोपर्यंत ते त्याला पुढे नेतात (नयन्ति) म्हणजेच चालू ठेवतात, असे म्हटले आहे. अशा प्रकारे, हे सर्व धर्म आयतन असल्यामुळे, किंवा आयांचा (उत्पत्तीचा) विस्तार करत असल्यामुळे, आणि दीर्घकाळापर्यंत नेणारे असल्यामुळे 'आयतन' म्हटले जातात. အပိစ နိဝါသဋ္ဌာနဋ္ဌေန အာကရဋ္ဌေန သမောသရဏဋ္ဌာနဋ္ဌေန သဉ္ဇာတိဒေသဋ္ဌေန ကာရဏဋ္ဌေန အာယတနံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ‘‘လောကေ ဣဿရာယတနံ ဝါသုဒေဝါယတန’’န္တိအာဒီသု နိဝါသဋ္ဌာနံ အာယတနန္တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘သုဝဏ္ဏာယတနံ ရဇတာယတန’’န္တိအာဒီသု အာကရော, သာသနေ ပန ‘‘မနောရမေ အာယတနေ, သေဝန္တိ နံ ဝိဟင်္ဂမာ’’တိအာဒီသု သမောသရဏဋ္ဌာနံ[Pg.360]. ‘‘ဒက္ခိဏာပထော ဂုန္နံ အာယတန’’န္တိအာဒီသု သဉ္ဇာတိဒေသော. ‘‘တတြ တတြေဝ သက္ခိဘဗ္ဗတံ ပါပုဏာတိ သတိ သတိအာယတနေ’’တိအာဒီသု ကာရဏံ. शिवाय, निवासस्थान, खाण (आकर), एकत्र येण्याचे स्थान (समवसरण स्थान), उत्पत्तीचे स्थान (संजाती देश) आणि कारण या अर्थांनी देखील 'आयतन' समजले पाहिजे. जसे की, 'जगात ईश्वराचे आयतन, वासुदेवाचे आयतन' इत्यादींमध्ये निवासस्थानाला 'आयतन' म्हटले जाते. 'सुवर्णाचे आयतन, रजताचे आयतन' इत्यादींमध्ये खाणीला, आणि बुद्धशासनात तर 'मनोरम आयतनात पक्षी वास्तव्य करतात' इत्यादींमध्ये एकत्र येण्याच्या स्थानाला, 'दक्षिणापथ हा गाईंचे आयतन आहे' इत्यादींमध्ये उत्पत्तीच्या स्थानाला, आणि 'त्या त्या ठिकाणी कारण (आयतन) असतानाच तो साक्षात्काराची योग्यता प्राप्त करतो' इत्यादींमध्ये कारणाला 'आयतन' म्हटले जाते. စက္ခုအာဒီသု စာပိ စိတ္တစေတသိကာ ဓမ္မာ နိဝသန္တိ တဒါယတ္တဝုတ္တိတာယာတိ စက္ခာဒယော စ နေသံ နိဝါသဋ္ဌာနံ. စက္ခာဒီသု တေ အာကိဏ္ဏာ တန္နိဿိတတ္တာ တဒါရမ္မဏတ္တာ စာတိ စက္ခာဒယော စ နေသံ အာကရော. စက္ခာဒယော စ နေသံ သမောသရဏဋ္ဌာနံ တတ္ထ တတ္ထ ဒွါရာရမ္မဏဝသေန သမောသရဏတော. စက္ခာဒယော စ နေသံ သဉ္ဇာတိဒေသော တန္နိဿယာရမ္မဏဘာဝေန တတ္ထေဝ ဥပ္ပတ္တိတော, စက္ခာဒယော စ နေသံ ကာရဏံ တေသံ အဘာဝေ အဘာဝတော. ဣတိ နိဝါသဋ္ဌာနဋ္ဌေန အာကရဋ္ဌေန သမောသရဏဋ္ဌာနဋ္ဌေန သဉ္ဇာတိဒေသဋ္ဌေန ကာရဏဋ္ဌေနာတိ ဣမေဟိ ကာရဏေဟိ ဧတေ ဓမ္မာ အာယတနန္တိ ဝုစ္စန္တိ, တသ္မာ ယထာဝုတ္တေနတ္ထေန စက္ခု စ တံ အာယတနဉ္စာတိ စက္ခာယတနံ…ပေ… ဓမ္မာ စ တေ အာယတနဉ္စာတိ ဓမ္မာယတနန္တိ ဧဝံ တာဝေတ္ထ အတ္ထတော ဝိညာတဗ္ဗော ဝိနိစ္ဆယောတိ. ဣစ္စေဝံ – चक्षू इत्यादींमध्ये देखील चित्त आणि चैतसिक धर्म त्यांच्यावर अवलंबून राहून कार्य करत असल्यामुळे निवास करतात, म्हणून चक्षू इत्यादी हे त्यांचे निवासस्थान आहे. चक्षू इत्यादींवर ते आश्रित असल्यामुळे आणि त्यांना आलंबन बनवत असल्यामुळे ते चक्षू इत्यादींमध्ये पसरलेले असतात, म्हणून चक्षू इत्यादी हे त्यांची खाण (आकर) आहे. चक्षू इत्यादी हे त्यांचे एकत्र येण्याचे स्थान (समवसरण स्थान) आहे, कारण त्या त्या ठिकाणी द्वार आणि आलंबनाच्या रूपाने ते एकत्र येतात. चक्षू इत्यादी हे त्यांचे उत्पत्तीचे स्थान (संजाती देश) आहे, कारण त्यांचा आश्रय आणि आलंबन घेऊन ते तेथेच उत्पन्न होतात. आणि चक्षू इत्यादी हे त्यांचे कारण आहे, कारण त्यांच्या अभावी ते उत्पन्न होऊ शकत नाहीत. अशा प्रकारे, निवासस्थान, खाण, एकत्र येण्याचे स्थान, उत्पत्तीचे स्थान आणि कारण या कारणांमुळे हे धर्म 'आयतन' म्हटले जातात. म्हणून, वर सांगितलेल्या अर्थानुसार चक्षू आणि ते आयतन म्हणजे 'चक्षुरायतन'...पे... धर्म आणि ते आयतन म्हणजे 'धर्मायतन', अशा प्रकारे येथे अर्थाच्या दृष्टीने निर्णय समजून घ्यावा. अशा प्रकारे - နိဝါသော အာကရော စေဝ, ဇာတိဒေသော စ ကာရဏံ; သမောသရဏဋ္ဌာနဉ္စ, ဝုစ္စတာ’ယတနံ ဣတိ; निवासस्थान, खाण (आकर), उत्पत्तीचे स्थान (जाती देश), कारण आणि एकत्र येण्याचे स्थान (समवसरण स्थान) यांना 'आयतन' असे म्हटले जाते. ဝိဒိဝိဒေဟိ ဓာတူဟိ, အကာရပုဗ္ဗကေဟိ ဝါ; အန္တဝိရဟိတသဒ္ဒူ-ပပဒေန ဇုနာပိ ဝါ.အဝိဇ္ဇာသဒ္ဒနိပ္ဖတ္တိ, ဒီပေတဗ္ဗာ သုဓီမတာ. 'विद्' (जाणणे) किंवा 'विद्' (मिळवणे) या धातूंपासून, किंवा त्यांच्यापूर्वी 'अ' कार लागून, अथवा 'अंतविरहित' शब्दाच्या उपपदाने किंवा 'जु' धातूने 'अविद्या' या शब्दाची उत्पत्ती बुद्धिमान पुरुषाने स्पष्ट करावी. ဧတ္ထ ပူရေတုံ အယုတ္တဋ္ဌေန ကာယဒုစ္စရိတာဒိ အဝိန္ဒိယံ နာမ, အလဒ္ဓဗ္ဗန္တိ အတ္ထော, တံ အဝိန္ဒိယံ ဝိန္ဒတီတိ အဝိဇ္ဇာ, တဗ္ဗိပရီတတော ကာယသုစရိတာဒိ ဝိန္ဒိယံ နာမ, တံ ဝိန္ဒိယံ န ဝိန္ဒတီတိ အဝိဇ္ဇာ. ခန္ဓာနံ ရာသဋ္ဌံ, အာယတနာနံ အာယတနဋ္ဌံ, ဓာတူနံ သုညဋ္ဌံ, သစ္စာနံ တထဋ္ဌံ, ဣန္ဒြိယာနံ အဓိပတိယဋ္ဌံ အဝိဒိတံ ကရောတီတိ [Pg.361] အဝိဇ္ဇာ. ဒုက္ခာဒီနံ ပီဠနာဒိဝသေန ဝုတ္တံ စတုဗ္ဗိဓံ အတ္ထံ အဝိဒိတံ ကရောတီတိ အဝိဇ္ဇာ, အန္တဝိရဟိတေ သံသာရေ သဗ္ဗဘဝယောနိဂတိဝိညာဏဋ္ဌိတိသတ္တာဝါသေသု သတ္တေ ဇဝါပေတီတိ အဝိဇ္ဇာ, ပရမတ္ထတော အဝိဇ္ဇမာနေသု ဣတ္ထိပုရိသာဒီသု ဇဝတိ, ဝိဇ္ဇမာနေသုပိ ခန္ဓာဒီသု န ဇဝတီတိ အဝိဇ္ဇာ. येथे पूर्ण करण्यास अयोग्य असल्यामुळे कायदुश्चरित (शारीरिक गैरवर्तन) इत्यादींना 'अविंदिय' (मिळवण्यास अयोग्य) म्हटले जाते, ज्याचा अर्थ 'न मिळवण्याजोगे' असा आहे. त्या अविंदियाला जे मिळवते (जाणते/अनुभवते) ती 'अविज्जा' (अविद्या) होय. त्याच्या उलट, कायसुचरित (शारीरिक सत्कृत्य) इत्यादींना 'विंदिय' (मिळवण्यास योग्य) म्हटले जाते, त्या विंदियाला जे मिळवत नाही (जाणत नाही) ती 'अविज्जा' होय. स्कंधांचा राशी-अर्थ (समूह अर्थ), आयतनांचा आयतन-अर्थ (उत्पत्तीचे स्थान), धातूंचा शून्य-अर्थ, सत्यांचा तथ्य-अर्थ (यथार्थ अर्थ), आणि इंद्रियांचा अधिपती-अर्थ (प्रभुत्व अर्थ) जे अज्ञात करते (जाणू देत नाही), ती 'अविज्जा' होय. दुःखादींच्या पीडन (त्रास देणे) इत्यादींच्या स्वरूपात सांगितलेला चार प्रकारचा अर्थ जे अज्ञात करते, ती 'अविज्जा' होय. अंत नसलेल्या संसारात सर्व भव, योनी, गती, विज्ञानाची स्थिती आणि सत्त्वांच्या आवासांमध्ये (निवासस्थानांमध्ये) प्राण्यांना जे भटकवायला लावते, ती 'अविज्जा' होय. परमार्थतः जे अस्तित्वात नाही अशा स्त्री-पुरुष इत्यादींमध्ये जे धावते (प्रवृत्त होते), आणि जे खरोखर अस्तित्वात आहेत अशा स्कंधादींमध्ये जे धावत नाही (प्रवृत्त होत नाही), ती 'अविज्जा' होय. ယံ ပန အဋ္ဌကထာယံ ‘‘အပိစ စက္ခုဝိညာဏာဒီနံ ဝတ္ထာရမ္မဏပဋိစ္စသမုပ္ပာဒပဋိစ္စသမုပ္ပန္နာ နံ ဓမ္မာနံ ဆာဒနတောပိ အဝိဇ္ဇာ’’တိ ဝုတ္တံ, ဧတံ န သဒ္ဒတ္ထတော ဝုတ္တံ, အထ ခေါ အဝိဇ္ဇာယ ဆာဒနကိစ္စတ္တာ ဝုတ္တံ. တထာ ဟိ အဘိဓမ္မဋီကာယံ ဣဒံ ဝုတ္တံ – परंतु, अट्ठकथेत जे म्हटले आहे की, 'शिवाय, चक्षुविज्ञान इत्यादींचे वस्तू (आश्रय), आलंबन (विषय), पटिच्चसमुप्पाद (प्रतीत्यसमुत्पाद) आणि पटिच्चसमुप्पन्न (प्रतीत्यसमुत्पन्न) धर्मांना झाकून टाकण्यामुळेही ती अविज्जा आहे,' हे शाब्दिक अर्थाने म्हटलेले नाही, तर अविज्जेच्या झाकण्याच्या कार्यामुळे (आवरण घालण्याच्या कार्यामुळे) म्हटले आहे. तसेच अभिधम्मटीकेमध्ये हे म्हटले आहे – ‘‘ဗျဉ္ဇနတ္ထံ ဒဿေတွာ သဘာဝတ္ထံ ဒဿေတုံ ‘အပိစာ’တိအာဒိမာဟ, စက္ခုဝိညာဏာဒီနံ ဝတ္ထာရမ္မဏာနိ ‘ဣဒံ ဝတ္တု, ဣဒမာရမ္မဏ’န္တိ အဝိဇ္ဇာယ ဉာတုံ န သက္ကာတိ အဝိဇ္ဇာ တပ္ပဋိစ္ဆာဒိကာ ဝုတ္တာ, ဝတ္ထာရမ္မဏသဘာဝစ္ဆာဒနတော ဧဝ အဝိဇ္ဇာဒီနံ ပဋိစ္စသမုပ္ပာဒဘာဝဿ, ဇရာမရဏာဒီနံ ပဋိစ္စသမုပ္ပန္နဘာဝဿ စ ဆာဒနတော ပဋိစ္စသမုပ္ပာဒပဋိစ္စသမုပ္ပန္နဆာဒနံ ဝေဒိတဗ္ဗန္တိ. တတ္ထ ဒုဂ္ဂတိဂါမိကမ္မဿ ဝိသေသပ္ပစ္စယတ္တာ အဝိဇ္ဇာ ‘အဝိန္ဒိယံ ဝိန္ဒတီ’တိ ဝုတ္တာ, တထာ ဝိသေသပစ္စယော ဝိန္ဒနီယဿ န ဟောတီတိ ‘ဝိန္ဒိယံ န ဝိန္ဒတီ’တိ စ, အတ္တနိဿိတာနံ စက္ခုဝိညာဏာဒီနံ ပဝတ္တာပနံ ဥပ္ပာဒနံ အာယတနံ, သမ္မောဟဘာဝေနေဝ အနဘိသမယဘူတတ္တာ ‘အဝိဒိတံ အညာတံ ကရောတိ, အန္တဝိရဟိတေ ဇဝါပေတီ’တိ ဝဏ္ဏာဂမဝိပရိယာယဝိကာရဝိနာသဓာတုအတ္ထဝိသေသယောဂေဟိ ပဉ္စဝိဓဿ နိရုတ္တိလက္ခဏဿ ဝသေန တီသုပိ ပဒေသု အကာရဝိကာရဇကာရေ ဂဟေတွာ အညေသံ ဝဏ္ဏာနံ လောပံ ကတွာ ဇကာရဿ စ ဒုတိယဿ အာဂမံ ကတွာ အဝိဇ္ဇာတိ ဝုတ္တာ’’တိ. 'व्यंजनाचा (शब्दाचा) अर्थ दाखवून स्वभावाचा अर्थ दाखवण्यासाठी 'अपि च' (शिवाय) इत्यादी म्हटले आहे. चक्षुविज्ञान इत्यादींचे वस्तू आणि आलंबन 'हे वस्तू आहे, हे आलंबन आहे' असे अविज्जेमुळे जाणणे शक्य नाही, म्हणून अविज्जेला त्यांचे आवरण घालणारी (झाकणारी) म्हटले आहे. वस्तू आणि आलंबनाच्या स्वभावाला झाकल्यामुळेच, अविज्जा इत्यादींच्या पटिच्चसमुप्पादभावाला (प्रतीत्यसमुत्पादत्वाला) आणि जरामरण इत्यादींच्या पटिच्चसमुप्पन्नभावाला (प्रतीत्यसमुत्पन्नत्वाला) झाकल्यामुळे, 'पटिच्चसमुप्पाद आणि पटिच्चसमुप्पन्न यांना झाकणारी' असे समजले पाहिजे. त्यामध्ये, दुर्गतिकडे नेणाऱ्या कर्माचा विशेष प्रत्यय (कारण) असल्यामुळे अविज्जेला 'अविंदियाला मिळवणारी' म्हटले आहे. तसेच, मिळवण्यास योग्य असलेल्या गोष्टीचा ती विशेष प्रत्यय होत नाही, म्हणून 'विंदियाला न मिळवणारी' असे म्हटले आहे. स्वतःवर आश्रित असलेल्या चक्षुविज्ञान इत्यादींचे प्रवर्तन आणि उत्पादन हेच आयतन आहे. संमोहभावामुळेच (अज्ञानामुळेच) सत्य न समजल्यामुळे 'अज्ञात करते, अंत नसलेल्या संसारात भटकवायला लावते' असे म्हटले आहे. वर्णागम (अक्षराचा आगम), वर्णविपर्यय (अक्षरांचे मागेपुढे होणे), वर्णविकार (अक्षरात बदल होणे), वर्णविनाश (अक्षराचा लोप होणे) आणि धातूच्या अर्थाचा विशेष योग या पाच प्रकारच्या निरुक्तीच्या लक्षणांच्या आधारे, तिन्ही पदांमध्ये 'अ' कार, विकार आणि 'ज' कार घेऊन, इतर वर्णांचा लोप करून आणि दुसऱ्या 'ज' काराचा आगम करून 'अविज्जा' असे म्हटले आहे.' အရဟဓာတုတော [Pg.362] ဉေယျာ, အရဟံသဒ္ဒသဏ္ဌိတိ; အရာရူပပဒဟန-ဓာတုတော ဝါထဝါ ပန. 'अरह' धातूपासून 'अरहं' या शब्दाची उत्पत्ती जाणावी; किंवा 'अर' (आरे), 'रूप' आणि 'पदहन' (प्रहार करणे/नाश करणे) या धातूंपासून जाणावी. ရဟတော ရဟိတော စာပိ, အကာရပုဗ္ဗတော ဣဓ; ဝုစ္စတေ အဿ နိပ္ဖတ္တိ, အာရကာဒိရဝဿိတာ. तसेच येथे 'रह' (गुप्त/एकांत) आणि 'रहित' या शब्दांच्या मागे 'अ' कार लावून; 'आरक' (दूर असणे) इत्यादी अर्थांच्या आश्रयाने याची निष्पत्ती (व्युत्पत्ती) सांगितली जाते. တထာ ဟိ အရဟန္တိ အဂ္ဂဒက္ခိဏေယျတ္တာ စီဝရာဒိပစ္စယေ အရဟတိ ပူဇာဝိသေသဉ္စာတိ အရဟံ. ဝုတ္တဉ္စ – कारण, ते सर्वश्रेष्ठ दक्षिणेय (दान देण्यास योग्य) असल्यामुळे चीवर इत्यादी प्रत्यय (गरजा) आणि विशेष पूजेस पात्र आहेत, म्हणून ते 'अरहं' (अर्हत) होत. आणि म्हटले आहे – ‘‘ပူဇာဝိသေသံ သဟ ပစ္စယေဟိ,ယသ္မာ အယံ အရဟတိ လောကနာထော; အတ္ထာနုရူပံ အရဟန္တိ လောကေ,တသ္မာ ဇိနော အရဟတိ နာမမေတ’’န္တိ. 'ज्या अर्थी हे लोकनाथ (बुद्ध) प्रत्ययांसह (चीवरादी सामग्रीसह) विशेष पूजेस पात्र आहेत; जगामध्ये अर्थाला अनुरूप अशा पूजेस ते पात्र आहेत, म्हणूनच त्या जिनांना (विजेत्याला) 'अरहं' हे नाव योग्य आहे.' တထာ သော ကိလေသာရယော မဂ္ဂေန ဟနီတိ အရဟံ. ဝုတ္တဉ္စ – तसेच, त्यांनी क्लेशांच्या शत्रूंना (किलेस-अरी) मार्गाने (आर्यमार्गाने) मारले (नष्ट केले), म्हणून ते 'अरहं' होत. आणि म्हटले आहे – ‘‘ယသ္မာ ရာဂါဒိသင်္ခါတာ, သဗ္ဗေပိ အရယော ဟတာ; ပညာသတ္ထေန နာထေန, တသ္မာပိ အရဟံ မတော’’တိ. 'ज्या अर्थी राग (आसक्ती) इत्यादी नावाचे सर्व शत्रू मारले गेले आहेत; प्रज्ञा रूपी शस्त्राने त्या नाथांनी (बुद्धांनी) त्यांना मारले आहे, म्हणूनही त्यांना 'अरहं' मानले जाते.' ယဉ္စေတံ အဝိဇ္ဇာဘဝတဏှာမယနာဘိံ ပုညာဒိအဘိသင်္ခါရာရံ ဇရာမရဏနေမိံ အာသဝသမုဒယမယေန အက္ခေန ဝိဇ္ဈိတွာ ဝိဘဝရထေ သမာယောဇိတံ အနာဒိကာလပ္ပဝတ္တံ သံသာရစက္ကံ, တဿ သော ဗောဓိမဏ္ဍေ ဝီရိယပါဒေဟိ သီလပထဝိယံ ပတိဋ္ဌာယ သဒ္ဓါဟတ္ထေန ကမ္မက္ခယကရံ ဉာဏပရသုံ ဂဟေတွာ သဗ္ဗေ အရေ ဟနီတိပိ အရဟံ. ဝုတ္တဉ္စ – आणि हे जे अविज्जा (अविद्या) आणि भवतण्हा (भवतृष्णा) रूपी नाभी (कणा) असलेले, पुण्यादी अभिसंस्कार (पुण्य-अपुण्य कर्म) रूपी आरे (काठ्या) असलेले, जरामरण रूपी नेमी (धाव/कडा) असलेले, आसवांच्या उत्पत्ती रूपी अक्षाने (धुरीने) वेधलेले आणि विभव रूपी रथाला जोडलेले, अनादी काळापासून चालत आलेले संसारचक्र आहे; त्या संसारचक्राचे सर्व आरे त्यांनी बोधिमंडळावर, वीर्य रूपी पायांनी शील रूपी पृथ्वीवर स्थिर राहून, श्रद्धा रूपी हाताने कर्माचा क्षय करणारी ज्ञानरूपी कुऱ्हाड घेऊन मारले (नष्ट केले), म्हणूनही ते 'अरहं' होत. आणि म्हटले आहे – ‘‘အရာ သံသာရစက္ကဿ, ဟတာ ဉာဏာသိနာ ယတော; လောကနာထေန တေနေသ, အရဟန္တိ ပဝုစ္စတီ’’တိ. 'ज्या अर्थी संसारचक्राचे आरे ज्ञानरूपी तलवारीने नष्ट केले गेले आहेत; त्या लोकनाथांनी (बुद्धांनी) ते नष्ट केले आहेत, म्हणूनच त्यांना 'अरहं' असे म्हटले जाते.' တထာ အတ္တဟိတံ ပရဟိတဉ္စ ပရိပူရေတုံ သမ္မာ ပဋိပဇ္ဇန္တေဟိ သာဓူဟိ ဒူရတော ရဟိတဗ္ဗာ ပရိစ္စဇိတဗ္ဗာ ပရိဟာတဗ္ဗာတိ ရဟာ, ရာဂါဒယော ပါပဓမ္မာ, န သန္တိ ဧတဿ ရဟာတိ [Pg.363] အရဟံ. ‘‘အရဟော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ဩကာရဿ သာနုသာရံ အကာရာဒေသံ ကတွာ ‘‘အရဟံ’’န္တိ ဝုတ္တံ. အာဟ စ – तसेच, स्वतःचे हित आणि दुसऱ्यांचे हित पूर्ण करण्यासाठी सम्यक प्रतिपन्न (योग्य आचरण) करणाऱ्या सज्जनांनी ज्यांच्यापासून दूर राहिले पाहिजे, ज्यांचा त्याग केला पाहिजे आणि जे टाळले पाहिजेत, ते 'रहा' म्हणजे राग इत्यादी पापधर्म होत. त्यांच्यामध्ये हे 'रहा' (पापधर्म) नाहीत, म्हणून ते 'अरहं' होत. 'अरहो' असे म्हणायचे असताना 'ओ' काराच्या जागी सानुस्वार 'अ' कार आदेश करून 'अरहं' असे म्हटले आहे. आणि म्हटले आहे – ‘‘ပါပဓမ္မာ ရဟာ နာမ, သာဓူဟိ ရဟိတဗ္ဗတော; တေသံ သုဋ္ဌု ပဟီနတ္တာ, ဘဂဝါ အရဟံ မတော’’တိ. 'सज्जनांनी त्याग करण्यायोग्य असल्यामुळे पापधर्मांना 'रहा' म्हटले जाते; त्यांचा पूर्णपणे प्रहाण (नाश) केल्यामुळे भगवान 'अरहं' मानले जातात.' အထ ဝါ ခီဏာသဝေဟိ သေက္ခေဟိ ကလျာဏပုထုဇ္ဇနေဟိ စ န ရဟိတဗ္ဗော န ပရိစ္စဇိတဗ္ဗော, တေ စ ဘဂဝါတိ အရဟံ. အာဟ စ – किंवा, क्षीणास्रव (अर्हत), शैक्ष आणि कल्याण-पृथग्जनांनी ज्यांचा त्याग करू नये, ज्यांना सोडू नये, आणि ते भगवान आहेत, म्हणून ते 'अरहं' होत. आणि म्हटले आहे – ‘‘ယေ စ သစ္ဆိကတဓမ္မာ,အရိယာ သုဒ္ဓဂေါစရာ; န တေဟိ ရဟိတော ဟောတိ,နာထော တေနာ’ရဟံ မတော’’တိ. 'ज्यांनी धर्माचा साक्षात्कार केला आहे, जे आर्य आणि शुद्ध आचरण असणारे आहेत; त्यांच्यापासून हे नाथ (बुद्ध) कधीही विलग (रहित) होत नाहीत, म्हणून त्यांना 'अरहं' मानले जाते.' ရဟောတိ စ ဂမနံ ဝုစ္စတိ, နတ္ထိ ဧတဿ ရဟော ဂမနံ ဂတီသု ပစ္စာဇာတီတိ အရဟံ. အာဟ စ – 'रहो' म्हणजे गमन (जाणे/जन्म घेणे) असे म्हटले जाते. विविध गतींमध्ये पुन्हा जन्म घेण्यासाठी त्यांचे गमन (पुनर्जन्म) उरलेले नाही, म्हणून ते 'अरहं' होत. आणि म्हटले आहे – ‘‘ရဟော ဝါ ဂမနံ ယဿ, သံသာရေ နတ္ထိ သဗ္ဗသော; ပဟီနဇာတိမရဏော, အရဟံ သုဂတော မတော’’တိ. 'ज्यांचे संसारात कोणत्याही प्रकारे गमन (पुनर्जन्म) उरलेले नाही; ज्यांनी जन्म आणि मरण नष्ट केले आहे, त्या सुगतांना 'अरहं' मानले जाते.' ပါသံသတ္တာ ဝါ ဘဂဝါ အရဟံ. အက္ခရစိန္တကာ ဟိ ပသံသာယံ အရဟသဒံ ဝဏ္ဏေန္တိ. ပါသံသဘာဝေါ စ ဘဂဝတော အနညသာဓာရဏော ယထာဘုစ္စဂုဏာဓိဂတော သဒေဝကေ လောကေ သုပ္ပတိဋ္ဌိတော. ဣတိ ပါသံသတ္တာပိ ဘဂဝါ အရဟံ. အာဟ စ – किंवा, प्रशंसनीय (स्तुतीस पात्र) असल्यामुळे भगवान 'अरहं' होत. कारण व्याकरणकार (अक्षरचिंतक) स्तुतीच्या अर्थामध्ये 'अरह' शब्दाचे वर्णन करतात. आणि भगवंतांचा प्रशंसनीय भाव हा असाधारण (इतरांमध्ये नसलेला), यथार्थ गुणांच्या प्राप्तीमुळे देवलोकासह संपूर्ण जगात चांगल्या प्रकारे प्रस्थापित झालेला आहे. अशा प्रकारे, प्रशंसनीय असल्यामुळेही भगवान 'अरहं' होत. आणि म्हटले आहे – ‘‘ဂုဏေဟိ သဒိသော နတ္ထိ, ယသ္မာ လောကေ သဒေဝကေ; တသ္မာ ပါသံသိယတ္တာပိ, အရဟံ ဒွိပဒုတ္တမော’’တိ. 'ज्या अर्थी देवलोकासह संपूर्ण जगात गुणांच्या बाबतीत त्यांच्यासारखा कोणीही नाही; त्यामुळे प्रशंसनीय असल्यामुळेही ते द्विपदोत्तम (मनुष्यांमध्ये श्रेष्ठ) 'अरहं' आहेत.' ဣမာနိ [Pg.364] နိဗ္ဗစနာနိ ‘‘အရဟ ပူဇာယံ, ဟန ဟိံသာယံ, ရဟ စာဂေ, ရဟိ ဂတိယ’’န္တိ ဣမေသံ ဓာတူနံ ဝသေန ဣဓ ဝုတ္တာနိ ကိလေသေဟိ အာရကတ္တာ ‘‘အရဟ’’န္တိ စ ပါပကရဏေ ရဟာဘာဝါ ‘‘အရဟ’’န္တိ စ အသပ္ပုရိသာနံ အာရကာ ဒူရေတိ ‘‘အရဟ’’န္တိ စ သပ္ပုရိသာနံ အာရကာ အာသန္နေတိ ‘‘အရဟ’’န္တိ စ. နိဗ္ဗစနာနိ ပန ဓာတုသဒ္ဒနိဿိတာနိ န ဟောန္တီတိ ဣဓ န ဂဟိတာနိ. ပသံသာ ပန အတ္ထတော ပူဇာ ဧဝါတိ ‘‘အရဟ ပူဇာယ’’န္တိ ဓာတုဿ အတ္ထော ဘဝိတုံ ယုတ္တောတိ ဣဓ အမှေဟိ ဂဟိတာ, အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ တု အရဟသဒ္ဒဿ လဗ္ဘမာနဝသေန သဗ္ဗေပိ အတ္ထာ ဂဟိတာ ဓာတုနိဿိတာ စ အဓာတုနိဿိတာ စ. ကထံ? – ही निर्वचने (व्युत्पत्ती) 'अरह पूजायं' (पूजा करणे), 'हन हिंसायं' (नाश करणे), 'रह चागे' (त्याग करणे), 'रहि गतियं' (गमन करणे) या धातूंच्या आधारे येथे सांगितली आहेत – क्लेशांपासून दूर (आरक) असल्यामुळे 'अरह' असे, पाप कृत्य करण्यात एकांत (रह) नसल्यामुळे 'अरह' असे, असत्पुरुषांपासून अत्यंत दूर असल्यामुळे 'अरह' असे, आणि सत्पुरुषांच्या अत्यंत जवळ असल्यामुळे 'अरह' असे. परंतु, ही निर्वचने धातूच्या शब्दांवर आधारित नसल्यामुळे येथे घेतलेली नाहीत. प्रशंसा ही अर्थाच्या दृष्टीने पूजाच आहे, म्हणून 'अरह पूजायं' या धातूचा अर्थ असणे योग्य आहे, म्हणून ती आम्ही येथे घेतली आहे. परंतु अट्ठकथाचार्यांनी तर 'अरह' शब्दाच्या उपलब्धतेनुसार धातूवर आधारित आणि धातूवर आधारित नसलेले सर्वच अर्थ घेतले आहेत. ते कसे? – အာရကတ္တာ ဟတတ္တာ စ, ကိလေသာရီန သော မုနိ; ဟတသံသာရစက္ကာရော, ပစ္စယာဒီန စာရဟော; န ရဟော ကရောတိ ပါပါနိ, အရဟံ တေန ဝုစ္စတီတိ. 'क्लेशांच्या शत्रूंपासून दूर असल्यामुळे आणि त्यांचा नाश केल्यामुळे ते मुनी; संसारचक्राचा नाश केल्यामुळे आणि प्रत्ययादींना (चीवरादी दानाला) पात्र असल्यामुळे; एकांतातही पापकृत्ये करत नसल्यामुळे, त्यांना 'अरहं' म्हटले जाते.' ဋီကာစရိယေဟိပိ တထေဝ ဂဟိတာ. ကထံ? – टीकाकारांनीही तसेच ग्रहण केले आहे. ते कसे? – အာရကာ မန္ဒဗုဒ္ဓီနံ, အာရကာ စ ဝိဇာနတံ; ရဟာနံ သုပ္ပဟီနတ္တာ, ဝိဒူနမရဟေယျတော; ဘဝေသု စ ရဟာဘာဝါ, ပါသံသာ အရဟံ ဇိနောတိ. जे मंदबुद्धीच्या लोकांपासून अत्यंत दूर आहेत, आणि सुज्ञ लोकांना अत्यंत जवळ (विशिष्ट ज्ञानाने जाणता येणारे) आहेत; ज्यांनी सर्व गुप्त पापे पूर्णपणे नष्ट केली आहेत; जे ज्ञानी लोकांकडून पूजनीय (अर्ह) आहेत; आणि ज्यांच्यामध्ये पुनर्जन्माचा (भवांचा) अभाव आहे; असे ते प्रशंसनीय अर्हत बुद्ध विजयी आहेत. ယထာ ပန အရဟံသဒ္ဒဿ, ဧဝံ အရဟာသဒ္ဒဿာပိ နိဗ္ဗစနာနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. ज्याप्रमाणे 'अर्हं' या शब्दाची व्युत्पत्ती आहे, त्याचप्रमाणे 'अर्हा' या शब्दाचीही व्युत्पत्ती समजावी. သုပုဗ္ဗဂမိတော စေဝ, သုပုဗ္ဗဂဒိတောပိ စ; ဓီရော သုဂတသဒ္ဒဿ, နိပ္ဖတ္တိံ သမုဒီရယေ. ज्ञानी पुरुषाने 'सु' पूर्वपदासह 'गम्' धातूपासून आणि 'सु' पूर्वपदासह 'गद्' धातूपासून 'सुगत' या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी. ဧတ္ထ ဟိ သုဂတောတိ သောဘနံ ဂတံ ဧတဿာတိ သုဂတော, သုန္ဒရံ ဌာနံ ဂတောတိ သုဂတော, သမ္မာ ဂတောတိ သုဂတော, သမ္မာ စ ဂဒတီတိ သုဂတောတိ ဓာတုနိဿိတံ အတ္ထံ ဂဟေတွာ သဒ္ဒနိပ္ဖတ္တိ ကာတဗ္ဗာ. ဝုတ္တဉှိ အဋ္ဌကထာသု – येथे 'सुगत' म्हणजे ज्यांचे गमन कल्याणकारी आहे ते सुगत; जे सुंदर स्थानाला (निर्वाणाला) गेले आहेत ते सुगत; जे सम्यक प्रकारे गेले आहेत ते सुगत; आणि जे सम्यक प्रकारे भाषण करतात ते सुगत; अशा प्रकारे धातूवर आधारित अर्थ घेऊन शब्दाची उत्पत्ती करावी. अट्ठकथांमध्ये म्हटले आहे की – ‘‘သောဘနဂမနတ္တာ[Pg.365], သုန္ဒရံ ဌာနံ ဂတတ္တာ, သမ္မာ ဂတတ္တာ, သမ္မာ စ ဂဒတ္တာ သုဂတော. ဂမနမ္ပိ ဟိ ဂတန္တိ ဝုစ္စတိ, တဉ္စ ဘဂဝတော သောဘနံ ပရိသုဒ္ဓမနဝဇ္ဇံ. ကိံ ပန တန္တိ? အရိယမဂ္ဂေါ, တေနေသ ဂမနေန ခေမံ ဒိသံ အသဇ္ဇမာနော ဂတောတိ သောဘနဂမနတ္တာ သုဂတော’’တိအာဒိ. “शोभन (कल्याणकारी) गमनामुळे, सुंदर स्थानाला गेल्यामुळे, सम्यक प्रकारे गेल्यामुळे आणि सम्यक भाषण केल्यामुळे ते 'सुगत' आहेत. गमन म्हणजेच 'गत' असे म्हटले जाते, आणि ते भगवंतांचे गमन शोभन, अत्यंत शुद्ध व निर्दोष आहे. ते गमन कोणते? तर तो आर्यमार्ग आहे. त्या गमनाने ते कोणत्याही आसक्तीशिवाय क्षेम अशा दिशेला (निर्वाणाला) गेले, म्हणून शोभन गमनामुळे ते 'सुगत' आहेत” इत्यादी. ဘဂသဒ္ဒူပပဒတော, ဝနုတော ဝမုတောပိ စ; ဘဂဝါသဒ္ဒနိပ္ဖတ္တိံ, ပဝဒေ အညထာပိ ဝါ. 'भग' या शब्दाला उपपद जोडून, 'वन्' धातूपासून किंवा 'वम्' धातूपासून 'भगवंत' (भगवा) या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी, किंवा इतर प्रकारेही सांगावी. အတြိမာနိ နိဗ္ဗစနာနိ – ဘဂသင်္ခါတာ လောကိယလောကုတ္တရသမ္ပတ္တိယော ဝနိ ဘဇိ သေဝီတိ ဘဂဝါ. သောမနဿကုမာရတ္တဘာဝါဒီသု စရိမတ္တဘာဝေ စ ဘဂသင်္ခါတံ သိရိံ ဣဿရိယံ ယသဉ္စ ဝမိ ဥဂ္ဂိရိ ခေဠပိဏ္ဍံ ဝိယ အနပေက္ခော ဆဍ္ဍယီတိ ဘဂဝါ. အထ ဝါ နက္ခတ္တေဟိ သမံ ပဝတ္တတ္တာ ဘဂသင်္ခါတေ သိနေရုယုဂန္ဓရဥတ္တရကုရုဟိမဝန္တာဒိဘာဇနလောကေ ဝမိ, တန္နိဝါသိတတ္တာဝါသသမတိက္ကမနတော တပ္ပဋိဗဒ္ဓဆန္ဒရာဂပ္ပဟာနေန ပဇဟီတိ ဘဂဝါတိ. यावर खालील व्युत्पत्ती आहेत – 'भग' संज्ञक लौकिक आणि लोकोत्तर संपत्तीचे ज्यांनी सेवन केले, भजन केले, ते 'भगवंत' (भगवा). सोमनस्य, कुमार अवस्था इत्यादींमध्ये आणि अंतिम जन्मामध्ये ज्यांनी 'भग' संज्ञक ऐश्वर्य, यश आणि कीर्तीचा थुंकीच्या गोळ्याप्रमाणे निरपेक्षपणे त्याग केला (वमन केले), ते 'भगवंत'. अथवा, नक्षत्रांसोबत फिरणाऱ्या 'भग' संज्ञक सुमेरू, युगंधर, उत्तरकुरु, हिमवंत इत्यादी भाजनलोकांचे (भौतिक जगाचे) ज्यांनी उल्लंघन केले आणि त्यावरील तृष्णा व राग नष्ट करून त्याचा त्याग केला, ते 'भगवंत' होत. ပရဓာတုဝသာ ဝါပိ, ပရူပပဒတောပိ ဝါ; မုတော တထာ မဇတော စ, မယတော မုနတော မိတော. 'पर' धातूच्या प्रभावाने किंवा 'पर' उपपदावरून; तसेच 'मुत्', 'मज्', 'मय्', 'मुन्' आणि 'मित्' या धातूंपासून; ပုန မိတောတိ ဧတေဟိ, ဓာတူဟိ ခလု သတ္တဟိ; ဝဒေ ပရမသဒ္ဒဿ, နိပ္ဖတ္တိံ ဇိနသာသနေ. तसेच 'मित्' या धातूपासून; अशा या सात धातूंवरून बुद्धशासनात 'परम' या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी. ဥတ္တမဝါစီပရမ-သဒ္ဒေန သဟ အဋ္ဌဟိ; ပဒေဟိ ပါရမီသဒ္ဒံ, ဝဒေ တဒ္ဓိတပစ္စယိံ. उत्कृष्टता दर्शवणाऱ्या 'परम' या शब्दासह आठ पदांनी तद्धित प्रत्यय लावून 'पारमी' या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी. ပါရသဒ္ဒူပပဒတော, မဇတောပိ မုတောထ ဝါ; မယတော ဝါ မုနတော ဝါ, မိတော ဝါ ပုနပိ မိတော. 'पार' या शब्दाला उपपद जोडून, 'मज्' धातूपासून किंवा 'मुत्' धातूपासून; अथवा 'मय्', 'मुन्', 'मित्' किंवा पुन्हा 'मित्' धातूपासून; ဧတေဟိ ဆဟိ ဓာတူဟိ, မဟာပုရိသဝါစကံ; ပါရမီသဒ္ဒမီရေန္တိ, တတော ပါရမိတာရဝံ. या सहा धातूंवरून महापुरुषाला दर्शवणाऱ्या 'पारमी' या शब्दाची उत्पत्ती सांगतात, आणि त्यावरून 'पारमिता' हा शब्द सिद्ध होतो. ဧတ္ထ [Pg.366] တာဝ ဥတ္တမတ္ထဝါစကပရမသဒ္ဒဝသေန ပါရမီနိဗ္ဗစနံ ကထေဿာမ. တတော ပရဓာတုဝသေန, တတော ပရသဒ္ဒူပပဒမုဓာတာဒိဝသေန တတော ပါရသဒ္ဒူပပဒမဇဓာတာဒိဝသေန. येथे प्रथम आपण उत्तम अर्थ दर्शवणाऱ्या 'परम' शब्दाच्या आधारे 'पारमी'ची व्युत्पत्ती सांगू. त्यानंतर 'पर' धातूच्या आधारे, त्यानंतर 'पर' उपपद आणि 'मुत्' इत्यादी धातूंच्या आधारे, आणि त्यानंतर 'पार' उपपद आणि 'मज्' इत्यादी धातूंच्या आधारे व्युत्पत्ती सांगू. ဒါနသီလာဒိဂုဏဝိသေသယောဂေန သတ္တုတ္တမတာယ ပရမာ. မဟာဗောဓိသတ္တာ ဗောဓိသတ္တာ, တေသံ ဘာဝေါ, ကမ္မံ ဝါ ပါရမီ, ဒါနာဒိကြိယာ. အထ ဝါ ပရတိ ပါလေတိ ပူရေတိ စာတိ ပရမော, ဒါနာဒီနံ ဂုဏာနံ ပါလကော ပူရကော စ ဗောဓိသတ္တော, ပရမဿ အယံ, ပရမဿ ဝါ ဘာဝေါ, ကမ္မံ ဝါ ပါရမီ, ဒါနာဒိကြိယာ. အထ ဝါ ပရံ သတ္တံ အတ္တနိ မဝတိ ဗန္ဓတိ ဂုဏဝိသေသယောဂေနာတိ ပရမော, ပရံ ဝါ အဓိကတရံ မဇ္ဇတိ သုဇ္ဈတိ ကိလေသမလတောတိ ပရမော, ပရံ ဝါ သေဋ္ဌံ နိဗ္ဗာနံ မယတိ ဂစ္ဆတီတိ ပရမော, ပရံ ဝါ လောကံ ပမာဏဘူတေန ဉာဏဝိသေသေန ဣဓလောကံ ဝိယ မုနာတိ ပရိစ္ဆိန္ဒတီတိ ပရမော, ပရံ ဝါ အတိဝိယ သီလာဒိဂုဏဂဏံ အတ္တနော သန္တာနေ မိနောတိ ပက္ခိပတီတိ ပရမော, ပရံ ဝါ အတ္တဘူတတော ဓမ္မကာယတော အညံ ပဋိပက္ခံ ဝါ တဒနတ္ထကရံ ကိလေသစောရဂဏံ မိနာတိ ဟိံသတီတိ ပရမော, မဟာသတ္တော, ပရမဿ အယံ, ပရမဿ ဝါ ဘာဝေါ, ကမ္မံ ဝါ ပါရမီ, ဒါနာဒိကြိယာ. दान, शील इत्यादी विशेष गुणांच्या योगाने जे प्राण्यांमध्ये सर्वोत्तम आहेत, ते 'परम' (सर्वश्रेष्ठ) होत. ते म्हणजे महाबोधिसत्व किंवा बोधिसत्व; त्यांचा भाव किंवा त्यांचे कर्म म्हणजे 'पारमी', म्हणजेच दानादी क्रिया होय. अथवा, जो इतरांचे रक्षण करतो आणि त्यांना परिपूर्ण करतो तो 'परम' होय; दान इत्यादी गुणांचे रक्षण करणारा आणि ते पूर्ण करणारा तो बोधिसत्व होय. अशा सर्वश्रेष्ठ (परम) पुरुषाचा हा भाव किंवा कर्म म्हणजे 'पारमी', म्हणजेच दानादी क्रिया होय. अथवा, जो आपल्या विशेष गुणांच्या योगाने इतर प्राण्यांना स्वतःकडे आकर्षित करतो (बाँधतो), तो 'परम' होय. किंवा जो क्लेशांच्या मळापासून अत्यंत शुद्ध होतो, तो 'परम' होय. किंवा जो सर्वश्रेष्ठ अशा निर्वाणाला प्राप्त करतो, तो 'परम' होय. किंवा जो या लोकाप्रमाणेच परलोकालाही आपल्या प्रमाणभूत विशेष ज्ञानाने जाणतो, तो 'परम' होय. किंवा जो शील इत्यादी गुणांच्या समूहाला आपल्या अंतःकरणात अत्यंत साठवतो, तो 'परम' होय. किंवा जो आपल्या धर्मकायापेक्षा भिन्न असलेल्या, अहित करणाऱ्या क्लेशरूपी शत्रूंचा नाश करतो, तो 'परम' म्हणजेच महासत्व होय. अशा सर्वश्रेष्ठ (परम) महापुरुषाचा हा भाव किंवा कर्म म्हणजे 'पारमी', म्हणजेच दानादी क्रिया होय. အပရော နယော – ပါရေ နိဗ္ဗာနေ မဇ္ဇတိ သုဇ္ဈတိ, သတ္တေ စ မဇ္ဇေတိ သောဓေတီတိ ပါရမီ, မဟာပုရိသော, တဿ ဘာဝေါ, ကမ္မံ ဝါ ပါရမိတာ. ပါရေ နိဗ္ဗာနေ သတ္တေ မဝတိ ဗန္ဓတိ ယောဇေဤတိ ပါရမီ, ပါရံ ဝါ နိဗ္ဗာနံ မယတိ ဂစ္ဆတိ, သတ္တေ စ မာယေတိ ဂမေတီတိ ပါရမီ, မုနာတိ ဝါ ပါရံ နိဗ္ဗာနံ ယာထာဝတော, တတ္ထ ဝါ သတ္တေ မိနောတိ ပက္ခိပတီတိ ပါရမီ, ကိလေသာရိံ ဝါ သတ္တာနံ ပါရေ နိဗ္ဗာနေ မိနာတိ ဟိံသတီတိ ပါရမီ, မဟာပုရိသော, တဿ ဘာဝေါ, ကမ္မံ ဝါ ပါရမိတာ, ဒါနာဒိကြိယာဝ. ဣမိနာ နယေန ပါရမီနံ သဒ္ဒတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော. दुसरा नय (पद्धत) – जो पलीकडच्या तीरावर असलेल्या निर्वाणात मग्न होतो, शुद्ध होतो आणि प्राण्यांना मग्न करतो, शुद्ध करतो ती 'पारमी' होय. महापुरुष, त्याचा भाव किंवा त्याचे कर्म म्हणजे 'पारमिता' होय. जो पलीकडच्या तीरावर असलेल्या निर्वाणात प्राण्यांना बांधतो, जोडतो ती 'पारमी' होय; किंवा जो पलीकडच्या तीरावर असलेल्या निर्वाणाप्रत जातो आणि प्राण्यांना तेथे पोहोचवतो ती 'पारमी' होय; किंवा जो पलीकडच्या तीरावर असलेल्या निर्वाणाला यथार्थपणे जाणतो, किंवा प्राण्यांना तेथे प्रस्थापित करतो ती 'पारमी' होय; किंवा जो प्राण्यांच्या क्लेशरूप शत्रूचा पलीकडच्या तीरावर असलेल्या निर्वाणात नाश करतो, हिंसा करतो ती 'पारमी' होय. महापुरुष, त्याचा भाव किंवा त्याचे कर्म म्हणजे 'पारमिता' होय, जसे की दानादी क्रिया. या पद्धतीने पारमींचा शब्दार्थ समजून घ्यावा। ကရဓာတုဝသာ [Pg.367] ဝါပိ, ကိရဓာတုဝသေန ဝါ; ကံသဒ္ဒူပပဒရုဓိ-ဓာတုတော ဝါပိ ဒီပယေ; ကရုဏာသဒ္ဒနိပ္ဖတ္တိံ, မဟာကရုဏသာသနေ. महाकरुणा शासनामध्ये 'करुणा' या शब्दाची उत्पत्ती 'कर' धातूवरून किंवा 'किर' धातूवरून किंवा 'कम्' शब्दाच्या उपपदासह 'रुध्' धातूवरून स्पष्ट करावी। တတ္ထ ကရုဏာတိ ပရဒုက္ခေ သတိ သာဓူနံ ဟဒယကမ္ပနံ ကရောတီတိ ကရုဏာ. ကိရတိ ပရဒုက္ကံ ဝိက္ခိပတီတိ ကရုဏာ. ကံ ဝုစ္စတိ သုခံ, တံ ရုန္ဓတိ ဝိဗာဓတိ ကာရုဏိကံ န သုခါပေတီတိပိ ကရုဏာ. त्यात 'करुणा' म्हणजे – दुसऱ्याचे दुःख पाहून सज्जनांच्या हृदयाला कंपित करते ती 'करुणा' होय. दुसऱ्याचे दुःख दूर करते (विखुरते) ती 'करुणा' होय. 'कम्' म्हणजे सुख म्हटले जाते, त्या सुखाला जे रोखते, बाधा आणते, कारुणिक व्यक्तीला सुखी होऊ देत नाही (जोपर्यंत इतर दुःखी आहेत), ती देखील 'करुणा' होय। ဝိဒိဝိဓဝိဒဓာတု-ဝသေန ပရိဒီပယေ; ဝိဇ္ဇာသဒ္ဒဿ နိပ္ဖတ္တိံ, သဒ္ဒနိပ္ဖတ္တိကောဝိဒေါ. शब्दोत्पत्तीमध्ये कुशल असलेल्याने 'विद्' (जाणणे), 'विद्' (लाभणे) आणि 'विद्' (असणे/विचार करणे) या धातूंच्या आधारे 'विज्जा' (विद्या) या शब्दाची उत्पत्ती स्पष्ट करावी। တတ္ထ ဝိဇ္ဇာတိ ဝိန္ဒိယံ ကာယသုစရိတာဒိံ ဝိန္ဒတိ ယာထာဝတော ဥပလဘတီတိ ဝိဇ္ဇာ. တမောခန္ဓာဒိပဒါလနဋ္ဌေန ဝါ အတ္တနော ပဋိပက္ခံ ဝိဇ္ဈတီတိ ဝိဇ္ဇာ. တတော ဧဝ အတ္တနော ဝိသယံ ဝိဒိတံ ကရောတီတိပိ ဝိဇ္ဇာ. त्यात 'विज्जा' (विद्या) म्हणजे – जी जाणण्यायोग्य अशा कायसुचरित इत्यादींना यथार्थपणे प्राप्त करते, मिळवते ती 'विज्जा' होय. किंवा अज्ञानाचा अंधकार इत्यादींचा नाश करण्याच्या अर्थाने जी आपल्या विरोधी पक्षाचा (अज्ञानाचा) वेध घेते (नाश करते) ती 'विज्जा' होय. म्हणूनच जी आपल्या विषयाला ज्ञात करते ती देखील 'विज्जा' होय। မေဓဓာတုဝသာ စေဝ, မေဓာဓာတူဟိ စ ဒွိဓာ; မေဓာသဒ္ဒဿ နိပ္ဖတ္တိံ, မေဓာဝီ သမုဒီရယေ. बुद्धिमान मनुष्याने 'मेध' धातूवरून आणि 'मेधा' धातूवरून अशा दोन प्रकारे 'मेधा' शब्दाची उत्पत्ती सांगावी। တတ္ထ မေဓာတိ သမ္မောဟံ မေဓတိ ဟိံသတီတိ မေဓာ. ပါပကေ ဝါ အကုသလေ ဓမ္မေ မေဓတိ ဟိံသတီတိပိ မေဓာ. အထ ဝါ – त्यात 'मेधा' म्हणजे – जी संमोहाचा (अज्ञानाचा) नाश करते, हिंसा करते ती 'मेधा' होय. किंवा जी पापी व अकुशल धर्मांचा नाश करते, हिंसा करते ती देखील 'मेधा' होय. अथवा – ‘‘ပညာ ဟိ သေဋ္ဌာ ကုသလာ ဝဒန္တိ,နက္ခတ္တရာဇာရိဝ တာရကာနံ; သီလံ သိရိဉ္စာပိ သတဉ္စ ဓမ္မော,အနွာယိကာ ပညဝတော ဘဝန္တီ’’တိ “कुशल लोक प्रज्ञेलाच श्रेष्ठ मानतात, जसा नक्षत्रांचा राजा (चंद्र) ताऱ्यांमध्ये श्रेष्ठ असतो; शील, श्री (समृद्धी) आणि सज्जनांचा धर्म हे प्रज्ञावंताचे अनुगामी असतात.” ဝစနတော ပန မေဓတိ သီလေန သိရိယာ သတဉ္စ ဓမ္မေဟိ သဟ ဂစ္ဆတိ, န ဧကိကာ ဟုတွာ တိဋ္ဌတီတိပိ မေဓာ. အပရော နယော – သုခုမမ္ပိ အတ္ထံ ဓမ္မဉ္စ ခိပ္ပမေဝ မေတိ စ ဓာရေတိ စာတိ မေဓာ, ဧတ္ထ မေတီတိ ဂဏှာတီတိ အတ္ထော. တထာ ဟိ [Pg.368] အဋ္ဌသာလိနိယံ ဝုတ္တံ ‘‘အသနိ ဝိယ သိလုစ္စယေ ကိလေသေ မေဓတိ ဟိံသတီတိ မေဓာ, ခိပ္ပံ ဂဟဏဓာရဏဋ္ဌေန ဝါ မေဓာ’’တိ. या वचनानुसार, जी शील, श्री आणि सज्जनांच्या धर्मांसोबत जाते (युक्त असते), एकटी राहत नाही ती 'मेधा' होय. दुसरा नय (पद्धत) – जी सूक्ष्म अर्थ आणि धर्माला देखील अत्यंत वेगाने ग्रहण करते आणि धारण करते ती 'मेधा' होय, येथे 'मेति' म्हणजे ग्रहण करते असा अर्थ आहे. म्हणूनच अट्ठसालिनीमध्ये म्हटले आहे – 'जशी पर्वतावर वीज पडते, तशी जी क्लेशांचा नाश करते, हिंसा करते ती 'मेधा' होय, किंवा वेगाने ग्रहण व धारण करण्याच्या अर्थाने ती 'मेधा' होय.' ရန္ဇဓာတုဝသာ စေဝ, ရာပုဗ္ဗတိရတောပိ စ; ရတ္တိသဒ္ဒဿ နိပ္ဖတ္တိံ, သဒ္ဒတ္ထညူ ဝိဘာဝယေ. शब्दाचा अर्थ जाणणाऱ्याने 'रंज्' धातूवरून आणि 'रा' पूर्वी असलेल्या 'रम्' धातूवरून 'रत्ति' (रात्र/आसक्ती) या शब्दाची उत्पत्ती स्पष्ट करावी। ရန္ဇန္တိ သတ္တာ ဧတ္ထာတိ ရတ္တိ, ရာ သဒ္ဒေါ တိယျတိ ဆိဇ္ဇတိ ဧတ္ထာတိ ရတ္တိ, သတ္တာနံ သဒ္ဒဿ ဝူပသမကာလောတိ အတ္ထော. ज्यामध्ये प्राणी रममाण होतात (आसक्त होतात) ती 'रत्ति' (रात्र) होय. किंवा ज्यामध्ये 'रा' हा शब्द नष्ट होतो (छिन्न होतो) ती 'रत्ति' होय. प्राण्यांच्या आवाजाच्या उपशमनाचा (शांत होण्याचा) काळ, असा याचा अर्थ आहे। မာ မာနေ ဣတိ သောအန္တ, ကမ္မနီတိ စုဘောဟိ တု; ဓာတူဟိ မာသသဒ္ဒဿ, နိပ္ဖတ္တိံ သမုဒီရယေ. 'मा' (मोजणे या अर्थी) आणि 'कमु' (इच्छा करणे किंवा पाऊल टाकणे) या दोन्ही धातूंपासून 'मास' (महिना) या शब्दाची निष्पत्ती सांगावी। တထာ ဟိ သတ္တာနံ အာယုံ မာနန္တော ဝိယ သိယတိ အန္တံ ကရောတီတိ မာသော, စိတ္တမာသာဒယော ဒွါဒသ မာသာ. သေယျထိဒံ? စိတ္တော ဝိသာခေါ ဇေဋ္ဌော အာသာဠှော သာဝဏော ဘဒ္ဒေါ အဿယုဇော ကတ္တိကော မာဂသိရော ဖုဿော မာဃော ဖဂ္ဂုဏောတိ. တတြ စိတ္တော မာသော ‘‘ရမ္မကော’’တိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ယထာပိ ရမ္မကေ မာသေ, ဗဟူ ပုပ္ဖန္တိ ဝါရိဇာ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. ဘဒ္ဒေါ ပန ‘‘ပေါဋ္ဌပါဒေါ’’တိ ဝုစ္စတိ. तसेच, जो प्राण्यांच्या आयुष्याचे मोजमाप केल्यासारखा अंत करतो, तो 'मास' (महिना) होय. चित्त (चैत्र) इत्यादी बारा महिने आहेत. ते खालीलप्रमाणे आहेत – चित्त (चैत्र), विसाख (वैशाख), जेट्ठ (ज्येष्ठ), आसाळ्ह (आषाढ), सावण (श्रावण), भद्द (भाद्रपद), अस्सयुज (अश्विन), कत्तिक (कार्तिक), मागसिर (मार्गशीर्ष), फुस्स (पौष), माघ आणि फग्गुण (फाल्गुन). त्यापैकी चित्त महिन्याला 'रम्मक' (रमणीय) असे म्हणतात. 'ज्याप्रमाणे रम्मक (रमणीय) महिन्यात अनेक कमळे फुलतात' असा पाळी पाठ आढळतो. तर भद्द महिन्याला 'पोट्ठपाद' असे म्हणतात। အထ ဝါ မာသောတိ အပရဏ္ဏဝိသေသဿပိ သုဝဏ္ဏမာသဿပိ နာမံ. တတ္ထ အပရဏ္ဏဝိသေသော ယထာပရိမိတေ ကာလေ အသိယတိ ဘက္ခိယတီတိ မာသော, ဣတရော ပန ‘‘မမ ဣဒ’’န္တိ မသိယတိ အာမသိယတိ ဂဏှိယတီတိ မာသောတိ ဝုစ္စတိ. अथवा 'मास' हे एका विशिष्ट कडधान्याचे (उडीद इत्यादी) आणि सुवर्णमासाचे (सोन्याचे नाणे) देखील नाव आहे. त्यापैकी, विशिष्ट कडधान्य हे योग्य प्रमाणात वेळेवर खाल्ले जाते (भक्षण केले जाते) म्हणून त्याला 'मास' म्हणतात; तर दुसरे (सोन्याचे नाणे) 'हे माझे आहे' असे मानले जाते, स्पर्श केले जाते आणि ग्रहण केले जाते म्हणून त्याला 'मास' म्हणतात। သံပုဗ္ဗဝဒစရေဟိ, သံဝစ္ဆရရဝဿ တု; နိပ္ဖတ္တိံ သမုဒီရေယျ, သကျသီဟဿ သာသနေ. शाक्यसिंहाच्या (बुद्धांच्या) शासनात 'सं' उपसर्गासह 'वद' आणि 'चर' धातूंपासून 'संवत्सर' (वर्ष) या शब्दाची निष्पत्ती सांगावी। တထာ ဟိ တံ တံ သတ္တံ ဓမ္မပ္ပဝတ္တိဉ္စ သင်္ဂမ္မ ဝဒန္တော ဝိယ စရတိ ပဝတ္တတီတိ သံဝစ္ဆရော. कारण, जो त्या त्या प्राण्याशी आणि धर्माच्या (गोष्टींच्या) प्रवृत्तीशी मिळून-मिसळून बोलल्यासारखा चालतो (प्रवृत्त होतो), तो 'संवत्सर' होय। ဘိဒိဘိက္ခိဓာတုဝသာ[Pg.369], အထ ဝါ ဘယဝါစကံ; ဘီသဒ္ဒံ ပုရိမံ ကတွာ, ဣက္ခဓာတုဝသေန စ; ဘိက္ခုသဒ္ဒဿ နိပ္ဖတ္တိံ, ကထယေယျ ဝိစက္ခဏော. बुद्धिमान मनुष्याने 'भिदि' (भेदणे/तोडणे) आणि 'भिक्खि' (भिक्षा मागणे) या धातूंच्या आधारे, किंवा भयवाचक 'भी' शब्दाला पुढे ठेवून 'इक्ख' (पाहणे) धातूच्या आधारे 'भिक्खू' शब्दाची निष्पत्ती सांगावी। တထာ ဟိ ကိလေသေ ဘိန္ဒတီတိ ဘိက္ခု. ဆိန္နဘိန္နပဋဓရောတိပိ ဘိက္ခု. ဘိက္ခနသီလောတိပိ ဘိက္ခု. သံသာရေ ဘယံ ဣက္ခတိ, ဣက္ခနသီလောတိ ဝါ ဘိက္ခု. तसेच, जो क्लेशांचा नाश करतो (भेदतो) तो 'भिक्खू' होय. फाटलेले आणि ठिगळ लावलेले वस्त्र परिधान करणारा तोही 'भिक्खू' होय. भिक्षा मागण्याचा स्वभाव असलेला तोही 'भिक्खू' होय. किंवा जो संसारात भय पाहतो, ज्याचा (भय) पाहण्याचा स्वभाव आहे, तो 'भिक्खू' होय। သဒဘိဒီဟိ ဓာတူဟိ, သဗ္ဘိသဒ္ဒဂတိံ ဝဒေ; သပ္ပုရိသေ စ နိဗ္ဗာနေ, ဧသ သဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. 'सद' (बसणे/नष्ट होणे) आणि 'भिदि' (भेदणे) या धातूंपासून 'सब्भि' शब्दाची उत्पत्ती सांगावी. हा शब्द 'सत्पुरुष' आणि 'निब्बान' (निर्वाण) या दोन्ही अर्थांत वापरला जातो। အတြိမာနိ နိဗ္ဗစနာနိ – သီဒနသဘာဝေ ကိလေသေ ဘိန္ဒတီတိ သဗ္ဘိ, သပ္ပုရိသော, ယော ‘‘အရိယော’’တိပိ ‘‘ပဏ္ဍိတော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. အပိစ သီဒနသဘာဝါ ကိလေသာ ဘိဇ္ဇန္တိ ဧတ္ထာတိ သဗ္ဘိ, နိဗ္ဗာနံ, ယံ ‘‘ရာဂက္ခယော’’တိအာဒိနာမံ လဘတိ. တထာ ဟိ သံယုတ္တဋ္ဌကထာယံ ဝုတ္တံ ‘‘ယသ္မာ နိဗ္ဗာနံ အာဂမ္မ သီဒနသဘာဝါ ကိလေသာ ဘိဇ္ဇန္တိ, တသ္မာ တံ သဗ္ဘီတိ ဝုစ္စတီ’’တိ. येथे या निरुक्ती (व्याख्या) आहेत – शिथिल करणाऱ्या (संसारात बुडवणाऱ्या) स्वभावाच्या क्लेशांचा जो नाश करतो तो 'सब्भि' म्हणजेच 'सत्पुरुष' होय, ज्याला 'अरीय' (आर्य) आणि 'पंडित' असेही म्हटले जाते. तसेच, ज्यामध्ये शिथिल करणाऱ्या स्वभावाचे क्लेश नष्ट होतात ते 'सब्भि' म्हणजेच 'निब्बान' (निर्वाण) होय, ज्याला 'रागक्खय' (रागाचा क्षय) इत्यादी नाव मिळते. म्हणूनच संयुत्त-अट्ठकथेत म्हटले आहे – 'ज्या अर्थी निब्बानाचा आश्रय घेऊन शिथिल करणाऱ्या स्वभावाचे क्लेश नष्ट होतात, त्या अर्थी त्याला सब्भि असे म्हटले जाते।' ဧတ္ထေတံ ဝဒါမ – या संदर्भात आम्ही हे सांगतो – ‘‘ယသ္မာ နိဗ္ဗာနမာဂမ, သံသီဒနသဘာဝိနော; က္လေသာ ဘိဇ္ဇန္တိ တံ တသ္မာ, သဗ္ဘီတိ အမတံ’ဗြဝု’’န္တိ. 'ज्या अर्थी निब्बानाचा (निर्वाणाचा) आश्रय घेऊन संसारात बुडवणाऱ्या स्वभावाचे क्लेश नष्ट होतात, त्या अर्थी त्या अमृताला (अमरणशील तत्त्वाला) 'सब्भि' असे म्हटले आहे।' ဗ္ရူဓာတုသဒဓာတူဟိ, ဘိသိသဒ္ဒဿ သမ္ဘဝံ; ဂုဏေဟိ ဗြူဟိတာ ဓီရာ, ပေါရာဏာစရိယာ’ဗြဝုံ. गुणांनी समृद्ध असलेल्या धीर (बुद्धिमान) प्राचीन आचार्यांनी 'ब्रू' आणि 'सद' या धातूंपासून 'भिसि' (आसन/उशी) या शब्दाची उत्पत्ती सांगितली आहे। တထာ ဟိ ဗြဝန္တာ ဧတ္ထ သီဒန္တီတိ ဘိသီတိ ဘိသိသဒ္ဒဿ သမ္ဘဝံ ပေါရာဏာ ကထယိံသု. कारण, प्राचीन आचार्यांनी 'भिसि' शब्दाची उत्पत्ती अशी सांगितली आहे की, ज्यावर बोलणारे (किंवा वाढणारे) लोक बसतात (विश्रांती घेतात) ते 'भिसि' होय। သုခဓာတုဝသာ စာပိ, သုပုဗ္ဗခါဒတောပိ ဝါ; သုပုဗ္ဗခနုတော ဝါပိ, သုခသဒ္ဒဂတိံ ဝဒေ. 'सुख' धातूच्या आधारे, किंवा 'सु' उपसर्गासह 'खाद' (खाणे) धातूपासून, अथवा 'सु' उपसर्गासह 'खनु' (खणणे) धातूपासून 'सुख' या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी। သုခန္တိ [Pg.370] ဟိ သုခယတီတိ သုခံ. ယဿုပ္ပဇ္ဇတိ, တံ သုခိတံ ကရောတီတိ အတ္ထော. သုဋ္ဌု ဒုက္ခံ ခါဒတီတိပိ သုခံ. သုဋ္ဋု ဒုက္ခံ ခနတီတိပိ သုခံ. कारण, जे सुखी करते ते 'सुख' होय. ज्याच्यामध्ये ते उत्पन्न होते, त्याला ते सुखी करते, असा याचा अर्थ आहे. जे दुःखाचा चांगल्या प्रकारे नाश करते (खाऊन टाकते), ते देखील 'सुख' होय. जे दुःखाला चांगल्या प्रकारे खणून काढते (उखडून टाकते), ते देखील 'सुख' होय। ဒုက္ခဓာတုဝသာ စာပိ, ဒုပုဗ္ဗခါဒတောပိ ဝါ; ဒုပုဗ္ဗခနုတော ဝါပိ, ဒုက္ခသဒ္ဒဂတိံ ဝဒေ. 'दुःख' धातूच्या आधारे, किंवा 'दु' उपसर्गासह 'खाद' (खाणे) धातूपासून, अथवा 'दु' उपसर्गासह 'खनु' (खणणे) धातूपासून 'दुःख' या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी। ဒုက္ခန္တိ ဟိ ဒုက္ခယတီတိ ဒုက္ခံ. ယဿုပ္ပဇ္ဇတိ, တံ ဒုက္ခိတံ ကရောတီတိ အတ္ထော. ဒုဋ္ဌု သုခံ ခါဒတီတိပိ ဒုက္ခံ. ဒုဋ္ဌု သုခံ ခနတီတိပိ ဒုက္ခံ. အထ ဝါ ဒွိဓာ သုခံ ခနတီတိပိ ဒုက္ခံ. कारण, जे दुःख देते ते 'दुःख' होय. ज्याच्यामध्ये ते उत्पन्न होते, त्याला ते दुःखी करते, असा याचा अर्थ आहे. जे सुखाचा वाईट प्रकारे नाश करते (खाऊन टाकते), ते देखील 'दुःख' होय. जे सुखाला वाईट प्रकारे खणून काढते (उखडून टाकते), ते देखील 'दुःख' होय. अथवा, जे सुखाला दोन प्रकारे खणून काढते (नष्ट करते), ते देखील 'दुःख' होय। ဂန္ဓဓာတုဝသာ စာပိ, ဂမုဓာတုဝသေန ဝါ; ဂမုဓာဓာတုတော ဝါပိ, ဂန္ဓသဒ္ဒဂတိံ ဝဒေ. 'गंध' धातूच्या आधारे, किंवा 'गमु' (जाणे) धातूच्या आधारे, अथवा 'गमु' आणि 'धा' (धारण करणे) या धातूंपासून 'गंध' या शब्दाची उत्पत्ती सांगावी। တထာ ဟိ ဂန္ဓယတီတိ ဂန္ဓော, အတ္တနော ဝတ္ထုံ သူစယတိ ‘‘ဣဒံ သုဂန္ဓံ, ဣဒံ ဒုဂ္ဂန္ဓ’’န္တိ ပကာသေတိ, ပဋိစ္ဆန္နံ, ဝါ ပုပ္ဖဖလာဒိံ ‘‘ဣဒမေတ္ထ အတ္ထီ’’တိ ပေသုညံ ကရောန္တော ဝိယ အဟောသီတိ အတ္ထော. အထ ဝါ ဂန္ဓယတိ ဆိန္ဒတိ မနာပဂန္ဓော သုဂန္ဓဘာဝေန ဒုဂ္ဂန္ဓံ, အမနာပဂန္ဓော စ ဒုဂ္ဂန္ဓဘာဝေန သုဂန္ဓန္တိ ဂန္ဓော. ဧတ္ထ ပန ဂန္ဓသဒ္ဒဿ ဆေဒနဝါစကတ္တေ – कारण, जो सुवास देतो (किंवा सूचित करतो) तो 'गंध' होय; तो स्वतःच्या वस्तूची सूचना देतो, 'हा सुगंध आहे, हा दुर्गंध आहे' असे प्रकट करतो. याचा अर्थ असा की, लपलेल्या फुला-फळांविषयी 'ते येथे आहे' असे सांगून जणू काही चहाडीच करत असतो. अथवा, जो नष्ट करतो (कापतो) तो 'गंध' होय – मनपसंत गंध (सुगंध) आपल्या सुवासिकतेने दुर्गंधाचा नाश करतो आणि नापसंत गंध (दुर्गंध) आपल्या घाणेरड्या वासाने सुगंधाचा नाश करतो. येथे 'गंध' शब्दाचा अर्थ 'नाश करणे' (कापणे) या अर्थाने घेतला असता – ‘‘အတိဇာတံ အနုဇာတံ, ပုတ္တမိစ္ဆန္တိ ပဏ္ဍိတာ; အဝဇာတံ န ဣစ္ဆန္တိ, ယော ဟောတိ ကုလဂန္ဓနော’’တိ 'बुद्धिमान लोक अतिजात (कुळापेक्षा श्रेष्ठ) आणि अनुजात (कुळासारखाच) पुत्राची इच्छा करतात; ते अवजात (कुळापेक्षा हीन) पुत्राची इच्छा करत नाहीत, जो कुळाचा नाश करणारा (कुलगंधन) असतो।' အယံ ပါဠိ နိဒဿနံ. ဝါယုနာ ဝါ နီယမာနော ဂစ္ဆတီတိ ဂန္ဓော. ကစ္စာယနသ္မိဉှိ ‘‘ခါဒါမဂမာနံ ခန္ဓန္ဓဂန္ဓာ’’တိ ခါဒအမဂမိဣစ္စေတေသံ ဓာတူနံ ယထာက္ကမံ ခန္ဓ အန္ဓဂန္ဓာဒေသာ ဝုတ္တာ. အထ ဝါ ဂစ္ဆန္တော ဓရိယတေ သောတိ ဂန္ဓော. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဒန္တေန ဗုဒ္ဓဒတ္တာစရိယေန ဝေယျာကရဏေန နိရုတ္တိနယဒဿိနာ ‘‘ဓရိယတီတိ ဂစ္ဆန္တော, ဂန္ဓော သူစနတောပိ ဝါ’’တိ. हे पाळीचे उदाहरण आहे. किंवा वाऱ्याद्वारे वाहून नेला जात असताना जो जातो (पसरतो), तो 'गंध' होय. कच्चायन व्याकरणात 'खादामगमानं खन्धन्धगन्धा' या सूत्रात 'खाद', 'अम' आणि 'गमु' या धातूंचे अनुक्रमे 'खन्ध', 'अन्ध' आणि 'गन्ध' असे आदेश सांगितले आहेत. अथवा, जो जात असताना ग्रहण केला (धारण केला) जातो, तो 'गंध' होय. व्याकरणकार आणि निरुक्तीचे जाणकार भदन्त बुद्धदत्ताचार्यांनी म्हटलेच आहे – 'जो जात असताना ग्रहण केला जातो तो गंध होय, किंवा सूचकतेमुळेही त्याला गंध म्हणतात।' ရသဓာတုဝသာ စေဝ, ရမာသဓာတုတောပိ စ; ရသသဒ္ဒဿ နိပ္ဖတ္တိံ, အာဟု ဓမ္မရသညုနော. धम्मरसाचे जाणकार 'रस' धातूच्या आधारे, तसेच 'रम' (रममाण होणे) आणि 'अस' (खाणे) या धातूंपासून 'रस' या शब्दाची निष्पत्ती सांगतात। ရသောတိ [Pg.371] ဟိ ရသန္တိ တံ အဿာဒေန္တီတိ ရသော, ရမန္တာ တံ အသန္တီတိပိ ရသော. ဝုတ္တမ္ပိ စေတံ ‘‘ရမမာနာ န’သန္တီတိ ရသောတိ ပရိဒီပိတော’’တိ. တတြာယမတ္ထော – ဒေဝမနုဿာဒယော သတ္တာ ယသ္မာ ရမမာနာ နံ ဓမ္မဇာတံ အသန္တိ ဘက္ခန္တိ, တသ္မာ တံ ဓမ္မဇာတံ ရသော နာမာတိ နိရုတ္တညူဟိ ပရိဒီပိတောတိ. ပဒစ္ဆေဒေါ ပန ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗော – कारण, ज्याची चव घेतात (आस्वाद घेतात) तो 'रस' होय; किंवा ज्यामध्ये रममाण होऊन लोक त्याचे सेवन करतात (खातात) तोही 'रस' होय. असे म्हटलेही आहे – 'रममाण होऊन ज्याचे सेवन करतात, म्हणून त्याला रस असे स्पष्ट केले आहे.' त्याचा अर्थ असा आहे – देव, मनुष्य इत्यादी प्राणी ज्या अर्थी रममाण होऊन त्या धम्मरूपाचे सेवन करतात (भक्षण करतात), त्या अर्थी त्या धम्मरूपाला 'रस' म्हणतात, असे निरुक्तीकारांनी स्पष्ट केले आहे. शब्दाचा विग्रह (पदच्छेद) असा समजावा – နံ အသန္တိ န သန္တီတိ, ပဒစ္ဆေဒေါ သိယာ တဟိံ; ကမ္မကာရကဘာဝေန, အတ္ထော ဟိ တတ္ထ ဣစ္ဆိတော. तेथे 'णं असन्ति' (त्याचे सेवन करतात) असा पदच्छेद असावा, 'न सन्ति' (ते नाहीत) असा नाही; कारण तेथे कर्मकारकाच्या भावाने अर्थ अभिप्रेत आहे। ဣတိ ဝုတ္တာနုသာရေန, အဝုတ္တေသု ပဒေသုပိ; ယထာရဟံ နယညူဟိ, နယော နေယျော သုသောဘနော. या सांगितलेल्या नियमांनुसार, न सांगितलेल्या शब्दांच्या बाबतीतही पद्धती जाणणाऱ्यांनी योग्य प्रकारे सुंदर पद्धत योजावी। ဓာတုစိန္တာယ ယေ မုတ္တာ, အနိပ္ဖန္နာတိ တေ မတာ; တေ စာပိ ဗဟဝေါ သန္တိ, ပီတလောဟိတကာဒယော; जे शब्द धातूच्या विचारापासून मुक्त आहेत, ते 'अनिष्पन्न' (अव्युत्पन्न) मानले जातात. पिवळा (पीत), लाल (लोहित) इत्यादी असे अनेक शब्द आहेत। နိပ္ဖန္နေ အပိ ဓာတူဟိ, သဒ္ဒေ ဓဂါဣတိအာဒယော; အနိပ္ဖန္နံဝ ပေက္ခန္တိ, ဂဝါဒိဝိဓိဘေဒတော. जरी 'धगा' इत्यादी शब्द धातूंपासून निष्पन्न झालेले असले, तरी 'गवा' (गाय) इत्यादी नियमांच्या भेदांमुळे ते अनिष्पन्नासारखेच पाहिले जातात। တထာ ဟိ ‘‘ဂစ္ဆတီတိ ဂေါ’’, ဣတိ ဝုတ္တပဒံ ပုန; အနိပ္ဖန္နံ ကရိတွာန, ‘‘ဂါဝေါ’’ ဣစ္စာဒိကံဗြဝုံ. कारण, 'जी चालते ती गो (गाय)' असे म्हटलेले असतानाही, पुन्हा त्या शब्दाला अनिष्पन्न मानून 'गावो' (गायी) इत्यादी रूपे सांगतात। ဧကန္တေန အနိပ္ဖန္နာ, သဒ္ဒါ ဝိဍူဍဘာဒယော; ဓာတုရူပကသဒ္ဒါ စ, ‘‘ပဗ္ဗတာယတိ’’အာဒယော. 'विडूडभ' इत्यादी शब्द आणि 'पब्बतायति' (पर्वतासारखे आचरण करणे) इत्यादी धातूंसारखे वाटणारे शब्द पूर्णपणे अनिष्पन्न (अव्युत्पन्न) आहेत। သေယျထိဒံ? ‘‘ဝိဍူဍဘော, တိဿော, ယေဝါပနော, ပီတံ, လောဟိတံ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ နာမိကပဒါနိ အနိပ္ဖန္နာနိ ဘဝန္တိ. ‘‘နီလံ, ပီတံ, ယေဝါပနကော’’ ဣစ္စာဒီနိ ပန နီလဝဏ္ဏေ ပီတဝဏ္ဏေ. ကေ ရေ ဂေ သဒ္ဒေတိ ဓာတုဝသေန အာဂတတ္တာ နီလတီတိ နီလံ, ပီတတီတိ ပီတံ, ယေ ဝါ ပန ဣတိဝစနေန ဘဂဝတာ ကိယတေ ကထိယတေတိ ယေဝါပနကောတိ နိဗ္ဗစနမရဟန္တီတိ နိပ္ဖန္နာနီတိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ. ကေစိ ပနေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘နနု နီလတိ ပီတတီတိအာဒီနိ ကြိယာပဒါနိ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ န ဒိဿန္တီ’’တိ? ကိဉ္စာပိ [Pg.372] န ဒိဿန္တိ, တထာပိ ဧတရဟိ အဝိဇ္ဇမာနာ ပုရာဏဘာသာ ဧသာတိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ယထာ ဟိ ‘‘နာထတီတိ နာထော’’တိ ဧတ္ထ ကိဉ္စာပိ ‘‘နာထတီ’’တိ ကြိယာပဒံ ဗုဒ္ဓဝစနေ န ဒိဿတိ, တထာပိ နာထ ယာစနောပတာပိဿရိယာသီသနေသူတိ ဓာတုနော ဒိဋ္ဌတ္တာ အဋ္ဌကထာစရိယာ ဂဏှိံသုယေဝ, ဧဝံ သမ္ပဒမိဒံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. န ဟိ ကြိယာပဒပရိဟီနော ဓာတု ဝုစ္စေယျ. जसे की? 'विडूडभो, तिस्सो, येवापनो, पीतं, लोहितं' इत्यादी नामिक पदे अनिष्पन्न असतात. परंतु 'नीलं, पीतं, येवापनको' इत्यादी पदे निळ्या रंगात आणि पिवळ्या रंगात (वापरली जातात). 'के रे गे' या ध्वनींच्या धातूंच्या प्रभावामुळे आल्यामुळे 'नीलतीति नीलं' (जे निळे होते ते नील), 'पीततीति पीतं' (जे पिवळे होते ते पीत), 'ये वा पाना' या वचनाने भगवंतांद्वारे जे केले जाते किंवा सांगितले जाते ते 'येवापनको' असे निरुक्तिलक्षण प्राप्त करत असल्यामुळे ती निष्पन्न आहेत असे म्हटले पाहिजे. येथे काही जण असे म्हणू शकतील की, 'काय नीलति, पीतति इत्यादी क्रियापदे त्रिपिटकातील बुद्धवचनात दिसत नाहीत?' जरी ती दिसत नसली, तरी ती सध्या अस्तित्वात नसलेली प्राचीन भाषा आहे असे मानले पाहिजे. जसे की 'नाथतीति नाथो' यामध्ये जरी 'नाथति' हे क्रियापद बुद्धवचनात दिसत नसले, तरी 'नाथ' धातू याचना, उपताप, ऐश्वर्य आणि आशिष या अर्थांमध्ये दिसून येत असल्यामुळे अट्ठकथाचार्यांनी त्याचा स्वीकार केलाच आहे, त्याचप्रमाणे हे देखील समजले पाहिजे. कारण क्रियापदाशिवाय धातू सांगितला जाऊ शकत नाही. ကိဉ္စ ဘိယျော – ယထာ ‘‘ယာဝ ဗျာတိ နိမီသတိ, တတြာပိ ရသတိဗ္ဗယော’’တိ ဇာတကပါဠိယံ ဣမသ္မိံ ဗုဒ္ဓုပ္ပာဒေ ဒေဝမနုဿာနံ ဝေါဟာရပထေ အသဉ္စရန္တံ ပုရာဏဘာသာဘူတံ ‘‘ဗျာတီ’’တိ ကြိယာပဒမ္ပိ ဒိဿတိ, တထာ ‘‘နီလတိ, ပီတတီ’’တိအာဒီဟိပိ ပုရာဏဘာသာဘူတေဟိ ကြိယာပဒေဟိ ဘဝိတဗ္ဗံ. တတ္ထ ယာဝ ဗျာတီတိ ယာဝ ဥမ္မီသတိ. အယဉှိ တသ္မိံ ကာလေ ဝေါဟာရော, ယသ္မိံ ကာလေ ဗောဓိသတ္တော စူဠဗောဓိ နာမ ပရိဗ္ဗာဇကော အဟောသိ. ယထာ ပန ဝိဍူဍဘသဒ္ဒါဒယော ဓာတုဝသေန အနိပ္ဖန္နာ နာမ ဝုစ္စန္တိ, တထာ ‘‘ပဗ္ဗတာယတိ, သမုဒ္ဒါယတိ, စိစ္စိဋာယတိ, ဓူမာယတိ, ဒုဒ္ဒုဘာယတိ, မေတ္တာယတိ, ကရုဏာယတိ, မမာယတိ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော စ ‘‘ဆတ္တီယတိ, ဝတ္ထီယတိ, ပရိက္ခာရီယတိ, ဓနီယတိ, ပဋီယတိ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော စ ‘‘အတိဟတ္ထယတိ, ဥပဝီဏယတိ, ဒဠှယတိ, ပမာဏယတိ, ကုသလယတိ, ဝိသုဒ္ဓယတိ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော စ ဓာတုဝသေန အနိပ္ဖန္နာယေဝ နာမ ဝုစ္စန္တိ. आणखी काय - जसे जातकपाळीमध्ये 'याव ब्याति निमीसति, तत्रापि रसतिब्बयो' यामध्ये या बुद्धोत्पाद काळात देव आणि मनुष्यांच्या व्यवहारात न चालणारे, प्राचीन भाषेचे रूप असलेले 'ब्याति' हे क्रियापद देखील दिसते, तसेच 'नीलति, पीतति' इत्यादी देखील प्राचीन भाषेतील क्रियापदे असली पाहिजेत. तेथे 'याव ब्याति' म्हणजे 'जोपर्यंत डोळे उघडतात'. कारण हा त्या काळातील व्यवहार आहे, ज्या काळात बोधिसत्व चूळबोधी नावाचे परिव्राजक होते. परंतु जसे 'विडूडभ' इत्यादी शब्द धातूच्या दृष्टीने अनिष्पन्न म्हटले जातात, तसेच 'पब्बतायति, समुद्दायति, चिच्चिटायति, धूमायति, दुद्दुभायति, मेत्तायति, करुणायति, mमायति' इत्यादी आणि 'छत्तीयति, वत्थीयति, परिक्खारीयति, धनीयति, पटीयति' इत्यादी आणि 'अतिहत्थयति, उपवीणयति, दळ्हयति, पमाणयति, कुसलयति, विसुद्धयति' इत्यादी देखील धातूच्या दृष्टीने अनिष्पन्नच म्हटले जातात. တတ္ထ ‘‘ပဗ္ဗတာယတီ’’တိအာဒီသု သံဃော ပဗ္ဗတမိဝ အတ္တာနမာစရတိ ပဗ္ဗတာယတိ, ဧဝံ သမုဒ္ဒါယတိ. သဒ္ဒေါ စိစ္စိဋမိဝ အတ္တာနမာစရတိ စိစ္စိဋာယတိ. ဝတ္ထု ဓူမမိဝ အတ္တာနမာစရတိ ဓူမာယတိ. သဒ္ဒေါ ဒုဒ္ဒုဘဣတိ အာစရတိ ဒုဒ္ဒုဘာယတိ, ဘိက္ခု မေတ္တာယတိ, တထာ ကရုဏာယတိ. ‘‘မမ ဣဒ’’န္တိ ဂဏှတိ မမာယတိ. အဆတ္တံ ဆတ္တမိဝ အာစရတိ ဆတ္တီယတိ. အပုတ္တံ [Pg.373] ပုတ္တမိဝ အာစရတိ ပုတ္တီယတိ, သိဿံ အာစရိယော, အတ္တနော ပတ္တမိစ္ဆတိ ပတ္တီယတိ. ဧဝံ ဝတ္ထီယတိ, ပရိက္ခာရီယတိ, စီဝရီယတိ, ဓနီယတိ, ပဋီယတိ. ဟတ္ထိနာ အတိက္ကမတိ အတိဟတ္ထယတိ. ဝီဏာယ ဥပဂါယတိ ဥပဝီဏယတိ. ဒဠှံ ကရောတိ ဝီရိယံ ဒဠှယတိ. ပမာဏံ ကရောတိ ပမာဏယတိ. ကုသလံ ပုစ္ဆတိ ကုသလယတိ. ဝိသုဒ္ဓါ ဟောတိ ရတ္တိ ဝိသုဒ္ဓါယတိ. तेथे 'पब्बतायति' इत्यादींमध्ये - संघ पर्वतासारखा स्वतःचे आचरण करतो म्हणून 'पब्बतायति', याचप्रमाणे 'समुद्दायति'. आवाज 'चिच्चिट' सारखा स्वतःचे आचरण करतो म्हणून 'चिच्चिटायति'. वस्तू धुरासारखे स्वतःचे आचरण करते म्हणून 'धूमायति'. आवाज 'दुद्दुभ' सारखा आचरण करतो म्हणून 'दुद्दुभायति'. भिक्खू मैत्रीचे आचरण करतात म्हणून 'मेत्तायति', तसेच 'करुणायति'. 'हे माझे आहे' असे ग्रहण करतो म्हणून 'ममायति'. जे छत्र नाही ते छत्रासारखे आचरण करते म्हणून 'छत्तीयति'. जो पुत्र नाही त्याला पुत्रासारखे वागवतो म्हणून 'पुत्तीयति' - जसे आचार्य शिष्याला वागवतात. स्वतःच्या पात्राची इच्छा करतो म्हणून 'पत्तीयति'. याचप्रमाणे 'वत्थीयति, परिक्खारीयति, चीवरीयति, धनीयति, pटीयति'. हत्तीने ओलांडून जातो म्हणून 'अतिहत्थयति'. विणेने गातो म्हणून 'उपवीणयति'. दृढ करतो, वीर्याला दृढ करतो म्हणून 'दळ्हयति'. प्रमाण करतो म्हणून 'पमाणयति'. कुशल विचारतो म्हणून 'कुसलयति'. रात्र विशुद्ध होते म्हणून 'विसुद्धायति'. တတြာယံ ပဒမာလာ – ‘‘ပဗ္ဗတာယတိ, ပဗ္ဗတာယန္တိ. ပဗ္ဗတာယသိ, ပဗ္ဗတာယထ. ပဗ္ဗတာယာမိ, ပဗ္ဗတာယာမာ’’တိ ဣမိနာ နယေန အဋ္ဌန္နံ ဝိဘတ္တီနံ ဝသေန သေသံ သဗ္ဗံ ယောဇေတဗ္ဗံ, ဧဝံ ‘‘သမုဒ္ဒါယတိ, ဆတ္တီယတီ’’တိအာဒီသု. တတြ ကာရိတဝသေနပိ ‘‘ပဗ္ဗတာယန္တံ ပယောဇယတိ ပဗ္ဗတာယတိ, ပုတ္တိယန္တံ ပယောဇယတိ ပုတ္တီယတိ’’ ဣစ္စာဒိ ပဒသိဒ္ဓိ ဘဝတိ. အယံ ပန ပဒမာလာ – ပဗ္ဗတာယတိ, ပဗ္ဗတာယန္တိ. ပဗ္ဗတာယသိ. သေသံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဣစ္စေဝံ ဓာတုဝသေန နိပ္ဖန္နာနိပ္ဖန္နပဒါနိ ဝိဘာဝိတာနိ. तेथे ही पदमाला आहे - 'पब्बतायति, pब्बतायन्ति। पब्बतायसि, पब्बतायथ। पब्बतायामि, पब्बतायाम' या पद्धतीने आठही विभक्तींच्या नियमांनुसार उर्वरित सर्व योजना करावी, याचप्रमाणे 'समुद्दायति, छत्तीयति' इत्यादींमध्ये देखील करावी. तेथे कारित भावाच्या दृष्टीने देखील 'पब्बतायन्तं पयोजयति पब्बतायति', 'पुत्तियन्तं पयोजयति पुत्तीयति' इत्यादी पदांची सिद्धी होते. ही पदमाला अशी आहे - पब्बतायति, पब्बतायन्ति। पब्बतायसि। उर्वरित योजना करावी. अशा प्रकारे धातूच्या दृष्टीने निष्पन्न आणि अनिष्पन्न पदे स्पष्ट केली आहेत. ဣဒါနိ ဓာတုဂဏလက္ခဏံ, အဓာတုလက္ခဏံ, ကာရိတပစ္စယယောဂံ, သကာရိတေကကမ္မဒွိကမ္မတိကမ္မပဒံ, ဦဟနီယရူပဂဏံ, ဓာတူနံ ဧကဂဏိကဒွိဂဏိကတေဂဏိကပဒံ, သုဒ္ဓကတ္တုဟေတုကတ္တုပဒရူပံ, ကမ္မဘာဝပဒရူပံ, ဧကကာရိတဒွိကာရိတပဒံ, အကာရိတဒွိကမ္မကပဒဉ္စ သဗ္ဗမေတံ ယထာရဟံ ကထယာမ. आता धातूंच्या गणांचे लक्षण, अधातूचे लक्षण, कारित प्रत्ययांचा योग, सकारित एककर्मक, द्विकर्मक आणि त्रिकर्मक पदे, ऊहनीय रूपगण, धातूंचे एकगणिक, द्विगणीक आणि त्रिगणिक पद, शुद्धकर्तृ आणि हेतुकर्तृ पदांचे रूप, कर्म आणि भाव पदांचे रूप, एककारित आणि द्विकारित पद, आणि अकारित द्विकर्मक पद - हे सर्व आम्ही योग्यतेनुसार सांगतो. တတြ သဗ္ဗဓာတုကနိဿိတေ သုဒ္ဓကတ္တုပ္ပယောဂေ သုဒ္ဓဿရဓာတုတော ဝါ ဧကဿရတော ဝါ အနေကဿရတော ဝါ အပစ္စယဿ ပရဘာဝေါ ဘူဝါဒိဂဏလက္ခဏံ သာမညလက္ခဏဝသေန, ဝိသေသလက္ခဏဝသေန ပန အာချာတတ္တေ ဣကာရန္တာနေကဿရဓာတုတော သဟ အပစ္စယေန နိစ္စံ နိဂ္ဂဟီတာဂမနဉ္စ နာမိကတ္တေ နိဂ္ဂဟီတာဂမနမတ္တဉ္စ ဘူဝါဒိဂဏလက္ခဏံ. အာကျာတတ္တေ ကတ္တရိ ဓာတူဟိ အပစ္စယေန သဒ္ဓိံနိယတဝသေန နိဂ္ဂဟီတာဂမနံ ရုဓာဒိဂဏလက္ခဏံ သာမညလက္ခဏဝသေန, ဝိသေသလက္ခဏဝသေန [Pg.374] ပန အာချာတတ္တေ ကတ္တရိ ဓာတူဟိ ဣဝဏ္ဏေကာရောကာရပစ္စယေဟိ သဒ္ဓိံ နိယတဝသေန နိဂ္ဂဟီတာဂမနဉ္စ နာမကတ္တေ အနိယတဝသေန နိဂ္ဂဟီတာဂမနမတ္တဉ္စ ရုဓာဒိဂဏလက္ခဏံ. ကတ္တရိ ဓာတူဟိ အာဒေသလာဘာလာဘိနော ယပစ္စယဿ ပရဘာဝေါ ဒိဝါဒိဂဏလက္ခဏံ. ကတ္တရိ ဓာတူဟိ ယထာရဟံ ဏု ဏာ ဥဏာပစ္စယာနံ ပရဘာဝေါ သွာဒိဂဏလက္ခဏံ. ကတ္တရိ ဓာတူဟိ နာပစ္စယဿ ပရဘာဝေါ ကိယာဒိဂဏလက္ခဏံ. ကတ္တရိ ဓာတူဟိ အာချာတတ္တေ အပ္ပကတရပ္ပယောဂဝသေန နာမိကတ္တေ ပစုရပ္ပယောဂဝသေန ပ္ပဏှာပစ္စယာနံ ပရဘာဝေါ ဂဟာဒိဂဏလက္ခဏံ. ကတ္တရိ ဓာတူဟိ ယထာသမ္ဘဝံ ဩယိရပ္ပစ္စယာနံ ပရဘာဝေါ တနာဒိဂဏလက္ခဏံ. အာချာတတ္တေ ကတ္တရိ ဓာတူဟိ သဗ္ဗထာ ဏေဏယပ္ပစ္စယာနံ ပရဘာဝေါ စုရာဒိဂဏလက္ခဏံ သာမညလက္ခဏဝသေန, ဝိသေသလက္ခဏဝသေန ပန အာချာတတ္တေ ဣကာရန္တဓာတုတော သဟ ဏေ ဏယပစ္စယေဟိ နိစ္စံ နိဂ္ဂဟီတာဂမနဉ္စ နာမိကတ္တေ နိဂ္ဂဟီတာဂမနမတ္တဉ္စ စုရာဒိဂဏလက္ခဏံ. ဂဏသူစကာနံ ပစ္စယာနမပရတ္တံ အဓာတုလက္ခဏံ. ဣတိ ဓာတုဂဏလက္ခဏမဓာတုလက္ခဏံ ဝိဘာဝိတံ. तेथे सर्वधातुकांशी संबंधित प्रयोगात, शुद्ध स्वर असलेल्या धातूपासून किंवा एक स्वर असलेल्या किंवा अनेक स्वर असलेल्या धातूपासून 'अ' प्रत्ययाचा परभाव हे सामान्य लक्षणाच्या दृष्टीने 'भूवादि' गणाचे लक्षण आहे. विशेष लक्षणाच्या दृष्टीने आख्यात रूपात इ-कारान्त अनेक स्वर असलेल्या धातूपासून 'अ' प्रत्ययासोबत नेहमी निग्गहीत (अनुस्वार) आगम होणे आणि नाम रूपात केवळ निग्गहीत आगम होणे हे 'भूवादि' गणाचे लक्षण आहे. आख्यात रूपात कर्तरि प्रयोगात धातूंपासून 'अ' प्रत्ययासोबत निश्चितपणे निग्गहीत आगम होणे हे सामान्य लक्षणाच्या दृष्टीने 'रुधादि' गणाचे लक्षण आहे. विशेष लक्षणाच्या दृष्टीने आख्यात रूपात कर्तरि प्रयोगात धातूंपासून इ-वर्ण, ए-कार आणि ओ-कार प्रत्ययांसोबत निश्चितपणे निग्गहीत आगम होणे आणि नाम रूपात अनिश्चितपणे केवळ निग्गहीत आगम होणे हे 'रुधादि' गणाचे लक्षण आहे. कर्तरि प्रयोगात धातूंपासून आदेश प्राप्त होणाऱ्या किंवा न होणाऱ्या 'य' प्रत्ययाचा परभाव हे 'दिवादि' गणाचे लक्षण आहे. कर्तरि प्रयोगात धातूंपासून योग्यतेनुसार 'णु', 'णा', 'उणा' प्रत्ययांचा परभाव हे 'स्वादि' गणाचे लक्षण आहे. कर्तरि प्रयोगात धातूंपासून 'ना' प्रत्ययाचा परभाव हे 'कियादि' गणाचे लक्षण आहे. कर्तरि प्रयोगात धातूंपासून आख्यात रूपात अत्यंत कमी प्रयोगामुळे आणि नाम रूपात विपुल प्रयोगामुळे 'प्प', 'ण्हा' प्रत्ययांचा परभाव हे 'गहादि' गणाचे लक्षण आहे. कर्तरि प्रयोगात धातूंपासून संभवानुसार 'ओ', 'यिर' प्रत्ययांचा परभाव हे 'तनादि' गणाचे लक्षण आहे. आख्यात रूपात कर्तरि प्रयोगात धातूंपासून सर्व प्रकारे 'णे', 'णय' प्रत्ययांचा परभाव हे सामान्य लक्षणाच्या दृष्टीने 'चुरादि' गणाचे लक्षण आहे. विशेष लक्षणाच्या दृष्टीने आख्यात रूपात इ-कारान्त धातूपासून 'णे', 'णय' प्रत्ययांसोबत नेहमी निग्गहीत आगम होणे आणि नाम रूपात केवळ निग्गहीत आगम होणे हे 'चुरादि' गणाचे लक्षण आहे. गण दर्शवणाऱ्या प्रत्ययांचा अभाव असणे हे 'अधातू'चे लक्षण आहे. अशा प्रकारे धातूंच्या गणांचे लक्षण आणि अधातूचे लक्षण स्पष्ट केले आहे. ကာရိတပစ္စယဿ ယောဂေ ‘‘ဏေ ဏယော ဏာပေ ဏာပယော စာ’’တိ ဣမေ စတ္တာရော ကာရိတပစ္စယာ. कारित प्रत्ययाच्या योगात 'णे, णय, णापे आणि णापय' हे चार कारित प्रत्यय आहेत. ဏေ ဏယာသုံ ဥဝဏ္ဏန္တာ,အာဒန္တာ ပစ္ဆိမာ ဒုဝေ; သေသတော စတုရောဒွေ ဝါ,ဏယောယေဝ အဓာတုတော. ‘णे’ आणि ‘णय’ हे प्रत्यय ‘उ’ वर्णाने अंत होणाऱ्या धातूंना लागतात, तर शेवटचे दोन (‘आपे’ आणि ‘आपय’) हे ‘आ’ वर्णाने अंत होणाऱ्या धातूंना लागतात. उर्वरित चार किंवा दोन प्रत्यय (‘णे’, ‘णय’ इत्यादी) धातू नसलेल्या शब्दांशिवाय इतर धातूंना लागतात. တတြ သာဝေတိ, သာဝယတိ. ဘာဝေတိ, ဘာဝယတိ, ဩဘာသေတိ, ဩဘာသယတိ. ဣမာနိ ကာရိတေ ဥဝဏ္ဏန္တဓာတုရူပါနိ. तेथे ‘सावेति’ (ऐकवतो), ‘सावयति’ (ऐकवतो); ‘भावेति’ (भावना करतो/वाढवतो), ‘भावयति’ (भावना करतो/वाढवतो); ‘ओभासेति’ (प्रकाशित करतो), ‘ओभासयति’ (प्रकाशित करतो). ही प्रयोजक (कारित) रूपांमधील ‘उ’ वर्णाने अंत होणाऱ्या धातूंची रूपे आहेत. ဒါပေတိ[Pg.375], ဒါပယတိ. ဟာပေတိ, ဟာပယတိ. နှာပေတိ, နှာပယတိ. နဟာပေတိ, နဟာပယတိ. အာကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ‘दापेति’ (द्यायला लावतो), ‘दापयति’ (द्यायला लावतो); ‘हापेति’ (कमी करवतो), ‘हापयति’ (कमी करवतो); ‘न्हापेति’ (आंघोळ घालतो), ‘न्हापयति’ (आंघोळ घालतो); ‘नहापेति’ (आंघोळ घालतो), ‘नहापयति’ (आंघोळ घालतो). ही ‘आ’ कारान्त धातूंची रूपे आहेत. သောသေတိ, သောသယတိ. သောသာပေတိ, သောသာပယတိ. ဃောသာပေတိ, ဃောသာပယတိ. အကာရန္တဓာတုရုပါနိ. ‘सोसेति’ (वाळवतो), ‘सोसयति’ (वाळवतो); ‘सोसापेति’ (वाळवायला लावतो), ‘सोसापयति’ (वाळवायला लावतो); ‘घोसापेति’ (घोषणा करायला लावतो), ‘घोसापयति’ (घोषणा करायला लावतो). ही ‘अ’ कारान्त धातूंची रूपे आहेत. မဂ္ဂေါ သံသာရတော လောကံ ဉာပေတိ, ဉာပယတိ. ဣဓာတုရူပါနိ နိဂ္ဂစ္ဆာပေတီတိ ဧတေသမတ္ထော. ဣမာနိ ဟိ နိပုဗ္ဗာယ ဣဓာတုယာ ဝသေန သမ္ဘူတာနိ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ. တထာ ဟိ သုဒ္ဓကတ္တုဘာဝေန မဂ္ဂေါ သယံ ဉာယတိ, သံသာရတော နိဂ္ဂစ္ဆတီတိ ဉာယောတိ ဝုစ္စတိ. ‘मार्ग संसारातून जगाला बाहेर काढतो’ या अर्थाने ‘ञापेति’ (जाणवून देतो), ‘ञापयति’ (जाणवून देतो) ही ‘इ’ धातूची रूपे आहेत. ‘निग्गच्छापेति’ (बाहेर काढतो) हा या शब्दांचा अर्थ आहे. कारण ही रूपे ‘नि’ उपसर्गासह ‘इ’ धातूच्या प्रभावाने निर्माण झालेली प्रयोजक (कारित) रूपे आहेत. तसेच, प्रयोजक भावामुळे मार्ग स्वतः जाणला जातो, संसारातून बाहेर पडतो, म्हणून त्याला ‘न्याय’ (ञाय) असे म्हटले जाते. ပါဝေတိ, ပါဝယတိ, ဥဓာတုရူပါနိ. ဝဒါပေတီတိ ဧတေသမတ္ထော. ဣမာနိ ဟိ ပပုဗ္ဗာယ ဥဓာတုယာ ဝသေန သမ္ဘူတာနိ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ. တထာ ဟိ ‘‘ယော အာတုမာနံ သယမေဝ ပါဝါ’’တိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒံ အာဟစ္စဘာသိတံ ဒိဿတိ. ‘पावेति’ (बोलवतो), ‘पावयति’ (बोलवतो) ही ‘उ’ धातूची रूपे आहेत. ‘वदापेति’ (बोलायला लावतो) हा या शब्दांचा अर्थ आहे. कारण ही रूपे ‘प’ उपसर्गासह ‘उ’ धातूच्या प्रभावाने निर्माण झालेली प्रयोजक (कारित) रूपे आहेत. तसेच, ‘जो स्वतःला स्वतःच बोलतो (प्रशंसा करतो)’ या वाक्यात ‘पावा’ हे शुद्ध कर्तापद स्पष्टपणे वापरलेले दिसते. ခေပေတိ, ခေပယတိ. ကင်္ခေတိ, ကင်္ခယတိ, ကင်္ခါပေတိ, ကင်္ခါပယတိ. အာစိက္ခာပေတိ, အာစိက္ခာပယတိ. ဣဝဏ္ဏန္တဓာတုရူပါနိ. ‘खेपेति’ (क्षय करतो/वेळ घालवतो), ‘खेपयति’ (क्षय करतो); ‘कङ्खेति’ (शंका घेतो), ‘कङ्खयति’ (शंका घेतो), ‘कङ्खापेति’ (शंका घ्यायला लावतो), ‘कङ्खापयति’ (शंका घ्यायला लावतो); ‘आचिक्खापेति’ (सांगायला लावतो), ‘आचिक्खापयति’ (सांगायला लावतो). ही ‘इ’ वर्णाने अंत होणाऱ्या धातूंची रूपे आहेत. ခိယေတိ, ခိယယတိ. မိလာယေတိ, မိလာယယတိ. ဧကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ‘खियेति’ (क्षीण होतो), ‘खिययति’ (क्षीण होतो); ‘मिलायेति’ (कोमेजतो), ‘मिलाययति’ (कोमेजतो). ही ‘ए’ कारान्त धातूंची रूपे आहेत. သိယေတိ, သိယယတိ. ဩကာရန္တဓာတုရူပါနိ. ‘सियेeti’ (शिवणकाम करतो), ‘सिययति’ (शिवणकाम करतो). ही ‘ओ’ कारान्त धातूंची रूपे आहेत. ပဗ္ဗတာယာယတိ, ပုတ္တိယာယတိ. အဓာတုနိဿိတာနိ ရူပါနိ. ဣမိနာ နယေန သေသာနိ အဝုတ္တာနိပိ ရူပါနိ သက္ကာ ဝိညာတုံ ဝိညုနာ ပါဠိနယညုနာတိ ဝိတ္ထာရော န ဒဿိတော. ဣတိ ကာရိတပစ္စယယောဂေါ သင်္ခေပေန ဝိဘာဝိတော. ‘पब्बतायायति’ (पर्वतासारखा आचरण करतो), ‘पुत्तियायति’ (पुत्रासारखा मानतो). ही नामधातूची (धातू नसलेल्या शब्दांवरून बनलेली) रूपे आहेत. या पद्धतीने, पाळी भाषेच्या नियमांचे ज्ञान असणाऱ्या विद्वानांना इतर न सांगितलेली रूपे देखील समजून घेणे शक्य आहे, म्हणून येथे अधिक विस्तार दाखवलेला नाही. अशा प्रकारे, प्रयोजक (कारित) प्रत्ययांचा संबंध थोडक्यात स्पष्ट केला आहे. ဣဒါနိ [Pg.376] သကာရိတေကကမ္မာဒီနိ ဗြူမ – आता आपण प्रयोजक रूपांमधील एककर्मक इत्यादींविषयी सांगू – အကမ္မကာ ဧကကမ္မာ, ဒွိကမ္မာ ဝါပိ ဟောန္တိ ဟိ; ကာရိတပစ္စယေ လဒ္ဓေ, သကမ္မာ စ ဒွိကမ္မကာ. अकर्मक धातू हे एककर्मक होतात, आणि एककर्मक धातू हे द्विकर्मक होतात; प्रयोजक (कारित) प्रत्यय लागल्यावर, अकर्मक धातू सकर्मक (एककर्मक) आणि सकर्मक धातू द्विकर्मक होतात. သယံ သောဓေတိ သော ဘူမိံ, သောဓာပေတိ ပရေမဟိံ; နရံ ကမ္မံ ကာရယတိ, ဝိညေယျံ ကမတော ဣဒံ. ‘तो स्वतः जमिनीची साफसफाई करतो’ (सकर्मक), ‘तो इतरांकडून जमीन साफ करून घेतो’ (द्विकर्मक); ‘तो माणसाकडून काम करवून घेतो’ (त्रिकर्मक), हे क्रमाने समजून घ्यावे. ဒွိကမ္မိကာ သမ္ဘဝန္တိ, တိကမ္မာ ဧတ္ထ ဒီပယေ; ‘‘ဣဿရော သေဝကံ ဂါမံ, အဇံ နာယေတိ’’ ဣစ္စပိ. येथे द्विकर्मक धातू त्रिकर्मक होतात, हे स्पष्ट करावे; जसे की, ‘मालक सेवकाकडून गावाला शेळी नेववतो’ (इस्सरो सेवकं गामं अजं नायेति). ‘‘နရော နရေန ဝါ ဂါမံ, အဇံ နာယေတိ’’ဣစ္စပိ; ကမ္မတ္ထဒီပကံယေဝ, ကရဏံ ဧတ္ထ ဣစ္ဆိတံ. ‘माणूस माणसाकडून गावाला शेळी नेववतो’ (नरो नरेन वा गामं अजं नायेति); येथे तृतीया विभक्तीचे ‘करण’ कारक हे कर्माचा अर्थ स्पष्ट करणारेच मानले गेले आहे. ဣတိ သကာရိတေကကမ္မာဒီနိ ဝိဘာဝိတာနိ. अशा प्रकारे, प्रयोजक रूपांमधील एककर्मक इत्यादींचे स्पष्टीकरण संपले. ဣဒါနိ ဦဟနီယရူပဂဏံ ဗြူမ – ဟောတိ, ဘောတိ, သမ္ဘောတိ, ဣဒံ ဘူဝါဒိရူပံ. သုမ္ဘောတိ, ပရိသုမ္ဘောတိ, ဣဒံ ရုဓာဒိဂူပံ. နိန္ဒတိ, ဝိနိန္ဒတိ, ဗန္ဓတိ, ဣဒံ ဘူဝါဒိရူပံ. ဆိန္ဒတိ, ဘိန္ဒတိ, ရုန္ဓတိ, ဣဒံ ရုဓာဒိရူပံ. ဒေတိ, နေတိ, ဝဒေတိ, အနွေတိ, ဣဒံ ဘူဝါဒိရူပံ. ရုန္ဓေတိ, ပဋိရုန္ဓေတိ, ဣဒံ ရုဓာဒိရူပံ. ဗုဒ္ဓေတိ, ပလိဗုဒ္ဓေတိ, ဣဒံ စုရာဒိရူပံ. ဇယတိ, သယတိ, ပလာယတိ, မိလာယတိ, ဂါယတိ, ဣဒံ ဘူဝါဒိရူပံ. ဟာယတိ, သာယတိ, နှာယတိ, ဣဒံ ဒိဝါဒိရူပံ. ကထယတိ, စိန္တယတိ, ဘာဇယတိ, ဣဒံ စုရာဒိရူပံ. ဂဗ္ဗတိ, ပဂဗ္ဗတိ, ဣဒံ ဘူဝါဒိရူပံ. ကုဗ္ဗတိ, ကြုဗ္ဗတိ, ဣဒံ တနာဒိရူပံ. ဟိနောတိ, စိနောတိ, ဣဒံ သွာဒိရူပံ. တနောတိ, သနောတိ, ကရောတိ, ဣဒံ တနာဒိရူပံ. စိန္တေတိ, စိန္တယတိ, ဣဒံ ကတ္တုရူပဉ္စေဝ ဟေတုကတ္တုရူပဉ္စ. ကန္တေတိ, ကန္တယတိ, ဣဒံ ဟေတုကတ္တုရူပမေဝ. ဘက္ခေတိ, ဘက္ခယတိ, ဝါဒေတိ, ဝါဒယတိ, ဣဒံ သုဒ္ဓကတ္တုရူပဉ္စေဝ ဟေတုကတ္တုရူပဉ္စ. မိယျတီတိ ကတ္တုပဒဉ္စေဝ ကမ္မပဒဉ္စ. ဘာဝေထာတိ ဗဟုဝစနဉ္စေဝ ဧကဝစနဉ္စ. သံယမိဿန္တိ အနာဂတဝစနဉ္စေဝ အတီတဝစနဉ္စ. အနုသာသတီတိ အာချာတဉ္စေဝ နာမိကဉ္စ. ဂစ္ဆံ ဝိဓမံ နိက္ခဏန္တိ နာမိကဉ္စေဝ [Pg.377] အာချာတဉ္စ. ဧတ္ထ အာချာတတ္တေ ဂစ္ဆန္တိ အနာဂတဝစနံ, ဝိဓမန္တိ အတီတဝစနံ, နိခဏန္တိ ပရိကပ္ပဝစနံ, သဗ္ဗံ ဝါ ဧတံ ပဒံ အနာဂတာဓိဝစနန္တိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတေဝ. ဣမိနာ နယေန အညာနိပိ ဦဟနီယပဒါနိ နာနပ္ပကာရတော ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဣမာနိ ပဒါနိ ဒုဗ္ဗိညေယျဝိသေသာနိ မန္ဒဗုဒ္ဓီနံ သမ္မောဟကရာနိ အာစရိယပါစရိယေ ပယိရုပါသိတွာ ဝေဒနီယာနီတိ ဦဟနီယရူပဂဏော ဝိဘာဝိတော. आता आपण तर्क करून समजून घेण्याच्या रूपांच्या समूहाविषयी (ऊहनीय रूपगण) सांगू – ‘होति’ (होतो), ‘भोति’ (होतो), ‘सम्भॉति’ (उत्पन्न होतो), हे भूवादि गणाचे रूप आहे. ‘सुम्भोति’ (मारतो), ‘परिसुम्भोति’ (चोहोबाजूने मारतो), हे रुधादि गणाचे रूप आहे. ‘निन्दति’ (निंदा करतो), ‘विनिन्दति’ (विशेष निंदा करतो), ‘बन्धति’ (बांधतो), हे भूवादि गणाचे रूप आहे. ‘छिन्दति’ (कापतो), ‘भिन्दति’ (फोडतो), ‘रुन्धति’ (रोखतो), हे रुधादि गणाचे रूप आहे. ‘देति’ (देतो), ‘नेति’ (नेतो), ‘वदेति’ (बोलतो), ‘अन्वेति’ (अनुसरण करतो), हे भूवादि गणाचे रूप आहे. ‘रुन्धेति’ (रोखतो), ‘पठिरुन्धेति’ (प्रतिकार करतो), हे रुधादि गणाचे रूप आहे. ‘बुद्धेति’ (जाणतो), ‘पलिबुद्धेति’ (बाधित करतो), हे चुरादि गणाचे रूप आहे. ‘जयति’ (जिंकतो), ‘सयति’ (झोपतो), ‘पलायति’ (पळून जातो), ‘मिलायति’ (कोमेजतो), ‘गायति’ (गातो), हे भूवादि गणाचे रूप आहे. ‘हायति’ (कमी होतो), ‘सायति’ (चव घेतो), ‘न्हायति’ (आंघोळ करतो), हे दिवादि गणाचे रूप आहे. ‘कथयति’ (सांगतो), ‘चिन्तयति’ (विचार करतो), ‘भाजयति’ (विभागणी करतो), हे चुरादि गणाचे रूप आहे. ‘गब्बति’ (गर्व करतो), ‘पगब्बति’ (धिटाई करतो), हे भूवादि गणाचे रूप आहे. ‘कुब्बति’ (करतो), ‘क्रुब्बति’ (करतो), हे तनादि गणाचे रूप आहे. ‘हिनोति’ (फेकतो/पाठवतो), ‘चिनोति’ (एकत्र करतो), हे स्वादि गणाचे रूप आहे. ‘तनोति’ (विस्तार करतो), ‘सनोति’ (मिळवतो), ‘करोति’ (करतो), हे तनादि गणाचे रूप आहे. ‘चिन्तेति’, ‘चिन्तयति’ हे कर्तृरूप आणि प्रयोजकरूप (कारितरूप) दोन्ही आहे. ‘कन्तेति’, ‘कन्तयति’ हे केवळ प्रयोजकरूपच आहे. ‘भक्खेति’, ‘भक्खयति’, ‘वादेति’, ‘वादयति’ हे कर्तृरूप आणि प्रयोजकरूप दोन्ही आहे. ‘मिय्यति’ (मरतो) हे कर्तृपद आणि कर्मपद दोन्ही आहे. ‘भावेथ’ हे बहुवचन आणि एकवचन दोन्ही आहे. ‘संयमिसन्ति’ हे भविष्यकाळ आणि भूतकाळ दोन्हीचे वाचक आहे. ‘अनुसासति’ हे क्रियापद (आख्यात) आणि नाम (नामिक) दोन्ही आहे. ‘गच्छं’, ‘विधमं’, ‘निक्खणन्ति’ हे नाम आणि क्रियापद दोन्ही आहेत. येथे क्रियापद म्हणून ‘गच्छन्ति’ हे भविष्यकाळ, ‘विधमन्ति’ हे भूतकाळ, ‘निखणन्ति’ हे विध्यर्थ (परिकल्प) दर्शवते, किंवा हे सर्व शब्द भविष्यकाळाचे वाचक आहेत असे म्हणणे देखील योग्यच आहे. या पद्धतीने इतरही तर्क करून समजून घेण्याचे शब्द वेगवेगळ्या प्रकारे योजले पाहिजेत. हे शब्द समजण्यास कठीण असून मंद बुद्धीच्या लोकांमध्ये संभ्रम निर्माण करणारे आहेत, म्हणून आचार्य आणि उपाध्यायांची सेवा करून ते शिकले पाहिजेत. अशा प्रकारे तर्क करून समजून घेण्याच्या रूपांचा समूह (ऊहनीय रूपगण) स्पष्ट केला आहे. ဣဒါနိ ဧကဂဏိကာဒီနိ ဝဒါမ – ဓာ ဓာရဏေ, ဘူဝါဒိဂဏိကဝသေနာယံ ဧကဂဏိကာ သကမ္မိကာ ဓာတု. ဘဂဝါ သကလလောကဿ ဟိတံ ဒဓာတိ ဝိဒဓာတိ, ပုရိသော အတ္ထံ သံဝိဓေတိ, နိဓိံ နိဓေတိ, ဣမာနိ သုဒ္ဓကတ္တရိ ဘဝန္တိ. ‘‘သံဝိဓာပေတိ, ဝိဓာပေတီ’’တိ ဣမာနိ ဟေတုကတ္တရိ ဘဝန္တိ. ကမ္မေ ပန ဘာဝေ စ ‘‘အနုဝိဓီယတီ’’တိအာဒီနိ ဘဝန္တိ. တထာ ဟိ ကမ္မေ ‘‘နိဓိ နာမ နိဓီယတီ’’တိ စ ‘‘ဓီယတိ ဓပိယတီတိ ဓေယျ’’န္တိ စ ရူပါနိ ဒိဿန္တိ. တတ္ထ ကမ္မေ ‘‘ကမ္မံ သတ္တေဟိ အနုဝိဓိယျတိ, ကမ္မာနိ သတ္တေဟိ အနုဝိဓိယျန္တိ. ဘော ကမ္မ တွံ သတ္တေဟိ အနုဝိဓိယျသိ, အဟံ ကမ္မံ သတ္တေဟိ အနုဝိဓိယျာမီ’’တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဘာဝေ ပန ‘‘သတ္တော ဒုက္ခံ အနုဝိဓိယျတိ, သတ္တာ ဒုက္ခံ အနုဝိဓိယျန္တိ, တော သတ္တ တွံ ဒုက္ခံ အနုဝိဓိယျသီ’’တိ ယောဇေတဗ္ဗံ. အယံ နယော အတိဝိယ သုခုမော ပါဠိနယာနုကူလော. आता आपण एकगणक इत्यादींविषयी सांगू – ‘धा’ हा धारण करण्याच्या अर्थातील, भूवादि गणाच्या नियमानुसार एकगणक सकर्मक धातू आहे. भगवान संपूर्ण जगाचे हित धारण करतात (दधाति), विधान करतात (विदधाति); माणूस अर्थाची व्यवस्था करतो (संविधेति), संपत्ती ठेवतो (निधेति); ही कर्तरी रूपे आहेत. ‘संविधापेति’ (व्यवस्था करवतो), ‘विधापेति’ (विधान करवतो) ही प्रयोजक (कारित) रूपे आहेत. कर्मणि आणि भावे प्रयोगात ‘अनुविधीयति’ इत्यादी रूपे होतात. तसेच कर्मणि प्रयोगात ‘निधी नावाचा ठेवला जातो’ (निधि नाम निधीयति) आणि ‘ठेवले जाते किंवा ठेवले जाण्यास योग्य ते धेय्य’ (धीयति धपियतीति धेय्यं) अशी रूपे दिसतात. तेथे कर्मणि प्रयोगात ‘प्राण्यांद्वारे कर्म केले जाते’ (कम्मं सत्तेहि अनुविधीयति), ‘प्राण्यांद्वारे कर्मे केली जातात’ (कम्मानि सत्तेहि अनुविधीयन्ति); ‘हे कर्मा, तू प्राण्यांद्वारे केला जातोस’ (भो कम्म त्वं सत्तेहि अनुविधीयसि), ‘मी प्राण्यांद्वारे कर्म केले जातो’ (अहं कम्मं सत्तेहि अनुविधीयामि) इत्यादी प्रकारे योजना करावी. भावे प्रयोगात ‘प्राणी दुःखाचे अनुसरण करतो’ (सत्तो दुक्खं अनुविधीयति), ‘प्राणी दुःखाचे अनुसरण करतात’ (सत्ता दुक्खं अनुविधीयन्ति), ‘हे प्राण्या, तू दुःखाचे अनुसरण करतोस’ (तो सत्त त्वं दुक्खं अनुविधीयसि) अशी योजना करावी. हा नियम अत्यंत सूक्ष्म आणि पाळी भाषेच्या नियमांना अनुकूल असा आहे. နာမိကပဒတ္တေ ‘‘ဓာတူ’’တိအာဒီနိ ဘဝန္တိ. တတ္ထ ဓာတူတိ သလက္ခဏံ ဒဓာတိ ဓာရေတီတိ ဓာတု. အဋ္ဌကထာသု ပန ‘‘သလက္ခဏဓာရဏတော ဒုက္ခဝိဓာနတော ဒုက္ခဓာနတော စ ဓာတူ’’တိ ဝုတ္တံ. ဓာတူတိ ပထဝီဓာတာဒိဓာတုယော. တတ္ထ သလက္ခဏဓာရဏတောတိ ယထာ တိတ္ထိယပရိကပ္ပိတော ပကတိ အတ္တာတိ ဧဝမာဒိကော သဘာဝတော နတ္ထိ, န ဧဝမေတာ, ဧတာ ပန သလက္ခဏံ သဘာဝံ ဓာရေန္တီတိ ဓာတုယော[Pg.378]. ဒုက္ခဝိဓာနတောတိ ဒုက္ခဿ ဝိဒဟနတော. ဧတာ ဟိ ဓာတုယော ကာရဏဘာဝေန ဝဝတ္ထိတာ ဟုတွာ ယထာ အယလောဟာဒိဓာတုယော အယလောဟာဒိအနေကပ္ပကာရံ သံသာရဒုက္ခံ ဝိဒဟန္တိ. ဒုက္ခဓာနတောတိ အနပ္ပကဿ ဒုက္ခဿ ဝိဓာနမတ္တတော အဝသဝတ္တနတော, တံ ဝါ ဒုက္ခံ ဧတာဟိ ကာရဏဘူတာဟိ သတ္တေဟိ အနုဝိဓီယတိ, တထာဝိဟိတဉ္စ တံ ဧတေသွေဝ ဓီယတိ ဌပိယတိ, ဧဝံ ဒုက္ခဓာနတော ဓာတုယော. အပိစ နိဇ္ဇီဝဋ္ဌော ဓာတဝေါတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ဘဂဝါ ‘‘ဆ ဓာတုယောသံ ဘိက္ခု ပုရိသော’’တိအာဒီသု ဇီဝသညာသမူဟနတ္ထံ ဓာတုဒေသနံ အကာသီတိ. ယော ပန တတ္ထ အမှေဟိ ဘာဝဋ္ဌာနေ ‘‘သတ္တော ဒုက္ခံ အနုဝိဓိယျတီ’’တိ တိပုရိသမဏ္ဍိတော ဧကဝစနဗဟုဝစနိကော ပဌမာဝိဘတ္တိပ္ပယောဂေါ ဝုတ္တော. သော – नामिकपदामध्ये 'धातू' इत्यादी असतात. तेथे 'धातू' म्हणजे जे स्वतःचे लक्षण धारण करते किंवा ठेवते, तो 'धातू' होय. परंतु अट्ठकथांमध्ये 'स्वतःचे लक्षण धारण करण्यामुळे, दुःखाची मांडणी (विधान) करण्यामुळे आणि दुःख धारण करण्यामुळे धातू' असे म्हटले आहे. धातू म्हणजे पृथ्वीधातू इत्यादी धातू होत. तेथे 'स्वतःचे लक्षण धारण करण्यामुळे' म्हणजे जसे तीर्थकरांनी (इतर पंथीयांनी) कल्पिलेला 'प्रकृती', 'आत्मा' इत्यादी स्वभावतः अस्तित्वात नाही, तसे हे (धातू) नाहीत; तर हे स्वतःचे लक्षण किंवा स्वभाव धारण करतात, म्हणून हे 'धातू' आहेत. 'दुःखाची मांडणी करण्यामुळे' म्हणजे दुःखाची निर्मिती करण्यामुळे. कारण हे धातू कारणरूपाने प्रस्थापित होऊन, जसे लोखंड-तांबे इत्यादी धातू लोखंड-तांब्यादी अनेक प्रकारच्या वस्तू बनवतात, तसेच हे धातू अनेक प्रकारचे संसारदुःख निर्माण करतात. 'दुःख धारण करण्यामुळे' म्हणजे विपुल दुःखाच्या केवळ विधानामुळे (मांडणीमुळे) ते वश न होणारे (अवशवर्तन) असल्यामुळे, किंवा ते दुःख या कारणभूत धातूंमुळे प्राण्यांद्वारे अनुभवले जाते (अनुविधीयते), आणि तसे विहित केलेले ते दुःख यांच्यामध्येच ठेवले जाते (धीयते/स्थापित केले जाते), अशा प्रकारे दुःख धारण करण्यामुळे हे 'धातू' आहेत. शिवाय, 'धातू' हे निर्जीव अर्थाने घेतले पाहिजेत. म्हणूनच भगवंतांनी 'भिक्खू, हा पुरुष सहा धातूंचा बनलेला आहे' इत्यादी उपदेशांमध्ये जीव-संज्ञेचे (आत्म्याच्या कल्पनेचे) समूळ उच्चाटन करण्यासाठी धातूंचा उपदेश केला. परंतु, तेथे आमच्याद्वारे भाव-अर्थामध्ये 'प्राणी दुःखाचे अनुकरण करतो (अनुविधीयते)' असा जो तिन्ही पुरुषांनी युक्त, एकवचन आणि बहुवचनाचा प्रथमा विभक्तीचा प्रयोग सांगितला आहे, तो — ‘‘ဒူသိတော ဂိရိဒတ္တေန, ဟယော သာမဿ ပဏ္ဍဝေါ; ပေါရာဏံ ပကတိံ ဟိတွာ, တဿေဝါနုဝိဓိယျတီ’’တိ စ 'गिरिदत्ताने दूषित केलेला, स्वामीचा पांढरा घोडा (पाण्डव); आपला जुना स्वभाव सोडून, त्याचेच अनुकरण करतो (अनुविधीयते)' आणि ‘‘မာတာ ဟိ တဝ ဣရန္ဓတိ, ဝိဓုရဿ ဟဒယံ ဓနိယျတီ’’တိ စ ‘‘တေ သံကိလေသိကာ ဓမ္မာ ပဟီယိဿန္တီ’’တိ စ ဣမာသံ ပါဠီနံ ဝသေန သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗော. တတ္ထ ပဏ္ဍဝေါ နာမ အဿော ဂိရိဒတ္တနာမကဿ အဿဂေါပကဿ ပကတိံ အနုဝိဓိယျတိ အနုကရောတီတိ အတ္ထော. ဧတ္ထ စ ယဒိ ကတ္တုပဒံ ဣစ္ဆိတံ သိယာ, ‘‘အနုဝိဒဓာတီ’’တိ ပါဠိ ဝတ္တဗ္ဗာ သိယာ. ယဒိ ကမ္မပဒံ ဣစ္ဆိတံ သိယာ, ‘‘ပဏ္ဍဝေနာ’’တိ တတိယန္တံ ကတ္တုပဒံ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ, ဧဝံ အဝစနေန ‘‘အနုဝိဓိယျတီ’’တိ ဣဒံ ဘာဝပဒန္တိ သိဒ္ဓံ. န ကေနစိ ဧတ္ထ ဝတ္တုံ သက္ကာ ‘‘ဒိဝါဒိဂဏေ ကတ္တရိ ဝိဟိတယပစ္စယဿ ဝသေန ဝုတ္တံ ဣဒံ ရူပ’’န္တိ, ဓာဓာတုယာ ဒိဝါဒိဂဏေ အပ္ပဝတ္တနတော, ဧကန္တဘူဝါဒိဂဏိကတ္တာ စ. ဒုတိယပ္ပယောဂေ ပန ယဒိ ကတ္တုပဒံ ဣစ္ဆိတံ သိယာ, ‘‘ဓနုတေ’’တိ ပါဠိ ဝတ္တဗ္ဗာ သိယာ. ယဒိ ကမ္မပဒံ ဣစ္ဆိတံ သိယာ, ‘‘ဓာတုယာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ[Pg.379]. ဧဝံ အဝစနေန ‘‘ဓနိယျတီ’’တိ ဣဒမ္ပိ ဘာဝပဒန္တိ သိဒ္ဓံ. ဧတ္ထ ‘‘ဓနိယျတီတိ ပတ္ထေတိ, ဣစ္ဆတီတိ အတ္ထော’’တိ အဋ္ဌကထာယံ ဝုတ္တံ. ‘‘ဓနု ယာစနေ’’တိ ဓာတု ဧသာ ဧကန္တေန တနာဒိဂဏေယေဝ ဝတ္တတိ. တတိယပ္ပယောဂေ ‘‘ပဟီယိဿန္တီ’’တိ ယဒိ ဘူဝါဒိဂဏေ ‘‘ဟာ စာဂေ’’တိ ဓာတုယာ ရူပံ သိယာ, ကတ္တရိ ‘‘ပဇဟိဿန္တီ’’တိ ရူပံ သိယာ, ‘‘ကသ္မာ နော ပဇဟိဿတီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. ကမ္မပဒံ ပန ‘‘ပဇဟိယိဿန္တီ’’တိ သိယာ. ယသ္မာ ‘‘ပဟီယိဿန္တီ’’တိ ဣဒံ ဒိဝါဒိဂဏေ ‘‘ဟာ ပရိဟာနိယ’’န္တိ ဓာတုယာ ရူပတ္တာ ‘‘ပဟာယိဿန္တီ’’တိ ကတ္တုပဒရူပံ သိယာ ‘‘အာဇညော ကုရုတေ ဝေဂံ, ဟာယန္တိ တတ္ထ ဝဠဝါ’’တိ အကမ္မကဿ ကတ္တုပဒရူပဿ ဒဿနတော, တသ္မာ ‘‘ပဟာယိဿန္တီ’’တိ အဝတွာ ‘‘ပဟီယိဿန္တီ’’တိ ဝစနေန ယပစ္စယော ဘာဝေ ဝတ္တတီတိ ဉာယတိ. 'हे इरंधती, तुझी माता विधुराचे हृदय इच्छिते (धनीयती)' आणि 'ते संक्लेशिक (मळकट/अशुद्ध) धर्म नष्ट होतील (पहीयिस्संती)' या पाळी सूत्रांच्या आधारे याचा सारांश समजून घेतला पाहिजे. तेथे 'पाण्डव' नावाचा घोडा 'गिरिदत्त' नावाच्या अश्वपालाच्या स्वभावाचे अनुकरण करतो (अनुविधीयती) असा अर्थ आहे. आणि येथे जर कर्तृपद अपेक्षित असते, तर 'अनुविदधाती' अशी पाळी भाषा असावी लागली असती. जर कर्मपद अपेक्षित असते, तर 'पाण्डवेन' असे तृतीयान्त कर्तृपद म्हणावे लागले असते, अशा प्रकारे न बोलल्यामुळे 'अनुविधीयती' हे भावपद आहे हे सिद्ध होते. येथे कोणीही असे म्हणू शकत नाही की 'दिवादिगणात कर्त्यामध्ये विहित केलेल्या 'य' प्रत्ययाच्या बळावर हे रूप सांगितले आहे', कारण 'धा' धातूचा दिवादिगणात प्रवेश होत नाही आणि तो पूर्णपणे भ्वादिगणाचाच आहे. दुसऱ्या प्रयोगात जर कर्तृपद अपेक्षित असते, तर 'धनुते' अशी पाळी म्हणावी लागली असती. जर कर्मपद अपेक्षित असते, तर 'धातुया' असे म्हणावे लागले असते. अशा प्रकारे न बोलल्यामुळे 'धनीयती' हे देखील भावपद आहे हे सिद्ध होते. येथे 'धनीयती म्हणजे प्रार्थना करतो, इच्छा करतो असा अर्थ आहे' असे अट्ठकथेमध्ये म्हटले आहे. 'धनु याचने' हा धातू निश्चितपणे तनादिगणातच चालतो. तिसऱ्या प्रयोगात 'पहीयिस्संती' हे जर भ्वादिगणातील 'हा चागे' (त्याग करणे) या धातूचे रूप असते, तर कर्त्यामध्ये 'पजहिस्संती' असे रूप झाले असते, जसे 'कस्मा नो पजहिस्सती' (तो आमचा त्याग का करणार नाही?) यामध्ये आहे. कर्मपद तर 'पजहियिस्संती' असे झाले असते. ज्याअर्थी 'पहीयिस्संती' हे दिवादिगणातील 'हा परिहानियं' (ऱ्हास होणे) या धातूचे रूप असल्यामुळे 'पहायिस्संती' असे कर्तृपदाचे रूप झाले असते, जसे 'आजन्य (उत्कृष्ट घोडा) वेग करतो, तेथे घोड्या मागे पडतात (हायंती)' या प्रयोगात कर्तृपदाचे रूप दिसते, म्हणून 'पहायिस्संती' असे न म्हणता 'पहीयिस्संती' या वचनाने 'य' प्रत्यय भाव प्रयोगात आहे हे समजते. ကေစိ ပနေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘သော ပဟီယိဿတိ. တေ သံကိလေသိကာ ဓမ္မာ ပဟီယိဿန္တိ. ရူပံ ဝိဘဝိယျတိ. အဂ္ဂိဇာဟိ ပုဗ္ဗေဝ ဘူယတေ’တိအာဒီသု ယပစ္စယော ကမ္မေယေဝ ဝိဟိတော, န ဘာဝေ. ကမ္မကတ္တုဝသေန ဟိ ဣမေ ပယောဂါ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ, သယမေဝ ပီယတေ ပါနီယံ, သယမေဝ ကဋော ကရိယတေတိ ပယောဂါ ဝိယာ’’တိ. တံ န, ဧဝဉှိ သတိ ‘‘ပဇဟိယိဿန္တီ’’တိအာဒီနိ သကမ္မကဓာတုရူပါနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ ‘‘ပီယတေ ကရိယတေ’’တိ ရူပါနိ ဝိယ. ဧတ္ထ ပန ဘာဝဋ္ဌာနေ ကတ္တုနော ဌိတဘာဝေါ ဟေဋ္ဌာ နာနပ္ပကာရေန ဒဿိတောတိ န ဝုတ္တော. ယေ သဒ္ဒသတ္ထေ မတံ ဂဟေတွာ သာသနိကာ ဂရူ ဘာဝေ အဒဗ္ဗဝုတ္တိနော ဘာဝဿေကတ္တာ ဧကဝစနမေဝ, တဉ္စ ပဌမပုရိသဿေဝ ‘‘ဘူယတေ ဒေဝဒတ္တေန ဒေဝဒတ္တေန သမ္ပတ္တိံ အနုဘဝနန္တိ အတ္ထော’’တိ ပယောဂဉ္စ တဒတ္ထယောဇနဉ္စ [Pg.380] ဝဒန္တိ. တေသံ တံ ဝစနံ ပါဠိယာ, အဋ္ဌကထာဒီဟိ စ န သမေတိ, တသ္မာ ယထာဝုတ္တောယေဝတ္ထော အာယသ္မန္တေဟိ ဓာရေတဗ္ဗော. परंतु येथे काही जण असे म्हणू शकतात की, 'तो नष्ट होईल (पहीयिस्सती). ते संक्लेशिक धर्म नष्ट होतील (पहीयिस्संती). रूप नष्ट होईल (विभवीयती). अग्नीच्या ज्वाळांद्वारे पूर्वीच अस्तित्वात आले जाते (भूयते)' इत्यादींमध्ये 'य' प्रत्यय कर्मामध्येच विहित केला आहे, भावे प्रयोगात नाही. कारण हे प्रयोग कर्मकर्तरी (कर्मवद्भाव) मानले पाहिजेत, जसे 'पाणी स्वतःच प्यायले जाते (पीयते)', 'चटई स्वतःच बनवली जाते (करियते)' या प्रयोगांप्रमाणे.' ते योग्य नाही, कारण असे असल्यास 'पीयते, करियते' या रूपांप्रमाणे 'पजहियिस्संती' इत्यादी सकर्मक धातूंची रूपे म्हणावी लागली असती. परंतु येथे भाव-अर्थात कर्त्याची स्थिती खाली विविध प्रकारे दर्शविली असल्यामुळे ती पुन्हा सांगितली नाही. जे व्याकरणशास्त्रातील मत स्वीकारून, शासनातील (धम्मातील) आदरणीय आचार्य भावे प्रयोगात द्रव्यरहित भावाच्या एकत्वामुळे केवळ एकवचनच आणि तेही केवळ प्रथम पुरुषाचेच असते असे मानून 'देवदत्ताद्वारे अस्तित्वात आले जाते (भूयते देवदत्तेन) म्हणजे देवदत्त संपत्तीचा अनुभव घेतो असा अर्थ आहे' असा प्रयोग आणि त्याचा अर्थ लावतात; त्यांचे ते वचन पाळी आणि अट्ठकथा इत्यादींशी सुसंगत नाही. म्हणून, आयुष्यमानांनी वर सांगितलेलाच अर्थ लक्षात ठेवावा. ဇရ ရောဂေ. ဇရတိ, ဇရိယျတိ. ဇရဝယောဟာနိယံ. ဇီရတိ, ဇိယျတိ. ဣမာ ဒွေပိ ဘူဝါဒိ ဂဏိကဝသေန ဧကဂဏိကာ. တာသံ အယံ သာဓာရဏရူပဝိဘာဝနာ. ‘‘ယေန စ သန္တပ္ပတိ, ယေန စ ဇရိယျတီ’’တိအာဒိ. တတ္ထ ယေန စ ဇရိယျတီတိ ယေန တေဇောဂတေန ကုပိတေန အယံ ကာယော ဧကာဟိကာဒိဇရရောဂေန ဇရိယျတိ ဇရတိ. အထ ဝါ ယေန စ ဇရိယတိ ယေန အယံ ကာယော ဇီရတိ ဣန္ဒြိယဝေကလျတံ ဗလက္ခယံ ပလိတဝလိတာဒိဉ္စ ပါပုဏာတိ. 'जर्' हा धातू रोगाच्या अर्थात आहे. 'जरती', 'जरिय्यती' अशी रूपे होतात. 'जर्' वयोवृद्धी किंवा ऱ्हासाच्या अर्थात आहे. 'जीरती', 'जिय्यती' अशी रूपे होतात. हे दोन्ही धातू भ्वादिगणाच्या नियमानुसार एकाच गणाचे आहेत. त्यांचे हे सामान्य रूप स्पष्टीकरण आहे: 'ज्यामुळे तो संतप्त होतो, आणि ज्यामुळे तो जर्जर होतो (जरिय्यती)' इत्यादी. तेथे 'ज्यामुळे तो जर्जर होतो' म्हणजे ज्या प्रकोपित झालेल्या तेजोधातूमुळे (उष्णतेमुळे) हा शरीररूपी देह एका दिवसाच्या तापासारख्या ज्वररोगाने जर्जर होतो (जरिय्यती/जरती). किंवा 'ज्यामुळे तो जर्जर होतो' म्हणजे ज्याच्यामुळे हा देह जीर्ण होतो, इंद्रियांची दुर्बलता, शक्तीचा ऱ्हास आणि केस पांढरे होणे, त्वचेवर सुरकुत्या पडणे इत्यादी अवस्थेला प्राप्त होतो. မရ ပါဏစာဂေ. ဘူဝါဒိဂဏိကောယံ အကမ္မကော စ. သတ္တော မရတိ, မိယျတိ. ကိဉ္စာပိ အယံ ဓာတု ‘‘မရ ပါဏစာဂေ’’တိ ဝစနတော သကမ္မကော ဝိယ ဒိဿတိ, တထာပိ ‘‘ပုတ္တော မရတိ. ကိစ္ဆံ ဝတာယံ လောကော အာပန္နော ဇာယတိ စ ဇိယျတိ စ မိယျတိ စာ’’တိ ဧဝမာဒီနံ ကမ္မရဟိတပ္ပယောဂါနံ ဒဿနတော အကမ္မကောယေဝါတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အတ္ထယောဇနာနယေန ပန မရတီတိ ပါဏံ စဇတီတိ ကမ္မံ အာနေတွာ ကထေတုံ လဗ္ဘတိ. ‘‘မရတိ, မိယတီ’’တိ ဣမာနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ, ‘‘သတ္တော သတ္တံ မာရေတိ, မာရယတိ, မာရာပေတိ, မာရာပယတီ’’တိ ဣမာနိ ကာရိတပဒသင်္ခါတာနိ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ. ဧတ္ထ စ ယော အမတံ သတ္တံ မရဏံ ပါပေတိ, သော ဝဓကော မာရေတိ မာရယတိ မာရာပေတိ မာရာပယတီတိ စ ဝုစ္စတိ. သတ္တော သတ္တေဟိ မာရိယတိ မာရာပိယတီတိ ဣမာနိ ကမ္မပဒါနိ. ဘာဝပဒမပ္ပသိဒ္ဓံ. ဧဝမညတြာပိ ပသိဒ္ဓတာ စ အပ္ပသိဒ္ဓတာ စ ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗာ. 'मर्' हा धातू प्राणत्यागाच्या अर्थात आहे. हा भ्वादिगणाचा आणि अकर्मक धातू आहे. प्राणी मरतो (मरती, मिय्यती). जरी हा धातू 'मर् प्राणत्यागे' या वचनामुळे सकर्मक असल्यासारखा दिसतो, तरीही 'पुत्र मरतो. हा लोक खरोखरच कष्टाला प्राप्त झाला आहे, जो जन्मतो, वृद्ध होतो आणि मरतो (मिय्यती)' इत्यादी कर्मरहित प्रयोगांच्या दर्शनावरून हा अकर्मकच आहे असे मानले पाहिजे. परंतु अर्थ लावण्याच्या पद्धतीने 'मरतो म्हणजे प्राणाचा त्याग करतो' असे कर्माला आणून सांगता येते. 'मरती, मियती' ही शुद्ध कर्तृपदे आहेत; 'प्राणी प्राण्याला मारतो (मारेती, मारयती, मारापेती, मारापयती)' ही कारितपदे म्हणून ओळखली जाणारी हेतुकर्तृपदे आहेत. आणि येथे जो न मरणार्या प्राण्याला मरणाप्रत पोहोचवतो, तो वधक 'मारतो (मारेती, मारयती, मारापेती, मारापयती)' असे म्हटले जाते. 'प्राणी प्राण्यांद्वारे मारला जातो (मारियती, मारापियती)' ही कर्मपदे आहेत. भावपद अप्रसिद्ध आहे. अशा प्रकारे इतर ठिकाणीही प्रसिद्धी आणि अप्रसिद्धी तपासून पाहिली पाहिजे. ခါဒ ဘက္ခဏေ. အယံ ပန ဘူဝါဒိဂဏိကဝသေန ဧကဂဏိကော သကမ္မကော ဓာတု. ခါဒတိ, သင်္ခါဒတိ, ဣမာနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ[Pg.381]. ပုရိသော ပုရိသေန ပုရိသံ ဝါ ပူဝံ ခါဒေတိ ခါဒယတိ ခါဒါပေတိ ခါဒါပယတိ, ဣမာနိ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ. ဧတ္ထ စ ယော အခါဒန္တံ ခါဒန္တံ ဝါ ခါဒါဟီတိ ပယောဇေတိ, သော ခါဒါပကော ခါဒေတိ ခါဒယတိ ခါဒါပေတိ ခါဒါပယတီတိ စ ဝုစ္စတိ. ခဇ္ဇတိ, သံခဇ္ဇတိ, သင်္ခါဒိယတိ. ဣမာနိ ကမ္မပဒါနိ. အတြပနာယံ ပါဠိ ‘‘အတီတံ ပါဟံ အဒ္ဓါနံ ရူပေန ခဇ္ဇိံ, သေယျထာပါဟံ ဧတရဟိ ပစ္စုပ္ပန္နေန ရူပေန ခဇ္ဇာမိ. အဟဉ္စေဝ ခေါ ပန အနာဂတံ ရူပံ အဘိနန္ဒေယျံ, အနာဂတေနပါဟံ ရူပေန ခဇ္ဇေယျံ, သေယျထာပေတရဟိ ခဇ္ဇာမီ’’တိ. ဘာဝပဒံ န လဗ္ဘတိ သကမ္မကတ္တာ ဣမဿ ဓာတုဿ. ဘူဝါဒိဂဏော. အယံ နာမဓာတု ဧကန္တရုဓာဒိဂဏိကောတိ အပ္ပသိဒ္ဓေါ. 'खाद' (धातू) खाण्याच्या (भक्षण करण्याच्या) अर्थात आहे. हा भूवादिगणाच्या नियमानुसार एकगणी, सकर्मक धातू आहे. 'खादति' (खातो), 'संखादति' (चावून खातो), ही शुद्ध कर्तृपदे आहेत. 'पुरुष दुसऱ्या पुरुषाकडून किंवा पुरुषाला वडा (पिष्टक) खाऊ घालतो' (खादेति, खादयति, खादापेति, खादापयति), ही प्रयोजक कर्तृपदे (हेतुकर्तृपदे) आहेत. आणि येथे जो न खाणाऱ्याला किंवा खाणाऱ्याला 'खा!' अशी प्रेरणा देतो, तो 'खादापक' (खाऊ घालणारा) म्हटला जातो आणि 'खादेति', 'खादयति', 'खादापेति', 'खादापयति' असे म्हटले जाते. 'खज्जति' (खाल्ले जाते), 'संखज्जति', 'संखादियति', ही कर्मपदे आहेत. येथे ही पालि (वचन) आहे - "भूतकाळात मी रूपाने खाल्ला गेलो (पीडित झालो), जसा मी आता वर्तमानकाळात रूपाने खाल्ला जात आहे. जर मी अनागत (भविष्यातील) रूपाचे अभिनंदन केले (त्यात आनंद मानला), तर मी भविष्यातही रूपाने खाल्ला जाईन, जसा मी आता खाल्ला जात आहे." या धातूच्या सकर्मकत्वामुळे भावपद (भावे प्रयोग) मिळत नाही. भूवादिगण. हा नामधातू एकांतराने रुधादिगणाचा आहे असे समजावे. ဒိဝါဒိဂဏေ တာ ပါလနေ. လောကံ တာယတိ သန္တာယတိ. ဣမာနိ သကမ္မကာနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ. ဟေတုကတ္တုပဒံ ပန ကမ္မပဒဉ္စ ဘာဝပဒဉ္စ အပ္ပသိဒ္ဓါနိ. दिवादिगणात 'ता' (धातू) रक्षणाच्या (पालनाच्या) अर्थात आहे. 'लोकाचे रक्षण करतो' (लोकं तायति संतायति). ही सकर्मक शुद्ध कर्तृपदे आहेत. प्रयोजक कर्तृपद, कर्मपद आणि भावपद हे (इतर उदाहरणांप्रमाणे) समजून घ्यावेत. သုဓ သံသုဒ္ဓိယံ. စိတ္တံ သုဇ္ဈတိ ဝိသုဇ္ဈတိ. ဣမာနိ အကမ္မကာနိ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ. သောဓေတိ, သောဓယတိ, သောဓာပေတိ, သောဓာပယတိ, ဣမာနိ ဟေတုကတ္တုရူပါနိ. ဧတ္ထ စ ယော အသုဒ္ဓံ ဌာနံ သုဒ္ဓံ ကရောတိ, သော သောဓကော သောဓေတိ, သောဓယတီတိ ဝုစ္စတိ, ဧသ နယော အညတြာပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု. ယော ပန အသုဒ္ဓဋ္ဌာနံ သယံ အသောဓေတွာ ‘‘တွံ သောဓေဟီ’’တိ အညံ ပယောဇေတိ, သော သောဓာပကော သောဓာပေတိ သောဓာပယတီတိ ဝုစ္စတိ. ဧသ နယော အညတြာပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု. တထာ ဟိ ‘‘ကာရေတိ, ကာရယတိ, ကာရာပေတိ, ကာရာပယတီ’’တိအာဒီသု အယံ နယော န လဗ္ဘတိ, ဧဝံ လဗ္ဘမာနနယော စ အလဗ္ဘမာနနယော စ သဗ္ဗတ္ထ ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗော. ဣမာ ပနေတ္ထ ပါဠိယော – 'सुध' (धातू) पूर्ण शुद्धीच्या (संशुद्धीच्या) अर्थात आहे. 'चित्त शुद्ध होते, विशुद्ध होते' (चित्तं सुज्झति विसुज्झति). ही अकर्मक शुद्ध कर्तृपदे आहेत. 'सोधेति', 'सोधयति', 'सोधापेति', 'सोधापयति', ही प्रयोजक (हेतु) रूपे आहेत. आणि येथे जो अशुद्ध स्थान शुद्ध करतो, तो 'शोधक' (शुद्ध करणारा) म्हटला जातो आणि 'सोधेति', 'सोधयति' असे म्हटले जाते; हाच नियम इतर अशाच ठिकाणीही लागू होतो. परंतु जो अशुद्ध स्थान स्वतः शुद्ध न करता "तू शुद्ध कर!" अशी दुसऱ्याला प्रेरणा देतो, तो 'सोधापक' (शुद्ध करवून घेणारा) म्हटला जातो आणि 'सोधापेति', 'सोधापयति' असे म्हटले जाते. हाच नियम इतर अशाच ठिकाणीही लागू होतो. कारण की, 'कारेति, कारयति, कारापेति, कारापयति' इत्यादींमध्ये हा नियम मिळत नाही; अशा प्रकारे लागू होणारा नियम आणि लागू न होणारा नियम सर्वत्र तपासून पाहिला पाहिजे. या संदर्भात खालील पालि (वचने) आहेत - ‘‘ပစ္စန္တဒေသဝိသယေ, နိမန္တေတွာ တထာဂတံ; တဿ အာဂမနံ မဂ္ဂံ, သောဓေန္တိ တုဋ္ဌမာနသာ’’တိ စ “प्रत्यंत देशात (सीमावर्ती भागात) तथागतांना निमंत्रित करून, प्रसन्न मनाने त्यांच्या येण्याचा मार्ग ते शुद्ध (साफ) करतात.” आणि ‘‘မဂ္ဂံ [Pg.382] သောဓေမဟံ တဒါ’’တိ စ. ဣမာ ဟိ ပါဠိယော သဟတ္ထာ သောဓနံ သန္ဓာယ ဝုတ္တာ. ‘‘အာယသ္မာ ပိလိန္ဒဝစ္ဆော ရာဇဂဟေ ပဗ္ဘာရံ သောဓာပေတိ လေဏံ ကတ္တုကာမော’’တိ ပန ပါဠိ, ‘‘ကိံ ဘန္တေ ထေရော ကာရာပေတီ’’တိ, ‘‘ပဗ္ဘာရံ မဟာရာဇ သောဓာပေမိ လေဏံ ကတ္တကာမော’’တိ စ ပါဠိ. ဣမာ ပရေဟိ သောဓာပနံ သန္ဓာယ ဝုတ္တာ. ‘‘ကဿ သောဓိယတိ မဂ္ဂေါ’’တိ ဣဒံ ကမ္မပဒံ, ဘာဝပဒံ ပန အပ္ပသိဒ္ဓံ. ဣမိနာ နယေန ယာဝ စုရာဒိဂဏာ ယောဇေတဗ္ဗံ. “तेव्हा मी मार्ग शुद्ध (साफ) केला.” आणि ही पालि वचने स्वतःच्या हाताने शुद्ध करण्याच्या (साफ करण्याच्या) संदर्भात म्हटली आहेत. “आयुष्यमान पिलिन्दवच्छ राजगृहात लेणे (गुहा) बनवण्याच्या इच्छेने डोंगर-उतार (पब्भार) साफ करवून घेत आहेत,” ही पालि, “भन्ते, थेर काय करवून घेत आहेत?” “महाराज, लेणे बनवण्याच्या इच्छेने मी डोंगर-उतार साफ करवून घेत आहे,” ही पालि. ही वचने दुसऱ्यांकडून साफ करवून घेण्याच्या संदर्भात म्हटली आहेत. “कोणासाठी मार्ग साफ केला जात आहे?” (कस्स सोधियति मग्गो) हे कर्मपद आहे, आणि भावपद (भावे प्रयोग) समजून घ्यावे. या नियमाने चुरादिगणापर्यंत योजना करावी. ဒွိဂဏိကတ္တေ သုဘ သောဘေ. သောဘတိ ဝတာယံ ပုရိသော. သုဘ ပဟာရေ. ယော နော ဂါဝေါဝ သုမ္ဘတိ သုမ္ဘောတိ ဣစ္စပိ ဒိဿတိ. ‘‘သုမ္ဘောတီ’’တိ စ ကစ္စာယနမတေ ရူပံ, ဣမာနိ ကတ္တုပဒါနိ. နဂရံ သောဘေတိ, သောဘယတိ. ပုရိသော ပုရိသေ စောရံ သုမ္ဘေတိ, သုမ္ဘယတိ, သုမ္ဘာပေတိ, သုမ္ဘာပယတိ. ဣမာနိ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ. ကမ္မဘာဝပဒါနိ လဗ္ဘမာနာလဗ္ဘမာနဝသေန ယထာသမ္ဘဝံ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဘူဝါဒိရုဓာဒိဂဏိကရူပါနိ. दोन गणांमध्ये असण्याच्या संदर्भात, 'सुभ' (धातू) शोभून दिसण्याच्या (शोभे) अर्थात आहे. 'हा पुरुष खरोखर शोभून दिसतो' (सोभति वतायं पुरिसो). 'सुभ' (धातू) प्रहाराच्या (मारण्याच्या) अर्थात आहे. 'जो आमच्या बैलाप्रमाणे मारतो (सुम्भति/सुम्भोति)' असे दिसते. आणि 'सुम्भोति' हे कच्चायनाच्या मते रूप आहे; ही कर्तृपदे आहेत. 'नगर सुशोभित करतो' (नगरं सोभेति, सोभयति). 'पुरुष दुसऱ्या पुरुषाकडून चोराला मारवतो' (पुरिसो पुरिसे चोरं सुम्भेति, सुम्भayati, सुम्भापेति, सुम्भापयति). ही प्रयोजक कर्तृपदे आहेत. कर्मपदे आणि भावपदे उपलब्ध असणे किंवा नसणे यानुसार यथासंभव योजावीत. ही भूवादि आणि रुधादिगणाची रूपे आहेत. ပစ ပါကေ. ပုရိသော ဘတ္တံ ပစတိ. နေရယိကော နိရယေ ပစ္စတိ. ကမ္မံ ပစ္စတိ. ဘတ္တံ ပစ္စတိ. ပါရမိယော ပရိပစ္စန္တိ. ဖလာနိ ပရိပစ္စန္တိ, ပက္ကာနိ ဟောန္တီတိ အတ္ထော. ဂရဝေါ ပန – 'पच' (धातू) शिजवण्याच्या किंवा पिकण्याच्या (पाके) अर्थात आहे. 'पुरुष भात शिजवतो' (पुरिसो भत्तं पचति). 'नारकीय प्राणी नरकात शिजतो (यातना भोगतो)' (नेरयिको निरये पच्चति). 'कर्म परिपक्व होते' (कम्मं पच्चति). 'भात शिजतो' (भत्तं पच्चति). 'पारमिता परिपक्व होतात' (पारमियो परिपच्चन्ति). 'फळे पिकतात' (फलानि परिपच्चन्ति), म्हणजेच ती पक्व होतात असा अर्थ आहे. परंतु आदरणीय आचार्य तर - ဉာဏယုတ္တဝရံ တတ္ထ, ဒတွာ သန္ဓိံ တိဟေတုကံ; ပစ္ဆာ ပစ္စတိ ပါကာနံ, ပဝတ္တေ အဋ္ဌကေ ဒုဝေတိ စ – “तेथे ज्ञानयुक्त श्रेष्ठ तिहेतुक प्रतिसंधी देऊन, नंतर प्रवृत्तीमध्ये (विपाकांच्या उत्पत्तीत) आठ विपाकांपैकी दोन विपाक परिपक्व होतात.” आणि - ‘‘အသင်္ခါရံ သသင်္ခါရ-ဝိပါကာနိ န ပစ္စတီ’’တိ စ ဧဝံ ပစတိပဒဿ ဒွိဂဏိကရူပဿ သကမ္မကတ္တံ ဣစ္ဆန္တိ. ဧဝံ ပန သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ ကုတော လဗ္ဘာ. တေပိဋကေ ဟိ ဗုဒ္ဓဝစနေ ‘‘ကပ္ပံ နိရယမှိ ပစ္စတိ. ယာဝ ပါပံ န ပစ္စတိ. နိရယမှိ [Pg.383] အပစ္စိ သော’’တိ ဧဝံ အကမ္မကတ္တံယေဝ ဒိဿတိ. ဧတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘နနု ပစ ပါကေ’တိ အယံ ဓာတု သကမ္မကော, တေန ‘ပစ္စတီ’တိ ပဒဿ ဒိဝါဒိဂဏိကရူပဿပိ သတော သကမ္မကတ္တံ ယုဇ္ဇတိ, တသ္မာယေဝ ‘ပစ္စတိ ပါကာနံ ပဝတ္တေ အဋ္ဌကေ ဒုဝေ’တိအာဒီသု ဝုတ္တ’’န္တိ. ဧတ္ထ ဝုစ္စတေ – ယထာ ‘‘ဆိဒိ ဒွိဓာကရဏေ, ဘိဒိ ဝိဒါရဏေ’’တိ ဓာတူနံ ရုဓာဒိဂဏေ ပဝတ္တာနံ ‘‘ရုက္ခံ ဆိန္ဒတိ, ဘိတ္တိံ ဘိန္ဒတီ’’တိ ရူပပဒါနံ သကမ္မကတ္တေပိ သတိ ဒိဝါဒိဂဏံ ပတ္တာနံ တေသံ ဓာတူနံ ‘‘ဥဒကံ ဆိဇ္ဇတိ, ဃဋော ဘိဇ္ဇတီ’’တိ ရူပပဒါနိ အကမ္မကာနိယေဝ ဘဝန္တိ, ယထာ ဘူဝါဒိဂဏေ ပဝတ္တဿ ပစဓာတုဿ ‘‘ဘတ္တံ ပစတီ’’တိ ရူပပဒဿ သကမ္မကတ္တေပိ သတိ ဒိဝါဒိဂဏံ ပတ္တဿ ‘‘နိရယေ ပစ္စတိ, ကမ္မာနိ ဝိပစ္စန္တီ’’တိ ရူပပဒါနိ အကမ္မကာနိယေဝ ဘဝန္တိ. “असंस्कारिक आणि ससंस्कारिक विपाक परिपक्व होत नाहीत,” अशा प्रकारे 'पचति' या दोन गणांच्या रूपाचे सकर्मकत्व इच्छितात (मानतात). परंतु असे अट्ठकथासहित त्रिपिटक बुद्धवचनात कोठे मिळते? कारण त्रिपिटक बुद्धवचनात “कल्पापर्यंत नरकात शिजतो (यातना भोगतो)”, “जोपर्यंत पाप परिपक्व होत नाही”, “तो नरकात शिजला (यातना भोगल्या)”, अशा प्रकारे केवळ अकर्मकत्वच दिसून येते. येथे काही जण म्हणू शकतात - “नक्कीच 'पच पाके' हा धातू सकर्मक आहे, त्यामुळे 'पच्चति' या दिवादिगणाच्या रूपाचेही सकर्मकत्व योग्य ठरते, म्हणूनच 'पच्चति पाकानं पवत्ते अट्ठके दुवे' इत्यादींमध्ये असे म्हटले आहे.” यावर उत्तर दिले जाते - ज्याप्रमाणे 'छिदि' (दोन भाग करणे) आणि 'भिदि' (फाडणे/फोडणे) हे धातू रुधादिगणात प्रवृत्त असताना 'रुक्खं छिन्दति' (झाड तोडतो), 'भित्तिं भिन्दति' (भिंत फोडतो) ही रूपपदे सकर्मक असूनही, दिवादिगणात आल्यावर त्या धातूंची 'उदकं छिज्जति' (पाणी तुटते/थांबते), 'घटो भिज्जति' (घडा फुटतो) ही रूपपदे केवळ अकर्मकच होतात; त्याचप्रमाणे भूवादिगणात प्रवृत्त असलेल्या 'पच' धातूचे 'भत्तं पचति' (भात शिजवतो) हे रूपपद सकर्मक असूनही, दिवादिगणात आल्यावर त्याचे 'निरये पच्चति' (नरकात शिजतो), 'कम्मानि विपच्चन्ति' (कर्मे परिपक्व होतात) ही रूपपदे केवळ अकर्मकच होतात. အထာပိ ဝဒေယျုံ ‘‘နနု စ ဘော ယထာ ‘အာသဝေဟိ စိတ္တာနိ ဝိမုစ္စိံသူ’တိ ဧတ္ထ ‘‘အာသဝတော စိတ္တာနိ ဝိမုစ္စိံသူ’တိ စ ‘အာသဝေဟိ ကတ္တုဘူတေဟိ စိတ္တာနိ ဝိမုစ္စိံသူ’တိ စ ဧဝံ ဒိဝါဒိဂဏိကဿ ဓာတုဿ ‘ဝိမုစ္စိံသူ’တိ ရူပပဒဿ အကမ္မကတ္တဉ္စ သကမ္မကတ္တဉ္စ ဘဝတိ, တထာ ‘နိရယေ ပစ္စတိ, ကမ္မာနိ ဝိပစ္စန္တီ’တိ စ အကမ္မကတ္တေနပိ ဘဝိတဗ္ဗံ. ‘ပစ္စတိ ပါကာနံ ပဝတ္တေ အဋ္ဌကေ ဒုဝေ, အသင်္ခါရံ သသင်္ခါရဝိပါကာနိ န ပစ္စတီ’တိ သကမ္မကတ္တေနပိ ဘဝိတဗ္ဗ’’န္တိ. အကမ္မကတ္တေနေဝ ဘဝိတဗ္ဗံ, န သကမ္မကတ္တေန, ‘‘ပစ္စတိ ပါကာန’’န္တိအာဒိနာ ဝုတ္တပ္ပယောဂါနံ ‘‘အာသဝေဟိ စိတ္တာနိ ဝိမုစ္စိံသူ’’တိ ပယောဂေန အသမာနတ္တာ. တထာ ဟေတ္ထ ‘‘ဝိမုစ္စိံသူ’’တိ ပဒံ ကမ္မရဟိတကတ္တုဝါစကယပစ္စယန္တမ္ပိ ဘဝတိ ကတ္တုသဟိတကမ္မဝါစကယပစ္စယန္တမ္ပိ. ‘‘ဝိမုစ္စိံသူ’’တိ ဣမဿ ဟိ ပဒဿ ကမ္မရဟိတယပစ္စယဝန္တတ္တာ ‘‘အာသဝေဟီ’’တိ ကရဏဝစနံ အပါဒါနကာရကဝါစကံ ဘဝတိ. ‘စိတ္တာနီ’’တိ ပစ္စတ္တဝစနံ ပန ကတ္တုကာရကဝါစကံ ဘဝတိ. တထာ ‘‘ဝိမုစ္စိံသူ’’တိ ပဒဿ ကတ္တုသဟိတကမ္မဝါစကတ္တာ ‘‘အာသဝေဟီ’’တိ [Pg.384] ကရဏဝစနံ ကတ္တုကာရကဝါစကံ ဘဝတိ. ‘‘စိတ္တာနီ’’တိ ပစ္စတ္တဝစနံ ပန ကမ္မကာရကဝါစကံ ဘဝတိ. အယံ နယော ‘‘ပစ္စတိ ပါကာန’’န္တိအာဒိနာ ဝုတ္တပ္ပယောဂေသု န လဗ္ဘတိ. တထာ ဟိ တတ္ထ ပစ္စတ္တဝစနံ ကတ္တာရံ ဝဒတိ, ဥပယောဂဝစနံ ကမ္မံ ဝဒတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ကာရိတေ ‘‘ပုရိသော ပုရိသေန ပုရိသံ ဝါ ဘတ္တံ ပါစေတိ ပါစယတိ ပါစာပေတိ ပါစာပယတီ’’တိ စ, ‘‘အနန္တေ ဗောဓိသမ္ဘာရေ, ပရိပါစေသိ နာယကော’’တိ ဒဿနတော ပန ‘‘ပရိပါစေတိ, ပရိပါစယတီ’’တိ စ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဣမာနိ ဟေတုကတ္တုပဒါနိ. ကမ္မေ – ယညဒတ္တေန ဩဒနော ပစ္စတေ, ဘာဝပဒံ အပ္ပသိဒ္ဓံ. ဣမာနိ ဘူဝါဒိဒိဝါဒိဂဏိကရူပါနိ. ဣမိနာ နယေန အညာနိပိ ဒွိဂဏိကရူပါနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. जरी असे म्हटले गेले की, 'ज्याप्रमाणे "आसवेहि चित्तानि विमुच्चिंसु" (आसवांपासून चित्त विमुक्त झाले) येथे "आसवतो चित्तानि विमुच्चिंसु" आणि "आसवेहि कत्तुभूतेहि चित्तानि विमुच्चिंसु" (कर्ता बनलेल्या आसवांपासून चित्त विमुक्त झाले) अशा प्रकारे दिवादिगणातील धातूच्या "विमुच्चिंसु" या क्रियापदाचे अकर्मकत्व आणि सकर्मकत्व दोन्ही सिद्ध होते, त्याचप्रमाणे "निरये पच्चति" (नरकात शिजतो/पचतो) आणि "कम्माणि विपच्चन्ति" (कर्मे परिपक्व होतात) येथे अकर्मकत्व देखील असले पाहिजे. आणि "पच्चति पाकानं पवत्ते अट्ठके दुवे, असङ्खारं ससङ्खारविपाकानि न पच्चती" येथे सकर्मकत्व देखील असले पाहिजे.' तर (त्यावर उत्तर असे की) ते केवळ अकर्मकच असले पाहिजे, सकर्मक नाही. कारण "पच्चति पाकानं" इत्यादींमध्ये सांगितलेले प्रयोग "आसवेहि चित्तानि विमुच्चिंसु" या प्रयोगासारखे समान नाहीत. कारण येथे "विमुच्चिंसु" हे पद कर्मरहित कर्ता दर्शवणारा 'य' प्रत्यय लागलेले देखील होते आणि कर्त्यासह कर्म दर्शवणारा 'य' प्रत्यय लागलेले देखील होते. "विमुच्चिंसु" या पदाला कर्मरहित 'य' प्रत्यय लागल्यामुळे "आसवेहि" ही तृतीया विभक्ती अपादान कारकाची वाचक होते, तर "चित्तानि" ही प्रथमा विभक्ती कर्ता कारकाची वाचक होते. तसेच "विमुच्चिंसु" या पदाला कर्त्यासह कर्मवाचक प्रत्यय लागल्यामुळे "आसवेहि" ही तृतीया विभक्ती कर्ता कारकाची वाचक होते, तर "चित्तानि" ही प्रथमा विभक्ती कर्म कारकाची वाचक होते. हा नियम "पच्चति पाकानं" इत्यादी प्रयोगांमध्ये लागू होत नाही. कारण तेथे प्रथमा विभक्ती कर्ता सांगते आणि द्वितीया विभक्ती कर्म सांगते, असे समजले पाहिजे. प्रयोजक (कारित) प्रयोगात "पुरिसो पुरिसेन पुरिसं वा भत्तं पाचेति, पाचयति, पाचापेति, पाचापयति" (माणूस दुसऱ्या माणसाकडून भात शिजवून घेतो) आणि "अनन्ते बोधिसम्भारे, परिपाचेसि नायको" (नायकाने अनंत बोधिसंभारांना परिपक्व केले) या प्रयोगांवरून "परिपाचेति, परिपाचयति" अशी रूपे होतात. ही प्रयोजक कर्ता (हेतुकर्तृ) पदे आहेत. कर्म प्रयोगात – "यञ्ञदत्तेन ओदनो पच्चते" (यज्ञदत्ताकडून भात शिजवला जातो), येथे भावपद देखील असेच समजावे. ही भूवादि आणि दिवादि गणातील रूपे आहेत. याच नियमाने इतरही द्विगणिक (दोन गणांतील) रूपे जोडावीत. တေဂဏိကတ္တေ သု ပသဝေ. ဟေတုဖလံ သဝတိ, ပသဝတိ. သု သဝနေ. သဒ္ဓေါ ဓမ္မံ သုဏောတိ, သုဏာတိ. သု ဟိံသာယံ. ယောဓော ပစ္စာမိတ္တံ သုနာတိ. ဣမာနိ ယထာက္ကမံ ဘူဝါဒိသွာဒိကိယာဒိဂဏိကာနိ ကတ္တုပဒါနိ. တထာ ဟေတုနာ ဖလံ သဝိယျတိ, ဥန္နာဒသဒ္ဒေါ ပထဝီဥန္ဒြိယသဒ္ဒေါ ဝိယ သုယျတိ. ယောဓေန ပစ္စမိတ္တော သုနိယျတိ. ဣမာနိ ကမ္မပဒါနိ. ဘာဝပဒံ န လဗ္ဘတိ သကမ္မကတ္တာ ဣမေသံ ဓာတူနံ. ဣမိနာ နယေန အညာနိပိ တေဂဏိကရူပါနိ ဥပပရိက္ခိတွာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. အတြ ပနာယံ နယဝိဘာဝနာ – त्रिगणिक (तीन गणांतील) धातूंमध्ये 'सु' धातू प्रसव (उत्पत्ती) अर्थात आहे. 'हेतुफलं सवति, पसवति' (हेतू फलाला प्रसवतो/उत्पन्न करतो). 'सु' धातू श्रवण (ऐकणे) अर्थात – 'सद्धो धम्मं सुणोति, सुणाति' (श्रद्धावान मनुष्य धम्म ऐकतो). 'सु' धातू हिंसा अर्थात – 'योधो पच्चामित्तं सुनाति' (योद्धा शत्रूला मारतो). ही अनुक्रमे भूवादि, स्वादि आणि क्र्यादि गणातील कर्तावाचक पदे आहेत. तसेच 'हेतुना फलं सविय्यति' (हेतूद्वारे फल प्रसवले जाते), 'उन्नादशब्दो पथवीउन्द्रियशब्दो विय सुय्यति' (मोठा आवाज पृथ्वीच्या इंद्रियशब्दाप्रमाणे ऐकू येतो). 'योधेन पच्चमित्तो सुनिय्यति' (योद्ध्याकडून शत्रू मारला जातो). ही कर्मवाचक पदे आहेत. हे धातू सकर्मक असल्यामुळे यांचे भावपद मिळत नाही. याच नियमाने इतरही त्रिगणिक रूपे तपासून जोडावीत. येथे हा नियम स्पष्ट केला आहे – ဘွာဒိရုဓာဒိကာ ဓာတူ, သွာဒိဒိဝါဒိကာ တထာ; ရုဓာဒိကဒိဝါဒိဋ္ဌာ, ဘူဝါဒိကစုရာဒိကာ. काही धातू भूवादि आणि रुधादि गणातील असतात, तसेच काही स्वादि आणि दिवादि गणातील असतात; काही रुधादि आणि दिवादि गणात आढळतात, तर काही भूवादि आणि चुरादि गणात आढळतात. ဘူဝါဒိကဂဟာဒိဋ္ဌာ, ဘွာဒိသွာဒိကိယာဒိကာ; ဧဝမာဒိပ္ပဘေဒေဟိ, ဝိတ္ထာရေန္တု ဝိစက္ခဏာ. काही भूवादि आणि ग्रहादि गणात आढळतात, तर काही भूवादि, स्वादि आणि क्र्यादि गणात आढळतात; अशा विविध प्रकारांनी विद्वानांनी याचा विस्तार करावा. ဣစ္စေဝံ သင်္ခေပတော ယထာရဟံ ဧကဂဏိကဒွိဂဏိကတေဂဏိကဝသေန သုဒ္ဓကတ္တုဟေတုကတ္တုကမ္မဘာဝပဒါနိ စ သကာရိတေကကမ္မာနိ [Pg.385] စ သကာရိတဒွိကမ္မာနိ စ သကာရိတတိကမ္မာနိ စ ဒဿိတာနိ. अशा प्रकारे संक्षेपाने योग्यतेनुसार एकगणिक, द्विगणिक आणि त्रिगणिक रूपांच्या आधारे शुद्ध कर्ता, प्रयोजक कर्ता, कर्म आणि भाव पदे, तसेच एककर्मक प्रयोजक, द्विकर्मक प्रयोजक आणि त्रिकर्मक प्रयोजक पदे दाखवली आहेत. ဣဒါနိ ဧကကာရိတဒွိကာရိတပဒါနံ ဝစနောကာသော အနုပ္ပတ္တော, တသ္မာ တံ ဝဒါမ. သော အန္တကမ္မနိ. အရဟတ္တမဂ္ဂေါ မာနံ သိယတိ, ကမ္မံ ပရိယောသိယတိ. ဣမာနိ တာဝ သုဒ္ဓကတ္တုပဒါနိ. ဧတ္ထ မာနံ သိယတီတိ မာနံ သမုစ္ဆိန္ဒတိ. ကမ္မံ ပရိယောသိယတီတိ ကမ္မံ နိပ္ဖဇ္ဇတိ. ပရိ အဝ ဣစ္စုပသဂ္ဂဝသေန ဟိ ဣဒံ ပဒံ အကမ္မကံ ဘဝတိ, အတ္ထော ပန ‘‘ပရိယောသာနံ ဂစ္ဆတီ’’တိ သကမ္မကဝသေန ဂဟေတဗ္ဗော. အတ္တနာ ဝိပ္ပကတံ အတ္တနာ ပရိယောသာပေတိ. ဣဒမေကံ ကာရိတံ ဟေတုကတ္တုပဒံ. ဧတ္ထ ပန ပရိအဝ ဣစ္စုပသဂ္ဂဝသေန အကမ္မကဘူတဿ သောဓာတုဿ လဒ္ဓကာရိတပစ္စယတ္တာ ဧကကမ္မမေဝ သကာရိတပဒံ ဘဝတိ. အတ္တနာ ဝိပ္ပကတံ ပရေဟိ ပရိယောသာဝါပေတိ. ဣဒံ ဒွိကာရိတံ ဟေတုကတ္တုပဒံ. ဧတ္ထ စ ပန ပရိ အဝ ဣစ္စုပသဂ္ဂဝသေန အကမ္မကဘူတဿ သောဓာတုဿ လဒ္ဓကာရိတပစ္စယဒွယတ္တာ ဒွိကမ္မကံ သကာရိတပဒံ ဘဝတိ. ‘‘ပရိယောသာဝါပေတီ’’တိ ဣဒမ္ပိ ပရိ အဝ ပုဗ္ဗသ္မာ သောဓာတုမှာ ဏာပေ ဏာပေ ဣတိ ပစ္စယဒွယံ ကတွာ အဝသဒ္ဒဿောကာရဉ္စ ကတွာ တတော ယကာရာဂမဉ္စ အနုဗန္ဓဏကာရလောပဉ္စ ပဌမပစ္စယေ ပကာရဿ ဝကာရဉ္စ ဒွီသု စ ဌာနေသု ပုဗ္ဗသရလောပံ ကတွာ နိပ္ဖဇ္ဇတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. आता एक-प्रयोजक (एककारित) आणि द्वि-प्रयोजक (द्विकारित) पदांच्या विधानाचा प्रसंग आला आहे, म्हणून आम्ही ते सांगतो. 'सो' धातू अंत (नाश किंवा समाप्ती) आणि कर्म अर्थात आहे. 'अरहत्तमग्गो मानं सियति' (अर्हतमार्ग मानाचा नाश करतो), 'कम्मं परियोसियति' (कर्म समाप्त होते). ही आधी शुद्ध कर्तावाचक पदे आहेत. येथे 'मानं सियति' म्हणजे मानाचा समूळ नाश करतो. 'कम्मं परियोसियति' म्हणजे कर्म पूर्ण होते. 'परि' आणि 'अव' या उपसर्गांच्या प्रभावामुळे हे पद अकर्मक होते, परंतु याचा अर्थ 'परियोसानं गच्छति' (शेवटास जातो) अशा सकर्मक अर्थाने घ्यावा. 'अत्तना विप्पकतं अत्तना परियोसापेति' (स्वतः सुरू केलेले काम स्वतःच पूर्ण करतो). हे एक प्रयोजक (एककारित) हेतुकर्तृपद आहे. येथे 'परि' आणि 'अव' उपसर्गांमुळे सकर्मक झालेल्या 'सो' धातूला एक प्रयोजक प्रत्यय लागल्यामुळे हे एककर्मक प्रयोजक पद बनते. 'अत्तना विप्पकतं परेहि परियोसावापेति' (स्वतः सुरू केलेले काम इतरांकडून पूर्ण करून घेतो). हे द्वि-प्रयोजक (द्विकारित) हेतुकर्तृपद आहे. येथे 'परि' आणि 'अव' उपसर्गांमुळे सकर्मक झालेल्या 'सो' धातूला दोन प्रयोजक प्रत्यय लागल्यामुळे हे द्विकर्मक प्रयोजक पद बनते. "परियोसावापेति" हे रूप 'परि' आणि 'अव' पूर्व असलेल्या 'सो' धातूपासून 'णापे' आणि 'णापे' हे दोन प्रत्यय लावून, 'अव' शब्दाचा 'ओ' करून, त्यानंतर 'य' काराचा आगम करून आणि अनुबंध 'ण' काराचा लोप करून, पहिल्या प्रत्ययातील 'प' काराचा 'व' कार करून आणि दोन ठिकाणी पूर्व स्वराचा लोप करून सिद्ध होते, असे समजावे. ဣဒါနိ တာ ပါဠိယော အတ္ထန္တရဝိညာပနတ္ထံ အာဟစ္စဒေသိတာကာရေန ဧကတော ကထယာမ – ‘‘အတ္တနာ ဝိပ္ပကတံ အတ္တနာ ပရိယောသာပေတိ, အာပတ္တိ သံဃာဒိသေသဿ. အတ္တနာ ဝိပ္ပကတံ ပရေဟိ ပရိယောသာဝါပေတိ, အာပတ္တိ သံဃာဒိသေသဿာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဘိက္ခူ’’တိ ဟေတုကတ္တုပဒံ အာနေတဗ္ဗံ. အတ္တနာ ဝိပ္ပကတန္တိ ဧတ္ထ စ အတ္တနာတိ ဝိပ္ပကရဏကြိယာယ ကတ္တုကာရကဝါစကံ ကရဏဝစနံ. ဝိပ္ပကတန္တိ ကမ္မကာရကဝါစကံ [Pg.386] ဥပယောဂဝစနံ. အတ္တနာ ပရိယောသာပေတီတိ ဧတ္ထ ပန အတ္တနာတိ အဗျယပဒဘူတေန သယံသဒ္ဒေန သမာနတ္ထံ ဝိဘတျန္တပတိရူပကံ အဗျယပဒံ, သယံသဒ္ဒသဒိသံ ဝါ တတိယာဝိဘတျန္တံ အဗျယပဒံ. တထာ ဟိ ‘‘အတ္တနာ ပရိယောသာပေတီ’’တိ ဝုတ္တဝစနဿ ‘‘သယံ ပရိယောသာပေတီ’’တိ အတ္ထော ဘဝတိ ‘‘အတ္တနာ စ ပါဏာတိပါတီ’’တိအာဒီသု ဝိယ. ပရေဟိ ပရိယောသာဝါပေတီတိ ဧတ္ထ ပန ပရေဟီတိ ကမ္မကာရကဝါစကံ ကရဏဝစနန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ, ‘‘သုနခေဟိပိ ခါဒါပေန္တီ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘သုနခေဟီ’’တိ ပဒံ ဝိယ. ဧတ္ထ ဟိ ယထာ ‘‘ရာဇာနော စောရံ သုနခေ ခါဒါပေန္တီ’’တိ ဥပယောဂဝသေန အတ္ထော ဘဝတိ, တထာ ‘‘ဘိက္ခု အတ္တနာ ဝိပ္ပကတံ ပရေ ဇနေ ပရိယောသာဝါပေတီ’’တိ ဥပယောဂဝသေန အတ္ထော ဘဝတိ. ဧဝံ ဣမသ္မိံ အစ္ဆရိယဗ္ဘုတနယဝိစိတ္တေ ဘဂဝတော ပါဝစနေ ဒွိကာရိတပစ္စယဝန္တမ္ပိ ပဒမတ္ထီတိ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗံ. အယံ နယော သုခုမော သာသနေ အာဒရံ ကတွာ အာယသ္မန္တေဟိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗော. ယဿ ဟိ အတ္ထာယ ဣဒံ ပကရဏံ ကရိမှ, န အယံ အတ္တနော မတိ, အထ ခေါ ပုဗ္ဗာစရိယာနံ သန္တိကာ လဒ္ဓတ္တာ တေသညေဝ မတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. आता त्या पाळी (वचने) अर्थाचा भेद स्पष्ट करण्यासाठी प्रत्यक्ष उपदेशिलेल्या रूपाने एकत्र सांगतो - "स्वतः अपूर्ण ठेवलेले कार्य स्वतःच पूर्ण करतो, तर संघादिसेस आपत्ती होते. स्वतः अपूर्ण ठेवलेले कार्य इतरांकडून पूर्ण करून घेतो, तर संघादिसेस आपत्ती होते." येथे "भिक्खू" हे हेतुकर्तृपद आणले पाहिजे. "अत्तना विप्पकतं" (स्वतः अपूर्ण ठेवलेले) येथे "अत्तना" (स्वतःद्वारे) हे अपूर्ण ठेवण्याच्या क्रियेच्या कर्त्याचे वाचक असणारे तृतीया विभक्तीचे रूप (करणवचन) आहे. "विप्पकतं" हे कर्मकारकाचे वाचक असणारे द्वितीया विभक्तीचे रूप (उपयोगवचन) आहे. "अत्तना परियोसापेति" (स्वतः पूर्ण करतो) येथे "अत्तना" हे अव्ययपद बनलेल्या "सयं" (स्वतः) या शब्दाशी समान अर्थ असणारे, विभक्तीच्या रूपासारखे दिसणारे अव्ययपद आहे, किंवा "सयं" शब्दासारखे तृतीया विभक्तीचे अव्ययपद आहे. कारण "अत्तना परियोसापेति" या म्हटलेल्या वचनाचा अर्थ "सयं परियोसापेति" (स्वतः पूर्ण करतो) असा होतो, जसे "अत्तना च पाणातिपाती" (आणि स्वतः प्राणातिपाती असणारा) इत्यादींमध्ये होते. "परेहि परियोसावापेति" (इतरांकडून पूर्ण करून घेतो) येथे "परेहि" (इतरांद्वारे) हे कर्मकारकाचे वाचक असणारे तृतीया विभक्तीचे रूप (करणवचन) मानले पाहिजे, जसे "सुनखेहिपि खादापेन्ति" (कुत्र्यांकडूनही खाववितात) येथे "सुनखेहि" हे पद आहे. येथे जसे "राजाने चोराला कुत्र्यांकडून खावविले" असा द्वितीयेच्या (उपयोगाच्या) अर्थाने अर्थ होतो, तसेच "भिक्खू स्वतः अपूर्ण ठेवलेले कार्य इतर लोकांकडून पूर्ण करून घेतो" असा द्वितीयेच्या अर्थाने अर्थ होतो. अशा प्रकारे, भगवंतांच्या या आश्चर्यकारक आणि अद्भुत नय-विचित्र प्रवचनात द्विकारित प्रत्यय असणारे पद देखील आहे, हे सार रूपाने समजून घेतले पाहिजे. हा सूक्ष्म नय शासनाविषयी आदर ठेवून आयुष्यमानांनी चांगल्या प्रकारे मनात धारण केला पाहिजे. ज्या अर्थासाठी आम्ही हा ग्रंथ रचला आहे, ते आमचे स्वतःचे मत नाही, तर पूर्वाचार्यांच्या जवळून प्राप्त झाल्यामुळे त्यांचेच मत आहे, असे मानले पाहिजे. ဣဒါနိ အကာရိတဒွိကမ္မိကပဒါနံ ဝစနောကာသော အနုပ္ပတ္တော, တသ္မာ တာနိ ကထယာမ, တာနိ စ ခေါ ဓာတုဝသေန ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ သဝိနိစ္ဆယာနိ. သေယျထိဒံ? आता अकारित (प्रयोजक नसलेल्या) द्विकर्मक पदांच्या विधानाचा प्रसंग प्राप्त झाला आहे, म्हणून आम्ही ती सांगतो. आणि ती धातूंच्या नियमांनुसार अशा प्रकारे निर्णयांसह समजून घेतली पाहिजेत. ते खालीलप्रमाणे आहेत: ဒုဟိကရဝဟိပုစ္ဆိ, ယာစိ ဘိက္ခိ စ နိဗြူတိ; ဘဏိဝဒိဝစိဘာသိ, သာသိဒဟိနာထဓာတု. दुह (दुभणे), कर (करणे), वह (वाहणे), पुच्छि (विचारणे), याचि (याचना करणे), भिक्खि (भिक्षा मागणे), निब्रू (सांगणे), भण (म्हणणे), वद (बोलणे), वच (सांगणे), भास (भाषण करणे), सासि (शासन करणे), दहि (धारण करणे/दहन करणे) आणि नाथ (याचना करणे) हे धातू; ရုဓိ ဇိ စိပဘုတီတိ, ယေ တေ ဒွိကမ္မကာ ဓီရာ; ပဝဒုမပိ ဝိယုတ္တာ, ကာရိတပ္ပစ္စယေဟိ စ. रुधि (अडवणे), जि (जिंकणे), चि (एकत्र करणे) इत्यादी जे द्विकर्मक धातू आहेत, त्यांना विद्वानांनी कारित (प्रयोजक) प्रत्ययांशिवाय देखील द्विकर्मक म्हटले आहे. အပါဒါနာဒိကေ ပုဗ္ဗ-ဝိဓိမှာ သဟိမေ’ဗြဝုံ; ဥပယောဂဝစနဿ, နိမိတ္တန္တိ သနန္တနာ. प्राचीन आचार्यांनी अपादान इत्यादी पूर्व नियमांच्या ऐवजी या धातूंच्या बाबतीत द्वितीया विभक्तीचे (उपयोगवचनाचे) निमित्त सांगितले आहे. ဧတေ [Pg.387] ဒုဟာဒယော ဓာတူ, တိကမ္မာပိ ဘဝန္တိ တု; ကာရိတပ္ပစ္စယေ လဒ္ဓေ, ဣတိ အာစရိယာ’ဗြဝုံ. हे दुह इत्यादी धातू कारित (प्रयोजक) प्रत्यय लागल्यावर त्रिकर्मक देखील होतात, असे आचार्यांनी सांगितले आहे. တတြိမာနိ ဥဒါဟရဏာနိ – ဂဝံ ပယော ဒုဟတိ ဂေါပါလကော. ဂါဝိံ ခီရံ ဒုဟတိ ဂေါပါလဒါရကော. တတ္ထ ပယောတိ ဥပယောဂဝစနံ, ‘‘ယသော လဒ္ဓါ န မဇ္ဇေယျာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ယသော’’တိ ပဒမိဝ. မနောဂဏိကဿ ဟိ ဤဒိသမ္ပိ ဥပယောဂဝစနံ ဟောတိ အညာဒိသမ္ပိ. ဣဿရော ဂေါပါလံ ဂဝံ ပယော ဒုဟာပေတိ. ဂေါပါလေန ဂါဝေါ ခီရံ ဒုဟိတာ. ဂေါဟိ ပယော ဒုဟတီတိ ဧတ္ထ အပါဒါနဝိသယတ္တာ ဒွိကမ္မကဘာဝေါ နတ္ထိ. ‘‘ဝိသာဏတော ဂဝံ ဒုဟံ, ယတ္ထ ခီရံ န ဝိန္ဒတီ’’တိ ဧတ္ထ ပန အပါဒါနဝိသယတ္တေပိ ဂဝါဝယဝဘူတဿ ဝိသာဏဿ ဝိသုံ ဂဟိတတ္တာ ‘‘ဂဝံ ခီရံ ဒုဟန္တော’’တိ ဒွိကမ္မိကဘာဝေါ လဗ္ဘတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဒုဟိနော ပယောဂေါယံ. त्यात ही उदाहरणे आहेत - 'गवं पयो दुहति गोपालको' (गोपाळ गाईचे दूध काढतो). 'गाविं खीरं duhati गोपालदारको' (गोपाळपुत्र गाईचे दूध काढतो). तेथे 'पयो' हे द्वितीया विभक्तीचे रूप (उपयोगवचन) आहे, जसे "यसो लद्धा न मज्जेय्या" (यश मिळवून उन्मत्त होऊ नये) येथे 'यसो' हे पद आहे. कारण मनोगण (मनस्-गणी) शब्दांचे असेही द्वितीया विभक्तीचे रूप होते आणि इतरही होते. 'इस्सरो गोपालं गवं पयो दुहापेति' (मालक गोपाळाकडून गाईचे दूध काढवतो). 'गोपालेन गावो खीरं दुहिता' (गोपाळाकडून गाईंचे दूध काढले गेले). 'गोहि पयो दुहति' (गाईंपासून दूध काढतो) येथे अपादान कारक असल्यामुळे द्विकर्मक भाव नाही. "विसाणतो गवं दुहं, यत्थ खीरं न विन्दती" (शिंगातून गाईचे दूध काढणारा, जेथे दूध मिळत नाही) येथे अपादान कारक असूनही, गाईचा अवयव असलेल्या शिंगाचे वेगळे ग्रहण केल्यामुळे "गवं खीरं दुहन्तो" (गाईचे दूध काढणारा) असा द्विकर्मक भाव प्राप्त होतो, असे मानले पाहिजे. हा 'दुह' धातूचा प्रयोग आहे. ကရောတိဿ ပယောဂေ ကဋ္ဌမင်္ဂါရံ ကရောတိ, သုဝဏ္ဏံ ကဋကံ ကရောတိ, သစေ ဇေ သစ္စံ ဘဏသိ, အဒါသိံ တံ ကရောမိ. ဧတ္ထ စ အင်္ဂါရံ ကရောတီတိ ပရိစ္စတ္တကာရဏဝသေန ဝုတ္တံ. ကဋ္ဌဉှိ အင်္ဂါရဘာဝဿ ကာရဏံ, အင်္ဂါရေ ကတေ ကာရဏဘူတဿ ကဋ္ဌဿ ကဋ္ဌဘာဝေါ ဝိဂစ္ဆတိ. ကဋကံ ကရောတီတိ ဣဒံ အပရိစ္စတ္တကာရဏဝသေန ဝုတ္တံ. သုဝဏ္ဏဉှိ ကဋကဘာဝဿ ကာရဏံ, ကဋကေ ကတေပိ ကာရကဘူတဿ သုဝဏ္ဏဿ သုဝဏ္ဏဘာဝေါ န ဝိဂစ္ဆတိ, အထ ခေါ ဝိသေသန္တရုပ္ပတ္တိဘာဝေန သမ္ပဇ္ဇတိ. အဒါသိံ တံ ကရောမီတိ ဣဒံ ပန ဌာနန္တရဒါနဝသေန ဝုတ္တံ ‘‘ဥပရာဇံ မဟာရာဇံ ကရောမီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. တတ္ထ ‘‘ဣဿရော ပုရိသေန ပုရိသံ ဝါ ကဋ္ဌမင်္ဂါရံ ကာရေတိ. တထာ သုဝဏ္ဏံ ကဋကံ ကာရေတီ’’တိ တိကမ္မိကပ္ပယောဂေါပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. တထာ ‘‘ဗြဟ္မဒတ္တော ရဇ္ဇံ ကာရေတီ’’တိ, ‘‘ဗြဟ္မဒတ္တေ ရဇ္ဇံ ကာရေန္တေ’’တိ ဒွိကမ္မကပ္ပယောဂေါ. 'करोति' (करू धातू) च्या प्रयोगात 'कट्ठमङ्गारं करोति' (लाकडाचा कोळसा करतो), 'सुवण्णं कटकं करोति' (सोन्याचे कडे करतो), 'सचे जे सच्चं भणसि, अदासिं तं करोमि' (हे दासी, जर तू खरे बोललीस, तर मी तुला अ-दासी [मुक्त] करीन). आणि येथे 'अङ्गारं करोति' हे कारण सोडून देण्याच्या (रूपांतरणाच्या) अर्थाने म्हटले आहे. कारण लाकूड हे कोळसा होण्याचे कारण आहे, कोळसा झाल्यावर कारणभूत असलेल्या लाकडाचा लाकूडपणा नष्ट होतो. 'कटकं करोति' हे कारण न सोडण्याच्या अर्थाने म्हटले आहे. कारण सोने हे कड्याचे कारण आहे, कडे बनविल्यावरही कारणभूत असलेल्या सोन्याचा सोनेपणा नष्ट होत नाही, तर एका विशिष्ट रूपाच्या उत्पत्तीने तो प्राप्त होतो. 'अदासिं तं करोमि' हे पदवी किंवा स्थान देण्याच्या अर्थाने म्हटले आहे, जसे "उपराजं महाराजं करोमि" (उपराजाला महाराज करतो) येथे आहे. तेथे "इस्सरो पुरिसेन पुरिसं वा कट्ठमङ्गारं कारेति" (मालक माणसाकडून लाकडाचा कोळसा करवतो. तसेच सोन्याचे कडे करवतो) असा त्रिकर्मक प्रयोग देखील समजून घेतला पाहिजे. तसेच "ब्रह्मदत्तो रज्जं कारेति" (ब्रह्मदत्त राज्य करवतो), "ब्रह्मदत्ते रज्जं कारेन्ते" (ब्रह्मदत्त राज्य करवीत असताना) हा द्विकर्मक प्रयोग आहे. ဧတ္ထေကေ [Pg.388] ဝဒေယျုံ ‘‘နနု စ ဘော ဧတ္ထ ဧကမေဝ ကမ္မံ ဒိဿတိ, ကေနာယံ ပယောဂေါ ဒွိကမ္မိကပ္ပယောဂေါ ဟောတီ’’တိ. ကိဉ္စာပိ ဧကမေဝ ဒိဿတိ, တထာပိ အတ္ထတော ဒွေယေဝ ကမ္မာနိ ဒိဿန္တီတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ဗြဟ္မဒတ္တော ရဇ္ဇံ ကာရေတီတိ ဧတ္ထ ဗြဟ္မဒတ္တော အတ္တနော ရာဇဘာဝံ မဟာဇနေန ကာရယတီတိ အတ္ထော. ဧဝံ ပန အတ္ထေ ဂဟိတေ ‘‘ရဇ္ဇံ ကာရေဟိ ဘဒ္ဒန္တေ, ကိံ အရညေ ကရိဿသီ’’တိအာဒီသုပိ တွံ အတ္တနော ရာဇဘာဝံ အမှေဟိ ကာရာပေဟိ, အတ္တာနံ ရဇ္ဇေ အဘိသိဉ္စာပေဟိ, မယံ တံ ရဇ္ဇေ အဘိသိဉ္စိတုကာမာတိ အတ္ထော သမတ္ထိတော ဘဝတိ. येथे काही जण म्हणू शकतात - "अहो, येथे तर एकच कर्म दिसत आहे, मग हा प्रयोग द्विकर्मक प्रयोग कसा होतो?" जरी एकच कर्म दिसत असले, तरी अर्थाच्या दृष्टीने दोनच कर्मे दिसतात, असे मानले पाहिजे. कारण "ब्रह्मदत्तो रज्जं कारेति" येथे ब्रह्मदत्त स्वतःचा राजा असण्याचा भाव (राजत्व) महाजनांकडून करवून घेतो, असा अर्थ होतो. आणि असा अर्थ घेतल्यावर "रज्जं कारेहि भद्दनते, किं अरञ्ञे करिससि" (भदंत, राज्य करवून घ्या, अरण्यात काय कराल?) इत्यादींमध्ये देखील 'तुम्ही स्वतःचे राजत्व आमच्याकडून करवून घ्या, स्वतःला राज्यावर अभिषिक्त करून घ्या, आम्ही तुम्हाला राज्यावर अभिषिक्त करू इच्छितो' असा अर्थ सिद्ध होतो. ဗြဟ္မဒတ္တေ ရဇ္ဇံ ကာရေန္တေတိ ဧတ္ထာပိ ဗြဟ္မဒတ္တေ အတ္တနော ရာဇဘာဝံ မဟာဇနေန ကာရယန္တေတိ အတ္ထော ဘဝတိ. သာသနသ္မိဉှိ ကာရိတဝိသယေ ကရဏဝစနံ ဥပယောဂတ္ထညေဝ ဒီပေတိ, တသ္မာ အတ္ထတော ဒွေယေဝ ကမ္မနိ ဒိဿန္တီတိ ဝဒါမ. အယမတ္ထော အဘိဓမ္မဋီကာယံ စက္ခုန္ဒြိယာဒိနိဗ္ဗစနတ္ထဝိဘာဝနာယ ဒီပေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ အဘိဓမ္မဋီကာယံ ဣဒံ ဝုတ္တံ ‘‘စက္ခုဒွါရေ ဣန္ဒတ္တံ ကာရေတီတိ စက္ခုဒွါရဘာဝေ တံဒွါရိကေဟိ အတ္တနော ဣန္ဒဘာဝံ ပရမိဿရဘာဝံ ကာရယတီတိ အတ္ထော. တဉှိ တေ ရူပဂ္ဂဟဏေ အတ္တာနံ အနုဝတ္တေတိ, တေ စ တံ အနုဝတ္တန္တီ’’တိ. ယဒိ ပန ကရဓာတု ဒွိကမ္မကော, ဧဝံ သန္တေ ‘‘ဗြဟ္မဒတ္တော ရဇ္ဇံ ကာရေတီ’’တိအာဒီသု လဒ္ဓကာရိတပစ္စယတ္တာ ‘‘ကာရေတီ’’တိအာဒီဟိ ပဒေဟိ တိကမ္မကေဟိယေဝ ဘဝိတဗ္ဗန္တိ? န, နိယမာဘာဝတော, တာဒိသဿ စ ပယောဂဿ ဝေါဟာရပထေ အနာဂတတ္တာ. "ब्रह्मदत्ते रज्जं कारेन्ते" येथे देखील 'ब्रह्मदत्त स्वतःचे राजत्व महाजनांकडून करवून घेत असताना' असा अर्थ होतो. कारण शासनात (बुद्धवचनात) कारित (प्रयोजक) च्या विषयात तृतीया विभक्ती (करणवचन) ही द्वितीयेचाच (उपयोगवचनाचा) अर्थ दर्शवते, म्हणून अर्थाच्या दृष्टीने दोनच कर्मे दिसतात, असे आम्ही म्हणतो. हा अर्थ अभिधम्मटीकेमध्ये चक्षुइंद्रिय इत्यादींच्या निरुक्तीच्या अर्थाच्या स्पष्टीकरणात स्पष्ट केला पाहिजे. कारण अभिधम्मटीकेमध्ये असे म्हटले आहे - "चक्खुद्वारे इन्दत्तं कारेति" (चक्षुद्वारात इंद्रत्व करवतो) म्हणजे चक्षुद्वारभावामध्ये त्या द्वाराशी संबंधित असलेल्यांकडून स्वतःचे इंद्रत्व (परमेश्वरत्व/प्रभुत्व) करवून घेतो, असा अर्थ आहे. कारण ते रूपग्रहणामध्ये स्वतःचे अनुकरण करते आणि ते त्याचे अनुकरण करतात. पण जर 'कर' धातू द्विकर्मक आहे, तर अशा स्थितीत "ब्रह्मदत्तो रज्जं कारेति" इत्यादींमध्ये कारित प्रत्यय लागल्यामुळे "कारेति" इत्यादी पदांनी त्रिकर्मकच असायला हवे का? नाही, कारण असा कोणताही नियम नाही, आणि तशा प्रयोगाचा व्यवहारात वापर आढळत नाही. ကဋ္ဌံ ပုရိသေန အင်္ဂါရံ ကတံ. သုဝဏ္ဏံ ကမ္မာရေန ကဋကံ ကတံ, ဒါသီ သာမိကေန အဒါသိံ ကတာ, ဧဝမ္ပေတ္ထ ဒွိကမ္မကပ္ပယောဂါ ဝေဒိတဗ္ဗာ. သုဝဏ္ဏေန ကဋကံ ကရောတီတိ ဧတ္ထ [Pg.389] ဟိ ဝိသေသနတ္ထေ ပဝတ္တကရဏဝိသယတ္တာ ဒွိကမ္မိကဘာဝေါ န လဗ္ဘတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အယံ နယော အညတြာပိ ဥပပရိက္ခိတွာ ယထာသမ္ဘဝံ နေတဗ္ဗော. ကရောတိဿ ပယောဂေါယံ. माणसाने लाकडाचा कोळसा केला. सुवर्णकाराने सोन्याचे कडे केले, मालकाने दासीला मुक्त (अ-दासी) केले, अशा प्रकारे येथे द्विकर्मक प्रयोग जाणावेत. 'सोन्याने कडे करतो' (सुवण्णेन कटकं करोति) येथे विशेषण अर्थात प्रवृत्त होणाऱ्या करण-विषयत्वामुळे द्विकर्मक भाव प्राप्त होत नाही, असे समजावे. हा नियम इतर ठिकाणीही तपासून यथासंभव लागू करावा. हा 'करोति' (कृ धातूचा) प्रयोग आहे. ဝဟိအာဒီနံ ပယောဂေ ရာဇပုရိသာ ရထံ ဂါမံ ဝဟန္တိ. အယံ ရာဇာ မံ နာမံ ပုစ္ဆတိ. ပရာဘဝန္တံ ပုရိသံ, မယံ ပုစ္ဆာမ ဂေါတမံ. အာယသ္မာ ဥပါလိ အာယသ္မတာ မဟာကဿပေန ဝိနယံ ပုဋ္ဌော. ဒေဝဒတ္တော ရာဇာနံ ကမ္ဗလံ ယာစတိ. တေ မံ အဿေ အယာစိသုံ. ဓနံ တံ တာတ ယာစတိ. ဗြာဟ္မဏော နာဂံ မဏိံ ယာစတိ. နာဂေါ မဏိံ ယာစိတော ဗြာဟ္မဏေန ဗြဟ္မုနာ အာယာစိတော ဓမ္မဒေသနံ ဘဂဝါ. တာပသော ကုလံ ဘောဇနံ ဘိက္ခတိ. အဇံ ဂါမံ နေတိ. အဇော ဂါမံ နီတော. မုတ္တော စမ္ပေယျကော နာဂေါ, ရာဇာနံ ဧတဒဗြဝိ. 'वह्' (वाहून नेणे) इत्यादींच्या प्रयोगात, 'राजपुरुष रथाला गावाकडे वाहून नेतात'. 'हा राजा मला नाव विचारतो'. 'पतन पावणाऱ्या माणसाविषयी आम्ही गोतमांना विचारतो'. 'आयुष्यमान उपालि यांना आयुष्यमान महाकस्सपांनी विनयाविषयी विचारले'. 'देवदत्त राजाकडे घोंगडीची याचना करतो'. 'त्यांनी माझ्याकडे घोड्यांची याचना केली'. 'हे तात! तो तुझ्याकडे धनाची याचना करतो'. 'ब्राह्मण नागाकडे मण्याची याचना करतो'. 'ब्राह्मणाने नागाकडे मण्याची याचना केली; ब्रह्मदेवाने भगवंतांकडे धम्मदेशनेची याचना केली'. 'तापस कुळाकडे भोजनाची भिक्षा मागतो'. 'तो शेळीला गावाकडे नेतो'. 'बोकड गावाकडे नेला गेला'. 'मुक्त झालेल्या चंपेय्यक नागाने राजाला असे म्हटले'. ဧတ္ထ ရာဇာနန္တိ မုချတော ကမ္မံ ဝုတ္တံ. ဧတန္တိ ဂုဏတော. တထာ ရာဇာနန္တိ အကထိတကမ္မံ ဝုတ္တံ. ဧတန္တိ ကထိတကမ္မံ. ဧသ နယော အညတြာပိ ဥပပရိက္ခိတွာ ယထာရဟံ ယောဇေတဗ္ဗော. ဧဝမေဝ ‘‘ဗြူဟိ ဘဂဝါ’’တိအာဒီသု သမ္ပဒါနဝိသယတ္တာ ဒွိကမ္မကဘာဝေါ န လဗ္ဘတိ. ဘိက္ခု မဟာရာဇာနံ ဓမ္မံ ဘဏတိ. ယံ မံ ဘဏသိ သာရထိ. ယံ မံ ဝဒတိ. ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ. ပိတာ ပုတ္တံ ဘာသတိ. ယံ မံ တွံ အနုသာသသိ. သကျာ ခေါ ပန အမ္ဗဋ္ဌ ရာဇာနံ ဩက္ကာကံ ပိတာမဟံ ဒဟန္တိ. ဘဂဝါ ဘိက္ခူ တံ တံ ဟိတပဋိပတ္တိံ နာထတိ. ဂါဝေါ ဝဇံ ရုန္ဓတိ ဂေါပါလကော. ဓုတ္တော ဓုတ္တဇနံ ဓနံ ဇိနာတိ. ဧတ္ထ စ ‘‘ကမနုတ္တရံ ရတ္နဝရံ ဇိနာမာ’’တိ ပုဏ္ဏကဇာတကပါဠိ နိဒဿနံ. တတ္ထာယမတ္ထော ‘‘မယံ ဇနိန္ဒာ ကတရံ ရာဇာနံ အနုတ္တရံ ရတ္နဝရံ ဇိနာမာ’’တိ. ဣဋ္ဌကာယော ပါကာရံ စိနောတိ ဝဍ္ဎကီ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. येथे 'राजानं' (राजाला) हे मुख्य कर्म म्हटले आहे आणि 'एतं' (हे) हे गौण कर्म. तसेच 'राजानं' हे अकथित कर्म म्हटले आहे आणि 'एतं' हे कथित कर्म. हाच नियम इतर ठिकाणीही तपासून योग्यतेनुसार लावावा. याचप्रमाणे 'ब्रूहि भगवा' (हे भगवन्, सांगा) इत्यादींमध्ये संप्रदान-विषयत्वामुळे द्विकर्मक भाव प्राप्त होत नाही. 'भिक्खू महाराजांना धम्म सांगतात'. 'हे सारथी, तू मला जे सांगतोस'. 'जे मला सांगतो'. 'भगवंतांना असे म्हणाले'. 'पिता पुत्राशी बोलतो'. 'तू मला जे अनुशासित करतोस'. 'हे अंबट्ठ! शाक्य लोक राजा ओक्काकला आपला पूर्वज (पितामह) मानतात'. 'भगवान भिक्खूंना त्या त्या हितकारक प्रतिपदेचा उपदेश करतात'. 'गोपाळ गाईंना गोठ्यात कोंडतो'. 'धूर्त माणूस धूर्त लोकांचे धन जिंकतो'. आणि येथे 'कमनुत्तरं रत्नवरं जिनाम' (आम्ही कोणत्या अनुत्तर श्रेष्ठ रत्नाला जिंकू?) ही पुण्णक जातक पाळीचे उदाहरण आहे. तेथे हा अर्थ आहे: 'हे जनेंद्र! आम्ही कोणत्या राजाचे अनुत्तर श्रेष्ठ रत्न जिंकू?'. 'गवंडी विटांनी भिंत बांधतो'. इतर उदाहरणेही अशीच जोडावीत. ဧတ္ထ [Pg.390] ကေစိ ပုစ္ဆေယျုံ ‘‘ဂန္ဓကုဋိံ ပဒက္ခိဏံ ကရောတိ, ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂစ္ဆာမိ. ဥပါသကံ မံ ဘဝံ ဂေါတမော ဓာရေတူ’တိ ပယောဂေသု ကိံ ဒွိကမ္မကဘာဝေါ လဗ္ဘတီ’’တိ? ဧတ္ထ ဝုစ္စတေ – ‘‘ဂန္ဓကုဋိံ ပဒက္ခိဏံ ကရောတီ’’တိ ဧတ္ထ န လဗ္ဘတိ ဂုဏဂုဏီနံ ဝသေန ဂဟိတတ္တာ. ‘‘ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂစ္ဆာမီ’’တိ ဧတ္ထာပိ န လဗ္ဘတိ ‘‘သရဏံ ဣတိ ဂစ္ဆာမီ’’တိ ဣတိသဒ္ဒလောပဝသေန ဝုတ္တတ္တာ. တထာ ဟိ ဗုဒ္ဓန္တိ ဥပယောဂဝစနံ. သရဏန္တိ ပစ္စတ္တဝစနံ. ‘‘ဗုဒ္ဓံ မမ သရဏံ ပရာယဏံ, အဃဿ တာတာ ဟိတဿ စ ဝိဓာတာ’’တိ ဣမိနာ အဓိပ္ပာယေန ‘‘ဘဇာမိ သေဝါမိ ဗုဇ္ဈာမီ’’တိ အတ္ထော. ‘‘ဥပါသကံ မံ ဘဝံ ဂေါတမော ဓာရေတူ’’တိ ဧတ္ထ ပန ဒွိကမ္မကဘာဝေါ လဗ္ဘတီတိ ဝတ္တဗ္ဗော ‘‘မံ ဣတော ပဋ္ဌာယ ဥပါသကံ ဓာရေတူ’’တိ အတ္ထသမ္ဘဝတော ‘‘သကျာ ခေါ ပန အမ္ဗဋ္ဌ ရာဇာနံ ဩက္ကာကံ ပိတာမဟံ ဒဟန္တီ’’တိ ဒဟဓာတုပ္ပယောဂေန သမာနတ္တာ စ, အဓိပ္ပာယတ္ထတော ပန ‘‘မံ ‘ဥပါသကော မေ အယ’န္တိ ဓာရေတူ’’တိ အတ္ထော သမ္ဘဝတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧဝံ အကာရိတာနိ ဒွိကမ္မိကဓာတုရူပါနိ ဝိဘာဝိတာနိ. येथे काही जण विचारू शकतात: 'गंधकुटीला प्रदक्षिणा करतो', 'बुद्धांना शरण जातो', 'पूज्य गोतमांनी मला उपासक म्हणून स्वीकारावे' या प्रयोगांमध्ये काय द्विकर्मक भाव प्राप्त होतो? यावर सांगितले जाते – 'गंधकुटीला प्रदक्षिणा करतो' येथे गुण आणि गुणी यांच्या संबंधाने ग्रहण केल्यामुळे द्विकर्मक भाव प्राप्त होत नाही. 'बुद्धांना शरण जातो' येथेही प्राप्त होत नाही, कारण 'शरण असे जातो' यातील 'इति' शब्दाचा लोप करून हे म्हटले गेले आहे. कारण 'बुद्धं' हे द्वितीया विभक्तीचे रूप आहे आणि 'सरणं' हे प्रथमा विभक्तीचे रूप आहे. 'बुद्ध माझे शरण आणि परायण आहेत, दुःखाचे निवारक आणि हिताचे विधाता आहेत' या अभिप्रायाने 'मी भजतो, सेवा करतो, जाणतो' असा अर्थ होतो. परंतु 'पूज्य गोतमांनी मला उपासक म्हणून स्वीकारावे' येथे द्विकर्मक भाव प्राप्त होतो असे म्हणावे, कारण 'मला आजपासून उपासक म्हणून स्वीकारावे' असा अर्थ संभवतो आणि 'हे अंबट्ठ! शाक्य लोक राजा ओक्काकला आपला पूर्वज मानतात' यातील 'दह' धातूच्या प्रयोगाशी हे समान आहे. अभिप्रायाच्या अर्थाने 'मला हा माझा उपासक आहे असे स्वीकारावे' असा अर्थ संभवतो, असे समजावे. अशा प्रकारे अकारित (प्रयोजक नसलेली) द्विकर्मक धातुरूपांचे स्पष्टीकरण केले आहे. ဣစ္စေဝမမှေဟိ အာဒိတော ပဋ္ဌာယ ဘဂဝတော သာသနတ္ထံ ယထာသတ္တိ ယထာဗလံ ဓာတုယော စ တံရူပါနိ စ တဒနုရူပေဟိ နာနာပဒေဟိ နာနာအတ္ထေဟိ နာနာနယေဟိ စ ယောဇေတွာ ဝိဘာဝိတာနိ, ဧဝံ ဝိဘာဝေန္တေဟိပိ အမှေဟိ တာသံ သရူပပရိစ္ဆေဒေါ အတ္ထပရိစ္ဆေဒေါ ဝါ န သက္ကာ သဗ္ဗသော ဝတ္တုံ. တဒုဘယဉှိ ကော သဗ္ဗသော ဝတ္တုံ သက္ခိဿတိ အညတြ အာဂမာဓိဂမသမ္ပန္နေဟိ ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေဟိ မဟာခီဏာသဝေဟိ. अशा प्रकारे, आम्ही सुरुवातीपासून भगवंतांच्या शासनाच्या अर्थासाठी, आमच्या शक्ती व बलानुसार, धातू आणि त्यांची रूपे, त्यांच्याशी सुसंगत अशा विविध पदांनी, विविध अर्थांनी आणि विविध नियमांनी जोडून स्पष्ट केली आहेत. असे स्पष्टीकरण केले असले तरी, आमच्याद्वारे स्वरूप निश्चित करणे किंवा अर्थ निश्चित करणे पूर्णपणे सांगणे शक्य नाही. कारण आगम (श्रुत) आणि अधिगम (साक्षात्कार) यांनी संपन्न, प्रतिसंभिदा प्राप्त केलेल्या महान क्षीणासवांच्या (अर्हतांच्या) व्यतिरिक्त, ते दोन्ही पूर्णपणे सांगण्यास कोण समर्थ असेल? အတ္ထာတိသယယုတ္တာပိ, ဓာတူ ဟောန္တိ ယတော တတော. ပယောဂတောနုဂန္တဗ္ဗာ, အနေကတ္ထာ ဟိ ဓာတဝေါ. ज्या अर्थी धातू हे अत्यंत विपुल अर्थांनी युक्त असतात, त्या अर्थी प्रयोगांनुसारच त्यांचे अनुसरण केले पाहिजे, कारण धातू हे अनेक अर्थांचे असतात. ယေနေကတ္ထဓရာ [Pg.391] စရန္တိ ဝိဝိဓာ နာထဿ ပါဌေ ဝရေ,တေနေကတ္ထဓရာဝ ဟောန္တိ သဟိတာ နာနူပသဂ္ဂေဟိဝေ; ဓာတူနံ ပန တေသမတ္ထပရမံ ခီဏာသဝေ ပဏ္ဍိတေ,ဝဇ္ဇေတွာ ပဋိသမ္ဘိဒါမတိယုတေ ကော သဗ္ဗသော ဘဏတီတိ. ज्या कारणाने नाथांच्या (बुद्धांच्या) श्रेष्ठ पाठात विविध धातू अनेक अर्थ धारण करून प्रवृत्त होतात, त्याच कारणाने विविध उपसर्गांनी युक्त होऊन ते एकाच अर्थाचे धारक देखील बनतात. परंतु त्या धातूंचा परम अर्थ, क्षीणासव (अर्हत) पंडितांना आणि प्रतिसंभिदा बुद्धीने युक्त असलेल्यांना वगळता, इतर कोण पूर्णपणे सांगू शकेल? ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ कौशल्यासाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' प्रकरणामध्ये... သဗ္ဗဂဏဝိနိစ္ဆယော နာမ ဧကူနဝီသတိမော ပရိစ္ဆေဒေါ 'सब्बगणविनिच्छय' (सर्व गण निश्चय) नावाचा एकोणिसावा परिच्छेद. သဟ ရူပဝိဘာဝနာယ ဓာတုဝိဘာဝနာ နိဋ္ဌိတာ. रूपविभावने (रूपांच्या स्पष्टीकरणा) सह धातूंचे स्पष्टीकरण (धातुविभावना) समाप्त झाले. ဓာတုမာလာ နိဋ္ဌိတာ. धातुमाला समाप्त झाली. | |||
| မြန်မာ | |||
| ပါဠိတော် | အဋ္ဌကထာ | ဋီကာ | အခြား |
| 1101 ပါရာဇိက ပါဠိ 1102 ပါစိတ္တိယ ပါဠိ 1103 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဝိနယ) 1104 စူဠဝဂ္ဂ ပါဠိ 1105 ပရိဝါရ ပါဠိ | 1201 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၁ 1202 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၂ 1203 ပါစိတ္တိယ အဋ္ဌကထာ 1204 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဝိနယ) 1205 စူဠဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 1206 ပရိဝါရ အဋ္ဌကထာ | 1301 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၁ 1302 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၂ 1303 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၃ | 1401 ဒွေမာတိကာပါဠိ 1402 ဝိနယသင်္ဂဟ အဋ္ဌကထာ 1403 ဝဇိရဗုဒ္ဓိ ဋီကာ 1404 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၁ 1405 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၂ 1406 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၁ 1407 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၂ 1408 ကင်္ခာဝိတရဏီပုရာဏ ဋီကာ 1409 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ-ဥတ္တရဝိနိစ္ဆယ 1410 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၁ 1411 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၂ 1412 ပါစိတျာဒိယောဇနာပါဠိ 1413 ခုဒ္ဒသိက္ခာ-မူလသိက္ခာ 8401 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၁ 8402 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၂ 8403 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၁ 8404 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၂ 8405 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ နိဒါနကထာ 8406 ဒီဃနိကာယ (ပု-ဝိ) 8407 မဇ္ဈိမနိကာယ (ပု-ဝိ) 8408 သံယုတ္တနိကာယ (ပု-ဝိ) 8409 အင်္ဂုတ္တရနိကာယ (ပု-ဝိ) 8410 ဝိနယပိဋက (ပု-ဝိ) 8411 အဘိဓမ္မပိဋက (ပု-ဝိ) 8412 အဋ္ဌကထာ (ပု-ဝိ) 8413 နိရုတ္တိဒီပနီ 8414 ပရမတ္ထဒီပနီ သင်္ဂဟမဟာဋီကာပါဌ 8415 အနုဒီပနီပါဌ 8416 ပဋ္ဌာနုဒ္ဒေသ ဒီပနီပါဌ 8417 နမက္ကာရဋီကာ 8418 မဟာပဏာမပါဌ 8419 လက္ခဏာတော ဗုဒ္ဓထောမနာဂါထာ 8420 သုတဝန္ဒနာ 8421 ကမလာဉ္ဇလိ 8422 ဇိနာလင်္ကာရ 8423 ပဇ္ဇမဓု 8424 ဗုဒ္ဓဂုဏဂါထာဝလီ 8425 စူဠဂန္ထဝံသ 8427 သာသနဝံသ 8426 မဟာဝံသ 8429 မောဂ္ဂလ္လာနဗျာကရဏံ 8428 ကစ္စာယနဗျာကရဏံ 8430 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) 8431 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ဓါတုမာလာ) 8432 ပဒရူပသိဒ္ဓိ 8433 မောဂလ္လာနပဉ္စိကာ 8434 ပယောဂသိဒ္ဓိပါဌ 8435 ဝုတ္တောဒယပါဌ 8436 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာပါဌ 8437 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာဋီကာ 8438 သုဗောဓါလင်္ကာရပါဌ 8439 သုဗောဓါလင်္ကာရဋီကာ 8440 ဗာလာဝတာရ ဂဏ္ဌိပဒတ္ထဝိနိစ္ဆယသာရ 8446 ကဝိဒပ္ပဏနီတိ 8447 နီတိမဉ္ဇရီ 8445 ဓမ္မနီတိ 8444 မဟာရဟနီတိ 8441 လောကနီတိ 8442 သုတ္တန္တနီတိ 8443 သူရဿတိနီတိ 8450 စာဏကျနီတိ 8448 နရဒက္ခဒီပနီ 8449 စတုရာရက္ခဒီပနီ 8451 ရသဝါဟိနီ 8452 သီမဝိသောဓနီပါဌ 8453 ဝေဿန္တရဂီတိ 8454 မောဂ္ဂလ္လာန ဝုတ္တိဝိဝရဏပဉ္စိကာ 8455 ထူပဝံသ 8456 ဒါဌာဝံသ 8457 ဓါတုပါဌဝိလာသိနိယာ 8458 ဓါတုဝံသ 8459 ဟတ္ထဝနဂလ္လဝိဟာရဝံသ 8460 ဇိနစရိတယ 8461 ဇိနဝံသဒီပံ 8462 တေလကဋာဟဂါထာ 8463 မိလိဒဋီကာ 8464 ပဒမဉ္ဇရီ 8465 ပဒသာဓနံ 8466 သဒ္ဒဗိန္ဒုပကရဏံ 8467 ကစ္စာယနဓါတုမဉ္ဇုသာ 8468 သာမန္တကူဋဝဏ္ဏနာ |
| 2101 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 2102 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဒီဃ) 2103 ပါထိကဝဂ္ဂ ပါဠိ | 2201 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 2202 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဒီဃ) 2203 ပါထိကဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ | 2301 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 2302 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (ဒီဃ) 2303 ပါထိကဝဂ္ဂ ဋီကာ 2304 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၁ 2305 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၂ | |
| 3101 မူလပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3102 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3103 ဥပရိပဏ္ဏာသ ပါဠိ | 3201 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၁ 3202 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၂ 3203 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ 3204 ဥပရိပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ | 3301 မူလပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3302 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3303 ဥပရိပဏ္ဏာသ ဋီကာ | |
| 4101 သဂါထာဝဂ္ဂ ပါဠိ 4102 နိဒါနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4103 ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 4104 သဠာယတနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4105 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (သံယုတ္တ) | 4201 သဂါထာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4202 နိဒါနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4203 ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4204 သဠာယတနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4205 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (သံယုတ္တ) | 4301 သဂါထာဝဂ္ဂ ဋီကာ 4302 နိဒါနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4303 ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 4304 သဠာယတနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4305 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (သံယုတ္တ) | |
| 5101 ဧကကနိပါတ ပါဠိ 5102 ဒုကနိပါတ ပါဠိ 5103 တိကနိပါတ ပါဠိ 5104 စတုက္ကနိပါတ ပါဠိ 5105 ပဉ္စကနိပါတ ပါဠိ 5106 ဆက္ကနိပါတ ပါဠိ 5107 သတ္တကနိပါတ ပါဠိ 5108 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ပါဠိ 5109 နဝကနိပါတ ပါဠိ 5110 ဒသကနိပါတ ပါဠိ 5111 ဧကာဒသကနိပါတ ပါဠိ | 5201 ဧကကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5202 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5203 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5204 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ အဋ္ဌကထာ | 5301 ဧကကနိပါတ ဋီကာ 5302 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ ဋီကာ 5303 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ ဋီကာ 5304 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ဋီကာ | |
| 6101 ခုဒ္ဒကပါဌ ပါဠိ 6102 ဓမ္မပဒ ပါဠိ 6103 ဥဒါန ပါဠိ 6104 ဣတိဝုတ္တက ပါဠိ 6105 သုတ္တနိပါတ ပါဠိ 6106 ဝိမာနဝတ္ထု ပါဠိ 6107 ပေတဝတ္ထု ပါဠိ 6108 ထေရဂါထာ ပါဠိ 6109 ထေရီဂါထာ ပါဠိ 6110 အပဒါန ပါဠိ-၁ 6111 အပဒါန ပါဠိ-၂ 6112 ဗုဒ္ဓဝံသ ပါဠိ 6113 စရိယာပိဋက ပါဠိ 6114 ဇာတက ပါဠိ-၁ 6115 ဇာတက ပါဠိ-၂ 6116 မဟာနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6117 စူဠနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6118 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ ပါဠိ 6119 နေတ္တိပ္ပကရဏ ပါဠိ 6120 မိလိန္ဒပဉှ ပါဠိ 6121 ပေဋကောပဒေသ ပါဠိ | 6201 ခုဒ္ဒကပါဌ အဋ္ဌကထာ 6202 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၁ 6203 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၂ 6204 ဥဒါန အဋ္ဌကထာ 6205 ဣတိဝုတ္တက အဋ္ဌကထာ 6206 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၁ 6207 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၂ 6208 ဝိမာနဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6209 ပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6210 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၁ 6211 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၂ 6212 ထေရီဂါထာ အဋ္ဌကထာ 6213 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၁ 6214 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၂ 6215 ဗုဒ္ဓဝံသ အဋ္ဌကထာ 6216 စရိယာပိဋက အဋ္ဌကထာ 6217 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၁ 6218 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၂ 6219 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၃ 6220 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၄ 6221 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၅ 6222 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၆ 6223 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၇ 6224 မဟာနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6225 စူဠနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6226 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၁ 6227 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၂ 6228 နေတ္တိပ္ပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 6301 နေတ္တိပ္ပကရဏ ဋီကာ 6302 နေတ္တိဝိဘာဝိနီ | |
| 7101 ဓမ္မသင်္ဂဏီ ပါဠိ 7102 ဝိဘင်္ဂ ပါဠိ 7103 ဓါတုကထာ ပါဠိ 7104 ပုဂ္ဂလပညတ္တိ ပါဠိ 7105 ကထာဝတ္ထု ပါဠိ 7106 ယမက ပါဠိ-၁ 7107 ယမက ပါဠိ-၂ 7108 ယမက ပါဠိ-၃ 7109 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၁ 7110 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၂ 7111 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၃ 7112 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၄ 7113 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၅ | 7201 ဓမ္မသင်္ဂဏိ အဋ္ဌကထာ 7202 သမ္မောဟဝိနောဒနီ အဋ္ဌကထာ 7203 ပဉ္စပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 7301 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-မူလဋီကာ 7302 ဝိဘင်္ဂ-မူလဋီကာ 7303 ပဉ္စပကရဏ-မူလဋီကာ 7304 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-အနုဋီကာ 7305 ပဉ္စပကရဏ-အနုဋီကာ 7306 အဘိဓမ္မာဝတာရော-နာမရူပပရိစ္ဆေဒေါ 7307 အဘိဓမ္မတ္ထသင်္ဂဟော 7308 အဘိဓမ္မာဝတာရ-ပုရာဏဋီကာ 7309 အဘိဓမ္မမာတိကာပါဠိ | |
| português | |||
| Páli | Aṭṭhakathā | Ṭīkā | Outro |
| 1101 Ofensas Graves (Pārājika) 1102 Ofensas Leves (Pācittiya) 1103 Grande Seção do Vīnaya (Mahāvagga) 1104 Pequena Seção do Vīnaya (Cūḷavagga) 1105 Apêndice do Vīnaya (Parivāra) | 1201 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 1 1202 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 2 1203 Comentário das Ofensas Leves 1204 Comentário da Grande Seção do Vīnaya 1205 Comentário da Pequena Seção do Vīnaya 1206 Comentário do Apêndice do Vīnaya | 1301 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 1 1302 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 2 1303 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 3 | 1401 Texto das Duas Matrizes 1402 Comentário do Compêndio do Vīnaya 1403 Subcomentário de Vajirabuddhi 1404 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 1 1405 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 2 1406 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 1 1407 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 2 1408 Antigo Subcomentário que Supera Dúvidas 1409 Decisão sobre o Vīnaya e Decisão Superior 1410 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 1 1411 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 2 1412 Texto da Aplicação das Regras 1413 Pequeno Treinamento e Treinamento Fundamental 8401 Caminho da Purificação - Vol. 1 8402 Caminho da Purificação - Vol. 2 8403 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 1 8404 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 2 8405 História da Origem do Caminho da Purificação 8406 Coleção dos Longos Discursos (índice Pāli-Vietnamita) 8407 Coleção dos Discursos Médios (índice Pāli-Vietnamita) 8408 Coleção dos Discursos Agrupados (índice Pāli-Vietnamita) 8409 Coleção dos Discursos Numerados (índice Pāli-Vietnamita) 8410 Cesto da Disciplina (índice Pāli-Vietnamita) 8411 Cesto do Abhidhamma (índice Pāli-Vietnamita) 8412 Comentários (índice Pāli-Vietnamita) 8413 Elucidação da Etimologia 8414 Grande Subcomentário do Compêndio que Elucida o Sentido Supremo 8415 Texto do Subcomentário Elucidativo 8416 Texto Elucidativo sobre a Exposição das Condições 8417 Subcomentário da Saudação 8418 Grande Texto de Saudação 8419 Versos de Louvor a Buda pelos Sinais 8420 Saudação com Recitação 8421 Oferenda de Lótus 8422 Ornamento dos Vencedores 8423 Mel dos Versos 8424 Coleção de Versos sobre as Qualidades de Buda 8425 Pequena Crônica dos Livros 8427 Crônica do Ensinamento 8426 Grande Crônica 8429 Gramática de Moggallāna 8428 Gramática de Kaccāyana 8430 Tratado sobre a Gramática - Série de Palavras 8431 Tratado sobre a Gramática - Série de Raízes 8432 Realização das Formas das Palavras 8433 Comentário de Moggallāna 8434 Texto sobre a Realização da Aplicação 8435 Texto sobre a Origem dos Versos 8436 Texto do Dicionário Iluminado 8437 Subcomentário do Dicionário Iluminado 8438 Texto sobre o Ornamento da Boa Compreensão 8439 Subcomentário do Ornamento da Boa Compreensão 8440 Essência da Decisão sobre os Termos do Glossário de Bālāvatāra 8446 Ética do Poeta 8447 Coleção de Ética 8445 Ética do Dhamma 8444 Grande Ética Secreta 8441 Ética do Mundo 8442 Ética dos Suttas 8443 Ética do Herói 8450 Ética de Cāṇakya 8448 Elucidação sobre os Perigos para os Homens 8449 Elucidação sobre as Quatro Proteções 8451 O Fluxo do Sabor - Histórias Edificantes 8452 Texto sobre a Purificação dos Limites 8453 Canto de Vessantara 8454 Explicação do Comentário de Moggallāna 8455 Crônica das Estupas 8456 Crônica da Relíquia do Dente 8457 O Esplendor da Leitura dos Elementos 8458 Crônica das Relíquias 8459 Crônica do Mosteiro de Hatthavanagalla 8460 História do Vencedor 8461 Ilha da Linhagem dos Vencedores 8462 Versos da Panela de Óleo 8463 Subcomentário de Milinda 8464 Cacho de Flores de Palavras 8465 Realização das Palavras 8466 Tratado sobre os Pontos da Gramática 8467 Coleção de Raízes de Kaccāyana 8468 Descrição do Pico de Sāmantakūṭa |
| 2101 Seção da Moralidade - Dīgha 2102 Grande Seção - Dīgha 2103 Seção de Pāthika - Dīgha | 2201 Comentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2202 Comentário da Grande Seção - Dīgha 2203 Comentário da Seção de Pāthika - Dīgha | 2301 Subcomentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2302 Subcomentário da Grande Seção - Dīgha 2303 Subcomentário da Seção de Pāthika - Dīgha 2304 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 1 2305 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 2 | |
| 3101 Cinquenta Discursos Fundamentais - Majjhima 3102 Cinquenta Discursos Médios - Majjhima 3103 Cinquenta Discursos Superiores - Majjhima | 3201 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 1 3202 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 2 3203 Comentário dos Cinquenta Médios 3204 Comentário dos Cinquenta Superiores | 3301 Subcomentário dos Cinquenta Fundamentais 3302 Subcomentário dos Cinquenta Médios 3303 Subcomentário dos Cinquenta Superiores | |
| 4101 Seção com Versos - Saṃyutta 4102 Seção das Causas - Saṃyutta 4103 Seção dos Agregados - Saṃyutta 4104 Seção das Seis Bases dos Sentidos - Saṃyutta 4105 Grande Seção - Saṃyutta | 4201 Comentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4202 Comentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4203 Comentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4204 Comentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4205 Comentário da Grande Seção - Saṃyutta | 4301 Subcomentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4302 Subcomentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4303 Subcomentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4304 Subcomentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4305 Subcomentário da Grande Seção - Saṃyutta | |
| 5101 Grupos de Um - Aṅguttara 5102 Grupos de Dois - Aṅguttara 5103 Grupos de Três - Aṅguttara 5104 Grupos de Quatro - Aṅguttara 5105 Grupos de Cinco - Aṅguttara 5106 Grupos de Seis - Aṅguttara 5107 Grupos de Sete - Aṅguttara 5108 Grupos de Oito, etc. - Aṅguttara 5109 Grupos de Nove - Aṅguttara 5110 Grupos de Dez - Aṅguttara 5111 Grupos de Onze - Aṅguttara | 5201 Comentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5202 Comentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5203 Comentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5204 Comentário dos Grupos de Oito, etc. | 5301 Subcomentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5302 Subcomentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5303 Subcomentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5304 Subcomentário dos Grupos de Oito, etc. | |
| 6101 Pequena Leitura (Khuddakapāṭha) 6102 Versos do Dhamma (Dhammapada) 6103 Exclamações Inspiradas (Udāna) 6104 Assim Foi Dito (Itivuttaka) 6105 Coleção de Discursos (Suttanipāta) 6106 Histórias das Mansões Celestiais 6107 Histórias dos Fantasmas 6108 Versos dos Monges Anciãos 6109 Versos das Monjas Anciãs 6110 Histórias Passadas - Vol. 1 6111 Histórias Passadas - Vol. 2 6112 História dos Budas (Buddhavaṃsa) 6113 Cesto das Condutas (Cariyāpiṭaka) 6114 Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6115 Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6116 Grande Exposição (Mahāniddesa) 6117 Pequena Exposição (Cūḷaniddesa) 6118 Caminho da Discriminação Analítica 6119 O Guia (Nettippakaraṇa) 6120 As Perguntas de Milinda 6121 Instrução do Cesto (Peṭakopadesa) | 6201 Comentário da Pequena Leitura 6202 Comentário do Dhammapada - Vol. 1 6203 Comentário do Dhammapada - Vol. 2 6204 Comentário do Udāna 6205 Comentário do Itivuttaka 6206 Comentário do Suttanipāta - Vol. 1 6207 Comentário do Suttanipāta - Vol. 2 6208 Comentário das Histórias das Mansões 6209 Comentário das Histórias dos Fantasmas 6210 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 1 6211 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 2 6212 Comentário dos Versos das Monjas 6213 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 1 6214 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 2 6215 Comentário da História dos Budas 6216 Comentário do Cesto das Condutas 6217 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6218 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6219 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 3 6220 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 4 6221 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 5 6222 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 6 6223 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 7 6224 Comentário da Grande Exposição 6225 Comentário da Pequena Exposição 6226 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 1 6227 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 2 6228 Comentário do Guia | 6301 Subcomentário do Guia 6302 Elucidação do Guia | |
| 7101 Enumeração dos Fenômenos (Dhammasaṅgaṇī) 7102 Análise (Vibhaṅga) 7103 Discurso sobre os Elementos (Dhātukathā) 7104 Designação das Pessoas (Puggalapaññatti) 7105 Pontos da Discussão (Kathāvatthu) 7106 O Livro dos Pares - Vol. 1 7107 O Livro dos Pares - Vol. 2 7108 O Livro dos Pares - Vol. 3 7109 Condições de Originação - Vol. 1 7110 Condições de Originação - Vol. 2 7111 Condições de Originação - Vol. 3 7112 Condições de Originação - Vol. 4 7113 Condições de Originação - Vol. 5 | 7201 Comentário da Enumeração dos Fenômenos 7202 Comentário que Dissipa a Confusão 7203 Comentário dos Cinco Tratados | 7301 Subcomentário Principal da Enumeração dos Fenômenos 7302 Subcomentário Principal da Análise 7303 Subcomentário Principal dos Cinco Tratados 7304 Subcomentário Secundário da Enumeração dos Fenômenos 7305 Subcomentário Secundário dos Cinco Tratados 7306 Introdução ao Abhidhamma - Análise de Nome e Forma 7307 Compêndio do Abhidhamma 7308 Antigo Subcomentário da Introdução ao Abhidhamma 7309 Matriz do Abhidhamma | |
| русский | |||
| Палийский канон | Комментарии | Субкомментарии | Другое |
| 1101 Параджика-пали 1102 Пачиттия-пали 1103 Махавагга-пали (Виная) 1104 Чулавагга-пали 1105 Паривара-пали | 1201 Параджиканда-аттхакатха-1 1202 Параджиканда-аттхакатха-2 1203 Пачиттия-аттхакатха 1204 Махавагга-аттхакатха (Виная) 1205 Чулавагга-аттхакатха 1206 Паривара-аттхакатха | 1301 Сараттхадипани-тика-1 1302 Сараттхадипани-тика-2 1303 Сараттхадипани-тика-3 | 1401 Двематика-пали 1402 Винаясангаха-аттхакатха 1403 Ваджирабуддхи-тика 1404 Вимативинодани-тика-1 1405 Вимативинодани-тика-2 1406 Винаяланкара-тика-1 1407 Винаяланкара-тика-2 1408 Канкхавитаранипурана-тика 1409 Винаявиниччая-уттаравиниччая 1410 Винаявиниччая-тика-1 1411 Винаявиниччая-тика-2 1412 Пачиттиядийоджана-пали 1413 Кхуддасиккха-муласиккха 8401 Висуддхимагга-1 8402 Висуддхимагга-2 8403 Висуддхимагга-махатика-1 8404 Висуддхимагга-махатика-2 8405 Висуддхимагга-ниданакатха 8406 Дигханикая (пу-ви) 8407 Мадджхиманикая (пу-ви) 8408 Самъюттаникая (пу-ви) 8409 Ангуттараникая (пу-ви) 8410 Винаяпитака (пу-ви) 8411 Абхидхаммапитака (пу-ви) 8412 Аттхакатха (пу-ви) 8413 Нируттидипани 8414 Параматтхадипани Сангахамахатикапатха 8415 Анудипанипатха 8416 Паттхануддеса дипанипатха 8417 Намаккаратика 8418 Махапанамапатха 8419 Лаккханато буддхатхоманагатха 8420 Сутавандана 8421 Камаланджали 8422 Джиналанкара 8423 Паджамадху 8424 Буддхагунагатхавали 8425 Чулагантхавамса 8427 Сасанавамса 8426 Махавамса 8429 Моггалланабьякарана 8428 Каччаянабьякарана 8430 Садданитиппакарана (падамала) 8431 Садданитиппакарана (дхатумала) 8432 Падарупасиддхи 8433 Могалланапанчика 8434 Пайогасиддхипатха 8435 Вуттодаяпатха 8436 Абхидханаппадипикапатха 8437 Абхидханаппадипикатика 8438 Субодхаланкарапатха 8439 Субодхаланкаратика 8440 Балаватара гантхипадаттхавиниччаясара 8446 Кавидаппананити 8447 Нитиманджари 8445 Дхамманити 8444 Махараханити 8441 Локанити 8442 Суттантанити 8443 Сурассатинити 8450 Чанакьянити 8448 Нарадаккхадипани 8449 Чатурараккхадипани 8451 Расавахини 8452 Симависодханипатха 8453 Вессантарагити 8454 Моггаллана вуттививаранапанчика 8455 Тхупавамса 8456 Датхавамса 8457 Дхатупатхавиласиния 8458 Дхатувамса 8459 Хаттхаванагаллавихаравамса 8460 Джиначаритая 8461 Джинавамсадипа 8462 Телакатахагатха 8463 Милидатика 8464 Падаманджари 8465 Падасадхана 8466 Саддабиндупакарана 8467 Каччаянадхатуманджуса 8468 Самантакутаваннана |
| 2101 Силаккхандхавагга-пали 2102 Махавагга-пали (Дигха) 2103 Патхикавагга-пали | 2201 Силаккхандхавагга-аттхакатха 2202 Махавагга-аттхакатха (Дигха) 2203 Патхикавагга-аттхакатха | 2301 Силаккхандхавагга-тика 2302 Махавагга-тика (Дигха) 2303 Патхикавагга-тика 2304 Силаккхандхавагга-абхинаватика-1 2305 Силаккхандхавагга-абхинаватика-2 | |
| 3101 Мулапаннаса-пали 3102 Мадджхимапаннаса-пали 3103 Упарипаннаса-пали | 3201 Мулапаннаса-аттхакатха-1 3202 Мулапаннаса-аттхакатха-2 3203 Мадджхимапаннаса-аттхакатха 3204 Упарипаннаса-аттхакатха | 3301 Мулапаннаса-тика 3302 Мадджхимапаннаса-тика 3303 Упарипаннаса-тика | |
| 4101 Сагатхавагга-пали 4102 Ниданавагга-пали 4103 Кхандхавагга-пали 4104 Салаятанавагга-пали 4105 Махавагга-пали (Самъютта) | 4201 Сагатхавагга-аттхакатха 4202 Ниданавагга-аттхакатха 4203 Кхандхавагга-аттхакатха 4204 Салаятанавагга-аттхакатха 4205 Махавагга-аттхакатха (Самъютта) | 4301 Сагатхавагга-тика 4302 Ниданавагга-тика 4303 Кхандхавагга-тика 4304 Салаятанавагга-тика 4305 Махавагга-тика (Самъютта) | |
| 5101 Экаканипата-пали 5102 Дуканипата-пали 5103 Тиканипата-пали 5104 Чатукканипата-пали 5105 Панчаканипата-пали 5106 Чхакканипата-пали 5107 Саттаканипата-пали 5108 Аттхакадинипата-пали 5109 Наваканипата-пали 5110 Дасаканипата-пали 5111 Экадасаканипата-пали | 5201 Экаканипата-аттхакатха 5202 Дука-тика-чатукканипата-аттхакатха 5203 Панчака-чхакка-саттаканипата-аттхакатха 5204 Аттхакадинипата-аттхакатха | 5301 Экаканипата-тика 5302 Дука-тика-чатукканипата-тика 5303 Панчака-чхакка-саттаканипата-тика 5304 Аттхакадинипата-тика | |
| 6101 Кхуддакапатха-пали 6102 Дхаммапада-пали 6103 Удана-пали 6104 Итивуттака-пали 6105 Суттанипата-пали 6106 Виманаваттху-пали 6107 Петаваттху-пали 6108 Тхерагатха-пали 6109 Тхеригатха-пали 6110 Ападана-пали-1 6111 Ападана-пали-2 6112 Буддхавамса-пали 6113 Чарияпитака-пали 6114 Джатака-пали-1 6115 Джатака-пали-2 6116 Маханиддеса-пали 6117 Чуланиддеса-пали 6118 Патисамбхидамагга-пали 6119 Неттиппакарана-пали 6120 Милиндапаньха-пали 6121 Петакопадеса-пали | 6201 Кхуддакапатха-аттхакатха 6202 Дхаммапада-аттхакатха-1 6203 Дхаммапада-аттхакатха-2 6204 Удана-аттхакатха 6205 Итивуттака-аттхакатха 6206 Суттанипата-аттхакатха-1 6207 Суттанипата-аттхакатха-2 6208 Виманаваттху-аттхакатха 6209 Петаваттху-аттхакатха 6210 Тхерагатха-аттхакатха-1 6211 Тхерагатха-аттхакатха-2 6212 Тхеригатха-аттхакатха 6213 Ападана-аттхакатха-1 6214 Ападана-аттхакатха-2 6215 Буддхавамса-аттхакатха 6216 Чарияпитака-аттхакатха 6217 Джатака-аттхакатха-1 6218 Джатака-аттхакатха-2 6219 Джатака-аттхакатха-3 6220 Джатака-аттхакатха-4 6221 Джатака-аттхакатха-5 6222 Джатака-аттхакатха-6 6223 Джатака-аттхакатха-7 6224 Маханиддеса-аттхакатха 6225 Чуланиддеса-аттхакатха 6226 Патисамбхидамагга-аттхакатха-1 6227 Патисамбхидамагга-аттхакатха-2 6228 Неттиппакарана-аттхакатха | 6301 Неттиппакарана-тика 6302 Неттивибхавини | |
| 7101 Дхаммасангани-пали 7102 Вибханга-пали 7103 Дхатукатха-пали 7104 Пуггалапаннятти-пали 7105 Катхаваттху-пали 7106 Ямака-пали-1 7107 Ямака-пали-2 7108 Ямака-пали-3 7109 Паттхана-пали-1 7110 Паттхана-пали-2 7111 Паттхана-пали-3 7112 Паттхана-пали-4 7113 Паттхана-пали-5 | 7201 Дхаммасангани-аттхакатха 7202 Саммохивинодани-аттхакатха 7203 Панчапакарана-аттхакатха | 7301 Дхаммасангани-мулатика 7302 Вибханга-мулатика 7303 Панчапакарана-мулатика 7304 Дхаммасангани-анутика 7305 Панчапакарана-анутика 7306 Абхидхаммаватаро-намарупапариччхедо 7307 Абхидхамматтхасангахо 7308 Абхидхаммаватара-пуранатика 7309 Абхидхаммаматика-пали | |
| සිංහල | |||
| පාලි කැනනය | විවරණ | අටුවා | වෙනත් |
| 1101 පාරාජික පාළි 1102 පාචිත්තිය පාළි 1103 මහාවග්ග පාළි (විනය) 1104 චූළවග්ග පාළි 1105 පරිවාර පාළි | 1201 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-1 1202 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-2 1203 පාචිත්තිය අට්ඨකථා 1204 මහාවග්ග අට්ඨකථා (විනය) 1205 චූළවග්ග අට්ඨකථා 1206 පරිවාර අට්ඨකථා | 1301 සාරත්ථදීපනී ටීකා-1 1302 සාරත්ථදීපනී ටීකා-2 1303 සාරත්ථදීපනී ටීකා-3 | 1401 ද්වෙමාතිකාපාළි 1402 විනයසංගහ අට්ඨකථා 1403 වජිරබුද්ධි ටීකා 1404 විමතිවිනෝදනී ටීකා-1 1405 විමතිවිනෝදනී ටීකා-2 1406 විනයාලංකාර ටීකා-1 1407 විනයාලංකාර ටීකා-2 1408 කඞ්ඛාවිතරණීපුරාණ ටීකා 1409 විනයවිනිච්ඡය-උත්තරවිනිච්ඡය 1410 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-1 1411 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-2 1412 පාචිත්යාදියෝජනාපාළි 1413 ඛුද්දසික්ඛා-මූලසික්ඛා 8401 විසුද්ධිමග්ග-1 8402 විසුද්ධිමග්ග-2 8403 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-1 8404 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-2 8405 විසුද්ධිමග්ග නිදානකථා 8406 දීඝනිකාය (පු-වි) 8407 මජ්ඣිමනිකාය (පු-වි) 8408 සංයුත්තනිකාය (පු-වි) 8409 අඞ්ගුත්තරනිකාය (පු-වි) 8410 විනයපිටක (පු-වි) 8411 අභිධම්මපිටක (පු-වි) 8412 අට්ඨකථා (පු-වි) 8413 නිරුත්තිදීපනී 8414 පරමත්ථදීපනී සඞ්ගහමහාටීකාපාඨ 8415 අනුදීපනීපාඨ 8416 පට්ඨානුද්දේස දීපනීපාඨ 8417 නමක්කාරටීකා 8418 මහාපණාමපාඨ 8419 ලක්ඛණාතෝ බුද්ධථෝමනාගාථා 8420 සුතවන්දනා 8421 කමලාඤ්ජලි 8422 ජිනාලඞ්කාර 8423 පජ්ජමධු 8424 බුද්ධගුණගාථාවලී 8425 චූළගන්ථවංස 8427 සාසනවංස 8426 මහාවංස 8429 මොග්ගල්ලානබ්යාකරණං 8428 කච්චායනබ්යාකරණං 8430 සද්දනීතිප්පකරණං (පදමාලා) 8431 සද්දනීතිප්පකරණං (ධාතුමාලා) 8432 පදරූපසිද්ධි 8433 මොග්ගල්ලානපඤ්චිකා 8434 පයෝගසිද්ධිපාඨ 8435 වුත්තෝදයපාඨ 8436 අභිධානප්පදීපිකාපාඨ 8437 අභිධානප්පදීපිකාටීකා 8438 සුබෝධාලඞ්කාරපාඨ 8439 සුබෝධාලඞ්කාරටීකා 8440 බාලාවතාර ගණ්ඨිපදත්ථවිනිච්ඡයසාර 8446 කවිදප්පණනීති 8447 නීතිමඤ්ජරී 8445 ධම්මනීති 8444 මහාරහනීති 8441 ලෝකනීති 8442 සුත්තන්තනීති 8443 සූරස්සතිනීති 8450 චාණක්යනීති 8448 නරදක්ඛදීපනී 8449 චතුරාරක්ඛදීපනී 8451 රසවාහිනී 8452 සීමවිසෝධනීපාඨ 8453 වෙස්සන්තරගීති 8454 මොග්ගල්ලාන වුත්තිවිවරණපඤ්චිකා 8455 ථූපවංස 8456 දාඨාවංස 8457 ධාතුපාඨවිලාසිනියා 8458 ධාතුවංස 8459 හත්ථවනගල්ලවිහාරවංස 8460 ජිනචරිතය 8461 ජිනවංසදීපං 8462 තේලකටාහගාථා 8463 මිලිදටීකා 8464 පදමඤ්ජරී 8465 පදසාධනං 8466 සද්දබින්දුපකරණං 8467 කච්චායනධාතුමඤ්ජුසා 8468 සාමන්තකූටවණ්ණනා |
| 2101 සීලක්ඛන්ධවග්ග පාළි 2102 මහාවග්ග පාළි (දීඝ) 2103 පාථිකවග්ග පාළි | 2201 සීලක්ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 2202 මහාවග්ග අට්ඨකථා (දීඝ) 2203 පාථිකවග්ග අට්ඨකථා | 2301 සීලක්ඛන්ධවග්ග ටීකා 2302 මහාවග්ග ටීකා (දීඝ) 2303 පාථිකවග්ග ටීකා 2304 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-1 2305 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-2 | |
| 3101 මූලපණ්ණාස පාළි 3102 මජ්ඣිමපණ්ණාස පාළි 3103 උපරිපණ්ණාස පාළි | 3201 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-1 3202 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-2 3203 මජ්ඣිමපණ්ණාස අට්ඨකථා 3204 උපරිපණ්ණාස අට්ඨකථා | 3301 මූලපණ්ණාස ටීකා 3302 මජ්ඣිමපණ්ණාස ටීකා 3303 උපරිපණ්ණාස ටීකා | |
| 4101 සගාථාවග්ග පාළි 4102 නිදානවග්ග පාළි 4103 ඛන්ධවග්ග පාළි 4104 සළායතනවග්ග පාළි 4105 මහාවග්ග පාළි (සංයුත්ත) | 4201 සගාථාවග්ග අට්ඨකථා 4202 නිදානවග්ග අට්ඨකථා 4203 ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 4204 සළායතනවග්ග අට්ඨකථා 4205 මහාවග්ග අට්ඨකථා (සංයුත්ත) | 4301 සගාථාවග්ග ටීකා 4302 නිදානවග්ග ටීකා 4303 ඛන්ධවග්ග ටීකා 4304 සළායතනවග්ග ටීකා 4305 මහාවග්ග ටීකා (සංයුත්ත) | |
| 5101 එකකනිපාත පාළි 5102 දුකනිපාත පාළි 5103 තිකනිපාත පාළි 5104 චතුක්කනිපාත පාළි 5105 පඤ්චකනිපාත පාළි 5106 ඡක්කනිපාත පාළි 5107 සත්තකනිපාත පාළි 5108 අට්ඨකාදිනිපාත පාළි 5109 නවකනිපාත පාළි 5110 දසකනිපාත පාළි 5111 එකාදසකනිපාත පාළි | 5201 එකකනිපාත අට්ඨකථා 5202 දුක-තික-චතුක්කනිපාත අට්ඨකථා 5203 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත අට්ඨකථා 5204 අට්ඨකාදිනිපාත අට්ඨකථා | 5301 එකකනිපාත ටීකා 5302 දුක-තික-චතුක්කනිපාත ටීකා 5303 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත ටීකා 5304 අට්ඨකාදිනිපාත ටීකා | |
| 6101 ඛුද්දකපාඨ පාළි 6102 ධම්මපද පාළි 6103 උදාන පාළි 6104 ඉතිවුත්තක පාළි 6105 සුත්තනිපාත පාළි 6106 විමානවත්ථු පාළි 6107 පේතවත්ථු පාළි 6108 ථේරගාථා පාළි 6109 ථේරීගාථා පාළි 6110 අපදාන පාළි-1 6111 අපදාන පාළි-2 6112 බුද්ධවංස පාළි 6113 චරියාපිටක පාළි 6114 ජාතක පාළි-1 6115 ජාතක පාළි-2 6116 මහානිද්දේස පාළි 6117 චූළනිද්දේස පාළි 6118 පටිසම්භිදාමග්ග පාළි 6119 නෙත්තිප්පකරණ පාළි 6120 මිලින්දපඤ්හ පාළි 6121 පේටකෝපදේස පාළි | 6201 ඛුද්දකපාඨ අට්ඨකථා 6202 ධම්මපද අට්ඨකථා-1 6203 ධම්මපද අට්ඨකථා-2 6204 උදාන අට්ඨකථා 6205 ඉතිවුත්තක අට්ඨකථා 6206 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-1 6207 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-2 6208 විමානවත්ථු අට්ඨකථා 6209 පේතවත්ථු අට්ඨකථා 6210 ථේරගාථා අට්ඨකථා-1 6211 ථේරගාථා අට්ඨකථා-2 6212 ථේරීගාථා අට්ඨකථා 6213 අපදාන අට්ඨකථා-1 6214 අපදාන අට්ඨකථා-2 6215 බුද්ධවංස අට්ඨකථා 6216 චරියාපිටක අට්ඨකථා 6217 ජාතක අට්ඨකථා-1 6218 ජාතක අට්ඨකථා-2 6219 ජාතක අට්ඨකථා-3 6220 ජාතක අට්ඨකථා-4 6221 ජාතක අට්ඨකථා-5 6222 ජාතක අට්ඨකථා-6 6223 ජාතක අට්ඨකථා-7 6224 මහානිද්දේස අට්ඨකථා 6225 චූළනිද්දේස අට්ඨකථා 6226 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-1 6227 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-2 6228 නෙත්තිප්පකරණ අට්ඨකථා | 6301 නෙත්තිප්පකරණ ටීකා 6302 නෙත්තිවිභාවිනී | |
| 7101 ධම්මසංගණී පාළි 7102 විභඞ්ග පාළි 7103 ධාතුකථා පාළි 7104 පුග්ගලපඤ්ඤත්ති පාළි 7105 කථාවත්ථු පාළි 7106 යමක පාළි-1 7107 යමක පාළි-2 7108 යමක පාළි-3 7109 පට්ඨාන පාළි-1 7110 පට්ඨාන පාළි-2 7111 පට්ඨාන පාළි-3 7112 පට්ඨාන පාළි-4 7113 පට්ඨාන පාළි-5 | 7201 ධම්මසංගණි අට්ඨකථා 7202 සම්මෝහවිනෝදනී අට්ඨකථා 7203 පඤ්චපකරණ අට්ඨකථා | 7301 ධම්මසංගණී-මූලටීකා 7302 විභඞ්ග-මූලටීකා 7303 පඤ්චපකරණ-මූලටීකා 7304 ධම්මසංගණී-අනුටීකා 7305 පඤ්චපකරණ-අනුටීකා 7306 අභිධම්මාවතාරෝ-නාමරූපපරිච්ඡේදෝ 7307 අභිධම්මත්ථසංගහෝ 7308 අභිධම්මාවතාර-පුරාණටීකා 7309 අභිධම්මමාතිකාපාළි | |
| Español | |||
| El Canon Pali | Los Comentarios | Los Subcomentarios | Otros |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| แบบไทย | |||
| บาลีแคน | ข้อคิดเห็น | คำอธิบายย่อย | อื่น |
| 1101 ปาราชิกปาฬิ 1102 ปาจิตติยปาฬิ 1103 มหาวคฺคปาฬิ (วินัย) 1104 จูฬวคฺคปาฬิ 1105 ปริวารปาฬิ | 1201 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๑ 1202 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๒ 1203 ปาจิตฺติยอฏฺฐกถา 1204 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (วินัย) 1205 จูฬวคฺคอฏฺฐกถา 1206 ปริวารอฏฺฐกถา | 1301 สารตฺถทีปนีฏีกา-๑ 1302 สารตฺถทีปนีฏีกา-๒ 1303 สารตฺถทีปนีฏีกา-๓ | 1401 ทเวมาติกาปาฬิ 1402 วินยสํคหอฏฺฐกถา 1403 วชิรพุทฺธิฏีกา 1404 วิมติวิโนทนีฏีกา-๑ 1405 วิมติวิโนทนีฏีกา-๒ 1406 วินยาลงฺการฏีกา-๑ 1407 วินยาลงฺการฏีกา-๒ 1408 กงฺขาวิตรณีปุราณฏีกา 1409 วินยวินิจฉย-อุตฺตรวินิจฉย 1410 วินยวินิจฉยฏีกา-๑ 1411 วินยวินิจฉยฏีกา-๒ 1412 ปาจิตฺยาทิโยชนาปาฬิ 1413 ขุทฺทสิกฺขา-มูลสิกฺขา 8401 วิสุทฺธิมคฺค-๑ 8402 วิสุทฺธิมคฺค-๒ 8403 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๑ 8404 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๒ 8405 วิสุทฺธิมคฺค-นิทานกถา 8406 ทีฆนิกาย (ปุ-วิ) 8407 มชฺฌิมนิกาย (ปุ-วิ) 8408 สํยุตฺตนิกาย (ปุ-วิ) 8409 องฺคุตฺตรนิกาย (ปุ-วิ) 8410 วินยปิฎก (ปุ-วิ) 8411 อภิธมฺมปิฎก (ปุ-วิ) 8412 อฏฺฐกถา (ปุ-วิ) 8413 นิรุตฺติทีปนี 8414 ปรมตฺถทีปนี สงฺคหมหาฏีกาปาฐ 8415 อนุทีปนีปาฐ 8416 ปฎฺฐานุทฺเทสทีปนีปาฐ 8417 นมกฺการฏีกา 8418 มหาปณามปาฐ 8419 ลกฺขณาโต พุทฺธโถมนาคาถา 8420 สุตวทน 8421 กมลาญฺชลิ 8422 ชินาลงฺการ 8423 ปชฺชมธุ 8424 พุทฺธคุณคาถาวลี 8425 จูฬคนฺถวํส 8427 สาสนวํส 8426 มหาวํส 8429 โมคฺคลฺลานพฺยากรณํ 8428 กจฺจายนพฺยากรณํ 8430 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ปทมาลา) 8431 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ธาตุมาลา) 8432 ปทรูปสิทฺธิ 8433 โมคคฺลานปญฺจิกา 8434 ปโยคสิทฺธิปาฐ 8435 วุตฺโตทยปาฐ 8436 อภิธานปฺปทีปิกาปาฐ 8437 อภิธานปฺปทีปิกาฏีกา 8438 สุโพธาลงฺการปาฐ 8439 สุโพธาลงฺการฏีกา 8440 พาลาวตาร คณฺฐิปทตฺถวินิจฺฉยสาร 8446 กวิทปฺปณนีติ 8447 นีติมญฺชรี 8445 ธมฺมนีติ 8444 มหารหนีติ 8441 โลกนีติ 8442 สุตฺตนฺตนีติ 8443 สูรสฺสตินีติ 8450 จาณกฺยนีติ 8448 นรทกฺขทีปนี 8449 จตุราวรกฺขทีปนี 8451 รสวาหินี 8452 สีมวิโสธนีปาฐ 8453 เวสฺสนฺตรคีติ 8454 โมคฺคลฺลาน วุตฺติวิวรณปญฺจิกา 8455 ถูปวํส 8456 ทาฐาวํส 8457 ธาตุปาฐวิลาสินิยา 8458 ธาตุวํส 8459 หตฺถวนคัลลวิหารวํส 8460 ชนจริตย 8461 ชนวํสทีปํ 8462 เตลกฏาหคาถา 8463 มิลิทฏีกา 8464 ปทมญฺชรี 8465 ปทสาธนํ 8466 สทฺทพินฺทุปกรณํ 8467 กจฺจายนธาตุมญฺชุสา 8468 สามนฺตกูฏวณฺณนา |
| 2101 สีลกฺขนฺธวคฺคปาฬิ 2102 มหาวคฺคปาฬิ (ทีฆ) 2103 ปาถิกวคฺคปาฬิ | 2201 สีลกฺขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 2202 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (ทีฆ) 2203 ปาถิกวคฺคอฏฺฐกถา | 2301 สีลกฺขนฺธวคฺคฏีกา 2302 มหาวคฺคฏีกา (ทีฆ) 2303 ปาถิกวคฺคฏีกา 2304 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๑ 2305 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๒ | |
| 3101 มูลปณฺณาสปาฬิ 3102 มชฺฌิมปณฺณาสปาฬิ 3103 อุปริปณฺณาสปาฬิ | 3201 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๑ 3202 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๒ 3203 มชฺฌิมปณฺณาสอฏฺฐกถา 3204 อุปริปณฺณาสอฏฺฐกถา | 3301 มูลปณฺณาสฏีกา 3302 มชฺฌิมปณฺณาสฏีกา 3303 อุปริปณฺณาสฏีกา | |
| 4101 สคาถาวคฺคปาฬิ 4102 นิทานวคฺคปาฬิ 4103 ขนฺธวคฺคปาฬิ 4104 สฬายตนวคฺคปาฬิ 4105 มหาวคฺคปาฬิ (สํยุตฺต) | 4201 สคาถาวคฺคอฏฺฐกถา 4202 นิทานวคฺคอฏฺฐกถา 4203 ขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 4204 สฬายตนวคฺคอฏฺฐกถา 4205 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (สํยุตฺต) | 4301 สคาถาวคฺคฏีกา 4302 นิทานวคฺคฏีกา 4303 ขนฺธวคฺคฏีกา 4304 สฬายตนวคฺคฏีกา 4305 มหาวคฺคฏีกา (สํยุตฺต) | |
| 5101 เอกกนิปาตปาฬิ 5102 ทุกนิปาตปาฬิ 5103 ติกนิปาตปาฬิ 5104 จตุกฺกนิปาตปาฬิ 5105 ปญฺจกนิปาตปาฬิ 5106 ฉกฺกนิปาตปาฬิ 5107 สตฺตกนิปาตปาฬิ 5108 อฏฺฐกาทินิปาตปาฬิ 5109 นวกนิปาตปาฬิ 5110 ทสกนิปาตปาฬิ 5111 เอกาทสกนิปาตปาฬิ | 5201 เอกกนิปาตอฏฺฐกถา 5202 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตอฏฺฐกถา 5203 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตอฏฺฐกถา 5204 อฏฺฐกาทินิปาตอฏฺฐกถา | 5301 เอกกนิปาตฏีกา 5302 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตฏีกา 5303 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตฏีกา 5304 อฏฺฐกาทินิปาตฏีกา | |
| 6101 ขุทฺทกปาฐปาฬิ 6102 ธมฺมปทปาฬิ 6103 อุทานปาฬิ 6104 อิติวุตฺตกปาฬิ 6105 สุตฺตนิบาตปาฬิ 6106 วิมานวตฺถุปาฬิ 6107 เปตวตฺถุปาฬิ 6108 เถรคาถาปาฬิ 6109 เถรีคาถาปาฬิ 6110 อปทานปาฬิ-๑ 6111 อปทานปาฬิ-๒ 6112 พุทธวงฺสปาฬิ 6113 จริยาปิฏกปาฬิ 6114 ชาตกปาฬิ-๑ 6115 ชาตกปาฬิ-๒ 6116 มหานิทฺเทสปาฬิ 6117 จูฬนิทฺเทสปาฬิ 6118 ปฏิสมฺภิทามคฺคปาฬิ 6119 เนตฺติปฺปกฺรณปาฬิ 6120 มิลินฺทปญฺหาปาฬิ 6121 เปฏโกปเทสปาฬิ | 6201 ขุทฺทกปาฐอฏฺฐกถา 6202 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๑ 6203 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๒ 6204 อุทานอฏฺฐกถา 6205 อิติวุตฺตกอฏฺฐกถา 6206 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๑ 6207 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๒ 6208 วิมานวตฺถุอฏฺฐกถา 6209 เปตวตฺถุอฏฺฐกถา 6210 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๑ 6211 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๒ 6212 เถรีคาถาอฏฺฐกถา 6213 อปทานอฏฺฐกถา-๑ 6214 อปทานอฏฺฐกถา-๒ 6215 พุทธวงฺสอฏฺฐกถา 6216 จริยาปิฏกอฏฺฐกถา 6217 ชาตกอฏฺฐกถา-๑ 6218 ชาตกอฏฺฐกถา-๒ 6219 ชาตกอฏฺฐกถา-๓ 6220 ชาตกอฏฺฐกถา-๔ 6221 ชาตกอฏฺฐกถา-๕ 6222 ชาตกอฏฺฐกถา-๖ 6223 ชาตกอฏฺฐกถา-๗ 6224 มหานิทฺเทสอฏฺฐกถา 6225 จูฬนิทฺเทสอฏฺฐกถา 6226 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๑ 6227 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๒ 6228 เนตฺติปฺปกฺรณอฏฺฐกถา | 6301 เนตฺติปฺปกฺรณฏีกา 6302 เนตฺติวิภาวินี | |
| 7101 ธมฺมสงฺคณีปาฬิ 7102 วิภงฺคปาฬิ 7103 ธาตุกถาปาฬิ 7104 ปุคฺคลปญฺญตฺติปาฬิ 7105 กถาวตฺถุปาฬิ 7106 ยมกปาฬิ-๑ 7107 ยมกปาฬิ-๒ 7108 ยมกปาฬิ-๓ 7109 ปฎฺฐานปาฬิ-๑ 7110 ปฎฺฐานปาฬิ-๒ 7111 ปฎฺฐานปาฬิ-๓ 7112 ปฎฺฐานปาฬิ-๔ 7113 ปฎฺฐานปาฬิ-๕ | 7201 ธมฺมสงฺคณิอฏฺฐกถา 7202 สมฺโมหวินิทนีอฏฺฐกถา 7203 ปญฺจปกรณอฏฺฐกถา | 7301 ธมฺมสงฺคณีมูลฏีกา 7302 วิภงฺคมูลฏีกา 7303 ปญฺจปกรณมูลฏีกา 7304 ธมฺมสงฺคณีอนุฏีกา 7305 ปญฺจปกรณอนุฏีกา 7306 อภิธมฺมาวตาโร-นามรูปปริจฺเฉโท 7307 อภิธมฺมตฺถสงฺคโห 7308 อภิธมฺมาวตาร-ปุราณฏีกา 7309 อภิธมฺมมาติกาปาฬิ | |
| བོད་མི | |||
| པཱ་ལི་གསུང་རབ། | འགྲེལ་བཤད། | འགྲེལ་བཤད་ཕྲན། | གཞན། |
| 1101 ཕ་ར་ཇི་ཀ་པཱ་ལི། 1102 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་པཱ་ལི། 1103 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (ཝི་ན་ཡ) 1104 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 1105 པ་རི་ཝཱ་ར་པཱ་ལི། | 1201 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 1202 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 1203 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1204 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (ཝི་ན་ཡ) 1205 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1206 པ་རི་ཝཱ་ར་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 1301 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1302 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1303 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༣ | 1401 དྭེ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། 1402 ཝི་ན་ཡ་སངྒ་ཧ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1403 ཝ་ཇི་ར་བུད་དྷི་ཊཱི་ཀཱ། 1404 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1405 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1406 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1407 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1408 ཀངྑཱ་ཝི་ཏ་ར་ཎཱི་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 1409 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཨུ་ཏྟ་ར་ཝི་ནི་ཙ་ཡ། 1410 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1411 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1412 པཱ་ཙི་ཏྱཱ་དི་ཡོ་ཇ་ནཱ་པཱ་ལི། 1413 ཁུད་ད་སིཀྑཱ་མཱུ་ལ་སིཀྑཱ། 8401 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༡ 8402 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༢ 8403 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 8404 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 8405 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་ནི་དཱ་ན་ཀ་ཐཱ། 8406 དཱི་གྷ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8407 མཛྷི་མ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8408 སཾ་ཡུཏྟ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8409 ཨངྒུ་ཏྟ་ར་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8410 ཝི་ན་ཡ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8411 ཨ་བྷི་དྷམྨ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8412 ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (པུ་ཝི) 8413 ནི་རུཏྟི་དཱི་པ་ནཱི། 8414 པ་ར་མཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་སངྒ་ཧ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8415 ཨ་ནུ་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8416 པཊྛཱ་ནུདྡེ་ས་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8417 ན་མཀྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8418 མ་ཧཱ་པ་ཎཱ་མ་པཱ་ཋ། 8419 ལཀྑ་ཎཱ་ཏོ་བུདྡྷ་ཐོ་མ་ནཱ་གཱ་ཐཱ། 8420 སུ་ཏ་ཝནྡ་ནཱ། 8421 ཀ་མ་ལཱཉྫ་ལི། 8422 ཇི་ནཱ་ལངྐཱ་ར། 8423 པཛྫ་མ་དྷུ། 8424 བུདྡྷ་གུ་ཎ་གཱ་ཐཱ་ཝ་ལཱི། 8425 ཙཱུ་ལ་གནྠ་ཝཾ་ས། 8427 སཱ་ས་ན་ཝཾ་ས། 8426 མ་ཧཱ་ཝཾ་ས། 8429 མོགྒ་ལླཱ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8428 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8430 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (པ་ད་མཱ་ལཱ) 8431 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (དྷཱ་ཏུ་མཱ་ལཱ) 8432 པ་ད་རཱུ་པ་སིད་དྷི། 8433 མོ་ག་ལླཱ་ན་པཉྩ་ཀཱ། 8434 པ་ཡོ་ག་སིད་དྷི་པཱ་ཋ། 8435 བུཏྟོ་ད་ཡ་པཱ་ཋ། 8436 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8437 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་ཊཱི་ཀཱ། 8438 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་པཱ་ཋ། 8439 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8440 བཱ་ལཱ་ཝ་ཏཱ་ར་གཎྛི་པ་དཏྠ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་སཱ་ར། 8446 ཀ་ཝི་དཔྤ་ཎ་ནཱི་ཏི། 8447 ནཱི་ཏི་མཉྫ་རཱི། 8445 དྷམྨ་ནཱི་ཏི། 8444 མ་ཧཱ་ར་ཧ་ནཱི་ཏི། 8441 ལོ་ཀ་ནཱི་ཏི། 8442 སུཏྟནྟ་ནཱ་ཏི། 8443 སཱུ་རསྶ་ཏི་ནཱི་ཏི། 8450 ཙཱ་ཎཀྱ་ནཱི་ཏི། 8448 ན་ར་དཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8449 ཙ་ཏུ་རཱ་རཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8451 ར་ས་ཝཱ་ཧི་ནཱི། 8452 སཱི་མ་ཝི་སོ་ད་ནཱི་པཱ་ཋ། 8453 ཝེསྶནྟ་ར་གཱི་ཏི། 8454 མོགྒ་ལླཱ་ན་བུཏྟི་ཝི་ཝ་ར་ཎ་པཉྩ་ཀཱ། 8455 ཐཱུ་པ་ཝཾ་ས། 8456 དཱ་ཊྷཱ་ཝཾ་ས། 8457 དྷཱ་ཏུ་པཱ་ཋ་ཝི་ལཱ་སི་ནི་ཡཱ། 8458 དྷཱ་ཏུ་ཝཾ་ས། 8459 ཧཏྠ་ཝ་ན་གལླ་ཝི་ཧཱ་ར་ཝཾ་ས། 8460 ཇི་ན་ཙ་རི་ཏ་ཡ། 8461 ཇི་ན་ཝཾ་ས་དཱི་པཾ། 8462 ཏེ་ལ་ཀ་ཊཱ་ཧ་གཱ་ཐཱ། 8463 མི་ལི་ད་ཊཱི་ཀཱ། 8464 པ་ད་མཉྫ་རཱི། 8465 པ་ད་སཱ་ད་ནཾ། 8466 སདྡ་བིནྡུ་པ་ཀ་ར་ཎཾ། 8467 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་དྷཱ་ཏུ་མཉྫུ་སཱ། 8468 སཱ་མནྟ་ཀཱུ་ཊ་ཝཎྞ་ནཱ། |
| 2101 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 2102 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (དཱི་གྷ) 2103 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་པཱ་ལི། | 2201 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 2202 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (དཱི་གྷ) 2203 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 2301 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2302 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (དཱི་གྷ) 2303 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2304 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 2305 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༢ | |
| 3101 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3102 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3103 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། | 3201 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 3202 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 3203 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 3204 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 3301 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3302 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3303 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 4101 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4102 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4103 ཁནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4104 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4105 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4201 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4202 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4203 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4204 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4205 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4301 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4302 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4303 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4304 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4305 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | |
| 5101 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5102 དུ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5103 ཏི་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5104 ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5105 པཉྩ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5106 ཆཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5107 སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5108 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5109 ན་ཝ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5110 ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5111 ཨེ་ཀཱ་ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། | 5201 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5202 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5203 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5204 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 5301 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5302 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5303 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5304 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 6101 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་པཱ་ལི། 6102 དྷམྨ་པ་ད་པཱ་ལི། 6103 ཨུ་དཱ་ན་པཱ་ལི། 6104 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་པཱ་ལི། 6105 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 6106 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6107 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6108 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6109 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6110 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 6111 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 6112 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་པཱ་ལི། 6113 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་པཱ་ལི། 6114 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 6115 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 6116 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6117 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6118 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་པཱ་ལི། 6119 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་པཱ་ལི། 6120 མི་ལིནྡ་པཉྷ་པཱ་ལི། 6121 པེ་ཊ་ཀོ་པ་དེ་ས་པཱ་ལི། | 6201 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6202 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6203 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6204 ཨུ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6205 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6206 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6207 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6208 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6209 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6210 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6211 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6212 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6213 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6214 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6215 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6216 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6217 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6218 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6219 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༣ 6220 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༤ 6221 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༥ 6222 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༦ 6223 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༧ 6224 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6225 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6226 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6227 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6228 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 6301 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 6302 ནེཏྟི་ཝི་བྷཱི་ནཱི། | |
| 7101 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་པཱ་ལི། 7102 ཝི་བྷངྒ་པཱ་ལི། 7103 དྷཱ་ཏུ་ཀ་ཐཱ་པཱ་ལི། 7104 པུགྒ་ལ་པཉྙཏྟི་པཱ་ལི། 7105 ཀ་ཐཱ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 7106 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 7107 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 7108 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༣ 7109 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 7110 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 7111 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༣ 7112 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༤ 7113 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༥ | 7201 དྷམྨ་སངྒ་ཎི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7202 སམྨོ་ཧ་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7203 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 7301 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7302 ཝི་བྷངྒ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7303 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7304 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7305 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7306 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་རོ་ནཱ་མ་རཱུ་པ་པ་རི་ཙྪེ་དོ། 7307 ཨ་བྷི་དྷམྨཏྠ་སངྒ་ཧོ། 7308 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་ར་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 7309 ཨ་བྷི་དྷམྨ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། | |
| Tiếng Việt | |||
| Kinh điển Pali | Chú giải | Phụ chú giải | Khác |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Tạng Luật) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 1 1202 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 2 1203 Chú Giải Pācittiya 1204 Chú Giải Mahāvagga (Tạng Luật) 1205 Chú Giải Cūḷavagga 1206 Chú Giải Parivāra | 1301 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 1 1302 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 2 1303 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Chú Giải Vinayasaṅgaha 1403 Phụ Chú Giải Vajirabuddhi 1404 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 1 1405 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 2 1406 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 1 1407 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 2 1408 Phụ Chú Giải Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 1 1411 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Thanh Tịnh Đạo - 1 8402 Thanh Tịnh Đạo - 2 8403 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 1 8404 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 2 8405 Lời Tựa Thanh Tịnh Đạo 8406 Trường Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8407 Trung Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8408 Tương Ưng Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8409 Tăng Chi Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8410 Tạng Luật (Vấn Đáp) 8411 Tạng Vi Diệu Pháp (Vấn Đáp) 8412 Chú Giải (Vấn Đáp) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Phụ Chú Giải Namakkāra 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Phụ Chú Giải Abhidhānappadīpikā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Phụ Chú Giải Subodhālaṅkāra 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8444 Mahārahanīti 8445 Dhammanīti 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8450 Cāṇakyanīti 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Phụ Chú Giải Milinda 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Trường Bộ) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2202 Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2203 Chú Giải Pāthikavagga | 2301 Phụ Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2302 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2303 Phụ Chú Giải Pāthikavagga 2304 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 1 2305 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 1 3202 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 2 3203 Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3204 Chú Giải Uparipaṇṇāsa | 3301 Phụ Chú Giải Mūlapaṇṇāsa 3302 Phụ Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3303 Phụ Chú Giải Uparipaṇṇāsa | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Tương Ưng Bộ) | 4201 Chú Giải Sagāthāvagga 4202 Chú Giải Nidānavagga 4203 Chú Giải Khandhavagga 4204 Chú Giải Saḷāyatanavagga 4205 Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | 4301 Phụ Chú Giải Sagāthāvagga 4302 Phụ Chú Giải Nidānavagga 4303 Phụ Chú Giải Khandhavagga 4304 Phụ Chú Giải Saḷāyatanavagga 4305 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Chú Giải Ekakanipāta 5202 Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5203 Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5204 Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | 5301 Phụ Chú Giải Ekakanipāta 5302 Phụ Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5303 Phụ Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5304 Phụ Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi - 1 6111 Apadāna Pāḷi - 2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi - 1 6115 Jātaka Pāḷi - 2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Chú Giải Khuddakapāṭha 6202 Chú Giải Dhammapada - 1 6203 Chú Giải Dhammapada - 2 6204 Chú Giải Udāna 6205 Chú Giải Itivuttaka 6206 Chú Giải Suttanipāta - 1 6207 Chú Giải Suttanipāta - 2 6208 Chú Giải Vimānavatthu 6209 Chú Giải Petavatthu 6210 Chú Giải Theragāthā - 1 6211 Chú Giải Theragāthā - 2 6212 Chú Giải Therīgāthā 6213 Chú Giải Apadāna - 1 6214 Chú Giải Apadāna - 2 6215 Chú Giải Buddhavaṃsa 6216 Chú Giải Cariyāpiṭaka 6217 Chú Giải Jātaka - 1 6218 Chú Giải Jātaka - 2 6219 Chú Giải Jātaka - 3 6220 Chú Giải Jātaka - 4 6221 Chú Giải Jātaka - 5 6222 Chú Giải Jātaka - 6 6223 Chú Giải Jātaka - 7 6224 Chú Giải Mahāniddesa 6225 Chú Giải Cūḷaniddesa 6226 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 1 6227 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 2 6228 Chú Giải Nettippakaraṇa | 6301 Phụ Chú Giải Nettippakaraṇa 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi - 1 7107 Yamaka Pāḷi - 2 7108 Yamaka Pāḷi - 3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi - 1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi - 2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi - 3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi - 4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi - 5 | 7201 Chú Giải Dhammasaṅgaṇi 7202 Chú Giải Sammohavinodanī 7203 Chú Giải Pañcapakaraṇa | 7301 Phụ Chú Giải Gốc Dhammasaṅgaṇī 7302 Phụ Chú Giải Gốc Vibhaṅga 7303 Phụ Chú Giải Gốc Pañcapakaraṇa 7304 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Dhammasaṅgaṇī 7305 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Pañcapakaraṇa 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Phụ Chú Giải Cổ Điển Abhidhammāvatāra 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |