| বাংলা | |||
| পালি | অট্ঠকথা | টীকা | অন্ন |
| 1101 পারাজিক পালি 1102 পাচিত্তিয় পালি 1103 মহাবগ্গ পালি (বিনয়) 1104 চূলবগ্গ পালি 1105 পরিবার পালি | 1201 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-১ 1202 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-২ 1203 পাচিত্তিয় অট্ঠকথা 1204 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (বিনয়) 1205 চূলবগ্গ অট্ঠকথা 1206 পরিবার অট্ঠকথা | 1301 সারত্থদীপনী টীকা-১ 1302 সারত্থদীপনী টীকা-২ 1303 সারত্থদীপনী টীকা-৩ | 1401 দ্বেমাতিকাপালি 1402 বিনয়সংগহ অট্ঠকথা 1403 বজিরবুদ্ধি টীকা 1404 বিমতিবিনোদনী টীকা-১ 1405 বিমতিবিনোদনী টীকা-২ 1406 বিনয়ালংকার টীকা-১ 1407 বিনয়ালংকার টীকা-২ 1408 কঙ্খাবিতরণীপুরাণ টীকা 1409 বিনয়বিনিচ্ছয়-উত্তরবিনিচ্ছয় 1410 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-১ 1411 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-২ 1412 পাচিত্যাদিযোজনাপালি 1413 খুদ্ধসিক্খা-মূলসিক্খা 8401 বিসুদ্ধিমগ্গ-১ 8402 বিসুদ্ধিমগ্গ-২ 8403 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-১ 8404 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-২ 8405 বিসুদ্ধিমগ্গ নিদানকথা 8406 দীঘনিকায় (পু-বি) 8407 মজ্ঝিমনিকায় (পু-বি) 8408 সংযুত্তনিকায় (পু-বি) 8409 অঙ্গুত্তরনিকায় (পু-বি) 8410 বিনয়পিটক (পু-বি) 8411 অভিধম্মপিটক (পু-বি) 8412 অট্ঠকথা (পু-বি) 8413 নিরুত্তিদীপনী 8414 পরমত্থদীপনী সংগহমহাটীকাপাঠ 8415 অনুদীপনীপাঠ 8416 পট্ঠানুদ্দেস দীপনীপাঠ 8417 নমক্কারটীকা 8418 মহাপণামপাঠ 8419 লক্খণাতো বুদ্ধথোমনাগাথা 8420 সুতবন্দনা 8421 কমলাঞ্জলি 8422 জিনালংকার 8423 পজ্জমধু 8424 বুদ্ধগুণগাথাবলী 8425 চূলগন্থবংস 8426 মহাবংস 8427 সাসনবংস 8428 কচ্চায়নব্যাকরণং 8429 মোগ্গল্লানব্যাকরণং 8430 সদ্দনীতিপ্পকরণং (পদমালা) 8431 সদ্দনীতিপ্পকরণং (ধাতুমালা) 8432 পদরূপসিদ্ধি 8433 মোগ্গল্লানপঞ্চিকা 8434 পযোগসিদ্ধিপাঠ 8435 বুত্তোদয়পাঠ 8436 অভিধানপ্পদীপিকাপাঠ 8437 অভিধানপ্পদীপিকাটীকা 8438 সুবোধালংকারপাঠ 8439 সুবোধালংকারটীকা 8440 বালাবতার গণ্ঠিপদত্থবিনিচ্ছয়সার 8441 লোকনীতি 8442 সুত্তন্তনীতি 8443 সূরস্সতীনীতি 8444 মহারহনীতি 8445 ধম্মনীতি 8446 কবিদপ্পণনীতি 8447 নীতিমঞ্জরী 8448 নরদক্খদীপনী 8449 চতুরারক্খদীপনী 8450 চাণক্যনীতি 8451 রসবাহিনী 8452 সীমাবিসোধনীপাঠ 8453 বেস্সন্তরগীতি 8454 মোগ্গল্লান বুত্তিবিবরণপঞ্চিকা 8455 থূপবংস 8456 দাঠাবংস 8457 ধাতুপাঠবিলাসিনিয়া 8458 ধাতুবংস 8459 হত্থবনগল্লবিহারবংস 8460 জিনচরিতয় 8461 জিনবংসদীপং 8462 তেলকটাহগাথা 8463 মিলিদটীকা 8464 পদমঞ্জরী 8465 পদসাধনং 8466 সদ্দবিন্দুপকরণং 8467 কচ্চায়নধাতুমঞ্জুসা 8468 সামন্তকূটবণ্ণনা |
| 2101 সীলক্খন্ধবগ্গ পালি 2102 মহাবগ্গ পালি (দীঘ) 2103 পাথিকবগ্গ পালি | 2201 সীলক্খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 2202 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (দীঘ) 2203 পাথিকবগ্গ অট্ঠকথা | 2301 সীলক্খন্ধবগ্গ টীকা 2302 মহাবগ্গ টীকা (দীঘ) 2303 পাথিকবগ্গ টীকা 2304 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-১ 2305 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-২ | |
| 3101 মূলপণ্ণাস পালি 3102 মজ্ঝিমপণ্ণাস পালি 3103 উপরিপণ্ণাস পালি | 3201 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-১ 3202 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-২ 3203 মজ্ঝিমপণ্ণাস অট্ঠকথা 3204 উপরিপণ্ণাস অট্ঠকথা | 3301 মূলপণ্ণাস টীকা 3302 মজ্ঝিমপণ্ণাস টীকা 3303 উপরিপণ্ণাস টীকা | |
| 4101 সগাথাবগ্গ পালি 4102 নিদানবগ্গ পালি 4103 খন্ধবগ্গ পালি 4104 সলায়তনবগ্গ পালি 4105 মহাবগ্গ পালি (সংযুত্ত) | 4201 সগাথাবগ্গ অট্ঠকথা 4202 নিদানবগ্গ অট্ঠকথা 4203 খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 4204 সলায়তনবগ্গ অট্ঠকথা 4205 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (সংযুত্ত) | 4301 সগাথাবগ্গ টীকা 4302 নিদানবগ্গ টীকা 4303 খন্ধবগ্গ টীকা 4304 সলায়তনবগ্গ টীকা 4305 মহাবগ্গ টীকা (সংযুত্ত) | |
| 5101 এককনিপাত পালি 5102 দুকনিপাত পালি 5103 তিকনিপাত পালি 5104 চতুক্কনিপাত পালি 5105 পঞ্চকনিপাত পালি 5106 ছক্কনিপাত পালি 5107 সত্তকনিপাত পালি 5108 অট্ঠকাদিনিপাত পালি 5109 নবকনিপাত পালি 5110 দশকনিপাত পালি 5111 একাদশকনিপাত পালি | 5201 এককনিপাত অট্ঠকথা 5202 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত অট্ঠকথা 5203 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত অট্ঠকথা 5204 অট্ঠকাদিনিপাত অট্ঠকথা | 5301 এককনিপাত টীকা 5302 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত টীকা 5303 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত টীকা 5304 অট্ঠকাদিনিপাত টীকা | |
| 6101 খুদ্ধকপাঠ পালি 6102 ধম্মপদ পালি 6103 উদান পালি 6104 ইতিবুত্তক পালি 6105 সুত্তনিপাত পালি 6106 বিমানবত্থু পালি 6107 পেতবত্থু পালি 6108 থেরগাথা পালি 6109 থেরীগাথা পালি 6110 অপদান পালি-১ 6111 অপদান পালি-২ 6112 বুদ্ধবংস পালি 6113 চরিয়াপিটক পালি 6114 জাতক পালি-১ 6115 জাতক পালি-২ 6116 মহানিদ্দেস পালি 6117 চূলনিদ্দেস পালি 6118 পটিসম্ভিদামগ্গ পালি 6119 নেত্তিপ্পকরণ পালি 6120 মিলিন্দপঞ্হ পালি 6121 পেটকোপদেস পালি | 6201 খুদ্ধকপাঠ অট্ঠকথা 6202 ধম্মপদ অট্ঠকথা-১ 6203 ধম্মপদ অট্ঠকথা-২ 6204 উদান অট্ঠকথা 6205 ইতিবুত্তক অট্ঠকথা 6206 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-১ 6207 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-২ 6208 বিমানবত্থু অট্ঠকথা 6209 পেতবত্থু অট্ঠকথা 6210 থেরগাথা অট্ঠকথা-১ 6211 থেরগাথা অট্ঠকথা-২ 6212 থেরীগাথা অট্ঠকথা 6213 অপদান অট্ঠকথা-১ 6214 অপদান অট্ঠকথা-২ 6215 বুদ্ধবংস অট্ঠকথা 6216 চরিয়াপিটক অট্ঠকথা 6217 জাতক অট্ঠকথা-১ 6218 জাতক অট্ঠকথা-২ 6219 জাতক অট্ঠকথা-৩ 6220 জাতক অট্ঠকথা-৪ 6221 জাতক অট্ঠকথা-৫ 6222 জাতক অট্ঠকথা-৬ 6223 জাতক অট্ঠকথা-৭ 6224 মহানিদ্দেস অট্ঠকথা 6225 চূলনিদ্দেস অট্ঠকথা 6226 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-১ 6227 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-২ 6228 নেত্তিপ্পকরণ অট্ঠকথা | 6301 নেত্তিপ্পকরণ টীকা 6302 নেত্তিবিভাবিনী | |
| 7101 ধম্মসংগণী পালি 7102 বিভঙ্গ পালি 7103 ধাতুকথা পালি 7104 পুগ্গলপঞ্ঞাত্তি পালি 7105 কথাবত্থু পালি 7106 যমক পালি-১ 7107 যমক পালি-২ 7108 যমক পালি-৩ 7109 পট্ঠান পালি-১ 7110 পট্ঠান পালি-২ 7111 পট্ঠান পালি-৩ 7112 পট্ঠান পালি-৪ 7113 পট্ঠান পালি-৫ | 7201 ধম্মসংগণি অট্ঠকথা 7202 সম্মোহবিনোদনী অট্ঠকথা 7203 পঞ্চপকরণ অট্ঠকথা | 7301 ধম্মসংগণী-মূলটীকা 7302 বিভঙ্গ-মূলটীকা 7303 পঞ্চপকরণ-মূলটীকা 7304 ধম্মসংগণী-অনুটীকা 7305 পঞ্চপকরণ-অনুটীকা 7306 অভিধম্মাবতারো-নামরূপপরিচ্ছেদো 7307 অভিধম্মত্থসংগহো 7308 অভিধম্মাবতার-পুরাণটীকা 7309 অভিধম্মমাতিকাপালি | |
| 中文 | |||
| 巴利 | 義註 | 複註 | 藏外典籍 |
| 1101 巴拉基咖(波羅夷) 1102 巴吉帝亞(波逸提) 1103 大品(律藏) 1104 小品 1105 附隨 | 1201 巴拉基咖(波羅夷)義註-1 1202 巴拉基咖(波羅夷)義註-2 1203 巴吉帝亞(波逸提)義註 1204 大品義註(律藏) 1205 小品義註 1206 附隨義註 | 1301 心義燈-1 1302 心義燈-2 1303 心義燈-3 | 1401 疑惑度脫 1402 律攝註釋 1403 金剛智疏 1404 疑難解除疏-1 1405 疑難解除疏-2 1406 律莊嚴疏-1 1407 律莊嚴疏-2 1408 古老解惑疏 1409 律抉擇-上抉擇 1410 律抉擇疏-1 1411 律抉擇疏-2 1412 巴吉帝亞等啟請經 1413 小戒學-根本戒學 8401 清淨道論-1 8402 清淨道論-2 8403 清淨道大複註-1 8404 清淨道大複註-2 8405 清淨道論導論 8406 長部問答 8407 中部問答 8408 相應部問答 8409 增支部問答 8410 律藏問答 8411 論藏問答 8412 義注問答 8413 語言學詮釋手冊 8414 勝義顯揚 8415 隨燈論誦 8416 發趣論燈論 8417 禮敬文 8418 大禮敬文 8419 依相讚佛偈 8420 經讚 8421 蓮花供 8422 勝者莊嚴 8423 語蜜 8424 佛德偈集 8425 小史 8427 佛教史 8426 大史 8429 目犍連文法 8428 迦旃延文法 8430 文法寶鑑(詞幹篇) 8431 文法寶鑑(詞根篇) 8432 詞形成論 8433 目犍連五章 8434 應用成就讀本 8435 音韻論讀本 8436 阿毗曇燈讀本 8437 阿毗曇燈疏 8438 妙莊嚴論讀本 8439 妙莊嚴論疏 8440 初學入門義抉擇精要 8446 詩王智論 8447 智論花鬘 8445 法智論 8444 大羅漢智論 8441 世間智論 8442 經典智論 8443 勇士百智論 8450 考底利耶智論 8448 人眼燈 8449 四護衛燈 8451 妙味之流 8452 界清淨 8453 韋桑達拉頌 8454 目犍連語釋五章 8455 塔史 8456 佛牙史 8457 詞根讀本注釋 8458 舍利史 8459 象頭山寺史 8460 勝者行傳 8461 勝者宗燈 8462 油鍋偈 8463 彌蘭王問疏 8464 詞花鬘 8465 詞成就論 8466 正理滴論 8467 迦旃延詞根注 8468 邊境山注釋 |
| 2101 戒蘊品 2102 大品(長部) 2103 波梨品 | 2201 戒蘊品註義註 2202 大品義註(長部) 2203 波梨品義註 | 2301 戒蘊品疏 2302 大品複註(長部) 2303 波梨品複註 2304 戒蘊品新複註-1 2305 戒蘊品新複註-2 | |
| 3101 根本五十經 3102 中五十經 3103 後五十經 | 3201 根本五十義註-1 3202 根本五十義註-2 3203 中五十義註 3204 後五十義註 | 3301 根本五十經複註 3302 中五十經複註 3303 後五十經複註 | |
| 4101 有偈品 4102 因緣品 4103 蘊品 4104 六處品 4105 大品(相應部) | 4201 有偈品義注 4202 因緣品義注 4203 蘊品義注 4204 六處品義注 4205 大品義注(相應部) | 4301 有偈品複註 4302 因緣品註 4303 蘊品複註 4304 六處品複註 4305 大品複註(相應部) | |
| 5101 一集經 5102 二集經 5103 三集經 5104 四集經 5105 五集經 5106 六集經 5107 七集經 5108 八集等經 5109 九集經 5110 十集經 5111 十一集經 | 5201 一集義註 5202 二、三、四集義註 5203 五、六、七集義註 5204 八、九、十、十一集義註 | 5301 一集複註 5302 二、三、四集複註 5303 五、六、七集複註 5304 八集等複註 | |
| 6101 小誦 6102 法句經 6103 自說 6104 如是語 6105 經集 6106 天宮事 6107 餓鬼事 6108 長老偈 6109 長老尼偈 6110 譬喻-1 6111 譬喻-2 6112 諸佛史 6113 所行藏 6114 本生-1 6115 本生-2 6116 大義釋 6117 小義釋 6118 無礙解道 6119 導論 6120 彌蘭王問 6121 藏釋 | 6201 小誦義注 6202 法句義注-1 6203 法句義注-2 6204 自說義注 6205 如是語義註 6206 經集義注-1 6207 經集義注-2 6208 天宮事義注 6209 餓鬼事義注 6210 長老偈義注-1 6211 長老偈義注-2 6212 長老尼義注 6213 譬喻義注-1 6214 譬喻義注-2 6215 諸佛史義注 6216 所行藏義注 6217 本生義注-1 6218 本生義注-2 6219 本生義注-3 6220 本生義注-4 6221 本生義注-5 6222 本生義注-6 6223 本生義注-7 6224 大義釋義注 6225 小義釋義注 6226 無礙解道義注-1 6227 無礙解道義注-2 6228 導論義注 | 6301 導論複註 6302 導論明解 | |
| 7101 法集論 7102 分別論 7103 界論 7104 人施設論 7105 論事 7106 雙論-1 7107 雙論-2 7108 雙論-3 7109 發趣論-1 7110 發趣論-2 7111 發趣論-3 7112 發趣論-4 7113 發趣論-5 | 7201 法集論義註 7202 分別論義註(迷惑冰消) 7203 五部論義註 | 7301 法集論根本複註 7302 分別論根本複註 7303 五論根本複註 7304 法集論複註 7305 五論複註 7306 阿毘達摩入門 7307 攝阿毘達磨義論 7308 阿毘達摩入門古複註 7309 阿毘達摩論母 | |
| English | |||
| Pali Canon | Commentaries | Sub-commentaries | Other |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
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| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| हिंदी | |||
| पाली कैनन | कमेंट्री | उप-टिप्पणियाँ | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळि 1102 पाचित्तिय पाळि 1103 महावग्ग पाळि (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळि 1105 परिवार पाळि | 1201 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-1 1202 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-2 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-1 1302 सारत्थदीपनी टीका-2 1303 सारत्थदीपनी टीका-3 | 1401 द्वेमातिकापाळि 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-1 1405 विमतिविनोदनी टीका-2 1406 विनयालंकार टीका-1 1407 विनयालंकार टीका-2 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-1 1411 विनयविनिच्छय टीका-2 1412 पाचित्यादियोजनापाळि 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-1 8402 विसुद्धिमग्ग-2 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-1 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-2 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अङ्गुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी सङ्गहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवन्दना 8421 कमलाञ्जलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगन्थवंस 8427 सासनवंस 8426 महावंस 8429 मोग्गल्लानब्याकरणं 8428 कच्चायनब्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपञ्चिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गण्ठिपदत्थविनिच्छयसार 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमञ्जरी 8445 धम्मनीति 8444 महारहनीति 8441 लोकनीति 8442 सुत्तन्तनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8450 चाणक्यनीति 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8451 रसवाहिनी 8452 सीमविसोधनीपाठ 8453 वेस्सन्तरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपञ्चिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमञ्जरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिन्दुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमञ्जुसा 8468 सामन्तकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खन्धवग्ग पाळि 2102 महावग्ग पाळि (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळि | 2201 सीलक्खन्धवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खन्धवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-1 2305 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-2 | |
| 3101 मूलपण्णास पाळि 3102 मज्झिमपण्णास पाळि 3103 उपरिपण्णास पाळि | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-1 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-2 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळि 4102 निदानवग्ग पाळि 4103 खन्धवग्ग पाळि 4104 सळायतनवग्ग पाळि 4105 महावग्ग पाळि (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खन्धवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खन्धवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळि 5102 दुकनिपात पाळि 5103 तिकनिपात पाळि 5104 चतुक्कनिपात पाळि 5105 पञ्चकनिपात पाळि 5106 छक्कनिपात पाळि 5107 सत्तकनिपात पाळि 5108 अट्ठकादिनिपात पाळि 5109 नवकनिपात पाळि 5110 दसकनिपात पाळि 5111 एकादसकनिपात पाळि | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळि 6102 धम्मपद पाळि 6103 उदान पाळि 6104 इतिवुत्तक पाळि 6105 सुत्तनिपात पाळि 6106 विमानवत्थु पाळि 6107 पेतवत्थु पाळि 6108 थेरगाथा पाळि 6109 थेरीगाथा पाळि 6110 अपदान पाळि-1 6111 अपदान पाळि-2 6112 बुद्धवंस पाळि 6113 चरियापिटक पाळि 6114 जातक पाळि-1 6115 जातक पाळि-2 6116 महानिद्देस पाळि 6117 चूळनिद्देस पाळि 6118 पटिसम्भिदामग्ग पाळि 6119 नेत्तिप्पकरण पाळि 6120 मिलिन्दपञ्ह पाळि 6121 पेटकोपदेस पाळि | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-1 6203 धम्मपद अट्ठकथा-2 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-1 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-2 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-1 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-2 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-1 6214 अपदान अट्ठकथा-2 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-1 6218 जातक अट्ठकथा-2 6219 जातक अट्ठकथा-3 6220 जातक अट्ठकथा-4 6221 जातक अट्ठकथा-5 6222 जातक अट्ठकथा-6 6223 जातक अट्ठकथा-7 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-1 6227 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-2 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसङ्गणी पाळि 7102 विभङ्ग पाळि 7103 धातुकथा पाळि 7104 पुग्गलपञ्ञत्ति पाळि 7105 कथावत्थु पाळि 7106 यमक पाळि-1 7107 यमक पाळि-2 7108 यमक पाळि-3 7109 पट्ठान पाळि-1 7110 पट्ठान पाळि-2 7111 पट्ठान पाळि-3 7112 पट्ठान पाळि-4 7113 पट्ठान पाळि-5 | 7201 धम्मसङ्गणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पञ्चपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसङ्गणी-मूलटीका 7302 विभङ्ग-मूलटीका 7303 पञ्चपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसङ्गणी-अनुटीका 7305 पञ्चपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसङ्गहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळि | |
| Indonesia | |||
| Kanon Pali | Komentar | Sub-komentar | Lainnya |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| 日文 | |||
| パーリ仏典 | 註釈書 | 副註釈書 | その他 |
| 1101 パーラージカ・パーリ 1102 パーチッティヤ・パーリ 1103 マハーヴァッガ・パーリ(ヴィナヤ) 1104 チューラヴァッガ・パーリ 1105 パリヴァーラ・パーリ | 1201 パーラージカカンダ・アッタカター-1 1202 パーラージカカンダ・アッタカター-2 1203 パーチッティヤ・アッタカター 1204 マハーヴァッガ・アッタカター(ヴィナヤ) 1205 チューラヴァッガ・アッタカター 1206 パリヴァーラ・アッタカター | 1301 サーラッタディーパニー・ティーカー-1 1302 サーラッタディーパニー・ティーカー-2 1303 サーラッタディーパニー・ティーカー-3 | 1401 ドヴェマーティカー・パーリ 1402 ヴィナヤサンガハ・アッタカター 1403 ヴァジラブッディ・ティーカー 1404 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-1 1405 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-2 1406 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-1 1407 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-2 1408 カンカーウィタラニープラーナ・ティーカー 1409 ヴィナヤヴィニッチャヤ-ウッタラヴィニッチャヤ 1410 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-1 1411 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-2 1412 パーチッティヤーディヨージャナー・パーリ 1413 クッダシッカー-ムーラシッカー 8401 ヴィスッディマッガ-1 8402 ヴィスッディマッガ-2 8403 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-1 8404 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-2 8405 ヴィスッディマッガ・ニダーナカター 8406 ディーガニカーヤ(プ・ヴィ) 8407 マッジマニカーヤ(プ・ヴィ) 8408 サンユッタニカーヤ(プ・ヴィ) 8409 アングッタラニカーヤ(プ・ヴィ) 8410 ヴィナヤピタカ(プ・ヴィ) 8411 アビダンマピタカ(プ・ヴィ) 8412 アッタカター(プ・ヴィ) 8413 ニルッティディーパニー 8414 パラマッタディーパニー・サンガハマハーティカーパータ 8415 アヌディーパニーパータ 8416 パッターヌッデーサ・ディーパニーパータ 8417 ナマッカラ・ティーカー 8418 マハーパナーマ・パータ 8419 ラッカナート・ブッダトーマナーガーター 8420 スタヴァンダナー 8421 カマラーニャジャリ 8422 ジナランカーラ 8423 パッジャマドゥ 8424 ブッダグナガーター・ヴァリー 8425 チューラガンタヴァンサ 8427 サーサナヴァンサ 8426 マハーヴァンサ 8429 モッガラーナ・ビャーカラナン 8428 カッチャーヤナ・ビャーカラナン 8430 サッダニーティッパカラナン(パダマーラー) 8431 サッダニーティッパカラナン(ダートゥマーラー) 8432 パダルーパシッディ 8433 モッガラーナ・パンチカー 8434 パヨーガシッディ・パータ 8435 ヴットーダヤ・パータ 8436 アビダーナッパディーピカー・パータ 8437 アビダーナッパディーピカー・ティーカー 8438 スボーダーランカーラ・パータ 8439 スボーダーランカーラ・ティーカー 8440 バーラーヴァターラ・ガンティパダッタヴィニッチャヤサーラ 8446 カヴィダッパナニーティ 8447 ニーティマンジャリー 8445 ダンマニーティ 8444 マハーラハニーティ 8441 ローカニーティ 8442 スタンタニーティ 8443 スーラッサティニーティ 8450 チャーナキャニーティ 8448 ナラダッカディーパニー 8449 チャトゥラーラッカディーパニー 8451 ラサヴァーヒニー 8452 シーマヴィソーダニー・パータ 8453 ヴェッサンタラ・ギーティ 8454 モッガラーナ・ヴッティヴィヴァラナパンチカー 8455 トゥーパヴァンサ 8456 ダーターヴァンサ 8457 ダートゥパータヴィラーヴィシニヤー 8458 ダートゥヴァンサ 8459 ハッタヴァナッガラヴィハーラヴァンサ 8460 ジナチャリタヤ 8461 ジナヴァンサディーパン 8462 テーラカターガーター 8463 ミリダ・ティーカー 8464 パダマンジャリー 8465 パダサーダナン 8466 サッダビンドゥパカラナン 8467 カッチャーヤナ・ダートゥマンジューサー 8468 サーマンタクータ・ヴァンナナー |
| 2101 シーラッカンダワッガ・パーリ 2102 マハーワッガ・パーリ(ディーガ) 2103 パーティカワッガ・パーリ | 2201 シーラッカンダワッガ・アッタカター 2202 マハーワッガ・アッタカター(ディーガ) 2203 パーティカワッガ・アッタカター | 2301 シーラッカンダワッガ・ティーカー 2302 マハーワッガ・ティーカー(ディーガ) 2303 パーティカワッガ・ティーカー 2304 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-1 2305 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-2 | |
| 3101 ムーラパンナーサ・パーリ 3102 マッジマパンナーサ・パーリ 3103 ウパリパンナーサ・パーリ | 3201 ムーラパンナーサ・アッタカター-1 3202 ムーラパンナーサ・アッタカター-2 3203 マッジマパンナーサ・アッタカター 3204 ウパリパンナーサ・アッタカター | 3301 ムーラパンナーサ・ティーカー 3302 マッジマパンナーサ・ティーカー 3303 ウパリパンナーサ・ティーカー | |
| 4101 サガーター・ワッガ・パーリ 4102 ニダーナ・ワッガ・パーリ 4103 カンダ・ワッガ・パーリ 4104 サラーヤタナ・ワッガ・パーリ 4105 マハーワッガ・パーリ(サンユッタ) | 4201 サガーター・ワッガ・アッタカター 4202 ニダーナ・ワッガ・アッタカター 4203 カンダ・ワッガ・アッタカター 4204 サラーヤタナ・ワッガ・アッタカター 4205 マハーワッガ・アッタカター(サンユッタ) | 4301 サガーター・ワッガ・ティーカー 4302 ニダーナ・ワッガ・ティーカー 4303 カンダ・ワッガ・ティーカー 4304 サラーヤタナ・ワッガ・ティーカー 4305 マハーワッガ・ティーカー(サンユッタ) | |
| 5101 エーカカニパータ・パーリ 5102 ドゥカニパータ・パーリ 5103 ティカニパータ・パーリ 5104 チャトゥッカニパータ・パーリ 5105 パンチャカニパータ・パーリ 5106 チャッカニパータ・パーリ 5107 サッタカニパータ・パーリ 5108 アッタカーディニパータ・パーリ 5109 ナヴァカニパータ・パーリ 5110 ダサカニパータ・パーリ 5111 エーカーダサカニパータ・パーリ | 5201 エーカカニパータ・アッタカター 5202 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・アッタカター 5203 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・アッタカター 5204 アッタカーディニパータ・アッタカター | 5301 エーカカニパータ・ティーカー 5302 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・ティーカー 5303 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・ティーカー 5304 アッタカーディニパータ・ティーカー | |
| 6101 クッダカパータ・パーリ 6102 ダンマパダ・パーリ 6103 ウダーナ・パーリ 6104 イティヴッタカ・パーリ 6105 スッタニパータ・パーリ 6106 ヴィマーナヴァットゥ・パーリ 6107 ペーヴァットゥ・パーリ 6108 テーラガーター・パーリ 6109 テーリーガーター・パーリ 6110 アパダーナ・パーリ-1 6111 アパダーナ・パーリ-2 6112 ブッダヴァンサ・パーリ 6113 チャリヤーピタカ・パーリ 6114 ジャータカ・パーリ-1 6115 ジャータカ・パーリ-2 6116 マハーニッデーサ・パーリ 6117 チューラニッデーサ・パーリ 6118 パティサンビダーマッガ・パーリ 6119 ネッティッパカラナ・パーリ 6120 ミリンダパンハ・パーリ 6121 ペータコーパデーサ・パーリ | 6201 クッダカパータ・アッタカター 6202 ダンマパダ・アッタカター-1 6203 ダンマパダ・アッタカター-2 6204 ウダーナ・アッタカター 6205 イティヴッタカ・アッタカター 6206 スッタニパータ・アッタカター-1 6207 スッタニパータ・アッタカター-2 6208 ヴィマーナヴァットゥ・アッタカター 6209 ペータヴァットゥ・アッタカター 6210 テーラガーター・アッタカター-1 6211 テーラガーター・アッタカター-2 6212 テーリーガーター・アッタカター 6213 アパダーナ・アッタカター-1 6214 アパダーナ・アッタカター-2 6215 ブッダヴァンサ・アッタカター 6216 チャリヤーピタカ・アッタカター 6217 ジャータカ・アッタカター-1 6218 ジャータカ・アッタカター-2 6219 ジャータカ・アッタカター-3 6220 ジャータカ・アッタカター-4 6221 ジャータカ・アッタカター-5 6222 ジャータカ・アッタカター-6 6223 ジャータカ・アッタカター-7 6224 マハーニッデーサ・アッタカター 6225 チューラニッデーサ・アッタカター 6226 パティサンビダーマッガ・アッタカター-1 6227 パティサンビダーマッガ・アッタカター-2 6228 ネッティッパカラナ・アッタカター | 6301 ネッティッパカラナ・ティーカー 6302 ネッティヴィバーヴィニー | |
| 7101 ダンマサンガニー・パーリ 7102 ヴィバンガ・パーリ 7103 ダートゥカター・パーリ 7104 プッガラパンニャッティ・パーリ 7105 カター・ヴァットゥ・パーリ 7106 ヤマカ・パーリ-1 7107 ヤマカ・パーリ-2 7108 ヤマカ・パーリ-3 7109 パッターナ・パーリ-1 7110 パッターナ・パーリ-2 7111 パッターナ・パーリ-3 7112 パッターナ・パーリ-4 7113 パッターナ・パーリ-5 | 7201 ダンマサンガニ・アッタカター 7202 サンモーハヴィノーダニー・アッタカター 7203 パンチャパカラナ・アッタカター | 7301 ダンマサンガニー・ムーラティーカー 7302 ヴィバンガ・ムーラティーカー 7303 パンチャパカラナ・ムーラティーカー 7304 ダンマサンガニー・アヌティーカー 7305 パンチャパカラナ・アヌティーカー 7306 アビダンマーヴァターロ・ナーマルーパパリッチェード 7307 アビダンマッタ・サンガホ 7308 アビダンマーヴァターラ・プラーナティーカー 7309 アビダンマ・マーティカーパーリ | |
| ខ្មែរ | |||
| ព្រះត្រៃបិដកបាលី | អដ្ឋកថា | ដីកា | ផ្សេងទៀត |
| 1101 បារាជិកបាឡិ 1102 បាចិត្តិយបាឡិ 1103 មហាវគ្គបាឡិ (វិន័យ) 1104 ចូឡវគ្គបាឡិ 1105 បរិវារបាឡិ | 1201 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-១ 1202 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-២ 1203 បាចិត្តិយអដ្ឋកថា 1204 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (វិន័យ) 1205 ចូឡវគ្គអដ្ឋកថា 1206 បរិវារអដ្ឋកថា | 1301 សារត្ថទីបនីដីកា-១ 1302 សារត្ថទីបនីដីកា-២ 1303 សារត្ថទីបនីដីកា-៣ | 1401 ទ្វេមាតិកាបាឡិ 1402 វិនយសង្គហអដ្ឋកថា 1403 វជិរពុទ្ធិដីកា 1404 វិមតិវិនោទនីដីកា-១ 1405 វិមតិវិនោទនីដីកា-២ 1406 វិនយាលង្ការដីកា-១ 1407 វិនយាលង្ការដីកា-២ 1408 កង្ខាវិតរណីបុរាណដីកា 1409 វិនយវិនិច្ឆយ-ឧត្តរវិនិច្ឆយ 1410 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-១ 1411 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-២ 1412 បាចិត្យាទិយោជនាបាឡិ 1413 ខុទ្ទសិក្ខា-មូលសិក្ខា 8401 វិសុទ្ធិមគ្គ-១ 8402 វិសុទ្ធិមគ្គ-២ 8403 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-១ 8404 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-២ 8405 វិសុទ្ធិមគ្គ និទានកថា 8406 ទីឃនិកាយ (បុ-វិ) 8407 មជ្ឈិមនិកាយ (បុ-វិ) 8408 សំយុត្តនិកាយ (បុ-វិ) 8409 អង្គុត្តរនិកាយ (បុ-វិ) 8410 វិនយបិដក (បុ-វិ) 8411 អភិធម្មបិដក (បុ-វិ) 8412 អដ្ឋកថា (បុ-វិ) 8413 និរុត្តិទីបនី 8414 បរមត្ថទីបនី សង្គហមហាដីកាបាឋ 8415 អនុទីបនីបាឋ 8416 បដ្ឋានុទ្ទេស ទីបនីបាឋ 8417 នមក្ការដីកា 8418 មហាបណាមបាឋ 8419 លក្ខណាតោ ពុទ្ធថោមនាគាថា 8420 សុតវន្ទនា 8421 កមលាញ្ជលិ 8422 ជិនាលង្ការ 8423 បជ្ជមធុ 8424 ពុទ្ធគុណគាថាវលី 8425 ចូឡគន្ថវង្ស 8427 សាសនវង្ស 8426 មហាវង្ស 8429 មោគ្គល្លានព្យាករណំ 8428 កច្ចាយនព្យាករណំ 8430 សទ្ទនីតិប្បករណំ (បទមាលា) 8431 សទ្ទនីតិប្បករណំ (ធាតុមាលា) 8432 បទរូបសិទ្ធិ 8433 មោគ្គល្លានបញ្ចិកា 8434 បយោគសិទ្ធិបាឋ 8435 វុត្តោទយបាឋ 8436 អភិធានប្បទីបិកាបាឋ 8437 អភិធានប្បទីបិកាដីកា 8438 សុពោធាលង្ការបាឋ 8439 សុពោធាលង្ការដីកា 8440 បាលាវតារ គណ្ឋិបទត្ថវិនិច្ឆយសារ 8446 កវិទប្បណនីតិ 8447 នីតិមញ្ជរី 8445 ធម្មនីតិ 8444 មហារហនីតិ 8441 លោកនីតិ 8442 សុត្តន្តនីតិ 8443 សូរស្សតិនីតិ 8450 ចាណក្យនីតិ 8448 នរទក្ខទីបនី 8449 ចតុរារក្ខទីបនី 8451 រសវាហិនី 8452 សីមវិសោធនីបាឋ 8453 វេស្សន្តរគីតិ 8454 មោគ្គល្លាន វុត្តិវិវរណបញ្ចិកា 8455 ថូបវង្ស 8456 ទាឋាវង្ស 8457 ធាតុបាឋវិលាសិនិយា 8458 ធាតុវង្ស 8459 ហត្ថវនគល្លវិហារវង្ស 8460 ជិនចរិតយ 8461 ជិនវង្សទីបំ 8462 តេលកដាហគាថា 8463 មិលិទដីកា 8464 បទមញ្ជរី 8465 បទសាធនំ 8466 សទ្ទពិន្ទុបករណំ 8467 កច្ចាយនធាតុមញ្ជុសា 8468 សាមន្តកូដវណ្ណនា |
| 2101 សីលក្ខន្ធវគ្គបាឡិ 2102 មហាវគ្គបាឡិ (ទីឃ) 2103 បាថិកវគ្គបាឡិ | 2201 សីលក្ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 2202 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (ទីឃ) 2203 បាថិកវគ្គអដ្ឋកថា | 2301 សីលក្ខន្ធវគ្គដីកា 2302 មហាវគ្គដីកា (ទីឃ) 2303 បាថិកវគ្គដីកា 2304 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-១ 2305 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-២ | |
| 3101 មូលបណ្ណាសបាឡិ 3102 មជ្ឈិមបណ្ណាសបាឡិ 3103 ឧបរិបណ្ណាសបាឡិ | 3201 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-១ 3202 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-២ 3203 មជ្ឈិមបណ្ណាសអដ្ឋកថា 3204 ឧបរិបណ្ណាសអដ្ឋកថា | 3301 មូលបណ្ណាសដីកា 3302 មជ្ឈិមបណ្ណាសដីកា 3303 ឧបរិបណ្ណាសដីកា | |
| 4101 សគាថាវគ្គបាឡិ 4102 និទានវគ្គបាឡិ 4103 ខន្ធវគ្គបាឡិ 4104 សឡាយតនវគ្គបាឡិ 4105 មហាវគ្គបាឡិ (សំយុត្ត) | 4201 សគាថាវគ្គអដ្ឋកថា 4202 និទានវគ្គអដ្ឋកថា 4203 ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 4204 សឡាយតនវគ្គអដ្ឋកថា 4205 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (សំយុត្ត) | 4301 សគាថាវគ្គដីកា 4302 និទានវគ្គដីកា 4303 ខន្ធវគ្គដីកា 4304 សឡាយតនវគ្គដីកា 4305 មហាវគ្គដីកា (សំយុត្ត) | |
| 5101 ឯកកនិបាតបាឡិ 5102 ទុកនិបាតបាឡិ 5103 តិកនិបាតបាឡិ 5104 ចតុក្កនិបាតបាឡិ 5105 បញ្ចកនិបាតបាឡិ 5106 ឆក្កនិបាតបាឡិ 5107 សត្តកនិបាតបាឡិ 5108 អដ្ឋកាទិនិបាតបាឡិ 5109 នវកនិបាតបាឡិ 5110 ទសកនិបាតបាឡិ 5111 ឯកាទសកនិបាតបាឡិ | 5201 ឯកកនិបាតអដ្ឋកថា 5202 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតអដ្ឋកថា 5203 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតអដ្ឋកថា 5204 អដ្ឋកាទិនិបាតអដ្ឋកថា | 5301 ឯកកនិបាតដីកា 5302 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតដីកា 5303 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតដីកា 5304 អដ្ឋកាទិនិបាតដីកា | |
| 6101 ខុទ្ទកបាឋបាឡិ 6102 ធម្មបទបាឡិ 6103 ឧទានបាឡិ 6104 ឥតិវុត្តកបាឡិ 6105 សុត្តនិបាតបាឡិ 6106 វិមានវត្ថុបាឡិ 6107 បេតវត្ថុបាឡិ 6108 ថេរគាថាបាឡិ 6109 ថេរីគាថាបាឡិ 6110 អបទានបាឡិ-១ 6111 អបទានបាឡិ-២ 6112 ពុទ្ធវង្សបាឡិ 6113 ចរិយាបិដកបាឡិ 6114 ជាតកបាឡិ-១ 6115 ជាតកបាឡិ-២ 6116 មហានិទ្ទេសបាឡិ 6117 ចូឡនិទ្ទេសបាឡិ 6118 បដិសម្ភិទាមគ្គបាឡិ 6119 នេត្តិប្បករណបាឡិ 6120 មិលិន្ទបញ្ហាបាឡិ 6121 បេដកោបទេសបាឡិ | 6201 ខុទ្ទកបាឋអដ្ឋកថា 6202 ធម្មបទអដ្ឋកថា-១ 6203 ធម្មបទអដ្ឋកថា-២ 6204 ឧទានអដ្ឋកថា 6205 ឥតិវុត្តកអដ្ឋកថា 6206 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-១ 6207 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-២ 6208 វិមានវត្ថុអដ្ឋកថា 6209 បេតវត្ថុអដ្ឋកថា 6210 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-១ 6211 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-២ 6212 ថេរីគាថាអដ្ឋកថា 6213 អបទានអដ្ឋកថា-១ 6214 អបទានអដ្ឋកថា-២ 6215 ពុទ្ធវង្សអដ្ឋកថា 6216 ចរិយាបិដកអដ្ឋកថា 6217 ជាតកអដ្ឋកថា-១ 6218 ជាតកអដ្ឋកថា-២ 6219 ជាតកអដ្ឋកថា-៣ 6220 ជាតកអដ្ឋកថា-៤ 6221 ជាតកអដ្ឋកថា-៥ 6222 ជាតកអដ្ឋកថា-៦ 6223 ជាតកអដ្ឋកថា-៧ 6224 មហានិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6225 ចូឡនិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6226 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-១ 6227 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-២ 6228 នេត្តិប្បករណអដ្ឋកថា | 6301 នេត្តិប្បករណដីកា 6302 នេត្តិវិភាវិនី | |
| 7101 ធម្មសង្គណីបាឡិ 7102 វិភង្គបាឡិ 7103 ធាតុកថាបាឡិ 7104 បុគ្គលបញ្ញត្តិបាឡិ 7105 កថាវត្ថុបាឡិ 7106 យមកបាឡិ-១ 7107 យមកបាឡិ-២ 7108 យមកបាឡិ-៣ 7109 បដ្ឋានបាឡិ-១ 7110 បដ្ឋានបាឡិ-២ 7111 បដ្ឋានបាឡិ-៣ 7112 បដ្ឋានបាឡិ-៤ 7113 បដ្ឋានបាឡិ-៥ | 7201 ធម្មសង្គណិអដ្ឋកថា 7202 សម្មោហវិនោទនីអដ្ឋកថា 7203 បញ្ចបករណអដ្ឋកថា | 7301 ធម្មសង្គណី-មូលដីកា 7302 វិភង្គ-មូលដីកា 7303 បញ្ចបករណ-មូលដីកា 7304 ធម្មសង្គណី-អនុដីកា 7305 បញ្ចបករណ-អនុដីកា 7306 អភិធម្មាវតារោ-នាមរូបបរិច្ឆេទោ 7307 អភិធម្មត្ថសង្គហោ 7308 អភិធម្មាវតារ-បុរាណដីកា 7309 អភិធម្មមាតិកាបាឡិ | |
| 한국인 | |||
| 팔리 대장경 | 주석서 | 부주석서 | 기타 |
| 1101 빠라지카 빨리 1102 빠찟띠야 빨리 1103 마하왁가 빨리 (비나야) 1104 출라왁가 빨리 1105 빠리와라 빨리 | 1201 빠라지까깐다 앗타카타-1 1202 빠라지까깐다 앗타카타-2 1203 빠찟띠야 앗타카타 1204 마하왁가 앗타카타 (비나야) 1205 출라왁가 앗타카타 1206 빠리와라 앗타카타 | 1301 사랏타디빠니 띠까-1 1302 사랏타디빠니 띠까-2 1303 사랏타디빠니 띠까-3 | 1401 드베마띠까빨리 1402 위나야상가하 앗타카타 1403 와지라붓디 띠까 1404 위마띠위노다니 띠까-1 1405 위마띠위노다니 띠까-2 1406 위나야랑까라 띠까-1 1407 위나야랑까라 띠까-2 1408 깡카위따라니뿌라나 띠까 1409 위나야위닛차야-웃따라위닛차야 1410 위나야위닛차야 띠까-1 1411 위나야위닛차야 띠까-2 1412 빠찟땨디요자나빨리 1413 쿳닷시카-물라시카 8401 위숟디막가-1 8402 위숟디막가-2 8403 위숟디막가-마하띠까-1 8404 위숟디막가-마하띠까-2 8405 위숟디막가 니다나까타 8406 디가니까야 (뿌-위) 8407 맛지마니까야 (뿌-위) 8408 삼윳따니까야 (뿌-위) 8409 앙굳따라니까야 (뿌-위) 8410 위나야삐따까 (뿌-위) 8411 아비담마삐따까 (뿌-위) 8412 앗타카타 (뿌-위) 8413 니룻띠디빠니 8414 빠라맛타디빠니 상가하마하띠까빠타 8415 아누디빠니빠타 8416 빳타누ㄸ데사 디빠니빠타 8417 나막까라띠까 8418 마하빠나마빠타 8419 락카나또 붓다토마나가타 8420 수타완다나 8421 까말란자리 8422 지나랑까라 8423 빳자마두 8424 붓다구나가타왈리 8425 출라간타왕사 8427 사사나왕사 8426 마하왕사 8429 목갈라나뱌까라낭 8428 깟차야나뱌까라낭 8430 삿다니띠빠까라낭 (빠다말라) 8431 삿다니띠빠까라낭 (다두말라) 8432 빠다루빠싣디 8433 목갈라나빤찌까 8434 빠요가싣디빠타 8435 붇또다야빠타 8436 아비다나빠디피까빠타 8437 아비다나빠디피까띠까 8438 수보다랑까라빠타 8439 수보다랑까라띠까 8440 발라와따라 간티빠닷타위닛차야사라 8446 까위닷빠나니띠 8447 니띠만자리 8445 담마니띠 8444 마하라하니띠 8441 로까니띠 8442 숫딴따니띠 8443 수랏사띠니띠 8450 짜낙야니띠 8448 나라닥카디빠니 8449 짜뚜라락카디빠니 8451 라사와히니 8452 시마위소다니빠타 8453 웨산따라기띠 8454 목갈라나 붇띠위와라나빤찌까 8455 투빠왕사 8456 다타왕사 8457 다두빠타윌라시니야 8458 다두왕사 8459 핟타와나갈라위하라왕사 8460 지나짜리따야 8461 지나왕사디빵 8462 떼라까타하가타 8463 밀리다띠까 8464 빠다만자리 8465 빠다사다낭 8466 삿다빈두빠까라낭 8467 깟차야나다두만주사 8468 사만따꿋타완나나 |
| 2101 실락칸다왁가 빨리 2102 마하왁가 빨리 (디가) 2103 빠티까왁가 빨리 | 2201 실락칸다왁가 앗타카타 2202 마하왁가 앗타카타 (디가) 2203 빠티까왁가 앗타카타 | 2301 실락칸다왁가 띠까 2302 마하왁가 띠까 (디가) 2303 빠티까왁가 띠까 2304 실락칸다왁가-아비나와띠까-1 2305 실락칸다왁가-아비나와띠까-2 | |
| 3101 물라빤나사 빨리 3102 맛지마빤나사 빨리 3103 우빠리빤나사 빨리 | 3201 물라빤나사 앗타카타-1 3202 물라빤나사 앗타카타-2 3203 맛지마빤나사 앗타카타 3204 우빠리빤나사 앗타카타 | 3301 물라빤나사 띠까 3302 맛지마빤나사 띠까 3303 우빠리빤나사 띠까 | |
| 4101 사가타왁가 빨리 4102 니다나왁가 빨리 4103 칸다왁가 빨리 4104 살라야따나왁가 빨리 4105 마하왁가 빨리 (삼윳따) | 4201 사가타왁가 앗타카타 4202 니다나왁가 앗타카타 4203 칸다왁가 앗타카타 4204 살라야따나왁가 앗타카타 4205 마하왁가 앗타카타 (삼윳따) | 4301 사가타왁가 띠까 4302 니다나왁가 띠까 4303 칸다왁가 띠까 4304 살라야따나왁가 띠까 4305 마하왁가 띠까 (삼윳따) | |
| 5101 에까까니빠따 빨리 5102 두까니빠따 빨리 5103 띠까니빠따 빨리 5104 짜뚝까니빠따 빨리 5105 빤짜까니빠따 빨리 5106 착까니빠따 빨리 5107 삿따까니빠따 빨리 5108 앗타까디니빠따 빨리 5109 나와까니빠따 빨리 5110 다사까니빠따 빨리 5111 에까다사까니빠따 빨리 | 5201 에까까니빠따 앗타카타 5202 두까-띠까-짜뚝까니빠따 앗타카타 5203 빤짜까-착까-삿따까니빠따 앗타카타 5204 앗타까디니빠따 앗타카타 | 5301 에까까니빠따 띠까 5302 두까-띠까-짜뚝까니빠따 띠까 5303 빤짜까-착까-삿따까니빠따 띠까 5304 앗타까디니빠따 띠까 | |
| 6101 쿳닥까빠타 빨리 6102 담마빠다 빨리 6103 우다나 빨리 6104 이띠웃따까 빨리 6105 숫따니빠따 빨리 6106 위마나왓투 빨리 6107 베따왓투 빨리 6108 테라가타 빨리 6109 테리가타 빨리 6110 아빠다나 빨리-1 6111 아빠다나 빨리-2 6112 붓다왕사 빨리 6113 짜리야삐따까 빨리 6114 자따까 빨리-1 6115 자따까 빨리-2 6116 마하닷데사 빨리 6117 출라닷데사 빨리 6118 빠티삼비다막가 빨리 6119 넷띠빠까라나 빨리 6120 밀린다빤하 빨리 6121 뻬따꼬빠데사 빨리 | 6201 쿳닥까빠타 앗타카타 6202 담마빠다 앗타카타-1 6203 담마빠다 앗타카타-2 6204 우다나 앗타카타 6205 이띠웃따까 앗타카타 6206 숫따니빠따 앗타카타-1 6207 숫따니빠따 앗타카타-2 6208 위마나왓투 앗타카타 6209 베따왓투 앗타카타 6210 테라가타 앗타카타-1 6211 테라가타 앗타카타-2 6212 테리가타 앗타카타 6213 아빠다나 앗타카타-1 6214 아빠다나 앗타카타-2 6215 붓다왕사 앗타카타 6216 짜리야삐따까 앗타카타 6217 자따까 앗타카타-1 6218 자따까 앗타카타-2 6219 자따까 앗타카타-3 6220 자따까 앗타카타-4 6221 자따까 앗타카타-5 6222 자따까 앗타카타-6 6223 자따까 앗타카타-7 6224 마하닷데사 앗타카타 6225 출라닷데사 앗타카타 6226 빠티삼비다막가 앗타카타-1 6227 빠티삼비다막가 앗타카타-2 6228 넷띠빠까라나 앗타카타 | 6301 넷띠빠까라나 띠까 6302 넷띠위바비니 | |
| 7101 담마상가니 빨리 7102 위방가 빨리 7103 다뚜까타 빨리 7104 뿍갈라빤냣띠 빨리 7105 까타왓투 빨리 7106 야마까 빨리-1 7107 야마까 빨리-2 7108 야마까 빨리-3 7109 빳타나 빨리-1 7110 빳타나 빨리-2 7111 빳타나 빨리-3 7112 빳타나 빨리-4 7113 빳타나 빨리-5 | 7201 담마상가니 앗타카타 7202 삼모하위노다니 앗타카타 7203 빤짜빠까라나 앗타카타 | 7301 담마상가니-물라띠까 7302 위방가-물라띠까 7303 빤짜빠까라나-물라띠까 7304 담마상가니-아누띠까 7305 빤짜빠까라나-아누띠까 7306 아비담마와따로-나마루빠빠릳체도 7307 아비담맛타상가호 7308 아비담마와따라-뿌라나띠까 7309 아비담마마띠까빨리 | |
| ອັກສອນລາວ | |||
| ປາລີ | ອັດຖະກະຖາ | ຏີກາ | ອັນຍາ |
| 1101 ປາຣາຊິກະ ປາລີ 1102 ປາຈິດຕິຍະ ປາລີ 1103 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ວິໄນ) 1104 ຈູລະວັກຄະ ປາລີ 1105 ປະລິວາລະ ປາລີ | 1201 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-1 1202 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-2 1203 ປາຈິດຕິຍະ ອັດຖະກະຖາ 1204 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ວິໄນ) 1205 ຈູລະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 1206 ປະລິວາລະ ອັດຖະກະຖາ | 1301 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-1 1302 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-2 1303 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-3 | 1401 ທເວມາຕິກາປາລີ 1402 ວິນະຍະສັງຄະຫະ ອັດຖະກະຖາ 1403 ວະຊິລະພຸດທິ ຏີກາ 1404 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-1 1405 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-2 1406 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-1 1407 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-2 1408 ກັງຂາວິຕະຣະນີປຸຣານະ ຏີກາ 1409 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ-ອຸຕຕະຣະວິນິດສະຍະ 1410 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-1 1411 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-2 1412 ປາຈິຕະຍາທິໂຍຊະນາປາລີ 1413 ຂຸທະທະສິກຂາ-ມູລະສິກຂາ 8401 ວິສຸດທິມັກຄະ-1 8402 ວິສຸດທິມັກຄະ-2 8403 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-1 8404 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-2 8405 ວິສຸດທິມັກຄະ ນິທານະກະຖາ 8406 ທີຆະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8407 ມັດຊິມະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8408 ສັງຍຸຕຕະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8409 ອັງຄຸຕຕະລະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8410 ວິນະຍະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8411 ອະພິທັມມະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8412 ອັດຖະກະຖາ (ປຸ-ວິ) 8413 ນິລຸຕຕິທີປະນີ 8414 ປະຣະມັດຖະທີປະນີ ສັງຄະຫະມະຫາຏີກາປາຖະ 8415 ອະນຸທີປະນີປາຖະ 8416 ປັດຖານຸທເທສະ ທີປະນີປາຖະ 8417 ນະມັກກາລະຏີກາ 8418 ມະຫາປະຖາມະປາຖະ 8419 ລັກຂະນາໂຕ ພຸດທະຖະມະນາຄາຖາ 8420 ສຸຕະວັນທະນາ 8421 ກະມະລາຍຈະລິ 8422 ຊິນາລັງກາລະ 8423 ປັດຊະມະທຸ 8424 ພຸດທະຄຸນະຄາຖາວະລີ 8425 ຈູລະຄັນຖະວັງສະ 8426 ມະຫາວັງສະ 8427 ສາສະນະວັງສະ 8428 ກັດຈາຍະນະພະຍາກະລະນັງ 8429 ມົກຄັນທານະພະຍາກະລະນັງ 8430 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ປະທະມາລາ) 8431 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ຘາຕຸມາລາ) 8432 ປະທະຣູປະສິດທິ 8433 ໂມຄັນທານະປັນຈິກາ 8434 ປະໂຍຄະສິດທິປາຖະ 8435 ວຸຕະໂທຍະປາຖະ 8436 ອະພິທານະປະປະທີປິກາປາຖະ 8437 ອະພິທານະປະປະທີປິກາຏີກາ 8438 ສຸໂພທາລັງກາລະປາຖະ 8439 ສຸໂພທາລັງກາລະຏີກາ 8440 ພາລາວະຕາລະ ຄັນຖິປະທັດຖະວິນິດສະຍະສາລະ 8441 ໂລກະນີຕິ 8442 ສຸດຕັນຕະນີຕິ 8443 ສູລັດສະຕິນີຕິ 8444 ມະຫາລະຫະນີຕິ 8445 ທັມມະນີຕິ 8446 ກະວິທັບປະຖານີຕິ 8447 ນີຕິມັນຊະລີ 8448 ນະລະທັກຂະທີປະນີ 8449 ຈະຕຸຣາລັກຂະທີປະນີ 8450 ຈານັກຍະນີຕິ 8451 ລະສະວາຫິນີ 8452 ສີມາວິໂສທະນີປາຖະ 8453 ເວສສັນຕະລະຄີຕິ 8454 ໂມຄັນທານະ ວຸຕຕິວິວະລະນະປັນຈິກາ 8455 ຖູປະວັງສະ 8456 ທາຐາວັງສະ 8457 ຘາຕຸປາຖະວິລາສິນີຍາ 8458 ຘາຕຸວັງສະ 8459 ຫັດຖະວະນະຄັນລະວິຫາລະວັງສະ 8460 ຊິນະຈະລິຕະຍະ 8461 ຊິນະວັງສະທີປັງ 8462 ເຕລະກະຕາຫາຄາຖາ 8463 ມິລິທະຏີກາ 8464 ປະທະມັນຊະລີ 8465 ປະທະສາຘະນັງ 8466 ສັດທະພິນທຸປະກະລະນັງ 8467 ກັດຈາຍະນະຘາຕຸມັນຊຸສາ 8468 ສາມັນຕະກູຏະວັນນະນາ |
| 2101 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 2102 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ທີຆະ) 2103 ປາຖິກະວັກຄະ ປາລີ | 2201 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 2202 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ທີຆະ) 2203 ປາຖິກະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ | 2301 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 2302 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ທີຆະ) 2303 ປາຖິກະວັກຄະ ຏີກາ 2304 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-1 2305 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-2 | |
| 3101 ມູລະປັນຍາສະ ປາລີ 3102 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ປາລີ 3103 ອຸປະລິປັນຍາສະ ປາລີ | 3201 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-1 3202 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-2 3203 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ 3204 ອຸປະລິປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ | 3301 ມູລະປັນຍາສະ ຏີກາ 3302 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ຏີກາ 3303 ອຸປະລິປັນຍາສະ ຏີກາ | |
| 4101 ສະຄາຖາວັກຄະ ປາລີ 4102 ນິທານະວັກຄະ ປາລີ 4103 ຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 4104 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ປາລີ 4105 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4201 ສະຄາຖາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4202 ນິທານະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4203 ຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4204 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4205 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4301 ສະຄາຖາວັກຄະ ຏີກາ 4302 ນິທານະວັກຄະ ຏີກາ 4303 ຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 4304 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ຏີກາ 4305 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ສັງຍຸຕຕະ) | |
| 5101 ເອກະກະນິປາຕະ ປາລີ 5102 ທຸກະນິປາຕະ ປາລີ 5103 ຕິກະນິປາຕະ ປາລີ 5104 ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ປາລີ 5105 ປັຈຈະກະນິປາຕະ ປາລີ 5106 ຉັກກະນິປາຕະ ປາລີ 5107 ສັດຕະກະນິປາຕະ ປາລີ 5108 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ປາລີ 5109 ນະວະກະນິປາຕະ ປາລີ 5110 ທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ 5111 ເອກາທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ | 5201 ເອກະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5202 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5203 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5204 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ | 5301 ເອກະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5302 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ຏີກາ 5303 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5304 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ຏີກາ | |
| 6101 ຂຸທະທະກະປາຖະ ປາລີ 6102 ທຳມະປະທະ ປາລີ 6103 ອຸທານະ ປາລີ 6104 ອິຕິວຸຕຕະກະ ປາລີ 6105 ສຸດຕະນິປາຕະ ປາລີ 6106 ວິມານະວັດຖຸ ປາລີ 6107 ເປຕະວັດຖຸ ປາລີ 6108 ເຖລະຄາຖາ ປາລີ 6109 ເຖລີຄາຖາ ປາລີ 6110 ອະປະທານະ ປາລີ-1 6111 ອະປະທານະ ປາລີ-2 6112 ພຸດທະວັງສະ ປາລີ 6113 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ປາລີ 6114 ຊາຕະກະ ປາລີ-1 6115 ຊາຕະກະ ປາລີ-2 6116 ມະຫານິທເທສະ ປາລີ 6117 ຈູລະນິທເທສະ ປາລີ 6118 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ປາລີ 6119 ເນຕຕິປະກະລະນະ ປາລີ 6120 ມິລິນທະປັນຫາ ປາລີ 6121 ເປຏະກົປເທສະ ປາລີ | 6201 ຂຸທະທະກະປາຖະ ອັດຖະກະຖາ 6202 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-1 6203 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-2 6204 ອຸທານະ ອັດຖະກະຖາ 6205 ອິຕິວຸຕຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6206 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-1 6207 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-2 6208 ວິມານະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6209 ເປຕະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6210 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-1 6211 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-2 6212 ເຖລີຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ 6213 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-1 6214 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-2 6215 ພຸດທະວັງສະ ອັດຖະກະຖາ 6216 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6217 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-1 6218 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-2 6219 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-3 6220 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-4 6221 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-5 6222 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-6 6223 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-7 6224 ມະຫານິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6225 ຈູລະນິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6226 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-1 6227 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-2 6228 ເນຕຕິປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 6301 ເນຕຕິປະກະລະນະ ຏີກາ 6302 ເນຕຕິວິພາວິນີ | |
| 7101 ທຳມະສັງຄະນີ ປາລີ 7102 ວິພັງຄະ ປາລີ 7103 ຘາຕຸກະຖາ ປາລີ 7104 ປຸກຄະລະປັນຍັດຕິ ປາລີ 7105 ກະຖາວັດຖຸ ປາລີ 7106 ຍະມະກະ ປາລີ-1 7107 ຍະມະກະ ປາລີ-2 7108 ຍະມະກະ ປາລີ-3 7109 ປັດຖານະ ປາລີ-1 7110 ປັດຖານະ ປາລີ-2 7111 ປັດຖານະ ປາລີ-3 7112 ປັດຖານະ ປາລີ-4 7113 ປັດຖານະ ປາລີ-5 | 7201 ທຳມະສັງຄະນິ ອັດຖະກະຖາ 7202 ສັມໂມຫະວິໂນທະນີ ອັດຖະກະຖາ 7203 ປັຈຈະປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 7301 ທຳມະສັງຄະນີ-ມູລະຏີກາ 7302 ວິພັງຄະ-ມູລະຏີກາ 7303 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ມູລະຏີກາ 7304 ທຳມະສັງຄະນີ-ອະນຸຏີກາ 7305 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ອະນຸຏີກາ 7306 ອະພິທັມມາວະຕາໂຣ-ນາມະຣູປະປະຣິຈເທໂທ 7307 ອະພິທັມມັດຖະສັງຄະໂຫ 7308 ອະພິທັມມາວະຕາລະ-ປຸຣານະຏີກາ 7309 ອະພິທັມມາມາຕິກາປາລີ | |
| मराठी | |||
| पाळी | अट्ठकथा | टीका | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळी 1102 पाचित्तिय पाळी 1103 महावग्ग पाळी (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळी 1105 परिवार पाळी | 1201 पाराजिककंड अट्ठकथा-१ 1202 पाराजिककंड अट्ठकथा-२ 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-१ 1302 सारत्थदीपनी टीका-२ 1303 सारत्थदीपनी टीका-३ | 1401 द्वेमातिकापाळी 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-१ 1405 विमतिविनोदनी टीका-२ 1406 विनयालंकार टीका-१ 1407 विनयालंकार टीका-२ 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-१ 1411 विनयविनिच्छय टीका-२ 1412 पाचित्यादियोजनापाळी 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-१ 8402 विसुद्धिमग्ग-२ 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-१ 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-२ 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अंगुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी संगहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवंदना 8421 कमलांजलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगंथवंस 8426 महावंस 8427 सासनवंस 8428 कच्चायनव्याकरणं 8429 मोग्गल्लानव्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपंचिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गंठिपदत्थविनिच्छयसार 8441 लोकनीति 8442 सुत्तंतनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8444 महारहनीति 8445 धम्मनीति 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमंजरी 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8450 चाणक्यनीति 8451 रसवाहिनी 8452 सीमाविसोधनीपाठ 8453 वेस्संतरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपंचिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमंजरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिंदुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमंजुसा 8468 सामंतकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खंधवग्ग पाळी 2102 महावग्ग पाळी (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळी | 2201 सीलक्खंधवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खंधवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-१ 2305 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-२ | |
| 3101 मूलपण्णास पाळी 3102 मज्झिमपण्णास पाळी 3103 उपरिपण्णास पाळी | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-१ 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-२ 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळी 4102 निदानवग्ग पाळी 4103 खंधवग्ग पाळी 4104 सळायतनवग्ग पाळी 4105 महावग्ग पाळी (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खंधवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खंधवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळी 5102 दुकनिपात पाळी 5103 तिकनिपात पाळी 5104 चतुक्कनिपात पाळी 5105 पंचकनिपात पाळी 5106 छक्कनिपात पाळी 5107 सत्तकनिपात पाळी 5108 अट्ठकादिनिपात पाळी 5109 नवकनिपात पाळी 5110 दसकनिपात पाळी 5111 एकादसकनिपात पाळी | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळी 6102 धम्मपद पाळी 6103 उदान पाळी 6104 इतिवुत्तक पाळी 6105 सुत्तनिपात पाळी 6106 विमानवत्थु पाळी 6107 पेतवत्थु पाळी 6108 थेरगाथा पाळी 6109 थेरीगाथा पाळी 6110 अपदान पाळी-१ 6111 अपदान पाळी-२ 6112 बुद्धवंस पाळी 6113 चरियापिटक पाळी 6114 जातक पाळी-१ 6115 जातक पाळी-२ 6116 महानिद्देस पाळी 6117 चूळनिद्देस पाळी 6118 पटिसंभिदामग्ग पाळी 6119 नेत्तिप्पकरण पाळी 6120 मिलिंदपंह पाळी 6121 पेटकोपदेस पाळी | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-१ 6203 धम्मपद अट्ठकथा-२ 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-१ 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-२ 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-१ 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-२ 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-१ 6214 अपदान अट्ठकथा-२ 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-१ 6218 जातक अट्ठकथा-२ 6219 जातक अट्ठकथा-३ 6220 जातक अट्ठकथा-४ 6221 जातक अट्ठकथा-५ 6222 जातक अट्ठकथा-६ 6223 जातक अट्ठकथा-७ 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-१ 6227 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-२ 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसंगणी पाळी 7102 विभंग पाळी 7103 धातुकथा पाळी 7104 पुग्गलपंयत्ति पाळी 7105 कथावत्थु पाळी 7106 यमक पाळी-१ 7107 यमक पाळी-२ 7108 यमक पाळी-३ 7109 पट्ठान पाळी-१ 7110 पट्ठान पाळी-२ 7111 पट्ठान पाळी-३ 7112 पट्ठान पाळी-४ 7113 पट्ठान पाळी-५ | 7201 धम्मसंगणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पंचपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसंगणी-मूलटीका 7302 विभंग-मूलटीका 7303 पंचपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसंगणी-अनुटीका 7305 पंचपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसंगहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळी | |
နမော တဿ ဘဂဝတော အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ त्या भगवंत, अर्हत, सम्यक्संबुद्धांना नमस्कार असो. သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) सद्दनीतिप्रकरण (पदमाला) ဂန္ထာရမ္ဘကထာ ग्रंथारंभकथा ဓီရေဟိ [Pg.1] မဂ္ဂနာယေန, ယေန ဗုဒ္ဓေန ဒေသိတံ; သိတံ ဓမ္မမိဓညာယ, ဉာယတေ အမတံ ပဒံ. धीर (बुद्धिमान) पुरुषांद्वारे, मार्गदर्शक अशा ज्या बुद्धांनी उपदेशिलेल्या या शांत धम्माला जाणून घेऊन, अमृत पद (निर्वाण) जाणले जाते. တံ နမိတွာ မဟာဝီရံ, သဗ္ဗညုံ လောကနာယကံ; မဟာကာရုဏိကံ သေဋ္ဌံ, ဝိသုဒ္ဓံ သုဒ္ဓိဒါယကံ. त्या महावीर, सर्वज्ञ, लोकनायक, महाकारुणिक, श्रेष्ठ, विशुद्ध आणि शुद्धी प्रदान करणाऱ्या बुद्धांना नमस्कार करून, သဒ္ဓမ္မဉ္စဿ ပူဇေတွာ, သုဒ္ဓံ သန္တမသင်္ခတံ; အတက္ကာဝစရံ သုဋ္ဌု, ဝိဘတ္တံ မဓုရံ သိဝံ. आणि त्यांच्या शुद्ध, शांत, असंस्कृत (असंखत), तर्कातीत, सुविभक्त, मधुर आणि कल्याणकारी सद्धम्माची पूजा करून, သံဃဿ စ’ဉ္ဇလိံ ကတွာ, ပုညက္ခေတ္တဿ တာဒိနော; သီလသမာဓိပညာဒိ-ဝိသုဒ္ဓဂုဏဇောတိနော. तसेच शील, समाधी, प्रज्ञा इत्यादी विशुद्ध गुणांनी प्रकाशमान असणाऱ्या आणि पुण्यक्षेत्र स्वरूप अशा संघास हात जोडून (अंजली करून), နမဿနာဒိပုညဿ, ကတဿ ရတနတ္တယေ; တေဇသာဟံ ပဟန္တွာန, အန္တရာယေ အသေသတော. त्रिरत्नांच्या प्रति केलेल्या या नमस्कारादी पुण्याच्या प्रभावाने (तेजाने) सर्व अंतरायांचा (अडथळ्यांचा) पूर्णपणे नाश करून, လောကနီတိဝိယတ္တဿ, သတ္ထု သဒ္ဓမ္မနီတိနော; သာသနတ္ထံ ပဝက္ခာမိ, သဒ္ဒနီတိမနာကုလံ. लोकनीतीमध्ये निपुण आणि सद्धम्मनीतीचे प्रणेते असणाऱ्या शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) शासनाच्या कल्याणासाठी मी या स्पष्ट (व्याकुळता नसलेल्या) 'सद्दनीति' ग्रंथाचे प्रतिपादन करतो. အာသဝက္ခယလာဘေန, ဟောတိ သာသနသမ္ပဒါ; အာသဝက္ခယလာဘော စ, သစ္စာဓိဂမဟေတုကော. आसवांच्या (चित्तमलांच्या) क्षयाच्या प्राप्तीने शासनाची समृद्धी होते; आणि आसवक्षयाची प्राप्ती ही सत्य-प्राप्तीवर (सच्चाधिगम) आधारित असते. သစ္စာဓိဂမနံ [Pg.2] တဉ္စ, ပဋိပတ္တိဿိတံ မတံ; ပဋိပတ္တိ စ သာ ကာမံ, ပရိယတ္တိပရာယဏာ. आणि ती सत्य-प्राप्ती प्रतिपत्तीवर (आचरणावर) आश्रित मानली गेली आहे; आणि ती प्रतिपत्ती निश्चितच परियत्तीवर (धम्मशिक्षणावर) अवलंबून असते. ပရိယတ္တာဘိယုတ္တာနံ, ဝိဒိတွာ သဒ္ဒလက္ခဏံ; ယသ္မာ န ဟောတိ သမ္မောဟော, အက္ခရေသု ပဒေသု စ. कारण परियत्तीमध्ये (धम्मशिक्षणात) मग्न असणाऱ्यांना शब्दांचे लक्षण (व्याकरण) माहीत असल्यामुळे, अक्षरे आणि पदांच्या बाबतीत कोणताही संमोह (भ्रम) होत नाही. ယသ္မာ စာမောဟဘာဝေန, အက္ခရေသု ပဒေသု စ; ပါဠိယတ္ထံ ဝိဇာနန္တိ, ဝိညူ သုဂတသာသနေ. आणि अक्षरे व पदांच्या बाबतीत संमोह नसल्यामुळे, सुगत-शासनातील (बुद्धांच्या शासनातील) विद्वान लोक पाळी भाषेचा (किंवा पाठाचा) अर्थ योग्य प्रकारे जाणतात. ပါဠိယတ္ထာဝဗောဓေန, ယောနိသော သတ္ထုသာသနေ; သပ္ပညာ ပဋိပဇ္ဇန္တိ, ပဋိပတ္တိမတန္ဒိကာ. पाळी भाषेच्या अर्थाचे आकलन झाल्यामुळे, प्रज्ञावान लोक शास्त्यांच्या शासनात आळस सोडून योग्य प्रकारे प्रतिपत्तीचे (धम्माचे) आचरण करतात. ယောနိသော ပဋိပဇ္ဇိတွာ, ဓမ္မံ လောကုတ္တရံ ဝရံ; ပါပုဏန္တိ ဝိသုဒ္ဓါယ, သီလာဒိပဋိပတ္တိယာ. योग्य प्रकारे आचरण करून, ते शील इत्यादींच्या विशुद्ध आचरणाद्वारे श्रेष्ठ अशा लोकोत्तर धम्माला प्राप्त करतात. တသ္မာ တဒတ္ထိကာ သုဒ္ဓံ, နယံ နိဿာယ ဝိညုနံ; ဘညမာနံ မယာ သဒ္ဒ-နီတိံ ဂဏှန္တု သာဓုကံ. म्हणून, त्याचे इच्छुक असणाऱ्यांनी विद्वानांच्या शुद्ध पद्धतीचा आश्रय घेऊन, माझ्याद्वारे सांगितल्या जाणाऱ्या या 'सद्दनीति' ग्रंथाचे चांगल्या प्रकारे ग्रहण करावे. ဓာတု ဓာတူဟိ နိပ္ဖန္န-ရူပါနိ စ သလက္ခဏော; သန္ဓိနာမာဒိဘေဒေါ စ, ပဒါနံ တု ဝိဘတ္တိ စ. धातू, धातूंपासून निष्पन्न होणारी रूपे आणि त्यांची लक्षणे, तसेच संधी, नाम इत्यादींचे भेद आणि पदांची विभक्ती, ပါဠိနယာဒယောစ္စေဝ-မေတ္ထ နာနပ္ပကာရတော; သာသနဿောပကာရာယ, ဘဝိဿတိ ဝိဘာဝနာ. आणि पाळी भाषेचे नियम इत्यादींचे येथे विविध प्रकारे केलेले स्पष्टीकरण शासनाच्या उपकारासाठी (कल्याणासाठी) होईल. ၁. သဝိကရဏာချာတဝိဘာဂ १. सविकरण आख्यात विभाग (विकरणांसह क्रियापद विभाग) တတ္ထ ဓာတူတိ ကေနဋ္ဌေန ဓာတု? သကတ္ထမ္ပိ ဓာရေတီတိ ဓာတု, အတ္ထာတိသယယောဂတော ပရတ္ထမ္ပိ ဓာရေတီတိ ဓာတု, ဝီသတိယာ ဥပသဂ္ဂေသု ယေန ကေနစိ ဥပသဂ္ဂေန အတ္ထဝိသေသကာရဏေန ပဋိဗဒ္ဓါ အတ္ထဝိသေသမ္ပိ ဓာရေတီတိ ဓာတု, ‘‘အယံ ဣမိဿာ အတ္ထော, အယမိတော ပစ္စယော ပရော’’တိအာဒိနာ အနေကပ္ပကာရေန ပဏ္ဍိတေဟိ ဓာရိယတိ ဧသာတိပိ ဓာတု, ဝိဒဟန္တိ ဝိဒုနော ဧတာယ သဒ္ဒနိပ္ဖတ္တိံ အယလောဟာဒိမယံ [Pg.3] အယလောဟာဒိဓာတူဟိ ဝိယာတိပိ ဓာတု. ဧဝံ တာဝ ဓာတုသဒ္ဒဿတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော. त्यामध्ये, 'धातू' हा शब्द कोणत्या अर्थाने वापरला जातो? स्वतःचा अर्थ धारण करतो म्हणून तो 'धातू' आहे; अर्थाच्या अतिशयाच्या योगाने दुसऱ्या अर्थालाही धारण करतो म्हणून तो 'धातू' आहे; वीस उपसर्गांपैकी कोणत्याही उपसर्गाच्या विशिष्ट अर्थाच्या कारणाशी जोडला गेल्यामुळे विशिष्ट अर्थाला धारण करतो म्हणून तो 'धातू' आहे; "हा याचा अर्थ आहे, याच्यापुढे हा प्रत्यय आहे" इत्यादी अनेक प्रकारे पंडितांद्वारे (विद्वानांद्वारे) जो धारण केला (निश्चित केला) जातो म्हणूनही तो 'धातू' आहे; ज्याप्रमाणे लोखंड, तांबे इत्यादी धातूंपासून लोखंड, तांबे इत्यादी वस्तू बनवल्या जातात, त्याचप्रमाणे विद्वान लोक ज्याच्याद्वारे शब्दांची निष्पत्ती (रचना) करतात म्हणूनही तो 'धातू' आहे. अशा प्रकारे प्रथम 'धातू' या शब्दाचा अर्थ समजून घेतला पाहिजे. ဓာတုသဒ္ဒေါ ဇိနမတေ, ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တနေ မတော; သတ္ထေ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝသ္မိံ, ကစ္စာယနမတေ ဒွိသု. 'धातू' हा शब्द जिनमतामध्ये (बुद्धांच्या शासनात) स्त्रीलिंगी मानला गेला आहे; लौकिक शास्त्रांमध्ये तो पुल्लिंगी मानला गेला आहे, आणि कच्चायनाच्या मतात तो दोन्ही लिंगांत (स्त्रीलिंग व पुल्लिंग) मानला गेला आहे. အထ ဝါ ဇိနမတေ ‘‘တတော ဂေါတမိဓာတူနီ’’တိ ဧတ္ထ ဓာတုသဒ္ဒေါ လိင်္ဂဝိပလ္လာသေ ဝတ္တတိ ‘‘ပဗ္ဗတာနိ ဝနာနိ စာ’’တိ ဧတ္ထ ပဗ္ဗတသဒ္ဒေါ ဝိယ, န ပနေတ္ထ ဝတ္တဗ္ဗံ ‘‘အဋ္ဌိဝါစကတ္တာ နပုံသကနိဒ္ဒေသော’’တိ အဋ္ဌိဝါစကတ္တေပိ ‘‘ဓာတုယော’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဒဿနတော. ဘူဝါဒယော သဒ္ဒါ ဓာတဝေါ. သေယျထိဒံ? ဘူ ဣ ကု ကေ တက္က တက တကိ သုကဣစ္စာဒယော. ဂဏတော တေ အဋ္ဌဝိဓာ ဘူဝါဒိဂဏော ရုဓာဒိဂဏော ဒိဝါဒိဂဏော သွာဒိဂဏော ကိယာဒိဂဏော ဂဟာဒိဂဏော တနာဒိဂဏော စုရာဒိဂဏော စာတိ. ဣဒါနိ တေသံ ဝိကရဏသညိတေ ပစ္စယေ ဒဿေဿာမ. အနေကဝိဓာ ဟိ ပစ္စယာ နာနပ္ပကာရေသု နာမနာမ ကိတနာမ သမာသနာမ တဒ္ဓိတနာမာချာတေသု ပဝတ္တနတော. သင်္ခေပတော ပန ဒုဝိဓာဝ နာမပစ္စယော အာချာတပစ္စယော စာတိ. တတြာပိ အာချာတပစ္စယာ ဒုဝိဓာ ဝိကရဏပစ္စယနောဝိကရဏပစ္စယဝသေန. တတ္ထ ဝိကရဏပစ္စယော အကာရာဒိသတ္တရသဝိဓော အဂ္ဂဟိတဂ္ဂဟဏေန ပန္နရသဝိဓော စ. နောဝိကရဏပစ္စယော ပန ခ ဆ သာဒိနေကဝိဓော. ယေ ရူပနိပ္ဖတ္တိယာ ဥပကာရကာ အတ္ထဝိသေသဿ ဇောတကာ ဝါ အဇောတကာ ဝါ လောပနီယာ ဝါ အလောပနီယာ ဝါ, တေ သဒ္ဒါ ပစ္စယာ. अथवा जिनमतामध्ये "ततो गोतमिधातूनि" (tato gotamidhātūni) येथे 'धातू' हा शब्द लिंग-विपर्यासाने (लिंग बदलून) वापरला गेला आहे, ज्याप्रमाणे "पब्बतानि वनानि च" (pabbatāni vanāni cā) येथे 'पब्बत' (पर्वत) हा शब्द नपुंसकलिंगात वापरला आहे. येथे "अस्थीवाचक (हाडांचा वाचक) असल्यामुळे हा नपुंसकलिंगी निर्देश आहे" असे म्हणता येणार नाही, कारण अस्थीवाचक असतानाही "धातुयो" (dhātuyo) असा स्त्रीलिंगी प्रयोग पाहायला मिळतो. 'भू' इत्यादी शब्द धातू आहेत. जसे की: भू, इ, कु, के, तक्क, तक, तकि, सुक इत्यादी. गणानुसार ते आठ प्रकारचे आहेत: भूवादिगण, रुधादिगण, दिवादिगण, स्वादिगण, कियादिगण, गहादिगण, तनादिगण आणि चुरादिगण. आता आपण त्यांचे 'विकरण' नावाचे प्रत्यय दाखवू. नाम, कृदन्त (कितनाम), समास (समासनाम), तद्धित (तद्धितनाम) आणि आख्यात (क्रियापद) यांमध्ये विविध प्रकारे प्रवृत्त होत असल्यामुळे प्रत्यय अनेक प्रकारचे असतात. संक्षेपाने सांगायचे तर, प्रत्यय दोनच प्रकारचे आहेत: नामप्रत्यय आणि आख्यातप्रत्यय. त्यामध्येही आख्यातप्रत्यय दोन प्रकारचे आहेत: विकरणप्रत्यय आणि अविकरणप्रत्यय (नोविकरणप्रत्यय). त्यापैकी विकरणप्रत्यय 'अ' कारादी सतरा प्रकारचे आहेत आणि पुनरुक्ती वगळता (अग्गहितग्गहणेन) पंधरा प्रकारचे आहेत. अविकरणप्रत्यय (नोविकरणप्रत्यय) मात्र ख, छ, स इत्यादी अनेक प्रकारचे आहेत. जे शब्दांच्या रूपसिद्धीसाठी उपकारक असतात, विशिष्ट अर्थाचे द्योतक (स्पष्ट करणारे) असोत वा नसोत, लोप पावणारे असोत वा न पावणारे असोत, त्या शब्दांना 'प्रत्यय' असे म्हणतात. ပဋိစ္စ ကာရဏံ တံ တံ, ဧန္တီတိ ပစ္စယာထ ဝါ; ပဋိစ္စ သဒ္ဒနိပ္ဖတ္တိ, ဣတော ဧတီတိ ပစ္စယာ. त्या त्या कारणाचा आश्रय घेऊन जे येतात (उत्पन्न होतात), ते 'प्रत्यय' होत; अथवा ज्याचा आश्रय घेऊन शब्दांची सिद्धी होते, ते 'प्रत्यय' होत. နာမိကပ္ပစ္စယာနံ [Pg.4] ယော, ဝိဘာဂေါ အာဝိ ဟေဿတိ; နာမကပ္ပေ ယတော တသ္မာ, န တံ ဝိတ္ထာရယာမသေ. नामप्रत्ययांचे जे वर्गीकरण आहे, ते 'नामकल्प' (नाम विभाग) मध्ये स्पष्ट केले जाईल; म्हणून आम्ही येथे त्याचा विस्तार करत नाही. ယော နောဝိကရဏာနံ တု, ပစ္စယာနံ ဝိဘာဂတော; သော ပနာချာတကပ္ပမှိ, ဝိတ္ထာရေနာ’ဂမိဿတီတိ. आणि अविकरण (नोविकरण) प्रत्ययांचे जे वर्गीकरण आहे, ते 'आख्यातकल्प' (क्रियापद विभाग) मध्ये विस्ताराने येईल. ဣစ္စာနေကဝိဓေသု ပစ္စယေသု ‘‘ဝိကရဏပစ္စယာ နာမ ဣမေ’’တိ သလ္လက္ခေတဗ္ဗာ. ကထံ? ဘူဝါဒိဂဏတော အပစ္စယော ဟောတိ ကတ္တရိ, ရုဓာဒိဂဏတော အကာရိဝဏ္ဏေကာရောကာရပစ္စယာ ဟောန္တိ ကတ္တရိ, ပုဗ္ဗမဇ္ဈဋ္ဌာနေ နိဂ္ဂဟီတာဂမော စ, ဒိဝါဒိဂဏတော ယပစ္စယော ဟောတိ ကတ္တရိ, သွာဒိဂဏတော ဏု ဏာ ဥဏာပစ္စယာ ဟောန္တိ ကတ္တရိ, ကိယာဒိဂဏတော နာပစ္စယော ဟောတိ ကတ္တရိ, ဂဟာဒိဂဏတော ပ္ပ ဏှာပစ္စယာ ဟောန္တိ ကတ္တရိ, တနာဒိဂဏတော ဩ ယိရပစ္စယာ ဟောန္တိ ကတ္တရိ, စုရာဒိဂဏတော ဏေ ဏယပစ္စယာ ဟောန္တိ ကတ္တရိ. अशा अनेक प्रकारच्या प्रत्ययांमध्ये "हे विकरणप्रत्यय आहेत" असे लक्षात ठेवावे. ते कसे? भूवादिगणामध्ये कर्तरी प्रयोगात 'अ' प्रत्यय होतो; रुधादिगणामध्ये कर्तरी प्रयोगात 'अ', 'इ', 'ए', 'ओ' प्रत्यय होतात आणि पूर्व स्वराच्या मध्यभागी निग्गहीत (अनुस्वार) चा आगम होतो; दिवादिगणामध्ये कर्तरी प्रयोगात 'य' प्रत्यय होतो; स्वादिगणामध्ये कर्तरी प्रयोगात 'णु', 'णा', 'उणा' प्रत्यय होतात; कियादिगणामध्ये कर्तरी प्रयोगात 'ना' प्रत्यय होतो; गहादिगणामध्ये कर्तरी प्रयोगात 'प्प', 'ण्हा' प्रत्यय होतात; तनादिगणामध्ये कर्तरी प्रयोगात 'ओ', 'यिर' प्रत्यय होतात; आणि चुरादिगणामध्ये कर्तरी प्रयोगात 'णे', 'णय' प्रत्यय होतात. အကာရော စ ဣဝဏ္ဏော စ, ဧ ဩကာရာ စ ယော တထာ; ဏု ဏာ ဥဏာ စ နာ ပ္ပ ဏှာ-ယိရာ ဏေ ဏယပစ္စယာ. 'अ' कार, 'इ' वर्ण, 'ए' आणि 'ओ' कार, तसेच 'य' प्रत्यय; 'णु', 'णा', 'उणा', 'ना', 'प्प', 'ण्हा', 'यिर', 'णे' आणि 'णय' प्रत्यय. အဂ္ဂဟိတဂ္ဂဟဏေန, ဧဝံ ပန္နရသေ’ရိတာ; ဝိကရဏဝှယာ ဧတေ, ပစ္စယာတိ ဝိဘာဝယေ. पुनरुक्ती वगळता अशा प्रकारे हे पंधरा प्रत्यय सांगितले आहेत; हे 'विकरण' नावाचे प्रत्यय आहेत असे समजावे. ယေ ဧဝံ နိဒ္ဒိဋ္ဌေဟိ ဝိကရဏပစ္စယေဟိ တဒညေဟိ စ သပ္ပစ္စယာ အဋ္ဌဝိဓာ ဓာတုဂဏာ သုတ္တန္တေသု ဗဟူပကာရာ, တေသွာယံ ဘူဝါဒိဂဏော. ဘူ သတ္တာယံ, ဘူဓာတု ဝိဇ္ဇမာနတာယံ ဝတ္တတိ. သကမ္မိကာကမ္မိကာသု ဓာတူသု အယံ အကမ္မိကာ ဓာတု, န ပန ‘‘ဓမ္မဘူတော’’တိအာဒီသု ပတ္တိအတ္ထဝါစိကာ အပရာ ဘူဓာတု ဝိယ သကမ္မိကာ. ဧသာ ဟိ ပရိအဘိအာဒီဟိ ဥပသဂ္ဂေဟိ ယုတ္တာယေဝ သကမ္မိကာ ဘဝတိ, န ဥပ ပရာ ပါတုအာဒီဟိ ဥပသဂ္ဂနိပါတေဟိ ယုတ္တာပိ. အတော ဣမိဿာ သိဒ္ဓါနိ ရူပါနိ ဒွိဓာ ဉေယျာနိ အကမ္မကပဒါနိ သကမ္မကပဒါနိ စာတိ. जे अशा प्रकारे निर्देशित केलेल्या विकरणप्रत्ययांनी आणि इतर प्रत्ययांनी युक्त असणारे आठ प्रकारचे धातूंचे गण सुत्तांमध्ये अत्यंत उपकारक आहेत, त्यांमध्ये हा 'भूवादिगण' आहे. 'भू' हा धातू अस्तित्वाच्या (विद्यमानतेच्या) अर्थात वापरला जातो. सकर्मक आणि अकर्मक धातूंमध्ये हा अकर्मक धातू आहे, परंतु "धम्मभूतो" इत्यादी शब्दांमध्ये प्राप्तीच्या अर्थाचा वाचक असणाऱ्या दुसऱ्या सकर्मक 'भू' धातूसारखा हा नाही. हा धातू 'परि', 'अभि' इत्यादी उपसर्गांशी जोडला गेल्यासच सकर्मक होतो, 'उप', 'परा', 'पातु' इत्यादी उपसर्ग आणि निपातांशी जोडला गेल्यास नाही. म्हणून या धातूची सिद्ध झालेली रूपे दोन प्रकारची समजावीत - सकर्मक आणि अकर्मक. သုဒ္ဓကတ္တုကြိယာပဒနိဒ္ဒေသ शुद्ध कर्तृक क्रियापद निर्देश တတြ [Pg.5] ဘဝတိ ဥဗ္ဘဝတိ သမုဗ္ဘဝတိ ပဘဝတိ ပရာဘဝတိ သမ္ဘဝတိ ဝိဘဝတိ, ဘောတိ သမ္ဘောတိ ဝိဘောတိ ပါတုဘဝတိ ပါတုဗ္ဘဝတိ ပါတုဘောတိ, ဣမာနိ အကမ္မကပဒါနိ. ဧတ္ထ ပါတုဣတိ နိပါတော, သော ‘‘အာဝိဘဝတိ တိရောဘဝတီ’’တိအာဒီသု အာဝိ တိရောနိပါတာ ဝိယ ဘူဓာတုတော နိပ္ဖန္နာချာတသဒ္ဒဿ နေဝ ဝိသေသကရော, န စ သကမ္မကတ္တသာဓကော. ဥဣစ္စာဒယော ဥပသဂ္ဂါ, တေ ပန ဝိသေသကရာ, န သကမ္မကတ္တသာဓကာ. ယေသမတ္ထော ကမ္မေန သမ္ဗန္ဓနီယော န ဟောတိ, တာနိ ပဒါနိ အကမ္မကာနိ. အကမ္မကပဒါနံ ယထာရဟံ သကမ္မကာကမ္မကဝသေန အတ္ထော ကထေတဗ္ဗော. ပရိဘောတိ ပရိဘဝတိ, အဘိဘောတိ အဘိဘဝတိ, အဓိဘောတိ အဓိဘဝတိ, အတိဘောတိ အတိဘဝတိ, အနုဘောတိ အနုဘဝတိ, သမနုဘောတိ သမနုဘဝတိ, အဘိသမ္ဘောတိ အဘိသမ္ဘဝတိ, ဣမာနိ သကမ္မကပဒါနိ. ဧတ္ထ ပရိဣစ္စာဒယော ဥပသဂ္ဂါ, တေ ဘူဓာတုတော နိပ္ဖန္နာချာတသဒ္ဒဿ ဝိသေသကရာ စေဝ သကမ္မကတ္တသာဓကာ စ. ယေသမတ္ထော ကမ္မေန သမ္ဗန္ဓနီယော, တာနိ ပဒါနိ သကမ္မကာနိ. သကမ္မကပဒါနံ သကမ္မကဝသေန အတ္ထော ကထေတဗ္ဗော, ကွစိ အကမ္မကဝသေနပိ. ဧဝံ သုဒ္ဓကတ္တုကြိယာပဒါနိ ဘဝန္တိ. ဥဒ္ဒေသောယံ. तेथे 'भवति', 'उब्भवति', 'समुब्भवति', 'पभवति', 'पराभवति', 'सम्भवति', 'विभवति', 'भोति', 'सम्भोटि', 'विभोति', 'पातुभवति', 'पातुब्भवति', 'पातुभोति' - ही अकर्मक पदे आहेत. येथे 'पातु' हा निपात आहे. तो 'आविभवति', 'तिरोभवति' इत्यादींमधील 'आवि' आणि 'तिरो' या निपातांप्रमाणे 'भू' धातूपासून निष्पन्न झालेल्या आख्यात शब्दाचा (क्रियापदाचा) विशेष अर्थ करणारा नाही आणि सकर्मकत्व सिद्ध करणाराही नाही. 'उ' इत्यादी उपसर्ग आहेत, ते मात्र विशेष अर्थ करणारे आहेत, सकर्मकत्व सिद्ध करणारे नाहीत. ज्यांचा अर्थ कर्माशी जोडला जाऊ शकत नाही, ती पदे अकर्मक असतात. अकर्मक पदांचा योग्यतेनुसार सकर्मक किंवा अकर्मक भावाने अर्थ सांगावा. 'परिभोति', 'परिभवति', 'अभिभोति', 'अभिभवति', 'अधिभोति', 'अधिभवति', 'अतिभोति', 'अतिभवति', 'अनुभोति', 'अनुभवति', 'समनुभोति', 'समनुभवति', 'अभिसम्भोति', 'अभिसम्भवति' - ही सकर्मक पदे आहेत. येथे 'परि' इत्यादी उपसर्ग आहेत, ते 'भू' धातूपासून निष्पन्न झालेल्या आख्यात शब्दाचा विशेष अर्थ करणारे तसेच सकर्मकत्व सिद्ध करणारेही आहेत. ज्यांचा अर्थ कर्माशी जोडला जाऊ शकतो, ती पदे सकर्मक असतात. सकर्मक पदांचा अर्थ सकर्मक भावाने सांगावा, काही ठिकाणी अकर्मक भावानेही. अशा प्रकारे कर्तृक्रियापदे होतात. हा उद्देश (संक्षिप्त निर्देश) आहे. တတြ ဘဝတီတိ ဟောတိ ဝိဇ္ဇတိ ပညာယတိ သရူပံ လဘတိ. ဥဗ္ဘဝတီတိ ဥပ္ပဇ္ဇတိ သရူပံ လဘတိ. သမုဗ္ဘဝတီတိ သမုပ္ပဇ္ဇတိ သရူပံ လဘတိ. ပဘဝတီတိ ဟောတိ သမ္ဘဝတိ. အထ ဝါ ပဘဝတီတိ ယတော ကုတောစိ သန္ဒတိ, န ဝိစ္ဆိဇ္ဇတိ, အဝိစ္ဆိန္နံ ဟောတိ, တံ တံ ဌာနံ ဝိသရတိ. ပရာဘဝတီတိ ပရာဘဝေါ ဟောတိ ဗျသနံ အာပဇ္ဇတိ အဝုဒ္ဓိံ ပါပုဏာတိ. သမ္ဘဝတီတိ သုဋ္ဌု ဘဝတိ ဝုဒ္ဓိံ ဝိရူဠှိံ ဝေပုလ္လံ အာပဇ္ဇတိ. ဝိဘဝတီတိ ဥစ္ဆိဇ္ဇတိ ဝိနဿတိ ဝိပဇ္ဇတိ, ဝိသေသတော ဝါ ဘဝတိ သမ္ပဇ္ဇတိ. ဘောတိ သမ္ဘောတိ ဝိဘောတီတိ ဣမာနိ ‘‘ဘဝတိ [Pg.6] သမ္ဘဝတိ ဝိဘဝတီ’’တိ ဣမေဟိ ယထာက္ကမံ သမာနနိဒ္ဒေသာနိ. ပါတုဘဝတီတိ ပကာသတိ ဒိဿတိ ပညာယတိ ပါကဋံ ဟောတိ. ပါတုဗ္ဘဝတိ ပါတုဘောတီတိ ဣမာနိ ‘‘ပါတုဘဝတီ’’တိ ဣမိနာ သမာနနိဒ္ဒေသာနိ. ဧဝံ အကမ္မကပဒါနံ ယထာရဟံ သကမ္မကာကမ္မကဝသေန အတ္ထကထနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧဝမုတ္တရတြာပိ အညေသမ္ပိ အကမ္မကပဒါနံ. तेथे 'भवति' म्हणजे होतो, विद्यमान असतो, प्रज्ञापित होतो, स्वरूप प्राप्त करतो. 'उब्भवति' म्हणजे उत्पन्न होतो, स्वरूप प्राप्त करतो. 'समुब्भवति' म्हणजे सम्यक उत्पन्न होतो, स्वरूप प्राप्त करतो. 'पभवति' म्हणजे होतो, संभवतो. किंवा 'पभवति' म्हणजे ज्या कुठूनतरी वाहतो, खंडित होत नाही, अखंड असतो, त्या त्या ठिकाणी पसरतो. 'पराभवति' म्हणजे पराभव होतो, संकटात पडतो, अवनतीला प्राप्त होतो. 'सम्भवति' म्हणजे चांगल्या प्रकारे होतो, वृद्धी, वाढ आणि विपुलतेला प्राप्त होतो. 'विभवति' म्हणजे उच्छेद होतो, नष्ट होतो, विपत्तीला प्राप्त होतो, किंवा विशेष रूपाने होतो, संपन्न होतो. 'भोति', 'सम्भोटि', 'विभोति' हे अनुक्रमे 'भवति', 'सम्भवति', 'विभवति' यांच्याशी समान निर्देश असणारे आहेत. 'पातुभवति' म्हणजे प्रकाशित होतो, दिसतो, प्रज्ञापित होतो, प्रकट होतो. 'पातुब्भवति', 'पातुभोति' हे 'पातुभवति' याच्याशी समान निर्देश असणारे आहेत. अशा प्रकारे अकर्मक पदांचे योग्यतेनुसार सकर्मक किंवा अकर्मक भावाने स्पष्टीकरण समजून घ्यावे. पुढे इतर अकर्मक पदांच्या बाबतीतही असेच समजावे. ပရိဘောတိဒုကာဒီသု ပန သတ္တသု ဒုကေသု ယထာက္ကမံ ဒွေ ဒွေ ပဒါနိ သမာနတ္ထာနိ, တသ္မာ ဒွေ ဒွေ ပဒါနိယေဝ ဂဟေတွာ နိဒ္ဒိသိဿာမ. တတြ ပရိဘောတိ ပရိဘဝတီတိ ပရံ ဟိံသတိ ပီဠေတိ, အထ ဝါ ဟီဠေတိ အဝဇာနာတိ. အဘိဘောတိ အဘိဘဝတီတိ ပရံ အဇ္ဈောတ္ထရတိ မဒ္ဒတိ. အဓိဘောတိ အဓိဘဝတီတိ ပရံ အဘိမဒ္ဒိတွာ ဘဝတိ အတ္တနော ဝသံ ဝတ္တာပေတိ. အတိဘောတိ အတိဘဝတီတိ ပရံ အတိက္ကမိတွာ ဘဝတိ. အနုဘောတိ အနုဘဝတီတိ သုခဒုက္ခံ ဝေဒေတိ ပရိဘုဉ္ဇတိ သုခဒုက္ခပဋိသံဝေဒီ ဟောတိ. သမနုဘောတိ သမနုဘဝတီတိ သုခဒုက္ခံ သုဋ္ဌု ဝေဒေတိ သုဋ္ဌု ပရိဘုဉ္ဇတိ သုဋ္ဌု သုခဒုက္ခပဋိသံဝေဒီ ဟောတိ. အဘိသမ္ဘောတိ အဘိသမ္ဘဝတီတိ ပရံ အဇ္ဈောတ္ထရတိ မဒ္ဒတိ. ဧဝံ သကမ္မကပဒါနံ သကမ္မကဝသေန အတ္ထကထနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ကတ္ထစိ ပန ဂစ္ဆတီတိ ပဝတ္တတီတိ ဧဝံ အကမ္မကဝသေနပိ. ဧဝမုတ္တရတြာပိ အညေသံ သကမ္မကပဒါနံ. परंतु 'परिभोति' इत्यादी सात द्विकांमध्ये अनुक्रमे दोन-दोन पदे समान अर्थाची आहेत, म्हणून दोन-दोन पदेच घेऊन निर्देश करू. तेथे 'परिभोति', 'परिभवति' म्हणजे दुसऱ्याला हिंसेत टाकतो, पीडा देतो, किंवा निंदा करतो, अवहेलना करतो. 'अभिभोति', 'अभिभवति' म्हणजे दुसऱ्याला दडपून टाकतो, चिरडतो. 'अधिभोति', 'अधिभवति' म्हणजे दुसऱ्याला चिरडून स्वतःच्या वशात ठेवतो. 'अतिभोति', 'अतिभवति' म्हणजे दुसऱ्याचे अतिक्रमण करून राहतो. 'अनुभोति', 'अनुभवति' म्हणजे सुख-दुःखाचे वेदन करतो, उपभोग घेतो, सुख-दुःखाचा प्रतिसंवेदी होतो. 'समनुभोति', 'समनुभवति' म्हणजे सुख-दुःखाचे चांगल्या प्रकारे वेदन करतो, चांगल्या प्रकारे उपभोग घेतो, चांगल्या प्रकारे सुख-दुःखाचा प्रतिसंवेदी होतो. 'अभिसम्भोति', 'अभिसम्भवति' म्हणजे दुसऱ्याला दडपून टाकतो, चिरडतो. अशा प्रकारे सकर्मक पदांचे सकर्मक भावाने स्पष्टीकरण समजून घ्यावे. परंतु काही ठिकाणी 'गच्छति' (जातो), 'पवत्तति' (प्रवृत्त होतो) याप्रमाणे अकर्मक भावानेही. पुढे इतर सकर्मक पदांच्या बाबतीतही असेच समजावे. အပစ္စယော ပရော ဟောတိ, ဘူဝါဒိဂဏတော သတိ; သုဒ္ဓကတ္တုကြိယာချာနေ, သဗ္ဗဓာတုကနိဿိတေ. भूवादी गणातील धातू असताना, सर्व सार्वधातुक प्रत्ययांच्या संदर्भात, शुद्ध कर्तृवाचक क्रियापदाच्या प्रयोगात 'अ' प्रत्यय नंतर येतो. အယံ သုဒ္ဓကတ္တုကြိယာပဒါနံ နိဒ္ဒေသော. हा कर्तृक्रियापदांचा निर्देश आहे. ဟေတုကတ္တုကြိယာပဒနိဒ္ဒေသ हेतुकर्तृक्रियापद निर्देश (प्रयोजक क्रियापद निर्देश) ဘာဝေတိ ဝိဘာဝေတိသမ္ဘာဝေတိ ပရိဘာဝေတိ, ဧဝံ ဟေတုကတ္တုကြိယာပဒါနိ ဘဝန္တိ. ဧကကမ္မကဝသေနေသမတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော[Pg.7]. ပစ္ဆိမဿ ပန ဒွိကမ္မကဝသေနပိ. ပရိဘာဝါပေတိ အဘိဘာဝါပေတိ အနုဘာဝါပေတိ, ဧဝမ္ပိ ဟေတုကတ္တုကြိယာပဒါနိ ဘဝန္တိ. ဒွိကမ္မကဝသေနေသမတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဣစ္စေဝံ ဒွိဓာ ဟေတုကတ္တုကြိယာပဒါနိ ဉေယျာနိ, အညာနိပိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. 'भावेति', 'विभावेति', 'सम्भावेति', 'परिभावेति' - अशा प्रकारे हेतुकर्तृक्रियापदे होतात. यांचा अर्थ एककर्मक भावाने ग्रहण करावा. परंतु शेवटच्या पदाचा अर्थ द्विकर्मक भावानेही ग्रहण करावा. 'परिभावापेति', 'अभिभावापेति', 'अनुभावापेति' - अशीही हेतुकर्तृक्रियापदे होतात. यांचा अर्थ द्विकर्मक भावाने ग्रहण करावा. अशा प्रकारे दोन प्रकारची हेतुकर्तृक्रियापदे जाणावीत, आणि इतरही अशीच ग्रहण करावीत. တတြ ဘာဝေတီတိ ပုဂ္ဂလော ဘာဝေတဗ္ဗံ ယံ ကိဉ္စိ ဘာဝေတိ အာသေဝတိ ဗဟုလီကရောတိ, အထ ဝါ ဘာဝေတီတိ ဝဍ္ဎေတိ. ဝိဘာဝေတီတိ ဘာဝေတဗ္ဗံ ယံ ကိဉ္စိ ဝိဘာဝေတိ ဝိသေသေန ဘာဝေတိ, ဝိဝိဓေန ဝါ အာကာရေန ဘာဝေတိ ဘာဝယတိ ဝဍ္ဎေတိ, အထ ဝါ ဝိဘာဝေတီတိ အဘာဝေတိ အန္တရဓာပေတိ. သမ္ဘာဝေတီတိ ယဿ ကဿစိ ဂုဏံ သမ္ဘာဝေတိ သမ္ဘာဝယတိ သုဋ္ဌု ပကာသေတိ ဥက္ကံသေတိ. ပရိဘာဝေတီတိ ပရိဘာဝေတဗ္ဗံ ယံ ကိဉ္စိ ပရိဘာဝေတိ ပရိဘာဝယတိ သမန္တတော ဝဍ္ဎေတိ. ဧဝံ ဧကကမ္မကဝသေနတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အထ ဝါ ပရိဘာဝေတီတိ ဝါသေတဗ္ဗံ ဝတ္ထုံ ပရိဘာဝေတိ ပရိဘာဝယတိ ဝါသေတိ ဂန္ဓံ ဂါဟာပေတိ. ဧဝံ ဒွိကမ္မကဝသေနာပိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ပရိဘာဝါပေတီတိ ပုဂ္ဂလော ပုဂ္ဂလေန သပတ္တံ ပရိဘာဝါပေတိ ဟိံသာပေတိ, အထ ဝါ ပရိဘာဝါပေတီတိ ဟီဠာပေတိ အဝဇာနာပေတိ. အဘိဘာဝါပေတီတိ ပုဂ္ဂလော ပုဂ္ဂလေန သပတ္တံ အဘိဘာဝါပေတိ အဇ္ဈောတ္ထရာပေတိ. အနုဘာဝါပေတီတိ ပုဂ္ဂလော ပုဂ္ဂလေန သမ္ပတ္တိံ အနုဘာဝါပေတိ ပရိဘောဇေတိ. तेथे 'भावेति' म्हणजे एखादा पुद्गल भावना करण्यायोग्य अशा कोणत्याही गोष्टीची भावना करतो, आचरण करतो, तिचा वारंवार सराव करतो; किंवा 'भावेति' म्हणजे वाढवतो. 'विभावेति' म्हणजे भावना करण्यायोग्य अशा कोणत्याही गोष्टीची विशेष रूपाने भावना करतो, किंवा विविध प्रकारे भावना करतो, वाढवतो; किंवा 'विभावेति' म्हणजे अभाव करतो, अदृश्य करतो. 'सम्भावेति' म्हणजे कोणाच्याही गुणांचा सन्मान करतो, चांगल्या प्रकारे प्रकट करतो, उत्कर्ष करतो. 'परिभावेति' म्हणजे भावना करण्यायोग्य अशा कोणत्याही गोष्टीची चहूबाजूंनी भावना करतो, चहूबाजूंनी वाढवतो. अशा प्रकारे एककर्मक भावाने अर्थ ग्रहण करावा. किंवा 'परिभावेति' म्हणजे सुवासित करण्यायोग्य वस्तूला सुवासित करतो, सुगंधित करतो, सुगंध ग्रहण करायला लावतो. अशा प्रकारे द्विकर्मक भावानेही अर्थ ग्रहण करावा. 'परिभावापेति' म्हणजे एखादा पुद्गल दुसऱ्या पुद्गलाद्वारे शत्रूला पीडा देण्यास लावतो, किंवा 'परिभावापेति' म्हणजे निंदा करायला लावतो, अवहेलना करायला लावतो. 'अभिभावापेति' म्हणजे एखादा पुद्गल दुसऱ्या पुद्गलाद्वारे शत्रूला दडपून टाकायला लावतो. 'अनुभावापेति' म्हणजे एखादा पुद्गल दुसऱ्या पुद्गलाद्वारे संपत्तीचा उपभोग घ्यायला लावतो. ပယုတ္တော ကတ္တုနာ ယောဂေ, ဌိတောယေဝါပ္ပဓာနိယေ; ကြိယံ သာဓေတိ ဧတဿ, ဒီပကံ သာသနေ ပဒံ. कर्त्याशी जोडलेला (प्रयोजित कर्ता), जो अप्रधान कारकात स्थित असतो, तो क्रिया सिद्ध करतो; बुद्धशासनात हे स्पष्ट करणारे पद आहे. ကရဏဝစနံယေဝ, ယေဘုယျေန ပဒိဿတိ; အာချာတေ ကာရိတဋ္ဌာနံ, သန္ဓာယ ကထိတံ ဣဒံ. बहुतांश करून करण विभक्तीच (तृतीया विभक्ती) दिसून येते; आख्यात (क्रियापद) मध्ये कारित (प्रयोजक) अर्थाचा विचार करून हे सांगितले गेले आहे. န [Pg.8] နာမေ ကာရိတဋ္ဌာနံ, ‘‘ဗောဓေတာ’’ ဣတိအာဒိကံ; ‘‘သုနခေဟိပိ ခါဒါပေန္တိ’’, ဣစ္စာဒီနိ ပဒါနိ စ; အာဟရိတွာန ဒီပေယျ, ပယောဂကုသလော ဗုဓော. 'बोधेता' इत्यादी नामांमध्ये कारित (प्रयोजक) अर्थ नसतो. 'कुत्र्यांकडूनही खाववले जाते' इत्यादी पदे प्रयोगात कुशल असलेल्या विद्वानाने उदाहरणादाखल आणून स्पष्ट करावीत. တတြိဒံ ကရဏဝစနံ ကမ္မတ္ထဒီပကံ, ဥပယောဂသာမိဝစနာနိပိ တဒ္ဒီပကာနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ကထံ? ပရိဘာဝါပေတီတိ ပုဂ္ဂလော ပုဂ္ဂလံ သပတ္တံ ပရိဘာဝါပေတီတိ, တထာ ပရိဘာဝါပေတီတိ ပုဂ္ဂလော ပုဂ္ဂလဿ သပတ္တံ ပရိဘာဝါပေတီတိ. သေသာနိ နယာနုသာရေန နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗာနိ. ဧဝံ သဗ္ဗာနေတာနိ ကရဏောပယောဂသာမိဝစနာနိ ကမ္မတ္ထဒီပကာနိယေဝ ဟောန္တိ, တသ္မာ ဒွိကမ္မကဝသေနတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. येथे हे करणवचन (तृतीया विभक्ती) कर्माचा अर्थ दर्शवणारे आहे, उपभोग आणि स्वामीवचने (द्वितीया आणि षष्ठी विभक्ती) सुद्धा तोच अर्थ दर्शवणारी म्हणून योजावीत. कसे? 'परिभावापेति' (अपमानित करवतो) म्हणजे एखादा मनुष्य दुसऱ्या मनुष्याकडून शत्रूचा अपमान करवतो, तसेच 'परिभावापेति' म्हणजे एखादा मनुष्य दुसऱ्या मनुष्याच्या शत्रूचा अपमान करवतो. उर्वरित उदाहरणे नियमानुसार स्पष्ट करावीत. अशा प्रकारे ही सर्व करण, उपयोग आणि स्वामीवचने कर्माचाच अर्थ दर्शवणारी असतात, म्हणून द्विकर्मक पद्धतीने अर्थ ग्रहण करावा. အယံ ဟေတုကတ္တုကြိယာပဒါနံ နိဒ္ဒေသော. हा प्रयोजक कर्तृ-क्रियापदांचा (हेतुकर्तृ-क्रियापदांचा) निर्देश आहे. ကမ္မကြိယာပဒနိဒ္ဒေသ कर्म-क्रियापद निर्देश ဘဝိယတေ ဝိဘဝိယတေ ပရိဘဝိယတေ အဘိဘဝိယတေ အနုဘဝိယတေ ပရိဘူယတေ အဘိဘူယတေ အနုဘူယတေ, ဧဝံ ကမ္မုနော ကြိယာပဒါနိ ဘဝန္တိ. အညထာ စ ဘဝိယျတေ ဝိဘဝိယျတေ ပရိဘဝိယျတေ အဘိဘဝိယျတေ အနုဘဝိယျတေ ပရိဘုယျတေ အဘိဘုယျတေ အနုဘုယျတေတိ. ဧတ္ထ ကမ္မုနော ကြိယာပဒါနိယေဝ ကမ္မကတ္တုနော ကြိယာပဒါနိ ကတွာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဝိသုဉှိ ကမ္မကတ္တုနော ကြိယာပဒါနိ န လဗ္ဘန္တိ. भवीयते (भाविले जाते), विभवीयते (विभाविले जाते), परिभवीयते (अपमानित केले जाते), अभिभवीयते (पराभूत केले जाते), अनुभवीयते (अनुभवले जाते), परिभूयते, अभिभूयते, अनुभूयते, अशी कर्माची क्रियापदे होतात. आणि दुसऱ्या प्रकारे भविय्यते, विभविय्यते, परिभविय्यते, अभिभविय्यते, अनुभविय्यते, परिभुय्यते, अभिभुय्यते, अनुभुय्यते अशी होतात. येथे कर्माच्याच क्रियापदांना कर्मकर्तृपदाची क्रियापदे करून योजावे. कारण कर्मकर्तृपदाची क्रियापदे स्वतंत्रपणे आढळत नाहीत. တတြ ဘဝိယတေတိ ဘာဝေတဗ္ဗံ ယံ ကိဉ္စိ ပုဂ္ဂလေန ဘာဝိယတေ အာသေဝိယတေ ဗဟုလီကရိယတေ, အထ ဝါ ဘဝိယတေတိ ဝဍ္ဎိယတေ. ဝိဘဝိယတေတိ ဝိဘာဝေတဗ္ဗံ ယံ ကိဉ္စိ ပုဂ္ဂလေန ဝိဘဝိယတေ ဝိသေသေန ဘဝိယတေ, ဝိဝိဓေန [Pg.9] ဝါ အာကာရေန ဘဝိယတေ ဝဍ္ဎိယတေ, အထ ဝါ ဝိဘဝိယတေတိ အဘဝိယတေ အန္တရဓာပိယတေ. ပရိဘဝိယတေတိ သပတ္တော ပုဂ္ဂလေန ပရိဘဝိယတေ ဟိံသိယတေ, အထ ဝါ ပရိဘဝိယတေတိ ဟီဠိယတေ အဝဇာနိယတေ. အဘိဘဝိယတေတိ သပတ္တော ပုဂ္ဂလေန အဘိဘဝိယတေ အဇ္ဈောတ္ထရိယတေ အဘိမဒ္ဒိယတေ. အနုဘဝိယတေတိ သမ္ပတ္တိ ပုဂ္ဂလေန အနုဘဝိယတေ ပရိဘုဉ္ဇိယတေ. ပရိဘူယတေတိအာဒီနိ တီဏိ ‘‘ပရိဘဝိယတေ’’တိအာဒီဟိ တီဟိ သမာနနိဒ္ဒေသာနိ. သေသာနိ ပန ယထာဝုတ္တေဟိ ယံ ကမ္မမေဝ ပဓာနတော ဂဟေတွာ နိဒ္ဒိသိယတိ ပဒံ, တံ ကမ္မတ္ထဒီပကံ. တသ္မာ ကတ္တရိ ဧကဝစနေန နိဒ္ဒိဋ္ဌေပိ ယဒိ ကမ္မံ ဗဟုဝစနဝသေန ဝတ္တဗ္ဗံ, ဗဟုဝစနန္တညေဝ ကမ္မုနော ကြိယာပဒံ ဒိဿတိ. ယဒိ ပနေကဝစနဝသေန ဝတ္တဗ္ဗံ, ဧကဝစနန္တညေဝ. တထာ ကတ္တရိ ဗဟုဝစနေန နိဒ္ဒိဋ္ဌေပိ ယဒိ ကမ္မံ ဧကဝစနဝသေန ဝတ္တဗ္ဗံ, ဧကဝစနန္တညေဝ ကမ္မုနော ကြိယာပဒံ ဒိဿတိ. ယဒိ ပန ဗဟုဝစနဝသေန ဝတ္တဗ္ဗံ, ဗဟုဝစနန္တညေဝ. ကထံ? ဘိက္ခုနာ ဓမ္မော ဘဝိယတေ, ဘိက္ခုနာ ဓမ္မာ ဘဝိယန္တေ, ဘိက္ခူဟိ ဓမ္မော ဘဝိယတေ, ဘိက္ခူဟိ ဓမ္မာ ဘဝိယန္တေတိ. ဣမိနာ နယေန သဗ္ဗတ္ထ ကမ္မုနော ကြိယာပဒေသု ဝေါဟာရော ကာတဗ္ဗော. ယသ္မိံ ပန ကမ္မုနော ကြိယာပဒေ ကမ္မတ္ထဒီပကေ ကမ္မဘူတဿေဝတ္ထဿ ကတ္တုဘာဝပရိကပ္ပော ဟောတိ, တံ ကမ္မကတ္တုတ္ထဒီပကံ, တံ ကမ္မုနော ကြိယာပဒတော ဝိသုံ န လဗ္ဘတိ. အယံ ပနေတ္ထ အတ္ထဝိညာပနေ ပယောဂရစနာ. သယမေဝ ပရိဘဝိယတေ ဒုဗ္ဘာသိတံ ဘဏံ ဗာလော တပ္ပစ္စယာ အညေဟိ ပရိဘူတောပိ, သယမေဝ အဘိဘဝိယတေ ပါပကာရီ နိရယေ နိရယပါလေဟိ အဘိဘူတောပိ တထာရူပဿ ကမ္မဿ သယံ ကတတ္တာတိ. ဧတ္ထ ဟိ သယမေဝ ပီယတေ ပါနီယံ, သယမေဝ ကဋော ကရိယတေတိအာဒီသု ဝိယ [Pg.10] သုခါဘိသင်္ခရဏီယတာ လဗ္ဘတေဝ, တတော ကမ္မကတ္တုတာ စ. त्यात 'भवीयते' म्हणजे भाविले जाणे, जे काही मनुष्याद्वारे भाविले जाते, आचरले जाते, वारंवार केले जाते; किंवा 'भवीयते' म्हणजे वाढविले जाते. 'विभवीयते' म्हणजे विभाविले जाणे, जे काही मनुष्याद्वारे विभवविले जाते, विशेष रूपाने भाविले जाते, किंवा विविध प्रकारे भाविले जाते, वाढविले जाते; किंवा 'विभवीयते' म्हणजे नष्ट केले जाते, अंतर्धान पावले जाते. 'परिभवीयते' म्हणजे मनुष्याद्वारे शत्रूचा पराभव केला जातो, छळ केला जातो; किंवा 'परिभवीयते' म्हणजे निंदा केली जाते, अवहेलना केली जाते. 'अभिभवीयते' म्हणजे मनुष्याद्वारे शत्रूवर मात केली जाते, त्याला दडपले जाते, चिरडले जाते. 'अनुभवीयते' म्हणजे मनुष्याद्वारे संपत्तीचा उपभोग घेतला जातो, ती अनुभवली जाते. 'परिभूयते' इत्यादी तीन शब्द 'परिभवीयते' इत्यादी तीन शब्दांसारख्याच समान अर्थाचे आहेत. उर्वरित शब्दांमध्ये सांगितल्याप्रमाणे जे कर्मच मुख्य मानून पद निर्देशित केले जाते, ते कर्माचा अर्थ दर्शवणारे (कर्मार्थदीपक) असते. म्हणून कर्ता एकवचनात निर्देशित असला तरी जर कर्म बहुवचनात सांगायचे असेल, तर कर्माचे क्रियापद बहुवचनातच दिसते. जर एकवचनात सांगायचे असेल, तर एकवचनातच दिसते. तसेच कर्ता बहुवचनात निर्देशित असला तरी जर कर्म एकवचनात सांगायचे असेल, तर कर्माचे क्रियापद एकवचनातच दिसते. जर बहुवचनात सांगायचे असेल, तर बहुवचनातच दिसते. कसे? 'भिक्खुना धम्मो भवीयते' (भिक्खूद्वारे धम्माची भावना केली जाते), 'भिक्खुना धम्मा भवीयन्ते' (भिक्खूद्वारे धम्मांची भावना केली जाते), 'भिक्खूहि धम्मो भवीयते' (भिक्खूंद्वारे धम्माची भावना केली जाते), 'भिक्खूहि धम्मा भवीयन्ते' (भिक्खूंद्वारे धम्मांची भावना केली जाते). या नियमाने सर्वत्र कर्माच्या क्रियापदांमध्ये व्यवहार करावा. परंतु ज्या कर्माच्या क्रियापदात, जे कर्माचा अर्थ दर्शवणारे आहे, कर्म असलेल्या अर्थाचीच कर्ता म्हणून कल्पना केली जाते, ते कर्मकर्तृवाचक (कर्मकर्तृत्वदीपक) असते, ते कर्माच्या क्रियापदापेक्षा वेगळे आढळत नाही. येथे अर्थ समजून घेण्यासाठी ही प्रयोगाची रचना आहे: 'मूर्ख माणूस वाईट बोलून स्वतःच अपमानित होतो, जरी तो त्या कारणामुळे इतरांकडून अपमानित झाला असला तरी; पापी माणूस नरकात नरकपालांद्वारे पराभूत केला जात असला तरी, तशा प्रकारच्या कर्माचा तो स्वतःच कर्ता असल्यामुळे स्वतःच पराभूत होतो.' येथे 'पाणी स्वतःच प्यायले जाते', 'चटई स्वतःच बनविली जाते' इत्यादींप्रमाणे सुलभतेने सिद्ध होणे प्राप्त होतेच, आणि त्यावरून कर्मकर्तृत्वही सिद्ध होते. အယံ ကမ္မုနော ကြိယာပဒါနံ နိဒ္ဒေသော. हा कर्माच्या क्रियापदांचा निर्देश आहे. ဘာဝကြိယာပဒနိဒ္ဒေသ भाव-क्रियापद निर्देश ဘူယတေ ဘဝိယတေ ဥဗ္ဘဝိယတေ, ဧဝံ ဘာဝဿ ကြိယာပဒါနိ ဘဝန္တိ. အညထာ စ ဘုယျတေ ဘဝိယျတေ ဥဗ္ဘဝိယျတေတိ. တတြ ယထာ ဌီယတေပဒဿ ဌာနန္တိ ဘာဝဝသေန အတ္ထကထနမိစ္ဆန္တိ, ဧဝံ ဘူယတေတိအာဒီနမ္ပိ ဘဝနန္တိအာဒိနာ ဘာဝဝသေန အတ္ထကထနမိစ္ဆိတဗ္ဗံ. ယထာ စ ဌာနံ ဌိတိ ဘဝနန္တိအာဒီဟိ ဘာဝဝါစကကိတန္တနာမပဒေဟိ သဒ္ဓိံ သမ္ဗန္ဓေ ဆဋ္ဌိယောဇနမိစ္ဆန္တိ, န တထာ ဌီယတေ ဘူယတေတိအာဒီဟိ ဘာဝဝါစကာချာတပဒေဟိ သဒ္ဓိံ သမ္ဗန္ဓေ ဆဋ္ဌိယောဇနာ ဣစ္ဆိတဗ္ဗာ သမ္ဗန္ဓေ ပဝတ္တဆဋ္ဌိယန္တသဒ္ဒေဟိ အသမ္ဗန္ဓနီယတ္တာ အာချာတိကပဒါနံ. ယသ္မိံ ပယောဂေ ယံ ကမ္မုနော ကြိယာပဒေန သမာနဂတိကံ ကတွာ ဝိနာ ကမ္မေန နိဒ္ဒိသိယတိ ကြိယာပဒံ, ကတ္တုဝါစကပဒံ ပန ပစ္စတ္တဝစနေန ဝါ ကရဏဝစနေန ဝါ နိဒ္ဒိသိယတိ, တံ တတ္ထ ဘာဝတ္ထဒီပကံ. န ဟိ သဗ္ဗထာ ကတ္တာရမနိဿာယ ဘာဝေါ ပဝတ္တတိ. ဧဝံ သန္တေပိ ဘာဝေါ နာမ ကေဝလော ဘဝနလဝနပစနာဒိကော ဓာတုအတ္ထောယေဝ. အက္ခရစိန္တကာ ပန ‘‘ဌီယတေ ဘူယတေ’’တိအာဒီသု ဘာဝဝိသယေသု ကရဏဝစနမေဝ ပယုဉ္ဇန္တိ ‘‘နနု နာမ ပဗ္ဗဇိတေန သုနိဝတ္ထေန ဘဝိတဗ္ဗံ သုပါရုတေန အာကပ္ပသမ္ပန္နေနာ’’တိအာဒီသု ဝိယ, တသ္မာ တေသံ မတေ ‘‘တေန ဥဗ္ဘဝိယတေ’’တိ ကရဏဝစနေန ယောဇေတဗ္ဗံ. ဇိနမတေန ပန ‘‘သော ဘူယတေ’’တိအာဒိနာ ပစ္စတ္တဝစနေနေဝ. သစ္စသင်္ခေပပ္ပကရဏေ ဟိ ဓမ္မပါလာစရိယေန, နိဒ္ဒေသပါဠိယံ ပန ဓမ္မသေနာပတိနာ, ဓဇဂ္ဂသုတ္တန္တေ ဘဂဝတာ စ ဘာဝပဒံ ပစ္စတ္တဝစနာပေက္ခဝသေနု’စ္စာရိတံ. भूयते, भवीयते, उब्भवीयते, अशी भावाची (भाववाचक) क्रियापदे होतात. आणि दुसऱ्या प्रकारे भुय्यते, भविय्यते, उब्भविय्यते अशी होतात. तेथे ज्याप्रमाणे 'ठीयते' या पदाचा 'ठाण' (स्थान/स्थिती) असा भाववाचक अर्थ स्पष्ट करणे अपेक्षित आहे, त्याचप्रमाणे 'भूयते' इत्यादींचाही 'भवन' (होणे) इत्यादी भाववाचक अर्थ स्पष्ट करणे अपेक्षित आहे. आणि ज्याप्रमाणे 'ठाण', 'ठिती', 'भवन' इत्यादी भाववाचक कृदंत नामपदांशी संबंध जोडताना षष्ठी विभक्तीची योजना अपेक्षित असते, तशी 'ठीयते', 'भूयते' इत्यादी भाववाचक आख्यातपदांशी (क्रियापदांशी) संबंध जोडताना षष्ठी विभक्तीची योजना अपेक्षित नसावी; कारण संबंधात प्रवृत्त होणाऱ्या षष्ठी विभक्तीच्या शब्दांशी आख्यातपदांचा संबंध जोडता येत नाही. ज्या प्रयोगात कर्माच्या क्रियापदासारखेच करून कर्माशिवाय क्रियापद निर्देशित केले जाते, आणि कर्ता दर्शवणारे पद प्रथमा विभक्तीने (पच्चत्तवचन) किंवा तृतीया विभक्तीने (करणवचन) निर्देशित केले जाते, ते तेथे भावाचा अर्थ दर्शवणारे (भावार्थदीपक) असते. कारण कर्त्याचा आश्रय घेतल्याशिवाय भाव कोणत्याही प्रकारे प्रवृत्त होत नाही. असे असले तरी, 'भाव' म्हणजे केवळ होणे, कापणी करणे, शिजवणे इत्यादी धातूचा अर्थच होय. परंतु व्याकरणकार 'ठीयते, भूयते' इत्यादी भावविषयांमध्ये तृतीया विभक्तीचाच प्रयोग करतात, जसे की 'प्रव्रजिताने (भिक्खूने) सुवस्त्र परिधान केलेले असावे, पांघरलेले असावे आणि आचारसंपन्न असावे' इत्यादींमध्ये; म्हणून त्यांच्या मते 'तेन उब्भवीयते' (त्याच्याद्वारे उद्भवले जाते) असे तृतीया विभक्तीने योजावे. परंतु जिनमतानुसार (बुद्धांच्या मतानुसार) 'सो भूयते' (तो होतो) इत्यादी प्रथमा विभक्तीनेच योजावे. कारण 'सच्चसंक्षेप' ग्रंथात आचार्य धम्मपाल यांनी, 'निद्देसपाळी' मध्ये धम्मसेनापतींनी (सारिपुत्तांनी), आणि 'ध्वजग्ग सुत्ता' मध्ये भगवंतांनी भावपद प्रथमा विभक्तीच्या अपेक्षेनेच उच्चारले आहे. ကထိတော [Pg.11] သစ္စသင်္ခေပေ, ပစ္စတ္တဝစနေန ဝေ,‘‘ဘူယတေ’’ ဣတိ သဒ္ဒဿ, သမ္ဗန္ဓော ဘာဝဒီပနော. सच्चसंक्षेपात खरोखरच प्रथमा विभक्तीने (पच्चत्तवचन) 'भूयते' या शब्दाचा संबंध भाव दर्शवणारा म्हणून सांगितला आहे. နိဒ္ဒေသပါဠိယံ ‘‘ရူပံ, ဝိဘောတိ ဝိဘဝိယျတိ’’; ဣတိ ဒဿနတော ဝါပိ, ပစ္စတ္တဝစနံ ထိရံ. निद्देसपाळीमध्ये 'रूपं, विभोति विभविय्यति' अशा निर्देशावरूनही प्रथमा विभक्तीच निश्चित होते. တထာ ဓဇဂ္ဂသုတ္တန္တေ, မုနိနာဟစ္စဘာသိတေ; ‘‘သော ပဟီယိဿတိ’’ ဣတိ, ပါဠိဒဿနတောပိ စ. तसेच ध्वजग्ग सुत्तामध्ये मुनींनी (बुद्धांनी) स्वतः स्पष्टपणे सांगितलेल्या 'सो पहीयिस्सति' (तो नष्ट होईल) या पाळी पाठाच्या दर्शनावरूनही (प्रथमा विभक्तीच सिद्ध होते). ပါရမိတာနုဘာဝေန, မဟေသီနံဝ ဒေဟတော; သန္တိ နိပ္ဖာဒနာ, နေဝ, သက္ကတာဒိဝစော ဝိယ. महान ऋषींच्या (बुद्धांच्या) शरीरातून पारमितांच्या प्रभावाने जशी उत्पत्ती होते, तशी ती संस्कृत इत्यादी भाषेच्या शब्दांप्रमाणे नसते. ပစ္စတ္တဒဿနေနေဝ, ပုရိသတ္တယယောဇနံ; ဧကဝစနိကဉ္စာပိ, ဗဟုဝစနိကမ္ပိ စ; ကာတဗ္ဗမိတိ နော ခန္တိ, ပရဿပဒအာဒိကေ. प्रथमा विभक्तीच्या दर्शनानेच तिन्ही पुरुषांची (प्रथम, मध्यम, उत्तम पुरुष) योजना, तसेच एकवचन आणि बहुवचनाची योजना सुद्धा परस्मैपद इत्यादींमध्ये करावी, हे आमचे मत आहे. တသ္မာ ရူပံ ဝိဘဝိယျတိ, ရူပါနိ ဝိဘဝိယျန္တိ, တွံ ဝိဘဝိယျသိ, တုမှေ ဝိဘဝိယျထ, အဟံ ဝိဘဝိယျာမိ, မယံ ဝိဘဝိယျာမ, ရူပံ ဝိဘဝိယျတေ, ရူပါနိ ဝိဘဝိယျန္တေ ဣစ္စေဝမာဒိ ဇိနဝစနာနုရူပတော ယောဇေတဗ္ဗံ. အတြာယံ ပဒသောဓနာ – म्हणून 'रूपं विभविय्यति' (रूप नष्ट होईल), 'रूपाणि विभविय्यन्ति' (रूपे नष्ट होतील), 'त्वं विभविय्यसि' (तू नष्ट होशील), 'तुम्हे विभविय्यथ' (तुम्ही नष्ट व्हाल), 'अहं विभविय्यामि' (मी नष्ट होईन), 'मयं विभविय्याम' (आम्ही नष्ट होऊ), 'रूपं विभविय्यते' (रूप नष्ट केले जाते), 'रूपाणि विभविय्यन्ते' (रूपे नष्ट केली जातात) इत्यादी जिनवचनांच्या (बुद्धांच्या वचनांच्या) अनुरूप योजना करावी. येथे ही पदशोधना (शब्दांचे विश्लेषण) आहे – ဝိဘဝိယျတီတိ ဣဒံ, ကမ္မပဒသမာနကံ; န စ ကမ္မပဒံ နာပိ, ကမ္မကတ္တုပဒါဒိကံ. 'विभविय्यति' हे पद कर्मपदासारखे (कर्मवाच्य क्रियापदासारखे) आहे; परंतु ते कर्मपद नाही आणि कर्माकर्तृपद (कर्मकर्तृवाच्य क्रियापद) इत्यादी देखील नाही. ယဒိ ကမ္မပဒံ ဧတံ, ပစ္စတ္တဝစနံ ပန; ကမ္မံ ဒီပေယျ ကရဏ-ဝစနံ ကတ္တုဒီပကံ. जर हे कर्मपद असते, तर प्रथमा विभक्ती (पच्चत्तवचन) कर्माला दर्शविली असती आणि तृतीया विभक्ती (करणवचन) कर्त्याला दर्शविणारी झाली असती. ယဒိ ကမ္မကတ္တုပဒံ, ‘‘ပီယတေ’’တိ ပဒံ ဝိယ; သိယာ သကမ္မကံ, နေတံ, တထာ ဟောတီတိ ဒီပယေ. जर हे कर्मकर्तृपद असते, जसे 'पीयते' (पिले जाते) हे पद; तर ते सकर्मक झाले असते, पण हे तसे नाही, असे स्पष्ट होते. ယဒိ ကတ္တုပဒံ ဧတံ, ဝိဘဝတိပဒံ ဝိယ; ဝိနာ ယပစ္စယံ တိဋ္ဌေ, န တထာ တိဋ္ဌတေ ဣဒံ. जर हे कर्तृपद (कर्तृवाच्य क्रियापद) असते, तर 'विभवति' या पदाप्रमाणे ते 'य' प्रत्ययाशिवाय (य-पच्चय) राहिले असते, परंतु हे तसे राहत नाही. န ကတ္တရိ ဘုဝါဒီနံ, ဂဏေ ယပစ္စယော ရုတော; ဒိဝါဒီနံ ဂဏေယေဝ, ကတ္တရိ သမုဒီရိတော. भू-इत्यादी (भुवादि) गणाच्या धातूंना कर्तृवाच्य प्रयोगात 'य' प्रत्यय विहित केलेला नाही; केवळ दिवादि गणातच कर्तृवाच्य प्रयोगात 'य' प्रत्यय सांगितला आहे. န [Pg.12] ဘူဓာတု ဒိဝါဒီနံ, ဓာတူနံ ဒိဿတေ ဂဏေ; ဘူဝါဒိကစုရာဒီနံ, ဂဏေသုယေဝ ဒိဿတိ. भू-धातू हा दिवादि गणाच्या धातूंमध्ये आढळत नाही; तो केवळ भुवादि आणि चुरादि इत्यादी गणांमध्येच आढळतो. ‘‘ဝိဘဝိယျတိ’’ ဣစ္စာဒေါ, တသ္မာ ယပစ္စယော ပန; ဘာဝေယေဝါတိ ဝိညေယျံ, ဝိညုနာ သမယညုနာ. म्हणून 'विभविय्यति' इत्यादींमध्ये 'य' प्रत्यय केवळ भाववाच्य प्रयोगातच (भावे प्रयोगात) आहे, असे परंपरा जाणणाऱ्या विद्वानाने समजले पाहिजे. ဧတ္ထ ဟိ ပါကဋံ ကတွာ, ဘာဝကာရကလက္ခဏံ; ဒဿယိဿာမဟံ ဒါနိ, သက္ကစ္စံ မေ နိဗောဓထ. येथे भावकारकाचे लक्षण स्पष्ट करून मी आता ते दाखवणार आहे, ते तुम्ही आदरपूर्वक ऐका. ‘‘တိဿော ဂစ္ဆတိ’’ဣစ္စတြ, ကတ္တာရံ ကတ္တုနော ပဒံ; ‘‘ဓမ္မော ဒေသိယတိ’’စ္စတြ, ကမ္မံ တု ကမ္မုနော ပဒံ. 'तिस्सो गच्छति' (तिस्स जातो) येथे कर्तृपद कर्त्याला प्रकट करते; तर 'धम्मो देसियति' (धम्माचा उपदेश केला जातो) येथे कर्मपद कर्माला प्रकट करते. သရူပတော ပကာသေတိ, တသ္မာ တေ ပါကဋာ ဥဘော; တထာ ဝိဘဝိယျတီတိ-အာဒိဘာဝပဒံ ပန. ते स्वतःच्या रूपाने प्रकट करतात, म्हणून ते दोन्ही स्पष्ट आहेत. तसेच 'विभविय्यति' इत्यादी भावपद (भाववाच्य क्रियापद) देखील... သရူပတော န ဒီပေတိ, ကာရကံ ဘာဝနာမကံ; ဒဗ္ဗဘူတံ တု ကတ္တာရံ, ပကာသေတိ သရူပတော. ...'भाव' नावाच्या कारकाला स्वतःच्या रूपाने प्रकट करत नाही, तर द्रव्यरूप असलेल्या कर्त्याला स्वतःच्या रूपाने प्रकट करते. ကတ္တာရံ ပန ဒီပေန္တံ, ကတ္တုသန္နိဿိတမ္ပိ တံ; ဘာဝံ ဒီပေတိ သွာကာရော, ပစ္စယေန ဝိဘာဝိတော. परंतु कर्त्याला प्रकट करत असतानाच, प्रत्ययाद्वारे अभिव्यक्त झालेले त्याचे स्वतःचे रूप कर्त्यावर आश्रित असलेल्या भावाला (क्रियेला) देखील प्रकट करते. ယသ္မာ စ ကတ္တုဘာဝေန, ဘာဝေါ နာမ န တိဋ္ဌတိ; ကတ္တာဝ ကတ္တုဘာဝေန, ဘာဝဋ္ဌာနေ ဌိတော တတော. आणि ज्याअर्थी 'भाव' (क्रिया) हा कर्तृभावाने (कर्त्याच्या रूपाने) अस्तित्वात नसतो, म्हणून कर्ताच कर्तृभावाने भावाच्या (क्रियेच्या) स्थानी स्थित असतो. ယဇ္ဇေဝံ ကတ္တုဝေါဟာရော, ဘာဝဿ တု ကထံ သိယာ; ‘‘သာဝကာနံ သန္နိပါတော, အဟောသိ’’ဣတိအာဒိသု. जर असे आहे, तर 'सावकानं सन्निपातो अहोसि' (श्रावकांचा संनिपात/मेळावा झाला) इत्यादींमध्ये भावासाठी (क्रियेसाठी) 'कर्ता' असा व्यवहार कसा होऊ शकतो? ဣတိ စေ နိဿယာနံ တု, ဝသာ နိဿိတသမ္ဘဝါ; ကတ္တုဋ္ဌာနေပိ ဘာဝဿ, ကတ္တုပညတ္တိ သိဇ္ဈတိ. असे असल्यास, आश्रयाच्या (निस्सय) प्रभावाने आश्रिताची (निस्सित) उत्पत्ती होत असल्यामुळे, कर्त्याच्या स्थानी देखील भावाची 'कर्तृ-प्रज्ञप्ती' (कर्त्याची संज्ञा) सिद्ध होते. ကာရကေ ကတ္တုကမ္မဝှေ, ကြိယာသန္နိဿယေ ယထာ; ဓာရေန္တီ အာသနထာလီ, ကြိယာဓာရောတိ ကပ္ပိတာ. ज्याप्रमाणे क्रिया-आश्रित असलेल्या कर्ता आणि कर्म नावाच्या कारकांमध्ये, धारण करणारी 'आसन' किंवा 'थाळी' (भांडे) ही क्रियेचा आधार मानली जाते; တထာ ဘာဝပဒံ ဓီရာ, ကတ္တာရံ ဘာဝနိဿယံ; ဒီပယန္တမ္ပိ ကပ္ပေန္တိ, ဘာဝဿ ဝါစကံ ဣတိ. त्याचप्रमाणे, ज्ञानी लोक भावपदाला (भाववाच्य क्रियापदाला), ते भावाचा आश्रय असलेल्या कर्त्याला प्रकट करत असले तरीही, 'भावाचे (क्रियेचे) वाचक' असे मानतात. ကေစိ [Pg.13] အဒဗ္ဗဘူတဿ, ဘာဝဿေကတ္တတော ဗြဝုံ; ဘာဝေဒေကဝစောဝါဒိ-ပုရိသဿေဝ ဟောတိတိ. काही आचार्य म्हणतात की, अमूर्त (अद्रव्यरूप) असलेल्या भावाच्या एकत्वामुळे, भाववाच्य प्रयोगात केवळ एकवचन आणि प्रथम पुरुष (अन्य पुरुष) च होतो. ပါဠိံ ပတွာန တေသံ တု, ဝစနံ အပ္ပမာဏကံ; ‘‘တေ သံကိလေသိကာ ဓမ္မာ, ပဟီယိဿန္တိ’’ ဣတိ ဟိ. परंतु पालि ग्रंथांचा विचार करता त्यांचे हे म्हणणे अप्रमाण ठरते; कारण 'ते संकिलेसिका धम्मा पहीयिस्सन्ति' (ते संक्लेशकारक धर्म नष्ट होतील) असा पाठ आढळतो. ပါဌော ပါဝစနေ ဒိဋ္ဌော, တသ္မာ ဧဝံ ဝဒေမသေ; ပစ္စတ္တဒဿနေနေဝ, ပုရိသတ္တယယောဇနံ. हा पाठ बुद्धवचनात (पावचन) दिसून येतो, म्हणून आम्ही असे म्हणतो की, प्रथमा विभक्तीच्या (पच्चत्त) दर्शनानेच तिन्ही पुरुषांची (प्रथम, मध्यम, उत्तम पुरुष) योजना होते. ဝစနေဟိ ယုတံ ဒွီဟိ, ဣစ္ဆိတဗ္ဗန္တိ နော ရုစိ; ဘာဝေ ကြိယာပဒံ နာမ, ပါဠိယံ အတိဒုဒ္ဒသံ; တသ္မာ တဂ္ဂဟဏူပါယော, ဝုတ္တော ဧတ္တာဝတာ မယာတိ. ते दोन्ही वचनांनी (एकवचन आणि बहुवचन) युक्त असावे, अशी आमची संमती आहे. पालि भाषेमध्ये भाववाच्य क्रियापद शोधणे अत्यंत कठीण आहे; म्हणून ते ग्रहण करण्याचा (समजून घेण्याचा) उपाय माझ्याद्वारे येथे स्पष्ट करण्यात आला आहे. အယံ ဘာဝဿ ကြိယာပဒါနံ နိဒ္ဒေသော. हा भाववाच्य क्रियापदांचा निर्देश (स्पष्टीकरण) आहे. ဧဝံ သုဒ္ဓကတ္တုကြိယာပဒါနိ ဟေတုကတ္တုကြိယာပဒါနိ ကမ္မုနော ကြိယာပဒါနိ, ဘာဝဿ ကြိယာပဒါနိ စာတိ စတုဓာ, ကမ္မကတ္တုကြိယာပဒေဟိ ဝါ ပဉ္စဓာ ဘူဓာတုတော နိပ္ဖန္နာနိ ကြိယာပဒါနိ နာနပ္ပကာရေန နိဒ္ဒိဋ္ဌာနိ, ဧတာနိ လောကိယာနံ ဘာဝဘေဒဝသေန ဝေါဟာရဘေဒေါ ဟောတီတိ ဒဿနတ္ထံ ဝိသုံ ဝိသုံ ဝုတ္တာနိ. အတ္ထတော ပန ကမ္မကတ္တုဘာဝကာရကတ္တယဝသေန တိဝိဓာနေဝ. ဟေတုကတ္တာ ဟိ သုဒ္ဓကတ္တုသင်္ခါတေ ကာရကေ တဿင်္ဂဘာဝတော သင်္ဂဟမုပဂစ္ဆတိ, တထာ ကမ္မကတ္တာ ကမ္မကာရကေ, ဘာဝေါ ပန ကေဝလော. သော ဟိ ဂမနပစနလဝနာဒိဝသေနာနေကဝိဓောပိ ကြိယာသဘာဝတ္တာ ဘေဒရဟိတော ကာရကန္တရော. ဧဝံ သန္တေပိ ဒဗ္ဗသန္နိဿိတတ္တာ ဒဗ္ဗဘေဒေန ဘိဇ္ဇတိ. တေန ပါဝစနေ ဘာဝဝါစကံ ပဒံ ဗဟုဝစနန္တမ္ပိ ဒိဿတိ. အာချာတိကပဒေ ဘာဝကာရကဝေါဟာရော နိရုတ္တိနယံ နိဿာယ ဂတော, အတ္ထတော ပန ဘာဝဿ ကာရကတာ နုပပဇ္ဇတိ. သော ဟိ န [Pg.14] ကိဉ္စိ ဇနေတိ, န စ ကြိယာယ နိမိတ္တံ. ကြိယာနိမိတ္တဘာဝေါယေဝ ဟိ ကာရကလက္ခဏံ. ဣတိ မုချတော ဝါ ဟေတုတော ဝါ ဘာဝဿ ကာရကတာ န လဗ္ဘတိ. ဧဝံ သန္တေပိ သော ကရဏမတ္တတ္တာ ကာရကံ. တထာ ဟိ ကရဏံ ကာရော, ကြိယာ, တဒေဝ ကာရကန္တိ ဘာဝဿ ကာရကတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. ယသ္မာ ပန ကြိယာနိမိတ္တဘာဝေါယေဝ ကာရကလက္ခဏံ, တသ္မာ နာမိကပဒေ ကာရကလက္ခဏေ ဘာဝကာရကန္တိ ဝေါဟာရံ ပဟာယ ကတ္တုကမ္မကရဏသမ္ပဒါနာပါဒါနာဓိကရဏာနံ ဆန္နံ ဝတ္ထူနံ ကတ္တုကာရကကမ္မကာရကန္တိအာဒိ ဝေါဟာရော ကရိယတိ ဝေယျာကရဏေဟိ. ဧဝံ နိရုတ္တိနယံ နိဿာယ ဝုတ္တံ ဘာဝကာရကဉ္စ ဒွေ စ ကမ္မကတ္တုကာရကာနီတိ ကာရကတ္တယံ ဘဝတိ. တဒ္ဒီပကဉ္စာချာတိကပဒံ တိကာရကံ. अशा प्रकारे, कर्तृक्रियापदे, हेतुक्रियापदे (प्रयोजक क्रियापदे), कर्मक्रियापदे (कर्मवाच्य क्रियापदे) आणि भावक्रियापदे (भाववाच्य क्रियापदे) अशी चार प्रकारची, किंवा कर्मकर्तृक्रियापदांसह पाच प्रकारची 'भू' धातूपासून निष्पन्न झालेली क्रियापदे वेगवेगळ्या प्रकारे निर्दिष्ट केली आहेत. ही क्रियापदे लौकिक भावांच्या भेदांमुळे व्यवहारात भेद निर्माण करतात, हे दर्शवण्यासाठी वेगवेगळी सांगितली आहेत. परंतु अर्थाच्या दृष्टीने कर्म, कर्तृ आणि भाव या तीन कारकांच्या भेदाने ती तीन प्रकारचीच आहेत. कारण हेतुकर्ता (प्रयोजक कर्ता) हा 'कर्तृ' संज्ञक कारकाचाच एक भाग असल्यामुळे त्यातच समाविष्ट होतो, तसेच कर्मकर्ता हा कर्मकारकात समाविष्ट होतो, आणि 'भाव' हा केवळ स्वतंत्र असतो. तो गमन (जाणे), पचन (शिजवणे), लवन (कापणे) इत्यादी रूपाने अनेक प्रकारचा असला तरी क्रियास्वभाव असल्यामुळे भेदरहित असे दुसरे कारक आहे. असे असले तरी, द्रव्यावर आश्रित असल्यामुळे द्रव्याच्या भेदाने तो भिन्न होतो. म्हणूनच बुद्धवचनात (पावचन) भाववाचक पद बहुवचनात देखील आढळते. आख्यात पदात (क्रियापदात) भावकारकाचा व्यवहार व्याकरणशास्त्राच्या नियमांवर (निरुत्तिनय) आधारित आहे, परंतु अर्थाच्या दृष्टीने भावाचे कारकत्व सिद्ध होत नाही. कारण तो काहीही उत्पन्न करत नाही आणि क्रियेचे निमित्तही बनत नाही. क्रियेचे निमित्त असणे हेच कारकाचे लक्षण आहे. अशा प्रकारे, मुख्य रूपाने किंवा हेतू रूपाने भावाचे कारकत्व प्राप्त होत नाही. असे असले तरी, तो केवळ क्रिया (करण) असल्यामुळे कारक मानला जातो. कारण 'करण' म्हणजे क्रिया आणि तीच कारक आहे, या दृष्टीने भावाचे कारकत्व समजले पाहिजे. परंतु ज्याअर्थी क्रियेचे निमित्त असणे हेच कारकाचे लक्षण आहे, म्हणून नामपदांच्या कारक-लक्षणात 'भावकारक' असा व्यवहार सोडून व्याकरणकारांनी कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान आणि अधिकरण या सहा गोष्टींना 'कर्तृकारक', 'कर्मकारक' इत्यादी व्यवहार केला आहे. अशा प्रकारे व्याकरणशास्त्राच्या नियमाचा आश्रय घेऊन सांगितलेले भावकारक आणि दोन (कर्ता व कर्म) मिळून तीन कारके होतात. आणि त्यांना दर्शवणारे आख्यातपद (क्रियापद) हे 'त्रिकारक' (तीन कारके असणारे) असते. ဣမမတ္ထဉှိ သန္ဓာယ, ဝုတ္တမာစရိယေဟိပိ; မဟာဝေယျာကရဏေဟိ, နိရုတ္တိနယဒဿိဘိ. हाच अर्थ लक्षात घेऊन, व्याकरणशास्त्राच्या नियमांचे दर्शन घडवणाऱ्या महान वैयाकरण आचार्यांनी देखील असे म्हटले आहे: ‘‘ယံ တိကာလံ တိပုရိသံ, ကြိယာဝါစိ တိကာရကံ; အတိလိင်္ဂံ ဒွိဝစနံ, တဒါချာတန္တိ ဝုစ္စတီ’’တိ. 'जे तीन काळ (त्रिकाल), तीन पुरुष (त्रिपुरुष) यांनी युक्त, क्रियावाचक, तीन कारके असणारे (त्रिकारक), लिंगविरहित (अतिलिंग) आणि दोन वचने (द्विवचन) असणारे असते, त्याला आख्यात (क्रियापद) असे म्हटले जाते.' ဣဓ ဘာဝကမ္မေသု အတ္တနောပဒုပ္ပတ္တိံ ကေစိ အက္ခရစိန္တကာ အဝဿမိစ္ဆန္တီတိ တေသံ မတိဝိဘာဝနတ္ထမမှေဟိ ဘာဝကမ္မာနံ ကြိယာပဒါနိ အတ္တနောပဒဝသေနုဒ္ဒိဋ္ဌာနိ စေဝ နိဒ္ဒိဋ္ဌာနိ စ. သဗ္ဗာနိပိ ပနေတာနိ တိကာရကာနိ ကြိယာပဒါနိ ကြိယာပဒမာလမိစ္ဆတာ ပရဿပဒတ္တနောပဒဝသေန ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ပါဠိအာဒီသု ဟိ တိကာရကာနိ ကြိယာပဒါနိ ပရဿပဒတ္တနောပဒဝသေန ဒွိဓာ ဌိတာနိ. သေယျထိဒံ? ဘဂဝါ သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ. သမာဓိဇ္ဈာနကုသလာ, ဝန္ဒန္တိ လောကနာယကံ. မောနံ ဝုစ္စတိ ဉာဏံ. အတ္ထာဘိသမယာ ဓီရော, ပဏ္ဍိတောတိ ပဝုစ္စတိ. ကထံ ပဋိပန္နဿ ပုဂ္ဂလဿ ရူပံ ဝိဘောတိ ဝိဘဝိယျတိ. သော [Pg.15] ပဟီယိဿတိ. ပဏ္ဍုကမ္ဗလေ နိက္ခိတ္တံ ဘာသတေ တပတေ. ပူဇကော လဘတေ ပူဇံ. ပုတ္တကာမာ ထိယော ယာစံ, လဘန္တေ တာဒိသံ သုတံ. အသိတော တာဒိ ဝုစ္စတေ သဗြဟ္မာ. အဂ္ဂိဇာဒိ ပုဗ္ဗေဝ ဘူယတေ. သော ပဟီယေထာပိ နော ပဟီယေထာတိ ဧဝံ ဒွိဓာ ဌိတာနိ. အတြိဒံ ပါဠိဝဝတ္ထာနံ – येथे भाव आणि कर्म (प्रयोगां) मध्ये आत्मनेपदाची उत्पत्ती काही व्याकरणकार (अक्षरचिंतक) आवश्यक मानत नाहीत, त्यांच्या मताचे स्पष्टीकरण करण्यासाठी आम्ही भाव आणि कर्माच्या क्रियापदांचे आत्मनेपदाच्या नियमांनुसार निर्देश आणि स्पष्टीकरण केले आहे. परंतु, क्रियापदांची मालिका इच्छिणाऱ्यांनी ही सर्व तीनही कारकांशी (कर्तरी, कर्मणी, भावे) संबंधित क्रियापदे परस्मैपद आणि आत्मनेपदाच्या नियमांनुसार योजावीत. कारण पाळी इत्यादींमध्ये तीनही कारकांतील क्रियापदे परस्मैपद आणि आत्मनेपद अशा दोन प्रकारे स्थित आहेत. जसे की: 'भगवा सावत्थियं विहरति' (भगवान श्रावस्तीमध्ये विहार करतात). 'समाधिज्झानकुसला, वन्दन्ति लोकनायकं' (समाधी आणि ध्यानात कुशल असलेले लोकनायकाला वंदन करतात). 'मोनं वुच्चति ञाणं' (ज्ञानाला मौन म्हटले जाते). 'अत्थाभिसमया धीरो, पण्डितोति पवुच्चति' (अर्थाचा साक्षात्कार झाल्यामुळे धीर पुरुषाला पंडित म्हटले जाते). 'कथं पटिपन्नस्स पुग्गलस्स रूपं विभोति विभविय्यति' (प्रतिपन्न व्यक्तीचे रूप कसे नष्ट होते आणि नष्ट होईल?). 'सो पहीयिस्सति' (ते नष्ट होईल/त्याचा प्रहाण होईल). 'पण्डुकम्बले निक्खित्तं भासते तपते' (लाल घोंगडीवर ठेवलेले चमकते आणि तळपते). 'पूजको लभते पूजं' (पूजा करणारा पूजा प्राप्त करतो). 'पुत्तकामा थियो याचं, लभन्ते तादिसं सुतं' (पुत्राची इच्छा करणाऱ्या स्त्रिया याचना करून तसा पुत्र प्राप्त करतात). 'असितो तादि वुच्चते सब्रह्मा' (असित असा तो ब्रह्मसम म्हटला जातो). 'अग्गिजादि पुब्बेव भूयते' (अग्नीपासून उत्पन्न झालेले इत्यादी आधीच अस्तित्वात येते). 'सो पहीयेथापि नो पहीयेथा' (ते नष्ट होऊ शकते किंवा नष्ट होणार नाही) - अशा प्रकारे हे दोन प्रकारे स्थित आहे. याविषयी पाळीचा नियम असा आहे – တိကာရကာနိ သဗ္ဗာနိ, ကြိယာပဒါနိ ပါယတော; ပရဿပဒယောဂေန, ဒိဿန္တိ ပိဋကတ္တယေ. त्रिपिटकात बहुतांश करून सर्व तीनही कारकांतील क्रियापदे परस्मैपदाच्या योगाने दिसून येतात. အတ္တနောပဒယုတ္တာနိ, စုဏ္ဏိယေသု ပဒေသု ဟိ; အတီဝပ္ပာနိ ဂါထာသု, ပဒါနီတိ ဗဟူနိ တု. गद्य पदांमध्ये (चूर्णिय पदांमध्ये) आत्मनेपदाने युक्त असलेली पदे अत्यंत कमी आहेत, परंतु गाथांमध्ये (पद्यांमध्ये) अशी पदे पुष्कळ आहेत. ဂါထာသု စေဝိတရာနိ, စုဏ္ဏိယေသု ပဒေသု စ; သုဗဟူနေဝ ဟုတွာန, ဒိဿန္တီတိ ပကာသယေ. गाथांमध्ये तसेच इतर गद्य पदांमध्येही ती (परस्मैपदाची पदे) अतिशय मोठ्या संख्येने दिसून येतात, असे स्पष्ट करावे. ပဒါနံ နိဒ္ဒေသော ပနတိ အန္တိအာဒီနံ တေသံ တေသံ ဝစနာနမနုရူပေန ယောဇေတဗ္ဗော. ဧဝံ တိကာရကကြိယာပဒါနိ သရူပတော ဝဝတ္ထာနတော နိဒ္ဒေသတော စ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. पदांचा निर्देश 'ति', 'अन्ति' इत्यादी त्या त्या वचनांच्या अनुरूप योजावा. अशा प्रकारे तीनही कारकांतील क्रियापदे त्यांच्या स्वरूपावरून, वर्गीकरणावरून आणि निर्देशावरून समजून घ्यावीत. ဣဒါနိ နောပသဂ္ဂါကမ္မိကာဒိဝသေန ဘဝတိဿ ဓာတုဿ ဝိနိစ္ဆယံ ဝဒါမ – आता आपण उपसर्ग नसणे, अकर्मक असणे इत्यादींच्या आधारे 'भू' (भवति) धातूचा निर्णय सांगू – နောပသဂ္ဂါ အကမ္မာ စ, သောပသဂ္ဂါ အကမ္မိကာ; သောပသဂ္ဂါ သကမ္မာ စ, ဣတိ ဘူတိ ဝိဘာဝိတာ. उपसर्ग नसलेला आणि अकर्मक, उपसर्ग असलेला आणि अकर्मक, तसेच उपसर्ग असलेला आणि सकर्मक - अशा प्रकारे 'भू' (अस्तित्व) धातू स्पष्ट केला आहे. ဣဒံ တု ဝစနံ ‘‘ဓမ္မ-ဘူတော ဘုတွာ’’တိအာဒိသု; ပတ္တာနုဘဝနတ္ထံ မေ, ဝိဝဇ္ဇေတွာ ဥဒီရိတံ. परंतु हे वचन 'धम्मभूतो भुत्वा' (धम्मरूप होऊन) इत्यादींमध्ये 'प्राप्ती आणि अनुभव' हा अर्थ वगळून माझ्याद्वारे सांगितले गेले आहे. ဧတေန ပန အတ္ထေန, နောပသဂ္ဂသကမ္မိကံ; ဂဟေတွာ စတုဓာ ဟောတိ, ဣတိ ဉေယျံ ဝိသေသတော. परंतु या अर्थाने, उपसर्ग नसलेला आणि सकर्मक असा स्वीकार करून तो विशेषतः चार प्रकारचा होतो, असे समजावे. နောပသဂ္ဂါ အကမ္မာ စ, သောပသဂ္ဂါ အကမ္မိကာ; ဘူဓာတု ကာရိတေ သန္တေ, ဧကကမ္မာ ဘဝန္တိ ဟိ. उपसर्ग नसलेला व अकर्मक, आणि उपसर्ग असलेला व अकर्मक असलेला 'भू' धातू प्रयोजक (णिजन्त/कारित) प्रत्यय लागल्यास एककर्मक होतो. ‘‘ဘာဝေတိ [Pg.16] ကုသလံ ဓမ္မံ, ဝိဘာဝေတီ’’တိမာနိဓ; ဒဿေတဗ္ဗာနိ ဝိညူဟိ, သာသနညူဟိ သာသနေ. 'भावेति कुसलं धम्मं' (तो कुशल धम्माची भावना करतो/विकसित करतो), 'विभावेति' (तो स्पष्ट करतो) ही उदाहरणे शासनाला (बुद्धशासनाला) जाणणाऱ्या विद्वानांनी येथे शासनात दाखवून दिली पाहिजेत. သောပသဂ္ဂါ သကမ္မာ တု, ကာရိတပ္ပစ္စယေ သတိ; ဒွိကမ္မာယေဝ ဟောတီတိ, ဉာတဗ္ဗံ ဝိညုနာ ကထံ. परंतु उपसर्ग असलेला आणि सकर्मक असलेला धातू प्रयोजक प्रत्यय लागल्यास द्विकर्मकच होतो, हे विद्वानांनी कसे जाणावे? အဘိဘာဝေန္တိ ပုရိသာ, ပုရိသေ ပါဏဇာတိကံ; အနုဘာဝေတိ ပုရိသော, သမ္ပတ္တိံ ပုရိသံ ဣတိ. 'अभिभावेन्ति पुरिसा, पुरिसे पाणजातिकं' (माणसे इतर माणसांना प्राण्यांवर विजय मिळवून देतात); 'अनुभावेति पुरिसो, सम्पत्तिं पुरिसं' (माणूस दुसऱ्या माणसाला संपत्तीचा अनुभव करून देतो) - अशा प्रकारे. ဣဒံ သကမ္မကံ နာမ, အကမ္မကမိဒံ ဣတိ; ကထမမှေဟိ ဉာတဗ္ဗံ, ဝိတ္ထာရေန ဝဒေထ နော. 'हे सकर्मक आहे आणि हे अकर्मक आहे' हे आम्ही कसे जाणावे? कृपया आम्हाला हे सविस्तर सांगा. ဝိတ္ထာရေနေဝ ကိံ ဝတ္တုံ, သက္ကောမိ ဧကဒေသတော; ကထယိဿာမိ သက္ကစ္စံ, ဝဒတော မေ နိဗောဓထ. पूर्ण विस्ताराने काय सांगू? मी एका अंशाने (थोडक्यात) सांगू शकेन. मी आदरपूर्वक सांगेन, मी सांगत असताना आपण लक्षपूर्वक ऐकावे. အာချာတိကပဒံ နာမ, ဒုဝိဓံ သမုဒီရိတံ; သကမ္မကမကမ္မဉ္စ, ဣတိ ဝိညူ ဝိဘာဝယေ. आख्यात पद (क्रियापद) हे सकर्मक आणि अकर्मक असे दोन प्रकारचे सांगितले गेले आहे, असे विद्वानांनी स्पष्ट करावे. တတြ ယဿ ပယောဂမှိ, ပဒဿ ကတ္တုနာ ကြိယာ; နိပ္ဖာဒိတာ ဝိနာ ကမ္မံ, န ဟောတိ တံ သကမ္မကံ. त्यामध्ये, ज्या पदाच्या प्रयोगात कर्त्याद्वारे केली जाणारी क्रिया कर्माशिवाय पूर्ण होत नाही, ते सकर्मक पद होय. ‘‘ပစတီ’’တိ ဟိ ဝုတ္တေ တု, ယေန ကေနစိ ဇန္တုနာ; ဩဒနံ ဝါ ပနညံ ဝါ, ကိဉ္စိ ဝတ္ထုန္တိ ဉာယတိ. कारण जेव्हा 'पचति' (तो शिजवतो) असे म्हटले जाते, तेव्हा कोणत्याही व्यक्तीद्वारे भात किंवा इतर काहीतरी वस्तू शिजवली जात आहे, असे समजते. ယဿ ပန ပယောဂမှိ, ကမ္မေန ရဟိတာ ကြိယာ; ပဒဿ ဉာယတေ ဧတံ, အကမ္မကန္တိ တီရယေ. परंतु ज्या पदाच्या प्रयोगात क्रिया कर्माशिवाय समजली जाते, ते अकर्मक आहे असा निर्णय करावा. ‘‘တိဋ္ဌတိ ဒေဝဒတ္တော’’တိ, ဝုတ္တေ ကေနစိ ဇန္တုနာ; ဌာနံဝ ဗုဒ္ဓိဝိသယော, ကမ္မဘူတံ န ကိဉ္စိပိ. जेव्हा 'तिट्ठति देवदत्तो' (देवदत्त उभा आहे) असे म्हटले जाते, तेव्हा केवळ उभे राहणे हाच बुद्धीचा विषय होतो, कर्म म्हणून काहीही नसते. သကမ္မကပဒံ တတ္ထ, ကတ္တာရံ ကမ္မမေဝ စ; ပကာသေတိ ယထာယောဂ-မိတိ ဝိညူ ဝိဘာဝယေ. तेथे सकर्मक पद योग्यतेनुसार कर्ता आणि कर्म या दोन्हीचा प्रकाश करते, असे विद्वानांनी स्पष्ट करावे. ‘‘ဩဒနံ ပစတိ ပေါသော, ဩဒနော ပစ္စတေ သယံ’’; ဣစ္စုဒါဟရဏာ ဉေယျာ, အဝုတ္တေပိ အယံ နယော. 'ओदनं पचति पोसो' (माणूस भात शिजवतो), 'ओदनो पच्चते सयं' (भात स्वतः शिजतो) - या उदाहरणांवरून हा नियम समजावा, न सांगितलेल्या ठिकाणीही हाच नियम लागू होतो. အကမ္မကပဒံ [Pg.17] နာမ, ကတ္တာရံ ဘာဝမေဝ စ; ယထာရဟံ ပကာသေတိ, ဣတိ ဓီရောပလက္ခယေ. अकर्मक पद योग्यतेनुसार कर्ता आणि भाव (क्रिया) यांचा प्रकाश करते, असे बुद्धिमान पुरुषाने जाणावे. ကတ္တာရံ ‘‘တိဋ္ဌတိ’’စ္စတြ, သူစေတိ ဘာဝနာမကံ; ‘‘ဥပဋ္ဌီယတိ’’ ဣစ္စတြ, အဝုတ္တေပိ အယံ နယော. 'तिट्ठति' (तो उभा राहतो) यामध्ये कर्त्याचे आणि 'उपट्ठीयति' (सेवा केली जाते) यामध्ये भावाचे (क्रियेचे) सूचन होते, न सांगितलेल्या ठिकाणीही हाच नियम लागू होतो. ဧဝံ သကမ္မကာကမ္မံ, ဉတွာ ယောဇေယျ ဗုဒ္ဓိမာ; တိကမ္မကဉ္စ ဇာနေယျ, ကရာဒေါ ကာရိတေ သတိ. अशा प्रकारे सकर्मक आणि अकर्मक जाणून बुद्धिमान माणसाने योजना करावी; आणि 'कृ' (करणे) इत्यादी धातूंना प्रयोजक प्रत्यय लागल्यास त्रिकर्मक होते, असे जाणावे. ‘‘သုဝဏ္ဏံ ကဋကံ ပေါသော, ကာရေတိ ပုရိသ’’န္တိ စ; ‘‘ပုရိသော ပုရိသေ ဂါမံ, ရထံ ဝါဟေတိ’’ဣစ္စပိ. 'सुवण्णं कटकं पोसो, कारेति पुरिसं' (माणूस दुसऱ्या माणसाकडून सोन्याचे कडे बनवतो) आणि 'पुरिसो पुरिसे गामं, रथं वाहेति' (माणूस इतर माणसांकडून गावात रथ वाहून नेतो) - असेही. ဧတ္ထ ဘဝတိဓာတုမှိ, နယော ဧသော န လဗ္ဘတိ; တသ္မာ ဒွိကမ္မကညေဝ, ပဒမေတ္ထ ဝိဘာဝိတံ. येथे 'भू' (भवति) धातूच्या बाबतीत हा नियम आढळत नाही; म्हणून येथे केवळ द्विकर्मक पदच स्पष्ट केले आहे. ဧဒိသော စ နယော နာမ, ပါဠိယံ တု န ဒိဿတိ; ဧကစ္စာနံ မတေနေဝ, မယာ ဧဝံ ပကာသိတော. आणि असा नियम पाळीमध्ये दिसून येत नाही; काही आचार्यांच्या मतानुसारच मी तो येथे अशा प्रकारे स्पष्ट केला आहे. ဧတ္ထ စ ‘‘တမေနံ ရာဇာ, ဝိဝိဓာ ကမ္မကာရဏာ; ကာရာပေတီ’’တိ ယော ပါဌော, နိဒ္ဒေသေ တံ သုနိဒ္ဒိသေ. आणि येथे 'तमेनं राजा, विविधा कम्मकारणा कारापेति' (त्यानंतर राजा त्याला विविध प्रकारच्या शिक्षा करवतो) हा जो पाठ आहे, तो निद्देसामध्ये चांगल्या प्रकारे स्पष्ट केला आहे. ‘‘မနုဿေဟီ’’တိ အာဟရိတွာ, ပါဌသေသံ သုမေဓသော; ‘‘သုနခေဟိပိ ခါဒါပေန္တိ’’, ဣတိ ပါဌဿ ဒဿနာ. बुद्धिमान पुरुषाने 'मनुस्सेहि' (माणसांद्वारे) हा शब्द आणून उर्वरित पाठाची पूर्तता करावी, कारण 'सुनखेहिपि खादापेन्ति' (कुत्र्यांकडूनही खाववले जाते) असा पाठ दिसून येतो. ဧတံ နယံ ဝိဒူ ဉတွာ, ယောဇေ ပါဌာနုရူပတော; ‘‘သုဝဏ္ဏံ ကဋကံ ပေါသော, ကာရေတိ ပုရိသေနိ’’တိ. हा नियम जाणून विद्वानाने पाठाच्या अनुरूप अशी योजना करावी: 'सुवण्णं कटकं पोसो, कारेति पुरिसेन' (माणूस माणसाद्वारे सोन्याचे कडे बनवतो). ဝိကရဏပ္ပစ္စယာဝ, ဝုတ္တာ ဧတ္ထ သရူပတော; သဂဏေ သဂဏေ တေသံ, ဝုတ္တိံ ဒီပေတုမေဝ စ. येथे विकरण प्रत्ययच त्यांच्या मूळ स्वरूपात सांगितले आहेत, आणि त्यांच्या आपापल्या गणांमधील प्रवृत्तीला स्पष्ट करण्यासाठीच हे केले आहे. ‘‘အသ္မိံ ဂဏေ အယံ ဓာတု, ဟောတီ’’တိ တေဟိ ဝိညုနော; ဝိညာပေတုဉ္စ အညေဟိ, ဉာပနာ ပစ္စယေဟိ န. 'या गणात हा धातू आहे' हे त्या (विकरण प्रत्ययांद्वारे) विद्वानांना समजते, इतर कोणत्याही ज्ञापकांद्वारे किंवा प्रत्ययांद्वारे नाही. တထာ ဟိ ဘာဝကမ္မေသု, ဝိဟိတော ပစ္စယော တု ယော; အဋ္ဌဝိဓေပိ ဓာတူနံ, ဂဏသ္မိံ သမ္ပဝတ္တတိ. कारण त्याचप्रमाणे, भाव आणि कर्म प्रयोगात जो प्रत्यय विहित केला आहे, तो धातूंच्या आठही गणांमध्ये प्रवृत्त होतो. ဘူဓာတုဇေသု [Pg.18] ရူပေသု, အသမ္မောဟာယ သောတုနံ; နာနာဝိဓော နယော ဧဝံ, မယာ ဧတ္ထ ပကာသိတော. 'भू' धातूपासून उत्पन्न होणाऱ्या रूपांविषयी श्रोत्यांचा गोंधळ उडू नये म्हणून, माझ्याद्वारे येथे विविध प्रकारचे नियम स्पष्ट केले गेले आहेत. ယေ လောကေ အပ္ပယုတ္တာ ဝိဝိဓဝိကရဏာချာတသဒ္ဒေသွဆေကာ,တေ ပတွာချာတသဒ္ဒေ အဝိဂတဝိမတီ ဟောန္တိ ဉာဏီပိ တသ္မာ; အစ္စန္တညေဝ ဓီရော သပရဟိတရတော သာသနေ ဒဠှပေမော,ယောဂံ တေသံ ပယောဂေ ပဋုတရမတိတံ ပတ္ထယာနော ကရေယျ. जे लोग जगात विविध विकरणयुक्त आख्यात शब्दांच्या बाबतीत अकुशल आहेत, ते ज्ञानी असूनही आख्यात शब्दांच्या बाबतीत संशयाने युक्त राहतात; म्हणून, स्वतःच्या आणि इतरांच्या कल्याणात मग्न असलेला, शासनावर (बुद्धशासनावरील) दृढ प्रेम असलेला आणि अत्यंत तीक्ष्ण बुद्धीची इच्छा करणारा धीर पुरुष त्यांच्या प्रयोगात सतत प्रयत्न करेल. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त असलेल्या त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये... ဝိညူနံ ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ विद्वानांच्या कौशल्यासाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' ग्रंथामध्ये... သဝိကရဏာချာတဝိဘာဂေါ နာမ 'सविकरण आख्यात विभाग' नावाचा... ပဌမော ပရိစ္ဆေဒေါ. पहिला परिच्छेद. ၂. ဘဝတိကြိယာပဒမာလာဝိဘာဂ २. 'भवति' क्रियापद-माला-विभाग ဣတော ပရံ ပဝက္ခာမိ, သောတူနံ မတိဝဍ္ဎနံ; ကြိယာပဒက္ကမံ နာမ, ဝိဘတ္တာဒီနိ ဒီပယံ. यापुढे मी श्रोत्यांच्या बुद्धीचा विकास करणारे, विभक्ती इत्यादी स्पष्ट करणारे 'क्रियापदक्रम' नावाचे प्रकरण सांगेन. တတြ အာချာတိကဿ ကြိယာလက္ခဏတ္တသူစိကာ တျာဒယော ဝိဘတ္တိယော, တာ အဋ္ဌဝိဓာ ဝတ္တမာနာပဉ္စမီသတ္တမီပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဘဝိဿန္တီ ကာလာတိပတ္တိဝသေန. त्यामध्ये आख्यात (क्रियापदाच्या) क्रिया-लक्षणाचे सूचक असणारे 'ति' इत्यादी विभक्ती प्रत्यय आहेत. काळाच्या भेदानुसार त्या आठ प्रकारच्या आहेत: वर्तमान, पंचमी, सप्तमी, परोक्षा, हिय्यत्तनी (ह्यस्तनी), अज्जतनी (अद्यतनी), भविष्यन्ती आणि कालातिपत्ती. တတ္ထတိ အန္တိ, သိ ထ, မိ မ, တေ အန္တေ, သေ ဝှေ, ဧ မှေ ဣစ္စေတာ ဝတ္တမာနာဝိဘတ္တိယော နာမ. त्यामध्ये ति-अन्ति, सि-थ, मि-म, ते-अन्ते, से-व्हे, ए-म्हे हे 'वर्तमान' विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. တု အန္တု, ဟိ ထ, မိ မ, တံ အန္တံ, သု ဝှော, ဧ အာမသေ ဣစ္စေတာ ပဉ္စမီဝိဘတ္တိယော နာမ. तु-अन्तु, हि-थ, मि-म, तं-अन्तं, सु-व्हो, ए-आमसे हे 'पंचमी' विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. ဧယျ [Pg.19] ဧယျုံ, ဧယျာသိ ဧယျာထ, ဧယျာမိ ဧယျာမ, ဧထ ဧရံ, ဧထော ဧယျာဝှော, ဧယျံ ဧယျာမှေ ဣစ္စေတာ သတ္တမီဝိဘတ္တိယော နာမ. एय्य-एय्युं, एय्यासि-एय्याथ, एय्यामि-एय्याम, एथ-एरं, एथो-एय्याव्हो, एय्यं-एय्याम्हे हे 'सप्तमी' विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. အ ဥ, ဧ တ္ထ, အံ မှ, တ္ထ ရေ, တ္ထော ဝှော, ဣံ မှေ ဣစ္စေတာ ပရောက္ခာဝိဘတ္တိယော နာမ. अ-उ, ए-त्थ, अं-म्ह, त्थ-रे, त्तो-व्हो, इं-म्हे हे 'परोक्षा' विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. အာ ဦ, ဩ တ္ထ, အံ မှာ, တ္ထ တ္ထုံ, သေ ဝှံ, ဣံ မှသေ ဣစ္စေတာ ဟိယျတ္တနီဝိဘတ္တိယော နာမ. आ-ऊ, ओ-त्थ, अं-म्हा, त्थ-त्थुं, से-व्हं, इं-म्हसे हे 'हिय्यत्तनी' विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. ဤ ဥံ, ဩ တ္ထ, ဣံ မှာ, အာ ဦ, သေ ဝှံ, အံ မှေ ဣစ္စေတာ အဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိယော နာမ. ई-उं, ओ-त्थ, इं-म्हा, आ-ऊ, से-व्हं, अं-म्हे हे 'अज्जतनी' विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. ဿတိ ဿန္တိ, ဿသိ ဿထ, ဿာမိ ဿာမ, ဿတေ ဿန္တေ, ဿသေ ဿဝှေ, ဿံ ဿာမှေ ဣစ္စေတာ ဘဝိဿန္တီဝိဘတ္တိယော နာမ. स्सति-स्सन्ति, स्ससि-स्सथ, स्सामि-स्साम, स्सते-स्सन्ते, स्ससे-स्सव्हे, स्सं-स्साम्हे हे 'भविष्यन्ती' विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. ဿာ ဿံသု, ဿေ ဿထ, ဿံ ဿာမှာ, ဿထ ဿိသု, ဿသေ ဿဝှေ, ဿိံ ဿာမှသေ ဣစ္စေတာ ကာလာတိပတ္တိဝိဘတ္တိယော နာမ. स्सा-स्शंसु, स्से-स्सथ, स्सं-स्साम्हा, स्सथ-स्सि सु, स्ससे-स्सव्हे, स्सिं-स्साम्हसे हे 'कालातिपत्ती' विभक्तीचे प्रत्यय आहेत. သဗ္ဗာသမေတာသံ ဝိဘတ္တီနံ ယာနိ ယာနိ ပုဗ္ဗကာနိ ဆ ပဒါနိ, တာနိ တာနိ ပရဿပဒါနိ နာမ. ယာနိ ယာနိ ပန ပရာနိ ဆ ပဒါနိ, တာနိ တာနိ အတ္တနောပဒါနိ နာမ. တတ္ထ ပရဿပဒါနိ ဝတ္တမာနာ ဆ, ပဉ္စမိယော ဆ, သတ္တမိယော ဆ, ပရောက္ခာ ဆ, ဟိယျတ္တနိယော ဆ, အဇ္ဇတနိယော ဆ, ဘဝိဿန္တိယော ဆ, ကာလာတိပတ္တိယော ဆာတိ အဋ္ဌစတ္တာလီသဝိဓာနိ ဟောန္တိ, တထာ ဣတရာနိ, သဗ္ဗာနိ တာနိ ပိဏ္ဍိတာနိ ဆန္နဝုတိဝိဓာနိ. या सर्व विभक्तींच्या प्रत्ययांपैकी जे पहिले सहा प्रत्यय (पदे) आहेत, त्यांना 'परस्मैपद' (परस्सपद) म्हणतात. आणि जे नंतरचे सहा प्रत्यय आहेत, त्यांना 'आत्मनेपद' (अत्तनौपद) म्हणतात. त्यामध्ये परस्मैपदाचे वर्तमानकाळाचे सहा, पंचमीचे सहा, सप्तमीचे सहा, परोक्षाचे सहा, हिय्यत्तनीचे सहा, अज्जतनीचे सहा, भविष्यन्तीचे सहा आणि कालातिपत्तीचे सहा मिळून एकूण ४८ (अठ्ठेचाळीस) प्रकार होतात; त्याचप्रमाणे इतर (आत्मनेपदाचेही ४८ प्रकार होतात). हे सर्व मिळून एकूण ९६ (शहाण्णव) प्रकार होतात. ပရဿပဒါနမတ္တနောပဒါနဉ္စ ဒွေ ဒွေ ပဒါနိ ပဌမမဇ္ဈိမုတ္တမပုရိသာ နာမ. တေ ဝတ္တမာနာဒီသု စတ္တာရော စတ္တာရော, အဋ္ဌန္နံ ဝိဘတ္တီနံ ဝသေန ဒွတ္တိံသ, ပိဏ္ဍိတာနိ ပရိမာဏာနေဝ. परस्मैपद आणि आत्मनेपदाचे दोन-दोन प्रत्यय अनुक्रमे प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष आणि उत्तम पुरुष या नावांनी ओळखले जातात. ते वर्तमानकाळ इत्यादींमध्ये चार-चार होतात, आणि आठ विभक्तींच्या हिशोबाने (प्रत्येक पुरुषाचे) ३२ होतात, आणि एकूण मिळून तेवढेच (९६) प्रमाण होते. ဒွီသု [Pg.20] ဒွီသု ပဒေသု ပဌမံ ပဌမံ ဧကဝစနံ, ဒုတိယံ ဒုတိယံ ဗဟုဝစနံ. दोन-दोन प्रत्ययांमध्ये पहिले-पहिले एकवचन असते आणि दुसरे-दुसरे बहुवचन असते. တတြ ဝတ္တမာနဝိဘတ္တီနန္တိ အန္တိ, သိ ထ, မိ မ ဣစ္စေတာနိ ပရဿပဒါနိ. တေ အန္တေ, သေ ဝှေ, ဧ မှေ ဣစ္စေတာနိ အတ္တနောပဒါနိ. ပရဿပဒတ္တနောပဒေသုပိတိ အန္တိ ဣတိ ပဌမပုရိသာ, သိထ ဣတိ မဇ္ဈိမပုရိသာ, မိ မ ဣတိ ဥတ္တမပုရိသာ, တေ အန္တေ ဣတိ ပဌမပုရိသာ, သေ ဝှေ ဣတိ မဇ္ဈိမပုရိသာ, ဧ မှေ ဣတိ ဥတ္တမပုရိသာ. त्यामध्ये वर्तमान विभक्तीचे 'ति-अन्ति, सि-थ, मि-म' हे परस्मैपदाचे प्रत्यय आहेत आणि 'ते-अन्ते, से-व्हे, ए-म्हे' हे आत्मनेपदाचे प्रत्यय आहेत. परस्मैपद आणि आत्मनेपद या दोन्हीमध्ये, 'ति-अन्ति' हे प्रथम पुरुष, 'सि-थ' हे मध्यम पुरुष, 'मि-म' हे उत्तम पुरुष; आणि 'ते-अन्ते' हे प्रथम पुरुष, 'से-व्हे' हे मध्यम पुरुष, 'ए-म्हे' हे उत्तम पुरुष आहेत. ပဌမမဇ္ဈိမုတ္တမပုရိသေသုပိ တိ-ဣတိ ဧကဝစနံ, အန္တိ-ဣတိ ဗဟုဝစနန္တိ ဧဝံ ဧကဝစနဗဟုဝစနာနိ ကမတော ဉေယျာနိ. ဧဝံ သေသာသု ဝိဘတ္တီသု ပရဿပဒတ္တနောပဒပဌမမဇ္ဈိမုတ္တမပုရိသေကဝစနဗဟုဝစနာနိ ဉေယျာနိ. प्रथम, मध्यम आणि उत्तम पुरुषांमध्ये देखील 'ति' हे एकवचन आणि 'अन्ति' हे बहुवचन, अशा प्रकारे एकवचन आणि बहुवचन अनुक्रमे जाणावे. याचप्रमाणे उर्वरित विभक्तींमध्ये देखील परस्मैपद, आत्मनेपद, प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष, उत्तम पुरुष, एकवचन आणि बहुवचन जाणावे. တတ္ထ ဝိဘတ္တီတိ ကေနဋ္ဌေန ဝိဘတ္တိ? ကာလာဒိဝသေန ဓာတွတ္ထံ ဝိဘဇတီတိ ဝိဘတ္တိ, သျာဒီဟိ နာမိကဝိဘတ္တီဟိ သဟ သဗ္ဗသင်္ဂါဟကဝသေန ပန သကတ္ထပရတ္ထာဒိဘေဒေ အတ္ထေ ဝိဘဇတီတိ ဝိဘတ္တိ, ကမ္မာဒယော ဝါ ကာရကေ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဝိဘဇတီတိ ဝိဘတ္တိ, ဝိဘဇိတဗ္ဗာ ဉာဏေနာတိပိ ဝိဘတ္တိ, ဝိဘဇန္တိ အတ္ထေ ဧတာယာတိပိ ဝိဘတ္တိ, အထ ဝါ သတိပိ ဇိနသာသနေ အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသေ သဗ္ဗေန သဗ္ဗံ ဝိဘတ္တီဟိ ဝိနာ အတ္ထဿာ’နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗတော ဝိသေသေန ဝိဝိဓေန ဝါ အာကာရေန ဘဇန္တိ သေဝန္တိ နံ ပဏ္ဍိတာတိပိ ဝိဘတ္တိ. တတ္ထ အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသလက္ခဏံ ဝဒါမ သဟ ပယောဂနိဒဿနာဒီဟိ. त्यामध्ये 'विभक्ती' हा शब्द कोणत्या अर्थाने वापरला जातो? काळ इत्यादींच्या द्वारे धातूच्या अर्थाचे विभाजन (स्पष्टीकरण) करते म्हणून ती 'विभक्ती' होय; किंवा 'सि' इत्यादी नामविभक्तींसह सर्वसमावेशकतेने स्वार्थ, परार्थ इत्यादी भेदांच्या अर्थांचे विभाजन करते म्हणून ती 'विभक्ती' होय; किंवा कर्म इत्यादी कारकांना एकवचन आणि बहुवचनाच्या द्वारे विभाजित करते म्हणून ती 'विभक्ती' होय; किंवा जिचे ज्ञानाने विभाजन केले पाहिजे ती 'विभक्ती' होय; किंवा जिच्याद्वारे अर्थांचे विभाजन केले जाते ती 'विभक्ती' होय; अथवा बुद्धशासनात (जिनशासनात) विभक्तीरहित निर्देश असले तरी, विभक्तींशिवाय अर्थाचा पूर्णपणे निर्देश करणे अशक्य असल्यामुळे, विद्वान लोक ज्याचे विशेष किंवा विविध प्रकारे भजन (सेवन/अभ्यास) करतात, म्हणून ती 'विभक्ती' होय. त्यामध्ये, आम्ही प्रयोगाच्या उदाहरणांसह विभक्तीरहित निर्देशाचे लक्षण सांगतो. အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသော, နာမိကေသုပလဗ္ဘတိ; နာချာတေသူတိ ဝိညေယျ-မိဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. विभक्तीरहित निर्देश नामांमध्ये आढळतो, आख्यातांमध्ये (क्रियापदांमध्ये) नाही, असे जाणावे; याचे उदाहरण येथे दिले आहे. နိဂြောဓောဝ မဟာရုက္ခော, ထေရ ဝါဒါနမုတ္တမော; အနူနံ အနဓိကဉ္စ, ကေဝလံ ဇိနသာသနံ. वडाच्या मोठ्या वृक्षाप्रमाणे, थेरवाद हा सर्व वादांमध्ये (मतांमध्ये) श्रेष्ठ आहे; जे कमी नाही आणि अधिकही नाही, असे हे केवळ जिनशासन (बुद्धशासन) आहे. တတြ [Pg.21] ထေရ-ဣတိ အဝိဘတ္တိကော နိဒ္ဒေသော, ထေရာနံ အယန္တိ ထေရော. ကော သော? ဝါဒေါ. ထေရဝါဒေါ အညေသံ ဝါဒါနံ ဥတ္တမောတိ အယမတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော. त्यामध्ये 'थेर' (thera) हा विभक्तीरहित निर्देश आहे. थेरांचा (स्थविरांचा) हा 'थेर' होय. तो कोणता? वाद (सिद्धांत). थेरवाद हा इतर वादांमध्ये श्रेष्ठ आहे, असा हा अर्थ समजला पाहिजे. ‘‘ကာယော တေ သဗ္ဗ သောဝဏ္ဏော’’, ဣစ္စာဒိမှိပိ နာမိကေ; အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသော, ဂဟေတဗ္ဗော နယညုနာ. 'तुझे शरीर पूर्णपणे सुवर्णमयी आहे' (कायो ते सब्ब सोवण्णो) इत्यादी नामविभक्तीच्या प्रयोगांमध्ये देखील, नियम जाणणाऱ्याने विभक्तीरहित निर्देश ग्रहण करावा. အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသော, နနွာချာတေပိ ဒိဿတိ; ‘‘ဘော ခါဒ ပိဝ’’ဣစ္စတြ, ဝဒေ ယော ကောစိ စောဒကော. जर कोणी आक्षेप घेणारा असे म्हणेल की, 'हे गृहस्था, खा, पी' (भो खाद पिव) या वाक्यात विभक्तीरहित निर्देश आख्यातांमध्ये (क्रियापदांमध्ये) देखील दिसून येतो की नाही? ယဒိ ဧဝံ မတေနဿ, ဘဝေယျ အဝိဘတ္တိကံ; ‘‘ဘိက္ခု, ဘော ပုရိသိ’’စ္စာဒိ, ပဒမ္ပိ, န ဟိဒံ တထာ. जर त्याच्या मते असे असेल, तर 'भिक्खू, भो पुरिस' इत्यादी पदे देखील विभक्तीरहित होतील, परंतु हे तसे नाही. ‘‘ဘိက္ခု, ဘော ပုရိသိ’’စ္စာဒိ, သိ ဂ လောပေန ဝုစ္စတိ; တထာ ‘‘ခါဒါ’’တိအာဒီနိ, ဟိ လောပေန ပဝုစ္စရေ. 'भिक्खू, भो पुरिस' इत्यादींमध्ये 'सि' आणि 'ग' प्रत्ययांचा लोप झाल्यामुळे असे रूप होते; त्याचप्रमाणे 'खा' (खाद) इत्यादींमध्ये 'हि' प्रत्ययाचा लोप झाल्यामुळे असे म्हटले जाते. ဧဝံ အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသော အာချာတေသု န လဗ္ဘတိ, နာမေသုယေဝ လဗ္ဘတိ. တတြာပိ ‘‘အဋ္ဌ စ ပုဂ္ဂလ ဓမ္မဒသာ တေ’’တိ ဧတ္ထ ဆန္ဒဝသေန ပုဂ္ဂလ ဣတိ ရဿကရဏံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ, န ‘‘ကကုသန္ဓ ကောဏာဂမနော စ ကဿပေါ’’တိ ဧတ္ထ ကကုသန္ဓ ဣတိ အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသော ဝိယ အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ‘‘ဘိက္ခု နိသိန္နေ မာတုဂါမော ဥပနိသိန္နော ဝါ ဟောတိ ဥပနိပန္နော ဝါ’’တိ ဧတ္ထ ပန ဘိက္ခူတိ ဣဒံ ဘိက္ခုမှီတိ ဝတ္တဗ္ဗတ္ထတ္တာ ဘုမ္မေ ပစ္စတ္တန္တိပိ အဒိဋ္ဌဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသောတိပိ ဝတ္တုံ ယုဇ္ဇတိ. တတ္ထ ပန ဆန္ဒဝသေန ကတရဿတ္တာ တာနိ ပဒါနိ အဝိဘတ္တိကနိဒ္ဒေသပက္ခမ္ပိ ဘဇန္တီတိ ဝတ္တုံ န ယုဇ္ဇတိ. अशा प्रकारे, विभक्तीरहित निर्देश आख्यातांमध्ये (क्रियापदांमध्ये) आढळत नाही, तो केवळ नामांमध्येच आढळतो. तेथे देखील 'अट्ठ च पुग्गल धम्मदसा ते' (आणि ते आठ पुद्गल धर्मदर्शी आहेत) यामध्ये छंदाच्या (वृत्ताच्या) आवश्यकतेमुळे 'पुग्गल' असा र्हस्व उच्चार केला आहे असे समजले पाहिजे, 'ककुसन्ध कोणागमनो च कस्सपो' यामध्ये 'ककुसन्ध' या विभक्तीरहित निर्देशाप्रमाणे हा विभक्तीरहित निर्देश समजला जाऊ नये. 'भिक्खू निसिन्ने मातुगामो उपनिसिन्नो वा होति उपनिपन्नो वा' (भिक्खू बसलेला असताना स्त्री जवळ बसलेली किंवा जवळ झोपलेली असते) येथे 'भिक्खू' हे पद 'भिक्खुम्हि' (भिक्खूच्या जवळ) या अर्थाने सांगायचे असल्यामुळे, ते सप्तमीच्या ऐवजी प्रथमा विभक्तीत किंवा अदृष्ट-विभक्ती-निर्देश (ज्यात विभक्ती दिसत नाही असा निर्देश) म्हणून म्हणणे योग्य आहे. परंतु तेथे छंदाच्या कारणाने र्हस्व केल्यामुळे ती पदे विभक्तीरहित निर्देशाच्या पक्षात जातात, असे म्हणणे योग्य नाही. တတ္ထ ပရဿပဒါနီတိ ပရဿ အတ္ထဘူတာနိ ပဒါနိ ပရဿပဒါနိ. ဧတ္ထုတ္တမပုရိသေသု အတ္တနော အတ္ထေသုပိ အတ္တနောပဒဝေါဟာရော န ကရိယတိ. त्यामध्ये 'परस्मैपद' (परस्सपद) म्हणजे दुसऱ्याच्या अर्थासाठी असणारी पदे होय. येथे उत्तम पुरुषांमध्ये स्वतःच्या अर्थासाठी देखील 'आत्मनेपद' असा व्यवहार केला जात नाही. ကိဉ္စာပိ [Pg.22] အတ္တနော အတ္ထာ, ပုရိသာ ဥတ္တမဝှယာ; တထာပိ ဣတရေသာန-မုဿန္နတ္တာဝ တဗ္ဗသာ; တဗ္ဗောဟာရော ဣမေသာနံ, ပေါရာဏေဟိ နိရောပိတော. जरी उत्तम पुरुष नावाचे पुरुष स्वतःच्या अर्थासाठी असले, तरीही इतरांच्या (परस्मैपदाच्या) प्राचुर्यामुळे आणि त्याच्या प्रभावामुळे, प्राचीन आचार्यांनी यांच्यासाठी तोच (परस्मैपदाचा) व्यवहार प्रस्थापित केला आहे. အတ္တနောပဒါနီတိ အတ္တနော အတ္ထဘူတာနိ ပဒါနိ အတ္တနောပဒါနိ. ဧတ္ထ ပန ပဌမမဇ္ဈိမပုရိသေသု ပရဿတ္ထေသုပိ ပရဿပဒဝေါဟာရော န ကရိယတိ. 'आत्मनेपद' (अत्तनौपद) म्हणजे स्वतःच्या अर्थासाठी असणारी पदे होय. परंतु येथे प्रथम आणि मध्यम पुरुषांमध्ये दुसऱ्याच्या अर्थासाठी देखील 'परस्मैपद' असा व्यवहार केला जात नाही. ပဌမမဇ္ဈိမာ စေတေ, ပရဿတ္ထာ တထာပိ စ; ဣတရေသံ နိရူဠှတ္တာ, တဗ္ဗောဟာရဿ သစ္စတော. हे प्रथम आणि मध्यम पुरुष जरी दुसऱ्याच्या अर्थासाठी असले, तरीही इतरांच्या (आत्मनेपदाच्या) रूढतेमुळे, तो व्यवहार सत्य मानला जातो. ဣမဿ ပနိမေသာနံ, ပုဗ္ဗဝေါဟာရတာယ စ; တထာ သင်္ကရဒေါသဿ, ဟရဏတ္ထာယ သော အယံ; အတ္တနောပဒဝေါဟာရော, ဧသမာရောပိတော ဓုဝံ. परंतु याच्या आणि यांच्या प्राचीन व्यवहारासाठी, तसेच संकरदोष (मिश्रणदोष) दूर करण्यासाठी, हा 'आत्मनेपद' व्यवहार येथे निश्चितपणे प्रस्थापित केला आहे. ပရဿပဒသညာဒိ-သညာယော ဗဟုကာ ဣဓ; ပေါရာဏေဟိ ကတတ္တာတာ, သညာ ပေါရာဏိကာ မတာ. येथे 'परस्मैपद' इत्यादी अनेक संज्ञा प्राचीन आचार्यांनी केलेल्या असल्यामुळे, त्या 'पौराणिक' (प्राचीन) संज्ञा मानल्या जातात. တသ္မာ ဣဓ ပဌမပုရိသာဒီနံ တိဏ္ဏံ ပုရိသာနံ ဝစနတ္ထံ န ပရိယေသာမ. ရူဠှိယာ ဟိ ပေါရာဏေဟိ တျာဒီနံ ပုရိသသညာ ဝိဟိတာ. म्हणून, येथे आम्ही 'प्रथमपुरुष' इत्यादी तिन्ही पुरुषांच्या शब्दाचा अर्थ शोधत नाही. कारण प्राचीन आचार्यांनी रूढीने 'ति' इत्यादी प्रत्ययांना 'पुरुष' ही संज्ञा दिली आहे. ဧကဝစနဗဟုဝစနေသု ပန ဧကဿတ္ထဿ ဝစနံ ဧကဝစနံ. ဗဟူနမတ္ထာနံ ဝစနံ ဗဟုဝစနံ. အထ ဝါ ဗဟုတ္တေပိ သတိ သမုဒါယဝသေန ဇာတိဝသေန ဝါ စိတ္တေန သမ္ပိဏ္ဍေတွာ ဧကီကတဿတ္ထဿ ဧကဿ ဝိယ ဝစနမ္ပိ ဧကဝစနံ, ဗဟုတ္တေ နိဿိတဿ နိဿယဝေါဟာရေန ဝုတ္တဿ နိဿယဝသေန ဧကဿ ဝိယ ဝစနမ္ပိ ဧကဝစနံ, ဧကတ္တလက္ခဏေန ဗဝှတ္ထာနံ ဧကဝစနံ ဝိယ ဝစနမ္ပိ ဧကဝစနံ. အဗဟုတ္တေပိ သတိ အတ္တဂရုကာရာပရိစ္ဆေဒမာတိကာနုသန္ဓိနယပုစ္ဆာသဘာဂပုထုစိတ္တ- သမာယောဂပုထုအာရမ္မဏဝသေန ဧကတ္ထဿ ဗဟူနံ ဝိယ ဝစနံ ဗဟုဝစနံ, တထာ ယေ ယေ ဗဟဝေါ တန္နိဝါသတံပုတ္တသင်္ခါတဿေကဿတ္ထဿ ရူဠှီဝသေန ဗဟူနံ ဝိယ ဝစနမ္ပိ ဗဟုဝစနံ, ဧကဿတ္ထဿ အညေနတ္ထေန ဧကာဘိဓာနဝသေန ဗဟူနံ [Pg.23] ဝိယ ဝစနမ္ပိ ဗဟုဝစနံ, ဧကဿတ္ထဿ နိဿိတဝသေန ဗဟူနံ ဝိယ ဝစနမ္ပိ ဗဟုဝစနံ, ဧကဿတ္ထဿ အာရမ္မဏဘေဒကိစ္စဘေဒဝသေန ဗဟူနံ ဝိယ ဝစနမ္ပိ ဗဟုဝစနံ. ဧဝမိမေဟိ အာကာရေဟိ ဧကမှိ ဝတ္တဗ္ဗေ, ဧကမှိ ဝိယ စ ဝတ္တဗ္ဗေ ဧကဝစနံ, ဗဟုမှိ ဝတ္တဗ္ဗေ, ဗဟုမှိ ဝိယ စ ဝတ္တဗ္ဗေ ဗဟုဝစနံ ဟောတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ပုထုဝစနံ, အနေကဝစနန္တိ စ ဣမဿေဝ နာမံ. एकवचन आणि बहुवचनामध्ये, एका अर्थाचे वाचन (कथन) म्हणजे 'एकवचन' होय. अनेक अर्थांचे वाचन म्हणजे 'बहुवचन' होय. किंवा, अनेकत्व असतानाही, समुदाय रूपाने किंवा जाती रूपाने, किंवा मनाने एकत्र करून एक केलेल्या अर्थाचे एकासारखे वाचन करणे हे देखील 'एकवचन' आहे; अनेकत्वावर आश्रित असलेल्या आणि आश्रय-व्यवहाराने बोलल्या गेलेल्या आश्रयाच्या रूपाने एकासारखे वाचन करणे हे देखील 'एकवचन' आहे; एकत्वाच्या लक्षणाने अनेक अर्थांचे एकवचनासारखे वाचन करणे हे देखील 'एकवचन' आहे. अनेकत्व नसतानाही, आत्म-गौरव (स्वतःचा आदर), अपरिच्छेद (अनिश्चितता), मातिका-अनुसंधि (मातृका-संबंध), नय (पद्धती), पृच्छा-सभाग (प्रश्नाचे सादृश्य), अनेक चित्तांचा संयोग आणि अनेक आलंबन यांच्या प्रभावाने एका अर्थाचे अनेकांसारखे वाचन करणे म्हणजे 'बहुवचन' होय. तसेच, जे अनेक तेथे राहतात त्या रहिवाशांच्या किंवा पुत्रांच्या संख्येत असलेल्या एका अर्थाचे रूढीने अनेकांसारखे वाचन करणे हे देखील 'बहुवचन' आहे; एका अर्थाचे दुसऱ्या अर्थासह एकाच संज्ञेने अनेकांसारखे वाचन करणे हे देखील 'बहुवचन' आहे; एका अर्थाचे आश्रितत्वामुळे अनेकांसारखे वाचन करणे हे देखील 'बहुवचन' आहे; एका अर्थाचे आलंबन-भेद आणि कार्य-भेद यांच्यामुळे अनेकांसारखे वाचन करणे हे देखील 'बहुवचन' आहे. अशा प्रकारे, या प्रकारांनी जेव्हा एकाविषयी बोलायचे असते किंवा एकासारख्याविषयी बोलायचे असते तेव्हा 'एकवचन' होते, आणि जेव्हा अनेकांविषयी बोलायचे असते किंवा अनेकांसारख्याविषयी बोलायचे असते तेव्हा 'बहुवचन' होते, असे समजावे. 'पुथुवचन' (पृथुवचन) आणि 'अनेकवचन' ही देखील याच बहुवचनाची नावे आहेत. ဝစနေသု အယံ အတ္ထော, နာမာချာတဝိဘတ္တိနံ; ဝသေန အဓိဂန္တဗ္ဗော, သာသနတ္ထဂဝေသိနာ. शासनाचा (बुद्धवचनाचा) अर्थ शोधणाऱ्याने नाम, आख्यात (क्रियापद) आणि विभक्ती यांच्याद्वारे वचनांमधील हा अर्थ समजून घेतला पाहिजे. တသ္မာ တဒတ္ထဝိညာပနတ္ထံ ဣဓ နာမိကပယောဂေဟိ သဟေဝါချာတပယောဂေ ပဝက္ခာမ – ‘‘ရာဇာ အာဂစ္ဆတိ, သဟာယော မေ အာဂစ္ဆတိ, ဧကံ စိတ္တ’’ မိစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ ဧကဝစနပယောဂါ. ‘‘ရာဇာနော အာဂစ္ဆန္တိ, သဟာယာ မေ အာဂစ္ဆန္တိ, န မေ ဒေဿာ ဥဘော ပုတ္တာ, ဒွေ တီဏိ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဗဝှတ္ထာနံ ဗဟုဝစနပယောဂါ. म्हणून, तो अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी येथे नाम-प्रयोगांसह क्रियापद-प्रयोग सांगतो – 'राजा येतो (राजा आगच्छति), माझा मित्र येतो (सहायो मे आगच्छति), एक चित्त (एकं चित्तं)' इत्यादी एका अर्थाचे एकवचनी प्रयोग आहेत. 'राजे येतात (राजानो आगच्छन्ति), माझे मित्र येतात (सहाया मे आगच्छन्ति), मला दोन्ही पुत्र अप्रिय नाहीत (न मे देस्सा उभो पुत्ता), दोन, तीन (द्वे तीणि)' इत्यादी अनेक अर्थांचे बहुवचनी प्रयोग आहेत. ‘‘သာ သေနာ မဟတီ အာသိ, ဗဟုဇ္ဇနော ပသန္နောသိ, သဗ္ဗော တံ ဇနော ဩဇိနာယတု, ဣတ္ထိဂုမ္ဗဿ ပဝရာ, ဗုဒ္ဓဿာဟံ ဝတ္ထယုဂံ အဒါသိံ, ဒွယံ ဝေါ ဘိက္ခဝေ ဒေသေဿာမိ, ပေမံ မဟန္တံ ရတနတ္တယဿ, ကရေ ပသာဒဉ္စ နရော အဝဿံ, ဘိက္ခုသံဃော, ဗလကာယော, ဒေဝနိကာယော, အရိယဂဏော’’- ဣစ္စေဝမာဒယော, ‘‘ဒွိကံ တိက’’မိစ္စာဒယော စ သမုဒါယဝသေန ဗဝှတ္ထာနံ ဧကဝစနပယောဂါ. 'ती सेना मोठी होती (सा सेना महती आसि), बहुजन प्रसन्न झाले (बहुज्जनो पसन्नोसि), सर्व लोकांनी त्याचा आदर करावा (सब्बो तं जनो ओजिनायतु), स्त्री-समूहात श्रेष्ठ (इत्थिगुम्बस्स पवरा), मी बुद्धांना वस्त्रयुगुल दिले (बुद्धस्साहं वत्थयुगं अदासिं), भिक्खूंनो, मी तुम्हाला द्वय (दोन गोष्टी) देशित करीन (द्वयं वो भिक्खवे देसेस्सामि), रत्नत्रयावर मोठे प्रेम (पेमं महन्तं रतनत्तयस्स), मनुष्याने निश्चितच श्रद्धा ठेवावी (करे प्रसादञ्च नरो अवस्सं), भिक्खू संघ (भिक्खुसङ्घो), सैन्य (बलकायो), देवसमूह (देवनिकायो), आर्यगण (अरियगणो)' इत्यादी, आणि 'द्विक, त्रिक' इत्यादी समुदाय रूपाने अनेक अर्थांचे एकवचनी प्रयोग आहेत. ကတ္ထစိ ပန ဤဒိသေသု ဌာနေသု ဗဟုဝစနပယောဂါပိ ဒိဿန္တိ. တထာ ဟိ ‘‘ပူဇိတာ ဉာတိသံဃေဟိ, ဒေဝကာယာ သမာဂတာ, သဗ္ဗေတေ ဒေဝနိကာယာ, ဒွေ ဒေဝသံဃာ, တီဏိ [Pg.24] ဒုကာနိ, စတ္တာရိ နဝကာနိ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ပယောဂါပိ ဒိဿန္တိ. ဣမေ ဧကဝစနဝသေန ဝတ္တဗ္ဗဿ သမုဒါယဿ ဗဟုသမုဒါယဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါတိ ဂဟေတဗ္ဗာ, သင်္ဂယှမာနာ စ ဗဝှတ္ထဗဟုဝစနေ သင်္ဂဟံ ဂစ္ဆန္တိ ဝိသုံယေဝ ဝါ, တသ္မာ ဗဟုသမုဒါယာပေက္ခဗဟုဝစနန္တိ ဧတေသံ နာမံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. परंतु काही ठिकाणी अशा प्रसंगी बहुवचनाचे प्रयोगही आढळतात. जसे की – 'नातेवाईकांच्या समूहांद्वारे पूजित (पूजिता ज्ञातिसङ्घेहि), देवसमूह एकत्र आले (देवकाया समागता), हे सर्व देवसमूह (सब्बेते देवनिकाया), दोन देवसंघ (द्वे देवसङ्घा), तीन द्विक (तीणि दुकानि), चार नवक (चत्तारि नवकानि)' इत्यादी प्रयोगही दिसतात. हे एकवचनाने सांगण्यायोग्य समुदायाचे, अनेक समुदायांच्या रूपाने केलेले बहुवचनी प्रयोग आहेत असे समजावे; आणि समाविष्ट करताना त्यांचा अनेक अर्थांच्या बहुवचनात किंवा स्वतंत्रपणे समावेश होतो. म्हणून, त्यांना 'बहु-समुदाय-अपेक्षित बहुवचन' (बहुसमुदायापेक्षबहुवचन) असे नाव दिले पाहिजे. ‘‘ပါဏံ န ဟနေ, သဿော သမ္ပဇ္ဇတိ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဇာတိဝသေန ဗဝှတ္ထာနံ ဧကဝစနပယောဂါ, တဗ္ဘာဝသာမညေန ဗဝှတ္ထာနံ ဧကဝစနပယောဂါတိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. 'प्राण्याची हत्या करू नये (पाणं न हने), पीक समृद्ध होते (सस्सो सम्पज्जति)' इत्यादी जातीच्या (वर्गाच्या) रूपाने अनेक अर्थांचे एकवचनी प्रयोग आहेत. त्यांना 'तद्भाव-सामान्य' (त्या भावाच्या सामान्यतेने) मुळे अनेक अर्थांचे एकवचनी प्रयोग असे म्हणणेही योग्य आहे. ‘‘နာဂံ ရဋ္ဌဿ ပူဇိတံ, သာဝတ္ထီ သဒ္ဓါ အဟောသိ ပသန္နာ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော နိဿယဝသေန ပဝတ္တာနံ နိဿယဝေါဟာရေန ဝုတ္တာနမေကဝစနပယောဂါ. 'राष्ट्राने पूजिलेला हत्ती/श्रेष्ठ पुरुष (नागं रट्ठस्स पूजितं), सावत्थी श्रद्धाळू व प्रसन्न झाली (सावत्थी सुद्धा अहोसि पसन्ना)' इत्यादी आश्रयाच्या रूपाने अस्तित्वात असलेल्यांचे, आश्रय-व्यवहाराने म्हटलेले एकवचनी प्रयोग आहेत. ‘‘တိလက္ခဏံ, ကုသလာကုသလံ, ဝိညာဏပစ္စယာ နာမရူပံ, နာမရူပပစ္စယာ သဠာယတနံ, ဓမ္မဝိနယော, စိတ္တသေနော စ ဂန္ဓဗ္ဗော, နတိယာ အသတိ အာဂတိဂတိ န ဟောတိ, အာဂတိဂတိယာ အသတိ စုတူပပါတော န ဟောတိ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကတ္တလက္ခဏေ ဗဝှတ္ထာနံ ဧကဝစနပယောဂါ. 'त्रिलक्षण (तिलक्खणं), कुशल-अकुशल (कुसलाकुसलं), विज्ञानाच्या प्रत्ययाने (कारणाने) नामरूप (विञ्ञाणपच्चया नामरूपं), नामरूपाच्या प्रत्ययाने सळायतन (नामरूपपच्चया सळायतनं), धम्म आणि विनय (धम्मविनयो), चित्तसेन गंधर्व (चित्तसेनो च गन्धब्बो), आसक्ती नसताना येणे-जाणे होत नाही (नतिया असति आगतिगति न होति), येणे-जाणे नसताना च्युती आणि उत्पत्ती (मृत्यू आणि जन्म) होत नाही (आगतिगतिया असति चुतूपपातो न होति)' इत्यादी एकत्वाच्या लक्षणात अनेक अर्थांचे एकवचनी प्रयोग आहेत. ‘‘ဧဝံ မယံ ဂဏှာမ, အမှာကံ ပကတိ, ပဓာနန္တိ ခေါ မေဃိယ ဝဒမာနံ ကိန္တိ ဝဒေယျာမ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ အတ္တဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါ. 'अशा प्रकारे आम्ही ग्रहण करतो (एवं मयं गण्हाम), आमची प्रकृती (अम्हाकं पकति), हे मेघिय! 'प्रधान' (प्रयत्न) असे म्हणणाऱ्याला आपण काय म्हणावे? (पधानन्ति खो मेघिय वदमानं किन्ति वदेय्याम)' इत्यादी एका अर्थाचे स्वतःच्या (आत्म) रूपाने केलेले बहुवचनी प्रयोग आहेत. ‘‘တေ မနုဿာ တံ ဘိက္ခုံ ဧတဒဝေါစုံ ‘ဘုဉ္ဇထ ဘန္တေ’တိ, အဟံ မနုဿေသု မနုဿဘူတာ, အဗ္ဘာဂတာနာ’သနကံ အဒါသိံ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ ဂရုကာရဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါ. 'त्या माणसांनी त्या भिक्खूंना असे म्हटले – 'भंते, भोजन करा' (ते मनुस्सा तं भिक्खुं एतदवोचुं 'भुञ्जथ भन्ते'ति), मी माणसांमध्ये माणूस होऊन आलेल्या पाहुण्यांना आसन दिले (अहं मनुस्सेसु मनुस्सभूता, अब्भागतानासनकं अदासिं)' इत्यादी एका अर्थाचे आदर दाखवण्यासाठी (गौरवार्थ) केलेले बहुवचनी प्रयोग आहेत. ‘‘အပ္ပစ္စယာ [Pg.25] ဓမ္မာ, အသင်္ခတာ ဓမ္မာ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ အပရိစ္ဆေဒဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါ, အနိယမိတသင်္ခါဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါ ဝါ. 'अप्रत्यय धम्म (अप्पच्चया धम्मा), असंस्कृत धम्म (असङ्खता धम्मा)' इत्यादी एका अर्थाचे अपरिच्छेद (अनिश्चितता) मुळे केलेले बहुवचनी प्रयोग आहेत, किंवा अनिश्चित संख्येमुळे केलेले बहुवचनी प्रयोग आहेत. ကေစိ ပန ‘‘ဒေသနာသောတပါတဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါ’’တိပိ ဝဒန္တိ, တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ. န ဟိ တထာဂတော သတိသမ္ပဇညရဟိတော ဓမ္မံ ဒေသေတိ, ယုတ္တိ စ န ဒိဿတိ ‘‘မာတိကာယံ ပုစ္ဆာယံ ဝိဿဇ္ဇနေ စာတိ တီသုပိ ဌာနေသု အပ္ပစ္စယာဒိဓမ္မေ ဒေသေန္တော သတ္ထာ ပုနပ္ပုနံ ဗဟုဝစနဝသေန ဒေသနာသောတေ ပတိတွာ ဓမ္မံ ဒေသေတီ’’တိ. परंतु काही जण 'देशना-प्रवाहाच्या ओघात पडल्यामुळे बहुवचनाचे प्रयोग झाले आहेत' असे म्हणतात, ते स्वीकारले जाऊ नये. कारण तथागत स्मृति आणि संप्रजन्य (सति-सम्पजञ्ञ) विरहित होऊन धम्माची देशना करत नाहीत, आणि 'मातृका (मातिका), प्रश्न आणि विसर्जन (उत्तर) या तिन्ही ठिकाणी अप्रत्यय इत्यादी धम्मांची देशना करताना शास्ता (बुद्ध) वारंवार बहुवचनाच्या रूपाने देशना-प्रवाहाच्या ओघात पडून धम्माची देशना करतात' यात कोणतीही युक्ती (तर्क) दिसत नाही. ‘‘ကတမေ ဓမ္မာ အပ္ပစ္စယာ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ မာတိကာနုသန္ဓိနယေန ဗဟုဝစနပယောဂါ. 'कोणते धम्म अप्रत्यय आहेत? (कतमे धम्मा अपप्पच्चया)' इत्यादी एका अर्थाचे मातिका-अनुसंधि (मातृका-संबंध) च्या पद्धतीने केलेले बहुवचनी प्रयोग आहेत. ‘‘ဣမေ ဓမ္မာ အပ္ပစ္စယာ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ ပုစ္ဆာနုသန္ဓိနယေန ဗဟုဝစနပယောဂါ. 'हे धम्म अप्रत्यय आहेत (इमे धम्मा अप्पच्चया)' इत्यादी एका अर्थाचे पृच्छा-अनुसंधि (प्रश्न-संबंध) च्या पद्धतीने केलेले बहुवचनी प्रयोग आहेत. ‘‘ကတမေ ဓမ္မာ နော ပရာမာသာ, တေ ဓမ္မေ ဌပေတွာ အဝသေသာ ကုသလာကုသလာဗျာကတာ ဓမ္မာ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ ပုစ္ဆာသဘာဂေန ဗဟုဝစနပယောဂါ. 'कोणते धम्म परामर्ष (आसक्ती) नसलेले आहेत? त्या धम्मांना सोडून उर्वरित कुशल, अकुशल आणि अव्याकृत धम्म (कतमे धम्मा नो परामासा, ते धम्मे ठपेत्वा अवसेसा कुसलाकुसला ब्याकता धम्मा)' इत्यादी एका अर्थाचे पृच्छा-सभाग (प्रश्नाच्या सादृश्या) मुळे केलेले बहुवचनी प्रयोग आहेत. ‘‘အတ္ထိ ဘိက္ခဝေ အညေဝ ဓမ္မာ ဂမ္ဘီရာ ဒုဒ္ဒသာ ဒုရနုဗောဓာ သန္တာ ပဏီတာ အတက္ကာဝစရာ နိပုဏာ ပဏ္ဍိတဝေဒနီယာ, ယေ တထာဂတော သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ပဝေဒေတီ’’တိ အယမေကဿတ္ထဿ ပုထုစိတ္တသမာယောဂပုထုအာရမ္မဏဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂေါ. 'भिक्खूंनो, इतरही असे धम्म आहेत जे गंभीर, दुर्दर्श (पाहण्यास कठीण), दुरनुबोध (समजण्यास कठीण), शांत, प्रणीत (उत्कृष्ट), अतर्कावचर (तर्काच्या पलीकडचे), निपुण आणि पंडितांनाच वेद्य (अनुभवता येण्याजोगे) आहेत, ज्यांना तथागतांनी स्वतः अभिज्ञेने (विशेष ज्ञानाने) साक्षात करून घोषित केले आहे' हा एका अर्थाचा अनेक चित्तांच्या संयोगामुळे आणि अनेक आलंबनांमुळे केलेला बहुवचनी प्रयोग आहे. ‘‘ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သက္ကေသု ဝိဟရတိ ကပိလဝတ္ထုသ္မိံ မဟာဝနေ, एकदा भगवान शाक्यांच्या कपिलवस्तू येथील महावनात विहार करत होते, သန္တိ [Pg.26] ပုတ္တာ ဝိဒေဟာနံ, ဒီဃာဝု ရဋ္ဌဝဍ္ဎနော; တေ ရဇ္ဇံ ကာရယိဿန္တိ, မိထိလာယံ ပဇာပတိ’’ – विदेहांचे पुत्र आहेत, जे दीर्घायु आणि राष्ट्रवर्धक आहेत; ते मिथिला नगरीत राज्य करतील, हे प्रजापती! ဣစ္စေဝမာဒယော သဒ္ဒါ ယေ ယေ ဗဟဝေါ, တန္နိဝါသတံပုတ္တသင်္ခါတဿေကတ္ထဿ ရူဠှီဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါ. अशा प्रकारचे जे अनेक शब्द आहेत, ते तेथे राहणाऱ्या पुत्रांच्या संदर्भातील एकाच अर्थाच्या रूढीमुळे बहुवचनाचे प्रयोग आहेत. ‘‘သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနေ အာမန္တေသိ ‘ဂစ္ဆထ တုမှေ သာရိပုတ္တာ ကီဋာဂိရိံ ဂန္တွာ အဿဇိပုနဗ္ဗသုကာနံ ဘိက္ခူနံ ကီဋာဂိရိသ္မာ ပဗ္ဗာဇနီယကမ္မံ ကရောထ, တုမှာကံ ဧတေ သဒ္ဓိဝိဟာရိနော’တိ’’, ‘‘ကစ္စိ ဝေါ ကုလပုတ္တာ, ဧထ ဗျဂ္ဃာ နိဝတ္တဝှော’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ အညေနတ္ထေန ဧကာဘိဓာနဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါ. “त्यांनी सारिपुत्त आणि मोग्गल्लान यांना आमंत्रित केले—'तुम्ही जा, सारिपुत्तहो! कीटागिरीला जाऊन अस्सजि आणि पुनब्बसुक भिक्खूंचे कीटागिरीतून निष्कासन कर्म (पब्बापनीयकम्म) करा, हे तुमचे सद्धिविहारिक आहेत'”, “हे कुलपुत्रहो, तुम्ही वाघांपासून मागे फिरलात का?” अशा प्रकारचे प्रयोग एकाच अर्थासाठी दुसऱ्या अर्थाच्या एकाच अभिधानाच्या (नावाच्या) आधारे बहुवचनाचे प्रयोग आहेत. ‘‘မဉ္စာ ဥက္ကုဋ္ဌိံ ကရောန္တိ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဧကဿတ္ထဿ နိဿိတဝသေန ဗဟုဝစနပယောဂါ. “मंच (खाटा) ओरडत आहेत” अशा प्रकारचे प्रयोग एकाच अर्थाच्या आश्रितत्वाच्या (निसित) आधारे बहुवचनाचे प्रयोग आहेत. ‘‘စတ္တာရော သတိပဋ္ဌာနာ’’တိ အယမာရမ္မဏဘေဒေန ဧကဿတ္ထဿ ဗဟုဝစနပယောဂေါ. “चार सतिपट्ठान” हा आलंबनभेदाने (विषयभेदाने) एकाच अर्थाचा बहुवचन प्रयोग आहे. ‘‘စတ္တာရော သမ္မပ္ပဓာနာ’’တိ အယံ ပန ကိစ္စဘေဒေန ဧကဿတ္ထဿ ဗဟုဝစနပယောဂေါ. “चार सम्मप्पधान” हा कार्यभेदाने (किच्चभेदाने) एकाच अर्थाचा बहुवचन प्रयोग आहे. တတ္ထ ဧကတ္ထေကဝစနံ, သမုဒါယာပေက္ခေကဝစနံ, ဇာတျာပေက္ခေကဝစနံ, တန္နိဿယာပေက္ခေကဝစနံ, ဧကတ္တလက္ခဏေကဝစနန္တိ ပဉ္စဝိဓံ ဧကဝစနံ ဘဝတိ. ဧတ္ထ ပန ဇာတျာပေက္ခေကဝစနံ အတ္ထတော သာမညာပေက္ခေကဝစနမေဝါတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. त्यामध्ये, एका अर्थाचे एकवचन (एकत्थेकवचन), समुदायाच्या अपेक्षेने एकवचन (समुदायापेक्खेकवचन), जातीच्या अपेक्षेने एकवचन (जात्यापेक्खेकवचन), त्याच्या आश्रयाच्या अपेक्षेने एकवचन (तन्निस्सयापेक्खेकवचन) आणि एकत्वलक्षणाचे एकवचन (एकत्तलक्खणेकवचन) असे पाच प्रकारचे एकवचन असते. येथे जातीच्या अपेक्षेने असणारे एकवचन हे अर्थाच्या दृष्टीने सामान्य अपेक्षेचे एकवचनच आहे, असे समजावे. ဗဝှတ္ထဗဟုဝစနံ, ဗဟုသမုဒါယာပေက္ခဗဟုဝစနံ, အတ္တဗဟုဝစနံ, ဂရုကာရဗဟုဝစနံ, အပရိစ္ဆေဒဗဟုဝစနံ, မာတိကာနုသန္ဓိနယဗဟုဝစနံ, ပုစ္ဆာနုသန္ဓိနယဗဟုဝစနံ, ပုစ္ဆာသဘာဂဗဟုဝစနံ, ပုထုစိတ္တသမာယောဂပုထုအာရမ္မဏဗဟုဝစနံ, တန္နိဝါသဗဟုဝစနံ, တံပုတ္တဗဟုဝစနံ, ဧကာဘိဓာနဗဟုဝစနံ, တန္နိဿိတာပေက္ခဗဟုဝစနံ[Pg.27], အာရမ္မဏဘေဒဗဟုဝစနံ, ကိစ္စဘေဒဗဟုဝစနန္တိ ပန္နရသဝိဓံ ဗဟုဝစနံ ဘဝတိ. ဣစ္စေဝံ ဝီသဓာ သဗ္ဗာနိ ဧကဝစနဗဟုဝစနာနိ သင်္ဂဟိတာနိ. အတြိဒံ ပါဠိဝဝတ္ထာနံ – अनेक अर्थांचे बहुवचन (बव्हत्थबहुवचन), अनेक समुदायांच्या अपेक्षेने बहुवचन (बहुसमुदायापेक्खबहुवचन), आत्म-बहुवचन (अत्तबहुवचन), आदरार्थी बहुवचन (गरुकारबहुवचन), अपरिच्छेद बहुवचन (अपरिच्छेदबहुवचन), मातिका-अनुसंधि-नय बहुवचन (मातिकानुसन्धिनयबहुवचन), पृच्छा-अनुसंधि-नय बहुवचन (पुच्छानुसन्धिनयबहुवचन), पृच्छा-सभाग बहुवचन (पुच्छासभागबहुवचन), पृथक्-चित्त-समायोग-पृथक्-आलंबन बहुवचन (पुथुचित्तसमायोगपुथुआरम्मणबहुवचन), तेथे राहणाऱ्यांच्या संदर्भातील बहुवचन (तन्निवासबहुवचन), त्यांच्या पुत्रांच्या संदर्भातील बहुवचन (तंपुत्तबहुवचन), एकाच अभिधानाने होणारे बहुवचन (एकाभिधानबहुवचन), त्याच्या आश्रितांच्या अपेक्षेने होणारे बहुवचन (तन्निस्सितापेक्खबहुवचन), आलंबनभेदाने होणारे बहुवचन (आरम्मणभेदबहुवचन) आणि कार्यभेदाने होणारे बहुवचन (किच्चभेदबहुवचन) असे पंधरा प्रकारचे बहुवचन असते. अशा प्रकारे सर्व एकवचन आणि बहुवचन मिळून वीस प्रकारांत समाविष्ट केले आहेत. या संदर्भात पाळी भाषेचा हा नियम आहे— ဧကတ္ထေ ဒေကဝစန-ဉ္စိတရသ္မိတရမ္ပိ စ; သမုဒါယဇာတိဧကတ္တ-လက္ခဏေကဝစောပိ စ; သာဋ္ဌကထေ ပိဋကမှိ, ပါဌေ ပါယေန ဒိဿရေ. एका अर्थामध्ये एकवचन आणि दुसऱ्या अर्थामध्ये दुसरे (बहुवचन) देखील; तसेच समुदाय, जाती आणि एकत्वलक्षणाचे एकवचन देखील; अट्ठकथांसह संपूर्ण तिपिटक पाठात बहुतांश करून दिसून येतात. ဂရုမှိ စတ္တနေကသ္မိံ, ဗဟုဝစနကံ ပန; ပါဠိယံ အပ္ပကံ အဋ္ဌ-ကထာဋီကာသု တံ ဗဟုံ. आदरणीय व्यक्तीच्या संदर्भात आणि स्वतःच्या संदर्भात बहुवचनाचा प्रयोग पाळीमध्ये (मूळ पाठात) अल्प प्रमाणात आढळतो, परंतु अट्ठकथा आणि टीकांमध्ये तो विपुल प्रमाणात आढळतो. တထာ ဟိ ဗဟုကံ ဒေက-ဝစနံယေဝ ပါဠိယံ; ဂရုမှိ စတ္တနေကသ္မိံ, ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. कारण पाळीमध्ये आदरणीय व्यक्तीच्या संदर्भात आणि स्वतःच्या संदर्भात बहुतांश करून एकवचनच वापरले जाते; याचे उदाहरण येथे दिले आहे. ‘‘နမော တေ ပုရိသာဇည, နမော တေ ပုရိသုတ္တမ; တဝ သာသနမာဂမ္မ, ပတ္တောမှိ အမတံ ပဒံ’’. “हे पुरुषश्रेष्ठ! आपल्याला नमस्कार असो. हे पुरुषोत्तम! आपल्याला नमस्कार असो. आपल्या शासनाचा (उपदेशाचा) आश्रय घेऊन मी अमृत पदाला (निर्वाणाला) प्राप्त झालो आहे.” ဣစ္စေဝမာဒယော ပါဌာ, ဗဟုဓာ ဇိနသာသနေ; ဒိဿန္တီတိ ဝိဇာနေယျ, ဝိဒွါ အက္ခရစိန္တကော. अशा प्रकारचे पाठ जिनशासनात (बुद्धांच्या शासनात) अनेक ठिकाणी आढळतात, असे अक्षरांचे चिंतन करणाऱ्या विद्वानाने जाणावे. သာတိသယံ ဂရုကာရာ-ရဟဿာပိ မဟေသိနော; ဧကဝစနယောဂေန, နိဒ္ဒေသော ဒိဿတေ ယတော. कारण अत्यंत आदरास पात्र असलेल्या महर्षींचे (बुद्धांचे) देखील एकवचनाच्या प्रयोगाने निर्देश केलेले दिसून येतात. တတော ဝေါဟာရကုသလော, ကရေယျတ္ထာနုရူပတော; ဧကဝစနယောဂံ ဝါ, ဣတရံ ဝါ သုမေဓသော. त्यामुळे व्यवहारात कुशल असलेल्या बुद्धिमान व्यक्तीने अर्थाला अनुसरून एकवचनाचा किंवा दुसऱ्याचा (बहुवचनाचा) प्रयोग करावा. ပါယေန တန္နိဝါသမှိ, ဗဟုဝစနကံ ဌိတံ; တံပုတ္တေ အပ္ပကံ တန္နိ-ဿယေကဝစနမ္ပိ စ. बहुतांश करून तेथे राहणाऱ्यांच्या संदर्भात बहुवचन वापरले जाते; त्यांच्या पुत्रांच्या संदर्भात आणि त्यांच्या आश्रयाच्या संदर्भात एकवचन देखील अल्प प्रमाणात आढळते. ပုထုစိတ္တာပရိစ္ဆေဒ-မာတိကာသန္ဓိအာဒိသု; ဗဟုဝစနကဉ္စာပိ, အပ္ပကန္တိ ပကာသယေ. पृथक्-चित्त, अपरिच्छेद, मातिका-अनुसंधि इत्यादींमध्ये बहुवचनाचा प्रयोग देखील अल्प प्रमाणात आहे, असे स्पष्ट करावे. ဧကာဘိဓာနတော ကိစ္စာ, တထာ ဂေါစရတောပိ စ; ဗဟုဝစနကံ တန္နိ-ဿိတာပေက္ခဉ္စ အပ္ပကံ. एकाच अभिधानाने, कार्याने तसेच गोचराने (विषयाने) होणारे बहुवचन आणि त्याच्या आश्रितांच्या अपेक्षेने होणारे बहुवचन देखील अल्प प्रमाणात असते. ဣစ္စေဝံ [Pg.28] သပ္ပယောဂံ တု, ဉတွာန ဝစနဒွယံ; ကာတဗ္ဗော ပန ဝေါဟာရော, ယထာပါဠိ ဝိဘာဝိနာ. अशा प्रकारे दोन्ही वचनांचे योग्य प्रयोग जाणून घेऊन, विद्वानाने पाळी भाषेला अनुसरूनच व्यवहार (भाषाप्रयोग) केला पाहिजे. ဣဒါနိ ကာလာဒိဝသေန အာချာတပ္ပဝတ္တိံ ဒီပယိဿာမ – ကာလကာရကပုရိသပရိဒီပကံ ကြိယာလက္ခဏံ အာချာတိကံ. တတြ ကာလန္တိ အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္နဝသေန တယော ကာလာ, အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္နာဏတ္တိပရိကပ္ပကာလာတိပတ္တိဝသေန ပန ဆ, တေ ဧကေကာ တိပုရိသကာ. आता आम्ही काळ इत्यादींच्या आधारे आख्यात (क्रियापद) प्रवृत्ती स्पष्ट करू—काळ, कारक आणि पुरुष यांचे प्रकटीकरण करणारे क्रियालक्षण म्हणजे आख्यात होय. त्यामध्ये काळ म्हणजे भूतकाळ, भविष्यकाळ आणि वर्तमानकाळ या भेदाने तीन काळ आहेत; परंतु भूत, भविष्य, वर्तमान, आज्ञा (आणत्ति), परिकल्प (संभावना) आणि कालातिपत्ती (अतिपत्ती) या भेदाने सहा काळ आहेत, आणि त्यातील प्रत्येक काळ तीन पुरुषांनी युक्त असतो. ဝုတ္တပ္ပကာရကာလေသု, ယဒိဒံ ဝတ္တတေ ယတော; အာချာတိကံ တတော တဿ, ကာလဒီပနတာ မတာ. वर सांगितलेल्या काळांमध्ये जे क्रियापद प्रवृत्त होते, त्यावरून त्याचे काळ-प्रकटीकरण (काळाचे ज्ञान करून देणे) मानले गेले आहे. ကာရကန္တိ ကမ္မကတ္တုဘာဝါ. တေ ဟိ ဥပစာရမုချသဘာဝဝသေန ကရောန္တိ ကရဏန္တိ စ ‘‘ကာရကာ’’တိ ဝုစ္စန္တိ. တေဝ ယထာက္ကမံ ကြိယာနိမိတ္တ တံသာဓက တံသဘာဝါတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. कारक म्हणजे कर्म, कर्ता आणि भाव होय. ते उपचाराने (गौण अर्थाने) आणि मुख्य स्वभावाच्या वशने 'करतात' आणि 'करण' (साधन) आहेत म्हणून त्यांना 'कारक' म्हटले जाते. ते अनुक्रमे क्रियेचे निमित्त, क्रियेचे साधक आणि क्रियारूप स्वभावाचे आहेत, असे जाणावे. ကမ္မံ ကတ္တာ စ ဘာဝေါ စ, ဣစ္စေဝံ ကာရကာ တိဓာ; ဝိဘတ္တိပစ္စယာ ဧတ္ထ, ဝုတ္တာ နာညတြ သစ္စတော. कर्म, कर्ता आणि भाव अशा प्रकारे कारक तीन प्रकारचे आहेत; येथे विभक्ती प्रत्यय याच अर्थांमध्ये सांगितले आहेत, इतरत्र नाही, हे सत्य आहे. ‘‘ပရိဘဝိယျတိ’’စ္စာဒီ, ကမ္မေ သိဇ္ဈန္တိ ကာရကေ; ‘‘သမ္ဘဝတီ’’တိအာဒီနိ, သိဇ္ဈရေ ကတ္တုကာရကေ. “परिभविय्यति” (पराभूत केला जातो) इत्यादी रूपे कर्म कारकात सिद्ध होतात; “संभवति” (उत्पन्न होतो) इत्यादी रूपे कर्ता कारकात सिद्ध होतात. ‘‘ဝိဘဝိယျတိ’’ဣစ္စာဒီ, ဘာဝေ သိဇ္ဈန္တိ ကာရကေ; တိဝိဓေသွေဝမေတေသု, ဝိဘတ္တိပစ္စယာ မတာ. “विभविय्यति” इत्यादी रूपे भाव कारकात सिद्ध होतात; अशा या तीन प्रकारच्या कारकांमध्ये विभक्ती प्रत्यय मानले गेले आहेत. ကာရကတ္တယမုတ္တံ ယံ, အာချာတံ နတ္ထိ သဗ္ဗသော; တသ္မာ တဒ္ဒီပနတ္တမ္ပိ, တဿာချာတဿ ဘာသိတံ. या तीन कारकांपासून मुक्त असलेले कोणतेही आख्यात (क्रियापद) सर्वथा अस्तित्वात नाही; म्हणून त्या आख्याताचे कारक-प्रकटीकरणत्व देखील सांगितले गेले आहे. ကာရကတ္တံ တု ဘာဝဿ, သစေပိ န သမီရိတံ; ကာရကလက္ခဏေ တေန, ဘာဝေန စ အဝတ္ထုနာ. जरी भावाचे कारकत्व कारक-लक्षणामध्ये सांगितले गेले नसले, तरी त्या भावाच्या आणि अवस्तूच्या (अद्रव्याच्या) अभावी... ကြိယာနိပ္ဖတ္တိ [Pg.29] နတ္ထီတိ, ယုတ္တိတောပိ စ နတ္ထိ တံ; တထာပါချာတိကေ တဿ, တဗ္ဗောဟာရော နိရုတ္တိယံ; ပတိဋ္ဌိတနယောဝါတိ, မန္တွာ အမှေဟိ ဘာသိတော. क्रियेची निष्पत्ती होत नाही, म्हणून युक्तीने देखील ते (कारकत्व) नाकारता येत नाही; तसेच आख्यात प्रकरणात त्याचा तो व्यवहार निरुक्तीमध्ये (व्याकरणात) प्रस्थापित न्याय आहे, असे मानून आम्ही ते सांगितले आहे. ပုရိသောတိ ဧကဝစနဗဟုဝစနကာ ပဌမမဇ္ဈိမုတ္တမပုရိသာ. တတ္ထ ပဌမပုရိသော အာချာတပဒေန တုလျာဓိကရဏေ သာဓကဝါစကေ ဝါ ကမ္မဝါစကေ ဝါ တုမှာ’မှသဒ္ဒဝဇ္ဇိတေ ပစ္စတ္တဝစနဘူတေ နာမမှိ ‘‘အဘိနီဟာရော သမိဇ္ဈတိ, ဗောဓိ ဝုစ္စတိ စတူသု မဂ္ဂေသုဉာဏ’’န္တိအာဒီသု ဝိယ ပယုဇ္ဇမာနေပိ, တဋ္ဌာနိယတ္တေ သတိ ‘‘ဘာသတိ ဝါ ကရောတိ ဝါ, ပီဠိယက္ခောတိ မံ ဝိဒူ, ဝုစ္စတီတိ ဝစန’’န္တိအာဒီသု ဝိယ အပ္ပယုဇ္ဇမာနေပိ သဗ္ဗဓာတူဟိ ပရော ဟောတိ. ကတ္ထစိ ပန ပါဠိပ္ပဒေသေ နာမဿ အပ္ပယုတ္တတ္တာ ပဌမပုရိသပယောဂတ္ထော ဒုရနုဗောဓော ဘဝတိ, ယထာ ‘‘ဒုက္ခံ တေ ဝေဒယိဿာမိ, တတ္ထ အဿာသယန္တု မ’’န္တိ. တထာ ဟိ ဧတ္ထ ‘‘ပါဒါ’’တိ ပါဌသေသော, တသ္မိံ ဒုက္ခသာသနာရောစနေ ဝတ္တုံ အဝိသဟနဝသေန ကိလမန္တံ မံ ဒေဝဿ ဥဘော ပါဒါ အဿာသေန္တု, ဝိဿဋ္ဌော ကထေဟီတိ မံ ဝဒထာတိ အဓိပ္ပာယော စ ဘဝတိ. पुरुष म्हणजे एकवचन आणि बहुवचनातील प्रथम, मध्यम आणि उत्तम पुरुष होत. त्यामध्ये प्रथम पुरुष हा आख्यातपदाशी (क्रियापदाशी) सामानाधिकरण्य असलेल्या, साधकवाचक किंवा कर्मवाचक असलेल्या, 'तुम्ह' (तू/तुम्ही) आणि 'अम्ह' (मी/आम्ही) हे शब्द वगळून प्रथमा विभक्तीत असलेल्या नामाच्या सोबत—जसे की “अभिनीहारो समिज्झति” (संकल्प सिद्ध होतो), “बोधि वुच्चति चतूसु मग्गेसुञाणं” (चार मार्गांमधील ज्ञानाला बोधी म्हटले जाते) इत्यादींमध्ये—वापरला जात असला तरी, किंवा त्याच्या जागी (नामाचा प्रयोग न करता) केवळ क्रियापदच—जसे की “भासति वा करोति वा” (बोलतो किंवा करतो), “पीळियक्खोति मं विदू” (मला पिळियक्ख म्हणून ओळखतात), “वुच्चतीति वचनं” (म्हटले जाते ते वचन) इत्यादींमध्ये—वापरले जात नसले तरी, सर्व धातूंहून पर (नंतर) असतो. परंतु पाळी भाषेमध्ये काही ठिकाणी नामाचा प्रयोग न केल्यामुळे प्रथम पुरुषाच्या प्रयोगाचा अर्थ समजणे कठीण होते, जसे की “dukkhaṃ te vedayissāmi, tattha assāsayantu ma” (मी तुला माझे दुःख सांगेन, तेथे ते मला आश्वासित करोत). कारण येथे “पादा” (पाय) हा पाठ उर्वरित (अध्याहृत) आहे, आणि 'त्या दुःखद संदेशाचे निवेदन करताना असमर्थतेमुळे थकलेल्या मला देवाचे दोन्ही पाय आश्वासित करोत, तू मोकळेपणाने सांग असे मला म्हणा' असा त्याचा अभिप्राय आहे. အဓိပ္ပာယော သုဒုဗ္ဗောဓော, ယသ္မာ ဝိဇ္ဇတိ ပါဠိယံ; တသ္မာ ဥပဋ္ဌဟံ ဂဏှေ, ဂရုံ ဂရုမတံ ဝိဒူ. ज्याअर्थी पाळीमध्ये अभिप्राय समजणे अत्यंत कठीण असते, त्याअर्थी विद्वानाने आदरणीय गुरूंच्या चरणांशी उपस्थित राहून (त्यांच्याकडून) ज्ञान ग्रहण करावे. တတြိမာနိ ဘူဓာတာဓိကာရတ္တာ ဘူဓာတုဝသေန နိဒဿနပဒါနိ. သော ပရိဘဝတိ, တေ ပရိဘဝန္တိ, ပရိဘဝတိ, ပရိဘဝန္တိ. သပတ္တော အဘိဘဝိယတေ, သဗ္ဗာ ဝိတျာ’နုဘူယတေ, အဘိဘဝိယတေ, အနုဘူယတေတိ. ယတ္ထ သတိပိ နာမဿ သာဓကဝါစကတ္တေ အပစ္စတ္တဝစနတ္တာ အာချာတပဒေန တုလျာဓိကရဏတာ န လဗ္ဘတိ, တတ္ထ ကမ္မဝါစကံ ပစ္စတ္တဝစနဘူတံ တုလျာဓိကရဏပဒံ ပဋိစ္စ ပဌမပုရိသာဒယော တယော လဗ္ဘန္တိ. တံ [Pg.30] ယထာ? ပရိဘဝိယျတေ ပုရိသော ဒေဝဒတ္တေန, ပရိဘဝိယျသေ တွံ ဒေဝဒတ္တေန, ပရိဘဝိယျမှေ မယံ အကုသလေဟိ ဓမ္မေဟိ. ဧတ္ထ ပနိဒံ ဝစနံ န ဝတ္တဗ္ဗံ ‘‘နိန္ဒန္တိ တုဏှိမာသိန’န္တိအာဒီသု သတိပိ နာမဿ ကမ္မဝါစကတ္တေ အပစ္စတ္တဝစနတ္တာ အာချာတပဒေန တုလျာဓိကရဏတာ န လဗ္ဘတီတိ ပဌမပုရိသုပ္ပတ္တိ န သိယာ’’တိ. ကသ္မာတိ စေ? ‘‘နိန္ဒန္တိ တုဏှိမာသိန’’န္တိအာဒီသု ‘‘ဇနာ’’တိ အဇ္ဈာဟရိတဗ္ဗဿ သာဓကဝါစကဿ နာမဿ သဒ္ဓိမာချာတပဒေန တုလျာဓိကရဏဘာဝဿ ဣစ္ဆိတတ္တာ. ဧဝမုတ္တရတြာပိ နယော. येथे 'भू' धातूच्या अधिकाराने 'भू' धातूच्या संदर्भातील ही उदाहरणे आहेत. 'सो परिभवति' (तो पराभूत करतो), 'ते परिभवन्ति' (ते पराभूत करतात), 'परिभवति' (पराभूत करतो), 'परिभवन्ति' (पराभूत करतात). 'सपत्तो अभिभवियते' (शत्रू पराभूत केला जातो), 'सब्बा वित्याऽनुभूयते' (सर्व संपत्ती अनुभवली जाते), 'अभिभवियते' (पराभूत केला जातो), 'अनुभूयते' (अनुभवला जातो). जेथे नामाचे साधकवाचकत्व (कर्तृवाचकत्व) असूनही, प्रथमा विभक्तीत (अपच्चत्तवचन) नसल्यामुळे आख्यात पदाशी (क्रियापदाशी) समानाधिकरणता मिळत नाही, तेथे कर्मवाचक आणि प्रथमा विभक्तीत असलेल्या समानाधिकरण पदाच्या आधारे प्रथम पुरुष इत्यादी तिन्ही पुरुष प्राप्त होतात. ते कसे? जसे की, 'परिभविय्यते पुरिसो देवदत्तेन' (देवदत्ताकडून पुरुष पराभूत केला जातो), 'परिभविय्यसे त्वं देवदत्तेन' (देवदत्ताकडून तू पराभूत केला जातोस), 'परिभविय्यम्हे मयं अकुसलेहि धम्मेहि' (आम्ही अकुशल धर्मांद्वारे पराभूत केले जातो). परंतु येथे असे म्हणू नये की, 'निन्दन्ति तुण्हिमासिनं' (शांत बसलेल्याची निंदा करतात) इत्यादी वाक्यांमध्ये नामाचे कर्मवाचकत्व असूनही, प्रथमा विभक्तीत नसल्यामुळे आख्यात पदाशी समानाधिकरणता मिळत नाही, म्हणून प्रथम पुरुषाची उत्पत्ती होणार नाही. कारण काय? तर 'निन्दन्ति तुण्हिमासिनं' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'जना' (लोक) या अध्याहृत (गृहीत धरलेल्या) साधकवाचक नामाचा आख्यात पदाशी समानाधिकरण भाव असणे इष्ट आहे. पुढील ठिकाणीही हाच नियम लागू होतो. မဇ္ဈိမပုရိသော အာချာတပဒေန တုလျာဓိကရဏေ သာဓကဝါစကေ ဝါ ကမ္မဝါစကေ ဝါ ပစ္စတ္တဝစနဘူတေ တုမှသဒ္ဒေ ပယုဇ္ဇမာနေပိ, တဋ္ဌာနိယတ္တေ သတိ အပ္ပယုဇ္ဇမာနေပိ သဗ္ဗဓာတူဟိ ပရော ဟောတိ. တွံ အတိဘဝသိ, တုမှေ အတိဘဝထ, အတိဘဝသိ, အတိဘဝထ. တွံ ပရိဘဝိယသေ ဒေဝဒတ္တေန, တုမှေ ပရိဘဝိယဝှေ. ယတ္ထ သတိပိ တုမှသဒ္ဒဿ သာဓကဝါစကတ္တေ အပစ္စတ္တဝစနတ္တာ အာချာတပဒေန တုလျာဓိကရဏတာ န လဗ္ဘတိ, န တတ္ထ မဇ္ဈိမပုရိသော ဟောတိ. ဣတရေ ပန ဒွေ ဟောန္တိ ကမ္မဝါစကံ ပစ္စတ္တဝစနဘူတံ တုလျာဓိကရဏပဒံ ပဋိစ္စ. တံ ယထာ? တယာ အဘိဘဝိယတေ သပတ္တော, တယာ အဘိဘဝိယေ အဟံ. मध्यम पुरुष हा आख्यात पदाशी समानाधिकरण असलेल्या, साधकवाचक (कर्तृवाचक) किंवा कर्मवाचक आणि प्रथमा विभक्तीत असलेल्या 'तुम्ह' (तू/तुम्ही) शब्दाचा प्रयोग केला असता, किंवा तो अध्याहृत (न वापरलेला) असतानाही सर्व धातूंनंतर येतो. जसे की, 'त्वं अतिभवसि' (तू अतिक्रमण करतोस), 'तुम्हे अतिभवथ' (तुम्ही अतिक्रमण करता), 'अतिभवसि' (अतिक्रमण करतोस), 'अतिभवथ' (अतिक्रमण करता). 'त्वं परिभवियसे देवदत्तेन' (तू देवदत्ताकडून पराभूत केला जातोस), 'तुम्हे परिभवियव्हे' (तुम्ही पराभूत केले जाता). जेथे 'तुम्ह' शब्दाचे साधकवाचकत्व असूनही, प्रथमा विभक्तीत नसल्यामुळे आख्यात पदाशी समानाधिकरणता मिळत नाही, तेथे मध्यम पुरुष होत नाही. परंतु, कर्मवाचक आणि प्रथमा विभक्तीत असलेल्या समानाधिकरण पदाच्या आधारे इतर दोन पुरुष (प्रथम आणि उत्तम) होतात. ते कसे? जसे की, 'तया अभिभवियते सपत्तो' (तुझ्याकडून शत्रू पराभूत केला जातो), 'तया अभिभविये अहं' (तुझ्याकडून मी पराभूत केला जातो). ဥတ္တမပုရိသော အာချာတပဒေန တုလျာဓိကရဏေ သာဓကဝါစကေ ဝါ ကမ္မဝါစကေ ဝါ ပစ္စတ္တဝစနဘူတေ အမှသဒ္ဒေ ပယုဇ္ဇမာနေပိ, တဋ္ဌာနိယတ္တေ သတိ အပ္ပယုဇ္ဇမာနေပိ သဗ္ဗဓာတူဟိ ပရော ဟောတိ. အဟံ ပရိဘဝါမိ, မယံ ပရိဘဝါမ, ပရိဘဝါမိ, ပရိဘဝါမ. အဟံ ပရိဘဝိယျာမိ အကုသလေဟိ ဓမ္မေဟိ, မယံ ပရိဘဝိယျာမ, ပရိဘဝိယျာမိ, ပရိဘဝိယျာမ. ယတ္ထ သတိပိ အမှသဒ္ဒဿ သာဓကဝါစကတ္တေ အပစ္စတ္တဝစနတ္တာ အာချာတပဒေန တုလျာဓိကရဏတာ န လဗ္ဘတိ, န တတ္ထ [Pg.31] ဥတ္တမပုရိသော ဟောတိ. ဣတရေ ပန ဒွေ ဟောန္တိ ကမ္မဝါစကံ ပစ္စတ္တဝစနဘူတံ တုလျာဓိကရဏပဒံ ပဋိစ္စ. တံ ယထာ? မယာ အနုဘဝိယတေ သမ္ပတ္တိ, မယာ အဘိဘဝိယသေ တွံ. ဧဝံ ယတ္ထ ယတ္ထ သာဓကဝါစကာနံ ဝါ ကမ္မဝါစကာနံ ဝါ နာမာဒီနံ ပစ္စတ္တဝစနဘူတာနံ အာချာတပဒေဟိ တုလျာဓိကရဏတ္တေ လဒ္ဓေ တတ္ထ တတ္ထ ပဌမပုရိသာဒယော လဗ္ဘန္တိ, တသ္မာ နာမာဒီနံ ပစ္စတ္တဝစနဘူတာနံ တုလျာဓိကရဏဘာဝေါယေဝ ပဌမပုရိသာဒီနမုပ္ပတ္တိယာ ကာရဏံ. उत्तम पुरुष हा आख्यात पदाशी समानाधिकरण असलेल्या, साधकवाचक (कर्तृवाचक) किंवा कर्मवाचक आणि प्रथमा विभक्तीत असलेल्या 'अम्ह' (मी/आम्ही) शब्दाचा प्रयोग केला असता, किंवा तो अध्याहृत असतानाही सर्व धातूंनंतर येतो. जसे की, 'अहं परिभवामि' (मी पराभूत करतो), 'मयं परिभवाम' (आम्ही पराभूत करतो), 'परिभवामि' (पराभूत करतो), 'परिभवाम' (पराभूत करतो). 'अहं परिभविय्यामि अकुसलेहि धम्मेहि' (मी अकुशल धर्मांद्वारे पराभूत केला जातो), 'मयं परिभविय्याम' (आम्ही पराभूत केले जातो), 'परिभविय्यामि' (पराभूत केला जातो), 'परिभविय्याम' (पराभूत केले जातो). जेथे 'अम्ह' शब्दाचे साधकवाचकत्व असूनही, प्रथमा विभक्तीत नसल्यामुळे आख्यात पदाशी समानाधिकरणता मिळत नाही, तेथे उत्तम पुरुष होत नाही. परंतु, कर्मवाचक आणि प्रथमा विभक्तीत असलेल्या समानाधिकरण पदाच्या आधारे इतर दोन पुरुष (प्रथम आणि मध्यम) होतात. ते कसे? जसे की, 'मया अनुभवियते सम्पत्ति' (माझ्याकडून संपत्ती अनुभवली जाते), 'मया अभिभवियसे त्वं' (माझ्याकडून तू पराभूत केला जातोस). अशा प्रकारे, जेथे जेथे साधकवाचक किंवा कर्मवाचक असलेल्या नाम इत्यादी प्रथमा विभक्तीतील शब्दांचे आख्यात पदांशी समानाधिकरणत्व प्राप्त होते, तेथे तेथे प्रथम पुरुष इत्यादी प्राप्त होतात. म्हणून, प्रथमा विभक्तीत असलेल्या नाम इत्यादी शब्दांचा समानाधिकरण भाव हाच प्रथम पुरुष इत्यादींच्या उत्पत्तीचे कारण आहे. ဒွိန္နံ တိဏ္ဏံ ဝါ ပုရိသာနမေကာဘိဓာနေ ပရော ပုရိသော ဂဟေတဗ္ဗော. ဧတ္ထ ဧကာဘိဓာနံ နာမ ဧကတော အဘိဓာနံ ဧကကာလာဘိဓာနဉ္စ. တဉ္စ ခေါ စသဒ္ဒပယောဂေယေဝ, အစသဒ္ဒပယောဂေ ဘိန္နကာလာဘိဓာနေ တဂ္ဂဟဏာဘာဝတော. ‘‘တုမှေ အတ္ထကုသလာ ဘဝထ, မယမတ္ထကုသလာ ဘဝါမ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော တပ္ပယောဂါ. တတ္ထ တုမှေ အတ္ထကုသလာ ဘဝထ – ဣစ္စေတသ္မိံ ဝေါဟာရေ ‘‘သော စ အတ္ထကုသလော ဘဝတိ, တွဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝသိ, တုမှေ အတ္ထကုသလာ ဘဝထာ’’တိ ဧဝံ ဒွိန္နမေကာဘိဓာနေ ပရော ပုရိသော ဂဟေတဗ္ဗော. ‘‘မယမတ္ထကုသလာ ဘဝါမ’’ ဣစ္စေတသ္မိံ ပန ‘‘သော စ အတ္ထကုသလော ဘဝတိ, အဟဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝါမိ, မယမတ္ထကုသလာ ဘဝါမာ’’တိ ဝါ ‘‘တွဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝသိ, အဟဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝါမိ, မယမတ္ထကုသလာ ဘဝါမာ’’တိ ဝါ ဧဝမ္ပိ ဒွိန္နမေကာဘိဓာနေ ပရော ပုရိသော ဂဟေတဗ္ဗော. ‘‘သော စ အတ္ထကုသလော ဘဝတိ, တွဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝသိ, အဟဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝါမိ, မယမတ္ထကုသလာ ဘဝါမာ’’တိ ဝါ ‘‘သော စ အတ္ထကုသလော ဘဝတိ, တေ စ အတ္ထကုသလာ ဘဝန္တိ, တွဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝသိ, တုမှေ စ အတ္ထကုသလာ ဘဝထ, အဟဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝါမိ, မယမတ္ထကုသလာ ဘဝါမာ’’တိ ဝါ ဧဝံ တိဏ္ဏမေကာဘိဓာနေ ပရော ပုရိသော ဂဟေတဗ္ဗော. दोन किंवा तीन पुरुषांचे एकाच वेळी कथन (एकाभिधान) करताना पर (पुढील) पुरुष ग्रहण करावा. येथे 'एकाभिधान' म्हणजे एकत्र कथन करणे आणि एकाच वेळी कथन करणे होय. आणि हे केवळ 'च' शब्दाच्या प्रयोगानेच होते, कारण 'च' शब्दाचा प्रयोग न केल्यास भिन्न काळातील कथन होत असल्याने त्याचे ग्रहण होत नाही. 'तुम्हे अत्थकुसला भवथ' (तुम्ही अर्थकुशल व्हा), 'मयं अत्थकुसला भवाम' (आम्ही अर्थकुशल होतो) इत्यादी त्याचे प्रयोग आहेत. त्यामध्ये, 'तुम्हे अत्थकुसला भवथ' या व्यवहारात—'सो च अत्थकुसलो भवति, त्वञ्च अत्थकुसलो भवसि, तुम्हे अत्थकुसला भवथ' (तोही अर्थकुशल होतो आणि तूही अर्थकुशल होतोस, म्हणून तुम्ही अर्थकुशल होता)—अशा प्रकारे दोघांचे एकाच वेळी कथन करताना पर पुरुष ग्रहण करावा. 'मयं अत्थकुसला भवाम' या व्यवहारात तर—'सो च अत्थकुसलो भवति, अहञ्च अत्थकुसलो भवामि, मयं अत्थकुसला भवाम' (तोही अर्थकुशल होतो आणि मीही अर्थकुशल होतो, म्हणून आम्ही अर्थकुशल होतो) किंवा 'त्वञ्च अत्थकुसलो भवसि, अहञ्च अत्थकुसलो भवामि, मयं अत्थकुसला भवाम' (तूही अर्थकुशल होतोस आणि मीही अर्थकुशल होतो, म्हणून आम्ही अर्थकुशल होतो)—अशा प्रकारेही दोघांचे एकाच वेळी कथन करताना पर पुरुष ग्रहण करावा. 'सो च अत्थकुसलो भवति, त्वञ्च अत्थकुसलो भवसि, अहञ्च अत्थकुसलो भवामि, मयं अत्थकुसला भवाम' किंवा 'सो च अत्थकुसलो भवति, ते च अत्थकुसला भवन्ति, त्वञ्च अत्थकुसलो भवसि, तुम्हे च अत्थकुसला भवथ, अहञ्च अत्थकुसलो भवामि, मयं अत्थकुसला भवाम' अशा प्रकारे तिघांचे एकाच वेळी कथन करताना पर पुरुष ग्रहण करावा. အပရောပိ [Pg.32] အတ္ထနယော ဝုစ္စတိ – ‘‘တွဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝသိ, သော စ အတ္ထကုသလော ဘဝတိ, တုမှေ အတ္ထကုသလာ ဘဝထာ’’တိ ဝါ ‘‘အဟဉ္စ အတ္ထကုသလော ဘဝါမိ, သော စ အတ္ထကုသလော ဘဝတိ, မယမတ္ထကုသလာ ဘဝါမာ’’တိ ဝါ ဣမိနာ နယေန အနေကပ္ပဘေဒေါ အတ္ထနယော. ဧဝံ သေသာသု ဝိဘတ္တီသု ပဉ္စမီသတ္တမိယာဒီသု ပရောပုရိသော ဂဟေတဗ္ဗော. သဗ္ဗေသု စ ကြိယာပဒေသု ဗဝှတ္ထဝါစကေသု ဗဟုဝစနန္တေသု, န ပန ဗဟုဝစနန္တေသုပိ ဧကဿတ္တနော ဝါစကေသု ဂရုကာတဗ္ဗဿေကဿတ္ထဿ ဝါစကေသု စ ကြိယာပဒေသု. ဧတ္ထ စောဒနာသန္ဒီပနိယော ဣမာ ဂါထာ – दुसराही अर्थनय (अर्थाचा नियम) सांगितला जातो—'त्वञ्च अत्थकुसलो भवसि, सो च अत्थकुसलो भवति, तुम्हे अत्थकुसला भवथ' (तूही अर्थकुशल होतोस आणि तोही अर्थकुशल होतो, म्हणून तुम्ही अर्थकुशल होता) किंवा 'अहञ्च अत्थकुसलो भवामि, सो च अत्थकुसलो भवति, मयं अत्थकुसला भवाम' (मीही अर्थकुशल होतो आणि तोही अर्थकुशल होतो, म्हणून आम्ही अर्थकुशल होतो) या नियमाने अनेक प्रकारचा अर्थनय होतो. अशा प्रकारे उर्वरित विभक्तींमध्ये, जसे की पंचमी, सप्तमी इत्यादींमध्ये पर पुरुष ग्रहण करावा. आणि हे bowl-vachanak (बहुवचनान्त) असलेल्या सर्व बहुअर्थवाचक क्रियापदांच्या बाबतीत लागू होते, परंतु बहुवचनान्त असूनही स्वतःच्या एकाच व्यक्तीच्या वाचक असलेल्या किंवा आदरणीय अशा एकाच व्यक्तीच्या वाचक असलेल्या क्रियापदांच्या बाबतीत लागू होत नाही. येथे शंकांचे स्पष्टीकरण करणाऱ्या या गाथा आहेत— ‘‘တွဉ္စ ဘဝသိ သော စာပိ, ဘဝတိ’’စ္စာဒိဘာသနေ; ‘‘တုမှေ ဘဝထ’’ ဣစ္စာဒိ, ပရောပေါသော ကထံ သိယာ?; "'तू होतोस आणि तोही होतो' अशा कथनात 'तुम्ही होता' इत्यादी प्रकारे पर पुरुष (मध्यम पुरुष) कसा काय होऊ शकतो?" ‘‘အဟံ ဘဝါမိ သော စာပိ, ဘဝတိ’’စ္စာဒိဘာသနေ; ‘‘မယံ ဘဝါမ’’ဣစ္စာဒိ, ဥတ္တမော စ ကထံ သိယာ?; "'मी होतो आणि तोही होतो' अशा कथनात 'आम्ही होतो' इत्यादी प्रकारे उत्तम पुरुष कसा काय होऊ शकतो?" ဧတ္ထ စ ဝုစ္စတေ – "यावर उत्तर दिले जाते—" ပစ္ဆာ ဝုတ္တော ပရော နာမ, သညာယ ပဋိပါဋိယာ; ဧဝံ ပန ဂဟေတဗ္ဗော, ပရောပုရိသနာမကော. "संज्ञेच्या अनुक्रमानुसार जो नंतर सांगितला जातो तो 'पर' (पुढील) होय. अशा प्रकारे 'परपुरुष' नावाचा पुरुष ग्रहण करावा." ပဌမမှာ ပရော နာမ, မဇ္ဈိမော ဥတ္တမောပိ စ; မဇ္ဈိမမှာ ပရော နာမ, ဥတ္တမော ပုရိသော ရုတော. "प्रथम पुरुषापेक्षा 'पर' म्हणजे मध्यम आणि उत्तम पुरुष होय; आणि मध्यम पुरुषापेक्षा 'पर' म्हणजे उत्तम पुरुष असे म्हटले आहे." ဧဝံ တု ဂဟဏဉှေတ္ထ, ဝေါဟာရဿာနုလောမကံ; ဒေါသော တဒနုလောမမှိ, ဂဟဏသ္မိံ န ဝိဇ္ဇတိ. "अशा प्रकारे येथे ग्रहण करणे हे लोकव्यवहाराला अनुकूल आहे; आणि त्या व्यवहाराला अनुकूल अशा ग्रहणात कोणताही दोष आढळत नाही." ‘‘တွဉ္စ ဘဒ္ဒေ သုခီ ဟောဟိ, ဧသော စာပိ မဟာမိဂေါ’’; ဣတိ ပါဌော ယတော ဒိဋ္ဌော, တသ္မာ ဧဝံ ဝဒေမသေ. "'हे भद्रे! तू आणि हा महामृग सुखी व्हावे' असा पाठ (साहित्यात) आढळतो, म्हणूनच आम्ही असे सांगतो." ‘‘တုမှေ ဒွေ သုခိတာ ဟောထ’’, ဣစ္စတ္ထော တတ္ထ ဒိဿတိ; ဧဝံပျယံ နယော ဝုတ္တော, အတ္တနောမတိယာ မမ. “तुम्ही दोघे सुखी व्हा”, असा अर्थ तेथे दिसून येतो; अशा प्रकारे हा नियम (नय) माझ्या स्वतःच्या मतानुसार (अत्तनोमतिया) सांगितला आहे. အတ္တနောမတိ [Pg.33] ကိဉ္စာပိ, ကထိတာ သဗ္ဗဒုဗ္ဗလာ; တထာပိ နယမာဒါယ, ကထိတတ္တာ အကောပိယာ. जरी स्वतःचे मत (अत्तनोमति) अत्यंत दुर्बळ मानले गेले असले, तरीही नियमाचा (नय) आधार घेऊन सांगितल्यामुळे ते अमान्य करण्याजोगे नाही (अकोपीय आहे). ‘‘ဓမ္မေန ရဇ္ဇံ ကာရေန္တံ, ရဋ္ဌာ ပဗ္ဗာဇယိတ္ထ မံ; တွဉ္စ ဇာနပဒါ စေဝ, နေဂမာ စ သမာဂတာ’’. “धर्माने राज्य करत असताना, तुम्ही मला राष्ट्रातून (राज्यातून) हद्दपार केले; तुम्ही, जनपदातील लोक आणि एकत्र आलेले नगरातील व्यापारी (नेगम) सर्वांनी मिळून.” ‘‘အဟဉ္စ မဒ္ဒိဒေဝီ စ, ဇာလီကဏှာဇိနာ စုဘော; အညမညံ သောကနုဒါ, ဝသာမ အဿမေ တဒါ’’. “मी आणि मद्दीदेवी, तसेच जाली आणि कण्हाजिना हे दोघेही; एकमेकांचे दुःख दूर करत, तेव्हा आम्ही आश्रमात राहत होतो.” ဧတာ ဂါထာပိ ဧတဿ, အတ္ထဿ ပန သာဓိကာ; တာသု ဝုတ္တနယေနေဝ, အတ္ထော သုပါကဋော သိယာ; ဧဝံ ဝိညူဟိ ဝိညေယျံ, ဗဟုနာ ဘာသိတေန ကိံ. या गाथा देखील या अर्थाची सिद्धी करणाऱ्या आहेत; त्यांमध्ये सांगितलेल्या पद्धतीनेच अर्थ स्पष्ट होतो; सुज्ञांनी हे अशा प्रकारे समजून घ्यावे, अधिक बोलण्याची काय गरज? အာကာရေန မနာပေန, ကထနေ ယေန ကေနစိ; န ဝိရုဇ္ဈတိ စေ အတ္ထော, တံ ပမာဏံ သုဓီမတံ. कोणत्याही मनपसंत (योग्य) पद्धतीने सांगताना जर अर्थाचा विरोध होत नसेल, तर विद्वानांसाठी तेच प्रमाण मानले जाते. ပုရိသတ္တယတော ဧသော, ပရောပုရိသနာမကော; နုပလဗ္ဘတိ ပစ္စေကံ, တဒန္တောဂဓတောဝ ယံ. तीन पुरुषांशिवाय (प्रथम, मध्यम, उत्तम पुरुष) हा 'परपुरुष' नावाचा प्रकार स्वतंत्रपणे आढळत नाही, कारण तो त्यांच्यातच समाविष्ट आहे. ပါဋဝတ္ထာယ သောတူနံ, ဝေါဟာရတ္ထေသု သဗ္ဗသော; ဝိသုံ အလဗ္ဘမာနောပိ, လဗ္ဘမာနောဝ ဥဒ္ဓဋော. श्रोत्यांच्या व्यावहारिक अर्थांमधील कौशल्यासाठी, स्वतंत्रपणे आढळत नसतानाही, तो आढळल्याप्रमाणेच उद्धृत केला गेला आहे. သင်္ခေပတောပေတ္ထ ပုရိသပ္ပဝတ္တိ ဧဝံ ဥပလက္ခိတဗ္ဗာ ‘‘အမှဝစနတ္ထေ ဥတ္တမော, တုမှဝစနတ္ထေ မဇ္ဈိမော, အညေသံ ဝစနတ္ထေ ပဌမော’’တိ. थोडक्यात येथे पुरुषांची प्रवृत्ती अशी समजून घ्यावी: “माझ्या (अम्ह) संदर्भातील वचनात 'उत्तम पुरुष', तुमच्या (तुम्ह) संदर्भातील वचनात 'मध्यम पुरुष' आणि इतरांच्या वचनात 'प्रथम पुरुष' असतो.” တျာဒီနံ ပုရိသသညာ, ယသ္မာ ဝုတ္တာ တတော ဣဒံ; တဗ္ဗန္တာချာတိကံ ဉေယျံ, ပုရိသပရိဒီပကံ. ज्याअर्थी 'ति' इत्यादी प्रत्ययांना 'पुरुष' ही संज्ञा दिली आहे, त्याअर्थी ते प्रत्यय शेवटी असणारे आख्यात (क्रियापद) पुरुषाचे स्पष्टीकरण करणारे आहे असे समजावे. ဧဝံ သဗ္ဗထာပိ အာချာတိကဿ ကာလကာရကပုရိသပရိဒီပနတာ ဝုတ္တာ. अशा प्रकारे, सर्व प्रकारे आख्याताचे (क्रियापदाचे) काळ, कारक आणि पुरुष स्पष्ट करण्याचे स्वरूप सांगितले गेले आहे. ကြိယာလက္ခဏန္တိ ဧတ္ထ ကထံ အာချာတိကဿ ကြိယာလက္ခဏတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ? “क्रियालक्षण” (क्रियेचे लक्षण असणारे) - येथे आख्याताचे (क्रियापदाचे) क्रियालक्षणत्व कसे समजून घ्यावे? လက္ခိယတိ [Pg.34] ကြိယာယေတံ, ကြိယာ ဝါ အဿ လက္ခဏံ; ကြိယာလက္ခဏတာ ဧဝံ, ဝေဒိတဗ္ဗာ တထာ ဟိ စ. याच्याद्वारे क्रिया दर्शविली जाते किंवा क्रिया हेच याचे लक्षण आहे; अशा प्रकारे याचे क्रियालक्षणत्व समजून घ्यावे, कारण की... ‘‘ဂစ္ဆတိ’’စ္စာဒိကံ သုတွာ, ကြိယာသန္ဒီပနံ ပဒံ; ‘‘အာချာတိက’’န္တိ ဓီရေဟိ, အာချာတညူဟိ သညိတံ. “गच्छति” (तो जातो) इत्यादी ऐकून, क्रियेचे स्पष्टीकरण करणाऱ्या पदाला आख्यात जाणणाऱ्या विद्वानांनी “आख्यात” (क्रियापद) अशी संज्ञा दिली आहे. လက္ခဏံ ဟောတိ နာမဿ, ယထာ သတွာဘိဓာနတာ; ကြိယာဘိဓာနတာ ဧဝံ, အာချာတဿေဝ လက္ခဏံ. ज्याप्रमाणे प्राण्याचे किंवा वस्तूचे (सत्त्व) अभिधान (नाव सांगणे) हे नामाचे लक्षण आहे, त्याचप्रमाणे क्रियेचे अभिधान (क्रिया सांगणे) हे आख्याताचेच (क्रियापदाचे) लक्षण आहे. အတ္ထတော ပန ဧတဿ, ကြိယာဝါစကတာ ဣဓ; လက္ခဏံ ဣတိ ဝိညေယျံ, လက္ခဏညူဟိ လက္ခိတံ. परंतु अर्थाच्या दृष्टीने, येथे याचे क्रियावाचकत्व हेच लक्षण समजावे, जे लक्षण जाणणाऱ्यांनी निश्चित केले आहे. ‘‘ကိံ ကရောသီ’’တိ ပုဋ္ဌဿ, ‘‘ပစာမိ’’စ္စာဒိနာ ‘‘အဟံ’’; ပဋိဝါစာယ ဒါနေန, ကြိယာဝါစကတာ မတာ. “तू काय करत आहेस?” असे विचारले असता, “मी शिजवत आहे” (पचामि) इत्यादी उत्तर देण्यावरून याचे क्रियावाचकत्व सिद्ध होते. ဧဝမာချာတိကဿ ကြိယာလက္ခဏတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ; ဣဒါနိ ကာလေသု ဝိဘတ္တိပ္ပဝတ္တိ ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗာ – अशा प्रकारे आख्याताचे क्रियालक्षणत्व समजून घ्यावे; आता काळांमध्ये विभक्तींची (प्रत्ययांची) प्रवृत्ती खालीलप्रमाणे समजून घ्यावी – ပစ္စုပ္ပန္နမှိ ကာလသ္မိံ, ဝတ္တမာနာ ပဝတ္တတိ; အာသိဋ္ဌာဏာပနတ္ထေသု, ပစ္စုပ္ပန္နမှိ ပဉ္စမီ. वर्तमानकाळात 'वत्तमाना' (वर्तमानकाळ) प्रवृत्त होते; आशीर्वाद आणि आज्ञा या अर्थांमध्ये वर्तमानकाळात 'पंचमी' (आज्ञार्थ) प्रवृत्त होते. ပစ္စုပ္ပန္နေ ပရိကပ္ပာ-နုမတျတ္ထေသု သတ္တမီ; အပ္ပစ္စက္ခေ အတီတမှိ, ပရောက္ခာ သမ္ပဝတ္တတိ. वर्तमानकाळात कल्पना (परिकप्प) आणि अनुमती या अर्थांमध्ये 'सत्तमी' (विध्यर्थ) प्रवृत्त होते; परोक्ष (डोळ्यांसमोर न घडलेल्या) भूतकाळात 'परोक्खा' प्रवृत्त होते. ဟိယျော ပဘုတိ ကာလသ္မိံ, အတီတမှိ ပဝတ္တတိ; ပစ္စက္ခေ ဝါ အပစ္စက္ခေ, ဟိယျတ္တနီ နိရုတ္တိတာ. कालपासून (हिय्यो) सुरू होणाऱ्या भूतकाळात, प्रत्यक्ष असो वा परोक्ष, व्याकरणकारांनी 'हिय्यत्तनी' (ह्यस्तन भूतकाळ) प्रवृत्त होते असे सांगितले आहे. အဇ္ဇပ္ပဘုတိ ကာလသ္မိံ, အတီတမှိ ပဝတ္တတိ; ပစ္စက္ခေ ဝါ အပစ္စက္ခေ, သမီပေဇ္ဇတနဝှယာ. आजपासून (अज्ज) सुरू होणाऱ्या भूतकाळात, प्रत्यक्ष असो वा परोक्ष, जवळच्या भूतकाळात 'अज्जतनी' (अद्यतन भूतकाळ) प्रवृत्त होते. အနာဂတေ ဘဝိဿန္တီ, ကာလသ္မိံ သမ္ပဝတ္တတိ; ကြိယာတိပန္နမတ္တမှိ, တီတေ ကာလာတိပတ္တိကာ; အနာဂတေပိ ဟောတီတိ, နိရုတ္တညူဟိ ဘာသိတာ. भविष्यकाळात 'भविस्सती' (भविष्यकाळ) प्रवृत्त होते; क्रिया निष्फळ ठरली असता भूतकाळात 'कालातिपत्तिका' (क्रियातिपत्ती) प्रवृत्त होते; ती भविष्यकाळातही होते, असे व्याकरणकारांनी सांगितले आहे. ဧဝံ ကာလေသု ဝိဘတ္တိပ္ပဝတ္တိံ ဉတွာ ယေ တေ သုတ္တန္တေသု ဝိစိတ္တာ သုဝိသဒဝိပုလတိခိဏဗုဒ္ဓိဝိသယဘူတာ ပယောဂါ ဒိဿန္တိ, တေသု ပါဋဝမိစ္ဆန္တေဟိ တျာဒိက္ကမေန ဝုစ္စမာနာ ကြိယာပဒမာလာ [Pg.35] သလ္လက္ခိတဗ္ဗာ – ဘဝတိ, ဘဝန္တိ. ဘဝသိ, ဘဝထ. ဘဝါမိ, ဘဝါမ. ဘဝတေ, ဘဝန္တေ. ဘဝသေ, ဘဝဝှေ. ဘဝေ, ဘဝါမှေ. အယံ အညယောဂါဒိရဟိတာ ကြိယာပဒမာလာ. अशा प्रकारे काळांमध्ये विभक्तींची प्रवृत्ती जाणून घेऊन, ज्यांना सुत्तांमध्ये आढळणाऱ्या विविध, स्पष्ट, विस्तृत आणि तीक्ष्ण बुद्धीच्या विषयरूप प्रयोगांमध्ये प्राविण्य मिळवायचे आहे, त्यांनी 'ति' इत्यादी क्रमाने सांगितलेली क्रियापदमाला लक्षात घ्यावी – भवति, भवन्ति। भवसि, भवथ। भवामि, भवाम। भवते, भवन्ते। भवसे, भवव्हे। भवे, भवाम्हे। ही इतर शब्दांच्या (सर्वनामांच्या) योगाशिवाय असणारी क्रियापदमाला आहे. ဒိဿန္တိ စ သုတ္တန္တေသု အတ္ထသမ္ဘဝေပိ အညယောဂါဒိရဟိတာနိ ကြိယာပဒါနိ. သေယျထိဒံ? ‘‘သဗ္ဗေ သင်္ခါရာ အနိစ္စာတိ, ယဒါ ပညာယ ပဿတိ. ယံ မံ ဘဏသိ သာရထိ. အညံ သေပဏ္ဏိ ဂစ္ဆာမိ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ ဧတဿတ္ထဿ ပရိဒီပနိယာ ကြိယာပဒမာလာ. आणि सुत्तांमध्ये अर्थाची शक्यता असतानाही इतर शब्दांच्या योगाशिवाय असणारी क्रियापदे आढळतात. जसे की – “यदा पञ्ञाय पस्सति” (जेव्हा प्रज्ञेने पाहतो), “यं मं भणसि सारथि” (हे सारथी, जे तू मला सांगतोस), “अञ्ञं सेपण्णि गच्छामि” (मी दुसऱ्या शेपण्णी वृक्षाकडे जातो) इत्यादी या अर्थाचे स्पष्टीकरण करणाऱ्या क्रियापदमाला आहेत. ဧတ္ထ တိဝိဓော ကြိယာပဒေသု ယောဂေါ တယောဂေါ, မယောဂေါ, အညယောဂေါ စ. တတ္ထ မဇ္ဈိမပုရိသာ တယောဂဝသေန ဂဟေတဗ္ဗာ, ဥတ္တမပုရိသာ မယောဂဝသေန. ပဌမပုရိသာ အညယောဂဝသေန. တျာဒီနမေတ္ထ ပဋိပါဋိယာ အယံ အနုဂီတိ – येथे क्रियापदांमधील योग तीन प्रकारचा आहे: त-योग (तुम्हाशी योग), म-योग (माझ्याशी योग) आणि अन्य-योग (इतरांशी योग). त्यामध्ये मध्यम पुरुष 'त-योगा'नुसार, उत्तम पुरुष 'म-योगा'नुसार आणि प्रथम पुरुष 'अन्य-योगा'नुसार ग्रहण करावा. 'ति' इत्यादींच्या क्रमाने येथे ही अनुगीती (श्लोक) आहे – အညယောဂေန ပဌမာ, တယောဂေန တု မဇ္ဈိမာ; မယောဂေနုတ္တမာ ဟောန္တိ, ဂဟေတဗ္ဗာ ဝိဘာဝိနာ. अन्य-योगाने प्रथम पुरुष, त-योगाने मध्यम पुरुष आणि म-योगाने उत्तम पुरुष होतो, हे सुज्ञाने समजून घ्यावे. သောတူနံ ပယောဂေသု ကောသလ္လတ္ထံ အညယောဂါဒိသဟိတမပရမ္ပိ ကြိယာပဒမာလံ ဝဒါမ – သော ဘဝတိ, တေ ဘဝန္တိ. တွံ ဘဝသိ, တုမှေ ဘဝထ. အဟံ ဘဝါမိ, မယံ ဘဝါမ. သော ဘဝတေ, တေ ဘဝန္တေ. တွံ ဘဝသေ, တုမှေ ဘဝဝှေ. အဟံ ဘဝေ, မယံ ဘဝါမှေ. အယံ အညယောဂါဒိသဟိတာ ကြိယာပဒမာလာ. श्रोत्यांच्या प्रयोगांमधील कौशल्यासाठी आम्ही अन्य-योगासह असणारी दुसरी क्रियापदमाला सांगतो – सो भवति (तो होतो), ते भवन्ति (ते होतात). त्वं भवसि (तू होतोस), तुम्हे भवथ (तुम्ही होता). अहं भवामि (मी होतो), मयं भवाम (आम्ही होतो). सो भवते, ते भवन्ते. त्वं भवसे, तुम्हे भवव्हे. अहं भवे, मयं भवाम्हे. ही अन्य-योगासह असणारी क्रियापदमाला आहे. ဒိဿန္တိ စ သုတ္တန္တေသု အညယောဂါဒိသဟိတာနိပိ ကြိယာပဒါနိ. သေယျထိဒံ? ‘‘ယံပါယံ ဒေဝ ကုမာရော သုပ္ပတိဋ္ဌိတပါဒေါ, ဣဒမ္ပိမဿ မဟာပုရိသဿ မဟာပုရိသလက္ခဏံ ဘဝတိ, တဿိမာနိ သတ္တ ရတနာနိ ဘဝန္တိ. ယော ဒန္ဓကာလေ တရတိ[Pg.36], တရဏီယေ စ ဒန္ဓတိ, တွံသိ အာစရိယော မမ, အဟမ္ပိ ဒဋ္ဌုကာမောသ္မိ, ပိတရံ မေ ဣဓာဂတံ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ ဧတဿတ္ထဿ ပရိဒီပနိယာ ကြိယာပဒမာလာ. आणि सुत्तांमध्ये अन्य-योगासह असणारी क्रियापदे देखील आढळतात. जसे की – “यम्पायं देव कुमारो सुप्पतिट्ठितपादो...” (हे देवा, या कुमाराचे पाय सुप्रतिष्ठित आहेत, हे देखील या महापुरुषाचे महापुरुषलक्षण होते, त्याचे हे सात रत्न होतात), “यो दन्धकाले तरति...” (जो विलंबाच्या वेळी पार करतो आणि पार करण्याच्या वेळी विलंब करतो), “त्वंसि आचरियो मम” (तू माझा आचार्य आहेस), “अहम्पि दट्ठुकामोस्मि...” (मी देखील येथे आलेल्या माझ्या पित्याला पाहू इच्छितो) इत्यादी या अर्थाचे स्पष्टीकरण करणाऱ्या क्रियापदमाला आहेत. ယော တုမှသဒ္ဒေန ဝတ္တဗ္ဗေ အတ္ထေ နိပတတိ, န ပန ဟောတိ တုမှတ္ထဝါစကော, နေသော သဒ္ဒေါ ကြိယာပဒဿ တယောဂသဟိတတ္တံ သာဓေတိ, အညဒတ္ထု အညယောဂသဟိတတ္တညေဝ သာဓေတိ. ယော စ အမှသဒ္ဒေန ဝတ္တဗ္ဗေ အတ္ထေ နိပတတိ, န ပန ဟောတိ အမှတ္ထဝါစကော, န သောပိ သဒ္ဒေါ ကြိယာပဒဿ မယောဂသဟိတတ္တံ သာဓေတိ, အညဒတ္ထု အညယောဂသဟိတတ္တညေဝ သာဓေတိ. जो शब्द 'तुम्ह' (तू/तुम्ही) शब्दाने सांगण्याच्या अर्थात वापरला जातो, परंतु तो 'तुम्ह' अर्थाचा वाचक नसतो, तो शब्द क्रियापदाचा 'त-योग' सिद्ध करत नाही, तर केवळ 'अन्य-योग' सिद्ध करतो. आणि जो शब्द 'अम्ह' (मी/आम्ही) शब्दाने सांगण्याच्या अर्थात वापरला जातो, परंतु तो 'अम्ह' अर्थाचा वाचक नसतो, तो देखील क्रियापदाचा 'म-योग' सिद्ध करत नाही, तर केवळ 'अन्य-योग' सिद्ध करतो. တတြ တုမှသဒ္ဒေန တာဝ ဝတ္တဗ္ဗတ္ထေ – ‘‘န ဘဝံ ဧတိ ပုညတ္ထံ, သိဝိရာဇဿ ဒဿနံ. မာယသ္မာ သမဂ္ဂဿ သံဃဿ ဘေဒါယ ပရက္ကမိ. ဣဓ ဘန္တေ ဘဂဝါ ပံသုကူလံ ဓောဝတူ’’တိ ဣစ္စေဝမာဒယော ပယောဂါ. အမှသဒ္ဒေန ပန ဝတ္တဗ္ဗတ္ထေ ‘‘ဥပါလိ တံ မဟာဝီရ, ပါဒေ ဝန္ဒတိ သတ္ထုနော. သာဝကော တေ မဟာဝီရ, သရဏော ဝန္ဒတိ သတ္ထုနော’’တိ စ ဣစ္စေဝမာဒယော ပယောဂါ. ဣဒမေတ္ထုပလက္ခိတဗ္ဗံ ‘‘တွံ တုမှေ အဟံ မယ’’န္တိ အတ္ထဒီပက တယောဂ မယောဂတော အညော အညတ္ထဒီပနော ပယောဂေါယေဝ အညယောဂေါ နာမ, တတ္ထ ပဌမပုရိသော ဘဝတီတိ. त्यामध्ये 'तुम्ह' शब्दाने सांगण्याच्या अर्थात – “न भवं एति पुञ्ञत्थं...” (पूजनीय शिवि राजाच्या दर्शनासाठी पुण्याच्या हेतूने येत नाहीत), “मायस्मा समग्गस्स सङ्घस्स भेदाय परक्कमि” (आयुष्मानांनी समग्र संघाच्या भेदासाठी प्रयत्न करू नये), “इध भन्ते भगवा पंसुकूलं धोवतु” (भन्ते, भगवंतांनी येथे पांसुकूल वस्त्र धुवावे) इत्यादी प्रयोग आहेत. 'अम्ह' शब्दाने सांगण्याच्या अर्थात – “उपालि तं महावीर, पादे वन्दति सत्थुनो” (हे महावीरा, उपालि शास्त्यांच्या चरणांना वंदन करतो), “सावको ते महावीर, सरणो वन्दति सत्थुनो” (हे महावीरा, तुमचा शरण आलेला श्रावक शास्त्यांच्या चरणांना वंदन करतो) इत्यादी प्रयोग आहेत. येथे हे लक्षात घ्यावे की – “त्वं, तुम्हे, अहं, मयं” या अर्थांचे स्पष्टीकरण करणाऱ्या त-योग आणि म-योगापेक्षा वेगळा, इतर अर्थांचे स्पष्टीकरण करणारा प्रयोग म्हणजेच 'अन्य-योग' होय, आणि तेथे 'प्रथम पुरुष' होतो. ယဇ္ဇေဝံ ‘‘သဗ္ဗာယသံ ကူဋမတိပ္ပမာဏံ, ပဂ္ဂယှ သော တိဋ္ဌသိ အန္တလိက္ခေ. ဧသ သုတွာ ပသီဒါမိ, ဝစော တေ ဣသိသတ္တမာ’’တိအာဒီသု ကထံ. ဧတ္ထ ဟိ မဇ္ဈိမုတ္တမပုရိသသမ္ဘဝေါယေဝ ဒိဿတိ, န တု ပဌမပုရိသသမ္ဘဝေါတိ? ဝုစ္စတေ – ‘‘သဗ္ဗာယသံ ကူဋမတိပ္ပမာဏံ, ပဂ္ဂယှ သော တိဋ္ဌသိ အန္တလိက္ခေ’’တိအာဒီသု ‘‘သော’’တိအာဒိကဿ နာမသဒ္ဒဿ တုမှ’မှသဒ္ဒဿတ္ထဝါစကသဒ္ဒေဟိ‘‘တိဋ္ဌသီ’’တိအာဒီနံ သျာဒျန္တာနံ ပဒါနံ ဒဿနတော အစ္စန္တမဇ္ဈာဟရိတဗ္ဗေဟိ [Pg.37] သမာနာဓိကရဏတ္တာ တဂ္ဂုဏဘူတတ္တာ စ မဇ္ဈိမုတ္တမပုရိသသမ္ဘဝေါ သမဓိဂန္တဗ္ဗော. ဤဒိသေသု ပယောဂေသု သျာဒျန္တာနံ ဒဿနဝသေန အဝိဇ္ဇမာနာနိပိ အဇ္ဈာဟရိတဗ္ဗာနိ ‘‘တွမဟ’’မိစ္စာဒီနိ ပဒါနိ ဘဝန္တိ. ကတ္ထစိ ပန ပရိပုဏ္ဏာနိ ဒိဿန္တိ ‘‘သာတွံ ဝင်္ကမနုပ္ပတ္တာ, ကထံ မဒ္ဒိ ကရိဿသိ. သော အဟံ ဝိစရိဿာမိ, ဂါမာ ဂါမံ ပုရာ ပုရ’’န္တိ ဣစ္စေဝမာဒီသု. जर असे आहे, तर 'सब्बायसं कूटमतिप्पमाणं, पग्गय्ह सो तिट्ठसि अन्तलिक्खे' (सर्व लोखंडी प्रचंड हातोडा हातात धरून तू आकाशात उभा आहेस) आणि 'एस सुत्वा पसीदामि, वचो ते इसिसत्तमा' (हे ऋषिश्रेष्ठा, तुझे हे वचन ऐकून मी प्रसन्न झालो आहे) इत्यादी वाक्यांमध्ये काय नियम आहे? येथे केवळ मध्यम पुरुष आणि उत्तम पुरुष यांचाच संभव दिसून येतो, प्रथम पुरुषाचा संभव का दिसत नाही? यावर सांगितले जाते – 'सब्बायसं कूटमतिप्पमाणं, पग्गय्ह सो तिट्ठसि अन्तलिक्खे' इत्यादी वाक्यांमध्ये 'सो' इत्यादी नामशब्दांचा, 'तुम्ह' (तू) आणि 'अम्ह' (मी) या शब्दांच्या अर्थाचे वाचक असलेल्या आणि 'तिट्ठसि' इत्यादी 'सि' प्रत्ययाने संपणाऱ्या क्रियापदांशी अत्यंत अध्याहार (अप्रत्यक्ष संबंध) करावा लागत असल्यामुळे, त्यांच्याशी सामानाधिकरण्य आणि तद्गुणभूतत्व असल्यामुळे मध्यम पुरुष आणि उत्तम पुरुषाचा संभव समजून घेतला पाहिजे. अशा प्रयोगांमध्ये 'सि' इत्यादी प्रत्ययाने संपणाऱ्या क्रियापदांच्या दर्शनावरून, जरी 'त्वं' (तू) आणि 'अहं' (मी) इत्यादी पदे प्रत्यक्ष विद्यमान नसली, तरी त्यांचा अध्याहार करावा लागतो. परंतु काही ठिकाणी ती पूर्णपणे दिसून येतात, जसे की – 'सा त्वं वङ्कमनुप्पत्ता, कथं मद्धि करिस्ससि' (ती तू वंक पर्वतावर पोहोचल्यावर, हे मद्री, तू काय करशील?) आणि 'सो अहं विचरिस्सामि, गामा गामं पुरा पुरं' (तो मी एका गावातून दुसऱ्या गावात, एका नगरातून दुसऱ्या नगरात फिरेन) इत्यादींमध्ये. အာချာတိကဿ ကြိယာလက္ခဏတ္တာ အလိင်္ဂဘေဒတ္တာ စ တိဏ္ဏံ လိင်္ဂါနံ သာဓာရဏဘာဝပရိဒီပနတ္ထံ အပရမ္ပိ ကြိယာပဒမာလံ ဝဒါမ – आख्यात (क्रियापद) हे क्रिया-लक्षणयुक्त आणि लिंगभेदरहित असल्यामुळे, तिन्ही लिंगांमधील त्याचा साधारण भाव (समानता) स्पष्ट करण्यासाठी आम्ही आणखी एक क्रियापदमाला सांगतो – ပုရိသော ဘဝတိ, ကညာ ဘဝတိ, စိတ္တံ ဘဝတိ, ပုရိသာ ဘဝန္တိ, ကညာယော ဘဝန္တိ, စိတ္တာနိ ဘဝန္တိ. ဘော ပုရိသ တွံ ဘဝသိ, ဘောတိ ကညေ တွံ ဘဝသိ, ဘော စိတ္တ တွံ ဘဝသိ, ဘဝန္တော ပုရိသာ တုမှေ ဘဝထ, ဘောတိယော ကညာယော တုမှေ ဘဝထ, ဘဝန္တော စိတ္တာနိ တုမှေ ဘဝထ. အဟံ ပုရိသော ဘဝါမိ, အဟံ ကညာ ဘဝါမိ, အဟံ စိတ္တံ ဘဝါမိ, မယံ ပုရိသာ ဘဝါမ, မယံ ကညာယော ဘဝါမ, မယံ စိတ္တာနိ ဘဝါမ. पुरुष होतो (पुरिसो भवति), कन्या होते (कञ्ञा भवति), चित्त होते (चित्तं भवति); पुरुष होतात (पुरिसा भवन्ति), कन्या होतात (कञ्ञायो भवन्ति), चित्ते होतात (चित्तानि भवन्ति). हे पुरुषा, तू होतोस (भो पुरिस त्वं भवसि); हे कन्ये, तू होतेस (भोति कञ्ञे त्वं भवसि); हे चित्ता, तू होतोस (भो चित्त त्वं भवसि); हे पुरुषहो, तुम्ही होता (भवन्तो पुरिसा तुम्हे भवथ); हे कन्यांनो, तुम्ही होता (भोतियो कञ्ञायो तुम्हे भवथ); हे चित्तांनों, तुम्ही होता (भवन्तो चित्तानि तुम्हे भवथ). मी पुरुष होतो (अहं पुरिसो भवामि); मी कन्या होते (अहं कञ्ञा भवामि); मी चित्त होतो (अहं चित्तं भवामि); आम्ही पुरुष होतो (मयं पुरिसा भवाम); आम्ही कन्या होतो (मयं कञ्ञायो भवाम); आम्ही चित्ते होतो (मयं चित्तानि भवाम). ဧသ နယော အတ္တနောပဒေသု, သေသဝိဘတ္တီနံ သဗ္ဗပဒေသုပိ. အယမာချာတိကဿ တိဏ္ဏံ လိင်္ဂါနံ သာဓာရဏဘာဝပရိဒီပနီ ကြိယာပဒမာလာဝ. हाच नियम आत्मनेपदांमध्ये आणि उर्वरित सर्व विभक्तींच्या सर्व पदांमध्येही लागू होतो. ही आख्याताची (क्रियापदाची) तिन्ही लिंगांमधील साधारणता (समानता) स्पष्ट करणारी क्रियापदमालाच आहे. ဝုတ္တဉှေတံ နိရုတ္တိပိဋကေ ‘‘ကြိယာလက္ခဏမာချာတိကမလိင်္ဂဘေဒ’’မိတိ. တတြ အလိင်္ဂဘေဒမိတိ ကော အတ္ထော? ဣတ္ထိပုမနပုံသကာနံ အဝိသေသတ္ထော ဝုစ္စတေ ‘‘အလိင်္ဂဘေဒ’’မိတိ. ယထာ ‘‘ပုရိသော ဂစ္ဆတိ, ကညာ ဂစ္ဆတိ, စိတ္တံ ဂစ္ဆတီ’’တိ. စတုဓာ ဥဒ္ဒိဋ္ဌကြိယာပဒေသု ယထာ ‘‘ဘဝတီ’’တိ အကာရာနန္တရတျန္တပဒံ ဂဟေတွာ ‘‘ဘဝတိ ဘဝန္တိ ဘဝသီ’’တိအာဒိနာ ကြိယာပဒမာလာ သဗ္ဗထာ ကတာ, ဧဝံ ‘‘ဥဗ္ဘဝတိ’’စ္စာဒီနိပိ အကာရာနန္တရတျန္တပဒါနိ ဂဟေတွာ ‘‘ဥဗ္ဘဝတိ ဥဗ္ဘဝန္တိ ဥဗ္ဘဝသီ’’တိအာဒိနာ [Pg.38] ကြိယာပဒမာလာ သဗ္ဗထာ ကာတဗ္ဗာ. ‘‘ဘောတိ သမ္ဘောတီ’’တိအာဒီနိ ပန ဩကာရာနန္တရတျန္တပဒါနိ, ‘‘ဘာဝေတိ ဝိဘာဝေတီ’’တိအာဒီနိ စ ဧကာရာနန္တရတျန္တပဒါနိ ဂဟေတွာ ပါဠိနယာနုသာရေနေဝ ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ, နယိဓ ဝုတ္တနယာနုသာရေန. ဤဒိသေသု ဟိ ဌာနေသု ဒုရနုဗောဓာ ကြိယာပဒဂတိ. အတော လဗ္ဘမာနဝသေန ကြိယာပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ. န ဟိ လောကေ လောကိယာ သဗ္ဗေ ဓာတုသဒ္ဒေ ပစ္စေကံ သဗ္ဗေဟိပိ ဆန္နဝုတိယာ ဝစနေဟိ ယောဇေတွာ ဝဒန္တိ, ဧဝံ အဝဒန္တာနမ္ပိ နေသံ ကထာ အပရိပုဏ္ဏာ နာမ န ဟောတိ, တသ္မာ ဝဇ္ဇေတဗ္ဗဋ္ဌာနံ ဝဇ္ဇေတွာ ယထာသမ္ဘဝံ ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ. ဧဝံ ပဉ္စမိယာဒီသုပိ ဝိဘတ္တီသု. အယံ ဝတ္တမာနဝိဘတ္တိဝသေန ကြိယာပဒမာလာနိဒ္ဒေသော. निरुत्तिपिटकात (व्याकरण ग्रंथात) म्हटलेच आहे – 'क्रियालक्षणमाख्यातिकमलिंगभेदं' (क्रियापद हे क्रिया-लक्षणयुक्त आणि लिंगभेदरहित असते). तेथे 'अलिंगभेद' म्हणजे काय अर्थ आहे? स्त्री, पुरुष आणि नपुंसक लिंगांमध्ये कोणताही भेद न असणे या अर्थाला 'अलिंगभेद' म्हटले जाते. जसे की – 'पुरिसो गच्छति' (पुरुष जातो), 'कञ्ञा गच्छति' (कन्या जाते), 'चित्तं गच्छति' (चित्त जाते). चार प्रकारच्या निर्दिष्ट क्रियापदांमध्ये जसे 'भवति' हे अकारान्त 'ति' प्रत्ययाने संपणारे पद घेऊन 'भवति, भवन्ति, bhavasi' इत्यादी प्रकारे क्रियापदमाला पूर्णपणे तयार केली गेली आहे, त्याचप्रमाणे 'उब्भवति' इत्यादी अकारान्त 'ति' प्रत्ययाने संपणारी पदे घेऊन 'उब्भवति, उब्भवन्ति, उब्भवसि' इत्यादी प्रकारे क्रियापदमाला पूर्णपणे तयार करावी. परंतु 'भोति, सम्भोति' इत्यादी ओकारान्त 'ति' प्रत्ययाने संपणारी पदे, आणि 'भावेति, विभावेति' इत्यादी एकारान्त 'ति' प्रत्ययाने संपणारी पदे घेऊन पाळिनियमांनुसारच पदमाला तयार करावी, येथे सांगितलेल्या नियमांनुसार नाही. कारण अशा ठिकाणी क्रियापदांची गती समजण्यास कठीण असते. म्हणून उपलब्ध रूपानुसारच क्रियापदमाला तयार करावी. कारण जगात सर्व लोक प्रत्येक धातूच्या शब्दाला सर्वच्या सर्व ९६ वचनांशी जोडून बोलत नाहीत, आणि असे न बोलणाऱ्यांचे संभाषण अपूर्ण ठरत नाही. म्हणून वर्ज्य करण्यायोग्य रूपे वर्ज्य करून यथासंभव पदमाला तयार करावी. याचप्रमाणे पंचमी इत्यादी विभक्तींमध्येही करावे. हा वर्तमानकाळाच्या (वत्तमाना विभत्ती) संदर्भातील क्रियापदमालेचा निर्देश आहे. ဣတော ပဋ္ဌာယ ပန ယထုဒ္ဒိဋ္ဌပဒါနေဝ ပရိဏာမေတွာ ပရိဏာမေတွာ ပဉ္စမိယာဒီနံ မာတိကာဘာဝေန ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ဣဒါနိ ပန တယောဂါဒိသဟိတာသဟိတဝသေန ဒွိဓာ ကြိယာပဒမာလာယော ဒဿေဿာမ ကွစာဒေသဝသေန သမ္ဘူတာနိ စ ရူပန္တရာနိ သောတူနံ သုခဓာရဏတ္ထဉ္စေဝ ပုရိသပ္ပယောဂေ အသမ္မောဟတ္ထဉ္စ. यापुढे मात्र, वर निर्दिष्ट केलेली पदेच बदलून बदलून पंचमी इत्यादी विभक्तींच्या मातृका (मूळ आराखडा) म्हणून ग्रहण करावीत. आता आम्ही श्रोत्यांना सहज लक्षात राहण्यासाठी आणि पुरुषांच्या (प्रथम, मध्यम, उत्तम पुरुष) प्रयोगात संभ्रम न होण्यासाठी, 'त-योग' (सर्वनामांचा योग) इत्यादींनी युक्त आणि अयुक्त अशा दोन प्रकारच्या क्रियापदमाला आणि काही ठिकाणी आदेशांमुळे (बदलांमुळे) निर्माण झालेली इतर रूपे दाखवू. ဘဝတု, ဘဝန္တု. ဘဝါဟိ, ဘဝ, ဘဝထ. ဘဝါမိ, ဘဝါမ. ဘဝတံ, ဘဝန္တံ. ဘဝဿု, ဘဝဝှော. ဘဝေ, ဘဝါမသေ. သော ဘဝတု, တေ ဘဝန္တု. တွံ ဘဝါဟိ, ဘဝ, တုမှေ ဘဝထ. အဟံ ဘဝါမိ, မယံ ဘဝါမ. သော ဘဝတံ, တေ ဘဝန္တံ. တွံ ဘဝဿု, တုမှေ ဘဝဝှော. အဟံ ဘဝေ, မယံ ဘဝါမသေ. အယံ ပဉ္စမီဝိဘတ္တိဝသေန ကြိယာပဒမာလာနိဒ္ဒေသော. भवतु, भवन्तु। भवाहि, भव, भवथ। भवामि, भवाम। भवतं, भवन्तं। भवस्सु, भवव्हो। भवे, भवामसे। सो भवतु, ते भवन्तु। त्वं भवाहि, भव, तुम्हे भवथ। अहं भवामि, मयं भवाम। सो भवतं, ते भवन्तं। त्वं भवस्सु, तुम्हे भवव्हो। अहं भवे, मयं भवामसे। हा पंचमी विभक्तीच्या (आज्ञार्थ) संदर्भातील क्रियापदमालेचा निर्देश आहे. ဘဝေယျ, ဘဝေ, ဘဝေယျုံ. ဘဝေယျာသိ, ဘဝေယျာထ. ဘဝေယျာမိ, ဘဝေယျာမ, ဘဝေမု. ဘဝေထ, ဘဝေရံ. ဘဝေထော, ဘဝေယျာဝှော. ဘဝေယျံ, ဘဝေယျာမှေ ဣတိ ဝါ, သော ဘဝေယျ[Pg.39], ဘဝေ, တေ ဘဝေယျုံ. တွံ ဘဝေယျာသိ, တုမှေ ဘဝေယျာထ. အဟံ ဘဝေယျာမိ, မယံ ဘဝေယျာမ, ဘဝေမု. သော ဘဝေထ, တေ ဘဝေရံ. တွံ ဘဝေထော, တုမှေ ဘဝေယျာဝှော. အဟံ ဘဝေယျံ, မယံ ဘဝေယျာမှေ ဣတိ ဝါ. အယံ သတ္တမီဝိဘတ္တိဝသေန ကြိယာပဒမာလာနိဒ္ဒေသော. भवेय्य, भवे, भवेय्युं। भवेय्यासि, भवेय्याथ। भवेय्यामि, भवेय्याम, भवेमु। भवेथ, भवेरं। भवेथो, भवेय्याव्हो। भवेय्यं, भवेय्याम्हे इति वा, सो भवेय्य, भवे, ते भवेय्युं। त्वं भवेय्यासि, तुम्हे भवेय्याथ। अहं भवेय्यामि, मयं भवेय्याम, भवेमु। सो भवेथ, ते भवेरं। त्वं भवेथो, तुम्हे भवेय्याव्हो। अहं भवेय्यं, मयं भवेय्याम्हे इति वा। हा सप्तमी विभक्तीच्या (विध्यर्थ) संदर्भातील क्रियापदमालेचा निर्देश आहे. ဗဘူဝ, ဗဘူဝု. ဗဘူဝေ, ဗဘူဝိတ္ထ. ဗဘူဝံ, ဗဘူဝိမှ. ဗဘူဝိတ္ထ, ဗဘူဝိရေ. ဗဘူဝိတ္ထော, ဗဘူဝိဝှော. ဗဘူဝိံ, ဗဘူဝိမှေ ဣတိ ဝါ, သော ဗဘူဝ, တေ ဗဘူဝု. တွံ ဗဘူဝေ, တုမှေ ဗဘူဝိတ္ထ. အဟံ ဗဘူဝံ, မယံ ဗဘူဝိမှ. သော ဗဘူဝိတ္ထ, တေ ဗဘူဝိရေ. တွံ ဗဘူဝိတ္ထော, တုမှေ ဗဘူဝိဝှော. အဟံ ဗဘူဝိံ, မယံ ဗဘူဝိမှေ ဣတိ ဝါ. အယံ ပရောက္ခာဝိဘတ္တိဝသေန ကြိယာပဒမာလာနိဒ္ဒေသော. बभूव, babhūvu। बभूवे, बभूवित्थ। बभूवं, बभूविम्ह। बभूवित्थ, बभूविरे। बभूवित्तो, बभूविव्हो। बभूविं, बभूविम्हे इति वा, सो बभूव, ते बभूवु। त्वं बभूवे, तुम्हे बभूवित्थ। अहं बभूवं, मयं बभूविम्ह। सो बभूवित्थ, ते बभूविरे। त्वं बभूवित्तो, तुम्हे बभूविव्हो। अहं बभूविं, मयं बभूविम्हे इति वा। हा परोक्षा विभक्तीच्या (परोक्ष भूतकाळ) संदर्भातील क्रियापदमालेचा निर्देश आहे. အဘဝါ, အဘဝူ. အဘဝေါ, အဘဝတ္ထ. အဘဝံ, အဘဝမှာ. အဘဝတ္ထ, အဘဝတ္ထုံ. အဘဝသေ, အဘဝဝှံ. အဘဝိံ, အဘဝမှသေ ဣတိ ဝါ, သော အဘဝါ, တေ အဘဝူ. တွံ အဘဝေါ, တုမှေ အဘဝတ္ထ. အဟံ အဘဝံ, မယံ အဘဝမှာ. သော အဘဝတ္ထ, တေ အဘဝတ္ထုံ. တွံ အဘဝသေ, တုမှေ အဘဝဝှံ. အဟံ အဘဝိံ, မယံ အဘဝမှသေ ဣတိ ဝါ. အယံ ဟိယျတ္တနီဝိဘတ္တိဝသေန ကြိယာပဒမာလာနိဒ္ဒေသော. अभवा, अभवू। अभवो, अभवत्थ। अभवं, अभवम्हा। अभवत्थ, अभवत्थुं। अभवसे, अभवव्हं। अभविं, अभवम्हसे इति वा, सो अभवा, ते अभवू। त्वं अभवो, तुम्हे अभवत्थ। अहं अभवं, मयं अभवम्हा। सो अभवत्थ, ते अभवत्थुं। त्वं अभवसे, तुम्हे अभवव्हं। अहं अभविं, मयं अभवम्हसे इति वा। हा हिय्यत्तनी विभक्तीच्या (ह्यस्तन भूतकाळ) संदर्भातील क्रियापदमालेचा निर्देश आहे. အဘဝိ, အဘဝုံ. အဘဝေါ, အဘဝိတ္ထ. အဘဝိံ, အဘဝိမှာ. အဘဝါ, အဘဝူ. အဘဝသေ, အဘဝိဝှံ. အဘဝှံ, အဘဝိမှေ ဣတိ ဝါ, သော အဘဝိ, တေ အဘဝုံ. တွံ အဘဝေါ, တုမှေ အဘဝိတ္ထ. အဟံ အဘဝိံ, မယံ အဘဝိမှာ. သော အဘဝါ, တေ အဘဝူ. တွံ အဘဝသေ, တုမှေ အဘဝိဝှံ. အဟံ အဘဝံ, မယံ အဘဝိမှေ ဣတိ ဝါ. အယံ အဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိဝသေန ကြိယာပဒမာလာနိဒ္ဒေသော. अभवि, अभवुं। अभवो, अभवित्थ। अभविं, अभविम्हा। अभवा, अभवू। अभवसे, अभविव्हं। अभव्हं, अभविम्हे किंवा 'सो अभवि' (तो झाला), 'ते अभवुं' (ते झाले). 'त्वं अभवो' (तू झालास), 'तुम्हे अभवित्थ' (तुम्ही झालात). 'अहं अभविं' (मी झालो), 'मयं अभविम्हा' (आम्ही झालो). 'सो अभवा' (तो झाला), 'ते अभवू' (ते झाले). 'त्वं अभवसे' (तू झालास), 'तुम्हे अभविव्हं' (तुम्ही झालात). 'अहं अभवं' (मी झालो), 'मयं अभविम्हे' (आम्ही झालो) असे रूपे होतात. हा अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) विभक्तीनुसार क्रियापदमालेचा निर्देश आहे. ဧတ္ထ ပနဇ္ဇတနိယာ ဥံဝစနဿ ဣံသုမာဒေသဝသေန ဘဝတိနော ရူပန္တရာနိပိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. သေယျထိဒံ? တေ ဘဝိံသု, သမုဗ္ဘဝိံသု, ပဘဝိံသု, ပရာဘဝိံသု, သမ္ဘဝိံသု, ပါတုဘဝိံသု, ပါတုဗ္ဘဝိံသု[Pg.40], ဣမာနိ အကမ္မကပဒါနိ. ပရိဘဝိံသု, အဘိဘဝိံသု, အဓိဘဝိံသု, အတိဘဝိံသု, အနုဘဝိံသု, သမနုဘဝိံသု, အဘိသမ္ဘဝိံသု. येथे अज्जतनी विभक्तीच्या 'उं' (uṃ) प्रत्ययाच्या जागी 'इंसु' (iṃsu) आदेश होऊन 'भू' (भवति) धातूची इतर रूपे देखील जाणून घ्यावीत. जसे की— 'ते भविंसु' (ते झाले), 'समुब्भविंसु', 'पभविंसु', 'पराभविंसु', 'सम्भविंसु', 'पातुभविंसु', 'पातुब्भविंसु' ही क्रियापदे आहेत. तसेच 'परिभविंसु', 'अभिभविंसु', 'अधिभविंसु', 'अतिभविंसु', 'अनुभविंसु', 'समनुभविंसु', 'अभिसम्भविंसु' ही देखील आहेत. ‘‘အဓိဘောသု’’န္တိ ရူပမ္ပိ, ယသ္မာ ဒိဿတိ ပါဠိယံ; တသ္မာ ဟိ နယတော ဉေ ယျံ, ‘‘ပရိဘောသု’’န္တိအာဒိကံ. ज्याअर्थी पाळि साहित्यात 'अधिभोसूं' (adhibhosuṃ) असे रूप देखील दिसून येते; त्याअर्थी याच नियमाने 'परिभोसूं' (paribhosuṃ) इत्यादी रूपे देखील जाणून घ्यावीत. တတြာယံ ပါဠိ – ‘‘ဧဝံဝိဟာရိဉ္စာဝုသော ဘိက္ခုံ ရူပါ အဓိဘောသုံ, န ဘိက္ခု ရူပေ အဓိဘောသီ’’တိ. ဣမာနိ သကမ္မကပဒါနိ, ဧဝမဇ္ဇတနိယာ ဥံဝစနဿ ဣံသုမာဒေသဝသေန ဘဝတိနော ရူပန္တရာနိ ဘဝန္တိ. အပိစ त्यावर हा पाळि संदर्भ आहे— 'एवंविहारिञ्चावुसो भिक्खुं रूपा अधिभोसुं, न भिक्खु रूपे अधिभोसी' (हे आवुसो! अशा प्रकारे विहार करणाऱ्या भिक्खूवर रूपे अधिराज्य गाजवतात, परंतु भिक्खू रूपांवर अधिराज्य गाजवत नाही). ही क्रियापदे आहेत. अशा प्रकारे अज्जतनी विभक्तीच्या 'उं' प्रत्ययाच्या जागी 'इंसु' आदेश होऊन 'भू' (भवति) धातूची इतर रूपे होतात. आणखीही— ‘‘အနွဘိ’’ ဣတိရူပမ္ပိ, အဇ္ဇတနျာ ပဒိဿတိ; တသ္မာ ဟိ နယတော ဉေယျံ, ‘‘အဇ္ဈဘိ’’စ္စာဒိကမ္ပိ စ. 'अन्वभि' (anvabhi) असे रूप देखील अज्जतनी विभक्तीमध्ये दिसून येते; म्हणून याच नियमाने 'अज्झभि' (ajjhabhi) इत्यादी रूपे देखील जाणून घ्यावीत. တတြာယံ ပါဠိ – သော တေန ကမ္မေန ဒိဝံ သမက္ကမိ, သုခဉ္စ ခိဍ္ဍာရတိယော စ အနွဘီတိ. တတ္ထ အနွဘီတိ အနု အဘီတိ ဆေဒေါ. အနူတိ ဥပသဂ္ဂေါ. အဘီတိ အာချာတိကပဒန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. त्यावर हा पाळि संदर्भ आहे— 'सो तेन कम्मेन दिवं समक्कमि, सुखञ्च खिड्डारतियो च अन्वभी' (तो आपल्या त्या कर्माने स्वर्गात गेला आणि सुख व क्रीडारतीचा अनुभव घेता झाला). तेथे 'अन्वभी' म्हणजे 'अनु' + 'अभी' अशी संधी सोडवावी. 'अनु' हा उपसर्ग आहे आणि 'अभी' हे आख्यातपद (क्रियापद) आहे असे समजावे. ဘဝိဿတိ, ဘဝိဿန္တိ. ဘဝိဿသိ, ဘဝိဿထ. ဘဝိဿာမိ, ဘဝိဿာမ. ဘဝိဿတေ, ဘဝိဿန္တေ. ဘဝိဿသေ, ဘဝိဿဝှေ. ဘဝိဿံ, ဘဝိဿာမှေ ဣတိ ဝါ, သော ဘဝိဿတိ, တေ ဘဝိဿန္တိ. တွံ ဘဝိဿသိ, တုမှေ ဘဝိဿထ. အဟံ ဘဝိဿာမိ, မယံ ဘဝိဿာမ. သော ဘဝိဿတေ, တေ ဘဝိဿန္တေ. တွံ ဘဝိဿသေ, တုမှေ ဘဝိဿဝှေ. အဟံ ဘဝိဿံ, မယံ ဘဝိဿာမှေ ဣတိ ဝါ. အယံ ဘဝိဿန္တီဝိဘတ္တိဝသေန ကြိယာပဒမာလာနိဒ္ဒေသော. 'भविस्सति, भविस्सन्ति। भविस्ससि, भविस्सथ। भविस्सामि, भविस्साम। भविस्सते, भविस्सन्ते। भविस्ससे, भविस्सव्हे। भविस्सं, भविस्साम्हे' किंवा 'सो भविस्सति' (तो होईल), 'ते भविस्सन्ति' (ते होतील). 'त्वं भविस्ससि' (तू होशील), 'तुम्हे भविस्सथ' (तुम्ही व्हाल). 'अहं भविस्सामि' (मी होईन), 'मयं भविस्साम' (आम्ही होऊ). 'सो भविस्सते' (तो होईल), 'ते भविस्सन्ते' (ते होतील). 'त्वं भविस्ससे' (तू होशील), 'तुम्हे भविस्सव्हे' (तुम्ही व्हाल). 'अहं भविस्सं' (मी होईन), 'मयं भविस्साम्हे' (आम्ही होऊ) असे रूपे होतात. हा भविस्सती (भविष्यकाळ) विभक्तीनुसार क्रियापदमालेचा निर्देश आहे. အဘဝိဿာ, အဘဝိဿံသု. အဘဝိဿေ, အဘဝိဿထ. အဘဝိဿံ, အဘဝိဿာမှာ. အဘဝိဿထ, အဘဝိဿိသု. အဘဝိဿသေ, အဘဝိဿဝှေ. အဘဝိဿိံ, အဘဝိဿာမှသေ ဣတိ ဝါ, သော အဘဝိဿာ, တေ အဘဝိဿံသု. တွံ အဘဝိဿေ, တုမှေ [Pg.41] အဘဝိဿထ. အဟံ အဘဝိဿံ, မယံ အဘဝိဿာမှာ. သော အဘဝိဿထ, တေ အဘဝိဿိသု. တွံ အဘဝိဿသေ, တုမှေ အဘဝိဿဝှေ. အဟံ အဘဝိဿိံ, မယံ အဘဝိဿာမှသေ ဣတိ ဝါ. အယံ ကာလာတိပတ္တိဝိဘတ္တိဝသေန ကြိယာပဒမာလာနိဒ္ဒေသော. 'अabhaviस्सा, अभविस्सं सु। अभविस्से, अभविस्सथ। अभविस्सं, अभविस्साम्हा। अभविस्सथ, अभविस्सि सु। अभविस्ससे, अभविस्सव्हे। अभविस्सिं, अभविस्साम्हसे' किंवा 'सो अभविस्सा' (तो झाला असता), 'ते अभविस्सं सु' (ते झाले असते). 'त्वं अभविस्से' (तू झाला असतास), 'तुम्हे अभविस्सथ' (तुम्ही झाले असता). 'अहं अभविस्सं' (मी झालो असतो), 'मयं अभविस्साम्हा' (आम्ही झालो असतो). 'सो अभविस्सथ' (तो झाला असता), 'ते अभविस्सि सु' (ते झाले असते). 'त्वं अभविस्ससे' (तू झाला असतास), 'तुम्हे अभविस्सव्हे' (तुम्ही झाले असता). 'अहं अभविस्सिं' (मी झालो असतो), 'मयं अभविस्साम्हसे' (आम्ही झालो असतो) असे रूपे होतात. हा कालातिपत्ति (क्रियातिपत्ती/संकेतार्थ) विभक्तीनुसार क्रियापदमालेचा निर्देश आहे. ဝေါဟာရဘေဒကုသလေန သုဗုဒ္ဓိနာ ယော,ကစ္စာယနေန ကထိတော ဇိနသာသနတ္ထံ; တျာဒိက္ကမော တဒနုဂံ ကိရိယာပဒါနံ,ကတွာ ကမော ဘဝတိဓာတုဝသေန ဝုတ္တော. व्यवहाराच्या भेदांमध्ये कुशल आणि सुबुद्ध अशा कच्चायनांनी जिनशासनाच्या (बुद्धांच्या शासनाच्या) कल्याणासाठी जो 'ति' इत्यादी प्रत्ययांचा क्रम सांगितला आहे, त्याला अनुसरून येथे 'भू' (भवति) धातूच्या रूपांनुसार क्रियापदांचा क्रम सांगितला गेला आहे. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह (टीकांसह) नऊ अंगांनी युक्त असलेल्या तिपिटकातील (त्रिपिटकातील) वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ...कुशलतेसाठी रचल्या गेलेल्या 'सद्दनीति' (शब्दानुशासन) ग्रंथात... ဘဝတိနော ကြိယာပဒမာလာဝိဘာဂေါ နာမ ...'भवति' (भू) धातूच्या क्रियापदमालेचा विभाग नावाचा... ဒုတိယော ပရိစ္ဆေဒေါ. दुसरा परिच्छेद। ၃. ပကိဏ္ဏကဝိနိစ္ဆယ ३. प्रकीर्णक विनिर्णय ဣတော ပရံ ပဝက္ခာမိ, ပကိဏ္ဏကဝိနိစ္ဆယံ; သပ္ပယောဂေသု အတ္ထေသု, ဝိညူနံ ပါဋဝတ္ထယာ. यानंतर, विद्वानांच्या योग्य प्रयोगांमधील अर्थांच्या कुशलतेसाठी, मी प्रकीर्णक विनिर्णय (विविध विषयांचे स्पष्टीकरण) सांगणार आहे. တတ္ထ အတ္ထုဒ္ဓါရော, အတ္ထသဒ္ဒစိန္တာ, အတ္ထာတိသယယောဂေါ, သမာနာသမာနဝသေနဝစနသင်္ဂဟော, အာဂမလက္ခဏဝသေန ဝိဘတ္တိဝစနသင်္ဂဟော, ကာလဝသေန ဝိဘတ္တိဝစနသင်္ဂဟော, ကာလသင်္ဂဟော, ပကရဏသံသန္ဒနာ, ဝတ္တမာနာဒီနံ ဝစနတ္ထဝိဘာဝနာ စာတိ နဝဓာ ဝိနိစ္ဆယော ဝေဒိတဗ္ဗော. त्यामध्ये नऊ प्रकारचा विनिर्णय (निश्चय) समजून घ्यावा, जो याप्रमाणे आहे— १) अर्थोद्धार (अर्थ स्पष्ट करणे), २) 'अत्थ' शब्दाचा विचार, ३) अर्थातिशययोग (अर्थाच्या अतिशयाचा संबंध), ४) समान आणि असमानतेच्या आधारे शब्दांचा संग्रह, ५) आगम लक्षणाच्या आधारे विभक्ती व वचनांचा संग्रह, ६) काळानुसार विभक्ती व वचनांचा संग्रह, ७) काळ संग्रह, ८) ग्रंथांची तुलना (प्रकरण तुलना), आणि ९) वर्तमानकाळ इत्यादींच्या वचन-अर्थाचे स्पष्टीकरण. အတ္ထုဒ္ဓါရေ တာဝ သမာနသုတိကပဒါနမတ္ထုဒ္ဓါရဏံ ကရိဿာမ. ဧတ္ထာချာတပဒသညိတာနံ ဘောတိသဒ္ဒ ဘဝေသဒ္ဒါနမတ္ထော ဥဒ္ဓရိတဗ္ဗော. တထာ ဟေတေ နာမိကပဒသညိတေဟိ အပရေဟိ ဘောတိသဒ္ဒ ဘဝေသဒ္ဒေဟိ သမာနသုတိကာပိ အသမာနတ္ထာ စေဝ ဟောန္တိ အသမာနဝိဘတ္တိကာ စ. သာသနသ္မိဉှိ [Pg.42] ကေစိ သဒ္ဒါ အညမညံ သမာနသုတိကာ သမာနာပိ အသမာနတ္ထာ အသမာနပဝတ္တိနိမိတ္တာ အသမာနလိင်္ဂါ အသမာနဝိဘတ္တိကာ အသမာနဝစနကာ အသမာနန္တာ အသမာနကာလိကာ အသမာနပဒဇာတိကာ စ ဘဝန္တိ. प्रथम 'अर्थोद्धार' या विषयांतर्गत, आम्ही समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांचा अर्थ स्पष्ट करू. येथे आख्यातपद (क्रियापद) म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या 'भोति' आणि 'भवे' या शब्दांचा अर्थ स्पष्ट केला पाहिजे. कारण, नामपद म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या इतर 'भोति' आणि 'भवे' या शब्दांशी समान उच्चार असूनही, त्यांचे अर्थ आणि विभक्ती भिन्न असतात. कारण बुद्धांच्या शासनात (पाळि साहित्यात) काही शब्द एकमेकांशी समान उच्चार असणारे असूनही, त्यांचे अर्थ भिन्न, प्रवृत्ती-निमित्त (उत्पत्तीचे कारण) भिन्न, लिंग भिन्न, विभक्ती भिन्न, वचन भिन्न, अंत (शेवट) भिन्न, काळ भिन्न आणि पदजाती (शब्दांच्या जाती) भिन्न असतात. တေသမသမာနတ္ထတ္တေ ‘‘သဗ္ဗဉှိ တံ ဇီရတိ ဒေဟနိဿိတံ. အပ္ပဿုတာယံ ပုရိသော, ဗလိဗဒ္ဒေါဝ ဇီရတိ. သန္တော တသိတော. ပဟု သန္တော န ဘရတိ. သန္တော အာစိက္ခတေ မုနိ. သန္တော သပ္ပုရိသာ လောကေ. သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနာ လောကသ္မိ’’န္တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. ဧတ္ထ ဇီရတိသဒ္ဒဒွယံ ယထာသမ္ဘဝံ နဝဘာဝါပဂမဝဍ္ဎနဝါစကံ. သန္တောသဒ္ဒပဉ္စကံ ယထာသမ္ဘဝံ ပရိဿမပ္ပတ္တသမာနောပသန္တောပလဗ္ဘမာနဝါစကန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. त्यांच्या भिन्न अर्थांच्या बाबतीत पुढीलप्रमाणे प्रयोग आहेत— 'सब्बञ्हि तं जीरति देहनिस्सितं' (शरीरावर अवलंबून असलेले सर्व काही जीर्ण होते/नाश पावते), 'अप्पस्सुतायं पुरिसो, बलिबद्दोव जीरति' (हा अल्पश्रुत मनुष्य बैलाप्रमाणे म्हातारा होतो/वाढतो), 'सन्तो तसितो' (थकलेला आणि तहानलेला), 'पहु सन्तो न भरति' (समर्थ असूनही तो पोषण करत नाही), 'सन्तो आचिक्खते मुनि' (शांत मुनी उपदेश करतात), 'सन्तो सप्पुरिसा लोके' (जगात संत हेच सत्पुरुष आहेत), 'सन्तो संविज्जमाना लोकस्मिं' (जगात अस्तित्वात असलेले). येथे 'जीरति' हे दोन शब्द यथासंभव 'नाश पावणे' (तारुण्य नष्ट होणे) आणि 'म्हातारे होणे/वाढणे' यांचे वाचक आहेत. तसेच 'सन्तो' हे पाच शब्द यथासंभव 'थकलेला' (परिश्रम पावलेला), 'असलेला' (विद्यमान), 'शांत' (उपशांत), 'सत्पुरुष' (सज्जन) आणि 'उपलब्ध असणारा' (अस्तित्वात असलेला) यांचे वाचक आहेत असे समजावे. အသမာနပဝတ္တိနိမိတ္တတ္တေ ပန ‘‘အကတညူ မိတ္တဒုဗ္ဘီ, အဿဒ္ဓေါ အကတညူစာ’’တိဧဝမာဒယော. ဧတ္ထ စ အကတညူသဒ္ဒဒွယံ ကတာကတာဇာနနဇာနနပဝတ္တိနိမိတ္တံ ပဋိစ္စ သမ္ဘူတတ္တာ အသမာနပဝတ္တိနိမိတ္တကန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. भिन्न प्रवृत्ती-निमित्ताच्या (उत्पत्तीच्या कारणाच्या) बाबतीत पुढीलप्रमाणे प्रयोग आहेत— 'अकतञ्ञू मित्तदुब्भी' (केलेले उपकार न जाणणारा आणि मित्राचा द्रोह करणारा), 'अस्सद्धो अकतञ्ञू च' (श्रद्धा नसलेला आणि अकृत-निर्वाण जाणणारा). येथे 'अकतञ्ञू' हे दोन शब्द अनुक्रमे 'केलेले उपकार न जाणणे' आणि 'अकृत (निर्वाण) जाणणे' या प्रवृत्ती-निमित्तांवर आधारित उत्पन्न झाल्यामुळे, ते भिन्न प्रवृत्ती-निमित्तक आहेत असे समजावे. အသမာနလိင်္ဂတ္တေ ‘‘သုခီ ဟောတု ပဉ္စသိခ သက္ကော ဒေဝါနမိန္ဒော. တွဉ္စ ဘဒ္ဒေ သုခီ ဟောဟိ. ယတ္ထ သာ ဥပဋ္ဌိတော ဟောတိ. မာတာ မေ အတ္ထိ, သာ မယာ ပေါသေတဗ္ဗာ’’တိ ဧဝမာဒယော. ဧတ္ထ သုခီသဒ္ဒဒွယံ သာသဒ္ဒဒွယဉ္စ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂဝသေန အသမာနလိင်္ဂန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. भिन्न लिंगाच्या बाबतीत पुढीलप्रमाणे प्रयोग आहेत— 'सुखी होतु पञ्चसिख सक्को देवानमिन्दो' (देवराज सक्क आणि पञ्चसिख सुखी होवोत), 'त्वञ्च भद्दे सुखी होहि' (आणि हे भद्रे! तू सुखी हो), 'यत्थ सा उपट्ठितो होति' (जिथे तो उपस्थित असतो), 'माता मे अत्थि, सा मया पोसेतब्बा' (माझी माता आहे, तिचे मी पालन केले पाहिजे). येथे 'सुखी' हे दोन शब्द आणि 'सा' हे दोन शब्द पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगाच्या भेदाने भिन्न लिंगी आहेत असे समजावे. အသမာနဝိဘတ္တိကတ္တေ ‘‘အာဟာရေ ဥဒရေ ယတော. ယတော ပဇာနာတိ သဟေတုဓမ္မ’’န္တိ ဧဝမာဒယော. ဧတ္ထ ယတောသဒ္ဒဒွယံ [Pg.43] ပဌမာပဉ္စမီဝိဘတ္တိသဟိတတ္တာ အသမာနဝိဘတ္တိကန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. भिन्न विभक्तीच्या बाबतीत पुढीलप्रमाणे प्रयोग आहेत— 'आहारे उदरे यतो' (आहार आणि उदराच्या बाबतीत संयमित असणारा), 'यतो पजानाति सहेतुधम्मं' (ज्या कारणाने तो सहेतुक धम्माला जाणतो). येथे 'यतो' हे दोन शब्द अनुक्रमे प्रथमा आणि पंचमी विभक्तीने युक्त असल्यामुळे, ते भिन्न विभक्तीचे आहेत असे समजावे. အသမာနဝစနကတ္တေ ဣမေ ပယောဂါ – भिन्न वचनाच्या बाबतीत पुढील प्रयोग आहेत— ‘‘ယာယ မာတု ဘတော ပေါသော, ဣမံ လောကံ အဝေက္ခတိ; တမ္ပိ ပါဏဒဒိံ သန္တိံ, ဟန္တိ ကုဒ္ဓေါ ပုထုဇ္ဇနော’’တိ 'याय मातु भतो पोसो, इमं लोकं अवेक्खति; तम्पि पाणददिं सन्तिं, हन्ति कुद्धो पुथुज्जनो' (ज्या मातेने पोसलेला मनुष्य या जगाकडे पाहतो; त्या शांत आणि जीवन देणाऱ्या मातेला देखील क्रोधाविष्ट झालेला सामान्य माणूस मारून टाकतो). အာဒီသု ဟန္တိသဒ္ဒေါ ဧကဝစနော. इत्यादींमध्ये 'हन्ति' हा शब्द एकवचनी आहे. ‘‘ဣမေ နူန အရညသ္မိံ, မိဂသံဃာနိ လုဒ္ဒကာ; ဝါကုရာဟိ ပရိက္ခိပ္ပ, သောဗ္ဘံ ပါတေတွာ တာဝဒေ; ဝိက္ကောသမာနာ တိဗ္ဗာဟိ, ဟန္တိ နေသံ ဝရံ ဝရ’’န္တိ. 'इमे नून अरञ्ञस्मिं, मिगसङ्घानि लुद्दका; वाकुराहि perikखिप्प, सोब्भं पातेत्वा तावदे; विक्कोसमाना तिब्बाहि, हन्ति नेसं वरं वरं' (नक्कीच हे जंगलातील शिकारी, हरणांच्या कळपांना जाळ्यांनी वेढून आणि खड्ड्यात पाडून, तीव्र ओरडत त्यांच्यातील सर्वोत्तम हरणांना मारून टाकतात). အာဒီသု ပန ဗဟုဝစနော. ‘‘သီလဝါ ဝတ္တသမ္ပန္နော. ဧထ တုမှေ အာယသ္မန္တော သီလဝါ ဟောထ. သန္တော ဒန္တော နိယတော ဗြဟ္မစာရီ. သန္တော ဟဝေ သဗ္ဘိ ပဝေဒယန္တိ. မဟာရာဇာ ယသဿီ သော. စတ္တာရော မဟာရာဇာ’’တိ ဧဝမာဒီသု သီလဝါသဒ္ဒါဒယော ဧကဝစနဗဟုဝစနကာ. परंतु इत्यादींमध्ये बहुवचन आहे. "शीलवान, व्रतसंपन्न (सिल्वा वत्तसंपन्नो). या, तुम्ही आयुष्यमानांनो शीलवान व्हा (एथ तुम्हे आयस्मन्तो सीलवा होथ). शांत, दमित, नियत, ब्रह्मचारी (सन्तो दन्तो नियतो ब्रह्मचारी). संत खरोखर सज्जनांना प्रवेदित करतात (सन्तो हवे सब्भि पवेदयन्ति). तो यशस्वी महाराज (महाराजा यसस्सी सो). चार महाराज (चत्तारो महाराजा)" इत्यादींमध्ये 'शीलवा' (sīlavā) इत्यादी शब्द एकवचनी आणि बहुवचनी आहेत. အသမာနန္တတ္တေ ပန ယတ္ထ သမာနသုတိကာနံ အသမာနဝိဘတ္တိကတ္တံ ဝါ အသမာနဝစနတ္တံ ဝါ ဥပလဗ္ဘတိ. တေယေဝ ပယောဂါ. တံ ယထာ? ‘‘သတံ သမ္ပဇာနံ, သတံ ဓမ္မော, သန္တော ဒန္တော, သန္တော သပ္ပုရိသာ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော. परंतु असमानतेमध्ये (असमानावस्थेत) जिथे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांची असमान विभक्ती किंवा असमान वचन आढळते, तेच प्रयोग आहेत. ते कसे? जसे की— 'सतं संपजानं' (स्मृतिमान आणि संप्रजन्ययुक्त), 'सतं धम्मो' (सज्जनांचा धर्म), 'सन्तो दन्तो' (शांत आणि दमित), 'सन्तो सप्पुरिसा' (संत हे सत्पुरुष आहेत) इत्यादी. အသမာနကာလတ္တေ ‘‘နနု တေ သုတံ ဗြာဟ္မဏ ဘညမာနေ, ဒေဝါ န ဣဿန္တိ ပုရိသပရက္ကမဿ. တေ ဇနာ ပါရမိဿန္တိ, မစ္စုဓေယျံ သုဒုတ္တရ’’န္တိ ဧဝမာဒယော. ဧတ္ထ ဣဿန္တိသဒ္ဒဒွယံ ဝတ္တမာနာဘဝိဿန္တီကာလဝသေန အသမာနကာလန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဝတ္တမာနာဘဝိဿန္တီဝိဘတ္တိဝသေန ပန အသမာနဝိဘတ္တိကန္တိပိ. असमान काळ असण्याबाबत— 'हे ब्राह्मणा, जेव्हा (धर्म) सांगितला जात असतो, तेव्हा तू ऐकले नाहीस का की देव पुरुषाच्या पराक्रमाचा हेवा करत नाहीत (इस्सन्ति). ते लोक मृत्यूच्या अत्यंत कठीण अशा साम्राज्याला पार करतील (पारमिस्सन्ति)' इत्यादी. येथे 'इस्सन्ति' (issanti) हा शब्दद्वय वर्तमानकाळ आणि भविष्यकाळ या काळभेदांमुळे असमान काळ असलेला समजावा. तसेच वर्तमानकाळ व भविष्यकाळाच्या विभक्तीच्या (प्रत्ययांच्या) भेदांमुळे तो असमान विभक्तीचा देखील आहे. အသမာနပဒဇာတိကတ္တေ [Pg.44] ‘‘သယံ သမာဟိတော နာဂေါ, သယံ အဘိညာယ ကမုဒ္ဒိသေယျံ. ပထေ ဓာဝန္တိယာ ပတိ, ဧကံသံ အဇိနံ ကတွာ, ပါဒေသု သိရသာ ပတိ. ဂိရိံ စဏ္ဍောရဏံ ပတီ’’တိ ဧဝမာဒယော. ဧတ္ထ သယံသဒ္ဒဒွယံ နာမနိပါတဝသေန ပတိသဒ္ဒတ္တယံ နာမာချာတောပသဂ္ဂဝသေန အသမာနပဒဇာတိကန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. असमान पदजाती (शब्दांच्या जाती) असण्याबाबत— 'हत्ती स्वतः समाहित असतो (सयं समाहितो नागो), मी स्वतः अभिज्ञा प्राप्त करून कोणाला उद्देशून उपदेश करू? (सयं अभिञ्ञाय कम्मुद्दिसेय्यं). रस्त्यावर धावणाऱ्या स्त्रीचा पती (पथे धावन्तिया पति), एका खांद्यावर मृगचर्म धारण करून, पायांवर डोके ठेवून पडला (पादेसु सिरसा पति). चंडोरण पर्वताचा स्वामी (गिरिं चण्डोरणं पति)' इत्यादी. येथे 'सयं' (sayaṃ) हा शब्दद्वय नाम आणि निपात या रूपाने, आणि 'पति' (pati) हा शब्दत्रय नाम, आख्यात (क्रियापद) आणि उपसर्ग या रूपाने असमान पदजातीचे (भिन्न शब्दजातीचे) समजावे. ဣမိနာ နယေန သဗ္ဗတ္ထ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဧဝံ သာသနသ္မိံ ကေစိ သဒ္ဒါ အညမညံ သမာနသုတိကာ သမာနာပိ အသမာနတ္ထာ အသမာနပဝတ္တိနိမိတ္တာ အသမာနလိင်္ဂါ အသမာနဝိဘတ္တိကာ အသမာနဝစနကာ အသမာနန္တာ အသမာနကာလိကာ အသမာနပဒဇာတိကာ စ ဘဝန္တိ. ဧတာဒိသေသု သဒ္ဒေသု ယော ကြိယာပဒတ္တံ ပကာသေတိ, န သော နာမိကပဒတ္တံ. ယော စ နာမိကပဒတ္တံ ပကာသေတိ, န သော ကြိယာပဒတ္တံ. ဧဝံ သန္တေပိ သုတိသာမညတော ဧကတ္တေန ဂဟေတွာ အတ္ထုဒ္ဓါရော ကရဏီယောတိ ယထာဝုတ္တကြိယာပဒါနံ နာမပဒေဟိ သမာနသုတိကာနံ ဘောတိသဒ္ဒ ဘဝေ သဒ္ဒါနမတ္ထုဒ္ဓါရံ ဝဒါမ. या पद्धतीने सर्वत्र विस्तार करावा. अशा प्रकारे बुद्धशासनात काही शब्द परस्परांशी समान उच्चार असणारे असूनही, असमान अर्थाचे, असमान प्रवृत्ती-निमित्ताचे, असमान लिंगाचे, असमान विभक्तीचे, असमान वचनाचे, असमान अंताचे, असमान काळाचे आणि असमान पदजातीचे असतात. अशा शब्दांमध्ये जो क्रियापदत्व प्रकट करतो, तो नामपदत्व प्रकट करत नाही; आणि जो नामपदत्व प्रकट करतो, तो क्रियापदत्व प्रकट करत नाही. असे असूनही, केवळ समान उच्चारामुळे त्यांना एक मानून अर्थाचा उद्धार (स्पष्टीकरण) केला पाहिजे, म्हणून नामपदांशी समान उच्चार असणाऱ्या पूर्वोक्त क्रियापदांपैकी 'भोति' (bhoti) आणि 'भवे' (bhave) या शब्दांच्या अर्थाचा उद्धार आम्ही सांगतो. ကထံ? ဘောတိသဒ္ဒေါ ကတ္တုယောဂေ ကြိယာပဒံ, ကြိယာယောဂေ နာမိကပဒံ, တသ္မာ သော ဒွီသု အတ္ထေသု ဝတ္တတိ ကြိယာပဒတ္ထေ နာမိကပဒတ္ထေ စ. တတ္ထ ကြိယာပဒတ္ထေ ဝတ္တမာနဝသေန, နာမိကပဒတ္ထေ ပနာလပနဝသေန. ကြိယာပဒတ္ထေ တာဝ ‘‘ဧကော ဘောတိ’’, နာမိကပဒတ္ထေ ‘‘မာ ဘောတိ ပရိဒေဝေသိ’’. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – कसे? 'भोति' (bhoti) हा शब्द कर्त्याच्या योगात क्रियापद असतो आणि क्रियापदाच्या योगात नामपद असतो. म्हणून तो क्रियापदाच्या अर्थात आणि नामपदाच्या अर्थात अशा दोन्ही अर्थांत वापरला जातो. त्यापैकी क्रियापदाच्या अर्थात वर्तमानकाळाच्या रूपाने, तर नामपदाच्या अर्थात संबोधनाच्या रूपाने (आलपन) वापरला जातो. क्रियापदाच्या अर्थात जसे— 'एको भोति' (एक होतो), आणि नामपदाच्या अर्थात जसे— 'मा भोति परिदेवेसि' (हे आदरणीय स्त्री, शोक करू नकोस). याविषयी असे म्हटले आहे— ဘာဝေ နာမပဒတ္ထေ စ, အာလပနဝိသေသိတေ; ဣမေသု ဒွီသု အတ္ထေသု, ဘောတိသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. भाव (क्रियापद) आणि संबोधनाने विशेषित अशा नामपदाच्या अर्थात; या दोन अर्थांमध्ये 'भोति' (bhoti) हा शब्द प्रवृत्त होतो. ဘဝေသဒ္ဒေါ [Pg.45] ပန ‘‘ဘဝါမီ’’တိမဿ ဝတ္တမာနာဝိဘတ္တိယုတ္တဿ သဒ္ဒဿတ္ထေပိ ဝတ္တတိ. ‘‘ဘဝါမီ’’တိမဿ ပဉ္စမီဝိဘတ္တိယုတ္တဿ သဒ္ဒဿ အာဏတျာသီသနတ္ထေသုပိ ဝတ္တတိ. ‘‘ဘဝေယျာမီ’’တိမဿ သတ္တမီဝိဘတ္တိသဟိတဿ သဒ္ဒဿ အနုမတိပရိကပ္ပတ္ထေသုပိ ဝတ္တတိ. တတြိဒံ ပဌမတ္ထဿ သာဓကံ အာဟစ္စဝစနံ – परंतु 'भवे' (bhave) हा शब्द 'भवामि' (मी होतो) या वर्तमानकाळाच्या विभक्तीने युक्त असलेल्या शब्दाच्या अर्थातही वापरला जातो. 'भवामि' (मी होवो) या पंचमी विभक्तीने (आज्ञार्थ) युक्त असलेल्या शब्दाच्या आज्ञा आणि आशीर्वाद या अर्थांतही वापरला जातो. 'भवेय्यं' (मी व्हावे) या सप्तमी विभक्तीने (विध्यर्थ) युक्त असलेल्या शब्दाच्या अनुमती आणि परिकल्पना (संभावना) या अर्थांतही वापरला जातो. त्यापैकी पहिल्या अर्थाचे साधक असणारे हे प्रत्यक्ष वचन आहे— ‘‘ဒေဝါနံ အဓိကော ဟောမိ, ဘဝါမိ မနုဇာဓိပေါ; ရူပလက္ခဏသမ္ပန္နော, ပညာယ အသမော ဘဝေ’’တိ. 'मी देवांपेक्षा श्रेष्ठ होतो, मनुष्यांचा राजा होतो; रूप आणि लक्षणांनी संपन्न असा मी प्रज्ञेमध्ये अतुलनीय होतो (भवे).' အယံ ပန သဗ္ဗေသံ တေသမတ္ထာနံ သာဓိကာ အမှာကံ ဂါထာရစနာ – परंतु त्या सर्व अर्थांचे साधन करणारी (सिद्ध करणारी) आमची ही गाथारचना आहे— ‘‘သုခီ ဘဝတိ ဧသော စ, အဟဉ္စာပိ သုခီ ဘဝေ; သုခီ ဘဝတု ဧသော စ, အဟဉ္စာပိ သုခီ ဘဝေ. 'हा देखील सुखी होतो आणि मी देखील सुखी होतो (भवे); हा देखील सुखी होवो आणि मी देखील सुखी होवो (भवे). ဣမာယ ဗုဒ္ဓပူဇာယ, ဘဝန္တု သုခိတာ ပဇာ; ဘဝေ’ဟဉ္စ သုခပ္ပတ္တော, သာမစ္စော သဟ ဉာတိဘိ. या बुद्धपूजेने सर्व प्रजा सुखी होवोत; आणि मी माझ्या अमात्य व नातेवाईकांसह सुख प्राप्त करणारा होवो (भवे). သုခီ ဘဝေယျ ဧသော စ, အဟဉ္စာပိ သုခီ ဘဝေ; သုခီ ဘဝေယျ စေ ဧသော, အဟဉ္စာပိ သုခီ ဘဝေ’’တိ. हा देखील सुखी व्हावा आणि मी देखील सुखी व्हावे (भवे); जर हा सुखी झाला, तर मी देखील सुखी व्हावे (भवे).' ဣစ္စေဝံ – अशा प्रकारे— ဝတ္တမာနာယ ပဉ္စမျံ, သတ္တမျဉ္စ ဝိဘတ္တိယံ; ဧတေသု တီသု ဌာနေသု, ဘဝေသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. वर्तमानकाळ, पंचमी आणि सप्तमी विभक्तीमध्ये; या तीन प्रसंगांत 'भवे' (bhave) हा शब्द प्रवृत्त होतो. ဧကဓာ ဝတ္တမာနာယံ, ပဉ္စမီသတ္တမီသု စ; ဒွေဓာ ဒွေဓာတိမဿတ္ထံ, ပဉ္စဓာ ပရိဒီပယေ. वर्तमानकाळात एका प्रकारे, आणि पंचमी व सप्तमीमध्ये दोन-दोन प्रकारे, अशा प्रकारे याचा पाच प्रकारचा अर्थ स्पष्ट करावा. ဒွေဓာ ဝါ ဝတ္တမာနာယ-မာဒိပုရိသဝါစကော; အတ္ထော ‘‘ဘဝေ’’တိ ဧတဿ, ‘‘ဘဝတီ’’တိပိယုဇ္ဇတိ. किंवा वर्तमानकाळात दोन प्रकारे—प्रथम पुरुष आणि उत्तम पुरुष वाचक असा 'भवे' (bhave) या शब्दाचा अर्थ 'भवति' (bhavati) आणि 'भवामि' (bhavāmi) असा देखील योजला जातो. ဣဒါနိ ပန ဧတဿ, ဝုတ္တဿတ္ထဿ သာဓကံ; ဧတ္ထ ပါဠိပ္ပဒေသံ တု, အာဟရိဿံ သုဏာထ မေ. आता या सांगितलेल्या अर्थाचे साधक असणारे, येथील पाळि वचन मी सादर करतो, ते माझ्याकडून ऐका. ကော’ယံ [Pg.46] မဇ္ဈေသမုဒ္ဒသ္မိံ, အပဿံ တီရမာယုဟေ; ကံ တွံ အတ္ထဝသံ ဉတွာ, ဧဝံ ဝါယမသေ ဘုသံ. 'किनारा न दिसताही समुद्राच्या मध्यभागी हातपाय मारणारा (प्रयत्न करणारा) हा कोण आहे? कोणत्या प्रयोजनाचा विचार करून तू असा तीव्र प्रयत्न करत आहेस?' နိသမ္မ ဝတ္တံ လောကဿ, ဝါယာမဿ စ ဒေဝတေ; တသ္မာ မဇ္ဈေသမုဒ္ဒသ္မိံ, အပဿံ တီရမာယုဟေ. 'हे देवते, जगाची रीत आणि प्रयत्नाचे महत्त्व जाणून घेऊन, म्हणूनच मी किनारा न दिसताही समुद्राच्या मध्यभागी हातपाय मारत आहे (प्रयत्न करत आहे).' အဿံ ပုရိမဂါထာယံ, ‘‘အာယုဟေ’’တိပဒဿ ဟိ; ‘‘အာယူဟတီ’’တိ အတ္ထောတိ, ဝိညာတဗ္ဗော ဝိဘာဝိနာ. या पहिल्या गाथेत 'आयुहे' (āyuhe) या पदाचा अर्थ 'आयूहिति' (āyūhati - तो प्रयत्न करतो) असा आहे, हे विद्वानाने जाणावे. ဝိဘတ္တိယာ ဝိပလ္လာသ-ဝသေနာယံ သမီရိတော; ဝတ္တမာနေ သတ္တမီတိ, တိဿေကာရဝသေန ဝါ. हा प्रयोग विभक्तीच्या विपर्यासाने (बदलाने) म्हटला गेला आहे, किंवा वर्तमानकाळात सप्तमी विभक्तीच्या 'ए' (e) कार प्रत्ययामुळे असे झाले आहे. ပစ္ဆိမာယ စ ဂါထာယံ, ‘‘အာယုဟေ’’တိပဒဿ တု; ‘‘အာယူဟာမီ’’တိ အတ္ထောတိ, သဒ္ဒတ္ထညူ ဝိဘာဝယေ. आणि नंतरच्या गाथेत 'आयुहे' (āyuhe) या पदाचा अर्थ 'आयूहामि' (āyūhāmi - मी प्रयत्न करतो) असा आहे, हे शब्दार्थ जाणणाऱ्या विद्वानाने स्पष्ट करावे. တထာ ‘‘ဘဝေ’’တိဧတဿ, ဝတ္တမာနာဝိဘတ္တိယံ; ‘‘ဘဝတီ’’တိ, ‘‘ဘဝါမီ’’တိ, စတ္ထံ ဒွေဓာ ဝိဘာဝယေ. त्याचप्रमाणे 'भवे' (bhave) या शब्दाचा वर्तमानकाळात 'भवति' (bhavati) आणि 'भवामि' (bhavāmi) असा दोन प्रकारचा अर्थ स्पष्ट करावा. ဧဝံဝိဓေသု အညေသု, ပါဌေသုပိ အယံ နယော; နေတဗ္ဗော နယဒက္ခေန, နယသာဂရသာသနေ. अशा प्रकारच्या इतर पाठांमध्ये देखील हाच नियम नय-सागरासारख्या बुद्धशासनात नय-कुशल विद्वानाने लावावा. ဧဝမယံ ဘဝေသဒ္ဒေါ ပဉ္စသု ဆသု ဝါ ကြိယာပဒတ္ထေသု ပဝတ္တတိ. တထာ သတ္တမီဝိဘတျန္တနာမိကပဒဿ ဝုဒ္ဓိသံသာရကမ္မဘဝူပပတ္တိဘဝသင်္ခါတေသု အတ္ထေသုပိ. တထာ ဟိ ‘‘အဘဝေ နန္ဒတိ တဿ, ဘဝေ တဿ န နန္ဒတီ’’တိအာဒီသု ဝုဒ္ဓိမှိ. ‘‘ဘဝေ ဝိစရန္တော’’တိအာဒီသု သံသာရေ. ‘‘ဘဝေ ခေါ သတိ ဇာတိ ဟောတိ, ဇာတိပစ္စယာ ဇရာမရဏ’’န္တိအာဒီသု ကမ္မဘဝေ. ‘‘ဧဝံ ဘဝေဝိဇ္ဇမာနေ’’တိအာဒီသု ဥပပတ္တိဘဝေတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣမိနာ နယေန ဘူဓာတုတော နိပ္ဖန္နာနံ အညတောပိ အညေသံ ကြိယာပဒါနံ ယထာသမ္ဘဝမတ္ထော ဥဒ္ဓရိတဗ္ဗော. अशा प्रकारे हा 'भवे' (bhave) शब्द पाच किंवा सहा क्रियापदांच्या अर्थांत प्रवृत्त होतो. तसेच सप्तमी विभक्तीने अंत होणाऱ्या नामपदाच्या वृद्धी (विकास), संसार, कर्मभव आणि उपपत्तिभव (पुनर्जन्म) म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या अर्थांतही वापरला जातो. जसे की— 'अभावे नन्दति तस्स, भवे तस्स न नन्दति' (त्याच्या अवनतीमध्ये तो आनंदित होतो, त्याच्या वृद्धीमध्ये तो आनंदित होत नाही) इत्यादींमध्ये 'वृद्धी' या अर्थात. 'भवे विचरन्तो' (संसारात फिरणारा) इत्यादींमध्ये 'संसार' या अर्थात. 'भवे खो सति जाति होति, जातिपच्चया जरामरणं' (भव असतानाच जन्म होतो, जन्माच्या प्रत्ययाने जरा-मरण होते) इत्यादींमध्ये 'कर्मभव' या अर्थात. 'एवं भवे विज्जमाने' (अशा प्रकारे भव विद्यमान असताना) इत्यादींमध्ये 'उपपत्तिभव' या अर्थात समजावे. या पद्धतीने 'भू' धातूपासून निष्पन्न झालेल्या इतरही क्रियापदांचा अर्थ यथासंभव स्पष्ट करावा. အာချာတတ္ထမှိမေ [Pg.47] အတ္ထာ, န လာတဗ္ဗာ ကုဒါစနံ; အတ္ထုဒ္ဓါရဝသေနေတေ, ဥဒ္ဓဋာ နာမတော ယတော. हे अर्थ क्रियापदाच्या अर्थावरून कधीही घेऊ नयेत; कारण हे अर्थाच्या स्पष्टीकरणाच्या वशात नामावरून उद्धृत केले गेले आहेत. ဣဒမေတ္ထ သင်္ခေပတော အတ္ထုဒ္ဓါရနယနိဒဿနံ. हे येथे संक्षेपाने अर्थाच्या स्पष्टीकरणाच्या पद्धतीचे उदाहरण आहे. အတ္ထသဒ္ဒစိန္တာယံ ပန ဧဝမုပလက္ခေတဗ္ဗံ – ‘‘ဘဝန္တေ, ပရာဘဝန္တေ, ပရာဘဝေ’’ဣစ္စာဒယော ဂစ္ဆတိ ဂစ္ဆံ ဂစ္ဆတောသဒ္ဒါဒယော ဝိယ ဝိသေသသဒ္ဒါ, န ယာစနောပတာပနတ္ထာဒိဝါစကော နာထတိသဒ္ဒေါ ဝိယ, န စ ရာဇဒေဝတာဒိဝါစကော ဒေဝသဒ္ဒေါ ဝိယ သာမညသဒ္ဒါ. ယေ စေတ္ထ ဝိသေသသဒ္ဒါ, တေ သဗ္ဗကာလံ ဝိသေသသဒ္ဒါဝ. ယေ စ သာမညသဒ္ဒါ, တေပိ သဗ္ဗကာလံ သာမညသဒ္ဒါဝ. अर्थ आणि शब्दाच्या चिंतनामध्ये मात्र असे लक्षात घेतले पाहिजे – 'भवन्ते', 'पराभवन्ते', 'पराभवे' इत्यादी शब्द हे 'गच्छति', 'गच्छं', 'गच्छतो' इत्यादी शब्दांप्रमाणे 'विशेष शब्द' आहेत; याचना करणे, पीडा देणे इत्यादी अर्थ दर्शवणाऱ्या 'नाथति' शब्दासारखे किंवा राजा, देवता इत्यादी अर्थ दर्शवणाऱ्या 'देव' शब्दासारखे 'सामान्य शब्द' नाहीत. आणि जे येथे विशेष शब्द आहेत, ते सर्वकाळ विशेष शब्दच राहतात. आणि जे सामान्य शब्द आहेत, तेही सर्वकाळ सामान्य शब्दच राहतात। တတြ ဂစ္ဆတီတိအာဒီနံ ဝိသေသသဒ္ဒတာ ဧဝံ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ – ဂစ္ဆတီတိ ဧကံ နာမပဒံ, ဧကမာချာတံ. တထာ ဂစ္ဆန္တိ ဧကံ နာမပဒံ, ဧကမာချာတံ. ဂစ္ဆတောတိ ဧကော ကိတန္တော, အပရော ရူဠှီသဒ္ဒေါ. သတိပိ ဝိသေသသဒ္ဒတ္တေ သဒိသတ္တာ သုတိသာမညတော တဗ္ဗိသယံ ဗုဒ္ဓိံ နုပ္ပာဒေတိ ဝိနာဝ’တ္ထပ္ပကရဏသဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓေန. တထာ ဟိ သဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓေန ‘‘ဂစ္ဆတိ ပတိဋ္ဌိတ’’န္တိ ဝုတ္တေ သတ္တမျန္တံ နာမပဒန္တိ ဝိညာယတိ. ‘‘ဂစ္ဆတိ တိဿော’’တိ ဝုတ္တေ ပနာချာတန္တိ. တထာ ‘‘သ ဂစ္ဆံ န နိဝတ္တတီ’’တိ ဝုတ္တေ ပဌမန္တံ နာမပဒန္တိ ဝိညာယတိ. ‘‘ဂစ္ဆံ ပုတ္တနိဝေဒကော’’တိ ဝုတ္တေ အာချာတန္တိ ဝိညာယတိ. ‘‘ဂစ္ဆတော ဟယတော ပတိတော’’တိ ဝုတ္တေ ကိတန္တောတိ ဝိညာယတိ. ‘‘ဂစ္ဆတော ပဏ္ဏပုပ္ဖာနိ ပတန္တီ’’တိ ဝုတ္တေ ရုက္ခဝါစကော ရူဠှီသဒ္ဒေါတိ. ဣတိ ဝိသေသသဒ္ဒါနံ အာချာတနာမာနံ နာမာချာတေဟိ သမာနသုတိကာနံ အတ္ထာဘိသမ္ဗန္ဓာဒီသု ယော ကောစိ အတ္ထဝိသေသဉာပကော သမ္ဗန္ဓော အဝဿမိစ္ဆိတဗ္ဗော. ဧဝံ ‘‘ဂစ္ဆတီ’’တိအာဒီနံ အာချာတနာမတ္တာဒိဝသေန ပစ္စေကံ ဌိတာနံ ဧကေကတ္ထဝါစကာနံ ဝိသေသသဒ္ဒတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. त्यात 'गच्छति' इत्यादी शब्दांची 'विशेष-शब्दता' याप्रमाणे पाहिली पाहिजे – 'गच्छति' हे एक नामपद आहे आणि एक आख्यातपद आहे. तसेच 'गच्छन्ति' हे एक नामपद आहे आणि एक आख्यातपद आहे. 'गच्छतो' हा एक कृदन्त शब्द आहे आणि दुसरा रूळ्ही शब्द आहे. विशेष शब्द असूनही, समान उच्चारामुळे संदर्भ आणि इतर शब्दांच्या संबंधाशिवाय त्या विषयाचे ज्ञान उत्पन्न होत नाही. कारण, इतर शब्दांच्या संबंधाने जेव्हा 'गच्छति पतिट्ठितं' असे म्हटले जाते, तेव्हा ते सप्तम्यन्त नामपद आहे असे समजते. परंतु जेव्हा 'गच्छति तिस्सो' असे म्हटले जाते, तेव्हा ते आख्यातपद आहे असे समजते. तसेच जेव्हा 'स गच्छं न निवत्तति' असे म्हटले जाते, तेव्हा ते प्रथमान्त नामपद आहे असे समजते. 'गच्छं पुत्तनिवेदको' असे म्हटले जाते, तेव्हा ते आख्यातपद आहे असे समजते. 'गच्छतो हयतो पतितो' असे म्हटले जाते, तेव्हा ते कृदन्त आहे असे समजते. 'गच्छतो पण्णपुप्फानि पतन्ति' असे म्हटले जाते, तेव्हा तो वृक्षाचा वाचक असलेला रूळ्ही शब्द आहे असे समजते. अशा प्रकारे, समान उच्चार असणाऱ्या आख्यात आणि नाम रूपांच्या विशेष शब्दांमध्ये, अर्थाच्या संबंधासाठी कोणताही विशिष्ट अर्थ दर्शवणारा संबंध असणे आवश्यक मानले पाहिजे. अशा प्रकारे, 'गच्छति' इत्यादी शब्दांची आख्यात, नाम इत्यादी रूपाने स्वतंत्रपणे स्थित असलेल्या आणि एकेका अर्थाचे वाचक असलेल्या शब्दांची 'विशेष-शब्दता' समजली पाहिजे। ‘‘နာထတိ [Pg.48] ဒေဝေါ’’တိအာဒီနံ ပန အာချာတနာမာနံ နာမာချာတေဟိ အသမာနသုတိကာနံ အနေကတ္ထဝါစကာနံ သာမညသဒ္ဒတာ ဧဝ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. အတ္ထသမ္ဗန္ဓာဒီသု ဟိ ဝိနာ ယေန ကေနစိ သမ္ဗန္ဓေန ‘‘နာထတီ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ယာစတီ’’တိ ဝါ ‘‘ဥပတာပေတီ’’တိ ဝါ ‘‘ဣဿရိယံ ကရောတီ’’တိ ဝါ ‘‘အာသီသတီ’’တိ ဝါ အတ္ထော ပဋိဘာတိ, တထာ ‘‘ဒေဝေါ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘မေဃော’’တိ ဝါ ‘‘အာကာသော’’တိ ဝါ ‘‘ရာဇာ’’တိ ဝါ ‘‘ဒေဝတာ’’တိ ဝါ ‘‘ဝိသုဒ္ဓိဒေဝေါ’’တိ ဝါ အတ္ထော ပဋိဘာတိ. ယဒါ ပန သဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓေန ‘‘နာထတိ သုပ္ပဋိပတ္တိ’’န္တိ ဝုတ္တေ တဒါ ‘‘နာထတီ’’တိ ကြိယာပဒဿ ‘‘ယာစတီ’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ, ‘‘နာထတိ သဗ္ဗကိလေသေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ဥပတာပေတီ’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. ‘‘နာထတိ သကစိတ္တေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ဣဿရိယံ ကရောတီ’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. ‘‘နာထတိ လောကဿ ဟိတ’’န္တိ ဝုတ္တေ ‘‘အာသီသတီ’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. တထာ ‘‘ဒေဝေါ ဂဇ္ဇတီ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ဒေဝေါ’’တိ နာမပဒဿ ‘‘မေဃော’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. ‘‘ဝိဒ္ဓေါ ဝိဂတဝလာဟကော ဒေဝေါ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘အာကာသော’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. ‘‘ပိဝတု ဒေဝေါ ပါနီယ’’န္တိ ဝုတ္တေ ‘‘ရာဇာ’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. ‘‘ဒေဝေါ ဒေဝကာယာ စဝတိ အာယုသင်္ခယာ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ဒေဝတာ’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. ‘‘ဒေဝါတိဒေဝေါ သတပုညလက္ခဏော’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ဝိသုဒ္ဓိဒေဝေါ’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. ဣမိနာ နယေန အညေပိ သာမညသဒ္ဒါ ဉာတဗ္ဗာ. परंतु 'नाथति', 'देवो' इत्यादी आख्यात आणि नाम रूपांच्या, नाम व आख्यातांशी असमान उच्चार असणाऱ्या आणि अनेक अर्थांचे वाचक असणाऱ्या शब्दांची 'सामान्य-शब्दता' पाहिली पाहिजे. कारण अर्थाच्या संबंधाशिवाय, कोणत्याही संबंधाविना जेव्हा केवळ 'नाथति' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'याचना करतो' किंवा 'पीडा देतो' किंवा 'ऐश्वर्य गाजवतो' किंवा 'आकांक्षा करतो' असा अर्थ प्रतीत होतो. तसेच जेव्हा 'देवो' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'मेघ', 'आकाश', 'राजा', 'देवता' किंवा 'विशुद्धिदेव' असा अर्थ प्रतीत होतो. परंतु जेव्हा इतर शब्दांच्या संबंधाने 'नाथति सुप्पटिपत्तिं' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'नाथति' या क्रियापदाचा 'याचना करतो' असा अर्थ समजतो. 'नाथति सब्बकिलेसे' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'पीडा देतो' असा अर्थ समजतो. 'नाथति सकचित्ते' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'ऐश्वर्य गाजवतो' असा अर्थ समजतो. 'नाथति lokassa hita' (नाथति लोकस्स हितं) असे म्हटले जाते, तेव्हा 'आकांक्षा करतो' असा अर्थ समजतो. तसेच 'देवो गज्जति' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'देवो' या नामपदाचा 'मेघ' असा अर्थ समजतो. 'विद्धो विगतवलाहको देवो' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'आकाश' असा अर्थ समजतो. 'पिवतु देवो पानीयं' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'राजा' असा अर्थ समजतो. 'देवो देवकाया चवति आयुसंखया' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'देवता' असा अर्थ समजतो. 'देवातिदेवो सतपुञ्ञलक्खणो' असे म्हटले जाते, तेव्हा 'विशुद्धिदेव' असा अर्थ समजतो. या पद्धतीने इतरही सामान्य शब्द समजून घ्यावेत। သဗ္ဗမေတံ ဉတွာ ယထာ အတ္ထော သဒ္ဒေန, သဒ္ဒေါ စတ္ထေန န ဝိရုဇ္ဈတိ, တထာတ္ထသဒ္ဒါ စိန္တနီယာ. တတြိဒံ ဥပလက္ခဏမတ္တံ စိန္တာကာရနိဒဿနံ – ‘‘အတ္ထကုသလာ ဘဝန္တေ’’တိ ဝါ ‘‘ကိစ္စာနိ ဘဝန္တေ’’တိ ဝါ ဝုတ္တေ ‘‘ဘဝန္တေ’’တိ ဣဒံ ‘‘ဘဝန္တီ’’တိမိနာ သမာနတ္ထမာချာတပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ဘဝန္တေ ပဿာမီ’’တိ ဝါ ‘‘ဣစ္ဆာမီ’’တိ ဝါ ဝုတ္တေ ဥပယောဂတ္ထဝံ [Pg.49] နာမပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ဘဝန္တေ ဇနေ ပသံသတီ’’တိ ဝါ ‘‘ကာမေတီ’’တိ ဝါ ဝုတ္တေ ပစ္စတ္တောပယောဂတ္ထဝန္တာနိ ဒွေ နာမပဒါနီတိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘စောရာ ပရာဘဝန္တေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ပရာဘဝန္တေ’’တိ ဣဒံ ‘‘ပရာဘဝန္တီ’’တိမိနာ သမာနတ္ထမာချာတိကပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ပရာဘဝန္တေ ဇနာ ဣစ္ဆန္တိ အမိတ္တာန’’န္တိ ဝုတ္တေ ‘‘ပရာဘဝန္တေ’’တိ ဣမာနိ ဥပယောဂပစ္စတ္တတ္ထဝန္တာနိ ဒွေ နာမပဒါနီတိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ဧသော ပရာဘဝေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ပရာဘဝေ’’တိ ဣဒံ ‘‘ပရာဘဝေယျာ’’တိမိနာ သမာနတ္ထမာချာတပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ဧတေ ပရာဘဝေ လောကေ, ပဏ္ဍိတော သမဝေက္ခိယာ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ပရာဘဝေ’’တိ ဣဒံ ဥပယောဂတ္ထဝံ ဗဟုဝစနံ နာမပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ပရာဘဝေ သတီ’’တိ ဝုတ္တေ ဘာဝလက္ခဏဘုမ္မတ္ထေကဝစနကံ နာမပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘တုမှေ မေ ပသာဒါ သမ္ဘဝေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘သမ္ဘဝေ’’တိ ဣဒံ ‘‘သမ္ဘဝထာ’’တိမိနာ သမာနတ္ထမာချာတပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ဧဟိ တွံ သမ္ဘဝဝှေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘သမ္ဘဝဝှေ’’တိ ဣဒံ သမ္ဘဝါယ နာမ ဣတ္ထိယာ ဝါစကံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ သာလပနံ နာမိကပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ဧဟိ တွံ သမ္ဘဝဝှေပတိဋ္ဌိတ’’န္တိ ဝုတ္တေ သမ္ဘဝနာမကဿ ပုရိသဿ ဝါစကံ ပုလ္လိင်္ဂံ ဘုမ္မဝစနန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. हे सर्व जाणून घेऊन, ज्याप्रमाणे अर्थाचा शब्दाशी आणि शब्दाचा अर्थाशी विरोध होणार नाही, त्याप्रमाणे अर्थ आणि शब्दांचे चिंतन केले पाहिजे. येथे चिंतनाच्या पद्धतीचे केवळ एक उदाहरण दिले आहे – 'अत्थकुसला भवन्ते' किंवा 'किच्चानि भवन्ते' असे म्हटले असता, 'भवन्ते' हे 'भवन्ति' या शब्दाशी समान अर्थ असणारे आख्यातपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'भवन्ते पस्सामि' किंवा 'इच्छामि' असे म्हटले असता, ते द्वितीया विभक्तीचा अर्थ असणारे नामपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'भवन्ते जने पसंसति' किंवा 'कामेति' असे म्हटले असता, ती प्रथमा आणि द्वितीया विभक्तीचा अर्थ असणारी दोन नामपदे आहेत, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'चोरा पराभवन्ते' असे म्हटले असता, 'पराभवन्ते' हे 'पराभवन्ति' या शब्दाशी समान अर्थ असणारे आख्यातपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'पराभवन्ते जना इच्छन्ति अमित्तानं' असे म्हटले असता, 'पराभवन्ते' ही द्वितीया आणि प्रथमा विभक्तीचा अर्थ असणारी दोन नामपदे आहेत, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'एसो पराभवे' असे म्हटले असता, 'पराभवे' हे 'पराभवेय्य' या शब्दाशी समान अर्थ असणारे आख्यातपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'एते पराभवे लोके, पण्डितो समवेक्खिया' असे म्हटले असता, 'पराभवे' हे द्वितीया विभक्तीचा अर्थ असणारे बहुवचनी नामपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'पराभवे सति' असे म्हटले असता, ते भावलक्षण सप्तमी विभक्तीचे एकवचनी नामपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'तुम्हे मे पसादा सम्भवे' असे म्हटले असता, 'सम्भवे' हे 'सम्भवथ' या शब्दाशी समान अर्थ असणारे आख्यातपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'एहि त्वं सम्भवव्हे' असे म्हटले असता, 'सम्भवव्हे' हे 'सम्भवा' नावाच्या स्त्रीचे वाचक असलेले स्त्रीलिंगी संबोधन नामपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे. 'एहि त्वं सम्भवव्हेपतिट्ठितं' असे म्हटले असता, ते 'सम्भव' नावाच्या पुरुषाचे वाचक असलेले पुल्लिंगी सप्तमी विभक्तीचे रूप आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्दाचे चिंतन केले पाहिजे। ‘‘ဝရုဏော ဗြဟ္မဒေဝေါ စ, အဟေသုံ အဂ္ဂသာဝကာ; သမ္ဘဝေါ နာမုပဋ္ဌာကော, ရေဝတဿ မဟေသိနော’’တိ – 'वरुण आणि ब्रह्मदेव हे मुख्य श्रावक होते; आणि महर्षी रेवतांचे उपस्थायक 'संभव' नावाचे होते' – ဟိ ပါဠိ. ‘‘ဓမ္မာ ပါတုဘဝန္တေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ပါတုဘဝန္တေ’’တိ ဣဒံ ‘‘ပါတုဘဝန္တီ’’တိမိနာ သမာနတ္ထံ သနိပါတမာချာတပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ပါတု ဘဝန္တေ ဇနေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘တေ ဇနေ ဘဝံ ရက္ခတူ’’တိ အတ္ထဝါစကာနိ အာချာတကိတန္တသဗ္ဗနာမိကပဒါနီတိ [Pg.50] ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ပါတုဘဝသေ တွံ ဂုဏေဟီ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ပါတုဘဝသေ’’တိ ဣဒံ ‘‘ပါတုဘဝသီ’’တိမိနာ သမာနတ္ထမာချာတပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘ပါတုဘဝသေ ဂုဏေ ယော တွ’’န္တိ ဝုတ္တေ ‘‘ပါတုဘဝါဟိ အတ္တနော ဂုဏဟေတု တွ’’န္တိ အတ္ထဝါစကာနိနိပါတယုတ္တာချာတနာမပဒါနီတိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘အဟမတ္တနော ဂုဏေဟိ ပါတုဘဝေ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ပါတုဘဝေ’’တိ ဣဒံ ‘‘ပါတုဘဝါမီ’’တိမိနာ သမာနတ္ထံ သနိပါတမာချာတပဒန္တိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ‘‘မံ ပါတု ဘဝေ ဣဒံ ပုညကမ္မ’’န္တိ ဝုတ္တေ ‘‘မံ ရက္ခတု သံသာရေ ဣဒံ ပုညကမ္မ’’န္တိ အတ္ထဝါစကာနိ အာချာတနာမပဒါနီတိ ဧဝမတ္ထော စ သဒ္ဒေါ စ စိန္တနီယော. ဣမိနာ နယေန သဗ္ဗတ္ထ ယထာရဟမတ္ထသဒ္ဒါ စိန္တနီယာ. တတ္ထ သမာနသုတိကာနံ ကေသဉ္စိ သဒ္ဒါနံ ‘‘န တေသံ ကောဋ္ဌေ ဩပေန္တိ. န တေသံ အန္တရာ ဂစ္ဆေ. သတ္တ ဝေါ လိစ္ဆဝီ အပရိဟာနီယေ ဓမ္မေ ဒေသေဿာမိ, ဣမေ တေ ဒေဝ သတ္တဝေါ, တွဉ္စ ဥတ္တမသတ္တဝေါ’’တိအာဒီသု သမာနသုတိကာနံ ဝိယ ဥစ္စာရဏဝိသေသော ဣစ္ဆနီယော. ဥစ္စာရဏဝိသေသေ ဟိ သတိ ပဒါနိ ပရိဗျတ္တာနိ, ပဒေသု ပရိဗျတ္တေသု အတ္ထော ပရိဗျတ္တော ဟောတိ, အတ္ထပရိဂ္ဂါဟကာနံ အတ္ထာဓိဂမော အကိစ္ဆော ဟောတိ, သုပရိသုဒ္ဓါဒါသတလေ ပဋိဗိမ္ဗဒဿနံ ဝိယ, သော စ ဂဟိတပုဗ္ဗသင်္ကေတဿ အတ္ထသမ္ဗန္ဓာဒီသု အညတရသ္မိံ ဉာတေယေဝ ဟောတိ, န ဣတရထာ. ဝုတ္တဉှေတံ ပေါရာဏေဟိ – ही पाळि (मूळ संहिता) आहे. 'धम्मा पातुभवन्ते' असे म्हटले असता, 'पातुभवन्ते' हे 'पातुभवन्ति' याच्याशी समान अर्थ असलेले, निपातयुक्त आख्यातपद (क्रियापद) आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्द या दोन्हीचा विचार केला पाहिजे. 'पातु भवन्ते जने' असे म्हटले असता, 'ते जने भवं रक्खतु' (त्या लोकांना पूजनीय व्यक्तीने वाचवावे) या अर्थाचे वाचक असलेले आख्यात, कृदन्त आणि सर्वनाम पद आहेत, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्द या दोन्हीचा विचार केला पाहिजे. 'पातुभवसे त्वं गुणेहि' असे म्हटले असता, 'पातुभवसे' हे 'पातुभवसि' याच्याशी समान अर्थ असलेले आख्यातपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्द या दोन्हीचा विचार केला पाहिजे. 'पातुभवसे गुणे यो त्वं' असे म्हटले असता, 'पातुभवाहि अत्तनो गुणहेतु त्वं' (तू स्वतःच्या गुणांच्या कारणाने प्रकट हो) या अर्थाचे वाचक असलेले, निपातयुक्त आख्यात आणि नाम पद आहेत, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्द या दोन्हीचा विचार केला पाहिजे. 'अहमत्तनो गुणेहि पातुभवे' असे म्हटले असता, 'पातुभवे' हे 'पातुभवामि' याच्याशी समान अर्थ असलेले, निपातयुक्त आख्यातपद आहे, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्द या दोन्हीचा विचार केला पाहिजे. 'मं पातु भवे इदं पुञ्ञकम्मं' असे म्हटले असता, 'मं रक्खतु संसारे इदं पुञ्ञकम्मं' (या पुण्यकर्माने माझे संसारात रक्षण करावे) या अर्थाचे वाचक असलेले आख्यात आणि नाम पद आहेत, अशा प्रकारे अर्थ आणि शब्द या दोन्हीचा विचार केला पाहिजे. या पद्धतीने सर्व ठिकाणी योग्यतेनुसार अर्थ आणि शब्दांचा विचार केला पाहिजे. तेथे समान उच्चार असणाऱ्या काही शब्दांच्या बाबतीत, जसे की 'न तेसं कोठ्ठे ओपेन्ति', 'न तेसं अन्तरा गच्छे', 'सत्त वो लिच्छवी अपरिहानीये धम्मे देसेस्सामि', 'इमे ते देव सत्तवो', 'त्वञ्च उत्तमसत्तवो' इत्यादींमध्ये, समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांप्रमाणेच विशिष्ट उच्चार (उच्चारणविशेष) अपेक्षित आहे. कारण विशिष्ट उच्चार केला असता पदे स्पष्ट होतात, पदे स्पष्ट झाली असता अर्थ स्पष्ट होतो, आणि अर्थ ग्रहण करणाऱ्यांना अर्थाचा बोध विनासायास होतो, जसे की अत्यंत स्वच्छ आरशाच्या पृष्ठभागावर प्रतिबिंब दिसणे. आणि तो (अर्थबोध) पूर्वसंकेत ग्रहण केलेल्या व्यक्तीला अर्थाचा संबंध इत्यादींपैकी काहीतरी माहीत असल्यासच होतो, अन्यथा नाही. म्हणूनच प्राचीन आचार्यांनी म्हटले आहे – ‘‘ဝိသယတ္တမနာပန္နာ, သဒ္ဒါ နေဝတ္ထဗောဓကာ; န ပဒမတ္တတော အတ္ထေ, တေ အညာတာ ပကာသကာ’’တိ. “विषयत्वाला (ज्ञानाचा विषय न बनलेले) प्राप्त न झालेले शब्द अर्थाचा बोध करून देत नाहीत; केवळ पदमात्रेवरून ते अज्ञात असताना अर्थाचा प्रकाश करत नाहीत.” ယဒိဒမေတ္ထ ဝုတ္တမမှေဟိ ‘‘ဥစ္စာရဏဝိသေသော ဣစ္ဆနီယော’’တိ. အတြာယမုစ္စာရဏဝိသေသဒီပနီ ဂါထာ သဟတ္ထပ္ပကာသနနယဒါနဂါထာယ. आम्ही येथे जे म्हटले आहे की 'विशिष्ट उच्चार अपेक्षित आहे', त्याविषयी विशिष्ट उच्चार स्पष्ट करणारी ही गाथा स्वतःच्या हाताने (हस्तसंकेताने) अर्थ स्पष्ट करण्याच्या पद्धतीचे प्रदर्शन करणाऱ्या गाथेसह आहे. ‘‘န [Pg.51] တေ သံ ကောဋ္ဌေ ဩပေန္တိ’’, ဣတိ ပါဌေ သုမေဓသော; ပဒံ ‘‘န တေ’’တိ ဆိန္ဒိတွာ, ‘‘သံ ကောဋ္ဌေ’’တိ ပဌေယျ ဝေ. 'न ते सं कोठ्ठे ओपेन्ति' या पाठात बुद्धिमान व्यक्तीने 'न ते' असे पद तोडून (विभक्त करून) 'सं कोठ्ठे' असा पाठ निश्चितपणे वाचावा. ‘‘သံ န ဩပေန္တိ ကောဋ္ဌေ တေ, ဘိက္ခူ’’တိ အတ္ထမီရယေ; ဧဝမိမေသု အညေသု, ပါဌေသုပိ အယံ နယော. 'ते भिक्खू स्वतःच्या कोठारात (धान्य) साठवून ठेवत नाहीत' असा अर्थ सांगावा. इतर पाठांच्या बाबतीतही हाच नियम लागू होतो. အထ ယံ ပနိဒမ္ပိ ဝုတ္တံ ‘‘ကေသဉ္စီ’’တိ, တံ ကိမတ္ထံ? ‘‘ဂစ္ဆတိ ပတိဋ္ဌိတံ, ဂစ္ဆတိ တိဿော, ဘဝန္တေ ပဿာမိ, အတ္ထကုသလာ ဘဝန္တေ, ဝဒန္တံ ဧကပေါက္ခရာ, ဝဒန္တံ ပဋိဝဒတီ’’တိအာဒီသု သမာနသုတိကာနမုစ္စာရဏဝိသေသော န လဗ္ဘတီတိ ဒဿနတ္ထံ. တသ္မာ ဣဒမေတ္ထ သလ္လက္ခေတဗ္ဗံ – ယတ္ထ သမာနသုတိကာနမုစ္စာရဏဝိသေသော လဗ္ဘတိ အတ္ထဝိသေသော စ ပဒါနံ ဝိဘာဂဝသေန ဝါ အဝိဘာဂဝသေန ဝါ, တတ္ထ ပယောဂေ သမာနသုတိကမေကစ္စံ ပဒံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. သေယျထိဒံ? ‘‘ဟေတု ဟေတုသမ္ပယုတ္တကာနံ ဓမ္မာနံ တံသမုဋ္ဌာနာနဉ္စ ရူပါနံ ဟေတုပစ္စယေန ပစ္စယော. သော တေန သဒ္ဓိံ ဘာသတိ, သောတေန ဝုယှတိ. ဘဝန္တေ ဇနေ ပသံသတိ, ဘဝန္တေ ပဿာမီ’’တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. ဧတ္ထ ‘‘ဟေတူ’’တိ ဤသကံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ‘‘ဟေတုသမ္ပယုတ္တာန’’န္တိ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. တထာ ‘‘သော’’တိ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ‘‘တေန သဒ္ဓိ’’န္တိ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. ‘‘ဘဝ’’န္တိ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ‘‘တေ ဇနေ’’တိ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. आता, जे हे देखील म्हटले आहे की 'काहींच्या बाबतीत', ते कशासाठी? 'गच्छति पतिट्ठितं', 'गच्छति तिस्सो', 'भवन्ते पस्सामि', 'अत्थकुसला भवन्ते', 'वदन्तं एकपोक्खरा', 'वदन्तं पटिवदति' इत्यादींमध्ये समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांचा विशिष्ट उच्चार आढळत नाही, हे दर्शवण्यासाठी. म्हणून येथे हे लक्षात घेतले पाहिजे – जेथे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांचा विशिष्ट उच्चार आढळतो आणि पदांच्या विभागामुळे (विग्रह) किंवा अविभागामुळे (संधी) अर्थाचा विशेष फरक पडतो, तेथे प्रयोगात समान उच्चार असणारे काही पद विभक्त करून (तोडून) उच्चारले पाहिजे. जसे की – 'हेतु हेतुसम्पयुत्तकानं धम्मानं तंसमुट्ठानानञ्च रूपानं हेतुपच्चयेन पच्चयो', 'सो तेन सद्धिं भासति', 'सोतेन वुय्हति', 'भवन्ते जने पसंसति', 'भवन्ते पस्सामि' इत्यादी प्रयोग. येथे 'हेतू' असे थोडे विभक्त करून 'हेतुसम्पयुत्तानं' असे उच्चारले पाहिजे. तसेच 'सो' असे विभक्त करून 'तेन सद्धिं' असे उच्चारले पाहिजे. 'भवं' असे विभक्त करून 'ते जने' असे उच्चारले पाहिजे. သေသံ ပန သမာနသုတိကံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ န ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. အဝိစ္ဆိန္ဒနီယသ္မိဉှိ ဌာနေ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ပဌိတဿ အတ္ထော ဒုဋ္ဌော ဟောတိ. ဧဝံ ပဒဝိဘာဂါဝိဘာဂဝသေန သမာနသုတိကာနမတ္ထုစ္စာရဏဝိသေသော ဝေဒိတဗ္ဗော. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘သော တေနာ’’တိအာဒီသု ဒွိပဒတ္ထဂ္ဂဟဏံ ဝိဘာဂေါ, ဧကပဒတ္ထဂ္ဂဟဏမဝိဘာဂေါတိ အဓိပ္ပေတော. ဧတ္ထ စ ဝိသုံ ဝဝတ္ထိတာနံ အသမာနသုတိကာနံ ဧကတော ကတွာ သမာနသုတိကဘာဝပရိကပ္ပနံ အတ္ထန္တရဝိညာပနတ္ထဉ္စေဝ ဥစ္စာရဏဝိသေသဒဿနတ္ထဉ္စ. န ဟိ ဧတာနိ [Pg.52] ‘‘သပ္ပော သပ္ပော’’တိအာဒီသု ဝိယ ဧကသ္မိံယေဝတ္ထေ သမာနသုတိကာနိ. ဧဝံ သန္တေပိ ဧကဇ္ဈကရဏေန လဒ္ဓံ သမာနသုတိလေသံ ဂဟေတွာ အတ္ထန္တရဝိညာပနတ္ထံ ဥစ္စာရဏဝိသေသဒဿနတ္ထဉ္စ ‘‘သမာနသုတိကာနီ’’တိ ဝုတ္တာနိ. ဧသ နယော အညတြာပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု. ဣဒမေတ္ထ သလ္လက္ခေတဗ္ဗံ – परंतु उर्वरित समान उच्चार असणारे शब्द विभक्त करून उच्चारू नयेत. कारण जेथे विभक्त करू नये अशा ठिकाणी विभक्त करून वाचल्यास अर्थ दूषित (चुकीचा) होतो. अशा प्रकारे, पदांच्या विभागामुळे आणि अविभागामुळे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांचा अर्थ आणि विशिष्ट उच्चार समजून घेतला पाहिजे. येथे 'सो तेन' इत्यादींमध्ये दोन पदांच्या अर्थाचे ग्रहण करणे म्हणजे 'विभाग' आणि एका पदाच्या अर्थाचे ग्रहण करणे म्हणजे 'अविभाग' असा अभिप्राय आहे. आणि येथे वेगवेगळ्या असलेल्या असमान उच्चार असणाऱ्या शब्दांना एकत्र करून समान उच्चार असण्याची कल्पना करणे हे केवळ दुसरा अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी आणि विशिष्ट उच्चार दर्शवण्यासाठीच आहे. कारण हे शब्द 'sapo sappo' (साप साप) इत्यादींप्रमाणे एकाच अर्थात समान उच्चार असणारे नाहीत. असे असूनही, एकत्र केल्याने प्राप्त झालेल्या समान उच्चाराचा लेश घेऊन, दुसरा अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी आणि विशिष्ट उच्चार दर्शवण्यासाठी त्यांना 'समान उच्चार असणारे' (समानसुतिकानि) म्हटले आहे. इतर ठिकाणीही अशा प्रसंगी हाच नियम लागू होतो. येथे हे लक्षात घेतले पाहिजे – ယတ္ထ သမာနသုတိကာနံ အဋ္ဌာရသာကာရေသု ယေန ကေနစိ အာကာရေန အတ္ထဝိသေသော လဗ္ဘတိ, ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ပန ဥစ္စာရဏေ သဒ္ဒဝိလာသော န ဟောတိ, အတ္ထော ဝါ ဒုဋ္ဌော ဟောတိ, န တာဒိသေသု ပယောဂေသု သမာနသုတိကာနိ ပဒါနိ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ဥစ္စာရေတဗ္ဗာနိ. တတြ ကတမေန စာကာရေန အတ္ထဝိသေသလာဘော ဘဝတိ? ပဒါနံ ဝိဘာဂဝသေန ဝါ အဝိဘာဂဝသေန ဝါ အက္ခရသန္နိဓာနဝသေန ဝါ ပဒသန္နိဓာနဝသေန ဝါ ပဒက္ခရသန္နိဓာနဝသေန ဝါ ဝိစ္ဆာဝသေန ဝါ ကမ္မပ္ပဝစနီယဝသေန ဝါ ဘယကောဓာဒီသု ဥပ္ပန္နေသု ကထိတာမေဍိတဝစနဝသေန ဝါ ဂုဏဝါစကသဒ္ဒဿ ဒွိရုတ္တဝသေန ဝါ ကြိယာပဒဿ ဒွိရုတ္တဝသေန ဝါ သံဟိတာပဒစ္ဆေဒဝသေန ဝါ အဂါရဝတ္ထပရိဒီပနဝသေန ဝါ နိရန္တရတ္ထပရိဒီပနဝသေန ဝါ နနိရန္တရတ္ထပရိဒီပနဝသေန ဝါ ‘‘ပုနပ္ပုန’’မိစ္စတ္ထပရိဒီပနဝသေန ဝါ ဥပမာနေ ဣဝ သဒ္ဒဝသေန ဝါ ဣတိသဒ္ဒံ ပဋိစ္စ သဒ္ဒပဒတ္ထဝါစကတ္ထပရိဒီပနဝသေန ဝါ တထာပဝတ္တစိတ္တပရိဒီပနဝသေန ဝါတိ ဣမေသုဋ္ဌာရသာကာရေသု, ဝိတ္ထာရတော ပန ဆဗ္ဗီသာယ အာကာရေသု တတော ဝါဓိကေသု ယေန ကေနစိ အာကာရေန အတ္ထဝိသေသလာဘော ဘဝတိ. जेथे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांच्या अठरा प्रकारांपैकी कोणत्याही एका प्रकाराने अर्थाचा विशेष लाभ होतो, परंतु विभक्त करून उच्चारल्यास शब्दाचे सौंदर्य नष्ट होते किंवा अर्थ दूषित होतो, अशा प्रयोगांमध्ये समान उच्चार असणारी पदे विभक्त करून उच्चारू नयेत. तेथे कोणत्या प्रकारांनी अर्थाचा विशेष लाभ होतो? पदांच्या विभागामुळे (विग्रह) किंवा अविभागामुळे (संधी), अक्षरांच्या सान्निध्यामुळे, पदांच्या सान्निध्यामुळे, पद आणि अक्षरांच्या सान्निध्यामुळे, वीप्सा (पुनरावृत्ती) मुळे, कर्मप्रवचनीयामुळे, भय किंवा क्रोध इत्यादी उत्पन्न झाले असता बोलल्या जाणाऱ्या द्विरुक्तीमुळे (आमेडित), गुणवाचक शब्दाच्या द्विरुक्तीमुळे, क्रियापदाच्या द्विरुक्तीमुळे, संहितेच्या पदच्छेदामुळे, अनादर दर्शवण्यामुळे, निरंतर अर्थ स्पष्ट करण्यामुळे, अनिरंतर अर्थ स्पष्ट करण्यामुळे, 'पुन्हा पुन्हा' असा अर्थ स्पष्ट करण्यामुळे, उपमेमध्ये 'इव' शब्दाच्या वापरामुळे, 'इति' शब्दाच्या आधारे शब्द आणि पदाच्या अर्थाचे वाचकत्व स्पष्ट करण्यामुळे, किंवा तशा प्रकारे प्रवृत्त झालेल्या चित्ताचे प्रकटीकरण करण्यामुळे – या अठरा प्रकारांनी, आणि विस्ताराने सांगायचे तर सव्वीस किंवा त्याहून अधिक प्रकारांपैकी कोणत्याही एका प्रकाराने अर्थाचा विशेष लाभ होतो. ဧတ္ထ ပဒါနံ တာဝ ဝိဘာဂဝသေန ဝါ အဝိဘာဂဝသေန ဝါ သမာနသုတိကာနမတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘သာ နံ သင်္ဂတိ ပါလေတိ, အဘိက္ကမော သာနံ ပညာယတိ. မာ နော ဒေဝ အဝဓိ, မာနော မယှံ န ဝိဇ္ဇတီ’’တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. येथे शब्दांच्या विभागणीने (विभागामुळे) किंवा अविभागणीने (अविभागामुळे) समान ध्वनी असलेल्या शब्दांच्या विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'सा नं संगति पालेति, अभिक्रमो सानं पञ्ञायति। मा नो देव अवधि, मानो मय्हं न विज्जति' (ती संगती त्याचे रक्षण करते, त्यांचा पराक्रम दिसून येतो. हे देवा, आम्हास मारू नका, माझ्यात मान/अभिमान नाही) इत्यादी प्रयोग आहेत. အက္ခရသန္နိဓာနဝသေန [Pg.53] ပန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘သန္တေဟိ မဟိတော ဟိတော. သင်္ဂါ သင်္ဂါမဇိံ မုတ္တံ, တမဟံ ဗြူမိ ဗြာဟ္မဏံ. ဒါဌီ ဒါဌီသု ပက္ခန္ဒိ, မညမာနော ယထာ ပုရေ. သဗ္ဗာဘိဘုံဝ သိရသာသိရသာ နမာမိ. ဘူမိတော ဥဋ္ဌိတာ ယာဝ, ဗြဟ္မလောကာ ဝိဓာဝတိ. အစ္စိ အစ္စိမတော လောကေ, ဍယှမာနမှိ တေဇသာ’’တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. परंतु अक्षरांच्या सान्निध्यामुळे (जवळ असण्यामुळे) विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'सन्तेहि महितो हितो। सङ्गा सङ्गामजिं मुत्तं, तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं। दाठी दाठीसु पक्खन्दि, मञ्ञमानो यथा पुरे। सब्बाभिभुं व सिरसा सिरसा नमामि। भूमितो उट्ठिता याव, ब्रह्मलोका विधावति। अच्चि अच्चिमतो लोके, डय्हमानम्हि तेजसा' इत्यादी प्रयोग आहेत. ပဒသန္နိဓာနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘အာပေါ အာပေါဂတံ. ရာဇရာဇမဟာမတ္တာဒယော, သုခေါ’လောကဿ လောကဿ, ကာရကော ဉာဏစက္ခုဒေါ, နိရာပဒေ ပဒေ နိန္နော, အနန္တဉာဏံ ကရုဏာလယံ လယံ, မလဿ ဗုဒ္ဓံ သုသမာဟိတံ ဟိတံ. နမာမိ ဓမ္မံ ဘဝသံဝရံ ဝရံ, ဂုဏာကရဉ္စေဝ နိရင်္ဂဏံ ဂဏ’’န္တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. शब्दांच्या (पदांच्या) सान्निध्यामुळे विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'आपो आपोगतं। राजराजमहामत्तादयो, सुखोऽलोकस्स लोकस्स, कारको ञाणचक्खुदो, निरापदे पदे निन्नो, अनन्तञाणं करुणालयं लयं, मलस्स बुद्धं सुसमाहितं हितं। नमामि धम्मं भवसंवरं वरं, गुणाकरञ्चेव निरङ्गणं गणं' इत्यादी प्रयोग आहेत. ပဒက္ခရသန္နိဓာနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ပမာဏရဟိတံ ဟိတံ, သိဒ္ဓတ္ထော သဗ္ဗသိဒ္ဓတ္ထော, တိလောကမဟိတော ဟိတော. ဥပဂန္တွာန သမ္ဗုဒ္ဓေါ, ဣဒံ ဝစနမဗြဝီ’’တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. တတြိမာ အက္ခရသန္နိဓာနာဒီသု အဓိပ္ပာယဝိညာပနိယော ဂါထာ – पद आणि अक्षरांच्या सान्निध्यामुळे विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'पमाणरहितं हितं, सिद्धत्थो सब्बसिद्धत्थो, तिलोकमहितो हितो। उपगन्त्वान सम्बुद्धो, इदं वचनमब्रवी' इत्यादी प्रयोग आहेत. त्याविषयी अक्षरसन्निधी इत्यादींच्या संदर्भातील अभिप्राय स्पष्ट करणाऱ्या गाथा खालीलप्रमाणे आहेत – မဟိတောဣတိ သဒ္ဒမှာ, မကာရော စေ ဝိဝေစိတော; သဒ္ဒေါ နိရတ္ထကော ဧတ္ထ, ‘‘အက္ခရ’’န္တိ ဝဒေ ဗုဓော. 'महितो' या शब्दातून जर 'म'कार वेगळा केला, तर येथे तो शब्द निरर्थक होतो; विद्वानांनी त्याला 'अक्षर' म्हणावे. ဉေယျာ အက္ခရယောဂေန,‘‘သန္တေဟိ မဟိတော ဟိတော’’; ဣစ္စာဒီသု သရူပါနံ,ဟောတိ အတ္ထဝိသေသတာ. अक्षरांच्या योगाने (जोडणीने) 'सन्तेहि महितो हितो' इत्यादींमध्ये समान रूपांच्या शब्दांची विशेष अर्थवत्ता जाणून घ्यावी. ဥပသဂ္ဂါ နိပါတာ စ, ယဉ္စညံ အတ္ထဇောတကံ; ဧကက္ခရမ္ပိ ဝိညူဟိ, တံ ‘‘ပဒ’’န္တိ သမီရိတံ. उपसर्ग आणि निपात, तसेच जे काही इतर अर्थ प्रकट करणारे आहे, ते जरी एक अक्षरी असले तरी विद्वानांनी त्याला 'पद' (शब्द) म्हटले आहे. ပဒါနံ [Pg.54] သန္နိဓာနဉ္စ, ပဒက္ခရာနမေဝ စ; သမာသေ လဗ္ဘမာနတ္တံ, သန္ဓာယ လပိတံ မယာ. पदांचे सान्निध्य आणि पद-अक्षरांचे सान्निध्य, समासामध्ये त्यांची होणारी प्राप्ती लक्षात घेऊन माझ्याद्वारे हे सांगितले गेले आहे. ဝိစ္ဆာဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ဂါမေ ဂါမေ သတံ ကုမ္ဘာ, ဂါမော ဂါမော ရမဏီယော’’တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. ဧတ္ထ ဟိ ဝိစ္ဆာဝသေန သဗ္ဗေပိ ဂါမာ ပရိဂ္ဂဟိတာ. विप्सा (पुनरुक्ती/व्याप्ती) च्या द्वारे विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'गामे गामे सतं कुम्भा, गामो गामो रमणीयो' (प्रत्येक गावात शंभर कुंभ आहेत, प्रत्येक गाव रमणीय आहे) इत्यादी प्रयोग आहेत. येथे विप्सेच्या द्वारे सर्वच गावांचा समावेश होतो. နာနာဓိကရဏာနံ တု, ဝတ္တုမေကက္ခဏမှိ ယာ; ဣစ္ဆတော ဗျာပိတုံ ဣစ္ဆာ, သာ ဝိစ္ဆာတိ ပကိတ္တိတာ. विविध अधिकरणांना (स्थानांना) एकाच क्षणी सांगण्याची आणि व्यापण्याची जी इच्छा असते, तिला 'विप्सा' (वीप्सा) असे म्हटले गेले आहे. ကမ္မပ္ပဝစနီယဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ရုက္ခံ ရုက္ခံ ပတိ ဝိဇ္ဇောတတေ စန္ဒော, ရုက္ခံ ရုက္ခံ ပရိ ဝိဇ္ဇောတတေ စန္ဒော’’တိ ပယောဂါ, ရုက္ခာနံ ဥပရိ ဥပရိ ဝိဇ္ဇောတတေတိ အတ္ထော. कर्मप्रवचनीयाच्या द्वारे विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'रुक्खं रुक्खं पति विज्जोतते चन्दो, रुक्खं रुक्खं परि विज्जोतते चन्दो' हे प्रयोग आहेत; याचा अर्थ 'झाडांच्या वर-वर चंद्र चमकतो' असा आहे. ဘယကောဓာဒီသု ဥပ္ပန္နေသု ကထိတာမေဍိတဝစနဝသေန ပန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ဣမေ ပယောဂါ – ဘယေ တာဝ ‘‘စောရော စောရော, သပ္ပော သပ္ပော’’ဣစ္စာဒယော. ကောဓေ ‘‘ဝသလ ဝသလ, စဏ္ဍာလ စဏ္ဍာလ, ဝိဇ္ဈ ဝိဇ္ဈ, ပဟရ ပဟရ’’ဣစ္စာဒယော. ပသံသာယံ ‘‘သာဓု သာဓု သာရိပုတ္တ, အဘိက္ကန္တံ ဘန္တေ အဘိက္ကန္တံ ဘန္တေ’’ဣစ္စာဒယော. တုရိတေ ‘‘အဘိက္ကမ ဝါသေဋ္ဌ အဘိက္ကမ ဝါသေဋ္ဌ, ဂစ္ဆ ဂစ္ဆ, လုနာဟိ လုနာဟိ’’ဣစ္စာဒယော. ကောတူဟလေ ‘‘အာဂစ္ဆ အာဂစ္ဆ’’ဣစ္စာဒယော. အစ္ဆရိယေ ‘‘အဟော ဗုဒ္ဓေါ အဟော ဗုဒ္ဓေါ’’ဣစ္စာဒယော. ဟာသေ ‘‘အဟော သုခံ အဟော သုခံ, အဟော မနာပံ အဟော မနာပံ’’ဣစ္စာဒယော. သောကေ ‘‘ကဟံ ဧကပုတ္တက ကဟံ ဧကပုတ္တက’’ဣစ္စာဒယော. ပသာဒေ ‘‘ဘဝိဿန္တိ ဝဇ္ဇီ ဘဝိဿန္တိ ဝဇ္ဇီ’’ဣစ္စာဒယော. ဧဝံ ဘယကောဓာဒီသု ဥပ္ပန္နေသု ကထိတာမေဍိတဝစနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘော ဘဝတိ. ဧတ္ထ ပန အတ္ထန္တရာဘာဝေပိ ဒဠှီကမ္မဝသေန ပဒါနမတ္ထဇောတကဘာဝေါယေဝ အတ္ထဝိသေသလာဘော. भय, क्रोध इत्यादी उत्पन्न झाल्यावर बोलल्या जाणाऱ्या द्विरुक्त शब्दांच्या (आमेडित वचनांच्या) द्वारे विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी हे प्रयोग आहेत – भयात: 'चोरो चोरो, सप्पो सप्पो' (चोर चोर, साप साप) इत्यादी. क्रोधात: 'वसल वसल, चण्डाल चण्डाल, विज्झ विज्झ, पहर पहर' (वृषल वृषल, चंडाल चंडाल, मार मार, प्रहार कर प्रहार कर) इत्यादी. प्रशंसेत: 'साधु साधु सारिपुत्त, अभिक्कन्तं भन्ते अभिक्कन्तं भन्ते' (उत्तम उत्तम सारिपुत्त, अतिशय सुंदर भन्ते, अतिशय सुंदर भन्ते) इत्यादी. घाईत (त्वरेत): 'अभिक्कम वासेट्ठ अभिक्कम वासेट्ठ, गच्छ गच्छ, लुनाहि लुनाहि' (पुढे चल वासिष्ठ पुढे चल वासिष्ठ, जा जा, काप काप) इत्यादी. कुतूहलात: 'आगच्छ आगच्छ' (ये ये) इत्यादी. आश्चर्यात: 'अहो बुद्धो अहो बुद्धो' (अहा! बुद्ध, अहा! बुद्ध) इत्यादी. हास्यात (आनंदात): 'अहो सुखं अहो सुखं, अहो मनापं अहो मनापं' (अहा! काय सुख, अहा! काय सुख, अहा! किती मनपसंत, अहा! किती मनपसंत) इत्यादी. शोकात: 'कहं एकपुत्तक कहं एकपुत्तक' (कुठे आहेस माझ्या एकुलत्या एक मुला, कुठे आहेस माझ्या एकुलत्या एक मुला) इत्यादी. प्रसन्नतेत (श्रद्धेत): 'भविस्सन्ति वज्जी भविस्सन्ति वज्जी' (वज्जी राहतील, वज्जी राहतील) इत्यादी. अशा प्रकारे भय, क्रोध इत्यादी उत्पन्न झाल्यावर बोलल्या जाणाऱ्या द्विरुक्त शब्दांच्या द्वारे विशेष अर्थाची प्राप्ती होते. येथे दुसरा अर्थ नसला तरीही, दृढीकरणाच्या (निश्चयाच्या) द्वारे शब्दांचा अर्थ स्पष्ट करणे हाच विशेष अर्थाचा लाभ आहे. ဘယေ [Pg.55] ကောဓေ ပသံသာယံ,တုရိတေ ကောတူဟလ’စ္ဆရေ; ဟာသေ သောကေ ပသာဒေ စ,ကရေ အာမေဍိတံ ဗုဓော. भय, क्रोध, प्रशंसा, घाई (त्वरा), कुतूहल, आश्चर्य, आनंद (हास), शोक आणि प्रसन्नता यामध्ये विद्वानांनी द्विरुक्ती (आमेडित) करावी. စသဒ္ဒေါ အဝုတ္တသမုစ္စယတ္ထော, တေန ဂရဟာအသမ္မာနာဒီနံ သင်္ဂဟော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ‘‘ပါပေါ ပါပေါ’’တိအာဒီသု ဟိ ဂရဟာယံ. ‘‘အဘိရူပက အဘိရူပကာ’’တိအာဒီသု အသမ္မာနေ. ‘‘ကွာယံ အဗလဗလော ဝိယာ’’တိအာဒီသု အတိသယတ္ထေ အာမေဍိတံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဂုဏဝါစကဿ ဒွိရုတ္တဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ကဏှော ကဏှော စ ဃောရော စာ’’တိ ဧဝမာဒယော. ‘‘ကဏှော ကဏှော’’တိ ဟိ အတီဝ ကဏှောတိ အတ္ထော. ကြိယာပဒဿ ဒွိရုတ္တဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ဓမေ ဓမေ နာတိဓမေ’’တိ ဧဝမာဒယော. တတ္ထ ဓမေ ဓမေတိ ဓမေယျ နော န ဓမေယျ. နာတိဓမေတိ ပမာဏာတိက္ကန္တံ ပန န ဓမေယျ. သံဟိတာပဒစ္ဆေဒဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘နရာနရာ, သုရာသုရာ, ကတာကတကုသလာကုသလဝိသယံ ဝိပ္ပဋိသာရာကာရေန ပဝတ္တံ အနုသောစနံ ကုက္ကုစ္စ’’န္တိ ဧဝမာဒယော. ဧတ္ထ ပန ဝိညူနံ ပရမကောသလ္လဇနနတ္ထံ သိလောကံ ရစယာမ – 'च' (च-सद्द) हा शब्द न सांगितलेल्या गोष्टींचा संग्रह करण्यासाठी आहे, त्यामुळे निंदा, अनादर इत्यादींचा संग्रह समजला पाहिजे. 'पापो पापो' इत्यादींमध्ये निंदा आहे. 'अभिरूपक अभिरूपका' इत्यादींमध्ये अनादर आहे. 'क्वायं अबलबलो विया' इत्यादींमध्ये अतिशय (अतिरेक) अर्थामध्ये द्विरुक्ती समजली पाहिजे. गुणवाचक शब्दाच्या द्विरुक्तीमुळे विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'कण्हो कण्हो च घोरो चा' इत्यादी प्रयोग आहेत. 'कण्हो कण्हो' म्हणजे 'अतिशय काळा' असा अर्थ आहे. क्रियापदाच्या द्विरुक्तीमुळे विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'धमे धमे नातिधमे' इत्यादी प्रयोग आहेत. तेथे 'धमे धमे' म्हणजे वाजवावे, वाजवू नये असे नाही. 'नातिधमे' म्हणजे प्रमाणाबाहेर वाजवू नये. संहितेच्या (संधीच्या) पदच्छेदामुळे विशेष अर्थाच्या प्राप्तीसाठी 'नरानरा, सुरासुरा, कताकतकुसलाकुसलविसयं विप्पटिसाराकारेण पवत्तं अनुसोचनं कुक्कुच्चं' (केलेले-न केलेले, कुशल-अकुशल विषयांसंबंधी पश्चात्ताप रूपाने होणारे अनुशोचन म्हणजे कुक्कुच्च/कुकृत्य होय) इत्यादी प्रयोग आहेत. येथे विद्वानांच्या परम कौशल्यासाठी आम्ही एक श्लोक रचत आहोत – ဟိတာဟိတာ ဟိတံဟိတံ, အာနုဘာဝေန တေ ဇိန; ပဝရာပဝရာဟစ္စ, ဘဝါမာ’နာမယာ မယန္တိ. हे जिन (विजेते बुद्ध)! आपल्या प्रभावाने हित-अहित आणि उत्तम-अनुत्तम यांचा नाश करून आम्ही निरोगी (आरोग्यसंपन्न) होऊ या. အဂါရဝတ္ထပရိဒီပနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘တုဝံတုဝံ ပေသုညကလဟဝိဂ္ဂဟဝိဝါဒါ’’တိ ဧဝမာဒယော. နိရန္တရတ္ထပရိဒီပနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ဒိဝသေ ဒိဝသေ ပရိဘုဉ္ဇတီ’’တိ ဧဝမာဒယော. နနိရန္တရတ္ထပရိဒီပနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ [Pg.56] ‘‘ခဏေ ခဏေ ပီတိ ဥပ္ပဇ္ဇတီ’’တိ ဧဝမာဒယော. ‘‘ပုနပ္ပုန’’မိစ္စတ္ထပရိဒီပနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘မုဟုံ မုဟုံ ဘာယယတေ ကုမာရေ’’တိ ဧဝမာဒယော. ဥပမာနေ ဣဝသဒ္ဒဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ရာဇာ ရက္ခတု ဓမ္မေန, အတ္တနောဝ ပဇံ ပဇ’’န္တိ ဧဝမာဒယော. ဣတိသဒ္ဒံ ပဋိစ္စ သဒ္ဒပဒတ္ထဝါစကတ္တပရိဒီပနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ဗုဒ္ဓေါ ဗုဒ္ဓေါတိ ကထယန္တော, သောမနဿံ ပဝေဒယိ’’န္တိ ဧဝမာဒယော. တထာပဝတ္တစိတ္တပရိဒီပနဝသေန အတ္ထဝိသေသလာဘေ ‘‘ဗုဒ္ဓေါ ဗုဒ္ဓေါတိ စိန္တေန္တော, မဂ္ဂံ သောဓေမဟံ တဒါ’’တိ ဧဝမာဒယော. ဧဝံ ဤဒိသေသု ပယောဂေသု သမာနသုတိကပဒံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ န ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ဟိ ဥစ္စာရဏေ သတိ သဒ္ဒဝိလာသော န ဘဝတိ, ကတ္ထစိ ပန ‘‘ကတာကတာကုသလာကုသလဝိသယ’’န္တိ ဧဝမာဒီသု ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ဥစ္စာရိတဿ အတ္ထော ဒုဋ္ဌော ဟောတိ, တသ္မာ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ န ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ, ဧကာဗဒ္ဓံယေဝ ကတွာ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. ဣတိ သမာနသုတိကေသု ဝိနိစ္ဆယော ဆဗ္ဗီသာယ အာကာရေဟိ အဓိကေဟိ စ မဏ္ဍေတွာ ဒဿိတော. घरगुती बाबींचे स्पष्टीकरण करण्याच्या दृष्टीने अर्थाचा विशेष लाभ दर्शविताना 'तुवं-तुवं (तू-तू), चहाडी, कलह, भांडण आणि वाद' इत्यादी उदाहरणे आहेत. निरंतरतेचा अर्थ स्पष्ट करण्याच्या दृष्टीने अर्थाचा विशेष लाभ दर्शविताना 'दिवसेंदिवस उपभोग घेतो' इत्यादी उदाहरणे आहेत. निरंतरता नसलेला अर्थ स्पष्ट करण्याच्या दृष्टीने अर्थाचा विशेष लाभ दर्शविताना 'क्षणाक्षणाला प्रीती उत्पन्न होते' इत्यादी उदाहरणे आहेत. 'पुन्हा पुन्हा' असा अर्थ स्पष्ट करण्याच्या दृष्टीने अर्थाचा विशेष लाभ दर्शविताना 'क्षणोक्षणी मुलाला घाबरवतो' इत्यादी उदाहरणे आहेत. उपमेमध्ये 'इव' (सारखा) या शब्दाच्या अर्थाने अर्थाचा विशेष लाभ दर्शविताना 'राजाने धर्माने स्वतःच्या प्रजेप्रमाणे प्रजेचे रक्षण करावे' इत्यादी उदाहरणे आहेत. 'इति' शब्दाच्या आधारे शब्दाच्या अर्थाचे वाचकत्व स्पष्ट करण्याच्या दृष्टीने अर्थाचा विशेष लाभ दर्शविताना 'बुद्ध बुद्ध असे म्हणत त्याने आनंद व्यक्त केला' इत्यादी उदाहरणे आहेत. तसेच प्रवृत्त झालेल्या चित्ताचे स्पष्टीकरण करण्याच्या दृष्टीने अर्थाचा विशेष लाभ दर्शविताना 'बुद्ध बुद्ध असा विचार करत, तेव्हा मी मार्ग शुद्ध केला' इत्यादी उदाहरणे आहेत. अशा प्रकारे, या प्रयोगांमध्ये समान उच्चार असलेले शब्द तोडून (विभक्त करून) उच्चारू नयेत. कारण तोडून उच्चार केल्यास शब्दाचे सौंदर्य नष्ट होते, आणि काही ठिकाणी जसे की 'कृताकृत-कुशलाकुशल-विषय' इत्यादींमध्ये तोडून उच्चारल्यास अर्थ दूषित होतो, म्हणून तोडून उच्चारू नये, तर एकत्र जोडूनच उच्चार करावा. अशा प्रकारे समान उच्चार असलेल्या शब्दांविषयीचा निर्णय सव्वीस आणि त्याहून अधिक प्रकारांनी सुशोभित करून दर्शविला आहे. ယသ္မာ ပန သမာနသုတိကေသု ဝိနိစ္ဆယေ ဒဿိတေ အသမာနသုတိကေသုပိ ဝိနိစ္ဆယော ဒဿေတဗ္ဗော ဟောတိ, တသ္မာ တမ္ပိ ဒဿေဿာမ – ယတ္ထ နိဂ္ဂဟီတမှာ ပရာကာရလောပေါပိ ပါဌော ပညာယတိ, သံယောဂဗျဉ္ဇနဿ ဝိသံယောဂတ္တမ္ပိ. တေသု ပယောဂေသု နိဂ္ဂဟီတပဒံ အနန္တရပဒေန သဒ္ဓိံ ဧကာဗဒ္ဓံယေဝ ကတွာ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. ကတမာနိ တာနိ? ‘‘သစေ ဘုတ္တော ဘဝေယျာဟံ-သာ’ဇီဝေါ ဂရဟိတော မမ. ပုပ္ဖံ’သာ ဥပ္ပဇ္ဇိ. ခယမတ္တံ န နိဗ္ဗာနံ’သ ဂမ္ဘီရာဒိဝါစတော’’တိ ဧဝမာဒယော. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘သစေ ဘုတ္တော ဘဝေယျာဟ’’န္တိအာဒိနာ ဝိစ္ဆေဒမကတွာ [Pg.57] အနန္တရေ ဒွီသု ဂါထာပဒေသု အန္တရီဘူတာနံ ဒွိန္နံ သမာနသုတိကပဒါနံ ဧကတော ဥစ္စာရဏမိဝ အနန္တရပဒေဟိ သဒ္ဓိံ ဧကာဗဒ္ဓုစ္စာရဏဝသေန ‘‘သစေ ဘုတ္တော ဘဝေယျာဟံ-သာ’ဇီဝေါ ဂရဟိတော မမာ’’တိအာဒိနာ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. ဧဝရူပေါယေဝ ဟိ ဥစ္စာရဏဝိသေသော သကလေဟိပိ ပေါရာဏေဟိ ဝိညူဟိ အနုမတော ဥစ္စာရိတော စ ‘‘အဿ အာဇီဝေါ ဂရဟိတော မမ, အဿာ ဥပ္ပဇ္ဇိ, အဿ ဂမ္ဘီရာဒိဝါစတော’’တိဧဝမာဒိအတ္ထပ္ပဋိပါဒနဿာနုရူပတ္တာ. परंतु, ज्याअर्थी समान उच्चार असलेल्या शब्दांविषयीचा निर्णय दर्शविला असता, असमान उच्चार असलेल्या शब्दांविषयीचा निर्णयही दर्शविणे आवश्यक ठरते, म्हणून आम्ही तो देखील दर्शवू – जेथे निग्गहीत (अनुस्वार) नंतर 'अ' काराचा लोप झालेला पाठ आढळतो, आणि संयुक्त व्यंजनाचा विसंयोग (विभक्त होणे) देखील आढळतो. त्या प्रयोगांमध्ये निग्गहीतयुक्त शब्द पुढील शब्दाशी एकत्र जोडूनच उच्चारला पाहिजे. ते कोणते आहेत? 'सचे भुत्तो भवेय्याहं-साऽजीवो गरहितो मम' (जर मी जेवलो असतो, तर माझी ती उपजीविका निंद्य ठरली असती), 'पुप्फंऽसा उप्पज्जि' (तिला फूल उमलले), 'खयमत्तं न निब्बानंऽस गम्भीरादिवाचतो' (गंभीर इत्यादी वचनांमुळे निर्वाण हे केवळ क्षयमात्र नाही) इत्यादी. येथे 'सचे भुत्तो भवेय्याहं' इत्यादींमध्ये खंड न पाडता, पुढील दोन गाथापदांमध्ये समाविष्ट असलेल्या दोन समान उच्चार असलेल्या शब्दांच्या एकत्र उच्चाराप्रमाणे, पुढील शब्दांशी एकत्र जोडून उच्चारण्याच्या पद्धतीने 'सचे भुत्तो भवेय्याहं-साऽजीवो गरहितो मम' इत्यादी प्रकारे उच्चार केला पाहिजे. कारण अशाच प्रकारचा विशिष्ट उच्चार सर्व प्राचीन विद्वानांनी संमत केला आहे आणि उच्चारला आहे, कारण तो 'अस्स आजीवो गरहितो मम' (माझी ती उपजीविका निंद्य ठरली असती), 'अस्सा उप्पज्जि' (तिला उमलले), 'अस्स गम्भीरादिवाचतो' (त्याच्या गंभीर इत्यादी वचनांमुळे) इत्यादी अर्थ प्रतिपादन करण्यासाठी योग्य आहे. ယတ္ထ ပန ယာဒိသေ ဥစ္စာရဏေ ကရိယမာနေ အတ္ထော ပရိဗျတ္တော ဟောတိ, တေသု ပယောဂေသု ကွစိ စသဒ္ဒ ပနသဒ္ဒါဒိယောဂဋ္ဌာနေ ဤသကံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ပဒမုစ္စာရေတဗ္ဗံ. သေယျထိဒံ? ‘‘ဝါဠာ စ လပသက္ခရာ. အစ္စန္တသန္တာ ပန ယာ, အယံ နိဗ္ဗာနသမ္ပဒါ, ‘‘ဣဒံ ဒုက္ခ’’န္တိ ဝါစံ ဘာသတော ‘‘ဣဒံ ဒုက္ခ’’န္တိ ဉာဏံ ပဝတ္တတီတိ? အာမန္တာ. ဣတိ စ ဒန္တိ စ ဒုတိ စ ခန္တိ စ ဉာဏံ ပဝတ္တတီတိ? န ဟေဝံ ဝတ္တဗ္ဗေ’’တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. परंतु जेथे ज्या प्रकारचा उच्चार केल्याने अर्थ स्पष्ट होतो, त्या प्रयोगांमध्ये काही ठिकाणी 'च' शब्द, 'पन' शब्द इत्यादींच्या जोडणीच्या ठिकाणी शब्द थोडा तोडून उच्चारला पाहिजे. जसे की – 'वाळा च लपसक्खरा' (आणि गोड बोलणारे हिंस्र प्राणी), 'अच्चन्तसन्ता पन या, अयं निब्बानसम्पदा' (परंतु जी अत्यंत शांत आहे, ती ही निर्वाण संपत्ती आहे), 'हे दुःख आहे' असे वचन बोलणाऱ्याला 'हे दुःख आहे' असे ज्ञान प्रवृत्त होते काय? होय. 'इति च', 'दन्ति च', 'दुति च' आणि 'खन्ति च' असे ज्ञान प्रवृत्त होते काय? असे म्हणता येणार नाही, इत्यादी प्रयोग आहेत. ဧတေသု ဟိ ပဌမပယောဂေ ‘‘ဝါဠာ စာ’’တိ ဤသကံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ‘‘လပသက္ခရာ’’တိ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. တတ္ထ လပသက္ခရာတိ သက္ခရသဒိသမဓုရဝစနာ. ဇာတကဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘နိရတ္ထကဝစနေဟိ သက္ခရာ ဝိယ မဓုရာ’’တိ ဝုတ္တံ, တသ္မာတြ ဗဟုဗ္ဗီဟိတပ္ပုရိသဝသေန ဒွိဓာ သမာသော ဒဋ္ဌဗ္ဗော ‘‘လပါ သက္ခရာ ဝိယ ယာသံ တာ လပသက္ခရာ, လပေဟိ ဝါ သက္ခရာ ဝိယာတိ လပသက္ခရာ’’တိ. कारण या प्रयोगांपैकी पहिल्या प्रयोगात 'वाळा च' येथे थोडा खंड पाडून 'लपसक्खरा' असा उच्चार केला पाहिजे. तेथे 'लपसक्खरा' म्हणजे साखरेसारखे गोड बोलणारे. जातक अट्ठकथेमध्ये मात्र 'निरर्थक वचनांमुळे साखरेसारखे गोड' असे म्हटले आहे, म्हणून येथे बहुव्रीहि आणि तत्पुरुष या दोन्ही समासांच्या दृष्टीने समास समजला पाहिजे – 'लपा सक्खरा विय यासं ता लपसक्खरा' (ज्यांचे बोलणे साखरेसारखे आहे ते) किंवा 'लपेहि वा सक्खरा विय' (किंवा बोलण्याने साखरेसारखे). ဒုတိယပယောဂေ ‘‘အစ္စန္တသန္တာ ပန’’ဣတိ ဤသကံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ‘‘ယာ’’တိ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. ယာ ပန အယံ နိဗ္ဗာနသမ္ပဒါ အစ္စန္တသန္တာတိ ဟိ အတ္ထော. दुसऱ्या प्रयोगात 'अच्चन्तसन्ता पन' येथे थोडा खंड पाडून 'या' असा उच्चार केला पाहिजे. कारण 'जी ही निर्वाण संपत्ती आहे, ती अत्यंत शांत आहे' असा अर्थ आहे. တတိယပယောဂေ [Pg.58] ဣတိ စ ဒန္တိ စ ဒုတိ စ ခန္တိ စာတိ ဧတေသု စတူသု ဌာနေသု ဣကာရဉ္စ ဒံကာရဉ္စ ဒုကာရဉ္စ ခံကာရဉ္စ ဤသကံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ တဒနန္တရံ တိ စ သဒ္ဒါ ဥစ္စာရေတဗ္ဗာ. तिसऱ्या प्रयोगात 'इति च दन्ति च दुति च खन्ति च' या चार ठिकाणी 'इ' कार, 'दं' कार, 'दु' कार आणि 'खं' कार येथे थोडा खंड पाडून त्यानंतर 'ति च' हे शब्द उच्चारले पाहिजेत. ဧတ္ထ ဟိ အဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ဥစ္စာရဏေ သတိ အညထာ ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ အတ္ထော ဒုဋ္ဌော ဘဝတိ. ကထံ? ဤဒိသေသု ဌာနေသု အဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ဥစ္စာရဏေ သတိ ဣတိသဒ္ဒေါ ဧဝန္တိ အတ္ထဝါစကော နိပါတော သိယာ, သန္ဓိဝသေန ပန ဣကာရတ္ထဝါစကော ရူဠှီသဒ္ဒေါ န သိယာ. ဒန္တိသဒ္ဒေါ ဒမနတ္ထော သိယာ, ဒံကာရဝါစကော န သိယာ. ဒုတိသဒ္ဒေါ နိရတ္ထကော သိယာ, ဒုကာရဝါစကော န သိယာ. ခန္တိသဒ္ဒေါ ခမနတ္ထော သိယာ, ခံကာရဝါစကော န သိယာ. တသ္မာ ဣကာရ ဒံကာရ ဒုကာရ ခံကာရာနိ ဤသကံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတဗ္ဗာနိ. कारण येथे खंड न पाडता उच्चार केल्यास, दुसराच अर्थ ग्रहण केला गेल्यामुळे अर्थ दूषित होतो. कसे? अशा ठिकाणी खंड न पाडता उच्चार केल्यास 'इति' शब्द 'अशा प्रकारे' या अर्थाचा वाचक निपात ठरेल, परंतु संधीमुळे 'इ' काराचा अर्थ सांगणारा रूढ शब्द ठरणार नाही. 'दन्ति' शब्द दमन करण्याच्या अर्थाचा ठरेल, 'दं' काराचा वाचक ठरणार नाही. 'दुति' शब्द निरर्थक ठरेल, 'दु' काराचा वाचक ठरणार नाही. 'खन्ति' शब्द क्षमा करण्याच्या अर्थाचा ठरेल, 'खं' काराचा वाचक ठरणार नाही. म्हणून 'इ' कार, 'दं' कार, 'दु' कार आणि 'खं' कार येथे थोडा खंड पाडला पाहिजे. ဧတ္ထ ဟိ ဣဣတိ ဒံဣတိ ဒုဣတိ ခံဣတီတိအာဒိနာ သံဟိတာပဒစ္ဆေဒေါ ဝေဒိတဗ္ဗော, ပရဘူတဿ စ ဣကာရဿ လောပေါ. န ပနေတ္ထ ဣဒံ ဝတ္တဗ္ဗံ ‘‘သရူပသရာနံ ဝိသယေ ပရဘူတဿ သရူပသရဿ လောပေါ န ဟောတိ, ပုဗ္ဗသရဿေဝ လောပေါ ဟောတိ တတြာယန္တိ ဧတ္ထ ဝိယာ’’တိ ‘‘အကိလာသုနော ဝဏ္ဏပထေ ခဏန္တာ, ဥဒင်္ဂဏေ တတ္ထ ပပံ အဝိန္ဒု’’န္တိ ပါဠိယံ သရူပပရသရဿ လောပဒဿနတော. တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ‘‘ပဝဒ္ဓံ အာပံ ပပ’’န္တိ အတ္ထော သံဝဏ္ဏိတော. တသ္မာ ‘‘ဣတိ စာ’’တိ ဧတ္ထာပိ ဣဣတိ စာတိ ဆေဒံ ကတွာ ဒွီသု ဣကာရေသု ပရဿ ဣကာရဿ လောပေါ ကာတဗ္ဗော, န ပုဗ္ဗဿ. येथे 'इ इति', 'दं इति', 'दु इति', 'खं इति' इत्यादी प्रकारे संहितेचा पदच्छेद समजला पाहिजे, आणि नंतर येणाऱ्या 'इ' काराचा लोप होतो. येथे असे म्हणता येणार नाही की – 'समान स्वरांच्या बाबतीत नंतर येणाऱ्या समान स्वराचा लोप होत नाही, तर आधीच्या स्वराचाच लोप होतो, जसे की 'तत्रायं' यामध्ये', कारण 'अकिलासुनो वण्णपथे खणन्ता, उदङ्गणे तत्थ पपं अविन्दुं' या पाळीमध्ये समान असलेल्या नंतरच्या स्वराचा लोप झालेला आढळतो. तसेच अट्ठकथाचार्यांनी 'प्रवृद्ध पाण्याला प्रपा (पाण्याचे ठिकाण)' असा अर्थ स्पष्ट केला आहे. म्हणून 'इति च' येथे देखील 'इ इति च' असा छेद करून, दोन 'इ' कारांपैकी नंतरच्या 'इ' काराचा लोप केला पाहिजे, आधीच्या नाही. ပုဗ္ဗသ္မိဉှိ ဣကာရဝါစကေ ဣကာရေ နဋ္ဌေ သတိ နိပါတဘူတေန ဣတိသဒ္ဒေန ဣကာရသင်္ခါတော အတ္ထော န ဝိညာယေယျ, နိပါတဘူတဿ ပန ဣတိသဒ္ဒဿ ဣကာရေ နဋ္ဌေပိ သော အတ္ထော ဝိညာယတေဝ ‘‘ဒေဝဒတ္တောတိ မေ သုတ’’န္တိ ဧတ္ထ [Pg.59] ဒေဝဒတ္တပဒတ္ထော ဝိယ. တသ္မာ ဣတိသဒ္ဒဿ ပရဘူတဿ ဣကာရဿေဝ လောပေါ ကာတဗ္ဗော, န ပုဗ္ဗဿ ဣကာရဝါစကဿ ဣကာရဿ. ကစ္စာယနေ ပန ယေဘုယျပ္ပဝတ္တိံ သန္ဓာယ အသရူပသရတော ပရဿေဝ အသရူပသရဿ လောပေါ ဝုတ္တော, န သရူပသရတော ပရဿ သရူပသရဿ. မဟာပဒေသသုတ္တေဟိ ဝါ သရူပဿ ပရသရဿ လောပေါ ဝုတ္တောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. कारण, पूर्वपदातील 'इ' कारवाचक 'इ' चा लोप झाला असता, निपात असलेल्या 'इति' शब्दाने 'इ' कार संज्ञित अर्थ समजला जाणार नाही. परंतु, निपात असलेल्या 'इति' शब्दातील 'इ' चा लोप झाला तरी तो अर्थ समजतोच, जसे की "देवदत्तोति मे सुतं" (देवदत्त असे मी ऐकले) यामध्ये 'देवदत्त' या पदाच्या अर्थाप्रमाणे. म्हणून, नंतर आलेल्या 'इति' शब्दातील 'इ' चाच लोप केला पाहिजे, पूर्वपदातील 'इ' कारवाचक 'इ' चा नाही. कच्चायनात (कच्चायन व्याकरणात) बहुतांश प्रवृत्तीचा विचार करून असमान स्वराच्या पुढे असलेल्या असमान स्वराचाच लोप सांगितला आहे, समान स्वराच्या पुढे असलेल्या समान स्वराचा नाही. किंवा महाअपदेश सूत्रांद्वारे समान स्वराच्या पुढील स्वराचा लोप सांगितला आहे, असे समजावे. ‘‘အန္တရာ စ ရာဇဂဟံ အန္တရာ စ နာဠန္ဒ’’န္တိအာဒီသု ပန စသဒ္ဒါဒိယောဂဋ္ဌာနေပိ သတိ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ပဒံ န ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. ယတ္ထ စ အာဂမက္ခရာဒီနိ ဒိဿန္တိ, တေသု ပယောဂေသု ပုဗ္ဗပဒါနိ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ န ဥစ္စာရေတဗ္ဗာနိ, အာဂမက္ခရဝန္တေဟိ ပရပဒေဟိ သဒ္ဓိံယေဝ ဥစ္စာရေတဗ္ဗာနိ. သေယျထိဒံ? ‘‘နက္ခတ္တရာဇာရိဝ တာရကာနံ. ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ’’ဣစ္စေဝမာဒယော ပယောဂါ. ယတ္ထ ယေသံ ဝိသုံ ဝိသုံ သမ္ဗန္ဓော ဒိဿတိ, အတ္ထော စ ယုဇ္ဇတိ, တတ္ထ တာနိ အတ္ထာနုရူပံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ဥစ္စာရေတဗ္ဗာနိ. သေယျထိဒံ? ‘‘နဟာနေ ဥဿုက္ကံ အကာသိ, ဥဿုက္ကမ္ပိ အကာသိ ယာဂုယာ ခါဒနီယေ ဘတ္တသ္မိံ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ပယောဂါ. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘နဟာနေ ဥဿုက္ကံ အကာသီ’’တိ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ‘‘ဥဿုက္ကမ္ပိ အကာသိ ယာဂုယာ ခါဒနီယေ ဘတ္တသ္မိ’’န္တိ ဥစ္စာရေတဗ္ဗံ. ဧဝဉှိ သတိ န ကေဝလံ သော ဘိက္ခု နဟာနေယေဝ ဥဿုက္ကံ အကာသိ, အထ ခေါ ယာဂုယာပိ ခါဒနီယေပိ ဘတ္တသ္မိမ္ပိ ဥဿုက္ကံ အကာသီတိ အတ္ထပ္ပကာသနေ သမတ္ထော ဘဝတိ, အဋ္ဌာနပ္ပယုတ္တော သမုစ္စယတ္ထဝါစကော အပိသဒ္ဒေါ. "अंतरा च राजगहं अंतरा च नाळन्दं" (राजगृह आणि नालंदा यांच्या दरम्यान) इत्यादींमध्ये 'च' इत्यादी शब्दांचा योग असतानाही पद विभक्त करून उच्चारू नये. आणि जेथे आगम अक्षरे इत्यादी दिसतात, त्या प्रयोगांमध्ये पूर्वपदे विभक्त करून उच्चारू नयेत, तर आगम अक्षरे असलेल्या उत्तरपदांसोबतच ती उच्चारली पाहिजेत. जसे की: "नक्खत्तराजारीव तारकानं" (ताऱ्यांमध्ये नक्षत्रराजाप्रमाणे), "भगवा एतदवोच" (भगवान असे म्हणाले) इत्यादी प्रयोग. जेथे ज्यांचा वेगवेगळा संबंध दिसतो आणि अर्थही योग्य ठरतो, तेथे ती पदे अर्थानुसार विभक्त करून उच्चारली पाहिजेत. जसे की: "न्हाने उस्सुक्कं अकासि, उस्सुक्कम्पि अकासि यागुया खादनीये भत्तस्मिं" (त्याने स्नानासाठी उत्सुकता दाखवली, तसेच पेज, खाण्याचे पदार्थ आणि भात यांसाठीही उत्सुकता दाखवली) इत्यादी प्रयोग. येथे "न्हाने उस्सुक्कं अकासि" असे विभक्त करून "उस्सुक्कम्पि अकासि यागुया खादनीये भत्तस्मिं" असे उच्चारले पाहिजे. कारण असे केल्याने, केवळ त्या भिक्खूने स्नानासाठीच उत्सुकता दाखवली नाही, तर पेजेसाठी, खाण्याच्या पदार्थांसाठी आणि भातासाठीही उत्सुकता दाखवली, असा अर्थ प्रकट करण्यास अयोग्य ठिकाणी न वापरलेला आणि समुच्चय अर्थ दर्शवणारा 'अपि' शब्द समर्थ ठरतो. ယတ္ထ ပန ယေသမိတရေန ဝါ ဣတရေန ဝါ ဧကေကပဒေန ဥဘယပဒေဟိ ဝါ သမ္ဗန္ဓော ဒိဿတိ သဟေဝတ္ထယုတ္တိယာ, တတ္ထ တာနိ ယထာရဟံ ဝိစ္ဆိန္ဒိတွာ ဥစ္စာရေတဗ္ဗာနိ. သေယျထိဒံ? ‘‘သော ဓမ္မံ ဒေသေတိအာဒိကလျာဏံ မဇ္ဈေကလျာဏံ ပရိယောသာနကလျာဏံ သာတ္ထံ သဗျဉ္ဇနံ ကေဝလပရိပုဏ္ဏံ ပရိသုဒ္ဓံ ဗြဟ္မစရိယံ [Pg.60] ပကာသေတိ. ပဋိစ္စသမုပ္ပာဒံ ဝေါ ဘိက္ခဝေ ဒေသေဿာမိ, တံ သုဏာထ သာဓုကံ မနသိကရောထ. အဇ္ဈတ္တံ သမ္ပသာဒနံ စေတသော ဧကောဒိဘာဝ’’န္တိ ဧဝမာဒယော ပယောဂါ. တတြိမာ အဓိပ္ပာယဝိညာပိကာ ဂါထာ – परंतु जेथे ज्यांचा इतर किंवा इतर अशा एकेका पदाशी किंवा दोन्ही पदांशी अर्थाच्या योग्यतेसह संबंध दिसतो, तेथे ती पदे योग्यतेनुसार विभक्त करून उच्चारली पाहिजेत. जसे की: "सो धम्मं देसेति आदिकल्याणं मज्झेकल्याणं परियोसानकल्याणं सात्थं सब्यञ्जनं केवलपरिपुण्णं परिसुद्धं ब्रह्मचरियं पकासेति" (ते सुरुवातीला कल्याणकारी, मध्ये कल्याणकारी आणि शेवटी कल्याणकारी अशा धर्माचा उपदेश करतात; अर्थयुक्त, व्यंजनयुक्त, संपूर्ण परिपूर्ण आणि अत्यंत शुद्ध अशा ब्रह्मचर्याचे प्रकाशन करतात), "पटिच्चसमुप्पादं वो भिक्खवे देसेस्सामि, तं सुणाथ साधुकं मनसिकरोथ" (भिक्खूंनो, मी तुम्हांला पटिच्चसमुप्पाद [प्रतीत्यसमुत्पाद] उपदेशेन, तो नीट ऐका आणि मनात चांगल्या प्रकारे धारण करा), "अज्झत्तं सम्पसादनं चेतसो एकोदिभावं" (अध्यात्मिक प्रसन्नता, चित्ताची एकाग्रता) इत्यादी प्रयोग. या संदर्भात अभिप्राय स्पष्ट करणाऱ्या पुढील गाथा आहेत – ဓမ္မသဒ္ဒေန ဝါ ဗြဟ္မ-စရိယသဒ္ဒေန ဝါ ပဒံ; ယောဇေတွာ ဤရယေ ဝိညူ, ‘‘သာတ္ထံ သဗျဉ္ဇန’’န္တိဒံ. सुज्ञ माणसाने 'धम्म' शब्दाशी किंवा 'ब्रह्मचर्य' शब्दाशी 'सात्थं सब्यञ्जनं' (अर्थयुक्त आणि व्यंजनयुक्त) हे पद जोडून उच्चारले पाहिजे. ‘‘သာဓုက’’န္တိ ပဒံ ဝိညူ, ‘‘သုဏာထာ’’တိ ပဒေန ဝါ; တထာ ‘‘မနသိကရောထ’’, ဣတိ ဝုတ္တပဒေန ဝါ; ဤရယေ ယောဇယိတွာန, ဥဘယေဟိ ပဒေဟိ ဝါ. सुज्ञ माणसाने 'साधुकं' (चांगल्या प्रकारे) हे पद 'सुणाथ' (ऐका) या पदाशी किंवा 'मनसिकरोथ' (मनात धारण करा) या सांगितलेल्या पदाशी जोडून, किंवा दोन्ही पदांशी जोडून उच्चारले पाहिजे. ဧကမေကေန သမ္ဗန္ဓော, သမ္ဗန္ဓော ဥဘယေဟိ ဝါ; ဒိဿတီတိ ဝိဇာနေယျ, သဒ္ဓိမေဝတ္ထယုတ္တိယာ. एकेका पदाशी संबंध किंवा दोन्ही पदांशी संबंध हा अर्थाच्या योग्यतेसह दिसतो, असे जाणावे. နတ္တနောမတိယာ ဧသော, အတ္ထော ဧတ္ထ မယာ ရုတော; ပုဗ္ဗာစရိယသီဟာနံ, နယံ နိဿာယ မေ ရုတော. हा अर्थ येथे मी स्वतःच्या बुद्धीने सांगितलेला नाही, तर पूर्वाचार्यांच्या (प्राचीन आचार्यांच्या) सिंहतुल्य पद्धतीचा आश्रय घेऊन मी सांगितला आहे. ဧဝံဝိဓေသု အညေသု, ပါဌေသုပိ အယံ နယော; နေတဗ္ဗော နယဒက္ခေန, သာသနတ္ထဂဝေသိနာ. या प्रकारच्या इतर पाठांमध्येही, शासनाचा (बुद्ध शासनाचा) अर्थ शोधणाऱ्या आणि पद्धतीमध्ये निपुण असलेल्या व्यक्तीने हाच नियम लागू केला पाहिजे. အတ္ထာနုရူပတော သဒ္ဒံ, အတ္ထံ သဒ္ဒါနုရူပတော; စိန္တယိတွာန မေဓာဝီ, ဝေါဟရေ န ယထာ တထာတိ. बुद्धिमान माणसाने अर्थानुसार शब्दाचा आणि शब्दानुसार अर्थाचा विचार करून व्यवहार करावा, जसा तसा (अविचाराने) करू नये. အယမေတ္ထ အတ္ထသဒ္ဒစိန္တာ. येथे ही अर्थ आणि शब्दाची चिंता (विचार) आहे. အတ္ထာတိသယယောဂေ ဧဝံ ဥပလက္ခေတဗ္ဗံ – ဘူဓာတုအတ္ထာတိသယယောဂတော ဝဍ္ဎနေ ဒိဋ္ဌာ ‘‘ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ မဟာနာမော လိစ္ဆဝီ ဥဒါနံ ဥဒါနေသိ ‘ဘဝိဿန္တိ ဝဇ္ဇီ ဘဝိဿန္တိ ဝဇ္ဇီ’တိ’’ ဣတိ ဝါ ‘‘အဟမေဝ ဒူသိယာ ဘူနဟတာ, ရညော မဟာပတာပဿာ’’တိ ဝါ ‘‘ဝေဒါ န တာဏာယ ဘဝန္တိဒဿ, မိတ္တဒ္ဒုနော ဘူနဟုနော နရဿာ’’တိ ဝါ ‘‘ဘူနဟစ္စံ ကတံ မယာ’’တိ ဝါ ဧဝံ ဝဍ္ဎနေ ဒိဋ္ဌာ. अर्थाच्या अतिशय योगामध्ये (विशिष्ट अर्थाच्या संबंधात) असे लक्षात घेतले पाहिजे – 'भू' धातूचा अर्थाच्या अतिशय योगामुळे वृद्धी (वाढ) या अर्थात प्रयोग आढळतो, जसे की: "एकमन्तं निसिन्नो खो महानामो लिच्छवी उदानं उदानेसि ‘भविस्सन्ति वज्जी भविस्सन्ति वज्जी’ति" (एका बाजूला बसलेल्या महानाम लिच्छवीने उद्गार काढले, 'वज्जी समृद्ध होतील, वज्जी समृद्ध होतील') किंवा "अहमेव दूसिया भूनहता, रञ्ञो महाप्रतापस्सा" (मीच महाप्रतापी राजाची भ्रूणहत्या करणारी/विनाश करणारी आहे) किंवा "वेदा न ताणाय भवन्तिदस्स, मित्तद्दुनो भूनहुनो नरस्सा" (वेद हे मित्राचा द्रोह करणाऱ्या आणि भ्रूणहत्या करणाऱ्या/विनाश करणाऱ्या माणसाच्या रक्षणासाठी नसतात) किंवा "भूनहच्चं कतं मया" (माझ्याकडून विनाश/भ्रूणहत्या केली गेली) अशा प्रकारे वृद्धी (किंवा विनाश/अतिशय) या अर्थात प्रयोग दिसतो. ဝစနသင်္ဂဟေ [Pg.61] ဧဝံ ဥပလက္ခေတဗ္ဗံ – ဝတ္တမာနာယ ဝိဘတ္တိယာ ပရဿပဒံ မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနံ ပဉ္စမိယာ ပရဿပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနေန သဒိသံ. တုမှေ ဘဝထ. वचनसंग्रहामध्ये (वचनांच्या संक्षेपात) असे लक्षात घेतले पाहिजे – वर्तमानकाळातील (वत्तमाना) विभक्तीचे परस्मैपद मध्यम पुरुष बहुवचन हे आज्ञार्थ (पंचमी) परस्मैपद मध्यम पुरुष बहुवचनासारखेच असते. जसे: 'तुम्हे भवथ' (तुम्ही होता/व्हा). ဝတ္တမာနပဉ္စမီနံ ပရဿပဒေ ဥတ္တမပုရိသစတုက္ကေ ဧကဝစနံ ဧကဝစနေန, ဗဟုဝစနမ္ပိ ဗဟုဝစနေန သဒိသံ. အဟံ ဘဝါမိ, မယံ ဘဝါမ. वर्तमानकाळ आणि आज्ञार्थ (पंचमी) यांच्या परस्मैपदातील उत्तम पुरुषाच्या चार रूपांमध्ये, एकवचन एकवचनासारखे आणि बहुवचन बहुवचनासारखेच असते. जसे: 'अहं भवामि' (मी होतो/आहे), 'मयं भवाम' (आम्ही होतो/आहोत). ဝတ္တမာနာယ အတ္တနောပဒံ မဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနံ ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီနံ အတ္တနောပဒေဟိ ဒွီဟိ မဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနေဟိ သဒိသံ ကတ္ထစိ ဝဏ္ဏသမုဒါယဝသေန ကိဉ္စိ ဝိသေသံ ဝဇ္ဇေတွာ, ဧသ နယော ဥတ္တရတြာပိ ယောဇေတဗ္ဗော. တွံ ဘဝသေ, ဣဒံ ဝတ္တမာနာယ ရူပံ. တွံ အဘဝသေ, ဣဒံ ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီနံ ရူပံ. वर्तमानकाळातील आत्मनेपद मध्यम पुरुष एकवचन हे हिय्यत्तनी (ह्यस्तन भूतकाळ) आणि अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) या दोन्ही काळांच्या आत्मनेपद मध्यम पुरुष एकवचनासारखेच असते, काही ठिकाणी वर्णसमुदायामुळे होणारा थोडा फरक वगळता. हाच नियम पुढेही लागू केला पाहिजे. जसे: 'त्वं भवसे' (तू होतोस), हे वर्तमानकाळाचे रूप आहे. 'त्वं अभवसे', हे हिय्यत्तनी आणि अज्जतनीचे रूप आहे. ဝတ္တမာနာယ အတ္တနောပဒံ ဥတ္တမပုရိသေကဝစနံ ပဉ္စမိယာ အတ္တနောပဒေနုတ္တမပုရိသေကဝစနေန စ ပရောက္ခာယ ပရဿပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနေန စာတိ ဒွီဟိ ဝစနေဟိ သဒိသံ. အဟံ ဘဝေ, ဣဒံ ဝတ္တမာနပဉ္စမီနံ ရူပံ. တွံ ဗဘူဝေ, ဣဒံ ပရောက္ခာယ ရူပံ. वर्तमानकाळातील आत्मनेपद उत्तम पुरुष एकवचन हे आज्ञार्थ (पंचमी) आत्मनेपद उत्तम पुरुष एकवचनाशी आणि परोक्ष भूतकाळ (परोक्खा) परस्मैपद मध्यम पुरुष एकवचनाशी, अशा दोन वचनांशी (रूपांशी) समान असते. जसे: 'अहं भवे', हे वर्तमानकाळ आणि आज्ञार्थाचे रूप आहे. 'त्वं बभूवे', हे परोक्ष भूतकाळाचे रूप आहे. ဝတ္တမာနာယ အတ္တနောပဒံ ဥတ္တမပုရိသဗဟုဝစနံ ပရောက္ခဇ္ဇတနီနံ အတ္တနောပဒေဟိ ဒွီဟိ ဥတ္တမပုရိသဗဟုဝစနေဟိ သဒိသံ. မယံ ဘဝါမှေ, ဣဒံ ဝတ္တမာနာယ ရူပံ. မယံ ဗဘူဝိမှေ, ဣဒံ ပရောက္ခာယ ရူပံ. မယံ အဘဝိမှေ, ဣဒမဇ္ဇတနိယာ ရူပံ. वर्तमानकाळातील आत्मनेपद उत्तम पुरुष बहुवचन हे परोक्ष भूतकाळ आणि अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) या दोन्ही काळांच्या आत्मनेपद उत्तम पुरुष बहुवचनासारखेच असते. जसे: 'मयं भवाम्हे', हे वर्तमानकाळाचे रूप आहे. 'मयं बभूविम्हे', हे परोक्ष भूतकाळाचे रूप आहे. 'मयं अभविम्हे', हे अज्जतनीचे रूप आहे. ပဉ္စမိယာ အတ္တနောပဒံ မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနံ ပရောက္ခာယ အတ္တနောပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနေန သဒိသံ. တုမှေ ဘဝဝှော, ဣဒံ ပဉ္စမိယာ ရူပံ. တုမှေ ဗဘူဝိဝှော, ဣဒံ ပရောက္ခာယ ရူပံ. आज्ञाविभक्तीचे (पंचमीचे) आत्मनेपद मध्यम पुरुष बहुवचन हे परोक्ष भूतकाळ आत्मनेपद मध्यम पुरुष बहुवचनासारखेच असते. जसे: 'तुम्हे भवव्हो', हे आज्ञार्थाचे रूप आहे. 'तुम्हे बभूविव्हो', हे परोक्ष भूतकाळाचे रूप आहे. ပရောက္ခာယ ပရဿပဒံ ပဌမပုရိသဗဟုဝစနံ ဟိယျတ္တနိယာ ပရဿပဒေန ပဌမပုရိသဗဟုဝစနေန စ အဇ္ဇတနိယာ အတ္တနောပဒေန ပဌမပုရိသဗဟုဝစနေန စာတိ ဒွီဟိ ဝစနေဟိ သဒိသံ. တေ ဗဘူဝု, ဣဒံ ပရောက္ခာယ ရူပံ. တေ အဘဝု, ဣဒံ ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီနံ ရူပံ. परोक्ष भूतकाळातील परस्मैपद प्रथम पुरुष बहुवचन हे हिय्यत्तनी (ह्यस्तन भूतकाळ) परस्मैपद प्रथम पुरुष बहुवचनाशी आणि अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) आत्मनेपद प्रथम पुरुष बहुवचनाशी, अशा दोन वचनांशी (रूपांशी) समान असते. जसे: 'ते बभूवु', हे परोक्ष भूतकाळाचे रूप आहे. 'ते अभवु', हे हिय्यत्तनी आणि अज्जतनीचे रूप आहे. ပရောက္ခာယ [Pg.62] ပရဿပဒံ မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနံ အတ္တနောပဒေန ပဌမပုရိသေကဝစနေန စ ဟိယျတ္တနိယာ ပရဿပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနေန စ အတ္တနောပဒေန ပဌမပုရိသေကဝစနေန စ အဇ္ဇတနိယာ ပရဿပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနေန စာတိ စတူဟိ ဝစနေဟိ သဒိသံ. တုမှေ ဗဘူဝိတ္ထ, သော ဗဘူဝိတ္ထ, ဣမာနိ ပရောက္ခာယ ရူပါနိ. တုမှေ အဘဝတ္ထ, သော အဘဝတ္ထ, ဣမာနိ ဟိယျတ္တနိယာ ရူပါနိ. တုမှေ အဘဝိတ္ထ, ဣဒမဇ္ဇတနိယာ ရူပံ. परोक्खा (परोक्ष) विभक्तीचे परस्मैपद मध्यमपुरुष बहुवचन हे (१) परोक्खा आत्मनेपद प्रथमपुरुष एकवचनाशी, (२) हिय्यत्तनी (ह्यस्तनी) परस्मैपद मध्यमपुरुष बहुवचनाशी, (३) हिय्यत्तनी आत्मनेपद प्रथमपुरुष एकवचनाशी आणि (४) अज्जतनी (अद्यतनी) परस्मैपद मध्यमपुरुष बहुवचनाशी अशा चार वचनांशी समान असते. 'तुम्हे बभूवित्थ' (तुम्ही झालात), 'सो बभूवित्थ' (तो झाला), ही परोक्खाची रूपे आहेत. 'तुम्हे अभवत्थ' (तुम्ही झालात), 'सो अभवत्थ' (तो झाला), ही हिय्यत्तनीची रूपे आहेत. 'तुम्हे अभवित्थ' (तुम्ही झालात), हे अज्जतनीचे रूप आहे. ပရောက္ခာယ ပရဿပဒံ ဥတ္တမပုရိသေကဝစနံ ဟိယျတ္တနိယာ ပရဿပဒေနုတ္တမပုရိသေကဝစနေန စ အဇ္ဇတနိယာ အတ္တနောပဒေနုတ္တမပုရိသေကဝစနေန စာတိ ဒွီဟိ ဝစနေဟိ သဒိသံ. အဟံ ဗဘူဝံ, ဣဒံ ပရောက္ခာယ ရူပံ. အဟံ အဘဝံ, ဣဒံ ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီနံ ရူပံ. परोक्खा विभक्तीचे परस्मैपद उत्तमपुरुष एकवचन हे (१) हिय्यत्तनी परस्मैपद उत्तमपुरुष एकवचनाशी आणि (२) अज्जतनी आत्मनेपद उत्तमपुरुष एकवचनाशी अशा दोन वचनांशी समान असते. 'अहं बभूवं' (मी झालो), हे परोक्खाचे रूप आहे. 'अहं अभवं' (मी झालो), हे हिय्यत्तनी आणि अज्जतनीचे रूप आहे. ပရောက္ခာယ ပရဿပဒံ ဥတ္တမပုရိသဗဟုဝစနံ ဟိယျတ္တနိယာ ပရဿပဒေနုတ္တမပုရိသဗဟုဝစနေန သဒိသံ. မယံ ဗဘူဝိမှ, ဣဒံ ပရောက္ခာယ ရူပံ. မယံ အဘဝမှ, ဣဒံ ဟိယျတ္တနိယာ ရူပံ. परोक्खा विभक्तीचे परस्मैपद उत्तमपुरुष बहुवचन हे हिय्यत्तनी परस्मैपद उत्तमपुरुष बहुवचनाशी समान असते. 'मयं बभूविम्ह' (आम्ही झालो), हे परोक्खाचे रूप आहे. 'मयं अभवम्ह' (आम्ही झालो), हे हिय्यत्तनीचे रूप आहे. ပရောက္ခာယ အတ္တနောပဒဥတ္တမပုရိသေကဝစနံ ဟိယျတ္တနိယာ အတ္တနောပဒေနုတ္တမပုရိသေကဝစနေန စ အဇ္ဇတနိယာ ပရဿပဒေနုတ္တမပုရိသေကဝစနေန စာတိ ဒွီဟိ ဝစနေဟိ သဒိသံ. အဟံ ဗဘူဝိံ, ဣဒံ ပရောက္ခာယ ရူပံ. အဟံ အဘဝိံ, ဣဒံ ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီနံ ရူပံ. परोक्खा विभक्तीचे आत्मनेपद उत्तमपुरुष एकवचन हे (१) हिय्यत्तनी आत्मनेपद उत्तमपुरुष एकवचनाशी आणि (२) अज्जतनी परस्मैपद उत्तमपुरुष एकवचनाशी अशा दोन वचनांशी समान असते. 'अहं बभूविं' (मी झालो), हे परोक्खाचे रूप आहे. 'अहं अभविं' (मी झालो), हे हिय्यत्तनी आणि अज्जतनीचे रूप आहे. ဟိယျတ္တနိယာ ပရဿပဒံ ပဌမပုရိသေကဝစနံ အဇ္ဇတနိယာ အတ္တနောပဒေန ပဌမပုရိသေကဝစနေန သဒိသံ. သော အဘဝါ. हिय्यत्तनी विभक्तीचे परस्मैपद प्रथमपुरुष एकवचन हे अज्जतनी आत्मनेपद प्रथमपुरुष एकवचनाशी समान असते. 'सो अभवा' (तो झाला). ဟိယျတ္တနိယာ ပရဿပဒံ မဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနံ အဇ္ဇတနိယာ ပရဿပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနေန သဒိသံ. တွံ အဘဝေါ. हिय्यत्तनी विभक्तीचे परस्मैपद मध्यमपुरुष एकवचन हे अज्जतनी परस्मैपद मध्यमपुरुष एकवचनाशी समान असते. 'त्वं अभवो' (तू झालास). ဘဝိဿန္တိယာ ပရဿပဒံ မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနံ ကာလာတိပတ္တိယာ ပရဿပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနေန အတ္တနောပဒေန ပဌမပုရိသေကဝစနေန စာတိ ဒွီဟိ ဝစနေဟိ သဒိသံ. တုမှေ [Pg.63] ဘဝိဿထ, ဣဒံ ဘဝိဿန္တိယာ ရူပံ. တုမှေ အဘဝိဿထ, သော အဘဝိဿထ, ဣမာနိ ကာလာတိပတ္တိယာ ရူပါနိ. भविस्संती (भविष्यकाळ) विभक्तीचे परस्मैपद मध्यमपुरुष बहुवचन हे कालातिपत्ती विभक्तीच्या परस्मैपद मध्यमपुरुष बहुवचनाशी आणि आत्मनेपद प्रथमपुरुष एकवचनाशी अशा दोन वचनांशी समान असते. 'तुम्हे भविस्सथ' (तुम्ही व्हाल), हे भविस्संतीचे रूप आहे. 'तुम्हे अभविस्सथ' (तुम्ही झाला असता), 'सो अभविस्सथ' (तो झाला असता), ही कालातिपत्तीची रूपे आहेत. ဘဝိဿန္တိယာ အတ္တနောပဒံ မဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနံ ကာလာတိပတ္တိယာ အတ္တနောပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသေကဝစနေန သဒိသံ. တွံ ဘဝိဿသေ, ဣဒံ ဘဝိဿန္တိယာ ရူပံ. တွံ အဘဝိဿသေ, ဣဒံ ကာလာတိပတ္တိယာ ရူပံ. भविस्संती विभक्तीचे आत्मनेपद मध्यमपुरुष एकवचन हे कालातिपत्ती आत्मनेपद मध्यमपुरुष एकवचनाशी समान असते. 'त्वं भविस्ससे' (तू व्हाल), हे भविस्संतीचे रूप आहे. 'त्वं अभविस्ससे' (तू झाला असतास), हे कालातिपत्तीचे रूप आहे. ဘဝိဿန္တိယာ အတ္တနောပဒံ မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနံ ကာလာတိပတ္တိယာ အတ္တနောပဒေန မဇ္ဈိမပုရိသဗဟုဝစနေန သဒိသံ. တုမှေ ဘဝိဿဝှေ, ဣဒံ ဘဝိဿန္တိယာ ရူပံ. တုမှေ အဘဝိဿဝှေ, ဣဒံ ကာလာတိပတ္တိယာ ရူပံ. भविस्संती विभक्तीचे आत्मनेपद मध्यमपुरुष बहुवचन हे कालातिपत्ती आत्मनेपद मध्यमपुरुष बहुवचनाशी समान असते. 'तुम्हे भविस्सव्हे' (तुम्ही व्हाल), हे भविस्संतीचे रूप आहे. 'तुम्हे अभविस्सव्हे' (तुम्ही झाला असता), हे कालातिपत्तीचे रूप आहे. ဘဝိဿန္တိယာ အတ္တနောပဒံ ဥတ္တမပုရိသေကဝစနံ ကာလာတိပတ္တိယာ ပရဿပဒေနုတ္တမပုရိသေကဝစနေန သဒိသံ. အဟံ ဘဝိဿံ, ဣဒံ ဘဝိဿန္တိယာ ရူပံ. အဟံ အဘဝိဿံ, ဣဒံ ကာလာတိပတ္တိယာ ရူပံ. သေသာနိ သဗ္ဗာသမဋ္ဌန္နံ ဝိဘတ္တီနံ ဝစနာနိ အညမညံ ဝိသဒိသာနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဘဝန္တိ စတြ – भविस्संती विभक्तीचे आत्मनेपद उत्तमपुरुष एकवचन हे कालातिपत्ती परस्मैपद उत्तमपुरुष एकवचनाशी समान असते. 'अहं भविस्सं' (मी होईन), हे भविस्संतीचे रूप आहे. 'अहं अभविस्सं' (मी झालो असतो), हे कालातिपत्तीचे रूप आहे. उर्वरित सर्व आठही विभक्तींची वचने एकमेकांपासून भिन्न आहेत असे समजावे. याविषयी खालील गाथा आहेत – ဝတ္တမာနာပဉ္စမီသု, ထဒွယံ သမုဒီရိတံ; ‘‘တုမှေ ဘဝထ’’ဣစ္စတြ, ဥဒါဟရဏကံ ဒွိဓာ. वत्तमाना (वर्तमानकाळ) आणि पंचमी (आज्ञार्थ) विभक्तींमध्ये 'थ' हे दोन प्रत्यय सांगितले आहेत; 'तुम्हे भवथ' (तुम्ही होता/व्हा) हे येथे दोन प्रकारचे उदाहरण आहे. မိဒွယံ မဒွယဉ္စေဝ, တာသု ဝုတ္တံ ဒွိဓာ ဒွိဓာ; ‘‘ဘဝါမီ’’တိ ‘‘ဘဝါမာ’’တိ, စေတ္ထ ရူပါနိ နိဒ္ဒိသေ. त्याच विभक्तींमध्ये 'मि' चे दोन आणि 'म' चे दोन प्रत्यय दोन-दोन प्रकारे सांगितले आहेत; येथे 'भवामि' आणि 'भवाम' अशी रूपे दर्शवावीत. ဝတ္တမာနကဟိယျတ္တ-နဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိသု; သေတ္တယံ ‘‘ဘဝသေ တွ’’န္တိ, ဝတ္တမာနာဝိဘတ္တိတော; ‘‘အဘဝသေ’’တိ ဟိယျတ္တ-နဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိတော. वत्तमाना, हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्तींमध्ये 'से' हा प्रत्यय येतो; वत्तमाना विभक्तीमध्ये 'भवसे त्वं' (तू होतोस) आणि हिय्यत्तनी व अज्जतनी विभक्तींमध्ये 'अभवसे' (तू झालास) असे रूप होते. ဝတ္တမာနာပဉ္စမိကာ-ပရောက္ခာသု ဝိဘတ္တိသု; ဧတ္တယံ လပိတံ တတ္ထ, အာဒေါ ဒွိန္နံ ဝသေန တု. वत्तमाना, पंचमी आणि परोक्खा विभक्तींमध्ये 'ए' हा प्रत्यय सांगितला आहे, त्यापैकी पहिल्या दोन विभक्तींच्या (वत्तमाना आणि पंचमी) संबंधात – ဇညာ ‘‘အဟံ ဘဝေ’’တိ ‘‘တွံ, ဗဘူဝေ’’တိ ပရောက္ခတော; ဝတ္တမာနာပရောက္ခဇ္ဇ-တနီသု တီသု သဒ္ဒိတံ. 'अहं भवे' (मी होतो/व्हावे) असे जाणावे, आणि परोक्खा विभक्तीमध्ये 'त्वं बभूवे' (तू झालास) असे जाणावे. वत्तमाना, परोक्खा आणि अज्जतनी या तिन्हींमध्ये हा प्रत्यय उच्चारला जातो. မှေတ္တယံ [Pg.64] ကမတော ရူပံ, မယံသဒ္ဒဝိသေသိယံ; ‘‘သမ္ဘဝါမှေ ဗဘူဝိမှေ, အဘဝိမှေ’’တိ နိဒ္ဒိသေ. 'म्हे' हा प्रत्यय क्रमाने 'मयं' शब्दाने विशेषित होऊन 'संभवाम्हे' (वत्तमाना), 'बभूविम्हे' (परोक्खा) आणि 'अभविम्हे' (अज्जतनी) अशी रूपे दर्शवतो. ပဉ္စမိကာပရောက္ခာသု, ဝှောဒွယံ ရူပမေတ္ထ ဟိ; ‘‘ဘဝဝှော ဗဘူဝိဝှော’’တိ, တုမှေသဒ္ဒဝိသေသိယံ. पंचमी आणि परोक्खा विभक्तींमध्ये 'व्हो' चे दोन प्रत्यय आहेत; येथे 'तुम्हे' शब्दाने विशेषित होऊन 'भवव्हो' (पंचमी) आणि 'बभूविव्हो' (परोक्खा) अशी रूपे होतात. ပရောက္ခမှိ ဝါ ဟိယျတ္တ-နဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိသု; ဥတ္တယံ ‘‘တေ ဗဘူဝူ’’တိ, ရူပံ ဇညာ ပရောက္ခတော; परोक्खा किंवा हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्तींमध्ये 'उ' हा प्रत्यय येतो; परोक्खामध्ये 'ते बभूवू' (ते झाले) असे रूप जाणावे. ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနိတော, ဇညာ ‘‘တေ အဘဝူ’’ဣတိ. हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्तींमध्ये 'ते अभवू' (ते झाले) असे रूप जाणावे. ပရောက္ခမှိ ဝါ ဟိယျတ္တ-နဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိသု; သဒ္ဒိတံ တထသံယောဂ- ပဉ္စကံ ဣတိ နိဒ္ဒိသေ. परोक्खा किंवा हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्तींमध्ये 'त्थ' (त-कार संयोग) चे पाच प्रत्यय सांगितले आहेत, ते खालीलप्रमाणे दर्शवावेत. ဗဘူဝိတ္ထဒွယံ တတ္ထ, ရူပံ ဇညာ ပရောက္ခဇံ; ဗဝှတ္တေကတ္တတော ဝုတ္တံ, မဇ္ဈိမပဌမဝှယံ. त्यामध्ये 'बभूवित्थ' ही दोन रूपे परोक्खा विभक्तीची जाणावीत; ती बहुवचन आणि एकवचनाच्या अनुक्रमाने मध्यमपुरुष आणि प्रथमपुरुष अशी सांगितली आहेत. အဘဝတ္ထဒွယံ ဉေယျံ, ဟိယျတ္တနီဝိဘတ္တိဇံ; ဗဝှတ္တေကတ္တတော ဝုတ္တံ, မဇ္ဈိမော ပဌမော စ သော; ‘‘အဘဝိတ္ထာ’’တိဒံ ရူပံ, အဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိဇံ. 'अभवत्थ' ही दोन रूपे हिय्यत्तनी विभक्तीची जाणावीत; ती बहुवचन आणि एकवचनाच्या अनुक्रमाने मध्यमपुरुष आणि प्रथमपुरुष अशी सांगितली आहेत. तर 'अभवित्थ' हे रूप अज्जतनी विभक्तीचे आहे. တဉ္စ ခေါ ဗဟုကတ္တမှိ, တုမှေသဒ္ဒေန ယောဇယေ; ပရောက္ခာဝှယဟိယျတ္တ-နဇ္ဇတနီသု ကိတ္တိတံ. आणि ते (अभवित्थ) बहुवचनामध्ये 'तुम्हे' शब्दाशी जोडावे. हे परोक्खा, हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्तींमध्ये सांगितले आहे. အံတယံ တတ္ထ အာဒိယံ, ‘‘ဗဘူဝံ’’ရူပမီရိတံ; ဒုဝိန္နံ အဘဝံရူပံ, အဟံသဒ္ဒေန ယောဇယေ. त्यामध्ये 'अं' प्रत्ययाचे पहिले रूप 'बभूवं' असे सांगितले आहे; आणि उर्वरित दोन 'अभवं' ही रूपे 'अहं' शब्दाशी जोडावीत. ပရောက္ခကာဟိယျတ္တနီ-ဝသေန မှဒုကံ ‘‘မယံ; ဗဘူဝိမှ အဘဝိမှ’’, ဣတိ ရူပဒွယံ ကမာ. परोक्खा आणि हिय्यत्तनी विभक्तींच्या अनुक्रमाने 'म्ह' चे दोन प्रत्यय 'मयं' शब्दाशी जोडून 'मयं बभूविम्ह' आणि 'मयं अभविम्ह' अशी दोन रूपे क्रमाने होतात. ပရောက္ခာဝှယဟိယျတ္တ-နဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိသု; ဣံတယံ တု တဟိံ ရူပံ, ‘‘ဗဘူဝိ’’န္တိ ပရောက္ခဇံ; ‘‘အဘဝိ’’န္တီတရာသံ တု, အဟံသဒ္ဒယုတာခိလံ. परोक्खा, हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्तींमध्ये 'इं' प्रत्ययाचे रूप येते; त्यापैकी 'बभूविं' हे परोक्खाचे रूप आहे, तर 'अहं' शब्दाशी जोडलेली इतर रूपे 'अभविं' (हिय्यत्तनी व अज्जतनीची) आहेत. ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီသု[Pg.65], အာဒွယံ မတမေတ္ထ ဟိ; ‘‘အဘဝါ’’ ဣတိ ဧကတ္တေ, ရူပံ ပဌမပေါရိသံ. हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्तींमध्ये 'आ' चे दोन प्रत्यय मानले आहेत; येथे एकवचनात 'अभवा' हे प्रथमपुरुषाचे रूप होते. ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီသု, ဩဒွယံ ဝုတ္တမေတ္ထ တု; ‘‘အဘဝေါ’’ဣတိ ဧကတ္တေ, ရူပံ မဇ္ဈိမပေါရိသံ. हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्तींमध्ये 'ओ' चे दोन प्रत्यय सांगितले आहेत; येथे एकवचनात 'अभवो' हे मध्यमपुरुषाचे रूप होते. ဘဝိဿန္တိယကာလာတိ-ပတ္တီသု ဒွီသု ဘာသိတံ; ဗဝှတ္တေ ဗဟုဧကတ္တေ, သသံယောဂံ ဿထတ္တယံ. भविस्संती आणि कालातिपत्ती या दोन्ही विभक्तींमध्ये बहुवचन आणि एकवचनात 'स्सथ' (संयोगासह) हे तीन प्रत्यय सांगितले आहेत. ‘‘တုမှေ ဘဝိဿထိ’’စ္စေတံ, ဘဝိဿန္တိယတော မတံ; ‘‘အဘဝိဿထ တုမှေ’’တိ, ‘‘အဘဝိဿထ သော’’တိ စ; ကာလာတိပတ္တိတော ဝုတ္တံ, ဧတဉှိ ဝစနဒွယံ. 'तुम्हे भविस्सथ' हे भविस्संती विभक्तीचे मानले जाते; तर 'अभविस्सथ तुम्हे' आणि 'अभविस्सथ सो' ही दोन वचने कालातिपत्ती विभक्तीची सांगितली आहेत. ဘဝိဿန္တိယကာလာတိ-ပတ္တီသု သမုဒီရိတံ; မဇ္ဈိမပုရိသဋ္ဌာနေ, သသံယောဂံ ဿသေယုဂံ. भविस्संती आणि कालातिपत्ती विभक्तींमध्ये मध्यमपुरुषाच्या ठिकाणी 'स्ससे' (संयोगासह) हे दोन प्रत्यय सांगितले आहेत. ‘‘ဘဝိဿသေ တွ’’မိစ္စေတံ, ‘‘တွံ အဘဝိဿသေ’’တိ စ; ဣမာနိ တု ပယောဂါနိ, တတ္ထ ဝိညူ ပကာသယေ. 'भविस्ससे त्वं' आणि 'त्वं अभविस्ससे' हे प्रयोग विद्वानांनी तेथे स्पष्ट करावेत. ဿဝှေဒွယံ သေန ယုတံ, ဿံဒွယဉ္စ စတုက္ကကံ; ဣဒမ္ပိ ကထိတံ ဒွီသု, ယထာရုတဝိဘတ္တိသု. दोन 'स्सव्हे' (ssavhe) हे 'स' ने युक्त असतात, आणि दोन 'स्सं' (ssaṃ) हे चतुष्क (चार) असतात; हे देखील दोन विभक्तींमध्ये, शब्दाच्या उच्चारानुसार (यथारुतविभत्तीसु) सांगितले आहे. ‘‘ဘဝိဿဝှေ’’တိ ဗဝှတ္တေ, ဘဝိဿန္တိကမဇ္ဈိမော; ဗဝှတ္တေ ‘‘အဘဝိဿဝှေ’’, ကာလာတိပတ္တိမဇ္ဈိမော. बहुवचनामध्ये 'भविस्सव्हे' (bhavissavhe) हे भविष्यकाळातील मध्यम पुरुष (बहुवचन) आहे; आणि बहुवचनामध्ये 'अभविस्सव्हे' (abhavissavhe) हे कालातिपत्ती (conditional mood) मधील मध्यम पुरुष (बहुवचन) आहे. ‘‘ဘဝိဿံ’’ ဣတိ ဧကတ္တေ, ဘဝိဿန္တိကမုတ္တမော; ‘‘အဘဝိဿ’’န္တိ ဧကတ္တေ, ကာလာတိပတ္တိကုတ္တမော. एकवचनामध्ये 'भविस्सं' (bhavissaṃ) हे भविष्यकाळातील उत्तम पुरुष (एकवचन) आहे; आणि एकवचनामध्ये 'अभविस्सं' (abhavissaṃ) हे कालातिपत्तीमधील उत्तम पुरुष (एकवचन) आहे. ဣတိ ဝုတ္တာနိ ဝုတ္တေဟိ, ဝစနေဟိ သမာနတံ; ယန္တေ’ကစ္စေဟိ တံ သဗ္ဗံ, ဧကတာလီသဓာ ဌိတံ. अशा प्रकारे सांगितलेल्या वचनांशी समानता असणारे जे काही आहे, ते सर्व काहींच्या मते एकेचाळीस (४१) प्रकारे स्थित आहे. သေသာနိ ပဉ္စပညာသ, အသမာနာနိ သဗ္ဗထာ; ဧတံ နယံ ဂဟေတွာန, ဝဒေ သဗ္ဗတ္ထ သမ္ဘဝါတိ. उर्वरित पंचावन्न (५५) सर्व प्रकारे असमान आहेत; हा नियम (नय) लक्षात घेऊन सर्व ठिकाणी संभाव्य रूपांचे कथन करावे. အယမေတ္ထ သမာနာသမာနဝသေန ဝစနသင်္ဂဟော. येथे समान आणि असमान रूपांच्या आधारे हा 'वचनसंग्रह' (वचनांचा संक्षेप) आहे. အာဂမလက္ခဏဝသေန [Pg.66] ဝိဘတ္တိဝစနသင်္ဂဟေ ဧဝံ ဥပလက္ခေတဗ္ဗံ – आगम-लक्षणाच्या (प्रत्यय किंवा आगम जोडण्याच्या नियमांच्या) आधारे विभक्ती आणि वचनांच्या संग्रहामध्ये खालीलप्रमाणे लक्ष दिले पाहिजे – ဘဝိဿန္တီပရောက္ခဇ္ဇ-တနီကာလာတိပတ္တိသု; နိစ္စံ ကွစိ ကွစာ’နိစ္စံ, ဣကာရာဂမနံ ဘဝေ. भविष्यन्ती (भविष्यकाळ), परोक्खा (परोक्ष भूतकाळ), अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) आणि कालातिपत्ती (संकेतार्थ) मध्ये 'इ' काराचा आगम (ikārāgamana) नेहमी, कधी कधी किंवा कधी कधी अनिश्चितपणे होतो. ဣကာရာဂမနံ တဉှိ, ပရောက္ခာယံ ဝိဘတ္တိယံ; ဗဝှတ္တေ မဇ္ဈိမဋ္ဌာနေ, ဗဝှတ္တေ စုတ္တမေ သိယာ; ပရဿပဒံ သန္ဓာယ, ဣဒံ ဝစနမီရိတံ. परोक्खा विभक्तीमध्ये 'इ' काराचा आगम बहुवचनातील मध्यम पुरुषात आणि बहुवचनातील उत्तम पुरुषात होतो; परस्मैपद (परस्सपद) लक्षात घेऊन हे वचन सांगितले गेले आहे. ဥတ္တမေကဝစော စာပိ, နေတဿ အတ္တနောပဒေ; ဟောတီတိ အဝဂန္တဗ္ဗံ, ဘဝိဿန္တိမှိ သဗ္ဗသော. तसेच उत्तम पुरुषाच्या एकवचनात आत्मनेपदात (अत्तनौपद) हा आगम होत नाही; भविष्यन्तीमध्ये (भविष्यकाळात) हे सर्वथा असेच होते, असे समजावे. ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနိက-ကာလာတိပတ္တီသု ပန; အကာရာဂမနံ ဟောတိ, သဗ္ဗသော ဣတိ လက္ခယေ. परंतु, हिय्यतनी (ह्यस्तन भूतकाळ), अज्जतनी (अद्यतन भूतकाळ) आणि कालातिपत्तीमध्ये 'अ' काराचा आगम (akārāgamana) सर्वथा होतो, असे जाणावे. အဇ္ဇတနိမှိ ဗဝှတ္တေ, မဇ္ဈိမေ ဥတ္တမေ တထာ; ဗဝှတ္တမှိ အကာရေန, ဣကာရာဂမနံ ဘဝေ. अज्जतनीमध्ये बहुवचनातील मध्यम पुरुषात तसेच उत्तम पुरुषात, बहुवचनामध्ये 'अ' कारासोबत 'इ' काराचा देखील आगम होतो. ဣကာရာဂမနံ နိစ္စံ, ကာလာတိပတ္တိယံ ဘဝေ; အကာရာဂမနံ တတ္ထ, အနေကန္တိကမီရိတံ. कालातिपत्तीमध्ये 'इ' काराचा आगम नित्य (नियमित) होतो; तेथे 'अ' काराचा आगम अनैकांतिक (अनिश्चित किंवा वैकल्पिक) सांगितला आहे. အကာရာဂမနံယေဝ, ဟိယျတ္တနျံ ပကာသတိ; ပရောက္ခာယံ ဘဝိဿန္တျ-ဉ္စိကာရောယေဝ ဒိဿတိ. हिय्यतनीमध्ये केवळ 'अ' काराचाच आगम दिसून येतो; तर परोक्खा आणि भविष्यन्तीमध्ये केवळ 'इ' कारच दिसून येतो. အကာရာဂမနဉ္စေဝ, ဣကာရာဂမနမ္ပိ စ; အဇ္ဇတနိကကာလာတိ-ပတ္တီသု ပန ဒိဿတိ. परंतु, अज्जतनी आणि कालातिपत्तीमध्ये 'अ' काराचा आगम आणि 'इ' काराचा आगम हे दोन्ही दिसून येतात. တီသု သေသဝိဘတ္တီသု, နာ’ကာရတ္တယမီရိတံ; ဝတ္တမာနာယ ပဉ္စမျံ, သတ္တမိယန္တိ သဗ္ဗသော. उर्वरित तीन विभक्तींमध्ये – वर्तमानकाळ (वत्तमाना), पंचमी आणि सप्तमीमध्ये – सर्वथा 'अ' कार इत्यादींचा आगम सांगितलेला नाही. ဣကာရေနေဝ သဟိတာ, ဒွေ ဘဝန္တိ ဝိဘတ္တိယော; သတ္တ ဒွါဒသ ဟောန္တေတ္ထ, ဝစနာနီတိ လက္ခယေ. केवळ 'इ' काराशी संबंधित दोन विभक्ती असतात; येथे सात आणि बारा वचने (रूपे) होतात, असे जाणावे. အကာရေနေဝ သဟိတာ, ဧကာယေဝ ဝိဘတ္တိ တု; ဒွါဒသ ဝစနာနေတ္ထ, ဘဝန္တီတိ စ လက္ခယေ. केवळ 'अ' काराशी संबंधित फक्त एकच विभक्ती असते; येथे बारा वचने (रूपे) होतात, असे जाणावे. အကာရိကာရသဟိတာ[Pg.67], ဒုဝေယေဝ ဝိဘတ္တိယော; စတ္တာရိ ဒွါဒသဉ္စေဝ, ဝစနာနိ ဘဝန္တိဓ. 'अ' आणि 'इ' या दोन्ही कारांनी युक्त अशा केवळ दोनच विभक्ती असतात; येथे चार आणि बारा वचने (रूपे) होतात. အာကာရတ္တယမုတ္တာ တု, တိဿောယေဝ ဝိဘတ္တိယော; ဝစနာနေတ္ထ ဆတ္တိံသ, ဟောန္တီတိ ပရိဒီပယေ. या तिन्ही आगमांनी (अ, इ इत्यादी) मुक्त अशा केवळ तीनच विभक्ती असतात; येथे छत्तीस (३६) वचने (रूपे) होतात, असे स्पष्ट करावे. ပရောက္ခာအဇ္ဇတနီသု, ပဉ္စဋ္ဌ စ ယထာက္ကမံ; ဣကာရတော ဝိမုတ္တာနိ, ဝစနာနိ ဘဝန္တိတိ. परोक्खा आणि अज्जतनीमध्ये अनुक्रमे पाच आणि आठ वचने (रूपे) 'इ' कारापासून मुक्त असतात. ဧဝမေတ္ထ ဝိဘတ္တီနံ, ဆန္နဝုတိဝိဓာန စ; သင်္ဂဟော ဝစနာနန္တိ, ဝိညာတဗ္ဗော ဝိဘာဝိနာတိ. अशा प्रकारे, येथे विभक्तींच्या शहाण्णव (९६) प्रकारांचा आणि वचनांचा संग्रह विद्वानांनी समजून घ्यावा. အယမေတ္ထ အာဂမလက္ခဏဝသေန ဝိဘတ္တိဝစနသင်္ဂဟော. येथे आगम-लक्षणाच्या आधारे हा विभक्ती आणि वचनांचा संग्रह आहे. ကာလဝသေန ပန ဝိဘတ္တိဝစနသင်္ဂဟေ ဒုဝိဓော သင်္ဂဟော ကာလတ္တယဝသေန သင်္ဂဟော, ကာလဆက္ကဝသေန သင်္ဂဟော စာတိ. တတ္ထ ဝတ္တမာနာပဉ္စမီသတ္တမီဝိဘတ္တိယော ပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာ, ဝတ္တမာနာပဉ္စမီသတ္တမီဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ ပစ္စုပ္ပန္နဝစနာနိ. ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိယော အတီတကာလိကာ, ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ အတီတဝစနာနိ. ဘဝိဿန္တီဝိဘတ္တိ အနာဂတကာလိကာ, ဘဝိဿန္တီဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ အနာဂတဝစနာနိ. ကာလာတိပတ္တိဝိဘတ္တိ ပန ကတ္ထစိ အတီတကာလိကာ ကတ္ထစိ အနာဂတကာလိကာ, တသ္မာ တဒန္တာနိ ပဒါနိ အတီတဝစနာနိပိ အနာဂတဝစနာနိပိ ဟောန္တိ. အယံ ကာလတ္တယဝသေန ဝိဘတ္တိဝစနသင်္ဂဟော. काळाच्या (काळाच्या नियमांनुसार) आधारे विभक्ती आणि वचनांचा संग्रह दोन प्रकारचा आहे: त्रिकाळ-पद्धतीने (कालत्रय) संग्रह आणि षट्काळ-पद्धतीने (कालषट्क) संग्रह. त्यापैकी, वत्तमाना (वर्तमान), पंचमी आणि सप्तमी या विभक्ती वर्तमानकालीन आहेत, आणि वत्तमाना, पंचमी व सप्तमी विभक्तींनी अंत होणारे शब्द वर्तमानकालीन वचने आहेत. परोक्खा, हिय्यतनी आणि अज्जतनी या विभक्ती भूतकालीन आहेत, आणि परोक्खा, हिय्यतनी व अज्जतनी विभक्तींनी अंत होणारे शब्द भूतकालीन वचने आहेत. भविष्यन्ती विभक्ती भविष्यकालीन आहे, आणि भविष्यन्ती विभक्तीने अंत होणारे शब्द भविष्यकालीन वचने आहेत. परंतु, कालातिपत्ती विभक्ती काही ठिकाणी भूतकालीन तर काही ठिकाणी भविष्यकालीन असते; म्हणून, त्या विभक्तीने अंत होणारे शब्द भूतकालीन आणि भविष्यकालीन दोन्ही प्रकारची वचने असतात. हा त्रिकाळ-पद्धतीने विभक्ती आणि वचनांचा संग्रह आहे. အယံ ပန ကာလဆက္ကဝသေန ဝိဘတ္တိဝစနသင်္ဂဟော – ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဝိဘတ္တိယော အတီတကာလိကာ, ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ အတီတဝစနာနိ. ဘဝိဿန္တီဝိဘတ္တိ အနာဂတကာလိကာ, ဘဝိဿန္တီဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ အနာဂတဝစနာနိ. ဝတ္တမာနာဝိဘတ္တိ ပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာ, ဝတ္တမာနာဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ ပစ္စုပ္ပန္နဝစနာနိ. ပဉ္စမီဝိဘတ္တိ အာဏတ္တိကာလိကာ[Pg.68], ပဉ္စမီဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ အာဏတ္တိဝစနာနိ. သတ္တမီဝိဘတ္တိ ပရိကပ္ပကာလိကာ, သတ္တမီဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ ပရိကပ္ပဝစနာနိ. ဧတ္ထ ပန ‘‘အာဏတ္တိဝစနာနီ’’တိ စ ‘‘ပရိကပ္ပဝစနာနီ’’တိ စ ဣဒံ တထာသီသမတ္တံ အာသိဋ္ဌာနုမတျာဒီသု ပဉ္စမျာဒီနံ ဒိဿနတော. ကာလာတိပတ္တိဝိဘတ္တိ ကာလာတိပတ္တိကာလိကာ, ကာလာတိပတ္တိဝိဘတျန္တာနိ ပဒါနိ ကာလာတိပတ္တိဝစနာနိ. ဧဝံ ကာလဆက္ကဝသေန ဝိဘတ္တိဝစနသင်္ဂဟော ဝေဒိတဗ္ဗော. आता हा षट्काळ-पद्धतीने विभक्ती आणि वचनांचा संग्रह आहे – परोक्खा, हिय्यतनी आणि अज्जतनी या विभक्ती भूतकालीन आहेत, आणि परोक्खा, हिय्यतनी व अज्जतनी विभक्तींनी अंत होणारे शब्द भूतकालीन वचने आहेत. भविष्यन्ती विभक्ती भविष्यकालीन आहे, आणि भविष्यन्ती विभक्तीने अंत होणारे शब्द भविष्यकालीन वचने आहेत. वत्तमाना विभक्ती वर्तमानकालीन आहे, आणि वत्तमाना विभक्तीने अंत होणारे शब्द वर्तमानकालीन वचने आहेत. पंचमी विभक्ती आज्ञार्थक (आणत्तिकालिका) आहे, आणि पंचमी विभक्तीने अंत होणारे शब्द आज्ञार्थक वचने आहेत. सप्तमी विभक्ती विध्यर्थक/संकेतार्थक (परिकप्पकालिका) आहे, आणि सप्तमी विभक्तीने अंत होणारे शब्द विध्यर्थक/संकेतार्थक वचने आहेत. येथे 'आज्ञा-वचने' आणि 'संकेत-वचने' हे केवळ मुख्य शीर्षक म्हणून दिले आहे, कारण पंचमी इत्यादी विभक्ती आशीर्वाद (आसिट्ठ), अनुमती (अनुमति) इत्यादी अर्थांमध्येही दिसून येतात. कालातिपत्ती विभक्ती कालातिपत्तीकालीन (conditional) आहे, आणि कालातिपत्ती विभक्तीने अंत होणारे शब्द कालातिपत्ती वचने आहेत. अशा प्रकारे षट्काळ-पद्धतीने विभक्ती आणि वचनांचा संग्रह समजून घ्यावा. ကာလသင်္ဂဟေ တိဝိဓော ကာလသင်္ဂဟော ကာလတ္တယသင်္ဂဟော ကာလစတုက္ကသင်္ဂဟော ကာလဆက္ကသင်္ဂဟော စာတိ. काळ-संग्रहामध्ये (काळाच्या संक्षेपात) तीन प्रकारचा काळ-संग्रह आहे: त्रिकाळ-संग्रह (कालत्रयसंग्रह), चतुष्काळ-संग्रह (कालचतुष्कसंग्रह) आणि षट्काळ-संग्रह (कालषट्कसंग्रह). ပစ္စုပ္ပန္နေ ဝတ္တမာနာ, ပဉ္စမီ သတ္တမီ စိမာ; ဟောန္တာတီတေ ပရောက္ခာဒီ, သဟ ကာလာတိပတ္တိယာ. वर्तमानकाळात वत्तमाना, पंचमी आणि सप्तमी या विभक्ती होतात; भूतकाळात परोक्खा इत्यादी विभक्ती कालातिपत्तीसह होतात. အနာဂတေ ဘဝိဿန္တီ, ကာလာတိပတ္တိကာပိ ဝါ; ဧဝံ ကာလတ္တယံ ဉေယျံ, အာချာတံ တပ္ပကာသကံ. भविष्यकाळात भविष्यन्ती किंवा कालातिपत्ती देखील होते; अशा प्रकारे तीन काळ समजून घ्यावेत, आणि आख्यात (क्रियापद) हे त्यांचे प्रकाशक (दर्शक) असते. နနု ကစ္စာယနေ ဂန္ထေ, ကာလော ဝုတ္တော စတုဗ္ဗိဓော; ပစ္စုပ္ပန္နေနုတ္တကာလေ, အတီတေနာဂတေ ဣတိ. कच्चायन ग्रंथामध्ये काळ चार प्रकारचा सांगितला आहे ना? – वर्तमानकाळ, अनुक्तकाळ (अनुत्तकाल), भूतकाळ आणि भविष्यकाळ. သစ္စံ ဝုတ္တော နုတ္တကာလော, ပစ္စုပ္ပန္နောတိ ဣစ္ဆိတော; သမီပေ ဝုတ္တကာလောတိ, အတ္ထသမ္ဘဝတော ပန. हे सत्य आहे की तेथे 'अनुक्तकाळ' (नूत्तकाल) सांगितला आहे, परंतु अर्थाच्या संभवामुळे तो वर्तमानकाळ किंवा 'समीप भूतकाळ' (समीपे वृत्तकाल) म्हणून स्वीकारला गेला आहे. တထာ ဟိ ‘‘ယံ တိကာလ’’န္တိ, ဝုတ္တမာစရိယေဟိပိ; န ကာလတော ဝိနိမုတ္တံ, အာချာတံ ကိဉ္စိ ဒိဿတိ. तसेच आचार्यांनी देखील 'जे त्रिकाळ आहे' असे म्हटले आहे; काळापासून मुक्त असलेले कोणतेही आख्यात (क्रियापद) दिसून येत नाही. နနု စာဝုတ္တကာလေတိ, အတ္ထော တတြ တု ယုဇ္ဇတိ; တထာ ဟိ ဆဗ္ဗိဓော ကာလော, နိရုတ္တိမှိ ပကာသိတော. परंतु तेथे 'अवृत्तकाळ' (अवुत्तकाल) हाच अर्थ योग्य ठरतो ना? कारण व्याकरणामध्ये (निरुत्तीमध्ये) सहा प्रकारचा काळ प्रकाशित केला आहे. အတီတာနာဂတော ပစ္စု-ပ္ပန္နော အာဏတ္တိမေဝ စ; ပရိကပ္ပော စ ကာလဿ, အတိပတ္တီတိ ဆဗ္ဗိဓော. भूतकाळ, भविष्यकाळ, वर्तमानकाळ, आज्ञा (आणत्ती), संकेत/परिकल्पना (परिकप्प) आणि कालातिपत्ती – अशा प्रकारे काळाचे सहा प्रकार आहेत. ဒုဝေ ဝိဘတ္တိယော တတ္ထ, အာဏတ္တိပရိကပ္ပိကာ; ကာလမနာမသိတွာပိ, နိရုတ္တညူဟိ ဘာသိတာ. त्यामध्ये आज्ञार्थक आणि संकेतार्थक या दोन विभक्ती, काळाचा उल्लेख न करताही व्याकरणकारांनी सांगितल्या आहेत. ‘‘ဂစ္ဆတု [Pg.69] ဂစ္ဆေယျိ’’စ္စာဒိ-ဝစနေ ကထိတေ န ဟိ; ကြိယာ နိပ္ဖဇ္ဇတိ နိဋ္ဌံ, နာဂတာ နာတိပန္နိကာ. 'गच्छतु' (तो जावो), 'गच्छेय्य' (त्याने जावे) इत्यादी वचने म्हटली असता, क्रिया निश्चितपणे पूर्ण होत नाही, ती भविष्यकालीनही नसते आणि अतीत (कालातिपत्ती) देखील नसते. ကာလာတိပတ္တိကာ သဒ္ဒါ, အတီတေနာဂတေပိ စ; ဘဝန္တီတိ ယထာဝုတ္တာ, နိရုတ္တိမှိ ဝိဒူဟိ ဝေ. कालातिपत्तीचे शब्द भूतकाळात आणि भविष्यकाळात देखील होतात, असे व्याकरणतज्ज्ञांनी व्याकरणामध्ये योग्य प्रकारे सांगितले आहे. ပဉ္စမီသတ္တမီဝှိတာ, အာဏတ္တိပရိကပ္ပိကာ; ပစ္စုပ္ပန္နေ ဘဝန္တီတိ, န တထာ တတ္ထ ဘာသိတာ. पंचमी आणि सप्तमी नावाच्या आज्ञार्थक व संकेतार्थक विभक्ती वर्तमानकाळात होतात, असे तेथे त्या प्रकारे सांगितलेले नाही. တသ္မာ ကစ္စာယနေ ဂန္ထေ, ‘‘နုတ္တကာလေ’’တိ ယံ ပဒံ; အတ္ထော ‘‘အဝုတ္တကာလေ’’တိ, တဿ ဉာယတိမေဝိဒံ. म्हणून कच्चायन ग्रंथामध्ये 'नुत्तकाले' (nuttakāle) हा जो शब्द आहे, त्याचा अर्थ 'अवृत्तकाले' (avuttakāle - अव्यक्त काळात) असा समजला पाहिजे. သစ္စမေဝံ တု သန္တေပိ, အာဏတ္တိပရိကပ္ပိကာ; ပစ္စုပ္ပန္နေပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ, ပဏ္ဍိတေန နယညုနာ. हे जरी सत्य असले, तरी नियम जाणणाऱ्या विद्वानाने आज्ञार्थक आणि संकेतार्थक विभक्ती वर्तमानकाळात देखील समजाव्यात. ကသ္မာတိ စေ အာဏာပနံ, ပရိကပ္ပော စ သစ္စတော; ပစ္စုပ္ပန္နေ ယတော အတ္ထာ, နိပ္ဖန္နာ ဒိဿရေ ဣမေ. जर विचारले की, आज्ञा (आणापन) आणि परिकल्प (संभावना) हे प्रत्यक्षात वर्तमानकाळात का समाविष्ट केले जातात? कारण हे अर्थ (किंवा क्रिया) वर्तमानकाळातच निष्पन्न (पूर्ण) झालेले दिसतात. ‘‘အနုတ္တကာလေ’’တိ ပဒံ, ဧတဿတ္ထဿ ဇောတကံ; ‘‘သမီပေ ဝုတ္တကာလေ’’တိ, အတ္ထဒီပနတောထ ဝါ. ‘अनुत्तकाले’ (न सांगितलेल्या काळात) हा शब्द याच अर्थाचा प्रकाशक आहे; किंवा त्याचा अर्थ ‘सांगितलेल्या काळाच्या समीप असलेल्या काळात’ असा स्पष्ट होतो. အတ္ထာနံ ဂမနာဒီနံ, နိပ္ဖတ္တိ န တု ဒိဿတိ; ‘‘ဂစ္ဆတု ဂစ္ဆေယျိ’’စ္စာဒိ, ဝုတ္တကာလေ ယတော တတော; အဝုတ္တကာလေ နိဒ္ဒိဋ္ဌာ, တဒ္ဒီပကဝိဘတ္တိယော. कारण ‘गच्छतु’ (तो जावो), ‘गच्छेय्य’ (त्याने जावे) इत्यादी रूपांमध्ये जाणे वगैरे क्रियांची निष्पत्ती सांगितलेल्या काळात दिसून येत नाही; म्हणूनच, त्या काळाचे द्योतक असणारे विभक्ती प्रत्यय हे ‘अवृत्तकाले’ (न सांगितलेल्या काळात) निर्दिष्ट केले आहेत. ကာလော ဝါ ဝုတ္တကာလောတိ, ဣစ္စေဝံ ဂဟိတော ဣဓ; ဒက္ခိဏာသုဒ္ဓိပါဌမှိ, ကတာဝ တတိယာ အယံ; ကာလဒီပနတာ တာသံ, ဣတိ ယုဇ္ဇတိ နာညထာ. किंवा येथे ‘कालो’ म्हणजे ‘वृत्तकालो’ (सांगितलेला काळ) असा घेतला आहे. ‘दक्खिणासुद्धि’ पाठात ही तृतीया विभक्ती केली आहे; त्यांचा काळ दर्शविण्याचा स्वभाव याच प्रकारे योग्य ठरतो, अन्यथा नाही. အတ္ထဒွယံ ပကာသေတုံ, ဂန္ထေ ကစ္စာယနဝှယေ; ထေရော ကစ္စာယနော ‘‘နုတ္တ-ကာလေ’’တိ ပဒမဗြဝိ. कच्चायन नावाच्या ग्रंथात हे दोन्ही अर्थ प्रकट करण्यासाठी, थेर कच्चायन यांनी ‘नुत्तकाले’ (अनुत्तकाले) हा शब्द वापरला आहे. ဧဝံ တိဓာ စတုဓာပိ, ဝုတ္တော ကာလာန သင်္ဂဟော; ဆဓာ ဣဒါနိ ကာလာနံ, သင်္ဂဟော နာမ နိယျတေ. अशा प्रकारे काळांचा संग्रह (संक्षिप्त वर्गीकरण) तीन प्रकारे आणि चार प्रकारे सांगितला आहे; आता काळांचा सहा प्रकारांनी होणारा संग्रह सादर केला जात आहे. ဝိဘတ္တိယော [Pg.70] ပရောက္ခာ စ, ဟိယျတ္တနီဝိဘတ္တိယော; အထ အဇ္ဇတနီ စာတိ, တိဿော’တီတေ ပကာသိတာ. परोक्खा विभक्ती, हिय्यत्तनी विभक्ती आणि अज्जतनी विभक्ती—या तीन विभक्ती भूतकाळात (अतीते) घोषित केल्या आहेत. အနာဂတေ ဘဝိဿန္တီ, ဘဝတီတိ ပကိတ္တိတာ; ပစ္စုပ္ပန္နေ ဝတ္တမာနာ, တိကာလေ ပဉ္စဓာ ကတာ. भविष्यकाळात (अनागते) ‘भविस्सती’ विभक्ती सांगितली आहे आणि वर्तमानकाळात (पच्चुप्पन्ने) ‘वत्तमाना’ विभक्ती सांगितली आहे. अशा प्रकारे तीन काळांमध्ये पाच प्रकारच्या विभक्ती केल्या आहेत. ပဉ္စမီသတ္တမီဝှိတာ, အာဏတ္တိပရိကပ္ပိကာ; သင်္ဂယှမာနာ တာ ယန္တိ, ပစ္စုပ္ပန္နမှိ သင်္ဂဟံ. ‘पंचमी’ आणि ‘सत्तमी’ नावाच्या विभक्ती, ज्या अनुक्रमे आज्ञा (आणत्ति) आणि परिकल्प (परिकप्प) दर्शवितात, त्या वर्तमानकाळातच समाविष्ट केल्या जातात. ယသ္မာ ပဉ္စမိဘူတာယ, ဝတ္တမာနာယ ဌာနတော; သမာနာ ပဉ္စမီ ဟောတိ, တသ္မာ သာ ပဉ္စမီ မတာ. ज्याअर्थी पाचवी असलेल्या वर्तमानकाळाच्या स्थानावर राहिल्यामुळे ही विभक्ती तिच्या समान होते, म्हणून तिला ‘पंचमी’ मानले गेले आहे. သတ္တမီ ပန ကိဉ္စာပိ, သမာနာ တာဟိ သတ္တမာ; ဟောတိ ယသ္မာ တတော ဝုတ္တာ, သတ္တမီတွေဝ နော မတိ. परंतु, ‘सत्तमी’ विभक्ती जरी त्यांच्या समान असली, तरी ती सातवी होत असल्यामुळे तिला ‘सत्तमी’ म्हटले गेले आहे, असे आमचे मत आहे. ကာလာတိပတ္တိယာဒီဟိ, ယဇ္ဇေဝံ ဝတ္တမာနိကာ; ဆဋ္ဌီ ဘဝေယျ ကာလာတိ-ပတ္တိကာတီတဝါစိကာ. जर असे असेल, तर कालातिपत्ती (क्रिया-अतिपत्ती) इत्यादींमुळे वर्तमानकाळासारखी असणारी सहावी विभक्ती ही भूतकाळ दर्शवणारी ‘कालातिपत्ती’ असायला हवी. ပဉ္စမီ တာယ ဆဋ္ဌဿ, တုလျတ္တာ ဌာနတော နနု; တာဟိ သတ္တဝိဘတ္တီဟိ, သတ္တမီ အဋ္ဌမီ သိယာ. नक्कीच, त्या पंचमीचे सहाव्या विभक्तीशी स्थानाच्या समानतेमुळे, त्या सात विभक्तींसह ‘सत्तमी’ ही आठवी विभक्ती झाली असती. ဣတိ စေ ကောစိ ဘာသေယျ, ‘‘တန္နာ’’တိ ပဋိသေဓယေ; အတီတေနာဂတေ စာပိ, ကာလာတိပတ္တိသမ္ဘဝါ. जर कोणी असे म्हटले, तर ‘तन्ना’ (तसे नाही) असे म्हणून त्याचा निषेध करावा; कारण भूतकाळ आणि भविष्यकाळ या दोन्हीमध्ये कालातिपत्तीचा संभव असतो. တထာ ဟိ ဘာသိတာ စူဠ-နိရုတ္တိမှိ ဝိသုံ အယံ; ကာလာတိပတျတီတမှာ-နာဂတေ စာတိ ဒီပယေ. तसेच, ‘चूळनिरुत्ती’ मध्ये हे स्वतंत्रपणे सांगितले आहे की, ‘कालातिपत्ती ही भूतकाळ आणि भविष्यकाळ या दोन्हीमध्ये होते’, असे ते स्पष्ट करते. ကြိယာတိပန္နေတီတေတိ, ကသ္မာ ကစ္စာယနေ ရုတံ; အထာပိ စေ ဝဒေယျတြ, ‘‘ပါယေနာ’’တိ ပကာသယေ. तर मग कच्चायनामध्ये ‘क्रियातिपन्नेतीते’ (भूतकाळात क्रिया निष्फळ झाली असता) असे का म्हटले आहे? जर येथे असा प्रश्न विचारला, तर ‘प्रामुख्याने’ (पायेन - बहुतांश करून) असे उत्तर द्यावे. ယေဘုယျေန ဟိ လောကသ္မိံ, အတီတမှိ ပဝတ္တတိ; ကာလာတိပတ္တိသံယုတ္တော, ဝေါဟာရော ဣတိ လက္ခယေ. कारण जगात बहुतांश करून कालातिपत्तीशी संबंधित व्यवहार भूतकाळातच प्रवृत्त होतो; असे समजावे. အတြိဒံ ကာလာတိပတ္တိယာ အတီတဝစနံ – ‘‘သစာယံ ဘိက္ခဝေ ရာဇာ ပိတရံ ဓမ္မိကံ ဓမ္မရာဇာနံ ဇီဝိတာ န ဝေါရောပေဿထ, ဣမသ္မိံယေဝဿ အာသနေ ဝိရဇံ ဝီတမလံ ဓမ္မစက္ခု [Pg.71] ဥပ္ပဇ္ဇိဿထာ’’တိ. ‘‘ပဿာနန္ဒ ဣမံ မဟာဓနသေဋ္ဌိပုတ္တံ ဣမသ္မိံယေဝ နဂရေ ဒွေအသီတိကောဋိဓနံ ခေပေတွာ ဘရိယံ အာဒါယ ဘိက္ခာယ စရန္တံ. သစေ ဟိ အယံ ပဌမဝယေ ဘောဂေ အခေပေတွာ ကမ္မန္တေ ပယောဇယိဿာ, ဣမသ္မိံယေဝ နဂရေ အဂ္ဂသေဋ္ဌိ အဘဝိဿာ. သစေ ပန နိက္ခမိတွာ ပဗ္ဗဇိဿာ, အရဟတ္တံ ပါပုဏိဿာ, ဘရိယာပိဿ အနာဂါမိဖလေ ပတိဋ္ဌဟိဿာ. သစေ မဇ္ဈိမဝယေ ဘောဂေ အခေပေတွာ ကမ္မန္တေ ပယောဇယိဿာ, ဒုတိယသေဋ္ဌိ အဘဝိဿာ. နိက္ခမိတွာ ပဗ္ဗဇန္တော အနာဂါမီ အဘဝိဿာ, ဘရိယာပိဿ သကဒါဂါမိဖလေ ပတိဋ္ဌဟိဿာ. သစေ ပစ္ဆိမဝယေ ဘောဂေ အခေပေတွာ ကမ္မန္တေ ပယောဇယိဿာ, တတိယသေဋ္ဌိ အဘဝိဿာ. နိက္ခမိတွာ ပဗ္ဗဇန္တော သကဒါဂါမီ အဘဝိဿာ, ဘရိယာပိဿ သောတာပတ္တိဖလေ ပတိဋ္ဌဟိဿာ’’ ဣတိ ဝါ, ‘‘သစေ သတ္ထာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသိဿာ, စက္ကဝတ္တိရာဇာ အဘဝိဿာ. ရာဟုလသာမဏေရော ပရိဏာယကရတနံ, ထေရီ ဣတ္ထိရတနံ, သကလစက္ကဝါဠရဇ္ဇံ ဧတေသညေဝ အဘဝိဿာ’’ ဣတိ ဝါ ဧဝံ ကာလာတိပတ္တိယာ အတီတဝစနံ ဘဝတိ. येथे कालातिपत्तीचे भूतकाळातील वचन खालीलप्रमाणे आहे – 'भिक्षूंनो, जर या राजाने आपल्या धार्मिक, धर्मराज पित्याचा जीव घेतला नसता, तर याच आसनावर त्याला विरज, विमल धम्मचक्षू प्राप्त झाले असते.' किंवा 'आनंदा, या महाधन श्रेष्ठिपुत्राला बघ, जो याच नगरात ब्याऐंशी कोटींची संपत्ती नष्ट करून पत्नीसह भिक्षा मागत फिरत आहे. जर याने आपल्या प्रथम वयात (तारुण्यात) संपत्ती नष्ट न करता उद्योगधंदा केला असता, तर तो याच नगरात अग्रश्रेष्ठी (मुख्य व्यापारी) झाला असता. जर त्याने गृहत्याग करून प्रवज्जा घेतली असती, तर त्याला अर्हतपद प्राप्त झाले असते आणि त्याची पत्नी अनागामी फलावर प्रतिष्ठित झाली असती. जर त्याने मध्यम वयात संपत्ती नष्ट न करता उद्योगधंदा केला असता, तर तो द्वितीयश्रेष्ठी झाला असता. गृहत्याग करून प्रवज्जा घेतली असती, तर तो अनागामी झाला असता आणि त्याची पत्नी सकदागामी फलावर प्रतिष्ठित झाली असती. जर त्याने अंतिम वयात संपत्ती नष्ट न करता उद्योगधंदा केला असता, तर तो तृतीयश्रेष्ठी झाला असता. गृहत्याग करून प्रवज्जा घेतली असती, तर तो सकदागामी झाला असता आणि त्याची पत्नी सोतापन्न फलावर प्रतिष्ठित झाली असती.' किंवा 'जर शास्त्यांनी (बुद्धांनी) गृहस्थाश्रमात वास्तव्य केले असते, तर ते चक्रवर्ती राजा झाले असते. राहुल सामणेर हे परिणायकरत्न (प्रधानरत्न), थेरी ही स्त्रीरत्न आणि संपूर्ण चक्रवाळ राज्य त्यांचेच झाले असते.' अशा प्रकारे कालातिपत्तीचे भूतकाळातील वचन होते. ကထံ ကာလာတိပတ္တိယာ အနာဂတဝစနံ ဘဝတိ? ‘‘စိရမ္ပိ ဘက္ခော အဘဝိဿာ, သစေ န ဝိဝဒါမသေ. အသီသကံ အနင်္ဂုဋ္ဌံ, သိင်္ဂါလော ဟရတိ ရောဟိတံ’’ဣတိဝါ, ‘‘သစေ အာနန္ဒ နာလဘိဿာ မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇံ, စိရဋ္ဌိတိကံ အာနန္ဒ ဗြဟ္မစရိယံ အဘဝိဿာ’’တိ ဣတိ ဝါ, ‘‘အယံ အင်္ဂုလိမာလဿ မာတာ ‘အင်္ဂုလိမာလံ အာနေဿာမီ’တိ ဂစ္ဆတိ, သစေ သမာဂမိဿတိ, အင်္ဂုလိမာလော ‘အင်္ဂုလိသဟဿံ ပူရေဿာမီ’တိ မာတရံ မာရေဿတိ. သစာဟံ န ဂမိဿာမိ, မဟာဇာနိကော အဘဝိဿာ’’ ဣတိ ဝါ ဧဝံ ကာလာတိပတ္တိယာ အနာဂတဝစနံ ဘဝတိ[Pg.72]. ကစ္စာယနေ ပန ယေဘုယျေန အတီတပ္ပဝတ္တိံ သန္ဓာယ ကာလာတိပတ္တိဝိဘတ္တိယာ အတီတကာလိကတာ ဝုတ္တာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. कालातिपत्तीचे भविष्यकाळातील वचन कसे होते? 'जर आपण भांडलो नसतो, तर दीर्घकाळपर्यंत आपले अन्न राहिले असते. डोके नसलेला आणि शेपूट नसलेला रोहित मासा कोल्हा घेऊन जात आहे.' किंवा 'आनंदा, जर तथागतांनी प्रवेदित केलेल्या धम्म-विनयात स्त्रियांना घराबाहेर पडून अनगारिक प्रवज्जा मिळाली नसती, तर आनंदा, हे ब्रह्मचर्य दीर्घकाळ टिकणारे झाले असते.' किंवा 'ही अंगुलिमालाची माता ‘मी अंगुलिमालाला घेऊन येते’ असे म्हणून जात आहे; जर त्यांची भेट झाली, तर अंगुलिमाल ‘हजार बोटांची संख्या पूर्ण करतो’ या विचाराने आपल्या मातेला मारून टाकेल. जर मी गेलो नाही, तर मोठी हानी झाली असती.' अशा प्रकारे कालातिपत्तीचे भविष्यकाळातील वचन होते. परंतु कच्चायनामध्ये प्रामुख्याने भूतकाळातील प्रवृत्तीचा संदर्भ घेऊन कालातिपत्ती विभक्तीची भूतकालिकता सांगितली आहे, असे समजावे. ကစ္စာယနေပိ ဝါ ဧသာ, ကာလာတိပတ္တိကာ ပန; အနာဂတေပိ ဟောတီတိ, အယမတ္ထောပိ ဒိဿတိ. किंवा कच्चायनामध्ये देखील ही कालातिपत्ती भविष्यकाळातही होते, असा अर्थ दिसून येतो. အပ္ပစ္စက္ခေ ပရောက္ခာယ-တီတေ ဣတိ ဟိ လက္ခဏေ; သန္တေပျတီတဂ္ဂဟဏေ, အနပေက္ခိယ တံ ဣဒံ. ‘अप्पच्चक्खे परोक्खायतीते’ (परोक्ष भूतकाळात जो प्रत्यक्ष नाही) या लक्षणामध्ये भूतकाळाचे ग्रहण केलेले असतानाही, त्याची अपेक्षा न करता हे सांगितले आहे. အနာဂတေ ဘဝိဿန္တီ, ဣတိ သုတ္တဿနန္တရံ; ကာလာတိပတ္တိဝစနာ, အနာဂတာနုကဍ္ဎနံ; တသ္မာ အနိယတံ ကာလံ, ကာလာတိပတ္တိကံ ဝိနာ. ‘अनागते भविस्सती’ या सूत्राच्या लगेचच नंतर कालातिपत्तीचे वचन असल्यामुळे, तेथे भविष्यकाळाचे आकर्षण (अनुवृत्ती) होते. म्हणून, कालातिपत्ती वगळता इतर काळ अनियत (अनिश्चित) आहेत. အတီတာနာဂတပစ္စု-ပ္ပန္နိကာဟိ ဝိဘတ္တိဟိ; သတ္တမီ သတ္တမီယေဝ, ဘဝတေ န တု အဋ္ဌမီ. भूतकाळ, भविष्यकाळ आणि वर्तमानकाळाच्या विभक्तींसह ‘सत्तमी’ ही सातवीच विभक्ती राहते, आठवी नाही. ပဉ္စမီသတ္တမီနံ တု, ပစ္စုပ္ပန္နဝိဘတ္တိယံ; သင်္ဂဏှနတ္ထမေတာသံ, မဇ္ဈေ ဆဋ္ဌီ န ဝုစ္စတိ. परंतु, वर्तमानकाळाच्या विभक्तीमध्ये पंचमी आणि सत्तमी यांचा समावेश करण्यासाठी, त्यांच्यामध्ये सहावी विभक्ती सांगितली जात नाही. တထာ ပဉ္စ ဥပါဒါယ, ဘဝိတဗ္ဗဉ္စ ဆဋ္ဌိယာ; ပဉ္စမိယာ တု သာ ဧသာ, ‘‘ဆဋ္ဌီ’’တိ န သမီရိတာ. त्याचप्रमाणे, पाच विभक्ती गृहीत धरून सहावी विभक्ती असायला हवी होती; परंतु पंचमीमुळे तिला ‘छठ्ठी’ (सहावी) म्हटले गेले नाही. ဆဋ္ဌီဘာဝမှိ သန္တေပိ, ‘‘ပဉ္စမီ’’တိ ဝစော ပန; ပဉ္စမိယာ ဝိဘတ္တိယာ, ပစ္စုပ္ပန္နဝိဘတ္တိယံ. सहावी विभक्ती असण्याचा भाव असतानाही, वर्तमानकाळाच्या विभक्तीमध्ये पंचमी विभक्तीसाठी ‘पंचमी’ हाच शब्द वापरला आहे. သင်္ဂဏှနတ္ထံ ဝုတ္တန္တိ, ဝိညာတဗ္ဗာ ဝိဘာဝိနာ; ပဉ္စမိံ တု ဥပါဒါယ, သတ္တမိယာ ဝိဘတ္တိယာ. हे समाविष्ट करण्याच्या उद्देशाने सांगितले आहे, असे विद्वानांनी समजावे; परंतु पंचमी विभक्ती गृहीत धरून, सत्तमी विभक्तीसाठी... ဆဋ္ဌိယာ စ ဘဝိတဗ္ဗံ, န သာ ‘‘ဆဋ္ဌီ’’တိ ဤရိတာ; ဆဋ္ဌိံ ပန ဥပါဒါယ, ‘‘သတ္တမီ’’တွေဝ ဤရိတာ. ...सहावी विभक्ती असायला हवी होती, पण तिला ‘छठ्ठी’ (सहावी) म्हटले गेले नाही; तर सहावी विभक्ती गृहीत धरून तिला ‘सत्तमी’ (सातवी) असेच म्हटले गेले आहे. မဇ္ဈေ ဆဋ္ဌိံ အဒဿေတွာ, ဧဝံ တု ကထနမ္ပိ စ; သတ္တမိယာ ဝိဘတ္တိယာ, ပစ္စုပ္ပန္နဝိဘတ္တိယံ; သင်္ဂဏှနတ္ထံ ဝုတ္တန္တိ, အဓိပ္ပာယံ ဝိဘာဝယေ. मध्ये सहावी विभक्ती न दाखवता अशा प्रकारे सांगणे देखील वर्तमानकाळाच्या विभक्तीमध्ये सत्तमी विभक्तीचा समावेश करण्यासाठीच आहे, असा अभिप्राय समजावा. သဘာဝေါ ဟေသ ဝတ္ထူနံ, ဂမ္ဘီရတ္ထေသု အတ္တနော; ယေန ကေနစာကာရေန, အဓိပ္ပာယဿ ဉာပနံ. कारण गंभीर अर्थांच्या बाबतीत वस्तूंचा हाच स्वभाव असतो की, कोणत्याही प्रकारे आपला अभिप्राय प्रकट करणे. ယဇ္ဇေဝံ [Pg.73] ပဌမံတီတေ-နာဂတေ စ ဝိဘတ္တိယော; ဝတွာ တတော ပစ္စုပ္ပန္နေ, ကထေတဗ္ဗာ ဝိဘတ္တိယော. जर असे असेल, तर आधी भूतकाळ आणि भविष्यकाळाच्या विभक्ती सांगून, त्यानंतर वर्तमानकाळाच्या विभक्ती सांगायला हव्या होत्या. ကစ္စာယနဝှယေ ဂန္ထေ, ကသ္မာ ဧဝံ န ဘာသိတာ; ပစ္စုပ္ပန္နဝိဘတျောဝ, ကသ္မာ အာဒိမှိ ဘာသိတာ? कच्चायन नावाच्या ग्रंथात असे का सांगितले गेले नाही? वर्तमानकाळाच्याच विभक्ती सुरुवातीला का सांगितल्या गेल्या आहेत? ယသ္မာ ဝဒန္တိ ဝေါဟာရ-ပထေ ဧတာဝ ပါယတော; တသ္မာ ဗဟုပ္ပယောဂတ္တံ, ဟောတေတာသံ ဝိဘတ္တိနံ. ज्याअर्थी व्यवहाराच्या मार्गात या (विभक्ती) प्रामुख्याने बोलल्या जातात; त्याअर्थी या विभक्तींचा वापर बहुतांश प्रमाणात होतो. အာဒေါဗဟုပ္ပယောဂေါဝ, ကထေတဗ္ဗောတိ ဉာယတော; ပစ္စုပ္ပန္နမှိ သမ္ဘူတာ, ဝိဘတျောဝါဒိတော မတာ. सुरुवातीला बहुउपयोगी गोष्टीच सांगितल्या पाहिजेत या न्यायाने, वर्तमानकाळात उत्पन्न झालेल्या विभक्तीच सुरुवातीला मानल्या गेल्या आहेत. အတီတာနာဂတံ ဝတွာ, ပစ္စုပ္ပန္နေ တတော ပရံ; ယသ္မာ ဝုတ္တမှိ လောကသ္မိံ, ဟောတိ ဝါစာသိလိဋ္ဌတာ. कारण भूतकाळ आणि भविष्यकाळ बोलून, त्यानंतर वर्तमानकाळ बोलल्याने जगात बोलण्यात सुसंगतता (मधुरता) येते. တသ္မာ သိလိဋ္ဌကထနေ, အတီတာဒိမပေက္ခိယ; ပဉ္စမီ သတ္တမီ စေတာ, ဝတ္တမာနာယနန္တရံ; သင်္ဂဏှနတ္ထမက္ခာတာ, ပစ္စုပ္ပန္နဝိဘတ္တိသု. म्हणून सुसंगत कथनात भूतकाळ इत्यादींची अपेक्षा ठेवून, वर्तमानकाळानंतर या 'पंचमी' आणि 'सप्तमी' विभक्तींचा वर्तमानकालीन विभक्तींमध्ये समावेश करण्यासाठी उल्लेख केला आहे. ဧတ္ထ ဟိ ယထာ ‘‘မာတာပိတရော’’တိ ဝုတ္တေ သိလိဋ္ဌကထနံ ဟောတိ, တသ္မိံယေဝ ဝစနေ ဝိပရိယယံ ကတွာ သမာသဝသေန ‘‘ပိတာမာတရော’’တိ ဝုတ္တေ သိလိဋ္ဌကထနံ န ဟောတိ, တသ္မာ တာဒိသီ သဒ္ဒရစနာ အပူဇနီယာ, ‘‘ပိတာ မာတာ စ မေ ဒဇ္ဇု’’န္တိ ပါဌော ပန ဗျာသဝသေန ယထိစ္ဆိတပ္ပယောဂတ္တာ ပူဇနီယော, ဧဝမေဝ ‘‘အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္န’’န္တိ ဝုတ္တေ သိလိဋ္ဌကထနံ ဟောတိ, ‘‘အတီတပစ္စုပ္ပန္နာနာဂတ’’န္တိ ဧဝမာဒိနာ ဝုတ္တေ သိလိဋ္ဌကထနံ န ဟောတိ, တသ္မာ တာဒိသီ သဒ္ဒရစနာ အပူဇနီယာ သိယာ. ‘‘အတီတာရမ္မဏာ ပစ္စု-ပ္ပန္နာနာဂတဂေါစရာ’’တိ ဝစနံ ပန ဂါထာဗန္ဓသုခတ္ထံ ယထိစ္ဆိတပ္ပယောဂတ္တာ ပူဇနီယမေဝ. အယမေတ္ထ ပါဠိ ဝေဒိတဗ္ဗာ – येथे जसे 'मातापितरो' (आई-वडील) असे म्हटले असता सुसंगत कथन होते, परंतु त्याच शब्दाचा उलट करून समासाच्या नियमाने 'पितामातरो' असे म्हटले असता सुसंगत कथन होत नाही, म्हणून तशी शब्दरचना आदरणीय (योग्य) मानली जात नाही. परंतु 'पिता माता च मे दज्जुं' हा पाठ विस्ताराने इच्छित प्रयोगामुळे आदरणीयच आहे. तसेच 'अतीतानागतपच्चुप्पन्नं' (भूत, भविष्य आणि वर्तमान) असे म्हटले असता सुसंगत कथन होते, पण 'अतीतपच्चुप्पन्नानागतं' इत्यादी प्रकारे म्हटले असता सुसंगत कथन होत नाही, म्हणून तशी शब्दरचना आदरणीय असणार नाही. परंतु 'अतीतारम्मणा पच्चुप्पन्नानागतगोचरा' हे वचन गाथा रचनेच्या सुलभतेसाठी इच्छित प्रयोगामुळे आदरणीयच आहे. येथे ही पाळी (पाठांतर) जाणावी – ‘‘ယံကိဉ္စိ ရူပံ အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္န’’န္တိ စ, “जे काही रूप भूत, भविष्य आणि वर्तमान काळातील आहे” आणि, ‘‘ဧကာယနံ [Pg.74] ဇာတိခယန္တဒဿီ,မဂ္ဂံ ပဇာနာတိ ဟိတာနုကမ္ပီ; ဧတေန မဂ္ဂေန အတံသု ပုဗ္ဗေ,တရိဿန္တိ ယေ စ တရန္တိ ဩဃ’’န္တိ စ, “कल्याणकारी आणि अनुकंपा करणारे (बुद्ध), जे जन्माचा क्षय पाहणारे आहेत, ते या एकमेव मार्गाला जाणतात; या मार्गाने पूर्वीचे लोक तरून गेले, आणि जे तरत आहेत व जे (भविष्यात) या ओघाला (संसारप्रवाहाला) तरून जातील” आणि, ‘‘ယေ စဗ္ဘတီတာ သမ္ဗုဒ္ဓါ, ယေ စ ဗုဒ္ဓါ အနာဂတာ; ယေ စေတရဟိ သမ္ဗုဒ္ဓါ, ဗဟူနံ သောကနာသကာ. “जे भूतकाळातील सम्यक्संबुद्ध होते, आणि जे भविष्यकाळातील बुद्ध असतील; आणि जे सध्याचे सम्यक्संबुद्ध आहेत, जे बहुतांच्या शोकाचा नाश करणारे आहेत. သဗ္ဗေ သဒ္ဓမ္မဂရုနော, ဝိဟံသု ဝိဟရန္တိ စ; အထောပိ ဝိဟရိဿန္တိ, ဧသာ ဗုဒ္ဓါန ဓမ္မတာ’’တိ စ ते सर्व सद्धम्माचा आदर करणारे होते, आदर करत आहेत आणि आदर करत राहतील; हीच बुद्धांची धम्मता (नियम) आहे.” आणि ဧဝမနေကေသု သဒ္ဒပ္ပယောဂေသု. ဣဓ ယထိစ္ဆိတပ္ပယောဂဝသေန အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာသု အဋ္ဌသု ဝိဘတ္တီသု တိဿော ပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာ ဝိဘတ္တိယော အာဒိမှိ ကထိတာ, တဉ္စ ကထနံ တာသညေဝ ဝေါဟာရပထေ ယေဘုယျေန ပဝတ္တိတော ဗဟုပ္ပယောဂတာဉာပနတ္ထံ. တာသု ပန ဒွိန္နံ ဝိဘတ္တီနံ ‘‘ပဉ္စမီသတ္တမီ’’တိသညာ သိလိဋ္ဌကထနိစ္ဆာယံ ကမေန ဝတ္တဗ္ဗာ, အတီတာနာဂတကာလိကာ ဝိဘတ္တိယော အပေက္ခိတွာ ကတာ. ဣစ္စေဝံ अशा अनेक शब्दप्रयोगांमध्ये. येथे इच्छित प्रयोगाच्या अनुसार भूत, भविष्य आणि वर्तमान काळातील आठ विभक्तींपैकी तीन वर्तमानकालीन विभक्ती सुरुवातीला सांगितल्या आहेत, आणि ते सांगणे व्यवहारात त्यांचाच प्रामुख्याने वापर होत असल्यामुळे त्यांचा बहुउपयोग दर्शवण्यासाठी आहे. त्यापैकी दोन विभक्तींना 'पंचमी' आणि 'सप्तमी' ही संज्ञा सुसंगत कथनाच्या इच्छेने क्रमाने सांगावी, जी भूत आणि भविष्यकालीन विभक्तींची अपेक्षा ठेवून केली आहे. अशा प्रकारे - ယထိစ္ဆိတပ္ပယောဂေန, ပစ္စုပ္ပန္နဝိဘတ္တိယော; တိဓာ ကတွာန အာဒိမှိ, ကစ္စာနေန ဥဒီရိတာ. इच्छित प्रयोगाच्या अनुसार, वर्तमानकालीन विभक्तींचे तीन प्रकार करून कच्चायनाने सुरुवातीला सांगितले आहेत. အာဒိမှိ ကထနံ တဉ္စ, တာသံ ပါယေန ဝုတ္တိတော; ဗဟုပ္ပယောဂဘာဝဿ, ဉာပနတ္ထန္တိ နိဒ္ဒိသေ. सुरुवातीला त्यांचे सांगणे हे प्रामुख्याने त्यांच्या वापरामुळे त्यांच्या बहुउपयोगी स्वरूपाचे ज्ञान करून देण्यासाठी आहे, असे निर्देश करावे. အတီတာဒိမပေက္ခိတွာ, သိလိဋ္ဌကထနေ ဓုဝံ; ‘‘ပဉ္စမီ သတ္တမိ’’စ္စေဝ, ဒွိန္နံ နာမံ ကတန္တိ စ; ကာလာတိပတ္တိံ ဝဇ္ဇေတွာ, ဣဒံ ဝစနမီရိတံ. भूतकाळ इत्यादींची अपेक्षा ठेवून, सुसंगत कथनात निश्चितपणे 'पंचमी' आणि 'सप्तमी' असे या दोघांचे नाव केले आहे; 'कालातिपत्ती' विभक्तीला वगळून हे वचन सांगितले आहे. ယဒိ ဧဝံ အယံ ဒေါသော, အာပဇ္ဇတိ န သံသယော; ဣတိ စေ ကောစိ ဘာသေယျ, အတ္ထေ အကုသလောနရော. जर असे असेल तर हा दोष निर्माण होईल यात शंका नाही; असे जर अर्थाच्या बाबतीत अकुशल असलेला कोणी मनुष्य म्हणाला, တေကာလိကာချာတပဒေ[Pg.75], ကာလာတိပတ္တိယာ ပန; အသင်္ဂဟောဝ ဟောတီတိ, ‘‘တန္နာ’’တိ ပဋိသေဓယေ. तर 'त्रैकालिक आख्यात पदांमध्ये कालातिपत्तीचा समावेश होत नाही' या विधानाचा 'तसे नाही' असे म्हणून निषेध करावा. တေကာလိကာချာတပဒေ, န နော ကာလာတိပတ္တိယာ; ဣဋ္ဌော အသင်္ဂဟော တတ္ထ, သင်္ဂဟောယေဝ ဣစ္ဆိတော. त्रैकालिक आख्यात पदांमध्ये कालातिपत्तीचा समावेश न होणे आम्हाला मान्य नाही, तर तेथे तिचा समावेश असणेच इष्ट आहे. ပဉ္စမီသတ္တမီသညာ, ကာလာတိပတ္တိကံ ပန; ဝိဘတ္တိမနပေက္ခိတွာ, ကတာ ဣစ္စေဝ နော မတိ. परंतु 'पंचमी' आणि 'सप्तमी' ही संज्ञा 'कालातिपत्ती' विभक्तीची अपेक्षा न ठेवता केली आहे, असेच आमचे मत आहे. နာနာနယံ ဂဟေတွာန,ပစ္စေတဗ္ဗံ တု သာရတော; ယာယ ဧသော ရုတော အတ္ထော,တသ္မာ ဧသာ န ဒုဗ္ဗလာ. विविध पद्धतींचा स्वीकार करून, सारांश रूपाने हे समजून घेतले पाहिजे; ज्या अर्थाने हा अर्थ स्पष्ट होतो, त्यामुळे ही (पद्धत) दुर्बळ नाही. အတ္ထော လဗ္ဘတိ ပါသံသော,ယတ္ထ ယတ္ထ ယထာ ယထာ; တထာ တထာ ဂဟေတဗ္ဗော,တတ္ထ တတ္ထ ဝိဘာဝိနာ. जिथे जिथे जसा जसा प्रशंसनीय अर्थ प्राप्त होतो, तिथे तिथे तसा तसा तो अर्थ विद्वानाने ग्रहण करावा. ဝုတ္တဉှေတံ အဘိဓမ္မဋီကာယံ ‘‘ယတ္ထ ယတ္ထ ယထာ ယထာ အတ္ထော လဗ္ဘတိ, တတ္ထ တတ္ထ တထာ တထာ ဂဟေတဗ္ဗော’’တိ. अभिधम्मटीकेमध्ये असेच म्हटले आहे की, “जिथे जिथे जसा जसा अर्थ प्राप्त होतो, तिथे तिथे तसा तसा तो ग्रहण करावा.” ပဉ္စမီသတ္တမီသညာ, ရူဠှီသညာတိ ကေစန; န ပနေဝံ ဂဟေတဗ္ဗံ, အဇာနိတွာ ဝဒန္တိ တေ. काही लोक म्हणतात की 'पंचमी' आणि 'सप्तमी' ही संज्ञा रूढी संज्ञा (पारंपारिक संज्ञा) आहे; परंतु असे मानू नये, ते न जाणता असे बोलतात. နေသာ ပုရိသသညာဒိ, ဈလ သညာဒယော ဝိယ; ရူဠှိယာ ဘာသိတာ သညာ, ဘူတေနတ္ထေန ဘာသိတာ. ही संज्ञा 'झल' इत्यादी संज्ञांप्रमाणे केवळ पुरुषाने दिलेली संज्ञा नाही; ही रूढीने बोलली गेलेली संज्ञा नसून, वास्तविक अर्थाच्या आधारे बोलली गेली आहे. ဥပနိဓာယ ပညတ္တိ, ဧသာ သညာ ယတော တတော; အနွတ္ထသညာ ဌပိတာ, ပေါရာဏေဟီတိ လက္ခယေ. ज्याअर्थी ही संज्ञा परस्पर संबंधावरून (अपेक्षेवरून) निर्माण झाली आहे, त्याअर्थी प्राचीन आचार्यांनी ही सार्थ संज्ञा (अन्वर्थ संज्ञा) प्रस्थापित केली आहे, असे जाणावे. ဣစ္စေဝံ ကာလဆက္ကံ တု, သင်္ခေပေန တိဓာ မတံ; ဧတမတ္ထဉှိ သန္ဓာယ, ‘‘ယံ တိကာလ’’န္တိ ဘာသိတံ. अशा प्रकारे काळाचे सहा प्रकार संक्षेपाने तीन प्रकारांत मानले जातात; हाच अर्थ मनात ठेवून “जे त्रिकाल आहे” असे म्हटले गेले आहे. အယမေတ္ထ ကာလဆက္ကသင်္ဂဟော. येथे हा कालचक्राचा संक्षेप आहे. ဧဝံ [Pg.76] တိဓာ စတုဓာ ဝါ, ဆဓာ ဝါပိ သုမေဓသော; ကာလဘေဒံ ဝိဘာဝေယျ, ကာလညူဟိ ဝိဘာဝိတံ. अशा प्रकारे बुद्धिमान मनुष्याने काळाचे तीन, चार किंवा सहा प्रकार स्पष्ट करावेत, जसे ते कालवेत्त्यांनी (काळाचे ज्ञान असणाऱ्यांनी) स्पष्ट केले आहेत. အတီတာနာဂတံ ကာလံ, ဝိသုံ ကာလာတိပတ္တိကံ; ဂဟေတွာ ပဉ္စဓာ ဟောတိ, ဧဝဉ္စာပိ ဝိဘာဝယေ. भूतकाळ, भविष्यकाळ आणि स्वतंत्रपणे कालातिपत्ती काळ धरून काळाचे पाच प्रकार होतात, असेही स्पष्ट करावे. ဧတ္ထ နယောဝ ‘‘အဇ္ဈတ္တ-ဗဟိဒ္ဓါ ဝါ’’တိ ပါဠိယံ; အတီတာနာဂတကာလီ, ဝိဘတ္တိ သမုဒီရိတာ. येथे पाळीमध्ये (पाठात) “अध्यात्म किंवा बाह्य” या न्यायानेच भूत आणि भविष्यकालीन विभक्ती सांगितली आहे. ဣစ္စေဝံ သဗ္ဗထာပိ ကာလသင်္ဂဟော သမတ္တော. अशा प्रकारे सर्व प्रकारे कालसंक्षेप समाप्त झाला. ဣဒါနိ ဝိညူနံ အတ္ထဂ္ဂဟဏေ ကောသလ္လဇနနတ္ထံ ပကရဏန္တရဝသေနပိ ဣမသ္မိံ ပကရဏေ ဝတ္တမာနာနန္တရံ ဝုတ္တာနံ အာဏတ္တိပရိကပ္ပကာလိကာနံ ‘‘ပဉ္စမီသတ္တမီ’’တိသင်္ခါတာနံ ဒွိန္နံ ဝိဘတ္တီနံ ပဋိပါဋိဋ္ဌပနေ ပကရဏသံသန္ဒနံ ကထယာမ – ကာတန္တပ္ပကရဏသ္မိဉှိ သက္ကတဘာသာနုရူပေန ဒသဓာ အာချာတဝိဘတ္တိယော ဌပိတာ, ကစ္စာယနပ္ပကရဏေ ပန မာဂဓဘာသာနုရူပေန အဋ္ဌဓာ ဌပိတာ, နိရုတ္တိယဉ္စ ပန မာဂဓဘာသာနုရူပေနေဝ အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္နာဏတ္တိပရိကပ္ပကာလာတိပတ္တိဝသေန ဆဓာ ဌပိတာ. တေသု ဟိ ကာတန္တေ ဝတ္တမာနာ, သတ္တမီ, ပဉ္စမီ, ဟိယျတ္တနီ, အဇ္ဇတနီ, ပရောက္ခာ, သွာတနီ, အာသီ, ဘဝိဿန္တီ, ကြိယာတိပတ္တိ စာတိ ဒသဓာ ဝိဘတ္တာ. ကစ္စာယနေ ပန ဝတ္တမာနာ, ပဉ္စမီ, သတ္တမီ, ပရောက္ခာ, ဟိယျတ္တနီ, အဇ္ဇတနီ, ဘဝိဿန္တီ, ကာလာတိပတ္တိ စာတိ အဋ္ဌဓာ ဝိဘတ္တာ. ဣတိ ဧတေသု ဒွီသု ကာတန္တကစ္စာယနေသု ဝိဘတ္တိယော ဝိသဒိသာယ ပဋိပါဋိယာ ဌပိတာ. ကိဉ္စာပေတ္ထ ဝိသဒိသာ ပဋိပါဋိ, တထာပေတာ နိရုတ္တိယံ ဝုတ္တာတီတာဒိကာလဝိဘာဂဝသေန ဧကတော သံသန္ဒန္တိ သမေန္တိ ကိဉ္စိ ဝိသေသံ ဌပေတွာ. आता विद्वानांना अर्थ ग्रहण करण्यात कौशल्य प्राप्त व्हावे म्हणून, इतर ग्रंथांच्या आधारे देखील या ग्रंथात वर्तमानकाळानंतर सांगितलेल्या आज्ञा आणि तर्क दर्शवणाऱ्या 'पंचमी' आणि 'सप्तमी' नावाच्या दोन विभक्तींच्या मांडणीच्या क्रमाची तुलना आम्ही सांगतो – कातन्त्र व्याकरणामध्ये संस्कृत भाषेच्या अनुरूप आख्यात विभक्तींचे दहा प्रकार सांगितले आहेत, परंतु कच्चायन व्याकरणामध्ये मागधी (पाली) भाषेच्या अनुरूप आठ प्रकार सांगितले आहेत, आणि निरुत्तीमध्ये मागधी भाषेच्याच अनुरूप भूत, भविष्य, वर्तमान, आज्ञा, तर्क आणि कालातिपत्तीच्या भेदाने सहा प्रकार सांगितले आहेत. त्यापैकी कातन्त्र व्याकरणामध्ये वर्तमान, सप्तमी, पंचमी, ह्यस्तनी, अद्यतनी, परोक्षा, श्वस्तनी, आशीः, भविष्यन्ती आणि क्रियातिपत्ती असे दहा प्रकार आहेत. कच्चायनामध्ये वर्तमान, पंचमी, सप्तमी, परोक्षा, ह्यस्तनी, अद्यतनी, भविष्यन्ती आणि कालातिपत्ती असे आठ प्रकार आहेत. अशा प्रकारे या कातन्त्र आणि कच्चायन या दोन्ही ग्रंथांमध्ये विभक्ती वेगवेगळ्या क्रमाने मांडल्या आहेत. जरी हा क्रम भिन्न असला, तरीही निरुत्तीमध्ये सांगितलेल्या भूतकाळ इत्यादी कालविभागाच्या आधारे काही विशेष फरक वगळता ते एकमेकांशी जुळतात आणि समान ठरतात. ကထံ[Pg.77]? ကာတန္တေ တာဝ ဟိယျတ္တနီ အဇ္ဇတနီ ပရောက္ခာ စာတိ ဣမာ တိဿော ဧကန္တေန အတီတကာလိကာ, သွာတနီ အာသီ ဘဝိဿန္တိ စာတိ ဣမာ တိဿော ဧကန္တေန အနာဂတကာလိကာ, ဝတ္တမာနာ ဧကာယေဝ ပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာ, သတ္တမီ ပန ပဉ္စမီ စ ပစ္စုပ္ပန္နာနာဂတကာလဝသေန ဒွိကာလိကာ ‘‘အဇ္ဇ ပုညံ ကရေယျ, သွေပိ ကရေယျ. အဇ္ဇ ဂစ္ဆတု, သွေ ဝါ ဂစ္ဆတူ’’တိ ပယောဂါရဟတ္တာ. ကြိယာတိပတ္တိ အနိယတကာလိကာ ‘‘သော စေ ဟိယျော ယာနံ အလဘိဿာ, အဂစ္ဆိဿာ. သော စေ အဇ္ဇ အနတ္ထင်္ဂတေ သူရိယေ ယာနံ အလဘိဿာ, အဂစ္ဆိဿာ. သော စေ သွေ ယာနံ အလဘိဿာ, အဂစ္ဆိဿာ’’တိ ပယောဂါရဟတ္တာ. ဧဝံ အသင်္ကရတော ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗံ. कसे? कातन्त्र व्याकरणात तर हिय्यत्तनी (कालचा भूतकाळ), अज्जतनी (आजचा भूतकाळ) आणि परोक्खा (परोक्ष भूतकाळ) या तिन्ही पूर्णपणे भूतकाळातील (अतीतकलिक) आहेत; स्वातनी (उद्याचा भविष्यकाळ), आसी (आशीर्वाद) आणि भविसन्ती (भविष्यकाळ) या तिन्ही पूर्णपणे भविष्यकाळातील (अनागतकालिक) आहेत; वत्तमाना (वर्तमानकाळ) ही एकच वर्तमानकाळातील (पच्चुप्पन्नकालिक) आहे; परंतु सत्तमी (सप्तमी) आणि पञ्चमी (पंचमी) या वर्तमान व भविष्य काळाच्या अपेक्षेने द्विकालिक (दोन काळांच्या) आहेत, कारण 'आज पुण्य करावे, उद्याही करावे' आणि 'आज जावे, किंवा उद्या जावे' अशा प्रयोगांच्या योग्यतेमुळे. क्रियातिपत्ती ही अनियतकालिक (अनिश्चित काळाची) आहे, कारण 'जर त्याला काल वाहन मिळाले असते, तर तो गेला असता; जर त्याला आज सूर्य मावळण्यापूर्वी वाहन मिळाले असते, तर तो गेला असता; जर त्याला उद्या वाहन मिळाले असते, तर तो गेला असता' अशा प्रयोगांच्या योग्यतेमुळे. अशा प्रकारे संकर (मिश्रण) न करता हे निश्चित केले पाहिजे. ဧဝံ ဝဝတ္ထပေတွာ အယမမှေဟိ ဝုစ္စမာနော နယော သာဓုကံ သလ္လက္ခေတဗ္ဗော. ကထံ? ဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီပရောက္ခာသွာတနျာသီဘဝိဿန္တိဝသေန ဧကန္တာတီတာနာဂတကာလိကာ ဝိဘတ္တိယော ဆ, ဝတ္တမာနဝသေန ဧကန္တပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာ ဝိဘတ္တိ ဧကာယေဝ, သာ ပဋိပါဋိယာ ဂဏိယမာနာ သတ္တမံ ဌာနံ ဘဇတိ. ဧဝံ ဧတသ္မိံ ဝတ္တမာနာသင်္ခါတေ သတ္တမဋ္ဌာနေ ပက္ခိပိတုံ နိရုတ္တိနယေန ‘‘ပရိကပ္ပကာလိကာ’’တိ သင်္ခံ ဂတံ သတ္ထနယေန ‘‘ပစ္စုပ္ပန္နာနာဂတကာလိကာ’’တိဝတ္တဗ္ဗံ ဧကံ ဝိဘတ္တိံ သတ္တမီဘူတာယ ဝတ္တမာနာယ သမာနဋ္ဌာနတ္တာ သတ္တမီသညံ ကတွာ ဌပေသိ. တတော ပုနဒေဝ သွာတနျာသီဘဝိဿန္တိဝသေန ဧကန္တာနာဂတကာလိကာ တိဿော ဝိဘတ္တိယော ဂဏေတွာ တံ ပစ္စုပ္ပန္နာနာဂတကာလိကံ ‘‘သတ္တမီ’’တိ လဒ္ဓသညံ ဝိဘတ္တိံ အနာဂတကာလိကဘာဝေန တာဟိ တီဟိ သဒ္ဓိံ သမာနဋ္ဌာနတ္တာ စတုတ္ထံ ကတွာ နိရုတ္တိနယေန ‘‘အာဏတ္တိကာလိကာ’’တိ သင်္ခံ ဂတံ သတ္ထနယေန ‘‘ပစ္စုပ္ပန္နာနာဂတကာလိကာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ ဧကံ ဝိဘတ္တိံ ပဉ္စန္နံ သင်္ချာနံ ပူရဏေန ပဉ္စမီသညံ ကတွာ ဌပေသိ. अशा प्रकारे निश्चित करून, आमच्याद्वारे सांगितली जाणारी ही पद्धत चांगल्या प्रकारे लक्षात घेतली पाहिजे. कसे? हिय्यत्तनी, अज्जतनी, परोक्खा, स्वातनी, आसी आणि भविसन्ती या रूपाने पूर्णपणे भूत व भविष्य काळातील सहा विभक्ती आहेत; वर्तमानकाळाच्या रूपाने पूर्णपणे वर्तमानकाळातील विभक्ती एकच आहे, जी क्रमाने मोजली असता सातवे स्थान प्राप्त करते. अशा प्रकारे, या वर्तमान संज्ञक सातव्या स्थानात समाविष्ट करण्यासाठी, निरुक्ति-पद्धतीने 'परिकप्पकालिका' (संभाव्य काळ) अशी संज्ञा प्राप्त झालेल्या आणि शास्त्र-पद्धतीने 'पच्चुप्पन्नानागतकालिका' (वर्तमान-भविष्य काळ) म्हटल्या जाणाऱ्या एका विभक्तीला, सातव्या स्थानावर असलेल्या वर्तमानकाळाशी समान स्थान असल्यामुळे 'सत्तमी' (सप्तमी) अशी संज्ञा देऊन स्थापित केले. त्यानंतर पुन्हा, स्वातनी, आसी आणि भविसन्ती या रूपाने पूर्णपणे भविष्यकाळातील तीन विभक्ती मोजून, त्या वर्तमान-भविष्य काळातील 'सत्तमी' अशी संज्ञा प्राप्त झालेल्या विभक्तीला भविष्यकाळ असण्याच्या दृष्टीने त्या तिन्हींसह समान स्थान असल्यामुळे चौथे करून, निरुक्ति-पद्धतीने 'आणत्तिकालिका' (आज्ञार्थक काळ) अशी संज्ञा प्राप्त झालेल्या आणि शास्त्र-पद्धतीने 'पच्चुप्पन्नाnaगतकालिका' म्हटल्या जाणाऱ्या एका विभक्तीला, पाच संख्या पूर्ण करण्याच्या हेतूने 'पञ्चमी' (पंचमी) अशी संज्ञा देऊन स्थापित केले. ကြိယာတိပတ္တိယာ [Pg.78] ပန အနိယတကာလိကတ္တာ တံ ဝဇ္ဇေတွာ အယံ ဝိနိစ္ဆယော ကတော, သော စ ခေါ နိရုတ္တိနယံယေဝ နိဿာယ. အယံ တာဝ ကာတန္တေ ဝတ္တမာနာနန္တရံ ဝုတ္တာနံ သတ္တမီပဉ္စမီနံ အနွတ္ထသညံ ဣစ္ဆန္တာနံ အမှာကံ ရုစိ, ဧသာ သဒ္ဓမ္မဝိဒူဟိ ဂရူဟိ အပ္ပဋိက္ကောသိတာ အနုမတာ သမ္ပဋိစ္ဆိတာ ‘‘ဧဝမေဝံ အာဝုသော, ဧဝမေဝံ အာဝုသော’’တိ. ဝေယျာကရဏေဟိပိ အပ္ပဋိက္ကောသိတာ အနုမတာ သမ္ပဋိစ္ဆိတာ ‘‘ဧဝမေဝံ ဘန္တေ, ဧဝမေဝံ ဘန္တေ’’တိ. ဧဝံ သဗ္ဗေဟိပိ တေဟိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ အဗ္ဘနုမောဒိတာ အပ္ပဋိက္ကောသိတာ. परंतु क्रियातिपत्ती ही अनियतकालिक (अनिश्चित काळाची) असल्यामुळे, तिला वगळून हा निर्णय केला गेला आहे, आणि तो केवळ निरुक्ति-पद्धतीचा आश्रय घेऊनच केला आहे. कातन्त्र व्याकरणात वर्तमानकाळानंतर सांगितलेल्या सत्तमी आणि पञ्चमी विभक्तींच्या सार्थ संज्ञेची (अन्वर्थ संज्ञा) इच्छा करणाऱ्या आम्हा लोकांचे हे मत आहे; जे सद्धम्माचे ज्ञाते असलेल्या आदरणीय गुरूंनी नाकारले नाही, तर 'असेच आहे आवुसो, असेच आहे आवुसो' असे म्हणून संमत व स्वीकृत केले आहे. वैयाकरणांनी देखील ते नाकारले नाही, तर 'असेच आहे भन्ते, असेच आहे भन्ते' असे म्हणून संमत व स्वीकृत केले आहे. अशा प्रकारे त्या सर्व पूर्वाचार्यांनी याचे अनुमोदन केले आहे आणि ते नाकारलेले नाही. ကစ္စာယနပ္ပကရဏေ ပန ဗုဒ္ဓဝစနာနုရူပေန အဋ္ဌဓာ ဝိဘတ္တီနံ ဝုတ္တတ္တာ ဝတ္တမာနာဝိဘတ္တိ ပဉ္စမဋ္ဌာနေ ဌိတာ. ကထံ? ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဘဝိဿန္တိဝသေန ဧကန္တာတီတာနာဂတကာလိကာ စတဿော ဝိဘတ္တိယော, ဝတ္တမာနဝသေန ဧကန္တပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာ ဝိဘတ္တိ ဧကာယေဝ, သာ ပဋိပါဋိယာ ဂဏိယမာနာ ပဉ္စမံ ဌာနံ ဘဇတိ. ဧဝံ ဧတသ္မိံ ဝတ္တမာနာသင်္ခါတေ ပဉ္စမဋ္ဌာနေ ပက္ခိပိတုံ နိရုတ္တိနယေန ‘‘အာဏတ္တိကာလိကာ’’တိ သင်္ခံ ဂတံ ‘‘အနုတ္တကာလိကာ’’တိ ဝုတ္တံ ဝိဘတ္တိံ ပဉ္စမီဘူတာယ ဝတ္တမာနာယ သမာနဋ္ဌာနတ္တာ ပဉ္စမီသညံ ကတွာ ဌပေသိ. တတော ပရံ တံ ပဉ္စမံ ဆဋ္ဌိဋ္ဌာနေ ဌပေတွာ ပရောက္ခာ ဟိယျတ္တနီ အဇ္ဇတနီ ဘဝိဿန္တီ ဝတ္တမာနာ ပဉ္စမီတိ ဧဝံ ဂဏနာဝသေန ဆ ဝိဘတ္တိယော ဥပါဒါယ နိရုတ္တိနယေန ‘‘ပရိကပ္ပကာလိကာ’’တိ သင်္ခံ ဂတံ ‘‘အနုတ္တကာလိကာ’’တိ ဝုတ္တံ ဝိဘတ္တိံ သတ္တန္နံ သင်္ချာနံ ပူရဏေန သတ္တမီသညံ ကတွာ ဌပေသိ. परंतु कच्चायन व्याकरण ग्रंथात बुद्धवचनाच्या अनुरूप आठ प्रकारच्या विभक्ती सांगितल्या असल्यामुळे, वत्तमाना (वर्तमान) विभक्ती पाचव्या स्थानावर स्थित आहे. कसे? परोक्खा, हिय्यत्तनी, अज्जतनी आणि भविसन्ती या रूपाने पूर्णपणे भूत व भविष्य काळातील चार विभक्ती आहेत; वर्तमानकाळाच्या रूपाने पूर्णपणे वर्तमानकाळातील विभक्ती एकच आहे, जी क्रमाने मोजली असता पाचवे स्थान प्राप्त करते. अशा प्रकारे, या वर्तमान संज्ञक पाचव्या स्थानात समाविष्ट करण्यासाठी, निरुक्ति-पद्धतीने 'आणत्तिकालिका' (आज्ञार्थक काळ) अशी संज्ञा प्राप्त झालेल्या आणि 'अनुत्तकालिका' (न सांगितलेल्या काळाची) म्हटल्या जाणाऱ्या विभक्तीला, पाचव्या स्थानावर असलेल्या वर्तमानकाळाशी समान स्थान असल्यामुळे 'पञ्चमी' (पंचमी) अशी संज्ञा देऊन स्थापित केले. त्यानंतर, त्या पाचव्या विभक्तीला सहाव्या स्थानावर ठेवून, परोक्खा, हिय्यत्तनी, अज्जतनी, भविसन्ती, वत्तमाना आणि पञ्चमी अशा मोजणीच्या रूपाने सहा विभक्ती घेऊन, निरुक्ति-पद्धतीने 'परिकप्पकालिका' (संभाव्य काळ) अशी संज्ञा प्राप्त झालेल्या आणि 'अनुत्तकालिका' म्हटल्या जाणाऱ्या विभक्तीला, सात संख्या पूर्ण करण्याच्या हेतूने 'सत्तमी' (सप्तमी) अशी संज्ञा देऊन स्थापित केले. ကာလာတိပတ္တိယာ ပန အတီတာနာဂတကာလိကတ္တာ တံ ဝဇ္ဇေတွာ အယံ ဝိနိစ္ဆယော ကတော, သော စ ခေါ နိရုတ္တိနယံယေဝ နိဿာယ. အယံ ကစ္စာယနေ ဝတ္တမာနာနန္တရံ ဝုတ္တာနံ ပဉ္စမီသတ္တမီနံ အနွတ္ထသညံ ဣစ္ဆန္တာနံ အမှာကံ ရုစိ, ဧသာ စ သဒ္ဓမ္မဝိဒူဟိ ဂရူဟိ အပ္ပဋိက္ကောသိတာ အနုမတာ သမ္ပဋိစ္ဆိတာ [Pg.79] ‘‘ဧဝမေဝံ အာဝုသော, ဧဝမေဝံ အာဝုသော’’တိ. ဝေယျာကရဏေဟိပိ အပ္ပဋိက္ကောသိတာ အနုမတာ သမ္ပဋိစ္ဆိတာ ‘‘ဧဝမေဝံ ဘန္တေ, ဧဝမေဝံ ဘန္တေ’’တိ. ဧဝံ သဗ္ဗေဟိပိ တေဟိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ အဗ္ဘနုမောဒိတာ အပ္ပဋိက္ကောသိတာ. परंतु कालातिपत्ती ही भूत व भविष्य काळाची असल्यामुळे, तिला वगळून हा निर्णय केला गेला आहे, आणि तो केवळ निरुक्ति-पद्धतीचा आश्रय घेऊनच केला आहे. कच्चायन व्याकरणात वर्तमानकाळानंतर सांगितलेल्या पञ्चमी आणि सत्तमी विभक्तींच्या सार्थ संज्ञेची (अन्वर्थ संज्ञा) इच्छा करणाऱ्या आम्हा लोकांचे हे मत आहे; जे सद्धम्माचे ज्ञाते असलेल्या आदरणीय गुरूंनी नाकारले नाही, तर 'असेच आहे आवुसो, असेच आहे आवुसो' असे म्हणून संमत व स्वीकृत केले आहे. वैयाकरणांनी देखील ते नाकारले नाही, तर 'असेच आहे भन्ते, असेच आहे भन्ते' असे म्हणून संमत व स्वीकृत केले आहे. अशा प्रकारे त्या सर्व पूर्वाचार्यांनी याचे अनुमोदन केले आहे आणि ते नाकारलेले नाही. ယသ္မာ ဟိ ကာတန္တကစ္စာယနာနိ အညမညံ ဝိသဒိသဝိဘတ္တိက္ကမာနိပိ အန္တရေန ကိဉ္စိ ဝိသေသံ နိရုတ္တိယံ ဝုတ္တာတီတာဒိကာလဝိဘာဂဝသေနေကဇ္ဈံ သံသန္ဒန္တိ သမေန္တိ, တသ္မာ နိရုတ္တိနယညေဝ သာရတော ဂဟေတွာ ပဉ္စမီသတ္တမီဝိဘတ္တီနံ အနွတ္ထသညာပရိကပ္ပနေ အမှာကံ ရုစိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ အဗ္ဘနုမောဒိတာ အပ္ပဋိက္ကောသိတာ, တသ္မာ ဧဝ ယော ကောစိ ဣမံ ဝါဒံ မဒ္ဒိတွာ အညံ ဝါဒံ ပတိဋ္ဌာပေတုံ သက္ခိဿတီတိ နေတံ ဌာနံ ဝိဇ္ဇတိ. အယဉှိ နယော အတီဝ သုခုမော ဒုဒ္ဒသော စ ပရမာဏုရိဝ, ဒုက္ခောဂါဠှော စ မဟာဂဟနမိဝ, အတိဂမ္ဘီရော စ မဟာသမုဒ္ဒေါ ဝိယ, တသ္မာ ဣမိဿံ သဒ္ဒနီတိယံ သဒ္ဓါသမ္ပန္နေဟိ ကုလပုတ္တေဟိ သာသနောပကာရတ္ထံ ယောဂေါ သုဋ္ဌု ကရဏီယော. တထာ ဟိ ဣဓ ကတယောဂေဟိ နာမာချာတာဒီသု စတူသု ပဒေသု ဥပ္ပန္နဝါဒါ ပရဝါဒိနော ဇိတာဝ ဟောန္တိ. कारण, जरी कातन्त्र आणि कच्चायन या व्याकरणांमध्ये विभक्तींचा क्रम एकमेकांशी भिन्न असला, तरीही कोणत्याही विशेष फरकाशिवाय निरुक्तीमध्ये सांगितलेल्या भूत इत्यादी काळांच्या विभागणीच्या आधारे ते एकत्र जुळतात आणि समान होतात; म्हणूनच, निरुक्ति-पद्धतीलाच सार रूपाने ग्रहण करून पञ्चमी आणि सत्तमी विभक्तींच्या सार्थ संज्ञेची कल्पना करण्याबाबतचे आमचे मत पूर्वाचार्यांनी अनुमोदित केले आहे आणि नाकारलेले नाही. म्हणूनच, कोणीही या मताचे खंडन करून दुसरे मत प्रस्थापित करू शकेल, अशी शक्यता नाही. कारण ही पद्धत अत्यंत सूक्ष्म आणि परमाणूसारखी दुर्लक्ष्य (पाहण्यास कठीण) आहे, महाअरण्यासारखी कठीण प्रवेश असणारी आहे, आणि महासागरासारखी अत्यंत गंभीर (खोल) आहे. म्हणून, या 'सद्दनीति' ग्रंथात श्रद्धासंपन्न कुलपुत्रांनी बुद्ध शासनाच्या उपकारासाठी चांगला प्रयत्न केला पाहिजे. कारण, येथे अभ्यास करणाऱ्यांकडून नाम, आख्यात इत्यादी चार पदांमध्ये उपस्थित झालेल्या वादांमध्ये परवादी (प्रतिपक्षी) पराभूतच होतात. မုနိနာ မုနိနာဂေန, ဒုဋ္ဌာ ပဗ္ဗဇိတာ ဇိတာ; ယထာ ယထာ အသဒ္ဓမ္မ-ပူရဏာ ပူရဏာဒယော. ज्याप्रमाणे मुनींमध्ये श्रेष्ठ (मुनिनाग) अशा बुद्धांद्वारे, असद्धर्माने भरलेले पूरण (पूरण कस्सप) इत्यादी दुष्ट प्रव्रजित पराभूत केले गेले; တထာ တထာဂတာဒါယာ-နုဂါယံ သဒ္ဒနီတိယံ; ကတယောဂေဟိပိ ဇိတာ, သဝန္တိ ပရဝါဒိနောတိ. त्याचप्रमाणे, तथागतांच्या वारशाचे अनुकरण करणाऱ्या या 'सद्दनीति' ग्रंथात अभ्यास करणाऱ्यांकडूनही परवादी पराभूत होऊन पळून जातात. အယံ ပဉ္စမီသတ္တမီနံ ပဋိပါဋိဋ္ဌပနေ ပကရဏသံသန္ဒနာ. ही पञ्चमी आणि सत्तमी विभक्तींच्या क्रमाच्या स्थापनेमध्ये ग्रंथांची सुसंगती (तुलना) आहे. အထ ဝတ္တမာနာဒီနံ ဝစနတ္ထံ ကထယာမ – တတ္ထ ဝတ္တမာနာတိ ကေနဋ္ဌေန ဝတ္တမာနာ? ဝတ္တမာနကာလဝစနဋ္ဌေန. ပစ္စုပ္ပန္နဘာဝေန ဟိ ဝတ္တတီတိ ဝတ္တမာနော, ပစ္စုပ္ပန္နကြိယာသင်္ခါတော ကာလော. တဗ္ဗာစကဝသေန ဝတ္တမာနော ကာလော ဧတိဿာ အတ္ထီတိ အယံ တိ အန္တိအာဒိဝိဘတ္တိ ဝတ္တမာနာ. တထာ [Pg.80] ဟိ ‘‘ဂစ္ဆတိ ဒေဝဒတ္တော’’တိ ဧတ္ထ ဒေဝဒတ္တဿ ပစ္စုပ္ပန္နံ ဂမနကြိယံ ဝိဘတ္တိဘူတော တိသဒ္ဒေါယေဝ ဝဒတိ, တသ္မာ တဗ္ဗာစကဝသေန ဝတ္တမာနော ကာလော ဧတိဿာ အတ္ထီတိ ဝတ္တမာနာတိ ဝုစ္စတိ. ပဉ္စမီတိ ကေနဋ္ဌေန ပဉ္စမီ? ပဉ္စမံ ဝတ္တမာနဋ္ဌာနံ ဂမနဋ္ဌေန, ပဉ္စန္နဉ္စ သင်္ချာနံ ပူရဏဋ္ဌေန. တထာ ဟိ နိယောဂါ အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာနံ ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဘဝိဿန္တီဝတ္တမာနာသင်္ခါတာနံ ပဉ္စန္နံ ဝိဘတ္တီနမန္တရေ ပဉ္စမီဘူတာယ ဝတ္တမာနာယ သယမ္ပိ ပစ္စုပ္ပန္နကာလိကဘာဝေန သမာနဋ္ဌာနတ္တာ ပဉ္စမံ ဝတ္တမာနဋ္ဌာနံ ဂစ္ဆတီတိ ပဉ္စမီ. ယထာ နဒန္တီ ဂစ္ဆတီတိ နဒီ. တထာ နိယောဂါ အတီတာနာဂတကာလိကာ ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဘဝိဿန္တီသင်္ခါတာ စတဿော ဝိဘတ္တိယော ဥပါဒါယ သယမ္ပိ ဝတ္တမာနာဝိဘတ္တိ ဝိယ ပဉ္စန္နံ သင်္ချာနံ ပူရဏီတိ ပဉ္စမီ. သတ္တမီတိ ကေနဋ္ဌေန သတ္တမီ? သတ္တန္နံ သင်္ချာနံ ပူရဏဋ္ဌေန. တထာ ဟိ အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာ ပရောက္ခာဟိယျတ္တနဇ္ဇတနီဘဝိဿန္တီဝတ္တမာနာပဉ္စမီသင်္ခါတာ ဆ ဝိဘတ္တိယော ဥပါဒါယ သယမ္ပိ ပစ္စုပ္ပန္နကာလိကာ ဟုတွာ သတ္တန္နံ သင်္ချာနံ ပူရဏီတိ သတ္တမီ. आता आपण 'वर्तमान' इत्यादींच्या शब्दांचा अर्थ सांगू - त्यामध्ये 'वर्तमाना' (वर्तमानकाळ) कोणत्या अर्थाने 'वर्तमाना' आहे? वर्तमानकाळ दर्शविण्याच्या अर्थाने. कारण वर्तमान रूपाने जे वर्तते (अस्तित्वात असते) ते 'वर्तमान' होय, ज्याला वर्तमान क्रियायुक्त काळ म्हटले जाते. त्या काळाचे वाचक असल्यामुळे ज्या विभक्तीला वर्तमानकाळ प्राप्त होतो, ती 'ति', 'अन्ति' इत्यादी विभक्ती 'वर्तमाना' होय. जसे की, "गच्छति देवदत्तो" (देवदत्त जातो) यामध्ये देवदत्ताची वर्तमान काळातील गमनक्रिया विभक्तीरूप असलेला 'ति' हा शब्दच सांगतो, म्हणून त्या काळाचे वाचक असल्यामुळे ज्या विभक्तीला वर्तमानकाळ प्राप्त होतो, तिला 'वर्तमाना' असे म्हणतात. 'पंचमी' कोणत्या अर्थाने 'पंचमी' आहे? पाचव्या वर्तमान स्थानाप्रत जाण्याच्या अर्थाने आणि पाच या संख्येची पूर्ती करण्याच्या अर्थाने. जसे की, नियमानुसार भूत, भविष्य आणि वर्तमान काळातील परोक्खा, हिय्यत्तनी, अज्जतनी, भविसन्ती आणि वर्तमाना या पाच विभक्तींच्या मध्ये पाचवी बनलेल्या वर्तमाना विभक्तीशी स्वतःही वर्तमानकालिक भावाने समान स्थान असल्यामुळे ती पाचव्या वर्तमान स्थानाप्रत जाते, म्हणून तिला 'पंचमी' म्हणतात. ज्याप्रमाणे आवाज करत वाहते (नदन्ती) ती 'नदी' होय. त्याचप्रमाणे नियमानुसार भूत आणि भविष्य काळातील परोक्खा, हिय्यत्तनी, अज्जतनी आणि भविसन्ती या चार विभक्तींना गृहीत धरून स्वतःही वर्तमाना विभक्तीप्रमाणे पाच या संख्येची पूर्ती करणारी असल्यामुळे ती 'पंचमी' होय. 'सप्तमी' कोणत्या अर्थाने 'सप्तमी' आहे? सात या संख्येची पूर्ती करण्याच्या अर्थाने. जसे की, भूत, भविष्य आणि वर्तमान काळातील परोक्खा, हिय्यत्तनी, अज्जतनी, भविसन्ती, वर्तमाना आणि पंचमी या सहा विभक्तींना गृहीत धरून स्वतःही वर्तमानकालिक होऊन सात या संख्येची पूर्ती करणारी असल्यामुळे ती 'सप्तमी' होय. ပရောက္ခာတိ ကေနဋ္ဌေန ပရောက္ခာ? ပရောက္ခေ ဘဝါတိ အတ္ထေန. တထာ ဟိ စက္ခာဒိန္ဒြိယသင်္ခါတဿ အက္ခဿ ပရော တိရောဘာဝေါ ပရောက္ခံ, တဗ္ဗာစကဘာဝေန ပရောက္ခေ ဘဝါတိ ပရောက္ခာ. ဟိယျတ္တနီတိ ကေနဋ္ဌေန ဟိယျတ္တနီ? ဟိယျော ပဘုတိ အတီတေ ကာလေ ဘဝါ တဗ္ဗာစကဘာဝေနာတိ အတ္ထေန. အဇ္ဇတနီတိ ကေနဋ္ဌေန အဇ္ဇတနီ? အဇ္ဇ ပဘုတိ အတီတေ ကာလေ ဘဝါ တဗ္ဗာစကဘာဝေနာတိ အတ္ထေန. ဘဝိဿန္တီတိ ကေနဋ္ဌေန ဘဝိဿန္တီ? ‘‘ဧဝံ အနာဂတေ ဘဝိဿတီ’’တိ အတ္ထံ ပကာသေန္တီ ဧတိ ဂစ္ဆတီတိ အတ္ထေန. ကာလာတိပတ္တီတိ ကေနဋ္ဌေန ကာလာတိပတ္တိ? ကာလဿာတိပတနဝစနဋ္ဌေန. တထာ ဟိ ကာလဿ အတိပတနံ အစ္စယော အတိက္ကမိတွာ ပဝတ္တိ ကာလာတိပတ္တိ, လဘိတဗ္ဗဿ အတ္ထဿ နိပ္ဖတ္တိရဟိတံ ကြိယာတိက္ကမနံ[Pg.81]. ကာလောတိ စေတ္ထ ကြိယာ အဓိပ္ပေတာ. ကရဏံ ကာရော, ကာရော ဧဝ ကာလော ရကာရဿ လကာရံ ကတွာ ဥစ္စာရဏဝသေန. အယံ ပန ဝိဘတ္တိ တဗ္ဗာစကတ္တာ ကာလာတိပတ္တီတိ. အယံ ပန ဝတ္တမာနာဒီနံ ဝစနတ္ထဝိဘာဝနာ. 'परोक्खा' कोणत्या अर्थाने 'परोक्खा' आहे? परोक्षामध्ये (डोळ्यांच्या पलीकडे) असण्याच्या अर्थाने. कारण चक्षु इत्यादी इंद्रियरूप अक्ष (डोळा) च्या पलीकडे किंवा अदृश्य असणे म्हणजे 'परोक्ष' होय, आणि त्याचे वाचक असल्यामुळे परोक्षामध्ये असणारी ती 'परोक्खा' होय. 'हिय्यत्तनी' कोणत्या अर्थाने 'हिय्यत्तनी' आहे? कालच्या दिवसापासून (हिय्यो) सुरू होणाऱ्या भूतकाळात असणारी आणि त्याचे वाचक असण्याच्या अर्थाने. 'अज्जतनी' कोणत्या अर्थाने 'अज्जतनी' आहे? आजच्या दिवसापासून (अज्ज) सुरू होणाऱ्या भूतकाळात असणारी आणि त्याचे वाचक असण्याच्या अर्थाने. 'भविसन्ती' कोणत्या अर्थाने 'भविसन्ती' आहे? "अशा प्रकारे भविष्यात घडेल" हा अर्थ प्रकट करत जाणारी (प्रवृत्त होणारी) या अर्थाने. 'कालातिपत्ती' कोणत्या अर्थाने 'कालातिपत्ती' आहे? काळाच्या उल्लंघनाचे वाचक असण्याच्या अर्थाने. कारण काळाचे उल्लंघन, व्यत्यय किंवा मर्यादा ओलांडून प्रवृत्त होणे म्हणजे 'कालातिपत्ती' होय, जे प्राप्त करावयाच्या फलाच्या सिद्धीशिवाय क्रियेचे उल्लंघन करणे आहे. येथे 'काळ' या शब्दाने 'क्रिया' अभिप्रेत आहे. करणे म्हणजे 'कार', आणि 'र' च्या जागी 'ल' करून उच्चारण्याच्या सुलभतेसाठी 'कार' लाच 'काल' म्हटले जाते. आणि ही विभक्ती त्याचे वाचक असल्यामुळे 'कालातिपत्ती' होय. ही 'वर्तमाना' इत्यादींच्या शब्दांच्या अर्थांचे स्पष्टीकरण आहे. ဝိပ္ပကိဏ္ဏဝိဝိဓနယေ, သံကိဏ္ဏလက္ခဏဓရဝရသာသနေ; သုမတိမတိဝဍ္ဎနတ္ထံ, ကထိတော ပကိဏ္ဏကဝိနိစ္ဆယော. विखुरलेल्या विविध पद्धती आणि संकीर्ण लक्षणे धारण करणाऱ्या श्रेष्ठ शासनात (बुद्धशासनात), सुज्ञांच्या बुद्धीच्या वृद्धीसाठी हा 'प्रकीर्णकविनिर्णय' (पकिण्णकविनिच्छय) सांगितला आहे. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ...कौशल्यासाठी (प्रविण्य मिळवण्यासाठी) रचलेल्या 'सद्दनीति' ग्रंथात... ပကိဏ္ဏကဝိနိစ္ဆယော နာမ ...'प्रकीर्णकविनिर्णय' (पकिण्णकविनिच्छय) नावाचा... တတိယော ပရိစ္ဆေဒေါ. ...तिसरा परिच्छेद समाप्त झाला. ၄. ဘူဓာတုမယနာမိကရူပဝိဘာဂ ४. भू-धातूपासून बनलेल्या नामरूपांचा विभाग (नामविभक्ती रूपविभाग). ‘‘ဘူ သတ္တာယ’’န္တိ ဓာတုဿ, ရူပမာချာတသညိတံ; တျာဒျန္တံ လပိတံ နာန-ပ္ပကာရေဟိ အနာကုလံ. "भू सत्तायाम्" (अस्तित्व या अर्थी भू धातू) या धातूचे 'आख्यात' संज्ञेने ओळखले जाणारे आणि 'ति' इत्यादी प्रत्ययांनी शेवट होणारे रूप विविध प्रकारे स्पष्टपणे (गोंधळ न करता) सांगितले गेले आहे. သျာဒျန္တံ, ဒါနိ တဿေဝ, ရူပံ နာမိကသဝှယံ; ဘာသိဿံ ဘာသိတတ္ထေသု, ပဋုဘာဝါယ သောတုနံ. आता श्रोत्यांच्या कुशलतेसाठी, त्याच धातूचे 'सि' इत्यादी प्रत्ययांनी शेवट होणारे 'नामिक' (नाम) नावाचे रूप पूर्वी सांगितलेल्या अर्थांमध्ये मी सांगेन. ယဒတ္ထေ’တ္တနိ နာမေတိ, ပရ’မတ္ထေသု ဝါ သယံ; နမတီတိ တဒါဟံသု, နာမံ ဣတိ ဝိဘာဝိနော. विद्वान लोक असे म्हणतात की, जे स्वतःच्या अर्थाकडे झुकते (नमित करते) किंवा स्वतः इतर अर्थांकडे झुकते (नमते), त्याला 'नाम' असे म्हणतात. နာမံ နာမိကမိစ္စတြ, ဧကမေဝေတ္ထတော ဘဝေ; တဒေဝံ နာမိကံ ဉေ ယျံ, သလိင်္ဂံ သဝိဘတ္တိကံ. येथे 'नाम' आणि 'नामिक' हे दोन्ही एकच समजावे. अशा प्रकारे ते नामिक लिंगयुक्त (सलिङ्ग) आणि विभक्तियुक्त (सविभत्तिक) जाणावे. သတွာဘိဓာနံ လိင်္ဂန္တိ, ဣတ္ထိပုမနပုံသကံ; ဝိဘတ္တီတိဓ သတ္တေဝ, တတ္ထ စဋ္ဌ ပဝုစ္စရေ. वस्तू किंवा अस्तित्वाचे वाचक असणे म्हणजे 'लिंग' होय, जे स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंग असे आहे. येथे विभक्ती सातच आहेत, परंतु त्यामध्ये आठ सांगितल्या जातात (संबोधनासह). ပဌမာ ဒုတိယာ တတိယာ, စတုတ္ထီ ပဉ္စမီ တထာ; ဆဋ္ဌီ စ သတ္တမီ စာတိ, ဟောန္တိ သတ္တ ဝိဘတ္တိယော. प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी आणि सप्तमी अशा सात विभक्ती असतात. လိင်္ဂတ္ထေ ပဌမာ သာယံ, ဘိန္နာ ဒွေဓာ သိယော ဣတိ; ကမ္မတ္ထေ ဒုတိယာ သာပိ, ဘိန္နာ အံ ယော ဣတိ ဒွိဓာ. प्रातिपदिकार्थात (लिंगार्थात) प्रथमा विभक्ती होते, ती 'सि' आणि 'यो' अशी दोन प्रकारांत विभागलेली आहे. कर्माच्या अर्थात द्वितीया विभक्ती होते, ती देखील 'अं' आणि 'यो' अशी दोन प्रकारांत विभागलेली आहे. ကရဏေ [Pg.82] တတိယာ သာပိ, ဘိန္နာ နာ ဟိ ဣတိ ဒွိဓာ; သမ္ပဒါနေ စတုတ္ထီ သာ, ဘိန္နာ ဒွေဓာ သ နံ ဣတိ. करणाच्या (साधनाच्या) अर्थात तृतीया विभक्ती होते, ती देखील 'ना' आणि 'हि' अशी दोन प्रकारांत विभागलेली आहे. संप्रदानाच्या अर्थात चतुर्थी विभक्ती होते, ती 'स' आणि 'नं' अशी दोन प्रकारांत विभागलेली आहे. အပါဒါနေ ပဉ္စမီ သာ, ဘိန္နာ ဒွေဓာ သ္မာ ဟိ ဣတိ; ဆဋ္ဌီ သာမိမှိ သာ စာပိ, ဘိန္နာ ဒွေဓာ သ နံ ဣတိ. अपादानाच्या (वियोगाच्या) अर्थात पंचमी विभक्ती होते, ती 'स्मा' आणि 'हि' अशी दोन प्रकारांत विभागलेली आहे. स्वामीच्या (मालकी किंवा संबंधाच्या) अर्थात षष्ठी विभक्ती होते, ती देखील 'स' आणि 'नं' अशी दोन प्रकारांत विभागलेली आहे. ဩကာသေ သတ္တမီ သာပိ, ဘိန္နာ ဒွေဓာ သ္မိံသု ဣတိ; အာမန္တနဋ္ဌမီ သာယံ, သိယောယေဝါတိ စုဒ္ဒသ. अधिकरणाच्या (स्थानाच्या) अर्थात सप्तमी विभक्ती होते, ती देखील 'स्मिं' आणि 'सु' अशी दोन प्रकारांत विभागलेली आहे. संबोधनाच्या अर्थात आठवी विभक्ती होते, ती 'सि' आणि 'यो' (सियो) हीच असते. अशा प्रकारे हे चौदा प्रत्यय आहेत. ဝစနဒွယသံယုတ္တာ, ဧကေကာ တာ ဝိဘတ္တိယော; သတွမိတိဟ ဝိညေယျော, အတ္ထော သော ဒဗ္ဗသညိတော. त्या प्रत्येक विभक्ती दोन वचनांनी (एकवचन आणि बहुवचन) युक्त असतात. येथे 'सत्त्व' (अस्तित्व) म्हणजे 'द्रव्य' या संज्ञेने ओळखला जाणारा अर्थ समजावा. ယော ကရောတိသ ကတ္တာတု, တံ ကမ္မံ ယံ ကရောတိ ဝါ; ကုဗ္ဗတေ ယေန ဝါ တန္တု, ကရဏံ ဣတိ သညိတံ. जो करतो तो 'कर्ता' होय, आणि तो जे करतो ते 'कर्म' होय; तसेच ज्याच्याद्वारे तो करतो, त्याला 'करण' अशी संज्ञा दिली आहे. ဒေတိ ရောစတိ ဝါ ယဿ, သမ္ပဒါနန္တိ တံ မတံ; ယတောပေတိ ဘယံ ဝါ တံ, အပါဒါနန္တိ ကိတ္တိတံ. ज्याला दिले जाते किंवा ज्याला आवडते, त्याला 'संप्रदान' मानले जाते; ज्याच्यापासून दूर जातो किंवा भीती वाटते, त्याला 'अपादान' असे म्हटले आहे. ယဿာယတ္တော သမူဟောဝါ, တံ ဝေ သာမီတိ ဒေသိတံ; ယသ္မိံ ကရောတိ ကိရိယံ, တဒေါကာသန္တိ သဒ္ဒိတံ. ज्याच्या अधीन एखादा समूह किंवा वस्तू असते, त्याला 'स्वामी' (मालक/संबंधी) असे सांगितले आहे; ज्याच्यामध्ये क्रिया केली जाते, त्याला 'ओकास' (अधिकरण/स्थान) असे म्हटले जाते. ယဒါလပတိ တံ ဝတ္ထု, အာမန္တနမုဒီရိတံ; သဒ္ဒေနာဘိမုခီကာရော, ဝိဇ္ဇမာနဿ ဝါ ပန. ज्या वस्तूला संबोधित केले जाते, त्याला 'आमंत्रण' (संबोधन) म्हटले आहे; किंवा प्रत्यक्ष असलेल्या व्यक्तीला शब्दाद्वारे आपल्याकडे अभिमुख करणे (लक्ष वेधून घेणे) म्हणजे संबोधन होय. ဝိနာ အာလပနတ္ထံ လိင်္ဂတ္ထာဒီသု ပဌမာဒိဝိဘတ္တုပ္ပတ္တိ ဥပလက္ခဏဝသေန ဝုတ္တာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. संबोधनाचा अर्थ वगळता, प्रातिपदिकार्थ (लिंगार्थ) इत्यादींमध्ये प्रथमा इत्यादी विभक्तींची उत्पत्ती उपलक्षण रूपाने (लक्षणेवरून) सांगितली आहे, असे समजावे. ဣဒမေတ္ထ နိရုတ္တိလက္ခဏံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ – ပစ္စတ္တဝစနေ ပဌမာ ဝိဘတ္တိ ဘဝတိ, ဥပယောဂဝစနေ ဒုတိယာ ဝိဘတ္တိ ဘဝတိ, ကရဏဝစနေ တတိယာ ဝိဘတ္တိ ဘဝတိ, သမ္ပဒါနဝစနေ စတုတ္ထီ ဝိဘတ္တိ ဘဝတိ, နိဿက္ကဝစနေ ပဉ္စမီ ဝိဘတ္တိ ဘဝတိ, သာမိဝစနေ ဆဋ္ဌီ ဝိဘတ္တိ ဘဝတိ, ဘုမ္မဝစနေ သတ္တမီ ဝိဘတ္တိ ဘဝတိ, အာမန္တနဝစနေ အဋ္ဌမီ ဝိဘတ္တိ ဘဝတိ. တတြုဒ္ဒါနံ – येथे हे निरुक्त-लक्षण (व्याकरणिक व्याख्या) पाहावे – पच्चत्तवचनात (कर्त्याच्या अर्थात) प्रथमा विभक्ती होते, उपयोगवचनात (कर्माच्या अर्थात) द्वितीया विभक्ती होते, करणवचनात (साधनाच्या अर्थात) तृतीया विभक्ती होते, संप्रदानवचनात चतुर्थी विभक्ती होते, निस्सक्कवचनात (अपादानाच्या अर्थात) पंचमी विभक्ती होते, सामिवचनात (संबंधाच्या अर्थात) षष्ठी विभक्ती होते, भुम्मवचनात (अधिकरणाच्या अर्थात) सप्तमी विभक्ती होते, आमंत्रणवचनात (संबोधनाच्या अर्थात) आठवी विभक्ती होते. त्याविषयीचा संक्षेप (उद्दान) खालीलप्रमाणे आहे – ပစ္စတ္တမုပယောဂဉ္စ, ကရဏံ သမ္ပဒါနိယံ; နိဿက္ကံ သာမိဝစနံ, ဘုမ္မမာလပနဋ္ဌမံ. पच्चत्त (प्रथमा), उपयोग (द्वितीया), करण (तृतीया), संप्रदान (चतुर्थी), niस्सक्क (पंचमी), सामिवचन (षष्ठी), भुम्म (सप्तमी) आणि आठवे आलपन (संबोधन) होय. တတြ [Pg.83] ပစ္စတ္တဝစနံ နာမ တိဝိဓလိင်္ဂဝဝတ္ထာနဂတာနံ ဣတ္ထိပုမနပုံသကာနံ ပစ္စတ္တသဘာဝနိဒ္ဒေသတ္ထော. ဥပယောဂဝစနံ နာမ ယော ယံ ကရောတိ, တေန တဒုပယုတ္တပရိဒီပနတ္ထော. ကရဏဝစနံ နာမ တဇ္ဇာပကတနိဗ္ဗတ္တကပရိဒီပနတ္ထော. သမ္ပဒါနဝစနံ နာမ တပ္ပဒါနပရိဒီပနတ္ထော. နိဿက္ကဝစနံ နာမ တန္နိဿဋတဒပဂမပရိဒီပနတ္ထော. သာမိဝစနံ နာမ တဒိဿရပရိဒီပနတ္ထော. ဘုမ္မဝစနံ နာမ တပ္ပတိဋ္ဌာပရိဒီပနတ္ထော. အာမန္တနဝစနံ နာမ တဒါမန္တနပရိဒီပနတ္ထော. ဧဝံ ဉတွာ ပယောဂါနိ အသမ္မုယှန္တေန ယောဇေတဗ္ဗာနိ. तेथे पच्चत्तवचन (प्रथमा विभक्ती) म्हणजे स्त्री, पुरुष आणि नपुंसक या तीन प्रकारच्या लिंगव्यवस्थेमध्ये असलेल्यांच्या स्वतःच्या स्वभावाचा निर्देश करणे होय. उपयोगवचन (द्वितीया विभक्ती) म्हणजे जो जे करतो, त्याद्वारे त्या उपयोगाचे (कर्माचे) प्रकटीकरण करणे होय. करणवचन (तृतीया विभक्ती) म्हणजे त्या क्रियेच्या साधकाचे किंवा निष्पादकाचे प्रकटीकरण करणे होय. संप्रदानवचन (चतुर्थी विभक्ती) म्हणजे त्याला प्रदान करण्याचे (देण्याचे) प्रकटीकरण करणे होय. निस्सक्कवचन (पंचमी विभक्ती) म्हणजे त्यापासून निघून जाणे किंवा दूर जाणे याचे प्रकटीकरण करणे होय. सामिवचन (षष्ठी विभक्ती) म्हणजे त्याच्या स्वामीत्वाचे प्रकटीकरण करणे होय. भुम्मवचन (सप्तमी विभक्ती) म्हणजे त्याच्या आधाराचे प्रकटीकरण करणे होय. आमंत्रणवचन (संबोधन) म्हणजे त्याला आमंत्रित करण्याचे प्रकटीकरण करणे होय. अशा प्रकारे जाणून घेऊन, गोंधळात न पडता प्रयोगांची योजना करावी. ဘူတော, ဘာဝကော, ဘဝေါ, အဘဝေါ, ဘာဝေါ, အဘာဝေါ, သဘာဝေါ, သဗ္ဘာဝေါ, သမ္ဘဝေါ, ပဘဝေါ, ပဘာဝေါ, အနုဘဝေါ, အာနုဘာဝေါ, ပရာဘဝေါ, ဝိဘဝေါ, ပါတုဘာဝေါ, အာဝိဘာဝေါ, တိရောဘာဝေါ, ဝိနာဘာဝေါ, သောတ္ထိဘာဝေါ, အတ္ထိဘာဝေါ, နတ္ထိဘာဝေါတိ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ. भूतो, भावको, भवो, अभवो, भावो, अभावो, सभावो, सब्भावो, सम्भवो, पभवो, पभावो, अनुभवो, आनुभावो, पराभवो, विभवो, पातुभावो, आविभावो, तिरोभावो, विनाभावो, सोत्थिभावो, अत्थिभावो, नत्थिभावो - हे ओकारान्त पुल्लिंगी शब्द आहेत. အဘိဘဝိတာ, ပရိဘဝိတာ, အနုဘဝိတာ, သမနုဘဝိတာ, ဘာဝိတာ, ပစ္စနုဘဝိတာတိ အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ. अभिभविता, परिभविता, अनुभविता, समनुभविता, भाविता, पच्चनुभविता - हे आकारान्त पुल्लिंगी शब्द आहेत. ဘဝံ, ပရာဘဝံ, ပရိဘဝံ, အဘိဘဝံ, အနုဘဝံ, သမနုဘဝံ, ပစ္စနုဘဝံ, ပဘဝံ, အပ္ပဘဝန္တိ နိဂ္ဂဟီတန္တပုလ္လိင်္ဂံ. भवं, पराभवं, परिभवं, अभिभवं, अनुभवं, समनुभवं, पच्चनुभवं, पभवं, अप्पभवं - हे निग्गहीत-अन्त (अनुस्वारान्त) पुल्लिंगी शब्द आहेत. ဓနဘူတိ, သိရိဘူတိ, သောတ္ထိဘူတိ, သုဝတ္ထိဘူတီတိ ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ. धनभूति, सिरिभूति, सोत्थिभूति, सुवत्थिभूति - हे इकारान्त पुल्लिंगी शब्द आहेत. ဘာဝီ, ဝိဘာဝီ, သမ္ဘာဝီ, ပရိဘာဝီတိ ဤကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ. भावी, विभावी, सम्भावी, परिभावी - हे ईकारान्त पुल्लिंगी शब्द आहेत. သယမ္ဘူ, ပဘူ, အဘိဘူ, ဝိဘူ, အဓိဘူ, ပတိဘူ, ဂေါတြဘူ, ဝတြဘူ, ပရာဘိဘူ, ရူပါဘိဘူ, သဒ္ဒါဘိဘူ, ဂန္ဓာဘိဘူ, ရသာဘိဘူ, ဖောဋ္ဌဗ္ဗာဘိဘူ, ဓမ္မာဘိဘူ, သဗ္ဗာဘိဘူတိ ဦကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ. सयम्भू, pभू, अभिभू, विभू, अधिभू, पतिभू, गोत्रभू, वत्रभू, पराभिभू, रूपाभिभू, सद्दाभिभू, गन्धाभिभू, रसाभिभू, फोट्ठब्बाभिभू, धम्माभिभू, सब्बाभिभू - हे ऊकारान्त पुल्लिंगी शब्द आहेत. ဣမာနေတ္ထ ဆဗ္ဗိဓာနိ ပုလ္လိင်္ဂါနိ ဘူဓာတုမယာနိ ဥဒ္ဒိဋ္ဌာနိ. येथे ही 'भू' धातूपासून बनलेली सहा प्रकारची पुल्लिंगी रूपे निर्दिष्ट केली आहेत. ဥကာရန္တံ [Pg.84] ပုလ္လိင်္ဂံတု ဘူဓာတုမယမပ္ပသိဒ္ဓံ, အညဓာတုမယံ ပနုကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ ပသိဒ္ဓံ ‘‘ဘိက္ခု, ဟေတု’’ဣတိ. တေန သဒ္ဓိံ သတ္တဝိဓာနိ ပုလ္လိင်္ဂါနိ ဟောန္တိ, သဗ္ဗာနေတာနိ သဘာဝတောယေဝ ပုလ္လိင်္ဂါနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ. ဧတ္ထ သတ္တောတိ အတ္ထဝါစကော ဘူတသဒ္ဒေါယေဝ နိယောဂါ ပုလ္လိင်္ဂန္တိပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. 'भू' धातूपासून बनलेले उकारान्त पुल्लिंग रूप मात्र अप्रसिद्ध आहे, परंतु इतर धातूंपासून बनलेले उकारान्त पुल्लिंग रूप जसे की 'भिक्खु' (bhikkhu), 'हेतु' (hetu) प्रसिद्ध आहे. त्यासह सात प्रकारची पुल्लिंगी रूपे होतात; ही सर्व स्वभावतःच पुल्लिंगी आहेत असे समजावे. येथे 'सत्तो' (प्राणी/सत्त्व) या अर्थाचा वाचक असलेला 'भूतो' हा शब्द देखील नियमाने पुल्लिंगीच समजावा. ယေ ပန ‘‘ယော ဓမ္မော ဘူတော, ယာ ဓမ္မဇာတိ ဘူတာ, ယံ ဓမ္မဇာတံ ဘူတ’’န္တိ ဧဝံ လိင်္ဂတ္တယေ ယောဇနာရဟတ္တာ အနိယတလိင်္ဂါ အညေပိ ဘူတပရာဘူတသမ္ဘူတသဒ္ဒါဒယော သန္ဒိဿန္တိ ပါဝစနဝရေ, တေပိ နာနောပသဂ္ဂနိပါတပဒေဟိ ယောဇနဝသေန သဒ္ဒရစနာယံ သုခုမတ္ထဂ္ဂဟဏေ စ ဝိညူနံ ကောသလ္လဇနနတ္ထံ နိယတပုလ္လိင်္ဂေသု ပက္ခိပိတွာ ဒဿေဿာမ. परंतु, जे 'यो धम्मो भूतो' (जो धर्म उत्पन्न झाला), 'या धम्मजाति भूता' (जी धर्मजाती उत्पन्न झाली), 'यं धम्मजातं भूतं' (जे धर्मजात उत्पन्न झाले) अशा प्रकारे तिन्ही लिंगांमध्ये योजण्यास योग्य असल्यामुळे अनियतलिंगी (अनिश्चित लिंग असलेले) इतरही 'भूत', 'पराभूत', 'सम्भूत' इत्यादी शब्द श्रेष्ठ बुद्धवचनात (पावचनवरे) दिसून येतात; ते देखील विविध उपसर्ग आणि निपात पदांच्या योजनेद्वारे शब्दरचनेत आणि सूक्ष्म अर्थ समजून घेण्यात विद्वानांचे कौशल्य वाढवण्यासाठी, निश्चित पुल्लिंगी शब्दांमध्ये समाविष्ट करून आम्ही दाखवू. သေယျထိဒံ? ဘူတော, ပရာဘူတော, သမ္ဘူတော, ဝိဘူတော, ပါတုဘူတော, အာဝိဘူတော, တိရောဘူတော, ဝိနာဘူတော, ဘဗ္ဗော, ပရိဘူတော, အဘိဘူတော, အဓိဘူတော, အဒ္ဓဘူတော, အနုဘူတော, သမနုဘူတော, ပစ္စနုဘူတော, ဘာဝိတော, သမ္ဘာဝိတော, ဝိဘာဝိတော, ပရိဘာဝိတော, အနုပရိဘူတော, ပရိဘဝိတဗ္ဗော, ပရိဘောတဗ္ဗော, ပရိဘဝနီယော, အဘိဘဝိတဗ္ဗော, အဘိဘောတဗ္ဗော, အဘိဘဝနီယော, အဓိဘဝိတဗ္ဗော, အဓိဘောတဗ္ဗော, အဓိဘဝနီယော, အနုဘဝိတဗ္ဗော, အနုဘောတဗ္ဗော, အနုဘဝနီယော, သမနုဘဝိတဗ္ဗော, သမနုဘောတဗ္ဗော, သမနုဘဝနီယော, ပစ္စနုဘဝိတဗ္ဗော, ပစ္စနုဘောတဗ္ဗော, ပစ္စနုဘဝနီယော, ဘာဝေတဗ္ဗော, ဘာဝနီယော, သမ္ဘာဝေတဗ္ဗော, သမ္ဘာဝနီယော, ဝိဘာဝေတဗ္ဗော, ဝိဘာဝနီယော, ပရိဘာဝေတဗ္ဗော, ပရိဘာဝနီယော, ဘဝမာနော, ဝိဘဝမာနော, ပရိဘဝမာနော, အဘိဘဝမာနော, အနုဘဝမာနော, သမနုဘဝမာနော, ပစ္စနုဘဝမာနော, အနုဘောန္တော, သမနုဘောန္တော, ပစ္စနုဘောန္တော, သမ္ဘောန္တော, အဘိသမ္ဘောန္တော, ဘာဝေန္တော, သမ္ဘာဝေန္တော, ဝိဘာဝေန္တော[Pg.85], ပရိဘာဝေန္တော, ပရိဘဝိယမာနော, ပရိဘုယျမာနော, အဘိဘဝိယမာနော, အဘိဘူယမာနော, အနုဘဝိယမာနော, အနုဘုယျမာနော, သမနုဘဝိယမာနော, သမနုဘုယျမာနော, ပစ္စနုဘဝိယမာနော, ပစ္စနုဘုယျမာနောတိ ဣမာနိ နိယတပုလ္လိင်္ဂေသု ပက္ခိတ္တလိင်္ဂါနိ. ဧဝမောကာရန္တာဒိဝသေန ဆဗ္ဗိဓာနိ ပုလ္လိင်္ဂါနိ ဘူဓာတုမယာနိ ပကာသိတာနိ. အယံ တာဝ ပုလ္လိင်္ဂဝသေန ဥဒါဟရဏုဒ္ဒေသော. ते खालीलप्रमाणे आहेत: भूतो, पराभूतो, सम्भूतो, विभूतो, पातुभूतो, आविभूतो, तिरोभूतो, विनाभूतो, भब्बो, परिभूतो, अभिभूतो, अधिभूतो, अद्धभूतो, अनुभूतो, समनुभूतो, पच्चनुभूतो, भावितो, सम्भावितो, विभावितो, परिभावितो, अनुपरिभूतो, परिभवितब्बो, परिभोतब्बो, परिभवनीयो, अभिभवितब्बो, अभिभोतब्बो, अभिभवनीयो, अधिभवितब्बो, अधिभोतब्बो, अधिभवनीयो, अनुभवितब्बो, अनुभोतब्बो, अनुभवनीयो, समनुभवितब्बो, समनुभोतब्बो, समनुभवनीयो, पच्चनुभवितब्बो, पच्चनुभोतब्बो, पच्चनुभवनीयो, भावेतब्बो, भावनीयो, सम्भावेतब्बो, सम्भावनीयो, विभावेतब्बो, विभावनीयो, परिभावेतब्बो, परिभावनीयो, भवमानो, विभवमानो, परिभवमानो, अभिभवमानो, अनुभवमानो, समनुभवमानो, पच्चनुभवमानो, अनुभवन्तो, समनुभवन्तो, पच्चनुभवन्तो, सम्भोन्तो, अभिसम्भोन्तो, भावेन्तो, सम्भावेन्तो, विभावेन्तो, परिभावेन्तो, परिभवियमानो, परिभुय्यमानो, अभिभवियमानो, अभिभूयमानो, अनुभवियमानो, अनुभुय्यमानो, समनुभवियमानो, समनुभुय्यमानो, पच्चनुभवियमानो, पच्चनुभुय्यमानो - ही निश्चित पुल्लिंगी शब्दांमध्ये समाविष्ट केलेली लिंगे आहेत. अशा प्रकारे ओकारान्तादी क्रमाने 'भू' धातूपासून बनलेली सहा प्रकारची पुल्लिंगी रूपे प्रकाशित केली आहेत. हा पुल्लिंगाच्या दृष्टीने उदाहरणांचा निर्देश आहे. ဘာဝိကာ, ဘာဝနာ, ဝိဘာဝနာ, သမ္ဘာဝနာ, ပရိဘာဝနာတိ အာကာရန္တဣတ္ထိလိင်္ဂံ. भाविका, भावना, विभावना, सम्भावना, परिभावना - हे आकारान्त स्त्रीलिंगी शब्द आहेत. ဘူမိ, ဘူတိ, ဝိဘူတိ. ဣကာရန္တဣတ္ထိလိင်္ဂံ. भूमि, भूति, विभूति - हे इकारान्त स्त्रीलिंगी शब्द आहेत. ဘူရီ, ဘူတီ, ဘောတီ, ဝိဘာဝိနီ, ပရိဝိဘာဝိနီ, သမ္ဘာဝိနီ, ပါတုဘဝန္တီ, ပါတုဘောန္တီ, ပရိဘဝန္တီ, ပရိဘောန္တီ, အဘိဘဝန္တီ, အဘိဘောန္တီ, အဓိဘဝန္တီ, အဓိဘောန္တီ, အနုဘဝန္တီ, အနုဘောန္တီ, သမနုဘဝန္တီ, သမနုဘောန္တီ, ပစ္စနုဘဝန္တီ, ပစ္စနုဘောန္တီ, အဘိသမ္ဘဝန္တီ, အဘိသမ္ဘောန္တီတိ ဤကာရန္တဣတ္ထိလိင်္ဂံ. भूरी, भूती, भोती, विभाविनी, परिविभाविनी, सम्भाविनी, पातुभवन्ती, पातुभोन्ती, परिभवन्ती, परिभोन्ती, अभिभवन्ती, अभिभोन्ती, अधिभवन्ती, अधिभोन्ती, अनुभवन्ती, अनुभोन्ती, समनुभवन्ती, समनुभोन्ती, पच्चनुभवन्ती, पच्चनुभोन्ती, अभिसम्भवन्ती, अभिसम्भोन्ती - हे ईकारान्त स्त्रीलिंगी शब्द आहेत. ဘူ, အဘူ. ဦကာရန္တဣတ္ထိလိင်္ဂံ. भू, अभू - हे ऊकारान्त स्त्रीलिंगी शब्द आहेत. ဣမာနေတ္ထ စတုဗ္ဗိဓာနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ ဘူဓာတုမယာနိ ဥဒ္ဒိဋ္ဌာနိ. येथे ही 'भू' धातूपासून बनलेली चार प्रकारची स्त्रीलिंगी रूपे निर्दिष्ट केली आहेत. ဥကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ ဘူဓာတုမယမပ္ပသိဒ္ဓံ, အညဓာတုမယံ ပန ဥကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ ပသိဒ္ဓံ ‘‘ဓာတု, ဓေနု’’ဣတိ. တေန သဒ္ဓိံ ပဉ္စဝိဓာနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ ဟောန္တိ, ဩကာရန္တဿ ဝါ ဂေါသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေ တေန သဒ္ဓိံ ဆဗ္ဗိဓာနိပိ ဟောန္တိ, သဗ္ဗာနေတာနိ သဘာဝတောယေဝိတ္ထိလိင်္ဂါနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ. ဧတ္ထာပိ အနိယတလိင်္ဂါ ဘူတပရာဘူတသမ္ဘူတသဒ္ဒါဒယော ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ယုဇ္ဇန္တေ. 'भू' धातूपासून बनलेले उकारान्त स्त्रीलिंग रूप मात्र अप्रसिद्ध आहे, परंतु इतर धातूंपासून बनलेले उकारान्त स्त्रीलिंग रूप जसे की 'धातु' (dhātu), 'धेनु' (dhenu) प्रसिद्ध आहे. त्यासह पाच प्रकारची स्त्रीलिंगी रूपे होतात; किंवा ओकारान्त 'गो' शब्दाच्या स्त्रीलिंगी रूपामुळे त्यासह सहा प्रकारची देखील होतात. ही सर्व स्वभावतःच स्त्रीलिंगी आहेत असे समजावे. येथे देखील अनियतलिंगी असलेले 'भूत', 'पराभूत', 'सम्भूत' इत्यादी शब्द स्त्रीलिंगाच्या दृष्टीने योजले जातात. ကထံ? ဘူတာ, ပရာဘူတာ, သမ္ဘူတာတိ သဗ္ဗံ ဝိတ္ထာရတော ဂဟေတဗ္ဗံ ‘‘အနုဘောန္တော သမနုဘောန္တော’’တိအာဒီနိ နဝ ပဒါနိ [Pg.86] ဝဇ္ဇေတွာ. တာနိ ဟိ ဤကာရန္တဝသေန ယောဇိတာနိ. ဣမာနိ နိယတလိင်္ဂေသု ပက္ခိတ္တလိင်္ဂါနိ. ဧဝံ အာကာရန္တာဒိဝသေန စတုဗ္ဗိဓာနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ ဘူဓာတုမယာနိ ပကာသိတာနိ. အယံ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဥဒါဟရဏုဒ္ဒေသော. कसे? 'भूता', 'पराभूता', 'सम्भूता' इत्यादी सर्व विस्ताराने समजून घ्यावे, फक्त 'अनुभोन्तो', 'समनुभोन्तो' इत्यादी नऊ पदे वगळून. कारण ती ईकारान्त रूपाने योजली गेली आहेत. ही निश्चित स्त्रीलिंगी शब्दांमध्ये समाविष्ट केलेली लिंगे आहेत. अशा प्रकारे आकारान्तादी क्रमाने 'भू' धातूपासून बनलेली चार प्रकारची स्त्रीलिंगी रूपे प्रकाशित केली आहेत. हा स्त्रीलिंगाच्या दृष्टीने उदाहरणांचा निर्देश आहे. ဘူတံ, မဟာဘူတံ, ဘဝိတ္တံ, ဘူနံ, ဘဝနံ, ပရာဘဝနံ, သမ္ဘဝနံ, ဝိဘဝနံ, ပါတုဘဝနံ, အာဝိဘဝနံ, တိရောဘဝနံ, ဝိနာဘဝနံ, သောတ္ထိဘဝနံ, ပရိဘဝနံ, အဘိဘဝနံ, အဓိဘဝနံ, အနုဘဝနံ, သမနုဘဝနံ, ပစ္စနုဘဝနန္တိ နိဂ္ဂဟီတန္တနပုံသကလိင်္ဂံ. भूतं, महाभूतं, भवित्तं, भूनं, भवनं, पराभवनं, सम्भवनं, विभवनं, पातुभवनं, आविभवनं, तिरोभवनं, विनाभवनं, सोत्थिभवनं, परिभवनं, अभिभवनं, अधिभवनं, अनुभवनं, समनुभवनं, पच्चनुभवनं - हे निग्गहीत-अंत (अनुस्वारान्त) नपुंसकलिंगी शब्द आहेत. အတ္ထဝိဘာဝိ, ဓမ္မဝိဘာဝိ. ဣကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂံ. अत्थविभावि, धम्मविभावि - हे इ-कारान्त नपुंसकलिंगी शब्द आहेत. ဂေါတြဘု, စိတ္တသဟဘု, နစိတ္တသဟဘု. ဥကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂံ. गोत्रभु, चित्तसहभु, नचित्तसहभु - हे उ-कारान्त नपुंसकलिंगी शब्द आहेत. သဗ္ဗာနေတာနိ သဘာဝတောယေဝ နပုံသကလိင်္ဂါနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ. ဧတ္ထ သတ္တဘူတရူပဝါစကော ဘူတသဒ္ဒေါယေဝ နိယောဂါ နပုံသကလိင်္ဂေါတိပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧတ္ထာပိ အနိယတလိင်္ဂါ ဘူတ ပရာဘူတ သမ္ဘူတသဒ္ဒါဒယော နပုံသကလိင်္ဂဝသေန ယုဇ္ဇန္တေ. हे सर्व स्वभावतःच नपुंसकलिंगी आहेत असे समजावे. येथे प्राणी (सत्त) आणि महाभूत-रूप वाचक असलेला 'भूत' हा शब्द देखील नियमाने नपुंसकलिंगीच समजावा. येथे अनियतलिंगी (निश्चित लिंग नसलेले) 'भूत', 'पराभूत', 'सम्भूत' इत्यादी शब्द नपुंसकलिंगाच्या रूपाने योजले जातात. ကထံ? ဘူတံ, ပရာဘူတံ, သမ္ဘူတံ, ဝိဘူတံ. ပေယျာလော. သမနုဘဝမာနံ, ပစ္စနုဘဝမာနံ, အနုဘောန္တံ, အနုဘဝန္တံ, သမနုဘောန္တံ, သမနုဘဝန္တံ, ပစ္စနုဘောန္တံ, ပစ္စနုဘဝန္တံ, သမ္ဘောန္တံ, သမ္ဘဝန္တံ, အဘိသမ္ဘောန္တံ, အဘိသမ္ဘဝန္တံ, ပါတုဘောန္တံ, ပါတုဘဝန္တံ, ပရိဘောန္တံ, ပရိဘဝန္တံ, အဘိဘောန္တံ, အဘိဘဝန္တံ, အဓိဘောန္တံ, အဓိဘဝန္တံ, ဘာဝေန္တံ, သမ္ဘာဝေန္တံ, ဝိဘာဝေန္တံ, ပရိဘာဝေန္တံ, ပရိဘာဝိယမာနံ, ပရိဘုယျမာနံ, ပေယျာလော. ပစ္စနုဘဝိယမာနံ, ပစ္စနုဘုယျမာနန္တိ ဣမာနိ နိယတနပုံသကလိင်္ဂေသု ပက္ခိတ္တလိင်္ဂါနိ. ဧဝံ နိဂ္ဂဟီတန္တာဒိဝသေန တိဝိဓာနိ နပုံသကလိင်္ဂါနိ ဘူဓာတုမယာနိ ပကာသိတာနိ[Pg.87]. အယံ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန ဥဒါဟရဏုဒ္ဒေသော, ဧဝံ ပုလ္လိင်္ဂါဒိဝသေန လိင်္ဂတ္တယံ ဘူဓာတုမယမုဒ္ဒိဋ္ဌံ. कसे? भूतं, पराभूतं, सम्भूतं, विभूतं... (पेय्यालो - इत्यादी). समनुभवमानं, पच्चनुभवमानं, अनुभोन्तं, अनुभवन्तं, समनुभोन्तं, समनुभवन्तं, पच्चनुभोन्तं, पच्चनुभवन्तं, सम्भोन्तं, सम्भवन्तं, अभिसम्भोन्तं, अभिसम्भवन्तं, पातुभोन्तं, पातुभवन्तं, परिभोन्तं, परिभवन्तं, अभिभोन्तं, अभिभवन्तं, अधिभोन्तं, अधिभवन्तं, भावेन्तं, सम्भावेन्तं, विभावेन्तं, परिभावेन्तं, परिभावियमानं, परिभुय्यमानं... (पेय्यालो - इत्यादी), पच्चनुभावियमानं, पच्चनुभुय्यमानं - हे शब्द नियत नपुंसकलिंगांमध्ये समाविष्ट केलेले लिंग (प्रक्षिप्त लिंग) आहेत. अशा प्रकारे, निग्गहीत-अंत इत्यादींच्या आधारे 'भू' धातूपासून बनलेले तीन प्रकारचे नपुंसकलिंगी शब्द प्रकाशित केले आहेत. हा नपुंसकलिंगाच्या दृष्टीने उदाहरणांचा निर्देश आहे. अशा प्रकारे पुल्लिंग इत्यादींच्या आधारे 'भू' धातूपासून बनलेल्या तिन्ही लिंगांचा निर्देश केला गेला आहे. ဧတ္ထ မေ အပ္ပသိဒ္ဓါတိ, ယေ ယေ သဒ္ဒါ ပကာသိတာ; တေ တေ ပါဠိပ္ပဒေသေသု, မဂ္ဂိတဗ္ဗာ ဝိဘာဝိနာ. येथे माझ्याद्वारे जे जे शब्द प्रकाशित केले गेले आहेत, ते ते शब्द विद्वानांनी पालि ग्रंथांमध्ये शोधून काढावेत. ဩ, အာ, ဗိန္ဒု, ဣ, ဤ, ဥ, ဦ-အန္တိမေ သတ္တဓာ ဌိတာ; ဉေ ယျာ ပုလ္လိင်္ဂဘေဒါတိ, နိရုတ္တညူဟိ ဘာသိတာ. ओ, आ, बिन्दु (अनुस्वार), इ, ई, उ, ऊ - हे शेवटी असणारे सात प्रकारचे पुल्लिंगी भेद आहेत, असे व्याकरणकारांनी सांगितले आहे. အာ ဣဝဏ္ဏော စုဝဏ္ဏော စ, ပဉ္စ အန္တာ သရူပတော; ဣတ္ထိဘေဒါတိ ဝိညေယျာ, ဩကာရန္တေန ဆာပိ ဝါ. आ, इ-वर्ण (इ, ई) आणि उ-वर्ण (उ, ऊ) हे पाच अंत असलेले शब्द मूळतः स्त्रीलिंगी भेद म्हणून जाणावेत, किंवा ओ-कारान्तासह सहा भेद जाणावेत. ဗိန္ဒု, ဣ, ဥ-ဣမေ အန္တာ, တယော ဉေယျာ ဝိဘာဝိနာ; နပုံသကပ္ပဘေဒါတိ, နိရုတ္တညူဟိ ဘာသိတာ. बिन्दु (अनुस्वार), इ, उ - हे तीन अंत असलेले शब्द नपुंसकलिंगाचे भेद आहेत, असे विद्वानांनी आणि व्याकरणकारांनी सांगितले आहे. အန္တာ သတ္တေဝ ပုလ္လိင်္ဂေ, ဣတ္ထိယံ ပဉ္စ ဝါ ဆ ဝါ; နပုံသကေ တယော ဧဝံ, ဒသ ပဉ္စဟိ ဆဗ္ဗိဓာ. अशा प्रकारे पुल्लिंगात सात, स्त्रीलिंगात पाच किंवा सहा, आणि नपुंसकलिंगात तीन अंत असतात; अशा प्रकारे एकूण दहा, पाच आणि सहा प्रकारचे भेद होतात. ယသ္မာ ပနေတ္ထ ‘‘ဘူတော’’တိအာဒယော သဒ္ဒါ နိဗ္ဗစနာဘိဓေယျကထနတ္ထသာဓကဝစနပရိယာယဝစနတ္ထုဒ္ဓါရဝသေန ဝုစ္စမာနာ ပါကဋာ ဟောန္တိ သုဝိညေယျာ စ, တသ္မာ ဣမေသံ နိဗ္ဗစနာဒီနိ ယထာသမ္ဘဝံ ဝက္ခာမ ဝိညူနံ တုဋ္ဌိဇနနတ္ထဉ္စေဝ သောတာရာနမတ္ထေသု ပဋုတရဗုဒ္ဓိပဋိလာဘာယ စ. တတြ ဘူတောတိ ခန္ဓပါတုဘာဝေန ဘဝတီတိ ဘူတော, ဣဒံ တာဝ နိဗ္ဗစနံ. ‘‘ဘူတော’’တိ သဗ္ဗသင်္ဂါဟကဝသေန သတ္တော ဝုစ္စတိ, ဣဒမဘိဓေယျကထနံ. ‘‘ယော စ ကာလဃသော ဘူတော. သဗ္ဗေဝ နိက္ခိပိဿန္တိ, ဘူတာ လောကေ သမုဿယ’’န္တိ စ ဣဒမေတဿ အတ္ထဿ သာဓကဝစနံ. အထ ဝါ ဘူတောတိ ဧဝံနာမကော အမနုဿဇာတိယော သတ္တဝိသေသော, ဣဒမဘိဓေယျကထနံ. ‘‘ဘူတဝိဇ္ဇာ, ဘူတဝေဇ္ဇော, ဘူတဝိဂ္ဂဟိတော’’တိ စ ဣဒမေတဿ အတ္ထဿ သာဓကဝစနံ. ယဉ္စ ပန ‘‘သတ္တော မစ္စော ပဇာ’’တိအာဒိကံ တတ္ထ တတ္ထ အာဂတံ ဝစနံ, ဣဒံ သတ္တောတိ [Pg.88] အတ္ထဝါစကဿ ဘူတသဒ္ဒဿ ပရိယာယဝစနံ. ယဉ္စ နိဒ္ဒေသပါဠိယံ ‘‘မစ္စောတိ သတ္တော နရော မာနဝေါ ပေါသော ပုဂ္ဂလော ဇီဝေါ ဇဂု ဇန္တု ဟိန္ဒဂု မနုဇော’’တိ အာဂတံ, ဣဒမ္ပိ ပရိယာယဝစနမေဝ. တာနိ သဗ္ဗာနိ ပိဏ္ဍေတွာ ဝုစ္စန္တေ – कारण येथे 'भूतो' इत्यादी शब्द व्युत्पत्ती (निरुक्ती), अभिधेय (अर्थ), साधक वचन, पर्याय वचन आणि अर्थाचा उद्धार (स्पष्टीकरण) यांद्वारे सांगितले असता स्पष्ट आणि सहज समजण्याजोगे होतात. म्हणून, विद्वानांच्या आनंदासाठी आणि श्रोत्यांना अर्थाचे अधिक तीव्र आकलन व्हावे यासाठी आम्ही या शब्दांची व्युत्पत्ती इत्यादी यथासंभव सांगू. त्यामध्ये 'भूतो' म्हणजे जो स्कंधांच्या प्रादुर्भावाने (उत्पत्तीने) अस्तित्त्वात येतो तो 'भूतो' (भूत) होय; ही त्याची व्युत्पत्ती आहे. 'भूतो' या शब्दाने सर्वसमावेशक अर्थाने 'प्राणी' (सत्त) असे म्हटले जाते; हे त्याचे अभिधेय (अर्थ) कथन आहे. 'यो च कालघसो भूतो...' (जो काळाला खाणारा प्राणी आहे...) आणि 'सब्बेव निक्खिपिस्सन्ति, भूता लोके समुस्सयं' (जगातील सर्व प्राणी आपला देह सोडून देतील) हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. किंवा 'भूत' नावाचा एक विशिष्ट अमनुष्य जातीचा प्राणी, हे त्याचे अभिधेय कथन आहे. 'भूतविज्जा' (भूतविद्या), 'भूतवेज्जो' (भूतवैद्य), 'भूतविग्गहितो' (भूताने पछाडलेला) हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. आणि जे 'सत्तो, मच्चो, पजा' इत्यादी शब्द वेगवेगळ्या ठिकाणी आले आहेत, ते 'सत्त' (प्राणी) या अर्थाचा वाचक असलेल्या 'भूत' शब्दाचे पर्याय शब्द (समानार्थी शब्द) आहेत. आणि निर्देशपालिमध्ये जे 'मच्चो, सत्तो, नरो, मानवो, पोसो, पुग्गलो, जीवो, जगु, जन्तु, हिन्दगु, मनुजो' असे आले आहे, ते देखील पर्याय वचनच आहे. हे सर्व एकत्रित करून सांगितले जात आहे - သတ္တော မစ္စော ဇနော ဘူတော, ပါဏော ဟိန္ဒဂု ပုဂ္ဂလော; ဇန္တု ဇီဝေါ ဇဂု ယက္ခော, ပါဏီ ဒေဟီ တထာဂတော. सत्त, मच्च, जन, भूत, पाण, हिन्दगु, पुग्गल, जन्तु, जीव, जगु, यक्ख, पाणी, देही, तथागत - သတ္တဝေါ မာတိယော လောကော, မနုဇော မာနဝေါ နရော; ပေါသော သရီရီတိ ပုမေ, ဘူတမိတိ နပုံသကေ. सत्तव, मातिय, लोक, मनुज, मानव, नर, पोस, सरीरी - हे पुल्लिंगात वापरले जातात; आणि 'भूतमिति' (भूतं) हा शब्द नपुंसकलिंगात वापरला जातो. ပဇာတိ ဣတ္ထိယံ ဝုတ္တော, လိင်္ဂတော, န စ အတ္ထတော; ဧဝံ တိလိင်္ဂိကာ ဟောန္တိ, သဒ္ဒါ သတ္တာဘိဓာနကာ. 'पजा' (प्रजा) हा शब्द स्त्रीलिंगात वापरला जातो, हा भेद केवळ लिंगाच्या दृष्टीने आहे, अर्थाच्या दृष्टीने नाही. अशा प्रकारे प्राण्याचे वाचक असलेले शब्द तिन्ही लिंगांत असतात. ယော သော ဇင်္ဃာယ ဥလတိ, သော သတ္တော ဇင်္ဃလော ဣဓ; ပါဏဒေဟာဘိဓာနေဟိ, သတ္တနာမံ ပပဉ္စိတံ. जो आपल्या पायांनी चालतो, त्याला येथे 'जंघलो' (जंघल - वेगवान) प्राणी म्हटले जाते. 'पाण' (प्राण) आणि 'देह' या नावांनी प्राण्याच्या नावाचा विस्तार केला गेला आहे. ဣမသ္မိံ ပကရဏေ ‘‘ပရိယာယဝစန’’န္တိ စ ‘‘အဘိဓာန’’န္တိ စ ‘‘သင်္ခါ’’တိအာဒီနိ စ ဧကတ္ထာနိ အဓိပ္ပေတာနိ, အတ္ထုဒ္ဓါရဝသေန ပန ဘူတသဒ္ဒေါ ပဉ္စက္ခန္ဓာမနုဿဓာတုသဿတဝိဇ္ဇမာနခီဏာသဝသတ္တရုက္ခာဒီသု ဒိဿတိ, တပ္ပယောဂေါ ဥပရိ အတ္ထတ္တိကဝိဘာဂေ အာဝိဘဝိဿတိ. ဘာဝကောတိ ဘာဝေတီတိ ဘာဝကော, ဣဒံ နိဗ္ဗစနံ. ယော ဘာဝနံ ကရောတိ, သော ဘာဝကော. ဣဒမဘိဓေယျကထနံ. ‘‘ဘာဝကော နိပကော ဓီရော’’တိ ဣဒမေတဿ အတ္ထဿ သာဓကဝစနံ. ‘‘ဘာဝကော ဘာဝနာပသုတော ဘာဝနာပယုတ္တော ဘာဝနာသမ္ပန္နော’’တိ ဣဒံ ပရိယာယဝစနံ. ဣမာနိ ‘‘ဘူတော ဘာဝကော’’တိ ဒွေ ပဒါနိ သုဒ္ဓကတ္တုဟေတုကတ္တုဝသေန ဝုတ္တာနီတိ. ဣတော ပရံ နယာနုသာရေန သုဝိညေယျတ္တာ ‘‘ဣဒံ နိဗ္ဗစန’’န္တိ စ အာဒီနိ [Pg.89] အဝတွာ ကတ္ထစိ အတ္ထသာဓကဝစနံ ပရိယာယဝစနံ အတ္ထုဒ္ဓါရဉ္စ ယထာရဟံ ဒဿေဿာမ. တေသု ဟိ သဗ္ဗတ္ထ ဒဿိတေသု ဂန္ထဝိတ္ထာရော သိယာ, တသ္မာ ယေသမတ္ထော ဥတ္တာနော, တေသမ္ပိ ပဒါနမဘိဓေယျံ န ကထေဿာမ, နိဗ္ဗစနမတ္တမေဝ နေသံ ကထေဿာမ. ယေသံ ပန ဂမ္ဘီရော အတ္ထော, တေသမဘိဓေယျံ ကထေဿာမ. या ग्रंथामध्ये 'पर्यायवचन', 'अभिधान' आणि 'संखा' (संख्या/संज्ञा) इत्यादी शब्द एकाच अर्थाने अभिप्रेत आहेत. अर्थाच्या स्पष्टीकरणानुसार (अत्थुद्धारवसेन) 'भूत' हा शब्द पंचस्कंध, अमनुष्य, धातू, धान्य (सस्स), विद्यमान, क्षीणासव (अर्हत), प्राणी, वृक्ष इत्यादी अर्थांमध्ये आढळतो. त्याचा प्रयोग पुढे 'अत्थत्तिकविभागा'मध्ये स्पष्ट होईल. 'भावको' म्हणजे जो भावना (ध्यान/विकास) करतो तो 'भावको' होय; ही त्याची व्युत्पत्ती आहे. जो भावना करतो, तो भावक होय; हे त्याचे अभिधेय कथन आहे. 'भावको निपको धीरो' (भावक, निपुण आणि धीर) हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. 'भावको, भावनापसुतो, भावनापयुत्तो, भावनासम्पन्नो' हे त्याचे पर्याय शब्द आहेत. हे 'भूतो' आणि 'भावको' हे दोन शब्द शुद्ध कर्ता आणि प्रयोजक कर्ता यांच्या अर्थात सांगितले आहेत. यानंतर, नियमांनुसार सहज समजण्याजोगे असल्यामुळे 'ही व्युत्पत्ती आहे' इत्यादी न सांगता, जेथे आवश्यक असेल तेथे अर्थाचे साधक वचन, पर्याय वचन आणि अर्थाचे स्पष्टीकरण योग्यतेनुसार दाखवू. कारण जर हे सर्व ठिकाणी दाखवले तर ग्रंथाचा विस्तार खूप मोठा होईल. म्हणून ज्या शब्दांचा अर्थ अगदी स्पष्ट आहे, त्या शब्दांचे अभिधेय (अर्थ) आम्ही सांगणार नाही, केवळ त्यांची व्युत्पत्तीच सांगू. परंतु ज्या शब्दांचा अर्थ गंभीर (गहन) आहे, त्यांचे अभिधेय आम्ही स्पष्ट करू. ဘဝနံ ဘဝေါ, ဘဝေါ ဝုစ္စတိ ဝုဒ္ဓိ. ဘူသဒ္ဒဿ အတ္ထာတိသယယောဂတော ဝဍ္ဎနေပိ ဒိဿမာနတ္တာ ဘဝနံ ဝဍ္ဎနန္တိ ကတွာ. ‘‘ဘဝေါ စ ရညော အဘဝေါ စ ရညော’’တိ ဣဒံ ဝုဒ္ဓိအတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. အထ ဝါ ဘဝေါတိ ဝုစ္စတိ သဿတံ. ‘‘သဿတော အတ္တာ စ လောကော စာ’’တိ ဟိ သဿတဝသေန ပဝတ္တာ ဒိဋ္ဌိ သဿတဒိဋ္ဌိ, တသ္မာ ဘဝဒိဋ္ဌီ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. တထာ ဘဝေါတိ ဘဝဒိဋ္ဌိ, ဘဝတိ သဿတံ တိဋ္ဌတီတိ ပဝတ္တနတော သဿတဒိဋ္ဌိ ဘဝဒိဋ္ဌိ နာမ. ဘဝဒိဋ္ဌိ ဟိ ဥတ္တရပဒလောပေန ဘဝေါတိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ဘဝေန ဘဝဿ ဝိပ္ပမောက္ခမာဟံသူ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဧတ္ထာယံ ပါဠိဝစနတ္ထော – ဧကစ္စေ သမဏာ ဝါ ဗြာဟ္မဏာ ဝါ ဘဝဒိဋ္ဌိယာ ဝါ ကာမဘဝါဒိနာ ဝါ သဗ္ဗဘဝတော ဝိမုတ္တိံ သံသာရဝိသုဒ္ဓိံ ကထယိံသူတိ. အထ ဝါ ဘဝန္တိ ဝဍ္ဎန္တိ သတ္တာ ဧတေနာတိ ဘဝေါတိ အတ္ထေန သမ္ပတ္တိပုညာနိ ဘဝေါတိ စ ဝုစ္စန္တိ. ‘‘ဣတိဘဝါဘဝတဉ္စ ဝီတိဝတ္တော’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဧတ္ထ ပနာယံ ပါဠိဝစနတ္ထော – ဘဝေါတိ သမ္ပတ္တိ, အဘဝေါတိ ဝိပတ္တိ. တထာ ဘဝေါတိ ဝုဒ္ဓိ, အဘဝေါတိ ဟာနိ. ဘဝေါတိ သဿတံ, အဘဝေါတိ ဥစ္ဆေဒေါ. ဘဝေါတိ ပုညံ, အဘဝေါတိ ပါပံ, တံ သဗ္ဗံ ဝီတိဝတ္တောတိ. भवन म्हणजे भव, भव याला वृद्धी (वाढ) म्हटले जाते. 'भू' शब्दाचा अर्थाच्या अतिशय योगाने वाढीमध्येही दिसून येत असल्यामुळे 'भवन' म्हणजे 'वर्धन' (वाढवणे) असे मानून. "भवा च रञ्ञो अभवा च रञ्ञो" (राजाची वृद्धी आणि राजाचा ऱ्हास) हे वचन वृद्धी या अर्थाचे साधक आहे. अथवा 'भव' म्हणजे 'शाश्वत' असे म्हटले जाते. "शाश्वत आत्मा आणि लोक" अशा प्रकारे शाश्वत रूपाने प्रवृत्त झालेली दृष्टी म्हणजे 'शाश्वतदृष्टी' होय, म्हणून 'भवदृष्टी' हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. तसेच 'भव' म्हणजे 'भवदृष्टी', 'भवति' म्हणजे शाश्वत राहते या अर्थाने प्रवृत्त झाल्यामुळे शाश्वतदृष्टीला 'भवदृष्टी' असे नाव आहे. भवदृष्टीला उत्तरपदलोप होऊन 'भव' असे म्हटले जाते. "भवेन भवस्स विप्पमोक्खमाहंसु" (भवाच्या द्वारे भवापासून मुक्ती सांगतात) हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. येथे या पाळिवचनाचा अर्थ असा आहे - काही श्रमण किंवा ब्राह्मण भवदृष्टीने किंवा कामभवादिने सर्व भवापासून विमुक्ती (संसारविशुद्धी) सांगतात. अथवा 'भवन्ति' म्हणजे प्राणी याच्याद्वारे वाढतात म्हणून 'भव' या अर्थाने संपत्ती आणि पुण्य यांनाही 'भव' म्हटले जाते. "इतिभवाभवतञ्च वीतिवत्तो" (अशा प्रकारे भव आणि अभव या दोन्ही अवस्था पार केलेला) हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. येथे या पाळिवचनाचा अर्थ असा आहे - भव म्हणजे संपत्ती, अभव म्हणजे विपत्ती. तसेच भव म्हणजे वृद्धी, अभव म्हणजे हानी. भव म्हणजे शाश्वत, अभव म्हणजे उच्छेद. भव म्हणजे पुण्य, अभव म्हणजे पाप, त्या सर्वांना पार केलेला (वीतिवत्तो). သဟောကာသာ [Pg.90] ခန္ဓာပိ ဘဝေါ. ‘‘ကာမဘဝေါ ရူပဘဝေါ’’ ဣစ္စေဝမာဒိ ဧတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဧတ္ထ ပန ခန္ဓာ ‘‘ယော ပညာယတိ, သော သရူပံ လဘတီ’’တိ ကတွာ ‘‘ဘဝတိ အဝိဇ္ဇာတဏှာဒိသမုဒယာ နိရန္တရံ သမုဒေတီ’’တိ အတ္ထေန ဝါ ‘‘ဘဝါ’’တိ ဝုစ္စန္တိ. ဩကာသော ပန ‘‘ဘဝန္တိ ဇာယန္တိ ဧတ္ထ သတ္တာ နာမရူပဓမ္မာ စာ’’တိ အတ္ထေန ‘‘ဘဝေါ’’တိ. အပိစ ကမ္မဘဝေါပိ ဘဝေါ, ဥပပတ္တိဘဝေါပိ ဘဝေါ. ‘‘ဥပါဒါနပစ္စယာ ဘဝေါ ဒုဝိဓေန အတ္ထိ ကမ္မဘဝေါ, အတ္ထိ ဥပပတ္တိဘဝေါ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. တတ္ထ ကမ္မမေဝ ဘဝေါ ကမ္မဘဝေါ. တထာ ဥပပတ္တိ ဧဝ ဘဝေါ ဥပပတ္တိဘဝေါ. ဧတ္ထူပပတ္တိ ဘဝတီတိ ဘဝေါ, ကမ္မံ ပန ယထာ သုခကာရဏတ္တာ ‘‘သုခေါ ဗုဒ္ဓါနမုပ္ပာဒေါ’’တိ ဝုတ္တော. ဧဝံ ဘဝကာရဏတ္တာ ဖလဝေါဟာရေန ဘဝေါတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အထ ဝါ ဘာဝနလက္ခဏတ္တာ ဘာဝေတီတိ ဘဝေါ. ကိံ ဘာဝေတိ? ဥပပတ္တိံ. ဣတိ ဥပပတ္တိံ ဘာဝေတီတိ ဘဝေါတိ ဝုစ္စတိ. ဘာဝေတီတိမဿ စ နိဗ္ဗတ္တေတီတိ ဟေတုကတ္တုဝသေနတ္ထော. အထ ဝါ ‘‘ဘဝပစ္စယာ ဇာတီ’’တိ ဝစနတော ဘဝတိ ဧတေနာတိ ဘဝေါတိ ကမ္မဘဝေါ ဝုစ္စတိ. अवकाशासह (स्थानासह) स्कंध देखील 'भव' आहेत. "कामभव, रूपभव" इत्यादी या अर्थाचे साधक वचन आहे. येथे स्कंध "जो जाणला जातो, तो स्वरूप प्राप्त करतो" असे मानून, किंवा "अविद्या, तृष्णा इत्यादींच्या समुदयाने निरंतर उत्पन्न होतो (भवति)" या अर्थाने "भव" म्हटले जातात. अवकाश (स्थान) तर "येथे प्राणी आणि नामरूपधर्म उत्पन्न होतात (भवन्ति)" या अर्थाने "भव" आहे. शिवाय, कर्मभव देखील भव आहे आणि उपपत्तिभव देखील भव आहे. "उपादानपच्चया भवो" (उपादानाच्या प्रत्ययाने भव होतो), तो द्विविध आहे - कर्मभव आणि उपपत्तिभव, हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. त्यामध्ये कर्मच भव म्हणजे "कर्मभव" होय. तसेच उपपत्ती (पुनर्जन्म) हाच भव म्हणजे "उपपत्तिभव" होय. येथे उपपत्ती उत्पन्न होते म्हणून "भव" आहे, परंतु कर्म जसे सुखाचे कारण असल्यामुळे "सुखो बुद्धानमुप्पादो" (बुद्धांचा उत्पाद सुखकारक आहे) असे म्हटले आहे, त्याचप्रमाणे भवाचे कारण असल्यामुळे फलोपचाराने (फलव्यवहाराने) त्याला "भव" समजावे. अथवा भावनलक्षण असल्यामुळे जो भावित करतो (उत्पन्न करतो) तो "भव" होय. काय भावित करतो? उपपत्तीला. अशा प्रकारे उपपत्तीला भावित करतो म्हणून "भव" म्हटले जाते. "भावेति" (भावित करतो) याचा हेतुकर्तृवाचक अर्थ "उत्पन्न करतो" असा आहे. अथवा "भवपच्चया जाती" (भवाच्या प्रत्ययाने जात/जन्म होतो) या वचनावरून ज्याच्याद्वारे उत्पन्न होतो तो "भव" म्हणजे "कर्मभव" म्हटला जातो. ‘‘ခန္ဓာနဉ္စ ပဋိပါဋိ, ဓာတုအာယတနာန စ; အဗ္ဗောစ္ဆိန္နံ ဝတ္တမာနာ, သံသာရောတိ ပဝုစ္စတီ’’တိ "स्कंधांची, धातूंची आणि आयतनांची अखंडपणे चालणारी परंपरा म्हणजेच 'संसार' म्हटला जातो." ဝုတ္တလက္ခဏော သံသာရောပိ ဘဝေါ. ‘‘ဘဝေ ဒုက္ခံ ဘဝဒုက္ခံ, ဘဝေ သံသရန္တော’’တိ ဣမာနေတဿတ္ထဿ သာဓကာနိ ဝစနာနိ. တတြ ကေနဋ္ဌေန သံသာရော ဘဝေါတိ ကထီယတိ? ဘဝတိ ဧတ္ထ သတ္တသမ္မုတိ ခန္ဓာဒိပဋိပါဋိသင်္ခါတေ ဓမ္မပုဉ္ဇသ္မိန္တိ အတ္ထေန[Pg.91]. ဣဒံ ဘဝသဒ္ဒဿ ဘာဝကတ္တုကရဏာဓိကရဏသာဓနဝသေနတ္ထကထနံ. उक्त लक्षणांचा संसार देखील 'भव' आहे. "भवे दुक्खं भवदुक्खं" (भवातील दुःख हे भवदुःख आहे), "भवे संसरन्तो" (भवामध्ये संसार करणारा) ही या अर्थाची साधक वचने आहेत. तेथे कोणत्या अर्थाने संसाराला 'भव' म्हटले जाते? स्कंधादींच्या परंपरेने युक्त अशा धर्मसमूहामध्ये 'प्राणी' अशी संज्ञा उत्पन्न होते (भवति) या अर्थाने. हे 'भव' शब्दाचे भाव, कर्तृ, करण आणि अधिकरण साधनाच्या वशाने केलेले अर्थकथन आहे. ဧတ္ထ ဘဝသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရံ ဝဒါမ – येथे आपण 'भव' शब्दाचा अर्थोद्धार (अर्थांचे वर्गीकरण) सांगू - ဝုဒ္ဓိသမ္ပတ္တိပုညာနိ, ခန္ဓာ သောကာသသညိတာ; သံသာရော သဿတဉ္စေတံ, ဘဝသဒ္ဒေန သဒ္ဒိတံ. वृद्धी, संपत्ती, पुण्य, अवकाशासह (स्थानासह) असलेले स्कंध, संसार आणि शाश्वतदृष्टी - हे सर्व 'भव' या शब्दाने संबोधिले जातात. ဘဝတဏှာ ဘဝဒိဋ္ဌိ, ဥပပတ္တိဘဝေါ တထာ; ကမ္မဘဝေါ စ သဗ္ဗန္တံ, ဘဝသဒ္ဒေန သဒ္ဒိတံ. भवतृष्णा, भवदृष्टी, तसेच उपपत्तिभव आणि कर्मभव - हे सर्व 'भव' या शब्दाने संबोधिले जातात. ဘဝတဏှာဘဝဒိဋ္ဌိ-ဒွယံ ကတ္ထစိ ပါဠိယံ; ဥတ္တရပဒလောပေန, ဘဝသဒ္ဒေန သဒ္ဒိတံ. भवतृष्णा आणि भवदृष्टी हे दोन्ही पाळीमध्ये काही ठिकाणी उत्तरपदलोप होऊन केवळ 'भव' या शब्दाने संबोधिले जातात. အဘဝေါတိ န ဘဝေါ အဘဝေါ. अभव म्हणजे जो भव नाही तो अभव. ဝိပတ္တိ ဟာနိ ဥစ္ဆေဒေါ, ပါပဉ္စေဝ စတုဗ္ဗိဓာ; ဣမေ အဘဝသဒ္ဒေန, အတ္ထာ ဝုစ္စန္တိ သာသနေ. विपत्ती, हानी, उच्छेद आणि पाप - हे चार प्रकारचे अर्थ शासनात (बुद्धशासनात) 'अभव' या शब्दाने सांगितले जातात. ဘာဝေါတိ အဇ္ဈာသယော, ယော ‘‘အဓိပ္ပာယော’’တိပိ ဝုစ္စတိ. ‘‘ထီနံဘာဝေါ ဒုရာဇာနော. နာမစ္စော ရာဇဘရိယာသု, ဘာဝံ ကုဗ္ဗေထ ပဏ္ဍိတော. ဟဒယင်္ဂတဘာဝံ ပကာသေတီ’’တိ ဧဝမာဒိ ဧတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. အပိစ ဝတ္ထုဓမ္မောပိ ဘာဝေါ. ‘‘ဘာဝသင်္ကေတသိဒ္ဓီန’’န္တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ, စိတ္တမ္ပိ ဘာဝေါ. ‘‘အစ္စာဟိတံ ကမ္မံ ကရောသိ လုဒ္ဒံ, ဘာဝေ စ တေ ကုသလံ နတ္ထိ ကိဉ္စီ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ကြိယာပိဘာဝေါ. ‘‘ဘာဝလက္ခဏံ ဘာဝသတ္တမီ’’တိ စ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. အပိစ ဘာဝေါတိ သတ္တဝေဝစနန္တိ ဘဏန္တိ, ဓာတု ဝါ ဧတံ အဓိဝစနံ. တတ္ထ အဇ္ဈာသယော စ ဝတ္ထုဓမ္မော စ စိတ္တဉ္စ သတ္တော စာတိ ဣမေ ဘဝတီတိ ဘာဝေါ. တထာ ပန ဘာဝေတီတိ ဘာဝေါ, ကြိယာ [Pg.92] တု ဘဝနန္တိ ဘာဝေါ. သာ စ ဘဝနဂမနပစနာဒိဝသေနာနေကဝိဓာ. အပိစ ဘာဝရူပမ္ပိ ဘာဝေါ, ယံ ဣတ္ထိဘာဝေါ ပုမ္ဘာဝေါ ဣတ္ထိန္ဒြိယန္တိ စ ဝုစ္စတိ. တတြာယံ ဝစနတ္ထော – ‘‘ဣတ္ထီ’’တိ ဝါ ‘‘ပုရိသော’’တိ ဝါ ဘဝတိ ဧတေန စိတ္တံ အဘိဓာနဉ္စာတိ ဘာဝေါ. 'भाव' म्हणजे अध्याशय (आशय/हेतू), ज्याला 'अभिप्राय' देखील म्हटले जाते. "थीनांभावो दुराजानो" (स्त्रियांचा स्वभाव समजण्यास कठीण असतो), "ना मच्चो राजभरियासु, भावं कुब्बेथ पण्डितो" (बुद्धिमान अमात्याने राजाच्या पत्नींविषयी आसक्तीचा भाव ठेवू नये), "हदयङ्गतभावं पकासेति" (हृदयातील भाव प्रकट करतो) इत्यादी या अर्थाचे साधक वचन आहे. शिवाय, वस्तुधर्म देखील 'भाव' आहे. "भावसङ्केतसिद्धीनं" हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. चित्त देखील 'भाव' आहे. "अच्चाहितं कम्मं करोसि लुद्दं, भावे च ते कुसलं नत्थि किञ्ची" (हे व्याधा! तू अत्यंत क्रूर कर्म करतोस आणि तुझ्या चित्तात थोडेही कुशल नाही) हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. क्रिया देखील 'भाव' आहे. "भावलक्खणं भावसत्तमी" हे देखील या अर्थाचे साधक वचन आहे. शिवाय, 'भाव' हा प्राण्याचा (सत्त्वाचा) पर्यायवाचक शब्द आहे असे म्हणतात, किंवा हा धातूचा वाचक आहे. त्यामध्ये अध्याशय, वस्तुधर्म, चित्त आणि प्राणी - हे उत्पन्न होतात (भवति) म्हणून 'भाव' आहेत. तसेच जो भावित करतो (उत्पन्न करतो) तो 'भाव' होय, तर क्रिया म्हणजे होणे (भवन) या अर्थाने 'भाव' आहे. ती क्रिया होणे, जाणे, शिजवणे इत्यादींच्या वशाने अनेक प्रकारची आहे. शिवाय, भावरूप देखील 'भाव' आहे, ज्याला स्त्रीभाव, पुरुषभाव आणि स्त्रीइंद्रिय असे म्हटले जाते. येथे हा वचनाचा अर्थ आहे - ज्याच्याद्वारे 'स्त्री' किंवा 'पुरुष' असे चित्त आणि अभिधान (नाव) उत्पन्न होते (भवति), तो 'भाव' होय. နတ္တနောမတိယာ ဧတံ, နိဗ္ဗစနမုဒါဟဋံ; ပုဗ္ဗာစရိယသီဟာနံ, မတံ နိဿာယ မာဟဋံ. हे स्वतःच्या मताने मांडलेले नाही, तर पूर्वाचार्यरूपी सिंहांच्या मताचा आश्रय घेऊन मांडले गेले आहे. ဝုတ္တဉှေတံ ပေါရာဏေဟိ ‘‘ဣတ္ထိယာ ဘာဝေါ ဣတ္ထိဘာဝေါ, ဣတ္ထီတိ ဝါ ဘဝတိ ဧတေန စိတ္တံ အဘိဓာနဉ္စာတိ ဣတ္ထိဘာဝေါ’’တိ, တသ္မာ ပုမ္ဘာဝေါတိ ဧတ္ထာပိ ပုမဿ ဘာဝေါ ပုမ္ဘာဝေါ, ပုမာတိ ဝါ ဘဝတိ ဧတေန စိတ္တံ အဘိဓာနဉ္စာတိ ပုမ္ဘာဝေါတိ နိဗ္ဗစနံ သမဓိဂန္တဗ္ဗံ. ဣဒံ ဘာဝသဒ္ဒဿ ကတ္တုဘာဝကရဏသာဓနဝသေနတ္ထကထနံ. कारण पोराणांनी (प्राचीन आचार्यांनी) म्हटले आहे - 'स्त्रीचा भाव म्हणजे स्त्रीभाव, किंवा ज्याच्याद्वारे स्त्री असे चित्त आणि अभिधान (नाव) उत्पन्न होते तो स्त्रीभाव होय.' म्हणून 'पुंभाव' (पुरुषभाव) याविषयी देखील 'पुरुषाचा भाव म्हणजे पुंभाव, किंवा ज्याच्याद्वारे पुरुष असे चित्त आणि अभिधान उत्पन्न होते तो पुंभाव होय' अशी निरुक्ती (व्युत्पत्ती) समजून घ्यावी. हे 'भाव' शब्दाचे कर्तृ, भाव आणि करण साधनाच्या वशाने केलेले अर्थकथन आहे. အဘာဝေါတိ န ဘာဝေါတိ အဘာဝေါ, ကော သော? သုညတာ နတ္ထိတာ. သဘာဝေါတိ အတ္တနော ဘာဝေါ သဘာဝေါ, အတ္တနော ပကတိ ဣစ္စေဝတ္ထော. အထ ဝါ သဘာဝေါတိ ဓမ္မာနံ သတိ အတ္ထသမ္ဘဝေ ယော ကောစိ သရူပံ လဘတိ, တဿ ဘာဝေါ လက္ခဏမိတိ သညိတော နမနရုပ္ပနကက္ခဠဖုသနာဒိအာကာရော ဣစ္စေဝတ္ထော. ‘‘သာမညံ ဝါ သဘာဝေါ ဝါ, ဓမ္မာနံ လက္ခဏံ မတ’’န္တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. အပိစ သဘာဝေါတိ သလက္ခဏော ပရမတ္ထဓမ္မော. ကေနဋ္ဌေန? သဟ ဘာဝေနာတိ အတ္ထေန. သဗ္ဘာဝေါတိ သတံ ဘာဝေါ သဗ္ဘာဝေါ, သပ္ပုရိသဓမ္မော ဣစ္စေဝတ္ထော. အထ ဝါ အတ္တနော ဘာဝေါ သဗ္ဘာဝေါ. ‘‘ဂါဟာပယန္တိ သဗ္ဘာဝ’’န္တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. သံဝိဇ္ဇမာနော ဝါ ဘာဝေါ သဗ္ဘာဝေါ. ‘‘ဧဝံ ဂဟဏသဗ္ဘာဝေါ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ [Pg.93] ဝစနံ. ဣဒံ သဘာဝ သဗ္ဘာဝသဒ္ဒါနံ ဘာဝသာဓနဝသေနတ္ထကထနံ. "अभाव" म्हणजे "भाव" (अस्तित्व) नसणे. तो काय आहे? शून्यता, नास्तित्व. "स्वभाव" म्हणजे स्वतःचा भाव, स्वतःची प्रकृती असा याचा अर्थ आहे. किंवा "स्वभाव" म्हणजे धर्मांचे अस्तित्व संभवत असताना जे काही स्वतःचे रूप प्राप्त करते, त्याचा भाव (अस्तित्व) हा "लक्षण" या नावाने ओळखला जातो; जसे की नमन (वाकणे), रुप्पन (पीडित होणे), कक्खळ (कठोरता), फुसन (स्पर्श) इत्यादी आकार (अवस्था) असा याचा अर्थ आहे. "धर्मांचे लक्षण हे सामान्य किंवा स्वभाव मानले जाते" हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. तसेच, "स्वभाव" म्हणजे स्वलक्षणाने युक्त असलेला परमार्थ धर्म होय. कोणत्या अर्थाने? "सह भावेन" (भावासह असणे) या अर्थाने. "सद्भाव" म्हणजे सत् (सज्जनांचा) भाव तो सद्भाव, म्हणजेच सत्पुरुष धर्म असा याचा अर्थ आहे. किंवा स्वतःचा भाव म्हणजे सद्भाव. "सद्भावाचे ग्रहण करवितात" हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. किंवा विद्यमान (अस्तित्वात असलेला) भाव म्हणजे सद्भाव. "अशा प्रकारे ग्रहण करण्याचा सद्भाव" हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. हे "स्वभाव" आणि "सद्भाव" या शब्दांचे भावसाधनाच्या आधारे केलेले अर्थस्पष्टीकरण आहे. သမ္ဘဝေါတိ သမ္ဘဝနံ သမ္ဘဝေါ, သမ္ဘဝနကြိယာ, ယုတ္တိ ဝါ. ယုတ္တိ ဟိ သမ္ဘဝေါတိ ဝုစ္စတိ ‘‘သမ္ဘဝေါ ဂဟဏဿ ကာရဏ’’န္တိအာဒီသု. အထ ဝါ သမ္ဘဝတိ ဧတသ္မာတိ သမ္ဘဝေါ. ယတော ဟိ ယံ ကိဉ္စိ သမ္ဘဝတိ, သော သမ္ဘဝေါ. ပဘဝေါတိ ပဘဝနံ ပဘဝေါ, အစ္ဆိန္နတာ, ပဘဝတိ ဧတသ္မာတိ ဝါ ပဘဝေါ. ယတော ဟိ ယံ ကိဉ္စိ ပဘဝတိ, သော ပဘဝေါ. ဣမေ ပန သမ္ဘဝပဘဝသဒ္ဒါ ကတ္ထစိ သမာနတ္ထာ ကတ္ထစိ ဘိန္နတ္ထာတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ကထံ? သမ္ဘဝသဒ္ဒေါ ဟိ ဘဝနကြိယမ္ပိ ဝဒတိ ယုတ္တိမ္ပိ ပညတ္တိမ္ပိ သမ္ဘဝရူပမ္ပိ ပစ္စယတ္ထမ္ပိ, ပဘဝသဒ္ဒေါ ပန ဘဝနကြိယမ္ပိ ဝဒတိ နဒိပ္ပဘဝမ္ပိ ပစ္စယတ္ထမ္ပိ, တသ္မာ ပစ္စယတ္ထံ ဝဇ္ဇေတွာ ဘိန္နတ္ထာတိ ဂဟေတဗ္ဗာ, ပစ္စယတ္ထေန ပန သမာနတ္ထာတိ ဂဟေတဗ္ဗာ. ဝုတ္တဉှေတံ ‘‘ပစ္စယော ဟေတု နိဒါနံ ကာရဏံ သမ္ဘဝေါ ပဘဝေါတိအာဒိ အတ္ထတော ဧကံ, ဗျဉ္ဇနတော နာန’’န္တိ. "संभव" म्हणजे संभवणे (उत्पन्न होणे) तो संभव, किंवा संभवण्याची क्रिया, अथवा युक्ती (योग्य असणे). कारण "ग्रहणाचे कारण संभव आहे" इत्यादी वाक्यांमध्ये युक्तीलाच "संभव" म्हटले जाते. किंवा ज्याच्यापासून काही संभवते (उत्पन्न होते) तो संभव. कारण ज्याच्यापासून जे काही संभवते, तो संभव होय. "प्रभव" म्हणजे प्रभवन (उत्पत्ती), अखंडता, किंवा ज्याच्यापासून काही प्रभवते (उत्पन्न होते) तो प्रभव. कारण ज्याच्यापासून जे काही प्रभवते, तो प्रभव होय. परंतु हे "संभव" आणि "प्रभव" शब्द कुठे समान अर्थाचे तर कुठे भिन्न अर्थाचे आहेत, असे जाणावे. कसे? कारण "संभव" शब्द हा उत्पत्तीची क्रिया, युक्ती, प्रज्ञप्ती (संकल्पना), संभव-रूप आणि प्रत्ययाचा (कारणाचा) अर्थ देखील सांगतो. तर "प्रभव" शब्द हा उत्पत्तीची क्रिया, नदीचा उगम (नदीप्रभव) आणि प्रत्ययाचा (कारणाचा) अर्थ सांगतो. म्हणून प्रत्ययाचा (कारणाचा) अर्थ वगळता ते भिन्न अर्थाचे आहेत असे मानावे, आणि प्रत्ययाच्या अर्थाने ते समान अर्थाचे आहेत असे मानावे. कारण असे म्हटले आहे की— "प्रत्यय, हेतू, निदान, कारण, संभव, प्रभव इत्यादी अर्थाने एकच आहेत, केवळ व्यंजनाने (शब्दाने) भिन्न आहेत." ‘‘မူလံ ဟေတု နိဒါနဉ္စ, သမ္ဘဝေါ ပဘဝေါ တထာ; သမုဋ္ဌာနာဟာရာရမ္မဏံ, ပစ္စယော သမုဒယေန စာ’’တိ "मूळ, हेतू, निदान, तसेच संभव, प्रभव, समुत्थान, आहार, आलंबन (आरम्मण), प्रत्यय आणि समुदय (हे सर्व एकाच अर्थाचे शब्द आहेत)." အယမ္ပိ ဂါထာ ဧတဿတ္ထဿ သာဓိကာ. ဣဒံ သမ္ဘဝပဘဝသဒ္ဒါနံ ဘာဝါပါဒါနသာဓနဝသေနတ္ထကထနံ. ही गाथा देखील याच अर्थाची साधक आहे. हे "संभव" आणि "प्रभव" या शब्दांचे भाव आणि अपादान साधनांच्या आधारे केलेले अर्थस्पष्टीकरण आहे. ဧဝမေတ္ထ ဘာဝကတ္တုကမ္မကရဏာပါဒါနာဓိကရဏဝသေန ဆ သာဓနာနိ ပကာသိတာနိ. တာနိ သမ္ပဒါနသာဓနေန သတ္တဝိဓာနိ ဘဝန္တိ, တံ ပန ဥတ္တရိ အာဝိဘဝိဿတိ ‘‘ဓနမဿ ဘဝတူတိ ဓနဘူတီ’’တိအာဒိနာ. ဣစ္စေဝံ ကိတကဝသေန သဗ္ဗထာပိ သတ္တဝိဓာနိ သာဓနာနိ ဟောန္တိ, ယာနိ ‘‘ကာရကာနီ’’တိပိ ဝုစ္စတိ, ဣတော အညံ သာဓနံ နတ္ထိ. ဣဓ ပယောဂေသွတ္ထေသု စ ဝိညူနံ [Pg.94] ပါဋဝတ္ထံ သာဓနနာမံ ပကာသိတံ. တထာ ဟိ ဒုန္နိက္ခိတ္တသာဓနေဟိ ပဒေဟိ ယောဇိတာ သဒ္ဒပ္ပယောဂါ ဒုဗ္ဗောဓတ္ထာ ဟောန္တိ, သုနိက္ခိတ္တသာဓနေဟိ ပန ပဒေဟိ ယောဇိတာ သုဗောဓတ္ထာ ဟောန္တိ, တသ္မာ ပယောဂါသာဓနမူလကာ, အတ္ထော စ ပယောဂမူလကော. ပယောဂါနုရူပဉှိ အဝိပရီတံ ကတွာ အတ္ထံ ကထနသီလာ ‘‘ယာစိတောဝ ဗဟုလံ စီဝရံ ပရိဘုဉ္ဇတိ, အပ္ပံ အယာစိတော’’တိ ဧဝမာဒီသု သာဓနဝသေန ဂဟေတဗ္ဗေသု အတ္ထေသု, အညေသု စတ္ထေသု ပဋုတရဗုဒ္ဓိနော ပဏ္ဍိတာယေဝ ဧကန္တေန ဘဂဝတော ပရိယတ္တိသာသနဓရာ နာမ ဟောန္တီတိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ဣတော ပရံ နယာနုသာရေန သုဝိညေယျတ္တာ ‘‘ဣဒံ နာမ သာဓန’’န္တိ န ဝက္ခာမ, ကေဝလမိဓ ဒဿိတေသု ပယောဂေသု ဝိညူနံ ဗဟုမာနုပ္ပာဒနတ္ထဉ္စေဝ ဝိဝိဓဝိစိတ္တပါဠိဂတိကေ ဝိဝိဓတ္ထသာရေ ဇိနဝရဝစနေ သောတူနံ ဗုဒ္ဓိဝိဇမ္ဘနတ္ထဉ္စ အတ္ထသာဓကဝစနာနိယေဝ ယထာရဟံ သုတ္တဂေယျဝေယျာကရဏဂါထာဒီသု တတော တတော အာဟရိတွာ ဒဿေဿာမ. अशा प्रकारे, येथे भाव, कर्ता, कर्म, करण, अपादान आणि अधिकरण यांच्या आधारे सहा साधने (कारके) प्रकाशित केली आहेत. संप्रदान साधनासह ती सात प्रकारची होतात, जे पुढे "त्याला धन लाभो म्हणून धनभूती" इत्यादी उदाहरणांद्वारे स्पष्ट होईल. अशा प्रकारे कृदंत प्रत्ययांच्या (कितक) आधारे सर्व प्रकारे सात साधने होतात, ज्यांना "कारके" असेही म्हटले जाते; याशिवाय दुसरे कोणतेही साधन नाही. येथे प्रयोगांमध्ये आणि अर्थांमध्ये विद्वानांच्या कौशल्यासाठी "साधन" हे नाव प्रकाशित केले आहे. कारण चुकीच्या पद्धतीने योजलेल्या साधनांच्या पदांनी युक्त असलेले शब्दप्रयोग समजण्यास कठीण (दुर्बोध) असतात, तर योग्य प्रकारे योजलेल्या साधनांच्या पदांनी युक्त असलेले शब्दप्रयोग समजण्यास सोपे (सुबोध) असतात. म्हणून प्रयोग हे साधनावर आधारित असतात आणि अर्थ हा प्रयोगावर आधारित असतो. कारण प्रयोगाला अनुसरून विपर्यास न करता अर्थ सांगणारे, "मागितल्यावरच तो बहुतांश चीवराचा उपभोग घेतो, न मागता फार कमी" इत्यादी साधनांच्या आधारे ग्रहण करावयाच्या अर्थांमध्ये आणि इतर अर्थांमध्ये अत्यंत कुशाग्र बुद्धी असलेले पंडितच निश्चितपणे भगवंतांच्या परियत्ती शासनाचे (बुद्धवचनांचे) धारक असतात, असे जाणावे. यापुढे नियमांनुसार सहज समजण्याजोगे असल्यामुळे "हे अमुक साधन आहे" असे आम्ही सांगणार नाही. केवळ येथे दर्शविलेल्या प्रयोगांमध्ये विद्वानांचा आदर वाढवण्यासाठी आणि विविध व विचित्र पाळी भाषेतील विविध अर्थांनी समृद्ध अशा जिनवरांच्या (बुद्धांच्या) वचनांमध्ये श्रोत्यांच्या बुद्धीचा विकास करण्यासाठी, आम्ही सुत्त, गेय्य, वेय्याकरण, गाथा इत्यादींमधून योग्यतेनुसार अर्थ सिद्ध करणारी वचने ठिकठिकाणाहून उद्धृत करून दाखवू. ပဘာဝေါတိ ပကာရတော ဘဝတီတိ ပဘာဝေါ, သောယမာနုဘာဝေါယေဝ. ‘‘ပဘာဝံ တေ န ပဿာမိ, ယေန တွံ မိထိလံ ဝဇေ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. အနုဘဝေါတိ အနုဘဝနံ အနုဘဝေါ, ကိံ တံ? ပရိဘုဉ္ဇနံ. အာနုဘာဝေါတိ တေဇုဿာဟမန္တပဘူသတ္တိယော. ‘‘တေဇသင်္ခတော ဥဿာဟမန္တပဘူသတ္တိသင်္ခါတော ဝါ မဟန္တော အာနုဘာဝေါ ဧတဿာတိ မဟာနုဘာဝေါ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. "प्रभाव" म्हणजे प्रकर्षाने (विशेष प्रकारे) उत्पन्न होणे तो प्रभाव, तो हा "अनुभाव" (किंवा महान सामर्थ्य) च होय. "मी तुझा तो प्रभाव पाहत नाही, ज्याने तू मिथिला नगरीला जाशील" हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. "अनुभव" म्हणजे अनुभवणे तो अनुभव. तो काय आहे? उपभोग घेणे (परिभोग). "आनुभाव" (सामर्थ्य) म्हणजे तेज, उत्साह, मंत्र, प्रभू आणि शक्ती (या पाच शक्ती). "तेजाने युक्त किंवा उत्साह, मंत्र, प्रभू आणि शक्तीने युक्त असा ज्याचा महान आनुभाव (प्रभाव) आहे, तो "महानुभाव" (महाप्रतापी) होय" हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. တေဇော ဥဿာဟမန္တာ စ, ပဘူသတ္တီတိ ပဉ္စိမေ; အာနုဘာဝါတိ ဝုစ္စန္တိ, ပဘာဝါတိ စ တေ ဝဒေ. "तेज, उत्साह, मंत्र, प्रभू आणि शक्ती या पाचांना "आनुभाव" म्हटले जाते आणि त्यांनाच "प्रभाव" असेही म्हणतात." တေဇာဒိဝါစကတ္တမှိ, အာနုဘာဝပဒဿ တု; အတ္ထနိဗ္ဗစနံ ဓီရော, ယထာသမ္ဘဝမုဒ္ဒိသေ. "परंतु "आनुभाव" हा शब्द तेज इत्यादींचा वाचक असताना, विद्वानाने योग्यतेनुसार त्याची अर्थव्युत्पत्ती सांगावी." အထ [Pg.95] ဝါ အာနုဘာဝေါတိ အနုဘဝိတဗ္ဗဖလံ. ‘‘အနုဘဝိတဗ္ဗဿ ဖလဿ မဟန္တတာယ မဟာနုဘာဝေါ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ပရာဘဝေါတိ ပရာဘဝနံ ပရာဘဝေါ, အထ ဝါ ပရာဘဝတီတိ ပရာဘဝေါ. ‘‘သုဝိဇာနော ပရာဘဝေါ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. အပိစ ‘‘ဓမ္မဒေဿီ ပရာဘဝေါ’’တိ ပါဌာနုရူပတော ပရာဘဝိဿတီတိ ပရာဘဝေါတိ အနာဂတကာလဝသေနပိ နိဗ္ဗစနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အထ ဝါ ပရာဘဝန္တိ ဧတေနာတိ ပရာဘဝေါ. ကိံ တံ? ဓမ္မဒေဿိတာဒိ. ‘‘ပဌမော သော ပရာဘဝေါ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဝိဘဝေါတိ နိဗ္ဗာနံ. တဉှိ ဘဝတော ဝိဂတတ္တာ ဘဝတော ဝိဂတောတိ ဝိဘဝေါ, ဘဝဿ စ တံဟေတု ဝိဂတတ္တာ ဝိဂတော ဘဝေါ ဧတသ္မာတိ ဝိဘဝေါ. ဝိဘဝန္တိ ဥစ္ဆိဇ္ဇန္တိ ဝိနဿန္တိ ဣတော အရိယဓနဝိလောမကာ ကိလေသမဟာစောရာတိပိ ဝိဘဝေါ. ဝိဘဝသဒ္ဒဿ နိဗ္ဗာနာဘိဓာနတ္တေ ‘‘ဧဝံ ဘဝေ ဝိဇ္ဇမာနေ, ဝိဘဝေါ ဣစ္ဆိတဗ္ဗကော’’တိ ဣဒမေတ္ထ သာဓကံ ဝစနံ. ဣမာနိ ပန နိဗ္ဗာနဿ ပရိယာယဝစနာနိ – किंवा "आनुभाव" म्हणजे अनुभवायचे फळ. "अनुभवायच्या फळाच्या मोठेपणामुळे तो "महानुभाव" होय" हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. "पराभव" म्हणजे पराभूत होणे (पतन होणे) तो पराभव, किंवा जो पराभूत होतो तो पराभव. "पराभव सहज ओळखता येतो" हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. तसेच, "धर्माचा द्वेष करणारा पराभूत होतो (त्याचा पराभव होतो)" या पाठानुसार, "जो भविष्यात पराभूत होईल तो पराभव" अशी भविष्यकाळाच्या आधारे देखील व्युत्पत्ती पाहावी. किंवा ज्याच्याद्वारे पराभूत होतात तो पराभव. तो काय आहे? धर्मद्वेष इत्यादी. "तो पहिला पराभव आहे" हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. "विभव" म्हणजे निर्वाण. कारण ते (निर्वाण) भवापासून (अस्तित्वापासून/संसारापासून) मुक्त असल्यामुळे "भवापासून मुक्त तो विभव" किंवा भवाचा नाश करण्याचे कारण असल्यामुळे "ज्याच्यापासून भव नष्ट होतो तो विभव" होय. किंवा ज्याच्यामध्ये आर्यधनाच्या विरोधी असलेले क्लेशरूपी महाचोर नष्ट होतात, नाहीसे होतात, तो "विभव" होय. "विभव" हा शब्द निर्वाणाचा वाचक असताना, "अशा प्रकारे भव (संसार) विद्यमान असताना, विभव (निर्वाण) इच्छिण्याजोगा आहे" हे वचन येथे साधक आहे. ही निर्वाणाची समानार्थी (पर्यायी) नावे आहेत— နိဗ္ဗာနံ ဝိဘဝေါ မောက္ခော, နိရောဓော အမတံ သမံ; သင်္ခါရူပသမော ဒုက္ခ-နိရောဓော အစ္စုတ’က္ခယော. "निर्वाण, विभव, मोक्ष, निरोध, अमृत, सम, संस्कारोपशम, दुःखनिरोध, अच्युत, अक्षय," ဝိဝဋ္ဋ’မကတံ အတ္ထံ, သန္တိပဒ’မသင်္ခတံ; ပါရံ တဏှာက္ခယော ဒုက္ခ-က္ခယော သညောဇနက္ခယော. "विवट्ट (विवर्त), अकृत, अर्थ, शांतिपद, असंस्कृत, पार (पलीकडचा तीर), तृष्णाक्षय, दुःखक्षय आणि संयोजनक्षय (ही सर्व निर्वाणाची नावे आहेत)." ယောဂက္ခေမော ဝိရာဂေါ စ,လောကန္တော စ ဘဝက္ခယော; အပဝဂ္ဂေါ ဝိသင်္ခါရော,သဗ္ဘိ သုဒ္ဓိ ဝိသုဒ္ဓိ စ. योगक्खेम, विराग, लोकान्त, भवक्खय (भवक्षय), अपवग्ग, विसंखार, आणि सत्पुरुषांद्वारे शुद्धी व विशुद्धी. ဝိမုတျာ’ပစယော မုတ္တိ, နိဗ္ဗုတိ ဥပဓိက္ခယော; သန္တိ အသင်္ခတာ ဓာတု, ဒိသာ စ သဗ္ဗတောပဘံ. विमुत्ती (मुक्तता), अपचय (कर्मक्षय), मुत्ती (मुक्ती), निब्बुती (निर्वाण), उपधिक्खय (उपाधींचा क्षय), सन्ती (शांती), असंखत धातू (असंस्कृत धातू) आणि सर्वतोप्रभ (सर्व बाजूंनी प्रकाशमान असणारी) दिशा. ဝိနာပေတာနိ [Pg.96] နာမာနိ, ဝိသေသကပဒံ ဣဓ; နိဗ္ဗာနဝါစကာနီတိ, သလ္လက္ခေယျ သုမေဓသော. बुद्धिमान मनुष्याने (सुमेधसाने) हे लक्षात घ्यावे की, या नावांव्यतिरिक्त येथे विशेषण म्हणून वापरलेले शब्द देखील निब्बानाचे (निर्वाणाचे) वाचक आहेत. ‘‘တာဏံ လေဏ’’န္တိအာဒီနိ-ပေက္ခိကာနိ ဘဝန္တိ ဟိ; ဝိသေသကပဒါနန္တိ, ဧတ္ထေတာနိ ပကာသယေ. कारण 'ताण' (रक्षण), 'लेण' (आश्रय) इत्यादी शब्द हे अपेक्षेने युक्त (सापेक्ष) असतात; येथे त्यांना विशेषण (विशेषक पद) म्हणून स्पष्ट करावे. တာဏံ လေဏ’မရူပဉ္စ, သန္တံ သစ္စ’မနာလယံ; သုဒုဒ္ဒသံ သရဏဉ္စ, ပရာယဏ’မနီတိကံ. ताण (रक्षण), लेण (आश्रय), अरूप, सन्त (शांत), सच्च (सत्य), अनालय (आसक्तीरहित), सुदुद्दरस (अतिशय कठीणतेने दिसणारे), सरण (शरण), परायण (अंतिम ध्येय) आणि अनीतिक (उपद्रवरहित). အနာသဝံ ဓုဝံ နိစ္စံ, ဝိညာဏ’မနိဒဿနံ; အဗျာပဇ္ဇံ သိဝံ ခေမံ, နိပုဏံ အပလောကိကံ. अनासव (आसवरहित), धुव (ध्रुव/स्थिर), निच्च (नित्य), अनिदरसन विञ्ञाण (अनिर्देश्य विज्ञान), अब्यापज्ज (व्याधी/पीडारहित), सिव (शिव/कल्याणकारी), खेम (क्षेम), निपुण (सूक्ष्म) आणि अपलोकिक (नाश न पावणारे). အနန္တ’မက္ခရံ ဒီပေါ, အစ္စန္တံ ကေဝလံ ပဒံ; ပဏီတံ အစ္စုတဉ္စာတိ, ဗဟုဓာပိ ဝိဘာဝယေ. अनन्त, अक्खर (अक्षर/अविनाशी), दीप (बेटासारखा आश्रय), अच्चन्त (अत्यंत/अंतिम), केवळ पद (अद्वितीय स्थान), पणीत (उत्कृष्ट) आणि अच्चुत (च्युतीरहित/अच्युत) - अशा अनेक प्रकारे (निब्बानाचे) स्पष्टीकरण करावे. ဂေါတြဘူတိ ပဒဿတ္ထံ, ဝဒန္တေဟိ ဂရူဟိ တု; ဂေါတ္တံ ဝုစ္စတိ နိဗ္ဗာန-မိတိ ဂေါတ္တန္တိ ဘာသိတံ. 'गोत्रभू' या पदाचा अर्थ सांगताना आचार्यांनी (गुरूंनी) 'गोत्र' म्हणजे 'निब्बान' (निर्वाण) असे म्हटले आहे, म्हणून याला 'गोत्र' असे म्हटले गेले आहे. ဝိဘဝေါတိ ဝါ ဝိနာသသမ္ပတ္တိဓနုစ္ဆေဒဒိဋ္ဌိယောပိ ဝုစ္စန္တိ. တတ္ထ ဝိနာသော ဝိဘဝနံ ဥစ္ဆိဇ္ဇနံ နဿနန္တိ အတ္ထေန ဝိဘဝေါ. ‘‘ဝိဘဝေါ သဗ္ဗဓမ္မာနံ, ဣတ္ထေကေ သတော သတ္တဿ ဥစ္ဆေဒံ ဝိနာသံ ဝိဘဝံ ပညပေန္တီ’’တိ စ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. သမ္ပတ္တိ ပန ဝိသေသတော ဘဝတီတိ ဝိဘဝေါ. ‘‘ရညော သိရိဝိဘဝံ ဒဋ္ဌုကာမာ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဓနံ ပန ဘဝန္တိ ဝဍ္ဎန္တိ ဝုဒ္ဓိံ ဝိရူဠှိံ ဝေပုလ္လံ အာပဇ္ဇန္တိ သတ္တာ ဧတေနာတိ ဝိဘဝေါ. ‘‘အသီတိကောဋိဝိဘဝဿ ဗြာဟ္မဏဿ ပုတ္တော ဟုတွာ နိဗ္ဗတ္တီ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဣဒံ ပန ပရိယာယဝစနံ – 'विभव' या शब्दाने विनाश, संपत्ती, धन आणि उच्छेददृष्टी देखील म्हटले जाते. त्यामध्ये, विनाश, नष्ट होणे, उच्छेद होणे आणि नाहीसे होणे या अर्थाने 'विभव' हा शब्द वापरला जातो. 'सर्व धर्मांचा विभव, येथे काही लोक विद्यमान सत्त्वाचा उच्छेद, विनाश आणि विभव प्रस्थापित करतात' - हे वचन या अर्थाचे साधक (प्रमाण) आहे. संपत्ती विशेष रूपाने होते म्हणून तिला 'विभव' म्हणतात. 'राजाचे श्रीविभव (वैभव/संपत्ती) पाहण्याची इच्छा असणारे' - हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. धन (पैसा) ज्याच्याद्वारे प्राणी अस्तित्वात येतात, वाढतात, वृद्धी, प्रगती आणि विपुलता प्राप्त करतात, म्हणून त्याला 'विभव' म्हणतात. 'ऐंशी कोटी विभवाच्या (धनाच्या) ब्राह्मणाचा मुलगा म्हणून जन्मला' - हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. हे त्याचे समानार्थी शब्द आहेत – ဓနံ သံ ဝိဘဝေါ ဒဗ္ဗံ, သာပတေယျံ ပရိဂ္ဂဟော; ဩဍ္ဍံ ဘဏ္ဍံ သကံ အတ္ထော, ဣစ္စေတေ ဓနဝါစကာ. धन, सं, विभव, दब्ब (द्रव्य), सापतेय्य (स्वकीय धन), परिग्गह (परिग्रह), ओड्ड, भण्ड (भांड/वस्तू), सक (स्वतःचे) आणि अत्थ (अर्थ) - हे सर्व 'धना'चे वाचक शब्द आहेत. ဥစ္ဆေဒဒိဋ္ဌိ ပန ဝိဘဝတိ ဥစ္ဆိဇ္ဇတိ ‘‘အတ္တာ စ လောကော စ ပုန စုတိတော ဥဒ္ဓံ န ဇာယတီ’’တိ ဂဟဏတော ဝိဘဝေါတိ. ‘‘ဝိဘဝတဏှာ’’တိ [Pg.97] ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဝိဘဝတဏှာတိ ဟိ ဥစ္ဆေဒဒိဋ္ဌိသဟဂတာယ တဏှာယ နာမံ. ဧတ္ထ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတိ – परंतु, 'आत्मा आणि लोक मृत्यूनंतर पुन्हा उत्पन्न होत नाहीत, त्यांचा उच्छेद होतो' अशा प्रकारे ग्रहण केल्यामुळे उच्छेददृष्टीला 'विभव' म्हटले जाते. 'विभवतण्हा' (विभवतृष्णा) हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. कारण विभवतण्हा हे उच्छेददृष्टीने युक्त असलेल्या तृष्णेचे नाव आहे. येथे अर्थाचा संक्षेप (अर्थोद्धार) सांगितला जात आहे – ဓနနိဗ္ဗာနသမ္ပတ္တိ-ဝိနာသုစ္ဆေဒဒိဋ္ဌိယော; ဝုတ္တာ ဝိဘဝသဒ္ဒေန, ဣတိ ဝိညူ ဝိဘာဝယေ. धन, निब्बान (निर्वाण), संपत्ती, विनाश आणि उच्छेददृष्टी हे सर्व 'विभव' या शब्दाने सांगितले जातात; सुज्ञांनी (विद्वानांनी) असे स्पष्ट करावे. ပါတုဘာဝေါတိ ပါတုဘဝနံ ပါတုဘာဝေါ. အာဝိဘာဝေါတိ အာဝိဘဝနံ အာဝိဘာဝေါ, ဥဘိန္နမေတေသံ ပါကဋတာ ဣစ္စေဝတ္ထော. တိရောဘာဝေါတိ တိရောဘဝနံ တိရောဘာဝေါ, ပဋိစ္ဆန္နဘာဝေါ. ဝိနာဘာဝေါတိ ဝိနာဘဝနံ ဝိနာဘာဝေါ, ဝိယောဂေါ. သောတ္ထိဘာဝေါတိ သောတ္ထိဘဝနံ သောတ္ထိဘာဝေါ, သုဝတ္ထိဘာဝေါ သုခဿ အတ္ထိတာ, အတ္ထတော ပန နိဗ္ဘယတာ နိရုပဒ္ဒဝတာ ဧဝ. အတ္ထိဘာဝေါတိ အတ္ထိတာ ဝိဇ္ဇမာနတာ အဝိဝိတ္တတာ. နတ္ထိဘာဝေါတိ နတ္ထိတာ အဝိဇ္ဇမာနတာ ဝိဝိတ္တတာ ရိတ္တတာ တုစ္ဆတာ သုညတာ. ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. 'पातुभाव' म्हणजे प्रकट होणे (प्रादुर्भाव). 'आविभाव' म्हणजे प्रकट होणे (आविर्भाव), या दोन्ही शब्दांचा अर्थ 'स्पष्टता' (प्रकटता) असाच आहे. 'तिरोभाव' म्हणजे अदृश्य होणे, लपलेली अवस्था (प्रच्छन्नभाव). 'विनाभाव' म्हणजे विलग होणे, वियोग. 'सोत्थिभाव' (स्वस्तिभाव) म्हणजे कल्याणकारी अवस्था, सुखाचे अस्तित्व; परंतु अर्थाच्या दृष्टीने ही निर्भयता आणि उपद्रवरहितता आहे. 'अत्थिभाव' (अस्तिभाव) म्हणजे अस्तित्व, विद्यमानता, रिक्त नसणे. 'नत्थिभाव' (नास्तिभाव) म्हणजे अनस्तित्व, अविद्यमानता, विविक्तता (शून्यता), रिक्तता, तुच्छता आणि शून्यता. हा 'ओ' कारान्त पुल्लिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. အဘိဘဝတီတိ အဘိဘဝိတာ, ပရံ အဘိဘဝန္တော ယော ကောစိ. ဧဝံ ပရိဘဝိတာ, အနုဘဝတီတိ အနုဘဝိတာ, သုခံ ဝါ ဒုက္ခံ ဝါ အဒုက္ခမသုခံ ဝါ အနုဘဝန္တော ယော ကောစိ. ဧဝံ သမနုဘဝိတာ. ပစ္စနုဘဝိတာ, ဧတ္ထ ပန ယထာ ‘‘အမတဿ ဒါတာ. အနုပ္ပန္နဿ မဂ္ဂဿ ဥပ္ပာဒေတာ’’တိအာဒီသု ‘‘ဒါတာ’’တိ ပဒါနံ ကတ္တုဝါစကာနံ ‘‘အမတဿာ’’တိအာဒီဟိ ပဒေဟိ ကမ္မဝါစကေဟိ ဆဋ္ဌိယန္တေဟိ သဒ္ဓိံ ယောဇနာ ဒိဿတိ, တထာ ဣမေသမ္ပိ ပဒါနံ ‘‘ပစ္စာမိတ္တဿ အဘိဘဝိတာ’’တိအာဒိနာ ယောဇနာ ကာတဗ္ဗာ. ဧဝံ အညေသမ္ပိ ဧဝရူပါနံ ပဒါနံ. အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. जो पराभूत करतो तो 'अभिभविता' (विजेता), म्हणजेच दुसऱ्यावर विजय मिळवणारा कोणताही व्यक्ती. याचप्रमाणे 'परिभविता' (अपमान करणारा). जो अनुभव घेतो तो 'अनुभविता', म्हणजेच सुख, दुःख किंवा अदुःख-असुख (उपेक्षा) यांचा अनुभव घेणारा कोणताही व्यक्ती. याचप्रमाणे 'समनुभविता' आणि 'पच्चनुभविता'. येथे ज्याप्रमाणे 'अमृताचा दाता (अमतस्स दाता)', 'उत्पन्न न झालेल्या मार्गाचा उत्पादक (अनुप्पन्नस्स मग्गस्स उप्पादेता)' इत्यादींमध्ये 'दाता' या कर्तावाचक पदांचा 'अमतस्स' इत्यादी षष्ठी विभक्तीतील कर्मवाचक पदांशी संबंध दिसतो, त्याचप्रमाणे या पदांचा देखील 'शत्रूचा पराभव करणारा (पच्चामित्तस्स अभिभविता)' इत्यादी प्रकारे संबंध जोडला पाहिजे. इतर अशाच प्रकारच्या शब्दांच्या बाबतीतही हेच समजावे. हा 'आ' कारान्त पुल्लिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. ဘဝတီတိ ဘဝံ. ဘဝိဿတီတိ ဝါ ဘဝံ, ဝဍ္ဎမာနော ပုဂ္ဂလော. ‘‘သုဝိဇာနော ဘဝံ ဟောတိ, သုဝိဇာနော ပရာဘဝေါ. ဓမ္မကာမော [Pg.98] ဘဝံ ဟောတိ, ဓမ္မဒေဿီ ပရာဘဝေါ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. အထ ဝါ ယေန သဒ္ဓိံ ကထေတိ, သော ‘‘ဘဝ’’န္တိ ဝတ္တဗ္ဗော, ‘‘ဘဝံ ကစ္စာယနော. ဘဝံ အာနန္ဒော. မညေ ဘဝံ ပတ္ထယတိ, ရညော ဘရိယံ ပတိဗ္ဗတ’’န္တိအာဒီသု. ဧတ္ထ ပန ဓာတုအတ္ထေ အာဒရော န ကာတဗ္ဗော, သမ္မုတိအတ္ထေယေဝါဒရော ကာတဗ္ဗော ‘‘သင်္ကေတဝစနံ သစ္စံ, လောကသမ္မုတိကာရဏ’’န္တိ ဝစနတော. ဝေါဟာရဝိသယသ္မိဉှိ လောကသမ္မုတိ ဧဝ ပဓာနာ အဝိလင်္ဃနီယာ. ပရာဘဝတီတိ ပရာဘဝံ. ဧဝံ ပရိဘဝံ. အဘိဘဝံ. အနုဘဝံ. ပဘဝတိ ပဟောတိ သက္ကောတီတိ ပဘဝံ, ပဟောန္တော ယော ကောစိ. န ပဘဝံ အပ္ပဘဝံ, ‘‘အပ္ပဘဝ’’န္တိ စ ဣဒံ ဇာတကေ ဒိဋ္ဌံ – जो वृद्धिंगत होतो तो 'भवं' (कल्याण पावणारा). किंवा जो भविष्यात वृद्धिंगत होईल तो 'भवं', म्हणजेच प्रगती करणारा मनुष्य. 'कल्याण पावणारा मनुष्य सहज ओळखता येतो, पराभव (ऱ्हास) पावणाराही सहज ओळखता येतो. धम्मावर प्रेम करणारा कल्याण पावतो, धम्माचा द्वेष करणारा ऱ्हास पावतो' - हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. किंवा ज्याच्याशी बोलले जाते, त्याला 'भवं' (महाशय/पूज्य) असे म्हटले पाहिजे, जसे की 'भवं कच्चायन' (महाशय कात्यायन), 'भवं आनंद' (महाशय आनंद), 'मला वाटते की महाशय राजाच्या पतिव्रता पत्नीची इच्छा करतात' इत्यादींमध्ये. येथे धातूच्या मूळ अर्थाचा आग्रह धरू नये, तर केवळ लोकसंकेताच्या (संमृती) अर्थाचाच आदर केला पाहिजे, कारण म्हटले आहे: 'संकेतवचन हे सत्य आहे, जे लोकव्यवहाराचे कारण आहे.' कारण व्यावहारिक क्षेत्रात लोकसंकेतच मुख्य आणि अनुलंघनीय असतो. जो ऱ्हास पावतो तो 'पराभवं'. याचप्रमाणे 'परिभवं', 'अभिभवं', 'अनुभवं'. जो समर्थ आहे, सक्षम आहे, करू शकतो तो 'पभवं' (प्रभवं), म्हणजेच समर्थ असणारा कोणताही व्यक्ती. जो समर्थ नाही तो 'अप्पभवं' (अप्रभवं), आणि हा 'अप्पभवं' शब्द जातकामध्ये आढळतो – ‘‘ဆိန္နဗ္ဘမိဝ ဝါတေန, ရုဏ္ဏော ရုက္ခမုပါဂမိံ; သောဟံ အပ္ပဘဝံ တတ္ထ, သာခံ ဟတ္ထေဟိ အဂ္ဂဟိ’’န္တိ 'वाऱ्याने छिन्नविच्छिन्न झालेल्या ढगाप्रमाणे, मी रडत रडत एका वृक्षाजवळ गेलो; तेथे मी असमर्थ (अप्पभवं) होऊन हातांनी एका फांदीला पकडले.' တတ္ထ သာဓကဝစနမိဒံ. နိဂ္ဂဟီတန္တပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. तेथे हे साधक वचन आहे. हा निग्गहीत (अनुस्वार) अन्त्य असणाऱ्या पुल्लिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. ဓနဘူတီတိ ဓနမဿ ဘဝတူတိ ဓနဘူတိ. သိရိဘူတီတိ သောဘာယ စေဝ ပညာပုညာနဉ္စ အဓိဝစနံ. သာ အဿ ဘဝတူတိ သိရိဘူတိ. ဧဝံ သောတ္ထိဘူတိ, သုဝတ္ထိဘူတိ. ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. 'धनभूती' म्हणजे 'त्याला धन प्राप्त होवो'. 'सिरिभूती' (श्रीभूती) हे शोभा तसेच प्रज्ञा व पुण्याचे नाव आहे. 'ती त्याला प्राप्त होवो' म्हणजे 'सिरिभूती'. याचप्रमाणे 'सोत्थिभूती' (स्वस्तिभूती), 'सुवत्थिभूती'. हा 'इ' कारान्त पुल्लिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. ဘာဝီတိ ဘဝနသီလော ဘာဝီ, ဘဝနဓမ္မော ဘာဝီ, ဘဝနေ သာဓုကာရီ ဘာဝီ. ဧဝံ ဝိဘာဝီ. သမ္ဘာဝီ. ပရိဘာဝီတိ. တတြ ဝိဘာဝီတိ အတ္ထဝိဘာဝနေ သမတ္ထော ပဏ္ဍိတော ဝုစ္စတိ. ဧတ္ထ ဝိဒွါ, ဝိဇ္ဇာဂတော, ဉာဏီတိအာဒိ ပရိယာယဝစနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဘဝန္တိ စတြ – 'भावी' म्हणजे अस्तित्वात राहण्याचा स्वभाव असणारा, अस्तित्वाचा धर्म असणारा, अस्तित्वात चांगले कार्य करणारा. याचप्रमाणे 'विभावी', 'संभावी', 'परिभावी'. त्यामध्ये 'विभावी' म्हणजे अर्थाचे स्पष्टीकरण करण्यात समर्थ असणारा पंडित (विद्वान) म्हटला जातो. येथे 'विद्वा' (विद्वान), 'विज्जागतो' (विद्याप्राप्त), 'ञाणी' (ज्ञानी) इत्यादी समानार्थी शब्द समजावेत. आणि याविषयी पुढील गाथा आहेत – ဝိဒွါ ဝိဇ္ဇာဂတော ဉာဏီ, ဝိဘာဝီ ပဏ္ဍိတော သုဓီ; ဗုဓော ဝိသာရဒေါ ဝိညူ, ဒေါသညူ ဝိဒ္ဒသု ဝိဒူ. विद्वा (विद्वान), विज्जागतो (विद्याप्राप्त), ञाणी (ज्ञानी), विभावी, पण्डितो (पंडित), सुधी, बुधो (बुध), विसारदो (विशारद), विञ्ञू (विज्ञ), दोसञ्ञू (दोषज्ञ), विद्दसु आणि विदू (विद्वान). ဝိပဿီ [Pg.99] ပဋိဘာဏီ စ, မေဓာဝီ နိပကော ကဝိ; ကုသလော ဝိဒုရော ဓီမာ, ဂတိမာ မုတိမာ စယံ. विपस्सी (विपश्यना करणारा/अंतर्दृष्टी असलेला), पटिभाणी (प्रतिभावान), मेधावी, निपको (चतुर), कवी, कुसलो (कुशल), विदुरो (विदुर), धीमा (धीमान), गतिमा (बुद्धिवान) आणि मुतिमा (स्मृतिमान/मतिमान). စက္ခုမာ ကဏ္ဏဝါ ဒဗ္ဗော, ဓီရော ဘူရိ ဝိစက္ခဏော; သပ္ပညော ဗုဒ္ဓိမာ ပညော, ဧဝံနာမာ ဝိဘာဝိနောတိ. चक्खुमा (चक्षुमान/ज्ञानचक्षू असलेला), कण्णवा (कर्णवान/ऐकणारा), दब्बो (द्रव्यवान/योग्य), धीरो (धीर), भूरि (विशाल प्रज्ञेचा), विचक्खणो (विचक्षण), सप्पञ्ञो (सप्रज्ञ), बुद्धिमा (बुद्धिमान) आणि पञ्ञो (प्रज्ञावान) - ही सर्व 'विभावी' (विद्वान) पुरुषांची नावे आहेत. ဤကာရန္တပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. हा 'ई' कारान्त पुल्लिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. သယမ္ဘူတိ သယမေဝ ဘဝတီတိ သယမ္ဘူ. ကော သော? အန္တရေန ပရောပဒေသံ သာမံယေဝ သဗ္ဗံ ဉေယျဓမ္မံ ပဋိဝိဇ္ဈိတွာ သဗ္ဗညုတံ ပတ္တော သကျမုနိ ဘဂဝါ. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ – 'सयंभू' म्हणजे जो स्वतःच उत्पन्न होतो (स्वयंभू). तो कोण आहे? दुसऱ्याच्या उपदेशाशिवाय स्वतःच सर्व ज्ञेय धर्मांचा साक्षात्कार करून सर्वज्ञता प्राप्त केलेले शाक्यमुनी भगवान. कारण भगवंतांनी असे म्हटले आहे – ‘‘န မေ အာစရိယော အတ္ထိ, သဒိသော မေ န ဝိဇ္ဇတိ; သဒေဝကသ္မိံ လောကသ္မိံ, နတ္ထိ မေ ပဋိပုဂ္ဂလော. 'माझा कोणीही आचार्य (गुरु) नाही, माझ्यासारखा दुसरा कोणी अस्तित्वात नाही; देवलोकासह या संपूर्ण जगात माझ्या तोडीचा कोणीही प्रतिपुरुष (प्रतिस्पर्धी) नाही.' အဟဉှိ အရဟာ လောကေ, အဟံ သတ္ထာ အနုတ္တရော; ဧကောမှိ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ, သီတီဘူတောသ္မိ နိဗ္ဗုတော’’တိ. मीच या जगात अर्हत आहे, मीच सर्वश्रेष्ठ शास्ता आहे; मी एकटाच सम्यक्संबुद्ध आहे, मी शीतलीभूत आणि निर्वाणप्राप्त झालो आहे. အတ္ထတော ပန ပါရမိတာပရိဘာဝိတော သယမ္ဘူဉာဏေန သဟ ဝါသနာယ ဝိဂတဝိဒ္ဓသ္တနိရဝသေသကိလေသော မဟာကရုဏာသဗ္ဗညုတညာဏာဒိအပရိမေယျဂုဏဂဏာဓာရော ခန္ဓသန္တာနော သယမ္ဘူ. သော ဧဝံဘူတော ခန္ဓသန္တာနော လောကေ အဂ္ဂပုဂ္ဂလောတိ ဝုစ္စတိ. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ ‘‘ဧကပုဂ္ဂလော ဘိက္ခဝေ လောကေ ဥပ္ပဇ္ဇမာနော ဥပ္ပဇ္ဇတိ အစ္ဆရိယမနုဿော, ကတမော ဧကပုဂ္ဂလော? တထာဂတော ဘိက္ခဝေ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ’’တိ. သော ဧကပုဂ္ဂလော ဧတရဟိ ‘‘သဗ္ဗညူ, သုဂတော’’တိအာဒီဟိ ယထာဘုစ္စဂုဏာဓိဂတနာမေဟိ စ ပသိဒ္ဓေါ, ‘‘ဂေါတမော အာဒိစ္စဗန္ဓူ’’တိ ဂေါတ္တတော စ ပသိဒ္ဓေါ, သကျပုတ္တော သက္ကော သကျမုနိ သကျသီဟော သကျပုင်္ဂဝေါတိ ကုလတော စ ပသိဒ္ဓေါ, သုဒ္ဓေါဒနိမာယာဒေဝီသုတောတိ [Pg.100] မာတာပိတိတော စ ပသိဒ္ဓေါ, သိဒ္ဓတ္ထောတိ ဂဟိတနာမေန စ ပသိဒ္ဓေါ. ဘဝန္တိ စတြ – वास्तविक पाहता, पारमितांनी परिपूर्ण, स्वयंभू ज्ञानाने वासनेसह सर्व क्लेशांचा समूळ नाश केलेले, महाकरुणा आणि सर्वज्ञता-ज्ञानादी अपरिमित गुणांचे आधार असलेले पंचस्कंधांचे प्रवाह म्हणजेच 'स्वयंभू' होय. अशी ही स्कंध-संतती जगात 'अग्रपुद्गल' (सर्वश्रेष्ठ पुरुष) म्हटली जाते. भगवंतांनी म्हटलेच आहे - 'भिक्खूहो, जगात उत्पन्न होणारा एकच असा अद्भुत मनुष्य उत्पन्न होतो. तो एक पुद्गल कोणता? भिक्खूहो, तो म्हणजे अर्हत सम्यक्संबुद्ध तथागत होय.' तो एक पुद्गल सध्या 'सर्वज्ञ, सुगत' इत्यादी यथार्थ गुणांवरून प्राप्त झालेल्या नावांनी प्रसिद्ध आहे, गोत्रावरून 'गोतम' आणि 'आदिच्चबंधू' म्हणून प्रसिद्ध आहे, कुलावरून 'सक्यपुत्त' (शाक्यपुत्र), 'सक्क' (शाक्य), 'सक्यमुनि' (शाक्यमुनी), 'सक्यसीह' (शाक्यसिंह), 'सक्यपुंगव' (शाक्यश्रेष्ठ) म्हणून प्रसिद्ध आहे, माता-पित्यावरून 'शुद्धोदनपुत्र' आणि 'मायादेवीपुत्र' म्हणून प्रसिद्ध आहे, आणि ठेवलेल्या नावावरून 'सिद्धत्थ' (सिद्धार्थ) म्हणून प्रसिद्ध आहे. याविषयी खालील गाथा आहेत – ယော ဧကပုဂ္ဂလော အာသိ, ဗုဒ္ဓေါ သော ဝဒတံ ဝရော; ဂေါတ္တတော ဂေါတမော နာမ, တထေဝါဒိစ္စဗန္ဓု စ. जे अद्वितीय पुरुष होते, ते वक्तांमध्ये श्रेष्ठ बुद्ध; गोत्राने 'गोतम' आणि तसेच 'आदिच्चबंधू' (सूर्यबंधू) म्हणून ओळखले जातात. သကျကုလေ ပသူတတ္တာ, သကျပုတ္တောတိ ဝိဿုတော; သက္ကော ဣတိ စ အဝှိတော, တထာ သကျမုနီတိ စ. शाक्य कुळात जन्मल्यामुळे 'सक्यपुत्त' (शाक्यपुत्र) म्हणून प्रसिद्ध झाले; त्यांना 'सक्क' (शाक्य) आणि तसेच 'सक्यमुनि' (शाक्यमुनी) असेही म्हटले जाते. သဗ္ဗတ္ထ သေဋ္ဌဘာဝေန, သကျေ စ သေဋ္ဌဘာဝတော; သကျသီဟောတိ သော သကျ-ပုင်္ဂဝေါတိ စ သမ္မတော. सर्व ठिकाणी श्रेष्ठ असल्यामुळे आणि शाक्यांमध्येही श्रेष्ठ असल्यामुळे, त्यांना 'सक्यसीह' (शाक्यसिंह) आणि 'सक्यपुंगव' (शाक्यश्रेष्ठ) मानले गेले आहे. သုဒ္ဓေါဒနီတိ ပိတိတော, နဘေ စန္ဒောဝ ဝိဿုတော; မာတိတောပိ စ သညာတော, မာယာဒေဝီသုတော ဣတိ. पित्यावरून आकाशातील चंद्राप्रमाणे 'शुद्धोदनी' (शुद्धोदनपुत्र) म्हणून प्रसिद्ध झाले; आणि मातेवरूनही 'मायादेवीसुत' (मायादेवीपुत्र) म्हणून ओळखले गेले. သဗ္ဗညူ သုဂတော ဗုဒ္ဓေါ, ဓမ္မရာဇာ တထာဂတော; သမန္တဘဒ္ဒေါ ဘဂဝါ, ဇိနော ဒသဗလော မုနိ. सर्वज्ञ, सुगत, बुद्ध, धम्मराजा, तथागत, समंतभद्र (सर्व बाजूंनी कल्याणकारी), भगवंत, जिन (विजेता), दसबल (दशबलधारी) आणि मुनी. သတ္ထာ ဝိနာယကော နာထော,မုနိန္ဒော လောကနာယကော; နရာသဘော လောကဇိနော,သမ္ဗုဒ္ဓေါ ဒွိပဒုတ္တမော. शास्ता (शिक्षक), विनायक (मार्गदर्शक), नाथ, मुनिंद (मुनींद्र), लोकनायक, नरासभ (मनुष्यांमध्ये श्रेष्ठ), लोकजिन (जगाला जिंकणारे), संबुद्ध आणि द्विपदुत्तम (द्विपदांमध्ये सर्वश्रेष्ठ). ဒေဝဒေဝေါ လောကဂရု, ဓမ္မဿာမီ မဟာမုနိ; သမန္တစက္ခု ပုရိသ-ဒမ္မသာရထိ မာရဇိ. देवदेव, लोकगुरू, धम्मस्वामी, महामुनी, समंतचक्खू (सर्वद्रष्टे), पुरिसदम्मसारथी (दमनाचा योग्य पुरुषांचे सारथी) आणि मारजी (मारावर विजय मिळवणारे). ဓမ္မိဿရော စ အဒွေဇ္ဈ-ဝစနော သတ္ထဝါဟကော; ဝိသုဒ္ဓိဒေဝေါ ဒေဝါတိ-ဒေဝေါ စ သမဏိဿရော. धम्मीसर (धम्मेश्वर), अद्वैधवचन (सत्यवचनी), सत्थवाह (सार्थवाह), विसुद्धिदेव (विशुद्ध देव), देवातिदेव आणि समणिस्सर (श्रमणांचे ईश्वर). ဘူရိပညော’နဓိဝရော, နရသီဟော စ စက္ခုမာ; မုနိမုနိ နရဝရော, ဆဠဘိညော ဇနေ သုတော. भूरिपञ्ञ (विशाल प्रज्ञेचे), अनधिवर (सर्वश्रेष्ठ), नरसिंह, चक्खुमा (ज्ञानचक्षू असलेले), मुनिमुनी (मुनींचे मुनी), नरवर (मनुष्यांमध्ये श्रेष्ठ), आणि लोकांमध्ये 'छळभिञ्ञ' (षडभिज्ञ) म्हणून प्रसिद्ध. အင်္ဂီရသော ယတိရာဇာ, လောကဗန္ဓု’မတန္ဒဒေါ; ဝတ္တာ ပဝတ္တာ သဒ္ဓမ္မ-စက္ကဝတ္တီ ယတိဿရော. अंगीरस, यतिराज, लोकबंधू, अमतंदद (अमृत देणारे), वक्ता, प्रवर्तक, सद्धम्म-चक्कवत्ती (सद्धम्म-चक्रवर्ती) आणि यतीश्वर. လောကဒီပေါ [Pg.101] သိရီဃနော, သမဏိန္ဒော နရုတ္တမော; လောကတ္တယဝိဒူ လောက-ပဇ္ဇောတော ပုရိသုတ္တမော. लोकदीप, सिरीघन (श्रीघन), समणिंद (श्रमणेंद्र), नरुत्तम (मनुष्यांमध्ये उत्तम), लोकत्तयविदू (त्रिलोकज्ञ), लोकपज्जोत (लोकप्रदीप) आणि पुरिसुत्तम (पुरुषोत्तम). သစ္စဒသော သတပုည-လက္ခဏော သစ္စသဝှယော; ရဝိဗန္ဓာ’သမသမော, ပဉ္စနေတ္တ’ဂ္ဂပုဂ္ဂလော. सच्चदसो (सत्य पाहणारे), शतपुण्यलक्षण (शंभर पुण्यांची लक्षणे असलेले), सच्चसव्य (सत्यनाम), रविबंधू (सूर्यबंधू), असमसमी (अतुलनीय), पंचनेत्र आणि अग्रपुद्गल (सर्वश्रेष्ठ पुरुष). သဗ္ဗာဘိဘူ သဗ္ဗဝိဒူ, သစ္စနာမော စ ပါရဂူ; ပုရိသာတိသယော သဗ္ဗ-ဒဿာဝီ နရသာရထိ. सब्बाभिभू (सर्वविजेते), सब्बविदू (सर्वज्ञ), सच्चनाम (सत्यनाम), पारगू (पारंगत), पुरिसातिसय (अतिमानव), सब्बदस्सावी (सर्वद्रष्टे) आणि नरसारथी. သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဣတိ သော, ဉာတော သတ္တုတ္တမောတိ စ; တာဒီ ဝိဘဇ္ဇဝါဒီတိ, မဟာကာရုဏိကောတိ စ. ते 'सम्यक्संबुद्ध' आणि 'सत्तुत्तम' (प्राण्यांमध्ये श्रेष्ठ) म्हणून ओळखले जातात; तसेच 'तादी' (समता बाळगणारे), 'विभज्जवादी' (विश्लेषणवादी) आणि 'महाकारुणिक' म्हणूनही प्रसिद्ध आहेत. စက္ခုဘူတော ဓမ္မဘူတော, ဉာဏဘူတောတိ ဝဏ္ဏိတော; ဗြဟ္မဘူတောတိ ပုရိသာ-ဇညော ဣတိ စ ထောမိတော. त्यांचे 'चक्खुभूत' (ज्ञानचक्षूरूप), 'धम्मभूत' (धम्मरूप), 'ञाणभूत' (ज्ञानरूप) म्हणून वर्णन केले गेले आहे; आणि 'ब्रह्मभूत' (श्रेष्ठरूप) व 'पुरिसाजञ्ञ' (पुरुषश्रेष्ठ) म्हणून त्यांची स्तुती केली गेली आहे. လောကဇေဋ္ဌော သယမ္ဘူ စ, မဟေသိ မာရဘဉ္ဇနော; အမောဃဝစနော ဓမ္မ-ကာယော မာရာဘိဘူ ဣတိ. लोकजेठ्ठ (लोकांमध्ये ज्येष्ठ), स्वयंभू, महेसी (महर्षी), मारभंजन (माराचा नाश करणारे), अमोघवचन (सत्यवचनी), धम्मकाय आणि माराभिभू (मारावर विजय मिळवणारे) असे त्यांना म्हटले जाते. အသင်္ချေယျာနိ နာမာနိ, သဂုဏေန မဟေသိနော; နာမံ ဂုဏေဟိ နိဿိတံ, ကော ကဝိန္ဒော ကထေဿတိ. त्या महान महर्षींच्या गुणांनुसार त्यांची असंख्य नावे आहेत; नावे गुणांवर आधारित असतात, कोणता कवीश्वर ती सर्व सांगू शकेल? တတြ သဗ္ဗညု ဣစ္စာဒိ-နာမံ သာဓာရဏံ ဘဝေ; သဗ္ဗေသာနမ္ပိ ဗုဒ္ဓါနံ, ဂေါတမော ဣတိအာဒိ န. त्यामध्ये 'सर्वज्ञ' इत्यादी नावे सर्व बुद्धांसाठी सामायिक आहेत, परंतु 'गोतम' इत्यादी नावे तशी नाहीत. ဗုဒ္ဓေါ ပစ္စေကဗုဒ္ဓေါ စ, ‘‘သယမ္ဘူ’’ဣတိ သာသနေ; ကေစိ ‘‘ဗြဟ္မာ သယမ္ဘူ’’တိ, သာသနာဝစရံ န တံ. बुद्ध शासनात बुद्ध आणि प्रत्येकबुद्ध यांना 'स्वयंभू' म्हटले जाते; काही लोक 'ब्रह्मा स्वयंभू आहे' असे म्हणतात, परंतु ते बुद्ध शासनाला धरून नाही. ‘‘ဗုဒ္ဓေါ တထာဂတော သတ္ထာ, ဘဂဝါ’’တိ ပဒါနိ တု; ဌာနေနေကသဟဿမှိ, သဉ္စရန္တိ အဘိဏှသော. परंतु 'बुद्ध, तथागत, शास्ता, भगवंत' हे शब्द हजारो ठिकाणी वारंवार येतात. တတြ စာဒိပဒံ အန္တ-ပဒဉ္စေဝ ဣမာနိ တု; ဧကတောပိ စရန္တီတိ, ဝိဘာဝေယျ ဝိသာရဒေါ. त्यामध्ये पहिले पद आणि शेवटचे पद, तसेच ही पदे एकत्रही येतात, हे विद्वानांनी स्पष्टपणे समजून घ्यावे. ဝိသေသကပဒါနံ တု, အပေက္ခကပဒါနိ စ; အနပေက္ခပဒါနီတိ, ပဒါနိ ဒုဝိဓာ သိယုံ. विशेषक पदांचे (विशेषणांचे) दोन प्रकार असू शकतात: अपेक्षक पदे (सापेक्ष) आणि अनपेक्षक पदे (निरपेक्ष). တထာ [Pg.102] ဟိ သတ္ထဝါဟော နရဝရော ဆဠဘိညောတိ ဧဝံပကာရာနိ အဘိဓာနပဒါနိ ဝိသေသကပဒါပေက္ခကာနိ. ကထံ? तसेच 'सत्थवाह' (सार्थवाह), 'नरवर' (मनुष्यश्रेष्ठ), 'छळभिञ्ञ' (षडभिज्ञ) यांसारखी अभिधान पदे (नावे) विशेषक पदांची अपेक्षा ठेवणारी असतात. ती कशी? ‘‘ဧဝံ ဝိဇိတသင်္ဂါမံ, သတ္ထဝါဟံ အနုတ္တရံ; သာဝကာ ပယိရုပါသန္တိ, တေဝိဇ္ဇာ မစ္စုဟာယိနော. “अशा प्रकारे, युद्ध जिंकलेल्या, सर्वश्रेष्ठ सार्थवाहाची (मार्गदर्शकाची), मृत्यूला जिंकणारे आणि त्रिविद्य (तीन विद्या प्राप्त) असलेले श्रावक उपासना करतात. ယံ လောကော ပူဇယတေ,သလောကပါလော သဒါ နမဿတိ စ; တဿေတ သာသနဝရံ,ဝိဒူဟိ ဉေယျံ နရဝရဿာ’’တိ, ज्यांची जग पूजा करते आणि लोकपालांसह सर्वजण ज्यांना नेहमी नमस्कार करतात; त्या नरवराचे (मनुष्यश्रेष्ठाचे) हे श्रेष्ठ शासन विद्वानांनी जाणून घ्यावे.” ‘‘ဆဠဘိညဿ သာသန’’န္တိ စ ဧဝံ ဝိသေသကပဒါပေက္ခကာနိ ဘဝန္တိ. ဗုဒ္ဓေါ ဇိနော ဘဂဝါတိ ဧဝံပကာရာနိ ပန နော ဝိသေသကာပေက္ခာနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. आणि “छळभिञ्ञस्स सासनं” (षडभिज्ञांचे शासन) याप्रमाणे ही पदे विशेषक पदांची अपेक्षा ठेवणारी असतात. परंतु 'बुद्ध, जिन, भगवंत' यांसारखी पदे विशेषकाची अपेक्षा न ठेवणारी असतात, असे समजावे. ကေစိ ပနေတ္ထ ဧဝံ ဝဒေယျုံ ‘‘မုနိန္ဒော သမဏိန္ဒော သမဏိဿရော ယတိဿရော အာဒိစ္စဗန္ဓု ရဝိဗန္ဓူတိ ဧဝံပကာရာနံ ဣဓ ဝုတ္တာနမဘိဓာနာနံ ဝိသေသတ္ထာဘာဝတော ပုနရုတ္တိဒေါသော အတ္ထီ’’တိ. တန္န, အဘိဓာနာနံ အဘိသင်္ခရဏီယာနဘိသင်္ခရဏီယဝသေန အဘိသင်္ခတာဘိဓာနာနိ အနဘိသင်္ခတာဘိဓာနာနီတိ ဒွေဓာ ဒိဿနတော. တထာ ဟိ ကတ္ထစိ ကေစိ ‘‘သကျသီဟော’’တိ အဘိဓာနံ ပဋိစ္စ ‘‘သကျကေသရီ သကျမိဂါဓိပေါ’’တိအာဒိနာ နာနာဝိဝိဓမဘိဓာနမဘိသင်္ခရောန္တိ, ပါဝစနေပိ ဟိ ‘‘ဒွိဒုဂ္ဂမဝရဟနုတ္တ’မလတ္ထာ’’တိ ပါဌော ဒိဿတိ. တထာ ကေစိ ‘‘ဓမ္မရာဇာ’’တိ အဘိဓာနံ ပဋိစ္စ ‘‘ဓမ္မဒိသမ္ပတီ’’တိအာဒီနိ အဘိသင်္ခရောန္တိ. ‘‘သဗ္ဗညူ’’တိ အဘိဓာနံ ပဋိစ္စ ‘‘သဗ္ဗဒဿာဝီ သဗ္ဗဒဿီ’’တိအာဒီနိ အဘိသင်္ခရောန္တိ, ‘‘သဟဿက္ခော’’တိ အဘိဓာနံ ပဋိစ္စ ‘‘ဒသသတလောစနော’’တိအာဒီနိ အဘိသင်္ခရောန္တိ. ‘‘အာဒိစ္စဗန္ဓူ’’တိ အဘိဓာနံ ပဋိစ္စ ‘‘အရဝိန္ဒသဟာယဗန္ဓူ’’တိအာဒီနိ အဘိသင်္ခရောန္တိ. ‘‘အမ္ဗုဇ’’န္တိ အဘိဓာနံ ပဋိစ္စ ‘‘နီရဇံ ကုဉ္ဇ’’န္တိအာဒီနိ အဘိသင်္ခရောန္တိ. ပါဝစနေပိ ဟိ [Pg.103] ယံ ပဒုမံ, တံ ဇလဇံ နာမာတိ မန္တွာ ပဋိသမ္ဘိဒါပ္ပတ္တေဟိ အရိယေဟိ ဒေသနာဝိလာသဝသေန ဝုတ္တော ‘‘ပဒုမုတ္တရနာမိနော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗဋ္ဌာနေ ‘‘ဇလဇုတ္တရနာမိနော’’တိ ပါဌော ဒိဿတိ. ဧဝံ အဘိသင်္ခတာဘိဓာနာနိ ဒိဿန္တိ. यावर काही लोक असे म्हणू शकतात की, 'मुनिंद, समणिंद, समणिस्सर, yatiस्सर, आदिच्चबंधू, रविबंधू इत्यादी येथे सांगितलेल्या नावांमध्ये काही विशेष अर्थ नसल्यामुळे पुनरुक्ती दोष आहे.' पण तसे नाही, कारण नावांचे रचना करण्यायोग्य आणि रचना न करण्यायोग्य अशा दोन प्रकारांनी 'अभिसंखत' (रचित) आणि 'अनभिसंखत' (मूळ) असे दोन भेद दिसून येतात. जसे की, काही ठिकाणी काही लोक 'सक्यसीह' (शाक्यसिंह) या नावाच्या आधारे 'सक्यकेसरी', 'सक्यमिगाधिप' (शाक्यमृगाधिप) इत्यादी विविध नावांची रचना करतात. बुद्धवचनातही (पावचनात) “द्विदुग्गमवरहनुत्त’मलत्था” असा पाठ आढळतो. तसेच काही लोक 'धम्मराजा' या नावाच्या आधारे 'धम्मदिसंपती' इत्यादी नावांची रचना करतात. 'सर्वज्ञ' या नावाच्या आधारे 'सब्बदस्सावी' (सर्वद्रष्टा), 'सब्बदस्सी' इत्यादी नावांची रचना करतात. 'सहस्सक्ख' (सहस्राक्ष) या नावाच्या आधारे 'दससतलोचन' इत्यादी नावांची रचना करतात. 'आदिच्चबंधू' या नावाच्या आधारे 'अरविंदसहायबंधू' इत्यादी नावांची रचना करतात. 'अंबुज' या शब्दाच्या आधारे 'नीरज', 'कुंज' इत्यादी शब्दांची रचना करतात. बुद्धवचनातही जे 'पदुम' (कमळ) आहे, तेच 'जलज' (पाण्यात जन्मणारे) आहे असे मानून, प्रतिसंभिदा प्राप्त अरहंतांनी देशनेच्या वैविध्यासाठी 'पदुमुत्तरनामिस्स' (पदुमुत्तर नावाच्या) असे म्हणण्याऐवजी 'जलजुत्तरनामिस्स' (जलजुत्तर नावाच्या) असा पाठ वापरलेला दिसतो. अशा प्रकारे रचित (अभिसंखत) नावे दिसून येतात. ‘‘ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ’’တိ အဘိဓာနာနိ ပန အနဘိသင်္ခတာဘိဓာနာနိ. ဝုတ္တဉှေတံ ဓမ္မသေနာပတိနာ အာယသ္မတာ သာရိပုတ္တေန ‘‘ဗုဒ္ဓေါတိ နေတံ နာမံ မာတရာ ကတံ, န ပိတရာ ကတံ, န ဘဂိနိယာ ကတံ, န ဉာတိသာလောဟိတေဟိ ကတံ, န ဒေဝတာဟိ ကတံ, ဝိမောက္ခန္တိကမေတံ ဗုဒ္ဓါနံ ဘဂဝန္တာနံ ဗောဓိယာ မူလေ သဟ သဗ္ဗညုတညာဏပ္ပဋိလာဘာ သစ္ဆိကာ ပညတ္တိ ယဒိဒံ ဗုဒ္ဓေါ’’တိ, တထာ ‘‘ဘဂဝါတိ နေတံ နာမံ မာတရာ ကတံ…ပေ… သစ္ဆိကာ ပညတ္တိ ယဒိဒံ ဘဂဝါ’’တိ. ဧဝံ ‘‘ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ’’တိ အဘိဓာနာနိ အနဘိသင်္ခတာဘိဓာနာနိ. န ဟိ တာနိ အဘိဓာနာနိ စေဝ ‘‘သတ္ထာ သုဂတော ဇိနော’’တိအာဒီနိ စ အညံ ကိဉ္စိ အဘိဓာနံ ပဋိစ္စ အဘိသင်္ခတာနိ, နာပိ အညာနိ အဘိဓာနာနိ ဧတာနိ ပဋိစ္စ အဘိသင်္ခတာနိ ဒိဿန္တိ. တထာ ဟိ ‘‘ဗုဒ္ဓေါ’’တိ အဘိဓာနံ ပဋိစ္စ ‘‘ဗုဇ္ဈိတာ ဗောဓေတာ ဗောဓကော’’တိအာဒီနိ နာမာဘိဓာနာနိ န အဘိသင်္ခရောန္တိ. တထာ ‘‘ဘဂဝါ သတ္ထာ သုဂတော’’တိအာဒီနိ နာမာဘိဓာနာနိ ပဋိစ္စ ‘‘သမ္ပန္နဘဂေါ အနုသာသကော သုန္ဒရဝစနော’’တိအာဒီနိ နာမာဘိဓာနာနိ နာဘိသင်္ခရောန္တိ. ဧဝံ ဣမံ ဝိဘာဂံ ဒဿေတုံ ‘‘မုနိန္ဒော သမဏိန္ဒော သမဏိဿရော ယတိဿရော အာဒိစ္စဗန္ဓု ရဝိဗန္ဓူ’’တိအာဒိနာ နယေန ပုနရုတ္တိ အမှေဟိ ကတာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. ဧဝမညတြာပိ နယော နေတဗ္ဗော. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – “बुद्ध” आणि “भगवा” ही नावे अनभिसंखत (अकृत्रिम किंवा स्वाभाविक) नावे आहेत. कारण धम्मसेनापती आयुष्यमान सारिपुत्तांनी म्हटले आहे की, “बुद्ध हे नाव आईने ठेवलेले नाही, वडिलांनी ठेवलेले नाही, बहिणीने ठेवलेले नाही, नातेवाईक आणि सगोत्रांनी ठेवलेले नाही, देवतांनी ठेवलेले नाही. हे बुद्ध भगवंतांचे विमोक्षाच्या (मुक्तीच्या) अंतिम क्षणी, बोधिवृक्षाच्या मुळाशी सर्वज्ञता-ज्ञानाच्या प्राप्तीसोबतच झालेले प्रत्यक्ष प्रकटीकरण (सच्छिका पण्णत्ति) आहे, जे ‘बुद्ध’ या नावाने ओळखले जाते.” तसेच, “भगवा हे नाव आईने ठेवलेले नाही... पे... प्रत्यक्ष प्रकटीकरण आहे, जे ‘भगवा’ या नावाने ओळखले जाते.” अशा प्रकारे “बुद्ध” आणि “भगवा” ही नावे अनभिसंखत नावे आहेत. कारण ही नावे आणि “सत्था (शास्ता), सुगत, जिन” इत्यादी इतर कोणतीही नावे इतर कोणत्याही नावावर अवलंबून तयार झालेली (अभिसंखत) नाहीत, आणि इतर कोणतीही नावे या नावांवर अवलंबून तयार झालेली दिसत नाहीत. तसेच, “बुद्ध” या नावावर अवलंबून “बुज्झिता (जाणणारा), बोधेता (जाणून देणारा), बोधक” इत्यादी नाम-अभिधाने तयार होत नाहीत. तसेच “भगवा, सत्था, सुगत” इत्यादी नाम-अभिधानांवर अवलंबून “संपन्नभग (ऐश्वर्यसंपन्न), अनुशासक, सुंदरवचन” इत्यादी नाम-अभिधाने तयार होत नाहीत. अशा प्रकारे हा भेद दर्शवण्यासाठी “मुनिंद (मुनींद्र), समणिंद (श्रमणींद्र), समणिस्सर (श्रमणेश्वर), यतिस्सर (यतीश्वर), आदिच्चबंधु (आदित्यबंधू), रविबंधू” इत्यादी पद्धतीने आमच्याद्वारे पुनरुक्ती केली गेली आहे, असे समजावे. इतर ठिकाणीही असाच नियम लावावा. याविषयी असे म्हटले आहे – ‘‘အဘိသင်္ခတနာမဉ္စ, နာမဉ္စာနဘိသင်္ခတံ; ဒွိဒုဂ္ဂမဝရော ဗုဒ္ဓေါ, ဣတိ နာမံ ဒွိဓာ ဘဝေ’’တိ. “अभिसंखत (कृत्रिम) नाव आणि अनभिसंखत (अकृत्रिम) नाव; दोन दुर्गम (संसारसागर) पार केलेले श्रेष्ठ बुद्ध, अशा प्रकारे हे नाव दोन प्रकारचे होते.” ပဘူတိ ပရံ ပသယှ ဘဝတီတိ ပဘူ, ဣဿရော. ‘‘အရညဿ ပဘူ အယံ လုဒ္ဒကော’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. အဘိဘူတိ [Pg.104] အဘိဘဝတီတိ အဘိဘူ, အသညသတ္တော. ကိံ သော အဘိဘဝိ? စတ္တာရော ခန္ဓေ အရူပိနော. ဣတိ စတ္တာရော ခန္ဓေ အရူပိနော အဘိဘဝီတိ အဘိဘူ. သော စ ခေါ နိစ္စေတနတ္တာ အဘိဘဝနကြိယာယာသတိ ပုဗ္ဗေဝါ’သညုပ္ပတ္တိတော ဈာနလာဘိကာလေ အတ္တနာ အဓိဂတပဉ္စမဇ္ဈာနံ သညာဝိရာဂဝသေန ဘာဝေတွာ စတ္တာရော အရူပက္ခန္ဓေ အသညိဘဝေ အပ္ပဝတ္တိကရဏေန အဘိဘဝိတုမာရဘိ, တဒဘိဘဝနကိစ္စံ ဣဒါနိ သိဒ္ဓန္တိ အဘိဘဝီတိ အဘိဘူတိ ဝုစ္စတိ. အပိစ နိစ္စေတနဘာဝေန အဘိဘဝနဗျာပါရေ အသတိပိ ပုဗ္ဗေ သစေတနကာလေ သဗျာပါရတ္တာ သစေတနဿ ဝိယ နိစ္စေတနဿာပိ သတော တဿ ဥပစာရေန သဗျာပါရတာဝစနံ ယုဇ္ဇတေဝ. ဒိဿတိ ဟိ လောကေ သာသနေ စ သစေတနဿ ဝိယ အစေတနဿပိ ဥပစာရေန သဗျာပါရတာဝစနံ. တံ ယထာ? ကူလံ ပတိတုကာမံ, ဧဝံ လောကေ. သာသနေ ပန – ‘प्रभू’ म्हणजे दुसऱ्यावर प्रभाव पाडून राहणारा, स्वामी (ईश्वर). “हा शिकारी अरण्याचा प्रभू (स्वामी) आहे” हे वाक्य या अर्थाचे साधक (सिद्ध करणारे) आहे. ‘अभिभू’ म्हणजे पराभूत करणारा, असंज्ञसत्त (संज्ञाहीन प्राणी). त्याने कशाला पराभूत केले? चार अरूप स्कंधांना. अशा प्रकारे चार अरूप स्कंधांना पराभूत केले म्हणून तो ‘अभिभू’ होय. तो अचेतन असल्यामुळे पराभूत करण्याची क्रिया नसतानाही, पूर्वी असंज्ञ अवस्थेत उत्पन्न होण्यापूर्वी, ध्यान प्राप्तीच्या वेळी स्वतः प्राप्त केलेल्या पाचव्या ध्यानाचा संज्ञेच्या विरागाद्वारे (वैराग्याद्वारे) अभ्यास करून, चार अरूप स्कंधांना असंज्ञ भवात अप्रवृत्त (अक्रिय) करून पराभूत करण्यास सुरुवात केली; ते पराभूत करण्याचे कार्य आता सिद्ध झाले आहे, म्हणून ‘पराभूत केले’ या अर्थाने त्याला ‘अभिभू’ म्हटले जाते. शिवाय, अचेतन असल्यामुळे पराभूत करण्याचा व्यापार (क्रिया) नसला तरी, पूर्वी सचेतन असताना क्रियाशील असल्यामुळे, सचेतन प्राण्याप्रमाणेच अचेतन असलेल्या त्याच्यासाठीही उपचाराने (लाक्षणिक अर्थाने) क्रियाशीलतेचे वचन योग्यच ठरते. कारण लोकव्यवहारात आणि शासनात (बुद्धवचनात) सचेतनाप्रमाणेच अचेतनासाठीही उपचाराने क्रियाशीलतेचे वचन दिसून येते. ते कसे? जसे लोकव्यवहारात “काठ कोसळू इच्छितो” (कोसळण्याच्या बेतात आहे). आणि शासनात (बुद्धवचनात) तर – ‘‘ရောဒန္တေ ဒါရကေ ဒိသွာ, ဥဗ္ဗိဂ္ဂါ ဝိပုလာ ဒုမာ; သယမေဝေါနမိတွာန, ဥပဂစ္ဆန္တိ ဒါရကေ’’တိ စ “रडणाऱ्या मुलांना पाहून व्याकुळ झालेले मोठे वृक्ष स्वतःच खाली वाकून मुलांच्या जवळ जातात” आणि ‘‘အင်္ဂါရိနော ဒါနိ ဒုမာ ဘဒန္တေ, ဖလေသိနော ဆဒနံ ဝိပ္ပဟာယာ’’တိ စ ‘‘ဖလံ တောသေတိ ကဿက’’န္တိ စ အာဒိ. အဘိဘူသဒ္ဒဿ အသညသတ္တာဘိဓာနတ္တေ ‘‘အဘိဘုံ အဘိဘုတော မညတီ’’တိ ဣဒမေတ္ထ သာဓကံ ဝစနံ. အထ ဝါ အဘိဘဝတီတိ အဘိဘူ, ပရေသမဘိဘဝိတာ ယော ကောစိ. ဝိသေသတော ပန တထာဂတောယေဝ အဘိဘူ. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ ‘‘တထာဂတော ဘိက္ခဝေ အဘိဘူ အနဘိဘူတော အညဒတ္ထုဒသော ဝသဝတ္တီ’’တိ. ကေစိ ပန ‘‘အဘိဘူ နာမ သဟဿော ဗြဟ္မာ’’တိ ဝဒန္တိ. “भदंत! आता वृक्ष कोळशासारखे (लाल फुलांनी युक्त) झाले आहेत, फळांची इच्छा करणारे ते पानांचा त्याग करत आहेत” आणि “फळ शेतकऱ्याला संतुष्ट करते” इत्यादी. ‘अभिभू’ हा शब्द असंज्ञसत्त (संज्ञाहीन प्राणी) या अर्थाचा वाचक आहे, यासाठी “अभिभूला पराभूत मानतो” हे वाक्य येथे साधक (प्रमाण) आहे. अथवा, जो पराभूत करतो तो ‘अभिभू’ होय, म्हणजेच इतरांना पराभूत करणारा कोणीही. परंतु विशेषतः तथागतच ‘अभिभू’ आहेत. कारण भगवंतांनी म्हटले आहे की, “भिक्खूंनो! तथागत हे अभिभू (सर्वांना पराभूत करणारे), अनभिभूत (कोणाकडूनही पराभूत न होणारे), सर्वद्रष्टे आणि वशवर्ती (सर्वांवर नियंत्रण ठेवणारे) आहेत.” काही लोक मात्र “अभिभू नावाचा सहस्र (हजार) ब्रह्मा आहे” असे म्हणतात. ဝိဘူတိ ဝိသေသဘူတောတိ ဝိဘူ, ‘‘ဘဝသောတံ သစေ ဗုဒ္ဓေါ, တိဏ္ဏော လောကန္တဂူ ဝိဘူ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ [Pg.105] ဝစနံ. ဝိဘူတိ ဟေတ္ထ ရူပကာယဓမ္မကာယသမ္ပတ္တိယာ ဝိသေသဘူတောတိ အတ္ထော. အာဟ စ – ‘विभू’ म्हणजे विशेष रूपाने अस्तित्वात असलेला तो विभू. “जर बुद्ध भवप्रवाह पार करून गेलेले, लोकांतगू (लोकांचा अंत गाठलेले) आणि विभू आहेत...” हे वाक्य या अर्थाचे साधक आहे. येथे ‘विभू’ म्हणजे रूपकाय आणि धम्मकाय यांच्या संपत्तीने (समृद्धीने) विशेष झालेला, असा अर्थ आहे. आणि म्हटलेही आहे – ‘‘ဒိဿမာနောပိ တာဝဿ, ရူပကာယော အစိန္တိယော; အသာဓာရဏဉာဏဋ္ဌေ, ဓမ္မကာယေ ကထာဝ ကာ’’တိ. “त्यांचा प्रत्यक्ष दिसणारा रूपकाय देखील अचिंत्य आहे; मग असाधारण ज्ञानयुक्त धम्मकायाविषयी काय बोलावे!” အဓိဘူတိ အဓိဘဝတီတိ အဓိဘူ, ဣဿရော. ‘अधिभू’ म्हणजे अधिभूत (अधिष्ठित) करणारा किंवा पराभूत करणारा, स्वामी (ईश्वर). ‘‘တဒါ မံ တပတေဇေန, သန္တတ္တော တိဒိဝါဓိဘူ; ဓာရေန္တော ဗြာဟ္မဏံ ဝဏ္ဏံ, ဘိက္ခာယ မံ ဥပါဂမီ’’တိ – “तेव्हा माझ्या तपाच्या तेजाने संतप्त झालेला, त्रिदिवाचा (स्वर्गाचा) अधिभू (स्वामी) ब्राह्मणाचे रूप धारण करून माझ्याकडे भिक्षेसाठी आला” – ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ပတိဘူတိ ပတိဘူတောတိ ပတိဘူ, ‘‘ဂေါဏဿ ပတိဘူ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဂေါတြဘူတိ ဂေါတ္တသင်္ခါတံ အမတမဟာနိဗ္ဗာနံ အာရမ္မဏံ ကတွာ ဘူတောတိ ဂေါတြဘူ, သောတာပတ္တိမဂ္ဂဿ အနန္တရပစ္စယေန သိခါပ္ပတ္တဗလဝဝိပဿနာစိတ္တေန သမန္နာဂတော ပုဂ္ဂလော. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ ‘‘ကတမော စ ပုဂ္ဂလော ဂေါတြဘူ? ယေသံ ဓမ္မာနံ သမနန္တရာ အရိယဓမ္မဿ အဝက္ကန္တိ ဟောတိ, တေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ပုဂ္ဂလော ဂေါတြဘူ’’တိ, ဣဒမေဝေတ္ထ အတ္ထသာဓကံ ဝစနံ. အပိစ သမဏောတိ ဂေါတ္တမတ္တမနုဘဝမာနော ကာသာဝကဏ္ဌသမဏောပိ ဂေါတြဘူ. သော ဟိ ‘‘သမဏော’’တိ ဂေါတ္တမတ္တံ အနုဘဝတိ ဝိန္ဒတိ, န သမဏဓမ္မေ အတ္တနိ အဝိဇ္ဇမာနတ္တာတိ ‘‘ဂေါတြဘူ’’တိ ဝုစ္စတိ, ‘‘ဘဝိဿန္တိ ခေါ ပနာနန္ဒ အနာဂတမဒ္ဓါနံ ဂေါတြဘုနော ကာသာဝကဏ္ဌာ ဒုဿီလာ ပါပဓမ္မာ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဝတြဘူတိ သက္ကော. သော ဟိ မာတာပိတိဘရဏာဒီဟိ သတ္တဟိ ဝတ္တေဟိ သက္ကတ္တံ လဘိတွာ အညေ ဒေဝေ ဝတ္တေန အဘိဘဝတီတိ ဝတြဘူ. အာဂမဋ္ဌကထာယံ ပန ဘူဓာတုမှိ လဗ္ဘမာနံ ပတ္တိအတ္ထမ္ပိ ဂဟေတွာ ‘‘ဝတ္တေန အညေ အဘိဘဝိတွာ ဒေဝိဿရိယံ ပတ္တောတိ ဝတြဘူ’’တိ [Pg.106] ဝုတ္တံ, ‘‘ဝတြနာမကံ ဝါ အသုရံ အဘိဘဝတီတိ ဝတြဘူ’’တိ စ, ‘‘ဝတြဘူ ဇယတံပိတာ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဧတ္ထ ဟိ ဝတြဘူတိ ဝတြနာမကဿ အသုရဿ အဘိဘဝိတာ. ဇယတံ ပိတာတိ ဇယန္တာနံ ပိတာ. ‘‘သက္ကော ဣန္ဒော ပုရိန္ဒဒေါ’’ ဣစ္စာဒိ ပရိယာယဝစနံ. ဣဒံ တု ဓာတာဓိကာရေ ပကာသေဿာမ. ပရာဘိဘူတိ ပရမဘိဘဝတီတိ ပရာဘိဘူ. ဧဝံ ရူပါဘိဘူတိအာဒီသုပိ. သဗ္ဗာဘိဘူတိ သဗ္ဗမဘိဘဝိတဗ္ဗံ အဘိဘဝတီတိ သဗ္ဗာဘိဘူ. သဗ္ဗာဘိဘူတိ စ ဣဒံ နာမံ တထာဂတဿေဝ ယုဇ္ဇတိ. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ – हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. 'पतिभू' म्हणजे प्रतिभू (जामीनदार). 'गोणाचा (बैलाचा) प्रतिभू' हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. 'गोत्रभू' म्हणजे गोत्रसंज्ञक अशा अमृत महानिर्वाणाला आलंबन करून जो उत्पन्न झाला आहे तो गोत्रभू होय; जो सोतापत्तिमार्गाच्या अनंतरप्रत्ययाने (तात्कालिक कारणाने) शिखाप्राप्त (सर्वोच्च) बलवान विपश्यनाचित्ताने युक्त असलेला पुद्गल (व्यक्ती) आहे. भगवंतांनी असे म्हटले आहे की, 'आणि कोणता पुद्गल गोत्रभू आहे? ज्या धर्मांच्या लगेचच नंतर आर्यधर्माची अवक्रांती (प्रवेश) होते, त्या धर्मांनी युक्त असलेला पुद्गल गोत्रभू होय.' हेच येथे अर्थसाधक वचन आहे. शिवाय, 'श्रमण' अशा केवळ गोत्राचा (नावाचा) अनुभव घेणारा, गळ्यात काषाय वस्त्र धारण करणारा श्रमण (काषावकंठ श्रमण) देखील गोत्रभू आहे. कारण तो स्वतःमध्ये श्रमणधर्माचा अभाव असल्यामुळे केवळ 'श्रमण' या गोत्राचाच अनुभव घेतो, प्राप्त करतो, म्हणून त्याला 'गोत्रभू' म्हटले जाते. 'हे आनंदा, भविष्यकाळात काषाय वस्त्र गळ्यात घालणारे, दुःशील आणि पापी धर्माचे गोत्रभू होतील,' हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. 'वत्रभू' म्हणजे शक्र (इंद्र). तो माता-पित्यांचे भरण-पोषण इत्यादी सात व्रतांमुळे शक्रत्व प्राप्त करून इतर देवांना आपल्या व्रताने पराभूत करतो, म्हणून तो 'वत्रभू' होय. आगम-अट्ठकथेत मात्र 'भू' धातूपासून मिळणारा 'प्राप्ती' हा अर्थही घेऊन, 'व्रताने इतरांना पराभूत करून देव-ऐश्वर्य प्राप्त केलेला तो वत्रभू' असे म्हटले आहे, आणि 'वत्र नावाच्या असुराला पराभूत करतो म्हणून वत्रभू' असेही म्हटले आहे. 'वत्रभू जयतांपिता' हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. येथे 'वत्रभू' म्हणजे वत्र नावाच्या असुराचा पराभव करणारा. 'जयतांपिता' म्हणजे जिंकणाऱ्यांचा पिता. 'शक्र, इंद्र, पुरिंदद' इत्यादी त्याचे पर्यायवाची शब्द आहेत. हे आम्ही धातूच्या अधिकारात स्पष्ट करू. 'पराभिभू' म्हणजे दुसऱ्याला पराभूत करतो तो पराभिभू. याचप्रमाणे रूपाभिभू इत्यादी शब्दांमध्येही समजावे. 'सर्वाभिभू' म्हणजे सर्व अभिभवनीय गोष्टींना पराभूत करतो तो सर्वाभिभू. आणि 'सर्वाभिभू' हे नाव केवळ तथागतांनाच शोभते. भगवंतांनी असे म्हटले आहे की - ‘‘သဗ္ဗာဘိဘူ သဗ္ဗဝိဒူဟမသ္မိ,သဗ္ဗေသု ဓမ္မေသု အနူပလိတ္တော; သဗ္ဗဉ္ဇဟော တဏှက္ခယေ ဝိမုတ္တော,သယံ အဘိညာယ ကမုဒ္ဒိသေယျ’’န္တိ. मी सर्वाभिभू (सर्वांना जिंकणारा) आणि सर्वविद् (सर्व जाणणारा) आहे, सर्व धर्मांमध्ये अलिप्त आहे; सर्व काही त्यागलेला, तृष्णाक्षयामुळे विमुक्त झालेला आहे. स्वतःच (परम सत्य) जाणून घेतल्यावर मी कोणाला (माझा गुरु म्हणून) निर्देशित करू? ဦကာရန္တပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. နိယတပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသောယံ. ऊ-कारान्त पुल्लिंगी निर्देश. हा नियत पुल्लिंगी निर्देश आहे. ဣဒါနိ အနိယတလိင်္ဂါနံ နိယတလိင်္ဂေသု ပက္ခိတ္တာနံ ဘူတပရာဘူတ သမ္ဘူတသဒ္ဒါဒီနံ နိဒ္ဒေသော ဝုစ္စတိ. တတြ ဘူတောတိ အတ္တနော ပစ္စယေဟိ အဘဝီတိ ဘူတော, ဘူတောတိ ဇာတော သဉ္ဇာတော နိဗ္ဗတ္တော အဘိနိဗ္ဗတ္တော ပါတုဘူတော, ဘူတောတိ ဝါ လဒ္ဓသရူပေါ ယော ကောစိ သဝိညာဏကော ဝါ အဝိညာဏကော ဝါ. အထ ဝါ တထာကာရေန ဘဝတီတိ ဘူတော, ဘူတောတိ သစ္စော တထော အဝိတထော အဝိပရီတော ယော ကောစိ, ဧတ္ထ ယော ဘူတသဒ္ဒေါ သစ္စတ္ထော, တဿ ‘‘ဘူတဋ္ဌော’’တိ ဣဒမေတ္ထ သာဓကံ ဝစနံ. ပရာဘူတောတိ ပရာဘဝီတိ ပရာဘူတော. သုဋ္ဌု ဘူတောတိ သမ္ဘူတော. ဝိသေသေန ဘူတောတိ ဝိဘူတော. ဝိဿုတော ဘူတောတိ ဝါ ဝိဘူတော, ‘‘ဝိဘူတာရမ္မဏ’’န္တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဝိဘဝီတိ ဝါ ဝိဘူတော, ဝိနဋ္ဌောတိ အတ္ထော, ‘‘ရူပေ ဝိဘူတေ န ဖုသန္တိ ဖဿာ’’တိ [Pg.107] ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ပါကဋော ဘူတောတိ ပါတုဘူတော. အာဝိ ဘဝတီတိ အာဝိဘူတော. ဧဝံ တိရောဘူတော. ဝိနာဘူတော. ဘဝိတုမနုစ္ဆဝိကောတိ ဘဗ္ဗော. ပရိဘဝိယတေ သောတိ ပရိဘူတော. ယေန ကေနစိ ယော ပီဠိတော ဟီဠိတော ဝါ, သော ပရိဘူတော. ဂမျမာနတ္ထော ယထာကာမစာရီ. အဘိဘဝိယျတေ သောတိ အဘိဘူတော. အဓိဘဝိယတေ သောတိ အဓိဘူတော. ဧဝံ အဒ္ဓဘူတော. ဧတ္ထ အဓိသဒ္ဒေန သမာနတ္ထော အဒ္ဓသဒ္ဒေါ, ‘‘စက္ခု ဘိက္ခဝေ အဒ္ဓဘူတံ, ရူပါ အဒ္ဓဘူတာ, စက္ခုဝိညာဏံ အဒ္ဓဘူတ’’န္တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ, တထာ ‘‘ဣဓ ဘိက္ခဝေ ဘိက္ခု န ဟေဝ အနဒ္ဓဘူတံ အတ္တာနံ န အဒ္ဓဘာဝေတီ’’တိ ပဒမ္ပိ. တတ္ထ အနဒ္ဓဘူတန္တိ ဒုက္ခေန အနဓိဘူတံ. ဒုက္ခေန အနဓိဘူတော နာမ မနုဿတ္တဘာဝေါ ဝုစ္စတိ, တံ န အဒ္ဓဘာဝေတိ နာဘိဘဝတီတိ သုတ္တပဒတ္ထော. आता नियत लिंगांमध्ये समाविष्ट केलेल्या अनियत लिंगी अशा 'भूत', 'पराभूत', 'संभूत' इत्यादी शब्दांचा निर्देश केला जात आहे. त्यामध्ये 'भूत' म्हणजे आपल्या प्रत्ययांनी (कारणांनी) जो उत्पन्न झाला तो भूत होय. 'भूत' म्हणजे जन्मलेला, उत्पन्न झालेला, निर्वृत्त (प्रकट) झालेला, अभिनिर्वृत्त झालेला, प्रादुर्भूत झालेला. किंवा 'भूत' म्हणजे ज्याने स्वरूप प्राप्त केले आहे असा कोणताही सविज्ञाणक (सजीव) किंवा अविज्ञाणक (निर्जीव) पदार्थ. अथवा त्या प्रकारे जो होतो तो 'भूत' होय. 'भूत' म्हणजे सत्य, तथ्य, avitath (अपरिवर्तित), अविपरीत असा कोणताही. येथे जो 'भूत' शब्द सत्य या अर्थाने आहे, त्याचे 'भूतत्थ' (सत्यार्थ) हे येथे साधक वचन आहे. 'पराभूत' म्हणजे ज्याचा पराभव झाला तो पराभूत. चांगल्या प्रकारे उत्पन्न झालेला तो 'संभूत'. विशेष रूपाने उत्पन्न झालेला तो 'विभूत'. किंवा प्रसिद्ध झालेला तो 'विभूत'. 'विभूतारम्मण' (स्पष्ट आलंबन) हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. किंवा नष्ट झाला तो 'विभूत', नष्ट झालेला असा अर्थ आहे. 'रूप नष्ट झाल्यावर स्पर्श स्पर्श करत नाहीत' हे या अर्थाचे साधक वचन आहे. प्रकट झालेला तो 'प्रादुर्भूत'. प्रकट होतो तो 'आविर्भूत'. याचप्रमाणे तिरोभूत (अदृश्य झालेला), विनाभूत (वियुक्त झालेला). होण्यास योग्य असलेला तो 'भव्य' (भब्ब). ज्याचा परिभव (अपमान) केला जातो तो 'परिभूत'. ज्या कोणाकडून जो पीडित किंवा निंदित केला गेला आहे, तो परिभूत होय. गम्यमान अर्थ असलेला तो यथाकामचारी (स्वेच्छेने वागणारा). जो पराभूत केला जातो तो 'अभिभूत'. ज्याच्यावर अधिभव (अधिकार/अभिभव) केला जातो तो 'अधिभूत'. याचप्रमाणे 'अद्धभूत'. येथे 'अधि' शब्दाशी समान अर्थ असलेला 'अद्ध' शब्द आहे. 'हे भिक्खूहो, चक्षू अद्धभूत (अधिभूत/पीडित) आहे, रूपे अद्धभूत आहेत, चक्षूविज्ञान अद्धभूत आहे' हे या अर्थाचे साधक वचन आहे, तसेच 'येथे भिक्खूहो, भिक्खू अनद्धभूत अशा स्वतःला अद्धभावित करत नाही' हे पद देखील आहे. त्यामध्ये 'अनद्धभूत' म्हणजे दुःखाने अनधिभूत (न ग्रासलेला). दुःखाने अनधिभूत म्हणजे मनुष्य-आत्मभाव (मनुष्य जन्म) म्हटला जातो, त्याला तो अद्धभावित करत नाही म्हणजे पराभूत करत नाही, असा या सूत्राचा अर्थ आहे. အနုဘဝိယတေ သောတိ အနုဘူတော. ဧဝံ သမနုဘူတော. ပစ္စနုဘူတော. ဘာဝိတော. ဧတ္ထ ဘာဝိတောတိ ဣမိနာ သမာနာဓိကရဏံ ‘‘သတိသမ္ဗောဇ္ဈင်္ဂေါ ခေါ ကဿပ မယာ သမ္မဒက္ခာတော ဘာဝိတော’’တိအာဒီသု ဂုဏီဝါစကံ ပဓာနပဒံ သာသနေ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. တိတ္ထိယသမယေ ပန ဘာဝိတောတိ ကာမဂုဏော ဝုစ္စတိ. ဝုတ္တဉှေတံ ပါဠိယံ ‘‘န ဘာဝိတမာသီသတီ’’တိ. တတြ ဘာဝိတာ နာမ ပဉ္စ ကာမဂုဏာ, တေ န အာသီသတိ န သေဝတီတိ သုတ္တပဒတ္ထော. သမ္ဘာဝိယတေ သောတိ သမ္ဘာဝိတော. ဧဝံ ဝိဘာဝိတော. ပရိဘာဝိတော. အနုပရိဘူတော. မနံပရိဘူတောတိ မနံ ပရိဘဝိယိတ္ထ သောတိ မနံပရိဘူတော. ဧတ္ထ မနံပရိဘူတောတိ ဤသကံ အပ္ပတ္တပရိဘဝနော ဝုစ္စတိ. မနန္တိ ဟိ နိပါတပဒံ. ‘‘အတိပဏ္ဍိတေန ပုတ္တေန, မနမှိ ဥပကူလိတော, ဒေဝဒတ္တေန အတ္တနော အဗုဒ္ဓဘာဝေန စေဝ ခန္တိမေတ္တာဒီနဉ္စ [Pg.108] အဘာဝေန ကုမာရကဿပတ္ထေရော စ ထေရီ စ မနံ နာသိတော, မနံ ဝုဠှော အဟောသီ’’တိအာဒီသု စဿ ပယောဂေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. အတြ မနံသဒ္ဒဿ ကိဉ္စိ ယုတ္တိံ ဝဒါမ. ज्याचा अनुभव घेतला जातो तो 'अनुभूत'. याचप्रमाणे समनुभूत, पच्चनुभूत (प्रत्यनुभूत), भावित. येथे 'भावित' या शब्दाशी सामानाधिकरण्य केलेले 'हे कस्सप, माझ्याद्वारे सतिसंबोज्झंग (स्मृतिसंबोध्यंग) चांगल्या प्रकारे आख्यात (सांगितलेला) आणि भावित (विकसित केलेला) आहे' इत्यादी वाक्यांमधील गुणीवाचक प्रधान पद बुद्धशासनात पाहावे. तीर्थिकांच्या (इतर पंथीयांच्या) सिद्धांतात मात्र 'भावित' म्हणजे कामगुण म्हटले जाते. पाळीमध्ये असे म्हटले आहे की, 'भावितची आकांक्षा करत नाही.' तेथे 'भावित' म्हणजे पाच कामगुण आहेत, त्यांची तो आकांक्षा करत नाही, त्यांचे सेवन करत नाही, असा या सूत्राचा अर्थ आहे. ज्याचा आदर केला जातो तो 'संभावित'. याचप्रमाणे विभावित, परिभावित, अनुपरिभूत. 'मनां-परिभूत' म्हणजे ज्याचा थोडा परिभव (अपमान) झाला तो मनां-परिभूत. येथे 'मनां-परिभूत' म्हणजे थोडासा झालेला परिभव म्हटला जातो. 'मनां' (manaṃ) हे निपात पद आहे. 'अतिपंडित पुत्राने, मी थोडा भाजला गेलो,' 'देवदत्ताने स्वतःच्या अबुद्धभावामुळे (अज्ञानामुळे) आणि क्षान्ती-मैत्री इत्यादींच्या अभावामुळे कुमारकस्सप थेर आणि थेरी यांना थोडे नष्ट केले, थोडे वाहून नेले,' इत्यादी वाक्यांमध्ये याचा प्रयोग समजून घ्यावा. येथे 'मनां' शब्दाचे काही स्पष्टीकरण आम्ही सांगतो. မနံသဒ္ဒေါ ဒွိဓာ ဘိန္နော, နာမံ နေပါတိကဉ္စိတိ; သန္တံ တဿ မနံ ဟောတိ, မနမှိ ဥပကူလိတောတိ. 'मनां' शब्द दोन प्रकारे विभागला गेला आहे - नाम आणि निपात; 'त्याचे मन शांत असते' (येथे 'मन' हे नाम आहे) आणि 'मी थोडा भाजला गेलो' (येथे 'मनां' हे निपात आहे). ပရိဘဝိတဗ္ဗောတိ အညေန ပရိဘဝိတုံ သက္ကုဏေယျောတိ ပရိဘဝိတဗ္ဗော. ဧဝံ ပရိဘောတ္တဗ္ဗော ပရိဘဝနီယော. တဗ္ဗပစ္စယဋ္ဌာနေ ဟိ သက္ကုဏေယျပဒယောဇနာ ဒိဿတိ ‘‘အလဒ္ဓံ အာရမ္မဏံ လဒ္ဓဗ္ဗံ လဘနီယံ လဒ္ဓုံ ဝါ သက္ကုဏေယျ’’န္တိ. အထ ဝါ ပရိဘဝနမရဟတီတိ ပရိဘဝိတဗ္ဗော. ဧဝံ ပရိဘောတ္တဗ္ဗော ပရိဘဝနီယော. တထာ ဟိ တဗ္ဗပစ္စယဋ္ဌာနေ အရဟတိပဒယောဇနာ ဒိဿတိ ‘‘ပရိသက္ကုဏေယျံ လာဘမရဟတီတိ လဒ္ဓဗ္ဗ’’န္တိ. ဧတ္ထ ပန ပရိဘောတ္တဗ္ဗောတိ ပဒဿ အတ္ထိဘာဝေ ‘‘ခတ္တိယော ခေါ မဟာရာဇ ဒဟရောတိ န ဥညာတဗ္ဗော န ပရိဘောတ္တဗ္ဗော’’တိ ပါဠိ နိဒဿနံ. အဘိအဓိပုဗ္ဗာ ဘူဓာတုယော သမာနတ္ထာ. သေသာနိ ဒုကာနိ နယာနုသာရေန ဉေယျာနိ. ဘမာနောတိ ဘဝတီတိ ဘမာနော, မဇ္ဈေ ဝကာရလောပေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အတြိဒံ ဝတ္တဗ္ဗံ – 'परिभवितब्बो' म्हणजे दुसऱ्याद्वारे तिरस्कृत (अपमानित) केले जाण्यास योग्य तो 'परिभवितब्बो' होय. याचप्रमाणे 'परिभोत्तब्बो' आणि 'परिभवनीयो' हे शब्द आहेत. कारण 'तब्ब' प्रत्ययाच्या स्थानी 'सक्कुणेय्य' (शक्य असणे) या पदाची योजना दिसून येते, जसे की - 'न मिळालेले आलम्बन मिळवण्यास योग्य (लद्धब्बं), मिळवण्यासारखे (लभनीयं) किंवा मिळवणे शक्य असणारे (लद्धुं वा सक्कुणेय्यं)'. अथवा, तिरस्कारास पात्र असणारा तो 'परिभवितब्बो' होय. याचप्रमाणे 'परिभोत्तब्बो' आणि 'परिभवनीयो' हे शब्द आहेत. कारण 'तब्ब' प्रत्ययाच्या स्थानी 'अरहति' (पात्र असणे) या पदाची योजना दिसून येते, जसे की - 'प्राप्त करण्यास योग्य अशा लाभाला मिळवण्यास पात्र असणे म्हणजे लद्धब्बं'. येथे 'परिभोत्तब्बो' या पदाच्या अस्तित्वाविषयी 'खत्तियो खो महाराज दहरोति न उञ्ञातब्बो न परिभोत्तब्बो' (हे महाराजा! क्षत्रिय तरुण असला तरी त्याचा अनादर करू नये, त्याचा तिरस्कार करू नये) हे पाळीचे उदाहरण आहे. 'अभि' आणि 'अधि' उपसर्गपूर्वक 'भू' धातू समान अर्थाचे आहेत. उर्वरित द्विक (जोड्या) नियमांनुसार समजून घ्याव्यात. 'भमानो' म्हणजे जो होतो (भवति) तो 'भमानो' होय, येथे मध्यभागी 'व' काराचा लोप झाला आहे असे समजावे. येथे हे सांगणे आवश्यक आहे - ‘‘ကိံ သော ဘမာနော သစ္စကော’’, ဣစ္စတြ ပါဠိယံ ပန; ရူပံ ဘဝတိဓာတုဿ, ဝလောပေနေဝ ဒိဿတိ. “किं सो भमानो सच्चको” (तो सच्चक काय होत आहे/भ्रमण करत आहे का?), या पाळीमध्ये 'भवति' धातूचे रूप 'व' काराच्या लोपानेच दिसून येते. အတြာယံ ပါဠိ ‘‘ကိံ သော ဘမာနော သစ္စကော နိဂဏ္ဌပုတ္တော, ယော ဘဂဝတော ဝါဒံ အာရောပေဿတီ’’တိ. ဝိဘဝမာနောတိ ဝိဘဝတီတိ ဝိဘဝမာနော. ဧဝံ ပရိဘဝမာနောတိအာဒီသု. တတ္ထ ‘‘အဘိသမ္ဘောန္တော’’တိမဿ ကရောန္တော နိပ္ဖာဒေန္တော ဣစ္စေဝတ္ထော. ‘‘သဗ္ဗာနိ အဘိသမ္ဘောန္တော, သ ရာဇဝသတိံ ဝသေ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ယသ္မာ ပနိမာနိ [Pg.109] ‘‘ဘဝမာနော’’တိအာဒီနိ ဝိပ္ပကတပစ္စတ္တဝစနာနိ, တသ္မာ သရမာနော ရောဒတိ, ဂစ္ဆန္တော ဂဏှာတိ, ‘‘ဂစ္ဆန္တော သော ဘာရဒွါဇော, အဒ္ဒသ အစ္စုတံ ဣသိ’’န္တိအာဒီနိ ဝိယ ပရိပုဏ္ဏုတ္တရကြိယာပဒါနိ ကတွာ ရာဇာ ဘဝမာနော သမ္ပတ္တိမနုဘဝတီတိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ‘‘သရမာနော ဂစ္ဆန္တော’’တိအာဒီနိ ဟိ ‘‘ယာတော ဂတော ပတ္တော’’တိအာဒီဟိ သဒိသာနိ န ဟောန္တိ, ဥတ္တရကြိယာပဒါပေက္ခကာနိ ဟောန္တိ တွာပစ္စယန္တပဒါနိ ဝိယာတိ. येथे ही पाळी अशी आहे - 'किं सो भमानो सच्चको निगण्ठपुत्तो, यो भगवतो वादं आरोपेस्सती' (तो निगण्ठपुत्र सच्चक काय होत आहे, जो भगवंतांवर वाद लादणार आहे?). 'विभवमानो' म्हणजे जो नष्ट होतो किंवा ऐश्वर्यवान होतो तो 'विभवमानो' होय. याचप्रमाणे 'परिभवमानो' इत्यादी शब्दांमध्ये समजावे. तेथे 'अभिसम्भोन्तो' याचा अर्थ 'करणारा' किंवा 'उत्पन्न करणारा' असा आहे. 'सब्बानि अभिसम्भोन्तो, स राजवसतिं वसे' (सर्व गोष्टी पूर्ण करत त्याने राजवाड्यात राहावे) हे वचन या अर्थाचे साधक (सिद्ध करणारे) आहे. परंतु, ज्याअर्थी हे 'भवमानो' इत्यादी शब्द अपूर्ण वर्तमानकृदन्त (विप्पकतपच्चत्तवचन) आहेत, त्याअर्थी 'स्मरण करत रडतो', 'जात असताना पकडतो', किंवा 'जात असताना त्या भारद्वाजाने अच्युत ऋषींना पाहिले' इत्यादींप्रमाणे पूर्ण उत्तर-क्रियापदे जोडून 'राजा होत असताना संपत्तीचा उपभोग घेतो' इत्यादी प्रकारे योजना करावी. कारण 'सरमानो' (स्मरण करत), 'गच्छन्तो' (जात असताना) इत्यादी शब्द 'यातो' (गेलेला), 'गतो' (गेलेला), 'पत्तो' (पोहोचलेला) इत्यादींसारखे नसतात, तर ते 'त्वा' प्रत्ययान्त शब्दांप्रमाणे उत्तर-क्रियापदाची अपेक्षा ठेवणारे असतात. ပရိဘဝိယမာနောတိ ပရိဘဝိယတေ သောတိ ပရိဘဝိယမာနော. ဧဝံ ပရိဘုယျမာနောတိအာဒီသုပိ. ဣမာနိပိ ဝိပ္ပကတပစ္စတ္တဝစနာနိ, တသ္မာ ‘‘ရာဇပုရိသေဟိ နီယမာနော စောရော ဧဝံ စိန္တေသီ’’တိအာဒီနိ ဝိယ ပရိပုဏ္ဏုတ္တရကြိယာပဒါနိ ကတွာ အညေဟိ ပရိဘဝိယမာနော တာဏံ ဂဝေသတိ. ဘောဂေါ ပုဂ္ဂလေနာနုဘဝိယမာနော ပရိက္ခယံ ဂစ္ဆတီတိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဧဝံ သဗ္ဗတြ ဤဒိသေသု ဝိပ္ပကတဝစနေသု ယောဇေတဗ္ဗာနိ. အယံ အနိယတလိင်္ဂါနံ နိယတလိင်္ဂေသု ပက္ခိတ္တာနံ ဘူတ ပရာဘူတ သမ္ဘူတသဒ္ဒါနံ နိဒ္ဒေသော. ဣစ္စေဝံ ပုလ္လိင်္ဂါနံ ဘူဓာတုမယာနံ ယထာရဟံ နိဗ္ဗစနာဒိဝသေန နိဒ္ဒေသော ဝိဘာဝိတော. 'परिभवियमानो' म्हणजे ज्याचा तिरस्कार केला जातो तो 'परिभवियमानो' होय. याचप्रमाणे 'परिभुय्यमानो' इत्यादी शब्दांमध्येही समजावे. हे शब्द देखील अपूर्ण वर्तमानकृदन्त (विप्पकतपच्चत्तवचन) आहेत, म्हणून 'राजपुरुषांद्वारे नेला जाणारा चोर असा विचार करू लागला' इत्यादींप्रमाणे पूर्ण उत्तर-क्रियापदे जोडून 'इतरांकडून तिरस्कृत केला जात असताना तो संरक्षणाचा शोध घेतो' अशी योजना करावी. 'मनुष्याद्वारे उपभोगला जाणारा भोग क्षयाला जातो' इत्यादी प्रकारे योजना करावी. अशा प्रकारे सर्वत्र यांसारख्या अपूर्ण वर्तमानकृदन्त शब्दांमध्ये योजना करावी. हा अनियत लिंग असणाऱ्या आणि नियत लिंगांमध्ये समाविष्ट केलेल्या 'भूत', 'पराभूत', 'सम्भूत' या शब्दांचा निर्देश आहे. अशा प्रकारे पुल्लिंगी, 'भू' धातूपासून बनलेल्या शब्दांचा योग्यतेनुसार व्युत्पत्ती इत्यादींच्या द्वारे निर्देश स्पष्ट केला आहे. ဣဒါနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော ဝုစ္စတိ – တတြ ဘာဝိကာတိ ဘာဝေတီတိ ဘာဝိကာ. ယာ ဘာဝနံ ကရောတိ, သာ ဘာဝိကာ. ဘာဝနာတိ ဝဍ္ဎနာ ဗြူဟနာ ဖာတိကရဏံ အာသေဝနာ ဗဟုလီကာရော. ဝိဘာဝနာတိ ပကာသနာ သန္ဒဿနာ. အထ ဝါ ဝိဘာဝနာတိ အဘာဝနာ အန္တရဓာပနာ. သမ္ဘာဝနာတိ ဥက္ကံသနာ ထောမနာ. ပရိဘာဝနာတိ ဝါသနာ, သမန္တတော ဝါ ဝဍ္ဎနာ. အာကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. आता स्त्रीलिंगी शब्दांचा निर्देश केला जात आहे - तेथे 'भाविका' म्हणजे जी भावना करते (भावेति) ती 'भाविका' होय. जी भावना करते ती 'भाविका' होय. 'भावना' म्हणजे वाढवणे, वृद्धी करणे, विपुल करणे, वारंवार सराव करणे, बहुलीकरण करणे होय. 'विभावना' म्हणजे प्रकट करणे, स्पष्ट दाखवणे होय. अथवा 'विभावना' म्हणजे अभाव करणे, नाहीसे करणे होय. 'संभावना' म्हणजे आदर करणे, प्रशंसा करणे होय. 'परिभावना' म्हणजे सुवासित करणे किंवा सर्व बाजूंनी वाढवणे होय. हा आकारांत स्त्रीलिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. ဘူမီတိ သတ္တာယမာနာ ဘဝတီတိ ဘူမိ, အထ ဝါ ဘဝန္တိ ဇာယန္တိ ဝဍ္ဎန္တိ စေတ္ထ ထာဝရာ စ ဇင်္ဂမာ စာတိ ဘူမိ. ဘူမိ ဝုစ္စတိ [Pg.110] ပထဝီ. ‘‘ပဌမာယ ဘူမိယာ ပတ္တိယာ’’တိအာဒီသု ပန လောကုတ္တရမဂ္ဂေါ ဘူမီတိ ဝုစ္စတိ. ယာ ပနန္ဓဗာလမဟာဇနေန ဝိညာတာ ပထဝီ, တဿိမာနိ အဘိဓာနာနိ – 'भूमी' म्हणजे जी अस्तित्वात असते ती 'भूमी' होय, अथवा ज्या ठिकाणी स्थावर आणि जंगम (सजीव-निर्जीव) प्राणी उत्पन्न होतात आणि वाढतात ती 'भूमी' होय. भूमीला 'पृथ्वी' असे म्हटले जाते. परंतु 'पठमाय भूमिया पत्तिया' (पहिल्या भूमीच्या प्राप्तीसाठी) इत्यादी वाक्यांमध्ये लोकोत्तर मार्गाला 'भूमी' असे म्हटले जाते. जी सामान्य अज्ञानी लोकांद्वारे जाणली गेलेली पृथ्वी आहे, तिची ही नावे आहेत - ‘‘ပထဝီ မေဒနီ ဘူမိ, ဘူရီ ဘူ ပုထုဝီ မဟီ; ဆမာ ဝသုမတီ ဥဗ္ဗီ, အဝနီ ကု ဝသုန္ဓရာ; ဇဂတီ ခိတိ ဝသုဓာ, ဓရဏီ ဂေါ ဓရာ’’ဣတိ. “पथवी, मेदनी, भूमी, भूरी, भू, पुथुवी, मही, छमा, वसुमती, उब्बी, अवनी, कु, वसुन्धरा, जगती, खिति, वसुधा, धरणी, गो, धरा” ही पृथ्वीची नावे आहेत. အတြ ဘူ ကု ဂေါသဒ္ဒါ ပထဝီပဒတ္ထေ ဝတ္တန္တီတိ ကုတြ ဒိဋ္ဌပုဗ္ဗာတိ စေ? येथे 'भू', 'कु' आणि 'गो' हे शब्द पृथ्वी या अर्थामध्ये वापरले जातात, हे पूर्वी कोठे पाहिले गेले आहे काय? असा प्रश्न विचारल्यास - ဝိဒွါ ဘူပါလ ကုမုဒ-ဂေါရက္ခာဒိပဒေသု ဝေ; ဘူ ကု ဂေါဣတိ ပထဝီ, ဝုစ္စတီတိ ဝိဘာဝယေ. विद्वानांनी 'भूपाल' (राजा), 'कुमुद' (कमळ), 'गोरक्ख' (गोपाळ/गायींचे रक्षण करणारा) इत्यादी शब्दांमध्ये 'भू', 'कु' आणि 'गो' हे शब्द पृथ्वी या अर्थाचेच आहेत, असे स्पष्टपणे समजून घ्यावे. ဘူတီတိ ဘဝနံ ဘူတိ. ဝိဘူတီတိ ဝိနာသော, ဝိသေသတော ဘဝနံ ဝါ, အထ ဝါ ဝိသေသတော ဘဝန္တိ သတ္တာ ဧတာယာတိ ဝိဘူတိ, သမ္ပတ္တိယေဝ, ‘‘ရညော ဝိဘူတိ. ပိဟနီယာ ဝိဘူတိယော’’တိ စ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ဣကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. 'भूती' म्हणजे असणे किंवा समृद्धी होय. 'विभूती' म्हणजे विनाश, किंवा विशेष रूपाने असणे, अथवा ज्याच्याद्वारे प्राणी विशेष रूपाने समृद्ध होतात ती 'विभूती' म्हणजे संपत्तीच होय. 'रञ्ञो विभूति' (राजाचे ऐश्वर्य) आणि 'पिहनीया विभूतियो' (इच्छा करण्यायोग्य संपत्ती) हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. हा इकारांत स्त्रीलिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. ဘူရီတိ ပထဝီ. သာ ဟိ ဘဝန္တိ ဧတ္ထာတိ ဘူရီတိ ဝုစ္စတိ, ဘဝတိ ဝါ ပညာယတိ ဝဍ္ဎတိ စာတိ ဘူရီ, အထ ဝါ ဘူတာဘူတာ တန္နိဿိတာ သတ္တာ ရမန္တိ ဧတ္ထာတိ ဘူရီ. ပထဝီနိဿိတာ ဟိ သတ္တာ ပထဝိယံယေဝ ရမန္တိ, တသ္မာ သာ ဣမိနာပိ အတ္ထေန ဘူရီတိ ဝုစ္စတိ. ဘူရီသဒ္ဒဿ ပထဝီဝစနေ ‘‘ဘူရိပညော’’တိ အတ္ထသာဓကံ ဝစနံ. အပိစ ဘူရီ ဝိယာတိ ဘူရီ, ပညာ, ဘူရီတိ ပထဝီသမာယ ဝိတ္ထတာယ ပညာယ နာမံ, ‘‘ယောဂါ ဝေ ဇာယတီ ဘူရီ, အယောဂါ ဘူရိသင်္ခယော’’တိ ဧတ္ထ အဋ္ဌကထာဝစနံ ဣမဿတ္ထဿ သာဓကံ. အထ ဝါ ဘူတေ အတ္ထေ ရမတီတိ ဘူရီ, ပညာယေတံ နာမံ, ‘‘ဘူရီ မေဓာ ပရိဏာယိကာ’’တိ ဧတ္ထ [Pg.111] အဋ္ဌကထာဝစနံ ဣမဿတ္ထဿ သာဓကံ. အထ ဝါ ပညာယေဝ ရာဂါဒယော ဓမ္မေ အဘိဘဝတီတိ ဘူရီ, ရာဂါဒိအရယော အဘိဘဝတီတိပိ ဘူရီ. တထာ ဟိ ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂေ အာယသ္မတာ သာရိပုတ္တေန ဝုတ္တံ ‘‘ရာဂံ အဘိဘူယတီတိ ဘူရီ, ပညာ. ဒေါသံ မောဟံ…ပေ… ရာဂေါ အရိ, တံ အရိံ မဒ္ဒတီတိ ဘူရီ, ပညာ. ဒေါသော. မောဟော…ပေ… သဗ္ဗေ ဘဝဂါမိနော ကမ္မာ အရိ, တံ အရိံ မဒ္ဒတီတိ ဘူရီ, ပညာ’’. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဂေါတြဘူ’’တိ ပဒမိဝ ‘‘အရိဘူ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေပိ ဘူသဒ္ဒံ ပုဗ္ဗနိပါတံ ကတွာ သန္ဓိဝသေန ဘူရီတိ ပဒမုစ္စာရိတန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အပိစ ဤဒိသေသု နာမိကပဒေသု ဝိနာပိ ဥပသဂ္ဂေန အဘိဘဝနာဒိအတ္ထာ လဗ္ဘန္တိယေဝ, နာချာတိကပဒေသူတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣဒံ ပန ပညာယ ပရိယာယဝစနံ – 'भूरी' म्हणजे पृथ्वी होय. कारण तिच्यावर सर्व प्राणी राहतात (भवन्ति एत्थ) म्हणून तिला 'भूरी' असे म्हणतात, किंवा ती उत्पन्न होते, ओळखली जाते आणि वाढते म्हणून ती 'भूरी' होय, अथवा अस्तित्वात असलेले व नसलेले तिच्यावर आश्रित असणारे प्राणी येथे रममाण होतात म्हणून ती 'भूरी' होय. पृथ्वीवर आश्रित असणारे प्राणी पृथ्वीवरच रमतात, म्हणून ती या अर्थानेही 'भूरी' म्हटली जाते. 'भूरी' शब्दाचा पृथ्वी या अर्थाचा साधक शब्द 'भूरिपञ्ञो' (पृथ्वीसमान विस्तीर्ण प्रज्ञा असलेला) हा आहे. शिवाय, 'भूरी' प्रमाणे असणारी ती 'भूरी' म्हणजे प्रज्ञा होय. पृथ्वीसारख्या विस्तीर्ण प्रज्ञेचे नाव 'भूरी' आहे, 'योगा वे जायती भूरी, अयोगा भूरिसङ्खयो' (योगापासून प्रज्ञा उत्पन्न होते, अयोगापासून प्रज्ञेचा क्षय होतो) या गाथेतील अट्ठकथेचे वचन या अर्थाचे साधक आहे. अथवा, जी सत्य अर्थामध्ये रमते ती 'भूरी' म्हणजे प्रज्ञा होय, 'भूरी मेधा परिणायिका' (विस्तीर्ण प्रज्ञा आणि बुद्धी मार्गदर्शक असते) या गाथेतील अट्ठकथेचे वचन या अर्थाचे साधक आहे. अथवा, प्रज्ञाच राग इत्यादी धर्मांचा पराभव करते म्हणून ती 'भूरी' होय, किंवा राग इत्यादी शत्रूंचा (अरींचा) पराभव करते म्हणूनही ती 'भूरी' होय. तसेच पटिसम्भिदामग्ग ग्रंथात आयुष्यमान सारिपुत्तांनी म्हटले आहे - 'रागाचा पराभव करते म्हणून भूरी म्हणजे प्रज्ञा होय. द्वेष, मोह... इत्यादी. राग हा शत्रू (अरी) आहे, त्या शत्रूचे मर्दन करते म्हणून भूरी म्हणजे प्रज्ञा होय. द्वेष, मोह... इत्यादी. सर्व संसारगामी कर्मे हे शत्रू आहेत, त्या शत्रूंचे मर्दन करते म्हणून भूरी म्हणजे प्रज्ञा होय.' येथे 'गोत्रभू' या शब्दाप्रमाणे 'अरिभू' असे म्हणणे योग्य असतानाही, 'भू' शब्दाला पूर्वस्थानी ठेवून संधीच्या नियमांनुसार 'भूरी' असे पद उच्चारले गेले आहे, असे समजावे. शिवाय, अशा नामवाचक शब्दांमध्ये उपसर्गाशिवायही पराभव इत्यादी अर्थ प्राप्त होतातच, क्रियापदांमध्ये नाही, असे समजावे. प्रज्ञेचे हे समानार्थी शब्द आहेत - ပညာ ပဇာနနာ စိန္တာ, ဝိစယော ဥပလက္ခဏာ; ပဝိစယော စ ပဏ္ဍိစ္စံ, ဓမ္မဝိစယမေဝ စ. प्रज्ञा (बुद्धी), पजानना (विशेष ज्ञान), चिंता (विचार), विचयो (शोध), उपलक्खणा (निरीक्षण), पविचयो (उत्कृष्ट शोध), पाण्डिच्चं (पांडित्य) आणि धम्मविचय (धर्माचा शोध) हे प्रज्ञेचे समानार्थी शब्द आहेत. သလ္လက္ခဏာ စ ကောသလ္လံ, ဘူရီ ပစ္စုပလက္ခဏာ; နေပုညဉ္စေဝ ဝေဘဗျာ, မေဓာ စုပပရိက္ခကာ. संलक्षणा (सूक्ष्म निरीक्षण) आणि कौशल्य, भूरी (विशाल प्रज्ञा) आणि प्रत्युपलक्षणा (प्रत्यक्ष परीक्षण); नैपुण्य आणि वैभव्य (विश्लेषण क्षमता), मेधा आणि उपपरीक्षा (तпасणी). သမ္ပဇညဉ္စ ပရိဏာ-ယိကာ စေဝ ဝိပဿနာ; ပညိန္ဒြိယံ ပညာဗလံ, အမောဟော သမ္မာဒိဋ္ဌိ စ; ပတောဒေါ စာဘိဓမ္မသ္မာ, ဣမာနိ ဂဟိတာနိ မေ. संपजन्य (स्पष्ट जाणीव) आणि मार्गदर्शक विपश्यना; प्रज्ञेंद्रिय, प्रज्ञाबल, अमोह आणि सम्यक् दृष्टी; आणि अभिधम्मातील प्रतोद (अंकुश), हे सर्व माझ्याद्वारे ग्रहण केले गेले आहेत. ဉာဏံ ပညာဏမုမ္မင်္ဂေါ, သတ္ထော သောတော စ ဒိဋ္ဌိ စ; မန္တာ ဗောဓော ဗုဒ္ဓိ ဗုဒ္ဓံ, ပဋိဘာနဉ္စ ဗောဓိတိ. ज्ञान, प्रज्ञान, उम्मंग (भेदक प्रज्ञा), शस्त्र, स्रोत आणि दृष्टी; मन्ता (मंत्रणा/प्रज्ञा), बोध, बुद्धी, बुद्ध आणि प्रतिभा व बोधी. ဓမ္မော ဝိဇ္ဇာ ဂတိ မောနံ, နေပက္ကံ ဂေါ မတီ မုတိ; ဝီမံသာ ယောနိ ဓောနာ စ, ပဏ္ဍာ ပဏ္ဍိစ္စယမ္ပိ စ; ဝေဒေါ ပဏ္ဍိတိယဉ္စေဝ, စိကိစ္ဆာ မိရိယာပိ စ. धम्म, विद्या, गती, मौन, नैपक्क्य (चतुरता), गो, मती, मुती (समज); वीमंसा (मीमांसा/तपासणी), योनी (योग्य विचार), धोना (शुद्धीकरण), पंडा (प्रज्ञा) आणि पांडित्य; वेद, पाण्डित्य, चिकित्सा आणि मिरीया (प्रयत्न). ‘‘သောတော ဗောဓီ’’တိ ယံ ဝုတ္တံ, ဉာဏနာမဒွယံ ဣဒံ; ဗုဒ္ဓပစ္စေကသမ္ဗုဒ္ဓ-သာဝကာနမ္ပိ ရူဟတိ. ‘स्रोत’ आणि ‘बोधी’ असे जे म्हटले गेले आहे, ही ज्ञानाची दोन नावे; बुद्ध, प्रत्येकबुद्ध आणि श्रावक यांच्यासाठीही लागू होतात. ‘‘အဘိသမ္ဗောဓိ [Pg.112] သမ္ဗောဓိ’’, ဣတိ နာမဒွယံ ပန; ပစ္စေကဗုဒ္ဓသဗ္ဗညု-ဗုဒ္ဓါနံယေဝ ရူဟတိ. परंतु ‘अभिसंबोधी’ आणि ‘संबोधी’ ही दोन नावे; केवळ प्रत्येकबुद्ध आणि सम्यक्संबुद्ध (सर्वज्ञ बुद्ध) यांच्यासाठीच लागू होतात. အဘိသမ္ဗောဓိသင်္ခါတာ, ပရမောပပဒါ ပန; ဉာဏပဏ္ဏတ္တိ သဗ္ဗညု-သမ္ဗုဒ္ဓဿေဝ ရူဟတိ. परंतु ‘अभिसंबोधी’ म्हणून ओळखली जाणारी, परम पदाला प्राप्त करून देणारी ज्ञानाची संज्ञा केवळ सर्वज्ञ सम्यक्संबुद्धांसाठीच लागू होते. သမ္မာသမ္ဗောဓိသင်္ခါတာ, အနုတ္တရပဒါဒိကာ; ဗုဒ္ဓါ ဝါ ဉာဏပဏ္ဏတ္တိ, သဗ္ဗညုဿေဝ ရူဟတိ. ‘सम्यक्संबोधी’ म्हणून ओळखली जाणारी, अनुत्तर (सर्वोच्च) पदादी किंवा ‘बुद्ध’ ही ज्ञानाची संज्ञा केवळ सर्वज्ञांसाठीच लागू होते. ‘‘သဗ္ဗညုတာ’’တိ ယံ ဝုတ္တံ, ဉာဏံ သဗ္ဗညုနောဝ တံ; ယုဇ္ဇတေ အဝသေသာ တု, ဉာဏပညတ္တိ သဗ္ဗဂါ. ‘सर्वज्ञता’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते ज्ञान केवळ सर्वज्ञांनाच लागू होते; परंतु उर्वरित ज्ञानाच्या संज्ञा सर्वांसाठी (ज्ञानवंतांसाठी) सामान्य आहेत. ဉာဏဘာဝမှိ သန္တေပိ, ဓမ္မစက္ခာဒိကံ ပန; ပယောဇနန္တရာဘာဝါ, နာတြ သန္ဒဿိတံ မယာတိ. ज्ञानाचा भाव असूनही, ‘धम्मचक्षु’ इत्यादींचा इतर प्रयोजनाच्या अभावामुळे माझ्याकडून येथे उल्लेख केला गेला नाही. ဘူတီတိ ဘူတဿ ဘရိယာ. ယထာ ဟိ ပေတဿ ဘရိယာ ‘‘ပေတီ’’တိ ဝုစ္စတိ, ဧဝမေဝ ဘူတဿ ဘရိယာ ‘‘ဘူတီ’’တိ ဝုစ္စတိ. ဘောတီတိ ယာယ သဒ္ဓိံ ကထေန္တေန သာ ဣတ္ထီ ‘‘ဘောတီ’’ ဣတိ ဝတ္တဗ္ဗာ, တသ္မာ ဣမိနာ ပဒေန ဣတ္ထီ ဝေါဟရိယတီတိ စ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ယထာ ဟိ ပုရိသေန သဒ္ဓိံ ကထေန္တေန ပုရိသော ‘‘ဘဝံ’’ ဣတိ ဝေါဟရိယတိ, ဧဝမေဝ ဣတ္ထိယာ သဒ္ဓိံ ကထေန္တေန ဣတ္ထီ ‘‘ဘောတီ’’ဣတိ ဝေါဟရိယတိ. ‘‘ကုတော နု ဘဝံ ဘာရဒွါဇော, ဣမေ အာနေသိ ဒါရကေ’’တိ, ‘‘အဟံ ဘောတိံ ဥပဋ္ဌိဿံ, မာ ဘောတီ ကုပိတာ အဟူ’’တိ စေတ္ထ နိဒဿနံ. အထ ဝါ ဣဓေကစ္စော သတ္တော ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန လဒ္ဓနာမော, သော ‘‘ဘောတီ’’ဣတိ ဝတ္တဗ္ဗော, တသ္မာ ဣမိနာ ပဒေန ဣတ္ထီပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေန လဒ္ဓနာမာ အနိတ္ထီပိ ဝေါဟရိယတီတိ စ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. တထာ ဟိ ဒေဝပုတ္တောပိ ‘‘ဒေဝတာ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဝေါဟရိတဗ္ဗတ္တာ ဒေဝတာသဒ္ဒမပေက္ခိတွာ ‘‘ဘောတီ’’ဣတိ ဝေါဟရိတော, ပဂေဝ ဒေဝဓီတာ. တထာ ဟိ ‘‘ဘောတီ စရဟိ ဇာနာတိ, တံ မေ အက္ခာဟိ ပုစ္ဆိတာ’’တိ ဧတ္ထ ပန ဒေဝတာသဒ္ဒမပေက္ခိတွာ ‘‘ဘောတီ’’ဣတိ ဣတ္ထိ လိင်္ဂဝေါဟာရော ကတော. အတြာယံ [Pg.113] သုတ္တပဒတ္ထော ‘‘ယဒိ သော ကုဟကော ဓနတ္ထိကော တာပသော န ဇာနာတိ, ဘောတီ ဒေဝတာ ပန ဇာနာတိ ကိ’’န္တိ. အပိစ – ‘भूती’ म्हणजे भूताची पत्नी. ज्याप्रमाणे प्रेताच्या पत्नीला ‘प्रेती’ म्हटले जाते, त्याचप्रमाणे भूताच्या पत्नीला ‘भूती’ म्हटले जाते. ‘भोती’ म्हणजे ज्या स्त्रीशी बोलताना तिला ‘भोती’ (आदरणीय स्त्री) असे म्हटले पाहिजे, म्हणून या पदाने स्त्रीला संबोधित केले जाते असे समजावे. ज्याप्रमाणे पुरुषाशी बोलताना पुरुषाला ‘भवं’ (महोदय) असे संबोधित केले जाते, त्याचप्रमाणे स्त्रीशी बोलताना स्त्रीला ‘भोती’ (महोदया) असे संबोधित केले जाते. ‘पूजनीय भारद्वाज हे बालक कोठून आणत आहेत?’ आणि ‘मी महोदेची सेवा करीन, महोदया रागावू नयेत’ हे याचे उदाहरण आहे. किंवा, येथे एखादा प्राणी स्त्रीलिंगी नामामुळे नाव प्राप्त करतो, त्याला ‘भोती’ म्हटले पाहिजे, म्हणून या पदाने स्त्रीलिंगी नाव प्राप्त झालेली स्त्री आणि स्त्री नसलेला (परंतु स्त्रीलिंगी नाव असलेला) देखील संबोधित केला जातो असे समजावे. कारण देवपुत्र देखील ‘देवता’ या स्त्रीलिंगी शब्दाच्या वापरामुळे ‘देवता’ शब्दाच्या अपेक्षेने ‘भोती’ असा संबोधित केला जातो, मग देवकन्येबद्दल काय सांगावे! जसे की ‘महोदया आता जाणतात का? विचारल्यावर मला सांगा’, येथे ‘देवता’ शब्दाच्या अपेक्षेने ‘भोती’ असा स्त्रीलिंगी प्रयोग केला आहे. येथे सूत्रातील पदाचा अर्थ असा आहे: ‘जर तो कपटी, धनलोभी तपस्वी जाणत नसेल, तर महोदया देवता जाणतात काय?’ आणि आणखीही – ‘‘အတ္ထကာမောသိ မေ ယက္ခ, ဟိတကာမာသိ ဒေဝတေ; ကရောမိ တေ တံ ဝစနံ, တွံသိ အာစရိယော မမာ’’တိ – “हे यक्षा, तू माझा हितचिंतक आहेस; हे देवते, तू माझी कल्याण करणारी आहेस. मी तुझे ते वचन पाळीन, तू माझा आचार्य आहेस.” – မဋ္ဌကုဏ္ဍလီဝတ္ထုသ္မိံ ပုလ္လိင်္ဂယက္ခသဒ္ဒမပေက္ခိတွာ ‘‘အတ္ထကာမော’’တိ ပုလ္လိင်္ဂဝသေန ဣတ္ထိလိင်္ဂဉ္စ ဒေဝတာသဒ္ဒမပေက္ခိတွာ ‘‘ဟိတကာမာ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ပုရိသဘူတော မဋ္ဌကုဏ္ဍလီ ဝေါဟရိတော. အညတြာပိ ဒေဝတာသဒ္ဒမပေက္ခိတွာ ဒေဝပုတ္တော ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဝေါဟရိတော – मठ्ठकुंडलीच्या कथेत, पुल्लिंगी ‘यक्ष’ शब्दाच्या अपेक्षेने ‘अत्थकामो’ (हितचिंतक) या पुल्लिंगी रूपाने आणि स्त्रीलिंगी ‘देवता’ शब्दाच्या अपेक्षेने ‘हितकामा’ (कल्याण करणारी) या स्त्रीलिंगी रूपाने, पुरुष असलेला मठ्ठकुंडली संबोधित केला गेला आहे. इतर ठिकाणीही ‘देवता’ शब्दाच्या अपेक्षेने देवपुत्राला स्त्रीलिंगी रूपाने संबोधित केले गेले आहे – ‘‘န တွံ ဗာလေ ဝိဇာနာသိ, ယထာ အရဟတံ ဝစော’’တိ; ‘‘အတ္ထကာမာသိ မေ အမ္မ, ဟိတကာမာသိ ဒေဝတေ’’တိ. “हे बाळे, अर्हतांचे वचन जसे आहे तसे तू जाणत नाहीस”; “हे अम्मा, तू माझी हितचिंतक आहेस; हे देवते, तू माझी कल्याण करणारी आहेस.” ဧတ္ထ ပန ‘‘ဧဟိ ဗာလေ ခမာပေဟိ, ကုသရာဇံ မဟဗ္ဗလ’’န္တိ ဧတ္ထ စ ဣတ္ထီယေဝ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဝေါဟရိတာ, တသ္မာ ကတ္ထစိ ဣတ္ထိပုရိသပဒတ္ထသင်္ခါတံ အတ္ထံ အနပေက္ခိတွာ လိင်္ဂမတ္တမေဝါပေက္ခိတွာ ဘောတီ ဒေဝတာ, ဘောတီ သိလာ, ဘောတီ ဇမ္ဗူ, ဘောတိံ ဒေဝတန္တိအာဒီဟိ သဒ္ဓိံ ပစ္စတ္တဝစနာဒီနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ကတ္ထစိ ပန လိင်္ဂဉ္စ အတ္ထဉ္စ အပေက္ခိတွာ ‘‘ဘောတီ ဣတ္ထီ, ဘောတိံ ဒေဝ’’န္တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဝိဘာဝိနီတိ ဝိဘာဝေတီတိ ဝိဘာဝိနီ. ဧဝံ ပရိဘာဝိနီတိအာဒီသုပိ. ဤကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. येथे ‘ये बाळे, महाबली कुस राजाची क्षमा माग’ यामध्ये स्त्रीलाच स्त्रीलिंगी रूपाने संबोधित केले गेले आहे. म्हणून काही ठिकाणी स्त्री-पुरुष या अर्थाची अपेक्षा न ठेवता, केवळ लिंगाचीच अपेक्षा ठेवून ‘भोती देवता’ (महोदया देवता), ‘भोती सिला’ (महोदया शिळा), ‘भोती जंबू’ (महोदया जांभूळ), ‘भोतीं देवतं’ इत्यादींसह प्रथमा विभक्ती इत्यादी जोडल्या पाहिजेत. परंतु काही ठिकाणी लिंग आणि अर्थ या दोन्हीची अपेक्षा ठेवून ‘भोती इत्थी’ (महोदया स्त्री), ‘भोतीं देवं’ इत्यादी जोडले पाहिजेत. ‘विभाविनी’ म्हणजे जी स्पष्ट करते ती विभाविनी. याचप्रमाणे ‘परिभाविनी’ इत्यादींमध्येही समजावे. हा ई-कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. ဘူတိ သတ္တာယမာနာ ဘဝတီတိ ဘူ. အထ ဝါ ဘဝန္တိ ဇာယန္တိ ဝဍ္ဎန္တိ စေတ္ထ သတ္တသင်္ခါရာတိ ဘူ. ဘူ ဝုစ္စတိ ပထဝီ. အဘူတိ ဝဍ္ဎိဝိရဟိတာ ကထာ, န ဘူတပုဗ္ဗာတိ ဝါ အဘူ, အဘူတပုဗ္ဗာ ကထာ. န ဘူတာတိ ဝါ အဘူ, အဘူတာ ကထာ. ‘‘အဘုံ မေ ကထံ နု ဘဏသိ, ပါပကံ ဝတ ဘာသသီ’’တိ ဣဒမေတေသမတ္ထာနံ [Pg.114] သာဓကံ ဝစနံ. ဦကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. နိယတိတ္ထိလိင်္ဂနိဒ္ဒေသောယံ. ‘भू’ म्हणजे जी अस्तित्वात येते किंवा होते. अथवा ज्यामध्ये प्राणी आणि संस्कार उत्पन्न होतात, जन्मतात आणि वाढतात ती ‘भू’. ‘भू’ म्हणजे पृथ्वी असे म्हटले जाते. ‘अभू’ म्हणजे वृद्धीरहित (असत्य) कथा, किंवा जी पूर्वी कधी घडली नाही ती ‘अभू’ (अभूतपूर्व कथा). किंवा जी सत्य नाही ती ‘अभू’ (असत्य कथा). “तू माझ्याशी असत्य कसे काय बोलतोस? खरोखर तू पापयुक्त (वाईट) बोलत आहेस!” हे वचन या अर्थांचे साधक (सिद्ध करणारे) आहे. हा ऊ-कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. हा नियत (निश्चित) स्त्रीलिंगी शब्दांचा निर्देश आहे. အနိယတလိင်္ဂါနံ ပန နိယတိတ္ထိလိင်္ဂေသု ပက္ခိတ္တာနံ ဘူတပရာဘူတသမ္ဘူတသဒ္ဒါဒီနံ နိဒ္ဒေသော နယာနုသာရေန သုဝိညေယျောဝ. ဣစ္စေဝံ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနံ ဘူဓာတုမယာနံ ယထာရဟံ နိဗ္ဗစနာဒိဝသေန နိဒ္ဒေသော ဝိဘာဝိတော. परंतु अनियतलिंगी असूनही नियत स्त्रीलिंगी शब्दांमध्ये समाविष्ट केलेल्या ‘भूत’, ‘पराभूत’, ‘संभूत’ इत्यादी शब्दांचा निर्देश नियमानुसार सहज समजण्याजोगा आहे. अशा प्रकारे, ‘भू’ धातूपासून बनलेल्या स्त्रीलिंगी शब्दांचा निर्देश त्यांच्या व्युत्पत्ती इत्यादीनुसार योग्य प्रकारे स्पष्ट केला गेला आहे. ဣဒါနိ နပုံသကလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော ဝုစ္စတိ – တတြ ဘူတန္တိ စတုဗ္ဗိဓံ ပထဝီဓာတုအာဒိကံ မဟာဘူတရူပံ. တဉှိ အညေသံ နိဿယဘာဝေန ဘဝတီတိ ဘူတံ, ဘဝတိ ဝါ တသ္မိံ တဒဓီနဝုတ္တိတာယ ဥပါဒါရူပန္တိ ဘူတံ. အထ ဝါ ဘူတန္တိ သတ္တော ဘူတနာမကော ဝါ. ဘူတန္တိ ဟိ နပုံသကဝသေန သကလော သတ္တော ဧဝံနာမကော စ ယက္ခာဒိကော ဝုစ္စတိ. ‘‘ကာလော ဃသတိ ဘူတာနိ, သဗ္ဗာနေဝ သဟတ္တနာ. ယာနီဓ ဘူတာနိ သမာဂတာနိ, ဥဇ္ဈာပေတွာန ဘူတာနိ, တမှာ ဌာနာ အပက္ကမီ’’တိ ဧဝမာဒီသု နပုံသကပ္ပယောဂေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. ဂါတာဗန္ဓသုခတ္ထံ လိင်္ဂဝိပလ္လာသောတိ စေ? တန္န, ‘‘ယက္ခာဒီနိ မဟာဘူတာနိ ယံ ဂဏှန္တိ, နေဝ တေသံ တဿ အန္တော, န ဗဟိ ဌာနံ ဥပလဗ္ဘတီ’’တိ စုဏ္ဏိယပဒရစနာယမ္ပိ ဘူတသဒ္ဒဿ နပုံသကလိင်္ဂတ္တဒဿနတောတိ အဝဂန္တဗ္ဗံ. မဟာဘူတန္တိ ဝုတ္တပ္ပကာရံ စတုဗ္ဗိဓံ မဟာဘူတရူပံ. တဿ မဟန္တပါတုဘာဝါဒီဟိ ကာရဏေဟိ မဟာဘူတတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ကထံ? မဟန္တံ ဘူတန္တိ မဟာဘူတံ, မာယာကာရသင်္ခါတေန မဟာဘူတေန သမန္တိပိ မဟာဘူတံ, ယက္ခာဒီဟိ မဟာဘူတေဟိ သမန္တိပိ မဟာဘူတံ, မဟန္တေဟိ ဃာသစ္ဆာဒနာဒိပစ္စယေဟိ ဘူတံ ပဝတ္တန္တိပိ မဟာဘူတံ, မဟာဝိကာရဘူတန္တိပိ မဟာဘူတံ. ဧဝံ မဟန္တပါတုဘာဝါဒီဟိ ကာရဏေဟိ မဟာဘူတတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. အတြိဒံ သုဋ္ဌုပလက္ခိတဗ္ဗံ – आता नपुंसकलिंगाचे स्पष्टीकरण (निर्देश) सांगितले जात आहे – त्यामध्ये ‘भूत’ म्हणजे पृथ्वीधातू इत्यादी चार प्रकारचे महाभूतरूप होय. कारण ते इतरांच्या आश्रयभावाने अस्तित्वात येते म्हणून ‘भूत’ आहे, किंवा त्याच्यावर अवलंबून राहून उपादारूप त्यात उत्पन्न होते म्हणून ‘भूत’ आहे. अथवा ‘भूत’ म्हणजे प्राणी किंवा ‘भूत’ नावाचा जीव. कारण नपुंसकलिंगाच्या प्रयोगाने संपूर्ण प्राणी आणि यक्ष इत्यादींना या नावाने संबोधले जाते. “कालो घसति भूतानि, सब्बानेव सहत्तना। यानीध भूतानि समागतानि, उज्झापेत्वान भूतानि, तम्हा ठाना अपक्कमी” (काळ सर्व प्राण्यांना स्वतःसह गिळंकृत करतो... इत्यादी) अशा उदाहरणांमध्ये नपुंसकलिंगाचा प्रयोग समजून घ्यावा. जर असे म्हटले की, गाथेच्या रचनेच्या सुलभतेसाठी लिंगविपर्यास (लिंग बदल) झाला आहे का? तर तसे नाही, कारण “यक्षादी महाभूते ज्याला पकडतात, त्यांचा अंत किंवा बाह्य स्थान आढळत नाही” या गद्य रचनेतही (चुण्णियपदात) ‘भूत’ शब्दाचे नपुंसकलिंगत्व दिसून येते, असे समजले पाहिजे. ‘महाभूत’ म्हणजे वर सांगितलेले चार प्रकारचे महाभूतरूप. त्याचे महाभूतत्व हे त्याच्या विशाल प्रकटीकरण इत्यादी कारणांमुळे समजले पाहिजे. कसे? जे महान भूत (अस्तित्व) आहे ते ‘महाभूत’ होय; जादूगारासारख्या महाभूताशी साम्य असल्यामुळेही ते ‘महाभूत’ आहे; यक्षादी महाभूतांशी साम्य असल्यामुळेही ते ‘महाभूत’ आहे; अन्न-वस्त्र इत्यादी महान प्रत्ययांच्या (कारणांच्या) आधारे जे भूत (अस्तित्व) प्रवर्तित होते तेही ‘महाभूत’ आहे; आणि जे महाविकाररूप भूत आहे तेही ‘महाभूत’ आहे. अशा प्रकारे, विशाल प्रकटीकरण इत्यादी कारणांमुळे त्याचे महाभूतत्व समजले पाहिजे. येथे हे चांगल्या प्रकारे लक्षात ठेवले पाहिजे – ပုန္နပုံသကလိင်္ဂေါ [Pg.115] စ, ဘူတသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ; ပဏ္ဏတ္တိယံ ဂုဏေ စေဝ, ဂုဏေယေဝိတ္ထိလိင်္ဂကော. ‘भूत’ हा शब्द पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगात प्रयुक्त होतो; तो प्रज्ञप्ती (संकल्पना) आणि गुणाच्या अर्थात वापरला जातो, तर गुणी (गुणाने युक्त) च्या अर्थात तो स्त्रीलिंगी असतो. ဘူတ သမ္ဘူတသဒ္ဒါဒိ-နယေ ပဏ္ဏတ္တိဝါစကာ; ယောဇေတဗ္ဗာ တိလိင်္ဂေ တေ, ဣတိ ဉေ ယျံ ဝိသေသတော. ‘भूत’, ‘संभूत’ इत्यादी शब्दांच्या नियमांनुसार प्रज्ञप्तीवाचक (संकल्पनावाचक) शब्द तिन्ही लिंगांत योजले पाहिजेत, हे विशेषत्वाने जाणले पाहिजे. ‘‘ဘူတော တိဋ္ဌတိ, ဘူတာနိ, တိဋ္ဌန္တိ, သမဏော အယံ; ဣဒါနိ ဘူတော, စိတ္တာနိ, ဘူတာနိ ဝိမလာနိ တု. “भूतो तिट्ठति (प्राणी उभा आहे), भूतानि तिट्ठन्ति (प्राणी उभे आहेत), समणो अयं इदानि भूतो (हा श्रमण आता भूत/उत्पन्न झाला आहे), चित्तानि भूतानि विमलानि तु (चित्त निर्मळ झाले आहे).” ဝဉ္ဈာ ဘူတာ ဝဓူ ဧသာ’’, ဣစ္စုဒါဟရဏာနိမေ; ဝုတ္တာနိ သုဋ္ဌု လက္ခေယျ, သာသနတ္ထဂဝေသကော. “वन्झा भूता वधू एसा (ही वधू वांझ झाली आहे)”, ही उदाहरणे शासनाच्या (बुद्धवचनाच्या) अर्थाचा शोध घेणाऱ्याने चांगल्या प्रकारे लक्षात ठेवली पाहिजेत. ဘဝိတ္တန္တိ ဝဍ္ဎိတဋ္ဌာနံ. တဉှိ ဘဝန္တိ ဝဍ္ဎန္တိ ဧတ္ထာတိ ဘဝိတ္တန္တိ ဝုစ္စတိ, ‘‘ဇနိတ္တံ မေ ဘဝိတ္တံ မေ, ဣတိ ပင်္ကေ အဝဿယိ’’န္တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ‘भवित्त’ म्हणजे वाढीचे स्थान (समृद्धीचे स्थान). कारण जिथे प्राणी वाढतात (समृद्ध होतात) त्याला ‘भवित्त’ म्हणतात. “जनित्तं मे भवित्तं मे, इति पंके अवस्सयि” (माझे जन्मस्थान आणि माझे समृद्धीचे स्थान, असे म्हणून तो चिखलात पडला) हे वचन या अर्थाचे साधक (प्रमाण) आहे. ‘‘ဘဝိတ္တံ’’ ဣတိ ‘‘ဘာဝိတ္တ’’-န္တိ စ ပါဌော ဒွိဓာ မယာ; ရဿတ္တဒီဃဘာဝေန, ဒိဋ္ဌော ဘဂ္ဂဝဇာတကေ. ‘भवित्तं’ आणि ‘भावित्तं’ असा दोन प्रकारचा पाठ मी र्हस्व आणि दीर्घ भावामुळे ‘भग्गव जातका’त पाहिला आहे. ဘူနန္တိ ဘဝနံ ဘူနံ ဝဒ္ဓိ. ‘‘အဟမေဝ ဒူသိယာ ဘူနဟတာ, ရညော မဟာပတာပဿာ’’တိ, ‘‘ဘူနဟစ္စံ ကတံ မယာ’’တိ စ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ‘भून’ म्हणजे भवन (घर) किंवा ‘भून’ म्हणजे वृद्धी (वाढ). “अहमेव दूसिया भूनhता, रञ्ञो महाप्रतापस्स” (महाप्रतापी राजाची मीच दूषिका आणि वृद्धीचा नाश करणारी ठरले) आणि “भूनहच्चं कतं मया” (माझ्याकडून भ्रूणहत्या/वृद्धीचा नाश झाला) हे वचन या अर्थाचे साधक (प्रमाण) आहे. ဘဝနန္တိ ဘဝနကြိယာ. အထ ဝါ ဘဝန္တိ ဝဍ္ဎန္တိ ဧတ္ထ သတ္တာ ပုတ္တဓီတာဟိ နာနာသမ္ပတ္တီဟိ စာတိ ဘဝနံ ဝုစ္စတိ ဂေဟော, ‘‘ပေတ္တိကံ ဘဝနံ မမာ’’တိ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ‘‘ဂေဟော ဃရဉ္စ အာဝါသော, ဘဝနဉ္စ နိကေတန’’န္တိ ဣဒံ ပရိယာယဝစနံ. ပရာဘဝနန္တိ အဝဒ္ဓိမာပဇ္ဇနံ. သမ္ဘဝနန္တိ သုဋ္ဌု ဘဝနံ. ဝိဘဝနန္တိ ဥစ္ဆေဒေါ ဝိနာသော ဝါ. ပါတုဘဝနန္တိ ပါကဋတာ သရူပလာဘော ဣစ္စေဝတ္ထော. အာဝိဘဝနန္တိ ပစ္စက္ခဘာဝေါ. တိရောဘဝနန္တိ ပဋိစ္ဆန္နဘာဝေါ. ဝိနာဘဝနန္တိ ဝိနာဘာဝေါ. သောတ္ထိဘဝနန္တိ သုဝတ္ထိတာ. ပရိဘဝနန္တိ ပီဠနာ ဟီဠနာ ဝါ. အဘိဘဝနန္တိ ဝိဓမနံ. အဓိဘဝနန္တိ အဇ္ဈောတ္ထရဏံ[Pg.116]. အနုဘဝနန္တိ ပရိဘုဉ္ဇနံ. သမနုဘဝနန္တိ သုဋ္ဌု ပရိဘုဉ္ဇနံ. ပစ္စနုဘဝနန္တိ အဓိပတိဘာဝေနပိ သုဋ္ဌု ပရိဘုဉ္ဇနံ. နိဂ္ဂဟီတန္တနပုံသကလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. ‘भवन’ म्हणजे होण्याची क्रिया. अथवा जिथे प्राणी पुत्र-पुत्री आणि विविध संपत्तीने वाढतात (समृद्ध होतात) त्याला ‘भवन’ म्हणजे घर म्हणतात. “पेत्तिकं भवनं ममा” (हे माझे पैतृक गृह आहे) हे वचन या अर्थाचे साधक आहे. “गेहो, घरं, आवासो, भवनं, निकेतनं” हे त्याचे समानार्थी शब्द आहेत. ‘पराभवन’ म्हणजे अवनती किंवा वृद्धी न होणे. ‘संभवन’ म्हणजे चांगल्या प्रकारे होणे (उत्पत्ती). ‘विभवन’ म्हणजे उच्छेद किंवा विनाश. ‘पातुभवन’ म्हणजे प्रकट होणे किंवा स्वतःचे रूप प्राप्त करणे, असा अर्थ आहे. ‘आविभवन’ म्हणजे प्रत्यक्ष होणे. ‘तिरोभवन’ म्हणजे अदृश्य किंवा गुप्त होणे. ‘विनाभवन’ म्हणजे विनाभाव (वियोग). ‘सोत्थिभवन’ म्हणजे कल्याण किंवा स्वस्तिभाव. ‘परिभवन’ म्हणजे पीडा देणे किंवा निंदा करणे. ‘अभिभवन’ म्हणजे पराभूत करणे किंवा नष्ट करणे. ‘अधिभवन’ म्हणजे आच्छादित करणे (अधिपत्य गाजवणे). ‘अनुभवन’ म्हणजे उपभोग घेणे. ‘समनुभवन’ म्हणजे चांगल्या प्रकारे उपभोग घेणे. ‘पच्चनुभवन’ म्हणजे अधिपत्यभावाने देखील चांगल्या प्रकारे उपभोग घेणे. हा निग्गहीत-अंत (अनुस्वार-अंत) नपुंसकलिंगाचा निर्देश आहे. အတ္ထဝိဘာဝီတိ အတ္ထဿ ဝိဘာဝနသီလံ စိတ္တံ ဝါ ဉာဏံ ဝါ ကုလံ ဝါ အတ္ထဝိဘာဝိ. ဧဝံ ဓမ္မဝိဘာဝိ. ဣကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. ‘अत्थविभावी’ म्हणजे अर्थाचे प्रकटीकरण करणारे चित्त, ज्ञान किंवा कुल हे ‘अत्थविभावी’ होय. याचप्रमाणे ‘धम्मविभावी’ समजावे. हा इ-कारान्त नपुंसकलिंगाचा निर्देश आहे. ဂေါတြဘူတိ ပညတ္တာရမ္မဏံ မဟဂ္ဂတာရမ္မဏံ ဝါ ဂေါတြဘုစိတ္တံ. တဉှိ ကာမာဝစရဂေါတ္တမဘိဘဝတိ, မဟဂ္ဂတဂေါတ္တဉ္စ ဘာဝေတိ နိဗ္ဗတ္တေတီတိ ‘‘ဂေါတြဘူ’’တိ ဝုစ္စတိ. အပိစ ဂေါတြဘူတိ နိဗ္ဗာနာရမ္မဏံ မဂ္ဂဝီထိယံ ပဝတ္တံ ဂေါတြဘုဉာဏံ ဝါ သင်္ခါရာရမ္မဏံ ဝါ ဖလသမာပတ္တိဝီထိယံ ပဝတ္တံ ဂေါတြဘုဉာဏံ. တေသု ဟိ ပဌမံ ပုထုဇ္ဇနဂေါတ္တမဘိဘဝတိ, အရိယဂေါတ္တဉ္စ ဘာဝေတိ, ဂေါတ္တာဘိဓာနာ စ နိဗ္ဗာနတော အာရမ္မဏကရဏဝသေန ဘဝတီတိ ‘‘ဂေါတြဘူ’’တိ ဝုစ္စတိ, ဒုတိယံ ပန သင်္ခါရာရမ္မဏမ္ပိ သမာနံ အာသေဝနပစ္စယဘာဝေန သသမ္ပယုတ္တာနိ ဖလစိတ္တာနိ ဂေါတ္တာဘိဓာနေ နိဗ္ဗာနမှိ ဘာဝေတီတိ ‘‘ဂေါတြဘူ’’တိ ဝုစ္စတိ. ဣဒံ ပါဠိဝဝတ္ထာနံ – ‘गोत्रभू’ म्हणजे प्रज्ञप्ति-आलंबन (संकल्पना-आलंबन) किंवा mahaggat-आलंबन असणारे गोत्रभूचित्त होय. कारण ते कामावचर गोत्राचा पराभव करते आणि mahaggat गोत्राची भावना (उत्पत्ती) करते, म्हणून त्याला ‘गोत्रभू’ म्हटले जाते. शिवाय, ‘गोत्रभू’ म्हणजे निर्वाण-आलंबन असणारे आणि मार्गवीथीमध्ये प्रवृत्त असणारे गोत्रभूज्ञान, किंवा संस्कार-आलंबन असणारे आणि फलसमापत्तीवीथीमध्ये प्रवृत्त असणारे गोत्रभूज्ञान होय. त्यापैकी पहिले (ज्ञान) पृथग्जन गोत्राचा पराभव करते आणि आर्य गोत्राची भावना करते, आणि निर्वाणाला आलंबन बनवल्यामुळे गोत्र संज्ञेचे होत असल्याने त्याला ‘गोत्रभू’ म्हटले जाते. दुसरे (ज्ञान) संस्कार-आलंबन असूनही आसेवनप्रत्ययभावामुळे आपल्याशी संप्रयुक्त असणाऱ्या फलचित्तांना गोत्र संज्ञेच्या निर्वाणामध्ये भावित करते (उत्पन्न करते), म्हणून त्याला ‘गोत्रभू’ म्हटले जाते. हा पाळीचा नियम आहे – ‘‘ဂေါတြဘု’’ဣတိ ရဿတ္တ-ဝသေန ကထိတံ ပဒံ; နပုံသကန္တိ ဝိညေယျံ, ဉာဏစိတ္တာဒိပေက္ခကံ. ‘गोत्रभु’ असे र्हस्व रूपाने सांगितलेले पद नपुंसकलिंगी समजावे, जे ज्ञान, चित्त इत्यादींच्या अपेक्षेने असते. ‘‘ဂေါတြဘူ’’ဣတိ ဒီဃတ္တ-ဝသေန ကထိတံ ပန; ပုလ္လိင်္ဂမိတိ ဝိညေယျံ, ပုဂ္ဂလာဒိကပေက္ခကံ. परंतु ‘गोत्रभू’ असे दीर्घ रूपाने सांगितलेले पद पुल्लिंगी समजावे, जे पुद्गल (व्यक्ती) इत्यादींच्या अपेक्षेने असते. ဒီဃဘာဝေန ဝုတ္တံ တု, နပုံသကန္တိ နော ဝဒေ; ဗိန္ဒုဝန္တီ’တရေ ဘေဒါ, တယော ဣတိ ဟိ ဘာသိတာ. दीर्घ रूपाने सांगितलेल्या पदाला नपुंसकलिंगी म्हणू नये; इतर तीन भेद अनुस्वारयुक्त (बिंदूयुक्त) सांगितले आहेत. ဤကာရန္တာ စ ဦဒန္တာ, ရဿတ္တံ ယန္တိ သာသနေ; နပုံသကတ္တံ ပတွာန, သဟဘု သီဃယာယိတိ. शासनात (बुद्धवचनात) ई-कारान्त आणि ऊ-कारान्त शब्द नपुंसकलिंग प्राप्त झाल्यावर र्हस्व होतात, जसे ‘सहभु’ आणि ‘सीघयायि’. စိတ္တေန သဟ ဘဝတီတိ စိတ္တသဟဘု, စိတ္တေန သဟ န ဘဝတီတိ နစိတ္တသဟဘု, ရူပံ. ဥကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. နိယတနပုံသကလိင်္ဂနိဒ္ဒေသောယံ. चित्तासोबत जे उत्पन्न होते ते ‘चित्तसहभु’ आणि चित्तासोबत जे उत्पन्न होत नाही ते ‘नचित्तसहभु’ रूप होय. हा उ-कारान्त नपुंसकलिंगाचा निर्देश आहे. हा नियत (निश्चित) नपुंसकलिंगाचा निर्देश आहे. အနိယတလိင်္ဂါနံ [Pg.117] နိယတနပုံသကလိင်္ဂေသု ပက္ခိတ္တာနံ ဘူတပရာဘူတသဒ္ဒါဒီနံ နိဒ္ဒေသော နယာနုသာရေန သုဝိညေယျောဝ. ဣစ္စေဝံ နပုံသကလိင်္ဂါနံ ဘူဓာတုမယာနံ ယထာရဟံ နိဗ္ဗစနာဒိဝသေန နိဒ္ဒေသော ဝိဘာဝိတော. ဣစ္စေဝံ သဗ္ဗထာပိ လိင်္ဂတ္တယနိဒ္ဒေသော သမတ္တော. अनियतलिंगी शब्दांपैकी जे निश्चित नपुंसकलिंगात समाविष्ट केले आहेत, अशा ‘भूत’, ‘पराभूत’ इत्यादी शब्दांचे स्पष्टीकरण नियमांनुसार सहज समजण्यासारखेच आहे. अशा प्रकारे, ‘भू’ धातूपासून बनलेल्या नपुंसकलिंगी शब्दांचे योग्य प्रकारे व्युत्पत्ती इत्यादींद्वारे स्पष्टीकरण केले गेले आहे. अशा प्रकारे, सर्व प्रकारे तिन्ही लिंगांचे स्पष्टीकरण समाप्त झाले. ဥလ္လိင်္ဂနေန ဝိဝိဓေန နယေန ဝုတ္တံ,ဘူဓာတုသဒ္ဒမယလိင်္ဂတိကံ ယဒေတံ; အာလိင်္ဂိယံ ပိယတရဉ္စ သုတံ သုလိင်္ဂံ,ပေါသော ကရေ မနသိ လိင်္ဂဝိဒုတ္တမိစ္ဆံ. विविध नियमांच्या आधारे स्पष्ट केलेले, ‘भू’ धातूच्या शब्दांपासून बनलेले हे जे तिन्ही लिंगांचे वर्णन आहे; लिंगांचे ज्ञान मिळवू इच्छिणाऱ्या मनुष्याने या सुंदर आणि प्रिय अशा श्रुत (शास्त्राचा) आपल्या मनात स्वीकार करावा. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ कौशल्यासाठी (निपुणतेसाठी) रचलेल्या ‘सद्दनीति’ ग्रंथात... ဘူဓာတုမယာနံ တိဝိဓလိင်္ဂိကာနံ နာမိကရူပါနံ ဝိဘာဂေါ ‘भू’ धातूपासून बनलेल्या तिन्ही लिंगांच्या नामरूपांचा विभाग... စတုတ္ထော ပရိစ္ဆေဒေါ. चौथा परिच्छेद (अध्याय) समाप्त. ၅. ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂနာမိကပဒမာလာ ५. ओ-कारान्त पुल्लिंगी नामपदमाला. ဘူ ဓာတုတော ပဝတ္တာနံ, နာမိကာနမိတော ပရံ; နာမမာလံ ပကာသိဿံ, နာမမာလန္တရမ္ပိ စ. 'भू' धातूपासून उत्पन्न होणाऱ्या नामांनंतर, मी नाममाला आणि इतर नाममाला देखील प्रकाशित करीन. ဝိပ္ပကိဏ္ဏကထာ ဧတ္ထ, ဧဝံ ဝုတ္တေ န ဟေဿတိ; ပဘေဒေါ နာမမာလာနံ, ပရိပုဏ္ဏောဝ ဟေဟိတိ. येथे विखुरलेली चर्चा अशा प्रकारे सांगितली असता होणार नाही; नाममालांचे वर्गीकरण परिपूर्णच होईल. ပုဗ္ဗာစရိယသီဟာနံ, တသ္မာ ဣဓ မတံ သုတံ; ပုရေစရံ ကရိတွာန, ဝက္ခာမိ သဝိနိစ္ဆယံ. म्हणून, पूर्व आचार्य-सिंहांचे (श्रेष्ठ आचार्यांचे) ऐकलेले मत येथे अग्रभागी ठेवून, मी सविस्तर निर्णयांसह सांगेन. ပုရိသော, ပုရိသာ. ပုရိသံ, ပုရိသေ. ပုရိသေန, ပုရိသေဟိ, ပုရိသေဘိ. ပုရိသဿ, ပုရိသာနံ. ပုရိသာ, ပုရိသသ္မာ, ပုရိသမှာ, ပုရိသေဟိ, ပုရိသေဘိ. ပုရိသဿ, ပုရိသာနံ. ပုရိသေ, ပုရိသသ္မိံ, ပုရိသမှိ, ပုရိသေသု. ဘော ပုရိသ, ဘဝန္တော ပုရိသာ. पुरिसो, पुरिसा। पुरिसं, पुरिसे। पुरिसेन, पुरिसेहि, पुरिसेभि। पुरिसस्स, पुरिसानं। पुरिसा, पुरिसस्मा, पुरिसम्हा, पुरिसेहि, पुरिसेभि। पुरिसस्स, पुरिसानं। पुरिसे, पुरिसस्मिं, पुरिसम्हि, पुरिसेसु। भो पुरिस, भवन्तो पुरिसा। အယမာယသ္မတာ မဟာကစ္စာနေန ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေန ကတသ္မာ နိရုတ္တိပိဋကတော ဥဒ္ဓရိတော ပုရိသဣစ္စေတဿ ပကတိရူပဿ [Pg.118] နာမိကပဒမာလာနယော. တတြ ပုရိသဝစနဧကဝစနပုထုဝစနေသု ပစ္စတ္တဝစနာဒီနိ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? ပုရိသော တိဋ္ဌတိ, ပုရိသာ တိဋ္ဌန္တိ. တတြ ပုရိသောတိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ ပစ္စတ္တဝစနံ ဘဝတိ, ပုရိသာတိ ပုရိသဝစနေ ပုထုဝစနေ ပစ္စတ္တဝစနံ ဘဝတိ. हा, प्रभिन्नपटिसम्भिदा (विशिष्ट ज्ञान) प्राप्त असलेल्या आयुष्यमान महाकच्चायनांनी रचलेल्या 'निरुत्तिपिटक' मधून उद्धृत केलेला 'पुरिस' (पुरुष) या प्रातिपदिक रूपाचा नामपदविभक्तीचा नियम आहे. तेथे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचन आणि बहुवचनात (पुथुवचन) प्रथमा विभक्ती (पच्चत्तवचन) इत्यादी विभक्त्या होतात. जसे की? 'पुरिसो तिट्ठति' (पुरुष उभा राहतो), 'पुरिसा तिट्ठन्ति' (पुरुष उभे राहतात). तेथे 'पुरिसो' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात प्रथमा विभक्तीचे रूप होते, आणि 'पुरिसा' हे 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनात प्रथमा विभक्तीचे रूप होते. ပုရိသံ ပဿတိ, ပုရိသေ ပဿတိ. တတြ ပုရိသန္တိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ ဥပယောဂဝစနံ ဘဝတိ, ပုရိသေတိ ပုရိသဝစနေ ပုထုဝစနေ ဥပယောဂဝစနံ ဘဝတိ. 'पुरिसं पस्सति' (पुरुषाला पाहतो), 'पुरिसे पस्सति' (पुरुषांना पाहतो). तेथे 'पुरिसं' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात द्वितीया विभक्तीचे (उपयोगवचन) रूप होते, आणि 'पुरिसे' हे 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनात द्वितीया विभक्तीचे रूप होते. ပုရိသေန ကတံ, ပုရိသေဟိ ကတံ, ပုရိသေဘိ ကတံ. တတြ ပုရိသေနာတိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ ကရဏဝစနံ ဘဝတိ, ပုရိသေဟိ, ပုရိသေဘီတိ ပုရိသဝစနေ ပုထုဝစနေ ကရဏဝစနံ ဘဝတိ. 'पुरिसेन कतं' (पुरुषाने केले), 'पुरिसेहि कतं', 'पुरिसेभि कतं' (पुरुषांनी केले). तेथे 'पुरिसेन' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात तृतीया विभक्तीचे (करणवचन) रूप होते, आणि 'पुरिसेहि', 'पुरिसेभि' हे 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनात तृतीया विभक्तीचे रूप होते. ပုရိသဿ ဒီယတေ, ပုရိသာနံ ဒီယတေ. တတြ ပုရိသဿာတိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ သမ္ပဒါနဝစနံ ဘဝတိ, ပုရိသာနန္တိ ပုရိသဝစနေ ပုထုဝစနေ သမ္ပဒါနဝစနံ ဘဝတိ. 'पुरिसस्स दीयते' (पुरुषाला दिले जाते), 'पुरिसानं दीयते' (पुरुषांना दिले जाते). तेथे 'पुरिसस्स' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात चतुर्थी विभक्तीचे (संप्रदानवचन) रूप होते, आणि 'पुरिसानं' हे 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनात चतुर्थी विभक्तीचे रूप होते. ပုရိသာ နိဿဋံ, ပုရိသသ္မာ နိဿဋံ, ပုရိသမှာ နိဿဋံ, ပုရိသေဟိ နိဿဋံ, ပုရိသေဘိ နိဿဋံ. တတြ ပုရိသာတိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ နိဿက္ကဝစနံ ဘဝတိ. ပုရိသသ္မာတိ…ပေ… ပုရိသမှာတိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ နိဿက္ကဝစနံ ဘဝတိ, ပုရိသေဟိ, ပုရိသေဘီတိ ပုရိသဝစနေ ပုထုဝစနေ နိဿက္ကဝစနံ ဘဝတိ. 'पुरिसा निस्सटं', 'पुरिसस्मा निस्सटं', 'पुरिसम्हा निस्सटं' (पुरुषापासून मुक्त/निघलेले), 'पुरिसेहि निस्सटं', 'पुरिसेभि निस्सटं' (पुरुषांपासून मुक्त/निघलेले). तेथे 'पुरिसा' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात पंचमी विभक्तीचे (निस्सक्कवचन) रूप होते. 'पुरिसस्मा'...पे... 'पुरिसम्हा' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात पंचमी विभक्तीचे रूप होते, आणि 'पुरिसेहि', 'पुरिसेभि' हे 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनात पंचमी विभक्तीचे रूप होते. ပုရိသဿ ပရိဂ္ဂဟော, ပုရိသာနံ ပရိဂ္ဂဟော. တတြ ပုရိသဿာတိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ သာမိဝစနံ ဘဝတိ, ပုရိသာနန္တိ ပုရိသဝစနေ ပုထုဝစနေ သာမိဝစနံ ဘဝတိ. 'पुरिसस्स परिग्गहो' (पुरुषाचा ताबा/मालकी), 'पुरिसानं परिग्गहो' (पुरुषांचा ताबा/मालकी). तेथे 'पुरिसस्स' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात षष्ठी विभक्तीचे (सामीवचन) रूप होते, आणि 'पुरिसानं' हे 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनात षष्ठी विभक्तीचे रूप होते. ပုရိသေ ပတိဋ္ဌိတံ, ပုရိသသ္မိံ ပတိဋ္ဌိတံ, ပုရိသမှိ ပတိဋ္ဌိတံ, ပုရိသေသု ပတိဋ္ဌိတံ. တတြ ပုရိသေတိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ ဘုမ္မဝစနံ ဘဝတိ, ပုရိသသ္မိန္တိ…ပေ… ပုရိသမှီတိ…ပေ… ပုရိသေသူတိ ပုရိသဝစနေ ပုထုဝစနေ ဘုမ္မဝစနံ ဘဝတိ. 'पुरिसे पतिट्ठितं', 'पुरिसस्मिं पतिट्ठितं', 'पुरिसम्हि पतिट्ठितं' (पुरुषावर प्रतिष्ठित), 'पुरिसेसु पतिट्ठितं' (पुरुषांवर प्रतिष्ठित). तेथे 'पुरिसे' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात सप्तमी विभक्तीचे (भुम्मवचन) रूप होते, आणि 'पुरिसस्मिं'...पे... 'पुरिसम्हि'...पे... 'पुरिसेसु' हे 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनात सप्तमी विभक्तीचे रूप होते. ဘော [Pg.119] ပုရိသ တိဋ္ဌ, ဘဝန္တော ပုရိသာ တိဋ္ဌထ. တတြ ဘော ပုရိသဣတိ ပုရိသဝစနေ ဧကဝစနေ အာလပနံ ဘဝတိ, ဘဝန္တော ပုရိသာဣတိ ပုရိသဝစနေ ပုထုဝစနေ အာလပနံ ဘဝတီတိ ဣမိနာ နယေန သဗ္ဗတ္ထ နယော ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗော. 'भो पुरिस तिट्ठ' (हे पुरुषा, थांब), 'भवन्तो पुरिसा तिट्ठथ' (हे पुरुषहो, थांबा). तेथे 'भो पुरिस' हे 'पुरिस' शब्दाच्या एकवचनात संबोधन (आलपन) होते, आणि 'भवन्तो पुरिसा' हे 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनात संबोधन होते. या पद्धतीने सर्व ठिकाणी विस्तार करावा. ယမကမဟာထေရေန ကတာယ ပန စူဠနိရုတ္တိယံ ‘‘ဘော ပုရိသ’’ဣတိ ရဿဝသေန အာလပနေကဝစနံ ဝတွာ ‘‘ဘော ပုရိသာ’’ဣတိ ဒီဃဝသေန အာလပနဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ. ကိဉ္စာပိ တာဒိသော နယော နိရုတ္တိပိဋကေ နတ္ထိ, တထာပိ ဗဟူနမာလပနဝိသယေ ‘‘ဘော ယက္ခာ’’ဣတိအာဒီနံ အာလပနဗဟုဝစနာနံ ဇာတကဋ္ဌကထာဒီသု ဒိဿနတော ပသတ္ထတရောဝ ဟောတိ ဝိညူနံ ပမာဏဉ္စ, တသ္မာ ဣမိနာ ယမကမဟာထေရမတေနပိ ‘‘ပုရိသော ပုရိသာ ပုရိသ’’န္တိအာဒီနိ ဝတွာ အာမန္တနေ ‘‘ဘော ပုရိသ, ဘော ပုရိသာ, ဘဝန္တော ပုရိသာ’’တိ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. परंतु, यमक महाथेरांनी रचलेल्या 'चूळनिरुत्ति' मध्ये 'भो पुरिस' असे र्हस्व रूपाने संबोधनाचे एकवचन सांगून, 'भो पुरिसा' असे दीर्घ रूपाने संबोधनाचे बहुवचन सांगितले आहे. जरी असा नियम 'निरुत्तिपिटक' मध्ये नसला, तरी अनेकांच्या संबोधनाच्या बाबतीत 'भो यक्खा' (हे यक्षांनो) इत्यादी संबोधनाचे बहुवचन जातक-अट्ठकथा इत्यादींमध्ये दिसून येत असल्याने, ते विद्वानांसाठी अधिक प्रशस्त आणि प्रमाणभूतच आहे. म्हणून, या यमक महाथेरांच्या मतानुसार देखील 'पुरिसो, पुरिसा, पुरिसं' इत्यादी रूपे सांगून, संबोधनात 'भो पुरिस, bho पुरिसा, भवन्तो पुरिसा' अशी नामपदमाला जोडावी. တတ္ထ ပုရိသောတိ ပဌမာယ ဧကဝစနံ. ပုရိသာတိ ဗဟုဝစနံ. ပုရိသန္တိ ဒုတိယာယ ဧကဝစနံ. ပုရိသေတိ ဗဟုဝစနံ. ပုရိသေနာတိ တတိယာယ ဧကဝစနံ. ပုရိသေဟိ, ပုရိသေဘီတိ ဒွေ ဗဟုဝစနာနိ. ပုရိသဿာတိ စတုတ္ထိယာ ဧကဝစနံ. ပုရိသာနန္တိ ဗဟုဝစနံ. ပုရိသာ, ပုရိသသ္မာ, ပုရိသမှာတိ တီဏိ ပဉ္စမိယာ ဧကဝစနာနိ. ပုရိသေဟိ, ပုရိသေဘီတိ ဒွေ ဗဟုဝစနာနိ. ပုရိသဿာတိ ဆဋ္ဌိယာ ဧကဝစနံ. ပုရိသာနန္တိ ဗဟုဝစနံ. ပုရိသေ, ပုရိသသ္မိံ, ပုရိသမှီတိ တီဏိ သတ္တမိယာ ဧကဝစနာနိ. ပုရိသေသူတိ ဗဟုဝစနံ. ဘော ပုရိသာတိ အဋ္ဌမိယာ ဧကဝစနံ. ဘော ပုရိသာ, ဘဝန္တော ပုရိသာတိ ဒွေ ဗဟုဝစနာနိ. तेथे 'पुरिसो' हे प्रथमेचे एकवचन आहे. 'पुरिसा' हे बहुवचन आहे. 'पुरिसं' हे द्वितीयेचे एकवचन आहे. 'पुरिसे' हे बहुवचन आहे. 'पुरिसेन' हे तृतीयेचे एकवचन आहे. 'पुरिसेहि', 'पुरिसेभि' ही दोन बहुवचने आहेत. 'पुरिसस्स' हे चतुर्थीचे एकवचन आहे. 'पुरिसानं' हे बहुवचन आहे. 'पुरिसा', 'पुरिसस्मा', 'पुरिसम्हा' ही तीन पंचमीची एकवचने आहेत. 'पुरिसेहि', 'पुरिसेभि' ही दोन बहुवचने आहेत. 'पुरिसस्स' हे षष्ठीचे एकवचन आहे. 'पुरिसानं' हे बहुवचन आहे. 'पुरिसे', 'पुरिसस्मिं', 'पुरिसम्हि' ही तीन सप्तमीची एकवचने आहेत. 'पुरिसेसु' हे बहुवचन आहे. 'भो पुरिस' हे अष्टमीचे (संबोधनाचे) एकवचन आहे. 'भो पुरिसा', 'भवन्तो पुरिसा' ही दोन बहुवचने आहेत. ကိဉ္စာပေတေသု ‘‘ပုရိသာ’’တိ ဣဒံ ပဌမာပဉ္စမီအဋ္ဌမီနံ, ‘‘ပုရိသေ’’တိ ဣဒံ ဒုတိယာသတ္တမီနံ, ‘‘ပုရိသေဟိ, ပုရိသေဘီ’’တိ တတိယာပဉ္စမီနံ, ‘‘ပုရိသာန’’န္တိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီနံ ဧကသဒိသံ, တထာပိ အတ္ထဝသေန အသင်္ကရဘာဝေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. ကထံ? ‘‘ပုရိသော [Pg.120] တိဋ္ဌတိ, ပုရိသာ တိဋ္ဌန္တိ. ပုရိသံ ပဿတိ, ပုရိသေ ပဿတီ’’တိအာဒိနာ. जरी यांमध्ये 'पुरिसा' हे प्रथमा, पंचमी आणि अष्टमीचे; 'पुरिसे' हे द्वितीया आणि सप्तमीचे; 'पुरिसेहि, पुरिसेभि' हे तृतीया आणि पंचमीचे; 'पुरिसानं' हे चतुर्थी आणि षष्ठीचे समान रूप असले, तरी अर्थाच्या आधारे त्यांमधील स्पष्ट भेद (असंकरभाव) समजून घ्यावा. कसा? 'पुरिसो तिट्ठति, पुरिसा तिट्ठन्ति' (पुरुष उभा राहतो, पुरुष उभे राहतात), 'पुरिसं पस्सति, पुरिसे पस्सति' (पुरुषाला पाहतो, पुरुषांना पाहतो) इत्यादी उदाहरणांद्वारे. တတ္ထ စ ဘောတိ အာမန္တနတ္ထေ နိပါတော. သော န ကေဝလံ ဧကဝစနံယေဝ ဟောတိ, အထ ခေါ ဗဟုဝစနမ္ပိ ဟောတီတိ ‘‘ဘော ပုရိသာ’’ဣတိ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂေါပိ ဂဟိတော. ‘‘ဘဝန္တော’’တိဒံ ပန ဗဟုဝစနမေဝ ဟောတီတိ ‘‘ပုရိသာ’’တိ ပုန ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣတိ ယမကမဟာထေရေန ‘‘ဘော ပုရိသ’’ဣတိ ရဿဝသေန အာလပနေကဝစနံ ဝတွာ ‘‘ဘော ပုရိသာ’’ဣတိ ဒီဃဝသေန အာလပနဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ. တထာ ဟိ ပါဠိယံ အဋ္ဌကထာသု စ နိပါတဘူတော ဘောသဒ္ဒေါ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဒွိဓာ ဘိဇ္ဇတိ. အတြိမာနိ နိဒဿနပဒါနိ – ‘‘အပိ နု ခေါ သပရိဂ္ဂဟာနံ တေဝိဇ္ဇာနံ ဗြာဟ္မဏာနံ အပရိဂ္ဂဟေန ဗြဟ္မုနာ သဒ္ဓိံ သံသန္ဒတိ သမေတီတိ, နော ဟိဒံ ဘော ဂေါတမ. အစ္ဆရိယံ ဘော အာနန္ဒ, အဗ္ဘုတံ ဘော အာနန္ဒ, ဧဟိ ဘော သမဏ, ဘော ပဗ္ဗဇိတ’’ဣစ္စာဒိပါဠိတော အဋ္ဌကထာတော စ ဘောသဒ္ဒဿ ဧကဝစနပ္ပယောဂေ ပဝတ္တိနိဒဿနံ, ‘‘တေန ဟိ ဘော မမပိ သုဏာထ. ယထာ မယမေဝ အရဟာမ တံ ဘဝန္တံ ဂေါတမံ ဒဿနာယ ဥပသင်္ကမိတုံ, နာဟံ ဘော သမဏဿ ဂေါတမဿ သုဘာသိတံ သုဘာသိတတော နာဗ္ဘနုမောဒါမိ, ပဿထ ဘော ဣမံ ကုလပုတ္တံ. ဘော ယက္ခာ အဟံ ဣမံ တုမှာကံ ဘာဇေတွာ ဒဒေယျံ. အပရိသုဒ္ဓေါ ပနမှိ, ဘော ဓုတ္တာ တုမှာကံ ကြိယာ မယှံ န ရုစ္စတိ. သော တေ ပုရိသေ အာဟ ဘော တုမှေ မံ မာရေန္တာ ရညော ဒဿေတွာဝ မာရေထာ’’တိ ဣစ္စာဒိ ပန ပါဠိတော အဋ္ဌကထာတော စ ဘောသဒ္ဒဿ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂေ ပဝတ္တိနိဒဿနံ. ကစ္စာယနပ္ပကရဏေ ပန ‘‘ဘော ပုရိသ, ဘော ပုရိသာ’’တိ ပဒဒွယံ အာလပနေကဝစနဝသေန ဝုတ္တံ. တံ ယထာ အာဂမေဟိ န ဝိရုဇ္ဈတိ, တထာ ဂဟေတဗ္ဗံ. येथे 'भो' (bhoti) हा संबोधनार्थी निपात आहे. तो केवळ एकवचनातच होतो असे नाही, तर बहुवचनातही होतो, म्हणूनच “भो पुरिसा” (bho purisā) हा बहुवचनी प्रयोगही घेतला आहे. “भवन्तो” (bhavanto) हा शब्द तर बहुवचनातच होतो, म्हणून पुन्हा “पुरिसा” (purisā) असे म्हटले आहे, हे लक्षात घ्यावे. अशा प्रकारे यमक महाथेरांनी “भो पुरिस” (bho purisa) असे र्हस्व स्वराने संबोधनाचे एकवचन सांगून, “भो पुरिसा” (bho purisā) असे दीर्घ स्वराने संबोधनाचे बहुवचन सांगितले आहे. कारण पाळीमध्ये आणि अट्ठकथांमध्ये निपात असलेला 'भो' हा शब्द एकवचन आणि बहुवचनाच्या भेदाने दोन प्रकारे विभागला जातो. याची उदाहरणे खालीलप्रमाणे आहेत – “सपरिग्रह (संसारिक आसक्ती असलेल्या) त्रैविद्य ब्राह्मणांचे अपरिग्रही ब्रह्माशी साम्य किंवा ऐक्य होते काय? नाही, हे भो गोतम! (no hidaṃ bho gotama). आश्चर्य आहे भो आनंद! अद्भुत आहे भो आनंद! ये भो समण! भो पब्बजित!” इत्यादी पाळी आणि अट्ठकथांमधील उदाहरणे 'भो' शब्दाच्या एकवचनी प्रयोगाची आहेत. “तर मग भो, माझेही ऐका. ज्याप्रमाणे आपण स्वतः त्या भदन्त गोतमांच्या दर्शनासाठी जाण्यास योग्य आहोत, मी भो समण गोतमांच्या सुभाषिताबद्दल सुभाषित म्हणून अनुमोदन करत नाही असे नाही, पहा भो या कुलपुत्राला. भो यक्खा (यक्षांनो), मी हे तुमच्यात वाटून देईन. पण मी अपवित्र आहे, भो धुत्ता (धूर्तांनो), तुमचे कृत्य मला आवडत नाही. त्याने त्या पुरुषांना म्हटले, भो तुम्ही मला मारताना राजाला दाखवूनच मारा.” इत्यादी पाळी आणि अट्ठकथांमधील उदाहरणे 'भो' शब्दाच्या बहुवचनी प्रयोगाची आहेत. कच्चायन व्याकरणामध्ये (Kaccāyanappakaraṇe) मात्र “भो पुरिस, bho purisā” हे दोन्ही शब्द संबोधनाच्या एकवचनाच्या अर्थाने सांगितले आहेत. ते जसे आगमांशी (परंपरेशी) सुसंगत आहे, तसेच ग्रहण करावे. ကေစိ [Pg.121] ပန အဒူရဋ္ဌဿာလပနေ ‘‘ဘော ပုရိသ’’ဣတိ ရဿဝသေန အာလပနေကဝစနံ ဣစ္ဆန္တိ, ဒူရဋ္ဌဿာလပနေ ပန ‘‘ဘော ပုရိသာ’’ဣတိ ဒီဃဝသေန အာလပနေကဝစနံ ဣစ္ဆန္တိ. အဒူရဋ္ဌာနံ ဒူရဋ္ဌာနဉ္စ ပုရိသာနံ ဣတ္ထီနဉ္စ အာလပနေ န ကိဉ္စိ ဝဒန္တိ. တထာ အဒူရဋ္ဌာယ ဒူရဋ္ဌာယ စ ဣတ္ထိယာ အာလပနေ တေ ပုစ္ဆိတဗ္ဗာ ‘‘အဒူရဋ္ဌာနံ ဒူရဋ္ဌာနဉ္စ ပုရိသာနမာလပနေ ကထံ ဝတ္တဗ္ဗ’’န္တိ. အဒ္ဓါ တေ ဧဝံ ပုဋ္ဌာ ဥတ္တရိ ကိဉ္စိ ဝတ္တုံ န သက္ခိဿန္တိ. ဧဝမ္ပိ တေ စေ ဝဒေယျုံ ‘‘ဘဝန္တော ပုရိသာတိ ဣမိနာဝ အဒူရဋ္ဌာနံ ဒူရဋ္ဌာနဉ္စ ပုရိသာနမာလပနံ ဘဝတီ’’တိ. တဒါ တေ ဝတ္တဗ္ဗာ ‘‘ယဒိ ဘဝန္တော ပုရိသာ’’တိ ဣမိနာ အဒွေဇ္ဈေန ဝစနေန အဒူရဋ္ဌာနံ ဒူရဋ္ဌာနဉ္စ ပုရိသာနမာလပနံ ဘဝတိ, ဧဝံ သန္တေ ‘‘ဘော ပုရိသ’’ဣတိ ရဿပဒေနပိ ဒူရဋ္ဌဿ စ ပုရိသဿာလပနံ ဝတ္တဗ္ဗံ, ဧဝံ အဝတွာ ကိမတ္ထံ အဒူရဋ္ဌဿာလပနေ ‘‘ဘော ပုရိသ’’ဣတိ ရဿဝသေန အာလပနေကဝစနံ ဣစ္ဆထ, ကိမတ္ထဉ္စ ဒူရဋ္ဌဿာလပနေ ‘‘ဘော ပုရိသာ’’ဣတိ ဒီဃဝသေန အာလပနေကဝစနံ ဣစ္ဆထ. काही लोक जवळ असलेल्या व्यक्तीला संबोधताना “भो पुरिस” (bho purisa) अशा र्हस्व स्वराने संबोधनाचे एकवचन मानतात, तर दूर असलेल्या व्यक्तीला संबोधताना “भो पुरिसा” (bho purisā) अशा दीर्घ स्वराने संबोधनाचे एकवचन मानतात. जवळ असलेल्या आणि दूर असलेल्या पुरुषांच्या व स्त्रियांच्या संबोधनाविषयी ते काहीच बोलत नाहीत. तसेच जवळ असलेल्या आणि दूर असलेल्या स्त्रीला संबोधण्याविषयी त्यांना विचारले पाहिजे की, “जवळ असलेल्या आणि दूर असलेल्या पुरुषांना संबोधताना कसे बोलावे?” नक्कीच, असे विचारले असता ते पुढे काही सांगू शकणार नाहीत. तरीही जर ते असे म्हणाले की, “'भवन्तो पुरिसा' (bhavanto purisā) यानेच जवळ असलेल्या आणि दूर असलेल्या पुरुषांचे संबोधन होते.” तर त्यांना विचारले पाहिजे की, “जर 'भवन्तो पुरिसा' या निःसंदिग्ध शब्दाने जवळ असलेल्या आणि दूर असलेल्या पुरुषांचे संबोधन होते, तर मग 'भो पुरिस' या र्हस्व शब्दानेही दूर असलेल्या पुरुषाचे संबोधन व्हायला हवे. असे न सांगता तुम्ही जवळ असलेल्याच्या संबोधनासाठी 'भो पुरिस' या र्हस्व स्वराने संबोधनाचे एकवचन का मानता, आणि दूर असलेल्याच्या संबोधनासाठी 'भो पुरिसा' या दीर्घ स्वराने संबोधनाचे एकवचन का मानता?” နနု ‘‘တဂ္ဃ ဘဂဝါ ဗောဇ္ဈင်္ဂါ, တဂ္ဃ သုဂတ ဗောဇ္ဈင်္ဂါ’’တိအာဒီသု အာလပနပဒဘူတံ ‘‘ဘဂဝါ’’ဣတိ ဒီဃပဒံ သမီပေ ဌိတကာလေပိ ဒူရေ ဌိတကာလေပိ ဗုဒ္ဓဿာလပနပဒံ ဘဝိတုမရဟတေဝ, တထာ အာလပနပဒဘူတံ ‘‘သုဂတ’’ဣတိ ရဿပဒမ္ပိ. ယသ္မာ ပနေတေသု ‘‘ဘဂဝါ’’တိ အာလပနပဒဿ န ကတ္ထစိပိ ရဿတ္တံ ဒိဿတိ, ‘‘သုဂတာ’’တိ အာလပနပဒဿ စ န ကတ္ထစိပိ ဒီဃတ္တံ ဒိဿတိ, တသ္မာ ဒီဃရဿမတ္တာဘေဒံ အစိန္တေတွာ ‘‘ပုရိသ’’ဣတိ ရဿဝသေန ဝုတ္တပဒံ ပကတိဿရဝသေန သမီပေ ဌိတဿ ပုရိသဿ အာမန္တနကာလေ အဒူရဋ္ဌဿာလပနပဒံ ဘဝတိ, အာယတဿရဝသေန ဒူရေ ဌိတပုရိသဿ အာမန္တနကာလေ ဒူရဋ္ဌဿာလပနပဒံ ဘဝတီတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. တထာ ‘‘ဘဝန္တော ပုရိသာ, ဘော ယက္ခာ, ဘော ဓုတ္တာ’’တိအာဒီနိ [Pg.122] ဒီဃဝသေန ဝုတ္တာနိ အာလပနဗဟုဝစနပဒါနိပိ ပကတိဿရဝသေန သမီပေ ဌိတပုရိသာနံ အာမန္တနကာလေ အဒူရဋ္ဌာနမာလပနပဒါနိ ဘဝန္တိ, အာယတဿရဝသေန ဒူရေ ဌိတပုရိသာဒီနံ အာမန္တနကာလေ ဒူရဋ္ဌာနမာလပနပဒါနိ ဘဝန္တီတိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. တထာ ဟိ ဗြာဟ္မဏာ ကတ္ထစိ ကတ္ထစိ ရဿဋ္ဌာနေပိ ဒီဃဋ္ဌာနေပိ အာယတေန သရေန မဇ္ဈိမာယတေန သရေန အစ္စာယတေန စ သရေန ဝေဒံ ပဌန္တိ လိခိတုမသက္ကုဏေယျေန ဂီတဿရေန ဝိယ. ဣတိ သဗ္ဗက္ခရေသုပိ အာယတေန သရေနုစ္စာရဏံ လဗ္ဘတေဝ လိခိတုမသက္ကုဏေယျံ, တသ္မာ အသမ္ပထမနောတရိတွာ ‘‘ဘော ပုရိသ’’ဣတိ ဝစနေန ဒူရဋ္ဌဿ စ အဒူရဋ္ဌဿ စ ပုရိသဿာလပနံ ဘဝတိ, ‘‘ဘော ပုရိသာ, ဘဝန္တော ပုရိသာ’’တိ ဣမေဟိ ဝစနေဟိပိ ဒူရဋ္ဌာနဉ္စ အဒူရဋ္ဌာနဉ္စ ပုရိသာနမာလပနံ ဘဝတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣတိ ဒူရဋ္ဌဿ အဒူရဋ္ဌာနဉ္စ အာယတေန သရေန အာမန္တနမေဝ ပမာဏံ, န ဒီဃရဿမတ္တာဝိသေသော, တသ္မာ ‘‘ဘော သတ္ထ, ဘော ရာဇ, ဘော ဂစ္ဆ, ဘော မုနိ, ဘော ဒဏ္ဍိ, ဘော ဘိက္ခု, ဘော သယမ္ဘု, ဘောတိ ကညေ, ဘောတိ ပတ္တိ, ဘောတိ ဣတ္ထိ, ဘောတိ ယာဂု, ဘောတိ ဝဓု, ဘော ကုလ, ဘော အဋ္ဌိ, ဘော စက္ခု’’ဣစ္စေဝမာဒီဟိ ပဒေဟိ အဒူရဋ္ဌဿာလပနဉ္စ ဒူရဋ္ဌဿာလပနဉ္စ ဘဝတိ. ‘‘ဘဝန္တော သတ္ထာ, သတ္ထာရော, ဘောတိယော ကညာ, ကညာယော’’တိ ဧဝမာဒီဟိပိ ပဒေဟိ အဒူရဋ္ဌာနဉ္စာလပနံ ဘဝတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. “तग्ध भगवा बोज्झङ्गा, तग्ध सुगत बोज्झङ्गा” (नक्कीच, भगवन्! हे बोध्यंग आहेत; नक्कीच, सुगत! हे बोध्यंग आहेत) इत्यादींमध्ये संबोधन पद असलेले “भगवा” (bhagavā) हे दीर्घ पद जवळ असतानाही आणि दूर असतानाही बुद्धांचे संबोधन पद असू शकतेच, तसेच संबोधन पद असलेले “सुगत” (sugata) हे र्हस्व पदही. परंतु, ज्याअर्थी यांमध्ये “भगवा” या संबोधन पदाचे कुठेही र्हस्व रूप दिसत नाही आणि “सुगत” या संबोधन पदाचे कुठेही दीर्घ रूप दिसत नाही, त्याअर्थी दीर्घ आणि र्हस्व मात्रेचा भेद न विचारता, “पुरिस” (purisa) असे र्हस्व स्वराने म्हटलेले पद सामान्य स्वराने (पकतिस्सर) जवळ असलेल्या पुरुषाला संबोधताना जवळचे संबोधन पद होते, आणि लांबवलेल्या स्वराने (आयतस्सर) दूर असलेल्या पुरुषाला संबोधताना दूरचे संबोधन पद होते, असे समजावे. तसेच “भवन्तो पुरिसा, भो यक्खा, भो धुत्ता” इत्यादी दीर्घ स्वराने म्हटलेली संबोधनाची बहुवचनी पदेही सामान्य स्वराने जवळ असलेल्या पुरुषांना संबोधताना जवळची संबोधन पदे होतात, आणि लांबवलेल्या स्वराने दूर असलेल्या पुरुषांना संबोधताना दूरची संबोधन पदे होतात, असे समजावे. कारण ब्राह्मण लोक काही ठिकाणी र्हस्व स्थानीही आणि दीर्घ स्थानीही लांबवलेल्या स्वराने, मध्यम लांबवलेल्या स्वराने आणि अत्यंत लांबवलेल्या स्वराने वेदांचे पठण करतात, जसे की लिहिता न येणाऱ्या गाण्याच्या स्वराप्रमाणे. अशा प्रकारे सर्व अक्षरांमध्ये लांबवलेल्या स्वराने उच्चारण करणे शक्य होतेच, जे लिहिता येत नाही. म्हणून गोंधळात न पडता “भो पुरिस” या शब्दाने दूर असलेल्या आणि जवळ असलेल्या पुरुषाचे संबोधन होते, आणि “भो पुरिसा, भवन्तो पुरिसा” या शब्दांनीही दूर असलेल्या आणि जवळ असलेल्या पुरुषांचे संबोधन होते, असे समजावे. अशा प्रकारे दूर असलेल्या आणि जवळ असलेल्यांचे लांबवलेल्या स्वराने केलेले संबोधनच प्रमाण आहे, दीर्घ-र्हस्व मात्रेचा विशेष भेद नाही. म्हणून “भो सत्थ (शास्ता), भो राज, भो गच्छ, भो मुनि, भो दण्डि, भो भिक्खु, भो स्वयम्भू, भोति कञ्ञे, भोति पत्ति, भोति इत्थि, भोति यागु, भोति वधु, भो कुल, भो अट्ठि, भो चक्खु” इत्यादी पदांनी जवळचे संबोधन आणि दूरचे संबोधन होते. “भवन्तो सत्था, सत्थारो, भोतियो कञ्ञा, कञ्ञायो” इत्यादी पदांनीही जवळचे संबोधन होते, असे समजावे. ဣဒံ ပနေတ္ထ သန္နိဋ္ဌာနံ – यावर हा निष्कर्ष आहे – တဿ တံ ဝစနံ သုတွာ, ရညော ပုတ္တံ အဒဿယုံ; ပုတ္တော စ ပိတရံ ဒိသွာ, ဒူရတောဝဇ္ဈဘာသထ. त्याचे ते बोलणे ऐकून त्यांनी राजाला पुत्राला दाखवले; आणि पुत्राने पित्याला पाहून दूरवरूनच असे म्हटले. အာဂစ္ဆု ဒေါဝါရိကာ ခဂ္ဂဗန္ဓာ,ကာသာဝိယာ ဟန္တု မမံ ဇနိန္ဒ; အက္ခာဟိ မေ ပုစ္ဆိတော ဧတမတ္ထံ,အပရာဓော ကော နွိဓ မမဇ္ဇ အတ္ထိ. “हे जनिन्द (नरेंद्रा/राजन)! तलवार धारण केलेले द्वारपाल आले आहेत, काषाय वस्त्र परिधान केलेल्या मला ते मारोत; पण विचारले असता मला हा अर्थ सांगा की, आज येथे माझा काय अपराध आहे?” ဧဝံ [Pg.123] သဒ္ဓမ္မရာဇေန, ဝေါဟာရကုသလေန ဝေ; သုဒေသိတေ သောမနဿ-ဇာတကေ သဗ္ဗဒဿိနာ. अशा प्रकारे व्यवहारकुशल आणि सर्वदर्शी सद्धम्मराजांनी (बुद्धांनी) 'सोमनस्स जातक' चांगल्या प्रकारे उपदेशिले आहे. ဒူရဋ္ဌာနေပိ ရဿတ္တံ, ‘‘ဇနိန္ဒ’’ဣတိ ဒိဿတိ; န ကတ္ထစိပိ ဒီဃတ္တံ, ဣတိ နီတိ မယာ မတာ. दूर अंतरावर असलेल्या व्यक्तीला संबोधताना देखील र्हस्वत्व (र्हस्व स्वर) दिसून येते, जसे की 'जनिन्द' (हे जननायक); कुठेही दीर्घत्व (दीर्घ स्वर) दिसून येत नाही, असा नियम माझ्याद्वारे समजला गेला आहे। ဣဒမ္ပေတ္ထ ဝတ္တဗ္ဗံ ‘‘ကုတော နု ဘော ဣဒမာယာတံ ‘ဒူရဋ္ဌဿာလပနံ အဒူရဋ္ဌဿာလပနမိ’တိ’’? သဒ္ဒသတ္ထတော. သဒ္ဒသတ္ထံ နာမ န သဗ္ဗသော ဗုဒ္ဓဝစနဿောပကာရကံ, ဧကဒေသေန ပန ဟောတိ. येथे हे देखील सांगितले पाहिजे की, 'हे महोदय, हे कुठून आले आहे - दूर असलेल्याचे संबोधन आणि जवळ असलेल्याचे संबोधन?' शब्दशास्त्रातून (व्याकरणातून)। शब्दशास्त्र हे बुद्धवचनासाठी सर्वतोपरी उपकारक नाही, परंतु अंशतः (एका अंशाने) उपकारक ठरते। ဣမသ္မိံ ပကရဏေ ‘‘ဗဟုဝစန’’န္တိ ဝါ ‘‘ပုထုဝစန’’န္တိ ဝါ ‘‘အနေကဝစန’’န္တိ ဝါ အတ္ထတော ဧကံ, ဗျဉ္ဇနမေဝ နာနံ, တသ္မာ သဗ္ဗတ္ထ ‘‘ဗဟုဝစန’’န္တိ ဝါ ‘‘ပုထုဝစန’’န္တိ ဝါ ‘‘အနေကဝစန’’န္တိ ဝါ ဝေါဟာရော ကာတဗ္ဗော, ပုထုဝစနံ အနေကဝစနန္တိ စ ဣဒံ သာသနေ နိရုတ္တညူနံ ဝေါဟာရော, ဣတရံ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူနံ. या प्रकरणामध्ये 'बहुवचन' किंवा 'पुथुवचन' (अनेकवचन) किंवा 'अनेकवचन' हे अर्थाच्या दृष्टीने एकच आहेत, केवळ व्यंजने (शब्दरूप) भिन्न आहेत। म्हणून सर्वत्र 'बहुवचन', 'पुथुवचन' किंवा 'अनेकवचन' असा व्यवहार केला पाहिजे। 'पुथुवचन' आणि 'अनेकवचन' हा शासनातील (बुद्धशासनातील) निरुक्तिज्ञांचा (भाषाशास्त्रज्ञांचा) व्यवहार आहे, तर दुसरा (बहुवचन) शब्दशास्त्रज्ञांचा (व्याकरणकारांचा) व्यवहार आहे। ကသ္မာ ပန ဣမသ္မိံ ပကရဏေ ဒွိဝစနံ န ဝုတ္တန္တိ? ယသ္မာ ဗုဒ္ဓဝစနေ ဒွိဝစနံ နာမ နတ္ထိ, တသ္မာ န ဝုတ္တန္တိ. နနု ဗုဒ္ဓဝစနေ ဝစနတ္တယံ အတ္ထိ, တထာ ဟိ ‘‘အာယသ္မာ’’တိ ဣဒံ ဧကဝစနံ, ‘‘အာယသ္မန္တာ’’တိ ဣဒံ ဒွိဝစနံ, ‘‘အာယသ္မန္တော’’တိ ဣဒံ ဗဟုဝစနန္တိ? တန္န, ယဒိ ‘‘အာယသ္မန္တာ’’တိ ဣဒံ ဝစနံ ဒွိဝစနံ ဘဝေယျ, ‘‘ပုရိသော ပုရိသာ’’တိအာဒီသု ကတရံ ဒွိဝစနန္တိ ဝဒေယျာထ, တသ္မာ ဗုဒ္ဓဝစနေ ဒွိဝစနံ နာမ နတ္ထိ. တေနေဝ ဟိ သိ ယော အံ ယော နာ ဟီတိအာဒိနာ ဧကဝစနဗဟုဝစနာနေဝ ဒဿိတာနီတိ. परंतु या प्रकरणामध्ये द्विवचन का सांगितले नाही? कारण बुद्धवचनामध्ये 'द्विवचन' नावाचा प्रकार नाही, म्हणून ते सांगितले नाही। बुद्धवचनामध्ये तीन वचने आहेत ना? जसे की, 'आयुष्मान्' (आयस्मा) हे एकवचन, 'आयस्मन्ता' हे द्विवचन आणि 'आयस्मन्तो' हे बहुवचन आहे? तसे नाही। जर 'आयस्मन्ता' हे रूप द्विवचन असते, तर 'पुरिसो, पुरिसा' इत्यादींमध्ये तुम्ही कोणत्या रूपाला द्विवचन म्हणाल? म्हणून बुद्धवचनामध्ये द्विवचन नावाचा प्रकार नाही। म्हणूनच 'सि, यो, अं, यो, ना, हि' इत्यादी प्रत्ययांद्वारे केवळ एकवचन आणि बहुवचनच दर्शविले गेले आहेत। နနု စ ဘော ‘‘သုဏန္တု မေ အာယသ္မန္တာ, အဇ္ဇ ဥပေါသထော ပန္နရသော. ယဒါယသ္မန္တာနံ ပတ္တကလ္လံ, မယံ အညမညံ ပါရိသုဒ္ဓိဥပေါသထံ ကရေယျာမာ’’တိ ပါဠိယံ ဒွေ သန္ဓာယ ‘‘အာယသ္မန္တာ’’တိ ဝုတ္တံ, ‘‘ဥဒ္ဒိဋ္ဌာ ခေါ အာယသ္မန္တော စတ္တာရော ပါရာဇိကာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသု ပန ပါဠီသု ဗဟဝေါ သန္ဓာယ ‘‘အာယသ္မန္တော’’တိ ဝုတ္တံ, န စ သက္ကာ ဝတ္တုံ ‘‘ယထာ တထာ ဝုတ္တ’’န္တိ[Pg.124], ပရိဝါသာဒိအာရောစနေပိ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ဝိညာတသုဂတာဓိပ္ပာယေဟိ ‘‘ဒွိန္နံ အာရောစေန္တေန ‘အာယသ္မန္တာ ဓာရေန္တူ’တိ, တိဏ္ဏံ အာရောစေန္တေန ‘အာယသ္မန္တော ဓာရေန္တူ’တိ ဝတ္တဗ္ဗ’’န္တိ ဝုတ္တတ္တာတိ? သစ္စံ ဝုတ္တံ, တံ ပန ဝိနယဝေါဟာရဝသေန ဝုတ္တန္တိ. နနု ဝိနယော ဗုဒ္ဓဝစနံ, ကသ္မာ ‘‘ဗုဒ္ဓဝစနေ ဒွိဝစနံ နာမ နတ္ထီ’’တိ ဝဒထာတိ? သစ္စံ ဝိနယော ဗုဒ္ဓဝစနံ, တထာပိ ဝိနယကမ္မဝသေန ဝုတ္တတ္တာ ဥပလက္ခဏမတ္တံ, န သဗ္ဗသာဓာရဏဗဟုဝစနပရိယာပန္နံ. ယဒိ ဟိ ‘‘အာယသ္မန္တာ’’တိ ဣဒံ ဒွိဝစနံ သိယာ, တပ္ပယောဂါနိပိ ကြိယာပဒါနိ ဒွိဝစနာနေဝ သိယုံ, တထာရူပါနိပိ ကြိယာပဒါနိ န သန္တိ. န ဟိ အက္ခရသမယကောဝိဒေါ ဈာနလာဘီပိ ဒိဗ္ဗစက္ခုနာ ဝဿသတမ္ပိ ဝဿသဟဿမ္ပိ သမဝေက္ခန္တော ဗုဒ္ဓဝစနေ ဧကမ္ပိ ကြိယာပဒံ ဒွိဝစနန္တိ ပဿေယျ, ဧဝံ ကြိယာပဒေသု ဒွိဝစနဿာဘာဝါ နာမိကပဒေသု ဒွိဝစနံ နတ္ထိ. နာမိကပဒေသု တဒဘာဝါပိ ကြိယာပဒေသု တဒဘာဝေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. သက္ကဋဘာသာယံ ဒွီသုပိ ဒွိဝစနာနိ သန္တိ, မာဂဓဘာသာယံ ပန နတ္ထိ. पण हे महोदय, 'सुणन्तु मे आयस्मन्ता, अज्ज उपोसथो पन्नरसो... (हे आयुष्मन्तांनो, माझे ऐका, आज पंधरावा उपोसथ आहे। जर आयुष्मन्तांना योग्य वाटत असेल, तर आपण परस्परांच्या परिशुद्धीचा उपोसथ करूया)' या पाळीमध्ये दोघांना उद्देशून 'आयस्मन्ता' असे म्हटले आहे, आणि 'उद्दिठ्ठा खो आयस्मन्तो चत्तारो पाराजिका धम्मा' (हे आयुष्मन्तांनो, चार पाराजिकांचे पठण केले गेले आहे) इत्यादी पाळीमध्ये अनेकांना उद्देशून 'आयस्मन्तो' असे म्हटले आहे। आणि 'हे कसेतरी बोलले गेले आहे' असे म्हणता येणार नाही। तसेच परिवास (परिवर्तन काळ) इत्यादींच्या सूचनेमध्ये देखील, सुगतांचा (बुद्धांचा) अभिप्राय जाणणाऱ्या अट्ठकथाचार्यांनी 'दोघांना सूचित करताना "आयस्मन्ता धारेन्तु" (दोन्ही आयुष्मन्तांनी लक्षात ठेवावे) आणि तिघांना सूचित करताना "आयस्मन्तो धारेन्तु" (सर्व आयुष्मन्तांनी लक्षात ठेवावे) असे म्हणावे' असे म्हटले आहे ना? हे खरे आहे, परंतु ते विनय-व्यवहाराच्या (विनय नियमांच्या) दृष्टीने म्हटले गेले आहे। विनय हे बुद्धवचन नाही का? मग तुम्ही 'बुद्धवचनात द्विवचन नावाचा प्रकार नाही' असे का म्हणता? विनय हे बुद्धवचन आहे हे खरे आहे, तरीही विनयकर्माच्या दृष्टीने म्हटल्यामुळे ते केवळ एक लक्षण (विशिष्ट निर्देश) आहे, ते सर्वसाधारण बहुवचनात समाविष्ट नाही। जर 'आयस्मन्ता' हे द्विवचन असते, तर त्याच्याशी संबंधित क्रियापदे देखील द्विवचनातच असती, परंतु तशी क्रियापदे अस्तित्वात नाहीत। व्याकरणशास्त्रामध्ये निपुण असलेला एखादा ध्यानप्राप्त पुरुष देखील आपल्या दिव्यचक्षूने शंभर वर्षे किंवा हजार वर्षे शोधत राहिला, तरी त्याला बुद्धवचनात एकही क्रियापद द्विवचनात आढळणार नाही। अशा प्रकारे क्रियापदांमध्ये द्विवचनाचा अभाव असल्यामुळे नामपदांमध्येही द्विवचन नाही। नामपदांमध्ये त्याचा अभाव असल्यामुळे क्रियापदांमध्येही त्याचा अभाव समजला पाहिजे। संस्कृत भाषेमध्ये दोन्हीमध्ये (नाम आणि क्रियापद) द्विवचने आहेत, परंतु मागधी भाषेमध्ये (पाळीमध्ये) ती नाहीत। အပိစ ‘‘ပုထုဝစန’’န္တိ နိရုတ္တိဝေါဟာရောပိ ‘‘ဗုဒ္ဓဝစနေ ဒွိဝစနံ နတ္ထီ’’တိ ဧတမတ္ထံ ဒီပေတိ. တဉှိ သက္ကဋဘာသာယံ ဝုတ္တာ ဒွိဝစနတော ဗဟုဝစနတော စ ဝိသုံဘူတံ ဝစနံ, တတ္ထ ဝါ ဝုတ္တေဟိ အတ္ထေဟိ ဝိသုံဘူတဿ အတ္ထဿ ဝစနံ ‘‘ပုထုဝစန’’န္တိ ဝုစ္စတိ. ကထမိဒံ သက္ကဋဘာသာယံ ဝုတ္တာ ဒွိဝစနတော ဗဟုဝစနတော စ ဝိသုံဘူတံ ဝစနန္တိ စေ? ယသ္မာ သက္ကဋဘာသာယံ ‘‘ပုထုဝစန’’န္တိ ဝေါဟာရော နတ္ထိ, တသ္မာ ဣဒံ တေဟိ သက္ကဋဘာသာယံ ဝုတ္တေဟိ ဒွိဝစနဗဟုဝစနေဟိ ဝိသုံဘူတအတ္ထဿ ဝစနန္တိ ဝုစ္စတိ. ကထဉ္စ ပန သက္ကဋဘာသာယံ ဝုတ္တေဟိ ဝိသုံဘူတဿ အတ္ထဿ ဝစနန္တိ ပုထုဝစနန္တိ စေ? ယသ္မာ သက္ကဋဘာသာယံ ဒွေ ဥပါဒါယ ဒွိဝစနံ ဝုတ္တံ, န တိစတုပဉ္စာဒိကေ [Pg.125] ဗဟဝေါ ဥပါဒါယ, ဗဟဝေါ ပန ဥပါဒါယ ဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ, န ဒွေ ဥပါဒါယ, အယံ သက္ကဋဘာသာယ ဝိသေသော. မာဂဓဘာသာယံ ပန ဒွိတိစတုပဉ္စာဒိကေ ဗဟဝေါ ဥပါဒါယ ပုထုဝစနံ ဝုတ္တံ, တသ္မာ သက္ကဋဘာသာယံ ဝုတ္တေဟိ အတ္ထေဟိ ဝိသုံဘူတဿ အတ္ထဿ ဝစနန္တိ ပုထုဝစနန္တိ ဝုစ္စတိ. အယံ မာဂဓဘာသာယ ဝိသေသော. တသ္မာတြ ပုထုဘူတဿ, ပုထုနော ဝါ အတ္ထဿ ဝစနံ ‘‘ပုထုဝစန’’န္တိ အတ္ထော သမဓိဂန္တဗ္ဗော. शिवाय, 'पुथुवचन' हा व्याकरणिक व्यवहार देखील 'बुद्धवचनात द्विवचन नाही' हाच अर्थ स्पष्ट करतो। कारण ते संस्कृत भाषेमध्ये सांगितलेल्या द्विवचन आणि बहुवचनापेक्षा भिन्न असलेले वचन आहे, किंवा तेथे (संस्कृतात) सांगितलेल्या अर्थांपेक्षा भिन्न असलेल्या अर्थाचे वचन असल्यामुळे त्याला 'पुथुवचन' असे म्हटले जाते। जर असे विचारले की, हे संस्कृत भाषेमध्ये सांगितलेल्या द्विवचन आणि बहुवचनापेक्षा भिन्न असलेले वचन कसे आहे? तर, कारण संस्कृत भाषेमध्ये 'पुथुवचन' असा व्यवहार नाही, म्हणून याला संस्कृत भाषेमध्ये सांगितलेल्या द्विवचन आणि बहुवचनापेक्षा भिन्न अर्थाचे वचन म्हटले जाते। आणि संस्कृत भाषेमध्ये सांगितलेल्या अर्थांपेक्षा भिन्न अर्थाचे वचन म्हणजे 'पुथुवचन' कसे? कारण संस्कृत भाषेमध्ये दोघांना उद्देशून द्विवचन सांगितले जाते, तीन, चार, पाच इत्यादी अनेकांना उद्देशून नाही; आणि अनेकांना उद्देशून बहुवचन सांगितले जाते, दोघांना उद्देशून नाही। हे संस्कृत भाषेचे वैशिष्ट्य आहे। परंतु मागधी भाषेमध्ये दोन, तीन, चार, पाच इत्यादी अनेकांना उद्देशून 'पुथुवचन' सांगितले जाते। म्हणून संस्कृत भाषेमध्ये सांगितलेल्या अर्थांपेक्षा भिन्न अर्थाचे वचन असल्यामुळे याला 'पुथुवचन' म्हटले जाते। हे मागधी भाषेचे वैशिष्ट्य आहे। म्हणून येथे विस्तृत किंवा अनेकविध अर्थाचे वचन म्हणजे 'पुथुवचन' असा अर्थ समजला पाहिजे। ဣဒါနိ ‘‘ပုရိသော, ပုရိသာ, ပုရိသ’’န္တိ နိရုတ္တိပိဋကတော ဥဒ္ဓရိတနယံ နိဿာယ ပကတိရူပဘူတဿ ဘူတသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'पुरिसो, पुरिसा, पुरिस' या निरुत्तिपिटकातून उद्धृत केलेल्या पद्धतीचा आधार घेऊन, मूळ रूप असलेल्या 'भूत' शब्दाची नामपद-तालिका (विभक्ती रूपे) सांगितली जात आहे – ဘူတော, ဘူတာ. ဘူတံ, ဘူတေ. ဘူတေန, ဘူတေဟိ, ဘူတေဘိ. ဘူတဿ, ဘူတာနံ. ဘူတာ, ဘူတသ္မာ, ဘူတမှာ, ဘူတေဟိ, ဘူတေဘိ. ဘူတဿ, ဘူတာနံ. ဘူတေ, ဘူတသ္မိံ, ဘူတမှိ, ဘူတေသု. ဘော ဘူတ, ဘဝန္တော ဘူတာ. भूतो, भूता। भूतं, भूते। भूतेन, भूतेहि, भूतेभि। भूतस्स, भूतानं। भूता, भूतस्मा, भूतम्हा, भूतेहि, भूतेभि। भूतस्स, भूतानं। भूते, भूतस्मिं, भूतम्हि, भूतेसु। भो भूत, भवन्तो भूता। အထ ဝါ ‘‘ဘော ဘူတာ’’ဣတိ ဗဟုဝစနံ ဝိညေယျံ. ယထာ ပနေတ္ထ ဘူတဣစ္စေတဿ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ ပုရိသနယေန ယောဇိတာ, ဧဝံ ဘာဝကာဒီနဉ္စ အညေသဉ္စ တံသဒိသာနံ နာမိကပဒမာလာ ပုရိသနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထညာနိ တံသဒိသာနိ နာမ ‘‘ဗုဒ္ဓေါ’’တိအာဒီနံ ပဒါနံ ဗုဒ္ဓဣစ္စာဒီနိ ပကတိရူပါနိ. अथवा 'भो भूता' हे बहुवचन समजावे। ज्याप्रमाणे येथे 'भूत' या मूळ रूपाची नामपद-तालिका 'पुरिस' शब्दाच्या पद्धतीनुसार योजली आहे, त्याचप्रमाणे 'भावक' इत्यादी आणि इतर तत्सम शब्दांची नामपद-तालिका देखील 'पुरिस' शब्दाच्या पद्धतीनुसार योजली पाहिजे। येथे इतर तत्सम शब्द म्हणजे 'बुद्धो' इत्यादी शब्दांचे 'बुद्ध' इत्यादी मूळ रूप होय। ဗုဒ္ဓေါ ဓမ္မော သံဃော မဂ္ဂေါ,ခန္ဓော ကာယော ကာမော ကပ္ပော; မာသော ပက္ခော ယက္ခော ဘက္ခော,နာဂေါ မေဃော ဘောဂေါ ယာဂေါ. बुद्धो (बुद्ध), धम्मो (धम्म), सङ्घो (संघ), मग्गो (मार्ग), खन्धो (स्कंध), कायो (काय/शरीर), कामो (काम), कप्पो (कल्प); मासो (महिना), पक्खो (पक्ष), यक्खो (यक्ष), भक्खो (भक्ष्य), नागो (नाग), मेघो (मेघ), भोगो (भोग), यागो (याग)। ရာဂေါ ဒေါသော မောဟော မာနော,မက္ခော ထမ္ဘော ကောဓော လောဘော; ဟာသော ဝေရော ဒါဟော တေဇော,ဆန္ဒော ကာသော သာသော ရောဂေါ. रागो (राग/आसक्ती), दोसो (द्वेष), मोहो (मोह), मानो (मान/अभिमान), मक्खो (मक्ख/गुणवैगुण्य लपवणे), थम्भो (स्तंभ/ताठरपणा), कोधो (क्रोध), लोभो (लोभ); हासो (हास/आनंद), वेरो (वैर), दाहो (दाह), तेजो (तेज), छन्दो (छंद/इच्छा), कासो (खोकला), सासो (श्वास), रोगो (रोग)। အဿော [Pg.126] သဿော ဣဿော သိဿော,သီဟော ဗျဂ္ဃော ရုက္ခော သေလော; ဣန္ဒော သက္ကော ဒေဝေါ ဂါမော,စန္ဒော သူရော ဩဃော ဒီပေါ. अस्सो (घोडा), सस्सो (धान्य/सासरा), इस्सो (ईश/स्वामी), सिस्सो (शिष्य), सीहो (सिंह), ब्यग्घो (वाघ), रुक्खो (वृक्ष), सेलो (शैल/पर्वत); इन्दो (इंद्र), सक्को (शक्र), देवो (देव), गामो (गाव), चन्दो (चंद्र), सूरो (सूर्य/वीर), ओघो (ओघ/पूर), दीपो (दीप/द्वीप)। ပဿော ယညော စာဂေါ ဝါဒေါ,ဟတ္ထော ပတ္တော သောသော ဂေဓော; သောမော ယောဓော ဂစ္ဆော အစ္ဆော,ဂေဟော မာဠော အဋ္ဋော သာလော. पस्सो (पाच/बाजू), यञ्ञो (यज्ञ), चागो (त्याग), वादो (वाद), हत्थो (हात), पत्तो (पात्र/पान), सोसो (शोष/क्षयरोग), गेधो (लोभ/आसक्ती); सोमो (सोम), योधो (योद्धा), गच्छो (झुडूप), अच्छो (अस्वल/स्वच्छ), गेहो (गृह/घर), माळो (माळा/मंडप), अट्टो (अट्ट/मचाण), सालो (साल वृक्ष/शाळा)। နရော နဂေါ မိဂေါ သသော,သုဏော ဗကော အဇော ဒိဇော; ဟယော ဂဇော ခရော သရော,ဒုမော တလော ပဋော ဓဇော. नरो (नर/माणूस), nago (नग/पर्वत), मिगो (मृग/हरिण), ससो (ससा), सुणो (कुत्रा), बको (बगळा), अजो (बोकड/बकरा), दिजो (द्विज/पक्षी); हयो (घोडा), गजो (हत्ती), खरो (गाढव), सरो (बाण/तलाव), दुमो (द्रुम/वृक्ष), तालो (ताड वृक्ष), पटो (पट/वस्त्र), धजो (ध्वज)। ဥရဂေါ ပဋဂေါ ဝိဟဂေါ ဘုဇဂေါ,ခရဘော သရဘော ပသဒေါ ဂဝဇော; မဟိသော ဝသဘော အသုရော ဂရုဠော,တရုဏော ဝရုဏော ဗလိသော ပလိဃော. उरग (साप), पटग (पतंग), विहग (पक्षी), भुजग (भुजंग), खरभ, शरभ, प्रसद, गवज; महिष (म्हैस), वषभ (बैल), असुर, गरुड, तरुण, वरुण, बलिश (गळ), पलिघ (अडसर). သာလော ဓဝေါ စ ခဒိရော,ဂေါဓုမော သဋ္ဌိကော ယဝေါ; ကဠာယော စ ကုလတ္ထော စ,တိလော မုဂ္ဂေါ စ တဏ္ဍုလော. साल, धव आणि खदिर (खैर); गहू, षष्टिक (साठ दिवसांत पिकणारे धान्य) आणि यव (जव); कलाय (वाटाणा) आणि कुलत्थ (कुळीथ); तीळ, मूग आणि तांदूळ. ခတ္တိယော ဗြာဟ္မဏော ဝေဿော,သုဒ္ဒေါ ဓုတ္တော စ ပုက္ကုသော; စဏ္ဍာလော ပတိကော ပဋ္ဌော,မနုဿော ရထိကော ရထော. क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य, शूद्र, धूर्त (जुगारी) आणि पुक्कस; चंडाल, पती, पठ्ठ (तज्ज्ञ), मनुष्य, रथी (सारथी) आणि रथ. ပဗ္ဗဇိတော [Pg.127] ဂဟဋ္ဌော စ,ဂေါဏော ဩဋ္ဌော စ ဂဒြဘော; မာတုဂါမော စ ဩရောဓော,ဣစ္စာဒီနိ ဝိဘာဝယေ. प्रव्रजित (संन्यासी) आणि गृहस्थ, बैल, उंट आणि गाढव; मातृग्राम (स्त्री) आणि अवरोध (अंतःपूर/राण्या), इत्यादी स्पष्ट करावेत (जाणावेत). ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘နနု ဘော ‘ဩရောဓာ စ ကုမာရာ စာ’တိ ပါဌဿ ဒဿနတော ဩရောဓသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ’’တိ? တန္န, တတ္ထ ဟိ ‘‘ဩရောဓာ’’တိ ဣဒံ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂမေဝ, နာ’ကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ, တုမှေ ပန ‘‘အာကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂ’’န္တိ မညမာနာ ဧဝံ ဝဒထ, န ပနိဒံ အာကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ, အထ ခေါ ‘‘မာတုဂါမာ’’တိပဒံ ဝိယ ဗဟုဝစနဝသေန ဝုတ္တမာကာရန္တပဒန္တိ. နနု စ ဘော သမ္မောဟဝိနောဒနိယာဒီသု ဩရောဓသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂတာ ပါကဋာ, ကထန္တိ စေ? ‘‘ရုက္ခေ အဓိဝတ္ထာ ဒေဝတာ ထေရဿ ကုဒ္ဓါ ပဌမမေဝ မနံ ပလောဘေတွာ ‘ဣတော တေ သတ္တဒိဝသမတ္ထကေ ဥပဋ္ဌာကော ရာဇာ မရိဿတီ’တိ သုပိနေ အာရောစေသိ. ထေရော တံ ကထံ သုတွာ ရာဇောရောဓာနံ အာစိက္ခိ. တာ ဧကပ္ပဟာရေနေဝ မဟာဝိရဝံ ဝိရဝိံသူ’’တိ. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘ရာဇောရောဓာန’’န္တိ ဝတွာ ‘‘တာ’’တိ ဝုတ္တတ္တာဝ ဩရောဓသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂတာ ပါကဋာတိ? တန္န, အတ္ထဿ ဒုဂ္ဂဟဏတော. ဒုဂ္ဂဟိတော ဟိ ဧတ္ထ တုမှေဟိ အတ္ထော, ဧတ္ထ ပန ဩရောဓသဒ္ဒေန ဣတ္ထိပဒတ္ထဿ ကထနတော ဣတ္ထိပဒတ္ထံ သန္ဓာယ ‘‘တာ’’တိ ဝုတ္တတ္တာ ‘‘တာ ဣတ္ထိယော’’တိ အယမေဝတ္ထော. တုမှေ ပန အမာတာပိတရသံဝဒ္ဓတ္တာ အာစရိယကုလေ စ အနိဝုဋ္ဌတ္တာ ဧတံ သုခုမတ္ထမဇာနန္တာ ယံ ဝါ တံ ဝါ မုခါရူဠှံ ဝဒထ. येथे काही लोक असे म्हणू शकतात की, 'अहो, ‘ओरोधा च कुमारा च’ (अवरोध आणि कुमार) या पाठाच्या दर्शनावरून ‘ओरोध’ (अवरोध) हा शब्द स्त्रीलिंगी नाही का?' ते योग्य नाही, कारण तेथे ‘ओरोधा’ हा ओ-कारान्त पुल्लिंगीच शब्द आहे, आ-कारान्त स्त्रीलिंगी नाही. परंतु तुम्ही त्याला ‘आ-कारान्त स्त्रीलिंगी’ मानून असे म्हणत आहात. पण हा आ-कारान्त स्त्रीलिंगी शब्द नाही, तर ‘मातृगामा’ (mātugāmā) या पदाप्रमाणे बहुवचनामुळे वापरलेले आ-कारान्त पद आहे. 'अहो, संमोहविनोदनी इत्यादी ग्रंथांमध्ये ‘ओरोध’ शब्दाचे स्त्रीलिंगी असणे स्पष्ट आहे, ते कसे?' असे विचारल्यास: 'वृक्षावर राहणाऱ्या देवतेने स्थविरांवर (थेरांवर) क्रुद्ध होऊन, आधी त्यांचे मन विचलित केले आणि स्वप्नात सांगितले की, ‘आजपासून सातव्या दिवशी तुमचा उपस्थायक असलेला राजा मरेल.’ स्थविरांनी ती गोष्ट ऐकून राजाच्या अंतःपुराला (राण्यांना) सांगितले. त्यांनी (त्यांनी - ता) एकाच वेळी मोठा आक्रोश केला.' येथे ‘राजओरोधानं’ असे म्हणून पुढे ‘ता’ (त्या) असे म्हटल्यामुळे ‘ओरोध’ शब्दाचे स्त्रीलिंगी असणे स्पष्ट होत नाही का? ते योग्य नाही, कारण अर्थ चुकीचा ग्रहण केला गेला आहे. येथे तुम्ही अर्थ चुकीचा समजला आहे. येथे ‘ओरोध’ शब्दाने स्त्री या अर्थाचा बोध होत असल्यामुळे, स्त्री या अर्थाचा संदर्भ घेऊन ‘ता’ (त्या) असे म्हटले आहे, ज्याचा अर्थ ‘त्या स्त्रिया’ असाच आहे. परंतु तुम्ही आई-वडिलांच्या संस्कारांशिवाय वाढल्यामुळे आणि आचार्यांच्या कुळात न राहिल्यामुळे हा सूक्ष्म अर्थ न जाणता, तोंडाला येईल ते बोलत आहात. ဘုဉ္ဇနတ္ထံ ကထနတ္ထံ, မုခံ ဟောတီတိ နော ဝဒေ; ယံ ဝါ တံ ဝါ မုခါရူဠှံ, ဝစနံ ပဏ္ဍိတော နရောတိ. खाण्यासाठी आणि बोलण्यासाठी तोंड असते, म्हणून (काहीही) बोलू नये; पंडित माणसाने तोंडाला येईल ते (जे काही मुखात येईल ते) बोलू नये. န မယံဘော ယံ ဝါ တံ ဝါ မုခါရူဠှံ ဝဒါမ, အဋ္ဌကထာစရိယာနညေဝ ဝစနံ ဂဟေတွာ ဝဒါမ, အဋ္ဌကထာယေဝ အမှာကံ ပဋိသရဏံ[Pg.128], န မယံ တုမှာကံ သဒ္ဒဟာမာတိ. အမှာကံ သဒ္ဒဟထ ဝါ မာ ဝါ, မာ တုမှေ ‘‘အဋ္ဌကထာစရိယာနညေဝ ဝစနံ ဂဟေတွာ ဝဒါမာ’’တိ အဋ္ဌကထာစရိယေ အဗ္ဘာစိက္ခထ. န ဟိ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ‘‘ဩရောဓသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ’’တိ ဝုတ္တဋ္ဌာနမတ္ထိ, တသ္မာပိ အဋ္ဌကထာစရိယေ အဗ္ဘာစိက္ခထ, န ယုတ္တံ ဗုဒ္ဓါဒီနံ ဂရူနမဗ္ဘာစိက္ခနံ မဟတော အနတ္ထဿ လာဘာယ သံဝတ္တနတော. ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ ‘‘အတ္တနာ ဒုဂ္ဂဟိတေန အမှေ စေဝ အဗ္ဘာစိက္ခတိ, ဗဟုဉ္စ အပုညံ ပသဝတိ, တတော အတ္တာနဉ္စ ခဏတီ’’တိ. ‘अहो, आम्ही तोंडाला येईल ते बोलत नाही, आम्ही अट्ठकथाचार्यांचेच वचन प्रमाण मानून बोलतो, अट्ठकथाच आमचा आश्रय आहे, आम्ही तुमच्यावर विश्वास ठेवत नाही.’ आमच्यावर विश्वास ठेवा किंवा ठेवू नका, परंतु तुम्ही 'आम्ही अट्ठकथाचार्यांचेच वचन घेऊन बोलतो' असे म्हणून अट्ठकथाचार्यांवर खोटा आळ ठेवू नका. कारण अट्ठकथाचार्यांनी ‘ओरोध शब्द स्त्रीलिंगी आहे’ असे म्हटलेले कोणतेही स्थान अस्तित्वात नाही, म्हणून तुम्ही अट्ठकथाचार्यांवर खोटा आळ ठेवत आहात. बुद्ध इत्यादी आदरणीय गुरूंवर खोटा आळ ठेवणे योग्य नाही, कारण ते मोठ्या अनर्थाला कारणीभूत ठरते. कारण भगवंतांनी म्हटले आहे की, ‘स्वतःच्या चुकीच्या ग्रहणामुळे जो आमच्यावर खोटा आळ ठेवतो, तो पुष्कळ अपुण्य पदरी पाडून घेतो आणि स्वतःचाच नाश करतो.’ ဧဝံ အဗ္ဘာစိက္ခနဿ အယုတ္တတံ သာဝဇ္ဇတဉ္စ ဒဿေတွာ ပုနပိ တေ ဣဒံ ဝတ္တဗ္ဗာ – ဇာတကဋ္ဌကထာယမ္ပိ တုမှေဟိ အာဟဋဥဒါဟရဏသဒိသံ ဥဒါဟရဏမတ္ထိ, တံ သုဏာထ. ကောသိယဇာတကဋ္ဌကထာယဉှိ ‘‘သတ္ထာ ဇေတဝနေ ဝိဟရန္တော ဧကံ သာဝတ္ထိယံ မာတုဂါမံ အာရဗ္ဘ ကထေသိ. သာ ကိရေကဿ သဒ္ဓဿ ပသန္နဿ ဥပါသကဗြာဟ္မဏဿ ဗြာဟ္မဏီ ဒုဿီလာ ပါပဓမ္မာ’’တိ ပါဌော ဒိဿတိ. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘မာတုဂါမံ အာရဗ္ဘ ကထေသီ’’တိ ဝတွာ ‘‘သာ’’တိ ဝုတ္တတ္တာ တုမှာကံ မတေန မာတုဂါမသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါယေဝ သိယာ, န ပုလ္လိင်္ဂေါ, ကိမိဒံ အဋ္ဌကထာဝစနမ္ပိ န ပဿထ, တဒေဝ ပန အဋ္ဌကထာဝစနံ ပဿထ, ကိံ သာ ဧဝ အဋ္ဌကထာ တုမှာကံ ပဋိသရဏံ, န တဒညာတိ. अशा प्रकारे खोटा आळ ठेवण्याची अयोग्यता आणि दोष दाखवून त्यांना पुन्हा हे विचारले पाहिजे – जातक-अट्ठकथेतही तुम्ही दिलेल्या उदाहरणासारखेच एक उदाहरण आहे, ते ऐका. कोसियजातक-अट्ठकथेत असा पाठ आढळतो की, ‘शास्ता जेतवनात विहार करत असताना श्रावस्तीतील एका मातृग्रामाचा (स्त्रीचा) संदर्भ घेऊन बोलले. ती एका श्रद्धाळू व प्रसन्न उपासक ब्राह्मणाची दुःशील व पापी स्वभावाची ब्राह्मणी होती.’ येथे ‘मातृग्रामाचा संदर्भ घेऊन बोलले’ असे म्हणून पुढे ‘ती’ (सॉ) असे म्हटल्यामुळे तुमच्या मते ‘मातृग्राम’ हा शब्द स्त्रीलिंगीच असायला हवा, पुल्लिंगी नाही. हे काय, तुम्ही हे अट्ठकथेचे वचन पाहत नाही का? फक्त तेच अट्ठकथेचे वचन पाहता का? काय तीच अट्ठकथा तुमची शरण आहे, दुसरी नाही? ယဒိ တာသဒ္ဒံ အပေက္ခိတွာ ဩရောဓသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တမိစ္ဆထ, ဧတ္ထာပိ သာသဒ္ဒမပေက္ခိတွာ မာတုဂါမသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တမိစ္ဆထာတိ. ဧဝံ ဝုတ္တာ တေ နိရုတ္တရာ အပ္ပဋိဘာနာ မင်္ကုဘူတာ ပတ္တက္ခန္ဓာ အဓောမုခါ ပဇ္ဈာယေယျုံ. ဧတ္ထာပိ မာတုဂါမသဒ္ဒေန ဣတ္ထိပဒတ္ထဿ ကထနတော ဣတ္ထိပဒတ္ထံ သန္ဓာယ ‘‘သာ’’တိ ဝုတ္တတ္တာ ‘‘သာ ဣတ္ထီ’’တိ အယမေဝတ္ထော. ကတ္ထစိ [Pg.129] ဟိ ပဓာနဝါစကေန ပုလ္လိင်္ဂေန နပုံသကလိင်္ဂေန ဝါ သမာနာဓိကရဏဿ ဂုဏသဒ္ဒဿ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနုဝတ္တိတ္တာပုလ္လိင်္ဂဝသေန ဝါ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန ဝါ နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗတ္တေပိ လိင်္ဂမနပေက္ခိတွာ ဣတ္ထိပဒတ္ထမေဝါပေက္ခိတွာ ဣတ္ထိလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ. တံ ယထာ? ‘‘ဣဓ ဝိသာခေ မာတုဂါမော သုသံဝိဟိတကမ္မန္တာ ဟောတိ သင်္ဂဟိတပရိဇနာ ဘတ္တုမနာပံ စရတိ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတီ’’တိ စ, ‘‘ကော နု ခေါ ဘန္တေ ဟေတု ကော ပစ္စယော, ယေန မိဓေကစ္စော မာတုဂါမော ဒုဗ္ဗဏ္ဏာ စ ဟောတိ ဒုရူပါ သုပါပိကာ ဒဿနာယ, ဒလိဒ္ဒါ စ ဟောတိ အပ္ပဿကာ အပ္ပဘောဂါ အပ္ပေသက္ခာ စ. ဣဓ မလ္လိကေ ဧကစ္စော မာတုဂါမော ကောဓနာ ဟောတိ ဥပါယာသဗဟုလာ, အပ္ပမ္ပိ ဝုတ္တာ သမာနာ အဘိသဇ္ဇတိ ကုပ္ပတိ ဗျာပဇ္ဇတိ ပတိတ္ထိယတိ ကောပဉ္စ ဒေါသဉ္စ အပ္ပစ္စယဉ္စ ပါတုကရောတီ’’တိ စ, ‘‘တံ ခေါ ပန ဘိက္ခဝေ ဣတ္ထိရတနံ ရညော စက္ကဝတ္တိဿ ပုဗ္ဗုဋ္ဌာယိနီ ပစ္ဆာနိပါတိနီ ကိံကာရပဋိဿာဝိနီ’’တိ စ ဣမေ ပယောဂါ. जर तुम्ही ‘ता’ (त्या) या शब्दाचा विचार करून ‘ओरोध’ शब्दाचे स्त्रीलिंगी असणे इच्छित असाल, तर येथेही ‘सा’ (ती) या शब्दाचा विचार करून ‘मातृग्राम’ शब्दाचे स्त्रीलिंगी असणे मान्य करा. असे म्हटल्यावर ते निरुत्तर, हतबुद्ध, लज्जित, खांदे पाडलेले आणि खाली मान घालून विचार करू लागतील. येथेही ‘मातृग्राम’ शब्दाने स्त्री या अर्थाचा बोध होत असल्यामुळे, स्त्री या अर्थाचा संदर्भ घेऊन ‘सा’ (ती) असे म्हटले आहे, ज्याचा अर्थ ‘ती स्त्री’ असाच आहे. कारण काही ठिकाणी मुख्य वाचक असलेल्या पुल्लिंगी किंवा नपुंसकलिंगी शब्दाशी समानाधिकरण असलेल्या विशेषण शब्दाचे लिंग, अभिधेय लिंगाचे अनुकरण करणारे असल्यामुळे, पुल्लिंग किंवा नपुंसकलिंग रूपाने निर्देश करणे योग्य असतानाही, त्या लिंगाचा विचार न करता केवळ स्त्री या अर्थाचा विचार करून स्त्रीलिंगी निर्देश केलेला आढळतो. ते कसे? जसे की – ‘हे विशाखे! येथे मातृग्राम (स्त्री) उत्तम प्रकारे कामे करणारी असते, परिजनांचा सांभाळ करणारी असते, पतीला आवडणारे आचरण करते आणि साठवलेल्या धनाचे रक्षण करते.’ आणि ‘भंते! काय हेतू आणि काय कारण आहे, ज्यामुळे येथे एखादी स्त्री (मातृग्राम) कुरूप, दिसायला वाईट, दरिद्री, अल्प संपत्ती असणारी, अल्प भोग असणारी आणि अल्प प्रभाव असणारी असते? हे मल्लिका! येथे एखादी स्त्री (मातृग्राम) क्रोधी असते, अत्यंत संतापी असते, थोडेसे बोलले तरी ती चिडते, रागावते, द्वेष करते, विरोध करते आणि आपला राग, द्वेष व अप्रसन्नता प्रकट करते.’ आणि ‘भिक्खूंनो! चक्रवर्ती राजाचे ते स्त्री-रत्न आधी उठणारे, नंतर झोपणारे आणि आज्ञा पाळणारे असते.’ हे प्रयोग आहेत. ကတ္ထစိ ပန ပဓာနဝါစကေန နပုံသကလိင်္ဂေန သမာနာဓိကရဏဿ ဂုဏသဒ္ဒဿ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနုဝတ္တိတ္တာ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗတ္တေပိ လိင်္ဂမနပေက္ခိတွာ ပုရိသပဒတ္ထမေဝါပေက္ခိတွာ ပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ. တံ ယထာ? ‘‘ပဉ္စ ပစ္စေကဗုဒ္ဓသတာနိ ဣမသ္မိံ ဣသိဂိလိသ္မိံ ပဗ္ဗတေ စိရနိဝါသိနော အဟေသုံ. တံ ခေါ ပန ရညော စက္ကဝတ္တိဿ ပရိဏာယကရတနံ ဉာတာနံ ပဝေသေတာ အညာတာနံ နိဝါရေတာ’’တိ. ကတ္ထစိ ပဓာနဝါစကေန လိင်္ဂတ္တယေန သမာနာဓိကရဏဿ ဂုဏသဒ္ဒဿ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနုရူပံ နိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ. တံ ယထာ? သာ ဣတ္ထီ ‘‘သီလဝတီ ကလျာဏဓမ္မာ. အဋ္ဌဟိ ခေါ နကုလမာတေ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ကာယဿ ဘေဒါ ပရမ္မရဏာ မနာပကာယိကာနံ ဒေဝါနံ [Pg.130] သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. သဒ္ဓေါ ပုရိသပုဂ္ဂလော, သဒ္ဓံ ကုလံ, စိတ္တံ ဒန္တံ သုခါဝဟ’’န္တိ. पण काही ठिकाणी मुख्य वाचक नपुंसकलिंगी शब्दाशी समानाधिकरण असलेल्या गुणवाचक शब्दाच्या अभिधेयलिंगाचे (विशेष्यलिंगाचे) अनुकरण करण्याच्या स्वभावामुळे नपुंसकलिंगाच्या रूपाने निर्देश करावयाचा असला तरी, लिंगाची अपेक्षा न करता केवळ पुरुष (पुल्लिंगी) अर्थाचीच अपेक्षा करून पुल्लिंगी निर्देश दिसून येतो. तो कसा? "पाचशे प्रत्येकबुद्ध या इसिगिलि पर्वतावर दीर्घकाळ निवास करणारे होते. तसेच, चक्रवर्ती राजाचे ते परिणायकरत्न परिचितांना प्रवेश देणारे आणि अपरिचितांना रोखणारे होते." काही ठिकाणी मुख्य वाचक तिन्ही लिंगांशी समानाधिकरण असलेल्या गुणवाचक शब्दाचा अभिधेयलिंगाला (विशेष्यलिंगाला) अनुरूप असा निर्देश दिसून येतो. तो कसा? ती स्त्री "शीलवती, कल्याणधर्मी (आहे). हे नकुलमाते! आठ गुणांनी युक्त असलेली स्त्री शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मनापकायिक देवांच्या सहवासात उत्पन्न होते. श्रद्धावान पुरुषपुद्गल, श्रद्धावान कुल, दमन केलेले चित्त सुख देणारे असते." သေယျဣတိ သဒ္ဒေါ ပန ယေဘုယျေန ဩကာရန္တဘာဝေ ဌတွာ လိင်္ဂတ္တယာနုကူလော ဘဝတိ ဧကာကာရေနေဝ တိဋ္ဌနတော. ကထံ? သေယျော အမိတ္တော မတိယာ ဥပေတော. ဧသာဝ ပူဇနာ သေယျော, ဧကာဟံ ဇီဝိတံ သေယျော. परंतु 'सेय्य' (seyya) हा शब्द बहुधा ओकारान्त रूपात राहून तिन्ही लिंगांना अनुकूल होतो, कारण तो एकाच रूपात राहतो. कसा? बुद्धीने युक्त असलेला शत्रू श्रेष्ठ (सेय्यो अमित्तो मतिया उपेतो). हीच पूजा श्रेष्ठ आहे, एका दिवसाचे जीवन श्रेष्ठ आहे. ‘‘ဓမ္မေန စ အလာဘော ယော,ယော စ လာဘော အဓမ္မိကော; အလာဘော ဓမ္မိကော သေယျော,ယဉ္စေ လာဘော အဓမ္မိကော. "धर्माने होणारा जो अलाभ (तोटा) आहे, आणि जो अधार्मिक लाभ आहे; अधार्मिक लाभापेक्षा धर्माने होणारा अलाभ श्रेष्ठ आहे. ယသော စ အပ္ပဗုဒ္ဓီနံ, ဝိညူနံ အယသော စ ယော; အယသောဝ သေယျော ဝိညူနံ, န ယသော အပ္ပဗုဒ္ဓိနံ. अल्पबुद्धी लोकांची जी कीर्ती (यश) आहे, आणि विद्वानांचा जो अपयश आहे; अल्पबुद्धी लोकांच्या यशापेक्षा विद्वानांचे अपयशच श्रेष्ठ आहे. ဒုမ္မေဓေဟိ ပသံသာ စ, ဝိညူဟိ ဂရဟာ စ ယာ; ဂရဟာဝ သေယျော ဝိညူဟိ, ယဉ္စေ ဗာလပ္ပသံသနာ. दुर्बुद्धी लोकांकडून होणारी प्रशंसा आणि विद्वानांकडून होणारी जी निंदा आहे; मूर्खांच्या प्रशंसेपेक्षा विद्वानांकडून होणारी निंदाच श्रेष्ठ आहे. သုခဉ္စ ကာမမယိကံ, ဒုက္ခဉ္စ ပဝိဝေကိကံ; ပဝိဝေကံ ဒုက္ခံ သေယျော, ယဉ္စေ ကာမမယံ သုခံ. कामवासनेतून उत्पन्न होणारे सुख आणि विवेकपूर्ण एकांतातून उत्पन्न होणारे दुःख; काममय सुखापेक्षा एकांतातील दुःखच श्रेष्ठ आहे. ဇီဝိတဉ္စ အဓမ္မေန, ဓမ္မေန မရဏဉ္စ ယံ; မရဏံ ဓမ္မိကံ သေယျော, ယဉ္စေ ဇီဝေ အဓမ္မိက’’န္တိ. अधर्माने जगणे आणि धर्माने येणारा जो मृत्यू आहे; अधर्माने जगण्यापेक्षा धार्मिक मृत्यूच श्रेष्ठ आहे." ဧဝမယံ သေယျ ဣတိ သဒ္ဒေါ ဩကာရန္တဘာဝေ ဌတွာ လိင်္ဂတ္တယာနုကူလော ဘဝတိ. ကတ္ထစိ ပန အာကာရန္တဘာဝေ ဌတွာ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနုကူလော ဒိဿတိ ‘‘ဣတ္ထီပိ ဟိ ဧကစ္စိယာ, သေယျာ ပေါသ ဇနာဓိပါ’’တိ. နိဂ္ဂဟီတန္တော ပန ဟုတွာ နပုံသကလိင်္ဂါနုကူလော အပသိဒ္ဓေါ. ဧဝံပကာရေ ပယောဂေ ကိံ တုမှေ န ပဿထာတိ. ဧဝံ ဝုတ္တာ စ တေ နိရုတ္တရာဝ ဘဝိဿန္တိ. अशा प्रकारे हा 'सेय्य' हा शब्द ओकारान्त रूपात राहून तिन्ही लिंगांना अनुकूल होतो. परंतु काही ठिकाणी तो आकारान्त रूपात राहून स्त्रीलिंगाला अनुकूल असलेला दिसतो, जसे की - "हे जनाधिप (राजे)! काही स्त्रिया सुद्धा पुरुषापेक्षा श्रेष्ठ असतात." निग्गहीत-अन्त (अनुस्वारान्त) होऊन नपुंसकलिंगाला अनुकूल असणे अपसिद्ध (अशुद्ध) आहे. अशा प्रकारचा प्रयोग तुम्ही पाहत नाही का? असे विचारले असता ते निरुत्तरच होतील. သစေပိ [Pg.131] တေ ဧတ္ထ ဧဝံ ဝဒေယျုံ ‘‘တတ္ထ တတ္ထ သုတ္တပ္ပဒေသေ အဋ္ဌကထာဒီသု စ ‘မာတုဂါမော’တိ ဝါ ‘မာတုဂါမေနာ’တိ ဝါ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဘာဝေန မာတုဂါမသဒ္ဒဿ ဒဿနတော ပုလ္လိင်္ဂဘူတံ မာတုဂါမသဒ္ဒံ အနပေက္ခိတွာ ဣတ္ထိပဒတ္ထမေဝ အပေက္ခိတွာ ‘‘သာ ဣတ္ထီ’’တိ ဣတ္ထီသဒ္ဒေန သာသဒ္ဒဿ သမ္ဗန္ဓဂ္ဂဟဏံ မယံ သမ္ပဋိစ္ဆာမ, ‘ဩရောဓော’တိ ဝါ ‘ဩရောဓေနာ’တိ ဝါ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဘာဝေန ဌိတဿ ဩရောဓသဒ္ဒဿ အဒဿနတော ပန တုမှေဟိ ဝုတ္တံ ပုရိမတ္ထံ န သမ္ပဋိစ္ဆာမာ’’တိ. တဒါ တေသံ ဣမာနိ ဝိနယပါဠိယံ အာဂတပဒါနိ ဒဿေတဗ္ဗာနိ ‘‘တေန ခေါ ပန သမယေန ရာဇာ ဥဒေနော ဥယျာနေ ပရိစာရေသိ သဒ္ဓိံ ဩရောဓေန, အထ ခေါ ရညော ဥဒေနဿ ဩရောဓော ရာဇာနံ ဥဒေနံ ဧတဒဝေါစာ’’တိ. ဧဝံ ဣမာနိ သုတ္တပဒါနိ ဒဿေတွာ သုတ္တနိပါတဋ္ဌကထာယံ ‘‘ရာမော နာမ ရာဇာ ကုဋ္ဌရောဂီ ဩရောဓေဟိ စ နာဋကေဟိ စ ဇိဂုစ္ဆမာနော’’တိ ဝစနဉ္စ ဒဿေတွာ ‘‘ဂစ္ဆထ တုမှေ ဂရုကုလမုပဂန္တွာ ဘဂဝတော သဒ္ဓမ္မဿ စိရဋ္ဌိတတ္ထံ သာဓုကံ ပဒဗျဉ္ဇနာနိ ဥဂ္ဂဏှထာ’’တိ ဥယျောဇေတဗ္ဗာ. जरी त्यांनी यावर असे म्हटले की, "त्या त्या सुत्तप्रदेशात आणि अट्ठकथा इत्यादींमध्ये 'मातुगामो' किंवा 'मातुगामेन' अशा ओकारान्त पुल्लिंगी रूपाने 'मातुगाम' शब्दाचा प्रयोग दिसत असल्यामुळे, पुल्लिंगी असलेल्या 'मातुगाम' शब्दाची अपेक्षा न करता केवळ स्त्री या अर्थाचीच अपेक्षा करून 'सा इत्थी' (ती स्त्री) या स्त्रीशब्दाशी 'सा' या शब्दाचा संबंध जोडणे आम्ही स्वीकारतो; परंतु 'ओरोधो' किंवा 'ओरोधेन' अशा ओकारान्त पुल्लिंगी रूपाने राहणारा 'ओरोध' शब्द न आढळल्यामुळे तुम्ही सांगितलेला पूर्व अर्थ आम्ही स्वीकारत नाही." तेव्हा त्यांना विनयपाळीमध्ये आलेली ही पदे दाखवावीत - "त्या वेळी राजा उदेन आपल्या अंतःपुरासह (राण्यांसह) उद्यानात विहार करत होता. तेव्हा राजा उदेनच्या अंतःपुराने (राण्यांनी) राजा उदेनला असे म्हटले." अशा प्रकारे ही सुत्तपदे दाखवून आणि सुत्तनिपात-अट्ठकथेतील "राम नावाचा राजा कुष्ठरोगी होता आणि तो आपल्या अंतःपुरातील स्त्रियांकडून व नर्तकींकडून तिरस्कृत होत होता" हे वचनही दाखवून, "तुम्ही गुरुगृही जाऊन भगवंतांच्या सद्धर्माच्या चिरस्थायी अस्तित्वासाठी पदे व व्यंजने चांगल्या प्रकारे शिका" असे सांगून त्यांना पाठवून द्यावे. ဣဒါနိ မာတုဂါမသဒ္ဒါဒီသု ကိဉ္စိ ဝိနိစ္ဆယံ ဝဒါမ – မာတုဂါမသဒ္ဒေါ စ ဩရောဓသဒ္ဒေါ စ ဒါရသဒ္ဒေါ စာတိ ဣမေ ဣတ္ထိပဒတ္ထဝါစကာပိ သမာနာ ဧကန္တေန ပုလ္လိင်္ဂါ ဘဝန္တိ. တေသု ဒါရသဒ္ဒဿ ဧကသ္မိံ အတ္ထေ ဝတ္တမာနဿာပိ ဗဟုဝစနကတ္တမေဝ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဣစ္ဆန္တိ, န ဧကဝစနကတ္တံ. မယံ ပန ဒါရသဒ္ဒဿ ဧကသ္မိံ အတ္ထေ ဧကဝစနကတ္တံ, ယေဘုယျေန ပန ဗဟုဝစနကတ္တံ အနုဇာနာမ, ဗဝှတ္ထေ ဝတ္တဗ္ဗမေဝ နတ္ထိ. ပါဠိယဉှိ ဒါရသဒ္ဒေါ ယေဘုယျေန ဗဟုဝစနကော ဘဝတိ, ဧကဝစနကော အပ္ပော. တတြိမေ ပယောဂါ – आता आपण 'मातुगाम' इत्यादी शब्दांविषयी काही निर्णय सांगू या - 'मातुगाम' (मातृग्राम) शब्द, 'ओरोध' (अंतःपूर) शब्द आणि 'दार' (पत्नी) शब्द हे स्त्री या अर्थाचे वाचक असूनही निश्चितपणे पुल्लिंगी असतात. त्यांपैकी 'दार' शब्द एकाच अर्थात वापरला जात असतानाही व्याकरणकार त्याचे बहुवचनी रूपच इच्छितात, एकवचनी रूप नाही. परंतु आम्ही 'दार' शब्दाचे एका अर्थात एकवचनी रूप आणि बहुधा बहुवचनी रूप स्वीकारतो; अनेक अर्थांच्या बाबतीत तर सांगण्याची गरजच नाही. कारण पाळीमध्ये 'दार' शब्द बहुधा बहुवचनी असतो, एकवचनी फार कमी असतो. त्यातील हे प्रयोग आहेत - ‘‘ဒါသာ [Pg.132] စ ဒါသျော အနုဇီဝိနော စ,ပုတ္တာ စ ဒါရာ စ မယဉ္စ သဗ္ဗေ; ဓမ္မဉ္စရာမပ္ပရလောကဟေတု,တသ္မာ ဟိ အမှံ ဒဟရာ န မိယျရေ’’တိ စ, "दास, दासी, सेवक, पुत्र, पत्नी आणि आम्ही सर्वजण परलोकाच्या कल्याणासाठी धर्माचे आचरण करतो, म्हणूनच आमचे तरुण (मुले) मरत नाहीत." आणि, ‘‘ယော ဉာတီနံ သခီနံ ဝါ, ဒါရေသု ပဋိဒိဿတိ; သဟသာ သမ္ပိယာယေန, တံ ဇညာဝသလော ဣတီ’’တိ စ, "जो नातेवाईकांच्या किंवा मित्रांच्या पत्नींशी बळजबरीने किंवा प्रेमाने संबंध ठेवताना दिसतो, त्याला 'वसल' (हीन मनुष्य) समजावे." आणि, ‘‘သေဟိ ဒါရေဟိ’သန္တုဋ္ဌော, ဝေသိယာသု ပဒိဿတိ; ဒိဿတိ ပရဒါရေသု, တံ ပရာဘဝတော မုခ’’န္တိ စ, "स्वतःच्या पत्नीने संतुष्ट न राहता जो वेश्यांकडे जातो आणि परस्त्रीशी संबंध ठेवताना दिसतो, ते त्याच्या विनाशाचे द्वार आहे." आणि, ‘‘ပုတ္တေသု ဒါရေသု စ ယာ အပေက္ခာ’’တိ စ ဗျာသေ, သမာသေ ပန ‘‘ပုတ္တဒါရာ ဒိသာ ပစ္ဆာ, ပုတ္တဒါရေဟိ မတ္တနော’’တိ စ ဧဝမာဒယော ဗဟုဝစနပ္ပယောဂါ ဗဟဝေါ ဘဝန္တိ. "पुत्र आणि पत्नी यांच्याविषयी जी आसक्ती आहे" अशा विग्रहात, आणि समासात "पुत्र-पत्नी ही मागची दिशा आहे, स्वतःच्या पुत्र-पत्नीसह" इत्यादी अनेक बहुवचनी प्रयोग विपुल प्रमाणात आढळतात. ဧကဝစနပ္ပယောဂါ ပန အပ္ပာ. သေယျထိဒံ? ‘‘ဂရူနံ ဒါရေ, ဓမ္မံ စရေ ယောပိ သမုဉ္ဇကံ စရေ, ဒါရဉ္စ ပေါသံ ဒဒမပ္ပကသ္မိ’’န္တိ စ, परंतु एकवचनी प्रयोग कमी आहेत. जसे की - "गुरूंच्या पत्नीशी, जो उदरनिर्वाहासाठी धान्य गोळा करतो त्यानेही धर्माचे आचरण करावे, आणि थोड्या उत्पन्नातूनही दान देऊन पत्नीचे पोषण करावे." आणि, ‘‘ယေ ဂဟဋ္ဌာ ပုညကရာ, သီလဝန္တော ဥပါသကာ; ဓမ္မေန ဒါရံ ပေါသေန္တိ, တေ နမဿာမိ မာတလီ’’တိ စ, "हे मातली! जे गृहस्थ पुण्यकर्म करणारे, शीलवान उपासक आहेत आणि जे धर्माने आपल्या पत्नीचे पोषण करतात, त्यांना मी नमस्कार करतो." आणि, ‘‘ပရဒါရံ န ဂစ္ဆေယျံ, သဒါရပသုတော သိယ’’န္တိ စ, "परस्त्रीकडे जाऊ नये, स्वतःच्या पत्नीशीच एकनिष्ठ असावे." आणि, ‘‘ယော ဣစ္ဆေ ပုရိသော ဟောတုံ, ဇာတိံ ဇာတိံ ပုနပ္ပုနံ; ပရဒါရံ ဝိဝဇ္ဇေယျ, ဓောတပါဒေါဝ ကဒ္ဒမ’’န္တိ စ "ज्या पुरुषाला जन्मोजन्मी पुन्हा पुन्हा पुरुष म्हणून जन्माला येण्याची इच्छा असेल, त्याने परस्त्रीचा तसाच त्याग करावा, जसे धुवून स्वच्छ केलेल्या पायाने चिखल टाळला जातो." आणि, ဧဝမာဒယော ဧကဝစနပ္ပယောဂါ အပ္ပာ. अशा प्रकारचे एकवचनी प्रयोग कमी आहेत. သမာဟာရလက္ခဏဝသေန ပနေသ ဒါရသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေကဝစနောပိ ကတ္ထစိ ဘဝတိ. ‘‘အာဒါယ ပုတ္တဒါရံ. ပုတ္တဒါရဿ သင်္ဂဟော’’ဣတိ ဧဝံ ဣဓ ဝုတ္တပ္ပကာရေန လိင်္ဂဉ္စ အတ္ထဉ္စ သလ္လက္ခေတွာ ‘‘ပုရိသော ပုရိသာ’’တိ ပဝတ္တံ ပုရိသသဒ္ဒနယံ နိဿာယ [Pg.133] သဗ္ဗေသံ ‘‘ဘူတော ဘာဝကော ဘဝေါ’’တိအာဒီနံ ဘူဓာတုမယာနံ အညေသဉ္စောကာရန္တပဒါနံ နာမိကပဒမာလာသု သဒ္ဓါသမ္ပန္နေဟိ ကုလပုတ္တေဟိ သဒ္ဓမ္မဋ္ဌိတိယာ ကောသလ္လမုပ္ပာဒေတဗ္ဗံ. समाहार लक्षणाने (समूह अर्थाने) हा 'दार' शब्द काही ठिकाणी नपुंसकलिंगी एकवचनातही होतो. जसे की - "पुत्र आणि पत्नीला घेऊन. पुत्र आणि पत्नीचा सांभाळ करणे." अशा प्रकारे येथे सांगितलेल्या पद्धतीने लिंग आणि अर्थ लक्षात घेऊन, "पुरिसो पुरिसा" या पद्धतीने चालणाऱ्या 'पुरिस' शब्दाच्या नियमाचा आश्रय घेऊन, श्रद्धासंपन्न कुलपुत्रांनी सद्धर्माच्या चिरस्थायी अस्तित्वासाठी "भूतो, भावको, भवो" इत्यादी 'भू' धातूपासून बनलेल्या आणि इतर ओकारान्त शब्दांच्या नामरूपांच्या तक्त्यांमध्ये (नामिकपदमला) नैपुण्य प्राप्त केले पाहिजे. ကိံ ပန သဗ္ဗာနိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ သဗ္ဗပ္ပကာရေန ဧကသဒိသာနေဝ ဟုတွာ ပဝိဋ္ဌာနီတိ? န ပဝိဋ္ဌာနိ. ကာနိစိ ဟိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌာနိ စ ဟောန္တိ, ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌာနိ စ, ကာနိစိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌာနိ စ ဟောန္တိ, ဧကဒေသေန န ပဝိဋ္ဌာနိ စ, ကာနိစိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ အပ္ပဝိဋ္ဌာနေဝ. တတြ ကတမာနိ ကာနိစိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌာနိ စ ဟောန္တိ, ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌာနိ စ? ‘‘သရော ဝယော စေတော’’တိအာဒီနိ. သရောဣတိ ဟိ အယံသဒ္ဒေါ ဥသုသဒ္ဒသရဝနအကာရာဒိသရဝါစကော စေ, ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌော. ရဟဒဝါစကော စေ, မနောဂဏပက္ခိကတ္တာ ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌော. ဝယောဣတိ သဒ္ဒေါ ပရိဟာနိဝါစကော စေ, ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌော. အာယုကောဋ္ဌာသဝါစကော စေ, မနောဂဏပက္ခိကတ္တာ ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌော. စေတော ဣတိ သဒ္ဒေါ ယဒိ ပဏ္ဏတ္တိဝါစကော, ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌော. ယဒိ ပန စိတ္တဝါစကော, မနောဂဏပက္ခိကတ္တာ ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌော. မနောဂဏော စ နာမ – पण काय सर्व 'ओ'कारान्त (okāranta) शब्द 'पुरिस' (purisa) शब्दाच्या रूपांप्रमाणे सर्व प्रकारे अगदी सारखेच होऊन समाविष्ट होतात का? नाही, समाविष्ट होत नाहीत. कारण काही 'ओ'कारान्त शब्द 'पुरिस' रूपांमध्ये सर्व प्रकारे समाविष्ट होतात आणि काही अंशाने (एकदेशाने) समाविष्ट होतात; काही 'ओ'कारान्त शब्द 'पुरिस' रूपांमध्ये काही अंशाने समाविष्ट होतात आणि काही अंशाने समाविष्ट होत नाहीत; तर काही 'ओ'कारान्त शब्द 'पुरिस' रूपांमध्ये सर्वथा समाविष्ट होतच नाहीत. त्यापैकी, कोणते काही 'ओ'कारान्त शब्द 'पुरिस' रूपांमध्ये सर्व प्रकारे समाविष्ट होतात आणि काही अंशाने समाविष्ट होतात? 'सरो' (saro), 'वयो' (vayo), 'चेतो' (ceto) इत्यादी. कारण 'सरो' हा शब्द जर बाण (उसु), तलाव (सर), अकार इत्यादी स्वर (सर) यांचा वाचक असेल, तर तो 'पुरिस' रूपांमध्ये सर्व प्रकारे समाविष्ट होतो. जर तो तलावाचा वाचक असेल, तर 'मनोगण' (manogaṇa) वर्गातील असल्यामुळे तो 'पुरिस' रूपांमध्ये काही अंशाने समाविष्ट होतो. 'वयो' हा शब्द जर ऱ्हास (पर्हाणी) वाचक असेल, तर तो 'पुरिस' रूपांमध्ये सर्व प्रकारे समाविष्ट होतो. जर तो आयुष्याचा भाग (वय) दर्शवणारा असेल, तर 'मनोगण' वर्गातील असल्यामुळे तो 'पुरिस' रूपांमध्ये काही अंशाने समाविष्ट होतो. 'चेतो' हा शब्द जर प्रज्ञेचा (पण्णत्ति) वाचक असेल, तर तो 'पुरिस' रूपांमध्ये सर्व प्रकारे समाविष्ट होतो. पण जर तो चित्ताचा वाचक असेल, तर 'मनोगण' वर्गातील असल्यामुळे तो 'पुरिस' रूपांमध्ये काही अंशाने समाविष्ट होतो. आणि 'मनोगण' म्हणजे - မနော ဝစော ဝယော တေဇော,တပေါ စေတော တမော ယသော; အယော ပယော သိရော ဆန္ဒော,သရော ဥရော ရဟော အဟော – मनो (मन), वचो (वाणी), वयो (वय/अवस्था), तेजो (तेज), तपो (तप), चेतो (चित्त), तमो (अंधकार), यसो (यश); अयो (लोखंड), पयो (दूध/पाणी), सिरो (मस्तक), छन्दो (इच्छा/छंद), सरो (तलाव), उरो (छाती), रहो (एकांत), अहो (दिवस) - ဣမေ သောဠသ. हे सोळा (शब्द) आहेत. ဣဒါနိ ယထာဝုတ္တဿ ပါကဋီကရဏတ္ထံ မနသဒ္ဒါဒီနံ နာမိကပဒမာလံ ကထယာမ – आता वर सांगितलेल्या गोष्टी स्पष्ट करण्यासाठी 'मन' इत्यादी शब्दांची नामरूपमाला (विभक्ती रूपे) सांगू - မနော[Pg.134], မနာ. မနံ, မနော, မနေ. မနသာ, မနေန, မနေဟိ, မနေဘိ. မနသော, မနဿ, မနာနံ. မနာ, မနသ္မာ, မနမှာ, မနေဟိ, မနေဘိ. မနသော, မနဿ, မနာနံ. မနသိ, မနေ, မနသ္မိံ, မနမှိ, မနေသု. ဘော မန, ဘဝန္တော မနာ. मनो, मना (प्रथमा). मनं, मनो, मने (द्वितीया). मनसा, मनेन, मनेहि, मनेभि (तृतीया). मनसो, मनस्स, मनानं (चतुर्थी). मना, मनस्मा, मनम्हा, मनेहि, मनेभि (पंचमी). मनसो, मनस्स, मनानं (षष्ठी). मनसि, मने, मनस्मिं, मनम्हि, मनेसु (सप्तमी). भो मन, भवन्तो मना (संबोधन). အထ ဝါ ‘‘ဘော မနာ’’ဣတိ ဗဟုဝစနမ္ပိ ဉေယျံ. ဧဝံ ဝစော, ဝစာ. ဝစံ, ဝစော, ဝစေ. ဝစသာတိအာဒိနာ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. အဟသဒ္ဒဿ ပန ဘုမ္မေကဝစနဋ္ဌာနေ အဟသိ, အဟေ, အဟသ္မိံ, အဟမှိ, အဟု, အဟနီတိ ယောဇေတဗ္ဗာ. अथवा 'भो मना' असे बहुवचनही समजावे. याचप्रमाणे वचो, वचा. वचं, वचो, वचे. 'वचसा' इत्यादी रूपांप्रमाणे नामरूपमाला जोडावी. परंतु 'अह' (दिवस) शब्दाच्या सप्तमी एकवचनाच्या ठिकाणी अहसि, अहे, अहस्मिं, अहम्हि, अहु, अहनि अशी रूपे जोडावीत. ဣဒါနိ ရူပန္တရဝိသေသဒဿနတ္ထံ နပုံသကလိင်္ဂဿ မနသဒ္ဒဿပိ နာမိကပဒမာလံ ဝဒါမ, အဋ္ဌာနေ အယံ ကထိတာတိ န စောဒေတဗ္ဗံ. आता रूपांमधील विशेष फरक दाखवण्यासाठी नपुंसकलिंगी 'मन' शब्दाची देखील नामरूपमाला सांगतो, ही अयोग्य ठिकाणी सांगितली आहे असा आक्षेप घेऊ नये. မနံ, မနာနိ, မနာ. မနံ, မနာနိ, မနေ. မနေန, မနေဟိ, မနေဘိ. မနဿ, မနသော, မနာနံ. မနာ, မနသ္မာ, မနမှာ, မနေဟိ, မနေဘိ. မနဿ, မနသော, မနာနံ. မနေ, မနသ္မိံ, မနမှိ, မနေသု. ဘော မန, ဘဝန္တော မနာ. အထ ဝါ ‘‘ဘော မနာနိ, ဘော မနာ’’ဧဝမ္ပိ ဗဟုဝစနံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ဧဝမုတ္တရတြာပိ နယော. मनं, मनानि, मना (प्रथमा). मनं, मनानि, मने (द्वितीया). मनेन, मनेहि, मनेभि (तृतीया). मनस्स, मनसो, मनानं (चतुर्थी). मना, मनस्मा, मनम्हा, मनेहि, मनेभि (पंचमी). मनस्स, मनसो, मनानं (षष्ठी). मने, मनस्मिं, मनम्हि, मनेसु (सप्तमी). भो मन, भवन्तो मना (संबोधन). अथवा 'भो मनानि, भो मना' असेही बहुवचन समजावे. पुढेही याच नियमाने जावे. ဧတ္ထ စ ပုလ္လိင်္ဂဿ မနသဒ္ဒဿ ပစ္စတ္တကရဏသမ္ပဒါနသာမိဘုမ္မဝစနာနိ မနော မနသာ မနသော မနသီတိ ရူပါနိ ဌပေတွာ ယာနိ သေသာနိ, နပုံသကလိင်္ဂဿ စ မနသဒ္ဒဿ ပစ္စတ္တဝစနာနိ ‘‘မနံ မနာနီ’’တိ ရူပါနိ စ, အဋ္ဌမျောပယောဂဝစနာနံ ‘‘မနံ မနာနီ’’တိ ရူပဒွယဉ္စ ဌပေတွာ ယာနိ သေသာနိ, တာနိ သဗ္ဗာနိ ကမတော သမသမာနိ. आणि येथे पुल्लिंगी 'मन' शब्दाची प्रथमा (पच्चत्त), तृतीया (करण), चतुर्थी-षष्ठी (संपदान-सामी) आणि सप्तमी (भुम्म) यांची 'मनो', 'मनसा', 'मनसो', 'मनसि' ही रूपे सोडून जी उरलेली रूपे आहेत; आणि नपुंसकलिंगी 'मन' शब्दाची प्रथमेची 'मनं, मनानि' ही रूपे आणि संबोधन (अष्टमी) व द्वितीया (उपयोग) यांची 'मनं, मनानि' ही दोन रूपे सोडून जी उरलेली रूपे आहेत, ती सर्व अनुक्रमे एकमेकांशी अगदी समान आहेत. ကေစိ ဩကာရန္တော မနောဣတိ သဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါတိ ဝဒန္တိ, တေ ဝတ္တဗ္ဗာ – ယဒိ သော နပုံသကလိင်္ဂေါ သိယာ, တဿဒိသေဟိ ဝစော ဝယောတိအာဒိသဒ္ဒေဟိပိ နပုံသကလိင်္ဂေဟေဝ ဘဝိတဗ္ဗံ, န ‘‘တေ နပုံသကလိင်္ဂါ’’တိ ဂရူ ဝဒန္တိ, ‘‘ပုလ္လိင်္ဂါ’’ဣစ္စေဝ ဝဒန္တိ. ယသ္မာ စ ပါဠိယံ ‘‘ကာယော အနိစ္စော; မနော [Pg.135] အနိစ္စော’’တိ စ ‘‘ကာယော ဒုက္ခော, မနော ဒုက္ခော’’တိ စ ‘‘နိစ္စော ဝါ အနိစ္စော ဝါတိ အနိစ္စော ဘန္တေ’’တိ စ ဧဝမာဒယော ပုလ္လိင်္ဂပ္ပယောဂါ ဗဟဝေါ ဒိဋ္ဌာ. တေန ဉာယတိ မနောသဒ္ဒေါ ဧကန္တေန ပုလ္လိင်္ဂေါတိ. ယဒိ ပန နပုံသကလိင်္ဂေါသိယာ, ‘‘အနိစ္စော ဒုက္ခော’’တိ ဧဝမာဒီနိ တံသမာနာဓိကရဏာနိ အနေကပဒသတာနိပိ နပုံသကလိင်္ဂါနေဝ သိယုံ. န ဟိ တာနိ နပုံသကလိင်္ဂါနိ, အထ ခေါ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနုဝတ္တကာနိ ဝါစ္စလိင်္ဂါနိ. ဧဝံ မနောသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂတာ ပစ္စေတဗ္ဗာတိ, သစေ မနောသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါ န ဟောတိ, ကထံ ‘‘မနာနီ’’တိ နပုံသကရူပံ ဒိဿတီတိ? သစ္စံ ‘‘မနာနီ’’တိ နပုံသကလိင်္ဂမေဝ, တထာပိ မနောဂဏေ ပမုခဘာဝေန ဂဟိတဿောကာရန္တဿ မနသဒ္ဒဿ ရူပံ န ဟောတိ. အထ ကိဉ္စရဟီတိ စေ? စိတ္တသဒ္ဒေန သမာနလိင်္ဂဿ သမာနသုတိတ္တေပိ မနောဂဏေ အပရိယာပန္နဿ နိဂ္ဂဟီတန္တဿေဝ မနသဒ္ဒဿ ရူပံ. မနသဒ္ဒေါ ဟိ ပုန္နပုံသကဝသေန ဒွိဓာ ဘိဇ္ဇတိ ‘‘မနော မနံ’’ဣတိ ယထာ ‘‘အဇ္ဇဝေါအဇ္ဇဝ’’န္တိ. ‘‘မနော စေ နပ္ပဒုဿတိ. သန္တံ တဿ မနံ ဟောတီ’’တိ ဟိ ပါဠိ. ယဒိ စ သော မနောသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါ န ဟောတိ. काही लोक म्हणतात की 'ओ'कारान्त 'मनो' हा शब्द नपुंसकलिंगी आहे. त्यांना सांगावे की - जर तो नपुंसकलिंगी असता, तर त्याच्यासारखे 'वचो', 'वयो' इत्यादी शब्दही नपुंसकलिंगीच असायला हवे होते. परंतु आचार्य त्यांना 'नपुंसकलिंगी' म्हणत नाहीत, तर 'पुल्लिंगी'च म्हणतात. आणि ज्याअर्थी पाळीमध्ये 'कायो अनिच्चो; मनो अनिच्चो' (काय अनित्य आहे, मन अनित्य आहे) आणि 'कायो दुक्खो, मनो दुक्खो' (काय दुःख आहे, मन दुःख आहे) आणि 'निच्चो वा अनिच्चो वाति अनिच्चो भन्ते' (नित्य की अनित्य? भन्ते, अनित्य आहे) इत्यादी अनेक पुल्लिंगी प्रयोग आढळतात, त्यावरून हे स्पष्ट होते की 'मन' शब्द निश्चितपणे पुल्लिंगी आहे. पण जर तो नपुंसकलिंगी असता, तर 'अनिच्चो', 'दुक्खो' इत्यादी त्याच्याशी समान अधिकरण असलेले शेकडो शब्दही नपुंसकलिंगीच झाले असते. परंतु ते नपुंसकलिंगी नाहीत, तर विशेष्य लिंगाचे अनुकरण करणारे विशेषण लिंग (वाच्चलिंग) आहेत. अशा प्रकारे 'मन' शब्दाचे पुल्लिंगत्व मान्य केले पाहिजे. मग जर 'मन' शब्द नपुंसकलिंगी नाही, तर 'मनानि' हे नपुंसकलिंगी रूप कसे दिसते? हे सत्य आहे की 'मनानि' हे नपुंसकलिंगीच रूप आहे, तरीही ते मनोगणामध्ये प्रामुख्याने घेतलेल्या 'ओ'कारान्त 'मन' शब्दाचे रूप नाही. तर मग ते कोणाचे रूप आहे? 'चित्त' शब्दाशी समान लिंग असलेल्या आणि समान उच्चार असूनही मनोगणात समाविष्ट नसलेल्या मकारान्त (निग्गहीत-अन्त) 'मनं' शब्दाचेच ते रूप आहे. कारण 'मन' शब्द पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंग या भेदाने 'मनो' आणि 'मनं' असा दोन प्रकारे विभागला जातो, जसे 'अज्जवो' आणि 'अज्जवं'. कारण पाळीमध्ये 'मनो चे नप्पदुस्सति' (जर मन दूषित झाले नाही) आणि 'सन्तं तस्स मनं होति' (त्याचे मन शांत असते) असे आढळते. आणि जर तो 'मनो' शब्द नपुंसकलिंगी नसता... ‘‘ဂရု စေတိယပဗ္ဗတဝတ္တနိယာ,ပမဒါ ပမဒါ ပမဒါ ဝိမဒံ; သမဏံ သုနိသမ္မ အကာ ဟသိတံ,ပတိတံ အသုဘေသု မုနိဿ မနော’’တိ “चेतियपब्बत (चैत्यपर्वत) येथील श्रेष्ठ आचरणाने, प्रमदा (स्त्री) उन्मत्तपणा सोडून शांत झाली; श्रमणाचे (वचन) ऐकून तिने हास्य केले, (आणि) मुनींचे मन अशुभांमध्ये पडले.” ဧတ္ထ မနောသဒ္ဒေန သမာနာဓိကရဏော ‘‘ပတိတ’’န္တိ သဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂဘာဝေန ကသ္မာ သန္နိဟိတော. ယသ္မာ စ သမာနာဓိကရဏပဒံ နပုံသကလိင်္ဂဘာဝေန သန္နိဟိတံ, တသ္မာ သဒ္ဒန္တရသန္နိဓာနဝသေန မနောသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါတိ ဉာယတီတိ? တန္န, သမာနာဓိကရဏပဒဿ သဗ္ဗတ္ထ လိင်္ဂဝိသေသာဇောတနတော. ယဒိ ဟိ သမာနာဓိကရဏပဒံ သဗ္ဗတ္ထ လိင်္ဂဝိသေသံ ဇောတေယျ, ‘‘စတ္တာရော ဣန္ဒြိယာနီ’’တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘စတ္တာရော’’တိ [Pg.136] ပဒံ ဣန္ဒြိယသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂတ္တံ ကရေယျ, န စ ကာတုံ သက္ကောတိ. ဣန္ဒြိယသဒ္ဒေါ ဟိ ဧကန္တေန နပုံသကလိင်္ဂေါ. ယဒိ တုမှေ ‘‘ပတိတ’’န္တိ သမာနာဓိကရဏပဒံ နိဿာယ မနောသဒ္ဒဿ နပုံသကလိင်္ဂတ္တမိစ္ဆထ, ‘‘စတ္တာရော ဣန္ဒြိယာနီ’’တိ ဧတ္ထပိ ‘‘စတ္တာရော’’တိ သမာနာဓိကရဏပဒံ နိဿာယ ဣန္ဒြိယသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂတ္တံ ဣစ္ဆထာတိ. န မယံ ဘော ဣန္ဒြိယသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂတ္တံ ဣစ္ဆာမ, အထ ခေါ နပုံသကလိင်္ဂတ္တံယေဝ ဣစ္ဆာမ, ‘‘စတ္တာရော’’တိ ပဒံ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဌိတတ္တာ ‘‘စတ္တာရီ’’တိ ဂဏှာမ, တသ္မာ ‘‘စတ္တာရိ ဣန္ဒြိယာနီ’’တိ အတ္ထံ ဓာရေမာတိ. ယဒိ ဧဝံ ‘‘ပတိတံ အသုဘေသု မုနိဿ မနော’’တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘ပတိတ’’န္တိ ပဒံ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဌိတန္တိ မန္တွာ ‘‘ပတိတော’’တိ အတ္ထံ ဓာရေထာတိ. န ဓာရေမ ဧတ္ထ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဿ အနိစ္ဆိတဗ္ဗတော. ယဒိ ဟိ မနောသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါ သိယာ, တံသမာနာဓိကရဏပဒံ ‘‘ပတိတော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ. ကိမာစရိယော ဧဝံ ဝတ္တုံ န ဇာနိ, ဇာနမာနော ဧဝ သော ‘‘ပတိတော’’တိ နာဝေါစ, ‘‘ပတိတ’’န္တိ ပနာဝေါစ, တေန ဉာယတိ ‘‘မနောသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါ’’တိ. မာ တုမှေ ဧဝံ ဝဒေထ, သမာနာဓိကရဏပဒံ နာမ ကတ္ထစိ ပဓာနလိင်္ဂမနုဝတ္တတိ, ကတ္ထစိ နာနုဝတ္တတိ, တသ္မာ န တံ လိင်္ဂဝိသေသဇောတနေ ဧကန္တတော ပမာဏံ. ‘‘မာတုဂါမော, ဩရောဓော, အာဝုသော ဝိသာခ, ဧဟိ ဝိသာခေ, စိတ္တာနိ အဋ္ဌီနီ’’တိ ဧဝမာဒိရူပဝိသေသောယေဝ ပမာဏံ. ယဒိ သမာနာဓိကရဏပဒေယေဝ လိင်္ဂဝိသေသော အဓိဂန္တဗ္ဗော သိယာ, ‘‘စတ္တာရော စ မဟာဘူတာ’’တိအာဒီသု လိင်္ဂဝဝတ္ထာနံ န သိယာ. ယသ္မာ ဧဝမာဒီသုပိ ဌာနေသု လိင်္ဂဝဝတ္ထာနံ ဟောတိယေဝ. ကထံ? ‘‘စတ္တာရော’’တိ ပုလ္လိင်္ဂံ ‘‘မဟာဘူတာ’’တိ နပုံသကန္တိ, တသ္မာ ‘‘ပတိတံ အသုဘေသု မုနိဿ မနော’’တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘ပတိတ’’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂံ ‘‘မနော’’တိ ပုလ္လိင်္ဂန္တိ ဝဝတ္ထာနံ ဘဝတီတိ. ဣဒံ သုတွာ တေ တုဏှီ ဘဝိဿန္တိ. တတော [Pg.137] တေသံ တုဏှီဘူတာနံ ဣဒံ ဝတ္တဗ္ဗံ – ယသ္မာ မနောဂဏေ ပဝတ္တာနံ ပဒါနံ သမာနာဓိကရဏပဒါနိ ကတ္ထစိ နပုံသကဝသေန ယောဇေတဗ္ဗာနိ, တသ္မာ မနောဂဏေ ပမုခဿ မနောသဒ္ဒဿပိ သမာနာဓိကရဏပဒါနိ ကတ္ထစိ နပုံသကဝသေန ယောဇိတာနိ. တထာ ဟိ ပုဗ္ဗာစရိယာ ‘‘သဒ္ဓမ္မတေဇဝိဟတံ ဝိလယံ ခဏေန, ဝေနေယျသတ္တဟဒယေသု တမော’ပယာတိ. ဒုက္ခံ ဝစော ဧတသ္မိန္တိ ဒုဗ္ဗစော. အဝနတံ သိရော ယဿ သောယံ အဝံသိရော, အပ္ပကံ ရာဂါဒိ ရဇော ယေသံ ပညာမယေ အက္ခိမှိ တေ အပ္ပရဇက္ခာ’’တိအာဒိနာ သဒ္ဒရစနံ ကုဗ္ဗိံသု, န ပန တေဟိ ဝစော သိရော ရဇောသဒ္ဒါဒီနံ နပုံသကလိင်္ဂတ္တံ ဝိဘာဝေတုံ ဤဒိသီ သဒ္ဒရစနာ ကတာ, အထ ခေါ သိရောမနောသဒ္ဒါနံ မနောဂဏေ ပဝတ္တာနံ ပုလ္လိင်္ဂသဒ္ဒါနံ ကတ္ထစိပိ ဤဒိသာနိပိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဌိတာနိ သမာနာဓိကရဏပဒါနိ ဟောန္တီတိ ပရေသံ ဇာနာပနာဓိပ္ပာယဝတိယာ အနုကမ္ပာယ ဝိရစိတာ. ဧတ္ထာပိ တုမှာကံ မတေန မနောသဒ္ဒဿ နပုံသကလိင်္ဂတ္တေ သတိ ဝစော သိရော ဣစ္စာဒယောပိ နပုံသကလိင်္ဂတ္တမာပဇ္ဇန္တိ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန သမာနာဓိကရဏပဒါနံ နိဒ္ဒိဋ္ဌတ္တာ. ကိံ ပနေတေသမ္ပိ နပုံသကလိင်္ဂတ္တံ ဣစ္ဆထာတိ. အဒ္ဓါ တေ ဣဒမ္ပိ သုတွာ နိဗ္ဗေဌေတုမသက္ကောန္တာ တုဏှီ ဘဝိဿန္တိ. ကိဉ္စာပိ တေ အညံ ဂဟေတဗ္ဗကာရဏံ အပဿန္တာ ဧဝံ ဝဒေယျုံ ‘‘ယဒိ ဘော မနော သဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါန ဟောတိ, ကသ္မာ ဝေယျာကရဏာ ‘မနောသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါ’တိ ဝဒန္တီ’’တိ? တေ ဝတ္တဗ္ဗာ – ယဒိ တုမှေ ဝေယျာကရဏမတံ ဂဟေတွာ မနောသဒ္ဒဿ နပုံသကလိင်္ဂတ္တံ ရောစေထ, နနု ဘဂဝါယေဝ လောကေ အသဒိသော မဟာဝေယျာကရဏော မဟာပုရိသော ဝိသာရဒေါ ပရပ္ပဝါဒမဒ္ဒနော. ဘဂဝန္တဉှိ ပဒကာ ဝေယျာကရဏာ အမ္ဗဋ္ဌမာဏဝပေါက္ခရသာတိသောဏဒဏ္ဍာဒယော စ ဗြာဟ္မဏာ သစ္စကနိဂဏ္ဌာဒယော စ ပရိဗ္ဗာဇကာ [Pg.138] ဝါဒေန န သမ္ပာပုဏိံသု, အညဒတ္ထု ဘဂဝါယေဝ မတ္တဝါရဏဂဏမဇ္ဈေ ကေသရသီဟော ဝိယ အသမ္ဘီတော နေသံ နေသံ ဝါဒံ မဒ္ဒေသိ, မဟန္တေ စ နေ အတ္ထေ ပတိဋ္ဌာပေသိ, ဧဝံဝိဓေန ဘဂဝတာ ဝေါဟာရကုသလေန ယသ္မာ ‘‘ကာယော အနိစ္စော’’တိ စ ‘‘ကာယော ဒုက္ခော, မနော အနိစ္စော, မနော ဒုက္ခော’’တိ စ ဧဝမာဒိနာ ဝုတ္တာ မနောသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝသူစနိကာ ဗဟူ ပါဠိယော ဒိဿန္တိ, တသ္မာ မနောသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါယေဝါတိ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗောတိ. ဧဝံ ဝုတ္တာ တေ နိရုတ္တရာ အပ္ပဋိဘာနာ မင်္ကုဘူတာ ပတ္တက္ခန္ဓာ အဓောမုခါ ပဇ္ဈာယိဿန္တိ. येथे 'मनो' (मन) या शब्दाशी समानाधिकरण असलेला 'पतितं' हा शब्द नपुंसकलिंगी रूपात का ठेवला गेला आहे? आणि ज्याअर्थी समानाधिकरण पद नपुंसकलिंगी रूपात ठेवले गेले आहे, त्याअर्थी दुसऱ्या शब्दाच्या सान्निध्यामुळे 'मनो' शब्द नपुंसकलिंगी आहे असे समजले जाते का? तसे नाही, कारण समानाधिकरण पद सर्व ठिकाणी लिंगाचा विशेष भेद स्पष्ट करत नाही. जर समानाधिकरण पद सर्व ठिकाणी लिंगाचा विशेष भेद स्पष्ट करत असते, तर 'चत्तारो इन्द्रियानि' (cattāro indriyānī) येथे देखील 'चत्तारो' हे पद 'इन्द्रिय' शब्दाला पुल्लिंगी बनवू शकले असते, परंतु ते तसे करू शकत नाही. कारण 'इन्द्रिय' शब्द हा निश्चितपणे नपुंसकलिंगी आहे. जर तुम्ही 'पतितं' या समानाधिकरण पदाचा आश्रय घेऊन 'मनो' शब्दाचे नपुंसकलिंगत्व स्वीकारू इच्छिता, तर 'चत्तारो इन्द्रियानि' येथे देखील 'चत्तारो' या समानाधिकरण पदाचा आश्रय घेऊन 'इन्द्रिय' शब्दाचे पुल्लिंगत्व का स्वीकारत नाही? हे महाशय, आम्ही 'इन्द्रिय' शब्दाचे पुल्लिंगत्व स्वीकारत नाही, तर त्याचे नपुंसकलिंगत्वच स्वीकारतो. 'चत्तारो' हे पद लिंगविपर्यासामुळे (लिंगव्यत्ययामुळे) आलेले असल्याने आम्ही त्याला 'चत्तारि' असे मानतो, म्हणून 'चत्तारि इन्द्रियानि' असा अर्थ ग्रहण करतो. जर असे असेल, तर 'पतितं असुभेसु मुनिस्स मनो' (मुनींचे मन अशुभांमध्ये पडले आहे) येथे देखील 'पतितं' हे पद लिंगविपर्यासामुळे आलेले आहे असे मानून 'पतितो' असा अर्थ का ग्रहण करत नाही? आम्ही तसा अर्थ ग्रहण करत नाही, कारण येथे लिंगविपर्यास इष्ट (मान्य) नाही. जर 'मनो' शब्द पुल्लिंगी असता, तर त्याचे समानाधिकरण पद 'पतितो' असे म्हणावे लागले असते. आचार्यांना असे बोलणे माहीत नव्हते काय? माहीत असूनही त्यांनी 'पतितो' असे म्हटले नाही, तर 'पतितं' असे म्हटले; यावरून हे समजते की 'मनो' शब्द नपुंसकलिंगी आहे. तुम्ही असे बोलू नका. समानाधिकरण पद हे कधी मुख्य लिंगाचे अनुकरण करते, तर कधी करत नाही. म्हणून लिंगाचा विशेष भेद स्पष्ट करण्यासाठी ते निश्चितपणे प्रमाण मानले जाऊ शकत नाही. 'मातुगामो' (स्त्री), 'ओरोधो' (अन्तःपूर), 'आवुसो विसाख' (हे विशाख), 'एहि विसाखे' (ये विशाखे), 'चित्तानि अट्ठीनि' (चित्ते आणि हाडे) इत्यादी रूपांमधील विशेषच प्रमाण आहे. जर केवळ समानाधिकरण पदावरूनच लिंगाचा विशेष भेद समजायचा असता, तर 'चत्तारो च महाभूता' (आणि चार महाभूते) इत्यादींमध्ये लिंगाची व्यवस्था झाली नसती. कारण अशा ठिकाणी देखील लिंगाची व्यवस्था होतेच. कशी? 'चत्तारो' हे पुल्लिंगी आहे आणि 'महाभूता' हे नपुंसकलिंगी आहे. म्हणून 'पतितं असुभेसु मुनिस्स मनो' येथे देखील 'पतितं' हे नपुंसकलिंगी आणि 'मनो' हे पुल्लिंगी आहे, अशी व्यवस्था होते. हे ऐकून ते शांत (मौन) होतील. त्यानंतर ते मौन झाल्यावर त्यांना हे सांगावे – ज्याअर्थी 'मनोगण' (मन-समूह) मध्ये येणाऱ्या शब्दांची समानाधिकरण पदे काही ठिकाणी नपुंसकलिंगी रूपाने जोडली जातात, त्याचअर्थी मनोगणातील प्रमुख असलेल्या 'मनो' शब्दाची समानाधिकरण पदे देखील काही ठिकाणी नपुंसकलिंगी रूपाने जोडली गेली आहेत. तसेच पूर्वाचार्यांनी 'सद्धम्मतेजविहतं विलयं खणेन, वेनेय्यसत्तहदयेसु तमोऽपयाति' (सद्धम्माच्या तेजाने नष्ट होऊन क्षणात नाहीसे होते, विनेय प्राण्यांच्या हृदयातील अंधकार दूर होतो), 'दुक्खं वचो एतस्मिन्ति दुब्बचो' (ज्यामध्ये बोलणे कठीण आहे तो दुर्वच), 'अवनतं सिरो यस्स सोयं अवंसिरो' (ज्याचे डोके खाली झुकले आहे तो अधोमुख), 'अप्पकं रागादि रजो येसं पञ्ञामये अक्खिम्हि ते अप्परजक्खा' (ज्यांच्या प्रज्ञारूपी डोळ्यात राग इत्यादी रज/धूळ कमी आहे ते अल्प-रजस्क) इत्यादी शब्दरचना केली आहे. परंतु त्यांनी 'वचो' (वाणी), 'सिरो' (मस्तक), 'रजो' (धुळीचा कण) इत्यादी शब्दांचे नपुंसकलिंगत्व स्पष्ट करण्यासाठी अशी शब्दरचना केलेली नाही, तर 'सिरो' आणि 'मनो' यांसारखे मनोगणात यायला हवे असलेले पुल्लिंगी शब्द असूनही, काही ठिकाणी लिंगविपर्यासामुळे त्यांची समानाधिकरण पदे अशी (नपुंसकलिंगी) होतात, हे इतरांना समजावून सांगण्याच्या उद्देशाने आणि अनुकंपेने ही रचना केली आहे. येथे देखील तुमच्या मतानुसार जर 'मनो' शब्द नपुंसकलिंगी मानला, तर 'वचो', 'सिरो' इत्यादी शब्द देखील नपुंसकलिंगी ठरतील, कारण त्यांची समानाधिकरण पदे नपुंसकलिंगी रूपाने दर्शवली गेली आहेत. तर मग काय तुम्ही या शब्दांचे देखील नपुंसकलिंगत्व स्वीकारू इच्छिता? नक्कीच, ते हे देखील ऐकून याचे खंडन करण्यास असमर्थ ठरून मौन होतील. जरी त्यांना दुसरे कोणतेही स्वीकारण्याजोगे कारण न दिसल्याने ते असे म्हणू शकतील की, 'हे महाशय, जर 'मनो' शब्द नपुंसकलिंगी नाही, तर वैयाकरण (व्याकरणकार) 'मनो शब्द नपुंसकलिंगी आहे' असे का म्हणतात?' त्यांना असे सांगावे – जर तुम्ही वैयाकरणांचे मत स्वीकारून 'मनो' शब्दाचे नपुंसकलिंगत्व पसंत करता, तर या जगात भगवानच अद्वितीय, महान वैयाकरण, महापुरुष, विशारद (कुशल) आणि परवादाचे (इतर मतांचे) मर्दन करणारे आहेत ना? कारण पदरचनाकार, वैयाकरण, अंबट्ठ माणव, पोक्खरसाती, सोणदण्ड इत्यादी ब्राह्मण आणि सच्चक निगण्ठ इत्यादी परिव्राजक हे वादात भगवंतांची बरोबरी करू शकले नाहीत. उलट, भगवानच मत्त हत्तींच्या कळपात सिंह जसा निर्भयपणे वावरतो, तसे निर्भयपणे त्यांच्या वादाचे मर्दन करत असत आणि त्यांना महान अर्थामध्ये (कल्याणामध्ये) प्रतिष्ठित करत असत. अशा व्यवहारकुशल भगवंतांनी 'कायो अनिच्चो' (शरीर अनित्य आहे), 'कायो दुक्खो' (शरीर दुःखकारक आहे), 'मनो अनिच्चो' (मन अनित्य आहे), 'मनो दुक्खो' (मन दुःखकारक आहे) इत्यादी उपदेशांद्वारे 'मनो' शब्दाचे पुल्लिंगत्व दर्शवणारी अनेक पाळि वचने सांगितलेली दिसतात. म्हणून 'मनो' शब्द हा पुल्लिंगीच आहे, असा दृढ विश्वास ठेवावा. असे म्हटल्यावर ते निरुत्तर, हतबुद्ध, खिन्न, खांदे पाडलेले आणि खाली तोंड करून विचारमग्न होतील. ဣဒါနိ သရသဒ္ဒါဒီနံ နာမိကပဒမာလာ ဝိသေသတော ဝုစ္စတေ – आता 'सर' इत्यादी शब्दांची नामरूपे (विभक्ती रूपे) विशेष रूपाने सांगितली जात आहेत – သရော, သရာ. သရံ, သရေ. သရေန, သရေဟိ, သရေဘိ. သရဿ, သရာနံ. သရာ, သရသ္မာ, သရမှာ, သရေဟိ, သရေဘိ. သရဿ, သရာနံ. သရေ, သရသ္မိံ, သရမှိ, သရေသု. ဘော သရ, ဘဝန္တော သရာ. सरो, सरा (प्रथमा). सरं, सरे (द्वितीया). सरेन, सरेहि, सरेभि (तृतीया). सरस्स, सरानं (चतुर्थी). सरा, सरस्मा, सरम्हा, सरेहि, सरेभि (पंचमी). सरस्स, सरानं (षष्ठी). सरे, सरस्मिं, सरम्हि, सरेसु (सप्तमी). भो सर, भवन्तो सरा (संबोधन). အယံ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌဿ ဥသုသဒ္ဒသရဝနအကာရာဒိသရဝါစကဿ သရသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. ही 'पुरिस' (पुरुष) शब्दाच्या नियमाचे पूर्णपणे अनुसरण करणाऱ्या, बाण, आवाज, तलाव, 'अ' कार इत्यादी स्वरांचा वाचक असलेल्या 'सर' शब्दाची नामरूपे (विभक्ती रूपे) आहेत. အယံ ပန ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌဿ မနောဂဏပက္ခိကဿ ရဟဒဝါစကဿ သရသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ – परंतु ही 'पुरिस' शब्दाच्या नियमाचे अंशतः अनुसरण करणाऱ्या, 'मनोगण' (मन-समूह) अंतर्गत येणाऱ्या आणि तलाव (सरोवर) या अर्थाचा वाचक असलेल्या 'सर' शब्दाची नामरूपे आहेत – သရော, သရာ. သရံ, သရော, သရေ. သရသာ, သရေန, သရေဟိ, သရေဘိ. သရသော, သရဿ, သရာနံ. သရာ, သရသ္မာ, သရမှာ, သရေဟိ, သရေဘိ. သရသော, သရဿ, သရာနံ. သရသိ, သရေ, သရသ္မိံ, သရမှိ, သရေသု. ဘော သရ, ဘဝန္တော သရာ, ဘော သရာ ဣတိ ဝါ. सरो, सरा। सरं, सरो, सरे। सरसा, सरेन, सरेहि, सरेभि। सरसो, सरस्स, सरानं। सरा, सरस्मा, सरम्हा, सरेहि, सरेभि। सरसो, सरस्स, सरानं। सरसि, सरे, सरस्मिं, सरम्हि, सरेसु। भो सर, भवन्तो सरा, भो सरा - असे रूप होते. ဝယော, ဝယာ. ဝယံ, ဝယေ. ဝယေန, ဝယေဟိ, ဝယေဘီတိ ပုရိသနယေန ဉေ ယျော. အယံ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌဿ ပရိဟာနိဝါစကဿ ဝယသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. वयो, वया। वयं, वये। वयेन, वयेहि, वयेभि - हे 'पुरिस' (पुरुष) नियमाप्रमाणे जाणावे. ही 'पुरिस' नियमात पूर्णपणे समाविष्ट असलेल्या, 'ऱ्हास' (पतन) दर्शवणाऱ्या 'वय' शब्दाची नामरूपमाला आहे. အယံ [Pg.139] ပန ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌဿ မနောဂဏပက္ခိကဿ အာယုကောဋ္ဌာသဝါစကဿ ဝယသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ – ဝယော, ဝယာ. ဝယံ, ဝယော, ဝယေ. ဝယသာ, ဝယေန, ဝယေဟိ, ဝယေဘီတိ မနနယေန ဉေယျော. တဿ စေတော ပဋိဿောသိ, အရညေ လုဒ္ဒဂေါစရော. စေတာ ဟနိံသု ဝေဒဗ္ဗံ. परंतु, ही 'पुरिस' नियमात अंशतः समाविष्ट असलेल्या, 'मनोगण' वर्गातील, 'आयुष्याचा भाग' दर्शवणाऱ्या 'वय' शब्दाची नामरूपमाला आहे – वयो, वया। वयं, वयो, वये। वयसा, वयेन, वयेहि, वयेभि - हे 'मन' नियमाप्रमाणे जाणावे. 'त्याच्या मनाने प्रतिसाद दिला, अरण्यात पारध्याच्या क्षेत्रात.' 'चेत लोकांनी वेदब्बाला मारले.' စေတော, စေတာ. စေတံ, စေတေ. စေတေန, စေတေဟိ, စေတေဘီတိ ပုရိသနယေန ဉေယျော. အယံ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌဿ ပဏ္ဏတ္တိဝါစကဿ စေတသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. चेतो, चेता। चेतं, चेते। चेतेन, चेतेहि, चेतेभि - हे 'पुरिस' नियमाप्रमाणे जाणावे. ही 'पुरिस' नियमात पूर्णपणे समाविष्ट असलेल्या, 'प्रज्ञप्ती' (नाव/संज्ञा) दर्शवणाऱ्या 'चेत' शब्दाची नामरूपमाला आहे. အယံ ပန ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌဿ စိတ္တဝါစကဿ စေတသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ – စေတော, စေတာ. စေတံ, စေတော, စေတေ. စေတသာ, စေတေန, စေတေဟိ, စေတေဘီတိ မနနယေန ဉေယျော. ယသော ကုလပုတ္တော, ယသံ ကုလပုတ္တံ, ယသေန ကုလပုတ္တေနာတိ ဧကဝစနဝသေန ပုရိသနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ, ဧကဝစနပုထုဝစနဝသေန ဝါ. ဧဝံ ကာနိစိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ပဝိဋ္ဌာနိ စ ဟောန္တိ, ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌာနိ စာတိ ဣမိနာ နယေန သဗ္ဗပဒါနိ ပညာစက္ခုနာ ဥပပရိက္ခိတွာ ဝိသေသော ဝေဒိတဗ္ဗော. အဝိသေသညုနော ဟိ ဧဝမာဒိဝိဘာဂံ အဇာနန္တာ ယံ ဝါ တံ ဝါ ဗျဉ္ဇနံ ရောပေန္တာ ယထာဓိပ္ပေတံ အတ္ထံ ဝိရာဓေန္တိ, တသ္မာ ယော ဧတ္ထ အမှေဟိ ပကာသိတော ဝိဘာဂေါ, သော သဒ္ဓါသမ္ပန္နေဟိ ကုလပုတ္တေဟိ သက္ကစ္စမုဂ္ဂဟေတဗ္ဗော. ကတမာနိ ကာနိစိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌာနိ စ ဧကဒေသေန န ပဝိဋ္ဌာနိ စ? မနော ဝစော တေဇောသဒ္ဒါဒယော စေဝ အယျသဒ္ဒေါ စ, တတြ မနသဒ္ဒါဒီနံ နာမိကပဒမာလာ ဟေဋ္ဌာ ဝိဘာဝိတာ. परंतु, ही 'पुरिस' नियमात अंशतः समाविष्ट असलेल्या, 'चित्त' (मन) दर्शवणाऱ्या 'चेत' शब्दाची नामरूपमाला आहे – चेतो, चेता। चेतं, चेतो, चेते। चेतसा, चेतेन, चेतेहि, cetebhīti (चेतेभि) - हे 'मन' नियमाप्रमाणे जाणावे. 'यसो कुलपुत्तो' (यस कुलपुत्र), 'यसं कुलपुत्तं' (यस कुलपुत्राला), 'यसेन कुलपुत्तेन' (यस कुलपुत्राद्वारे) - हे एकवचनाच्या स्वरूपात 'पुरिस' नियमाप्रमाणे किंवा एकवचन व बहुवचनाच्या स्वरूपात योजावे. अशा प्रकारे, काही 'ओ-कारान्त' शब्द 'पुरिस' नियमात पूर्णपणे समाविष्ट असतात, तर काही अंशतः समाविष्ट असतात; या नियमाने सर्व शब्दांची प्रज्ञाचक्षूने परीक्षा करून त्यातील फरक समजून घ्यावा. कारण, फरक न जाणणारे लोक अशा प्रकारचा विभाग न समजता वाटेल ते व्यंजन (शब्दरूप) योजून इच्छित अर्थाचा नाश करतात. म्हणून, आम्ही येथे जो विभाग स्पष्ट केला आहे, तो श्रद्धासंपन्न कुलपुत्रांनी काळजीपूर्वक ग्रहण करावा. 'पुरिस' नियमात अंशतः समाविष्ट असलेले आणि अंशतः समाविष्ट नसलेले काही 'ओ-कारान्त' शब्द कोणते आहेत? 'मन', 'वच', 'तेज' इत्यादी शब्द आणि 'अय्य' शब्द; त्यापैकी 'मन' इत्यादी शब्दांची नामरूपमाला खाली स्पष्ट केली आहे. အယျသဒ္ဒဿ [Pg.140] ပန နာမိကပဒမာလာယံ ‘‘အယျော, အယျာ. အယျံ, အယျေ’’တိ ပုရိသနယေန ဝတွာ အာလပနဋ္ဌာနေ ‘‘ဘော အယျ, ဘော အယျော’’တိ ဒွေ ဧကဝစနာနိ, ‘‘ဘဝန္တော အယျာ, ဘဝန္တော အယျော’’တိ ဒွေ ဗဟုဝစနာနိ စ ဝတ္တဗ္ဗာနိ. ဧတ္ထ အယျော ဣတိ သဒ္ဒေါ ပစ္စတ္တဝစနဘာဝေ ဧကဝစနံ, အာလပနဝစနဘာဝေ ဧကဝစနဉ္စေဝ ဗဟုဝစနဉ္စ. တတြိမေ ပယောဂါ ‘‘အယျော ကိရ သာဂတော အမ္ဗတိတ္ထိကေန နာဂေန သင်္ဂါမေသိ, ပိဝတု ဘန္တေ အယျော သာဂတော ကာပေါတိကံ ပသန္န’’န္တိ ဧဝမာဒီနိ အယျောသဒ္ဒဿ ပစ္စတ္တေကဝစနပ္ပယောဂါနိ, ‘‘အထ ခေါ သာ ဣတ္ထီ တံ ပုရိသံ ဧတဒဝေါစ ‘နာယျော သော ဘိက္ခု မံ နိပ္ပာဋေသိ, အပိစ အဟမေဝ တေန ဘိက္ခုနာ ဂစ္ဆာမိ, အကာရကော သော ဘိက္ခု, ဂစ္ဆ ခမာပေဟီ’တိ’’ ဧဝမာဒီနိ အယျောသဒ္ဒဿ အာလပနေကဝစနပ္ပယောဂါနိ, ‘‘ဧထ’ယျော ရာဇဝသတိံ, နိသီဒိတွာ သုဏာထ မေ. ဧထ မယံ အယျော သမဏေသု သကျပုတ္တိယေသု ပဗ္ဗဇိဿာမာ’’တိ ဧဝမာဒီနိ အယျောသဒ္ဒဿ အာလပနဗဟုဝစနပ္ပယောဂါနိ. ဘဝတိ စတြ – परंतु, 'अय्य' शब्दाच्या नामरूपमालेमध्ये “अय्यो, अय्या। अय्यं, अय्ये” असे 'पुरिस' नियमाप्रमाणे म्हणून, संबोधन स्थानी “भो अय्य, भो अय्यो” अशी दोन एकवचने आणि “भवन्तो अय्या, भवन्तो अय्यो” अशी दोन बहुवचने म्हणावीत. येथे 'अय्यो' हा शब्द प्रथमा विभक्तीत एकवचन आहे, आणि संबोधन विभक्तीत एकवचन तसेच बहुवचनही आहे. त्यामध्ये हे प्रयोग आहेत: “अय्यो किर सागतो अम्बतित्थिकेन नागेन सङ्गामेसि, पिवतु भन्ते अय्यो सागतो कापोतिकं प्रसन्नं” (आर्य सागत यांनी खरोखर आंबतित्थिय नागाशी युद्ध केले, भन्ते आर्य सागत यांनी कापोतिका नावाची मद्य प्यावी) इत्यादी 'अय्यो' शब्दाचे प्रथमा एकवचनाचे प्रयोग आहेत; “अथ खो सा इत्थी तं पुरिसं एतदवोच - नाय्यो सो भिक्खु मं निप्पाटेसि, अपि च अहमेव तेन भिक्खुना गच्छामि, अकारको सो भिक्खु, गच्छ खमापेहीति” (त्यानंतर त्या स्त्रीने त्या पुरुषाला असे म्हटले - 'त्या आर्य भिक्खूने मला घराबाहेर काढले नाही, उलट मीच त्या भिक्खूंसोबत जात आहे, ते भिक्खू निरपराध आहेत, जा आणि त्यांची क्षमा माग') इत्यादी 'अय्यो' शब्दाचे संबोधन एकवचनाचे प्रयोग आहेत; “एथय्यो राजवसतिं, निसीदित्वा सुणाथ मे। एथ मयं अय्यो समणेसु सक्यपुत्तियेसु पब्बजिस्सामा” (या, आर्यहो, राजवाड्यात, बसून माझे ऐका. या, आपण आर्य शाक्यपुत्रीय श्रमणांमध्ये प्रव्रजित होऊ या) इत्यादी 'अय्यो' शब्दाचे संबोधन बहुवचनाचे प्रयोग आहेत. याविषयी असे म्हटले आहे – အယျော ဣတိ အယံ သဒ္ဒေါ, ပစ္စတ္တေကဝစော ဘဝေ; အာလပနေ ဗဟုဝစော, ဘဝေ ဧကဝစောပိ စ – “अय्यो” हा शब्द प्रथमा विभक्तीत एकवचनी असतो; संबोधनात तो बहुवचनी आणि एकवचनीसुद्धा असतो – ဧဝံ ကာနိစိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌာနိ စ ဟောန္တိ ဧကဒေသေန န ပဝိဋ္ဌာနိ စ. अशा प्रकारे, काही 'ओ-कारान्त' शब्द 'पुरिस' नियमात अंशतः समाविष्ट असतात आणि अंशतः समाविष्ट नसतात. ကတမာနိ ကာနိစိ ဩကာရန္တပဒါနိ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ အပ္ပဝိဋ္ဌာနိ? ဂေါသဒ္ဒေါယေဝ. ဂေါသဒ္ဒဿ ဟိ အယံ နာမိကပဒမာလာ – 'पुरिस' नियमात पूर्णपणे समाविष्ट नसलेले काही 'ओ-कारान्त' शब्द कोणते आहेत? केवळ 'गो' (गाय/बैल) शब्दच. कारण 'गो' शब्दाची नामरूपमाला खालीलप्रमाणे आहे – ဂေါ, ဂါဝေါ, ဂဝေါ. ဂါဝုံ, ဂါဝံ, ဂဝံ, ဂါဝေါ, ဂဝေါ. ဂါဝေန, ဂဝေန, ဂေါဟိ, ဂေါဘိ. ဂါဝဿ, ဂဝဿ, ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ. ဂါဝါ, ဂါဝသ္မာ, ဂါဝမှာ, ဂဝါ, ဂဝသ္မာ, ဂဝမှာ, ဂေါဟိ, ဂေါဘိ. ဂါဝဿ, ဂဝဿ, ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ. ဂါဝေ, ဂါဝသ္မိံ, ဂါဝမှိ, ဂဝေ, ဂဝသ္မိံ[Pg.141], ဂဝမှိ, ဂါဝေသု, ဂဝေသု, ဂေါသု. ဘော ဂေါ, ဘဝန္တော ဂါဝေါ, ဂဝေါ. အယံ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ အပ္ပဝိဋ္ဌဿ ဂေါသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. गो, गावो, गवो। गावुं, गावं, गवं, गावो, गवो। गावेन, गवेन, गोहि, गोभि। गावस्स, गवस्स, गवं, गुन्नं, गोनं। गावा, गावस्मा, गावम्हा, गवा, गवस्मा, गवम्हा, गोहि, गोभि। गावस्स, गवस्स, गवं, गुन्नं, गोनं। गावे, गावस्मिं, गावम्हि, गवे, गवस्मिं, गवम्हि, गावेसु, गवेसु, गोसु। भो गो, भवन्तो गावो, गवो - ही 'पुरिस' नियमात पूर्णपणे समाविष्ट नसलेल्या 'गो' शब्दाची नामरूपमाला आहे. နနု စ ဘော ဂေါသဒ္ဒေါ အတ္တနာ သမ္ဘူတဂေါဏသဒ္ဒမာလာဝသေန ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌော စေဝ ဧကဒေသေန န ပဝိဋ္ဌော စာတိ? သစ္စံ. ဂေါဏသဒ္ဒေါ ဂေါသဒ္ဒဝသေန သမ္ဘူတောပိ ‘‘ဝတ္တိစ္ဆာနုပုဗ္ဗိကာ သဒ္ဒပဋိပတ္တီ’’တိ ဝစနတော ဂေါသဒ္ဒတော ဝိသုံ အမှေဟိ ဂဟေတွာ ပုရိသနယေ ပက္ခိတ္တော. တဿ ဟိ ဝိသုံ ဂဟဏေ ယုတ္တိ ဒိဿတိ သျာဒီသု ဧကာကာရေနေဝ တိဋ္ဌနတော, တသ္မာ ဂေါသဒ္ဒတော သမ္ဘူတမ္ပိ ဂေါဏသဒ္ဒံ အနပေက္ခိတွာ သုဒ္ဓံ ဂေါသဒ္ဒမေဝ ဂဟေတွာ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ ဂေါသဒ္ဒဿ အပ္ပဝိဋ္ဌတာ ဝုတ္တာ. पण हे पहा, 'गो' शब्द स्वतःपासून उत्पन्न झालेल्या 'गोण' शब्दाच्या रूपमालेच्या आधारे 'पुरिस' नियमात अंशतः समाविष्ट आणि अंशतः समाविष्ट नाही असे नाही का? हे सत्य आहे. 'गोण' शब्द 'गो' शब्दापासून उत्पन्न झालेला असला तरी, “वक्त्याच्या इच्छेनुसार शब्दांची योजना होते” या वचनानुसार, आम्ही 'गो' शब्दापासून त्याला वेगळे मानून 'पुरिस' नियमात समाविष्ट केले आहे. कारण, 'सि' इत्यादी विभक्ती प्रत्ययांमध्ये तो एकाच रूपाने राहत असल्यामुळे त्याला वेगळे मानणे योग्य ठरते. म्हणून, 'गो' शब्दापासून उत्पन्न झालेल्या 'गोण' शब्दाचा विचार न करता, केवळ शुद्ध 'गो' शब्दच घेऊन 'पुरिस' नियमात 'गो' शब्दाचा पूर्णपणे समावेश नाही, असे म्हटले आहे. နနု စ ဘော ပစ္စတ္တဝစနဘူတော ဂေါဣတိ သဒ္ဒေါ ပုရိသောတိ သဒ္ဒေန သဒိသတ္တာ ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌောတိ? တန္န, ဂေါသဒ္ဒေါ ဟိ နိစ္စမောကာရန္တော, န ပုရိသသဒ္ဒါဒယော ဝိယ ပဌမံ အကာရန္တဘာဝေ ဌတွာ ပစ္ဆာ ပဋိလဒ္ဓေါကာရန္တဋ္ဌော. တေနေဝ ဟိ ပစ္စတ္တဝစနဋ္ဌာနေပိ အာလပနဝစနဋ္ဌာနေပိ ဂေါဣစ္စေဝ တိဋ္ဌတိ. ယဒိ ပစ္စတ္တဝစနတ္တံ ပဋိစ္စ ဂေါသဒ္ဒဿ ပုရိသနယေ ဧကဒေသေန ပဝိဋ္ဌတာ ဣစ္ဆိတဗ္ဗာ, ‘‘ကာနိစိ ဩကာရန္တပဒါနီ’’တိ ဧဝံ ဝုတ္တာ ဩကာရန္တကထာ ကမတ္ထံ ဒီပေယျ, နိပ္ဖလာဝ သာ ကထာ သိယာ, တသ္မာ အမှေဟိ ယထာဝုတ္တော နယောယေဝ အာယသ္မန္တေဟိ မနသိ ကာတဗ္ဗော. ဧဝံ ဂေါသဒ္ဒဿ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ အပ္ပဝိဋ္ဌတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. पण हे पहा, प्रथमा विभक्तीत असलेला 'गो' हा शब्द 'पुरिस' शब्दासारखा असल्यामुळे तो 'पुरिस' नियमात अंशतः समाविष्ट आहे असे नाही का? तसे नाही; कारण 'गो' शब्द हा नेहमी 'ओ-कारान्त' असतो, 'पुरिस' इत्यादी शब्दांप्रमाणे तो आधी 'अ-कारान्त' राहून नंतर 'ओ-कारान्त' रूप प्राप्त करत नाही. म्हणूनच, प्रथमा विभक्तीच्या स्थानी आणि संबोधन विभक्तीच्या स्थानी देखील तो 'गो' असाच राहतो. जर प्रथमा विभक्तीच्या आधारे 'गो' शब्दाचा 'पुरिस' नियमात अंशतः समावेश मान्य करायचा असेल, तर “काही ओ-कारान्त शब्द” अशी सांगितलेली ओ-कारान्त चर्चा काय स्पष्ट करेल? ती चर्चा निरर्थकच ठरेल. म्हणून, आम्ही सांगितलेला नियमच आयुष्यमानांनी (पूजनीय भिक्खूंनी) मनात ठेवावा. अशा प्रकारे, 'गो' शब्दाचा 'पुरिस' नियमात पूर्णपणे समावेश नाही, असे समजावे. ကေစေတ္ထ ဧဝံ ပုစ္ဆေယျုံ ‘‘ဂေါသဒ္ဒဿ တာဝ ‘ဂေါ, ဂါဝေါ, ဂဝေါ. ဂါဝုံ, ဂါဝံ, ဂဝံ’ ဣစ္စာဒိနာ နယေန ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ အပ္ပဝိဋ္ဌတာ အမှေဟိ ဉာတာ, ဇရဂ္ဂဝ ပုင်္ဂဝါဒိသဒ္ဒါ ပန ကုတြ နယေ [Pg.142] ပဝိဋ္ဌာ’’တိ? တေသံ ဧဝံ ဗျာကာတဗ္ဗံ ‘‘ဇရဂ္ဂဝ ပုင်္ဂဝါဒိသဒ္ဒါ သဗ္ဗထာပိ ပုရိသနယေ ပဝိဋ္ဌာ’’တိ. တထာ ဟိ တေသံ ဂေါသဒ္ဒတော အယံ ဝိသေသော, ဇရန္တော စ သော ဂေါ စာတိ ဇရဂ္ဂဝေါ. ဧတ္ထ နကာရလောပေါ တကာရဿ စ ဂကာရတ္တံ ဘဝတိ သမာသပဒတ္တာ, သမာသေ စ သိမှိ ပရေ ဂေါသဒ္ဒဿောကာရဿ အဝါဒေသော လဗ္ဘတိ, တသ္မာ ပါဠိယံ ‘‘ဝိသာဏေန ဇရဂ္ဂဝေါ’’တိ ဧကဝစနရူပံ ဒိဿတိ. တထာ ဟိ အညတ္ထ အနုပပဒတ္တာ ဂဝေါဣတိ ဗဟုဝစနပဒံယေဝ ဒိဿတိ. ဣဓ ပန သောပပဒတ္တာ သမာသပဒဘာဝမာဂမ္မ ‘‘ဇရဂ္ဂဝေါ’’တိ ဧကဝစနပဒံယေဝ ဒိဿတိ. တထာ ဟိ ဇရဂ္ဂဝေါတိ ဧတ္ထ ဇရန္တာ စ တေ ဂဝေါ စာတိ ဧဝံ ဗဟုဝစနဝသေန နိဗ္ဗစနီယတာ န လဗ္ဘတိ လောကသင်္ကေတဝသေန ဧကသ္မိံ အတ္ထေ နိရူဠှတ္တာတိ. ‘‘ဇရဂ္ဂဝေါ, ဇရဂ္ဂဝါ. ဇရဂ္ဂဝံ, ဇရဂ္ဂဝေ. ဇရဂ္ဂဝေနာ’’တိ ပုရိသနယေန နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧသ နယော ပုင်္ဂဝေါ သကျပုင်္ဂဝေါတိအာဒီသုပိ. येथे काही जण असे विचारू शकतात की, "आम्हाला हे माहीत आहे की 'गो' शब्दाचा 'गो, गावो, गवो. गावुं, गावं, गवं' इत्यादी पद्धतीने 'पुरिस' (पुरुष) नामाच्या रूपात पूर्णपणे प्रवेश होत नाही, परंतु 'जरग्गव', 'पुङ्गव' इत्यादी शब्द कोणत्या पद्धतीमध्ये (नय) समाविष्ट होतात?" त्यांना असे उत्तर दिले पाहिजे की, "'जरग्गव', 'पुङ्गव' इत्यादी शब्द सर्व प्रकारे 'पुरिस' (पुरुष) नामाच्या पद्धतीमध्येच समाविष्ट होतात." कारण 'गो' शब्दापेक्षा त्यांचा हा फरक आहे की, 'जरन्तो च सो गो चाति जरग्गवो' (जो म्हातारा आहे आणि तो बैल आहे तो 'जरग्गव' होय). येथे समासपद असल्यामुळे 'न' काराचा लोप होतो आणि 'त' काराचा 'ग' कार होतो, आणि समासात 'सि' प्रत्यय पर असताना 'गो' शब्दाच्या 'ओ' काराचा 'अव' आदेश होतो, म्हणूनच पाळीमध्ये "विसाणेन जरग्गवो" (शिंगाने म्हातारा बैल) असे एकवचनी रूप दिसते. कारण इतर ठिकाणी उपपद नसल्यामुळे 'गवो' हे बहुवचनी रूपच दिसते. परंतु येथे उपपद असल्यामुळे समासपद होऊन 'जरग्गवो' असे एकवचनी रूपच दिसते. कारण 'जरग्गवो' येथे 'जरन्ता च ते गवो चाति' अशा प्रकारे बहुवचनाच्या आधारे व्युत्पत्ती (निर्वचन) मिळत नाही, कारण लोकसंकेतानुसार (लोकव्यवहारानुसार) ते एकाच अर्थात रूढ झाले आहे. "जरग्गवो, जरग्गवा. जरग्गवं, जरग्गवे. जरग्गवेना" अशा प्रकारे 'पुरिस' पद्धतीनुसार नामविभक्तीचे रूप (नामिकपदमला) जोडले पाहिजे. हाच नियम 'पुङ्गव', 'सक्यपुङ्गव' इत्यादी शब्दांनाही लागू होतो. တတြ ပုင်္ဂဝေါတိ ဂုန္နံ ယူထပတိ နိသဘသင်္ခါတော ဥသဘော. ယော ပါဠိယံ ‘‘မုဟုတ္တဇာတောဝ ယထာ ဂဝံပတိ, သမေဟိ ပါဒေဟိ ဖုသီ ဝသုန္ဓရ’’န္တိ စ ‘‘ဂဝဉ္စေ တရမာနာနံ, ဥဇုံ ဂစ္ဆတိ ပုင်္ဂဝေါ’’တိ စ အာဂတော. ဤဒိသေသု ပန ဌာနေသု ကေစိ ‘‘ပုမာ စ သော ဂေါ စာတိ ပုင်္ဂဝေါ’’တိ ဝစနတ္ထံ ဘဏန္တိ. မယံ ပန ပဓာနေ နိရူဠှော အယံ သဒ္ဒေါတိ ဝစနတ္ထံ န ဘဏာမ. န ဟိ ပုင်္ကောကိလောတိအာဒိသဒ္ဒါနံ ကောကိလာဒီနံ ပုမ္ဘာဝပ္ပကာသနမတ္တေ သမတ္ထတာ ဝိယ ဣမဿ ပုမ္ဘာဝပ္ပကာသနမတ္တေ သမတ္ထတာ သမ္ဘဝတိ, အထ ခေါ ပဓာနဘာဝပ္ပကာသနေ စ သမတ္ထတာ သမ္ဘဝတိ. တေန ‘‘သကျပုင်္ဂဝေါ’’တိအာဒီသု နိသဘသင်္ခါတော ပုင်္ဂဝေါ ဝိယာတိ ပုင်္ဂဝေါ, သကျာနံ, သကျေသု [Pg.143] ဝါ ပုင်္ဂဝေါ သကျပုင်္ဂဝေါတိအာဒိနာ သမာသပဒတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အထ ဝါ ဥတ္တရပဒတ္တေ ဌိတာနံ သီဟဗျဂ္ဃနာဂါဒိသဒ္ဒါနံ သေဋ္ဌဝါစကတ္တာ ‘‘သကျပုင်္ဂဝေါ’’တိအာဒီနံ ‘‘သကျသေဋ္ဌော’’တိအာဒိနာ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဣတိ သဗ္ဗထာပိ ပုရိသနယေ ပဝတ္တနတော ဇရဂ္ဂဝ ပုင်္ဂဝါဒိသဒ္ဒါနံ ဂေါသဒ္ဒဿ ပဒမာလတော ဝိသဒိသပဒမာလတာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. ဂေါသဒ္ဒဿ ပန ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ အပ္ပဝိဋ္ဌတာ စ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. तेथे 'पुङ्गव' म्हणजे गाईंच्या कळपाचा पती (कळपाचा प्रमुख), ज्याला 'निसभ' किंवा 'उसभ' (वृषभ/बैल) म्हटले जाते. जो पाळीमध्ये "मुहुत्तजातोव यथा ग्वम्पति, समेहि पादेहि फुसी वसुन्धरं" (जन्माला आल्यावर लगेचच कळपाच्या प्रमुखाप्रमाणे सम चरणांनी पृथ्वीला स्पर्श केला) आणि "गवञ्चे तरमानानं, उजुं गच्छति पुङ्गवो" (नदी पार करणाऱ्या गाईंमध्ये जर पुङ्गव/बैल सरळ गेला तर...) अशा प्रकारे आला आहे. अशा ठिकाणी काही जण "पुमा च सो गो चाति पुङ्गवो" (जो नर आहे आणि बैल आहे तो पुङ्गव) असा शब्दार्थ सांगतात. परंतु आम्ही हा शब्द 'प्रधान' (श्रेष्ठ) या अर्थी रूढ असल्यामुळे असा शब्दार्थ सांगत नाही. कारण 'पुङ्कोकिल' इत्यादी शब्दांमध्ये कोकिळा इत्यादींचा केवळ नरभाव (पुंभाव) प्रकट करण्याची जी क्षमता असते, तशी क्षमता या शब्दाची केवळ नरभाव प्रकट करण्यात नाही, तर श्रेष्ठत्व (प्रधानभाव) प्रकट करण्यात आहे. म्हणूनच "सक्यपुङ्गवो" (शाक्यपुङ्गव) इत्यादी शब्दांमध्ये 'निसभ' (श्रेष्ठ बैल) समजल्या जाणाऱ्या पुङ्गवाप्रमाणे जो आहे तो पुङ्गव, शाक्यांचा किंवा शाक्यांमध्ये जो पुङ्गव (श्रेष्ठ) तो 'सक्यपुङ्गवो' अशा प्रकारे समासाचा अर्थ घेतला पाहिजे. किंवा उत्तरपदामध्ये असलेल्या सिंह, व्याघ्र, नाग इत्यादी शब्दांप्रमाणे श्रेष्ठवाचक असल्यामुळे "सक्यपुङ्गवो" इत्यादींचा अर्थ "सक्यसेट्ठो" (शाक्यश्रेष्ठ) असा घेतला पाहिजे. अशा प्रकारे सर्व बाजूंनी 'पुरिस' (पुरुष) पद्धतीमध्ये प्रवृत्त होत असल्यामुळे 'जरग्गव', 'पुङ्गव' इत्यादी शब्दांची नामरूपे 'गो' शब्दाच्या नामरूपांपेक्षा भिन्न आहेत असे निश्चित केले पाहिजे. आणि 'गो' शब्दाचा 'पुरिस' पद्धतीमध्ये सर्वथा प्रवेश होत नाही, हेही निश्चित केले पाहिजे. အာပသဒ္ဒေ အာစရိယာနံ လိင်္ဂဝစနဝသေန မတိဘေဒေါ ဝိဇ္ဇတိ, တသ္မာ တံမတေန တဿ ပုရိသနယေ သဗ္ဗထာ အပ္ပဝိဋ္ဌတာ ဘဝတိ. ‘‘အင်္ဂုတ္တရာပေသူ’’တိ ပါဠိယာ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘မဟိယာ ပန နဒိယာ ဥတ္တရေန အာပေါ’’တိ ဝုတ္တံ, ဋီကာယံ ပန တံ ဥလ္လိင်္ဂိတွာ ‘‘မဟိယာ နဒိယာ အာပေါ တဿ ဇနပဒဿ ဥတ္တရေန ဟောန္တိ, တာသံ အဝိဒူရတ္တာ သော ဇနပဒေါ ဥတ္တရာပေါ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧဝံ အာပသဒ္ဒဿ ဧကန္တေန ဣတ္ထိလိင်္ဂတာ ဗဟုဝစနတာ စ အာစရိယေဟိ ဣစ္ဆိတာ, တေသံ မတေ အာပေါဣတိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ပဌမာဗဟုဝစနရူပေ ဟောန္တေ ဒုတိယာတတိယာပဉ္စမီသတ္တမီနံ ဗဟုဝစနရူပါနိ ကီဒိသာနိ သိယုံ. တထာ ဟိ ‘‘ပုရိသေ, ပုရိသေဟိ ပုရိသေဘိ ပုရိသေသူ’’တိ ရူပဝတော ပုလ္လိင်္ဂဿ ဝိယ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ဧကာရဧဟိ ကာရာဒိယုတ္တာနိ ရူပါနိ ကတ္ထစိပိ န ဒိဿန္တိ. အတော တေသံ မတေ ပဒမာလာနယော အတီဝ ဒုက္ကရော. 'आप' (पाणी) शब्दाच्या लिंग आणि वचनाबाबत आचार्यांमध्ये मतभेद आहेत, म्हणून त्यांच्या मते या शब्दाचा 'पुरिस' (पुरुष) पद्धतीमध्ये सर्वथा प्रवेश होत नाही. "अङ्गुत्तरापेसू" या पाळीच्या अट्ठकथेमध्ये "महिया पन नदिया उत्तरेन आपो" (मही नदीच्या उत्तरेला पाणी आहे) असे म्हटले आहे, तर टीकेमध्ये त्याचा उल्लेख करून "महिया नदिया आपो तस्स जनपदस्स उत्तरेन होन्ति, तासं अविदूरत्ता सो जनपदो उत्तरापो" (मही नदीचे पाणी त्या जनपदाच्या उत्तरेला आहे, त्यांच्या जवळ असल्यामुळे तो जनपद 'उत्तराप' आहे) असे म्हटले आहे. अशा प्रकारे 'आप' शब्दाचे केवळ स्त्रीलिंगी असणे आणि बहुवचनी असणे आचार्यांना अभिप्रेत आहे. त्यांच्या मते जर 'आपो' हे स्त्रीलिंगी प्रथमा बहुवचनाचे रूप असेल, तर द्वितीया, तृतीया, पंचमी आणि सप्तमीची बहुवचनी रूपे कशी असतील? कारण "पुरिसे, पुरिसेहि पुरिसेसू" अशा रूपांयुक्त पुल्लिंगाप्रमाणे, ओ-कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दाची 'ए' कार आणि 'इ' कार इत्यादींनी युक्त रूपे कोठेही दिसत नाहीत. म्हणून त्यांच्या मते नामरूपांची पद्धती (पदमाला) अत्यंत कठीण आहे. အာပသဒ္ဒဿ ဂရဝေါ, သဒ္ဒသတ္ထနယံ ပတိ; ဗဟုဝစနတဉ္စိတ္ထိ-လိင်္ဂဘာဝဉ္စ အဗြဝုံ. व्याकरणशास्त्राच्या नियमांनुसार आचार्यांनी 'आप' शब्दाचे बहुवचन आणि स्त्रीलिंगी असणे सांगितले आहे. ဣစ္စာပသဒ္ဒဿ [Pg.144] ဣတ္ထိလိင်္ဂဗဟုဝစနန္တတာ ဝေယျာကရဏာနံ မတံ နိဿာယ အနုမတာတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. အဋ္ဌသာလိနိယံ ပန အာပေါ ဣတိ သဒ္ဒဿ နပုံသကလိင်္ဂေကဝစနဝသေန ဝုတ္တော ပယောဂေါ ဒိဋ္ဌော ‘‘ဩမတ္တံ ပန အာပေါ အဓိမတ္တပထဝီဂတိကံ ဇာတ’’န္တိ. ဇာတကပါဠိယံ တု တဿေကဝစနန္တတာ ဒိဋ္ဌာ. တထာ ဟိ ‘‘သုစိံ သုဂန္ဓံ သလိလံ, အာပေါ တတ္ထာဘိသန္ဒတီ’’တိ. ဣမသ္မိံ ပဒေသေ အာပေါ ဣတိ သဒ္ဒေါ ဧကဝစနဋ္ဌာနေ ဌိတော ဒိဋ္ဌော. ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘အာပေါတိ သင်္ခံ ဂတံ သလိလံ သုစိ သုဂန္ဓံ ဟုတွာ တတ္ထ အဘိသန္ဒတီတိ သလိလံသဒ္ဒဝသေန ဧကဝစနပ္ပယောဂေါ ကတော, န နာမသဒ္ဒဝသေန. အာပသဒ္ဒေါ ဟိ ဧကန္တေနိတ္ထိလိင်္ဂေါ စေဝ ဗဟုဝစနန္တော စ. တထာ ဟိ ‘အာပေါ တတ္ထာဘိသန္ဒန္တီ’တိ ဗဟုဝစနဝသေန တပ္ပယောဂေါ ဝတ္တဗ္ဗောပိ ဆန္ဒာနုရက္ခဏတ္ထံ ဝစနဝိပလ္လာသဝသေန နိဒ္ဒိဋ္ဌော’’တိ. တန္န, ‘‘အာပေါ တတ္ထာဘိသန္ဒရေ’’တိ ဝတ္တုံ သက္ကုဏေယျတ္တာ ‘‘တာနိ အဇ္ဇ ပဒိဿရေ’’တိ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂါ ဝိယ. ယသ္မာ ဧဝံ န ဝုတ္တံ, ယသ္မာ စ ပန ပါဠိယံ ‘‘အာပေါ လဗ္ဘတိ, တေဇော လဗ္ဘတိ, ဝါယော လဗ္ဘတီ’’တိ ဧကဝစနပ္ပယောဂေါ ဒိဿတိ, တသ္မာ ‘‘အာပေါ’’တိ သဒ္ဒဿ ဧကဝစနန္တတာ ပစ္စက္ခတော ဒိဋ္ဌာတိ. अशा प्रकारे 'आप' शब्दाचे स्त्रीलिंगी आणि बहुवचनान्त असणे हे वैयाकरणांच्या मताचा आश्रय घेऊन मान्य केले आहे असे समजावे. परंतु अट्ठसालिनीमध्ये 'आप' या शब्दाचा नपुंसकलिंगी एकवचनाच्या रूपात वापर झालेला दिसतो: "ओमत्तं पन आपो अधिमत्तपथवीगतिकं जातं" (कमी प्रमाणात असलेले पाणी हे अधिक प्रमाणात पृथ्वीच्या स्वभावाचे झाले आहे). जातकपाळीमध्ये तर त्याचे एकवचनी रूप दिसते. जसे की, "सुचिं सुगन्धं सलिलं, आपो तत्थाभिसन्दती" (स्वच्छ आणि सुगंधी पाणी तेथे वाहते). या ठिकाणी 'आपो' हा शब्द एकवचनाच्या जागी वापरलेला दिसतो. येथे काही जण असे म्हणू शकतात की, "'आप' अशी संज्ञा मिळालेले पाणी स्वच्छ आणि सुगंधी होऊन तेथे वाहते, येथे 'सलिल' शब्दाच्या प्रभावामुळे एकवचनी प्रयोग केला आहे, नाम शब्दाच्या प्रभावामुळे नाही. कारण 'आप' शब्द निश्चितपणे स्त्रीलिंगी आणि बहुवचनान्तच आहे. म्हणूनच 'आपो तत्थाभिसन्दन्ती' असा बहुवचनी प्रयोग करणे योग्य असतानाही, छंदाचे रक्षण करण्यासाठी वचन-विपर्यास (वचनात बदल) करून तसा निर्देश केला आहे." हे योग्य नाही, कारण "आपो तत्थाभिसन्दरे" असे म्हणणे शक्य होते, जसे "तानि अज्ज पदिस्सरे" हा बहुवचनी प्रयोग आहे. ज्याअर्थी असे म्हटले गेले नाही, आणि ज्याअर्थी पाळीमध्ये "आपो लब्भति, तेजो लब्भति, वायो लब्भति" (पाणी मिळते, तेज मिळते, वायू मिळतो) असा एकवचनी प्रयोग दिसतो, त्याअर्थी 'आपो' या शब्दाचे एकवचनान्त असणे प्रत्यक्षपणे दिसून येते. အထာပိ စေ ဝဒေယျုံ – နနု ပါဠိယံယေဝ တဿ ဗဟုဝစနန္တတာ ပစ္စက္ခတော ဒိဋ္ဌာ ‘‘အာပေါ စ ဒေဝါ ပထဝီ စ, တေဇော ဝါယော တဒါဂမု’’န္တိ? တမ္ပိ န. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘ဒေဝါ’’တိ သဒ္ဒံ အပေက္ခိတွာ ‘‘အာဂမု’’န္တိ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂေါ ကတော, န ‘‘အာပေါ’’တိ သဒ္ဒံ. ယဒိ ‘‘အာပေါ’’တိ သဒ္ဒံ သန္ဓာယ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂေါ ကတော သိယာ, ‘‘ပထဝီ’’တိ ‘‘တေဇော’’တိ ‘‘ဝါယော’’တိ စ သဒ္ဒမ္ပိ သန္ဓာယ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂေါ ကတော သိယာ[Pg.145]. ဧဝံ သန္တေ ပထဝီ တေဇော ဝါယောသဒ္ဒါပိ ဗဟုဝစနကဘာဝမာပဇ္ဇေယျုံ, န ပန အာပဇ္ဇန္တိ. န ဟေတေ ဗဟုဝစနကာ, အထ ခေါ ဧကဝစနကာ ဧဝ. ရူဠှီဝသေန တေ ပဝတ္တာ ပကတိအာပါဒီသု အတ္ထေသု အပ္ပဝတ္တနတော. တထာ ဟိ အာပေါကသိဏာဒီသု ပရိကမ္မံ ကတွာ နိဗ္ဗတ္တာ ဒေဝါ အာရမ္မဏဝသေန ‘‘အာပေါ’’တိအာဒိနာမံ လဘန္တီတိ. ဧဝံ ဝုတ္တာပိ တေ ဧဝံ ဝဒေယျုံ ‘‘နနု စ ဘော ‘အင်္ဂုတ္တရာပေသူ’တိ ဗဟုဝစနပါဠိ ဒိဿတီ’’တိ? တေ ဝတ္တဗ္ဗာ – အသမ္ပထမဝတိဏ္ဏာ တုမှေ, န ဟိ တုမှေ သဒ္ဒပ္ပဝတ္တိံ ဇာနာထ, ‘‘အင်္ဂုတ္တရာပေသူ’’တိ ဗဟုဝစနံ ပန ‘‘ကုရူသု အင်္ဂေသု အင်္ဂါနံ မဂဓာန’’န္တိအာဒီနိ ဗဟုဝစနာနိ ဝိယ ရူဠှီဝသေန ဧကဿာပိ ဇနပဒဿ ဝုတ္တံ, န အာပသင်္ခါတံ အတ္ထံ သန္ဓာယ. ‘‘အင်္ဂုတ္တရာပေသူ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ အာပသင်္ခါတော အတ္ထော ဥပသဇ္ဇနီဘူတော, ပုလ္လိင်္ဂဗဟုဝစနေန ပန ဝုတ္တော ဇနပဒသင်္ခါတော အတ္ထောယေဝ ပဓာနော ‘‘အာဂတသမဏော သံဃာရာမော’’တိ ဧတ္ထ သမဏသင်္ခါတံ အတ္ထံ ဥပသဇ္ဇနကံ ကတွာ ပဝတ္တဿ အာဂတသမဏသဒ္ဒဿ သံဃာရာမသင်္ခါတော အတ္ထော ဝိယ, တသ္မာ အာပသင်္ခါတံ အတ္ထံ ဂဟေတွာ ယော အင်္ဂုတ္တရာပေါ နာမ ဇနပဒေါ, တသ္မိံ အင်္ဂုတ္တရာပေသု ဇနပဒေတိ အတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘အင်္ဂုတ္တရာပေသု ဝိဟရတိ အာပဏံ နာမ အင်္ဂါနံ နိဂမော’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. တတ္ထ ဥတ္တရေန မဟာမဟိယာ နဒိယာ အာပေါ ယေသံ တေ ဥတ္တရာပါ, အင်္ဂါ စ တေ ဥတ္တရာပါ စာတိ အင်္ဂုတ္တရာပါ, တေသု အင်္ဂုတ္တရာပေသု. ဧဝံ ဧကသ္မိံ ဇနပဒေယေဝ ဗဟုဝစနံ န အာပသင်္ခါတေ အတ္ထေ, တေန အဋ္ဌကထာယံ ဝုတ္တံ ‘‘တသ္မိံ အင်္ဂုတ္တရာပေသု ဇနပဒေ’’တိ. ဧဝံ ဝုတ္တာ တေ နိရုတ္တရာ ဘဝိဿန္တိ. जरी ते असे म्हणत असतील की - पाळिमध्येच (पालि साहित्यातच) त्याचे बहुवचनी रूप प्रत्यक्षपणे पाहिले गेले आहे, जसे की: 'आपो च देवा पथवी च, तेजो वायो तदागमुं' (पाणी, देव, पृथ्वी, तेज आणि वायू तेथे आले)? तर ते देखील योग्य नाही. कारण येथे 'देवा' या शब्दाच्या अपेक्षेने 'आगमुं' या बहुवचनी क्रियापदाचा प्रयोग केला गेला आहे, 'आपो' या शब्दाच्या अपेक्षेने नाही. जर 'आपो' या शब्दाला उद्देशून बहुवचनी प्रयोग केला गेला असता, तर 'पथवी', 'तेजो' आणि 'वायो' या शब्दांना उद्देशूनही बहुवचनी प्रयोग केला गेला असता. असे झाले असते तर पृथ्वी, तेज आणि वायू हे शब्द देखील बहुवचनी झाले असते, परंतु ते तसे होत नाहीत. कारण हे शब्द बहुवचनी नसून एकवचनीच आहेत. मूळ पाणी इत्यादी अर्थांमध्ये ते प्रवृत्त होत नसल्यामुळे रूढीने ते प्रवृत्त झाले आहेत. तसेच, आप-कसिण (पाणी-कसिण) इत्यादींमध्ये परिकर्म (ध्यानसाधना) करून उत्पन्न झालेले देव आलंबनाच्या प्रभावाने 'आपो' इत्यादी नाव प्राप्त करतात. असे म्हटले तरी ते असे म्हणू शकतात की, 'अहो, पण "अंगुत्तरापेसु" अशी बहुवचनी पाळि दिसते ना?' त्यांना असे सांगावे की - तुम्ही योग्य मार्गावर आलेला नाही आहात, कारण तुम्हाला शब्दांच्या प्रवृत्तीचे ज्ञान नाही. 'अंगुत्तरापेसु' हे बहुवचन तर 'कुरुसु, अंगेसु, अंगाने, मगधाने' इत्यादी बहुवचनांप्रमाणे रूढीने एकाच जनपदासाठी वापरले गेले आहे, पाण्याचा अर्थ लक्षात घेऊन नाही. 'अंगुत्तरापेसु' यामध्ये पाण्याचा अर्थ गौण झाला आहे, आणि पुल्लिंगी बहुवचनाने सांगितलेला जनपदाचा अर्थच मुख्य आहे. जसे 'आगतसमणो संघाराम' (ज्या संघारामात श्रमण आले आहेत तो संघाराम) यामध्ये श्रमण हा अर्थ गौण करून प्रवृत्त झालेल्या 'आगतसमण' या शब्दाचा मुख्य अर्थ 'संघाराम' असा होतो. म्हणून, पाण्याचा अर्थ सोडून जो 'अंगुत्तराप' नावाचा जनपद आहे, त्या 'अंगुत्तरापेसु' जनपदाचा असा अर्थ समजला पाहिजे. तसेच 'अंगुत्तरापेसु विहरति आपणं नाम अंगानां निगमो' अशी पाळि दिसते. तेथे महामही नदीच्या उत्तरेला ज्यांचे पाणी आहे ते 'उत्तराप' आणि जे अंग देश आहेत व उत्तराप आहेत ते 'अंगुत्तराप', त्या अंगुत्तराप देशांमध्ये. अशा प्रकारे एकाच जनपदासाठी बहुवचन वापरले आहे, पाण्याचा अर्थ दर्शवण्यासाठी नाही. म्हणूनच अट्ठकथेत म्हटले आहे - 'तस्मिं अंगुत्तरापेसु जनपदे' (त्या अंगुत्तराप जनपदा मध्ये). असे सांगितल्यावर ते निरुत्तर होतील. တထာပိ ယေ ဧဝံ ဝဒန္တိ ‘‘အာပသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ စေဝ ဗဟုဝစနကောစာ’’တိ. တေ ပုစ္ဆိတဗ္ဗာ ‘‘ကိံ ပဋိစ္စ တုမှေ အာယသ္မန္တော ‘အာပသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ စေဝ ဗဟုဝစနကော စာ’တိ ဝဒထာ’’တိ[Pg.146]? တေ ဧဝံ ပုဋ္ဌာ ဧဝံ ဝဒေယျုံ – ‘‘အင်္ဂါယေဝ သော ဇနပဒေါ, မဟိယာ ပန နဒိယာ ဥတ္တရေန အာပေါ, တာသံ အဝိဒူရတ္တာ ဥတ္တရာပေါတိ ဝုစ္စတီ’’တိ စ ‘‘မဟိယာ ပန နဒိယာ အာပေါ တဿ ဇနပဒဿ ဥတ္တရေန ဟောန္တိ, တာသံ အဝိဒူရတ္တာ သော ဇနပဒေါ ဥတ္တရာပေါတိ ဝုစ္စတီ’’တိ စ ဧဝံ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ အဘိသင်္ခတော သဒ္ဒရစနာဝိသေသော ဒိဿတိ, တသ္မာ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ စေဝ ဗဟုဝစနကော စာ’’တိ ဝဒါမာတိ. သစ္စံ ဒိဿတိ, သော ပန သဒ္ဒသတ္ထေ ဝေယျာကရဏာနံ မတံ ဂဟေတွာ အဘိသင်္ခတော, သဒ္ဒသတ္ထဉ္စ နာမ န သဗ္ဗထာ ဗုဒ္ဓဝစနဿောပကာရကံ, ဧကဒေသေန ပန ဟောတိ, တသ္မာ ကစ္စာယနပ္ပကရဏေ ဣစ္ဆိတာနိစ္ဆိတသင်္ဂဟဝိဝဇ္ဇနံ ကာတုံ ‘‘ဇိနဝစနယုတ္တဉှိ, လိင်္ဂဉ္စ နိပ္ပဇ္ဇတေ’’တိ လက္ခဏာနိ ဝုတ္တာနိ. तसेच जे असे म्हणतात की - 'आप' शब्द स्त्रीलिंगी आणि बहुवचनीच आहे. त्यांना विचारले पाहिजे की - 'आयुष्यमानांनो, तुम्ही कोणत्या कारणाने "आप शब्द स्त्रीलिंगी आणि बहुवचनी आहे" असे म्हणता?' असे विचारले असता ते असे म्हणू शकतात - 'तो जनपद अंग देशच आहे, परंतु मही नदीच्या उत्तरेला पाणी आहे, त्याच्या जवळ असल्यामुळे त्याला "उत्तराप" म्हटले जाते' आणि 'मही नदीचे पाणी त्या जनपदाच्या उत्तरेला आहे, त्याच्या जवळ असल्यामुळे तो जनपद "उत्तराप" म्हटला जातो' अशा प्रकारे पूर्वाचार्यांनी तयार केलेली विशिष्ट शब्दरचना दिसते, म्हणून आम्ही 'तो स्त्रीलिंगी आणि बहुवचनी आहे' असे म्हणतो. हे खरे दिसते, परंतु ते व्याकरणशास्त्रात वैयाकरणांचे मत घेऊन तयार केले गेले आहे. व्याकरणशास्त्र हे पूर्णपणे बुद्धवचनाला उपकारक नसते, तर ते अंशतःच उपकारक असते. म्हणूनच कच्चायन व्याकरणामध्ये इष्ट आणि अनिष्ट गोष्टींचा संग्रह व त्याग करण्यासाठी 'जिनवचनयुत्तं हि, लिंगं च निप्पज्जते' (कारण बुद्धवचनाला अनुकूल असेच लिंग सिद्ध होते) हे लक्षण सांगितले आहे. ယဒိ စ အာပသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂဗဟုဝစနကော, ကထံ အာပေါတိ ပဒံ သိဇ္ဈတီတိ? အာပသဒ္ဒတော ပဌမာယောဝစနံ ကတွာ တဿောကာရာဒေသဉ္စ ကတွာ အာပေါတိ ပဒံ သိဇ္ဈတိ ‘‘ဂါဝေါ’’တိ ပဒမိဝါတိ. ဝိသမမိဒံ နိဒဿနံ, ‘‘ဂါဝေါ’’တိ ပဒဉှိ နိစ္စောကာရန္တေန ဂေါသဒ္ဒေန သမ္ဘူတံ. တထာ ဟိ ယောမှိ ပရေ ဂေါသဒ္ဒန္တဿာဝါဒေသံ ကတွာ တတော ယောနမောကာရာဒေသံ ကတွာ ‘‘ဂါဝေါ’’တိ နိပ္ဖဇ္ဇတိ, အာပသဒ္ဒေ ပန ဒွေ အာဒေသာ န သန္တိ. ဗုဒ္ဓဝစနဉှိ ပတွာ အာပသဒ္ဒေါ အကာရန္တတာပကတိကော ဇာတော, န အညထာပကတိကောတိ. आणि जर 'आप' शब्द स्त्रीलिंगी बहुवचनी आहे, तर 'आपो' हे पद कसे सिद्ध होते? 'आप' शब्दाहून प्रथमेचे बहुवचन करून आणि त्याचा 'ओ' कार आदेश करून 'गावो' या पदाप्रमाणे 'आपो' हे पद सिद्ध होते. हे उदाहरण विषम (अयोग्य) आहे, कारण 'गावो' हे पद नेहमी ओ-कारान्त असणाऱ्या 'गो' शब्दापासून बनले आहे. तसेच 'यो' प्रत्यय पुढे असताना 'गो' शब्दाच्या शेवटी 'आव' आदेश करून आणि त्यानंतर 'यो' प्रत्ययाचा 'ओ' कार आदेश करून 'गावो' असे रूप सिद्ध होते, परंतु 'आप' शब्दात हे दोन आदेश होत नाहीत. बुद्धवचनाचा विचार करता 'आप' शब्द अ-कारान्त स्वभावाचा झाला आहे, इतर स्वभावाचा नाही. ဧဝံ ဝုတ္တာပိ တေ ‘‘ဣဒမေဝ သစ္စံ, နာည’’န္တိ စေတသိ သန္နိဓာယ အာဓာနဂ္ဂါဟိဒုပ္ပဋိနိဿဂ္ဂိဘာဝေ, ‘‘န ဝစနပစ္စနီကသာတေန သုဝိဇာနံ သုဘာသိတ’’န္တိ ဧဝံ ဝုတ္တပစ္စနီကသာတဘာဝေ စ ဌတွာ ဧဝံ ဝဒေယျုံ ‘‘ယထေဝ ဂါဝေါသဒ္ဒေါ, တထေဝ အာပေါသဒ္ဒေါ ကိံ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ န ဘဝိဿတိ ဗဟုဝစနကော စာ’’တိ? တတော တေသံ ဣမာနိ သုတ္တပဒါနိ ဒဿေတဗ္ဗာနိ. သေယျထိဒံ? ‘‘အာပံ အာပတော သဉ္ဇာနာတိ, အာပံ အာပတော [Pg.147] သညတွာ အာပံ မညတိ, အာပသ္မိံ မညတိ, အာပံ မေတိ မညတိ, အာပံ အဘိနန္ဒတီ’’တိ ဧဝံ သုတ္တပဒါနိ ဒဿေတွာ ‘‘အာပန္တိ ဣဒံ ကတရဝစန’’န္တိ ပုစ္ဆိတဗ္ဗာ. အဒ္ဓါ တေ အာပသဒ္ဒဿ ဗဟုဝစနန္တဘာဝမေဝ ဣစ္ဆမာနာ ဝက္ခန္တိ ‘‘ဒုတိယာဗဟုဝစန’’န္တိ. တေ ဝတ္တဗ္ဗာ ‘‘နနု ယောဝစနံ န သုယျတီ’’တိ? တေ ဝဒေယျုံ ‘‘ယောဝစနံ ကတအမာဒေသတ္တာ န သုယျတီ’’တိ. ယံ ယံ ဘောန္တော ဣစ္ဆန္တိ, တံ တံ မုခါရူဠှံ ဝဒန္တိ. असे म्हटले तरी ते 'हेच सत्य आहे, इतर काही नाही' असे मनात धरून, स्वतःच्या मताचा हेका धरणारे व ते न सोडणारे होऊन, आणि 'विरोधी बोलण्यात आनंद मानणाऱ्याला सुभाषित सहज समजत नाही' अशा विरोधी आनंद घेण्याच्या वृत्तीत राहून असे म्हणू शकतात - 'जसा "गावो" शब्द आहे, तसाच "आपो" शब्द स्त्रीलिंगी आणि बहुवचनी का असणार नाही?' तेव्हा त्यांना ही सुत्तपदे दाखवावीत. ती कोणती? 'आपं आपतो संजानाति, आपं आपतो सञ्ञत्वा आपं मञ्ञति, आपस्मिं मञ्ञति, आपं मेति मञ्ञति, आपं अभिनन्दति' अशी सुत्तपदे दाखवून त्यांना विचारले पाहिजे की - '"आपं" हे कोणते वचन आहे?' नक्कीच ते 'आप' शब्दाचे बहुवचनी रूपच मानू इच्छित असल्यामुळे म्हणतील - 'द्वितीयेचे बहुवचन'. त्यांना विचारले पाहिजे - 'पण येथे "यो" प्रत्यय ऐकू येत नाही ना?' ते म्हणतील - '"यो" प्रत्ययाचा आदेश केल्यामुळे तो ऐकू येत नाही.' हे गृहस्थ जे जे इच्छितात, ते ते आपल्या तोंडाने बोलतात. ‘‘အာပတော’’တိ ဣဒံ ပန ကိံ ဘောန္တော ဝဒန္တီတိ? ‘‘အာပတော’’တိ ဣဒမ္ပိ ‘‘ဗဟုဝစနကံ တောပစ္စယန္တ’’န္တိ ဝဒါမ တောပစ္စယဿ ဧကတ္ထေ စ ဗဝှတ္ထေ စ ပဝတ္တနတော. ဣတိ တုမှေ ဗဟုဝစနကတ္တံယေဝ ဣစ္ဆမာနာ ‘‘အာပေါသဒ္ဒေါ စ ယောဝစနန္တော’’တိ ဘဏထ, ‘‘အာပတော’’တိ ဣဒမ္ပိ ‘‘ဗဟုဝစနကံ တောပစ္စယန္တ’’န္တိ ဘဏထ, ‘‘အာပသ္မိံ မညတီ’’တိ ဧတ္ထ ပန ‘‘အာပသ္မိ’’န္တိဒံ ကတရဝစနန္တံ ကတရာဒေသေန သမ္ဘူတန္တိ? အဒ္ဓါ တေ ဧဝံ ပုဋ္ဌာ နိရုတ္တရာ ဘဝိဿန္တိ. တထာ ယေသံ ဧဝံ ဟောတိ ‘‘အာပသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ စေဝ ဗဟုဝစနကော စာ’’တိ, တေ ပုစ္ဆိတဗ္ဗာ ‘‘ယံ အာစရိယေဟိ ဝေယျာကရဏမတံ ဂဟေတွာ ‘ယာ အာပေါ’တိ စ ‘တာသ’န္တိ စ ဝုတ္တံ, တတ္ထ ‘ကိံ တာသ’န္တိ ဝစနေ ‘အာပါန’န္တိ ပဒံ အာနေတွာ အတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော, ဥဒါဟု အာပဿာ’’တိ? ‘‘အာပါန’န္တိ ပဒမာနေတွာ အတ္ထော ဝတ္တဗ္ဗော’’တိ စေ, ဧဝဉ္စ သတိ ‘‘ယာ အာပါ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ ‘‘ယာ ကညာ တိဋ္ဌန္တီ’’တိ ပဒမိဝ. အထ ‘‘အာပါ’’တိ ပဒံ နာမ နတ္ထိ, ‘‘အာပေါ’’တိ ပဒံယေဝ ဗဟုဝစနကန္တိ စေ, ဧဝံ သတိ ‘‘တာသ’’န္တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘အာပဿာ’’တိ ပဒံ အာနေတွာ အတ္ထော ဝေဒိတဗ္ဗော. ကသ္မာတိ စေ? ယသ္မာ ‘‘အာပေါ’’တိ ပစ္စတ္တေကဝစနဿ တုမှာကံ မတေန ဗဟုဝစနတ္တေ သတိ ‘‘အာပဿာ’’တိ ပဒမ္ပိ ဗဟုဝစနန္တိ ကတွာ တာသံသဒ္ဒေန ယောဇေတွာ ဝတ္တုံ ယုတ္တိတောတိ. ဧဝံ သတိ ‘‘အာပါန’’န္တိ [Pg.148] ပဒဿ အဘာဝေနေဝ ဘဝိတဗ္ဗံ. ယထာ ပန ‘‘ပုရိသော, ပုရိသာ. ပုရိသံ, ပုရိသေ’’တိ စ, ‘‘ဂေါ, ဂါဝေါ, ဂဝေါ. ဂါဝု’’န္တိ စ ဧကဝစနဗဟုဝစနာနိ ဘဝန္တိ, ဧဝံ ‘‘အာပေါ, အာပါ. အာပံ, အာပေ’’တိ ဧကဝစနဗဟုဝစနေဟိ ဘဝိတဗ္ဗံ. ဧဝဉ္စ သတိ ‘‘အာပသဒ္ဒေါ ဗဟုဝစနကောယေဝ ဟောတီ’’တိ န ဝတ္တဗ္ဗံ. “पण ‘आपतो’ (āpato) याबद्दल आपण काय म्हणता? ‘आपतो’ हे देखील ‘बहुवचन आणि ‘त’ प्रत्ययाने युक्त’ (topaccayanta) आहे असे आम्ही म्हणतो, कारण ‘त’ प्रत्यय एकवचन आणि बहुवचन दोन्हीमध्ये वापरला जातो. अशा प्रकारे, आपण केवळ बहुवचनच इच्छित असल्याने ‘आप-शब्द हा ‘यो’ प्रत्ययाने युक्त आहे’ असे म्हणता, आणि ‘आपतो’ हे देखील ‘बहुवचन आणि ‘त’ प्रत्ययाने युक्त’ आहे असे म्हणता. परंतु ‘आपस्मिं मञ्ञति’ (āpasmiṃ maññatī) यामध्ये ‘आपस्मिं’ हे कोणत्या वचनाचे रूप आहे आणि कोणत्या आदेशाने (बदलाने) तयार झाले आहे? नक्कीच, असे विचारले असता ते निरुत्तर होतील. तसेच, ज्यांचे असे मत आहे की ‘आप-शब्द हा स्त्रीलिंगी आणि बहुवचनीच आहे’, त्यांना विचारले पाहिजे की, ‘आचार्यांनी व्याकरणाचे मत स्वीकारून जे ‘या आपो’ (yā āpo) आणि ‘तासं’ (tāsaṃ) असे म्हटले आहे, त्यामध्ये ‘तासं’ या वचनात ‘आपानं’ (āpānaṃ) हे पद आणून अर्थ सांगावा की ‘आपस्सा’ (āpassā) असे?’ जर ते म्हणतील की ‘आपानं’ हे पद आणून अर्थ सांगावा, तर मग ‘या आपा’ (yā āpā) असे म्हटले पाहिजे, जसे ‘या कञ्ञा तिट्ठन्ति’ (yā kaññā tiṭṭhantī) हे पद आहे. आणि जर ‘आपा’ असे पदच अस्तित्वात नाही, केवळ ‘आपो’ हेच पद बहुवचनी आहे असे म्हटले, तर मग ‘तासं’ यामध्ये देखील ‘आपस्सा’ हे पद आणून अर्थ समजून घेतला पाहिजे. असे का? कारण तुमच्या मते ‘आपो’ हे प्रथमा एकवचन असूनही जर बहुवचन मानले, तर ‘आपस्सा’ हे पद देखील बहुवचन मानून ‘तासं’ या शब्दाशी जोडून बोलणे योग्य ठरेल. असे झाल्यास ‘आपानं’ या पदाचा अभावच असायला हवा. परंतु ज्याप्रमाणे ‘पुरिसो, पुरिसा’ (एकवचन, बहुवचन) आणि ‘पुरिसं, पुरिसे’ (द्वितीया एकवचन, बहुवचन) तसेच ‘गो, गावो, गवो’ आणि ‘गावुं’ अशी एकवचन आणि बहुवचनाची रूपे होतात, त्याचप्रमाणे ‘आपो, आपा’ आणि ‘आपं, आपे’ अशी एकवचन आणि बहुवचनाची रूपे असायला हवीत. आणि असे असताना ‘आप-शब्द केवळ बहुवचनीच असतो’ असे म्हणता येणार नाही.” ယေ ဧဝံ ဝဒန္တိ, တေသံ ဝစနံ သဒေါသံ ဒုပ္ပရိဟရဏီယံ မူလပရိယာယသုတ္တေ ‘‘အာပံ မညတိ အာပသ္မိ’’န္တိ ဧကဝစနပါဠီနံ ဒဿနတော, ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂါဒီသု စ ‘‘ဝိဿန္ဒနဘာဝေန တံ တံ ဌာနံ အာပေါတိ အပ္ပောတီတိ အာပေါ’’တိအာဒိကဿ ဧကဝစနဝသေန ဝုတ္တနိဗ္ဗစနဿ ဒဿနတော. ယထာ ပန ပါဠိယံ ဣတ္ထိလိင်္ဂေပိ ပရိယာပန္နော ဂေါသဒ္ဒေါ ‘‘တာ ဂါဝေါ တတော တတော ဒဏ္ဍေန အာကောဋေယျာ’’တိ စ ‘‘အန္နဒါ ဗလဒါ စေတာ’’တိ စ အာဒိနာ ဗဝှတ္ထဒီပကေဟိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘူတေဟိ သဗ္ဗနာမိကပဒေဟိ စ အသဗ္ဗနာမိကပဒေဟိ စ သမာနာဓိကရဏဘာဝေန ဝုတ္တော ဒိဿတိ, န တထာ ပါဠိယံ ဗဝှတ္ထဒီပကေဟိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘူတေဟိ သဗ္ဗနာမိကပဒေဟိ ဝါ အသဗ္ဗနာမိကပဒေဟိ ဝါ သမာနာဓိကရဏဘာဝေန ဝုတ္တော အာပသဒ္ဒေါ ဒိဿတိ. ယဒိ ဟိ အာပသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ သိယာ, ကညသဒ္ဒတော အာပစ္စယော ဝိယ အာပသဒ္ဒတော အာပစ္စယော ဝါ သိယာ, နဒသဒ္ဒတော ဝိယ စ ဤပစ္စယော ဝါ သိယာ, ဥဘယမ္ပိ နတ္ထိ, ဥဘယာဘာဝတော ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝုတ္တံ သဗ္ဗမ္ပိ ဝိဓာနံ တတ္ထ န လဗ္ဘတိ, တေန ဉာယတိ ‘‘အာပသဒ္ဒေါ အနိတ္ထိလိင်္ဂေါ’’တိ. နနု စ ဘော ဂေါသဒ္ဒတောပိ အာပစ္စယော နတ္ထိ, တဒဘာဝတော ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝုတ္တဝိဓာနံ န လဗ္ဘတိ, ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ သောယေဝ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ဟောတိ, န ပနာယံ အာပသဒ္ဒေါတိ? “जे असे म्हणतात, त्यांचे बोलणे सदोष आणि खंडन करण्यास कठीण आहे; कारण मूलपरियायसुत्तात ‘आपं मञ्ञति आपस्मिं’ (āpaṃ maññati āpasmiṃ) अशा एकवचनी पाळी वचनांचे दर्शन होते, आणि विसुद्धिमग्ग इत्यादी ग्रंथांमध्ये ‘विस्सन्दनभावेन तं तं ठानं आपोति अप्पोतीति आपो’ (vissandanabhāvena taṃ taṃ ṭhānaṃ āpoti appotīti āpo - वाहून जाण्याच्या स्वभावामुळे त्या त्या स्थानाला प्राप्त होते म्हणून ‘आप’ म्हणतात) इत्यादी एकवचनाच्या स्वरूपात सांगितलेली व्युत्पत्ती दिसून येते. परंतु ज्याप्रमाणे पाळी भाषेमध्ये स्त्रीलिंगात समाविष्ट असलेला ‘गो’ (गाय) शब्द ‘ता गावो ततो ततो दण्डेन आकोटेय्या’ (tā gāvo tato tato daṇḍena ākoṭeyyā) आणि ‘अन्नदा बलदा चेता’ (annadā baladā cetā) इत्यादी बहुवचन दर्शवणाऱ्या स्त्रीलिंगी सर्वनामांशी आणि इतर नामांशी समानाधिकरण भावाने वापरलेला दिसतो, तसा पाळी भाषेमध्ये बहुवचन दर्शवणाऱ्या स्त्रीलिंगी सर्वनामांशी किंवा इतर नामांशी समानाधिकरण भावाने वापरलेला ‘आप’ शब्द दिसून येत नाही. जर ‘आप’ शब्द स्त्रीलिंगी असता, तर ‘कञ्ञा’ (कन्या) शब्दाप्रमाणे ‘आप’ शब्दाला ‘आ’ प्रत्यय लागला असता, किंवा ‘नदी’ शब्दाप्रमाणे ‘ई’ प्रत्यय लागला असता. परंतु हे दोन्ही प्रत्यय लागत नाहीत. या दोन्हीच्या अभावामुळे स्त्रीलिंगासाठी सांगितलेले कोणतेही नियम तिथे लागू होत नाहीत, यावरून हे स्पष्ट होते की ‘आप-शब्द स्त्रीलिंगी नाही’. पण अहो! ‘गो’ शब्दाला देखील ‘आ’ प्रत्यय लागत नाही, आणि त्याच्या अभावामुळे स्त्रीलिंगाचे नियम लागू होत नाहीत; असे असताना तो (गो शब्द) स्त्रीलिंगी कसा होतो, आणि हा ‘आप’ शब्द का होत नाही?” ဧတ္ထ ဝုစ္စတေ – ဂေါသဒ္ဒေါ န နိယောဂါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ, အထ ခေါ ပုလ္လိင်္ဂေါဝ. ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေ ပန တမှာ အာပစ္စယေ [Pg.149] အဟောန္တေပိ ဤပစ္စယော ဝိကပ္ပေန ဟောတိ, အညမ္ပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝုတ္တဝိဓာနံ လဗ္ဘတိ. သော ဟိ နိစ္စမောကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ‘‘ဂေါ, ဂါဝီ’’တိအာဒိနာ အတ္တနော ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနံ နိဗ္ဗတ္တိကာရဏဘူတော, တေန သော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ဘဝတိ. အာပသဒ္ဒေ ပန ဤပစ္စယာဒိ န လဗ္ဘတိ. တေန သော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါတိ န ဝတ္တဗ္ဗော. ယထာ ဝါ ဂေါသဒ္ဒဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတံ ပဋိစ္စ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေါ ဥပပဇ္ဇတိ, န တထာ အာပသဒ္ဒဿ. အာပသဒ္ဒဿ ဟိ အနာကုလရူပက္ကမတ္တာ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ န ဒိဿတိ, ယာယ ဧသော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ သိယာ. ဧဝံ ဝုတ္တာ တေ နိရုတ္တရာ ဘဝိဿန္တိ. “यावर उत्तर दिले जाते – ‘गो’ शब्द अनिवार्यपणे स्त्रीलिंगी नाही, तर तो पुल्लिंगीच आहे. परंतु स्त्रीलिंगी रूपात त्याला ‘आ’ प्रत्यय लागत नसला तरी ‘ई’ प्रत्यय विकल्पाने लागतो, आणि स्त्रीलिंगासाठी सांगितलेले इतर नियमही लागू होतात. तो नेहमी ‘ओकारान्त’ प्रकृतीमध्ये राहून ‘गो, गावी’ (go, gāvī) इत्यादी रूपांनी स्वतःच्या स्त्रीलिंगी रूपांच्या उत्पत्तीचे कारण बनतो, त्यामुळे तो स्त्रीलिंगी होतो. परंतु ‘आप’ शब्दामध्ये ‘ई’ इत्यादी प्रत्यय मिळत नाहीत. त्यामुळे तो स्त्रीलिंगी आहे असे म्हणता येणार नाही. किंवा ज्याप्रमाणे ‘गो’ शब्दाच्या अस्पष्ट आकाराच्या व्यवहारामुळे (वापरामुळे) त्याचे स्त्रीलिंगी असणे सिद्ध होते, तसे ‘आप’ शब्दाच्या बाबतीत नाही. कारण ‘आप’ शब्दाचा रूपक्रम स्पष्ट (नियमित) असल्यामुळे त्याचा अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार दिसत नाही, ज्यामुळे तो स्त्रीलिंगी ठरेल. असे सांगितले असता ते निरुत्तर होतील.” တထာ ယေသံ ဧဝံ ဟောတိ ‘‘အာပသဒ္ဒေါ သဗ္ဗဒါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ စေဝ ဗဟုဝစနကော စာ’’တိ, တေ ဝတ္တဗ္ဗာ – ယထာ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘူတဿ ကညာသဒ္ဒဿ ပဌမံ ကညဣတိ ရဿဝသေန ဌပိတဿ အာပစ္စယတော ပရံ သ္မိံဝစနံ သရူပတော န တိဋ္ဌတိ, ယံဘာဝေန စ ယာဘာဝေန စ တိဋ္ဌတိ ‘‘ကညာယံ, ကညာယာ’’တိ, န တထာ ‘‘ဣတ္ထိလိင်္ဂ’’န္တိ တုမှေဟိ ဂဟိတဿ အာပေါသဒ္ဒဿ ပဌမံ အာပဣတိ ရဿဝသေန ဌပိတဿ ပရံ သ္မိံဝစနံ ယံဘာဝေန စ ယာဘာဝေန စ တိဋ္ဌတိ, အထ ခေါ သရူပတောယေဝ တိဋ္ဌတိ ‘‘အာပသ္မိံ မညတီ’’တိ. ယဒိ ပန အာပသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ သိယာ, သ္မိံဝစနံ သရူပတော န တိဋ္ဌေယျ. ယသ္မာ စ သ္မိံဝစနံ သရူပတော တိဋ္ဌတိ, တသ္မာ အာပသဒ္ဒေါ န ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ. န ဟိ စတုရာသီတိဓမ္မက္ခန္ဓသဟဿသင်္ဂဟေသု အနေကကောဋိသတသဟဿေသု ပါဠိပ္ပဒေသေသု ဧကသ္မိမ္ပိ ပါဠိပ္ပဒေသေ ပဌမံ အကာရန္တဘာဝေန ဌပေတဗ္ဗာနံ ဣတ္ထိလိင်္ဂသဒ္ဒါနံ ပရတော ဌိတံ သ္မိံဝစနံ သရူပတော တိဋ္ဌတီတိ. ဧဝံ ဝုတ္တာ တေ နိရုတ္တရာ ဘဝိဿန္တိ. “तसेच, ज्यांचे असे मत आहे की ‘आप-शब्द नेहमी स्त्रीलिंगी आणि बहुवचनीच असतो’, त्यांना विचारले पाहिजे – ज्याप्रमाणे स्त्रीलिंगी असलेल्या ‘कञ्ञा’ (कन्या) शब्दाला प्रथम ‘कञ्ञ’ असे र्हस्व करून ठेवल्यावर ‘आ’ प्रत्ययानंतर येणारा ‘स्मिं’ (smiṃ) प्रत्यय मूळ रूपात राहत नाही, तर तो ‘यं’ आणि ‘या’ भावाने ‘कञ्ञायं, कञ्ञाय’ (kaññāyaṃ, kaññāya) असा राहतो; त्याप्रमाणे तुम्ही स्त्रीलिंगी मानलेल्या ‘आप’ शब्दाला प्रथम ‘आप’ असे र्हस्व करून ठेवल्यावर पुढील ‘स्मिं’ प्रत्यय ‘यं’ किंवा ‘या’ भावाने राहत नाही, तर तो मूळ रूपातच राहतो, जसे ‘आपस्मिं मञ्ञति’ (āpasmiṃ maññatī). जर ‘आप’ शब्द स्त्रीलिंगी असता, तर ‘स्मिं’ प्रत्यय मूळ रूपात राहिला नसता. आणि ज्याअर्थी ‘स्मिं’ प्रत्यय मूळ रूपात राहतो, त्याअर्थी ‘आप’ शब्द स्त्रीलिंगी नाही. कारण चौऱ्याऐंशी हजार धम्मस्कंधांच्या संग्रहातील अनेक कोटी-अब्ज पाळी उताऱ्यांमध्ये एकाही पाळी उताऱ्यात, प्रथम अकारान्त रूपात ठेवल्या जाणाऱ्या स्त्रीलिंगी शब्दांच्या पुढे असलेला ‘स्मिं’ प्रत्यय मूळ रूपात राहिलेला दिसत नाही. असे सांगितले असता ते निरुत्तर होतील.” ကေစိ ပနေတ္ထ ဧဝံ ဝဒေယျုံ ‘‘အာပသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါ, တထာ ဟိ အဋ္ဌသာလိနိယံ ‘ဩမတ္တံ ပန အာပေါ အဓိမတ္တပထဝီဂတိကံ [Pg.150] ဇာတ’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂဘာဝေန တံသမာနာဓိကရဏပဒါနိ နိဒ္ဒိဋ္ဌာနီ’’တိ? တန္န, မနောဂဏေ ပဝတ္တေဟိ တမ ဝစ သိရသဒ္ဒါဒီဟိ ဝိယ အာပသဒ္ဒေနပိ သမာနာဓိကရဏပဒါနံ ကတ္ထစိ နပုံသကလိင်္ဂဘာဝေန နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗတ္တာ. ပုဗ္ဗာစရိယာနဉှိ သဒ္ဒရစနာသု ‘‘သဒ္ဓမ္မတေဇဝိဟတံ ဝိလယံ ခဏေန, ဝေနေယျသတ္တဟဒယေသု တမော ပယာတီ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘တမော’’တိပဒေန သမာနာဓိကရဏံ ‘‘ဝိဟတ’’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂံ ဒိဿတိ, တထာ ‘‘ဒုက္ခံ ဝစော ဧတသ္မိံ ဝိပစ္စနီကသာတေ ပုဂ္ဂလေတိ ဒုဗ္ဗစော’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဝစော’’တိ ပဒေန သမာနာဓိကရဏံ ‘‘ဒုက္ခ’’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂံ, ‘‘အဝနတံ သိရော ယဿ သော အဝနတသိရော’’တိ ဧတ္ထ ‘‘သိရော’’တိ ပဒေန သမာနာဓိကရဏံ ‘‘အဝနတ’’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂံ, ‘‘အပ္ပံ ရာဂါဒိရဇော ယေသံ ပညာမယေ အက္ခိမှိ တေ အပ္ပရဇက္ခာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ရဇော’’တိ ပဒေန သမာနာဓိကရဏံ ‘‘အပ္ပ’’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂံ ဒိဿတိ. န တေ အာစရိယာ တေဟိ သမာနာဓိကရဏပဒေဟိ တမဝစသိရသဒ္ဒါဒီနံ နပုံသကလိင်္ဂတ္တဝိညာပနတ္ထံ တထာဝိဓံ သဒ္ဒရစနံ ကုဗ္ဗိံသု, အထ ခေါ ‘‘သောဘနံ မနော တဿာတိ သုမနော’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ မနောဂဏေ ပဝတ္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပယောဂေ နပုံသကလိင်္ဂဘာဝေနပိ သမာနာဓိကရဏပဒါနိ ကတ္ထစိ ဟောန္တီတိ ဒဿနတ္ထံ ကုဗ္ဗိံသု. ယထာ စ ‘‘ဝိဟတ’’န္တိအာဒိကာ သဒ္ဒရစနာ တမဝစသိရသဒ္ဒါဒီနံ နပုံသကလိင်္ဂတ္တဝိညာပနတ္ထံ န ကတာ, တထာ ‘‘ဩမတ္တ’’န္တိ စ ‘‘အဓိမတ္တပထဝီဂတိကံ ဇာတ’’န္တိ စ သဒ္ဒရစနာပိ အာပသဒ္ဒဿ နပုံသကလိင်္ဂတ္တဝိညာပနတ္ထံ န ကတာ. ယသ္မာ ပန မနောဂဏေ ပဝတ္တေဟိ မနသဒ္ဒါဒီဟိ ဧကဒေသေန သမာနဂတိကတ္တာ အာပသဒ္ဒေနပိ နပုံသကလိင်္ဂဿ သမာနာဓိကရဏတာ ယုဇ္ဇတိ, တသ္မာ အဋ္ဌသာလိနိယံ ‘‘ဩမတ္တံ ပန အာပေါ အဓိမတ္တပထဝီဂတိကံ ဇာတ’’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂဿ အာပသဒ္ဒေန သမာနာဓိကရဏတာ ကတာ. တထာပိ အာပသဒ္ဒေါ [Pg.151] မနသဒ္ဒါဒီဟိ ဧကဒေသေန သမာနဂတိကော သမာသပဒတ္တေ မဇ္ဈောကာရဿ ‘‘အာပေါကသိဏံ, အာပေါဂတ’’န္တိအာဒိပ္ပယောဂဿ ဒဿနတော, တသ္မာ ‘‘ဩမတ္တ’’န္တိအာဒိဝစနံ အာပသဒ္ဒဿ နပုံသကလိင်္ဂတ္တဝိညာပနတ္ထံ ဝုတ္တန္တိ န ဂဟေတဗ္ဗံ, လိင်္ဂဝိပရိယယဝသေန ပန ကတ္ထစိ ဧဝမ္ပိ သဒ္ဒဂတိ ဟောတီတိ ဉာပနတ္ထံ ဝုတ္တန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ. ‘‘ဩမတ္တော’’တိ စ ‘‘အဓိမတ္တပထဝီဂတိကော ဇာတော’’တိ စ လိင်္ဂံ ပရိဝတ္တေတဗ္ဗံ. ယဒိ ဟိ အာပသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါ သိယာ, သနိကာရာနိ’ဿ ပစ္စတ္တောပယောဂရူပါနိ ဗုဒ္ဓဝစနာဒီသု ဝိဇ္ဇေယျုံ, န တာဒိသာနိ သန္တိ. ကိဉ္စိ ဘိယျော – ဩကာရန္တံ နာမ နပုံသကလိင်္ဂံ ကတ္ထစိပိ နတ္ထိ, နိဂ္ဂဟီတန္တဣကာရန္တ ဥကာရန္တဝသေန ဟိ တိဝိဓာနိယေဝ နပုံသကလိင်္ဂါနိ. တေန အာပသဒ္ဒဿ နပုံသကလိင်္ဂတာ နုပပဇ္ဇတီတိ. ဧဝံ ဝုတ္တာ တေ နိရုတ္တရာ ဘဝိဿန္တိ. ဣစ္စောကာရန္တဝသေန ဂဟိတဿ အာပသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂတာ စ နပုံသကလိင်္ဂတာ စ ဧကန္တတော နတ္ထိ, နိဂ္ဂဟီတန္တဝသေန ပန ဂဟိတဿ ကတ္ထစိ နပုံသကလိင်္ဂတာ သိယာ ‘‘ဘန္တေ နာဂသေန သမုဒ္ဒေါ သမုဒ္ဒေါတိ ဝုစ္စတိ, ကေန ကာရဏေန အာပံ ဥဒကံ သမုဒ္ဒေါတိ ဝုစ္စတီ’’တိ ပယောဂဒဿနတော. ဧတ္ထ ပနေကေ ဝဒေယျုံ ‘‘ယဒိ ဘော ဩကာရန္တဝသေန ဂဟိတဿ အာပသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိနပုံသကလိင်္ဂဝသေန ဒွိလိင်္ဂတာ နတ္ထိ, ဩကာရန္တော အာပသဒ္ဒေါ ကတရလိင်္ဂေါ’’တိ? ပုလ္လိင်္ဂေါတိ မယံ ဝဒါမာတိ. यावर काही लोक असे म्हणू शकतात की, “'आप' (āpo) हा शब्द नपुंसकलिंगी आहे, कारण अट्ठसालिनीमध्ये 'ओमत्तं पन आपो अधिमत्तपथवीगतिकं जातं' (परंतु अल्पप्रमाण असलेले 'आप' हे अधिक प्रमाणात पृथ्वीभावाला प्राप्त झाले) असे नपुंसकलिंगी भावामध्ये त्याचे समानाधिकरण पद निर्दिष्ट केले आहे”? ते योग्य नाही, कारण मनोगणामध्ये (मन-वर्गात) प्रवृत्त होणाऱ्या 'तम', 'वच', 'शिर' इत्यादी शब्दांप्रमाणे 'आप' शब्दाने देखील समानाधिकरण पदांचा काही ठिकाणी नपुंसकलिंगी भावाने निर्देश केला जाऊ शकतो. कारण पूर्वाचार्यांच्या शब्दरचनांमध्ये “सद्धम्मतेजविहतं विलयं खणेन, वेनेय्यसत्तहदयेसु तमो पयाती” येथे 'तमो' या पदाशी समानाधिकरण असलेले 'विहतं' हे नपुंसकलिंगी रूप दिसते, तसेच “दुक्खं वचो एतस्मिं विपच्चनीकसाते पुग्गलेति दुब्बचो” येथे 'वचो' या पदाशी समानाधिकरण असलेले 'दुक्खं' हे नपुंसकलिंगी रूप, “अवनतं सिरो यस्स सो अवनतसिरो” येथे 'सिरो' या पदाशी समानाधिकरण असलेले 'अवनतं' हे नपुंसकलिंगी रूप, आणि “अप्पं रागादिरजो येसं पञ्ञामये अक्खिम्हि ते अप्परजक्खा” येथे 'रजो' या पदाशी समानाधिकरण असलेले 'अप्पं' हे नपुंसकलिंगी रूप दिसते. त्या आचार्यांनी त्या समानाधिकरण पदांद्वारे 'तम', 'वच', 'शिर' इत्यादी शब्दांचे नपुंसकलिंगत्व दर्शवण्यासाठी तशी शब्दरचना केली नव्हती, तर “सोभनं मनो तस्साति सुमनो” याप्रमाणे मनोगणामध्ये प्रवृत्त होणाऱ्या पुल्लिंगी शब्दांच्या प्रयोगात काही ठिकाणी नपुंसकलिंगी भावाने देखील समानाधिकरण पदे होतात, हे दर्शवण्यासाठी ती रचना केली होती. आणि ज्याप्रमाणे 'विहतं' इत्यादी शब्दरचना 'तम', 'वच', 'शिर' इत्यादी शब्दांचे नपुंसकलिंगत्व दर्शवण्यासाठी केलेली नाही, त्याचप्रमाणे 'ओमत्तं' आणि 'अधिमत्तपथवीगतिकं जातं' ही शब्दरचना देखील 'आप' शब्दाचे नपुंसकलिंगत्व दर्शवण्यासाठी केलेली नाही. परंतु, मनोगणामध्ये प्रवृत्त होणाऱ्या 'मन' इत्यादी शब्दांशी अंशतः समान गती (समान रूप) असल्यामुळे 'आप' शब्दाशी देखील नपुंसकलिंगाचे समानाधिकरण जुळते, म्हणूनच अट्ठसालिनीमध्ये “ओमत्तं पन आपो अधिमत्तपथवीगतिकं जातं” असे नपुंसकलिंगाचे 'आप' शब्दाशी समानाधिकरण केले गेले आहे. तरीही, 'आप' शब्द हा 'मन' इत्यादी शब्दांशी अंशतः समान गती असलेला आहे, कारण सामासिक पदामध्ये मध्यवर्ती 'ओ' काराचा 'आपोकसिणं, आपोगतं' इत्यादी प्रयोगांमध्ये निर्देश आढळतो. म्हणून, 'ओमत्तं' इत्यादी वचन 'आप' शब्दाचे नपुंसकलिंगत्व दर्शवण्यासाठी म्हटले आहे असे मानू नये, तर लिंगविपर्यासाच्या (लिंग बदलाच्या) नियमामुळे काही ठिकाणी अशीही शब्दगती (शब्दाचे रूप) होते, हे दर्शवण्यासाठी ते म्हटले आहे असे मानावे. “ओमत्तो” आणि “अधिमत्तपथवीगतिको जातो” असे लिंग परिवर्तित केले पाहिजे. जर 'आप' शब्द नपुंसकलिंगी असता, तर बुद्धवचनांमध्ये त्याचे 'स' कारयुक्त प्रथमा व द्वितीया विभक्तीची रूपे आढळली असती, परंतु तशी रूपे आढळत नाहीत. आणखी थोडे सांगायचे तर – 'ओ' कारान्त नपुंसकलिंग कुठेही आढळत नाही, कारण अनुस्वारान्त (निग्गहीतन्त), 'इ' कारान्त आणि 'उ' कारान्त अशा तीनच प्रकारचे नपुंसकलिंगी शब्द असतात. त्यामुळे 'आप' शब्दाचे नपुंसकलिंगत्व सिद्ध होत नाही. असे म्हटल्यावर ते निरुत्तर होतील. अशा प्रकारे, 'ओ' कारान्त रूपाने स्वीकारलेल्या 'आप' शब्दाचे स्त्रीलिंगत्व आणि नपुंसकलिंगत्व एकांताने (निश्चितपणे) नाही. परंतु, अनुस्वारान्त (निग्गहीतन्त) रूपाने स्वीकारलेल्या शब्दाचे काही ठिकाणी नपुंसकलिंगत्व असू शकते, कारण “भन्ते नागसेन समुद्दो समुद्दोति वुच्चति, केन कारणेन आपं उदकं समुद्दोति वुच्चति” असा प्रयोग आढळतो. येथे काही लोक विचारू शकतात की, “हे महाशय, जर 'ओ' कारान्त रूपाने स्वीकारलेल्या 'आप' शब्दाचे स्त्रीलिंग आणि नपुंसकलिंग या दोन्ही लिंगांमध्ये अस्तित्व नसेल, तर 'ओ' कारान्त 'आप' शब्द कोणत्या लिंगाचा आहे?” आम्ही सांगतो की, तो पुल्लिंगी आहे. ယဒိ စ ဘော အာပသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါ. ယထာ အာပသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂတာ ပညာယေယျ, နိဇ္ဈာနက္ခမတာ စ ဘဝေယျ, တထာ သုတ္တံ အာဟရထာတိ. ‘‘အာဟရိဿာမိသုတ္တံ, န နော သုတ္တာဟရဏေ ဘာရော အတ္ထီ’’တိ ဧဝဉ္စ ပန ဝတွာ တေသံ ဣမာနိ သုတ္တပဒါနိ ဒဿေတဗ္ဗာနိ. သေယျထိဒံ? ‘‘အာပေါ ဥပလဗ္ဘတီတိ? အာမန္တာ. အာပဿ ကတ္တာ ကာရေတာ ဥပလဗ္ဘတီတိ? န [Pg.152] ဟေဝံ ဝတ္တဗ္ဗေ. အတီတော အာပေါ အတ္ထီတိ? အာမန္တာ. တေန အာပေန အာပကရဏီယံ ကရောတီတိ? န ဟေဝံ ဝတ္တဗ္ဗေ. အာပံ မညတိ အာပသ္မိံ မညတီ’’တိ ဣမာနိ သုတ္တပဒါနိ. “आणि जर, हे महाशय, 'आप' शब्द पुल्लिंगी असेल, तर ज्यायोगे 'आप' शब्दाचे पुल्लिंगत्व स्पष्ट होईल आणि ते विचारपूर्वक स्वीकारण्यास योग्य ठरेल, असे सुत्त (सूत्र) सादर करा.” “मी सुत्त सादर करेन, आम्हाला सुत्त सादर करणे कठीण नाही,” असे सांगून त्यांना ही सुत्तपदे दाखवावीत. उदाहरणाथ: “'आपो' (पाणी/जलधातू) उपलब्ध आहे का? होय, आहे. 'आप'चा कर्ता किंवा करविणारा उपलब्ध आहे का? असे म्हणता येणार नाही. भूतकालीन 'आप' आहे का? होय, आहे. त्या 'आप'ने 'आप'चे कार्य करतो का? असे म्हणता येणार नाही. 'आप' मानतो, 'आप'मध्ये मानतो” ही सुत्तपदे आहेत. ဧတ္ထ စ ‘‘ဥပလဗ္ဘတီ’’တိအာဒိနာ အာပသဒ္ဒဿ ဧကဝစနတာ သိဒ္ဓါ, တာယ သိဒ္ဓါယ ဗဟုဝစနတာပိ သိဒ္ဓါယေဝ. ဧကဝစနတာယေဝ ဟိ သဒ္ဒသတ္ထေ ပဋိသိဒ္ဓါ, န ဗဟုဝစနတာ, တေန ‘‘အာပေနာ’’တိ ဣမိနာ ပန အာပသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝဝိဂမော သိဒ္ဓေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဧနာဒေသာဘာဝတော. ‘‘အာပဿ, အာပသ္မိ’’န္တိ ဣမိနာပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝဝိဂမောယေဝ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ သရူပတော နာ သ္မာ သ္မိံ ဝစနာနမဘာဝါ. ‘‘အတီတော’’တိ ဣမိနာ ဣတ္ထိလိင်္ဂနပုံသကလိင်္ဂဘာဝဝိဂမော ဩကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂဿ အဘာဝတော, ဩကာရန္တဿ ဂုဏနာမဘူတဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ စ အဘာဝတော. आणि येथे “उपलब्भति” (उपलब्ध आहे) इत्यादी प्रयोगांमुळे 'आप' शब्दाचे एकवचन सिद्ध होते, आणि ते सिद्ध झाल्यामुळे त्याचे बहुवचन देखील सिद्धच होते. कारण व्याकरणशास्त्रामध्ये केवळ एकवचनाचाच निषेध केला आहे, बहुवचनाचा नाही. म्हणून “आपेन” या प्रयोगावरून 'आप' शब्दाचे स्त्रीलिंगत्व दूर होते (स्त्रीलिंगी नसल्याचे सिद्ध होते), कारण स्त्रीलिंगामध्ये 'एन' (ena) हा आदेश होत नाही. “आपस्स, आपस्मिं” या प्रयोगांवरून देखील स्त्रीलिंगत्वाचाच अभाव सिद्ध होतो, कारण स्त्रीलिंगामध्ये मूळ रूपाने 'ना', 'स्मा', 'स्मिं' हे प्रत्यय होत नाहीत. “अतीतो” या प्रयोगावरून स्त्रीलिंग आणि नपुंसकलिंग या दोन्ही लिंगांचा अभाव सिद्ध होतो, कारण 'ओ' कारान्त नपुंसकलिंगी शब्द नसतात, तसेच 'ओ' कारान्त विशेषणयुक्त स्त्रीलिंगी शब्दही नसतात. အပိစ ဗုဒ္ဓဝစနာဒီသု ‘‘စိတ္တာနိ, ရူပါနီ’’တိအာဒီနိ ဝိယ သနိကာရာနံ ရူပါနံ အဒဿနတော ဩကာရန္တဘာဝေန ဂဟိတဿ နပုံသကလိင်္ဂဘာဝဝိဂမော အတီဝ ပါကဋော. အပရမ္ပေတ္ထ ဝတ္တဗ္ဗံ – ‘‘အတီတော အာပေါ အတ္ထီတိ? အာမန္တာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘အတီတော’’တိ ဣမိနာ အာပသဒ္ဒဿ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာသူစကေန ဩကာရန္တပဒေန တဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာယ စ ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရတာယ စ အဘာဝေါ သိဒ္ဓေါ. တဿ စ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာယ အဘာဝေ သိဒ္ဓေ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေါ ဒူရတရော. ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရတာယ စ အဘာဝေ သိဒ္ဓေ နပုံသကလိင်္ဂဘာဝေါပိ ဒူရတရောယေဝ. ဣတိ န ကတ္ထစိပိ ဩကာရန္တဘာဝေန ဂဟိတော အာပသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ဝါ နပုံသကလိင်္ဂေါ ဝါ ဘဝတိ. မိလိန္ဒပဉှေ ပန နိဂ္ဂဟီတန္တဝသေန အာဂတော နပုံသကလိင်္ဂေါတိ ဝေဒိတဗ္ဗော, န စေတ္ထ ဝတ္တဗ္ဗံ ‘‘အတီတော’’တိ ‘‘တေနာ’’တိ [Pg.153] စ ဣမာနိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဝုတ္တာနီတိ ဝါစ္စလိင်္ဂါနမနုဝတ္တာပကဿ အဘိဓေယျလိင်္ဂဘူတဿ အာပသဒ္ဒဿ ‘‘ကညာယ စိတ္တာနီ’’တိအာဒီနံ ဝိယ ဣတ္ထိနပုံသကလိင်္ဂရူပါနံ အဘာဝတော. အပိစ ဝေါဟာရကုသလာ တထာဂတာ တထာဂတသာဝကာ စ, တေဟိယေဝ ဥတ္တမပုရိသေဟိ ဝေါဟာရကုသလေဟိ ‘‘အတီတော အာပေါ’’တိအာဒိနာ ဝုတ္တတ္တာပိ ‘‘အတီတော’’တိ ‘‘တေနာ’’တိ စ ဣမာနိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဝုတ္တာနီတိ န စိန္တေတဗ္ဗာနိ, တသ္မာ တံသမာနာဓိကရဏော ဩကာရန္တဘာဝေန ဂဟိတော အာပသဒ္ဒေါ ဧကဝစနန္တော ပုလ္လိင်္ဂေါ စေဝ ယထာပယောဂံ ဧကဝစနဗဟုဝစနကော စာတိ ဝေဒိတဗ္ဗော ‘‘အာပေါ, အာပါ. အာပံ, အာပေ’’တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗတ္တာ. ဧဝံ ဝုတ္တာနိ သုတ္တပဒါနိ သဝိနိစ္ဆယာနိ သုတွာ အဒ္ဓါ တေ အာပသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဗဟုဝစနတာဝါဒိနော နိရုတ္တရာ ဘဝိဿန္တိ. शिवाय, बुद्धवचनांमध्ये 'चित्तानि, रूपाणि' इत्यादींप्रमाणे सविकार रूपांचे अदर्शन असल्यामुळे, 'ओ'-कारान्त रूपाने ग्रहण केलेल्या शब्दाचा नपुंसकलिंगी भाव नाहीसा होणे अत्यंत स्पष्ट आहे. येथे आणखी एक गोष्ट सांगण्यासारखी आहे – 'अतीतो आपो अत्थि (भूतकालीन पाणी आहे का)? आमन्ता (होय)' येथे 'अतीतो' या 'आप' शब्दाच्या स्पष्ट आकाराच्या व्यवहाराला सूचित करणाऱ्या 'ओ'-कारान्त पदाने त्याचा अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार आणि दोन्हीपासून मुक्त आकाराचा व्यवहार या दोन्हीचा अभाव सिद्ध होतो. आणि त्याचा अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार सिद्ध न झाल्यामुळे स्त्रीलिंगी भाव तर फार दूर राहिला. आणि दोन्हीपासून मुक्त आकाराचा व्यवहार सिद्ध न झाल्यामुळे नपुंसकलिंगी भाव देखील फार दूरच आहे. अशा प्रकारे, कुठेही 'ओ'-कारान्त रूपाने ग्रहण केलेला 'आप' शब्द स्त्रीलिंगी किंवा नपुंसकलिंगी होत नाही. परंतु मिलिन्दपञ्हमध्ये अनुस्वाराच्या (निग्गहीत) रूपाने आलेला शब्द नपुंसकलिंगी समजावा, आणि येथे असे म्हणता येणार नाही की 'अतीतो' आणि 'तेन' हे लिंगविपर्यासाने (लिंग बदलामुळे) म्हटले गेले आहेत, कारण विशेष्य लिंगाचे अनुकरण करणाऱ्या आणि अभिधेय लिंग असलेल्या 'आप' शब्दाचे, 'कञ्ञाय' (कन्येचे), 'चित्तानि' इत्यादींप्रमाणे स्त्रीलिंगी व नपुंसकलिंगी रूपे नसतात. शिवाय, व्यवहारात कुशल असलेले तथागत आणि तथागत-श्रावक, त्या व्यवहारात कुशल असलेल्या उत्तम पुरुषांनी 'अतीतो आपो' इत्यादी प्रकारे म्हटले असल्यामुळे देखील, 'अतीतो' आणि 'तेन' हे लिंगविपर्यासाने म्हटले गेले आहेत असा विचार करू नये, म्हणून त्याच्याशी समानाधिकरण असलेला, 'ओ'-कारान्त रूपाने ग्रहण केलेला 'आप' शब्द एकवचनान्त पुल्लिंगीच आहे आणि प्रयोगानुसार तो एकवचनी व बहुवचनी दोन्ही रूपांत समजावा, कारण 'आपो, आपा. आपं, आपे' इत्यादी प्रकारे त्याची योजना करायची असते. अशा प्रकारे निर्णयांसह सांगितलेली सूत्रपदे ऐकून, निश्चितच ते 'आप' शब्दाला स्त्रीलिंगी बहुवचनी मानणारे लोक निरुत्तर होतील. ဧတ္ထ ကောစိ ဝဒေယျ – ပါဠိယံ ပုလ္လိင်္ဂနယော ဧကဝစနနယော စ ကိံ အဋ္ဌကထာဋီကာစရိယေဟိ န ဒိဋ္ဌော, ယေ အာပသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဗဟုဝစနတ္တံ ဝဏ္ဏေသုန္တိ? နော န ဒိဋ္ဌော, ဒိဋ္ဌောယေဝ သော နယော တေဟိ. ယသ္မာ ပန တေ န ကေဝလံ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေယေဝ ဝိသာရဒါ, အထ ခေါ သကလေပိ သဒ္ဒသတ္ထေ ဝိသာရဒါ, တသ္မာ သဒ္ဒသတ္ထေ အတ္တနော ပဏ္ဍိစ္စံ ပကာသေတုံ, ‘‘သဒ္ဒသတ္ထေ စ ဤဒိသော နယော ဝုတ္တော’’တိ ဝိညာပေတုဉ္စ သဒ္ဒသတ္ထနယံ ဂဟေတွာ အာပသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဗဟုဝစနကတ္တံ ဝဏ္ဏေသုန္တိ နတ္ထိ တေသံ ဒေါသော. တထာ ဟိ မူလပရိယာယသုတ္တန္တဋ္ဌကထာယံ တေဟိယေဝ ဝုတ္တံ အာပသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂေကဝစနကတ္တသူစနကံ ‘‘လက္ခဏသသမ္ဘာရာရမ္မဏသမ္မုတိဝသေန စတုဗ္ဗိဓော အာပေါ, တေသူ’’တိအာဒိ, တသ္မာ နတ္ထိ တေသံ ဒေါသော. ပူဇာရဟာ ဟိ တေ အာယသ္မန္တော, နမောယေဝ တေသံ [Pg.154] ကရောမ, န တေသံ ဝစနံ စောဒနာဘာဇနံ. ယေ ပန ဥဇုဝိပစ္စနီကဝါဒါ ဒဠှမေဝ အာပသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဗဟုဝစနတ္တံ မမာယန္တိ, တေသံယေဝ ဝစနံ စောဒနာဘာဇနံ. ယသ္မာ ပန မယံ ပါဠိနယာနုသာရေန အန္တဒွယဝတော အာပသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂတ္တံ နပုံသကလိင်္ဂတ္တဉ္စ ဝိဒဓာမ, တသ္မာ ယော ကောစိ ဣဒံ ဝါဒံ မဒ္ဒိတွာ အညံ ဝါဒံ ပတိဋ္ဌာပေတုံ သက္ခိဿတီတိ နေတံ ဌာနံ ဝိဇ္ဇတိ, ဣဒဉ္စ ပန ဌာနံ မဟာဂဟနံ ဒုပ္ပဋိဝိဇ္ဈနဋ္ဌေန, ပရမသုခုမဉ္စ ကတဉာဏသမ္ဘာရေဟိ ပရမသုခုမဉာဏေဟိ ပဏ္ဍိတေဟိ ဝေဒနီယတ္တာ. သဗ္ဗမိဒဉှိ ဝစနံ တေသု တေသု ဌာနေသု အတ္ထဗျဉ္ဇနပရိဂ္ဂဟဏေ သောတူနံ ပရမကောသလ္လဇနနတ္ထဉ္စေဝ သာသနေ အာဒရံ အကတွာ သဒ္ဒသတ္ထမတေန ကာလံ ဝီတိနာမေန္တာနံ သာထလိကာနံ ပမာဒဝိဟာရနိသေဓနတ္ထဉ္စ သာသနဿာတိမဟန္တဘာဝဒီပနတ္ထဉ္စ ဝုတ္တံ, န အတ္တုက္ကံသနပရဝမ္ဘနတ္ထန္တိ ဣမိဿံ နီတိယံ သဒ္ဓါသမ္ပန္နေဟိ ကုလပုတ္တေဟိ ယောဂေါ ကရဏီယော ဘဂဝတော သာသနဿ စိရဋ္ဌိတတ္ထံ. येथे कोणी म्हणू शकेल – पाळी भाषेतील पुल्लिंगी नियम आणि एकवचनी नियम काय अट्ठकथा आणि टीकाचार्यांनी पाहिले नव्हते, ज्यांनी 'आप' शब्दाला स्त्रीलिंगी बहुवचनी म्हणून वर्णन केले आहे? असे नाही की त्यांनी पाहिले नव्हते, त्यांनी तो नियम नक्कीच पाहिला होता. परंतु, ते केवळ अट्ठकथांसह त्रिपिटक बुद्धवचनातच निष्णात नव्हते, तर संपूर्ण व्याकरणशास्त्रामध्ये (सद्दसत्थ) देखील निष्णात होते, म्हणून व्याकरणशास्त्रातील आपले पांडित्य प्रकट करण्यासाठी आणि 'व्याकरणशास्त्रात असा नियम सांगितला आहे' हे समजावून सांगण्यासाठी, त्यांनी व्याकरणशास्त्राचा नियम घेऊन 'आप' शब्दाचे स्त्रीलिंगी बहुवचनी रूप म्हणून वर्णन केले आहे, यात त्यांचा काही दोष नाही. तसेच, मूलपरियायसुत्तन्त-अट्ठकथेमध्ये त्यांनी स्वतःच 'आप' शब्दाच्या पुल्लिंगी एकवचनी रूपाचे सूचक असे म्हटले आहे की – 'लक्षण, ससंभार, आलंबन आणि संमृतीच्या भेदाने आप चार प्रकारचा आहे, त्यांमध्ये...' इत्यादी. म्हणून त्यांचा काही दोष नाही. ते पूजनीय आयुष्यमान आहेत, आम्ही त्यांना केवळ नमस्कार करतो, त्यांचे वचन आक्षेपास पात्र नाही. परंतु जे थेट विरोधी वाद मांडणारे लोक 'आप' शब्दाच्या स्त्रीलिंगी बहुवचनी रूपाचाच हट्ट धरून बसतात, त्यांचेच वचन आक्षेपास पात्र आहे. परंतु, आम्ही पाळी नियमांनुसार दोन्ही टोकांपासून मुक्त असलेल्या 'आप' शब्दाचे पुल्लिंगी आणि नपुंसकलिंगी रूप सिद्ध करतो, म्हणून कोणीही या वादाचे खंडन करून दुसरा वाद प्रस्थापित करू शकेल, अशी शक्यता नाही. आणि हा विषय अत्यंत गहन आहे कारण तो समजण्यास कठीण आहे, आणि ज्यांनी ज्ञानाचा संभार गोळा केला आहे अशा अत्यंत सूक्ष्म बुद्धीच्या पंडितांद्वारेच तो जाणण्याजोगा असल्यामुळे तो अत्यंत सूक्ष्म आहे. हे सर्व वचन वेगवेगळ्या ठिकाणी अर्थ आणि व्यंजनाचे ग्रहण करण्यात श्रोत्यांमध्ये परम कौशल्य निर्माण करण्यासाठीच, आणि शासनाविषयी (बुद्धशासनाविषयी) आदर न बाळगता केवळ व्याकरणशास्त्राच्या मतानुसार काळ घालवणाऱ्या शिथिल लोकांच्या प्रमादविहाराचा (आळसाचा) निषेध करण्यासाठी आणि शासनाचे अतिशय मोठेपण स्पष्ट करण्यासाठी म्हटले गेले आहे, स्वतःची प्रशंसा करण्यासाठी किंवा इतरांना कमी लेखण्यासाठी नाही. म्हणून, भगवंतांच्या शासनाच्या चिरस्थायी अस्तित्वासाठी श्रद्धासंपन्न कुलपुत्रांनी या पद्धतीचा अभ्यास केला पाहिजे. ယသ္မာ ပန ပါဠိတော အဋ္ဌကထာ ဗလဝတီ နာမ နတ္ထိ, တသ္မာ ပါဠိနယာနုရူပေနေဝ အာပသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလံ ယောဇေဿာမ သောတူနမသမ္မောဟတ္ထံ, ကိမေတ္ထ သဒ္ဒသတ္ထနယော ကရိဿတိ. အတြာယံ ဥဒါနပါဠိ ‘‘ကိံ ကယိရာ ဥဒပါနေန, အာပါ စေ သဗ္ဗဒါ သိယု’’န္တိ. परंतु, पाळीपेक्षा (मूळ पाळी ग्रंथापेक्षा) अट्ठकथा अधिक बलवान नसते, म्हणून आम्ही पाळी नियमांनुसारच 'आप' शब्दाची नामरूपे (विभक्ती रूपे) श्रोत्यांच्या संभ्रमनिरासासाठी योजू, येथे व्याकरणशास्त्राचा नियम काय करणार? याविषयी ही उदानपाळी आहे – 'विहिरीचे काय करायचे, जर सर्वत्र नेहमी पाणीच (आपा) असेल.' အာပေါ, အာပါ. အာပံ, အာပေ. အာပေန, အာပေဟိ, အာပေဘိ. အာပဿ, အာပါနံ. အာပါ, အာပသ္မာ, အာပမှာ, အာပေဟိ, အာပေဘိ. အာပဿ, အာပါနံ. အာပေ, အာပသ္မိံ, အာပမှိ, အာပေသု. ဘော အာပ, ဘဝန္တော အာပါ. आपो, आपा। आपं, आपे। आपेन, आपेहि, आपेभि। आपस्स, आपानं। आपा, आपस्मा, आपम्हा, आपेहि, आपेभि। आपस्स, आपानं। आपे, आपस्मिं, आपम्हि, आपेसु। भो आप, भवन्तो आपा। သဗ္ဗနာမာဒီဟိပိ ယောဇေဿာမ – ယော အာပေါ, ယေ အာပါ. ယံ အာပံ, ယေ အာပေ. ယေန အာပေန, သေသံ နေယျံ[Pg.155], သော အာပေါ, တေ အာပါ. အတီတော အာပေါ, အတီတာ အာပါ. သေသံ နေယျံ. ဣစ္စေဝံ – सर्वनामांसोबत देखील आम्ही योजना करू – यो आपो, ये आपा। यं आपं, ये आपे। येन आपेन, उर्वरित रूपे याचप्रमाणे समजावीत, सो आपो, ते आपा। अतीतो आपो, अतीता आपा। उर्वरित रूपे याचप्रमाणे समजावीत. अशा प्रकारे – ပုရိသေန သမာ အာပ-သဒ္ဒါဒီ သဗ္ဗထာ မတာ; န သဗ္ဗထာဝ ဂေါသဒ္ဒေါ, ပုရိသေန သမော မတော. 'आप' इत्यादी शब्द सर्व प्रकारे 'पुरिस' (पुरुष) शब्दासारखेच मानले गेले आहेत; परंतु 'गो' शब्द सर्व प्रकारे 'पुरिस' शब्दासारखा मानला गेला नाही. မနာဒီ ဧကဒေသေန, ပုရိသေန သမာ မတာ; သရာဒီ ဧကဒေသေန, သဗ္ဗထာ ဝါ သမာ မတာ. 'मन' इत्यादी शब्द अंशतः 'पुरिस' शब्दासारखे मानले गेले आहेत; 'सर' (बाण) इत्यादी शब्द अंशतः किंवा सर्व प्रकारे 'पुरिस' शब्दासारखे मानले गेले आहेत. ယေ ပနေတ္ထ သဒ္ဒါ ‘‘မနောဂဏော’’တိ ဝုတ္တာ, ကထံ တေသံ မနောဂဏဘာဝေါ သလ္လက္ခေတဗ္ဗောတိ? ဝုစ္စတေ တေသံ မနောဂဏဘာဝသလ္လက္ခဏကာရဏံ – येथे जे शब्द 'मनोगण' म्हणून सांगितले आहेत, त्यांचा मनोगणभाव कसा ओळखावा? त्यांच्या मनोगणभावाच्या ओळखीचे कारण सांगितले जात आहे – မနောဂဏော မနောဂဏာ-ဒိကာ စေဝါ’မနောဂဏော; ဣတိ သဒ္ဒါ တိဓာ ဉေယျာ,မနောဂဏဝိဘာဝနေ. मनोगण, मनोगणादी आणि अमनोगण; मनोगणाचे स्पष्टीकरण करताना हे शब्द तीन प्रकारचे समजावेत. ယေ တေ နာ သ သ္မိံဝိသယေ,သာ သော သျန္တာ ဘဝန္တိ စ; သမာသတဒ္ဓိတန္တတ္တေ,မဇ္ဈောကာရာ စ ဟောန္တိ ဟိ. जे शब्द 'ना', 'सा', 'स्मिं' या विभक्ती प्रत्ययांच्या विषयात 'सा', 'सो', 'सि' (किंवा 'सु') अंत असणारे होतात; आणि समास व तद्धित प्रत्यय लागल्यास ज्यांच्या मध्यभागी 'ओ'-कार होतो. သောကာရန္တပယောဂါ စ, ကြိယာယောဂမှိ ဒိဿရေ; ဧဝံဝိဓာ စ တေ သဒ္ဒါ, ဉေယျာ ‘‘မနောဂဏော’’ဣတိ. आणि क्रियापदाच्या योगात 'सो'-कारान्त प्रयोग दिसून येतात; अशा प्रकारचे शब्द 'मनोगण' म्हणून समजावेत. အတြ တဿတ္ထဿ သာဓကာနိ ပယောဂါနိ သာသနတော စ လောကတော စ ယထာရဟမာဟရိတွာ ဒဿေဿာမ – မနသာ စေ ပသန္နေန, ဘာသတိ ဝါ ကရောတိ ဝါ. န မယှံ မနသော ပိယော. သာဓုကံ မနသိ ကရောထ. မနောပုဗ္ဗင်္ဂမာ ဓမ္မာ. မနောရမံ, မနောဓာတု, မနောမယေန ကာယေန, ဣဒ္ဓိယာ ဥပသင်္ကမိ. ယော ဝေ ‘‘ဒဿ’’န္တိ ဝတွာန, အဒါနေ ကုရုတေ မနော. ဝစသာ ပရိစိတာ. ဝစသော ဝစသိ. येथे त्या अर्थाचे साधक असणारे प्रयोग शासनातून (बुद्धवचनातून) आणि लोकव्यवहारातून योग्यतेनुसार आणून दाखवू – 'मनसा चे पसन्नेन, भासति वा करोति वा' (जर प्रसन्न मनाने मनुष्य बोलतो किंवा कर्म करतो). 'न मय्हं मनसो पियो' (ते माझ्या मनाला प्रिय नाही). 'साधुकं मनसि करोथ' (मनात चांगल्या प्रकारे धारण करा). 'मनोपुब्बङ्गमा धम्मा' (सर्व धर्म मनाच्या पूर्वगामी आहेत). 'मनोरमं' (मनोरम), 'मनोधातु' (मनोधातू), 'मनोमयेन कायेन, इद्धिया उपसङ्कमि' (मनोमय शरीराने ऋद्धीद्वारे जवळ गेले). 'यो वे दस्संति वत्वान, अदाने कुरुते मनो' (जो 'देईन' असे बोलून न देण्याकडे मन वळवतो). 'वचसा परिचिता' (वाणीने परिचित). 'वचसो वचसि' (वचसो वचसि). ဝစောရသ္မီဟိ [Pg.156] ဗောဓေသိ, ဝေနေယျကုမုဒဉ္စိဒံ; ရာဂေါ သာရာဂရဟိတော, ဝိသုဒ္ဓေါ ဗုဒ္ဓစန္ဒိမာ. वाणीरूपी किरणांनी या विनेयरूपी (उपदेश देण्यास योग्य) कमळाला प्रबोधित केले; आसक्तीरहित आणि अत्यंत शुद्ध असे बुद्धरूपी चंद्र आहेत. ကဿပဿ ဝစော သုတွာ, အလာတော ဧတဒဗြဝိ; ဧသ ဘိယျော ပသီဒါမိ, သုတွာန မုနိနော ဝစော. कस्सपाचे (कश्यपाचे) वचन ऐकून अलाताने हे म्हटले, 'मुनींचे (बुद्धांचे) वचन ऐकून मी अधिकच प्रसन्न झालो आहे.' သခါ စ မိတ္တော စ မမာသိ သီဝိက, သုသိက္ခိတော သာဓု ကရောဟိ မေ ဝစော. ဧကူနတိံသော ဝယသာ သုဘဒ္ဒ. ဝယသော, ဝယသိ, ဝယောဝုဒ္ဓေါ, ဝယောဂုဏာ အနုပုဗ္ဗံ ဇဟန္တိ. ဇလန္တမိဝ တေဇသာ. တေဇသော, တေဇသိ, တေဇောဓာတုကုသလော. တေဇောကသိဏံ. တပသာ ဥတ္တမော, တပသော, တပသိ, တပေါဓနော, တပေါဇိဂုစ္ဆာ. ကသ္မာ ဘဝံ ဝိဇနမရညနိဿိတော, တပေါ ဣဓ ကြုဗ္ဗသိ ဗြဟ္မပတ္တိယာ. စေတသာ အညာသိ, ဧဝံ စေတသော ပရိဝိတက္ကော ဥဒပါဒိ, ဧတမတ္ထံ စေတသိ သန္နိဓာယ, စေတောပရိဝိတက္ကမညာယ. စေတောပရိယဉာဏံ, စေတော ပရိစ္ဆိန္ဒတိ, သော ပရသတ္တာနံ ပရပုဂ္ဂလာနံ စေတသာ စေတော ပရိစ္စ ဇာနာတိ. တမသာ, တမသော, တမသိ, တမောနုဒေါ, တမောဟရော. နဝါဟမေတံ ယသသာ ဒဒါမိ. ယသသော, ယသသိ, ယသော ဘောဂသမပ္ပိတော. ယသောလဒ္ဓါခေါ ပနသ္မာကံ ဘောဂါ. ယသောဓရာ ဒေဝီ, ယသော လဒ္ဓါ န မဇ္ဇေယျ. အယသာဝ မလံ သမုဋ္ဌိတံ. အယသော, အယသိ, အယောပါကာရပရိယန္တံ, အယသာ ပဋိကုဇ္ဇိတံ. သေယျော အယောဂုဠော ဘုတ္တော, အယောပတ္တော[Pg.157], အယောမယံ, အယော ကန္တတီတိ အယောကန္တော. ဃတေန ဝါ ဘုဉ္ဇဿု ပယသာ ဝါ, သာဓု ခလု ပယသော ပါနံ ယညဒတ္တေန, ပယသိ ဩဇာ, ပယောဓရာ, ပယောနိဓိ. သဟဿနေတ္တော သိရသာ ပဋိဂ္ဂဟိ. သိရသော, သိရသိ အဉ္ဇလိံ ကတွာ, ဝန္ဒိတဗ္ဗံ ဣသိဒ္ဓဇံ. သိရောရုဟာ, သိရော ဆိန္ဒတိ. ယော ကာမေ ပရိဝဇ္ဇေတိ, သပ္ပဿေဝ ပဒါသိရော. သိရော တေ ဝဇ္ဈယိတွာန. သရသာ, သရသော, တီဏိ ဥပ္ပလဇာတာနိ, တသ္မိံ သရသိ ဗြာဟ္မဏ. သရောရုဟံ. ယံ ဧတာ ဥပသေဝန္တိ, ဆန္ဒသာဝါ ဓနေနဝါ. သာဝိတ္တီ ဆန္ဒသော မုခံ. ဆန္ဒသိ, ဆန္ဒောဝိစိတိ, ဆန္ဒောဘင်္ဂေါ, ဥရသာ ပနုဒဟိဿာမိ, ဥရသော, ဥရသိ ဇာယတိ, ဥရသိလောမော, ဥရောမဇ္ဈေ ဝိဇ္ဈိ. ရဟသာ, ရဟသော, ရဟသိ, ရဟောဂတော နိသီဒိတွာ, ဧဝံ စိန္တေသဟံ တဒါ. အဟသာ, အဟသိ. ဇာယန္တိ တတ္ထ ပါရောဟာ, အဟောရတ္တာနမစ္စယေတိ ဣမာနိ ပယောဂါနိ. ဧတ္ထ စ ‘‘မနေန, မနဿ, မနေ, မနသ္မိံ, မနမှီ’’တိအာဒီနိ စ ‘‘မနအာယတနံ တမပရာယနော အယပတ္တော ဆန္ဒဟာနီ’’တိအာဒီနိ စ ‘‘န မနံ အညာသိ. ယသံ လဒ္ဓါန ဒုမ္မေဓော. ‘‘သိရံ ဆိန္ဒတီ’’တိအာဒီနိ စ ရူပါနိ မနောဂဏဘာဝပ္ပကာသကာနိ န ဟောန္တီတိ န ဒဿိတာနိ, န အလဗ္ဘမာနဝသေန, တသ္မာတြ ဣမာ အာဒိတော ပဋ္ဌာယ မနောဂဏဘာဝဝိဘာဝိနီ ဂါထာယော ဘဝန္တိ – हे सीविक, तू माझा सखा आणि मित्र आहेस, सुशिक्षित आहेस, माझे वचन नीट ऐक. सुभद्दा, वयाने एकोणतीस (वर्षे). 'वयसो', 'वयसि', 'वयोवृद्ध', 'वयोगुण' अनुक्रमे नष्ट होतात. तेजाने जळत असल्यासारखे. 'तेजसो', 'तेजसि', 'तेजोधातूकुशल'. 'तेजोकसिण'. तपाने उत्तम, 'तपसो', 'तपसि', 'तपोधन', 'तपोजिगुच्छा'. आपण निर्जन अरण्याचा आश्रय घेऊन ब्रह्मप्राप्तीसाठी येथे तप का करत आहात? मनाने जाणले, अशा प्रकारे मनात विचार उत्पन्न झाला, हा अर्थ मनात ठेवून, मनातील विचार जाणून. 'चेतोपरियज्ञान', चित्त मर्यादित करतो, तो इतर प्राण्यांच्या आणि इतर व्यक्तींच्या चित्ताला आपल्या चित्ताने जाणून घेतो. तमाने (अंधकाराने), 'तमसो', 'तमसि', 'तमोनुद', 'तमोहर'. मी हे यशाने देत नाही. 'यशसो', 'यशसि', 'यश आणि भोगाने युक्त'. यश प्राप्त झाल्यावर आमचे भोग. यशोधरा देवी, यश मिळवून उन्मत्त होऊ नये. लोखंडापासूनच मळ (गंज) उत्पन्न होतो. 'अयसो', 'अयसि', 'लोखंडी तटबंदीने वेढलेले', 'लोखंडाने झाकलेले'. लोखंडाचा गोळा खाणे अधिक श्रेयस्कर आहे, 'लोखंडाचे पात्र', 'लोखंडी', लोखंड कापतो म्हणून 'लोहकांत'. तुपासोबत किंवा दुधासोबत खावे, यज्ञदत्ताने दूध पिणे खरोखर चांगले आहे, दुधात ओज असते, 'पयोधर', 'पयोनिधी'. सहस्रनेत्राने (शक्राने) डोक्याने स्वीकार केला. 'शिरसो', 'शिरसि', डोक्यावर हात जोडून ऋषींच्या ध्वजाला वंदन करावे. 'शिरोरुह', डोके कापतो. जो कामांचा (वासनांचा) त्याग करतो, तो सापाच्या डोक्याला पाय देण्यासारखा आहे. तुझे डोके कापून. सरोवराने, 'सरसो', तीन प्रकारची कमळे, त्या सरोवरात हे ब्राह्मणा. 'सरोरुह'. ज्याची या सेवा करतात, इच्छेने किंवा धनाने. 'सावित्री हा छंदांचा मुख आहे'. 'छंदसि', 'छंदोविचिती', 'छंदोभंग', छातीने दूर करीन, 'उरसो', छातीवर उत्पन्न होतो, 'छातीवर केस असलेला', छातीच्या मध्यभागी वेधले. रहस्याने (एकांतात), 'रहसो', 'रहसि', एकांतात बसून, तेव्हा मी असा विचार केला. 'अहसा', 'अहसि'. तेथे पारंब्या उत्पन्न होतात, अहोरात्रांच्या समाप्तीने, हे प्रयोग आहेत. आणि येथे 'मनेन, मनस्स, मने, मनस्मिं, मनम्हि' इत्यादी आणि 'मनायतनं, तमपरायणो, अयपत्तो, छंदहानी' इत्यादी आणि 'न मनं अञ्ञासि, यसं लद्धान दुम्मेधो, सिरं छिन्दति' इत्यादी रूपे मनोगणाचा भाव प्रकट करत नाहीत, म्हणून ती दाखवली नाहीत; ती उपलब्ध नसल्यामुळे नव्हे. म्हणून, सुरुवातीपासूनच मनोगणाचा भाव स्पष्ट करणाऱ्या या गाथा आहेत - ‘‘မနသာ [Pg.158] မနသော မနသိ’’,ဣတိအာဒိဝသာ ဌိတာ; သာ သော သျန္တာ သဒ္ဒရူပါ,ဝုတ္တာ ‘‘မနောဂဏော’’ဣတိ. 'मनसा, मनसो, मनसि' इत्यादी रूपांनी जे शब्द स्थित आहेत; 'सा', 'सो', 'सि' अंत असणारे ते शब्दरूप 'मनोगण' म्हटले जातात. မနောဓာတု ဝစောရသ္မိ,ဝယောဝုဒ္ဓေါ တပေါဂုဏော; တေဇောဓာတု တမောနာသော,ယသောဘောဂသမပ္ပိတော. मनोधातू, वचोरस्मि (वचो-रश्मी), वयोवृद्ध, तपोगुण, तेजोधातू, तमोनाश, यश आणि भोगाने युक्त. စေတောပရိဝိတက္ကော စ, အယောပတ္တော ပယောဓရာ; သိရောရုဟာ သရောရုဟံ, ဥရောမဇ္ဈေ ရဟောဂတော. चेतोपरिवितर्क (मनातील विचार), अयपात्र (लोखंडी पात्र), पयोधरा, शिरोरुह (केस), सरोरुह (कमळ), उरोमध्य (छातीचा मध्यभाग), रहोगत (एकांतात गेलेला). ဆန္ဒောဘင်္ဂေါ အဟောရတ္တံ, မနောမယ’မယောမယံ; ဧဝံဝိဓော ဝိသေသော ယော, လက္ခဏန္တံ မနောဂဏေ. छंदोभंग, अहोरात्र, मनोमय, अयोमयी (लोहमय); अशा प्रकारची जी वैशिष्ट्ये आहेत, ते मनोगणाचे लक्षण आहे. ‘‘ဝစော သုတွာ, သိရော ဆိန္ဒိ, အယော ကန္တတိ’’ ဣစ္စပိ; ဥပယောဂဿ သံသိဒ္ဓိ, လက္ခဏန္တံ မနောဂဏေ. 'वचो सुत्वा' (वचन ऐकून), 'शिरो छिन्दि' (डोके कापले), 'अयो कन्तति' (लोखंड कापतो) इत्यादी; द्वितीया विभक्तीची (उपयोगाची) सिद्धी हे मनोगणाचे लक्षण आहे. မနောဂဏေ ဝုတ္တနယော, ဣတ္ထိလိင်္ဂေ န လဗ္ဘတိ; ပုန္နပုံသကလိင်္ဂေသု, လဗ္ဘတေဝ ယထာရဟံ. मनोगणात सांगितलेला नियम स्त्रीलिंगात आढळत नाही; पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगात तो योग्यतेनुसार आढळतोच. ဣစ္စေဝံ သဗ္ဗထာပိ – अशा प्रकारे सर्व प्रकारे - သာ သော သျန္တာနိ ရူပါနိ, သန္ဒိဿန္တိ မနောဂဏေ; မဇ္ဈောကာရန္တရူပါ စ, သောကာရန္တူပယောဂတာ. 'सा', 'सो', 'सि' अंत असणारी रूपे मनोगणात दिसून येतात; तसेच मध्यभागी 'ओ'कार असणारी रूपे आणि द्वितीया विभक्तीत 'ओ'कार अंत असणारी रूपेही दिसतात. ဣဒံ မနောဂဏလက္ခဏံ. ဧဝံ မနောဂဏလက္ခဏံ အနာကုလံ နိဂ္ဂုမ္ဗံ နိဇ္ဇဋံ သမုဒ္ဒိဋ္ဌံ. हे मनोगणाचे लक्षण आहे. अशा प्रकारे मनोगणाचे लक्षण व्याकुळता नसलेले, गुंतागुंत नसलेले आणि स्पष्टपणे सांगितले आहे. အထ မနောဂဏာဒိလက္ခဏံ ကထယာမ – आता आपण मनोगणादींचे (मनोगणासारख्या इतर शब्दांचे) लक्षण सांगू - ယေ တေ နာ သသ္မိံဝိသယေ,သာ သော သျန္တာ ယထာရဟံ; သမာသတဒ္ဓိတန္တတ္တေ,မဇ္ဈောကာရော န ဟောန္တိ တု. जे शब्द तृतीया, षष्ठी आणि सप्तमी विभक्तीच्या विषयात अनुक्रमे 'सा', 'सो', 'सि' अंत असणारे होत नाहीत; तसेच समास आणि तद्धित प्रत्यय लागल्यावर ज्यांच्या मध्यभागी 'ओ'कार होत नाही. သောကာရန္တူပယောဂါ [Pg.159] စ,ကြိယာယောဂေ န ဟောန္တိ တေ; သဒ္ဒါ ဧဝံဝိဓာ သဗ္ဗေ; မနောဂဏာဒိကာ မတာ. आणि क्रियापदाच्या योगात ज्यांची द्वितीया विभक्ती 'ओ'कार अंत असणारी होत नाही; अशा प्रकारचे सर्व शब्द 'मनोगणादी' मानले जातात. သေယျထိဒံ? ‘‘ဗိလံ ပဒံ မုခ’’မိစ္စာဒယော. တေသံ ရူပါနိ ဘဝန္တိ – ဗိလသာ, ဗိလသော, ဗိလသိ, ဗိလဂတော, ဗိလံ ပါဝိသိ. ပဒသာဝ အဂမာသိ, တီဏိ ပဒဝါရာနိ, မာကာသိ မုခသာ ပါပံ, မုခဂတံ ဘောဇနံ ဆဍ္ဍာပေတိ. သစ္စေန ဒန္တော ဒမသာ ဥပေတော. ရသဝရံ ရသမယံ ရသံ ပိဝီတိ. ဣဒံ မနောဂဏာဒိကလက္ခဏံ. उदाहरणादाखल: 'बिल', 'पद', 'मुख' इत्यादी. त्यांची रूपे अशी होतात - 'बिलसा', 'बिलसो', 'बिलसि', 'बिलगत', 'बिलं पाविसि' (बिळात प्रवेश केला). 'पदसाव अगमासि' (पायानेच गेला), 'तीणि पदवाराणि' (तीन पदवार). 'माकासि मुखसा पापं' (मुखाने पाप करू नकोस), 'मुखगतं भोजनं छड्डापेति' (मुखात गेलेले भोजन ओकवून टाकतो). 'सच्चेन दंतो दमसा उपेतो' (सत्याने दमन केलेला, संयमाने युक्त). 'रसवरं रसमयं रसं पिविति' (उत्कृष्ट रस, रसमय रस पितो). हे मनोगणादींचे लक्षण आहे. အပရမ္ပိ ဘဝတိ – दुसरेही (लक्षण) होते - ယေ သမာသာဒိဘာဝမှိ, မဇ္ဈောကာရာဝ ဟောန္တိ တု; နာ သ သ္မိံဝိသယေ သာသော-သျန္တာ ပန န ဟောန္တိဟိ. जे शब्द समास इत्यादी भावात मध्यभागी 'ओ'कार असणारेच होतात; परंतु तृतीया, षष्ठी आणि सप्तमी विभक्तीच्या विषयात 'सा', 'सो', 'सि' अंत असणारे होत नाहीत. သောကာရန္တူပယောဂါ စ,ကြိယာယောဂေ န ဟောန္တိ တေ; သဒ္ဒါ ဧဝံဝိဓာ စာပိ,မနောဂဏာဒိကာ မတာ. आणि क्रियापदाच्या योगात ज्यांची द्वितीया विभक्ती 'ओ'कार अंत असणारी होत नाही; अशा प्रकारचे शब्द देखील 'मनोगणादी' मानले जातात. သေယျထိဒံ? ‘‘အာပေါ ဝါယော သရဒေါ’’ဣစ္စေဝမာဒယော. တေသံ ရူပါနိ ဘဝန္တိ – အာပေါဓာတု, ဝါယောဓာတု, အာပေါကသိဏံ, ဝါယောကသိဏံ, အာပေါမယံ, ဝါယောမယံ, ဇီဝ တွံ သရဒေါသတံ, သရဒကာလော. အာပေန, အာပဿ, အာပေ, အာပသ္မိံ, အာပမှိ. ဝါယေန, ဝါယဿ, ဝါယေ, ဝါယသ္မိံ, ဝါယမှိ. သရဒေန, သရဒဿ, သရဒေ, သရဒသ္မိံ, သရဒမှိ. အာပံ အာပတော သဉ္ဇာနာတိ. ဝါယံ ဝါယတော သဉ္ဇာနာတိ. သရဒံ ပတ္ထေတိ, သရဒံ ရမဏီယာ နဒီ. उदाहरणादाखल: 'आप', 'वाय', 'सरद' इत्यादी. त्यांची रूपे अशी होतात - 'आपोधातू', 'वायोधातू', 'आपोकसिण', 'वायोकसिण', 'आपोमय', 'वायोमय', 'जीव त्वं सरदसतं' (तू शंभर शरद ऋतू जग), 'सरदकालो' (शरद काळ). 'आपेन', 'आपस्स', 'आपे', 'आपस्मिं', 'आपम्हि'. 'वायेन', 'वायस्स', 'वाये', 'वायस्मिं', 'वायम्हि'. 'सरदेन', 'सरदस्स', 'सरदे', 'सरदस्मिं', 'सरदम्हि'. 'आपं आपतो संजानाति' (जलाला जलाच्या रूपाने जाणतो). 'वायं वायतो संजानाति' (वायूला वायूच्या रूपाने जाणतो). 'सरदं पत्थेति' (शरद ऋतूची इच्छा करतो), 'सरदं रमणीया नदी' (शरद ऋतूत नदी रमणीय असते). ကေစိ [Pg.160] ပနေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘နနု သာသနေ ဝါယသဒ္ဒေါ ဝိယ ဝါယုသဒ္ဒေါပိ မနောဂဏာဒီသု ဣစ္ဆိတဗ္ဗော’’တိ? ဧတ္ထ ဝုစ္စတေ – येथे काही जण असे म्हणू शकतात की, 'शासनात जसा 'वाय' शब्द आहे, तसा 'वायू' शब्दही मनोगणादींमध्ये स्वीकारला पाहिजे की नाही?' यावर सांगितले जाते - ‘‘ဝါယု ဝါယော’’တိ ဧတေသု, ပစ္ဆိမောယေဝ ဣစ္ဆိတော; မနောဂဏာဒီသု နာဒိ, အာဒိဂ္ဂဟဝသေနိဓ. 'वायू' आणि 'वायो' या शब्दांमध्ये नंतरचाच मनोगणादींमध्ये स्वीकारला गेला आहे, आधीचा नाही; येथे 'आदी' ग्रहणाच्या वशामुळे. ‘‘မနောဓာတု ဝါယောဓာတု’’, ဣစ္စာဒီနိ ပဒါနိ ဟိ; အကာရန္တဝသေနေဝ, မဇ္ဈောကာရာနိ သိဇ္ဈရေ. 'मनोधातू', 'वायोधातू' इत्यादी पदे अकारान्त शब्दांच्या प्रभावानेच मध्यभागी 'ओ'कार असणारी सिद्ध होतात. ဝါယုသဒ္ဒမှိ ဂဟိတေ, အာဒိဂ္ဂဟဝသေနိဓ; ‘‘ဝါယောဓာတူ’’တိ ဩမဇ္ဈံ, ရူပမေဝ န ဟေဿတိ. जर येथे 'वायू' शब्द स्वीकारला, तर 'आदी' ग्रहणाच्या वशामुळे 'वायोधातू' असे मध्यभागी 'ओ'कार असणारे रूप सिद्ध होणार नाही. ယထာ ဟိ အာယုသဒ္ဒဿ, ရူပံ ဒိဿတိ သာဂမံ; ‘‘အာယုသာ ဧကပုတ္တ’’န္တိ, မနသာဒိပဒံ ဝိယ. कारण जसे 'आयु' शब्दाचे रूप 'आयुसा एकपुत्तं' असे 'मनसा' इत्यादी पदांप्रमाणे स-आगमासह दिसून येते. န တထာ ဝါယုသဒ္ဒဿ, ရူပံ ဒိဿတိ သာဂမံ; တသ္မာ မနောဂဏာဒိမှိ, တဿော’ကာသော န ဝိဇ္ဇတိ. तसे 'वायू' शब्दाचे रूप स-आगमासह दिसून येत नाही; म्हणून मनोगणादींमध्ये त्याला स्थान नाही. တထာ ဟိ ‘‘ဝါယတိ ဣတိ, ဝါယော’’ ဣတိ ဂရူ ဝဒုံ; ‘‘ဝါယောဓာတူ’’တိ ဧတဿ, ပဒဿတ္ထံ တဟိံ တဟိံ. कारण 'वायतीती वायो' (जो वाहतो तो वायू) असे गुरूंनी म्हटले आहे; आणि 'वायोधातू' या पदाचा अर्थ ठिकठिकाणी तोच आहे. ယတ္ထ ပထဝီ စ အာပေါ စ, တေဇော ဝါယော န ဂါဓတိ; ဧတ္ထ အာပါဒိကံ သဒ္ဒ-တ္တိကံ မနောဂဏာဒိကေ. जिथे पृथ्वी, आप, तेज आणि वायू प्रतिष्ठा पावत नाहीत; येथे 'आप' इत्यादी तीन शब्द मनोगणादींमध्ये समाविष्ट आहेत. ဣဒမ္ပိ မနောဂဏာဒိကလက္ခဏံ. ဧတ္ထ မနောဂဏာဒိကာ ဒွိဓာ ဘိဇ္ဇန္တိ ဗိလ ပဒါဒိတော အာပါဒိတော စ. ဧဝံ မနောဂဏာဒိကလက္ခဏံ အနာကုလံ နိဂ္ဂုမ္ဗံ နိဇ္ဇဋံ သမုဒ္ဒိဋ္ဌံ. हे देखील मनोगणादिकांचे लक्षण आहे. येथे मनोगणादिक 'बिल' पदापासून आणि 'आप' पासून असे दोन प्रकारे विभागले जातात. अशा प्रकारे मनोगणादिकांचे लक्षण गोंधळरहित, गुंतागुंतीशिवाय आणि जटारहित करून स्पष्टपणे सांगितले आहे. အထ အမနောဂဏလက္ခဏံ ကထယာမ – आता आपण अमनोगणाचे लक्षण सांगू या – ယေ စ နာဝိသယေ သောန္တာ, ယေ စ သ္မာဝိသယေ သိယုံ; သဒ္ဒါ ဧဝံပကာရာ တေ, အမနောဂဏသညိတာ. जे शब्द 'ना' च्या विषयात 'सो' अंत असणारे असतात, आणि जे 'स्मा' च्या विषयात 'सो' अंत असणारे असतात; अशा प्रकारचे ते शब्द 'अमनोगण' संज्ञक असतात. ကေ [Pg.161] တေ? အတ္ထဗျဉ္ဇနက္ခရသဒ္ဒါဒယော စေဝ ဒီဃောရသဒ္ဒါ စ. ဧတေသု ဟိ အတ္ထသဒ္ဒါဒီနံ နာဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘အတ္ထသော ဗျဉ္ဇနသော အက္ခရသော သုတ္တသော ဥပါယသော သဗ္ဗသော ဌာနသော’’တိအာဒီနိ သောန္တာနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဒီဃောရသဒ္ဒါနံ ပန သ္မာဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဒီဃသော ဩရသော’’တိ သောန္တာနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဣဒံ အမနောဂဏလက္ခဏံ. ते कोणते? 'अत्थ' (अर्थ), 'ब्यञ्जन' (व्यंजन), 'अक्खर' (अक्षर) इत्यादी शब्द आणि 'दीघ' (दीर्घ) व 'ओर' (और) हे शब्द. कारण, यांच्यामध्ये 'अत्थ' इत्यादी शब्दांच्या 'ना' प्रत्ययाच्या स्थानी "अत्थसो, ब्यञ्जनसो, अक्खरसो, सुत्तसो, उपायसो, सब्बसो, ठानसो" इत्यादी 'सो' अंत असणारी रूपे होतात. परंतु 'दीघ' आणि 'ओर' या शब्दांच्या 'स्मा' प्रत्ययाच्या स्थानी "दीघसो, ओरसो" अशी 'सो' अंत असणारी रूपे होतात. हे अमनोगणाचे लक्षण आहे. အပရမ္ပိ ဘဝတိ – आणखी दुसरेही लक्षण आहे – သဗ္ဗထာ ဝိနိမုတ္တာ ယေ, သာ သော သျန္တာဒိဘာဝတော; ဧဝံဝိဓာပိ တေ သဒ္ဒါ, အမနောဂဏသညိတာ. जे शब्द 'सा', 'सो', 'स्यन्त' इत्यादी भावांपासून सर्वथा मुक्त असतात; अशा प्रकारचे ते शब्द देखील 'अमनोगण' संज्ञक असतात. ကေ တေ? ‘‘ပုရိသော ကညာ စိတ္တ’’မိစ္စာဒယော. ဣဒမ္ပိ အမနောဂဏလက္ခဏံ. ဧဝံ အမနောဂဏလက္ခဏံ အနာကုလံ နိဂ္ဂုမ္ဗံ နိဇ္ဇဋံ သမုဒ္ဒိဋ္ဌံ. ते कोणते? "पुरिसो" (पुरुष), "कञ्ञा" (कन्या), "चित्तं" (चित्त) इत्यादी. हे देखील अमनोगणाचे लक्षण आहे. अशा प्रकारे अमनोगणाचे लक्षण गोंधळरहित, गुंतागुंतीशिवाय आणि जटारहित करून स्पष्टपणे सांगितले आहे. ဧဝံ ဒဿိတေသု မနောဂဏလက္ခဏာဒီသု ကောစိ ဝဒေယျ ‘‘ယဒိဒံ တုမှေဟိ ဝုတ္တံ ‘ယေ သမာသာဒိဘာဝမှိ, မဇ္ဈောကာရာဝ ဟောန္တိ တူ’တိအာဒိနာ မနောဂဏာဒိကလက္ခဏံ, တေန ‘‘ပရောသတံ ဂေါမယံ ဂေါဓနော’’ဣစ္စာဒီသု ဂေါပရသဒ္ဒါဒယောပိ မနောဂဏာဒိကဘာဝံ အာပဇ္ဇန္တီတိ? နာပဇ္ဇန္တိ. ကသ္မာတိ စေ? ယသ္မာ – अशा प्रकारे मनोगणादिकांचे लक्षण दाखविले असता कोणी म्हणू शकेल की, "तुम्ही जे 'ये समासादिभावम्हि, मज्झोकाराव होन्ति तु' इत्यादींद्वारे मनोगणादिकांचे लक्षण सांगितले आहे, त्याने "परोसतं, गोमयं, गोधनो" इत्यादींमध्ये 'गोपर' इत्यादी शब्द देखील मनोगणादिक भाव प्राप्त करतात का?" ते प्राप्त करत नाहीत. का? कारण – ဧတ္ထ မနောဂဏာဒီနံ, အန္တဿောတ္တံ ပဋိစ္စိဒံ; ‘‘မဇ္ဈောကာရာ’’တိ ဝစနံ, ဝုတ္တံ န တွာဂမာဒိကံ. येथे मनोगणादिकांच्या संदर्भात, हे 'सो' प्रत्ययाच्या अंताला अनुसरून आहे; "मज्झोकारा" (मध्यभागी 'ओ' कार होणे) हे वचन सांगितले आहे, आगम इत्यादींच्या बाबतीत नाही. ‘‘ပရောသတံ ဂေါမယ’’န္တိ-အာဒီသု အမနောဂဏော; ပုဗ္ဗဘူတံ ပဒံ ဩဿာ-ဂမတ္တာ’နိစ္စတာယ စ. "परोसतं, गोमयं" इत्यादींमध्ये अमनोगण आहे; कारण पूर्वपदामध्ये 'ओ' आणि 'स' चा आगम होतो आणि अनित्यता असल्यामुळे देखील. တသ္မာ နာပဇ္ဇန္တိ. ဣတိ သဗ္ဗထာပိ အမနောဂဏလက္ခဏံ နိဿေသတော ဒဿိတံ. ဣစ္စေဝံ မနောဂဏဝိဘာဝနာယံ မနောဂဏော မနောဂဏာဒိကော အမနောဂဏော စာတိ တိဓာ ဘေဒေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. म्हणून ते प्राप्त करत नाहीत. अशा प्रकारे सर्व प्रकारे अमनोगणाचे लक्षण पूर्णपणे दाखविले आहे. अशा रीतीने मनोगणाच्या स्पष्टीकरणात मनोगण, मनोगणादिक आणि अमनोगण असा तीन प्रकारचा भेद समजला पाहिजे. တတ္ထ [Pg.162] မနောဂဏေ ပရိယာပန္နသဒ္ဒါနံ သမာသံ ပတွာ ‘‘အဗျဂ္ဂမနသော နရော, ထိရစေတသံ ကုလံ, သဒ္ဓေယျဝစသာ ဥပါသိကာတိအာဒိနာ လိင်္ဂတ္တယဝသေန အညထာပိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဧတ္ထ ပန ကေစိ ဧဝံ ဝဒန္တိ ‘‘ယဒါ မနသဒ္ဒေါ သကတ္ထေ အဝတ္တိတွာ ‘အဗျဂ္ဂေါ မနော ယဿ သောယံ အဗျဂ္ဂမနသော, အလီနော မနော ယဿ သောယံ အလီနမနသော’တိ ဧဝံ အညတ္ထေ ဝတ္တတိ, တဒါ ပုရိသနယေနေဝ နာမိကပဒမာလာ လဗ္ဘတိ, န မနောဂဏနယေနာ’’တိ. တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ ဥဘိန္နမ္ပိ ယထာရဟံ လဗ္ဘနတော. တထာ ဟိ ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂေ ပုဂ္ဂလာပေက္ခနဝသေန ‘‘ခန္တိသောရစ္စမေတ္တာဒိ-ဂုဏဘူသိတစေတသော. အဇ္ဈေသနံ ဂဟေတွာနာ’’တိ ဧတ္ထ မနောဂဏနယော ဒိဿတိ. တဋ္ဋီကာယမ္ပိ ‘‘အဇ္ဈေသိတော ဒါဌာနာဂ-တ္ထေရေန ထိရစေတသာ’’တိ မနောဂဏနယော ဒိဿတိ, တသ္မာ တေသံ ဝစနံ န ဂဟေတဗ္ဗံ. ဧဝံ ဝဒန္တာ စ တေ အဗျဂ္ဂမနသဒ္ဒါဒီနံ အဗျဂ္ဂမနသဣစ္စာဒိနာ သကာရန္တပကတိဘာဝေန ဌပေတဗ္ဗဘာဝံ ဝိဗ္ဘန္တမတိဝသေန စိန္တေတွာ သဗ္ဗာသု ဝိဘတ္တီသု, ဒွီသု စ ဝစနေသု ပုရိသနယေန ယောဇေတဗ္ဗတံ မညန္တိ. ဧဝဉ္စ သတိ ‘‘ဂုဏဘူသိတစေတသော, ထိရစေတသာ’’တိ ဆဋ္ဌီစတုတ္ထီတတိယာရူပါနိ နသိယုံ, အညာနိယေဝ အနဘိမတာနိ ရူပါနိ သိယုံ. ယသ္မာ သိယုံ, တသ္မာ ဧဝံ အဂ္ဂဟေတွာ အယံ ဝိသေသော ဂဟေတဗ္ဗော. त्या मनोगणामध्ये समाविष्ट असलेल्या शब्दांचे समासात आल्यावर "अब्यग्गमनसो नरो" (स्थिर मनाचा मनुष्य), "थिरचेतसं कुलं" (दृढ मनाचे कुळ), "सद्धेय्यवचसा उपासिका" (विश्वासार्ह बोलणारी उपासिका) इत्यादी तीन लिंगांच्या अनुसार इतर रूपे देखील होतात. परंतु येथे काही जण असे म्हणतात की, "जेव्हा 'मन' शब्द स्वतःच्या अर्थात न राहता दुसऱ्या अर्थात वर्ततो, जसे की 'ज्याचे मन स्थिर आहे तो अब्यग्गमनसो', 'ज्याचे मन अलीन आहे तो अलीगमनसो', तेव्हा नामाची पदमाला केवळ 'पुरिस' शब्दाप्रमाणेच मिळते, मनोगणाच्या पद्धतीने नाही." हे स्वीकारले जाऊ नये, कारण योग्यतेनुसार दोन्ही पद्धतींची रूपे मिळतात. तथाहि, विशुद्धिमार्गात पुद्गलाच्या अपेक्षेने "खन्तिसोरच्चमेत्तादि-गुणभूसितचेतसो। अज्झेसनं गहेत्वाना" येथे मनोगणाची पद्धत दिसून येते. त्याच्या टीकेमध्ये देखील "अज्झेसितो दाठान्हागतत्थेरेन थिरचेतसा" येथे मनोगणाची पद्धत दिसून येते, म्हणून त्यांचे म्हणणे स्वीकारले जाऊ नये. आणि असे बोलणारे ते 'अब्यग्गमन' इत्यादी शब्दांना 'अब्यग्गमनस' इत्यादी 'स'कारान्त प्रातिपदिक मानून, भ्रान्त बुद्धीने विचार करून, सर्व विभक्तींमध्ये आणि दोन्ही वचनांमध्ये 'पुरिस' शब्दाप्रमाणे योजना करावी असे मानतात. आणि जर असे झाले, तर "गुणभूसितचेतसो, thiracetasā" ही षष्ठी, चतुर्थी आणि तृतीयेची रूपे होणार नाहीत, तर दुसरीच अनिष्ट रूपे होतील. ज्याअर्थी ती होतील, त्याअर्थी असे न स्वीकारता हा विशेष समजून घेतला पाहिजे. ယတ္ထ ဟိ သမာသဝသေန မနသဒ္ဒေါ စေတသဒ္ဒါဒယော စ သကတ္ထေ အဝတ္တိတွာ အညတ္ထေ ဝတ္တန္တိ, တတ္ထ သကာရာဂမာနံ ပဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ပုရိသနယေန စ မနောဂဏေ မနနယေန စ ယထာရဟံ လဗ္ဘတိ. နိဿကာရာဂမာနံ ပန ပုရိသနယေနေဝ လဗ္ဘတိ. ယတ္ထ ပန သမာသဝိသယေယေဝ မနာဒိသဒ္ဒါ သကတ္ထေ ဝတ္တန္တိ, တတ္ထ နိဿကာရာဂမာနံ နာမိကပဒမာလာ ပုရိသနယေန စ မနောဂဏေ မနနယေန စ လဗ္ဘတိ. कारण जेथे समासामुळे 'मन' शब्द आणि 'चेत' इत्यादी शब्द स्वतःच्या अर्थात न राहता दुसऱ्या अर्थात वर्ततात, तेथे 'स'कारागम असलेल्या पदांची विभक्ती रूपे 'पुरिस' पद्धतीने आणि मनोगणातील 'मन' पद्धतीने योग्यतेनुसार दोन्ही प्रकारे मिळतात. परंतु 'स'कारागम नसलेल्या पदांची रूपे केवळ 'पुरिस' पद्धतीनेच मिळतात. पण जेथे समासाच्या विषयातच 'मन' इत्यादी शब्द स्वतःच्या अर्थात वर्ततात, तेथे 'स'कारागम नसलेल्या पदांची विभक्ती रूपे 'पुरिस' पद्धतीने आणि मनोगणातील 'मन' पद्धतीने देखील मिळतात. ဣဒါနိ [Pg.163] ဣမဿတ္ထဿ အာဝိဘာဝတ္ထံ, သဒ္ဒဂတီသု စ ဝိညူနံ ကောသလ္လုပ္ပာဒနတ္ထံ ယထာဝုတ္တာနံ ပဒါနံ ပဒမာလာ တိဓာ ကတွာ ဒဿယိဿာမ – ‘‘ဗျာသတ္တော မနော ယဿ သောယံ ဗျာသတ္တမနသော နရော’’တိ ဧဝမစ္စန္တံ ပုဂ္ဂလာပေက္ခကဿ ဣမဿ ပဒဿ – आता या अर्थाच्या स्पष्टतेसाठी आणि शब्दांच्या गतीमध्ये विद्वानांचे कौशल्य वाढवण्यासाठी, वर सांगितलेल्या पदांची पदमाला तीन प्रकारे करून दाखवू – "ज्याचे मन आसक्त आहे तो ब्यासत्तमनसो मनुष्य" अशा प्रकारे अत्यंत पुद्गलापेक्षी असलेल्या या पदाची – ဗျာသတ္တမနသော နရော, ဗျာသတ္တမနသာ နရာ. ဗျာသတ္တမနသံ နရံ, ဗျာသတ္တမနသေ နရေ. ဗျာသတ္တမနသာ, ဗျာသတ္တမနေန နရေန, ဗျာသတ္တမနေဟိ, ဗျာသတ္တမနေဘိ နရေဟိ. ဗျာသတ္တမနသော, ဗျာသတ္တမနဿ နရဿ, ဗျာသတ္တမနာနံ နရာနံ. ဗျာသတ္တမနာ, ဗျာသတ္တမနသ္မာ, ဗျာသတ္တမနမှာ နရာ, ဗျာသတ္တမနေဟိ, ဗျာသတ္တမနေဘိ နရေဟိ. ဗျာသတ္တမနသော, ဗျာသတ္တမနဿ နရဿ, ဗျာသတ္တမနာနံ နရာနံ. ဗျာသတ္တမနသိ, ဗျာသတ္တမနေ, ဗျာသတ္တမနသ္မိံ, ဗျာသတ္တမနမှိ နရေ, ဗျာသတ္တမနေသု နရေသု. ဘော ဗျာသတ္တမနသ နရ, ဘဝန္တော ဗျာသတ္တမနသာ နရာတိ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. "ब्यासत्तमनसो नरो, ब्यासत्तमनसा नरा (प्रथमा). ब्यासत्तमनसं नरं, ब्यासत्तमने नरे (द्वितीया). ब्यासत्तमनसा, ब्यासत्तमननेन नरेन, ब्यासत्तमनेहि, ब्यासत्तमनेभि नरेहि (तृतीया). ब्यासत्तमनसो, ब्यासत्तमनस्स नरस्स, ब्यासत्तमनानं नरानं (चतुर्थी). ब्यासत्तमना, ब्यासत्तमनस्मा, ब्यासत्तमनम्हा नरा, ब्यासत्तमनेहि, ब्यासत्तमनेभि नरेहि (पंचमी). ब्यासत्तमनसो, ब्यासत्तमनस्स नरस्स, ब्यासत्तमनानं नरानं (षष्ठी). ब्यासत्तमनसि, ब्यासत्तमने, ब्यासत्तमनस्मिं, ब्यासत्तमनम्हि नरे, ब्यासत्तमनेसु नरेसु (सप्तमी). भो ब्यासत्तमनस नर, भवन्तो ब्यासत्तमनसा नरा (संबोधन)" अशी विभक्ती रूपे (पदमाला) होते. ဧဝံ သကာရာဂမဿ လဗ္ဘမာနာလဗ္ဘမာနတာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ ဟိ ပဌမာဒုတိယာဝိဘတ္တီနံ ဧကဝစနဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ စ တတိယာစတုတ္ထီဆဋ္ဌီသတ္တမီနံ ဧကဝစနဋ္ဌာနေ စ ယထာရဟံ သာဂမော ဘဝတိ အာဒေသသရဝိဘတ္တိသရပရတ္တာ. အယဉ္စ နယော သုခုမော သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗော. अशा प्रकारे 'स'कारागमाची प्राप्ती आणि अप्राप्ती निश्चित केली पाहिजे. येथे प्रथमा व द्वितीया विभक्तीच्या एकवचन आणि बहुवचनाच्या स्थानी, आणि तृतीया, चतुर्थी, षष्ठी व सप्तमी विभक्तीच्या एकवचनाच्या स्थानी, आदेश स्वर आणि विभक्ती स्वर पर असल्यामुळे योग्यतेनुसार 'स'चा आगम होतो. आणि ही सूक्ष्म पद्धत चांगल्या प्रकारे मनात ठेवली पाहिजे. အပရော နယော – ‘‘ဗျာသတ္တော မနော ယဿ သောယံ ဗျာသတ္တမနော’’တိ ဧဝမ္ပိ ပုဂ္ဂလာပေက္ခကဿ ဣမဿ ပဒဿ ‘‘ဗျာသတ္တမနော နရော, ဗျာသတ္တမနာ နရာ. ဗျာသတ္တမနံ နရ’’န္တိအာဒိနာ ပုရိသနယေနေဝ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. ဧတ္ထ ပန သဗ္ဗထာပိ သာဂမော နတ္ထိ. အပရောပိ နယော – ‘‘ဗျာသတ္တော စ သော မနော စာတိ ဗျာသတ္တမနော’’တိ ဧဝံ စိတ္တာပေက္ခကဿပိ ဣမဿ ပဒဿ ‘‘ဗျာသတ္တမနော, ဗျာသတ္တမနာ. ဗျာသတ္တမနံ, ဗျာသတ္တမနေ. ဗျာသတ္တမနသာ, ဗျာသတ္တမနေနာ’’တိအာဒိနာ မနောဂဏေ မနနယေန နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ, ဧတ္ထ ပန တတိယာစတုတ္ထီဆဋ္ဌီသတ္တမီနံ [Pg.164] ဧကဝစနဋ္ဌာနေယေဝ သာဂမော ဘဝတိ အာဒေသသရပရတ္တာ. ယထာ စ ဧတ္ထ, ဧဝံ ‘‘အလီနမနသော နရော’’တိအာဒီသုပိ အယံ တိဝိဓော နယော ဝေဒိတဗ္ဗော. दुसरी पद्धत (नय) - "ज्याचे मन आसक्त आहे तो 'ब्यासात्तमना' (व्यासक्तमना)" अशा प्रकारे व्यक्तीच्या अपेक्षेने असलेल्या या शब्दाची "ब्यासात्तमना नरो, b्यासात्तमना नरा. ब्यासात्तमनं नरं" इत्यादी प्रकारे 'पुरिस' (पुरुष) पद्धतीनुसारच नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमाला) होतात. येथे मात्र कोणत्याही प्रकारे 'स' आगम होत नाही. आणखी एक पद्धत - "जे आसक्त आहे तेच मन म्हणजे 'ब्यासात्तमना'" अशा प्रकारे चित्ताच्या अपेक्षेने असलेल्या या शब्दाची "ब्यासात्तमना, ब्यासात्तमना. ब्यासात्तमनं, ब्यासात्तमने. ब्यासात्तमनसा, ब्यासात्तमनेन" इत्यादी प्रकारे मनोगणामध्ये 'मन' पद्धतीनुसार नामविभक्तीची रूपे होतात. येथे मात्र तृतीया, चतुर्थी, षष्ठी आणि सप्तमीच्या एकवचनाच्या ठिकाणीच आदेश स्वराच्या परत्वामुळे 'स' आगम होतो. ज्याप्रमाणे येथे आहे, त्याचप्रमाणे "अलीनामनसो नरो" (अलीनमना मनुष्य) इत्यादी शब्दांमध्येही ही त्रिविध पद्धत समजली पाहिजे. နပုံသကလိင်္ဂေ ပန ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဗျာသတ္တမနသံ ကုလံ, ဗျာသတ္တမနာနိ ကုလာနိ. ဗျာသတ္တမနသံ ကုလံ, ဗျာသတ္တမနာနိ ကုလာနိ. ဗျာသတ္တမနသာ ကုလေနာ’’တိအာဒိနာ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ ပန ပဌမာဒုတိယာတတိယာစတုတ္ထီဆဋ္ဌီသတ္တမီနံ ဧကဝစနဋ္ဌာနေယေဝ ယထာရဟံ သာဂမော ဘဝတိ အာဒေသသရဝိဘတ္တိသရပရတ္တာ, အယမ္ပိ နယော သုခုမော သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗော. नपुंसकलिंगात सांगायचे झाल्यास "ब्यासात्तमनसं कुलं, ब्यासात्तमनानि कुलानि. ब्यासात्तमनसं कुलं, ब्यासात्तमनानि कुलानि. ब्यासात्तमनसा कुलेन" इत्यादी प्रकारे नामविभक्तीची रूपे जोडली पाहिजेत. येथे मात्र प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, षष्ठी आणि सप्तमीच्या एकवचनाच्या ठिकाणीच आदेश स्वर आणि विभक्ती स्वराच्या परत्वामुळे योग्यतेनुसार 'स' आगम होतो. ही सूक्ष्म पद्धतही चांगल्या प्रकारे मनात ठेवली पाहिजे. ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ပန ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဗျာသတ္တမနသာ ဣတ္ထီ’’တိ ဧဝံ ပဌမေကဝစနဋ္ဌာနေယေဝ သာဂမံ ဝတွာ တတော ‘‘ဗျာသတ္တမနာ, ဗျာသတ္တမနာယော ဣတ္ထိယော. ဗျာသတ္တမနံ ဣတ္ထိ’’န္တိ ကညာနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. ‘‘ဧဝံ သဒ္ဓေယျဝစသာ ဥပါသိကာ, သဒ္ဓေယျဝစာယော ဥပါသိကာယော. သဒ္ဓေယျဝစံ ဥပါသိက’’န္တိအာဒိနာပိ. ‘‘ဗျာသတ္တမနံ ကုလံ, ဗျာသတ္တမနာ ဣတ္ထီ’’တိအာဒိနာ ပန စိတ္တကညာနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ ပန သဗ္ဗထာပိ သာဂမော နတ္ထိ. स्त्रीलिंगात सांगायचे झाल्यास "ब्यासात्तमनसा इत्थी" अशा प्रकारे केवळ प्रथमा एकवचनाच्या ठिकाणी 'स' आगम सांगून, त्यानंतर "ब्यासात्तमना, ब्यासात्तमनायो इत्थियो. ब्यासात्तमनं इत्थिं" अशा प्रकारे 'कञ्ञा' (कन्या) पद्धतीनुसार रूपे जोडली पाहिजेत. "एवं सद्धेय्यवचसा उपासिका, सद्धेय्यवचायो उपासिकायो. सद्धेय्यवचं उपासिकं" इत्यादी प्रकारेही रूपे होतात. परंतु "ब्यासात्तमनं कुलं, ब्यासात्तमना इत्थी" इत्यादी प्रकारे 'चित्त-कञ्ञा' पद्धतीनुसार रूपे जोडली पाहिजेत. येथे मात्र कोणत्याही प्रकारे 'स' आगम होत नाही. သောတူနံ ဉာဏပ္ပဘေဒဇနနတ္ထံ အပရာပိ နာမိကပဒမာလာယော ဒဿယိဿာမ သဟနိဗ္ဗစနေန – မနော ဧဝ မာနသံ, သမုဿာဟိတံ မာနသံ ယဿ သောယံ သမုဿာဟိတမာနသော. ‘‘သမုဿာဟိတမာနသော, သမုဿာဟိတမာနသာ. သမုဿာဟိတမာနသံ, သမုဿာဟိတမာနသေ. သမုဿာဟိတမာနသေနာ’’တိ ပုရိသနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. သုန္ဒရာ မေဓာ အဿ အတ္ထီတိ သုမေဓသော. ‘‘သုမေဓသော, သုမေဓသာ. သုမေဓသံ, သုမေဓသေ. သုမေဓသေနာ’’တိ ပုရိသနယေန, ဧဝံ ‘‘ဘူရိမေဓသော’’တိအာဒီနမ္ပိ. တတြိမေ ပယောဂါ – श्रोत्यांच्या ज्ञानाचा विकास करण्यासाठी आम्ही व्युत्पत्तीसह (निर्वचनासह) इतरही नामविभक्तीची रूपे दाखवू - मन हेच मानस होय, ज्याचे मानस (मन) उत्साहित झाले आहे तो 'समुस्साहितमानसो'. "समुस्साहितमानसो, समुस्साहितमानसा. समुस्साहितमानसं, समुस्साहितमानसे. समुस्साहितमानसेन" अशा प्रकारे 'पुरिस' पद्धतीनुसार रूपे जोडली पाहिजेत. ज्याची बुद्धी (मेधा) सुंदर आहे तो 'सुमेधसो'. "सुमेधसो, सुमेधसा. सुमेधसं, सुमेधसे. सुमेधसेन" अशा प्रकारे 'पुरिस' पद्धतीनुसार, आणि याचप्रमाणे "भूरिमेधसो" इत्यादी शब्दांचीही रूपे होतात. त्यातील हे प्रयोग आहेत - ‘‘ယံ [Pg.165] ဝဒန္တိ သုမေဓောတိ, ဘူရိပညံ သုမေဓသံ; ကိံ နု တမှာ ဝိပ္ပဝသိ, မုဟုတ္တမပိ ပိင်္ဂိယ; ဂေါတမာ ဘူရိပညာဏာ, ဂေါတမာ ဘူရိမေဓသာ. "ज्याला लोक 'सुमेध' म्हणतात, त्या विपुल प्रज्ञेच्या सुमेधसाला; हे पिंगिय! तू त्याच्यापासून एका क्षणासाठी तरी का दूर राहिलास? गौतम हे विपुल प्रज्ञेचे आहेत, गौतम हे विपुल बुद्धीचे (भूरिमेधस) आहेत." နာဟံ တမှာ ဝိပ္ပဝသာမိ, မုဟုတ္တမပိ ဗြာဟ္မဏ; ဂေါတမာ ဘူရိပညာဏာ, ဂေါတမာ ဘူရိမေဓသာ’’တိ. "हे ब्राह्मणा! मी त्यांच्यापासून एका क्षणासाठीही दूर राहत नाही; गौतम हे विपुल प्रज्ञेचे आहेत, गौतम हे विपुल बुद्धीचे (भूरिमेधस) आहेत." ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘သမုဿာဟိတမာနသာ သုမေဓသာ’’တိ ရူပါနိ, နပုံသကေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘သမုဿာဟိတမာနသံ သုမေဓသ’’န္တိ ရူပါနိ, ကညာ စိတ္တနယေန ဧတေသံ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဋ္ဌာနေ ဣတ္ထိလိင်္ဂါဒိဝိနိစ္ဆယော နယပ္ပကာသနတ္ထံ ကတော. ဝိသေသတော ဟိ ဩကာရန္တကထာယေဝ ဣဓာဓိပ္ပေတာ. အပိစ လောကေ နီတိ နာမ နာနပ္ပကာရေဟိ ကထိတာ ဧဝ သောဘတိ, အယဉ္စ သာသနေ နီတိ, တသ္မာ နာနပ္ပကာရေဟိ ကထိတာတိ. स्त्रीलिंगात सांगायचे झाल्यास "समुस्साहितमानसा सुमेधसा" अशी रूपे होतात, नपुंसकलिंगात सांगायचे झाल्यास "समुस्साहितमानसं सुमेधसं" अशी रूपे होतात. 'कञ्ञा' आणि 'चित्त' पद्धतीनुसार यांची नामरूपे जोडली पाहिजेत. ओ-कारान्त पुल्लिंगाच्या ठिकाणी स्त्रीलिंग इत्यादींचा निर्णय पद्धती स्पष्ट करण्यासाठी केला आहे. विशेषतः येथे ओ-कारान्त शब्दांची चर्चाच अभिप्रेत आहे. शिवाय, जगामध्ये नीती ही विविध प्रकारे सांगितली तरच शोभून दिसते, आणि ही शासनातील (बुद्धशासनातील) नीती आहे, म्हणूनच ती विविध प्रकारे सांगितली आहे. သဗ္ဗာနိ နယတော ဧဝံ, ဩကာရန္တပဒါနိမေ; ပုလ္လိင်္ဂါနိ ပဝုတ္တာနိ, သာသနတ္ထံ မဟေသိနော. महर्षींच्या (बुद्धांच्या) शासनाच्या (धम्माच्या) अर्थासाठी हे सर्व ओ-कारान्त पुल्लिंगी शब्द अशा प्रकारे पद्धतीनुसार सांगितले आहेत. ဝိသေသော တေသု ကေသဉ္စိ, ပါဠိယံ ယော ပဒိဿတိ; ပစ္စတ္တဝစနဋ္ဌာနေ, ပကာသေဿာမိ တံ’ဓုနာ. त्यांच्यापैकी काहींचा जो विशेष फरक पाळीमध्ये दिसून येतो, तो मी आता प्रथमा विभक्तीच्या (पच्चत्तवचन) ठिकाणी प्रकट करतो. ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ ယထ ဖုဿိတဂ္ဂေ’’, ဣတိအာဒိနယေန ဟိ; ကတ္ထစောဒန္တပုလ္လိင်္ဂ-ရူပါနိ အညထာ သိယုံ. "वनप्पगुम्बे यथा फुस्सितग्गे" (ज्याप्रमाणे फुलांनी बहरलेले वन) इत्यादी पद्धतीनुसार काही ठिकाणी अ-कारान्त पुल्लिंगी रूपे वेगळ्या प्रकारे (ए-कारान्त) होतात. ပစ္စတ္တဝစနိစ္စေဝ, တဉ္စ ရူပံ ပကာသယေ; ‘‘ပစ္စတ္တေ ဘုမ္မနိဒ္ဒေသော’’, ဣတိ ဘာသန္တိ ကေစန. ते रूप प्रथमा विभक्तीचेच (पच्चत्तवचन) म्हणून प्रकट करावे; काही जण म्हणतात की "प्रथमा विभक्तीमध्ये सप्तमी विभक्तीचा (भुम्म) निर्देश आहे." တတြ ကာနိစိ သုတ္တပဒါနိ ဒဿေဿာမ – နတ္ထိ အတ္တကာရေ, နတ္ထိ ပရကာရေ, နတ္ထိ ပုရိသကာရေ, ပရိယန္တကတေ သံသာရေ, ဇီဝေ သတ္တမေ, န ဟေဝံ ဝတ္တဗ္ဗေ, ဗာလေ စ ပဏ္ဍိတေ စ သန္ဓာဝိတွာ သံသရိတွာ ဒုက္ခဿန္တံ ကရိဿန္တီတိ. ဣမာနိ [Pg.166] ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဒွိဓာ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ပစ္စတ္တေကဝစနဗဟုဝစနာနဉ္စ ဧကာရာဒေသော ဝေဒိတဗ္ဗော. त्यातील काही सूत्रपदे आम्ही दाखवतो - "नत्थि अत्तकारे" (स्वतःचे कर्तृत्व नाही), "नत्थि परकारे" (दुसऱ्याचे कर्तृत्व नाही), "नत्थि पुरिसकारे" (पुरुषार्थ नाही), "परियन्तकते संसारे" (संसार मर्यादित झाल्यावर), "जीवे सत्तमे" (सातव्या जीवामध्ये), "न हेवं वत्तब्बे" (असे म्हणता येणार नाही), "बाले च पण्डिते च सन्धावित्वा संसरित्वा दुक्खस्सन्तं करिस्सन्तीति" (मूर्ख आणि पंडित दोघेही भटकून आणि संसार करून दुःखाचा अंत करतील). ही रूपे एकवचन आणि बहुवचनाच्या आधारे दोन प्रकारे घेतली पाहिजेत. प्रथमा एकवचन आणि बहुवचनाचा 'ए' कार आदेश समजावा. ယေ ပန ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေတိ ပစ္စတ္တဝစနဿ ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသော’’တိ ဝဒန္တိ, တေ ဝတ္တဗ္ဗာ ‘‘ယဒိ ဝနပ္ပဂုမ္ဗေတိ ပစ္စတ္တဝစနဿ ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသော, ဧဝဉ္စ သတိ ‘ထာလိယံ ဩဒနံ ပစတီ’တိ ဧတ္ထ ဝိယ အာဓာရသုတိသမ္ဘဝတော ‘ဂိမှာန မာသေ ပဌမသ္မိံ ဂိမှေ’တိ ဣဒံ ကတရတ္ထံ ဇောတေတီ’’တိ? တေ ဝဒေယျုံ ‘‘န မယံ ဘော ‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေတိ ဣဒံ ဘုမ္မဝစန’န္တိ ဝဒါမ, အထ ခေါ ‘ပစ္စတ္တဝစနဿ ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသော’တိ ဝဒါမာ’’တိ. ဧဝမ္ပိ ဒေါသောယေဝ တုမှာကံ, နနု ‘‘သံဃေ ဂေါတမိ ဒေဟီ’’တိ ဧတ္ထာပိ သမ္ပဒါနဝစနဿ ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသောတိ ဝုတ္တေပိ သံဃဿ ဒါနကြိယာယ အာဓာရဘာဝတော ‘‘သံဃေ’’တိ ဝစနံ သုဏန္တာနံ အာဓာရသုတိ စ အာဓာရပရိကပ္ပော စ ဟောတိယေဝ. န ဟိ သက္ကာ ဧဝံ ပဝတ္တံ စိတ္တံ နိဝါရေတုံ, တသ္မာ ဧတ္ထ ဧဝံ ပန ဝိသေသော ဂဟေတဗ္ဗော ‘‘ပစ္စတ္တဝစနဿပိ ကတ္ထစိ ဘုမ္မဝစနဿ ဝိယ ရူပံ ဟောတီ’’တိ. ဧဝဉှိ ဂဟိတေ န ကောစိ ဝိရောဓော. ဤဒိသေသု ဟိ ဌာနေသု နိရုတ္တိပ္ပဘေဒကုသလော လောကာနုကမ္ပကော ဘဂဝါ ပစ္စတ္တဝစနဝသေန နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗေ သတိ ဧဝံ အနိဒ္ဒိသိတွာ လောကဿ သမ္မောဟမုပ္ပာဒယန္တော ဝိယ ကထံ ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသံ ကရိဿတိ, တသ္မာ သဒ္ဒသာမညလေသမတ္တံ ဂဟေတွာ ‘‘ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသော’’တိ န ဝတ္တဗ္ဗံ. ယဒိ သဒ္ဒသာမညံ ဂဟေတွာ ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသံ ဣစ္ဆထ, ‘‘ပစ္စတ္တေကဝစနဿ ဥပယောဂဗဟုဝစနနိဒ္ဒေသော’’တိပိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗံ သိယာ. पण जे लोक असे म्हणतात की, 'वनप्पगुम्बे (vanappagumbe) हा प्रथमा विभक्तीचा (paccattavacana) सप्तमी विभक्तीच्या (bhummavacana) अर्थाने निर्देश आहे', त्यांना असे विचारले पाहिजे की, 'जर वनप्पगुम्बे हा प्रथमा विभक्तीचा सप्तमी विभक्तीच्या अर्थाने निर्देश असेल, आणि असे असताना जसे 'थाळियं ओदनं पचति' (भांड्यात भात शिजवतो) येथे आधाराचे (अधिकरण) श्रवण संभवते, तसे 'गिम्हान मासे पठमस्मिं गिम्हे' (उन्हाळ्याच्या महिन्यातील पहिल्या उन्हाळ्यात) हे कोणत्या अर्थाला प्रकाशित करते?' ते कदाचित म्हणतील, 'हे महाशय, आम्ही 'वनप्पगुम्बे' हे सप्तमीचे रूप आहे असे म्हणत नाही, तर 'प्रथमा विभक्तीचा सप्तमी विभक्तीच्या अर्थाने निर्देश' आहे असे म्हणतो.' असे असले तरी तुमच्या मतात दोषच आहे. कारण 'संघे गोतमि देहि' (हे गौतमी, संघात दान दे) येथे देखील संप्रदान विभक्तीचा सप्तमी विभक्तीच्या अर्थाने निर्देश आहे असे म्हटले तरी, संघाच्या दानक्रियेचा आधार असल्यामुळे 'संघे' हा शब्द ऐकणाऱ्यांना आधाराचे श्रवण आणि आधाराची कल्पना होतेच. अशा प्रकारे उत्पन्न होणाऱ्या चित्ताला रोखणे शक्य नाही. म्हणून येथे हा विशेष नियम स्वीकारला पाहिजे की, 'प्रथमा विभक्तीचे देखील काही ठिकाणी सप्तमी विभक्तीसारखे रूप होते.' असे स्वीकारल्यास कोणताही विरोध राहत नाही. कारण अशा ठिकाणी व्याकरणभेदात कुशल आणि लोकांवर अनुकंपा करणारे भगवान, जेव्हा प्रथमा विभक्तीच्या रूपाने निर्देश करणे योग्य होते, तेव्हा तसा निर्देश न करता लोकांमध्ये संभ्रम निर्माण केल्यासारखा सप्तमी विभक्तीचा निर्देश कसा करतील? म्हणून केवळ शब्दाच्या सामान्य अंशाचा आधार घेऊन 'सप्तमी विभक्तीचा निर्देश' असे म्हणू नये. जर केवळ शब्दाचे साधर्म्य घेऊन सप्तमी विभक्तीचा निर्देश मानू इच्छित असाल, तर 'प्रथमा एकवचनाचा द्वितीया बहुवचनाच्या अर्थाने निर्देश' असेही मानावे लागेल. အပိစ တထေဝ ‘‘အတ္တကာရေ’’တိ ပစ္စတ္တဝစနဿ ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသေ သတိ အာဓာရသုတိသမ္ဘဝတော ‘‘အတ္တကာရသ္မိံ ကိဉ္စိ ဝတ္ထု နတ္ထီ’’တိ အနဓိပ္ပေတော အတ္ထော သိယာ, န ပန ‘‘အတ္တကာရော နတ္ထီ’’တိ အဓိပ္ပေတော အတ္ထော. ‘‘ဥပယောဂဗဟုဝစနနိဒ္ဒေသော’’တိ ဂဟဏေပိ ဥပယောဂတ္ထဿ နတ္ထိသဒ္ဒေန [Pg.167] အဝတ္တဗ္ဗတ္တာ ဒေါသောယေဝ သိယာ, အတ္ထိသဒ္ဒါဒီနံ ဝိယ ပန နတ္ထိသဒ္ဒဿပိ ပဌမာယ ယောဂတော ‘‘အတ္တကာရေ’’တိ ဣဒံ ပစ္စတ္တဝစနမေဝါတိ ဝိညာယတိ. ‘‘ဗာလေ စ ပဏ္ဍိတေ စ သန္ဓာဝိတွာ သံသရိတွာ ဒုက္ခဿန္တံ ကရိဿန္တီ’’တိ ဧတ္ထာပိ ပစ္စတ္တဝစနဿ ‘‘ဘုမ္မဝစနနိဒ္ဒေသော’’တိ ဝါ ‘‘ဥပယောဂဝစနနိဒ္ဒေသော’’တိ ဝါ ဂဟဏေ သတိ ‘‘ဗာလာ စ ပဏ္ဍိတာ စာ’’တိ ဧတ္တကမ္ပိ ဝတ္တုံ အဇာနနဒေါသော သိယာ, ‘‘ကရိဿန္တီ’’တိ ပဒယောဂတော ပန ‘‘ဗာလေ စာ’’တိအာဒိ ပစ္စတ္တဝစနမေဝါတိ ဝိညာယတိ. ယထာ ပန နိဂ္ဂဟီတာဂမဝသေနုစ္စာရိတေ ‘‘စက္ခုံ ဥဒပါဒီ’’တိ ပဒေ ပစ္စတ္တဝစနဿ ‘‘စက္ခုံ မေ ဒေဟိ ယာစိတော’’တိ ဧတ္ထ ဥပယောဂဝစနေန သုတိဝသေန သမာနတ္တေပိ ပစ္စတ္တဝစနတ္ထောယေဝ သောတာရေ ပဋိဘာတိ ‘‘ဥဒပါဒီ’’တိအာချာတေန ကထိတတ္တာ, န ပန ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသတ္ထဘူတော ဥပယောဂဝစနတ္ထော ‘‘ဥဒပါဒီ’’တိအာချာတေန အဝစနီယတ္တာ, ‘‘စက္ခုံ ဥဒပါဒီ’’တိ ဟိ ဘဂဝတာ ဝုတ္တကာလေ ကော ‘‘စက္ခုံ ဥဒပါဒီ’’တိ ပဒံ ပရိဝတ္တိတွာ အတ္ထမာစိက္ခတိ, တထာ ‘‘ဗာလေ ပဏ္ဍိတေ’’တိအာဒီနမ္ပိ ပစ္စတ္တဝစနာနံ အပရေဟိ ‘‘ဗာလေ ပဏ္ဍိတေ’’တိအာဒီဟိ ဘုမ္မောပယောဂဝစနေဟိ သုတိဝသေန သမာနတ္တေပိ ပစ္စတ္တဝစနတ္ထောယေဝ သောတာရေ ပဋိဘာတိ, န ဣတရဝစနတ္ထော ယထာပယောဂံ အတ္ထဿ ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ. ဣတိ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ, ဗာလေ, ပဏ္ဍိတေ’’တိအာဒီနံ သုဒ္ဓပစ္စတ္တဝစနတ္တညေဝ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗံ, န သုတိသာမညေန ဘုမ္မောပယောဂဝစနတ္တံ. शिवाय, त्याचप्रमाणे 'अत्तकारे' (attakāre) या प्रथमा विभक्तीच्या (paccattavacana) जागी सप्तमी विभक्तीचा (bhummavacana) निर्देश मानल्यास, आधारवाचक श्रुती संभवत असल्यामुळे 'अत्तकारामध्ये (स्वतःच्या कर्तृत्वात) काही वस्तू नाही' असा अनपेक्षित अर्थ होईल, परंतु 'अत्तकार (स्वतःचे कर्तृत्व) नाही' हा अभिप्रेत अर्थ होणार नाही. 'द्वितीया बहुवचनाचा निर्देश' असे ग्रहण केल्यासही, द्वितीया विभक्तीच्या अर्थाचा 'नत्थि' (नाही) या शब्दाशी संबंध जोडता येत नसल्यामुळे दोषच निर्माण होईल. परंतु 'अत्थि' (आहे) इत्यादी शब्दांप्रमाणे 'नत्थि' या शब्दाचाही प्रथमा विभक्तीशी योग असल्यामुळे 'अत्तकारे' हे प्रथमा विभक्तीचेच रूप आहे, असे समजले जाते. 'बाले च पंडिते च संधावित्वा संसरित्वा दुक्खस्सन्तं करिस्सन्ति' (मूर्ख आणि पंडित धावून, संसार करून दुःखाचा अंत करतील) येथेही प्रथमा विभक्तीच्या जागी 'सप्तमी विभक्तीचा निर्देश' किंवा 'द्वितीया विभक्तीचा निर्देश' असे ग्रहण केल्यास, 'बाला च पंडिता चा' (मूर्ख आणि पंडित) एवढेही बोलता न यायचा दोष निर्माण होईल. परंतु 'करिस्सन्ति' (करतील) या क्रियापदाच्या योगामुळे 'बाले चा' इत्यादी प्रथमा विभक्तीचेच रूप आहे, असे समजले जाते. ज्याप्रमाणे निग्गहीत (अनुस्वार) आगम झाल्यामुळे उच्चारलेल्या 'चक्खुं उदापादि' (चक्षु उत्पन्न झाले) या पदात प्रथमा विभक्तीचे रूप असूनही, 'चक्खुं मे देहि याचितो' (मागितल्यावर मला डोळा दे) यातील द्वितीया विभक्तीच्या उच्चाराशी साम्य असले, तरी ऐकणाऱ्याला प्रथमा विभक्तीचाच अर्थ भासतो; कारण 'उदापादि' (उत्पन्न झाले) या क्रियापदाद्वारे ते सांगितले गेले आहे. विभक्तीच्या विपर्यासाने होणारा द्वितीया विभक्तीचा अर्थ भासत नाही, कारण 'उदापादि' या क्रियापदाने तो सांगता येत नाही. कारण भगवंतांनी 'चक्खुं उदापादि' असे म्हटल्याच्या वेळी कोण 'चक्खुं उदापादि' या पदाचा बदल करून अर्थ सांगतो? त्याचप्रमाणे 'बाले पंडिते' इत्यादी प्रथमा विभक्तीच्या रूपांचे इतर 'बाले पंडिते' इत्यादी सप्तमी किंवा द्वितीया विभक्तीच्या रूपांशी उच्चारसाम्य असले, तरी ऐकणाऱ्याला प्रथमा विभक्तीचाच अर्थ भासतो, इतर विभक्तीचा अर्थ भासत नाही; कारण प्रयोगानुसारच अर्थ ग्रहण केला पाहिजे. म्हणून 'वनप्पगुम्बे, बाले, पंडिते' इत्यादींचे शुद्ध प्रथमा विभक्तीचे रूप असणेच सारभूत मानले पाहिजे, केवळ उच्चारसाम्यामुळे सप्तमी किंवा द्वितीया विभक्तीचे रूप मानू नये. ယံ ပနာစရိယေန ဇာတကဋ္ဌကထာယံ – परंतु आचार्यांनी जातक-अट्ठकथेत जे म्हटले आहे की – ‘‘တယော ဂိရိံ တိအန္တရံ ကာမယာမိ,ပဉ္စာလာ ကုရုယော ကေကကေ စ; တတုတ္တရိံ ဗြာဟ္မဏ ကာမယာမိ,တိကိစ္ဆ မံ ဗြာဟ္မဏ ကာမနီတ’’န္တိ – “मी तीन पर्वत आणि तीन अंतराळ (किंवा तीन राज्ये) इच्छितो - पांचाल, कुरु आणि केकक; हे ब्राह्मणा, मी त्याहूनही अधिक इच्छितो, हे ब्राह्मणा, माझ्यावर उपचार कर, मी कामासक्त आहे” – ဣမဿ [Pg.168] ကာမနီတဇာတကဿ သံဝဏ္ဏနာယံ ‘‘ကေကကေ စာတိ ပစ္စတ္တေ ဥပယောဂဝစနံ, တေန ကေကကဿ ရဋ္ဌံ ဒဿေတီ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧဝံ ဝဒန္တော စ သော ‘‘ပုရိသေ ပဿတိ, ပုရိသေ ပတိဋ္ဌိတ’’န္တိ, ‘‘ပဿာမိ လောကေ သဓနေ မနုဿေ’’တိ စ အာဒီသု ယေဘုယျေန ‘‘ပုရိသေ, လောကေ, သဓနေ, မနုဿေ’’တိအာဒီနံ ဥပယောဂဗဟုဝစနဘုမ္မေကဝစနဘာဝေန အာဂတတ္တာ ပစ္စတ္တေကဝစနဗဟုဝစနဘာဝဿ ပန အပါကဋတ္တာ ယေဘုယျပ္ပဝတ္တိံ သန္ဓာယ ‘‘ဣဒမ္ပိ တာဒိသမေဝါ’’တိ မညမာနော ဝဒတိ မညေ. အာစရိယာ ဟိ ကတ္ထစိ အတ္တနော ရုစိယာပိ ဝိသုံ ဝိသုံ ကထေန္တိ. အယံ ပန အမှာကံ ရုစိ – ‘‘ကေကကေ’’တိ ဣဒံ ပစ္စတ္တဝစနမေဝ ‘‘ပဉ္စာလာ, ကုရုယော’’တိ သဟဇာတပဒါနိ ဝိယ, ရဋ္ဌဝါစကတ္တာ ပန ‘‘ကုရုယော’’တိ ပဒမိဝ ဗဟုဝစနဝသေန ဝုတ္တံ. န ဟိ ဘဂဝါ ‘‘ခတ္တိယော, ဗြာဟ္မဏော, ဝေဿော’’တိအာဒီသု ဝိယ သမာနဝိဘတ္တီဟိ နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗေသု သဟဇာတပဒေသု ပစ္ဆိမံ ဥပယောဂဝစနဝသေန နိဒ္ဒိသေယျ, ယုတ္တိ စ န ဒိဿတိ ‘‘ပဉ္စာလာ’’တိ, ‘‘ကုရုယော’’တိ ပစ္စတ္တဝစနံ ဝတွာ ‘‘ကေကကေ’’တိ ဥပယောဂဝစနဿ ဝစနေ, တသ္မာ ‘‘ကေကကေ’’တိ ဣဒံ ပစ္စတ္တဝစနမေဝ. တထာ ဟိ သန္ဓိဝိသောဓနဝိဓာယကော အာစရိယော တာဒိသာနံ ပဒါနံ ပစ္စတ္တဝစနတ္တညေဝ ဝိဘာဝေန္တော သာမံ ကတေ ပကရဏေ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗော ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ, သုခံ ဒုက္ခံ ဇီဝေါ, သုခေ ဒုက္ခေ ဇီဝေ’’တိ အာဟ, ဋီကာယမ္ပိ စ တေသံ ပစ္စတ္တဝစနဘာဝမေဝ ဝိဘာဝေန္တော ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗော, သုခံ, ဒုက္ခံ, ဇီဝေါ’’တိ သာဓနီယံ ရူပံ ပတိဋ္ဌပေတွာ နိဂ္ဂဟီတလောပဝသေန အကာရောကာရာနဉ္စ ဧကာရာဒေသဝသေန ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ, သုခေ, ဒုက္ခေ, ဇီဝေ’’တိ ရူပနိပ္ဖတ္တိမာဟ. သာ ပါဠိနယာနု ကူလာ. ကစ္စာယနာစရိယေနပိ ပါဠိနယံ နိဿာယ ‘‘ဒွိပဒေ တုလျာဓိကရဏေ’’တိ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနပဒံ ဝုတ္တံ. တေနာဟ ဝုတ္တိယံ ‘‘ဒွေ ပဒါနိ တုလျာဓိကရဏာနီ’’တိ. ‘‘ဒွိပဒေ တုလျာဓိကရဏေ’’တိ [Pg.169] စ ဣဒံ ‘‘အဋ္ဌ နာဂါဝါသသတာနီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘အဋ္ဌ နာဂါဝါသသတေ’’တိ ပဒမိဝ ဝုစ္စတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. या कामनीतजातकाच्या वर्णनात 'केकके च' हे प्रथमा विभक्तीच्या जागी द्वितीया विभक्तीचे रूप आहे, त्याद्वारे केकक देश दर्शविला जातो, असे म्हटले आहे. असे म्हणताना ते (आचार्य), 'पुरिसे पस्सति, पुरिसे पतिट्ठितं' (माणसांना पाहतो, माणसांत प्रतिष्ठित) आणि 'पस्सामि लोके सधने मनुस्से' (मी जगात धनवान माणसांना पाहतो) इत्यादींमध्ये बहुतांश करून 'पुरिसे, लोके, सधने, मनुस्से' इत्यादी शब्द द्वितीया बहुवचन आणि सप्तमी एकवचन या रूपाने आलेले असल्यामुळे, आणि प्रथमा एकवचन व बहुवचनाचे रूप स्पष्ट नसल्यामुळे, बहुतांश प्रवृत्तीचा विचार करून 'हे देखील तसेच आहे' असे मानून बोलत असावेत, असे मला वाटते. कारण आचार्य कधीकधी स्वतःच्या मतानुसार वेगवेगळ्या प्रकारे सांगतात. परंतु आमचे मत असे आहे की – 'केकके' हे प्रथमा विभक्तीचेच रूप आहे, जसे की 'पंचला, कुरुयो' हे सोबत आलेले शब्द आहेत. देशवाचक असल्यामुळे 'कुरुयो' या शब्दाप्रमाणे ते बहुवचनात वापरले गेले आहे. कारण भगवान 'खत्तियो, ब्राह्मणो, वेस्सो' (क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य) इत्यादींप्रमाणे समान विभक्तीने निर्देशित करावयाच्या सोबत आलेल्या पदांमध्ये शेवटच्या पदाचा द्वितीया विभक्तीत निर्देश करणार नाहीत. आणि 'पंचला', 'कुरुयो' ही प्रथमा विभक्तीची रूपे बोलून 'केकके' हे द्वितीया विभक्तीचे रूप बोलण्यात कोणतीही युक्ती दिसत नाही, म्हणून 'केकके' हे प्रथमा विभक्तीचेच रूप आहे. तसेच, संधीचे विशोधन करणाऱ्या आचार्यांनी अशा पदांचे प्रथमा विभक्तीचे रूपच स्पष्ट करताना स्वतः रचलेल्या ग्रंथात 'vanappagumbo vanappagumbe, sukhaṃ dukkhaṃ jīvo, sukhe dukkhe jīve' (वनप्पगुम्बो वनप्पगुम्बे, सुखं दुक्खं जीवो, सुखे दुक्खे जीवे) असे म्हटले आहे. आणि टीकेमध्येही त्यांचे प्रथमा विभक्तीचे रूपच स्पष्ट करताना 'वनप्पगुम्बो, सुखं, दुक्खं, जीवो' हे सिद्ध करावयाचे रूप प्रस्थापित करून, निग्गहीताचा (अनुस्वाराचा) लोप करून आणि 'अ'कार व 'ओ'काराच्या जागी 'ए'कार आदेश करून 'वनप्पगुम्बे, सुखे, दुक्खे, जीवे' अशी रूपसिद्धी सांगितली आहे. ती पाळि पद्धतीला अनुकूल आहे. कच्चायन आचार्यांनीही पाळि पद्धतीचा आश्रय घेऊन 'द्विपदे तुल्याधिकरणे' (दोन पदे समान अधिकरणात) हे प्रथमा बहुवचनाचे पद म्हटले आहे. म्हणूनच त्यांनी वृत्तीमध्ये 'द्वे पदानि तुल्याधिकरणानि' (दोन पदे समान अधिकरण आहेत) असे म्हटले आहे. आणि 'द्विपदे तुल्याधिकरणे' हे 'अट्ठ नागावाससतानि' (आठशे नागनिवास) म्हणावयाचे असताना 'अट्ठ नागावाससते' या पदासारखे म्हटले जाते, असे समजले पाहिजे. ကေစိ ပန တေသံ ဘုမ္မေကဝစနတ္တံ ဣစ္ဆန္တိ. တတ္ထ ယဒိ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ’’တိ ပစ္စတ္တေ ဘုမ္မဝစနံ, ‘‘ကေကကေ’’တိ စ ပစ္စတ္တေ ဥပယောဂဝစနံ, ‘‘ဧသေသေ ဧကေ ဧကဋ္ဌေ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဧသေသေ’’တိ ဣမာနိပိ ပစ္စတ္တေ ဘုမ္မဝစနာနိ ဝါ သိယုံ, ဥပယောဂဝစနာနိ ဝါ. ယထေတာနိ ဧဝံဝိဓာနိ န ဟောန္တိ, သုဒ္ဓပစ္စတ္တဝစနာနိယေဝ ဟောန္တိ, တထာ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ, ကေကကေ’’တိအာဒီနိပိ တထာဝိဓာနိ န ဟောန္တိ, သုဒ္ဓပစ္စတ္တဝစနာနိယေဝ ဟောန္တိ. ဣစ္စေဝံ သဗ္ဗထာပိ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ, ဗာလေ, ပဏ္ဍိတေ, ကေကကေ’’တိ, ‘‘ဝိရတ္တေ ကောသိယာယနေ, အဋ္ဌ နာဂါဝါသသတေ, ကေ ပုရိသေ, ဧသေသေ’’တိ ဧဝမာဒီနံ အနေကေသံ ပုရိသလိင်္ဂဣတ္ထိလိင်္ဂနပုံသကလိင်္ဂသဗ္ဗနာမဧကဝစနအနေကဝစနဝသေန သာသနဝရေ ဌိတာနံ ပဒါနံ နိပ္ဖတ္တိ ပစ္စတ္တေကဝစနပုထုဝစနာနမေကာရာဒေသဝသေနေဝ ဘဝတီတိ အဝဿမိဒံ သမ္ပဋိစ္ဆိတဗ္ဗံ. ဧဝံ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ, ဗာလေ, ပဏ္ဍိတေ’’တိအာဒီနံ သုဒ္ဓပစ္စတ္တဝစနတာ အတီဝ သုခုမာ ဒုဗ္ဗိညေယျာ, သဒ္ဓေန ကုလပုတ္တေန အာစရိယေ ပယိရုပါသိတွာ တဒုပဒေသံ သက္ကစ္စံ ဂဟေတွာ ဇာနိတဗ္ဗာ. ဗုဒ္ဓဝစနသ္မိဉှိ သဒ္ဒတော စ အတ္ထတော စ အဓိပ္ပာယတော စ အက္ခရစိန္တကာနံ ဉာဏစက္ခုသမ္မုယှနဋ္ဌာနဘူတာ ပါဠိနယာ ဝိဝိဓာ ဒိဿန္တိ. परंतु काही लोक त्यांचे सप्तमी एकवचन मानतात. त्यामध्ये जर 'वनप्पगुम्बे' हे प्रथमा विभक्तीच्या जागी सप्तमी विभक्तीचे रूप असेल, आणि 'केकके' हे प्रथमा विभक्तीच्या जागी द्वितीया विभक्तीचे रूप असेल, तर 'एसेसे एके एकट्ठे' यामध्ये 'एसेसे' ही देखील प्रथमा विभक्तीच्या जागी सप्तमी विभक्तीची किंवा द्वितीया विभक्तीची रूपे असावीत. ज्याप्रमाणे ही अशा प्रकारची नसून शुद्ध प्रथमा विभक्तीचीच रूपे आहेत, त्याचप्रमाणे 'वनप्पगुम्बे, केकके' इत्यादी देखील तशा प्रकारची नसून शुद्ध प्रथमा विभक्तीचीच रूपे आहेत. अशा प्रकारे सर्वथा 'वनप्पगुम्बे, बाले, पंडिते, केकके', 'विरत्ते कोसियायने, अट्ठ नागावाससते, के पुरिसे, एसेसे' इत्यादी अनेक पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग, सर्वनाम, एकवचन आणि बहुवचनाच्या रूपाने श्रेष्ठ शासनात असलेल्या पदांची सिद्धी प्रथमा एकवचन आणि बहुवचनाच्या जागी 'ए'कार आदेशाच्या योगानेच होते, हे अवश्य स्वीकारले पाहिजे. अशा प्रकारे 'वनप्पगुम्बे, बाले, पंडिते' इत्यादींची शुद्ध प्रथमा विभक्ती असणे अत्यंत सूक्ष्म आणि समजण्यास कठीण आहे, जे श्रद्धाळू कुलपुत्राने आचार्यांची सेवा करून, त्यांचा उपदेश आदरपूर्वक ग्रहण करून जाणून घेतले पाहिजे. कारण बुद्धवचनामध्ये शब्दाच्या दृष्टीने, अर्थाच्या दृष्टीने आणि अभिप्रायाच्या दृष्टीने व्याकरणकारांच्या ज्ञानचक्षूंना संभ्रमित करणारी विविध पाळि पद्धती दिसून येते. တတ္ထ သဒ္ဒတော တာဝ ဣဒံ သမ္မုယှနဋ္ဌာနံ – ‘‘ဝိရတ္တာ ကောသိယာယနီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဝိရတ္တေ ကောသိယာယနေ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂပစ္စတ္တဝစနံ ဒိဿတိ, ‘‘ကော ပုရိသော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ကေ ပုရိသေ’’တိ သဗ္ဗနာမိကပစ္စတ္တဝစနံ ဒိဿတိ, ‘‘ကိန္နာမော တေ ဥပဇ္ဈာယော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ကောနာမော တေ ဥပဇ္ဈာယော’’တိ သမာသပဒံ ပုလ္လိင်္ဂဝိသယံ ဒိဿတိ. ကိံ နာမံ ဧတဿာတိ [Pg.170] ကောနာမောတိ ဟိ သမာသော. တေန ‘‘ကောနာမာ ဣတ္ထီ, ကောနာမံ ကုလ’’န္တိ အယမ္ပိ နယော ဂဟေတဗ္ဗော. ‘‘ကွ တေ ဗလံ မဟာရာဇာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ကော တေ ဗလံ မဟာရာဇာ’’တိ ဧတ္ထ ကွသဒ္ဒေန ဤသကံ သမာနသုတိကော သတ္တမိယန္တော ကောသဒ္ဒေါ ဒိဿတိ, ကွ ကောသဒ္ဒါ ဟိ အညမညမီသကသမာနသုတိကာ. တထာ ‘‘ဣဓ ဟေမန္တဂိမှေသု, ဣဓ ဟေမန္တဂိမှိသု, န တေနတ္ထံ အဗန္ဓိ သော, န တေနတ္ထံ အဗန္ဓိသူ’’တိ အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. तेथे शब्दाच्या दृष्टीने प्रथम हे संभ्रमाचे स्थान आहे – 'विरत्ता कोसियायनी' असे म्हणायचे असताना 'विरत्ते कोसियायने' असे स्त्रीलिंगी प्रथमा विभक्तीचे वचन दिसते; 'को पुरिसो' असे म्हणायचे असताना 'के पुरिसे' असे सर्वनामिक प्रथमा विभक्तीचे वचन दिसते; 'किन्नामो ते उपज्झायो' असे म्हणायचे असताना 'कोनामो ते उपज्झायो' असे पुल्लिंगी विषयातील सामासिक पद दिसते. 'याचे नाव काय?' या अर्थाने 'कोनामो' असा समास होतो. त्यामुळे 'कोनामा इत्थी, कोनामं कुलं' हा देखील नियम ग्रहण करावा. 'क्व ते बलं महाराजा' असे म्हणायचे असताना 'को ते बलं महाराजा' येथे 'क्व' शब्दाशी किंचित समान उच्चार असलेला सप्तमी विभक्तीचा 'को' शब्द दिसतो, कारण 'क्व' आणि 'को' हे शब्द परस्परांशी किंचित समान उच्चार असणारे आहेत. तसेच 'इध हेमन्तगिम्हेसु, इध हेमन्तगिम्हिसु, न तेनत्थं अबन्धि सो, न तेनत्थं अबन्धिस्' इत्यादी इतर उदाहरणेही योजावीत. အတ္ထတော ပန ဣဒံ သမ္မုယှနဋ္ဌာနံ – ‘‘ယံ န ကဉ္စနဒွေပိဉ္ဆ, အန္ဓေန တမသာ ဂတ’’န္တိ ဧတ္ထ နကာရော ‘‘ကတ’’န္တိ ဣမိနာ သမ္ဗန္ဓိတဗ္ဗော. န ကတန္တိ ကတံ ဝိယာတိ အတ္ထော. ဧတ္ထ ဟိ နကာရော ဥပမာနေ ဝတ္တတိ, န ပဋိသေဓေ. अर्थाच्या दृष्टीने मात्र हे संभ्रमाचे स्थान आहे – 'यं न कञ्चनद्वेपिञ्छ, अन्धेन तमसा गतं' येथे 'न' हा कार (नकार) 'कतं' याच्याशी संबंधित केला पाहिजे. 'न कतं' म्हणजे 'केल्यासारखे' असा अर्थ आहे. कारण येथे 'न' कार उपमा देण्यासाठी वापरला आहे, निषेध करण्यासाठी नाही. ‘‘အဿဒ္ဓေါ အကတညူ စ,သန္ဓိစ္ဆေဒေါ စ ယော နရော; ဟတာဝကာသော ဝန္တာသော,သ ဝေ ဥတ္တမပေါရိသော’’တိ 'जो मनुष्य अश्रद्ध (अंधश्रद्धा नसलेला), अकृतज्ञ (कृतघ्न नव्हे, तर निर्वाण जाणणारा), संधीचा छेद करणारा (संसार-बंध तोडणारा), ज्याने संधी नष्ट केली आहे आणि ज्याने तृष्णा ओकून टाकली आहे, तोच खरोखर उत्तम पुरुष होय.' ဧဝမာဒီနိပိ အညာနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. याचप्रमाणे इतर उदाहरणेही योजावीत. အဓိပ္ပာယတော ဣဒံ သမ္မုယှနဋ္ဌာနံ – ‘‘တဏှံ အသ္မိမာနံ သဿတုစ္ဆေဒဒိဋ္ဌိယော ဒွါဒသာယတနနိဿိတံ နန္ဒိရာဂဉ္စ ဟန္တွာ ဗြာဟ္မဏော အနီဃော ယာတီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေပိ တထာ အဝတွာ တမေဝတ္ထံ ဂဟေတွာ အညေန ပရိယာယေန अभिप्राय (तात्पर्य) च्या दृष्टीने हे संभ्रमाचे स्थान आहे – 'तृष्णा, अस्मिमान, शाश्वत व उच्छेद दृष्टी आणि बारा आयतनांवर आश्रित असलेला नंदीराग नष्ट करून ब्राह्मण दुःखमुक्त होऊन चालतो' असे म्हणायचे असताना, तसे न म्हणता तोच अर्थ घेऊन दुसऱ्या पर्यायाने - ‘‘မာတရံ ပိတရံ ဟန္တွာ, ရာဇာနော ဒွေ စ ခတ္တိယေ; ရဋ္ဌံ သာနုစရံ ဟန္တွာ, အနီဃော ယာတိ ဗြာဟ္မဏော’’တိ 'माता आणि पित्याचा वध करून, तसेच दोन क्षत्रिय राजांचा वध करून, आणि अनुचरांसह राष्ट्राचा नाश करून ब्राह्मण दुःखमुक्त होऊन चालतो' असे - ဝုတ္တံ. म्हणले आहे. ‘‘ဝနံ [Pg.171] ဆိန္ဒထ မာ ရုက္ခံ, ဝနတော ဇာယတေ ဘယံ; ဆေတွာ ဝနဉ္စ ဝနထံ, နိဗ္ဗနာ ဟောထ ဘိက္ခဝေါ’’တိ 'हे भिक्खूंनो! जंगलाचा छेद करा, केवळ वृक्षाचा नाही; कारण जंगलातून भय निर्माण होते. जंगल आणि जंगलातील झुडूप या दोन्हीचा छेद करून तुम्ही तृष्णारहित व्हा.' ဧဝမာဒီနိပိ အညာနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဧဝံ ဗုဒ္ဓဝစနေ သဒ္ဒတော စ အတ္ထတော စ အဓိပ္ပာယတော စ အက္ခရစိန္တကာနံ ဉာဏစက္ခုသမ္မုယှနဋ္ဌာနဘူတာ ပါဠိနယာ ဝိဝိဓာ ဒိဿန္တိ. ယထာဟ – याचप्रमाणे इतर उदाहरणेही योजावीत. अशा प्रकारे बुद्धवचनात शब्दाच्या दृष्टीने, अर्थाच्या दृष्टीने आणि अभिप्रायाच्या दृष्टीने व्याकरणकारांच्या ज्ञानचक्षूंना संभ्रमात टाकणारे विविध पाळी नियम दिसतात. जसे म्हटले आहे – ‘‘ဇာနန္တာ အပိ သဒ္ဒသတ္ထမခိလံ မုယှန္တိ ပါဌက္ကမေ,ယေဘုယျေန ဟိ လောကနီတိဝိဓုရာ ပါဌေ နယာ ဝိဇ္ဇရေ; ပဏ္ဍိစ္စမ္ပိ ပဟာယ ဗာဟိရဂတံ ဧတ္ထေဝ တသ္မာ ဗုဓော,သိက္ခေယျာမလဓမ္မသာဂရတရေ နိဗ္ဗာနတိတ္ထူပဂေ’’တိ. 'संपूर्ण शब्दशास्त्र जाणणारे देखील पाठाच्या क्रमामध्ये संभ्रमात पडतात, कारण बहुतांश पाठांमधील नियम हे लौकिक नीतीपेक्षा वेगळे असतात. म्हणूनच, विद्वानाने बाह्य पांडित्याचा त्याग करून, निर्वाणरूपी घाटाकडे नेणाऱ्या या निर्मळ धम्मसागराला पार करण्यासाठी येथेच शिकले पाहिजे.' ဧဝံ ပါဠိနယာနံ ဒုဗ္ဗိညေယျတ္တာ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ, ဗာလေ စ, ပဏ္ဍိတေ စာ’’တိအာဒီနံ သုဒ္ဓပစ္စတ္တဝစနတ္တညေဝ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗံ, န သုတိသာမညေန ဘုမ္မောပယောဂဝစနတ္တံ ဘုမ္မောပယောဂဝစနေဟိ တေသံ သမာနသုတိကတ္တေပိ ပစ္စတ္တဇောတကတ္တာ. သမာနသုတိကာပိ ဟိ သဒ္ဒါ အတ္ထပ္ပကရဏလိင်္ဂသဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓာဒိဝသေန အတ္ထဝိသေသဇောတကာ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? ‘‘သီဟော ဂါယတီ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ဧဝံနာမကော ပုရိသော’’တိ အတ္ထော ဝိညာယတိ. ‘‘သီဟော နင်္ဂုဋ္ဌံ စာလေတီ’’တိ ဝုတ္တေ ပန ‘‘မိဂရာဇာ’’တိ ဝိညာယတိ. ဧဝံ အတ္ထဝသေန သမာနသုတိကာနံ အတ္ထဝိသေသဇောတနံ ဘဝတိ. သင်္ဂါမေ ဌတွာ ‘‘သိန္ဓဝမာနေဟီ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘အဿော’’တိ ဝိညာယတိ. ရောဂိသာလာယံ ပန ‘‘သိန္ဓဝမာနေဟီ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘လဝဏ’’န္တိ ဝိညာယတိ. ဧဝံ ပကရဏဝသေန သမာနသုတိကာနံ အတ္ထဝိသေသဇောတနံ ဘဝတိ. ‘‘ဣဿာ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘ဧဝံနာမိကာ ဓမ္မဇာတီ’’တိ ဝိညာယတိ. ‘‘ဣဿော’’တိ ဝုတ္တေ ပန ‘‘အစ္ဆမိဂေါ’’တိ ဝိညာယတိ. ဧဝံ လိင်္ဂဝသေန ဧကဒေသသမာနသုတိကာနံ အတ္ထဝိသေသဇောတနံ ဘဝတိ. ဧတ္ထ ပန ကိဉ္စာပိ ‘‘ဒေဝဒတ္တံ ပက္ကောသ ဃဋဓာရကံ [Pg.172] ဒဏ္ဍဓာရက’’န္တိအာဒီသုပိ ဃဋဒဏ္ဍာဒီနိ လိင်္ဂံ, တထာပိ သမာနသုတိကာဓိကာရတ္တာ န တံ ဣဓာဓိပ္ပေတံ. अशा प्रकारे पाळी नियमांचे आकलन कठीण असल्यामुळे, 'वनप्पगुम्बे', 'बाले च', 'पण्डिते चा' इत्यादींना केवळ शुद्ध प्रथमा विभक्तीचे वचन म्हणूनच प्रामुख्याने मानले पाहिजे, केवळ समान उच्चारामुळे त्यांना सप्तमी किंवा द्वितीया विभक्तीचे वचन मानू नये; जरी सप्तमी आणि द्वितीया विभक्तीच्या वचनांशी त्यांचा उच्चार समान असला, तरी ते प्रथमा विभक्तीचेच द्योतक आहेत. कारण समान उच्चार असणारे शब्द देखील अर्थ, प्रकरण, लिंग आणि इतर शब्दांशी असलेला संबंध इत्यादींच्या आधारे विशिष्ट अर्थाचे द्योतक बनतात. ते कसे? 'सीहो गायती' असे म्हटले असता 'या नावाचा माणूस' असा अर्थ समजतो. परंतु 'सीहो नङ्गुट्ठं चालेती' असे म्हटले असता 'मृगराज' असा अर्थ समजतो. अशा प्रकारे अर्थाच्या आधारे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांच्या विशिष्ट अर्थाचे प्रकटीकरण होते. युद्धाच्या मैदानात उभे राहून 'सिन्धवमानेही' असे म्हटले असता 'घोडा' असा अर्थ समजतो. परंतु रुग्णालयात 'सिन्धवमानेही' असे म्हटले असता 'मीठ' असा अर्थ समजतो. अशा प्रकारे प्रकरणाच्या आधारे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांच्या विशिष्ट अर्थाचे प्रकटीकरण होते. 'इस्सा' असे म्हटले असता 'या नावाची मानसिक प्रवृत्ती' समजते. परंतु 'इस्सो' असे म्हटले असता 'अस्वल' समजतो. अशा प्रकारे लिंगाच्या आधारे अंशतः समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांच्या विशिष्ट अर्थाचे प्रकटीकरण होते. येथे जरी 'देवदत्तं पक्कोस घटधारकं दण्डधारकं' इत्यादींमध्ये घडा, दंड इत्यादी लिंग आहेत, तरीही समान उच्चाराच्या अधिकाराचा विषय असल्यामुळे ते येथे अभिप्रेत नाही. ‘‘ဣဿာ ဥပ္ပဇ္ဇတီ’’တိ စ ‘‘ဣဿာ ပုရိသမနုဗန္ဓိံသူ’’တိ စ ဝုတ္တေ ပန သဗ္ဗထာ သမာနသုတိကာနံ သဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓဝသေန ယထာဝုတ္တအတ္ထဝိသေသဇောတနံ ဘဝတိ. တထာ ‘‘သီဟော ဘိက္ခဝေ မိဂရာဇာ သာယနှသမယံ အာသယာ နိက္ခမတီ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘မိဂါဓိပေါ ကေသရသီဟော’’တိ ဝိညာယတိ. ‘‘သီဟော သမဏုဒ္ဒေသော, သီဟော သေနာပတီ’’တိ စ ဝုတ္တေ ပန ‘‘သီဟော နာမ သာမဏေရော, သီဟော နာမ သေနာပတီ’’တိ ဝိညာယတိ. ဧဝမ္ပိ သဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓဝသေန သမာနသုတိကာနံ အတ္ထဝိသေသဇောတနံ ဘဝတိ. ‘‘အဒ္ဒသံသု ခေါ ဆဗ္ဗဂ္ဂိယာ ဘိက္ခူ သတ္တရသဝဂ္ဂိယေ ဘိက္ခူ ဝိဟာရံ ပဋိသင်္ခရောန္တေ’’တိ ဧဝမ္ပိ သဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓဝသေန သမာနသုတိကာနံ ပစ္စတ္တောပယောဂတ္ထသင်္ခါတအတ္ထဝိသေသဇောတနံ ဘဝတိ. တထာ ‘‘သိဉ္စ ဘိက္ခု ဣမံ နာဝံ, အညတရော ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစာ’’တိ ဧဝမ္ပိ သဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓဝသေန သမာနသုတိကာနံ အာလပနတ္ထပစ္စတ္တတ္ထသင်္ခါတအတ္ထဝိသေသဇောတနံ ဘဝတိ, တသ္မာ ‘‘ဝနပ္ပဂုမ္ဗေ ယထ ဖုဿိတဂ္ဂေ’’တိအာဒီနိ ဘုမ္မောပယောဂဝစနေဟိ သဒိသတ္တေပိသဒ္ဒန္တရာဘိသမ္ဗန္ဓဝသေန သုဒ္ဓပစ္စတ္တဝစနာနီတိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ပစ္စတ္တေကဝစနဗဟုဝစနာနံ ဧဝ ဟိ ဧကာရာဒေသဝသေန ဧဝံဝိဓာနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ ဘုမ္မောပယောဂဝစနာနိ ဝိယာတိ. နနု စ ဘော ဧဝံဝိဓာနံ ရူပါနံ ပါဠိယံ ဒိဿနတော ‘ဧကာရန္တမ္ပိ ပုလ္လိင်္ဂံ အတ္ထီ’တိ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ? န ဝတ္တဗ္ဗံ, ဩကာရန္တဘာဝေါဂဓရူပဝိသေသတ္တာ တေသံ ရူပါနံ. အာဒေသဝသေန ဟိ သိဒ္ဓတ္တာ ဝိသုံ ဧကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ နာမ နတ္ထိ, တသ္မာ ပုလ္လိင်္ဂါနံ ယထာဝုတ္တသတ္တဝိဓတာယေဝ ဂဟေတဗ္ဗာတိ. 'इस्सा उप्पज्जती' आणि 'इस्सा पुरिसमनुबन्धिंसु' असे म्हटले असता, सर्व प्रकारे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांचे इतर शब्दांशी असलेल्या संबंधामुळे वर सांगितल्याप्रमाणे विशिष्ट अर्थाचे प्रकटीकरण होते. तसेच 'सीहो भिक्खवे मिगराजा सायन्हसमयं आसया निक्खमती' असे म्हटले असता 'मृगाधिपती केसरसिंह' असा अर्थ समजतो. परंतु 'सीहो समणुद्देसो, सीहो सेनापती' असे म्हटले असता 'सिंह नावाचा श्रामणेर, सिंह नावाचा सेनापती' असा अर्थ समजतो. अशा प्रकारे देखील इतर शब्दांशी असलेल्या संबंधामुळे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांच्या विशिष्ट अर्थाचे प्रकटीकरण होते. 'अद्दसंसु खो छब्बग्गिया भिक्खू सत्तरसवग्गिये भिक्खू विहारं पटिसङ्खरोन्ते' येथे देखील इतर शब्दांशी असलेल्या संबंधामुळे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांच्या प्रथमा आणि द्वितीया विभक्तीच्या अर्थाचे विशिष्ट प्रकटीकरण होते. तसेच 'सिञ्च भिक्खु इमं नावं' आणि 'अञ्ञतरो भिक्खु भगवन्तं एतदवोच' येथे देखील इतर शब्दांशी असलेल्या संबंधामुळे समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांच्या संबोधन आणि प्रथमा विभक्तीच्या अर्थाचे विशिष्ट प्रकटीकरण होते. म्हणून 'वनप्पगुम्बे यथा फुस्सितग्गे' इत्यादी शब्द सप्तमी किंवा द्वितीया विभक्तीच्या वचनांसारखे दिसत असले, तरी इतर शब्दांशी असलेल्या संबंधामुळे ते शुद्ध प्रथमा विभक्तीचेच वचन आहेत असे मानले पाहिजे. कारण प्रथमा विभक्तीच्या एकवचन आणि बहुवचनांना 'ए' कार आदेश झाल्यामुळे सप्तमी किंवा द्वितीया विभक्तीच्या वचनांसारखी अशी रूपे बनतात. पण मग, 'अशा प्रकारची रूपे पाळी भाषेमध्ये दिसत असल्यामुळे, एकांत पुल्लिंग देखील असते असे म्हणावे का?' असे म्हणू नये, कारण ती रूपे ओकारान्त भावामध्ये समाविष्ट असणारी विशिष्ट रूपे आहेत. आदेश झाल्यामुळे सिद्ध होत असल्यामुळे स्वतंत्रपणे 'ए-कारान्त पुल्लिंग' नावाचा प्रकार अस्तित्वात नाही. म्हणून पुल्लिंगांचे वर सांगितलेले सात प्रकारच ग्राह्य धरले पाहिजेत. ကေစိ [Pg.173] ပန ဝဒေယျုံ ‘‘ယာယံ ပုရိသသဒ္ဒနယံ ဂဟေတွာ ‘ဘူတော, ဘူတာ. ဘူတ’န္တိအာဒိနာ သဗ္ဗေသမောကာရန္တပဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ဝိဘတ္တာ, တတ္ထ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတာနိ ရူပါနိ ကိမတ္ထံ န ဝုတ္တာနီ’’တိ? ဝိသေသဒဿနတ္ထံ. တာဒိသာနိ ဟိ စတုတ္ထေကဝစနရူပါနိ ပါဠိနယေ ပေါရာဏဋ္ဌကထာနယေ စ ဥပပရိက္ခိယမာနေ ‘‘ဂတျတ္ထကမ္မနိ, နယနတ္ထကမ္မနိ, ဝိဘတ္တိဝိပရိဏာမေ, တဒတ္ထေ စာ’’တိ သင်္ခေပတော ဣမေသု စတူသုယေဝ ဌာနေသု, ပဘေဒတော ပန သတ္တသု ဌာနေသု ဒိဿန္တိ. ဒါနရောစနဓာရဏနမောယောဂါဒိဘေဒေ ပန ယတ္ထ ကတ္ထစိ သမ္ပဒါနဝိသယေ န ဒိဿန္တိ, ဣတိ ဣမံ ဝိသေသံ ဒဿေတုံ န ဝုတ္တာနီတိ. နနု ဒါနကြိယာယောဂေ ‘‘အဘိရူပါယ ကညာ ဒေယျာ’’တိ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတရူပဒဿနတော ဣမသ္မိမ္ပိ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ‘‘ပုရိသာယ, ဘူတာယာ’’တိအာဒီနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ, ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ ‘‘ဒါနရောစနဓာရဏနမောယောဂါဒိဘေဒေ ပန ယတ္ထ ကတ္ထစိ သမ္ပဒါနဝိသယေ န ဒိဿန္တီ’’တိ ဝုတ္တန္တိ? အပါဠိနယတ္တာ. ‘‘အဘိရူပါယ ကညာ ဒေယျာ’’တိ အယဉှိ သဒ္ဒသတ္ထတော အာဂတော နယော, န ဗုဒ္ဓဝစနတော. ဗုဒ္ဓဝစနဉှိ ပတွာ ‘‘အဘိရူပဿ ကညာ ဒေယျာ’’တိ ပဒရူပံ ဘဝိဿတီတိ. နနု စ ဘော နမောယောဂါဒီသုပိ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသော ဒိဿတီတိ. သာသနာဝစရာပိ ဟိ နိပုဏာ ပဏ္ဍိတာ ‘‘နမော ဗုဒ္ဓါယာ’’တိအာဒီနိ ဝတွာ ရတနတ္တယံ ဝန္ဒန္တိ. ကေစိ ပန – काही लोक कदाचित् असे म्हणतील की, “ज्याप्रमाणे ‘पुरिस’ शब्दाच्या नियमानुसार ‘भूतो, भूता, भूत’ इत्यादी सर्व अकारान्त शब्दांची नामरूपे (विभक्ती रूपे) विभागली गेली आहेत, तर मग तेथे चतुर्थी एकवचनाच्या ‘आय’ आदेशासह असणारी रूपे का सांगितली गेली नाहीत?” विशेष (वैशिष्ट्य) दर्शवण्यासाठी. कारण, पाळि नियमात आणि प्राचीन अट्ठकथांच्या पद्धतीत तपासणी केली असता, चतुर्थी एकवचनाची अशी रूपे संक्षेपाने ‘गत्यर्थक कर्मात, नयनार्थक कर्मात, विभक्ती परिवर्तनात आणि तदर्थात (त्याच्यासाठी या अर्थात)’ या चारच ठिकाणी, आणि विस्ताराने (प्रभेदाने) सात ठिकाणी दिसून येतात. परंतु दान देणे, आवडणे, धारण करणे, ‘नमो’ चा योग इत्यादी भेदांमध्ये कोणत्याही संप्रदान विषयात ती (रूपे) दिसून येत नाहीत; म्हणून हा विशेष दर्शवण्यासाठी ती सांगितली गेली नाहीत. पण दानक्रियेच्या योगात “अभिरूपाय कञ्ञा देय्या” (सुंदर कन्येला दान द्यावे) असे चतुर्थी एकवचनाच्या ‘आय’ आदेशासह रूप दिसत असल्यामुळे, या सद्दनीति प्रकरणातही “पुरिसाय, भूताय” इत्यादी रूपे सांगायला हवीत. असे असताना “दान, रोचन (आवडणे), धारण, नमो-योग इत्यादी भेदांमध्ये कोणत्याही संप्रदान विषयात ती दिसत नाहीत” असे का म्हटले आहे? कारण ती पाळि पद्धती नाही. “अभिरूपाय कञ्ञा देय्या” हा नियम व्याकरणशास्त्रातून आलेला आहे, बुद्धवचनातून नाही. कारण बुद्धवचनाचा विचार करता “अभिरूपस्स कञ्ञा देय्या” असे पदरूप होईल. पण हे महाशय, ‘नमो’ च्या योगात इत्यादी ठिकाणीही चतुर्थी एकवचनाचा ‘आय’ आदेश दिसून येतोच की. कारण बुद्ध शासनात वावरणारे निपुण पंडित देखील “नमो बुद्धाय” इत्यादी म्हणून त्रिरत्नाचे वंदन करतात. आणि काही लोक तर — ‘‘နမော ဗုဒ္ဓါယ ဗုဒ္ဓဿ,နမော ဓမ္မာယ ဓမ္မိနော; နမော သံဃာယ သံဃဿ,နမောကာရေန သောတ္ထိ မေ’’တိ စ, “बुद्धाला आणि बुद्धाचे वंदन असो, धम्माला आणि धम्मवानाचे वंदन असो; संघाला आणि संघाचे वंदन असो, या नमोकारामुळे माझे कल्याण होवो.” ‘‘မုခေ [Pg.174] သရသိ သမ္ဖုလ္လေ, နယနုပ္ပလပင်္ကဇေ; ပါဒပင်္ကဇပူဇာယ, ဗုဒ္ဓါယ သတတံ ဒဒေ’’တိ စ, “विकसित सरोवरासारख्या मुखावर, नीलकमलासारख्या नेत्रांवर आणि पादकमलांच्या पूजेसाठी मी बुद्धाला सतत (दान) अर्पण करतो.” ‘‘နရော နရံ ယာစတိ ကိဉ္စိ ဝတ္ထုံ, နရေန ဒူတော ပဟိတော နရာယာ’’တိ စ ဂါထာရစနမ္ပိ ကုဗ္ဗန္တီတိ? သစ္စံ, သာသနာဝစရာပိ နိပုဏာ ပဏ္ဍိတာ ‘‘နမော ဗုဒ္ဓါယာ’’တိအာဒီနိဝတွာ ရတနတ္တယံ ဝန္ဒန္တိ, ဂါထာရစနမ္ပိ ကုဗ္ဗန္တိ, ဧဝံ သန္တေပိ တေ သဒ္ဒသတ္ထေ ကတပရိစယဝသေန သဒ္ဒသတ္ထတော နယံ ဂဟေတွာ တထာရူပါ ဂါထာပိ စုဏ္ဏိယပဒါနိပိ အဘိသင်္ခရောန္တိ, ‘‘နမော ဗုဒ္ဓါယာ’’တိအာဒီနိ ဝတွာ ရတနတ္တယံ ဝန္ဒန္တိ. ယေ ပန သဒ္ဒသတ္ထေ အကတပရိစယာ အန္တမသော ဗာလဒါရကာ, တေပိ အညေသံ ဝစနံ သုတွာ ကတပရိစယဝသေန ‘‘နမော ဗုဒ္ဓါယာ’’တိအာဒီနိ ဝတွာ ရတနတ္တယံ ဝန္ဒန္တိ, ‘‘နမော ဗုဒ္ဓဿာ’’တိ ဝဒန္တာ ပန အပ္ပကတရာ. ကတ္ထစိ ဟိ ပဒေသေ ကုမာရကေ အက္ခရသမယံ ဥဂ္ဂဏှာပေန္တာ ဂရူ အက္ခရာနမာဒိမှိ ‘‘နမော ဗုဒ္ဓါယာ’’တိ သိက္ခာပေန္တိ, န ပန ‘‘နမော ဗုဒ္ဓဿာ’’တိ, ဧဝံ သန္တေပိ ပါဠိနယေ ပေါရာဏဋ္ဌကထာနယေ စ ဥပပရိက္ခိယမာနေ ဌပေတွာ ဂတျတ္ထကမ္မာဒိဋ္ဌာနစတုက္ကံ, ပဘေဒတော သတ္တဋ္ဌာနံ ဝါ ဒါနရောစနဓာရဏနမောယောဂါဒိဘေဒေ ယတ္ထ ကတ္ထစိ သမ္ပဒါနဝိသယေ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတာနိ ရူပါနိ န ဒိဿန္တိ, တသ္မာ ကေဟိစိ အဘိသင်္ခတာနိ ‘‘နမော ဗုဒ္ဓါယ, ဗုဒ္ဓါယ ဒါနံ ဒေန္တီ’’တိ ပဒါနိ ပါဠိံ ပတွာ ‘‘နမော ဗုဒ္ဓဿ, ဗုဒ္ဓဿ ဒါနံ ဒေန္တီ’’တိ အညရူပါနိ ဘဝန္တီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အယံ ပန ပါဠိနယအဋ္ဌကထာနယာနုရူပေန အာယာဒေသဿ ပယောဂရစနာ – ‘‘ဗုဒ္ဓါယ သရဏံ ဂစ္ဆတိ, ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂစ္ဆတီ’’တိ ဝါ, ‘‘ဗုဒ္ဓါယ နဂရံ နေန္တိ, ဗုဒ္ဓံ နဂရံ နေန္တီ’’တိ ဝါ, ‘‘ဗုဒ္ဓါယ သက္ကတော ဓမ္မော, ဗုဒ္ဓေန သက္ကတော ဓမ္မော’’တိ ဝါ, ‘‘ဗုဒ္ဓါယ ဇီဝိတံ ပရိစ္စဇတိ, ဗုဒ္ဓဿ အတ္ထာယ ဇီဝိတံ ပရိစ္စဇတီ’’တိ ဝါ, ‘‘ဗုဒ္ဓါယ အပေန္တိ အညတိတ္ထိယာ, ဗုဒ္ဓသ္မာ အပေန္တိ အညတိတ္ထိယာ’’တိ ဝါ[Pg.175], ‘‘ဗုဒ္ဓါယ ဓမ္မတာ, ဗုဒ္ဓဿ ဓမ္မတာ’’တိ ဝါ, ‘‘ဗုဒ္ဓါယ ပသန္နော, ဗုဒ္ဓေ ပသန္နော’’တိ ဝါ ဣတိ ပဘေဒတော ဣမံ သတ္တဌာနံ ဝိဝဇ္ဇေတွာ အညတ္ထ အာယာဒေသော န ဒိဿတိ. တထာ ဟိ – “माणूस माणसाकडे काही वस्तू मागतो, माणसाने माणसासाठी दूत पाठवला आहे” अशी गाथारचना देखील ते करतात का? हे सत्य आहे, बुद्ध शासनात वावरणारे निपुण पंडित देखील “नमो बुद्धाय” इत्यादी म्हणून त्रिरत्नाचे वंदन करतात, गाथारचना देखील करतात. असे असले तरी, ते व्याकरणशास्त्राच्या अभ्यासाच्या बळावर व्याकरणशास्त्रातून नियम घेऊन तशा प्रकारच्या गाथा आणि गद्यपदे रचतात, आणि “नमो बुद्धाय” इत्यादी म्हणून त्रिरत्नाचे वंदन करतात. परंतु ज्यांचा व्याकरणशास्त्राचा अभ्यास नाही, अगदी लहान मुले देखील, इतरांचे बोलणे ऐकून आणि सवयीने “नमो बुद्धाय” इत्यादी म्हणून त्रिरत्नाचे वंदन करतात; “नमो बुद्धस्स” असे म्हणणारे मात्र फार कमी आहेत. कारण काही प्रदेशांत मुलांना अक्षरे शिकवताना शिक्षक अक्षरांच्या सुरुवातीला “नमो बुद्धाय” असे शिकवतात, “नमो बुद्धस्स” असे नाही. असे असले तरी, पाळि पद्धतीत आणि प्राचीन अट्ठकथांच्या पद्धतीत तपासणी केली असता, गत्यर्थक कर्मादी चार स्थाने किंवा विस्ताराने सात स्थाने वगळता, दान, रोचन, धारण, नमो-योग इत्यादी भेदांमध्ये कोणत्याही संप्रदान विषयात चतुर्थी एकवचनाच्या ‘आय’ आदेशासह असणारी रूपे दिसून येत नाहीत. म्हणून काहींनी रचलेली “नमो बुद्धाय, बुद्धाय दानं देन्ति” ही पदे पाळि भाषेचा विचार करता “नमो बुद्धस्स, बुद्धस्स दानं देन्ति” अशी अन्य रूपांत बदलतात, असे समजले पाहिजे. पाळि पद्धती आणि अट्ठकथा पद्धतीनुसार ‘आय’ आदेशाची प्रयोगरचना खालीलप्रमाणे आहे — “बुद्धाय सरणं गच्छति” (बुद्धाला शरण जातो) किंवा “बुद्धं सरणं गच्छति” असे; “बुद्धाय नगरं नेन्ति” (बुद्धाला नगरात नेतात) किंवा “बुद्धं नगरं नेन्ति” असे; “बुद्धाय सक्कतो धम्मो” (बुद्धाने धम्माचा सत्कार केला) किंवा “बुद्धेन सक्कतो धम्मो” असे; “बुद्धाय जीवितं परिच्चजति” (बुद्धासाठी जीवन त्याग करतो) किंवा “बुद्धस्स अत्थाय जीवितं परिच्चजति” असे; “बुद्धाय अपेन्ति अञ्ञतित्थिया” (बुद्धापासून अन्यतीर्थीय दूर जातात) किंवा “बुद्धस्मा अपेन्ति अञ्ञतित्थिया” असे; “बुद्धाय धम्मता” (बुद्धाचा स्वभाव) किंवा “बुद्धस्स धम्मता” असे; “बुद्धाय पसन्नो” (बुद्धावर प्रसन्न) किंवा “बुद्धे पसन्नो” असे. याप्रमाणे विस्ताराने ही सात स्थाने वगळता इतरत्र ‘आय’ आदेश दिसून येत नाही. कारण की — ပါဌေ မဟာနမက္ကာရ-သင်္ခါတေ သာဓုနန္ဒနေ; သမ္ပဒါနေ နမောယောဂေ, အာယာဒေသော န ဒိဿတိ. महा-नमक्कार (महान नमस्कार) म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या आणि सज्जनांना आनंद देणाऱ्या पाठात, संप्रदानात आणि नमो-योगात ‘आय’ आदेश दिसून येत नाही. ဧတ္ထ မဟာနမက္ကာရပါဌော နာမ ‘‘နမော တဿ ဘဂဝတော အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿာ’’တိ ပါဌော. အတြာပိ အာယာဒေသော န ဒိဿတိ. ဝမ္မိကသုတ္တေပိ ‘‘နမော ကရောဟိ နာဂဿာ’’တိ ဧဝံ အာယာဒေသော န ဒိဿတိ. အမ္ဗဋ္ဌသုတ္တေပိ ‘‘သောတ္ထိ ဘဒန္တေ ဟောတု ရညော, သောတ္ထိ ဇနပဒဿ’’. ဧဝံ အာယာဒေသော န ဒိဿတိ. येथे ‘महा-नमक्कार पाठ’ म्हणजे “नमो तस्स भगवतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स” हा पाठ होय. येथेही ‘आय’ आदेश दिसून येत नाही. वम्मिक सुत्तातही “नमो करोहि नागस्स” (नागाला नमस्कार कर) असे असून ‘आय’ आदेश दिसून येत नाही. अम्बट्ठ सुत्तातही “सोत्थि भदन्ते होतु रञ्ञो, सोत्थि जनपदस्स” (भदन्त! राजाचे कल्याण होवो, जनपदाचे कल्याण होवो) असे आहे. येथेही ‘आय’ आदेश दिसून येत नाही. ‘‘သုပ္ပဗုဒ္ဓ’’န္တိ ပါဌဿ, အတ္ထသံဝဏ္ဏနာယပိ; သမ္ပဒါနေ နမောယောဂေ, အာယာဒေသော န ဒိဿတိ. “सुप्पबुद्धं” या पाठाच्या अर्थ-वर्णनात (अट्ठकथेत) देखील संप्रदानात आणि नमो-योगात ‘आय’ आदेश दिसून येत नाही. တထာ ဟိ तसेच — ‘‘သုပ္ပဗုဒ္ဓံ ပဗုဇ္ဈန္တိ, သဒါ ဂေါတမသာဝကာ; ယေသံ ဒိဝါ စ ရတ္တော စ, နိစ္စံ ဗုဒ္ဓဂတာ သတီ’’တိ “गौतमाचे (बुद्धाचे) श्रावक नेहमी उत्तम प्रकारे जागे होतात, ज्यांची बुद्धगती स्मृती (बुद्धाविषयीची स्मृती) दिवस आणि रात्र नेहमी जागृत असते.” ဣမိဿာ ပါဠိယာ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘သမ္မာဒိဋ္ဌိကဿ ပုတ္တော ဂုဠံ ခိပမာနော ဗုဒ္ဓါနုဿတိံ အာဝဇ္ဇေတွာ ‘နမော ဗုဒ္ဓဿာ’တိ ဝတွာ ဂုဠံ ခိပတီ’’တိ အာယာဒေသဝဇ္ဇိတော သဒ္ဒရစနာဝိသေသော ဒိဿတိ. သဂါထာဝဂ္ဂဝဏ္ဏနာယမ္ပိ ဓနဉ္ဇာနီသုတ္တဋ္ဌကထာယံ ‘‘တွံ ဌိတာပိ နိသိန္နာပိ ခိပိတွာပိ ကာသေတွာပိ ‘နမော ဗုဒ္ဓဿာ’တိ တဿ မုဏ္ဍကဿ သမဏကဿ နမက္ကာရံ ကရောသီ’’တိ အာယာဒေသဝဇ္ဇိတော သဒ္ဒရစနာဝိသေသော ဒိဿတိ. တထာ တတ္ထ တတ္ထ ‘‘ဗုဒ္ဓပ္ပမုခဿ ဘိက္ခုသံဃဿ ဒါနံ ဒေတိ. တဿ [Pg.176] ပုရိသဿ ဘတ္တံ န ရုစ္စတိ. သမဏဿ ရောစတေ သစ္စံ, ဗုဒ္ဓဿ ဆတ္တံ ဓာရေတိ, ဗုဒ္ဓဿ သိလာဃတေ’’တိအာဒိနာ အာယာဒေသဝိဝဇ္ဇိတော သဒ္ဒရစနာဝိသေသော ဒိဿတိ. ဧဝံ ဒါနရောစနာဒီသု ဗဟူသု သမ္ပဒါနဝိသယေသု စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတံ ရူပံ န ဒိဿတိ. या पाळिच्या अट्ठकथेत “सम्यग्दृष्टीचा मुलगा गुळ फेकत असताना बुद्धानुस्मृतीचे स्मरण करून ‘नमो बुद्धस्स’ (बुद्धाला नमस्कार असो) असे म्हणून गुळ फेकतो” असा ‘आय’ आदेश नसलेला शब्दरचनेचा विशेष दिसून येतो. सगाथावग्ग-वर्णनेत देखील धनञ्जानी सुत्ताच्या अट्ठकथेत “तू उभी असताना, बसलेली असताना, शिंकताना किंवा खोकताना देखील ‘नमो बुद्धस्स’ असे म्हणून त्या मुंडक (मुंडण केलेल्या) श्रमणाला नमस्कार करतेस” असा ‘आय’ आदेश नसलेला शब्दरचनेचा विशेष दिसून येतो. तसेच ठिकठिकाणी “बुद्धप्रमुख भिक्खू संघाला दान देतो. त्या माणसाला भात आवडत नाही. श्रमणाला सत्य आवडते, बुद्धासाठी छत्र धारण करतो, बुद्धाची प्रशंसा करतो” इत्यादींमध्ये ‘आय’ आदेश नसलेला शब्दरचनेचा विशेष दिसून येतो. अशा प्रकारे दान, रोचन इत्यादी अनेक संप्रदान विषयांमध्ये चतुर्थी एकवचनाच्या ‘आय’ आदेशासह असणारे रूप दिसून येत नाही. ဂတျတ္ထကမ္မာဒီသု ပန စတူသု ဌာနေသု ဒိဿတိ. တထာ ဟိ ‘‘မူလာယ ပဋိကဿေယျ, အပ္ပော သဂ္ဂါယ ဂစ္ဆတီ’’တိ စေတ္ထ ဂတျတ္ထကမ္မနိ ဒိဿတိ. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘မူလံ ပဋိကဿေယျ, အပ္ပော သဂ္ဂံ ဂစ္ဆတီ’’တိ စ အတ္ထော. ‘‘ပဋိကဿေယျာ’’တိ စေတ္ထ ကသ ဂတိယန္တိ ဓာတုဿ ပတိဥပသဂ္ဂေန ဝိသေသိတတ္တာ ‘‘အာကဍ္ဎေယျာ’’တိ အတ္ထော ဘဝတိ. ‘‘အယံ ပုရိသော မမ အတ္ထကာမော, ယော မံ ဂဟေတွာန ဒကာယ နေတီ’’တိ ဧတ္ထ နယနတ္ထကမ္မနိ ဒိဿတိ. ဧတ္ထ ဟိ မံ ဥဒကံ နေတိ, အတ္တနော ဝသနကသောဗ္ဘံ ပါပေတီတိ အတ္ထော. ‘‘ဝိရမထာယသ္မန္တော မမ ဝစနာယာ’’တိ ဧတ္ထ ဝိဘတ္တိဝိပရိဏာမေ ဒိဿတိ. မမ ဝစနတော ဝိရမထာတိ ဟိ နိဿက္ကဝစနဝသေန အတ္ထော. ‘‘မဟာဂဏာယ ဘတ္တာ မေ’’တိ ဧတ္ထာပိ ဝိဘတ္တိဝိပရိဏာမေ ဒိဿတိ. မမ မဟတော ဟံသဂဏဿ ဘတ္တာတိ ဟိ သာမိဝစနဝသေန အတ္ထော. မမ ဟံသရာဇာတိ စေတ္ထ အဓိပ္ပာယော. ‘‘အသက္ကတာ စသ္မ ဓနဉ္စယာယာ’’တိ ဧတ္ထာပိ ဝိဘတ္တိဝိပရိဏာမေ ဒိဿတိ. မယံ ဓနဉ္စယဿ ရညော အသက္ကတာ စ ဘဝါမာတိ ဟိ ကတ္တုတ္ထေ သာမိဝစနံ. တထာ ဟိ ‘‘ဓနဉ္စယဿာ’’တိ ဝါ ‘‘ဓနဉ္စယေနာ’’တိ ဝါ ဝတ္တဗ္ဗေ ဧဝံ အဝတွာ ‘‘ဓနဉ္စယာယာ’’တိ သမ္ပဒါနဝစနံ ဒါနကြိယာဒိကဿ သမ္ပဒါနဝိသယဿ အဘာဝတော ဝိဘတ္တိဝိပရိဏာမေယေဝ ယုဇ္ဇတိ, တသ္မာ ဓနဉ္စယရာဇေန မယံ အသက္ကတာ စ ဘဝါမာတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အညမ္ပိ ဝိဘတ္တိဝိပရိဏာမဋ္ဌာနံ မဂ္ဂိတဗ္ဗံ. परंतु, गत्यर्थक कर्म इत्यादी चार स्थानांमध्ये (हा प्रत्यय) दिसून येतो. तसेच, "मूलाय पटिकस्सेय्य, अप्पो सग्गाय गच्छति" (मूळाकडे खेचावे, थोडेच स्वर्गाला जातात) यामध्ये गत्यर्थक कर्मामध्ये दिसून येतो. येथे "मूलं पटिकस्सेय्य, अप्पो सग्गं गच्छति" (मूळाला खेचावे, थोडेच स्वर्गात जातात) असा अर्थ आहे. "पटिकस्सेय्य" यामध्ये "कस गतिया" (गती अर्थातील कष् धातू) या धातूला "पति" (प्रति) उपसर्गाने विशेषित केल्यामुळे "आकड्ढेय्य" (खेचावे) असा अर्थ होतो. "अयं पुरिसो मम अत्थकामो, यो मं गहेत्वान दकाय नेति" (हा मनुष्य माझा हितचिंतक आहे, जो मला पकडून पाण्याकडे नेतो) येथे नयनार्थक (नेण्याच्या अर्थातील) कर्मामध्ये दिसून येतो. येथे "मला पाण्याकडे नेतो, स्वतःच्या राहण्याच्या खड्ड्यापर्यंत पोहोचवतो" असा अर्थ आहे. "विरमथायस्मन्तो मम वचनाय" (आयुष्यमानांनो, माझ्या वचनापासून परावृत्त व्हा) येथे विभक्ती-विपरिणामामध्ये दिसून येतो. कारण "मम वचनो विरमथ" (माझ्या वचनापासून परावृत्त व्हा) असा अपादान (निसक्क) विभक्तीच्या अर्थाने अर्थ होतो. "महागणाय भत्ता मे" (माझ्या मोठ्या समूहाचा तो पोशिंदा आहे) येथेही विभक्ती-विपरिणामामध्ये दिसून येतो. कारण "माझ्या मोठ्या हंसगणाचा तो पोशिंदा आहे" असा षष्ठी (सामी) विभक्तीच्या अर्थाने अर्थ होतो. येथे "माझा हंसराज" असा अभिप्राय आहे. "असक्कता चस्म धनञ्जयाय" (आणि आम्ही धनंजयाकडून असत्कृत झालो आहोत) येथेही विभक्ती-विपरिणामामध्ये दिसून येतो. कारण "आम्ही धनंजय राजाचे असत्कृत (अनादरित) झालो आहोत" असा कर्त्याच्या अर्थात षष्ठी विभक्तीचा प्रयोग आहे. तसेच "धनञ्जयस्स" (धनंजयाचे) किंवा "धनञ्जयेन" (धनंजयाद्वारे) असे म्हणायचे असताना, तसे न म्हणता "धनञ्जयाय" असे संप्रदान विभक्तीचे रूप वापरणे, दानक्रिया इत्यादी संप्रदानाच्या विषयाचा अभाव असल्यामुळे विभक्ती-विपरिणामच योग्य ठरतो. म्हणून, "धनंजय राजाकडून आम्ही असत्कृत झालो आहोत" असाच अर्थ घेतला पाहिजे. इतरही विभक्ती-विपरिणामाची स्थाने शोधली पाहिजेत. ‘‘ဝိရာဂါယ [Pg.177] ဥပသမာယ နိရောဓာယာ’’တိအာဒီနိ ပန အနေကသဟဿာနိ အာယာဒေသသဟိတာနိ သဒ္ဒရူပါနိ တဒတ္ထေ ပဝတ္တန္တိ. အဋ္ဌကထာစရိယာပိ ဟိ ဓမ္မဝိနယသဒ္ဒတ္ထံ ဝဏ္ဏေန္တာ ‘‘ဓမ္မာနံ ဝိနယာယ. အနဝဇ္ဇဓမ္မတ္ထဉှေသ ဝိနယော, န ဘဝဘောဂါဒိအတ္ထ’’န္တိ တဒတ္ထဝသေနေဝ အာယာဒေသသဟိတံ သဒ္ဒရူပံ ပယုဉ္ဇိံသု, ဧဝံ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတာနိ ရူပါနိ ဂတျတ္ထကမ္မနိ နယနတ္ထကမ္မနိ ဝိဘတ္တိဝိပရိဏာမေ တဒတ္ထေ စာတိ ဣမေသု စတူသုယေဝ ဌာနေသု ဒိဿန္တိ, န ပန ဒါနရောစနာဒိဘေဒေ ယတ္ထ ကတ္ထစိ သမ္ပဒါနဝိသယေ. တထာ ဟိ နိရုတ္တိပိဋကေ ‘‘အတ္ထာယာတိ သမ္ပဒါနဝစန’’န္တိ အာယာဒေသသဟိတံ သဒ္ဒရူပံ ဝုတ္တံ, ပုရိသသဒ္ဒါဒိဝသေန ပန တာဒိသာနိ ရူပါနိ န ဝုတ္တာနိ တာဒိသာနံ သဒ္ဒရူပါနံ ယတ္ထ ကတ္ထစိ အပ္ပဝတ္တနတော. ကစ္စာယနပ္ပကရဏေပိ ဟိ ‘‘အာယ စတုတ္ထေကဝစနဿ တူ’’တိ လက္ခဏဿ ဝုတ္တိယံ ‘‘အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဒေဝမနုဿာန’’န္တိ ဝုတ္တံ. ‘‘ပုရိသာယာ’’တိ ဝါ ‘‘သမဏာယာ’’တိ ဝါ ‘‘ဗြာဟ္မဏာယာ’’တိ ဝါ န ဝုတ္တန္တိ. परंतु "विरागाय उपसमाय निरोधाय" (विरागासाठी, उपशमासाठी, निरोधासाठी) इत्यादी अनेक हजार "आय" आदेशासह असलेली शब्दरूपे त्याच अर्थात (तदर्थात) प्रवृत्त होतात. अट्ठकथाचार्य देखील धम्म-विनय शब्दाच्या अर्थाचे वर्णन करताना "धम्मानं विनयाय. अनवज्जधम्मत्थञ्हेस विनयो, न भवभोगादिअत्थं" (धम्माच्या विनयासाठी. हा विनय अनवद्य धम्माच्या अर्थासाठी आहे, भवभोगादींच्या अर्थासाठी नाही) असे सांगून त्याच अर्थाच्या वशने "आय" आदेशासह असलेले शब्दरूप वापरतात. अशा प्रकारे, चतुर्थी एकवचनाची "आय" आदेशासह असलेली रूपे गत्यर्थक कर्मामध्ये, नयनार्थक कर्मामध्ये, विभक्ती-विपरिणामामध्ये आणि तदर्थामध्ये (त्याच अर्थात) याच चार स्थानांवर दिसून येतात; परंतु दान, रोचन (आवडणे) इत्यादी भेद असलेल्या इतर कोणत्याही संप्रदानाच्या विषयात दिसून येत नाहीत. तसेच निरुत्तिपिटकात "अत्थाय इति संप्रदानवचनं" (अत्थाय हे संप्रदान वचन आहे) असे "आय" आदेशासह असलेले शब्दरूप सांगितले आहे, परंतु "puris" (पुरुष) इत्यादी शब्दांच्या बाबतीत तशी रूपे सांगितलेली नाहीत, कारण तशा शब्दरूपांची इतर कुठेही प्रवृत्ती होत नाही. कच्चायन व्याकरणामध्येही "आय चतुत्थेकवचनस्स तु" या सूत्राच्या वृत्तीमध्ये "अत्थाय हिताय सुखाय देवमनुस्सानं" (देव आणि मनुष्यांच्या हितासाठी, सुखासाठी, कल्याणासाठी) असे म्हटले आहे. "पुरिसाय" किंवा "समणाय" किंवा "ब्राह्मणाय" असे म्हटलेले नाही. ဧတ္ထ သိယာ – နနု ဘော တဿေဝ ဝုတ္တိယံ ‘‘စတုတ္ထီတိ ကိမတ္ထံ ပုရိသဿ မုခံ. ဧကဝစနဿာတိ ကိမတ္ထံ ပုရိသာနံ ဒဒါတိ. ဝါတိ ကိမတ္ထံ ဒါတာ ဟောတိ သမဏဿ ဝါ ဗြာဟ္မဏဿ ဝါ’’တိ ဝုတ္တတ္တာ ‘‘ပုရိသာယ သမဏာယ ဗြာဟ္မဏာယာ’’တိအာဒီနိ ပဒရူပါနိ နယတော ဒဿိတာနိ, ကေဝလံ ပန မုခသဒ္ဒယောဂတော ဗဟုဝစနဘာဝတော ဝိကပ္ပနတော စ ‘‘ပုရိသာယာ’’တိအာဒီနိ န သိဇ္ဈန္တိ, မုခသဒ္ဒယောဂါဒိဝိရဟိတေ ပန ဌာနေ အဝဿံ သိဇ္ဈန္တီတိ? ဧတ္ထ ဝုစ္စတေ – ‘‘စတုတ္ထီတိ ကိမတ္ထံ ပုရိသဿ မုခ’’န္တိ ဝဒန္တော ‘‘သစေ အာယာဒေသော ဘဝေယျ[Pg.178], စတုတ္ထိယာ ဧဝ ဘဝတိ, န ဆဋ္ဌိယာ’’တိ ဒဿေန္တော ‘‘မုခ’’န္တိ ပဒံ ဒဿေသိ, န စ တေန ‘‘မုခသဒ္ဒဋ္ဌာနေ ဒေတီတိအာဒိကေ သမ္ပဒါနဝိသယဘူတေ ကြိယာပဒေ ဌိတေ အာယာဒေသော ဟောတီ’’တိ ဒဿေတိ. ‘‘ဧကဝစနဿာတိ ကိမတ္ထံ ပုရိသာနံ ဒဒါတီ’’တိ ဝဒန္တောပိ ‘‘ဧကဝစနဿေဝ အာယာဒေသော ဟောတိ, န ဗဟုဝစနဿာ’’တိ ဒဿေတိ. ‘‘ဒဒါတီ’’တိ ဣဒံ ပဒံ ‘‘ပုရိသာန’’န္တိ ပဒဿ သမ္ပဒါနဝစနတ္တံ ဉာပေတုံ အဝေါစ, န စ ‘‘ဒေတီတိအာဒိကေ သမ္ပဒါနဝိသယဘူတေ ကြိယာပဒေ သတိ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသော ဟောတီ’’တိ ဣမမတ္ထံ ဝိညာပေတိ. ‘‘ဝါတိ ကိမတ္ထံ ဒါတာ ဟောတိ သမဏဿ ဝါ ဗြာဟ္မဏဿ ဝါ’’တိ စ ဝဒန္တောပိ ‘‘သမ္ပဒါနေယေဝ ဝိကပ္ပေန အာယာဒေသော ဟောတီ’’တိ ဝိညာပေတိ, န ဒါနာဒိကြိယံ ပဋိစ္စ အာယာဒေသဝိဓာနံ ဉာပေတိ. येथे अशी शंका उपस्थित होऊ शकते – हे पहा, त्याच वृत्तीमध्ये "चतुर्थी कशासाठी? पुरिसस्स मुखं (पुरुषाचे मुख). एकवचनासाठी कशासाठी? पुरिसानं ददाति (पुरुषांना देतो). 'वा' (पर्याय) कशासाठी? दाता होति समणस्स वा ब्राह्मणस्स वा (श्रमणाचा किंवा ब्राह्मणाचा दाता होतो)" असे म्हटल्यामुळे "पुरिसाय, समणाय, ब्राह्मणाय" इत्यादी पदरूपे नियमाने दर्शविली आहेत. केवळ "मुख" शब्दाच्या योगामुळे, बहुवचनामुळे आणि विकल्पामुळे "पुरिसाय" इत्यादी रूपे सिद्ध होत नाहीत, परंतु "मुख" शब्दाचा योग इत्यादी नसलेल्या ठिकाणी ती नक्कीच सिद्ध होतात का? यावर उत्तर दिले जाते – "चतुर्थी कशासाठी? पुरिसस्स मुखं" असे म्हणताना, "जर आय-आदेश झाला, तर तो चतुर्थीचाच होतो, षष्ठीचा नाही" हे दर्शवण्यासाठी त्यांनी "मुखं" हे पद दाखवले आहे. त्याद्वारे ते "मुख शब्दाच्या जागी 'देतो' इत्यादी संप्रदानविषयक क्रियापद असताना आय-आदेश होतो" असे दर्शवत नाहीत. "एकवचनासाठी कशासाठी? पुरिसानं ददाति" असे म्हणतानाही ते "एकवचनाचाच आय-आदेश होतो, बहुवचनाचा नाही" हे दर्शवतात. "ददाति" (देतो) हे पद "पुरिसानं" या पदाचे संप्रदानत्व दर्शवण्यासाठी म्हटले आहे, "देतो" इत्यादी संप्रदानविषयक क्रियापद असताना चतुर्थी एकवचनाचा आय-आदेश होतो, हा अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी नाही. आणि "वा कशासाठी? दाता होति समणस्स वा ब्राह्मणस्स वा" असे म्हणतानाही ते "संप्रदानातच विकल्पाने आय-आदेश होतो" हे स्पष्ट करतात, दान इत्यादी क्रियेवर अवलंबून आय-आदेशाचे विधान स्पष्ट करत नाहीत. ယဒိ ပန ဒါနာဒိကြိယံ ပဋိစ္စ အာယာဒေသဝိဓာနံ သိယာ, ဝုတ္တိကာရကေန လက္ခဏဿ ဝုတ္တိယံ မူလောဒါဟရဏေယေဝ ‘‘အတ္ထာယ ဟိတာယာ’’တိ တဒတ္ထပယောဂါနိ ဝိယ ‘‘ပုရိသာယ ဒီယတေ’’တိအာဒိ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ, န စ ဝုတ္တံ. ကသ္မာတိ စေ? ဗုဒ္ဓဝစနေ ပေါရာဏဋ္ဌကထာသု စ တာဒိသဿ ပယောဂဿ အဘာဝါ. နိရုတ္တိပိဋကေ ဟိ ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေါ သော အာယသ္မာ မဟာကစ္စာနော ‘‘ပုရိသဿ ဒီယတေ’’တိ အာယာဒေသရဟိတာနိယေဝ ရူပါနိ ဒဿေတိ, ‘‘အတ္ထာယာတိ သမ္ပဒါနဝစန’’န္တိ ဘဏန္တောပိ စ ထေရော ဒါနာဒိကြိယာပေက္ခံ အကတွာ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတံ ရူပမေဝ နိဒ္ဒိသိ. တေန သော ပယောဂေါ တဒတ္ထပ္ပယောဂေါတိ ဝိညာယတိ. ဣတိ ဣမေဟိ ကာရဏေဟိ ဇာနိတဗ္ဗံ ‘‘ဒါနာဒိကြိယံ ပဋိစ္စ အာယာဒေသဝိဓာနံ န ကတ’’န္တိ. ယဇ္ဇေဝံ ‘‘အတ္ထာယ ဟိတာယာ’’တိအာဒီနိယေဝ တဒတ္ထပ္ပယောဂါနိ ‘‘အာယ စတုတ္ထေကဝစနဿ တူ’’တိ လက္ခဏဿ ဝိသယာ ဘဝေယျုံ, နာညာနီတိ? တန္န, အညာနိပိ ဝိသယာယေဝ တဿ. ကတမာနိ? ‘‘မူလာယ ပဋိကဿေယျ, အပ္ပော [Pg.179] သဂ္ဂါယ ဂစ္ဆတိ, ဒကာယ နေတိ, ဝိရမထာယသ္မန္တော မမဝစနာယ, ဂဏာယ ဘတ္တာ’’တိအာဒီနိ. ‘‘သဂ္ဂဿ ဂမနေန ဝါ’’တိအာဒီနိ ပန ဝါဓိကာရတ္တာ အဝိသယာဝါတိ. परंतु जर दान इत्यादी क्रियेवर अवलंबून आय-आदेशाचे विधान असते, तर वृत्तिकारांनी सूत्राच्या वृत्तीमध्ये मूळ उदाहरणातच "अत्थाय हिताय" या तदर्थ प्रयोगांप्रमाणे "पुरिसाय दीयते" (पुरुषाला दिले जाते) इत्यादी म्हणायला हवे होते, पण तसे म्हटलेले नाही. असे का? कारण बुद्धवचनात आणि प्राचीन अट्ठकथांमध्ये अशा प्रयोगाचा अभाव आहे. कारण निरुत्तिपिटकात प्रभिन्नपटिसंभिदा (विशेष ज्ञान प्राप्त केलेले) असलेले ते आयुष्यमान महाकच्चायन "पुरिसस्स दीयते" अशी आय-आदेशरहित रूपेच दर्शवतात, आणि "अत्थाय इति संप्रदानवचनं" असे म्हणतानाही त्या थेरांनी दान इत्यादी क्रियेची अपेक्षा न ठेवता चतुर्थी एकवचनाचे आय-आदेशासह असलेले रूपच निर्दिष्ट केले आहे. त्यावरून तो प्रयोग "तदर्थ प्रयोग" (त्याच अर्थाचा प्रयोग) आहे असे समजते. अशा प्रकारे, या कारणांवरून हे जाणले पाहिजे की "दान इत्यादी क्रियेवर अवलंबून आय-आदेशाचे विधान केलेले नाही". जर असे असेल, तर "अत्थाय हिताय" इत्यादी तदर्थ प्रयोगच "आय चतुत्थेकवचनस्स तु" या सूत्राचे विषय होतील, इतर नाहीत का? तसे नाही, इतरही त्याचे विषय आहेतच. कोणते? "मूलाय पटिकस्सेय्य, अप्पो सग्गाय गच्छति, दकाय नेति, विरमथायस्मन्तो ममवचनाय, गणाय भत्ता" इत्यादी. परंतु "सग्गस्स गमनेन वा" इत्यादी रूपे "वा" (विकल्प) अधिकाराच्या अंतर्गत असल्यामुळे विषय ठरत नाहीत. နနု စ ဘော ဧဝံ သန္တေ ဝုတ္တိကာရကေန မူလောဒါဟရဏေသု ‘‘အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဒေဝမနုဿာန’’န္တိ ဝတွာ ‘‘မူလာယ ပဋိကဿေယျာ’’တိအာဒီနိပိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ, ကိမုဒါဟရဏေ ပန ‘‘ဝါတိ ကိမတ္ထံ သဂ္ဂဿ ဂမနေန ဝါ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ? သစ္စံ, အဝစနေ ကာရဏမတ္ထိ, တံ သုဏာထ – ‘‘မူလာယ ပဋိကဿေယျ, အပ္ပော သဂ္ဂါယ ဂစ္ဆတီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ‘‘မူလာယ, သဂ္ဂါယာ’’တိ ပဒါနိ သုဒ္ဓသမ္ပဒါနဝစနာနိ န ဟောန္တိ ဂတျတ္ထကမ္မနိ ဝတ္တနတော, တသ္မာ မူလောဒါဟရဏေသု န ဝုတ္တာနိ. တထာ ‘‘ဒကာယ နေတီ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဒကာယာ’’တိ ပဒံ နယနတ္ထကမ္မနိ ဝတ္တနတော သုဒ္ဓသမ္ပဒါနဝစနံ န ဟောတီတိ န ဝုတ္တံ. ‘‘ဝိရမထာယသ္မန္တော မမ ဝစနာယာ’’တိ ဧတ္ထ ပန ‘‘ဝစနာယာ’’တိ ပဒံ နိဿက္ကဝစနတ္ထေ ဝတ္တနတော, ‘‘ဂဏာယ ဘတ္တာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဂဏာယာ’’တိ ပဒံ သာမိဝစနတ္ထေ ဝတ္တနတော, ‘‘အသက္ကတာ စသ္မ ဓနဉ္စယာယာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဓနဉ္စယာယာ’’တိ ပဒံ ကတ္တုဝသေန သာမိအတ္ထေ ဝတ္တနတော သုဒ္ဓသမ္ပဒါနဝစနံ န ဟောတီတိ န ဝုတ္တံ. ကိမုဒါဟရဏေပိ ‘‘သဂ္ဂဿာ’’တိ ပဒံ ဂမနသဒ္ဒသန္နိဓာနတော ဂတျတ္ထကမ္မနိ ဝတ္တနတော သုဒ္ဓသမ္ပဒါနဝစနံ န ဟောတီတိ ‘‘ဝါတိ ကိမတ္ထံ သဂ္ဂဿ ဂမနေန ဝါ’’တိ န ဝုတ္တံ. ဧဝဉှေတ္ထ ဝုတ္တနယေန ဗုဒ္ဓဝစနံ ပေါရာဏဋ္ဌကထာနယဉ္စ ပတွာ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတာနိ ရူပါနိ ဂတျတ္ထကမ္မာဒီသု စတူသုယေဝ ဌာနေသု ဒိဿန္တိ, န ပန ဒါနရောစနာဒိဘေဒေ ယတ္ထ ကတ္ထစိ သမ္ပဒါနဝိသယေတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. अहो, जर असे असेल तर वृत्तिकाराने मूळ उदाहरणांमध्ये 'अत्थाय हिताय सुखाय देवमनुस्सानं' (देवांच्या आणि मनुष्यांच्या हितासाठी, सुखासाठी) असे म्हणून 'मूलाय पटिकस्सेय्य' इत्यादी देखील सांगायला हवे होते, मग उदाहरणामध्ये 'वा ति किमत्थं सग्गस्स गमनेन वा' असे का सांगितले? सत्य आहे, न सांगण्याचे कारण आहे, ते ऐका - 'मूलाय पटिकस्सेय्य, अप्पो सग्गाय गच्छति' येथे 'मूलाय, सग्गाय' हे शब्द शुद्ध संप्रदान वाचक नाहीत, कारण ते गत्यर्थक कर्मामध्ये वापरले गेले आहेत, म्हणून मूळ उदाहरणांमध्ये ते सांगितले गेले नाहीत. तसेच 'दकाय नेति' येथे 'दकाय' हा शब्द नयनार्थक (नेणे या अर्थाच्या) कर्मामध्ये वापरला गेल्यामुळे शुद्ध संप्रदान वाचक होत नाही, म्हणून तो सांगितला नाही. 'विरमथायस्मन्तो मम वचनाय' येथे 'वचनाय' हा शब्द अपादान (निस्सक्क) अर्थात वापरला गेल्यामुळे, 'गणाय भत्ता' येथे 'गणाय' हा शब्द स्वामी (षष्ठी) अर्थात वापरला गेल्यामुळे, 'असक्कता चस्म धनञ्जयाय' येथे 'धनञ्जयाय' हा शब्द कर्त्याच्या स्वामी अर्थात वापरला गेल्यामुळे शुद्ध संप्रदान वाचक होत नाही, म्हणून तो सांगितला नाही. मूळ उदाहरणामध्ये देखील 'सग्गस्स' हा शब्द 'गमन' शब्दाच्या सान्निध्यामुळे गत्यर्थक कर्मामध्ये वापरला गेल्यामुळे शुद्ध संप्रदान वाचक होत नाही, म्हणून 'वा ति किमत्थं सग्गस्स गमनेन वा' असे सांगितले नाही. अशा प्रकारे, येथे सांगितलेल्या नियमानुसार बुद्धवचन आणि प्राचीन अट्ठकथांच्या पद्धतीनुसार चतुर्थी एकवचनाचे 'आय' आदेशासह रूपे गत्यर्थक कर्म इत्यादी केवळ चारच ठिकाणी दिसतात, परंतु दान, रोचन (आवडणे) इत्यादी भेद असलेल्या इतर कोणत्याही संप्रदानाच्या विषयात दिसत नाहीत, असे जाणावे। နနု စ ဘော ‘‘စန္ဒနသာရံ ဇေဋ္ဌိကာယ အဒါသိ သုဝဏ္ဏမာလံ ကနိဋ္ဌာယာ’’တိ ဒါနပ္ပယောဂေ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတရူပဒဿနတော ‘‘ရာဇကညာယ ဒီယတေ, ရာဇကညာယ [Pg.180] ရုစ္စတိ အလင်္ကာရော, ရာဇကညာယ ဆတ္တံ ဓာရေတိ, ရာဇကညာယ နမော ကရောဟိ, ရာဇကညာယ သောတ္ထိ ဘဝတု, ရာဇကညာယ သိလာဃတေ’’တိအာဒီဟိပိ ပယောဂေဟိ ဘဝိတဗ္ဗံ, အထ ကသ္မာ ‘‘ဗုဒ္ဓဝစနံ ပေါရာဏဋ္ဌကထာနယဉ္စ ပတွာ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတာနိ ရူပါနိ ဂတျတ္ထကမ္မာဒီသု စတူသုယေဝ ဌာနေသု ဒိဿန္တိ, န ပန ဒါနရောစနာဒိဘေဒေ ယတ္ထ ကတ္ထစိ သမ္ပဒါနဝိသယေ’’တိ ဝဒထာတိ? ဥပ္ပထမဝတိဏ္ဏော ဘဝံ, န ဟိ ဘဝံ အမှာကံ ဝစနတ္ထံ ဇာနာတိ. အယဉှေတ္ထ အမှာကံ ဝစနတ္ထော – သဗ္ဗာနိပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ ဧကဝစနဝသေန တတိယာစတုတ္ထီပဉ္စမီဆဋ္ဌီသတ္တမီဌာနေသု သမသမာနိ ဟောန္တိ, အပ္ပာနိ အသမာနိ, တသ္မာ တာနိ ဌပေတွာ ပုလ္လိင်္ဂနပုံသကလိင်္ဂေသု ပုရိသာဒိ စိတ္တာဒိသဒ္ဒါနံ အကာရန္တပကတိဘာဝေ ဌိတာနံ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသသဟိတာနိ ရူပါနိ ဗုဒ္ဓဝစနာဒီသု ဒါနရောစနာဒိဘေဒေ ယတ္ထ ကတ္ထစိ သမ္ပဒါနဝိသယေ န ဒိဿန္တိ. တေနေဝ ဟိ ‘‘မူလာယ, သဂ္ဂါယ, ဒကာယ, ဝစနာယ, ဂဏာယာ’’တိအာဒီနိ ဂတျတ္ထကမ္မာဒီသု တီသု ‘‘အဘိညာယ, သမ္ဗောဓာယ, နိဗ္ဗာနာယာ’’တိ ဧဝမာဒီနိ ပန အနေကသတာနိ တိလိင်္ဂပဒါနိ တဒတ္ထေယေဝါတိ ဣမေသု စတူသု ဌာနေသု ဒိဿန္တိ. ‘‘ဒေတိ, ရောစတိ, ဓာရေတီ’’တိအာဒီသု ပန သုဒ္ဓသမ္ပဒါနဝိသယေသု န ဒိဿန္တိ. ဘဝန္တိ စတြ – अहो, 'चन्दनसारं जेट्ठिकाय अदासि सुवण्णमालं कनििट्ठाय' (मोठ्या बहिणीला चंदनाचा अर्क दिला आणि धाकट्या बहिणीला सोन्याची माळ दिली) या दानाच्या प्रयोगात चतुर्थी एकवचनाचे 'आय' आदेशासह रूप दिसत असल्यामुळे, 'राजकञ्ञाय दीयते, राजकञ्ञाय रुच्चति अलङ्कारो, राजकञ्ञाय छत्तं धारेति, राजकञ्ञाय नमो करोहि, राजकञ्ञाय सोत्थि भवतु, राजकञ्ञाय सिलाघते' इत्यादी प्रयोग देखील असायला हवेत, मग तुम्ही असे का म्हणता की 'बुद्धवचन आणि प्राचीन अट्ठकथांच्या पद्धतीनुसार चतुर्थी एकवचनाचे 'आय' आदेशासह रूपे गत्यर्थक कर्म इत्यादी केवळ चारच ठिकाणी दिसतात, परंतु दान, रोचन इत्यादी भेद असलेल्या इतर कोणत्याही संप्रदानाच्या विषयात दिसत नाहीत'? आपण चुकीच्या मार्गावर गेला आहात, आपल्याला आमच्या बोलण्याचा अर्थ समजलेला नाही. आमच्या बोलण्याचा अर्थ असा आहे - सर्व स्त्रीलिंगी शब्द एकवचनामध्ये तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी आणि सप्तमी विभक्तीच्या ठिकाणी समान असतात, काही थोडे असमान असतात. म्हणून, ते वगळून, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगातील 'पुरिस', 'चित्त' इत्यादी अकारान्त प्रातिपदिक (प्रकृती) असलेल्या शब्दांचे चतुर्थी एकवचनाचे 'आय' आदेशासह रूपे बुद्धवचनात दान, रोचन इत्यादी संप्रदानाच्या विषयात कुठेही दिसत नाहीत. म्हणूनच 'मूलाय, सग्गाय, दकाय, वचनाय, गणाय' इत्यादी गत्यर्थक कर्म इत्यादी तीन ठिकाणी आणि 'अभिञ्ञाय, सम्बोधाय, निब्बानाय' इत्यादी शेकडो तिन्ही लिंगांतील शब्द 'तदर्थ' (त्याच अर्थासाठी) या अर्थात अशा चार ठिकाणी दिसतात. परंतु 'देति, रोचति, धारेति' इत्यादी शुद्ध संप्रदानाच्या विषयात ते दिसत नाहीत. याविषयी पुढील गाथा आहेत - စတုတ္ထေကဝစနဿ, အာယာဒေသေန သံယုတံ; ရူပံ အနိတ္ထိလိင်္ဂါနံ, ဌာနေသု စတုသုဋ္ဌိတံ. चतुर्थी एकवचनाचे 'आय' आदेशाने युक्त असलेले स्त्रीलिंगेतर (पुल्लिंग व नपुंसकलिंगी) शब्दांचे रूप चार ठिकाणीच आढळते. ဂတျတ္ထကမ္မနိ စေဝ, နယနတ္ထဿ ကမ္မနိ; ဝိဘတ္တိယာ ဝိပလ္လာသေ, တဒတ္ထေ စာတိ နိဒ္ဒိသေ. गत्यर्थक कर्मामध्ये, नयनार्थक (नेणे या अर्थाच्या) कर्मामध्ये, विभक्तीच्या विपर्यासात (व्यत्ययात) आणि तदर्थ (त्याच अर्थासाठी) या ठिकाणी ते निर्दिष्ट करावे. ‘‘မူလာယ ပဋိကဿေယျ, အပ္ပော သဂ္ဂါယ ဂစ္ဆတိ’’; ဧဝံ ဂတျတ္ထကမ္မသ္မိံ, ဒိဋ္ဌမမှေဟိ သာသနေ. 'मूलाय पटिकस्सेय्य' आणि 'अप्पो सग्गाय गच्छति' अशा प्रकारे गत्यर्थक कर्मामध्ये आम्ही शासनात पाहिले आहे. ‘‘ဒကာယ [Pg.181] နေတိ’’ ဣစ္စေဝံ, နယနတ္ထဿ ကမ္မနိ; ‘‘ဝစနာယာ’’တိ နိဿက္ကေ, ဝိရမဏပ္ပယောဂတော. 'दकाय नेति' अशा प्रकारे नयनार्थक कर्मामध्ये, आणि 'वचनाय' हे अपादान (निस्सक्क) अर्थात विरतीच्या प्रयोगामुळे आहे. ‘‘ဂဏာယ’’ဣတိ သာမိသ္မိံ, ‘‘ဘတ္တာ’’တိ သဒ္ဒယောဂတော; ‘‘ဓနဉ္စယာယာ’’တိ ပဒံ, ကတ္တုတ္ထေ သာမိသူစကံ. 'भत्ता' या शब्दाच्या योगामुळे 'गणाय' हे षष्ठी (स्वामी) अर्थात आहे, आणि 'धनञ्जयाय' हा शब्द कर्त्याच्या अर्थात स्वामीत्व दर्शवणारा आहे. ‘‘အသက္ကတာ’’တိ သဒ္ဒဿ, ယောဂတောတိ ဝိနိဒ္ဒိသေ; အညော စာပိ ဝိပလ္လာသော, မဂ္ဂိတဗ္ဗော ဝိဘာဝိနာ. 'असक्कता' या शब्दाच्या योगामुळे (ते रूप झाले आहे) असे निर्दिष्ट करावे; आणि विद्वानांनी इतरही विभक्ती विपर्यास शोधावेत. ‘‘အဘိညာယ သမ္ဗောဓာယ, နိဗ္ဗာနာယာ’’တိမာနိ တု; လိင်္ဂတ္တယဝသေနေဝ, တဒတ္ထသ္မိံ ဝိနိဒ္ဒိသေ. परंतु 'अभिञ्ञाय, सम्बोधाय, niब्बानाय' हे शब्द तिन्ही लिंगांच्या नियमांनुसार 'तदर्थ' (त्याच अर्थासाठी) या अर्थात निर्दिष्ट करावेत. ဧဝံ ပါဌာနုလောမေန, ကထိတော အာယသမ္ဘဝေါ; ဣဒန္တု သုခုမံ ဌာနံ, စိန္တေတဗ္ဗံ ပုနပ္ပုနံ. अशा प्रकारे पाठाच्या अनुषंगाने 'आय' आदेशाची उत्पत्ती सांगितली आहे; परंतु हा अत्यंत सूक्ष्म विषय असून यावर वारंवार विचार केला पाहिजे. ဩကာရန္တဝသေနေဝ, နာနာနယသုမဏ္ဍိတာ; ပဒမာလာ မဟေသိဿ, သာသနတ္ထံ ပကာသိတာ. ओकारान्त शब्दांच्या आधारेच, विविध नियमांनी सुशोभित अशी ही पदमाला महर्षींच्या शासनाचा अर्थ प्रकाशित करण्यासाठी प्रकट केली आहे. ဣမမတိမဓုရဉ္စေ စိတ္တိကတွာ သုဏေယျုံ,ဝိဝိဓနယဝိစိတ္တံ သာဓဝေါ သဒ္ဒနီတိံ; ဇိနဝရဝစနေတေ သဒ္ဒတော ဇာတကင်္ခံ,ကုမုဒမိဝ’သိနာ ဝေ သုဋ္ဌု ဆိန္ဒေယျုမေတ္ထ. जर सज्जन लोक विविध नियमांनी युक्त असलेल्या या अत्यंत मधुर 'सद्दनीति' ग्रंथाचा आदरपूर्वक अभ्यास करतील, तर ते श्रेष्ठ जिनांच्या वचनांविषयी शब्दांच्या बाबतीत निर्माण झालेल्या शंकांचे, तलवारीने कमळ कापून टाकावे त्याप्रमाणे, नक्कीच पूर्णपणे निरसन करतील. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त असलेल्या त्रिपिटकाच्या वचनपद्धतींमध्ये विद्वानांच्या ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ कौशल्यासाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' प्रकरणामध्ये သဝိနိစ္ဆယော ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ ओकारान्त पुल्लिंगी शब्दांच्या प्रातिपदिक रूपाचा निर्णय असलेला နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ နာမ ‘नामिक पदमाला विभाग’ नावाचा ပဉ္စမော ပရိစ္ဆေဒေါ. पाचवा परिच्छेद समाप्त. အကာရန္တောကာရန္တတာပကတိကဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. अकारान्त आणि ओकारान्त प्रकृती असलेले ओकारान्त पुल्लिंगी रूप समाप्त झाले. ၆. အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂနာမိကပဒမာလာ ६. आकारान्त पुल्लिंगी नामिक पदमाला. အထ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပေသု အဘိဘဝိတု ဣစ္စေတဿ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလံ [Pg.182] ဝက္ခာမ – သတ္ထာ, သတ္ထာ, သတ္ထာရော. သတ္ထာရံ, သတ္ထာရော. သတ္ထာရာ, သတ္ထာရေဟိ, သတ္ထာရေဘိ. သတ္ထု, သတ္ထုဿ, သတ္ထုနော, သတ္ထာနံ, သတ္ထာရာနံ. သတ္ထာရာ, သတ္ထာရေဟိ, သတ္ထာရေဘိ. သတ္ထု, သတ္ထုဿ, သတ္ထုနော, သတ္ထာနံ, သတ္ထာရာနံ. သတ္ထရိ, သတ္ထာရေသု. ဘော သတ္ထ, ဘော သတ္ထာ, ဘဝန္တော သတ္ထာရော. आता पूर्व आचार्यांचे मत अग्रभागी ठेवून, आकारान्त पुल्लिंगी शब्दांच्या प्रातिपदिक रूपांमध्ये 'अभिभवितुं इच्छणाऱ्या' या प्रातिपदिक रूपाची नामिक पदमाला सांगतो - सत्था, सत्था, सत्थारो (प्रथमा). सत्थारं, सत्थारो (द्वितीया). सत्थारा, सत्थारेहि, सत्थारेभि (तृतीया). सत्थु, सत्थुस्स, सत्थुनो, सत्थानं, सत्थारानं (चतुर्थी). सत्थारा, सत्थारेहि, सत्थारेभि (पंचमी). सत्थु, सत्थुस्स, सत्थुनो, सत्थानं, सत्थारानं (षष्ठी). सत्थरि, सत्थारेसु (सप्तमी). भो सत्थ, भो सत्था, भवन्तो सत्थारो (संबोधन). အယံ ယမကမဟာထေရေန ကတာယ စူဠနိရုတ္တိယာ အာဂတော နယော. ဧတ္ထ စ နိရုတ္တိပိဋကေ စ ကစ္စာယနေ စ ‘‘သတ္ထုနာ’’တိ ပဒံ အနာဂတမ္ပိ ဂဟေတဗ္ဗမေဝ ‘‘ဓမ္မရာဇေန သတ္ထုနာ’’တိ ဒဿနတော. ‘‘သတ္ထာရာ, သတ္ထုနာ, သတ္ထာရေဟိ, သတ္ထာရေဘီ’’တိ ကမော စ ဝေဒိတဗ္ဗော. ဧတ္ထ စ အသတိပိ အတ္ထဝိသေသေ ဗျဉ္ဇနဝိသေသဝသေန, ဗျဉ္ဇနဝိသေသာဘာဝေပိ အတ္ထနာနတ္ထတာဝသေန သဒ္ဒန္တရသန္ဒဿနံ နိရုတ္တိက္ကမောတိ ‘‘သတ္ထာ’’တိ ပဒံ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဒွိက္ခတ္တုံ ဝုတ္တန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. နိရုတ္တိပိဋကာဒီသု ပန ‘‘သတ္ထာ’’တိ ပဌမာဗဟုဝစနံ န အာဂတံ. ကိဉ္စာပိ န အာဂတံ, တထာပိ ‘‘အဝိတက္ကိတာ မစ္စုမုပဗ္ဗဇန္တီ’’တိ ပါဠိယံ ‘‘အဝိတက္ကိတာ’’တိ ပဌမာဗဟုဝစနဿ ဒဿနတော ‘‘သတ္ထာ’’တိ ပဒဿ ပဌမာဗဟုဝစနတ္တံ အဝဿမိစ္ဆိတဗ္ဗံ. တထာ ဝတ္တာ, ဓာတာ, ဂန္တာဒီနမ္ပိ တဂ္ဂတိကတ္တာ. တထာ နိရုတ္တိပိဋကေ ‘‘သတ္ထာရေ’’တိ ဒုတိယာဗဟုဝစနဉ္စ ‘‘သတ္ထုဿ, သတ္ထာန’’န္တိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌေကဝစနဗဟုဝစနာနိ စ အာဂတာနိ, စူဠနိရုတ္တိယံ ပန န အာဂတာနိ. တတ္ထ ‘‘မာတာပိတရော ပေါသေတိ. ဘာတရော အတိက္ကမတီ’’တိ ဒဿနတော ‘‘သတ္ထာရေ’’တိ ဒုတိယာဗဟုဝစနရူပံ အယုတ္တံ ဝိယ ဒိဿတိ. ကစ္စာယနာဒီသု ‘‘ဘော သတ္ထ, ဘော သတ္ထာ’’ ဣတိ ရဿဒီဃဝသေန အာလပနေကဝစနဒွယံ ဝုတ္တံ. နိရုတ္တိပိဋကေ ‘‘ဘော သတ္ထ’’ ဣတိရဿဝသေန အာလပနေကဝစနံ ဝတွာ ‘‘ဘဝန္တော သတ္ထာရော’’တိ အာရာဒေသဝသေန အာလပနဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ. စူဠနိရုတ္တိယံ [Pg.183] ‘‘ဘော သတ္ထ’’ ဣတိ ရဿဝသေန အာလပနေကဝစနံ ဝတွာ ‘‘ဘော သတ္ထာ’’ ဣတိ ဒီဃဝသေန အာလပနဗဟုဝစနံ လပိတံ. သဗ္ဗမေတံ အာဂမေ ဥပပရိက္ခိတွာ ယထာ န ဝိရုဇ္ဈတိ, တထာ ဂဟေတဗ္ဗံ. हा यमक महास्थविरांनी रचलेल्या 'चूळनिरुत्ती' मधील आलेला नियम आहे. आणि येथे, निरुत्तिपिटकात आणि कच्चायनात 'सत्थुना' (satthunā) हा शब्द आलेला नसला तरी 'धम्मराजेन सत्थुना' (धम्मराज शास्त्याद्वारे) अशा प्रयोगावरून तो स्वीकारलाच पाहिजे. 'सत्थारा, सत्थुना, सत्थारेहि, सत्थारेभि' हा क्रम समजून घ्यावा. आणि येथे अर्थाचा विशेष भेद नसतानाही व्यंजनाच्या विशेषत्वामुळे, आणि व्यंजनाचा विशेष भेद नसतानाही अर्थाच्या विविधतेमुळे दुसऱ्या शब्दाचे दर्शन घडवणे हा निरुत्तीचा (व्याकरणाचा) मार्ग आहे, म्हणून 'सत्था' हा शब्द एकवचन आणि बहुवचनाच्या रूपाने दोनदा सांगितले आहे असे समजावे. परंतु निरुत्तिपिटक इत्यादींमध्ये 'सत्था' हे प्रथमा बहुवचनाचे रूप आलेले नाही. जरी ते आलेले नसले, तरी 'अवितक्किता मच्चुमुपब्बजन्ति' या पाळीतील 'अवितक्किता' या प्रथमा बहुवचनाच्या प्रयोगावरून 'सत्था' या शब्दाचे प्रथमा बहुवचन रूप अवश्य स्वीकारले पाहिजे. तसेच वत्ता (वक्ता), धाता (विधाता), गन्ता (जाणारा) इत्यादींचेही याच नियमाने रूप होते. तसेच निरुत्तिपिटकात 'सत्थारे' हे द्वितीया बहुवचनाचे रूप आणि 'सत्थुस्स, सत्थानं' हे चतुर्थी व षष्ठीचे एकवचन व बहुवचनाचे रूप आलेले आहे, परंतु चूळनिरुत्तीमध्ये ते आलेले नाही. तेथे 'मातापितरो पोसेति' (मातापित्यांचे पोषण करतो), 'भांतरो अतिक्कमति' (भावांचे उल्लंघन करतो) अशा प्रयोगांवरून 'सत्थारे' हे द्वितीया बहुवचनाचे रूप अयोग्य असल्यासारखे दिसते. कच्चायन इत्यादींमध्ये 'भो सत्थ, भो सत्था' असे र्हस्व आणि दीर्घाच्या भेदाने दोन संबोधन एकवचने सांगितली आहेत. निरुत्तिपिटकात 'भो सत्थ' असे र्हस्व रूपाने संबोधन एकवचन सांगून 'भवन्तो सत्थारो' असे आदेश रूपाने संबोधन बहुवचन सांगितले आहे. चूळनिरुत्तीमध्ये 'भो सत्थ' असे र्हस्व रूपाने संबोधन एकवचन सांगून 'भोत्था' असे दीर्घ रूपाने संबोधन बहुवचन म्हटले आहे. हे सर्व आगमात (परंपरेत) तपासून, जसे विरोधाभास होणार नाही, तसे ग्रहण केले पाहिजे. ဣဒါနိ သတ္ထုသဒ္ဒဿ ယံ ရူပန္တရံ အမှေဟိ ဒိဋ္ဌံ, တံ ဒဿေဿာမ – တထာ ဟိ ‘‘ဣမေသံ မဟာနာမ တိဏ္ဏံ သတ္ထူနံ ဧကာ နိဋ္ဌာ ဥဒါဟု ပုထု နိဋ္ဌာ’’တိ ပါဠိယံ ‘‘သတ္ထူန’’န္တိ ပဒံ ဒိဋ္ဌံ, တသ္မာ အယမ္ပိ ကမော ဝေဒိတဗ္ဗော ‘‘သတ္ထု, သတ္ထုဿ, သတ္ထုနော, သတ္ထာနံ, သတ္ထာရာနံ, သတ္ထူန’’န္တိ. အဘိဘဝိတာ, အဘိဘဝိတာ, အဘိဘဝိတာရော. အဘိဘဝိတာရံ, အဘိဘဝိတာရော. အဘိဘဝိတာရာ, အဘိဘဝိတုနာ, အဘိဘဝိတာရေဟိ, အဘိဘဝိတာရေဘိ. အဘိဘဝိတု, အဘိဘဝိတုဿ, အဘိဘဝိတုနော, အဘိဘဝိတာနံ, အဘိဘဝိတာရာနံ, အဘိဘဝိတူနံ. အဘိဘဝိတာရာ, အဘိဘဝိတာရေဟိ, အဘိဘဝိတာရေဘိ. အဘိဘဝိတု, အဘိဘဝိတုဿ, အဘိဘဝိတုနော, အဘိဘဝိတာနံ, အဘိဘဝိတာရာနံ. အဘိဘဝိတရိ, အဘိဘဝိတာရေသု. ဘော အဘိဘဝိတ, ဘော အဘိဘဝိတာ, ဘဝန္တော အဘိဘဝိတာရော. ယထာ ပနေတ္ထ အဘိဘဝိတု ဣစ္စေတဿ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ သတ္ထုနယေန ယောဇိတာ, ဧဝံ ပရိဘဝိတုအာဒီနဉ္စ အညေသဉ္စ တံသဒိသာနံ နာမိကပဒမာလာ သတ္ထုနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထညာနိ တံသဒိသာနိ နာမ ‘‘ဝတ္တာ, ဓာတာ’’ဣစ္စာဒီနံ ပဒါနံ ဝတ္တုဓာတု ဣစ္စာဒီနိ ပကတိရူပါနိ. आता 'सत्थु' (शास्ता) शब्दाचे जे दुसरे रूप आमच्या पाहण्यात आले आहे, ते आम्ही दाखवू – जसे की 'इमेसं महानाम तिण्णं सत्थूनं एका निट्ठा उदाहु पुथु निट्ठा' (हे महानाम, या तीन शास्त्यांची निष्ठा एकच आहे की वेगवेगळी?) या पाळीत 'सत्थूनं' हा शब्द आढळतो, म्हणून हा देखील क्रम समजून घ्यावा – 'सत्थु, सत्थुस्स, सत्थुनो, सत्थानं, सत्थारानं, सत्थूनं'. अभिभविता, अभिभविता, अभिभवितारो. अभिभवितारं, अभिभवितारो. अभिभवितारा, अभिभवितुना, अभिभवितारेहि, अभिभवितारेभि. अभिभवितु, अभिभवितुस्स, अभिभवितुनो, अभिभवितानं, अभिभवितारानं, अभिभवितूनं. अभिभवितारा, अभिभवितारेहि, अभिभवितारेभि. अभिभवितु, अभिभवितुस्स, अभिभवितुनो, अभिभवितानं, अभिभवितारानं. अभिभवितरि, अभिभवितारेसु. भो अभिभविता, भो अभिभविता, भवन्तो अभिभवितारो. जसे येथे 'अभिभवितु' या मूळ रूपाची (प्रातिपदिकाची) नामविभक्ती रूपमाला 'सत्थु' च्या नियमाने जोडली आहे, तसेच 'परिभवितु' इत्यादी आणि इतर तत्सम शब्दांची नामविभक्ती रूपमाला 'सत्थु' च्या नियमाने जोडली पाहिजे. येथे इतर तत्सम शब्द म्हणजे 'वत्ता, धाता' इत्यादी शब्दांची 'वत्तु, धातु' इत्यादी मूळ रूपे (प्रातिपदिके) होत. ဝတ္တာ ဓာတာ ဂန္တာ နေတာ,ဒါတာ ကတ္တာ စေတာ တာတာ; ဆေတ္တာ ဘေတ္တာ ဟန္တာ မေတာ,ဇေတာ ဗောဒ္ဓါ ဉာတာ သောတာ. वत्ता (वक्ता), धाता (विधाता), गन्ता (जाणारा), नेता (मार्गदर्शक), दाता (देणारा), कत्ता (कर्ता), चेता (चेतवणारा), ताता (रक्षक/पिता); छेत्ता (कापणारा), भेत्ता (भेदणारा), हन्ता (मारणारा), मेता (मापणारा), जेता (जिंकणारा), बोद्धा (जाणणारा), ज्ञाता (ज्ञाता), सोता (ऐकणारा). ဂဇ္ဇိတာ ဝဿိတာ ဘတ္တာ, မုစ္ဆိတာ ပဋိသေဓိတာ; ဘာသိတာ ပုစ္ဆိတာ ခန္တာ, ဥဋ္ဌာတောက္ကမိတာ တတာ. गज्जिता (गर्जना करणारा), वस्सिता (वर्षा करणारा), भत्ता (भरणपोषण करणारा/पती), मुच्छिता (मूर्च्छित होणारा), पटिसेधिता (प्रतिषेध करणारा); भासिता (बोलणारा), पुच्छिता (विचारणारा), खन्ता (क्षमा करणारा), उट्ठाता (उठणारा), ओक्कमिता (प्रवेश करणारा), तता (विस्तार करणारा). နတ္တာ [Pg.184] ပနတ္တာ အက္ခာတာ, သဟိတာ ပဋိသေဝိတာ; နေတာ ဝိနေတာ ဣစ္စာဒီ, ဝတ္တရေ သုဒ္ဓကတ္တရိ. नत्ता (नातू), पणत्ता (पणतू), अक्खाता (सांगणारा), सहिता (सहन करणारा), पटिसेविता (सेवन करणारा); नेता (मार्गदर्शक), विनेता (शिस्त लावणारा) इत्यादी शब्द याच वर्गातील (जातीचे) म्हटले जातात. ဥပ္ပာဒေတာ ဝိညာပေတာ, သန္ဒဿေတာ ပဗြူဟေတာ; ဗောဓေတာဒီ စညေ သဒ္ဒါ, ဉေယျာ ဟေတုသ္မိံ အတ္ထသ္မိံ. उप्पादेता (उत्पन्न करणारा), विञ्ञापेता (विज्ञापित करणारा), सन्दस्सेता (दर्शन घडवणारा), पब्रूहेता (प्रवृद्ध करणारा); बोधेता (बोध देणारा) इत्यादी इतर शब्द प्रयोजक (हेतु) अर्थामध्ये जाणावेत. ကတ္တာ ခတ္တာ နေတ္တာ ဘတ္တာ, ပိတာ ဘာတာတိမေ ပန; ကိဉ္စိ ဘိဇ္ဇန္တိ သုတ္တသ္မိံ, တံ ပဘေဒံ ကထေဿဟံ. परंतु कत्ता (कर्ता), खत्ता (द्वारपाल/सारथी), नेत्ता (मार्गदर्शक), भत्ता (भरणपोषण करणारा), पिता (वडील), भाता (भाऊ) हे शब्द सूत्रांमध्ये काही प्रमाणात भिन्न होतात, तो भेद मी सांगेन. သတ္ထာတိအာဒီသု ကေစိ, ဥပယောဂေန သာမိနာ; သဟေဝ နိစ္စံ ဝတ္တန္တိ, နေဝ ဝတ္တန္တိ ကေစိ တု. सत्था (शास्ता) इत्यादी शब्दांपैकी काही शब्द नेहमी द्वितीया (उपयोग) आणि षष्ठी (सामी) विभक्तीच्या संबंधातच वापरले जातात, तर काही शब्द तसे वापरले जात नाहीत. တတြ ကတ္တုသဒ္ဒါဒယော ရူပန္တရဝသေန သတ္ထုသဒ္ဒတော ကိဉ္စိ ဘိဇ္ဇန္တိ. တထာ ဟိ ‘‘ဥဋ္ဌေဟိ ကတ္တေ တရမာနော, ဂန္တွာ ဝေဿန္တရံဝဒါ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ကတ္တေ’’တိ ဣဒံ အာလပနေကဝစနရူပံ, ဧဝဉှိ ‘‘ဘော ကတ္တာ’’တိ ရူပတော ရူပန္တရံ နာမ. ‘‘တေန ဟိ ဘော ခတ္တေ ယေန စမ္ပေယျကာ ဗြာဟ္မဏဂဟပတိကာ တေနုပသင်္ကမာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ခတ္တေ’’တိ ဣဒဉ္စာလပနေကဝစနရူပံ. ဧဝမ္ပိ ‘‘ဘော ခတ္တာ’’တိ ရူပတော ရူပန္တရံ နာမ. ‘‘နေတ္တေ ဥဇုံ ဂတေ သတီ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘နေတ္တေ’’တိ ဣဒံ သတ္တမိယာ ဧကဝစနရူပံ, ဧတမ္ပိ ‘‘နေတ္တရီ’’တိ ရူပတော ရူပန္တရံ. ‘‘အာရာဓယတိ ရာဇာနံ, ပူဇံ လဘတိ ဘတ္တုသူ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဘတ္တူသူ’’တိ ဣဒံ သတ္တမိယာ ဗဟုဝစနရူပံ. ‘‘ဘတ္တာရေသူ’’တိ ရူပတော ရူပန္တရံ, အတြ ‘‘ဘတ္တူသူ’’တိ ဒဿနတော, ‘‘မာတာပိတူသု ပဏ္ဍိတာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ပိတူသူ’’တိ ဒဿနတော စ ‘‘ဝတ္တူသု ဓာတူသု ဂန္တူသု နေတူသု ဒါတူသု ကတ္တူသူ’’တိ ဧဝမာဒိနယောပိ ဂဟေတဗ္ဗော. အယံ နယော သတ္ထုသဒ္ဒေပိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗော ဝိယ အမှေ ပဋိဘာတိ. तेथे 'कत्तु' (कर्ता) इत्यादी शब्द रूपभेदाच्या दृष्टीने 'सत्थु' शब्दापेक्षा थोडे भिन्न आहेत. जसे की, 'उट्ठेहि कत्ते तरमानो, गन्त्वा वेस्सन्तरं वद' (हे कत्ते/सारथी, घाईघाईने उठ आणि वेस्संतराला जाऊन सांग) येथे 'कत्ते' हे संबोधन एकवचनाचे रूप आहे, अशा प्रकारे हे 'भो कत्ता' या रूपापेक्षा वेगळे रूप आहे. 'तेन हि भो खत्ते येन चम्पेय्यका ब्राह्मणगहपत्तिका तेनुपसङ्कम' (म्हणून हे खत्ते/सारथी, जेथे चम्पेय्यक ब्राह्मण आणि गृहपती आहेत तेथे जा) येथे 'खत्ते' हे संबोधन एकवचनाचे रूप आहे. हे देखील 'भो खत्ता' या रूपापेक्षा वेगळे रूप आहे. 'नेत्ते उजुं गते सति' (नेत्र सरळ मार्गावर गेले असता) येथे 'नेत्ते' हे सप्तमी एकवचनाचे रूप आहे, हे देखील 'नेत्तरि' या रूपापेक्षा वेगळे रूप आहे. 'आराधयति राजानं, पूजं लभति भत्तूसु' (राजाला प्रसन्न करतो, पतींमध्ये/भरणपोषण करणाऱ्यांमध्ये आदर मिळवतो) येथे 'भत्तूसु' हे सप्तमी बहुवचनाचे रूप आहे. हे 'भत्तारेसु' या रूपापेक्षा वेगळे रूप आहे, येथे 'भत्तूसु' या प्रयोगावरून आणि 'मातापितूसु पण्डिता' येथे 'पितूसु' या प्रयोगावरून 'वत्तूसु, धातूसु, गन्तूसु, नेतूसु, दातूसु, कत्तूसु' इत्यादी नियम देखील ग्रहण करावा. हा नियम 'सत्थु' शब्दाच्या बाबतीतही स्वीकारणे योग्य आहे, असे आम्हाला वाटते. ပိတာ, ပိတာ, ပိတရော. ပိတရံ, ပိတရော. ပိတရာ, ပိတုနာ, ပေတျာ, ပိတရေဟိ, ပိတရေဘိ, ပိတူဟိ, ပိတူဘိ. ပိတု, ပိတုဿ, ပိတုနော[Pg.185], ပိတာနံ, ပိတရာနံ, ပိတူနံ. ပိတရာ, ပေတျာ, ပိတရေဟိ, ပိတရေဘိ, ပိတူဟိ, ပိတူဘိ. ပိတု, ပိတုဿ, ပိတုနော, ပိတာနံ, ပိတရာနံ, ပိတူနံ. ပိတရိ, ပိတရေသု, ပိတူသု. ဘော ပိတ, ဘော ပိတာ, ဘဝန္တော ပိတရော. ဧတ္ထ ပန ‘‘ပေတျာ, ပိတူန’’န္တိ ဣမံ နယဒွယံ ဝဇ္ဇေတွာ ဘာတုသဒ္ဒဿ စ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. တတ္ထ ‘‘မတျာ စ ပေတျာ စ ကတံ သုသာဓု, အနုညာတောသိ မာတာပိတူဟိ, မာတာပိတူနံ အစ္စယေနာ’’တိ စ ဒဿနတော ပိတုသဒ္ဒဿ ‘‘ပေတျာ, ပိတူဟိ, ပိတူဘိ. ပိတူန’’န္တိ ရူပဘေဒေါ စ, ‘‘ပိတရော’’ ဣစ္စာဒီသု ရဿတ္တဉ္စ သတ္ထုသဒ္ဒတော ဝိသေသော. တတ္ထ စ ‘‘ပေတျာ’’တိ ဣဒံ ‘‘ဇန္တုယော, ဟေတုယော, ဟေတုယာ, အဓိပတိယာ’’တိ ပဒါနိ ဝိယ အစိန္တေယျံ ပုလ္လိင်္ဂရူပန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. पिता, पिता, पितरो। पितरं, पितरो। पितरा, पितुना, पेत्या, पितरेहि, पितरेभि, पितूहि, पितूभि। पितु, पितुस्स, पितुनो, पितानं, पितरानं, पितूनं। पितरा, पेत्या, पितरेहि, पितरेभि, पितूहि, पितूभि। पितु, पितुस्स, पितुनो, पितानं, पितरानं, पितूनं। पितरि, पितरेसु, पितूसु। भो पित, भो पिता, भवन्तो पितरो। येथे 'पेत्या, पितूनं' हे दोन प्रकार वगळून 'भातु' (भाऊ) शब्दाची पदमाला (विभक्ती रूपे) योजावी. त्यामध्ये "मत्या च पेत्या च कतं सुसाधु" (आई आणि वडिलांनी केलेले अत्यंत चांगले आहे), "अनुञ्ञातोसि मातापितूहि" (तुला माता-पित्यांनी अनुमती दिली आहे), "मातापितूनं अच्चयेन" (माता-पित्यांच्या निधनानंतर) इत्यादी प्रयोगांवरून 'पितु' शब्दाचे "पेत्या, पितूहि, पितूभि, पितूनं" हे रूपभेद आणि "पितरो" इत्यादींमध्ये र्हस्वत्व असणे हे 'सत्थु' (शास्ता) शब्दापेक्षा वेगळे वैशिष्ट्य आहे. आणि तेथे "पेत्या" हे रूप "जन्तुयो, हेतुयो, हेतुया, अधिपतिया" या शब्दांप्रमाणेच अचिंत्य (विशेष) पुल्लिंगी रूप समजावे. စောဒနာ သောဓနာ စာတြ ဘဝတိ – သတ္ထာ ပိတာ ဣစ္စေဝမာဒီနိ နိပ္ဖန္နတ္တမုပါဒါယ အာကာရန္တာနီတိ စ, ပဌမံ ဌပေတဗ္ဗံ ပကတိရူပမုပါဒါယ ဥကာရန္တာနီတိ စ တုမှေ ဘဏထ, ‘‘ဟေတု သတ္ထာရဒဿနံ. အမာတာပိတရသံဝဍ္ဎော. ကတ္တာရနိဒ္ဒေသော’’တိအာဒီသု ပန သတ္ထာရ ဣစ္စာဒီနိ ကထံ တုမှေ ဘဏထာတိ? ဧတာနိပိ မယံ ပကတိရူပမုပါဒါယ ဥကာရန္တာနီတိ ဘဏာမာတိ. နနု စ ဘော ဧတာနိ အကာရန္တာနီတိ? န, ဥကာရန္တာနိယေဝ တာနိ. နနု စ ဘော ယော အံ နာဒီနိ ပရဘူတာနိ ဝစနာနိ န ဒိဿန္တိ ယေဟိ ဥကာရန္တသဒ္ဒါနမန္တဿ အာရာဒေသော သိယာ, တသ္မာ အကာရန္တာနီတိ? န, ဤဒိသေ ဌာနေ ပရဘူတာနံ ယော အံ နာဒီနံ ဝစနာနမနောကာသတ္တာ. တထာ ဟိ သမာသဝိသယော ဧသော. သမာသဝိသယသ္မိဉှိ အစိန္တေယျာနိပိ ရူပါနိ ဒိဿန္တီတိ. ဧဝံ သန္တေပိ ဘော ‘‘ဂါမတော နိက္ခမတီ’’တိ ပယောဂဿ ဝိယ အသမာသဝိသယေ ‘‘သတ္ထာရတော သတ္ထာရံ ဂစ္ဆတီ’’တိ နိဒ္ဒေသပါဠိဒဿနတော ‘‘ဟေတု [Pg.186] သတ္ထာရဒဿန’’န္တိအာဒီသု သတ္ထာရ ဣစ္စာဒီနိ အကာရန္တာနီတိ စိန္တေတဗ္ဗာနီတိ? န စိန္တေတဗ္ဗာနိ ‘‘သတ္ထာရတော သတ္ထာရံ ဂစ္ဆတီ’’တိ ဧတ္ထာပိ ဥကာရန္တတ္တာ. ဧတ္ထ ဟိ အသမာသတ္တေပိ တောပစ္စယံ ပဋိစ္စ သတ္ထုသဒ္ဒဿ ဥကာရော အာရာဒေသံ လဘတိ. ယာနိ ပန တုမှေ ဥကာရဿ အာရာဒေသနိမိတ္တာနိ ယော အံနာဒီနိ ဝစနာနိ ဣစ္ဆထ, တာနိ ဤဒိသေ ဌာနေ ဝိညူနံ ပမာဏံ န ဟောန္တိ. ကာနိ ပန ဟောန္တီတိ စေ? အသမာသဝိသယေ တောပစ္စယော စ သမာသဝိသယေ ပရပဒါနိ စ ပရပဒါဘာဝေ သျာဒိဝိဘတ္တိယော စာတိ ဣမာနေဝ ဤဒိသေ ဌာနေ ဧကန္တေန ပမာဏံ ဟောန္တိ. တထာ ဟိ ဓမ္မပဒဋ္ဌကထာယံ ‘‘ယာဝဒေဝ အနတ္ထာယ, ဉတ္တံ ဗာလဿ ဇာယတီ’’တိ ဣမိဿာ ပါဠိယာ အတ္ထသံဝဏ္ဏနာယံ ‘‘အယံ နိမ္မာတာပိတရောတိ ဣမသ္မိံ ပဟဋေ ဒဏ္ဍော နတ္ထီ’’တိ ဧတ္ထ နိမ္မာတာပိတရောတိ ဣမဿ သမာသဝိသယတ္တာ သိမှိ ပရေ ဥကာရော အာရာဒေသံ လဘတိ, တတော သိဿ ဩကာရာဒေသော, ဣစ္စေတံ ပဒံ ပကတိရူပဝသေန ဥကာရန္တံ ဘဝတိ. နိပ္ဖန္နတ္တမုပါဒါယ ‘‘ပုရိသော, ဥရဂေါ’’တိ ပဒါနိ ဝိယ ဩကာရန္တဉ္စ ဘဝတိ. အယံ ပနေတ္ထ သမာသဝိဂ္ဂဟော ‘‘မာတာ စ ပိတာ စ မာတာပိတရော, နတ္ထိ မာတာပိတရော ဧတဿာတိ နိမ္မာတာပိတရော’’တိ. ပကတိရူပဝသေန ဟိ ‘‘နိမ္မာတာပိတု’’ ဣတိ ဌိတေ သိဝစနသ္မိံ ပရေ ဥကာရဿ အာရာဒေသော ဟောတိ. ကတ္ထစိ ပန ဓမ္မပဒဋ္ဌကထာပေါတ္ထကေ ‘‘အယံ နိမ္မာတာပိတိကော’’တိ ပါဌော ဒိဿတိ, ဧသော ပန ‘‘အယံ နိမ္မာတာပိတရော’’တိ ပဒဿ အယုတ္တတံ မညမာနေဟိ ဌပိတောတိ မညာမ, န သော အယုတ္တော အဋ္ဌကထာပါဌော. သော ဟိ ဥမင်္ဂဇာတကဋ္ဌကထာယံ ဧကပိတရောတိ သိမှိ အာရာဒေသပယောဂေန သမေတိ. တထာ ဟိ – येथे आक्षेप आणि समाधान असे आहे – 'सत्था' (शास्ता), 'पिता' इत्यादी शब्द सिद्ध रूपाच्या आधारे आकारान्त आहेत आणि मूळ प्रकृती रूपाच्या आधारे उकारान्त आहेत, असे तुम्ही म्हणता. मग "हेतु सत्थारदस्सनं", "अमातापितरसंवड्ढो", "कत्तारनिद्देसो" इत्यादींमध्ये 'सत्थार' इत्यादी शब्दांना तुम्ही काय म्हणता? आम्ही यांनाही मूळ प्रकृती रूपाच्या आधारे उकारान्तच म्हणतो. अहो, पण हे अकारान्त नाहीत का? नाही, ते उकारान्तच आहेत. अहो, पण ज्यांच्यामुळे उकारान्त शब्दांच्या शेवटी 'आर' आदेश व्हावा, असे 'यो', 'अं' इत्यादी नंतर येणारे प्रत्यय दिसत नाहीत, म्हणून ते अकारान्त नाहीत का? नाही, कारण अशा ठिकाणी नंतर येणाऱ्या 'यो', 'अं' इत्यादी प्रत्ययांना वाव (अवकाश) नसतो. कारण हा समासाचा विषय आहे. समासाच्या विषयात अचिंत्य (आश्चर्यकारक) रूपेही दिसतात. असे असले तरी, अहो! "गामतो निक्खमति" (गावातून निघतो) या प्रयोगाप्रमाणे असमस्त (समास नसलेल्या) विषयात "सत्थारतो सत्थारं गच्छति" (शास्त्याकडून शास्त्याकडे जातो) या निर्देश पाळीवरून "हेतु सत्थारदस्सनं" इत्यादींमध्ये 'सत्थार' इत्यादी शब्द अकारान्त आहेत असे मानावे का? तसे मानू नये, कारण "सत्थारतो सत्थारं गच्छति" येथेही उकारान्तत्वच आहे. येथे समास नसतानाही 'तो' प्रत्ययामुळे 'सत्थु' शब्दाच्या उकाराला 'आर' आदेश मिळतो. परंतु, उकाराच्या 'आर' आदेशाचे निमित्त म्हणून तुम्ही ज्या 'यो', 'अं' इत्यादी प्रत्ययांची अपेक्षा करता, ते अशा ठिकाणी विद्वानांसाठी प्रमाण मानले जात नाहीत. मग कोणते प्रमाण मानले जातात? तर, असमस्त विषयात 'तो' प्रत्यय, समस्त विषयात परपद (पुढील शब्द) आणि परपदाच्या अभावी 'सि' इत्यादी विभक्ती प्रत्यय, हेच अशा ठिकाणी निश्चितपणे प्रमाण मानले जातात. तसेच धम्मपद-अट्ठकथेत "यावदेव अनत्थाय, ञत्तं बालस्स जायती" या पाळीच्या अर्थवर्णनात "अयं निम्मातापितरोति इमस्मिं पहटे दण्डो नत्थी" (हा माता-पिता नसलेला आहे, याला मारल्यास दंड नाही) येथे 'निम्मातापितरो' हा समासाचा विषय असल्यामुळे 'सि' प्रत्यय नंतर असताना उकाराला 'आर' आदेश मिळतो, त्यानंतर 'सि' प्रत्ययाचा 'ओ' आदेश होतो, आणि हे पद मूळ प्रकृती रूपाने उकारान्त बनते. सिद्ध रूपाच्या आधारे "पुरिसो, उरगो" या शब्दांप्रमाणे ते ओकारान्तही बनते. येथे समासविग्रह असा आहे – "माता च पिता च मातापितरो, नत्थि मातापितरो एतस्साति निम्मातापितरो" (माता आणि पिता म्हणजे माता-पिता; ज्याला माता-पिता नाहीत तो निम्माता-पिता). मूळ प्रकृती रूपाने "निम्मातापितु" अशी स्थिती असताना 'सि' प्रत्यय नंतर आल्यावर उकाराचा 'आर' आदेश होतो. काही धम्मपद-अट्ठकठेच्या हस्तलिखितांमध्ये "अयं निम्मातापितिको" असा पाठ दिसतो, परंतु हा पाठ "अयं निम्मातापितरो" हे पद अयोग्य मानणाऱ्यांनी ठेवला असावा असे आम्हाला वाटते; तो अट्ठकठेचा पाठ अयोग्य नाही. कारण तो उमंगजातक-अट्ठकथेत 'एकपितरो' या 'सि' प्रत्ययातील 'आर' आदेशाच्या प्रयोगाशी जुळतो. जसे की – ‘‘ယထာပိ [Pg.187] နိယကော ဘာတာ,သဥဒရိယော ဧကမာတုကော; ဧဝံ ပဉ္စာလစန္ဒော တေ,ဒယိတဗ္ဗော ရထေသဘာ’’တိ ज्याप्रमाणे स्वतःचा सख्खा भाऊ, एकाच आईच्या उदरी जन्मलेला (सहोदर) असतो; हे रथांचे स्वामी! त्याचप्रमाणे हा पांचालचंड तुमचा प्रिय असावा. ဣမိဿာ ပါဠိယာ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏေန္တေဟိ ပါဠိနယညူဟိ ဂရူဟိ ‘‘နိယကောတိ အဇ္ဈတ္တိကော ဧကပိတရော ဧကမာတုယာ ဇာတော’’တိ သိမှိ အာရာဒေသပယောဂရစနာ ကတာ. န ကေဝလဉ္စ သိမှိ အာရာဒေသေ ပုလ္လိင်္ဂပ္ပယောဂေါယေဝမှေဟိ ဒိဋ္ဌော, အထ ခေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂပ္ပယောဂေါပိ သာသနေ ဒိဋ္ဌော. တထာ ဟိ ဝိနယပိဋကေ စူဠဝဂ္ဂေ ‘‘အဿမဏီ ဟောတိ အသကျဓီတရာ’’တိ ပဒံ ဒိဿတိ. အယံ ပနေတ္ထ သမာသဝိဂ္ဂဟော ‘‘သကျကုလေ ဥပ္ပန္နတ္တာ သကျဿ ဘဂဝတော ဓီတာ သကျဓီတရာ, န သကျဓီတရာ အသကျဓီတရာ’’တိ. ဣဓာပိ သိမှိ ပရေ ဥကာရဿ အာရာဒေသော ကတော, ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝဿ ဣစ္ဆိတတ္တာ အာပစ္စယော, တတော သိလောပေါ စ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ဧဝံ သမာသပဒတ္တေ သတ္ထု ပိတု ကတ္တုသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာယံ ဝုတ္တရူပတော ကောစိ ကောစိ ရူပဝိသေသော ဒိဿတိ. အညေသမ္ပိ ရူပဝိသေသော နယညုနာ မဂ္ဂိတဗ္ဗော သုတ္တန္တေသု. ကော ဟိ နာမ သမတ္ထော နိဿေသတော ဗုဒ္ဓဝစနသာဂရေ သံကိဏ္ဏာနိ ဝိစိတြာနိ ပဏ္ဍိတဇနာနံ ဟဒယဝိမှာပနကရာနိ ပဒရူပရတနာနိ သမုဒ္ဓရိတွာ ဒဿေတုံ, တသ္မာ အမှေဟိ အပ္ပမတ္တကာနိယေဝ ဒဿိတာနိ. या पाळीचा अर्थ स्पष्ट करताना पाळीच्या नियमांचे जाणकार असलेल्या आदरणीय गुरूंनी "नियकोति अज्झत्तिको एकपितरो एकमातुया जातो" (नियक म्हणजे स्वतःचा, एकाच पित्यापासून आणि एकाच मातेपासून जन्मलेला) अशी 'सि' प्रत्ययात 'आर' आदेशाच्या प्रयोगाची रचना केली आहे. आणि केवळ 'सि' प्रत्ययात 'आर' आदेशाचा पुल्लिंगी प्रयोगच आम्हाला आढळला नाही, तर शासनात (बुद्धवचनात) स्त्रीलिंगी प्रयोगही आढळला आहे. जसे की विनयपिटकातील चुल्लवग्गात "असमणी होति असक्यधीतरा" (ती श्रमणी राहत नाही आणि शाक्यपुत्रीही राहत नाही) हे पद दिसते. येथे समासविग्रह असा आहे – "सक्यकुले उप्पन्नत्ता सक्यस्स भगवतो धीता सक्यधीतरा, न सक्यधीतरा असक्यधीतरा" (शाक्य कुळात जन्मल्यामुळे शाक्य भगवंतांची कन्या म्हणजे शाक्यधीतरा; जी शाक्यधीतरा नाही ती असाक्यधीतरा). येथेही 'सि' प्रत्यय नंतर असताना उकाराचा 'आर' आदेश केला आहे, स्त्रीलिंगी भाव विवक्षित असल्यामुळे 'आ' प्रत्यय लागला आहे आणि त्यानंतर 'सि' प्रत्ययाचा लोप झाला आहे, असे समजावे. अशा प्रकारे, समस्त पद असताना 'सत्थु', 'पितु', 'कत्तु' या शब्दांच्या नामविभक्ती रूपमालेत सांगितलेल्या रूपांपेक्षा काही काही विशेष रूपे आढळतात. इतर शब्दांचेही विशेष रूप नियमांच्या जाणकारांनी सुत्तांमध्ये शोधून काढावे. बुद्धवचनरूपी महासागरात विखुरलेली, विद्वानांच्या हृदयाला विस्मित करणारी विविध पदरूपरूपी रत्ने पूर्णपणे बाहेर काढून दाखवण्यास कोण समर्थ आहे? म्हणूनच आम्ही केवळ थोडीशीच रूपे दाखवली आहेत. အဒန္ဓဇာတိကော ဝိညု-ဇာတိကော သတတံ ဣဓ; ယောဂံ ကရောတိ စေ သတ္ထု, ပါဠိယံ သော န ကင်္ခတိ. जो मंद बुद्धीचा नाही, तर बुद्धिमान आहे, तो जर येथे सतत शास्त्यांच्या पाळी भाषेचा अभ्यास (प्रयत्न) करेल, तर त्याला पाळी भाषेविषयी कोणतीही शंका उरणार नाही. ယေ ပနိဓ အမှေဟိ ‘‘သတ္ထာ, အဘိဘဝိတာ, ဝတ္တာ, ကတ္တာ’’ဒယော သဒ္ဒါ ပကာသိတာ, တေသု ကေစိ ဥပယောဂဝစနေန သဒ္ဓိံ နိစ္စံ ဝတ္တန္တိ ‘‘ပုစ္ဆိတာ, ဩက္ကမိတာ’’ဣစ္စာဒယော. တထာ ဟိ ‘‘အဘိဇာနာသိ [Pg.188] နော တွံ မဟာရာဇ ဣမံ ပဉှံ အညေ သမဏဗြာဟ္မဏေ ပုစ္ဆိတာ. နိဒ္ဒံ ဩက္ကမိတာ’’တိအာဒိပယောဂါ ဗဟူ ဒိဿန္တိ. ကေစိ သာမိဝစနေန သဒ္ဓိံ နိစ္စံ ဝတ္တန္တိ ‘‘အဘိဘဝိတာ, ဝတ္တာ’’ဣစ္စာဒယော. တထာ ဟိ ‘‘ပစ္စာမိတ္တာနံ အဘိဘဝိတာ, တဿ ဘဝန္တိ ဝတ္တာရော. အမတဿ ဒါတာ. ပရိဿယာနံ သဟိတာ. အနုပ္ပန္နဿ မဂ္ဂဿ, ဥပ္ပာဒေတာ နရုတ္တမော’’တိအာဒိပယောဂါ ဗဟူ ဒိဿန္တိ. ကေစိ ပန ဥပယောဂဝစနေနပိ သဒ္ဓိံ နေဝ ဝတ္တန္တိ နိယောဂါ ပညတ္တိယံ ပဝတ္တနတော. တံ ယထာ? ‘‘သတ္ထာ, ပိတာ, ဘာတာ, နတ္တာ’’ဣစ္စာဒယော. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဥပယောဂဝစနေန သဒ္ဓိံ နိစ္စံ ဝတ္တန္တီ’’တိအာဒိဝစနံ ကမ္မဘူတံ အတ္ထံ သန္ဓာယ ကတန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. येथे आमच्याद्वारे जे "सत्था (शास्ता), अभिभविता (पराभूत करणारा), वत्ता (बोलणारा), कत्ता (करणारा)" इत्यादी शब्द प्रकाशित केले गेले आहेत, त्यांपैकी काही शब्द नेहमी द्वितीया विभक्तीसोबत (उपयोगवचन) प्रयुक्त होतात, जसे की "पुच्छिता (विचारणारा), ओक्कमिता (प्रवेश करणारा)" इत्यादी. तसेच "अभिजानासि नो त्वं महाराज इमं पञ्हं अञ्ञे समणब्राह्मणे पुच्छिता" (महाराज, तुम्ही इतर श्रमण-ब्राह्मणांना हा प्रश्न विचारल्याचे आठवते का?), "निद्दं ओक्कमिता" (झोपेत प्रवेश करणारा) इत्यादी अनेक प्रयोग आढळतात. काही शब्द नेहमी षष्ठी विभक्तीसोबत (सामिवचन) प्रयुक्त होतात, जसे की "अभिभविता, वत्ता" इत्यादी. तसेच "पच्चामित्तानं अभिभविता" (शत्रूंना पराभूत करणारा), "तस्स भवन्ति वत्तारो" (त्याचे वक्ते होतात), "अमतस्स दाता" (अमृताचा दाता), "परिस्सयानं सहिता" (संकटांना सहन करणारा), "अनुप्पन्नस्स मग्गस्स, उप्पादेता नरुत्तमो" (उत्पन्न न झालेल्या मार्गाचा उत्पादक असणारा नरोत्तम) इत्यादी अनेक प्रयोग आढळतात. परंतु काही शब्द तर द्वितीया विभक्तीसोबतही कधीच प्रयुक्त होत नाहीत, कारण ते केवळ प्रज्ञप्तीमध्ये (पण्णत्ति) प्रयुक्त होतात. ते कसे? "सत्था (शास्ता), पिता (पिता), भाता (भाऊ), नत्ता (नातू)" इत्यादी. येथे "द्वितीया विभक्तीसोबत नेहमी प्रयुक्त होतात" इत्यादी वचन कर्मभूत अर्थाला उद्देशून केले आहे, असे समजावे. ဧဝံ ဥကာရန္တတာပကတိကာနံ အာကာရန္တပဒါနံ ပဝတ္တိံ ဝိဒိတွာ သဒ္ဒေသု အတ္ထေသု စ ကောသလ္လမိစ္ဆန္တေဟိ ပုန လိင်္ဂအန္တဝသေန ‘‘သတ္ထာ, သတ္ထော, သတ္ထ’’န္တိ တိကံ ကတွာ ပဒါနမတ္ထော စ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ စ ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ စ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. တတြ ဟိ ‘‘သတ္ထာ’’တိ ဣဒံ ပဌမံ ဥကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ပစ္ဆာ အာကာရန္တဘူတံ ပုလ္လိင်္ဂံ, ‘‘သတ္ထော’’တိ ဣဒံ ပဌမံ အကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ပစ္ဆာ ဩကာရန္တဘူတံ ပုလ္လိင်္ဂံ, ‘‘သတ္ထ’’န္တိဒံ ပန ပဌမံ အကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ပစ္ဆာ နိဂ္ဂဟီတန္တဘူတံ နပုံသကလိင်္ဂံ. တတြ သတ္ထာတိ သဒေဝကံ လောကံ သာသတိ အနုသာသတီတိ သတ္ထာ, ကော သော? ဘဂဝါ. သတ္ထောတိ သဟ အတ္ထေနာတိ သတ္ထော, ဘဏ္ဍမူလံ ဂဟေတွာ ဝါဏိဇ္ဇာယ ဒေသန္တရံ ဂတော ဇနသမူဟော. သတ္ထန္တိ သာသတိ အာစိက္ခတိ အတ္ထေ ဧတေနာတိ သတ္ထံ, ဗျာကရဏာဒိဂန္ထော, အထ ဝါ သသတိ ဟိံသတိ သတ္တေ ဧတေနာတိ သတ္ထံ, အသိအာဒိ. ‘‘သတ္ထာ, သတ္ထာ, သတ္ထာရော. သတ္ထာရံ, သတ္ထာရော’’တိ ပုရေ ဝိယ [Pg.189] ပဒမာလာ. ‘‘သတ္ထော, သတ္ထာ. သတ္ထံ, သတ္ထေ’’တိ ပုရိသနယေန ပဒမာလာ. ‘‘သတ္ထံ, သတ္ထာနိ, သတ္ထာ. သတ္ထံ, သတ္ထာနိ, သတ္ထေ’’တိ နပုံသကေ ဝတ္တမာန စိတ္တနယေန ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧဝံ တိဓာ ဘိန္နာသု နာမိကပဒမာလာသု ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. अशा प्रकारे उकारान्त मूळ प्रकृती असलेल्या आकारान्त पदांची प्रवृत्ती जाणून घेऊन, शब्दांमध्ये आणि अर्थांमध्ये कौशल्य इच्छिणाऱ्यांनी पुन्हा लिंग आणि अन्ताच्या भेदाने "सत्था, सत्थो, सत्थं" अशी त्रयी करून, पदांचा अर्थ, मूळ रूपाची नामपदमाळा आणि पदांचे साधर्म्य व वैधर्म्य निश्चित केले पाहिजे. त्यामध्ये "सत्था" हे आधी उकारान्त मूळ प्रकृतीमध्ये राहून नंतर आकारान्त झालेले पुल्लिंगी रूप आहे. "सत्थो" हे आधी अकारान्त मूळ प्रकृतीमध्ये राहून नंतर ओकारान्त झालेले पुल्लिंगी रूप आहे. "सत्थं" हे आधी अकारान्त मूळ प्रकृतीमध्ये राहून नंतर निग्गहीत-अन्त (अनुस्वारान्त) झालेले नपुंसकलिंगी रूप आहे. त्यामध्ये "सत्था" म्हणजे जो देवलोकासह संपूर्ण जगाला शास्तन (अनुशासन/उपदेश) करतो तो "सत्था" (शास्ता) होय. तो कोण आहे? भगवान. "सत्थो" म्हणजे जो अर्थासह (धनासह) असतो तो "सत्थो" (सार्थ/तांडा), म्हणजेच भांडवल घेऊन व्यापारासाठी दुसऱ्या देशात गेलेला लोकसमूह. "सत्थं" म्हणजे ज्याच्याद्वारे अर्थाचे शास्तन (कथन/स्पष्टीकरण) केले जाते ते "सत्थं" (शास्त्र), जसे की व्याकरण इत्यादी ग्रंथ; अथवा ज्याच्याद्वारे प्राण्यांची हिंसा केली जाते ते "सत्थं" (शस्त्र), जसे की तलवार इत्यादी. "सत्था, सत्था, सत्थारो। सत्थारं, सत्थारो" ही पूर्वीप्रमाणेच पदमाळा आहे. "सत्थो, सत्था। सत्थं, सत्थे" ही "पुरिस" (पुरुष) शब्दाप्रमाणे चालणारी पदमाळा आहे. "सत्थं, सत्थानि, सत्था। सत्थं, सत्थानि, सत्थे" ही नपुंसकलिंगात चालणाऱ्या "चित्त" शब्दाप्रमाणे पदमाळा योजावी. अशा प्रकारे तीन प्रकारांनी भिन्न असलेल्या नामपदमाळांमध्ये पदांचे साधर्म्य आणि वैधर्म्य निश्चित केले पाहिजे. သတ္ထာ တိဋ္ဌတိ သဗ္ဗညူ, သတ္ထာ ယန္တိ ဓနတ္ထိကာ; သတ္ထာ အပေတိ ပုရိသော, ဘောန္တော သတ္ထာ ဒဒါထ သံ. सर्वज्ञ शास्ता (सत्था) उभे आहेत, धनाची इच्छा करणारे तांडे (सत्था) जात आहेत; मनुष्य शस्त्रापासून (सत्था) दूर जातो, हे महोदय, तांड्याला (सत्था) आपले (धन) द्या. ဧဝံ သုတိသာမညဝသေန သဒိသတာ ဘဝတိ. अशा प्रकारे श्रुती-सामान्यामुळे (ऐकण्याच्या समानतेमुळे) साधर्म्य (सारखेपणा) होते. သတ္ထံ ယံ တိခိဏံ တေန, သတ္ထော ကတွာန ကပ္ပိယံ; ဖလံ သတ္ထုဿ ပါဒါသိ, သတ္ထာ တံ ပရိဘုဉ္ဇတိ. जे तीक्ष्ण शस्त्र (सत्थं) आहे, त्याने तांड्याने (सत्थो) कल्पिय (योग्य) करून, ते फळ शास्त्याला (सत्थुस्स) दिले, शास्ता (सत्था) त्याचा उपभोग घेतात. ဧဝံ အသုတိသာမညဝသေန အသဒိသတာ ဘဝတိ, တထာ လိင်္ဂအန္တဝသေန. ‘‘စေတာ စေတော’’တိ စ ‘‘တာတာ တာတော’’တိ စ ဒုကံ ကတွာ ပဒါနမတ္ထော စ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ စ ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ စ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. अशा प्रकारे श्रुती-सामान्याच्या अभावामुळे (ऐकण्याच्या असमानतेमुळे) वैधर्म्य (भिन्नता) होते, तसेच लिंग आणि अन्ताच्या भेदानेही होते. "चेता, चेतो" आणि "ताता, तातो" अशी द्वयी करून पदांचा अर्थ, मूळ रूपाची नामपदमाळा आणि पदांचे साधर्म्य व वैधर्म्य निश्चित केले पाहिजे. တတြ ဟိ ‘‘စေတာ’’တိ ပဌမံ ဥကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ပစ္ဆာ အာကာရန္တဘူတံ ပုလ္လိင်္ဂံ, တထာ ‘‘တာတာ’’တိ ပဒမ္ပိ. ‘‘စေတော’’တိ ဣဒံ ပန ပဌမံ အကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ပစ္ဆာ ဩကာရန္တဘူတံ ပုလ္လိင်္ဂံ, တထာ ‘‘တာတော’’တိ ပဒမ္ပိ. တတြ စေတာတိ စိနောတိ ရာသိံ ကရောတီတိ စေတာ, ပါကာရစိနနကော ပုဂ္ဂလော, ဣဋ္ဌကဝဍ္ဎကီတိ အတ္ထော. စေတောတိ စိတ္တံ, ဧဝံနာမကော ဝါ လုဒ္ဒေါ. ဧတ္ထ စ စိတ္တံ ‘‘စေတယတိ စိန္တေတီ’’တိ အတ္ထဝသေန စေတော, လုဒ္ဒေါ ပန ပဏ္ဏတ္တိဝသေန. တာတာတိ တာယတီတိ တာတာ. ‘‘အဃဿ တာတာ ဟိတဿ ဝိဓာတာ’’တိဿ ပယောဂေါ. ‘‘တာတော’’တိ ဧတ္ထာပိ တာယတီတိ တာတော, ပုတ္တာနံ ပိတူသု, ပိတရာနံ ပုတ္တေသု, အညေသဉ္စ အညေသု ပိယပုဂ္ဂလေသု ဝတ္တဗ္ဗဝေါဟာရော [Pg.190] ဧသော. ‘‘သော နူန ကပဏော တာတော, စိရံ ရုစ္စတိ အဿမေ. ကိစ္ဆေနာဓိဂတာ ဘောဂါ, တေ တာတော ဝိဓမံ ဓမံ. ဧဟိ တာတာ’’တိအာဒီသု စဿ ပယောဂေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. ‘‘စေတာ, စေတာ, စေတာရော. စေတာရံ, စေတာရော’’တိ သတ္ထုနယေန ပဒမာလာ. ‘‘စေတော, စေတာ. စေတံ, စေတေ. စေတသာ, စေတေနာ’’တိ မနောဂဏနယေန ဉေယျာ. အယံ စိတ္တဝါစကဿ စေတသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. ‘‘စေတော, စေတာ. စေတံ, စေတေ. စေတေနာ’’တိ ပုရိသနယေန ဉေယျာ. အယံ ပဏ္ဏတ္တိဝါစကဿ စေတသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. ‘‘တာတာ, တာတာ, တာတာရော. တာတာရ’’န္တိ သတ္ထုနယေန ဉေယျာ. ‘‘တာတော, တာတာ, တာတ’’န္တိ ပုရိသနယေန ဉေယျာ. ဧဝမိမာသုပိ နာမိကပဒမာလာသု ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ, တထာ လိင်္ဂအန္တဝသေန ‘‘ဉာတာ, ဉာတော, ဉာတံ, ဉာတာ’’တိ စတုက္ကံ ကတွာ ပဒါနမတ္ထော စ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ စ ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ စ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. त्यामध्ये "चेता" हे आधी उकारान्त मूळ प्रकृतीमध्ये राहून नंतर आकारान्त झालेले पुल्लिंगी रूप आहे, तसेच "ताता" हे पदही. परंतु "चेतो" हे आधी अकारान्त मूळ प्रकृतीमध्ये राहून नंतर ओकारान्त झालेले पुल्लिंगी रूप आहे, तसेच "तातो" हे पदही. त्यामध्ये "चेता" म्हणजे जो गोळा करतो, रास करतो तो "चेता" (चिणणारा), म्हणजेच भिंत चिणणारा माणूस, वीटकाम करणारा कारागीर (गवंडी) असा अर्थ आहे. "चेतो" म्हणजे चित्त, किंवा या नावाचा एखादा शिकारी. येथे चित्त हे "चेतयति चिन्तेति" (चेतना करते, विचार करते) या अर्थाने "चेतो" आहे, तर शिकारी हा प्रज्ञप्तीच्या (पण्णत्ति) स्वरूपात आहे. "ताता" म्हणजे जो रक्षण करतो तो "ताता". "अघस्स ताता हितस्स विधाता" (पापापासून रक्षण करणारा आणि हिताचे विधान करणारा) हा याचा प्रयोग आहे. "तातो" यामध्येही जो रक्षण करतो तो "तातो" (तात/वडील किंवा प्रिय व्यक्ती). मुलांनी वडिलांना, वडिलांनी मुलांना आणि इतरांनी इतर प्रिय व्यक्तींना संबोधण्यासाठी वापरला जाणारा हा व्यावहारिक शब्द आहे. "सो नून कपणो तातो, चिरं रुच्चति अस्समे। किच्छेनाधिगता भोगा, ते तातो विधमं धमं। एहि ताता" (तो बिचारा तात नक्कीच आश्रमात दीर्घकाळ रडत असेल. कष्टाने मिळवलेले जे भोग आहेत, ते तात नष्ट करत आहेत. ये ताता!) इत्यादींमध्ये याचा प्रयोग समजून घ्यावा. "चेता, चेता, चेतारो। चेतारं, चेतारो" ही "सत्थु" शब्दाप्रमाणे चालणारी पदमाळा आहे. "चेतो, चेता। चेतं, चेते। चेतसा, चेतेन" ही "मनोगण" (मनस्-गण) प्रमाणे समजून घ्यावी. ही चित्तवाचक "चेत" शब्दाची नामपदमाळा आहे. "चेतो, चेता। चेतं, चेते। चेतेन" ही "पुरिस" (पुरुष) शब्दाप्रमाणे समजून घ्यावी. ही प्रज्ञप्तीवाचक "चेत" शब्दाची नामपदमाळा आहे. "ताता, ताता, तातारो। तातारं" ही "सत्थु" शब्दाप्रमाणे समजून घ्यावी. "तातो, ताता, तात" ही "पुरिस" शब्दाप्रमाणे समजून घ्यावी. अशा प्रकारे या नामपदमाळांमध्येही पदांचे साधर्म्य आणि वैधर्म्य निश्चित केले पाहिजे, तसेच लिंग आणि अन्ताच्या भेदाने "ञाता, ञातो, ञातं, ञाता" अशी चतुष्टयी करून पदांचा अर्थ, मूळ रूपाची नामपदमाळा आणि पदांचे साधर्म्य व वैधर्म्य निश्चित केले पाहिजे. တတြ ဟိ ‘‘ဉာတာ’’တိ ဣဒံ ပဌမံ ဥကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ပစ္ဆာ အာကာရန္တဘူတံ ပုလ္လိင်္ဂံ. ‘‘ဉာတော ဉာတ’’န္တိ ဣမာနိ ယထာက္ကမံ ပဌမံ အကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ပစ္ဆောကာရန္တနိဂ္ဂဟီတန္တဘူတာနိ ဝါစ္စလိင်္ဂေသု ပုန္နပုံသကလိင်္ဂါနိ. တထာ ဟိ ‘‘ဉာတော အတ္ထော သုခါဝဟော. ဉာတမေတံ ကုရင်္ဂဿာ’’တိ နေသံ ပယောဂါ ဒိဿန္တိ. ‘‘ဉာတာ’’တိ ဣဒံ ပန ပဌမံ အာကာရန္တတာပကတိယံ ဌတွာ ပစ္ဆာပိ အာကာရန္တဘူတံ ဝါစ္စလိင်္ဂေသု ဣတ္ထိလိင်္ဂံ. တထာ ဟိ ‘‘ဧသာ ဣတ္ထိမယာ ဉာတာ’’တိ ပယောဂေါ. တတြ ပုလ္လိင်္ဂပက္ခေ ‘‘ဇာနာတီတိ ဉာတာ’’တိ ကတ္တုကာရကဝတ္တမာနကာလဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဣတ္ထိလိင်္ဂါဒိပက္ခေ ‘‘ဉာယိတ္ထာတိ ဉာတာ ဉာတော [Pg.191] ဉာတ’’န္တိ ကမ္မကာရကာတီတကာလဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဧသ နယော အညတ္ထာပိ ယထာသမ္ဘဝံ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ‘‘ဉာတာ, ဉာတာ, ဉာတာရော. ဉာတာရ’’န္တိ သတ္ထုနယေန ဉေယျာ. ‘‘ဉာတော, ဉာတာ. ဉာတ’’န္တိ ပုရိသနယေန ဉေယျာ. ‘‘ဉာတံ, ဉာတာနိ, ဉာတာ. ဉာတံ, ဉာတာနိ, ဉာတေ’’တိ ဝက္ခမာနစိတ္တနယေန ဉေယျာ. ‘‘ဉာတာ, ဉာတာ, ဉာတာယော. ဉာတံ, ဉာတာ, ဉာတာယော’’တိ ဝက္ခမာနကညာနယေန ဉေယျာ. ဧဝမိမာသုပိ နာမိကပဒမာလာသု ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. အညေသုပိ ဌာနေသု ယထာရဟံ ဣမိနာ နယေန သဒိသာသဒိသတာ ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗာ. ဝတ္တာ ဓာတာ ဂန္တာဒီနမ္ပိ ‘‘ဝဒတီတိ ဝတ္တာ, ဓာရေတီတိ ဓာတာ, ဂစ္ဆတီတိ ဂန္တာ’’တိအာဒိနာ ယထာသမ္ဘဝံ နိဗ္ဗစနာနိ ဉေယျာနိ. तेथे 'ञाता' (ñātā) हा शब्द प्रथम उकारान्त मूळ रूपात (ukārantatāpakatiya) राहून नंतर आकारान्त बनलेला पुल्लिंगी शब्द आहे. 'ञातो, ञातं' (ñāto, ñātaṃ) हे शब्द अनुक्रमे प्रथम अकारान्त मूळ रूपात राहून नंतर ओकारान्त आणि निग्गहीत (अनुस्वार) अन्त झालेले, विशेष्यलिंगानुसार (vāccaliṅgesu) पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगी आहेत. तसेच त्यांचे प्रयोग 'ञातो अत्थो सुखावहो' (ñāto attho sukhāvaho - जाणलेला अर्थ सुख देणारा असतो) आणि 'ञातमेतं कुरङ्गस्स' (ñātametaṃ kuraṅgassa - हे हरिणाला माहीत आहे) असे दिसतात. 'ञाता' (ñātā) हा शब्द प्रथम आकारान्त मूळ रूपात राहून नंतरही आकारान्तच राहणारा, विशेष्यलिंगानुसार स्त्रीलिंगी शब्द आहे. जसे की 'एसा इत्थिमया ञाता' (esā itthimayā ñātā - ही स्त्री माझ्याकडून ओळखली गेली आहे) असा प्रयोग आहे. तेथे पुल्लिंगी पक्षाच्या बाबतीत 'जानाति इति ञाता' (जो जाणतो तो ज्ञाता/ञाता) असा कर्तृकारक वर्तमानकाळाच्या अर्थाने अर्थ घ्यावा. स्त्रीलिंग इत्यादी पक्षांच्या बाबतीत 'ञायित्थ इति ञाता, ञातो, ञातं' (जे जाणले गेले ते) असा कर्मकारक भूतकाळाच्या अर्थाने अर्थ घ्यावा. हाच नियम इतर ठिकाणीही यथासंभव पाहावा. 'ञाता, ञाता, ञातारो, ञातारं' हे 'सत्थु' (शास्ता) च्या रूपांप्रमाणे जाणावे. 'ञातो, ञाता, ञातं' हे 'पुरिस' (पुरुष) च्या रूपांप्रमाणे जाणावे. 'ञातं, ञातानि, ञाता, ञातं, ञातानि, ञाते' हे पुढे सांगण्यात येणाऱ्या 'चित्त' च्या रूपांप्रमाणे जाणावे. 'ञाता, ञाता, ञातायो, ञातं, ञाता, ञातायो' हे पुढे सांगण्यात येणाऱ्या 'कञ्ञा' (कन्या) च्या रूपांप्रमाणे जाणावे. अशा प्रकारे या नामविभक्तीच्या रूपमालांमध्ये शब्दांचे साधर्म्य आणि वैधर्म्य निश्चित करावे. इतर ठिकाणीही योग्यतेनुसार याच पद्धतीने साधर्म्य आणि वैधर्म्य तपासावे. 'वत्ता' (वक्ता), 'धाता' (धाता), 'गन्ता' (गंता) इत्यादी शब्दांचेही 'वदति इति वत्ता' (जो बोलतो तो वक्ता), 'धारेति इति धाता' (जो धारण करतो तो धाता), 'गच्छति इति गन्ता' (जो जातो तो गंता) इत्यादी प्रकारे यथासंभव व्युत्पत्तीचे अर्थ जाणावे. ယံ ပနေတ္ထ အမှေဟိ ပကိဏ္ဏကဝစနံ ကထိတံ, တံ ‘‘အဋ္ဌာနေ ဣဒံ ကထိတ’’န္တိ န ဝတ္တဗ္ဗံ. ယသ္မာ အယံ သဒ္ဒနီတိ နာမ သဒ္ဒါနမတ္ထာနဉ္စ ယုတ္တာယုတ္တိပကာသနတ္ထံ ကတာရမ္ဘတ္တာ နာနပ္ပကာရေန သဗ္ဗံ မာဂဓဝေါဟာရံ သင်္ခေါဘေတွာ ကထိတာယေဝ သောဘတိ, န ဣတရထာ, တသ္မာ နာနပ္ပဘေဒေန ဝတ္တုမိစ္ဆာယ သမ္ဘဝတော ‘‘အဋ္ဌာနေ ဣဒံ ကထိတ’’န္တိ န ဝတ္တဗ္ဗံ. နာနာဥပါယေဟိ ဝိညူနံ ဉာပနတ္ထံ ကတာရမ္ဘတ္တာ စ ပန ပုနရုတ္တိဒေါသောပေတ္ထ န စိန္တေတဗ္ဗော, အညဒတ္ထု သဒ္ဓါသမ္ပန္နေဟိ ကုလပုတ္တေဟိ အယံ သဒ္ဒနီတိ ပိဋကတ္တယောပကာရာယ သက္ကစ္စံ ပရိယာပုဏိတဗ္ဗာ. येथे आमच्याद्वारे जे प्रकीर्ण (विविध) वचन सांगितले गेले आहे, त्याला 'हे अयोग्य स्थानी सांगितले आहे' असे म्हणू नये. कारण हा 'सद्दनीति' (शब्दानुशासन) नावाचा ग्रंथ शब्दांच्या आणि अर्थांच्या योग्य-अयोग्यतेचे प्रकाशन करण्यासाठी सुरू केला असल्याने, विविध प्रकारे संपूर्ण मागध भाषेचे (पालीचे) मंथन करून सांगितल्यानेच शोभून दिसतो, अन्यथा नाही. म्हणून विविध भेदांनी सांगण्याच्या इच्छेच्या शक्यतेमुळे 'हे अयोग्य स्थानी सांगितले आहे' असे म्हणू नये. तसेच विविध उपायांनी विद्वानांना समजवण्यासाठी हा ग्रंथ सुरू केला असल्याने, येथे पुनरुक्तीचा दोषही मानू नये. उलट, श्रद्धासंपन्न कुलपुत्रांनी त्रिपिटकाच्या उपकारासाठी या सद्दनीतीचा आदरपूर्वक अभ्यास केला पाहिजे. ဣတိ အဘိဘဝိတာပဒသဒိသာနိ ဝတ္တာ, ဓာတာ, ဂန္တာဒီနိ ပဒါနိ ဒဿိတာနိ. ဣဒါနိ အတံသဒိသာနိ ဒဿေဿာမ. သေယျထိဒံ – अशा प्रकारे 'अभिभविता' शब्दासारखे 'वक्ता', 'धाता', 'गंता' इत्यादी शब्द दाखवले गेले आहेत. आता जे त्याच्यासारखे नाहीत (अतंसदिस - भिन्न रूप असलेले) ते दाखवू. जसे की – ဂုဏဝါ ဂဏဝါ စေဝ, ဗလဝါ ယသဝါ တထာ; ဓနဝါ သုတဝါ ဝိဒွါ, ဓုတဝါ ကတဝါပိ စ. गुणवा (गुणवान), गणवा (गणवान), तसेच बलवा (बलवान), यसवा (यशस्वी); धनवा (धनवान), सुतवा (श्रुतवान), विद्वा (विद्वान), तसेच धुतवा (धुतगुणयुक्त) आणि कतवा (कृतवान). ဟိတဝါ [Pg.192] ဘဂဝါ စေဝ, ဓိတဝါ ထာမဝါ တထာ; ယတဝါ စာဂဝါ စာထ, ဟိမဝိစ္စာဒယော ရဝါ. हितवा (हितवान), भगवा (भगवान), तसेच धितवा (धैर्यवान), थामवा (सामर्थ्यवान); यतवा (संयमी), चागवा (त्यागी) आणि हिमवा (हिमालय) इत्यादी शब्द आहेत. ပုန္နပုံသကလိင်္ဂေဟိ, အကာရန္တေဟိ ပါယတော; ဝန္တုသဒ္ဒေါ ပရော ဟောတိ, တဒန္တာ ဂုဏဝါဒယော. प्रायः अकारान्त पुल्लिंगी आणि नपुंसकलिंगी शब्दांनंतर 'वन्तु' प्रत्यय लागतो, आणि त्या प्रत्ययाने अंत होणारे 'गुणवा' इत्यादी शब्द बनतात. သညာဝါ ရသ္မိဝါ စေဝ, မဿုဝါ စ ယသဿိဝါ; ဣစ္စာဒိဒဿနာပေသော, အာကာရိဝဏ္ဏုကာရတော; ဣတ္ထိလိင်္ဂါဒီသု ဟောတိ, ကတ္ထစီတိ ပကာသယေ. 'सञ्ञावा' (संज्ञावान), 'रस्मिवा' (रश्मिवान), 'मस्सुवा' (श्मश्रुवान) आणि 'यसस्सिवा' (यशस्वी) इत्यादी प्रयोगांच्या दर्शनावरून, आकारान्त, इकारान्त आणि उकारान्त शब्दांनंतर स्त्रीलिंग इत्यादींमध्ये काही ठिकाणी (हा प्रत्यय) होतो, असे स्पष्ट करावे. သတိမာ ဂတိမာ အတ္ထ-ဒဿိမာ ဓိတိမာ တထာ; မုတိမာ မတိမာ စေဝ, ဇုတိမာ ဟိရိမာပိ စ. सतिमा (स्मृतिमान), गतिमा (गतिमान), अत्थदस्सिमा (अर्थदर्शी), धितिमा (धैर्यवान); मुतिमा (मतिमान), मतिमा (बुद्धिमान), जुतिमा (द्युतिमान) आणि हिरिमा (लज्जावान). ထုတိမာ ရတိမာ စေဝ, ယတိမာ ဗလိမာ တထာ; ကသိမာ သုစိမာ ဓီမာ, ရုစိမာ စက္ခုမာပိ စ. थुतिमा (स्तुतिमान), रतिमा (रतिमान), यतिमा (यत्नवान), बलिमा (बलवान); कसिमा (कृषिमान), सुचिमा (शुचिमान), धीमा (धीमान), रुचिमा (रुचिमान) आणि चक्खुमा (चक्षुमान). ဗန္ဓုမာ ဟေတုမာ’ယသ္မာ, ကေတုမာ ရာဟုမာ တထာ; ခါဏုမာ ဘာဏုမာ ဂေါမာ, ဝိဇ္ဇုမာ ဝသုမာဒယော. बन्धुमा (बंधुमान), हेतुमा (हेतुमान), आयस्मा (आयुष्मान), केतुमा (केतुमान), तसेच राहुमा (राहुमान); खाणुमा (स्थाणुमान), भाणुमा (भानुमान), गोमा (गोमान), विज्जुमा (विद्युत्मान) आणि वसुमा (वसुमान) इत्यादी. ပါပိမာ ပုတ္တိမာ စေဝ, စန္ဒိမိစ္စာဒယောပိ စ; အတံသဒိသသဒ္ဒါတိ, ဝိညာတဗ္ဗာ ဝိဘာဝိနာ. पापिमा (पापी), पुत्तिमा (पुत्रवान) आणि चन्दिमा (चंद्रमा) इत्यादी शब्दही; त्यांच्यापेक्षा भिन्न रूप असलेले (अतंसदिस) शब्द आहेत, असे विद्वानांनी जाणावे. ဣဝဏ္ဏုကာရောကာရေဟိ, မန္တုသဒ္ဒေါ ပရော ဘဝေ; အာကာရန္တာ စိကာရန္တာ, ဣမန္တူတိ ဝိဘာဝယေ. इ-वर्ण (इ, ई) आणि उ-कारानंतर 'मन्तु' प्रत्यय लागतो. आकारान्त आणि च-कारान्त शब्दांनंतर 'इमन्तु' प्रत्यय होतो, असे स्पष्ट करावे. ဂုဏဝါ, ဂုဏဝါ, ဂုဏဝန္တော. ဂုဏဝန္တံ, ဂုဏဝန္တေ. ဂုဏဝတာ, ဂုဏဝန္တေန, ဂုဏဝန္တေဟိ, ဂုဏဝန္တေဘိ. ဂုဏဝတော, ဂုဏဝန္တဿ, ဂုဏဝတံ, ဂုဏဝန္တာနံ. ဂုဏဝတာ, ဂုဏဝန္တာ, ဂုဏဝန္တသ္မာ, ဂုဏဝန္တမှာ, ဂုဏဝန္တေဟိ, ဂုဏဝန္တေဘိ. ဂုဏဝတော, ဂုဏဝန္တဿ, ဂုဏဝတံ, ဂုဏဝန္တာနံ. ဂုဏဝတိ, ဂုဏဝန္တေ, ဂုဏဝန္တသ္မိံ, ဂုဏဝန္တမှိ, ဂုဏဝန္တေသု. ဘော ဂုဏဝါ, ဘဝန္တော ဂုဏဝါ, ဘောန္တော ဂုဏဝန္တော. गुणवा, गुणवा, गुणवन्तो (प्रथमा). गुणवन्तं, गुणवन्ते (द्वितीया). गुणवता, गुणवन्तेन, गुणवन्तेहि, गुणवन्तेभि (तृतीया). गुणवतो, गुणवन्तस्स, गुणवतं, गुणवन्तानं (चतुर्थी). गुणवता, गुणवन्ता, गुणवन्तस्मा, गुणवन्तम्हा, गुणवन्तेहि, गुणवन्तेभि (पंचमी). गुणवतो, गुणवन्तस्स, गुणवतं, गुणवन्तानं (षष्ठी). गुणवति, गुणवन्ते, गुणवन्तस्मिं, गुणवन्तम्हि, गुणवन्तेसु (सप्तमी). भो गुणवा, भवन्तो गुणवा, भोन्तो गुणवन्तो (संबोधन). ဧတ္ထ [Pg.193] ပန ‘‘ဧထ တုမှေ အာဝုသော သီလဝါဟောထာ’’တိ စ, येथे पुन्हा "या, तुम्ही आवुसो (मित्रांनो), शीलवान व्हा" असे, आणि ‘‘ဗလဝန္တော ဒုဗ္ဗလာ ဟောန္တိ, ထာမဝန္တောပိ ဟာယရေ; စက္ခုမာ အန္ဓိကာ ဟောန္တိ, မာတုဂါမဝသံ ဂတာ’’တိ စ "बलवान लोक दुर्बळ होतात, सामर्थ्यवानही क्षीण होतात; चक्षुमान (डोळस) लोक आंधळे होतात, जेव्हा ते स्त्रीच्या (मातृग्रामाच्या) अधीन जातात" असे प्रयोग आहेत. ပါဠိယံ ‘‘သီလဝါ, စက္ခုမာ’’တိ ပဌမာဗဟုဝစနဿ ဒဿနတော ‘‘ဂုဏဝါ’’တိ ပစ္စတ္တာလပနဋ္ဌာနေ ဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ. ‘‘ဂုဏဝါ သတိမာ’’တိအာဒီသုပိ ဧသေဝ နယော. စူဠနိရုတ္တိယမ္ပိ ဟိ ‘‘ဂုဏဝါ’’တိ ပစ္စတ္တာလပနဗဟုဝစနာနိ အာဂတာနိ, နိရုတ္တိပိဋကေ ပစ္စတ္တေကဝစနဘာဝေနေဝ အာဂတံ, စူဠနိရုတ္တိယံ ပန နိရုတ္တိပိဋကေ စ ‘‘ဘော ဂုဏဝ’’ဣတိ ရဿဝသေန အာလပနေကဝစနံ အာဂတံ. မယံ ပန ‘‘တဂ္ဃ ဘဂဝါ ဗောဇ္ဈင်္ဂါ. ကထံ နု ဘဂဝါ တုယှံ သာဝကော သာသနေ ရတော’’တိဧဝမာဒီသု အနေကသတေသု ပါဌေသု ‘‘ဘဂဝါ’’ဣတိ အာလပနေကဝစနဿ ဒီဃဘာဝဒဿနတော ဝန္တုပစ္စယဋ္ဌာနေ ‘‘ဘော ဂုဏဝါ’’ဣစ္စာဒိ ဒီဃဝသေန ဝစနံ ယုတ္တတရံ ဝိယ မညာမ, မန္တုပစ္စယဋ္ဌာနေ ပန ဣမန္တုပစ္စယဋ္ဌာနေ စ ‘‘သဗ္ဗဝေရဘယာတီတ, ပါဒေ ဝန္ဒာမိ စက္ခုမ. ဧဝံ ဇာနာဟိ ပါပိမ’’ဣစ္စာဒီသု ပါဠိပဒေသေသု ‘‘စက္ခုမ’’ဣစ္စာဒိအာလပနေကဝစနဿ ရဿဘာဝဒဿနတော ‘‘ဘော သတိမ, ဘော ဂတိမ’’ဣစ္စာဒိ ရဿဝသေန ဝစနံ ယုတ္တတရံ ဝိယ မညာမ, အထ ဝါ မဟာပရိနိဗ္ဗာနသုတ္တဋ္ဌကထာယံ ‘‘အာယသ္မာ တိဿ’’ ဣတိဒီဃဝသေန ဝုတ္တာလပနေကဝစနဿ ဒဿနတော ‘‘ဘဂဝါ, အာယသ္မာ’’ ဣတိဒီဃဝသေန ဝုတ္တပဒမတ္တံ ဌပေတွာ ဝန္တုပစ္စယဋ္ဌာနေပိ မန္တုပစ္စယနယော နေတဗ္ဗော, မန္တုပစ္စယဋ္ဌာနေပိ ဝန္တုပစ္စယနယော နေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ ကစ္စာယနာဒီသု ‘‘ဘော ဂုဏဝံ, ဘော ဂုဏဝ, ဘော ဂုဏဝါ’’ဣတိ နိဂ္ဂဟီတရဿဒီဃဝသေန တီဏိ အာလပနေကဝစနာနိ ဝုတ္တာနိ, ဣမိနာ ‘‘ဘော သတိမံ, ဘော သတိမ, ဘော သတိမာ’’တိ ဧဝမာဒိနယောပိ ဒဿိတော[Pg.194]. ပဌမာဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ ပန ‘‘ဂုဏဝန္တော, ဂုဏဝန္တာ, ဂုဏဝန္တီ’’တိ တီဏိ ပဒါနိ ဝုတ္တာနိ, ဣမိနာပိ ‘‘သတိမန္တော, သတိမန္တာ, သတိမန္တီ’’တိ ဧဝမာဒိနယောပိ ဒဿိတော. တေသု ‘‘ဘော ဂုဏဝံ ဘော သတိမံ, ဂုဏဝန္တာ, ဂုဏဝန္တီ’’တိ ဣမာနိ ပဒါနိ ဧဝံဂတိကာနိ စ အညာနိ ပဒါနိ ပါဠိယံ အပ္ပသိဒ္ဓါနိ ယထာ ‘‘အာယသ္မန္တာ’’တိ ပဒံ ပသိဒ္ဓံ, တသ္မာ ယံ စူဠနိရုတ္တိယံ ဝုတ္တံ, ယဉ္စ နိရုတ္တိပိဋကေ, ယဉ္စ ကစ္စာယနာဒီသု, တံ သဗ္ဗံ ပါဠိယာ အဋ္ဌကထာဟိ စ သဒ္ဓိံ ယထာ န ဝိရုဇ္ဈတိ, ဂင်္ဂေါဒကေန ယမုနောဒကံ ဝိယ အညဒတ္ထု သံသန္ဒတိ သမေတိ, တထာ ဂဟေတဗ္ဗံ. पाळीमध्ये 'सीलवा, चक्खुमा' (शीलवान, चक्षुमान) हे प्रथमा बहुवचनाचे रूप दिसत असल्यामुळे, 'गुणवा' (गुणवान) हे प्रथमा आणि संबोधन स्थानामध्ये बहुवचन म्हटले आहे. 'गुणवा सतिमा' (गुणवान, स्मृतिमान) इत्यादींमध्ये देखील हाच नियम आहे. कारण चुळनिरुत्तीमध्ये देखील 'गुणवा' अशी प्रथमा आणि संबोधनाची बहुवचने आली आहेत, तर निरुत्तिपिटकामध्ये केवळ प्रथमा एकवचन रूपानेच आले आहे. परंतु चुळनिरुत्तीमध्ये आणि निरुत्तिपिटकामध्ये 'भो गुणव' असे र्हस्व रूपाने संबोधन एकवचन आले आहे. परंतु आम्ही 'तग्ध भगवा बोज्झंगा' (निश्चितच भगवंतांनी बोध्यंग...), 'कथं नु भगवा तुय्हं सावको सासने रतो' (भगवंत! आपला श्रावक शासनात कसा बरं रममाण आहे?) इत्यादी शेकडो पाठांमध्ये 'भगवा' हे संबोधन एकवचनाचे रूप दीर्घ दिसत असल्यामुळे, 'वन्तु' प्रत्ययाच्या स्थानामध्ये 'भो गुणवा' इत्यादी दीर्घ रूपाने प्रयोग करणे अधिक योग्य मानतो. परंतु 'मन्तु' प्रत्ययाच्या स्थानामध्ये आणि 'इमन्तु' प्रत्ययाच्या स्थानामध्ये 'सब्बवेरभयातीत, पादे वंदामि चक्खुम' (सर्व वैर आणि भयापासून मुक्त असलेल्या, हे चक्षुमान! मी आपल्या चरणी वंदन करतो), 'एवं जानाहि पापिम' (हे पापी! असे जाण) इत्यादी पाळी पदांमध्ये 'चक्खुम' इत्यादी संबोधन एकवचनाचे रूप र्हस्व दिसत असल्यामुळे, 'भो सतिम, भो गतिम' इत्यादी र्हस्व रूपाने प्रयोग करणे अधिक योग्य मानतो. किंवा महापरिनिब्बानसुत्त अट्ठकथेमध्ये 'आयुस्मा तिस्स' (आयुष्मान तिस्स) अशा दीर्घ रूपाने सांगितलेले संबोधन एकवचन दिसत असल्यामुळे, 'भगवा, आयुस्मा' ही दीर्घ रूपाने सांगितलेली पदे वगळता, 'वन्तु' प्रत्ययाच्या स्थानामध्ये देखील 'मन्तु' प्रत्ययाचा नियम लावावा आणि 'मन्तु' प्रत्ययाच्या स्थानामध्ये देखील 'वन्तु' प्रत्ययाचा नियम लावावा. कारण कच्चायन इत्यादी व्याकरणांमध्ये 'भो गुणवं, भो गुणव, भो गुणवा' अशी निग्गहीत, र्हस्व आणि दीर्घ रूपाने तीन संबोधन एकवचने सांगितली आहेत. यावरून 'भो सतिमं, भो सतिम, भो सतिमा' इत्यादी नियम देखील दर्शविला गेला आहे. प्रथमा बहुवचनाच्या स्थानामध्ये 'गुणवन्तो, गुणवन्ता, गुणवन्ती' अशी तीन पदे सांगितली आहेत, यावरून 'सतिमन्तो, सतिमन्ता, सतिमन्ती' इत्यादी नियम देखील दर्शविला गेला आहे. त्यांपैकी 'भो गुणवं, भो सतिमं, गुणवन्ता, गुणवन्ती' ही पदे आणि अशाच प्रकारची इतर पदे पाळीमध्ये दर्शविली आहेत, जसे की 'आयुस्मन्ता' हे पद प्रसिद्ध आहे. म्हणून जे काही चुळनिरुत्तीमध्ये सांगितले आहे, जे निरुत्तिपिटकामध्ये सांगितले आहे आणि जे कच्चायन इत्यादींमध्ये सांगितले आहे, ते सर्व पाळी आणि अट्ठकथांशी विसंगत न ठरता, गंगेच्या पाण्यात यमुनेचे पाणी मिसळावे त्याप्रमाणे निश्चितपणे सुसंगत होते आणि जुळते, असे ग्रहण करावे. အပိစေတ္ထ အယမ္ပိ ဝိသေသော ဂဟေတဗ္ဗော. တံ ယထာ? ‘‘တုယှံ ဓီတာ မဟာဝီရ, ပညဝန္တ ဇုတိန္ဓရာ’’တိ ပါဠိယံ ‘‘ပညဝန္တ’’ဣတိ အာလပနေကဝစနဿ ဒဿနတော. शिवाय, येथे हा देखील विशेष (भेद) घेतला पाहिजे. तो कसा? 'तुझी कन्या, हे महावीर, प्रज्ञावान आणि दीप्तिमान आहे' (तुय्हं धीता महावीर, पञ्ञवन्त जुतिन्धरा) या पाळीतील 'पञ्ञवन्त' (paññavanta) या संबोधन एकवचनाच्या दर्शनामुळे. ‘‘သဗ္ဗာ ကိရေဝံ ပရိနိဋ္ဌိတာနိ,ယသဿိ နံ ပညဝန္တံ ဝိသယှ; ယသော စ လဒ္ဓါ ပုရိမံ ဥဠာရံ,နပ္ပဇ္ဇဟေ ဝဏ္ဏဗလံ ပုရာဏ’’န္တိ. ‘सर्व काही अशा प्रकारे पूर्ण झाले आहे, हे यशस्वी, प्रज्ञावान! पूर्वीची थोर कीर्ती प्राप्त करून, जुने वर्ण आणि बल सोडू नये.’ ဣမိဿာ ဇာတကပါဠိယာ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘ပညဝန္တ’’ဣတိ အာလပနေကဝစနဿ ဒဿနတော စ ‘‘ဘော ဂုဏဝန္တ, ဘော ဂုဏဝန္တာ, ဘော သတိမန္တ, ဘော သတိမန္တာ’’တိအာဒီနိပိ အာလပနေကဝစနာနိ အဝဿမိစ္ဆိတဗ္ဗာနိ. တထာ ဟိ တိဿံ ပါဠိယံ ‘‘ယသဿိ ပညဝန္တ’’ ဣစ္စာလပနဝစနံ အဋ္ဌကထာစရိယာ ဣစ္ဆန္တိ. နန္တိ ဟိ ပဒပူရဏေ နိပါတမတ္တံ. ပညဝန္တန္တိ ပန ဆန္ဒာနုရက္ခဏတ္ထံ အနုသာရာဂမံ ကတွာ ဝုတ္တံ. ဧဝံ ပါဝစနေ ဝန္တုပစ္စယာဒိသဟိတာနံ သဒ္ဒါနံ ‘‘ဘဂဝါ, အာယသ္မာ, ပညဝန္တ, စက္ခုမ, ပါပိမ’’ဣတိဒဿိတနယေန အာလပနပ္ပဝတ္တိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဂင်္ဂါဘာဂီရထီ နာမ, ဟိမဝန္တာ ပဘာဝိတာ’’တိ စ ‘‘ကုတော အာဂတတ္ထ ဘန္တေတိ, ဟိမဝန္တာ မဟာရာဇာ’’တိ စ ဒဿနတော [Pg.195] ‘‘ဂုဏဝန္တာ’’တိ ပဉ္စမိယာ ဧကဝစနံ ကထိတံ. ယထာ ဂုဏဝန္တု သဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ယောဇိတာ, ဧဝံ ဓနဝန္တုဗလဝန္တာဒီနံ သတိမန္တု ဂတိမန္တာဒီနဉ္စ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. या जातकपाळीच्या अट्ठकथेमध्ये 'पञ्ञवन्त' (paññavanta) या संबोधन एकवचनाच्या दर्शनामुळे 'भो गुणवन्त, भो गुणवन्ता, भो सतिमन्त, भो सतिमन्ता' इत्यादी संबोधन एकवचने देखील अवश्य स्वीकारली पाहिजेत. कारण त्या पाळीमध्ये 'यसस्सि पञ्ञवन्त' (yasassi paññavanta) हे संबोधन रूप अट्ठकथाचार्यांना अभिप्रेत आहे. 'नं' (naṃ) हा केवळ पादपूरक निपात आहे. तर 'पञ्ञवन्तं' (paññavantaṃ) हे छंदाचे रक्षण करण्यासाठी अनुस्वाराचा आगम करून म्हटले आहे. अशा प्रकारे बुद्धवचनात (पावचन) 'वन्तु' प्रत्यय इत्यादींनी युक्त असलेल्या शब्दांची 'भगवा, आयुस्मा, पञ्ञवन्त, चक्खुम, पापिम' या दर्शविलेल्या पद्धतीने संबोधनाची प्रवृत्ती जाणावी. आणि येथे 'गंगा भागीरथी नावाचा प्रवाह हिमालयातून उगम पावतो' (गंगाभागीरथी नाम, हिमवन्ता पभाविता) आणि 'भन्ते! आपण कोठून आलात? हे महाराज, हिमालयातून' (कुतो आगतत्थ भन्तेति, हिमवन्ता महाराजा) या दर्शनावरून 'गुणवन्ता' हे पंचमी विभक्तीचे एकवचन सांगितले आहे. ज्याप्रमाणे 'गुणवन्तु' शब्दाची नामविभक्ती रूपे (नामपदमाला) योजली आहेत, त्याचप्रमाणे 'धनवन्तु', 'बलवन्तु' इत्यादींची आणि 'सतिमन्तु', 'गतिमन्तु' इत्यादींची देखील नामविभक्ती रूपे योजावीत. ဣဒါနိ ဝိဒွါဒိပဒါနံ ဂုဏဝါပဒေန သမာနဂတိကတ္တမ္ပိ သောတူနံ ပယောဂေသု သမ္မောဟာပဂမတ္ထံ ဧကဒေသတော နိဗ္ဗစနာဒီဟိ သဒ္ဓိံ ဝိဒွန္တုဣစ္စာဒိပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – ဉာဏသင်္ခါတော ဝေဒေါ အဿ အတ္ထီတိ ဝိဒွါ, ပဏ္ဍိတော. ဧတ္ထ စ ဝိဒွါသဒ္ဒဿ အတ္ထိဘာဝေ ‘‘ဣတိ ဝိဒွါ သမံ စရေ’’တိအာဒိ အာဟစ္စပါဌော နိဒဿနံ. အတြာယံ ပဒမာလာ – ဝိဒွါ, ဝိဒွါ, ဝိဒွန္တော. ဝိဒွန္တံ, ဝိဒွန္တေ. ဝိဒွတာ, ဝိဒွန္တေန. သေသံ သဗ္ဗံ နေယျံ. ဝေဒနာဝါ, ဝေဒနာဝါ, ဝေဒနာဝန္တော. ဝေဒနာဝန္တံ, ဝေဒနာဝန္တေ. ဝေဒနာဝတာ, ဝေဒနာဝန္တေန. သေသံ သဗ္ဗံ နေယျံ. ဧဝံ ‘‘သညာဝါစေတနာဝါ သဒ္ဓါဝါ ပညဝါ သဗ္ဗာဝါ’’ဣစ္စာဒီသုပိ. ဧတ္ထ စ ‘‘ဝေဒနာဝန္တံ ဝါ အတ္တာနံ သဗ္ဗာဝန္တံ လောက’’န္တိအာဒီနိ နိဒဿနပဒါနိ. တတ္ထ သဗ္ဗာဝန္တန္တိ သဗ္ဗသတ္တဝန္တံ, သဗ္ဗသတ္တယုတ္တန္တိ အတ္ထော. မဇ္ဈေဒီဃဉှိ ဣဒံ ပဒံ. ယေဘုယျေန ပန ‘‘ပညဝါပညဝန္တော’’တိအာဒီနိ မဇ္ဈေရဿာနိပိ ဘဝန္တိ. ယသဿိနော ပရိဝါရဘူတာ ဇနာ အဿ အတ္ထီတိ ယသဿိဝါ, အထ ဝါ ယသဿီ စ ယသဿိဝါ စာတိ ယသဿိဝါ. ဧကဒေသသရူပေကသေသောယံ. ‘‘ယသဿိဝါ’’တိ ပဒဿ ပန အတ္ထိဘာဝေ – आता, ऐकणाऱ्यांच्या प्रयोगांमधील संभ्रम दूर करण्यासाठी, 'विद्वन्त्व' (vidvantu) इत्यादी मूळ रूपांची नामविभक्ती रूपे (नामपदमाला) काही अंशी व्युत्पत्तीसह सांगितली जात आहे, जी 'गुणवा' (guṇavā) शब्दासारखीच चालते – ज्ञानरूपी वेद (विद्या) ज्याच्याकडे आहे तो 'विद्वा' (vidvā) म्हणजेच पंडित होय. आणि येथे 'विद्वा' शब्दाच्या अस्तित्वाबाबत 'इति विद्वा समं चरे' (अशा प्रकारे विद्वानाने समतेने आचरण करावे) इत्यादी स्पष्ट पाठ हे उदाहरण आहे. येथे ही नामपदमाला अशी आहे – विद्वा, विद्वा, विद्वन्तो (प्रथमा). विद्वन्तं, विद्वन्ते (द्वितीया). विद्वता, विद्वन्तेन (तृतीया). उर्वरित सर्व रूपे याचप्रमाणे जाणावीत. वेदनावा, वेदनावा, वेदनावन्तो. वेदनावन्तं, वेदनावन्ते. वेदनावता, वेदनावन्तेन. उर्वरित सर्व रूपे याचप्रमाणे जाणावीत. याचप्रमाणे 'सञ्ञावा (संज्ञावान), चेतनावा (चेतनावान), सद्धावा (श्रद्धावान), पञ्ञावा (प्रज्ञावान), सब्बावा (सर्ववान)' इत्यादींमध्ये देखील जाणावे. आणि येथे 'वेदनावा किंवा स्वतःला सर्ववान लोक...' (वेदनाविन्तं वा अत्तानं सब्बावन्तं लोकं) इत्यादी उदाहरणांची पदे आहेत. तेथे 'सब्बावन्तं' म्हणजे सर्व सत्त्वांनी (प्राण्यांनी) युक्त, सर्व सत्त्वांनी वेढलेला असा अर्थ आहे. हे पद मध्यदीर्घ आहे. परंतु या बहुतांश करून 'पञ्ञवा, पञ्ञवन्तो' इत्यादी रूपे मध्य-र्हस्व देखील असतात. ज्याच्याकडे कीर्तिमान अनुयायी (परिवार) आहेत तो 'यसस्सिवा' (yasassivā), किंवा जो यशस्वी आणि कीर्तिमान आहे तो 'यसस्सिवा'. हा एकदेशसरूप एकशेष समास आहे. 'यसस्सिवा' या शब्दाच्या अस्तित्वाबाबत – ‘‘ခတ္တိယော ဇာတိသမ္ပန္နော, အဘိဇာတော ယသဿိဝါ; ဓမ္မရာဇာ ဝိဒေဟာနံ, ပုတ္တော ဥပ္ပဇ္ဇတေ တဝါ’’တိ ‘क्षत्रिय जातिसंपन्न, अभिजात आणि यशस्वी; विदेहांचा धम्मराज असलेला पुत्र तुला उत्पन्न होईल.’ ဣဒံ နိဒဿနံ. ‘‘ယသဿိဝါ, ယသဿိဝါ, ယသဿိဝန္တော. ယသဿိဝန္တံ’’ ဣစ္စာဒိ နေတဗ္ဗံ. အတ္ထေ ဒဿနသီလံ အတ္ထဒဿိ, ကိံ [Pg.196] တံ? ဉာဏံ. အတ္ထဒဿိ အဿ အတ္ထီတိ အတ္ထဒဿိမာ, ဧတ္ထ စ – हे उदाहरण आहे. 'यसस्सिवा, यसस्सिवा, यसस्सिवन्तो, यसस्सिवन्तं' इत्यादी रूपे जाणावीत. अर्थ पाहण्याचा स्वभाव असलेला तो 'अत्थदस्सी' (अर्थदर्शी). ते काय आहे? ज्ञान. ज्याच्याकडे 'अत्थदस्सी' आहे तो 'अत्थदस्सिमा' (atthadassimā) होय. आणि येथे— ‘‘တံ တတ္ထ ဂတိမာ ဓိတိမာ, မုတိမာ အတ္ထဒဿိမာ; သင်္ခါတာ သဗ္ဗဓမ္မာနံ, ဝိဓုရော ဧတဒဗြဝီ’’တိ ‘तेथे गतीमान (बुद्धिमान), धृतीमान (धैर्यवान), मतीमान (प्रज्ञावान) आणि अर्थदर्शी (हित पाहणारा), सर्व धम्मांचे आकलन करणारा विधुर असे म्हणाला.’ ဣဒမေတဿတ္ထဿ သာဓကံ ဝစနံ. ‘‘အတ္ထဒဿိမာ, အတ္ထဒဿိမာ, အတ္ထဒဿိမန္တော. အတ္ထဒဿိမန္တံ’’ ဣစ္စာဒိ နေတဗ္ဗံ. ပါပံ အဿ အတ္ထီတိ ပါပိမာ, အကုသလရာသိသမန္နာဂတော မာရော. ပုတ္တာ အဿ အတ္ထီတိ ပုတ္တိမာ, ဗဟုပုတ္တော. ‘‘သောစတိ ပုတ္တေဟိ ပုတ္တိမာ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ဗဟုပုတ္တော ‘‘ပုတ္တိမာ’’တိ ဝုစ္စတိ. စန္ဒော အဿ အတ္ထီတိ စန္ဒိမာ. စန္ဒောတိ စေတ္ထ စန္ဒဝိမာနမဓိပ္ပေတံ, စန္ဒဝိမာနဝါသီ ပန ဒေဝပုတ္တော ‘‘စန္ဒိမာ’’တိ. တထာ ဟိ ‘‘စန္ဒော ဥဂ္ဂတော, ပမာဏတော စန္ဒော အာယာမဝိတ္ထာရတော ဥဗ္ဗေဓတော စ ဧကူနပညာသယောဇနော, ပရိက္ခေပတော တီဟိ ယောဇနေဟိ ဦနဒိယဍ္ဎသတယောဇနော’’တိအာဒီသု စန္ဒဝိမာနံ ‘‘စန္ဒော’’တိ ဝုတ္တံ. ‘‘တထာဂတံ အရဟန္တံ, စန္ဒိမာ သရဏံ ဂတော’’တိအာဒီသု ပန စန္ဒဒေဝပုတ္တော ‘‘စန္ဒိမာ’’တိ. အပရော နယော – စန္ဒော အဿ အတ္ထီတိ စန္ဒိမာ. စန္ဒောတိ စေတ္ထ စန္ဒဒေဝပုတ္တော အဓိပ္ပေတော, တန္နိဝါသဋ္ဌာနဘူတံ ပန စန္ဒဝိမာနံ ‘‘စန္ဒိမာ’’တိ. တထာ ဟိ ‘‘ရာဟု စန္ဒံ ပမုဉ္စဿု, စန္ဒော မဏိမယဝိမာနေ ဝသတီ’’တိအာဒီသု စန္ဒဒေဝပုတ္တော ‘‘စန္ဒော’’တိ ဝုတ္တော. हे या अर्थाचे साधक (सिद्ध करणारे) वचन आहे. “अत्थदस्सिमा, अत्थदस्सिमा, अत्थदस्सिमन्तो, अत्थदस्सिमन्तं” इत्यादी जाणावे. ज्याच्याकडे पाप आहे तो 'पापिमा' (पापी), म्हणजेच अकुशल राशीने युक्त असलेला मार. ज्याला पुत्र आहेत तो 'पुत्तिमा' (पुत्रवान), म्हणजेच अनेक पुत्रांचा पिता. “पुत्रांमुळे पुत्रवान शोक करतो” येथे अनेक पुत्र असलेल्याला 'पुत्तिमा' म्हटले आहे. ज्याच्याकडे चंद्र आहे तो 'चन्दिमा' (चंद्रमा). येथे 'चन्द' शब्दाने चंद्रविमान अभिप्रेत आहे, आणि चंद्रविमानात राहणारा देवपुत्र म्हणजे 'चन्दिमा' होय. कारण की, “चंद्र उगवला, प्रमाणाने चंद्र लांबी-रुंदीने आणि उंचीने एकोणपन्नास योजन आहे, परिघाने तीन योजनांनी कमी दीडशे योजन आहे” इत्यादींमध्ये चंद्रविमानाला 'चन्द' म्हटले आहे. परंतु “तथागत अरहंतांना चंद्रमा शरण गेला” इत्यादींमध्ये चंद्रदेवपुत्राला 'चन्दिमा' म्हटले आहे. दुसरा प्रकार - ज्याच्याकडे चंद्र आहे तो 'चन्दिमा'. येथे 'चन्द' शब्दाने चंद्रदेवपुत्र अभिप्रेत आहे, आणि त्याचे निवासस्थान असलेले चंद्रविमान म्हणजे 'चन्दिमा' होय. कारण की, “हे राहू, चंद्राला मुक्त कर, चंद्र मणीमय विमानामध्ये राहतो” इत्यादींमध्ये चंद्रदेवपुत्राला 'चन्द' म्हटले आहे. ‘‘ယော ဟဝေ ဒဟရော ဘိက္ခု, ယုဉ္ဇတိ ဗုဒ္ဓသာသနေ; သောမံလောကံပဘာသေတိ, အဗ္ဘာ မုတ္တောဝ စန္ဒိမာ’’တိ “जो खरोखर तरुण भिक्खू बुद्धशासनात स्वतःला जोडतो (साधना करतो), तो या जगाला प्रकाशित करतो, जसा ढगांतून मुक्त झालेला चंद्रमा.” အာဒီသု ပန တန္နိဝါသဋ္ဌာနဘူတံ စန္ဒဝိမာနံ ‘‘စန္ဒိမာ’’တိ ဝုတ္တံ. ဣတိ ‘‘စန္ဒော’’တိ စ ‘‘စန္ဒိမာ’’တိ စ စန္ဒဒေဝပုတ္တဿပိ စန္ဒဝိမာနဿပိ [Pg.197] နာမန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. တတြ ‘‘ပါပိမာ ပုတ္တိမာ စန္ဒိမာ’’တိ ဣမာနိ ပါပသဒ္ဒါဒိတော ‘‘တဒဿတ္ထိ’’ ဣစ္စေတသ္မိံ အတ္ထေ ပဝတ္တဿ ဣမန္တုပစ္စယဿ ဝသေန သိဒ္ဓိမုပါဂတာနီတိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. इत्यादींमध्ये त्याचे निवासस्थान असलेल्या चंद्रविमानाला 'चन्दिमा' म्हटले आहे. अशा प्रकारे 'चन्द' आणि 'चन्दिमा' हे चंद्रदेवपुत्राचे आणि चंद्रविमानाचेही नाव आहे असे जाणावे. त्यामध्ये 'पापिमा, पुत्तिमा, चन्दिमा' हे शब्द 'पाप' इत्यादी शब्दांपासून 'ते त्याचे आहे' (तदस्सत्थि) या अर्थात प्रवृत्त झालेल्या 'इमन्तु' प्रत्ययाच्या बळावर सिद्ध झाले आहेत असे समजावे. နနု စ ဘော မန္တုပစ္စယဝသေနေဝ သာဓေတဗ္ဗာနီတိ? န, ကတ္ထစိပိ အကာရန္တတော မန္တုနော အဘာဝါ. နနု စ ဘော ဧဝံ သန္တေပိ ပါပ ပုတ္တ စန္ဒတော ပဌမံ ဣကာရာဂမံ ကတွာ တတော မန္တုပစ္စယံ ကတွာ သက္ကာ သာဓေတုန္တိ? သက္ကာ ရူပမတ္တသိဇ္ဈနတော, နယော ပန သောဘနော န ဟောတိ. တထာ ဟိ ပါပ ပုတ္တာဒိတော အကာရန္တတော ဣကာရာဂမံ ကတွာ မန္တုပစ္စယေ ဝိဓိယမာနေ အညေဟိ ဂုဏယသာဒီဟိ အကာရန္တေဟိ ဣကာရာဂမံ ကတွာ မန္တုပစ္စယဿ ကာတဗ္ဗတာပသင်္ဂေါ သိယာ. န ဟိ အနေကေသု ပါဠိသတသဟဿေသု ကတ္ထစိပိ အကာရန္တတော ဂုဏ ယသာဒိတော ဣကာရာဂမေန သဒ္ဓိံ မန္တုပစ္စယော ဒိဿတိ, အဋ္ဌာနတ္တာ ပန ပါပ ပုတ္တာဒိတော အကာရန္တတော ဣကာရာဂမံ အကတွာ ဣမန္တုပစ္စယေ ကတေယေဝ ‘‘ပါပိမာ ပုတ္တိမာ’’တိအာဒီနိ သိဇ္ဈန္တီတိ. पण अहो, हे केवळ 'मन्तु' प्रत्ययाच्या बळावरच सिद्ध केले पाहिजेत ना? नाही, कारण कुठेही अ-कारान्त शब्दांनंतर 'मन्तु' प्रत्यय होत नाही. पण अहो, असे असले तरी 'पाप', 'पुत्त', 'चन्द' या शब्दांनंतर आधी 'इ' काराचा आगम करून, त्यानंतर 'मन्तु' प्रत्यय लावून हे सिद्ध करता येऊ शकते ना? केवळ रूपाच्या सिद्धीसाठी हे शक्य आहे, पण हा नियम (नय) योग्य नाही. कारण जर 'पाप', 'पुत्त' इत्यादी अ-कारान्त शब्दांनंतर 'इ' काराचा आगम करून 'मन्तु' प्रत्यय लावला, तर इतर 'गुण', 'यस' इत्यादी अ-कारान्त शब्दांनंतरही 'इ' काराचा आगम करून 'मन्तु' प्रत्यय लावण्याचा प्रसंग येईल. लाखो पाळि वाक्यांमध्ये कुठेही 'गुण', 'यस' इत्यादी अ-कारान्त शब्दांनंतर 'इ' कार आगमासह 'मन्तु' प्रत्यय दिसत नाही. म्हणून अयोग्य असल्यामुळे 'पाप', 'पुत्त' इत्यादी अ-कारान्त शब्दांनंतर 'इ' कार आगम न करता, 'इमन्तु' प्रत्यय लावल्यावरच 'पापिमा', 'पुत्तिमा' इत्यादी रूपे सिद्ध होतात. ဧဝံ သန္တေပိ ဘော ကသ္မာ ကစ္စာယနပ္ပကရဏေ မန္တုပစ္စယောဝ ဝုတ္တော, န ဣမန္တုပစ္စယောတိ? ဒွယမ္ပိ ဝုတ္တမေဝ. ကထံ ဉာယတီတိ စေ? ယသ္မာ တတ္ထ ‘‘တပါဒိတော သီ, ဒဏ္ဍာဒိတော ဣက ဤ, မဓွာဒိတော ရော, ဂုဏာဒိတော ဝန္တူ’’တိ ဣမာနိ စတ္တာရိ သုတ္တာနိ သန္နိဟိတတောဒန္တသဒ္ဒဘာဝေန ဝတွာ မဇ္ဈေ ‘‘သတျာဒီဟိ မန္တူ’’တိ အညထာ သုတ္တံ ဝတွာ တတော သန္နိဟိတတောဒန္တဝသေန ‘‘သဒ္ဓါဒိတော ဏာ’’တိ သုတ္တံ ဝုတ္တံ, တသ္မာ တတ္ထ ‘‘သတျာဒီဟိမန္တူ’’တိ ဝိသဒိသံ ကတွာ ဝုတ္တဿ သုတ္တဿ ဝသေန ဣမန္တု ပစ္စယော စ ဝုတ္တောတိ ဝိညာယတိ. ပကတိ ဟေသာစရိယာနံ ယေန ကေနစိ အာကာရေန အတ္တနော အဓိပ္ပာယဝိညာပနံ. ဧတ္ထ စ ဒုတိယော အတ္ထော သရသန္ဓိဝသေန ဂဟေတဗ္ဗော. တထာ ဟိဿ ‘‘သတျာဒီဟိ မန္တူ’’တိ [Pg.198] ပဌမော အတ္ထော, ‘‘သတျာဒီဟိ ဣမန္တူ’’တိ ဒုတိယော အတ္ထော. ဣတိ ‘‘သေတော ဓာဝတီ’’တိ ပယောဂေ ဝိယ ‘‘သတျာဒီဟိ မန္တူ’’တိ သုတ္တေ ဘိန္နသတ္တိသမဝေတဝသေန အတ္ထဒွယပဋိပတ္တိ ဘဝတိ, တသ္မာ ပရမသုခုမသုဂမ္ဘီရတ္ထဝတာ အနေန သုတ္တေန ကတ္ထစိ သတိ ဂတိ သေတု ဂေါဣစ္စာဒိတော မန္တုပစ္စယော ဣစ္ဆိတော. ကတ္ထစိ သတိ ပါပ ပုတ္တဣစ္စာဒိတော ဣမန္တုပစ္စယော ဣစ္ဆိတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. असे असले तरी, अहो, कच्चायन व्याकरण ग्रंथात (कच्चायनप्पकरणे) केवळ 'मन्तु' प्रत्ययच का सांगितला आहे, 'इमन्तु' प्रत्यय का नाही? दोन्हीही सांगितले आहेत. ते कसे समजते? कारण तेथे “तपादितो सी, दण्डादितो इक ई, मध्वादितो रो, गुणादितो वन्तू” ही चार सूत्रे जवळ असलेल्या अ-कारान्त आणि द-कारान्त शब्दांच्या भावाने सांगून, मध्ये “सत्यादीहि मन्तू” हे वेगळे सूत्र सांगून, त्यानंतर जवळ असलेल्या अ-कारान्त आणि द-कारान्त शब्दांच्या संबंधाने “सद्धादितो णा” हे सूत्र सांगितले आहे. म्हणून तेथे “सत्यादीहि मन्तू” असे भिन्न करून सांगितलेल्या सूत्राच्या बळावर 'इमन्तु' प्रत्यय देखील सांगितला आहे असे समजते. आचार्यांचा हा स्वभावच असतो की कोणत्याही प्रकारे आपला अभिप्राय प्रकट करणे. आणि येथे दुसरा अर्थ स्वरसंधीच्या बळावर घेतला पाहिजे. कारण त्याचा “सत्यादीहि मन्तू” हा पहिला अर्थ आहे, आणि “सत्यादीहि इमन्तू” हा दुसरा अर्थ आहे. अशा प्रकारे “सेतो धावति” (पांढरा धावतो / कुत्रा धावतो) या प्रयोगाप्रमाणे “सत्यादीहि मन्तू” या सूत्रात भिन्न शक्तींच्या समवायामुळे दोन अर्थांचे आकलन होते. म्हणून अत्यंत सूक्ष्म आणि गंभीर अर्थ असलेल्या या सूत्राद्वारे कुठे 'सति, गति, सेतु, गो' इत्यादी शब्दांनंतर 'मन्तु' प्रत्यय अभिप्रेत आहे, तर कुठे 'सति, पाप, पुत्त' इत्यादी शब्दांनंतर 'इमन्तु' प्रत्यय अभिप्रेत आहे असे पाहावे. ယသ္မာ ပန သတိသဒ္ဒေါ မန္တုဝသေန ဂတိဓီသေထုဂေါ ဣစ္စာဒီဟိ, ဣမန္တုဝသေန ပါပပုတ္တာဒီဟိ စ သမာနဂတိကတ္တာ တေသံ ပကာရဘာဝေန ဂဟိတော, တသ္မာ ဧဝံ သုတ္တတ္ထော ဘဝတိ ‘‘သတျာဒီဟိ မန္တု သတိပ္ပကာရေဟိ သဒ္ဒေဟိ မန္တုပစ္စယော ဟောတိ ဣမန္တုပစ္စယော စ ယထာရဟံ ‘တဒဿတ္ထိ’ ဣစ္စေတသ္မိံ အတ္ထေ’’တိ. အယံ ပနေတ္ထ အဓိပ္ပာယော – ယထာ ‘‘သတိမာ’’တိ ဧတ္ထ သတီတိ ဣကာရန္တတော မန္တုပစ္စယော ဟောတိ, တထာ ‘‘ဂတိမာ, ဓီမာ, သေတုမာ, ဂေါမာ’’တိအာဒီသု ဣကာရန္တ ဤကာရန္တ ဥကာရန္တနိစ္စောကာရန္တတော မန္တုပစ္စယော ဟောတိ. ယထာ စ ‘‘သတိမာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘သတီ’’တိ ဣကာရန္တတော ဣမန္တုပစ္စယော ဟောတိ, တထာ ‘‘ဂတိမာ, ပါပိမာ, ပုတ္တိမာ’’တိအာဒီသု ဣကာရန္တ အကာရန္တတော ဣမန္တုပစ္စယော ဟောတိ. ဧဝံ သတိပ္ပကာရေဟိ သဒ္ဒေဟိ ယထာသမ္ဘဝံ မန္တု ဣမန္တုပစ္စယာ ဟောန္တီတိ. परंतु ज्याअर्थी 'सति' शब्द 'मन्तु' प्रत्ययाच्या दृष्टीने 'गति, धी, सेतु, गो' इत्यादींशी आणि 'इमन्तु' प्रत्ययाच्या दृष्टीने 'पाप, पुत्त' इत्यादींशी समान गतीचा (समान स्वरूपाचा) असल्यामुळे त्यांचा प्रकार म्हणून घेतला गेला आहे, म्हणून सूत्राचा अर्थ असा होतो - “सत्यादीहि मन्तु” म्हणजे सति-सारख्या शब्दांनंतर 'ते त्याचे आहे' (तदस्सत्थि) या अर्थात योग्यतेनुसार 'मन्तु' प्रत्यय आणि 'इमन्तु' प्रत्यय होतो. येथे हा अभिप्राय आहे - ज्याप्रमाणे 'सतिमा' येथे 'सति' या इ-कारान्त शब्दाला 'मन्तु' प्रत्यय होतो, त्याचप्रमाणे 'गतिमा, धीमा, सेतुमा, गोमा' इत्यादींमध्ये इ-कारान्त, ई-कारान्त, उ-कारान्त आणि ओ-कारान्त शब्दांनंतर 'मन्तु' प्रत्यय होतो. आणि ज्याप्रमाणे 'सतिमा' येथे 'सति' या इ-कारान्त शब्दाला 'इमन्तु' प्रत्यय होतो, त्याचप्रमाणे 'गतिमा, पापिमा, पुत्तिमा' इत्यादींमध्ये इ-कारान्त आणि अ-कारान्त शब्दांनंतर 'इमन्तु' प्रत्यय होतो. अशा प्रकारे सति-सारख्या शब्दांनंतर यथासंभव 'मन्तु' आणि 'इमन्तु' प्रत्यय होतात. ယဇ္ဇေဝံ ပစ္စယဒွယဝိဓာယကံ ‘‘ဒဏ္ဍာဒိတော ဣက ဤ’’တိ သုတ္တံ ဝိယ ‘‘သတျာဒိတော ဣမန္တု မန္တူ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ, ကသ္မာ နာဝေါစာတိ? တထာ အဝစနေ ကာရဏမတ္ထိ. ယဒိ ဟိ ‘‘ဒဏ္ဍာဒိတော ဣက ဤ’’တိ သုတ္တံ ဝိယ ‘‘သတျာဒိတော ဣမန္တု မန္တူ’’တိ သုတ္တံ ဝုတ္တံ သိယာ, ဧကက္ခဏေယေဝ ဣမန္တု မန္တူနံ ဝစနေန ဒဏ္ဍသဒ္ဒတော သမ္ဘူတံ ‘‘ဒဏ္ဍိကော ဒဏ္ဍီ’’တိ ရူပဒွယမိဝ သတိဂတိအာဒိတောပိ ဝိသဒိသရူပဒွယမိစ္ဆိတဗ္ဗံ သိယာ, တဉ္စ နတ္ထိ, တသ္မာ [Pg.199] ‘‘သတျာဒိတော ဣမန္တု မန္တူ’’တိ န ဝုတ္တံ. အပိစ တထာ ဝုတ္တေ ဗဝှက္ခရတာယ ဂန္ထဂရုတာ သိယာ. ယသ္မာ စ သုတ္တေန နာမ အပ္ပက္ခရေန အသန္ဒိဒ္ဓေန သာရဝန္တေန ဂူဠှနိန္နယေန သဗ္ဗတောမုခေန အနဝဇ္ဇေန ဘဝိတဗ္ဗံ. ကစ္စာယနေ စ ယေဘုယျေန တာဒိသာနိ ဂမ္ဘီရတ္ထာနိ သုဝိသဒဉာဏဝိသယဘူတာနိ သုတ္တာနိ ဒိဿန္တိ ‘‘ဥပါဈဓိကိဿရဝစနေ, သရာ သရေ လောပ’’န္တိအာဒီနိ, ဣဒမ္ပိ တေသမညတရံ, တသ္မာ ‘‘သတျာဒိတော ဣမန္တု မန္တူ’’တိ န ဝုတ္တံ. ဧဝံ သုတ္တောပဒေသေ အကတေပိ ဣမန္တုနောပိ ဂဟဏတ္ထံ ဘိန္နသတ္တိသမဝေတဝသေန ‘‘သတျာဒီဟိ မန္တူ’’တိ ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. जर दोन प्रत्ययांचे विधान करणाऱ्या “दण्डादितो इक ई” (दण्डादि शब्दांहून 'इक' आणि 'ई' प्रत्यय होतात) या सूत्राप्रमाणे “सत्यादितो इमन्तु मन्तू” (सत्यादि शब्दांहून 'इमन्तु' आणि 'मन्तु' प्रत्यय होतात) असे म्हणायला हवे होते, तर मग (व्याकरणकारांनी) तसे का म्हटले नाही? तसे न म्हणण्यामागे कारण आहे. जर खरोखरच “दण्डादितो इक ई” या सूत्राप्रमाणे “सत्यादितो इमन्तु मन्तू” असे सूत्र म्हटले गेले असते, तर एकाच वेळी 'इमन्तु' आणि 'मन्तु' या दोन्ही प्रत्ययांच्या विधानामुळे 'दण्ड' शब्दापासून बनलेल्या “दण्डिको, दण्डी” या दोन रूपांप्रमाणे 'सति', 'गति' इत्यादी शब्दांपासूनही दोन भिन्न रूपांची अपेक्षा करावी लागली असती, परंतु तसे (प्रयोग) आढळत नाहीत. म्हणून “सत्यादितो इमन्तु मन्तू” असे म्हटले नाही. शिवाय, तसे म्हटले असता अधिक अक्षरे असल्यामुळे ग्रंथाचा विस्तार (ग्रंथगौरव) वाढला असता. कारण सूत्रात कमी अक्षरे (अल्पाक्षरत्व), संशयरहितता (असंदिग्धता), सारगर्भितता (सारवत्त्व), गूढ अर्थ (गूळ्हनिन्नयत्व), सर्वतोमुखता आणि निर्दोषता असावी लागते. कच्चायन व्याकरणात बहुतांश करून अशीच गंभीर अर्थ असणारी आणि अत्यंत स्पष्ट ज्ञानाचा विषय असणारी सूत्रे आढळतात, जसे की “उपाज्झधिकिस्सरवचने, सरा सरे लोपं” इत्यादी. हे (प्रस्तुत सूत्र) देखील त्यांपैकीच एक आहे, म्हणून “सत्यादितो इमन्तु मन्तू” असे म्हटले नाही. अशा प्रकारे सूत्राचा उपदेश केला नसला तरी, 'इमन्तु' प्रत्ययाचे ग्रहण करण्यासाठी भिन्न शक्तीच्या समवायामुळे (संयोगामुळे) “सत्यादीहि मन्तू” असे म्हटले आहे, असे समजावे. အပရော နယော – ‘‘တပါဒိတော သီ’’တိအာဒီသု တောဒန္တသဒ္ဒဿ ဗဟုဝစနန္တတာ န သုဋ္ဌု ပါကဋာ တောပစ္စယဿ ဧကတ္ထဗဝှတ္ထေသု ဝတ္တနတော, ‘‘သတျာဒီဟိ မန္တူ’’တိ ဧတ္ထ ပန ဟိသဒ္ဒဿ ဗဟုဝစနတ္ထတာ အတီဝ ပါကဋာ, တသ္မာ ဗဟုဝစနဂ္ဂဟဏေန ဣမန္တု ပစ္စယော ဟောတီတိပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. နနု စ ဘော ဝိနာပိ ဣမန္တုပစ္စယေန ပါပမဿတ္ထီတိ ပါပီ, ပါပီ ဧဝ ပါပိမာတိ သကတ္ထေ မာပစ္စယေ ကတေယေဝ ‘‘ပါပိမာ ပုတ္တိမာ’’တိအာဒီနိ သိဇ္ဈန္တိ ‘‘ဆဋ္ဌမော သော ပရာဘဝေါ’’တိ ဧတ္ထ မပစ္စယေန ‘‘ဆဋ္ဌမော’’တိ ပဒံ ဝိယာတိ? အတိနယညူ ဘဝံ, အတိနယညူ နာမာတိ ဘဝံ ဝတ္တဗ္ဗော, န ပန ဘဝံ သဒ္ဒဂတိံ ဇာနာတိ, သဒ္ဒဂတိယော စ နာမ ဗဟုဝိဓာ. တထာ ဟိ ဆဋ္ဌောယေဝ ဆဋ္ဌမော, ‘‘သုတ္တမေဝ သုတ္တန္တော’’တိအာဒီသု ပုရိသနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ သဒ္ဒဂတိ, ‘‘ဒေဝေါယေဝ ဒေဝတာ’’တိအာဒီသု ကညာနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ သဒ္ဒဂတိ, ‘‘ဒိဋ္ဌိ ဧဝ ဒိဋ္ဌိဂတ’’န္တိအာဒီသု စိတ္တနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ သဒ္ဒဂတိ. ဧဝံဝိဓာသု သဒ္ဒဂတီသု ‘‘ပါပီ ဧဝ ပါပိမာ’’တိအာဒိကံ ကတရံ သဒ္ဒဂတိံ ဝဒေသိ? ‘‘သတ္ထာ ရာဇာ ဗြဟ္မာ သခါ အတ္တာ သာ ပုမာ’’တိအာဒီသု [Pg.200] စ ကတရံ သဒ္ဒဂတိံ ဝဒေသိ? ကတရသဒ္ဒန္တောဂဓံ ကတရာယ စ နာမိကပဒမာလာယံ ယောဇေတဗ္ဗံ မညသီတိ? သော ဧဝံ ပုဋ္ဌော အဒ္ဓါ ဥတ္တရိ ကိဉ္စိ အဒိသွာ တုဏှီ ဘဝိဿတိ, တသ္မာ တာဒိသော နယော န ဂဟေတဗ္ဗော. တာဒိသသ္မိဉှိ နယေ ‘‘ပါပိမတာ ပါပိမတော’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ န သိဇ္ဈန္တိ, ဣမန္တုပစ္စယနယေန ပန သိဇ္ဈန္တိ, တသ္မာ အယမေဝ နယော ပသတ္ထတရော အာယသ္မန္တေဟိ သမ္မာ စိတ္တေ ဌပေတဗ္ဗော. အတြိဒံ နိဒဿနံ – दुसरा प्रकार असा – “तपादितो सी” इत्यादी सूत्रांमध्ये 'तप' शब्दाच्या शेवटी असलेल्या शब्दाची बहुवचनान्तता नीट स्पष्ट होत नाही, कारण 'त' प्रत्यय हा एकवचन आणि बहुवचन या दोन्ही अर्थांमध्ये वापरला जातो. परंतु “सत्यादीहि मन्तू” यामध्ये मात्र 'हि' शब्दाची बहुवचनान्तता अत्यंत स्पष्ट आहे. म्हणून बहुवचनाच्या ग्रहणाने 'इमन्तु' प्रत्यय देखील होतो, असे समजावे. (शंकाकार म्हणतो) “अहो! 'इमन्तु' प्रत्ययाशिवाय देखील 'पापम् अस्य अत्थि' (ज्याला पाप आहे तो) या अर्थी 'पापी' असा शब्द बनतो, आणि 'पापी' हाच 'पापिमा' (पापी पुरुष) असा स्वतःच्याच अर्थात (स्वार्थे) 'म' प्रत्यय केल्यावरच 'पापिमा', 'पुत्तिमा' इत्यादी शब्द सिद्ध होतात; जसे की “छट्ठमो सो पराभवो” (तो सहावा पराभव आहे) येथे 'म' प्रत्ययाने 'छट्ठमो' हे पद सिद्ध होते, तसे का नाही?” (उत्तर) “आपण अत्यंत नीतिज्ञ (अतिनयज्ञ) आहात, आपल्याला 'अतिनयज्ञ' असेच म्हटले पाहिजे! परंतु आपण शब्दांच्या गतीला (शब्दांच्या प्रवृत्तीला किंवा रूपांच्या सिद्धीला) जाणत नाही. शब्दांच्या गती अनेक प्रकारच्या असतात. जसे की, 'छट्ठ' हाच 'छट्ठमो' आहे; “सुत्तमेव सुत्तन्तो” इत्यादींमध्ये पुरुषवाचक पद्धतीने (पुंल्लिंगी रूपाने) शब्दाची गती जोडली पाहिजे. “देवोयेव देवता” इत्यादींमध्ये कन्यावाचक पद्धतीने (स्त्रीलिंगी रूपाने) शब्दाची गती जोडली पाहिजे. “दिट्ठि एव दिट्ठिगतं” इत्यादींमध्ये चित्तवाचक पद्धतीने (नपुंसकलिंगी रूपाने) शब्दाची गती जोडली पाहिजे. अशा प्रकारच्या शब्दांच्या गतींमध्ये “पापी एव पापिमा” इत्यादींना आपण कोणत्या प्रकारची शब्दाची गती म्हणणार? आणि “सत्था, राजा, ब्रह्मा, सखा, अत्ता, सा, पुमा” इत्यादींमध्ये कोणती शब्दाची गती सांगणार? हे कोणत्या शब्दाच्या अंतर्गत येते आणि कोणत्या नामविभक्तीच्या रूपात (नामिकपदमॉलेत) जोडले पाहिजे, असे आपल्याला वाटते?” असे विचारले असता, तो नक्कीच पुढे काहीही न सुचल्यामुळे शांत बसेल. म्हणून तसा प्रकार (नियम) स्वीकारू नये. कारण अशा प्रकारच्या नियमात “पापिमता, पापिमतो” इत्यादी रूपे सिद्ध होत नाहीत, परंतु 'इमन्तु' प्रत्ययाच्या नियमाने ती सिद्ध होतात. म्हणून हाच मार्ग अधिक प्रशस्त आहे, जो आयुष्यमानांनी (पूजनीय भिक्खूंनी) आपल्या मनात चांगल्या प्रकारे धारण करावा. याविषयी हे उदाहरण आहे – ‘‘ဇယော ဟိ ဗုဒ္ဓဿ သိရီမတော အယံ,မာရဿ စ ပါပိမတော ပရာဇယော; ဥဂ္ဃောသယုံ ဗောဓိမဏ္ဍေ ပမောဒိတာ,ဇယံ တဒါ ဒေဝဂဏာ မဟေသိနော’’တိ စ, “हा श्रीमान (तेजस्वी) बुद्धांचा विजय आहे आणि पापी माराचा पराभव आहे; त्यावेळी बोधिमंडळावर प्रसन्न झालेल्या देवगणांनी महर्षींच्या (बुद्धांच्या) या विजयाचा जयघोष केला.” ‘‘သာခါပတ္တဖလူပေတော, ခန္ဓိမာဝမဟာဒုမော’’တိ စ. आणि “फांद्या, पाने आणि फळांनी युक्त असा हा विस्तीर्ण खोड असलेला मोठा वृक्ष आहे.” ပါပိမာ, ပါပိမာ, ပါပိမန္တော. ပါပိမန္တံ. သေသံ နေယျံ, ဧသ နယော ‘‘ခန္ဓိမာ, ပုတ္တိမာ’’တိအာဒီသုပိ. पापिमा (एकवचन), पापिमा (दुसरे रूप), पापिमन्तो (बहुवचन). पापिमन्तं (द्वितीया एकवचन). उर्वरित रूपे याचप्रमाणे जाणावीत. हाच नियम “खन्धिमा, पुत्तिमा” इत्यादी शब्दांनाही लागू होतो. ဣဒါနိ ယထာပါဝစနံ ကိဉ္စိဒေဝ ဟိမဝန္တု သတိမန္တာဒီနံ ဝိသေသံ ဗြူမ. ဟိမဝန္တောဝ ပဗ္ဗတော. သတိမံ ဘိက္ခုံ. ဗန္ဓုမံ ရာဇာနံ. စန္ဒိမံ ဒေဝပုတ္တံ. သတိမဿ ဘိက္ခုနော. ဗန္ဓုမဿ ရညော. ဣဒ္ဓိမဿ စ ပရဿ စ ဧကက္ခဏေ စိတ္တံ ဥပ္ပဇ္ဇတိ. ဣစ္စာဒိ ဝိသေသော ဝေဒိတဗ္ဗော. အပိစေတ္ထ ‘‘အာယသ္မန္တာ’’တိ ဒွိန္နံ ဝတ္တဗ္ဗဝစနံ, ‘‘အာယသ္မန္တော’’တိ ဗဟူနံ ဝတ္တဗ္ဗဝစနန္တိ အယမ္ပိ ဝိသေသော ဝေဒိတဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘ဒွိန္နံ အာရောစေန္တေန ‘အာယသ္မန္တာ ဓာရေန္တူ’တိ, တိဏ္ဏံ အာရောစေန္တေန ‘အာယသ္မန္တော ဓာရေန္တူ’တိ ဝတ္တဗ္ဗ’’န္တိ ဝုတ္တံ. ‘‘တိဏ္ဏ’’န္တိ စေတ္ထ ကထာသီသမတ္တံ, တေန စတုန္နမ္ပိ ပဉ္စန္နမ္ပိ အတိရေကသတာနမ္ပီတိ ဒဿိတံ [Pg.201] ဟောတိ. ဗဟဝေါဟိ ဥပါဒါယ ‘‘ဥဒ္ဒိဋ္ဌာ ခေါ အာယသ္မန္တော စတ္တာရော ပါရာဇိကာ ဓမ္မာ’’တိအာဒိကာ ပါဠိယော ဌပိတာ. တတ္ထ ‘‘အာယသ္မန္တာ’’တိဒံ ဝိနယဝေါဟာရဝသေန ဒွေယေဝ သန္ဓာယ ဝုတ္တတ္တာ န သဗ္ဗသာဓာရဏံ. ဝိနယဝေါဟာရဉှိ ဝဇ္ဇေတွာ အညသ္မိံ ဝေါဟာရေ န ပဝတ္တတိ. ‘‘အာယသ္မန္တော’’တိဒံ ပန သဗ္ဗတ္ထ ပဝတ္တတီတိ ဒွိန္နံ ဝိသေသော ဝေဒိတဗ္ဗော. आता प्रवचनानुसार (बुद्धवचनानुसार) 'हिमवन्तु', 'सतिमन्तु' इत्यादी शब्दांमधील काही विशेष फरक आम्ही सांगतो. 'हिमवन्तो' म्हणजेच पर्वत. 'सतिमं' म्हणजे स्मृतिवान भिक्खू. 'बन्धुमं' म्हणजे बंधू असलेला राजा. 'चन्दिमं' म्हणजे चंद्र देवपुत्र. 'सतिमस्स' म्हणजे स्मृतिवान भिक्खूचा. 'बन्धुमस्स' म्हणजे बंधू असलेल्या राजाचा. 'इद्धिमस्स' (ऋद्धिवान) आणि दुसऱ्याच्या मनात एकाच क्षणी चित्त उत्पन्न होते. अशा प्रकारे यांमधील विशेष फरक समजून घ्यावा. तसेच, येथे 'आयस्मन्ता' हे दोन व्यक्तींसाठी वापरायचे वचन आहे आणि 'आयस्मन्तो' हे अनेकांसाठी वापरायचे वचन आहे, हा देखील विशेष फरक समजून घ्यावा. म्हणूनच म्हटले आहे – “दोघांना सांगताना 'आयस्मन्ता धारेन्तु' (आयुष्यमानांनी धारण करावे) असे म्हणावे आणि तिघांना सांगताना 'आयस्मन्तो धारेन्तु' असे म्हणावे.” येथे 'तिघांना' असे म्हणणे हे केवळ संभाषणाच्या सुरुवातीचे उदाहरण आहे, त्याद्वारे चार, पाच किंवा शंभरहून अधिक व्यक्तींचाही निर्देश होतो. कारण अनेकांना उद्देशूनच “उद्दिट्ठा खो आयस्मन्तो चत्तारो पाराजिका धम्मा” (हे आयुष्यमान हो, चार पाराजिका धर्मांचा उपदेश केला आहे) इत्यादी पाळी (वचने) प्रस्थापित केली आहेत. तेथे 'आयस्मन्ता' हा शब्द विनय नियमांच्या (विनयव्यवहाराच्या) प्रथेनुसार केवळ दोघांनाच उद्देशून वापरला गेल्यामुळे तो सर्वसाधारण नाही. कारण विनयव्यवहार सोडून इतर व्यवहारात त्याचा प्रयोग होत नाही. परंतु 'आयस्मन्तो' हा शब्द सर्व ठिकाणी वापरला जातो, हा दोघांमधील फरक समजून घ्यावा. တတြ ‘‘ဟိမဝန္တော’’တိ ဣဒံ ယေဘုယျေနေကဝစနံ ဘဝတိ, ကတ္ထစိ ဗဟုဝစနမ္ပိ, တေနာဟ နိရုတ္တိပိဋကေ ထေရော ‘‘ဟိမဝါ တိဋ္ဌတိ, ဟိမဝန္တော တိဋ္ဌန္တီ’’တိ. ‘‘ဟိမဝန္တောဝ ပဗ္ဗတော’’တိ အယံ ဧကဝစနနယော ယထာရုတပါဠိဝသေန ဂဟေတဗ္ဗော. ယထာရုတပါဠိ စ နာမ – त्यामध्ये 'हिमवन्तो' हा शब्द बहुतांश करून एकवचनात वापरला जातो, तर काही ठिकाणी बहुवचनातही वापरला जातो. म्हणूनच निरुत्तिपिटकात थेरांनी (स्थविरांनी) म्हटले आहे – “हिमवा तिट्ठति, हिमवन्तो तिट्ठन्ति” (हिमवान पर्वत उभा आहे, हिमवान पर्वत उभे आहेत). “हिमवन्तो व पब्बतो” हा एकवचनाचा नियम मूळ पाळी वचनानुसार ग्रहण करावा. आणि मूळ पाळी वचन असे आहे – ‘‘ဒူရေ သန္တော ပကာသန္တိ, ဟိမဝန္တောဝ ပဗ္ဗတော; အသန္တေတ္ထ န ဒိဿန္တိ, ရတ္တိံ ခိတ္တာ ယထာ သရာ. “सज्जन लोक दूर असले तरी हिमवान पर्वताप्रमाणे चमकतात (प्रकट होतात); तर दुर्जन लोक रात्री मारलेल्या बाणाप्रमाणे जवळ असूनही दिसत नाहीत. အဟံ တေန သမယေန, နာဂရာဇာ မဟိဒ္ဓိကော; အတုလော နာမ နာမေန, ပုညဝန္တော ဇုတိန္ဓရော. त्या काळी मी अतुल नावाचा, महान ऋद्धी असलेला, पुण्यवान आणि तेजस्वी नागराज होतो. ဂတိမန္တော သတိမန္တော, ဓိတိမန္တော စ သော ဣသိ; သဒ္ဓမ္မဓာရကော ထေရော, အာနန္ဒော ရတနာကရော’’ ते ऋषी (बुद्ध) गतीमान, स्मृतिमान आणि धैर्यवान होते; आणि सद्धर्माला धारण करणारे थेर (स्थवीर) आनंद हे रत्नांचे जणू सागरच होते.” ဣစ္စာဒိ. ဧတ္ထ ‘‘ပုညဝန္တော’’တိအာဒီနိ အနေကေသု ဌာနေသု ဗဟုဝစနဘာဝေန ပုနပ္ပုနံ ဝဒန္တာနိပိ ကတ္ထစိ ဧကဝစနာနိ ဟောန္တိ, ဧကဝစနဘာဝေါ စ နေသံ ဂါထာဝိသယေ ဒိဿတိ, တသ္မာ တာနိ ယထာပါဝစနံ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. इत्यादी. येथे 'पुण्णवन्तो' इत्यादी शब्द अनेक ठिकाणी बहुवचन म्हणून वारंवार येत असले, तरी काही ठिकाणी ते एकवचनातही असतात. गाथांच्या (श्लोकांच्या) संदर्भात त्यांचे एकवचनी रूप दिसून येते, म्हणून ते बुद्धवचनानुसार (प्रवचनानुसार) योग्य प्रकारे ग्रहण करावेत. ဧဝံ ဟိမဝန္တုသတိမန္တုသဒ္ဒါဒီနံ ဝိသေသံ ဉတွာ ပုန လိင်္ဂန္တဝသေန ဒွိလိင်္ဂကပဒါနမတ္ထော စ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ စ ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ စ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. अशा प्रकारे 'हिमवन्तु', 'सतिमन्तु' इत्यादी शब्दांमधील विशेष फरक जाणून घेऊन, पुन्हा लिंगभेदानुसार द्विलिंगी पदांचा अर्थ, मूळ रूपांची नामविभक्ती मालिका (नामिकपदमॉला) आणि पदांमधील साम्य व भेद निश्चित करावा. တတြ [Pg.202] ဟိ ‘‘သိရိမာ’’တိ ပဒံ သုတိသာမညဝသေန လိင်္ဂဒွယေ ဝတ္တနတော ဒွိဓာ ဘိဇ္ဇတိ. ‘‘သိရိမာ ပုရိသော’’တိ ဟိ အတ္ထေ အာကာရန္တံ ပုလ္လိင်္ဂံ, ‘‘သိရိမာ နာမ ဒေဝီ’’တိ အတ္ထေ အာကာရန္တံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ, ဥဘယမ္ပေတံ ဥကာရန္တတာပကတိကာ. အထ ဝါ ပန ပစ္ဆိမံ အာကာရန္တတာပကတိကံ, သိရီ ယဿ အတ္ထိ သော သိရိမာတိ ပုလ္လိင်္ဂဝသေန နိဗ္ဗစနံ, သိရီ ယဿာ အတ္ထိ သာ သိရိမာတိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန နိဗ္ဗစနံ. အတြိမာနိ ကိဉ္စာပိ သုတိဝသေန နိဗ္ဗစနတ္ထဝသေန စ အညမညံ သမာနတ္ထာနိ, တထာပိ ပုရိသပဒတ္ထဣတ္ထိပဒတ္ထဝါစကတ္တာ ဘိန္နတ္ထာနီတိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. ဧသ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. သိရိမာ, သိရိမာ, သိရိမန္တော. သိရိမန္တံ, သိရိမန္တေ. သိရိမတာ, သိရိမန္တေန. ဂုဏဝန္တုသဒ္ဒဿေဝ နာမိကပဒမာလာ. သိရိမာ, သိရိမာ, သိရိမာယော. သိရိမံ, သိရိမာ, သိရိမာယော. သိရိမာယ. ဝက္ခမာနကညာနယေန ဉေယျာ. ဧဝံ ဒွိဓာ ဘိန္နာနံ သမာနသုတိကသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာသု ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. သမာနနိဗ္ဗစနတ္ထဿပိ ဟိ အသမာနသုတိကဿ ‘‘သိရိမာ’’တိ သဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာယံ ပဒါနံ ဣမေဟိ ပဒေဟိ ကာစိပိ သမာနတာ န လဗ္ဘတိ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – तेथे 'सिरिमा' (sirimā) हे पद श्रवणसाम्यामुळे (उच्चारसाम्यामुळे) दोन्ही लिंगांत प्रयुक्त होत असल्याने दोन प्रकारे विभागले जाते. 'सिरिमा पुरिसो' (श्रीमंत पुरुष) या अर्थामध्ये ते आकारान्त पुल्लिंगी आहे, आणि 'सिरिमा नाम देवी' (सिरिमा नावाची देवी) या अर्थामध्ये ते आकारान्त स्त्रीलिंगी आहे; हे दोन्ही मूळचे उकारान्त प्रातिपदिक आहेत. किंवा मग, नंतरचे (स्त्रीलिंगी रूप) हे मूळचे आकारान्त प्रातिपदिक आहे. 'श्री (शोभा/संपत्ती) ज्याच्याजवळ आहे तो सिरिमा' अशी पुल्लिंगी व्युत्पत्ती होते, आणि 'श्री ज्याच्याजवळ आहे ती सिरिमा' अशी स्त्रीलिंगी व्युत्पत्ती होते. जरी हे शब्द श्रवणाच्या दृष्टीने आणि व्युत्पत्तीच्या अर्थाच्या दृष्टीने परस्परांशी समान अर्थाचे असले, तरीही पुरुषवाचक अर्थ आणि स्त्रीवाचक अर्थ दर्शविणारे असल्यामुळे ते भिन्न अर्थाचे आहेत असे जाणावे. हाच नियम इतरही अशाच प्रकारच्या ठिकाणी लागू करावा. सिरिमा, सिरिमा, सिरिमन्तो. सिरिमन्तं, सिरिमन्ते. सिरिमता, सिरिमन्तेन. 'गुणवन्तु' शब्दाप्रमाणेच याची नामपदमाला (विभक्ती रूपे) चालते. सिरिमा, सिरिमा, सिरिमायो. सिरिमं, सिरिमा, सिरिमायो. सिरिमाय. पुढे सांगितल्या जाणाऱ्या 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाच्या नियमाप्रमाणे हे जाणावे. अशा प्रकारे दोन प्रकारे विभागलेल्या समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांच्या नामपदमालांमध्ये पदांचे साधर्म्य आणि वैधर्म्य निश्चित केले पाहिजे. कारण समान व्युत्पत्तीचा अर्थ असूनही भिन्न उच्चार असणाऱ्या 'सिरिमा' या शब्दाच्या नामपदमालेतील पदांचे या पदांशी कोणतेही साधर्म्य आढळत नाही. याविषयी असे म्हटले जाते – ‘‘သိရိမာ’’တိ ပဒံ ဒွေဓာ, ပုမိတ္ထီသု ပဝတ္တိတော; ဘိဇ္ဇတီတိ ဝိဘာဝေယျ, ဧတ္ထ ပုလ္လိင်္ဂမိစ္ဆိတံ. 'सिरिमा' हे पद पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंग या दोन्हीमध्ये प्रयुक्त होत असल्याने दोन प्रकारे विभागले जाते, असे स्पष्ट करावे; येथे (प्रस्तुत प्रकरणात) पुल्लिंगी रूप अपेक्षित आहे. ဣတိ အဘိဘဝိတာ ပဒေန ဝိသဒိသာနိ ဂုဏဝါသတိမာဒီနိ ပဒါနိ ဒဿိတာနိ သဒ္ဓိံ နာမိကပဒမာလာဟိ. ဣဒါနိ အပရာနိပိ တဗ္ဗိသဒိသာနိ ပဒါနိ ဒဿေဿာမ သဒ္ဓိံ နာမိကပဒမာလာဟိ. သေယျထိဒံ? अशा प्रकारे 'अभिभविता' या पदाशी विसदृश (भिन्न) असणारी 'गुणवा', 'सतिमा' इत्यादी पदे त्यांच्या नामपदमालांसह (विभक्ती रूपांसह) दर्शविली आहेत. आता आपण त्यांच्याशी विसदृश असणारी इतरही पदे त्यांच्या नामपदमालांसह दर्शवू. ते खालीलप्रमाणे आहेत – ရာဇာ ဗြဟ္မာ သခါ အတ္တာ, အာတုမာ သာ ပုမာ ရဟာ; ဒဠှဓမ္မာ စ ပစ္စက္ခ-ဓမ္မာ စ ဝိဝဋစ္ဆဒါ. राजा, ब्रह्मा, सखा, अत्ता (आत्मा), आतुमा (आत्मा), सा (तो/ती), पुमा (पुरुष), रहा (रह/गुप्त); आणि दळ्हधम्मा (दृढधर्मा), पच्चक्खधम्मा (प्रत्यक्षधर्मा) आणि विवटच्छदा (विवृतच्छद/ज्याने आवरण दूर केले आहे तो). ဝတ္တဟာ [Pg.203] စ တထာ ဝုတ္တ-သိရာ စေဝ ယုဝါပိ စ; မဃဝ အဒ္ဓ မုဒ္ဓါဒိ, ဝိညာတဗ္ဗာ ဝိဘာဝိနာ. तसेच वत्तहा (वृत्रहा/इंद्र), वुत्तसिरा (मुंडित मस्तक असलेला), युवा, मघवा, अद्धा (मार्ग/काळ), मुद्धा (मस्तक) इत्यादी पदे विद्वानांनी जाणून घ्यावीत. ဧတ္ထ ‘‘သာ’’တိ ပဒမေဝ အာကာရန္တတာပကတိကမာကာရန္တံ, သေသာနိ ပန အကာရန္တတာပကတိကာနိ အာကာရန္တာနိ. येथे 'सा' हे पदच मूळचे आकारान्त प्रातिपदिक असून आकारान्त आहे, तर उर्वरित पदे मूळची अकारान्त प्रातिपदिक असून आकारान्त (प्रथमा एकवचनात) बनतात. ရာဇာ, ရာဇာ, ရာဇာနော. ရာဇာနံ, ရာဇံ, ရာဇာနော. ရညာ, ရာဇိနာ, ရာဇူဟိ, ရာဇူဘိ. ရညော, ရာဇိနော, ရညံ, ရာဇူနံ, ရာဇာနံ. ရညာ, ရာဇူဟိ, ရာဇူဘိ. ရညော, ရာဇိနော, ရညံ, ရာဇူနံ, ရာဇာနံ. ရညေ, ရာဇိနိ, ရာဇူသု. ဘော ရာဇ, ဘဝန္တော ရာဇာနော, ဘဝန္တော ရာဇာ ဣတိ ဝါ, အယမမှာကံ ရုစိ. राजा, राजा, राजानो (प्रथमा). राजानं, राजं, राजानो (द्वितीया). रञ्ञा, राजिना, राजूहि, राजूभि (तृतीया). रञ्ञो, राजिनो, रञ्ञं, राजूनां, राजानं (चतुर्थी). रञ्ञा, राजूहि, राजूभि (पंचमी). रञ्ञो, राजिनो, रञ्ञं, राजूनां, राजानं (षष्ठी). रञ्ञे, राजिनि, राजूसु (सप्तमी). भो राज, भवन्तो राजानो, किंवा भवन्तो राजा (संबोधन) – हे आमचे मत (पसंती) आहे. နိရုတ္တိပိဋကာဒီသု ‘‘ရာဇာ’’တိ ဗဟုဝစနံ န အာဂတံ, စူဠနိရုတ္တိယံ ပန အာဂတံ. ကိဉ္စာပိ နိရုတ္တိပိဋကာဒီသု န အာဂတံ, တထာပိ ‘‘နေတာဒိသာ သခါ ဟောန္တိ, လဗ္ဘာ မေ ဇီဝတော သခါ’’တိ ပါဠိယံ ဗဟုဝစနေကဝစနဝသေန ‘‘သခါ’’တိ ပဒဿ ဒဿနတော ‘‘ရာဇာ’’တိ ဗဟုဝစနံ ဣစ္ဆိတဗ္ဗမေဝ. တထာ ‘‘ဗြဟ္မာ, အတ္တာ’’ဣစ္စာဒီနိပိ ဗဟုဝစနာနိ တဂ္ဂတိကတ္တာ ဝိနာ ကေနစိ ရူပဝိသေသေန. निरुत्तिपिटक इत्यादी ग्रंथांमध्ये 'राजा' चे बहुवचन रूप आलेले नाही, परंतु चूळनिरुत्तीमध्ये ते आले आहे. जरी निरुत्तिपिटक इत्यादींमध्ये ते आलेले नसले, तरीही पाळीमध्ये 'नेतादिसा सखा होन्ति, लब्भा मे जीवतो सखा' (असे सखे नसतात, माझ्या जिवंतपणी मला सखे मिळतील) या वाक्यात बहुवचन आणि एकवचनाच्या रूपाने 'सखा' या पदाचा प्रयोग दिसत असल्याने, 'राजा' चे बहुवचन रूप देखील मान्य केलेच पाहिजे. त्याचप्रमाणे 'ब्रह्मा', 'अत्ता' इत्यादींची बहुवचन रूपे देखील कोणत्याही विशेष रूपाशिवाय त्याच नियमाने (तद्गतिकत्वामुळे) सिद्ध होतात. ဧတ္ထ စ ‘‘ဂဟပတိကော နာမ ဌပေတွာ ရာဇံ ရာဇဘောဂံ ဗြာဟ္မဏံ အဝသေသော ဂဟပတိကော နာမာ’’တိ ဒဿနတော ရာဇန္တိ ဝုတ္တံ, ဣဒံ ပန နိရုတ္တိပိဋကေ န အာဂတံ. ‘‘သဗ္ဗဒတ္တေန ရာဇိနာ’’တိ ဒဿနတော ‘‘ရာဇိနာ’’တိ ဝုတ္တံ. ‘‘အာရာဓယတိ ရာဇာနံ, ပူဇံ လဘတိ ဘတ္တုသူ’’တိ ဒဿနတော စတုတ္ထီဆဋ္ဌီဝသေန ‘‘ရာဇာန’’န္တိ ဝုတ္တံ. ကစ္စာယနရူပသိဒ္ဓိဂန္ထေသု ပန ‘‘ရာဇေန, ရာဇေဟိ, ရာဇေဘိ. ရာဇေသူ’’တိ ပဒါနိ ဝုတ္တာနိ. စူဠနိရုတ္တိနိရုတ္တိပိဋကေသု တာနိ နာဂတာနိ, အနာဂတဘာဝေါယေဝ တေသံ ယုတ္တတရော ပါဠိယံ အဒဿနတော, တသ္မာ ဧတ္ထေတာနိ [Pg.204] အမှေဟိ န ဝုတ္တာနိ. ပါဠိနယေ ဟိ ဥပပရိက္ခိယမာနေ ဤဒိသာနိ ပဒါနိ သမာသေယေဝ ပဿာမ, န ပနာညတြ, အတြိမေ ပယောဂါ – ‘‘အာဝုတ္ထံ ဓမ္မရာဇေနာ’’တိ စ, ‘‘သိဝိရာဇေန ပေသိတော’’တိ စ, ‘‘ပဇာပတိဿ ဒေဝရာဇဿ ဓဇဂ္ဂ’’န္တိ စ, ‘‘နိက္ခမန္တေ မဟာရာဇေ, သိဝီနံ ရဋ္ဌဝဍ္ဎနေ’’တိ စ, ဧဝံ ပါဠိနယေ ဥပပရိက္ခိယမာနေ ‘‘ရာဇေနာ’’တိအာဒီနိ သမာသေယေဝ ပဿာမ, န ကေဝလံ ပါဠိနယေ ပေါရာဏဋ္ဌကထာနယေပိ ဥပပရိက္ခိယမာနေ သမာသေယေဝ ပဿာမ, န ပနာညတြ, ဧဝံ သန္တေပိ သုဋ္ဌု ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗမိဒံ ဌာနံ. ကော ဟိ နာမ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ သဗ္ဗသော နယံ သလ္လက္ခေတုံ သမတ္ထော အညတြ ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေဟိ ခီဏာသဝေဟိ. आणि येथे 'गृहपती म्हणजे राजा, राजभोगी आणि ब्राह्मण यांना सोडून उर्वरित सर्व गृहपती होत' या प्रयोगावरून 'राजं' असे म्हटले आहे, परंतु हे निरुत्तिपिटकात आलेले नाही. 'सब्बदत्तेन राजिना' या प्रयोगावरून 'राजिना' असे म्हटले आहे. 'आराधयति राजानं, पूजं लभति भत्तुसू' या प्रयोगावरून चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीच्या अर्थाने 'राजानं' असे म्हटले आहे. कच्चायन आणि रूपसिद्धी ग्रंथांमध्ये मात्र 'राजेन, राजेहि, राजेभि, राजेसु' ही पदे सांगितली आहेत. चूळनिरुत्ती आणि निरुत्तिपिटक यांमध्ये ती आलेली नाहीत; पाळीमध्ये त्यांचा प्रयोग न आढळल्यामुळे ती न येणेच अधिक योग्य आहे, म्हणूनच आम्ही येथे ती सांगितलेली नाहीत. कारण पाळी पद्धतीचे सूक्ष्म निरीक्षण केले असता, अशी पदे केवळ समासातच आढळतात, इतरत्र नाही. येथे हे प्रयोग आहेत – 'आवुत्थं धम्मराजेन' (धम्मराजाने वास्तव्य केले), 'सिविराजेन पेसितो' (सिविराजाने पाठविलेला), 'pajāpatissa devarājassa dhajagga' म्हणजे 'पजापतिस्स देवराजस्स धजग्गं' (प्रजापती देवराजाचा ध्वज), 'निक्खमन्ते महाराजे, सिवीनं रट्ठवड्ढने' (शिवी राष्ट्राची समृद्धी करणाऱ्या महाराजांनी प्रस्थान केले असता). अशा प्रकारे पाळी पद्धतीचे सूक्ष्म निरीक्षण केले असता 'राजेन' इत्यादी पदे केवळ समासातच आढळतात. केवळ पाळी पद्धतीतच नव्हे, तर प्राचीन अट्ठकथांच्या पद्धतीचे सूक्ष्म निरीक्षण केले असता देखील ती केवळ समासातच आढळतात, इतरत्र नाही. असे असले तरी, या विषयाचे चांगल्या प्रकारे परीक्षण केले पाहिजे. कारण अट्ठकथांसह संपूर्ण त्रिपिटक बुद्धवचनातील सर्व नियमांचे पूर्णपणे आकलन करण्यास, ज्यांनी प्रतिसंभिदा प्राप्त केली आहे अशा क्षीणासवांच्या (अर्हंतांच्या) व्यतिरिक्त दुसरा कोण समर्थ असू शकेल? ဧတ္ထ စ သမာသန္တဂတရာဇ-သဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာယော ဒွိဓာ ဝုစ္စန္တေ ဩကာရန္တာကာရန္တဝသေန. တတြောကာရန္တာ ‘‘မဟာရာဇော ယုဝရာဇော သိဝိရာဇော ဓမ္မရာဇော’’ဣစ္စေဝမာဒယော ဘဝန္တိ. အာကာရန္တာ ပန ‘‘မဟာရာဇာ ယုဝရာဇာ သိဝိရာဇာ ဓမ္မရာဇာ’’ဣစ္စေဝမာဒယော. ဧတ္ထ ကိဉ္စာပိ ပါဠိယံ ပေါရာဏဋ္ဌကထာသု စ ‘‘မဟာရာဇော’’တိအာဒီနိ န သန္တိ, တထာပိ ‘‘သဗ္ဗမိတ္တော သဗ္ဗသခေါ, သဗ္ဗဘူတာနုကမ္ပကော’’တိ ပါဠိယံ ‘‘သဗ္ဗသခေါ’’တိ ဒဿနတော ‘‘မဟာရာဇော’’တိအာဒီနိပိ အဝဿမိစ္ဆိတဗ္ဗာနိ. တထာ ဟိ သမာသေသု ‘‘ဓမ္မရာဇေန, ဓမ္မရာဇဿာ’’တိအာဒီနိ ဒိဿန္တိ. ဧတာနိ ဩကာရန္တရူပါနိ ဧဝ, နာကာရန္တရူပါနိ. မဟာရာဇော, မဟာရာဇာ. မဟာရာဇံ, မဟာရာဇေ. မဟာရာဇေန, မဟာရာဇေဟိ, မဟာရာဇေဘိ. မဟာရာဇဿ, မဟာရာဇာနံ. မဟာရာဇာ, မဟာရာဇသ္မာ, မဟာရာဇမှာ, မဟာရာဇေဟိ, မဟာရာဇေဘိ. မဟာရာဇဿ, မဟာရာဇာနံ. မဟာရာဇေ, မဟာရာဇသ္မိံ, မဟာရာဇမှိ, မဟာရာဇေသု. ဘော မဟာရာဇ, ဘဝန္တော မဟာရာဇာ[Pg.205]. ကစ္စာယနစူဠနိရုတ္တိနယေဟိ ပန ‘‘ဘော မဟာရာဇာ’’ဣတိ ဧကဝစနဗဟုဝစနာနိပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ. ယထာ ‘‘မဟာရာဇော’’တိ ဩကာရန္တပဒဿ ဝသေန, ဧဝံ ‘‘သိဝိရာဇော ဓမ္မရာဇော ဒေဝရာဇော’’တိအာဒီနမ္ပိ ဩကာရန္တပဒါနံ ဝသေန ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. आणि येथे समासाच्या शेवटी येणाऱ्या 'राज' शब्दाच्या नामपदमाला ओकारान्त आणि आकारान्त अशा दोन प्रकारे सांगितल्या जातात. त्यापैकी ओकारान्त रूपे 'महाराजो, युवराजो, सिविराजो, धम्मराजो' इत्यादी होतात. तर आकारान्त रूपे 'महाराजा, युवराजा, सिविराजा, धम्मराजा' इत्यादी होतात. येथे जरी पाळीमध्ये आणि प्राचीन अट्ठकथांमध्ये 'महाराजो' इत्यादी रूपे आढळत नसली, तरीही पाळीमध्ये 'सब्बमित्तो सब्बसखो, सब्बभूतानुकम्पको' या वाक्यात 'सब्बसखो' असा प्रयोग दिसत असल्याने 'महाराजो' इत्यादी रूपे देखील अवश्य मान्य केली पाहिजेत. कारण समासांमध्ये 'धम्मराजेन, धम्मराजस्स' इत्यादी रूपे आढळतात. ही ओकारान्त रूपेच आहेत, आकारान्त रूपे नाहीत. महाराजो, महाराजा (प्रथमा). महाराजं, महाराजे (द्वितीया). महाराजेन, महाराजेहि, महाराजेभि (तृतीया). महाराजस्स, महाराजानां (चतुर्थी). महाराजा, महाराजस्मा, महाराजम्हा, महाराजेहि, महाराजेभि (पंचमी). महाराजस्स, महाराजानां (षष्ठी). महाराजे, महाराजस्मिं, महाराजम्हि, महाराजेसु (सप्तमी). भो महाराज, भवन्तो महाराजा (संबोधन). कच्चायन आणि चूळनिरुत्तीच्या नियमांनुसार 'भो महाराजा' अशी एकवचन आणि बहुवचनाची रूपे देखील जाणावीत. ज्याप्रमाणे 'महाराजो' या ओकारान्त पदाच्या आधारे रूपमाला चालते, त्याचप्रमाणे 'सिविराजो, धम्मराजो, देवराजो' इत्यादी ओकारान्त पदांच्या आधारे देखील मूळ रूपाची नामपदमाला योजावी. အယံ ပနာကာရန္တဝသေန နာမိကပဒမာလာ – आणि ही आकारान्त रूपांनुसार नामपदमाला आहे – မဟာရာဇာ, မဟာရာဇာ, မဟာရာဇာနော. မဟာရာဇာနံ, မဟာရာဇံ, မဟာရာဇာနော. မဟာရညာ, မဟာရာဇိနာ, မဟာရာဇူဟိ, မဟာရာဇူဘိ. မဟာရညော, မဟာရာဇိနော, မဟာရညံ, မဟာရာဇူနံ. မဟာရညာ, မဟာရာဇူဟိ, မဟာရာဇူဘိ. မဟာရညော, မဟာရာဇိနော, မဟာရညံ, မဟာရာဇူနံ. မဟာရညေ, မဟာရာဇိနိ, မဟာရာဇူသု. ဘော မဟာရာဇ, ဘဝန္တော မဟာရာဇာနော. महाराजा, महाराजा, महाराजानो (प्रथमा). महाराजानं, महाराजं, महाराजानो (द्वितीया). महाराञ्ञा, महाराजिना, महाराजूहि, महाराजूभि (तृतीया). महाराञ्ञो, महाराजिनो, महाराञ्ञं, महाराजूनं (चतुर्थी). महाराञ्ञा, महाराजूहि, महाराजूभि (पंचमी). महाराञ्ञो, महाराजिनो, महाराञ्ञं, महाराजूनं (षष्ठी). महाराञ्ञे, महाराजिनि, महाराजूसु (सप्तमी). भो महाराज, भवन्तो महाराजानो (संबोधन). ဣဓာပိ ပကရဏဒွယနယေန ‘‘ဘော မဟာရာဇာ’’ ဣတိ ဧကဝစနဗဟုဝစနာနိပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ. ယထာ စ ‘‘မဟာရာဇာ’’တိ အာကာရန္တပဒဿ ဝသေန, ဧဝံ ‘‘သိဝိရာဇာ, ဓမ္မရာဇာ, ဒေဝရာဇာ’’တိအာဒီနမ္ပိ အာကာရန္တပဒါနံ ဝသေန ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. येथे देखील दोन्ही ग्रंथांच्या नियमांनुसार 'भो महाराजा' अशी एकवचन आणि बहुवचनाची रूपे देखील पाहिली पाहिजेत. आणि ज्याप्रमाणे 'महाराजा' या आकारांत शब्दाच्या आधारे रूपमाला चालते, त्याचप्रमाणे 'सिविराजा' (शिविराज), 'धम्मराजा' (धर्मराज), 'देवराजा' (देवराज) इत्यादी आकारांत शब्दांच्या आधारे मूळ रूपाची (प्रातिपदिकाची) नामविभक्ती रूपमाला जोडली पाहिजे. ဣဓ အပရာပိ အတ္ထဿ ပါကဋီကရဏတ္ထံ ကြိယာပဒေဟိ သဒ္ဓိံ ယောဇေတွာ အာကာရန္တောကာရန္တာနံ မိဿကဝသေန နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – येथे अर्थ अधिक स्पष्ट करण्यासाठी क्रियापदांसह जोडून, आकारांत आणि ओकारांत शब्दांची मिश्र नामविभक्ती रूपमाला सांगितली जात आहे – မဟာရာဇာ, မဟာရာဇော တိဋ္ဌတိ, မဟာရာဇာနော, မဟာရာဇာ တိဋ္ဌန္တိ. မဟာရာဇာနံ, မဟာရာဇံ ပဿတိ, မဟာရာဇာနော, မဟာရာဇေ ပဿတိ. မဟာရညာ, မဟာရာဇိနာ, မဟာရာဇေန ကတံ, မဟာရာဇူဟိ, မဟာရာဇူဘိ, မဟာရာဇေဟိ, မဟာရာဇေဘိ ကတံ. မဟာရညော, မဟာရာဇိနော, မဟာရာဇဿ ဒီယတေ, မဟာရညာ, မဟာရာဇာ, မဟာရာဇသ္မာ, မဟာရာဇမှာ နိဿဋံ, မဟာရာဇူဟိ, မဟာရာဇူဘိ, မဟာရာဇေဟိ[Pg.206], မဟာရာဇေဘိ နိဿဋံ. မဟာရညော, မဟာရာဇိနော, မဟာရာဇဿ ပရိဂ္ဂဟော, မဟာရညံ, မဟာရာဇူနံ, မဟာရာဇာနံ ပရိဂ္ဂဟော. မဟာရညေ, မဟာရာဇိနိ, မဟာရာဇေ, မဟာရာဇသ္မိံ, မဟာရာဇမှိ ပတိဋ္ဌိတံ, မဟာရာဇူသု, မဟာရာဇေသု ပတိဋ္ဌိတံ. ဘော မဟာရာဇ တွံ တိဋ္ဌ, ဘောန္တော မဟာရာဇာနော, မဟာရာဇာ တုမှေ တိဋ္ဌထာတိ. ဧဝံ ‘‘ယုဝရာဇာ, ယုဝရာဇော’’တိအာဒီသုပိ. महाराजा, महाराजो तिट्ठति (महाराज उभे आहेत - एकवचन), महाराजानो, महाराजा तिट्ठन्ति (महाराज उभे आहेत - बहुवचन). महाराजानं, महाराजं पस्सति (महाराजांना पाहतो - एकवचन), महाराजानो, महाराजे पस्सति (महाराजांना पाहतो - बहुवचन). महाराञ्ञा, महाराजिना, महाराजेन कतं (महाराजांद्वारे केले गेले - एकवचन), महाराजूहि, महाराजूभि, महाराजेहि, महाराजेभि कतं (महाराजांद्वारे केले गेले - बहुवचन). महाराञ्ञो, महाराजिनो, महाराजस्स दीयते (महाराजांना दिले जाते - एकवचन), महाराञ्ञा, महाराजा, महाराजस्मा, महाराजम्हा निस्सटं (महाराजांपासून निघालेले - एकवचन), महाराजूहि, महाराजूभि, महाराजेहि, महाराजेभि निस्सटं (महाराजांपासून निघालेले - बहुवचन). महाराञ्ञो, महाराजिनो, महाराजस्स परिग्गहो (महाराजांचे स्वामित्व - एकवचन), महाराञ्ञं, महाराजूनं, महाराजानं परिग्गहो (महाराजांचे स्वामित्व - बहुवचन). महाराञ्ञे, महाराजिनि, महाराजे, महाराजस्मिं, महाराजम्हि पतिट्ठितं (महाराजांवर प्रतिष्ठित - एकवचन), महाराजूसु, महाराजेसु पतिट्ठितं (महाराजांवर प्रतिष्ठित - बहुवचन). भो महाराज त्वं तिट्ठ (हे महाराज, तुम्ही उभे राहा - एकवचन), भोन्तो महाराजानो, महाराजा तुम्हे तिट्ठथ (हे महाराज, तुम्ही सर्व उभे राहा - बहुवचन). याचप्रमाणे 'युवराजा, युवराजो' इत्यादी शब्दांच्या बाबतीतही समजावे. ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ ‘‘ကသ္မာ ပကရဏကတ္တုနာ ဣမသ္မိံ ဌာနေ မဟန္တော ဝါယာမော စ မဟန္တော စ ပရက္ကမော ကတော, နနွေတေသုပိ ပဒေသု ကာနိစိ ဗုဒ္ဓဝစနေ ဝိဇ္ဇန္တိ, ကာနိစိ န ဝိဇ္ဇန္တီတိ? ဝိညူဟိ တေ ဧဝံ ဝတ္တဗ္ဗာ ‘‘ပကရဏကတ္တာရေနေတ္ထ သော စ မဟန္တော ဝါယာမော သော စ မဟန္တော ပရက္ကမော သာဋ္ဌကထေ နဝင်္ဂေ သတ္ထုသာသနေ သဒ္ဒေသု စ အတ္ထေသု စ သောတာရာနံ သုဋ္ဌု ကောသလ္လုပ္ပာဒနေန သာသနဿောပကာရတ္ထံ ကတော, ယာနိ စေတာနိ တေန ပဒါနိ ဒဿိတာနိ, ဧတေသု ကာနိစိ ဗုဒ္ဓဝစနေ ဝိဇ္ဇန္တိ, ကာနိစိ န ဝိဇ္ဇန္တိ. ဧတ္ထ ယာနိ ဗုဒ္ဓဝစနေ ဝိဇ္ဇန္တိ, တာနိ ဝိဇ္ဇမာနဝသေန ဂဟိတာနိ. ယာနိ န ဝိဇ္ဇန္တိ, တာနိ ပေါရာဏဋ္ဌကထာဒီသု ဝိဇ္ဇမာနဝသေန ပါဠိနယဝသေန စ ဂဟိတာနီ’’တိ. အတြာယံ သင်္ခေပတော အဓိပ္ပာယဝိဘာဝနာ – येथे काही लोक असे म्हणू शकतील की, 'ग्रंथकर्त्याने या ठिकाणी एवढा मोठा प्रयत्न आणि एवढा मोठा पराक्रम का केला आहे? या शब्दांपैकी काही शब्द बुद्धवचनात आढळतात आणि काही आढळत नाहीत, हे खरे नाही का?' सुज्ञ लोकांनी त्यांना असे सांगावे की, 'ग्रंथकर्त्याने येथे जो मोठा प्रयत्न आणि मोठा पराक्रम केला आहे, तो अट्ठकथा (भाष्य) आणि नवअंग (नवांग) बुद्धशासनातील शब्दांमध्ये आणि अर्थांमध्ये श्रोत्यांना उत्तम कौशल्य प्राप्त करून देऊन शासनाच्या (धम्माच्या) उपकारासाठी केला आहे. आणि त्याने जे शब्द येथे दाखवले आहेत, त्यांपैकी काही बुद्धवचनात आढळतात आणि काही आढळत नाहीत. येथे जे बुद्धवचनात आढळतात, ते विद्यमान असल्यामुळे ग्रहण केले आहेत. जे आढळत नाहीत, ते प्राचीन अट्ठकथा इत्यादींमध्ये विद्यमान असल्यामुळे आणि पाळीच्या नियमांनुसार ग्रहण केले आहेत.' येथे संक्षेपाने अभिप्रेत असलेला अर्थ स्पष्ट केला जात आहे – ‘‘ဣဒံ ဝတွာ မဟာရာဇာ, ကံသော ဗာရာဏသိဂ္ဂဟော; ဓနုံ တူဏိဉ္စ နိက္ခိပ္ပ, သံယမံ အဇ္ဈုပါဂမီ’’တိ ‘असे बोलून वाराणसीचा राजा कंसाने धनुष्य आणि बाणभत्ता खाली ठेवून संयम स्वीकारला.’ ဣဒံ အာကာရန္တဿ မဟာရာဇသဒ္ဒဿ နိဒဿနံ. ယသ္မာ ‘‘သဗ္ဗသခေါ’’တိ ပါဠိ ဝိဇ္ဇတိ, တသ္မာ တေန နယေန ‘‘မဟာရာဇော’’တိပိ ဩကာရန္တော ဒိဋ္ဌော နာမ ဟောတိ ပုရိသနယေန ယောဇေတဗ္ဗော စ. တေနေဝ စ ‘‘တမဗြဝိ မဟာရာဇာ. နိက္ခမန္တေ မဟာရာဇေ’’တိအာဒီနိ ဒိဿန္တိ. हे आकारांत 'महाराजा' शब्दाचे उदाहरण आहे. ज्याअर्थी 'सब्बसखो' अशी पाळी आढळते, त्याअर्थी त्या नियमाने 'महाराजो' हे देखील ओकारांत रूप सिद्ध होते आणि ते 'पुरिस' (पुरुष) शब्दाच्या नियमाप्रमाणे जोडले पाहिजे. म्हणूनच 'तमब्रवि महाराजा' (त्याला महाराज म्हणाले) आणि 'निक्खमन्ते महाराजे' (महाराज बाहेर पडत असताना) इत्यादी प्रयोग आढळतात. ဧဝံ [Pg.207] မဟာရာဇသဒ္ဒဿ ဩကာရန္တတ္တေ သိဒ္ဓေ ‘‘မဟာရာဇာ, မဟာရာဇသ္မာ, မဟာရာဇမှာ’’တိ ပဉ္စမိယာ ဧကဝစနဉ္စ ‘‘မဟာရာဇေ, မဟာရာဇသ္မိံ, မဟာရာဇမှီ’’တိ သတ္တမိယာ ဧကဝစနဉ္စ သိဒ္ဓါနိ ဧဝ ဟောန္တိ ပါဠိယံ အဝိဇ္ဇမာနာနမ္ပိ နယဝသေန ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ. ‘‘ရာဇေန, ရာဇဿာ’’တိအာဒီနိ ပန နယဝသေန ဂဟေတဗ္ဗာနိ န ဟောန္တိ. ကသ္မာတိ စေ? ယသ္မာ ‘‘ရာဇာ ဗြဟ္မာ သခါ အတ္တာ’’ဣစ္စေဝမာဒီနိ ‘‘ပုရိသော ဥရဂေါ’’တိအာဒီနိ ဝိယ အညမညံ သဗ္ဗထာ သဒိသာနိ န ဟောန္တိ. တထာ ဟိ နေသံ ‘‘ရညာ ဗြဟ္မုနာ သခိနာ အတ္တနာ အတ္တေန သာနာ ပုမုနာ’’တိအာဒီနိ ဝိသဒိသာနိပိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ, တသ္မာ တာနိ န သက္ကာ နယဝသေန ဇာနိတုံ. ဧဝံ ဒုဇ္ဇာနတ္တာ ပန ပါဠိယံ ပေါရာဏဋ္ဌကထာသု စ ယထာရုတပဒါနေဝ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. မဟာရာဇသဒ္ဒါဒီနံ ပန ဩကာရန္တဘာဝေ သိဒ္ဓေယေဝ ‘‘ပုရိသနယောဂဓာ ဣမေ သဒ္ဒါ’’တိ နယဂ္ဂဟဏံ ဒိဿတိ, တသ္မာ အမှေဟိ နယဝသေန ‘‘မဟာရာဇာ, မဟာရာဇသ္မာ’’တိအာဒီနိ ဝုတ္တာနိ. ယထာ ဟိ – अशा प्रकारे 'महाराज' शब्दाचे ओकारान्तत्व सिद्ध झाल्यावर, "महाराजा, महाराजस्मा, महाराजम्हा" हे पंचमीचे एकवचन आणि "महाराजे, महाराजस्मिं, महाराजम्हि" हे सप्तमीचे एकवचन सिद्धच होते, कारण पाळिमध्ये ते उपलब्ध नसले तरीही नयाच्या (नियमाच्या) आधारे ते ग्रहण केले पाहिजे. परंतु "राजेन, राजस्स" इत्यादी रूपे नयाच्या आधारे ग्रहण करता येत नाहीत. असे का? कारण "राजा, ब्रह्मा, सखा, अत्ता" इत्यादी रूपे "पुरिसो, उरगो" इत्यादी रूपांप्रमाणे सर्व प्रकारे एकमेकांशी समान नसतात. कारण त्यांची "रञ्ञा, ब्रह्मुना, सखिना, अत्तना, अत्तेन, साना, पुमुना" इत्यादी विसदृश (भिन्न) रूपे देखील होतात, म्हणून ती नयाच्या आधारे जाणणे शक्य नाही. अशा प्रकारे ते जाणणे कठीण असल्यामुळे पाळिमध्ये आणि प्राचीन अट्ठकथांमध्ये जसे शब्द दिले आहेत तसेच ग्रहण केले पाहिजेत. परंतु 'महाराज' इत्यादी शब्दांचे ओकारान्तत्व सिद्ध झाल्यावरच "हे शब्द पुरुष शब्दाच्या नयाचे अनुसरण करणारे आहेत" असे नयाचे ग्रहण दिसते, म्हणून आम्ही नयाच्या आधारे "महाराजा, महाराजस्मा" इत्यादी रूपे सांगितली आहेत. जसे की – ‘‘ဧတဉှိ တေ ဒုရာဇာနံ, ယံ သေသိ မတသာယိကံ; ယဿ တေ ကဍ္ဎမာနဿ, ဟတ္ထာ ဒဏ္ဍောန မုစ္စတီ’’တိ "हे तुझ्यासाठी खरोखरच कठीण आहे, जे तू मृतासारखा निजला आहेस; ज्या तुला ओढले जात असताना, तुझ्या हातातून दंड सुटत नाही." ဧတ္ထ ‘‘ဟတ္ထာ’’တိ, ‘‘အတ္တဒဏ္ဍာ ဘယံ ဇာတ’’န္တိ ဧတ္ထ ပန ‘‘ဒဏ္ဍာ’’တိ စ ဩကာရန္တဿ ပဉ္စမိယေကဝစနဿ ဒဿနတော ‘‘ဥရဂါ, ပဋင်္ဂါ, ဝိဟဂါ’’တိအာဒီနိပိ ဩကာရန္တာနိ ပဉ္စမိယေကဝစနာနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ ဟောန္တိ. ယထာ စ ‘‘ဒါဌိနိ မာတိမညဝှော, သိင်္ဂါလော မမ ပါဏဒေါ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘မညဝှော’’တိ, ‘‘သုဒ္ဓါ သုဒ္ဓေဟိ သံဝါသံ, ကပ္ပယဝှော ပတိဿတာ’’တိ ဧတ္ထ ပန ‘‘ကပ္ပယဝှော’’တိ စ ကြိယာပဒဿ ဒဿနတော ‘‘ဂစ္ဆဝှော, ဘုဉ္ဇဝှော, သယဝှော’’တိအာဒီနိပိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ ဟောန္တိ. ဂဏှန္တိ စ တာဒိသာနိ ပဒရူပါနိ သာသနေ သုကုသလာ ကုသလာ, တသ္မာ အမှေဟိပိ နယဂ္ဂါဟဝသေန ‘‘မဟာရာဇာ[Pg.208], မဟာရာဇသ္မာ’’တိအာဒီနိ ဝုတ္တာနိ. နယဂ္ဂါဟဝသေန ပန ဂဟဏေ အသတိ ကထံ နာမိကပဒမာလာ ပရိပုဏ္ဏာ ဘဝိဿန္တိ, သတိယေဝ တသ္မိံ ပရိပုဏ္ဏာ ဘဝန္တိ. येथे "हत्था" आणि "अत्तदण्डा भयं जातं" येथे "दण्डा" हे ओकारान्त शब्दाचे पंचमी एकवचनाचे रूप दिसून आल्यामुळे "उरगा, पटङ्गा, vihagā" (विहगा) इत्यादी ओकारान्त शब्दांची पंचमी एकवचनाची रूपे देखील ग्रहण केली पाहिजेत. आणि जसे "दाठिनि मातिमञ्ञव्हो, सिङ्गालो मम पाणदो" येथे "मञ्ञव्हो" आणि "सुद्धा सुद्धेहि संवासं, कप्पयव्हो पतिस्सता" येथे "कप्पयव्हो" हे क्रियापदाचे रूप दिसून आल्यामुळे "gacchavho, bhuñjavho, sayavho" (गच्छव्हो, भुञ्जव्हो, सयव्हो) इत्यादी रूपे देखील ग्रहण केली पाहिजेत. आणि शासनात अत्यंत कुशल आणि विद्वान लोक अशा प्रकारची पदरूपे ग्रहण करतात, म्हणूनच आम्ही देखील नयाच्या आधारे "महाराजा, महाराजस्मा" इत्यादी रूपे सांगितली आहेत. जर नयाच्या आधारे ग्रहण केले नाही, तर नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) कशी पूर्ण होतील? नयाच्या आधारे ग्रहण केल्यावरच ती पूर्ण होतात. တထာ ဟိ ဗုဒ္ဓဝစနေ အနေကသတသဟဿာနိ နာမိကပဒါနိ ကြိယာပဒါနိ စ ပါဋိဧက္ကံ ပါဋိဧက္ကံ ဧကဝစနဗဟုဝစနကာဟိ သတ္တဟိ အဋ္ဌဟိ ဝါ နာမဝိဘတ္တီဟိ ဆန္နဝုတိယာ စ အာချာတိကဝစနေဟိ ယောဇိတာနိ န သန္တိ, နယဝသေန ပန သန္တိယေဝ, ဣတိ နယဝသေန ‘‘မဟာရာဇာ, မဟာရာဇသ္မာ’’တိအာဒီနိ အမှေဟိ ဌပိတာနိ. ‘‘မဟာရာဇာ တိဋ္ဌန္တိ, မဟာရာဇာ တုမှေ တိဋ္ဌထာ’’တိ ဣမာနိ ပန ‘‘အထ ခေါ စတ္တာရော မဟာရာဇာ မဟတိယာ စ ယက္ခသေနာယ မဟတိယာ စ ကုမ္ဘဏ္ဍသေနာယာ’’တိ ဒဿနတော, कारण बुद्धवचनात अनेक लाखो नामपदे आणि क्रियापदे स्वतंत्रपणे एकवचन आणि बहुवचनाच्या सात किंवा आठ नामविभक्तींनी आणि शहाण्णव आख्यात प्रत्ययांनी जोडलेली नाहीत, परंतु नयाच्या आधारे ती अस्तित्वात आहेतच. म्हणूनच नयाच्या आधारे आम्ही "महाराजा, महाराजस्मा" इत्यादी रूपे स्थापित केली आहेत. "महाराजा तिट्ठन्ति, महाराजा तुम्हे तिट्ठथ" ही रूपे तर "अथ खो चत्तारो महाराजा महतिया च यक्खसेनाय महतिया च कुम्भण्डसेनाय" या वचनावरून दिसून येतात, ‘‘စတ္တာရော တေ မဟာရာဇာ, သမန္တာ စတုရော ဒိသာ; ဒဒ္ဒဠှမာနာ အဋ္ဌံသု, ဝနေ ကာပိလဝတ္ထဝေ’’တိ "ते चार महाराज, चारही दिशांना; कपिलवस्तूच्या वनात देदीप्यमान होऊन उभे राहिले." ဒဿနတော စ ဝုတ္တာနိ. ‘‘မဟာရာဇ’’န္တိအာဒီနိပိ ပါဠိဉ္စ ပါဠိနယဉ္စ ဒိသွာ ဧဝ ဝုတ္တာနိ. အသမာသေ ‘‘ရာဇံ, ရာဇေနာ’’တိအာဒီနိ န ပဿာမ, တသ္မာ သုဋ္ဌု ဝိစာရေတဗ္ဗမိဒံ ဌာနံ. ဣဒဉှိ ဒုဒ္ဒသံ ဝီရဇာတိနာ ဇာနိတဗ္ဗဋ္ဌာနံ. သစေ ပနာယသ္မန္တော ဗုဒ္ဓဝစနေ ဝါ ပေါရာဏိကာသု ဝါ အဋ္ဌကထာသု အသမာသေ ‘‘ရာဇံ, ရာဇေနာ’’တိအာဒီနိ ပဿေယျာထ, တဒါ သာဓုကံ မနသိ ကရောထ. ကော ဟိ နာမ သဗ္ဗပ္ပကာရေန ဗုဒ္ဓဝစနေ ဝေါဟာရပ္ပဘေဒံ ဇာနိတုံ သမတ္ထော အညတြ ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေဟိ မဟာခီဏာသဝေဟိ. दर्शनावरून (उदाहरणांवरून) असे म्हटले आहे. "महाराज" इत्यादी रूपे देखील पालि आणि पालि-नय (व्याकरण पद्धती) पाहूनच म्हटली गेली आहेत. असमासात (समास नसताना) "राजं, राजेन" इत्यादी रूपे आपल्याला आढळत नाहीत, म्हणून या स्थानाचा चांगला विचार केला पाहिजे. कारण हे स्थान दुर्दर्श (समजण्यास कठीण) असून वीरजातींनी (विद्वान किंवा प्रज्ञावंतांनी) जाणून घेण्यासारखे स्थान आहे. परंतु जर आयुष्यमानांना (तुम्हा पूज्य भिक्खूंना) बुद्धवचनात किंवा प्राचीन अट्ठकथांमध्ये असमासात "राजं, राजेन" इत्यादी रूपे आढळली, तर त्यावर नीट विचार करावा. कारण प्रभिन्न-पटिसम्भिदा (विशेष ज्ञान) प्राप्त झालेल्या महा-खीणासवांच्या (अर्हतांच्या) व्यतिरिक्त दुसरा कोण बुद्धवचनातील सर्व प्रकारच्या व्यावहारिक भेदांना जाणण्यास समर्थ असू शकेल? ဝုတ္တဉှေတံ ဘဂဝတာ – कारण भगवंतांनी असे म्हटले आहे – ‘‘ဝီတတဏှော အနာဒါနော, နိရုတ္တိပဒကောဝိဒေါ; အက္ခရာနံ သန္နိပါတံ, ဇညာ ပုဗ္ဗာပရာနိ စာ’’တိ. "जो तृष्णारहित आणि उपादानरहित (आसक्तीरहित) आहे, जो निरुक्ति (व्याकरण) आणि पदांचा कोविद (कुशल) आहे; त्याने अक्षरांचा संयोग आणि त्यांचा पूर्वापार (क्रम) जाणावा." ဗြဟ္မာ[Pg.209], ဗြဟ္မာ, ဗြဟ္မာနော. ဗြဟ္မာနံ, ဗြဟ္မံ, ဗြဟ္မာနော. ဗြဟ္မုနာ, ဗြဟ္မေဟိ, ဗြဟ္မေဘိ, ဗြဟ္မူဟိ, ဗြဟ္မူဘိ. ဗြဟ္မဿ, ဗြဟ္မုနော, ဗြဟ္မာနံ, ဗြဟ္မူနံ. ဗြဟ္မုနာ, ဗြဟ္မေဟိ, ဗြဟ္မေဘိ, ဗြဟ္မူဟိ, ဗြဟ္မူဘိ. ဗြဟ္မဿ, ဗြဟ္မုနော, ဗြဟ္မာနံ, ဗြဟ္မူနံ. ဗြဟ္မနိ, ဗြဟ္မေသု, ဘော ဗြဟ္မ, ဘော ဗြဟ္မေ, ဘဝန္တော ဗြဟ္မာနော. ब्रह्मा, ब्रह्मा, ब्रह्मानो। ब्रह्मानं, ब्रह्मं, ब्रह्मानो। ब्रह्मुना, ब्रह्मेहि, ब्रह्मेभि, ब्रह्मूहि, ब्रह्मूभि। ब्रह्मस्स, ब्रह्मुनो, ब्रह्मानं, ब्रह्मूनं। ब्रह्मुना, ब्रह्मेहि, ब्रह्मेभि, ब्रह्मूहि, ब्रह्मूभि। ब्रह्मस्स, ब्रह्मुनो, ब्रह्मानं, ब्रह्मूनं। ब्रह्मनि, ब्रह्मेसु, भो ब्रह्म, भो ब्रह्मे, भवन्तो ब्रह्मानो। ယမကမဟာထေရရုစိယာ ‘‘ဘော ဗြဟ္မာ’’ဣတိ ဗဟုဝစနံ ဝါ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ပဏ္ဍိတပုရိသေဟိ ဒေဝေဟိ ဗြဟ္မူဟီ’’တိ ဋီကာဝစနဿ ဒဿနတော, ‘‘ဗြဟ္မူနံ ဝစီဃောသော ဟောတီ’’တိ စ ‘‘ဗြဟ္မူနံ ဝိမာနာဒီသု ဆန္ဒရာဂေါ ကာမာသဝေါ န ဟောတီ’’တိ စ အဋ္ဌကထာဝစနဿ ဒဿနတော, ‘‘ဝိဟိံသသညီ ပဂုဏံ န ဘာသိံ, ဓမ္မံ ပဏီတံ မနုဇေသု ဗြဟ္မေ’’တိ အာဟစ္စဘာသိတဿ စ ဒဿနတော ‘‘ဗြဟ္မူဟိ, ဗြဟ္မူဘိ, ဗြဟ္မူနံ, ဗြဟ္မေ’’တိ ပဒါနိ ဝုတ္တာနိ, ဧတာနိ စူဠနိရုတ္တိနိရုတ္တိပိဋကကစ္စာယနေသု န အာဂတာနိ. यमक महाथेरांच्या आवडीनुसार (मतानुसार) "भो ब्रह्मा" हे बहुवचन देखील होते. परंतु येथे "पण्डितपुरिसेहि देवेहि ब्रह्मूही" (पंडित पुरुषांद्वारे, देवांद्वारे, ब्रह्मांद्वारे) या टीका-वचनाच्या दर्शनावरून, आणि "ब्रह्मूनं वचीघोसो होती" (ब्रह्मांचा वाणीचा घोष असतो) व "ब्रह्मूनं विमानादीसु छन्दरागो कामासवो न होती" (ब्रह्मांच्या विमानादींमध्ये छंदराग आणि कामासव नसतो) या अट्ठकथा-वचनांच्या दर्शनावरून, तसेच "विहिंससञ्ञी पगुणं न भासिं, धम्मं पणीतं मनुजेसु ब्रह्मे" (हिंसासंज्ञी असलेला मी मनुष्यांमध्ये प्रणीत धर्माचे स्पष्ट भाषण केले नाही, हे ब्रह्मा!) या आहतवचनाच्या (थेट वचनाच्या) दर्शनावरून "ब्रह्मूhi, ब्रह्मूभि, ब्रह्मूनं, ब्रह्मे" ही पदे सांगितली आहेत; ही पदे चूळनिरुत्ति, निरुत्तिपिटक आणि कच्चायन व्याकरणामध्ये आलेली नाहीत. သခါ, သခါ, သခိနော, သခါနော, သခါယော. သခံ, သခါရံ, သခါနံ, သခိနော, သခါနော, သခါယော. သခိနာ, သခါရေဟိ, သခါရေဘိ, သခေဟိ, သခေဘိ. သခိဿ, သခိနော, သခီနံ, သခါရာနံ, သခါနံ. သခါရသ္မာ, သခိနာ, သခါရေဟိ, သခါရေဘိ, သခေဟိ, သခေဘိ. သခိဿ, သခိနော, သခီနံ, သခါရာနံ, သခါနံ. သခေ, သခေသု, သခါရေသု. ဘော သခ, ဘော သခါ, ဘော သခိ, ဘော သခီ, ဘော သခေ, ဘဝန္တော သခိနော, သခါနော, သခါယော. सखा, सखा, सखिनो, सखानो, सखायो। सखं, सखारं, सखानं, सखिनो, सखानो, सखायो। सखिना, सखारेहि, सखारेभि, सखेहि, सखेभि। सखिस्स, सखिनो, सखीनं, सखारानं, सखानं। सखारस्मा, सखिना, सखारेहि, सखारेभि, सखेहि, सखेभि। सखिस्स, सखिनो, सखीनं, सखारानं, सखानं। सखे, सखेसु, सखारेसु। भो सख, भो सखा, भो सखि, भो सखी, भो सखे, भवन्तो सखिनो, सखानो, सखायो. ယမကမဟာထေရမတေန ‘‘ဘော သခါ’’ဣတိ ဗဟုဝစနံ ဝါ. ပါဠိယံ ပန သုဝဏ္ဏကက္ကဋဇာတကေ ‘‘ဟရေ သခါ ကိဿ နု မံ ဇဟာသီ’’တိ ဒီဃဝသေန ဝုတ္တော သခါသဒ္ဒေါ အာလပနေကဝစနံ, တသ္မာ ယမကမဟာထေရနယော န ယုဇ္ဇတီတိ စေ[Pg.210]? နော န ယုဇ္ဇတိ. ယသ္မာ ‘‘နေတာဒိသာ သခါ ဟောန္တိ, လဗ္ဘာ မေ ဇီဝတော သခါ’’တိ မနောဇဇာတကေ သခါသဒ္ဒေါ ဧကဝစနမ္ပိ ဟောတိ ဗဟုဝစနမ္ပိ. တထာ ဟိ တတ္ထ ပဌမပါဒေ ဗဟုဝစနံ, ဒုတိယပါဒေ ပနေကဝစနံ, တသ္မာ ယမကမဟာထေရေန ပစ္စတ္တာလပနဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ သခါသဒ္ဒေါ ဝုတ္တော. ဧတ္ထ စ ‘‘သဗ္ဗမိတ္တော သဗ္ဗသခေါ, သဗ္ဗဘူတာနုကမ္ပကော’’တိ ပါဌာနုလောမေန သမာသေ လဗ္ဘမာနဿ သခသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ ‘‘သဗ္ဗသခေါ, သဗ္ဗသခါ, သဗ္ဗသခံ, သဗ္ဗသခေ’’တိအာဒိနာ ပုရိသနယေန. တတြာယံ သမာသဝိဂ္ဂဟော – သဗ္ဗေသံ ဇနာနံ သခါ, သဗ္ဗေ ဝါ ဇနာ သခိနော ဧတဿာတိ သဗ္ဗသခေါ, ယထာ သဗ္ဗဝေရီတိ. यमक महाथेरांच्या मते "भो सखा" हे बहुवचन देखील होते. परंतु जर पालीमधील सुवण्णकक्कट जातकात "हरे सखा किस्स नु मं जहासी" (अरे मित्रा, तू मला का सोडत आहेस?) या या दीर्घ स्वराच्या प्रयोगाने म्हटलेला "सखा" शब्द हा संबोधनाचा एकवचन आहे, त्यामुळे यमक महाथेरांचा नियम योग्य ठरत नाही, असे म्हटले तर? नाही, ते अयोग्य नाही. कारण "नेतादिसा सखा होन्ति, लब्भा मे जीवतो सखा" (असे मित्र नसतात, मी जिवंत राहिलो तर मला मित्र मिळतील) या मनोज जातकात "सखा" शब्द एकवचनातही आहे आणि बहुवचनातही आहे. कारण तेथे पहिल्या पादात बहुवचन आहे, तर दुसऱ्या पादात एकवचन आहे; म्हणूनच यमक महाथेरांनी प्रथमा आणि संबोधनाच्या बहुवचनाच्या ठिकाणी "सखा" शब्द वापरला आहे. आणि येथे "सब्बमित्तो सब्बसखो, सब्बभूतानुकम्पको" (सर्वमित्र, सर्वसखा, सर्व प्राण्यांवर अनुकंपा करणारा) या पाठाच्या अनुषंगाने समासात मिळणाऱ्या "सख" शब्दाची नामविभक्ती रूपे (नामिकपद्माला) "सब्बसखो, सब्बसखा, सब्बसखं, सब्बसखे" इत्यादी प्रकारे "पुरिस" शब्दाप्रमाणे चालतात. तेथे हा समासविग्रह असा आहे – "सब्बेसं जनानं सखा" (सर्व लोकांचा मित्र) या अर्थी किंवा "सब्बे वा जना सखिनो एतस्साति सब्बसखो" (किंवा सर्व लोक ज्याचे मित्र आहेत तो "सब्बसखो"), जसे "सब्बवेरी" (सर्ववैरी) हा शब्द होतो. အတ္တာ, အတ္တာ, အတ္တာနော. အတ္တာနံ, အတ္တံ, အတ္တာနော. အတ္တနာ, အတ္တေန, အတ္တနေဟိ, အတ္တနေဘိ. အတ္တနော, အတ္တာနံ. အတ္တနာ, အတ္တနေဟိ, အတ္တနေဘိ. အတ္တနော, အတ္တာနံ. အတ္တနိ, အတ္တနေသု. ဘော အတ္တ, ဘဝန္တော အတ္တာ, ဘောန္တော အတ္တာနော. अत्ता, अत्ता, अत्तानो। अत्तानं, अत्तं, अत्तानो। अत्तना, अत्तेन, अत्तेहि, अत्तेभि। अत्तनो, अत्तानं। अत्तना, अत्तेहि, अत्तेभि। अत्तनो, अत्तानं। अत्तनि, अत्तेसु। भो अत्त, भवन्तो अत्ता, भोन्तो अत्तानो. ဧတ္ထ ပန အတ္တံ နိရင်္ကတွာန ပိယာနိ သေဝတိ. परंतु येथे "अत्तं निरंकत्वान पियानि सेवति" (स्वतःचा त्याग करून प्रिय गोष्टींचे सेवन करतो). ‘‘သစေ ဂစ္ဆသိ ပဉ္စာလံ, ခိပ္ပ’မတ္တံ ဇဟိဿသိ; မိဂံ ပန္ထာနုပန္နံဝ, မဟန္တံ ဘယမေဿတီ’’တိ "जर तू पंचालात जाशील, तर लवकरच स्वतःचा (जीवाचा) नाश करशील; मार्गावर आलेल्या मृगाप्रमाणे तुला मोठे भय प्राप्त होईल." ပါဠီသု ‘‘အတ္တ’’န္တိ ဒဿနတော ‘‘အတ္တ’’န္တိ ဣဓ ဝုတ္တံ, ‘‘အတ္တေန ဝါ အတ္တနိယေန ဝါ’’တိ ပါဠိဒဿနတော ပန ‘‘အတ္တေနာ’’တိ. စူဠနိရုတ္တိယံ ပန ‘‘အတ္တဿာ’’တိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီနမေကဝစနံ အာဂတံ, ဧတံ ကစ္စာယနေ နိရုတ္တိပိဋကေ စ န ဒိဿတိ. ကတ္ထစိ ပန ‘‘အတ္တေသူ’’တိ အာဂတံ. သဗ္ဗာနေတာနိ သာဋ္ဌကထံ ဇိနတန္တိံ ဩလောကေတွာ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. पालि ग्रंथांमध्ये "अत्तं" असे दर्शन होत असल्यामुळे येथे "अत्तं" असे म्हटले आहे, आणि "अत्तेन वा अत्तनीयेन वा" या पालि-दर्शनावरून "अत्तेन" असे म्हटले आहे. परंतु चूळनिरुत्तीमध्ये "अत्तस्स" हे चतुर्थी आणि षष्ठीचे एकवचन आले आहे, हे कच्चायन आणि निरुत्तिपिटकात दिसत नाही. काही ठिकाणी "अत्तेसु" असेही आले आहे. ही सर्व रूपे अट्ठकथेसह जिनतंती (बुद्धवचन परंपरा) पाहूनच ग्रहण करावीत. ‘‘အာတုမာ[Pg.211], အာတုမာ, အာတုမာနော. အာတုမာနံ, အာတုမံ, အာတုမာနော. အာတုမေန, အာတုမေဟိ, အာတုမေဘီ’’တိအာဒိနာ ပုရိသနယေန ဝတွာ ‘‘ဘော အာတုမ, ဘဝန္တော အာတုမာ, အာတုမာနော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ. "आतुमा, आतुमा, आतुमानो। आतुमानं, आतुमं, आतुमानो। आतुमेन, आतुमेहि, आतुमेभि" इत्यादी प्रकारे "पुरिस" शब्दाप्रमाणे रूपे सांगून "भो आतुम, भवन्तो आतुमा, आतुमानो" असे म्हणावे. တတြ အတ္တသဒ္ဒဿ သမာသေ ‘‘ဘာဝိတတ္တော, ဘာဝိတတ္တာ. ဘာဝိတတ္တံ, ဘာဝိတတ္တေ. ဘာဝိတတ္တေန, ဘာဝိတတ္တေဟိ, ဘာဝိတတ္တေဘီ’’တိ ပုရိသနယေနေဝ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. तेथे "अत्त" शब्दाच्या समासात "भावितत्तो, भावितत्ता। भावितत्तं, भावितत्ते। भावितत्तेन, भावितत्तेहि, भावितत्तेभि" अशा प्रकारे "पुरिस" शब्दाच्या नियमानेच नामविभक्ती रूपे (नामिकपद्माला) योजावीत. သာ, သာ, သာနော. သာနံ, သာနေ. သာနာ, သာနေဟိ, သာနေဘိ. သာဿ, သာနံ. သာနာ, သာနေဟိ, သာနေဘိ. သာဿ, သာနံ. သာနေ, သာနေသု. ဘော သာ, ဘဝန္တော သာနော. သာ ဝုစ္စတိ သုနခေါ. सा, सा, सानो। सानं, साने। साना, सानेहि, सानेभि। सास्स, सानं। साना, सानेहि, सानेभि। सास्स, सानं। साने, सानेसु। भो सा, भवन्तो सानो। "सा" म्हणजे कुत्रा (श्वान) म्हटला जातो. ဧတ္ထ စ ‘‘န ယတ္ထ သာ ဥပဋ္ဌိတော ဟောတိ. သာဝ ဝါရေန္တိ သူကရ’’န္တိ နိဒဿနပဒါနိ. ကေစိ ပန သာသဒ္ဒဿ ဒုတိယာတတိယာဒီသု ‘‘သံ, သေ. သေနာ’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဝဒန္တိ, တံ န ယုတ္တံ. န ဟိ တာနိ ‘‘သံ, သေ. သေနာ’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဗုဒ္ဓဝစနေ စေဝ အဋ္ဌကထာဒီသု စ နိရုတ္တိပိဋကေ စ ဒိဿန္တိ. ဧဝံ ပန နိရုတ္တိပိဋကေ ဝုတ္တံ ‘‘သာ တိဋ္ဌတိ, သာနော တိဋ္ဌန္တိ. သာနံ ပဿတိ, သာနေ ပဿတိ. သာနာ ကတံ, သာနေဟိ ကတံ, သာနေဘိ ကတံ. သာဿ ဒီယတေ, သာနံ ဒီယတေ. သာနာ နိဿဋံ, သာနေဟိ နိဿဋံ, သာနေဘိ နိဿဋံ. သာဿ ပရိဂ္ဂဟော, သာနံ ပရိဂ္ဂဟော. သာနေ ပတိဋ္ဌိတံ, သာနေသု ပတိဋ္ဌိတံ. ဘော သာ, ဘဝန္တော သာနော’’တိ, တသ္မာ နိရုတ္တိပိဋကေ ဝုတ္တနယေနေဝ နာမိကပဒမာလာ ဂဟေတဗ္ဗာ. आणि येथे "न यत्थ सा उपट्ठितो होति" (जिथे कुत्रा उपस्थित नसतो) आणि "साव वारेंति सूकरं" (कुत्रेच डुकराला अडवतात) ही उदाहरणाची पदे आहेत. काही लोक "सा" शब्दाच्या द्वितीया, तृतीया इत्यादी विभक्तींमध्ये "सं, से, सेना" इत्यादी रूपे सांगतात, ते योग्य नाही. कारण ही "सं, से, सेना" इत्यादी रूपे बुद्धवचनात, अट्ठकथांमध्ये आणि निरुत्तिपिटकात आढळत नाहीत. परंतु निरुत्तिपिटकात असे म्हटले आहे – "सा तिट्ठति, सानो तिट्ठन्ति। सानं पस्सति, साने पस्सति। साना कतं, saनेहि कतं, सानेभि कतं। सास्स दीयते, सानं दीयते। साना निस्सटं, सानेहि निस्सटं, सानेभि निस्सटं। सास्स परिग्गहो, सानं परिग्गहो। साने पतिट्ठितं, सानेसु पतिट्ठितं। भो सा, भवन्तो सानो" इति, म्हणून निरुत्तिपिटकात सांगितलेल्या नियमानेच नामविभक्ती रूपे (नामिकपद्माला) ग्रहण करावीत. အတြိဒံ [Pg.212] ဝတ္တဗ္ဗံ – ယထာ ‘‘သေဟိ ဒါရေဟိ အသန္တုဋ္ဌော’’တိအာဒီသု ပုလ္လိင်္ဂေ ဝတ္တမာနဿ ‘‘သကော’’ဣတိ အတ္ထဝါစကဿ သသဒ္ဒဿ ‘‘အတ္တနော အယန္တိ သော’’တိ ဧတသ္မိံ အတ္ထေ ‘‘သော, သာ. သံ, သေ. သေန, သေဟိ, သေဘိ. သဿ, သာနံ. သာ, သသ္မာ, သမှာ, သေဟိ, သေဘိ. သဿ, သာနံ. သေ, သသ္မိံ, သမှိ, သေသူ’’တိ ပုရိသနယေန ရူပါနိ ဘဝန္တိ, န တထာ သုနခဝါစကဿ သာသဒ္ဒဿ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ယထာ ဝါ ‘‘ဟိံသန္တိ အတ္တသမ္ဘူတာ, တစသာရံဝ သံ ဖလံ. သာနိ ကမ္မာနိ တပ္ပေန္တိ, ကောသလံ သေန’သန္တုဋ္ဌံ, ဇီဝဂ္ဂါဟံ အဂါဟယီ’’တိအာဒီသု နပုံသကလိင်္ဂေ ဝတ္တမာနဿ သကမိစ္စတ္ထဝါစကဿ သသဒ္ဒဿ ‘‘သံ, သာနိ, သာ. သံ, သာနိ, သေ. သေန, သေဟိ, သေဘိ. သဿ, သာနံ. သာ, သသ္မာ, သမှာ, သေဟိ, သေဘိ. သဿ, သာနံ. သေ, သသ္မိံ, သမှိ, သေသူ’’တိ စိတ္တနယေန ရူပါနိ ဘဝန္တိ, န တထာ သုနခဝါစကဿ သာသဒ္ဒဿ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ တေဟိ အာစရိယေဟိ ဒုတိယာတတိယာဌာနေ ‘‘သံ, သေ. သေနာ’’တိ ဝုတ္တံ, ကသ္မာ စ ပဉ္စမီဌာနေ ‘‘သာ, သသ္မာ, သမှာ’’တိ ဝုတ္တံ, သတ္တမီဌာနေ စ ‘‘သေ, သသ္မိံ, သမှီ’’တိ စ ဝုတ္တံ? သဗ္ဗမေတံ အကာရဏံ, တက္ကဂါဟမတ္တေန ဂဟိတံ အကာရဏံ. သုနခဝါစကော ဟိ သာသဒ္ဒေါ အာကာရန္တတာပကတိကော, န ပုရိသ စိတ္တသဒ္ဒါဒယော ဝိယ အကာရန္တတာပကတိကော. ယာယ ဣမဿ ဤဒိသာနိ ရူပါနိ သိယုံ, သာ စ ပကတိ နတ္ထိ. န စေသော ‘‘ရာဇာ, ဗြဟ္မာ, သခါ, အတ္တာ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ဝိယ ပဌမံ အကာရန္တဘာဝေ ဌတွာ ပစ္ဆာ ပဋိလဒ္ဓအာကာရန္တတာ, အထ ခေါ နိစ္စမောကာရန္တတာပကတိကော ဂေါသဒ္ဒေါ ဝိယ နိစ္စမာကာရန္တတာပကတိကော. နိစ္စမာကာရန္တတာပကတိကဿ စ ဧဝရူပါနိ ရူပါနိ န ဘဝန္တိ, တသ္မာ နိရုတ္တိပိဋကေ ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေန အာယသ္မတာ မဟာကစ္စာယနေန န ဝုတ္တာနိ. သစေပိ မညေယျုံ ‘‘အတ္တံ, အတ္တေနာ’တိ [Pg.213] စ ဒဿနတော ‘သံ, သေနာ’တိ ဣမာနိ ပန ဂဟေတဗ္ဗာနီ’’တိ. န ဂဟေတဗ္ဗာနိ ‘‘ရာဇာ, ဗြဟ္မာ, သခါ, အတ္တာ, သာ, ပုမာ’’ဣစ္စေဝမာဒီနံ အညမညံ ပဒမာလာဝသေန ဝိသဒိသတ္တာ နယဝသေန ဂဟေတဗ္ဗာကာရဿ အသမ္ဘဝတော. ဤဒိသေ ဟိ ဌာနေ နယဂ္ဂါဟဝသေန ဂဟဏံ နာမ သဒေါသံယေဝ သိယာ, တသ္မာ နယဂ္ဂါဟဝသေနပိ န ဂဟေတဗ္ဗာနိ. येथे हे सांगणे आवश्यक आहे – ज्याप्रमाणे ‘सेहि दारेहि असन्तुट्ठो’ (आपल्या पत्नीने असंतुष्ट) इत्यादींमध्ये पुल्लिंगात वर्तमान असलेल्या, ‘स्वतःचा’ (सको) या अर्थाचा वाचक असलेल्या ‘स’ शब्दाची, ‘तो स्वतःचा आहे’ (अत्तनो अयन्ति सो) या अर्थामध्ये “सो, सा. सं, से. सेन, सेहि, सेभि. सस्स, सानं. सा, सस्मा, सम्हा, सेहि, सेभि. सस्स, सानं. से, सस्मिं, सम्हि, सेसू” अशी ‘पुरिस’ (पुरुष) शब्दाच्या नियमाने रूपे होतात, तशी ‘कुत्रा’ (सुनख) वाचक ‘सा’ शब्दाची रूपे होत नाहीत. किंवा ज्याप्रमाणे “हिंसन्ति अत्तसम्भुता, तचसारंव सं फलं. सानि कम्मानि तप्पेंति, कोसलं सेन’सन्तुट्ठं, जीवग्गाहं अगाहयी” इत्यादींमध्ये नपुंसकलिंगात वर्तमान असलेल्या, ‘स्वतःचा’ (सक) या अर्थाचा वाचक असलेल्या ‘स’ शब्दाची “सं, सानि, सा. सं, सानि, से. सेन, सेहि, सेभि. सस्स, सानं. सा, सस्मा, सम्हा, सेहि, सेभि. सस्स, सानं. से, सस्मिं, सम्हि, सेसू” अशी ‘चित्त’ शब्दाच्या नियमाने रूपे होतात, तशी ‘कुत्रा’ वाचक ‘सा’ शब्दाची रूपे होत नाहीत. असे असताना, त्या आचार्यांनी द्वितीया व तृतीया विभक्तीच्या ठिकाणी ‘सं, से. सेना’ असे का म्हटले आहे, आणि पंचमीच्या ठिकाणी ‘सा, सस्मा, सम्हा’ असे का म्हटले आहे, आणि सप्तमीच्या ठिकाणी ‘से, सस्मिं, सम्हि’ असे का म्हटले आहे? हे सर्व अकारण (निराधार) आहे, केवळ तर्काने ग्रहण केलेले अकारण आहे. कारण कुत्रा वाचक ‘सा’ शब्द हा आकारांत प्रकृतीचा (मूळ रूपाचा) आहे, ‘पुरिस’ किंवा ‘चित्त’ शब्दाप्रमाणे अकारांत प्रकृतीचा नाही. ज्याच्यामुळे याची अशी रूपे व्हावीत, ती प्रकृती (मूळ रूप) येथे नाही. आणि हा ‘राजा, ब्रह्मा, सखा, अत्ता’ इत्यादी शब्दांप्रमाणे आधी अकारांत भावात राहून नंतर आकारांतत्व प्राप्त झालेला नाही, तर नेहमी ओकारांत प्रकृती असलेल्या ‘गो’ शब्दाप्रमाणे नेहमी आकारांत प्रकृतीचाच आहे. आणि नेहमी आकारांत प्रकृती असलेल्या शब्दाची अशी रूपे होत नाहीत, म्हणूनच निरुत्तिपिटकात प्रभिन्नपटिसम्भिदा (प्रभेद-प्रतिसंविदा) प्राप्त पूजनीय महाकच्चायन यांनी ती सांगितलेली नाहीत. जरी असे मानले की ‘अत्तं, अत्तेना’ इत्यादी दर्शनावरून ‘सं, सेना’ ही रूपे ग्रहण करावीत, तरी ती ग्रहण करू नयेत. कारण “राजा, ब्रह्मा, सखा, अत्ता, सा, पुमा” इत्यादींची परस्परांच्या पदमाळेनुसार विसदृशता (भिन्नता) असल्यामुळे, नियमाच्या (नय) आधारे ग्रहण करण्यायोग्य रूप असणे असंभव आहे. अशा ठिकाणी केवळ नियमाच्या आधारे ग्रहण करणे दोषयुक्तच ठरेल, म्हणून नियमाच्या आधारे देखील ती ग्रहण करू नयेत. အပရမ္ပိ အတြ ဝတ္တဗ္ဗံ – ယထာ ဟိ ‘‘သာဟိ နာရီဟိ တေ ယန္တီ’’တိ ဝုတ္တေ ‘‘အတ္တနော နာရီ’’တိ, ‘‘သာ နာရီ’’တိ ဧဝံ အတ္ထဝတော ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ကညာသဒ္ဒေန သဒိသဿ သာသဒ္ဒဿ ‘‘သာ, သာ, သာယော. သံ, သာ, သာယော. သာယ, သာဟိ, သာဘိ. သာယ, သာနံ. သာယ, သာဟိ, သာဘိ. သာယ, သာနံ. သာယ, သာယံ, သာသူ’’တိ ကညာနယေန ရူပါနိ ဘဝန္တိ, န တထာ ဣမဿ သုနခဝါစကဿ သာသဒ္ဒဿ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ တေ အာစရိယာ တတိယာဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ စ ‘‘သာဟိ, သာဘီ’’တိ ရူပါနိ ဣစ္ဆန္တိ, ကသ္မာ စ သတ္တမီဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘သာသူ’’တိ? ဣဒမ္ပိ အကာရဏံ အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂတ္တာ. ကသ္မာ စ ပန စတုတ္ထီဆဋ္ဌေကဝစနဋ္ဌာနေ ပုဗ္ဗက္ခရဿ ရဿဝသေန ‘‘သဿ’’ဣတိ ရူပံ ဣစ္ဆန္တိ? ဣဒမ္ပိ အကာရဏံ သုနခဝါစကဿ သာသဒ္ဒဿ အာကာရန္တတာပကတိကတ္တာ. အာကာရန္တတာပကတိကဿ စ သာသဒ္ဒဿ ယထာ အကာရန္တတာပကတိကဿ ပုရိသသဒ္ဒဿ ‘‘ပုရိသဿာ’’တိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌေကဝစနရူပံ ဘဝတိ ဧဝရူပဿ ရူပဿ အဘာဝတော. တေနေဝ အာယသ္မာ ကစ္စာနော နိရုတ္တိပိဋကေ သုနခဝါစကဿ သာသဒ္ဒဿ ရူပံ ဒဿေန္တော စတုတ္ထီဆဋ္ဌေကဝစနဋ္ဌာနေ ပုဗ္ဗက္ခရဿ ဒီဃဝသေန ‘‘သာဿ’’ဣတိ ရူပမာဟ. ကသ္မာ စ ပန တေ အာစရိယာ စတုတ္ထေကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘သာယ’’ဣတိ ရူပံ ဣစ္ဆန္တိ? ဣဒမ္ပိ အကာရဏံ, ဌပေတွာ ဟိ အာကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂေ ဃသညတော အာကာရတော ပရေသံ နာဒီနံ အာယာဒေသဉ္စ အကာရန္တတော ပုန္နပုံသကလိင်္ဂတော [Pg.214] ပရဿ စတုတ္ထေကဝစနဿ အာယာဒေသဉ္စ အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂေ အဃတော အာကာရန္တတော ပရဿ စတုတ္ထေကဝစနဿ ကတ္ထစိပိ အာယာဒေသော န ဒိဿတိ. နိရုတ္တိပိဋကေ စ တာဒိသံ ရူပံ န ဝုတ္တံ, အဝစနံယေဝ ယုတ္တတရံ ဗုဒ္ဓဝစနေ အဋ္ဌကထာဒီသု စ အနာဂမနတော. ယာ ပနမှေဟိ နိရုတ္တိပိဋကံ နိဿာယ ဗုဒ္ဓဝစနဉ္စ သုနခဝါစကဿ သာသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုတ္တာ, သာယေဝ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထာပိ နာနာအတ္ထေသု ဝတ္တမာနာနံ လိင်္ဂတ္တယပရိယာပန္နာနံ သာ သော သံဣစ္စေတေသံ တိဏ္ဏံ ပဒါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာသု ပဒါနံ သဒိသာသဒိသတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. येथे आणखी एक गोष्ट सांगणे आवश्यक आहे – ज्याप्रमाणे “साहि नारीहि ते यन्ती” (त्या आपल्या स्त्रियांसोबत ते जातात) असे म्हटले असता ‘स्वतःची स्त्री’ (अत्तनो नारी), ‘ती स्त्री’ (सा नारी) अशा अर्थाच्या, ‘कञ्ञा’ (कन्या) शब्दासारख्या स्त्रीलिंगी ‘सा’ शब्दाची “सा, सा, सायो. सं, सा, सायो. साय, साहि, साभि. साय, सानं. साय, साहि, साभि. साय, सानं. साय, सायं, सासू” अशी ‘कञ्ञा’ शब्दाच्या नियमाने रूपे होतात, तशी या कुत्रा वाचक ‘सा’ शब्दाची रूपे होत नाहीत. असे असताना, ते आचार्य तृतीया बहुवचनाच्या ठिकाणी ‘साहि, साभि’ अशी रूपे का इच्छितात (मानतात), आणि सप्तमी बहुवचनाच्या ठिकाणी ‘सासू’ असे का मानतात? हे देखील अकारण आहे, कारण हा आकारांत पुल्लिंगी शब्द आहे. आणि चतुर्थी व षष्ठी एकवचनाच्या ठिकाणी पूर्व अक्षराच्या र्हस्वतेमुळे ‘सस्स’ असे रूप का मानतात? हे देखील अकारण आहे, कारण कुत्रा वाचक ‘सा’ शब्द हा आकारांत प्रकृतीचा आहे. आणि आकारांत प्रकृती असलेल्या ‘सा’ शब्दाचे, ज्याप्रमाणे अकारांत प्रकृती असलेल्या ‘पुरिस’ शब्दाचे ‘पुरिसस्स’ असे चतुर्थी व षष्ठी एकवचनाचे रूप होते, तसे रूप असणे शक्य नाही. म्हणूनच आयुष्यमान कच्चायन यांनी निरुत्तिपिटकात कुत्रा वाचक ‘सा’ शब्दाचे रूप दाखवताना चतुर्थी व षष्ठी एकवचनाच्या ठिकाणी पूर्व अक्षराच्या दीर्घतेमुळे ‘सास्स’ असे रूप सांगितले आहे. आणि ते आचार्य चतुर्थी एकवचनाच्या ठिकाणी ‘साय’ असे रूप का मानतात? हे देखील अकारण आहे, कारण आकारांत स्त्रीलिंगात ‘घ’ संज्ञक आकाराच्या पुढील ‘ना’ इत्यादींच्या जागी ‘आय’ आदेश होणे आणि अकारांत पुल्लिंग व नपुंसकलिंगाच्या पुढील चतुर्थी एकवचनाच्या जागी ‘आय’ आदेश होणे सोडून, आकारांत पुल्लिंगात ‘अघ’ संज्ञक आकाराच्या पुढील चतुर्थी एकवचनाच्या जागी कुठेही ‘आय’ आदेश दिसत नाही. आणि निरुत्तिपिटकात तसे रूप सांगितलेले नाही, बुद्धवचनात आणि अट्ठकथा इत्यादींमध्ये ते आलेले नसल्यामुळे ते न सांगणेच अधिक योग्य आहे. परंतु आम्ही निरुत्तिपिटक आणि बुद्धवचनाचा आधार घेऊन कुत्रा वाचक ‘सा’ शब्दाची जी नामपदमाळा (विभक्ती रूपे) सांगितली आहे, तीच प्रमाण मानली पाहिजे. येथेही वेगवेगळ्या अर्थांमध्ये वर्तमान असलेल्या आणि तिन्ही लिंगांत समाविष्ट असलेल्या ‘सा’, ‘सो’, ‘सं’ या तीन शब्दांच्या मूळ रूपाच्या नामपदमाळांमध्ये शब्दांचे सादृश्य आणि वैसादृश्य (सारखेपणा आणि वेगळेपणा) पाहिले पाहिजे. ဧတ္ထ သိယာ – ယော တုမှေဟိ သာသဒ္ဒေါ ‘‘တံသဒ္ဒတ္ထေ စ သုနခေ စ သကမိစ္စတ္ထေ စ ဝတ္တတီ’’တိ ဣစ္ဆိတော, ကထံ တံ ‘‘သာ’’တိ ဝုတ္တေယေဝ ‘‘ဣမဿ အတ္ထဿ ဝါစကော’’တိ ဇာနန္တီတိ? န ဇာနန္တိ, ပယောဂဝသေန ပန ဇာနန္တိ လောကိယဇနာ စေဝ ပဏ္ဍိတာ စ. ပယောဂဝသေန ဟိ ‘‘သာ မဒ္ဒီ နာဂမာရုဟိ, နာတိဗဒ္ဓံဝ ကုဉ္ဇရ’’န္တိအာဒီသု သာသဒ္ဒဿ တံသဒ္ဒတ္ထတာ ဝိညာယတိ, ဧဝံ သာသဒ္ဒေါ တံသဒ္ဒတ္ထေ စ ဝတ္တတိ. ‘‘န ယတ္ထ သာ ဥပဋ္ဌိတော ဟောတိ. ဘဂဝတော သာဇာတိမ္ပိ သုတွာ သတ္တာ အမတရသဘာဂိနော ဘဝန္တီ’’တိအာဒီသု သာသဒ္ဒဿ သုနခဝါစကတာ ဝိညာယတိ. येथे अशी शंका उपस्थित होऊ शकते – तुम्ही जो ‘सा’ शब्द “तो (तद्) शब्दाच्या अर्थात, कुत्र्याच्या अर्थात आणि स्वतःच्या (स्वक) अर्थात वापरला जातो” असे मानले आहे, तर केवळ ‘सा’ असे म्हटले असता “हा या अर्थाचा वाचक आहे” हे लोक कसे जाणतात? ते केवळ शब्दाने जाणत नाहीत, तर प्रयोगाच्या (संदर्भाच्या) आधारे सामान्य लोक आणि पंडित देखील जाणतात. प्रयोगाच्या आधारेच “सा मद्दी नागमारुहि, नातिबद्धंव कुञ्जरं” (ती मद्दी हत्तीवर चढली...) इत्यादींमध्ये ‘सा’ शब्दाचा ‘तो’ (तद्) हा अर्थ समजतो, अशा प्रकारे ‘सा’ शब्द ‘तो’ या अर्थात वापरला जातो. “न यत्थ सा उपट्ठितो होति” (जिथे तो कुत्रा उपस्थित नसतो) आणि “भगवतो साजातिम्पि सुत्वा सत्ता अमतरसभागिनो भवन्ति” (भगवंतांच्या कुत्र्याची जात/उत्पत्ती ऐकूनही प्राणी अमृत रसाचे भागीदार होतात) इत्यादींमध्ये ‘सा’ शब्दाचा ‘कुत्रा’ हा अर्थ समजतो. ‘‘အန္နံ တဝေဒံ ပကတံ ယသဿိ,တံ ခဇ္ဇရေ ဘုဉ္ဇရေ ပိယျရေ စ; ဇာနာသိ မံ တွံ ပရဒတ္တူပဇီဝိံ,ဥတ္တိဋ္ဌပိဏ္ဍံ လဘတံ သပါကော’’တိ “हे यशस्वी! हे अन्न तुझ्यासाठी तयार केले आहे, ते खाल्ले जाते, भोगले जाते आणि प्यायले जाते; तू मला दुसऱ्याने दिलेल्या अन्नावर जगणारा समज, चंडाल (सपाको - कुत्र्यांसह शिजवून खाणारा किंवा कुत्र्यांचा मालक) देखील उरलेले अन्न (उत्तिट्ठपिण्डं) मिळवो.” ဧတ္ထ ပန သာသဒ္ဒဿ ရဿဘာဝကရဏေန ‘‘သပါကော’’တိ ပါဠိ ဌိတာတိ အတ္ထံ အဂ္ဂဟေတွာ ‘‘သာနံ သုနခါနံ ဣဒံ မံသန္တိ သ’’မိတိ အတ္ထံ ဂဟေတွာ ‘‘သံ ပစတီတိ သပါကော’’တိ ဝုတ္တန္တိ [Pg.215] ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘သပါကောတိ သပါကစဏ္ဍာလော’’ ဣစ္စေဝ ဝုတ္တံ. တမ္ပိ ဧတဒေဝတ္ထံ ဒီပေတိ. ဧဝံ သာသဒ္ဒေါ သုနခေ စ ဝတ္တတိ. ‘‘သာ ဒါရာ ဇန္တူနံ ပိယာ’’တိ ဝုတ္တေ ပန ‘‘သကာ ဒါရာ သတ္တာနံ ပိယာ’’တိ အတ္ထဒီပနဝသေန သာသဒ္ဒဿ သကဝါစကတာ ပညာယတိ. ဧဝံ သာသဒ္ဒေါ သကမိစ္စတ္ထေ စ ဝတ္တတိ. ဣတိ သာသဒ္ဒံ ပယောဂဝသေန ဤဒိသတ္ထဿ ဝါစကောတိ ဇာနန္တိ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – येथे 'सा' शब्दाचा र्हस्व भाव केल्याने "सपाको" अशी पाळि राहिली आहे, असा अर्थ न घेता, "सां म्हणजे कुत्र्यांचे हे मांस आहे" असा अर्थ घेऊन "सां पचतीति सपाको" (जो कुत्र्याचे मांस शिजवतो तो सपाक) असे म्हटले आहे, असे समजावे. परंतु अट्ठकथेमध्ये "सपाको म्हणजे सपाकचांडाल" असेच म्हटले आहे. ते देखील याच अर्थाचे प्रकटीकरण करते. अशा प्रकारे 'सा' शब्द कुत्र्यासाठी देखील वापरला जातो. "सा दारा जन्तूनं पिया" असे म्हटले असता "स्वतःची पत्नी प्राण्यांना प्रिय असते" या अर्थाच्या स्पष्टीकरणामुळे 'सा' शब्दाची स्व-वाचकता समजते. अशा प्रकारे 'सा' शब्द 'स्वतःचा' या अर्थात देखील वापरला जातो. अशा प्रकारे 'सा' शब्द प्रयोगाच्या आधारे अशा अर्थाचा वाचक आहे असे जाणतात. याविषयी असे म्हटले आहे – တံသဒ္ဒတ္ထေ စ သုနခေ,သကသ္မိမ္ပိ စ ဝတ္တတိ; သာသဒ္ဒေါ သော စ ခေါ ဉေယျော,ပယောဂါနံ ဝသေန ဝေ. "तो 'सा' शब्द 'तो' (तद्) शब्दाच्या अर्थात, कुत्र्याच्या अर्थात आणि स्वतःच्या अर्थात देखील वापरला जातो; प्रयोगांच्या आधारेच तो खरोखर जाणला पाहिजे." ဧတ္ထ စ ပါဠိယံ ‘‘န ယတ္ထ သာ ဥပဋ္ဌိတော ဟောတီ’’တိ ဧကဝစနပ္ပယောဂဒဿနတော စ, आणि येथे पाळिमध्ये "न यत्थ सा उपट्ठितो होति" हा एकवचनाचा प्रयोग दिसून आल्यामुळे, ‘‘အသန္တာ ကိရ မံ ဇမ္မာ, တာတ တာတာတိ ဘာသရေ; ရက္ခသာ ပုတ္တရူပေန, သာဝ ဝါရေန္တိ သူကရ’’န္တိ "अहो! ते दुष्ट राक्षस पुत्राच्या रूपाने मला 'तात, तात' असे म्हणत आहेत; कुत्र्यांप्रमाणे ते डुकराला अडवत आहेत." ဗဟုဝစနပ္ပယောဂဒဿနတော စ, နိရုတ္တိပိဋကေ ‘‘သာနော’’ဣစ္စာဒိဒဿနတော စ ‘‘သာ, သာ, သာနော. သာနံ, သာနေ. သာနာ’’တိအာဒိနာ သုနခဝါစကဿ သာသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ကထိတာ. बहुवचनाचा प्रयोग दिसून आल्यामुळे आणि निरुत्तिपिटकात "सानो" इत्यादी रूपे दिसून आल्यामुळे "सा, सा, सानो। सानं, साने। साना" इत्यादी प्रकारे कुत्रा या अर्थाच्या 'सा' शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगितली आहे. ဣဒါနိ ပုမသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'पुम' (पुरुष) शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगितली जात आहे – ပုမာ, ပုမာ, ပုမာနော. ပုမာနံ, ပုမာနေ. ပုမာနာ, ပုမုနာ, ပုမေန, ပုမာနေဟိ, ပုမာနေဘိ. ပုမဿ, ပုမုနော, ပုမာနံ. ပုမာနာ, ပုမုနာ, ပုမာနေဟိ, ပုမာနေဘိ. ပုမဿ, ပုမုနော, ပုမာနံ. ပုမာနေ, ပုမာနေသု. ဘော ပုမ, ဘဝန္တော ပုမာ, ပုမာနော. ‘‘ဘော ပုမာ’’ဣတိ ဗဟုဝစနေ နယောပိ ဉေယျော. पुमा, पुमा, pumāno (पुमानो)। pumānaṃ (पुमानं), pumāne (पुमाने)। pumānā (पुमाना), pumunā (पुमुना), pumena (पुमेन), pumānehi (पुमानेहि), pumānebhi (पुमानेभि)। pumassa (पुमस्स), pumuno (पुमुनो), pumānaṃ (पुमानं)। pumānā (पुमाना), pumunā (पुमुना), pumānehi (पुमानेहि), pumānebhi (पुमानेभि)। pumassa (पुमस्स), pumuno (पुमुनो), pumānaṃ (पुमानं)। pumāne (पुमाने), pumānesu (पुमानेसु)। भो पुम, भवन्तो पुमा, पुमानो। "भो पुमा" हा बहुवचनातील नियम देखील जाणावा. ဧတ္ထ [Pg.216] ပန – येथे तर – ‘‘ထိယော တဿ ပဇာယန္တိ, န ပုမာ ဇာယရေ ကုလေ; ယော ဇာနံ ပုစ္ဆိတော ပဉှံ, အညထာ နံ ဝိယာကရေ’’တိ "जो मनुष्य जाणूनबुजून विचारलेल्या प्रश्नाचे चुकीचे उत्तर देतो, त्याच्या कुळात स्त्रियाच जन्माला येतात, पुरुष जन्माला येत नाहीत." အယံ ပါဠိ ပုမသဒ္ဒဿ ဗဟုဝစနဘာဝသာဓိကာ, ကစ္စာယနေ ‘‘ဟေ ပုမံ’’ဣတိ သာနုသာရံ အာလပနေကဝစနံ ဒိဿတိ. တဒနေကေသု ပါဠိပ္ပဒေသေသု စ အဋ္ဌကထာသု စ သာနုသာရာနံ အာလပနဝစနာနံ အဒဿနတော ဣဓ န ဝဒါမိ. ဥပပရိက္ခိတွာ ယုတ္တံ စေ, ဂဟေတဗ္ဗံ. ‘‘ယသဿိ နံ ပညဝန္တံ ဝိသယှာ’’တိ ဧတ္ထ ပန ဆန္ဒာနုရက္ခဏတ္ထံ အာဂမဝသေနေဝါနုသာရော ဟောတိ, န သဘာဝတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အယမာကာရန္တဝသေန နာမိကပဒမာလာ. ही पाळि 'पुम' शब्दाचे बहुवचन सिद्ध करणारी आहे. कच्चायनामध्ये "हे पुमं" असे अनुस्वारासह संबोधनाचे एकवचन दिसते. परंतु अनेक पाळि प्रदेशांमध्ये आणि अट्ठकथांमध्ये अनुस्वारासह संबोधनाची वचने दिसून येत नसल्यामुळे मी येथे ते सांगत नाही. नीट परीक्षण करून जर योग्य वाटले तर ते ग्रहण करावे. "यसस्सि नं पञ्ञवन्तं विसय्हा" येथे छंदोभंग टाळण्यासाठी आगम म्हणून अनुस्वार आला आहे, तो स्वाभाविक नाही असे समजावे. ही आकारान्त रूपाने नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) आहे. ‘‘သောဠသိတ္ထိသဟဿာနံ,န ဝိဇ္ဇတိ ပုမော တဒါ; အဟောရတ္တာနမစ္စယေန,နိဗ္ဗတ္တော အဟမေကကော’’တိ စ, "तेव्हा सोळा हजार स्त्रियांमध्ये एकही पुरुष नव्हता; अहोरात्र उलटून गेल्यावर मी एकटाच जन्माला आलो." आणि, ‘‘ယထာ ဗလာကယောနိမှိ, န ဝိဇ္ဇတိ ပုမော သဒါ; မေဃေသု ဂဇ္ဇမာနေသု, ဂဗ္ဘံ ဂဏှန္တိ တာ တဒါ’’တိ စ "जसे बगळ्यांच्या योनीमध्ये कधीही नर नसतो; मेघ गर्जना करत असताना त्या गर्भ धारण करतात." आणि, ပါဠိဒဿနတော ပန ဩကာရန္တဝသေနပိ နာမိကပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. पाळि वचन दिसून आल्यामुळे ओकारान्त रूपाने देखील नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) जाणावी. ပုမော, ပုမာ. ပုမံ, ပုမေ. ပုမေန, ပုမေဟိ, ပုမေဘိ. ပုမဿ, ပုမာနံ. ပုမာ, ပုမသ္မာ, ပုမမှာ, ပုမေဟိ, ပုမေဘိ. ပုမဿ, ပုမာနံ. ပုမေ, ပုမသ္မိံ, ပုမမှိ, ပုမေသု. ဘော ပုမ, ဘဝန္တော ပုမာ. ‘‘ဘော ပုမာ’’ဣတိ ဝါ, ဧဝံ ပုမသဒ္ဒဿ ဒွိဓာ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. पुमो, पुमा। पुमं, पुमे। पुमेन, पुमेहि, पुमेभि। पुमस्स, पुमानं। पुमा, पुमस्मा, पुमम्हा, पुमेहि, पुमेभि। पुमस्स, पुमानं। पुमे, पुमस्मिं, पुमम्हि, पुमेसु। भो पुम, भवन्तो पुमा। "भो पुमा" किंवा, अशा प्रकारे 'पुम' शब्दाची दोन प्रकारची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) होते. ဣဒါနိ မိဿကနယော ဝုစ္စတေ – आता मिश्र नियम (मिश्रनय) सांगितला जात आहे – ပုမာ[Pg.217], ပုမော, ပုမာ, ပုမာနော. ပုမာနံ, ပုမံ, ပုမာနေ, ပုမေ. ပုမာနာ, ပုမုနာ, ပုမေန, ပုမာနေဟိ, ပုမာနေဘိ, ပုမေဟိ, ပုမေဘိ. ပုမဿ, ပုမုနော, ပုမာနံ. ပုမာနာ, ပုမုနာ, ပုမာ, ပုမသ္မာ, ပုမမှာ, ပုမာနေဟိ, ပုမာနေဘိ, ပုမေဟိ, ပုမေဘိ. ပုမဿ, ပုမုနော, ပုမာနံ. ပုမာနေ, ပုမေ, ပုမသ္မိံ, ပုမမှိ, ပုမာနေသု, ပုမေသု. ဘော ပုမ, ဘဝန္တော ပုမာနော, ဘဝန္တော ပုမာ. ‘‘ဘော ပုမာနော, ဘော ပုမာ’’ဣတိ ဝါ. पुमा, पुमो, पुमा, पुमानो। पुमानं, पुमं, पुमाने, पुमे। पुमाना, पुमुना, पुमेन, पुमानेहि, पुमानेभि, पुमेहि, पुमेभि। पुमस्स, पुमुनो, पुमानं। पुमाना, पुमुना, पुमा, पुमस्मा, पुमम्हा, पुमानेहि, पुमानेभि, पुमेहि, पुमेभि। पुमस्स, पुमुनो, पुमानं। पुमाने, पुमे, पुमस्मिं, पुमम्हि, पुमानेसु, पुमेसु। भो पुम, भवन्तो पुमानो, भवन्तो पुमा। "भो पुमानो, भो पुमा" किंवा. ဣဒါနိ ရဟသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'रह' शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगितली जात आहे – ရဟာ ဝုစ္စတိ ပါပဓမ္မော. ရဟာ, ရဟာ, ရဟိနော. ရဟာနံ, ရဟာနေ. ရဟိနာ, ရဟိနေဟိ, ရဟိနေဘိ. ရဟဿ, ရဟာနံ. ရဟာ, ရဟာနေဟိ, ရဟာနေဘိ. ရဟဿ, ရဟာနံ. ရဟာနေ, ရဟာနေသု. ဘော ရဟ, ဘဝန္တော ရဟိနော, ဘဝန္တော ရဟာ. 'रह' म्हणजे पापी धर्म (पापधर्म) म्हटले जाते. रहा, रहा, रहिनो। रहानं, रहाने। रहिना, रहिनेहि, रहिनेभि। रहस्स, रहानं। रहा, रहानेहि, रहानेभि। रहस्स, रहानं। रहाने, रहानेसु। भो रह, भवन्तो रहिनो, भवन्तो रहा. ဣဒါနိ ဒဠှဓမ္မသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'दळ्हधम्म' (दृढधर्मा) शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगितली जात आहे – ဒဠှဓမ္မာ, ဒဠှဓမ္မာ, ဒဠှဓမ္မာနော. ဒဠှဓမ္မာနံ, ဒဠှဓမ္မာနေ. ဒဠှဓမ္မိနာ, ဒဠှဓမ္မေဟိ, ဒဠှဓမ္မေဘိ. ဒဠှဓမ္မဿ, ဒဠှဓမ္မာနံ. ဒဠှဓမ္မိနာ, ဒဠှဓမ္မေဟိ, ဒဠှဓမ္မေဘိ. ဒဠှဓမ္မဿ, ဒဠှဓမ္မာနံ. ဒဠှဓမ္မေ ဒဠှဓမ္မေသု. ဘော ဒဠှဓမ္မ, ဘဝန္တော ဒဠှဓမ္မာနော, ဘဝန္တော ဒဠှဓမ္မာ. ‘‘ဘော ဒဠှဓမ္မာနော, ဘော ဒဠှဓမ္မာ’’ဣတိ ပုထုဝစနမ္ပိ ဉေယျံ, ဧဝံ ပစ္စက္ခဓမ္မသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. दळ्हधम्मा, दळ्हधम्मा, दळ्हधम्मानो। दळ्हधम्मानं, दळ्हधम्माने। दळ्हधम्मिना, दळ्हधम्मेहि, दळ्हधम्मेभि। दळ्हधम्मस्स, दळ्हधम्मानं। दळ्हधम्मिना, दळ्हधम्मेहि, दळ्हधम्मेभि। दळ्हधम्मस्स, दळ्हधम्मानं। दळ्हधम्मे, दळ्हधम्मेसु। भो दळ्हधम्म, भवन्तो दळ्हधम्मानो, भवन्तो दळ्हधम्मा। "भो दळ्हधम्मानो, भो दळ्हधम्मा" हे बहुवचन देखील जाणावे, अशाच प्रकारे 'पच्चक्खधम्म' (प्रत्यक्षधर्मा) शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) जोडावी. ဧတ္ထ စ ‘‘သေယျထာပိ ဘိက္ခဝေ စတ္တာရော ဓနုဂ္ဂဟာ ဒဠှဓမ္မာ’’တိ ဣဒံ နိဒဿနံ. ဣမိဿံ ပန ပါဠိယံ ‘‘ဒဠှဓမ္မာ’’ ဣတိ ဗဟုဝစနဝသေန အာဂတတ္တာ ဒဠှဓမ္မသဒ္ဒေါ အာကာရန္တောတိပိ ဩကာရန္တောတိပိ အပ္ပသိဒ္ဓေါ တဒန္တာနံ ဗဟုဝစနဘာဝေ တုလျရူပတ္တာ. တထာပိ အမှေဟိ ပဒမာလာ အာကာရန္တဝသေနေဝ ယောဇိတာ. ဤဒိသေသု ဟိ ဌာနေသု ဒဠှဓမ္မသဒ္ဒေါ အာကာရန္တောတိပိ ဩကာရန္တောတိပိ ဝတ္တုံ ယုဇ္ဇတေဝ [Pg.218] အပရိဗျတ္တရူပတ္တာ. အညသ္မိံ ပန ပါဠိပ္ပဒေသေ အတီဝ ပရိဗျတ္တော ဟုတွာ ဩကာရန္တ ဒဠှဓမ္မသဒ္ဒေါ ဒွိဓာ ဒိဿတိ ဂုဏသဒ္ဒပဏ္ဏတ္တိဝါစကသဒ္ဒဝသေန. တတ္ထ ‘‘ဣဿတ္တေ စသ္မိ ကုသလော, ဒဠှဓမ္မောတိ ဝိဿုတော’’တိ ဧတ္ထ ဒဠှဓမ္မသဒ္ဒေါ ဩကာရန္တော ဂုဏသဒ္ဒေါ. ‘‘ဗာရာဏသိယံ ဒဠှဓမ္မော နာမ ရာဇာ ရဇ္ဇံ ကာရေသီ’’တိ ဧတ္ထ ပန ပဏ္ဏတ္တိဝါစကသဒ္ဒေါ. ဧဝံ ဩကာရန္တော ဒဠှဓမ္မသဒ္ဒေါ ဒွိဓာ ဒိဋ္ဌော. တဿ ပန ‘‘ဒဠှဓမ္မော, ဒဠှဓမ္မာ. ဒဠှဓမ္မံ, ဒဠှဓမ္မေ’’တိ ပုရိသနယေန နာမိကပဒမာလာ ဉေယျာ, အာကာရန္တောကာရန္တာနံ ဝသေန မိဿကပဒမာလာ စ. ကထံ? आणि येथे "सेय्यथापि भिक्खवे चत्तारो धनुग्गहा दळ्हधम्मा" हे उदाहरण आहे. या पाळिमध्ये "दळ्हधम्मा" हे बहुवचनाच्या रूपाने आले असल्यामुळे 'दळ्हधम्म' शब्द आकारान्त देखील आणि ओकारान्त देखील समजला पाहिजे, कारण त्यांच्या शेवटी येणाऱ्या बहुवचनाची रूपे समान असतात. तरीही आम्ही नामिकपदमला आकारान्त रूपानेच जोडली आहे. कारण अशा ठिकाणी 'दळ्हधम्म' शब्द अस्पष्ट रूप असल्यामुळे आकारान्त देखील आणि ओकारान्त देखील म्हणणे योग्यच आहे. परंतु इतर पाळि प्रदेशात अत्यंत स्पष्ट होऊन ओकारान्त 'दळ्हधम्म' शब्द गुणवाचक शब्द आणि संज्ञावाचक शब्द अशा दोन प्रकारे दिसून येतो. त्यामध्ये "इस्सत्ते चस्मि कुसलो, दळ्हधम्मोति विस्सुतो" येथे 'दळ्हधम्म' हा ओकारान्त गुणवाचक शब्द आहे. "वाराणसीत दळ्हधम्म नावाचा राजा राज्य करत होता" येथे तो संज्ञावाचक शब्द आहे. अशा प्रकारे ओकारान्त 'दळ्हधम्म' शब्द दोन प्रकारे दिसून येतो. त्याची "दळ्हधम्मो, दळ्हधम्मा। दळ्हधम्मं, दळ्हधम्मे" अशी पुरुष शब्दाच्या नियमाने नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) जाणावी, आणि आकारान्त व ओकारान्त रूपांच्या आधारे मिश्र नामिकपदमला देखील जाणावी. ती कशी? ဒဠှဓမ္မာ, ဒဠှဓမ္မော, ဒဠှဓမ္မာနော, ဒဠှဓမ္မာ. ဒဠှဓမ္မာနံ, ဒဠှဓမ္မံ, ဒဠှဓမ္မာနေ, ဒဠှဓမ္မေ. ဒဠှဓမ္မိနာ, ဒဠှဓမ္မေန, ဒဠှဓမ္မေဟိ, ဒဠှဓမ္မေဘိ. ဒဠှဓမ္မဿ, ဒဠှဓမ္မာနံ. ဒဠဓမ္မိနာ, ဒဠှဓမ္မာ, ဒဠှဓမ္မသ္မာ, ဒဠှဓမ္မမှာ, ဒဠှဓမ္မေဟိ, ဒဠှဓမ္မေဘိ. ဒဠှဓမ္မဿ, ဒဠှဓမ္မာနံ. ဒဠှဓမ္မေ, ဒဠှဓမ္မသ္မိံ, ဒဠှဓမ္မမှိ, ဒဠှဓမ္မေသု. ဘော ဒဠှဓမ္မ, ဘဝန္တော ဒဠှဓမ္မာနော, ဘဝန္တော ဒဠှဓမ္မာတိ. ဧဝံ ပစ္စက္ခဓမ္မာ, ပစ္စက္ခဓမ္မောတိ မိဿကပဒမာလာ စ ယောဇေတဗ္ဗာ. दळ्हधम्मा, दळ्हधम्मो, दळ्हधम्मानो, दळ्हधम्मा. दळ्हधम्मानं, दळ्हधम्मं, दळ्हधम्माने, दळ्हधम्मे. दळ्हधम्मिना, दळ्हधम्मेन, दळ्हधम्मेहि, दळ्हधम्मेभि. दळ्हधम्मस्स, दळ्हधम्मानं. दळधम्मिना, दळ्हधम्मा, दळ्हधम्मस्मा, दळ्हधम्मम्हा, दळ्हधम्मेहि, दळ्हधम्मेभि. दळ्हधम्मस्स, दळ्हधम्मानं. दळ्हधम्मे, दळ्हधम्मस्मिं, दळ्हधम्मम्हि, दळ्हधम्मेसु. भो दळ्हधम्म, भवन्तो दळ्हधम्मानो, भवन्तो दळ्हधम्मा ति. अशा प्रकारे 'पच्चक्खधम्मा', 'पच्चक्खधम्मो' यांची मिश्रपदमाला (मिश्र शब्दरूपांची मालिका) देखील योजावी. ဣဒါနိ ဝိဝဋစ္ဆဒသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'विवटच्छद' (vivaṭacchada) या शब्दाची नामपदमाला (विभक्ती रूपे) सांगितली जात आहे – ဝိဝဋစ္ဆဒါ, ဝိဝဋစ္ဆဒါ, ဝိဝဋစ္ဆဒါနော. ဝိဝဋစ္ဆဒါနံ, ဝိဝဋစ္ဆဒါနေ. ဝိဝဋစ္ဆဒေန, ဝိဝဋစ္ဆဒေဟိ, ဝိဝဋစ္ဆဒေဘိ. ဝိဝဋစ္ဆဒဿ, ဝိဝဋစ္ဆဒါနံ. ဝိဝဋစ္ဆဒါ, ဝိဝဋစ္ဆဒေဟိ, ဝိဝဋစ္ဆဒေဘိ. ဝိဝဋစ္ဆဒဿ, ဝိဝဋစ္ဆဒါနံ. ဝိဝဋစ္ဆဒေ, ဝိဝဋစ္ဆဒေသု. ဘော ဝိဝဋစ္ဆဒ, ဘဝန္တော ဝိဝဋစ္ဆဒါ, ဘဝန္တော ဝိဝဋစ္ဆဒါနော. विवटच्छदा, विवटच्छदा, विवटच्छदानो. विवटच्छदानं, विवटच्छदाने. विवटच्छदेन, विवटच्छदेहि, विवटच्छदेभि. विवटच्छदस्स, विवटच्छदानं. विवटच्छदा, विवटच्छदेहि, विवटच्छदेभि. विवटच्छदस्स, विवटच्छदानं. विवटच्छदे, विवटच्छदेसु. भो विवटच्छद, भवन्तो विवटच्छदा, भवन्तो विवटच्छदानो. အယံ နာမိကပဒမာလာ ‘‘သစေ ပန အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇတိ အရဟံ ဟောတိ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ လောကေ ဝိဝဋစ္ဆဒါ’’တိ [Pg.219] ပါဠိဒဿနတော အာကာရန္တဝသေန ကထိတာ. ‘‘လောကေ ဝိဝဋစ္ဆဒေါ’’တိပိ ပါဠိဒဿနတော ပန ဩကာရန္တဝသေနပိ ကထေတဗ္ဗာ ‘‘ဝိဝဋစ္ဆဒေါ, ဝိဝဋစ္ဆဒါ, ဝိဝဋစ္ဆဒံ, ဝိဝဋစ္ဆဒေ’’တိ. မိဿကဝသေနပိ ကထေတဗ္ဗာ ‘‘ဝိဝဋစ္ဆဒါ, ဝိဝဋစ္ဆဒေါ, ဝိဝဋစ္ဆဒါနော, ဝိဝဋစ္ဆဒါ. ဝိဝဋစ္ဆဒါနံ, ဝိဝဋစ္ဆဒံ, ဝိဝဋစ္ဆဒါနေ, ဝိဝဋစ္ဆဒေ’’ဣတိ. ही नामपदमाला 'सचे पन अगारस्मा अनगारियं पब्बजति अरहं होति सम्मासम्बुद्धो लोके विवटच्छदा' (जर तो घराबाहेर पडून अनगारिक [प्रव्रजित] झाला, तर तो जगात अर्हत, सम्यक्संबुद्ध, विवटच्छद [अज्ञानाचा पडदा दूर केलेला] होतो) या पालि वचनाच्या आधारे 'आकारान्त' रूपाने सांगितली आहे. परंतु, 'लोके विवटच्छदो' या पालि वचनाच्या आधारे 'ओकारान्त' रूपाने देखील 'विवटच्छदो, विवटच्छदा, विवटच्छदं, विवटच्छदे' अशी सांगावी. तसेच मिश्र रूपाने देखील 'विवटच्छदा, विवटच्छदो, विवटच्छदानो, विवटच्छदा. विवटच्छदानं, विवटच्छदं, विवटच्छदाने, विवटच्छदे' अशी सांगावी. ဣဒါနိ ဝတ္တဟသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – ဝတ္တဟာတိ သက္ကော. आता 'वत्तह' (vattaha) या शब्दाची नामपदमाला सांगितली जात आहे – 'वत्तह' म्हणजे सक्क (शक्र/इंद्र). ဝတ္တဟာ, ဝတ္တဟာနော. ဝတ္တဟာနံ, ဝတ္တဟာနေ. ဝတ္တဟာနာ, ဝတ္တဟာနေဟိ, ဝတ္တဟာနေဘိ. ဝတ္တဟိနော, ဝတ္တဟာနံ. ဝတ္တဟာနာ, ဝတ္တဟာနေဟိ, ဝတ္တဟာနေဘိ. ဝတ္တဟိနော, ဝတ္တဟာနံ. ဝတ္တဟာနေ, ဝတ္တဟာနေသု. ဘော ဝတ္တဟ, ဘဝန္တော ဝတ္တဟာနော. အထ ဝါ ‘‘ဘော ဝတ္တဟာ, ဘော ဝတ္တဟာနော’’ဣစ္စပိ. वत्तहा, वत्तहानो. वत्तहानं, वत्तहाने. वत्तहाना, वत्तहानेहि, वत्तहानेभि. वत्तहिनो, वत्तहानं. वत्तहाना, वत्तहानेहि, वत्तहानेभि. वत्तहिनो, वत्तहानं. वत्तहाने, वत्तहानेसु. भो वत्तह, भवन्तो वत्तहानो. किंवा 'भो वत्तहा, भो वत्तहानो' असेही होते. ဣဒါနိ ဝုတ္တသိရသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'वुत्तसिर' (vuttasira) या शब्दाची नामपदमाला सांगितली जात आहे – ဝုတ္တသိရာ, ဝုတ္တသိရာ, ဝုတ္တသိရာနော. ဝုတ္တသိရာနံ, ဝုတ္တသိရာနေ. ဝုတ္တသိရာနာ, ဝုတ္တသိရာနေဟိ, ဝုတ္တသိရာနေဘိ. ဝုတ္တသိရဿ, ဝုတ္တသိရာနံ, ဝုတ္တသိရာ, ဝုတ္တသိရေဟိ, ဝုတ္တသိရေဘိ. ဝုတ္တသိရဿ, ဝုတ္တသိရာနံ. ဝုတ္တသိရေ, ဝုတ္တသိရေသု. ဘော ဝုတ္တသိရ, ဘာန္တော ဝုတ္တသိရာနောတိ. ‘‘ဝုတ္တသိရော’’တိ ဩကာရန္တပါဌောပိ ဒိဿတိ. वुत्तसिरा, वुत्तसिरा, वुत्तसिरानो. वुत्तसिरानं, वुत्तसिराने. वुत्तसिराना, वुत्तसिरानेहि, वुत्तसिरानेभि. वुत्तसिरस्स, वुत्तसिरानं, वुत्तसिरा, वुत्तसिरेहि, वुत्तसिरेभि. वुत्तसिरस्स, वुत्तसिरानं. वुत्तसिरे, वुत्तसिरेसु. भो वुत्तसिर, भान्तो वुत्तसिरानो. 'वुत्तसिरो' असा ओकारान्त पाठ देखील आढळतो. ဣဒါနိ ယုဝသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'युव' (yuva) या शब्दाची नामपदमाला सांगितली जात आहे – ယုဝါ, ယုဝါ, ယုဝါနော, ယုဝါနာ. ယုဝါနံ, ယုဝံ, ယုဝါနေ, ယုဝေ. ယုဝါနာ, ယုဝေန, ယုဝါနေန, ယုဝါနေဟိ, ယုဝါနေဘိ, ယုဝေဟိ, ယုဝေဘိ. ယုဝါနဿ, ယုဝဿ, ယုဝါနာနံ, ယုဝါနံ. ယုဝါနာ[Pg.220], ယုဝါနသ္မာ, ယုဝါနမှာ, ယုဝါနေဟိ, ယုဝါနေဘိ, ယုဝေဟိ, ယုဝေဘိ. ယုဝါနဿ, ယုဝဿ, ယုဝါနာနံ, ယုဝါနံ. ယုဝါနေ, ယုဝါနသ္မိံ, ယုဝါနမှိ, ယုဝေ, ယုဝသ္မိံ, ယုဝမှိ, ယုဝါနေသု, ယုဝါသု, ယုဝေသု. ဘော ယုဝ, ယုဝါန, ဘဝန္တော ယုဝါနာ. युवा, युवा, युवानो, युवाना. युवानं, युवं, युवाने, युवे. युवाना, युवेन, युवानेन, युवानेहि, युवानेभि, युवेहि, युवेभि. युवानस्स, युवस्स, युवानानं, युवानं. युवाना, युवानस्मा, युवानम्हा, युवानेहि, युवानेभि, युवेहि, युवेभि. युवानस्स, युवस्स, युवानानं, युवानं. युवाने, युवानस्मिं, युवानम्हि, युवे, युवस्मिं, युवम्हि, युवानेसु, युवासु, युवेसु. भो युव, युवान, भवन्तो युवाना. ဣမသ္မိံ ဌာနေ ဧကဒေသေန အာကာရန္တနယော စ သဗ္ဗထာ ဩကာရန္တနယော စ ဧကဒေသေန စ ဩကာရန္တနယောတိ တယော နယာ ဒိဿန္တိ. या ठिकाणी अंशतः आकारान्त पद्धत, पूर्णतः ओकारान्त पद्धत आणि अंशतः ओकारान्त पद्धत असे तीन प्रकार (नय) दिसून येतात. မဃဝသဒ္ဒဿပိ ‘‘မဃဝါ, မဃဝါ, မဃဝါနော, မဃဝါနာ’’တိအာဒိနာ ယုဝသဒ္ဒဿေဝ နာမိကပဒမာလာယောဇနံ ကုဗ္ဗန္တိ ဂရူ. နိရုတ္တိပိဋကေ ပန ‘‘မဃဝါ တိဋ္ဌတိ, မဃဝန္တော တိဋ္ဌန္တိ. မဃဝန္တံ ပဿတိ, မဃဝန္တေ ပဿတိ. မဃဝတာ ကတံ, မဃဝန္တေဟိ ကတံ, မဃဝန္တေဘိ ကတံ. မဃဝတော ဒီယတေ, မဃဝန္တာနံ ဒီယတေ. မဃဝတာ နိဿဋံ, မဃဝန္တေဟိ နိဿဋံ, မဃဝန္တေဘိ နိဿဋံ. မဃဝတော ပရိဂ္ဂဟော, မဃဝန္တာနံ ပရိဂ္ဂဟော. မဃဝတိ ပတိဋ္ဌိတံ, မဃဝန္တေသု ပတိဋ္ဌိတံ. ဘော မဃဝါ, ဘဝန္တော မဃဝန္တော’’တိ ဂုဏဝါပဒနယေန ဝုတ္တံ, တထာ စူဠနိရုတ္တိယမ္ပိ. တံ ပါဠိယာ သံသန္ဒတိ သမေတိ. ပါဠိယဉှိ ‘‘သက္ကော မဟာလိ ဒေဝါနမိန္ဒော ပုဗ္ဗေ မနုဿဘူတော သမာနော မဃော နာမ မာဏဝေါ အဟောသိ, တသ္မာ မဃဝါတိ ဝုစ္စတီ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧတေန ‘‘မဃောတိ နာမံ အဿ အတ္ထီတိ မဃဝါ’’တိ အတ္ထိ အတ္ထဝါစကဝန္တုပစ္စယဝသေန ပဒသိဒ္ဓိ ဒဿိတာ ဟောတိ, တသ္မာဿ ဂုဏဝန္တုသဒ္ဒဿ ဝိယ စ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. आचार्य (गुरू) 'मघव' शब्दाची देखील 'मघवा, मघवा, मघवानो, मघवाना' इत्यादी प्रकारे 'युव' शब्दाप्रमाणेच नामपदमाला तयार करतात. परंतु, निरुत्तिपिटकात 'मघवा तिट्ठति, मघवन्तो तिट्ठन्ति...' इत्यादी रूपांनी 'गुणवत्' (गुणवान) शब्दाच्या पद्धतीने सांगितले आहे, आणि चूळनिरुत्तीमध्येही तसेच आहे. ते पालि वचनाशी सुसंगत आणि जुळणारे आहे. कारण पालिमध्ये म्हटले आहे – 'सक्को महालि देवानामिन्दो पुब्बे मनुस्सभूतो समानो मघो नाम माणवो अहोसि, तस्मा मघवाति वुच्चति' (हे महाली! देवांचा राजा सक्क पूर्वी मनुष्य असताना 'मघ' नावाचा तरुण होता, म्हणून त्याला 'मघवा' म्हटले जाते). याद्वारे 'मघ हे ज्याचे नाव आहे तो मघवा' अशा प्रकारे 'अस्ति' (असणे) अर्थ दर्शवणाऱ्या 'वन्तु' प्रत्ययाच्या आधारे शब्दाची सिद्धी (उत्पत्ती) दर्शवली आहे, म्हणून याची नामपदमाला 'गुणवन्तु' शब्दाप्रमाणे योजावी. ဣဒါနိ အဒ္ဓသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – အဒ္ဓသဒ္ဒဿ ဟိ ယံ ကာလေ မဂ္ဂေ စ ဝတ္တမာနဿ ‘‘အတီတော အဒ္ဓါ. ဒီဃော အဒ္ဓါ သုဒုဂ္ဂမော’’တိအာဒီသု ‘‘အဒ္ဓါ’’တိ ပဌမန္တံ ရူပံ ဒိဿတိ, တံ ‘‘အဒ္ဓါ ဣဒံ မန္တပဒံ သုဒုဒ္ဒသ’’န္တိအာဒီသု ဧကံသတ္ထေ [Pg.221] ဝတ္တမာနေန ‘‘အဒ္ဓါ’’တိ နိပါတပဒေန သမာနံ. နိပါတာနံ ပန ပဒမာလာ န ရူဟတိ, နာမိကာနံယေဝ ရူဟတိ. आता 'अद्ध' (addha) या शब्दाची नामपदमाला सांगितली जात आहे – काळ (वेळ) आणि मार्ग (रस्ता) या अर्थांमध्ये वापरल्या जाणाऱ्या 'अद्ध' शब्दाचे 'अतीतो अद्धा' (भूतकाळ), 'दीघो अद्धा सुदुग्गमो' (लांबचा मार्ग अत्यंत कठीण आहे) इत्यादींमध्ये 'अद्धा' हे प्रथमेचे रूप दिसते. ते 'अद्धा इदं मन्तपदं सुदुद्दरं' (नक्कीच हे मंत्रपद अत्यंत दुर्बोध आहे) इत्यादींमध्ये निश्चिततेच्या अर्थाने वापरल्या जाणाऱ्या 'अद्धा' या निपात (अव्यय) शब्दासारखेच आहे. परंतु, निपातांची नामपदमाला चालत नाही, ती केवळ नामपदांचीच चालते. အဒ္ဓါ, အဒ္ဓါ, အဒ္ဓါနော. အဒ္ဓါနံ, အဒ္ဓါနေ. အဒ္ဓုနာ, အဒ္ဓါနေဟိ, အဒ္ဓါနေဘိ. အဒ္ဓုနော, အဒ္ဓါနံ. အဒ္ဓုနာ, အဒ္ဓါနေဟိ, အဒ္ဓါနေဘိ. အဒ္ဓုနော, အဒ္ဓါနံ. အဒ္ဓနိ, အဒ္ဓါနေ, အဒ္ဓါနေသု. ဘော အဒ္ဓ, ဘဝန္တော အဒ္ဓါ, အဒ္ဓါနော. अद्धा, अद्धा, अद्धानो. अद्धानं, अद्धाने. अद्धुना, अद्धानेहि, अद्धानेभि. अद्धुनो, अद्धानं. अद्धुना, अद्धानेहि, अद्धानेभि. अद्धुनो, अद्धानं. अद्धनि, अद्धाने, अद्धानेसु. भो अद्ध, भवन्तो अद्धा, अद्धानो. ဧတ္ထ ကိဉ္စိ ပယောဂံ ဒဿေဿာမ – တယော အဒ္ဓါ. အဒ္ဓါနံ ဝီတိဝတ္တော. ဣမိနာ ဒီဃေန အဒ္ဓုနာ. ဒီဃဿ အဒ္ဓုနော အစ္စယေန. ပထဒ္ဓုနော ပန္နရသေဝ စန္ဒော. အဟူ အတီတမဒ္ဓါနေ, သမဏော ခန္တိဒီပနော. အဒ္ဓါနေ ဂစ္ဆန္တေ ပညာယိဿတိ. ဣစ္စာဒယော ဉေယျာ. အယမ္ပိ ပနေတ္ထ နီတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ ‘‘အဒ္ဓါနန္တိ ဒုတိယေကဝစနန္တဝသေန စတုတ္ထီဆဋ္ဌီဗဟုဝစနဝသေန စ ဝုတ္တံ ရူပံ. ‘‘အဒ္ဓါနမဂ္ဂပဋိပ္ပန္နော ဟောတီ’’တိအာဒီသု ဒီဃမဂ္ဂဝါစကေန ‘‘အဒ္ဓါန’’န္တိ နပုံသကေန သဒိသံ သုတိသာမညဝသေနာတိ. येथे काही प्रयोग दाखवू या – 'तयो अद्धा' (तीन काळ). 'अद्धानं वीतिवत्तो' (मार्ग पार केलेला). 'इमिना दीघेन अद्धुना' (या प्रदीर्घ काळाने/मार्गाने). 'दीघस्स अद्धुनो अच्चयेन' (प्रदीर्घ काळ उलटून गेल्यावर). 'पथद्धुनो पन्नरसेव चन्दो' (आकाशातील पंधराव्या रात्रीच्या चंद्राप्रमाणे). 'अहू अतीत मद्धाने, समणो खन्तिदीपनो' (भूतकाळात क्षमाशीलतेचा प्रकाश पसरवणारे एक श्रमण होते). 'अद्धाने गच्छन्ते पञ्ञायिस्सति' (काळ सरत जाईल तसे समजेल). इत्यादी उदाहरणे जाणावीत. येथे हा नियम देखील समजून घ्यावा – 'अद्धानं' हे रूप द्वितीया एकवचन आणि चतुर्थी-षष्ठी बहुवचनाच्या अर्थाने सांगितले आहे. 'अद्धानमग्गपटिपन्नो होति' इत्यादी वाक्यांमध्ये दीर्घ मार्गाचा वाचक असलेल्या 'अद्धानं' या नपुंसकलिंगी शब्दाशी ते केवळ ऐकण्याच्या समानतेमुळे (श्रुतिसामान्यामुळे) सारखे वाटते. ဣဒါနိ မုဒ္ဓသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'मुद्ध' (muddha - मस्तक/डोके) या शब्दाची नामपदमाला सांगितली जात आहे – မုဒ္ဓါ, မုဒ္ဓါ, မုဒ္ဓါနော. မုဒ္ဓံ, မုဒ္ဓေ, မုဒ္ဓါနေ. မုဒ္ဓါနာ, မုဒ္ဓေဟိ, မုဒ္ဓေဘိ. မုဒ္ဓဿ, မုဒ္ဓါနံ. မုဒ္ဓါနာ, မုဒ္ဓေဟိ, မုဒ္ဓေဘိ. မုဒ္ဓဿ, မုဒ္ဓါနံ. မုဒ္ဓနိ, မုဒ္ဓနေသု. ဘော မုဒ္ဓ, ဘဝန္တော မုဒ္ဓါ, မုဒ္ဓါနော. मुद्धा, मुद्धा, मुद्धानो। मुद्धं, मुद्धे, मुद्धाने। मुद्धाना, मुद्धेहि, मुद्धेभि। मुद्धस्स, मुद्धानं। मुद्धाना, मुद्धेहि, मुद्धेभि। मुद्धस्स, मुद्धानं। मुद्धनि, मुद्धनेसु। भो मुद्ध, भवन्तो मुद्धा, मुद्धानो. ဧဝံ အဘိဘဝိတာပဒေန ဝိသဒိသပဒါနိ ဘဝန္တိ. ဣတိ နာနာနယေဟိ အဘိဘဝိတာပဒေန သဒိသာနိ ဝတ္တာဒီနိ ဝိသဒိသာနိ ဂုဏဝါဒီနိ ရာဇသာဣစ္စာဒီနိ စ အာကာရန္တပဒါနိ ဒဿိတာနိ သဒ္ဓိံ နာမိကပဒမာလာဟိ. अशा प्रकारे 'अभिभविता' या शब्दाप्रमाणे विसदृश (भिन्न) शब्द होतात. अशा रीतीने विविध पद्धतींनी 'अभिभविता' शब्दाशी समान असलेले 'वत्तू' (वक्ता) इत्यादी आणि विसदृश असलेले 'गुणवादी', 'राजसी' इत्यादी आकारान्त शब्द नामविभक्तीच्या रूपांसह (नामिकपदमला) दाखवले आहेत. ဧတ္ထ [Pg.222] ယောဂံ သစေ ပေါသော, ကရေ ပဏ္ဍိတဇာတိကော; တဿ ဝေါဟာရဘေဒေသု, ဝိဇမ္ဘေ ဉာဏမုတ္တမံ. जर एखादा बुद्धिमान मनुष्य येथे (या व्याकरणात) प्रयत्न करेल, तर त्याचे उत्तम ज्ञान व्यवहाराच्या (भाषेच्या वापराच्या) भेदांमध्ये विकसित होईल. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, नऊ अंगांनी युक्त आणि अट्ठकथांसह असलेल्या तिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ...कौशल्यासाठी (नैपुण्यासाठी) रचलेल्या 'सद्दनीति' ग्रंथात... သဝိနိစ္ဆယော အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ ...आकारान्त पुल्लिंगी शब्दांच्या मूळ रूपाचा (प्रकृतिरूपाचा) निर्णयात्मक विचार... နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ နာမ ...'नामिकपदमलाविभाग' नावाचा... ဆဋ္ဌော ပရိစ္ဆေဒေါ. सहावा परिच्छेद. ဥကာရန္တ အဝဏ္ဏန္တတာပကတိကံ उकारान्त आणि अवर्णान्त प्रकृतीचे... အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. आकारान्त पुल्लिंगी शब्द समाप्त झाले. ၇. နိဂ္ဂဟီတန္တပုလ္လိင်္ဂနာမိကပဒမာလာ ७. निग्गहीत (अनुस्वार) अन्त असलेल्या पुल्लिंगी शब्दांची नामिकपदमला (विभक्ती रूपे). အထ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ နိဂ္ဂဟီတန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ဘဝန္တ ကရောန္တဣစ္စာဒိကဿ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလံ ဝက္ခာမ – आता, पूर्व आचार्यांचे मत अग्रभागी ठेवून, 'भवन्त', 'करोन्त' इत्यादी निग्गहीत-अन्त पुल्लिंगी शब्दांच्या मूळ रूपाची (प्रकृतिरूपाची) नामिकपदमला (विभक्ती रूपे) सांगू – ဂစ္ဆံ မဟံ စရံ တိဋ္ဌံ, ဒဒံ ဘုဉ္ဇံ သုဏံ ပစံ; ဇယံ ဇရံ စဝံ မီယံ, သရံ ကုဗ္ဗံ ဇပံ ဝဇံ. गच्छं, महं, चरं, तिट्ठं, ददं, भुञ्जं, सुणं, पचं; जयं, जरं, चवं, मीयं, सरं, kuब्बं, जपं, वजं. ဂစ္ဆံ, ဂစ္ဆန္တော, ဂစ္ဆန္တာ. ဂစ္ဆန္တံ, ဂစ္ဆန္တေ. ဂစ္ဆတာ, ဂစ္ဆန္တေဟိ, ဂစ္ဆန္တေတိ. ဂစ္ဆတော, ဂစ္ဆန္တဿ, ဂစ္ဆန္တာနံ, ဂစ္ဆတံ. ဂစ္ဆတာ, ဂစ္ဆန္တေဟိ, ဂစ္ဆန္တေဘိ. ဂစ္ဆတော, ဂစ္ဆန္တဿ, ဂစ္ဆန္တာနံ, ဂစ္ဆတံ. ဂစ္ဆတိ, ဂစ္ဆန္တေသု. ဘော ဂစ္ဆံ, ဘော ဂစ္ဆာ, ဘဝန္တော ဂစ္ဆန္တော. गच्छं, गच्छन्तो, गच्छन्ता। गच्छन्तं, गच्छन्ते। गच्छता, गच्छन्तेहि, गच्छन्तेभि। गच्छतो, गच्छन्तस्स, गच्छन्तानं, गच्छतं। गच्छता, गच्छन्तेहि, गच्छन्तेभि। गच्छतो, गच्छन्तस्स, गच्छन्तानं, गच्छतं। गच्छति, गच्छन्तेसु। भो गच्छं, भो गच्छा, भवन्तो गच्छन्तो. ဂစ္ဆာဒီနိ အညာနိ စ တံသဒိသာနံ ဧဝံ ဉေယျာနီတိ ယမကမဟာထေရမတံ. ကိဉ္စာပေတ္ထ တတိယေကဝစနဋ္ဌာနာဒီသု ‘‘ဂစ္ဆန္တေန, ဂစ္ဆန္တာ, ဂစ္ဆန္တသ္မာ, ဂစ္ဆန္တမှာ, ဂစ္ဆန္တသ္မိံ, ဂစ္ဆန္တမှီ’’တိ ဣမာနိ ပဒါနိ နာဂတာနိ, တထာပိ တတ္ထ တတ္ထ ပယောဂဒဿနတော ဂဟေတဗ္ဗာနိ. 'गच्छ' इत्यादी आणि इतर तत्सम शब्द याच प्रकारे जाणावेत, असे यमक महाथेरांचे मत आहे. जरी येथे तृतीयेच्या एकवचनाच्या स्थानी इत्यादी ठिकाणी 'गच्छन्तेन, गच्छन्ता, गच्छन्तस्मा, गच्छन्तम्हा, गच्छन्तस्मिं, गच्छन्तम्हि' हे शब्द आलेले नाहीत, तरीही ठिकठिकाणी प्रयोगांमध्ये (वापरात) दिसत असल्यामुळे ते ग्रहण करावेत. တတြ ယမကမဟာထေရေန အာလပနဝစနဋ္ဌာနေယေဝ ‘‘ဂစ္ဆန္တော, မဟန္တော, စရန္တော’’တိအာဒီနံ ဗဟုဝစနတ္တံ ကထိတံ, ပစ္စတ္တဝစနဋ္ဌာနေ [Pg.223] ဧကဝစနတ္တံ. ကေဟိစိ ပန ပစ္စတ္တဝစနဋ္ဌာနေ ဧကဝစနဗဟုဝစနတ္တံ, အာလပနဝစနဋ္ဌာနေ ဗဟုဝစနတ္တံယေဝ ကထိတံ. ‘‘ဂစ္ဆံ, မဟံ, စရ’’န္တိအာဒီနံ ပန အာလပနဋ္ဌာနေ ဧကဝစနတ္တံ. မယံ ပန ဗုဒ္ဓဝစနေ အနေကာသု စာဋ္ဌကထာသု ‘‘ဂစ္ဆန္တော, မဟန္တော’’တိအာဒီနံ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂါနံ ‘‘ဂစ္ဆံ, မဟံ’’ဣစ္စာဒီနဉ္စ သာနုသာရာလပနေကဝစနပ္ပယောဂါနံ အဒဿနတော ‘‘ဂစ္ဆန္တော ဘာရဒွါဇော. သ ဂစ္ဆံ န နိဝတ္တတိ. မဟန္တော လောကသန္နိဝါသော’’တိအာဒီနံ ပန ပစ္စတ္တေကဝစနပ္ပယောဂါနညေဝ ဒဿနတော တာဒိသာနိ ရူပါနိ အနိဇ္ဈာနက္ခမာနိ ဝိယ မညာမ. နိရုတ္တိပိဋကေ ပစ္စတ္တာလပနဋ္ဌာနေ ‘‘မဟန္တော, ဘဝန္တော, စရန္တော’’တိအာဒီနံ ဗဟုဝစနတ္တမေဝ ကထိတံ, န ဧကဝစနတ္တံ. တထာ ဟိ တတ္ထ ‘‘မဟံ ဘဝံ စရံ တိဋ္ဌ’’န္တိ ဂါထံ ဝတွာ ‘‘မဟံ တိဋ္ဌတိ, မဟန္တော တိဋ္ဌန္တီ’’တိ စ, ‘‘ဘော မဟာ, ဘဝန္တော မဟန္တော’’တိ စ, ‘‘ဘဝံ တိဋ္ဌတိ, ဘဝန္တော တိဋ္ဌန္တီ’’တိ စ အာဒိ ဝုတ္တံ. त्यात यमक महाथेरांनी केवळ संबोधन विभक्तीच्या स्थानीच 'गच्छन्तो, महन्तो, चरन्तो' इत्यादींचे बहुवचन सांगितले आहे, आणि प्रथमा विभक्तीच्या (पच्चत्त) स्थानी एकवचन सांगितले आहे. काही इतरांनी मात्र प्रथमेच्या स्थानी एकवचन आणि बहुवचन दोन्ही, आणि संबोधनाच्या स्थानी केवळ बहुवचनच सांगितले आहे. परंतु 'गच्छं, महं, चरं' इत्यादींचे संबोधनाच्या स्थानी एकवचन सांगितले आहे. आम्ही मात्र बुद्धवचनात आणि अनेक अट्ठकथांमध्ये 'गच्छन्तो, महन्तो' इत्यादींच्या बहुवचनी प्रयोगांचा आणि 'गच्छं, महं' इत्यादींच्या अनुस्वारयुक्त संबोधनाच्या एकवचनी प्रयोगांचा अभाव असल्यामुळे, आणि 'गच्छन्तो भारद्वाजो' (गच्छन्तो भारद्वाज), 'स गच्छं न निवत्तति' (तो जात असताना परतत नाही), 'महन्तो लोकसन्निवॉसो' (महान लोकनिवास) इत्यादी केवळ प्रथमेच्या एकवचनी प्रयोगांचेच दर्शन होत असल्यामुळे, अशी रूपे विचारार्ह (स्वीकारार्ह) नाहीत असे मानतो. निरुत्तिपिटकात प्रथमा आणि संबोधन स्थानी 'महन्तो, भवन्तो, चरन्तो' इत्यादींचे केवळ बहुवचनच सांगितले आहे, एकवचन नाही. कारण तेथे 'महं भवं चरं तिट्ठं' ही गाथा सांगून 'महं तिट्ठति, mahन्तो तिट्ठन्ति' आणि 'भो महा, भवन्तो महन्तो' आणि 'भवं तिट्ठति, भवन्तो तिट्ठन्ति' इत्यादी म्हटले आहे. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဘဝံ, ဘဝန္တော’’တိ ပဒါနိ ယတ္ထ ‘‘ဟောန္တော ဟောန္တာ’’တိ ကြိယတ္ထံ န ဝဒန္တိ, တတ္ထ ‘‘ဘဝံ ကစ္စာနော. မာ ဘဝန္တော ဧဝံ အဝစုတ္ထာ’’တိအာဒီသု ဝိယ အညသ္မိံ အတ္ထေ ပတနတော ဧကဝစနဗဟုဝစနာနိ ဘဝန္တိ, တသ္မာ ‘‘သန္တော သပ္ပုရိသာ လောကေ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘သန္တော’’တိ ပဒဿ ဝိယ ‘‘အရဟန္တော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓါ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘အရဟန္တော’’တိ ပဒဿ ဝိယ စ ‘‘ဘဝန္တော’’တိ ပဒဿ ဗဟုဝစနတ္တံ နိဇ္ဈာနက္ခမံ. ‘‘မဟန္တော, စရန္တော, တိဋ္ဌန္တော’’တိအာဒီနံ ပန ဗဟုဝစနတ္တံ န နိဇ္ဈာနက္ခမံ ဝိယ အမှေ ပဋိဘာတိ. န ဟိ ကတ္ထစိပိ ‘‘သန္တော, အရဟန္တော, ဘဝန္တော’’တိ ပဒဝဇ္ဇိတာနံ ‘‘ဂစ္ဆန္တော, မဟန္တော, စရန္တော’’တိအာဒီနံ အနေကပဒသတာနံ ဗဟုဝစနန္တတာပယောဂေ ပဿာမ. တထာ ဟိ – परंतु येथे 'भवं, भवन्तो' हे शब्द जेथे 'होन्तो, होन्ता' (असणे) हा क्रियावाचक अर्थ दर्शवत नाहीत, तेथे 'भवं कच्चानो' (पूज्य कच्चायन), 'मा भवन्तो एवं अवचुत्थ' (आपण असे बोलू नका) इत्यादींप्रमाणे दुसऱ्या अर्थात प्रयुक्त होत असल्यामुळे ते एकवचन आणि बहुवचन होतात. म्हणूनच, 'सन्तो सप्पुरिसा लोके' (जगात सत्पुरुष आहेत) यातील 'सन्तो' या शब्दाप्रमाणे आणि 'अरहन्तो सम्मासम्बुद्धा' (अर्हत सम्यक्संबुद्ध) यातील 'अरहन्तो' या शब्दाप्रमाणे 'भवन्तो' या शब्दाचे बहुवचन असणे विचारार्ह (स्वीकारार्ह) आहे. परंतु 'महन्तो, चरन्तो, तिट्ठन्तो' इत्यादींचे बहुवचन असणे आम्हाला विचारार्ह वाटत नाही. कारण 'सन्तो, अरहन्तो, भवन्तो' हे शब्द वगळता 'गच्छन्तो, महन्तो, चरन्तो' इत्यादी शेकडो शब्दांचा बहुवचनी प्रयोग आम्हाला कोठेही आढळत नाही. कारण की – ဗဝှတ္တေ [Pg.224] ကတ္ထစိ ဌာနေ, ‘‘ဇာန’’မိစ္စာဒယော ယထာ; ဒိဿန္တိ နေဝံ ဗဝှတ္တေ, ‘‘ဂစ္ဆန္တော’’ ဣတိအာဒယော. ज्याप्रमाणे काही ठिकाणी 'जानं' (जाणणारा) इत्यादी शब्द बहुवचनात दिसतात, त्याप्रमाणे 'गच्छन्तो' इत्यादी शब्द बहुवचनात दिसत नाहीत. ဗဝှတ္တေ ကတ္ထစိ ဌာနေ, ‘‘သန္တော’’ ဣစ္စာဒယောပိ စ; ဒိဿန္တိ နေဝံ ဗဝှတ္တေ, ‘‘ဂစ္ဆန္တော’’ ဣတိအာဒယော. ज्याप्रमाणे काही ठिकाणी 'सन्तो' इत्यादी शब्द देखील बहुवचनात दिसतात, त्याप्रमाणे 'गच्छन्तो' इत्यादी शब्द बहुवचनात दिसत नाहीत. ‘‘အရဟန္တော’’တိ ဗဝှတ္တေ, ဧကန္တေနေဝ ဒိဿတိ; နေဝံ ဒိဿန္တိ ဗဝှတ္တေ, ‘‘ဂစ္ဆန္တော’’ ဣတိအာဒယော. 'अरहन्तो' हा शब्द निश्चितपणे बहुवचनात दिसतो; परंतु 'गच्छन्तो' इत्यादी शब्द बहुवचनात अशा प्रकारे दिसत नाहीत. အနေကသတပါဌေသု, ‘‘ဝိဟရန္တော’’တိအာဒီသု; ဧကဿပိ ဗဟုကတ္တေ, ပဝတ္တိ န တု ဒိဿတိ. 'विहरन्तो' इत्यादी शेकडो पाठांमध्ये, एकाही शब्दाची बहुवचनात प्रवृत्ती (वापर) दिसून येत नाही. ဗဟုဝစနနယေန, ‘‘ဂစ္ဆန္တော’’တိ ပဒဿ ဟိ; ဂဟဏေ သတိ ဗဟဝေါ, ဒေါသာ ဒိဿန္တိ သစ္စတော. कारण 'गच्छन्तो' हा शब्द बहुवचनाच्या नियमाने ग्रहण केला असता, खरोखरच अनेक दोष दिसून येतात. ယထေကမှိ ဃရေ ဒဍ္ဎေ, ဒဍ္ဎာ သာမီပိကာ ဃရာ; တထာ ဗဝှတ္တဝါစိတ္တေ, ‘‘ဂစ္ဆန္တော’’တိ ပဒဿ တု. ज्याप्रमाणे एक घर जळले असता शेजारची घरेही जळतात, त्याचप्रमाणे 'गच्छन्तो' या शब्दाला बहुवचनवाचक मानल्यास... ‘‘ဝိဟရန္တော’’တိအာဒီနံ, ဗဝှတ္တဝါစိတာ သိယာ; ရူပနယော အနိဋ္ဌော စ, ဂဟေတဗ္ဗော အနေကဓာ. ...'विहरन्तो' इत्यादी शब्दही बहुवचनवाचक होतील आणि अनिष्ट रूपपद्धती अनेक प्रकारे स्वीकारावी लागेल. ဧဝံ သန္တေပိ ယသ္မာ ‘‘နိရုတ္တိပိဋကံ နာမ ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေန မဟာခီဏာသဝေန မဟာကစ္စာယနေန ကတ’’န္တိ လောကေ ပသိဒ္ဓံ, တသ္မာ ဣဒံ ဌာနံ ပုနပ္ပုနံ ဥပပရိက္ခိတဗ္ဗံ. ကိဉ္စာပေတ္ထ ထေရေ ဂါရဝေန ဧဝံ ဝုတ္တံ, တထာပိ ပါဠိနယံ ဂရုံ ကတွာ ဒိဋ္ဌေနေကဝစနနယေန အဒိဋ္ဌော ဗဟုဝစနနယော ဆဍ္ဍေတဗ္ဗော. ဧဝံ သတိ နိဂ္ဂဟီတန္တေသု နယော သောဘနော ဘဝတိ. အယံ ပန အမှာကံ ရုစိ – असे असले तरी, 'निरुत्तिपिटक हे प्रभिन्नपटिसम्भिदा (प्रभेदयुक्त प्रतिसंभिदा) प्राप्त महान खीणासव (अर्हत) महाकच्चायनांनी रचले आहे' असे जगात प्रसिद्ध असल्यामुळे, या विषयाचे वारंवार परीक्षण केले पाहिजे. जरी येथे थेरांबद्दलच्या (स्थविरांबद्दलच्या) आदरापोटी असे म्हटले गेले असले, तरी पाळी भाषेच्या नियमाला श्रेष्ठ मानून, दृष्ट (दिसणाऱ्या) एकवचनाच्या नियमाच्या आधारे अदृष्ट (न दिसणारा) बहुवचनाचा नियम सोडून दिला पाहिजे. असे केल्यास निग्गहीत-अन्त शब्दांच्या बाबतीत हा नियम शोभून दिसतो. आमची पसंती (रुची) मात्र अशी आहे – ‘‘ဘဝံ ကရံ အရဟံ သံ, မဟံ’’ ဣတိ ပဒါနိ တု; ဝိသဒိသာနိ သမ္ဘောန္တိ, အညမညန္တိ လက္ခယေ. 'भवं, करं, अरहं, सं, महं' हे शब्द मात्र परस्परांपेक्षा विसदृश (भिन्न) आहेत, असे जाणावे. ‘‘ဂစ္ဆံ စရံ ဒဒံ တိဋ္ဌံ, စိန္တယံ ဘာဝယံ ဝဒံ; ဇာနံ ပဿ’’န္တိအာဒီနိ, သဒိသာနိ ဘဝန္တိ ဟိ. 'गच्छं, चरं, ददं, तिट्ठं, चिन्तयं, भावयं, वदं, जानं, पस्सं' इत्यादी शब्द खरोखरच समान (सदृश) आहेत. တတြ ‘‘ဇာန’’န္တိအာဒီနိ, ကတ္ထစိ ပရိဝတ္တရေ; ဝိဘတ္တိလိင်္ဂဝစန-ဝသေနာတိ ဝိဘာဝယေ. त्यात 'जानं' इत्यादी शब्द विभक्ती, लिंग आणि वचनाच्या अनुसार काही ठिकाणी बदलतात, असे स्पष्ट समजावे. တတြ [Pg.225] တာဝ ဘဝန္တသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတိ – ဘဝံသဒ္ဒေါ ဟိ ‘‘ဝဍ္ဎန္တော, ဟောန္တော’’တိ အတ္ထေပိ ဝဒတိ. တေသံ ဝသေန အယံ နာမိကပဒမာလာ. त्यामध्ये सर्वप्रथम 'भवन्त' शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगितली जात आहे – 'भवं' शब्द "वाढणारा, असणारा" या अर्थात देखील वापरला जातो. त्यांच्या आधारे ही नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) आहे. ဘဝံ, ဘဝန္တော, ဘဝန္တာ. ဘဝန္တံ, ဘဝန္တေ. ဘဝန္တေန, ဘဝန္တေဟိ, ဘဝန္တေဘိ. ဘဝန္တဿ, ဘဝန္တာနံ. ဘဝန္တာ, ဘဝန္တသ္မာ, ဘဝန္တမှာ, ဘဝန္တေဟိ, ဘဝန္တေဘိ. ဘဝန္တဿ, ဘဝန္တာနံ. ဘဝန္တေ, ဘဝန္တသ္မိံ, ဘဝန္တမှိ, ဘဝန္တေသု. ဟေ ဘဝန္တ, ဟေ ဘဝန္တာ. भवं, भवन्तो, भवन्ता। भवन्तं, भवन्ते। भवन्तेन, भवन्तेहि, भवन्तेभि। भवन्तस्स, भवन्तानं। भवन्ता, भवन्तस्मा, भवन्तम्हा, भवन्तेहि, भवन्तेभि। भवन्तस्स, भवन्तानं। भवन्ते, भवन्तस्मिं, भवन्तम्हि, भवन्तेसु। हे भवन्त, हे भवन्ता। တတ္ထ ‘‘ဘဝံ, ဘဝန္တော’’တိအာဒီနံ ‘‘ဝဍ္ဎန္တောဟောန္တော’’တိအာဒိနာ အတ္ထော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘သုဝိဇာနော ဘဝံ ဟောတိ. ဓမ္မကာမော ဘဝံ ဟောတိ. ရာဇာ ဘဝန္တော နာနာသမ္ပတ္တီဟိ မောဒတိ. ကုဠီရဒဟော ဂင်္ဂါယ ဧကာဗဒ္ဓေါ, ဂင်္ဂါယ ပူရဏကာလေ ဂင်္ဂေါဒကေန ပူရတိ, ဥဒကေ မန္ဒီ ဘဝန္တေ ဒဟတော ဥဒကံ ဂင်္ဂါယ ဩတရတီ’’တိ ပယောဂါ ဘဝန္တိ, တသ္မာ အယံ နာမိကပဒမာလာ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ ဘဝံသဒ္ဒမတ္တံ ဝဇ္ဇေတွာ ဂစ္ဆမာနစရမာနသဒ္ဒါဒီသု ဝိယ ဘဝန္တသဒ္ဒေ ‘‘ဘဝန္တော, ဘဝန္တာ’’တိ ပုရိသနယောပိ လဗ္ဘတိ, နပုံသကလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဘဝန္တံ, ဘဝန္တာနီ’’တိ စိတ္တနယောပိ လဗ္ဘတိ. ဧဝံ ဝဍ္ဎနဘဝနတ္ထဝါစကဿ ဘဝန္တသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. तेथे 'भवं, भवन्तो' इत्यादी शब्दांचा अर्थ 'वाढणारा, असणारा' (वड्ढन्तो, होन्तो) इत्यादी असा समजला पाहिजे. कारण की, 'सुविजानो भवं होति' (कल्याणकारी मनुष्य सहज ओळखता येतो), 'धम्मकामो भवं होति' (धम्माची आवड असणारा मनुष्य कल्याणकारी होतो), 'राजा भवन्तो नानासम्पत्तीहि मोदति' (राजा समृद्ध होत विविध संपत्तीने आनंदित होतो), 'कुळीरदहो गङ्गाय एकाबद्धो, गङ्गाय पूरणकाले गङ्गोदकेन पूरति, उदके मन्दी भवन्ते दहतो उदकं गङ्गाय ओतरती' (कर्कटक डोह गंगेला जोडलेला आहे, गंगेला पूर येतो तेव्हा तो गंगेच्या पाण्याने भरतो, आणि पाणी कमी होत असताना डोहातील पाणी गंगेत उतरते) असे प्रयोग आढळतात. म्हणून ही नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमळा) मूलतः समजून घेतली पाहिजेत. येथे केवळ 'भवं' हा शब्द वगळता, 'गच्छमान, चरमान' इत्यादी शब्दांप्रमाणे 'भवन्त' शब्दात 'भवन्तो, भवन्ता' असा पुल्लिंगी प्रयोगही मिळतो; नपुंसकलिंगात सांगायचे झाल्यास 'भवन्तं, भवन्तानि' असा 'चित्त' शब्दासारखा प्रयोगही मिळतो. अशा प्रकारे, वाढणे किंवा असणे या अर्थाचा वाचक असलेल्या 'भवन्त' शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमळा) समजून घ्यावीत. အယဉ္စ ဝိသေသော ‘‘ဘဝန္တော’’တိ ပဒံ ဝဍ္ဎနဘဝနတ္ထတော အညတ္ထေ ဝတ္တမာနံ ဗဟုဝစနမေဝ ဟောတိ, ယထာ ‘‘ဘဝန္တော အာဂစ္ဆန္တီ’’တိ. ဝဍ္ဎနဘဝနတ္ထေသု ဝတ္တမာနံ ဧကဝစနမေဝ. အတြိမေ ပယောဂါ ‘‘အနုပုဗ္ဗေန ဘဝန္တော ဝိညုတံ ပါပုဏာတိ. သမဏေန နာမ ဤဒိသေသု ကမ္မေသု အဗျာဝဋေန ဘဝိတဗ္ဗံ, ဧဝံ ဘဝန္တော ဟိ သမဏော သုသမဏော အဿာ’’တိ. ‘‘ဘဝံ’’ ဣတိ ပဒံ ပန ဥဘယတ္ထာပိ ဧကဝစနမေဝ, တသ္မာ [Pg.226] ဣဒါနိ ‘‘ဘဝံ အာနန္ဒော. ဘဝန္တော အာဂစ္ဆန္တိ, အပ္ပသဒ္ဒါ ဘဝန္တော ဟောန္တု, မာ ဘောန္တော သဒ္ဒမကတ္ထာ’’တိ ဧဝမာဒိပယောဂဒဿနဝသေန ဝေါဟာရဝိသေသေ ပဝတ္တံ အညံ အတ္ထံ ပဋိစ္စ အပရာပိ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आणि हा विशेष आहे की, 'भवन्तो' हा शब्द वाढणे किंवा असणे या अर्थाव्यतिरिक्त इतर अर्थात (उदा. आदरणीय महोदय या अर्थात) वापरला असता तो केवळ बहुवचनातच असतो, जसे की 'भवन्तो आगच्छन्ति' (महोदय येत आहेत). वाढणे किंवा असणे या अर्थांमध्ये वापरला असता तो केवळ एकवचनातच असतो. येथे हे प्रयोग आहेत: 'अनुपुब्बेन भवन्तो विञ्ञुतं पापुणाति' (हळूहळू वाढणारा मनुष्य शहाणपणाला प्राप्त होतो). 'समणेन नाम ईदिसेसु कम्मेसु अब्यावटेन भवितब्बं, एवं भवन्तो हि समणो susamaṇo assā' (श्रमणाने अशा कामांमध्ये अलिप्त राहिले पाहिजे, कारण असा असणारा श्रमणच चांगला श्रमण होतो). परंतु 'भवं' हा शब्द दोन्ही अर्थांमध्ये केवळ एकवचनातच असतो. म्हणून आता 'भवं आनन्दो' (आदरणीय आनंद), 'भवन्तो आगच्छन्ति' (महोदय येत आहेत), 'अप्पसद्दा भवन्तो होन्तु' (महोदय, शांत व्हा), 'मा भोन्तो सद्दं अकत्था' (महोदयांनो, गोंगाट करू नका) इत्यादी प्रयोगांच्या दर्शनावरून, विशिष्ट व्यवहारात प्रवृत्त झालेल्या दुसऱ्या अर्थाच्या अपेक्षेने दुसरी नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमळा) सांगितली जात आहेत – ဘဝံ, ဘဝန္တော, ဘောန္တော. ဘဝန္တံ, ဘဝန္တေ. ဘဝတာ, ဘောတာ, ဘဝန္တေန, ဘဝန္တေဟိ, ဘဝန္တေဘိ. ဘဝတော, ဘောတော, ဘဝန္တဿ, ဘဝန္တာနံ, ဘဝတံ. ဘဝတာ, ဘောတာ, ဘဝန္တေဟိ, ဘဝန္တေဘိ. ဘဝတော, ဘောတော, ဘဝန္တဿ, ဘဝန္တာနံ, ဘဝတံ. ဘဝတိ, ဘဝန္တေ, ဘဝန္တသ္မိံ, ဘဝန္တမှိ, ဘဝန္တေသု. ဘော, ဘဝန္တော, ဘောန္တော ဣတိ. भवं, भवन्तो, भोन्तो। भवन्तं, भवन्ते। भवता, भोता, भवन्तेन, भवन्तेहि, भवन्तेभि। भवतो, भोतो, भवन्तस्स, भवन्तानं, भवतं। भवता, भोता, भवन्तेहि, भवन्तेभि। भवतो, भोतो, भवन्तस्स, भवन्तानं, भवतं। भवति, भवन्ते, भवन्तस्मिं, भवन्तम्हि, भवन्तेसु। भो, भवन्तो, भोन्तो. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဘော’’ဣစ္စာဒီနိ တီဏိ ပဒါနိ ယသ္မာ ဝေါဟာရဝိသေသပဝတ္တာနိ အာလပနပဒါနိ ဟောန္တိ, တသ္မာ ‘‘အာဝုသော, ဘန္တေ’’တိ ပဒါနိ ဝိယ ဘောသဒ္ဒါဒိဥပပဒဝန္တာနိ န ဘဝန္တိ, ‘‘ဘော ပုရိသ, ဘဝန္တော ဗြာဟ္မဏာ, ဘောန္တော သမဏာ, ဘော ရာဇ’’ဣစ္စာဒီသု ဟိ ပုရိသသဒ္ဒါဒယောယေဝ ဘောသဒ္ဒါဒိ ဥပပဒဝန္တော ဘဝန္တိ. ဣဓ စ ‘‘ဘဝံ အာနန္ဒော’’တိ ဧတ္ထ ဘဝံသဒ္ဒေန သမာနတ္ထာနိ ‘‘ဘော, ဘဝန္တော, ဘောန္တော’’တိ ပဒါနိ ဝုတ္တာနိ, န ပန ‘‘ဓမ္မကာမော ဘဝံ ဟောတီ’’တိ ဧတ္ထ ဘဝံသဒ္ဒေန သမာနတ္ထာနိ. ပဌမသ္မိဉှိ နယေ ဝဍ္ဎနတ္ထဝသေန ‘‘ဘော ဘဝန္တ, ဘဝန္တော ဘဝန္တာ, ဘောန္တော ဘဝန္တာ’’တိ ဘောသဒ္ဒါဒယော အာလပနပဒါနံ ဥပပဒါနိ ဘဝန္တိ, န ဒုတိယသ္မိံ နယေ. အာမေဍိတဝသေန ပန ‘‘ဘော ဘော, ဘဝန္တော ဘဝန္တော, ဘောန္တော ဘောန္တော’’တိ ပဒါနိ ဘဝန္တိ ယထာ ‘‘ဘန္တေ ဘန္တေ’’တိ. येथे 'भो' इत्यादी तीन शब्द विशिष्ट व्यवहारात प्रवृत्त झालेले संबोधनाचे शब्द (आलपनपदे) असल्यामुळे, ते 'आवुसो, भन्ते' या शब्दांप्रमाणे 'भो' इत्यादी उपपदे असणारे नसतात. कारण 'भो पुरिस' (हे माणसा), 'भवन्तो ब्राह्मणा' (आदरणीय ब्राह्मणहो), 'भोन्तो समणा' (आदरणीय श्रमणहो), 'भो राज' (हे राजा) इत्यादींमध्ये 'पुरिस' इत्यादी शब्दच 'भो' इत्यादी उपपदांनी युक्त असतात. आणि येथे 'भवं आनन्दो' यामध्ये 'भवं' या शब्दाशी समान अर्थ असलेले 'भो, भवन्तो, भोन्तो' हे शब्द सांगितले आहेत, परंतु 'धम्मकामो भवं होति' यातील 'भवं' शब्दाशी समान अर्थाचे नाहीत. पहिल्या पद्धतीमध्ये (म्हणजे वाढणे या अर्थात) वाढण्याच्या अर्थामुळे 'भो भवन्त, भवन्तो भवन्ता, भोन्तो भवन्ता' असे 'भो' इत्यादी शब्द संबोधनाच्या पदांचे उपपदे होतात, दुसऱ्या पद्धतीमध्ये नाही. पुनरावृत्तीच्या (आमेडित) रूपाने 'भो भो, भवन्तो भवन्तो, भोन्तो भोन्तो' असे शब्द होतात, जसे की 'भन्ते भन्ते'. အတြိဒံ ဘူဓာတုဝသေန သင်္ခေပတော ပါဠိနိဒဿနံ – ကသ္မာ ဘဝံ ဝိဇ္ဇနမရညနိဿိတော. ကထံ ပနာဟံ ဘော တံ ဘဝန္တံ ဂေါတမံ ဇာနိဿာမိ. ဧဝံ ဘောတိ ခေါ အမ္ဗဋ္ဌော မာဏဝေါ [Pg.227] ဗြာဟ္မဏဿ ပေါက္ခရသာတိဿ ပဋိဿုတွာ. မာ ဘဝန္တော ဧဝံ အဝစုတ္ထ. ဣမံ ဘောန္တော နိသာမေထ. ဧဝံ ဘော ပုရိသ ဇာနာဟိ, ပါပဓမ္မာ အသညတာ ဣစ္စေဝမာဒိ. ဧတ္ထ ‘‘ဘဝံ’’ဣစ္စာဒီနိ ဘူဓာတုမယာနိ နာမပဒါနီတိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. येथे 'भू' धातूच्या अनुषंगाने थोडक्यात पालि उदाहरणे दिली आहेत – 'कस्मा भवं विज्जनमरण्ञनिस्सितो' (आदरणीय महोदय निर्जन अरण्याचा आश्रय का घेत आहेत?), 'कथं पनाहं भो तं भवन्तं गोतमं जानिस्सामि' (पण हे महोदया, मी त्या आदरणीय गोतमांना कसे ओळखणार?), 'एवं भोति खो अम्बट्ठो माणवो ब्राह्मणस्स पोक्खरसातिस्स पटिस्सुत्वा' (अशा प्रकारे, 'हे महोदया' [किंवा 'असे होय' या अर्थी 'भो' + 'इति'], अम्बट्ठ नावाच्या तरुण ब्राह्मणाने पोक्खरसाती ब्राह्मणाला उत्तर दिले), 'मा भवन्तो एवं अवचुत्थ' (महोदयांनो, असे बोलू नका), 'इमं भोन्तो निसामेथ' (महोदयांनो, हे ऐका), 'एवं भो पुरिस जानाहि, पापधम्मा असञ्ञता' (हे माणसा, असे समज की पापी लोक असंयमी असतात) इत्यादी. येथे 'भवं' इत्यादी शब्द 'भू' धातूपासून बनलेले नामशब्द आहेत असे समजले पाहिजे. အပိစ တေသု ‘‘ဘော, ဘဝန္တော, ဘောန္တော’’တိ ဣမာနိ နိပါတပဒါနိပိ ဟောန္တီတိ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗံ. ‘‘ဘော ပုရိသာ’’တိအာဒီသု တေသံ နိပါတာနိပါတဘာဝေ ဝိဝါဒေါ န ကရဏီယော. ကစ္စာယနသ္မိဉှိ ‘‘ဘော ဂေ တူ’’တိ ဝုတ္တံ. အညတ္ထ ပန ‘‘အာမန္တနတ္ထေ နိပါတော’’တိအာဒိ ဝုတ္တံ. တထာ ဟိ နိရုတ္တိမဉ္ဇူသာယံ ဝုတ္တံ ‘‘ဘောတိဒံ အာမန္တနတ္ထေ နိပါတော. သော န ကေဝလံ ဧကဝစနမေဝ ဟောတိ, အထ ခေါ ဗဟုဝစနမ္ပိ ဟောတီတိ ‘ဘော ပုရိသာ’တိ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂေါပိ ဂဟိတော. ‘ဘဝန္တော’တိ ပဒံ ပန ဗဟုဝစနမေဝ ဟောတီတိ ‘ပုရိသာ’တိ ပုန ဝုတ္တ’’န္တိ. ပါဠိယဉှိ အဋ္ဌကထာသု စ နိပါတဘူတော ဘောသဒ္ဒေါ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဒွိဓာ ဒိဿတိ, ဣတရေ ပန ဗဟုဝစနဝသေနေဝ ဒိဿန္တိ. တေသံ တု နိပါတပဒတ္တေ ရူပနိပ္ဖာဒနကိစ္စံ နတ္ထိ. တေသု ဘောသဒ္ဒဿ နိပါတပဒတ္တာ အာဟစ္စဘာသိတေ နိဇ္ဇီဝါလပနေ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝိသယော ‘‘ဥမ္မုဇ္ဇ ဘော ပုထုသိလေ, ပရိပ္လဝ ဘော ပုထုသိလေ’’တိ ပယောဂေါပိ ဒိဿတိ. အတြိမာ ဘောသဒ္ဒဿ ပဝတ္တိပရိဒီပနီ ဂါထာယော – शिवाय, त्यांच्यामध्ये 'भो, भवन्तो, भोन्तो' हे अव्यय (निपात) शब्द देखील असतात, असे निश्चित केले पाहिजे. 'भो पुरिसा' इत्यादींमध्ये त्यांच्या अव्यय असण्या-नसण्याबाबत वाद घालू नये. कारण कच्चायन व्याकरणात 'भो गे तू' असे म्हटले आहे. इतर ठिकाणी 'संबोधनाच्या अर्थातील अव्यय' (आमन्तनत्थे निपातो) इत्यादी म्हटले आहे. तसेच निरुत्तिमंजुषामध्ये म्हटले आहे: 'हा "भो" शब्द संबोधनाच्या अर्थातील अव्यय आहे. तो केवळ एकवचनातच असतो असे नाही, तर बहुवचनातही असतो, म्हणूनच "भो पुरिसा" हा बहुवचनी प्रयोगही स्वीकारला आहे. परंतु "भवन्तो" हा शब्द केवळ बहुवचनातच असतो, म्हणून पुन्हा "पुरिसा" असे म्हटले आहे.' कारण पालि आणि अट्ठकथांमध्ये अव्यय असलेला 'भो' शब्द एकवचन आणि बहुवचनाच्या भेदाने दोन प्रकारे दिसतो, परंतु इतर शब्द केवळ बहुवचनातच दिसतात. परंतु त्यांचे अव्यय रूप असल्यामुळे त्यांच्यात रूपसिद्धीचे कार्य (रूपनिप्फादन-किच्च) नसते. त्यांच्यामध्ये 'भो' हा शब्द अव्यय असल्यामुळे, निर्जीव गोष्टींना संबोधित करताना स्त्रीलिंगी विषयात देखील 'उम्मुज्ज भो पुथुसिले, परिप्लव भो पुथुसिले' (हे विस्तीर्ण शिळे, वर ये! हे विस्तीर्ण शिळे, तरंग!) असा प्रयोगही दिसतो. येथे 'भो' शब्दाच्या वापराचे स्पष्टीकरण करणाऱ्या गाथा आहेत – ‘‘ဣတော ဘော သုဂတိံ ဂစ္ဆ, မနုဿာနံ သဟဗျတံ’’; ဧဝမာဒီသု ဘောသဒ္ဒေါ, ဧကဝစနကော မတော. 'हे महोदया, येथून सुगतीला जा, मनुष्यांच्या सहवासात जा'; इत्यादींमध्ये 'भो' हा शब्द एकवचनी मानला गेला आहे. ‘‘ပဿထ ဘော ဣမံ ကုလ-ပုတ္တ’’မိစ္စေဝမာဒိသု; ဗဟုဝစနကော ဧသော, ဘောသဒ္ဒေါတိ ဝိဘာဝယေ. 'महोदयांनो, या कुलपुत्राला पहा'; इत्यादींमध्ये हा 'भो' शब्द बहुवचनी आहे असे स्पष्ट होते. ပုဂ္ဂလာလပနေ [Pg.228] စေဝ, ဓမ္မဿာလပနေပိ စ; နိဇ္ဇီဝါလပနေ စာတိ, ဘောသဒ္ဒေါ တီသု ဒိဿတိ. व्यक्तीला संबोधित करताना, गुणाला (धम्माला) संबोधित करताना आणि निर्जीव वस्तूला संबोधित करताना – अशा तीनही ठिकाणी 'भो' शब्द आढळतो. တတြ ဓမ္မာလပနမှိ, ဧကဝစောဝ လဗ္ဘတိ; ဣတရေသု သိယာ ဒေက-ဝစော ဗဟုဝစောပိ စ. त्यामध्ये गुणाच्या (धम्माच्या) संबोधनात केवळ एकवचनच मिळते; इतरांमध्ये एकवचन किंवा बहुवचन देखील असू शकते. နိစ္ဆိတဗ္ဗံ ဂုဏီပဒံ, ဓမ္မဿာလပနေ ဓုဝံ; ‘‘အစ္ဆရိယံ ဝတ ဘော’’တိ, ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. गुणाच्या (धम्माच्या) संबोधनात विशेष्य पद (गुणीपद) निश्चितपणे ठरवले पाहिजे; 'आश्चर्य आहे खरोखर, महोदया!' (अच्छरियं वत भो) हे याचे येथे उदाहरण आहे. ဣစ္ဆိတဗ္ဗံ ဂုဏီပဒံ, ပုဂ္ဂလာလပနေ ပန; ‘‘ဧဝံ ဘော ပုရိသ ဇာနာဟိ’’, ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. परंतु व्यक्तीच्या संबोधनात विशेष्य पद (गुणीपद) अपेक्षित असते; 'हे माणसा, असे समज' (एवं भो पुरिस जानाहि) हे याचे येथे उदाहरण आहे. ဂုဏီပဒံ အသန္တမ္ပိ, ပုဂ္ဂလာလပနမှိ တု; အဇ္ဈာဟရိတွာ ပါဝဒေ, အတ္ထံ ‘‘ဘော ဧဟိ’’အာဒိသု. परंतु व्यक्तीच्या संबोधनात विशेष्य पद (गुणीपद) नसले तरीही, 'भो एहि' (हे महोदया, या) इत्यादींमध्ये अध्याहार करून अर्थ स्पष्ट करावा. ဃဋာဒီနံ အာလပနံ, နိဇ္ဇီဝါလပနံ ဘဝေ; ဇီဝံဝ လောကိယာ လောကေ, အာလပန္တိ ကဒါစိ တု. घडा इत्यादींना संबोधित करणे हे निर्जीव संबोधन (निज्जीवालापन) होय; संसारी लोक जगात कधीकधी त्यांना जणू काही सजीव असल्यासारखे संबोधित करतात. နိဇ္ဇီဝါလပနံ အပ္ပံ, အတ္ထဝိညာပနေ သိယာ; ‘‘ဥမ္မုဇ္ဇ ဘော ပုထုသိလေ’’, ဣတိ ပါဠိ နိဒဿနံ. निर्जीव वस्तूंचे संबोधन अल्प असते, ते अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी असू शकते; 'हे विस्तीर्ण शिळे, वर ये (उमज्जा)', हे पाळी भाषेतील उदाहरण आहे. ဧတ္ထ လိင်္ဂဝိပလ္လာသံ, ကေစိ ဣစ္ဆန္တိ ပဏ္ဍိတာ; တေသံ မတေန ဘောတီတိ, လိင်္ဂံ ဝိပရိဏာမယေ. येथे काही पंडित लिंगविपर्यास (लिंग बदल) मानतात; त्यांच्या मते 'भोती' (bhotī) असे लिंग परिवर्तित करावे. အထ ဝါ ပန ဘောသဒ္ဒေါ, နိပါတော သောပဒံ ဝိယ; တသ္မာ ဝိရောဓတာ နာဿ, တိလိင်္ဂေ ဝစနဒွယေ. किंवा 'भो' हा शब्द निपात (अव्यय) आहे, पदासारखा; म्हणून तिन्ही लिंगांत आणि दोन्ही वचनांत त्याचा काही विरोध (विसंगती) नाही. ဧဝံ သန္တေပိ ဘောသဒ္ဒေါ, ဒွိလိင်္ဂေယေဝ ပါယတော; ယသ္မာ ဒိဋ္ဌော တတော ဝိညူ, ဒွိလိင်္ဂေယေဝ တံ ဝဒေ. असे असूनही, 'भो' हा शब्द प्रायः दोनच लिंगांत आढळतो; म्हणून विद्वानांनी त्याचा प्रयोग दोनच लिंगांत करावा. ဣတ္ထိလိင်္ဂမှိ သမ္ပတ္တေ, ‘‘ဘော’’တိ ဣတိ ပယောဇယေ; ဧဝံဝိဓံ ပယောဂဉှိ, သုပ္ပယောဂံ ဗုဓာဗြဝုံ. स्त्रीलिंग प्राप्त झाले असता 'भो' असा प्रयोग करावा; अशा प्रकारच्या प्रयोगालाच विद्वानांनी सुप्रयोग (योग्य प्रयोग) म्हटले आहे. ယဇ္ဇေဝံ [Pg.229] ဒုပ္ပယောဂံဝ, သိယာ တုမှေဟိ ဒဿိတံ; ‘‘ဥမ္မုဇ္ဇ ဘော ပုထုသိလေ’’, ဣစ္စာဟစ္စပဒန္တိ စေ. जर तुमच्याद्वारे दर्शविलेला 'हे विस्तीर्ण शिळे, वर ये' (उमज्जा भो पुथुसिले) हा प्रयोग दुष्प्रयोग (अयोग्य प्रयोग) वाटत असेल, आणि तो केवळ एक अपवादात्मक प्रयोग (आहतपद) आहे असे मानले तर? ဒုပ္ပယောဂံ န တံ ယသ္မာ, ဝေါဟာရကုသလေန ဝေ; ဇိနေန ဘာသိတေ ဓမ္မေ, ဒုပ္ပယောဂါ န ဝိဇ္ဇရေ. तो दुष्प्रयोग नाही, कारण व्यवहारकुशल अशा जिनांनी (बुद्धांनी) उपदेशिलेल्या धम्मामध्ये दुष्प्रयोग आढळत नाहीत. ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဝိသယေ, ဘောတိသဒ္ဒပ္ပယောဇနံ; ကဝီနံ ပေမနီယန္တိ, မယာ ဧဝမုဒီရိတံ. स्त्रीलिंगाच्या विषयात 'भोती' (bhoti) शब्दाचा प्रयोग कवींना प्रिय वाटणारा आहे, असे माझ्याद्वारे म्हटले गेले आहे. ဧဝံ ဘဝန္တသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ပါဠိနယာနုရူပံ ဒွိဓာ ဝိဘတ္တာ ဝဍ္ဎနဘဝနတ္ထတဒညတ္ထဝသေန. अशा प्रकारे 'भवंत' शब्दाची नामपदमाला (विभक्ती रूपे) पाळी नियमांनुसार 'वर्धन-भवन' अर्थ आणि त्याव्यतिरिक्त इतर अर्थांच्या भेदाने दोन प्रकारे विभागली आहे. ကရောန္တသဒ္ဒဿ ပန – पण 'करोन्त' (करत असलेला) शब्दाची रूपे खालीलप्रमाणे आहेत – ကရံ, ကရောန္တော, ကရောန္တာ. ကရောန္တံ, ကရောန္တေ. ကရောတာ, ကရောန္တေန, ကရောန္တေဟိ, ကရောန္တေဘိ. ကရောတော, ကရောန္တဿ, ကရောန္တာနံ, ကရောတံ. ကရောတာ, ကရောန္တာ, ကရောန္တသ္မာ, ကရောန္တမှာ, ကရောန္တေဟိ, ကရောန္တေဘိ. ကရောတော, ကရောန္တဿ, ကရောန္တာနံ, ကရောတံ. ကရောန္တေ, ကရောန္တသ္မိံ, ကရောန္တမှိ, ကရောန္တေသု. ဘော ကရောန္တ, ဘဝန္တော ကရောန္တာတိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. करं, करोन्तो, करोन्ता. करोन्तं, करोन्ते. करोता, करोन्तेन, करोन्तेहि, करोन्तेभि. करोतो, करोन्तस्स, करोन्तानं, करोतं. करोता, करोन्ता, करोन्तस्मा, करोन्तम्हा, करोन्तेहि, करोन्तेभि. करोतो, करोन्तस्स, करोन्तानं, करोतं. करोन्ते, करोन्तस्मिं, करोन्तम्हि, करोन्तेसु. भो करोन्त, भवन्तो करोन्ता अशी रूपे होतात. ‘‘ကရောတော န ကရိယတိ ပါပ’’န္တိ ဣဒမေတ္ထ ကရောတောသဒ္ဒဿ အတ္ထိတာနိဒဿနံ. ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ကရောန္တီ, ကရောန္တိယော’’တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ, နပုံသကလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ကရောန္တံ, ကရောန္တာနီ’’တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. 'करणाऱ्याकडून पाप केले जात नाही' (करोतो न करियति पापं) हे येथे 'करोतो' शब्दाच्या अस्तित्वाचे उदाहरण आहे. स्त्रीलिंगात सांगायचे असल्यास 'करोन्ती, करोन्तियो' इत्यादी रूपांनी योजना करावी, आणि नपुंसकलिंगात सांगायचे असल्यास 'करोन्तं, करोन्तानी' इत्यादी रूपांनी योजना करावी. အရဟန္တသဒ္ဒဿ – 'अरहन्त' शब्दाची रूपे खालीलप्रमाणे आहेत – အရဟံ, အရဟန္တော. အရဟန္တံ, အရဟန္တေ. အရဟတာ, အရဟန္တေန, အရဟန္တေဟိ, အရဟန္တေဘိ. အရဟတော, အရဟန္တဿ, အရဟန္တာနံ, အရဟတံ. အရဟတာ, အရဟန္တာ, အရဟန္တသ္မာ, အရဟန္တမှာ, အရဟန္တေဟိ, အရဟန္တေဘိ. အရဟတော, အရဟန္တဿ, အရဟန္တာနံ, အရဟတံ. အရဟန္တေ, အရဟန္တသ္မိံ[Pg.230], အရဟန္တမှိ, အရဟန္တေသု. ဘော အရဟန္တ, ဘဝန္တော အရဟန္တော ဣတိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. अरहं, अरहन्तो. अरहन्तं, अरहन्ते. अरहता, अरहन्तेन, अरहन्तेहि, अरहन्तेभि. अरहतो, अरहन्तस्स, अरहन्तानं, अरहतं. अरहता, अरहन्ता, अरहन्तस्मा, अरहन्तम्हा, अरहन्तेहि, अरहन्तेभि. अरहतो, अरहन्तस्स, अरहन्तानं, अरहतं. अरहन्ते, अरहन्तस्मिं, अरहन्तम्हि, अरहन्तेसु. भो अरहन्त, भवन्तो अरहन्तो अशी रूपे होतात. အယံ ဂုဏဝါစကဿ အရဟန္တသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. ‘‘အရဟာ, အရဟန္တော, အရဟန္တာ’’ဣတိ စ. ဧတဉှိ ရူပံ သမန္တပါသာဒိကာယံ မနုဿဝိဂ္ဂဟဋ္ဌာနေ ဒိဿတိ. ဥတ္တရိမနုဿဓမ္မပါဠိယံ ပန ‘‘မယဉ္စမှာ အနရဟန္တော’’တိ ပဒံ ဒိဿတိ. အရဟန္တံ, အရဟန္တေ. အရဟတာ, သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. အယံ ပဏ္ဏတ္တိဝါစကဿ အရဟန္တသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. ही गुणवाचक 'अरहन्त' शब्दाची नामपदमाला आहे. तसेच 'अरहा, अरहन्तो, अरहन्ता' अशीही रूपे होतात. हे रूप समन्तपासादिकामध्ये 'मनुष्यविग्रह' (मनुस्सविग्गह) प्रकरणात दिसते. उत्तरिमनुस्सधम्म पाळीमध्ये (विनयपिटक) 'मयञ्चम्हा अनरहन्तो' (आम्ही अरहंत नाही आहोत) हे पद दिसते. अरहन्तं, अरहन्ते, अरहता, उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ही प्रज्ञप्तिवाचक (संज्ञावाचक) 'अरहन्त' शब्दाची नामपदमाला आहे. တထာ ဟိ ‘‘အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ. အရဟံ သုဂတော လောကေ. အရဟန္တော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓါ’’တိအာဒီသု အရဟံသဒ္ဒါဒယော ဂုဏဝါစကာ. ‘‘အရဟာ အဟောသိ. အဟဉှိ အရဟာ လောကေ. ဧကော အရဟာ, ဧကသဋ္ဌိ အရဟန္တော လောကေ အဟေသုံ. तसेच, जसे की 'अरहं सम्मासम्बुद्धो' (अरहंत सम्यक्संबुद्ध), 'अरहं सुगतो लोके' (जगात अरहंत सुगत), 'अरहन्तो सम्मासम्बुद्धा' (अरहंत सम्यक्संबुद्ध) इत्यादींमध्ये 'अरहं' इत्यादी शब्द गुणवाचक आहेत. तर 'अरहा अहोसि' (अरहंत झाले), 'अहञ्हि अरहा लोके' (मीच जगात अरहंत आहे), 'एकॉ अरहा, एकसट्ठि अरहन्तो लोके अहेसुं' (जगात एक अरहंत, एकसष्ट अरहंत झाले) इत्यादींमध्ये... ဂါမေ ဝါ ယဒိ ဝါရညေ, နိန္နေ ဝါ ယဒိ ဝါ ထလေ; ယတ္ထ အရဟန္တော ဝိဟရန္တိ, တံ ဘူမိရာမဏေယျကံ. गावात असो वा अरण्यात, सखल भागात असो वा मैदानावर, जेथे अरहंत विहार करतात, ती भूमी रमणीय असते. မယဉ္စမှာ အနရဟန္တော’’တိအာဒီသု အရဟာသဒ္ဒါဒယော ပဏ္ဏတ္တိဝါစကာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. ဣဓ ဣတ္ထိနပုံသကလိင်္ဂဝသေန ဝိသုံ ဝတ္တဗ္ဗနယော အပ္ပသိဒ္ဓေါ. ယဒိ ဧဝံ အာသဝက္ခယံ ပတ္တာ ဣတ္ထီ ကထံ ဝတ္တဗ္ဗာ, အာသဝက္ခယံ ပတ္တံ စိတ္တံ ကထံ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ? ဣတ္ထီ တာဝ ‘‘ယံ ဣတ္ထီ အရဟံ အဿ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ’’တိ ဝစနတော ‘‘အရဟ’’န္တိ ဝတ္တဗ္ဗာ ဂုဏဝသေန, ပဏ္ဏတ္တိဝသေန ပန ‘‘ဣတ္ထီ အရဟာ အဟောသီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗာ. စိတ္တံ ပန ဂုဏဝသေနေဝ ‘‘အရဟံ စိတ္တ’’န္တိ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ. ...आणि 'मयञ्चम्हा अनरहन्तो' इत्यादींमध्ये 'अरहा' इत्यादी शब्द प्रज्ञप्तिवाचक (संज्ञावाचक) आहेत असे जाणावे. येथे स्त्रीलिंग आणि नपुंसकलिंगाच्या बाबतीत स्वतंत्रपणे सांगण्याचा नियम जाणावा. जर असे असेल, तर आसवांचा क्षय (आसवक्खय) झालेल्या स्त्रीला काय म्हणावे, आणि आसवांचा क्षय झालेल्या चित्ताला काय म्हणावे? स्त्रीला तर 'जी स्त्री अरहंत असेल, सम्यक्संबुद्ध असेल...' या वचनानुसार गुणाच्या दृष्टीने 'अरहं' (arahaṃ) म्हणावे, परंतु प्रज्ञप्तीच्या (संज्ञेच्या) दृष्टीने 'इत्थी अरहा अहोसि' (स्त्री अरहंत झाली) असे म्हणावे. चित्ताला मात्र गुणाच्या दृष्टीनेच 'अरहं चित्तं' (arahaṃ cittaṃ) असे म्हणावे. သန္တသဒ္ဒဿ [Pg.231] – 'सन्त' (सज्जन) शब्दाची रूपे खालीलप्रमाणे आहेत – သံ, သန္တော, သန္တော, သန္တာ. သံ, သန္တံ, သန္တေ. သတာ, သန္တေန, သန္တေဟိ, သန္တေဘိ, သဗ္ဘိ. သတော, သန္တဿ, သန္တာနံ, သတံ, သတာနံ. သတာ, သန္တာ, သန္တသ္မာ, သန္တမှာ, သန္တေဟိ, သန္တေဘိ, သဗ္ဘိ. သတော, သန္တဿ, သန္တာနံ, သတံ, သတာနံ. သတိ, သန္တေ, သန္တသ္မိံ, သန္တမှိ, သန္တေသု. ဘော သန္တ, ဘဝန္တော သန္တောတိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. सं, सन्तो, सन्तो, सन्ता. सं, सन्तं, सन्ते. सता, सन्तेन, सन्तेहि, सन्तेभि, सब्भि. सतो, सन्तस्स, सन्तानं, सतं, सतानं. सता, सन्ता, सन्तस्मा, सन्तम्हा, सन्तेहि, सन्तेभि, सब्भि. सतो, सन्तस्स, सन्तानं, सतं, सतानं. सति, सन्ते, सन्तस्मिं, सन्तम्हि, सन्तेसु. भो सन्त, भवन्तो सन्तो अशी रूपे होतात. ဧတ္ထ ပန ‘‘အဒ္ဓါ ဟိ တာတ သတနေသ ဓမ္မော’’တိ ဇယဒ္ဒိသဇာတကပါဠိဒဿနတော ‘‘သတာန’’န္တိ ဝုတ္တံ. တတ္ထ ဟိ သတနေသာတိ သတာနံ ဧသာတိ ဆေဒေါ, ရဿတ္တနိဂ္ဂဟီတသရလောပဝသေန စ ရူပနိဋ္ဌာနံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. တထာ ဟိ တဒဋ္ဌကထာယံ ‘‘အဒ္ဓါ ဧကံသေန ဧသ တာတ သတာနံ ပဏ္ဍိတာနံ ဓမ္မော သဘာဝေါ’’တိ အတ္ထော ဝုတ္တော. အယံ ယေ လောကေ ‘‘သပ္ပုရိသာ’’တိ စ ‘‘အရိယာ’’တိ စ ‘‘ပဏ္ဍိတာ’’တိ စ ဝုစ္စန္တိ, တေသံ ဝါစကဿ သန္တသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. တပ္ပဋိသေဓဿ ပန အသံ, အသန္တော, ကတ္ထစိ အသန္တာ ဣစ္စပိ. တထာ ဟိ ‘‘အသန္တာ ကိရ မံ ဇမ္မာ, တာတ တာတာတိ ဘာသရေ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. ‘‘အသံ, အသန္တံ, အသန္တေ. အသတာ’’တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဣမသ္မိံ အတ္ထေ ‘‘သန္တော, အသန္တော’’တိမာနိ ဗဟုဝစနကာနိယေဝ ဘဝန္တိ, န ကတ္ထစိပိ ဧကဝစနကာနိ. ကသ္မာ? ပဏ္ဏတ္တိဝါစကတ္တာ. အညတြ ပန ‘‘သန္တော, ဒန္တော’’တိအာဒီသု ဧကဝစနာနိယေဝ ဌပေတွာ ဝိဇ္ဇမာနတ္ထဝါစကသန္တောသဒ္ဒံ, ကသ္မာ? အပဏ္ဏတ္တိဝါစကတ္တာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. येथे 'अद्धा हि तात सतनेसो धम्मो' या जयद्दिस जातक पाळीतील वचनावरून 'सतानं' (satānaṃ) असे म्हटले आहे. कारण तेथे 'सतनेसो' म्हणजे 'सतानं एसो' असा संधिच्छेद आहे, आणि र्हस्वत्व, निग्गहीत व स्वरलोप यांच्या नियमांनुसार हे रूप सिद्ध झाले आहे असे जाणावे. कारण त्याच्या अट्ठकथेमध्ये 'अद्धा एकंसेन एस तात सतानं पण्डितानं धम्मो सभावो' (नक्कीच, हे पुत्रा, हा सज्जन पंडितांचा धम्म व स्वभाव आहे) असा अर्थ सांगितला आहे. ही जगात ज्यांना 'सत्पुरुष' (सप्पुरिस), 'आर्य' (अरिय) आणि 'पंडित' (पण्डित) म्हटले जाते, त्यांच्या वाचक अशा 'सन्त' शब्दाची नामपदमाला आहे. त्याच्या निषेधार्थ (नकारार्थी) 'असं, असन्तो' आणि काही ठिकाणी 'असन्ता' असे रूप होते. कारण 'असन्ता किर मं जम्मा, तात ताताति भासरे' (दुर्जन लोक मला 'हे पुत्रा, हे पुत्रा' असे म्हणतात) अशी पाळी आढळते. 'असं, असन्तं, असन्ते, असता' इत्यादी रूपांनी योजना करावी. या अर्थामध्ये 'सन्तो, असन्तो' ही बहुवचनी रूपेच होतात, कुठेही एकवचनी रूपे होत नाहीत. का? कारण ते प्रज्ञप्तिवाचक (संज्ञावाचक) आहेत. इतर ठिकाणी मात्र 'सन्तो, दन्तो' (शांत, दमित) इत्यादींमध्ये एकवचनी रूपेच ठेवून, विद्यमान अर्थाचा वाचक असलेला 'सन्त' शब्द वापरावा. का? कारण तो अप्रज्ञप्तिवाचक (संज्ञावाचक नसलेला) आहे असे जाणावे. ဣဒါနိ ပဏ္ဏတ္တိဝါစကာနံ တေသံ ကာနိစိ ပယောဂါနိ ကထယာမ – आता त्या प्रज्ञप्तिवाचक (संज्ञावाचक) शब्दांचे काही प्रयोग सांगतो – သမေတိ [Pg.232] အသတာ အသံ. ယံ ယဉှိ ရာဇ ဘဇတိ, သန္တံ ဝါ ယဒိ ဝါ အသံ. န သာ သဘာ ယတ္ထ န သန္တိ သန္တော. အသန္တော နိရယံ ယန္တိ, သန္တော သဂ္ဂပရာယဏာ. အသန္တေ နောပသေဝေယျ, သန္တေ သေဝေယျ ပဏ္ဍိတော. သဗ္ဘိရေဝ သမာသေထ. သတံ ဓမ္မော ဣစ္စေဝမာဒီနိ ဘဝန္တိ. 'समेति असता असं' (दुर्जनांशी दुर्जन मिळून जातो), 'यं यञ्हि राज भजति, सन्तं वा यदि वा असं' (हे राजा, मनुष्य ज्याची संगत करतो, मग तो सज्जन असो वा दुर्जन), 'न सा सभा यत्थ न सन्ति सन्तो' (ती सभा नव्हे जेथे सज्जन नसतात), 'असन्तो निरयं यन्ति, सन्तो सग्गपरायणा' (दुर्जन नरकात जातात, तर सज्जन स्वर्गपरायण असतात), 'असन्ते नोपसेवेय्य, सन्ते सेवेय्य पण्डितो' (पंडिताने दुर्जनांची संगत करू नये, सज्जनांचीच संगत करावी), 'सब्भिरेव समासेथ' (सज्जनांसोबतच संगत करावी), 'सतं धम्मो' (सज्जनांचा धम्म) इत्यादी उदाहरणे होतात. ယော ပနမှေဟိ ပဒမာလာယံ ‘‘သဗ္ဘီ’’တိ အယံ သဒ္ဒေါ တတိယာပဉ္စမီဗဟုဝစနဝသေန ယောဇိတော, သော စ ခေါ သန္တဣတိ အကာရန္တပကတိဝသေန, အညတ္ထ ပန ‘‘သဗ္ဘီ’’တိ ဣကာရန္တပကတိဝသေန ယောဇေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ သဗ္ဘီတိ သပ္ပုရိသော နိဗ္ဗာနဉ္စ, သုန္ဒရာဓိဝစနံ ဝါ ဧတံ သဗ္ဘီတိ. သဗ္ဗော စာယမတ္ထော သာဋ္ဌကထာယ ‘‘ဗဟုမ္ပေတံ အသဗ္ဘိ ဇာတဝေဒါ’’တိ ဣမာယ ပါဠိယာ ‘‘သန္တော ဟဝေ သဗ္ဘိ ပဝေဒယန္တီ’’တိ ဣမာယ စ ဒီပေတဗ္ဗော. आणि आमच्याद्वारे पदमालेमध्ये जो "सब्भी" हा शब्द तृतीया व पंचमी बहुवचनाच्या रूपाने योजला गेला आहे, तो 'सन्त' या अकारान्त प्रकृतीच्या (मूळ शब्दाच्या) आधारे आहे; परंतु इतर ठिकाणी "सब्भी" हा इकारान्त प्रकृतीच्या आधारे योजला पाहिजे. कारण 'सब्भी' म्हणजे सत्पुरुष आणि निर्वाण होय, याशिवाय 'सब्भी' हे सुंदरतेचे (उत्कृष्टतेचे) एक विशेषण आहे. हा सर्व अर्थ अट्ठकथेसह "बहुम्पेतं असब्भि जातवेदा" या पाळी वचनाने आणि "सन्तो हवे सब्भि पवेदयन्ति" या पाळी वचनाने स्पष्ट केला पाहिजे. အာလပနေ စ ပစ္စတ္တေ, တတိယာပဉ္စမီသု စ; သမာသမှိ စ ယောဇေယျ, သဗ္ဘိသဒ္ဒံ သုမေဓသော. बुद्धिमान मनुष्याने संबोधन, प्रथमा, तृतीया व पंचमी विभक्तींमध्ये आणि समासामध्ये सुद्धा 'सब्भि' शब्दाची योजना करावी. အတြာယံ ယောဇနာ – ဘော သဗ္ဘိ တိဋ္ဌ, သဗ္ဘိ တိဋ္ဌတိ, သဗ္ဘိ သဟ ဂစ္ဆတိ, သဗ္ဘိ အပေဟိ, အသဗ္ဘိရူပေါ ပုရိသော. ယသ္မာ ပနာယံ သာသနာနုကူလာ, တသ္မာ ဣမိဿာ တဒနုကူလတ္တံ ဒဿေတုံ ဣဓ သာသနတော ပယောဂေ ဒဿေဿာမ အတက္ကာဝစရေ ဝိစိတ္တေ သုဂတပါဠိနယေ သောတူနံ ဝိသာရဒမတိပဋိလာဘတ္ထံ. တံ ယထာ? ဗဟုမ္ပေတံ အသဗ္ဘိ ဇာတဝေဒ, ယံ တံ ဝါလဓိနာ’ဘိပူဇယာမ. သဗ္ဘိ ကုဗ္ဗေထ သန္ထဝံ. ယံ သာလဝနသ္မိံ သေနကော, ပါပကမ္မမကရိ အသဗ္ဘိရူပံ. အာဗာဓောယံ အသဗ္ဘိရူပေါ. အသမ္မောဒကော ထဒ္ဓေါ အသဗ္ဘိရူပေါ’’တိ[Pg.233]. တတ္ထ အာလပနဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ပစ္စတ္တဝစနံ ပါဠိယံ သရူပတော အနာဂတမ္ပိ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ. တထာ ကရဏဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ နိဿက္ကဝစနမ္ပိ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ. သမာသေ သဒ္ဒရူပေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ဗျာသေ သဒ္ဒရူပံ ယထာသမ္ဘဝံ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ ဌပေတွာ ‘‘ဟေတုသတ္ထာရဒဿန’’န္တိအာဒီနိ. တတ္ထ စ နိဗ္ဗာနဝါစကော စေ, သဗ္ဘိသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ သန္တိဝိသုဒ္ဓိ နိဗ္ဗုတိသဒ္ဒါ ဝိယ, သော စ ယမကမဟာထေရမတေ ရတ္တိနယေန ယောဇေတဗ္ဗော. သဗ္ဗေသမိကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂါနံ သာဓာရဏော ဟိ သော နယော. သုန္ဒရတ္ထဝါစကော စေ, အဂ္ဂိ ရတ္တိ အဋ္ဌိနယေဟိ ယောဇေတဗ္ဗော ဝါစ္စလိင်္ဂတ္တာ. ‘‘သဗ္ဘိဓမ္မဘူတံ နိဗ္ဗာန’’န္တိ ဧတ္ထ ဟိ သုန္ဒရဓမ္မဘူတံ နိဗ္ဗာနန္တိ အတ္ထော. ဧဝံ ပါဠိနယဝသေန အာလပနာဒီသု ပဉ္စသု ဌာနေသု သဗ္ဘိသဒ္ဒဿ ပဝတ္တိံ ဉတွာ ပုန အဋ္ဌကထာနယဝသေနပိ တပ္ပဝတ္တိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ကထံ? ယသ္မာ သဂါထာဝဂ္ဂဿ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘သန္တော ‘သဗ္ဘီဟိ သဒ္ဓိံ သတံ ဓမ္မော န ဇရံ ဥပေတီ’တိ ပဝေဒယန္တီ’’တိ ဣမသ္မိံ ပဒေသေ ‘‘သဗ္ဘီဟီ’’တိ ဟိဝစနဝသေန သဒ္ဒရစနာဝိသေသော အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ဒဿိတော, တသ္မာ သဗ္ဘိသဒ္ဒေါ သဗ္ဗေသုပိ ဝိဘတ္တိဝစနေသု ယောဇေတဗ္ဗော. အတြိဒံ ဝဒါမ – येथे ही योजना अशी आहे – 'भो सब्भि तिट्ठ' (हे सत्पुरुषा, थांब), 'सब्भि तिट्ठति' (सत्पुरुष थांबतो), 'सब्भि सह गच्छति' (सत्पुरुषासोबत जातो), 'सब्भि अपेहि' (सत्पुरुषापासून दूर जा), 'असब्भिरूपो पुरिसो' (असत्पुरुषतुल्य मनुष्य). आणि कारण ही योजना बुद्धशासनाला अनुकूल आहे, म्हणून तिची अनुकूलता दर्शवण्यासाठी, अतर्क्स आणि विस्मयकारक अशा सुगत-पाळी-नयामध्ये (बुद्धांच्या पाळी पद्धतीमध्ये) श्रोत्यांना प्रगल्भ बुद्धी प्राप्त व्हावी या उद्देशाने आम्ही येथे शासनातील प्रयोग दाखवू. ते कसे? "बहुम्पेतं असब्भि जातवेद, यं तं वालधिनाऽभिपूजयाम" (हे अग्नी, आम्ही शेपटीने तुझी जी पूजा करतो, ती असत्पुरुषासारखी निरर्थक आहे). "सब्भि कुब्बेथ सन्थवं" (सत्पुरुषांशी मैत्री करावी). "यं सालवनस्मिं सेनको, पापकम्ममकरि असब्भिरूपं" (शालवनात सशाने जे असत्पुरुषासारखे पापकर्म केले). "आबाधोयं असब्भिरूपो" (हा आजार असत्पुरुषासारखा/अयोग्य आहे). "असम्मॉदको थद्धो असब्भिरूपो" (आनंद न देणारा, उद्धट आणि असत्पुरुषासारखा). त्यामध्ये, संबोधनाचे रूप पाहिले असता, प्रथमेचे रूप पाळीमध्ये प्रत्यक्ष आले नसले तरी ते सिद्धच मानले जाते. त्याचप्रमाणे, तृतीया विभक्तीचे रूप पाहिले असता, पंचमी विभक्तीचे रूपही सिद्धच मानले जाते. समासातील शब्दरूप पाहिले असता, विग्रहातील शब्दरूप सुद्धा "हेतुसत्थारदस्सनं" इत्यादी शब्द वगळता यथासंभव सिद्धच मानले जाते. आणि त्यामध्ये जर 'सब्भि' शब्द निर्वाणवाचक असेल, तर तो 'सन्ति', 'विसुद्धि', 'निब्बुति' या शब्दांप्रमाणे स्त्रीलिंगी असतो, आणि यमक महाथेरांच्या मतानुसार तो 'रत्ति' शब्दाच्या रूपाप्रमाणे योजला पाहिजे. कारण सर्व इकारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांसाठी तोच सामान्य नियम आहे. जर तो 'सुंदर' (उत्कृष्ट) या अर्थाचा वाचक असेल, तर विशेष्यलिंगी असल्यामुळे तो 'अग्गि', 'रत्ति', 'अट्ठि' यांच्या रूपांप्रमाणे योजला पाहिजे. कारण "सब्भिधम्मभूतं निब्बानं" यामध्ये 'सुंदर धर्मरूप निर्वाण' असा अर्थ आहे. अशा प्रकारे, पाळी नियमानुसार संबोधन इत्यादी पाच ठिकाणी 'सब्भि' शब्दाची प्रवृत्ती (वापर) जाणून घेऊन, पुन्हा अट्ठकथेच्या नियमानुसारही त्याची प्रवृत्ती समजून घेतली पाहिजे. ते कसे? कारण सगाथावग्गाच्या अट्ठकथेमध्ये "सन्तो 'सब्भीहि सद्धिं सतं धम्मो न जरं उपेती'ति पवेदयन्ति" या वाक्यात 'सब्भीहि' अशा 'हि' प्रत्ययाच्या रूपाने अट्ठकथाचार्यांनी विशिष्ट शब्दरचना दाखवली आहे, म्हणून 'सब्भि' शब्द सर्वच विभक्ती व वचनांमध्ये योजला पाहिजे. याविषयी आम्ही असे म्हणतो – ဂရူ ‘‘သဗ္ဘီဟိ သဒ္ဓိ’’န္တိ, အတ္ထံ ဘာသိံသု ပါဠိယာ; ယတော တတော သဗ္ဘိသဒ္ဒံ, ဓီရော သဗ္ဗတ္ထ ယောဇယေ. आदरणीय गुरूंनी "सब्भीहि सद्धिं" या पाळी वचनाचा अर्थ सांगितला आहे; म्हणून बुद्धिमान मनुष्याने 'सब्भि' शब्दाची सर्व ठिकाणी योजना करावी. ‘‘အသဗ္ဘိရူပေါ’’ဣတိပိ, သမာသဝိသယေ သုတံ; ယသ္မာ တသ္မာ သဗ္ဘိသဒ္ဒံ, ဝိညူ သဗ္ဗဓိ ယောဇယေ. "असब्भिरूपो" असा शब्दही समासाच्या विषयात ऐकला जातो; म्हणून सुज्ञ मनुष्याने 'सब्भि' शब्दाची सर्व ठिकाणी योजना करावी. ‘‘ဩဝဒေယျာနုသာသေယျ[Pg.234], အသဗ္ဘာ စ နိဝါရယေ’’တိ ဧတ္ထ ပန ‘‘အသဗ္ဘာ’’တိပဒံ ဝိစိတြဝုတ္တီသု တဒ္ဓိတပစ္စယေသု ဏျပစ္စယဝသေန နိပ္ဖတ္တိမုပါဂတန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ကထံ? ယေဘုယျေန အသဗ္ဘီသု ဘဝံ အသဗ္ဘံ. ကိံ တံ? အကုသလံ, တတော အသဗ္ဘာ အကုသလဓမ္မာ နိဝါရယေ စ, ကုသလဓမ္မေ ပတိဋ္ဌပေယျာတိ အတ္ထော. ‘‘အမှေ အသဗ္ဘာဟိ ဝါစာဟိ ဝိက္ကောသမာနာ တိဗ္ဗာဟိ သတ္တီဟိ ဟနိဿန္တီ’’တိ ဧတ္ထ တု အသဗ္ဘီနံ ဧတာတိ အသဗ္ဘာ, န ဝါ သဗ္ဘီနံ ဧတာတိပိ အသဗ္ဘာတိ နိဗ္ဗစနံ, ဏျပစ္စယဝသေန စ ပဒသိဒ္ဓိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ယာ စ ပနေတ္ထ အမှေဟိ သန္တသဒ္ဒဿ ‘‘သံ, သန္တော. သံ, သန္တံ, သန္တေ’’တိအာဒိနာ ပဒမာလာ ဒဿိတာ, တတ္ထ ‘‘သမေတိ အသတာ အသ’’န္တိ ပါဠိယံ ‘‘အသ’’န္တိ ပဒေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ‘‘သ’’န္တိ ပဒံ ပါဠိယံ အနာဂတမ္ပိ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ ယုဂဠဘာဝေန ဝိဇ္ဇမာနတာရဟတ္တာ. ဧဝံ ဒိဋ္ဌေန အဒိဋ္ဌဿ ဂဟဏံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. အထ ဝါ ‘‘အသ’’န္တိ ဧတ္ထ န သံ အသန္တိ သမာသဝိဂ္ဂဟဝသေနာဓိဂန္တဗ္ဗတ္တာ ‘‘သ’’မိတိ ပဒံ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ. ဧဝမညတြာပိ နယော. တတြ သန္တိ သပ္ပုရိသော. အသန္တိ အသပ္ပုရိသော. ဣတ္ထိလိင်္ဂေဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘အသတီ, အသာ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ‘‘အသတီ, အသတီ, အသတိယော, အသာ. အသတိံ, အသတီ, အသတိယော. အသာယ, အသတိယာ, အသတီဟိ, အသတီဘိ. အသတိယာ, အသတီန’’န္တိ ဝက္ခမာန ဣတ္ထိနယေန နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. "ओवदेय्यानुसासेय्य, असब्भा च निवारये" (उपदेश करावा, अनुशासने करावीत आणि असभ्य गोष्टींपासून परावृत्त करावे) यामध्ये "असब्भा" हा शब्द विविध वृत्तींमध्ये तद्धित प्रत्ययांपैकी 'ण्य' प्रत्ययाच्या प्रभावाने सिद्ध झाला आहे, असे समजावे. ते कसे? बहुतांश करून असत्पुरुषांमध्ये जे उत्पन्न होते ते 'असब्भं' (असभ्य/अयोग्य) होय. ते काय आहे? अकुशल (पाप). म्हणून "असब्भा" म्हणजे अकुशल धर्मांपासून परावृत्त करावे आणि कुशल धर्मांमध्ये प्रतिष्ठित करावे, असा अर्थ आहे. "आम्हाला असभ्य शब्दांनी ओरडत, तीक्ष्ण शस्त्रांनी मारतील" यामध्ये मात्र "असत्पुरुषांचे जे आहे ते असभ्य (असब्भा)" किंवा "जे सत्पुरुषांचे नाही ते असभ्य (असब्भा)" अशी व्युत्पत्ती आहे, आणि 'ण्य' प्रत्ययाच्या योगाने ही पदसिद्धी झाली आहे असे समजावे. आणि येथे आमच्याद्वारे 'सन्त' शब्दाची जी "सं, सन्तो. सं, सन्तं, सन्ते" इत्यादी रूपांनी पदमाला दाखवली आहे, त्यामध्ये "समेति असता असं" या पाळी वचनात "असं" हा शब्द प्रत्यक्ष दिसतो, तेव्हा "सं" हा शब्द पाळीमध्ये प्रत्यक्ष आला नसला तरी तो सिद्धच मानला जातो, कारण ते जोडीने अस्तित्वात असतात. अशा प्रकारे, प्रत्यक्ष दिसणाऱ्या शब्दावरून न दिसणाऱ्या शब्दाचे ग्रहण करावे. अथवा "असं" यामध्ये 'न सं असं' अशा समासविग्रहाच्या नियमाने समजून घेता येत असल्यामुळे "सं" हा शब्द सिद्धच मानला जातो. इतर ठिकाणीही हाच नियम लावावा. त्यामध्ये 'सन्ति' म्हणजे सत्पुरुष आणि 'असन्ति' म्हणजे असत्पुरुष. स्त्रीलिंगात सांगायचे झाल्यास "असती, असा" अशी रूपे होतात. "असती, असती, असतियो, असा. असतिं, असती, असतियो. असाया, असतिया, असतीहि, असतीभि. असतिया, असतीनं" अशा प्रकारे पुढे सांगण्यात येणाऱ्या स्त्रीलिंगी नियमानुसार नामपदमाला योजली पाहिजे. ဧတ္ထ ပန ‘‘အသာ လောကိတ္ထိယော နာမ, ဝေလာ တာသံ န ဝိဇ္ဇတိ. မာ စ ဝသံ အသတီနံ နိဂစ္ဆေ’’တိအာဒီနိ ဒဿေတဗ္ဗာနိ. အသာတိ စေတ္ထ အသတီတိ စ သမာနတ္ထာ, အသန္တဇာတိကာတိ ဟိ တေသံ အတ္ထော. ယသ္မာ ပန ဇာတကဋ္ဌကထာယံ ‘‘အသာတိ အသတိယော လာမိကာ, အထ ဝါ သာတံ ဝုစ္စတိ သုခံ, တံ တာသု နတ္ထိ, အတ္တနိ ပဋိဗဒ္ဓစိတ္တာနံ အသာတမေဝ ဒေန္တီတိပိ အသာ[Pg.235], ဒုက္ခာ, ဒုက္ခဝတ္ထုဘူတာတိ အတ္ထော’’တိ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏေသုံ, တသ္မာ သာတံ နတ္ထိ ဧတိဿန္တိ အသာတိ အတ္ထေ ‘‘အသာ’’တိ ပဒဿ ယထာ ရိတ္တော အဿာဒေါ ဧတ္ထာတိ ရိတ္တဿန္တိပဒဿ လုတ္တုတ္တရက္ခရဿ ‘‘ရိတ္တဿံ, ရိတ္တဿာနိ. ရိတ္တဿ’’န္တိ စိတ္တနယေန နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ, တထာ ‘‘အသာ, အသာ, အသာယော. အသံ, အသာ, အသာယော. အသာယာ’’တိ ကညာနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. येथे "असा लोकित्थियो नाम, वेला तासं न विज्जति। मा च वसं असतीनं निगच्छे" (जगातील स्त्रिया खरोखरच चंचल असतात, त्यांची मर्यादा नसते. असती स्त्रियांच्या आहारी जाऊ नये) इत्यादी उदाहरणे दिली पाहिजेत. येथे 'असा' आणि 'असती' हे समान अर्थाचे शब्द आहेत, कारण त्यांचा अर्थ 'असत् स्वभावाच्या' असा आहे. परंतु ज्याअर्थी जातक-अट्ठकथेमध्ये "असा म्हणजे असती, निकृष्ट स्त्रिया; अथवा 'सात' म्हणजे सुख म्हटले जाते, ते त्यांच्यामध्ये नसते, स्वतःवर आसक्त चित्त असणाऱ्यांना त्या केवळ दुःखच (असात) देतात म्हणूनही त्या 'असा' म्हणजे दुःखद, दुःखाचे कारण आहेत असा अर्थ" असे स्पष्टीकरण दिले आहे, म्हणून 'ज्यांच्यामध्ये सुख नाही त्या असा' या अर्थाने "असा" या शब्दाची नामपदमाला, ज्याप्रमाणे 'रित्तो अस्सादो एत्थाति रित्तस्सं' (ज्यामध्ये आस्वाद शून्य आहे ते रित्तस्स) या शब्दातील शेवटचे अक्षर लुप्त होऊन "रित्तस्सं, rittassāni. रित्तस्सं" अशी 'चित्त' शब्दाच्या नियमाप्रमाणे योजली जाते, त्याचप्रमाणे "असा, असा, असायो. असं, असा, असायो. असाया" अशी 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाच्या नियमाप्रमाणे योजली पाहिजे. ဧတ္ထ စ ယော အမှေဟိ ‘‘သန္တော’’ဣတိ သဒ္ဒေါ ဒဿိတော. သော ကတ္ထစိ ဧကဝစနဗဟုဝစနဘာဝေန သံဝိဇ္ဇမာနသဒ္ဒဿတ္ထမ္ပိ ဝဒတိ, တဿ ဝသေန အယံ နာမိကပဒမာလာ – आणि येथे आमच्याद्वारे जो "सन्तो" हा शब्द दाखवला गेला आहे, तो काही ठिकाणी एकवचन आणि बहुवचन रूपाने अस्तित्वात असलेल्या शब्दाचा अर्थही सांगतो, त्याच्या आधारे ही नामपदमाला अशी आहे – သန္တော, သန္တော, သန္တာ. သန္တံ, သန္တေ. သတာ, သန္တေန, သန္တေဟိ, သန္တေဘိ. သတော, သန္တဿ, သတံ, သန္တာနံ. သတာ, သန္တာ, သန္တသ္မာ, သန္တမှာ, သန္တေဟိ, သန္တေဘိ. သတော, သန္တဿ, သတံ, သန္တာနံ. သတိ, သန္တေ, သန္တသ္မိံ, သန္တမှိ, သန္တေသု. ဘော သန္တ, ဘဝန္တော သန္တော, ဘဝန္တော သန္တာ. सन्तो, सन्तो, सन्ता। सन्तं, सन्ते। सता, सन्तेन, सन्तेहि, सन्तेभि। सतो, सन्तस्स, सतं, सन्तानं। सता, सन्ता, सन्तस्मा, सन्तम्हा, सन्तेहि, सन्तेभि। सतो, सन्तस्स, सतं, सन्तानं। सति, सन्ते, सन्तस्मिं, सन्तम्हि, सन्तेसु। भो सन्त, भवन्तो सन्तो, भवन्तो सन्ता। ဧတ္ထ ပန ‘‘အယံ ခေါ ဘိက္ခဝေ အဋ္ဌမော ဘဒ္ဒေါ အဿာဇာနီယော သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနော လောကသ္မိံ. စတ္တာရောမေ ဘိက္ခဝေ ပုဂ္ဂလာ သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနာ လောကသ္မိံ. အသတာ တုစ္ဆာ မုသာ အဘူတေန အဗ္ဘာစိက္ခန္တိ. ဘဝေ ခေါ သတိ ဇာတိ ဟောတိ’’ဣစ္စေဝမာဒီနိ ပယောဂါနိ ဘဝန္တိ. ‘‘သင်္ခါရေသု ခေါ သတိ ဝိညာဏံ ဟောတီ’’တိအာဒီသု ပန သတိသဒ္ဒေါ ဝစနဝိပလ္လာသဝသေန ဌိတောတိ ဂဟေတဗ္ဗော. येथे, "भिक्षूंनो, हा आठवा उत्तम जातिवंत अश्व (अस्सआजानीय) जगात विद्यमान आहे, उपलब्ध आहे. भिक्षूंनो, हे चार पुद्गल (व्यक्ती) जगात विद्यमान आहेत, उपलब्ध आहेत. ते असत्य, तुच्छ, खोटे आणि अभूताने (असत्याने) आरोप करतात. भव असताना जाती (जन्म) होते" इत्यादी प्रयोग होतात. परंतु, "संस्कार असताना विज्ञान होते" इत्यादींमध्ये 'सति' (sati) हा शब्द वचनविपर्यासामुळे (वचनबदलामुळे) स्थित आहे असे समजावे. တတြ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဒွိဓာ ဌိတေသု သန္တောသဒ္ဒေသု ဗဟုဝစနသန္တောသဒ္ဒံ ဌပေတွာ သေသာ သမာနသဒ္ဒဿတ္ထမ္ပိ ဝဒန္တိ, တသ္မာ ‘‘သန္တောတိ သမာနော, သန္တာတိ သမာနာ’’တိအာဒိနာ [Pg.236] အတ္ထော ကထေတဗ္ဗော. သမာနောတိ ဣမဿ စ ‘‘ဟောန္တော’’တိ အတ္ထော ‘‘ပဟု သမာနော ဝိပုလတ္ထစိန္တီ, ကိံ ကာရဏာ မေ န ကရောသိ ဒုက္ခ’’န္တိအာဒီသု ဝိယ. ပယောဂါနိ ပန – त्यामध्ये, एकवचन आणि बहुवचनाच्या रूपाने दोन प्रकारे स्थित असलेल्या 'संतो' (santo) शब्दांमध्ये, बहुवचनी 'संतो' शब्द वगळून, उर्वरित शब्द 'समान' (samāna - असणे/होणे) या शब्दाचा अर्थही सांगतात. म्हणून, "'संतो' म्हणजे 'समानो' (असणारा), 'संता' म्हणजे 'समाना' (असणारे)" इत्यादी प्रकारे अर्थ सांगावा. 'समानो' याचा अर्थ 'होन्तो' (honto - असणारा/होणारा) असा आहे, जसे की "समर्थ असताना (पहु समानो), विपुल कल्याणाचा विचार करणारा, तू कोणत्या कारणाने माझे दुःख दूर करत नाहीस?" इत्यादींमध्ये. प्रयोग तर खालीलप्रमाणे आहेत – ‘‘ယော မာတရံ ပိတရံ ဝါ, ဇိဏ္ဏကံ ဂတယောဗ္ဗနံ; ပဟု သန္တော န ဘရတိ, တံ ပရာဘဝတော မုခံ. "जो तरुण वय निघून गेलेल्या, वृद्ध झालेल्या माता किंवा पित्याचे, स्वतः समर्थ (पहु संतो) असूनही पोषण करत नाही, ते त्याच्या पराभवाचे (अधोगतीचे) द्वार आहे." ဣဓေဝ တိဋ္ဌမာနဿ, ဒေဝဘူတဿ မေ သတော; ပုနရာယု စ မေ လဒ္ဓေါ, ဧဝံ ဇာနာဟိ မာရိသာ’’တိ "येथेच राहत असताना, devabhūta (देव झालेल्या) मला (सतो - असताना/असलेल्या), पुन्हा आयुष्य प्राप्त झाले आहे; हे मित्रा, असे जाण." ဧဝမာဒီနိ ဘဝန္တိ. इत्यादी प्रयोग होतात. အပိစ သန္တောသဒ္ဒေါ ယသ္မာ ‘‘ကိလန္တော’’တိ စ ‘‘ဥပသန္တော’’တိ စ ‘‘နိရုဒ္ဓေါ’’တိ စ အတ္ထံ ဝဒတိ, တသ္မာ တေသံ ဝသေန သန္တသဒ္ဒဿ ‘‘သန္တော, သန္တာ. သန္တံ, သန္တေ. သန္တေနာ’’တိ ပုရိသနယေန နာမိကပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ စ ‘‘သန္တော တသိတော. ဒီဃံ သန္တဿ ယောဇနံ. သန္တော ဒန္တော နိယတော ဗြဟ္မစာရီ. သန္တော နိရုဒ္ဓေါ အတ္ထင်္ဂတော အဗ္ဘတ္ထင်္ဂတော’’တိအာဒီနိ ပယောဂါနိ. နပုံသကလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘သန္တံ, သန္တာနီ’’တိ စိတ္တနယေန နာမိကပဒမာလာ. သာ စ ‘‘သံဝိဇ္ဇမာနံ သမာနံ ကိလန္တံ ဥပသန္တံ နိရုဒ္ဓ’’မိတိ အတ္ထဒီပကာပဒဝတီတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. အထ ဝါ ‘‘ဥပါဒါနေ ခေါ သတိ ဘဝေါ ဟောတီ’’တိအာဒီသု နပုံသကပ္ပယောဂဒဿနတော သန္တသဒ္ဒဿ သံဝိဇ္ဇမာနသဒ္ဒတ္ထဝါစကတ္တေ တတိယာပဉ္စမီစတုတ္ထီဆဋ္ဌီသတ္တမီဌာနေ ‘‘သတာ, သတော, သတံ, သတီ’’တိ ပဒါနိ အဓိကာနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ, သေသာနိ စိတ္တနယေန ဉေယျာနိ. ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ပန ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘သန္တာ, သန္တာ, သန္တာယော. သန္တံ, သန္တာ, သန္တာယော. သန္တာယာ’’တိ ကညာနယေန စ, သန္တီ, သန္တီ, သန္တိယော[Pg.237]. သန္တိံ, သန္တီ, သန္တိယော. သန္တိယာ’’တိ ဣတ္ထိနယေန စ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧတာသု ပဌမာ ‘‘သံဝိဇ္ဇမာနာ ကိလန္တာ ဥပသန္တာ နိရုဒ္ဓါ’’တိ အတ္ထဒီပကာပဒဝတီ, ဧတ္ထ ပယောဂါ သုဝိညေယျာဝ. ဒုတိယာ ပန ‘‘သံဝိဇ္ဇမာနာ သမာနာ’’တိ အတ္ထဒီပကာပဒဝတီ. တထာ ဟိ ‘‘သန္တီ အာပတ္တိ အာဝိကာတဗ္ဗာ’’တိ ဧတ္ထ သံဝိဇ္ဇမာနာ ‘‘သန္တီ’’တိ ဝုစ္စတိ. शिवाय, 'संतो' शब्द ज्याअर्थी 'किलंतो' (थकलेला), 'उपसंतो' (शांत झालेला) आणि 'निरुद्धो' (निरुद्ध झालेला) असा अर्थ व्यक्त करतो, त्याअर्थी त्यांच्या अनुषंगाने 'संत' शब्दाची 'संतो, संता; संतं, संते; संतेन' अशी पुरुष-पद्धतीने (पुल्लिंगी) नाम-विभक्ती-रूपावली (नामिकपदमला) समजावी. येथे 'संतो तसितो' (थकलेला आणि तहानलेला), 'दीघं संतस्स योजनं' (थकलेल्या प्रवाशासाठी योजन लांब असते), 'संतो दंतो नियतो ब्रह्मचारी' (शांत, दमित, नियत ब्रह्मचारी), 'संतो निरुद्धो अत्थङ्गतो अब्भत्थङ्गतो' (शांत, निरुद्ध, अस्त पावलेला, पूर्णपणे अस्त पावलेला) इत्यादी प्रयोग आहेत. नपुंसकलिंगात सांगायचे असल्यास, 'संतं, संतानि' अशी 'चित्त' शब्दाच्या रूपावलीप्रमाणे नाम-विभक्ती-रूपावली होते. आणि ती 'संविज्जमानं (विद्यमान), समानं (असलेले), किलंतं (थकलेले), उपसंतं (शांत झालेले), निरुद्धं (निरुद्ध झालेले)' असा अर्थ स्पष्ट करणाऱ्या पदांनी युक्त आहे असे समजावे. अथवा 'उपादाने खो सति भवो होति' (उपादान असताना भव होतो) इत्यादींमध्ये नपुंसकलिंगी प्रयोग दिसत असल्यामुळे, 'संत' शब्दाचा 'संविज्जमान' (विद्यमान) या अर्थाचा वाचक म्हणून तृतीया, पंचमी, चतुर्थी, षष्ठी आणि सप्तमी विभक्तीच्या ठिकाणी 'सता, सतो, सतं, सति' ही पदे अधिक सांगावीत, उर्वरित रूपे 'चित्त' शब्दाच्या रूपावलीप्रमाणे जाणावीत. स्त्रीलिंगात सांगायचे असल्यास, 'संता, संता, संतायो; संतं, संता, संतायो; संताया' अशी 'कन्या' शब्दाच्या रूपावलीप्रमाणे, आणि 'संती, संती, संतियो; संतिं, संती, संतियो; संतिया' अशी 'इत्थी' (स्त्री) शब्दाच्या रूपावलीप्रमाणे नाम-विभक्ती-रूपावली जोडावी. यांपैकी पहिली रूपावली 'संविज्जमाना, किलंता, उपसंता, निरुद्धा' असा अर्थ स्पष्ट करणाऱ्या पदांनी युक्त आहे, येथे प्रयोग सहज समजण्यासारखेच आहेत. दुसरी रूपावली तर 'संविज्जमाना, समाना' असा अर्थ स्पष्ट करणारी आहे. तसेच 'संती आपत्ति आविकातब्बा' (विद्यमान असलेली आपत्ती/गुन्हा प्रकट करावा) येथे विद्यमान असणाऱ्या गोष्टीला 'संती' म्हटले आहे. ‘‘ယာယ မာတု ဘတော ပေါသော,ဣမံ လောကံ အဝေက္ခတိ; တမ္ပိ ပါဏဒဒိံ သန္တိံ,ဟန္တိ ကုဒ္ဓေါ ပုထုဇ္ဇနော’’တိ "ज्या मातेने सांभाळलेला मनुष्य या लोकाकडे पाहतो (म्हणजेच जगतो), त्या प्राण देणाऱ्या आणि विद्यमान असलेल्या (संतिं - असणाऱ्या) मातेलाही क्रोधाविष्ट झालेला पृथग्जन (अज्ञानी मनुष्य) मारून टाकतो." ဧတ္ထ ပန သမာနာ ‘‘သန္တီ’’တိ ဝုစ္စတိ. အပရာပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. သန္တီသဒ္ဒဿ ဟိ သံဝိဇ္ဇမာနသဒ္ဒတ္ထဝါစကတ္တေ ‘‘ဇာတိယာ ခေါ သတိ ဇရာမရဏံ ဟောတီ’’တိအာဒိနာ ဣတ္ထိလိင်္ဂပ္ပယောဂဒဿနတော သတ္တမီဌာနေ ‘‘သတိ, သတိယာ, သတိယံ, သန္တိယာ, သန္တိယံ, သန္တီသူ’’တိ ရူပါနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ. သေသာနိ ဣတ္ထိနယေန ဉေယျာနိ. အယံ တတိယာ, ဧတ္ထ စ ‘‘အသန္တိယာ အာပတ္တိယာ တုဏှီ ဘဝိတဗ္ဗ’’န္တိ ပါဠိ ‘‘သန္တိယာ’’ဣစ္စာဒီနံ အတ္ထိဘာဝေ နိဒဿနံ. အပရော နယော – သတီသဒ္ဒဿ ‘‘သမာနာ’’တိ ဣမသ္မိံ အတ္ထေ ‘‘ယာ တွံ ဝသသိ ဇိဏ္ဏဿ, ဧဝံ ဒဟရိယာ သတီ’’တိ စ ‘‘ယေ တံ ဇိဏ္ဏဿ ပါဒံသု, ဧဝံ ဒဟရိယံ သတိ’’န္တိ စ ပါဠိဒဿနတော ‘‘သတီ, သတီ, သတိယော. သတိံ, သတီ, သတိယော. သတိယာ’’တိအာဒီနိပိ ရူပါနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ, သံယောဂေ နကာရလောပဝသေန ဝါ. येथे 'समाना' (असणारी) या अर्थी 'संती' असे म्हटले आहे. स्त्रीलिंगात सांगायची असल्यास दुसरीही नाम-विभक्ती-रूपावली जाणावी. 'संती' शब्दाचा 'संविज्जमान' (विद्यमान) या अर्थाचा वाचक म्हणून 'जाती (जन्म) असताना जरामरण होते' इत्यादी स्त्रीलिंगी प्रयोगांच्या दर्शनावरून सप्तमी विभक्तीच्या ठिकाणी 'sati, satiyā, satiyaṃ, santiyā, santiyaṃ, santīsū' अशी रूपे सांगावीत. उर्वरित रूपे 'इत्थी' (स्त्री) शब्दाच्या रूपावलीप्रमाणे जाणावीत. ही तिसरी रूपावली आहे, आणि येथे "आपत्ती (गुन्हा) नसताना (असंतिया आपत्तिया) मौन बाळगावे" हा पालिपाठ 'संतिया' इत्यादींच्या अस्तित्वाचे (अत्थिभावाचे) उदाहरण आहे. दुसरा प्रकार – 'सती' शब्दाचा 'समाना' (असणारी) या अर्थी "तू जी वृद्ध माणसासोबत राहतेस, अशी तरुण असताना (दहरिया सती)" आणि "ज्यांनी तुला वृद्धाला दिले, तू अशी तरुण असताना (दहरियं सतिं)" या पालिपाठांच्या दर्शनावरून 'सती, सती, सतियो; सतिं, सती, सतियो; सतिया' इत्यादी रूपेही जोडावीत, किंवा संयोगात 'न' काराचा लोप झाल्यामुळे (अशी रूपे होतात). ဣဒါနိ ‘‘သန္တော, သန္တာ’’တိ ပဒဒွယဿ ပယောဂနိစ္ဆယံ ကထယာမ ပယောဂေသု သောတူနံ အသမ္မူဠှဘာဝါယ. တထာ ဟိ ‘‘သပ္ပုရိသာ’’တိ ဝါ ‘‘ပဏ္ဍိတာ’’တိ ဝါ ဗဟုဝစနဝသေန အတ္ထံ [Pg.238] ဝတ္တုကာမေန ‘‘သန္တော ဒန္တော’’တိ ဧဝံ ဝုတ္တဧကဝစနသဒိသံ ‘‘သန္တော’’တိ ဗဟုဝစနံ ဝတ္တဗ္ဗံ. ‘‘သံဝိဇ္ဇမာနော’’တိ ဧကဝစနဝသေန အတ္ထံ ဝတ္တုကာမေန ‘‘သန္တော’’တိ ဧကဝစနံ ဝတ္တဗ္ဗံ. ‘‘သံဝိဇ္ဇမာနာ’’တိ ဗဟုဝစနဝသေန အတ္ထံ ဝတ္တုကာမေန ‘‘သန္တော သပ္ပုရိသာ’’တိ, ‘‘သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနာ’’တိ စ ဧဝံ ဝုတ္တဗဟုဝစနသဒိသံ ‘‘သန္တော’’တိ ဝါ ‘‘သန္တာ’’တိ ဝါ ဗဟုဝစနံ ဝတ္တဗ္ဗံ, ‘‘ကိလန္တော’’တိ ဝါ ‘‘သမာနော’’တိ ဝါ ‘‘ဥပသန္တော’’တိ ဝါ ‘‘နိရုဒ္ဓေါ’’တိ ဝါ ဧကဝစနဝသေန အတ္ထံ ဝတ္တုကာမေန ‘‘သန္တော သပ္ပုရိသာ’’တိ ဧဝံ ဝုတ္တဗဟုဝစနသဒိသံ ‘‘သန္တော’’တိ ဧကဝစနံ ဝတ္တဗ္ဗံ. တေယေဝတ္ထေ ဗဟုဝစနဝသေန ဝတ္တုကာမေန ပန ‘‘သန္တာ သူနေဟိ ပါဒေဟိ, ကော နေ ဟတ္ထေ ဂဟေဿတီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ ‘‘သန္တာ’’တိ ဗဟုဝစနံ ဝတ္တဗ္ဗံ. အယံ နီတိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. ဣဒဉှိ မန္ဒဗုဒ္ဓီနံ သမ္မောဟဋ္ဌာနံ. အယမ္ပိ ပနေတ္ထ သင်္ဂဟော ဝေဒိတဗ္ဗော – आता प्रयोगांमध्ये श्रोत्यांचा गोंधळ उडू नये म्हणून 'संतो' आणि 'संता' या दोन पदांच्या प्रयोगाचा निश्चय सांगतो. जसे की, 'सप्पुरिसा' (सत्पुरुष) किंवा 'पंडिता' (पंडित) या बहुवचनी अर्थाने बोलण्याची इच्छा असल्यास, 'संतो दंतो' (शांत, दमित) या एकवचनी रूपासारखेच 'संतो' हे बहुवचनी रूप वापरावे. 'संविज्जमानो' (विद्यमान असणारा) या एकवचनी अर्थाने बोलण्याची इच्छा असल्यास, 'संतो' हे एकवचनी रूप वापरावे. 'संविज्जमाना' (विद्यमान असणारे) या बहुवचनी अर्थाने बोलण्याची इच्छा असल्यास, 'संतो सप्पुरिसा' (सत्पुरुष) आणि 'संतो संविज्जमाना' (विद्यमान असणारे) या बहुवचनी रूपांप्रमाणे 'संतो' किंवा 'संता' हे बहुवचनी रूप वापरावे. 'किलंतो' (थकलेला), 'समानो' (असणारा), 'उपसंतो' (शांत झालेला) किंवा 'निरुद्धो' (निरुद्ध झालेला) या एकवचनी अर्थाने बोलण्याची इच्छा असल्यास, 'संतो सप्पुरिसा' या बहुवचनी रूपासारखेच 'संतो' हे एकवचनी रूप वापरावे. परंतु, त्याच अर्थांमध्ये बहुवचनाने बोलण्याची इच्छा असल्यास, "सुजलेल्या पायांनी थकलेले (संता) असताना, त्यांना हाताने कोण पकडेल?" यामधील 'संता' प्रमाणे 'संता' हे बहुवचनी रूप वापरावे. हा नियम चांगल्या प्रकारे मनात ठेवावा. कारण हे मंदबुद्धी लोकांच्या गोंधळाचे स्थान आहे. येथे हा संग्रह (संक्षिप्त नियम) देखील समजावा – ‘‘တိလိင်္ဂတ္ထေ စ ဧကတ္ထေ, ဗဝှတ္ထေပိ စ ဒိဿတိ; သတ္တမျန္တော သတိသဒ္ဒေါ, ဝိပလ္လာသေ ဗဟုမှိ သော’’တိ. "सप्तमी विभक्तीचा अंत असणारा 'सति' (sati) शब्द तिन्ही लिंगांच्या अर्थात, एकवचनात आणि बहुवचनातही दिसतो; तो अनेक प्रकारच्या विपर्यासात (बदलात) वापरला जातो." ဣဒါနိ မဟန္တသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'महंत' (mahanta - महान) शब्दाची नाम-विभक्ती-रूपावली (नामिकपदमला) सांगितली जात आहे – မဟံ, မဟာ, မဟန္တော, မဟန္တာ. မဟန္တံ, မဟန္တေ. မဟတာ, မဟန္တေန, မဟန္တေဟိ, မဟန္တေဘိ. မဟတော, မဟန္တဿ, မဟန္တာနံ, မဟတံ. မဟတာ, မဟန္တာ, မဟန္တသ္မာ, မဟန္တမှာ, မဟန္တေဟိ, မဟန္တေဘိ. မဟတော, မဟန္တဿ, မဟန္တာနံ, မဟတံ. မဟတိ, မဟန္တေ, မဟန္တသ္မိံ, မဟန္တမှိ, မဟန္တေသု. ဘော မဟ, ဘော မဟာ, ဘဝန္တော မဟန္တောတိ အယမမှာကံ ရုစိ. "महं, महा, महंतो, महंता (प्रथमा). महंतं, महंते (द्वितीया). महता, महंतेन, महंतेहि, महंतेभि (तृतीया). महतो, महंतस्स, महंतानं, महतं (चतुर्थी). महता, महंता, महंतस्मा, महंतम्हा, महंतेहि, महंतेभि (पंचमी). महतो, महंतस्स, महंतानं, महतं (षष्ठी). महति, महंते, महंतस्मिं, महंतम्हि, महंतेसु (सप्तमी). भो मह, भो महा, भवंतो महंतो (संबोधन) – हे आमचे मत (रुची) आहे." ဧတ္ထ ‘‘မဟန္တော, မဟန္တာ. မဟန္တံ, မဟန္တေ. မဟန္တေနာ’’တိ ပုရိသနယောပိ လဗ္ဘတိ, တသ္မာ ‘‘ဘော မဟန္တ, ဘဝန္တော မဟန္တာ’’တိ အာလပနပဒါနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. နပုံသကလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ [Pg.239] ‘‘မဟန္တံ, မဟန္တာနီ’’တိ စိတ္တနယောပိ လဗ္ဘတိ. ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘မဟတီ, မဟတီ, မဟတိယော. မဟတိံ, မဟတီ, မဟတိယော. မဟတိယာ, မဟတီဟိ မဟတီဘီ’’တိ ဣတ္ထိနယောပိ လဗ္ဘတိ. ‘‘မဟတိယာ စ ယက္ခသေနာယာ’’တိအာဒီနေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. အပရောပိ ‘‘မဟန္တာ, မဟန္တာ, မဟန္တာယော. မဟန္တ’’န္တိ ကညာနယောပိ လဗ္ဘတိ, ‘‘မဟန္တာ နိဓိကုမ္ဘိယော’’တိအာဒီနေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. ကစ္စာယနေ ပန ‘‘မဟန္တီ’’ဣတိ ပဒံ ဒိဋ္ဌံ. တံ ‘‘ဂုဏဝန္တီ, ကုလဝန္တီ’’ဣစ္စာဒီနိ ဝိယ ပါဠိယံ အပ္ပသိဒ္ဓတ္တာ ဝီမံသိတဗ္ဗံ. येथे 'महन्तो, महन्ता (प्रथमा एकवचन व बहुवचन), महन्तं, महन्ते (द्वितीया एकवचन व बहुवचन), महन्तेन' (तृतीया एकवचन) इत्यादींप्रमाणे पुल्लिंगी रूपे देखील आढळतात. म्हणून 'भो महन्त (हे महान पुरुष!), भवन्तो महन्ता (हे महान पुरुषहो!)' अशी संबोधनाची पदे योजावीत. नपुंसकलिंगात सांगायचे झाल्यास 'महन्तं, महन्तानि' असे 'चित्त' शब्दाप्रमाणे रूपे देखील आढळतात. स्त्रीलिंगात सांगायचे झाल्यास 'महती, महती, महतियो (प्रथमा एकवचन व बहुवचन), महतिं, महती, महतियो (द्वितीया एकवचन व बहुवचन), महतिया, महतीहि, महतीभि' (तृतीया एकवचन व बहुवचन) असे 'इत्थी' (स्त्री) शब्दाप्रमाणे रूपे देखील आढळतात. 'महतिया च यक्खसेनाया' (आणि यक्षांच्या मोठ्या सेनेने) इत्यादी येथील उदाहरणांची पदे आहेत. दुसरे देखील 'महन्ता, महन्ता, महन्तायो (प्रथमा एकवचन व बहुवचन), महन्तं' (द्वितीया एकवचन) असे 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाप्रमाणे रूपे देखील आढळतात. 'महन्ता निधिकुम्भियो' (मोठ्या संपत्तीचे घडे) इत्यादी येथील उदाहरणांची पदे आहेत. कच्चायन व्याकरणात मात्र 'महन्ती' असे पद पाहिले गेले आहे. ते 'गुणवन्ती, कुलवन्ती' इत्यादींप्रमाणे पाळीमध्ये न दिसल्यामुळे (असिद्ध असल्यामुळे) विचार करण्याजोगे आहे. နနု ဘော ယသ္မာ သာသနေပိ ‘‘ဂစ္ဆန္တီ, စရန္တီ’’တိအာဒီနိ စ ‘‘ဣဒ္ဓိမန္တီ’’တိ စ ပဒံ ဒိဿတိ, တသ္မာ ‘‘မဟန္တီ, ဂုဏဝန္တီ’’တိအာဒီနိပိ ဘဝိတဗ္ဗန္တိ? န ဘဝိတဗ္ဗံ တထာရူပဿ နယဿ ဝသေန အဂ္ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ, ‘‘မဟတီ, ဂုဏဝတီ’’ဣစ္စာဒိနယဿေဝ ဒဿနတော စ. တထာ ဟိ ပါဠိယံ အဋ္ဌကထာသု စ ‘‘သေယျထာပိ နာမ မဟတီ နင်္ဂလသီသာ, ဣတ္ထီ သိယာ ရူပဝတီ, သာ စ သီလဝတီ သိယာ. သတိမတီ စက္ခုမတီ. ဣဒ္ဓိမတီ ပတ္တိမတီ’’တိ စ ‘‘မဟတိံ သေနံ ဒိသွာ မဟောသဓသေနာ မန္ဒာ, အယံ အတိဝိယ မဟတီ သေနာ ဒိဿတီ’’တိ စ အာဒီနိ ပယောဂါနိ ဒိဿန္တိ, န ‘‘မဟန္တီ, ရူပဝန္တီ’’ဣစ္စာဒီနိ. अहो! जर शासनात (बुद्धवचनात) देखील 'गच्छन्ती, चरन्ती' इत्यादी आणि 'इद्धिमन्ती' असे पद दिसते, तर मग 'महन्ती, गुणवन्ती' इत्यादी रूपे देखील असायला हवीत ना? (उत्तर-) तसे नसावे; कारण तशा प्रकारच्या नियमाच्या आधारे ते स्वीकारले जात नाही आणि 'महती, गुणवती' इत्यादी नियमांचेच दर्शन घडते. तसेच पाळीमध्ये आणि अट्ठकथांमध्ये 'सेय्यथापि नाम महती नङ्गलसीसा (ज्याप्रमाणे नांगराचा मोठा फाळ असावा), इत्थी सिया रूपवती, सा च सीलवती सिया (स्त्री रूपवती असावी आणि ती शीलवती असावी), सतिमती चक्खुमती (स्मृतिमान व प्रज्ञावान), इद्धिमती पत्तिमती' आणि 'महतिं सेनं दिस्वा महोसधसेना मन्दा, अयं अतिविय महती सेना दिस्सती' (मोठी सेना पाहून महौषधाची सेना मंद झाली, ही अत्यंत मोठी सेना दिसत आहे) इत्यादी प्रयोग दिसतात, 'महन्ती, रूपवन्ती' इत्यादी प्रयोग दिसत नाहीत. ကေစိ ပန ‘‘မဟာဣတိ သဒ္ဒေါ ဗျာသေ န လဗ္ဘတိ, သမာသေယေဝ လဗ္ဘတိ ‘မဟာပုရိသော’တိ ဧတ္ထ ဝိယာ’’တိ ဝဒန္တိ, တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ. ‘‘မဟာ တေ ဥပါသက ပရိစ္စာဂေါ. မဟာ ဝတာယံ ဘန္တေ ဘူမိစာလော. ဃောသော စ ဝိပုလော မဟာ. ဗာရာဏသိရဇ္ဇံ နာမ မဟာ. သေနာ သာဒိဿတေ မဟာ’’တိ ပယောဂဒဿနတော. ဧဝံ ဗျာသေပိ လဗ္ဘတီတိ [Pg.240] ဝေဒိတဗ္ဗံ, တသ္မာ ‘‘မဟံ, မဟာ, မဟန္တော, မဟန္တာ. ဘော မဟန္တ, ဘဝန္တော မဟန္တာ’’တိ ပုလ္လိင်္ဂေ, ‘‘မဟန္တံ, မဟာ, မဟန္တာနိ. ဘော မဟန္တ, ဘဝန္တော မဟန္တာနီ’’တိ နပုံသကလိင်္ဂေ, ‘‘မဟန္တာ, မဟာ, မဟန္တာ, မဟန္တာယော. ဘောတိ မဟန္တေ, ဘောတိယော မဟန္တာ, မဟန္တာယော’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ သဗ္ဗံ သမ္ပုဏ္ဏံ ယောဇေတဗ္ဗံ. သမာသေ ပန ‘‘မဟာသတ္တော မဟာဥပါသကော မဟာဥပါသိကာ မဟဗ္ဗလော မဟာဝနံ မဟဂ္ဂတံ မဟပ္ဖလံ မဟဗ္ဘယ’’န္တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ, တဒ္ဓိတေ ‘‘မဟတ္တနော မဟတ္တံ မဟန္တတ္တံ မဟန္တတာ’’တိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဂစ္ဆန္တသဒ္ဒဿ ပန ‘‘ဂစ္ဆန္တော ဂစ္ဆန္တာ’’တိ ရူပါနိ ဝတွာ သေသာနိ မဟန္တသဒ္ဒေ ဝုတ္တနယေန ဝိတ္ထာရေတွာ နာမိကပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. တထာ ‘‘ဂစ္ဆန္တော, ဂစ္ဆန္တာ’’တိ ပုရိသနယော စ ‘‘ဂစ္ဆန္တံ, ဂစ္ဆန္တာနီ’’တိ စိတ္တနယော စ ‘‘ဂစ္ဆန္တီ, ဂစ္ဆန္တီ, ဂစ္ဆန္တိယော’’တိ ဣတ္ထိနယော စ ဂဟေတဗ္ဗော. ဧဝံ လိင်္ဂတ္တယဝသေန ‘‘စရံ စရန္တော စရန္တံ စရန္တီ, ဒဒံ ဒဒန္တော ဒဒန္တံ ဒဒန္တီ’’တိအာဒီနံ အနေကပဒသဟဿာနံ နာမိကပဒမာလာ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗာ. काही लोक म्हणतात की, 'महा' हा शब्द विग्रहात (स्वतंत्रपणे) आढळत नाही, तर तो केवळ 'महापुरिसो' याप्रमाणे समासातच आढळतो; परंतु ते स्वीकारू नये. कारण 'महा ते उपासक परित्चागो (हे उपासका, तुझा त्याग मोठा आहे), महा वतायं भन्ते भूमिचालो (भन्ते, हा भूकंप खरोखरच मोठा आहे), घोसो च विपुलो महा (आणि मोठा व प्रचंड आवाज), बाराणसिरज्जं नाम महा (वाराणसीचे राज्य मोठे आहे), सेना सा दिस्सते महा' (ती मोठी सेना दिसत आहे) असे प्रयोग पाहायला मिळतात. यावरून विग्रहात (स्वतंत्रपणे) देखील हा शब्द आढळतो हे जाणावे. म्हणून 'महं, महा, महन्तो, महन्ता. भो महन्त, भवन्तो महन्ता' असे पुल्लिंगात; 'महन्तं, महा, महन्तानि. भो महन्त, भवन्तो महन्तानि' असे नपुंसकलिंगात; 'महन्ता, महा, महन्ता, महन्तायो. भोति महन्ते, भोतियो महन्ता, महन्तायो' असे स्त्रीलिंगात सर्व रूपे पूर्णपणे योजावीत. समासात मात्र 'महासत्तो, महाउपासको, महाउपासिका, महब्बलो, महावनं, महग्गतं, महप्फलं, महब्भयं' इत्यादी रूपे होतात. तद्धित प्रत्ययात 'महत्तनो, महत्तं, महन्तत्तं, महन्तता' अशी रूपे होतात. 'गच्छन्त' शब्दाची मात्र 'गच्छन्तो, गच्छन्ता' अशी रूपे सांगून, उर्वरित रूपे 'महन्त' शब्दाच्या सांगितलेल्या पद्धतीने सविस्तरपणे नामविभक्तीच्या तक्त्याप्रमाणे जाणावीत. तसेच 'गच्छन्तो, गच्छन्ता' हा पुल्लिंगी प्रकार, 'गच्छन्तं, गच्छन्तानि' हा नपुंसकलिंगी प्रकार आणि 'गच्छन्ती, गच्छन्ती, गच्छन्तियो' हा स्त्रीलिंगी प्रकार ग्रहण करावा. अशा प्रकारे तिन्ही लिंगांच्या नियमांनुसार 'चरं चरन्तो चरन्तं चरन्ती, ददं ददन्तो ददन्तं ददन्ती' इत्यादी हजारो शब्दांचे नामविभक्तीचे तक्ते सविस्तरपणे जाणावेत. ယေ ပနာစရိယာ ‘‘ဂစ္ဆန္တော’’တိအာဒီနံ ပစ္စတ္တာလပနဗဟုဝစနတ္တဉ္စ ‘‘ဂစ္ဆံ’’ဣစ္စာဒီနံ အာလပနေကဝစနတ္တဉ္စ ဣစ္ဆန္တိ, တေ သမမှေဟိ ပယောဂေါ သာသနေ န ဒိဋ္ဌော နယဝသေနာဂဟေတဗ္ဗတ္တာ. တသ္မာ တာနိ ဧတ္ထ န ဝဒါမ. အယံ ပန ဝိသေသော ဒိဋ္ဌော. သေယျထိဒံ? जे आचार्य 'गच्छन्तो' इत्यादींचे प्रथमा व संबोधन बहुवचन आणि 'गच्छं' इत्यादींचे संबोधन एकवचन मानतात, त्यांचा तो प्रयोग आमच्याद्वारे शासनात (बुद्धवचनात) पाहिला गेला नाही, कारण तो नियमानुसार स्वीकारण्याजोगा नाही. म्हणून आम्ही ते येथे सांगत नाही. परंतु हा विशेष फरक पाहिला गेला आहे. तो कसा? ‘‘ဂစ္ဆံ ဝိဓမ’’မိစ္စာဒိ-ပဒါနိ မုနိသာသနေ; ကတ္ထစာချာတိကာ ဟောန္တိ, ကတ္ထစိ ပန နာမိကာ. बुद्धशासनात 'गच्छं, विधमं' इत्यादी पदे कोठे आख्यात (क्रियापद) असतात, तर कोठे नाम (कृदन्त नाम) असतात. ‘‘တဿာဟံ သန္တိကေ ဂစ္ဆံ,သော မေ သတ္ထာ ဘဝိဿတိ; ဝိဓမံ ဒေဝ တေ ရဋ္ဌံ,ပုတ္တော ဝေဿန္တရော တဝ. ‘तस्साहं सन्तिके गच्छं (मी त्याच्या जवळ जाईन), सो मे सत्था भविस्सति (तो माझा शास्ता होईल); विधमं देव ते रट्ठं (हे देवा, तुझ्या राष्ट्राचा नाश करणारा), पुत्तो वेस्सन्तरो तव (तुझा पुत्र वेस्सन्तर आहे). အဓမ္မံ [Pg.241] သာရထိ ကယိရာ, မဉ္စေ တွံ နိက္ခနံ ဝနေ’’; ဣစ္စေဝမာဒယော ဉေယျာ, ပယောဂါ ဧတ္ထ ဓီမတာ. अधम्मं सारथि कयिरा (सारथीने अधर्म करावा), मञ्चे त्वं निक्खनं वने’ (तू वनात मंचकावर पुरत असताना); बुद्धिवान मनुष्याने यांसारखे प्रयोग येथे समजून घ्यावेत. ‘‘ဂစ္ဆိဿာမိ ဝိဓမီ’’တိ-အာဒိနာ ဇိနသာသနေ; နာနာကာလပုရိသာနံ, ဝသေနတ္ထံ ဝဒေ ဝိဒူ. बुद्धशासनात 'गच्छिस्सामि (मी जाईन), विधमी (त्याने नाश केला)' इत्यादींद्वारे वेगवेगळ्या काळ आणि पुरुषांच्या (प्रथम, मध्यम, उत्तम पुरुष) नियमांनुसार विद्वानाने अर्थ सांगावा. နာမတ္တေ ပန ‘‘ဂစ္ဆန္တော, ဝိဓမန္တော’’တိအာဒိနာ; ‘‘ဂစ္ဆ’’မိစ္စေဝမာဒီန-မတ္ထမတ္ထဝိဒူ ဝဒေ. परंतु नाम रूपात 'गच्छन्तो (जाणारा), विधमन्तो (नाश करणारा)' इत्यादींद्वारे 'गच्छं' इत्यादी शब्दांचा अर्थ अर्थ जाणणाऱ्या विद्वानाने सांगावा. ဣဒါနိ သမဂတိကတ္တေပိ ‘‘ဇာနံ, ပဿ’’န္တိအာဒီနံ လိင်္ဂဝိဘတ္တိဝစနန္တရဝသေန ယော ဝိသေသော ဒိဿတိ, တံ ဝဒါမ. တထာ ဟိ ‘‘သာ ဇာနံယေဝ အာဟ န ဇာနာမီတိ, ပဿံယေဝ အာဟ န ပဿာမီ’’တိ ဧဝမာဒီသု ဇာနံ ပဿံ သဒ္ဒါနံ ‘‘ဇာနန္တီ ပဿန္တီ’’တိ လိင်္ဂန္တရဝသေန ပရိဝတ္တနံ ဘဝတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣမိနာ ‘‘ဂစ္ဆံ’’ဣတိ သဒ္ဒဿပိ ယထာပယောဂံ ‘‘ဂစ္ဆန္တီ’’တိ ဣတ္ထိယာ ကထနတ္ထော လဗ္ဘတိ တေဟိ သမာနဂတိကတ္တာ, န ‘‘ဂစ္ဆန္တော’’တိ သဒ္ဒဿ ‘‘ဂစ္ဆန္တီ’’တိ ဣတ္ထိယာ ကထနတ္ထော လဗ္ဘတိ တေဟိ အသမာနဂတိကတ္တာတိ ကာရဏံ ဒဿိတံ ဟောတိ. ‘‘အပိ နု တုမှေ အာယသ္မန္တော ဧကန္တသုခံ လောကံ ဇာနံ ပဿံ ဝိဟရထာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဇာနန္တာ ပဿန္တာ’’တိ ဝစနန္တရဝသေန ပရိဝတ္တနံ ဘဝတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣမိနာ ပန ‘‘ဂစ္ဆံ’’ဣတိ သဒ္ဒဿပိ ယထာပယောဂံ ‘‘ဂစ္ဆန္တာ’’တိ ဗဟုဝစနတ္ထော လဗ္ဘတိ တေဟိ သမာနဂတိကတ္တာ, န ‘‘ဂစ္ဆန္တေ’’တိ သဒ္ဒဿ ‘‘ဂစ္ဆန္တာ’’တိ ဗဟုဝစနတ္ထော လဗ္ဘတိ တေဟိ အသမာနဂတိကတ္တာတိ ကာရဏံ ဒဿိတံ ဟောတိ. ဧသ နယော ဥတ္တရတြာပိ. ‘‘ဘရန္တိ မာတာပိတရော, ပုဗ္ဗေ ကတမနုဿရ’’န္တိ ဧတ္ထ အနုဿရံသဒ္ဒဿ ‘‘အနုဿရန္တာ’’တိ ဝစနန္တရဝသေန ပရိဝတ္တနံ ဘဝတိ. ‘‘သဒ္ဓမ္မော ဂရုကာတဗ္ဗော, သရံ ဗုဒ္ဓါန သာသန’’န္တိ ဧတ္ထ သရံသဒ္ဒဿ သရန္တေနာတိ ဝိဘတ္တန္တရဝသေန ပရိဝတ္တနံ ဘဝတိ. ‘‘ဖုသံ ဘူတာနိ သဏ္ဌာနံ, မနသာ ဂဏှတော [Pg.242] ယထာ’’တိ ဧတ္ထ ဖုသံသဒ္ဒဿပိ ‘‘ဖုသန္တဿာ’’တိ ဝိဘတ္တန္တရဝသေန ပရိဝတ္တနံ ဘဝတိ. တထာ ‘‘ယာစံ အဒဒမပ္ပိယော’’တိ ဧတ္ထာပိ ယာစံသဒ္ဒဿ ‘‘ယာစန္တဿာ’’တိ ဝိဘတ္တန္တရဝသေန ပရိဝတ္တနံ ဘဝတိ. ယာစန္တိ ဝါ ယာစိတဗ္ဗံ ဓနံ, ဣမိနာ နယေန နာနပ္ပကာရတော ပရိဝတ္တနံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ဣတိ ‘‘ဘဝံကရ’’န္တိအာဒီနံ ဝိသဒိသပဒမာလာ စ ‘‘ဂစ္ဆံ, စရ’’န္တိအာဒီနံ သဒိသပဒမာလာ စ ‘‘ဇာနံ, ပဿ’’န္တိအာဒီနံ လိင်္ဂဝိဘတ္တိဝစနန္တရဝသေန ကတ္ထစိ ပရိဝတ္တနန္တိ အယံ တိဝိဓောပိ အာကာရော အာချာတိကပဒတ္ထဝိဘာဝနာယ သဒ္ဓိံ ကထိတော ပါဝစနဝရေ သောတူနံ သဒ္ဒေသွတ္ထေသု စ ဝိသာရဒဗုဒ္ဓိပဋိလာဘတ္ထံ. သဗ္ဗမေတဉှိ သန္ဓာယ ဣမာ ဂါထာ ဝုတ္တာ – आता, समान गती (समान रूप) असूनही "जानं, पस्सं" (जाणत, पाहत) इत्यादी शब्दांमध्ये लिंग, विभक्ती आणि वचनाच्या फरकामुळे जो विशेष फरक दिसून येतो, तो आम्ही सांगतो. जसे की, "सा जानंयेव आह न जानामीति, पस्संयेव आह न पस्सामीति" (ती जाणत असूनही म्हणाली की मी जाणत नाही, पाहत असूनही म्हणाली की मी पाहत नाही) इत्यादींमध्ये 'जानं', 'पस्सं' या शब्दांचे 'जानन्ती', 'पस्सन्ती' असे लिंगबदलामुळे परिवर्तन होते, असे समजावे. याद्वारे "गच्छं" या शब्दाचा देखील प्रयोगानुसार "गच्छन्ती" असा स्त्रीलिंगी अर्थ प्राप्त होतो, कारण ते समान गतीचे आहेत; परंतु "गच्छन्तो" या शब्दाचा "गच्छन्ती" असा स्त्रीलिंगी अर्थ प्राप्त होत नाही, कारण ते असमान गतीचे आहेत, हे कारण दर्शविले आहे. "अपि नु तुम्हे आयस्मन्तो एकन्तसुखं लोकं जानं पस्सं विहरथा" (हे आयुष्यमानांनो, तुम्ही अत्यंत सुखी लोकाला जाणत आणि पाहत विहार करता का?) येथे "जानन्ता पस्सन्ता" असे वचनबदलामुळे परिवर्तन होते, असे समजावे. याद्वारे "गच्छं" या शब्दाचा देखील प्रयोगानुसार "गच्छन्ता" असा बहुवचनी अर्थ प्राप्त होतो, कारण ते समान गतीचे आहेत; परंतु "गच्छन्ते" या शब्दाचा "गच्छन्ता" असा बहुवचनी अर्थ प्राप्त होत नाही, कारण ते असमान गतीचे आहेत, हे कारण दर्शविले आहे. हाच नियम पुढेही लागू होतो. "भरन्ति मातापितरो, पुब्बे कतमनुस्सरं" (माता-पित्यांचे पालनपोषण करतात, पूर्वी केलेल्या उपकारांचे स्मरण करत) येथे 'अनुस्सरं' या शब्दाचे 'अनुस्सरन्ता' असे वचनबदलामुळे परिवर्तन होते. "सद्धम्मो गरुकातब्बो, सरं बुद्धान सासनं" (सद्धम्माचा आदर केला पाहिजे, बुद्धांच्या शासनाचे स्मरण करत) येथे 'सरं' या शब्दाचे 'सरन्तेन' (स्मरण करणाऱ्याने) असे विभक्तीबदलामुळे परिवर्तन होते. "फुसं भूतानि सण्ठानं, मनसा गण्हतो यथा" (प्राण्यांना स्पर्श करत, जसे मनाने ग्रहण करणाऱ्याचे रूप असते) येथे 'फुसं' या शब्दाचे देखील 'फुसन्तस्स' असे विभक्तीबदलामुळे परिवर्तन होते. तसेच "याचं अददमप्पियो" (याचना करणाऱ्याला न देणारा अप्रिय होतो) येथेही 'याचं' या शब्दाचे 'याचन्तस्स' असे विभक्तीबदलामुळे परिवर्तन होते. किंवा 'याचन्ति' म्हणजे याचना केली जाणारी संपत्ती, या नियमाने विविध प्रकारे परिवर्तन समजून घ्यावे. अशा प्रकारे "भवं, करं" इत्यादींची असमान शब्दमाळा आणि "गच्छं, चरं" इत्यादींची समान शब्दमाळा, आणि "जानं, पस्सं" इत्यादींचे लिंग, विभक्ती व वचनाच्या फरकामुळे काही ठिकाणी होणारे परिवर्तन, हे तिन्ही प्रकार आख्यातपदांच्या अर्थाच्या स्पष्टीकरणासह श्रेष्ठ बुद्धवचनात (पावचनवरे) श्रोत्यांना शब्दांमध्ये आणि अर्थांमध्ये कुशल बुद्धी प्राप्त व्हावी म्हणून सांगितले आहेत. हे सर्व लक्षात घेऊनच या गाथा म्हटल्या आहेत – ‘‘ဘဝံ ကရံ အရဟံ သံ, မဟံ’’ဣတိ ပဒါနိ တု; ဝိသဒိသာနိ သမ္ဘောန္တိ, အညမညန္တိ လက္ခယေ. "भवं, करं, अरहं, सं, महं" हे शब्द मात्र असमान (विसदृश) असतात, ते एकमेकांपासून भिन्न आहेत असे समजावे. ‘‘ဂစ္ဆံ စရံ ဒဒံ တိဋ္ဌံ, စိန္တယံ ဘာဝယံ ဝဒံ; ဇာနံ ပဿ’’န္တိအာဒီနိ, သမာနာနိ ဘဝန္တိ ဟိ. "गच्छं, चरं, ददं, तिट्ठं, चिन्तयं, भावयं, वदं, जानं, पस्सं" इत्यादी शब्द मात्र समान (सदृश) असतात. တတြ ‘‘ဇာန’’န္တိအာဒီနံ, ကတ္ထစိ ပရိဝတ္တနံ; လိင်္ဂဝိဘတ္တိဝစန-န္တရတော ပန ဒိဿတီတိ. त्यामध्ये "जानं" इत्यादी शब्दांचे काही ठिकाणी लिंग, विभक्ती आणि वचनाच्या फरकामुळे परिवर्तन दिसून येते. အပိစ အယံ သဗ္ဗေသမ္ပိ နိဂ္ဂဟီတန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိ, ယဒိဒံ ဒွီသု လိင်္ဂေသု ဆသု ဝိဘတ္တီသု တေရသသု ဝစနေသု အညတရလိင်္ဂဝိဘတ္တိဝစနဝသေန ပရိဝတ္တနံ. အယမ္ပိ ပနေတ္ထ နီတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. शिवाय, ही सर्व अनुस्वारान्त (निग्गहीतान्त) पुल्लिंगी शब्दांची मूळ प्रकृती आहे, जी दोन लिंगांमध्ये, सहा विभक्तींमध्ये आणि तेरा वचनांमध्ये इतर कोणत्याही लिंग, विभक्ती आणि वचनाच्या स्वरूपात परिवर्तित होते. हा देखील येथील नियम समजावा. ‘‘ဂစ္ဆံ စရ’’န္တိအာဒီနိ, ဝိပ္ပကတဝစော သိယုံ; ‘‘ဂစ္ဆမာနော စရမာနော’’, ဣစ္စာဒီနိ ပဒါနိ စ. "गच्छं, चरं" इत्यादी शब्द आणि "गच्छमानो, चरमानो" इत्यादी शब्द अपूर्ण क्रिया (वर्तमानकाळात चालू असलेली क्रिया) दर्शवणारे असावेत. ‘‘မဟံ ဘဝ’’န္တိ ဧတာနိ, ဝိပ္ပကတဝစောပိ စ; အဝိပ္ပကတဝစော စ, သိယုံ အတ္ထာနုရူပတော. "महं, भवं" हे शब्द अर्थानुसार अपूर्ण क्रिया दर्शवणारे आणि पूर्ण क्रिया दर्शवणारे देखील असावेत. ‘‘အရဟံ [Pg.243] သ’’န္တိ ဧတာနိ, ဝိနိမုတ္တာနိ သဗ္ဗထာ; အာကာရံ တိဝိဓမ္ပေတံ, ကရေ စိတ္တေ သုမေဓသောတိ. "अरहं, सं" हे शब्द सर्वथा (या नियमांपासून) मुक्त आहेत. बुद्धिमान मनुष्याने हा त्रिविध प्रकार आपल्या चित्तात धारण करावा. သဝိနိစ္ဆယောယံ နိဂ္ဂဟီတန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. अनुस्वारान्त (निग्गहीतान्त) पुल्लिंगी शब्दांच्या मूळ रूपाचा हा सविस्तर निर्णयांसह नाम-शब्दरूपांचा (नामिकपद्माला) विभाग आहे. အာကာရန္တတာပကတိကံ နိဂ္ဂဟီတန္တပုလ္လိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. आकारान्त प्रकृतीचे अनुस्वारान्त (निग्गहीतान्त) पुल्लिंगी रूप समाप्त झाले. ဣဒါနိ ဓနဘူတိဣစ္စေတဿ ပကတိရူပဿ အညေသဉ္စ တံသဒိသာနံ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂံ ဝက္ခာမိ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ. आता मी 'धनभूति' या मूळ रूपाचा आणि त्याच्यासारख्या इतर शब्दांचा नाम-शब्दरूपांचा (नामिकपद्माला) विभाग प्राचीन आचार्यांचे मत समोर ठेवून सांगतो. အဂ္ဂိ, အဂ္ဂီ, အဂ္ဂယော. အဂ္ဂိံ, အဂ္ဂီ, အဂ္ဂယော. အဂ္ဂိနာ, အဂ္ဂီဟိ, အဂ္ဂီဘိ. အဂ္ဂိဿ, အဂ္ဂိနော, အဂ္ဂီနံ. အဂ္ဂိနာ, အဂ္ဂီဟိ, အဂ္ဂီဘိ. အဂ္ဂိဿ, အဂ္ဂိနော, အဂ္ဂီနံ. အဂ္ဂိသ္မိံ, အဂ္ဂိမှိ, အဂ္ဂီသု. ဘော အဂ္ဂိ, ဘော အဂ္ဂီ, ဘဝန္တော အဂ္ဂယော. ယမကမဟာထေရမတံ. अग्गि, अग्गी, अग्गयो। अग्गिं, अग्गी, अग्गयो। अग्गिना, अग्गीहि, अग्गीभि। अग्गिस्स, अग्गिनो, अग्गीनं। अग्गिना, अग्गीहि, अग्गीभि। अग्गिस्स, अग्गिनो, अग्गीनं। अग्गिस्मिं, अग्गिम्हि, अग्गीसु। भो अग्गि, भो अग्गी, भवन्तो अग्गयो। हे यमक महाथेरांचे मत आहे. ဧတ္ထ ကိဉ္စာပိ နိဿက္ကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘အဂ္ဂိသ္မာ, အဂ္ဂိမှာ’’တိ ဣမာနိ နာဂတာနိ, တထာပိ တတ္ထ တတ္ထ တံသဒိသပ္ပယောဂဒဿနတော ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ‘‘အဂ္ဂိနာ, အဂ္ဂိသ္မာ, အဂ္ဂိမှာ’’တိ ကမော စ ဝေဒိတဗ္ဗော. येथे जरी अपादान (निसक्क/पंचमी) विभक्तीच्या ठिकाणी "अग्गिस्मा, अग्गिम्हा" ही रूपे आलेली नसली, तरीही वेगवेगळ्या ठिकाणी त्यांच्यासारखे प्रयोग दिसून येत असल्यामुळे ती ग्रहण करावीत. आणि "अग्गिना, अग्गिस्मा, अग्गिम्हा" असा क्रम समजावा. ဓနဘူတိ, ဓနဘူတီ, ဓနဘူတယော. ဓနဘူတိံ, ဓနဘူတီ, ဓနဘူတယော. ဓနဘူတိနာ, ဓနဘူတီဟိ, ဓနဘူတီဘိ. ဓနဘူတိဿ, ဓနဘူတိနော, ဓနဘူတီနံ. ဓနဘူတိနာ, ဓနဘူတိသ္မာ, ဓနဘူတိမှာ, ဓနဘူတီဟိ, ဓနဘူတီဘိ. ဓနဘူတိဿ, ဓနဘူတိနော, ဓနဘူတီနံ. ဓနဘူတိသ္မိံ, ဓနဘူတိမှိ, ဓနဘူတီသု. ဘော ဓနဘူတိ, ဘော ဓနဘူတီ, ဘဝန္တော ဓနဘူတယော. धनभूति, धनभूती, धनभूतयो। धनभूतिं, धनभूती, धनभूतयो। धनभूतिना, धनभूतीहि, धनभूतीभि। धनभूतिस्स, धनभूतिनो, धनभूतीनं। धनभूतिना, धनभूतिस्मा, धनभूतिम्हा, धनभूतीहि, धनभूतीभि। धनभूतिस्स, धनभूतिनो, धनभूतीनं। धनभूतिस्मिं, धनभूतिम्हि, धनभूतीसु। भो धनभूति, भो धनभूती, भवन्तो धनभूतयो। သိရိဘူတိ သောတ္ထိဘူတိ, သုဝတ္ထိဘူတိ အဂ္ဂိနိ; ဂိနိ ဇောတိ ဒဓိ ပါဏိ, ဣသိ သန္ဓိ မုနိ မဏိ. सिरिभूति, सोत्थिभूति, सुवत्थिभूति, अग्गिनि, गिनी, जोति, दधि, पाणि, इसि, सन्धि, मुनि, मणि, ဗျာဓိ [Pg.244] ဂဏ္ဌိ ရဝိ မုဋ္ဌိ, ကဝိ ဂိရိ ကပိ နိဓိ; ကုစ္ဆိ ဝတ္ထိ ဝိဓိ သာလိ, ဝီဟိ ရာသိ အဟိ မသိ. ब्याधि, गण्ठि, रवि, मुट्ठि, कवि, गिरि, कपि, निधि, कुच्छि, वत्थि, विधि, सालि, वीहि, रासि, अहि, masi, သာတိ ကေသိ ကိမိ ဗောန္ဒိ, ဗောဓိ ဒီပိ ပတိ ဟရိ; အရိ ဓနိ တိမိ ကလိ, သာရထျုဒဓိ အဉ္ဇလိ, साति, केसि, किमि, बोन्दि, बोधि, दीपि, पति, हरि, अरि, धनि, तिमि, कलि, सारथ्युदधि, अञ्जलि, အဓိပတိ နရပတိ, အသိ ဉာတိ နိရူပဓိ; သမာဓိ ဇလဓိစ္စာဒီ, ဓနဘူတိသမာ မတာ. अधिपति, नरपति, असि, ञाति, निरूपधि, समाधि, जलधि इत्यादी शब्द 'धनभूति' शब्दाप्रमाणेच (रूपे चालणारे) मानले जातात. အထ ဝါ ဧတေသု အဓိပတိသဒ္ဒဿ ‘‘အဓိပတိယာ သတ္တာ’’တိ ပါဠိဒဿနတော ‘‘အဓိပတိယာ’’တိ သတ္တမီရူပမ္ပိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗံ. အပိစ ‘‘အသာရေ သာရမတိနော’’တိ ပါဠိယံ ဣကာရန္တသမာသပဒတော ယောဝစနဿ နောအာဒေသဒဿနတော ကွစိ အဓိပတိဣစ္စာဒီနံ ဣကာရန္တသမာသပဒါနံ ‘‘အဓိပတိနော’’တိအာဒိနာပိ ပစ္စတ္တောပယောဂရူပါနိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗာနိ ဤကာရန္တာနံ ဒဏ္ဍီသဒ္ဒါဒီနံ ‘‘ဒဏ္ဍိနော’’တိအာဒီနိ ပစ္စတ္တောပယောဂသမ္ပဒါနသာမိဝစနရူပါနိ ဝိယ. ဂဟပတိဇာနိပတိသဒ္ဒါဒီနံ ပန သမာသပဒါနမ္ပိ ဧဝရူပါနိ ပစ္စတ္တောပယောဂရူပါနိ န ဣစ္ဆိတဗ္ဗာနိ ‘‘ဂဟပတယော ဇာနိပတယော’’တိအာဒိနာ နယေန ယထာပါဝစနံ ဂဟေတဗ္ဗရူပတ္တာ. ဣသိ မုနိသဒ္ဒါနံ ပနာလပနဋ္ဌာနေ ‘‘ဣသေ, မုသေ’’တိ ရူပန္တရမ္ပိ ဂဟေတဗ္ဗံ ‘‘ပုတ္တော ဥပ္ပဇ္ဇတံ ဣသေ. ပဋိဂ္ဂဏှ မဟာမုနေ’’တိ ဒဿနတော. किंवा, यांमध्ये 'अधिपति' शब्दाचे "अधिपतिया सत्ता" (adhipatiyā sattā) या पाळी पाठाच्या दर्शनावरून "अधिपतिया" असे सप्तमीचे रूप देखील स्वीकारले पाहिजे. तसेच, "असारे सारमतिनो" (asāre sāramatino) या पाळी पाठात इ-कारान्त समासपदावरून 'यो' प्रत्ययाचा 'नो' असा आदेश दिसत असल्यामुळे, काही ठिकाणी 'अधिपति' इत्यादी इ-कारान्त समासपदांची "अधिपतिनो" इत्यादी प्रथमा आणि द्वितीया विभक्तीची रूपे देखील स्वीकारली पाहिजेत; जसे ई-कारान्त 'दण्डी' इत्यादी शब्दांची "दण्डिनो" इत्यादी प्रथमा, द्वितीया, चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीची रूपे होतात त्याप्रमाणे. परंतु 'गृहपति' (gahapati), 'जानिपति' (jānipati) इत्यादी समासपदांची अशी प्रथमा व द्वितीया विभक्तीची रूपे स्वीकारू नयेत, कारण "गहपतयो जानिपतयो" इत्यादी पद्धतीने बुद्धवचनानुसार (पाठांनुसार) रूपे ग्रहण केली जातात. तसेच 'इसि' (ऋषी) आणि 'मुनि' शब्दांच्या संबोधन स्थानामध्ये "इसे, मुसे" असे रूपान्तर देखील ग्रहण केले पाहिजे, कारण "पुत्तो उप्पज्जतं इसे. पटिग्गण्ह महामुने" (putto uppajjataṃ ise. paṭiggaṇha mahāmune) असा पाळी पाठ दिसतो. ယေ ပနေတ္ထ အမှေဟိ အဂ္ဂိနိ ဂိနိသဒ္ဒါ ဝုတ္တာ, တတြေကေ ဧဝံ ဝဒန္တိ ‘‘အဂ္ဂိနိသဒ္ဒေါ ပစ္စတ္တေကဝစနဘာဝေယေဝ လဗ္ဘတိ, န ပစ္စတ္တဗဟုဝစနဘာဝေ ဥပယောဂဘာဝါဒီသု ဝါ’’တိ. ကေစိ ပန ‘‘ပါဠိယံ အဂ္ဂိနိသဒ္ဒေါ နာမ နတ္ထိ, ဂိနိသဒ္ဒေါယေဝ အတ္ထီ’’တိ ဝဒန္တိ. ကေစိ ‘‘ဂိနိသဒ္ဒေါ နာမ နတ္ထိ, အဂ္ဂိနိသဒ္ဒေါယေဝတ္ထီ’’တိ [Pg.245] ဝဒန္တိ. သဗ္ဗမေတံ န ယုဇ္ဇတိ အဂ္ဂိနိ ဂိနိသဒ္ဒါနမုပလဗ္ဘနတော, သဗ္ဗာသုပိ ဝိဘတ္တီသု ဒွီသု ဝစနေသု ယောဇေတဗ္ဗတာဒဿနတော စ. တထာ ဟိ သုတ္တနိပါတေ ကောကာလိကသုတ္တေ – येथे आम्ही जे 'अग्गिनि' (aggini) आणि 'गिनि' (gini) शब्द सांगितले आहेत, त्याविषयी काही लोक असे म्हणतात की, "अग्गिनि शब्द केवळ प्रथमा एकवचनातच मिळतो, प्रथमा बहुवचनात किंवा द्वितीया इत्यादी विभक्तींमध्ये नाही." तर काही जण म्हणतात की, "पाळीमध्ये 'अग्गिनि' नावाचा शब्दच नाही, केवळ 'गिनि' हाच शब्द आहे." काही जण म्हणतात की, "'गिनि' नावाचा शब्द नाही, केवळ 'अग्गिनि' हाच शब्द आहे." हे सर्व योग्य नाही, कारण 'अग्गिनि' आणि 'गिनि' हे दोन्ही शब्द आढळतात, आणि सर्व विभक्तींमध्ये दोन्ही वचनांत त्यांची योजना केली जाऊ शकते असे दिसून येते. तसेच सुत्तनिपातातील कोकालिकसुत्तात म्हटले आहे – ‘‘န ဟိ ဝဂ္ဂု ဝဒန္တိ ဝဒန္တာ,နာဘိဇဝန္တိ န တာဏမုပေန္တိ; အင်္ဂါရေ သန္ထတေ သေန္တိ,အဂ္ဂိနိံ သမ္ပဇ္ဇလိတံ ပဝိသန္တီ’’တိ "ते बोलताना मधुर बोलत नाहीत, ते वेगाने धावत नाहीत आणि शरण जात नाहीत; ते पसरलेल्या निखाऱ्यांवर निजतात आणि प्रज्वलित अग्नीमध्ये प्रवेश करतात." ဣမသ္မိံ ပဒေသေ ‘‘အဂ္ဂိနိ’’န္တိ ဥပယောဂဝစနံ ဒိဿတိ. တေနာဟ အဋ္ဌကထာစရိယော ‘‘အဂ္ဂိနိံ သမ္ပဇ္ဇလိတန္တိ သမန္တတောဇာလံ သဗ္ဗဒိသာသု စ သမ္ပဇ္ဇလိတမဂ္ဂိ’’န္တိ. တတြေဝ စ သုတ္တနိပါတေ ကောကာလိကသုတ္တေ – या ठिकाणी "अग्गिनिं" (agginiṃ) असे द्वितीया विभक्तीचे रूप दिसते. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी म्हटले आहे: "'अग्गिनिं सम्पज्जलितं' म्हणजे सर्व बाजूंनी ज्वालांनी युक्त आणि सर्व दिशांना प्रज्वलित झालेला अग्नी." आणि त्याच सुत्तनिपातातील कोकालिकसुत्तात – ‘‘အထ လောဟမယံ ပန ကုမ္ဘိံ,အဂ္ဂိနိသဉ္ဇလိတံ ပဝိသန္တိ; ပစ္စန္တိ ဟိ တာသု စိရရတ္တံ,အဂ္ဂိနိသမာသု သမုပ္လဝါတေ’’တိ "त्यानंतर ते लोखंडी कढईत प्रवेश करतात, जी अग्नीने प्रज्वलित झालेली असते; तेथे ते दीर्घकाळ शिजतात, अग्नीसारख्या कढयांमध्ये तरंगत राहतात." ဣမသ္မိံ ပဒေသေ သမာသဝိသယတ္တာ အဂ္ဂိနိသဉ္ဇလိတန္တိ အဂ္ဂိနီဟိ သဉ္ဇလိတန္တိ အတ္ထော လဗ္ဘတိ, တထာ အဂ္ဂိနိသမာသူတိ အဂ္ဂိနီဟိ သဒိသာသူတိ အတ္ထောပိ. ဧဝံ သမာသဝိဓာနမုခေန ‘‘အဂ္ဂိနီဟီ’’တိ ကရဏဝစနမ္ပိ ဒိဿတိ. या ठिकाणी समासाच्या नियमांमुळे "अग्गिनिसञ्जलितं" याचा अर्थ "अग्नींनी प्रज्वलित" असा प्राप्त होतो, तसेच "अग्गिनिसमासु" याचा अर्थ "अग्नींसारख्या" असा देखील प्राप्त होतो. अशा प्रकारे समास रचनेच्या माध्यमातून "अग्गिनीहि" असे तृतीया (करण) विभक्तीचे रूप देखील दिसते. ဂိနိသဒ္ဒေါပိ စ ပါဠိယံ ဒိဿတိ. တထာ ဟိ ‘‘တမေဝ ကဋ္ဌံ ဒဟတိ, ယသ္မာ သော ဇာယတေ ဂိနီ’’တိ စူဠဗောဓိစရိယာယံ ဂိနိသဒ္ဒေါ ဒိဋ္ဌော. ကေစိ ပနေတ္ထ သန္ဓိဝသေန အကာရလောပံ သညောဂါဒိဿ စ ဂကာရဿ လောပံ ဝဒန္တိ, တမ္ပိ န ယုဇ္ဇတိ တဿာ ပါဠိယာ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘ယသ္မာတိ [Pg.246] ယတော ကဋ္ဌာ. ဂိနီတိ အဂ္ဂီ’’တိ ဧဝံ ဂိနိသဒ္ဒဿ ဥလ္လိင်္ဂေတွာ ဝစနတော. တထာ ‘‘ဆန္နာ ကုဋိ အာဟိတော ဂိနီ’’တိ ဣမဿ ဓနိယသုတ္တဿ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘အာဟိတောတိ အာဘတော ဇာလိတော ဝါ. ဂိနီတိ အဂ္ဂီ’’တိ ဝစနတော, တထေဝ စ ‘‘မဟာဂိနိ ပဇ္ဇလိတော, အနာဟာရောပသမ္မတီ’’တိ ဣမိဿာ ထေရဂါထာယ သံဝဏ္ဏနာယံ ‘‘ဂိနီတိ အဂ္ဂီ’’တိ ဝစနတော. ယဒိ ဟိ ဂိနိသဒ္ဒေါ ဝိသုံ န သိယာ, အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘ဇာယတေ ဂိနီ’’တိအာဒီနိ ‘‘ဇာယတေ အဂ္ဂိနီ’’တိအာဒိနာ ပဒစ္ဆေဒဝသေန အတ္ထံ ဝဒေယျုံ. ယသ္မာ ဧဝံ န ဝဒိံသု, ‘‘ဂိနီတိ အဂ္ဂီ’’တိ ပန ဝဒိံသု, တေန ဉာယတိ ‘‘ဂိနိသဒ္ဒေါပိ ဝိသုံ အတ္ထီ’’တိ. ယေ ‘‘ဂိနိသဒ္ဒေါ နတ္ထီ’’တိ ဝဒန္တိ, တေသံ ဝစနံ န ဂဟေတဗ္ဗမေဝ သာသနေ ဂိနိသဒ္ဒဿုပလဗ္ဘနတော. သုတ္တနိပါတဋ္ဌကထာယဉှိ ‘‘ဆန္နာ ကုဋိ အာဟိတော ဂိနီ’’တိ ပါဌဿ သံဝဏ္ဏနာယမေဝ ‘‘တေသု ဌာနေသု အဂ္ဂိနိ ‘ဂိနီ’တိ ဝေါဟရိယတီ’’တိ တဿ အဘိဓာနန္တရံ ဝုတ္တံ, တသ္မာ မယမေတ္ထ ဂါထာရစနံ ကရိဿာမ – 'गिनि' (gini) शब्द देखील पाळीमध्ये आढळतो. जसे की, "तमेव कट्ठं दहति, यस्मा सो जायते गिनी" (तेच लाकूड जळते, ज्याच्यापासून अग्नी उत्पन्न होतो) या चूळबोधिचर्येत 'गिनि' शब्द पाहिला गेला आहे. येथे काही लोक संधीमुळे 'अ' काराचा लोप आणि संयोगाच्या सुरुवातीच्या 'ग्' काराचा लोप झाला असे म्हणतात, परंतु ते देखील योग्य नाही; कारण त्या पाळीच्या अट्ठकथेत "यस्मा म्हणजे ज्या लाकडापासून, गिनी म्हणजे अग्नी" असा 'गिनि' शब्दाचा स्पष्ट उल्लेख करून अर्थ सांगितला आहे. तसेच "छन्ना कुटि आहितो गिनी" या धनियसुत्ताच्या अट्ठकथेत "आहितो म्हणजे आणलेला किंवा प्रज्वलित केलेला, गिनी म्हणजे अग्नी" असे म्हटले आहे, आणि त्याचप्रमाणे "महागिनी पज्जलितो, अनाहारोपसम्मती" या थेरगाथेच्या वर्णनात "गिनी म्हणजे अग्नी" असे म्हटले आहे. जर 'गिनि' हा स्वतंत्र शब्द नसता, तर अट्ठकथाचार्यांनी "जायते गिनी" इत्यादींचा अर्थ "जायते अग्गिनी" अशा पदच्छेदाने केला असता. ज्याअर्थी त्यांनी तसे म्हटले नाही, तर "गिनी म्हणजे अग्नी" असे म्हटले, त्यावरून हे समजते की 'गिनि' हा देखील एक स्वतंत्र शब्द आहे. जे लोक "'गिनि' शब्द नाही" असे म्हणतात, त्यांचे म्हणणे मुळीच स्वीकारण्याजोगे नाही, कारण बुद्धशासनात 'गिनि' शब्द आढळतो. कारण सुत्तनिपात अट्ठकथेत "छन्ना कुटि आहितो गिनी" या पाठाच्या वर्णनातच "त्या ठिकाणी 'अग्गिनि' याला 'गिनि' असे म्हटले जाते" असे त्याचे दुसरे नाव सांगितले आहे, म्हणून आम्ही येथे एक गाथा रचतो – ဝိဒေဟရဋ္ဌမဇ္ဈမှိ, ယံ တံ နာမေန ဝိဿုတံ; ရဋ္ဌံ ပဗ္ဗတရဋ္ဌန္တိ, ဒဿနေယျံ မနောရမံ. "विदेह राष्ट्राच्या मध्यभागी, जे 'पर्वत राष्ट्र' या नावाने प्रसिद्ध आहे, जे दर्शनीय आणि मनोरम आहे." ဓမ္မကောဏ္ဍဝှယံ တတ္ထ, နဂရံ အတ္ထိ သောဘနံ; တမှိ ဌာနေ မနုဿာနံ, ဘာသာ ဧဝ ဂိနိစ္စယံ. "तेथे 'धम्मकोण्ड' नावाचे एक सुंदर नगर आहे; त्या ठिकाणी लोकांच्या भाषेत 'गिनि' हाच अग्नीचा वाचक शब्द आहे." ‘‘ဂိနိ ဂိနီ ဂိနယော’’တိ-အာဒိနာ ပဝဒေ ဝိဒူ; ပဒမာလံ ယထာ အဂ္ဂိ-သဒ္ဒဿေဝ သုမေဓသော. "विद्वानांनी 'गिनि, गिनी, गिनयो' इत्यादी रूपांनी पदमाला (शब्दरूपे) सांगावी, जसे बुद्धिमान लोक 'अग्गि' शब्दाची सांगतात." ဣတိ အလာဗု လာဗုသဒ္ဒါ ဝိယ အဂ္ဂိနိ ဂိနိသဒ္ဒါပိ ဘဂဝတော ပါစနေ ဒိဿန္တီတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ယထာ ပန အဂ္ဂိနိသဒ္ဒဿ သဗ္ဗာသု ဝိဘတ္တီသု ဒွီသု ဝစနေသု ယောဇေတဗ္ဗတာ သိဒ္ဓါ, တထာ ဂိနိသဒ္ဒဿပိ သိဒ္ဓါဝ ဟောတိ. တသ္မာတြ – अशा प्रकारे, 'अलाबु' (alābu) आणि 'लाबु' (lābu) शब्दांप्रमाणे 'अग्गिनि' आणि 'गिनि' शब्द देखील भगवंतांच्या प्रवचनात आढळतात, असे जाणावे. आणि ज्याप्रमाणे 'अग्गिनि' शब्दाची सर्व विभक्तींमध्ये दोन्ही वचनांत योजना सिद्ध होते, त्याचप्रमाणे 'गिनि' शब्दाची देखील सिद्ध होते. म्हणून येथे – အဂ္ဂိနိ[Pg.247], အဂ္ဂိနီ, အဂ္ဂိနယော. အဂ္ဂိနိံ, အဂ္ဂိနီ, အဂ္ဂိနယော. အဂ္ဂိနိနာ, အဂ္ဂိနီဟိ, အဂ္ဂိနီဘိ. အဂ္ဂိနိဿ, အဂ္ဂိနီနံ. အဂ္ဂိနိနာ, အဂ္ဂိနိသ္မာ, အဂ္ဂိနိမှာ, အဂ္ဂိနီဟိ, အဂ္ဂိနီဘိ. အဂ္ဂိနိဿ, အဂ္ဂိနီနံ. အဂ္ဂိနိသ္မိံ, အဂ္ဂိနိမှိ, အဂ္ဂိနီသု. ဘော အဂ္ဂိနိ, ဘဝန္တော အဂ္ဂိနီ, ဘဝန္တော အဂ္ဂိနယော. अग्गिनि, अग्गिनी, अग्गिनयो (प्रथमा)। अग्गिनिं, अग्गिनी, अग्गिनयो (द्वितीया)। अग्गिनिना, अग्गिनीहि, अग्गिनीभि (तृतीया)। अग्गिनिस्स, अग्गिनीनं (चतुर्थी)। अग्गिनिना, अग्गिनिस्मा, अग्गिनिम्हा, अग्गिनीहि, अग्गिनीभि (पंचमी)। अग्गिनिस्स, अग्गिनीनं (षष्ठी)। अग्गिनिस्मिं, अग्गिनिम्हि, अग्गिनीसु (सप्तमी)। भो अग्गिनि, भवन्तो अग्गिनी, भवन्तो अग्गिनयो (संबोधन). ‘‘ဂိနိ, ဂိနီ, ဂိနယော. ဂိနိံ, ဂိနီ, ဂိနယော, ဂိနိနာ’’တိ သဗ္ဗံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဣတိ ပါဠိနယာနုသာရေန အဂ္ဂိနိ ဂိနိသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ယောဇိတာ. အထ ဝါ ယထာ သက္ကဋဘာသာယံ သတွ ပဒ္ဓသွာမိနီတိ သညောဂဝသေန ဝုတ္တာနံ သဒ္ဒါနံ မာဂဓဘာသံ ပတွာ သတ္တဝပဒုမသုဝါမိနီတိ နိဿညောဂဝသေန ဥစ္စာရိတာ ပါဠိ ဒိဿတိ ‘‘တွဉ္စ ဥတ္တမသတ္တဝေါ’’တိအာဒိနာ, တထာ သက္ကဋဘာသာယံ အဂ္နီတိ သညောဂဝသေန ဝုတ္တဿ မာဂဓဘာသံ ပတွာ ‘‘အဂ္ဂိနီ’’တိ သညောဂနကာရဝသေန ဥစ္စာရိတာ ပါဠိ ဒိဿတိ ‘‘အဂ္ဂိနိံ သမ္ပဇ္ဇလိတံ ပဝိသန္တီ’’တိအာဒိကာ. ယထာ စ ဝေယျာကရဏေဟိ သက္ကဋဘာသာဘူတော အဂ္နိသဒ္ဒေါ သဗ္ဗာသု ဝိဘတ္တီသု တီသု ဝစနေသု ယောဇိယတိ, တထာ မာဂဓဘာသာဘူတော အဂ္ဂိနိသဒ္ဒေါပိ သဗ္ဗာသု ဝိဘတ္တီသု ဒွီသု ဝစနေသု ယောဇေတဗ္ဗောဝ ဟောတိ, တသ္မာ သော ဣဓမှေဟိ ယောဇိယတိ, ဂိနိသဒ္ဒေါပိ အဂ္ဂိနိသဒ္ဒေန သမာနတ္ထတ္တာ, ဤသကဉ္စ သရူပတ္တာ တထေဝ ယောဇိယတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. "गिनि, गिनी, गिनयो। गिनिं, गिनी, गिनयो, गिनिना" इत्यादी सर्व रूपे योजावीत. अशा प्रकारे पाळीच्या नियमांनुसार 'अग्गिनि' आणि 'गिनि' शब्दांची नाम-पदमाला (विभक्ती रूपे) योजली आहे. किंवा, ज्याप्रमाणे संस्कृत भाषेत 'सत्त्व' (sattva), 'पद्म' (padma), 'स्वामी' (svāmī) असे संयोगयुक्त उच्चारलेले शब्द मागधी भाषेत (पाळीत) आल्यावर 'सत्तव' (sattava), 'पदुम' (paduma), 'सुवामी' (suvāmī) असे संयोगरहित उच्चारलेले पाळीमध्ये दिसतात, जसे की "त्वञ्च उत्तमसत्तवो" इत्यादींमध्ये; त्याचप्रमाणे संस्कृत भाषेत 'अग्नि' (agni) अशा संयोगयुक्त उच्चारलेल्या शब्दाचा मागधी भाषेत आल्यावर 'अग्गिनि' (aggini) असा संयोगरहित उच्चार पाळीमध्ये दिसतो, जसे की "अग्गिनिं सम्पज्जलितं पविसन्ति" इत्यादींमध्ये. आणि ज्याप्रमाणे वैयाकरणांनी संस्कृत भाषेतील 'अग्नि' शब्दाची सर्व विभक्तींमध्ये तीन वचनांत योजना केली आहे, त्याचप्रमाणे मागधी भाषेतील 'अग्गिनि' शब्दाची देखील सर्व विभक्तींमध्ये दोन वचनांत योजना केलीच पाहिजे; म्हणूनच आम्ही येथे त्याची योजना केली आहे. 'गिनि' शब्द देखील 'अग्गिनि' शब्दाशी समान अर्थाचा असल्यामुळे आणि थोडेसे समान रूप असल्यामुळे त्याची देखील तशीच योजना केली जाते, असे समजावे. ဧတ္ထ သိယာ – ယဒိ အဂ္ဂိနိသဒ္ဒေါ သဗ္ဗေသု ဝိဘတ္တိဝစနေသု ယောဇေတဗ္ဗော, အထ ကသ္မာ ကစ္စာယနေ ‘‘အဂ္ဂိဿိနီ’’တိ လက္ခဏေန သိမှိ ပရေ အဂ္ဂိသဒ္ဒန္တဿ ဣနိအာဒေသော ဒဿိတောတိ? သစ္စံ, ယထာ နဝက္ခတ္တုံ ဌပေတွာ ကတေကသေသဿ ဒသသဒ္ဒဿ ယောဝစနမှိ နဝါဒေသံ ကတွာ ယောဝစနဿ ဥတိအာဒေသံ ကသ္မာ ‘‘နဝုတီ’’တိ ရူပေ နိပ္ဖန္နေ ပုန ‘‘နဝုတီ’’တိ ပကတိံ ဌပေတွာ တတော နံဝစနံ ကတွာ ‘‘နဝုတီန’’န္တိ ရူပံ နိပ္ဖာဒိတံ[Pg.248]. ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ပန နာဒိဧကဝစနာနိ ကတွာ တေသံ ယာအာဒေသံ ကတွာ ‘‘နဝုတိယာ’’တိ ရူပံ နိပ္ဖာဒိတံ. တထာ ဟိ ‘‘ဆန္နဝုတီနံ ပါသဏ္ဍာနံ ဓမ္မာနံ ပဝရံ ယဒိဒံ သုဂတဝိနယံ နဝုတိယာ ဟံသသဟဿေဟိ ပရိဝုတော’’တိအာဒီနိ ပယောဂါနိ ဒိဿန္တိ. တထာ သိမှိ အဂ္ဂိသဒ္ဒန္တဿ ဣနိအာဒေသကရဏဝသေန ‘‘အဂ္ဂိနီ’’တိ ရူပေ နိပ္ဖန္နေပိ ပုန ‘‘အဂ္ဂိနီ’’တိ ပကတိံ ဌပေတွာ တတော ယောအံနာဒယော ဝိဘတ္တိယော ကတွာ ‘‘အဂ္ဂိနိ, အဂ္ဂိနီ, အဂ္ဂိနယော. အဂ္ဂိနိံ, အဂ္ဂိနီ, အဂ္ဂိနယော. အဂ္ဂိနိနာ’’တိအာဒီနိ ကထံ န နိပ္ဖဇ္ဇိဿန္တီတိ သန္နိဋ္ဌာနံ ကာတဗ္ဗံ. येथे अशी शंका येऊ शकते – जर 'अग्गि' (aggi) हा शब्द सर्व विभक्ती वचनांमध्ये योजायचा असेल, तर कच्चायन व्याकरणात "अग्गिस्सिनी" (aggissinī) या सूत्राने 'सि' प्रत्यय पर असताना 'अग्गि' शब्दाच्या अंताला 'इनि' आदेश का दर्शविला आहे? हे सत्य आहे, जसे नऊ वेळा ठेवून उर्वरित 'दस' शब्दाला 'यो' प्रत्यय असताना 'नव' आदेश करून आणि 'यो' प्रत्ययाचा 'उति' आदेश करून "नवुती" (navutī) हे रूप सिद्ध झाल्यावर, पुन्हा "नवुती" हा प्रातिपदिक (प्रकृती) मानून त्याला 'नं' प्रत्यय लावून "नवुतीनं" (navutīnaṃ) हे रूप सिद्ध केले जाते. स्त्रीलिंगात मात्र 'ना' इत्यादी एकवचन प्रत्यय लावून त्यांचा 'या' आदेश करून "नवुतिया" (navutiyā) हे रूप सिद्ध केले जाते. तसेच "छन्नवुतीनं पासंडानं धम्मानं पवरं यदिदं सुगतविनयं नवुतिया हंससहस्सेहि परिवुतो" (शहाण्णव पाखंडी मतांमध्ये सुगतविनय हा श्रेष्ठ धर्म आहे, जो नव्वद हजार हंसांनी वेढलेला आहे) इत्यादी प्रयोग आढळतात. त्याचप्रमाणे 'सि' प्रत्यय असताना 'अग्गि' शब्दाच्या अंताला 'इनि' आदेश केल्याने "अग्गिनी" (agginī) हे रूप सिद्ध झाल्यावरही, पुन्हा "अग्गिनी" हा प्रातिपदिक मानून त्याला 'यो', 'अं' इत्यादी विभक्ती प्रत्यय लावून "अग्गिनि, अग्गिनी, अग्गिनयो; अग्गिनिं, अग्गिनी, अग्गिनयो; अग्गिनिना" इत्यादी रूपे का सिद्ध होणार नाहीत? असा निष्कर्ष काढला पाहिजे. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा इ-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांच्या प्रातिपदिक रूपांचा (प्रकृती रूपांचा) सविस्तर निर्णयांसह नाम-पदमाला विभाग (शब्दरूपांचा विभाग) आहे. ဣကာရန္တတာပကတိကံ ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. इ-कारान्त प्रकृती असलेले इ-कारान्त पुल्लिंगी प्रकरण समाप्त झाले. ဣဒါနိ ဘာဝီ ဣစ္စေတဿ ပကတိရူပဿ အညေသဉ္စ တံသဒိသာနံ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂံ ဝက္ခာမ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ. आता आम्ही 'भावी' (bhāvī) या प्रातिपदिकाचा आणि त्याच्यासारख्या इतर शब्दांचा नाम-पदमाला विभाग, पूर्वाचार्यांच्या मताला अग्रभागी ठेवून सांगू. ဒဏ္ဍီ, ဒဏ္ဍီ, ဒဏ္ဍိနော. ဒဏ္ဍိံ, ဒဏ္ဍီ, ဒဏ္ဍိနော. ဒဏ္ဍိနာ, ဒဏ္ဍီဟိ, ဒဏ္ဍီဘိ. ဒဏ္ဍိဿ, ဒဏ္ဍိနော, ဒဏ္ဍီနံ. ဒဏ္ဍိနာ, ဒဏ္ဍီဟိ, ဒဏ္ဍီဘိ. ဒဏ္ဍိဿ, ဒဏ္ဍိနော, ဒဏ္ဍီနံ. ဒဏ္ဍိသ္မိံ, ဒဏ္ဍိမှိ, ဒဏ္ဍီသု. ဘော ဒဏ္ဍိ, ဘော ဒဏ္ဍီ, ဘဝန္တော ဒဏ္ဍိနော. ယမကမဟာထေရမတံ. दण्डी, दण्डी, दण्डिनो (प्रथमा). दण्डिं, दण्डी, दण्डिनो (द्वितीया). दण्डिना, दण्डीहि, दण्डीभि (तृतीया). दण्डिस्स, दण्डिनो, दण्डीनं (चतुर्थी). दण्डिना, दण्डीहि, दण्डीभि (पंचमी). दण्डिस्स, दण्डिनो, दण्डीनं (षष्ठी). दण्डिस्मिं, दण्डिम्हि, दण्डीसु (सप्तमी). भो दण्डि, भो दण्डी, भवन्तो दण्डिनो (संबोधन). हे यमक महाथेरांचे मत आहे. ဧတ္ထ ကိဉ္စာပိ ‘‘ဒဏ္ဍိန’’န္တိ ဥပယောဂေကဝစနဉ္စ ‘‘ဒဏ္ဍိသ္မာ, ဒဏ္ဍိမှာ’’တိ နိဿက္ကဝစနဉ္စ ‘‘ဒဏ္ဍိနီ’’တိ ဘုမ္မေကဝစနဉ္စ နာဂတံ, တထာပိ တတ္ထ တတ္ထ တံသဒိသဿ ပယောဂဿ ဒဿနတော ဂဟေတဗ္ဗမေဝ. येथे जरी 'दण्डिनं' (daṇḍinaṃ) हे द्वितीया एकवचन, 'दण्डिस्मा, दण्डिम्हा' (daṇḍismā, daṇḍimhā) हे पंचमी एकवचन आणि 'दण्डिनी' (daṇḍinī) हे सप्तमी एकवचन आलेले नसले, तरी त्या त्या ठिकाणी तशा प्रकारच्या प्रयोगांच्या दर्शनावरून ते ग्रहण केलेच पाहिजे. ‘‘ဘဏ [Pg.249] သမ္မ အနုညာတော, အတ္ထံ ဓမ္မဉ္စ ကေဝလံ; သန္တိ ဟိ ဒဟရာ ပက္ခီ, ပညဝန္တော ဇုတိန္ဓရာ’’တိ “हे मित्रा! अनुज्ञा मिळाल्यावर संपूर्ण अर्थ आणि धर्म सांग; कारण तरुण पक्षी देखील प्रज्ञावान आणि तेजस्वी असतात.” ပါဠိယံ ‘‘ပက္ခီ’’ဣတိ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနဿ ဒဿနတော ပန ‘‘ဒဏ္ဍီ’’ဣတိ ပစ္စတ္တောပယောဂဗဟုဝစနာနိ ဝုတ္တာနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. पाळिमध्ये (पाळी भाषेत) 'पक्खी' (pakkhī) हे प्रथमा बहुवचनाचे रूप आढळत असल्यामुळे, 'दण्डी' (daṇḍī) हे प्रथमा आणि द्वितीया बहुवचनाचे रूप सांगितले आहे, असे समजले पाहिजे. ဘာဝီ, ဘာဝီ, ဘာဝိနော. ဘာဝိံ, ဘာဝိနံ, ဘာဝီ, ဘာဝိနော. ဘာဝိနာ, ဘာဝီဟိ, ဘာဝီဘိ. ဘာဝိဿ, ဘာဝိနော, ဘာဝီနံ. ဘာဝိနာ, ဘာဝိသ္မာ, ဘာဝိမှာ, ဘာဝီဟိ, ဘာဝီဘိ. ဘာဝိဿ, ဘာဝိနော, ဘာဝီနံ. (ဘာဝိနိ) ဘာဝိသ္မိံ, ဘာဝိမှိ, ဘာဝီသု. ဘော ဘာဝိ, ဘော ဘာဝီ, ဘဝန္တော ဘာဝိနော. भावी, भावी, भाविनो (प्रथमा). भाविं, भाविनं, भावी, भाविनो (द्वितीया). भाविना, भावीहि, भावीभि (तृतीया). भाविस्स, भाविनो, भावीनं (चतुर्थी). भाविना, भाविस्मा, भाविम्हा, भावीहि, भावीभि (पंचमी). भाविस्स, भाविनो, भावीनं (षष्ठी). (भाविनि) भाविस्मिं, भाविम्हि, भावीसु (सप्तमी). भो भावि, भो भावी, भवन्तो भाविनो (संबोधन). ဧဝံ ဝိဘာဝီ သမ္ဘာဝီ, ပရိဘာဝီ ဓဇီ ဂဏီ; သုခီ ရောဂီ သသီ ကုဋ္ဌီ, မကုဋီ ကုသလီ ဗလီ. याचप्रमाणे विभावी, सम्भावी, परिभावी, धजी, गणी, suxī (सुखी), रोगी, ससी (शशी), कुट्ठी (कुष्ठी), मकुटी, कुसली (कुशली) आणि बली. ဇဋီ ယောဂီ ကရီ ယာနီ, တောမရီ မုသလီ ဖလီ; ဒန္တီ မန္တီ သုဓီ မေဓီ, ဘာဂီ ဘောဂီ နခီ သိခီ. जटी, योगी, करी, yani (यानी), तोमरी, मुसली, फली, दन्ती, मन्ती, सुधी, मेधी, भागी, भोगी, नखी आणि सिखी (शिखी). ဓမ္မီ သံဃီ ဉာဏီ အတ္ထီ, ဟတ္ထီ စက္ခီ ပက္ခီ ဒါဌီ; ရဋ္ဌီ ဆတ္တီ မာလီ စမ္မီ, စာရီ စာဂီ ကာမီ သာမီ. धम्मी, संघी, ञाणी (ज्ञानी), अत्थी, हत्थी, चक्खी, पक्खी, दाठी, रट्ठी, छत्ती, माली, चम्मी, चारी, चागी, कामी आणि सामी (स्वामी). မလ္လကာရီ ပါပကာရီ, သတ္တုဃာတီ ဒီဃဇီဝီ; ဓမ္မဝါဒီ သီဟနာဒီ, ဘူမိသာယီ သီဃယာယီ. मल्लकारी, पापकारी, सत्तुघाती (शत्रुघाती), दीघजीवी (दीर्घजीवी), धम्मवादी, सीहनादी (सिंहनादी), भूमिसायी आणि सीघयायी (शीघ्रयायी). ဝဇ္ဇဒဿီ စ ပါဏီ စ, ယသဿိစ္စာဒယောပိ စ; ဧတေသံ ကောစိ ဘေဒေါ တု, ဧကဒေသေန ဝုစ္စတေ. तसेच 'वज्जदस्सी' (वज्रदर्शी), 'पाणी' (प्राणी), 'यसस्सी' (यशस्वी) इत्यादी शब्दांमधील काही भेद अंशतः (एका भागात) सांगितले जात आहेत. ဤကာရန္တပုလ္လိင်္ဂပဒေသု ဟိ ‘‘ဝဇ္ဇဒဿီ, ပါဏီ’’ဣစ္စေဝမာဒီနံ ဥပယောဂဘုမ္မဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဝဇ္ဇဒဿိနံ, ပါဏိနေ’’တိအာဒီနိပိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. ဧတ္ထ စ – कारण ई-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांमध्ये 'वज्जदस्सी', 'पाणी' इत्यादी शब्दांच्या द्वितीया आणि सप्तमी विभक्तीच्या ठिकाणी 'वज्जदस्सिनं', 'पाणिने' इत्यादी रूपे देखील होतात. आणि येथे – ‘‘နိဓီနံဝ ပဝတ္တာရံ, ယံ ပဿေ ဝဇ္ဇဒဿိနံ; ဧဝံ ဇရာ စ မစ္စု စ, အဓိဝတ္တန္တိ ပါဏိနေ. “ज्याप्रमाणे गुप्त धनाचा मार्ग दाखवणाऱ्याला पाहावे, त्याप्रमाणे दोष दाखवणाऱ्याला (वज्जदस्सिनं) पाहावे; याचप्रमाणे जरा (वृद्धत्व) आणि मृत्यू प्राण्यावर (पाणिने) आक्रमण करतात. သမုပဂစ္ဆတိ [Pg.250] သသိနိ ဂဂနတလံ. चंद्र (ससिनि) गगनतळावर आरूढ होतो. ဥပဟစ္စ မနံ မဇ္ဈော, မာတင်္ဂသ္မိံ ယသဿိနေ; ဥစ္ဆိန္နော သဟ ရဋ္ဌေန, မဇ္ဈာရညံ တဒါ အဟု. यशस्वी (यसस्सिने) मातंग ऋषींच्या प्रति मनात द्वेष निर्माण करून, राजा माझ हा आपल्या राष्ट्रासह नष्ट झाला आणि तेव्हा ते माझ अरण्य झाले. သုသုခံ ဝတ ဇီဝါမ, ဝေရိနေသု အဝေရိနော’’တိ आम्ही वैऱ्यांमध्येही वैररहित (अवेरिनो) होऊन अत्यंत सुखाने जगतो.” ဧဝမာဒယော ပယောဂါ ဝေဒိတဗ္ဗာ, အယံ နယော ဒဏ္ဍီပဒါဒီသုပိ လဗ္ဘတေဝ သမာနဂတိကတ္တာ ဒဏ္ဍီပဒါဒီနံ ဝဇ္ဇဒဿီပဒါဒီဟိ. တသ္မာ ဥပယောဂဋ္ဌာနေ ‘‘ဒဏ္ဍိံ, ဒဏ္ဍိနံ, ဒဏ္ဍိနော, ဒဏ္ဍိနေ’’တိ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဘုမ္မဋ္ဌာနေ ‘‘ဒဏ္ဍိသ္မိံ, ဒဏ္ဍိမှိ, ဒဏ္ဍိနိ, ဒဏ္ဍိနေ, ဒဏ္ဍီသု, ဒဏ္ဍိနေသူ’’တိ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဧသ နယော ဂါမဏီ သေနာနီဣစ္စာဒီနိ ဝဇ္ဇေတွာ ယထာရဟံ ဤကာရန္တပုလ္လိင်္ဂေသု နေတဗ္ဗော. इत्यादी प्रयोग समजून घ्यावेत. हाच नियम 'दण्डी' इत्यादी शब्दांमध्येही प्राप्त होतोच, कारण 'दण्डी' इत्यादी शब्दांची गती (रूपसिद्धी) 'वज्जदस्सी' इत्यादी शब्दांसारखीच समान आहे. म्हणून द्वितीयेच्या (उपयोगाच्या) ठिकाणी "दण्डिं, दण्डिनं, दण्डिनो, दण्डिने" अशी योजना करावी. सप्तमीच्या (भुम्माच्या) ठिकाणी "दण्डिस्मिं, दण्डिम्हि, दण्डिनि, दण्डिने, दण्डीसु, दण्डिनेसू" अशी योजना करावी. हा नियम 'गामणी' (ग्रामणी), 'सेनानी' इत्यादी शब्द वगळून इतर ई-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांमध्ये योग्यतेनुसार लावावा. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဤကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा ई-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांच्या प्रातिपदिक रूपांचा सविस्तर निर्णयांसह नाम-पदमाला विभाग आहे. ဤကာရန္တတာပကတိကံ ဤကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. ई-कारान्त प्रकृती असलेले ई-कारान्त पुल्लिंगी प्रकरण समाप्त झाले. ဣဒါနိ ဘူဓာတုမယာနံ ဥကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ အပ္ပသိဒ္ဓတ္တာ အညေသံ ဥကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ဝသေန ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလံ ပူရေဿာမ. ကတမာနိ တာနိ? ‘‘ဘိက္ခု ဟေတု သေတု ကေတု ရာဟု ဘာဏု ခါဏု သင်္ကု ဥစ္ဆု ဝေဠု မစ္စု ဇန္တု သိန္ဓု ဗန္ဓု ရုရု နေရု သတ္တု ဗဗ္ဗု ပဋု ဗိန္ဒု ဂရု’’ဣစ္စာဒီနိ. आता भू-धातूपासून बनलेल्या उ-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांच्या अनेक विभक्ती रूपे असल्यामुळे, इतर उ-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांच्या आधारे प्रातिपदिक रूपांची नाम-पदमाला पूर्ण करू. ते शब्द कोणते? 'भिक्खु', 'हेतु', 'सेतु', 'केतु', 'राहु', 'भाणु', 'खाणु', 'संकु', 'उच्छु', 'वेळु', 'मच्चु', 'जन्तु', 'सिन्धु', 'बन्धु', 'रुरु', 'नेरु', 'सत्तु', 'बब्बु', 'पटु', 'बिन्दु', 'गरु' इत्यादी. ဘိက္ခု, ဘိက္ခူ, ဘိက္ခဝေါ. ဘိက္ခုံ, ဘိက္ခူ, ဘိက္ခဝေါ. ဘိက္ခုနာ, ဘိက္ခူဟိ, ဘိက္ခူဘိ. ဘိက္ခုဿ, ဘိက္ခုနော, ဘိက္ခူနံ. ဘိက္ခုနာ, ဘိက္ခုသ္မာ, ဘိက္ခုမှာ, ဘိက္ခူဟိ, ဘိက္ခူဘိ. ဘိက္ခုဿ, ဘိက္ခုနော, ဘိက္ခူနံ. ဘိက္ခုသ္မိံ, ဘိက္ခုမှိ, ဘိက္ခူသု. ဘော ဘိက္ခု, ဘဝန္တော ဘိက္ခူ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခဝေါ. ဘိက္ခုအာဒီနိ အညာနိ စ တံသဒိသာနိ ဧဝံ ဉေယျာနိ. भिक्खु, भिक्खू, भिक्खवो (प्रथमा). भिक्खुं, भिक्खू, भिक्खवो (द्वितीया). भिक्खुना, भिक्खूहि, भिक्खूभि (तृतीया). भिक्खुस्सा, भिक्खुनो, भिक्खूनं (चतुर्थी). भिक्खुना, भिक्खुस्मा, भिक्खुम्हा, भिक्खूहि, भिक्खूभि (पंचमी). भिक्खुस्सा, भिक्खुनो, भिक्खूनं (षष्ठी). भिक्खुस्मिं, भिक्खुम्हि, भिक्खूसु (सप्तमी). भो भिक्खु, भवन्तो भिक्खू, भिक्खवे, भिक्खवो (संबोधन). 'भिक्खु' इत्यादी आणि इतर त्यांच्यासारखे शब्द याचप्रमाणे समजावेत. အယမ္ပိ [Pg.251] ပနေတ္ထ ဝိသေသော ဉေယျော – ဟေတု, ဟေတူ, ဟေတုယော, ဟေတဝေါ. ဟေတုံ, ဟေတူ, ဟေတုယော, ဟေတဝေါ. ဘော ဟေတု, ဘဝန္တော ဟေတူ, ဟေတဝေ, ဟေတဝေါ. သေသံ ဘိက္ခုသမံ. येथे हा देखील विशेष फरक समजून घ्यावा – हेतु, हेतू, हेतुयो, हेतवो (प्रथमा). हेतुं, हेतू, हेतुयो, हेतवो (द्वितीया). भो हेतु, भवन्तो हेतू, हेतवे, हेतवो (संबोधन). उर्वरित रूपे 'भिक्खु' शब्दाप्रमाणेच होतात. အထ ဝါ ‘‘ဟေတုယာ’’တိအာဒီနံ ဒဿနတော ‘‘ဓေနုယာ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပေန သဒိသံ ‘‘ဟေတုယာ’’တိ ပုလ္လိင်္ဂရူပမ္ပိ သတ္တမီဌာနေ ဣစ္ဆိတဗ္ဗံ. ကာနိစိ ဟိ ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ ကေဟိစိ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပေဟိ သဒိသာနိ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? ‘‘ဥဋ္ဌေဟိ ကတ္တေ တရမာနော. ဧဟိ ဗာလေခမာပေဟိ, ကုသရာဇံ မဟဗ္ဗလံ. ဘာတရာ မာတရာ အဓိပတိယာ ရတ္တိယာ ဟေတုယော ဓေနုယော မတျာ ပေတျာ’’တိ ဧဝံ နယဒဿနေန ‘‘ဟေတုယာ တီဏိ. အဓိပတိယာ သတ္တ. ဥဋ္ဌေဟိ ကတ္တေ’’တိအာဒီသု လိင်္ဂဝိပလ္လာသစိန္တာ န ဥပ္ပာဒေတဗ္ဗာ. अथवा 'हेतुया' इत्यादींच्या दर्शनावरून 'धेनुया' या स्त्रीलिंगी रूपासारखे 'हेतुया' हे पुल्लिंगी रूप देखील सप्तमी विभक्तीच्या स्थानी इच्छिले पाहिजे. कारण काही पुल्लिंगी रूपे काही स्त्रीलिंगी रूपांसारखी असतात. ते कसे? 'उट्ठेहि कत्ते तरमानो. एहि बालेखमापेहि, कुसराजं महब्बलं. भातरा मातरा अधिपतिया रत्तिया हेतुयो धेनुयो मत्या पेत्या' अशा प्रकारे नयदर्शनाने 'हेतुया तीणि. अधिपतिया सत्त. उट्ठेहि कत्ते' इत्यादींमध्ये लिंगविपर्यास विषयी शंका उत्पन्न करू नये. ဇန္တု, ဇန္တူ, ဇန္တုယော, ဇန္တုနော, ဇန္တဝေါ. ဇန္တုံ, ဇန္တူ, ဇန္တုယော, ဇန္တုနော, ဇန္တဝေါ. ဘော ဇန္တု, ဘဝန္တော ဇန္တူ, ဇန္တဝေ ဇန္တဝေါ. သေသံ ဘိက္ခုသမံ. जन्तु, जन्तू, जन्तुयो, जन्तुनो, जन्तवो. जन्तुं, जन्तू, जन्तुयो, जन्तुनो, जन्तवो. भो जन्तु, भवन्तो जन्तू, जन्तवे जन्तवो. उर्वरित रूपे 'भिक्खु' प्रमाणे समजावीत. ဂရု, ဂရူ, ဂရဝေါ, ဂရုနော. ဂရုံ, ဂရူ, ဂရဝေါ, ဂရုနော. ဘော ဂရု, ဘဝန္တော ဂရူ, ဂရဝေါ, ဂရုနော. သေသံ ဘိက္ခုသမံ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဘတ္တု စ ဂရုနော သဗ္ဗေ, ပဋိပူဇေတိ ပဏ္ဍိတာ’’တိပါဠိနိဒဿနံ. တတြ ‘‘ဘိက္ခဝေ’’တိ အာမန္တနပဒံ စုဏ္ဏိယပဒေသွေဝ ဒိဿတိ, န ဂါထာသု. ‘‘ဘိက္ခဝေါ’’တိ ပစ္စတ္တပဒံ ဂါထာသုယေဝ ဒိဿတိ, န စုဏ္ဏိယပဒေသု, အပိစ ‘‘ဘိက္ခဝေ’’တိ အာမန္တနပဒံ သာဝကဿ ဘိက္ခူနံ အာမန္တနပါဠိယံ သန္ဓိဝိသယေယေဝ ဒိဿတိ, န အသန္ဓိဝိသယေ, ဗုဒ္ဓဿ ပန ဘိက္ခူနံ အာမန္တနပါဠိယံ သန္ဓိဝိသယေပိ အသန္ဓိဝိသယေပိ ဒိဿတိ. ‘‘ဘိက္ခဝေါ’’တိ အာမန္တနပဒံ ဗုဒ္ဓဿ ဘိက္ခူနံ အာမန္တနပါဠိယံ ဂါထာသု စ ဒိဿတိ[Pg.252], စုဏ္ဏိယပဒေသု စ သန္ဓိဝိသယေယေဝ ဒိဿတိ. သာဝကဿ ပန ဘိက္ခူနံ အာမန္တနပါဠိယံ န ဒိဿတီတိ အယံ ဒွိန္နံ ဝိသေသော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘ဧဝဉ္စ ပန ဘိက္ခဝေ ဣမံ သိက္ခာပဒံ ဥဒ္ဒိသေယျာထာ’’တိအာဒီသု ‘‘ဘိက္ခဝေ’’တိ ပဒံ စုဏ္ဏိယပဒေသွေဝ ဒိဋ္ဌံ. ‘‘ဘိက္ခဝေါ တိသတာ ဣမေ, ယာစန္တိ ပဉ္ဇလီကတာ’’တိအာဒီသု ‘‘ဘိက္ခဝေါ’’တိ ပစ္စတ္တပဒံ ဂါထာသုယေဝ ဒိဋ္ဌံ. ‘‘အာယသ္မာ သာရိပုတ္တော ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ အာဝုသော ဘိက္ခဝေ’’တိ ဧဝမာဒီသု သာဝကဿ ဘိက္ခူနံ အာမန္တနပါဠီသု သန္ဓိဝိသယေယေဝ ‘‘ဘိက္ခဝေ’’တိ ပဒံ ဒိဋ္ဌံ. ‘‘ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ သောတုကာမတ္ထ ဘိက္ခဝေ’’တိ ‘‘ဣဓ ဘိက္ခဝေ ဘိက္ခူ’’တိအာဒီသု ပန ဗုဒ္ဓဿ ဘိက္ခူနံ အာမန္တနပါဠီသု သန္ဓိဝိသယာဝိသယေသု ‘‘ဘိက္ခဝေ’’တိ ပဒံ ဒိဋ္ဌံ. ‘‘အရညေ ရုက္ခမူလေ ဝါ, သုညာဂါရေဝ ဘိက္ခဝေါ’’တိ ‘‘တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ ဘိက္ခဝေါ’’တိ ဧဝမာဒီသု ဗုဒ္ဓဿ ဘိက္ခူနံ အာမန္တနပါဠီသု ‘‘ဘိက္ခဝေါ’’တိ အာမန္တနပဒံ ဂါထာသု စ ဒိဋ္ဌံ, စုဏ္ဏိယပဒေသု စ သန္ဓိဝိသယေယေဝ ဒိဋ္ဌံ. ဣစ္စေဝံ – गरु, गरू, गरवो, गरुनो. गरुं, गरू, गरवो, गरुनो. भो गरु, भवन्तो गरू, गरवो, गरुनो. उर्वरित रूपे 'भिक्खु' प्रमाणे समजावीत. येथे 'भत्तु च गरुनो सब्बे, पटिपूजेति पण्डिता' हे पाळी उदाहरण आहे. त्यामध्ये 'भिक्खवे' हे संबोधन पद केवळ गद्य पाठातच दिसते, गाथांमध्ये नाही. 'भिक्खवो' हे प्रथमा विभक्तीचे पद केवळ गाथांमध्येच दिसते, गद्य पाठात नाही. शिवाय, 'भिक्खवे' हे संबोधन पद श्रावकाने भिक्खूंना संबोधित केलेल्या पाळी पाठात केवळ संधियुक्त ठिकाणीच दिसते, संधिरहित ठिकाणी नाही. परंतु, बुद्धांनी भिक्खूंना संबोधित केलेल्या पाळी पाठात ते संधियुक्त आणि संधिरहित दोन्ही ठिकाणी दिसते. 'भिक्खवो' हे संबोधन पद बुद्धांनी भिक्खूंना संबोधित केलेल्या पाळी पाठात गाथांमध्ये देखील दिसते आणि गद्य पाठात केवळ संधियुक्त ठिकाणीच दिसते. श्रावकाने भिक्खूंना संबोधित केलेल्या पाळी पाठात ते दिसत नाही, हा या दोघांमधील फरक लक्षात घेतला पाहिजे. तसेच 'एवञ्च पन भिक्खवे इमं सिक्खापदं उद्दिसेय्याथ' इत्यादींमध्ये 'भिक्खवे' हे पद केवळ गद्य पाठातच दिसले आहे. 'भिक्खवो tisata इमे, याचन्ति पञ्जलीकता' इत्यादींमध्ये 'भिक्खवो' हे प्रथमा विभक्तीचे पद केवळ गाथांमध्येच दिसले आहे. 'आयस्मा सारिपुत्तो भिक्खू आमन्तेसि आवुसो भिक्खवे' इत्यादी श्रावकांच्या भिक्खू-संबोधन पाळी पाठात केवळ संधियुक्त ठिकाणीच 'भिक्खवे' हे पद दिसले आहे. 'भिक्खू आमन्तेसि सोतुकामत्थ भिक्खवे', 'इध भिक्खवे भिक्खू' इत्यादी बुद्धांच्या भिक्खू-संबोधन पाळी पाठात मात्र संधियुक्त आणि संधिरहित दोन्ही ठिकाणी 'भिक्खवे' हे पद दिसले आहे. 'अरञ्ञे रुक्खमूले वा, suññāgāreva भिक्खवो', 'तत्र खो भगवा भिक्खू आमन्तेसि भिक्खवो' इत्यादी बुद्धांच्या भिक्खू-संबोधन पाळी पाठात 'भिक्खवो' हे संबोधन पद गाथांमध्ये देखील दिसले आहे आणि गद्य पाठात केवळ संधियुक्त ठिकाणीच दिसले आहे. अशा प्रकारे - စုဏ္ဏိယေဝ ပဒေ ဒိဋ္ဌံ, ‘‘ဘိက္ခဝေ’’တိ ပဒံ ဒွိဓာ; ယတော ပဝတ္တတေ သန္ဓိ-ဝိသယာဝိသယေသု တံ. 'भिक्खवे' हे पद केवळ गद्य पाठातच दोन प्रकारे दिसले आहे; कारण ते संधियुक्त आणि संधिरहित अशा दोन्ही विषयांत प्रवृत्त होते. ‘‘ဘိက္ခဝေါ’’တိ ပဒံ ဒိဋ္ဌံ, ဂါထာယဉ္စေဝ စုဏ္ဏိယေ; ပဒသ္မိမ္ပိ စ သန္ဓိဿ, ဝိသယေဝါတိ နိဒ္ဒိသေတိ. 'भिक्खवो' हे पद गाथांमध्ये आणि गद्य पाठात देखील दिसले आहे; परंतु गद्य पाठात ते केवळ संधियुक्त ठिकाणीच दिसते, असे निर्देशिले आहे. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဥကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा उकारान्त पुल्लिंगी नामांच्या मूळ रूपाचा सविस्तर निर्णय असलेला नामविभक्ती रूपांचा विभाग आहे. ဥကာရန္တတာပကတိကံ ဥကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. उकारान्त मूळ रूप असलेला उकारान्त पुल्लिंगी विभाग समाप्त झाला. ဣဒါနိ ပန သယမ္ဘူဣစ္စေတဿ ပကတိရူပဿ တံသဒိသာနဉ္စ နာမိကပဒမာလံ ကထယာမ – आता आपण 'सयम्भू' या मूळ रूपाची आणि त्याच्यासारख्या इतर नामांची नामविभक्ती रूपे सांगू या - သယမ္ဘူ[Pg.253], သယမ္ဘူ, သယမ္ဘုဝေါ. သယမ္ဘုံ, သယမ္ဘူ, သယမ္ဘုဝေါ. သယမ္ဘုနာ, သယမ္ဘူဟိ, သယမ္ဘူဘိ. သယမ္ဘုဿ, သယမ္ဘုနော, သယမ္ဘူနံ. သယမ္ဘုနာ, သယမ္ဘုသ္မာ, သယမ္ဘုမှာ, သယမ္ဘူဟိ, သယမ္ဘူဘိ. သယမ္ဘုဿ, သယမ္ဘုနော, သယမ္ဘူနံ. သယမ္ဘုသ္မိံ, သယမ္ဘုမှိ, သယမ္ဘူသု. ဘော သယမ္ဘု, ဘော သယမ္ဘူ, ဘဝန္တော သယမ္ဘူ, သယမ္ဘုဝေါ. ဧဝံ ပဘူ အဘိဘူဝိဘူ ဣစ္စာဒီနိပိ. सयम्भू, सयम्भू, सयम्भुवो. सयम्भुं, सयम्भू, सयम्भुवो. सयम्भुना, सयम्भूहि, सयम्भूभि. सयम्भुस्स, सयम्भुनो, सयम्भूनां. सयम्भुना, सयम्भुस्मा, सयम्भुम्हा, सयम्भूहि, सयम्भूभि. सयम्भुस्स, सयम्भुनो, सयम्भूनां. सयम्भुस्मिं, सयम्भुम्हि, सयम्भूसु. भो सयम्भु, भो सयम्भू, भवन्तो सयम्भू, सयम्भुवो. याचप्रमाणे पभू, अभिभू, विभू इत्यादींची रूपे देखील होतात. သဗ္ဗညူ, သဗ္ဗညူ, သဗ္ဗညုနော. သဗ္ဗညုံ, သဗ္ဗညူ, သဗ္ဗညုနော. ဘော သဗ္ဗညု, ဘဝန္တော သဗ္ဗညူ, သဗ္ဗညုနော, သေသာသု ဝိဘတ္တီသု ပဒါနိ ဘိက္ခုသဒိသာနိ ဘဝန္တိ, ဧဝံ ဝိဒူ ဝိညူ ကတညူ မဂ္ဂညူ ဓမ္မညူ အတ္ထညူ ကာလညူ ရတ္တညူ မတ္တညူ ဝဒညူ အဝဒညူ ဣစ္စာဒီနိ. सब्बञ्ञू, सब्बञ्ञू, सब्बञ्ञुनो. सब्बञ्ञुं, सब्बञ्ञू, सब्बञ्ञुनो. भो सब्बञ्ञु, भवन्तो सब्बञ्ञू, सब्बञ्ञुनो, उर्वरित विभक्तींमध्ये रूपे 'भिक्खु' प्रमाणे होतात. याचप्रमाणे विदू, विञ्ञू, कतञ्ञू, मग्गञ्ञू, धम्मञ्ञू, अत्थञ्ञू, कालञ्ञू, rattiññū, मत्तञ्ञू, वदञ्ञू, अवदञ्ञू इत्यादींची रूपे होतात. တတြ ‘‘ယေ စ လဒ္ဓါ မနုဿတ္တံ, ဝဒညူ ဝီတမစ္ဆရာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဝဒညူ’’တိ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနဿ ဒဿနတော သယမ္ဘူ သဗ္ဗညူ ဣစ္စာဒီနမ္ပိ ပစ္စတ္တောပယောဂဗဟုဝစနတ္တံ ဂဟေတဗ္ဗံ. အပိစ ‘‘ဝိဒူ, ဝိညူ’’တိအာဒီသု ‘‘ပရစိတ္တဝိဒုနီ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဒဿနတော ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဝိဒုနီ, ဝိဒုနီ, ဝိဒုနိယော. ဝိဒုနိံ, ဝိဒုနီ, ဝိဒုနိယော. ဝိဒုနိယာ’’တိ ဣတ္ထိနယေန ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ. တထာ ‘‘ဝိညူ ပဋိဗလာ သုဘာသိတဒုဗ္ဘာသိတံ ဒုဋ္ဌုလ္လာဒုဋ္ဌုလ္လံ အာဇာနိတု’’န္တိ ဧတ္ထ ‘‘ဝိညူ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဒဿနတော ‘‘ကောဓနာ အကတညူ စ, ပိသုဏာ မိတ္တဘေဒိကာ’’တိ ဧတ္ထ စ ‘‘အကတညူ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဒဿနတောပိ ‘‘ဝိညူ, ဝိညူ, ဝိညုယော. ဝိညုံ, ဝိညူ, ဝိညုယော. ဝိညုယာ’’တိ စ ‘‘ကတညူ, ကတညူ, ကတညုယော. ကတညုံ, ကတညူ, ကတညုယော, ကတညုယာတိ စ ဇမ္ဗူနယေန ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ. ဧဝံ ‘‘မဂ္ဂညူ, ဓမ္မညူ’’ဣစ္စာဒီသုပိ. ‘‘သယမ္ဘူ’’တိ ပဒေ ပန [Pg.254] ‘‘သယမ္ဘု ဉာဏံ ဂေါတြဘု စိတ္တ’’န္တိ ဒဿနတော နပုံသကလိင်္ဂတ္တေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘သယမ္ဘု, သယမ္ဘူ, သယမ္ဘူနိ. သယမ္ဘုံ, သယမ္ဘူ, သယမ္ဘူနီ’’တိ နပုံသကေ အာယုနယောပိ ဂဟေတဗ္ဗော. ဧသ နယော သေသေသုပိ ယထာရဟံ ဂဟေတဗ္ဗော. त्यामध्ये 'ये च लद्धा मनुस्सत्तं, वदञ्ञू वीतमच्छरा' येथे 'वदञ्ञू' हे प्रथमा बहुवचनाचे रूप दिसल्यामुळे सयम्भू, सब्बञ्ञू इत्यादींचे देखील प्रथमा व द्वितीया बहुवचनाचे रूप असेच ग्रहण करावे. शिवाय 'विदू, विञ्ञू' इत्यादींमध्ये 'परचित्तविदुनी' असे स्त्रीलिंगी रूप दिसल्यामुळे, स्त्रीलिंगात रूपे करताना 'विदुनी, विदुनी, विदुनियो. विदुनिं, विदुनी, विदुनियो. विदुनिया' अशा प्रकारे स्त्रीलिंगी नियमाने नामविभक्ती रूपे करावीत. तसेच 'विञ्ञू पटिबला सुभासितदुब्भासितं दुट्ठुल्लादुट्ठुल्लं आजानितुं' येथे 'विञ्ञू' हे स्त्रीलिंगी रूप दिसल्यामुळे आणि 'कोधना अकतञ्ञू च, पिसुणा मित्तभेदिका' येथे 'अकतञ्ञू' हे स्त्रीलिंगी रूप दिसल्यामुळे देखील 'विञ्ञू, विञ्ञू, विञ्ञुयो. विञ्ञुं, विञ्ञू, विञ्ञुयो. विञ्ञुया' आणि 'कतञ्ञू, कतञ्ञू, कतञ्ञुयो. कतञ्ञुं, कतञ्ञू, कतञ्ञुयो, कतञ्ञुया' अशी 'जम्बू' प्रमाणे नामविभक्ती रूपे करावीत. याचप्रमाणे 'मग्गञ्ञू, धम्मञ्ञू' इत्यादींमध्ये देखील समजावे. परंतु 'सयम्भू' या पदात 'सयम्भु ञाणं गोत्रभु चित्तं' या दर्शनावरून नपुंसकलिंगी रूपे करताना 'सयम्भु, सयम्भू, सयम्भूनि. सयम्भुं, सयम्भू, सयम्भूनी' अशी नपुंसकलिंगात 'आयु' प्रमाणे रूपे ग्रहण करावीत. हाच नियम उर्वरित शब्दांमध्ये देखील योग्यतेनुसार ग्रहण करावा. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဦကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा ऊकारान्त पुल्लिंगी नामांच्या मूळ रूपाचा सविस्तर निर्णय असलेला नामविभक्ती रूपांचा विभाग आहे. ဦကာရန္တတာပကတိကံ ဦကာရန္တပုလ္လိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. ऊकारान्त मूळ रूप असलेला ऊकारान्त पुल्लिंगी विभाग समाप्त झाला. ဣတိ သဗ္ဗထာပိ ပုလ္လိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ अशा प्रकारे सर्व प्रकारे पुल्लिंगी नामांच्या मूळ रूपाचा နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ သမတ္တော. नामविभक्ती रूपांचा विभाग समाप्त झाला. ယသ္မာ ပနာယံ သမတ္တောပိ ပါဝစနာဒီသု ယံ ယံ ဌာနံ သောတူနံ သမ္မုယှနဋ္ဌာနံ ဒိဿတိ, တတ္ထ တတ္ထ သောတူနမနုဂ္ဂဟာယ စောဒနာသောဓနာဝသေန သံသယံ သမုဂ္ဃာဋေတွာ ပုန ဝတ္တဗ္ဗော ဟောတိ, တသ္မာ ကိဉ္စိ ပဒေသမေတ္ထ ကထယာမ. परंतु, जरी हा ग्रंथ संपूर्ण असला, तरी बुद्धवचनांमध्ये (पावचन) जे जे स्थान श्रोत्यांसाठी संभ्रमाचे स्थान म्हणून दिसून येते, तिथे तिथे श्रोत्यांच्या कल्याणासाठी (अनुग्रहासाठी) आक्षेप आणि निराकरण (चोदना-शोधन) करून संशय दूर करण्यासाठी पुन्हा सांगणे आवश्यक ठरते, म्हणून आम्ही येथे काही भागाचे विवेचन करत आहोत. ယံ ကိရ ဘော ပါဠိယံ ‘‘သညတေ ဗြဟ္မစာရယော, အပစေ ဗြဟ္မစာရယော’’တိ စ ရူပံ ဣကာရန္တဿ အဂ္ဂိသဒ္ဒဿ ‘‘အဂ္ဂယော’’တိ ရူပမိဝ ဝုတ္တံ, တံ တထာ အဝတွာ ဤကာရန္တဿ ဒဏ္ဍီသဒ္ဒဿ ‘‘ဒဏ္ဍိနော’’တိ ရူပမိဝ ‘‘ဗြဟ္မစာရိနော’’ဣစ္စေဝ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ? သစ္စံ, တတ္ထ ‘‘ဗြဟ္မံ စရတီတိ ဗြဟ္မစာရိ ယထာ မုနာတီတိ မုနီ’’တိ ဧဝံ ဣကာရန္တဝသေန ဣစ္ဆိတတ္တာ. ‘‘မုနယော အဂ္ဂယော’’တိ ရူပါနိ ဝိယ ‘‘ဗြဟ္မစာရယော’’တိ ရူပံ ဘဝတိ. အညတ္ထ ပန ‘‘ဗြဟ္မံ စရဏသီလောတိ ဗြဟ္မစာရီ, ယထာ ဒုက္ကဋံ ကမ္မံ ကရဏသီလောတိ ဒုက္ကဋကမ္မကာရီ’’တိ ဧဝံ တဿီလတ္ထံ ဂဟေတွာ ဤကာရန္တဝသေန ဂဟဏေ ‘‘ဒုက္ကဋကမ္မကာရိနော’’တိ ရူပမိဝ ‘‘ဒဏ္ဍော အဿ အတ္ထီတိ ဒဏ္ဍီ’’တိ ဤကာရန္တဿ သဒ္ဒဿ ‘‘ဒဏ္ဍိနော’’တိ ရူပမိဝ စ ‘‘ဗြဟ္မစာရိနော’’တိ ရူပံ ဘဝတိ. တထာ ဟိ ‘‘ဣမေ ဟိ နာမ ဓမ္မစာရိနော သမစာရိနော ဗြဟ္မစာရိနော သစ္စဝါဒိနော [Pg.255] သီလဝန္တော ကလျာဏဓမ္မာ ပဋိဇာနိဿန္တီ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. ဧဝံ ဣကာရန္တဝသေန ‘‘ဗြဟ္မစာရယော’’တိ ပစ္စတ္တောပယောဂါလပနဗဟုဝစနရူပံ ယုဇ္ဇတိ, ပုန ဤကာရန္တဝသေန ‘‘ဗြဟ္မစာရိနော’’တိ ပစ္စတ္တောပယောဂါလပနဗဟုဝစနရူပမ္ပိ ယုဇ္ဇတိ, တသ္မာ ‘‘ဗြဟ္မစာရိ, ဗြဟ္မစာရီ, ဗြဟ္မစာရယော’’တိ အဂ္ဂိနယေန, ‘‘ဗြဟ္မစာရီ, ဗြဟ္မစာရီ, ဗြဟ္မစာရိနော’’တိ ဒဏ္ဍီနယေန စ ပဒမာလာ ဂဟေတဗ္ဗာ. हे पहा, पाळीमध्ये (पाठात) 'सञ्ञते ब्रह्मचारयो, अपचे ब्रह्मचारयो' हे रूप 'अग्गि' (अग्नि) या इ-कारान्त शब्दाच्या 'अग्गयो' या रूपाप्रमाणे सांगितले आहे. ते तसे न सांगता, 'दण्डी' या ई-कारान्त शब्दाच्या 'दण्डिनो' या रूपाप्रमाणे 'ब्रह्मचारिनो' असेच म्हणायला हवे का? होय, हे खरे आहे; कारण तिथे 'ब्रह्मं चरतीति ब्रह्मचारि' (जो ब्रह्मचर्य आचरण करतो तो ब्रह्मचारि) आणि 'मुनातीति मुनी' (जो जाणतो तो मुनि) याप्रमाणे इ-कारान्त रूपाने ते अपेक्षित आहे. त्यामुळे 'मुनयो, अग्गयो' या रूपांप्रमाणे 'ब्रह्मचारयो' हे रूप बनते. परंतु इतर ठिकाणी, 'ब्रह्मं चरणसीलोति ब्रह्मचारी' (ब्रह्मचर्य आचरण करणे हा ज्याचा स्वभाव आहे तो ब्रह्मचारी), जसे 'दुक्कटं कम्मं करणसीलोति दुक्कटकम्मकारी' (वाईट कर्म करणे हा ज्याचा स्वभाव आहे तो दुष्कृत्य करणारा) याप्रमाणे स्वभाव (तच्छील) अर्थ घेऊन ई-कारान्त रूपाने स्वीकारल्यास, 'दुक्कटकम्मकारिनो' या रूपाप्रमाणे आणि 'दण्डो अस्स अत्थीति दण्डी' (ज्यांच्याकडे दंड आहे तो दण्डी) या ई-कारान्त शब्दाच्या 'दण्डिनो' या रूपाप्रमाणे 'ब्रह्मचारिनो' हे रूप बनते. कारण पाळीमध्ये असे दिसून येते: 'इमे हि नाम धम्मचारिनो समचारिनो ब्रह्मचारिनो सच्चवादिनो सीलवन्तो कल्याणधम्मा पटिजानिस्सन्ती'. अशा प्रकारे, इ-कारान्त रूपाने 'ब्रह्मचारयो' हे प्रथमा, द्वितीया आणि संबोधनाचे बहुवचन रूप योग्य ठरते, आणि पुन्हा ई-कारान्त रूपाने 'ब्रह्मचारिनो' हे प्रथमा, द्वितीया आणि संबोधनाचे बहुवचन रूपही योग्य ठरते. म्हणून, 'ब्रह्मचारि, ब्रह्मचारी, brahmacārayo' हे 'अग्गि' च्या नियमाप्रमाणे (अग्गिनयेन) आणि 'ब्रह्मचारी, ब्रह्मचारी, ब्रह्मचारिनो' हे 'दण्डी' च्या नियमाप्रमाणे (दण्डीनयेन) शब्दरूपे (पदमाला) समजली पाहिजेत. ယံ ပန အာယသ္မာ ဗုဒ္ဓဃောသော ‘‘ယထာ သောဘန္တိ ယတိနော, သီလဘူသနဘူသိတာ’’တိ ဧတ္ထ ယတိသဒ္ဒဿ ဣကာရန္တဿ အဂ္ဂိသဒ္ဒဿ ‘‘အဂ္ဂယော’’တိ ရူပံ ဝိယ ‘‘ယတယော’’တိ ရူပံ အဝတွာ ကသ္မာ ဤကာရန္တဿ ဒဏ္ဍီသဒ္ဒဿ ‘‘ဒဏ္ဍိနော’’တိ ရူပံ ဝိယ ‘‘ယတိနော’’တိ ရူပံ ဒဿေတိ. နနွေသာ ပမာဒလေခါ ဝိယ ဒိဿတိ. ယထာ ဟိ ‘‘ကုက္ကုဋာ မဏယော ဒဏ္ဍာ သိဝယော ဒေဝ တေ ကုဒ္ဓါ’’တိ ပါဠိဂတိယာ ဥပပရိက္ခိယမာနာယ ‘‘ယတယော’’တိ ရူပေနေဝ ဘဝိတဗ္ဗံ ဣကာရန္တတ္တာတိ? နာယံ ပမာဒလေခါ. ‘‘ဝဒနသီလော ဝါဒီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ တဿီလတ္ထံ ဂဟေတွာ ဤကာရန္တဝသေန ယောဇနေ နိဒ္ဒေါသတ္တာ, တသ္မာ ‘‘ယတနသီလော ယတီ’’တိ ဧဝံ တဿီလတ္ထံ စေတသိ သန္နိဓာယ ဤကာရန္တဝသေန ‘‘ယတိနော’’တိ သမ္ပဒါနသာမီနမေကဝစနသဒိသံ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနရူပံ ဘဒန္တေန ဗုဒ္ဓဃောသေန ဒဿိတန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဥပယောဂါလပနဗဟုဝစနရူပမ္ပိ တာဒိသမေဝ. परंतु, आयुष्यमान बुद्धघोषांनी 'यथा सोभन्ति यतिनो, सीलभूतनभूसिता' (शील रुपी अलंकाराने सुशोभित झालेले यती जसे शोभून दिसतात) येथे 'यति' या इ-कारान्त शब्दाचे, 'अग्गि' शब्दाच्या 'अग्गयो' या रूपाप्रमाणे 'यतयो' असे रूप न सांगता, 'दण्डी' या ई-कारान्त शब्दाच्या 'दण्डिनो' या रूपाप्रमाणे 'यतिनो' हे रूप का दाखवले आहे? ही लेखनाची चूक (प्रमादलेखा) असल्यासारखे वाटत नाही का? कारण 'कुक्कुटा मणयो दण्डा सिवयो देव ते सुद्धा' या पाळीच्या रचनेनुसार विचार केला असता, इ-कारान्त असल्यामुळे 'यतयो' असेच रूप असायला हवे होते ना? ही लेखनाची चूक नाही. 'वदनसीलो वादी' (बोलणे हा ज्याचा स्वभाव आहे तो वादी) याप्रमाणे स्वभाव (तच्छील) अर्थ घेऊन ई-कारान्त रूपाने योजना केल्यास ते निर्दोष ठरते. म्हणून, 'यतनसीलो यती' (प्रयत्न करणे हा ज्याचा स्वभाव आहे तो यती) असा स्वभाव अर्थ मनात ठेवून, ई-कारान्त रूपाने 'यतिनो' हे चतुर्थी व षष्ठी एकवचनासारखे दिसणारे प्रथमा बहुवचनाचे रूप भदन्त बुद्धघोषांनी दाखवले आहे, असे समजले पाहिजे. द्वितीया आणि संबोधनाचे बहुवचन रूपही तसेच असते. ယတ္ထ ပန တဿီလတ္ထံ အဂ္ဂဟေတွာ ‘‘ယော မုနာတိ ဥဘော လောကေ, မုနိ တေန ပဝုစ္စတီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ ‘‘ယတတိ ဝီရိယံ ကရောတီတိ ယတီ’’တိ ကတ္တုကာရကဝသေန ဣကာရန္တဘာဝေါ ဂယှတိ. တတ္ထ ‘‘မုနယော မဏယော သိဝယော’’တိ ယောကာရန္တရူပါနိ ဝိယ ‘‘ယတယော’’တိ ယောကာရန္တံ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနရူပဉ္စ [Pg.256] ဥပယောဂါလပနဗဟုဝစနရူပဉ္စ ဘဝတိ, ဧဝံ ဤကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ တီသု ဌာနေသု ယောကာရန္တာနေဝ ရူပါနိ ဘဝန္တီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. परंतु जेथे स्वभाव (तच्छील) अर्थ न घेता, 'यो मुनाति उभो लोके, मुनि तेन पवुच्चती' (जो दोन्ही लोकांचे ज्ञान प्राप्त करतो, त्याला मुनी म्हटले जाते) याप्रमाणे 'यतति वीरियं करोतीति यति' (जो प्रयत्न करतो, वीर्य करतो तो यति) अशा कर्तृकारकाच्या अर्थाने इ-कारान्त भाव घेतला जातो, तिथे 'मुनयो, मणयो, सिवयो' या 'यो'-कारान्त रूपांप्रमाणे 'यतयो' हे 'यो'-कारान्त प्रथमा बहुवचन रूप आणि द्वितीया व संबोधनाचे बहुवचन रूप बनते. अशा प्रकारे, इ-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांची तिन्ही ठिकाणी (प्रथमा, द्वितीया आणि संबोधन बहुवचनात) 'यो'-कारान्त रूपेच होतात, असे समजले पाहिजे. ယဒိ ဧဝံ ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ သာရမတိ သုဒ္ဓဒိဋ္ဌိသမ္မာဒိဋ္ဌိမိစ္ဆာဒိဋ္ဌိဝဇိရဗုဒ္ဓိ သဒ္ဒါဒီ ကထန္တိ? ဧတေသံ ပန ဣကာရန္တဝသေန နိဒ္ဒိဋ္ဌာနမ္ပိ သမာသပဒတ္တာ အဂ္ဂိနယေ အဋ္ဌတွာ ယထာသမ္ဘဝံ ဒဏ္ဍီနယေ တိဋ္ဌနတော နောကာရန္တာနေဝ ရူပါနိ. တထာ ဟိ ‘‘အသာရေ သာရမတိနော’’တိ နောကာရန္တပစ္စတ္တဗဟုဝစနပါဠိ ဒိဿတိ, ဥပယောဂါလပနဗဟုဝစနရူပမ္ပိ တာဒိသမေဝ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. နနု စ ဘော ကစ္စာယနပ္ပကရဏေ ‘‘အတ္ထေ ဝိသာရဒမတယော’’တိ ဧတ္ထ သမာသပဒဿ ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဿ ယောကာရန္တဿ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနပါဌဿ ဒဿနတော သာရမတိသဒ္ဒါဒီနမ္ပိ ‘‘ဝိသာရဒမတယော’’တိ ရူပေန ဝိယ ယောကာရန္တေဟိ ရူပေဟိ ဘဝိတဗ္ဗန္တိ? နပိ ဘဝိတဗ္ဗံ ဗုဒ္ဓဝစနေ သမာသပဒါနံ ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ‘‘ဝိသာရဒမတယော’’တိ ရူပသဒိသဿ ရူပဿ အဒဿနတောတိ. जर असे असेल, तर 'सारमति, सुद्धदिट्ठि, सम्मादिट्ठि, मिच्छादिट्ठि, वजिरबुद्धि' इत्यादी इ-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांचे रूप कसे होईल? जरी हे शब्द इ-कारान्त म्हणून निर्दिष्ट केले असले, तरी ते सामासिक शब्द (समासपद) असल्यामुळे 'अग्गि' च्या नियमात न बसता, शक्यतो 'दण्डी' च्या नियमात बसतात; म्हणून त्यांची 'नो'-कारान्त रूपेच होतात. कारण पाळीमध्ये 'असारे सारमतिनो' असे 'नो'-कारान्त प्रथमा बहुवचनाचे रूप दिसून येते. द्वितीया आणि संबोधनाचे बहुवचन रूपही तसेच समजावे. पण हे पहा, कच्चायन व्याकरणामध्ये (कच्चायनप्पकरणे) 'अत्थे विसारदमतयो' येथे इ-कारान्त पुल्लिंगी सामासिक शब्दाचे 'यो'-कारान्त प्रथमा बहुवचनाचे रूप दिसत असल्यामुळे, 'सारमति' इत्यादी शब्दांचेही 'विसारदमतयो' या रूपाप्रमाणे 'यो'-कारान्त रूपे व्हायला हवीत ना? नाही, तसे होऊ शकत नाही; कारण बुद्धवचनात इ-कारान्त पुल्लिंगी सामासिक शब्दांचे 'विसारदमतयो' सारखे रूप कुठेही दिसून येत नाही. နနု စ ဘော ဗုဒ္ဓဝစနေ ‘‘ပဉ္စိမေ ဂဟပတယော အာနိသံသာ. တေ ဟောန္တိ ဇာနိပတယော, အညမညံ ပိယံဝဒါ’’တိ သမာသပဒါနံ ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ‘‘ဝိသာရဒမတယော’’တိ ရူပသဒိသာနိ ယောကာရန္တာနိ ရူပါနိ ဒိဿန္တိ. ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ ‘‘ဗုဒ္ဓဝစနေ သမာသပဒါနံ ဣကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ‘‘ဝိသာရဒမတယော’’တိ ရူပသဒိသဿ ယောကာရန္တဿ ရူပဿ အဒဿနတော’’တိ ဝုတ္တန္တိ? ဧတ္ထ ဝုစ္စတေ – ဝိသဒိသတ္တံ ပဋိစ္စ. ဂဟပတိသဒ္ဒါဒီသု ဟိ ယသ္မာ ပတိသဒ္ဒေါ သဘာဝေနေဝ ပုလ္လိင်္ဂေါ, န တု သမာသတော ပုဗ္ဗေ ဣတ္ထိလိင်္ဂပကတိကော ဟုတွာ ပစ္ဆာ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝံ ပတ္တော, တသ္မာ ဤဒိသေသု ဌာနေသု ‘‘ဂဟပတယော, ဇာနိပတယော’’တိ ယောကာရန္တာနိ, ‘‘သေနာပတယော, သေနာပတိနော’’တိ ယော နောကာရန္တာနိ [Pg.257] စ ပစ္စတ္တောပယောဂါလပနဗဟုဝစနရူပါနိ ဘဝန္တိ. တထာ ဟိ ‘‘တတ္တကာ သေနာပတိနော’’တိ အဋ္ဌကထာပါဌော ဒိဿတိ. ယသ္မာ ပန သာရမတိ သုဒ္ဓဒိဋ္ဌိသမ္မာဒိဋ္ဌိ မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိ ဝဇိရဗုဒ္ဓိ သဒ္ဒါဒီသု မတိဒိဋ္ဌိသဒ္ဒါဒယော သမာသတော ပုဗ္ဗေ ဣတ္ထိလိင်္ဂပကတိကာ ဟုတွာ ပစ္ဆာ ဗဟုဗ္ဗီဟိသမာသဝသေန ပုလ္လိင်္ဂဘာဝပ္ပတ္တာ, တသ္မာ ဤဒိသေသု ဌာနေသု ‘‘သာရမတိနော သုဒ္ဓဒိဋ္ဌိနော သမ္မာဒိဋ္ဌိနော မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိနော ဝဇိရဗုဒ္ဓိနော’’တိအာဒီနိ’နောကာရန္တာနိယေဝ ပစ္စတ္တောပယောဂါလပနဗဟုဝစနရူပါနိ ဘဝန္တိ, သမ္ပဒါနသာမီနမေကဝစနေဟိ သဒိသာနီတိ နိဋ္ဌမေတ္ထာဝဂန္တဗ္ဗံ. पण हे पहा, बुद्धवचनात 'पञ्चिमे गहपतयो आनिसंसा। ते होन्ति जानिपतयो, अञ्ञमञ्ञं पियंवदा' (हे पाच गृहपतींचे फायदे आहेत. ते पत्नीचे पती होतात आणि परस्परांशी प्रिय बोलतात) याप्रमाणे इ-कारान्त पुल्लिंगी सामासिक शब्दांची 'विसारदमतयो' सारखी 'यो'-कारान्त रूपे दिसून येतात. असे असताना, 'बुद्धवचनात इ-कारान्त पुल्लिंगी सामासिक शब्दांचे विसारदमतयो सारखे यो-कारान्त रूप दिसत नाही' असे का म्हटले गेले? यावर उत्तर दिले जाते – त्यांच्यातील भिन्नतेमुळे (विसदृशतेमुळे). कारण 'गहपति' इत्यादी शब्दांमध्ये 'पति' हा शब्द स्वभावानेच पुल्लिंगी आहे, तो समासाच्या आधी स्त्रीलिंगी प्रकृतीचा (रूपाचा) असून नंतर पुल्लिंगी झालेला नाही. म्हणून अशा ठिकाणी 'गहपतयो, जानिपतयो' ही 'यो'-कारान्त रूपे, आणि 'सेनापतयो, सेनापतिनो' ही 'यो' व 'नो'-कारान्त प्रथमा, द्वितीया आणि संबोधनाची बहुवचन रूपे होतात. कारण अट्ठकथेमध्ये (अट्टकथापाठो) 'तत्तका सेनापतिनो' असा पाठ दिसून येतो. परंतु, 'सारमति, सुद्धदिट्ठि, सम्मादिट्ठि, मिच्छादिट्ठि, वजिरबुद्धि' इत्यादी शब्दांमध्ये 'मति, दिट्ठि' इत्यादी शब्द समासाच्या आधी स्त्रीलिंगी प्रकृतीचे असून नंतर बहुव्रीहि समासामुळे पुल्लिंगी झाले आहेत. म्हणून अशा ठिकाणी 'सारमतिनो, सुद्धदिट्ठिनो, सम्मादिट्ठिनो, मिच्छादिट्ठिनो, वजिरबुद्धिनो' इत्यादी 'नो'-कारान्त रूपेच प्रथमा, द्वितीया आणि संबोधनाची बहुवचन रूपे होतात, जी चतुर्थी व षष्ठी एकवचनाच्या रूपांसारखी असतात – हा निष्कर्ष येथे समजून घेतला पाहिजे. သေဋ္ဌိ သာရထိစက္ကဝတ္တိသာမိဣစ္စေတေသု ကထန္တိ? ဧတ္ထ ပန အယံ ဝိသေသော ဝေဒိတဗ္ဗော – ကတ္ထစိ ပါဌေ ‘‘သေဋ္ဌီ သာရထီ စက္ကဝတ္တီ သာမီ’’တိ အန္တက္ခရဿ ဒီဃတ္တံ ဒိဿတိ, ကတ္ထစိ ပန ‘‘သေဋ္ဌိ သာရထိ စက္ကဝတ္တိ သာမိ’’ဣတိ အန္တက္ခရဿ ရဿတ္တံ ဒိဿတိ. ကိဉ္စာပိ ရဿတ္တမေတေသံ ဒိဿတိ, တထာပိ တတ္ထ တတ္ထ ပစ္စတ္တဝစနာဒိဘာဝေန ‘‘သေဋ္ဌိနော သာရထိနော’’တိအာဒိပယောဂဒဿနတော ရဿံ ကတွာ ဧတာနိ ဥစ္စာရိယန္တီတိ ဉာယတိ, တသ္မာ ဧဝံ နိဗ္ဗစနတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော – သေဋ္ဌံ ဓနသာရံ, ဌာနန္တရံ ဝါ အဿ အတ္ထီတိ သေဋ္ဌီ. အဿဒမ္မာဒယော သာရဏသီလောတိ သာရထီ. စက္ကံ ပဝတ္တနသီလောတိ စက္ကဝတ္တီ. သံ ဧတဿ အတ္ထီတိ သာမီတိ. အဿတ္ထိကတဿီလတ္ထသဒ္ဒါ ဟိ နောကာရန္တရူပဝသေန သမာနဂတိကာ ဘဝန္တိ ယထာ ‘‘ဒဏ္ဍိနော ဘူမိသာယိနော’’တိ. အပရောပိ နိဗ္ဗစနတ္ထော ဤကာရန္တဝသေန အဿဒမ္မာဒယော သာရေတီတိ သာရထီ. တထာ ဟိ ‘‘ပုရိသဒမ္မေ သာရေတီတိ ပုရိသဒမ္မသာရထီ’’တိ ဝုတ္တံ. စက္ကံ ဝတ္တေတီတိ စက္ကဝတ္တီ. ဧဝံ ကတ္တုကာရကဝသေန ဤကာရန္တတ္တံ ဂဟေတွာ ကတ္ထစိ လဗ္ဘမာနမ္ပိ ဣကာရန္တတ္တံ အနပေက္ခိတွာ ဗုဒ္ဓဝစနာနုရူပေန ‘‘သာရထိနော [Pg.258] စက္ကဝတ္တိနော’’တိအာဒီနိ နောကာရန္တရူပါနိ ဂဟေတွာ ဒဏ္ဍီနယေန ယောဇေတဗ္ဗာနိ ‘‘ဒဏ္ဍိနီ’’တိအာဒိကံ ဝဇ္ဇိတဗ္ဗံ ဝဇ္ဇေတွာ. ဧဝံ ‘‘သေဋ္ဌိနော သာရထိနော စက္ကဝတ္တိနော သာမိနော’’တိအာဒီနိ နောကာရန္တာနိယေဝ ရူပါနိ ဉေယျာနိ. 'सेठ्ठि', 'सारथि', 'चक्कवत्ति', 'सामि' या शब्दांच्या बाबतीत काय सांगावे? येथे हा विशेष फरक समजून घेतला पाहिजे – काही पाठांमध्ये 'सेठ्ठी, सारथी, चक्कवत्ती, सामी' असे अंतिम अक्षराचे दीर्घत्व दिसते, तर काही पाठांमध्ये 'सेठ्ठि, सारथि, चक्कवत्ति, सामि' असे अंतिम अक्षराचे र्हस्वत्व दिसते. जरी यांचे र्हस्वत्व दिसत असले, तरीही त्या त्या ठिकाणी प्रथमा विभक्ती इत्यादींच्या रूपाने 'सेठ्ठिनो, सारथिनो' इत्यादी प्रयोगांच्या दर्शनावरून हे र्हस्व करून उच्चारले जातात असे समजते. म्हणून, असा व्युत्पत्ति-अर्थ घेतला पाहिजे – श्रेष्ठ धनसंपत्ती किंवा उच्च पद ज्याच्याकडे आहे तो 'सेठ्ठी'. दम्य अश्वांना (घोड्यांना) चालवण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'सारथी'. चक्र फिरवण्याचा (प्रवर्तित करण्याचा) ज्याचा स्वभाव आहे तो 'चक्कवत्ती' (चक्रवर्ती). स्वतःचे स्वामित्व ज्याच्याकडे आहे तो 'सामी' (स्वामी). कारण 'अत्थि' (अस्तित्व) आणि 'तच्छील' (स्वभाव) अर्थाचे शब्द 'न'कारान्त रूपांच्या द्वारे समान गतीचे (समान रूपांचे) होतात, जसे की 'दण्डिनो, भूमिसायिनो'. दुसराही व्युत्पत्ति-अर्थ 'ई'कारान्ताच्या दृष्टीने असा आहे – दम्य अश्वांना चालवतो तो 'सारथी'. तसेच 'पुरुषदम्यांना (दम्य पुरुषांना) चालवतो म्हणून पुरिसदम्मसारथी' असे म्हटले आहे. चक्र फिरवतो तो 'चक्कवत्ती'. अशा प्रकारे कर्तृकारकाच्या दृष्टीने 'ई'कारान्तत्व स्वीकारून, काही ठिकाणी आढळणाऱ्या 'इ'कारान्तत्वाचा विचार न करता, बुद्धवचनाला अनुसरून 'सारथिनो, चक्कवत्तिनो' इत्यादी 'न'कारान्त रूपे घेऊन 'दण्डी' शब्दाच्या नियमाप्रमाणे (दण्डिनयेन) योजना करावी, फक्त 'दण्डिनी' इत्यादी स्त्रीलिंगी रूपे वर्ज्य करून. अशा प्रकारे 'सेठ्ठिनो, सारथिनो, चक्कवत्तिनो, सामिनो' इत्यादी 'न'कारान्त रूपेच समजावीत. အတြ ကိဉ္စိ ပယောဂံ နိဒဿနမတ္တံ ကထယာမ. ‘‘တာတ တယော သေဋ္ဌိနော အမှာကံ ဗဟူပကာရာ’’တိ စ ‘‘တေ ကတဘတ္တကိစ္စာ ‘မဟာသေဋ္ဌိနော မယံ ဂမိဿာမာ’တိ ဝဒိံသူ’’တိ စ ‘‘သာရထိနော အာဟံသူ’’တိ စ ‘‘ဒွေ စက္ကဝတ္တိနော’’တိ စ ဧဝမာဒီနိ. တတ္ထ ကိဉ္စာပိ ကတ္ထစိ ‘‘သေဋ္ဌိ သာရထိ’’ဣစ္စာဒိ ရဿတ္တပါဌော ဒိဿတိ, တထာပိ သော သဘာဝေန ရဿတ္တဘာဝေါ ပါဌော န ဟောတိ, ဒီဃဿ ရဿတ္တကရဏပါဌောတိ ဝေဒိတဗ္ဗော. ပဒမာလာ စဿ ဝုတ္တနယေန ဝေဒိတဗ္ဗာ. येथे केवळ दर्शवण्यासाठी (उदाहरणादाखल) काही प्रयोग सांगतो. 'ताता (मुला/वडिला), तीन श्रेष्ठ (सेठ्ठिनो) आमचे खूप उपकारकर्ते आहेत', आणि 'त्यांनी भोजन आटोपून आम्ही महाश्रेष्ठ (महासेठ्ठिनो) जाऊ असे म्हटले', आणि 'सारथी (सारथिनो) म्हणाले', आणि 'दोन चक्रवर्ती (चक्कवत्तिनो)' इत्यादी. त्यामध्ये जरी काही ठिकाणी 'सेठ्ठि, सारथि' इत्यादी र्हस्व पाठ दिसत असला, तरी तो स्वभावाने र्हस्व पाठ नाही, तर दीर्घाचा र्हस्व केलेला पाठ आहे असे समजावे. आणि याची शब्दरूपे (पदमाला) सांगितलेल्या नियमाप्रमाणे समजावी. မဟေသီတိ ဧတ္ထ ကထန္တိ? ‘‘မဟေသီ’’တိ ဧတ္ထ ကိဉ္စာပိ မဟေသီသဒ္ဒေါ ဤကာရန္တဝသေန နိဒ္ဒိသိယတိ, တထာပိ ဣသိသဒ္ဒေန သမာနဂတိကတ္တာ ဣသိသဒ္ဒဿ အဂ္ဂိသဒ္ဒေန သမာနပဒမာလတ္တာ အဂ္ဂိနယေန ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ. နနု စ ဘော ဧတ္ထ တဿီလတ္ထော ဒိဿတိ ‘‘မဟန္တေ သီလက္ခန္ဓာဒယော ဓမ္မေ ဧသနသီလောတိ မဟေသီ’’တိ, တသ္မာ ‘‘ဘူမိသာယီ’’တိ ပဒဿ ဝိယ ဒဏ္ဍီနယေနေဝ ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာတိ? န ကာတဗ္ဗာ တဿီလတ္ထဿ အသမ္ဘဝတော. ဣမဿ ဟိ ‘‘မဟန္တေ သီလက္ခန္ဓာဒယော ဓမ္မေ ဧသိ ဂဝေသိ ဧသိတွာ ဌိတောတိ မဟေသီ’’တိ အတဿီလတ္ထော ဧဝ ယုဇ္ဇတိ. ကတကရဏီယေသု ဗုဒ္ဓါဒီသု အရိယေသု ပဝတ္တနာမတ္တာ. ဣသိသဒ္ဒေန စာယံ သဒ္ဒေါ ဤသကံ သမာနော ကေဝလံ သမာသပရိယောသာနေ ဒီဃဝသေန ဥစ္စာရိယတိ, ရဿဝသေန ပန ‘‘မဟာ ဣသိ မဟေသီ’’တိ သန္ဓိဝိဂ္ဂဟော[Pg.259]. ယသ္မာ ရဿတ္တံ ဂဟေတွာ တဿ ပဒမာလာကရဏံ ယုဇ္ဇတိ, တသ္မာ ‘‘သင်္ဂါယိံသု မဟေသယော’’တိ ဣကာရန္တရူပံ ဒိဿတိ. န ဟိ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ ကတ္ထစိပိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌေကဝစနရူပံ ဝိယ ‘‘မဟေသိနော’’တိ ပစ္စတ္တောပယောဂါလပနဗဟုဝစနရူပံ ဒိဿတိ. တသ္မာ ဤကာရန္တဝသေန ဥစ္စာရိတဿပိ သတော ရဿဝသေန ဥစ္စာရိတဿ ဝိယ ‘‘မဟေသိ, မဟေသီ, မဟေသယော. မဟေသိံ, မဟေသီ, မဟေသယော. မဟေသိနာ’’တိ ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ. အပိစ မဟေသီသဒ္ဒေါ ယတ္ထ ရာဇဂ္ဂုဗ္ဗရိဝါစကော, တတ္ထ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ဟောတိ, တဗ္ဗသေန ပန ‘‘မဟေသီ, မဟေသီ, မဟေသိယော. မဟေသိံ, မဟေသီ, မဟေသိယော. မဟေသိယာ’’တိ စ ဝက္ခမာနဣတ္ထီနယေန ပဒမာလာ ကာတဗ္ဗာ. ဟတ္ထီသဒ္ဒေ ကထန္တိ? ဟတ္ထီသဒ္ဒဿ ပန ဟတ္ထော အဿ အတ္ထီတိ ဧဝံ ဤကာရန္တဝသေန ဂဟဏေ ‘‘ဟတ္ထိနော’’တိ ရူပံ ဘဝတိ. တထာ ဟိ ‘‘ဝနေ ဟတ္ထိနော’’တိ ပယောဂေါ ဒိဿတိ. တဿေဝ တသ္မိံယေဝတ္ထေ ရဿံ ကတွာ ဂဟဏေ ‘‘ဟတ္ထယော’’တိ ရူပံ ဘဝတိ. တထာ ဟိ – 'महेसी' (mahesī) या शब्दाच्या बाबतीत काय सांगावे? 'महेसी' येथे जरी 'महेसी' शब्द 'ई'कारान्त रूपाने दर्शवला जात असला, तरी 'इसि' (ऋषि) शब्दाशी समान गतीचा (समान रूपांचा) असल्यामुळे आणि 'इसि' शब्दाची शब्दरूपे 'अग्गि' शब्दाप्रमाणे चालत असल्यामुळे, 'अग्गि'च्या नियमाप्रमाणे (अग्गिनयेन) याची शब्दरूपे बनवावीत. पण अहो! येथे तच्छील (स्वभाव) अर्थ दिसतो – 'महान शीलस्कंध इत्यादी धर्मांचा शोध घेण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो महेसी', म्हणून 'भूमिसायी' शब्दाप्रमाणे 'दण्डी'च्या नियमानेच याची शब्दरूपे बनवली पाहिजेत ना? नाही, तशी बनवू नयेत, कारण येथे तच्छील अर्थ संभवत नाही. कारण या शब्दाचा 'महान शीलस्कंध इत्यादी धर्मांचा ज्याने शोध घेतला, जो शोधत राहिला आणि शोधून स्थित झाला तो महेसी' असा अतच्छील (स्वभावाव्यतिरिक्त) अर्थच योग्य ठरतो. कारण हा शब्द कृतकृत्य झालेल्या बुद्ध इत्यादी आर्यांसाठी वापरला जाणारा केवळ एक संज्ञावाचक शब्द आहे. 'इसि' शब्दाशी हा शब्द थोडा समान आहे, केवळ समासाच्या शेवटी दीर्घत्वामुळे तो उच्चारला जातो, परंतु र्हस्वत्वाच्या दृष्टीने 'महा इसि = महेसी' असा संधिविग्रह होतो. ज्याअर्थी र्हस्वत्व स्वीकारून त्याची शब्दरूपे बनवणे योग्य ठरते, त्याअर्थी 'सङ्गायिंसु महेसयो' (महान ऋषींनी संगायन केले) असे 'इ'कारान्त रूप दिसते. कारण अट्ठकथासहित तिपिटक बुद्धवचनात कुठेही चतुर्थी-षष्ठी एकवचनाच्या रूपाप्रमाणे 'महेसिनो' असे प्रथमा, द्वितीया, संबोधन बहुवचनाचे रूप दिसत नाही. म्हणून 'ई'कारान्त रूपाने उच्चारला जात असला तरी, र्हस्व रूपाने उच्चारल्याप्रमाणेच 'महेसि, महेसी, महेसयो। महेसिं, महेसी, महेसयो। महेसिना' अशी शब्दरूपे बनवावीत. शिवाय, 'महेसी' शब्द जेथे राजाच्या मुख्य राणीचा (पट्टराणीचा) वाचक असतो, तेथे तो स्त्रीलिंगी असतो; आणि त्यानुसार 'महेसी, महेसी, महेसियो। महेसिं, महेसी, महेसियो। महेसिया' अशी पुढे सांगण्यात येणाऱ्या स्त्रीलिंगी नियमाप्रमाणे शब्दरूपे बनवावीत. 'हत्थी' (हत्ती) शब्दाच्या बाबतीत काय सांगावे? 'हत्थी' शब्दाचा 'हात (सोंड) ज्याला आहे तो' अशा प्रकारे 'ई'कारान्त रूपाने स्वीकार केल्यास 'हत्थिनो' असे रूप होते. तसेच 'वने hत्थिनो' (वनात हत्ती) असा प्रयोग दिसतो. त्याच अर्थात त्याचा र्हस्व करून स्वीकार केल्यास 'हत्थयो' असे रूप होते. जसे की – ‘‘ဟံသာ ကောဉ္စာ မယူရာ စ, ဟတ္ထယော ပသဒါ မိဂါ; သဗ္ဗေ သီဟဿ ဘာယန္တိ, နတ္ထိ ကာယသ္မိ တုလျတာ. “हंस, क्रौंच, मयूर (मोर), हत्ती (हत्थयो), ठिपक्यांचे हरिण आणि इतर मृग; हे सर्व सिंहाला भ्यातात, कारण शरीराच्या आकारात समानता नसते.” ဧဝမေဝ မနုဿေသု, ဒဟရော စေပိ ပညဝါ; သောပိ တတ္ထ မဟာ ဟောတိ, နေဝ ဗာလော သရီရဝါ’’တိ “त्याचप्रमाणे मनुष्यांमध्ये, जरी कोणी लहान असला तरी जर तो प्रज्ञावान असेल, तर तोच तिथे महान ठरतो; केवळ शरीराने मोठा असलेला मूर्ख मनुष्य महान ठरत नाही.” ဣမသ္မိံ ကေဠိသီလဇာတကေ ‘‘ဟတ္ထယော’’တိ အာဟစ္စပဒံ ဒိဿတိ. ဧဝမဿ ဒဏ္ဍီနယေန စ အဂ္ဂိနယေန စ ဒွိဓာ ပဒမာလာ, ဝေဒိတဗ္ဗာ. ဣမိနာ နယေန အဝုတ္တေသုပိ ဌာနေသု ပါဠိနယာနုရူပေန [Pg.260] ပေါရာဏဋ္ဌကထာနုရူပေန စ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. या 'केळिसील जातका'मध्ये 'हत्थयो' हे स्पष्ट पद दिसते. अशा प्रकारे याची 'दण्डी'च्या नियमाने आणि 'अग्गि'च्या नियमाने अशी दोन प्रकारची शब्दरूपे (पदमाला) समजावीत. या नियमाने न सांगितलेल्या ठिकाणीही पाळि नियमाला अनुसरून आणि प्राचीन अट्ठकथेला अनुसरून शब्दरूपांची योजना करावी. ဧတ္တာဝတာ ဘူဓာတုမယာနံ ပုလ္လိင်္ဂါနံ နာမိကပဒမာလာ သဒ္ဓိံ လိင်္ဂန္တရေဟိ သဒ္ဒန္တရေဟိ အတ္ထန္တရေဟိ စ နာနပ္ပကာရတော ဒဿိတာ. एवढ्या विवेचनाने 'भू' धातूपासून बनलेल्या पुल्लिंगी शब्दांची नाम-विभक्ती रूपे (नामिक पदमाला) इतर लिंगांसह, इतर शब्दांसह आणि इतर अर्थांसह विविध प्रकारे दर्शवली गेली आहेत. ဣမံ သဒ္ဒနီတိံ သုနီတိံ ဝိစိတ္တံ,သပညေဟိ သမ္မာ ပရီပါလနီယံ; သဒါ သုဋ္ဌု စိန္တေတိ ဝါစေတိ ယော သော,နရော ဉာဏဝိတ္ထိန္နတံ ယာတိ သေဋ္ဌံ. या विविधतेने नटलेल्या आणि उत्तम नीती असलेल्या 'सद्द्नीति' ग्रंथाचे प्रज्ञावंतांनी चांगल्या प्रकारे जतन केले पाहिजे. जो मनुष्य नेहमी याचे चांगल्या प्रकारे चिंतन करतो आणि अध्यापन करतो, तो श्रेष्ठ अशा ज्ञानविस्ताराला प्राप्त होतो. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथासहित नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ कौशल्यासाठी (नैपुण्यासाठी) रचलेल्या 'सद्द्नीति' प्रकरणामध्ये... သဝိနိစ္ဆယော နိဂ္ဂဟီတန္တာဒိပုလ္လိင်္ဂါနံ निग्गहीत-अन्त (अनुस्वारान्त) इत्यादी पुल्लिंगी शब्दांच्या निर्णयांसह... ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ मूळ रूपाचा (प्रकृतिरूपाचा) नाम-विभक्ती रूपांचा विभाग... သတ္တမော ပရိစ္ဆေဒေါ. सातवा परिच्छेद समाप्त. သဗ္ဗထာပိ ပုလ္လိင်္ဂံ သမတ္တံ. सर्व प्रकारे पुल्लिंग समाप्त झाले. ၈. ဣတ္ထိလိင်္ဂနာမိကပဒမာလာ ८. स्त्रीलिंगी नाम-विभक्ती रूपे (स्त्रीलिंगी नामिक पदमाला). အထ ဣတ္ထိလိင်္ဂေသု အာကာရန္တဿ ဘူဓာတုမယဿ ပကတိရူပဘူတဿ ဘာဝိကာသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာယံ ဝတ္တဗ္ဗာယမ္ပိ ပသိဒ္ဓဿ တာဝ ကညာသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလံ ဝက္ခာမ – आता स्त्रीलिंगी शब्दांमध्ये, 'भू' धातूपासून बनलेल्या आणि मूळ रूप असलेल्या 'भाविका' शब्दाची नाम-विभक्ती रूपे सांगायची असली, तरी आधी प्रसिद्ध असलेल्या 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाची नाम-विभक्ती रूपे सांगतो – ကညာ, ကညာ, ကညာယော. ကညံ, ကညာ, ကညာယော. ကညာယ, ကညာဟိ, ကညာဘိ. ကညာယ, ကညာနံ. ကညာယ, ကညာဟိ, ကညာဘိ. ကညာယ, ကညာနံ. ကညာယ, ကညာယံ, ကညာသု. ဘောတိ ကညေ, ဘောတိယော ကညာ, ကညာယော. အယမမှာကံ ရုစိ. कञ्ञा, कञ्ञा, कञ्ञायो (प्रथमा)। कञ्ञं, कञ्ञा, कञ्ञायो (द्वितीया)। कञ्ञाय, कञ्ञाहि, कञ्ञाभि (तृतीया)। कञ्ञाय, कञ्ञानं (चतुर्थी)। कञ्ञाय, कञ्ञाहि, कञ्ञाभि (पंचमी)। कञ्ञाय, कञ्ञानं (षष्ठी)। कञ्ञाय, कञ्ञायं, कञ्ञासु (सप्तमी)। भोति कञ्ञे, भोतियो कञ्ञा, कञ्ञायो (संबोधन)। हे आमचे मत (रुची) आहे. ဧတ္ထ [Pg.261] ‘‘ကညာ’’တိ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဝုတ္တံ, နိရုတ္တိပိဋကေ ဗဟုဝစနဝသေန ဝုတ္တော နယော နတ္ထိ. တထာ ဟိ တတ္ထ ‘‘သဒ္ဓါ တိဋ္ဌတိ, သဒ္ဓါယော တိဋ္ဌန္တိ. သဒ္ဓံ ပဿတိ, သဒ္ဓါယော ပဿတီ’’တိ ဧတ္တကမေဝ ဝုတ္တံ, ‘‘သဒ္ဓါ’’တိ ဗဟုဝစနံ န အာဂတံ. ကိဉ္စာပိ နာဂတံ, တထာပိ ‘‘ဗာဟာ ပဂ္ဂယှ ပက္ကန္ဒုံ, သိဝိကညာ သမာဂတာ. အဟေတု အပ္ပစ္စယာ ပုရိသဿ သညာ ဥပ္ပဇ္ဇန္တိပိ နိရုဇ္ဈန္တိပီ’’တိအာဒိပါဠိဒဿနတော ဗာဟာကညာ သညာသဒ္ဒါဒီနံ ဗဟုဝစနတာ ဂဟေတဗ္ဗာ. စူဠနိရုတ္တိယံ ‘‘ဘောတိ ကညေ, ဘောတိ ကညာ’’တိ ဒွေ ဧကဝစနာနိ ဝတွာ ‘‘ဘောတိယော ကညာယော’’တိ ဧကံ ဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ. နိရုတ္တိပိဋကေ ပန ‘‘ဘောတိ သဒ္ဓါ’’တိ ဧကဝစနံ ဝတွာ ‘‘ဘောတိယော သဒ္ဓါယော’’တိ ဧကံ ဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ. မယံ ပနေတ္ထ ‘‘ဧဟိ ဗာလေ ခမာပေဟိ, ကုသရာဇံ မဟဗ္ဗလံ. ဖုဿတီ ဝရဝဏ္ဏာဘေ. ဧဟိ ဂေါဓေ နိဝတ္တဿူ’’တိအာဒိပါဠိဒဿနတော ‘‘ဘောတိ ကညေ, ဘောတိယော ကညာ, ကညာယော’’တိ ဧဝံပကာရာနိယေဝ အာလပနေကဝစနဗဟုဝစနာနိ ဣစ္ဆာမ. ဧတ္ထ ‘‘ဘောတိ ကညေ’’တိ အယံ နယော အမ္မာဒီသု မာတာဒီသု စ န လဗ္ဘတိ. येथे “कञ्ञा” (कन्या) हा शब्द एकवचन आणि बहुवचनाच्या अर्थाने वापरला आहे, निरुत्तिपिटकात बहुवचनाच्या अर्थाने वापरलेला नियम आढळत नाही. तसेच तेथे “सद्धा तिट्ठति, सद्धायो तिट्ठन्ति (श्रद्धा राहते, श्रद्धा राहतात). सद्धं पस्सति, सद्धायो पस्सति (श्रद्धेला पाहतो, श्रद्धांना पाहतो)” एवढेच म्हटले आहे, “सद्धा” हे बहुवचन आलेले नाही. जरी ते आलेले नसले, तरी “बाहा पग्गय्ह पक्कन्दुं, सिविकञ्ञा समागता (बाहू पसरून रडू लागले, शिविका-कन्या एकत्र आल्या). अहेतु अप्पच्चया पुरिसस्स सञ्ञा उप्पज्जन्तिपि निरुज्झन्तिपि (हेतूशिवाय आणि प्रत्ययाशिवाय माणसाच्या संज्ञा उत्पन्नही होतात आणि निरुद्धही होतात)” इत्यादी पाळी पाठांवरून 'बाहा', 'कञ्ञा', 'सञ्ञा' इत्यादी शब्दांचे बहुवचनत्व ग्रहण केले पाहिजे. चूळनिरुत्तीमध्ये “भोति कञ्ञे, भोति कञ्ञा” अशी दोन एकवचने सांगून “भोतियो कञ्ञायो” असे एक बहुवचन सांगितले आहे. परंतु निरुत्तिपिटकात “भोति सद्धा” असे एकवचन सांगून “भोतियो सद्धायो” असे एक बहुवचन सांगितले आहे. आम्ही मात्र येथे “एहि बाले खमापेहि, कुसराजं महब्बलं (ये बाले, महाबली कुसराजाची क्षमा माग). फुस्सती वरवण्णाभे (उत्कृष्ट वर्णाच्या फुस्सती). एहि गोधे निवत्तस्सु (ये घोरपडी, परत फिर)” इत्यादी पाळी पाठांवरून “भोति कञ्ञे, भोतियो कञ्ञा, कञ्ञायो” अशाच प्रकारची संबोधनाची एकवचने आणि बहुवचने इच्छितो. येथे “भोति कञ्ञे” हा नियम 'अम्मा' इत्यादी आणि 'माता' इत्यादी शब्दांच्या बाबतीत मिळत नाही. ဘာဝိကာ, ဘာဝိကာ, ဘာဝိကာယော. ဘာဝိကံ, ဘာဝိကာ, ဘာဝိကာယော. ဘာဝိကာယ, ဘာဝိကာဟိ, ဘာဝိကာဘိ. ဘာဝိကာယ, ဘာဝိကာနံ. ဘာဝိကာယ, ဘာဝိကာဟိ, ဘာဝိကာဘိ. ဘာဝိကာယ, ဘာဝိကာနံ. ဘာဝိကာယ, ဘာဝိကာယံ, ဘာဝိကာသု. ဘောတိ ဘာဝိကေ, ဘောတိယော ဘာဝိကာ, ဘာဝိကာယော. भाविका, भाविका, भाविकायो। भाविकं, भाविका, भाविकायो। भाविकाय, भाविकाहि, भाविकाभि। भाविकाय, भाविकानं। भाविकाय, भाविकाहि, भाविकाभि। भाविकाय, भाविकानं। भाविकाय, भाविकायं, भाविकासु। भोति भाविके, भोतियो भाविका, भाविकायो। ဧဝံ ဟေဋ္ဌုဒ္ဒိဋ္ဌာနံ သဗ္ဗေသံ ဘူဓာတုမယာနံ ‘‘ဘာဝနာ ဝိဘာဝနာ’’ဣစ္စေဝမာဒီနံအာကာရန္တပဒါနံ အညေသဉ္စာကာရန္တပဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထညာနိ အာကာရန္တပဒါနိ နာမ သဒ္ဓါဒီနိ. अशा प्रकारे वर उल्लेखिलेल्या 'भू' धातूपासून बनलेल्या “भावना, विभावना” इत्यादी सर्व आकारान्त पदांची आणि इतर आकारान्त पदांची नामरूपे (विभक्ती रूपे) जोडली पाहिजेत. येथे इतर आकारान्त पदे म्हणजे 'सद्धा' (श्रद्धा) इत्यादी होत. သဒ္ဓါ [Pg.262] မေဓာ ပညာ ဝိဇ္ဇာ, စိန္တာ မန္တာ တဏှာ’ဘိဇ္ဈာ; ဣစ္ဆာ ပုစ္ဆာ ဇာယာ မာယာ, မေတ္တာ မတ္တာ သိက္ခာ သင်္ခါ. सद्धा (श्रद्धा), मेधा, पञ्ञा (प्रज्ञा), विज्जा (विद्या), चिन्ता, मन्ता (मंत्रणा), तण्हा (तृष्णा), अभिज्झा (अभिध्या); इच्छा, पुच्छा (प्रश्न), जाया (पत्नी), माया, मेत्ता (मैत्री), मत्ता (मात्रा), सिक्खा (शिक्षा), सङ्खा (संख्या). ဇင်္ဃာ ဗာဟာ ဂီဝါ ဇိဝှာ, ဝါစာ ဆာယာ ဂင်္ဂါ နာဝါ; နိဒ္ဒါ ကန္တာ သာလာ မာလာ, ဝေလာ ဝီဏာ ဘိက္ခာ လာခါ. जङ्घा (जंघा/पाय), बाहा (बाहू), गीवा (मान), जिव्हा (जीभ), वाचा, छाया, गङ्गा, नावा (नाव); निद्दा (निद्रा), कन्ता (कांता), साला (शाळा/गृह), माला (माळ), वेला (वेळ), वीणा, भिक्खा (भिक्षा), लाखा (लाख). ဂါထာ သေနာ လေခါ’ပေက္ခာ, အာသာ ပူဇာ ဧသာ ကင်္ခါ; အညာ မုဒ္ဒါ ခိဍ္ဍာ ဘဿာ, ဘာသာ ကီဠာ သတ္တာ စေတာ. गाथा, सेना, लेखा, अपेक्खा (अपेक्षा); आसा (आशा), पूजा, एसा (एषणा), कङ्खा (शंका); अञ्ञा (आज्ञा/ज्ञान), मुद्धा (मुद्रा), खिड्ढा (क्रीडा), bhassā (भाष्य); भासा (भाषा), कीळा (क्रीडा), सत्ता, चेता (चेतना). ပိပါသာ ဝေဒနာ သညာ, စေတနာ တသိဏာ ပဇာ; ဒေဝတာ ဝဋ္ဋကာ ဂေါဓာ, ဗလာကာ ဝသုဓာ သဘာ. पिपासा (तहान), वेदना, सञ्ञा (संज्ञा), चेतना, तसिणा (तृष्णा), पजा (प्रजा); देवता, वट्टका (लावा पक्षी), गोधा (घोरपड), बलाका (बगळा), वसुधा, सभा. ဥက္ကာ သေဖာလိကာ သိက္ကာ, သလာကာ ဝါလိကာ သိခါ; ကာရဏာ ဝိသိခါ သာခါ, ဝစာ ဝဉ္ဈာ ဇဋာ ဃဋာ. उक्का (उल्का/मशाल), सेफालिका (पारिजातक), सिक्का (शिंकें), सलाका (सळई), वालिका (वाळू), सिखा (शिखा/शेंडा); कारणा (कारण), विसिखा (गल्ली), साखा (शाखा), वचा (वेखंड), वञ्झा (वांझ), जटा, घटा (घट/समूह). ပီဠာ သောဏ္ဍာ ဝိတဏ္ဍာ စ, ကရုဏာ ဝနိတာ လတာ; ကထာ နိန္ဒာ သုဓာ ရာဓာ, ဝါသနာ သိံသပါ ပပါ. पीडा, सोण्डा (सोंड), वितण्डा (वितंडवाद) आणि, करुणा, वनिता, लता; कथा, निन्दा, सुधा, राधा (विशाखा नक्षत्र), वासना, सिंसपा (शिसवीचे झाड), पपा (पाणपोई). ပဘာ သီမာ ခမာ ဧဇာ,ခတ္တိယာ သက္ခရာ သုရာ; ဒေါလာ တုလာ သိလာ လီလာ,လာလေ’ဠာ မေခလာ ကလာ. पभा (प्रभा), सीमा, khamā (क्षमा), एजा (कंप/तृष्णा); खत्तिया (क्षत्रिय स्त्री), सक्खरा (साखर), सुरा (मद्य); दोला (झोपाळा), तुला, सिला (शिला/दगड), लीला; लाला (लाळ), एळा (वेलची), मेखला, कला. ဝဠဝါ သုဏိသာ မူသာ, မဉ္ဇူသာ သုလသာ ဒိသာ; နာသာ ဇုဏှာ ဂုဟာ ဤဟာ, လသိကာ ပရိသာ နိသာ; မာတိကိစ္စာဒယော စေဝ, ဘာဝိကာပဒသာဒိသာ. वळवा (घोडी), सुणिसा (सून), मूसा (साचा), मञ्जूसा (पेटी), सुलसा, दिसा (दिशा); नासा (नाक), जुण्हा (चांदणे), गुहा, ईहा (इच्छा), लसिका (लसीका), परिसा (परिषद), निसा (रात्र); मातकिच्च (मातृकृत्य) इत्यादी शब्द देखील 'भाविका' शब्दासारखेच चालतात. အမ္မန္နမ္ဗာ စ တာတာ စ, ကိဉ္စိဒေဝ သမာ သိယုံ; မာတာ ဓီတာ ပနတ္တာဒီ, ပုထဂေဝ ဣတော သိယုံ. 'अम्मा', 'अम्बा' आणि 'ताता' (आईच्या अर्थाने) हे शब्द काही प्रमाणात समान असू शकतात; परंतु 'माता', 'धीता' (कन्या), 'पणत्ता' (पणती) इत्यादी शब्द यापेक्षा वेगळेच चालतात. ပရိသာသဒ္ဒဿ ပန သတ္တမီဌာနေ ‘‘ပရိသာယ, ပရိသာယံ, ပရိသတိ, ပရိသာသူ’’တိ ယောဇေတဗ္ဗံ ‘‘ဧကမိဒံ ဘော ဂေါတမ သမယံ တောဒေယျဿ ဗြာဟ္မဏဿ ပရိသတိ ပရူပါရမ္ဘံ ဝတ္တေန္တီ’’တိ ပါဠိဒဿနတော. အမ္မာဒီနံ ပန ‘‘အမ္မာ, အမ္မာ, အမ္မာယော’’တိအာဒိနာ [Pg.263] ကညာနယေန ဝတွာ အဝသာနေ ‘‘ဘောတိ အမ္မ, ဘောတိ အမ္မာ, ဘောတိယော အမ္မာ, အမ္မာယော’’တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗံ. परंतु 'परिसा' (परिषद) शब्दाच्या सप्तमी विभक्तीच्या ठिकाणी “परिकाय, परिसायं, परिसति, परिसासू” असे रूप जोडले पाहिजे, कारण “एकमिदं भो गोतम समयं तोदेय्यस्स ब्राह्मणस्स परिसति परूपारम्भं वत्तेन्ती (हे गौतम, एका वेळी तोदेय्य ब्राह्मणाच्या परिषदेत दुसऱ्यांवर दोषारोप करत असताना)” असा पाळी पाठ आढळतो. 'अम्मा' इत्यादी शब्दांचे रूप “अम्मा, अम्मा, अम्मायो” इत्यादी प्रकारे 'कञ्ञा' शब्दाप्रमाणे चालवून शेवटी “भोति अम्म, भोति अम्मा, भोतियो अम्मा, अम्मायो” इत्यादी प्रकारे जोडले पाहिजे. မာတာ, မာတာ, မာတရော. မာတရံ, မာတရော. မာတရာ, မာတုယာ, မတျာ, မာတူဟိ, မာတူဘိ. မာတု, မာတုယာ, မတျာ, မာတရာနံ, မာတာနံ, မာတူနံ. မာတရာ, မာတုယာ, မတျာ, မာတူဟိ, မာတူဘိ. မာတု, မာတုယာ, မတျာ, မာတရာနံ, မာတာနံ, မာတူနံ. မာတရိ, မာတုယာ, မတျာ, မာတုယံ, မတျံ, မာတူသု. ဘောတိ မာတာ, ဘောတိယော မာတာ, မာတရော. माता, माता, मातरो। मातरं, मातरो। मातरा, मातुया, मत्या, मातूहि, मातूभि। मातु, मातुया, मत्या, मातराणं, मातानं, मातूनं। मातरा, मातुया, मत्या, मातूहि, मातूभि। मातु, मातुया, मत्या, मातराणं, मातानं, मातूनं। मातरी, मातुया, मत्या, मातुयं, मत्यं, मातूसु। भोति माता, भोतियो माता, मातरो। ဧတ္ထ ပန ယသ္မာ ပါဠိယံ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနံ သကာရန္တာနိ ရူပါနိ ဧဟိ ဧဘိ ဧသုကာရန္တာဒီနိ စ ဧနန္တာဒီနိ စ န ဒိဿန္တိ, တသ္မာ ကေဟိစိ ဝုတ္တာနိပိ ‘‘မာတုဿ မာတရေဟီ’’တိအာဒီနိ န ဝုတ္တာနိ, ဧသ နယော ဣတရေသုပိ. ‘‘ယံကိဉ္စိတ္ထိကတံ ပုညံ, မယှဉ္စ မာတုယာ စ တေ. အနုညာတော အဟံ မတျာ’’တိ ပါဠိဒဿနတော ပန ကရဏသမ္ပဒါနနိဿက္ကသာမိဘုမ္မဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘မာတုယာ, မတျာ’’တိ စ ဝုတ္တံ ဣတ္ထိလိင်္ဂဋ္ဌာနေ သမာနဂတိကတ္တာ တေသံ ဝစနာနံ. တထာ ဟိ ဥမ္မာဒန္တိဇာတကေ ‘‘မတျာ’’တိ ပဒံ ပဉ္စမီတတိယေကဝစနဝသေန အာဂတံ, ယထာ ပန ‘‘ခတ္တိယာ’’တိ ပဒံ မဇ္ဈသရလောပဝသေန ‘‘ခတျာ’’တိ ဘဝတိ, တထာ ‘‘မာတုယာ မာတုယ’’န္တိ စ ပဒံ ‘‘မတျာ, မတျ’’န္တိ ဘဝတိ, အယံ နယော ဓီတုသဒ္ဒါဒီသု န လဗ္ဘတိ. येथे मात्र, ज्याअर्थी पाळीमध्ये स्त्रीलिंगी शब्दांची 'स' कारान्त रूपे, 'एहि', 'एभि', 'एसु' कारान्त इत्यादी आणि 'एन' अन्त इत्यादी रूपे दिसत नाहीत, त्याअर्थी काहींनी सांगितलेली “मातुस्स, मातरेहि” इत्यादी रूपे येथे सांगितलेली नाहीत; हाच नियम इतरांच्या बाबतीतही लागू होतो. परंतु “यंकिञ्चित्थिकतं पुञ्ञं, मय्हञ्च मातुया च ते. अनुञ्ञातो अहं मत्या (जे काही स्त्रियांनी केलेले पुण्य आहे, ते माझे आणि तुझ्या मातेचे असो. मी मातेकडून अनुज्ञा मिळालेला आहे)” या पाळी पाठावरून तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी आणि सप्तमी विभक्तीच्या ठिकाणी “मातुया” आणि “मत्या” असे म्हटले आहे, कारण स्त्रीलिंगी स्थानी त्या वचनांची गती समान असते. तसेच उम्मादन्ती जातकामध्ये “मत्या” हे पद पंचमी आणि तृतीया एकवचनाच्या अर्थाने आले आहे. ज्याप्रमाणे “खत्तिया” हे पद मध्यस्वराचा लोप होऊन “खत्या” असे होते, त्याचप्रमाणे “मातुया, मातुयं” हे पद “मत्या, मत्यं” असे होते. हा नियम 'धीतु' (कन्या) इत्यादी शब्दांच्या बाबतीत मिळत नाही. ဓီတာ, ဓီတာ, ဓီတရော. ဓီတံ, ဓီတရံ, ဓီတရော. ဓီတုယာ, ဓီတူဟိ, ဓီတူဘိ. ဓီတု, ဓီတုယာ, ဓီတရာနံ, ဓီတာနံ, ဓီတူနံ. ဓီတရာ, ဓီတုယာ, ဓီတူဟိ, ဓီတူဘိ. ဓီတု, ဓီတုယာ, ဓီတရာနံ, ဓီတာနံ, ဓီတူနံ. ဓီတရိ, ဓီတုယာ, ဓီတုယံ, ဓီတူသု. ဘောတိ ဓီတု, ဘောတိ ဓီတာ, ဘောတိယော ဓီတာ, ဓီတရော. ဧတ္ထ ပန. धीता, धीता, धीतरो। धीतं, धीतरं, धीतरो। धीतुया, धीतूहि, धीतूभि। धीतु, धीतुया, धीतराणं, धीतानं, धीतूनं। धीतरा, धीतुया, धीतूहि, धीतूभि। धीतु, धीतुया, धीतराणं, धीतानं, धीतूनं। धीतरी, धीतुया, धीतुयं, धीतूसु। भोति धीतु, भोति धीता, भोतियो धीता, धीतरो। येथे मात्र. ‘‘ဇာလိံ [Pg.264] ကဏှာဇိနံ ဓီတံ, မဒ္ဒိဒေဝိံ ပတိဗ္ဗတံ; စဇမာနော န စိန္တေသိံ, ဗောဓိယာယေဝ ကာရဏာ’’တိ “जाली, कण्हाजिना ही कन्या (धीता) आणि पतिव्रता मद्दीदेवी यांचा त्याग करताना मी केवळ बोधीच्याच कारणासाठी (दुसऱ्या कशाचाही) विचार केला नाही.” ပါဠိယံ ‘‘ဓီတ’’န္တိ ဒဿနတော ဥပယောဂဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဓီတ’’န္တိ ဝုတ္တံ, တသ္မာ ဣဒံ သာရတော ဂဟေတဗ္ဗံ, တထာ ပါဠိယံ ‘‘အဿမဏီ ဟောတိ အသကျဓီတရာ’’တိ သမာသပဒဿ ဒဿနတော တတိယေကဝစနန္တပဒသဒိသံ ‘‘သေဋ္ဌိဓီတရာ’’တိအာဒိကံ ပဌမေကဝစနန္တမ္ပိ သမာသပဒံ ဂဟေတဗ္ဗမေဝ, နိရုတ္တိပိဋကေ ပန ‘‘မာတာ ဓီတာ’’တိ ပဒဒွယံ သဒ္ဓါနယေ ပက္ခိတ္တ, တမမှေဟိ ‘‘သဒ္ဓါယာ’’တိ ပဒဿ ဝိယ ‘‘မာတာယာ’’တိအာဒီနံ ပါဠိအာဒီသု ဗျာသေ အဒဿနတော ဝိသုံ ဂဟိတံ သမာသေယေဝ ဟိ ဤဒိသိံ သဒ္ဒဂတိံ ပဿာမ ‘‘ရာဇမာတာယ ရာဇဓီတာယ သေဋ္ဌိဓီတာယာ’’တိ. ဧဝံ ကညာနယောပိ ဧကဒေသေန လဗ္ဘတိ, တထာ ‘‘အစ္ဆရိယံ နန္ဒမာတေ, အဗ္ဘုတံ နန္ဒမာတေ’’တိ ပါဠိယံ ‘‘နန္ဒမာတေ’’တိ ဒဿနတော ‘‘ဘောတိ ရာဇမာတေ, ဘောတိ ရာဇဓီတေ’’တိ ဧဝမာဒိနယောပိ လဗ္ဘတိ, တတြ နန္ဒမာတေတိ နန္ဒဿ မာတာ နန္ဒမာတာ, ဘောတိ နန္ဒမာတေ, ဧဝံ သမာသေယေဝ ဤဒိသီ သဒ္ဒဂတိ ဟောတိ, တသ္မာ သမာသပဒတ္တေ ‘‘မာတု ဓီတု ဒုဟိတု’’ဣစ္စေတေသံ ပကတိရူပါနံ ဒွေ ကောဋ္ဌာသာ ဂဟေတဗ္ဗာ ပဌမံ ဒဿိတရူပကောဋ္ဌာသော စ ကညာနယော ရူပကောဋ္ဌာသော စာတိ. နတ္တာဒီနိ ပဒါနိ န ကေဝလံ ပုလ္လိင်္ဂါနိယေဝ ဟောန္တိ, အထ ခေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိပိ. တထာ ဟိ ‘‘ဝိသာခါယ နတ္တာ ကာလင်္ကတာ ဟောတိ. စတဿော မူသိကာ ဂါဓံ ကတ္တာ, နော ဝသိတာ’’တိအာဒီနိ ပယောဂါနိ သာသနေ ဒိဿန္တိ. पाळीमध्ये 'धीत' (dhīta) असे दिसल्यामुळे, द्वितीया विभक्तीच्या (उपयोगवचन) स्थानी 'धीत' असे म्हटले आहे, म्हणून हे महत्त्वाचे (सारभूत) मानले पाहिजे. तसेच पाळीमध्ये 'असमणी होति असक्यधीतरा' (ती श्रमणी नसलेली, शाक्यपुत्री नसलेली होते) या समासाचे दर्शन होत असल्यामुळे, तृतीया एकवचनान्त पदासारखे 'सेट्ठिधीतरा' (श्रेष्ठिपुत्री) इत्यादी प्रथमा एकवचनान्त समासपद सुद्धा ग्रहण केलेच पाहिजे. परंतु निरुत्तिपिटकात 'माता धीता' हे दोन शब्द 'सद्धा' (श्रद्धा) च्या नियमात समाविष्ट केले आहेत. आमच्याद्वारे 'सद्धाय' या शब्दाप्रमाणे 'माताय' इत्यादी रूपांचे पाळी इत्यादींमध्ये विस्ताराने दर्शन न झाल्यामुळे, ते स्वतंत्रपणे घेतले आहे. कारण समासातच आपण अशा प्रकारची शब्दांची गती (रूपे) पाहतो, जसे की 'राजमाताय, राजधीताय, सेट्ठिधीताय'. अशा प्रकारे 'कन्या' प्रमाणे चालणारा नियम (कञ्ञानय) देखील एका अंशाने प्राप्त होतो. तसेच पाळीमध्ये 'अच्छरियं नन्दमाते, अब्भुतं नन्दमाते' असे दिसल्यामुळे, 'भोति राजमाते, भोति राजधीते' इत्यादी प्रकारचा नियम देखील प्राप्त होतो. तेथे 'नंदमाता' म्हणजे नंदाची माता ती नंदमाता. 'भोति नंदमाते', अशा प्रकारे समासातच अशी शब्दांची गती होते. म्हणून समासपद असताना 'मातु, धीतु, दुहितु' या मूळ रूपांचे (प्रकृतिरूपांचे) दोन भाग ग्रहण केले पाहिजेत - पहिला दर्शविलेला रूपांचा भाग आणि दुसरा 'कन्या' प्रमाणे चालणारा रूपांचा भाग. 'नत्ता' (नातू/नात) इत्यादी शब्द केवळ पुल्लिंगीच नसतात, तर स्त्रीलिंगी देखील असतात. तसेच 'विशाखाय nत्ता कालङ्कता होति' (विशाखेची नात मरण पावली आहे), 'चतस्सो मूसिका गाधं कत्ता, नो वसिता' (चार उंदरींनी खोल खड्डा केला आहे, पण त्या तेथे राहिल्या नाहीत) इत्यादी प्रयोग शासनात दिसतात. နတ္တာ, နတ္တာ, နတ္တာရော. နတ္တံ, နတ္တာရံ, နတ္တာရော. နတ္တာရာ, နတ္တုယာ, နတ္တူဟိ, နတ္တူဘိ. နတ္တု, နတ္တုယာ, နတ္တာရာနံ [Pg.265] နတ္တာနံ, နတ္တူနံ. နတ္တာရာ, နတ္တုယာ, နတ္တူဟိ, နတ္တူဘိ. နတ္တု, နတ္တုယာ, နတ္တာရာနံ, နတ္တာနံ, နတ္တူနံ. နတ္တရိ, နတ္တုယာ, နတ္တုယံ, နတ္တူသု. ဘောတိ နတ္တ, ဘောတိ နတ္တာ, ဘောတိယော နတ္တာ, နတ္တာရော. नत्ता, नत्ता, नत्तारो। नत्तं, नत्तारं, नत्तारो। नत्तारा, नत्तुया, नत्तूहि, नत्तूभि। नत्तु, नत्तुया, नत्तारानं, नत्तानं, नत्तूनं। नत्तारा, नत्तुया, नत्तूहि, नत्तूभि। नत्तु, नत्तुया, नत्तारानं, नत्तानं, नत्तूनं। नत्तरि, नत्तुया, नत्तुयं, नत्तूसु। भोति नत्त, भोति नत्ता, भोतियो नत्ता, नत्तारो। ဧဝံ ‘‘ကတ္တာ ဝသိတာ ဘာသိတာ’’ ဣစ္စာဒီသုပိ သမာသပဒတ္တေ ပန ‘‘ရာဇမာတာယ နန္ဒမာတေ’’တိအာဒီနိ ဝိယ ‘‘ရာဇနတ္တာယ, ရာဇနတ္တေ’’တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. अशा प्रकारे 'कत्ता, वसिता, भासिता' इत्यादी शब्दांमध्ये देखील समासपद असताना 'राजमाताय, नंदमाते' इत्यादींप्रमाणे 'राजनत्ताय, राजनत्ते' इत्यादी रूपे होतात. သဝိနိစ္ဆယောယံ အာကာရန္တုကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा आकारांत आणि उकारांत स्त्रीलिंगी शब्दांच्या मूळ रूपांचा (प्रकृतिरूपांचा) सविस्तर निर्णय असलेला नामविभक्तीच्या रूपांचा विभाग (नामिकपदमलाविभाग) आहे. အာကာရန္တုကာရန္တတာပကတိကံ आकारांत आणि उकारांत मूळ रूप असलेले. အာကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. आकारांत स्त्रीलिंगी रूप समाप्त झाले. ဣဒါနိ ဘူမိပဒါဒီနံ နာမိကပဒမာလံ ဝက္ခာမ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ – आता आपण पूर्वाचार्यांचे मत अग्रभागी ठेवून 'भूमी' इत्यादी शब्दांची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगू – ရတ္တိ, ရတ္တီ, ရတ္တိယော. ရတ္တိံ, ရတ္တီ, ရတ္တိယော. ရတ္တိယာ, ရတ္တီဟိ, ရတ္တီဘိ. ရတ္တိယာ, ရတ္တီနံ. ရတ္တိယာ, ရတ္တီဟိ, ရတ္တီဘိ. ရတ္တိယာ, ရတ္တီနံ. ရတ္တိယာ, ရတ္တိယံ, ရတ္တီသု. ဘောတိ ရတ္တိ, ဘောတိယော ရတ္တိယော. ယမကမဟာထေရမတံ. रत्ति, रत्ती, रत्तियो। रत्तिं, रत्ती, रत्तियो। रत्तिया, रत्तीहि, रत्तीभि। रत्तिया, रत्तीनं। रत्तिया, रत्तीहि, रत्तीभि। रत्तिया, रत्तीनं। रत्तिया, रत्तियं, रत्तीसु। भोति रत्ति, भोतियो रत्तियो। यमकमहाथेरांचे मत. ‘‘ဘူမိ, ဘူမီ, ဘူမိယော. ဘူမိံ, ဘူမီ, ဘူမိယော’’တိ သဗ္ဗံ နေယျံ. ဧဝံ ‘‘ဘူတိ သတ္တိ ပတ္တိ ဝုတ္တိ မုတ္တိ ကိတ္တိ ခန္တိ တိတ္တိ သိဒ္ဓိ ဣဒ္ဓိ ဝုဒ္ဓိ သုဒ္ဓိ ဗုဒ္ဓိ ဗောဓိ ပီတိ နန္ဒိ မတိ အသနိ ဝသနိ သတိ ဂတိ ဝုဍ္ဎိ ယုဝတိ အင်္ဂုလိ ဗောန္ဒိ ဒိဋ္ဌိ တုဋ္ဌိ နာဘိ’’ ဣစ္စာဒီနမ္ပိ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. အပိစ ‘‘ရတျော အမောဃာ ဂစ္ဆန္တိ. ဒိဝါ စ ရတ္တော စ ဟရန္တိ ယေ ဗလိံ. န ဘူမျာ စတုရင်္ဂုလော. သေတိ ဘူမျာ အနုတ္ထုနံ. ဘူမျာ သော ပတိတံ ပါသံ. ဂီဝါယ ပဋိမုဉ္စတိ. ဣမာ စ နဘျော သတရာဇိစိတ္တိတာ. သတေရတာ ဝိဇ္ဇုရိဝပ္ပဘာသရေ’’တိ ဧဝမာဒီနံ [Pg.266] ပယောဂါနံ ဒဿနတော ရတ္တိ ဘူမိ နာဘိသဒ္ဒါဒီနံ အယမ္ပိ နာမိကပဒမာလာဝိသေသော ဝေဒိတဗ္ဗော. ကထံ? ‘भूमी, भूमी, भूमियो। भूमिं, भूमी, भूमियो’ याप्रमाणे सर्व जाणावे. अशा प्रकारे ‘भूती, सत्ती, पत्ती, वुत्ती, मुत्ती, कित्ती, खन्ती, तित्ती, सिद्धी, इद्धी, वुद्धी, सुद्धी, बुद्धी, बोधी, पीती, नन्दी, मती, असनी, वसनी, सती, गती, वुड्ढी, युवती, अङ्गुली, बोन्दी, दिट्ठी, तुट्ठी, नाभी’ इत्यादी शब्दांची देखील नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) योजावीत. शिवाय, 'रत्यो अमोघा गच्छन्ति। दिवा च रत्तो च हरन्ति ये बलिं। न भूम्या चतुरङ्गुलो। सेति भूम्या अनुत्थुनं। भूम्या सो पतितं पासं। गीवाय पटिमुञ्चति। इमा च नभ्यो सतराजिचित्तिता। सतेरता विज्जुरिवप्पभासरे' इत्यादी प्रयोगांचे दर्शन होत असल्यामुळे, 'रत्ति', 'भूमी', 'नाभी' इत्यादी शब्दांचा हा देखील नामविभक्तीचा विशेष (भेद) समजला पाहिजे. तो कसा? ရတ္တိ, ရတ္တီ, ရတ္တိယော, ရတျော. ရတ္တိံ, ရတ္တီ, ရတ္တိယော, ရတျော. ရတ္တိယာ, ရတျာ, ရတ္တီဟိ, ရတ္တီဘိ. ရတ္တိယာ, ရတျာ, ရတ္တီနံ. ရတ္တိယာ, ရတျာ, ရတ္တီဟိ, ရတ္တီဘိ. ရတ္တိယာ, ရတျာ, ရတ္တီနံ. ရတ္တိယာ, ရတျာ, ရတ္တိယံ ရတျံ, ရတ္တော, ရတ္တီသု. ဘောတိ ရတ္တိ, ဘောတိယော ရတ္တီ, ရတ္တိယော, ရတျော. रत्ति, रत्ती, रत्तियो, रत्यो। रत्तिं, रत्ती, रत्तियो, रत्यो। रत्तिया, रत्या, रत्तीहि, रत्तीभि। रत्तिया, रत्या, रत्तीनं। रत्तिया, रत्या, रत्तीहि, रत्तीभि। रत्तिया, रत्या, रत्तीनं। रत्तिया, रत्या, रत्तियं, रत्यं, रत्तो, रत्तीसु। भोति रत्ति, भोतियो रत्ती, रत्तियो, रत्यो. ဧတ္ထ ‘‘ရတ္တော’’တိ ရူပနယံ ဝဇ္ဇေတွာ ‘‘ဘူမိ, ဘူမီ, ဘူမိယော, ဘူမျော’’တိ သဗ္ဗံ နေယျံ. येथे 'रत्तो' हे रूप वगळून 'भूमी, भूमी, भूमियो, भूम्यो' याप्रमाणे सर्व जाणावे. နာဘိ, နာဘီ, နာဘိယော, နဘျော. နာဘိံ, နာဘီ, နာဘိယော, နဘျော. နာဘိယာ, နဘျာ, နာဘီဟိ, နာဘီဘိ. နာဘိယာ, နဘျာ, နာဘီနံ. နာဘိယာ, နဘျာ, နာဘီဟိ, နာဘီဘိ. နာဘိယာ, နဘျာ, နာဘီနံ. နာဘိယာ, နဘျာ, နာဘိယံ, နဘျံ, နာဘီသု. ဘောတိ နာဘိ, ဘောတိယော နာဘီ, နာဘိယော, နဘျော. नाभी, नाभी, नाभियो, नभ्यो। नाभिं, नाभी, नाभियो, नभ्यो। नाभिया, नभ्या, नाभीहि, नाभीभि। नाभिया, नभ्या, नाभीनं। नाभिया, नभ्या, नाभीहि, नाभीभि। नाभिया, नभ्या, नाभीनं। नाभिया, नभ्या, नाभियं, नभ्यं, नाभीसु। भोति नाभी, भोतियो नाभी, नाभियो, नभ्यो. ဗောဓိ, ဗောဓီ, ဗောဓိယော, ဗောဇ္ဈော. ဗောဓိံ, ဗောဓိယံ, ဗောဇ္ဈံ, ဗောဓီ, ဗောဓိယော, ဗောဇ္ဈော. ဗောဓိယာ, ဗောဇ္ဈာ, ဗောဓီဟိ, ဗောဓီဘိ. ဗောဓိယာ, ဗောဇ္ဈာ, ဗောဓီနံ. ဗောဓိယာ, ဗောဇ္ဈာ, ဗောဓီဟိ, ဗောဓီဘိ. ဗောဓိယာ, ဗောဇ္ဈာ, ဗောဓီနံ. ဗောဓိယာ, ဗောဇ္ဈာ, ဗောဓိယံ, ဗောဇ္ဈံ, ဗောဓီသု. ဘောတိ ဗောဓိ, ဘောတိယော ဗောဓီ, ဗောဓိယော, ဗောဇ္ဈော. बोधी, बोधी, बोधियो, बोज्झो। बोधिं, बोधियं, बोज्झं, बोधी, बोधियो, बोज्झो। बोधिया, बोज्झा, बोधीहि, बोधीभि। बोधिया, बोज्झा, बोधीनं। बोधिया, बोज्झा, बोधीहि, बोधीभि। बोधिया, बोज्झा, बोधीनं। बोधिया, बोज्झा, बोधियं, बोज्झं, बोधीसु। भोति बोधी, भोतियो बोधी, बोधियो, बोज्झो. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဗုဇ္ဈဿု ဇိန ဗောဓိယံ. အညတြ ဗောဇ္ဈာ တပသာ’’တိ ဝိစိတြပါဠိနယဒဿနတော ဝိစိတြနယာ နာမိကပဒမာလာ ဝုတ္တာ. သဗ္ဗောပိ စာယံ နယော အညတ္ထာပိ ယထာရဟံ ယောဇေတဗ္ဗော. परंतु येथे 'बुज्झस्सु जिन बोधियं। अञ्ञत्र बोज्झा तपसा' अशा विविध पाळी नियमांच्या दर्शनामुळे विविध प्रकारची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगितली आहेत. हा सर्व नियम इतर ठिकाणी देखील योग्यतेनुसार योजावा. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဣကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा इकारांत स्त्रीलिंगी शब्दांच्या मूळ रूपांचा (प्रकृतिरूपांचा) सविस्तर निर्णय असलेला नामविभक्तीच्या रूपांचा विभाग (नामिकपदमलाविभाग) आहे. ဣကာရန္တတာပကတိကံ ဣကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ इकारांत मूळ रूप असलेले इकारांत स्त्रीलिंगी. နိဋ္ဌိတံ. समाप्त झाले. ဣဒါနိ [Pg.267] ဘူရီသဒ္ဒါဒီနံ နာမိကပဒမာလံ ဝက္ခာမ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ – आता आपण पूर्वाचार्यांचे मत अग्रभागी ठेवून 'भूरी' इत्यादी शब्दांची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगू – ဣတ္ထီ, ဣတ္ထီ, ဣတ္ထိယော. ဣတ္ထိံ, ဣတ္ထီ, ဣတ္ထိယော. ဣတ္ထိယာ, ဣတ္ထီဟိ, ဣတ္ထီဘိ. ဣတ္ထိယာ, ဣတ္ထီနံ. ဣတ္ထိယာ, ဣတ္ထီဟိ, ဣတ္ထီဘိ. ဣတ္ထိယာ, ဣတ္ထီနံ. ဣတ္ထိယာ, ဣတ္ထိယံ, ဣတ္ထီသု. ဘောတိ ဣတ္ထိ, ဘောတိယော ဣတ္ထိယော. ယမကမဟာထေရမတံ. इत्थी, इत्थी, इत्थियो। इत्थिं, इत्थी, इत्थियो। इत्थिया, इत्थीहि, इत्थीभि। इत्थिया, इत्थीनं। इत्थिया, इत्थीहि, इत्थीभि। इत्थिया, इत्थीनं। इत्थिया, इत्थियं, इत्थीसु। भोति इत्थि, भोतियो इत्थियो। यमकमहाथेरांचे मत. ‘‘ဘူရီ, ဘူရီ, ဘူရိယော. ဘူရိံ, ဘူရီ, ဘူရိ ယော’’တိ ဣတ္ထိယာ သမံ. ဧဝံ ဘူတီ ဘောတီ ဝိဘာဝိနီ ဣစ္စာဒီနံ ဘူဓာတုမယာနံ အညေသဉ္စ ဤကာရန္တသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထညေ ဤကာရန္တသဒ္ဒါ နာမ – ‘भूरी, भूरी, भूरियो। भूरिं, भूरी, भूरियो’ हे 'इत्थी' (स्त्री) शब्दाप्रमाणेच आहे. अशा प्रकारे 'भूती', 'भोती', 'विभाविनी' इत्यादी 'भू' धातूपासून बनलेल्या आणि इतर ईकारांत शब्दांची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) योजावीत. येथे इतर ईकारांत शब्द म्हणजे – ‘‘မာတုလာနီ စ ဘဂိနီ, ဘိက္ခုနီ သာမုဂီ အဇီ; ဝါပီ ပေါက္ခရဏီ ဒေဝီ, နာဂီ ယက္ခိနီ ရာဇိနီ. ‘मातुलानी (मामी) आणि भगिनी (बहीण), भिक्खुनी, सामुगी, अजी (शेळी); वापी (विहीर), पोक्खरणी (तलाव), देवी, नागी, यक्खिनी, राजिनी (राणी).’ ဒါသီ စ ဗြာဟ္မဏီ မုဋ္ဌ-ဿတိနီ သီဃယာယိနီ; သာကိယာနီ’’တိ စာဒီနိ, ပယောဂါနိ ဘဝန္တိ ဟိ. दासी, ब्राह्मणी, मुट्ठस्सतिनी (स्मृतिभ्रष्ट स्त्री), सीघयायिनी (वेगाने जाणारी स्त्री), साकियानी (शाक्य स्त्री) इत्यादी प्रयोग खरोखर आढळतात. တတြ ‘‘ပေါက္ခရဏီ ဒါသီ, ဗြာဟ္မဏိ’’စ္စာဒိနံ ဂတိ; အညထာပိ သိယာ ဂါထာ-စုဏ္ဏိယေသု ယထာရဟံ. त्यामध्ये 'पोक्खरणी' (कमळतलाव), 'दासी', 'ब्राह्मणी' इत्यादी शब्दांची रूपे गाथा आणि गद्यामध्ये योग्यतेनुसार इतर प्रकारेही असू शकतात. ‘‘ကုသာဝတီ’’တိအာဒီနံ, ဂါထာသွေဝ ဝိသေသတော; ရူပါနိ အညထာ ဟောန္တိ, ဧကဝစနတော ဝဒေ. विशेषतः गाथांमध्येच 'कुसावती' इत्यादी शब्दांची रूपे वेगळी होतात, ती एकवचनात सांगावीत. ‘‘ကာသီ အဝန္တီ’’ဣစ္စာဒီ, ဗဟုဝစနတော ဝဒေ; ‘‘စန္ဒဝတီ’’တိအာဒီနိ, ပယောဂဿာနုရူပတော. 'कासी', 'अवन्ती' इत्यादी शब्द बहुवचनात सांगावेत; आणि 'चन्दवती' इत्यादी शब्द प्रयोगाच्या गरजेनुसार सांगावेत. တထာ ဟိ ‘‘ပေါက္ခရညော သုမာပိတာ. တာ စ သတ္တသတာ ဘရိယာ, ဒါသျော သတ္တသတာနိ စ. ဒါရကေ စ အဟံ နေဿံ[Pg.268], ဗြာဟ္မဏျာ ပရိစာရကေ. နဇ္ဇော သန္ဒန္တိ. နဇ္ဇာ နေရဉ္ဇရာယ တီရေ. လက္ချာ ဘဝ နိဝေသနံ. तसेच, 'पोक्खरञ्ञो सुमापिता' (कमळतलाव उत्तम प्रकारे बांधले आहेत), 'ता च सत्तसता भरिया, दास्यो सत्तसतानि च' (आणि त्या सातशे पत्नी आणि सातशे दासी), 'दारके च अहं नेस्सं, ब्राह्मण्या परिचारके' (आणि मी मुलाला, ब्राह्मणीच्या सेवकाला घेऊन जाईन), 'नज्जो सन्दान्ति' (नद्या वाहतात), 'नज्जा नेरञ्जराय तीरे' (नेरंजरा नदीच्या तीरावर), 'लक्ख्या भव निवेसनं' (लक्ष्मीचे निवासस्थान होवो). ဗာရာဏသျံ မဟာရာဇ, ကာကရာဇာ နိဝါသကော; အသီတိယာ သဟဿေဟိ, သုပတ္တော ပရိဝါရိတော. हे महाराज! बाराणशीमध्ये (बाराणस्यं) ऐंशी हजार कावळ्यांनी वेढलेला 'सुपत्त' नावाचा कावळ्यांचा राजा राहत होता. ရာဇာ ယထာ ဝေဿဝဏော နဠိည’’န္တိ 'जसा राजा वेस्सवण नळिणीमध्ये (कमळतलावात)' इत्यादी. ဧဝမာဒီနံ ပါဠီနံ ဒဿနတော ပေါက္ခရဏီ ဣစ္စာဒီနံ နာမိကပဒမာလာယော သဝိသေသာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ကထံ? ‘ပေါက္ခရဏီ, ပေါက္ခရဏီ, ပေါက္ခရဏိယော, ပေါက္ခရညော. ပေါက္ခရဏိ’’န္တိအာဒိနာ ဝတွာ ကရဏသမ္ပဒါနနိဿက္ကသာမိဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ပေါက္ခရဏိယာ, ပေါက္ခရညာ’’တိ ဧကဝစနာနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ. ဘုမ္မဝစနဋ္ဌာနေ ပန ‘‘ပေါက္ခရဏိယာ, ပေါက္ခရညာ, ပေါက္ခရဏိယံ, ပေါက္ခရည’’န္တိ စ ဧကဝစနာနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ. သဗ္ဗတ္ထ စ ပဒါနိ ပရိပုဏ္ဏာနိ ကာတဗ္ဗာနိ. တထာ ‘‘ဒါသီ, ဒါသီ, ဒါသိယော, ဒါသျော. ဒါသိံ, ဒါသိယံ, ဒါသီ, ဒါသိယော, ဒါသျော’’တိ ဝတွာ ကရဏဝစနဋ္ဌာနာဒီသု ‘‘ဒါသိယာ, ဒါသျာ’’တိ ဧကဝစနာနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ. ဘုမ္မဝစနဋ္ဌာနေ ပန ‘‘ဒါသိယာ, ဒါသျာ, ဒါသိယံ, ဒါသျ’’န္တိ စ ဧကဝစနာနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ. သဗ္ဗတ္ထ ပဒါနိ ပရိပုဏ္ဏာနိ ကာတဗ္ဗာနိ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ယဋ္ဌိယာ ပဋိကောဋေတိ, ဃရေ ဇာတံဝ ဒါသိယံ. ဖုသိဿာမိ ဝိမုတ္တိယ’’န္တိ ပယောဂါနံ ဒဿနတော အံဝစနဿ ယမာဒေသဝသေန ‘‘ဒါသိယ’’န္တိ ဝုတ္တံ. တေသု စ ‘‘ဃရေ ဇာတံဝ ဒါသိယ’’န္တိ ဧတ္ထ အံဝစနဿ ယမာဒေသတော အညောပိ သဒ္ဒနယော လဗ္ဘတိ. ကထံ? ယထာ ဒဟရီ ဧဝ ‘‘ဒဟရိယာ’’တိ ဝုစ္စတိ, ဧဝံ ဒါသီ ဧဝ ‘‘ဒါသိယာ’’တိ. अशा प्रकारच्या पाळी वचनांच्या दर्शनावरून 'पोक्खरणी' इत्यादी शब्दांच्या नामविभक्तीच्या रूपांची मालिका (नामपदमाला) विशेष रूपाने योजली पाहिजे. कशी? 'पोक्खरणी, पोक्खरणी, पोक्खरणियो, पोक्खरञ्ञो. पोक्खरणिं' इत्यादी रूपे सांगून, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी आणि षष्ठी विभक्तीच्या ठिकाणी 'पोक्खरणिया, पोक्खरञ्ञा' अशी एकवचनी रूपे सांगावीत. सप्तमी विभक्तीच्या ठिकाणी मात्र 'पोक्खरणिया, पोक्खरञ्ञा, पोक्खरणियं, पोक्खरञ्ञं' अशी एकवचनी रूपे सांगावीत. आणि सर्व ठिकाणी पदे परिपूर्ण करावीत. तसेच 'दासी, दासी, दासियो, दास्यो. दासिं, दासियं, दासी, दासियो, दास्यो' असे सांगून तृतीया विभक्ती इत्यादींच्या ठिकाणी 'दासिया, दास्या' अशी एकवचनी रूपे सांगावीत. सप्तमी विभक्तीच्या ठिकाणी मात्र 'दासिया, दास्या, दासियं, दास्यं' अशी एकवचनी रूपे सांगावीत. सर्व ठिकाणी पदे परिपूर्ण करावीत. परंतु येथे 'यट्ठिया पटिकोटेति, घरे जातंव दासियं. फुसिस्सामि विमुत्तियं' (काठीने मारतो, घरात जन्मलेल्या दासीप्रमाणे. मी विमुक्तीचा स्पर्श करेन) अशा प्रयोगांच्या दर्शनावरून 'अं' विभक्ती प्रत्ययाच्या जागी 'य' आदेश झाल्यामुळे 'दासियं' असे म्हटले आहे. त्यामध्ये 'घरे जातंव दासियं' येथे 'अं' विभक्ती प्रत्ययाच्या जागी 'य' आदेश झाल्यामुळे दुसरीही शब्दपद्धती प्राप्त होते. कशी? ज्याप्रमाणे 'दहरी' (तरुणी) लाच 'दहरिया' म्हटले जाते, त्याचप्रमाणे 'दासी' लाच 'दासिया' म्हटले जाते. ဧတ္ထ ပန ‘‘ပဿာမိ ဝေါဟံ ဒဟရိံ, ကုမာရိံ စာရုဒဿန’’န္တိ စ ‘‘ယေ တံ ဇိဏ္ဏဿ ပါဒံသု, ဧဝံ ဒဟရိယံ သတိ’’န္တိ စ ပါဠိ နိဒဿနံ[Pg.269], ဥပယောဂဝစနိစ္ဆာယ ‘‘ဒါသိယ’’န္တိ ဝုတ္တံ, ဣမသ္မိံ ပနာဓိပ္ပာယေ ‘‘ဒါသိယာ, ဒါသိယာ, ဒါသိယာယော. ဒါသိယံ, ဒါသိယာ, ဒါသိယာယော. ဒါသိယာယာ’’တိ ကညာနယေနေဝ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ ‘‘ကုမာရိယာ’’တိ သဒ္ဒဿေဝ. တထာ ဟိ ‘‘ကုမာရိယေ ဥပသေနိယေ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. တထာ ‘‘ပုပ္ဖဝတိယာ, ပုပ္ဖဝတိယံ, ပုပ္ဖဝတိယာယ, ပုပ္ဖဝတိယာယံ, ဘောတိ ပုပ္ဖဝတိယေ’’တိ ကညာနယနိဿိတေန ဧကဝစနနယေန နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. परंतु येथे 'पस्सामि वोहं दहरिं, कुमारिं चारुदस्सनं' (मी त्या सुंदर तरुण मुलीला पाहतो) आणि 'ये तं जिण्णस्स पादंसु, एवं दहरियं सति' (ज्यांनी तिला वृद्ध माणसाला दिले, अशी तरुणी असताना) हे पाळीचे उदाहरण आहे; द्वितीया विभक्तीच्या इच्छेने 'दासियं' असे म्हटले आहे. या अभिप्रायामध्ये 'दासिया, दासिया, दासियायो. दासियं, दासिया, दासियायो. दासियाया' अशी 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाच्या पद्धतीप्रमाणेच नामपदमाला होते, जशी 'कुमारिया' या शब्दाची होते. कारण 'कुमारिये उपसेनिये' अशी पाळी पाहायला मिळते. तसेच 'पुप्फवतिया, puप्फवतियं, पुप्फवतियाय, पुप्फवतियायं, भोति पुप्फवतिये' अशी 'कञ्ञा' शब्दाच्या पद्धतीवर आधारित एकवचनाच्या नियमाने नामपदमाला होते. ဧတ္ထ ပန ‘‘အတီတေ အယံ ဗာရာဏသီ ပုပ္ဖဝတိယာ နာမ အဟောသိ. ရာဇာသိ လုဒ္ဒကမ္မော, ဧကရာဇာ ပုပ္ဖဝတိယာယံ. ဥယျဿု ပုဗ္ဗေန ပုပ္ဖဝတိယာယာ’’တိ ပါဠိ စ အဋ္ဌကထာပါဌော စ နိဒဿနံ. အပရော နယော – ‘‘ဒါသိယာ ဒဟရိယာ ကုမာရိယာ’’တိအာဒီသု ကကာရဿ ယကာရာဒေသောပိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ဗြာဟ္မဏီသဒ္ဒဿ တု ‘‘ဗြာဟ္မဏီ, ဗြာဟ္မဏီ, ဗြာဟ္မဏိယော, ဗြာဟ္မဏျော. ဗြာဟ္မဏိ’’န္တိအာဒီနိ ဝတွာ ကရဏဝစနဋ္ဌာနာဒီသု ‘‘ဗြာဟ္မဏိယာ, ဗြာဟ္မဏျာ’’တိ ဧကဝစနာနိ ဝတ္တဗ္ဗာနိ, သဗ္ဗတ္ထ စ ပဒါနိ ပရိပုဏ္ဏာနိ ကာတဗ္ဗာနိ. နဒီသဒ္ဒဿ ‘‘နဒီ, နဒီ, နဒိယော, နဇ္ဇော. နဒိ’’န္တိအာဒိနာ ဝတွာ ‘‘နဒိယာ, နဇ္ဇာ’’တိ စ ‘‘နဒိယံ, နဇ္ဇ’’န္တိ စ ဝတ္တဗ္ဗံ, သဗ္ဗတ္ထ စ ပဒါနိ ပရိပုဏ္ဏာနိ ကာတဗ္ဗာနိ. ဣတ္ထိလိင်္ဂေသု ဟိ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ဥပယောဂဗဟုဝစနံ အနာဂတမ္ပိ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ, တထာ ဥပယောဂဗဟုဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနံ အနာဂတမ္ပိ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ, ကရဏသမ္ပဒါနနိဿက္ကသာမိဘုမ္မဝစနာနမ္ပိ အညတရသ္မိံ ဒိဋ္ဌေယေဝ အညတရံ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ. တထာ ဟိ ‘‘ဒါသာ စ ဒါသျော အနုဇီဝိနော စာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဒါသျော’’တိ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ အပရမ္ပိ ‘‘ဒါသျော’’တိ ဥပယောဂဗဟုဝစနံ တံသဒိသတ္တာ ဒိဋ္ဌမေဝ ဟောတိ. परंतु येथे 'अतीते अयं बाराणसी पुप्फवतिया नाम अहोसि' (भूतकाळात ही बाराणशी 'पुप्फवती' नावाचे शहर होते), 'राजासि लुद्दकम्मो, एकराजा पुप्फवतियायं' (पुप्फवतीमध्ये क्रूर कर्माचा एकराजा नावाचा राजा होता), 'उय्यस्सु पुब्बेन पुप्फवतियाया' (पुप्फवतीच्या पूर्वेकडे जा) ही पाळी आणि अट्ठकथा पाठ हे याचे उदाहरण आहे. दुसरी पद्धत अशी की – 'दासिया, दहरिया, कुमारिया' इत्यादींमध्ये 'क' काराच्या जागी 'य' काराचा आदेश झालेला देखील पाहावा. 'ब्राह्मणी' शब्दाच्या बाबतीत मात्र 'ब्राह्मणी, ब्राह्मणी, ब्राह्मणिंयो, ब्रह्मण्यो. ब्राह्मणिं' इत्यादी रूपे सांगून तृतीया विभक्ती इत्यादींच्या ठिकाणी 'ब्राह्मणिया, ब्रह्मण्या' अशी एकवचनी रूपे सांगावीत, आणि सर्व ठिकाणी पदे परिपूर्ण करावीत. 'नदी' शब्दाच्या बाबतीत 'नदी, नदी, नदियो, नज्जो. नदिं' इत्यादी सांगून 'नदिया, नज्जा' आणि 'नदियं, नज्जं' असे सांगावे, आणि सर्व ठिकाणी पदे परिपूर्ण करावीत. कारण स्त्रीलिंगी शब्दांमध्ये प्रथमा बहुवचनाचे रूप पाहिले असता, द्वितीया बहुवचनाचे रूप समोर आले नसले तरी ते समजून येते; तसेच द्वितीया बहुवचनाचे रूप पाहिले असता, प्रथमा बहुवचनाचे रूप समोर आले नसले तरी ते समजून येते; आणि तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी व सप्तमी विभक्तींपैकी कोणतेही एक रूप पाहिले असता, दुसरे रूप समजून येते. कारण 'दासा च दास्यो अनुजीविनो च' (दास आणि दासी व सेवक) येथे 'दास्यो' हे प्रथमा बहुवचनाचे रूप पाहिले असता, दुसरे 'दास्यो' हे द्वितीया बहुवचनाचे रूप देखील त्याच्यासारखेच असल्यामुळे समजून येते. ‘‘သက္ကော [Pg.270] စ မေ ဝရံ ဒဇ္ဇာ, သော စ လဗ္ဘေထ မေ ဝရော; ဧကရတ္တံ ဒွိရတ္တံ ဝါ, ဘဝေယျံ အဘိပါရကော; ဥမ္မာဒန္တျာ ရမိတွာန, သိဝိရာဇာ တတော သိယ’’န္တိ 'जर सक्काने मला वर दिला आणि तो वर मला मिळाला, तर एक किंवा दोन रात्रीसाठी मी सर्वोच्च रक्षक होईन; उम्मादन्तीसोबत रममाण होऊन त्यानंतर मी शिवी देशाचा राजा होईन' इत्यादी. ဧတ္ထ ‘‘ဥမ္မာဒန္တျာ’’တိ ကရဏဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ တံသဒိသာနိ သမ္ပဒါနနိဿက္ကသာမိဘုမ္မဝစနာနိပိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ ဟောန္တိ. ‘‘ဗြာဟ္မဏျာ ပရိစာရကေ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဗြာဟ္မဏျာ’’တိ သာမိဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ တံသဒိသာနိ ကရဏသမ္ပဒါနနိဿက္ကဘုမ္မဝစနာနိပိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ ဟောန္တိ. ‘‘သေတိ ဘူမျာ အနုတ္ထုန’’န္တိ ဧတ္ထ ‘‘ပထဗျာ စာရုပုဗ္ဗင်္ဂီ’’တိ ဧတ္ထ စ ‘‘ဘူမျာ, ပထဗျာ’’တိ သတ္တမိယာ ဧကဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ တံသဒိသာနိ ကရဏသမ္ပဒါနနိဿက္ကသာမိဝစနာနိပိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ ဟောန္တိ. ‘‘ဗာရာဏသျံ မဟာရာဇာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဗာရာဏသျ’’န္တိ ဘုမ္မဝစနေ ဒိဋ္ဌေယေဝ တံသဒိသာနိ အညာနိပိ ‘‘ဗြာဟ္မဏျံ ဧကာဒသျံ ပဉ္စမျ’’န္တိအာဒီနိ ဘုမ္မဝစနာနိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ ဟောန္တိ. येथे 'उम्मादन्त्या' हे तृतीया विभक्तीचे रूप पाहिले असता, त्याच्यासारखीच चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी आणि सप्तमी विभक्तीची रूपे देखील समजून येतात. 'ब्राह्मण्या परिचारके' येथे 'ब्राह्मण्या' हे षष्ठी विभक्तीचे रूप पाहिले असता, त्याच्यासारखीच तृतीया, चतुर्थी, पंचमी आणि सप्तमी विभक्तीची रूपे देखील समजून येतात. 'सेति भूम्या अनुत्थुनं' आणि 'पथब्या चारुपुब्बङ्गी' येथे 'भूम्या, पथब्या' ही सप्तमी एकवचनाची रूपे पाहिली असता, त्यांच्यासारखीच तृतीया, चतुर्थी, पंचमी आणि षष्ठी विभक्तीची रूपे देखील समजून येतात. 'बाराणस्यं महाराजा' येथे 'बाराणस्यं' हे सप्तमी विभक्तीचे रूप पाहिले असता, त्याच्यासारखीच इतर 'ब्राह्मण्यं, एकादस्यं, पञ्चम्यं' इत्यादी सप्तमी विभक्तीची रूपे देखील समजून येतात. ဂဏှန္တိ စ တာဒိသာနိ ရူပါနိ ပုဗ္ဗာစရိယာသဘာပိ ဂါထာဘိသင်္ခရဏဝသေန. သာသနေပိ ပန ဧတာဒိသာနိ ရူပါနိ ယေဘုယျေန ဂါထာသု သန္ဒိဿန္တိ. आणि प्राचीन आचार्य देखील गाथांच्या रचनेसाठी अशा प्रकारची रूपे स्वीकारतात. बुद्धशासनात देखील अशी रूपे बहुधा गाथांमध्येच दिसून येतात. ကုသာဝတီ. ကုသာဝတိံ. ကုသာဝတိယာ, ကုသာဝတျာ. ကုသာဝတိယံ, ကုသာဝတျံ. ဘောတိ ကုသာဝတိ. कुसावती (प्रथमा), कुसावतिं (द्वितीया), कुसावतिया, कुसावत्या (तृतीया इ.), कुसावतियं, कुसावत्यं (सप्तमी), भोति कुसावति (संबोधन). ဗာရာဏသီ. ဗာရာဏသိံ. ဗာရာဏသိယာ, ဗာရာဏသျာ. ဗာရာဏသိယံ, ဗာရာဏသျံ, ဗာရာဏဿံ ဣစ္စပိ, ဘောတိ ဗာရာဏသိ. बाराणसी (प्रथमा), बाराणसिं (द्वितीया), बाराणसिया, बाराणस्या (तृतीया इ.), बाराणसियं, बाराणस्यं, बाराणस्सं (सप्तमी) इत्यादी, भोति बाराणसि (संबोधन). နဠိနီ. နဠိနိံ. နဠိနိယာ, နဠိညာ. နဠိနိယံ, နဠိညံ. ဘောတိ နဠိနိ. အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. नळिणी (प्रथमा), nळिणिं (द्वितीया), नळिणिया, नळिञ्ञा (तृतीया इ.), नळिणियं, नळिञ्ञं (सप्तमी), भोति नळिणि (संबोधन). इतर शब्दांची रूपे देखील अशीच योजावीत. ဂါထာဝိသယံ ပန ပတွာ ‘‘ကုသာဝတိမှိ, ဗာရာဏသိမှိ, နဠိနိမှီ’’တိအာဒိနာ သဒ္ဒရူပါနိပိယောဇေတဗ္ဗာနိ. တထာ ဟိ ပါဠိယံ ‘‘ကုသာဝတိမှိ’’အာဒီနိ မှိယန္တာနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိ ဂါထာသုယေဝ [Pg.271] ပညာယန္တိ, န စုဏ္ဏိယပဒရစနာယံ. အက္ခရသမယေ ပန တာဒိသာနိ ရူပါနိ အနိဝါရိတာနိ ‘‘နဒိမှာ စာ’’တိအာဒိဒဿနတော. ယံ ပန အဋ္ဌကထာသု စုဏ္ဏိယပဒရစနာယံ ‘‘သမ္မာဒိဋ္ဌိမှီ’’တိအာဒိကံ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပံ ဒိဿတိ, တံ အက္ခရဝိပလ္လာသဝသေန ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ စုဏ္ဏိယပဒဋ္ဌာနေ ‘‘သမ္မာဒိဋ္ဌိယံ ပဋိသန္ဓိယံ သုဂတိယံ ဒုဂ္ဂတိယ’’န္တိအာဒိဒဿနတော. အယံ ပနေတ္ထ နိယမော သုဂတသာသနေ ဂါထာယံ စုဏ္ဏိယပဒဋ္ဌာနေ စ ‘‘ကညာ ရတ္တိ ဣတ္ထီ ယာဂု ဝဓူ’’တိ ဧဝံ ပဉ္စန္တေဟိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေဟိ သဒ္ဓိံ နာ သ သ္မာ သ္မိံ မှာ မှိဣစ္စေတေ သဒ္ဒါ သရူပတော ပရတ္တံ န ယန္တိ. မှိသဒ္ဒေါ ပန ဂါထာယံ ဣဝဏ္ဏန္တေဟိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေဟိ သဒ္ဓိံ ပရတ္တံ ယာတိ. တတြိဒံ ဝုစ္စတိ – परंतु गाथांच्या (काव्याच्या) विषयात आल्यावर "कुसावतिम्हि, बाराणसिम्हि, नळिनिम्हि" इत्यादी शब्दरूपे योजावीत. कारण पाळीमध्ये "कुसावतिम्हि" इत्यादी 'म्हि' अंत असणारी स्त्रीलिंगी रूपे गाथांमध्येच दिसून येतात, गद्य रचनेत (चुण्णियपदरचना) नाही. व्याकरणशास्त्रामध्ये (अक्खरसमये) मात्र अशी रूपे प्रतिबंधित नाहीत, कारण "नदिम्हा चा" इत्यादी प्रयोग आढळतात. परंतु अट्ठकथांमधील गद्य रचनेत जे "सम्मादिट्ठिम्हि" इत्यादी स्त्रीलिंगी रूप दिसते, ते वर्णांच्या विपर्यासाने (अक्खरविपल्लास) म्हटले गेले आहे असे समजावे; कारण गद्य रचनेच्या ठिकाणी "सम्मादिट्ठियं, पटिसन्धियं, सुगतियं, दुग्गतियं" इत्यादी प्रयोग दिसून येतात. येथे सुगतशासनात (बुद्धशासनात) गाथा आणि गद्य रचनेत हा नियम आहे की, "कञ्ञा, रत्ति, इत्थी, यागु, वधू" या पाच अंत असणाऱ्या स्त्रीलिंगी शब्दांसोबत 'ना, स, स्मा, स्मिं, म्हा, म्ही' हे शब्द त्यांच्या मूळ रूपात पुढे जोडले जात नाहीत. परंतु 'म्हि' हा शब्द गाथेत 'इ'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांसोबत पुढे जोडला जातो. त्याविषयी हे म्हटले जाते - ‘‘ဂါထာယံ စုဏ္ဏိယေ စာပိ, နာ သသ္မာဒီ သရူပတော; နာကာရန္တဣဝဏ္ဏန္တ-ဣတ္ထီတိ ပရတံ ဂတာ. “गाथा आणि गद्यातही, 'ना', 'स', 'स्मा' इत्यादी प्रत्यय त्यांच्या मूळ रूपात 'आ'कारान्त आणि 'इ'/'ई'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांच्या पुढे जोडले जात नाहीत. မှိသဒ္ဒေါ ပန ဂါထာယံ, ဣဝဏ္ဏန္တိတ္ထိဘီ သဟ; ယ’တော ပရတ္တမေတဿ, ပယောဂါနိ ဘဝန္တိ ဟိ. परंतु गाथेत 'म्हि' हा शब्द 'इ'/'ई'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांसोबत पुढे जोडला जातो, कारण याचे असे प्रयोग आढळतात. ယထာ ဗလာကယောနိမှိ, န ဝိဇ္ဇတိ ပုမော သဒါ; ကုသာဝဘိမှိ နဂရေ, ရာဇာ အာသိ မဟီပတီ’’တိ. जसे की, 'बलाकायोनिम्हि' (बगळ्याच्या योनीत) कधीही नर नसतो; आणि 'कुसावतिम्हि' नगरात एक राजा पृथ्वीचा स्वामी होता.” ဧဝံ ကုသာဝတီ ဣစ္စာဒီနိ အညထာ ဘဝန္တိ, နဂရနာမတ္တာ ပနေကဝစနာနိပိ, န ဇနပဒနာမာနိ ဝိယ ဗဟုဝစနာနိ. ‘‘ကာသီ, ကာသိယော. ကာသီဟိ, ကာသီဘိ. ကာသီနံ. ကာသီသု. ဘောတိယော ကာသိယော. ဧဝံ အဝန္တီ အဝန္တိယော’’တိအာဒိနာပိ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. အညာနိပိ ပဒါနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ဧဝံ ကာသီဣစ္စာဒီနိ ဇနပဒနာမတ္တာ ရူဠှီဝသေန ဗဟုဝစနာနေဝ ဘဝန္တိ အတ္ထဿ ဧကတ္တေပိ. अशा प्रकारे 'कुसावती' इत्यादी शब्द वेगळे होतात. नगराचे नाव असल्यामुळे ते एकवचनी देखील असतात, जनपदांच्या नावांप्रमाणे बहुवचनी नसतात. “कासी, कासियो। कासीहि, कासीभि। कासीनं। कासीsu। भोतियो कासियो। याचप्रमाणे अवन्ती, अवन्तियो” इत्यादी रूपांनी नामविभक्तीची रूपमाला (नामिकपदमला) योजावी. इतर शब्दही घ्यावेत. अशा प्रकारे 'कासी' इत्यादी शब्द जनपदाचे नाव असल्यामुळे रूढीनुसार अर्थ एकवचनी असला तरी बहुवचनातच वापरले जातात. စန္ဒဝတီ, စန္ဒဝတိံ, စန္ဒဝတိယာ, စန္ဒဝတိယံ, ဘောတိ စန္ဒဝတိ, ဧဝံ ဧကဝစနဝသေန ဝါ, စန္ဒဝတိယော, စန္ဒဝတိယော, စန္ဒဝတီဟိ, စန္ဒဝတီဘိ, စန္ဒဝတီနံ, စန္ဒဝတီသု, ဘောတိယော [Pg.272] စန္ဒဝတိယော, ဧဝံ ဗဟုဝစနဝသေန ဝါ နာမိကပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ, အညာနိပိ ပဒါနိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ‘‘စန္ဒဝတီ’’ဣစ္စာဒီနိ ဟိ ဧကိဿာ ဗဟူနဉ္စိတ္ထီနံ ပဏ္ဏတ္တိဘာဝတော ပယောဂါနုရူပေန ဧကဝစနဝသေန ဝါ ဗဟုဝစနဝသေန ဝါ ယောဇေတဗ္ဗာနိ ဘဝန္တိ. ဧသ နယော အညတြာပိ. “चन्दवती, चन्दवतीं, चन्दवतिया, चन्दवतियं, भोति चन्दवति” अशा प्रकारे एकवचनानुसार, किंवा “चन्दवतियो, चन्दवतियो, चन्दवतीहि, चन्दवतीभि, चन्दवतीनं, चन्दवतीसु, भोतियो चन्दवतियो” अशा प्रकारे बहुवचनानुसार नामविभक्तीची रूपमाला समजावी, आणि इतर शब्दही योजावेत. कारण “चन्दवती” इत्यादी शब्द एका किंवा अनेक स्त्रियांचे नाव (प्रज्ञप्ती) असल्यामुळे प्रयोगाच्या गरजेनुसार एकवचनात किंवा बहुवचनात योजले जातात. हाच नियम इतर ठिकाणीही लागू होतो. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဤကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा 'ई'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांच्या मूळ रूपाचा (प्रकृतिरूप) नामविभक्ती रूपमालेचा सविस्तर निर्णय (विभाग) आहे. ဤကာရန္တတာပကတိကံ ဤကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. मूळ स्वरूपाने 'ई'कारान्त असणारे स्त्रीलिंगी रूप समाप्त झाले. ဣဒါနိ ဘူဓာတုမယာနံ ဥကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂါနံ အပ္ပသိဒ္ဓတ္တာ အညေန ဥကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂေန နာမိကပဒမာလံ ပူရေဿာမ – आता 'भू' धातूपासून बनलेल्या 'उ'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांचे प्रयोग दुर्मिळ असल्यामुळे, दुसऱ्या 'उ'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दाने नामविभक्तीची रूपमाला पूर्ण करू - ယာဂု, ယာဂူ, ယာဂုယော. ယာဂုံ, ယာဂူ, ယာဂုယော. ယာဂုယာ, ယာဂူဟိ, ယာဂူဘိ. ယာဂုယာ, ယာဂူနံ. ယာဂုယာ, ယာဂူဟိ, ယာဂူဘိ. ယာဂုယာ, ယာဂူနံ. ယာဂုယာ, ယာဂုယံ, ယာဂူသု. ဘောတိ ယာဂု, ဘောတိယော ယာဂူ, ယာဂုယော. यागु, यागू, यागुयो। यागुं, यागू, यागुयो। यागुया, यागूहिक, यागूभि। यागुया, यागूनं। यागुया, यागूहिक, यागूभि। यागुया, यागूनं। यागुया, यागुयं, यागूसु। भोति यागु, भोतियो यागू, यागुयो. ဧဝံ ‘‘ဓာတု ဓေနု ကာသု ဒဒ္ဒု ကဏ္ဍု ကစ္ဆု ရဇ္ဇု’’ဣစ္စာဒီနိ. တတြ ဓာတုသဒ္ဒေါ ရသရုဓိရမံသမေဒနှာရုအဋ္ဌိအဋ္ဌိမိဉ္ဇသုက္ကသင်္ခါတဓာတုဝါစကော ပုလ္လိင်္ဂေါ, သဘာဝဝါစကော ပန သုဂတာဒီနံ သာရီရိကဝါစကော လောကဓာတုဝါစကော စ စက္ခာဒိဝါစကော စ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ, ဘူ ဟူ ကရပစာဒိသဒ္ဒဝါစကော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါစေဝ ပုလ္လိင်္ဂေါ စ. အတြ ပနိတ္ထိလိင်္ဂေါ အဓိပ္ပေတော. याचप्रमाणे “धातु, धेनु, कासु, दद्दु, कण्डु, कच्छु, रज्जु” इत्यादी शब्द चालतात. त्यामध्ये 'धातु' हा शब्द रस, रक्त, मांस, मेद, स्नायू, अस्थी, अस्थिमज्जा आणि शुक्र या धातूंचा वाचक असताना पुल्लिंगी असतो; स्वभाववाचक (गुणधर्म), सुगत (बुद्ध) इत्यादींच्या शारीरिक धातूंचा (अस्थी अवशेष) वाचक, लोकधातूचा वाचक आणि चक्षू (इंद्रिय) इत्यादींचा वाचक असताना स्त्रीलिंगी असतो; आणि 'भू, हू, कर, पच' इत्यादी क्रियापदांच्या धातूंचा वाचक असताना स्त्रीलिंगी आणि पुल्लिंगी दोन्ही असतो. परंतु येथे स्त्रीलिंगी रूप अभिप्रेत आहे. သဝိနိစ္ဆယောယံဥကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂါနံ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा 'उ'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांच्या नामविभक्ती रूपमालेचा सविस्तर निर्णय आहे. ဥကာရန္တတာပကတိကံ ဥကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. मूळ स्वरूपाने 'उ'कारान्त असणारे स्त्रीलिंगी रूप समाप्त झाले. ဣဒါနိ ဘူသဒ္ဒါဒီနံ နာမိကပဒမာလံ ဝက္ခာမ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ – आता पूर्वाचार्यांचे मत अग्रभागी ठेवून 'भू' इत्यादी शब्दांची नामविभक्ती रूपमाला सांगू - ဇမ္ဗူ, ဇမ္ဗူ, ဇမ္ဗုယော. ဇမ္ဗုံ, ဇမ္ဗူ, ဇမ္ဗုယော. ဇမ္ဗုယာ, ဇမ္ဗူဟိ, ဇမ္ဗူဘိ. ဇမ္ဗုယာ, ဇမ္ဗူနံ. ဇမ္ဗုယာ, ဇမ္ဗူဟိ, ဇမ္ဗူဘိ. ဇမ္ဗုယာ[Pg.273], ဇမ္ဗူနံ. ဇမ္ဗုယာ, ဇမ္ဗုယံ, ဇမ္ဗူသု. ဘောတိ ဇမ္ဗု, ဘောတိယော ဇမ္ဗူ, ဇမ္ဗုယော. ယမကမဟာထေရမတံ. जम्बू, जम्बू, जम्बुयो। जम्बुं, जम्बू, जम्बुयो। जम्बुया, जम्बूहि, जम्बूभि। जम्बुया, जम्बूनं। जम्बुया, जम्बूहि, जम्बूभि। जम्बुया, जम्बूनं। जम्बुया, जम्बुयं, जम्बूसु। भोति जम्बु, भोतियो जम्बू, जम्बुयो। हे यमक महाथेरांचे मत आहे. ဧတ္ထ ဇမ္ဗူသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တံ ‘‘အမ္ဗာ သာလာ စ ဇမ္ဗုယော’’တိအာဒိနာ ပသိဒ္ဓံ. ‘‘ဣမေ တေ ဇမ္ဗုကာ ရုက္ခာ’’တိ ဧတ္ထ ပန ရုက္ခသဒ္ဒံ အပေက္ခိတွာ ‘‘ဇမ္ဗုကာ’’တိ ပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော ကတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ဇမ္ဗူတိ ကထေတဗ္ဗာတိ ဇမ္ဗုကာ. ကေ ရေ ဂေ သဒ္ဒေတိ ဓာတု. အထ ဝါ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဇမ္ဗူ ဧဝ ဇမ္ဗုကာ, ဇမ္ဗုကာ စ တာ ရုက္ခာ စာတိ ဇမ္ဗုကာရုက္ခာ, ယထာ လင်္ကာဒီပေါ, ပုလ္လိင်္ဂပက္ခေ ဝါ သမာသဝသေန ‘‘ဇမ္ဗုကရုက္ခာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ဂါထာဝိသယတ္တာ ဆန္ဒာနုရက္ခဏတ္ထံ ဒီဃံ ကတွာ ‘‘ဇမ္ဗုကာရုက္ခာ’’တိ ဝုတ္တံ ‘‘သရဏာဂမနေ ကဉ္စီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. येथे 'जम्बू' शब्दाचे स्त्रीलिंगी असणे “अम्बा साला च जम्बुयो” इत्यादी प्रयोगांवरून प्रसिद्ध आहे. “इme ते जम्बुका रुक्खा” येथे मात्र 'रुक्ख' (वृक्ष) शब्दाचा विचार करून “जम्बुका” असा पुल्लिंगी निर्देश केला आहे असे समजावे. कारण 'जम्बू' असे म्हणावे म्हणून 'जम्बुका' असा शब्द बनतो. 'के रे गे सद्देति' हा धातू आहे. किंवा स्त्रीलिंगाच्या दृष्टीने 'जम्बू' म्हणजेच 'जम्बुका', आणि 'जम्बुका' असणारे ते 'रुक्खा' (वृक्ष) म्हणून 'जम्बुकारुक्खा' (जम्बुकावृक्ष), जसे 'लङ्कादीपो' (लंकाद्वीप). किंवा पुल्लिंगी पक्षात समासामुळे “जम्बुकरुक्खा” असे म्हणायचे असताना, गाथेचा विषय असल्यामुळे छंदाचे रक्षण करण्यासाठी दीर्घ करून “जम्बुकारुक्खा” असे म्हटले आहे, जसे “सरणागमने कञ्ची” या उदाहरणात झाले आहे. ဘူ, ဘူ, ဘုယော. ဘုံ, ဘူ, ဘုယော. ဘုယာ, ဘူဟိ, ဘူဘိ. ဘုယာ, ဘူနံ. ဘုယာ, ဘူဟိ, ဘူဘိ. ဘုယာ, ဘူနံ. ဘုယာ, ဘုယံ, ဘူသု. ဘောတိ ဘု, ဘောတိယော ဘူ, ဘုယော. भू, भू, भुयो। भुं, भू, भुयो। भुया, भूहि, भूभि। भुया, भूनं। भुया, भूहि, भूभि। भुया, भूनं। भुया, भुयं, भूसु। भोति भु, भोतियो भू, भुयो. ဧဝံ ‘‘အဘူ, အဘူ, အဘုယော. အဘုံ, အဘူ, အဘုယော. အဘုယာ’’တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာ. အတြ ‘‘အဘုံ မေ ကထံ နု ဘဏသိ, ပါပကံ ဝတ ဘာသသီ’’တိ နိဒဿနပဒံ. याचप्रमाणे “अभू, अभू, अभुयो। अभुं, अभू, अभुयो। अभुया” इत्यादी रूपे योजावीत. येथे “अभुं मे कथं नु भणसि, पापकं वत भाससि” (तू माझ्याशी असत्य कसे काय बोलतोस, खरोखर तू पापयुक्त बोलत आहेस) हे उदाहरणाचे वाक्य आहे. ‘‘ဝဓူ စ သရဘူ စေဝ, သရဗူ သုတနူ စမူ; ဝါမူရူ နာဂနာသူရူ’’, ဣစ္စာဒီ ဇမ္ဗုယာ သမာ. “वधू, सरभू, सरबू, सुतनू, चमू, वामूरू, नागनासूरू” इत्यादी शब्द 'जम्बू' शब्दाप्रमाणे चालतात. ဣဒံ ပန သုခုမံ ဌာနံ သုဋ္ဌု မနသိ ကာတဗ္ဗံ. ‘‘ဝဒညူ, ဝဒညူ, ဝဒညုယော. ဝဒညုံ, ဝဒညူ, ဝဒညုယော. ဝဒညုယာ’’တိ ဇမ္ဗူသမံ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဧဝံ ‘‘မဂ္ဂညူ ဓမ္မညူ ကတညူ’’ဣစ္စာဒီသုပိ. परंतु हा सूक्ष्म विषय चांगल्या प्रकारे मनात ठेवावा. “वदञ्ञू, वदञ्ञू, वदञ्ञुयो। वदञ्ञुं, वदञ्ञू, वदञ्ञुयो। वदञ्ञुया” अशी रूपे 'जम्बू' शब्दाप्रमाणे योजावीत. याचप्रमाणे “मग्गञ्ञू, धम्मञ्ञू, कतञ्ञू” इत्यादी शब्दांच्या बाबतीतही समजावे. နနု စ ဘော – पण अहो महाशय - ‘‘သောဟံ နူန ဣတော ဂန္တွာ, ယောနိံ လဒ္ဓါန မာနုသိံ; ဝဒညူ သီလသမ္ပန္နော, ကာဟာမိ ကုသလံ ဗဟု’’န္တိ “मी येथून जाऊन, मनुष्य योनी प्राप्त करून, वदान्य (दानशूर) आणि शीलसंपन्न होऊन पुष्कळ कुशल कर्म करीन” - ဧဝမာဒိပ္ပယောဂဒဿနတော ဝဒညူသဒ္ဒါဒီနံ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝေါ ပသိဒ္ဓေါ, ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ ဣဓ ဣတ္ထိလိင်္ဂနယော ဒဿိတောတိ? ဝဒညူဣစ္စာဒီနံ ဧကန္တပုလ္လိင်္ဂဘာဝါဘာဝတော ဒွိလိင်္ဂါနိ တေသံ ဝါစ္စလိင်္ဂတ္တာ. တထာ ဟိ – इत्यादी प्रयोगांवरून 'वदञ्ञू' इत्यादी शब्दांचे पुल्लिंगी असणे प्रसिद्ध आहे, असे असताना येथे स्त्रीलिंगी नियम का दाखवला आहे? कारण 'वदञ्ञू' इत्यादी शब्द केवळ पुल्लिंगीच नसतात, तर ते विशेषण (वाच्यलिङ्ग) असल्यामुळे दोन्ही लिंगांत (द्विलिंगी) असतात. कारण की - ‘‘သာဟံ ဂန္တွာ မနုဿတ္တံ, ဝဒညူ ဝီတမစ္ဆရာ; သံဃေ ဒါနာနိ ဒဿာမိ, အပ္ပမတ္တာ ပုနပ္ပုန’’န္တိ စ, “ती मी मनुष्यत्व प्राप्त करून, वदान्य (दानशूर) आणि मत्सररहित होऊन, संघात अप्रमत्त राहून पुन्हा पुन्हा दान देईन” असेही प्रयोग आढळतात. ‘‘ကောဓနာ အကတညူ စာ’’တိ စ ဣတ္ထိလိင်္ဂပယောဂိကာ ဗဟူ ပါဠိယော ဒိဿန္တိ, တသ္မာ ဧဝံ နီတိ အမှေဟိ ဌပိတာ. “कोधना अकतञ्ञू चा” (क्रोधी आणि कृतघ्न) असे स्त्रीलिंगी प्रयोगाचे अनेक पाळी (पाळि-पाठ) दिसून येतात, म्हणूनच आमच्याद्वारे असा नियम प्रस्थापित केला गेला आहे। သဝိနိစ္ဆယောယံ ဦကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा 'ऊ'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दांच्या मूळ रूपाचा (प्रकृती रूपाचा) सविस्तार निर्णयांसह नामपदमाला विभाग आहे। ဦကာရန္တတာပကတိကံ ဦကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. 'ऊ'कारान्त प्रकृती असलेले 'ऊ'कारान्त स्त्रीलिंगी प्रकरण समाप्त झाले। ဩကာရန္တပဒံ ဘူဓာတုမယံ ဣတ္ထိလိင်္ဂမပ္ပသိဒ္ဓံ, အညံ ပနောကာရန္တံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ ပသိဒ္ဓံ. 'भू' धातूपासून बनलेले 'ओ'कारान्त स्त्रीलिंगी पद अप्रसिद्ध आहे, परंतु इतर 'ओ'कारान्त स्त्रीलिंगी पद प्रसिद्ध आहे। ဩကာရန္တံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ, ဂေါသဒ္ဒေါတိ ဝိဘာဝယေ; ဂေါသဒ္ဒဿေဝ ပုလ္လိင်္ဂေ, ရူပမဿာဟု ကေစန; 'ओ'कारान्त स्त्रीलिंगी शब्द 'गो' शब्द आहे असे समजावे; काही आचार्य या 'गो' शब्दाची पुल्लिंगाप्रमाणेच रूपे होतात असे म्हणतात। တထာ ဟိ ကေစိ ‘‘ဂေါ, ဂါဝေါ, ဂဝေါ. ဂါဝု’’န္တိအာဒိနာ နယေန ဝုတ္တာနိ ပုလ္လိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ရူပါနိ ဝိယ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ရူပါနိ ဣစ္ဆန္တိ, တေသံ မတေ မဇ္ဈေ ဘိန္နသုဝဏ္ဏာနံ ဝဏ္ဏဝိသေသာဘာဝေါ ဝိယ ရူပဝိသေသာဘာဝတော ဂေါသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝပဋိပါဒနံ အနိဇ္ဈာနက္ခမံ. ကသ္မာတိ စေ? ယသ္မာ မာတုဂါမသဒ္ဒဿ ‘‘မာတုဂါမော, မာတုဂါမာ. မာတုဂါမ’’န္တိအာဒိနာ နယေန ဒွေ ပဒမာလာ ကတွာ ဧကာ ပုလ္လိင်္ဂဿ ပဒမာလာ, ဧကာ ဣတ္ထိလိင်္ဂပဒမာလာတိ ဝုတ္တဝစနံ ဝိယ ဣဒံ ဝစနံ အမှေ ပဋိဘာတိ, တသ္မာ အနိဇ္ဈာနက္ခမံ. कारण की, काही लोक “गो, गावो, गवो, गावुं” इत्यादी पद्धतीने सांगितलेली पुल्लिंगी 'गो' शब्दाची रूपे जशी आहेत, तशीच स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाची रूपे मानतात. त्यांच्या मते, वेगवेगळ्या सोन्याच्या तुकड्यांमध्ये जसा रंगाचा विशेष फरक नसतो, तसाच रूपांमध्ये विशेष फरक नसल्यामुळे 'गो' शब्दाचे स्त्रीलिंगीत्व सिद्ध करणे विचार करण्यायोग्य (ग्राह्य) वाटत नाही. असे का? कारण, 'मातुगाम' (स्त्री) शब्दाची “मातुगामो, मातुगामा, मातुगामं” इत्यादी पद्धतीने दोन पदमाला करून, एक पुल्लिंगी पदमाला आणि एक स्त्रीलिंगी पदमाला आहे, असे म्हणण्यासारखेच हे वचन आम्हाला वाटते, म्हणूनच हे विचार करण्यायोग्य नाही। အပိစ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ရူပေသု ပုလ္လိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ရူပေဟိ သမေသု သန္တေသု ကထံ ဂေါသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေါ [Pg.275] သိယာ? ရူပမာလာဝိသေသာဘာဝတော. ယထာ ဟိ ရတ္တိ အဂ္ဂိ အဋ္ဌိသဒ္ဒါနံ ဣကာရန္တဘာဝေန သမတ္တေပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂပုမနပုံသကလိင်္ဂလက္ခဏဘူတော ရူပမာလာဝိသေသော ဒိဿတိ. ယထာ ပန ဒွိန္နံ ဓာတုသဒ္ဒါနံ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂပရိယာပန္နာနံ ရူပမာလာဝိသေသော ဒိဿတိ, န တထာ တေဟာစရိယေဟိ အဘိမတဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ရူပမာလာဝိသေသော ဒိဿတိ. ယထာ ပန ဒွိန္နံ ဓာတုသဒ္ဒါနံ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂပရိယာပန္နာနံ ရူပမာလာဝိသေသော ဘဝတိ, ယထာ ဒွိန္နံ ဂေါသဒ္ဒါနံ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂပရိယာပန္နာနံ ရူပမာလာဝိသေသေန ဘဝိတဗ္ဗံ, ယထာ စ ဒွိန္နံ အာယုသဒ္ဒါနံ ပုန္နပုံသကလိင်္ဂပရိယာပန္နာနံ ရူပမာလာဝိသေသော ဒိဿတိ, တထာ ဒွိန္နံ ဂေါသဒ္ဒါနံ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂပရိယာပန္နာနံ ရူပမာလာဝိသေသေန ဘဝိတဗ္ဗံ. အဝိသေသတ္တေ သတိ ကထံ တေသံ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂဝဝတ္ထာနံ သိယာ, ကထဉ္စ ဝိသဒါဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ သိယာ. ဣဒံ ဌာနံ အတီဝ သဏှသုခုမံ ပရမဂမ္ဘီရံ မဟာဂဟနံ န သက္ကာ သဗ္ဗသတ္တာနံ မူလဘာသာဘူတာယ သဗ္ဗညုဇိနေရိတာယ မာဂဓိကာယ သဘာဝနိရုတ္တိယာ နယံ သမ္မာ အဇာနန္တေန အကတဉာဏသမ္ဘာရေန ကေနစိ အဇ္ဈောဂါဟေတုံ ဝါ ဝိဇဋေတုံ ဝါ, အမှာကံ ပန မတေ ဒွိန္နံ ဂေါသဒ္ဒါနံ ရူပမာလာဝိသေသော စေဝ ဒိဿတိ, ပုမိတ္ထိလိင်္ဂဝဝတ္ထာနဉ္စ ဒိဿတိ, ဝိသဒါဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ စ ဒိဿတိ, နပုံသကလိင်္ဂဿ တဒုဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရတာ စ ဒိဿတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. शिवाय, स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाची रूपे पुल्लिंगी 'गो' शब्दाच्या रूपांसारखीच असताना, 'गो' शब्दाचे स्त्रीलिंगीत्व कसे असू शकेल? कारण रूपमालेमध्ये काही विशेष फरक नाही. जसे की 'रत्ति' (रात्र), 'अग्गि' (अग्नी) आणि 'अट्ठि' (हाड) या शब्दांचे 'इ'कारान्तत्व समान असूनही, स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगाचे लक्षण दर्शवणारा रूपमालेतील विशेष फरक दिसून येतो. परंतु, ज्याप्रमाणे पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगात समाविष्ट असलेल्या दोन 'धातु' शब्दांचा रूपमाला-विशेष दिसून येतो, तसा त्या आचार्यांनी मानलेल्या स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाचा रूपमाला-विशेष दिसून येत नाही. परंतु, ज्याप्रमाणे पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगात समाविष्ट असलेल्या दोन 'धातु' शब्दांचा रूपमाला-विशेष असतो, त्याचप्रमाणे पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगात समाविष्ट असलेल्या दोन 'गो' शब्दांचा रूपमाला-विशेष असायला हवा; आणि ज्याप्रमाणे पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगात समाविष्ट असलेल्या दोन 'आयु' शब्दांचा रूपमाला-विशेष दिसून येतो, त्याचप्रमाणे पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगात समाविष्ट असलेल्या दोन 'गो' शब्दांचा रूपमाला-विशेष असायला हवा. जर फरकच नसेल, तर त्यांचे पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंग असे वर्गीकरण कसे होणार, आणि स्पष्ट व अस्पष्ट स्वरूपाचा व्यवहार कसा होणार? हे स्थान अत्यंत सूक्ष्म, परम गंभीर आणि अत्यंत गहन आहे. सर्व प्राण्यांची मूळ भाषा असलेल्या, सर्वज्ञ जिनांनी (बुद्धांनी) उपदेशिलेल्या मागधी (पाली) या स्वाभाविक भाषेचा नियम नीट न जाणणाऱ्या आणि ज्ञानाचा संचय न केलेल्या कोणत्याही व्यक्तीला यात प्रवेश करणे किंवा याचे विश्लेषण करणे शक्य नाही. परंतु, आमच्या मते, दोन 'गो' शब्दांचा रूपमाला-विशेषही दिसून येतो, पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगाचे वर्गीकरणही दिसून येते, स्पष्ट व अस्पष्ट स्वरूपाचा व्यवहारही दिसून येतो, आणि नपुंसकलिंगाचा त्या दोन्हीहून मुक्त असलेला व्यवहारही दिसून येतो, असे समजावे। ဣဒါနိ ဣမဿတ္ထဿ အာဝိဘာဝတ္ထံ ဣမသ္မိံ ဌာနေ ဣမံ နီတိံ ဌပေဿာမ. ဧဝဉှိ သတိ ပရိယတ္တိသာသနေ ပဋိပန္နကာ နိက္ကင်္ခဘာဝေန န ကိလမိဿန္တိ. ဧတ္ထ တာဝ အတ္ထဂ္ဂဟဏေ ဝိညူနံ ကောသလ္လုပ္ပာဒနတ္ထံ တိဿော နာမိကပဒမာလာယော ကထေဿာမ – သေယျထိဒံ? आता या अर्थाच्या स्पष्टीकरणासाठी आम्ही या ठिकाणी हा नियम प्रस्थापित करू. असे केल्याने, पर्यत्ती शासनात (धम्मशिक्षणात) प्रवृत्त झालेले लोक संशयरहित होऊन त्रासून जाणार नाहीत. येथे प्रथम अर्थ समजून घेण्यासाठी विद्वानांमध्ये कौशल्य निर्माण व्हावे म्हणून आम्ही तीन नामपदमाला सांगू – त्या खालीलप्रमाणे आहेत: ဂါဝီ, ဂါဝီ, ဂါဝိယော. ဂါဝိံ, ဂါဝီ, ဂါဝိယော. ဂါဝိယာ, ဂါဝီဟိ, ဂါဝီဘိ. ဂါဝိယာ, ဂါဝီနံ. ဂါဝိယာ, ဂါဝီဟိ, ဂါဝီဘိ. ဂါဝိယာ[Pg.276], ဂါဝီနံ. ဂါဝိယာ, ဂါဝိယံ, ဂါဝီသု. ဘောတိ ဂါဝိ, ဘောတိယော ဂါဝီ, ဂါဝိယော. गावी, गावी, गावियो। गाविं, गावी, गावियो। गाविया, गावीहि, गावीभि। गाविया, गावीनं। गाविया, गावीहि, गावीभि। गाविया, गावीनं। गाविया, गावियं, गावीसु। भोति गावि, भोतियो गावी, गावियो। အယံ ဂေါသဒ္ဒတော ဝိဟိတဿ ဤပစ္စယဿ ဝသေန နိပ္ဖန္နဿ ဣတ္ထိဝါစကဿ ဤကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂါဝီသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. ही 'गो' शब्दाला लावलेल्या 'ई' प्रत्ययामुळे निष्पन्न झालेल्या, स्त्री-वाचक 'ई'कारान्त स्त्रीलिंगी 'गावी' शब्दाची नामपदमाला आहे। ဂေါ, ဂါဝေါ, ဂဝေါ. ဂါဝုံ, ဂါဝံ, ဂဝံ, ဂါဝေါ, ဂဝေါ. ဂါဝေန, ဂဝေန, ဂေါဟိ, ဂေါဘိ. ဂါဝဿ, ဂဝဿ, ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ. ဂါဝါ, ဂါဝသ္မာ, ဂါဝမှာ, ဂဝါ, ဂဝသ္မာ, ဂဝမှာ, ဂေါဟိ, ဂေါဘိ. ဂါဝဿ, ဂဝဿ, ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ. ဂါဝေ, ဂါဝသ္မိံ, ဂါဝမှိ, ဂဝေ, ဂဝသ္မိံ, ဂဝမှိ, ဂါဝေသု, ဂဝေသု, ဂေါသု. ဘော ဂေါ, ဘဝန္တော ဂါဝေါ, ဂဝေါ. गो, गावो, गवो। गावुं, गावं, गवं, गावो, गवो। गावेन, गवेन, गोहि, गोभि। गावस्स, गवस्स, गवं, गुन्नं, गोनं। गावा, गावस्मा, गावम्हा, गवा, गवस्मा, गवम्हा, गोहि, गोभि। गावस्स, गवस्स, गवं, गुन्नं, गोनं। गावे, गावस्मिं, गावम्हि, गवे, गवस्मिं, गवम्हि, गावेसु, गवेसु, गोसु। भो गो, भवन्तो गावो, गवो। အယံ ပုမဝါစကဿ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ. ही पुरुष-वाचक 'ओ'कारान्त पुल्लिंगी 'गो' शब्दाची नामपदमाला आहे। ဂေါ, ဂါဝီ, ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ. ဂါဝံ, ဂဝံ, ဂါဝိံ, ဂါဝေါ, ဂါဝီ ဂဝေါ. ဂေါဟိ, ဂေါဘိ. ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ. ဂေါဟိ, ဂေါဘိ. ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ. ဂေါသု. ဘောတိ ဂေါ, ဘောတိယော ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ. အယံ ပုမိတ္ထိဝါစကဿ ဩကာရန္တဿိတ္ထိပုလ္လိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒနာမိကပဒမာလာ. गो, गावी, गावो, गावी, गवो। गावं, गवं, गाविं, गावो, गावी, गवो। गोहि, गोभि। गवं, गुन्नं, गोनं। गोहि, गोभि। गवं, गुन्नं, गोनं। गोसु। भोति गो, भोतियो गावो, गावी, गवो। ही स्त्री-पुरुष-वाचक 'ओ'कारान्त स्त्री-पुल्लिंगी 'गो' शब्दाची नामपदमाला आहे। ဧတ္ထ ပန ‘‘ဂါဝု’’န္တိ ပဒံ ဧကန္တပုမဝါစကတ္တာ န ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ, ဧကန္တပုမဝါစကတ္တဉ္စဿ အာဟစ္စပါဠိယာ ဉာယတိ ‘‘ဣဓ ပန ဘိက္ခဝေ ဝဿူပဂတံ ဘိက္ခုံ ဣတ္ထီ နိမန္တေသိ ‘ဧဟိ ဘန္တေ, ဟိရညံ ဝါ တေ ဒေမိ, သုဝဏ္ဏံ ဝါ တေ ဒေမိ, ခေတ္တံ ဝါ တေ ဒေမိ, ဝတ္ထုံ ဝါ တေ ဒေမိ, ဂါဝုံ ဝါ တေ ဒေမိ, ဂါဝိံ ဝါ တေ ဒေမိ. ဒါသံ ဝါ တေ ဒေမိ, ဒါသိံ ဝါ တေ ဒေမိ, ဓီတရံ ဝါ တေ ဒေမိ ဘရိယတ္ထာယ, အဟံ ဝါ တေ ဘရိယာ ဟောမိ, အညံ ဝါ တေ ဘရိယံ အာနေမီ’တိ’’ ဧဝံ အာဟစ္စပါဠိယာ ဉာယတိ. येथे “गावुं” हे पद केवळ पुल्लिंगी वाचक असल्यामुळे (या स्त्रीलिंगी/स्त्री-पुल्लिंगी पदमालेत) सांगितले गेले नाही असे समजावे, आणि त्याचे केवळ पुल्लिंगी वाचक असणे थेट पाळीवरून (मूळ पाठावरून) समजते: “येथे, भिक्खूंनो! वर्षावास पत्करलेल्या भिक्खूला एखादी स्त्री निमंत्रित करते की, 'या भन्ते, मी आपल्याला नाणी (हिरण्य) देते, किंवा सोने देते, किंवा शेत देते, किंवा वास्तू (जागा) देते, किंवा बैल (गावुं) देते, किंवा गाय (गाविं) देते, किंवा दास देते, किंवा दासी देते, किंवा पत्नी बनवण्यासाठी मुलगी देते, किंवा मी स्वतः आपली पत्नी होते, किंवा आपल्यासाठी दुसरी पत्नी आणून देते'.” अशा प्रकारे थेट पाळीवरून हे समजते। ဧတ္ထ [Pg.277] ဟိ ‘‘ဂါဝု’’န္တိ ဝစနေန ပုမာ ဝုတ္တော, ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ ဝစနေန ဣတ္ထီ, ယံ ပန ဣမိဿံ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂပဒမာလာယံ ‘‘ဂါဝီ’’တိ ပဒံ စတုက္ခတ္တုံ ဝုတ္တံ, တံ ‘‘ကညာ’’တိ ပဒံ ဝိယ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာဝိညာပနေ သမတ္ထံ ဟောတိ. န ဟိ ဣတရေသု လိင်္ဂေသု သမာနသုတိကဘာဝေန စတုက္ခတ္တုံ အာဂတပဒံ ဧကမ္ပိ အတ္ထိ, ‘‘ဂါဝီ ဂါဝိ’’န္တိ စ ဣမေသံ သဒ္ဒါနံ ကတ္ထစိ ဌာနေ ဣတ္ထိပုမေသု သာမညဝသေန ပဝတ္တိံ ဥပရိ ကထယိဿာမ. ယာ ပနမှေဟိ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ‘‘ဂေါ, ဂါဝီ, ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ. ဂါဝံ, ဂဝံ, ဂါဝိ’’န္တိအာဒိနာ နယေန ပဒမာလာ ကတာ, တတ္ထ ဂေါသဒ္ဒတော သိယောနံ ဤကာရာဒေသော အံဝစနဿ စ ဣံကာရာဒေသော ဘဝတိ, တေန ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ‘‘ဂါဝီ ဂါဝီ ဂါဝိ’’န္တိ ရူပါနိ ဒဿိတာနိ. တထာ ဟိ မုခမတ္တဒီပနိယံ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒုနာ ဝဇိရဗုဒ္ဓါစရိယေန နိရုတ္တိနယေ ကောသလ္လဝသေန ဂေါသဒ္ဒတော ယောနမီကာရာဒေသော ဝုတ္တော. ယထာ ပန ဂေါသဒ္ဒတော ယောနမီကာရာဒေသော ဘဝတိ, တထာ သိဿီကာရာဒေသော အံဝစနဿ စ ဣံကာရာဒေသော ဘဝတိ. အတြိမာ နယဂ္ဂါဟပရိဒီပနိယော ဂါထာ – येथे 'गावुं' या शब्दाने पुरुष (पुल्लिंग) आणि 'गाविं' या शब्दाने स्त्री (स्त्रीलिंग) दर्शविली आहे. परंतु, या ओकारान्त स्त्रीलिंगी शब्दरूपावलीत जे 'गावी' हे पद चार वेळा आले आहे, ते 'कन्या' या पदाप्रमाणे स्त्रीलिंगाच्या अस्पष्ट व्यवहाराचे ज्ञान करून देण्यास समर्थ आहे. कारण इतर लिंगांमध्ये समान उच्चारामुळे चार वेळा आलेले एकही पद नाही. 'गावी' आणि 'गाविं' या शब्दांची काही ठिकाणी स्त्री आणि पुरुष या दोघांसाठी सामान्य रूपाने होणारी प्रवृत्ती आम्ही पुढे सांगू. आम्ही जी ओकारान्त स्त्रीलिंगी 'गो, गावी, गावो, गावी, गवो. गावं, गवं, गाविं' इत्यादी पद्धतीने शब्दरूपावली तयार केली आहे, त्यामध्ये 'गो' शब्दाहून 'सि' आणि 'यो' प्रत्ययांचा 'ईकार' आदेश होतो आणि 'अं' प्रत्ययाचा 'इंकार' आदेश होतो, त्यामुळे ओकारान्त स्त्रीलिंगी 'गावी, गावी, गाविं' अशी रूपे दर्शविली आहेत. तसेच 'मुखमत्तदीपनी' मध्ये व्याकरणतज्ज्ञ वजिरबुद्धाचार्यांनी निरुक्तीच्या नियमातील कौशल्यामुळे 'गो' शब्दाहून 'यो' प्रत्ययाचा 'ईकार' आदेश सांगितला आहे. ज्याप्रमाणे 'गो' शब्दाहून 'यो' प्रत्ययाचा 'ईकार' आदेश होतो, त्याचप्रमाणे 'सि' प्रत्ययाचा 'ईकार' आदेश आणि 'अं' प्रत्ययाचा 'इंकार' आदेश होतो. याविषयी नय ग्रहण करून देणाऱ्या गाथा खालीलप्रमाणे आहेत – ဤပစ္စယာ သိဒ္ဓေသွပိ, ‘‘ဂါဝီ ဂါဝီ’’တိအာဒိသု; ပဌမေကဝစနာဒိ-အန္တေသု ဇိနသာသနေ. जिनशासनात प्रथमेच्या एकवचनापासून ते शेवटापर्यंत 'गावी, गावी' इत्यादी रूपे 'ई' प्रत्यय लावून सिद्ध होत असली तरी, ဝဒတာ ယောနမီကာရံ, ဂေါသဒ္ဒဿိတ္ထိယံ ပန; အဝိသဒတ္တမက္ခာတုံ, နယော ဒိန္နောတိ နော ရုစိ. परंतु स्त्रीलिंगात 'गो' शब्दाच्या 'यो' प्रत्ययाचा 'ईकार' आदेश सांगणाऱ्या आचार्यांनी अस्पष्टता प्रकट करण्यासाठी हा नियम दिला आहे, असे आमचे मत आहे. ကိဉ္စ ဘိယျော အဋ္ဌကထာသု စ – आणखी काय, अट्ठकथांमध्ये देखील – ‘‘ဂါဝေါ’’တိ ဝတွာ ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ-ဝစနေန ပနိတ္ထိယံ; အဝိသဒတ္တမက္ခာတုံ, နယော ဒိန္နောတိ နော ရုစိ. 'गावो' असे म्हणून पुन्हा स्त्रीलिंगात 'गाविं' या शब्दाने अस्पष्टता प्रकट करण्यासाठी हा नियम दिला आहे, असे आमचे मत आहे. တထာ ဟိ သမန္တပါသာဒိကာဒီသု အဋ္ဌကထာသု ‘‘ဆေကော ဟိ ဂေါပါလကော သက္ခရာယော ဥစ္ဆင်္ဂေန ဂဟေတွာ ရဇ္ဇုဒဏ္ဍဟတ္ထော ပါတောဝ ဝဇံ ဂန္တွာ ဂါဝေါ ပိဋ္ဌိယံ ပဟရိတွာ ပလိဃထမ္ဘမတ္ထကေ [Pg.278] နိသိန္နော ဒွါရံ ပတ္တံ ပတ္တံ ဂါဝိံ ‘ဧကော ဒွေ’တိ သက္ခရံ ခိပိတွာ ဂဏေတီ’’တိ ဣမသ္မိံ ပဒေသေ ‘‘ဂါဝေါ’’တိ ဝတွာ ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ ဝစနေန ဣတ္ထိပုမဝါစကဿ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ ဝိဟိတာ. ‘‘ဂါဝေါ’’တိ ဟိ ဣမိနာ သာမညတော ဣတ္ထိပုမဘူတာ ဂေါဏာ ဂဟိတာ, တထာ ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ ဣမိနာပိ ဣတ္ထိဘူတော ပုမဘူတော စ ဂေါဏော. ဧဝံ ‘‘ဂါဝေါ’’တိ စ ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ စ ဣမေ သဒ္ဒါ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူဟိ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ နိရုတ္တိနယကုသလတာယ သမာနလိင်္ဂဝသေန ဧကသ္မိံယေဝ ပကရဏေ ဧကသ္မိံယေဝ ဝါကျေ ပိဏ္ဍီကတာ. ယဒိ ဟိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တမာနဿ ဣတ္ထိပုမဝါစကဿ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ပဒမာလာယံ ‘‘ဂါဝီ ဂါဝိ’’မိစ္စေတာနိ ရူပါနိ န လဗ္ဘေယျုံ, အဋ္ဌကထာယံ ‘‘ဂါဝေါ’’တိ ဝတွာ ‘‘ဂါဝ’’န္တိစ္စေဝ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ, ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ ပန န ဝတ္တဗ္ဗံ. ယထာ စ ပန အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ‘‘ဂါဝေါ’’တိ ဣတ္ထိပုမဝသေန သဗ္ဗေသံ ဂုန္နံ သင်္ဂါဟကဝစနံ ဝတွာ တေယေဝ ဂါဝေါ သန္ဓာယ ပုန ‘‘ဒွါရံ ပတ္တံ ပတ္တံ ဂါဝိ’’န္တိ သဒ္ဒရစနံ ကုဗ္ဗိံသု, တသ္မာ ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ ဣဒမ္ပိ သဗ္ဗသင်္ဂါဟကဝစနမေဝါတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အသဗ္ဗသင်္ဂါဟကဝစနံ ဣဒံ ဂါဝီသဒ္ဒေန ဣတ္ထိယာယေဝ ဂဟေတဗ္ဗတ္တာတိ စေ? န, ပကရဏဝသေန အတ္ထန္တရဿ ဝိဒိတတ္တာ. န ဟိ သဗ္ဗဝဇေသု ‘‘ဣတ္ထိယောယေဝ ဝသန္တိ, န ပုမာနော’’တိ စ, ‘‘ပုမာနောယေဝ ဝသန္တိ, န ဣတ္ထိယော’’တိ စ သက္ကာ ဝတ္တုံ. အပိစ ‘‘ဂါဝိမ္ပိ ဒိသွာ ပလာယန္တိ ‘ဘိက္ခူ’တိ မညမာနာ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ, ဧတ္ထာပိ ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ ဝစနေန ဣတ္ထိဘူတော ပုမဘူတော စ သဗ္ဗော ဂေါ ဂဟိတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣတရထာ ‘‘ဣတ္ထိဘူတောယေဝ ဂေါ ဘိက္ခူတိ မညိတဗ္ဗော’’တိ အာပဇ္ဇတိ. ဣတိ ပါဠိနယေန ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တမာနမှာ ဣတ္ထိပုမဝါစကသ္မာ ဂေါသဒ္ဒတော အံဝစနဿ ဣံကာရာဒေသော ဟောတီတိ ဝိညာယတိ. तसेच समन्तपासादिका इत्यादी अट्ठकथांमध्ये 'चतुर गोपाळ आपल्या पदरात खडे घेऊन, हातात दोरी व काठी घेऊन पहाटेच गोठ्यात जातो, गाईंच्या पाठीवर मारून आणि वेशीच्या खांबावर बसून दारापाशी आलेल्या प्रत्येक गाईला (किंवा बैलाला) 'एक, दोन' असे म्हणून खडा फेकून मोजतो' या संदर्भात 'गावो' असे म्हणून पुन्हा 'गाविं' या शब्दाने स्त्री व पुरुष दोन्ही दर्शविणाऱ्या ओकारान्त स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाच्या अस्पष्ट व्यवहाराचे विधान केले आहे. 'गावो' या शब्दाने सामान्यतः स्त्री व पुरुष दोन्ही असलेले गोधन घेतले जाते, तसेच 'गाविं' या शब्दाने देखील स्त्रीरूप आणि पुरुषरूप असलेले गोधन घेतले जाते. अशा प्रकारे 'गावो' आणि 'गाविं' हे शब्द व्याकरणतज्ज्ञ अट्ठकथाचार्यांनी निरुक्तीच्या नियमातील कुशलतेमुळे समान लिंगाच्या आधारे एकाच प्रकरणात आणि एकाच वाक्यात एकत्र केले आहेत. जर स्त्रीलिंगात वापरल्या जाणाऱ्या, स्त्री व पुरुष दोन्ही दर्शविणाऱ्या ओकारान्त स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाच्या पदमालेत 'गावी, गाविं' ही रूपे मिळाली नसती, तर अट्ठकथेत 'गावो' असे म्हणून 'गावं' असेच म्हणावे लागले असते, 'गाविं' असे म्हणता आले नसते. आणि ज्याप्रमाणे अट्ठकथाचार्यांनी 'गावो' असे स्त्री व पुरुष दोन्हीच्या अर्थाने सर्व गोधनाचा संग्रह करणारे वचन वापरून, त्याच गाई-बैलांच्या संदर्भात पुन्हा 'दारापाशी आलेल्या प्रत्येक गाविं' अशी शब्दरचना केली, त्यावरून 'गाविं' हे देखील सर्वसंग्राहक वचनच आहे असे समजावे. जर कोणी असे म्हटले की, हे सर्वसंग्राहक वचन नाही, कारण 'गावी' शब्दाने केवळ स्त्रीच घेतली पाहिजे? तर तसे नाही, कारण प्रकरणाच्या संदर्भावरून दुसरा अर्थ स्पष्ट होतो. सर्व गोठ्यांमध्ये 'केवळ गाईच राहतात, बैल नाही' किंवा 'केवळ बैलच राहतात, गाई नाही' असे म्हणता येत नाही. शिवाय, 'गाविंपि दिस्वा पलायन्ति भिक्खूति मञ्ञमाना' अशी पाळी आढळते, येथेही 'गाविं' या शब्दाने स्त्रीरूप आणि पुरुषरूप असलेले सर्व गोधन घेतले आहे असे समजावे. अन्यथा 'केवळ स्त्रीरूप असलेल्या गाईलाच भिक्खू समजावे' असा प्रसंग येईल. अशा प्रकारे पाळीच्या नियमानुसार स्त्रीलिंगात वापरल्या जाणाऱ्या, स्त्री व पुरुष दोन्ही दर्शविणाऱ्या 'गो' शब्दाहून 'अं' प्रत्ययाचा 'इंकार' आदेश होतो, हे समजते. ဝဇိရဗုဒ္ဓါစရိယေနပိ [Pg.279] ဂေါသဒ္ဒတော ဤပစ္စယေ ကာတဗ္ဗေပိ အကတွာ ယောနမီကာရာဒေသော ကတော. တဿာဓိပ္ပာယော ဧဝံ သိယာ ဂေါသဒ္ဒတော ဤပစ္စယေ ကတေ သတိ ဤပစ္စယဝသေန ‘‘ဂါဝီ’’တိ နိပ္ဖန္နသဒ္ဒေါ ယတ္ထ ကတ္ထစိ ဝိသယေ ‘‘မိဂီ မောရီ ကုက္ကုဋီ’’ဣစ္စာဒယော ဝိယ ဣတ္ထိဝါစကောယေဝ သိယာ, န ကတ္ထစိပိ ဣတ္ထိပုမဝါစကော, တသ္မာ သာသနာနုကူလပ္ပယောဂဝသေန ယောနမီကာရာဒေသော ကာတဗ္ဗောတိ. ဣတိ ဝဇိရဗုဒ္ဓါစရိယမတေ ဂေါသဒ္ဒတော ယောနံ ဤကာရာဒေသော ဟောတီတိ ဉာယတိ. वजिरबुद्धाचार्यांनी देखील 'गो' शब्दाहून 'ई' प्रत्यय करणे शक्य असतानाही तो न करता 'यो' प्रत्ययाचा 'ईकार' आदेश केला आहे. त्यांचा अभिप्राय असा असावा की, 'गो' शब्दाहून 'ई' प्रत्यय केल्यास 'ई' प्रत्ययाच्या प्रभावाने 'गावी' हा सिद्ध झालेला शब्द कोणत्याही विषयात 'मृगी, मयुरी, कुक्कुटी' इत्यादींप्रमाणे केवळ स्त्रीलिंगवाचकच होईल, तो कुठेही स्त्री-पुरुष दोन्हीचा वाचक होणार नाही. म्हणून शासनाला अनुकूल अशा प्रयोगासाठी 'यो' प्रत्ययाचा 'ईकार' आदेश केला पाहिजे. अशा प्रकारे वजिरबुद्धाचार्यांच्या मते 'गो' शब्दाहून 'यो' प्रत्ययाचा 'ईकार' आदेश होतो, हे समजते. ကိဉ္စ ဘိယျော – ယသ္မာ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ‘‘ဂါဝေါ ပိဋ္ဌိယံ ပဟရိတွာ’’တိအာဒိနာ နယေန ရစိတာယ ‘‘ဒွါရံ ပတ္တံ ပတ္တံ ဂါဝိံ ‘ဧကော ဒွေ’တိ သက္ခရံ ခိပိတွာ ဂဏေတီ’’တိ ဝစနပရိယောသာနာယ သဒ္ဒရစနာယံ ‘‘ဧကော ဂါဝီ, ဒွေ ဂါဝီ’’တိ အတ္ထယောဇနာနယော ဝတ္တဗ္ဗော ဟောတိ, ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ ဥပယောဂဝစနဉ္စ ဒိဿတိ. ဣတိ အဋ္ဌကထာစရိယာနံ မတေ ဂေါသဒ္ဒတော သိယောနမီကာရာဒေသော အံဝစနဿ ဣံကာရာဒေသော ဟောတီတိ ဉာယတိ. တသ္မာယေဝမှေဟိ ယာ သာ ဩကာရန္တတာပကတိကဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ‘‘ဂေါ, ဂါဝီ, ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ, ဂါဝံ, ဂါဝိ’’န္တိအာဒိနာ နယေန ပဒမာလာ ဌပိတာ, သာ ပါဠိနယာနုကူလာ အဋ္ဌကထာနယာနုကူလာ ကစ္စာယနာစရိယမတံ ဂဟေတွာ ပဒနိပ္ဖတ္တိဇနကဿ ဂရုနော စ မတာနုကူလာ, ‘‘ဂါဝီ’’တိ ပဒဿ စတုက္ခတ္တုံ အာဂတတ္တာ ပန ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတ္တဉ္စ သာဓေတိ. ဣစ္စေသာ ပါဠိနယာဒီသု ဉာဏေန သမ္မာ ဥပပရိက္ခိယမာနေသု အတီဝ ယုဇ္ဇတိ, နတ္ထေတ္ထ အပ္ပမတ္တကောပိ ဒေါသော. ဧတ္ထ ပန ပစ္စတ္တောပယောဂါလပနာနံ ဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဂါဝိယော’’တိ ပဒဉ္စ ကရဏသမ္ပဒါနနိဿက္ကသာမီနမေကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဂါဝိယာ’’တိ ပဒဉ္စ ကရဏနိဿက္ကာနံ ဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဂါဝီဟိ ဂါဝီဘီ’’တိ ပဒါနိ စ သမ္ပဒါနသာမီနံ [Pg.280] ဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဂါဝီန’’န္တိ ပဒဉ္စ ဘုမ္မဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဂါဝိယာ, ဂါဝိယံ, ဂါဝီသူ’’တိ ပဒါနိ စာတိ ဣမာနိ ဝိတ္ထာရတော သောဠသ ပဒါနိ ဧကန္တေန ဤပစ္စယဝသေန သိဒ္ဓတ္တာ ဧကန္တိတ္ထိဝါစကတ္တာ စ န ဝုတ္တာနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. आणखी काय - ज्याअर्थी अट्ठकथाचार्यांनी 'गावो पिट्ठियं पहरित्वा' (गाईंच्या पाठीवर मारून) इत्यादी पद्धतीने रचलेल्या 'द्वारं पत्तं पत्तं गाविं एको द्वेति सक्खरं खिपित्वा गणेति' (दरवाजापाशी आलेल्या प्रत्येक गाईला 'एक, दोन' असे खडे टाकून मोजतो) या वाक्याच्या शेवटी असलेल्या शब्दरचनेत 'एको गावी, द्वे गावी' असा अर्थ लावायचा असतो, आणि 'गाविं' हे द्वितीया विभक्तीचे रूपही दिसते. यावरून अट्ठकथाचार्यांच्या मते 'गो' शब्दाहून 'सि' आणि 'यो' प्रत्ययांच्या जागी 'ई' कारादेश आणि 'अं' प्रत्ययाच्या जागी 'इं' कारादेश होतो, हे समजते. म्हणूनच, आम्ही जी 'ओ'कारान्त मूळ असलेल्या स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाची 'गो, गावी, गावो, गावी, गवो, गावं, गाविं' इत्यादी पद्धतीने पदमाला (रूपे) मांडली आहे, ती पाळि पद्धतीला अनुकूल, अट्ठकथा पद्धतीला अनुकूल आणि कच्चायनाचार्यांचे मत स्वीकारून पदसिद्धी करणाऱ्या गुरूंच्या मतालाही अनुकूल आहे. तसेच 'गावी' हा शब्द चार वेळा आल्यामुळे 'ओ'कारान्त स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाच्या स्पष्ट नसलेल्या रूपांचा वापर सिद्ध करतो. पाळि पद्धती इत्यादींमध्ये ज्ञानाने योग्य प्रकारे परीक्षण केले असता हे अत्यंत योग्य ठरते, यात थोडासाही दोष नाही. परंतु, येथे प्रथमा, द्वितीया आणि संबोधन यांच्या बहुवचनाच्या ठिकाणी 'गावियो' हे पद, आणि तृतीया, चतुर्थी, पंचमी व षष्ठी यांच्या एकवचनाच्या ठिकाणी 'गाविया' हे पद, तृतीया व पंचमी यांच्या बहुवचनाच्या ठिकाणी 'गावीहि, गावीभि' ही पदे, चतुर्थी व षष्ठी यांच्या बहुवचनाच्या ठिकाणी 'गावीनं' हे पद, आणि सप्तमीच्या ठिकाणी 'गाविया, गावियं, गावीसू' ही पदे - अशी ही सविस्तर सोळा पदे केवळ 'ई' प्रत्ययामुळे सिद्ध होत असल्यामुळे आणि केवळ स्त्रीलिंगवाचक असल्यामुळे येथे सांगितलेली नाहीत, असे समजावे. အယံ ပနေတ္ထ နိစ္ဆယော ဝုစ္စတေ သောတူနံ နိက္ကင်္ခဘာဝါယ – ဣတ္ထိလိင်္ဂပဒေသု ဟိ ‘‘ဂါဝီ ဂါဝိ’’န္တိ ဣမာနိ ဤပစ္စယဝသေန ဝါ ဤကာရိံကာရာဒေသဝသေန ဝါ သိဇ္ဈန္တိ. ဧတေသု ပစ္ဆိမနယော ဣဓာဓိပ္ပေတော, ပုဗ္ဗနယော အညတ္ထ. တထာ ‘‘ဂါဝီ ဂါဝိ’’န္တိ ဣမာနိ ဤပစ္စယဝသေနပိ သိဒ္ဓတ္တာ ယေဘုယျေန ဣတ္ထိဝါစကာနိ ဘဝန္တိ ဤကာရိံကာရာဒေသဝသေနပိ သိဒ္ဓတ္တာ. ကတ္ထစိ ဧကက္ခဏေယေဝ သဗ္ဗသင်္ဂါဟကဝသေန ဣတ္ထိပုမဝါစကာနိ ဘဝန္တိ. ဧတေသုပိ ပစ္ဆိမောယေဝ နယော ဣဓာဓိပ္ပေတော, ပုဗ္ဗနယော အညတ္ထ. ‘‘ဂါဝိယော. ဂါဝိယာ, ဂါဝီဟိ, ဂါဝီဘိ. ဂါဝီနံ. ဂါဝိယံ, ဂါဝီသူ’’တိ ဧတာနိ ပန ဤပစ္စယဝသေနေဝ သိဒ္ဓတ္တာ သဗ္ဗထာပိ ဣတ္ထီနံယေဝ ဝါစကာနိ ဘဝန္တိ. ဣတ္ထိဘူတေသွေဝ ဂေါဒဗ္ဗေသု လောကသင်္ကေတဝသေန ဝိသေသတော ပဝတ္တတ္တာ ဧကန္တတော ဣတ္ထိဒဗ္ဗေသု ပဝတ္တာနိ ‘‘မိဂီ မောရီ ကုက္ကုဋီ’’ဣစ္စာဒီနိ ပဒါနိ ဝိယ. ကိဉ္စာပိ ပန ‘‘နဒီ မဟီ’’ဣစ္စာဒီနိပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ ဤပစ္စယဝသေနေဝ သိဒ္ဓါနိ, တထာပိ တာနိ အဝိညာဏကတ္တာ တဒတ္ထာနံ ဣတ္ထိဒဗ္ဗေသု ဝတ္တန္တီတိ ဝတ္တုံ န ယုဇ္ဇတိ. ဣတ္ထိပုမနပုံသကဘာဝရဟိတာ ဟိ တဒတ္ထာ. ယသ္မာ ပန ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဂေါသဒ္ဒေ ဧနယောဂေါ ဧသုကာရော စ န လဗ္ဘတိ, တသ္မာ ‘‘ဂါဝေန ဂဝေန ဂါဝေသု ဂဝေသူ’’တိ ပဒါနိ န ဝုတ္တာနိ. ယသ္မာ စ ဣတ္ထိလိင်္ဂေန ဂေါသဒ္ဒေန သဒ္ဓိံ သသ္မာသ္မိံဝစနာနိ သရူပတော ပရတ္တံ န ယန္တိ, တသ္မာ ‘‘ဂါဝဿ ဂဝဿ ဂါဝသ္မာ ဂဝသ္မာ ဂါဝသ္မိံ ဂဝသ္မိ’’န္တိ ပဒါနိ န ဝုတ္တာနိ. ယသ္မာ စ တတ္ထ သ္မာဝစနဿ အာဒေသဘူတော အာကာရော စ မှာကာရော စ န လဗ္ဘတိ, တသ္မာ ‘‘ဂါဝါ ဂဝါ ဂါဝမှာ ဂဝမှာ’’တိ ပဒါနိ န ဝုတ္တာနိ. ယသ္မာ စ သ္မိံဝစနဿ အာဒေသဘူတော ဧကာရော [Pg.281] စ မှိကာရော စ န လဗ္ဘတိ, တသ္မာ ‘‘ဂါဝေ ဂဝေ ဂါဝမှိ ဂဝမှီ’’တိ ပဒါနိ န ဝုတ္တာနိ. အပိစ ‘‘ယာယ တာယာ’’တိအာဒီဟိ သမာနာဓိကရဏပဒေဟိ ယောဇေတုံ အယုတ္တတ္တာပိ ‘‘ဂါဝေန ဂဝေနာ’’တိအာဒီနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဋ္ဌာနေ န ဝုတ္တာနိ. တထာ ဟိ ‘‘ယာယ တာယ’’ဣစ္စာဒီဟိ သဒ္ဓိံ ‘‘ဂါဝေန ဂဝေနာ’’တိအာဒီနိ န ယောဇေတဗ္ဗာနိ ဧကန္တပုလ္လိင်္ဂရူပတ္တာ. येथे ऐकणाऱ्यांच्या शंकारहित होण्यासाठी हा निर्णय सांगितला जात आहे - स्त्रीलिंगी पदांमध्ये 'गावी, गाविं' ही रूपे 'ई' प्रत्ययामुळे किंवा 'ई'कार व 'इं'कार आदेशांमुळे सिद्ध होतात. यांपैकी नंतरची पद्धत येथे अभिप्रेत आहे, तर पहिली पद्धत इतर ठिकाणी आहे. तसेच 'गावी, गाविं' ही रूपे 'ई' प्रत्ययाने सिद्ध होत असल्यामुळे बहुधा स्त्रीलिंगवाचक असतात आणि 'ई'कार व 'इं'कार आदेशांमुळेही सिद्ध होतात. काही ठिकाणी एकाच वेळी सर्वांचा समावेश करण्याच्या दृष्टीने ती स्त्री व पुरुष दोन्ही वाचक असतात. यांमध्येही नंतरचीच पद्धत येथे अभिप्रेत आहे, पहिली पद्धत इतर ठिकाणी आहे. 'गावियो, गाविया, गावीहि, गावीभि, गावीनं, गावियं, गावीसू' ही पदे केवळ 'ई' प्रत्ययामुळेच सिद्ध होत असल्यामुळे सर्व प्रकारे केवळ स्त्रीलिंगाचीच वाचक असतात. स्त्रीलिंगी असलेल्याच गो-द्रव्यांमध्ये (गाईंमध्ये) लोकसंकेतानुसार विशेष रूपाने प्रवृत्त होत असल्यामुळे, ती केवळ स्त्रीलिंगी द्रव्यांमध्ये प्रवृत्त होणाऱ्या 'मिगी' (हरिणी), 'मोरी' (लांडोर), 'कुक्कुटी' (कोंबडी) इत्यादी पदांसारखी आहेत. जरी 'नदी, मही' इत्यादी स्त्रीलिंगी शब्दही केवळ 'ई' प्रत्ययानेच सिद्ध होतात, तरीही ते अचेतन असल्यामुळे त्यांचे अर्थ स्त्रीलिंगी द्रव्यांमध्ये वर्ततात असे म्हणणे योग्य नाही. कारण त्यांचे अर्थ स्त्री, पुरुष व नपुंसक भावापासून रहित असतात. परंतु, स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दात 'एन' योग आणि 'एसु'कार मिळत नसल्यामुळे 'गावेन, गवेन, गावेसु, गवेसु' ही पदे सांगितलेली नाहीत. आणि स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दासोबत 'स, स्मा, स्मिं' ही विभक्ती रूपे मूळ रूपात पुढे जात नसल्यामुळे 'गावस्स, गवस्स, गावस्मा, गवस्मा, गावस्मिं, गवस्मिं' ही पदे सांगितलेली नाहीत. आणि तेथे 'स्मा' विभक्तीच्या जागी आदेश होणारा 'आ'कार आणि 'म्हा'कार मिळत नसल्यामुळे 'गावा, गवा, गावम्हा, गवम्हा' ही पदे सांगितलेली नाहीत. आणि 'स्मिं' विभक्तीच्या जागी आदेश होणारा 'ए'कार आणि 'म्हि'कार मिळत नसल्यामुळे 'गावे, गवे, गावम्हि, गवम्हि' ही पदे सांगितलेली नाहीत. शिवाय, 'याय, ताय' इत्यादी समानाधिकरण पदांशी जोडणे अयोग्य असल्यामुळेही 'गावेन, गवेन' इत्यादी पदे स्त्रीलिंगाच्या ठिकाणी सांगितलेली नाहीत. कारण 'याय, ताय' इत्यादींसोबत 'गावेन, गवेन' इत्यादी पदे जोडली जाऊ शकत नाहीत, कारण ती पूर्णपणे पुल्लिंगी रूपे आहेत. ကေစိ ပနေတ္ထ ဝဒေယျုံ – ယာ တုမှေဟိ ဩကာရန္တတာပကတိကဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ‘‘ဂေါ, ဂါဝီ, ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ’’တိအာဒိနာ နယေန ပဒမာလာ ဌပိတာ, သာ ‘‘မာတုဂါမော ဣတ္ထီ မာတုဂါမာ ဣတ္ထိယော’’တိ ဝုတ္တသဒိသာ စ ဟောတီတိ? တန္န. မာတုဂါမဣတ္ထီသဒ္ဒါ ဟိ နာနာလိင်္ဂါ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေန, နာနာဓာတုကာ စ ဂမု ဣသုဓာတုဝသေန, ဣမသ္မိံ ပန ဌာနေ ဂေါ ဂါဝီသဒ္ဒါ ဧကလိင်္ဂါ ဣတ္ထိ လိင်္ဂဘာဝေန, ဧကဓာတုကာ စ ဂမုဓာတုဝသေနာတိ. ယဇ္ဇေဝံ ဂေါဏသဒ္ဒဿ ဂေါသဒ္ဒဿာဒေသဝသေန ကစ္စာယနေန ဝုတ္တတ္တာ တဒါဒေသတ္တံ ဧကဓာတုကတ္တဉ္စာဂမ္မ တေနာပိ သဒ္ဓိံ မိဿေတွာ ပဒမာလာ ဝတ္တဗ္ဗာတိ? န, ဂေါဏသဒ္ဒဿ အစ္စန္တပုလ္လိင်္ဂတ္တာ အကာရန္တတာပကတိကတ္တာ စ. တထာ ဟိ သော ဝိသုံ ပုလ္လိင်္ဂဋ္ဌာနေ ဥဒ္ဒိဋ္ဌော. အယံ ပန ‘‘ဂေါ, ဂါဝီ, ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ’’တိအာဒိကာ ပဒမာလာ ဩကာရီကာရန္တပဒါနိ မိဿေတွာ ကတာတိ န သလ္လက္ခေတဗ္ဗာ, အထ ခေါ ဝိကပ္ပေန ဂေါသဒ္ဒတော ပရေသံ သိ ယော အံဝစနာနံ ဤကာရိံကာရာဒေသဝသေန ဝုတ္တပဒဝန္တတ္တာ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂပဒမာလာ ဣစ္စေဝ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗာ. येथे काही लोक कदाचित् म्हणतील - तुम्ही जी 'ओ'कारान्त मूळ असलेल्या स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाची 'गो, गावी, गावो, गावी, गवो' इत्यादी पद्धतीने पदमाला मांडली आहे, ती 'मातुगामो इत्थी, मातुगामा इत्थियो' (स्त्री, स्त्रिया) असे म्हटल्यासारखीच आहे का? तर तसे नाही. कारण 'मातुगाम' आणि 'इत्थी' हे शब्द पुल्लिंग व स्त्रीलिंग अशा वेगवेगळ्या लिंगांचे आहेत, आणि 'गमु' व 'इसु' धातूंच्या भेदाने वेगवेगळ्या धातूंचे आहेत. परंतु या ठिकाणी 'गो' आणि 'गावी' हे शब्द स्त्रीलिंग रूपाने एकच लिंग असलेले आहेत, आणि 'गमु' धातूच्या योगाने एकाच धातूचे आहेत. जर असे आहे, तर 'गोण' शब्द 'गो' शब्दाचा आदेश असल्यामुळे कच्चायनांनी तसे सांगितले आहे, म्हणून त्याचा आदेश असणे आणि एकाच धातूचा असणे यावरून त्याच्याशीही मिश्रित करून पदमाला सांगावी का? नाही, कारण 'गोण' शब्द पूर्णपणे पुल्लिंगी आहे आणि 'अ'कारान्त मूळ असलेला आहे. म्हणूनच तो स्वतंत्रपणे पुल्लिंगाच्या ठिकाणी दर्शविला आहे. परंतु, ही 'गो, गावी, गावो, गावी, गवो' इत्यादी पदमाला 'ओ'कारान्त आणि 'ई'कारान्त पदांचे मिश्रण करून बनवली आहे असे समजू नये, तर पर्यायाने 'गो' शब्दाहून पुढील 'सि, यो, अं' प्रत्ययांच्या जागी 'ई'कार व 'इं'कार आदेशांमुळे युक्त पदे असल्यामुळे, ही 'ओ'कारान्त स्त्रीलिंगी पदमालाच आहे, असेच प्रामुख्याने मानले पाहिजे. ဣဒါနိ ဂေါသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝသာဓကာနိ သုတ္တပဒါနိ လောကိကပ္ပယောဂါနိ စ ကထယာမ – ‘‘သေယျထာပိ ဘိက္ခဝေ ဝဿာနံ ပစ္ဆိမေ မာသေ သရဒသမယေ ကိဋ္ဌသမ္ဗာဓေ ဂေါပါလကော [Pg.282] ဂါဝေါ ရက္ခေယျ, တာ ဂါဝေါ တတော တတော ဒဏ္ဍေန အာကောဋေယျ. आता 'गो' शब्दाचे स्त्रीलिंगत्व सिद्ध करणारी सुत्तपदे (सूत्रांमधील वाक्ये) and लौकिक प्रयोग सांगतो - 'भिक्खूहो, ज्याप्रमाणे पावसाळ्याच्या शेवटच्या महिन्यात, शरद ऋतूत, पिके दाट आलेली असताना, गोपाळकाने गाईंचे रक्षण करावे, आणि त्या गाईंना तिथून तिथून काठीने मारावे.' အန္နဒါ ဗလဒါ စေတာ, ဝဏ္ဏဒါ သုခဒါ စ တာ; ဧတမတ္ထံ ဝသံ ဉတွာ, နာဿု ဂါဝေါ ဟနိံသု တေ. या (गाई) अन्न देणाऱ्या, बल देणाऱ्या, तसेच वर्ण (तेज) देणाऱ्या आणि सुख देणाऱ्या आहेत; हा अर्थ (महत्त्व) लक्षात घेऊन त्यांनी गाईंना मारले नाही. သဗ္ဗာ ဂါဝေါ သမာဟရတိ. ဂမိဿန္တိ ဘန္တေ ဂါဝေါ ဝစ္ဆဂိဒ္ဓိနိယော’’တိ ဣမာနိ သုတ္တပဒါနိ. ‘‘ဂေါသု ဒုယှမာနာသု ဂတော’’တိအာဒီနိ ပန လောကိကပ္ပယောဂါနိ. ဣတိ ဂေါသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေါပိ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝေါ ဝိယ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗော. 'तो सर्व गाईंना एकत्र करतो. भन्ते, वासरांवर प्रेम करणाऱ्या गाई जातील' - ही सुत्तपदे आहेत. 'गाईंचे दूध काढत असताना तो गेला' इत्यादी लौकिक प्रयोग आहेत. अशा प्रकारे 'गो' शब्दाचे स्त्रीलिंगत्व देखील पुल्लिंगत्वाप्रमाणेच प्रामुख्याने मानले पाहिजे. တတြ ‘‘ဂေါ, ဂါဝီ, ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ’’တိအာဒီနိ ကိဉ္စာပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေန ဝုတ္တာနိ, တထာပိ ယထာပယောဂံ ‘‘ပဇာ ဒေဝတာ’’တိပဒါနိ ဝိယ ဣတ္ထိပုရိသဝါစကာနေဝ ဘဝန္တိ, တသ္မာ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ‘‘သာ ဂေါ’’တိ ဝါ ‘‘တာ ဂါဝေါ’’တိ ဝါ ဝုတ္တေ ဣတ္ထိပုမဘူတာ သဗ္ဗေပိ ဂေါဏာ ဂဟိတာတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. န ဟိ ဤဒိသေ ဌာနေ ဧကန္တတော လိင်္ဂံ ပဓာနံ, အတ္ထောယေဝ ပဓာနော. ‘‘ဝဇေဂါဝေါ ဒုဟန္တီ’’တိ ဝုတ္တေ ကိဉ္စာပိ ‘‘ဂါဝေါ’’တိ အယံ သဒ္ဒေါ ပုမေပိ ဝတ္တတိ, တထာပိ ဒုဟနကြိယာယ ပုမေ အသမ္ဘဝတော အတ္ထဝသေန ဣတ္ထိယော ဉာယန္တေ. ‘‘ဂါဝီ ဒုဟန္တီ’’တိ ဝုတ္တေ ပန လိင်္ဂဝသေန အတ္ထဝသေန စ ဝစနတော ကော သံသယမာပဇ္ဇိဿတိ ဝိညူ. ‘‘တာ ဂါဝေါ စရန္တီ’’တိ ဝုတ္တေ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဝစနတော ကဒါစိ ကဿစိ သံသယော သိယာ ‘‘နနု ဣတ္ထိယော’’တိ, ပုလ္လိင်္ဂဝသေန ပန ‘‘တေ ဂါဝေါ စရန္တီ’’တိ ဝုတ္တေ သံသယော နတ္ထိ, ဣတ္ထိယော စ ပုမာနော စ ဉာယန္တေ ပုလ္လိင်္ဂဗဟုဝစနေန ကတ္ထစိ ဣတ္ထိပုမဿ ဂဟိတတ္တာ. ‘‘အထေတ္ထ သီဟာ ဗျဂ္ဃာ စာ’’တိအာဒီသု ဝိယ ‘‘ဂါဝီ စရတီ’’တိ စ ‘‘ဂါဝိံ ပဿတီ’’တိ စ ဝုတ္တေ ဣတ္ထီ ဝိညာယတေ ဂါဝီသဒ္ဒေန ဣတ္ထိယာ ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ[Pg.283]. လောကိကပ္ပယောဂေသု ဟိ သာသနိကပ္ပယောဂေသု စ ဂါဝီသဒ္ဒေန ဣတ္ထီ ဂယှတိ. ဧကစ္စံ ပန သာသနိကပ္ပယောဂံ သန္ဓာယ ‘‘ဂါဝီ’’တိ, ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ စ ‘‘ဣတ္ထိပုရိသသာဓာရဏဝစနမဝေါစုမှ. တထာ ဟိ ‘‘သေယျထာပိ ဘိက္ခဝေ ဒက္ခော ဂေါဃာတကော ဝါ ဂေါဃာတကန္တေဝါသီ ဝါ ဂါဝိံ ဝဓိတွာ စတုမဟာပထေ ဗိလသော ဝိဘဇိတွာ နိသိန္နော အဿာ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. အဋ္ဌကထာသု စ ‘‘ဂါဝေါ’’တိ ဣတ္ထိပုမသာဓာရဏံ သဒ္ဒရစနံ ကတွာ ပုန တဒေဝ ဣတ္ထိပုမံ သန္ဓာယ ‘‘ဒွါရံ ပတ္တံ ပတ္တံ ဂါဝိ’’န္တိ ရစိတာ သဒ္ဒရစနာ ဒိဿတိ. तेथे 'गो, गावी, गावो, गावी, गवो' इत्यादी शब्द जरी स्त्रीलिंगी रूपाने सांगितले असले, तरीही प्रयोगाच्या अनुसार 'पजा' (प्रजा), 'देवता' या पदांप्रमाणे ते स्त्री आणि पुरुष दोन्हीचे वाचक असतात. म्हणून, स्त्रीलिंगाच्या दृष्टीने 'सा गो' (ती गाय) किंवा 'ता गावो' (त्या गाई) असे म्हटले असता, स्त्री आणि पुरुष दोन्ही रूपातील सर्वच गोवंश (बैल व गाई) ग्रहण केले जातात असे समजावे. कारण अशा ठिकाणी केवळ लिंग प्रधान नसते, तर अर्थच प्रधान असतो. 'वजे गावो दुहन्ति' (गोठ्यात गाईंचे दूध काढतात) असे म्हटले असता, जरी 'गावो' हा शब्द पुल्लिंगातही वापरला जात असला, तरी दूध काढण्याची क्रिया पुल्लिंगात (बैलांमध्ये) असंभव असल्याने, अर्थाच्या आधारे येथे स्त्रीलिंगी (गाई) असाच अर्थ समजला जातो. परंतु 'गावी दुहन्ति' (गाईंचे दूध काढतात) असे म्हटले असता, लिंग आणि अर्थ या दोन्हीच्या आधारे बोलले गेल्यामुळे कोणत्या विद्वानाला संशय येईल? 'ता गावो चरन्ति' (त्या गाई चरतात) असे स्त्रीलिंगी प्रयोगाने म्हटले असता, कधी कोणाला 'त्या केवळ माद्या (गाई) आहेत का?' असा संशय येऊ शकतो. परंतु पुल्लिंगी प्रयोगाने 'ते गावो चरन्ति' (ते गोवंश चरतात) असे म्हटले असता संशय राहत नाही, कारण पुल्लिंगी बहुवचनाने काही ठिकाणी स्त्री आणि पुरुष दोन्हीचे ग्रहण होते. जसे 'अथ एत्थ सीहा ब्यग्घा चा' (येथे सिंह आणि वाघ आहेत) इत्यादींमध्ये, तसेच 'गावी चरति' (गाय चरते) आणि 'गाविं पस्सति' (गाईला पाहतो) असे म्हटले असता, 'गावी' शब्दाने स्त्रीलिंगी (गाय) ग्रहण करायची असल्यामुळे स्त्री (गाय) असाच बोध होतो. कारण लौकिक प्रयोगांमध्ये आणि शासनिक (बौद्ध वाङ्मयीन) प्रयोगांमध्ये 'गावी' शब्दाने स्त्रीलिंगी (गाय) ग्रहण केली जाते. परंतु काही विशिष्ट शासनिक प्रयोगांचा संदर्भ घेऊन आम्ही 'गावी' आणि 'गाविं' हे स्त्री व पुरुष दोघांसाठीचे साधारण (सामायिक) वचन म्हटले आहे. तसेच, 'हे भिक्खूहो, ज्याप्रमाणे एखादा चतुर कसाई किंवा कसायचा शिकाऊ मुलगा गाईला मारून, चौकात तिचे तुकडे-तुकडे करून बसलेला असावा' अशी पाळी (मूळ पाठ) आढळते. आणि अट्ठकथांमध्ये 'गावो' अशी स्त्री-पुरुष साधारण शब्दरचना करून, पुन्हा त्याच स्त्री-पुरुषाचा संदर्भ घेऊन 'द्वारं पत्तं पत्तं गाविं' (प्रत्येक दाराशी आलेल्या गाईला/गोवंशाला) अशी रचलेली शब्दरचना आढळते. ဧတ္ထ ဟိ ဂေါဇာတိယံ ဌိတာ ဣတ္ထီပိ ပုမာပိ ‘‘ဂါဝီ’’တိ သင်္ခံ ဂစ္ဆတိ. ဝိသေသတော ပန ‘‘ဂါဝီ’’တိ ဣဒံ ဣတ္ထိယာ အဓိဝစနံ. တထာ ဟိ တတ္ထ တတ္ထ ပါဠိပ္ပဒေသာဒီသု ‘‘အစိရပက္ကန္တဿ ဘဂဝတော ဗာဟိယံ ဒါရုစီရိယံ ဂါဝီ တရုဏဝစ္ဆာ အဓိပတိတွာ ဇီဝိတာ ဝေါရောပေသီ’’တိ, ‘‘ဂါဝုံ ဝါ တေ ဒေမိ, ဂါဝိံ ဝါ တေ ဒေမီ’’တိ စ ‘‘တိဏသီဟော ကပေါတဝဏ္ဏဂါဝီသဒိသော’’တိ စ ပယောဂဒဿနတော ဣတ္ထီ ကထိယတီတိ ဝတ္တဗ္ဗံ. ဂေါသဒ္ဒေန ပန ‘‘ဂေါဒုဟနံ. ဂဒ္ဒုဟနံ. ဂေါခီရံ ဂေါဓနော ဂေါရူပါနိ စာ’’တိ ဒဿနတော ဣတ္ထီပိ ပုမာပိ ကထိယတီတိ ဝတ္တဗ္ဗံ. येथे गो-जातीमध्ये असलेले स्त्री (गाय) आणि पुरुष (बैल) दोन्हीही 'गावी' या संज्ञेस प्राप्त होतात. परंतु विशेषतः 'गावी' हे स्त्रीलिंगाचे (गाईचे) नाव आहे. कारण ठिकठिकाणी पाळी प्रदेशांमध्ये (पाठांमध्ये) 'भगवान प्रस्थान केल्यानंतर लगेचच, तरुण वासरू असलेल्या एका गाईने बाहिय दारुचीरिय याच्यावर हल्ला करून त्याला जीवानिशी मारले', 'मी तुला बैल देतो किंवा गाय देतो' आणि 'तृणसिंह हा कबुतराच्या रंगाच्या गाईसारखा असतो' असे प्रयोग दिसत असल्यामुळे, येथे स्त्रीलिंगी (गाय) बद्दल सांगितले आहे असे म्हणावे लागेल. परंतु 'गो' शब्दाने 'गोदुहनं (गाईचे दूध काढणे), गद्दुहनं, गोखीरं (गाईचे दूध), गोधनं, गोरूपाणि च' इत्यादी प्रयोगांवरून स्त्री आणि पुरुष दोन्ही सांगितले जातात असे म्हणावे लागेल. ဣဒါနိ ဩကာရန္တဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ပဒမာလာယံ ပါဠိနယာဒိနိဿိတော အတ္ထယုတ္တိနယော ဝုစ္စတေ ဝိညူနံ ကောသလ္လဇနနတ္ထံ – आता, विद्वानांच्या कौशल्यात वृद्धी व्हावी म्हणून, ओ-कारान्त स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाच्या पदमालेमध्ये (विभक्ती रूपांमध्ये) पाळी नियमांवर आधारित अर्थ आणि युक्तीचा नियम सांगितला जात आहे – သာ ဂေါ ဂစ္ဆတိ, သာ ဂါဝီ ဂစ္ဆတိ, တာ ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ ဂစ္ဆန္တိ. တံ ဂါဝံ, ဂါဝိံ, ဂဝံ ပဿတိ, တာ ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ ပဿတိ. တာဟိ ဂေါဟိ, ဂေါဘိ ကတံ. တာသံ ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ ဒေတိ. တာဟိ ဂေါဟိ, ဂေါဘိ အပေတိ. တာသံ ဂဝံ[Pg.284], ဂုန္နံ, ဂေါနံ သိင်္ဂါနိ. တာသု ဂေါသု ပတိဋ္ဌိတံ. ဘောတိ ဂေါ တွံ တိဋ္ဌ, ဘောတိယော ဂါဝေါ ဂါဝီ, ဂဝါ တုမှေ တိဋ္ဌထ. ती गाय जाते (सा गो गच्छति), ती गाय जाते (सा गावी गच्छति), त्या गाई जातात (ता गावो, गावी, गवो गच्छन्ति). त्या गाईला पाहतो (तं गावं, गाविं, गवं पस्सति), त्या गाईंना पाहतो (ता गावो, गावी, गवो पस्सति). त्या गाईंद्वारे केले गेले (ताहि गोहि, गोभि कतं). त्या गाईंना देतो (तासं गवं, गुन्नं, गोनं देति). त्या गाईंपासून दूर होतो (ताहि गोहि, गोभि अपेति). त्या गाईंची शिंगे (तासं गवं, गुन्नं, गोनं सिंगानि). त्या गाईंवर प्रतिष्ठित आहे (तासु गोसु पतिट्ठितं). हे गाई, तू थांब (भोति गो त्वं तिट्ठ), हे गाईंनो, तुम्ही थांबा (भोतियो गावो गावी, गवा तुम्हे तिट्ठथ). အပရောပိ ဝုစ္စတေ – दुसरा (प्रकार) देखील सांगितला जात आहे – သာ ဂေါ နဒိံ တရန္တီ ဂစ္ဆတိ, သာ ဂါဝီ နဒိံ တရန္တီ ဂစ္ဆတိ, တာ ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ နဒိံ တရန္တီယော ဂစ္ဆန္တိ. တံ ဂါဝံ, ဂါဝိံ, ဂဝံ နဒိံ တရန္တိံ ပဿတိ, တာ ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ နဒိံ တရန္တိယော ပဿတိ. တာဟိ ဂေါဟိ, ဂေါဘိ နဒိံ တရန္တီဟိ ကတံ. တာသံ ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ နဒိံ တရန္တီနံ ဒေတိ. တာဟိ ဂေါဟိ, ဂေါဘိ နဒိံ တရန္တီဟိ အပေတိ. တာသံ ဂဝံ, ဂုန္နံ, ဂေါနံ နဒိံ တရန္တီနံ သန္တကံ. တာသု ဂေါသု နဒိံ တရန္တီသု ပတိဋ္ဌိတန္တိ. ती गाय नदी पोहून पार करत जाते (सा गो नदिं तरन्ती गच्छति), ती गाय नदी पोहून पार करत जाते (सा गावी नदिं तरन्ती गच्छति), त्या गाई नदी पोहून पार करत जातात (ता गावो, गावी, गवो नदिं तरन्तीयो गच्छन्ति). त्या नदी पोहून पार करणाऱ्या गाईला पाहतो (तं गावं, गाविं, गवं नदिं तरन्तिं पस्सति), त्या नदी पोहून पार करणाऱ्या गाईंना पाहतो (ता गावो, गावी, गवो नदिं तरन्तियो पस्सति). त्या नदी पोहून पार करणाऱ्या गाईंद्वारे केले गेले (ताहि गोहि, गोभि नदिं तरन्तीहि कतं). त्या नदी पोहून पार करणाऱ्या गाईंना देतो (तासं गवं, गुन्नं, गोनं नदिं तरन्तीनं देति). त्या नदी पोहून पार करणाऱ्या गाईंपासून दूर होतो (ताहि गोहि, गोभि नदिं तरन्तीहि अपेति). ते नदी पोहून पार करणाऱ्या गाईंचे मालकीचे आहे (तासं गवं, गुन्नं, गोनं नदिं तरन्तीनं सन्तकं). त्या नदी पोहून पार करणाऱ्या गाईंवर प्रतिष्ठित आहे (तासु गोसु नदिं तरन्तीसु पतिट्ठितं). တတြ ယာ သာ ‘‘ဂေါ, ဂါဝီ, ဂါဝေါ, ဂါဝီ, ဂဝေါ’’တိအာဒိနာ ဩကာရန္တဿိတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ပဒမာလာ ဌပိတာ, သာ ‘‘ဂေါ, ဂါဝေါ ဂဝေါ’’တိအာဒိနာ ဝုတ္တဿ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ပဒမာလာတော သဝိသေသာ ပစ္စတ္တောပယောဂါလပနဋ္ဌာနေ စတုန္နံ ကညာသဒ္ဒါနံ ဝိယ ဂါဝီသဒ္ဒါနံ ဝုတ္တတ္တာ. ယသ္မာ ပနာယံ ဝိသေသော, တသ္မာ ဣမဿ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ အညေသမိတ္ထိလိင်္ဂါနံ ဝိယ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ သလ္လက္ခေတဗ္ဗာ, န ပုလ္လိင်္ဂါနံ ဝိယ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ, နာပိ နပုံသကလိင်္ဂါနံ ဝိယ ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရတာ သလ္လက္ခေတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ နိစ္ဆယကရဏီ ဂါထာ ဝုစ္စတိ – तेथे जी 'गो, गावी, गावो, गावी, गवो' इत्यादी रूपांनी ओ-कारान्त स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाची पदमाला मांडली आहे, ती 'गो, गावो, गवो' इत्यादी रूपांनी सांगितलेल्या ओ-कारान्त पुल्लिंगी 'गो' शब्दाच्या पदमालेपेक्षा विशेष आहे; कारण प्रथमा (पच्चत्त), द्वितीया (उपयोग) आणि संबोधन (आलपन) या स्थानांवर चार 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दांप्रमाणे 'गावी' शब्द सांगितले आहेत. आणि ज्याअर्थी हा विशेष (भेद) आहे, त्याअर्थी या ओ-कारान्त स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाचा इतर स्त्रीलिंगी शब्दांप्रमाणे अस्पष्ट-आकार व्यवहार (अविशदाकार व्यवहार) लक्षात घेतला पाहिजे, पुल्लिंगी शब्दांप्रमाणे स्पष्ट-आकार व्यवहार (विशदाकार व्यवहार) नव्हे, आणि नपुंसकलिंगी शब्दांप्रमाणे दोन्हीहून मुक्त असा व्यवहार (उभयमुक्ताकार व्यवहार) देखील लक्षात घेऊ नये. याविषयी निर्णय देणारी गाथा येथे सांगितली आहे – ဒုဝိန္နံ ဓာတုသဒ္ဒါနံ, ယထာ ဒိဿတိ နာနတာ; ဂေါသဒ္ဒါနံ တထာ ဒွိန္နံ, ဣစ္ဆိတဗ္ဗာဝ နာနတာ. ज्याप्रमाणे दोन 'धातु' शब्दांमध्ये भिन्नता दिसून येते, त्याचप्रमाणे दोन 'गो' शब्दांमध्येही भिन्नता स्वीकारलीच पाहिजे. တထာ ဟိ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဒွိန္နံ ဓာတုသဒ္ဒါနံ ဝိသေသော ဒိဿတိ. တံ ယထာ? तसेच, पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगाच्या भेदाने दोन 'धातु' शब्दांमधील विशेष (भेद) दिसून येतो. तो कसा? ဓာတု[Pg.285], ဓာတူ, ဓာတဝေါ. ဓာတုံ, ဓာတူ, ဓာတဝေါ. ဓာတုနာ, ဓာတူဟိ, ဓာတူဘိ. ဓာတုဿ, ဓာတူနံ. ဓာတုသ္မာ, ဓာတုမှာ, ဓာတူဟိ, ဓာတူဘိ. ဓာတုဿ, ဓာတူနံ. ဓာတုသ္မိံ, ဓာတုမှိ, ဓာတူသု. အယံ ပုလ္လိင်္ဂဝိသေသော. धातु, धातू, धातवो (प्रथमा). धातुं, धातू, धातवो (द्वितीया). धातुना, धातूहि, धातूभि (तृतीया). धातुस्स, धातूनं (चतुर्थी). धातुस्मा, धातुम्हा, धातूहि, धातूभि (पंचमी). धातुस्स, धातूनं (षष्ठी). धातुस्मिं, धातुम्हि, धातूसु (सप्तमी). हा पुल्लिंगी विशेष (भेद) आहे. ဓာတု, ဓာတူ, ဓာတုယော. ဓာတုံ, ဓာတူ, ဓာတုယော. ဓာတုယာ, ဓာတူဟိ, ဓာတူဘိ. ဓာတုယာ, ဓာတူနံ. ဓာတုယာ, ဓာတူဟိ, ဓာတူဘိ. ဓာတုယာ, ဓာတူနံ. ဓာတုယာ, ဓာတုယံ, ဓာတူသု. အယံ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဝိသေသော. धातु, धातू, धातुयो (प्रथमा). धातुं, धातू, धातुयो (द्वितीया). धातुया, धातूहि, धातूभि (तृतीया). धातुया, धातूनं (चतुर्थी). धातुया, धातूहि, धातूभि (पंचमी). धातुया, धातूनं (षष्ठी). धातुया, धातुयं, धातूसु (सप्तमी). हा स्त्रीलिंगी विशेष (भेद) आहे. ယထာ စ ဒွိန္နံ ဓာတုသဒ္ဒါနံ ဝိသေသော ပညာယတိ, တထာ ဒွိန္နမ္ပိ ဂေါသဒ္ဒါနံ ဝိသေသော ပညာယတေဝ. ယထာ စ ပုန္နပုံသကလိင်္ဂါနံ ဒွိန္နံ အာယုသဒ္ဒါနံ ‘‘အာယု, အာယူ, အာယဝေါ’’တိအာဒိနာ, ‘‘အာယု, အာယူ, အာယူနီ’’တိအာဒိနာ စ ဝိသေသော ပညာယတိ, ယထာ ဒွိန္နမ္ပိ ဂေါသဒ္ဒါနံ ဝိသေသော ပညာယတေဝ. တထာ ဟိ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရော ပုလ္လိင်္ဂံ, အဝိသဒါကာရဝေါဟာရော ဣတ္ထိလိင်္ဂံ, ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရော နပုံသကလိင်္ဂံ. आणि ज्याप्रमाणे दोन 'धातु' शब्दांमधील विशेष (भेद) समजून येतो, त्याचप्रमाणे दोन 'गो' शब्दांमधील विशेष देखील समजून येतोच. आणि ज्याप्रमाणे पुल्लिंग व नपुंसकलिंगी अशा दोन 'आयु' शब्दांमध्ये 'आयु, आयू, आयवो' इत्यादी रूपांनी आणि 'आयु, आयू, आयूनी' इत्यादी रूपांनी विशेष समजून येतो, त्याचप्रमाणे दोन 'गो' शब्दांमधील विशेष देखील समजून येतोच. कारण, स्पष्ट-आकार व्यवहार (विशदाकार व्यवहार) म्हणजे पुल्लिंग, अस्पष्ट-आकार व्यवहार (अविशदाकार व्यवहार) म्हणजे स्त्रीलिंग, आणि दोन्हीहून मुक्त असा व्यवहार (उभयमुक्ताकार व्यवहार) म्हणजे नपुंसकलिंग होय. ဣဒါနိ ဣမမေဝတ္ထံ ပါကဋတရံ ကတွာ သင်္ခေပတော ကထယာမ – ပုရိသောတိ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရော, ကညာတိ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရော, ရူပန္တိ ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရော. ပုရိသော တိဋ္ဌတိ, ကညာ တိဋ္ဌတိ, ကညာ တိဋ္ဌန္တိ, ကညာ ပဿတိ, ဘောတိယော ကညာ တိဋ္ဌထ, ဧတ္ထေကပဒမသမံ, စတ္တာရိ သမာနိ. ပုရိသာ တိဋ္ဌန္တိ, ပုရိသာ နိဿဋံ, ဘဝန္တော ပုရိသာ ဂစ္ဆထ. ကညာယော တိဋ္ဌန္တိ, ကညာယော ပဿတိ, ဘောတိယော ကညာယော ဂစ္ဆထ, တီဏိ တီဏိ သမာနိ. ပုရိသံ ပဿတိ, ကညံ ပဿတိ, ဒွေ အသမာနိ. ပုရိသေ ပဿတိ, ပုရိသေ ပတိဋ္ဌိတံ, ဒွေ သမာနိ. တေန ပုရိသေန ကတံ, တာယ ကညာယ ကတံ, တာယ ကညာယ ဒေတိ, တာယ ကညာယ [Pg.286] အပေတိ, တာယ ကညာယ သန္တကံ, တာယ ကညာယ ပတိဋ္ဌိတံ, ဧကမသမံ, ပဉ္စ သမာနိ. ဧဝံ ပုလ္လိင်္ဂဿ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ ဒိဿတိ, ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ ဒိဿတိ. နပုံသကလိင်္ဂဿ ပန ‘‘ရူပံ, ရူပါနိ, ရူပါ. ရူပံ, ရူပါနိ, ရူပေ. ဘော ရူပ, ဘဝန္တော ရူပါနိ, ရူပါ’’တိ ဧဝံ တီသု ပစ္စတ္တောပယောဂါလပနဋ္ဌာနေသု သနိကာရာယ ဝိသေသာယ ရူပမာလာယ ဝသေန ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရတာ ဒိဿတိ, ပုမိတ္ထိလိင်္ဂါနံ တီသု ဌာနေသု သနိကာရာနိ ရူပါနိ သဗ္ဗဒါ န သန္တိ, ဣတိ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရော ပုလ္လိင်္ဂံ, အဝိသဒါကာရဝေါဟာရော ဣတ္ထိလိင်္ဂံ, ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရော နပုံသကလိင်္ဂန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. आता हाच अर्थ अधिक स्पष्ट करून संक्षेपाने सांगतो – 'पुरिस' (पुरुष) हा स्पष्ट आकाराचा व्यवहार आहे, 'कञ्ञा' (कन्या) हा अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार आहे, 'रूप' हा दोन्ही प्रकारांनी मुक्त आकाराचा व्यवहार आहे. 'पुरिसो तिट्ठति' (पुरुष उभा राहतो), 'कञ्ञा तिट्ठति' (कन्या उभी राहते), 'कञ्ञा तिट्ठन्ति' (कन्या उभ्या राहतात), 'कञ्ञा पस्सति' (कन्या पाहते), 'भोतियो कञ्ञा तिट्ठथ' (हे कल्याणी कन्यांनो, तुम्ही उभे राहा) – येथे एक पद असमान आहे आणि चार समान आहेत. 'पुरिसा तिट्ठन्ति' (पुरुष उभे राहतात), 'पुरिसा निस्सटं' (पुरुषांपासून मुक्त), 'भवन्तो पुरिसा गच्छथ' (हे पूज्य पुरुषांनो, तुम्ही जा). 'कञ्ञायो तिट्ठन्ति' (कन्या उभ्या राहतात), 'कञ्ञायो पस्सति' (कन्यांना पाहतो), 'भोतियो कञ्ञायो गच्छथ' (हे कल्याणी कन्यांनो, तुम्ही जा) – येथे तीन-तीन समान आहेत. 'पुरिसं पस्सति' (पुरुषाला पाहतो), 'कञ्ञं पस्सति' (कन्येला पाहतो) – हे दोन असमान आहेत. 'पुरिसे पस्सति' (पुरुषांना पाहतो), 'पुरिसे पतिट्ठितं' (पुरुषांमध्ये प्रतिष्ठित) – हे दोन समान आहेत. 'तेन पुरिसेन कतं' (त्या पुरुषाने केले), 'ताय कञ्ञाय कतं' (त्या कन्येने केले), 'ताय कञ्ञाय देति' (त्या कन्येला देतो), 'ताय कञ्ञाय अपेति' (त्या कन्येपासून दूर होतो), 'ताय कञ्ञाय सन्तकं' (त्या कन्येच्या मालकीचे), 'ताय कञ्ञाय पतिट्ठितं' (त्या कन्येमध्ये प्रतिष्ठित) – येथे एक असमान आहे आणि पाच समान आहेत. अशा प्रकारे पुल्लिंगाची स्पष्ट-आकार-व्यवहारता दिसून येते आणि स्त्रीलिंगाची अस्पष्ट-आकार-व्यवहारता दिसून येते. नपुंसकलिंगाचे तर "रूपं, रूपाणि, रूपा. रूपं, रूपाणि, रूपे. भो रूप, भवन्तो रूपाणि, रूपा" अशा प्रकारे प्रथमा, द्वितीया आणि संबोधन या तीन स्थानांमध्ये विकारासह विशेष रूपमालेच्या द्वारे दोन्ही प्रकारांनी मुक्त आकाराचा व्यवहार दिसून येतो. पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंगाची या तीन स्थानांमध्ये विकारासह रूपे नेहमी नसतात. म्हणून, स्पष्ट-आकार-व्यवहार म्हणजे पुल्लिंग, अस्पष्ट-आकार-व्यवहार म्हणजे स्त्रीलिंग आणि दोन्ही प्रकारांनी मुक्त आकाराचा व्यवहार म्हणजे नपुंसकलिंग असे जाणावे. အယံ နယော ‘‘သဒ္ဓါ သတိ ဟိရီ, ယာ ဣတ္ထီ သဒ္ဓါ ပသန္နာ, တေ မနုဿာ သဒ္ဓါ ပသန္နာ, ပဟူတံ သဒ္ဓံ ပဋိယတ္တံ, သဒ္ဓံ ကုလ’’န္တိအာဒီသု သမာနသုတိကသဒ္ဒေသုပိ ပဒမာလာဝသေန လဗ္ဘတေဝ. ယာ စ ပန ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ ဝုတ္တာ, သာ ဧကစ္စေသုပိ သင်္ချာသဒ္ဒေသု လဗ္ဘတိ. တထာ ဟိ ဝီသတိအာဒယော နဝုတိပရိယန္တာ သဒ္ဒါ ဧကဝစနန္တာ ဣတ္ထိလိင်္ဂါတိ ဝုတ္တာ, ဧတ္ထ ‘‘ဝီသတိယာ’’တိ ပဉ္စက္ခတ္တုံ ဝတ္တဗ္ဗံ, တထာ ‘‘တိံသာယာ’’တိအာဒီနံ ‘‘နဝုတိယာ’’တိ ပဒပရိယန္တာနံ, ဧဝံ ဝီသတိအာဒီနံ ကညာသဒ္ဒဿေဝ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ လဗ္ဘတီတိ အဝဂန္တဗ္ဗံ. ယဒိ ဧဝံ တိစတုသဒ္ဒေသု ကထန္တိ? တိစတုသဒ္ဒါ ပန ယသ္မာ ‘‘တယော တိဿော တီဏိ, စတ္တာရော စတုရော စတဿော စတ္တာရီ’’တိ အတ္တနော အတ္တနော ရူပါနိ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနုဂဘတ္တာ ယထာသကလိင်္ဂဝသေန ‘‘ပုရိသာ ကညာယော စိတ္တာနီ’’တိအာဒီဟိ ဝိသဒါဝိသဒေါဘယရဟိတာကာရဝေါဟာရသင်္ခါတေဟိ သဒ္ဒေဟိ ယောဂံ ဂစ္ဆန္တိ, တသ္မာ ပစ္စေကလိင်္ဂဝသေန ဝိသဒါဝိသဒေါဘယရဟိတာကာရဝေါဟာရာတိ ဝတ္တုမရဟန္တိ. हा नियम "सद्धा (श्रद्धा), सति (स्मृती), हिरी (लज्जा); जी स्त्री श्रद्धेने प्रसन्न आहे (या इत्थी सद्धा पसन्ना); ते मनुष्य श्रद्धेने प्रसन्न आहेत (ते मनुस्सा सद्धा पसन्ना); प्रचुर श्रद्धा तयार केली आहे (पहूतं सद्धं पटियत्तं); श्रद्धाळू कुल (सद्धं कुलं)" इत्यादी समान उच्चार असणाऱ्या शब्दांमध्येही पदमालेच्या आधारे प्राप्त होतोच. आणि स्त्रीलिंगाची जी अस्पष्ट-आकार-व्यवहारता सांगितली आहे, ती काही संख्यावाचक शब्दांमध्येही आढळते. जसे की, 'वीसति' (वीस) पासून 'नवुति' (नव्वद) पर्यंतचे शब्द एकवचनान्त स्त्रीलिंगी सांगितले आहेत. येथे 'वीसतिया' हे रूप पाच वेळा वापरावे लागते, तसेच 'तिंसाय' इत्यादींपासून 'नवुतिया' या पदापर्यंत; अशा प्रकारे 'वीसति' इत्यादी शब्दांमध्ये 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाप्रमाणेच अस्पष्ट-आकार-व्यवहारता प्राप्त होते, असे समजावे. जर असे आहे, तर 'ति' (तीन) आणि 'चतु' (चार) या शब्दांच्या बाबतीत काय? 'ति' आणि 'चतु' हे शब्द तर "तयो, तिस्सो, तीणि" (तीन) आणि "चत्तारो, चतुरो, चतस्सो, चत्तारी" (चार) अशी आपली स्वतःची रूपे विशेष्य लिंगाच्या अनुगामी असल्यामुळे, आपापल्या लिंगानुसार 'पुरिसा' (पुरुष), 'कञ्ञायो' (कन्या), 'चित्तानि' (चित्ते) इत्यादी स्पष्ट, अस्पष्ट आणि दोन्ही प्रकारांनी रहित आकाराचा व्यवहार असणाऱ्या शब्दांशी जोडले जातात. म्हणून, प्रत्येक लिंगानुसार ते स्पष्ट, अस्पष्ट आणि दोन्ही प्रकारांनी रहित आकाराचे व्यवहार आहेत, असे म्हणणे योग्य ठरेल. သဗ္ဗနာမေသုပိ [Pg.287] အယံ တိဝိဓော အာကာရော လဗ္ဘတိ ရူပဝိသေသယောဂတော. ကထံ? ပုန္နပုံသကဝိသယေ ‘‘တဿ ကဿ’’ ဣစ္စာဒီနိ သဗ္ဗာနိ သဗ္ဗနာမိကရူပါနိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌိယန္တာနိ ဘဝန္တိ, ဣတ္ထိလိင်္ဂဝိသယေ ‘‘တဿာ ကဿာ’’ ဣစ္စာဒီနိ သဗ္ဗနာမိကရူပါနိ တတိယာစတုတ္ထီပဉ္စမီဆဋ္ဌီသတ္တမိယန္တာနိ ဘဝန္တိ, တသ္မာ သဗ္ဗနာမတ္တေပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ ဧကန္တတော သမ္ပဋိစ္ဆိတဗ္ဗာ. ဧတ္ထ ပန သုလဘာနိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီရူပါနိ အနာဟရိတွာ သုဒုလ္လဘဘာဝေန တတိယာပဉ္စမီသတ္တမီရူပါနိ သာသနတော အာဟရိတွာ ဒဿေဿာမ ဘဂဝတော ပါဝစနေ နိက္ကင်္ခဘာဝေန သောတူနံ ပရမသဏှသုခုမဉာဏာဓိဂမတ္ထံ. တံ ယထာ? ‘‘အာယသ္မာ ဥဒါယီ ယေန သာ ကုမာရိကာ တေနုပသင်္ကမိ, ဥပသင်္ကမိတွာ တဿာ ကုမာရိကာယ သဒ္ဓိံ ဧကော ဧကာယ ရဟော ပဋိစ္ဆန္နေ အာသနေ အလံကမ္မနီယေ နိသဇ္ဇံ ကပ္ပေသီ’’တိ. ဧတ္ထ ‘‘တဿာ’’တိ တတိယာယ ရူပံ, ‘‘တဿာ’’တိ တတိယာယ ရူပေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ‘‘သဗ္ဗဿာ ကတရိဿာ’’တိအာဒီနိ တတိယာရူပါနိ ပါဠိယံ အနာဂတာနိပိဒိဋ္ဌာနိယေဝ နာမ တေသံ အညမညသမာနဂတိကတ္တာ, ဒိဋ္ဌေန စ အဒိဋ္ဌဿပိ ယုတ္တဿ ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ. ‘‘ကဿာဟံ ကေန ဟာယာမီ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ကဿာ’’တိ ပဉ္စမိယာ ရူပံ, ‘‘ကဿာ’’တိ ပဉ္စမိယာ ရူပေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ‘‘သဗ္ဗဿာ ကတရိဿာ’’တိအာဒီနိ ပဉ္စမိယာ ရူပါနိ ပါဠိယံ အနာဂတာနိပိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ နာမ. ‘‘အညတရော ဘိက္ခု ဝေသာလိယံ မဟာဝနေ မက္ကဋိံ အာမိသေန ဥပလာပေတွာ တဿာ မေထုနံ ဓမ္မံ ပဋိသေဝတိ. အညတရော ဘိက္ခု အညတရိဿာ ဣတ္ထိယာ ပဋိဗဒ္ဓစိတ္တော ဟောတီ’’တိ စ ဧတ္ထ ‘‘တဿာ အညတရိဿာ’’တိ စ သတ္တမိယာ ရူပံ, တသ္မိံ ဒိဋ္ဌေယေဝ ‘‘သဗ္ဗဿာ ကတရိဿာ’’တိအာဒီနိ သတ္တမိယာ ရူပါနိ ပါဠိယံ အနာဂတာနိပိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ နာမာတိ. सर्वनामांमध्येही रूपांच्या विशेष योगामुळे हा त्रिविध (तीन प्रकारचा) आकार प्राप्त होतो. कसा? पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगाच्या विषयात "तस्स, कस्स" इत्यादी सर्व सर्वनामांची रूपे चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीची असतात. स्त्रीलिंगाच्या विषयात "तस्सा, कस्सा" इत्यादी सर्वनामांची रूपे तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी आणि सप्तमी विभक्तीची असतात. म्हणून सर्वनामांमध्येही स्त्रीलिंगाची अस्पष्ट-आकार-व्यवहारता पूर्णपणे स्वीकारली पाहिजे. येथे सहज मिळणारी चतुर्थी आणि षष्ठीची रूपे न घेता, अत्यंत दुर्मिळ असणारी तृतीया, पंचमी आणि सप्तमीची रूपे भगवंतांच्या प्रवचनातून आणून दाखवू, जेणेकरून श्रोत्यांना भगवंतांच्या वचनात निःशंकता निर्माण व्हावी आणि त्यांना परम सूक्ष्म व सखोल ज्ञानाची प्राप्ती व्हावी. ते कसे? जसे की: "आयुष्यमान उदायी जेथे ती कुमारी होती तेथे गेले. तेथे जाऊन त्यांनी त्या कुमारीसोबत एकांतात, झाकलेल्या आणि मैथुनास योग्य अशा आसनावर एकट्याने एका स्त्रीसोबत आसन ग्रहण केले." येथे 'तस्सा' हे तृतीया विभक्तीचे रूप आहे. 'तस्सा' हे तृतीया विभक्तीचे रूप पाहिले असता, 'सब्बस्सा', 'कतरिस्सा' इत्यादी तृतीया विभक्तीची रूपे पाळीमध्ये थेट आलेली नसली तरी ती पाहिलेलीच मानली पाहिजेत; कारण त्यांची गती एकमेकांसारखीच आहे आणि जे पाहिले आहे त्यावरून न पाहिलेल्या परंतु योग्य असलेल्या रूपांचे ग्रहण केले पाहिजे. "कस्साहं केन हायामि" (मी कोणापासून आणि कशाने हीन होत आहे?) येथे 'कस्सा' हे पंचमी विभक्तीचे रूप आहे. 'कस्सा' हे पंचमी विभक्तीचे रूप पाहिले असता, 'सब्बस्सा', 'कतरिस्सा' इत्यादी पंचमी विभक्तीची रूपे पाळीमध्ये आलेली नसली तरी ती पाहिलेलीच मानली पाहिजेत. "एक भिक्खू वैशालीतील महावनात एका माकडिणीला खाण्याचे आमिष दाखवून तिच्याशी मैथुन धर्म आचरतो. एक भिक्खू एका स्त्रीच्या प्रेमात पडतो (प्रतिबद्धचित्त होतो)." येथे 'तस्सा' आणि 'अञ्ञतरिस्सा' ही सप्तमी विभक्तीची रूपे आहेत. ती पाहिली असता, 'सब्बस्सा', 'कतरिस्सा' इत्यादी सप्तमी विभक्तीची रूपे पाळीमध्ये आलेली नसली तरी ती पाहिलेलीच मानली पाहिजेत. နနု [Pg.288] စ ဘော ‘‘တဿာ ကုမာရိကာယ သဒ္ဓိ’’န္တိ ဧတ္ထ ‘‘တဿာ’’တိ ဣဒံ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသေန ဝုတ္တံ, ‘‘တာယာ’’တိ ဟိဿ အတ္ထော, တထာ ‘‘ကဿာဟံ ကေန ဟာယာမီ’’တိ ဣဒမ္ပိ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသေန ဝုတ္တံ. ‘‘ကာယာ’’တိ ဟိဿ အတ္ထော. ‘‘အညတရိဿာ ဣတ္ထိယာ ပဋိဗဒ္ဓစိတ္တော’’တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘အညတရိဿာ’’တိ ဣဒံ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသေန ဝုတ္တံ. ‘‘အညတရိဿ’’န္တိ ဟိဿ အတ္ထောတိ? တန္န, ဤဒိသေသု စုဏ္ဏိယပဒဝိသယေသု ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသဿ အနိစ္ဆိတဗ္ဗတ္တာ. နနု စ ဘော စုဏ္ဏိယပဒဝိသယေပိ ‘‘သံဃေ ဂေါတမိ ဒေဟီ’’တိအာဒီသု ‘‘သံဃဿာ’’တိ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသတ္ထံ ဝဒန္တိ ဂရူတိ? သစ္စံ, တထာပိ တာဒိသေသု ဌာနေသု ဒွေ အဓိပ္ပာယာ ဘဝန္တိ အာဓာရပဋိဂ္ဂါဟကဘာဝေန ဘုမ္မသမ္ပဒါနာနမိစ္ဆိတဗ္ဗတ္တာ. တထာ ဟိ ‘‘သံဃဿ ဒေထာ’’တိ ဝတ္တုကာမဿ သတော ‘‘သံဃေ ဒေထာ’’တိ ဝစနံ န ဝိရုဇ္ဈတိ, ယုဇ္ဇတိယေဝ. တထာ ‘‘သံဃေ ဒေထာ’’တိ ဝတ္တုကာမဿပိ သတော ‘‘သံဃဿ ဒေထာ’’တိ ဝစနမ္ပိ န ဝိရုဇ္ဈတိ, ယုဇ္ဇတိယေဝ, ယထာ ပန အလာဗု လာဗုသဒ္ဒေသု ဝိသုံ ဝိသုံ ဝိဇ္ဇမာနေသုပိ ‘‘လာဗူနိ သီဒန္တိ သိလာ ပ္လဝန္တီ’’တိ ဧတ္ထ ဆန္ဒာနုရက္ခဏတ္ထံ အကာရလောပေါ ဟောတီတိ အက္ခရလောပေါ ဗုဒ္ဓိယာ ကရိယတိ. တထာ ‘‘သံဃေ ဂေါတမိ ဒေဟီ’’တိအာဒီသုပိ ဗုဒ္ဓိယာ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသဿ ပရိကပ္ပနံ ကတွာ ‘‘သံဃဿာ’’တိ ဝိပလ္လာသတ္ထမိစ္ဆန္တိ အာစရိယာ. တသ္မာ ‘‘သံဃေ ဂေါတမိ ဒေဟိ. ဝေဿန္တရေ ဝရံ ဒတွာ’’တိအာဒီသု ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော ယုတ္တော ‘‘တဿာ ကုမာရိကာယာ’’တိအာဒီသု ပန န ယုတ္တော, ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော စ နာမ ယေဘုယျေန ‘‘နေဝ ဒါနံ ဝိရမိဿ’’န္တိအာဒီသု ဂါထာသု ဣစ္ဆိတဗ္ဗော. अहो महोदय, 'तस्सा कुमारिकाय सद्धिं' (त्या कुमारीसोबत) येथे 'तस्सा' हे विभक्ती-विपर्यासामुळे (विभक्तीच्या बदलामुळे) म्हटले आहे, कारण त्याचा अर्थ 'ताया' (तिच्याद्वारे/तिच्यासोबत) असा आहे; तसेच 'कस्साहं केन हायामी' (मी कोणापेक्षा कशाने कमी पडतो?) हे देखील विभक्ती-विपर्यासामुळे म्हटले आहे, कारण त्याचा अर्थ 'काया' (कोणापेक्षा) असा आहे. 'अञ्ञतरिस्सा इत्थिया पटिबद्धचित्तो' (एका स्त्रीवर आसक्त चित्त असलेला) येथेही 'अञ्ञतरिस्सा' हे विभक्ती-विपर्यासामुळे म्हटले आहे, कारण त्याचा अर्थ 'अञ्ञतरिस्सं' (एका स्त्रीमध्ये) असा आहे, असे नाही का? तसे नाही, कारण अशा गद्यपदांच्या (चुण्णियपद) विषयात विभक्ती-विपर्यास स्वीकारणे इष्ट नाही. पण अहो महोदय, गद्यपदांच्या विषयातही 'संघे गोतमि देहि' (हे गौतमी, संघामध्ये दान दे) इत्यादी वाक्यांमध्ये आचार्य 'संघस्स' (संघाला) असा विभक्ती-विपर्यास मानतात ना? हे सत्य आहे, तरीही अशा ठिकाणी आधार (अधिकरण) आणि प्रतिग्राहक (संप्रदान) या दोन्ही भावांमुळे सप्तमी आणि चतुर्थी या दोन्ही विभक्तींचे अभिप्राय इच्छिले जातात. तसेच 'संघाला द्या' (संघस्स देथ) असे म्हणण्याची इच्छा असताना 'संघामध्ये द्या' (संघे देथ) असे म्हणणे विरुद्ध ठरत नाही, ते योग्यच आहे. त्याचप्रमाणे 'संघामध्ये द्या' असे म्हणण्याची इच्छा असताना 'संघाला द्या' असे म्हणणेही विरुद्ध ठरत नाही, ते योग्यच आहे. ज्याप्रमाणे 'अलाबु' आणि 'लाबु' हे शब्द वेगवेगळे अस्तित्वात असतानाही, 'लाबूनि सीदन्ति सिला प्लवन्ती' (भोपळे बुडतात आणि दगड तरंगतात) येथे छंदाच्या रक्षणासाठी 'अ' काराचा लोप होतो, अशा प्रकारे बुद्धीने अक्षरलोप केला जातो. त्याचप्रमाणे 'संघे गोतमि देहि' इत्यादींमध्ये देखील बुद्धीने विभक्ती-विपर्यासाची कल्पना करून आचार्य 'संघस्स' असा विपर्यास-अर्थ इच्छितात. म्हणून 'संघे गोतमि देहि', 'वेस्संतरे वरं दत्वा' इत्यादींमध्ये विभक्ती-विपर्यास योग्य आहे, परंतु 'तस्सा कुमारिकाय' इत्यादींमध्ये तो योग्य नाही. आणि विभक्ती-विपर्यास हा बहुधा 'नेव दानं विरमिस्सं' इत्यादी गाथांमध्येच (पद्यांमध्येच) स्वीकारला पाहिजे. တထာပိ ဝဒေယျ ယာ သာ တုမှေဟိ ‘‘တဿာ မေထုနံ ဓမ္မံ ပဋိသေဝတီ’’တိ ပါဠိ အာဘတာ, န သာ သတ္တမီပယောဂါ. ‘‘တဿာ’’တိ [Pg.289] ဟိ ဣဒံ ဆဋ္ဌိယန္တပဒံ ‘‘တဿာမက္ကဋိယာအင်္ဂဇာတေ မေထုနံ ဓမ္မံ ပဋိသေဝတီ’’တိ အတ္ထသမ္ဘဝတောတိ? တန္န, အဋ္ဌကထာယံ ‘‘တဿာတိ ဘုမ္မဝစန’’န္တိ ဝုတ္တတ္တာ. ကိဉ္စ ဘိယျော – အဋ္ဌကထာယံယေဝ ‘‘တဿာ စ သိက္ခာယ သိက္ခံ ပရိပူရေန္တော သိက္ခတိ, တသ္မိဉ္စ သိက္ခာပဒေ အဝီတိက္ကမန္တော သိက္ခတီ’’တိ ဣမသ္မိံ ပဒေသေ ‘‘တဿာ’’တိ ဘုမ္မဝစနံ နိဒ္ဒေသော ကတောတိ. နနု စ ဘော တတ္ထာပိ ‘‘တဿာ’’တိ ဣဒံ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသဝသေန ဘုမ္မတ္ထေ သာမိဝစနန္တိ? ‘‘အတိဝိယ တွံ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသနယေ ကုသလောသိ, ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသိကော နာမာ’’တိ ဘဝံ ဝတ္တဗ္ဗော. ယော တွံ ဓမ္မသင်္ဂါဟကတ္ထေရေဟိ ဝုတ္တပါဠိမ္ပိ ဥလ္လင်္ဃသိ, အဋ္ဌကထာဝစနမ္ပိ ဥလ္လင်္ဃသိ, အပရမ္ပိ တေ နိဒ္ဒေသပါဠိံ အာဟရိဿာမ. သစေ တွံ ပဏ္ဍိတဇာတိကော, သညတ္တိံ ဂမိဿသိ. သစေ အပဏ္ဍိတဇာတိကော, အတ္တနော ဂါဟံ အမုဉ္စန္တောယေဝ သညတ္တိံ န ဂမိဿတိ, သာသနေ စိတ္တိံ ကတွာ သုဏောဟီတိ. ‘‘တသ္မာ ဟိ သိက္ခေထ ဣဓေဝ ဇန္တူ’’တိ ဣမိဿာ ပါဠိယာ အတ္ထံ နိဒ္ဒိသန္တေန ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေန သတ္ထုကပ္ပေန အဂ္ဂသာဝကေန ဓမ္မသေနာပတိနာ အာယသ္မတာ သာရိပုတ္တေန ‘‘ဣဓာတိ ဣမိဿာ ဒိဋ္ဌိယာ ဣမိဿာ ခန္တိယာ ဣမိဿာ ရုစိယာ ဣမသ္မိံ အာဒါယေ ဣမသ္မိံ ဓမ္မေ’’တိ ဧဝံ ‘‘ဣမိဿာ’’တိ ပဒံ ဘုမ္မဝစနဝသေန ဝုတ္တံ. တဉှိ ‘‘ဣဓာ’’တိ ပဒဿ အတ္ထဝါစကတ္တာ သတ္တမိယာ ရူပန္တိ ဝိညာယတိ. ဣတိ ‘‘ဣမိဿာ’’တိ သတ္တမိယာ ရူပေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ‘‘သဗ္ဗဿာ ကတရိဿာ’’တိအာဒီနိ သတ္တမိယာ ရူပါနိ ပါဠိယံ အနာဂတာနိပိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ နာမ. तरीही तुम्ही असे म्हणू शकता की, तुम्ही जी 'तस्सा मेथुनं धम्मं पटिसेवति' (तिच्याशी मैथुनधर्म आचरतो) ही पाळी उद्धृत केली आहे, ती सप्तमी विभक्तीचा प्रयोग नाही. कारण 'तस्सा' हे षष्ठी विभक्तीचे पद असून 'त्या माकडिणीच्या जननेंद्रियामध्ये मैथुनधर्म आचरतो' असा अर्थ संभवतो? तसे नाही, कारण अट्ठकथेमध्ये 'तस्सा हे सप्तमीचे वचन (भूमवचन) आहे' असे स्पष्ट म्हटले आहे. आणखी काय - अट्ठकथेमध्येच 'तस्सा च सिक्खाय सिक्खं परिपूरेन्तो सिक्खति, तस्मिञ्च सिक्खापदे अवीतिक्कमन्तो सिक्खति' (त्या शिक्षेमध्ये शिक्षा परिपूर्ण करत शिकतो आणि त्या शिक्षापदाचे उल्लंघन न करता शिकतो) या वाक्यात 'तस्सा' हा सप्तमी विभक्तीचा निर्देश केला आहे. पण अहो महोदय, तिथेही 'तस्सा' हे विभक्ती-विपर्यासामुळे सप्तमीच्या अर्थी षष्ठीचे वचन (सामीवचन) आहे का? तर आपल्याला असे म्हणावे लागेल की, 'तुम्ही विभक्ती-विपर्यास पद्धतीमध्ये अत्यंत कुशल आहात, खरोखरच तुम्ही विभक्ती-विपर्यासवादी आहात!' जे तुम्ही धम्मसंगीतिका (धम्मसंग्रह) करणाऱ्या थेरांनी सांगितलेल्या पाळीचेही उल्लंघन करता आणि अट्ठकथेच्या वचनाचेही उल्लंघन करता. आम्ही तुमच्यासाठी आणखी एक निर्देश-पाळी सादर करतो. जर तुम्ही बुद्धिमान (पंडित) असाल, तर तुम्हाला हे समजेल. जर तुम्ही अबुद्धिमान असाल, तर स्वतःचा हट्ट न सोडता तुम्हाला हे समजणार नाही. शासनावर (बुद्धशासनावरील आदराने) चित्त एकाग्र करून ऐका. 'तस्मा हि सिक्खेथ इधेव जन्तू' (म्हणून माणसाने येथेच शिकावे) या पाळीचा अर्थ स्पष्ट करताना, प्रभिन्नपटिसंभिदा (विशेष ज्ञान) प्राप्त, शास्त्यांसमान (बुद्धांसमान) असणारे अग्रश्रावक, धम्मसेनापती आयुष्यमान सारिपुत्त यांनी 'इध (येथे) म्हणजे इमिस्सा दिट्ठिया (या दृष्टीमध्ये), इमिस्सा khantiyā (या सहनशीलतेमध्ये), इमिस्सा रुचिया (या आवडीमध्ये), इमस्मिं आदाये (या ग्रहणामध्ये), इमस्मिं धम्मे (या धम्मामध्ये)' अशा प्रकारे 'इमिस्सा' हे पद सप्तमी विभक्तीच्या (भूमवचन) अर्थाने वापरले आहे. कारण ते 'इध' या शब्दाचा अर्थ दर्शवणारे असल्याने सप्तमीचे रूप आहे असे समजले जाते. अशा प्रकारे 'इमिस्सा' हे सप्तमीचे रूप पाहिले असता, 'सब्बस्सा', 'कतरिस्सा' इत्यादी सप्तमीची रूपे पाळीमध्ये थेट आलेली नसली तरी ती पाहिलेलीच मानली पाहिजेत. အပရမ္ပိ တေ သဗ္ဗလောကာနုကမ္ပကေန သဗ္ဗညုနာ အာဟစ္စဘာသိတံ ပါဠိံ အာဟရိဿာမ, စိတ္တိံ ကတွာ သုဏောဟိ, ‘‘အဋ္ဌာနမေတံ ဘိက္ခဝေ အနဝကာသော, ယံ ဧကိဿာ လောကဓာတုယာ [Pg.290] အပုဗ္ဗံ အစရိမံ ဒွေ အရဟန္တော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓါ ဥပ္ပဇ္ဇေယျု’’န္တိ ဧတ္ထ ‘‘ဧကိဿာ’’တိ ဣဒံ သတ္တမိယာ ရူပံ. ဧဝံ ‘‘ဧကိဿာ’’တိ သတ္တမိယာ ရူပေ ဒိဋ္ဌေယေဝ ‘‘သဗ္ဗဿာ ကတရိဿာ’’တိအာဒီနိ သတ္တမိယာ ရူပါနိ ပါဠိယံ အနာဂတာနိပိ ဒိဋ္ဌာနိယေဝ နာမ. န ဟိ သဗ္ဗထာပိ ဝေါဟာရာ သရူပတော ပါဠိအာဒီသု ဒိဿန္တိ, ဧကစ္စေ ဒိဿန္တိ, ဧကစ္စေ န ဒိဿန္တိယေဝ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – आम्ही तुमच्यासाठी सर्व जगावर अनुकंपा करणाऱ्या सर्वज्ञांनी (बुद्धांनी) प्रत्यक्ष सांगितलेली आणखी एक पाळी सादर करतो, चित्त एकाग्र करून ऐका - 'अट्ठाणमेतं भिक्खवे अनवकासो, यं एकिस्सा लोकधातुया अपुब्बं अचरिमं द्वे अरहन्तो सम्मासम्बुद्धा उप्पज्जेय्युं' (हे भिक्खूंनो, हे अशक्य आहे, असा कोणताही वाव नाही की, एकाच लोकधातूमध्ये एकाच वेळी दोन अर्हत सम्यक्संबुद्ध उत्पन्न होतील). येथे 'एकिस्सा' हे सप्तमीचे रूप आहे. अशा प्रकारे 'एकिस्सा' हे सप्तमीचे रूप पाहिले असता, 'सब्बस्सा', 'कतरिस्सा' इत्यादी सप्तमीची रूपे पाळीमध्ये थेट आलेली नसली तरी ती पाहिलेलीच मानली पाहिजेत. कारण सर्वच व्यवहार (शब्दप्रयोग) मूळ रूपात पाळी इत्यादींमध्ये दिसून येत नाहीत; काही दिसतात, तर काही दिसतच नाहीत. या संदर्भात हे म्हटले आहे - ‘‘တဿာ’’ဣစ္စာဒယော သဒ္ဒါ, ‘‘တာယ’’ဣစ္စာဒယော ဝိယ; ဉေယျာ ပဉ္စသု ဌာနေသု, တတိယာဒီသု ဓီမတာ. ‘तस्सा’ इत्यादी शब्द, ‘ताया’ इत्यादी शब्दांप्रमाणेच; तृतीयेपासून पुढील पाच विभक्तींच्या ठिकाणी बुद्धिमान पुरुषाने जाणावेत. တိဏ္ဏန္နံ ပန နာဒီနံ, ဟောတိ သဗျပဒေသတော; ‘‘တဿာ ကဿာ’’တိအာဒီနိ, ဘဝန္တိ တတိယာဒိသု. परंतु ‘तिण्णं’ (तीन) इत्यादी नामांच्या बाबतीत, विशेष निर्देशामुळे; ‘तस्सा’, ‘कस्सा’ इत्यादी रूपे तृतीया इत्यादी विभक्तींमध्ये होतात. အတြ ပနာယံ ပါဠိနယဝိဘာဝနာ အဋ္ဌကထာနယဝိဘာဝနာ စ – တဿာ ကညာယ သဒ္ဓိံ ဂစ္ဆတိ, တဿာ ကညာယ ကတံ, တဿာ ကညာယ ဒေတိ, တဿာ ကညာယ အပေတိ, တဿာ ကညာယ အယံ ကညာ ဟီနာ, တဿာ ကညာယ အယံ ကညာ အဓိကာ, တဿာ ကညာယ သန္တကံ, တဿာ ကညာယ ပတိဋ္ဌိတန္တိ. ဒုလ္လဘာယံ နီတိ သာဓုကံ စိတ္တိံ ကတွာ ပရိယာပုဏိတဗ္ဗာ သာသနဿ စိရဋ္ဌိတတ္ထံ. ဧဝံ သဗ္ဗထာပိ ပါဠိအဋ္ဌကထာနယာနုသာရေန ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ ဉာတဗ္ဗာ. येथे पाळी पद्धतीचे आणि अट्ठकथा पद्धतीचे स्पष्टीकरण खालीलप्रमाणे आहे - तस्सा कञ्ञाय सद्धिं गच्छति (त्या कन्येसोबत जातो), तस्सा कञ्ञाय कतं (त्या कन्येने केले), तस्सा कञ्ञाय देति (त्या कन्येला देतो), तस्सा कञ्ञाय अपेति (त्या कन्येपासून दूर जातो), तस्सा कञ्ञाय अयं कञ्ञा हीना (त्या कन्येपेक्षा ही कन्या कनिष्ठ आहे), तस्सा कञ्ञाय अयं कञ्ञा अधिका (त्या कन्येपेक्षा ही कन्या श्रेष्ठ आहे), तस्सा कञ्ञाय सन्तकं (त्या कन्येचे मालकीचे), तस्सा कञ्ञाय पतिट्ठितं (त्या कन्येमध्ये प्रतिष्ठित आहे). ही दुर्मिळ व्याकरण पद्धती (नीति) शासनाच्या (बुद्धशासनाच्या) चिरंतन अस्तित्वासाठी चांगल्या प्रकारे मनात धरून आत्मसात केली पाहिजे. अशा प्रकारे, सर्वतोपरी पाळी आणि अट्ठकथा पद्धतीनुसार स्त्रीलिंगी शब्दांच्या अस्पष्ट स्वरूपाच्या व्यवहाराची माहिती करून घेतली पाहिजे. ဧဝံ ပန ဉတွာ ဝိညုဇာတိနာ ‘‘ဒွိန္နံ ဂေါသဒ္ဒါနံ ရူပမာလာဝိသေသေန လိင်္ဂနာနတ္တံ ဟောတီ’’တိ နိဋ္ဌမေတ္ထာဝဂန္တဗ္ဗံ. ဂေါသဒ္ဒေါ ဟိ ‘‘ပုရိသော မာတုဂါမော ဩရောဓော အာပေါ သတ္ထာ’’တိအာဒယော ဝိယ န နိယောဂါ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရော, နာပိ ‘‘ကညာ ရတ္တိ ဣတ္ထီ’’တိအာဒယော ဝိယ နိယောဂါ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရော. တထာ ဟိ အယံ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝေ ဓာတုသဒ္ဒေါ ဝိယ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရော, ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရော[Pg.291]. ဣတိ ဣမဿ အတ္ထဿ သောတူနံ ဉာပနေန ပရမသဏှသုခုမဉာဏပ္ပဋိလာဘတ္တံ ‘‘ဂေါ, ဂါဝီ ဂါဝေါ. ဂါဝိံ, ဂဝေါ’’တိအာဒိနာ ဩကာရန္တဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ အာဝေဏိကာ နာမိကပဒမာလာ ဝုတ္တာ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဂါဝိ’’န္တိ ဧကက္ခတ္တုမာဂတံ, ‘‘ဂေါ ဂေါဟီ’’တိအာဒီနိ ဒွိက္ခတ္တုံ, ‘‘ဂါဝေါ ဂါဝီ ဂါဝ’’န္တိ တိက္ခတ္တုံ, ‘‘ဂါဝိယာ’’တိ ပဉ္စက္ခတ္တုံ, ဧဝမေတ္ထ ပဉ္စက္ခတ္တုံ အာဂတပဒါနံ ဝသေန အဝိသဒါကာရော ဒိဿတီတိ ဣဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ. ဣမဉှိ နယံ မုဉ္စိတွာ နတ္ထိ အညော နယော ယေန ဂေါသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ သိယာ. တသ္မာ ဣဒမေဝ အမှာကံ မတံ သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗံ. ပုမိတ္ထိလိင်္ဂသင်္ခါတာနံ ဒွိန္နံ ဂေါသဒ္ဒါနံ ရူပမာလာယ နိဗ္ဗိသေသတံ ဝဒန္တာနံ ပန အာစရိယာနံ မတံ ပုလ္လိင်္ဂေ ဝတ္တမာနေန ဂေါသဒ္ဒေနိ’တ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တမာနဿ ဂေါသဒ္ဒဿ ရူပမာလာယ သဒိသတ္တေ သတိ မာတုဂါမသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာယော သမံ ယောဇေတွာ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂဘာဝပရိကပ္ပနံ ဝိယ ဟောတီတိ န သာရတော ပစ္စေတဗ္ဗံ. अशा प्रकारे जाणून घेऊन सुज्ञ व्यक्तीने "दोन 'गो' शब्दांच्या रूपमाळेच्या (विभक्तीरूपांच्या) फरकामुळे लिंगभेद होतो" असा येथे निष्कर्ष काढावा. कारण 'गो' शब्द हा "पुरिसो, मातुगामो, ओरोधो, आपो, सत्था" इत्यादी शब्दांप्रमाणे निश्चितपणे स्पष्ट आकाराचा व्यवहार (स्पष्ट रूप असणारा) नाही, आणि "कञ्ञा, रत्ति, इत्थी" इत्यादी शब्दांप्रमाणे निश्चितपणे अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार (अस्पष्ट रूप असणारा) देखील नाही. कारण हा पुल्लिंगी भावात 'धातु' शब्दाप्रमाणे स्पष्ट आकाराचा व्यवहार आहे, आणि स्त्रीलिंगी भावात अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार आहे. अशा प्रकारे या अर्थाचे श्रोत्यांना ज्ञान करून देण्यासाठी आणि परम सूक्ष्म व सखोल ज्ञानाची प्राप्ती करून देण्यासाठी "गो, गावी गावो. गाविं, गवो" इत्यादींद्वारे ओ-कारान्त स्त्रीलिंगी 'गो' शब्दाची विशिष्ट नामविभक्ती रूपमाळा (नामिकपदमळा) सांगितली आहे. येथे "गाविं" हे एकदा आले आहे, "गो, गोही" इत्यादी दोनदा आले आहेत, "गावो, गावी, गावं" हे तीनदा आले आहेत, "गाविया" हे पाचदा आले आहे; अशा प्रकारे येथे पाच वेळा आलेल्या पदांच्या आधारे अस्पष्ट आकार दिसतो, म्हणून हे स्त्रीलिंगी आहे असे मानले पाहिजे. कारण हा नियम सोडून दुसरा कोणताही नियम नाही ज्याद्वारे 'गो' शब्द स्त्रीलिंगी होऊ शकेल. म्हणून हेच आमचे मत सारभूत (योग्य) म्हणून स्वीकारले पाहिजे. परंतु, पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंग अशा दोन्ही 'गो' शब्दांच्या रूपमाळेत कोणताही फरक नाही असे म्हणणाऱ्या आचार्यांचे मत—पुल्लिंगात वापरल्या जाणाऱ्या 'गो' शब्दाची रूपमाळा स्त्रीलिंगात वापरल्या जाणाऱ्या 'गो' शब्दाच्या रूपमालेसारखीच असल्यामुळे, 'मातुगाम' शब्दाच्या नामिकपदमळेशी समान जुळवून पुल्लिंग-स्त्रीलिंग भावाची कल्पना करण्यासारखे आहे, म्हणून ते सारभूत (योग्य) म्हणून स्वीकारले जाऊ नये. ဧတ္ထ ပန ကိဉ္စိ လိင်္ဂသံသန္ဒနံ ကထယာမ – ဟေဋ္ဌာ နိဒ္ဒိဋ္ဌဿ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဿ ဂေါသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာယံ ‘‘ဂါဝုံ ဂါဝံ ဂါဝေနာ’’တိအာဒီနိ ဧကက္ခတ္တုမာဂတာနိ, ‘‘ဂေါ ဂေါဟီ’’တိအာဒီနိ ဒွိက္ခတ္တုံ, ‘‘ဂါဝေါ ဂဝေါ ဂဝ’’န္တိ ဣမာနိ ပန ‘‘သတ္ထာ ရာဇာ’’တိအာဒီနိ ဝိယ တိက္ခတ္တုံ, စတုက္ခတ္တုံ ဝါ ပနေတ္ထ ပဉ္စက္ခတ္တုံ ဝါ အာဂတပဒါနိ န သန္တိ. တဒဘာဝတော ဝိသဒါကာရော ဒိဿတိ. ပုရိသသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာယမ္ပိ ‘‘ပုရိသော ပုရိသ’’န္တိအာဒီနိ ဧကက္ခတ္တုမာဂတာနိ, ‘‘ပုရိသေ’’တိအာဒီနိ ဒွိက္ခတ္တုံ, ‘‘ပုရိသာ’’တိ တိက္ခတ္တုံ. ဧဝံ ဝိသဒါကာရော ဒိဿတိ. အာကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ ပန ‘‘ကည’’န္တိအာဒီနိ ဧကက္ခတ္တုမာဂတာနိ, ‘‘ကညာဟီ’’တိအာဒီနိ ဒွိက္ခတ္တုံ, ‘‘ကညာယော’’တိအာဒီနိ တိက္ခတ္တုံ, ‘‘ကညာ’’တိ ဣဒံ စတုက္ခတ္တုံ, ‘‘ကညာယာ’’တိ ဣဒံ ပန ပဉ္စက္ခတ္တုံ. ဧဝံ အဝိသဒါကာရော ဒိဿတိ. အာကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဿတု ‘‘သတ္ထရီ’’တိအာဒီနိ ဧကက္ခတ္တုမာဂတာနိ, ‘‘သတ္ထူ’’တိအာဒီနိ [Pg.292] ဒွိက္ခတ္တုံ, ‘‘သတ္ထာ’’တိအာဒီနိ တိက္ခတ္တုံ, ဧဝံ ဝိသဒါကာရော ဒိဿတိ. ဣမိနာ နယေန သဗ္ဗာသုပိ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂပဒမာလာသု ဝိသဒါကာရော စ အဝိသဒါကာရော စ ဝေဒိတဗ္ဗော. နပုံသကလိင်္ဂဿ ပန နာမိကပဒမာလာယံ ‘‘စိတ္တေနာ’’တိအာဒီနိ ဧကက္ခတ္တုမာဂတာနိ, ‘‘စိတ္တ’’န္တိအာဒီနိ ဒွိက္ခတ္တုံ, ‘‘စိတ္တာနီ’’တိ ဣဒံ တိက္ခတ္တုံ အာဂတံ. အဋ္ဌိ အာယုသဒ္ဒါဒီသုပိ ဧသေဝ နယော. ဧတ္ထ ဥဘယမုတ္တာကာရော ဒိဿတိ. ကိဉ္စာပေတ္ထ စတုက္ခတ္တုံ ပဉ္စက္ခတ္တုံ ဝါ အာဂတပဒါနံ အဘာဝတော ဝိသဒါကာရော ဥပလဗ္ဘမာနော ဝိယ ဒိဿတိ, တထာပိ ယသ္မာ ‘‘စိတ္တံ အဋ္ဌိ အာယူ’’တိအာဒီနိ နပုံသကာနိ ‘‘ဂစ္ဆံ အဂ္ဂိ ဘိက္ခူ’’တိအာဒီနံ ပုလ္လိင်္ဂါနံ နယေန အပ္ပဝတ္တနတော ဝိသဒါကာရဉ္စ, ‘‘ရတ္တိ ယာဂူ’’တိအာဒီနံ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနံ နယေန အပ္ပဝတ္တနတော အဝိသဒါကာရဉ္စ ဥဘယမနုပဂမ္မ ဝိသေသတော ‘‘စိတ္တံ, စိတ္တာနိ, စိတ္တာ. စိတ္တံ, စိတ္တာနိ, စိတ္တေ’’တိအာဒိနာ သနိကာရာယ ရူပမာလာယ ရူပဝန္တာနိ ဘဝန္တိ, တသ္မာ တေသမာကာရော ဥဘယမုတ္တောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. येथे आपण काही लिंग-तुलना करू या – खाली दर्शविलेल्या ओ-कारान्त पुल्लिंगी 'गो' शब्दाच्या नामिकपदमळेमध्ये "गावुं, गावं, गावेन" इत्यादी रूपे एकदा आली आहेत, "गो, गोही" इत्यादी दोनदा आली आहेत, "गावो, गवो, गवं" ही रूपे मात्र "सत्था, राजा" इत्यादींप्रमाणे तीनदा आली आहेत; येथे चार वेळा किंवा पाच वेळा आलेली पदे नाहीत. त्याच्या अभावामुळे स्पष्ट आकार (स्पष्ट रूप) दिसून येतो. 'पुरिस' शब्दाच्या नामिकपदमळेमध्ये देखील "पुरिसो, पुरिसं" इत्यादी एकदा आले आहेत, "पुरिसे" इत्यादी दोनदा आले आहेत, "पुरिसा" हे तीनदा आले आहे. अशा प्रकारे स्पष्ट आकार दिसून येतो. आ-कारान्त स्त्रीलिंगी शब्दाच्या बाबतीत "कञ्ञं" इत्यादी एकदा आले आहेत, "कञ्ञाही" इत्यादी दोनदा आले आहेत, "कञ्ञायो" इत्यादी तीनदा आले आहेत, "कञ्ञा" हे चारदा आले आहे, आणि "कञ्ञाय" हे पाचदा आले आहे. अशा प्रकारे अस्पष्ट आकार दिसून येतो. आ-कारान्त पुल्लिंगी शब्दाच्या बाबतीत तर "सत्थरी" इत्यादी एकदा आले आहेत, "सत्थू" इत्यादी दोनदा आले आहेत, "सत्था" इत्यादी तीनदा आले आहेत; अशा प्रकारे स्पष्ट आकार दिसून येतो. या नियमाने सर्वच पुल्लिंगी व स्त्रीलिंगी पदमाळांमध्ये स्पष्ट आकार आणि अस्पष्ट आकार समजून घ्यावा. नपुंसकलिंगाच्या नामिकपदमळेमध्ये तर "चित्तेन" इत्यादी एकदा आले आहेत, "चित्तं" इत्यादी दोनदा आले आहेत, "चित्तानी" हे तीनदा आले आहे. 'अट्ठि' (हाड), 'आयु' इत्यादी शब्दांच्या बाबतीतही हाच नियम आहे. येथे दोन्हीहून मुक्त (उभयमुक्त) आकार दिसून येतो. जरी येथे चार वेळा किंवा पाच वेळा आलेल्या पदांच्या अभावामुळे स्पष्ट आकार उपलब्ध असल्यासारखा दिसतो, तरीही ज्याअर्थी "चित्तं, अट्ठि, आयू" इत्यादी नपुंसकलिंगी शब्द "गच्छं, अग्गि, भिक्खू" इत्यादी पुल्लिंगी शब्दांच्या नियमाने न चालल्यामुळे स्पष्ट आकार, आणि "रत्ति, यागू" इत्यादी स्त्रीलिंगी शब्दांच्या नियमाने न चालल्यामुळे अस्पष्ट आकार, या दोन्हीकडे न जाता विशेषतः "चित्तं, चित्तानी, चित्ता. चित्तं, चित्तानी, citte" इत्यादींनी युक्त अशा रूपमाळेने युक्त असतात, म्हणून त्यांचा आकार 'उभयमुक्त' (दोन्हींपासून मुक्त) आहे असे मानले पाहिजे. တိဝိဓောပါယံ အာကာရော သက္ကဋဘာသာသု န လဗ္ဘတိ. တေနေသ သဗ္ဗေသုပိ ဗျာကရဏသတ္ထေသု န ဝုတ္တော. သဗ္ဗသတ္တာနံ ပန မူလဘာသာဘူတာယ ဇိနေရိတာယ မာဂဓိကာယ သဘာဝနိရုတ္တိယာ လဗ္ဘတိ. တထာ ဟိ အယံ နိရုတ္တိမဉ္ဇူသာယံ ဝုတ္တော – हा त्रिविध प्रकारचा आकार संस्कृत भाषेत आढळत नाही. म्हणूनच हा सर्वच व्याकरणशास्त्रांमध्ये सांगितलेला नाही. परंतु सर्व प्राण्यांची मूळ भाषा असलेल्या, जिनांनी (बुद्धांनी) उपदेशिलेल्या मागधी भाषेच्या स्वाभाविक निरुक्तीमध्ये (व्याकरणात) तो आढळतो. म्हणूनच 'निरुत्तिमंजूषा' मध्ये असे म्हटले आहे – ကိံ ပနေတံ လိင်္ဂံ နာမ? ကေစိ တာဝ ဝဒန္တိ – पण हे 'लिंग' म्हणजे नक्की काय? काही लोक तर म्हणतात – ‘‘ထနကေသဝတီ ဣတ္ထီ, မဿုဝါ ပုရိသော သိယာ. ဥဘိန္နမန္တရံ ဧတံ, ဣတရော’ဘယမုတ္တကော’တိ "स्तन व केस असणारी ती स्त्री, आणि मिशा असणारा तो पुरुष असावा. या दोघांमधील फरक हा आहे, आणि इतर (नपुंसकलिंग) हा दोन्हींपासून मुक्त आहे." ဝုတ္တတ္တာ ဝိသိဋ္ဌာ ထနကေသာဒယော လိင်္ဂ’’န္တိ, ဧတံ န သဗ္ဗတ္ထ, ဂင်္ဂါသာလာရုက္ခာဒီနံ ထနာဒိနာ သမ္ဗန္ဓာဘာဝတော. असे म्हटल्यामुळे विशिष्ट स्तन, केस इत्यादी म्हणजेच लिंग होय, पण हे सर्वत्र लागू होत नाही; कारण गंगा, सालवृक्ष इत्यादींचा स्तनादींशी काही संबंध नसतो. အပရေ [Pg.293] ဝဒန္တိ – ‘‘န လိင်္ဂံ နာမ ပရမတ္ထတော ကိဉ္စိ အတ္ထိ, လောကသင်္ကေတရူဠှော ပန ဝေါဟာရော လိင်္ဂံ နာမာ’’တိ. ဣဒမေတ္ထ သန္နိဋ္ဌာနံ. သဗ္ဗလိင်္ဂိကောပိ သဒ္ဒေါ ဟောတိ တဋံ တဋီ တဋောတိ. ယဒိ စ ပရမတ္ထတော လိင်္ဂံ နာမ သိယာ, ကထံ အညမညဝိရုဒ္ဓါနံ တေသံ ဧကတ္ထ သမာဝေသော ဘဝတိ, တသ္မာ ယဿ ကဿစိ အတ္ထဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရော ဣတ္ထိလိင်္ဂံ, ဝိသဒါကာရဝေါဟာရော ပုလ္လိင်္ဂံ, ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရော နပုံသကလိင်္ဂန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗန္တိ. इतर लोक म्हणतात – "परमार्थतः (वास्तविक पाहता) लिंग नावाची कोणतीही गोष्ट अस्तित्वात नाही, तर लोकसंकेताने रूढ झालेला व्यवहार म्हणजेच लिंग होय." हाच येथे निष्कर्ष आहे. 'तटं, तटी, तटो' याप्रमाणे शब्द सर्वलिंगी देखील असतो. आणि जर परमार्थतः लिंग अस्तित्वात असते, तर एकमेकांशी विरुद्ध असलेल्या या तिन्हींचा एकाच अर्थात कसा समावेश झाला असता? म्हणून, ज्या कोणत्याही अर्थाचा अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार असेल ते स्त्रीलिंग, स्पष्ट आकाराचा व्यवहार असेल ते पुल्लिंग, आणि दोन्हीहून मुक्त आकाराचा व्यवहार असेल ते नपुंसकलिंग समजावे. ဧတ္ထ ပန နာမိကပဒမာလာသင်္ခါတပဗန္ဓဝသေနေဝ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိတာ ဂဟေတဗ္ဗာ, န ဧကေကပဒဝသေန. တထာ ဟိ ‘‘ကညာ ပုရိသော စိတ္တ’’န္တိ စ, ‘‘ကညာယော ပုရိသာ စိတ္တာနီ’’တိ စ ဧဝမာဒိကဿ ဧကေကပဒဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိတာ န ဒိဿတိ. ယသ္မာ ပန ပဗန္ဓဝသေန ဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိဘာဝေ သိဒ္ဓေယေဝ သမုဒါယာဝယဝတ္တာ ဧကေကပဒဿပိ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိတာ သိဇ္ဈတေဝ. परंतु येथे नामिकपदमळा (विभक्ती रूपमाळा) नावाच्या प्रबंधाच्या (वाक्यरचना किंवा रूपांच्या समूहाच्या) आधारेच अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार इत्यादी ग्रहण करावे, एका एका पदाच्या आधारे नाही. कारण "कञ्ञा, पुरिसो, चित्तं" आणि "कञ्ञायो, पुरिसा, चित्तानी" इत्यादी प्रत्येक स्वतंत्र पदावरून अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार इत्यादी दिसून येत नाही. परंतु ज्याअर्थी प्रबंधाच्या (समूहाच्या) आधारे स्पष्ट आकाराचा व्यवहार इत्यादी सिद्ध झाल्यावरच, समुदायाचा अवयव असल्यामुळे प्रत्येक स्वतंत्र पदाचा देखील अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार इत्यादी सिद्ध होतोच. ကေစိ ပန နာမိကပဒမာလာသင်္ခါတံ ပဗန္ဓံ အပရာမသိတွာ ဧကေကပဒဝသေနေဝ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိကံ ဣစ္ဆန္တိ, တေ ဝတ္တဗ္ဗာ ‘‘ယဒိ ဧကေကပဒဿေဝ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိတာ သိယာ, ဧဝံ သန္တေ ‘ကညာ ပုရိသာ သတ္ထာ ဂုဏဝါ ရာဇာ’တိအာဒီနံ ပဒါနံ အာကာရသုတိဝသေန, ‘ပုရိသော သတ္ထာရော ကညာယော’တိအာဒီနံ ပန ဩကာရသုတိဝသေန, ‘စိတ္တံ ပုရိသံ ကည’န္တိအာဒီနံ အနုသာရသုတိဝသေန အညမညံ သမာနသုတိသမ္ဘဝါ ကထံ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိတာ သိယာ’’တိ? ကိဉ္စာပိ တေ ဧဝံ ဝဒေယျုံ ‘‘သိယာ ဧဝ, နာနတ္တံ ပန တေသံ ဒုပ္ပဋိဝေဓ’’န္တိ. တေ ဝတ္တဗ္ဗာ ‘‘မာ တုမှေ ဧဝမဝစုတ္ထ, ဒုဇ္ဇာနတရမ္ပိ နိဗ္ဗာနံ ကထနသမတ္ထံ ပုဂ္ဂလံ နိဿာယ ဇာနန္တိ, တသ္မာ သုဋ္ဌု ဥပပရိက္ခိတွာ ဝဒေထာ’’တိ. ဧဝဉ္စ ပန ဝတွာ [Pg.294] တတော ဥတ္တရိ တေ ပဉှံ ပုစ္ဆိတဗ္ဗာ ‘‘ဗောဓိသဒ္ဒေါ အာယုသဒ္ဒေါ စ ကတရလိင်္ဂေါ’’တိ. တေ ဇာနန္တာ ဧဝံ ဝက္ခန္တိ ‘‘ဗောဓိသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ စေဝ ပုလ္လိင်္ဂေါ စ, အာယုသဒ္ဒေါ စ ပန နပုံသကလိင်္ဂေါ စ ပုလ္လိင်္ဂေါ စာတိ ဒွိလိင်္ဂါ ဧတေ သဒ္ဒါ’’တိ. တေ ဝတ္တဗ္ဗာ ‘‘ယဒိ ဗောဓိသဒ္ဒေါ စ အာယုသဒ္ဒေါ စ ဒွိလိင်္ဂါ ဧတေ သဒ္ဒါ, ဧဝံ သန္တေ ဒွိန္နံ ဗောဓိသဒ္ဒါနံ ဧကပဒဘာဝေန ဝဝတ္ထိတာနံ အစ္စန္တသမာနသုတိကာနံ ကထံ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ စ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ စ သိယာ, ကထဉ္စ ပန ဒွိန္နံ အာယုသဒ္ဒါနံ ဧကပဒဘာဝေန ဝဝတ္ထိတာနံ အစ္စန္တသမာနသုတိကာနံ ဥဘယမုတ္တာကာရဝေါဟာရတာ စ ဝိသဒါကာရဝေါဟာရတာ စ သိယာ’’တိ? ဧဝံ ဝုတ္တာ တေ အဒ္ဓါ ကိဉ္စိ ဥတ္တရိ အပဿန္တာ နိရုတ္တရာ ဘဝိဿန္တိ. သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ပန သဒ္ဒသတ္ထတော နယံ ဂဟေတွာ ဝဒန္တိ – काही लोक नाम-पदमालेच्या (विभक्ती रूपांच्या मालिकेच्या) प्रबंधाचा विचार न करता, केवळ एकेका पदाच्या आधारेच 'अविशदाकार-व्यवहार' (अस्पष्ट आकाराचा व्यवहार) इत्यादी मानू इच्छितात. त्यांना असे विचारले पाहिजे की, 'जर केवळ एकेका पदाचाच अविशदाकार-व्यवहार इत्यादी असेल, तर अशा वेळी 'कञ्ञा (कन्या), पुरिसा (पुरुष), सत्था (शास्ता), गुणवा (गुणवान), राजा' इत्यादी पदांच्या 'आ'कार-श्रुतीमुळे (शेवटी 'आ' ऐकू आल्यामुळे), आणि 'puriso (पुरुष), सत्थारो (शास्ते), कञ्ञायो (कन्या)' इत्यादींच्या 'ओ'कार-श्रुतीमुळे, तसेच 'चित्तं (चित्त), पुरिसं (पुरुषाला), कञ्ञं (कन्येला)' इत्यादींच्या अनुस्वार-श्रुतीमुळे परस्परांमध्ये समान श्रुती (सारखाच उच्चार) संभवत असताना, अविशदाकार-व्यवहार इत्यादी कसा होऊ शकेल?' जरी ते असे म्हणतील की, 'असे होऊ शकते, परंतु त्यांच्यातील भेद समजणे कठीण आहे.' तर त्यांना असे सांगितले पाहिजे की, 'तुम्ही असे बोलू नका. अत्यंत कठीण असलेले निर्वाण देखील सांगण्यास समर्थ असलेल्या व्यक्तीच्या आश्रयाने लोक जाणतात, म्हणून नीट विचार करून बोला.' आणि असे बोलून त्यानंतर त्यांना पुढे असा प्रश्न विचारला पाहिजे की, 'बोधि-शब्द आणि आयु-शब्द हे कोणत्या लिंगाचे आहेत?' ते जाणत असल्यास असे म्हणतील की, 'बोधि-शब्द हा स्त्रीलिंगी आणि पुल्लिंगी दोन्ही आहे, आणि आयु-शब्द हा नपुंसकलिंगी आणि पुल्लिंगी दोन्ही आहे, अशा प्रकारे हे दोन्ही शब्द द्विलिंगी आहेत.' त्यांना विचारले पाहिजे की, 'जर बोधि-शब्द आणि आयु-शब्द हे द्विलिंगी शब्द आहेत, तर अशा वेळी एकाच पदभावाने निश्चित झालेल्या आणि अत्यंत समान श्रुती (उच्चार) असलेल्या दोन 'बोधि' शब्दांमध्ये अनुक्रमे अविशदाकार-व्यवहार आणि विशदाकार-व्यवहार कसा होऊ शकेल? आणि एकाच पदभावाने निश्चित झालेल्या आणि अत्यंत समान श्रुती असलेल्या दोन 'आयु' शब्दांमध्ये अनुक्रमे उभयमुक्त-आकार-व्यवहार (दोन्हींपासून मुक्त आकाराचा व्यवहार) आणि विशदाकार-व्यवहार कसा होऊ शकेल?' असे विचारले असता, ते निश्चितच पुढे काही न सुचल्यामुळे निरुत्तर होतील. परंतु व्याकरणशास्त्र जाणणारे (शब्दशास्त्रविद्) व्याकरणशास्त्रावरून नियम घेऊन असे म्हणतात – ‘‘ဧသေ’သာ ဧတ’မိတိ စ,ပသိဒ္ဓိ အတ္ထေသု ယေသု လောကဿ; ‘ထီပုမနပုံသကာနီ’တိ,ဝုစ္စန္တေ တာနိ နာမာနီ’’တိ. “ज्या अर्थांमध्ये (वस्तूंमध्ये) लोकांमध्ये 'एसे' (हा), 'एसा' (ही) आणि 'एतं' (हे) अशी प्रसिद्धी आहे, त्या नामांना अनुक्रमे 'स्त्री, पुरुष आणि नपुंसक' (स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंग) असे म्हटले जाते.” တေသံ ကိရ အယမဓိပ္ပာယော – ‘‘ဧသော ပုရိသော, ဧသော မာတုဂါမော, ဧသော ရာဇာ, ဧသာ ဣတ္ထီ, ဧသာ လတာ, ဧတံ နပုံသကံ, ဧတံ စိတ္တ’’န္တိ ဧဝံ ပုရိသာဒီသု ယေသု အတ္ထေသု လောကဿ ‘‘ဧသော ဧသာ ဧတ’’န္တိ စ ပသိဒ္ဓိ ဟောတိ, တေသု အတ္ထေသု တာနိ နာမာနိ ‘‘ပုမိတ္ထိနပုံသကလိင်္ဂါနီ’’တိ ဝုစ္စန္တိ, တံဒွါရေန အညာနိပီတိ. ဧဝံ ဝဒန္တေဟိ တေဟိ ‘‘ဣမိနာ နာမ အာကာရေန ‘ဧသော ဧသာ ဧတ’န္တိ နာမာနိ အညာနိ စ ပုလ္လိင်္ဂါဒိနာမံ လဘန္တီ’’တိ အယံ ဝိသေသော န ဒဿိတော, သဒ္ဓမ္မနယညူဟိ ပန နေရုတ္တိကေဟိ ဒဿိတော ‘‘ယဿ ကဿစိ အတ္ထဿ အဝိသဒါကာရဝေါဟာရော ဣတ္ထိလိင်္ဂ’’န္တိအာဒိနာ. त्यांचा असा अभिप्राय आहे की – 'एषो पुरिसो (हा पुरुष), एषो मातुगामो (हा मातृग्राम/स्त्री), एषो राजा (हा राजा), एषा इत्थी (ही स्त्री), एषा लता (ही लता), एतं नपुंसकं (हे नपुंसक), एतं चित्तं (हे चित्त)' अशा प्रकारे पुरुषादी ज्या अर्थांमध्ये लोकांमध्ये 'एषो, एषा, एतं' अशी प्रसिद्धी असते, त्या अर्थांमध्ये ती नामे 'पुल्लिंग, स्त्रीलिंग आणि नपुंसकलिंग' अशी म्हटली जातात, आणि त्याद्वारे इतर नामेही. असे म्हणणाऱ्या त्यांनी 'या विशिष्ट आकाराने 'एषो, एषा, एतं' ही नामे आणि इतर नामे पुल्लिंग इत्यादी नाव प्राप्त करतात' हा विशेष दाखवला नाही. परंतु सद्धम्माचा नियम जाणणाऱ्या वैयाकरणांनी (निरुक्तांनी) 'ज्या कोणत्याही अर्थाचा अविशदाकार-व्यवहार असतो, ते स्त्रीलिंग' इत्यादीद्वारे हा विशेष दाखवला आहे. ကေစိ [Pg.295] ပန ‘‘အဝိသဒါကာရာနံ အတ္ထာနံ ဝါစကော ဝေါဟာရော ဣတ္ထိလိင်္ဂ’’န္တိအာဒီနိ ဝဒန္တိ, တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ. ယဒိ ဟိ အဝိသဒါကာရာနံ အတ္ထာနံ ဝါစကော ဝေါဟာရော ဣတ္ထိလိင်္ဂံ, ဧဝံ သန္တေ မာတုဂါမကလတ္တကန္တကဏ္ဋကဂုမ္ဗာဒယောပိ ဝေါဟာရာ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ သိယုံ အဝိသဒါကာရတ္တာ တဒတ္ထာနံ. ယဒိ ပန ဝိသဒါကာရာနံ အတ္ထာနံ ဝါစကော ဝေါဟာရော ပုလ္လိင်္ဂံ, ဧဝံ သန္တေ ‘‘ဒေဝတာ သဒ္ဓါ ဉာဏ’’မိစ္စာဒယောပိ ဝေါဟာရာ ပုလ္လိင်္ဂါနိ သိယုံ ဝိသဒါကာရတ္တာ တဒတ္ထာနံ. အထ ဝါ ယဒိ အဝိသဒါကာရာနံ အတ္ထာနံ ဝါစကော ဝေါဟာရော ဣတ္ထိလိင်္ဂံ, ဝိသဒါကာရာနံ ပနတ္ထာနံ ဝါစကော ဝေါဟာရော ပုလ္လိင်္ဂံ, ဧဝံ သန္တေ ဧကဿေဝတ္ထဿ ဧကက္ခဏေ ဒွီဟိ လိင်္ဂေဟိ န ဝတ္တဗ္ဗတာ သိယာ – परंतु काही लोक 'अविशदाकार अर्थांचा वाचक असलेला व्यवहार म्हणजे स्त्रीलिंग' इत्यादी म्हणतात, ते स्वीकारता कामा नये. कारण जर अविशदाकार अर्थांचा वाचक असलेला व्यवहार स्त्रीलिंग असेल, तर अशा वेळी 'मातृग्राम (स्त्री), कलत्र (पत्नी), कांत (पती), कंटकगुम्ब (काट्यांचे झुडूप)' इत्यादी व्यवहार देखील त्यांच्या अर्थांच्या अविशदाकारत्वामुळे स्त्रीलिंगी झाले पाहिजेत. जर विशदाकार अर्थांचा वाचक असलेला व्यवहार पुल्लिंग असेल, तर अशा वेळी 'देवता, श्रद्धा, ज्ञान' इत्यादी व्यवहार देखील त्यांच्या अर्थांच्या विशदाकारत्वामुळे पुल्लिंगी झाले पाहिजेत. किंवा जर अविशदाकार अर्थांचा वाचक असलेला व्यवहार स्त्रीलिंग असेल आणि विशदाकार अर्थांचा वाचक असलेला व्यवहार पुल्लिंग असेल, तर अशा वेळी एकाच अर्थाला एकाच क्षणी दोन लिंगांनी सांगता आले नसते – ‘‘အတ္ထကာမောသိ မေ ယက္ခ, ဟိတကာမာသိ ဒေဝတေ; ကရောမိ တေ တံ ဝစနံ, တွံသိ အာစရိယော မမာ’’တိ. “हे यक्षा! तू माझा हितचिंतक (अर्थकाम) आहेस; हे देवते! तू माझी हितकर्ती (हितकामा) आहेस. मी तुझे ते वचन ऐकतो, तू माझा आचार्य आहेस.” ယဒိ စ ဥဘယမုတ္တာကာရာနံ အတ္ထာနံ ဝါစကော ဝေါဟာရော နပုံသကလိင်္ဂံ, ဧဝံ သန္တေ ဥဘယမုတ္တာကာရာနံ အတ္ထာနံ တိဏရုက္ခာဒီသု ‘‘ဣဒံ နာမာ’’တိ နိယမာဘာဝတော လိင်္ဂဝစနံ ဝိရုဒ္ဓံ သိယာ. အပိစ ‘‘ပညာရတနံ. သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနံ သာဝကယုဂ’’န္တိ စ အာဒိနာ နပုံသကလိင်္ဂဝစနေန တဒတ္ထာနမ္ပိ ဥဘယမုတ္တာကာရတာ ဝုတ္တာ သိယာ. အပိစ ဧကမ္ပိ တီရံ ‘‘တဋံ တဋီ တဋော’’တိ တီဟိ လိင်္ဂေဟိ န ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ. ဧကမ္ပိ စ ဉာဏံ ‘‘ပညာဏံ ပညာ ပဇာနနာ အမောဟော’’တိအာဒိနာ တီဟိ လိင်္ဂေဟိ န ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ, တသ္မာ တံ နယံ အဂ္ဂဟေတွာ ယထာဝုတ္တောယေဝ နယော ဂဟေတဗ္ဗော. आणि जर दोन्ही आकारांपासून मुक्त (उभयमुक्त) असलेल्या अर्थांचा वाचक असलेला व्यवहार नपुंसकलिंग असेल, तर अशा वेळी दोन्ही आकारांपासून मुक्त असलेल्या तृण, वृक्ष इत्यादी अर्थांमध्ये 'हे नाम' असा नियम नसल्यामुळे लिंगवचन विरुद्ध होईल. शिवाय, 'प्रज्ञारत्न (पञ्ञारतनं), सारिपुत्त-मोग्गल्लान हे श्रावकयुग (सावकयुगं)' इत्यादी नपुंसकलिंगी वचनाने त्यांच्या अर्थांची देखील उभयमुक्तता सांगितली गेली असती. शिवाय, एकाच तीराला (किनाऱ्याला) 'तटं (नपुंसकलिंग), तटी (स्त्रीलिंग), तटो (पुल्लिंग)' अशा तीन लिंगांनी सांगता आले नसते. आणि एकाच ज्ञानाला 'पञ्ञाणं (प्रज्ञान), पञ्ञा (प्रज्ञा), पजानना (प्रजानना), अमोहो (अमोह)' इत्यादी तीन लिंगांनी सांगता आले नसते. म्हणून तो नियम न स्वीकारता, वर सांगितलेलाच नियम स्वीकारला पाहिजे. လောကသ္မိဉှိ ဣတ္ထီနံ ဟေဋ္ဌိမကာယော ဝိသဒေါ ဟောတိ, ဥပရိမကာယော အဝိသဒေါ, ဥရမံသံ အဝိသဒံ, ဂမနာဒီနိပိ အဝိသဒါနိ[Pg.296]. ဣတ္ထိယော ဟိ ဂစ္ဆမာနာ အဝိသဒံ ဂစ္ဆန္တိ, တိဋ္ဌမာနာ နိပဇ္ဇမာနာ နိသီဒမာနာ ခါဒမာနာ ဘုဉ္ဇမာနာ အဝိသဒံ ဘုဉ္ဇန္တိ. ပုရိသမ္ပိ ဟိ အဝိသဒံ ဒိသွာ ‘‘မာတုဂါမော ဝိယ ဂစ္ဆတိ တိဋ္ဌတိ နိပဇ္ဇတိ နိသီဒတိ ခါဒတိ ဘုဉ္ဇတီ’’တိ ဝဒန္တိ. ဣတိ ယထာ ဣတ္ထိယော ယေဘုယျေန အဝိသဒါကာရာ, တထာ ယဿ ကဿစိ သဝိညာဏကဿ ဝါ အဝိညာဏကဿ ဝါ အတ္ထဿ ယေ ဝေါဟာရာ ယေဘုယျေန အဝိသဒါကာရာ, တေယေဝ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ နာမ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? ‘‘ကညာ ဒေဝတာ ဓီတလိကာ ဒုဗ္ဗာ သဒ္ဓါ ရတ္တိ ဣတ္ထီ ယာဂု ဝဓူ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ. ပုရိသာနံ ပန ဟေဋ္ဌိမကာယော အဝိသဒေါ ဟောတိ, ဥပရိမကာယော ဝိသဒေါ, ဥရမံသံ ဝိသဒံ, ဂမနာဒီနိပိ ဝိသဒါနိ ဟောန္တိ. ပုရိသာ ဟိ ဂစ္ဆမာနာ ဝိသဒံ ဂစ္ဆန္တိ, တိဋ္ဌမာနာ နိပဇ္ဇမာနာ နိသီဒမာနာ ခါဒမာနာ ဘုဉ္ဇမာနာ ဝိသဒံ ဘုဉ္ဇန္တိ. ဣတ္ထိမ္ပိ ဟိ ဂမနာဒီနိ ဝိသဒါနိ ကုရုမာနံ ဒိသွာ ‘‘ပုရိသော ဝိယ ဂစ္ဆတီ’’တိအာဒီနိ ဝဒန္တိ. ဣတိ ယထာ ပုရိသာ ယေဘုယျေန ဝိသဒါကာရာ, တထာ ယဿ ကဿစိ သဝိညာဏကဿ ဝါ အဝိညာဏကဿ ဝါ အတ္ထဿ ယေ ဝေါဟာရာ ယေဘုယျေန ဝိသဒါကာရာ, တေယေဝ ပုလ္လိင်္ဂါနိ နာမ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? ‘‘ပုရိသော မာတုဂါမော ဩရောဓော အာပေါ ရုက္ခော မောဟော သတ္ထာ’’ ဣစ္စေဝမာဒီနိ. ယထာ စ ပန နပုံသကာ ဥဘယမုတ္တာကာရာ, တထာ ယဿ ကဿစိ သဝိညာဏကဿ ဝါ အဝိညာဏကဿ ဝါ အတ္ထဿ ယေ ဝေါဟာရာ ဥဘယမုတ္တာကာရာ, တေယေဝ နပုံသကလိင်္ဂါနိ နာမ ဘဝန္တိ. တံ ယထာ? ‘‘စိတ္တံ ရူပံ ဣတ္ထာဂါရံ ကလတ္တံ နာဋကံ ရတနံ ဉာဏံ အဋ္ဌိ အာယု’’ဣစ္စေဝမာဒီနိ. ဣစ္စေဝံ နာမိကာနံ သဗ္ဗေသမ္ပိ ဝေါဟာရာနံ – लोकात स्त्रियांचा खालचा देह स्पष्ट (विशद) असतो, वरचा देह अस्पष्ट (अविशद) असतो, छातीचे मांस अस्पष्ट असते आणि चालणे इत्यादी क्रिया देखील अस्पष्ट असतात. स्त्रिया चालताना अस्पष्टपणे चालतात, उभ्या राहताना, झोपताना, बसताना, खाताना, जेवताना अस्पष्टपणे जेवतात. पुरुषालाही अस्पष्टपणे (अशा प्रकारे) करताना पाहून लोक म्हणतात, 'हा स्त्रीसारखा चालतो, उभा राहतो, झोपतो, बसतो, खातो, जेवतो.' अशा प्रकारे, जशा स्त्रिया बहुतांश करून अस्पष्ट आकाराच्या असतात, तसेच ज्या कोणत्याही सचेतन किंवा अचेतन वस्तूचे जे व्यवहार बहुतांश करून अस्पष्ट आकाराचे असतात, त्यांनाच 'स्त्रीलिंग' असे म्हणतात. जसे की? 'कन्या, देवता, धीतलिका (बाहुली), दुब्बा (दूर्वा), सद्धा (श्रद्धा), रत्ति (रात्र), इत्थी (स्त्री), यागु (पेज), वधू' इत्यादी. परंतु पुरुषांचा खालचा देह अस्पष्ट असतो, वरचा देह स्पष्ट असतो, छातीचे मांस स्पष्ट असते आणि चालणे इत्यादी क्रिया देखील स्पष्ट असतात. पुरुष चालताना स्पष्टपणे चालतात, उभ्या राहताना, झोपताना, बसताना, खाताना, जेवताना स्पष्टपणे जेवतात. स्त्रीलाही चालणे इत्यादी क्रिया स्पष्टपणे करताना पाहून लोक म्हणतात, 'ही पुरुषासारखी चालते' इत्यादी. अशा प्रकारे, जसे पुरुष बहुतांश करून स्पष्ट आकाराचे असतात, तसेच ज्या कोणत्याही सचेतन किंवा अचेतन वस्तूचे जे व्यवहार बहुतांश करून स्पष्ट आकाराचे असतात, त्यांनाच 'पुल्लिंग' असे म्हणतात. जसे की? 'पुरिसो (पुरुष), मातुगामो (स्त्री), ओरोधो (अन्तःपूर), आपो (पाणी), रुक्खो (वृक्ष), मोहो (मोह), सत्था (शास्ता/गुरु)' इत्यादी. आणि जसे नपुंसक हे दोन्ही आकारांपासून मुक्त (उभयमुक्त) असतात, तसेच ज्या कोणत्याही सचेतन किंवा अचेतन वस्तूचे जे व्यवहार दोन्ही आकारांपासून मुक्त असतात, त्यांनाच 'नपुंसकलिंग' असे म्हणतात. जसे की? 'चित्तं (चित्त), रूपं (रूप), इत्थागारं (अन्तःपूर), कलत्तं (पत्नी), नाटकं (नाटक), रतनं (रत्न), ञाणं (ज्ञान), अट्ठि (हाड), आयु (आयुष्य)' इत्यादी. अशा प्रकारे सर्व नामवाचक व्यवहारांचे – ဝိသဒါဝိသဒါကာရာ, အာကာရော’ဘယမုတ္တကော; လိင်္ဂဿ လက္ခဏံ ဧတံ, ဉေယျံ သျာဒိပ္ပဗန္ဓတော. स्पष्ट आणि अस्पष्ट आकार, आणि दोन्ही आकारांपासून मुक्त असणे; हे लिंगाचे लक्षण 'स्यादि' (विभक्ती) प्रत्ययांच्या संबंधावरून जाणावे. ဣဒံ [Pg.297] ဌာနံ ဒုဗ္ဗိနိဝိဇ္ဈံ မဟာဝနဂဟနံ နိဂ္ဂုမ္ဗံ နိဇ္ဇဋံ ကတွာ ဒဿိတံ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗံ. ဣတိ သဗ္ဗေသံ နာမိကပဒါနံ ပဗန္ဓနိဿိတေန အဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိဘာဝေန ဣတ္ထိလိင်္ဂါဒိဘာဝဿ သမ္ဘဝတော ဒွိန္နမ္ပိ ဂေါသဒ္ဒါနံ ပဗန္ဓနိဿိတေန အဝိသဒါကာရဝေါဟာရာဒိဘာဝေန ယထာသကံ ဣတ္ထိလိင်္ဂါဒိဘာဝေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. हे समजण्यास कठीण असलेले स्थान, जे एखाद्या घनदाट अरण्यासारखे होते, ते झुडपे आणि गुंतागुंत काढून स्पष्ट करून दाखवले आहे, ते चांगल्या प्रकारे मनात धारण करावे. अशा प्रकारे, सर्व नामपदांच्या संबंधावर आधारित असलेल्या अस्पष्ट आकाराच्या व्यवहारादी भावामुळे स्त्रीलिंग इत्यादी भावाचा संभव होत असल्याने, दोन्ही 'गो' शब्दांचा देखील संबंधावर आधारित असलेल्या अस्पष्ट आकाराच्या व्यवहारादी भावामुळे आपापल्या परीने स्त्रीलिंग इत्यादी भाव समजून घ्यावा. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा ओ-कारान्त स्त्रीलिंगाचा सविस्तर निर्णयांसह नामपदमालेचा विभाग आहे. ဩကာရန္တတာပကတိကံ ဩကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. ओ-कारान्त प्रकृती असलेले ओ-कारान्त स्त्रीलिंग समाप्त झाले. ဧဝံ သဗ္ဗထာပိ အာကာရန္တ ဣဝဏ္ဏန္တ ဥဝဏ္ဏန္တောကာရန္တဝသေန ဆဗ္ဗိဓာနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ နိရဝသေသတော ဂဟိတာနိ ဘဝန္တိ. ဧတေသု ပန ကေသဉ္စိ အာကာရန္တာနံ ဤကာရန္တာနဉ္စ ကတ္ထစိ ပစ္စတ္တေကဝစနဿ ဧကာရာဒေသဝသေန ယော ပဘေဒေါ ဒိဿတိ, သော ဣဒါနိ ဝုစ္စတိ. တထာ ဟိ – अशा प्रकारे सर्व प्रकारे आ-कारान्त, इ-वर्णान्त (इ, ई), उ-वर्णान्त (उ, ऊ) आणि ओ-कारान्त अशा सहा प्रकारच्या स्त्रीलिंगांचे पूर्णपणे ग्रहण केले गेले आहे. परंतु, यांमध्ये काही आ-कारान्त आणि ई-कारान्त शब्दांच्या प्रथमा एकवचनाच्या जागी 'ए-कार' आदेश झाल्यामुळे जो भेद दिसून येतो, तो आता सांगितला जात आहे. जसे की – ‘‘န တွံ ရာဓ ဝိဇာနာသိ, အဍ္ဎရတ္တေ အနာဂတေ; အဗျယတံ ဝိလပသိ, ဝိရတ္တေ ကောသိယာယနေ’’တိ “हे राधा, मध्यरात्र येण्यापूर्वी तुला काही समजत नाही; तू व्यर्थच विलाप करत आहेस, हे विरक्त कोसीयायनी!” ဣမသ္မိံ ရာဓဇာတကေ ‘‘ဝိရတ္တာ’’တိ အာကာရန္တဝသေန ဝတ္တဗ္ဗေ ပစ္စတ္တဝစနဿ ဧကာရာဒေသဝသေန ‘‘ဝိရတ္တေ’’တိ ဝုတ္တံ. တထာ ‘‘ကောသိယာယနီ’’တိ ဤကာရန္တဝသေန ဝတ္တဗ္ဗေ ပစ္စတ္တဝစနဿ ဧကာရာဒေသဝသေန ‘‘ကောသိယာယနေ’’တိ ဝုတ္တံ. တေန အဋ္ဌကထာစရိယော ‘‘ဝိရတ္တေ ကောသိယာယနေတိ မာတာ နော ကောသိယာယနီ ဗြာဟ္မဏီ ဝိရတ္တာ အမှာကံ ပိတရိ နိပ္ပေမာ ဇာတာ’’တိ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏေသိ. နနု စ ဘော ပါဠိယံ ‘‘ဝိရတ္တေ’’တိ, ‘‘ကောသိယာယနေ’’တိ စ ပစ္စတ္တဝစနဿ ဒဿနတော ‘‘ဧကာရန္တမ္ပိ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ အတ္ထီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ? န ဝတ္တဗ္ဗံ အာကာရီကာရန္တောဂဓရူပဝိသေသတ္တာ တေသံ ရူပါနံ. အာဒေသဝသေန [Pg.298] ဟိ သိဒ္ဓတ္တာ ဝိသုံ ဧကာရန္တံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ နာမ နတ္ထိ, တသ္မာ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနံ ယထာဝုတ္တာ ဆဗ္ဗိဓတာယေဝ ဂဟေတဗ္ဗာ. या राधजातकामध्ये 'विरत्ता' असे आ-कारान्त रूपाने सांगायचे असताना, प्रथमा विभक्तीच्या एकवचनात 'ए-कार' आदेश झाल्यामुळे 'विरत्ते' असे म्हटले आहे. तसेच 'कोसीयायनी' असे ई-कारान्त रूपाने सांगायचे असताना, प्रथमा विभक्तीच्या एकवचनात 'ए-कार' आदेश झाल्यामुळे 'कोसीयायने' असे म्हटले आहे. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी 'विरत्ते कोसीयायने म्हणजे आमची आई कोसीयायनी ब्राह्मणी विरक्त झाली आहे, आमच्या पित्यावर तिचे प्रेम राहिले नाही' असा अर्थ स्पष्ट केला आहे. पण मग, हे महाशय! पाळीमध्ये 'विरत्ते' आणि 'कोसीयायने' हे प्रथमा विभक्तीचे रूप दिसत असल्याने 'ए-कारान्त स्त्रीलिंग देखील आहे' असे म्हणावे का? तसे म्हणू नये, कारण ही रूपे आ-कारान्त आणि ई-कारान्त रूपांच्या अंतर्गतच विशेष रूपे आहेत. आदेशाच्या योगाने सिद्ध होत असल्यामुळे स्वतंत्र असे 'ए-कारान्त स्त्रीलिंग' अस्तित्वात नाही, म्हणून स्त्रीलिंगांचे वर सांगितलेले सहा प्रकारच ग्राह्य धरले पाहिजेत. ဣစ္စေဝံ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနံ, ပကိဏ္ဏနယသာလိနီ; ပဒမာလာ ဝိဘတ္တာ မေ, သာသနတ္ထံ သယမ္ဘုနော. अशा प्रकारे, स्वयंभू (बुद्धांच्या) शासनाच्या कल्याणासाठी, मी स्त्रीलिंगांची विविध नियमांनी युक्त अशी पदमाला विभक्त (स्पष्ट) केली आहे. သဒ္ဒနီတိသူရိယောယံ,အနေကသုဝိနိစ္ဆယရသ္မိကလာပေါ; သံသယန္ဓကာရနုဒေါ,ကဿ မတိပဒုမံ န ဝိကာသေ. हा सद्दनीति-रूपी सूर्य, जो अनेक उत्तम निर्णयांच्या किरणसमूहांनी युक्त आहे आणि संशयरूपी अंधाराचा नाश करणारा आहे, कोणाच्या बुद्धीरूपी कमळाला विकसित करणार नाही? ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ कुशलतेसाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' प्रकरणामध्ये ဣတ္ထိလိင်္ဂါနံ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ स्त्रीलिंगांच्या नामपदमालेचा विभाग အဋ္ဌမော ပရိစ္ဆေဒေါ. आठवा परिच्छेद समाप्त. ၉. နပုံသကလိင်္ဂနာမိကပဒမာလာ ९. नपुंसकलिंग नामपदमाला အထ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ နိဂ္ဂဟီတန္တနပုံသကလိင်္ဂါနံ ‘‘ဘူတံ’’ဣစ္စာဒိကဿ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလံ ဝက္ခာမ – आता, पूर्वाचार्यांचे मत अग्रभागी ठेवून, निग्गहीत-अन्त (अनुस्वारान्त) नपुंसकलिंगांच्या 'भूतं' इत्यादी प्रकृती रूपांची नामपदमाला सांगतो – စိတ္တံ, စိတ္တာနိ. စိတ္တံ, စိတ္တာနိ. စိတ္တေန, စိတ္တေဟိ, စိတ္တေဘိ. စိတ္တဿ, စိတ္တာနံ. စိတ္တာ, စိတ္တသ္မာ, စိတ္တမှာ, စိတ္တေဟိ, စိတ္တေဘိ. စိတ္တဿ, စိတ္တာနံ. စိတ္တေ, စိတ္တသ္မိံ, စိတ္တမှိ, စိတ္တေသု. ဘော စိတ္တ, ဘော စိတ္တာ, ဘဝန္တော စိတ္တာနိ. ယမကမဟာထေရမတံ. चित्तं, चित्तानि (प्रथमा). चित्तं, चित्तानि (द्वितीया). चित्तेन, चित्तेहि, चित्तेभि (तृतीया). चित्तस्स, चित्तानं (चतुर्थी). चित्ता, चित्तस्मा, चित्तम्हा, चित्तेहि, चित्तेभि (पंचमी). चित्तस्स, चित्तानं (षष्ठी). चित्ते, चित्तस्मिं, चित्तम्हि, चित्तेसु (सप्तमी). भो चित्त, भो चित्ता, भवन्तो चित्तानि (संबोधन). हे यमकमहाथेरांचे मत आहे. ဧတ္ထ ကိဉ္စာပိ ‘‘စိတ္တာ’’တိ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနံ ‘‘စိတ္တေ’’တိ ဥပယောဂဗဟုဝစနဉ္စ အနာဂတံ, တထာပိ တတ္ထ တတ္ထ အညေသမ္ပိ တာဒိသာနံ နိဂ္ဂဟီတန္တနပုံသကရူပါနံ ဒဿနတော ဝိဘင်္ဂပါဠိယဉ္စ ‘‘ဆ စိတ္တာ အဗျာကတာ’’တိအာဒိဒဿနတော ဂဟေတဗ္ဗမေဝ[Pg.299], တသ္မာ ‘‘စိတ္တံ, စိတ္တာနိ, စိတ္တာ. စိတ္တံ, စိတ္တာနိ, စိတ္တေ’’တိ ကမော ဝေဒိတဗ္ဗော. နိဂ္ဂဟီတန္တာနဉှိ နပုံသကလိင်္ဂါနံ ကတ္ထစိ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂါနံ ဝိယ ပစ္စတ္တောပယောဂဗဟုဝစနာနိ ဘဝန္တိ. တာနိ စ ပုလ္လိင်္ဂေန ဝါ သလိင်္ဂေန ဝါ အလိင်္ဂေန ဝါ သဒ္ဓိံ သမာနာဓိကရဏာနိ ဟုတွာ ကေဝလာနိ ဝါ ပါဝစနေ သဉ္စရန္တိ. အတြ ‘‘စတ္တာရော သတိပဋ္ဌာနာ. စတ္တာရော သမ္မပ္ပဓာနာ. သဗ္ဗေ မာလာ ဥပေန္တိမံ. ယဿ ဧတေ ဓနာ အတ္ထိ. စတ္တာရော မဟာဘူတာ. တီဏိန္ဒြိယာ. ဒွေ ဣန္ဒြိယာ. ဒသိန္ဒြိယာ. ဒွေ မဟာဘူတေ နိဿာယ ဒွေ မဟာဘူတာ, ပဉ္စ ဝိညာဏာ, စတုရော အင်္ဂေ အဓိဋ္ဌာယ, သေမိ ဝမ္မိကမတ္ထကေ, ရူပါ သဒ္ဒါ ရသာ ဂန္ဓာ. ရူပေ စ သဒ္ဒေ စ အထော ရသေ စ. စက္ခုဉ္စ ပဋိစ္စ ရူပေ စ ဥပ္ပဇ္ဇတိ စက္ခုဝိညာဏ’’န္တိ ဧဝမာဒယော အနေကသတာ ပါဠိပ္ပဒေသာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. येथे जरी 'चित्ता' (cittā) हे प्रथमा बहुवचन आणि 'चित्ते' (citte) हे द्वितीया बहुवचन आलेले नसले, तरीही तिथे तिथे इतरही अशाच प्रकारच्या निग्गहीत-अंत (अनुस्वार-अंत) नपुंसकलिंगी रूपांच्या दर्शनावरून आणि विभंगपाळीमध्ये 'छ चित्ता अब्याकता' (सहा चित्ते अव्याकृत आहेत) इत्यादी दर्शनावरून ते ग्रहण केलेच पाहिजे. म्हणून 'चित्तं, चित्तानि, चित्ता. चित्तं, चित्तानि, चित्ते' असा क्रम समजला पाहिजे. कारण निग्गहीत-अंत नपुंसकलिंगी शब्दांची काही ठिकाणी ओ-कारान्त पुल्लिंगी शब्दांप्रमाणे प्रथमा आणि द्वितीया बहुवचनाची रूपे होतात. आणि ती पुल्लिंगाशी, स्वलिंगाशी (नपुंसकलिंगाशी) किंवा अलिंगाशी (विशेषणाशी) समानाधिकरण होऊन किंवा केवळ स्वतंत्रपणे बुद्धवचनात (पावचनेत) वापरली जातात. येथे 'चत्तारो सतिपट्ठाना' (चार सतिपट्ठान), 'चत्तारो सम्मप्पधाना' (चार सम्मप्पधान), 'सब्बे माला उपेन्ति मं' (सर्व माळा माझ्याकडे येतात), 'यस्स एते धना अत्थि' (ज्यांच्याकडे हे धन आहे), 'चत्तारो महाभूता' (चार महाभूत), 'तीणिन्द्रिया' (तीन इंद्रिये), 'द्वे इन्द्रिया' (दोन इंद्रिये), 'दसिन्द्रिया' (दहा इंद्रिये), 'द्वे महाभूते निस्साय द्वे महाभूता' (दोन महाभूतांच्या आश्रयाने दोन महाभूते), 'पञ्च विञ्ञाणा' (पाच विज्ञाने), 'चतुरो अङ्गे अधिट्ठाय' (चार अंगांवर अधिष्ठित होऊन), 'सेमि वम्मिकमत्थके' (मी वारुळाच्या माथ्यावर झोपतो), 'रूपा सद्दा रसा गन्धा' (रूप, शब्द, रस, गंध), 'रूपे च sadde च अथो रसे च' (रूपांवर, शब्दांवर आणि रसांवर), 'चक्खुञ्च पटिच्च रूपे च उप्पज्जति चक्खुविञ्ञाणं' (डोळा आणि रूपांचा आश्रय घेऊन चक्षुविज्ञान उत्पन्न होते) इत्यादी शेकडो पाळी संदर्भ पाहावेत. ဧတ္ထ ပန ‘‘သတိပဋ္ဌာနာ’’တိအာဒီနိ ပဒါနိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဝုတ္တာနီတိ န ဂဟေတဗ္ဗာနိ သတိပဋ္ဌာနသဒ္ဒါဒီနံ ပဌမေကဝစနဋ္ဌာနေ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဘာဝေန ဌိတဘာဝဿ အဒဿနတော. ‘‘စတ္တာရော’’တိအာဒီနိယေဝ ပန ပဒါနိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဝုတ္တာနီတိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ နိယောဂါ နိဂ္ဂဟီတန္တေဟိ နပုံသကလိင်္ဂေဟိ သတိပဋ္ဌာနသဒ္ဒါဒီဟိ သဒ္ဓိံ တေသံ သမာနာဓိကရဏဘာဝဿ ဒဿနတောတိ. परंतु येथे 'सतिपट्ठाना' इत्यादी पदे लिंगविपर्यासामुळे (लिंगबदलामुळे) म्हटली गेली आहेत असे मानू नये; कारण सतिपट्ठान इत्यादी शब्दांचे प्रथमा एकवचनाच्या ठिकाणी ओ-कारान्त पुल्लिंगी रूप असल्याचे दिसून येत नाही. परंतु 'चत्तारो' इत्यादी पदेच लिंगविपर्यासामुळे म्हटली गेली आहेत असे मानले पाहिजे, कारण निग्गहीत-अंत नपुंसकलिंगी 'सतिपट्ठान' इत्यादी शब्दांशी त्यांचा समानाधिकरण भाव निश्चितपणे दिसून येतो. ကေစေတ္ထ ဝဒေယျုံ – နနု ‘‘သတိပဋ္ဌာနော ဓမ္မော, စိတ္တော ဓမ္မော, စိတ္တာ ဓမ္မာ’’တိအာဒိပ္ပယောဂဒဿနတော သတိပဋ္ဌာနသဒ္ဒါဒီနံ [Pg.300] ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဘာဝေါ လဗ္ဘတိ. ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ တုမှေဟိ ‘‘သတိပဋ္ဌာနသဒ္ဒါဒီနံ ပဌမေကဝစနဋ္ဌာနေ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဘာဝေန ဌိတဘာဝဿ အဒဿနတော’’တိ ဝုတ္တံ, ကသ္မာ စ ဧကန္တတော သတိပဋ္ဌာနသဒ္ဒါဒီနံ နိဂ္ဂဟီတန္တနပုံသကလိင်္ဂတာ အနုမတာ, နနု ‘‘သတိပဋ္ဌာနော ဓမ္မော, စိတ္တော ဓမ္မော, စိတ္တာ ဓမ္မာ’’တိအာဒိဒဿနတော ‘‘စတ္တာရော သတိပဋ္ဌာနာ’’တိအာဒီသုပိ ‘‘သတိပဋ္ဌာနသဒ္ဒါဒယော လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဝုတ္တာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗာတိ? န ဝတ္တဗ္ဗာ, ကသ္မာတိ စေ? ‘‘သတိပဋ္ဌာနော ဓမ္မော, စိတ္တော ဓမ္မော, စိတ္တာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသုပိ သတိပဋ္ဌာနစိတ္တသဒ္ဒါဒီနံ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန အနိစ္ဆိတဗ္ဗတော. တတ္ထ ဟိ ပုလ္လိင်္ဂေန ဓမ္မသဒ္ဒေန ယောဇေတုံ ဓမ္မိဿရော ဘဂဝါ ဓမ္မာပေက္ခံ ကတွာ ‘‘သတိပဋ္ဌာနော, စိတ္တော, စိတ္တာ’’တိ စ အဘာသိ. ကေဝလာ ဟိ သတိပဋ္ဌာန စိတ္တသဒ္ဒါဒယော ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂဘာဝေန ကတ္ထစိပိ ယောဇိတာ န သန္တိ, နိဂ္ဂဟီတန္တနပုံသကဘာဝေန ပန ယောဇိတာ သန္တိ. येथे काही लोक असे म्हणू शकतात – 'सतिपट्ठानो धम्मो, चित्तो धम्मो, चित्ता धम्मा' इत्यादी प्रयोगांच्या दर्शनावरून सतिपट्ठान इत्यादी शब्दांचे ओ-कारान्त पुल्लिंगी रूप प्राप्त होतेच. असे असताना तुमच्याकडून 'सतिपट्ठान इत्यादी शब्दांचे प्रथमा एकवचनाच्या ठिकाणी ओ-कारान्त पुल्लिंगी रूप असल्याचे दिसून येत नाही' असे का म्हटले गेले? आणि सतिपट्ठान इत्यादी शब्दांचे केवळ निग्गहीत-अंत नपुंसकलिंगी असणेच का मान्य केले गेले? 'सतिपट्ठानो धम्मो, चित्तो धम्मो, चित्ता धम्मा' इत्यादी दर्शनावरून 'चत्तारो सतिपट्ठाना' इत्यादींमध्येही 'सतिपट्ठान इत्यादी शब्द लिंगविपर्यासामुळे म्हटले गेले आहेत' असे म्हणावे की नाही? तसे म्हणू नये. का? कारण 'सतिपट्ठानो धम्मो, चित्तो धम्मो, चित्ता धम्मा' इत्यादींमध्येही सतिपट्ठान, चित्त इत्यादी शब्दांचा लिंगविपर्यास मान्य करता येत नाही. कारण तेथे पुल्लिंगी 'धम्म' शब्दाशी जोडण्यासाठी, धर्माचे स्वामी असलेल्या भगवंतांनी 'धम्म' शब्दाची अपेक्षा ठेवून 'सतिपट्ठानो, चित्तो, चित्ता' असे म्हटले. कारण केवळ 'सतिपट्ठान', 'चित्त' इत्यादी शब्द ओ-कारान्त पुल्लिंगी रूपाने कुठेही जोडलेले नाहीत, परंतु निग्गहीत-अंत नपुंसकलिंगी रूपाने मात्र जोडलेले आहेत. တထာ ဟိ ‘‘စိတ္တော ဂဟပတီ’’တိ ဧတ္ထာပိ ပုလ္လိင်္ဂဂဟပတိသဒ္ဒံ အပေက္ခိတွာ ဝိညာဏေ ပဝတ္တံ စိတ္တနာမံ ပဏ္ဏတ္တိဝသေန ပုဂ္ဂလေ အာရောပေတွာ ပုဂ္ဂလဝါစကံ ကတွာ ‘‘စိတ္တော’’တိ ဝုတ္တံ. ယဒိ ပန ဝိညာဏသင်္ခါတံ စိတ္တမဓိပ္ပေတံ သိယာ, ‘‘စိတ္တ’’မိစ္စေဝ ဝုစ္စေယျ. တသ္မာ ‘‘စိတ္တော ဂဟပတိ, စိတ္တာ ဣတ္ထီ’’တိအာဒီသု လိင်္ဂဝိပလ္လာသော န ဣစ္ဆိတဗ္ဗော သာပေက္ခတ္တာ စိတ္တသဒ္ဒါဒီနံ. ယထာ စ ဧတ္ထ, ဧဝံ ‘‘သတိပဋ္ဌာနော ဓမ္မော, စိတ္တော ဓမ္မော, စိတ္တာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသုပိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသော န ဣစ္ဆိတဗ္ဗော. ‘‘စတ္တာရော သတိပဋ္ဌာနာ’’တိအာဒီသု ပန သတိပဋ္ဌာနသဒ္ဒါဒီနံ အပေက္ခိတဗ္ဗာနိ ပဒါနိ န သန္တိ, ယေဟိ တေ ပုလ္လိင်္ဂါနိ သိယုံ, တသ္မာ ‘‘စတ္တာရော’’တိအာဒီနိယေဝ ပဒါနိ ပရိဝတ္တေတွာ ‘‘စတ္တာရိ, သဗ္ဗာနိ, ဧတာနီ’’တိ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန ဂဟေတွာ ‘‘သတိပဋ္ဌာနာ[Pg.301], သမ္မပ္ပဓာနာ’’တိအာဒီဟိ ပဒေဟိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဤဒိသေသု ဌာနေသု ကေစိ အဋ္ဌကထာစရိယာ နိကာရလောပံ ဣစ္ဆန္တိ ‘‘ယာ ပုဗ္ဗေ ဗောဓိသတ္တာနံ, ပလ္လင်္ကဝရမာဘုဇေ, နိမိတ္တာနိ ပဒိဿန္တီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. အဒဿနဉှိ လောပေါ, တသ္မာ ‘‘စတ္တာရိ သတိပဋ္ဌာနာနိ, စတ္တာရိ သမ္မပ္ပဓာနာနိ, သဗ္ဗာနိ မာလာနီ’တိအာဒိကာ ယောဇနာ ကာတဗ္ဗာ. तसेच 'चित्तो गहपती' येथेही पुल्लिंगी 'गहपति' शब्दाची अपेक्षा ठेवून, विज्ञानामध्ये प्रवृत्त असलेल्या 'चित्त' या नावाला प्रज्ञप्तीद्वारे (संज्ञेद्वारे) पुद्गलावर (व्यक्तीवर) आरोपित करून, त्याला पुद्गलवाचक बनवून 'चित्तो' असे म्हटले आहे. जर विज्ञान नावाचे चित्त अभिप्रेत असते, तर 'चित्तं' असेच म्हटले गेले असते. म्हणून 'चित्तो गहपति, cittā इत्थी' इत्यादींमध्ये चित्त इत्यादी शब्दांच्या सापेक्षतेमुळे लिंगविपर्यास मानू नये. आणि जसे येथे आहे, तसेच 'सतिपट्ठानो धम्मो, चित्तो धम्मो, चित्ता धम्मा' इत्यादींमध्येही लिंगविपर्यास मानू नये. परंतु 'चत्तारो सतिपट्ठाना' इत्यादींमध्ये सतिपट्ठान इत्यादी शब्दांना अपेक्षित असणारी अशी पदे नाहीत, ज्यांच्यामुळे ते पुल्लिंगी व्हावेत. म्हणून 'चत्तारो' इत्यादी पदेच बदलून 'चत्तारि, सब्बानि, एतानि' अशी नपुंसकलिंगी रूपाने ग्रहण करून 'सतिपट्ठाना, सम्मप्पधाना' इत्यादी पदांशी जोडली पाहिजेत. अशा ठिकाणी काही अट्ठकथाचार्य 'नि' काराचा लोप मानतात, जसे की 'या पुब्बे बोधिसत्तानं, पल्लङ्कवरमाभुजे, निमित्तानि पदिसन्ति' येथे दिसून येते. न दिसणे म्हणजेच लोप होणे होय, म्हणून 'चत्तारि सतिपट्ठानानि, चत्तारि सम्मप्पधानानि, सब्बानि मालानि' अशी योजना केली पाहिजे. ကေစိ ပန ‘‘သဗ္ဗေ မာလာ ဥပေန္တိ မ’’န္တိ ဧတ္ထ မာလာသဒ္ဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂန္တိ မညိတွာ ပုလ္လိင်္ဂဘူတံ သဗ္ဗေသဒ္ဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ပရိဝတ္တေတွာ ‘‘သဗ္ဗာ မာလာ’’တိ အတ္ထံ ကထေန္တိ. တံ ကိဉ္စာပိ ယုတ္တတရံ ဝိယ ဒိဿတိ, တထာပိ န ဂဟေတဗ္ဗံ. န ဟိ သော ဘဂဝါ လိင်္ဂံ နညာသိ, န စ ‘‘သဗ္ဗာ မာလာ ဥပေန္တိ မ’’န္တိ ဒွေ ပဒါနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနိ ကတွာ ဝတ္တုံ န သက္ခိ. ယော ဧဝံ ဝိသဒိသလိင်္ဂါနိ ပဒါနိ ဥစ္စာရေသိ. ဇာနန္တောယေဝ ပန ဘဂဝါ ဝတ္တုံ သက္ကောန္တောယေဝ စ ‘‘သဗ္ဗေ မာလာ ဥပေန္တိ မ’’န္တိ ဝိသဒိသလိင်္ဂါနိ ပဒါနိ ဥစ္စာရေသိ, တသ္မာ ပုလ္လိင်္ဂဘူတံ သဗ္ဗေသဒ္ဒံ ‘‘သဗ္ဗာနီ’’တိ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန ပရိဝတ္တေတွာ ဝိဘင်္ဂပါဠိယံ ‘‘တီဏိန္ဒြိယာ’’တိ ပဒံ ဝိယ လုတ္တနိကာရေန နပုံသကလိင်္ဂေန မာလာသဒ္ဒေန ယောဇေတွာ ‘‘သဗ္ဗာနိ မာလာနီ’’တိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော ကတ္ထစိ ‘‘ယဿ ဧတေ ဓနာ အတ္ထီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. ဧတ္ထ ဟိ ယဿ ဧတာနိ ဓနာနီတိ အတ္ထော. ဣဒမ္ပေတ္ထ သလ္လက္ခိတဗ္ဗံ. မာလာသဒ္ဒေါ ဒွိလိင်္ဂေါ ဣတ္ထိနပုံသကဝသေန. တိဋ္ဌတု တဿိတ္ထိလိင်္ဂတ္တံ သုဝိညေယျတ္တာ, နပုံသကတ္တေ ပန တီဏိ မာလာနိ. ‘‘မာလေဟိ စ ဂန္ဓေဟိ စ ဘဂဝတော သရီရံ ပူဇေန္တီ’’တိအာဒယော နပုံသကပ္ပယောဂါနိပိ ဗဟူ သန္ဒိဿန္တီတိ. परंतु काही लोक 'सब्बे माला उपेन्ति मं' येथे 'माला' शब्दाला स्त्रीलिंगी मानून, पुल्लिंगी असलेल्या 'सब्बे' शब्दाला स्त्रीलिंगी रूपाने बदलून 'सब्बा माला' असा अर्थ सांगतात. ते जरी अधिक योग्य असल्यासारखे वाटत असले, तरीही ते स्वीकारले जाऊ नये. कारण त्या भगवंतांना लिंग माहीत नव्हते असे नाही, किंवा 'सब्बा माला उपेन्ति मं' अशी दोन्ही पदे स्त्रीलिंगी करून बोलणे त्यांना शक्य नव्हते असेही नाही, ज्यांनी अशा प्रकारे भिन्न लिंगी पदे उच्चारली. परंतु सर्व काही जाणत असताना आणि बोलण्यास समर्थ असतानाच भगवंतांनी 'सब्बे माला उपेन्ति मं' अशी भिन्न लिंगी पदे उच्चारली. म्हणून पुल्लिंगी असलेल्या 'सब्बे' शब्दाला 'सब्बानि' अशा नपुंसकलिंगी रूपाने बदलून, विभंगपाळीतील 'तीणिन्द्रिया' या पदाप्रमाणे, लोप पावलेल्या रूपाने नपुंसकलिंगी 'माला' शब्दाशी जोडून 'सब्बानि मालानि' असा अर्थ ग्रहण केला पाहिजे, जसे की काही ठिकाणी 'यस्स एते धना अत्थि' येथे दिसून येते. येथे 'ज्यांच्याकडे हे धन आहे' (यस्स एतानि धनानि) असा अर्थ आहे. येथे हे देखील लक्षात घेतले पाहिजे की, 'माला' शब्द स्त्रीलिंग आणि नपुंसकलिंग अशा दोन्ही लिंगांत वापरला जातो. त्याचे स्त्रीलिंगी असणे सुस्पष्ट असल्याने बाजूला ठेवू या, परंतु नपुंसकलिंगात 'तीणि मालानि' (तीन माळा) असे रूप होते. 'मालेहि च गन्धेहि च भगवतो सरीरं पूजेन्ति' (माळांनी आणि गंधांनी भगवंतांच्या शरीराची पूजा करतात) इत्यादी नपुंसकलिंगी प्रयोगही पुष्कळ ठिकाणी दिसून येतात. ယဒိ ပန ဘော မာလသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိနပုံသကဝသေန ဒွိလိင်္ဂေါ, ‘‘သဗ္ဗေ မာလာ ဥပေန္တိ မ’’န္တိ ဧတ္ထ မာလာသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝပရိကပ္ပနေ ကော ဒေါသော အတ္ထီတိ? အတ္ထေဝ ဣတ္ထိလိင်္ဂသဒ္ဒဿ [Pg.302] ပုလ္လိင်္ဂဘူတေန သဗ္ဗနာမိကပဒေန သဒ္ဓိံ သမာနာဓိကရဏဘာဝဿာဘာဝတော, နပုံသကလိင်္ဂဿ ပန ပုလ္လိင်္ဂဘူတေန သဗ္ဗနာမိကပဒေန သဒ္ဓိံ သမာနာဓိကရဏဘာဝဿ ဥပလဗ္ဘနတော. တေနေဝ စ ‘‘ဧတေ ဓနာ’’တိအာဒယော ပယောဂါ ပါဝစနေ ဗဟုဓာ ဒိဋ္ဌာ. ဧတ္ထာပိ ပန ဝဒေယျုံ ‘‘ဓနာတိအာဒီနိ ဝိပလ္လာသဝသေန ပုလ္လိင်္ဂါနိယေဝ ‘‘ဧတေ’’တိအာဒီဟိ သမာနာဓိကရဏပဒေဟိ ယောဇိတတ္တာ’’တိ. န, နပုံသကာနိယေဝေတာနိ. ယဒိ ဟိ ‘‘ဓနာ’’တိအာဒီနိ ပုလ္လိင်္ဂါနိ သိယုံ, ကတ္ထစိ ပစ္စတ္တေကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဧသော’’တိအာဒီဟိ ဩကာရန္တသမာနာဓိကရဏပဒေဟိ ယောဇိတာ ဩကာရန္တဓနသဒ္ဒါဒယော သိယုံ. တထာရူပါနံ အဘာဝတော ပန ‘‘ဓနာ ဣန္ဒြိယာ ဝိညာဏာ’’တိအာဒယော သဒ္ဒါ နပုံသကလိင်္ဂါနိယေဝ ဟောန္တိ. အယံ နယော ပစ္စတ္တဗဟုဝစနဋ္ဌာနေယေဝ လဗ္ဘတိ. နပုံသကလိင်္ဂါနိ ဟိ ဝိသဒါကာရာနိ ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ ဝိယ ဟုတွာ ပုလ္လိင်္ဂေဟိပိ သဒ္ဓိံ စရန္တိ, နပုံသကာ ဝိယ ပုရိသဝေသဓာရိနော ပုရိသေဟီတိ နိဋ္ဌမေတ္ထာဝဂန္တဗ္ဗံ. पण जर, हे महाशय, 'माला' शब्द स्त्रीलिंग आणि नपुंसकलिंग या दोन्ही लिंगांत (द्विलिंगी) असेल, तर 'सब्बे माला उपेन्ति मं' (सर्व माळा माझ्याकडे येतात) यामध्ये 'माला' शब्दाला स्त्रीलिंग मानण्यात कोणता दोष आहे? दोष आहेच, कारण स्त्रीलिंगी शब्दाचा पुल्लिंगी सर्वनामाशी समानाधिकरण भाव (समान विभक्ती-वचन संबंध) असू शकत नाही; परंतु नपुंसकलिंगी शब्दाचा पुल्लिंगी सर्वनामाशी समानाधिकरण भाव आढळतो. म्हणूनच 'एते धना' (हे धन) इत्यादी प्रयोग बुद्धवचनात (पावचनेत) अनेकदा आढळतात. येथेही कदाचित ते म्हणतील की, 'धना' इत्यादी शब्द विपर्यासाने (लिंगबदलाने) पुल्लिंगीच आहेत, कारण ते 'एते' इत्यादी समानाधिकरण पदांशी जोडलेले आहेत. नाही, हे नपुंसकलिंगीच आहेत. जर 'धना' इत्यादी पुल्लिंगी असते, तर कुठे तरी प्रथमा एकवचनाच्या ठिकाणी 'एसो' इत्यादी 'ओ'-कारान्त समानाधिकरण पदांशी जोडलेले 'ओ'-कारान्त 'धन' इत्यादी शब्द आढळले असते. तशा रूपांचा अभाव असल्यामुळे 'धना, इन्द्रिया, विञ्ञाणा' इत्यादी शब्द नपुंसकलिंगीच आहेत. हा नियम केवळ प्रथमा बहुवचनाच्या ठिकाणीच लागू होतो. कारण नपुंसकलिंगी शब्द स्पष्ट रूपाने पुल्लिंगी रूपांसारखे होऊन पुल्लिंगी शब्दांसोबतही चालतात, जसे पुरुषाचा वेष धारण केलेले नपुंसक पुरुषांसोबत वावरतात; असा येथे निष्कर्ष काढावा. အထာပိ တေ ပုဗ္ဗေ ဝုတ္တဝစနံ ပုန ပရိဝတ္တေတွာ ဧဝံ ဝဒေယျုံ ‘‘စိတ္တော ဂဟပတိ, စိတ္တာ ဣတ္ထီ’’တိအာဒီသု စိတ္တံ ဧတဿ အတ္ထီတိ စိတ္တော, စိတ္တံ ဧတိဿာ အတ္ထီတိ စိတ္တာ ယထာ ‘‘သဒ္ဓေါ, သဒ္ဓါ’’တိ ဧဝံ အဿတ္ထီတိ အတ္ထဝသေန ဂဟေတဗ္ဗတော လိင်္ဂဝိပလ္လာသော နိစ္ဆိတဗ္ဗော, ‘‘သတိပဋ္ဌာနော ဓမ္မော, စိတ္တော ဓမ္မော, စိတ္တာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီနိ ပန ဧဝရူပဿ အတ္ထဿ အဂ္ဂဟေတဗ္ဗတော ‘‘သတိပဋ္ဌာနံ ဓမ္မော, စိတ္တံ ဓမ္မော, စိတ္တာနိ ဓမ္မာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ လိင်္ဂဝိပလ္လာသေန ‘‘သတိပဋ္ဌာနော ဓမ္မော, စိတ္တော ဓမ္မော, စိတ္တာ ဓမ္မာ’’တိအာဒိ ဝုတ္တန္တိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသော ဣစ္ဆိတဗ္ဗော’’တိ? တန္န, ‘‘စိတ္တော ဂဟပတီ’’တိအာဒီသု ပန ‘‘သတိပဋ္ဌာနော ဓမ္မော’’တိအာဒီသု စ စိတ္တသတိပဋ္ဌာနသဒ္ဒါဒီနံ ဂဟပတိ ဓမ္မာဒီနံ အပေက္ခနဝသေန နိစ္စံ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝဿ ဣစ္ဆိတတ္တာ. आणि जर त्यांनी पूर्वी सांगितलेले विधान पुन्हा बदलून असे म्हटले की, 'चित्तो गहपति' (चित्त असलेला गृहपती), 'चित्ता इत्थी' (चित्त असलेली स्त्री) इत्यादींमध्ये 'चित्त याचे आहे तो चित्तो', 'चित्त हिचे आहे ती चित्ता' - ज्याप्रमाणे 'सद्धो, सद्धा' (श्रद्धावान पुरुष, श्रद्धावान स्त्री) - याप्रमाणे 'त्याचे ते आहे' या अर्थाने ग्रहण करायचे असल्यामुळे लिंगविपर्यास (लिंगबदल) निश्चित करावा; परंतु 'सतिपट्ठानो धम्मो, चित्तो धम्मो, चित्ता धम्मा' इत्यादींमध्ये अशा प्रकारचा अर्थ ग्रहण करता येत नसल्यामुळे, 'सतिपट्ठानं धम्मो, चित्तं धम्मो, चित्तानि धम्मा' असे म्हणायला हवे असताना लिंगविपर्यासाने 'सतिपट्ठानो धम्मो, चित्तो धम्मो, चित्ता धम्मा' इत्यादी म्हटले आहे, म्हणून लिंगविपर्यास मान्य करावा? तर ते योग्य नाही, कारण 'चित्तो गहपति' इत्यादींमध्ये आणि 'सतिपट्ठानो धम्मो' इत्यादींमध्ये 'चित्त', 'सतिपट्ठान' इत्यादी शब्दांचा 'गहपति', 'धम्म' इत्यादींच्या अपेक्षेने (संबंधाने) नेहमी पुल्लिंगी भावच मान्य केला आहे. တထာ [Pg.303] ဟိ ဧကန္တနပုံသကလိင်္ဂေါပိ ပုညသဒ္ဒေါ အဘိသင်္ခါရာပေက္ခနဝသေန ‘‘ပုညော အဘိသင်္ခါရော’’တိ ပုလ္လိင်္ဂေါ ဇာတော, တထာ ဧကန္တနပုံသကလိင်္ဂါပိ ပဒုမ မင်္ဂလသဒ္ဒါဒယော အညဿတ္ထဿာပေက္ခနဝသေန ‘‘ပဒုမော ဘဂဝါ, ပဒုမာ ဒေဝီ, မင်္ဂလော ဘဂဝါ, မင်္ဂလာ ဣတ္ထီ’’တိ စ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂါ ဇာတာ. ဧကန္တပုလ္လိင်္ဂါပိ ဟတ္ထိဝိသေသဝါစကာ ကာလာဝက ဂင်္ဂေယျသဒ္ဒါဒယော ကုလာပေက္ခနဝသေန ‘‘ကာလာဝကဉ္စ ဂင်္ဂေယျ’’န္တိအာဒိနာ နပုံသကလိင်္ဂါ ဇာတာ. တဒပေက္ခနဝသေန ဟိ အဋ္ဌကထာယံ ‘‘ကာလာဝကော စ ဂင်္ဂေယျော’’တိအာဒိ ပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ. ဧဝံ တံတဒတ္ထာနမပေက္ခနဝသေန တံတံပကတိလိင်္ဂံ နာသေတွာ အပရံ လိင်္ဂံ ပတိဋ္ဌာပေတွာ နိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ, န စ တာနိ သဗ္ဗာနိပိ လိင်္ဂါနိ တဒ္ဓိတဝသေန အညလိင်္ဂါနိ ဇာတာနိ, အထ ခေါ ဂဟပတိဓမ္မာဒီနံ အပေက္ခနဝသေနေဝ အညလိင်္ဂါနိ ဇာတာနိ, တသ္မာ ‘‘ပေတာနိ ဘောတိ ပုတ္တာနိ, ခါဒမာနာ တုဝံ ပုရေ. သိဝိပုတ္တာနိ စဝှယ. ဧဝံ ဓမ္မာနိ သုတွာန, ဝိပ္ပသီဒန္တိ ပဏ္ဍိတာ’’တိအာဒီသုယေဝ လိင်္ဂဝိပလ္လာသော ဣစ္ဆိတဗ္ဗော အနညာပေက္ခကတ္တာ ဝုတ္တဓမ္မသဒ္ဒါဒီနံ, န ပန ‘‘စိတ္တော ဂဟပတိ, စိတ္တာ ဣတ္ထီ, သတိပဋ္ဌာနော ဓမ္မော, စိတ္တော ဓမ္မော, စိတ္တာ ဓမ္မာ’’တိအာဒီသု စိတ္တသဒ္ဒါဒီနံ ဝိပလ္လာသော ဣစ္ဆိတဗ္ဗော ဂဟပတိ ဓမ္မာဒီနံ အပေက္ခကတ္တာ တေသန္တိ နိဋ္ဌမေတ္ထာဝဂန္တဗ္ဗံ, ဣဒဉ္စ ဧကစ္စာနံ သမ္မောဟဋ္ဌာနံ, တသ္မာ သဒ္ဓမ္မဋ္ဌိတိယာ အယံ နီတိ သဒ္ဓါသမ္ပန္နေဟိ ကုလပုတ္တေဟိ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. तसेच, केवळ नपुंसकलिंगी असलेला 'पुञ्ञ' (पुण्य) शब्द सुद्धा 'अभिसङ्खार' (अभिसंस्कार) च्या अपेक्षेने 'पुञ्ञो अभिसङ्खारो' असा पुल्लिंगी झाला आहे. तसेच केवळ नपुंसकलिंगी असलेले 'पदुम' (कमळ), 'मङ्गल' इत्यादी शब्द दुसऱ्या अर्थाच्या अपेक्षेने 'पदुमो भगवा' (पद्म भगवान), 'पदुमा देवी', 'मङ्गलो भगवा', 'मङ्गला इत्थी' असे पुल्लिंगी व स्त्रीलिंगी झाले आहेत. केवळ पुल्लिंगी असलेले हत्तीच्या विशेषांचे वाचक 'कालावक', 'गङ्गेय्य' इत्यादी शब्द कुळाच्या अपेक्षेने 'कालावकञ्च गङ्गेय्यं' इत्यादी रूपाने नपुंसकलिंगी झाले आहेत. त्यांच्या अपेक्षेनेच अट्ठकथेत 'कालावको च गङ्गेय्यो' इत्यादी पुल्लिंगी निर्देश दिसतो. अशा प्रकारे त्या त्या अर्थांच्या अपेक्षेने त्या त्या मूळ लिंगाचा त्याग करून दुसरे लिंग प्रस्थापित करून निर्देश केलेला दिसतो. आणि ती सर्व लिंगे तद्धित प्रत्ययामुळे अन्य लिंगी झालेली नाहीत, तर गृहपती, धम्म इत्यादींच्या अपेक्षेनेच अन्य लिंगी झाली आहेत. म्हणूनच 'पेतानि भोति पुत्तानि, खादमाना तुवं पुरे. सिविपुत्तानि चव्हय. एवं धम्मानि सुत्वान, विप्पसीदन्ति पण्डिता' (हे भद्रे, तू पूर्वी मृत पुत्रांना खात होतीस. शिविपुत्रांना बोलाव. अशा प्रकारे धम्म ऐकून पंडित प्रसन्न होतात) इत्यादींमध्येच लिंगविपर्यास मान्य करावा, कारण तेथे उल्लेखिलेले 'धम्म' इत्यादी शब्द इतर कशाची अपेक्षा ठेवत नाहीत. परंतु 'चित्तो गहपति, चित्ता इत्थी, सतिपट्ठानो धम्मो, चित्तो धम्मो, चित्ता धम्मा' इत्यादींमध्ये 'चित्त' इत्यादी शब्दांचा विपर्यास मान्य करू नये, कारण ते गृहपती, धम्म इत्यादींची अपेक्षा ठेवतात, असा येथे निष्कर्ष काढावा. हे काही जणांच्या संमोहाचे (भ्रमाचे) स्थान आहे, म्हणून सद्धम्माच्या चिरस्थितीसाठी ही पद्धत श्रद्धासंपन्न कुलपुत्रांनी चांगल्या प्रकारे मनात धारण करावी. ဗဒရတိတ္ထဝိဟာရဝါသီ အာစရိယဓမ္မပါလော ပန ‘‘အပရိမာဏာ ပဒါ အပရိမာဏာ အက္ခရာ အပရိမာဏာ ဗျဉ္ဇနာတိ ပါဠိပ္ပဒေသေ [Pg.304] ‘ပဒါ အက္ခရာ ဗျဉ္ဇနာ’တိ လိင်္ဂဝိပလ္လာသော ကတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗ’’န္တိ အာဟ. ဧတ္ထာပိ မယံ ‘‘ပဒါ’’တိ ဣဒံ ‘‘ဣန္ဒြိယာ ရူပါ’’တိအာဒီနိ ဝိယ နပုံသကလိင်္ဂမေဝါတိ ဝဒါမ ဩကာရန္တဝသေန ပဌမေကဝစနန္တဘာဝါဘာဝတော, ဣတရဒွယံ ပန နပုံသကလိင်္ဂန္တိပိ ပုလ္လိင်္ဂန္တိပိ ဂဟေတဗ္ဗံ နိဂ္ဂဟီတန္တောကာရန္တဝသေန ပဌမေကဝစနန္တဘာဝဿူပလဗ္ဘနတော. တထာ ဟိ ‘‘ပုတ္တာနိ လတာနိ ပဗ္ဗတာနိ ဓမ္မာနီ’’တိအာဒီနံယေဝ လိင်္ဂဝိပလ္လာသာနိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗာနိ နိဂ္ဂဟီတန္တဝသေန ပဌမေကဝစနန္တတာယ အနုပလဒ္ဓိတော, တေသဉ္စောကာရန္တာကာရန္တဝသေန ပဌမေကဝစနန္တတာဒဿနတော. ‘‘ဇရာဓမ္မံ မာ ဇီရီ’’တိ ဣဒံ ပန အညပဒတ္ထဝသေန နပုံသကံ ဇာတန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. बदरतित्थविहारवासी आचार्य धम्मपाल यांनी मात्र 'अपरीमाणा पदा अपरीमाणा अक्खरा अपरीमाणा ब्यञ्जना' या पाळि पाठात 'पदा, अक्खरा, ब्यञ्जना' असा लिंगविपर्यास केला आहे असे समजावे, असे म्हटले आहे. येथेही आम्ही असे म्हणतो की, 'पदा' हा शब्द 'इन्द्रिया, रूपा' इत्यादींप्रमाणे नपुंसकलिंगीच आहे, कारण 'ओ'-कारान्त रूपाने तो प्रथमा एकवचनात आढळत नाही. इतर दोन शब्द (अक्खरा, ब्यञ्जना) मात्र नपुंसकलिंगी आणि पुल्लिंगी दोन्ही मानावेत, कारण निग्गहीत (अनुस्वार) आणि 'ओ'-कारान्त रूपाने त्यांचे प्रथमा एकवचनाचे रूप आढळते. तसेच 'पुत्तानि, लतानि, पब्बतानि, धम्मानि' इत्यादींचाच लिंगविपर्यास मान्य करावा, कारण निग्गहीत रूपाने त्यांचे प्रथमा एकवचन आढळत नाही, आणि त्यांचे 'ओ'-कारान्त व 'आ'-कारान्त रूपाने प्रथमा एकवचन आढळते. 'जराधम्मं मा जीरी' हे मात्र अन्य पदाच्या अर्थाच्या अपेक्षेने नपुंसकलिंगी झाले आहे असे समजावे. ဘူတံ, ဘူတာနိ, ဘူတာ. ဘူတံ, ဘူတာနိ, ဘူတေ. ဘူတေန, ဘူတေဟိ, ဘူတေဘိ. ဘူတဿ, ဘူတာနံ. ဘူတာ, ဘူတသ္မာ, ဘူတမှာ, ဘူတေဟိ, ဘူတေဘိ. ဘူတဿ, ဘူတာနံ. ဘူတေ, ဘူတသ္မိံ, ဘူတမှိ, ဘူတေသု. ဘော ဘူတ, ဘဝန္တော ဘူတာနိ, ဘဝန္တော ဘူတာ. ဧဝံ စိတ္တနယေန နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. भूतं, भूतानि, भूता (प्रथमा). भूतं, भूतानि, भूते (द्वितीया). भूतेन, भूतेहि, भूतेभि (तृतीया). भूतस्स, भूतानं (चतुर्थी). भूता, भूतस्मा, भूतम्हा, भूतेहि, भूतेभि (पंचमी). भूतस्स, भूतानं (षष्ठी). भूते, भूतस्मिं, भूतम्हि, भूतेसु (सप्तमी). भो भूत, भवन्तो भूतानि, भवन्तो भूता (संबोधन). याप्रमाणे 'चित्त' शब्दाच्या नियमाने नामपदमाला (विभक्ती रूपे) होते. ဣမိနာ နယေန ‘‘မဟာဘူတံ ဘဝိတ္တံ ဘူနံ ဘဝန’’မိစ္စာဒီနံ ဘူဓာတုမယာနံ နိဂ္ဂဟီတန္တပဒါနံ အညေသဉ္စ ‘‘ဝတ္တ’’မိစ္စာဒီနံ နိဂ္ဂဟီတန္တပဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. या नियमाने 'महाभूतं, भवित्तं, भूनं, भवनं' इत्यादी 'भू' धातूपासून बनलेल्या निग्गहीतान्त (अनुस्वारान्त) पदांची आणि इतर 'वत्तं' इत्यादी निग्गहीतान्त पदांची नामपदमाला समजावी. ဝတ္တံ ရူပံ သောတံ ဃာနံ, ဒုက္ခံ ပုပ္ဖံ ဈာနံ ဉာဏံ; ဒါနံ သီလံ ပုညံ ပါပံ, ဝဇ္ဇံ သစ္စံ ယာနံ ဆတ္တံ. वत्तं (कर्तव्य), रूपं (रूप), सोतं (कान), घानं (नाक), दुक्खं (दुःख), पुप्फं (फूल), झानं (ध्यान), ञाणं (ज्ञान); दानं (दान), सीलं (शील), पुञ्ञं (पुण्य), पापं (पाप), वज्जं (दोष), सच्चं (सत्य), यानं (वाहन), छत्तं (छत्र). သကဋံ ကနကံ တဂရံ နဂရံ, တရဏံ စရဏံ ဓရဏံ မရဏံ; နယနံ ဝဒနံ ကရဏံ လဝနံ, ဝသနံ ပဝနံ ဘဝနံ ဂဂနံ. सकटं (गाडी), कनकं (सोने), तगरं (तगर), नगरं (नगर), तरणं (पार करणे), चरणं (आचरण), धरणं (धारण करणे), मरणं (मरण); नयनं (डोळा), वदनं (मुख), करणं (करण/साधन), लवनं (कापणी), वसनं (वस्त्र), पवनं (वारा), भवनं (भवन), गगनं (आकाश). အမတံ ပုဠိနံ မာလံ, အာသနံ သဝနံ မုခံ; ပဒုမံ ဥပ္ပလံ ဝဿံ, လောစနံ သာဓနံ သုခံ. अमतं (अमृत), puळिनं (पुळण/वाळूचा किनारा), मालं (अंगण/माळ), आसनं (आसन), सवनं (श्रवण), मुखं (तोंड); पदुमं (कमळ), उप्पलं (उत्पल), वस्सं (वर्ष/पाऊस), लोचनं (डोळा), साधनं (साधन), सुखं (सुख). တာဏံ [Pg.305] မူလံ ဓနံ ကူလံ, မင်္ဂလံ နဠိနံ ဖလံ; ဟိရညံ အမ္ဗုဇံ ဓညံ, ဇာလံ လိင်္ဂံ ပဒံ ဇလံ. ताण (रक्षण), मूल (मूळ), धन, कूल (काठ), मङ्गल (मंगल), नळिन (कमळ), फल (फळ), हिरञ्ञ (सुवर्ण), अम्बुज (कमळ), धञ्ञ (धान्य), जाल (जाळे), लिङ्ग (लिंग), पद आणि जल (पाणी). အင်္ဂံ ပဏ္ဏံ သုသာနံ သံ, အာဝုဓံ ဟဒယံ ဝနံ; သောပါနံ စီဝရံ ပါဏံ, အလာတံ ဣန္ဒြိယံ ကုလံ. अङ्ग (अवयव), पण्ण (पान), सुसान (स्मशान), सं (स्वतःचे), आवुध (आयुध), हदय (हृदय), वन, सोपान (पायरी), चीवर, पाण (प्राण/पेय), अलात (कोळसा), इन्द्रिय आणि कुल (कुळ). လောဟံ ကဏံ ဗလံ ပီဌံ, အဏ္ဍံ အာရမ္မဏံ ပုရံ; အရညံ တီရမဿတ္ထ-မိစ္စာဒီနိ သမုဒ္ဓရေ. लोह, कण, बल (बळ), पीठ (आसन), अण्ड (अंडे), आरम्मण (आलंबन), पुर (नगर), अरञ्ञ (अरण्य), तीर, अस्सत्थ (पिंपळ) इत्यादी शब्द (नपुंसकलिंगी नामांच्या रूपांसाठी) उद्धृत करावेत. ဣမာနိ စိတ္တသဒ္ဒေန သဗ္ဗထာပိ သဒိသာနိ, ဣမာနိ ပန ဝိသဒိသာနိ. သေယျထိဒံ – हे सर्व शब्द 'चित्त' शब्दाप्रमाणेच सर्व प्रकारे समान आहेत, परंतु हे (खालील) भिन्न आहेत. जसे की – ‘‘စမ္မံ ဝေသ္မ’’န္တိအာဒီနိ, ဧကဓာယေဝ ဘိဇ္ဇရေ; ‘‘ကမ္မံ ထာမံ ဂုဏဝ’’န္တိ-အာဒီနိ တု အနေကဓာ. “चम्म” (चामडे), “वेस्म” (घर) इत्यादी शब्द एकाच प्रकारे विभक्त होतात; परंतु “कम्म” (कर्म), “थाम” (बल/शक्ती), “गुणवन्त” इत्यादी शब्द अनेक प्रकारे विभक्त होतात. ကထံ? कसे? စမ္မေ, စမ္မသ္မိံ, စမ္မမှိ, စမ္မနိ, ဝေသ္မေ, ဝေသ္မသ္မိံ, ဝေသ္မမှိ, ဝေသ္မနိ, ဃမ္မေ, ဃမ္မသ္မိံ, ဃမ္မမှိ, ဃမ္မနိ. ဧဝံ အညာနိပိ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. चम्मे, चम्मस्मिं, चम्मम्हि, चम्मनि; वेस्मे, वेस्मस्मिं, वेस्मम्हि, वेस्मनि; घम्मे, घम्मस्मिं, घम्मम्हि, घम्मनि. याप्रमाणे इतर शब्दांचीही योजना करावी. ကမ္မံ, ကမ္မာနိ, ကမ္မာ. ကမ္မံ, ကမ္မာနိ, ကမ္မေ. ကမ္မေန, ကမ္မုနာ, ကမ္မနာ, ကမ္မေဟိ, ကမ္မေဘိ. ကမ္မဿ, ကမ္မုနော, ကမ္မာနံ. ကမ္မသ္မာ, ကမ္မမှာ, ကမ္မုနာ, ကမ္မေဟိ, ကမ္မေဘိ. ကမ္မဿ, ကမ္မုနော, ကမ္မာနံ. ကမ္မေ, ကမ္မသ္မိံ, ကမ္မမှိ, ကမ္မနိ, ကမ္မေသု. ဘော ကမ္မ, ဘဝန္တော ကမ္မာနိ, ဘဝန္တော ကမ္မာ. कम्मं, कम्मानि, कम्मा (प्रथमा). कम्मं, कम्मानि, कम्मे (द्वितीया). कम्मेन, कम्मुना, कम्मना, कम्मेहि, कम्मेभि (तृतीया). कम्मस्स, कम्मुनो, कम्मानं (चतुर्थी). कम्मस्मा, कम्मम्हा, कम्मुना, कम्मेहि, कम्मेभि (पंचमी). कम्मस्स, कम्मुनो, कम्मानं (षष्ठी). कम्मे, कम्मस्मिं, कम्मम्हि, कम्मनि, कम्मेसु (सप्तमी). भो कम्म, भवन्तो कम्मानि, भवन्तो कम्मा (संबोधन). ထာမသဒ္ဒဿ ပန တတိယေကဝစနဋ္ဌာနာဒီသု ‘‘ထာမေန, ထာမုနာ, ထာမဿ, ထာမုနော’’တိ စ, ‘‘ထာမာ, ထာမသ္မာ, ထာမမှာ, ထာမုနာ’’တိ စ ယောဇေတဗ္ဗံ. परंतु 'थाम' (शक्ती) शब्दाच्या तृतीया एकवचनाच्या स्थानी इत्यादींमध्ये “थामेन, थामुना”, (षष्ठी/चतुर्थी एकवचनात) “थामस्स, थामुनो” आणि (पंचमी एकवचनात) “थामा, थामस्मा, थामम्हा, थामुना” अशी योजना करावी. ဝန္တု မန္တု ဣမန္တုပစ္စယဝတံ ပန နိဂ္ဂဟီတန္တသဒ္ဒါနံ ‘‘ဂုဏဝံ စိတ္တံ, ရုစိမံ ပုပ္ဖံ, ပါပိမံ ကုလံ’’ ဣစ္စာဒိပယောဂဝသေန – परंतु 'वन्तु', 'मन्तु' आणि 'इमन्तु' प्रत्यय लागलेल्या अनुस्वारान्त (निग्गहीतन्त) शब्दांचे, जसे की “गुणवं चित्तं” (गुणवान चित्त), “रुचिमं पुप्फं” (सुंदर फूल), “पापिमं कुलं” (पापी कुल) इत्यादी प्रयोगांनुसार – ဂုဏဝံ[Pg.306], ဂုဏဝန္တာနိ, ဂုဏဝန္တာ, ဂုဏဝန္တိ. ဂုဏဝန္တံ, ဂုဏဝန္တာနိ, ဂုဏဝန္တေ ဂုဏဝန္တိ. ဂုဏဝတာ, ဂုဏဝန္တေန, ဂုဏဝန္တေဟိ, ဂုဏဝန္တေဘိ. ဂုဏဝတော, ဂုဏဝန္တဿ, ဂုဏဝတံ, ဂုဏဝန္တာနံ. ဂုဏဝတာ, ဂုဏဝန္တာ, ဂုဏဝန္တသ္မာ, ဂုဏဝန္တမှာ, ဂုဏဝန္တေဟိ, ဂုဏဝန္တေဘိ. ဂုဏဝတော, ဂုဏဝန္တဿ, ဂုဏဝတံ, ဂုဏဝန္တာနံ. ဂုဏဝတိ, ဂုဏဝန္တေ, ဂုဏဝန္တသ္မိံ, ဂုဏဝန္တမှိ, ဂုဏဝန္တေသု. ဘော ဂုဏဝ, ဘဝန္တော ဂုဏဝန္တာနိ, ဂုဏဝန္တိ. गुणवं, गुणवन्तानि, गुणवन्ता, गुणवन्ति (प्रथमा). गुणवन्तं, गुणवन्तानि, गुणवन्ते, गुणवन्ति (द्वितीया). गुणवता, गुणवन्तेन, गुणवन्तेहि, गुणवन्तेभि (तृतीया). गुणवतो, गुणवन्तस्स, गुणवतं, गुणवन्तानं (चतुर्थी). गुणवता, गुणवन्ता, गुणवन्तस्मा, गुणवन्तम्हा, गुणवन्तेहि, गुणवन्तेभि (पंचमी). गुणवतो, गुणवन्तस्स, गुणवतं, गुणवन्तानं (षष्ठी). गुणवति, गुणवन्ते, गुणवन्तस्मिं, गुणवन्तम्हि, गुणवन्तेसु (सप्तमी). भो गुणव, भवन्तो गुणवन्तानि, गुणवन्ति (संबोधन). ဧဝံ ‘‘ရုစိမံ, ရုစိမန္တာနိ, ရုစိမ’’န္တိဣစ္စာဒိနာ, ‘‘ပါပိမံ, ပါပိမန္တာနိ, ပါပိမ’’န္တိ ဣစ္စာဒိနာ စ ယောဇေတဗ္ဗံ. အပိစေတ္ထ ‘‘ဂုဏဝံ ဗလဝံ ယသဝံ သတိမံ ဂတိမံ’’ဣစ္စာဒိနာ ပယောဂါ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗာ. याचप्रमाणे “रुचिमं, रुचिमन्तानि, रुचिमा” इत्यादी आणि “पापिमं, पापिमन्तानि, पापिमा” इत्यादी शब्दांची योजना करावी. तसेच येथे “गुणवं, बलवं, यसवं, सतिमं, गतिमं” इत्यादी प्रयोगांचा विस्तार करावा. ကရောန္တသဒ္ဒဿ ‘‘ကရောန္တံ စိတ္တံ, ကရောန္တံ ကုလ’’န္တိ ပယောဂဝသေန – 'करोन्त' (करणारे) शब्दाच्या “करोन्तं चित्तं” (करणारे चित्त), “करोन्तं कुलं” (करणारे घराणे) या प्रयोगांनुसार – ကရောန္တံ, ကရောန္တာနိ, ကရောန္တာ, ကရောန္တိ. ကရောန္တံ, ကရောန္တာနိ, ကရောန္တေ, ကရောန္တိ. ကရောတာ, ကရောန္တေန, ကရောန္တေဟိ, ကရောန္တေဘိ. ကရောတော, ကရတော, ကရောန္တဿ, ကရောန္တာနံ, ကရောတံ. ကရောတာ, ကရောန္တာ, ကရောန္တသ္မာ, ကရောန္တမှာ, ကရောန္တေဟိ, ကရောန္တေဘိ. ကရောတော, ကရတော, ကရောန္တဿ, ကရောန္တာနံ, ကရောတံ. ကရောတိ, ကရောန္တေ, ကရောန္တသ္မိံ, ကရောန္တမှိ, ကရောန္တေသု. ဘော ကရောန္တ, ဘဝန္တော, ကရောန္တာနိ, ကရောန္တာ, ကရောန္တီတိ ယောဇေတဗ္ဗံ. करोन्तं, करोन्तानि, करोन्ता, करोन्ति (प्रथमा). करोन्तं, करोन्तानि, करोन्ते, करोन्ति (द्वितीया). करोता, करोन्तेन, करोन्तेहि, करोन्तेभि (तृतीया). करोतो, करतो, करोन्तस्स, करोन्तानं, करोतं (चतुर्थी). करोता, करोन्ता, करोन्तस्मा, करोन्तम्हा, करोन्तेहि, करोन्तेभि (पंचमी). करोतो, करतो, करोन्तस्स, करोन्तानं, करोतं (षष्ठी). करोति, करोन्ते, करोन्तस्मिं, करोन्तम्हि, करोन्तेसु (सप्तमी). भो करोन्त, भवन्तो करोन्तानि, करोन्ता, करोन्ति (संबोधन) अशी योजना करावी. ဂစ္ဆန္တသဒ္ဒဿ တု ‘‘ဂစ္ဆန္တံ စိတ္တံ, ဂစ္ဆန္တံ ကုလ’’န္တိ ပယောဂဝသေန – परंतु 'गच्छन्त' (जाणारे) शब्दाच्या “गच्छन्तं चित्तं” (जाणारे चित्त), “गच्छन्तं कुलं” (जाणारे घराणे) या प्रयोगांनुसार – ဂစ္ဆန္တံ, ဂစ္ဆန္တာနိ, ဂစ္ဆန္တာ. ဂစ္ဆန္တံ, ဂစ္ဆန္တာနိ, ဂစ္ဆန္တေ. ဂစ္ဆတာ, ဂစ္ဆန္တေန, ဂစ္ဆန္တေဟိ, ဂစ္ဆန္တေဘိ. ဂစ္ဆတော, ဂစ္ဆန္တဿ, ဂစ္ဆန္တာနံ, ဂစ္ဆတံ. ဂစ္ဆတာ, ဂစ္ဆန္တာ, ဂစ္ဆန္တသ္မာ, ဂစ္ဆန္တမှာ, ဂစ္ဆန္တေဟိ[Pg.307], ဂစ္ဆန္တေဘိ. ဂစ္ဆတော, ဂစ္ဆန္တဿ, ဂစ္ဆန္တာနံ, ဂစ္ဆတံ. ဂစ္ဆတိ, ဂစ္ဆန္တေ, ဂစ္ဆန္တသ္မိံ, ဂစ္ဆန္တမှိ, ဂစ္ဆန္တေသု. ဘော ဂစ္ဆံ, ဘော ဂစ္ဆန္တာ, ဘဝန္တော ဂစ္ဆန္တာနိ, ဂစ္ဆန္တာတိ ယောဇေတဗ္ဗံ. गच्छन्तं, गच्छन्तानि, गच्छन्ता (प्रथमा). गच्छन्तं, गच्छन्तानि, गच्छन्ते (द्वितीया). गच्छता, गच्छन्तेन, गच्छन्तेहि, गच्छन्तेभि (तृतीया). गच्छतो, गच्छन्तस्स, गच्छन्तानं, गच्छतं (चतुर्थी). गच्छता, गच्छन्ता, गच्छन्तस्मा, गच्छन्तम्हा, गच्छन्तेहि, गच्छन्तेभि (पंचमी). गच्छतो, गच्छन्तस्स, गच्छन्तानं, गच्छतं (षष्ठी). गच्छति, गच्छन्ते, गच्छन्तस्मिं, गच्छन्तम्हि, गच्छन्तेसु (सप्तमी). भो गच्छं, भो गच्छन्ता, भवन्तो गच्छन्तानि, गच्छन्ता (संबोधन) अशी योजना करावी. ဧဝံ ‘‘စရန္တံ ဒဒန္တံ တိဋ္ဌန္တံ စိန္တယန္တ’’န္တိအာဒီသုပိ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. याचप्रमाणे “चरन्तं” (चालणारे), “ददन्तं” (देणारे), “तिट्ठन्तं” (उभे राहणारे), “चिन्तयन्तं” (विचार करणारे) इत्यादी शब्दांचीही नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) योजावीत. မဟန္တသဒ္ဒဿ ပန ကောစိ ဘေဒေါ, တထာ ဟိ ‘‘ဗာရာဏသိရဇ္ဇံ နာမ မဟာ’’တိ ဧဝံ ‘‘မဟာ’’ဣတိ နပုံသကပယောဂဒဿနတော ‘‘မဟန္တံ, မဟာ, မဟန္တာနိ, မဟန္တာ. မဟန္တံ, မဟန္တာနိ, မဟန္တေ. မဟတာ’’တိ ကမော ဝေဒိတဗ္ဗော. သဗ္ဗာနေတာနိ စိတ္တသဒ္ဒေန ဝိသဒိသာနိ. परंतु 'महन्त' (मोठा) शब्दाचा काही भेद आहे, जसे की “बाराणसिरज्जं नाम महा” (वाराणसीचे राज्य मोठे आहे) याप्रमाणे “महा” असा नपुंसकलिंगी प्रयोग दिसून येत असल्यामुळे “महन्तं, महा, mahantāni, mahantā (प्रथमा). महन्तं, महन्तानि, महन्ते (द्वितीया). महता (तृतीया)” असा क्रम समजावा. हे सर्व शब्द 'चित्त' शब्दापेक्षा भिन्न आहेत. သဝိနိစ္ဆယောယံ နိဂ္ဂဟီတန္တနပုံသကလိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा अनुस्वारान्त (निग्गहीतन्त) नपुंसकलिंगी शब्दांच्या मूळ रूपांच्या नामविभक्तीच्या रूपांचा (नामिकपदमला) सविस्तर निर्णय आहे. အဝဏ္ဏုကာရန္တတာပကတိကံ နိဂ္ဂဟီတန္တံ अ-कारान्त मूळ रूप असलेले अनुस्वारान्त (निग्गहीतन्त) နပုံသကလိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. नपुंसकलिंग समाप्त झाले. ဣဒါနိ တဿီလတ္ထဿ ကတရဿဿ အတ္ထဝိဘာဝိ ဣစ္စေတဿ သဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလံ ဝက္ခာမ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ – आता, पूर्व आचार्यांच्या मताला अग्रभागी ठेवून, तच्छील अर्थाच्या र्हस्व इ-कारान्त 'अत्थविभावि' (अर्थ स्पष्ट करणारे) या शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) सांगू – အဋ္ဌိ, အဋ္ဌီ, အဋ္ဌီနိ. အဋ္ဌိံ, အဋ္ဌီ, အဋ္ဌီနိ. အဋ္ဌိနာ, အဋ္ဌီဟိ, အဋ္ဌီဘိ. အဋ္ဌိဿ, အဋ္ဌိနော, အဋ္ဌီနံ. အဋ္ဌိနာ, အဋ္ဌီဟိ, အဋ္ဌီဘိ. အဋ္ဌိဿ, အဋ္ဌိနော, အဋ္ဌီနံ. အဋ္ဌိသ္မိံ, အဋ္ဌိမှိ, အဋ္ဌီသု. ဘော အဋ္ဌိ, ဘဝန္တော အဋ္ဌီ, ဘဝန္တော အဋ္ဌီနိ. ယမကမဟာထေရမတံ. अट्ठि, अट्ठी, अट्ठीनि (प्रथमा). अट्ठिं, अट्ठी, अट्ठीनि (द्वितीया). अट्ठिना, अट्ठीहि, अट्ठीभि (तृतीया). अट्ठिस्स, अट्ठिनो, अट्ठीनं (चतुर्थी). अट्ठिना, अट्ठीहि, अट्ठीभि (पंचमी). अट्ठिस्स, अट्ठिनो, अट्ठीनं (षष्ठी). अट्ठिस्मिं, अट्ठिम्हि, अट्ठीसु (सप्तमी). भो अट्ठि, भवन्तो अट्ठी, भवन्तो अट्ठीनि (संबोधन). हे यमक महाथेरांचे मत आहे. ကိဉ္စာပေတ္ထ နိဿက္ကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘အဋ္ဌိသ္မာ, အဋ္ဌိမှာ’’တိ ပဒါနိ အနာဂတာနိ, တထာပိ တတ္ထ တတ္ထ တံသဒိသပ္ပယောဂဒဿနာ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ယထာ ပန အဋ္ဌိသဒ္ဒဿ, ဧဝံ ‘‘သတ္ထိ ဒဓိ ဝါရိ အက္ခိ အစ္ဆိ’’ဣစ္စာဒီနမ္ပိ ရူပါနိ ဘဝန္တိ. जरी येथे पंचमी विभक्तीच्या (निस्सक्कवचन) स्थानी “अट्ठिस्मा, अट्ठिम्हा” हे शब्द आलेले नसले, तरी त्या त्या ठिकाणी तशाच प्रकारच्या प्रयोगांचे दर्शन होत असल्यामुळे ते ग्रहण करावेत. ज्याप्रमाणे 'अट्ठि' (हाड) शब्दाची रूपे होतात, त्याचप्रमाणे “सत्थि” (मांडी), “दधि” (दही), “वारि” (पाणी), “अक्खि” (डोळा), “अच्छि” (डोळा) इत्यादी शब्दांचीही रूपे होतात. အတ္ထဝိဘာဝိ[Pg.308], အတ္ထဝိဘာဝီ, အတ္ထဝိဘာဝီနိ. အတ္ထဝိဘာဝိံ, အတ္ထဝိဘာဝီ, အတ္ထဝိဘာဝီနိ. အတ္ထဝိဘာဝိနာ, အတ္ထဝိဘာဝီဟိ, အတ္ထဝိဘာဝီဘိ. အတ္ထဝိဘာဝိဿ, အတ္ထဝိဘာဝိနော, အတ္ထဝိဘာဝီနံ. အတ္ထဝိဘာဝိနာ, အတ္ထဝိဘာဝိသ္မာ အတ္ထဝိဘာဝိမှာ, အတ္ထဝိဘာဝီဟိ, အတ္ထဝိဘာဝီဘိ. အတ္ထဝိဘာဝိဿ, အတ္ထဝိဘာဝိနော, အတ္ထဝိဘာဝီနံ. အတ္ထဝိဘာဝိသ္မိံ, အတ္ထဝိဘာဝိမှိ, အတ္ထဝိဘာဝီသု. ဘော အတ္ထဝိဘာဝိ, ဘဝန္တော အတ္ထဝိဘာဝီ, ဘဝန္တော အတ္ထဝိဘာဝီနိ. अत्थविभावि, अत्थविभावी, अत्थविभावीनि (प्रथमा). अत्थविभाविं, अत्थविभावी, अत्थविभावीनि (द्वितीया). अत्थविभाविना, अत्थविभावीहि, अत्थविभावीभि (तृतीया). अत्थविभाविस्स, अत्थविभाविनो, अत्थविभावीनं (चतुर्थी). अत्थविभाविना, अत्थविभाविस्मा, अत्थविभाविम्हा, अत्थविभावीहि, अत्थविभावीभि (पंचमी). अत्थविभाविस्स, अत्थविभाविनो, अत्थविभावीनं (षष्ठी). अत्थविभाविस्मिं, अत्थविभाविम्हि, अत्थविभावीसु (सप्तमी). भो अत्थविभावि, भवन्तो अत्थविभावी, भवन्तो अत्थविभावीनि (संबोधन). ဧဝံ ‘‘ဓမ္မဝိဘာဝိ, စိတ္တာနုပရိဝတ္တိ, သုခကာရိ’’ဣစ္စာဒီနိပိ. တတ္ထ အဋ္ဌိ သတ္ထိအာဒီနိ ပဓာနလိင်္ဂါနိ အနညာပေက္ခကတ္တာ, အတ္ထဝိဘာဝိ ဓမ္မဝိဘာဝိအာဒီနိ အပ္ပဓာနလိင်္ဂါနိ အညာပေက္ခကတ္တာ. याचप्रमाणे “धम्मविभावि” (धम्म स्पष्ट करणारे), “चित्तानुपरिवत्ति” (चित्ताच्या अनुषंगाने चालणारे), “सुखकारि” (सुख देणारे) इत्यादी शब्दांची रूपे होतात. त्यामध्ये 'अट्ठि', 'सत्थि' इत्यादी शब्द इतर शब्दांवर अवलंबून नसल्यामुळे प्रधान लिंगी (विशेष्य) आहेत, तर 'अत्थविभावि', 'धम्मविभावि' इत्यादी शब्द इतर शब्दांवर अवलंबून असल्यामुळे अप्रधान लिंगी (विशेषण) आहेत. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဣကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा इकारान्त नपुंसकलिंगी नामांच्या मूळ रूपाचा सविस्तर निर्णय असलेला नामविभक्ती रूपांचा विभाग आहे. ဣဝဏ္ဏန္တတာပကတိကံ ဣကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. इ-वर्णान्त मूळ रूप असलेला इकारान्त नपुंसकलिंगी विभाग समाप्त झाला. ဣဒါနိ ကတရဿဿ ဂေါတြဘု ဣစ္စေတဿ သဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလံ ဝက္ခာမ ပုဗ္ဗာစရိယမတံ ပုရေစရံ ကတွာ – आता, पूर्वाचार्यांचे मत अग्रभागी ठेवून (त्यांचे अनुसरण करून), 'गोत्रभू' या शब्दाची नामविभक्ती रूपमाला सांगू – အာယု, အာယူ, အာယူနိ. အာယုံ, အာယူ, အာယူနိ. အာယုနာ, အာယူဟိ, အာယူဘိ. အာယုဿ, အာယုနော, အာယူနံ. အာယုနာ, အာယူဟိ, အာယူဘိ. အာယုဿ, အာယုနော, အာယူနံ. အာယုသ္မိံ, အာယုမှိ, အာယူသု. ဘော အာယု, ဘဝန္တော အာယူ, ဘဝန္တော အာယူနိ. ယမကမဟာထေရမတံ. आयु, आयू, आयूनि। आयुं, आयू, आयूनि। आयुना, आयूहि, आयूभि। आयुस्स, आयुनो, आयूनं। आयुना, आयूहि, आयूभि। आयुस्स, आयुनो, आयूनं। आयुस्मिं, आयुम्हि, आयूसु। भो आयु, भवन्तो आयू, भवन्तो आयूनि। हे यमकमहाथेरांचे मत आहे. ကိဉ္စာပေတ္ထ နိဿက္ကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘အာယုသ္မာ, အာယုမှာ’’တိ ပဒါနိ အနာဂတာနိ, တထာပိ တတ္ထ တတ္ထ တံသဒိသပ္ပယောဂဒဿနတော ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ဧတ္ထ စ အာယုသဒ္ဒေါ ပုံနပုံသကလိင်္ဂေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. တထာ ဟိ ပါဠိယံ အဋ္ဌကထာသု စ တဿ ဒွိလိင်္ဂတာ [Pg.309] ဒိဿတိ. ‘‘ပုနရာယု စ မေ လဒ္ဓေါ, ဧဝံ ဇာနာဟိ မာရိသ. အာယု စဿာ ပရိက္ခီဏော အဟောသီ’’တိအာဒီသု ဟိ အာယုသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါ, တဗ္ဗသေန ‘‘အာယု, အာယူ, အာယဝေါ’’တိအာဒိနာ ဘိက္ခုနယေန ယထာသမ္ဘဝံ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ‘‘အဂ္ဂံ အာယု စ ဝဏ္ဏော စ. ကိတ္တကံ ပနဿ အာယူ’’တိအာဒီသု ပန နပုံသကလိင်္ဂေါ, တဗ္ဗသေန ‘‘အာယု, အာယူ, အာယူနီ’’တိ ယောဇိတာ. जरी येथे अपादान विभक्तीच्या स्थानी “आयुस्मा, आयुम्हा” हे शब्द आलेले नसले, तरीही तिथे तिथे त्यासारखे प्रयोग दिसत असल्यामुळे ते ग्रहण करावेत. आणि येथे 'आयु' हा शब्द पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी समजावा. कारण पाळी आणि अट्ठकथांमध्ये त्याचे द्विलिंगत्व दिसून येते. “पुनरायु च मे लद्धो, एवं जानाहि मारिस। आयु चस्सा परिक्खीणो अहोसी” इत्यादींमध्ये 'आयु' शब्द पुल्लिंगी आहे, त्यानुसार “आयु, आयू, आयवो” इत्यादी भिक्खू-पद्धतीने शक्यतेनुसार नामविभक्ती रूपमाला योजावी. परंतु “अग्गं आयु च वण्णो च। कित्तकं पनस्स आयू” इत्यादींमध्ये तो नपुंसकलिंगी आहे, त्यानुसार “आयु, आयू, आयूनि” अशी योजना केली आहे. ဂေါတြဘု, ဂေါတြဘူ, ဂေါတြဘူနိ. ဂေါတြဘုံ, ဂေါတြဘူ, ဂေါတြဘူနိ. ဂေါတြဘုနာ, ဂေါတြဘူဟိ, ဂေါတြဘူဘိ. ဂေါတြဘုဿ, ဂေါတြဘုနော, ဂေါတြဘူနံ. ဂေါတြဘုနာ, ဂေါတြဘုသ္မာ, ဂေါတြဘုမှာ, ဂေါတြဘူဟိ, ဂေါတြဘူဘိ. ဂေါတြဘုဿ, ဂေါတြဘုနော, ဂေါတြဘူနံ. ဂေါတြဘုသ္မိံ, ဂေါတြဘုမှိ, ဂေါတြဘူသု. ဘော ဂေါတြဘု, ဘဝန္တော ဂေါတြဘူ, ဘဝန္တော ဂေါတြဘူနိ. ဘော ဂေါတြဘူ, ဘော ဂေါတြဘူနိ, ဧဝံ ဗဟုဝစနံ ဝါ. အယမမှာကံ မတံ, ဧဝံ ‘‘စိတ္တသဟဘု’’ဣစ္စာဒီနံ ဘူဓာတုမယာနံ ဥကာရန္တသဒ္ဒါနံ အညေသမ္ပိ တံသဒိသာနံ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ပုဂ္ဂလဝါစကော ပန ဦကာရန္တော ဂေါတြဘူသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂပရိယာပန္နတ္တာ သဗ္ဗညူနယေ ပဝိဋ္ဌော. တတြညေ သဒ္ဒါ နာမ ‘‘စက္ခု ဝသု ဓနု ဒါရု တိပု မဓု သိင်္ဂု ဟိင်္ဂု စိတ္တဂု’’ဣစ္စာဒယော. गोत्रभु, गोत्रभू, गोत्रभूनि। गोत्रभुं, गोत्रभू, गोत्रभूनि। गोत्रभुना, गोत्रभूहि, गोत्रभूभि। गोत्रभुस्स, गोत्रभुनो, गोत्रभूनं। गोत्रभुना, गोत्रभुस्मा, गोत्रभुम्हा, गोत्रभूहि, गोत्रभूभि। गोत्रभुस्स, गोत्रभुनो, गोत्रभूनं। गोत्रभुस्मिं, गोत्रभुम्हि, गोत्रभूसु। भो गोत्रभु, भवन्तो गोत्रभू, भवन्तो गोत्रभूनि। भो गोत्रभू, भो गोत्रभूनि, किंवा असे बहुवचन होते. हे आमचे मत आहे. याचप्रमाणे “चित्तसहभु” इत्यादी 'भू' धातूपासून बनलेल्या उकारान्त शब्दांची आणि इतरही तत्सम शब्दांची नामविभक्ती रूपमाला योजावी. परंतु पुद्गलवाचक ऊकारान्त 'गोत्रभू' शब्द पुल्लिंगात समाविष्ट असल्यामुळे तो 'सब्बञ्ञू' (सर्वज्ञ) पद्धतीमध्ये समाविष्ट होतो. तेथील इतर शब्द म्हणजे “चक्खु, वसु, धनु, दारु, तिपु, मधु, सिङ्गु, हिङ्गु, चित्तगु” इत्यादी आहेत. သဝိနိစ္ဆယောယံ ဥကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ. हा निर्णयांसह उकारान्त नपुंसकलिंगी शब्दांच्या प्रातिपदिक रूपाचा नामविभक्ती रूपमाला विभाग आहे. ဥဝဏ္ဏောကာရန္တတာပကတိကံ उ-वर्ण आणि ओ-कारान्त प्रकृतीचे. ဥကာရန္တနပုံသကလိင်္ဂံ နိဋ္ဌိတံ. उकारान्त नपुंसकलिंग समाप्त झाले. ဧဝံ နိဂ္ဂဟီတန္တ ဣကာရန္တ ဥကာရန္တဝသေန တိဝိဓာနိ နပုံသကလိင်္ဂါနိ နိရဝသေသတော ဂဟိတာနေဝ ဟောန္တိ. တေသု ကေသဉ္စိ [Pg.310] နိဂ္ဂဟီတန္တာနံ ကွစိ ပစ္စတ္တေကဝစနဿ ဗဟုဝစနဿ ဧကာရာဒေသဝသေန ဘေဒေါ ဒိဿတိ. သေယျထိဒံ? ‘‘သုခေ ဒုက္ခေ. ဧကူနပညာသ အာဇီဝကသတေ ဧကူနပညာသ ပရိဗ္ဗာဇကသတေ’’ဣစ္စေဝမာဒိ. နနု ဘော ဧဝံဝိဓာနံ ရူပါနံ ပါဠိယံ ဒဿနတော ‘‘ဧကာရန္တမ္ပိ နပုံသကလိင်္ဂံ အတ္ထီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗန္တိ? န ဝတ္တဗ္ဗံ နိဂ္ဂဟီတန္တောဂဓရူပဝိသေသတ္တာ တေသံ ရူပါနံ. အာဒေသဝသေန ဟိ သိဒ္ဓတ္တာ ဝိသုံ ဧကာရန္တံ နပုံသကလိင်္ဂံ နာမ နတ္ထိ. တသ္မာ နပုံသကလိင်္ဂါနံ ယထာဝုတ္တာ တိဝိဓတာယေဝ ဂဟေတဗ္ဗာတိ. अशा प्रकारे, निग्गहीत-अन्त (अनुस्वारान्त), इकारान्त आणि उकारान्त या भेदाने तीन प्रकारचे नपुंसकलिंग पूर्णपणे ग्रहण केले गेले आहेत. त्यापैकी काही निग्गहीत-अन्त शब्दांमध्ये कधीकधी प्रथमा एकवचन आणि बहुवचनात 'ए' काराच्या आदेशामुळे भेद दिसून येतो. जसे की – “सुखे दुक्खे। एकूनपञ्ञास आजीवकसते एकूनपञ्ञास परिब्बाजकसते” इत्यादी. अहो! पाळीमध्ये अशा प्रकारची रूपे दिसत असल्यामुळे “एकारान्त नपुंसकलिंग सुद्धा आहे” असे म्हणावे का? असे म्हणू नये, कारण ती रूपे निग्गहीत-अन्त अंतर्गतच विशेष रूपे आहेत. आदेशाच्या द्वारे सिद्ध होत असल्यामुळे स्वतंत्रपणे 'एकारान्त नपुंसकलिंग' नावाचे काही नाही. म्हणून, नपुंसकलिंगांचे वर सांगितलेले तीन प्रकारच ग्रहण करावेत. နပုံသကာနမိစ္စေဝံ, လိင်္ဂါနံ နယသာလိနီ; ပဒမာလာ ဝိဘတ္တာ မေ, သာသနတ္ထံ မဟေသိနော. अशा प्रकारे, नपुंसकलिंगी शब्दांची ही पद्धतशीर रूपमाला मी महर्षींच्या शासनाच्या कल्याणासाठी स्पष्ट केली आहे. ယဿေသာ ပဂုဏာ သဒ္ဒ-နီတိရေသာ သုဘာဝိတာ; သာသနေ ကုလပုတ္တာနံ, သရဏံ သော ပရာယဏံ. ज्याला ही सुसंस्कृत 'सद्दानीति' (व्याकरण) उत्तम प्रकारे अवगत आहे, तो शासनामध्ये कुलपुत्रांसाठी शरण आणि परम आश्रयस्थान बनतो. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ...कौशल्यासाठी रचलेल्या 'सद्दानीति' ग्रंथामध्ये... နပုံသကလိင်္ဂါနံ ပကတိရူပဿ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ ...नपुंसकलिंगी शब्दांच्या प्रातिपदिक रूपाचा नामविभक्ती रूपमाला विभाग... နဝမော ပရိစ္ဆေဒေါ. ...हा नववा परिच्छेद आहे. ၁၀. လိင်္ဂတ္တယမိဿကနာမိကပဒမာလာ १०. तिन्ही लिंगांची मिश्र नामविभक्ती रूपमाला. အဓိကူနကတော စေက-က္ခရတော စ ဣတော ပရံ; တီဏိ လိင်္ဂါနိ မိဿေတွာ, ပဒမာလမနာကုလံ. यापुढे, अधिक किंवा उणे आणि एकाक्षरी शब्दांच्या क्रमाने, तिन्ही लिंगांचे मिश्रण करून, स्पष्ट अशी रूपमाला सांगतो. နာနာသုခုမသင်္ကေတ-ဂတေသွတ္ထေသု ဝိညုနံ; ဂမ္ဘီရဗုဒ္ဓိစာရတ္ထံ, ပဝက္ခာမိ ယထာဗလံ. विद्वानांच्या गंभीर बुद्धीच्या विहारासाठी, विविध सूक्ष्म आणि संकेतांनी युक्त अर्थांमध्ये, मी माझ्या शक्तीनुसार सांगेन. ဣတ္ထီ ထီ စ ပဘာ ဘာ စ, ဂိရာ ရာ ပဝနံ ဝနံ; ဥဒကဉ္စ ဒကံ ကဉ္စ, ဝိတက္ကော ဣတိ စာဒယော. 'इत्थी' आणि 'थी', 'पभा' आणि 'भा', 'गिरा' आणि 'रा', 'पवनं' आणि 'वनं', 'उदकं', 'दकं' आणि 'कं', 'वितक्को' इत्यादी. ဘူ [Pg.311] ဘူမိ စေဝ အရညံ, အရညာနီတိ စာဒယော; ပညာ ပညာဏံ ဉာဏဉ္စ, ဣစ္စာဒီ စ တိဓာ သိယုံ. 'भू', 'भूमी' तसेच 'अरञ्ञं', 'अरञ्ञानी' इत्यादी; 'पञ्ञा', 'पञ्ञाणं' आणि 'ञाणं' इत्यादी तीन प्रकारे असू शकतात. ကော ဝိ သာ စေဝ ဘာ ရာ စ, ထီ ဓီ ကု ဘူ တထေဝ ကံ; ခံ ဂေါ မော မာ စ သံ ယံ တံ, ကိမိစ္စာဒီ စ ဧကိကာတိ. 'को', 'वी', 'सा' तसेच 'भा' व 'रा', 'थी', 'धी', 'कु', 'भू' तसेच 'कं', 'खं', 'गो', 'मो', 'मा', 'सं', 'यं', 'तं', 'किं' इत्यादी एकाक्षरी शब्द आहेत. အယံ လိင်္ဂတ္တယမိဿကော နာမိကပဒမာလာဥဒ္ဒေသော. တတြ ဣတ္ထီ, ဣတ္ထီ, ဣတ္ထိယော. ဣတ္ထိံ…ပေ… ဘောတိယော ဣတ္ထိယော. हा तिन्ही लिंगांच्या मिश्र नामविभक्ती रूपमालेचा निर्देश आहे. त्यामध्ये – इत्थी, इत्थी, इत्थियो। इत्थिं... पे... भोतियो इत्थियो। ထီ ထီ, ထိယော. ထိံ, ထီ, ထိယော. ထိယာ, ထီဟိ, ထီဘိ. ထိယာ, ထီနံ. ထိယာ, ထီဟိ, ထီဘိ. ထိယာ, ထီနံ. ထိယာ, ထိယံ, ထီသု. ဘောတိ ထိ, ဘောတိယော ထီ, ဘောတိယော ထိယော. ဧတ္ထ – थी थी, थियो। थिं, थी, थियो। थिया, थीहि, थीभि। थिया, थीनं। थिया, थीहि, थीभि। थिया, थीनं। थिया, थियं, थीसु। भोति थि, भोतियो थी, भोतियो थियो। येथे – ‘‘ကုက္ကုဋာ မဏယော ဒဏ္ဍာ, ထိယော စ ပုညလက္ခဏာ; ဥပ္ပဇ္ဇန္တိ အပါပဿ, ကတပုညဿ ဇန္တုနော; ထိယာ ဂုယှံ န သံသေယျ; ထီနံ ဘာဝေါ ဒုရာဇာနော’’တိ “कुक्कुटा मणयो दण्डा, थियो च पुञ्ञलक्खणा। उप्पज्जन्ति अपापस्स, कतपुञ्ञस्स जन्तुनो। थिया गुय्हं न संसेय्य। थीनं भावो दुराजानो” အာဒီနိ နိဒဿနပဒါနိ. इत्यादी उदाहरणाचे शब्द आहेत. ပဘာ, ပဘာ, ပဘာယော. ပဘံ…ပေ… ဘောတိယော ပဘာယော. पभा, pabhā, pabhāyo. पभं... पे... भोतियो पभायो। ဘာ, ဘာ, ဘာယော. ဘံ, ဘာ, ဘာယော. ဘာယ, ဘာဟိ, ဘာဘိ. ဘာယ, ဘာနံ. ဘာယ, ဘာဟိ, ဘာဘိ. ဘာယ, ဘာနံ. ဘာယ, ဘာယံ, ဘာသု. ဘောတိ ဘေ, ဘောတိယော ဘာ, ဘောတိယော ဘာယော. ဧတ္ထ စ ‘‘ဘာကရော ဘာနု’’ဣစ္စာဒီနိ နိဒဿနပဒါနိ. भा, भा, भायो। भं, भा, भायो। भाय, भाहि, भाभि। भाय, भानं। भाय, भाहि, भाभि। भाय, भानं। भाय, भायं, भासु। भोति भे, भोतियो भा, भोतियो भायो। आणि येथे “भाकरो भानु” इत्यादी उदाहरणाचे शब्द आहेत. ဂိရာ[Pg.312], ဂိရာ, ဂိရာယော. ဂိရံ…ပေ… ဘောတိယော ဂိရာယော. ‘‘ဝါစာ ဂိရာ ဗျပ္ပထော. ယေ ဝေါဟံ ကိတ္တယိဿာမိ, ဂိရာဟိ အနုပုဗ္ဗသော’’တိ ဣမာနိ ဂိရာသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေ နိဒဿနပဒါနိ. गिरा, गिरा, गिरायो। गिरं... पे... भोतियो गिरायो। “वाचा गिरा ब्यप्पथो। ये वोहं कित्तयिस्सामि, गिराहि अनुपुब्बसो” ही 'गिरा' शब्दाच्या स्त्रीलिंगी असण्याची उदाहरणे आहेत. သုဝဏ္ဏဝါစကော ရာသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါ, ဣဓ ပန သဒ္ဒဝါစကော ရာသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ. सुवर्णवाचक 'रा' शब्द पुल्लिंगी आहे, परंतु येथे शब्दवाचक 'रा' शब्द स्त्रीलिंगी आहे. ရာ, ရာ, ရာယော. ရံ, ရာ, ရာယော. ရာယ, ရာဟိ, ရာဘိ. ရာယ, ရာနံ. ရာယ, ရာဟိ, ရာဘိ. ရာယ, ရာနံ. ရာယ, ရာယံ, ရာသု. ဘောတိ ရေ, ဘောတိယော ရာ, ဘောတိယော ရာယော. रा, रा, रायो। रं, रा, रायो। राय, राहि, राभि। राय, रानं। राय, राहि, राभि। राय, रानं। राय, रायं, रासु। भोति रे, भोतियो रा, भोतियो रायो। ရာ ဝုစ္စတိ သဒ္ဒေါ. အဂ္ဂညသုတ္တဋီကာယဉှိ ‘‘ရာ သဒ္ဒေါ တိယတိ ဆိဇ္ဇတိ ဧတ္ထာတိ ရတ္တိ, သတ္တာနံ သဒ္ဒဿ ဝူပသမကာလော’’တိ ဝုတ္တံ. တသ္မာ ရာသဒ္ဒဿ သဒ္ဒဝါစကတ္တေ ‘‘ရတ္တီ’’တိ ပဒံ နိဒဿနံ. 'रा' म्हणजे शब्द म्हटला जातो. कारण अग्गञ्ञसुत्त-टीकेमध्ये म्हटले आहे – “रा सद्दो तियति छिज्जति एत्थाति रत्ति, सत्तानं सद्दस्स वूपसमकालो” (जिथे 'रा' म्हणजे शब्द खंडित होतो ती 'रत्ति' म्हणजे रात्र, जी प्राण्यांच्या शब्दाच्या शांत होण्याचा काळ आहे). म्हणून 'रा' शब्दाच्या शब्दवाचकतेमध्ये “रत्ती” हा शब्द उदाहरण आहे. ပဝနံ, ပဝနာနိ, ပဝနာ. ပဝနံ, ပဝနာနိ, ပဝနေ. पवनं, पवनानि, पवना। पवनं, पवनानि, पवने। ဝနံ, ဝနာနိ, ဝနာ. ဝနံ, ဝနာနိ, ဝနေ. သေသံ သဗ္ဗံ နေယျံ. वनं, वनानि, वना। वनं, वनानि, वने। उर्वरित सर्व समजून घ्यावे. ပဝန ဝနသဒ္ဒါ ကဒါစိ သမာနတ္ထာ ကဒါစိ ဘိန္နတ္ထာ. တေ ဟိ အရညဝါစကတ္တေ သမာနတ္ထာ ‘‘တေ ဓမ္မေ ပရိပူရေန္တော, ပဝနံ ပါဝိသိံ တဒါ. သပုတ္တော ပါဝိသိံ ဝန’’န္တိအာဒီသု. ယထာက္ကမံ ပန တေ ဝါယုတဏှာဝနဝါစကတ္တေ ဘိန္နတ္ထာ ‘‘ပရမဒုဂ္ဂန္ဓပဝနဝိစရိတေ. ဆေတွာ ဝနဉ္စ ဝနထံ, နိဗ္ဗနာ ဟောထ ဘိက္ခဝေါ’’တိအာဒီသု. ‘पवन’ आणि ‘वन’ हे शब्द कधी समान अर्थाचे तर कधी भिन्न अर्थाचे असतात. कारण, अरण्य (जंगल) या अर्थाचे वाचक असताना ते समान अर्थाचे असतात, जसे की— “ते धम्मे परिपूरेन्तो, पवनं पावििसं तदा। सपुत्तो पावििसं वनं” (त्या धर्मांना परिपूर्ण करत, तेव्हा मी पवनात [अरण्यात] प्रवेश केला. पुत्रासह मी वनात प्रवेश केला) इत्यादींमध्ये. परंतु, अनुक्रमे वायू (वारा), तृष्णा (इच्छा) आणि वन (जंगल) यांचे वाचक असताना ते भिन्न अर्थाचे असतात, जसे की— “परमदुग्गन्धपवनविचरिते” (अत्यंत दुर्गंधीयुक्त वायूने युक्त असलेल्या ठिकाणी) आणि “छेत्वा वनञ्च वनथं, निब्बना होथ भिक्खवो” (हे भिक्खूहो! वन [तृष्णा] आणि वनथ [लहान तृष्णा] कापून टाकून तुम्ही निब्बानयुक्त [तृष्णारहित] व्हा) इत्यादींमध्ये. ဥဒကံ, ဥဒကာနိ, ဥဒကာ. ဥဒကံ, ဥဒကာနိ, ဥဒကေ. उदकं, उदकानि, उदका (प्रथमा विभक्ती). उदकं, उदकानि, उदके (द्वितीया विभक्ती). ဒကံ, ဒကာနိ, ဒကာ. ဒကံ, ဒကာနိ, ဒကေ. သေသံ သဗ္ဗံ နေယျံ. दकं, दकानि, दका (प्रथमा). दकं, दकानि, दके (द्वितीया). उर्वरित सर्व (रूपे) याप्रमाणेच जाणावीत. ‘‘အမ္ဗပက္ကံ [Pg.313] ဒကံ သီတံ. ထလဇာ ဒကဇာ ပုပ္ဖာ’’တိအာဒီနေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. ‘‘နီလောဒံ ဝနမဇ္ဈတော. မဟောဒဓိ. ဥဒဗိန္ဒုနိပါတေန, ဥဒကုမ္ဘောပိ ပူရတီ’’တိ ပါဠိပ္ပဒေသေသု ပန သမာသန္တဂတနာမတ္တာ ဥဒသဒ္ဒေနေဝ ဥဒကတ္ထော ဝုတ္တော ‘‘ရိတ္တဿာဒ’’န္တိ ဝတ္တဗ္ဗဋ္ဌာနေ ‘‘ရိတ္တဿ’’န္တိ သဒ္ဒေန ရိတ္တဿာဒတ္ထော ဝိယ. ပါဠိယဉှိ ကေဝလော ဥဒသဒ္ဒေါ န ဒိဋ္ဌပုဗ္ဗော. အတ္ထိ စေ, သုဋ္ဌု မနသိ ကာတဗ္ဗော. “अम्बपक्कं दकं सीतं” (पिकलेला आंबा आणि थंड पाणी), “थलजा दकजा पुप्फा” (जमिनीवर आणि पाण्यात उगवणारी फुले) इत्यादी येथे उदाहरणाचे शब्द आहेत. परंतु, “नीलोदं वनमज्झतो” (वनाच्या मध्यभागातील निळे पाणी), “महोदधि” (महासागर), “उदबिन्दुनिपातेन, उदकुम्भोपि पूरती” (पाण्याच्या थेंबाथेंबाने पाण्याचा घडाही भरतो) इत्यादी पाळी वचनांमध्ये समासाच्या शेवटी नाम आल्यामुळे ‘उद’ या शब्दानेच ‘उदक’ (पाणी) हा अर्थ सांगितला आहे; जसे की “रित्तस्सादं” (रिक्त आस्वाद) असे म्हणण्याच्या ठिकाणी केवळ “रित्तस्स” या शब्दाने ‘रिक्त आस्वाद’ हा अर्थ व्यक्त होतो. कारण, पाळीमध्ये केवळ ‘उद’ हा शब्द पूर्वी कधी पाहिला गेलेला नाही. जर तो असेल, तर त्याचे नीट मनन केले पाहिजे. ကံ, ကာနိ, ကာ. ကံ, ကာနိ, ကေ. ကေန, ကေဟိ, ကေဘိ. ကဿ, ကာနံ. ကာ, ကသ္မာ, ကမှာ, ကေဟိ, ကေဘိ. ကဿ, ကာနံ. ကေ, ကသ္မိံ, ကမှိ, ကေသု. ဘော က, ဘဝန္တော ကာ, ဘဝန္တော ကာနိ. ဘောသဒ္ဒေန ဝါ ဗဟုဝစနံ ယောဇေတဗ္ဗံ ‘‘ဘော ကာနိ, ဘော ကာ’’တိ. कं, कानि, का (प्रथमा). कं, कानि, के (द्वितीया). केन, केहि, केभि (तृतीया). कस्स, कानं (चतुर्थी). का, कस्मा, कम्हा, केहि, केभि (पंचमी). कस्स, कानं (षष्ठी). के, कस्मिं, कम्हि, केसु (सप्तमी). भो क (हे क!), भवन्तो का, भवन्तो कानि (संबोधन). किंवा ‘भो’ शब्दाने बहुवचन जोडावे, जसे की— “भो कानि, bho का”. ဧတ္ထ ကံ ဝုစ္စတိ ဥဒကံ သီသံ သုခဉ္စ. အတြ ‘‘ကန္တာရော ကန္ဒရော ကေဝဋ္ဋာ ကေသာ ကရုဏာ နာကော’’တိအာဒီနိ ပယောဂါနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. တတြ ကန္တာရောတိ ကံ ဝုစ္စတိ ဥဒကံ, တေန တရိတဗ္ဗော အတိက္ကမိတဗ္ဗောတိ ကန္တာရော, နိရုဒကပ္ပဒေသော. စောရကန္တာရန္တိအာဒီသု ပန ရူဠှိယာ ဒုဂ္ဂမနဋ္ဌာနေပိ ကန္တာရသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ကန္ဒရောတိ ဧတ္ထာပိ ကံ ဝုစ္စတိ ဥဒကံ, တေန ဒါရိတော ဘိန္နောတိ ကန္ဒရော. ကေဝဋ္ဋာတိအာဒီသု ပန ကေ ဥဒကေ ဝတ္တနတော ဂဟဏတ္ထံ ပဝတ္တနတော ကေဝဋ္ဋာ. ကေ သီသေ သေန္တိ ဥပ္ပဇ္ဇန္တီတိ ကေသာ. ကံ သုခံ ရုန္ဓတီတိ ကရုဏာ. နာကောတိ သဂ္ဂေါ. ကန္တိ ဟိ သုခံ, န ကံ အကံ, ဒုက္ခံ, တံ နတ္ထိ ဧတ္ထာတိ နာကောတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော[Pg.314]. ယထေတ္ထ ဣတ္ထီသဒ္ဒါဒီနံ နာမိကပဒမာလာ ယောဇိတာ, ဧဝံ ‘‘ဝိတက္ကော ဝိစာရော အာဘာ ပဒီပေါ’’တိအာဒီနမ္ပိ ယောဇေတဗ္ဗာ. येथे ‘कं’ म्हणजे पाणी, डोके आणि सुख असे म्हटले जाते. येथे “कन्तारो, कन्दरो, केवट्टा, केसा, करुणा, नाको” इत्यादी प्रयोग जाणावेत. त्यामध्ये ‘कन्तारो’ (कांतार/अरण्य) म्हणजे— ‘कं’ म्हणजे पाणी, ज्याच्याद्वारे ते पार केले पाहिजे किंवा ओलांडले पाहिजे ते ‘कन्तार’ (पाणी नसलेला प्रदेश). परंतु ‘चोरकन्तार’ (चोरांचे अरण्य) इत्यादींमध्ये रूढीने दुर्गम ठिकाणीही ‘कन्तार’ शब्द वापरला जातो, असे समजावे. ‘कन्दरो’ (कंदरा/गुहा) येथेही ‘कं’ म्हणजे पाणी, ज्याच्याद्वारे ते विदीर्ण (कोरलेले) किंवा भिन्न केले जाते ते ‘कन्दर’. ‘केवट्टा’ (कोळी/मासेमार) इत्यादींमध्ये ‘के’ म्हणजे पाण्यात राहणारे (मासे) पकडण्यासाठी जे प्रवृत्त होतात ते ‘केवट्टा’. ‘के’ म्हणजे डोक्यावर जे राहतात किंवा उगवतात ते ‘केसा’ (केस). ‘कं’ म्हणजे सुखाला जे रोखते (दुसऱ्याचे दुःख पाहून जे मन द्रवते) ती ‘करुणा’. ‘नाको’ म्हणजे स्वर्ग. ‘कं’ म्हणजे सुख, ‘न कं’ म्हणजे ‘अकं’ (दुःख), जे येथे नाही तो ‘नाको’ (स्वर्ग) असा अर्थ घ्यावा. ज्याप्रमाणे येथे ‘इत्थी’ (स्त्री) इत्यादी शब्दांची नामविभक्ती रूपमाला जोडली आहे, त्याचप्रमाणे “वितक्को, विचारो, आभा, पदीपो” इत्यादींचीही जोडावी. ဘူ, ဘူ, ဘုယော. ဘုံ, ဘူ, ဘုယော. ဘုယာ, ဘူဟိ, ဘူဘိ. ဘုယာ, ဘူနံ. ဘုယာ, ဘူဟိ, ဘူဘိ. ဘုယာ, ဘူနံ. ဘုယာ, ဘုယံ, ဘူသု. ဘောတိ ဘု, ဘောတိယော ဘူ, ဘောတိယော ဘုယော. ဧတ္ထ စ ‘‘ဘူရုဟော ဘူပါလော ဘူဘုဇော ဘူတလ’’န္တိ နိဒဿနပဒါနိ. भू, भू, भुयो (प्रथमा). भुं, भू, भुयो (द्वितीया). भुया, भूhi, भूभि (तृतीया). भुया, भूनं (चतुर्थी). भुया, भूhi, भूभि (पंचमी). भुया, भूनं (षष्ठी). भुया, भुयं, भूसु (सप्तमी). भोति भु, भोतियो भू, भोतियो भुयो (संबोधन). आणि येथे “भूरुहो” (झाड), “भूपालो” (राजा), “भूभुजो” (राजा), “भूतलं” (पृथ्वीचा पृष्ठभाग) हे उदाहरणाचे शब्द आहेत. ဘူမိ, ဘူမီ, ဘူမိယော; သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ; အရညံ, အရညာနိ, အရညာ; သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. भूमि, भूमी, भूमियो; उर्वरित विस्तार करावा. अरञ्ञं, अरञ्ञानि, अरञ्ञा; उर्वरित विस्तार करावा. အရညာနီ ဝုစ္စတိ မဟာအရညံ, ‘‘ဂဟပတာနီ’’တိ ပဒမိဝ ဣနီပစ္စယဝသေန သာဓေတဗ္ဗံ ပဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂဉ္စ. ‘‘အရညာနီ’’တိ ဟိ အဋ္ဌကထာပါဌောပိ ဒိဿတိ. ‘अरञ्ञानी’ म्हणजे मोठे अरण्य (महाअरण्य) म्हटले जाते. “गहपतानी” या शब्दाप्रमाणे ‘इनी’ प्रत्ययाच्या साहाय्याने सिद्ध होणारा हा स्त्रीलिंगी शब्द आहे. कारण, अट्ठकथेमध्ये “अरञ्ञानी” असा पाठही दिसून येतो. အရညာနီ, အရညာနီ, အရညာနိယော. အရညာနိံ, အရညာနီ, အရညာနိယော. အရညာနိယာ, အရညာနီဟိ, အရညာနီဘိ. အရညာနိယာ, အရညာနီနံ. အရညာနိယာ, အရညာနီဟိ, အရညာနီဘိ. အရညာနိယာ, အရညာနီနံ. အရညာနိယာ, အရညာနိယံ, အရညာနီသု. ဘောတိ အရညာနိ, ဘောတိယော အရညာနီ, ဘောတိယော အရညာနိယော. अरञ्ञानी, अरञ्ञानी, अरञ्ञानियो (प्रथमा). अरञ्ञानिं, अरञ्ञानी, अरञ्ञानियो (द्वितीया). अरञ्ञानिया, अरञ्ञानीहि, अरञ्ञानीभि (तृतीया). अरञ्ञानिया, अरञ्ञानीनं (चतुर्थी). अरञ्ञानिया, अरञ्ञानीहि, अरञ्ञानीभि (पंचमी). अरञ्ञानिया, अरञ्ञानीनं (षष्ठी). अरञ्ञानिया, अरञ्ञानियं, अरञ्ञानीसु (सप्तमी). भोति अरञ्ञानि, भोतियो अरञ्ञानी, भोतियो अरञ्ञानियो (संबोधन). ယထေတ္ထ ဥတ္တရာဓိကဝသေန ယောဇိတာ, ဧဝံ ‘‘သဘာ, သဘာယ’’န္တိအာဒီသုပိ ယောဇေတဗ္ဗာ. သဘာယန္တိ သဘာ ဧဝ[Pg.315], လိင်္ဂဗျတ္တယဝသေန ပန ဧဝံ ဝုတ္တံ. ‘‘သဘာယေ ဝါ ဒွါရမူလေ ဝါ ဝတ္ထဗ္ဗ’’န္တိ ပါဠိ ဧတ္ထ နိဒဿနံ. ज्याप्रमाणे येथे पुढील अधिकाराच्या नियमानुसार योजना केली आहे, त्याचप्रमाणे “सभा, सभायं” इत्यादींमध्येही योजना करावी. ‘सभायं’ म्हणजे ‘सभा’च, परंतु लिंगबदलामुळे (लिंगव्यत्ययामुळे) असे म्हटले आहे. “सभाये वा द्वारमूले वा वत्थब्बं” (सभेत किंवा दारापाशी राहावे) हे पाळी वचन येथे उदाहरण आहे. ပညာ, ပညာ, ပညာယော. ပညံ, ပညာ, ပညာယော. ပညာယ. पञ्ञा, pञ्ञा, pञ्ञायो (प्रथमा). पञ्ञं, pञ्ञा, pञ्ञायो (द्वितीया). पञ्ञाय (तृतीयादी). ပညာဏံ, ပညာဏာနိ, ပညာဏာ. ပညာဏံ, ပညာဏာနိ, ပညာဏေ. ပညာဏေန. पञ्ञाणं, pञ्ञाणानि, pञ्ञाणा (प्रथमा). पञ्ञाणं, pञ्ञाणानि, pञ्ञाणे (द्वितीया). पञ्ञाणेन (तृतीया). ‘‘တထာ ဟိ ဘန္တေ ဘဂဝတော သီလပညာဏံ. သာဓု ပညာဏဝါ နရော’’တိအာဒီနေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. “तथा हि भन्ते भगवतो सीलपञ्ञाणं” (कारण, भन्ते! भगवंतांचे शील हेच त्यांचे लक्षण/ज्ञान आहे), “साधु पञ्ञाणवा नरो” (प्रज्ञावान मनुष्य चांगला असतो) इत्यादी येथे उदाहरणाचे शब्द आहेत. ဉာဏံ, ဉာဏာနိ, ဉာဏာ. ဉာဏံ, ဉာဏာနိ, ဉာဏေ. ဉာဏေန. သေသံ သဗ္ဗံ နေယျံ. ‘‘အဂ္ဂိ အဂ္ဂိနိ ဂိနိ’’ဣစ္စာဒီသုပိ ဥတ္တရာဓိကဝသေန နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ञाणं, ञाणानि, ञाणा (प्रथमा). ञाणं, ञाणानि, ञाणे (द्वितीया). ञाणेन (तृतीया). उर्वरित सर्व याप्रमाणेच जाणावे. “अग्गि, अग्गिनि, गिनि” इत्यादींमध्येही पुढील अधिकाराच्या नियमानुसार नामविभक्ती रूपमाला जोडावी. ကော ဝီ သာဒီသုပိ ဧကက္ခရေသု ကော ဝုစ္စတိ ဗြဟ္မာ ဝါတော စ သရီရဉ္စ, တဿ တဗ္ဗာစကတ္တေ ဣမေ ပယောဂါ. သေယျထိဒံ? ‘को’, ‘वी’ इत्यादी एकाक्षरी शब्दांमध्ये ‘को’ म्हणजे ब्रह्मा, वायू आणि शरीर असे म्हटले जाते. त्याचे वाचक असण्यामध्ये हे प्रयोग आहेत. ते कोणते? जसे की— ‘‘ဇိနေန ယေန အာနီတံ, လောကဿ အမိတံ ဟိတံ; တဿ ပါဒမ္ဗုဇံ ဝန္ဒေ, ကမောဠိအလိသေဝိတံ. “जिनेन येन आनीतं, लोकस्स अमितं हितं। तस्स पादम्बुजं वन्दे, कमोळिअलिसेवितं॥” (ज्या जिनांनी [बुद्धांनी] जगाचे अमर्याद हित आणले [साधले], त्यांच्या चरणकमलांना मी वंदन करतो, जे ‘कमोळिअलिसेवित’ [ब्रह्मदेवांच्या मुकुटावरील भ्रमरांनी सेवित] आहे.) ကကုဓရုက္ခော. ကရဇကာယော’’ ဣစ္စေဝမာဒယော. တတ္ထ ကမောဠိအလိသေဝိတန္တိ ဝန္ဒန္တာနံ အနေကသတာနံ ဗြဟ္မာနံ မောဠိဘမရသေဝိတန္တိ ကဝယော ဣစ္ဆန္တိ. ကကုဓရုက္ခောတိ ဧတ္ထ ပန ကော ဝုစ္စတိ ဝါတော, တဿ ယော ကုဇ္ဈတိ, ဝါတရောဂါပနယနဝသေန တံ နိဝါရေတိ, တသ္မာ သော ရုက္ခော ကကုဓောတိ ဝုစ္စတီဘိ အာစရိယာ. ကရဇကာယောတိ ဧတ္ထ တု ကော ဝုစ္စတိ သရီရံ, တတ္ထ ပဝတ္တော ရဇော ကရဇော. ကိံ တံ[Pg.316]? သုက္ကသောဏိတံ. တဉှိ ‘‘ရာဂေါ ရဇော, န စ ပန ရေဏု ဝုစ္စတီ’’တိ ဧဝံ ဝုတ္တရာဂရဇဖလတ္တာ သရီရဝါစကေန ကသဒ္ဒေန ဝိသေသေတွာ ဖလဝေါဟာရေန ‘‘ကရဇော’’တိ ဝုစ္စတိ. တေန သုက္ကသောဏိတသင်္ခါတေန ကရဇေန သမ္ဘူတော ကာယော ကရဇကာယောတိ အာစရိယာ. တထာ ဟိ ‘‘ကာယော မာတာပေတ္တိကသမ္ဘဝေါ’’တိ ဝုတ္တော, မဟာအဿပူရသုတ္တဋီကာယံ ပန ‘‘ကရိယတိ ဂဗ္ဘာသယေ ခိပိယတီတိ ကရော, သမ္ဘဝေါ. ကရတော ဇာတောတိ ကရဇော, မာတာပေတ္တိကသမ္ဘဝေါတိ အတ္ထော. မာတုအာဒီနံ သဏ္ဌာပနဝသေန ကရတော ဇာတောတိ အပရေ, ဥဘယထာပိ ကရဇကာယန္တိ စတုသန္တတိရူပမာဟာ’’တိ ဝုတ္တံ. အယံ ပနတ္ထော ဣဓ နာဓိပ္ပေတော, ပုရိမောယေဝတ္ထော အဓိပ္ပေတော ကသဒ္ဒါဓိကာရတ္တာ. “ककुधरुक्खो” (ककुध वृक्ष), “करजकायो” (करजकाय) इत्यादी. त्यामध्ये ‘कमोळिअलिसेवितं’ म्हणजे वंदन करणाऱ्या अनेक शेकडो ब्रह्मांच्या मुकुटावरील भ्रमरांनी सेवित, असा कवींना अर्थ अभिप्रेत आहे. ‘ककुधरुक्खो’ येथे ‘को’ म्हणजे वायू, जो त्याला क्रुद्ध करतो (म्हणजे वायूचे आजार दूर करतो), त्या वायूच्या रोगाचे निवारण करत असल्यामुळे त्या वृक्षाला ‘ककुध’ असे म्हटले जाते, असे आचार्य सांगतात. ‘करजकायो’ येथे मात्र ‘को’ म्हणजे शरीर, त्यामध्ये उत्पन्न होणारा रज म्हणजे ‘करज’. तो कोणता? शुक्र आणि शोणित (वीर्य आणि रक्त). कारण “रागो रजो, न च पन रेणु वुच्चति” (राग हा रज आहे, धूळ नव्हे) अशा प्रकारे सांगितलेल्या रागरूपी रजाचे फळ असल्यामुळे, शरीरवाचक ‘क’ शब्दाने विशेषित करून फलव्यवहाराने त्याला ‘करज’ म्हटले जाते. त्या शुक्र-शोणित रूपी करजापासून उत्पन्न झालेली काया म्हणजे ‘करजकाय’ असे आचार्य म्हणतात. म्हणूनच “कायो मातापेत्तिकसम्भवो” (माता-पित्यांपासून उत्पन्न झालेली काया) असे म्हटले आहे. महाअस्सपूरसुत्तटीकेमध्ये मात्र— “गर्भाशयात जे टाकले जाते ते ‘कर’ म्हणजे संभव (उत्पत्ती). करापासून जो जन्मला तो ‘करज’ म्हणजे माता-पित्यांपासून उत्पन्न झालेला, असा अर्थ आहे. माता इत्यादींच्या स्थापनेमुळे करापासून जन्मलेला तो ‘करज’ असे इतर म्हणतात. दोन्ही प्रकारे ‘करजकाय’ म्हणजे चार प्रकारच्या संततीचे रूप म्हटले आहे” असे सांगितले आहे. परंतु हा अर्थ येथे अभिप्रेत नाही, तर ‘क’ शब्दाच्या अधिकाराचा संबंध असल्यामुळे पूर्वोक्त (पहिलाच) अर्थ अभिप्रेत आहे. ကော, ကာ. ကံ, ကေ. ကေန, ကေဟိ, ကေဘိ. ကဿ, ကာနံ. ကာ, ကသ္မာ, ကမှာ, ကေဟိ, ကေဘိ. ကဿ, ကာနံ. ကေ, ကသ္မိံ, ကမှိ, ကေသု. ဘော က, ဘဝန္တော ကာ. को, का (प्रथमा). कं, के (द्वितीया). केन, केहि, केभि (तृतीया). कस्स, कानं (चतुर्थी). का, कस्मा, कम्हा, केहि, केभि (पंचमी). कस्स, कानं (षष्ठी). के, कस्मिं, कम्हि, केसु (सप्तमी). भो क, भवन्तो का (संबोधन). တတြ ဝိ ဝုစ္စတိ ပက္ခီ. တထာ ဟိ ပက္ခီနံ ဣဿရော သုပဏ္ဏရာဇာ ဝိန္ဒောတိ ကထိယတိ. ဧတမတ္ထဉှိ သန္ဓာယ ပုဗ္ဗာစရိယေနပိ အယံ ဂါထာ ဘာသိတာ – तेथे 'वि' म्हणजे पक्षी असे म्हटले जाते. तसेच पक्षांचा स्वामी सुपर्णराज (गरुडराज) याला 'विन्द' असे म्हटले जाते. याच अर्थाचा संदर्भ घेऊन पूर्वाचार्यांनीही ही गाथा म्हटली आहे – ‘‘သဒ္ဓါနတေ မုဒ္ဓနိ သဏ္ဌပေမိ, မုနိန္ဒ နိန္ဒာပဂတံ တဝဂ္ဂံ; ဒေဝိန္ဒနာဂိန္ဒနရိန္ဒဝိန္ဒ-န တံ ဝိဘိန္နံ စရဏာရဝိန္ဒ’’န္တိ. “हे मुनींद्र! देवेंद्र, नागेंद्र आणि नरेंद्रांच्या समूहानेही जे कधी विलग केले नाही, असे निंदेपासून मुक्त असलेले आपले श्रेष्ठ चरणकमल मी श्रद्धेने नम्र झालेल्या मस्तकावर धारण करतो.” တတ္ထ ဝီနံ ဣန္ဒောတိ ဝိန္ဒော, ပက္ခိဇာတိယာ ဇာတာနံ သုပဏ္ဏာနံ ရာဇာတိ အတ္ထော. तेथे 'वीनां इन्दो' (पक्षांचा स्वामी) म्हणजे 'विन्द', पक्षी जातीमध्ये जन्मलेल्या सुपर्णांचा (गरुडांचा) राजा असा याचा अर्थ आहे. ဝိံ, ဝီ, ဝယော. ဝိံ, ဝီ, ဝယော. ဝိနာ, ဝီဟိ, ဝီဘိ. ဝိဿ, ဝိနော, ဝီနံ. ဝိနာ, ဝိသ္မာ, ဝိမှာ, ဝီဟိ, ဝီဘိ. ဝိဿ, ဝိနော, ဝီနံ. ဝိသ္မိံ, ဝိမှိ, ဝီသု. ဘော ဝိ, ဘဝန္တော ဝယော. विं, वी, वयो। विं, वी, वयो। विना, वीहि, वीभि। विस्स, विनो, वीनं। विना, विस्मा, विम्हा, वीहि, वीभि। विस्स, विनो, वीनं। विस्मिं, विम्हि, वीसु। भो वि, भवन्तो वयो। သာ [Pg.317] ဝုစ္စတိ သုနခေါ, ‘‘မာတာ မေ အတ္ထိ, သာ မယာ ပေါသေတဗ္ဗာ’’တိအာဒီသု ပန သာသဒ္ဒေါ သဗ္ဗနာမိကပရိယာပန္နော ပရမ္မုခဝစနော တသဒ္ဒေန သမ္ဘူတော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. သာသဒ္ဒဿ ဘာ ရာ ထီ ဘူ ကသဒ္ဒါနဉ္စ နာမိကပဒမာလာ ဟေဋ္ဌာ ပကာသိတာ. 'सा' म्हणजे कुत्रा असे म्हटले जाते. परंतु “माझी माता आहे, तिचे मी पालन केले पाहिजे” इत्यादी वाक्यांमध्ये 'सा' हा शब्द सर्वनामाच्या अंतर्गत येणारा, परोक्षवाचक (तृतीय पुरुषवाचक) असून तो 'तद्' शब्दापासून उत्पन्न झालेला मानला पाहिजे. 'सा' शब्दाची आणि 'भा', 'रा', 'थी', 'भू', 'क' या शब्दांची नामविभक्ती रूपे खाली दर्शविली आहेत. ဓီ ဝုစ္စတိ ပညာ. ဧတ္ထ စ ‘‘အမစ္စေ တာတ ဇာနာဟိ, ဓီရေ အတ္ထဿ ကောဝိဒေ’’တိ. ‘‘ဓီမာ, ဓီမတိ, သုဓီ, သုဓိနီ, ဓီယုတ္တ’’န္တိ စ အာဒီနိ နိဒဿနပဒါနိ. 'धी' म्हणजे प्रज्ञा (बुद्धी) असे म्हटले जाते. आणि येथे “हे तात! अमात्यांना धीर (बुद्धिमान) आणि अर्थाचे (कार्याचे) कुशल म्हणून जाणावे” असे म्हटले आहे. “धीमा, धीमती, सुधी, सुधिनी, धीयुत्त” इत्यादी याची उदाहरणे आहेत. ဓီ, ဓီ, ဓိယော. ဓိံ, ဓီ, ဓိယော. ဓိယာ, ဓီဟိ, ဓီဘိ. ဓိယာ, ဓီနံ. ဓိယာ, ဓီဟိ, ဓီဘိ. ဓိယာ, ဓီနံ. ဓိယာ, ဓိယံ, ဓီသု. ဘောတိ ဓိ, ဘောတိယော ဓီ, ဘောတိယော ဓိယော. धी, धी, धियो। धिं, धी, धियो। धिया, धीहि, धीभि। धिया, धीनं। धिया, धीहि, धीभि। धिया, धीनं। धिया, धियं, धीसु। भोति धि, भोतियो धी, भोतियो धियो। ကု ဝုစ္စတိ ပထဝီ. ဧတ္ထ စ ‘‘ကုဒါလော. ကုမုဒံ. ကုဉ္ဇရော’’တိ ဣမာနိ နိဒဿနပဒါနိ. တတြ ကုံ ပထဝိံ ဒါလယတိ ပဒါလေတိ ဘိန္ဒတိ ဧတေနာတိ ကုဒါလော. ကုယံ ပထဝိယံ မောဒတီတိ ကုမုဒံ. ကုံ ဇရတီတိ ကုဉ္ဇရော. တထာ ဟိ ဝိမာနဝတ္ထုအဋ္ဌကထာယံ ဝုတ္တံ ‘‘ကုံ ပထဝိံ တဒဘိဃာတေန ဇရယတီတိ ကုဉ္ဇရော’’တိ. 'कु' म्हणजे पृथ्वी असे म्हटले जाते. आणि येथे “कुदालो (कुदळ), कुमुदं (कमळ), कुंजरो (हत्ती)” ही उदाहरणे आहेत. त्यामध्ये 'कु' म्हणजे पृथ्वीला जो दळतो, विदीर्ण करतो किंवा भेदतो, तो 'कुदालो' (कुदळ). 'कु' म्हणजे पृथ्वीवर जे आनंदित होते (उमलते), ते 'कुमुदं' (कमळ). 'कु' म्हणजे पृथ्वीला जो जर्जर करतो, तो 'कुंजरो' (हत्ती). तसेच विमानवत्थु-अट्ठकथेमध्ये म्हटले आहे – “'कु' म्हणजे पृथ्वीला आपल्या आघाताने जो जर्जर करतो, तो 'कुंजरो' होय.” ကု, ကူ, ကုယော. ကုံ, ကူ, ကုယော. ကုယာ, ကူဟိ, ကူဘိ. ကုယာ, ကူနံ. ကုယာ, ကူဟိ, ကူဘိ. ကုယာ, ကူနံ. ကုယာ, ကုယံ, ကူသု. ဘောတိ ကု, ဘောတိယော ကူ, ဘောတိယော ကုယော. कु, कू, कुयो। कुं, कू, कुयो। कुया, कूहि, कूबि। कुया, कूनं। कुया, कूहि, कूबि। कुया, कूनं। कुया, कुयं, कूसु। भोति कु, भोतियो कू, भोतियो कुयो। ခ’မိန္ဒြိယံ ပကထိတံ, ခ’မာကာသမုဒီရိတံ; သဂ္ဂဋ္ဌာနမ္ပိ ခံ ဝုတ္တံ, သုညတ္တမ္ပိ စ ခံ မတံ. 'ख' म्हणजे इंद्रिय असे सांगितले आहे, 'ख' म्हणजे आकाश असे म्हटले आहे; स्वर्गस्थानालाही 'ख' म्हटले आहे आणि शून्यतेलाही 'ख' मानले गेले आहे. တတြိန္ဒြိယံ [Pg.318] စက္ခုဝိညာဏာဒီနံ ဂတိနိဝါသဘာဝတော ‘‘ခ’’န္တိ ဝုစ္စတိ, အာကာသံ ဝိဝိတ္တဋ္ဌေန. သဂ္ဂေါ ကတသုစရိတေဟိ ဧကန္တေန ဂန္တဗ္ဗတာယ ‘‘ခ’’န္တိ သင်္ခံ ဂစ္ဆတိ. ‘‘ခဂေါ ယထာ ဟိ ရုက္ခဂ္ဂေ, နိလီယန္တောဝ သာခိနော. သာခံ ဃဋ္ဋေတီ’’တိ စ, ‘‘ခေ နိမ္မိတော အစရိ အဋ္ဌသတံ သယမ္ဘူ’’တိ စ အာဒိ ဧတ္ထ နိဒဿနံ. तेथे चक्षुविज्ञानादींच्या गती व निवासाचे स्थान असल्यामुळे इंद्रियाला 'ख' असे म्हटले जाते, आणि विविक्त (मोकळे) असल्याच्या अर्थाने आकाशाला 'ख' म्हटले जाते. केलेल्या सुचरितांमुळे (सत्कर्मामुळे) निश्चितपणे जाण्यायोग्य असल्यामुळे स्वर्गाला 'ख' ही संज्ञा प्राप्त होते. “ज्याप्रमाणे झाडाच्या शेंड्यावर बसणारा पक्षी (खग) फांदीवर उतरताना फांदीला स्पर्श करतो” आणि “स्वयंभू (बुद्धांनी) आकाशात (खे) निर्माण होऊन एकशे आठ प्रातिहार्ये केली” इत्यादी येथे उदाहरणे आहेत. ခံ, ခါနိ, ခါ. ခံ, ခါနိ, ခေ. ခေန, ခေဟိ, ခေဘိ. ခဿ, ခါနံ. ခါ, ခသ္မာ, ခမှာ, ခေဟိ, ခေဘိ. ခဿ, ခါနံ. ခေ, ခသ္မိံ, ခမှိ, ခေသု. ဘော ခ, ဘဝန္တော ခါနိ, ဘဝန္တော ခါ. खं, खानि, खा। खं, खानि, खे। खेन, खेहि, खेभि। खस्स, खानं। खा, खस्मा, खम्हा, खेहि, खेभि। खस्स, खानं। खे, खस्मिं, खम्हि, खेसु। भो ख, भवन्तो खानि, भवन्तो खा। ဂေါသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ – 'गो' शब्दाचा अर्थविस्तार सांगितला जात आहे – ဂေါ ဂေါဏေ စိန္ဒြိယေ ဘူမျံ, ဝစနေ စေဝ ဗုဒ္ဓိယံ; အာဒိစ္စေ ရသ္မိယဉ္စေဝ, ပါနီယေပိ စ ဝတ္တတေ; တေသု အတ္ထေသု ဂေါဏေ ထိ-ပုမာ စ ဣတရေ ပုမာ. 'गो' हा शब्द बैल (किंवा गाय), इंद्रिय, भूमी (पृथ्वी), वचन आणि बुद्धी; तसेच सूर्य, किरण आणि पाणी या अर्थांमध्ये वापरला जातो. या अर्थांपैकी 'बैल/गाय' या अर्थात तो स्त्रीलिंगी व पुल्लिंगी असतो आणि इतर अर्थांमध्ये तो पुल्लिंगी असतो. တထာ ဟိ ‘‘ဂေါသု ဒုယှမာနာသု ဂတော. ဂေါပဉ္စမော’’တိအာဒီသု ဂေါသဒ္ဒေါ ဂေါဏေ ဝတ္တတိ. ဂေါစရောတိ ဧတ္ထိန္ဒြိယေပိ ဝတ္တတိ ဂါဝေါ စက္ခာဒီနိန္ဒြိယာနိ စရန္တိ ဧတ္ထာတိ ဂေါစရော. တထာ ဟိ ပေါရာဏာ ကထယိံသု ‘‘ဂါဝေါ စရန္တိ ဧတ္ထာတိ ဂေါစရော, ဂေါစရော ဝိယ ဂေါစရော, အဘိဏှံ စရိတဗ္ဗဋ္ဌာနံ. ဂါဝေါဝါစက္ခာဒီနိန္ဒြိယာနိ, တေဟိ စရိတဗ္ဗဋ္ဌာနံ ဂေါစရော’’တိ. ‘‘ဂေါမတိံ ဂေါတမံ နမေ’’တိ ပေါရာဏကဝိရစနာယံ ပန ပထဝိယံ ဝတ္တတိ. ‘‘ဘူရိပညံ ဂေါတမံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓံဝန္ဒာမီ’’တိ ဟိ အတ္ထော. တထာ သုတ္တနိပါတဋ္ဌကထာယဝါသေဋ္ဌသုတ္တသံဝဏ္ဏနပ္ပဒေသေ ‘‘ဂေါရက္ခန္တိ ခေတ္တရက္ခံ, ကသိရက္ခန္တိ ဝုတ္တံ ဟောတိ. ပထဝီ ဟိ ‘‘ဂေါ’’တိ ဝုစ္စတိ, တပ္ပဘေဒေါ စ ခေတ္တ’’န္တိ ဝုတ္တံ. तसेच “गाईंचे दोहन केले जात असताना तो गेला” किंवा “गो-पंचम” इत्यादींमध्ये 'गो' शब्द बैलाच्या/गाईच्या अर्थात वापरला जातो. 'गोचर' यामध्ये तो इंद्रियाच्या अर्थातही वापरला जातो; 'गावो' म्हणजे चक्षु इत्यादी इंद्रिये ज्यामध्ये विचरतात, तो 'गोचर' होय. म्हणूनच प्राचीन आचार्यांनी म्हटले आहे – “गाई जेथे विचरतात तो गोचर, गोचरासारखाच गोचर म्हणजे वारंवार विचरण्याचे स्थान. किंवा 'गावो' म्हणजे चक्षु इत्यादी इंद्रिये, त्यांच्याद्वारे विचरण्याचे स्थान म्हणजे गोचर होय.” परंतु “गोमतीं गोतमं नमे” या प्राचीन कवींच्या रचनेत तो पृथ्वीच्या अर्थात वापरला जातो. कारण “विपुल प्रज्ञा असलेल्या गौतम सम्यक्संबुद्धांना मी वंदन करतो” असा याचा अर्थ आहे. तसेच सुत्तनिपात-अट्ठकथेतील वासेट्ठसुत्ताच्या वर्णनात “'गोरक्खं' म्हणजे शेताचे रक्षण, शेतीचे रक्षण असे म्हटले आहे. कारण पृथ्वीला 'गो' म्हटले जाते आणि तिचाच एक भाग म्हणजे शेत होय” असे म्हटले आहे. ‘‘ဂေါတ္တဝသေန [Pg.319] ဂေါတမော’’တိ ဧတ္ထ တု ဝစနေ ဗုဒ္ဓိယဉ္စ ဝတ္တတိ. တေနာဟု ပေါရာဏာ ‘‘ဂံ တာယတီတိ ဂေါတ္တံ. ဂေါတမောတိ ဟိ ပဝတ္တမာနံ ဂံ ဝစနံ ဗုဒ္ဓိဉ္စ တာယတိ ဧကံသိကဝိသယတာယ ရက္ခတီတိ ဂေါတ္တံ. ယထာ ဟိ ဗုဒ္ဓိ အာရမ္မဏဘူတေန အတ္ထေန ဝိနာ န ဝတ္တတိ, ဧဝံ အဘိဓာနံ အဘိဓေယျဘူတေန, တသ္မာ သော ဂေါတ္တသင်္ခါတော အတ္ထော တာနိ တာယတိ ရက္ခတီတိ ဝုစ္စတိ. ကော ပန သောတိ? အညကုလပရမ္ပရာသာဓာရဏံ တဿ ကုလဿ အာဒိပုရိသသမုဒါဂတံ တံကုလပရိယာပန္နသာဓာရဏံ သာမညရူပန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗ’’န္တိ. တထာ ဟိ တံဂေါတ္တဇာတာ သုဒ္ဓေါဒနမဟာရာဇာဒယောပိ ဂေါတမောတွေဝ ဝုစ္စန္တိ. ဘေန ဘဂဝါ အတ္တနော ပိတရံ သုဒ္ဓေါဒနမဟာရာဇာနံ ‘‘အတိက္ကန္တဝရာ ခေါ ဂေါတမ တထာဂတာ’’တိ အဝေါစ. ဝေဿဝဏောပိ မဟာရာဇာ ဘဂဝန္တံ ‘‘ဝိဇ္ဇာစရဏသမ္ပန္နံ, ဗုဒ္ဓံ ဝန္ဒာမ ဂေါတမ’’န္တိ အဝေါစ, အာယသ္မာပိ ဝင်္ဂီသော အာယသ္မန္တံ အာနန္ဒံ ‘‘သာဓု နိဗ္ဗာပနံ ဗြူဟိ, အနုကမ္ပာယ ဂေါတမာ’’တိ အဝေါစ. ဧဝံ ဣဒံ သာမညရူပံ ဂံ တာယတီတိ ဂေါတ္တန္တိ ဝုတ္တံ. တံ ပန ဂေါတမဂေါတ္တကဿပဂေါတ္တာဒိဝသေန ဗဟုဝိဓံ. परंतु “गोत्राच्या कारणाने गौतम” यामध्ये तो वचन आणि बुद्धी या अर्थांमध्ये वापरला जातो. म्हणूनच प्राचीन आचार्यांनी म्हटले आहे – “'गं' (वचन किंवा बुद्धी) चे जे रक्षण करते ते 'गोत्र'. 'गौतम' म्हणून प्रवृत्त होणारे जे वचन आणि बुद्धीचे रक्षण करते, एकांतिक विषयाच्या रूपाने रक्षण करते, ते गोत्र होय. कारण ज्याप्रमाणे बुद्धी ही आलंबनभूत अर्थाशिवाय प्रवृत्त होत नाही, त्याचप्रमाणे अभिधान (नाव) हे अभिधेय (अर्था) शिवाय प्रवृत्त होत नाही, म्हणून तो गोत्र नावाचा अर्थ त्यांचे रक्षण करतो असे म्हटले जाते. तो कोण आहे? इतर कुलपरंपरेपेक्षा वेगळे, त्या कुलाच्या आदिपुरुषापासून चालत आलेले, त्या कुलात समाविष्ट असलेल्या सर्वांसाठी सामायिक असलेले सामान्य रूप होय, असे मानले पाहिजे.” तसेच त्या गोत्रात जन्मलेले शुद्धोदन महाराज इत्यादींनाही 'गौतम' असेच म्हटले जाते. भगवंतांनी स्वतःचे पिता शुद्धोदन महाराजांना “हे गौतम! तथागत हे श्रेष्ठ गुणांनी युक्त असतात” असे म्हटले. वेस्सवण महाराजांनीही भगवंतांना “विद्याचरणसंपन्न अशा बुद्ध गौतमांना आम्ही वंदन करतो” असे म्हटले. आयुष्यमान वंगीसांनीही आयुष्यमान आनंदांना “हे गौतमा! अनुकंपा करून मला निर्वाणाचा उत्तम मार्ग सांगा” असे म्हटले. अशा प्रकारे, हे सामान्य रूप 'गं' चे रक्षण करते म्हणून याला 'गोत्र' म्हटले गेले आहे. ते गोत्र गौतमगोत्र, कस्सपगोत्र इत्यादी भेदांमुळे अनेक प्रकारचे आहे. တထာ ဂေါသဒ္ဒေါ အာဒိစ္စေ ဝတ္တတိ. ‘‘ဂေါဂေါတ္တံ ဂေါတမံ နမေ’’တိ ပေါရာဏကဝိရစနာ ဧတ္ထ နိဒဿနံ, အာဒိစ္စဗန္ဓုံ ဂေါတမံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓံ ဝန္ဒာမီတိ အတ္ထော. အာဒိစ္စောပိ ဟိ ဂေါတမဂေါတ္တေ ဇာတော ဘဂဝါပိ, ဧဝံ တေန သမာနဂေါတ္တတာယ တတ္ထ တတ္ထ ‘‘အာဒိစ္စဗန္ဓူ’’တိအာဒိနာ ဘဂဝတော ထောမနာ ဒိဿတိ ‘‘ပုစ္ဆာမိ တံ အာဒိစ္စဗန္ဓု, ဝိဝေကံ သန္တိပဒဉ္စ မဟေသီ’’တိ စ, ‘‘ဝန္ဒေ ဇေတဝနံ နိစ္စံ, ဝိဟာရံ ရဝိဗန္ဓုနော’’တိ စ, ‘‘လောကေကဗန္ဓု’မရဝိန္ဒသဟာယဗန္ဓု’’န္တိ စ. ‘‘ဥဏှဂူ’’တိ ဧတ္ထ ပန ဂေါသဒ္ဒေါ ရသ္မိယံ [Pg.320] ဝတ္တတိ. ဥဏှာ ဂါဝေါ ရသ္မိယော ဧတဿာတိ ဥဏှဂူ, သူရိယော. ပုဗ္ဗာစရိယာပိ ဟိ ဆန္ဒောဝိစိတိသတ္ထေ ဣမမေဝတ္ထံ ဗျာကရိံသု. तसेच 'गो' शब्द सूर्याच्या अर्थात वापरला जातो. “गोगोत्तं गोतमं नमे” ही प्राचीन कवींची रचना येथे उदाहरण आहे, ज्याचा अर्थ 'आदित्यबंधू गौतम सम्यक्संबुद्धांना मी वंदन करतो' असा आहे. कारण सूर्य देखील गौतम गोत्रात जन्मला होता आणि भगवान देखील; अशा प्रकारे त्यांच्याशी समान गोत्र असल्यामुळे जागोजागी “आदित्यबंधू” इत्यादी शब्दांनी भगवंतांची स्तुती केलेली दिसते. जसे की, “हे आदित्यबंधू! मी आपल्याला विवेक आणि शांतीच्या पदाविषयी विचारतो, हे महर्षी!” आणि “रविबंधूंच्या (सूर्याचे बांधव असलेल्या बुद्धांच्या) विहार असलेल्या जेतवनाला मी नित्य वंदन करतो” आणि “लोकांचे एकमेव बंधू आणि कमल-सखा (सूर्य) चे बंधू” असे म्हटले आहे. परंतु “उण्हगू” यामध्ये 'गो' शब्द किरणाच्या अर्थात वापरला जातो. ज्याचे किरण उष्ण आहेत तो 'उष्णगू' म्हणजे सूर्य होय. कारण पूर्वाचार्यांनी देखील छंदोविचिती शास्त्रामध्ये याच अर्थाचे स्पष्टीकरण केले आहे. ‘‘ဂေါသီတစန္ဒန’’န္တိ ဧတ္ထ ပါနီယေ ဝတ္တတိ. ဂေါသဒ္ဒေန ဟိ ဇလံ ဝုစ္စတိ. ဂေါ ဝိယ သီတံ စန္ဒနံ, တသ္မိံ ပန ဥဒ္ဓနတော ဥဒ္ဓရိတပက္ကုထိတတေလမှိ ပက္ခိတ္တေ တင်္ခဏညေဝ တံ တေလံ သုသီတလံ ဟောတိ. "गोसीतचंदन" (गोशीतचंदन) यामध्ये 'गो' हा शब्द पाण्यासाठी (पेय जलासाठी) वापरला जातो. कारण 'गो' शब्दाने पाणी म्हटले जाते. पाण्यासारखे शीतल असणारे चंदन म्हणजे 'गोसीतचंदन'. चुलीवरून उतरवलेल्या उकळत्या तेलात जर हे (चंदन) टाकले, तर त्याच क्षणी ते तेल अत्यंत शीतल (थंड) होते. ဧတ္ထေကေ ဝဒန္တိ ‘‘ကသ္မာ ဘော ‘ဂေါပဒတ္ထေ ဝတ္တမာနော ဂေါသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ စေဝ ပုလ္လိင်္ဂေါ စာ’တိ ဝဒထ, ကသ္မာ စ ပန ‘ဣန္ဒြိယပထဝီဝစနဗုဒ္ဓိသူရိယရသ္မိပါနီယေသု ဝတ္တမာနော ပုလ္လိင်္ဂေါ’တိ ဝဒထ, ဧတေသု သူရိယတ္ထေ ဝတ္တမာနော ပုလ္လိင်္ဂေါ ဟောတု, နနု ဣန္ဒြိယဝစနပါနီယေသု ဝတ္တမာနေန ပန ဂေါသဒ္ဒေန နပုံသကလိင်္ဂေန ဘဝိတဗ္ဗံ, ပထဝီဗုဒ္ဓိရသ္မီသု ဝတ္တမာနေန ဣတ္ထိလိင်္ဂေန ဘဝိတဗ္ဗံ ဣန္ဒြိယာဒိပထဝါဒိပဒတ္ထေသု ဝတ္တမာနာနံ ဣန္ဒြိယသဒ္ဒါဒိပထဝီသဒ္ဒါဒီနံ နပုံသကိတ္ထိလိင်္ဂဝသေန နိဒ္ဒေသဿ ဒဿနတော’’တိ? တန္န, နိယမာဘာဝတော. ဣတ္ထိပဒတ္ထေ ဝတ္တမာနဿာပိ ဟိ သတော ကဿစိ သဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂဝသေန နိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ ယထာ ‘‘ဩရောဓော’’တိ. ပုရိသပဒတ္ထေ ဝတ္တမာနဿာပိ စ သတော ကဿစိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန နိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ, ယထာ ‘‘အတ္ထကာမောသိ မေ ယက္ခ, ဟိတကာမာသိ ဒေဝတေ’’တိ. ဣတ္ထိပုရိသပဒတ္ထေသု ပန အဝတ္တမာနာနမ္ပိ သတံ ကေသဉ္စိ သဒ္ဒါနံ ဧကသ္မိံယေဝ ဉာဏာဒိအတ္ထေ ဝတ္တမာနာနံ ဣတ္ထိပုမနပုံသကလိင်္ဂဝသေန နိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ ယထာ ‘‘ပညာ အမောဟော ဉာဏ’’န္တိ, ‘‘တဋံတဋီတဋော’’တိ စ. တထာ ဟိ အနိတ္ထိဘူတောပိ သမာနော ‘‘မာတုလာ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ရုက္ခောပိ [Pg.321] နာမံ လဘတိ, တဗ္ဗသေန နဂရမ္ပိ. တေနာဟ စက္ကဝတ္တိသုတ္တဋီကာယံ ‘‘မာတုလာတိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန လဒ္ဓနာမော ဧကော ရုက္ခော, တာယ အာသန္နပ္ပဒေသေ မာပိတတ္တာ နဂရမ္ပိ ‘မာတုလာ’တွေဝ ပညာယိတ္ထ. တေန ဝုတ္တံ မာတုလာယန္တိ ဧဝံနာမကေ နဂရေ’’တိ. येथे काही जण म्हणतात— "हे महाशय, 'गाय' या अर्थी वापरला जाणारा 'गो' शब्द स्त्रीलिंगी आणि पुल्लिंगी दोन्ही आहे असे आपण का सांगता? आणि इंद्रिय, पृथ्वी, वचन, बुद्धी, सूर्य, किरण आणि पाणी या अर्थांमध्ये वापरला जाणारा 'गो' शब्द पुल्लिंगी आहे असे का सांगता? यापैकी 'सूर्य' या अर्थी वापरताना तो पुल्लिंगी असणे योग्य आहे; परंतु 'इंद्रिय', 'वचन' आणि 'पाणी' या अर्थांमध्ये वापरताना 'गो' शब्द नपुंसकलिंगी असायला हवा आणि 'पृथ्वी', 'बुद्धी' व 'किरण' या अर्थांमध्ये वापरताना तो स्त्रीलिंगी असायला हवा. कारण इंद्रिय, पृथ्वी इत्यादी अर्थांमध्ये वापरल्या जाणाऱ्या 'इंद्रिय', 'पृथ्वी' इत्यादी शब्दांचे निर्देश अनुक्रमे नपुंसकलिंग आणि स्त्रीलिंग या रूपांतच पाहायला मिळतात." हे योग्य नाही, कारण असा कोणताही नियम नाही. स्त्रीवाचक अर्थ असणाऱ्या काही शब्दांचा निर्देश पुल्लिंगी रूपातही पाहायला मिळतो, जसे की "ओरोधो" (अन्तःपूर/राण्या). आणि पुरुषवाचक अर्थ असणाऱ्या काही शब्दांचा निर्देश स्त्रीलिंगी रूपातही पाहायला मिळतो, जसे की "अत्थकामोसि मे यक्ख, हितकामासि देवते" (हे यक्षा, तू माझा हितचिंतक आहेस; हे देवते, तू माझी हितचिंतक आहेस - येथे 'देवता' हा स्त्रीलिंगी शब्द पुरुषवाचक देवतेसाठी वापरला आहे). स्त्री किंवा पुरुषवाचक अर्थ नसतानाही, केवळ 'ज्ञान' इत्यादी एकाच अर्थासाठी वापरल्या जाणाऱ्या काही शब्दांचे निर्देश स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंग या तिन्ही लिंगांत पाहायला मिळतात, जसे की "पञ्ञा" (स्त्री.), "अमोहो" (पु.) आणि "ञाणं" (नपुं.); तसेच "तटं" (नपुं.), "तटी" (स्त्री.) आणि "तटो" (पु.). त्याचप्रमाणे, स्त्रीलिंगी नसतानाही एका वृक्षाला "मातुला" हे स्त्रीलिंगी नाव मिळते आणि त्यावरून एका नगरालाही तेच नाव मिळते. म्हणूनच चक्कवत्तिसुत्त-टीकेमध्ये म्हटले आहे— "'मातुला' हे स्त्रीलिंगी रूपात नाव मिळालेला एक वृक्ष आहे, त्याच्या जवळच्या प्रदेशात वसवले गेल्यामुळे त्या नगरालाही 'मातुला' असेच ओळखले गेले. म्हणूनच 'मातुला नावाच्या नगरात' असे म्हटले आहे." ဂေါသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဟေဋ္ဌာ ပကာသိတာ. 'गो' शब्दाची नामरूपे (विभक्ती रूपे) खाली दर्शविली आहेत. မော ဝုစ္စတိ စန္ဒော, အဋ္ဌကထာယံ ပန ‘‘မာ ဝုစ္စတိ စန္ဒော’’တိ အာကာရန္တပါဌော ဒိဿတိ, ဩကာရန္တပါဌေန တေန ဘဝိတဗ္ဗံ သက္ကဋဘာသာယ ဧကက္ခရကောသတော နယံ ဂဟေတွာ ‘‘မော သိဝေါ စန္ဒိမာ စေဝါ’’တိ ဩကာရန္တဝသေန ဝတ္တဗ္ဗတ္တာ. ဧတ္ထ စ ဩကာရန္တဝသေန ဝုတ္တဿ မသဒ္ဒဿ စန္ဒဝါစကတ္တေ ‘‘ပုဏ္ဏမီ, ပုဏ္ဏမာ’’တိ စ နိဒဿနပဒါနိ. တတ္ထ ပုဏ္ဏော မော ဧတ္ထာတိ ပုဏ္ဏမီ, ဧဝံ ပုဏ္ဏမာ, ရတ္တာပေက္ခံ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝစနံ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဝိသာခပုဏ္ဏမာယ ရတ္တိယာ ပဌမယာမေပုဗ္ဗေနိဝါသံ အနုဿရီ’’တိ ဣဒံ နိဒဿနံ. ဧတ္ထ သိယာ – ယဒိ ‘‘ပုဏ္ဏမာ’’တိ အယံသဒ္ဒေါ ရတ္တာပေက္ခော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ. 'मो' म्हणजे चंद्र असे म्हटले जाते. परंतु अट्ठकथेमध्ये "मा वुच्चति चन्दो" (मा म्हणजे चंद्र) असा आकारांत पाठ आढळतो. वास्तविक तो ओकारांत पाठ असायला हवा, कारण संस्कृत भाषेतील एकाक्षरकोशाच्या नियमानुसार "मो सिवो चन्दिमा चेवा" (मो म्हणजे शिव आणि चंद्र) याप्रमाणे तो ओकारांत रूपातच सांगायला हवा. येथे ओकारांत रूपात सांगितलेल्या 'म' शब्दाचा चंद्र या अर्थी वापर झाल्याची उदाहरणे म्हणजे "पुण्णमी" (पौर्णिमा) आणि "पुण्णमा" हे शब्द आहेत. त्यामध्ये 'ज्या रात्री चंद्र (मो) पूर्ण (पुण्णो) असतो ती' म्हणजे 'पुण्णमी' आणि त्याचप्रमाणे 'पुण्णमा' होय; हे रात्रीच्या संदर्भातील स्त्रीलिंगी शब्द आहेत. येथे "विसाखपुण्णमाय रत्तिया पठमयामे पुब्बेनिवासं अनुस्सरि" (वैशाख पौर्णिमेच्या रात्रीच्या पहिल्या प्रहरात पूर्वजन्मांचे स्मरण केले) हे याचे उदाहरण आहे. येथे अशी शंका येऊ शकते की – जर "पुण्णमा" हा शब्द रात्रीच्या संदर्भातील स्त्रीलिंगी शब्द आहे, ‘‘ပုဏ္ဏမာယေ ယထာ စန္ဒော, ပရိသုဒ္ဓေါ ဝိရောစတိ; တထေဝ တွံ ပုဏ္ဏမနော, ဝိရောစ ဒသသဟဿိယံ. "ज्याप्रमाणे पौर्णिमेच्या रात्री (पुण्णमाये) चंद्र अत्यंत शुद्ध होऊन प्रकाशतो, त्याचप्रमाणे तू देखील प्रसन्न मनाने या दहा हजार लोकधातूंमध्ये प्रकाशित हो. အနွဒ္ဓမာသေ ပန္နရသေ, ပုဏ္ဏမာယေ ဥပေါသထေ; ပစ္စယံ နာဂမာရုယှ, ဒါနံ ဒါတုမုပါဂမိ’’န္တိ प्रत्येक पंधरवड्याच्या पंधराव्या दिवशी, पौर्णिमेच्या उपोसथ दिवशी, 'पच्चय' नावाच्या हत्तीवर स्वार होऊन तो दान देण्यासाठी आला." အာဒီသု ကထံ ‘‘ပုဏ္ဏမာယေ’’တိ ပဒသိဒ္ဓီတိ? ယကာရဿ ယေကာရာဒေသဝသေန. ဓမ္မိဿရေန ဟိ ဘဂဝတာ ‘‘ပုဏ္ဏမာယာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ပုဏ္ဏမာယေ’’တိ ဝဒတာ ယကာရဿ ဌာနေ ယေကာရော ပဌိတော ဣတ္ထိလိင်္ဂဝိသယေ တ္တာကာရဿ ဌာနေ တ္တေကာရော [Pg.322] ဝိယ, နီကာရဿ ဌာနေ နေကာရော ဝိယ စ. တထာ ဟိ ယထာ ‘‘အဗျယတံ ဝိလပသိ ဝိရတ္တေ ကောသိယာယနေ’’တိ ဣမသ္မိံ ရာဓဇာတကေ ‘‘ဝိရတ္တာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဝိရတ္တေ’’တိ ဝဒန္တေန တ္တာကာရဿ ဌာနေ တ္တေကာရော ပဌိတော, ‘‘ကောသိယာယနီ’’တိ စ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ကောသိယာယနေ’’တိ ဝဒန္တေန နီကာရဿ ဌာနေ နေကာရော ပဌိတော. ဧဝံ ‘‘ပုဏ္ဏမာယာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ပုဏ္ဏမာယေ’’တိ ဝဒတာ ယကာရဿ ဌာနေ ယေကာရော ပဌိတော. ယထာ စ ‘‘ဒက္ခိတာယေ အပရာဇိတသံဃ’’န္တိ ဣမသ္မိံ မဟာသမယသုတ္တပ္ပဒေသေ ‘‘ဒက္ခိတာယာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဒက္ခိတာယေ’’တိ ဝဒတာ ယကာရဿ ဌာနေ ယေကာရော ပဌိတော, ဧဝမိဓာပိ. ယထာ ပန ‘‘သဘာယေ ဝါ ဒွါရမူလေ ဝါ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘သဘာယ’’န္တိ လိင်္ဂဗျတ္တယဝသေန သဘာ ဝုတ္တာ, န တထာ ဣဓ ‘‘ပုဏ္ဏမာယ’’န္တိ လိင်္ဂဗျတ္တယေန ပုဏ္ဏမာ ဝုတ္တာ, အထ ခေါ ‘‘ပုဏ္ဏမာ’’တိ အာကာရန္တိတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ဝုတ္တာ. တထာ ဟိ ‘‘ပုဏ္ဏမာယော’’တိ ပဒံ ယကာရဋ္ဌာနေ ယေကာရုစ္စာရဏဝသေန သမ္ဘူတံ ဘုမ္မဝစနန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. इत्यादी गाथांमध्ये "पुण्णमाये" हा शब्द कसा सिद्ध होतो? 'य' काराच्या जागी 'ये' आदेश झाल्यामुळे. कारण धम्मेश्वर भगवान बुद्धांनी "पुण्णमाया" असे म्हणण्याऐवजी "पुण्णमाये" असे म्हटले आहे, म्हणजेच 'य' च्या जागी 'ये' चा उच्चार केला आहे; ज्याप्रमाणे स्त्रीलिंगाच्या बाबतीत 'त्ता' च्या जागी 'त्ते' आणि 'नी' च्या जागी 'ने' चा उच्चार केला जातो. जसे की, या राधजातकातील "अब्ययतं बदलसि विरत्ते कोसियायने" या गाथेत "विरत्ता" म्हणण्याऐवजी "विरत्ते" असे म्हणून 'त्ता' च्या जागी 'त्ते' चा उच्चार केला आहे, आणि "कोसियायनी" म्हणण्याऐवजी "कोसियायने" असे म्हणून 'नी' च्या जागी 'ने' चा उच्चार केला आहे. त्याचप्रमाणे "पुण्णमाया" म्हणण्याऐवजी "पुण्णमाये" असे म्हणून 'य' च्या जागी 'ये' चा उच्चार केला आहे. आणि ज्याप्रमाणे महासमयसुत्तातील "दक्खिताये अपराजितसङ्घं" या भागात "दक्खिताया" म्हणण्याऐवजी "दक्खिताये" असे म्हणून 'य' च्या जागी 'ये' चा उच्चार केला आहे, तसेच येथेही झाले आहे. परंतु, "सभाये वा द्वारमूले वा" यामध्ये ज्याप्रमाणे लिंगबदलामुळे (लिङ्गब्यत्तय) 'सभा' हा शब्द 'सभायं' असा वापरला आहे, तसा येथे लिंगबदलामुळे 'पुण्णमा' हा शब्द 'पुण्णमायं' असा वापरलेला नाही, तर तो 'पुण्णमा' या आकारांत स्त्रीलिंगी रूपानेच वापरला आहे. म्हणूनच "पुण्णमाये" हे पद 'य' च्या जागी 'ये' चा उच्चार केल्यामुळे बनलेले सप्तमी विभक्तीचे (भुम्मवचन) रूप आहे असे समजावे. မာ ဝုစ္စတိ သိရီ. တထာ ဟိ ဝိဒွမုခမဏ္ဍနဋီကာယံ ‘‘မာလိနီ’’တိ ပဒဿတ္ထံ ဝဒတာ ‘‘မာ ဝုစ္စတိ လက္ခီ, အလိနီ ဘမရီ’’တိ ဝုတ္တံ. လက္ခီသဒ္ဒေါ စ သိရီသဒ္ဒေန သမာနတ္ထော, တေန ‘‘မာ ဝုစ္စတိ သိရီ’’တိ အတ္ထော အမှေဟိ အနုမတော, တထာ ပေါရာဏေဟိပိ ‘‘မံ သိရိံ ဓာရေတိ ဝိဒဓာတိ စာတိ မန္ဓာတာ’’တိ အတ္ထော ပကာသိတော, တသ္မာ ‘‘မာလိနီ မန္ဓာတာ’’တိ စ ဣမာနေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. တတြ ပုလ္လိင်္ဂဿ တာဝ မသဒ္ဒဿ အယံ နာမိကပဒမာလာ – 'मा' म्हणजे 'सिरी' (श्री/लक्ष्मी/वैभव) असे म्हटले जाते. विद्वमुखमंडन-टीकेमध्ये "मालिनी" या शब्दाचा अर्थ सांगताना "मा वुच्चति लक्खी, अलिनी भमरी" (मा म्हणजे लक्ष्मी आणि अलिनी म्हणजे भ्रमरी) असे म्हटले आहे. 'लक्खी' हा शब्द 'सिरी' शब्दाचा समानार्थी आहे, म्हणून "मा म्हणजे सिरी" हा अर्थ आम्हाला मान्य आहे. तसेच प्राचीन आचार्यांनीही "मं सिरिं धारेति विदधाति चाति मन्धाता" (जो वैभवाला धारण करतो आणि प्रदान करतो तो मान्धाता) असा अर्थ स्पष्ट केला आहे. म्हणून "मालिनी" आणि "मान्धाता" ही याची उदाहरणे आहेत. त्यापैकी, प्रथम पुल्लिंगी 'म' शब्दाची नामरूपे (विभक्ती रूपे) खालीलप्रमाणे आहेत – မော, မာ. မံ, မေ. မေန, မေဟိ, မေဘိ. မဿ, မာနံ. မာ, မသ္မာ, မမှာ, မေဟိ, မေဘိ. မဿ, မာနံ. မေ, မသ္မိံ, မမှိ, မေသု. ဘော မ, ဘဝန္တော မာ. मो, मा (प्रथमा). मं, मे (द्वितीया). मेन, मेहि, मेभि (तृतीया). मस्स, मानं (चतुर्थी). मा, मस्मा, मम्हा, मेहि, मेभि (पंचमी). मस्स, मानं (षष्ठी). मे, मस्मिं, मम्हि, मेसु (सप्तमी). भो म, भवन्तो मा (संबोधन). အယံ [Pg.323] ပန ဣတ္ထိလိင်္ဂဿ မာသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ – आणि स्त्रीलिंगी 'मा' शब्दाची नामरूपे (विभक्ती रूपे) खालीलप्रमाणे आहेत – မာ, မာ, မာယော. မံ, မာ, မာယော. မာယ, မာဟိ, မာဘိ. မာယ, မာနံ. မာယ, မာဟိ, မာဘိ. မာယ, မာနံ. မာယ, မာယံ, မာသု. ဘောတိ မေ, ဘောတိယော မာယော. मा, मा, मायो (प्रथमा). मं, मा, मायो (द्वितीया). माय, माहि, माभि (तृतीया). माय, मानं (चतुर्थी). माय, माहि, माभि (पंचमी). माय, मानं (षष्ठी). माय, मायं, मासु (सप्तमी). भोति मे, भोतियो मायो (संबोधन). ဧတ္ထ ပန သိရီဝါစကော မာသဒ္ဒေါ စ သဒ္ဒဝါစကော ရာသဒ္ဒေါ စာတိ ဣမေ သမာနဂတိကာ ဧကက္ခရတ္တာ နိစ္စမာကာရန္တပကတိကတ္တာ ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တာ စ. येथे 'सिरी' (वैभव) वाचक 'मा' शब्द आणि 'सद्द' (शब्द) वाचक 'रा' शब्द हे दोन्ही एकाक्षरी असल्यामुळे, नेहमी आकारांत प्रातिपदिक (मूळ रूप) असल्यामुळे आणि स्त्रीलिंगी असल्यामुळे एकाच प्रकारे चालणारे (समान रूप असणारे) आहेत. တတြ သံ ဝုစ္စတိ သန္တစိတ္တော ပုရိသော. ယံ လောကေ ‘‘သပ္ပုရိသော’’တိ စ, ‘‘အရိယော’’တိ စ, ‘‘ပဏ္ဍိတော’’တိ စ ဝဒန္တိ, တဿေတံ အဓိဝစနံ ယဒိဒံ ‘‘သ’’န္တိ. ဧဝံ သပ္ပုရိသာရိယပဏ္ဍိတဝါစကဿ သံသဒ္ဒဿ ပစ္စတ္တဝစနဝသေန အတ္ထိဘာဝေ ‘‘သမေတိ အသတာ အသ’’န္တိ ဣဒံ ပယောဂနိဒဿနံ. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘န သံ အသ’’န္တိ သမာသစိန္တာယ သပ္ပုရိသာသပ္ပုရိသပဒတ္ထာ သံ အသံသဒ္ဒေဟိ ဝုတ္တာတိ ဉာယန္တိ, တသ္မာ ‘‘သပ္ပုရိသပဒတ္ထော ပစ္စတ္တဝစနေန သံသဒ္ဒေန ဝုတ္တော နတ္ထီ’’တိ ဝစနံ န ဝတ္တဗ္ဗံ. ယေ ‘‘နတ္ထီ’’တိ ဝဒန္တိ, တေသံ ဝစနံ န ဂဟေတဗ္ဗံ. နာမိကပဒမာလာ ပနဿ ‘‘သံ, သန္တံ, သန္တေ’’တိအာဒိနာ ဟေဋ္ဌာ ပကာသိတာ. နပုံသကလိင်္ဂတ္တေ သံ ဝုစ္စတိ ဓနံ, ‘‘မနုဿဿံ. ပရဿံ. သဗ္ဗဿံ. သဗ္ဗဿဟရဏံ. ပရဿဟရဏ’’န္တိအာဒီနေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. တတ္ထ မနုဿဿ သံ မနုဿဿံ. ဧဝံ ပရဿ သံ ပရဿံ. သဗ္ဗဿ သံ သဗ္ဗဿံ. တဿ ဟရဏံ ပရဿဟရဏံ သဗ္ဗဿဟရဏန္တိ သမာသော. တထာ သံ ဝုစ္စတိ သုခံ သန္တိ စ. ဝုတ္တဉှိ တဗ္ဗာစကတ္တံ ပေါရာဏကဝိရစနာယံ – तेथे 'सं' (saṃ) म्हणजे शांत चित्त असलेला पुरुष (माणूस) म्हटला जातो. ज्याला जगात 'सत्पुरुष' (sappuriso), 'आर्य' (ariyo) आणि 'पंडित' (paṇḍito) असे म्हणतात, त्याचेच हे 'सं' (saṃ) असे नाव (अधिवचन) आहे. अशा प्रकारे सत्पुरुष, आर्य आणि पंडित यांचा वाचक असलेल्या 'सं' या शब्दाच्या प्रथमा विभक्तीच्या (paccattavacana) रूपाने अस्तित्त्व दर्शवण्यासाठी 'समेति असता असं' (sameti asatā asaṃ - असत् पुरुषाशी असतचा मेळ बसतो) हे प्रयोगाचे उदाहरण आहे. येथे 'न सं असं' (na saṃ asaṃ) या समासाच्या विचाराने सत्पुरुष आणि असत्पुरुष यांचे अर्थ 'सं' आणि 'असं' या शब्दांनी सांगितले आहेत असे समजते, म्हणून 'सत्पुरुष हा अर्थ प्रथमा विभक्तीच्या 'सं' शब्दाने सांगितला जात नाही' असे म्हणणे योग्य नाही. जे 'नाही' असे म्हणतात, त्यांचे म्हणणे स्वीकारू नये. याची नामविभक्तीची रूपे (nāmikapadamālā) तर 'सं, संतं, संते' इत्यादी प्रकारे खाली स्पष्ट केली आहेत. नपुंसकलिंगात 'सं' म्हणजे धन (संपत्ती) म्हटले जाते, 'मनुस्सस्सं' (manussassaṃ - मनुष्याचे धन), 'परस्सं' (parassaṃ - दुसऱ्याचे धन), 'सब्बस्सं' (sabbassaṃ - सर्वस्व/सर्व धन), 'सब्बस्सहरणं' (sabbassaharaṇaṃ - सर्वस्वाचे हरण), 'परस्सहरणं' (parassaharaṇaṃ - परधनाचे हरण) इत्यादी येथे उदाहरणाचे शब्द आहेत. त्यात मनुष्याचे धन म्हणजे 'मनुस्सस्सं'. याचप्रमाणे दुसऱ्याचे धन म्हणजे 'परस्सं'. सर्वांचे धन म्हणजे 'सब्बस्सं'. त्याचे हरण म्हणजे 'परस्सहरणं' आणि 'सब्बस्सहरणं' असा समास होतो. तसेच 'सं' म्हणजे सुख आणि शांती (santi) देखील म्हटले जाते. प्राचीन कवींच्या रचनेत त्याचे वाचकत्व असे सांगितले आहे की - ‘‘ဒေဝဒေဝေါ [Pg.324] သံဒေဟီ နော, ဟီနော ဒေဝါတိဒေဟတော; ဟတောပပါတသံသာရော, သာရော သံ ဒေတု ဒေဟိန’’န္တိ. “देवांचे देव (बुद्ध), जे देवातिदेवापेक्षा हीन नाहीत, ज्यांनी पुनर्जन्म आणि संसार नष्ट केला आहे, ते श्रेष्ठ (सार) आम्हा देहधाऱ्यांना सुख (सं) देवोत.” တသ္မာ အယမေတ္ထ ဂါထာ, ‘‘သကလလောကသင်္ကရော ဒီပင်္ကရော’’တိ ဧတ္ထ ‘‘သင်္ကရော’’တိ ပဒဉ္စနိဒဿနံ. ‘‘သံ, သာနိ, သာ. သံ, သာနိ, သေ. သေန’’ဣစ္စာဒိ ပုဗ္ဗေ ပကာသိတနယေန ဉေယျံ. ဧတ္ထ စ သောတူနံ သုဂတမတဝရေ ကောသလ္လဇနနတ္ထံ သမာသန္တဂတဿ သံသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလံ ပရိပုဏ္ဏံ ကတွာ ကထယာမ – म्हणून येथे ही गाथा आहे, 'सकललोकसंकरो दीपंकरो' (सर्व जगाचे कल्याण करणारे दीपंकर बुद्ध) येथे 'संकरो' (saṅkaro) हे पद देखील याचे उदाहरण आहे. 'सं, सानि, सा. सं, सानि, से. सेन' इत्यादी पूर्वी स्पष्ट केलेल्या पद्धतीने जाणावे. आणि येथे श्रोत्यांना सुगत (बुद्ध) यांच्या श्रेष्ठ मतामध्ये कौशल्य प्राप्त व्हावे म्हणून समासाच्या शेवटी आलेल्या 'सं' शब्दाची नामविभक्तीची रूपे (nāmikapadamālā) पूर्ण करून सांगतो - မနုဿဿံ, မနုဿဿာနိ, မနုဿဿာ. မနုဿဿံ, မနုဿဿာနိ, မနုဿဿေ. မနုဿဿေန, မနုဿဿေဟိ, မနုဿဿေဘိ. မနုဿဿဿ, မနုဿဿာနံ. မနုဿဿာ, မနုဿဿသ္မာ, မနုဿဿမှာ, မနုဿဿေဟိ, မနုဿဿေဘိ. မနုဿဿဿ, မနုဿဿာနံ. မနုဿဿေ, မနုဿဿသ္မိံ, မနုဿဿမှိ, မနုဿဿေသု. ဘော မနုဿဿ, ဘောန္တော မနုဿဿာနိ, မနုဿဿာ. ဧသ နယော ‘‘ပရဿံ သဗ္ဗဿ’’န္တိအာဒီသုပိ, သဗ္ဗာနေတာနိ ပဒါနိ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနီတိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. मनुस्सस्सं, मनुस्सस्सानि, मनुस्सस्सा (प्रथमा). मनुस्सस्सं, मनुस्सस्सानि, मनुस्सस्से (द्वितीया). मनुस्सस्सेन, मनुस्सस्सेहि, मनुस्सस्सेभि (तृतीया). मनुस्सस्सस्स, मनुस्सस्सानं (चतुर्थी). मनुस्सस्सा, मनुस्सस्सस्मा, मनुस्सस्सम्हा, मनुस्सस्सेहि, मनुस्सस्सेभि (पंचमी). मनुस्सस्सस्स, मनुस्सस्सानं (षष्ठी). मनुस्सस्से, मनुस्सस्सस्मिं, मनुस्सस्सम्हि, मनुस्सस्सेसु (सप्तमी). भो मनुस्सस्स, भोन्तो मनुस्सस्सानि, मनुस्सस्सा (संबोधन). हाच नियम 'परस्सं', 'सब्बस्सं' इत्यादी शब्दांमध्येही लागू होतो, ही सर्व पदे विशेष्यलिंगी (abhidheyyaliṅgāni) आहेत असे समजावे. ယံ တံ ကိမိတိသဒ္ဒါနံ, နာမမာလံ ပနတ္တရိ; သဗ္ဗနာမပရိစ္ဆေဒေ, ပကာသိဿံ တိလိင်္ဂတော. परंतु 'यं', 'तं', 'किं' आणि 'इति' या शब्दांची नाममाला मी पुढे सर्वनाम परिच्छेदात तिन्ही लिंगांमध्ये स्पष्ट करीन. ဣစ္စေဝံ ဟေဋ္ဌာ ဥဒ္ဒိဋ္ဌာနံ ကော ဝိ သာဒီနံ နာမိကပဒမာလာ သဒ္ဓိံ အတ္ထန္တရနိဒဿနပဒေဟိ ဝိဘတ္တာ. တတြိဒံ လိင်္ဂဝဝတ္ထာနံ – अशा प्रकारे वर उल्लेखिलेल्या 'को', 'वि', 'सा' इत्यादी शब्दांची नामविभक्तीची रूपे इतर अर्थांच्या उदाहरणांच्या शब्दांसह विभागून सांगितली आहेत. त्यामध्ये लिंगांची व्यवस्था खालीलप्रमाणे आहे - ကော ဝိ သာ ဟောန္တိ ပုလ္လိင်္ဂေ, ဘာ ရာ ထီ ဓီ ကု ဘူ ထိယံ; ကံ ခံ နပုံသကေ ဂေါ တု, ပုမေ စေဝိတ္ထိလိင်္ဂကေ. 'को' (ko), 'वि' (vi), 'सा' (sā) हे पुल्लिंगात असतात; 'भा' (bhā), 'रा' (rā), 'थी' (thī), 'धी' (dhī), 'कु' (ku), 'भू' (bhū) हे स्त्रीलिंगात असतात; 'कं' (kaṃ), 'खं' (khaṃ) हे नपुंसकलिंगात असतात; आणि 'गो' (go) हा शब्द पुल्लिंग व स्त्रीलिंग दोन्हीमध्ये असतो. မော ပုမေ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ မာ, သံ ပုမေ စ နပုံသကေ; ယံ တံ ကိမိတိ သဗ္ဗတြ, လိင်္ဂေသွေဝ ပဝတ္တရေ. 'मो' (mo) पुल्लिंगात, 'मा' (mā) स्त्रीलिंगात, 'सं' (saṃ) पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगात असतो; तर 'यं' (yaṃ), 'तं' (taṃ), 'किं' (kiṃ) आणि 'इति' (iti) हे सर्व लिंगांमध्ये वापरले जातात. ဣတော အညာနိပိ ဧကက္ခရာနိ ဥပပရိက္ခိတွာ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. याशिवाय इतरही एकाक्षरी शब्दांचा काळजीपूर्वक विचार करून स्वीकार करावा. ဧဝံ [Pg.325] ဝိညူနံ နယညူနံ သဒ္ဒရစနာဝိသယေ ပရမဝိသုဒ္ဓဝိပုလဗုဒ္ဓိပဋိလာဘတ္ထံ ပရမသဏှသုခုမတ္ထေသု ပယောဂေသု အသမ္မောဟတ္ထံ သုဝဏ္ဏတလေ သီဟဝိဇမ္ဘနေန ကေသရီသီဟဿ ဝိဇမ္ဘနမိဝ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ ဉာဏဝိဇမ္ဘနေန ဝိဇမ္ဘနတ္ထဉ္စ အဓိကူနေကက္ခရဝသေန လိင်္ဂတ္တယံ မိဿေတွာ နာမိကပဒမာလာ ဝိဘတ္တာ. अशा प्रकारे, विद्वानांना आणि व्याकरण-नियम जाणणाऱ्यांना शब्दरचनेच्या बाबतीत अत्यंत शुद्ध व विशाल बुद्धी प्राप्त व्हावी म्हणून, अत्यंत सूक्ष्म व गहन अर्थांच्या प्रयोगांमध्ये संभ्रम निर्माण होऊ नये म्हणून, आणि सुवर्णभूमीवर सिंहाच्या गर्जनेप्रमाणे (विजंभण) त्रिपिटकातील बुद्धवचनांमध्ये ज्ञानाच्या विस्ताराने विहार करता यावा म्हणून, अधिक व उणे अशा एकाक्षरी शब्दांच्या आधारे तिन्ही लिंगांचे मिश्रण करून ही नामविभक्तीची रूपे (nāmikapadamālā) विभागून सांगितली आहेत. သဒ္ဒေ ဘဝန္တိ ကုသလာ န တု ကေစိ အတ္ထေ,အတ္ထေ ဘဝန္တိ ကုသလာ န တု ကေစိ သဒ္ဒေ. काही लोक शब्दांमध्ये कुशल असतात, पण अर्थामध्ये नाही; तर काही लोक अर्थामध्ये कुशल असतात, पण शब्दांमध्ये नाही. ကောသလ္လမေဝ ပရမံ ဒုဘယတ္ထ တသ္မာ,ယောဂံ ကရေယျ သတတံ မတိမာ ဝရန္တိ. म्हणून दोन्हीमध्ये (शब्द आणि अर्थ या दोन्हीत) कौशल्य मिळवणे हेच परम श्रेष्ठ आहे, म्हणून बुद्धिमान माणसाने नेहमी त्यासाठी प्रयत्न (योग) करावा. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त असलेल्या त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये (byappathagatīsu) ဝိညူနံ ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ विद्वानांच्या कौशल्यासाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' (Saddanīti) ग्रंथामध्ये လိင်္ဂတ္တယမိဿကော နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ तिन्ही लिंगांचे मिश्रण असलेला नामविभक्तीच्या रूपांचा विभाग (nāmikapadamālāvibhāgo) ဒသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. दहावा परिच्छेद समाप्त. ၁၁. ဝါစ္စာဘိဓေယျလိင်္ဂါဒိပရိဒီပနနာမိကပဒမာလာ ११. वाच्यलिंग आणि अभिधेयलिंग इत्यादींचे स्पष्टीकरण करणारी नामविभक्तीची रूपे (nāmikapadamālā) ဝါစ္စာဘိဓေယျလိင်္ဂါဒိ-ဝသေနပိ ဣတော ပရံ; ဘာသိဿံ ပဒမာလာယော, ဘာသိတဿာနုရူပတော. यापुढे मी वाच्यलिंग आणि अभिधेयलिंग इत्यादींच्या आधारे, कथनाच्या अनुरूप नामविभक्तीची रूपे (padamālāyo) सांगेन. တတ္ထ ဝါစ္စလိင်္ဂါနီတိ အပ္ပဓာနလိင်္ဂါနိ, ဂုဏနာမသင်္ခါတာနိ ဝါ လိင်္ဂါနိ. အဘိဓေယျလိင်္ဂါနီတိ ပဓာနလိင်္ဂါနိ, ဂုဏီပဒသင်္ခါတာနိ ဝါ လိင်္ဂါနိ. ယသ္မာ ပန တေသု ဝါစ္စလိင်္ဂါနိ နာမ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနုဝတ္တကာနိ ဘဝန္တိ, တသ္မာ သဗ္ဗာနိ ဘူဓာတုမယာနိ စ ဝါစ္စလိင်္ဂါနိ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနုရူပတော ယောဇေတဗ္ဗာနိ. တေသံ ဘူဓာတုမယာနိ ဝါစ္စလိင်္ဂါနိ သရူပတော နာမိကပဒမာလာယ အယောဇိတာနိပိ တတ္ထ တတ္ထ နယတော ယောဇိတာနိ[Pg.326], တသ္မာ န ဒါနိ ဒဿေဿာမ. အဘူဓာတုမယာနိပိ ကိဉ္စာပိ နယတော ယောဇိတာနိ, တထာပိ သောတာရာနံ ပယောဂေသု ကောသလ္လဇနနတ္ထံ ကထယာမ, နာမိကပဒမာလဉ္စ နေသံ ဒဿေဿာမ ကိဉ္စိ ပယောဂံ ဝဒန္တာ. त्यामध्ये 'वाच्यलिंगे' (vāccaliṅgāni) म्हणजे अप्रधान लिंगे किंवा गुणवाचक नामे म्हणून ओळखली जाणारी लिंगे होत. 'अभिधेयलिंगे' (abhidheyyaliṅgāni) म्हणजे प्रधान लिंगे किंवा गुणी (विशेष्य) पदांच्या स्वरूपातील लिंगे होत. परंतु, त्यामध्ये वाच्यलिंगे ही अभिधेयलिंगांचे अनुकरण करणारी असतात, म्हणून 'भू' धातूपासून बनलेली सर्व वाच्यलिंगे अभिधेयलिंगांच्या अनुरूप योजावीत. 'भू' धातूपासून बनलेली ती वाच्यलिंगे जरी प्रत्यक्ष नामविभक्तीच्या रूपात जोडलेली नसली, तरी ठिकठिकाणी नियमांनुसार जोडलेली आहेत, म्हणून ती आता आम्ही दाखवणार नाही. 'भू' धातूव्यतिरिक्त इतर धातूंपासून न बनलेली वाच्यलिंगे देखील जरी नियमांनुसार जोडलेली असली, तरी श्रोत्यांना प्रयोगांमध्ये कौशल्य प्राप्त व्हावे म्हणून आम्ही ती सांगतो आणि काही प्रयोगांचा उल्लेख करून त्यांची नामविभक्तीची रूपे दाखवतो. ဒီဃော ရဿော နီလော ပီတော,သုက္ကော ကဏှော သေဋ္ဌော ပါပေါ; သဒ္ဓေါ သုဒ္ဓေါ ဥစ္စော နီစော,ကတောတီတော ဣစ္စာဒီနိ. दीघो (लांब), रस्सो (आखाड/लहान), नीलो (निळा), पीतो (पिवळा), सुक्को (पांढरा), कण्हो (काळा), सेट्ठो (श्रेष्ठ), पापो (पापी), सद्धो (श्रद्धाळू), सुद्धो (शुद्ध), उच्चो (उंच), नीचो (नीच), कतो (केलेला), अतीतो (गेलेला) इत्यादी. ဒီဃာ ဇာဂရတော ရတ္တိ, ဒီဃံ သန္တဿ ယောဇနံ; ဒီဃော ဗာလာန သံသာရော, သဒ္ဓမ္မံ အဝိဇာနတံ. “जागणाऱ्यासाठी रात्र दीर्घ (लांब) असते, थकलेल्यासाठी योजन दीर्घ असते; सद्धम्म न जाणणाऱ्या मूर्खांसाठी संसार दीर्घ असतो.” ဒီဃော, ဒီဃာ. ဒီဃံ, ဒီဃေ. ဒီဃေန, ဒီဃေဟိ, ဒီဃေဘိ. ဒီဃဿ, ဒီဃာနံ. ဒီဃာ, ဒီဃသ္မာ, ဒီဃမှာ, ဒီဃေဟိ, ဒီဃေဘိ. ဒီဃဿ, ဒီဃာနံ. ဒီဃေ, ဒီဃသ္မိံ, ဒီဃမှိ, ဒီဃေသု. ဘော ဒီဃ, ဘဝန္တော ဒီဃာ. ‘‘ဒီဃာတိ မံ ပက္ကောသေယျာထာ’’တိ ဣဒမေတ္ထ နိဒဿနံ. दीघो, दीघा (प्रथमा). दीघं, दीघे (द्वितीया). दीघेन, दीघेहि, दीघेभि (तृतीया). दीघस्स, दीघानं (चतुर्थी). दीघा, दीघस्मा, दीघम्हा, दीघेहि, दीघेभि (पंचमी). दीघस्स, दीघानं (षष्ठी). दीघे, दीघस्मिं, दीघम्हि, दीघेsu (सप्तमी). भो दीघ, भवन्तो दीघा (संबोधन). 'दीघाति मं पक्कोसेय्याथ' (मला 'दीघा' म्हणून बोलवावे) हे येथे याचे उदाहरण आहे. ဒီဃာ, ဒီဃာ, ဒီဃာယော. ဒီဃံ, ဒီဃာ, ဒီဃာယော. ဒီဃာယ. သေသံ ကညာနယေန ဉေယျံ. दीघा, दीघा, दीघायो (प्रथमा). दीघं, दीघा, दीघायो (द्वितीया). दीघाय (तृतीया). उर्वरित रूपे 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाच्या नियमाप्रमाणे जाणावीत. ဒီဃံ, ဒီဃာနိ, ဒီဃာ. ဒီဃံ, ဒီဃာနိ, ဒီဃေ. ဒီဃေန. သေသံ စိတ္တနယေန ဉေယျံ. ရဿာဒီနိ စ ဧဝမေဝ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗာနိ. အယံ ဝါစ္စလိင်္ဂါနံ နာမိကပဒမာလာ, ‘‘ဂုဏနာမာနံ နာမိကပဒမာလာ’’တိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. दीघं, दीघानि, दीघा (प्रथमा). दीघं, दीघानि, दीघे (द्वितीया). दीघेन (तृतीया). उर्वरित रूपे 'चित्त' (citta) शब्दाच्या नियमाप्रमाणे जाणावीत. 'रस्स' (लहान) इत्यादी शब्दांची रूपे देखील याचप्रमाणे सविस्तर जाणावीत. ही वाच्यलिंगांची नामविभक्तीची रूपे आहेत, याला 'गुणवाचक नामांची नामविभक्तीची रूपे' असे म्हणणे योग्य आहे. အဘိဓေယျကလိင်္ဂေသု, သဝိသေသာနိ ယာနိ ဟိ; တေသံ ဒါနိ ယထာပါဠိံ, ပဒမာလံ ကထေဿဟံ. अभिधेयलिंगांमध्ये (विशेष्यलिंगांमध्ये) जी वैशिष्ट्यपूर्ण (सविशेषाणि) पदे आहेत, त्यांची नामविभक्तीची रूपे मी आता पाळी (मूळ मजकूर) नुसार सांगेन. ကတမာနိ တာနိ ပဒါနိ, ယာနိ သဝိသေသာနိ? ती वैशिष्ट्यपूर्ण पदे कोणती आहेत? ဘဝါဘဝါဒိကံ လင်္ကာ-ဒီပေါ ဣစ္စာဒိကာနိ စ; ဗောဓိ သန္ဓီတိ စာဒီနိ, သဝိသေသာနိ ဟောန္တိ တု. 'भवाभव' (bhavābhava) इत्यादी, 'लंकादीप' (laṅkādīpa) इत्यादी, तसेच 'बोधि' (bodhi), 'संधि' (sandhi) इत्यादी पदे वैशिष्ट्यपूर्ण आहेत. ဧတေသု [Pg.327] ဟိ – कारण यांमध्ये - ဘဝါဘဝပဒံ ဒေက-ဝစော ဗဟုဝစော ကွစိ; သမာသေ အသမာသေပိ, သမ္ဘဝေါ တဿ ဣစ္ဆိတော. 'भवाभव' हे पद कधी एकवचनी तर कधी बहुवचनी असते; समासात आणि समासाशिवाय (असमासात) देखील त्याचे अस्तित्व मान्य केले गेले आहे. ဝိဂ္ဂဟဉ္စ ပဒတ္ထဉ္စ, ဝတွာ ပဒဿိမဿ မေ; ဝုစ္စမာနမဝိက္ခိတ္တာ, ပဒမာလံ နိဗောဓထ. या पदाचा विग्रह आणि पदार्थाचा (शब्दाचा अर्थ) सांगून, माझ्याद्वारे सांगितली जाणारी ही पदमाला (विभक्ती रूपे) तुम्ही एकाग्र चित्ताने समजून घ्या. ဘဝေါ စ အဘဝေါ စ ဘဝါဘဝံ. အထ ဝါ ဘဝေါ စ အဘဝေါ စ ဘဝါဘဝါနိ, အယံ ဝိဂ္ဂဟော. တတြ ဘဝေါတိ ခုဒ္ဒကော ဘဝေါ. အဘဝေါတိ မဟန္တော ဘဝေါ. ဝုဒ္ဓတ္ထဝါစကော ဟေတ္ထ အကာရော. ဧတ္ထ စ သုဂတိဒုဂ္ဂတိဝသေန ဟီနပဏီတဝသေန စ ခုဒ္ဒကမဟန္တတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. အထ ဝါ ဘဝေါတိ ဝုဒ္ဓိ. အဘဝေါတိ အဝုဒ္ဓိ. အယံ ပဒတ္ထော. အယံ ပန နာမိကပဒမာလာ – "भवश्च अभवश्च भवाभवं" (भव आणि अभव म्हणजे भवाभव) किंवा "भवश्च अभवश्च भवाभवानि", हा याचा विग्रह आहे. त्यामध्ये 'भव' म्हणजे लहान भव (अस्तित्व). 'अभव' म्हणजे मोठा भव. येथे 'अ' कार हा वृद्धी (वाढ) या अर्थाचा वाचक आहे. आणि येथे सुगती-दुग्गती (सुगती आणि दुर्गती) च्या आधारे तसेच हीन आणि प्रणीत (श्रेष्ठ) च्या आधारे लहानपण आणि मोठेपण समजून घ्यावे. अथवा 'भव' म्हणजे वृद्धी (प्रगती) आणि 'अभव' म्हणजे अवृद्धी (अवनती). हा याचा पदार्थाचा अर्थ आहे. आणि ही नाम-पदमाला (विभक्ती रूपे) अशी आहे – ဘဝါဘဝံ, ဘဝါဘဝံ, ဘဝါဘဝေန, ဘဝါဘဝဿ, ဘဝါဘဝါ, ဘဝါဘဝသ္မာ, ဘဝါဘဝမှာ, ဘဝါဘဝဿ, ဘဝါဘဝေ, ဘဝါဘဝသ္မိံ, ဘဝါဘဝမှိ, ဘော ဘဝါဘဝ. ဣတိ ဘဝါဘဝပဒံ ဧကဝစနကံ ဘဝတိ. ဒိဿတိ စ တဿေကဝစနတာ ပါဠိယံ အဋ္ဌကထာယဉ္စ – भवाभवं, भवाभवं, भवाभवेन, भवाभवस्स, भवाभवा, भवाभवस्मा, भवाभवम्हा, भवाभवस्स, भवाभवे, भवाभवस्मिं, भवाभवम्हि, भो भवाभव. अशा प्रकारे 'भवाभव' हे पद एकवचनी होते. आणि त्याचे एकवचनी रूप पाळी (पाली) आणि अट्ठकथेत (टीकेत) दिसून येते – ‘‘အတီတကပ္ပေ စရိတံ, ဌပယိတွာ ဘဝါဘဝေ; ဣမသ္မိံ ကပ္ပေ စရိတံ, ပဝက္ခိဿံ သုဏောဟိ မေ’’ "भूतकाळातील कल्पांमधील भवाभवातील (विविध अस्तित्वातील) आचरण बाजूला ठेवून, या कल्पामधील आचरण मी सांगेन, ते माझ्याकडून ऐका." ဣတိ ဝါ, किंवा असे, ‘‘ဧဝံ ဗဟုဝိဓံ ဒုက္ခံ, သမ္ပတ္တိဉ္စ ဗဟူဝိဓံ; ဘဝါဘဝေ အနုဘဝိတွာ, ပတ္တော သမ္ဗောဓိမုတ္တမံ’’ "अशा प्रकारे विविध प्रकारचे दुःख आणि विविध प्रकारची संपत्ती भवाभवामध्ये अनुभवून, मी उत्तम संबोधीला (ज्ञान) प्राप्त झालो आहे." ဣတိ ဝါ ဧဝံ ပါဠိယံ ဘဝါဘဝ ပဒဿ ဧကဝစနတာ ဒိဋ္ဌာ. अशा प्रकारे पाळीमध्ये (पालीमध्ये) 'भवाभव' या पदाची एकवचनी अवस्था दिसून येते. အဋ္ဌကထာယမ္ပိ [Pg.328] – अट्ठकथेत (टीकेत) देखील – ‘‘အသမ္ဗုဓံ ဗုဒ္ဓနိသေဝိတံ ယံ,ဘဝါဘဝံ ဂစ္ဆတိ ဇီဝလောကော; နမော အဝိဇ္ဇာဒိကိလေသဇာလ-ဝိဒ္ဓံသိနော ဓမ္မဝရဿ တဿာ’’တိ "ज्या बुद्ध-सेवित (धम्माला) न जाणता हा जीवलोक भवाभवामध्ये (संसारात) भटकत राहतो; अविद्या इत्यादी क्लेशांच्या जाळ्याचा नाश करणाऱ्या त्या श्रेष्ठ धम्माला माझा नमस्कार असो." ဧဝံ တဿေကဝစနတာ ဒိဋ္ဌာ. अशा प्रकारे त्याची एकवचनी अवस्था दिसून येते. ဘဝါဘဝါနိ, ဘဝါဘဝါ, ဘဝါဘဝါနိ, ဘဝါဘဝေ, ဘဝါဘဝေဟိ, ဘဝါဘဝေဘိ, ဘဝါဘဝါနံ, ဘဝါဘဝေဟိ, ဘဝါဘဝေဘိ, ဘဝါဘဝါနံ, ဘဝါဘဝေသု, ဘဝန္တော ဘဝါဘဝါနိ. ဣတိ ဘဝါဘဝပဒံ ဗဟုဝစနကမ္ပိ ဘဝတိ. ဒိဿတိ စ တဿ ဗဟုဝစနကတာ ပါဠိယံ ‘‘ဓောနဿ ဟိ နတ္ထိ ကုဟိဉ္စိ လောကေ. ပကပ္ပိကာ ဒိဋ္ဌိ ဘဝါဘဝေသူ’’တိ. ဥဘယမ္ပိ နယံ ဝေါမိဿေတွာ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ကထံ? ‘‘ဘဝါဘဝံ, ဘဝါဘဝါနိ. ဘဝါဘဝံ, ဘဝါဘဝါနိ. ဘဝါဘဝေန, ဘဝါဘဝေဟိ, ဘဝါဘဝေဘိ’’ဣစ္စေဝမာဒိနာ စိတ္တနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. भवाभवानि, भवाभवा, भवाभवानि, भवाभवे, भवाभवेहि, भवाभवेभि, भवाभवानं, भवाभवेहि, भवाभवेभि, भवाभवानं, भवाभवेसु, भवन्तो भवाभवानि. अशा प्रकारे 'भवाभव' हे पद बहुवचनी देखील होते. आणि त्याची बहुवचनी अवस्था पाळीमध्ये (पालीमध्ये) दिसून येते: "धोनस्स हि नत्थि कुहिञ्चि लोके। पकप्पिका दिट्ठि भवाभवेसू" (शुद्ध झालेल्या पुरुषाची या जगात कुठेही भवाभवांमध्ये कल्पित दृष्टी नसते). दोन्ही पद्धतींचे मिश्रण करून नाम-पदमाला जोडली पाहिजे. कशी? "भवाभवं, भवाभवानि. भवाभवं, भवाभवानि. भवाभवेन, भवाभवेहि, भवाभवेभि" इत्यादी विविध प्रकारे ती जोडली पाहिजे. နပုံသကေကဝစန-ဗဟုဝစနကာ ဣမာ; ပဒမာလာ သမာသတ္တေ, ကတာတိ ပရိဒီပယေ. या नपुंसकलिंगी एकवचन आणि बहुवचनाच्या पदमाला समासाच्या अवस्थेत केल्या गेल्या आहेत, असे स्पष्ट करावे. သမာသကပဒဉ္စေဝ, အသမာသကမေဝ စ; ဘဝါဘဝပဒံ ဒွေဓာ, ဣတိ ဝိဒွါ ဝိဘာဝယေ. 'भवाभव' हे पद सामासिक आणि असामासिक अशा दोन प्रकारचे आहे, असे विद्वानांनी समजून घ्यावे. နပုံသကံ သမာသတ္တေ, ပုလ္လိင်္ဂမိတရတ္တနေ; နပုံသကံ တု ပါယေန, ဧကဝစနကံ ဝဒေ. समासाच्या अवस्थेत ते नपुंसकलिंगी असते आणि इतर (असामासिक) अवस्थेत ते पुल्लिंगी असते; परंतु नपुंसकलिंगी रूप सामान्यतः एकवचनातच सांगितले जाते. ‘‘ဘဝေါ စ အဘဝေါ စာ’’တိ, သမာသတ္ထံ ဝဒေ ဗုဓော; ‘‘ဘဝတော ဘဝ’’မိစ္စတ္ထံ, အသမာသဿ ဘာသယေ. "भवश्च अभवश्च" (भव आणि अभव) हा समासाचा अर्थ विद्वानांनी सांगावा; आणि "भवतो भवं" (भवापासून भव) हा असामासिक अर्थ सांगावा. ပုလ္လိင်္ဂတ္တမှိ သော ဉေယျော, နိဿက္ကဥပယောဂတော; ဧဝံ ဝိသေသတော ဇညာ, ဘဝါဘဝပဒံ ဝိဒူ. पुल्लिंगी अवस्थेत ते अपादान (पंचमी) आणि कर्म (द्वितीया) विभक्तीच्या योगाने जाणावे; अशा प्रकारे विद्वानांनी 'भवाभव' या पदाला विशेष रूपाने समजून घ्यावे. ယထာ [Pg.329] စေတ္ထ ဘဝါဘဝပဒဿ နာမိကပဒမာလာ ယောဇိတာ, ဧဝံ ‘‘ကမ္မာကမ္မံ ဖလာဖလ’’န္တိအာဒီနမ္ပိ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. အတ္ထောပိ နေသံ ယထာရဟံ ဝတ္တဗ္ဗော. ယေဘုယျေနေတာနိ ဧကဝစနကာနိ ဘဝန္တိ. ဧဝံ တာဝ ဘဝါဘဝပဒါဒီနံ ဝိသေသဝန္တတာ ဒဋ္ဌဗ္ဗာ. ज्याप्रमाणे येथे 'भवाभव' या पदाची नाम-पदमाला जोडली गेली आहे, त्याचप्रमाणे 'कम्माकम्मं' (कर्माकर्म), 'फलाफलं' (फलाफल) इत्यादी पदांची देखील नाम-पदमाला जोडली पाहिजे. त्यांचा अर्थ देखील योग्यतेनुसार सांगितला पाहिजे. बहुतांश करून ही पदे एकवचनी असतात. अशा प्रकारे 'भवाभव' इत्यादी पदांचे वैशिष्ट्य समजून घेतले पाहिजे. လင်္ကာဒီပေါ, လင်္ကာဒီပံ, လင်္ကာဒီပေန, လင်္ကာဒီပဿ, လင်္ကာဒီပါ, လင်္ကာဒီပသ္မာ, လင်္ကာဒီပမှာ, လင်္ကာဒီပဿ, လင်္ကာဒီပေ, လင်္ကာဒီပသ္မိံ, လင်္ကာဒီပမှိ, ဘော လင်္ကာဒီပ. အယံ သမာသတ္တေ နာမိကပဒမာလာ. အသမာသတ္တေပိ ပန ယောဇေတဗ္ဗာ. लङ्कादीपो, Lङ्कादीपं, Lङ्कादीपेन, Lङ्कादीपस्स, Lङ्कादीपा, Lङ्कादीपस्मा, Lङ्कादीपम्हा, Lङ्कादीपस्स, Lङ्कादीपे, Lङ्कादीपस्मिं, Lङ्कादीपम्हि, भो Lङ्कादीप. ही समासाच्या अवस्थेतील नाम-पदमाला आहे. परंतु असामासिक अवस्थेत देखील ती जोडली पाहिजे. လင်္ကာ ဒီပေါ, လင်္ကံ ဒီပံ, လင်္ကာယ ဒီပေန, လင်္ကာယ ဒီပဿ, လင်္ကာယ ဒီပါ, လင်္ကာယ ဒီပသ္မာ, လင်္ကာယ ဒီပမှာ, လင်္ကာယ ဒီပဿ, လင်္ကာယ ဒီပေ, လင်္ကာယ ဒီပသ္မိံ, လင်္ကာယ ဒီပမှိ, ဘောတိ လင်္ကေ ဒီပ. အယံ ဗျာသေ နာမိကပဒမာလာ. အယံ နယော ‘‘ဇမ္ဗုဒီပေါ’’တိ ဧတ္ထ န လဗ္ဘတိ ကေဝလေန ဇမ္ဗူသဒ္ဒေန ဇမ္ဗုဒီပဿ အကထနတော, ယထာ ကေဝလေန လင်္ကာသဒ္ဒေန လင်္ကာဒီပေါ ကထိယတိ. အယံ ပန ဗျာသေ ပဒမာလာနယော ဝိသေသတော ကဗ္ဗရစနာယံ ကဝီနံ ဥပကာရာယ သံဝတ္တတိ သာသနဿာပိ. တထာ ဟိ ဗျာသဝသေန ပေါရာဏကဝိရစနာ ဒိဿတိ – लङ्का दीपो, Lङ्कं दीपं, Lङ्काय दीपेन, Lङ्काय दीपस्स, Lङ्काय दीपा, Lङ्काय दीपस्मा, Lङ्काय दीपम्हा, Lङ्काय दीपस्स, Lङ्काय दीपे, Lङ्काय दीपस्मिं, Lङ्काय दीपम्हि, भोति Lङ्के दीप. ही विग्रह (व्यास) अवस्थेतील नाम-पदमाला आहे. हा नियम 'जम्बुदीपो' (जंबूद्दीप) यामध्ये मिळत नाही, कारण केवळ 'जम्बु' शब्दाने जंबूद्दीप म्हटला जात नाही, जसे केवळ 'लङ्का' शब्दाने लंकाद्वीप म्हटला जातो. परंतु हा विग्रहातील पदमालेचा नियम विशेषतः कवींना काव्यरचनेत आणि शासनाला (बुद्ध शासनाला) देखील उपकारक ठरतो. कारण प्राचीन कवींची रचना विग्रह रूपाने (व्यास रूपाने) दिसून येते – ‘‘ဝန္ဒာမိ သေလမှိ သမန္တကူဋေ,လင်္ကာယ ဒီပဿ သိခါယမာနေ; အာဝါသဘူတေ သုမနာမရဿ,ဗုဒ္ဓဿ တံ ပါဒဝဠဉ္ဇမဂ္ဂ’’န္တိ. "लंकाद्वीपाचा मुकुट असलेल्या समंतकूट पर्वतावर, जो सुमन नावाच्या देवाचे निवासस्थान आहे, तेथील बुद्धांच्या त्या पाऊलखुणेला (श्रीपाद) मी वंदन करतो." သာသနေပိ ဗျာသဝသေန ‘‘ဒိဗ္ဗော ရထော ပါတုရဟု, ဝေဒေဟဿ ယသဿိနော’’တိအာဒိကာ ပါဠိ ဒိဿတိ. शासनात (पाली साहित्यात) देखील विग्रह रूपाने "दिब्बो रथो पातुरहु, वेदेहस्स यसस्सिनो" (यशस्वी विदेहासाठी दिव्य रथ प्रकट झाला) इत्यादी पाळी (पाली) वाक्ये दिसून येतात. ယထာ [Pg.330] ပန ‘‘ဇမ္ဗုဒီပေါ’’တိ ဧတ္ထ အယံ နယော န လဗ္ဘတိ, တထာ ‘‘နာဂဒီပေါ’’တိအာဒီသုပိ ကေဝလေန ဇမ္ဗူသဒ္ဒေန ဇမ္ဗုဒီပဿ အကထနမိဝ ကေဝလေန နာဂသဒ္ဒါဒိနာ နာဂဒီပါဒီနံ အကထနတောတိ. နနု စ ဘော ‘‘ဗုဒ္ဓဿ ဇမ္ဗုနဒရံသိနော တံ, ဒါဌံ မယံ ဇမ္ဗုနရာ နမာမာ’’တိ ပေါရာဏကဝိရစနာယံ ဇမ္ဗူသဒ္ဒေန ဇမ္ဗုဒီပေါ ဝုတ္တော ‘‘ဇမ္ဗုဒီပနရာ’’တိ အတ္ထသမ္ဘဝတောတိ? သစ္စံ ‘‘ဇမ္ဗုဒီပနရာ’’တိ အတ္ထော သမ္ဘဝတိ, ကေဝလေန ပန ဇမ္ဗူသဒ္ဒေန ဇမ္ဗုဒီပတ္ထံ န ဝဒတိ, ကိန္တု ‘‘ဇမ္ဗုဒီပနရာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ဂါထာဝိသယတ္တာ အဓိကက္ခရဒေါသံ ပရိဝဇ္ဇန္တေန ဒီပသဒ္ဒလောပံ ကတွာ ‘‘ဇမ္ဗုနရာ’’တိ ဝုတ္တံ, ဧဝံ ဥတ္တရပဒလောပဝသေန ဝုတ္တော ဇမ္ဗုသဒ္ဒေါ နရသဒ္ဒံ ပဋိစ္စ သမာသဗလေန ‘‘ဇမ္ဗုဒီပနရာ’’တိ အတ္ထပ္ပကာသနေ သမတ္ထော ဟောတိ, န ကေဝလော ဗျာသကာလေ, တထာ ဟိ ‘‘ဇမ္ဗူ’’တိ ဝုတ္တေ ဇမ္ဗုဒီပေါ န ဉာယတိ, အထ ခေါ ဇမ္ဗုရုက္ခောယေဝ ဉာယတိ. परंतु ज्याप्रमाणे 'जम्बुदीपो' (जंबूद्दीप) यामध्ये हा नियम मिळत नाही, त्याचप्रमाणे 'नागदीपो' (नागद्वीप) इत्यादींमध्ये देखील केवळ 'जम्बु' शब्दाने जंबूद्दीप न दर्शवला जाण्याप्रमाणे केवळ 'नाग' इत्यादी शब्दांनी नागद्वीप इत्यादी दर्शवले जात नाहीत. पण मग, "बुद्धस्स जम्बुनदरंसिनो तं, दाठं मयं जम्बुनरा नमामा" (जंबूनद सोन्यासारख्या तेजस्वी बुद्धांच्या त्या दाढेला आम्ही जंबूचे लोक नमस्कार करतो) या प्राचीन कवींच्या रचनेत 'जम्बु' शब्दाने जंबूद्दीप म्हटला गेला आहे, कारण 'जम्बुदीपनरा' (जंबूद्दीपवासीय लोक) असा अर्थ संभवतो ना? हे सत्य आहे की 'जम्बुदीपनरा' असा अर्थ संभवतो, परंतु केवळ 'जम्बु' शब्दाने जंबूद्दीप हा अर्थ व्यक्त होत नाही. तर, 'जम्बुदीपनरा' असे म्हणावयाचे असताना, गाथेच्या छंदोबद्धतेमुळे आणि अधिक अक्षरांचा दोष टाळण्यासाठी 'दीप' शब्दाचा लोप करून 'जम्बुनरा' असे म्हटले गेले आहे. अशा प्रकारे उत्तरपदाचा लोप झाल्यामुळे वापरलेला 'जम्बु' शब्द 'नर' शब्दाच्या आश्रयाने समासाच्या बळावर 'जम्बुदीपनरा' हा अर्थ प्रकट करण्यास समर्थ होतो, केवळ विग्रहाच्या वेळी नाही. कारण 'जम्बु' असे म्हटले असता जंबूद्दीप समजला जात नाही, तर जंबूचा (जांभळाचा) वृक्षच समजला जातो. ကိံ ပန ဘော ‘‘ကာကော ဒါသော, ကာကံ ဒါသံ, ကာကေန ဒါသေနာ’’တိ အယံ နယော လဗ္ဘတိ, န လဗ္ဘတီတိ? လဗ္ဘတိ, ကာကသဒ္ဒေန ကာကနာမကဿ ဒါသဿ ကထနံ ဟောတိ. ယဒိ ဧဝံ ‘‘ဇမ္ဗုဒီပေါ’’တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘ဇမ္ဗုနာမကော ဒီပေါ’’တိ အတ္ထံ ဂဟေတွာ ‘‘ဇမ္ဗူ ဒီပေါ, ဇမ္ဗုံ ဒီပံ, ဇမ္ဗုယာ ဒီပေနာ’’တိ အယံ နယော လဗ္ဘတီတိ? န လဗ္ဘတိ ဇမ္ဗူသဒ္ဒဿ ပဏ္ဏတ္တိဝသေန ဒီပေ အပ္ပဝတ္တနတော. ဇမ္ဗူသဒ္ဒေါ ဟိ ရုက္ခေယေဝ ပဏ္ဏတ္တိဝသေန ပဝတ္တတိ, န ဒီပေ. ယထာ ပန စိတ္တဝေါဟာရော စိတ္တနာမကေ ဂဟပတိမှိပိ မနေပိ ပဝတ္တတိ ‘‘စိတ္တော ဂဟပတိ. စိတ္တံ မနော မာနသ’’န္တိအာဒီသု. ယထာ စ ကုသဝေါဟာရော ကုသနာမကေ ရညေပိ ကုသတိဏေပိ ပဝတ္တတိ – पण हे महाशय, 'काको दासो (कावळा दास), काकं दासं, काकेन दासेन' हा नियम प्राप्त होतो की नाही? प्राप्त होतो, 'काक' शब्दाने 'काक' नावाच्या दासाचे कथन होते. जर असे असेल, तर 'जम्बुदीपो' (जंबू द्वीप) येथेही 'जंबू नावाचे द्वीप' असा अर्थ घेऊन 'जम्बू दीपो, जम्बुं दीपं, जम्बुया दीपेन' हा नियम प्राप्त होतो का? प्राप्त होत नाही, कारण 'जंबू' शब्दाचा प्रज्ञप्तीनुसार (संज्ञेनुसार) द्वीपासाठी प्रयोग होत नाही. 'जंबू' हा शब्द प्रज्ञप्तीनुसार केवळ वृक्षासाठीच वापरला जातो, द्वीपासाठी नाही. परंतु, ज्याप्रमाणे 'चित्त' हा व्यवहार 'चित्त' नावाच्या गृहपतीसाठी आणि मनासाठीही वापरला जातो, जसे की 'चित्तो गहपति' (चित्त गृहपती), 'चित्तं मनो मानसं' (चित्त, मन, मानस) इत्यादींमध्ये. आणि ज्याप्रमाणे 'कुस' हा व्यवहार 'कुस' नावाच्या राजासाठी आणि 'कुस' तृणासाठीही (कुश गवत) वापरला जातो – ‘‘ပဘာဝတိဉ္စ [Pg.331] အာဒါယ, မဏိံ ဝေရောစနံ ကုသော; ကုသာဝတိံ ကုသရာဇာ, အဂမာသိ မဟဗ္ဗလော; ကုသော ယထာ ဒုဂ္ဂဟိတော, ဟတ္ထမေဝါနုကန္တတီ’’တိ जसे की – 'प्रभा आणि विरोचन मणी घेऊन, महाबली कुस राजा कुसावतीला गेला; ज्याप्रमाणे चुकीच्या पद्धतीने पकडलेला कुस (कुश गवत) हातालाच कापतो' इत्यादींमध्ये. အာဒီသု, တထာ ကာကသဒ္ဒေါပိ ဝါယသေ, ဧဝံနာမကေ ဒါသေပိ ပဝတ္တတိ ‘‘ကာကော ရဝတိ, ကာကော နာမ ဒါသော သဋ္ဌိယောဇနာနိ ဂစ္ဆတီ’’တိအာဒီသု. ဇမ္ဗူသဒ္ဒေါ ပန ဂဟပတိမနာဒီသု စိတ္တ ကုသ ကာကသဒ္ဒါ ဝိယ ပဏ္ဏတ္တိဝသေန ဒီပသ္မိံ န ပဝတ္တတိ, တသ္မာ ယထာဝုတ္တောယေဝ နယော မနသိကရဏီယော. इत्यादींमध्ये, त्याचप्रमाणे 'काक' शब्द देखील कावळ्यासाठी आणि त्या नावाच्या दासासाठीही वापरला जातो, जसे की 'काको रवती' (कावळा ओरडतो), 'काको नाम दासो सट्ठियोजनानि गच्छति' (काक नावाचा दास साठ योजने जातो) इत्यादींमध्ये. परंतु 'जंबू' शब्द हा गृहपती, मन इत्यादींमधील 'चित्त', 'कुस', 'काक' या शब्दांप्रमाणे प्रज्ञप्तीनुसार द्वीपासाठी वापरला जात नाही, म्हणून वर सांगितलेलाच नियम मनात ठेवला पाहिजे. ယထာ ပနေတ္ထ ‘‘လင်္ကာဒီပေါ’’တိ သဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ သမာသဝသေန ဗျာသဝသေန စ ယောဇိတာ, ဧဝံ ‘‘ပုဗ္ဗဝိဒေဟဒီပေါ, အပရဂေါယာနဒီပေါ, ဥတ္တရကုရုဒီပေါ, အဿယုဇနက္ခတ္တံ, စိတြမာသော, ဝေဿန္တရရာဇာ, သေတဝတ္ထံ, ဒိဗ္ဗရထော’’တိအာဒီနမ္ပိ နာမိကပဒမာလာ သမာသဝသေန ဗျာသဝသေန စ ယောဇေတဗ္ဗာ. ပုဗ္ဗဝိဒေဟာဒိသဒ္ဒေဟိ ပုဗ္ဗဝိဒေဟဒီပါဒီနံ ကထနဉ္စ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ‘‘ဒိဗ္ဗရထော’’တိအာဒီနံ သမာသဂတပဒါနံ ပယောဇနေ သတိ ဗျာသဝသေန ဝိသုံ ကတ္တဗ္ဗတာ စ ဝေဒိတဗ္ဗာ. တထာ ဟိ ဗျာသဝသေန ‘‘ဒိဗ္ဗော ရထော’’တိအာဒိနာ ဒွိန္နံ ဒွိန္နံ ပဒါနံ သမာနာဓိကရဏဝသေန ပစ္စေကဝိဘတ္တိယုတ္တဘာဝေ သတိ ဂါထာသု ဝုတ္တိပါလနသုခုစ္စာရဏဂုဏော ဘဝတိ. သော စ သာသနာနုကူလော ဟိ အယံ နယော ဌပိတော. တထာ ဟိ ပါဝစနေ ‘‘ဒိဗ္ဗော ရထော ပါတုရဟု, ဝေဒေဟဿ ယသဿိနော’’တိအာဒိကာ ပါဠိယော ဗဟူ ဒိဿန္တိ, ဧဝံ လင်္ကာဒီပါဒိသဒ္ဒါနံ ဝိသေသဝန္တတာ ဘဝတိ. परंतु, ज्याप्रमाणे येथे 'लङ्कादीपो' (लंकाद्वीप) या शब्दाची नामपदमाला समासाच्या रूपाने आणि व्यासाच्या (विग्रहाच्या) रूपाने योजली आहे, त्याचप्रमाणे 'पुब्बविदेहदीपो' (पूर्वविदेह द्वीप), 'अपरगोयानदीपो' (अपरगोयान द्वीप), 'उत्तरकुरुदीपो' (उत्तरकुरु द्वीप), 'अस्सयुजनक्खत्तं' (अश्वयुज नक्षत्र), 'चित्रमासो' (चित्र मास), 'वेस्सन्तरराजा' (वेस्सन्तर राजा), 'सेतवत्थं' (श्वेत वस्त्र), 'दिब्बरथो' (दिव्य रथ) इत्यादींचीही नामपदमाला समासाच्या रूपाने आणि व्यासाच्या रूपाने योजली पाहिजे. 'पुब्बविदेह' इत्यादी शब्दांनी 'पुब्बविदेहदीप' इत्यादींचे कथन केले जाते असे जाणावे. 'दिब्बरथो' इत्यादी समासातील पदांचे प्रयोजन असताना, व्यासाच्या रूपाने (विग्रहाने) त्यांना वेगळे केले पाहिजे हे जाणावे. कारण व्यासाच्या रूपाने 'दिब्बो ratho' इत्यादी दोन-दोन पदांच्या समानाधिकरणतेमुळे प्रत्येक पदाला स्वतंत्र विभक्ती प्राप्त होते, तेव्हा गाथांमध्ये वृत्ताचे पालन आणि सुलभ उच्चारणाचा गुण प्राप्त होतो. आणि हा नियम शासनाला (बुद्धशासनाला) अनुकूल असाच स्थापित केला गेला आहे. कारण प्रवचनात 'दिब्बो रथो पातुरहु, वेदेहस्स यसस्सिनो' इत्यादी अनेक पाळी वचने आढळतात, अशा प्रकारे 'लङ्कादीप' इत्यादी शब्दांचे वैशिष्ट्य दिसून येते. ဣဒါနိ ဗောဓိသန္ဓိအာဒီနံ ဝိသေသဝန္တတာ ဝုစ္စတိ – आता 'बोधि', 'सन्धि' इत्यादींचे वैशिष्ट्य सांगितले जात आहे – ဗောဓိ သန္ဓိ ဝိဘတ္တာ’ယု, ဓာတုယေဝ ပဇာပတိ; ဒါမာ ဒါမံ တထာ သဒ္ဓါ, သဒ္ဓံ တဋံ တဋီ တဋော. बोधि, सन्धि, विभत्ति, आयु, धातु आणि प्रजापति; दामा, दामं, तसेच सद्धा, सद्धं, तटं, तटी, तटो. ဗျဉ္ဇနံ [Pg.332] ဗျဉ္ဇနော အတ္ထော, အတ္ထမက္ခရမက္ခရော; အဇ္ဇဝံ အဇ္ဇဝေါ စေဝ, တထာ မဒ္ဒဝဂါရဝါ. ब्यञ्जनं, ब्यञ्जनो, अत्थो, अत्थं, अक्खरं, अक्खरो; अज्जवं, अज्जवो तसेच मद्दव आणि गारव. ဝစော ဝစီတိ စာဒီနိ, သမရူပါ သရူပတော; ဒွိတ္တိလိင်္ဂါနိ သမ္ဘောန္တိ, ယထာသမ္ဘဝမုဒ္ဒိသေ. वचो, वची इत्यादी समान रूपाचे शब्द स्वरूपाने; दोन किंवा तीन लिंगांचे असतात, जसे शक्य असेल तसे त्यांचे निर्देश करावेत. ဧတေသု ဟိ ဗောဓိသဒ္ဒဿ တာဝ ‘‘ဗောဓိ ရာဇကုမာရော’’တိ စ, ‘‘အရိယသာဝကော ‘ဗောဓီ’တိ ဝုစ္စတိ, တဿ ဗောဓိဿ အင်္ဂေါတိ ဗောဇ္ဈင်္ဂေါ’’တိ စ ဧဝံ ပုဂ္ဂလဝစနဿ ‘‘ဗောဓိ, ဗောဓီ, ဗောဓယော. ဗောဓိံ, ဗောဓီ, ဗောဓယော. ဗောဓိနာ’’တိ ပုလ္လိင်္ဂေ အဂ္ဂိနယေန နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. यांच्यामध्ये 'बोधि' शब्दाची, प्रथम 'बोधि राजकुमार' आणि 'अर्यश्रावकाला बोधि म्हटले जाते, त्या बोधीचे अंग म्हणजे बोज्झंग' अशा प्रकारे पुद्गलवाचक (व्यक्तीवाचक) अर्थामध्ये 'बोधि, बोधी, बोधयो। बोधिं, बोधी, बोधयो। बोधिना' अशी पुल्लिंगात 'अग्नि' शब्दाच्या नियमाप्रमाणे नामपदमाला होते. ရုက္ခမဂ္ဂနိဗ္ဗာနသဗ္ဗညုတညာဏဝစနဿ ပန ‘‘ဗောဓိ, ဗောဓီ, ဗောဓိယော. ဗောဓိံ, ဗောဓီ, ဗောဓိယော. ဗောဓိယာ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ရတ္တိနယေန နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. परंतु वृक्ष, मार्ग, निर्वाण आणि सर्वज्ञता-ज्ञान या अर्थांमध्ये 'बोधि, बोधी, bodhiyo। बोधिं, बोधी, bodhiyo। बोधिया' अशी स्त्रीलिंगात 'रत्ति' (रात्री) शब्दाच्या नियमाप्रमाणे नामपदमाला होते. ကေစိ ပန ‘‘ရုက္ခဝစနော ဗောဓိသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါ’’တိ ဝဒန္တိ, တံ အာဂမေန ဝိရုဒ္ဓံ ဝိယ ဒိဿနတော ဝိစာရေတဗ္ဗံ. န ဟိ အာဂမေ ရုက္ခဝစနဿ ဗောဓိသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝေါ ဒိဿတိ, ပုဂ္ဂလဝစနဿ ပန ဒိဿတိ. ယဒိ စ ‘‘သာလော ဓဝေါ ခဒီရော’’တိအာဒီနံ ဝိယ ရုက္ခဝစနဿ ဗောဓိသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂတ္တံ သိယာ, ဇမ္ဗူ သိမ္ဗလီ ပါဋလီသဒ္ဒါဒီနံ ရုက္ခဝါစကတ္တာ ပုလ္လိင်္ဂတ္တံ သိယာ, န တေသံ ဣမဿ စ ရုက္ခဝါစကတ္တေပိ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝေါ ဥပလဗ္ဘတိ. ယဒိ ဟိ ရုက္ခဝစနော ဗောဓိသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါ, ဧဝံ သန္တေ နိဗ္ဗာနဝစနော သဗ္ဗညုတညာဏဝစနော စ ဗောဓိသဒ္ဒေါ နပုံသကလိင်္ဂေါ သိယာ ‘‘နိဗ္ဗာန’’န္တိအာဒိနာ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန နိဒ္ဒိဋ္ဌဿ နိဗ္ဗာနာဒိနော အတ္ထဿ ကထနတော. परंतु काही लोक 'वृक्षवाचक बोधिशब्द पुल्लिंगी आहे' असे म्हणतात, ते आगमाशी (परंपरेशी) विरुद्ध असल्यासारखे दिसत असल्याने त्यावर विचार केला पाहिजे. कारण आगमात वृक्षवाचक 'बोधि' शब्दाचे पुल्लिंगी असणे आढळत नाही, तर पुद्गलवाचक (व्यक्तीवाचक) शब्दाचे आढळते. आणि जर 'सालो, धवो, खदीरो' इत्यादींप्रमाणे वृक्षवाचक 'बोधि' शब्दाचे पुल्लिंगत्व असते, तर जंबू, सिम्बली, पाटली इत्यादी शब्दांचेही वृक्षवाचक असल्यामुळे पुल्लिंगत्व झाले असते, परंतु वृक्षवाचक असूनही त्यांचे आणि याचे पुल्लिंगत्व आढळत नाही. जर वृक्षवाचक 'बोधि' शब्द पुल्लिंगी असता, तर निर्वाणवाचक आणि सर्वज्ञता-ज्ञानवाचक 'बोधि' शब्द नपुंसकलिंगी झाला असता, कारण 'निब्बानं' इत्यादी नपुंसकलिंगी रूपाने निर्दिष्ट केलेल्या निर्वाण इत्यादी अर्थांचे ते कथन करते. ယေ ဧဝံ ဝဒန္တိ ‘‘ရုက္ခဝစနော ဗောဓိသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါ’’တိ, တေ ‘‘ဗောဓိ ဝုစ္စတိ စတူသု မဂ္ဂေသု ဉာဏံ, တံ ဧတ္ထ ဘဂဝါ ပတ္တောတိ [Pg.333] ရုက္ခောပိ ဗောဓိစ္စေဝ ဝုစ္စတီ’’တိ ဝုတ္တမတ္ထံ စေတသိ သန္နိဓာယ ‘‘ဗုဇ္ဈတိ ဧတ္ထာတိ ဗောဓီ’’တိ နိဗ္ဗစနဝသေန ‘‘ကိံ ရုက္ခဝစနော ဗောဓိသဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂေါ န ဘဝိဿတီ’’တိ မညမာနာ ဝဒန္တိ မညေ. နေဝံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ, ဧဝဉ္စ ပန ဒဋ္ဌဗ္ဗံ, ‘‘ဗောဓိ ဝုစ္စတိ စတူသု မဂ္ဂေသု ဉာဏံ, တံ ဧတ္ထ ဘဂဝါ ပတ္တောတိ ရုက္ခောပိ ဗောဓိစ္စေဝ ဝုစ္စတီ’’တိ ဝဒန္တေဟိ ဂရူဟိ ဉာဏဝစနံ ဣတ္ထိ လိင်္ဂဘူတံ ဗောဓီတိ ဉာဏဿ နာမံ ပဏ္ဏတ္တိအန္တရပရိကပ္ပနေနတ္ထံ ပရိကပ္ပေန္တေန ဗုဇ္ဈနဋ္ဌာနဘူတေ ရုက္ခေ အာရောပေတွာ ရုက္ခော ‘‘ဗောဓီ’’တိ ဝုတ္တော, တသ္မာ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နိဗ္ဗစနေ အာဒရော န ကာတဗ္ဗော. န ဟိ ‘‘ဗုဇ္ဈတိ ဧတ္ထာတိ ဗောဓီ’’တိ နိဗ္ဗစနကရဏံ ရုက္ခဝစနဿ ဗောဓိသဒ္ဒဿ ပုလ္လိင်္ဂတ္တံ ကာတုံ သက္ကောတိ သင်္ကေတသိဒ္ဓတ္တာ ဝေါဟာရဿ, တသ္မာ ရုက္ခံ သယံ အဗောဓိမ္ပိ သမာနံ ဗောဓိယာ ပဋိလာဘဋ္ဌာနတ္တာ သင်္ကေတသိဒ္ဓေန ‘‘ဗောဓီ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝေါဟာရေန ဝေါဟရန္တိ သာသနိကာ, ဗောဓိယာ ဝါ ကာရဏတ္တာ ဖလဝေါဟာရေန. ဧတမတ္ထံယေဝ ဟိ သန္ဓာယ ‘‘ဗောဓိ ဝုစ္စတိ စတူသု မဂ္ဂေသု ဉာဏံ, တံ ဧတ္ထ ဘဂဝါ ပတ္တောတိ ရုက္ခောပိ ဗောဓိစ္စေဝ ဝုစ္စတီ’’တိ ဝုတ္တန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ, ဧဝံ ‘‘ဗောဓီ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ရုက္ခနာမံ ပဝတ္တတီတိ. တေနာဟ အာယသ္မာ သာရိပုတ္တော ဓမ္မသေနာပတိ အနုဓမ္မစက္ကဝတ္တီ ဝေါဟာရကုသလော ဣတ္ထိလိင်္ဂဝေါဟာရေန ‘‘ဗုဒ္ဓါနံ ဘဂဝန္တာနံ ဗောဓိယာ မူလေ သဟ သဗ္ဗညုတညာဏပ္ပဋိလာဘာ သစ္ဆိကာ ပညတ္တိ ယဒိဒံ ဗုဒ္ဓေါ’’တိ. အပိစ တတ္ထ တတ္ထ ‘‘ဗောဓိယာ သာခါ’’တိ စ, ‘‘ကေနဋ္ဌေန မဟာဗောဓိ, ကဿ သမ္ဗန္ဓိနီ စ သာ’’တိ စ, जे असे म्हणतात की, "वृक्षवाचक 'बोधि' शब्द पुल्लिंगी आहे", ते "चार मार्गांमधील ज्ञानाला 'बोधि' म्हटले जाते, ते येथे भगवंतांनी प्राप्त केले म्हणून वृक्षालाही 'बोधि'च म्हटले जाते" या सांगितलेल्या अर्थाला मनात ठेवून, "येथे बुद्धत्व प्राप्त होते म्हणून ती 'बोधि'" अशा व्युत्पत्तीच्या आधारे "वृक्षवाचक 'बोधि' शब्द पुल्लिंगी का असणार नाही?" असा विचार करून बोलतात असे मला वाटते. असे मानू नये, तर या प्रकारे मानले पाहिजे: "चार मार्गांमधील ज्ञानाला 'बोधि' म्हटले जाते, ते येथे भगवंतांनी प्राप्त केले म्हणून वृक्षालाही 'बोधि'च म्हटले जाते" असे सांगणाऱ्या आचार्यांनी, स्त्रीलिंगी असलेला 'बोधि' हा ज्ञानवाचक शब्द, दुसऱ्या प्रज्ञप्तीची (संकल्पनेची) कल्पना करून अर्थाचे नियोजन करत, बुद्धत्व प्राप्तीचे स्थान असलेल्या वृक्षावर आरोपित करून वृक्षाला 'बोधि' म्हटले आहे. म्हणून अशा ठिकाणी व्युत्पत्तीचा आग्रह धरू नये. कारण "येथे बुद्धत्व प्राप्त होते म्हणून ती 'बोधि'" अशी व्युत्पत्ती करणे हे वृक्षवाचक 'बोधि' शब्दाला पुल्लिंगी बनवू शकत नाही, कारण व्यवहार हा संकेताने सिद्ध होतो. म्हणूनच, वृक्ष स्वतः 'अबोध' (ज्ञानरहित) असूनही, बोधि (ज्ञान) प्राप्तीचे स्थान असल्यामुळे, शासनिक (बौद्ध अनुयायी) संकेताने सिद्ध झालेल्या 'बोधि' या स्त्रीलिंगी व्यवहाराने त्याचा उल्लेख करतात, किंवा बोधीचे कारण असल्यामुळे फलोपचाराने (कारणात फलाचा उपचार करून) तसे म्हणतात. याच अर्थाला उद्देशून "चार मार्गांमधील ज्ञानाला 'बोधि' म्हटले जाते, ते येथे भगवंतांनी प्राप्त केले म्हणून वृक्षालाही 'बोधि'च म्हटले जाते" असे म्हटले आहे, हे जाणावे. अशा प्रकारे 'बोधि' हे वृक्षाचे नाव स्त्रीलिंगी रूपाने प्रवृत्त होते. म्हणूनच, व्यवहारकुशल, धम्मसेनापती, अनुधम्मचक्रवर्ती आयुष्यमान सारिपुत्तांनी स्त्रीलिंगी व्यवहाराने म्हटले आहे: "बुद्ध भगवंतांच्या बोधिवृक्षाच्या मुळाशी सर्वज्ञता-ज्ञानाच्या प्राप्तीसह जी प्रत्यक्ष प्रज्ञप्ती झाली, ती म्हणजे 'बुद्ध' होय." शिवाय, ठिकठिकाणी "बोधीची फांदी" (बोधिया साखा) असे आणि "कोणत्या अर्थाने महाबोधि, आणि ती कोणाशी संबंधित आहे?" असेही म्हटले आहे. ‘‘ဟတ္ထတော မုတ္တမတ္တာ သာ, အသီတိရတနံ နဘံ; ဥဂ္ဂန္တွာန တဒါ မုဉ္စိ, ဆဗ္ဗဏ္ဏာ ရသ္မိယော သုဘာ’’တိ စ "हातातून सुटल्याबरोबर ती (महाबोधीची फांदी) ऐंशी हात आकाशात वर गेली आणि तिने तेव्हा शुभ अशा सहा रंगांच्या (षड्रंग) रश्मी (किरणे) सोडल्या." ဧဝမာဒယော [Pg.334] ရုက္ခဝါစကဿ ဗောဓိသဒ္ဒဿ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေ ပယောဂါ ဒိဿန္တိ. अशा प्रकारे वृक्षवाचक 'बोधि' शब्दाच्या स्त्रीलिंगी रूपाचे प्रयोग आढळतात. အထ ဝါ ရုက္ခဝါစကော ဗောဓိသဒ္ဒေါ ဒွိလိင်္ဂေါ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂဝသေန. တထာ ဟိ သမန္တပါသာဒိကာယံ ဝိနယသံဝဏ္ဏနာယံ မဟာဝေယျာကရဏဿ ပါဠိနယဝိဒုနော ဗုဒ္ဓဃောသာစရိယဿ ဧဝံ သဒ္ဒရစနာ ဒိဿတိ ‘‘သက္ခိဿသိ တွံ တာတ ပါဋလိပုတ္တံ ဂန္တွာ မဟာဗောဓိနာ သဒ္ဓိံ အယျံ သံဃမိတ္တတ္ထေရိံ အာနေတု’’န္တိ စ, ‘‘သာပိ ခေါ မဟာဗောဓိသမာရူဠှာ နာဝါ ပဿတော မဟာရာဇဿ မဟာသမုဒ္ဒတလံ ပက္ခန္ဒာ’’တိ စ တဿ ရုက္ခဝါစကဿ ဗောဓိသဒ္ဒဿ ‘‘ဗုဇ္ဈတိ ဧတ္ထာတိ ဗောဓီ’’တိ နိဗ္ဗစနဝသေန ‘‘ဗောဓိ, ဗောဓီ, ဗောဓယော. ဗောဓိံ, ဗောဓီ, ဗောဓယော. ဗောဓိနာ’’တိအာဒိနာ ပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ရုက္ခဝါစကဿေဝ ပန တဿ ဉာဏေ ပဝတ္တိတ္ထိလိင်္ဂဝေါဟာရေန သင်္ကေတသိဒ္ဓေန ရူဠှတ္ထဒီပကေန ‘‘ဗောဓိ, ဗောဓီ, ဗောဓိယော. ဗောဓိံ, ဗောဓီ, ဗောဓိယော. ဗောဓိယာ’’တိအာဒိနာ ပဒမာလာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ဣစ္စေဝံ – अथवा, वृक्षवाचक 'बोधि' शब्द पुल्लिंग आणि स्त्रीलिंग या दोन्ही लिंगांत (द्विलिंगी) आहे. कारण, समंतपासादिका या विनय-अट्ठकथेत, महान व्याकरणकार आणि पालि पद्धतीचे जाणकार आचार्य बुद्धघोषांची अशी शब्दरचना दिसते: "बाळा, तू पाटलीपुत्राला जाऊन महाबोधीसह (महाबोधिना सद्धिं - पुल्लिंगी तृतीया) आर्या संघमित्ता थेरींना आणू शकशील का?" आणि "ती महाबोधीने आरूढ झालेली नौका (महाबोधिसमारूळ्हा नावा) महाराज पाहत असताना महासागराच्या पाण्यात मार्गस्थ झाली." त्या वृक्षवाचक 'बोधि' शब्दाची "येथे बुद्धत्व प्राप्त होते म्हणून ती 'बोधि'" या व्युत्पत्तीनुसार "बोधि, बोधी, बोधयो (प्रथमा); बोधिं, बोधी, बोधयो (द्वितीया); बोधिना (तृतीया)" इत्यादी प्रकारे (पुल्लिंगी) पदमाला जाणावी. परंतु, त्याच वृक्षवाचक शब्दाची, ज्ञानात प्रवृत्त होणाऱ्या आणि संकेताने सिद्ध झालेल्या रूढ अर्थाला दर्शवणाऱ्या स्त्रीलिंगी व्यवहाराने "बोधि, बोधी, बोधियो (प्रथमा); बोधिं, बोधी, बोधियो (द्वितीया); बोधिया (तृतीया)" इत्यादी प्रकारे (स्त्रीलिंगी) पदमाला जाणावी. अशा प्रकारे – ပုဂ္ဂလဝါစကော ဗောဓိ-သဒ္ဒေါ ပုလ္လိင်္ဂိကော ဘဝေ; ဉာဏာဒိဝါစကော ဣတ္ထိ-လိင်္ဂေါယေဝ သိယာ သဒါ. पुद्गलवाचक (व्यक्तीवाचक) 'बोधि' शब्द पुल्लिंगी असावा; ज्ञान इत्यादींचा वाचक असलेला शब्द नेहमी स्त्रीलिंगीच असावा. ဗောဓိပါဒပဝစနော, ပုမိတ္ထိလိင်္ဂိကော ဘဝေ; ဧဝံ သန္တေပိ ဧတဿ, ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တမေဝ တု; ဣစ္ဆိတဗ္ဗတရံ ယသ္မာ, ဓမ္မသေနာပတီရိတံ. बोधिवृक्षाचा वाचक असलेला शब्द पुल्लिंगी आणि स्त्रीलिंगी असावा; असे असले तरी, याचे स्त्रीलिंगी रूपच अधिक इष्ट (स्वीकारार्ह) आहे, कारण धम्मसेनापतींनी (सारिपुत्तांनी) तसे म्हटले आहे. သန္ဓိသဒ္ဒါဒီနမ္ပိ နယာနုသာရေန နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. သန္ဓိသဒ္ဒေါ ဟိ သရသန္ဓိအာဒိဝါစကော ပုလ္လိင်္ဂေါ, ပဋိသန္ဓိယာဒိဝါစကော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ‘‘သန္ဓိနော. သန္ဓိယာ’’တိအာဒိဒဿနတော. ဝိဘတ္တိသဒ္ဒေါ ဝိဘဇနဝါစကော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ[Pg.335], သျာဒိဝါစကော ပုလ္လိင်္ဂေါ စေဝ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ စ ‘‘ဝိဘတ္တိဿ. ဝိဘတ္တိယာ’’တိအာဒိဒဿနတော. 'संधि' इत्यादी शब्दांचीही नियमांनुसार नाम-पदमाला योजावी. कारण 'संधि' शब्द स्वरसंधि इत्यादींचा वाचक असताना पुल्लिंगी असतो, आणि प्रतिसंधि (पुनर्जन्म) इत्यादींचा वाचक असताना स्त्रीलिंगी असतो; जसे की "संधिनो" (पुल्लिंगी) आणि "संधिया" (स्त्रीलिंगी) इत्यादी प्रयोगांवरून दिसते. 'विभत्ति' (विभक्ती) शब्द विभागणीचा वाचक असताना स्त्रीलिंगी असतो, आणि 'सि' (सु) इत्यादी प्रत्ययांचा वाचक असताना पुल्लिंगी तसेच स्त्रीलिंगी दोन्ही असतो; जसे की "विभत्तिस्स" (पुल्लिंगी) आणि "विभत्तिया" (स्त्रीलिंगी) इत्यादी प्रयोगांवरून दिसते. အာယုသဒ္ဒေါ ပန ဇီဝိတိန္ဒြိယဝါစကောယေဝ ဟုတွာ ပုန္နပုံသကလိင်္ဂေါ, ‘‘ပုနရာယု စ မေ လဒ္ဓေါ, ဧဝံ ဇာနာဟိ မာရိသာ’’တိ ‘‘ဧတ္တကံယေဝ တေ အာယု, စဝနကာလော ဘဝိဿတီ’’တိ စ ဒဿနတော. परंतु 'आयु' शब्द हा केवळ जीवितेंद्रियाचा वाचक असून पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंग या दोन्ही लिंगांत असतो; जसे की "हे मारिष (मित्रा), मला पुन्हा आयुष्य लाभले आहे" (पुनरायु च मे लद्धो - पुल्लिंगी) आणि "तुझे आयुष्य एवढेच आहे, आता तुझी च्युती (मृत्यू) होण्याची वेळ येईल" (एत्तकंयेव ते आयु - नपुंसकलिंगी) अशा प्रयोगांवरून दिसते. ဓာတုသဒ္ဒေါ သဘာဝါဒိဝါစကော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ, ကရပစာဒိဝါစကော ပုမိတ္ထိလိင်္ဂေါ ‘‘စက္ခုဓာတုယာ. ကရောတိဿ ဓာတုဿ. ဓာတုယော ဓာတုယာ’’တိ ဒဿနတော. 'धातु' शब्द स्वभाव (गुणधर्म) इत्यादींचा वाचक असताना स्त्रीलिंगी असतो, आणि 'कृ', 'पच्' इत्यादी क्रियापदांच्या मूळ रूपांचा (धातूंचा) वाचक असताना पुल्लिंगी असतो; जसे की "चक्खुधातुया" (चक्षुधातूचा - स्त्रीलिंगी), "करोतिस्स धातुस्स" ('करोति' या धातूचा - पुल्लिंगी), आणि "धातुयो धातुया" इत्यादी प्रयोगांवरून दिसते. ပဇာပတိသဒ္ဒေါ ဒေဝဝိသေသဝါစကော ပုလ္လိင်္ဂေါ, ကလတ္တဇိနမာတုစ္ဆာဝါစကော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ‘‘ပဇာပတိဿ ဒေဝရာဇဿ ဓဇဂ္ဂံ ဥလ္လောကေယျာထ’’, ‘‘အတ္တနော ပဇာပတိယာ သဒ္ဓိံ မဟာပဇာပတိယာ’’တိ စ ဒဿနတော. 'पजापति' (प्रजापती) शब्द विशिष्ट देवाचा वाचक असताना पुल्लिंगी असतो, आणि पत्नी किंवा जिन-मातृष्वसा (महाप्रजापती गौतमी) यांचा वाचक असताना स्त्रीलिंगी असतो; जसे की "प्रजापती देवराजाच्या ध्वजाच्या टोकाकडे पहावे" (पजापतिस्स देवराजस्स - पुल्लिंगी), "आपल्या पत्नीसह" (अत्तनो पजापतिया सद्धिं - स्त्रीलिंगी) आणि "महाप्रजापतीसह" (महापजापतिया - स्त्रीलिंगी) अशा प्रयोगांवरून दिसते. ဒါမာ ဒါမံ သဒ္ဒါ မာလတီဒါမာဒိဘေဒဘိန္နဿ ဧကဿ ဝတ္ထုဿ ယထာက္ကမံ ဣတ္ထိနပုံသကလိင်္ဂါ. တထာ ဟိ ‘‘မာလတီဒါမာ လောလာဠိင်္ဂလီလာ. မာလတီဒါမံ. သိင်္ဃိတံ ဒါမံ ဘမရေဟိ. ရတနဒါမာ. ရတနဒါမ’’န္တိ စ ဒွိလိင်္ဂဘာဝေ လောကိကပ္ပယောဂါ ဒိဿန္တိ သာသနာနုကူလာ. 'दामा' आणि 'दामं' हे शब्द मालतीची माळ इत्यादी भेदांनी भिन्न असलेल्या एकाच वस्तूचे वाचक असून अनुक्रमे स्त्रीलिंगी आणि नपुंसकलिंगी आहेत. कारण "चंचल भुंग्यांच्या लीलेने युक्त असलेली मालतीची माळ" (मालतीदामा - स्त्रीलिंगी), "मालतीची माळ" (मालतीदामं - नपुंसकलिंगी), "भुंग्यांनी हुंगलेली माळ" (सिंघितं दामं - नपुंसकलिंगी), "रत्नांची माळ" (रतनदामा - स्त्रीलिंगी) आणि "रत्नांची माळ" (रतनदामं - नपुंसकलिंगी) असे शासनाला (बुद्धवचनाला) अनुकूल असलेले द्विलिंगी लोकव्यवहारातील प्रयोग दिसतात. သဒ္ဓံ သဒ္ဓါသဒ္ဒါ ပန ဘိန္နဝတ္ထူနံ ဝါစကာ ဣတ္ထိနပုံသကလိင်္ဂါ, သဒ္ဓါသဒ္ဒေါ ပသာဒလက္ခဏဝါစကော ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ, သဒ္ဓံသဒ္ဒေါ မတကဘတ္တဝါစကော နပုံသကလိင်္ဂေါ ‘‘သဒ္ဓါ သဒ္ဒဟနာ. မယမဿုဘော ဂေါတမဗြာဟ္မဏာ နာမ ဒါနာနိ ဒေမ သဒ္ဓါနိ ကရောမာ’’တိ ဒဿနတော. ဣမသ္မိံ ပန ဌာနေ ‘‘သဒ္ဓေါ ပုရိသော[Pg.336], သဒ္ဓါ ဣတ္ထီ, သဒ္ဓံ ကုလ’’န္တိ ဣမာနိ ဝါစ္စလိင်္ဂတ္တာ သင်္ဂဟံ န ဂစ္ဆန္တီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ. परंतु 'saddhaṃ' आणि 'saddhā' हे शब्द वेगवेगळ्या वस्तूंचे वाचक असून अनुक्रमे नपुंसकलिंगी आणि स्त्रीलिंगी आहेत. 'saddhā' (श्रद्धा) शब्द प्रसन्नतेच्या लक्षणाचा वाचक असताना स्त्रीलिंगी असतो, आणि 'saddhaṃ' (श्राद्ध) शब्द मृत व्यक्तीच्या उद्देशाने दिलेल्या भोजनाचा वाचक असताना नपुंसकलिंगी असतो; जसे की "श्रद्धा म्हणजे विश्वास ठेवणे" (सद्धा सद्दहना - स्त्रीलिंगी) आणि "आम्ही हे सुप्रसिद्ध गौतम ब्राह्मणांना दान देतो आणि श्राद्ध करतो" (मयमस्सुभो गोतमब्राह्मणा नाम दानानि देम सद्धानि करोमा - नपुंसकलिंगी) अशा प्रयोगांवरून दिसते. परंतु या ठिकाणी "श्रद्धाळू पुरुष" (सद्धो पुरिसो), "श्रद्धाळू स्त्री" (सद्धा इत्थी), "श्रद्धाळू कुल" (सद्धं कुलं) हे शब्द विशेषण (वाच्यलिंगी) असल्यामुळे या वर्गीकरणात समाविष्ट होत नाहीत, असे जाणावे. တဋံ တဋီ တဋောတိမေ သဒ္ဒါ တီရသင်္ခါတေ ဧကသ္မိံယေဝတ္ထေ ထီပုန္နပုံသကလိင်္ဂါ. 'तटं', 'तटी' आणि 'तटो' हे शब्द 'तीर' (काठ) या एकाच अर्थाचे वाचक असून अनुक्रमे नपुंसकलिंगी, स्त्रीलिंगी आणि पुल्लिंगी आहेत. ဗျဉ္ဇနသဒ္ဒေါ ဥပသေစနလိင်္ဂဝါကျာဝေဏိကသရီရာဝယဝဝါစကော နပုံသကလိင်္ဂေါ, အက္ခရဝါစကော ပုန္နပုံသကလိင်္ဂေါ. တတြုပသေစနေ ‘‘သူပံ ဝါ ဗျဉ္ဇနံ ဝါ’’တိ နပုံသကနိဒ္ဒေသော ဒိဿတိ. တထာ လိင်္ဂေ ‘‘ဣတ္ထိဗျဉ္ဇနံ ပုရိသဗျဉ္ဇန’’န္တိ နပုံသကနိဒ္ဒေသော. ဝါကျေ ‘‘ပဒဗျဉ္ဇနာနိ သာဓုကံ ဥဂ္ဂဟေတွာ’’တိ နပုံသကလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော. အာဝေဏိကေ ‘‘အသီတိ အနုဗျဉ္ဇနာနီ’’တိ နပုံသကနိဒ္ဒေသော. သရီရာဝယဝေ ‘‘ကိလေသာနံ အနု အနု ဗျဉ္ဇနတော ပါကဋဘာဝကရဏတော အနုဗျဉ္ဇန’’န္တိ ဧဝံ နပုံသကနိဒ္ဒေသော. ဧတ္ထ ဟိ အနုဗျဉ္ဇနံ နာမ ဟတ္ထပါဒသိတဟသိတကထိတဝိလောကိတာဒိဘေဒေါ အာကာရော. သော ဧဝ ‘‘သရီရာဝယဝေါ’’တိ ဝုစ္စတီတိ. အက္ခရေ ‘‘ဗျဉ္ဇနော. ဗျဉ္ဇန’’န္တိ စ ပုန္နပုံသကနိဒ္ဒေသော. व्यंजन (ब्यञ्जन) हा शब्द उपसेचन (तोंडी लावणी/चटणी इ.), लिंग (चिन्ह), वाक्य, आवेणिक (असाधारण गुण) आणि शरीराचे अवयव यांचा वाचक असताना नपुंसकलिंगी असतो, आणि अक्षराचा वाचक असताना पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी दोन्ही असतो. त्यापैकी उपसेचनाच्या अर्थात “सूपं वा ब्यञ्जनं वा” (वरण किंवा व्यंजन) असा नपुंसकलिंगी निर्देश आढळतो. तसेच लिंगाच्या अर्थात “इत्थिब्यञ्जनं पुरिसब्यञ्जनं” (स्त्री-लिंग, पुरुष-लिंग) असा नपुंसकलिंगी निर्देश आहे. वाक्याच्या अर्थात “पदब्यञ्जनानि साधुकं उग्गहेत्वा” (पदे आणि व्यंजने नीट ग्रहण करून) असा नपुंसकलिंगी निर्देश आहे. आवेणिक (असाधारण गुणांच्या) अर्थात “असीiti अनुब्यञ्जनानि” (ऐंशी अनुव्यंजने) असा नपुंसकलिंगी निर्देश आहे. शरीराच्या अवयवाच्या अर्थात “किलेसानं अनु अनु ब्यञ्जनतो पाकटभावकरणतो अनुब्यञ्जनं” (क्लेशांना अनुसरून प्रकट करण्याचे साधन असल्यामुळे अनुव्यंजन) असा नपुंसकलिंगी निर्देश आहे. येथे 'अनुव्यंजन' म्हणजे हात, पाय, स्मितहास्य, बोलणे, पाहणे इत्यादींचे वेगवेगळे आकार (हावभाव) होत. त्यालाच 'शरीराचे अवयव' असे म्हटले जाते. अक्षराच्या अर्थात “ब्यञ्जनो, ब्यञ्जनं” (व्यंजन - पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी) असा पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी निर्देश आहे. အတ္ထသဒ္ဒေါ နိဗ္ဗာနဝစနော နပုံသကလိင်္ဂေါ, အဘိဓေယျဓနကာရဏပယောဇနနိဝတျာဘိသန္ဓာနာဒိဝစနော ပန ပုလ္လိင်္ဂေါ. တထာ ဟိ ကထာဝတ္ထုမှိ ‘‘အတ္ထတ္ထမှီ’’တိ ဣမိဿာ ပါဠိယာ အတ္ထသံဝဏ္ဏနာယံ ‘‘အတ္ထံ ဝုစ္စတိ နိဗ္ဗာန’’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂနိဒ္ဒေသေန အတ္ထသဒ္ဒေါ ဝုတ္တော. ဣတိ အတ္ထသဒ္ဒေါ ဒွိလိင်္ဂေါ. अत्थ (अर्थ) हा शब्द निर्वाणाचा वाचक असताना नपुंसकलिंगी असतो; परंतु अभिधेय (वाच्य अर्थ), धन, कारण, प्रयोजन, निवृत्ति, अभिप्राय इत्यादींचा वाचक असताना तो पुल्लिंगी असतो. तसेच, कथावस्तूमध्ये “अत्थत्थम्हि” या पाळीच्या अर्थविवरणामध्ये “अत्थं वुच्चति निब्बानं” (अर्थ म्हणजे निर्वाण म्हटले जाते) अशा नपुंसकलिंगी निर्देशाने 'अत्थ' शब्द वापरला आहे. अशा प्रकारे 'अत्थ' शब्द द्विलिंगी (पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी) आहे. အက္ခရသဒ္ဒေါ စ ‘‘ယော ပုဗ္ဗော အက္ခရော အက္ခရာနီ’’တိ စ ဒဿနတော. အပိစ အက္ခရသဒ္ဒေါ နိဗ္ဗာနဝစနော နာမပဏ္ဏတ္တိဝစနော စ သဗ္ဗဒါနပုံသကလိင်္ဂေါ ဘဝတိ ‘‘ပဒမစ္စုတမက္ခရံ, မဟာဇနသမ္မတောတိ [Pg.337] ခေါ ဝါသေဋ္ဌ ‘မဟာသမ္မတော’တွေဝ ပဌမံ အက္ခရံ နိဗ္ဗတ္တ’’န္တိ ဧဝမာဒီသု. ‘‘အက္ခရာယ ဒေသေတိ, အက္ခရက္ခရာယ အာပတ္တိ ပါစိတ္တိယဿာ’’တိ ဧတ္ထ ပန ပုလ္လိင်္ဂေါတိပိ နပုံသကလိင်္ဂေါတိပိ ဝတ္တဗ္ဗော, ဣတ္ထိလိင်္ဂေါတိ ပန န ဝတ္တဗ္ဗော. အယဉှိ ‘‘အသက္ကတာ စသ္မ ဓနဉ္စယာယ. ဝိရမထာယသ္မန္တော မမဝစနာယာ’’တိအာဒီသု ‘‘ဓနဉ္စယာယ, ဝစနာယာ’’တိ သဒ္ဒါ ဝိယ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသေန ဝုတ္တော, န လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေနာတိ. आणि 'अक्खर' (अक्षर) हा शब्द “यो पुब्बो अक्खरो अक्खरानि” (जो पूर्वीचा वर्ण, अक्षरे) अशा प्रयोगांवरून दिसून येतो. शिवाय, 'अक्खर' शब्द निर्वाणाचा वाचक आणि नाम-प्रज्ञप्तीचा (संज्ञेचा) वाचक असताना नेहमी नपुंसकलिंगी असतो; जसे की “पदमच्चुतमक्खरं” (अच्युत व अक्षर पद), “महाजनसम्मतोति खो वासेट्ठ ‘महासम्मतो’त्वेव पठमं अक्खरं निब्बत्तं” (हे वासेट्ठ! महाजनांनी संमत केलेला म्हणून 'महासम्मत' हे पहिले अक्षर/नाव उत्पन्न झाले) इत्यादींमध्ये. परंतु, “अक्खराय देसेति, अक्खरक्खराय आपत्ति पाचित्तियस्स” (अक्षराने उपदेश करतो, प्रत्येक अक्षरागणिक पाचित्तिय आपत्ती येते) येथे तो पुल्लिंगी किंवा नपुंसकलिंगी म्हणावा, स्त्रीलिंगी मात्र म्हणू नये. कारण हा प्रयोग “असक्कता चस्म धनञ्चयाय. विरमथायस्मन्तो ममवचनाय” इत्यादींमधील “धनञ्चयाय, वचनाय” या शब्दांप्रमाणे विभक्तीच्या विपर्यासाने (बदलाने) वापरला आहे, लिंगाच्या विपर्यासामुळे नाही. အဇ္ဇဝ မဒ္ဒဝ ဂါရဝသဒ္ဒါ ပန ပုန္နပုံသကလိင်္ဂါ. ‘‘အဇ္ဇဝေါ စ မဒ္ဒဝေါ စ. အဇ္ဇဝမဒ္ဒဝံ. ဂါရဝေါ စ နိဝါတော စ. သဟ အာဝဇ္ဇိတေ ထူပေ, ဂါရဝံ ဟောတိ မေ တဒါ’’တိ စ အာဒိဒဿနတော. अज्जव (ऋजुता/सरळपणा), मद्दव (मृदुता) आणि गारव (आदर/गौरव) हे शब्द पुल्लिंगी व नपुंसकलिंगी दोन्ही असतात. कारण “अज्जवो च मद्दवो च” (पुल्लिंगी), “अज्जवमद्दवं” (नपुंसकलिंगी), “गारवो च निवातो च” (पुल्लिंगी), “सह आवज्जिते थूपे, गारवं होति मे तदा” (स्तूपाचे स्मरण करताच मला तेव्हा आदर वाटला - नपुंसकलिंगी) इत्यादी प्रयोग दिसून येतात. ဝစောဝစီသဒ္ဒါ ပန ဃဋောဃဋီသဒ္ဒါ ဝိယ ပုမိတ္ထိလိင်္ဂါ, တတ္ထ ဝစီသဒ္ဒဿ ‘‘ဝစီ, ဝစီ, ဝစိယော. ဝစိံ, ဝစီ, ဝစိယော. ဝစိယာ’’တိ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ကေစိ ‘‘ဒုစ္စရိတပယောဂဝိညတ္တိသဒ္ဒါဒီသု ပရေသု ဝစသဒ္ဒဿန္တော ဤကာရော ဟောတိ, တေန ‘‘ဝစီဒုစ္စရိတ’’န္တိအာဒီနိ ရူပါနိ ဒိဿန္တီ’’တိ ဝဒန္တိ, တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ ဝစသဒ္ဒတော ဝိသုံ ဝစီသဒ္ဒဿ ဒဿနတော. အတြိမာနိ ပါဠိတော စ အဋ္ဌကထာတော စ နိဒဿနပဒါနိ. ‘‘ဝစီ ဝစီသင်္ခါရော, ဝစီသင်္ခါရော ဝစီ, ဝစိဉ္စ ဝစီသင်္ခါရေ စ ဌပေတွာ အဝသေသာ န စေဝ ဝစီ, န စ ဝစီသင်္ခါရော. ဂဒိတော ဝစီဘိ သတိမာဘိနန္ဒေ’’တိ ဣမာနိ ပါဠိတော နိဒဿနပဒါနိ. ‘‘စောပနသင်္ခါတာ ဝစီ ဧဝ ဝိညတ္တိ ဝစီဝိညတ္တိ, ဝစိယာ ဘေဒေါ ဝစီဘေဒေါ’’တိ ဣမာနိ အဋ္ဌကထာတော နိဒဿနပဒါနိ. ဣမိနာ နယေန အညေသမ္ပိ သရူပါသရူပပဒါနံ [Pg.338] ယထာရဟံ ဒွိတိလိင်္ဂတာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ. ဧဝံ အဘိဓေယျကလိင်္ဂေသု သဝိသေသာနိ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. परंतु 'वच' आणि 'वची' हे शब्द 'घट' आणि 'घटी' शब्दांप्रमाणे अनुक्रमे पुल्लिंगी व स्त्रीलिंगी आहेत. त्यापैकी 'वची' शब्दाची “वची, वची, वचियो। वचिं, वची, वचियो। वचिया” अशी नामिक पदमाला (विभक्ती रूपे) योजावी. काही व्याकरणकार म्हणतात की, “दुच्चरित, पयोग, विञ्ञत्ति इत्यादी शब्द पुढे असताना 'वच' शब्दाच्या शेवटी 'ई'कार होतो, त्यामुळे 'वचीदुच्चरितं' इत्यादी रूपे दिसतात”; परंतु ते स्वीकारू नये, कारण 'वच' शब्दापेक्षा स्वतंत्रपणे 'वची' शब्द दिसून येतो. याविषयी पाळी आणि अट्ठकथांमधील उदाहरणे खालीलप्रमाणे आहेत: “वची वचीसङ्खारो, वचीसङ्खारो वची, वचिञ्च वचीसङ्खारे च ठपेत्वा अवसेसा न चेव वची, न च वचीसङ्खारो” (वाणी हा वाक्संस्कार आहे...), “गदितो वचीभि सतिमाभिनन्दे” (स्मृतिमान पुरुषाने वाणीने बोललेल्याचे अभिनंदन करावे) - ही पाळीतील उदाहरणे आहेत. “चोपनसङ्खाता वची एव विञ्ञत्ति वचीविञ्ञत्ति, वचिया भेदो वचीभेदो” (कंपन स्वरूपाची वाणी हीच विज्ञप्ती म्हणजे वाग्विज्ञप्ती, वाणीचा भेद म्हणजे वाग्भेद) - ही अट्ठकथेतील उदाहरणे आहेत. या पद्धतीने इतरही समान व असमान रूपांच्या शब्दांचे योग्यतेनुसार द्विलिंगी किंवा त्रिलिंगी असणे निश्चित करावे. अशा प्रकारे, अभिधेय लिंगांमध्ये विशेष वैशिष्ट्यांसह असणारी अभिधेय लिंगे जाणून घ्यावीत. ဣဒါနိ ကတ္ထစိ ဝါစ္စလိင်္ဂဘူတာနံ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနဉ္စ တဒ္ဓိဘန္တလိင်္ဂါနဉ္စ ဓမ္မာဒိဝသေန နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ. တထာ ဟိ – आता काही ठिकाणी वाच्यलिंगी असणाऱ्या अभिधेय लिंगांची आणि तद्धितान्त लिंगांची 'धम्म' (धर्म) इत्यादींच्या आधारे नामिक पदमाला (विभक्ती रूपे) सांगितली जात आहे. ती खालीलप्रमाणे – ဓမ္မဘော ပုဂ္ဂလာ စေဝ, ဓမ္မပုဂ္ဂလတောပိ စ; ဧကန္တဓမ္မတော စေဝ, တထေဝေကန္တပုဂ္ဂလာ. केवळ धर्मवाचक, केवळ पुद्गलवाचक, धर्म आणि पुद्गल दोन्ही वाचक, एकांत (केवळ) धर्मवाचक आणि तसेच एकांत (केवळ) पुद्गलवाचक शब्दांच्या, ပဒမာလာ သိယုံ တာသု, ပစ္စတ္တာဒိဝသေန တု; ပဒံ သမံ ဝိသမဉ္စ, ဇညာ သဗ္ဗသမမ္ပိ စ. प्रथमा (पच्चत्त) इत्यादी विभक्तींच्या आधारे पदमाला होतात. त्यामध्ये पदे समान (सारखी), विषम (भिन्न) किंवा सर्व प्रकारे समान असतात, असे जाणावे. ကထံ? ‘‘မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိ, မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပော, မိစ္ဆာဝါစာ, မိစ္ဆာဝါစော, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိကော, မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပီ’’ ဣစ္စေတေသံ နာမိကပဒမာလာ ဧဝံ ဝေဒိတဗ္ဗာ. कसे? “मिच्छादिट्ठि (मिथ्यादृष्टी), मिच्छासङ्कप्पो (मिथ्यासंकल्प), मिच्छावाचा (मिथ्यावाचा), मिच्छावाचो (मिथ्यावाच), मिच्छादिट्ठिको (मिथ्यादृष्टी असलेला), मिच्छासङ्कप्पी (मिथ्यासंकल्प असलेला)” यांची नामिक पदमाला याप्रमाणे जाणून घ्यावी. ‘‘မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌီ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိယော. မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိံ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌီ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိယော. မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိယာ’’တိ ဧဝံ ဓမ္မတော, ‘‘မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌီ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိနော. မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိံ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌီ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိနော. မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိနာ’’တိ ဧဝံ ပုဂ္ဂလတော, ‘‘မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပော, မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပာ. မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပ’’န္တိ ဧဝံ ဓမ္မပုဂ္ဂလတော, ‘‘မိစ္ဆာဝါစာ, မိစ္ဆာဝါစာ, မိစ္ဆာဝါစာယော. မိစ္ဆာဝါစံ, မိစ္ဆာဝါစာ မိစ္ဆာဝါစာယော. မိစ္ဆာဝါစာယ’’ ဧဝံ ဧကန္တဓမ္မတော, ‘‘မိစ္ဆာဝါစော, မိစ္ဆာဝါစာ. မိစ္ဆာဝါစံ, မိစ္ဆာဝါစေ. မိစ္ဆာဝါစေန’’ ဧဝံ ဧကန္တပုဂ္ဂလတော, ‘‘မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိကော. မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိကာ. မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိက’’န္တိ ဧဝမ္ပိ ဧကန္တပုဂ္ဂလတော, ‘‘မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပီ, မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပိနော. မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပိ’’န္တိ ဧဝမ္ပိ ဧကန္တပုဂ္ဂလတော နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. ပစ္စတ္တောပယောဂဝစနာဒိဝသေန ပန ပဒံ သဒိသံ ဝိသဒိသံ သဗ္ဗထာ သဒိသမ္ပိ စ ဘဝတိ. ဧသ နယော သမ္မာဒိဋ္ဌိသမ္မာသင်္ကပ္ပာဒီသုပိ. “मिच्छादिट्ठि, मिच्छादिट्ठी, मिच्छादिट्ठियो। मिच्छादिट्ठिं, मिच्छादिट्ठी, मिच्छादिट्ठियो। मिच्छादिट्ठिया” - ही धर्माच्या (भाववाचक) दृष्टीने; “मिच्छादिट्ठि, मिच्छादिट्ठी, मिच्छादिट्ठिनो। मिच्छादिट्ठिं, मिच्छादिट्ठी, मिच्छादिट्ठिनो। मिच्छादिट्ठिना” - ही पुद्गलाच्या (व्यक्तीच्या) दृष्टीने; “मिच्छासङ्कप्पो, मिच्छासङ्कप्पा। मिच्छासङ्कप्पं” - ही धर्म आणि पुद्गल दोन्हीच्या दृष्टीने; “मिच्छावाचा, मिच्छावाचा, मिच्छावाचायो। मिच्छावाचं, मिच्छावाचा, मिच्छावाचायो। मिच्छावाचाय” - ही एकांत (केवळ) धर्माच्या दृष्टीने; “मिच्छावाचो, मिच्छावाचा। मिच्छावाचं, मिच्छावाचे। मिच्छावाचेन” - ही एकांत पुद्गलाच्या दृष्टीने; “मिच्छादिट्ठिको, मिच्छादिट्ठिका, मिच्छादिट्ठिकं” - ही देखील एकांत पुद्गलाच्या दृष्टीने; “मिच्छासङ्कप्पी, मिच्छासङ्कप्पिनो, मिच्छासङ्कप्पि” - ही देखील एकांत पुद्गलाच्या दृष्टीने नामिक पदमाला होते. प्रथमा (पच्चत्त) आणि द्वितीया (उपयोग) इत्यादी विभक्तींच्या वचनांनुसार पदे समान, विषम किंवा सर्व प्रकारे समान देखील होतात. हाच नियम सम्मादिट्ठि (सम्यक् दृष्टी), सम्मासङ्कप्प (सम्यक् संकल्प) इत्यादींच्या बाबतीतही लागू होतो. အတြိမေ [Pg.339] အာဟစ္စဘာသိတာ ပယောဂါ – အဝိဇ္ဇာဂတဿ ဘိက္ခဝေ အဝိဒ္ဒသုနော မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိ ပဟောတိ. မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိဿ မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပော ပဟောတိ. မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပဿ မိစ္ဆာဝါစာ ပဟောတိ. မိစ္ဆာဝါစဿ မိစ္ဆာကမ္မန္တော ပဟောတိ. မိစ္ဆာကမ္မန္တဿ မိစ္ဆာအာဇီဝေါ ပဟောတိ. မိစ္ဆာအာဇီဝဿ မိစ္ဆာဝါယာမော ပဟောတိ. မိစ္ဆာဝါယာမဿ မိစ္ဆာသတိ ပဟောတိ. မိစ္ဆာသတိဿ မိစ္ဆာသမာဓိ ပဟောတီတိ. ဝိဇ္ဇာဂတဿ ဘိက္ခဝေ ဝိဒ္ဒသုနော သမ္မာဒိဋ္ဌိ ပဟောတိ. သမ္မာဒိဋ္ဌိဿ သမ္မာသင်္ကပ္ပော ပဟောတီတိ ဝိတ္ထာရော, ဧဝံ ကတ္ထစိ ဝါစ္စလိင်္ဂဘူတာနံ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနဉ္စ တဒ္ဓိတန္တလိင်္ဂါနဉ္စ နာမိကပဒမာလာ သပ္ပယောဂါ ကထိတာ. या संदर्भात थेट बुद्धवचनातील (आहच्चभासित) हे प्रयोग आहेत – 'भिक्खूहो! अविद्याग्रस्त व अज्ञानी माणसाची मिथ्यादृष्टी वाढते. मिथ्यादृष्टी असलेल्याचा मिथ्यासंकल्प वाढतो. मिथ्यासंकल्प असलेल्याची मिथ्यावाचा वाढते. मिथ्यावाचा असलेल्याचा मिथ्याकर्मान्त वाढतो. मिथ्याकर्मान्त असलेल्याची मिथ्याआजीविका वाढते. मिथ्याआजीविका असलेल्याचा मिथ्याव्यायाम वाढतो. मिथ्याव्यायाम असलेल्याची मिथ्यास्मृती वाढते. मिथ्यास्मृती असलेल्याचा मिथ्यासमाधी वाढतो.' 'भिक्खूहो! विद्या प्राप्त झालेल्या व ज्ञानी माणसाची सम्यक् दृष्टी वाढते. सम्यक् दृष्टी असलेल्याचा सम्यक् संकल्प वाढतो...' इत्यादी विस्तार जाणावा. अशा प्रकारे, काही ठिकाणी वाच्यलिंगी असणाऱ्या अभिधेय लिंगांची आणि तद्धितान्त लिंगांची नामिक पदमाला प्रयोगांसह सांगितली आहे. ဣဒါနိ နေဝါဘိဓေယျလိင်္ဂဿ ဘဝိတဗ္ဗသဒ္ဒဿ စ အဘိဓေယျလိင်္ဂါနံ သောတ္ထိ သုဝတ္ထိ သဒ္ဒါနဉ္စ ဝါစ္စလိင်္ဂါဘိဓေယျလိင်္ဂဿ အဗ္ဘုတသဒ္ဒဿ စ ဝါစ္စလိင်္ဂဿ အဘူတသဒ္ဒဿစာတိ ဣမေသံ ကိဉ္စိ ဝိသေသံ ကထယာမ, နာမိကပဒမာလဉ္စ ယထာရဟံ ယောဇေဿာမ. ဧတေသု ဟိ ဘဝိတဗ္ဗသဒ္ဒေါ ဧကန္တဘာဝဝါစကော နပုံသကလိင်္ဂေါ ဧကဝစနန္တောယေဝ ဟောတိ. တတိယန္တပဒေဟိ ဧဝံသဒ္ဒ နသဒ္ဒါဒီဟိ စ ယောဇေတဗ္ဗော စ ဟောတိ. နာဿ နာမိကပဒမာလာ လဗ္ဘတိ, အတြိမေ စ ပယောဂါ ‘‘သဒ္ဓမ္မဂရုကေန ဘဝိတဗ္ဗံ, နော အာမိသဂရုကေန, ဣမိနာ စောရေန ဘဝိတဗ္ဗံ, ဣမေဟိ စောရေဟိ ဘဝိတဗ္ဗံ, ဣမာယ စောရိယာ ဘဝိတဗ္ဗံ, ဣမာဟိ စောရီဟိ ဘဝိတဗ္ဗံ, အနေန စိတ္တေန ဘဝိတဗ္ဗံ, ဣမေဟိ စိတ္တေဟိ ဘဝိတဗ္ဗံ, ဧဝံ ဘဝိတဗ္ဗံ, အညထာ ဘဝိတဗ္ဗ’’န္တိ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – आता लिंग नसलेल्या 'भवितब्ब' शब्दाचे आणि लिंग असलेल्या 'सोत्थि', 'सुवत्थि' शब्दांचे, तसेच वाच्यलिंग व अभिधेयलिंग असलेल्या 'अब्भुत' शब्दाचे आणि वाच्यलिंग असलेल्या 'अभूत' शब्दाचे काही वैशिष्ट्य सांगतो, आणि योग्यतेनुसार त्यांची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) जोडतो. या शब्दांमध्ये 'भवितब्ब' शब्द केवळ भाववाचक, नपुंसकलिंगी आणि एकवचनातच असतो. तो तृतीया विभक्तीच्या पदांशी आणि 'एवं', 'न' इत्यादी शब्दांशी जोडला जातो. त्याची नामविभक्तीची रूपे (नामिकपदमला) मिळत नाहीत, आणि त्याचे प्रयोग खालीलप्रमाणे आहेत – "सद्धम्मगरुकेन भवितब्बं, नो आमिसगरुकेन", "इमिना चोरेन भवितब्बं", "इमेहि चोरेहि भवितब्बं", "इमाय चोरिया भवितब्बं", "इमाहि चोरीहि भवितब्बं", "अनेन चित्तेन भवितब्बं", "इमेहि चित्तेहि भवितब्बं", "एवं भवितब्बं", "अञ्ञथा भवितब्बं". याविषयी असे म्हटले आहे – ဘဝိတဗ္ဗပဒံ နိစ္စံ, သဗ္ဗညုဝရသာသနေ; ပဌမေကဝစော ဘာဝ-ဝါစကဉ္စ နပုံသကံ. "सर्वज्ञ (बुद्धांच्या) श्रेष्ठ शासनात 'भवितब्ब' हे पद नेहमी प्रथमा विभक्तीच्या एकवचनात, भाववाचक आणि नपुंसकलिंगी असते." တတိယန္တပဒေဟေဝံ-သဒ္ဒါဒီဟိ [Pg.340] စ ဓီမတာ; ယောဇေတဗ္ဗံဝ သမ္ဘောတိ, ဣတိ ဝိဒွါ ဝိဘာဝယေ. "बुद्धिमान माणसाने ते तृतीया विभक्तीच्या पदांशी आणि 'एवं' इत्यादी शब्दांशीच जोडले पाहिजे, असे विद्वानाने जाणावे." အယံ ‘‘ဘဝိတဗ္ဗ’’န္တိ ပဒဿ ဝိသေသော. हे 'भवितब्ब' या पदाचे वैशिष्ट्य आहे. သောတ္ထိ ဘဒ္ဒန္တေ ဟောတု ရညော, သောတ္ထိံ ဂစ္ဆတိ နှာပိတော. သောတ္ထိနာမှိ သမုဋ္ဌိတော. သုဝတ္ထိ, သုဝတ္ထိံ, သုဝတ္ထိနာ, အယံ ဓသာတ္ထိသဒ္ဒါဒီနံ ဝိသေသော. भदन्त, राजाचे कल्याण असो, न्हावी कल्याणाने (सुरक्षितपणे) जातो. मी कल्याणाने युक्त होऊन उठलो आहे. 'सुवत्थि', 'सुवत्थिं', 'सुवत्थिना' - हा 'धसात्थि' इत्यादी शब्दांमधील विशेष (भेद) आहे. အယံ ပန ‘‘အဗ္ဘုတံ အဘူတ’’န္တိ ဒွိန္နံ ဝိသေသော. ဘူသဒ္ဒဿ ဗ္ဘူ, သံယောဂပရေ ပဋိသေဓတ္ထဝတိ အဣတိနိပါတေ ဥပပဒေ သတိ ဧကန္တေန ရဿတ္တမုပယာတိ. ကွတ္ထေ? ‘‘အဘူတပုဗ္ဗံ ဘူတ’’န္တိအာဒီသွတ္ထေသု. တထာဝိဓေ အသညောဂပရေ ရဿတ္တံ န ဥပယာတိ. ကွတ္ထေ? ‘‘အသစ္စ’’န္တိအာဒီသွတ္ထေသု. တထာ ဟိ ‘‘အဗ္ဘုတ’’န္တိ ပဒဿ ‘‘အဘူတပုဗ္ဗံ ဘူတ’’န္တိပိ အတ္ထော ဘဝတိ, ‘‘အဗ္ဘုတကရဏ’’န္တိပိ အတ္ထော ဘဝတိ. ‘‘အဘူတ’’န္တိ ပဒဿ ပန ‘‘အသစ္စ’’န္တိပိ အတ္ထော ဘဝတိ, ‘‘အဇာတ’’န္တိပိ အတ္ထော ဘဝတိ. တတြ ‘‘အစ္ဆရိယံ ဝတ ဘော အဗ္ဘုတံ ဝတ ဘော. အစ္ဆေရံ ဝတ လောကသ္မိံ, အဗ္ဘုတံ လောမဟံသနံ’’ ဣစ္စေဝမာဒယော ‘‘အဘူတပုဗ္ဗံ ဘူတ’’န္တိ အတ္ထေ ပယောဂါ. पण हा 'अब्भुत' (अद्भुत) आणि 'अभूत' या दोन्हीमधील विशेष (भेद) आहे. 'भू' शब्दाचा 'ब्भू' होतो, जेव्हा संयोग पुढे असतो आणि निषेधार्थक 'अ' हा निपात उपपद म्हणून असतो, तेव्हा तो निश्चितपणे र्हस्वत्व प्राप्त करतो. कोणत्या अर्थात? 'अभूतपुब्बं भूतं' (जे पूर्वी कधी घडले नाही ते घडले) इत्यादी अर्थांमध्ये. तशाच प्रकारच्या असंयोगाच्या वेळी र्हस्वत्व प्राप्त होत नाही. कोणत्या अर्थात? 'असच्चं' (असत्य) इत्यादी अर्थांमध्ये. कारण 'अब्भुत' या पदाचा 'अभूतपुब्बं भूतं' असाही अर्थ होतो आणि 'अद्भुत घडवणे' (अब्भुतकरणं) असाही अर्थ होतो. परंतु 'अभूत' या पदाचा 'असत्य' असाही अर्थ होतो आणि 'न जन्मलेले' (अजात) असाही अर्थ होतो. त्यामध्ये 'आश्चर्य आहे, हे गृहस्था! अद्भुत आहे, हे गृहस्था! जगात आश्चर्यकारक आहे, रोमांच उभे करणारे अद्भुत आहे' इत्यादी प्रयोग 'अभूतपुब्बं भूतं' या अर्थात आहेत. ‘‘တွံ မံ နာဂေန အာလမ္ပ,အဟံ မဏ္ဍူကဆာပိယာ; ဟောတု နော အဗ္ဘုတံ တတ္ထ,အာသဟဿေဟိ ပဉ္စဟီ’’တိ "तू मला नागाने दंश करव, मी बेडकीच्या पिल्लाने (दंश करवतो); तिथे पाच हजार (मुद्रांच्या) पैजेवर आपले अद्भुत (कौतुक) होऊ दे." ဣစ္စေဝမာဒယော အဗ္ဘုတကရဏတ္ထေ ပယောဂါ. ဧဝံ ရဿဝသေန, ဒီဃဝသေန ပန နိဿံယောဂေ ‘‘အဘူတံ အတစ္ဆံ. အတထံ’’ဣစ္စေဝမာဒယော [Pg.341] အသစ္စတ္ထေ ပယောဂါ, ‘‘အဘူတံ အဇာတံ အသဉ္ဇာတ’’န္တိ ဣစ္စေဝမာဒယော အဇာတတ္ထေ ပယောဂါ. ဘဝန္တိ စတြ – इत्यादी प्रयोग 'अद्भुत घडवणे' (अब्भुतकरण) या अर्थात आहेत. अशा प्रकारे र्हस्वत्वाच्या नियमाने, आणि दीर्घत्वाच्या नियमाने असंयोगात 'अभूतं अतच्छं, अतथं' (असत्य, अवास्तव, अयथार्थ) इत्यादी प्रयोग असत्य अर्थात आहेत, आणि 'अभूतं अजातं असंजातं' (उत्पन्न न झालेले, न जन्मलेले) इत्यादी प्रयोग अजात अर्थात आहेत. आणि याविषयी पुढील गाथा आहेत – ‘‘အဘူတပုဗ္ဗံ ဘူတ’’န္တိ, အတ္ထသ္မိံ အဗ္ဘုတန္တိဒံ; ပဒံ ဝိညူဟိ ဝိညေယျံ, ရဿဘာဝေန သဏ္ဌိတံ. "जे पूर्वी कधी घडले नाही ते घडले" या अर्थात हे 'अब्भुत' पद र्हस्व रूपाने स्थित आहे, असे विद्वानांनी जाणावे. အဗ္ဘုတကရဏတ္ထေပိ, အဗ္ဘုတန္တိ ပဒံ တထာ; သဏ္ဌိတံ ရဿဘာဝေန, ဣတိ ဝိဒွါ ဝိဘာဝယေ. तसेच 'अद्भुत घडवणे' या अर्थातही 'अब्भुत' हे पद र्हस्व रूपानेच स्थित आहे, असे विद्वानांनी स्पष्ट करावे. အဘူတမိတိ ဒီဃတ္တ-ဝသေန ကထိတံ ပန; ပဒံ သမဓိဂန္တဗ္ဗ-မသစ္စာဇာတဝါစကံ. परंतु दीर्घत्वाच्या नियमाने म्हटलेले 'अभूतं' हे पद असत्य आणि अजात (न जन्मलेले) यांचे वाचक आहे असे समजावे. အဗ္ဘုတံ, အဗ္ဘုတာနိ. စိတ္တနယေန, အဗ္ဘုတော, အဗ္ဘုတာ. အဗ္ဘုတံ, ပုရိသနယေန, အဗ္ဘုတာ, အဗ္ဘုတာ, အဗ္ဘုတာယော. အဗ္ဘုတံ. ကညာနယေန ဉေယျံ. ဧဝံ ဘူတသဒ္ဒဿပိ နာမိကပဒမာလာ တိဓာ ဂဟေတဗ္ဗာ. အတြ ‘‘အဗ္ဘုတ’’မိတိ ပဒံ ဝါစ္စလိင်္ဂမ္ပိ ဘဝတိ အဘိဓေယျလိင်္ဂမ္ပိ. ‘‘အဘူတ’’မိတိ ပဒံ ပန ဝါစ္စလိင်္ဂံ အဘိဓေယျလိင်္ဂမ္ပိ ဝါ သစ္စသဒ္ဒေါ ဝိယ ကတ္ထစိ. ဣတိဿ ယထာရဟံ အယမ္ပိ သပ္ပယောဂါ နာမိကပဒမာလာ ကထိတာ. अब्भुतं, अब्भुतानि (चित्त शब्दाप्रमाणे नपुंसकलिंगात). अब्भुतो, अब्भुता (पुरुष शब्दाप्रमाणे पुल्लिंगात). अब्भुता, अब्भुतायो (कन्या शब्दाप्रमाणे स्त्रीलिंगात) असे जाणावे. याचप्रमाणे 'भूत' शब्दाचीही नामरूपे तिन्ही लिंगांत घ्यावीत. येथे 'अब्भुत' हे पद विशेषण (वाच्यलिंग) आणि विशेष्य (अभिधेयलिंग) दोन्ही होते. परंतु 'अभूत' हे पद 'सच्च' (सत्य) शब्दाप्रमाणे काही ठिकाणी विशेषण आणि विशेष्य दोन्ही होते. अशा प्रकारे योग्यतेनुसार प्रयोगासह ही नामविभक्तीची रूपमाला (नामिकपदमला) सांगितली आहे. ဣဒါနိ အာဂမိကာနံ ကောသလ္လဇနနတ္ထံ ပဒသမောဓာနဝသေန နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ, ဗုဒ္ဓါ ဘဂဝန္တော. ဗုဒ္ဓံ ဘဂဝန္တံ, ဗုဒ္ဓေ ဘဂဝန္တေ. ဗုဒ္ဓေန ဘဂဝတာ, သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. အယံ ပဒမာလာ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဉေယျာ. आता आगम (शास्त्राचा) अभ्यास करणाऱ्यांच्या कौशल्यासाठी पदांच्या संयोगाने नामविभक्तीची रूपमाला सांगितली जात आहे – बुद्धो भगवा (बुद्ध भगवान - प्र. ए.), बुद्धा भगवन्तो (बुद्ध भगवान - प्र. ब.). बुद्धं भगवन्तं (द्वि. ए.), बुद्धे भगवन्ते (द्वि. ब.). बुद्धेन भगवता (तृ. ए.), उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ही रूपमाला एकवचन आणि बहुवचनाच्या नियमाने जाणावी. ဒေဝါ တာဝတိံသာ. ဒေဝေ တာဝတိံသေ. ဒေဝေဟိ တာဝတိံသေဟိ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဗဟုဝစနဝသေန ဉေယျာ ပဒမာလာ. देवा तावतिंसा (तावतिंस देव - प्र. ब.). देवे तावतिंसे (द्वि. ब.). देवेहि तावतिंसेहि (तृ. ब.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ही रूपमाला केवळ बहुवचनाच्या नियमाने जाणावी. သော [Pg.342] ဘဂဝါ ဇာနံ ပဿံ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ, တံ ဘဂဝန္တံ ဇာနန္တံ ပဿန္တံ အရဟန္တံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓံ, တေန ဘဂဝတာ ဇာနတာ ပဿတာ အရဟတာ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေန, တဿ ဘဂဝတော ဇာနတော ပဿတော အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဧကဝစနဝသေန ဉေယျာ ပဒမာလာ. सो भगवा जानं पस्सं अरहं सम्मासम्बुद्धो (ते भगवान जाणणारे, पाहणारे, अर्हत, सम्यक्संबुद्ध आहेत - प्र. ए.), तं भगवन्तं जानन्तं पस्सन्तं अरहन्तं सम्मासम्बुद्धं (त्या जाणणाऱ्या, पाहणाऱ्या, अर्हत, सम्यक्संबुद्ध भगवंतांना - द्वि. ए.), तेन भगवता जानता पस्सता अरहता सम्मासम्बुद्धेन (त्या जाणणाऱ्या, पाहणाऱ्या, अर्हत, सम्यक्संबुद्ध भगवंतांद्वारे - तृ. ए.), तस्स भगवतो जानतो पस्सतो अरहतो सम्मासम्बुद्धस्स (त्या जाणणाऱ्या, पाहणाऱ्या, अर्हत, सम्यक्संबुद्ध भगवंतांचे - च./ष. ए.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ही रूपमाला एकवचनाच्या नियमाने जाणावी. ရာဇာ သုဒ္ဓေါဒနော, ရာဇာနံ သုဒ္ဓေါဒနံ, ရညာ သုဒ္ဓေါဒနေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. राजा सुद्धोदनो (राजा शुद्धोदन - प्र. ए.), राजानं सुद्धोदनं (राजा शुद्धोदनाला - द्वि. ए.), रञ्ञा सुद्धोदनेन (राजा शुद्धोदनाद्वारे - तृ. ए.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ရာဇာ ပဿေနဒီ ကောသလော, ရာဇာနံ ပဿေနဒိံ ကောသလံ, ရညာ ပဿေနဒိနာ ကောသလေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. राजा पस्सेनदी कोसलो (कोसलचा राजा प्रसेनजित - प्र. ए.), राजानं पस्सेनदिं कोसलं (कोसलच्या राजा प्रसेनजिताला - द्वि. ए.), रञ्ञा पस्सेनदिना कोसलेन (कोसलच्या राजा प्रसेनजिताद्वारे - तृ. ए.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ရာဇာ မာဂဓော သေနိယော ဗိမ္ဗိသာရော, ရာဇာနံ မာဂဓံ သေနိယံ ဗိမ္ဗိသာရံ, ရညာ မာဂဓေန သေနိယေန ဗိမ္ဗိသာရေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. राजा मागधो सेनियो बिम्बिसारो (मगधचा राजा श्रेणिक बिंबिसार - प्र. ए.), राजानं मागधं सेनियं बिम्बिसारं (मगधच्या राजा श्रेणिक बिंबिसाराला - द्वि. ए.), रञ्ञा मागधेन सेनियेन बिम्बिसारेन (मगधच्या राजा श्रेणिक बिंबिसाराद्वारे - तृ. ए.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ရာဇာ မာဂဓော အဇာတသတ္တု ဝေဒေဟိပုတ္တော, ရာဇာနံ မာဂဓံ အဇာတသတ္တုံ ဝေဒေဟိပုတ္တံ, ရညာ မာဂဓေန အဇာတသတ္တုနာ ဝေဒေဟိပုတ္တေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. राजा मागधो अजातसत्tu वेदेहिपुत्तो (मगधचा राजा वैदेहीपुत्र अजातशत्रू - प्र. ए.), राजानं मागधं अजातसत्तुं वेदेहिपुत्तं (मगधच्या राजा वैदेहीपुत्र अजातशत्रूला - द्वि. ए.), रञ्ञा मागधेन अजातसत्तुना वेदेहिपुत्तेन (मगधच्या राजा वैदेहीपुत्र अजातशत्रूद्वारे - तृ. ए.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ, မဟာပဇာပတိံ ဂေါတမိံ, မဟာပဇာပတိယာ ဂေါတမိယာတိ ပဉ္စက္ခတ္တုံ ဝတ္တဗ္ဗံ. မဟာပဇာပတိယံ ဂေါတမိယံ, ဘောတိ မဟာပဇာပတိ ဂေါတမိ. महापजापती गोतमी (महाप्रजापती गौतमी - प्र. ए.), महापजापतिं गोतमिं (महाप्रजापती गौतमीला - द्वि. ए.), 'महापजापतिया गोतमिया' असे पाच वेळा (तृतीया ते सप्तमीपर्यंतच्या विभक्तींमध्ये) म्हणावे. महापजापतियं गोतमियं (सप्तमी ए.), भोती महापजापति गोतमी (हे महाप्रजापती गौतमी! - संबोधन ए.). မက္ခလိ ဂေါသာလော. မက္ခလိံ ဂေါသာလံ. မက္ခလိနာ ဂေါသာလေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. मक्खलि गोसालो (मक्खलि गोशाल - प्र. ए.), मक्खलिं गोसालं (मक्खलि गोशालला - द्वि. ए.), मक्खलिना गोसालेन (मक्खलि गोशालद्वारे - तृ. ए.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနံ သာဝကယုဂံ. သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနံ သာဝကယုဂံ, သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနေန သာဝကယုဂေန, သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနဿ [Pg.343] သာဝကယုဂဿ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. သဗ္ဗာပေတာ ပဒမာလာ ဧကဝစနဝသေန ဉေယျာ. သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနာ အဂ္ဂသာဝကာ, သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနေ အဂ္ဂသာဝကေ, သာရိပုတ္တမောဂ္ဂလ္လာနေဟိ အဂ္ဂသာဝကေဟိ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဗဟုဝစနဝသေန ဉေယျာ. ဣတော အညေသုပိ ဧသေဝ နယော. सारिपुत्तमोग्गल्लानं सावकयुगं (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन ही श्रावकजोडी - प्र. ए.), सारिपुत्तमोग्गल्लानं सावकयुगं (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन या श्रावकजोडीला - द्वि. ए.), सारिपुत्तमोग्गल्लानेन सावकयुगेन (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन या श्रावकजोडीद्वारे - तृ. ए.), सारिपुत्तमोग्गल्लानस्स सावकयुगस्स (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन या श्रावकजोडीचे - च./ष. ए.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ही सर्व रूपमाला एकवचनाच्या नियमाने जाणावी. सारिपुत्तमोग्गल्लाना अग्गसावका (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन हे अग्रश्रावक - प्र. ब.), सारिपुत्तमोग्गल्लाने अग्गसावके (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन या अग्रश्रावकांना - द्वि. ब.), सारिपुत्तमोग्गल्लानेहि अग्गसावकेहि (सारिपुत्र-मौद्गल्यायन या अग्रश्रावकांद्वारे - तृ. ब.). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. ही रूपमाला बहुवचनाच्या नियमाने जाणावी. यापुढील इतरांच्या बाबतीतही हाच नियम लागू होतो. သော ဒါရော, သာ ဒါရာ. သံ ဒါရံ, သေ ဒါရေ. သေန ဒါရေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. သာ နာရီ, သာ နာရိယော. သံ နာရိံ, သာ နာရိယော. သာယ နာရိယာ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. သံ ကမ္မံ, သာနိ ကမ္မာနိ. သေန ကမ္မေန. သံ ဖလံ, သာနိ ဖလာနိ. သေန ဖလေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. तो स्वतःचा पती/पत्नी, ती स्वतःची पत्नी. स्वतःची पत्नी (द्वितीया एकवचन), स्वतःच्या पत्नी (द्वितीया बहुवचन). स्वतःच्या पत्नीद्वारे. उर्वरित विस्तार करावा. ती स्त्री, त्या स्त्रिया. स्वतःच्या स्त्रीला, स्वतःच्या स्त्रियांना. स्वतःच्या स्त्रीद्वारे. उर्वरित विस्तार करावा. स्वतःचे कर्म, स्वतःची कर्मे. स्वतःच्या कर्माने. स्वतःचे फळ, स्वतःची फळे. स्वतःच्या फळाने. उर्वरित विस्तार करावा. ပဌမံ ဈာနံ, ပဌမံ ဈာနံ, ပဌမေန ဈာနေန, ပဌမဿ ဈာနဿ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. प्रथम ध्यान (प्रथमा एकवचन), प्रथम ध्यान (द्वितीया एकवचन), प्रथम ध्यानाने (तृतीया एकवचन), प्रथम ध्यानाचे (षष्ठी एकवचन). उर्वरित विस्तार करावा. စတုတ္ထီ ဒိသာ, စတုတ္ထိံ ဒိသံ, စတုတ္ထိယာ ဒိသာယ. चौथी दिशा (प्रथमा), चौथी दिशा (द्वितीया), चौथ्या दिशेने/दिशेचे/दिशेत (तृतीया/षष्ठी/सप्तमी). ဓမ္မီ ကထာ, ဓမ္မိံ ကထံ, ဓမ္မိယာ ကထာယ, ဓမ္မိယံ ကထာယံ. ဧဝံ အနုပုဗ္ဗီ ကထာ, ဧဝရူပီ ကထာ. ဣမိနာ နယေန အညေသုပိ ဌာနေသု ပဒသမောဓာနဝသေန လိင်္ဂတော စ အန္တတော စ ဝစနတော စ အပေက္ခိတဗ္ဗံ. ပဒတော စ နာနပ္ပကာရာ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. धार्मिक कथा (धम्मी कथा), धार्मिक कथेला (धम्मिं कथं), धार्मिक कथेने/कथेची (धम्मिया कथाय), धार्मिक कथेत (धम्मियं कथायं). याचप्रमाणे अनुपूर्वी कथा (अनुपुब्बी कथा), अशा प्रकारची कथा (एवरूपी कथा). या पद्धतीने इतर ठिकाणीही शब्दांच्या जोडणीनुसार लिंग, अंत (अंत्य स्वर) आणि वचनाचा विचार केला पाहिजे. आणि शब्दांनुसार विविध प्रकारच्या नाम-विभक्ती मालिका (नामिकपदमला) जोडल्या पाहिजेत. ဣဒါနိ ဧကပ္ပကာရာနံ သဒ္ဒါနံ လိင်္ဂအန္တဝသေန နာနတ္တံ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ကထံ? ယာဒိသော, ယာဒိသီ, ယာဒိသံ. တာဒိသော, တာဒိသီ, တာဒိသံ. ဧတာဒိသော, ဧတာဒိသီ, ဧတာဒိသံ. ကီဒိသော, ကီဒိသီ, ကီဒိသံ. ဤဒိသော, ဤဒိသီ, ဤဒိသံ. ဧဒိသော[Pg.344], ဧဒိသီ, ဧဒိသံ. သဒိသော, သဒိသီ, သဒိသံ. ကဒါစိ ပန ‘‘ယာဒိသာ တာဒိသာ’’တိ ဧဝမာဒီနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိပိ ဘဝန္တိ. နာမိကပဒမာလာ နေသံ ပုရိသ ဣတ္ထီ စိတ္တနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. आता, एकाच प्रकारच्या शब्दांचे लिंग आणि अंत (अंत्य स्वर) यानुसार असणारे वेगळेपण समजून घेतले पाहिजे. कसे? यादिसो (जसा), यादिसी (जशी), यादिसं (जसे). तादिसो (तसा), तादिसी (तशी), तादिसं (तसे). एतादिसो (यासारखा), एतादिसी (यासारखी), एतादिसं (यासारखे). कीदिसो (कसा), कीदिसी (कशी), कीदिसं (कसे). ईदिसो (असा), ईदिसी (अशी), ईदिसं (असे). एदिसो (असा), एदिसी (अशी), एदिसं (असे). सदिसो (सारखा), सदिसी (सारखी), सदिसं (सारखे). परंतु कधीकधी ‘यादिसा, तादिसा’ इत्यादी स्त्रीलिंगी रूपे देखील होतात. त्यांची नाम-विभक्ती मालिका ‘पुरिस’ (पुल्लिंग), ‘इत्थी’ (स्त्रीलिंग) आणि ‘चित्त’ (नपुंसकलिंग) यांच्या नियमांनुसार जोडली पाहिजे. ဣဒါနိ သမာသတဒ္ဓိတပဒဘူတာနံ အမမသဒ္ဒါဒီနံ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – အမမော, အမမာ, အမမံ, အမမေ. အမမေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. आता, समास आणि तद्धित प्रत्यय लागून बनलेल्या ‘अमम’ (ममत्वरहित) इत्यादी शब्दांची नाम-विभक्ती मालिका सांगितली जात आहे – अममो, अममा, अममं, अममे. अममेन. उर्वरित विस्तार करावा. မယှကော, မယှကာ. မယှကံ, မယှကေ. မယှကေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. मय्हको, mय्हका. मय्हकं, मय्हके. मय्हकेन. उर्वरित विस्तार करावा. အာမာ, အာမာ, အာမာယော. အာမံ, အာမာ, အာမာယော. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. आमा, आमा, आमायो. आमं, आमा, आमायो. उर्वरित विस्तार करावा. တတြ အမမောတိ နတ္ထိ တဏှာမမတ္တံ ဒိဋ္ဌိမမတ္တဉ္စ ဧတဿာတိ အမမော, ကော သော, အရဟာယေဝါတိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. အပိစ ယေသတဏှာပိ သဒိဋ္ဌီပိ ‘‘မမ ဣဒ’’န္တိ မမတ္တံ န ကရောန္တိ, တေပိ အမမာယေဝ. ဧတ္ထ စ ‘‘မနုဿာ တတ္ထ ဇာယန္တိ, အမမာ အပရိဂ္ဂဟာ’’တိ ဣဒံ သာသနတော နိဒဿနံ. ‘‘အမမော နိရဟင်္ကာရော’’တိ ဣဒံ ပန လောကတော နိဒဿနံ. ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘အမမာ, အမမာ, အမမာယော’’တိ ပဒမာလာ. နပုံသကေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘အမမံ, အမမာနီ’’တိ ပဒမာလာ. တတြ မယှကောတိ ‘‘ဣဒမ္ပိ မယှံ ဣဒမ္ပိ မယှ’’န္တိ ဝိပ္ပလပတီတိ မယှကော, ဧကော ပက္ခိဝိသေသော. ဝုတ္တဉှေတံ ဇာတကေ – तेथे ‘अमम’ म्हणजे: ज्यांच्यामध्ये तृष्णा-ममत्व (तृष्णेमुळे निर्माण होणारे ममत्व) आणि दृष्टी-ममत्व (चुकीच्या धारणेमुळे निर्माण होणारे ममत्व) नाही, ते ‘अमम’ होत. ते कोण? ते केवळ ‘अर्हत’ (अरिहंत) आहेत, असे म्हणणे योग्य ठरेल. शिवाय, ज्यांच्यामध्ये तृष्णा आणि दृष्टी असूनही ते ‘हे माझे आहे’ असे ममत्व करत नाहीत, ते देखील ‘अमम’च आहेत. आणि येथे “मनुष्य तेथे जन्मतात, जे ममत्वरहित आणि परिग्रहरहित असतात” (मनुस्सा तत्थ जायन्ति, अममा अपरिग्गहा) हे शासनातील (बुद्धवचनातील) उदाहरण आहे. “ममत्वरहित आणि अहंकाररहित” (अममो निरहंकारो) हे लौकिक जगातील उदाहरण आहे. स्त्रीलिंगात रूपे सांगताना ‘अममा, अममा, अममायो’ अशी शब्दमालिका होते. नपुंसकलिंगात रूपे सांगताना ‘अममं, अममानि’ अशी शब्दमालिका होते. तेथे ‘मय्हको’ म्हणजे: “हे माझे आहे, हेही माझे आहे” असे ओरडणारा तो ‘मय्हको’ नावाचा एक विशिष्ट पक्षी आहे. जातक कथेमध्ये असे म्हटले आहे की – ‘‘သကုဏော မယှကော နာမ, ဂိရိသာနုဒရီစရော; ပက္ကံ ပိပ္ဖလိမာရုယှ, ‘မယှံ မယှ’န္တိ ကန္ဒတီ’’တိ. “‘मय्हक’ नावाचा पक्षी, जो पर्वताच्या शिखरांवर आणि गुहांमध्ये फिरतो; तो पिकलेल्या पिंपळाच्या (किंवा फळाच्या) झाडावर चढून ‘माझे, माझे’ म्हणून ओरडतो.” ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘မယှကီ, မယှကီ, မယှကိယော’’တိ ပဒမာလာ. တတြ အာမာတိ ‘‘အာမ အဟံ တုမှာကံ ဒါသီ’’တိ ဧဝံ ဒါသိဘာဝံ ပဋိဇာနာတီတိ အာမာ. ဂေဟဒါသီ. ဝုတ္တဉှေတံ ဇာတကေသု [Pg.345] ‘‘ယတ္ထ ဒါသော အာမဇာတော, ဌိတော ထုလ္လာနိ ဂစ္ဆတီ’’တိ စ, ‘‘အာမာယ ဒါသာပိ ဘဝန္တိ လောကေ’’တိ စ, တသ္မာ ဣမာနေဝေတ္ထ နိဒဿနပဒါနိ. स्त्रीलिंगात रूपे सांगताना ‘मय्हकी, मय्हकी, मय्हकियो’ अशी शब्दमालिका होते. तेथे ‘आमा’ म्हणजे: “होय, मी तुमची दासी आहे” अशा प्रकारे दासी असणे स्वीकारते ती ‘आमा’ (घरातील दासी) होय. जातक कथांमध्ये असे म्हटले आहे की – “जिथे घरात जन्मलेला दास (आमजातो) राहून उद्धटपणे वागतो” आणि “जगात आमाचे (दासीचे) देखील दास असतात”, म्हणून हीच येथे उदाहरणाची पदे आहेत. ဣဒါနိ ကတိ ကတိပယ ကတိမီသဒ္ဒါနံ ဝိသေသော ဝုစ္စတေ ယထာရဟံ နာမိကပဒမာလာ စ. တတြ ကတိမီသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ န လဗ္ဘတိ ‘‘အဇ္ဇ ဘန္တေ ကတိမီ’’တိ ဧဝံ ပုစ္ဆာဝသေန အာဂတမတ္တတော. ကတိ ကတိပယသဒ္ဒါနံ ပန လဗ္ဘတေဝ, သာ စ ဗဟုဝစနိကာ. ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂဋီကာယံ ပန ကတိပယသဒ္ဒေါ ဧကဝစနိကော ဝုတ္တော. ကတိ ပုရိသာ တိဋ္ဌန္တိ, ကတိ ပုရိသေ ပဿတိ. ကတိ ဣတ္ထိယော, ကတိ ကုလာနိ. ကတိ လောကသ္မိံ ဆိဒ္ဒါနိ ယတ္ထ စိတ္တံ န တိဋ္ဌတိ. ကတိ ကုသလာ. ကတိ ဓာတုယော. ကတိ အာယတနာနိ. ကတိဟိ ခန္ဓေဟိ ကတိဟာယတနေဟိ ကတိဟိ ဓာတူဟိ သင်္ဂဟိတံ. ကတိဘိ ရဇမာနေတိ, ကတိဘိ ပရိသုဇ္ဈတိ. ကတိပယာ ပုရိသာ, ကတိပယာ ဣတ္ထိယော, ကတိပယာနိ စိတ္တာနိ. ဣမာ ပန နာမိကပဒမာလာ. आता ‘कति’ (किती), ‘कतिपय’ (काही/अल्प) आणि ‘कतिमी’ (कितवी/कितवा) या शब्दांचे वैशिष्ट्य आणि त्यांची योग्य नाम-विभक्ती मालिका सांगितली जात आहे. तेथे ‘कतिमी’ या शब्दाची नाम-विभक्ती मालिका आढळत नाही, कारण तो केवळ “भन्ते, आज कितवी तिथी आहे?” (अज्ज भन्ते कतिमी) अशा प्रश्नाच्या स्वरूपातच येतो. परंतु ‘कति’ आणि ‘कतिपय’ या शब्दांची विभक्ती रूपे नक्कीच आढळतात आणि ती बहुवचनात असतात. विसुद्धिमग्ग-टीकेमध्ये मात्र ‘कतिपय’ हा शब्द एकवचनी सांगितला आहे. किती पुरुष उभे आहेत? तो किती पुरुषांना पाहतो? किती स्त्रिया? किती कुळे? जगात अशी किती छिद्रे आहेत जिथे चित्त स्थिर राहत नाही? किती कुशल (धर्म) आहेत? किती धातू आहेत? किती आयतने आहेत? किती स्कंधांनी, किती आयतनांनी आणि किती धातूंनी संग्रह केला आहे? किती गोष्टींनी मनुष्य मलिन होतो, किती गोष्टींनी तो शुद्ध होतो? काही पुरुष, काही स्त्रिया, काही चित्ते. या त्यांच्या नाम-विभक्ती मालिका आहेत. ကတိ. ကတိဟိ, ကတိဘိ. ကတိနံ. ကတိသု. कति. कतिहि, कतिभि. कतिनं. कतिसु. ကတိပယာ. ကတိပယေဟိ, ကတိပယေဘိ. ကတိပယာနံ. ကတိပယေသု. ကတိပယာယော. ကတိပယာဟိ, ကတိပယာဘိ. ကတိပယာနံ. ကတိပယာသု. ကတိပယာနိ. ကတိပယေ. ကတိပယေဟိ, ကတိပယေဘိ. ကတိပယာနံ. ကတိပယေသူတိ. သဗ္ဗာပေတာ သတ္တန္နံ ဝိဘတ္တီနံ ဝသေန ဉေယျာ, သမာသဝိဓိမှိပိ ကတိ [Pg.346] ကတိပယသဒ္ဒါ ဗဟုဝစနဝသေနေဝ ယောဇေတဗ္ဗာ. ‘‘ကတိသင်္ဂါတိဂေါ ဘိက္ခု, ဩဃတိဏ္ဏောတိ ဝုစ္စတိ. ကတိပယဇနကတ’’န္တိအာဒီသု ဟိ ‘‘ကတိ ကိတ္တကာ သင်္ဂါ ကတိသင်္ဂါ’’တိအာဒိနာ သဗ္ဗဒါ ဗဟုဝစနသမာသော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. कतिपया. कतिपयेहि, कतिपयेभि. कतिपयानं. कतिपयेसु. कतिपयायो. कतिपयाहि, कतिपयाभि. कतिपयानं. कतिपयासु. कतिपयानि. कतिपये. कतिपयेहि, कतिपयेभि. कतिपयानं. कतिपयेसूति. हे सर्व सातही विभक्तींच्या नियमांनुसार समजून घ्यावे. समासाच्या नियमांमध्ये देखील ‘कति’ आणि ‘कतिपय’ हे शब्द बहुवचनाच्या अर्थानेच जोडले पाहिजेत. कारण “किती आसक्ती पार केलेला भिक्खू ओघ उत्तीर्ण झालेला (संसार पूर पार केलेला) म्हटला जातो” (कतिसङ्गातिगो भिक्खु, ओघतिण्णोति वुच्चति) आणि “काही लोकांनी केलेले” (कतिपयजनकतं) इत्यादींमध्ये “किती आणि केवढ्या आसक्ती म्हणजे कतिसङ्ग” अशा प्रकारे नेहमी बहुवचनी समास समजला पाहिजे. ဣဒါနိ ရူဠှီသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – ဣဓ ရူဠှီသဒ္ဒါ နာမ ယေဝါပနကသဒ္ဒါဒယော. ယေဝါပနကော, ယေဝါပနကာ. ယေဝါပနကံ. ယေဝါပနော, ယေဝါပနာ. ယေဝါပနံ. ယံဝါပနကံ, ယံဝါပနကာနိ. သေသံ သဗ္ဗတ္ထ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. တတြ ယေဝါပနကောတိ ‘‘ဖဿော ဟောတိ ဝေဒနာ ဟောတီ’’တိအာဒိနာ ဝုတ္တာ ဖဿာဒယော ဝိယ သရူပတော အဝတွာ ‘‘ယေ ဝါ ပန တသ္မိံ သမယေ အညေပိ အတ္ထိ ပဋိစ္စသမုပ္ပန္နာ အရူပိနော ဓမ္မာ’’တိ ဧဝံ ‘‘ယေဝါပနာ’’တိ ပဒေန ဝုတ္တော ယေဝါပနကော, ဧဝံ ‘‘ယေဝါပနော’’တိ ဧတ္ထာပိ. တထာ ‘‘ယံ ဝါ ပနညမ္ပိ အတ္ထိ ရူပ’’န္တိ ဧဝံ ‘‘ယံဝါပနာ’’တိ ပဒေန ဝုတ္တံ ယံဝါပနကံ. ဧသ နယော ယထာရဟံ ယဿကံ ယတ္ထကန္တိအာဒီသုပိ နေတဗ္ဗော. आता रूढ शब्दांची (रूळ्हीसद्दा) नाम-विभक्ती मालिका सांगितली जात आहे – येथे रूढ शब्द म्हणजे ‘येवापनक’ इत्यादी शब्द होत. येवापनको, येवापनका. येवापनकं. येवापनो, येवापना. येवापनं. यंवापनकं, यंवापनकानि. उर्वरित सर्व ठिकाणी विस्तार करावा. तेथे ‘येवापनको’ म्हणजे: “स्पर्श होतो, वेदना होते” इत्यादींप्रमाणे स्वतःच्या रूपात न सांगता, “किंवा त्या वेळी जे इतरही प्रतीत्यसमुत्पन्न अरूप धर्म (मानसिक धर्म) अस्तित्वात असतात” अशा प्रकारे ‘येवापना’ या पदाने जो सांगितला जातो तो ‘येवापनको’ होय. याचप्रमाणे ‘येवापनो’ यामध्येही समजावे. तसेच “किंवा इतर जे काही रूप अस्तित्वात आहे” अशा प्रकारे ‘यंवापना’ या पदाने जे सांगितले जाते ते ‘यंवापनकं’ होय. हाच नियम योग्यतेनुसार ‘यस्सकं’, ‘यत्थकं’ इत्यादींमध्येही लावला पाहिजे. ဧတ္ထ သိယာ – နနု စ ဘော ပနသဒ္ဒေါ နိပါတော, နိပါတာနဉ္စ အဗျယဘာဝေါ သိဒ္ဓေါ တီသု လိင်္ဂေသု သဗ္ဗဝိဘတ္တိဝစနေသု စ ဝယာဘာဝတော, သော ကသ္မာ ‘‘ယေဝါပနော’’တိ ဩကာရန္တော ဇာတောတိ? သစ္စံ ပနသဒ္ဒေါ နိပါတော, သော စ ခေါ ‘‘ယေ ဝါ ပန တသ္မိံ သမယေ’’တိ ဝါ, ‘‘ယံ ဝါ ပနညမ္ပီ’’တိ ဝါ, ‘‘ဗြာဟ္မဏာ ပနာ’’တိ ဝါ ဧဝမာဒီသု နိပါတော, ‘‘ယေဝါပနကော’’တိ ဝါ, ‘‘ယေဝါပနော’’တိ ဝါ ဧဝမာဒီသု နိပါတော နာမ န ဟောတိ. အနုကရဏမတ္တဉှေတံ, တသ္မာ ဤဒိသေသု ပနသဒ္ဒသဟိတာ ပယောဂါ ရူဠှီသဒ္ဒါတိ ဂဟေတဗ္ဗာ. ယဇ္ဇေဝံ ကသ္မာ နိဗ္ဗစနမုဒါဟဋန္တိ? အတ္ထဿ ပါကဋီကရဏတ္ထံ. येथे शंका उपस्थित होऊ शकते – हे महाशय, ‘पन’ हा शब्द तर निपात (अव्यय) आहे, आणि तिन्ही लिंगांत, सर्व विभक्तींत व वचनांत कोणताही बदल होत नसल्यामुळे निपातांचे अव्ययत्व सिद्ध आहे, मग तो “येवापनो” असा ओ-कारान्त कसा झाला? हे सत्य आहे की ‘पन’ हा शब्द निपात आहे, आणि तो “ये वा पन तस्मिं समये” किंवा “यं वा पनञ्ञम्पि” किंवा “ब्राह्मणा पना” इत्यादींमध्ये निपात आहे; परंतु “येवापनको” किंवा “येवापनो” इत्यादींमध्ये तो निपात राहत नाही. हे केवळ अनुकरण मात्र आहे, म्हणून अशा ठिकाणी ‘पन’ शब्दासह असणारे प्रयोग हे रूढ शब्द (रूळ्हीसद्दा) म्हणून स्वीकारले पाहिजेत. जर असे आहे, तर मग याचे उदाहरण का दिले आहे? अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी. တယောဓမ္မဇာတကံ[Pg.347]. တယောဓမ္မဇာတကံ. တယောဓမ္မဇာတကေန. တယောဓမ္မဇာတကဿ. တယောဓမ္မဇာတကာ, တယောဓမ္မဇာတကသ္မာ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. तयोधम्मजातकं (प्रथमा), तयोधम्मजातकं (द्वितीया), तयोधम्मजातकेन (तृतीया), तयोधम्मजातकस्स (चतुर्थी/षष्ठी), तयोधम्मजातका, तयोधम्मजातकस्मा (पंचमी). उर्वरित भाग सविस्तर जाणावा. တယောသင်္ခါရာ. တယောသင်္ခါရေ. တယောသင်္ခါရေဟိ, တယောသင်္ခါရေဘိ. တယောသင်္ခါရာနံ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. तयोसंखारा (प्रथमा), तयोसंखारे (द्वितीया), तयोसंखारेहि, तयोसंखारेभि (तृतीया/पंचमी), तयोसंखाराणं (चतुर्थी/षष्ठी). उर्वरित भाग सविस्तर जाणावा. စတ္တာရိပုရိသယုဂေါ သံဃော. စတ္တာရိပုရိသယုဂံ သံဃံ. စတ္တာရိပုရိသယုဂေန သံဃေန. စတ္တာရိပုရိသယုဂဿ သံဃဿ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. चत्तारिपुरिसयुगो संघो (प्रथमा), चत्तारिपुरिसयुगं संघं (द्वितीया), चत्तारिपुरिसयुगेन संघेन (तृतीया), चत्तारिपुरिसयुगस्स संघस्स (चतुर्थी/षष्ठी). उर्वरित भाग सविस्तर जाणावा. သတောကာရီ, သတောကာရီ, သတောကာရိနော. သတောကာရိံ, သတောကာရီ, သတောကာရိနော. သတောကာရိနာ, သတောကာရီဟိ, သတောကာရီဘိ. သတောကာရိဿ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဧတ္ထ သတောကာရီတိ သရတီတိ သတော, သတော ဧဝ ဟုတွာ ကရဏသီလောတိ သတောကာရီ. सतोकारी, सतोकारी, सतोकारिनो (प्रथमा). सतोकारिं, सतोकारी, सतोकारिनो (द्वितीया). सतोकारिना, सतोकारीहि, सतोकारीभि (तृतीया/पंचमी). सतोकारिस्स (चतुर्थी/षष्ठी). उर्वरित भाग सविस्तर जाणावा. येथे 'सतोकारी' म्हणजे: जो स्मरण करतो तो 'सतो' (स्मृतिमान), आणि स्मृतिमान होऊनच कार्य करण्याची सवय असलेला तो 'सतोकारी' होय. အပရေသမ္ပိ ရူဠှီသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ သဒ္ဓိမတ္ထဝိဘာဝနာယ. အင်္ဂါ. အင်္ဂေ. အင်္ဂေဟိ, အင်္ဂေဘိ. အင်္ဂါနံ. အင်္ဂေဟိ, အင်္ဂေဘိ. အင်္ဂါနံ. အင်္ဂေသု. ဘောန္တော အင်္ဂါ. इतरही रूढ शब्दांची (संज्ञांची) नामविभक्ती रूपे (नामिकपद्माला) अर्थ स्पष्टीकरणासह सांगितली जात आहेत. अंगा (प्रथमा). अंगे (द्वितीया). अंगेहि, अंगेभि (तृतीया). अंगानं (चतुर्थी). अंगेहि, अंगेभि (पंचमी). अंगानं (षष्ठी). अंगेसु (सप्तमी). भोन्तो अंगा (संबोधन). အင်္ဂါ ဇနပဒေါ. အင်္ဂေ ဇနပဒံ. အင်္ဂေဟိ, အင်္ဂေဘိ ဇနပဒေန. အင်္ဂါနံ ဇနပဒဿ. အင်္ဂေဟိ, အင်္ဂေဘိ ဇနပဒသ္မာ. အင်္ဂါနံ ဇနပဒဿ. အင်္ဂေသု ဇနပဒေ. ဘောန္တော အင်္ဂါ ဇနပဒ. ဧဝံ မဂဓကောသလာဒီနမ္ပိ ယောဇေတဗ္ဗာ. अंगा जनपदो (प्रथमा). अंगे जनपदं (द्वितीया). अंगेहि, अंगेभि जनपदेन (तृतीया). अंगानं जनपदस्स (चतुर्थी). अंगेहि, अंगेभि जनपदस्मा (पंचमी). अंगानं जनपदस्स (षष्ठी). अंगेसु जनपदे (सप्तमी). भोन्तो अंगा जनपद (संबोधन). याचप्रमाणे मगध, कोसल इत्यादींचेही रूप बनवावे. ဣတ္ထိလိင်္ဂေ ကာသီ, ကာသိယော, ကာသီ, ကာသိယော. ကာသီဟိ, ကာသီဘိ. ကာသီနံ. ကာသီဟိ, ကာသီဘိ. ကာသီနံ. ကာသီသု. ဘောတိယော ကာသိယော. အတြာယမတ္ထဝိဘာဝနာ – ကာသီ, ကာသိယော ဇနပဒေါ. ကာသီ, ကာသိယော ဇနပဒံ[Pg.348]. ကာသီဟိ, ကာသီဘိ ဇနပဒေန. ကာသီနံ ဇနပဒဿ. ကာသီဟိ, ကာသီဘိ ဇနပဒသ္မာ. ကာသီနံ ဇနပဒဿ. ကာသီသု ဇနပဒေ. ဘောတိယော ကာသိယော ဇနပဒ. ဧဝံ အဝန္တီစေတီ ဝဇ္ဇီ ဣစ္စေတေသမ္ပိ ပဒါနံ ယောဇေတဗ္ဗာ. တေနာဟု အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘ကုရူသု ဇနပဒေ’’တိ. ဧဝံ အင်္ဂါဒီနိ အတ္ထဿ ဧကတ္တေပိ ဇနပဒနာမတ္တာ ရူဠှီဝသေန ဗဟုဝစနာနေဝ ဘဝန္တိ. တထာ ဟိ တတ္ထ တတ္ထ ‘‘အင်္ဂေသု ဝိဟရတိ. မဂဓေသု စာရိကံ စရမာနော’’တိအာဒိနာ, ‘‘အင်္ဂါနံ မဂဓာနံ ကာသီနံ ကောသလာန’’န္တိအာဒိနာ စ ဗဟုဝစနပါဠိယော ဒိဿန္တိ. ဧဝံ ရူဠှီသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ဘဝန္တိ. स्त्रीलिंगात कासी, कासियो (प्रथमा), कासी, कासियो (द्वितीया). कासीहि, कासीभि (तृतीया/पंचमी). कासीनं (चतुर्थी/षष्ठी). कासीसु (सप्तमी). भोतियो कासियो (संबोधन). येथे हा अर्थ स्पष्ट केला आहे – कासी, कासियो जनपदो (प्रथमा). कासी, कासियो जनपदं (द्वितीया). कासीहि, कासीभि जनपदेन (तृतीया). कासीनं जनपदस्स (चतुर्थी). कासीहि, कासीभि जनपदस्मा (पंचमी). कासीनं जनपदस्स (षष्ठी). कासीसु जनपदे (सप्तमी). भोतियो कासियो जनपद (संबोधन). याचप्रमाणे अवंती, चेती, वज्जी या शब्दांचेही रूप बनवावे. म्हणूनच अट्ठकथाचार्यांनी "कुरूसु जनपदे" (कुरु देशात) असे म्हटले आहे. अशा प्रकारे, अंग इत्यादी देशांचे नाव एकवचनी अर्थात असले तरी, जनपदवाचक नाम असल्यामुळे रूढीनुसार ते नेहमी बहुवचनातच असतात. कारण ठिकठिकाणी "अंगेसु विहरति" (अंग देशात विहार करतात), "मगधेसु चारिकं चरमानो" (मगध देशात चारिका करत असताना) इत्यादी, आणि "अंगानं मगधानं कासीनं कोसलानं" (अंग, मगध, कासी, कोसल देशांचे) इत्यादी बहुवचनी पाळी (पाठांतर) आढळतात. अशा प्रकारे रूढ शब्दांची नामविभक्ती रूपे (नामिकपद्माला) होतात. ဣဒါနိ အပရာပိ ဣတော သဝိသေသတရာ သဒ္ဒဘေဒေ သမ္မောဟဝိဒ္ဓံသနကာရိကာ ပရမသုခုမဉာဏာဝဟာ နာမိကပဒမာလာယော ကထယာမ သောတူနံ အတ္ထဗျဉ္ဇနဂ္ဂဟဏေ ပရမကောသလ္လသမ္ပာဒနတ္ထံ. တာ စ ခေါ ‘‘သမ္ဗုဒ္ဓေါ ပဋိဇာနာသိ. ကဿကော ပဋိဇာနာသိ. ဥပါသကော ပဋိဇာနာသိ. သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ တေ ပဋိဇာနတော ဣမေ ဓမ္မာ အနဘိသမ္ဗုဒ္ဓါ’’တိအာဒယော ပါဠိနယေ နိဿာယေဝ. တတ္ထ သမ္ဗုဒ္ဓေါပဋိဇာနာသီတိ ‘‘တွံ ‘အဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ’တိ ပဋိဇာနာသီ’’တိ ဣတိသဒ္ဒလောပဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဧသ နယော ‘‘ကဿကော ပဋိဇာနာသီ’’တိအာဒီသုပိ. ‘‘သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ တေ ပဋိဇာနတော’’တိ ဧတ္ထ ပန ‘‘အဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ’’တိ ပဋိဇာနန္တဿ တဝါတိ ဧဝံ ဣတိသဒ္ဒလောပယောဇနာဝသေန အညော သဒ္ဒသန္နိဝေသော တေနေဝ အညော အတ္ထပဋိဝေဓော စ ဘဝတိ. ‘‘ခီဏာသဝဿ တေ ပဋိဇာနတောတိ’’အာဒီသုပိ ဧသေဝ နယော. အဋ္ဌကထာယံ ပန သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ တေ ပဋိဇာနတောတိ ‘‘အဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ, သဗ္ဗေ ဓမ္မာ မယာ အဘိသမ္ဗုဒ္ဓါ’’တိ [Pg.349] ဧဝံ ပဋိဇာနတော တဝါတိ ယော အတ္ထော ဝုတ္တော, သောပိ ယထာဒဿိတော အတ္ထောယေဝ. ဧဝံပကာရံ ဉတွာ ပဏ္ဍိတဇာတိယေန ကုလပုတ္တေန အမှေဟိ ဝုစ္စမာနာ ‘‘အဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ’တိ တွံ ပဋိဇာနာသီ’’တိ ဧတသ္မိံ အတ္ထေ သကြိယာပဒါ အယံ ပဒမာလာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ – आता आम्ही श्रोत्यांना अर्थ आणि व्यंजनांचे (शब्दांचे) ग्रहण करण्यात परम कौशल्य प्राप्त करून देण्यासाठी, शब्दांच्या भेदांमधील संभ्रम नष्ट करणारी आणि अत्यंत सूक्ष्म ज्ञान देणारी आणखी एक विशेष नामविभक्ती रूपे (नामिकपद्माला) सांगतो. ती "सम्बुद्धो पटिजानासि" (तू स्वतःला सम्यक्संबुद्ध म्हणवतोस), "कस्सको पटिजानासि" (तू स्वतःला शेतकरी म्हणवतोस), "उпасको पटिजानासि" (तू स्वतःला उपासक म्हणवतोस), "सम्मासम्बुद्धस्स ते पटिजानतो इमे धम्मा अनभिसम्बुद्धा" (सम्यक्संबुद्ध असल्याचा दावा करणाऱ्या तुला हे धर्म अवगत नाहीत) इत्यादी पाळी पद्धतीवरच आधारित आहेत. त्यामध्ये 'सम्बुद्धो पटिजानासि' याचा अर्थ 'इति' शब्दाच्या लोपामुळे "तू 'मी सम्यक्संबुद्ध आहे' असा दावा करतोस" असा घ्यावा. हाच नियम "कस्सको पटिजानासि" इत्यादींमध्येही लागू होतो. परंतु "सम्मासम्बुद्धस्स ते पटिजानतो" येथे "मी सम्यक्संबुद्ध आहे असा दावा करणाऱ्या तुला" अशा प्रकारे 'इति' शब्दाच्या लोपाच्या योजनेमुळे वेगळी शब्दरचना होते आणि त्यामुळे वेगळा अर्थबोध होतो. "खीणासवस्स ते पटिजानतो" (क्षीणास्रव असल्याचा दावा करणाऱ्या तुला) इत्यादींमध्येही हाच नियम आहे. अट्ठकथेत "सम्मासम्बुद्धस्स ते पटिजानतो" याचा जो अर्थ "मी सम्यक्संबुद्ध आहे, सर्व धर्म मी जाणले आहेत, असा दावा करणाऱ्या तुला" असा सांगितला आहे, तो देखील दर्शविल्याप्रमाणेच आहे. हे जाणून घेऊन, बुद्धिमान कुलपुत्राने आमच्याद्वारे सांगितल्या जाणाऱ्या "मी सम्यक्संबुद्ध आहे असा तू दावा करतोस" या अर्थातील क्रियापदासह ही नामिकपद्माला (विभक्ती रूपे) निश्चित करावी – သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ တွံ ပဋိဇာနံ တိဋ္ဌသိ. သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓံ တံ ပဋိဇာနန္တံ ပဿတိ. သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေန တေ ပဋိဇာနတာ ဓမ္မော ဒေသိတော. သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ တေ ပဋိဇာနတော ဒီယတေ. သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓသ္မာ တယာ ပဋိဇာနတာ အပေတိ. သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ တေ ပဋိဇာနတော ဓမ္မော. သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓသ္မိံ တယိ ပဋိဇာနန္တေ ပတိဋ္ဌိတန္တိ. တထာ ‘‘ခီဏာသဝေါ တွံ ပဋိဇာနာသီ’’တိအာဒိနာပိ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. सम्मासम्बुद्धो त्वं पटिजानं तिट्ठसि (तू स्वतःला सम्यक्संबुद्ध म्हणवून घेत उभा आहेस). सम्मासम्बुद्धं तं पटिजानन्तं पस्सति (तो तुला स्वतःला सम्यक्संबुद्ध म्हणवून घेताना पाहतो). सम्मासम्बुद्धेन ते पटिजानता धम्मो देसितो (स्वतःला सम्यक्संबुद्ध म्हणवून घेणाऱ्या तुझ्याद्वारे धम्म उपदेशिला गेला). सम्मासम्बुद्धस्स ते पटिजानतो दीयते (स्वतःला सम्यक्संबुद्ध म्हणवून घेणाऱ्या तुला दिले जाते). सम्मासम्बुद्धस्मा तया पटिजानता अपेति (स्वतःला सम्यक्संबुद्ध म्हणवून घेणाऱ्या तुझ्यापासून दूर जाते). सम्मासम्बुद्धस्स ते पटिजानतो धम्मो (स्वतःला सम्यक्संबुद्ध म्हणवून घेणाऱ्या तुझा धम्म). सम्मासम्बुद्धस्मिं तयि पटिजानन्ते पतिट्ठितं (स्वतःला सम्यक्संबुद्ध म्हणवून घेणाऱ्या तुझ्यात प्रतिष्ठित आहे). याचप्रमाणे "खीणासवो त्वं पटिजानासि" (तू स्वतःला क्षीणास्रव म्हणवतोस) इत्यादींद्वारेही विस्तार करावा. ဣဒ္ဓိမာ ဘိက္ခု ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောတိ, ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောတိ. ဣဒ္ဓိမန္တော ဘိက္ခူ ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တိ, ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တီတိ ဣမသ္မိံ ပနတ္ထေ အယမ္ပိ သကြိယာပဒါ ပဒမာလာ ဝဝတ္ထပေတဗ္ဗာ – ऋद्धिमान भिक्खू एक असूनही अनेक होतो, आणि अनेक असूनही एक होतो. ऋद्धिमान भिक्खू एक असूनही अनेक होतात, आणि अनेक असूनही एक होतात. या अर्थामध्ये क्रियापदासह ही नामिकपद्माला (विभक्ती रूपे) देखील निश्चित करावी – ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တော ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တော ဘိက္ခု တိဋ္ဌတိ, ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တာ ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တာ ဘိက္ခူ တိဋ္ဌန္တိ. ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တံ ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တံ ဘိက္ခုံ ပဿတိ, ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တေ ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တေ ဘိက္ခူ ပဿတိ. ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တေန ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တေန ဘိက္ခုနာ ဓမ္မော ဒေသိတော, ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တေဟိ ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တေဟိ ဘိက္ခူဟိ ဓမ္မော ဒေသိတော. ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တဿ ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တဿ ဘိက္ခုနော ဒီယတေ. သေသံ [Pg.350] ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဘော ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တ ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တ ဘိက္ခု တွံ ဓမ္မံ ဒေသေဟိ, ဘောန္တော ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တာ ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တာ တုမှေ ဓမ္မံ ဒေသေထာတိ. ဣမသ္မိံ ဌာနေ ကေဝဋ္ဋသုတ္တံ သာဓကံ. ‘‘ဣဓ ကေဝဋ္ဋ ဘိက္ခု အနေကဝိဟိတံ ဣဒ္ဓိဝိဓံ ပစ္စနုဘောတိ. ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောတိ, ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောတိ, အာဝိဘာဝံ…ပေ… တမေနံ အညတရော သဒ္ဓေါ ပသန္နော ပဿတိ တံ ဘိက္ခုံ အနေကဝိဟိတံ ဣဒ္ဓိဝိဓံ ပစ္စနုဘောန္တံ ဧကောပိ ဟုတွာ ဗဟုဓာ ဟောန္တံ ဗဟုဓာပိ ဟုတွာ ဧကော ဟောန္တ’’န္တိ ဣဒံ ကေဝဋ္ဋသုတ္တံ. एकोपि हुत्वा बहुधा होन्तो बहुधापि हुत्वा एको होन्तो भिक्खु तिट्ठति (एक असूनही अनेक होणारा आणि अनेक असूनही एक होणारा भिक्खू उभा राहतो), एकोपि हुत्वा bahudhā hoñtā bahudhāpi huṭvā eko hoñtā भिक्खू तिट्ठन्ति (एक असूनही अनेक होणारे आणि अनेक असूनही एक होणारे भिक्खू उभे राहतात). एकोपि हुत्वा बहुधा होन्तं बहुधापि हुत्वा एको होन्तं भिक्खुं पस्सति (एक असूनही अनेक होणाऱ्या आणि अनेक असूनही एक होणाऱ्या भिक्खूला पाहतो), एकोपि हुत्वा बहुधा होन्ते बहुधापि हुत्वा एको होन्ते भिक्खू पस्सति (एक असूनही अनेक होणाऱ्या आणि अनेक असूनही एक होणाऱ्या भिक्खूंना पाहतो). एकोपि हुत्वा बहुधा होन्तेन बहुधापि हुत्वा एको होन्तेन भिक्खुना धम्मो देसितो (एक असूनही अनेक होणाऱ्या आणि अनेक असूनही एक होणाऱ्या भिक्खूद्वारे धम्म उपदेशिला गेला), एकोपि हुत्वा बहुधा होन्तेहि बहुधापि हुत्वा एको होन्तेहि भिक्खूहि धम्मो देसितो (एक असूनही अनेक होणाऱ्या आणि अनेक असूनही एक होणाऱ्या भिक्खूंद्वारे धम्म उपदेशिला गेला). एकोपि हुत्वा बहुधा होन्तस्स बहुधापि हुत्वा एको होन्तस्स भिक्खुनो दीयते (एक असूनही अनेक होणाऱ्या आणि अनेक असूनही एक होणाऱ्या भिक्खूला दिले जाते). उर्वरित भाग सविस्तर जाणावा. भो एकोपि हुत्वा बहुधा होन्त बहुधापि हुत्वा एको होन्त भिक्खु त्वं धम्मं देसेहि (हे एक असूनही अनेक होणाऱ्या आणि अनेक असूनही एक होणाऱ्या भिक्खू, तू धम्माचा उपदेश कर!), भोन्तो एकोपि हुत्वा बहुधा होन्ता बहुधापि हुत्वा एको होन्ता तुम्हे धम्मं देसेथा (हे एक असूनही अनेक होणारे आणि अनेक असूनही एक होणारे भिक्खूहो, तुम्ही धम्माचा उपदेश करा!). या ठिकाणी केवट्टसुत्त हे प्रमाण आहे. "हे केवट्ट, येथे भिक्खू अनेक प्रकारच्या ऋद्धींचा (ऋद्धिविधींचा) अनुभव घेतात. एक असूनही अनेक होतात, अनेक असूनही एक होतात, प्रकट होतात... [पे]... मग एखादा श्रद्धावान व प्रसन्न मनुष्य त्या भिक्खूला अनेक प्रकारच्या ऋद्धींचा अनुभव घेताना, एक असूनही अनेक होताना आणि अनेक असूनही एक होताना पाहतो." हे केवट्टसुत्त आहे. ဧကောဧကာယ မာတုဂါမေန သဒ္ဓိံ ရဟော နိသဇ္ဇံ ကပ္ပေန္တော ဘိက္ခု ဧဝံ ဝဒတိ, ဧကောဧကာယ မာတုဂါမေန သဒ္ဓိံ ရဟော နိသဇ္ဇံ ကပ္ပေန္တာ ဘိက္ခူ ဧဝံ ဝဒန္တိ. ဧကောဧကာယ မာတုဂါမေန သဒ္ဓိံ ရဟော နိသဇ္ဇံ ကပ္ပေန္တံ ဘိက္ခုံ ပဿတိ, ဧကောဧကာယ မာတုဂါမေန သဒ္ဓိံ ရဟော နိသဇ္ဇံ ကပ္ပေန္တေ ဘိက္ခူ ပဿတိ. သဗ္ဗံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဧတ္ထ ပန ‘‘န တွေဝ ဧကောဧကာယ, မာတုဂါမေန သလ္လပေ’’တိအာဒိကံ ပါဠိပဒံ သာဓကံ. ဧတ္ထ ဟိ ဧကောဧကာယာတိ ဣဒံ အဗျယပဒသဒိသံ ရူဠှီပဒန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ, အညမညန္တိ သဒ္ဒဿ ဝိယ စ ဧကပဒတ္တူပဂမနဉ္စဿ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ဘိက္ခု ဝိနာ ဒုတိယေန သယံ ဧကော ဟုတွာ ဧကာယ ဣတ္ထိယာ သဒ္ဓိန္တိ ဣမသ္မိံ အတ္ထေ ‘‘ဧကောဧကာယာ’’တိ ဣဒံ ပဒံ န ရူဠှီပဒန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧဝံ သန္တေပိ န ‘‘ဧကော’’တိ သဒ္ဒေါ ‘‘ဘိက္ခူ’’တိ ပဒေန သမာနာဓိကရဏော. ယဒိ သမာနာဓိကရဏော သိယာ, ‘‘နိသဇ္ဇံ ကပ္ပေန္တ’’န္တိအာဒိ န ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ. ‘‘ဧကာယာ’’တိ သဒ္ဒေါပိ န အဇ္ဈာဟရိတဗ္ဗေန ‘‘ဣတ္ထိယာ’’တိ ပဒေန သမာနာဓိကရဏော. ယဒိ သမာနာဓိကရဏော သိယာ, ‘‘မာတုဂါမေနာ’’တိ [Pg.351] န ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ ဝိသေသာဘာဝတော ဒွိရုတ္တဘာဝါပဇ္ဇနတော စ. ကိဉ္စ ဘိယျော ‘‘မာတုဂါမေနာ’’တိ ဝုတ္တတ္တာ ‘‘ဧကေနာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ သိယာ, ဧကန္တတော ပန ‘‘ဧကောဧကာယာ’’တိ ဣဒံ ပဒံ ပုမိတ္ထိသင်္ခါတံ အတ္ထံ အပေက္ခတိ, န သမာနာဓိကရဏပဒံ, တသ္မာ ‘‘ဒွေ ဇာနိပတယော အညမညံ သလ္လပေန္တီ’’တိအာဒီသု ‘‘အညမည’’န္တိ ပဒဿ ဝိယ စ ‘‘ဧကောဧကာယာ’’တိ ဣမဿ ဧကပဒတ္တဉ္စ နိသဇ္ဇံ ကပ္ပေန္တဿ ဘိက္ခုနော ဝိသေသနတ္တဉ္စ ဝေဒိတဗ္ဗံ. အထ ဝါ ယဿံ နိသဇ္ဇကြိယာယံ ဘိက္ခုပိ ဧကောဝ ဟောတိ, ဣတ္ထီပိ ဧကာဝ. သာ ကြိယာ ရူဠှီဝသေန ‘‘ဧကောဧကာယာ’’တိ ဝုစ္စတိ, တာဒိသာယ ဧကောဧကာယ နိသဇ္ဇကြိယာယ ဘိက္ခု မာတုဂါမေန သဒ္ဓိန္တိပိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဣမိနာ နယေန အညေသမ္ပိ ရူဠှီသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ယထာပယောဂံ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ယောဇေတဗ္ဗာ. ဣစ္စေဝံ ဝါစ္စာဘိဓေယျလိင်္ဂါဒီနံ နာမိကပဒမာလာ နာနပ္ပကာရတော ပကာသိတာ. एकटा एका स्त्रीसोबत (मातुगाम) एकांतात बसणारा भिक्खू असे म्हणतो, एकटे एका स्त्रीसोबत एकांतात बसणारे भिक्खू असे म्हणतात. एकटा एका स्त्रीसोबत एकांतात बसणाऱ्या भिक्खूला पाहतो, एकटे एका स्त्रीसोबत एकांतात बसणाऱ्या भिक्खूंना पाहतो. सर्व सविस्तर जाणावे. येथे 'पण एकाने एका स्त्रीशी संभाषण करू नये' (न त्वेव एकोएकाय, मातुगामेन सल्लपे) इत्यादी पाळिपद (पाळी वचन) साधक (प्रमाण) आहे. येथे 'एकोएकाय' (एकटा एका स्त्रीसोबत) हे अव्ययपदासारखे रूढिपद मानले पाहिजे, आणि 'अञ्ञमञ्ञं' (परस्पर) या शब्दाप्रमाणे ते एकपदत्व पावले आहे असे जाणावे. भिक्खू दुसऱ्या कोणाशिवाय स्वतः एकटा होऊन एका स्त्रीसोबत (या अर्थाने) 'एकोएकाय' हे पद रूढिपद नाही असे पाहावे. असे असले तरी 'एको' हा शब्द 'भिक्खू' या पदाशी समानाधिकरण नाही. जर तो समानाधिकरण असता, तर 'निसज्जं कप्पेन्तं' (बसणारा) इत्यादी म्हणता आले नसते. 'एकाय' हा शब्दही अध्याहृत 'इत्थिया' (स्त्रीशी) या पदाशी समानाधिकरण नाही. जर तो समानाधिकरण असता, तर विशेष नसून द्विरुक्ती होत असल्यामुळे 'मातुगामेन' (स्त्रीसोबत) असे म्हणता आले नसते. आणखी काय, 'मातुगामेन' असे म्हटल्यामुळे 'एकेन' असे म्हणावे लागले असते, परंतु निश्चितपणे 'एकोएकाय' हे पद पुरुष आणि स्त्री या अर्थाची अपेक्षा करते, समानाधिकरण पदाची नाही. म्हणून 'दोन पती-पत्नी परस्परांशी बोलतात' इत्यादींमध्ये 'अञ्ञमञ्ञं' या पदाप्रमाणे 'एकोएकाय' या पदाचे एकपदत्व आणि आसन ग्रहण करणाऱ्या (बसणाऱ्या) भिक्खूचे विशेषणत्व जाणावे. किंवा ज्या आसन क्रियेमध्ये भिक्खूही एकटाच असतो आणि स्त्रीही एकटीच असते, ती क्रिया रूढीने 'एकोएकाय' अशी म्हटली जाते. अशा प्रकारच्या 'एकोएकाय' आसन क्रियेमध्ये भिक्खूने स्त्रीसोबत (आसन ग्रहण केले) असाही अर्थ घ्यावा. या पद्धतीने इतरही रूढिशब्दांची नामिक पदमाला (विभक्ती रूपे) प्रयोगाच्या आवश्यकतेनुसार एकवचन आणि बहुवचनाच्या रूपाने योजावी. अशा प्रकारे वाच्य, अभिधेय, लिंग इत्यादींची नामिक पदमाला विविध प्रकारे प्रकाशित केली आहे. သုမဓုရတရသဒ္ဒနိတိံ ဣမံ,ပဋုတရမတိတံ သုသိခေ ဝရံ; ဝိဒုဝိမတိတမောပဟရိံ ရဝိံ,မတိကုမုဒပဗောဓိနိသာပတိံ. अतिशय मधुर अशा या 'सद्दानीति' ग्रंथाला, जो अत्यंत कुशाग्र बुद्धीने चांगल्या प्रकारे शिकलेला आणि श्रेष्ठ आहे; विद्वानांच्या संशयाचे हरण करणाऱ्या सूर्यासारख्या आणि बुद्धीरूपी कुमुदाला (कमळाला) प्रफुल्लित करणाऱ्या चंद्रासारख्या (या ग्रंथाला मी सादर करतो/रचला आहे). ကတဝိညူဇနဿာသ-သာသနဿာဘိဝုဒ္ဓိယာ; ဓိယာ နီတိမိမံ သာဓု, သာဓုကညေဝ လက္ခယေ. कृतज्ञ आणि सुज्ञ लोकांच्या समाधानासाठी आणि शासनाच्या (बुद्ध शासनाच्या) अभिवृद्धीसाठी, बुद्धीने या नीतीला (व्याकरण नियमांना) चांगल्या प्रकारे आणि योग्य रीतीनेच लक्ष्यात घ्यावे (समजून घ्यावे). ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त अशा त्रिपिटकाच्या वचनमार्गांमध्ये सुज्ञांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ कौशल्यासाठी (ज्ञानासाठी) रचलेल्या 'सद्दानीति' प्रकरणात... ဝါစ္စာဘိဓေယျလိင်္ဂါဒိပရိဒီပနော နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ वाच्य, अभिधेय, लिंग इत्यादींचे स्पष्टीकरण करणारा 'नामिक पदमाला विभाग'... ဧကာဒသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. अकरावा परिच्छेद समाप्त. ဧတ္တာဝတာ [Pg.352] ဘူဓာတုမယာနံ ပုလ္လိင်္ဂါနံ ဣတ္ထိလိင်္ဂါနံ နပုံသကလိင်္ဂါနဉ္စ နာမိကပဒမာလာ ယထာရဟံ လိင်္ဂန္တရေဟိ သဒ္ဒန္တရေဟိ အတ္ထန္တရေဟိ စ သဒ္ဓိံ နာနပ္ပကာရတော ဒဿိတာ. သဗ္ဗနာမာနိ ဟိ ဌပေတွာ နယတော အညာနိ ကာနိစိ နာမာနိ အဂ္ဂဟိတာနိ နာမ နတ္ထိ. इथपर्यंत 'भू' धातूपासून बनलेल्या पुल्लिंगी, स्त्रीलिंगी आणि नपुंसकलिंगी शब्दांची नामिक पदमाला (विभक्ती रूपे) योग्यतेनुसार इतर लिंगांसह, इतर शब्दांसह आणि इतर अर्थांसह विविध प्रकारे दाखविली आहे. सर्वनामे वगळता, नियमानुसार इतर कोणतीही नामे ग्रहण न केलेली (सुटलेली) राहिलेली नाहीत. ၁၂. သဗ္ဗနာမတံသဒိသနာမနာမိကပဒမာလာ १२. सर्वनाम आणि तत्सम नामांची नामिक पदमाला (विभक्ती रूपे). ဣတော ပရံ ပဝက္ခာမိ, သဗ္ဗနာမဉ္စ တဿမံ; နာမဉ္စ ယောဇိတံ နာနာ-နာမေဟေဝ ဝိသေသတော. यानंतर मी सर्वनाम आणि तत्सम नामे, तसेच विविध नामांसोबत विशेष रूपाने योजलेले नाम सांगेन. ယာနိ ဟောန္တိ တိလိင်္ဂါနိ, အနုကူလာနိ ယာနိ စ; တိလိင်္ဂါနံ ဝိသေသေန, ပဒါနေတာနိ နာမတော. जी तिन्ही लिंगांमध्ये असतात आणि जी तिन्ही लिंगांच्या विशेषणांच्या रूपात अनुकूल असतात, ती नामे या पदांद्वारे स्पष्ट केली जातात. ‘‘သဗ္ဗသာဓာရဏကာနိ, နာမာနိ’’စ္စေဝ အတ္ထတော; သဗ္ဗနာမာနိ ဝုစ္စန္တိ, သတ္တဝီသတိ သင်္ခတော. अर्थाच्या दृष्टीने 'सर्वांसाठी सामायिक असणारी नामे' म्हणूनच त्यांना 'सर्वनामे' म्हटले जाते, ज्यांची संख्या सत्तावीस (२७) आहे. တေသု ကာနိစိ ရူပေဟိ, သေသာညေဟိ စ ယုဇ္ဇရေ; ကာနိစိ ပန သဟေဝ, ဧတေသံ လက္ခဏံ ဣဒံ. त्यांच्यापैकी काही रूपांच्या दृष्टीने इतर उर्वरित शब्दांशी जोडली जातात, तर काही एकत्रच जोडली जातात; हे त्यांचे लक्षण आहे. ဧတသ္မာ လက္ခဏာ မုတ္တံ, န ပဒံ သဗ္ဗနာမိကံ; တသ္မာတီတာဒယော သဒ္ဒါ, ဂုဏနာမာနိ ဝုစ္စရေ. या लक्षणापासून मुक्त (वेगळे) केलेले पद सर्वनाम नसते; म्हणून 'अतीत' (भूतकाळ) इत्यादी शब्द गुणनामे म्हटले जातात. သဗ္ဗနာမာနိ နာမ – သဗ္ဗ ကတရ ကတမ ဥဘယ ဣတရအည အညတရ အညတမ ပုဗ္ဗ ပရ အပရ ဒက္ခိဏ ဥတ္တရ အဓရယတ ဧတ ဣမ အမုကိံ ဧက ဥဘ ဒွိတိ စတု တုမှ အမှ ဣစ္စေတာနိ သတ္တဝီသ. सर्वनामे म्हणजे – सब्ब (सर्व), कतर, कतम, उभय, इतर, अञ्ञ (अन्य), अञ्ञतर, अञ्ञतम, पुब्ब (पूर्व), पर, अपर, दक्खिण (दक्षिण), उत्तर, अधर, य, त, एत, इम, अमु, किं, एक, उभ, द्वि, ति, चतु, तुम्हा, अम्हा – ही सत्तावीस (२७) होत. ဧတေသု သဗ္ဗသဒ္ဒေါ သကလတ္ထော, သော စ သဗ္ဗသဗ္ဗာဒိဝသေန ဉေယျော. ကတရ ကတမသဒ္ဒါ ပုစ္ဆနတ္ထာ. ဥဘယသဒ္ဒေါ ဒွိအဝယဝသမုဒါယဝစနော. ဣတရသဒ္ဒေါ ဝုတ္တပဋိယောဂီဝစနော. အညသဒ္ဒေါ အဓိဂတာပရဝစနော. အညတရ အညတမသဒ္ဒါ အနိယမတ္ထာ. ပုဗ္ဗာဒယော ဥတ္တရပရိယန္တာ ဒိသာကာလာဒိဝဝတ္ထာဝစနာ. တထာ ဟိ ပုဗ္ဗ [Pg.353] ပရာ ပရ ဒက္ခိဏုတ္တရသဒ္ဒါ ပုလ္လိင်္ဂတ္တေ ယထာရဟံ ကာလဒေသာဒိဝစနာ, ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တေ ဒိသာဒိဝစနာ, နပုံသကလိင်္ဂတ္တေ ဌာနာဒိဝစနာ. အဓရသဒ္ဒေါပိ ဟေဋ္ဌိမတ္ထဝါစကော ဝဝတ္ထာဝစနောယေဝ, သော စ တိလိင်္ဂေါ ‘‘အဓရော ပတ္တော. အဓရာ အရဏီ, အဓရံ ဘာဇန’’မိတိ, ယံသဒ္ဒေါ အနိယမတ္ထော. တံသဒ္ဒေါ ပရမ္မုခါဝစနော. ဧတသဒ္ဒေါ သမီပဝစနော. ဣမသဒ္ဒေါ အစ္စန္တသမီပဝစနော. အမုသဒ္ဒေါ ဒူရဝစနော. ကိံသဒ္ဒေါ ပုစ္ဆနတ္ထော. ဧကသဒ္ဒေါ သင်္ခါဒိဝစနော. ဝုတ္တဉှိ – यांच्यामध्ये 'सब्ब' शब्द संपूर्ण अर्थाचा वाचक आहे, आणि तो 'सब्ब' (सर्व) व 'सब्बादि' (सर्वादि) या रूपाने जाणावा. 'कतर' आणि 'कतम' शब्द प्रश्नार्थक आहेत. 'उभय' शब्द दोन अवयवांच्या समुदायाचा वाचक आहे. 'इतर' शब्द आधी सांगितलेल्याच्या विरोधी (किंवा दुसऱ्या) अर्थाचा वाचक आहे. 'अञ्ञ' शब्द प्राप्त झालेल्या दुसऱ्या अर्थाचा वाचक आहे. 'अञ्ञतर' आणि 'अञ्ञतम' शब्द अनिश्चित अर्थाचे वाचक आहेत. 'पुब्ब' पासून 'उत्तर' पर्यंतचे शब्द दिशा, काळ इत्यादींच्या व्यवस्थेचे वाचक आहेत. तसेच 'पुब्ब', 'पर', 'अपर', 'दक्खिण' आणि 'उत्तर' हे शब्द पुल्लिंगात योग्यतेनुसार काळ, देश इत्यादींचे वाचक असतात; स्त्रीलिंगात दिशा इत्यादींचे वाचक असतात; आणि नपुंसकलिंगात स्थान इत्यादींचे वाचक असतात. 'अधर' शब्द देखील खालच्या अर्थाचा वाचक असून व्यवस्थेचाच वाचक आहे, आणि तो तिन्ही लिंगांत वापरला जातो, जसे की – 'अधरो पत्तो' (खालचे पात्र), 'अधरा अरणी' (खालची अरणी), 'अधरं भाजनं' (खालचे भांडे). 'यं' शब्द अनिश्चित अर्थाचा वाचक आहे. 'तं' शब्द परोक्ष (दूर असलेल्या किंवा समोर नसलेल्या) अर्थाचा वाचक आहे. 'एत' शब्द जवळच्या अर्थाचा वाचक आहे. 'इम' शब्द अत्यंत जवळच्या अर्थाचा वाचक आहे. 'अमु' शब्द दूरच्या अर्थाचा वाचक आहे. 'किं' शब्द प्रश्नार्थक आहे. 'एक' शब्द संख्या इत्यादींचा वाचक आहे. कारण असे म्हटले आहे – ဧကသဒ္ဒေါ အညတ္ထသေဋ္ဌအသဟာယသင်္ခါဒီသု ဒိဿတိ. တထာ ဟေသ ‘‘သဿတော အတ္တာ စ လောကော စ, ဣဒမေဝ သစ္စံ မောဃမညန္တိ, ဣတ္ထေကေ အဘိဝဒန္တီ’’တိအာဒီသု အညတ္ထေ ဒိဿတိ. ‘‘စေတသော ဧကောဒိဘာဝ’’န္တိအာဒီသု သေဋ္ဌေ. ‘‘ဧကော ဝူပကဋ္ဌော’’တိအာဒီသု အသဟာယေ. ‘‘ဧကောဝ ခေါ ဘိက္ခဝေ ခဏော စ သမယော စ ဗြဟ္မစရိယဝါသာယာ’’တိအာဒီသု သင်္ခါယန္တိ. 'एक' शब्द इतर अर्थ, श्रेष्ठ, असहाय (एकटा), संख्या इत्यादी अर्थांमध्ये दिसून येतो. जसे की, 'आत्मा आणि लोक शाश्वत आहेत, हेच सत्य आहे आणि इतर सर्व व्यर्थ आहे, असे काही जण म्हणतात' (इत्थेके अभिवदन्ति) इत्यादींमध्ये तो 'इतर' या अर्थात दिसतो. 'चेतसो एकोदिभावं' (चित्ताची एकाग्रता) इत्यादींमध्ये 'श्रेष्ठ' या अर्थात. 'एको वूपकट्ठो' (एकटा एकांतात राहणारा) इत्यादींमध्ये 'असहाय' (एकटा) या अर्थात. 'भिक्खूंनो, ब्रह्मचर्य वासासाठी एकच क्षण आणि एकच वेळ आहे' इत्यादींमध्ये 'संख्या' या अर्थात दिसतो. ယတ္ထေသ သင်္ခါဝစနော, တတ္ထေကဝစနန္တောဝ. ဥဘသဒ္ဒေါ ဒွိသဒ္ဒပရိယာယော. ဒွိတိစတုသဒ္ဒါ သင်္ခါဝစနာ, သဗ္ဗကာလံ ဗဟုဝစနန္တာဝ. တုမှသဒ္ဒေါ ယေန ကထေတိ, တသ္မိံ ဝတ္တဗ္ဗဝစနံ. အမှသဒ္ဒေါ အတ္တနိ ဝတ္တဗ္ဗဝစနံ. जिथे हा संख्यावाचक असतो, तिथे तो केवळ एकवचनातच असतो. 'उभ' शब्द 'द्वि' (दोन) शब्दाचा पर्यायी शब्द आहे. 'द्वि', 'ति' आणि 'चतु' हे शब्द संख्यावाचक असून नेहमी बहुवचनातच असतात. 'तुम्ह' शब्द ज्याच्याशी बोलले जाते, त्याच्यासाठी वापरायचे वचन (द्वितीय पुरुष) आहे. 'अम्ह' शब्द स्वतःसाठी वापरायचे वचन (प्रथम पुरुष/उत्तम पुरुष) आहे. ဣဒါနိ တေသံ နာမိကပဒမာလံ ကထယာမ – आता आपण त्यांची नामिक पदमाला (विभक्ती रूपे) सांगू या – သဗ္ဗော, သဗ္ဗေ. သဗ္ဗံ, သဗ္ဗေ. သဗ္ဗေန, သဗ္ဗေဟိ, သဗ္ဗေဘိ. သဗ္ဗဿ, သဗ္ဗေသံ, သဗ္ဗေသာနံ. သဗ္ဗသ္မာ, သဗ္ဗမှာ, သဗ္ဗေဟိ, သဗ္ဗေဘိ. သဗ္ဗဿ, သဗ္ဗေသံ, သဗ္ဗေသာနံ. သဗ္ဗသ္မိံ, သဗ္ဗမှိ, သဗ္ဗေသု. ဘော သဗ္ဗ, ဘဝန္တော သဗ္ဗေ. सब्बो, सब्बे (प्रथमा). सब्बं, सब्बे (द्वितीया). सब्बेन, सब्बेहि, सब्बेभि (तृतीया). सब्बस्स, सब्बेसं, सब्बेसानं (चतुर्थी). सब्बस्मा, सब्बम्हा, सब्बेहि, सब्बेभि (पंचमी). सब्बस्स, सब्बेसं, सब्बेसानं (षष्ठी). सब्बस्मिं, सब्बम्हि, सब्बेसु (सप्तमी). भो सब्ब, भवन्तो सब्बे (संबोधन). တတြ [Pg.354] ‘‘သဗ္ဗော ဘူတော, သဗ္ဗေ ဘူတာ’’တိအာဒိနာ, ‘‘သဗ္ဗော ပုရိသော, သဗ္ဗေ ပုရိသာ’’တိအာဒိနာ စ နယေန သဗ္ဗာနိ ပုလ္လိင်္ဂနာမေဟိ သဒ္ဓိံ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ယာနိ ပန ယမကမဟာထေရေန ပုန္နပုံသကဝိသယေ သဗ္ဗ ကတရ ကတမာဒီနံ အညာနိပိ ရူပါနိ ဝုတ္တာနိ. တံ ယထာ? तेथे 'सब्बो भूतो, सब्बे भूता' (सर्व प्राणी) इत्यादी आणि 'सब्बो पुरिसो, सब्बे पुरिसा' (सर्व पुरुष) इत्यादी पद्धतीने सर्व पुल्लिंगी नामांसोबत (सर्वनाम) जोडले पाहिजेत. परंतु, यमक महास्थविरांनी (यमक महाथेरांनी) पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगाच्या बाबतीत 'सब्ब', 'कतर', 'कतम' इत्यादींचे जे इतरही रूप सांगितले आहेत, ते कसे आहेत? ‘‘သဗ္ဗာ’’ ဣစ္စာဒိကံ ရူပံ, နိဿက္ကေ ဘုမ္မကေ ပန; ‘‘သဗ္ဗေ’’ ဣစ္စာဒိကံ ရူပံ, ယမကေန ပကာသိတံ. 'सब्बा' इत्यादी रूप अपादानात (निसक्क) आणि अधिकरणात (भुम्मक) तर 'सब्बे' इत्यादी रूप यमक (महास्थविरांनी) द्वारे प्रकाशित केले गेले आहे. တဉ္စေ ဥပပရိက္ခိတွာ, ယုတ္တံ ဂဏှန္တု ယောဂိနော; သဗ္ဗနာမိကရူပဉှိ, ဝိဝိဓံ ဒုဗ္ဗုဓံ ယတော. त्याची नीट परीक्षा करून, योग्यांनी जे योग्य असेल ते ग्रहण करावे; कारण सर्वनामांचे रूप विविध आणि समजण्यास कठीण असते. သဗ္ဗာ, သဗ္ဗာ, သဗ္ဗာယော. သဗ္ဗံ, သဗ္ဗာ, သဗ္ဗာယော. သဗ္ဗာယ, သဗ္ဗဿာ, သဗ္ဗာဟိ, သဗ္ဗာဘိ. သဗ္ဗာယ, သဗ္ဗဿာ, သဗ္ဗာသံ. သဗ္ဗာယ, သဗ္ဗဿာ, သဗ္ဗာဟိ, သဗ္ဗာဘိ. သဗ္ဗာယ, သဗ္ဗဿာ, သဗ္ဗာသံ. သဗ္ဗာယံ, သဗ္ဗဿာ, သဗ္ဗဿံ, သဗ္ဗာသု. ဘောတိ သဗ္ဗေ, ဘောတိယော သဗ္ဗာ, သဗ္ဗာယော. ဣတ္ထိလိင်္ဂတ္တေ နာမိကပဒမာလာ. सब्बा, सब्बा, सब्बायो। सब्बं, सब्बा, सब्बायो। सब्बाय, सब्बस्सा, सब्बाहि, सब्बाभि। सब्बाय, सब्बस्सा, सब्बासं। सब्बाय, सब्बस्सा, सब्बाहि, सब्बाभि। सब्बाय, सब्बस्सा, सब्बासं। सब्बायं, सब्बस्सा, सब्बस्सं, सब्बासु। भोति सब्बे, भोतियो सब्बा, सब्बायो। स्त्रीलिंगातील नाम-विभक्ती रूपमाला (पदमला). ဧတ္ထ ‘‘သဗ္ဗာ ဘာဝိကာ, သဗ္ဗာ ဘာဝိကာယော’’တိ, ‘‘သဗ္ဗာ ကညာ, သဗ္ဗာ ကညာယော’’တိ စ အာဒိနာ ဣတ္ထိလိင်္ဂသဗ္ဗနာမာနိ သဗ္ဗေဟိ ဣတ္ထိလိင်္ဂေဟိ သဒ္ဓိံ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဧတ္ထ စ ‘‘သဗ္ဗဿာ’’တိ ပဒံ တတိယာစတုတ္ထီပဉ္စမီဆဋ္ဌီသတ္တမီဝသေန ပဉ္စဓာ ဝိဘတ္တံ ‘‘တဿာ ကုမာရိကာယ သဒ္ဓိ’’န္တိ ကရဏပ္ပယောဂါဒိဒဿနတော. သဗ္ဗဿာ ကညာယ ကတံ. သဗ္ဗဿာ ကညာယ ဒေတိ. အယံ ကညာ သဗ္ဗဿာ ကညာယ ဟီနာ ဝိရူပါ. အယံ ကညာ သဗ္ဗဿာ ကညာယ ဥတ္တမာ အဘိရူပါ. သဗ္ဗဿာ ကညာယ အပေတိ, သဗ္ဗဿာ ကညာယ ဓနံ. သဗ္ဗဿာ ကညာယ ပတိဋ္ဌိတံ. येथे 'सब्बा भाविका, सब्बा भाविकायो' आणि 'सब्बा कञ्ञा, सब्बा कञ्ञायो' इत्यादी प्रकारे स्त्रीलिंगी सर्वनामे सर्व स्त्रीलिंगी नामांसोबत जोडली पाहिजेत. आणि येथे 'सब्बस्सा' हे पद तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी आणि सप्तमीच्या भेदाने पाच प्रकारे विभक्त होते, जसे की 'तस्सा कुमारिकाय सद्धिं' (त्या कुमारीसोबत) या करणाच्या प्रयोगावरून दिसून येते. 'सब्बस्सा कञ्ञाय कतं' (सर्व कन्येने केले). 'सब्बस्सा कञ्ञाय देति' (सर्व कन्येला देतो). 'अयं कञ्ञा सब्बस्सा कञ्ञाय हीना विरूपा' (ही कन्या सर्व कन्येपेक्षा हीन व विरूप आहे). 'अयं कञ्ञा सब्बस्सा कञ्ञाय उत्तमा अभिरूपा' (ही कन्या सर्व कन्येपेक्षा उत्तम व सुंदर आहे). 'सब्बस्सा कञ्ञाय अपेति' (सर्व कन्येपासून दूर जातो), 'सब्बस्सा कञ्ञाय धनं' (सर्व कन्येचे धन). 'सब्बस्सा कञ्ञाय पतिट्ठितं' (सर्व कन्येमध्ये प्रतिष्ठित). သဗ္ဗံ, သဗ္ဗာနိ. သဗ္ဗံ, သဗ္ဗာနိ. သဗ္ဗေန, သဗ္ဗေဟိ, သဗ္ဗေဘိ. သဗ္ဗဿ, သဗ္ဗေသံ, သဗ္ဗေသာနံ. သဗ္ဗသ္မာ, သဗ္ဗမှာ, သဗ္ဗေဟိ, သဗ္ဗေဘိ[Pg.355]. သဗ္ဗဿ, သဗ္ဗေသံ, သဗ္ဗေသာနံ. သဗ္ဗသ္မိံ, သဗ္ဗမှိ, သဗ္ဗေသု. ဘော သဗ္ဗ, ဘဝန္တော သဗ္ဗာနိ. နပုံသကလိင်္ဂတ္တေ နာမိကပဒမာလာ. सब्बं, सब्बानि। सब्बं, सब्बानि। सब्बेन, सब्बेहि, सब्बेभि। सब्बस्स, सब्बेसं, सब्बेसानं। सब्बस्मा, सब्बम्हा, सब्बेहि, सब्बेभि। सब्बस्स, सब्बेसं, सब्बेसानं। सब्बस्मिं, सब्बम्हि, सब्बेसु। भो सब्ब, भवन्तो सब्बानि। नपुंसकलिंगातील नाम-विभक्ती रूपमाला (पदमला). ဧတ္ထ ‘‘သဗ္ဗံ ဘူတံ, သဗ္ဗာနိ ဘူတာနိ. သဗ္ဗံ စိတ္တံ, သဗ္ဗာနိ စိတ္တာနီ’’တိ စ အာဒိနာ နပုံသကလိင်္ဂသဗ္ဗနာမာနိ သဗ္ဗေဟိ နပုံသကလိင်္ဂေဟိ သဒ္ဓိံ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဧဝံ သဗ္ဗသဒ္ဒဿ လိင်္ဂတ္တယဝသေန ပဒမာလာ ဘဝတိ. येथे 'सब्बं भूतं, सब्बानि भूतानि' (सर्व प्राणी), 'सब्बं चित्तं, सब्बानि चित्तानि' (सर्व चित्त) इत्यादी प्रकारे नपुंसकलिंगी सर्वनामे सर्व नपुंसकलिंगी नामांसोबत जोडली पाहिजेत. अशा प्रकारे 'सब्ब' शब्दाची तिन्ही लिंगांनुसार रूपमाला (पदमला) होते. ဣဒါနိဿ ပရပဒေန သဒ္ဓိံ သမာသော ဝေဒိတဗ္ဗော ‘‘သဗ္ဗသာဓာရဏော သဗ္ဗဝေရီ’’ဣတိ. တတ္ထ သဗ္ဗေသံ သာဓာရဏော သဗ္ဗသာဓာရဏော. သဗ္ဗေသံ ဝေရီ, သဗ္ဗေ ဝါ ဝေရိနော ယဿ သောယံ သဗ္ဗဝေရီတိ သမာသဝိဂ္ဂဟော. ယထာ ပန သဗ္ဗသဒ္ဒဿ ပဒမာလာ လိင်္ဂတ္တယဝသေန ယောဇိတာ, ဧဝံ ကတရသဒ္ဒါဒီနမ္ပိ အဓရသဒ္ဒပရိယန္တာနံ ယောဇေတဗ္ဗာ. आता याचा दुसऱ्या पदासोबत समास समजून घेतला पाहिजे, जसे की 'सब्बसाधारणो', 'सब्बवेरी'. त्यामध्ये 'सब्बेसं साधारणो इति सब्बसाधारणो' (सर्वांसाठी सामान्य तो सर्वसाधारण). 'सब्बेसं वेरी' (सर्वांचा वैरी) किंवा 'सब्बे वा वेरिनो यस्स सो अयं सब्बवेरी' (सर्वच ज्याचे वैरी आहेत तो हा सर्ववैरी) असा समासविग्रह आहे. ज्याप्रमाणे 'सब्ब' शब्दाची रूपमाला तिन्ही लिंगांनुसार जोडली गेली आहे, त्याचप्रमाणे 'कतर' शब्दापासून ते 'अधर' शब्दापर्यंतच्या शब्दांचीही जोडली पाहिजे. တတြာယံ ဥဘယသဒ္ဒဝဇ္ဇိတော ပုလ္လိင်္ဂပေယျာလော – त्यामध्ये 'उभय' शब्द वगळता पुल्लिंगी संक्षेप (पेय्यालो) खालीलप्रमाणे आहे – ကတရော, ကတရေ. ကတရံ…ပေ… ဘော ကတရ, ဘဝန္တော ကတရေ. ကတမော, ကတမေ. ဣတရော, ဣတရေ. အညော, အညေ. အညတရော, အညတရေ. အညတမော, အညတမေ. ပုဗ္ဗော, ပုဗ္ဗေ. ပရော, ပရေ. အပရော, အပရေ. ဒက္ခိဏော, ဒက္ခိဏေ. ဥတ္တရော, ဥတ္တရေ. အဓရော, အဓရေ…ပေ… ဘော အဓရ, ဘဝန္တော အဓရေတိ. कतरो, कतरे। कतरं...पे... भो कतर, भवन्तो कतरे। कतमो, कतमे। इतरो, इतरे। अञ्ञो, अञ्ञे। अञ्ञतरो, अञ्ञतरे। अञ्ञतमो, अञ्ञतमे। पुब्बो, पुब्बे। परो, परे। अपरो, अपरे। दक्खिणो, दक्खिणे। उत्तरो, उत्तरे। अधरो, अधरे...पे... भो अधर, भवन्तो अधरे इति. အယံ ပန ဥဘယသဒ္ဒသဟိတော နပုံသကလိင်္ဂပေယျာလော – आणि हा 'उभय' शब्दासह नपुंसकलिंगी संक्षेप (पेय्यालो) आहे – ကတရံ, ကတရာနိ. ကတရံ…ပေ… ဘော ကတရ, ဘဝန္တော ကတရာနိ. ကတမံ. ဥဘယံ. ဣတရံ. အညံ. အညတရံ. အညတမံ. ပုဗ္ဗံ. ပရံ. အပရံ. ဒက္ခိဏံ. ဥတ္တရံ. အဓရံ, အဓရာနိ. အဓရံ…ပေ… ဘော အဓရ, ဘဝန္တော အဓရာနီတိ. कतरं, कतरानि। कतरं...पे... भो कतर, भवन्तो कतरानि। कतमं। उभयं। इतरं। अञ्ञं। अञ्ञतरं। अञ्ञतमं। पुब्बं। परं। अपरं। दक्खिणं। उत्तरं। अधरं, अधरानि। अधरं...पे... भो अधर, भवन्तो अधरानि इति. ဣဒါနိ [Pg.356] ပုန္နပုံသကလိင်္ဂါနံ ပရသဒ္ဒါဒီနံ ရူပန္တရနိဒ္ဒေသော ဝုစ္စတိ. ကစ္စာယနသ္မိဉှိ ‘‘ပုရိသာ’’တိ ဝိယ ‘‘ပရာ’’တိ ပဌမာဗဟုဝစနံ ဒိဿတိ. ဧဝရူပေါ နယော အပရသဗ္ဗကတရာဒီသု အညတမပရိယောသာနေသု နဝသု အပ္ပသိဒ္ဓေါ, လဗ္ဘမာနော ပုဗ္ဗဒက္ခိဏုတ္တရာဓရေသု စတူသု လဗ္ဘေယျ. တထာ ‘‘ပုရိသေ’’တိ ဝိယ ပါဠိအာဒီသု ‘‘ပုဗ္ဗေ’’တိ သစ္စသင်္ခေပေ ‘‘ဣတရေ’’တိ, ကစ္စာယနေ စ ‘‘ပရေ’’တိ သတ္တမီဧကဝစနံ ဒိဿတိ. ဧဝရူပေါ နယော သဗ္ဗ အညသဒ္ဒေသု အပ္ပသိဒ္ဓေါ, လဗ္ဘမာနော ကတရကတမာဒီသု သေသေသု အဓရပရိယောသာနေသု ဒွါဒသသု လဗ္ဘေယျ. တထာ ‘‘ပုရိသာ’’တိ ဝိယ သဗ္ဗာ ကတရာ ဣစ္စာဒိ ပဉ္စမီဧကဝစနနယော ပါဠိအာဒီသု အပ္ပသိဒ္ဓေါ. ဧဝံ သန္တေပိ အယံ နယော ပုနပ္ပုနံ ဥပပရိက္ခိတွာ ယုတ္တော စေ, ဂဟေတဗ္ဗော. आता पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगी 'पर' इत्यादी शब्दांच्या इतर रूपांचा निर्देश केला जात आहे. कच्चायन व्याकरणात 'पुरिसा' प्रमाणे 'परा' असे प्रथमा बहुवचन दिसून येते. अशा प्रकारची पद्धत 'अपर', 'सब्ब', 'कतर' इत्यादी 'अञ्ञतम' पर्यंतच्या नऊ शब्दांमध्ये योजली पाहिजे, आणि ती उपलब्ध असल्यास 'पुब्ब', 'दक्खिण', 'उत्तर', 'अधर' या चार शब्दांमध्येही प्राप्त होऊ शकते. तसेच 'पुरिसे' प्रमाणे पाळी इत्यादींमध्ये 'पुब्बे' असे, सच्चसंखेपमध्ये 'इतरे' असे, आणि कच्चायनमध्ये 'परे' असे सप्तमी एकवचन दिसून येते. अशा प्रकारची पद्धत 'सब्ब' आणि 'अञ्ञ' शब्दांमध्ये योजली पाहिजे, आणि ती उपलब्ध असल्यास 'कतर', 'कतम' इत्यादी उर्वरित 'अधर' पर्यंतच्या बारा शब्दांमध्ये प्राप्त होऊ शकते. तसेच 'पुरिसा' प्रमाणे 'सब्बा', 'कतरा' इत्यादी पंचमी एकवचनाची पद्धत पाळी इत्यादींमध्ये योजली पाहिजे. असे असले तरी, या पद्धतीचा वारंवार विचार करून जर ती योग्य असेल, तरच ती ग्रहण करावी. အယံ ပန ဥဘယသဒ္ဒသဟိတော ဣတ္ထိလိင်္ဂပေယျာလော – आणि हा 'उभय' शब्दासह स्त्रीलिंगी संक्षेप (पेय्यालो) आहे – ကတရာ, ကတရာ, ကတရာယော. ကတရံ…ပေ… ဘောတိ ကတရေ, ဘောတိယော ကတရာ, ကတရာယော. ကတမာ. ဥဘယာ. ဣတရာ. အညတရာ. အညတမာ. ပုဗ္ဗာ. ပရာ. အပရာ. ဒက္ခိဏာ. ဥတ္တရာ. အဓရာ, အဓရာ, အဓရာယော. အဓရံ…ပေ… ဘောတိ အဓရေ, ဘောတိယော အဓရာ, အဓရာယောတိ. कतरा, कतरा, कतरायो। कतरं...पे... भोति कतरे, भोतियो कतरा, कतरायो। कतमा। उभया। इतरा। अञ्ञतरा। अञ्ञतमा। पुब्बा। परा। अपरा। दक्खिणा। उत्तरा। अधरा, अधरा, अधरायो। अधरं...पे... भोति अधरे, भोतियो अधरा, अधरायो इति. ယသ္မာ ပနေတေသု ဣတရ အည အညတရ အညတမာနံ ပါဠိယာဒီသု ‘‘ဣတရိဿာ’’တိအာဒိဒဿနတော ကောစိ ဘေဒေါ ဝတ္တဗ္ဗော[Pg.357], တသ္မာ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီနံ ဧကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဣတရိဿာ, ဣတရာယ, အညိဿာ, အညာယ. အညတရိဿာ, အညတရာယ, အညတမိဿာ, အညတမာယာ’’တိ ယောဇေတဗ္ဗံ. တထာ တတိယာပဉ္စမီနမေကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘တဿာ ကုမာရိကာယ သဒ္ဓိံ. ကဿာဟံ ကေန ဟာယာမီ’’တိ ကရဏနိဿက္ကပ္ပယောဂဒဿနတော သတ္တမိယာ ပနေကဝစနဋ္ဌာနေ ‘‘ဣတရိဿာ, ဣတရိဿံ, ဣတရာယ, ဣတရာယံ, အညိဿာ, အညိဿံ, အညာယ, အညာယံ, အညတရိဿာ, အညတရိဿံ, အညတရာယ, အညတရာယံ, အညတမိဿာ, အညတမိဿံ, အညတမာယ, အညတမာယ’’န္တိ ယောဇေတဗ္ဗံ ‘‘အညတရော ဘိက္ခု အညတရိဿာ ဣတ္ထိယာ ပဋိဗဒ္ဓစိတ္တော ဟောတီ’’တိ ပါဠိဒဿနတော. परंतु, ज्याअर्थी या शब्दांमध्ये 'इतर', 'अञ्ञ', 'अञ्ञतर', 'अञ्ञतम' यांच्या पाळी इत्यादी ग्रंथांमध्ये 'इतरिस्सा' इत्यादी रूपांच्या दर्शनावरून काही भेद सांगणे आवश्यक आहे, म्हणून चतुर्थी आणि षष्ठीच्या एकवचनाच्या ठिकाणी 'इतरिस्सा, इतराय, अञ्ञिस्सा, अञ्ञाय, अञ्ञतरिस्सा, अञ्ञतराय, अञ्ञतमिस्सा, अञ्ञतमाय' असे जोडले पाहिजे. तसेच तृतीया आणि पंचमीच्या एकवचनाच्या ठिकाणी 'तस्सा कुमारिकाय सद्धिं' (त्या कुमारीसोबत) आणि 'कस्साहं केन हायामि' (मी कोणापासून कशाने हीन होतो) या करण आणि अपादान प्रयोगांच्या दर्शनावरून, आणि सप्तमीच्या एकवचनाच्या ठिकाणी 'इतरiस्सा, इतरिस्सं, इतराय, इतरायं, अञ्ञिस्सा, अञ्ञिस्सं, अञ्ञाय, अञ्ञायं, अञ्ञतरिस्सा, अञ्ञतरिस्सं, अञ्ञतराय, अञ्ञतरायं, अञ्ञतमिस्सा, अञ्ञतमिस्सं, अञ्ञतमाय, अञ्ञतमायं' असे जोडले पाहिजे, कारण पाळीमध्ये 'अञ्ञतरो भिक्खु अञ्ञतरिस्सा इत्थिया पटिबद्धचित्तो होति' (एक भिक्खू एका स्त्रीच्या ठिकाणी आसक्त चित्त असलेला होतो) असे दिसून येते. တတြ သဗ္ဗသဒ္ဒေါ သဗ္ဗသဗ္ဗံ, ပဒေသသဗ္ဗံ, အာယတနသဗ္ဗံ, သက္ကာယသဗ္ဗန္တိ စတူသု ဝိသယေသု ဒိဋ္ဌပ္ပယောဂေါ. တထာ ဟေသ ‘‘သဗ္ဗေ ဓမ္မာ သဗ္ဗာကာရေန ဗုဒ္ဓဿ ဘဂဝတော ဉာဏမုခေ အာပါထမာဂစ္ဆန္တီ’’တိအာဒီသု သဗ္ဗသဗ္ဗသ္မိံ အာဂတော. ‘‘သဗ္ဗေသံ ဝေါ သာရိပုတ္တာ သုဘာသိတံ ပရိယာယေနာ’’တိအာဒီသု ပဒေသသဗ္ဗသ္မိံ. ‘‘သဗ္ဗံ ဝေါ ဘိက္ခဝေ ဒေသေဿာမိ, တံ သုဏာထ သာဓုကံ မနသိ ကရောထ, ဘာသိဿာမိ…ပေ… ကတမဉ္စ ဘိက္ခဝေ သဗ္ဗံ စက္ခုဉ္စေဝ ရူပါ စ…ပေ… မနော စေဝ ဓမ္မာ စာ’’တိ ဧတ္ထ အာယတနသဗ္ဗသ္မိံ. ‘‘သဗ္ဗံ သဗ္ဗတော သဉ္ဇာနာတီ’’တိအာဒီသု သက္ကာယသဗ္ဗသ္မိံ. တတ္ထ သဗ္ဗသဗ္ဗသ္မိံ အာဂတော နိပ္ပဒေသော, ဣတရေသု တီသု သပ္ပဒေသောတိ ဝေဒိတဗ္ဗော. ဣစ္စေဝံ – तेथे 'सब्ब' (सर्व) हा शब्द 'सब्बसब्ब' (सर्व-सर्व), 'पदेससब्ब' (प्रादेशिक-सर्व), 'आयतनसब्ब' (आयतन-सर्व) आणि 'सक्कायसब्ब' (सत्काय-सर्व) अशा चार विषयांमध्ये उपयोगात आणलेला दिसतो. तसेच, “सर्व धर्म सर्व प्रकारे बुद्ध भगवंतांच्या ज्ञानमुखात (ज्ञानाच्या कक्षेत) येतात” इत्यादी वाक्यांमध्ये तो 'सब्बसब्ब' (सर्व-सर्व) या अर्थाने आला आहे. “हे सारिपुत्त, तुमच्या सर्वांचेच (भाषण) वेगवेगळ्या पर्यायांनी सुभाषित आहे” इत्यादी वाक्यांमध्ये तो 'पदेससब्ब' (प्रादेशिक-सर्व) या अर्थाने आला आहे. “भिक्खूहो, मी तुम्हांला सर्व काही उपदेशीन, ते नीट ऐका, मनात नीट धारण करा, मी बोलेन... पे... आणि भिक्खूहो, सर्व म्हणजे काय? चक्षु आणि रूप... पे... मन आणि धर्म” येथे तो 'आयतनसब्ब' (आयतन-सर्व) या अर्थाने आला आहे. “सर्व काही सर्व बाजूंनी जाणतो” इत्यादी वाक्यांमध्ये तो 'सक्कायसब्ब' (सत्काय-सर्व) या अर्थाने आला आहे. त्यापैकी 'सब्बसब्ब' मध्ये आलेला 'सब्ब' शब्द हा निरवशेष (निप्पदेस - संपूर्ण) आहे, आणि इतर तिन्हींमध्ये तो सावशेष (सप्पदेस - मर्यादित) आहे असे समजावे. अशा प्रकारे – သဗ္ဗသဗ္ဗပဒေသေသု[Pg.358], အထော အာယတနေပိ စ; သက္ကာယေ စာတိ စတူသု, သဗ္ဗသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. सब्बसब्ब (सर्व-सर्व), padesa (प्रादेशिक), तसेच आयतन आणि सक्काय (सत्काय) या चार अर्थांमध्ये 'सब्ब' शब्द प्रवृत्त होतो. ကတရ ကတမသဒ္ဒေသု ကတရသဒ္ဒေါ အပ္ပေသု ဧကံ ဝါ ဒွေ ဝါ တီဏိ ဝါ ဘိယျော ဝါ အပ္ပမုပါဒါယ ဝတ္တတိ. ကတမသဒ္ဒေါ ဗဟူသု ဧကံ ဝါ ဒွေ ဝါ တီဏိ ဝါ ဗဟုံ ဝါ ဥပါဒါယ ဝတ္တတိ. ကတရသဒ္ဒေါ ဟိ အပ္ပဝိသယော, ကတမသဒ္ဒေါ ဗဟုဝိသယော. တတြိမေ ပယောဂါ ‘‘ကတရေန မဂ္ဂေန ဂန္တဗ္ဗံ. သမုဒ္ဒေါ ကတရော အယံ. ကတမော တသ္မိံ သမယေ ဖဿော ဟောတိ. ကတမေ ဓမ္မာ ကုသလာ. ဒိသာ စတဿော ဝိဒိသာ စတဿော, ဥဒ္ဓံ အဓော ဒသ ဒိသတာ, ဣမာယော, ကတမံ ဒိသံ တိဋ္ဌတိ နာဂရာဇာ’’. ဣစ္စေဝမာဒယော ဘဝန္တိ. ဥဘယော. ဥဘယံ. ဥဘယော. ဥဘယေန. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂေ သဗ္ဗသဒ္ဒသမံ. ဥဘယော ဇနာ တိဋ္ဌန္တိ. ဥဘယော ဇနေ ပဿတိ. ယထာ ဥဘော ပုတ္တာ. ဥဘော ပုတ္တေတိ. ‘‘ဥဘယော’’တိ ဟိ ပဒံ ‘‘ဥဘော’’တိ ပဒမိဝ ဗဟုဝစနန္တဘာဝေန ပသိဒ္ဓံ, န တွေကဝစနန္တဘာဝေန. ဧတ္ထ ဟိ – 'कतर' आणि 'कतम' या शब्दांमध्ये, 'कतर' हा शब्द थोड्यांपैकी एक, दोन, तीन किंवा त्याहून अधिक थोड्यांना घेऊन वापरला जातो. 'कतम' हा शब्द बहुतांपैकी एक, दोन, तीन किंवा अनेकांना घेऊन वापरला जातो. कारण 'कतर' शब्द हा अल्पविषयक आहे आणि 'कतम' शब्द हा बहुविषयक आहे. त्यांचे प्रयोग खालीलप्रमाणे आहेत: “कोणत्या (कतर) मार्गाने जावे? हा कोणता (कतर) समुद्र आहे? त्या वेळी कोणता (कतम) स्पर्श असतो? कोणते (कतम) धर्म कुशल आहेत? चार दिशा, चार उपदिशा, वर आणि खाली अशा दहा दिशा आहेत, यांपैकी कोणत्या (कतम) दिशेला नागराज राहतात?” इत्यादी प्रयोग होतात. 'उभयो' (दोन्ही), 'उभयं', 'उभयो', 'उभयेन'. उर्वरित पुल्लिंगी रूपे 'सब्ब' शब्दाप्रमाणे होतात. 'उभयो जना तिट्ठन्ति' (दोन्ही लोक उभे आहेत). 'उभयो जने पस्सति' (दोन्ही लोकांना पाहतो). जसे 'उभो पुत्ता' (दोन्ही पुत्र), 'उभो पुत्ते' (दोन्ही पुत्रांना). कारण 'उभयो' हे पद 'उभो' या पदाप्रमाणे बहुवचनान्त म्हणूनच प्रसिद्ध आहे, एकवचनान्त म्हणून नाही. येथे – ‘‘ဧကရတ္တေန ဥဘယော, တုဝဉ္စ ဓနုသေခ စ; အန္နမေဝါဘိနန္ဒန္တိ, ဥဘယော ဒေဝမာနုသာ’’ “एका रात्रीत दोघेही, तू आणि धनुर्विद्येचा अभ्यास करणारा (धनुसेख); अन्नाचेच अभिनंदन करतात, देव आणि मनुष्य दोन्ही.” ‘‘ဥဘယော တေ ပိတာဘာတရော’’တိ တဒတ္ထသာဓကာနိ နိဒဿနပဒါနိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. ယဒါ ပနာယသ္မန္တော ‘‘ဥဘယော’’တိ ဧကဝစနန္တံ ပဿေယျာထ, တဒါ သာဓုကံ မနသိ ကရောထ. ကော ဟိ သမတ္ထော အနန္တနယပဋိမဏ္ဍိတေ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဇိနသာသနေ နိရဝသေသတော နယံ ဒဋ္ဌုံ [Pg.359] ဒဿေတုဉ္စ အညတြ အာဂမာဓိဂမသမ္ပန္နေန ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေန. ဣဒဉ္စေတ္ထုပလက္ခိတဗ္ဗံ – “ते दोघेही तुझे पिता आणि भाऊ आहेत” ही त्या अर्थाची साधक उदाहरणे समजावीत. परंतु, जेव्हा आयुष्यमानांनो! तुम्ही 'उभयो' हे रूप एकवचनान्त पाहाल, तेव्हा त्याचा नीट विचार करा. कारण अनंत नयांनी सुशोभित असलेल्या, अट्ठकथांसह असलेल्या तिपिटक रूपी जिनशासनात, आगम आणि अधिगम यांनी संपन्न असलेल्या आणि पटिसम्भिदा प्राप्त असलेल्या व्यक्तीशिवाय दुसरा कोण संपूर्णपणे नय पाहण्यास आणि दाखवण्यास समर्थ आहे? आणि येथे हे लक्षात घेतले पाहिजे – အညသဒ္ဒေါ ပုဗ္ဗသဒ္ဒေါ, ဒက္ခိဏော စုတ္တရော ပရော; သဗ္ဗနာမေသု ဂယှန္တိ, အသဗ္ဗနာမိကေသုပိ. 'अञ्ञ' (अन्य) शब्द, 'पुब्ब' (पूर्व) शब्द, 'दक्खिण' (दक्षिण), 'उत्तर' आणि 'पर' शब्द; हे सर्वनामांमध्ये घेतले जातात आणि असर्वनामांमध्येही घेतले जातात. ဧတေသဉှိ သဗ္ဗနာမေသု သင်္ဂဟော ဝိဘာဝိတောဝ. कारण यांचा सर्वनामांमध्ये समावेश स्पष्टच केला आहे. ဣဒါနိ အသဗ္ဗနာမေသု သင်္ဂဟော ဝုစ္စတေ – တတ္ထ အညသဒ္ဒေါ တာဝ ယဒါ ဗာလဝါစကော, တဒါ သဗ္ဗနာမံ နာမ န ဟောတိ. အသဗ္ဗနာမတ္တာ စ သဗ္ဗထာပိ ပုရိသ ကညာ စိတ္တနယေနေဝ ယောဇေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ န ဇာနာတီတိ အညော, ဗာလော ပုရိသော. န ဇာနာတီတိ အညာ, ဗာလာ ဣတ္ထီ. န ဇာနာတီတိ အညံ, ဗာလံ ကုလန္တိ ဝစနတ္ထော. ဧဝံ ဝိဒိတွာ ပုလ္လိင်္ဂဋ္ဌာနေ ‘‘အညော, အညာ. အညံ, အညေ’’တိအာဒိနာ ပုရိသနယေနေဝ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. ဣတ္ထိလိင်္ဂဋ္ဌာနေ ‘‘အညာ, အညာ, အညာယော’’တိအာဒိနာ ကညာနယေနေဝ, နပုံသကလိင်္ဂဋ္ဌာနေ ‘‘အညံ, အညာနီ’’တိအာဒိနာ စိတ္တနယေနေဝ ယောဇေတဗ္ဗာ. आता असर्वनामांमध्ये त्यांचा समावेश सांगितला जात आहे – त्यापैकी 'अञ्ञ' (अन्य) शब्द जेव्हा 'मूर्ख' (बाल) या अर्थाचा वाचक असतो, तेव्हा तो सर्वनाम नसतो. असर्वनाम असल्यामुळे तो सर्व प्रकारे 'पुरिस' (पुरुष), 'कञ्ञा' (कन्या) आणि 'चित्त' यांच्या रूपांप्रमाणेच योजावा. कारण 'जो जाणत नाही तो अञ्ञ (मूर्ख पुरुष)', 'जी जाणत नाही ती अञ्ञा (मूर्ख स्त्री)', 'जे जाणत नाही ते अञ्ञं (मूर्ख कुल)' असा शब्दाचा अर्थ होतो. हे जाणून पुल्लिंगाच्या ठिकाणी “अञ्ञो, अञ्ञा. अञ्ञं, अञ्ञे” इत्यादी प्रकारे 'पुरिस' शब्दाच्या रूपांप्रमाणेच नामविभक्तीची रूपे योजावीत. स्त्रीलिंगाच्या ठिकाणी “अञ्ञा, अञ्ञा, अञ्ञायो” इत्यादी प्रकारे 'कञ्ञा' शब्दाच्या रूपांप्रमाणे, आणि नपुंसकलिंगाच्या ठिकाणी “अञ्ञं, अञ्ञानि” इत्यादी प्रकारे 'चित्त' शब्दाच्या रूपांप्रमाणे योजावीत. ဣမသ္မိဉှိ အတ္ထဝိသေသေ ဗာလဇနေ ဝတ္တုကာမေန ‘‘အညာ ဇနာ’’တိ အဝတွာ ‘‘အညေ ဇနာ’’တိ ဝုတ္တေ တဿ တံ ဝစနံ အဓိပ္ပေတတ္ထံ န သာဓေတိ အညထာ အတ္ထဿ ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ. တထာ ‘‘အညာနံ ဇနာန’’န္တိ အဝတွာ ‘‘အညေသံ ဇနာနံ, အညေသာနံ ဇနာန’’န္တိ ဝါ ဝုတ္တေ တဿ တံ ဝစနံ အဓိပ္ပေတတ္ထံ န သာဓေတိ. တထာ ‘‘အညာနံ ဣတ္ထီန’’န္တိ အဝတွာ ‘‘အညာသံ ဣတ္ထီန’’န္တိ ဝုတ္တေပိ, ‘‘အညာနံ ကုလာန’’န္တိ အဝတွာ ‘‘အညေသံ ကုလာနံ, အညေသာနံ ကုလာန’’န္တိ ဝါ ဝုတ္တေပိ. သဗ္ဗနာမိကဝသေန ပန အဓိဂတာပရဝစနိစ္ဆာယံ ‘‘အညေ ဇနာ’’တိအာဒိနာ ဝတ္တဗ္ဗံ, န ‘‘အညာ ဇနာ’’တိအာဒိနာ. တထာ ဟိ ‘‘အညာ ဇနာ’’တိအာဒိနာ ဝုတ္တဝစနံ အဓိပ္ပေတတ္ထံ န သာဓေတိ အညထာ အတ္ထဿ [Pg.360] ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ. ဣတိ ယတ္ထ ‘‘အညာ ဇနာ’’တိအာဒိဝစနံ ဥပပဇ္ဇတိ, ‘‘အညေ ဇနာ’’တိအာဒိဝစနံ နုပပဇ္ဇတိ, ယတ္ထ ပန ‘‘အညေ ဇနာ’’တိအာဒိဝစနံ ဥပပဇ္ဇတိ, ‘‘အညာ ဇနာ’’တိအာဒိဝစနံ နုပပဇ္ဇတိ. ယာ ဧတသ္မိံ အတ္ထဝိသေသေ သလ္လက္ခဏာ ပညာ, အယံ နီတိယာ မဂ္ဂေါ ယုတ္တာယုတ္တိဝိစာရဏေ ဟေတုတ္တာ, လောကသ္မိဉှိ ယုတ္တာယုတ္တိဝိစာရဏာ နီတီတိ ဝုတ္တာ. သာ စ ဝိနာ ပညာယ န သိဇ္ဈတိ. ဧဝံ အညသဒ္ဒေါ အသဗ္ဗနာမိကောပိ ဘဝတိ. कारण या विशिष्ट अर्थामध्ये, मूर्ख लोकांबद्दल बोलण्याची इच्छा असताना “अञ्ञा जना” (मूर्ख लोक) असे न म्हणता जर “अञ्ञे जना” असे म्हटले, तर त्याचे ते वचन अभिप्रेत अर्थ सिद्ध करत नाही, कारण त्याचा दुसराच अर्थ घेतला जाईल. तसेच “अञ्ञानं जनानं” (मूर्ख लोकांचे) असे न म्हणता जर “अञ्ञेसं जनानं” किंवा “अञ्ञेसानं जनानं” असे म्हटले, तर त्याचे ते वचन अभिप्रेत अर्थ सिद्ध करत नाही. तसेच “अञ्ञानं इत्थीनं” असे न म्हणता जर “अञ्ञासं इत्थीनं” असे म्हटले तरीही, आणि “अञ्ञानं कुलानं” असे न म्हणता जर “अञ्ञेसं कुलानं” किंवा “अञ्ञेसानं कुलानं” असे म्हटले तरीही (अभिप्रेत अर्थ सिद्ध होत नाही). परंतु, सर्वनामाच्या अर्थाने दुसऱ्या अर्थाची इच्छा असताना “अञ्ञे जना” (इतर लोक) इत्यादी प्रकारे म्हणावे, “अञ्ञा जना” इत्यादी प्रकारे नाही. कारण “अञ्ञा जना” इत्यादी प्रकारे म्हटलेले वचन अभिप्रेत अर्थ सिद्ध करत नाही, कारण त्याचा दुसराच अर्थ घेतला जाईल. अशा प्रकारे, जेथे “अञ्ञा जना” इत्यादी वचन योग्य ठरते, तेथे “अञ्ञे जना” इत्यादी वचन योग्य ठरत नाही; आणि जेथे “अञ्ञे जना” इत्यादी वचन योग्य ठरते, तेथे “अञ्ञा जना” इत्यादी वचन योग्य ठरत नाही. या विशिष्ट अर्थाचे जे सूक्ष्म निरीक्षण करणारे ज्ञान (प्रज्ञा) आहे, तोच नीतीचा मार्ग आहे, कारण तो योग्य-अयोग्यतेचा विचार करण्यात कारणीभूत ठरतो. कारण लोकात योग्य-अयोग्यतेचा विचार करणे यालाच 'नीती' म्हटले आहे. आणि ती प्रज्ञेशिवाय सिद्ध होत नाही. अशा प्रकारे 'अञ्ञ' शब्द असर्वनामही होतो. ပုဗ္ဗ ဒက္ခိဏုတ္တရ ပရသဒ္ဒေသု ပုဗ္ဗသဒ္ဒေါ ယတ္ထ ပဓာနဝါစကော, ယတ္ထ စ ‘‘သေမှံ ပုဗ္ဗော’’တိအာဒီသု လောဟိတကောပဇဝါစကော, တတ္ထ အသဗ္ဗနာမိကော. ပဌမတ္ထေ တိလိင်္ဂေါ, ဒုတိယတ္ထေ ဧကလိင်္ဂေါ. ဥတ္တမတ္ထဝါစကော ပန ဥတ္တရသဒ္ဒေါ စ ပရသဒ္ဒေါ စ အသဗ္ဗနာမိကော တိလိင်္ဂေါယေဝ. တထာ ‘‘ဒက္ခိဏဿာ ဝဟန္တိမ’’န္တိ ဧတ္ထ ဝိယ သုသိက္ခိတတ္ထစတုရတ္ထဝါစကော ဒက္ခိဏသဒ္ဒေါ. ‘‘ပေတာနံ ဒက္ခိဏံ ဒဇ္ဇာ’’တိအာဒီသု ပန ဒေယျဓမ္မဝါစကော ဒက္ခိဏာသဒ္ဒေါ နိယောဂါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ အသဗ္ဗနာမိကောယေဝ. ဧဝံ အည ပုဗ္ဗ ဒက္ခိဏုတ္တရ ပရသဒ္ဒါ အသဗ္ဗနာမိကာပိ သန္တီတိ တေသံ သဗ္ဗနာမေသုပိ အသဗ္ဗနာမေသုပိ သင်္ဂဟော ဝေဒိတဗ္ဗော. 'पुब्ब' (पूर्व), 'दक्खिण' (दक्षिण), 'उत्तर' आणि 'पर' या शब्दांमध्ये, 'पुब्ब' शब्द जेथे 'प्रधान' (मुख्य) या अर्थाचा वाचक असतो, आणि जेथे “कफ आणि पू (पुब्ब)” इत्यादी वाक्यांमध्ये रक्तजन्य पू या अर्थाचा वाचक असतो, तेथे तो असर्वनाम असतो. पहिल्या अर्थात तो तिन्ही लिंगांत चालतो, दुसऱ्या अर्थात तो एकाच लिंगात (पुल्लिंगात) चालतो. 'उत्कृष्ट' या अर्थाचा वाचक असलेला 'उत्तर' शब्द आणि 'पर' शब्द हे असर्वनाम असून तिन्ही लिंगांतच चालतात. तसेच “दक्षिण दिशेकडून वाहणारी” या वाक्यातील 'दक्खिण' शब्द हा सुशिक्षित किंवा चतुर या अर्थाचा वाचक आहे. परंतु “मृतांसाठी (पेतांसाठी) दक्षिणा द्यावी” इत्यादी वाक्यांमध्ये दान देण्याच्या वस्तूचा (देय्यधम्म) वाचक असलेला 'दक्खिणा' शब्द हा निश्चितपणे स्त्रीलिंगी आणि असर्वनामच असतो. अशा प्रकारे अञ्ञ, puब्ब, दक्खिण, उत्तर आणि पर हे शब्द असर्वनामही असतात, म्हणून त्यांचा सर्वनामांमध्ये आणि असर्वनामांमध्येही समावेश समजावा. ဣဒါနိ ကတရသဒ္ဒါဒီနံ ပရပဒေန သဒ္ဓိံ သမာသော နီယတေ ‘‘ကတရဂါမဝါသီ ကတမဂါမဝါသီ. ဥဘယဂါမဝါသိနော, ဣတရဂါမဝါသီ အညတရဂါမဝါသီ, ပုဗ္ဗဒိသာ, ပရဇနော, ဒက္ခိဏဒိသာ, ဥတ္တရဒိသာ, အဓရပတ္တော’’တိ. တတြ ‘‘ကတရော ဂါမော ကတရဂါမော, ကတမော ဂါမော ကတမဂါမော, ဥဘယော ဂါမာ ဥဘယဂါမာ’’တိအာဒိနာ ယထာရဟံ သမာသဝိဂ္ဂဟော, ကတရသဒ္ဒဿ ပန ကတမသဒ္ဒေန သဒ္ဓိံ သမာသံ ဣစ္ဆန္တိ ဒွိဓာ စ ရူပါနိ ဂရူ ‘‘ကတရော စ ကတမော စ ကတရကတမေ ကတရကတမာ ဝါ’’တိ[Pg.361]. တသ္မာ သဗ္ဗနာမိကနယေန သုဒ္ဓနာမိကေသု ပုရိသနယေန စ ကတရ ကတမသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ, တေနဿ သမ္ပဒါနသာမိဝစနဋ္ဌာနေသု ‘‘ကတရကတမေသံ, ကတရကတမေသာနံ, ကတရကတမာန’’န္တိ တီဏိ ရူပါနိ သိယုံ ‘‘ကတရာ စ ကတမာ စ ကတရကတမာ’’တိ ဧဝံ ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ကတသမာသေ ပန သဗ္ဗနာမိကနယေန, သုဒ္ဓနာမိကေသု ကညာနယေန စ ယောဇေတဗ္ဗာ. ‘‘ကတရဉ္စ ကတမဉ္စ ကတရကတမာနီ’’တိ ဧဝံ နပုံသကလိင်္ဂဝသေန ကတသမာသေ သဗ္ဗနာမိကနယေန, သုဒ္ဓနာမိကေသု စိတ္တနယေန စ ယောဇေတဗ္ဗာ. आता 'कतर' इत्यादी शब्दांचा दुसऱ्या पदासोबत (परपदासोबत) समास केला जातो, जसे की - "कतरगामवासी (कतरगामवासी), कतमगामवासी (कतमगामवासी), उभयगामवासी (उभयगामवासिनो), इतरगामवासी (इतरगामवासी), अञ्ञतरगामवासी (अञ्ञतरगामवासी), पुब्बदिसा (पूर्व दिशा), परजनो (परजन), दक्खिणदिसा (दक्षिण दिशा), उत्तरदिसा (उत्तर दिशा), अधरपत्तो (अधरपत्त)" इत्यादी. तेथे "कतरो गामो कतरगामो (जो गाव तो कतरगाव), कतमो गामो कतमगामो (जो गाव तो कतमगाव), उभयो गामा उभयगामा (दोन्ही गावे ती उभयगाम)" इत्यादी प्रकारे योग्यतेनुसार समासविग्रह करावा. परंतु, 'कतर' शब्दाचा 'कतम' शब्दासोबत समास इच्छितात आणि त्याचे दोन प्रकारचे रूप श्रेष्ठ मानतात - "कतरो च कतमो च कतरकतमे किंवा कतरकतमा" (कतर आणि कतम ते कतरकतम). म्हणून, सर्वनाम पद्धतीनुसार (सब्बनामिकनयेन) आणि शुद्ध नामांमध्ये 'पुरिस' (पुरुष) शब्दाच्या पद्धतीनुसार 'कतर' व 'कतम' शब्दांची नामविभक्ती रूपे (नामिकपदमाला) योजावीत. त्यामुळे त्याच्या संप्रदान आणि स्वामी (षष्ठी) विभक्तीच्या बहुवचनाच्या ठिकाणी "कतरकतमेसं, कतरकतमेसानं, कतरकनमानं" अशी तीन रूपे होतील. "कतरा च कतमा च कतरकतमा" अशा प्रकारे स्त्रीलिंगी समासात सर्वनाम पद्धतीनुसार आणि शुद्ध नामांमध्ये 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाच्या पद्धतीनुसार रूपे योजावीत. "कतरञ्च कतमञ्च कतरकतमानी" अशा प्रकारे नपुंसकलिंगी समासात सर्वनाम पद्धतीनुसार आणि शुद्ध नामांमध्ये 'चित्त' शब्दाच्या पद्धतीनुसार रूपे योजावीत. အယံ ပနေတ္ထ ဝိသေသောပိ ဝေဒိတဗ္ဗော – ပုဗ္ဗာပရာဒိသဒ္ဒါ ဒွန္ဒသမာသာဒိဝိဓိံ ပတွာ သေဟိ ရူပေဟိ ရူပဝန္တော န ဟောန္တိ, တံ ယထာ? ပုဗ္ဗာပရာ, အဓရုတ္တရာ, မာသပုဗ္ဗာ ပုရိသာ, ဒိဋ္ဌပုဗ္ဗာ ပုရိသာ, တထာဂတံ ဒိဋ္ဌပုဗ္ဗာ သာဝကာ, ဣဒံ ပုလ္လိင်္ဂတ္တေ ပဌမာဗဟုဝစနရူပံ. ဧတ္ထေကာရော အာဒေသဘူတော န ဒိဿတိ. ပုဗ္ဗာပရာနံ အဓရုတ္တရာနံ, မာသပုဗ္ဗာနံ ပုရိသာနံ, ဣဒံ ပုလ္လိင်္ဂတ္တေ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီနံ ဗဟုဝစနရူပံ. ဧတ္ထ သံ သာနမိစ္စေတေ အာဒေသဘူတာ န ဒိဿန္တိ. တထာဂတံ ဒိဋ္ဌပုဗ္ဗာနံ သာဝကာနံ, တထာဂတံ ဒိဋ္ဌပုဗ္ဗာနံ သာဝိကာနံ, ကုလာနံ ဝါ, ဣဒံ တိလိင်္ဂတ္တေ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီနံ ဗဟုဝစနရူပံ. ဧတ္ထာပိ သံ သာနမိစ္စေတေ အာဒေသဘူတာ န ဒိဿန္တိ. မာသပုဗ္ဗာယံ မာသပုဗ္ဗာယ, ပိယပုဗ္ဗာယံ ပိယပုဗ္ဗာယ, ဣဒမိတ္ထိလိင်္ဂတ္တေ သတ္တမီစတုတ္ထီဆဋ္ဌီနံ ဧကဝစနရူပံ. ဧတ္ထာဒေသဘူတာ သံ သာ န ဒိဿန္တိ. မာသပုဗ္ဗာနံ ဣတ္ထီနံ, ပိယပုဗ္ဗာနံ ဣတ္ထီနံ, ဣဒမိတ္ထိလိင်္ဂတ္တေ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီဗဟုဝစနရူပံ. ဧတ္ထ ပနာဒေသဘူတော သမိစ္စေသော န ဒိဿတိ. အညာနိပိ ယထာသမ္ဘဝံ ယောဇေတဗ္ဗာနိ, ပုဗ္ဗာပရာဒီနံ သမာသဝိဂ္ဂဟံ သမာသပရိစ္ဆေဒေ ပကာသေဿာမ. येथे हा विशेष देखील समजून घ्यावा - 'पुब्ब', 'अपर' इत्यादी शब्द द्वंद्व समासादी विधी प्राप्त करून आपल्या मूळ रूपांसारखे रूप धारण करत नाहीत. ते कसे? 'पुब्बापरा' (पूर्व आणि अपर), 'अधरुत्तरा' (अधर आणि उत्तर), 'मासपुब्बा पुरिसा' (एक महिना आधीचे पुरुष), 'दिट्ठपुब्बा पुरिसा' (पूर्वी पाहिलेले पुरुष), 'तथागतं दिट्ठपुब्बा सावका' (तथागतांना पूर्वी पाहिलेले श्रावक) - हे पुल्लिंगातील प्रथमा विभक्तीचे बहुवचनी रूप आहे. येथे 'ए' कार आदेश झालेला दिसत नाही. 'पुब्बापरानं', 'अधरुत्तरानं', 'मासपुब्बानं पुरिसानं' - हे पुल्लिंगातील चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीचे बहुवचनी रूप आहे. येथे 'सं' आणि 'सानं' हे आदेश झालेले दिसत नाहीत. 'तथागतं दिट्ठपुब्बानं सावकानं', 'तथागतं दिट्ठपुब्बानं साविकानं' किंवा 'कुलानं' - हे तिन्ही लिंगांतील चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीचे बहुवचनी रूप आहे. येथेही 'सं' आणि 'सानं' हे आदेश झालेले दिसत नाहीत. 'मासपुब्बायं', 'मासपुब्बाय', 'पियपुब्बायं', 'पियपुब्बाय' - हे स्त्रीलिंगातील सप्तमी, चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीचे एकवचनी रूप आहे. येथे आदेश झालेले 'सं' आणि 'सा' दिसत नाहीत. 'मासपुब्बानं इत्थीनं', 'पियपुब्बानं इत्थीनं' - हे स्त्रीलिंगातील चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीचे बहुवचनी रूप आहे. येथे मात्र आदेश झालेला 'सं' दिसत नाही. इतर रूपांचीही योग्यतेनुसार योजना करावी. 'पुब्ब', 'अपर' इत्यादींचा समासविग्रह आम्ही समास परिच्छेदात स्पष्ट करू. ဣဒါနိ [Pg.362] ယံသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'यं' (जो/जी/जे) या सर्वनामाची नामविभक्ती रूपे (नामिकपदमाला) सांगितली जात आहेत - ယော, ယေ. ယံ, ယေ. ယေန, ယေဟိ, ယေဘိ. ယဿ, ယေသံ, ယေသာနံ. ယသ္မာ, ယမှာ, ယေဟိ, ယေဘိ. ယဿ, ယေသံ, ယေသာနံ. ယသ္မိံ, ယမှိ, ယေသု. ဣဒံ ပုလ္လိင်္ဂံ. ယံ, ယာနိ. ယံ, ယာနိ. ယေန. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. အထ ဝါ ယံ, ယာနိ, ယာ. ယံ, ယာနိ, ယေ. ယေန. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. ကတ္ထစိ ဟိ နိကာရလောပေါ ဘဝတိ. အထ ဝါ ပန နိကာရဿ အာကာရေကာရာဒေသာပိ ဂါထာဝိသယေ. यो, ye (प्रथमा). यं, ye (द्वितीया). येन, yehi, yebhi (तृतीया). यस्स, yesaṃ, yesānaṃ (चतुर्थी). यस्मा, yamhā, yehi, yebhi (पंचमी). यस्स, yesaṃ, yesānaṃ (षष्ठी). यस्मिं, yamhi, yesu (सप्तमी). हे पुल्लिंगी रूप आहे. यं, yāni (प्रथमा). यं, yāni (द्वितीया). येन (तृतीया). उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच आहेत. अथवा यं, yāni, yā (प्रथमा). यं, yāni, ye (द्वितीया). येन (तृतीया). उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच आहेत. कारण काही ठिकाणी 'नि' काराचा लोप होतो. अथवा गाथेच्या विषयात 'नि' काराच्या जागी 'आकार' आणि 'एकार' आदेश देखील होतात. ‘‘ယာ ပုဗ္ဗေ ဗောဓိသတ္တာနံ, ပလ္လင်္ကဝရမာဘုဇေ; နိမိတ္တာနိ ပဒိဿန္တိ, တာနိ အဇ္ဇ ပဒိဿရေ’’တိ စ, "या पुब्बे बोधिसत्तानं, पल्लङ्कवरमाभुजे; निमित्तानि पदिसन्ति, तानि अज्ज पदिसरे" (पूर्वी बोधिसत्त्वांच्या श्रेष्ठ आसनावर बसताना जी चिन्हे दिसत होती, ती आज दिसत आहेत) आणि, ‘‘ကိံ မာဏဝဿ ရတနာနိ အတ္ထိ, ယေ တံ ဇိနန္တော ဟရေ အက္ခဓုတ္တော’’တိ စ ဣဒမေတ္ထ ပါဠိနိဒဿနံ. ဣဒံ နပုံသကလိင်္ဂံ. "किं माणवस्स रतनानि अत्थि, ye तं जिनन्तो हरे अक्खधुत्तो" (त्या माणवाकडे कोणती रत्ने आहेत, ज्यांना जिंकून हा जुगारी घेऊन जाईल?) हे येथे पाळी भाषेतील उदाहरण आहे. हे नपुंसकलिंगी रूप आहे. ယာ, ယာ, ယာယော. ယံ, ယာ, ယာယော. ယာယ, ယာဟိ, ယာဘိ. ယာယ, ယဿာ, ယာသံ. ယာယ, ယာဟိ, ယာဘိ. ယာယ, ယဿာ, ယာသံ. ယဿံ, ယာယံ, ယာသု. ဣတ္ထိလိင်္ဂံ. ဧဝံ ယံသဒ္ဒဿ လိင်္ဂတ္တယဝသေန ပဒမာလာ ဘဝတိ. ဧတ္ထာလပနပဒါနိ န လဗ္ဘန္တိ. တထာ တံသဒ္ဒါဒီနံ ပဒမာလာဒီသုပိ. या, या, yāyo (प्रथमा). यं, या, yāyo (द्वितीया). याय, yāhi, yābhi (तृतीया). याय, yassā, yāsaṃ (चतुर्थी). याय, yāhi, yābhi (पंचमी). याय, yassā, yāsaṃ (षष्ठी). यस्सं, yāyaṃ, yāsu (सप्तमी). हे स्त्रीलिंगी रूप आहे. अशा प्रकारे 'यं' शब्दाची तिन्ही लिंगांनुसार पदमाला (विभक्ती रूपे) होते. येथे संबोधन विभक्तीची पदे आढळत नाहीत. त्याचप्रमाणे 'तं' इत्यादी शब्दांच्या पदमालांमध्येही संबोधन पदे आढळत नाहीत. ဧတ္ထ ပန ယန္တိ သဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ – ယန္တိ သဒ္ဒေါ ‘‘ယံ မေ ဘန္တေ ဒေဝါနံ တာဝတိံသာနံ သမ္မုခါ သုတံ သမ္မုခါ ပဋိဂ္ဂဟိတံ, အာရောစေမိ တံ ဘန္တေ ဘဂဝတော’’တိအာဒီသု ပစ္စတ္တဝစနေ ဒိဿတိ. ‘‘ယန္တံ အပုစ္ဆိမှ အကိတ္တယီ နော, အညံ တံ ပုစ္ဆာမ တဒိင်္ဃ ဗြူဟီ’’တိအာဒီသု ဥပယောဂဝစနေ. ‘‘အဋ္ဌာ နမေတံ ဘိက္ခဝေ အနဝကာသော, ယံ ဧကိဿာ လောကဓာတုယာ’’တိအာဒီသု ကရဏဝစနေ. ‘‘ယံ ဝိပဿီ ဘဂဝါ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ [Pg.363] လောကေ ဥဒပါဒီ’’တိအာဒီသု ဘုမ္မဝစနေ ဒိဿတိ. ဧတ္ထေဒံ ဝုစ္စတိ – येथे 'यं' या शब्दाचा अर्थ-उद्धार (विविध अर्थांतील प्रयोग) सांगितला जात आहे - 'यं' हा शब्द "यं मे भन्ते देवानं तावतिंसानं सम्मुखा सुतं सम्मुखा पटिग्गहितं, आरोचेमि तं भन्ते भगवतो" (भन्ते, मी तावतिंस देवांच्या समक्ष जे ऐकले व ग्रहण केले, ते मी भगवंतांना सांगतो) इत्यादी वाक्यांमध्ये प्रथमा विभक्तीत (पच्चत्तवचने) दिसतो. "यन्तं अपुच्छिम्ह अकित्तयी नो, अञ्ञं तं पुच्छाम तदिङ्घ ब्रूही" (आम्ही जे विचारले ते आपण आम्हाला सांगितले, आता आम्ही दुसरे विचारतो, ते सांगा) इत्यादी वाक्यांमध्ये द्वितीया विभक्तीत (उपयोगवचने) दिसतो. "अट्ठा नमेतं भिक्खवे अनवकासो, यं एकिस्सा लोकधातुया" (भिक्खूहो, हे अशक्य आहे की एकाच लोकधातूमध्ये...) इत्यादी वाक्यांमध्ये तृतीया विभक्तीत (करणवचने) दिसतो. "यं यानेन गच्छति" इत्यादी वाक्यांमध्ये किंवा "यं विपस्सी भगवा अरहं सम्मासम्बुद्धो लोके उदपादी" (जेव्हा विपस्सी भगवंत, अर्हत, सम्यक्संबुद्ध जगात उत्पन्न झाले) इत्यादी वाक्यांमध्ये सप्तमी विभक्तीत (भुम्मवचने) दिसतो. याविषयी असे म्हटले आहे - ‘‘ပစ္စတ္တေ ဥပယောဂေ စ, ဘုမ္မေ စ ကရဏေပိ စ; စတူသွေတေသု ဌာနေသု, ယန္တိ သဒ္ဒေါ ပဝတ္တတီ’’တိ. "प्रथमा (पच्चत्त), द्वितीया (उपयोग), सप्तमी (भुम्म) आणि तृतीया (करण) या चारही ठिकाणी 'यं' हा शब्द वापरला जातो." ပရပဒေန သဒ္ဓိံ ယံသဒ္ဒဿ သမာသောပိ ဝေဒိတဗ္ဗော ‘‘ယံခန္ဓာဒိ, ယံဂုဏာ, ယဂ္ဂုဏာ’’တိ. တတ္ထ ယော ခန္ဓာဒိ ယံခန္ဓာဒိ, ယေ ဂုဏာ ယံဂုဏာတိ သမာသဝိဂ္ဂဟော. တထာ ဟိ ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂေ ‘‘ယံဂုဏနေမိတ္တိကဉ္စေတံ နာမံ, တေသံ ဂုဏာနံ ပကာသနတ္ထံ ဣမံ ဂါထံ ဝဒန္တီ’’တိ ဧတသ္မိံ ပဒေ ‘‘ယေ ဂုဏာ ယံဂုဏာ, ယံဂုဏာ ဧဝ နိမိတ္တံ ယံဂုဏနိမိတ္တံ, တတော ဇာတံ ‘ဘဂဝါ’တိ ဣဒံ နာမန္တိ ယံဂုဏနေမိတ္တိက’’န္တိ နိဗ္ဗစနမိစ္ဆိတဗ္ဗံ. ယဂ္ဂုဏာတိ ဧတ္ထ ပန ‘‘ယဿ ဂုဏာ ယဂ္ဂုဏာ’’တိ နိဗ္ဗစနံ. တထာ ဟိ – दुसऱ्या पदासोबत (परपदासोबत) 'यं' शब्दाचा समास देखील समजून घ्यावा, जसे की - "यंखन्धादि (यंखन्धादि), यंगुणा (यंगुणा), यग्गुणा (यग्गुणा)". तेथे "यो खन्धादि यंखन्धादि" (जे स्कंध इत्यादी ते यंस्कंधादी), "ye गुणा यंगुणा" (जे गुण ते यंगुण) असा समासविग्रह आहे. तसेच विशुद्धिमार्गात (विसुद्धिमग्गे) "यंगुणनेमित्तिकञ्चेतं नामं, तेसं गुणानं पकासनत्थं इमं गाथं वदन्ती" या पदात "ye गुणा यंगुणा, यंगुणा एव निमित्तं यंगुणनिमित्तं, ततो जातं 'भगवा'ति इदं नामन्ति यंगुणनेमित्तिकं" (जे गुण ते यंगुण, यंगुण हेच निमित्त ते यंगुणनिमित्त, त्यापासून उत्पन्न झालेले 'भगवा' हे नाव म्हणजे यं-गुण-नैमित्तिक) असा अर्थ समजून घ्यावा. 'यग्गुणा' येथे मात्र "यस्स गुणा यग्गुणा" (ज्याचे गुण ते यग्गुण) अशी व्युत्पत्ती (निब्बचन) आहे. कारण - ‘‘အပိ သဗ္ဗညုတာ ပညာ, ယဂ္ဂုဏန္တံ န ဇာနိယာ; အထ ကာ တဿ ဝိဇညာ, တံ ဗုဒ္ဓံ ဘူဂုဏံ နမေ’’တိ "अपि सब्बञ्ञुता पञ्ञा, यग्गुणन्तं न जानिया; अथ का तस्स विञ्ञा, तं बुद्धं भूगुणं नमे" (सर्वज्ञता प्रज्ञा देखील ज्यांच्या गुणांचा अंत जाणू शकत नाही, मग दुसरा कोण ते जाणू शकेल? अशा पृथ्वीसमान गुण असणाऱ्या बुद्धांना मी नमन करतो.) ပေါရာဏကဝိရစနာယံ ‘‘ယဿ ဂုဏာ ယဂ္ဂုဏာ’’တိ နိဗ္ဗစနမိစ္ဆိတဗ္ဗံ. प्राचीन कवींच्या रचनेत "यस्स गुणा यग्गुणा" (ज्याचे गुण ते यग्गुण) असा अर्थ समजून घ्यावा. ယသဒ္ဒဿ သမာသမှိ, သဒ္ဓိံ ပရပဒေဟိ ဝေ; နိဂ္ဂဟီတာဂမော ဝါထ, ဒွိဘာဝေါ ဝါ သိယာ ဒွိဓာ. 'यं' शब्दाचा दुसऱ्या पदांसोबत समास होताना, निश्चितच निग्गहीत (अनुस्वार) आगम किंवा द्वित्व (द्विभाव) अशा दोन प्रकारे रूपे होतात. ဧဝံ ယသဒ္ဒဿ သမာသော သလ္လက္ခိတဗ္ဗော. अशा प्रकारे 'यं' शब्दाचा समास लक्षात ठेवावा. ဣဒါနိ တသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'तं' (तो/ती/ते) या सर्वनामाची नामविभक्ती रूपे (नामिकपदमाला) सांगितली जात आहेत - သော, တေ. နံ, တံ, နေ, တေ. နေန, တေန, နေဟိ, တေဟိ, နေဘိ, တေဘိ. အဿ, နဿ, တဿ, ‘နေသံ, တေသံ (အာသံ). အသ္မာ, နသ္မာ, တသ္မာ, နမှာ, တမှာ, နေဟိ, တေဟိ, နေဘိ, တေဘိ. အဿ, နဿ, တဿ, နေသံ, တေသံ (အာသံ). အသ္မိံ, နသ္မိံ, တသ္မိံ, အမှိ, နမှိ, တမှိ, တျမှိ, နေသု, တေသု. ဣဒံ ပုလ္လိင်္ဂံ. ဧတ္ထ [Pg.364] စ အာသံသဒ္ဒဿ အတ္ထိဘာဝေ ‘‘နေဝါသံ ကေသာ ဒိဿန္တိ, ဟတ္ထပါဒါ စ ဇာလိနော’’တိ ဂါထာ နိဒဿနံ, သော စ တိလိင်္ဂေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. တျမှီတိ ပဒဿ အတ္ထိဘာဝေ – सो, ते. नं, तं, ने, ते. नेन, तेन, नेहि, तेहि, नेभि, तेभि. अस्स, नस्स, तस्स, नेसं, तेसं (आसं). अस्मा, नस्मा, तस्मा, नम्हा, तम्हा, नेहि, तेहि, नेभि, तेभि. अस्स, नस्स, तस्स, नेसं, तेसं (आसं). अस्मिं, नस्मिं, तस्मिं, अम्हि, नम्हि, तम्हि, त्यम्हि, नेसु, तेसु. हे पुल्लिंग आहे. आणि येथे 'आसं' या शब्दाच्या अस्तित्वाविषयी "नेवासं केसा दिस्सन्ति, हत्थपादा च जालिनो" (त्यांचे केस दिसत नाहीत, आणि हात-पाय जाळीदार आहेत) ही गाथा उदाहरण आहे, आणि तो (शब्द) तिन्ही लिंगांत पाहावा. 'त्यम्हि' या पदाच्या अस्तित्वाविषयी – ‘‘ယဒါဿ သီလံ ပညဉ္စ, သောစေယျဉ္စာဓိဂစ္ဆတိ; အထ ဝိဿာသတေ တျမှိ, ဂုယှဉ္စဿ န ရက္ခတီ’’တိ "यदास्स सीलं पञ्ञञ्च, सोचेय्यञ्चाधिगच्छति; अथ विस्सासते त्यम्हि, गुय्हञ्चस्स न रक्खती" (जेव्हा त्याचे शील, प्रज्ञा आणि शुचिता प्राप्त होते; तेव्हा त्याच्यावर विश्वास ठेवला जातो, आणि त्याचे रहस्य राखले जात नाही) - အယံ ဂါထာ နိဒဿနံ. အယမေတ္ထ ရူပဝိသေသော သလ္လက္ခိတဗ္ဗော – အရိယဝိနယေတိ ဝါ သပ္ပုရိသဝိနယေတိ ဝါ. ဧသေ သေ ဧကေ ဧကဋ္ဌေတိ ပါဠိပ္ပဒေသေ ပစ္စတ္တေကဝစနကာနမေတ တသဒ္ဒါနံ ဧကာရန္တနိဒ္ဒေသောပိ ဒိဿတီတိ. ही गाथा उदाहरण आहे. येथे हा रूपविशेष लक्षात घेतला पाहिजे – 'अरियविनये' (आर्यविनयात) किंवा 'सप्पुरिसविनये' (सत्पुरुषविनयात). 'एसे से एके एकट्ठे' या पाळी वाक्यात प्रथमेच्या एकवचनातील या 'त' शब्दांचे एकारांत निर्देश देखील दिसतात. ဧတ္ထ ပန တေသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ – တေသဒ္ဒေါ ‘‘န တေ သုခံ ပဇာနန္တိ, ယေ န ပဿန္တိ နန္ဒန’’န္တိအာဒီသု တံသဒ္ဒဿ ဝသေန ပစ္စတ္တဗဟုဝစနေ အာဂတော, ‘‘တေ န ပဿာမိ ဒါရကေ’’တိအာဒီသု ဥပယောဂဗဟုဝစနေ. ‘‘နမော တေ ပုရိသာဇည, နမော တေ ပုရိသုတ္တမ. နမော တေ ဗုဒ္ဓ ဝီရတ္ထူ’’တိ စ အာဒီသု တုမှသဒ္ဒဿ ဝသေန သမ္ပဒါနေ, တုယှန္တိ အတ္ထောတိ ဝဒန္တိ. ‘‘ကိန္တေ ဒိဋ္ဌံ ကိန္တိ တေ ဒိဋ္ဌံ, ဥပဓီ တေ သမတိက္ကန္တာ, အာသဝါ တေ ပဒါလိတာ’’တိ စ အာဒီသု ကရဏေ. ‘‘ကိန္တေ ဝတံ ကိံ ပန ဗြဟ္မစရိယ’’န္တိအာဒီသု သာမိအတ္ထေ, တဝါတိ အတ္ထောတိ ဝဒန္တိ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – येथे 'ते' शब्दाचा अर्थ स्पष्ट केला जात आहे – 'ते' शब्द "न ते सुखं पजानन्ति, ये न पस्सन्ति नन्दनं" (ते सुख जाणत नाहीत, जे नंदनवन पाहत नाहीत) इत्यादींमध्ये 'तं' शब्दाच्या अनुषंगाने प्रथमेच्या बहुवचनात आला आहे, "ते न पस्सामि दारके" (मी त्या मुलांना पाहत नाही) इत्यादींमध्ये द्वितीयेच्या बहुवचनात आला आहे. "नमो ते पुरिसाजञ्ञ, नमो ते पुरिसुत्तम। नमो ते बुद्ध वीरत्थू" (हे पुरुषश्रेष्ठ, आपल्याला नमस्कार असो; हे पुरुषोत्तम, आपल्याला नमस्कार असो; हे बुद्ध वीर, आपल्याला नमस्कार असो) इत्यादींमध्ये 'तुम्ह' शब्दाच्या अनुषंगाने संप्रदानात 'तुय्हं' (तुला/आपल्याला) या अर्थाने आला आहे, असे म्हणतात. "किन्ते दिट्ठं किन्ति ते दिट्ठं, उपधी ते समतिक्कन्ता, आसवा ते पदालिता" (तुझ्याकडून काय पाहिले गेले... तुझ्याकडून उपाधी ओलांडल्या गेल्या, तुझ्याकडून आसव नष्ट केले गेले) इत्यादींमध्ये तृतीयेत (करणे) आला आहे. "किन्ते वतं किं पन ब्रह्मचरियं" (तुझे व्रत काय आहे, तुझे ब्रह्मचर्य काय आहे) इत्यादींमध्ये षष्ठीत (स्वामी-अर्थात) 'तव' (तुझे) या अर्थाने आला आहे, असे म्हणतात. येथे हे म्हटले आहे – ‘‘ပစ္စတ္တေ ဥပယောဂေ စ, ကရဏေ သမ္ပဒါနိယေ; သာမိမှိ စာတိ တေသဒ္ဒေါ, ပဉ္စသွတ္ထေသု ဒိဿတီ’’တိ. "प्रथमा (पच्चत्त), द्वितीया (उपयोग), तृतीया (करण), संप्रदान आणि षष्ठी (सामी) या पाच अर्थांमध्ये 'ते' शब्द दिसून येतो." တံ, တာနိ. တံ, တာနိ. နေန, တေန ဣစ္စာဒိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. ဣဒံ နပုံသကလိင်္ဂံ. तं, तानि. तं, तानि. नेन, तेन इत्यादी. उर्वरित रूपे पुल्लिंगासारखीच आहेत. हे नपुंसकलिंग आहे. သာ[Pg.365], တာ, တာယော. နံ, တံ, နာ, တာ, နာယော, တာယော. နာယ, တာယ, နာဟိ, တာဟိ, နာဘိ, တာဘိ. အဿာ, နဿာ, (တိဿာ,) တဿာ, နာယ, တာယ, နာသံ, တာသံ, သာနံ, အာသံ. အဿာ, နဿာ, တဿာ, နာယ, တာယ, နာဟိ, တာဟိ, နာဘိ, တာဘိ. အဿာ, နဿာ, (တိဿာ,) တဿာ, နာယ, တာယ, နာသံ, တာသံ, သာနံ, အာသံ. နာယ, တာယ, အဿံ, နဿံ, တိဿံ, တဿံ, နာယံ, တာယံ, နာသု, တာသု, တျာသု. ဣဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ. सा, ता, तायो. नं, तं, ना, ता, नायो, तायो. नाय, ताय, नाहि, ताहि, नाभि, ताभि. अस्सा, नस्सा, (तिस्सा,) तस्सा, नाय, ताय, नासं, तासं, सानं, आसं. अस्सा, नस्सा, तस्सा, नाय, ताय, नाहि, ताहि, नाभि, ताभि. अस्सा, नस्सा, (तिस्सा,) तस्सा, नाय, ताय, नासं, तासं, सानं, आसं. नाय, ताय, अस्सं, नस्सं, तिस्सं, तस्सं, नायं, तायं, नासु, तासु, त्यासु. हे स्त्रीलिंग आहे. ဧတ္ထ ပန ‘‘အဘိက္ကမော သာနံ ပညာယတိ, နာသံ ကုဇ္ဈန္တိ ပဏ္ဍိတာ. ခိဍ္ဍာ ပဏိဟိတာ တျာသု, ရတိ တျာသု ပတိဋ္ဌိတာ. ဗီဇာနိ တျာသု ရုဟန္တီ’’တိ ပယောဂဒဿနတော ‘‘သာနံ အာသံ တျာသူ’’တိ ဣမာနိ ဝုတ္တာနိ အက္ခရစိန္တကာနံ ဉာဏစက္ခုသမ္မုယှနဋ္ဌာနဘူတာနိ. ဧဝံ ပရမ္မုခဝစနဿ တံသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. येथे "अभिक्कमो सानं पञ्ञायति, नासं कुज्झन्ति पण्डिता। खिड्ढा पणिहिता त्यासु, रति त्यासु पतिट्ठिता। बीजानि त्यासु रुहन्ति" (त्यांचे येणे दिसते, पंडित त्यांच्यावर रागावत नाहीत. त्यांच्यामध्ये खेळ मांडला आहे, त्यांच्यामध्ये रती प्रतिष्ठित आहे. त्यांच्यामध्ये बीजे रुजतात) या प्रयोगांच्या दर्शनावरून 'सानं', 'आसं', 'त्यासू' ही रूपे व्याकरणकारांच्या ज्ञानचक्षूंना संभ्रमित करणारी ठरली आहेत. अशा प्रकारे परोक्षवाचक (तृतीय पुरुषवाचक) 'तं' शब्दाची नामविभक्तीची रूपमाला (नामपदमाला) होते. ဧတ္ထ စ ဣဒံ ဝတ္တဗ္ဗံ – आणि येथे हे सांगितले पाहिजे – ‘‘တံ တွံ ဂန္တွာန ယာစဿု’’, ဣစ္စာဒီသု ပဒိဿရေ; အာဒေါ တံ တေတိအာဒီနိ, နန္တိအာဒီနိ နော တထာ. "तं त्वं गन्त्वान याचस्सु" (तू तिथे जाऊन याचना कर) इत्यादींमध्ये वाक्याच्या सुरुवातीला 'तं', 'ते' इत्यादी रूपे दिसतात, परंतु 'नं' इत्यादी रूपे तशी (सुरुवातीला) दिसत नाहीत. နံ နေ နေနာတိအာဒီနိ, ဝေါ နောဣစ္စာဒယော ဝိယ; ပဒတော ပရဘာဝမှိ, ဒိဋ္ဌာနိ ဇိနသာသနေ. 'नं', 'ने', 'नेन' इत्यादी रूपे, 'वो', 'नो' इत्यादींप्रमाणेच, जिनशासनात (बुद्धवचनात) पदाच्या नंतरच्या भागात (दुसऱ्या स्थानावर) दिसतात. ‘‘အထ နံ အထ နေ အာဟ, န စ နံ ပဋိနန္ဒတိ’’; ဣစ္စာဒီနိ ပယောဂါနိ, ဒဿေတဗ္ဗာနိ ဝိညုနာ. "अथ नं अथ ने आह, न च नं पटिनन्दति" (त्यानंतर त्याला, त्यानंतर त्यांना म्हणाला, आणि त्याचे अभिनंदन करत नाही) इत्यादी प्रयोग विद्वानांनी दाखवून दिले पाहिजेत. ကော စေတ္ထ ဝဒေယျ – येथे कोण असे म्हणेल की – ‘‘ယထာ နဒီ စ ပန္ထော စ, ပါနာဂါရံ သဘာ ပပါ; ဧဝံ လောကိတ္ထိယော နာမ, နာသံ ကုဇ္ဈန္တိ ပဏ္ဍိတာ’’တိ "यथा नदी च पन्थो च, पानागारं सभा पपा; एवं लोकित्थियो नाम, नासं कुज्झन्ति पण्डिता" (ज्याप्रमाणे नदी, मार्ग, मद्यशाळा, सभा आणि पाणपोई सर्वांसाठी असतात; त्याचप्रमाणे जगातील स्त्रिया असतात, पंडित त्यांच्यावर रागावत नाहीत) - ဧတ္ထ [Pg.366] – येथे – ပဒတော အပရတ္တေပိ, နာသံသဒ္ဒဿ ဒဿနာ; အာဒေါပိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗာဝ, နံ နေဣစ္စာဒယော ဣတိ. पदाच्या नंतर नसतानाही (म्हणजे सुरुवातीलाच) 'नासं' हा शब्द दिसत असल्यामुळे, 'नं', 'ने' इत्यादी रूपे सुरुवातीलाही स्वीकारली पाहिजेत. သော ပနေဝန္တု ဝတ္တဗ္ဗော, ‘‘တဝ ဝါဒေ န လဗ္ဘတိ; နာသံသဒ္ဒေါ နသဒ္ဒေါ စ, အာသံသဒ္ဒေါ စ လဗ္ဘရေ. त्याला असे उत्तर दिले पाहिजे की, "तुमच्या मतात हे सिद्ध होत नाही; कारण 'नासं' हा शब्द नसून, 'न' शब्द आणि 'आसं' शब्द मिळून तो बनला आहे." တသ္မာ ‘အာသံ န ကုဇ္ဈန္တိ, ဣတ္ထီနံ ပဏ္ဍိတာ’ဣတိ; အတ္ထောဝ ဘဝတေ ဧဝံ, သုဋ္ဌု ဓာရေဟိ ပဏ္ဍိတာ’’တိ. "त्यामुळे 'आसं न कुज्झन्ति, इत्थीनं पण्डिता' (पंडित स्त्रियांवर रागावत नाहीत) असाच अर्थ येथे होतो, हे हे पंडिता, तू चांगल्या प्रकारे लक्षात ठेव." အထ ဝါ ယသ္မာ နိရုတ္တိပိဋကေ ‘‘နံ ပုရိသံ ပဿတိ, နေ ပုရိသေ ပဿတီ’’တိအာဒိနာ ပဒတော အပရတ္တေပိ ‘‘နံ, နေ’’ ဣစ္စာဒီနိ ပဒါနိ ဝုတ္တာနိ, တသ္မာ တေနာပိ နယေန ပဒတော အပရာနိပိ တာနိ ကဒါစိ သိယုံ. မယံ ပန ပါဠိနယာနုသာရေန တေသံ ပဝတ္တိံ ဝဒါမ, ဣဒံ ဌာနံ သုဋ္ဌု ဝိစာရေတဗ္ဗံ. अथवा ज्याअर्थी निरुत्तिपिटकात "नं पुरिसं पस्सति, ने पुरिसे पस्सति" (त्या पुरुषाला पाहतो, त्या पुरुषांना पाहतो) इत्यादींद्वारे पदाच्या नंतर नसतानाही (सुरुवातीलाही) 'नं', 'ने' इत्यादी पदे सांगितली आहेत, त्यामुळे त्या नियमाने देखील ती पदे कधीकधी सुरुवातीला असू शकतात. परंतु आम्ही पाळी भाषेच्या नियमांनुसार त्यांचा वापर सांगत आहोत, या विषयावर चांगला विचार केला पाहिजे. ဧတ္ထ ပန တသဒ္ဒဿ ပရပဒေဟိ သဒ္ဓိံ သမာသောပိ ဝေဒိတဗ္ဗော ‘‘တံပုတ္တော, တံသဒိသော, တန္နိန္နော, တပ္ပောဏော, တပ္ပဗ္ဘာရော, တဗ္ဘူတော, တဂ္ဂုဏော, တဿဒိသော’’တိ. येथे 'त' शब्दाचा इतर पदांसोबत होणारा समास देखील समजून घेतला पाहिजे, जसे की – "तंपुत्तो (त्याचा पुत्र), तंसदिसो (त्याच्यासारखा), तन्निन्नो (त्याच्याकडे झुकलेला), तप्पोणो (त्याच्याकडे प्रवृत्त), तप्पब्भारो (त्याच्याकडे झुकलेला), तब्भूतो (तद्रूप झालेला), तग्गुणो (त्याच्या गुणांचा), तस्sadiso (त्याच्यासारखा)". တသဒ္ဒဿ သမာသမှိ, သဒ္ဓိံ ပရပဒေဟိ ဝေ; နိဂ္ဂဟီတာဂမော ပုဗ္ဗ-ပဒေ ဒွိတ္တန္တု ပစ္ဆိမေ. "'त' शब्दाचा इतर पदांसोबत समास होताना, पूर्व पदात निग्गहीत (अनुस्वार) चा आगम होतो आणि उत्तर पदातील पहिल्या अक्षराचे द्वित्व होते." ဧဝံ တသဒ္ဒဿ သမာသော သလ္လက္ခိတဗ္ဗော. अशा प्रकारे 'त' शब्दाचा समास लक्षात घेतला पाहिजे. ဣဒါနိ ဧတသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'एत' शब्दाची नामविभक्तीची रूपमाला (नामपदमाला) सांगितली जात आहे – ဧသော, ဧတေ. ဧတံ, ဧတေ. ဧတေန, ဧတေဟိ, ဧတေဘိ. ဧတဿ, ဧတေသံ, ဧတေသာနံ. ဧတသ္မာ, ဧတမှာ, ဧတေဟိ, ဧတေဘိ. ဧတဿ, ဧတေသံ, ဧတေသာနံ. ဧတသ္မိံ, ဧတမှိ, ဧတေသု. ဣဒံ ပုလ္လိင်္ဂံ. एसो, एते. एतं, एते. एतेन, एतेहि, एतेभि. एतस्स, एतेसं, एतेसानं. एतस्मा, एतम्हा, एतेहि, एतेभि. एतस्स, एतेसं, एतेसानं. एतस्मिं, एतम्हि, एतेसु. हे पुल्लिंग आहे. ဧတံ, ဧတာနိ. ဧတံ, ဧတာနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ, ဣဒံ နပုံသကလိင်္ဂံ. एतं, एतानि. एतं, एतानि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगासारखीच आहेत, हे नपुंसकलिंग आहे. ဧသာ[Pg.367], ဧတာ, ဧတာယော. ဧတံ, ဧတာ, ဧတာယော. ဧတာယ, ဧတာဟိ, ဧတာဘိ. ဧတာယ, ဧတိဿာ, ဧတိဿာယ, ဧတာသံ. ဧတာယ, ဧတာဟိ, ဧတာဘိ. ဧတာယ, ဧတိဿာ, ဧတိဿာယ, ဧတာသံ. ဧတာယ, ဧတိဿံ, ဧတာသု. ဣဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ. ဧဝံ ဧတသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. एसा, एता, एतायो. एतं, एता, एतायो. एताय, एताहि, एताभि. एताय, एतिस्सा, एतिस्साय, एतासं. एताय, एताहि, एताभि. एताय, एतिस्सा, एतिस्साय, एतासं. एताय, एतिस्सं, एतासु. हे स्त्रीलिंग आहे. अशा प्रकारे 'एत' शब्दाची नामविभक्तीची रूपमाला होते. ပရပဒေနေတ္ထ သဒ္ဓိံ သမာသောပိဿ ဝေဒိတဗ္ဗော ‘‘ဧတဒတ္ထာယ လောကသ္မိံ, နိဓိ နာမ နိဓိယျတိ. ဧတပ္ပရမာယေဝ ဒေဝတာ သန္နိပတိတာ အဟေသု’’န္တိအာဒီသု. येथे इतर पदांसोबत त्याचा होणारा समास देखील समजून घेतला पाहिजे, जसे की – "एतदत्थाय लोकस्मिं, निधि नाम निधिय्यति" (याच उद्देशासाठी जगात निधी ठेवला जातो), "एतप्परमायेव देवता सन्निपतिता अहेसुं" (याच श्रेष्ठ हेतूने देवता एकत्र आल्या होत्या) इत्यादींमध्ये. သမာသေ ဧတသဒ္ဒဿ, သဒ္ဓိံ ပရပဒေဟိ ဝေ; နိဂ္ဂဟီတာဂမော ပုဗ္ဗ-ပဒေ ဟောတိ န ဟောတိ စ. "'एत' शब्दाचा इतर पदांसोबत समास होताना, पूर्व पदात निग्गहीत (अनुस्वार) चा आगम होतो किंवा होत नाही." ဣဒါနိ ဣဒံသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'इदं' शब्दाची नामविभक्तीची रूपमाला (नामपदमाला) सांगितली जात आहे – အယံ, ဣမေ. ဣမံ, ဣမေ. အနေန, ဣမိနာ, ဧဟိ, ဧဘိ, ဣမေဟိ, ဣမေဘိ. အဿ, ဣမဿ, ဧသံ, ဧသာနံ, ဣမေသံ, ဣမေသာနံ. အသ္မာ, ဣမသ္မာ, ဣမမှာ, ဧဟိ, ဧဘိ, ဣမေဟိ, ဣမေဘိ. အဿ, ဣမဿ, ဧသံ, ဧသာနံ, ဣမေသံ, ဣမေသာနံ. အသ္မိံ, ဣမသ္မိံ, အမှိ, ဣမမှိ, ဧသု, ဣမေသု. ဣဒံ ပုလ္လိင်္ဂံ. अयं, इमे. इमं, इमे. अनेन, इमिना, एहि, एभि, इमेहि, इमेभि. अस्स, इमस्स, एसं, एसानं, इमेसं, इमेसानं. अस्मा, इमस्मा, इमम्हा, एहि, एभि, इमेहि, इमेभि. अस्स, इमस्स, एसं, एसानं, इमेसं, इमेसानं. अस्मिं, इमस्मिं, अम्हि, इमम्हि, एसु, इमेसु. हे पुल्लिंग आहे. ဣဒံ, ဣမာနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. ဣဒံ နပုံသကလိင်္ဂံ. इदं, इमानि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगासारखीच आहेत. हे नपुंसकलिंग आहे. အယံ, ဣမာ, ဣမာယော. ဣမံ, ဣမာ, ဣမာယော. ဣမာယ, ဣမာဟိ, ဣမာဘိ. အဿာ, အဿာယ, ဣမိဿာ, ဣမိဿာယ, ဣမာယ, ဣမာသံ. အဿာ, ဣမိဿာ, ဣမာယ, ဣမာဟိ, ဣမာဘိ. အဿာ, အဿာယ, ဣမိဿာ, ဣမိဿာယ, ဣမာယ, ဣမာသံ. အဿံ, ဣမိဿံ, ဣမာယ, ဣမာယံ, ဣမာသု. ဣဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ. ဧဝံ ဣဒံသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. अयम्, इमा, इमायो। इमम्, इमा, इमायो। इमाय, इमाहि, इमाभि। अस्सा, अस्साय, इमिस्सा, इमिस्साय, इमाय, इमासं। अस्सा, इमिस्सा, इमाय, इमाहि, इमाभि। अस्सा, अस्साय, इमिस्सा, इमिस्साय, इमाय, इमासं। अस्सं, इमिस्सं, इमाय, इमायं, इमासु। हे स्त्रीलिंग आहे. अशा प्रकारे 'इदम्' शब्दाची नामविभक्ती रूपमाला (नामपदमाला) होते. ကစ္စာယနေ တု ‘‘ဣမဿိဒမံသိသု နပုံသကေ’’တိ ဣမသဒ္ဒေါယေဝ ပကတိဘာဝေန ဝုတ္တော, ဣဓ ပန ဣဒံသဒ္ဒေါယေဝ ‘‘ဣဒပ္ပစ္စယတာ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဣဒ’’န္တိ ပကတိယာ ဒဿနတော. တထာ [Pg.368] ဟိ ‘‘ဣမေသံ ပစ္စယာ ဣဒပ္ပစ္စယာ, ဣဒပ္ပစ္စယာ ဧဝ ဣဒပ္ပစ္စယတာ, ဣဒပ္ပစ္စယာနံ ဝါ သမူဟော ဣဒပ္ပစ္စယတာ’’တိ ဝုတ္တံ. ဧတ္ထ စ ဣဒပ္ပစ္စယာ ဧဝ ဣဒပ္ပစ္စယတာတိ တာသဒ္ဒေန ပဒံ ဝဍ္ဎိတံ န ကိဉ္စိ အတ္ထန္တရံ ယထာ ဒေဝေါ ဧဝ ဒေဝတာတိ. ဣဒပ္ပစ္စယာနံ သမူဟော ဣဒပ္ပစ္စယတာတိ သမူဟတ္ထံ တာသဒ္ဒမာဟ ယထာ ဇနာနံ သမူဟော ဇနတာတိ. စူဠနိရုတ္တိယံ နိရုတ္တိပိဋကေ စ ဣဒံသဒ္ဒေါယေဝ ပကတိဘာဝေန ဝုတ္တော. कच्चायनात (कच्चायन व्याकरणात) तर 'इमस्सिदमंसिसु नपुंसके' या सूत्रात 'इम' हाच शब्द मूळ रूप (प्रकृतिभाव) म्हणून सांगितला आहे, परंतु येथे 'इदम्' हाच शब्द 'इदप्पच्चयता' (इदंप्रत्ययता) यामध्ये 'इदम्' या मूळ रूपाने दिसून येतो. तसेच 'इमेसं पच्चया इदप्पच्चया, इदप्पच्चया एव इदप्पच्चयता, इदप्पच्चयानं वा समूहो इदप्पच्चयता' (यांच्या प्रत्ययाने 'इदप्पच्चय' होतो, 'इदप्पच्चय' म्हणजेच 'इदप्पच्चयता', किंवा 'इदप्पच्चयांचा' समूह म्हणजे 'इदप्पच्चयता') असे म्हटले आहे. आणि येथे 'इदप्पच्चया एव इदप्पच्चयता' यामध्ये 'ता' प्रत्ययाने शब्द वाढवला आहे, त्यात कोणताही वेगळा अर्थ नाही, जसे 'देव' म्हणजेच 'देवता'. 'इदप्पच्चयांचा समूह म्हणजे इदप्पच्चयता' यामध्ये समूह अर्थासाठी 'ता' प्रत्यय सांगितला आहे, जसे 'जनांचा समूह म्हणजे जनता'. चूळनिरुत्तीत आणि निरुत्तिपिटकात देखील 'इदम्' हाच शब्द मूळ रूप म्हणून सांगितला आहे. သမာသေ ဣဒံသဒ္ဒဿ, သဒ္ဓိံ ပရပဒေန ဝေ; ဣဒပ္ပစ္စယတာတွေဝ, ရူပံ ဒွိတ္တံ သိယုတ္တရေ. समासामध्ये 'इदम्' शब्दाचा पुढील पदाशी (परपदाशी) संयोग झाल्यावर 'इदप्पच्चयता' असे रूप होते आणि पुढील अक्षराचे द्वित्व (दुप्पट होणे) होते. ဣဒါနိ အမုသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'अमु' शब्दाची नामविभक्ती रूपमाला (नामपदमाला) सांगितली जात आहे – အသု, အမု, အမူ. အမုံ, အမူ. အမုနာ, အမူဟိ, အမူဘိ. အမုဿ, ဒုဿ, အမူသံ, အမူသာနံ. အမုသ္မာ, အမုမှာ, အမူဟိ, အမူဘိ. အမုဿ, ဒုဿ, အမူသံ, အမူသာနံ. အမုသ္မိံ, အမုမှိ, အမူသု. ဣဒံ ပုလ္လိင်္ဂံ. असु, अमु, अमू। अमुं, अमू। अमुना, अमूहि, अमूभि। अमुस्स, दुस्स, अमूसं, अमूसानं। अमुस्मा, अमुम्हा, अमूहि, अमूभि। अमुस्स, दुस्स, अमूसं, अमूसानं। अमुस्मिं, अमुम्हि, अमूसु। हे पुल्लिंग आहे. အဒုံ, အမူနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. ဣဒံ နပုံသကလိင်္ဂံ. अदुं, अमूनि। उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. हे नपुंसकलिंग आहे. အသု, အမု, အမူ, အမုယော. အမူံ, အမူ, အမုယော. အမုယာ, အမူဟိ, အမူဘိ. အမုဿာ, အမုယာ, အမူသံ, အမူသာနံ. အမုယာ, အမူဟိ, အမူဘိ. အမုဿာ, အမုယာ, အမူသံ, အမူသာနံ. အမုယာ, အမုယံ, အမုဿံ, အမူသု. ဣဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ. ဧဝံ အမုသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ, သမာသော ပန အပ္ပသိဒ္ဓေါ. असु, अमु, अमू, अमुयो। अमूं, अमू, अमुयो। अमुया, अमूहि, अमूभि। अमुस्सा, अमुया, अमूसं, अमूसानं। अमुया, अमूहि, अमूभि। अमुस्सा, अमुया, अमूसं, अमूसानं। अमुया, अमुयं, अमुस्सं, अमूसु। हे स्त्रीलिंग आहे. अशा प्रकारे 'अमु' शब्दाची नामविभक्ती रूपमाला होते, आणि समास देखील योजावा (जाणावा). တတြ ‘‘ဒုဿ မေ ခေတ္တပါလဿ, ရတ္တိဘတ္တံ အပါဘတ’’န္တိ ပယောဂဒဿနတော ‘‘ဒုဿာ’’တိ ပဒမမှေဟိ ဌပိတံ. ကကာရာဂမဝသေန အညာနိပိ အသဗ္ဗနာမိကရူပါနိ ဘဝန္တိ. တေသံ [Pg.369] ဝသေန အယံ လိင်္ဂတ္တယဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – तेथे 'दुस्स मे खेत्तपालस्स, रत्तिभत्तं अपाभतं' (माझ्या त्या शेतकर्याचे रात्रीचे जेवण आणले गेले) या प्रयोगाच्या दर्शनावरून 'दुस्स' हे पद आमच्याद्वारे ठेवले गेले आहे. 'क' काराच्या आगमामुळे इतरही असर्वनामिक रूपे होतात. त्यांच्या आधारे या तिन्ही लिंगांची नामविभक्ती रूपमाला सांगितली जात आहे – ‘‘အသုကော, အသုကာ. အသုကံ, အသုကေ’’တိအာဒိနာ, ‘‘အမုကော, အမုကာ. အမုကံ, အမုကေ’’တိအာဒိနာ စ ပုရိသနယောပိ လဗ္ဘတိ. ‘‘အသုကာ, အသုကာယော’’တိအာဒိနာ, ‘‘အမုကာ, အမုကာယော’’တိအာဒိနာ စ ကညာနယောပိ လဗ္ဘတိ. ‘‘အသုကံ, အသုကာနီ’’တိအာဒိနာ, ‘‘အမုကံ, အမုကာနီ’’တိအာဒိနာ စ စိတ္တနယောပိ လဗ္ဘတိ. ဣမာနေတ္ထ ပဒါနိ အသဗ္ဗနာမိကာနိပိ ကကာရာဂမဝသေန နာနတ္တဒဿနတ္ထံ ဝုတ္တာနိ. 'असुको, असुका। असुकं, असुके' इत्यादींद्वारे आणि 'अमुको, अमुका। अमुकं, अमुके' इत्यादींद्वारे पुरुष-पद्धती (पुल्लिंगी रूपे) देखील प्राप्त होते. 'असुका, असुकायो' इत्यादींद्वारे आणि 'अमुका, अमुकायो' इत्यादींद्वारे कन्या-पद्धती (स्त्रीलिंगी रूपे) देखील प्राप्त होते. 'असुकं, असुकानि' इत्यादींद्वारे आणि 'अमुकं, अमुकानि' इत्यादींद्वारे चित्त-पद्धती (नपुंसकलिंगी रूपे) देखील प्राप्त होते. येथे ही पदे असर्वनामिक असली तरी 'क' काराच्या आगमामुळे विविध रूपे दाखवण्यासाठी सांगितली आहेत. ဣဒါနိ ကိံသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'किं' शब्दाची नामविभक्ती रूपमाला (नामपदमाला) सांगितली जात आहे – ကော, ကေ. ကံ, ကေ. ကေန, ကေဟိ, ကေဘိ. ကဿ, ကိဿ, ကေသံ. ကသ္မာ, ကမှာ, ကေဟိ, ကေဘိ. ကဿ, ကိဿ, ကေသံ. ကသ္မိံ, ကိသ္မိံ, ကမှိ, ကိမှိ, ကေသု. ဣဒံ ပုလ္လိင်္ဂံ. को, के। कं, के। केन, केहि, केभि। कस्स, किस्स, केसं। कस्मा, कम्हा, केहि, केभि। कस्स, किस्स, केसं। कस्मिं, किस्मिं, कम्हि, किम्हि, केसु। हे पुल्लिंग आहे. ရူပဝိသေသောပေတ္ထ ဝေဒိတဗ္ဗော ‘‘ကေ ဂန္ဓဗ္ဗေ စ ရက္ခသေ နာဂေ, ကေ ကိမ္ပုရိသေ စ မာနုသေ, ကေ ပဏ္ဍိတေ သဗ္ဗကာမဒဒေ, ဒီဃံ ရတ္တံ ဘတ္တာ မေ ဘဝိဿတိ, ကေ စ ဆဝေ ပါထိကပုတ္တေ, ကာ စ တထာဂတာနံ အရဟန္တာနံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓါနံ အာသာဒနာ’’တိ ပါဠိဒဿနတော. ယသ္မာ ပန ကေ ဂန္ဓဗ္ဗေ စ ရက္ခသေ နာဂေ ဣတိအာဒီသု ပါဠီသု ‘‘ကေ’’တိ ပစ္စတ္တဝစနံ ဧကာရန္တမ္ပိ ဒိဿတိ, တသ္မာ ‘‘ကေ’’တိ ရူပဘေဒေါ စေတ္ထ ဉေယျော. တထာ ‘‘ကိဿဿ ဧကဓမ္မဿ, ဝဓံ ရောစေသိ ဂေါတမ. ကိသ္မိံ မေ သိဝယော ကုဒ္ဓါ. ကမှိ ကာလေ တယာ ဝီရ, ပတ္ထိတာ ဗောဓိမုတ္တမာ’’တိအာဒီနိ စ နိဒဿနပဒါနိ ဉေယျာနိ. အပိစ – येथे रूपांमधील विशेष फरक देखील समजून घेतला पाहिजे, जसे की 'के गन्धब्बे च रक्खसे नागे, के किम्पुरिसे च मानुसे, के पण्डिते सब्बकामददे, दीघं रत्तं भत्ता मे भविस्सति, के च छवे पाथिकपुत्ते, का च तथागतानं अरहंतानं सम्मासम्बुद्धानं आसादना' या पाळी (पालि) वचनावरून दिसून येते. कारण 'के गन्धब्बे च रक्खसे नागे' इत्यादी पाळी वचनांमध्ये 'के' हे प्रथमा विभक्तीचे (पच्चत्तवचन) रूप एकारान्त देखील दिसते, म्हणून येथे 'के' हा रूपभेद समजून घ्यावा. तसेच 'किस्सस्स एकधम्मस्स, वधं रोचेसि गोतम। किस्मिं मे सिवयो कुद्धा। कम्हि काले तया वीर, पत्थिता बोधिमुत्तमा' इत्यादी उदाहरणांची पदे देखील समजून घ्यावीत. आणखी असे की – ‘‘ကော တေ ဗလံ မဟာရာဇ’’, ဣတိအာဒီသု ပါဠိသု; ကွသဒ္ဒတ္ထေ ဝတ္တတီတိ, ဉေယျာ ကော ဣစ္စယံ သုတိ. 'को ते बलं महाराज' इत्यादी पाळी वचनांमध्ये; 'को' हा शब्द 'क्व' (कोठे) या अर्थात वापरला आहे, असे समजावे. ပေတံ [Pg.370] တံ သာမမဒ္ဒက္ခိံ, ကော နု တွံ သာမ ဇီဝသိ; ဣတိ ပါဌေ ကထံသဒ္ဒါ-ဘိဓေယျေ ဝတ္တတီတိ စ. 'पेतं तं साममदक्खिं, को नु त्वं साम जीवसि' या पाठात 'को' हा शब्द 'कथं' (कसा) या अर्थाचा वाचक म्हणून वापरला आहे. ဧတေသု ဒွီသု အတ္ထေသု, ဒိဋ္ဌော ကော ဣစ္စယံ ရဝေါ; နိပါတောတိ ဂဟေတဗ္ဗော, သုတိသာမညတော ရုတော. या दोन्ही अर्थांमध्ये 'को' हा शब्दप्रयोग आढळतो; ध्वनीच्या समानतेमुळे याला निपात (अव्यय) मानले पाहिजे. နပုံသကလိင်္ဂေ ကံ, ကာနိ. ကံ, ကာနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ ယောဇေတဗ္ဗံ. အထ ဝါ ‘‘ကိံ စိတ္တံ. ကိံ ရူပံ. ကိံ ပရာဘဝတော မုခံ. ကိံ ဣစ္ဆသီ’’တိအာဒိပယောဂဒဿနတော ပန ‘‘ကိံ, ကာနိ. ကိံ, ကာနီ’’တိ ဝတွာ သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ ယောဇေတဗ္ဗံ. အယံ နယော ယုတ္တတရော, ဣဒံ နပုံသကလိင်္ဂံ. नपुंसकलिंगात 'कं, कानि। कं, कानि।' उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच जोडावीत. अथवा 'किं चित्तं। किं रूपं। किं पराभवतो मुखं। किं इच्छसि' इत्यादी प्रयोगांच्या दर्शनावरून 'किं, कानि। किं, कानि' असे म्हणून उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच जोडावीत. हाच नियम अधिक योग्य आहे. हे नपुंसकलिंग आहे. ကာ, ကာ, ကာယော. ကံ, ကာ, ကာယော. ကာယ, ကာဟိ, ကာဘိ. ကာယ, ကဿာ, ကာသံ, ကာသာနံ. ကာယ, ကဿာ, ကာဟိ, ကာဘိ. ကာယ, ကဿာ, ကာသံ ကာသာနံ. ကာယ, ကဿာ, ကာယံ, ကဿံ, ကာသု. का, का, कायो। कं, का, कायो। काय, काहि, काभि। काय, कस्सा, कासं, कासानं। काय, कस्सा, काहि, काभि। काय, कस्सा, कासं, कासानं। काय, कस्सा, कायं, कस्सं, कासु. ဧတ္ထ ပန ကာယောတိ ပဒဿ အတ္ထိဘာဝေ ‘‘ကာယော အမောဃာ ဂစ္ဆန္တီ’’တိ နိဒဿနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂံ. ဧဝံ ကိံသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဘဝတိ. ဧတ္ထေတဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ – ကိံ သဒ္ဒေါ ‘‘ကိံ ရာဇာ ယော လောကံ န ရက္ခတိ. ကိံ နု ခေါ နာမ တုမှေ မံ ဝတ္တဗ္ဗံ မညထာ’’တိအာဒီသု ဂရဟနေ အာဂတော. ‘‘ယံ ကိဉ္စိ ရူပံ အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္န’’န္တိအာဒီသု အနိယမေ. ‘‘ကိန္တေ ဝက္ကလိ ဣမိနာ ပူတိကာယေန ဒိဋ္ဌေန, ယော ခေါ ဝက္ကလိ ဓမ္မံ ပဿတိ, သော မံ ပဿတီ’’တိအာဒီသု နိပ္ပယောဇနတာယံ. ‘‘ကိံ န ကာဟာမိ တေ ဝစော’’တိအာဒီသု သမ္ပဋိစ္ဆနေ. ‘‘ကိံသူဓ ဝိတ္တံ ပုရိသဿ သေဋ္ဌ’’န္တိအာဒီသု ပုစ္ဆာယံ, ပုစ္ဆာ စ နာမ ကာရဏပုစ္ဆာဒိဝသေန [Pg.371] အနေကဝိဓာ, အတော ကာရဏပုစ္ဆာဒိဝသေနပိ ကိံသဒ္ဒဿ ပဝတ္တိ ဝိတ္ထာရတော ဉေယျာ. တထာ ဟိ အယံ ‘‘ကိံ နု သန္တရမာနောဝ, ကာသုံ ခဏသိ သာရထိ. ကိံ နု ဇာတိံ န ရောစေသိ. ကေန တေတာဒိသော ဝဏ္ဏော’’တိအာဒီသု ကာရဏပုစ္ဆာယံ ဝတ္တတိ. ‘‘ကိံ ကာသုယာ ကရိဿတီ’’တိအာဒီသု ကိစ္စပုစ္ဆာယံ. ‘‘ကိံ သီလံ. ကော သမာဓီ’’တိအာဒီသု သရူပပုစ္ဆာယံ. ‘‘ကိံ ခါဒသိ. ကိံ ပိဝသီ’’တိအာဒီသု ဝတ္ထုပုစ္ဆာယံ. ‘‘ခါဒသိ ကိံ ပိဝသိ ကိ’’န္တိအာဒီသု ကြိယာပုစ္ဆာယံ ဝတ္တတိ. အဒိဋ္ဌဇောတနာပုစ္ဆာတိ ဧဝမာဒိကာ ပန ပဉ္စဝိဓာ ပုစ္ဆာ ကိံသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရေ အနာဟရိတဗ္ဗတ္တာ အနာဂတာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – येथे 'कायो' या शब्दाच्या अस्तित्वाबाबत 'कायो अमोघा गच्छन्ति' हे उदाहरण पाहावे. हे स्त्रीलिंगी आहे. अशा प्रकारे 'किं' शब्दाची नामविभक्तीची रूपे होतात. येथे त्याचा अर्थ स्पष्ट केला जात आहे - 'किं' हा शब्द 'किं राजा यो लोकं न रक्खति' (जो राजा लोकांचे रक्षण करत नाही तो कसला राजा?) आणि 'किं नु खो नाम तुम्हे मं वत्तब्बं मञ्ञथा' (तुम्ही मला काय बोलण्यास योग्य मानता?) इत्यादींमध्ये निंदेच्या अर्थाने आला आहे. 'यं किञ्चि रूपं अतीतानागतपच्चुप्पन्नं' (जे काही भूत, भविष्य आणि वर्तमान रूप आहे) इत्यादींमध्ये अनियमाच्या (अनिश्चिततेच्या) अर्थाने आला आहे. 'किं ते वक्कलि इमिना पूतिकायेन दिट्ठेन, यो खो वक्कलि धम्मं पस्सति, सो मं पस्सति' (हे वक्कली, या सडणाऱ्या शरीराला पाहून तुला काय लाभ? जो धर्माला पाहतो, तो मला पाहतो) इत्यादींमध्ये निरर्थकतेच्या अर्थाने आला आहे. 'किं न काहामि ते वचो' (मी तुझे वचन का पाळणार नाही?) इत्यादींमध्ये संमतीच्या अर्थाने आला आहे. 'किंसूध वित्तं पुरिसस्स सेट्ठं' (या जगात माणसाची कोणती संपत्ती श्रेष्ठ आहे?) इत्यादींमध्ये प्रश्नाच्या अर्थाने आला आहे. प्रश्न हा कारण-प्रश्न इत्यादींच्या भेदाने अनेक प्रकारचा असतो, म्हणून कारण-प्रश्न इत्यादींच्या द्वारे देखील 'किं' शब्दाची प्रवृत्ती विस्ताराने जाणून घ्यावी. कारण, हा शब्द 'किं नु सन्तरमानोव, कासुं खणसि सारथि. किं नु जातिं न रोचेसि. केन तेतादिसो वण्णो' (हे सारथी, तू इतक्या घाईघाईने खड्डा का खणत आहेस? तुला जन्म का आवडत नाही? तुझा असा वर्ण कशामुळे आहे?) इत्यादींमध्ये कारण-प्रश्नाच्या अर्थाने वापरला जातो. 'किं कासुया करिस्सति' (तो खड्ड्याचे काय करणार आहे?) इत्यादींमध्ये कार्य-प्रश्नाच्या अर्थाने. 'किं सीलं. को समाधी' (शील काय आहे? समाधी कोणती आहे?) इत्यादींमध्ये स्वरूप-प्रश्नाच्या अर्थाने. 'किं खादसि. किं पिवसि' (तू काय खातोस? तू काय पितोस?) इत्यादींमध्ये वस्तू-प्रश्नाच्या अर्थाने. 'खाadसि किं पिवसि किं' (खातोस काय, पितोस काय?) इत्यादींमध्ये क्रिया-प्रश्नाच्या अर्थाने वापरला जातो. 'अदिट्ठजोतनापुच्छा' (अदृष्ट प्रकाशक प्रश्न) इत्यादी पाच प्रकारचे प्रश्न 'किं' शब्दाच्या अर्थ-स्पष्टीकरणात न घेण्यासारखे असल्यामुळे येथे आलेले नाहीत, असे समजावे. येथे हे म्हटले आहे - ဂရဟာယံ အနိယမေ, နိပ္ပယောဇနတာယ စ; သမ္ပဋိစ္ဆနပုစ္ဆာသု, ကိံသဒ္ဒေါ သမ္ပဝတ္တတိ. निंदा, अनियम (अनिश्चितता), निरर्थकता, संमती आणि प्रश्न या अर्थांमध्ये 'किं' हा शब्द चांगल्या प्रकारे वापरला जातो. ပရပဒေန သဒ္ဓိံ သမာသောပိဿ ဝေဒိတဗ္ဗော ‘‘ကိံသမုဒယော, ကိံဝေဒနော, ကိံသညောဇနော’’တိ. ဧတ္ထ ‘‘ကော, ကေ. ကာ, ကာ, ကာယော. ကိံ, ကာနီ’’တိ ဧဝံ လိင်္ဂတ္တယဝသေန ဝိဘတ္တာနိ ကိံသဒ္ဒမယာနိ ပဒါနိ သမာသပဒတ္တေ ပုန ကိမိတိ ပကတိဘာဝေနေဝ တိဋ္ဌန္တိ. နာမသဒ္ဒေန ပန သမာသေ တေသံ ဒွိဓာ ဂတိ ဒိဿတိ ‘‘ကိန္နာမော, ကောနာမော’’တိ. သဗ္ဗာနိ ပနေတာနိ ဣတ္ထိနပုံသကလိင်္ဂဝသေန ဗဟုဝစနဝသေန စ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. दुसऱ्या शब्दासोबत त्याचा समास देखील 'किंसमुदयो' (काय उदय असणारा), 'किंवेदनो' (काय वेदना असणारा), 'किंसञ्ञोजनो' (काय संयोजन असणारा) असा समजावा. येथे 'को, के' (पुल्लिंगी), 'का, का, कायो' (स्त्रीलिंगी), 'किं, कानि' (नपुंसकलिंगी) अशा प्रकारे तीन लिंगांच्या अनुसार विभक्त झालेली 'किं' शब्दाची पदे समासामध्ये पुन्हा 'किं' अशा मूळ रूपातच राहतात. नामशब्दासोबत समास झाल्यास त्यांची दोन प्रकारची गती (रूपे) दिसून येते - 'किन्नामो' आणि 'कोनामो'. ही सर्व रूपे स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग आणि बहुवचनाच्या अनुसार योजली पाहिजेत. ကိံသဒ္ဒဿ သမာသမှိ, သဒ္ဓိံ နာမရဝေန ဝေ; ‘‘ကိန္နာမော’’ ဣတိ ‘‘ကောနာမော’’, ဣတိ စေဝံ ဂတိ ဒွိဓာ. 'किं' शब्दाचा नामशब्दासोबत समास झाल्यावर 'किन्नामो' आणि 'कोनामो' अशी दोन प्रकारची गती (रूपे) निश्चितपणे होतात. ‘‘ကောနာမော [Pg.372] တေ ဥပဇ္ဈာယော’’, ဣစ္စာဒေတ္ထ နိဒဿနံ; သဟညေန သမာသမှိ, ‘‘ကိံ ကိံ’’ဣစ္စေဝ သုယျတေ. 'कोनामो ते उपज्झायो' (तुझ्या उपाध्यायांचे नाव काय आहे?) इत्यादी येथे उदाहरण आहे. इतर शब्दांसोबत समास झाल्यावर 'किं किं' असेच ऐकू येते. တထာ ဟိ ‘‘ကိံစိတ္တော တွံ ဘိက္ခု. ကိံကာရပဋိဿာဝိနီ’’တိအာဒီသု ကိံသဒ္ဒေါ သရူပမဝိဇဟန္တော တိဋ္ဌတိ. တတ္ထ ဟိ ကိံစိတ္တံ ယဿ သော ကိံစိတ္တော. ‘‘ကိံ ကရောမိ သာမီ’’တိ ဧဝံ ကိန္တိ ကာရော ကရဏံ သဒ္ဒနိစ္ဆာရဏံ ကိံကာရော, တံ ပဋိဿာဝေတီတိ ကိံကာရပဋိဿာဝိနီတိအာဒိ နိဗ္ဗစနမိစ္ဆိတဗ္ဗံ. ‘‘ကိန္နရော. ကိံပက္ကမိဝ ဘက္ခိတ’’န္တိအာဒီသု ပန နိဗ္ဗစနမပ္ပသိဒ္ဓံ, ကိံသဒ္ဒေါယေဝ ပဒါဝယဝဘာဝေန သုတော. တထာ ဟိ သော ကတ္ထစိ ပဒါဝယဝဘာဝေန ကတ္ထစိ နု သု နုခေါ ကာရဏာဒိသဒ္ဒေဟိ သဟစာရိဘာဝေန စ သုယျတိ. အတြိမေ ပယောဂါ – ဧသာ တေ ဣတ္ထီ ကိံ ဟောတိ. ဧတေ မနုဿာ တုမှာကံ ကိံ ဟောန္တိ. ကိမ္ပုရိသာနုစိဏ္ဏော. ကိံ နု ဘီတောဝ တိဋ္ဌသိ. ကိံသုဆေတွာ သုခံ သေတိ. ကိံ နုခေါ ကာရဏံ. ကိံ ကာရဏာ အမ္မ တုဝံ ပမဇ္ဇသိ, ကိဉှိ နာမ စဇန္တဿ, ဝါစာယ အဒဒမပ္ပကန္တိ ဧဝမာဒယော. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – तसेच 'किंचित्तो त्वं भिक्खु' (हे भिक्खू, तू कोणत्या चित्ताचा आहेस?), 'किंकारपटिस्साविनी' (काय करू असे विचारणारी) इत्यादींमध्ये 'किं' शब्द आपले मूळ रूप न सोडता राहतो. तेथे 'ज्याचे चित्त काय आहे तो किंचित्तो'. 'हे स्वामी, मी काय करू?' अशा प्रकारे 'किं' असा जो कार (करणे, शब्दोच्चार करणे) तो 'किंकार' होय, त्याला प्रतिसाद देणारी ती 'किंकारपटिस्साविनी' इत्यादी अर्थ जाणावा. 'किन्नरो' (किन्नर), 'किम्पक्कमिव भक्खितं' (किं-पक्व फळाप्रमाणे खाल्लेले) इत्यादींमध्ये तर अर्थ प्रसिद्ध आहे, तेथे 'किं' शब्दच पदाचा अवयव म्हणून ऐकू येतो. कारण तो कुठे पदाचा अवयव म्हणून, तर कुठे 'नु', 'सु', 'नुखो', 'कारण' इत्यादी शब्दांच्या सहचर्याने ऐकू येतो. येथे हे प्रयोग आहेत - 'एसा ते इत्थी किं होति' (ही स्त्री तुझी काय लागते?), 'एते मनुस्सा तुम्हाकं किं होन्ति' (हे लोक तुमचे काय लागतात?), 'किम्पुरिसानुचिण्णो' (किंपुरुषांनी युक्त), 'किं नु भीतोव तिट्ठसि' (तू घाबरल्यासारखा का उभा आहेस?), 'किंसुछेत्वा सुखं सेti' (काय तोडून माणूस सुखाने झोपतो?), 'किं नुखो कारणं' (काय बरे कारण आहे?), 'किं कारणा अम्म तुवं पमज्जसि' (हे आई, तू कोणत्या कारणाने प्रमाद करत आहेस?), 'किञ्हि नाम चजन्तस्स, वाचाय अददमप्पकं' (त्याग करणाऱ्याला वाणीने थोडेही न देणे काय बरे?) इत्यादी. येथे हे म्हटले आहे - ‘‘ဝိသုံ ပဒါဝယဝေါ ဝါ, ဟုတွာ နွာဒီဟိ ဝါ ပန; ယုတ္တော သဒ္ဒေဟိ ကိံသဒ္ဒေါ, ဒိဋ္ဌော သုဂတသာသနေ. सुगत शासनात (बुद्धांच्या शिकवणीत) 'किं' शब्द स्वतंत्रपणे, पदाचा अवयव बनून किंवा 'नु' इत्यादी शब्दांशी युक्त होऊन वापरलेला दिसतो. ပါဠိနယာနုသာရေန, သေသာနံ သမ္ဘဝေါပိ စ; ဉေယျော ဝိညူဟိ သဒ္ဓမ္မ-နယညူဟိ ပဘေဒတော’’တိ. तसेच पाळि नियमांनुसार इतर शब्दांचा संभव देखील सद्धर्माचे नियम जाणणाऱ्या विद्वानांनी त्यांच्या भेदांनुसार जाणून घ्यावा. ဣဒါနိ [Pg.373] သဗ္ဗနာမိကဘာဝေ ဌိတေဟိ ကော ကံသဒ္ဒေဟိ သမာနသုတိကာနံ အညေသံ ကော ကံသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာဝိသေသော ဝတ္တဗ္ဗော သိယာ, သော ဟေဋ္ဌာ လိင်္ဂတ္တယမိဿကပရိစ္ဆေဒေ ဝုတ္တော. အသဗ္ဗနာမိကတ္တာ ပန ပုရိသ စိတ္တနယေနေဝ ဝိဘတ္တော. တထာ ဟိ ယဒါ ကောသဒ္ဒေါ ဗြဟ္မဝါတကာယတ္ထဝါစကော, ကံသဒ္ဒေါ ပန သိရောဇလသုခတ္ထဝါစကော, တဒါ တာနိ ပဒါနိ အသဗ္ဗနာမိကာနိ, ကသ္မာ? အကိံသဒ္ဒမယတ္တာ သဗ္ဗနာမိကရူပသင်္ခါတေဟိ အသာဓာရဏရူပေဟိ ဝိရဟိတတ္တာ ပုစ္ဆတ္ထတော အတ္ထန္တရဝါစကတ္တာ စ. ဧတ္ထ ပန သမာနသုတိဝသေန အတ္ထန္တရဝိညာပနတ္ထံ ကောသဒ္ဒေါ ကံသဒ္ဒေါတိ စ ဝုတ္တံ, ဧကန္တတော ပန သဗ္ဗနာမိကတ္တေ ကိံသဒ္ဒေါယေဝ, သုဒ္ဓနာမတ္တေ ကသဒ္ဒေါယေဝါတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. ဣစ္စေဝံ – आता सर्वनाम रूपात असलेल्या 'को' आणि 'कं' या शब्दांसारखाच उच्चार असणाऱ्या इतर 'को' आणि 'कं' या शब्दांच्या नामविभक्तीच्या रूपांमधील फरक सांगावा लागेल, तो खाली तीन लिंगांच्या संमिश्र परिच्छेदात सांगितला आहे. सर्वनाम नसल्यामुळे त्यांची विभक्ती 'पुरिस' (पुरुष) आणि 'चित्त' यांच्या नियमाप्रमाणेच होते. कारण जेव्हा 'को' शब्द ब्रह्मा, वायू आणि शरीर यांचा वाचक असतो, आणि 'कं' शब्द डोके, पाणी आणि सुख यांचा वाचक असतो, तेव्हा ती पदे सर्वनामे नसतात. का? कारण ती 'किं' शब्दापासून बनलेली नसतात, सर्वनामाच्या रूपांनी युक्त अशा असाधारण रूपांनी रहित असतात आणि प्रश्नार्थक अर्थापेक्षा वेगळा अर्थ सांगणारी असतात. येथे समान उच्चारामुळे दुसरा अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी 'को' शब्द आणि 'कं' शब्द असे म्हटले आहे, परंतु पूर्णपणे सर्वनाम असताना 'किं' शब्दच आणि शुद्ध नाम असताना 'क' शब्दच घ्यावा, असे समजावे. अशा प्रकारे - ကာယေ ဗြဟ္မနိ ဝါတေ စ, သီသေ ဇလသုခေသု စ; ကသဒ္ဒေါ ဝတ္တတီ တီသု, ပုမာ တီသု နပုံသကော. शरीर, ब्रह्मा आणि वायू या अर्थांमध्ये, तसेच डोके, पाणी आणि सुख या अर्थांमध्ये 'क' शब्द वापरला जातो. पहिल्या तीन अर्थांमध्ये तो पुल्लिंगी आणि नंतरच्या तीन अर्थांमध्ये नपुंसकलिंगी असतो. ဧဝံ သဗ္ဗနာမဘူတာနံ ကိံကသဒ္ဒါနံ ပဝတ္တိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. अशा प्रकारे सर्वनाम असलेल्या 'किं' आणि 'क' शब्दांची प्रवृत्ती समजावी. ဣဓ ဝုတ္တပ္ပကာရာနံ, အတ္ထာနံ ဒါနိ သင်္ဂဟော; ပညာဝေပုလ္လကရဏော, ဧကဒေသေန ဝုစ္စတေ. येथे सांगितलेल्या प्रकारच्या अर्थांचा संग्रह, जो प्रज्ञेचा विस्तार करणारा आहे, आता संक्षेपाने सांगितला जात आहे. ကိံ ကိံပက္ကေန သဒိသံ, ကာယော ကိံပဘဝေါ ဝဒ; ကိံပက္ကသဒိသော ကာမော, ကာယော တဏှာဒိသမ္ဘဝေါ. 'काय किम्पक्व (विषारी फळ) सारखे आहे? शरीर कशापासून उत्पन्न होते, सांग?' 'काम (वासना) किम्पक्व फळासारखा आहे, आणि शरीर तृष्णेपासून उत्पन्न होते.' ဥဏှကာလေ က’မိစ္ဆန္တိ, က’မိစ္ဆန္တိ ပိပါသိတာ; ပစ္စာမိတ္တာ က’မိစ္ဆန္တိ, က’မိစ္ဆန္တိ ဒုခဋ္ဋိတာ. उष्ण काळात लोक कशाची (पाण्याची) इच्छा करतात? तहानलेले कशाची इच्छा करतात? शत्रू कशाची (नाशाची) इच्छा करतात? आणि दुःखाने पीडित कशाची इच्छा करतात? ကာယဿ ကဿ ကော အာယော,ကော နာထော ကဿ ဘူတလေ; ကဿ ကံ ဈာနဇံ သာတံ,ကဿင်္ဂေသု စ ကံ ပရန္တိ. कोणत्या शरीराचा काय उदय (लाभ) आहे? या पृथ्वीवर कोणाचा कोण रक्षक आहे? कोणाला ध्यानापासून उत्पन्न होणारे सुख मिळते? आणि कोणाच्या अवयवांमध्ये कोणते श्रेष्ठ सुख आहे? ယာ [Pg.374] ပန တာ ဟေဋ္ဌာ အမှေဟိ လိင်္ဂတ္တယဝသေန ကိံသဒ္ဒဿ သဗ္ဗနာမိကသညိတဿ နာမိကပဒမာလာ ဝိဘတ္တာ, ဧတာသု ပုလ္လိင်္ဂနပုံသကလိင်္ဂဋ္ဌာနေ ‘‘ကေဘိ, ကိဿ, ကသ္မာ, ကမှာ, ကမှီ’’တိ ဣမာနိ ပဒါနိ ပဟာယ ဣတ္ထိလိင်္ဂဋ္ဌာနေ ‘‘ကာယော, ကာဘိ, ကာသာနံ, ကာယံ, ကဿ’’န္တိ ဣမာနိ စ ပဒါနိ ပဟာယ တတော တတော သေသပဒတော ယထာသမ္ဘဝံ စိသဒ္ဒံ စနသဒ္ဒံ စနံသဒ္ဒဉ္စ နိပါတေတွာ ဧဝရူပါနိ ရူပါနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. သေယျထိဒံ? आम्ही मागे तीन लिंगांच्या अनुसार सर्वनाम संज्ञक 'किं' शब्दाची जी नामविभक्तीची रूपे विभक्त केली आहेत, त्यामध्ये पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगाच्या ठिकाणी 'केभि, किस्स, कस्मा, कम्हा, कम्ही' ही पदे सोडून, आणि स्त्रीलिंगाच्या ठिकाणी 'कायो, काभि, कासानं, कायं, कस्सं' ही पदे सोडून, त्या त्या उर्वरित पदांनंतर यथासंभव 'चि' (ci) शब्द, 'चन' (cana) शब्द आणि 'चनं' (canaṃ) शब्द जोडून अशा प्रकारची रूपे घ्यावीत. जसे की - ကောစိ, ကေစိ, ကေစန. ကိဉ္စိ, ကိဉ္စနံ, ကေစိ, ကေစန. ကေနစိ, ကေဟိစိ. ကဿစိ, ကေသဉ္စိ. ပဉ္စမိယာ ဧကဝစနံ ဦနံ ပါဠိယံ အနာဂတတ္တာ. ကေဟိစိ. ကဿစိ, ကေသဉ္စိ. ကသ္မိဉ္စိ, ကိသ္မိစိ, ကေသုစိ. ပုလ္လိင်္ဂနပုံသကလိင်္ဂဝသေန ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ. အတြ ကိသ္မိစီတိ အနုသာရလောပဝသေန ဝုတ္တံ. कोचि, केचि, केचन (प्रथमा). किञ्चि, किञ्चनं, केचि, केचन (द्वितीया). केनचि, केहिचि (तृतीया). कस्सचि, केसञ्चि (चतुर्थी). पाळिमध्ये (पाठात) न आल्यामुळे पंचमीचे एकवचन उणे (गहाळ) आहे. केहिचि (पंचमी बहुवचन). कस्सचि, केसञ्चि (षष्ठी). कस्मिञ्चि, किस्मिचि, केसुचि (सप्तमी). ही रूपे पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगानुसार समजावीत. येथे 'किस्मिचि' हे अनुस्वारलोपामुळे म्हटले गेले आहे. ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန ပန ကာစိ ဣတ္ထီ, ကာစိ ဣတ္ထိယော. ကာစိ, ကာစိ. ကိဉ္စိ, ကာစိ. ကာယစိ, ကာဟိစိ. ကာယစိ, ကဿာစိ, ကာသဉ္စိ. ကာယစိ, ကာဟိစိ. ကာယစိ, ကဿာစိ, ကာသဉ္စိ. ကာယစိ, ကာသုစီတိ ရူပါနိ. स्त्रीलिंगानुसार तर 'काचि इत्थी' (कोणतीतरी स्त्री), 'काचि इत्थियो' (काही स्त्रिया). काचि, काचि (प्रथमा). किञ्चि, काचि (द्वितीया). कायचि, काहिचि (तृतीया). कायचि, कस्साचि, कासञ्चि (चतुर्थी). कायचि, काहिचि (पंचमी). कायचि, कस्साचि, कासञ्चि (षष्ठी). कायचि, कासुचि (सप्तमी) अशी रूपे होतात. ဧတ္ထ ‘‘ဣတိ ဘာသန္တိ ကေစန, န နံ ဟိံသာမိ ကိဉ္စန’’န္တိအာဒယော ပယောဂါ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ဣတိ လိင်္ဂတ္တယဝသေန ဝုတ္တာနိ ကောစိ ကာစိ ကိဉ္စီတိအာဒီနိ အပ္ပမတ္တကာနံ သင်္ဂါဟကဝစနာနီတိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. येथे 'इति भासन्ति केचन' (असे काही लोक म्हणतात), 'न नं हिंसामि किञ्चन' (मी त्याला थोडेही हिंसित नाही) इत्यादी प्रयोग समजावेत. अशा प्रकारे तिन्ही लिंगांनुसार म्हटलेले 'कोचि, काचि, किञ्चि' इत्यादी शब्द अल्प प्रमाणातील गोष्टींचे बोधक (संग्राहक) शब्द आहेत असे समजावे. ပုနေတာနိယေဝ ယထာရဟံ ယံသဒ္ဒေန ယောဇေတွာ ဒဿေဿာမိ – पुन्हा हेच शब्द योग्यतेनुसार 'यं' (यद्) शब्दाशी जोडून दाखवतो – ယော ကောစိ, ယေ ကေစိ. ယံ ကိဉ္စိ, ယေ ကေစိ. ယေန ကေနစိ, ယေဟိ ကေဟိစိ. ယဿ ကဿစိ, ယေသံ ကေသဉ္စိ. ယသ္မာ ကသ္မာစိ, ယေဟိ ကေဟိစိ. ယဿ ကဿစိ, ယေသံ ကေသဉ္စိ. ယသ္မိံ ကသ္မိဉ္စိ, ယေသု ကေသုစိ. यो कोचि, ye केचि (प्रथमा). यं किञ्चि, ये केचि (द्वितीया). येन केनचि, येहि केहिचि (तृतीया). यस्स कस्सचि, येसं केसञ्चि (चतुर्थी). यस्मा कस्माचि, येहि केहिचि (पंचमी). यस्स कस्सचि, येसं केसञ्चि (षष्ठी). यस्मिं कस्मिञ्चि, येसु केसुचि (सप्तमी). ဧတ္ထ [Pg.375] ‘‘ယော ကောစိ မံ အဋ္ဌိ ကတွာ သုဏေယျ. ယေ ကေစိမေ အတ္ထိ ရသာ ပထဗျာ, သစ္စံ တေသံ သာဓုတရံ ရသာန’’န္တိအာဒယော ပယောဂါ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ. येथे 'यो कोचि मं अट्ठि कत्वा सुणेय्य' (जो कोणी माझे मन लावून ऐकेल), 'ये केचिमे अत्थि रसा पथब्या, सच्चं तेसं साधुतरं रसानं' (या पृथ्वीवर जे काही रस आहेत, त्या रसांमध्ये सत्य हाच सर्वात श्रेष्ठ रस आहे) इत्यादी प्रयोग समजावेत. ही पुल्लिंगी रूपे आहेत. ယံ ကိဉ္စိ, ယာနိ ကာနိစိ. ယံ ကိဉ္စိ, ယာနိ ကာနိစိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. ဧတ္ထ ‘‘ယံ ကိဉ္စိ ရတနံ အတ္ထိ, ဓတရဋ္ဌနိဝေသနေ. ယံ ကိဉ္စိ ဝိတ္တံ ဣဓ ဝါ ဟုရံ ဝါ. ယာနိ ကာနိစိ ရူပါနီ’’တိအာဒယော ပယောဂါ ဝေဒိတဗ္ဗာ. နပုံသကလိင်္ဂရူပါနိ. यं किञ्चि, यानि कानिचि (प्रथमा). यं किञ्चि, यानि कानिचि (द्वितीया). उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. येथे 'यं किञ्चि रतनं अत्थि, धतरट्ठनिवेसने' (धृतराष्ट्राच्या भवनात जे काही रत्न आहे), 'यं किञ्चि वित्तं इध वा हुरं वा' (येथे किंवा परलोकात जे काही धन आहे), 'यानि कानिचि रूपाणि' (जी काही रूपे आहेत) इत्यादी प्रयोग समजावेत. ही नपुंसकलिंगी रूपे आहेत. ယာ ကာစိ ဣတ္ထီ, ယာ ကာစိ ဣတ္ထိယော. ယံ ကိဉ္စိ, ယာ ကာစိ. ယာယ ကာယစိ, ယာဟိ ကာဟိစိ. ယာယ ကာယစိ, ယာသံ ကာသဉ္စိ. ယာယ ကာယစိ, ယာဟိ ကာဟိစိ. ယာယ ကာယစိ, ယာသံ ကာသဉ္စိ. ယာယ ကာယစိ, ယာသု ကာသုစိ. या काचि इत्थी, या काचि इत्थियो (प्रथमा). यं किञ्चि, या काचि (द्वितीया). याय कायचि, याहि काहिचि (तृतीया). याय कायचि, यासं कासञ्चि (चतुर्थी). याय कायचि, याहि काहिचि (पंचमी). याय कायचि, यासं कासञ्चि (षष्ठी). याय कायचि, यासु कासुचि (सप्तमी). ဧတ္ထ ‘‘ယာ ကာစိ ဝေဒနာ အတီတာနာဂတပစ္စုပ္ပန္နာ’’တိအာဒယော ပယောဂါ ဝေဒိတဗ္ဗာ. ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိ. ဣတိ လိင်္ဂတ္တယဝသေန ဝုတ္တာနိ ယော ကောစိ, ယာ ကာစိ, ယံ ကိဉ္စီတိအာဒီနိ အနဝသေသပရိယာဒါနဝစနာနီတိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. သဗ္ဗာနိ စေတာနိ န နိပါတပဒါနိ, နိပါတပတိရူပကာ သဒ္ဒဂတိယောတိ ဝေဒိတဗ္ဗာနိ. ယဒိ နိပါတပဒါနိ သိယုံ, တီသု လိင်္ဂေသု သတ္တသု ဝိဘတ္တီသု ဧကာကာရေန တိဋ္ဌေယျုံ, န စ တိဋ္ဌန္တိ, တသ္မာ န နိပါတပဒါနိ, နိပါတပတိရူပကာ သဒ္ဒဂတိယောယေဝ. येथे 'या काचि वेदना अतीतानागतपच्चुप्पन्ना' (जी कोणतीही वेदना भूत, भविष्य किंवा वर्तमानकाळातील असेल) इत्यादी प्रयोग समजावेत. ही स्त्रीलिंगी रूपे आहेत. अशा प्रकारे तिन्ही लिंगांनुसार म्हटलेले 'यो कोचि, या काचि, यं किञ्चि' इत्यादी शब्द संपूर्णता किंवा निःशेषता दर्शवणारे (अनवसेसपरियादानवचन) शब्द आहेत असे समजावे. आणि हे सर्व निपात (अव्यय) शब्द नाहीत, तर ते निपातासारखे दिसणारे शब्दप्रकार (निपातपतिरूपक सद्द्गति) आहेत असे समजावे. जर ते निपात शब्द असते, तर ते तिन्ही लिंगांत आणि साती विभक्तींमध्ये एकाच रूपात राहिले असते, परंतु ते तसे राहत नाहीत; म्हणून ते निपात शब्द नसून निपातासारखे भासणारे शब्दप्रकारच आहेत. အပိစ ယ တ ကိံ ဧတဣစ္စေတေဟိ သဗ္ဗနာမေဟိ လိင်္ဂါနုရူပတော တ္တကတ္တိကပစ္စယေ ကတွာ ဝတ္တိစ္ဆာယံ ယာနိ ပဒါနိ သိဇ္ဈန္တိ, တာနိ ပရိစ္ဆေဒဝစနာနိ အသဗ္ဗနာမိကာနိယေဝ ဘဝန္တိ. တေသံ နာမိကပဒမာလာ ပုရိသ စိတ္တ ကညာနယေန ယောဇေတဗ္ဗာ. တံ ယထာ? शिवाय, 'य', 'त', 'किं', 'एत' या सर्वनामांना लिंगानुसार '-त्तक' आणि '-त्तिक' प्रत्यय लावून वक्त्याच्या इच्छेनुसार जी रूपे सिद्ध होतात, ती परिच्छेदवाचक (मर्यादा दर्शवणारी) असून सर्वनामे नसतात (असर्वनामिक असतात). त्यांची नामविभक्ती रूपे (नामिकपदमला) 'पुरिस' (पुरुष), 'चित्त' आणि 'कञ्ञा' (कन्या) यांच्या नियमांनुसार योजावीत. ते कसे? ယတ္တကော [Pg.376] ဇနော, ယတ္တကံ စိတ္တံ, ယတ္တိကာ ဣတ္ထီ. တတ္တကော, တတ္တကံ, တတ္တိကာ. ကိတ္တကော, ကိတ္တကံ, ကိတ္တိကာ. ဧတ္တကော, ဧတ္တကံ, ဧတ္တိကာတိ. ဣမာနိ ပဒါနိ အသဗ္ဗနာမိကာနိပိ ပစ္စယဝသေန သမ္ဘူတတ္ထန္တရေသု ဝိညူနံ ကောသလ္လတ္ထံ ဝုတ္တာနိ. 'यत्तको जनो' (जेवढे लोक), 'यत्तकं चित्तं' (जेवढे चित्त), 'यत्तिका इत्थी' (जेवढी स्त्री). तत्तको, तत्तकं, तत्तिका (तेवढा, तेवढे, तेवढी). कित्तको, कित्तकं, कित्तिका (किती, केवढे, किती - स्त्री.). एत्तको, एत्तकं, एत्तिका (एवढा, एवढे, एवढी). हे शब्द असर्वनामिक असले तरी प्रत्ययांच्या प्रभावाने निर्माण होणाऱ्या विविध अर्थांमध्ये विद्वानांच्या कौशल्यासाठी (ज्ञानासाठी) सांगितले आहेत. ဣဒါနိ သင်္ခါဒိဝစနဿ ဧကသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता संख्या इत्यादी दर्शवणाऱ्या 'एक' शब्दाची नामविभक्ती रूपे (नामिकपदमला) सांगितली जात आहेत – ဧကသဒ္ဒေါ ဟိ သင်္ခါဝစနော စ ဟောတိ အသဒိသဝစနော စ အသဟာယဝစနော စ ဧကစ္စဝစနော စ မိဿီဘူတဝစနော စ. ယဒါ သင်္ခါ’သဒိသာ’သဟာယဝစနော, တဒါ ဧကဝစနကော ဘဝတိ. कारण 'एक' हा शब्द संख्यावाचक, असदृशवाचक (अद्वितीय), असहायवाचक (एकटा), एकच्चवाचक (काही/विशिष्ट) आणि मिस्सीभूतवाचक (एकत्रित/मिश्रित) असा असतो. जेव्हा तो संख्या, अद्वितीय आणि असहाय (एकटा) या अर्थांचा वाचक असतो, तेव्हा तो एकवचनी असतो. ဧကော, ဧကံ, ဧကေန, ဧကဿ, ဧကသ္မာ, ဧကမှာ, ဧကဿ, ဧကသ္မိံ, ဧကမှီတိ. ဧဝံ သင်္ခါဒိဝစနော ဧကသဒ္ဒေါ ဧကဝစနကော. တထာ ဟိ ‘‘ဧကော ဒွေ တယော’’တိ သင်္ခါဝိသယေ ဧကသဒ္ဒေါ ဧကဝစနကောဝ. ‘‘ဧကောမှိ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ. ဧကော ရာဇ နိပဇ္ဇာမီ’’တိ အသဒိသာသဟာယကထနေပိ ဧကဝစနကောဝ. အယံ ဧကဝစနိကာ သဗ္ဗနာမိကပဒမာလာ. एको, एकं, एकेन, एकस्स, एकस्मा/एकम्हा, एकस्स, एकस्मिं/एकम्हि. अशा प्रकारे संख्या इत्यादी अर्थांचा वाचक असलेला 'एक' शब्द एकवचनी असतो. जसे की 'एको द्वे तयो' (एक, दोन, तीन) या संख्यांच्या विषयात 'एक' शब्द एकवचनीच असतो. 'एकोम्हि सम्मासम्बुद्धो' (मी अद्वितीय सम्यक्संबुद्ध आहे), 'एको राज निपज्जामि' (मी राजा एकटाच निजतो) या अद्वितीय आणि असहाय (एकटेपणा) कथनातही तो एकवचनीच असतो. ही एकवचनी सर्वनामिक नामविभक्ती रूपे (नामिकपदमला) आहेत. ယဒါ ပန သင်္ခတ္ထာ စ အသဟာယာ စ ဗဟူ ဝတ္တဗ္ဗာ သိယုံ, တဒါ ဧကသဒ္ဒတော ကကာရာဂမံ ကတွာ ဧကကာ, ဧကကေ, ဧကကေဟိ, ဧကကေဘိ. ပုရိသနယေ ဗဟုဝစနဝသေန နာမိကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. တထာ ဟိ သင်္ခတ္ထာပိ ဗဟူ ဟောန္တိ. ‘‘စတ္တာရော ဧကကာ သိယု’’န္တိ ဟိ ဝုတ္တံ. အသဟာယာပိ ဗဟူ ဟောန္တိ. တထာ ဟိ ‘‘အယမ္ပိ ဂဟပတိ ဧကောဝ အာဂတော, အယမ္ပိ ဧကောဝ အာဂတော’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘ဣမေ ဂဟပတယော ဧကကာ အာဂတာ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗတာ ဒိဿတိ. အယံ နယော သဗ္ဗနာမိကပက္ခံ န ဘဇတိ အသာဓာရဏရူပါဘာဝတော, အတ္ထန္တရဝိညာပနတ္ထံ ပန ဝုတ္တော. परंतु जेव्हा संख्या दर्शवणारे आणि असहाय (एकटे) अनेक लोक किंवा गोष्टी सांगायच्या असतील, तेव्हा 'एक' शब्दाला 'क' काराचा आगम करून 'एकका, एकके, एककेहि, एककेभि' अशी रूपे होतात. 'पुरिस' शब्दाच्या नियमाप्रमाणे बहुवचनानुसार ही नामविभक्ती रूपे योजावीत. कारण संख्या दर्शवणारे देखील अनेक असू शकतात. जसे की 'चत्तारो एकका सियुं' (चार एके असावेत) असे म्हटले आहे. असहाय (एकटे) देखील अनेक असू शकतात. जसे की 'अयम्पि गहपति एकोव आगतो, अयम्पि एकोव आगतो' (हा गृहपती देखील एकटाच आला आहे, हा देखील एकटाच आला आहे) असे म्हणण्याऐवजी 'इमे गहपतयो एकका आगता' (हे गृहपती एकटेच आले आहेत) असा प्रयोग आढळतो. हा नियम सर्वनामाच्या वर्गात येत नाही, कारण यात असाधारण (सर्वनामिक) रूपांचा अभाव असतो, परंतु दुसऱ्या अर्थाचे ज्ञान करून देण्यासाठी हा सांगितला आहे. ယဒါ [Pg.377] ဧကစ္စဝစနော, တဒါ ‘‘ဧကေ, ဧကေ, ဧကေဟိ, ဧကေဘိ ဧကေသံ, ဧကေဟိ, ဧကေဘိ, ဧကေသံ, ဧကေသူ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗံ. အယမ္ပိ ဗဟုဝစနိကာ သဗ္ဗနာမိကပဒမာလာ. ဧတ္ထ ဧကေတိ ဧကစ္စေ. ဧသ နယော သေသေသုပိ. ယဒါ ပန မိဿီဘူတဝစနော, တဒါ ‘‘ဧကာ, ဧကေ, ဧကေဟိ, ဧကေဘိ, ဧကာန’’န္တိ ပုရိသနယေ ဗဟုဝစနဝသေန ဝတ္တဗ္ဗံ. ‘‘ပဉ္စာလော စ ဝိဒေဟော စ, ဥဘော ဧကာ ဘဝန္တု တေ’’တိ ပါဠိ ဒိဿတိ. အယံ နယော သဗ္ဗနာမိကပက္ခံ န ဘဇတိ အသာဓာရဏရူပါဘာဝတော, အတ္ထန္တရဝိညာပနတ္ထံ ပန ဝုတ္တော. တတ္ထ ဧကာ ဘဝန္တူတိ ဧကီဘဝန္တု မိဿီဘဝန္တု, ဂင်္ဂေါဒကေန ယမုနောဒကံ ဝိယ အညဒတ္ထု သံသန္ဒန္တု သမေန္တူတိ ဝစနတ္ထော. जेव्हा तो 'एकच्च' (काही) या अर्थाचा वाचक असतो, तेव्हा 'एके, एके, एकेहि, एकेभि, एकेसं, एकेहि, एकेभि, एकेसं, एकेसु' असे म्हणावे. ही देखील बहुवचनी सर्वनामिक नामविभक्ती रूपे आहेत. येथे 'एके' म्हणजे 'काही' (एकच्च). हाच नियम उर्वरित रूपांनाही लागू होतो. परंतु जेव्हा तो 'मिस्सीभूत' (एकत्रित) अर्थाचा वाचक असतो, तेव्हा 'पुरिस' शब्दाच्या बहुवचनाच्या नियमाप्रमाणे 'एका, एके, एकेहि, एकेभि, एकानं' असे म्हणावे. 'पञ्चालो च विदेहो च, उभो एका भवन्तु ते' (पाञ्चाल आणि विदेह हे दोन्ही एक व्हावेत) असा पाळिपाठ आढळतो. हा नियम सर्वनामाच्या वर्गात येत नाही, कारण यात असाधारण रूपांचा अभाव असतो, परंतु दुसऱ्या अर्थाचे ज्ञान करून देण्यासाठी हा सांगितला आहे. तेथे 'एका भवन्तु' म्हणजे 'एक व्हावेत, एकत्रित व्हावेत', जसे गंगेच्या पाण्याशी यमुनेचे पाणी पूर्णपणे मिसळून एकरूप होते, तसे त्यांनी एकमेकांशी जुळवून घ्यावे आणि एक व्हावे, असा या शब्दाचा अर्थ आहे. အာစရိယာ ပန ဧဝံ ဝိဘာဂံ အဒဿေတွာ ဧကသဒ္ဒဿ သဗ္ဗနာမတ္တမေဝ ဂဟေတွာ သဗ္ဗသဒ္ဒဿ ဝိယ နာမိကပဒမာလံ ယောဇေန္တိ. ကထံ? परंतु आचार्य असा विभाग न दाखवता 'एक' शब्दाचे केवळ सर्वनामत्वच स्वीकारून 'सब्ब' (सर्व) शब्दाप्रमाणे त्याची नामविभक्ती रूपे योजतात. ते कसे? ဧကော, ဧကေ. ဧကံ, ဧကေ. ဧကေန, ဧကေဟိ, ဧကေဘိ. ဧကဿ, ဧကေသံ, ဧကေသာနံ. ဧကသ္မာ, ဧကမှာ, ဧကေဟိ, ဧကေဘိ. ဧကဿ, ဧကေသံ, ဧကေသာနံ. ဧကသ္မိံ, ဧကမှိ, ဧကေသူတိ. အယံ သဗ္ဗနာမိကပဒမာလာတိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. एको, एके (प्रथमा). एकं, एके (द्वितीया). एकेन, एकेहि, एकेभि (तृतीया). एकस्स, एकेसं, एकेसानं (चतुर्थी). एकस्मा, एकम्हा, एकेहि, एकेभि (पंचमी). एकस्स, एकेसं, एकेसानं (षष्ठी). एकस्मिं, एकम्hi, एकेसु (सप्तमी). ही सर्वनामिक नामविभक्ती रूपे (नामिकपदमला) आहेत असे समजावे. ကေစိ ‘‘ဧကသဒ္ဒေါ သင်္ချာတုလျာသဟာယညဝစနော. ယဒါ သင်္ချာဝစနော, တဒါ သဗ္ဗတ္ထေကဝစနန္တောဝ, အညတ္ထ ဗဟုဝစနန္တောပိ, ဧကော ဧကာ ဧကံ ဣစ္စာဒိ သဗ္ဗတ္ထ သဗ္ဗသဒ္ဒသမံ. သံသာသွေဝ ဝိသေသော’’တိ လိင်္ဂတ္တယေ ယောဇနာနယံ ဝဒန္တိ. ဧဝံ ဝဒန္တာ စ တေ ဝိဘာဂံ အဒဿေတွာ ဝဒန္တိ. မယံ ပန သောတူနံ ပယောဂေသု ကောသလ္လုပ္ပာဒနတ္ထံ ဝိဘာဂံ ဒဿေတွာ ဝဒါမ. काही (आचार्य) म्हणतात की, " 'एक' हा शब्द संख्या, समान, असहाय (एकटा) आणि अन्य (दुसरा) या अर्थांचा वाचक आहे. जेव्हा तो संख्यावाचक असतो, तेव्हा सर्व अर्थांमध्ये तो केवळ एकवचनातच असतो; इतर अर्थांमध्ये तो बहुवचनातही असतो. 'एको, एका, एकं' इत्यादी सर्व रूपांमध्ये तो सर्व प्रकारे 'सब्ब' शब्दासारखाच चालतो. केवळ विभक्ती प्रत्ययांमध्येच (संसासु - सप्तमी बहुवचनात) विशेष फरक असतो," असा तिन्ही लिंगांमधील योजनेचा नियम ते सांगतात. आणि असे सांगताना ते विभाग (स्पष्ट वर्गीकरण) न दाखवताच सांगतात. परंतु, आम्ही श्रोत्यांना प्रयोगांमध्ये नैपुण्य प्राप्त व्हावे म्हणून विभाग स्पष्ट करून सांगत आहोत. အပိစေတ္ထ [Pg.378] အယံ ဝိသေသောပိ သလ္လက္ခိတဗ္ဗော ‘‘ဧကေ ဧကဋ္ဌေ သမေ သမဘာဂေ’တိ ပါဠိပ္ပဒေသေ ပစ္စတ္တေကဝစနဿ ဧကသဒ္ဒဿ ဧကာရန္တနိဒ္ဒေသောပိ ဒိဿတီ’’တိ. ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ. तसेच येथे हा विशेष देखील लक्षात घेतला पाहिजे की, " 'एके एकट्ठे समे समभागे' या पाळि पाठात प्रथमा एकवचनाच्या 'एक' शब्दाचा 'एकारान्त' निर्देशही दिसून येतो." पुल्लिंगी रूपे. ဧကံ, ဧကာနိ. ဧကံ, ဧကာနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. တတ္ထ ဧကာနီတိ ဧကစ္စာနိ. ဧသ နယော သေသဗဟုဝစနေသုပိ, နပုံသကလိင်္ဂရူပါနိ. एकं, एकानि. एकं, एकानि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. तेथे 'एकानि' म्हणजे 'एकच्चानि' (काही). हाच नियम उर्वरित बहुवचनी रूपांमध्येही लागू होतो. नपुंसकलिंगी रूपे. ဧကာ, ဧကာ, ဧကာယော. ဧကံ, ဧကာ, ဧကာယော. ဧကာယ, ဧကာဟိ, ဧကာဘိ. ဧကာယ, ဧကိဿာ, ဧကာသံ. ဧကာယ, ဧကာဟိ, ဧကာဘိ. ဧကာယ, ဧကိဿာ, ဧကာသံ. ဧကာယ, ဧကာယံ, ဧကိဿံ, ဧကာသု. ဧတ္ထ ဗဟုဝစနဋ္ဌာနေ ဧကာတိ ဧကစ္စာ, ဧကာဟီတိ ဧကစ္စာဟိ, ဧကာသန္တိ ဧကစ္စာနံ ဧကာသူတိ ဧကစ္စာသု. ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိ. သဗ္ဗာနေတာနိ သဗ္ဗနာမာနိ ဧကဝစနဗဟုဝစနဝသေန ဝုတ္တာနိ. एका, एका, एकायो. एकं, एका, एकायो. एकाय, एकाही, एकाभी. एकाय, एकिस्सा, एकासं. एकाय, एकाही, एकाभी. एकाय, एकिस्सा, एकासं. एकाय, एकायं, एकिस्सं, एकासु. येथे बहुवचनाच्या ठिकाणी 'एका' म्हणजे 'एकच्चा' (काही स्त्रिया), 'एकाही' म्हणजे 'एकच्चाही', 'एकासं' म्हणजे 'एकच्चानं' आणि 'एकासू' म्हणजे 'एकच्चासू' असा अर्थ होतो. स्त्रीलिंगी रूपे. ही सर्व सर्वनामे एकवचन आणि बहुवचनाच्या अनुषंगाने सांगितली आहेत. အပိစ ဧကသဒ္ဒေ ဝိစ္ဆာဝသေန ဝတ္တဗ္ဗေ လိင်္ဂတ္တယရူပါနိ ဧကဝစနာနေဝ ဘဝန္တိ. ကထံ? तसेच, जेव्हा 'एक' शब्दाचा वीप्सा (पुनरावृत्ती) अर्थाने प्रयोग करायचा असतो, तेव्हा तिन्ही लिंगांतील रूपे केवळ एकवचनातच होतात. ते कसे? ဧကေကော, ဧကေကံ, ဧကေကေန, ဧကေကဿ, ဧကေကသ္မာ, ဧကေကမှာ, ဧကေကဿ, ဧကေကသ္မိံ, ဧကေကမှီတိ ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ. एकेको, एकेकं, एकेकेन, एकेकस्स, एकेकस्मा, एकेकम्हा, एकेकस्स, एकेकस्मिं, एकेकम्हि - ही पुल्लिंगी रूपे आहेत. ဧကေကံ, ဧကေကံ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ, နပုံသကလိင်္ဂရူပါနိ. ဧကေကာ, ဧကေကံ, ဧကေကာယ, ဧကေကိဿာ, ဧကေကာယ, ဧကေကိဿာ, ဧကေကာယံ, ဧကေကိဿံ. ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိ. एकेकं, एकेकं. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. ही नपुंसकलिंगी रूपे आहेत. एकेका, एकेकं, एकेकाय, एकेकिस्सा, एकेकाय, एकेकिस्सा, एकेकायं, एकेकिस्सं. ही स्त्रीलिंगी रूपे आहेत. သဗ္ဗာနေတာနိ ဝိစ္ဆာသဗ္ဗနာမာနီတိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. ဗဟုဝစနာနိ ပနေတ္ထ န သန္တိ ပယောဂါဘာဝတော. ဣတိ ဣမေသု ဝိစ္ဆာဝသေန ဝုတ္တေသု လိင်္ဂတ္တယရူပေသု သမာသစိန္တာ န ဥပ္ပာဒေတဗ္ဗာ အနိဗ္ဗစနီယတ္တာ ဝိစ္ဆာသဒ္ဒါနံ. တထာ ဟိ ‘‘ပဗ္ဗံ ပဗ္ဗံ [Pg.379] သန္ဓိ သန္ဓိ ဩဓိ ဩဓိ ဟုတွာ တတ္တကပါလေ ပက္ခိတ္တတိလာ ဝိယ တဋတဋာယန္တာ သင်္ခါရာ ဘိဇ္ဇန္တီ’’တိအာဒီသု ပဗ္ဗပဗ္ဗသဒ္ဒါဒီနံ သမာသကရဏဝသေန နိဗ္ဗစနံ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ န ဒဿိတံ. ယသ္မာ စ ဝိစ္ဆာယံ ဝတ္တမာနာနံ ဒွိရုတ္တိ လောကတော ဧဝ သိဒ္ဓါ, န လက္ခဏတော, တသ္မာ တတ္ထ သမာသစိန္တာ န ဥပ္ပာဒေတဗ္ဗာ. या सर्व शब्दांना 'वीप्सा-सर्वनामे' (प्रत्येक या अर्थाची सर्वनामे) म्हणणे योग्य आहे. प्रयोगाच्या अभावामुळे येथे बहुवचनी रूपे नसतात. अशा प्रकारे, वीप्सा अर्थाने सांगितलेल्या या तिन्ही लिंगांतील रूपांमध्ये समासाचा विचार करू नये, कारण वीप्सा शब्दांचे निर्वचन (व्युत्पत्ती) करता येत नाही. तसेच, "पब्बं पब्बं (पेरापेराने), संधि संधि (सांध्यासांध्याने), ओधि ओधि (मर्यादेने) होऊन, तापलेल्या तव्यावर टाकलेल्या तिळांप्रमाणे तडतडत संस्कार नष्ट होतात," इत्यादी वाक्यांमध्ये 'पब्बपब्ब' इत्यादी शब्दांचे समासाच्या नियमाने निर्वचन पूर्वाचार्यांनी दाखवलेले नाही. आणि ज्याअर्थी वीप्सा अर्थात वापरल्या जाणाऱ्या शब्दांची द्विरुक्ती ही लोकव्यवहारातूनच सिद्ध होते, व्याकरणाच्या नियमातून नाही, त्याअर्थी तेथे समासाचा विचार करू नये. ဣဒါနိ ဧကစ္စ ဧကတိယ ဧကစ္စိယသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာယော ဝုစ္စန္တေ – ပုလ္လိင်္ဂေ တာဝ ဧကစ္စော, ဧကစ္စေ. ဧကစ္စံ, ဧကစ္စေ. သေသံ ပုရိသသဒ္ဒသမံ. ဧတ္ထ ဧကစ္စေတိ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနမေဝ သဗ္ဗနာမိကရူပသမံ အသာဓာရဏရူပတ္တာ. ‘‘ဣဓေကစ္စော ကုလပုတ္တော. ဣဓေကစ္စေ မောဃပုရိသာ’’တိ နိဒဿနပဒါနိ. आता 'एकच्च', 'एकतिय' आणि 'एकच्चिय' या शब्दांची नामरूपे (विभक्ती रूपे) सांगितली जात आहेत - प्रथम पुल्लिंगात: एकच्चो, एकच्चे. एकच्चं, एकच्चे. उर्वरित रूपे 'पुरिस' शब्दाप्रमाणे चालतात. येथे 'एकच्चे' हे प्रथमा बहुवचनाचे रूप सर्वनामाच्या रूपासारखेच आहे, कारण ते असाधारण रूप आहे. "इधेकच्चो कुलपुत्तो" (येथे कोणी एक कुलपुत्र) आणि "इधेकच्चे मोघपुरिसा" (येथे काही मूर्ख माणसे) ही याची उदाहरणे आहेत. ဧကတိယော, ဧကတိယေ. ဧကတိယံ, ဧကတိယေ. သေသံ ပုရိသသဒ္ဒသမံ. ဣဓာပိ ဧကတိယေတိ ပစ္စတ္တဗဟုဝစနမေဝ သဗ္ဗနာမိကရူပသမံ အသာဓာရဏရူပတ္တာ. ဧကတိယေ မနုဿာ. एकतियो, एकतिये. एकतियं, एकतिये. उर्वरित रूपे 'पुरिस' शब्दाप्रमाणे चालतात. येथेही 'एकतिये' हे प्रथमा बहुवचनाचे रूप सर्वनामाच्या रूपासारखेच आहे, कारण ते असाधारण रूप आहे. "एकतिये मनुस्सा" (काही माणसे) हे याचे उदाहरण आहे. ‘‘န ဝိဿသေ ဧကတိယေသု ဧဝ,အဂါရိသု ပဗ္ဗဇိတေသု စာပိ; သာဓူပိ ဟုတွာန အသာဓု ဟောန္တိ; အသာဓု ဟုတွာ ပုန သာဓု ဟောန္တီ’’တိ "काही गृहस्थांवर किंवा प्रव्रजितांवर (भिक्खूंवर) देखील विश्वास ठेवू नये; कारण ते चांगले असूनही वाईट बनतात, आणि वाईट बनून पुन्हा चांगले बनतात." နိဒဿနပဒါနိ. ဧကစ္စိယသဒ္ဒဿ အတ္ထိတာယံ ပန – ही उदाहरणे आहेत. आता 'एकच्चिय' शब्दाच्या अस्तित्वाविषयी सांगायचे तर - ‘‘သစ္စံ ကိရေဝမာဟံသု, နရာ ဧကစ္စိယာ ဣဓ; ကဋ္ဌံ နိပ္လဝိတံ သေယျော, န တွေဝေကစ္စိယော နရော. "येथे काही लोकांनी हे खरेच म्हटले आहे की, पाण्यात तरंगणारे लाकूड बरे, पण काही (कृतघ्न) मनुष्य चांगला नाही." ဧကစ္စိယံ အာဟာရ’’န္တိ နိဒဿနပဒါနိ. ဧကစ္စိယော, ဧကစ္စိယာ. ဧကစ္စိယံ, ဧကစ္စိယေတိ သဗ္ဗထာပိ ပုရိသနယော. ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ. "एकच्चियं आहारं" (काही आहार) ही उदाहरणे आहेत. एकच्चियो, एकच्चिया. एकच्चियं, एकच्चिये. सर्व प्रकारे 'पुरिस' शब्दाप्रमाणेच रूपे होतात. ही पुल्लिंगी रूपे आहेत. ဧကစ္စံ[Pg.380], ဧကစ္စာနိ. ဧကစ္စံ, ဧကစ္စာနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. ဧကတိယံ, ဧကတိယာနိ. ဧကတိယံ, ဧကတိယာနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. ဧကစ္စိယံ, ဧကစ္စိယာနိ. ဧကစ္စိယံ, ဧကစ္စိယာနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. နပုံသကလိင်္ဂရူပါနိ. एकच्चं, एकच्चानि. एकच्चं, एकच्चानि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. एकतियं, एकतियानि. एकतियं, एकतियानि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. एकच्चियं, एकच्चियानि. एकच्चियं, एकच्चियानि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. ही नपुंसकलिंगी रूपे आहेत. ‘‘ဧကစ္စာ, ဧကစ္စာ, ဧကစ္စာယော’’တိ ကညာနယေန, တထာ ‘‘ဧကတိယာ, ဧကတိယာ, ဧကတိယာယော. ဧကတိယ’’န္တိ စ, ‘‘ဧကစ္စိယာ, ဧကစ္စိယာ, ဧကစ္စိယာယော. ဧကစ္စိယ’’န္တိ စ ကညာနယေန ယောဇေတဗ္ဗံ. ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိ. "एकच्चा, एकच्चा, एकच्चायो" हे 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाच्या नियमाप्रमाणे, तसेच "एकतिया, एकतिया, एकतियायो. एकतियं" आणि "एकच्चिया, एकच्चिया, एकच्चियायो. एकच्चियं" हे देखील 'कञ्ञा' शब्दाच्या नियमाप्रमाणे योजावे. ही स्त्रीलिंगी रूपे आहेत. ဣဒါနိ ဧကာကီ ဧကာကိယသဒ္ဒဝသေန နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စန္တေ – आता 'एकाकी' आणि 'एकाकिय' या शब्दांच्या आधारे नामरूपे (विभक्ती रूपे) सांगितली जात आहेत - ဧကာကီ, ဧကာကီ, ဧကာကိနော. ဧကာကိံ, ဧကာကီ, ဧကာကိနော. ဒဏ္ဍီနယေန ဉေယျာ. ဧကာကိယော, ဧကာကိယာ. ဧကာကိယံ, ဧကာကိယေ. ဧကာကိယေန. ပုရိသနယေန ဉေယျံ. ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ. एकाकी, एकाकी, एकाकिनो. एकाकिं, एकाकी, एकाकिनो. हे 'दण्डी' शब्दाच्या नियमाप्रमाणे समजावे. एकाकियो, एकाकिया. एकाकियं, एकाकिये. एकाकियेन. हे 'पुरिस' शब्दाच्या नियमाप्रमाणे समजावे. ही पुल्लिंगी रूपे आहेत. ဧကာကိ ကုလံ, ဧကာကီ, ဧကာကီနိ. ဧကာကိံ, ဧကာကီ, ဧကာကီနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. ဧကာကိယံ, ဧကာကိယာနိ. ဧကာကိယံ, ဧကာကိယာနိ. သေသံ ပုလ္လိင်္ဂသဒိသံ. နပုံသကလိင်္ဂရူပါနိ. एकाकि कुलं, एकाकी, एकाकीनि. एकाकिं, एकाकी, एकाकीनि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. एकाकियं, एकाकियानि. एकाकियं, एकाकियानि. उर्वरित रूपे पुल्लिंगाप्रमाणेच असतात. ही नपुंसकलिंगी रूपे आहेत. ဧကာကိနီ, ဧကာကိနီ, ဧကာကိနိယော. ဧကာကိနိံ, ဧကာကိနီ, ဧကာကိနိယော. ဧကာကိနိယာတိ ဣတ္ထီသဒိသံ. ဧကာကိယာ, ဧကာကိယာ, ဧကာကိယာယော. ဧကာကိယံ, ဧကာကိယာ, ဧကာကိယာယော. ဧကာကိယာယာတိ ကညာသဒိသံ. ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိ. သဗ္ဗာနိ ပနေတာနိ အသဗ္ဗနာမိကရူပါနိ အတ္ထန္တရဝိညာပနတ္ထံ ဝုတ္တာနီတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာနိ. एकाकिनी, एकाकिनी, एकाकिनियो. एकाकिनिं, एकाकिनी, एकाकिनियो. 'एकाकिनिया' इत्यादी रूपे 'इत्थी' (स्त्री) शब्दाप्रमाणे असतात. एकाकिया, एकाकिया, एकाकियायो. एकाकियं, एकाकिया, एकाकियायो. 'एकाकियाय' इत्यादी रूपे 'कञ्ञा' (कन्या) शब्दाप्रमाणे असतात. ही स्त्रीलिंगी रूपे आहेत. ही सर्व रूपे सर्वनामाची नसून (असर्वनाम रूपे आहेत), ती भिन्न अर्थ स्पष्ट करण्यासाठी सांगितली आहेत, असे समजावे. ဣဒါနိ ဒွိသဒ္ဒပရိယာယဿ သဒါ ဗဟုဝစနန္တဿ သဗ္ဗနာမိကပဒဿ ဥဘသဒ္ဒဿ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'द्वि' (दोन) या शब्दाचा पर्याय असलेल्या, नेहमी बहुवचनातच राहणाऱ्या आणि सर्वनाम असलेल्या 'उभ' (दोन्ही) या शब्दाची नामरूपे (विभक्ती रूपे) सांगितली जात आहेत - ‘‘ဥဘော[Pg.381], ဥဘော, ဥဘောဟိ, ဥဘောဘိ, ဥဘိန္နံ, ဥဘောဟိ, ဥဘောဘိ, ဥဘိန္နံ, ဥဘောသူ’’တိ အယံ ပါဠိနယာနုရူပေန ဝုတ္တပဒမာလာ. အတြိမေ ပယောဂါ – ဥဘော ကုမာရာ နိက္ကီတာ. ဥဘော ဣတ္ထိယော တိဋ္ဌန္တိ, ဥဘော စိတ္တာနိ တိဋ္ဌန္တိ, ဥဘော ပုတ္တေ အဒါသိ. ဥဘော ကညာယော ပဿတိ. ဥဘော ပါဒါနိ ဘိန္ဒိတွာ, သညမိဿာမိ ဝေါ အဟံ. ဥဘောဟိ ဟတ္ထေဟိ. ဥဘောဟိ ဗာဟာဟိ, ဥဘောဟိ စိတ္တေဟိ, ဥဘိန္နံ ဇနာနံ, ဥဘိန္နံ ဣတ္ထီနံ, ဥဘိန္နံ စိတ္တာနံ, ဥဘောသု ပုရိသေသု, ဥဘောသု ဣတ္ထီသု, ဥဘောသု ပဿေသူတိ, အယမသ္မာကံ ရုစိ. အာစရိယာ ပန ‘‘ဥဘေဟိ, ဥဘေဘိ, ဥဘေသူ’’တိပိ ဣစ္ဆန္တိ. ကစ္စာယနေပိ ဟိ ‘‘ဥဘေ တပ္ပုရိသာ’’တိ ဝုတ္တံ. သဗ္ဗာနိပိ ဧတာနိ မနသိ ကာတဗ္ဗာနိယေဝ. ဥဘသဒ္ဒဿ သမာသော အပ္ပသိဒ္ဓေါ. လိင်္ဂတ္တယသာဓာရဏရူပါနိ. "उभो, उभो, उभोहि, उभोभि, उभिन्नं, उभोहि, उभोभि, उभिन्नं, उभोसू" ही पाळि नियमानुसार सांगितलेली नामरूपे आहेत. येथे हे प्रयोग आहेत - 'उभो कुमारा निक्कीता' (दोन्ही मुले विकत घेतली), 'उभो इत्थियो तिट्ठन्ति' (दोन्ही स्त्रिया उभ्या आहेत), 'उभो चित्तानि तिट्ठन्ति' (दोन्ही चित्ते राहतात), 'उभो पुत्ते अदासि' (दोन्ही पुत्रांना दिले), 'उभो कञ्ञायो पस्सति' (दोन्ही कन्यांना पाहतो), 'उभो पादानि भिन्दित्वा, साञ्ञमिस्सामि वो अहं' (दोन्ही पाय तोडून मी तुम्हांला नियंत्रित करीन), 'उभोहि हत्थेहि' (दोन्ही हातांनी), 'उभोहि बाहाहि' (दोन्ही बाहूंनी), 'उभोहि चित्तेहि' (दोन्ही चित्तांनी), 'उभिन्नं जनानं' (दोन्ही लोकांचे), 'उभिन्नं इत्थीनं' (दोन्ही स्त्रियांचे), 'उभिन्नं चित्तानं' (दोन्ही चित्तांचे), 'उभोसु पुरिसेसु' (दोन्ही पुरुषांमध्ये), 'उभोसु इत्थीसु' (दोन्ही स्त्रियांमध्ये), 'उभोसु पस्सेसु' (दोन्ही बाजूंना) - हे आमचे मत आहे. परंतु, आचार्य 'उभेहि, उभेभि, उभेसू' अशी रूपे देखील इच्छितात. कारण कच्चायनातही 'उभे तप्पुरिसा' असे म्हटले आहे. ही सर्व रूपे मनात ठेवली पाहिजेत. 'उभ' शब्दाचा समास योजावा. ही तिन्ही लिंगांमध्ये सामायिक (समान) रूपे आहेत. ဣဒါနိ သင်္ခါဝစနာနံ ဒွိတိ စတုသဒ္ဒါနံ သဒါ ဗဟုဝစနန္တာနံ သဗ္ဗနာမာနံ နာမိကပဒမာလာယော ဝုစ္စန္တေ – आता, नेहमी बहुवचनातच असणाऱ्या 'द्वि' (दोन), 'ति' (तीन) आणि 'चतु' (चार) या संख्यावाचक सर्वनामांच्या नामपदमाला (विभक्ती रूपे) सांगितली जात आहेत – ဒွေ, ဒွေ, ဒွီဟိ, ဒွီဘိ, ဒွိန္နံ, ဒုဝိန္နံ, ဒွီဟိ, ဒွီဘိ, ဒွိန္နံ, ဒုဝိန္နံ, ဒွီသု. စူဠနိရုတ္တိယံ ပန ‘‘ဒွိန္နန္န’’န္တိ ပဒမာလာ အာဂတာ. ဣမာနိ အဟံသဒ္ဒါဒီနိ ဝိယ ဣတ္ထိ လိင်္ဂါဒိဘာဝဝိနိမုတ္တာနိပိ တီသု လိင်္ဂေသု ယုဇ္ဇန္တေ ‘‘ဒွေ ပုရိသာ, ဒွေ ဣတ္ထိယော, ဒွေ စိတ္တာနိ’’ဣစ္စေဝမာဒိနာ. ဣမာနိပိ လိင်္ဂတ္တယသာဓာရဏာနိ ရူပါနိ. द्वे, द्वे, द्वीहि, द्वीभि, द्विन्नं, दुविन्नं, द्वीहि, द्वीभि, द्विन्नं, duvinnaṃ (दुविन्नं), द्वीसु. 'चूळनिरुत्ति' मध्ये मात्र 'द्विन्नन्नं' (dvinnannaṃ) हे रूप आले आहे. ही रूपे 'अहं' इत्यादी शब्दांप्रमाणे स्त्रीलिंग इत्यादी भेदांपासून मुक्त असूनही तिन्ही लिंगांत वापरली जातात; जसे की— 'द्वे पुरिसा' (दोन पुरुष), 'द्वे इत्थियो' (दोन स्त्रिया), 'द्वे चित्तानि' (दोन चित्ते) इत्यादी. ही रूपे तिन्ही लिंगांसाठी सामायिक (साधारण) आहेत. ‘‘ဒွေ’’တိ ရူပံ ဒွိသဒ္ဒဿ, ယံ သမာသမှိ တံ ဘဝေ; ဒွိတိပ္ပကတိကံယေဝ, နာနာဒေသေဟိ သာ သိယာ. 'द्वे' हे 'द्वि' शब्दाचे रूप समासामध्ये होते; ते 'द्वि' आणि 'ति' या मूळ प्रकृतीचेच (प्रातिपदिक) असते, आणि वेगवेगळ्या आदेशांमुळे (बदलांमुळे) ते तसे होते. ဒွိဘာဝေါ စေဝ ဒွေဘာဝေါ, ဒွိရတ္တဉ္စ ဒုဝဿကော; ဒေါဟဠိနီ ဒုပတ္တဉ္စ, တဒ္ဓိတတ္တေ ဒွယံ ဒွယံ. द्विभाव (द्विभावो), द्वेभाव (द्वेभावो), द्विरत्र (द्विरत्तं), द्विवर्षीय (दुवस्सको), दोहळिणी (दोहळिनी), दुपदरी (दुपत्तं) आणि तद्धित प्रत्ययात 'द्वय' (द्वयं) अशी रूपे होतात. တယော[Pg.382], တယော, တီဟိ, တီဘိ, တိဏ္ဏံ, တိဏ္ဏန္နံ, တီဟိ, တီဘိ, တိဏ္ဏံ, တိဏ္ဏန္နံ, တီသု. ဣမာနိ ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ. तयो, तयो, तीहि, तीभि, तिण्णं, तिण्णन्नं, तीहि, तीभि, तिण्णं, तिण्णन्नं, तीसु. ही पुल्लिंगी रूपे आहेत. တိဿော, တိဿော, တီဟိ, တီဘိ, တိဿန္နံ, တီဟိ, တီဘိ, တိဿန္နံ, တီသု. ဣမာနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိ. စူဠနိရုတ္တိယံ ‘‘တိဿန္နန္န’’န္တိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီနံ ဗဟုဝစနမာဂတံ, နိရုတ္တိပိဋကေ ပန ‘‘တိဏ္ဏန္န’’န္တိ. တာနိ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ ပုနပ္ပုနံ ဥပပရိက္ခိတွာ ဒိဿန္တိ စေ, ဂဟေတဗ္ဗာနိ. तिस्सो, तिस्सो, तीहि, तीभि, तिस्सन्नं, तीहि, तीभि, तिस्सन्नं, तीसु. ही स्त्रीलिंगी रूपे आहेत. 'चूळनिरुत्ति' मध्ये चतुर्थी आणि षष्ठीच्या बहुवचनात 'तिस्सन्नन्नं' (tissannannaṃ) असे रूप आले आहे, तर 'निरुत्तिपिटक' मध्ये 'तिण्णन्नं' (tiṇṇannaṃ) असे आले आहे. अट्ठकथांसह त्रिपिटक बुद्धवचनांमध्ये वारंवार तपासून जर ती रूपे आढळली, तर ती स्वीकारली पाहिजेत. တီဏိ, တီဏိ, တီဟိ, တီဘိ, တိဏ္ဏံ, တိဏ္ဏန္နံ, တီဟိ, တီဘိ, တိဏ္ဏံ, တိဏ္ဏန္နံ, တီသု. ဣမာနိ နပုံသကလိင်္ဂရူပါနိ. ကတ္ထစိ ပန ပါဠိပ္ပဒေသေ တီဏိသဒ္ဒဿ ဏိကာရလောပေါပိ ဘဝတိ ‘‘ဒွေ ဝါတိ ဝါ ဥဒကဖုသိတာနီ’’တိ. ‘‘တိဏ္ဏန္နံ ခေါ ဘိက္ခဝေ ဣန္ဒြိယာနံ ဘာဝိတတ္တာ ဗဟုလီကတတ္တာ ပိဏ္ဍောလဘာရဒွါဇေန ဘိက္ခုနာ အညာ ဗျာကတာ’’တိ ဣဒံ ‘‘တိဏ္ဏန္န’’န္တိ ပဒဿ အတ္ထိဘာဝေ နိဒဿနံ. तीणि, तीणि, तीहि, तीभि, तिण्णं, तिण्णन्नं, तीहि, तीभि, तिण्णं, तिण्णन्नं, तीसु. ही नपुंसकलिंगी रूपे आहेत. काही पाळी संदर्भांमध्ये 'तीणि' शब्दातील 'णि' अक्षराचा लोप देखील होतो, जसे की— 'द्वे वा ती वा उदकफुसितानि' (दोन किंवा तीन पाण्याचे थेंब). 'तिण्णन्नं खो भिक्खवे इन्द्रियानं भावितत्ता बहुलीकतत्ता पिण्डोलभारद्वाजेen भिक्खुना अञ्ञा ब्याकता' (भिक्खूंनो, तीन इंद्रियांच्या भावितपणामुळे आणि वारंवार अभ्यास केल्यामुळे पिण्डोल भारद्वाज भिक्खूंनी अर्हतपद घोषित केले आहे) हे वाक्य 'तिण्णन्नं' या पदाच्या अस्तित्वाचे उदाहरण आहे. ယာနိ ရူပါနိ ဝုတ္တာနိ, ‘‘တိဿော တီဏိ တယော’’ဣတိ; သမာသဝိသယေ တာနိ, တိတိပ္ပကတိကာ သိယုံ. जी 'तिस्सो', 'तीणि' आणि 'तयो' अशी रूपे सांगितली आहेत, ती समासाच्या बाबतीत 'ति' या मूळ प्रकृतीची (प्रातिपदिकाची) होतात. ယသ္မာ တိဿ သမာသမှိ, သဒ္ဓိံ ပရပဒေန ဝေ; ‘‘တိဝေဒနံ တိစိတ္တ’’န္တိ, ‘‘တိလောက’’န္တိ စ နိဒ္ဒိသေ. कारण समासामध्ये उत्तरपदासोबत 'ति' चे रूप जोडले जाते; जसे की 'तिवेदनं' (तीन वेदना), 'तिचित्तं' (तीन चित्ते) आणि 'तिलोकं' (त्रिलोक) असे निर्देश केले जातात. ဧတ္ထ နပုံသကတ္တံဝ, ပါသံသံ ပါယဝုတ္တိတော; ပုမတ္တမ္ပေတ္ထ ဣစ္ဆန္တိ, ‘‘တိဘဝေါ ခါယတေ’’ဣတိ. येथे बहुतांश प्रयोगांमध्ये नपुंसकलिंगच योग्य मानले जाते; परंतु येथे पुल्लिंग देखील स्वीकारले जाते, जसे की— 'तिभवो खायते' (तीन भव क्षीण होतात). စတ္တာရော, စတုရော, စတ္တာရော, စတုရော, စတူဟိ, စတူဘိ, စတုဗ္ဘိ, စတုန္နံ, စတူဟိ, စတူဘိ, စတုဗ္ဘိ, စတုန္နံ, စတူသု. ဣမာနိ ပုလ္လိင်္ဂရူပါနိ. चत्तारो, चतुरो, चत्तारो, चतुरो, चतूहू, चतूभि, चतुब्भि, चतुन्नं, चतूहू, चतूभि, चतुब्भि, चतुन्नं, चतूसु. ही पुल्लिंगी रूपे आहेत. စတဿော[Pg.383], စတဿော, စတူဟိ, စတူဘိ, စတုဗ္ဘိ, စတဿန္နံ, စတုန္နံ, စတူဟိ, စတူဘိ, စတုဗ္ဘိ, စတဿန္နံ, စတုန္နံ, စတူသု. ဣမာနိ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပါနိ. ဣတ္ထိလိင်္ဂဋ္ဌာနေ ‘‘စတုန္န’’န္တိ ပဒံ စူဠနိရုတ္တိယံ နိရုတ္တိပိဋကေ ပါဠိယံ အဋ္ဌကထာသု စ ဒဿနတော ဝုတ္တံ. တထာ ဟိ စူဠနိရုတ္တိယံ ဣတ္ထိလိင်္ဂဋ္ဌာနေ ‘‘စတုန္န’’န္တိ အာဂတံ, နိရုတ္တိပိဋကေ ‘‘စတုန္နံ ကညာန’’န္တိ အာဂတံ. ပါဠိယံ ပန သောဏဒန္တသုတ္တာဒီသု ‘‘သမဏော ဂေါတမော စတုန္နံ ပရိသာနံ ပိယော မနာပေါ’’တိ အာဂတံ. အဋ္ဌကထာသု စ ပန သုတ္တန္တဋ္ဌကထာယံ ‘‘စတူဟိ အစ္ဆရိယဗ္ဘုတဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော စတုန္နံ ပရိသာနံ ပိယော မနာပေါ’’တိ အာဂတံ. သတ္တိလင်္ဃဇာတကဋ္ဌကထာယံ ‘‘အာစရိယော ပနဿ စတုန္နံ သတ္တီနံ လင်္ဃနံ သိပ္ပံ ဇာနာတီ’’တိ အာဂတံ. चतस्सो, चतस्सो, चतूहू, चतूभि, चतुब्भि, चतस्सन्नं, चतुन्नं, चतूहू, चतूभि, चतुब्भि, चतस्सन्नं, चतुन्नं, चतूसु. ही स्त्रीलिंगी रूपे आहेत. स्त्रीलिंगाच्या ठिकाणी 'चतुन्नं' (catunnaṃ) हे पद चूळनिरुत्तीमध्ये, निरुत्तिपिटकात, पाळीमध्ये आणि अट्ठकथांमध्ये देखील दोन प्रकारे सांगितले आहे. तसेच चूळनिरुत्तीमध्ये स्त्रीलिंगाच्या ठिकाणी 'चतुन्नं' आले आहे, निरुत्तिपिटकात 'चतुन्नं कञ्ञानं' (चार कन्यांचे) असे आले आहे. पाळीमध्ये सोणदन्त सुत्त इत्यादींमध्ये 'समणो गोतमो चतुन्नं परिसानं पियो मनापो' (श्रमण गौतम चारही परिषदांना प्रिय व मनपसंत आहेत) असे आले आहे. आणि अट्ठकथांमध्ये, सुत्तन्त अट्ठकथेमध्ये 'चतूहि अच्छरियब्भुतधम्मेहि समन्नागतो चतुन्नं परिसानं पियो मनापो' (चार आश्चर्यकारक व अद्भुत गुणांनी युक्त असलेले, चारही परिषदांना प्रिय व मनपसंत आहेत) असे आले आहे. सत्तिलङ्घ जातक अट्ठकथेमध्ये 'आचरियो पनस्स चतुन्नं सत्तीनं लङ्घनं सिप्पं जानाति' (त्याचे आचार्य चार भाल्यांवरून उडी मारण्याची कला जाणतात) असे आले आहे. စတ္တာရိ, စတ္တာရိ, စတူဟိ, စတူဘိ, စတုဗ္ဘိ, စတုန္နံ, စတူဟိ, စတူဘိ, စတုဗ္ဘိ, စတုန္နံ, စတူသု. ဣမာနိ နပုံသကလိင်္ဂရူပါနိ. चत्तारि, चत्तारि, चतूहू, चतूभि, चतुब्भि, चतुन्नं, चतूहू, चतूभि, चतुब्भि, चतुन्नं, चतूसु. ही नपुंसकलिंगी रूपे आहेत. ‘‘စတ္တာရော’’တိ ‘‘စတဿော’’တိ, ‘‘စတ္တာရီ’’တိ စ သဒ္ဒိတံ; ရူပံ သမာသဘာဝမှိ, စတုပ္ပကတိကံ ဘဝေ. जे 'चत्तारो', 'चतस्सो' आणि 'चत्तारि' असे शब्दरूप आहे, ते समासामध्ये 'चतु' या मूळ प्रकृतीचे (प्रातिपदिकाचे) होते. နိဒဿနပဒါနေတ္ထ, ကမတော ကမကောဝိဒေါ; ‘‘စတုဗ္ဗိဓံ စတုဿာလံ, စတုသစ္စ’’န္တိ နိဒ္ဒိသေ. येथे क्रमाचे ज्ञान असणाऱ्याने क्रमाने उदाहरणे द्यावीत; जसे की— 'चतुब्बिधं' (चार प्रकारचे), 'चतुस्सालं' (चार खांबांचे घर) आणि 'चतुसच्चं' (चार आर्यसत्ये) असे निर्देश करावेत. ဣမာနိ ဒွေအာဒိကာနိ သဗ္ဗနာမိကာနိ ဗဟုဝစနာနိယေဝ ဘဝန္တိ, န ဧကဝစနာနိ. စူဠနိရုတ္တိယံ ပန တီသု လိင်္ဂေသု ‘‘စတဿန္န’’န္တိ ဝုတ္တံ, တံ အနိဇ္ဈာနက္ခမံ ဝိယ ဒိဿတိ. ही 'द्वि' (दोन) इत्यादी सर्वनामे केवळ बहुवचनातच असतात, एकवचनात नाही. परंतु 'चूळनिरुत्ति' मध्ये तिन्ही लिंगांत 'चतस्सन्नं' (catassannaṃ) असे म्हटले आहे, जे विचार करण्यायोग्य वाटत नाही (अयोग्य वाटते). ဣဒါနိ တုမှအမှသဒ္ဒါနံ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စန္တေ, တေသု ယေန ကထေတိ, တဿာလပနေ တုမှဝစနာနိ ဘဝန္တိ. आता 'तुम्ह' (तू/तुम्ही) आणि 'अम्ह' (मी/आम्ही) या शब्दांच्या नामपदमाला (विभक्ती रूपे) सांगितल्या जात आहेत. त्यांच्यापैकी ज्याच्याशी बोलले जाते, त्याला संबोधताना 'तुम्ह' चे शब्दरूप वापरले जाते. တွံ, တုဝံ, တုမှေ. တံ, တုဝံ, တွံ, တဝံ, တုမှေ. တယာ, တွယာ, တုမှေဟိ, တုမှေဘိ. တုယှံ, တဝ, တုမှံ, တုမှာကံ. တယာ, တွယာ, တုမှေဟိ, တုမှေဘိ. တုယှံ, တဝ, တုမှံ, တုမှာကံ. တယိ, တွယိ, တုမှေသု[Pg.384]. တတြ ‘‘တွံ ပုရိသော, တွံ ဣတ္ထီ, တွံ စိတ္တ’’န္တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. त्वं, तुवं, तुम्हे. तं, तुवं, त्वं, तवं, तुम्हे. तया, त्वया, तुम्हेहि, तुम्हेभि. तुय्हं, तव, तुम्हं, तुम्हाकं. तया, त्वया, तुम्हेहि, तुम्हेभि. तुय्हं, तव, तुम्हं, तुम्हाकं. तयि, त्वयि, तुम्हेसु. तेथे 'त्वं पुरिसो' (तू पुरुष), 'त्वं इत्थी' (तू स्त्री), 'त्वं चित्तं' (तू चित्त) इत्यादी प्रकारे योजना करावी. အတ္တယောဂေ အမှဝစနာနိ ဘဝန္တိ. स्वतःच्या संबंधात (आत्मयोगात) 'अम्ह' चे शब्दरूप वापरले जाते. အဟံ, အဟကံ, မယံ, အမှေ. မံ, မမံ, အမှေ. မယာ, အမှေဟိ, အမှေဘိ. မယှံ, မမ, အမှံ, အမှာကံ, အသ္မာကံ. မယာ, အမှေဟိ, အမှေဘိ. မယှံ, မမ, အမှံ, အမှာကံ, အသ္မာကံ. မယိ, အမှေသု, အသ္မေသု. अहं, अहकं, मयं, अम्हे. मं, ममं, अम्हे. मया, अम्हेहि, अम्हेभि. मय्हं, मम, अम्हं, अम्हाकं, अस्माकं. मया, अम्हेहि, अम्हेभि. मय्हं, मम, अम्हं, अम्हाकं, अस्माकं. मयि, अम्हेसु, अस्मेसु. ဧတ္ထ ပန ‘‘ကထံ အမှေ ကရောမသေ’’တိ ပါဠိဒဿနတော ‘‘တုမှေ’’တိ ပစ္စတ္တဝစနဿ ဝိယ ‘‘အမှေ’’တိ ပစ္စတ္တဝစနဿပိ အတ္ထိတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ, ‘‘အဟက’’န္တိ ရူပန္တရမ္ပိ ဣစ္ဆိတဗ္ဗံ. တဿ အတ္ထိဘာဝေ ‘‘အဟကဉ္စ စိတ္တဝသာနုဂါ ဘာသိဿ’’န္တိ ဧသာ ပါဠိ နိဒဿနံ. ဧတ္ထ ဟိ အဟကန္တိ အဟံ ဣစ္စေဝတ္ထော. တတြ ‘‘အဟံ ပုရိသော, အဟံ ကညာ, အဟံ စိတ္တ’’န္တိအာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗာနိ. ဣမာနိပိ လိင်္ဂတ္တယသာဓာရဏရူပါနိ. येथे 'कथं अम्हे करोमसे' (आम्ही कसे करू?) या पाळी प्रयोगावरून 'तुम्हे' या प्रथमा विभक्तीच्या (पच्चत्तवचन) रूपाप्रमाणे 'अम्हे' या प्रथमा विभक्तीच्या रूपाचे देखील अस्तित्व जाणावे, तसेच 'अहकं' (ahakaṃ) हे दुसरे रूप देखील स्वीकारले पाहिजे. त्याच्या अस्तित्वाचे उदाहरण म्हणजे 'अहकञ्च चित्तवसानुगा भासिस्सं' ही पाळी होय. येथे 'अहकं' चा अर्थ 'अहं' (मी) असाच आहे. तेथे 'अहं पुरिसो' (मी पुरुष), 'अहं कञ्ञा' (मी कन्या), 'अहं चित्तं' (मी चित्त) इत्यादी प्रकारे योजना करावी. ही रूपे देखील तिन्ही लिंगांसाठी सामायिक (साधारण) आहेत. ကစ္စာယနစူဠနိရုတ္တိနိရုတ္တိပိဋကေသု ပန ‘‘တုမှာကံ အမှာက’’န္တိ စ ဒုတိယာဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ. ကစ္စာယနေ ‘‘တုမှာနံ အမှာန’’န္တိ စ ပဌမာဒုတိယာဗဟုဝစနံ, ‘‘တုမှံ အမှ’’န္တိ စ စတုတ္ထီဆဋ္ဌေကဝစနံ, ပဌမာဒုတိယာဗဟုဝစနဉ္စ ဝုတ္တံ, စူဠနိရုတ္တိနိရုတ္တိပိဋကေ ပန ‘‘တုမှံ အမှ’’န္တိ စ ဒုတိယေကဝစနံ ဝုတ္တံ, ‘‘တုမှေ အမှေ’’တိ စ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီဗဟုဝစနံ ဝုတ္တံ. ဧတာနိ ဥပပရိက္ခိတွာ သာဋ္ဌကထေသု သုတ္တန္တေသု ဒိဿန္တိ စေ, ဂဟေတဗ္ဗာနိ. कच्चायन, 'चूळनिरुत्ति' आणि 'निरुत्तिपिटक' यांमध्ये मात्र 'तुम्हाकं' (tumhākaṃ) आणि 'अम्हाकं' (amhākaṃ) हे द्वितीया बहुवचनाचे रूप सांगितले आहे. कच्चायनामध्ये 'तुम्हानं' (tumhānaṃ) आणि 'अम्हानं' (amhānaṃ) हे प्रथमा व द्वितीया बहुवचनाचे रूप, तसेच 'तुम्हं' (tumhaṃ) आणि 'अम्हं' (amhaṃ) हे चतुर्थी व षष्ठी एकवचनाचे रूप, आणि प्रथमा व द्वितीया बहुवचनाचे रूप देखील सांगितले आहे. 'चूळनिरुत्ति' आणि 'निरुत्तिपिटक' यांमध्ये मात्र 'तुम्हं' आणि 'अम्हं' हे द्वितीया एकवचनाचे रूप सांगितले आहे, आणि 'तुम्हे' व 'अम्हे' हे चतुर्थी व षष्ठी बहुवचनाचे रूप सांगितले आहे. अट्ठकथांसह सुत्तांमध्ये तपासून जर ही रूपे आढळली, तर ती स्वीकारली पाहिजेत. တုမှအမှသဒ္ဒါနံ ပန ပရပဒေဟိ သဒ္ဓိံ သမာသေ ‘‘မံဒီပါ’’တိအာဒယော ပယောဂါ တထာဂတာဒိမုခတော သမ္ဘဝန္တိ. ‘‘ဧတေ ဂါမဏိ မံဒီပါ မံလေဏာ မံသရဏာ’’တိ ဟိ တထာဂတမုခတော, ‘‘တယျောဂေါ မယျောဂေါ’’တိ နိရုတ္တညုမုခတော, ကာဗျာဒါသေ စ ‘‘တွံမုခံ ကမလေနေဝ, တုလျံ နာညေန [Pg.385] ကေနစီ’’တိ စ ‘‘စန္ဒေန တွံမုခံ တုလျ’’န္တိ စ ကဝိမုခတော. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' या शब्दांचा इतर पदांसोबत समास झाल्यावर "मंदीपा" (माझे द्वीप) इत्यादी प्रयोग तथागत आदींच्या मुखातून संभवतात. कारण "हे गामणी, मंदीपा (माझे द्वीप), मंलेणा (माझे लेण), मंसरणा (माझे शरण)" हे तथागतांच्या मुखातून, "तय्योगो, मय्योगो" हे व्याकरणज्ञांच्या मुखातून, आणि काव्यादर्शामध्ये "त्वंमुखं कमलेनेव, तुल्यं नाञ्ञेन केनची" आणि "चंदेण त्वंमुखं तुल्यं" हे कवींच्या मुखातून आले आहे. တတ္ထ ဟိ အဟံ ဒီပေါ ဧတေသန္တိ မံဒီပါ, အဟံ လေဏံ ဧတေသန္တိ မံလေဏာ, ဧဝံ မံသရဏာ. တုမှေန ယောဂေါ တယျောဂေါ, တုမှသဒ္ဒေန ယောဂေါ ဣစ္စေဝတ္ထော. အမှေန ယောဂေါ မယျောဂေါ, အမှသဒ္ဒေန ယောဂေါ ဣစ္စေဝတ္ထော. တဝ မုခံ တွံမုခံ. ဗဟုဝစနဝသေနပိ နိဗ္ဗစနီယံ ‘‘တုမှာကံ မုခံ တွံမုခ’’န္တိ. ဧတ္ထ စ ပါဠိယံ ‘‘မံဒီပါ’’ဣစ္စာဒိဒဿနတော ‘‘တွံဒီပါ’’တိအာဒီနိ ကာဗျာဒါသေ စ ‘‘တွံမုခ’’န္တိ ဒဿနတော တွံဝဏ္ဏော, တွံသရော, မံမုခံ, မံဝဏ္ဏော, မံသရောအာဒီနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. တတ္ထ တွံ ဒီပေါ ဧတေသန္တိ တွံဒီပါ, တုမှေ ဝါ ဒီပါ ဧတေသန္တိ တွံဒီပါ, တဝ ဝဏ္ဏော တွံဝဏ္ဏော. မမ မုခံ မံမုခံ, အမှာကံ ဝါ မုခံ မံမုခန္တိ နိဗ္ဗစနာနိ. ဧသ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု. तेथे "मी ज्यांचा द्वीप (आश्रय) आहे ते मंदीपा", "मी ज्यांचे लेण (आश्रयस्थान) आहे ते मंलेणा", याचप्रमाणे "मंसरणा" (मी ज्यांचे शरण आहे). 'तुम्ह' सोबत योग म्हणजे 'तय्योगो', म्हणजेच 'तुम्ह' शब्दाशी योग असा अर्थ आहे. 'अम्ह' सोबत योग म्हणजे 'मय्योगो', म्हणजेच 'अम्ह' शब्दाशी योग असा अर्थ आहे. तुझे मुख म्हणजे 'त्वंमुखं'. बहुवचनाच्या दृष्टीनेही "तुमचे मुख म्हणजे त्वंमुखं" असे निर्वचन करावे. आणि येथे पाळीमध्ये "मंदीपा" इत्यादींच्या दर्शनावरून "त्वंदीपा" इत्यादी, आणि काव्यादर्शामध्ये "त्वंमुखं" या दर्शनावरून 'त्वंवण्णो' (तुझा वर्ण), 'त्वंसरो' (तुझा स्वर), 'मंमुखं' (माझे मुख), 'मंवण्णो' (माझा वर्ण), 'मंसरो' (माझा स्वर) इत्यादी ग्रहण करावेत. तेथे "तू ज्यांचा द्वीप आहेस ते त्वंदीपा" किंवा "तुम्ही ज्यांचे द्वीप आहात ते त्वंदीपा", "तुझा वर्ण तो त्वंवण्णो". "माझे मुख ते मंमुखं" किंवा "आमचे मुख ते मंमुखं" अशी निर्वचने आहेत. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू होतो. သမာသေ တုမှအမှာကံ, ဟောန္တိ ပရပဒေဟိ ဝေ; ‘‘တွံမုခ’’န္တိ စ ‘‘မံဒီပါ, တယျောဂေါ မယျောဂေါ’’တိ စ. समासामध्ये 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' या शब्दांचे इतर पदांसोबत खरोखर (असे रूप) होते: "त्वंमुखं", "मंदीपा", "तय्योगो" आणि "मय्योगो". ဧတ္ထာဟ ‘‘ကိံ ဧတ္တကမေဝ တုမှအမှသဒ္ဒါနံ ရူပံ, ဥဒါဟု အညမ္ပိ အတ္ထီ’’တိ? အတ္ထိ ‘‘တေ မေ’’ ဣစ္စာဒီနိ. ယဒိ ဧဝံ ကသ္မာ ပဒမာလာ ဝိသုံ န ဝုတ္တာတိ? အဝစနေ ကာရဏမတ္ထိ. အတြိဒံ ကာရဏံ – येथे विचारले जाते: "काय 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचे एवढेच रूप आहे, की आणखी काही आहे?" आहे, "ते, मे" इत्यादी. जर असे आहे, तर मग विभक्ती-रूपांची मालिका (पदमाला) स्वतंत्रपणे का सांगितली नाही? न सांगण्यामागे कारण आहे. ते कारण खालीलप्रमाणे आहे – ‘‘တေ မေ ဝေါ နော’’တိ ရူပါနိ, ပရာနိ ပဒတော ယတော; တတော နာမိကပန္တီသု, န တု ဝုတ္တာနိ တာနိ မေ. "ते, मे, वो, नो" ही रूपे दुसऱ्या पदाच्या नंतरच येत असल्यामुळे, नाम-विभक्तीच्या श्रेणींमध्ये (पदमालेत) मी ती स्वतंत्रपणे सांगितलेली नाहीत. ဧတ္ထ စ မယံ မေ ဝေါ နောသဒ္ဒါနမတ္ထုဒ္ဓါရော ဝုစ္စတေ – တေသဒ္ဒဿ ပန ဝုတ္တောဝ. ယသ္မာ အဋ္ဌကထာစရိယာ မယံသဒ္ဒဋ္ဌာနေပိ မယာသဒ္ဒေါ, မယာသဒ္ဒဋ္ဌာနေပိ စ မယံသဒ္ဒေါ ဣစ္စေဝ ဝဒန္တိ, တသ္မာ မယမ္ပိ တထေဝ ဝဒါမ. မယံသဒ္ဒေါ ‘‘အနုညာတပဋိညာတာ, တေဝိဇ္ဇာမယမသ္မုဘော’’တိအာဒီသု အသ္မဒတ္ထေ အာဂတော[Pg.386]. ‘‘မယံ နိဿာယ ဟေမာယ, ဇာတာ မန္ဒောသိသူပဂါ’’တိ ဧတ္ထ ပညတ္တိယံ. ‘‘မနောမယာ ပီတိဘက္ခာ သယံပဘာ’’တိအာဒီသု နိဗ္ဗတ္တိအတ္ထေ. ဗာဟိရေန ပစ္စယေန ဝိနာ မနသာဝ နိဗ္ဗတ္တာတိ မနောမယာ. ‘‘ယံနူနာဟံ သဗ္ဗမတ္တိကာမယံ ကုဋိကံ ကရေယျ’’န္တိအာဒီသု ဝိကာရတ္ထေ. ‘‘ဒါနမယံ သီလမယ’’န္တိအာဒီသု ပဒပူရဏမတ္တေ. ‘‘ပီဌံ တေ သောဝဏ္ဏမယံ ဥဠာရ’’န္တိ ဧတ္ထ ဝိကာရတ္ထေ ပဒပူရဏမတ္တေ ဝါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. ယဒါ ဟိ သုဝဏ္ဏမေဝ သောဝဏ္ဏန္တိ အယမတ္ထော, တဒါ သုဝဏ္ဏဿ ဝိကာရော သောဝဏ္ဏမယန္တိ ဝိကာရတ္ထေ မယသဒ္ဒေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. နိဗ္ဗတ္တိအတ္ထောတိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. ယဒါ ပန သုဝဏ္ဏေန နိဗ္ဗတ္တံ သောဝဏ္ဏန္တိ အယမတ္ထော, တဒါ သောဝဏ္ဏမေဝ သောဝဏ္ဏမယန္တိ ပဒပူရဏမတ္တေ မယသဒ္ဒေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. आणि येथे 'मयं', 'मे', 'वो', 'नो' या शब्दांचा अर्थ-उद्धार (स्पष्टीकरण) केला जात आहे – 'ते' शब्दाचा तर सांगितलाच आहे. ज्याअर्थी अट्ठकथाचार्य 'मयं' शब्दाच्या जागी 'मया' शब्द आणि 'मया' शब्दाच्या जागी 'मयं' शब्द असाच प्रयोग करतात, त्याअर्थी आम्हीही तसेच सांगतो. 'मयं' शब्द "अनुञ्ञातपटिञ्ञाता, तेविज्जामयमस्मुभो" इत्यादींमध्ये 'अस्मद्' (आम्ही) या अर्थाने आला आहे. "मयं निस्साय हेमाय, जाता मन्दोसिसूपगा" येथे तो प्रज्ञप्ती (संज्ञा) या अर्थाने आला आहे. "मनोमया पीतिभक्खा सयंपभा" इत्यादींमध्ये तो 'उत्पत्ती' (निब्बत्ति) या अर्थाने आला आहे. बाह्य प्रत्ययाशिवाय केवळ मनानेच उत्पन्न झालेले ते 'मनोमय'. "मी सर्व मातीची (मत्तिकामय) कुटी बनवावी का?" इत्यादींमध्ये तो 'विकार' (रूपांतर) या अर्थाने आला आहे. "दानमय, शीलमय" इत्यादींमध्ये तो केवळ 'पदपूरण' (शब्द पूर्ण करण्यासाठी) या अर्थाने आला आहे. "तुझे सुवर्णमय (सोवण्णमय) आसन भव्य आहे" येथे तो विकार अर्थाने किंवा केवळ पदपूरण अर्थाने पाहावा. कारण जेव्हा 'सुवर्ण हेच सोवण्ण' असा अर्थ असतो, तेव्हा सुवर्णाचा विकार म्हणजे 'सोवण्णमय' या विकार अर्थाने 'मय' शब्द पाहावा. 'उत्पत्ती' या अर्थानेही म्हणणे योग्य आहे. पण जेव्हा 'सुवर्णाने बनलेले ते सोवण्ण' असा अर्थ असतो, तेव्हा 'सोवण्ण हेच सोवण्णमय' या केवळ पदपूरण अर्थाने 'मय' शब्द पाहावा. မေသဒ္ဒေါ ‘‘ကိစ္ဆေန မေ အဓိဂတံ, ဟလံ ဒါနိ ပကာသိတု’’န္တိအာဒီသု ကရဏေ အာဂတော. မယာတိ အတ္ထော. ‘‘တဿ မေ ဘန္တေ ဘဂဝါ သံခိတ္တေန ဓမ္မံ ဒေသေတူ’’တိအာဒီသု သမ္ပဒါနေ, မယှန္တိ အတ္ထောတိ ဝဒန္တိ. ‘‘ပုဗ္ဗေဝ မေ ဘိက္ခဝေ သမ္ဗောဓာ အနဘိသမ္ဗုဒ္ဓဿ ဗောဓိသတ္တဿေဝ သတော’’တိအာဒီသု သာမိအတ္ထေ, မမာတိ အတ္ထောတိ စ ဝဒန္တိ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – 'मे' शब्द "किच्छेन मे अधिगतं, हलं दानि पकासितुं" इत्यादींमध्ये करण कारकात (तृतीया विभक्तीत) आला आहे. याचा अर्थ 'मया' (माझ्याद्वारे) असा आहे. "तस्स मे भन्ते भगवा संखित्तेन धम्मं देसेतु" इत्यादींमध्ये संप्रदान कारकात (चतुर्थी विभक्तीत) आला आहे, याचा अर्थ 'मय्हं' (मला) असा आहे, असे म्हणतात. "पुब्बेव मे भिक्खवे सम्बोधा अनभिसम्बुद्धस्स बोधिसत्तस्सेव सतो" इत्यादींमध्ये स्वामी अर्थात (षष्ठी विभक्तीत) आला आहे, याचा अर्थ 'मम' (माझा) असा आहे, असे म्हणतात. याविषयी असे म्हटले आहे – ကရဏေ သမ္ပဒါနေ စ, သာမိအတ္ထေ စ အာဂတော; မေသဒ္ဒေါ ဣတိ ဝိညေယျော, ဝိညုနာ နယဒဿိနာ. करण, संप्रदान आणि स्वामी अर्थात आलेला 'मे' शब्द, नियमांचे दर्शन घेणाऱ्या विद्वानाने असा जाणावा. ဧတ္ထ [Pg.387] ပန ဌတွာ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ ကတေ တေ မေသဒ္ဒါနမတ္ထဝိဝရဏေ ဝိနိစ္ဆယံ ဗြူမ တေသမဓိပ္ပာယပ္ပကာသနဝသေန သောတူနံ သံသယသမုဂ္ဃာဋနတ္ထံ. တထာ ဟိ အဋ္ဌကထာစရိယာ တေမေသဒ္ဒါနံ သမ္ပဒါနတ္ထဝသေန ‘‘တုယှံ မယှ’’န္တိ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏေသုံ, သာမိအတ္ထဝသေန ပန ‘‘တဝ မမာ’’တိ. ဧဝံ ယွာယံ တေဟိ အသင်္ကရတော နိယမော ဒဿိတော, သော သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ ကုတော လဗ္ဘာ. တထာ ဟိ တေမေသဒ္ဒတ္ထဝါစကာ တုယှံ မယှံသဒ္ဒါ တဝ မမသဒ္ဒါ စ သမ္ပဒါနသာမိအတ္ထေသု အနိယမတော ပဝတ္တန္တိ. येथे थांबून, अट्ठकथाचार्यांनी केलेल्या 'ते' आणि 'मे' शब्दांच्या अर्थ-विवरणावर आम्ही निर्णय सांगतो, त्यांच्या अभिप्रायाचे प्रकटीकरण करून श्रोत्यांच्या संशयाचे निर्मूलन करण्यासाठी. कारण अट्ठकथाचार्यांनी 'ते' आणि 'मे' शब्दांचा संप्रदान अर्थाने "तुय्हं, मय्हं" (तुला, मला) असा अर्थ वर्णन केला आहे, आणि स्वामी अर्थाने "तव, मम" (तुझा, माझा) असा. अशा प्रकारे त्यांनी जो हा संकररहित नियम दाखवला आहे, तो अट्ठकथांसह त्रिपिटकातील बुद्धवचनात कोठे मिळतो? कारण 'ते' आणि 'मे' शब्दांचे अर्थ सांगणारे 'तुय्हं', 'मय्हं' हे शब्द आणि 'तव', 'मम' हे शब्द संप्रदान आणि स्वामी अर्थांमध्ये अनियंत्रितपणे वापरले जातात. တတြိမေ ပယောဂါ – ဣဒံ တုယှံ ဒဒါမိ. တုယှံ ဝိကပ္ပေမိ. တုယှံ မံသေန မေဒေန, မတ္ထကေန စ ဗြာဟ္မဏ, အာဟုတိံ ပဂ္ဂဟေဿာမိ. ဧသ ဟိ တုယှံ ပိတာ နရသီဟော. တုယှံ ပန မာတာ ကဟန္တိ. မယှမေဝ ဒါနံ ဒါတဗ္ဗံ, န အညေသံ, မယှမေဝ သာဝကာနံ ဒါနံ ဒါတဗ္ဗံ, န အညေသံ. န မယှံ ဘရိယာ ဧသာ. အဿမော သုကတော မယှံ. သဗ္ဗညုတံ ပိယံ မယှံ. တာတ မယှံ မာတု မုခံ အညာဒိသံ, တုမှာကံ အညာဒိသံ. မယှံ သာမိကော ဣဒါနိ မရိဿတိ. တဝ ဒီယတေ, တဝ သိလာဃတေ, မမ သိလာဃတေ, ပဗ္ဗဇ္ဇာ မမ ရုစ္စတိ. တဝ ပုတ္တော. ဥဘော မာတာပိတာ မမာတိ ဧဝံ အနိယမတော ပဝတ္တန္တိ. तेथे हे प्रयोग आहेत – "हे मी तुला देतो" (इदं तुय्हं ददामि). "तुला अर्पण करतो" (तुय्हं विकप्पेमि). "हे ब्राह्मणा, तुझ्या मांसाने, चरबीने आणि मस्तकाने मी आहुती देईन" (तुय्हं मंसेन मेदेन...). "हा खरोखर तुझा पिता नरसिंह आहे" (एस हि तुय्हं पिता नरसीहो). "पण तुझी माता कोठे आहे?" (तुय्हं पन माता कहन्ति). "मलाच दान दिले पाहिजे, इतरांना नाही; माझ्याच श्रावकांना दान दिले पाहिजे, इतरांना नाही" (मय्हमेव दानं दातब्बं...). "ही माझी पत्नी नाही" (न मय्हं भरिया एसा). "माझा आश्रम चांगला बनवला आहे" (अस्समो सुकतो मय्हं). "सर्वज्ञता मला प्रिय आहे" (सब्बञ्ञुतं पियं मय्हं). "ताता, माझ्या मातेचे मुख वेगळे आहे, तुमचे वेगळे आहे" (तात मय्हं मातु मुखं अञ्ञादिसं...). "माझा पती आता मरेल" (मय्हं सामिको इदानि मरिस्सति). "तुला दिले जाते", "तुझी प्रशंसा केली जाते", "माझी प्रशंसा केली जाते", "मला प्रव्रज्या आवडते" (तव दीयते, tतव सिलाघते, मम सिलाघते, पब्बज्जा मम रुच्चति). "तुझा पुत्र", "दोन्ही माता-पिता माझे आहेत" – अशा प्रकारे हे शब्द अनियंत्रितपणे वापरले जातात. စူဠနိရုတ္တိယဉှိ ယမကမဟာထေရေန စတုတ္ထီဆဋ္ဌီနံ အနညရူပတ္တံ ဝုတ္တံ ‘‘စတုတ္ထီဆဋ္ဌီနံ သဗ္ဗတ္ထ အနညံ, တတိယာပဉ္စမီနံ ဗဟုဝစနဉ္စာ’’တိ[Pg.388]. ယဒိ ဧဝံ အဋ္ဌကထာစရိယာ ‘‘နမော တေ ပုရိသာဇည. နမော တေ ဗုဒ္ဓ ဝီရတ္ထူ’တိအာဒီသု တုယှံသဒ္ဒဿ ဝသေန သမ္ပဒါနေ, တုယှန္တိ ဟိ အတ္ထော. ‘ကိန္တေ ဝတံ ကိံ ပန ဗြဟ္မစရိယ’န္တိအာဒီသု သာမိအတ္ထေ, တဝါတိ ဟိ အတ္ထော’’တိအာဒီနိ ဝဒန္တာ ‘‘အယုတ္တံ သံဝဏ္ဏနံ သံဝဏ္ဏေသု’’န္တိပိ, ‘‘ပဿိတဗ္ဗံ န ပဿိံသူ’’တိပိ အာပဇ္ဇန္တီတိ? ယုတ္တံယေဝ တေ သံဝဏ္ဏယိံသု, ပဿိတဗ္ဗဉ္စ ပဿိံသု. တထာ ဟိ တေ ‘‘သဒ္ဒသတ္ထမ္ပိ ဧကဒေသတော သာသနာနုကူလံ ဟောတီ’’တိ ပရေသမနုကမ္ပာယ သဒ္ဒသတ္ထတော နယံ ဂဟေတွာ သမ္ပဒါနတ္ထဝသေန တေ မေသဒ္ဒါနံ ‘‘တုယှံ မယှ’’န္တိ အတ္ထံ သံဝဏ္ဏယိံသု, သာမိအတ္ထဝသေန ပန ‘‘တဝ မမာ’’တိ. သဒ္ဒသတ္ထေ ဟိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီရူပါနိ သဗ္ဗထာ ဝိသဒိသာနိ, သာသနေ ပန သဒိသာနိ. တသ္မာ သာသနေ သာမညေန ပဝတ္တာနိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီရူပါနိ သဒ္ဒသတ္ထေ ဝိသေသေန ပဝတ္တေဟိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီရူပေဟိ သမာနဂတိကာနိ ကတွာ ပရေသမနုကမ္ပာယ သမ္ပဒါနတ္ထေ တုယှံ မယှံသဒ္ဒါနံ ပဝတ္တိနိယမော, သာမိအတ္ထေ စ တဝ မမသဒ္ဒါနံ ပဝတ္တိနိယမော ဒဿိတော. ယသ္မာ ပန ပရေသမနုကမ္ပာယ အယံ နိယမော, တသ္မာ ကရုဏာယေဝါယံပရာဓော, န အဋ္ဌကထာစရိယာနံ. တာယ ဧဝ ဟိ တေဟိ ဧဝံ သံဝဏ္ဏနာ ကတာတိ. चूळनिरुत्तीमध्ये यमक महाथेरांनी चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीचे अभिन्न रूप असल्याचे सांगितले आहे: 'चतुर्थी आणि षष्ठीचे सर्वत्र अभिन्न रूप असते, आणि तृतीया व पंचमीचे बहुवचन देखील.' जर असे असेल, तर अट्ठकथाचार्य 'नमो ते पुरिसाजञ्ञ. नमो ते बुद्ध वीरत्थु' इत्यादींमध्ये 'ते' या शब्दाच्या संदर्भात संप्रदान अर्थात 'तुय्हं' असा अर्थ आहे, आणि 'किं ते वतं किं पन ब्रह्मचरियं' इत्यादींमध्ये स्वामी अर्थात 'तव' असा अर्थ आहे, असे म्हणतात. मग ते 'अयोग्य स्पष्टीकरण करत आहेत' किंवा 'जे पाहायला हवे होते ते त्यांनी पाहिले नाही' असा आक्षेप घेतला जाईल का? त्यांनी योग्यच स्पष्टीकरण केले आहे आणि जे पाहायला हवे होते तेच त्यांनी पाहिले आहे. कारण त्यांनी 'व्याकरणशास्त्र देखील अंशतः शासनाला अनुकूल असते' असे मानून, इतरांवरील अनुकंपेने व्याकरणशास्त्रातून नियम घेऊन, संप्रदान अर्थाच्या संदर्भात 'ते' आणि 'मे' या शब्दांचा अर्थ 'तुय्हं' आणि 'मय्हं' असा स्पष्ट केला, आणि स्वामी अर्थाच्या संदर्भात 'तव' आणि 'मम' असा स्पष्ट केला. कारण व्याकरणशास्त्रात चतुर्थी आणि षष्ठीची रूपे पूर्णपणे भिन्न असतात, परंतु शासनात ती समान असतात. म्हणून, शासनात सामान्यपणे वापरली जाणारी चतुर्थी व षष्ठीची रूपे व्याकरणशास्त्रात विशेष रूपाने वापरल्या जाणाऱ्या चतुर्थी व षष्ठीच्या रूपांशी समान मानून, इतरांवरील अनुकंपेने संप्रदान अर्थात 'तुय्हं' व 'मय्हं' या शब्दांचा वापर करण्याचा नियम आणि स्वामी अर्थात 'तव' व 'मम' या शब्दांचा वापर करण्याचा नियम दाखवून दिला आहे. आणि हा नियम इतरांवरील अनुकंपेमुळे असल्यामुळे, हा केवळ करुणेचाच दोष आहे, अट्ठकथाचार्यांचा नाही. कारण त्यांनी याच करुणेपोटी असे स्पष्टीकरण केले आहे. ကေစိ ပနေတ္ထ ဧဝံ ဝဒေယျုံ – နနု စ ဘော အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ သဒ္ဒနယံ နိဿာယ တေ မေသဒ္ဒါနံ သာမိအတ္ထေ ဝတ္တမာနာနံ ‘‘တဝ မမာ’’တိ အတ္ထဝစနေန ‘‘တုယှံ မံသေန မေဒေန, န မယှံ ဘရိယာ ဧသာ’’တိအာဒီသု သာမိဝိသယေသု ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသနယော ဒဿိတောတိ သက္ကာ ဝတ္တုံ, တထာ သဒ္ဒနယညေဝ နိဿာယ တေ မေသဒ္ဒါနံ သမ္ပဒါနတ္ထေ ဝတ္တမာနာနံ [Pg.389] ‘‘တုယှံ မယှ’’န္တိ အတ္ထဝစနေန ‘‘ဘတ္တံ တဝ န ရုစ္စတိ. ပဗ္ဗဇ္ဇာ မမ ရုစ္စတီ’’တိအာဒီသုပိ သမ္ပဒါနဝိသယေသု ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသနယော ဒဿိတောတိ သက္ကာ ဝတ္တုန္တိ? န သက္ကာ, ဂါထာသု ဝိယ စုဏ္ဏိယပဒဋ္ဌာနေပိ တုယှံ မယှံ တဝ မမသဒ္ဒါနံ အနိယမေန ဒွီသု အတ္ထေသု ပဝတ္တနတော. န ဟိ ဤဒိသေ ဌာနေ ဂါထာယံ ဝါ စုဏ္ဏိယပဒဋ္ဌာနေ ဝါ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော ဣစ္ဆိတဗ္ဗော. ‘‘တဿ ရဇ္ဇဿဟံ ဘီတော. ကိံ နု ခေါ အဟံ တဿ သုခဿ ဘာယာမီ’’တိအာဒီသုယေဝ ပန ဌာနေသု ဣစ္ဆိတဗ္ဗော. यावर काही लोक असे म्हणू शकतात – 'अहो, अट्ठकथाचार्यांनी व्याकरण नियमाचा आश्रय घेऊन, स्वामी अर्थात वापरल्या जाणाऱ्या 'ते' आणि 'मे' या शब्दांचा अर्थ 'तव' आणि 'मम' असा करून, 'तुय्हं मंसेन मेदेन', 'न मय्हं भरिया एसा' इत्यादी स्वामी विषयांमध्ये विभक्ती-विपर्यास दाखवला आहे, असे म्हणता येईल का? तसेच, व्याकरण नियमाचाच आश्रय घेऊन, संप्रदान अर्थात वापरल्या जाणाऱ्या 'ते' आणि 'मे' या शब्दांचा अर्थ 'तुय्हं' आणि 'मय्हं' असा करून, 'भत्तं तव न रुच्चति', 'पब्बज्जा मम रुच्चति' इत्यादी संप्रदान विषयांमध्येही विभक्ती-विपर्यास दाखवला आहे, असे म्हणता येईल का?' असे म्हणता येणार नाही. कारण गाथांप्रमाणेच गद्य पदांमध्येही 'तुय्हं', 'मय्हं', 'तव' आणि 'मम' हे शब्द कोणत्याही नियमाशिवाय दोन्ही अर्थांमध्ये वापरले जातात. कारण अशा ठिकाणी गाथेत किंवा गद्यात विभक्ती-विपर्यास मानण्याची गरज नाही. परंतु 'तस्स रज्जस्सहाम भीतो', 'किं नु खो अहं तस्स सुखस्स भायामि' इत्यादी ठिकाणीच विभक्ती-विपर्यास मानणे योग्य आहे. ယဒိ သဒ္ဒနယံ နိဿာယ ‘‘တုယှံ မံသေန မေဒေနာ’’တိအာဒီသု ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော ဣစ္ဆိတဗ္ဗော သိယာ, ‘‘ဗြာဟ္မဏဿ ပိယပုတ္တဒါနံ အဒါသိ. ဗြာဟ္မဏဿ ပိတာ အဒါသီ’’တိအာဒီသုပိ သဒ္ဒနယံ နိဿာယ ‘‘ဗြာဟ္မဏာယာ’’တိအာဒိနာ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသတ္ထော ဝစနီယော သိယာ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီရူပါနံ သတ္ထေ ဝိသုံ ဝစနတော. ဧဝဉ္စ သတိ ကော ဒေါသောတိ စေ? အတ္ထေဝ ဒေါသော, ယသ္မာ ဒါနယောဂေ ဝါ နမောယောဂေ ဝါ အာယာဒေသသဟိတာနိ စတုတ္ထီဆဋ္ဌီရူပါနိ သာဋ္ဌကထေ တေပိဋကေ ဗုဒ္ဓဝစနေ နုပလဗ္ဘန္တိ, တသ္မာ ‘‘ဗြာဟ္မဏာယာ’’တိအာဒိနာ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသတ္ထဝစနေ အယံ ဒေါသော ယဒိဒံ အဝိဇ္ဇမာနဂ္ဂဟဏံ. ယသ္မာ ပန ဤဒိသေသု ဌာနေသု ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသကရဏံ သာဝဇ္ဇံ, တသ္မာ ‘‘တုယှံ မံသေန မေဒေနာ’’တိအာဒီသုပိ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော န ဣစ္ဆိတဗ္ဗော. जर व्याकरण नियमाचा आश्रय घेऊन 'तुय्हं मंसेन मेदेन' इत्यादींमध्ये विभक्ती-विपर्यास मानायचा असेल, तर 'ब्राह्मणस्स पियपुत्तदानं अदासि', 'ब्राह्मणस्स पिता अदासि' इत्यादींमध्येही व्याकरण नियमाचा आश्रय घेऊन 'ब्राह्मणाय' इत्यादी रूपांद्वारे विभक्ती-विपर्यास सांगावा लागेल, कारण व्याकरणशास्त्रात चतुर्थी आणि षष्ठीची रूपे स्वतंत्रपणे सांगितली आहेत. आणि जर असे झाले तर काय दोष आहे? दोष नक्कीच आहे. कारण दान किंवा नमस्कार यांच्या योगात 'आय' आदेशासह असणारी चतुर्थी-षष्ठीची रूपे अट्ठकथांसह असणाऱ्या तिपिटक बुद्धवचनात आढळत नाहीत. म्हणून, 'ब्राह्मणाय' इत्यादी रूपांद्वारे विभक्ती-विपर्यास सांगण्यात हा दोष आहे की, जे अस्तित्वात नाही त्याचे ग्रहण केले जाईल. आणि ज्या अर्थी अशा ठिकाणी विभक्ती-विपर्यास करणे दोषयुक्त आहे, त्या अर्थी 'तुय्हं मंसेन मेदेन' इत्यादींमध्येही विभक्ती-विपर्यास मानू नये. စတုတ္ထီဆဋ္ဌီရူပါနိ ဟိ အနညာနိ ဒိဿန္တိ ‘‘ပုရိသဿ အဒါသိ, ပုရိသဿ ဓနံ ဗြာဟ္မဏာနံ အဒါသိ, ဗြာဟ္မဏာနံ သန္တက’’န္တိ. တထာ ဟိ ပါဝစနေ သ နံသဒ္ဒါ သမ္ပဒါနသာမိအတ္ထေသု သာမညေန [Pg.390] ပဝတ္တန္တိ, တပ္ပဝတ္တိ ‘‘အဂ္ဂဿ ဒါတာ မေဓာဝီ’’တိအာဒီဟိ ပယောဂေဟိ ဒီပေတဗ္ဗာ. ‘‘အဂ္ဂဿ ဒါတာ မေဓာဝီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ‘‘အဂ္ဂဿာ’’တိ အယံ သဒ္ဒေါ ယဒါ ကြိယာပဋိဂ္ဂဟဏံ ပဋိစ္စ သမ္ပဒါနတ္ထေ ပဝတ္တတိ, တဒါ ‘‘အဂ္ဂဿ ရတနတ္တယဿ ဒါတာ’’တိ အတ္ထဝသေန ပဝတ္တတိ. ယဒါ ပန ကြိယံ ပဋိစ္စ ကမ္မဘူတေ သာမိအတ္ထေ ပဝတ္တတိ, တဒါ ‘‘အဂ္ဂဿ ဒေယျဓမ္မဿ ဒါတာ’’တိ အတ္ထဝသေန ပဝတ္တတိ. ဧဝံ သဗ္ဗထာပိ ဝိပလ္လာသော တုမှာကံ သရဏံ န ဟောတီတိ. တထာ သဒ္ဒနယံ နိဿာယ ‘‘သမ္ပဒါနဝစန’’န္တိ တုမှေဟိ ဒဠှံ ဂဟိတဿ မယှံသဒ္ဒဿ သာမိအတ္ထဝသေန ပဏ္ဏတ္တိယံ ဒဿနတော ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော တုမှာကံ သရဏံ န ဟောတေဝ. တထာ ဟိ – कारण चतुर्थी आणि षष्ठीची रूपे अभिन्न दिसतात, जसे की: 'पुरिसस्स अदासि', 'पुरिसस्स धनं', 'ब्राह्मणानं अदासि', 'ब्राह्मणानं संतकं'. तसेच बुद्धवचनात 'स' आणि 'नं' प्रत्यय असलेले शब्द संप्रदान आणि स्वामी या दोन्ही अर्थांमध्ये सामान्यपणे वापरले जातात. त्यांचा हा वापर 'अग्गस्स दाता मेधावी' इत्यादी प्रयोगांवरून स्पष्ट होतो. येथे 'अग्गस्स दाता मेधावी' यामध्ये 'अग्गस्स' हा शब्द जेव्हा क्रिया स्वीकारण्याच्या अपेक्षेने संप्रदान अर्थात वापरला जातो, तेव्हा त्याचा अर्थ 'अग्र अशा रत्नत्रयाला देणारा' असा होतो. परंतु जेव्हा तो क्रियेच्या अपेक्षेने कर्मभूत अशा स्वामी अर्थात वापरला जातो, तेव्हा त्याचा अर्थ 'अग्र अशा देय वस्तूचे दान देणारा' असा होतो. अशा प्रकारे, कोणत्याही परिस्थितीत विभक्ती-विपर्यास हा तुमचा आधार होऊ शकत नाही. तसेच, व्याकरण नियमाचा आश्रय घेऊन 'संप्रदान वाचक' म्हणून तुम्ही ठामपणे स्वीकारलेल्या 'मय्हं' या शब्दाचा स्वामी अर्थात प्रज्ञप्तीमध्ये वापर झाल्याचे दिसत असल्यामुळे, विभक्ती-विपर्यास हा तुमचा आधार मुळीच होऊ शकत नाही. कारण की – ‘‘သကုဏော မယှကော နာမ, ဂိရိသာနုဒရီစရော; ပက္ကံ ပိပ္ဖလိမာရုယှ, ‘မယှံ မယှ’န္တိ ကန္ဒတီ’’တိ 'डोंगराच्या कड्या-कपारीत फिरणारा 'मय्हक' नावाचा एक पक्षी आहे; तो पिकलेल्या पिंपळाच्या झाडावर चढून 'माझे, माझे' (मय्हं, मय्हं) ओरडत असतो.' ဧတ္ထ မယှကောတိ ဧကာယ သကုဏဇာတိယာ နာမံ. သော ဟိ လောလုပ္ပစာရိတာယ ‘‘ဣဒမ္ပိ မယှံ, ဣဒမ္ပိ မယှ’’န္တိ ကာယတိ ရဝတီတိ မယှကောတိ ဝုစ္စတိ မယှသဒ္ဒူပပဒဿ ကေ ရေ ဂေ သဒ္ဒေတိ ဓာတုဿ ဝသေန. येथे 'मय्हक' हे एका पक्षीजातीचे नाव आहे. तो आपल्या अतिलोभी स्वभावामुळे 'हे देखील माझे, हे देखील माझे' असे ओरडतो, म्हणून त्याला 'मय्हक' असे म्हटले जाते. हे 'मय्ह' शब्दाच्या उपपदासह 'के रे गे सद्दे' या धातूच्या नियमानुसार होते. အတြာယံ ပဒသောဓနာ – ယဒိ တုယှံ မယှံသဒ္ဒါ ဓုဝံ သမ္ပဒါနတ္ထေ, တဝ မမသဒ္ဒါ စ သာမိအတ္ထေ ဘဝေယျုံ, ဧဝံ သန္တေ လောကဝေါဟာရကုသလေန သဗ္ဗညုနာ တဿ သကုဏဿ ‘‘မယှကော’’တိ ပဏ္ဏတ္တိ န ဝတ္တဗ္ဗာ သိယာ အနန္တောဂဓသမ္ပဒါနတ္ထတ္တာ, အန္တောဂဓသာမျတ္ထတ္တာ ပန ‘‘မမကော’’ ဣစ္စေဝ ပညတ္တိ ဝတ္တဗ္ဗာ သိယာ. ဧတ္ထပိ ‘‘မယှကော’’တိ ဣဒံ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသဝသေန ဝုတ္တန္တိ စေ? န, ပဏ္ဏတ္တိဝိသယေ ဝိဘတ္တိဝိပရိဏာမဿ အဋ္ဌာနတ္တာ အနဝကာသတ္တာ. येथे ही पद-मीमांसा आहे – जर 'तुय्हं' आणि 'मय्हं' हे शब्द निश्चितपणे संप्रदान अर्थातच असते, आणि 'तव' व 'मम' हे शब्द स्वामी अर्थातच असते, तर लोकव्यवहारात कुशल असणाऱ्या सर्वज्ञांनी त्या पक्षाला 'मय्हक' अशी संज्ञा दिली नसती; कारण त्यात संप्रदान अर्थ समाविष्ट नसून स्वामी अर्थ समाविष्ट आहे, त्यामुळे 'ममक' अशीच संज्ञा द्यायला हवी होती. जर येथेही 'मय्हक' हा शब्द विभक्ती-विपर्यासाने वापरला आहे असे म्हटले, तर? नाही, कारण प्रज्ञप्तीच्या विषयात विभक्ती-बदलाला कोणतेही स्थान किंवा वाव नसतो. အပိစေတ္ထ မယှံသဒ္ဒေါ သရူပတော ဝိဘတျန္တဘာဝေန တိဋ္ဌတိ ကသဒ္ဒေန ဧကပဒတ္တူပဂမနတော, ဧဝံ သန္တေပိ ‘‘မယှကော’’တိ [Pg.391] အယံ သကုဏဝိသေသဝါစကော သဒ္ဒေါ ပစ္စတ္တဝစနဘာဝေ ဌိတောယေဝ ဤသကံ သာမိအတ္ထမ္ပိ ဇောတယတိ သုဇမ္ပတိ ရာဇပုရိသသဒ္ဒါ ဝိယ. ဣမိနာပိ ကာရဏေန ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော တုမှာကံ သရဏံ န ဟောတိ. ဣတိ ‘‘မယှကော’’တိ ပဏ္ဏတ္တိယံ ဝတ္တမာနဿ ပဒါဝယဝဘူတဿ မယှသဒ္ဒဿ အဝိပလ္လာသဝစနလေသေန တုယှံ တဝ မမသဒ္ဒေသုပိ ဝိဘတ္တိဝိပလ္လာသော န ဣစ္ဆိတဗ္ဗောတိ သိဒ္ဓံ. တသ္မာ အဋ္ဌကထာစရိယေဟိ သမ္ပဒါနသာမိအတ္ထေသု သာမညေန ပဝတ္တာနမ္ပိ သမာနာနံ တုယှံ မယှံ တဝ မမသဒ္ဒါနံ သဒ္ဒနယညေဝ နိဿာယ ပရေသမနုကမ္ပာယ ဝုတ္တပ္ပကာရော နိယမော ဒဿိတောတိ အဝဂန္တဗ္ဗံ. ဣစ္စေဝံ – शिवाय येथे 'मय्हं' हा शब्द स्वतः विभक्तीच्या अंताने युक्त असलेला शब्द म्हणून राहतो, कारण 'क' शब्दाशी त्याचा एकाच पदात समावेश होतो. असे असले तरी, 'मय्हको' हा एका विशिष्ट पक्ष्याचा वाचक असलेला शब्द प्रथमा विभक्तीत (पच्चत्तवचन) राहूनच 'सुजम्पति' (सुजापती) आणि 'राजपुरिस' (राजपुरुष) या शब्दांप्रमाणे थोडा मालकीचा (स्वामी) अर्थही प्रकट करतो. या कारणाने देखील विभक्तीचा विपर्यास (बदल) तुमच्यासाठी आधार ठरू शकत नाही. अशा प्रकारे, 'मय्हको' या संज्ञेमध्ये वर्तमान असलेल्या आणि पदाचा अवयव बनलेल्या 'मय्ह' शब्दाच्या अव्यत्यस्त (न बदललेल्या) वचनाच्या निमित्ताने 'तुय्हं', 'तव', 'मम' या शब्दांमध्येही विभक्तीचा विपर्यास इच्छित नाही, हे सिद्ध होते. म्हणूनच, अट्ठकथाचार्यांनी संप्रदान आणि स्वामी (षष्ठी) अर्थांमध्ये सामान्यपणे वापरल्या जाणाऱ्या समान अशा 'तुय्हं', 'मय्हं', 'तव', 'मम' या शब्दांचा व्याकरण नियमाचाच आश्रय घेऊन, इतरांवरील अनुकंपेने (दयेने) वरील प्रकारचा नियम दर्शविला आहे, असे समजले पाहिजे. अशा प्रकारे - ‘‘တုယှံ မယှ’’န္တိမေ သဒ္ဒေ, သမ္ပဒါနေ ဂရူ ဝဒုံ; ‘‘တဝ မမာ’’တိ သာမိမှိ, နယမာဒါယ သတ္ထတော. शिक्षकांनी (गुरू) शास्त्रातील नियमाचा आधार घेऊन 'तुय्हं' आणि 'मय्हं' हे शब्द संप्रदान अर्थात आणि 'तव' व 'मम' हे शब्द स्वामी (षष्ठी) अर्थात सांगितले आहेत. ဧဝံ သန္တေပိ ဧတေသံ, နိယမော နတ္ထိ ပါဠိယံ; ကောစိ တေသံ ဝိသေသော စ, ဒိဋ္ဌော အမှေဟိ တံ သုဏ. असे असले तरी, पाळीमध्ये (पाळि भाषेत) यांचा असा कोणताही (कठोर) नियम नाही; आणि आमच्याद्वारे त्यांच्यात जो काही विशेष (भेद) पाहिला गेला आहे, तो ऐका. သာမျတ္ထသမ္ပဒါနတ္ထာ, သမ္ဘဝန္တိ ယဟိံ ဒုဝေ; ‘‘တုယှံ မယှ’’န္တိမေ သဒ္ဒါ, တေ ပယောဂါ န ဒုလ္လဘာ. जिथे स्वामी अर्थ आणि संप्रदान अर्थ हे दोन्ही संभवतात, तिथे 'तुय्हं' आणि 'मय्हं' या शब्दांचे प्रयोग दुर्मिळ नाहीत. ‘‘တဝ မမာ’’တိမေ သဒ္ဒါ, ပါယာ သာမိမှိ ဝတ္တရေ; သမ္ပဒါနေ ယဟိံ ဟောန္တိ, တေ ပယောဂါ ပနပ္ပကာ. 'तव' आणि 'मम' हे शब्द बहुधा स्वामी (षष्ठी) अर्थात वापरले जातात; परंतु जिथे ते संप्रदान अर्थात वापरले जातात, ते प्रयोग मात्र अल्प (कमी) आहेत. တဝတော မမတော တုယှံ-မယှံသဒ္ဒါဝ သာသနေ; ပါဌေ နေကသဟဿမှိ, သာမိအတ္ထေ ပဝတ္တရေတိ. शासनात (बुद्धवचनात) हजारो पाठांमध्ये 'तव' आणि 'मम' पेक्षा 'तुय्हं' आणि 'मय्हं' हे शब्दच स्वामी (षष्ठी) अर्थात वापरले जातात. သဗ္ဗာပိ ဣမာ နီတိယော ပရမသုခုမာ သုဒုဒ္ဒသာ ဝီရဇာတိနာ သာဓုကံ မနသိ ကာတဗ္ဗာ. या सर्व अत्यंत सूक्ष्म आणि समजण्यास कठीण असलेल्या व्याकरण पद्धती (नीती) प्रज्ञावंतांनी चांगल्या प्रकारे मनात धारण केल्या पाहिजेत. ဝေါ နောသဒ္ဒေသု ပန ဝေါသဒ္ဒေါ ပစ္စတ္တဥပယောဂကရဏသမ္ပဒါနသာမိဝစနပဒပူရဏေသု ဒိဿတိ. ‘‘ကစ္စိ ဝေါ [Pg.392] အနုရုဒ္ဓါ သမဂ္ဂါ သမ္မောဒမာနာ’’တိအာဒီသု ဟိ ပစ္စတ္တေ ဒိဿတိ. ‘‘ဂစ္ဆထ ဘိက္ခဝေ ပဏာမေမိ ဝေါ’’တိအာဒီသု ဥပယောဂေ. ‘‘န ဝေါ မမ သန္တိကေ ဝတ္ထဗ္ဗ’’န္တိအာဒီသု ကရဏေ. ‘‘ဝနပတ္ထပရိယာယံ ဝေါ ဘိက္ခဝေ ဒေသေဿာမီ’’တိအာဒီသု သမ္ပဒါနေ. ‘‘သဗ္ဗေသံ ဝေါ သာရိပုတ္တာ သုဘာသိတ’’န္တိအာဒီသု သာမိဝစနေ. ‘‘ယေ ဟိ ဝေါအရိယာ ပရိသုဒ္ဓါ ကာယကမ္မန္တာ’’တိအာဒီသု ပဒပူရဏမတ္တေ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – आता 'वो' आणि 'नो' या शब्दांमध्ये, 'वो' हा शब्द प्रथमा (पच्चत्त), द्वितीया (उपयोग), तृतीया (करण), संप्रदान, षष्ठी (सामिवचन) आणि पादपूरण (पद पूर्ण करण्यासाठी) या अर्थांमध्ये दिसून येतो. 'कच्चि वो अनुरुद्धा समग्गा सम्मोदमाना' (हे अनुरुद्धहो, तुम्ही सर्व एकोप्याने आणि आनंदाने राहत आहात ना?) इत्यादींमध्ये तो प्रथमा विभक्तीत दिसतो. 'गच्छथ भिक्खवे पणामेमि वो' (जा भिक्खूंनो, मी तुम्हाला घालवून देतो) इत्यादींमध्ये द्वितीया विभक्तीत. 'न वो मम सन्तिके वत्थब्बं' (तुम्ही माझ्या जवळ राहू नये) इत्यादींमध्ये तृतीया विभक्तीत. 'वनपत्थपरियायं वो भिक्खवे देसेस्सामि' (भिक्खूंनो, मी तुम्हाला वनप्रस्थ पर्याय उपदेशीन) इत्यादींमध्ये संप्रदान अर्थात. 'सब्बेसं वो सारिपुत्ता सुभासितं' (हे सारिपुत्त, तुम्हा सर्वांचे भाषण सुभाषित आहे) इत्यादींमध्ये षष्ठी विभक्तीत. 'ये हि वो अरिया परिसुद्धा कायकम्मन्ता' इत्यादींमध्ये केवळ पादपूरण अर्थात दिसतो. याविषयी असे म्हटले आहे - ‘‘ပစ္စတ္တေ ဥပယောဂေ စ, ကရဏေ သမ္ပဒါနိယေ; သာမိဿ ဝစနေ စေဝ, တထေဝ ပဒပူရဏေ; ဣမေသု ဆသု ဌာနေသု, ဝေါသဒ္ဒေါ သမ္ပဝတ္တတိ’’. प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, संप्रदान, षष्ठी आणि तसेच पादपूरण; या सहा स्थानांमध्ये 'वो' हा शब्द चांगल्या प्रकारे वापरला जातो. နောသဒ္ဒေါ ပစ္စတ္တောပယောဂကရဏသမ္ပဒါနသာမိဝစနာဝဓာရဏနုသဒ္ဒတ္ထေသု ပဋိသေဓေ နိပါတမတ္တေ စ ဝတ္တတိ. အယဉှိ ‘‘ဂါမံ နော ဂစ္ဆေယျာမာ’’တိ ဧတ္ထ ပစ္စတ္တေ ဒိဿတိ. ‘‘မာ နော အဇ္ဇ ဝိကန္တိံသု, ရညော သူဒါ မဟာနသေ’’တိအာဒီသု ဥပယောဂေ. ‘‘န နော ဝိဝါဟော နာဂေဟိ, ကတပုဗ္ဗော ကုဒါစန’’န္တိအာဒီသု ကရဏေ. ‘‘သံဝိဘဇေထ နော ရဇ္ဇေနာ’’တိအာဒီသု သမ္ပဒါနေ. ‘‘သတ္ထာ နော ဘဂဝါ အနုပ္ပတ္တော’’တိအာဒီသု သာမိဝစနေ. ‘‘န နော သမံ အတ္ထိ တထာဂတေနာ’’တိ ဧတ္ထ အဝဓာရဏေ. ‘‘အဘိဇာနာသိ နော တွံ မဟာရာဇာ’’တိအာဒီသု နုသဒ္ဒတ္ထေ, ပုစ္ဆာယန္တိပိ ဝတ္တုံ ဝဋ္ဋတိ. ‘‘သုဘာသိတညေဝ ဘာသေယျ, နော စ ဒုဗ္ဘာသိတံ ဘဏေ’’တိအာဒီသု ပဋိသေဓေ. ‘‘န နော သဘာယံ န ကရောန္တိ ကိဉ္စီ’’တိအာဒီသု နိပါတမတ္တေ. ဧတ္ထေတံ ဝုစ္စတိ – 'नो' हा शब्द प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, संप्रदान, षष्ठी, अवधारण (निश्चय), 'नु' शब्दाच्या अर्थात (प्रश्नार्थक), निषेध आणि केवळ निपात अर्थात वापरला जातो. जसे की, 'गामं नो गच्छेय्याम' (आम्ही गावात जावे) येथे तो प्रथमा विभक्तीत दिसतो. 'मा नो अज्ज विकन्तिंसु, रञ्ञो सूदा महानसे' (राजाच्या आचाऱ्यांनी आज स्वयंपाकघरात आमचे तुकडे करू नयेत) इत्यादींमध्ये द्वितीया विभक्तीत. 'न नो विवाहों नागेहि, कतपुब्बो कुदाचनं' (आमचा नागांशी कधीही विवाह झालेला नाही) इत्यादींमध्ये तृतीया विभक्तीत. 'संविभजेथ नो रज्जेन' (आम्हाला राज्याचा वाटा द्यावा) इत्यादींमध्ये संप्रदान अर्थात. 'सत्था नो भगवा अनुप्पत्तो' (आमचे शास्ता भगवान आले आहेत) इत्यादींमध्ये षष्ठी विभक्तीत. 'न नो समं अत्थि तथागतेन' (तथागतांसारखा दुसरा कोणीही नाहीच) येथे अवधारण (निश्चय) अर्थात. 'अभिजानासि नो त्वं महाराज' (हे महाराज, तुम्हाला आठवते का?) इत्यादींमध्ये 'नु' शब्दाच्या अर्थात, जो प्रश्न विचारण्यासाठी देखील वापरणे योग्य आहे. 'सुभासितञ्ञेव भासेय्य, नो च दुब्भासितं भणे' (सुभाषितच बोलावे, दुर्भाषित बोलू नये) इत्यादींमध्ये निषेध अर्थात. 'न नो सभायं न करोन्ति kiñcī' इत्यादींमध्ये केवळ निपात अर्थात. याविषयी असे म्हटले आहे - ပစ္စတ္တေ [Pg.393] စုပယောဂေ စ, ကရဏေ သမ္ပဒါနိယေ; သာမျာဝဓာရဏေ စေဝ, နုသဒ္ဒတ္ထေ နိဝါရဏေ; တထာ နိပါတမတ္တမှိ, နောသဒ္ဒေါ သမ္ပဝတ္တတိ. प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, संप्रदान, षष्ठी, अवधारण, 'नु' शब्दाचा अर्थ, निषेध आणि तसेच केवळ निपात अर्थात 'नो' हा शब्द चांगल्या प्रकारे वापरला जातो. ဣဒါနိ သဗ္ဗနာမာနံ ယထာရဟံ သံခိတ္တေန မိဿကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता सर्वनामांची योग्यतेनुसार संक्षेपाने मिश्र पदमाला (रूपे) सांगितली जात आहे - ယော သော, ယေ တေ. ယံ တံ, ယေ တေ. ယေန တေန. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ယာ သာ, ယာ တာ. ယံ တံ, ယာ တာ. ယာယ တာယ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ယံ တံ, ယာနိ တာနိ. သေသံ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗံ. ဣမိနာ နယေန လိင်္ဂတ္တယယောဇနာ ကာတဗ္ဗာ. यो सो (जो तो), ye te (जे ते). यं तं (ज्याला त्याला), ये ते. येन तेन (ज्याद्वारे त्याद्वारे). उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. या सा (जी ती), या ता. यं तं, या ता. याय ताय. उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. यं तं, यानि तानि. उर्वरित रूपे सविस्तर जाणावीत. या पद्धतीने तिन्ही लिंगांची योजना करावी. ‘‘ဧသော သော, ဧတေ တေ. အယံ သော, ဣမေ တေ. သော အယံ တေ ဣမေ’’တိအာဒိနာ ယထာပယောဂံ ပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. တထာ ဟိ ‘‘ယော သော ဘဂဝါ သယမ္ဘူ အနာစရိယကော. ဧတေ တေ ဘိက္ခဝေ ဥဘော အန္တေ အနုပဂမ္မ မဇ္ဈိမာ ပဋိပဒါ တထာဂတေန အဘိသမ္ဗုဒ္ဓါ. အယံ သော သာရထိ ဧတီ’’တိ ဧဝမာဒယော ဝိစိတ္တပ္ပယောဂါ ဒိဿန္တိ. ဣတိ သဗ္ဗနာမိကပဒါနံ မိဿကပဒမာလာ ယောဇေတဗ္ဗာ. 'एसो सो' (हा तो), 'एते ते' (हे ते). 'अयं सो' (हा तो), 'इमे ते' (हे ते). 'सो अयं' (तो हा), 'ते इमे' (ते हे) इत्यादी प्रकारे प्रयोगाच्या गरजेनुसार पदमाला योजावी. कारण, 'यो सो भगवा सयम्भू अनाचरियको' (जे ते भगवान स्वयंभू आणि गुरुविना ज्ञान प्राप्त केलेले आहेत), 'एते ते भिक्खवे उभो अन्ते अनुपगम्म मज्झिमा पटिपदा तथागतेन अभिसम्बुद्धा' (भिक्खूंनो, या त्या दोन्ही टोकांना न जाता तथागतांनी शोधून काढलेली मध्यम प्रतिपदा आहे), 'अयं सो सारथि एति' (हा तो सारथी येत आहे) इत्यादी विविध प्रयोग दिसून येतात. अशा प्रकारे सर्वनाम पदांची मिश्र पदमाला योजावी. မယာ သဗ္ဗတ္ထသိဒ္ဓဿ, သာသနေ သဗ္ဗဒဿိနော; သဗ္ဗတ္ထ သာသနေ သုဋ္ဌု, ကောသလ္လတ္ထာယ သောတုနံ. सर्वज्ञ (सब्बदस्सी) आणि सर्वार्थसिद्ध अशा बुद्धांच्या शासनात, श्रोत्यांच्या सर्व प्रकारे शासनातील चांगल्या कौशल्यासाठी माझ्याद्वारे - အသဗ္ဗနာမနာမေဟိ, သဗ္ဗနာမပဒေဟိ ဝေ; သဟ သဗ္ဗာနိ ဝုတ္တာနိ, သဗ္ဗနာမာနိ ပန္တိတော. अ-सर्वनाम नामांसह आणि सर्वनाम पदांसह खरोखर सर्व सर्वनामे क्रमाने सांगितली गेली आहेत. ဧတေသု ကတယောဂါနံ, သုခုမတ္ထဝိဇာနနံ; အကိစ္ဆပဋိဝေဓေန, ဘဝိဿတိ န သံသယော. यांमध्ये ज्यांनी अभ्यास (योग) केला आहे, त्यांना सूक्ष्म अर्थाचे आकलन कोणत्याही त्रासाशिवाय (सहजपणे) होईल, यात शंका नाही. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त असलेल्या त्रिपिटकाच्या वचनपद्धतींमध्ये विद्वानांच्या ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ कौशल्यासाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' ग्रंथातील သဗ္ဗနာမတံသဒိသနာမာနံ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ နာမ 'सर्वनाम आणि तत्सम नामांची नामिक पदमाला विभाग' नावाचा ဒွါဒသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. बारावा परिच्छेद समाप्त. ၁၃. သဝိနိစ္ဆယသင်္ချာနာမနာမိကပဒမာလာ १३. निर्णयांसह संख्यावाचक नामांची नामिक पदमाला ဣတော [Pg.394] ပရံ ပဝက္ခာမိ, သင်္ချာနာမိကပန္တိယော; ဘူဓာတုဇေဟိ ရူပေဟိ, အညေဟိ စုပယောဇိတုံ. यानंतर मी संख्यावाचक नामांच्या मालिका सांगेन, ज्यांचा 'भू' धातूपासून बनलेल्या रूपांशी आणि इतर रूपांशी प्रयोग केला जाऊ शकतो. ယာ ဟိ သာ ဟေဋ္ဌာ အမှေဟိ ဧက ဒွိတိ စတုဣစ္စေတေသံ သင်္ချာသဗ္ဗနာမာနံ နာမိကပဒမာလာ ကထိတာ, တံ ဌပေတွာ ဣဓ အသဗ္ဗနာမာနံ ပဉ္စ ဆ သတ္တာဒီနံ သင်္ချာနာမာနံ နာမိကပဒမာလာ ဘူဓာတုမယေဟိ အညေဟိ စ ရူပေဟိ ယောဇနတ္ထံ ဝုစ္စတေ – कारण, जी मागे आमच्याद्वारे 'एक', 'द्वि', 'ति', 'चतु' या संख्यावाचक सर्वनामांची नामिक पदमाला सांगितली गेली आहे, ती सोडून येथे अ-सर्वनाम असलेल्या 'पञ्च' (पाच), 'छ' (सहा), 'सत्त' (सात) इत्यादी संख्यावाचक नामांची नामिक पदमाला 'भू' धातूपासून बनलेल्या आणि इतर रूपांशी जोडण्यासाठी सांगितली जात आहे - ပဉ္စ, ပဉ္စဟိ, ပဉ္စဘိ, ပဉ္စန္နံ, ပဉ္စသု. သတ္တန္နံ ဝိဘတ္တီနံ ဝသေန ဉေယျံ. ‘‘ပဉ္စ ဘူတာ, ပဉ္စ အဘိဘဝိတာရော, ပဉ္စ ပုရိသာ, ပဉ္စ ဘူမိယော, ပဉ္စ ကညာယော, ပဉ္စ ဘူတာနိ, ပဉ္စ စိတ္တာနီ’’တိအာဒိနာ သဗ္ဗတ္ထ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဆ, ဆဟိ, ဆဘိ, ဆန္နံ, ဆသု, ဆဿု ဣတိပိ. ‘‘ဆဿု လောကော သမုပ္ပန္နော, ဆဿု ကြုဗ္ဗတိ သန္ထဝ’’န္တိ ဟိ ပါဠိ. သတ္တ, သတ္တဟိ, သတ္တဘိ, သတ္တန္နံ, သတ္တသု. အဋ္ဌ, အဋ္ဌဟိ, အဋ္ဌဘိ, အဋ္ဌန္နံ, အဋ္ဌသု. နဝ, နဝဟိ, နဝဘိ, နဝန္နံ, နဝသု. ဒသ, ဒသဟိ, ဒသဘိ, ဒသန္နံ, ဒသသု. ဧဝံ ဧကာဒသ. ဒွါဒသ, ဗာရသ. တေရသ, တေဒသ, တေဠသ. စတုဒ္ဒသ, စုဒ္ဒသ. ပဉ္စဒသ, ပန္နရသ. သောဠသ. သတ္တရသ. အဋ္ဌာရသ, အဋ္ဌာရသဟိ, အဋ္ဌာရသဘိ, အဋ္ဌာရသန္နံ, အဋ္ဌာရသသု. သဗ္ဗမေတံ ဗဟုဝစနဝသေန ဂဟေတဗ္ဗံ. पञ्च (पाच), पञ्चहि, पञ्चभि, पञ्चन्नं, पञ्चसु. हे सात विभक्तींच्या द्वारे जाणावे. "पञ्च भूता (पाच महाभूते), पञ्च अभिभवितारो (पाच अभिभवकर्ते), पञ्च पुरिसा (पाच पुरुष), पञ्च भूमियो (पाच भूमी), पञ्च कञ्ञायो (पाच कन्या), पञ्च भूतानि (पाच भूते), पञ्च चित्तानि (पाच चित्ते)" इत्यादी प्रकारे सर्वत्र योजना करावी. छ (सहा), छहि, छभि, छन्नं, छसु, छस्सु असेही होते. "छस्सु लोको समुप्पन्नो, छस्सु कृब्बति सन्थवं" (सहामध्ये लोक उत्पन्न होतो, सहामध्ये मैत्री करतो) ही पाळी (पाठांतर) आहे. सत्त (सात), सत्तहि, सत्तभि, सत्तन्नं, सत्तसु. अट्ठ (आठ), अट्ठहि, अट्ठभि, अट्ठन्नं, अट्ठसु. नव (नऊ), नवहि, नवभि, नवन्नं, नवसु. दस (दहा), दसहि, dasabhi, दसन्नं, दससु. याचप्रमाणे एकादस (अकरा). द्वादस, बारस (बारा). तेरस, तेदस, तेळस (तेरा). चतुद्दस, चुद्दस (चौदा). पञ्चदस, पन्नरस (पंधरा). सोळस (सोळा). सत्तरस (सतरा). अट्ठारस (अठरा), अट्ठारसहि, अट्ठारसभि, अट्ठारसन्नं, अट्ठारससु. हे सर्व बहुवचनाच्या अर्थाने ग्रहण करावे. ဧကူနဝီသတိ, ဧကူနဝီသံ ဣစ္စာဒိပိ. ဧကူနဝီသာယ, ဧကူနဝီသာယံ, ဧကူနဝီသ ဘိက္ခူ တိဋ္ဌန္တိ, ဧကူနဝီသံ ဘိက္ခူ ပဿတိ, ဧဝံ ‘‘ကညာယော စိတ္တာနီ’’တိ စ အာဒိနာ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဧကူနဝီသာယ ဘိက္ခူဟိ ဓမ္မော ဒေသိတော, ဧကူနဝီသာယ ကညာဟိ ကတံ, ဧကူနဝီသာယ စိတ္တေဟိ ကတံ, ဧကူနဝီသာယ ဘိက္ခူနံ စီဝရံ ဒေတိ, ဧကူနဝီသာယ ကညာနံ ဓနံ ဒေတိ, ဧကူနဝီသာယ စိတ္တာနံ ရုစ္စတိ, ဧကူနဝီသာယ ဘိက္ခူဟိ အပေတိ[Pg.395]. ဧဝံ ကညာဟိ စိတ္တေဟိ. ဧကူနဝီသာယ ဘိက္ခူနံ သန္တကံ, ဧဝံ ကညာနံ စိတ္တာနံ. ဧကူနဝီသာယံ ဘိက္ခူသု ပတိဋ္ဌိတံ. ဧဝံ ‘‘ကညာသု စိတ္တေသူ’’တိ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဧကူနဝီသတိ, ဧကူနဝီသတိံ, ဧကူနဝီသတိယာ, ဧကူနဝီသတိယံ. एकूनवीसति (एकोणीस), एकूनवीसं इत्यादी रूपेही होतात. एकूनवीसाय, एकूनवीसायं, "एकूनवीस भिक्खू तिट्ठन्ति" (एकोणीस भिक्खू उभे आहेत), "एकूनवीसं भिक्खू पस्सति" (एकोणीस भिक्खूंना पाहतो), याचप्रमाणे "कञ्ञायो चित्तानि" इत्यादींशी योजना करावी. "एकूनवीसाय भिक्खूहि धम्मो देसितो" (एकोणीस भिक्खूंद्वारे धम्म देशिला गेला), "एकूनवीसाय कञ्ञाहि कतं" (एकोणीस कन्यांद्वारे केले गेले), "एकूनवीसाय चित्तेहि कतं" (एकोणीस चित्तांद्वारे केले गेले), "एकूनवीसाय भिक्खूनं चीवरं देति" (एकोणीस भिक्खूंना चीवर देतो), "एकूनवीसाय कञ्ञानं धनं देति" (एकोणीस कन्यांना धन देतो), "एकूनवीसाय चित्तानं रुच्चति" (एकोणीस चित्तांना आवडते), "एकूनवीसाय भिक्खूहि अपेति" (एकोणीस भिक्खूंपासून दूर जातो). याचप्रमाणे कन्या आणि चित्तांच्या बाबतीत. "एकूनवीसाय भिक्खूनं सन्तंकं" (एकोणीस भिक्खूंच्या मालकीचे), याचप्रमाणे कन्या आणि चित्तांच्या बाबतीत. "एकूनवीसायं भिक्खूसु पतिट्ठितं" (एकोणीस भिक्खूंमध्ये प्रतिष्ठित). याचप्रमाणे "कञ्ञासु चित्तेसु" अशी योजना करावी. एकूनवीसति, एकूनवीसतिं, एकूनवीसतिया, एकूनवीसतियं. ဝီသတိ, ဝီသတိံ, ဝီသတိယာ, ဝီသတိယံ. ဝီသ, ဝီသံ, ဝီသာယ, ဝီသာယံ. တထာ ဧကဝီသ ဒွါဝီသ ဗာဝီသ တေဝီသ စတုဝီသ ဣစ္စာဒီသုပိ. တိံသ, တိံသံ, တိံသာယ, တိံသာယံ. စတ္တာလီသ, စတ္တာလီသံ, စတ္တာလီသာယ, စတ္တာလီသာယံ. စတ္တာရီသ ဣစ္စာဒိပိ. ပညာသ, ပညာသံ, ပညာသာယ, ပညာသာယံ. ပဏ္ဏာသ, ပဏ္ဏာသံ, ပဏ္ဏာသာယ, ပဏ္ဏာသာယံ. သဋ္ဌိ, သဋ္ဌိံ, သဋ္ဌိယာ, သဋ္ဌိယံ. သတ္တတိ, သတ္တတိံ, သတ္တတိယာ, သတ္တတိယံ. သတ္တရိ ဣစ္စာဒိပိ. အသီတိ, အသီတိံ, အသီတိယာ, အသီတိယံ. နဝုတိ. နဝုတိံ, နဝုတိယာ, နဝုတိယံ. वीसति (वीस), वीसतिं, वीसतिया, वीसतियं. वीस, वीसं, वीसाय, वीसायं. त्याचप्रमाणे एकवीस, द्वावीस, बावीस, तेवीस, चतुवीस इत्यादींमध्येही. तिंस (तीस), तिंसं, तिंसाय, तिंसायं. चत्तालीस (चाळीस), चत्तालीसं, चत्तालीसाय, चत्तालीसायं. चत्त्तारिस असेही होते. पञ्ञास (पन्नास), पञ्ञासं, पञ्ञासाय, पञ्ञासायं. पण्णास, पण्णासं, पण्णासाय, पण्णासायं. सट्ठि (साठ), सट्ठिं, सट्ठिया, सट्ठियं. सत्तति (सत्तर), सत्ततिं, सत्ततिया, सत्ततियं. सत्तरि असेही होते. असीति (ऐंशी), असीतिं, असीतिया, असीतियं. नवुति (नव्वद), नवुतिं, नवुतिया, नवुतियं. ဣတ္ထဉ္စ အညထာပိ သင်္ချာရူပါနိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ဧကူနဝီသေဟိ, ဧကူနဝီသာနံ, ဧကူနဝီသေသု. ‘‘ဆန္နဝုတီန’’န္တိ စ အာဒိနာပိ သင်္ချာရူပါနံ ကတ္ထစိ ဒဿနတော ကေစိ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူ ဦနဝီသတိသဒ္ဒံ သဗ္ဗဒါပိ ဧကဝစနန္တမိတ္ထိလိင်္ဂမေဝ ပယုဉ္ဇန္တိ. ကေစိ ‘‘ဝီသတိအာဒယော အာနဝုတိ ဧကဝစနန္တာ ဣတ္ထိလိင်္ဂါ’’တိ ဝဒန္တိ. ကေစိ ပနာဟု – अशा प्रकारे आणि इतर प्रकारेही संख्यारूपे ग्रहण करावीत. एकूनवीसेहि, एकूनवीसानं, एकूनवीसेसु. "छन्नवुतीनं" (शहाण्णवांचे) इत्यादी रूपांमध्ये संख्यारूपांचे काही ठिकाणी दर्शन होत असल्यामुळे, काही व्याकरणकार "ऊनवीसति" हा शब्द नेहमी एकवचनात आणि स्त्रीलिंगातच वापरतात. काही जण म्हणतात की, "वीसतिपासून नवुतिपर्यंतचे शब्द एकवचनात आणि स्त्रीलिंगात असतात." तर काही जण म्हणतात की – ‘‘သဒ္ဒါ သင်္ချေယျသင်္ခါသု, ဧကတ္တေ ဝီသတာဒယော; သင်္ခတ္ထေ ဒွိဗဟုတ္တမှိ, တာ တု စာနဝုတိတ္ထိယော’’တိ. "संख्या आणि संख्यय (मोजल्या जाणाऱ्या वस्तू) या अर्थांमध्ये 'वीसति' इत्यादी शब्द एकवचनात असतात; परंतु मोजल्या जाणाऱ्या वस्तूंच्या द्विवचन आणि बहुवचनाच्या अर्थात, नव्वदपर्यंतचे ते शब्द स्त्रीलिंगातच असतात." ဧတ္ထ ဒွိဝစနံ ဆဍ္ဍေတဗ္ဗံ ဗုဒ္ဓဝစနေ တဒဘာဝတော. သဗ္ဗေသမ္ပိ စ တေသံ ယထာဝုတ္တဝစနံ ကိဉ္စိ ပါဠိပ္ပဒေသံ ပတွာ ယုဇ္ဇတိ, ကိဉ္စိ ပန ပတွာ န ယုဇ္ဇတိ ဝီသတိဝီသံတိံသံဣစ္စာဒီနဉှိ သင်္ခတ္ထာနံ သဒ္ဒါနံ ဗဟုဝစနပ္ပယောဂဝသေနပိ ပါဠိယံ ဒဿနတော[Pg.396], ကစ္စာယနေ စ ယောဝစနသမ္ဘူတရူပဝန္တတာဒဿနတော. တသ္မာ ယထာသမ္ဘဝံ ယထာပါဝစနဉ္စ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေ တေသမေကဝစနန္တတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ အတ္ထိ နတ္ထိသဒ္ဒါနံ ဝိယ. येथे द्विवचनाचा त्याग केला पाहिजे, कारण बुद्धवचनात (पाळी भाषेत) त्याचा अभाव आहे. आणि त्या सर्वांचे वर सांगितलेले वचन काही पाळी प्रदेशांमध्ये (वाक्यांमध्ये) योग्य ठरते, तर काही ठिकाणी योग्य ठरत नाही; कारण "वीसति", "वीसं", "तिंसं" इत्यादी मोजल्या जाणाऱ्या अर्थाच्या शब्दांचा बहुवचनात प्रयोग देखील पाळीमध्ये दिसून येतो, आणि कच्चायन व्याकरणात "यो" विभक्ती प्रत्यय लागून बनलेली रूपे देखील आढळतात. म्हणून, "अत्थि" आणि "नत्थि" या शब्दांप्रमाणेच, संभवतेनुसार आणि बुद्धवचनानुसार (पाळी परंपरेनुसार) स्त्रीलिंगी भावामध्ये त्यांची एकवचनान्तता जाणावी. အတ္ထိနတ္ထိသဒ္ဒါ ဟိ နိပါတတ္တာ ဧကတ္တေပိ ဗဟုတ္တေပိ ပဝတ္တန္တိ ‘‘ပုတ္တာ မတ္ထိ ဓနမ္မတ္ထိ. နတ္ထိ အတ္တသမံ ပေမံ. နတ္ထိ သမဏဗြာဟ္မဏာ’’တိအာဒီသု. အလိင်္ဂတ္တေပိ ပနေတေသံ ကတ္ထစိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေါ ဒိဋ္ဌော. အဘိဓမ္မေ ဟိ ဓမ္မသေနာပတိနာ အနုဓမ္မစက္ကဝတ္တိနာ ဝေါဟာရကုသလေန ဝေါဟာရကုသလသာဓကေန ‘‘အတ္ထိယာ နဝ. နတ္ထိယာ နဝါ’’တိ ဧကဝစနန္တံ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပံ ဒဿိတံ, တသ္မာ ဝီသတိဝီသတိမိစ္စာဒီနမ္ပိ ယထာသမ္ဘဝံ ယထာပါဝစနဉ္စ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေ ဧကဝစနန္တတာ ဝေဒိတဗ္ဗာ. कारण "अत्थि" आणि "नत्थि" हे शब्द निपात असल्यामुळे एकवचनात आणि बहुवचनातही वापरले जातात; जसे की "पुत्ता मत्थि धनम्मत्थि" (मला पुत्र आहेत, धन आहे), "नत्थि अत्तसमं पेमं" (आत्म्यासारखे/स्वतःसारखे प्रेम नाही), "नत्थि समणब्राह्मणा" (श्रमण आणि ब्राह्मण नाहीत) इत्यादींमध्ये. लिंग नसतानाही (अलिङ्ग असूनही) काही ठिकाणी त्यांचा स्त्रीलिंगी भाव दिसून येतो. अभिधम्मामध्ये धम्मसेनापती, अनुधम्मचक्कवत्ती, व्यवहारकुशल आणि व्यवहारकुशलता साधणारे (सारिपुत्त थेर) यांच्याद्वारे "अत्थिया नव, नत्थिया नवा" (अस्तिभावात नऊ, नास्तिभावात नऊ) असे एकवचनान्त स्त्रीलिंगी रूप दाखवले गेले आहे. म्हणून, "वीसति", "वीसतिं" इत्यादी शब्दांची देखील संभवतेनुसार आणि बुद्धवचनानुसार स्त्रीलिंगी भावामध्ये एकवचनान्तता जाणावी. တတ္ထေကေ ‘‘ဟေတုယာ အဓိပတိယာ’’တိ စ ဣဒံ လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဂဟေတဗ္ဗံ မညန္တိ. တမ္မတိဝသေန ‘‘ဟေတုမှိ အဓိပတိမှီ’’တိ ပုလ္လိင်္ဂဘာဝေါ ပဋိပါဒေတဗ္ဗော, ‘‘ဟေတုပစ္စယေ အဓိပတိပစ္စယေ’’ ဣစ္စေဝတ္ထော. အထ ဝါ ‘‘ဟေတုယာ အဓိပတိယာ’’တိ ဒွယမိဒံ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပပဋိဘာဂံ ပုလ္လိင်္ဂရူပန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ ‘‘ဟေတုယော ဇန္တုယော’’တိအာဒီနံ ဣတ္ထိလိင်္ဂရူပပဋိဘာဂါနံ ပုလ္လိင်္ဂရူပါနမ္ပိ ဝိဇ္ဇမာနတ္တာ, ‘‘အတ္ထိယာ နတ္ထိယာ’’တိ ဣဒံ ပန လိင်္ဂဝိပလ္လာသဝသေန ဝုတ္တန္တိ န ဂဟေတဗ္ဗံ အတ္ထိ နတ္ထိသဒ္ဒါနံ အလိင်္ဂဘေဒတ္တာ. န ဟိ အတ္ထိ နတ္ထိသဒ္ဒါ တီသု လိင်္ဂေသု ဧကသ္မိမ္ပိ အန္တောဂဓာ. ဧတေသု ဟိ အတ္ထိသဒ္ဒေါ အာချာတနိပါတဝသေန ဘိဇ္ဇတိ ‘‘အတ္ထိ သန္တိ သံဝိဇ္ဇတိ. အတ္ထိခီရာ ဗြာဟ္မဏီ’’တိအာဒီသု[Pg.397], နတ္ထိသဒ္ဒေါ ပန နိပါတောယေဝ. ဣစ္စေဝံ အတ္ထိ နတ္ထိသဒ္ဒါနံ နိပါတာနဉ္စ လိင်္ဂဝစနဝသေန ကထနံ ယုဇ္ဇတိ ဣတ္ထိလိင်္ဂါဒိဝသေန ဧကတ္တာဒိဝသေန စ အပ္ပဝတ္တနတော. ဝုတ္တဉ္စ – त्यामध्ये काही जण असे मानतात की, "हेतुया अधिपतिया" हे लिंगविपर्यासाच्या (लिंग बदलण्याच्या) नियमामुळे ग्रहण केले पाहिजे. त्यांच्या मते "हेतुम्हि अधिपतिम्हि" असा पुल्लिंगी भाव प्रतिपादित केला पाहिजे, ज्याचा अर्थ "हेतुप्रत्ययात, अधिपतीप्रत्ययात" असाच आहे. किंवा "हेतुया अधिपतिया" हे दोन्ही स्त्रीलिंगी रूपासारखे दिसणारे पुल्लिंगी रूप आहे असे मानावे, कारण "हेतुयो जन्तुयो" इत्यादी स्त्रीलिंगी रूपांसारखी पुल्लिंगी रूपे देखील अस्तित्वात आहेत. परंतु "अत्थिया नत्थिया" हे लिंगविपर्यासाने म्हटले गेले आहे असे मानू नये, कारण "अत्थि" आणि "नत्थि" हे शब्द लिंगभेदरहित (अलिङ्ग) आहेत. "अत्थि" आणि "नत्थि" हे शब्द तिन्ही लिंगांपैकी कोणत्याही एका लिंगात समाविष्ट होत नाहीत. यांमध्ये "अत्थि" हा शब्द आख्यात-निपाताच्या (क्रियापद व अव्यय) रूपाने बदलतो, जसे की "अत्थि सन्ति संविज्जति" (आहे, आहेत, अस्तित्वात आहे), "अत्थिखीरा ब्राह्मणी" (दूध देणारी ब्राह्मणी आहे) इत्यादींमध्ये; तर "नत्थि" हा शब्द केवळ निपातच (अव्यय) आहे. अशा प्रकारे "अत्थि" आणि "नत्थि" या शब्दांचे आणि निपातांचे लिंग व वचनाच्या द्वारे कथन करणे योग्य ठरते, कारण ते स्त्रीलिंग इत्यादी रूपाने किंवा एकवचन इत्यादी रूपाने प्रवृत्त होत नाहीत. आणि म्हटले देखील आहे – ‘‘သဒိသံ တီသု လိင်္ဂေသု, သဗ္ဗာသု စ ဝိဘတ္တိသု; ဝစနေသု စ သဗ္ဗေသု, ယံ န ဗျေတိ တဒဗျယ’’န္တိ. "जे तिन्ही लिंगांमध्ये, सर्व विभक्तींमध्ये आणि सर्व वचनांमध्ये समान राहते, ज्यामध्ये कोणताही बदल (व्यय) होत नाही, त्याला अव्यय म्हणतात." ဧတ္ထ သိယာ – နနု စ ဘော ‘‘အတ္ထိ သက္ကာ လဗ္ဘာ ဣစ္စေတေ ပဌမာယာ’’တိ ဝစနတော အတ္ထိသဒ္ဒေါ ပဌမာယ ဝိဘတ္တိယာ ယုတ္တော, ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ ‘‘သဒိသံ တီသု လိင်္ဂေသူ’’တိအာဒိ ဝုတ္တန္တိ? သစ္စံ အတ္ထိသဒ္ဒေါ ပဌမာယ ဝိဘတ္တိယာ ယုတ္တော, တထာ နတ္ထိသဒ္ဒေါ အတ္ထိသဒ္ဒဿ ဝစနလေသေန ဂဟေတဗ္ဗတ္တာ ယုဂဠပဒတ္တာ စ. ဣဒံ ပန ‘‘သဒိသံ တီသု လိင်္ဂေသူ’’တိအာဒိဝစနံ ဥပသဂ္ဂနိပါတသင်္ခါတေ အသင်္ချာသဒ္ဒေ သန္ဓာယ ဝုတ္တံ, န ဧကေကမသင်္ချာသဒ္ဒံ သန္ဓာယ. တထာ ဟိ ‘‘အသင်္ချာ’’တိ စ ‘‘အဗျယာ’’တိ စ လဒ္ဓဝေါဟာရေသု ဥပသဂ္ဂနိပါတေသု ဥပသဂ္ဂါ သဗ္ဗေပိ သဗ္ဗဝိဘတ္တိဝစနကာ. နိပါတာနံ ပန ဧကစ္စေ ပဌမာဒီသု ယထာရဟံ ဝိဘတ္တိယုတ္တာ, ဧကစ္စေ အဝိဘတ္တိယုတ္တာ. တတ္ထ ယေ ယဒဂ္ဂေန ဝိဘတ္တိယုတ္တာ, တေ တဒဂ္ဂေန တဗ္ဗစနကာ. ဥပသဂ္ဂနိပါတေသု ဟိ ပစ္စေကံ ‘‘ဣဒံ နာမ ဝစန’’န္တိ လဒ္ဓုံ န သက္ကာ, သဗ္ဗသင်္ဂါဟကဝသေန ပန ‘‘သဒိသံ တီသု လိင်္ဂေသူ’’တိအာဒိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ဝုတ္တံ. ကစ္စာယနာစရိယေနပိ ဣမမေဝတ္ထံ သန္ဓာယ ‘‘သဗ္ဗာသမာဝုသောပသဂ္ဂနိပါတာဒီဟိ စာ’’တိ ဝုတ္တံ. န ဟိ အာဝုသောသဒ္ဒတော သဗ္ဗာပိ ဝိဘတ္တိယော လဗ္ဘန္တိ, အထ ခေါ အာလပနတ္ထဝါစကတ္တာ ဧကဝစနိကအနေကဝစနိကာ ပဌမာဝိဘတ္တိယောယေဝ လဗ္ဘန္တိ. အယမသ္မာကံ ခန္တိ. येथे अशी शंका उपस्थित होऊ शकते – "हे महाशय, 'अत्थि, सक्का, लब्भा हे प्रथमेत आहेत' या वचनानुसार 'अत्थि' हा शब्द प्रथमा विभक्तीने युक्त आहे, असे असताना 'तिन्ही लिंगांत समान' (सदिसं तीसु लिङ्गेसु) इत्यादी का म्हटले गेले आहे?" हे सत्य आहे की 'अत्थि' हा शब्द प्रथमा विभक्तीने युक्त आहे, तसेच 'नत्थि' हा शब्दही 'अत्थि' शब्दाच्या साहचर्याने आणि जोडीचा शब्द असल्यामुळे (प्रथमेतच) ग्रहण केला पाहिजे. परंतु, "तिन्ही लिंगांत समान" इत्यादी वचन हे उपसर्ग आणि निपात म्हणून ओळखल्या जाणाऱ्या 'असंख्या' (अव्यय) शब्दांच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे, प्रत्येक स्वतंत्र अव्यय शब्दाच्या संदर्भात नाही. कारण, 'असंख्या' आणि 'अव्यय' अशी संज्ञा मिळालेल्या उपसर्ग आणि निपातांमध्ये सर्वच उपसर्ग हे सर्व विभक्ती आणि वचनांचे अर्थ देणारे असतात. निपातांपैकी काही प्रथमा इत्यादी विभक्तींनी योग्यतेनुसार युक्त असतात, तर काही विभक्तीरहित असतात. त्यांपैकी जे ज्या प्रमाणात विभक्तीने युक्त असतात, ते त्या प्रमाणात त्या वचनाचे असतात. उपसर्ग आणि निपातांमध्ये प्रत्येक शब्दाच्या बाबतीत "हे अमुक वचन आहे" असे निश्चित करणे शक्य नाही, म्हणून सर्वसमावेशकतेने पूर्वाचार्यांनी "तिन्ही लिंगांत समान" इत्यादी म्हटले आहे. आचार्य कच्चायनांनी सुद्धा याच अर्थाचा संदर्भ घेऊन "सब्बासमावुसोपसग्गनिपातादीहि चा" असे म्हटले आहे. कारण 'आवुसो' या शब्दापासून सर्व विभक्ती प्राप्त होत नाहीत, तर संबोधन अर्थाचा वाचक असल्यामुळे केवळ एकवचन आणि बहुवचनातील प्रथमा विभक्तीच प्राप्त होते. हे आमचे मत (खन्ति) आहे. ကေစိ [Pg.398] ပန သဗ္ဗေဟိပိ နိပါတေဟိ သဗ္ဗဝိဘတ္တိလောပံ ဝဒန္တိ, တံ န ဂဟေတဗ္ဗံ. ‘‘အတ္ထိ သက္ကာ လဗ္ဘာ ဣစ္စေတေ ပဌမာယ. ဒိဝါ ဘိယျော နမော ဣစ္စေတေ ပဌမာယ စ ဒုတိယာယ စာ’’တိအာဒိဝစနတော, ပဒပူရဏမတ္တာနဉ္စ အဝိဘတ္တိယုတ္တာနံ အထ ခလု ဝတ ဝထ ဣစ္စာဒီနံ နိပါတာနံ ဝစနတော. ဧတ္ထာပိ သိယာ ‘‘နနု စ ဘော အဝိဘတ္တိယုတ္တာနမ္ပိ နိပါတာနံ သမ္ဘဝတော အတ္ထိ နတ္ထိသဒ္ဒါနံ အဝိဘတ္တိကော နိဒ္ဒေသော ကာတဗ္ဗော, အထ ကိမတ္ထံ ‘အတ္ထိယာ နဝ, နတ္ထိယာ နဝါ’တိ သဝိဘတ္တိကော နိဒ္ဒေသော ကတော’’တိ? သဗ္ဗထာ ဝိဘတ္တီဟိ ဝိနာ အတ္ထဿ နိဒ္ဒိသိတုမသက္ကုဏေယျတ္တာတိ. परंतु काही लोक सर्वच निपातांपासून सर्व विभक्तींचा लोप होतो असे म्हणतात, ते स्वीकारण्यायोग्य नाही. कारण "अत्थि, सक्का, लब्भा हे प्रथमेत आहेत. दिवा, भिय्यो, नमो हे प्रथमा आणि द्वितीयेत आहेत" इत्यादी वचने आहेत, आणि केवळ पादपूर्ती करणाऱ्या विभक्तीरहित 'अथ, खलु, वत, वथ' इत्यादी निपातांचे अस्तित्व असल्यामुळे. येथेही अशी शंका येऊ शकते की, "हे महाशय, विभक्तीरहित निपातही संभवत असल्यामुळे 'अत्थि' आणि 'नत्थि' या शब्दांचा विभक्तीरहित निर्देश करायला हवा था, मग 'अत्थिया नव, नत्थिया नवा' (अत्थि मध्ये नऊ, नत्थि मध्ये नऊ) असा सविभक्तीक निर्देश कशासाठी केला आहे?" कारण कोणत्याही प्रकारे विभक्तीशिवाय अर्थाचा निर्देश करणे अशक्य आहे. ယဒိ ဧဝံ ‘‘အတ္ထိ သက္ကာ လဗ္ဘာ ဣစ္စေတေ ပဌမာယာ’’တိ ဝစနတော အတ္ထိ နတ္ထိသဒ္ဒါ လုတ္တာယ ပဌမာယ ဝိဘတ္တိယာ ဝသေန ပဌမာဝိဘတ္တိကာယေဝ နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗာ, ဧဝမကတွာ ကသ္မာ သတ္တမျန္တဝသေန ‘‘အတ္ထိယာ နတ္ထိယာ’’တိ နိဒ္ဒိဋ္ဌာတိ? သစ္စံ, အတ္ထိ နတ္ထိသဒ္ဒါ ပဌမာဝိဘတ္တိယုတ္တာယေဝ နိဒ္ဒိသိတဗ္ဗာ, တထာပိ ‘‘အတ္ထိပစ္စယေ နဝ, နတ္ထိပစ္စယေ နဝါ’’တိ ဧတဿတ္ထဿ ပရိဒီပနေ ပဌမာယ ဩကာသော နတ္ထိ, သတ္တမိယာယေဝ ပန အတ္ထိ, တသ္မာ ‘‘အတ္ထိယာ နဝ, နတ္ထိယာ နဝါ’’တိ ဝုတ္တံ. ဣတိ အတ္ထိယာနတ္ထိယာသဒ္ဒါနံ သတ္တမျန္တဘာဝေ သိဒ္ဓေယေဝ တတိယာစတုတ္ထီပဉ္စမီဆဋ္ဌိယန္တဘာဝေါပိ သိဒ္ဓေါယေဝ ဟောတိ. တသ္မာ ‘‘အတ္ထိဘာဝေါ အတ္ထိတာ’’တိအာဒီသုပိ အတ္ထိယာ ဘာဝေါ အတ္ထိဘာဝေါ, နတ္ထိယာ ဘာဝေါ နတ္ထိဘာဝေါ, အတ္ထိယာ ဘာဝေါ အတ္ထိတာဘိအာဒိနာ သမာသတဒ္ဓိတဝိဂ္ဂဟော အဝဿမိစ္ဆိတဗ္ဗော. ယဒိဒမမှေဟိ ဝုတ္တံ, တံ ‘‘ပါဠိယာ ဝိရုဇ္ဈတီ’’တိ န ဝတ္တဗ္ဗံ ပါဠိနယာနုသာရေန ဝုတ္တတ္တာတိ. जर असे आहे, तर "अत्थि, सक्का, लब्भा हे प्रथमेत आहेत" या वचनानुसार 'अत्थि' आणि 'नत्थि' हे शब्द लुप्त झालेल्या प्रथमा विभक्तीच्या आधारे प्रथमा विभक्तीचेच म्हणून निर्देशित करायला हवे होते. असे न करता सप्तम्यंत रूपाने "अत्थिया, नत्थिया" असा निर्देश का केला आहे? हे सत्य आहे की, 'अत्थि' आणि 'नत्थि' हे शब्द प्रथमा विभक्तीने युक्तच निर्देशित करायला हवे होते, तरीही "अत्थि-प्रत्ययात नऊ, नत्थि-प्रत्ययात नऊ" या अर्थाचे स्पष्टीकरण करताना प्रथमेला वाव नाही, तर केवळ सप्तमीलाच वाव आहे; म्हणूनच "अत्थिया नव, नत्थिया नवा" असे म्हटले आहे. अशा प्रकारे 'अत्थिया' आणि 'नत्थिया' या शब्दांचे सप्तम्यंत रूप सिद्ध झाल्यावर तृतीया, चतुर्थी, पंचमी आणि षष्ठी विभक्तीचे रूपही सिद्धच होते. म्हणूनच "अत्थिभावो, अत्थिता" इत्यादींमध्ये सुद्धा 'अत्थिया भावो अत्थिभावो' (अत्थिचा भाव तो अत्थिभाव), 'नत्थिया भावो नत्थिभावो' (नत्थिचा भाव तो नत्थिभाव), 'अत्थिया भावो अत्थिता' इत्यादी प्रकारे समास आणि तद्धित विग्रह करणे अवश्य इष्ट आहे. आम्ही जे हे सांगितले आहे, ते "पाळीशी (पाळी भाषेतील नियमांशी) विरुद्ध आहे" असे म्हणता येणार नाही, कारण ते पाळीच्या पद्धतीनुसारच (पाळिनयानुसार) सांगितले गेले आहे. ဧဝံ ဟောတု, ကသ္မာ ဘော ‘‘အတ္ထိယာ, နတ္ထိယာ’’တိ ဣတ္ထိလိင်္ဂနိဒ္ဒေသော ကတော, နနု နိပါတောပသဂ္ဂါ အလိင်္ဂဘေဒါတိ? သစ္စံ, ဣဒံ ပန ဌာနံ အတီဝ သုခုမံ, တထာပိ ပုဗ္ဗာစရိယာနုဘာဝညေဝ [Pg.399] နိဿာယ ဝိနိစ္ဆယံ ဗြူမ. ယထာ ဟိ ဝီသတိဣစ္စာဒီနံ သင်္ချာသဒ္ဒါနံ သရူပတော အဒဗ္ဗဝါစကတ္တေပိ ဒဗ္ဗဝါစကာနံ လတာမတိရတ္တိဣတ္ထီ ယာဂုဝဓူသဒ္ဒါနံ ဝိယ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေါ သဒ္ဒသတ္ထဝိဒူဟိ အနုမတော, ဧဝံ အဒဗ္ဗဝါစကတ္တေပိ အတ္ထိ နတ္ထိသဒ္ဒါနံ ကတ္ထစိ ဣတ္ထိလိင်္ဂဘာဝေါ သဒ္ဓမ္မဝိဒူဟိ အနုမတော. တေနာဟ အာယသ္မာ ဓမ္မသေနာပတိ ‘‘အတ္ထိယာ နဝ, နတ္ထိယာ နဝါ’’တိ. အထ ဝါ ‘‘အတ္ထိယာ, နတ္ထိယာ’’တိ ဣမာနိ လိင်္ဂဘာဝဝိနိမုတ္တာနိ သတ္တမိယန္တာနိ နိပါတပဒါနီတိပိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ, န ဧတ္ထ စောဒေတဗ္ဗံ, ဧဝရူပါနိ နိပါတပဒါနိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ ဝုတ္တာနိ န သန္တိ, တသ္မာ ဆဍ္ဍေတဗ္ဗမိဒံ ဝစနန္တိ. असे असू दे, पण हे महाशय, "अत्थिया, नत्थिया" असा स्त्रीलिंगी निर्देश का केला आहे? निपात आणि उपसर्ग हे तर लिंगभेदविरहित (अलिङ्ग) असतात ना? हे सत्य आहे, हा विषय अत्यंत सूक्ष्म आहे, तरीही पूर्वाचार्यांच्या प्रभावाचाच आश्रय घेऊन आम्ही हा निर्णय सांगत आहोत. ज्याप्रमाणे 'वीसति' (वीस) इत्यादी संख्यावाचक शब्दांचे स्वरूप द्रव्यवाचक (वस्तूवाचक) नसले तरी, द्रव्यवाचक असलेल्या 'लता', 'मति', 'रत्ति' (रात्र), 'इत्थी' (स्त्री), 'यागु' (पेज), 'वधू' या शब्दांप्रमाणे त्यांचा स्त्रीलिंगी भाव व्याकरणकारांनी मान्य केला आहे; त्याचप्रमाणे द्रव्यवाचक नसतानाही 'अत्थि' आणि 'नत्थि' या शब्दांचा काही ठिकाणी स्त्रीलिंगी भाव सद्धम्म जाणणाऱ्यांनी मान्य केला आहे. म्हणूनच आयुष्यमान धम्मसेनापतींनी "अत्थिया नव, नत्थिया नवा" असे म्हटले आहे. किंवा "अत्थिया, नत्थिया" ही लिंगभावापासून मुक्त असलेली सप्तम्यंत निपात पदे आहेत असेही गृहीत धरले पाहिजे. येथे अशी शंका घेऊ नये की, "अशा प्रकारची निपात पदे पूर्वाचार्यांनी सांगितलेली नाहीत, म्हणून हे वचन सोडून दिले पाहिजे." ပါဝစနသ္မိဉှိ ဂရူဟိ အနိဒ္ဒိဋ္ဌာနိပိ အနေကဝိဟိတာနိ နိပါတပဒါနိ သန္ဒိဿန္တိ, နာပိ ‘‘ဟေတုယာ, အဓိပတိယာ, အတ္ထိယာ, နတ္ထိယာ’’တိ ဧဝမာဒီသု ‘‘အပသဒ္ဒါ ဣမေ’’တိ ဝိရောဓော ဥပ္ပာဒေတဗ္ဗော. န ဟိ အစိန္တေယျာနုဘာဝေန ပါရမိတာပုညေန နိပ္ဖန္နေန အနာဝရဏဉာဏေန သဗ္ဗံ ဉေယျမဏ္ဍလံ ဟတ္ထတလေ အာမလကံ ဝိယ ပစ္စက္ခံ ကတွာ ပဿတော ဗုဒ္ဓဿ ဝစနေ အညေသံ ဝါစာဝိပ္ပလာပေါ အဝဿံ လဗ္ဘတီတိ. နနု စ ဘော ‘‘ဟေတုယာ, အဓိပတိယာ, အတ္ထိယာ, နတ္ထိယာ’’တိ စ ဣဒံ သာရိပုတ္တတ္ထေရဝစနံ တေန နိက္ခိတ္တတ္တာ. တထာဂတေန ဟိ တာဝတိံသဘပနေ ဒေသိတကာလေ ဣမာနိ ပဒါနိ န သန္တိ, ဧဝံ သန္တေ ကသ္မာ ‘‘ဗုဒ္ဓဝစန’’န္တိ ဝဒထာတိ? ဗုဒ္ဓဝစနံယေဝ နာမ. အာယသ္မတော ဟိ သာရိပုတ္တဿ တထာဂတေန နယော ဒိန္နော, တေနပိ ပဘိန္နပဋိသမ္ဘိဒေန သတ္ထုကပ္ပေန အဂ္ဂသာဝကေန သတ္ထု သန္တိကာ နယံ လဘိတွာ ဗျဉ္ဇနံ သုရောပိတံ ကတံ. သဗ္ဗေပိ ဟိ ပဋိသမ္ဘိဒပ္ပတ္တာ အရိယာ ဒုန္နိရုတ္တိံ န ဝဒန္တိ နိရုတ္တိပဘေဒသ္မိံ သုကုသလတ္တာ, တသ္မာ အညေသမဝိသယော ဧသ အရိယာနံ ဝေါဟာရောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. कारण बुद्धवचनात (पावचनस्मिं) गुरूंनी (आचार्यांनी) निर्देश न केलेलीही अनेक प्रकारची निपात पदे दिसून येतात. तसेच "हेतुया, अधिपतिया, अत्थिया, नत्थिया" इत्यादींच्या बाबतीत "हे अपशब्द (अशुद्ध शब्द) आहेत" असा विरोध निर्माण करू नये. कारण अचिंत्य प्रभावाच्या पारमिता-पुण्याने निष्पन्न झालेल्या आणि अनावरण ज्ञानाने (अनावृत ज्ञानाने) संपूर्ण ज्ञेयमंडळ हातावरील आवळ्याप्रमाणे प्रत्यक्ष पाहून उपदेश करणाऱ्या बुद्धांच्या वचनात इतरांच्या बोलण्यातील गोंधळ (वाचाविप्पलाप) असणे मुळीच शक्य नाही. "पण हे महाशय, 'हेतुया, अधिपतिया, अत्थिया, नत्थिया' हे तर स्थवीर सारिपुत्तांचे वचन आहे, कारण ते त्यांनी रचले आहे. तथागतांनी तावतिंस भवनात उपदेश करताना ही पदे नव्हती, असे असताना तुम्ही याला 'बुद्धवचन' का म्हणता?" ते बुद्धवचनच आहे. कारण आयुष्यमान सारिपुत्तांना तथागतांनीच पद्धत (नय) दिली होती. प्रभिन्न-पटिसंभिदा (विशेष ज्ञान) प्राप्त असलेल्या, शास्त्यांसमान असलेल्या त्या अग्रश्रावकांनी शास्त्यांच्या सन्निध पद्धत प्राप्त करून व्यंजनांची (शब्दांची) सुयोग्य रचना केली. कारण पटिसंभिदा प्राप्त असलेले सर्वच आर्य हे चुकीची निरुक्ती (अपशब्द) बोलत नाहीत, कारण ते भाषा आणि व्याकरणाच्या प्रकारांमध्ये अत्यंत कुशल असतात. म्हणूनच, हा आर्यांचा व्यवहार इतरांच्या आकलनाचा विषय नाही, असे समजले पाहिजे. ဣဒါနိ [Pg.400] သတာဒီနံ နာမိကပဒမာလာ ဝုစ္စတေ – आता 'सत' (शंभर) इत्यादी शब्दांची नामरूपे (नामिक पदमाला) सांगितली जात आहे – သတံ, သတာနိ, သတာ. သတံ, သတာနိ, သတေ. သတေန, သတေဟိ, သတေဘိ. သတဿ, သတာနံ. သတာ, သတသ္မာ, သတမှာ, သတေဟိ, သတေဘိ. သတဿ, သတာနံ. သတေ, သတသ္မိံ, သတမှိ, သတေသု. ဧဝံ သဟဿံ, သဟဿာနီတိ ယောဇေတဗ္ဗံ. ဒသသဟဿံ သတသဟဿံ ဒသသတသဟဿန္တိ ဧတ္ထာပိ ဧသေဝ နယော. အယံ ပနေတ္ထ ပယောဂေါ ‘‘သတံ ဘိက္ခူ, သတံ ဣတ္ထိယော, သတံ စိတ္တာနိ. ဘိက္ခူနံ သတံ, ဣတ္ထီနံ သတံ, စိတ္တာနံ သတံ. သဟဿာဒီသုပိ ဧသေဝ နယော. ဣတ္ထဉ္စ အညထာပိ သဒ္ဒရူပါနိ ဘဝန္တိ. ကောဋိ, ကောဋီ, ကောဋိယော. ရတ္တိနယေန ဉေယျံ. 'सतं' (शंभर), 'सतानि', 'सता' (प्रथमा विभक्ती). 'सतं', 'सतानि', 'सते' (द्वितीया विभक्ती). 'सतेन', 'सतेहि', 'सतेभि' (तृतीया विभक्ती). 'सतस्स', 'सतानं' (चतुर्थी विभक्ती). 'सता', 'सतस्मा', 'सतम्हा', 'सतेहि', 'सतेभि' (पंचमी विभक्ती). 'सतस्स', 'सतानं' (षष्ठी विभक्ती). 'सते', 'सतस्मिं', 'सतम्हि', 'सतेसु' (सप्तमी विभक्ती). याचप्रमाणे 'सहस्सं' (हजार), 'सहस्सानी' असे जुळवावे. 'दसहस्सं' (दहा हजार), 'सतसहस्सं' (एक लाख), 'दसतसहस्सं' (दहा लाख) यामध्येही हाच नियम लागू होतो. येथे हा प्रयोग आहे - "सतं भिक्खू" (शंभर भिक्खू), "सतं इत्थियो" (शंभर स्त्रिया), "सतं चित्तानि" (शंभर चित्त). "भिक्खूनं सतं" (भिक्खूंचे शंभर), "इत्थीनं सतं" (स्त्रियांचे शंभर), "चित्तानं सतं" (चित्तांचे शंभर). 'सहस्स' (हजार) इत्यादींमध्येही हाच नियम आहे. आणि अशा प्रकारे इतरही शब्दरूपे होतात. जसे की 'कोटि', 'कोटी', 'कोटियो'. हे 'रत्ति' (रात्र) शब्दाच्या रूपांप्रमाणे जाणावे. ဧကပ္ပဘုတိတော ယာဝ, ဒသကာ ယာ ပဝတ္တတိ; သင်္ချာ တာဝ သာ သင်္ချေယျ-ပ္ပဓာနာတိ ဂရူ ဝဒုံ. एकपासून सुरू होऊन दहापर्यंत जी संख्या चालते, ती संख्या 'संख्येय-प्रधान' (मोजल्या जाणाऱ्या वस्तूला प्राधान्य देणारी) असते, असे आचार्यांनी (गुरू) म्हटले आहे. ဝီသတိတော ယာဝ သတာ, ယာ သင်္ချာ တာဝ သာ ပန; သင်္ချာပ္ပဓာနာ သင်္ချေယျ-ပ္ပဓာနာတိ စ ဝဏ္ဏယုံ. परंतु, वीसपासून शंभरपर्यंत जी संख्या आहे, ती 'संख्या-प्रधान' (संख्येला प्राधान्य देणारी) आणि 'संख्येय-प्रधान' (मोजल्या जाणाऱ्या वस्तूला प्राधान्य देणारी) दोन्ही असते, असे वर्णन केले आहे. အပိစ – शिवाय - ဝီသတော ယာဝ ကောဋိယာ, သင်္ချာ တာဝ ဟိ သာ ခလု; သင်္ချာပ္ပဓာနာ သင်္ချေယျ-ပ္ပဓာနာ စာတိ နိဒ္ဒိသေ. निश्चयपूर्वक, वीसपासून कोटीपर्यंत जी संख्या आहे, ती 'संख्या-प्रधान' आणि 'संख्येय-प्रधान' दोन्ही आहे असे निर्देश करावे. တထာ ဟိ ‘‘အသီတိ ကောဋိယော ဟိတွာ, ဟိရညဿာပိ ပဗ္ဗဇိ’’န္တိ, ‘‘ခီဏာသဝါ ဝီတမလာ, သမိံသု သတကောဋိယော’’တိ စ ပါဠိ ဒိဿတိ. तसेच, "अशीती कोटियो हित्वा, हिरञ्ञस्सापि पब्बजि" (ऐंशी कोटी सुवर्ण सोडून तो प्रव्रजित झाला) आणि "खीणासवा वीतमला, समिंसु सतकोटियो" (क्षणास्रव आणि मलरहित शंभर कोटी अरहंत एकत्र आले) अशी पाळी (पाठात) दिसून येते. ဣမသ္မိံ ပန ဌာနေ သဗ္ဗေသံ သင်္ချာသဒ္ဒရူပါနံ ပါကဋီကရဏေန ဝိညူနံ သုခုမဉာဏပဋိလာဘတ္ထံ သာဋ္ဌကထံ ဥဒါနပါဠိပ္ပဒေသံ အညဉ္စ ပါဠိပ္ပဒေသမဋ္ဌကထာဝစနဉ္စ အာဟရိတွာ ဒဿယိဿာမိ – परंतु, या ठिकाणी सर्व संख्यावाचक शब्दांची रूपे स्पष्ट करून विद्वानांना सूक्ष्म ज्ञान प्राप्त व्हावे या उद्देशाने, मी अट्ठकथेसह उदानपाळीचा भाग आणि इतर पाळी व अट्ठकथेतील वचने उद्धृत करून दाखवतो - ‘‘ယေသံ [Pg.401] ခေါ ဝိသာခေ သတံ ပိယာနိ, သတံ တေသံ ဒုက္ခာနိ, ယေသံ နဝုတိ ပိယာနိ, နဝုတိ တေသံ ဒုက္ခာနိ. ယေသံ အသီတိ…ပေ… ယေသံ သတ္တတိ. ယေသံ သဋ္ဌိ. ယေသံ ပညာသံ, ယေသံ စတ္တာရီသံ, ယေသံ တိံသံ. ယေသံ ခေါ ဝိသာခေ ဝီသံ ပိယာနိ, ဝီသတိ တေသံ ဒုက္ခာနိ. ယေသံ ဒသ. ယေသံ နဝ. ယေသံ အဋ္ဌ. ယေသံ သတ္တ. ယေသံ ဆ. ယေသံ ပဉ္စ. ယေသံ စတ္တာရိ. ယေသံ တီဏိ. ယေသံ ဒွေ. ယေသံ ဧကံ ပိယံ, တေသံ ဧကံ ဒုက္ခ’’န္တိ. “हे विशाखे! ज्यांना शंभर प्रिय गोष्टी आहेत, त्यांना शंभर दुःखे आहेत; ज्यांना नव्वद प्रिय गोष्टी आहेत, त्यांना नव्वद दुःखे आहेत. ज्यांना ऐंशी... पे... ज्यांना सत्तर. ज्यांना साठ. ज्यांना पन्नास, ज्यांना चाळीस, ज्यांना तीस. हे विशाखे! ज्यांना वीस प्रिय गोष्टी आहेत, त्यांना वीस दुःखे आहेत. ज्यांना दहा. ज्यांना नऊ. ज्यांना आठ. ज्यांना सात. ज्यांना सहा. ज्यांना पाच. ज्यांना चार. ज्यांना तीन. ज्यांना दोन. ज्यांना एक प्रिय गोष्ट आहे, त्यांना एक दुःख आहे.” တတ္ထ သတံ ပိယာနီတိ သတံ ပိယာယိတဗ္ဗဝတ္ထူနိ. ‘‘သတံ ပိယ’’န္တိပိ ကေစိ ပဌန္တိ. ဧတ္ထ စ ယသ္မာ ဧကတော ပဋ္ဌာယ ယာဝ ဒသ, တာဝ သင်္ချာသင်္ချေယျပ္ပဓာနာ, တသ္မာ ‘‘ယေသံ ဒသ ပိယာနိ, ဒသ တေသံ ဒုက္ခာနီ’’တိအာဒိနာ ပါဠိ အာဂတာ. ကေစိ ပန ‘‘ယေသံ ဒသ ပိယာနံ, ဒသ တေသံ ဒုက္ခာန’’န္တိအာဒိနာ ပဌန္တိ, တံ န သုန္ဒရံ. ယသ္မာ ပန ဝီသတိတော ပဋ္ဌာယ ယာဝ သတံ, တာဝ သင်္ချေယျပ္ပဓာနာ သင်္ချာပ္ပဓာနာ စ, တသ္မာ တတ္ထာပိ သင်္ချေယျပ္ပဓာနံယေဝ ဂဟေတွာ ‘‘ယေသံ ခေါ ဝိသာခေ သတံ ပိယာနိ, သတံ တေသံ ဒုက္ခာနီ’’တိအာဒိနာ ပါဠိ အာဂတာ. သဗ္ဗေသမ္ပိ စ ယေသံ ဧကံ ပိယံ, ဧကံ တေသံ ဒုက္ခန္တိ ပါဌော, န ပန ဒုက္ခဿာတိ. ဧကသ္မိဉှိ ပဒက္ကမေ ဧကရသာဝ ဘဂဝတော ဒေသနာ ဟောတီတိ. တသ္မာ ယထာဝုတ္တနယာဝ ပါဠိ ဝေဒိတဗ္ဗာ. အယံ တာဝ သာဋ္ဌကထော ဥဒါနပါဠိပ္ပဒေသော. तेथे 'सतं पियानि' म्हणजे शंभर प्रिय वस्तू. काही जण 'सतं पियं' असाही पाठ वाचतात. आणि येथे, कारण एकपासून सुरू करून दहापर्यंत संख्या ही 'संख्येय-प्रधान' असते, म्हणून 'येसं दस पियानि, दस तेसं दुक्खानि' (ज्यांना दहा प्रिय गोष्टी आहेत, त्यांना दहा दुःखे आहेत) इत्यादी प्रकारे पाळी आली आहे. काही जण 'येसं दस पियानं, दस तेसं दुक्खानं' असा पाठ वाचतात, ते योग्य नाही. कारण वीसपासून सुरू करून शंभरपर्यंत संख्या ही 'संख्येय-प्रधान' आणि 'संख्या-प्रधान' दोन्ही असते, म्हणून तेथेही 'संख्येय-प्रधान' रूपच घेऊन 'येसं खो विसाखे सतं पियानि, सतं तेसं दुक्खानि' इत्यादी प्रकारे पाळी आली आहे. आणि सर्वांसाठीच 'येसं एकं पियं, एकं तेसं दुक्खं' (ज्यांचे एक प्रिय आहे, त्यांचे एक दुःख आहे) असा पाठ आहे, 'दुक्खस्स' (दुःखाचे) असा नाही. कारण एकाच पदक्रमात भगवंतांचा उपदेश एकरस (एकसमान स्वराचा) असतो. म्हणून, वर सांगितलेल्या नियमानुसारच पाळी समजली पाहिजे. हा तर अट्ठकथेसह उदानपाळीचा भाग झाला. ဣဒါနိ အညော ပါဠိပ္ပဒေသော အဋ္ဌကထာပါဌပ္ပဒေသော စ နီယတေ – आता दुसरा पाळीचा भाग आणि अट्ठकथेचा पाठ उद्धृत केला जात आहे - ‘‘သတံ [Pg.402] ဟတ္ထီ သတံ အဿာ, သတံ အဿတရီရထာ; သတံ ကညာ သဟဿာနိ, အာမုက္ကမဏိကုဏ္ဍလာ; ဧကဿ ပဒဝီတိဟာရဿ, ကလံ နာဂ္ဃန္တိ သောဠသိ’’န္တိ “शंभर हत्ती, शंभर घोडे, शंभर खेचरांचे रथ, आणि मणिकुंडल धारण केलेल्या शंभर हजार कन्या; (या सर्व गोष्टी) एका (धर्माचरणी व्यक्तीच्या) पाऊल टाकण्याच्या सोळाव्या भागाचीही बरोबरी करू शकत नाहीत.” ပါဠိ. ဧတ္ထ ‘‘သတံ ဟတ္ထီ’’တိအာဒီနိ ဝိသေသိတာနိ, ‘‘သဟဿာနီ’’တိ ဝိသေသနံ, တသ္မာ သတံသဒ္ဒံ သဟဿသဒ္ဒေန ယောဇေတွာ ‘‘ဟတ္ထီ’’တိအာဒီနိ ပန ဥပပဒံ ကတွာ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဟတ္ထီ သတံ သဟဿာနိ. အဿာ သတံ သဟဿာနိ. အဿတရီရထာ သတံ သဟဿာနိ. အာမုက္ကမဏိကုဏ္ဍလာ ကညာ သတံ သဟဿာနိ. ဣဒံ သင်္ချေယျပ္ပဓာနဝသေနတ္ထဂဟဏံ. သင်္ချာပ္ပဓာနဝသေန ပန အယမ္ပိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော ‘‘ဟတ္ထီနံ သတသဟဿံ, အဿာနံ သတသဟဿံ, အဿတရီရထာနံ သတသဟဿံ, အာမုက္ကမဏိကုဏ္ဍလာနံ ကညာနံ သတသဟဿ’’န္တိ. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. ‘‘ယောဇနာနံ သတာနုစ္စော, ဟိမဝါ ပဉ္စ ပဗ္ဗတော’’တိ အယမဋ္ဌကထာပါဌော. ဧတ္ထ ‘‘ပဉ္စာ’’တိ သဒ္ဒံ သတသဒ္ဒေန သဒ္ဓိံ ယောဇေတွာ ‘‘သိပ္ပိကာနံ သတံ နတ္ထီ’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ ဟိမဝါ ပဗ္ဗတော ယောဇနာနံ ပဉ္စ သတာနိ ဥစ္စောတိ သင်္ချာပ္ပဓာနဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ‘‘ပဉ္စ သတာနီ’’တိ စ အဒ္ဓုနော အစ္စန္တသံယောဂဝသေန ဥပယောဂဝစနံ. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. သတမိတိ သဒ္ဒေါ ‘‘သတံ ဟောမိ, သဟဿံ ဟောမီ’’တိအာဒီသု ဧကဝစနော. ‘‘အထေတ္ထေကသတံ ခတျာ, အနုယန္တာ ယသဿိနော’’တိအာဒီသု ဗဟုဝစနော. ဧဝံ သဟဿာဒီနမ္ပိ ဧကဝစနဗဟုဝစနတာ လဗ္ဘတိ. တထာ ဟိ ‘‘ဘိယျော နံ သတသဟဿံ, ယက္ခာနံ ပယိရုပါသတီ’’တိ ဧတ္ထ ‘‘သတသဟဿ’’န္တိ ဧကဝစနံ. ‘‘ပရောသဟဿံ ခေါ ပနဿ ပုတ္တာ ဘဝိဿန္တီ’’တိ ဧတ္ထ သဟဿန္တိ ဗဟုဝစနန္တိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ही पाळी आहे. येथे 'सतं हत्थी' इत्यादी विशेष्य आहेत आणि 'सहस्सानी' हे विशेषण आहे, म्हणून 'सतं' शब्दाला 'सहस्स' शब्दाशी जोडून आणि 'हत्थी' इत्यादींना उपपद करून अर्थ घ्यावा. हत्ती शंभर हजार (एक लाख). घोडे शंभर हजार. खेचरांचे रथ शंभर हजार. मणिकुंडल धारण केलेल्या कन्या शंभर हजार. हा 'संख्येय-प्रधान' दृष्टीने घेतलेला अर्थ आहे. परंतु 'संख्या-प्रधान' दृष्टीने हा देखील अर्थ घ्यावा - 'हत्तींचे एक लाख, घोड्यांचे एक लाख, खेचरांच्या रथांचे एक लाख, मणिकुंडल धारण केलेल्या कन्यांचे एक लाख'. हा नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. 'योजनानं सतानुच्चो, हिमवा पञ्च पब्बतो' (हिमालय पर्वत पाचशे योजने उंच आहे) हा अट्ठकथेचा पाठ आहे. येथे 'पञ्च' शब्दाला 'सत' शब्दाशी जोडून, जसे 'सिप्पिकानं सतं नत्थी' यामध्ये आहे, तसे 'हिमालय पर्वत पाचशे योजने उंच आहे' असा 'संख्या-प्रधान' दृष्टीने अर्थ घ्यावा. आणि 'पञ्च सतानी' हे अंतराच्या अत्यंत संयोगामुळे द्वितीया विभक्तीत (उपयोगवचन) आहे. हा नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. 'सतं' हा शब्द 'सतं होमि, सहस्सं होमि' इत्यादींमध्ये एकवचनी आहे. 'अथेतथेकसतं खत्या, अनुयन्ता यसस्सिनो' इत्यादींमध्ये तो बहुवचनी आहे. अशा प्रकारे 'सहस्स' इत्यादी शब्दांचेही एकवचन आणि बहुवचन प्राप्त होते. जसे की, 'भिय्यो नं सतसहस्सं, यक्खानं पयिरुपासती' येथे 'सतसहस्सं' हे एकवचन आहे. 'परोसहस्सं खो पनस्स पुत्ता भविस्सन्ती' येथे 'सहस्स' हे बहुवचन आहे असे समजावे. ‘‘ကပ္ပေ [Pg.403] စ သတသဟဿေ, စတုရော စ အသင်္ခိယေ; အမရံ နာမ နဂရံ, ဒဿနေယျံ မနောရမ’’န္တိ “एक लाख कल्प आणि चार असंख्येय वर्षांपूर्वी, अमर नावाचे एक प्रेक्षणीय आणि मनोरम नगर होते.” ပါဠိ. ဧတ္ထ ‘‘ကပ္ပေ စ သတသဟဿေ စတုရော စ အသင်္ခိယေတိ သာမိအတ္ထေ ဥပယောဂဗဟုဝစနံ, တသ္မာ ‘‘မဟာကပ္ပာနံ သတသဟဿာနံ စတုန္နံ အသင်္ခိယာနံ မတ္ထကေ’’တိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော, ‘‘မတ္ထကေ’’တိ စေတ္ထ ဝစနသေသော. ‘‘ကပ္ပသတသဟဿာဓိကာနံ စတုန္နံ အသင်္ခိယာနံ မတ္ထကေ’’ဣစ္စေဝတ္ထော. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. ही पाळी आहे. येथे 'कप्पे च सतसहस्से चतुरो च असंखिये' हे षष्ठीच्या अर्थात द्वितीया बहुवचन (उपयोगबहुवचन) आहे, म्हणून 'चार असंख्येय आणि एक लाख महाकल्पांच्या शेवटी (पूर्वी)' असा अर्थ घ्यावा, आणि येथे 'मत्थके' (शेवटी/पूर्वी) हा शब्द अध्याहृत (वचनशेष) आहे. 'एक लाख कल्पांनी अधिक असलेल्या चार असंख्येय कल्पांच्या शेवटी' असाच याचा अर्थ आहे. हा नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘ကပ္ပေ စ သတသဟဿေ, စတုရော စ အသင်္ခိယေ; ဧတ္ထန္တရေ ယံ စရိတံ, သဗ္ဗံ တံ ဗောဓိပါစန’’န္တိ “एक लाख कल्प आणि चार असंख्येय वर्षांच्या या काळात जे काही आचरण (चर्या) केले गेले, ते सर्व बोधी परिपक्व करणारे (बोधिपाचन) होते.” ပါဠိ. ဧတ္ထ ‘‘ကပ္ပေ’’တိ အစ္စန္တသံယောဂဝသေန ဥပယောဂဗဟုဝစနံ. ‘‘သတသဟဿေ ကပ္ပေ’’တိ ကပ္ပသဒ္ဒသမ္ဗန္ဓေန စာယံ ပုလ္လိင်္ဂနိဒ္ဒေသော ဥပယောဂနိဒ္ဒေသော စ. သမာနာဓိကရဏဉှိ ဣဒံ ကပ္ပသဒ္ဒေန. ‘‘စတုရော စ အသင်္ခိယေ’’တိ အစ္ဆန္တသံယောဂဝသေန ဥပယောဂဗဟုဝစနာနိ. ကဿ ပန အသင်္ခိယေတိ? အညဿ အဝုတ္တတ္တာ ကပ္ပဿ စ ဝုတ္တတ္တာ ပကရဏတော ‘‘ကပ္ပာန’’န္တိ အယမတ္ထော ဝိညာယတေဝ. န ဟိ ဝုတ္တံ ဝဇ္ဇေတွာ အဝုတ္တဿ ကဿစိ ဂဟဏံ ယုတ္တန္တိ. စသဒ္ဒေါ သမ္ပိဏ္ဍနတ္ထော ‘‘မဟာကပ္ပာနံ စတုရော အသင်္ချေယျေ သတသဟဿေ စ မဟာကပ္ပေ’’တိ. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. पाळि (पाठात). येथे 'कप्पे' (कप्पांमध्ये) हे अत्यंतसंयोगाच्या (निरंतरतेच्या) अर्थाने द्वितीया बहुवचन आहे. 'सतसहस्से कप्पे' (एक लाख कप्पांमध्ये) हा 'कप्प' शब्दाच्या संबंधामुळे पुल्लिंगी निर्देश आणि द्वितीया निर्देश आहे. कारण हे 'कप्प' शब्दाशी समानाधिकरण आहे. 'चतुरो च असंखिये' (आणि चार असंख्येय) हे अत्यंतसंयोगाच्या अर्थाने द्वितीया बहुवचन आहे. पण 'असंख्येय' कशाचे? दुसऱ्या कशाचा उल्लेख नसल्यामुळे आणि 'कप्प' (कल्प) चा उल्लेख असल्यामुळे, प्रकरणावरून 'कप्पांचे' (कप्पानां) असाच अर्थ समजला जातो. कारण जे सांगितले आहे ते सोडून न सांगितलेल्या कशाचेही ग्रहण करणे योग्य नाही. 'च' (आणि) हा शब्द समुच्चयार्थक आहे, ज्याचा अर्थ 'चार असंख्येय महाकल्प आणि एक लाख महाकल्प' असा होतो. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘ဃဋာနေကသဟဿာနိ, ကုမ္ဘီနဉ္စ သတာ ဗဟူ’’တိ ပါဠိ. ဧတ္ထ ဃဋာတိ ဃဋာနံ. သာမိအတ္ထေ ဟိ ဣဒံ ပစ္စတ္တဝစနံ. ‘‘ဃဋာနံ အနေကသဟဿာနိ’’ ဣစ္စေဝတ္ထော. ကုမ္ဘီနဉ္စ သတာ ဗဟူတိ အနေကာနိ စ ကုမ္ဘီနံ သတာနိ. ဧတ္ထ နိကာရလောပေါ ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. 'घटानेकसहरूसाने, कुंभीनञ्च सता बहू' (हजारो घडे आणि अनेक शेकडो कुंभ) हा पाळिपाठ आहे. येथे 'घटा' म्हणजे 'घटानां' (घड्यांचे). कारण हे षष्ठीच्या अर्थात प्रथमा विभक्तीचे रूप आहे. 'घड्यांचे अनेक हजार' असाच याचा अर्थ आहे. 'कुंभीनञ्च सता बहू' म्हणजे कुंभांचे (घागरींचे) अनेक शेकडो. येथे 'नि' काराचा लोप झाला आहे असे समजावे. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘ဒသဝီသသဟဿာနံ[Pg.404], ဓမ္မာဘိသမယော အဟု; ဧကဒွိန္နံ အဘိသမယော, ဂဏနာတော အသင်္ခိယော’’တိ 'दसवीससहस्सानं, धम्माभिसमयो अहु; एकद्विन्नं अभिसमयो, गणनातो असंखियो' (दहा-वीस हजारांना धम्माभिसमय झाला; एक-दोघांचा अभिसमय तर गणनेच्या पलीकडे, असंख्येय होता) हा पाळिपाठ आहे. ပါဠိ. ဧတ္ထ ဒသဝီသသဟဿာနန္တိ ဒသသဟဿာနံ ဝီသသဟဿာနဉ္စ. ဓမ္မာဘိသမယောတိ စတုသစ္စပ္ပဋိဝေဓော. ဧကဒွိန္နန္တိ သီသမတ္တကထနံ, တေန ‘‘ဧကဿ စေဝ ဒွိန္နဉ္စ တိဏ္ဏံ စတုန္နံ…ပေ… ဒသန္န’’န္တိအာဒိနာ နယေန အသင်္ချေယျောတိ အတ္ထော. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. पाळि. येथे 'दसवीससहस्सानं' म्हणजे दहा हजार आणि वीस हजारांचे. 'धम्माभिसमयो' म्हणजे चतुरार्य सत्यांचा साक्षात्कार (चतुसच्चप्पटिवेधो). 'एकद्विन्नं' (एक-दोघांचा) हे केवळ मुख्यत्वे करून सांगितले आहे, त्याद्वारे 'एकाचा, दोघांचा, तिघांचा, चौघांचा... पे... दहा जणांचा' इत्यादी पद्धतीने असंख्येय असा अर्थ होतो. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘စတ္တာရိ သတသဟဿာနိ, ဆဠဘိညာ မဟိဒ္ဓိကာ; ဒီပင်္ကရံ လောကဝိဒုံ, ပရိဝါရေန္တိ သဗ္ဗဒါ’’တိ 'चत्तारि सतसहस्सानि, चळभिञ्ञा महिद्धिका; दीपङ्करं लोकविदुं, परिवारेंति सब्बदा' (सहा अभिज्ञा प्राप्त केलेले, महाऋद्धिवान चार लाख [भिक्खू] लोकविदू दीपंकर बुद्धांना नेहमी वेढून राहत असत) हा पाळिपाठ आहे. ပါဠိ. ဧတ္ထ စတ္တာရိ သတသဟဿာနီတိ ဣဒံ လိင်္ဂဘေဒဝသေန ‘‘ဆဠဘိညာ မဟိဒ္ဓိကာ’’တိ ဣမေဟိ ဒွီဟိ ပဒေဟိ သမာနာဓိကရဏံ. ဤဒိသေသု ဟိ ဌာနေသု အသင်္ချေယျ ဝါစကောပိ သဒ္ဒေါ နပုံသကောဝ ဟောတိ, တသ္မာ ‘‘စတ္တာရိ သတသဟဿာနီ’’တိ စ ‘‘ဆဠဘိညာ’’တိ စ ‘‘မဟိဒ္ဓိကာ’’တိ စ ဧတံ ပဒတ္တယံ သမာနာဓိကရဏံ. အထ ဝါ ဆဠဘိညာ မဟိဒ္ဓိကာတိ ဆဠဘိညာနံ မဟဒ္ဓိကာနန္တိ သာမိအတ္ထေ ပစ္စတ္တဝစနံ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. ဣမသ္မိံ ပနတ္ထေ ‘‘စတ္တာရိ သတသဟဿာနီ’’တိ အယံ သင်္ချာဝစနော ဘဝတိ. ‘‘တီဏိ သတသဟဿာနိ, နာရိယော သမလင်္ကတာ’’တိအာဒီသုပိ အယံ နယော နေတဗ္ဗော. ‘‘တာ စ သတ္တ သတာ ဘရိယာ, ဒါသျော သတ္တ သတာနိ စာ’’တိ ပါဠိ. ဧတ္ထ သတာတိ ‘‘သတာနီ’’တိ နပုံသကဝသေန ဂဟေတဗ္ဗံ, န ဣတ္ထိလိင်္ဂဝသေန. ‘‘သတာ’’တိ ဟိ ‘‘ပဉ္စ စိတ္တာ ဝိပါကာ’’တိအာဒီနိ ဝိယ နပုံသကရူပံ. ဣတ္ထိလိင်္ဂဘူတာ ဟိ သတသဒ္ဒေါ နတ္ထိ, တထာ ပုလ္လိင်္ဂဘူတော. ယဒိ စ ဒွိလိင်္ဂေါ သတသဒ္ဒေါ သိယာ[Pg.405], ဧဝဉ္စ သတိ ‘‘ပုရိသော, ကညာ’’တိ စ ဩကာရန္တပုလ္လိင်္ဂအာကာရန္တိတ္ထိရူပေဟိပိဘဝိတဗ္ဗံ. ရူပဒွယမ္ပိ သတသဒ္ဒဿ နတ္ထိ, တေန ဉာယတိ ‘‘သတသဒ္ဒေါ ဧကန္တနပုံသကော’’တိ. पाळि. येथे 'चत्तारि सतसहस्सानि' हे लिंगभेदाच्या कारणाने 'चळभिञ्ञा महिद्धिका' या दोन पदांशी समानाधिकरण आहे. कारण अशा ठिकाणी संख्यावाचक शब्द देखील नपुंसकलिंगीच असतो, म्हणून 'चत्तारि सतसहस्सानि', 'चळभिञ्ञा' आणि 'महिद्धिका' ही तिन्ही पदे समानाधिकरण आहेत. किंवा 'चळभिञ्ञा महिद्धिका' म्हणजे 'षडभिज्ञा प्राप्त आणि महाऋद्धिवान असलेल्यांचे' अशा षष्ठीच्या अर्थात प्रथमा विभक्तीचे रूप समजावे. या अर्थामध्ये 'चत्तारि सतसहस्सानि' हे संख्यावाचक बनते. 'तीणि सतसहस्सानि, नारियो समलङ्कता' (तीन लाख सुशोभित स्त्रिया) इत्यादींमध्येही हाच नियम लागू करावा. 'ता च सत्त सता भरिया, दास्यो सत्त सतानि चा' (आणि त्या सातशे पत्नी आणि सातशे दासी) हा पाळिपाठ आहे. येथे 'सता' हे 'सतानि' या नपुंसकलिंगी रूपाने ग्रहण करावे, स्त्रीलिंगी रूपाने नाही. कारण 'सता' हे 'पञ्च चित्ता विपाका' इत्यादींप्रमाणे नपुंसकलिंगी रूप आहे. स्त्रीलिंगी असलेला 'सत' शब्द अस्तित्वात नाही, तसेच तो पुल्लिंगीही नाही. जर 'सत' शब्द द्विलिंगी असता, तर 'पुरिसो, कञ्ञा' प्रमाणे अकारान्त पुल्लिंगी आणि आकारान्त स्त्रीलिंगी रूपे झाली असती. ही दोन्ही रूपे 'सत' शब्दाची नाहीत, यावरून हे सिद्ध होते की 'सत शब्द केवळ नपुंसकलिंगीच आहे'. နနု စ ဘော ‘‘တာ ဒေဝတာ သတ္တသတာ ဥဠာရာ’’တိ ဧတ္ထ သတသဒ္ဒေါ ဣတ္ထိလိင်္ဂေါ ဟုတွာ ဒိဿတီတိ? န, နပုံသကောယေဝါတိ. နနု စ ဘော ဒေဝတာသဒ္ဒေန သမာနာဓိကရဏောတိ? သစ္စံ သမာနာဓိကရဏော, တထာပိ နပုံသကောယေဝ. ဤဒိသေသု ဟိ သင်္ချာဝိသယေသု သမာနာဓိကရဏဘာဝေါ အပ္ပမာဏော. တထာ ဟိ ‘‘ပဉ္စ ပစ္စေကဗုဒ္ဓသတာနိ ဣမသ္မိံ ဣသိဂိလိသ္မိံ ပဗ္ဗတေ စိရဝါသိနော အဟေသု’’န္တိ နပုံသကလိင်္ဂေန ပုလ္လိင်္ဂဿ သမာနာဓိကရဏတာ ဒိဿတိ, တသ္မာ ‘‘တာ ဒေဝတာ သတ္တသတာ ဥဠာရာ’’တိ ဧတ္ထာပိ ‘‘သတ္တသတာနီ’’တိ နပုံသကဘာဝေါယေဝါတိ အဝဂန္တဗ္ဗော. ‘‘သတ္တ ဟတ္ထိသတေ ဒတွာ’’တိအာဒီသုပိ သတသဒ္ဒေါ နပုံသကောယေဝ. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. पण अहो! 'ता देवता सत्तसता उळारा' (त्या सातशे महान देवता) येथे 'सत' शब्द स्त्रीलिंगी म्हणून दिसत नाही का? नाही, तो नपुंसकलिंगीच आहे. पण अहो! तो 'देवता' शब्दाशी समानाधिकरण आहे ना? सत्य आहे, तो समानाधिकरण आहे, तरीही तो नपुंसकलिंगीच आहे. कारण अशा संख्यांच्या बाबतीत समानाधिकरण असणे हे प्रमाण मानले जात नाही. जसे की, 'पञ्च पच्चेकबुद्धसतानि इमस्मिं इसिगिलिस्मिं पब्बते चिरवासिनो अहेसुं' (पाचशे प्रत्येकबुद्ध या इसिगिलि पर्वतावर दीर्घकाळ राहणारे होते) येथे नपुंसकलिंगाचे पुल्लिंगाशी समानाधिकरण दिसते, म्हणून 'ता देवता सत्तसता उळारा' येथेही 'सत्तसतानि' असा नपुंसकलिंगी भावच आहे असे समजावे. 'सत्त हत्थिस्ते दत्वा' (सातशे हत्ती देऊन) इत्यादींमध्येही 'सत' शब्द नपुंसकलिंगीच आहे. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘နဝုတိကောဋိသဟဿေဟိ, ပရိဝါရေသိ မဟာမုနီ’’တိ ပါဠိ. ဧတ္ထ ‘‘နဝုတိကောဋိသဟဿေဟိ ဘိက္ခူဟီ’’တိ ဝါ ‘‘ဘိက္ခူနံ နဝုတိကောဋိသဟဿေဟီ’’တိ ဝါ သင်္ချေယျသင်္ချာပဓာနဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. 'नवुतिकोटिसहस्सेहि, परिवारेसि महामुनी' (नव्वद हजार कोटी भिक्खूंसह महामुनी वेढलेले होते) हा पाळिपाठ आहे. येथे 'नव्वद हजार कोटी भिक्खूंसह' किंवा 'भिक्खूंच्या नव्वद हजार कोटींसह' असा संख्यावाचक आणि संख्यय (ज्याची गणना करायची आहे तो) यांच्या प्राधान्यानुसार अर्थ घ्यावा. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘သတသဟဿဝဿာနိ, အာယု တဿ မဟေသိနော’’တိ ပါဠိ. ဧတ္ထ ‘‘သတသဟဿဝဿာနီ’’တိ ကာလဿ အစ္စန္တသံယောဂဝသေန ဥပယောဂဝစနံ. တထာ ‘‘ဒသဝဿသဟဿာနိ, အဂါရ’မဇ္ဈ သော ဝသီ’’တိ ပါဠိယမ္ပိ. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. 'सतसहस्सवस्सानि, आयु तस्स महेसिनो' (त्या महर्षींचे [बुद्धांचे] आयुष्य एक लाख वर्षे होते) हा पाळिपाठ आहे. येथे 'सतसहस्सवस्सानि' हे काळाच्या अत्यंतसंयोगाच्या (निरंतरतेच्या) अर्थाने द्वितीया विभक्तीचे रूप आहे. तसेच 'दसवस्ससहस्सानि, अगारमज्झ सो वसी' (तो दहा हजार वर्षे गृहस्थाश्रमात राहिला) या पाळिपाठातही हाच अर्थ आहे. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘ဣတော [Pg.406] သတသဟဿမှိ, ကပ္ပေ ဥပ္ပဇ္ဇိ နာယကော’’တိ ပါဠိ, ‘‘ဧကနဝုတေ ဣတော ကပ္ပေ’’တိ ပါဠိ စ. ဧတ္ထ သတသဟဿမှိ ကပ္ပေတိ သတသဟဿာနံ ကပ္ပာနံ မတ္ထကေ. ဧကနဝုတေ ကပ္ပေတိ ဧကနဝုတိယာ ကပ္ပာနံ မတ္ထကေတိ ဘုမ္မဝစနဿ သာမိဘုမ္မဝစနဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. တထာ ဟိ ‘‘ဘဂဝတိ ဗြဟ္မစရိယံ ဝုဿတီ’’တိ ဧတ္ထ ဘုမ္မဝစနဿ ‘‘ဘဂဝတော သန္တိကေ’’တိ သာမိဘုမ္မဝစနဝသေန အတ္ထော ဂဟိတော. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. 'इतो सतसहस्सम्हि, कप्पे उप्पज्जि नायको' (इथून एक लाख कप्पांपूर्वी नायक [बुद्ध] उत्पन्न झाले) हा पाळिपाठ, आणि 'एकनवुते इतो कप्पे' (इथून एक्याण्णव कप्पांपूर्वी) हा पाळिपाठ आहे. येथे 'सतसहस्सम्हि कप्पे' म्हणजे एक लाख कप्पांच्या समाप्तीनंतर (डोक्यावर). 'एकनवुते कप्पे' म्हणजे एक्याण्णव कप्पांच्या समाप्तीनंतर, असा सप्तमी विभक्तीचा अर्थ षष्ठी-सप्तमीच्या अर्थाने घ्यावा. जसे की, 'भगवति ब्रह्मचरियं वुस्सति' (भगवंतांच्या ठिकाणी ब्रह्मचर्य पाळले जाते) येथे सप्तमी विभक्तीचा अर्थ 'भगवंतांच्या सन्निध' असा षष्ठी-सप्तमीच्या अर्थाने घेतला आहे. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘ယဒိ တတ္ထ သဟဿာနိ, သတာနိ နဟုတာနိ စ; နေဝမှာကံ ဘယံ ကောစိ, ဝနေ ဝါဠေသု ဝိဇ္ဇတီ’’တိ 'यदि तत्थ सहस्सानि, सतानि नहुतानि च; नेवम्हाकं भयं कोचि, वने वाळेसु विज्जती' (जरी तेथे हजारो, शेकडो आणि लाखो हिंस्त्र श्वापदे असली, तरी वनातील त्या हिंस्त्र श्वापदांपासून आम्हाला थोडेही भय वाटत नाही) हा पाळिपाठ आहे. ပါဠိ. အယမေတဿာ အတ္ထော – တတ္ထ ဝနေ ဝါဠာနံ သဟဿာနိ စ သတာနိ စ နဟုတာနိ စ ယဒိ ဝိဇ္ဇန္တိ. အထ ဝါ သဟဿာနိ သတာနီတိ သတသဟဿာနိ, ဝါဠာနံ သတသဟဿာနိ စ နဟုတာနိ စ ယဒိ ဝိဇ္ဇန္တိ, ဧဝံ ဝိဇ္ဇန္တေသုပိ ဝါဠေသု ကောစီတိ ကွစိ. ကောစိသဒ္ဒေါ ဟိ ‘‘ကော တေ ဗလံ မဟာရာဇာ’’တိ ဧတ္ထ ကောသဒ္ဒေါ ဝိယ ကွသဒ္ဒတ္ထေ ဝတ္တတိ, နိမိတ္တတ္ထေ စာယံ နိဒ္ဒေသော. တေန ‘‘ကောစိ ကွစိ ကိသ္မိဉ္စိ ဝါဠေ ဧကဿပိ ဝါဠမိဂဿ ကာရဏာ နေဝမှာကံ ဘယံ ဝိဇ္ဇတီ’’တိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အထ ဝါ ကောစီတိ ကိဉ္စိ အပ္ပမတ္တကမ္ပိ. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဝါဠေသူ’’တိ နိမိတ္တတ္ထေ ဘုမ္မံ. ဝါဠာနံ ကာရဏာ အပ္ပမတ္တကမ္ပိ အမှာကံ ဘယံ န ဝိဇ္ဇတီတိ. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. पाळि. याचा हा अर्थ आहे – जर त्या वनात हिंस्त्र श्वापदांचे हजारो, शेकडो आणि लाखो (नहुत) असतील. किंवा 'सहस्सानि सतानि' म्हणजे लाखो, जर हिंस्त्र श्वापदांचे लाखो आणि अब्जो (नहुत) असतील, अशा प्रकारे हिंस्त्र श्वापदे असतानाही 'कोचि' म्हणजे कुठेही. कारण 'कोचि' हा शब्द 'को ते बलं महाराजा' येथील 'को' शब्दाप्रमाणे 'क्व' (कुठे) या अर्थाने वापरला आहे, आणि हा निर्देश निमित्त अर्थाने आहे. त्यामुळे 'कोचि म्हणजे कुठेही, कोणत्याही एका हिंस्त्र श्वापदाच्या कारणाने आम्हाला थोडेही भय वाटत नाही' असा अर्थ घ्यावा. किंवा 'कोचि' म्हणजे अगदी थोडेही. येथे 'वाळेसु' (हिंस्त्र श्वापदांमध्ये) हे निमित्त अर्थाने सप्तमी विभक्तीत आहे. हिंस्त्र श्वापदांच्या कारणाने आम्हाला थोडेही भय वाटत नाही. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू करावा. ‘‘သဗ္ဗံ သတသဟဿာနိ, ဆတ္တိံသပရိမဏ္ဍလံ; ဒသဉ္စေဝ သဟဿာနိ, အဍ္ဎုဍ္ဎာနိ သတာနိ စာ’’တိ सर्व मिळून छत्तीस लाख, दहा हजार आणि साडेतीनशे आहेत. အဋ္ဌကထာပါဌော[Pg.407]. ဧတ္ထ ယသ္မာ သဒ္ဒတော သမာနဝိဘတ္တိလိင်္ဂဝစနာနံ ပဒါနံ အသမာနဝိဘတ္တိလိင်္ဂဝစနာနံ ဝါ အတ္ထတော ပန သမာနာနံ ဒူရေ ဌိတာနမ္ပိ ဧကသမ္ဗန္ဓော ဟောတိ, ဣတရေသံ သမီပေ ဌိတာနမ္ပိ န ဟောတိ, တသ္မာ ‘‘သဗ္ဗ’’န္တိဒံ ‘‘ပရိမဏ္ဍလ’’န္တိမိနာ သမ္ဗန္ဓိတဗ္ဗံ. ‘‘ဆတ္တိံသာ’’တိ ဣဒံ ပန ‘‘သတသဟဿာနီ’’တိမိနာ သမ္ဗန္ဓိတဗ္ဗံ. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. हा अट्ठकथा-पाठ आहे. येथे ज्याअर्थी शब्दाच्या दृष्टीने समान विभक्ती, लिंग आणि वचन असलेल्या पदांचा किंवा असमान विभक्ती, लिंग आणि वचन असलेल्या पदांचा, परंतु अर्थाच्या दृष्टीने समान असलेल्या पदांचा दूर असूनही एकमेकांशी संबंध असतो, आणि इतरांचा जवळ असूनही संबंध नसतो, म्हणून 'सब्बं' (सर्व) या पदाचा 'परिमण्डलं' या पदाशी संबंध जोडला पाहिजे. 'छत्तिंस' (छत्तीस) या पदाचा संबंध 'सतसहस्सानि' (लाख) याच्याशी जोडला पाहिजे. हाच नियम इतरही अशाच प्रकारच्या ठिकाणी लागू केला पाहिजे. ‘‘ဒုဝေ သတသဟဿာနိ, စတ္တာရိ နဟုတာနိ စ; ဧတ္တကံ ဗဟလတ္တေန, သင်္ခါတာယံ ဝသုန္ဓရာ’’တိ दोन लाख आणि चाळीस हजार योजन जाडीची ही पृथ्वी मानली गेली आहे. အဋ္ဌကထာပါဌော. ဧတ္ထ ‘‘ဒုဝေ’’တိ ဝိသေသနံ, ‘‘သတသဟဿာနီ’’တိ ဝိသေသိတဗ္ဗံ. တထာ ‘‘စတ္တာရီ’’တိ ဝိသေသနံ, ‘‘နဟုတာနီ’’တိ ဝိသေသိတဗ္ဗံ. တထာ ဟိ ‘‘သတသဟဿာနိ နဟုတာနိ စာ’’တိ ဣမာနိ ‘‘ဒုဝေ စတ္တာရီ’’တိ ဣမေဟိ ဝိသေသိတဗ္ဗတ္တာ ‘‘ဒွိသတသဟဿံ စတုနဟုတ’’န္တိ အတ္ထပ္ပကာသနာနိ ဘဝန္တိ. ဧဝံ သန္တေပိ ‘‘ဒုဝေ’’ဣစ္စာဒီနံ သင်္ချာသဒ္ဒါနံ ‘‘သတသဟဿာနီ’’တိအာဒီဟိ သင်္ချာသဒ္ဒေဟိ သမာနာဓိကရဏတာ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ န ဝုတ္တာ. ယသ္မာ ပန ယထာ ‘‘ဒုဝေ ပုထုဇ္ဇနာ ဝုတ္တာ. သတသဟဿံ ဘိက္ခူ’’တိအာဒီသု သမာနာဓိကရဏတာ လဗ္ဘတိ ဒဗ္ဗဝါစကတ္တာ ဝိသေသိတဗ္ဗပဒါနံ, န တထာ ‘‘ဒုဝေ သတသဟဿာနီ’’တိအာဒီသု အဒဗ္ဗဝါစကတ္တာ ဝိသေသိတဗ္ဗပဒါနံ, တသ္မာ ဤဒိသေသု ဌာနေသု သမာနာဓိကရဏတာ န ဣစ္ဆိတဗ္ဗာ ယုတ္တိယာ အဘာဝတော. ယဒိ ဧဝံ ‘‘ကုသလာ, ရူပံ, စက္ခုမာ’’တိအာဒီနံ ဝိယ ဣမေသမညမညသမ္ဗန္ဓရဟိတာ သိယာတိ? န, ဝိသေသနဝိသေသိတဗ္ဗဘာဝေန ဂဟိတတ္တာ. ယဇ္ဇေဝံ သမာနာဓိကရဏဘာဝေါ လဒ္ဓဗ္ဗောတိ? န, နိယမာဘာဝတော. ဧကန္တေန ဟိ [Pg.408] ဂုဏဂုဏီနံယေဝ ဝိသေသနဝိသေသိတဗ္ဗာနံ သမာနာဓိကရဏဘာဝေါ, န ဣတရေသံ ဝိသေသနဝိသေသိတဗ္ဗတ္တေပိ. हा अट्ठकथा-पाठ आहे. येथे 'दुवे' (दोन) हे विशेषण आहे आणि 'सतसहस्सानि' (लाख) हे विशेष्य आहे. तसेच 'चत्तारि' (चार) हे विशेषण आहे आणि 'नहुतानि' (नहुत) हे विशेष्य आहे. कारण 'सतसहस्सानि नहुतानि च' ही पदे 'दुवे चत्तारि' या पदांद्वारे विशेषित होत असल्यामुळे 'दोन लाख आणि चार नहुत' असा अर्थ प्रकट करतात. असे असूनही, 'दुवे' इत्यादी संख्यावाचक शब्दांचे 'सतसहस्सानि' इत्यादी संख्यावाचक शब्दांशी समानाधिकरणत्व पूर्वाचार्यांनी सांगितलेले नाही. कारण ज्याप्रमाणे 'दुवे पुथुज्जना' (दोन पृथग्जन) किंवा 'सतसहस्सं भिक्खू' (एक लाख भिक्षू) इत्यादींमध्ये विशेष्य पदे द्रव्यवाचक (वस्तूवाचक) असल्यामुळे समानाधिकरणत्व प्राप्त होते, त्याप्रमाणे 'दुवे सतसहस्सानि' इत्यादींमध्ये विशेष्य पदे द्रव्यवाचक नसल्यामुळे समानाधिकरणत्व प्राप्त होत नाही. म्हणून अशा ठिकाणी युक्तीच्या (तर्काच्या) अभावामुळे समानाधिकरणत्वाची इच्छा करू नये. जर असे असेल, तर 'कुसला, रूपं, चक्खुमा' इत्यादींप्रमाणे यांचा परस्परांशी संबंध राहणार नाही का? नाही, कारण ते विशेषण-विशेष्य भावाने ग्रहण केले गेले आहेत. जर असे असेल, तर समानाधिकरण भाव प्राप्त झाला पाहिजे का? नाही, कारण तसा नियम नाही. केवळ गुण आणि गुणी यांच्यातील विशेषण-विशेष्य भावामध्येच समानाधिकरण भाव असतो, इतरांमध्ये विशेषण-विशेष्य भाव असूनही तो नसतो. တတ္ထ ‘‘ဧတ္တက’’န္တိ ပမာဏဝစနံ. ‘‘ဗဟလတ္တေနာ’’တိ ဝိသေသနေ တတိယာ. ဥဘယေန ဣမမတ္ထံ ဒဿေတိ ‘‘အယံ ဝသုန္ဓရာ ဗဟလတ္တေန ယောဇနာနံ ဒုဝေ သတသဟဿာနိ စတ္တာရိ နဟုတာနိ စ ဧတ္တကံ သင်္ခါတာ’’တိ. ‘‘ဧတ္တက’’န္တိ ပဒဿ စ ‘‘ဒုဝေ သတသဟဿာနိ စတ္တာရိ နဟုတာနိ စာ’’တိ ဣမေဟိ ဝါ ‘‘ဝသုန္ဓရာ’’တိ ဣမိနာ ဝါ သမာနာဓိကရဏတာ န ဣစ္ဆိတဗ္ဗာ. ဧတ္တကန္တိ ဟိ ဘာဝနပုံသကံ, ယံ သဒ္ဒသတ္ထေ ကြိယာဝိသေသနန္တိ ဝဒန္တိ. တဿ ‘‘ဧတ္တကေန ပမာဏေန’’ဣစ္စေဝတ္ထော. အပိစ ‘‘ဒုဝေ သတသဟဿာနိ စတ္တာရိ န ဟုတာနိ စာ’’တိ ဣမေသမ္ပိ ‘‘ဝသုန္ဓရာ’’တိ ဣမိနာ သမာနာဓိကရဏတာ န ဣစ္ဆိတဗ္ဗာ ‘‘ဘိက္ခူနံ သတ’’န္တိ ဧတ္ထ သတသဒ္ဒဿ ဝိယ သင်္ချာဝစနမတ္တတ္တာ. တထာ ဟိ ‘‘ဧတ္တက’’န္တိ ဝုတ္တံ. ‘‘သင်္ခါတာ’’တိ ပန ‘‘အယ’’န္တိ စ ဣမေသံ ‘‘ဝသုန္ဓရာ’’တိ ဣမိနာ သမာနာဓိကရဏတာ လဗ္ဘတိ. သဗ္ဗောပါယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. त्यामध्ये 'एत्तकं' (एवढे) हे परिमाणवाचक पद आहे. 'बहलत्तेन' (जाडीने) या विशेषणामध्ये तृतीया विभक्ती आहे. या दोन्ही पदांद्वारे हा अर्थ दर्शविला जातो की, "ही पृथ्वी जाडीने दोन लाख आणि चार नहुत योजन एवढी मोजली गेली आहे." 'एत्तकं' या पदाचे 'दुवे सतसहस्सानि चत्तारि nहुतानि च' या पदांशी किंवा 'वसुन्धरा' या पदाशी समानाधिकरणत्व मानू नये. कारण 'एत्तकं' हे भाव-नपुंसकलिंगी पद आहे, ज्याला व्याकरणशास्त्रात क्रियाविशेषण म्हणतात. त्याचा अर्थ 'एवढ्या परिमाणाने' असाच होतो. शिवाय, 'दुवे सतसहस्सानि चत्तारि नहुतानि च' यांचेही 'वसुन्धरा' या पदाशी समानाधिकरणत्व मानू नये, कारण 'भिक्खूनां सतं' (भिक्षूंचे शंभर) यातील 'सत' शब्दाप्रमाणे हे केवळ संख्यावाचक आहे. म्हणूनच 'एत्तकं' असे म्हटले आहे. परंतु 'सङ्खाता' (मोजली गेलेली) आणि 'अयं' (ही) यांचे 'वसुन्धरा' या पदाशी समानाधिकरणत्व प्राप्त होते. हाच नियम इतरही अशाच प्रकारच्या ठिकाणी सर्व प्रकारे लागू केला पाहिजे. ‘‘ဒသေတ္ထ ရာဇိယော သေတာ, ဒဿနီယာ မနောရမာ; ဆ ပိင်္ဂလာ ပန္နရသ, ဟလိဒ္ဒါ တာ စတုဒ္ဒသာ’’တိ यात दहा पांढऱ्या रेषा आहेत, ज्या दर्शनीय आणि मनोरम आहेत; सहा पिंगट आहेत, पंधरा पिवळ्या आहेत आणि त्या चौदा आहेत. ပါဠိ. ဧတ္ထ ဆ ပိင်္ဂလာ ပန္နရသာတိ ဆ စ ပန္နရသ စာတိ ဧကဝီသတိ ပိင်္ဂလာ ရာဇိယောတိ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. हा पाळी-पाठ आहे. येथे 'सहा पिंगट आणि पंधरा' याचा अर्थ 'सहा आणि पंधरा मिळून एकवीस पिंगट रेषा' असा अर्थ ग्रहण केला पाहिजे. တထာ – तसेच – ‘‘ပုတ္တာပိ တဿ ဗဟဝေါ, ‘ဧကနာမာ’တိ မေ သုတံ; အသီတိ ဒသ ဧကော စ, ဣန္ဒနာမာ မဟဗ္ဗလာ’’တိ त्याला अनेक पुत्रही होते, जे 'एकच नाव' केलेले होते असे मी ऐकले आहे; ऐंशी, दहा आणि एक (एकूण एक्याण्णव) महाबळवान पुत्र 'इंद्र' नावाचे होते. ပါဠိ[Pg.409]. ဧတ္ထ ပန ‘‘ဧကနဝုတီ’’တိ ဝတ္တဗ္ဗေ ‘‘အသီတိ ဒသ ဧကော စာ’’တိ ဝုတ္တံ. ဝိစိတြသဒ္ဒရစနဉှိ ပါဝစနံ. အယံ နယော အညေသုပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. हा पाळी-पाठ आहे. येथे 'एकनवुती' (एक्याण्णव) असे म्हणायचे असताना 'असीiti दस एको च' (ऐंशी, दहा आणि एक) असे म्हटले आहे. कारण बुद्धवचनात शब्दांची रचना विचित्र असते. हाच नियम इतरही अशाच प्रकारच्या ठिकाणी लागू केला पाहिजे. ‘‘တိံသပုရိသနာဝုတျော, သဗ္ဗေဝေကေကနိစ္စိတာ; ယေသံ သမံ န ပဿာမိ, ကေဝလံ မဟိ’မံ စရ’’န္တိ तीस हजार आणि नऊशे पुरुष, जे सर्व आपापल्या कलेत निपुण आहेत; ज्यांच्या तोडीचा मी या संपूर्ण पृथ्वीवर फिरताना कोणालाही पाहत नाही. ပါဠိ. ဧတ္ထ ‘‘ပုရိသာနံ တိံသသဟဿာနိ နဝုတိ စ သတာနိ တိံသ နာဝုတျော’’တိ ဝုစ္စန္တိ. ဣမသ္မိံ ပန ဌာနေ တိံသသဒ္ဒတော သဟဿသဒ္ဒဿ နဝုတိသဒ္ဒတော စ သတသဒ္ဒဿ လောပံ ကတွာ ‘‘တိံသ နာဝုတျော’’တိ ဝုတ္တန္တိ န ဂဟေတဗ္ဗံ. ဧဝဉှိ ဂဟဏေ သတိ ယတ္ထ ကတ္ထစိပိ ဧဒိသီ သဒ္ဒရစနာ ကာတဗ္ဗာ သိယာ, ကတာယ စ ဧဒိသာယ သဒ္ဒရစနာယ အတ္ထာဝဂမော ဝိနာ ဥပဒေသေန သုဏန္တာနံ န သိယာ, တသ္မာ နေဝံ ဂဟေတဗ္ဗံ. ဧဝံ ပန ဂဟေတဗ္ဗံ – ‘‘တိံသ နာဝုတျော’’တိ ဣဒံ လောကသင်္ကေတရူဠှံ ဝစနံ, သင်္ကေတရူဠှဿ ပန ဝစနဿတ္ထော ယသ္မာ ဂဟိတပုဗ္ဗသင်္ကေတေဟိ သုတွာ ဉာယတေ, န ဥပဒေသတော, တသ္မာ ဗြဟ္မဒတ္တေန ရညာ ဝုတ္တကာလေပိ သတ္ထာရာ တံ ကထံ အာဟရိတွာ ဝုတ္တကာလေပိ သဗ္ဗေ မနုဿာ ဝိနာပိ ဥပဒေသေန ဝစနတ္ထံ ဇာနန္တီတိ ဂဟေတဗ္ဗံ. हा पाळी-पाठ आहे. येथे 'पुरुषांचे तीस हजार आणि नव्वद शंभर (नऊ हजार) यांना तीस नावुत्यो' असे म्हटले जाते. परंतु या ठिकाणी 'तिंस' शब्दातून 'सहस्स' शब्दाचा आणि 'नवुति' शब्दातून 'सत' शब्दाचा लोप करून 'तिंस नावुत्यो' असे म्हटले आहे, असे मानू नये. कारण असे मानल्यास कुठेही अशी शब्दरचना केली जाऊ शकते, आणि अशी शब्दरचना केल्यावर उपदेशाशिवाय ऐकणाऱ्यांना त्याचा अर्थ समजणार नाही, म्हणून असे मानू नये. तर याप्रमाणे मानले पाहिजे – 'तिंस नावुत्यो' हे लोकसंकेताने रूढ झालेले वचन आहे. संकेत-रूढ वचनाचा अर्थ पूर्वी ग्रहण केलेल्या संकेतानुसार ऐकून समजतो, उपदेशावरून नाही. म्हणूनच ब्रह्मदत्त राजाने म्हटल्या वेळी किंवा शास्त्यांनी (बुद्धांनी) ती कथा उद्धृत करून सांगितल्या वेळीही सर्व लोग उपदेशाशिवायच या वचनाचा अर्थ जाणत होते, असे मानले पाहिजे. တိံသဉ္စေဝ သဟဿာနိ, နဝုတိ စ သတာနိ တု; တိံသ နာဝုတိယော နာမ, ဝုတ္တာ ဥမင်္ဂဇာတကေ. तीस हजार आणि नव्वद शंभर (नऊ हजार) यांनाच उमंग जातकात 'तीस नावुतियो' असे म्हटले आहे. ယသ္မာ ပါဝစနေ သန္တိ, နယာ စေဝ အစိန္တိယာ; ဝေါဟာရာ စ သုဂုဠှတ္ထာ, ဒယာပန္နေန ဒေသိတာ. ज्याअर्थी बुद्धवचनामध्ये अचिंत्य असे नियम आहेत आणि कारुणिक बुद्धांनी अत्यंत गूढ अर्थ असलेले व्यवहार (शब्दप्रयोग) उपदेशिले आहेत. တသ္မာ သာဋ္ဌကထေ ဓီရော, ဂမ္ဘီရေ ဇိနဘာသိတေ; ဥပဒေသံ သဒါ ဂဏှေ, ဂရုံ သမ္မာ ဥပဋ္ဌဟံ. म्हणून धीर पुरुषाने अट्ठकथेसह असलेल्या गंभीर अशा जिन-भाषितामध्ये (बुद्धवचनात), गुरूंची योग्य प्रकारे सेवा करत नेहमी उपदेश ग्रहण करावा. ဂရူပဒေသဟီနော ဟိ, အတ္ထသာရံ န ဝိန္ဒတိ; အတ္ထသာရဝိဟီနော သော, သဒ္ဓမ္မာ ပရိဟာယတိ. कारण गुरूंच्या उपदेशापासून वंचित असलेला मनुष्य अर्थाचे सार प्राप्त करू शकत नाही; आणि अर्थाच्या सारापासून वंचित असलेला तो सद्धम्मापासून भ्रष्ट होतो. ဂရူပဒေသလာဘီ [Pg.410] စ, အတ္ထသာရသမာယုတော; သဒ္ဓမ္မံ ပရိပါလေန္တော, သဒ္ဓမ္မသ္မာ န ဟာယတိ. परंतु गुरूंचा उपदेश प्राप्त करणारा आणि अर्थाच्या साराने युक्त असलेला मनुष्य सद्धम्माचे परिपालन करत सद्धम्मापासून कधीही भ्रष्ट होत नाही. သဒ္ဓမ္မတ္ထာယ မေ တသ္မာ, သင်္ချာမာလာပိ ဘာသိတာ; သပ္ပယောဂါ ယထာယောဂံ, သဟေဝတ္ထဝိနိစ္ဆယာ. म्हणून मी सद्धम्माच्या रक्षणासाठी अर्थ-निश्चयासह आणि योग्य प्रयोगांसह ही 'संख्यामाला' देखील सांगितली आहे. ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ अशा प्रकारे, अट्ठकथेसह असलेल्या नऊ अंगांच्या त्रिपिटकातील वचनमार्गांमध्ये विद्वानांच्या... ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ ...कौशल्यासाठी रचलेल्या 'सद्दनीति' प्रकरणामध्ये... သဝိနိစ္ဆယော သင်္ချာနာမာနံ နာမိကပဒမာလာဝိဘာဂေါ ...संख्यावाचक नामांच्या निर्णयांसह नाम-पदमालेचा विभाग... နာမ ...नावाचा... တေရသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. ...तेरावा परिच्छेद समाप्त झाला. ၁၄. အတ္ထတ္တိကဝိဘာဂ १४. अत्थ-त्तिक विभाग ဘူဓာတု တာယ နိပ္ဖန္န-ရူပဉ္စာတိ ဣဒံ ဒွယံ; ကတွာ ပဓာနမမှေဟိ, သဗ္ဗမေတံ ပပဉ္စိတံ. 'भू' धातू आणि त्यापासून निष्पन्न झालेले रूप या दोन्हींना मुख्य मानून आम्ही या सर्वाचा विस्तार केला आहे. ဘဝတိဿ ဝသာ ဒါနိ, ဝက္ခာမတ္ထတ္တိကံ ဝရံ; အတ္ထုဒ္ဓါရော တုမန္တဉ္စ, တွာဒိယန္တံ တိကံ ဣဓ. आता 'भवति' च्या प्रभावाने आम्ही येथे श्रेष्ठ अशा 'अत्थ-त्तिक', 'अत्थुद्धार', 'तुमन्त' आणि 'त्वादियन्त' या त्रिकांचे वर्णन करू. တသ္မာ တာဝ ဘူဓာတုတော ပဝတ္တဿ ဘူတသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော နီယတေ – म्हणून सर्वप्रथम 'भू' धातूपासून उत्पन्न झालेल्या 'भूत' शब्दाचा अर्थ-उद्धार सादर केले जात आहे – ခန္ဓသတ္တာမနုဿေသု, ဝိဇ္ဇမာနေ စ ဓာတုယံ; ခီဏာသဝေ ရုက္ခာဒိမှိ, ဘူတသဒ္ဒေါ ပဝတ္တတိ. स्कंध (पंचस्कंध), प्राणी (सत्त्व), अमनुष्य (यक्ष-राक्षस इत्यादी), विद्यमान (अस्तित्वात असलेले), धातू, क्षीणास्रव (अर्हत) आणि वृक्ष इत्यादींच्या संदर्भात 'भूत' हा शब्द वापरला जातो. ဥပ္ပာဒေ စာပိ ဝိညေယျော, ဘူတသဒ္ဒေါ ဝိဘာဝိနာ; ဝိပုလေ သောပသဂ္ဂေါယံ, ဟီဠနေ ဝိဓမေပိ စ; ပရာဇယေ ဝေဒိယနေ, နာမေ ပါကဋတာယ စ. तसेच, सुज्ञ पुरुषाने 'भूत' हा शब्द उत्पत्ती (उत्पाद), उपसर्गासह विपुल (पुष्कळ), निंदा (अवहेलना), विनाश, पराजय, वेदन (अनुभवणे), संज्ञा (नाव) आणि प्रगटता (स्पष्टता) या अर्थांमध्येही समजून घ्यावा. ဝုတ္တဉှေတံ – ဘူတသဒ္ဒေါ ပဉ္စက္ခန္ဓာမနုဿဓာတုဝိဇ္ဇမာနခီဏာသဝသတ္တရုက္ခာဒီသု ဒိဿတိ. ‘‘ဘူတမိဒန္တိ ဘိက္ခဝေ သမနုပဿထာ’’တိအာဒီသု ဟိ အယံ ပဉ္စက္ခန္ဓေသု ဒိဿတိ. ‘‘ယာနီဓ [Pg.411] ဘူတာနိ သမာဂတာနီ’’တိ ဧတ္ထ အမနုဿေ. ‘‘စတ္တာရော ခေါ ဘိက္ခု မဟာဘူတာ ဟေတူ’’တိ ဧတ္ထ ဓာတူသု. ‘‘ဘူတသ္မိံ ပါစိတ္တိယ’’န္တိအာဒီသု ဝိဇ္ဇမာနေ. ‘‘ယော စ ကာလဃသော ဘူတော’’တိ ဧတ္ထ ခီဏာသဝေ. ‘‘သဗ္ဗေဝ နိက္ခိပိဿန္တိ, ဘူတာ လောကေ သမုဿယ’’န္တိ ဧတ္ထ သတ္တေ. ‘‘ဘူတဂါမပါတဗျတာယာ’’တိ ဧတ္ထ ရုက္ခာဒီသူတိ. မူလပရိယာယသုတ္တဋ္ဌကထာယ ဝစနံ ဣဒံ. ဋီကာယမာဒိသဒ္ဒေန ဥပ္ပာဒါဒီနိ ဂယှရေ. ဝုတ္တဉှေတံ – ‘‘ဇာတံ ဘူတံ သင်္ခတ’’န္တိအာဒီသု ဘူတသဒ္ဒေါ ဥပ္ပာဒေ ဒိဿတိ. သဥပသဂ္ဂေါ ပန ‘‘ပဘူတမရိယော ပကရောတိ ပုည’’န္တိအာဒီသု ဝိပုလေ. ‘‘ယေဘုယျေန ဘိက္ခူနံ ပရိဘူတရူပေါ’’တိအာဒီသု ဟီဠနေ. ‘‘သမ္ဘူတော သာဏဝါသီ’’တိအာဒီသု ပညတ္တိယံ. ‘‘အဘိဘူတော မာရော ဝိဇိတော သင်္ဂါမော’’တိအာဒီသု ဝိဓမနေ. ‘‘ပရာဘူတရူပေါခေါ အယံ အစေလော ပါထိကပုတ္တော’’တိအာဒီသု ပရာဇယေ. ‘‘အနုဘူတံ သုခဒုက္ခ’’န္တိအာဒီသု ဝေဒိယနေ. ‘‘ဝိဘူတံ ပညာယာ’’တိအာဒီသု ပါကဋီကရဏေ ဒိဿတိ, တေ သဗ္ဗေ ‘‘ရုက္ခာဒီသူ’’တိအာဒိသဒ္ဒေန သင်္ဂဟိတာတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗာတိ. तसेच हे म्हटले आहे – 'भूत' हा शब्द पंचस्कंध, अमनुष्य, धातू, विद्यमान, क्षीणास्रव, प्राणी, वृक्ष इत्यादींच्या अर्थांमध्ये दिसून येतो. 'भिक्खूहो! हे उत्पन्न झाले आहे (भूतमिदं), असे तुम्ही पाहता का?' इत्यादी वाक्यांमध्ये हा शब्द पंचस्कंदांच्या अर्थात दिसून येतो. 'येथे जे भूत (अमनुष्य) एकत्र आले आहेत' यामध्ये अमनुष्यांच्या अर्थात आहे. 'भिक्खू, चार महाभूते हेच हेतू आहेत' यामध्ये धातूंच्या अर्थात आहे. 'विद्यमान (खऱ्या) गोष्टीबाबत पाचित्तिय होते' इत्यादींमध्ये विद्यमान (अस्तित्वात असलेल्या) अर्थात आहे. 'जो काळाचा घास घेणारा भूत (क्षीणास्रव) आहे' यामध्ये क्षीणास्रवाच्या अर्थात आहे. 'जगातील सर्वच प्राणी (भूत) आपले शरीर टाकून देतील' यामध्ये प्राण्यांच्या अर्थात आहे. 'वनस्पती समूहाचा (भूतगाम) नाश केल्यास' यामध्ये वृक्ष इत्यादींच्या अर्थात आहे. हे मूलपरियायसुत्त अट्ठकथेचे (टीकेचे) वचन आहे. उपटीकेमध्ये (टीका) 'आदि' शब्दाने उत्पत्ती (उत्पाद) इत्यादींचा संग्रह केला जातो. तसेच हे म्हटले आहे – 'जात, भूत, संखत' इत्यादींमध्ये 'भूत' शब्द उत्पत्तीच्या (उत्पाद) अर्थात दिसून येतो. उपसर्गासह 'पभूतं अरियो पकरोति पुञ्ञं' (आर्य पुरुष विपुल पुण्याची कमाई करतो) इत्यादींमध्ये विपुल (पुष्कळ) या अर्थात आहे. 'बहुतांश भिक्खूंच्या दृष्टीने तो तिरस्करणीय रूपाचा (परिभूतरूपो) आहे' इत्यादींमध्ये निंदा (अवहेलना) या अर्थात आहे. 'संभूत साणवासी' इत्यादींमध्ये प्रज्ञप्ती (संज्ञा) या अर्थात आहे. 'मार पराभूत (अभिभूत) झाला, युद्ध जिंकले गेले' इत्यादींमध्ये विनाश (पराभव करणे) या अर्थात आहे. 'हा अचेलक पाथिकपुत्त पराभूत (पराभूतरूप) झाला आहे' इत्यादींमध्ये पराजयाच्या अर्थात आहे. 'सुख-दुःखाचा अनुभव घेतला (अनुभूतं)' इत्यादींमध्ये वेदन (अनुभवणे) या अर्थात आहे. 'प्रज्ञेने स्पष्ट झाले (विभूतं)' इत्यादींमध्ये प्रगटीकरणाच्या (स्पष्ट करण्याच्या) अर्थात दिसून येतो. हे सर्व 'वृक्ष इत्यादी' या शब्दाने समाविष्ट केले आहेत, असे समजावे. ဣဒါနိ တုမန္တပဒါနိ ဝုစ္စန္တေ – आता 'तुं' प्रत्ययान्त (तुमुन्-प्रत्ययान्त) पदे सांगितली जात आहेत – ဘဝိတုံ, ဥဗ္ဘဝိတုံ, သမုဗ္ဘဝိတုံ, ပဘဝိတုံ, ပရာဘဝိတုံ, အတိဘဝိတုံ, သမ္ဘဝိတုံ, ဝိဘဝိတုံ, ဘောတုံ, သမ္ဘောတုံ, ဝိဘောတုံ, ပါတုဘဝိတုံ, ပါတုဗ္ဘဝိတုံ ဝါ, ပါတုဘောတုံ. ဣမာနိ အကမ္မကာနိ တုမန္တပဒါနိ. भवितुं, उब्भवितुं, समुब्भवितुं, पभवितुं, पराभवितुं, अतिभवितुं, सम्भवितुं, विभवितुं, भोतुं, सम्भोतुं, विभोतुं, पातुभवितुं, पातुब्भवितुं किंवा पातुभोतुं. ही अकर्मक 'तुं'-प्रत्ययान्त पदे आहेत. ပရိဘောတုံ [Pg.412] ပရိဘဝိတုံ, အဘိဘောတုံ အဘိဘဝိတုံ, အဓိဘောတုံ အဓိဘဝိတုံ, အတိဘောတုံ အတိဘဝိတုံ, အနုဘောတုံ အနုဘဝိတုံ, သမနုဘောတုံ သမနုဘဝိတုံ, အဘိသမ္ဘောတုံ အဘိသမ္ဘဝိတုံ. ဣမာနိ သကမ္မကာနိ တုမန္တပဒါနိ, သဗ္ဗာနေတာနိ သုဒ္ဓကတ္တရိ ဘဝန္တိ. परिभोतुं परिभवितुं, अभिभोतुं अभिभवितुं, अधिभोतुं अधिभवितुं, अतिभोतुं अतिभवितुं, अनुभोतुं अनुभवितुं, समनुभोतुं समनुभवितुं, अभिसम्भोतुं अभिसम्भवितुं. ही सकर्मक 'तुं'-प्रत्ययान्त पदे आहेत, ही सर्व कर्तरी प्रयोगात होतात. ‘‘ဘာဝေတုံ, ပဘာဝေတုံ, သမ္ဘာဝေတုံ, ဝိဘာဝေတုံ, ပရိဘာဝေတုံ’’ဣစ္စေဝမာဒီနိ ဟေတုကတ္တရိ တုမန္တပဒါနိ, သဗ္ဗာနိပိ ဟေတုကတ္တရိ တုမန္တပဒါနိ သကမ္မကာနိယေဝ ဘဝန္တိ. ဥဒ္ဒေသောယံ. “भावेतुं, पभावेतुं, सम्भावेतुं, विभावेतुं, परिभावेतुं” इत्यादी प्रयोजक (कारित) 'तुं'-प्रत्ययान्त पदे आहेत, ही सर्व प्रयोजक 'तुं'-प्रत्ययान्त पदे सकर्मकच असतात. हा उद्देश (संक्षिप्त निर्देश) आहे. တတြ သမာနတ္ထပဒေသု ဧကမေဝါဒိပဒံ ဂဟေတွာ နိဒ္ဒေသော ကာတဗ္ဗော – ဘဝိတုန္တိ ဟောတုံ ဝိဇ္ဇိတုံ ပညာယိတုံ သရူပံ လဘိတုံ. ဧတ္ထ ဝုတ္တနယာနုသာရေန သေသာနမ္ပိ တုမန္တာနံ နိဒ္ဒေသော ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗော, သဗ္ဗာနိ တုမန္တပဒါနိ စတုတ္ထိယတ္ထေ ဝတ္တန္တိ ‘‘တွံ မမ စိတ္တမညာယ, နေတ္တံ ယာစိတုမာဂတော’’တိ ဧတ္ထ ဝိယ. ယာစိတုန္တိ ဟိ ယာစနတ္ထာယာတိ အတ္ထော. တသ္မာ ဘဝိတုန္တိအာဒီနမ္ပိ ‘‘ဘဝနတ္ထာယာ’’တိ ဝါ ‘‘ဘဝနတ္ထ’’န္တိ ဝါ ‘‘ဘဝနာယာ’’တိ ဝါ အာဒိနာ အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. အပိစ ‘‘နေက္ခမ္မံ ဒဋ္ဌု ခေမတော’’တိ ဧတ္ထ ‘‘ဒဋ္ဌု’’န္တိ ပဒဿ ‘‘ဒိသွာ’’တိ အတ္ထဒဿနတော ယထာရဟံ တုမန္တာနိ တွာသဒ္ဒန္တပဒတ္ထဝသေနပိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. ဧတာနိ စ နိပါတပဒေသု သင်္ဂဟံဂစ္ဆန္တိ. ဝုတ္တဉှိ နိရုတ္တိပိဋကေ နိပါတပဒပရိစ္ဆေဒေ ‘‘တုံ ဣတိ စတုတ္ထိယာ’’တိ. တတြာယမတ္ထော ‘‘တုံ ဣတိ ဧတဒန္တော နိပါတော စတုတ္ထိယာ အတ္ထေ ဝတ္တတီ’’တိ. त्यामध्ये, समान अर्थ असलेल्या पदांपैकी केवळ पहिलेच पद घेऊन निर्देश केला पाहिजे – जसे की 'भवितुं' म्हणजे 'होतुं' (होण्यासाठी), 'विज्जितुं' (विद्यमान असण्यासाठी), 'पञ्ञायितुं' (प्रकट होण्यासाठी), 'सरूपं लभितुं' (स्वतःचे रूप प्राप्त करण्यासाठी). येथे सांगितलेल्या पद्धतीनुसार इतरही 'तुं'-प्रत्ययान्त पदांचा निर्देश सविस्तर करावा. सर्व 'तुं'-प्रत्ययान्त पदे चतुर्थी विभक्तीच्या अर्थात वापरली जातात, जसे की 'तू माझे मन जाणून, डोळे मागण्यासाठी आला आहेस' (त्वं मम चित्तमञ्ञाय, नेत्तं याचितुमागतो) या वाक्यात. कारण 'याचितुं' चा अर्थ 'याचना करण्यासाठी' (याचनत्थाय) असा आहे. म्हणून 'भवितुं' इत्यादींचा अर्थही 'होण्यासाठी' (भवनत्थाय किंवा भवनत्थं किंवा भवनाय) असा घ्यावा. शिवाय, 'नेक्खम्मं दट्ठु खेमतो' (नैष्क्रम्याला क्षेमकारक पाहून) येथे 'दट्ठुं' या पदाचा अर्थ 'दिसवा' (पाहून) असा दिसत असल्यामुळे, योग्यतेनुसार 'तुं'-प्रत्ययान्त पदांचा अर्थ 'त्वा'-प्रत्ययान्त (पूर्वकालवाचक) पदांच्या अर्थानुसारही घेतला पाहिजे. आणि ही पदे निपातांमध्ये समाविष्ट होतात. निरुक्तिपिटकातील निपातपद परिच्छेदात म्हटले आहे – 'तुं इति चतुत्थिया' (तुं हा चतुर्थीच्या अर्थात आहे). त्याचा अर्थ असा आहे – 'तुं' हा अंत असलेला निपात चतुर्थी विभक्तीच्या अर्थात वापरला जातो. တုမန္တကထာ သမတ္တာ. 'तुं'-प्रत्ययान्त पदांची चर्चा समाप्त झाली. ဣဒါနိ [Pg.413] တွာဒိယန္တပဒါနိ ဝုစ္စန္တေ – आता 'त्वा' इत्यादी प्रत्ययान्त (त्वा-प्रत्ययान्त) पदे सांगितली जात आहेत – ဘဝိတွာ, ဘဝိတွာန, ဘဝိတုန, ဘဝိယ, ဘဝိယာန. ဥဗ္ဘဝိတွာ, ဥဗ္ဘဝိတွာန, ဥဗ္ဘဝိတုန, ဥဗ္ဘဝိယ, ဥဗ္ဘဝိယာန. ဧသ နယော ‘‘သမုဗ္ဘဝိတွာ, ပရာဘဝိတွာ, သမ္ဘဝိတွာ, ဝိဘဝိတွာ, ပါတုဗ္ဘဝိတွာ’’တိ ဧတ္ထာပိ. ဣမာနိ အကမ္မကာနိ ဥဿုက္ကနတ္ထာနိ တွာဒိယန္တပဒါနိ. भवित्वा, भवित्वान, भवितुन, भविय, भवियान. उब्भवित्वा, उब्भवित्वान, उब्भवितुन, उब्भविय, उब्भवियान. हाच नियम 'समुब्भवित्वा, पराभवित्वा, सम्भवित्वा, विभवित्वा, पातुब्भवित्वा' यामध्येही लागू होतो. ही अकर्मक आणि उस्सुक्कन-अर्थी (क्रियाशील अर्थाची) 'त्वा'-प्रत्ययान्त पदे आहेत. ဘုတွာ, ဘုတွာန, ပရိဘဝိတွာ, ပရိဘဝိတွာန, ပရိဘဝိတုန, ပရိဘဝိယ, ပရိဘဝိယာန, ပရိဘုယျ. အဘိဘဝိတွာ, အဘိဘဝိတွာန, အဘိဘဝိတုန, အဘိဘဝိယ, အဘိဘဝိယာန, အဘိဘုယျ. ဧသ နယော ‘‘အဓိဘဝိတွာ, အတိဘဝိတွာ, အနုဘဝိတွာ’’တိ ဧတ္ထာပိ. ဣဒဉ္စေတ္ထ နိဒဿနံ. ‘‘တမဝေါစ ရာဇာ အနုဘဝိယာန တမ္ပိ, ဧယျာသိ ခိပ္ပံ အဟမပိ ပူဇံ ကဿ’’န္တိ. အနုဘုတွာ, အနုဘုတွာန. အဓိဘောတွာ, အဓိဘောတွာန. भुत्वा, भुत्वान, परिभवित्वा, परिभवित्वान, परिभवितुन, परिभविय, परिभवियान, परिभुय्य. अभिभवित्वा, अभिभवित्वान, अभिभवितुन, अभिभविय, अभिभवियान, अभिभुय्य. हाच नियम 'अधिभवित्वा, अतिभवित्वा, अनुभवित्वा' यामध्येही लागू होतो. आणि याचे उदाहरण येथे दिले आहे – 'राजाने त्याचाही अनुभव घेऊन (अनुभवियान) त्याला म्हटले, तू लवकर ये, मीही कोणाची पूजा करू?' अनुभुत्वा, अनुभुत्वान. अधिभोत्वा, अधिभोत्वान. ‘‘သဋ္ဌိ ကပ္ပသဟဿာနိ, ဒေဝလောကေ ရမိဿတိ; အညေ ဒေဝေ အဓိဘောတွာ, ဣဿရံ ကာရယိဿတီ’’တိ 'साठ हजार कल्प तो देवलोकात रमेल; इतर देवांवर मात करून (अधिभोत्वा) तो आपले ऐश्वर्य गाजवेल.' ဣဒမေတ္ထ ပါဠိနိဒဿနံ, ဣမာနိ သကမ္မကာနိ ဥဿုက္ကနတ္ထာနိ တွာဒိယန္တပဒါနိ. ဣမာနိ စတ္တာရိ သုဒ္ဓကတ္တရိယေဝ ဘဝန္တိ. हे येथे पाळी भाषेतील उदाहरण आहे. ही सकर्मक आणि उस्सुक्कन-अर्थी 'त्वा'-प्रत्ययान्त पदे आहेत. ही कर्तरी प्रयोगात होतात. ‘‘ဘာဝေတွာ, ဘာဝေတွာန. ပဘာဝေတွာ, ပဘာဝေတွာန. သမ္ဘာဝေတွာ, သမ္ဘာဝေတွာန. ဝိဘာဝေတွာ, ဝိဘာဝေတွာန. ပရိဘာဝေတွာ, ပရိဘာဝေတွာန’’ဣစ္စေဝမာဒီနိ သကမ္မကာနိ ဥဿုက္ကနတ္ထာနိ တွာဒိယန္တပဒါနိ ဟေတုကတ္တရိယေဝ ဘဝန္တိ. ဥဒ္ဒေသောယံ. “भावेत्वा, bhावेत्वान. पभावेत्वा, पभावेत्वान. सम्भावेत्वा, सम्भावेत्वान. विभावेत्वा, विभावेत्वान. परिभावेत्वा, परिभावेत्वान” इत्यादी सकर्मक आणि उस्सुक्कन-अर्थी 'त्वा'-प्रत्ययान्त पदे प्रयोजक (कारित) प्रयोगात होतात. हा उद्देश (संक्षिप्त निर्देश) आहे. တတြ သမာနတ္ထပဒေသု ဧကမေဝါဒိပဒံ ဂဟေတွာ နိဒ္ဒေသော ကာတဗ္ဗော – ဘဝိတွာတိ ဟုတွာ ပညာယိတွာ သရူပံ လဘိတွာ. ဧဝံ ဝုတ္တနယာနုသာရေန သေသာနမ္ပိ တွာဒိယန္တပဒါနံ နိဒ္ဒေသော ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗော. အယံ ပန ဝိသေသော [Pg.414] ဘုတွာတိ သမ္ပတ္တိံ အနုဘုတွာတိ သကမ္မကဝသေန အတ္ထော ဂဟေတဗ္ဗော. ဘုတွာ အနုဘုတွာတိ ဣမေသဉှိ သမာနတ္ထတံ သဒ္ဓမ္မဝိဒူ ဣစ္ဆန္တိ. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – त्यामध्ये, समान अर्थ असलेल्या पदांपैकी केवळ पहिलेच पद घेऊन निर्देश केला पाहिजे – जसे की 'भवित्वा' म्हणजे 'हुत्वा' (होऊन), 'पञ्ञायित्वा' (प्रकट होऊन), 'सरूपं लभित्वा' (स्वतःचे रूप प्राप्त करून). अशा प्रकारे सांगितलेल्या पद्धतीनुसार इतरही 'त्वा'-प्रत्ययान्त पदांचा निर्देश सविस्तर करावा. परंतु हा विशेष फरक आहे की, 'भुत्वा' म्हणजे 'संपत्तीचा अनुभव घेऊन' (अनुभुत्वा) असा सकर्मक अर्थ घ्यावा. कारण 'भुत्वा' आणि 'अनुभुत्वा' या दोन्ही शब्दांचा समान अर्थ सद्धम्माचे जाणकार मान्य करतात. या संदर्भात हे म्हटले आहे – ‘‘ဘုတွာ ဘုတွာန’’ဣစ္စေတေ, ‘‘အနုဘုတွာ’’တိမဿ ဟိ; အတ္ထံ သူစေန္တိ ‘‘ဟုတွာ’’တိ, ပဒဿ ပန နေဝ တေ. 'भुत्वा' आणि 'भुत्वान' हे शब्द 'अनुभुत्वा' (अनुभव घेऊन) या शब्दाचा अर्थ दर्शवतात, परंतु ते 'हुत्वा' (होऊन) या शब्दाचा अर्थ कधीही दर्शवत नाहीत. ကေစိ ‘‘ဘူတွာ’’တိ ဒီဃတ္တံ, တဿ ဣစ္ဆန္တိ သာသနေ; ဒီဃတာ ရဿတာ စေဝ, ဒွယမ္ပေတံ ပဒိဿတိ. काही लोक बुद्धशासनात 'भूत्वा' असा दीर्घ उच्चार इच्छितात; दीर्घत्व आणि रस्वत्व हे दोन्हीही (शासनात) दिसून येतात. သဒ္ဒသတ္ထေ စ ‘‘ဘူတွာ’’တိ, ဒီဃတ္တသဉှိတံ ပဒံ; ‘‘ဘဝိတွာ’’တိ ပဒဿတ္ထံ, ဒီပေတိ န တု သာသနေ. आणि व्याकरणशास्त्रात (सद्दसत्थ) दीर्घ स्वराने युक्त असलेले 'भूत्वा' हे पद 'भवित्वा' या पदाचा अर्थ स्पष्ट करते, परंतु बुद्धशासनात तसे नाही. ‘‘ဟုတွာ’’ဣတိ ပဒံယေဝ, ဒီပေတိ ဇိနသာသနေ; ‘‘ဘဝိတွာ’’တိ ပဒဿတ္ထံ, နတ္ထိ အညတ္ထ တံ ပဒံ. “जिनांच्या शासनात (बुद्धशासनात) ‘हुत्वा’ (hutvā) हाच शब्द ‘भवित्वा’ (bhavitvā) या शब्दाचा अर्थ दर्शवतो; इतरत्र तो (‘भवित्वा’ हा) शब्द आढळत नाही.” ဣစ္စေဝံ သဝိသေသန္တု, ဝစနံ သာရဒဿိနာ; သာသနေ သဒ္ဒသတ္ထေ စ, ဝိညုနာ ပေက္ခိတဗ္ဗကံ. “अशा प्रकारे, हे विशेष वचन सार (तत्त्व) पाहणाऱ्या विद्वानाने बुद्धशासनात आणि व्याकरणशास्त्रात पाहिले पाहिजे.” ဧဝံ ဥဿုက္ကနတ္ထေ ပဝတ္တာနိ တွာဒိယန္တပဒါနိပိ နိဒ္ဒိဋ္ဌာနိ, သဗ္ဗာနေတာနိ အဝိဘတ္တိကာနီတိ ဂဟေတဗ္ဗာနိ. နိရုတ္တိပိဋကေ ဟိ နိပါတပရိစ္ဆေဒေ အဝိဘတ္တိကာနိ ကတွာ တွာဒိယန္တပဒါနိ ဝုတ္တာနိ. သဒ္ဒတ္ထဝိဒူနံ ပန မတေ ပဌမာဒိဝိဘတ္တိဝသေန သဝိဘတ္တိကာနိ ဘဝန္တိ. “अशा प्रकारे, उत्सुकतेच्या (प्रयत्नाच्या) अर्थात वापरलेले ‘त्वा’ इत्यादी प्रत्ययांत शब्द देखील निर्दिष्ट केले आहेत, हे सर्व विभक्तीरहित (अविभक्तिक) मानले पाहिजेत. कारण निरुत्तिपिटकामध्ये निपात परिच्छेदात ‘त्वा’ इत्यादी प्रत्ययांत शब्दांना विभक्तीरहित करून सांगितले आहे. परंतु, व्याकरणकारांच्या मते प्रथमा इत्यादी विभक्तींच्या रूपाने ते विभक्तीयुक्त (सविभक्तिक) असतात.” ဣမသ္မိဉ္စ ပန တွာဒိယန္တာဓိကာရေ ဣဒဉ္စုပလက္ခိတဗ္ဗံ – ဘုတွာ ဂစ္ဆတိ, ဘုတွာ ဂတော, ဘုတွာ ဂမိဿသိ, ကသိတွာ ဝပတိ. ဥမင်္ဂါ နိက္ခမိတွာန, ဝေဒေဟော နာဝမာရုဟိ. ဘုတွာန ဘိက္ခု ဘိက္ခဿု ဣစ္စာဒီ သမာနကတ္တုကာနံ ဓာတူနံ ပုဗ္ဗကာလေ တွာဒိသဒ္ဒပ္ပယောဂါ. ‘‘ဘုတွာ ဂစ္ဆတီ’’တိ ဧတ္ထ ဟိ ‘‘ဘုတွာ’’တိ ဣဒံ ပုဗ္ဗကာလကြိယာဒီပကံ ပဒံ. ‘‘ဂစ္ဆတီ’’တိ ဣဒံ ပန ဥတ္တရကာလကြိယာဒီပကံ, သမာနကတ္တုကာနိ စေတာနိ ပဒါနိ ဧကကတ္တုကာနံ ကြိယာနံ ဝါစကတ္တာ. တထာ ဟေတ္ထ ယော ဂမနကြိယာယ [Pg.415] ကတ္တာ, သော ဧဝ ဘုဉ္ဇနကြိယာယ ကတ္တုဘူတော ဒဋ္ဌဗ္ဗော. အယံ နယော အညတြာပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. “आणि या ‘त्वा’ इत्यादी प्रत्ययांच्या अधिकारात हे देखील लक्षात घेतले पाहिजे – ‘भुत्वा गच्छति’ (जेवून जातो), ‘भुत्वा गतो’ (जेवून गेला), ‘भुत्वा गमिस्ससि’ (जेवून जाशील), ‘कसित्वा वपति’ (नांगरून पेरतो). ‘उमङ्गा निक्खमित्वान, वेदेहो नावमारुहि’ (बोगद्यातून बाहेर पडून वेदेहाने नौकेत प्रवेश केला). ‘भुत्वान भिक्खु भिक्खस्सु’ इत्यादी उदाहरणे समान कर्ता असलेल्या धातूंच्या पूर्वकाळात ‘त्वा’ इत्यादी शब्दांचे प्रयोग आहेत. ‘भुत्वा गच्छति’ यामध्ये ‘भुत्वा’ हा पूर्वकाळची क्रिया दर्शवणारा शब्द आहे. ‘गच्छति’ हा उत्तरकाळची क्रिया दर्शवणारा शब्द आहे, आणि हे शब्द समान कर्ता असलेले आहेत कारण ते एकाच कर्त्याच्या क्रियांचे वाचक आहेत. कारण येथे जो जाण्याच्या क्रियेचा कर्ता आहे, तोच जेवण्याच्या क्रियेचाही कर्ता मानला पाहिजे. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू केला पाहिजे.” ‘‘အန္ဓကာရံ နိဟန္တွာန, ဥဒိတောယံ ဒိဝါကရော; ဝဏ္ဏံ ပညာဝဘာသေဟိ, ဩဘာသေတွာ သမုဂ္ဂတော’’ “‘अंधकाराचा नाश करून हा सूर्य उगवला आहे; प्रज्ञेच्या प्रकाशाने रूपाला प्रकाशित करून तो वर आला आहे.’” ဣစ္စာဒီနိပိ ပန သမာနကတ္တုကာနံ သမာနကာလေ တွာဒိသဒ္ဒပ္ပယောဂါ. ဧတ္ထ ဟိ ‘‘နိဟန္တွာနာ’’တိ ပဒံ သမာနကာလကြိယာဒီပကံ ပဒံ. ‘‘ဥဒိတော’’တိ ဣဒံ ပန ဥတ္တရကာလကြိယာဒီပကံ ပဒန္တိ န ဝတ္တဗ္ဗံ သမာနကာလကြိယာယ ဣဓာဓိပ္ပေတတ္တာ. တသ္မာယေဝ သမာနကာလကြိယာဒီပကံ ပဒန္တိ ဂဟေတဗ္ဗံ. အယံ နယော အညတြာပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. “इत्यादी उदाहरणे समान कर्ता असलेल्या क्रियांच्या समान काळात (एकाच वेळी) ‘त्वा’ इत्यादी शब्दांचे प्रयोग आहेत. येथे ‘निहन्त्वान’ हा शब्द समान काळातील क्रिया दर्शवणारा शब्द आहे. ‘उदितो’ हा उत्तरकाळातील क्रिया दर्शवणारा शब्द आहे असे म्हणू नये, कारण येथे समान काळातील क्रियाच अभिप्रेत आहे. म्हणूनच, तो समान काळातील क्रिया दर्शवणारा शब्द आहे असेच मानले पाहिजे. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू केला पाहिजे.” ကေစိ ပန ‘‘မုခံ ဗျာဒါယ သယတိ, အက္ခိံ ပရိဝတ္တေတွာ ပဿတီ’’တိ ဥဒါဟရန္တိ. အပရေ ‘‘နိသဇ္ဇ အဓီတေ, ဌတွာ ကထေတီ’’တိ. တတ္ထ ဗျာဒါနပရိဝတ္တနုတ္တရကာလော ဗျာဒါနူပသမလက္ခဏံ ပဿနကြိယာယ လက္ခိယတိ. ‘‘နိသဇ္ဇ အဓီတေ, ဌတွာ ကထေတီ’’တိ စ သမာနကာလတာယပိ အဇ္ဈေနကထနေဟိ ပုဗ္ဗေပိ နိသဇ္ဇဋ္ဌာနာနိ ဟောန္တီတိ သက္ကာ ပုဗ္ဗုတ္တရကာလတာ သမ္ဘာဝေတုံ, တသ္မာ ပုရိမာနိယေဝ ဥဒါဟရဏာနိ ယုတ္တာနိ. ဥဒယသမကာလမေဝ ဟိ တန္နိဝတ္တနီယနိဝတ္တနန္တိ. “काही लोक ‘मुखं ब्यादाय सयति’ (तोंड उघडून झोपतो), ‘अक्खिं परिवत्तेत्वा पस्सति’ (डोळे फिरवून पाहतो) अशी उदाहरणे देतात. इतर काही ‘निसज्ज अधीते’ (बसून अभ्यास करतो), ‘ठत्वा कथेति’ (उभा राहून बोलतो) अशी उदाहरणे देतात. तेथे, तोंड उघडणे आणि डोळे फिरवणे यानंतरचा काळ, तोंड उघडणे थांबण्याच्या लक्षणाने पाहण्याच्या क्रियेद्वारे लक्षित होतो. ‘निसज्ज अधीते, ठत्वा कथेति’ यामध्ये समान काळ असतानाही, अभ्यास आणि भाषणाच्या आधीही बसणे व उभे राहणे घडत असल्यामुळे, पूर्व-उत्तर काळ असण्याची शक्यता मानता येते; म्हणून पूर्वीचीच उदाहरणे योग्य आहेत. कारण उगवण्याच्या समकाळालाच त्याचे निवारण करणे घडते.” ‘‘ဒွါရမာဝရိတွာ ပဝိသတိ’’ဣစ္စာဒိ သမာနကတ္တုကာနံ အပရကာလေ တွာဒိသဒ္ဒပ္ပယောဂေါ. ယသ္မာ ပနေတ္ထ ပဝိသနကြိယာ ပုရိမာ, အာဝရဏကြိယာ ပန ပစ္ဆိမာ, တသ္မာ ‘‘အာဝရိတွာ’’တိ ဣဒံ အပရကာလကြိယာဒီပကံ ပဒန္တိ ဝေဒိတဗ္ဗံ. ‘‘ပဝိသတီ’’တိ ဣဒံ ပန ပုဗ္ဗကာလကြိယာဒီပကံ ပဒန္တိ. အယံ နယော [Pg.416] အညတြာပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. အပရေ ‘‘ဓ’န္တိ ကစ္စ ပတိတော ဒဏ္ဍော’’တိ ဥဒါဟရဏန္တိ. အဘိဃာတဘူတသမာယောဂေ ပန အဘိဃာတဇသဒ္ဒဿ သမာနကာလတာ ဧတ္ထ လဗ္ဘတီတိ ဣဓာပိ ပုရိမာနိယေဝ ဥဒါဟရဏာနိ ယုတ္တာနီတိ. “‘द्वारमावरित्वा पविसति’ (दार बंद करून प्रवेश करतो - येथे प्रवेश केल्यानंतर दार बंद करणे अभिप्रेत आहे) इत्यादी उदाहरणे समान कर्ता असलेल्या क्रियांच्या उत्तरकाळात (नंतरच्या काळात) ‘त्वा’ इत्यादी शब्दांचे प्रयोग आहेत. कारण येथे प्रवेश करण्याची क्रिया पहिली आहे आणि दार बंद करण्याची क्रिया नंतरची आहे, म्हणून ‘आवरित्वा’ हा उत्तरकाळातील क्रिया दर्शवणारा शब्द आहे असे जाणावे. ‘पविसति’ हा पूर्वकाळातील क्रिया दर्शवणारा शब्द आहे. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू केला पाहिजे. इतर काही लोक ‘धं’ति कच्च पतितो दण्डो’ (धपकन असा आवाज करून काठी पडली) असे उदाहरण देतात. परंतु आघाताच्या संयोगात, आघातामुळे निर्माण होणाऱ्या आवाजाची समकालीनता येथे प्राप्त होत असल्यामुळे, येथेही पूर्वीचीच उदाहरणे योग्य आहेत.” ‘‘ပိသာစံ ဒိသွာ စဿ ဘယံ ဟောတိ. ပညာယ စဿ ဒိသွာ အာသဝါ ပရိက္ခီဏာ’’ဣစ္စာဒိ အသမာနေ ကတ္တရိ ပယောဂေါ. ဧတ္ထ ဟိ ပိသာစံ ဒိသွာ ပုရိသဿ ဘယံ ဟောတိ, ပညာယ ဒိသွာ အဿ ပုဂ္ဂလဿ အာသဝါ ပရိက္ခီဏာ. ဧဝံ သမာနကတ္တုကတာ ဓာတူနံ န လဗ္ဘတိ ဒဿနကြိယာယ ပုရိသေသု ပဝတ္တနတော, ဘဝနာဒိကြိယာယ စ ဘယာဒီသု ပဝတ္တနတောတိ ဒဋ္ဌဗ္ဗံ. အယံ နယော အညတြာပိ ဤဒိသေသု ဌာနေသု နေတဗ္ဗော. “‘पिसाचं दिस्वा चस्स भयं होति’ (पिशाचाला पाहून त्याला भीती वाटते), ‘पञ्ञाय चस्स दिस्वा आसवा परिक्खीणा’ (प्रज्ञेने पाहून त्याचे आसव नष्ट होतात) इत्यादी भिन्न कर्ता (असामान कर्ता) असतानाचे प्रयोग आहेत. कारण येथे पिशाचाला पाहून माणसाला भीती वाटते, प्रज्ञेने पाहून त्या पुद्गलाचे (व्यक्तीचे) आसव नष्ट होतात. अशा प्रकारे धातूंचे समानकर्तृत्व प्राप्त होत नाही, कारण पाहण्याची क्रिया माणसांमध्ये घडते आणि उत्पन्न होण्याची क्रिया भीती इत्यादींमध्ये घडते, असे समजले पाहिजे. हाच नियम इतरही अशाच ठिकाणी लागू केला पाहिजे.” ဣဒမ္ပိ ပနေတ္ထ ဥပလက္ခိတဗ္ဗံ ‘‘အပ္ပတွာ နဒိံ ပဗ္ဗတော, အတိက္ကမ္မ ပဗ္ဗတံ နဒီ’’ဣစ္စာဒိ ပရာပရယောဂေါ. ‘‘သီဟံ ဒိသွာ ဘယံ ဟောတိ, ဃတံ ပိဝိတွာ ဗလံ ဇာယတေ, ‘ဓ’န္တိ ကတွာ ဒဏ္ဍော ပတိတော’’ဣစ္စာဒိ လက္ခဏဟေတုအာဒိပ္ပယောဂေါ. ‘‘နှတွာ ဂမနံ, ဘုတွာ သယနံ. ဥပါဒါယ ရူပ’’မိစ္စာပိ ဗျတ္တယေန သဒ္ဒသိဒ္ဓိပ္ပယောဂေါတိ. “येथे हे देखील लक्षात घेतले पाहिजे – ‘अप्पत्वा नदिं पब्बतो’ (नदीपंपर्यंत न पोहोचलेला पर्वत), ‘अतिक्कम्म पब्बतं नदी’ (पर्वत ओलांडून जाणारी नदी) इत्यादी परापरयोग (परस्पर संबंध) आहेत. ‘सीहं दिस्वा भयं होति’ (सिंहाला पाहून भीती वाटते), ‘घतं पिवित्वा बलं जायते’ (तूप प्यायल्याने शक्ती निर्माण होते), ‘धं’ति कत्वा दण्डो पतितो’ (धपकन आवाज करून काठी पडली) इत्यादी लक्षण, हेतू इत्यादींचे प्रयोग आहेत. ‘न्हात्वा गमनं’ (आंघोळ करून जाणे), ‘भुत्वा सयनं’ (जेवून झोपणे), ‘उपादाय रूपं’ इत्यादी व्यत्ययाने (उलट क्रमाने) शब्दसिद्धीचे प्रयोग आहेत.” ဣစ္စေဝံ သဗ္ဗထာပိ သမာနကတ္တုကာနံ ဓာတူနံ ပုဗ္ဗကာလေ တွာဒိသဒ္ဒပ္ပယောဂေါ, သမာနကတ္တုကာနံ သမာနကာလေ တွာဒိသဒ္ဒပ္ပယောဂေါ, သမာနကတ္တုကာနံ အပရကာလေ တွာဒိသဒ္ဒပ္ပယောဂေါ, အသမာနကတ္တုကာနံ တွာဒိသဒ္ဒပ္ပယောဂေါ, ပရာပရယောဂေါ[Pg.417], လက္ခဏဟေတုအာဒိပ္ပယောဂေါ, ဗျတ္တယေန သဒ္ဒသိဒ္ဓိပ္ပယောဂေါတိ သတ္တဓာ တွာဒိယန္တာနံ ပဒါနံ ပယောဂေါ ဝေဒိတဗ္ဗော. “अशा प्रकारे, सर्व प्रकारे ‘त्वा’ इत्यादी प्रत्ययांत शब्दांचे प्रयोग सात प्रकारचे समजले पाहिजेत: १) समान कर्ता असलेल्या धातूंच्या पूर्वकाळात ‘त्वा’ इत्यादी शब्दांचा प्रयोग, २) समान कर्ता असलेल्या धातूंच्या समान काळात ‘त्वा’ इत्यादी शब्दांचा प्रयोग, ३) समान कर्ता असलेल्या धातूंच्या उत्तरकाळात ‘त्वा’ इत्यादी शब्दांचा प्रयोग, ४) भिन्न कर्ता असताना ‘त्वा’ इत्यादी शब्दांचा प्रयोग, ५) परापरयोग (परस्पर संबंध), ६) लक्षण, हेतू इत्यादींचा प्रयोग, आणि ७) व्यत्ययाने शब्दसिद्धीचा प्रयोग.” ယဒိ ဧဝံ ကသ္မာ ကစ္စာယနေ ‘‘ပုဗ္ဗကာလေကကတ္တုကာနံ တုန တွာန တွာ ဝါ’’တိ ပုဗ္ဗကာလေယေဝ ဧကကတ္တုကဂ္ဂဟဏံ ကတန္တိ? ယေတုယျေန တွာဒိယန္တာနံ ပဒါနံ ပုရိမကာလကြိယာဒီပနတော. ကစ္စာယနေ ဟိ ယေဘုယျေန ပဝတ္တိံ သန္ဓာယ ‘‘ပုဗ္ဗကာလေကကတ္တုကာန’’န္တိ ဝုတ္တံ. ယသ္မာ ပန ‘‘ဣတိ ကတွာ’’တိအာဒီနံ ပဒါနံ ဟေတုအတ္ထဝသေနပိ ပုဗ္ဗာစရိယေဟိ အတ္ထော သံဝဏ္ဏိတော, တသ္မာ ‘‘ဘဝိတွာ’’တိအာဒီနံ ဘူဓာတုမယာနံ တွာဒိသဒ္ဒန္တာနံ ပဒါနံ အညေသဉ္စ ‘‘ပစိတွာ’’တိအာဒီနံ ယထာပယောဂံ ‘‘ဘဝနဟေတု ပစနဟေတူ’’တိအာဒိနာ ဟေတုအတ္ထောပိ ဂဟေတဗ္ဗော. အတြိဒံ ဝုစ္စတိ – “जर असे आहे, तर कच्चायन व्याकरणात ‘पुब्बकालेककत्तुकानं तुन त्वान त्वा वा’ (समान कर्ता असलेल्या क्रियांच्या पूर्वकाळात ‘तुन’, ‘त्वान’ आणि ‘त्वा’ प्रत्यय होतात) असे केवळ पूर्वकाळ आणि एकच कर्ता ग्रहण करून का सांगितले आहे? कारण बहुतांश करून ‘त्वा’ इत्यादी प्रत्ययांत शब्द पूर्वकाळातील क्रियाच दर्शवतात. कच्चायन व्याकरणात बहुतांश प्रयोगांचा विचार करून ‘पुब्बकालेककत्तुकानं’ असे म्हटले आहे. परंतु, ज्याअर्थी प्राचीन आचार्यांनी ‘इति कत्वा’ इत्यादी शब्दांचा अर्थ हेतूच्या (कारणाच्या) अर्थाने देखील स्पष्ट केला आहे, त्याअर्थी ‘भवित्वा’ इत्यादी ‘भू’ धातूपासून बनलेल्या ‘त्वा’ प्रत्ययांत शब्दांचा आणि ‘पचित्वा’ इत्यादी इतर शब्दांचा प्रयोगाच्या आवश्यकतेनुसार ‘भवनहेतू’ (होण्याचे कारण), ‘पचनहेतू’ (शिजवण्याचे कारण) इत्यादी हेतूच्या अर्थाने देखील स्वीकार केला पाहिजे. याविषयी असे म्हटले आहे –” ဟေတုတ္ထေပိ ယတော ဟောန္တိ, သဒ္ဒါ ဥဿုက္ကနတ္ထကာ; တသ္မာ ဟေတုဝသေနာပိ, ဝဒေယျတ္ထံ ဝိစက္ခဏော. “ज्याअर्थी उत्सुकतेचे (प्रयत्नाचे) अर्थ सांगणारे शब्द हेतूच्या (कारणाच्या) अर्थातही वापरले जातात, त्याअर्थी विद्वानाने हेतूच्या (कारणाच्या) आधारे देखील अर्थ सांगावा.” ‘‘ဣတိ ကတွာ’’တိ သဒ္ဒဿ, အတ္ထသံဝဏ္ဏနာသု ဟိ; ‘‘ဣတိ ကရဏဟေတူ’’တိ, အတ္ထော ဓီရေဟိ ဂယှတိ. “कारण ‘इति कत्वा’ या शब्दाच्या अर्थस्पष्टीकरणात विद्वानांद्वारे ‘असे करण्याच्या हेतूने (कारणाने)’ असा अर्थ घेतला जातो.” ‘‘ဂစ္ဆာမိ ဒါနိ နိဗ္ဗာနံ, ယတ္ထ ဂန္တွာ န သောစတိ’’; ဣတိ ပါဌေပိ ဟေတုတ္ထော, ဂယှတေ ပုဗ္ဗဝိညုဘိ. “‘आता मी निर्वाणाला जातो, जेथे गेल्यावर मनुष्य शोक करत नाही’; या पाठात देखील प्राचीन विद्वानांनी हेतूचा (कारणाचा) अर्थ घेतला आहे.” ‘‘ယသ္မိံ နိဗ္ဗာနေ ဂမန-ဟေတူ’’တိ ဟိ ကထီယတေ; ဟေတုတ္ထေဝံ ယထာယောဂ-မညတြာပိ အယံ နယော. “कारण ‘ज्या निर्वाणात जाण्याच्या हेतूने (कारणाने)’ असे म्हटले जाते; अशा प्रकारे हेतूच्या अर्थाचा हा नियम योग्यतेनुसार इतरत्रही लागू केला पाहिजे.” ဧဝံ ဘူတသဒ္ဒဿ အတ္ထုဒ္ဓါရော စ တုမန္တပဒဉ္စ တွာဒိယန္တပဒဉ္စာတိ အတ္ထတ္တိကံ ဝိဘတ္တံ. “अशा प्रकारे, ‘भूत’ शब्दाच्या अर्थाचा उलगडा, ‘तुम्’ प्रत्ययांत शब्द आणि ‘त्वा’ इत्यादी प्रत्ययांत शब्द, या तीन अर्थांचे (अर्थत्रिक) वर्गीकरण स्पष्ट केले आहे.” ယော [Pg.418] ဣမမတ္ထတိကံ သုဝိဘတ္တံ,ကဏ္ဏရသာယနမာဂမိကာနံ; ဓာရယတေ သ ဘဝေ ဂတကင်္ခါ,ပါဝစနမှိ ဂတေ သုခုမတ္ထေ. “जो कोणी आगम (शास्त्र) जाणणाऱ्यांच्या कानांना अमृतासारखे वाटणारे हे सुविभक्त अर्थत्रिक धारण करतो, तो बुद्धवचनाच्या (पावचनाच्या) सूक्ष्म अर्थाविषयी शंकारहित होतो.” ဣတိ နဝင်္ဂေ သာဋ္ဌကထေ ပိဋကတ္တယေ ဗျပ္ပထဂတီသု ဝိညူနံ “अशा प्रकारे, अट्ठकथांसह नऊ अंगांनी युक्त असलेल्या त्रिपिटकाच्या वचनपद्धतीमध्ये विद्वानांच्या...” ကောသလ္လတ္ထာယ ကတေ သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏေ “...कौशल्यासाठी रचलेल्या ‘सद्दनीति’ ग्रंथात...” အတ္ထတ္တိကဝိဘာဂေါ နာမ अत्थत्तिक विभाग नावाचा. စုဒ္ဒသမော ပရိစ္ဆေဒေါ. चौदावा परिच्छेद. ဧဝံ နာနပ္ပကာရတော ဘူဓာတုရူပါနိ ဒဿိတာနိ. अशा प्रकारे विविध प्रकारांनी भू-धातूची रूपे दर्शविली आहेत. ပဒမာလာ နိဋ္ဌိတာ. पदमाला पूर्ण झाली. | |||
| မြန်မာ | |||
| ပါဠိတော် | အဋ္ဌကထာ | ဋီကာ | အခြား |
| 1101 ပါရာဇိက ပါဠိ 1102 ပါစိတ္တိယ ပါဠိ 1103 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဝိနယ) 1104 စူဠဝဂ္ဂ ပါဠိ 1105 ပရိဝါရ ပါဠိ | 1201 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၁ 1202 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၂ 1203 ပါစိတ္တိယ အဋ္ဌကထာ 1204 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဝိနယ) 1205 စူဠဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 1206 ပရိဝါရ အဋ္ဌကထာ | 1301 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၁ 1302 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၂ 1303 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၃ | 1401 ဒွေမာတိကာပါဠိ 1402 ဝိနယသင်္ဂဟ အဋ္ဌကထာ 1403 ဝဇိရဗုဒ္ဓိ ဋီကာ 1404 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၁ 1405 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၂ 1406 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၁ 1407 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၂ 1408 ကင်္ခာဝိတရဏီပုရာဏ ဋီကာ 1409 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ-ဥတ္တရဝိနိစ္ဆယ 1410 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၁ 1411 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၂ 1412 ပါစိတျာဒိယောဇနာပါဠိ 1413 ခုဒ္ဒသိက္ခာ-မူလသိက္ခာ 8401 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၁ 8402 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၂ 8403 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၁ 8404 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၂ 8405 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ နိဒါနကထာ 8406 ဒီဃနိကာယ (ပု-ဝိ) 8407 မဇ္ဈိမနိကာယ (ပု-ဝိ) 8408 သံယုတ္တနိကာယ (ပု-ဝိ) 8409 အင်္ဂုတ္တရနိကာယ (ပု-ဝိ) 8410 ဝိနယပိဋက (ပု-ဝိ) 8411 အဘိဓမ္မပိဋက (ပု-ဝိ) 8412 အဋ္ဌကထာ (ပု-ဝိ) 8413 နိရုတ္တိဒီပနီ 8414 ပရမတ္ထဒီပနီ သင်္ဂဟမဟာဋီကာပါဌ 8415 အနုဒီပနီပါဌ 8416 ပဋ္ဌာနုဒ္ဒေသ ဒီပနီပါဌ 8417 နမက္ကာရဋီကာ 8418 မဟာပဏာမပါဌ 8419 လက္ခဏာတော ဗုဒ္ဓထောမနာဂါထာ 8420 သုတဝန္ဒနာ 8421 ကမလာဉ္ဇလိ 8422 ဇိနာလင်္ကာရ 8423 ပဇ္ဇမဓု 8424 ဗုဒ္ဓဂုဏဂါထာဝလီ 8425 စူဠဂန္ထဝံသ 8427 သာသနဝံသ 8426 မဟာဝံသ 8429 မောဂ္ဂလ္လာနဗျာကရဏံ 8428 ကစ္စာယနဗျာကရဏံ 8430 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) 8431 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ဓါတုမာလာ) 8432 ပဒရူပသိဒ္ဓိ 8433 မောဂလ္လာနပဉ္စိကာ 8434 ပယောဂသိဒ္ဓိပါဌ 8435 ဝုတ္တောဒယပါဌ 8436 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာပါဌ 8437 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာဋီကာ 8438 သုဗောဓါလင်္ကာရပါဌ 8439 သုဗောဓါလင်္ကာရဋီကာ 8440 ဗာလာဝတာရ ဂဏ္ဌိပဒတ္ထဝိနိစ္ဆယသာရ 8446 ကဝိဒပ္ပဏနီတိ 8447 နီတိမဉ္ဇရီ 8445 ဓမ္မနီတိ 8444 မဟာရဟနီတိ 8441 လောကနီတိ 8442 သုတ္တန္တနီတိ 8443 သူရဿတိနီတိ 8450 စာဏကျနီတိ 8448 နရဒက္ခဒီပနီ 8449 စတုရာရက္ခဒီပနီ 8451 ရသဝါဟိနီ 8452 သီမဝိသောဓနီပါဌ 8453 ဝေဿန္တရဂီတိ 8454 မောဂ္ဂလ္လာန ဝုတ္တိဝိဝရဏပဉ္စိကာ 8455 ထူပဝံသ 8456 ဒါဌာဝံသ 8457 ဓါတုပါဌဝိလာသိနိယာ 8458 ဓါတုဝံသ 8459 ဟတ္ထဝနဂလ္လဝိဟာရဝံသ 8460 ဇိနစရိတယ 8461 ဇိနဝံသဒီပံ 8462 တေလကဋာဟဂါထာ 8463 မိလိဒဋီကာ 8464 ပဒမဉ္ဇရီ 8465 ပဒသာဓနံ 8466 သဒ္ဒဗိန္ဒုပကရဏံ 8467 ကစ္စာယနဓါတုမဉ္ဇုသာ 8468 သာမန္တကူဋဝဏ္ဏနာ |
| 2101 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 2102 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဒီဃ) 2103 ပါထိကဝဂ္ဂ ပါဠိ | 2201 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 2202 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဒီဃ) 2203 ပါထိကဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ | 2301 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 2302 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (ဒီဃ) 2303 ပါထိကဝဂ္ဂ ဋီကာ 2304 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၁ 2305 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၂ | |
| 3101 မူလပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3102 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3103 ဥပရိပဏ္ဏာသ ပါဠိ | 3201 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၁ 3202 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၂ 3203 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ 3204 ဥပရိပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ | 3301 မူလပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3302 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3303 ဥပရိပဏ္ဏာသ ဋီကာ | |
| 4101 သဂါထာဝဂ္ဂ ပါဠိ 4102 နိဒါနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4103 ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 4104 သဠာယတနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4105 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (သံယုတ္တ) | 4201 သဂါထာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4202 နိဒါနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4203 ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4204 သဠာယတနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4205 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (သံယုတ္တ) | 4301 သဂါထာဝဂ္ဂ ဋီကာ 4302 နိဒါနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4303 ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 4304 သဠာယတနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4305 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (သံယုတ္တ) | |
| 5101 ဧကကနိပါတ ပါဠိ 5102 ဒုကနိပါတ ပါဠိ 5103 တိကနိပါတ ပါဠိ 5104 စတုက္ကနိပါတ ပါဠိ 5105 ပဉ္စကနိပါတ ပါဠိ 5106 ဆက္ကနိပါတ ပါဠိ 5107 သတ္တကနိပါတ ပါဠိ 5108 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ပါဠိ 5109 နဝကနိပါတ ပါဠိ 5110 ဒသကနိပါတ ပါဠိ 5111 ဧကာဒသကနိပါတ ပါဠိ | 5201 ဧကကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5202 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5203 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5204 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ အဋ္ဌကထာ | 5301 ဧကကနိပါတ ဋီကာ 5302 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ ဋီကာ 5303 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ ဋီကာ 5304 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ဋီကာ | |
| 6101 ခုဒ္ဒကပါဌ ပါဠိ 6102 ဓမ္မပဒ ပါဠိ 6103 ဥဒါန ပါဠိ 6104 ဣတိဝုတ္တက ပါဠိ 6105 သုတ္တနိပါတ ပါဠိ 6106 ဝိမာနဝတ္ထု ပါဠိ 6107 ပေတဝတ္ထု ပါဠိ 6108 ထေရဂါထာ ပါဠိ 6109 ထေရီဂါထာ ပါဠိ 6110 အပဒါန ပါဠိ-၁ 6111 အပဒါန ပါဠိ-၂ 6112 ဗုဒ္ဓဝံသ ပါဠိ 6113 စရိယာပိဋက ပါဠိ 6114 ဇာတက ပါဠိ-၁ 6115 ဇာတက ပါဠိ-၂ 6116 မဟာနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6117 စူဠနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6118 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ ပါဠိ 6119 နေတ္တိပ္ပကရဏ ပါဠိ 6120 မိလိန္ဒပဉှ ပါဠိ 6121 ပေဋကောပဒေသ ပါဠိ | 6201 ခုဒ္ဒကပါဌ အဋ္ဌကထာ 6202 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၁ 6203 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၂ 6204 ဥဒါန အဋ္ဌကထာ 6205 ဣတိဝုတ္တက အဋ္ဌကထာ 6206 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၁ 6207 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၂ 6208 ဝိမာနဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6209 ပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6210 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၁ 6211 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၂ 6212 ထေရီဂါထာ အဋ္ဌကထာ 6213 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၁ 6214 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၂ 6215 ဗုဒ္ဓဝံသ အဋ္ဌကထာ 6216 စရိယာပိဋက အဋ္ဌကထာ 6217 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၁ 6218 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၂ 6219 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၃ 6220 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၄ 6221 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၅ 6222 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၆ 6223 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၇ 6224 မဟာနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6225 စူဠနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6226 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၁ 6227 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၂ 6228 နေတ္တိပ္ပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 6301 နေတ္တိပ္ပကရဏ ဋီကာ 6302 နေတ္တိဝိဘာဝိနီ | |
| 7101 ဓမ္မသင်္ဂဏီ ပါဠိ 7102 ဝိဘင်္ဂ ပါဠိ 7103 ဓါတုကထာ ပါဠိ 7104 ပုဂ္ဂလပညတ္တိ ပါဠိ 7105 ကထာဝတ္ထု ပါဠိ 7106 ယမက ပါဠိ-၁ 7107 ယမက ပါဠိ-၂ 7108 ယမက ပါဠိ-၃ 7109 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၁ 7110 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၂ 7111 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၃ 7112 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၄ 7113 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၅ | 7201 ဓမ္မသင်္ဂဏိ အဋ္ဌကထာ 7202 သမ္မောဟဝိနောဒနီ အဋ္ဌကထာ 7203 ပဉ္စပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 7301 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-မူလဋီကာ 7302 ဝိဘင်္ဂ-မူလဋီကာ 7303 ပဉ္စပကရဏ-မူလဋီကာ 7304 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-အနုဋီကာ 7305 ပဉ္စပကရဏ-အနုဋီကာ 7306 အဘိဓမ္မာဝတာရော-နာမရူပပရိစ္ဆေဒေါ 7307 အဘိဓမ္မတ္ထသင်္ဂဟော 7308 အဘိဓမ္မာဝတာရ-ပုရာဏဋီကာ 7309 အဘိဓမ္မမာတိကာပါဠိ | |
| português | |||
| Páli | Aṭṭhakathā | Ṭīkā | Outro |
| 1101 Ofensas Graves (Pārājika) 1102 Ofensas Leves (Pācittiya) 1103 Grande Seção do Vīnaya (Mahāvagga) 1104 Pequena Seção do Vīnaya (Cūḷavagga) 1105 Apêndice do Vīnaya (Parivāra) | 1201 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 1 1202 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 2 1203 Comentário das Ofensas Leves 1204 Comentário da Grande Seção do Vīnaya 1205 Comentário da Pequena Seção do Vīnaya 1206 Comentário do Apêndice do Vīnaya | 1301 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 1 1302 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 2 1303 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 3 | 1401 Texto das Duas Matrizes 1402 Comentário do Compêndio do Vīnaya 1403 Subcomentário de Vajirabuddhi 1404 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 1 1405 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 2 1406 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 1 1407 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 2 1408 Antigo Subcomentário que Supera Dúvidas 1409 Decisão sobre o Vīnaya e Decisão Superior 1410 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 1 1411 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 2 1412 Texto da Aplicação das Regras 1413 Pequeno Treinamento e Treinamento Fundamental 8401 Caminho da Purificação - Vol. 1 8402 Caminho da Purificação - Vol. 2 8403 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 1 8404 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 2 8405 História da Origem do Caminho da Purificação 8406 Coleção dos Longos Discursos (índice Pāli-Vietnamita) 8407 Coleção dos Discursos Médios (índice Pāli-Vietnamita) 8408 Coleção dos Discursos Agrupados (índice Pāli-Vietnamita) 8409 Coleção dos Discursos Numerados (índice Pāli-Vietnamita) 8410 Cesto da Disciplina (índice Pāli-Vietnamita) 8411 Cesto do Abhidhamma (índice Pāli-Vietnamita) 8412 Comentários (índice Pāli-Vietnamita) 8413 Elucidação da Etimologia 8414 Grande Subcomentário do Compêndio que Elucida o Sentido Supremo 8415 Texto do Subcomentário Elucidativo 8416 Texto Elucidativo sobre a Exposição das Condições 8417 Subcomentário da Saudação 8418 Grande Texto de Saudação 8419 Versos de Louvor a Buda pelos Sinais 8420 Saudação com Recitação 8421 Oferenda de Lótus 8422 Ornamento dos Vencedores 8423 Mel dos Versos 8424 Coleção de Versos sobre as Qualidades de Buda 8425 Pequena Crônica dos Livros 8427 Crônica do Ensinamento 8426 Grande Crônica 8429 Gramática de Moggallāna 8428 Gramática de Kaccāyana 8430 Tratado sobre a Gramática - Série de Palavras 8431 Tratado sobre a Gramática - Série de Raízes 8432 Realização das Formas das Palavras 8433 Comentário de Moggallāna 8434 Texto sobre a Realização da Aplicação 8435 Texto sobre a Origem dos Versos 8436 Texto do Dicionário Iluminado 8437 Subcomentário do Dicionário Iluminado 8438 Texto sobre o Ornamento da Boa Compreensão 8439 Subcomentário do Ornamento da Boa Compreensão 8440 Essência da Decisão sobre os Termos do Glossário de Bālāvatāra 8446 Ética do Poeta 8447 Coleção de Ética 8445 Ética do Dhamma 8444 Grande Ética Secreta 8441 Ética do Mundo 8442 Ética dos Suttas 8443 Ética do Herói 8450 Ética de Cāṇakya 8448 Elucidação sobre os Perigos para os Homens 8449 Elucidação sobre as Quatro Proteções 8451 O Fluxo do Sabor - Histórias Edificantes 8452 Texto sobre a Purificação dos Limites 8453 Canto de Vessantara 8454 Explicação do Comentário de Moggallāna 8455 Crônica das Estupas 8456 Crônica da Relíquia do Dente 8457 O Esplendor da Leitura dos Elementos 8458 Crônica das Relíquias 8459 Crônica do Mosteiro de Hatthavanagalla 8460 História do Vencedor 8461 Ilha da Linhagem dos Vencedores 8462 Versos da Panela de Óleo 8463 Subcomentário de Milinda 8464 Cacho de Flores de Palavras 8465 Realização das Palavras 8466 Tratado sobre os Pontos da Gramática 8467 Coleção de Raízes de Kaccāyana 8468 Descrição do Pico de Sāmantakūṭa |
| 2101 Seção da Moralidade - Dīgha 2102 Grande Seção - Dīgha 2103 Seção de Pāthika - Dīgha | 2201 Comentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2202 Comentário da Grande Seção - Dīgha 2203 Comentário da Seção de Pāthika - Dīgha | 2301 Subcomentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2302 Subcomentário da Grande Seção - Dīgha 2303 Subcomentário da Seção de Pāthika - Dīgha 2304 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 1 2305 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 2 | |
| 3101 Cinquenta Discursos Fundamentais - Majjhima 3102 Cinquenta Discursos Médios - Majjhima 3103 Cinquenta Discursos Superiores - Majjhima | 3201 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 1 3202 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 2 3203 Comentário dos Cinquenta Médios 3204 Comentário dos Cinquenta Superiores | 3301 Subcomentário dos Cinquenta Fundamentais 3302 Subcomentário dos Cinquenta Médios 3303 Subcomentário dos Cinquenta Superiores | |
| 4101 Seção com Versos - Saṃyutta 4102 Seção das Causas - Saṃyutta 4103 Seção dos Agregados - Saṃyutta 4104 Seção das Seis Bases dos Sentidos - Saṃyutta 4105 Grande Seção - Saṃyutta | 4201 Comentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4202 Comentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4203 Comentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4204 Comentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4205 Comentário da Grande Seção - Saṃyutta | 4301 Subcomentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4302 Subcomentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4303 Subcomentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4304 Subcomentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4305 Subcomentário da Grande Seção - Saṃyutta | |
| 5101 Grupos de Um - Aṅguttara 5102 Grupos de Dois - Aṅguttara 5103 Grupos de Três - Aṅguttara 5104 Grupos de Quatro - Aṅguttara 5105 Grupos de Cinco - Aṅguttara 5106 Grupos de Seis - Aṅguttara 5107 Grupos de Sete - Aṅguttara 5108 Grupos de Oito, etc. - Aṅguttara 5109 Grupos de Nove - Aṅguttara 5110 Grupos de Dez - Aṅguttara 5111 Grupos de Onze - Aṅguttara | 5201 Comentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5202 Comentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5203 Comentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5204 Comentário dos Grupos de Oito, etc. | 5301 Subcomentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5302 Subcomentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5303 Subcomentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5304 Subcomentário dos Grupos de Oito, etc. | |
| 6101 Pequena Leitura (Khuddakapāṭha) 6102 Versos do Dhamma (Dhammapada) 6103 Exclamações Inspiradas (Udāna) 6104 Assim Foi Dito (Itivuttaka) 6105 Coleção de Discursos (Suttanipāta) 6106 Histórias das Mansões Celestiais 6107 Histórias dos Fantasmas 6108 Versos dos Monges Anciãos 6109 Versos das Monjas Anciãs 6110 Histórias Passadas - Vol. 1 6111 Histórias Passadas - Vol. 2 6112 História dos Budas (Buddhavaṃsa) 6113 Cesto das Condutas (Cariyāpiṭaka) 6114 Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6115 Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6116 Grande Exposição (Mahāniddesa) 6117 Pequena Exposição (Cūḷaniddesa) 6118 Caminho da Discriminação Analítica 6119 O Guia (Nettippakaraṇa) 6120 As Perguntas de Milinda 6121 Instrução do Cesto (Peṭakopadesa) | 6201 Comentário da Pequena Leitura 6202 Comentário do Dhammapada - Vol. 1 6203 Comentário do Dhammapada - Vol. 2 6204 Comentário do Udāna 6205 Comentário do Itivuttaka 6206 Comentário do Suttanipāta - Vol. 1 6207 Comentário do Suttanipāta - Vol. 2 6208 Comentário das Histórias das Mansões 6209 Comentário das Histórias dos Fantasmas 6210 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 1 6211 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 2 6212 Comentário dos Versos das Monjas 6213 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 1 6214 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 2 6215 Comentário da História dos Budas 6216 Comentário do Cesto das Condutas 6217 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6218 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6219 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 3 6220 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 4 6221 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 5 6222 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 6 6223 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 7 6224 Comentário da Grande Exposição 6225 Comentário da Pequena Exposição 6226 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 1 6227 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 2 6228 Comentário do Guia | 6301 Subcomentário do Guia 6302 Elucidação do Guia | |
| 7101 Enumeração dos Fenômenos (Dhammasaṅgaṇī) 7102 Análise (Vibhaṅga) 7103 Discurso sobre os Elementos (Dhātukathā) 7104 Designação das Pessoas (Puggalapaññatti) 7105 Pontos da Discussão (Kathāvatthu) 7106 O Livro dos Pares - Vol. 1 7107 O Livro dos Pares - Vol. 2 7108 O Livro dos Pares - Vol. 3 7109 Condições de Originação - Vol. 1 7110 Condições de Originação - Vol. 2 7111 Condições de Originação - Vol. 3 7112 Condições de Originação - Vol. 4 7113 Condições de Originação - Vol. 5 | 7201 Comentário da Enumeração dos Fenômenos 7202 Comentário que Dissipa a Confusão 7203 Comentário dos Cinco Tratados | 7301 Subcomentário Principal da Enumeração dos Fenômenos 7302 Subcomentário Principal da Análise 7303 Subcomentário Principal dos Cinco Tratados 7304 Subcomentário Secundário da Enumeração dos Fenômenos 7305 Subcomentário Secundário dos Cinco Tratados 7306 Introdução ao Abhidhamma - Análise de Nome e Forma 7307 Compêndio do Abhidhamma 7308 Antigo Subcomentário da Introdução ao Abhidhamma 7309 Matriz do Abhidhamma | |
| русский | |||
| Палийский канон | Комментарии | Субкомментарии | Другое |
| 1101 Параджика-пали 1102 Пачиттия-пали 1103 Махавагга-пали (Виная) 1104 Чулавагга-пали 1105 Паривара-пали | 1201 Параджиканда-аттхакатха-1 1202 Параджиканда-аттхакатха-2 1203 Пачиттия-аттхакатха 1204 Махавагга-аттхакатха (Виная) 1205 Чулавагга-аттхакатха 1206 Паривара-аттхакатха | 1301 Сараттхадипани-тика-1 1302 Сараттхадипани-тика-2 1303 Сараттхадипани-тика-3 | 1401 Двематика-пали 1402 Винаясангаха-аттхакатха 1403 Ваджирабуддхи-тика 1404 Вимативинодани-тика-1 1405 Вимативинодани-тика-2 1406 Винаяланкара-тика-1 1407 Винаяланкара-тика-2 1408 Канкхавитаранипурана-тика 1409 Винаявиниччая-уттаравиниччая 1410 Винаявиниччая-тика-1 1411 Винаявиниччая-тика-2 1412 Пачиттиядийоджана-пали 1413 Кхуддасиккха-муласиккха 8401 Висуддхимагга-1 8402 Висуддхимагга-2 8403 Висуддхимагга-махатика-1 8404 Висуддхимагга-махатика-2 8405 Висуддхимагга-ниданакатха 8406 Дигханикая (пу-ви) 8407 Мадджхиманикая (пу-ви) 8408 Самъюттаникая (пу-ви) 8409 Ангуттараникая (пу-ви) 8410 Винаяпитака (пу-ви) 8411 Абхидхаммапитака (пу-ви) 8412 Аттхакатха (пу-ви) 8413 Нируттидипани 8414 Параматтхадипани Сангахамахатикапатха 8415 Анудипанипатха 8416 Паттхануддеса дипанипатха 8417 Намаккаратика 8418 Махапанамапатха 8419 Лаккханато буддхатхоманагатха 8420 Сутавандана 8421 Камаланджали 8422 Джиналанкара 8423 Паджамадху 8424 Буддхагунагатхавали 8425 Чулагантхавамса 8427 Сасанавамса 8426 Махавамса 8429 Моггалланабьякарана 8428 Каччаянабьякарана 8430 Садданитиппакарана (падамала) 8431 Садданитиппакарана (дхатумала) 8432 Падарупасиддхи 8433 Могалланапанчика 8434 Пайогасиддхипатха 8435 Вуттодаяпатха 8436 Абхидханаппадипикапатха 8437 Абхидханаппадипикатика 8438 Субодхаланкарапатха 8439 Субодхаланкаратика 8440 Балаватара гантхипадаттхавиниччаясара 8446 Кавидаппананити 8447 Нитиманджари 8445 Дхамманити 8444 Махараханити 8441 Локанити 8442 Суттантанити 8443 Сурассатинити 8450 Чанакьянити 8448 Нарадаккхадипани 8449 Чатурараккхадипани 8451 Расавахини 8452 Симависодханипатха 8453 Вессантарагити 8454 Моггаллана вуттививаранапанчика 8455 Тхупавамса 8456 Датхавамса 8457 Дхатупатхавиласиния 8458 Дхатувамса 8459 Хаттхаванагаллавихаравамса 8460 Джиначаритая 8461 Джинавамсадипа 8462 Телакатахагатха 8463 Милидатика 8464 Падаманджари 8465 Падасадхана 8466 Саддабиндупакарана 8467 Каччаянадхатуманджуса 8468 Самантакутаваннана |
| 2101 Силаккхандхавагга-пали 2102 Махавагга-пали (Дигха) 2103 Патхикавагга-пали | 2201 Силаккхандхавагга-аттхакатха 2202 Махавагга-аттхакатха (Дигха) 2203 Патхикавагга-аттхакатха | 2301 Силаккхандхавагга-тика 2302 Махавагга-тика (Дигха) 2303 Патхикавагга-тика 2304 Силаккхандхавагга-абхинаватика-1 2305 Силаккхандхавагга-абхинаватика-2 | |
| 3101 Мулапаннаса-пали 3102 Мадджхимапаннаса-пали 3103 Упарипаннаса-пали | 3201 Мулапаннаса-аттхакатха-1 3202 Мулапаннаса-аттхакатха-2 3203 Мадджхимапаннаса-аттхакатха 3204 Упарипаннаса-аттхакатха | 3301 Мулапаннаса-тика 3302 Мадджхимапаннаса-тика 3303 Упарипаннаса-тика | |
| 4101 Сагатхавагга-пали 4102 Ниданавагга-пали 4103 Кхандхавагга-пали 4104 Салаятанавагга-пали 4105 Махавагга-пали (Самъютта) | 4201 Сагатхавагга-аттхакатха 4202 Ниданавагга-аттхакатха 4203 Кхандхавагга-аттхакатха 4204 Салаятанавагга-аттхакатха 4205 Махавагга-аттхакатха (Самъютта) | 4301 Сагатхавагга-тика 4302 Ниданавагга-тика 4303 Кхандхавагга-тика 4304 Салаятанавагга-тика 4305 Махавагга-тика (Самъютта) | |
| 5101 Экаканипата-пали 5102 Дуканипата-пали 5103 Тиканипата-пали 5104 Чатукканипата-пали 5105 Панчаканипата-пали 5106 Чхакканипата-пали 5107 Саттаканипата-пали 5108 Аттхакадинипата-пали 5109 Наваканипата-пали 5110 Дасаканипата-пали 5111 Экадасаканипата-пали | 5201 Экаканипата-аттхакатха 5202 Дука-тика-чатукканипата-аттхакатха 5203 Панчака-чхакка-саттаканипата-аттхакатха 5204 Аттхакадинипата-аттхакатха | 5301 Экаканипата-тика 5302 Дука-тика-чатукканипата-тика 5303 Панчака-чхакка-саттаканипата-тика 5304 Аттхакадинипата-тика | |
| 6101 Кхуддакапатха-пали 6102 Дхаммапада-пали 6103 Удана-пали 6104 Итивуттака-пали 6105 Суттанипата-пали 6106 Виманаваттху-пали 6107 Петаваттху-пали 6108 Тхерагатха-пали 6109 Тхеригатха-пали 6110 Ападана-пали-1 6111 Ападана-пали-2 6112 Буддхавамса-пали 6113 Чарияпитака-пали 6114 Джатака-пали-1 6115 Джатака-пали-2 6116 Маханиддеса-пали 6117 Чуланиддеса-пали 6118 Патисамбхидамагга-пали 6119 Неттиппакарана-пали 6120 Милиндапаньха-пали 6121 Петакопадеса-пали | 6201 Кхуддакапатха-аттхакатха 6202 Дхаммапада-аттхакатха-1 6203 Дхаммапада-аттхакатха-2 6204 Удана-аттхакатха 6205 Итивуттака-аттхакатха 6206 Суттанипата-аттхакатха-1 6207 Суттанипата-аттхакатха-2 6208 Виманаваттху-аттхакатха 6209 Петаваттху-аттхакатха 6210 Тхерагатха-аттхакатха-1 6211 Тхерагатха-аттхакатха-2 6212 Тхеригатха-аттхакатха 6213 Ападана-аттхакатха-1 6214 Ападана-аттхакатха-2 6215 Буддхавамса-аттхакатха 6216 Чарияпитака-аттхакатха 6217 Джатака-аттхакатха-1 6218 Джатака-аттхакатха-2 6219 Джатака-аттхакатха-3 6220 Джатака-аттхакатха-4 6221 Джатака-аттхакатха-5 6222 Джатака-аттхакатха-6 6223 Джатака-аттхакатха-7 6224 Маханиддеса-аттхакатха 6225 Чуланиддеса-аттхакатха 6226 Патисамбхидамагга-аттхакатха-1 6227 Патисамбхидамагга-аттхакатха-2 6228 Неттиппакарана-аттхакатха | 6301 Неттиппакарана-тика 6302 Неттивибхавини | |
| 7101 Дхаммасангани-пали 7102 Вибханга-пали 7103 Дхатукатха-пали 7104 Пуггалапаннятти-пали 7105 Катхаваттху-пали 7106 Ямака-пали-1 7107 Ямака-пали-2 7108 Ямака-пали-3 7109 Паттхана-пали-1 7110 Паттхана-пали-2 7111 Паттхана-пали-3 7112 Паттхана-пали-4 7113 Паттхана-пали-5 | 7201 Дхаммасангани-аттхакатха 7202 Саммохивинодани-аттхакатха 7203 Панчапакарана-аттхакатха | 7301 Дхаммасангани-мулатика 7302 Вибханга-мулатика 7303 Панчапакарана-мулатика 7304 Дхаммасангани-анутика 7305 Панчапакарана-анутика 7306 Абхидхаммаватаро-намарупапариччхедо 7307 Абхидхамматтхасангахо 7308 Абхидхаммаватара-пуранатика 7309 Абхидхаммаматика-пали | |
| සිංහල | |||
| පාලි කැනනය | විවරණ | අටුවා | වෙනත් |
| 1101 පාරාජික පාළි 1102 පාචිත්තිය පාළි 1103 මහාවග්ග පාළි (විනය) 1104 චූළවග්ග පාළි 1105 පරිවාර පාළි | 1201 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-1 1202 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-2 1203 පාචිත්තිය අට්ඨකථා 1204 මහාවග්ග අට්ඨකථා (විනය) 1205 චූළවග්ග අට්ඨකථා 1206 පරිවාර අට්ඨකථා | 1301 සාරත්ථදීපනී ටීකා-1 1302 සාරත්ථදීපනී ටීකා-2 1303 සාරත්ථදීපනී ටීකා-3 | 1401 ද්වෙමාතිකාපාළි 1402 විනයසංගහ අට්ඨකථා 1403 වජිරබුද්ධි ටීකා 1404 විමතිවිනෝදනී ටීකා-1 1405 විමතිවිනෝදනී ටීකා-2 1406 විනයාලංකාර ටීකා-1 1407 විනයාලංකාර ටීකා-2 1408 කඞ්ඛාවිතරණීපුරාණ ටීකා 1409 විනයවිනිච්ඡය-උත්තරවිනිච්ඡය 1410 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-1 1411 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-2 1412 පාචිත්යාදියෝජනාපාළි 1413 ඛුද්දසික්ඛා-මූලසික්ඛා 8401 විසුද්ධිමග්ග-1 8402 විසුද්ධිමග්ග-2 8403 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-1 8404 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-2 8405 විසුද්ධිමග්ග නිදානකථා 8406 දීඝනිකාය (පු-වි) 8407 මජ්ඣිමනිකාය (පු-වි) 8408 සංයුත්තනිකාය (පු-වි) 8409 අඞ්ගුත්තරනිකාය (පු-වි) 8410 විනයපිටක (පු-වි) 8411 අභිධම්මපිටක (පු-වි) 8412 අට්ඨකථා (පු-වි) 8413 නිරුත්තිදීපනී 8414 පරමත්ථදීපනී සඞ්ගහමහාටීකාපාඨ 8415 අනුදීපනීපාඨ 8416 පට්ඨානුද්දේස දීපනීපාඨ 8417 නමක්කාරටීකා 8418 මහාපණාමපාඨ 8419 ලක්ඛණාතෝ බුද්ධථෝමනාගාථා 8420 සුතවන්දනා 8421 කමලාඤ්ජලි 8422 ජිනාලඞ්කාර 8423 පජ්ජමධු 8424 බුද්ධගුණගාථාවලී 8425 චූළගන්ථවංස 8427 සාසනවංස 8426 මහාවංස 8429 මොග්ගල්ලානබ්යාකරණං 8428 කච්චායනබ්යාකරණං 8430 සද්දනීතිප්පකරණං (පදමාලා) 8431 සද්දනීතිප්පකරණං (ධාතුමාලා) 8432 පදරූපසිද්ධි 8433 මොග්ගල්ලානපඤ්චිකා 8434 පයෝගසිද්ධිපාඨ 8435 වුත්තෝදයපාඨ 8436 අභිධානප්පදීපිකාපාඨ 8437 අභිධානප්පදීපිකාටීකා 8438 සුබෝධාලඞ්කාරපාඨ 8439 සුබෝධාලඞ්කාරටීකා 8440 බාලාවතාර ගණ්ඨිපදත්ථවිනිච්ඡයසාර 8446 කවිදප්පණනීති 8447 නීතිමඤ්ජරී 8445 ධම්මනීති 8444 මහාරහනීති 8441 ලෝකනීති 8442 සුත්තන්තනීති 8443 සූරස්සතිනීති 8450 චාණක්යනීති 8448 නරදක්ඛදීපනී 8449 චතුරාරක්ඛදීපනී 8451 රසවාහිනී 8452 සීමවිසෝධනීපාඨ 8453 වෙස්සන්තරගීති 8454 මොග්ගල්ලාන වුත්තිවිවරණපඤ්චිකා 8455 ථූපවංස 8456 දාඨාවංස 8457 ධාතුපාඨවිලාසිනියා 8458 ධාතුවංස 8459 හත්ථවනගල්ලවිහාරවංස 8460 ජිනචරිතය 8461 ජිනවංසදීපං 8462 තේලකටාහගාථා 8463 මිලිදටීකා 8464 පදමඤ්ජරී 8465 පදසාධනං 8466 සද්දබින්දුපකරණං 8467 කච්චායනධාතුමඤ්ජුසා 8468 සාමන්තකූටවණ්ණනා |
| 2101 සීලක්ඛන්ධවග්ග පාළි 2102 මහාවග්ග පාළි (දීඝ) 2103 පාථිකවග්ග පාළි | 2201 සීලක්ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 2202 මහාවග්ග අට්ඨකථා (දීඝ) 2203 පාථිකවග්ග අට්ඨකථා | 2301 සීලක්ඛන්ධවග්ග ටීකා 2302 මහාවග්ග ටීකා (දීඝ) 2303 පාථිකවග්ග ටීකා 2304 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-1 2305 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-2 | |
| 3101 මූලපණ්ණාස පාළි 3102 මජ්ඣිමපණ්ණාස පාළි 3103 උපරිපණ්ණාස පාළි | 3201 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-1 3202 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-2 3203 මජ්ඣිමපණ්ණාස අට්ඨකථා 3204 උපරිපණ්ණාස අට්ඨකථා | 3301 මූලපණ්ණාස ටීකා 3302 මජ්ඣිමපණ්ණාස ටීකා 3303 උපරිපණ්ණාස ටීකා | |
| 4101 සගාථාවග්ග පාළි 4102 නිදානවග්ග පාළි 4103 ඛන්ධවග්ග පාළි 4104 සළායතනවග්ග පාළි 4105 මහාවග්ග පාළි (සංයුත්ත) | 4201 සගාථාවග්ග අට්ඨකථා 4202 නිදානවග්ග අට්ඨකථා 4203 ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 4204 සළායතනවග්ග අට්ඨකථා 4205 මහාවග්ග අට්ඨකථා (සංයුත්ත) | 4301 සගාථාවග්ග ටීකා 4302 නිදානවග්ග ටීකා 4303 ඛන්ධවග්ග ටීකා 4304 සළායතනවග්ග ටීකා 4305 මහාවග්ග ටීකා (සංයුත්ත) | |
| 5101 එකකනිපාත පාළි 5102 දුකනිපාත පාළි 5103 තිකනිපාත පාළි 5104 චතුක්කනිපාත පාළි 5105 පඤ්චකනිපාත පාළි 5106 ඡක්කනිපාත පාළි 5107 සත්තකනිපාත පාළි 5108 අට්ඨකාදිනිපාත පාළි 5109 නවකනිපාත පාළි 5110 දසකනිපාත පාළි 5111 එකාදසකනිපාත පාළි | 5201 එකකනිපාත අට්ඨකථා 5202 දුක-තික-චතුක්කනිපාත අට්ඨකථා 5203 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත අට්ඨකථා 5204 අට්ඨකාදිනිපාත අට්ඨකථා | 5301 එකකනිපාත ටීකා 5302 දුක-තික-චතුක්කනිපාත ටීකා 5303 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත ටීකා 5304 අට්ඨකාදිනිපාත ටීකා | |
| 6101 ඛුද්දකපාඨ පාළි 6102 ධම්මපද පාළි 6103 උදාන පාළි 6104 ඉතිවුත්තක පාළි 6105 සුත්තනිපාත පාළි 6106 විමානවත්ථු පාළි 6107 පේතවත්ථු පාළි 6108 ථේරගාථා පාළි 6109 ථේරීගාථා පාළි 6110 අපදාන පාළි-1 6111 අපදාන පාළි-2 6112 බුද්ධවංස පාළි 6113 චරියාපිටක පාළි 6114 ජාතක පාළි-1 6115 ජාතක පාළි-2 6116 මහානිද්දේස පාළි 6117 චූළනිද්දේස පාළි 6118 පටිසම්භිදාමග්ග පාළි 6119 නෙත්තිප්පකරණ පාළි 6120 මිලින්දපඤ්හ පාළි 6121 පේටකෝපදේස පාළි | 6201 ඛුද්දකපාඨ අට්ඨකථා 6202 ධම්මපද අට්ඨකථා-1 6203 ධම්මපද අට්ඨකථා-2 6204 උදාන අට්ඨකථා 6205 ඉතිවුත්තක අට්ඨකථා 6206 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-1 6207 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-2 6208 විමානවත්ථු අට්ඨකථා 6209 පේතවත්ථු අට්ඨකථා 6210 ථේරගාථා අට්ඨකථා-1 6211 ථේරගාථා අට්ඨකථා-2 6212 ථේරීගාථා අට්ඨකථා 6213 අපදාන අට්ඨකථා-1 6214 අපදාන අට්ඨකථා-2 6215 බුද්ධවංස අට්ඨකථා 6216 චරියාපිටක අට්ඨකථා 6217 ජාතක අට්ඨකථා-1 6218 ජාතක අට්ඨකථා-2 6219 ජාතක අට්ඨකථා-3 6220 ජාතක අට්ඨකථා-4 6221 ජාතක අට්ඨකථා-5 6222 ජාතක අට්ඨකථා-6 6223 ජාතක අට්ඨකථා-7 6224 මහානිද්දේස අට්ඨකථා 6225 චූළනිද්දේස අට්ඨකථා 6226 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-1 6227 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-2 6228 නෙත්තිප්පකරණ අට්ඨකථා | 6301 නෙත්තිප්පකරණ ටීකා 6302 නෙත්තිවිභාවිනී | |
| 7101 ධම්මසංගණී පාළි 7102 විභඞ්ග පාළි 7103 ධාතුකථා පාළි 7104 පුග්ගලපඤ්ඤත්ති පාළි 7105 කථාවත්ථු පාළි 7106 යමක පාළි-1 7107 යමක පාළි-2 7108 යමක පාළි-3 7109 පට්ඨාන පාළි-1 7110 පට්ඨාන පාළි-2 7111 පට්ඨාන පාළි-3 7112 පට්ඨාන පාළි-4 7113 පට්ඨාන පාළි-5 | 7201 ධම්මසංගණි අට්ඨකථා 7202 සම්මෝහවිනෝදනී අට්ඨකථා 7203 පඤ්චපකරණ අට්ඨකථා | 7301 ධම්මසංගණී-මූලටීකා 7302 විභඞ්ග-මූලටීකා 7303 පඤ්චපකරණ-මූලටීකා 7304 ධම්මසංගණී-අනුටීකා 7305 පඤ්චපකරණ-අනුටීකා 7306 අභිධම්මාවතාරෝ-නාමරූපපරිච්ඡේදෝ 7307 අභිධම්මත්ථසංගහෝ 7308 අභිධම්මාවතාර-පුරාණටීකා 7309 අභිධම්මමාතිකාපාළි | |
| Español | |||
| El Canon Pali | Los Comentarios | Los Subcomentarios | Otros |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| แบบไทย | |||
| บาลีแคน | ข้อคิดเห็น | คำอธิบายย่อย | อื่น |
| 1101 ปาราชิกปาฬิ 1102 ปาจิตติยปาฬิ 1103 มหาวคฺคปาฬิ (วินัย) 1104 จูฬวคฺคปาฬิ 1105 ปริวารปาฬิ | 1201 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๑ 1202 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๒ 1203 ปาจิตฺติยอฏฺฐกถา 1204 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (วินัย) 1205 จูฬวคฺคอฏฺฐกถา 1206 ปริวารอฏฺฐกถา | 1301 สารตฺถทีปนีฏีกา-๑ 1302 สารตฺถทีปนีฏีกา-๒ 1303 สารตฺถทีปนีฏีกา-๓ | 1401 ทเวมาติกาปาฬิ 1402 วินยสํคหอฏฺฐกถา 1403 วชิรพุทฺธิฏีกา 1404 วิมติวิโนทนีฏีกา-๑ 1405 วิมติวิโนทนีฏีกา-๒ 1406 วินยาลงฺการฏีกา-๑ 1407 วินยาลงฺการฏีกา-๒ 1408 กงฺขาวิตรณีปุราณฏีกา 1409 วินยวินิจฉย-อุตฺตรวินิจฉย 1410 วินยวินิจฉยฏีกา-๑ 1411 วินยวินิจฉยฏีกา-๒ 1412 ปาจิตฺยาทิโยชนาปาฬิ 1413 ขุทฺทสิกฺขา-มูลสิกฺขา 8401 วิสุทฺธิมคฺค-๑ 8402 วิสุทฺธิมคฺค-๒ 8403 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๑ 8404 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๒ 8405 วิสุทฺธิมคฺค-นิทานกถา 8406 ทีฆนิกาย (ปุ-วิ) 8407 มชฺฌิมนิกาย (ปุ-วิ) 8408 สํยุตฺตนิกาย (ปุ-วิ) 8409 องฺคุตฺตรนิกาย (ปุ-วิ) 8410 วินยปิฎก (ปุ-วิ) 8411 อภิธมฺมปิฎก (ปุ-วิ) 8412 อฏฺฐกถา (ปุ-วิ) 8413 นิรุตฺติทีปนี 8414 ปรมตฺถทีปนี สงฺคหมหาฏีกาปาฐ 8415 อนุทีปนีปาฐ 8416 ปฎฺฐานุทฺเทสทีปนีปาฐ 8417 นมกฺการฏีกา 8418 มหาปณามปาฐ 8419 ลกฺขณาโต พุทฺธโถมนาคาถา 8420 สุตวทน 8421 กมลาญฺชลิ 8422 ชินาลงฺการ 8423 ปชฺชมธุ 8424 พุทฺธคุณคาถาวลี 8425 จูฬคนฺถวํส 8427 สาสนวํส 8426 มหาวํส 8429 โมคฺคลฺลานพฺยากรณํ 8428 กจฺจายนพฺยากรณํ 8430 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ปทมาลา) 8431 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ธาตุมาลา) 8432 ปทรูปสิทฺธิ 8433 โมคคฺลานปญฺจิกา 8434 ปโยคสิทฺธิปาฐ 8435 วุตฺโตทยปาฐ 8436 อภิธานปฺปทีปิกาปาฐ 8437 อภิธานปฺปทีปิกาฏีกา 8438 สุโพธาลงฺการปาฐ 8439 สุโพธาลงฺการฏีกา 8440 พาลาวตาร คณฺฐิปทตฺถวินิจฺฉยสาร 8446 กวิทปฺปณนีติ 8447 นีติมญฺชรี 8445 ธมฺมนีติ 8444 มหารหนีติ 8441 โลกนีติ 8442 สุตฺตนฺตนีติ 8443 สูรสฺสตินีติ 8450 จาณกฺยนีติ 8448 นรทกฺขทีปนี 8449 จตุราวรกฺขทีปนี 8451 รสวาหินี 8452 สีมวิโสธนีปาฐ 8453 เวสฺสนฺตรคีติ 8454 โมคฺคลฺลาน วุตฺติวิวรณปญฺจิกา 8455 ถูปวํส 8456 ทาฐาวํส 8457 ธาตุปาฐวิลาสินิยา 8458 ธาตุวํส 8459 หตฺถวนคัลลวิหารวํส 8460 ชนจริตย 8461 ชนวํสทีปํ 8462 เตลกฏาหคาถา 8463 มิลิทฏีกา 8464 ปทมญฺชรี 8465 ปทสาธนํ 8466 สทฺทพินฺทุปกรณํ 8467 กจฺจายนธาตุมญฺชุสา 8468 สามนฺตกูฏวณฺณนา |
| 2101 สีลกฺขนฺธวคฺคปาฬิ 2102 มหาวคฺคปาฬิ (ทีฆ) 2103 ปาถิกวคฺคปาฬิ | 2201 สีลกฺขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 2202 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (ทีฆ) 2203 ปาถิกวคฺคอฏฺฐกถา | 2301 สีลกฺขนฺธวคฺคฏีกา 2302 มหาวคฺคฏีกา (ทีฆ) 2303 ปาถิกวคฺคฏีกา 2304 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๑ 2305 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๒ | |
| 3101 มูลปณฺณาสปาฬิ 3102 มชฺฌิมปณฺณาสปาฬิ 3103 อุปริปณฺณาสปาฬิ | 3201 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๑ 3202 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๒ 3203 มชฺฌิมปณฺณาสอฏฺฐกถา 3204 อุปริปณฺณาสอฏฺฐกถา | 3301 มูลปณฺณาสฏีกา 3302 มชฺฌิมปณฺณาสฏีกา 3303 อุปริปณฺณาสฏีกา | |
| 4101 สคาถาวคฺคปาฬิ 4102 นิทานวคฺคปาฬิ 4103 ขนฺธวคฺคปาฬิ 4104 สฬายตนวคฺคปาฬิ 4105 มหาวคฺคปาฬิ (สํยุตฺต) | 4201 สคาถาวคฺคอฏฺฐกถา 4202 นิทานวคฺคอฏฺฐกถา 4203 ขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 4204 สฬายตนวคฺคอฏฺฐกถา 4205 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (สํยุตฺต) | 4301 สคาถาวคฺคฏีกา 4302 นิทานวคฺคฏีกา 4303 ขนฺธวคฺคฏีกา 4304 สฬายตนวคฺคฏีกา 4305 มหาวคฺคฏีกา (สํยุตฺต) | |
| 5101 เอกกนิปาตปาฬิ 5102 ทุกนิปาตปาฬิ 5103 ติกนิปาตปาฬิ 5104 จตุกฺกนิปาตปาฬิ 5105 ปญฺจกนิปาตปาฬิ 5106 ฉกฺกนิปาตปาฬิ 5107 สตฺตกนิปาตปาฬิ 5108 อฏฺฐกาทินิปาตปาฬิ 5109 นวกนิปาตปาฬิ 5110 ทสกนิปาตปาฬิ 5111 เอกาทสกนิปาตปาฬิ | 5201 เอกกนิปาตอฏฺฐกถา 5202 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตอฏฺฐกถา 5203 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตอฏฺฐกถา 5204 อฏฺฐกาทินิปาตอฏฺฐกถา | 5301 เอกกนิปาตฏีกา 5302 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตฏีกา 5303 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตฏีกา 5304 อฏฺฐกาทินิปาตฏีกา | |
| 6101 ขุทฺทกปาฐปาฬิ 6102 ธมฺมปทปาฬิ 6103 อุทานปาฬิ 6104 อิติวุตฺตกปาฬิ 6105 สุตฺตนิบาตปาฬิ 6106 วิมานวตฺถุปาฬิ 6107 เปตวตฺถุปาฬิ 6108 เถรคาถาปาฬิ 6109 เถรีคาถาปาฬิ 6110 อปทานปาฬิ-๑ 6111 อปทานปาฬิ-๒ 6112 พุทธวงฺสปาฬิ 6113 จริยาปิฏกปาฬิ 6114 ชาตกปาฬิ-๑ 6115 ชาตกปาฬิ-๒ 6116 มหานิทฺเทสปาฬิ 6117 จูฬนิทฺเทสปาฬิ 6118 ปฏิสมฺภิทามคฺคปาฬิ 6119 เนตฺติปฺปกฺรณปาฬิ 6120 มิลินฺทปญฺหาปาฬิ 6121 เปฏโกปเทสปาฬิ | 6201 ขุทฺทกปาฐอฏฺฐกถา 6202 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๑ 6203 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๒ 6204 อุทานอฏฺฐกถา 6205 อิติวุตฺตกอฏฺฐกถา 6206 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๑ 6207 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๒ 6208 วิมานวตฺถุอฏฺฐกถา 6209 เปตวตฺถุอฏฺฐกถา 6210 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๑ 6211 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๒ 6212 เถรีคาถาอฏฺฐกถา 6213 อปทานอฏฺฐกถา-๑ 6214 อปทานอฏฺฐกถา-๒ 6215 พุทธวงฺสอฏฺฐกถา 6216 จริยาปิฏกอฏฺฐกถา 6217 ชาตกอฏฺฐกถา-๑ 6218 ชาตกอฏฺฐกถา-๒ 6219 ชาตกอฏฺฐกถา-๓ 6220 ชาตกอฏฺฐกถา-๔ 6221 ชาตกอฏฺฐกถา-๕ 6222 ชาตกอฏฺฐกถา-๖ 6223 ชาตกอฏฺฐกถา-๗ 6224 มหานิทฺเทสอฏฺฐกถา 6225 จูฬนิทฺเทสอฏฺฐกถา 6226 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๑ 6227 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๒ 6228 เนตฺติปฺปกฺรณอฏฺฐกถา | 6301 เนตฺติปฺปกฺรณฏีกา 6302 เนตฺติวิภาวินี | |
| 7101 ธมฺมสงฺคณีปาฬิ 7102 วิภงฺคปาฬิ 7103 ธาตุกถาปาฬิ 7104 ปุคฺคลปญฺญตฺติปาฬิ 7105 กถาวตฺถุปาฬิ 7106 ยมกปาฬิ-๑ 7107 ยมกปาฬิ-๒ 7108 ยมกปาฬิ-๓ 7109 ปฎฺฐานปาฬิ-๑ 7110 ปฎฺฐานปาฬิ-๒ 7111 ปฎฺฐานปาฬิ-๓ 7112 ปฎฺฐานปาฬิ-๔ 7113 ปฎฺฐานปาฬิ-๕ | 7201 ธมฺมสงฺคณิอฏฺฐกถา 7202 สมฺโมหวินิทนีอฏฺฐกถา 7203 ปญฺจปกรณอฏฺฐกถา | 7301 ธมฺมสงฺคณีมูลฏีกา 7302 วิภงฺคมูลฏีกา 7303 ปญฺจปกรณมูลฏีกา 7304 ธมฺมสงฺคณีอนุฏีกา 7305 ปญฺจปกรณอนุฏีกา 7306 อภิธมฺมาวตาโร-นามรูปปริจฺเฉโท 7307 อภิธมฺมตฺถสงฺคโห 7308 อภิธมฺมาวตาร-ปุราณฏีกา 7309 อภิธมฺมมาติกาปาฬิ | |
| བོད་མི | |||
| པཱ་ལི་གསུང་རབ། | འགྲེལ་བཤད། | འགྲེལ་བཤད་ཕྲན། | གཞན། |
| 1101 ཕ་ར་ཇི་ཀ་པཱ་ལི། 1102 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་པཱ་ལི། 1103 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (ཝི་ན་ཡ) 1104 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 1105 པ་རི་ཝཱ་ར་པཱ་ལི། | 1201 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 1202 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 1203 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1204 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (ཝི་ན་ཡ) 1205 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1206 པ་རི་ཝཱ་ར་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 1301 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1302 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1303 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༣ | 1401 དྭེ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། 1402 ཝི་ན་ཡ་སངྒ་ཧ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1403 ཝ་ཇི་ར་བུད་དྷི་ཊཱི་ཀཱ། 1404 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1405 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1406 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1407 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1408 ཀངྑཱ་ཝི་ཏ་ར་ཎཱི་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 1409 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཨུ་ཏྟ་ར་ཝི་ནི་ཙ་ཡ། 1410 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1411 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1412 པཱ་ཙི་ཏྱཱ་དི་ཡོ་ཇ་ནཱ་པཱ་ལི། 1413 ཁུད་ད་སིཀྑཱ་མཱུ་ལ་སིཀྑཱ། 8401 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༡ 8402 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༢ 8403 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 8404 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 8405 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་ནི་དཱ་ན་ཀ་ཐཱ། 8406 དཱི་གྷ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8407 མཛྷི་མ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8408 སཾ་ཡུཏྟ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8409 ཨངྒུ་ཏྟ་ར་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8410 ཝི་ན་ཡ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8411 ཨ་བྷི་དྷམྨ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8412 ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (པུ་ཝི) 8413 ནི་རུཏྟི་དཱི་པ་ནཱི། 8414 པ་ར་མཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་སངྒ་ཧ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8415 ཨ་ནུ་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8416 པཊྛཱ་ནུདྡེ་ས་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8417 ན་མཀྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8418 མ་ཧཱ་པ་ཎཱ་མ་པཱ་ཋ། 8419 ལཀྑ་ཎཱ་ཏོ་བུདྡྷ་ཐོ་མ་ནཱ་གཱ་ཐཱ། 8420 སུ་ཏ་ཝནྡ་ནཱ། 8421 ཀ་མ་ལཱཉྫ་ལི། 8422 ཇི་ནཱ་ལངྐཱ་ར། 8423 པཛྫ་མ་དྷུ། 8424 བུདྡྷ་གུ་ཎ་གཱ་ཐཱ་ཝ་ལཱི། 8425 ཙཱུ་ལ་གནྠ་ཝཾ་ས། 8427 སཱ་ས་ན་ཝཾ་ས། 8426 མ་ཧཱ་ཝཾ་ས། 8429 མོགྒ་ལླཱ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8428 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8430 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (པ་ད་མཱ་ལཱ) 8431 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (དྷཱ་ཏུ་མཱ་ལཱ) 8432 པ་ད་རཱུ་པ་སིད་དྷི། 8433 མོ་ག་ལླཱ་ན་པཉྩ་ཀཱ། 8434 པ་ཡོ་ག་སིད་དྷི་པཱ་ཋ། 8435 བུཏྟོ་ད་ཡ་པཱ་ཋ། 8436 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8437 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་ཊཱི་ཀཱ། 8438 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་པཱ་ཋ། 8439 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8440 བཱ་ལཱ་ཝ་ཏཱ་ར་གཎྛི་པ་དཏྠ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་སཱ་ར། 8446 ཀ་ཝི་དཔྤ་ཎ་ནཱི་ཏི། 8447 ནཱི་ཏི་མཉྫ་རཱི། 8445 དྷམྨ་ནཱི་ཏི། 8444 མ་ཧཱ་ར་ཧ་ནཱི་ཏི། 8441 ལོ་ཀ་ནཱི་ཏི། 8442 སུཏྟནྟ་ནཱ་ཏི། 8443 སཱུ་རསྶ་ཏི་ནཱི་ཏི། 8450 ཙཱ་ཎཀྱ་ནཱི་ཏི། 8448 ན་ར་དཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8449 ཙ་ཏུ་རཱ་རཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8451 ར་ས་ཝཱ་ཧི་ནཱི། 8452 སཱི་མ་ཝི་སོ་ད་ནཱི་པཱ་ཋ། 8453 ཝེསྶནྟ་ར་གཱི་ཏི། 8454 མོགྒ་ལླཱ་ན་བུཏྟི་ཝི་ཝ་ར་ཎ་པཉྩ་ཀཱ། 8455 ཐཱུ་པ་ཝཾ་ས། 8456 དཱ་ཊྷཱ་ཝཾ་ས། 8457 དྷཱ་ཏུ་པཱ་ཋ་ཝི་ལཱ་སི་ནི་ཡཱ། 8458 དྷཱ་ཏུ་ཝཾ་ས། 8459 ཧཏྠ་ཝ་ན་གལླ་ཝི་ཧཱ་ར་ཝཾ་ས། 8460 ཇི་ན་ཙ་རི་ཏ་ཡ། 8461 ཇི་ན་ཝཾ་ས་དཱི་པཾ། 8462 ཏེ་ལ་ཀ་ཊཱ་ཧ་གཱ་ཐཱ། 8463 མི་ལི་ད་ཊཱི་ཀཱ། 8464 པ་ད་མཉྫ་རཱི། 8465 པ་ད་སཱ་ད་ནཾ། 8466 སདྡ་བིནྡུ་པ་ཀ་ར་ཎཾ། 8467 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་དྷཱ་ཏུ་མཉྫུ་སཱ། 8468 སཱ་མནྟ་ཀཱུ་ཊ་ཝཎྞ་ནཱ། |
| 2101 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 2102 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (དཱི་གྷ) 2103 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་པཱ་ལི། | 2201 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 2202 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (དཱི་གྷ) 2203 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 2301 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2302 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (དཱི་གྷ) 2303 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2304 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 2305 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༢ | |
| 3101 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3102 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3103 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། | 3201 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 3202 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 3203 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 3204 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 3301 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3302 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3303 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 4101 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4102 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4103 ཁནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4104 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4105 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4201 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4202 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4203 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4204 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4205 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4301 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4302 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4303 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4304 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4305 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | |
| 5101 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5102 དུ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5103 ཏི་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5104 ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5105 པཉྩ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5106 ཆཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5107 སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5108 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5109 ན་ཝ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5110 ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5111 ཨེ་ཀཱ་ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། | 5201 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5202 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5203 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5204 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 5301 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5302 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5303 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5304 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 6101 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་པཱ་ལི། 6102 དྷམྨ་པ་ད་པཱ་ལི། 6103 ཨུ་དཱ་ན་པཱ་ལི། 6104 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་པཱ་ལི། 6105 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 6106 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6107 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6108 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6109 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6110 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 6111 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 6112 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་པཱ་ལི། 6113 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་པཱ་ལི། 6114 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 6115 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 6116 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6117 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6118 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་པཱ་ལི། 6119 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་པཱ་ལི། 6120 མི་ལིནྡ་པཉྷ་པཱ་ལི། 6121 པེ་ཊ་ཀོ་པ་དེ་ས་པཱ་ལི། | 6201 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6202 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6203 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6204 ཨུ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6205 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6206 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6207 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6208 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6209 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6210 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6211 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6212 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6213 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6214 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6215 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6216 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6217 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6218 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6219 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༣ 6220 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༤ 6221 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༥ 6222 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༦ 6223 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༧ 6224 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6225 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6226 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6227 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6228 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 6301 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 6302 ནེཏྟི་ཝི་བྷཱི་ནཱི། | |
| 7101 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་པཱ་ལི། 7102 ཝི་བྷངྒ་པཱ་ལི། 7103 དྷཱ་ཏུ་ཀ་ཐཱ་པཱ་ལི། 7104 པུགྒ་ལ་པཉྙཏྟི་པཱ་ལི། 7105 ཀ་ཐཱ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 7106 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 7107 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 7108 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༣ 7109 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 7110 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 7111 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༣ 7112 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༤ 7113 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༥ | 7201 དྷམྨ་སངྒ་ཎི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7202 སམྨོ་ཧ་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7203 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 7301 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7302 ཝི་བྷངྒ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7303 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7304 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7305 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7306 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་རོ་ནཱ་མ་རཱུ་པ་པ་རི་ཙྪེ་དོ། 7307 ཨ་བྷི་དྷམྨཏྠ་སངྒ་ཧོ། 7308 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་ར་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 7309 ཨ་བྷི་དྷམྨ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། | |
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| Kinh điển Pali | Chú giải | Phụ chú giải | Khác |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Tạng Luật) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 1 1202 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 2 1203 Chú Giải Pācittiya 1204 Chú Giải Mahāvagga (Tạng Luật) 1205 Chú Giải Cūḷavagga 1206 Chú Giải Parivāra | 1301 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 1 1302 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 2 1303 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Chú Giải Vinayasaṅgaha 1403 Phụ Chú Giải Vajirabuddhi 1404 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 1 1405 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 2 1406 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 1 1407 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 2 1408 Phụ Chú Giải Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 1 1411 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Thanh Tịnh Đạo - 1 8402 Thanh Tịnh Đạo - 2 8403 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 1 8404 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 2 8405 Lời Tựa Thanh Tịnh Đạo 8406 Trường Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8407 Trung Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8408 Tương Ưng Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8409 Tăng Chi Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8410 Tạng Luật (Vấn Đáp) 8411 Tạng Vi Diệu Pháp (Vấn Đáp) 8412 Chú Giải (Vấn Đáp) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Phụ Chú Giải Namakkāra 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Phụ Chú Giải Abhidhānappadīpikā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Phụ Chú Giải Subodhālaṅkāra 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8444 Mahārahanīti 8445 Dhammanīti 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8450 Cāṇakyanīti 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Phụ Chú Giải Milinda 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Trường Bộ) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2202 Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2203 Chú Giải Pāthikavagga | 2301 Phụ Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2302 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2303 Phụ Chú Giải Pāthikavagga 2304 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 1 2305 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 1 3202 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 2 3203 Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3204 Chú Giải Uparipaṇṇāsa | 3301 Phụ Chú Giải Mūlapaṇṇāsa 3302 Phụ Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3303 Phụ Chú Giải Uparipaṇṇāsa | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Tương Ưng Bộ) | 4201 Chú Giải Sagāthāvagga 4202 Chú Giải Nidānavagga 4203 Chú Giải Khandhavagga 4204 Chú Giải Saḷāyatanavagga 4205 Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | 4301 Phụ Chú Giải Sagāthāvagga 4302 Phụ Chú Giải Nidānavagga 4303 Phụ Chú Giải Khandhavagga 4304 Phụ Chú Giải Saḷāyatanavagga 4305 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Chú Giải Ekakanipāta 5202 Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5203 Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5204 Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | 5301 Phụ Chú Giải Ekakanipāta 5302 Phụ Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5303 Phụ Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5304 Phụ Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi - 1 6111 Apadāna Pāḷi - 2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi - 1 6115 Jātaka Pāḷi - 2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Chú Giải Khuddakapāṭha 6202 Chú Giải Dhammapada - 1 6203 Chú Giải Dhammapada - 2 6204 Chú Giải Udāna 6205 Chú Giải Itivuttaka 6206 Chú Giải Suttanipāta - 1 6207 Chú Giải Suttanipāta - 2 6208 Chú Giải Vimānavatthu 6209 Chú Giải Petavatthu 6210 Chú Giải Theragāthā - 1 6211 Chú Giải Theragāthā - 2 6212 Chú Giải Therīgāthā 6213 Chú Giải Apadāna - 1 6214 Chú Giải Apadāna - 2 6215 Chú Giải Buddhavaṃsa 6216 Chú Giải Cariyāpiṭaka 6217 Chú Giải Jātaka - 1 6218 Chú Giải Jātaka - 2 6219 Chú Giải Jātaka - 3 6220 Chú Giải Jātaka - 4 6221 Chú Giải Jātaka - 5 6222 Chú Giải Jātaka - 6 6223 Chú Giải Jātaka - 7 6224 Chú Giải Mahāniddesa 6225 Chú Giải Cūḷaniddesa 6226 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 1 6227 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 2 6228 Chú Giải Nettippakaraṇa | 6301 Phụ Chú Giải Nettippakaraṇa 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi - 1 7107 Yamaka Pāḷi - 2 7108 Yamaka Pāḷi - 3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi - 1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi - 2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi - 3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi - 4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi - 5 | 7201 Chú Giải Dhammasaṅgaṇi 7202 Chú Giải Sammohavinodanī 7203 Chú Giải Pañcapakaraṇa | 7301 Phụ Chú Giải Gốc Dhammasaṅgaṇī 7302 Phụ Chú Giải Gốc Vibhaṅga 7303 Phụ Chú Giải Gốc Pañcapakaraṇa 7304 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Dhammasaṅgaṇī 7305 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Pañcapakaraṇa 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Phụ Chú Giải Cổ Điển Abhidhammāvatāra 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |