| বাংলা | |||
| পালি | অট্ঠকথা | টীকা | অন্ন |
| 1101 পারাজিক পালি 1102 পাচিত্তিয় পালি 1103 মহাবগ্গ পালি (বিনয়) 1104 চূলবগ্গ পালি 1105 পরিবার পালি | 1201 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-১ 1202 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-২ 1203 পাচিত্তিয় অট্ঠকথা 1204 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (বিনয়) 1205 চূলবগ্গ অট্ঠকথা 1206 পরিবার অট্ঠকথা | 1301 সারত্থদীপনী টীকা-১ 1302 সারত্থদীপনী টীকা-২ 1303 সারত্থদীপনী টীকা-৩ | 1401 দ্বেমাতিকাপালি 1402 বিনয়সংগহ অট্ঠকথা 1403 বজিরবুদ্ধি টীকা 1404 বিমতিবিনোদনী টীকা-১ 1405 বিমতিবিনোদনী টীকা-২ 1406 বিনয়ালংকার টীকা-১ 1407 বিনয়ালংকার টীকা-২ 1408 কঙ্খাবিতরণীপুরাণ টীকা 1409 বিনয়বিনিচ্ছয়-উত্তরবিনিচ্ছয় 1410 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-১ 1411 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-২ 1412 পাচিত্যাদিযোজনাপালি 1413 খুদ্ধসিক্খা-মূলসিক্খা 8401 বিসুদ্ধিমগ্গ-১ 8402 বিসুদ্ধিমগ্গ-২ 8403 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-১ 8404 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-২ 8405 বিসুদ্ধিমগ্গ নিদানকথা 8406 দীঘনিকায় (পু-বি) 8407 মজ্ঝিমনিকায় (পু-বি) 8408 সংযুত্তনিকায় (পু-বি) 8409 অঙ্গুত্তরনিকায় (পু-বি) 8410 বিনয়পিটক (পু-বি) 8411 অভিধম্মপিটক (পু-বি) 8412 অট্ঠকথা (পু-বি) 8413 নিরুত্তিদীপনী 8414 পরমত্থদীপনী সংগহমহাটীকাপাঠ 8415 অনুদীপনীপাঠ 8416 পট্ঠানুদ্দেস দীপনীপাঠ 8417 নমক্কারটীকা 8418 মহাপণামপাঠ 8419 লক্খণাতো বুদ্ধথোমনাগাথা 8420 সুতবন্দনা 8421 কমলাঞ্জলি 8422 জিনালংকার 8423 পজ্জমধু 8424 বুদ্ধগুণগাথাবলী 8425 চূলগন্থবংস 8426 মহাবংস 8427 সাসনবংস 8428 কচ্চায়নব্যাকরণং 8429 মোগ্গল্লানব্যাকরণং 8430 সদ্দনীতিপ্পকরণং (পদমালা) 8431 সদ্দনীতিপ্পকরণং (ধাতুমালা) 8432 পদরূপসিদ্ধি 8433 মোগ্গল্লানপঞ্চিকা 8434 পযোগসিদ্ধিপাঠ 8435 বুত্তোদয়পাঠ 8436 অভিধানপ্পদীপিকাপাঠ 8437 অভিধানপ্পদীপিকাটীকা 8438 সুবোধালংকারপাঠ 8439 সুবোধালংকারটীকা 8440 বালাবতার গণ্ঠিপদত্থবিনিচ্ছয়সার 8441 লোকনীতি 8442 সুত্তন্তনীতি 8443 সূরস্সতীনীতি 8444 মহারহনীতি 8445 ধম্মনীতি 8446 কবিদপ্পণনীতি 8447 নীতিমঞ্জরী 8448 নরদক্খদীপনী 8449 চতুরারক্খদীপনী 8450 চাণক্যনীতি 8451 রসবাহিনী 8452 সীমাবিসোধনীপাঠ 8453 বেস্সন্তরগীতি 8454 মোগ্গল্লান বুত্তিবিবরণপঞ্চিকা 8455 থূপবংস 8456 দাঠাবংস 8457 ধাতুপাঠবিলাসিনিয়া 8458 ধাতুবংস 8459 হত্থবনগল্লবিহারবংস 8460 জিনচরিতয় 8461 জিনবংসদীপং 8462 তেলকটাহগাথা 8463 মিলিদটীকা 8464 পদমঞ্জরী 8465 পদসাধনং 8466 সদ্দবিন্দুপকরণং 8467 কচ্চায়নধাতুমঞ্জুসা 8468 সামন্তকূটবণ্ণনা |
| 2101 সীলক্খন্ধবগ্গ পালি 2102 মহাবগ্গ পালি (দীঘ) 2103 পাথিকবগ্গ পালি | 2201 সীলক্খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 2202 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (দীঘ) 2203 পাথিকবগ্গ অট্ঠকথা | 2301 সীলক্খন্ধবগ্গ টীকা 2302 মহাবগ্গ টীকা (দীঘ) 2303 পাথিকবগ্গ টীকা 2304 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-১ 2305 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-২ | |
| 3101 মূলপণ্ণাস পালি 3102 মজ্ঝিমপণ্ণাস পালি 3103 উপরিপণ্ণাস পালি | 3201 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-১ 3202 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-২ 3203 মজ্ঝিমপণ্ণাস অট্ঠকথা 3204 উপরিপণ্ণাস অট্ঠকথা | 3301 মূলপণ্ণাস টীকা 3302 মজ্ঝিমপণ্ণাস টীকা 3303 উপরিপণ্ণাস টীকা | |
| 4101 সগাথাবগ্গ পালি 4102 নিদানবগ্গ পালি 4103 খন্ধবগ্গ পালি 4104 সলায়তনবগ্গ পালি 4105 মহাবগ্গ পালি (সংযুত্ত) | 4201 সগাথাবগ্গ অট্ঠকথা 4202 নিদানবগ্গ অট্ঠকথা 4203 খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 4204 সলায়তনবগ্গ অট্ঠকথা 4205 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (সংযুত্ত) | 4301 সগাথাবগ্গ টীকা 4302 নিদানবগ্গ টীকা 4303 খন্ধবগ্গ টীকা 4304 সলায়তনবগ্গ টীকা 4305 মহাবগ্গ টীকা (সংযুত্ত) | |
| 5101 এককনিপাত পালি 5102 দুকনিপাত পালি 5103 তিকনিপাত পালি 5104 চতুক্কনিপাত পালি 5105 পঞ্চকনিপাত পালি 5106 ছক্কনিপাত পালি 5107 সত্তকনিপাত পালি 5108 অট্ঠকাদিনিপাত পালি 5109 নবকনিপাত পালি 5110 দশকনিপাত পালি 5111 একাদশকনিপাত পালি | 5201 এককনিপাত অট্ঠকথা 5202 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত অট্ঠকথা 5203 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত অট্ঠকথা 5204 অট্ঠকাদিনিপাত অট্ঠকথা | 5301 এককনিপাত টীকা 5302 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত টীকা 5303 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত টীকা 5304 অট্ঠকাদিনিপাত টীকা | |
| 6101 খুদ্ধকপাঠ পালি 6102 ধম্মপদ পালি 6103 উদান পালি 6104 ইতিবুত্তক পালি 6105 সুত্তনিপাত পালি 6106 বিমানবত্থু পালি 6107 পেতবত্থু পালি 6108 থেরগাথা পালি 6109 থেরীগাথা পালি 6110 অপদান পালি-১ 6111 অপদান পালি-২ 6112 বুদ্ধবংস পালি 6113 চরিয়াপিটক পালি 6114 জাতক পালি-১ 6115 জাতক পালি-২ 6116 মহানিদ্দেস পালি 6117 চূলনিদ্দেস পালি 6118 পটিসম্ভিদামগ্গ পালি 6119 নেত্তিপ্পকরণ পালি 6120 মিলিন্দপঞ্হ পালি 6121 পেটকোপদেস পালি | 6201 খুদ্ধকপাঠ অট্ঠকথা 6202 ধম্মপদ অট্ঠকথা-১ 6203 ধম্মপদ অট্ঠকথা-২ 6204 উদান অট্ঠকথা 6205 ইতিবুত্তক অট্ঠকথা 6206 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-১ 6207 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-২ 6208 বিমানবত্থু অট্ঠকথা 6209 পেতবত্থু অট্ঠকথা 6210 থেরগাথা অট্ঠকথা-১ 6211 থেরগাথা অট্ঠকথা-২ 6212 থেরীগাথা অট্ঠকথা 6213 অপদান অট্ঠকথা-১ 6214 অপদান অট্ঠকথা-২ 6215 বুদ্ধবংস অট্ঠকথা 6216 চরিয়াপিটক অট্ঠকথা 6217 জাতক অট্ঠকথা-১ 6218 জাতক অট্ঠকথা-২ 6219 জাতক অট্ঠকথা-৩ 6220 জাতক অট্ঠকথা-৪ 6221 জাতক অট্ঠকথা-৫ 6222 জাতক অট্ঠকথা-৬ 6223 জাতক অট্ঠকথা-৭ 6224 মহানিদ্দেস অট্ঠকথা 6225 চূলনিদ্দেস অট্ঠকথা 6226 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-১ 6227 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-২ 6228 নেত্তিপ্পকরণ অট্ঠকথা | 6301 নেত্তিপ্পকরণ টীকা 6302 নেত্তিবিভাবিনী | |
| 7101 ধম্মসংগণী পালি 7102 বিভঙ্গ পালি 7103 ধাতুকথা পালি 7104 পুগ্গলপঞ্ঞাত্তি পালি 7105 কথাবত্থু পালি 7106 যমক পালি-১ 7107 যমক পালি-২ 7108 যমক পালি-৩ 7109 পট্ঠান পালি-১ 7110 পট্ঠান পালি-২ 7111 পট্ঠান পালি-৩ 7112 পট্ঠান পালি-৪ 7113 পট্ঠান পালি-৫ | 7201 ধম্মসংগণি অট্ঠকথা 7202 সম্মোহবিনোদনী অট্ঠকথা 7203 পঞ্চপকরণ অট্ঠকথা | 7301 ধম্মসংগণী-মূলটীকা 7302 বিভঙ্গ-মূলটীকা 7303 পঞ্চপকরণ-মূলটীকা 7304 ধম্মসংগণী-অনুটীকা 7305 পঞ্চপকরণ-অনুটীকা 7306 অভিধম্মাবতারো-নামরূপপরিচ্ছেদো 7307 অভিধম্মত্থসংগহো 7308 অভিধম্মাবতার-পুরাণটীকা 7309 অভিধম্মমাতিকাপালি | |
| 中文 | |||
| 巴利 | 義註 | 複註 | 藏外典籍 |
| 1101 巴拉基咖(波羅夷) 1102 巴吉帝亞(波逸提) 1103 大品(律藏) 1104 小品 1105 附隨 | 1201 巴拉基咖(波羅夷)義註-1 1202 巴拉基咖(波羅夷)義註-2 1203 巴吉帝亞(波逸提)義註 1204 大品義註(律藏) 1205 小品義註 1206 附隨義註 | 1301 心義燈-1 1302 心義燈-2 1303 心義燈-3 | 1401 疑惑度脫 1402 律攝註釋 1403 金剛智疏 1404 疑難解除疏-1 1405 疑難解除疏-2 1406 律莊嚴疏-1 1407 律莊嚴疏-2 1408 古老解惑疏 1409 律抉擇-上抉擇 1410 律抉擇疏-1 1411 律抉擇疏-2 1412 巴吉帝亞等啟請經 1413 小戒學-根本戒學 8401 清淨道論-1 8402 清淨道論-2 8403 清淨道大複註-1 8404 清淨道大複註-2 8405 清淨道論導論 8406 長部問答 8407 中部問答 8408 相應部問答 8409 增支部問答 8410 律藏問答 8411 論藏問答 8412 義注問答 8413 語言學詮釋手冊 8414 勝義顯揚 8415 隨燈論誦 8416 發趣論燈論 8417 禮敬文 8418 大禮敬文 8419 依相讚佛偈 8420 經讚 8421 蓮花供 8422 勝者莊嚴 8423 語蜜 8424 佛德偈集 8425 小史 8427 佛教史 8426 大史 8429 目犍連文法 8428 迦旃延文法 8430 文法寶鑑(詞幹篇) 8431 文法寶鑑(詞根篇) 8432 詞形成論 8433 目犍連五章 8434 應用成就讀本 8435 音韻論讀本 8436 阿毗曇燈讀本 8437 阿毗曇燈疏 8438 妙莊嚴論讀本 8439 妙莊嚴論疏 8440 初學入門義抉擇精要 8446 詩王智論 8447 智論花鬘 8445 法智論 8444 大羅漢智論 8441 世間智論 8442 經典智論 8443 勇士百智論 8450 考底利耶智論 8448 人眼燈 8449 四護衛燈 8451 妙味之流 8452 界清淨 8453 韋桑達拉頌 8454 目犍連語釋五章 8455 塔史 8456 佛牙史 8457 詞根讀本注釋 8458 舍利史 8459 象頭山寺史 8460 勝者行傳 8461 勝者宗燈 8462 油鍋偈 8463 彌蘭王問疏 8464 詞花鬘 8465 詞成就論 8466 正理滴論 8467 迦旃延詞根注 8468 邊境山注釋 |
| 2101 戒蘊品 2102 大品(長部) 2103 波梨品 | 2201 戒蘊品註義註 2202 大品義註(長部) 2203 波梨品義註 | 2301 戒蘊品疏 2302 大品複註(長部) 2303 波梨品複註 2304 戒蘊品新複註-1 2305 戒蘊品新複註-2 | |
| 3101 根本五十經 3102 中五十經 3103 後五十經 | 3201 根本五十義註-1 3202 根本五十義註-2 3203 中五十義註 3204 後五十義註 | 3301 根本五十經複註 3302 中五十經複註 3303 後五十經複註 | |
| 4101 有偈品 4102 因緣品 4103 蘊品 4104 六處品 4105 大品(相應部) | 4201 有偈品義注 4202 因緣品義注 4203 蘊品義注 4204 六處品義注 4205 大品義注(相應部) | 4301 有偈品複註 4302 因緣品註 4303 蘊品複註 4304 六處品複註 4305 大品複註(相應部) | |
| 5101 一集經 5102 二集經 5103 三集經 5104 四集經 5105 五集經 5106 六集經 5107 七集經 5108 八集等經 5109 九集經 5110 十集經 5111 十一集經 | 5201 一集義註 5202 二、三、四集義註 5203 五、六、七集義註 5204 八、九、十、十一集義註 | 5301 一集複註 5302 二、三、四集複註 5303 五、六、七集複註 5304 八集等複註 | |
| 6101 小誦 6102 法句經 6103 自說 6104 如是語 6105 經集 6106 天宮事 6107 餓鬼事 6108 長老偈 6109 長老尼偈 6110 譬喻-1 6111 譬喻-2 6112 諸佛史 6113 所行藏 6114 本生-1 6115 本生-2 6116 大義釋 6117 小義釋 6118 無礙解道 6119 導論 6120 彌蘭王問 6121 藏釋 | 6201 小誦義注 6202 法句義注-1 6203 法句義注-2 6204 自說義注 6205 如是語義註 6206 經集義注-1 6207 經集義注-2 6208 天宮事義注 6209 餓鬼事義注 6210 長老偈義注-1 6211 長老偈義注-2 6212 長老尼義注 6213 譬喻義注-1 6214 譬喻義注-2 6215 諸佛史義注 6216 所行藏義注 6217 本生義注-1 6218 本生義注-2 6219 本生義注-3 6220 本生義注-4 6221 本生義注-5 6222 本生義注-6 6223 本生義注-7 6224 大義釋義注 6225 小義釋義注 6226 無礙解道義注-1 6227 無礙解道義注-2 6228 導論義注 | 6301 導論複註 6302 導論明解 | |
| 7101 法集論 7102 分別論 7103 界論 7104 人施設論 7105 論事 7106 雙論-1 7107 雙論-2 7108 雙論-3 7109 發趣論-1 7110 發趣論-2 7111 發趣論-3 7112 發趣論-4 7113 發趣論-5 | 7201 法集論義註 7202 分別論義註(迷惑冰消) 7203 五部論義註 | 7301 法集論根本複註 7302 分別論根本複註 7303 五論根本複註 7304 法集論複註 7305 五論複註 7306 阿毘達摩入門 7307 攝阿毘達磨義論 7308 阿毘達摩入門古複註 7309 阿毘達摩論母 | |
| English | |||
| Pali Canon | Commentaries | Sub-commentaries | Other |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| Français | |||
| Canon Pali | Commentaires | Sous-commentaires | Autres |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| Deutsch | |||
| Pali-Kanon | Kommentare | Subkommentare | Sonstige |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| हिंदी | |||
| पाली कैनन | कमेंट्री | उप-टिप्पणियाँ | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळि 1102 पाचित्तिय पाळि 1103 महावग्ग पाळि (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळि 1105 परिवार पाळि | 1201 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-1 1202 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-2 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-1 1302 सारत्थदीपनी टीका-2 1303 सारत्थदीपनी टीका-3 | 1401 द्वेमातिकापाळि 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-1 1405 विमतिविनोदनी टीका-2 1406 विनयालंकार टीका-1 1407 विनयालंकार टीका-2 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-1 1411 विनयविनिच्छय टीका-2 1412 पाचित्यादियोजनापाळि 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-1 8402 विसुद्धिमग्ग-2 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-1 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-2 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अङ्गुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी सङ्गहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवन्दना 8421 कमलाञ्जलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगन्थवंस 8427 सासनवंस 8426 महावंस 8429 मोग्गल्लानब्याकरणं 8428 कच्चायनब्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपञ्चिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गण्ठिपदत्थविनिच्छयसार 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमञ्जरी 8445 धम्मनीति 8444 महारहनीति 8441 लोकनीति 8442 सुत्तन्तनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8450 चाणक्यनीति 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8451 रसवाहिनी 8452 सीमविसोधनीपाठ 8453 वेस्सन्तरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपञ्चिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमञ्जरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिन्दुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमञ्जुसा 8468 सामन्तकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खन्धवग्ग पाळि 2102 महावग्ग पाळि (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळि | 2201 सीलक्खन्धवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खन्धवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-1 2305 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-2 | |
| 3101 मूलपण्णास पाळि 3102 मज्झिमपण्णास पाळि 3103 उपरिपण्णास पाळि | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-1 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-2 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळि 4102 निदानवग्ग पाळि 4103 खन्धवग्ग पाळि 4104 सळायतनवग्ग पाळि 4105 महावग्ग पाळि (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खन्धवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खन्धवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळि 5102 दुकनिपात पाळि 5103 तिकनिपात पाळि 5104 चतुक्कनिपात पाळि 5105 पञ्चकनिपात पाळि 5106 छक्कनिपात पाळि 5107 सत्तकनिपात पाळि 5108 अट्ठकादिनिपात पाळि 5109 नवकनिपात पाळि 5110 दसकनिपात पाळि 5111 एकादसकनिपात पाळि | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळि 6102 धम्मपद पाळि 6103 उदान पाळि 6104 इतिवुत्तक पाळि 6105 सुत्तनिपात पाळि 6106 विमानवत्थु पाळि 6107 पेतवत्थु पाळि 6108 थेरगाथा पाळि 6109 थेरीगाथा पाळि 6110 अपदान पाळि-1 6111 अपदान पाळि-2 6112 बुद्धवंस पाळि 6113 चरियापिटक पाळि 6114 जातक पाळि-1 6115 जातक पाळि-2 6116 महानिद्देस पाळि 6117 चूळनिद्देस पाळि 6118 पटिसम्भिदामग्ग पाळि 6119 नेत्तिप्पकरण पाळि 6120 मिलिन्दपञ्ह पाळि 6121 पेटकोपदेस पाळि | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-1 6203 धम्मपद अट्ठकथा-2 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-1 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-2 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-1 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-2 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-1 6214 अपदान अट्ठकथा-2 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-1 6218 जातक अट्ठकथा-2 6219 जातक अट्ठकथा-3 6220 जातक अट्ठकथा-4 6221 जातक अट्ठकथा-5 6222 जातक अट्ठकथा-6 6223 जातक अट्ठकथा-7 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-1 6227 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-2 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसङ्गणी पाळि 7102 विभङ्ग पाळि 7103 धातुकथा पाळि 7104 पुग्गलपञ्ञत्ति पाळि 7105 कथावत्थु पाळि 7106 यमक पाळि-1 7107 यमक पाळि-2 7108 यमक पाळि-3 7109 पट्ठान पाळि-1 7110 पट्ठान पाळि-2 7111 पट्ठान पाळि-3 7112 पट्ठान पाळि-4 7113 पट्ठान पाळि-5 | 7201 धम्मसङ्गणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पञ्चपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसङ्गणी-मूलटीका 7302 विभङ्ग-मूलटीका 7303 पञ्चपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसङ्गणी-अनुटीका 7305 पञ्चपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसङ्गहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळि | |
| Indonesia | |||
| Kanon Pali | Komentar | Sub-komentar | Lainnya |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| 日文 | |||
| パーリ仏典 | 註釈書 | 副註釈書 | その他 |
| 1101 パーラージカ・パーリ 1102 パーチッティヤ・パーリ 1103 マハーヴァッガ・パーリ(ヴィナヤ) 1104 チューラヴァッガ・パーリ 1105 パリヴァーラ・パーリ | 1201 パーラージカカンダ・アッタカター-1 1202 パーラージカカンダ・アッタカター-2 1203 パーチッティヤ・アッタカター 1204 マハーヴァッガ・アッタカター(ヴィナヤ) 1205 チューラヴァッガ・アッタカター 1206 パリヴァーラ・アッタカター | 1301 サーラッタディーパニー・ティーカー-1 1302 サーラッタディーパニー・ティーカー-2 1303 サーラッタディーパニー・ティーカー-3 | 1401 ドヴェマーティカー・パーリ 1402 ヴィナヤサンガハ・アッタカター 1403 ヴァジラブッディ・ティーカー 1404 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-1 1405 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-2 1406 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-1 1407 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-2 1408 カンカーウィタラニープラーナ・ティーカー 1409 ヴィナヤヴィニッチャヤ-ウッタラヴィニッチャヤ 1410 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-1 1411 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-2 1412 パーチッティヤーディヨージャナー・パーリ 1413 クッダシッカー-ムーラシッカー 8401 ヴィスッディマッガ-1 8402 ヴィスッディマッガ-2 8403 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-1 8404 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-2 8405 ヴィスッディマッガ・ニダーナカター 8406 ディーガニカーヤ(プ・ヴィ) 8407 マッジマニカーヤ(プ・ヴィ) 8408 サンユッタニカーヤ(プ・ヴィ) 8409 アングッタラニカーヤ(プ・ヴィ) 8410 ヴィナヤピタカ(プ・ヴィ) 8411 アビダンマピタカ(プ・ヴィ) 8412 アッタカター(プ・ヴィ) 8413 ニルッティディーパニー 8414 パラマッタディーパニー・サンガハマハーティカーパータ 8415 アヌディーパニーパータ 8416 パッターヌッデーサ・ディーパニーパータ 8417 ナマッカラ・ティーカー 8418 マハーパナーマ・パータ 8419 ラッカナート・ブッダトーマナーガーター 8420 スタヴァンダナー 8421 カマラーニャジャリ 8422 ジナランカーラ 8423 パッジャマドゥ 8424 ブッダグナガーター・ヴァリー 8425 チューラガンタヴァンサ 8427 サーサナヴァンサ 8426 マハーヴァンサ 8429 モッガラーナ・ビャーカラナン 8428 カッチャーヤナ・ビャーカラナン 8430 サッダニーティッパカラナン(パダマーラー) 8431 サッダニーティッパカラナン(ダートゥマーラー) 8432 パダルーパシッディ 8433 モッガラーナ・パンチカー 8434 パヨーガシッディ・パータ 8435 ヴットーダヤ・パータ 8436 アビダーナッパディーピカー・パータ 8437 アビダーナッパディーピカー・ティーカー 8438 スボーダーランカーラ・パータ 8439 スボーダーランカーラ・ティーカー 8440 バーラーヴァターラ・ガンティパダッタヴィニッチャヤサーラ 8446 カヴィダッパナニーティ 8447 ニーティマンジャリー 8445 ダンマニーティ 8444 マハーラハニーティ 8441 ローカニーティ 8442 スタンタニーティ 8443 スーラッサティニーティ 8450 チャーナキャニーティ 8448 ナラダッカディーパニー 8449 チャトゥラーラッカディーパニー 8451 ラサヴァーヒニー 8452 シーマヴィソーダニー・パータ 8453 ヴェッサンタラ・ギーティ 8454 モッガラーナ・ヴッティヴィヴァラナパンチカー 8455 トゥーパヴァンサ 8456 ダーターヴァンサ 8457 ダートゥパータヴィラーヴィシニヤー 8458 ダートゥヴァンサ 8459 ハッタヴァナッガラヴィハーラヴァンサ 8460 ジナチャリタヤ 8461 ジナヴァンサディーパン 8462 テーラカターガーター 8463 ミリダ・ティーカー 8464 パダマンジャリー 8465 パダサーダナン 8466 サッダビンドゥパカラナン 8467 カッチャーヤナ・ダートゥマンジューサー 8468 サーマンタクータ・ヴァンナナー |
| 2101 シーラッカンダワッガ・パーリ 2102 マハーワッガ・パーリ(ディーガ) 2103 パーティカワッガ・パーリ | 2201 シーラッカンダワッガ・アッタカター 2202 マハーワッガ・アッタカター(ディーガ) 2203 パーティカワッガ・アッタカター | 2301 シーラッカンダワッガ・ティーカー 2302 マハーワッガ・ティーカー(ディーガ) 2303 パーティカワッガ・ティーカー 2304 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-1 2305 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-2 | |
| 3101 ムーラパンナーサ・パーリ 3102 マッジマパンナーサ・パーリ 3103 ウパリパンナーサ・パーリ | 3201 ムーラパンナーサ・アッタカター-1 3202 ムーラパンナーサ・アッタカター-2 3203 マッジマパンナーサ・アッタカター 3204 ウパリパンナーサ・アッタカター | 3301 ムーラパンナーサ・ティーカー 3302 マッジマパンナーサ・ティーカー 3303 ウパリパンナーサ・ティーカー | |
| 4101 サガーター・ワッガ・パーリ 4102 ニダーナ・ワッガ・パーリ 4103 カンダ・ワッガ・パーリ 4104 サラーヤタナ・ワッガ・パーリ 4105 マハーワッガ・パーリ(サンユッタ) | 4201 サガーター・ワッガ・アッタカター 4202 ニダーナ・ワッガ・アッタカター 4203 カンダ・ワッガ・アッタカター 4204 サラーヤタナ・ワッガ・アッタカター 4205 マハーワッガ・アッタカター(サンユッタ) | 4301 サガーター・ワッガ・ティーカー 4302 ニダーナ・ワッガ・ティーカー 4303 カンダ・ワッガ・ティーカー 4304 サラーヤタナ・ワッガ・ティーカー 4305 マハーワッガ・ティーカー(サンユッタ) | |
| 5101 エーカカニパータ・パーリ 5102 ドゥカニパータ・パーリ 5103 ティカニパータ・パーリ 5104 チャトゥッカニパータ・パーリ 5105 パンチャカニパータ・パーリ 5106 チャッカニパータ・パーリ 5107 サッタカニパータ・パーリ 5108 アッタカーディニパータ・パーリ 5109 ナヴァカニパータ・パーリ 5110 ダサカニパータ・パーリ 5111 エーカーダサカニパータ・パーリ | 5201 エーカカニパータ・アッタカター 5202 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・アッタカター 5203 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・アッタカター 5204 アッタカーディニパータ・アッタカター | 5301 エーカカニパータ・ティーカー 5302 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・ティーカー 5303 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・ティーカー 5304 アッタカーディニパータ・ティーカー | |
| 6101 クッダカパータ・パーリ 6102 ダンマパダ・パーリ 6103 ウダーナ・パーリ 6104 イティヴッタカ・パーリ 6105 スッタニパータ・パーリ 6106 ヴィマーナヴァットゥ・パーリ 6107 ペーヴァットゥ・パーリ 6108 テーラガーター・パーリ 6109 テーリーガーター・パーリ 6110 アパダーナ・パーリ-1 6111 アパダーナ・パーリ-2 6112 ブッダヴァンサ・パーリ 6113 チャリヤーピタカ・パーリ 6114 ジャータカ・パーリ-1 6115 ジャータカ・パーリ-2 6116 マハーニッデーサ・パーリ 6117 チューラニッデーサ・パーリ 6118 パティサンビダーマッガ・パーリ 6119 ネッティッパカラナ・パーリ 6120 ミリンダパンハ・パーリ 6121 ペータコーパデーサ・パーリ | 6201 クッダカパータ・アッタカター 6202 ダンマパダ・アッタカター-1 6203 ダンマパダ・アッタカター-2 6204 ウダーナ・アッタカター 6205 イティヴッタカ・アッタカター 6206 スッタニパータ・アッタカター-1 6207 スッタニパータ・アッタカター-2 6208 ヴィマーナヴァットゥ・アッタカター 6209 ペータヴァットゥ・アッタカター 6210 テーラガーター・アッタカター-1 6211 テーラガーター・アッタカター-2 6212 テーリーガーター・アッタカター 6213 アパダーナ・アッタカター-1 6214 アパダーナ・アッタカター-2 6215 ブッダヴァンサ・アッタカター 6216 チャリヤーピタカ・アッタカター 6217 ジャータカ・アッタカター-1 6218 ジャータカ・アッタカター-2 6219 ジャータカ・アッタカター-3 6220 ジャータカ・アッタカター-4 6221 ジャータカ・アッタカター-5 6222 ジャータカ・アッタカター-6 6223 ジャータカ・アッタカター-7 6224 マハーニッデーサ・アッタカター 6225 チューラニッデーサ・アッタカター 6226 パティサンビダーマッガ・アッタカター-1 6227 パティサンビダーマッガ・アッタカター-2 6228 ネッティッパカラナ・アッタカター | 6301 ネッティッパカラナ・ティーカー 6302 ネッティヴィバーヴィニー | |
| 7101 ダンマサンガニー・パーリ 7102 ヴィバンガ・パーリ 7103 ダートゥカター・パーリ 7104 プッガラパンニャッティ・パーリ 7105 カター・ヴァットゥ・パーリ 7106 ヤマカ・パーリ-1 7107 ヤマカ・パーリ-2 7108 ヤマカ・パーリ-3 7109 パッターナ・パーリ-1 7110 パッターナ・パーリ-2 7111 パッターナ・パーリ-3 7112 パッターナ・パーリ-4 7113 パッターナ・パーリ-5 | 7201 ダンマサンガニ・アッタカター 7202 サンモーハヴィノーダニー・アッタカター 7203 パンチャパカラナ・アッタカター | 7301 ダンマサンガニー・ムーラティーカー 7302 ヴィバンガ・ムーラティーカー 7303 パンチャパカラナ・ムーラティーカー 7304 ダンマサンガニー・アヌティーカー 7305 パンチャパカラナ・アヌティーカー 7306 アビダンマーヴァターロ・ナーマルーパパリッチェード 7307 アビダンマッタ・サンガホ 7308 アビダンマーヴァターラ・プラーナティーカー 7309 アビダンマ・マーティカーパーリ | |
| ខ្មែរ | |||
| ព្រះត្រៃបិដកបាលី | អដ្ឋកថា | ដីកា | ផ្សេងទៀត |
| 1101 បារាជិកបាឡិ 1102 បាចិត្តិយបាឡិ 1103 មហាវគ្គបាឡិ (វិន័យ) 1104 ចូឡវគ្គបាឡិ 1105 បរិវារបាឡិ | 1201 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-១ 1202 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-២ 1203 បាចិត្តិយអដ្ឋកថា 1204 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (វិន័យ) 1205 ចូឡវគ្គអដ្ឋកថា 1206 បរិវារអដ្ឋកថា | 1301 សារត្ថទីបនីដីកា-១ 1302 សារត្ថទីបនីដីកា-២ 1303 សារត្ថទីបនីដីកា-៣ | 1401 ទ្វេមាតិកាបាឡិ 1402 វិនយសង្គហអដ្ឋកថា 1403 វជិរពុទ្ធិដីកា 1404 វិមតិវិនោទនីដីកា-១ 1405 វិមតិវិនោទនីដីកា-២ 1406 វិនយាលង្ការដីកា-១ 1407 វិនយាលង្ការដីកា-២ 1408 កង្ខាវិតរណីបុរាណដីកា 1409 វិនយវិនិច្ឆយ-ឧត្តរវិនិច្ឆយ 1410 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-១ 1411 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-២ 1412 បាចិត្យាទិយោជនាបាឡិ 1413 ខុទ្ទសិក្ខា-មូលសិក្ខា 8401 វិសុទ្ធិមគ្គ-១ 8402 វិសុទ្ធិមគ្គ-២ 8403 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-១ 8404 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-២ 8405 វិសុទ្ធិមគ្គ និទានកថា 8406 ទីឃនិកាយ (បុ-វិ) 8407 មជ្ឈិមនិកាយ (បុ-វិ) 8408 សំយុត្តនិកាយ (បុ-វិ) 8409 អង្គុត្តរនិកាយ (បុ-វិ) 8410 វិនយបិដក (បុ-វិ) 8411 អភិធម្មបិដក (បុ-វិ) 8412 អដ្ឋកថា (បុ-វិ) 8413 និរុត្តិទីបនី 8414 បរមត្ថទីបនី សង្គហមហាដីកាបាឋ 8415 អនុទីបនីបាឋ 8416 បដ្ឋានុទ្ទេស ទីបនីបាឋ 8417 នមក្ការដីកា 8418 មហាបណាមបាឋ 8419 លក្ខណាតោ ពុទ្ធថោមនាគាថា 8420 សុតវន្ទនា 8421 កមលាញ្ជលិ 8422 ជិនាលង្ការ 8423 បជ្ជមធុ 8424 ពុទ្ធគុណគាថាវលី 8425 ចូឡគន្ថវង្ស 8427 សាសនវង្ស 8426 មហាវង្ស 8429 មោគ្គល្លានព្យាករណំ 8428 កច្ចាយនព្យាករណំ 8430 សទ្ទនីតិប្បករណំ (បទមាលា) 8431 សទ្ទនីតិប្បករណំ (ធាតុមាលា) 8432 បទរូបសិទ្ធិ 8433 មោគ្គល្លានបញ្ចិកា 8434 បយោគសិទ្ធិបាឋ 8435 វុត្តោទយបាឋ 8436 អភិធានប្បទីបិកាបាឋ 8437 អភិធានប្បទីបិកាដីកា 8438 សុពោធាលង្ការបាឋ 8439 សុពោធាលង្ការដីកា 8440 បាលាវតារ គណ្ឋិបទត្ថវិនិច្ឆយសារ 8446 កវិទប្បណនីតិ 8447 នីតិមញ្ជរី 8445 ធម្មនីតិ 8444 មហារហនីតិ 8441 លោកនីតិ 8442 សុត្តន្តនីតិ 8443 សូរស្សតិនីតិ 8450 ចាណក្យនីតិ 8448 នរទក្ខទីបនី 8449 ចតុរារក្ខទីបនី 8451 រសវាហិនី 8452 សីមវិសោធនីបាឋ 8453 វេស្សន្តរគីតិ 8454 មោគ្គល្លាន វុត្តិវិវរណបញ្ចិកា 8455 ថូបវង្ស 8456 ទាឋាវង្ស 8457 ធាតុបាឋវិលាសិនិយា 8458 ធាតុវង្ស 8459 ហត្ថវនគល្លវិហារវង្ស 8460 ជិនចរិតយ 8461 ជិនវង្សទីបំ 8462 តេលកដាហគាថា 8463 មិលិទដីកា 8464 បទមញ្ជរី 8465 បទសាធនំ 8466 សទ្ទពិន្ទុបករណំ 8467 កច្ចាយនធាតុមញ្ជុសា 8468 សាមន្តកូដវណ្ណនា |
| 2101 សីលក្ខន្ធវគ្គបាឡិ 2102 មហាវគ្គបាឡិ (ទីឃ) 2103 បាថិកវគ្គបាឡិ | 2201 សីលក្ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 2202 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (ទីឃ) 2203 បាថិកវគ្គអដ្ឋកថា | 2301 សីលក្ខន្ធវគ្គដីកា 2302 មហាវគ្គដីកា (ទីឃ) 2303 បាថិកវគ្គដីកា 2304 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-១ 2305 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-២ | |
| 3101 មូលបណ្ណាសបាឡិ 3102 មជ្ឈិមបណ្ណាសបាឡិ 3103 ឧបរិបណ្ណាសបាឡិ | 3201 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-១ 3202 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-២ 3203 មជ្ឈិមបណ្ណាសអដ្ឋកថា 3204 ឧបរិបណ្ណាសអដ្ឋកថា | 3301 មូលបណ្ណាសដីកា 3302 មជ្ឈិមបណ្ណាសដីកា 3303 ឧបរិបណ្ណាសដីកា | |
| 4101 សគាថាវគ្គបាឡិ 4102 និទានវគ្គបាឡិ 4103 ខន្ធវគ្គបាឡិ 4104 សឡាយតនវគ្គបាឡិ 4105 មហាវគ្គបាឡិ (សំយុត្ត) | 4201 សគាថាវគ្គអដ្ឋកថា 4202 និទានវគ្គអដ្ឋកថា 4203 ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 4204 សឡាយតនវគ្គអដ្ឋកថា 4205 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (សំយុត្ត) | 4301 សគាថាវគ្គដីកា 4302 និទានវគ្គដីកា 4303 ខន្ធវគ្គដីកា 4304 សឡាយតនវគ្គដីកា 4305 មហាវគ្គដីកា (សំយុត្ត) | |
| 5101 ឯកកនិបាតបាឡិ 5102 ទុកនិបាតបាឡិ 5103 តិកនិបាតបាឡិ 5104 ចតុក្កនិបាតបាឡិ 5105 បញ្ចកនិបាតបាឡិ 5106 ឆក្កនិបាតបាឡិ 5107 សត្តកនិបាតបាឡិ 5108 អដ្ឋកាទិនិបាតបាឡិ 5109 នវកនិបាតបាឡិ 5110 ទសកនិបាតបាឡិ 5111 ឯកាទសកនិបាតបាឡិ | 5201 ឯកកនិបាតអដ្ឋកថា 5202 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតអដ្ឋកថា 5203 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតអដ្ឋកថា 5204 អដ្ឋកាទិនិបាតអដ្ឋកថា | 5301 ឯកកនិបាតដីកា 5302 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតដីកា 5303 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតដីកា 5304 អដ្ឋកាទិនិបាតដីកា | |
| 6101 ខុទ្ទកបាឋបាឡិ 6102 ធម្មបទបាឡិ 6103 ឧទានបាឡិ 6104 ឥតិវុត្តកបាឡិ 6105 សុត្តនិបាតបាឡិ 6106 វិមានវត្ថុបាឡិ 6107 បេតវត្ថុបាឡិ 6108 ថេរគាថាបាឡិ 6109 ថេរីគាថាបាឡិ 6110 អបទានបាឡិ-១ 6111 អបទានបាឡិ-២ 6112 ពុទ្ធវង្សបាឡិ 6113 ចរិយាបិដកបាឡិ 6114 ជាតកបាឡិ-១ 6115 ជាតកបាឡិ-២ 6116 មហានិទ្ទេសបាឡិ 6117 ចូឡនិទ្ទេសបាឡិ 6118 បដិសម្ភិទាមគ្គបាឡិ 6119 នេត្តិប្បករណបាឡិ 6120 មិលិន្ទបញ្ហាបាឡិ 6121 បេដកោបទេសបាឡិ | 6201 ខុទ្ទកបាឋអដ្ឋកថា 6202 ធម្មបទអដ្ឋកថា-១ 6203 ធម្មបទអដ្ឋកថា-២ 6204 ឧទានអដ្ឋកថា 6205 ឥតិវុត្តកអដ្ឋកថា 6206 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-១ 6207 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-២ 6208 វិមានវត្ថុអដ្ឋកថា 6209 បេតវត្ថុអដ្ឋកថា 6210 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-១ 6211 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-២ 6212 ថេរីគាថាអដ្ឋកថា 6213 អបទានអដ្ឋកថា-១ 6214 អបទានអដ្ឋកថា-២ 6215 ពុទ្ធវង្សអដ្ឋកថា 6216 ចរិយាបិដកអដ្ឋកថា 6217 ជាតកអដ្ឋកថា-១ 6218 ជាតកអដ្ឋកថា-២ 6219 ជាតកអដ្ឋកថា-៣ 6220 ជាតកអដ្ឋកថា-៤ 6221 ជាតកអដ្ឋកថា-៥ 6222 ជាតកអដ្ឋកថា-៦ 6223 ជាតកអដ្ឋកថា-៧ 6224 មហានិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6225 ចូឡនិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6226 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-១ 6227 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-២ 6228 នេត្តិប្បករណអដ្ឋកថា | 6301 នេត្តិប្បករណដីកា 6302 នេត្តិវិភាវិនី | |
| 7101 ធម្មសង្គណីបាឡិ 7102 វិភង្គបាឡិ 7103 ធាតុកថាបាឡិ 7104 បុគ្គលបញ្ញត្តិបាឡិ 7105 កថាវត្ថុបាឡិ 7106 យមកបាឡិ-១ 7107 យមកបាឡិ-២ 7108 យមកបាឡិ-៣ 7109 បដ្ឋានបាឡិ-១ 7110 បដ្ឋានបាឡិ-២ 7111 បដ្ឋានបាឡិ-៣ 7112 បដ្ឋានបាឡិ-៤ 7113 បដ្ឋានបាឡិ-៥ | 7201 ធម្មសង្គណិអដ្ឋកថា 7202 សម្មោហវិនោទនីអដ្ឋកថា 7203 បញ្ចបករណអដ្ឋកថា | 7301 ធម្មសង្គណី-មូលដីកា 7302 វិភង្គ-មូលដីកា 7303 បញ្ចបករណ-មូលដីកា 7304 ធម្មសង្គណី-អនុដីកា 7305 បញ្ចបករណ-អនុដីកា 7306 អភិធម្មាវតារោ-នាមរូបបរិច្ឆេទោ 7307 អភិធម្មត្ថសង្គហោ 7308 អភិធម្មាវតារ-បុរាណដីកា 7309 អភិធម្មមាតិកាបាឡិ | |
| 한국인 | |||
| 팔리 대장경 | 주석서 | 부주석서 | 기타 |
| 1101 빠라지카 빨리 1102 빠찟띠야 빨리 1103 마하왁가 빨리 (비나야) 1104 출라왁가 빨리 1105 빠리와라 빨리 | 1201 빠라지까깐다 앗타카타-1 1202 빠라지까깐다 앗타카타-2 1203 빠찟띠야 앗타카타 1204 마하왁가 앗타카타 (비나야) 1205 출라왁가 앗타카타 1206 빠리와라 앗타카타 | 1301 사랏타디빠니 띠까-1 1302 사랏타디빠니 띠까-2 1303 사랏타디빠니 띠까-3 | 1401 드베마띠까빨리 1402 위나야상가하 앗타카타 1403 와지라붓디 띠까 1404 위마띠위노다니 띠까-1 1405 위마띠위노다니 띠까-2 1406 위나야랑까라 띠까-1 1407 위나야랑까라 띠까-2 1408 깡카위따라니뿌라나 띠까 1409 위나야위닛차야-웃따라위닛차야 1410 위나야위닛차야 띠까-1 1411 위나야위닛차야 띠까-2 1412 빠찟땨디요자나빨리 1413 쿳닷시카-물라시카 8401 위숟디막가-1 8402 위숟디막가-2 8403 위숟디막가-마하띠까-1 8404 위숟디막가-마하띠까-2 8405 위숟디막가 니다나까타 8406 디가니까야 (뿌-위) 8407 맛지마니까야 (뿌-위) 8408 삼윳따니까야 (뿌-위) 8409 앙굳따라니까야 (뿌-위) 8410 위나야삐따까 (뿌-위) 8411 아비담마삐따까 (뿌-위) 8412 앗타카타 (뿌-위) 8413 니룻띠디빠니 8414 빠라맛타디빠니 상가하마하띠까빠타 8415 아누디빠니빠타 8416 빳타누ㄸ데사 디빠니빠타 8417 나막까라띠까 8418 마하빠나마빠타 8419 락카나또 붓다토마나가타 8420 수타완다나 8421 까말란자리 8422 지나랑까라 8423 빳자마두 8424 붓다구나가타왈리 8425 출라간타왕사 8427 사사나왕사 8426 마하왕사 8429 목갈라나뱌까라낭 8428 깟차야나뱌까라낭 8430 삿다니띠빠까라낭 (빠다말라) 8431 삿다니띠빠까라낭 (다두말라) 8432 빠다루빠싣디 8433 목갈라나빤찌까 8434 빠요가싣디빠타 8435 붇또다야빠타 8436 아비다나빠디피까빠타 8437 아비다나빠디피까띠까 8438 수보다랑까라빠타 8439 수보다랑까라띠까 8440 발라와따라 간티빠닷타위닛차야사라 8446 까위닷빠나니띠 8447 니띠만자리 8445 담마니띠 8444 마하라하니띠 8441 로까니띠 8442 숫딴따니띠 8443 수랏사띠니띠 8450 짜낙야니띠 8448 나라닥카디빠니 8449 짜뚜라락카디빠니 8451 라사와히니 8452 시마위소다니빠타 8453 웨산따라기띠 8454 목갈라나 붇띠위와라나빤찌까 8455 투빠왕사 8456 다타왕사 8457 다두빠타윌라시니야 8458 다두왕사 8459 핟타와나갈라위하라왕사 8460 지나짜리따야 8461 지나왕사디빵 8462 떼라까타하가타 8463 밀리다띠까 8464 빠다만자리 8465 빠다사다낭 8466 삿다빈두빠까라낭 8467 깟차야나다두만주사 8468 사만따꿋타완나나 |
| 2101 실락칸다왁가 빨리 2102 마하왁가 빨리 (디가) 2103 빠티까왁가 빨리 | 2201 실락칸다왁가 앗타카타 2202 마하왁가 앗타카타 (디가) 2203 빠티까왁가 앗타카타 | 2301 실락칸다왁가 띠까 2302 마하왁가 띠까 (디가) 2303 빠티까왁가 띠까 2304 실락칸다왁가-아비나와띠까-1 2305 실락칸다왁가-아비나와띠까-2 | |
| 3101 물라빤나사 빨리 3102 맛지마빤나사 빨리 3103 우빠리빤나사 빨리 | 3201 물라빤나사 앗타카타-1 3202 물라빤나사 앗타카타-2 3203 맛지마빤나사 앗타카타 3204 우빠리빤나사 앗타카타 | 3301 물라빤나사 띠까 3302 맛지마빤나사 띠까 3303 우빠리빤나사 띠까 | |
| 4101 사가타왁가 빨리 4102 니다나왁가 빨리 4103 칸다왁가 빨리 4104 살라야따나왁가 빨리 4105 마하왁가 빨리 (삼윳따) | 4201 사가타왁가 앗타카타 4202 니다나왁가 앗타카타 4203 칸다왁가 앗타카타 4204 살라야따나왁가 앗타카타 4205 마하왁가 앗타카타 (삼윳따) | 4301 사가타왁가 띠까 4302 니다나왁가 띠까 4303 칸다왁가 띠까 4304 살라야따나왁가 띠까 4305 마하왁가 띠까 (삼윳따) | |
| 5101 에까까니빠따 빨리 5102 두까니빠따 빨리 5103 띠까니빠따 빨리 5104 짜뚝까니빠따 빨리 5105 빤짜까니빠따 빨리 5106 착까니빠따 빨리 5107 삿따까니빠따 빨리 5108 앗타까디니빠따 빨리 5109 나와까니빠따 빨리 5110 다사까니빠따 빨리 5111 에까다사까니빠따 빨리 | 5201 에까까니빠따 앗타카타 5202 두까-띠까-짜뚝까니빠따 앗타카타 5203 빤짜까-착까-삿따까니빠따 앗타카타 5204 앗타까디니빠따 앗타카타 | 5301 에까까니빠따 띠까 5302 두까-띠까-짜뚝까니빠따 띠까 5303 빤짜까-착까-삿따까니빠따 띠까 5304 앗타까디니빠따 띠까 | |
| 6101 쿳닥까빠타 빨리 6102 담마빠다 빨리 6103 우다나 빨리 6104 이띠웃따까 빨리 6105 숫따니빠따 빨리 6106 위마나왓투 빨리 6107 베따왓투 빨리 6108 테라가타 빨리 6109 테리가타 빨리 6110 아빠다나 빨리-1 6111 아빠다나 빨리-2 6112 붓다왕사 빨리 6113 짜리야삐따까 빨리 6114 자따까 빨리-1 6115 자따까 빨리-2 6116 마하닷데사 빨리 6117 출라닷데사 빨리 6118 빠티삼비다막가 빨리 6119 넷띠빠까라나 빨리 6120 밀린다빤하 빨리 6121 뻬따꼬빠데사 빨리 | 6201 쿳닥까빠타 앗타카타 6202 담마빠다 앗타카타-1 6203 담마빠다 앗타카타-2 6204 우다나 앗타카타 6205 이띠웃따까 앗타카타 6206 숫따니빠따 앗타카타-1 6207 숫따니빠따 앗타카타-2 6208 위마나왓투 앗타카타 6209 베따왓투 앗타카타 6210 테라가타 앗타카타-1 6211 테라가타 앗타카타-2 6212 테리가타 앗타카타 6213 아빠다나 앗타카타-1 6214 아빠다나 앗타카타-2 6215 붓다왕사 앗타카타 6216 짜리야삐따까 앗타카타 6217 자따까 앗타카타-1 6218 자따까 앗타카타-2 6219 자따까 앗타카타-3 6220 자따까 앗타카타-4 6221 자따까 앗타카타-5 6222 자따까 앗타카타-6 6223 자따까 앗타카타-7 6224 마하닷데사 앗타카타 6225 출라닷데사 앗타카타 6226 빠티삼비다막가 앗타카타-1 6227 빠티삼비다막가 앗타카타-2 6228 넷띠빠까라나 앗타카타 | 6301 넷띠빠까라나 띠까 6302 넷띠위바비니 | |
| 7101 담마상가니 빨리 7102 위방가 빨리 7103 다뚜까타 빨리 7104 뿍갈라빤냣띠 빨리 7105 까타왓투 빨리 7106 야마까 빨리-1 7107 야마까 빨리-2 7108 야마까 빨리-3 7109 빳타나 빨리-1 7110 빳타나 빨리-2 7111 빳타나 빨리-3 7112 빳타나 빨리-4 7113 빳타나 빨리-5 | 7201 담마상가니 앗타카타 7202 삼모하위노다니 앗타카타 7203 빤짜빠까라나 앗타카타 | 7301 담마상가니-물라띠까 7302 위방가-물라띠까 7303 빤짜빠까라나-물라띠까 7304 담마상가니-아누띠까 7305 빤짜빠까라나-아누띠까 7306 아비담마와따로-나마루빠빠릳체도 7307 아비담맛타상가호 7308 아비담마와따라-뿌라나띠까 7309 아비담마마띠까빨리 | |
| ອັກສອນລາວ | |||
| ປາລີ | ອັດຖະກະຖາ | ຏີກາ | ອັນຍາ |
| 1101 ປາຣາຊິກະ ປາລີ 1102 ປາຈິດຕິຍະ ປາລີ 1103 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ວິໄນ) 1104 ຈູລະວັກຄະ ປາລີ 1105 ປະລິວາລະ ປາລີ | 1201 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-1 1202 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-2 1203 ປາຈິດຕິຍະ ອັດຖະກະຖາ 1204 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ວິໄນ) 1205 ຈູລະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 1206 ປະລິວາລະ ອັດຖະກະຖາ | 1301 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-1 1302 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-2 1303 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-3 | 1401 ທເວມາຕິກາປາລີ 1402 ວິນະຍະສັງຄະຫະ ອັດຖະກະຖາ 1403 ວະຊິລະພຸດທິ ຏີກາ 1404 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-1 1405 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-2 1406 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-1 1407 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-2 1408 ກັງຂາວິຕະຣະນີປຸຣານະ ຏີກາ 1409 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ-ອຸຕຕະຣະວິນິດສະຍະ 1410 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-1 1411 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-2 1412 ປາຈິຕະຍາທິໂຍຊະນາປາລີ 1413 ຂຸທະທະສິກຂາ-ມູລະສິກຂາ 8401 ວິສຸດທິມັກຄະ-1 8402 ວິສຸດທິມັກຄະ-2 8403 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-1 8404 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-2 8405 ວິສຸດທິມັກຄະ ນິທານະກະຖາ 8406 ທີຆະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8407 ມັດຊິມະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8408 ສັງຍຸຕຕະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8409 ອັງຄຸຕຕະລະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8410 ວິນະຍະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8411 ອະພິທັມມະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8412 ອັດຖະກະຖາ (ປຸ-ວິ) 8413 ນິລຸຕຕິທີປະນີ 8414 ປະຣະມັດຖະທີປະນີ ສັງຄະຫະມະຫາຏີກາປາຖະ 8415 ອະນຸທີປະນີປາຖະ 8416 ປັດຖານຸທເທສະ ທີປະນີປາຖະ 8417 ນະມັກກາລະຏີກາ 8418 ມະຫາປະຖາມະປາຖະ 8419 ລັກຂະນາໂຕ ພຸດທະຖະມະນາຄາຖາ 8420 ສຸຕະວັນທະນາ 8421 ກະມະລາຍຈະລິ 8422 ຊິນາລັງກາລະ 8423 ປັດຊະມະທຸ 8424 ພຸດທະຄຸນະຄາຖາວະລີ 8425 ຈູລະຄັນຖະວັງສະ 8426 ມະຫາວັງສະ 8427 ສາສະນະວັງສະ 8428 ກັດຈາຍະນະພະຍາກະລະນັງ 8429 ມົກຄັນທານະພະຍາກະລະນັງ 8430 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ປະທະມາລາ) 8431 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ຘາຕຸມາລາ) 8432 ປະທະຣູປະສິດທິ 8433 ໂມຄັນທານະປັນຈິກາ 8434 ປະໂຍຄະສິດທິປາຖະ 8435 ວຸຕະໂທຍະປາຖະ 8436 ອະພິທານະປະປະທີປິກາປາຖະ 8437 ອະພິທານະປະປະທີປິກາຏີກາ 8438 ສຸໂພທາລັງກາລະປາຖະ 8439 ສຸໂພທາລັງກາລະຏີກາ 8440 ພາລາວະຕາລະ ຄັນຖິປະທັດຖະວິນິດສະຍະສາລະ 8441 ໂລກະນີຕິ 8442 ສຸດຕັນຕະນີຕິ 8443 ສູລັດສະຕິນີຕິ 8444 ມະຫາລະຫະນີຕິ 8445 ທັມມະນີຕິ 8446 ກະວິທັບປະຖານີຕິ 8447 ນີຕິມັນຊະລີ 8448 ນະລະທັກຂະທີປະນີ 8449 ຈະຕຸຣາລັກຂະທີປະນີ 8450 ຈານັກຍະນີຕິ 8451 ລະສະວາຫິນີ 8452 ສີມາວິໂສທະນີປາຖະ 8453 ເວສສັນຕະລະຄີຕິ 8454 ໂມຄັນທານະ ວຸຕຕິວິວະລະນະປັນຈິກາ 8455 ຖູປະວັງສະ 8456 ທາຐາວັງສະ 8457 ຘາຕຸປາຖະວິລາສິນີຍາ 8458 ຘາຕຸວັງສະ 8459 ຫັດຖະວະນະຄັນລະວິຫາລະວັງສະ 8460 ຊິນະຈະລິຕະຍະ 8461 ຊິນະວັງສະທີປັງ 8462 ເຕລະກະຕາຫາຄາຖາ 8463 ມິລິທະຏີກາ 8464 ປະທະມັນຊະລີ 8465 ປະທະສາຘະນັງ 8466 ສັດທະພິນທຸປະກະລະນັງ 8467 ກັດຈາຍະນະຘາຕຸມັນຊຸສາ 8468 ສາມັນຕະກູຏະວັນນະນາ |
| 2101 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 2102 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ທີຆະ) 2103 ປາຖິກະວັກຄະ ປາລີ | 2201 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 2202 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ທີຆະ) 2203 ປາຖິກະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ | 2301 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 2302 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ທີຆະ) 2303 ປາຖິກະວັກຄະ ຏີກາ 2304 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-1 2305 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-2 | |
| 3101 ມູລະປັນຍາສະ ປາລີ 3102 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ປາລີ 3103 ອຸປະລິປັນຍາສະ ປາລີ | 3201 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-1 3202 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-2 3203 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ 3204 ອຸປະລິປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ | 3301 ມູລະປັນຍາສະ ຏີກາ 3302 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ຏີກາ 3303 ອຸປະລິປັນຍາສະ ຏີກາ | |
| 4101 ສະຄາຖາວັກຄະ ປາລີ 4102 ນິທານະວັກຄະ ປາລີ 4103 ຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 4104 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ປາລີ 4105 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4201 ສະຄາຖາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4202 ນິທານະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4203 ຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4204 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4205 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4301 ສະຄາຖາວັກຄະ ຏີກາ 4302 ນິທານະວັກຄະ ຏີກາ 4303 ຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 4304 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ຏີກາ 4305 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ສັງຍຸຕຕະ) | |
| 5101 ເອກະກະນິປາຕະ ປາລີ 5102 ທຸກະນິປາຕະ ປາລີ 5103 ຕິກະນິປາຕະ ປາລີ 5104 ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ປາລີ 5105 ປັຈຈະກະນິປາຕະ ປາລີ 5106 ຉັກກະນິປາຕະ ປາລີ 5107 ສັດຕະກະນິປາຕະ ປາລີ 5108 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ປາລີ 5109 ນະວະກະນິປາຕະ ປາລີ 5110 ທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ 5111 ເອກາທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ | 5201 ເອກະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5202 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5203 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5204 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ | 5301 ເອກະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5302 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ຏີກາ 5303 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5304 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ຏີກາ | |
| 6101 ຂຸທະທະກະປາຖະ ປາລີ 6102 ທຳມະປະທະ ປາລີ 6103 ອຸທານະ ປາລີ 6104 ອິຕິວຸຕຕະກະ ປາລີ 6105 ສຸດຕະນິປາຕະ ປາລີ 6106 ວິມານະວັດຖຸ ປາລີ 6107 ເປຕະວັດຖຸ ປາລີ 6108 ເຖລະຄາຖາ ປາລີ 6109 ເຖລີຄາຖາ ປາລີ 6110 ອະປະທານະ ປາລີ-1 6111 ອະປະທານະ ປາລີ-2 6112 ພຸດທະວັງສະ ປາລີ 6113 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ປາລີ 6114 ຊາຕະກະ ປາລີ-1 6115 ຊາຕະກະ ປາລີ-2 6116 ມະຫານິທເທສະ ປາລີ 6117 ຈູລະນິທເທສະ ປາລີ 6118 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ປາລີ 6119 ເນຕຕິປະກະລະນະ ປາລີ 6120 ມິລິນທະປັນຫາ ປາລີ 6121 ເປຏະກົປເທສະ ປາລີ | 6201 ຂຸທະທະກະປາຖະ ອັດຖະກະຖາ 6202 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-1 6203 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-2 6204 ອຸທານະ ອັດຖະກະຖາ 6205 ອິຕິວຸຕຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6206 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-1 6207 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-2 6208 ວິມານະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6209 ເປຕະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6210 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-1 6211 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-2 6212 ເຖລີຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ 6213 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-1 6214 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-2 6215 ພຸດທະວັງສະ ອັດຖະກະຖາ 6216 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6217 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-1 6218 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-2 6219 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-3 6220 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-4 6221 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-5 6222 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-6 6223 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-7 6224 ມະຫານິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6225 ຈູລະນິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6226 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-1 6227 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-2 6228 ເນຕຕິປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 6301 ເນຕຕິປະກະລະນະ ຏີກາ 6302 ເນຕຕິວິພາວິນີ | |
| 7101 ທຳມະສັງຄະນີ ປາລີ 7102 ວິພັງຄະ ປາລີ 7103 ຘາຕຸກະຖາ ປາລີ 7104 ປຸກຄະລະປັນຍັດຕິ ປາລີ 7105 ກະຖາວັດຖຸ ປາລີ 7106 ຍະມະກະ ປາລີ-1 7107 ຍະມະກະ ປາລີ-2 7108 ຍະມະກະ ປາລີ-3 7109 ປັດຖານະ ປາລີ-1 7110 ປັດຖານະ ປາລີ-2 7111 ປັດຖານະ ປາລີ-3 7112 ປັດຖານະ ປາລີ-4 7113 ປັດຖານະ ປາລີ-5 | 7201 ທຳມະສັງຄະນິ ອັດຖະກະຖາ 7202 ສັມໂມຫະວິໂນທະນີ ອັດຖະກະຖາ 7203 ປັຈຈະປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 7301 ທຳມະສັງຄະນີ-ມູລະຏີກາ 7302 ວິພັງຄະ-ມູລະຏີກາ 7303 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ມູລະຏີກາ 7304 ທຳມະສັງຄະນີ-ອະນຸຏີກາ 7305 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ອະນຸຏີກາ 7306 ອະພິທັມມາວະຕາໂຣ-ນາມະຣູປະປະຣິຈເທໂທ 7307 ອະພິທັມມັດຖະສັງຄະໂຫ 7308 ອະພິທັມມາວະຕາລະ-ປຸຣານະຏີກາ 7309 ອະພິທັມມາມາຕິກາປາລີ | |
| मराठी | |||
| पाळी | अट्ठकथा | टीका | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळी 1102 पाचित्तिय पाळी 1103 महावग्ग पाळी (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळी 1105 परिवार पाळी | 1201 पाराजिककंड अट्ठकथा-१ 1202 पाराजिककंड अट्ठकथा-२ 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-१ 1302 सारत्थदीपनी टीका-२ 1303 सारत्थदीपनी टीका-३ | 1401 द्वेमातिकापाळी 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-१ 1405 विमतिविनोदनी टीका-२ 1406 विनयालंकार टीका-१ 1407 विनयालंकार टीका-२ 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-१ 1411 विनयविनिच्छय टीका-२ 1412 पाचित्यादियोजनापाळी 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-१ 8402 विसुद्धिमग्ग-२ 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-१ 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-२ 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अंगुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी संगहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवंदना 8421 कमलांजलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगंथवंस 8426 महावंस 8427 सासनवंस 8428 कच्चायनव्याकरणं 8429 मोग्गल्लानव्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपंचिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गंठिपदत्थविनिच्छयसार 8441 लोकनीति 8442 सुत्तंतनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8444 महारहनीति 8445 धम्मनीति 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमंजरी 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8450 चाणक्यनीति 8451 रसवाहिनी 8452 सीमाविसोधनीपाठ 8453 वेस्संतरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपंचिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमंजरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिंदुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमंजुसा 8468 सामंतकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खंधवग्ग पाळी 2102 महावग्ग पाळी (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळी | 2201 सीलक्खंधवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खंधवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-१ 2305 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-२ | |
| 3101 मूलपण्णास पाळी 3102 मज्झिमपण्णास पाळी 3103 उपरिपण्णास पाळी | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-१ 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-२ 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळी 4102 निदानवग्ग पाळी 4103 खंधवग्ग पाळी 4104 सळायतनवग्ग पाळी 4105 महावग्ग पाळी (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खंधवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खंधवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळी 5102 दुकनिपात पाळी 5103 तिकनिपात पाळी 5104 चतुक्कनिपात पाळी 5105 पंचकनिपात पाळी 5106 छक्कनिपात पाळी 5107 सत्तकनिपात पाळी 5108 अट्ठकादिनिपात पाळी 5109 नवकनिपात पाळी 5110 दसकनिपात पाळी 5111 एकादसकनिपात पाळी | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळी 6102 धम्मपद पाळी 6103 उदान पाळी 6104 इतिवुत्तक पाळी 6105 सुत्तनिपात पाळी 6106 विमानवत्थु पाळी 6107 पेतवत्थु पाळी 6108 थेरगाथा पाळी 6109 थेरीगाथा पाळी 6110 अपदान पाळी-१ 6111 अपदान पाळी-२ 6112 बुद्धवंस पाळी 6113 चरियापिटक पाळी 6114 जातक पाळी-१ 6115 जातक पाळी-२ 6116 महानिद्देस पाळी 6117 चूळनिद्देस पाळी 6118 पटिसंभिदामग्ग पाळी 6119 नेत्तिप्पकरण पाळी 6120 मिलिंदपंह पाळी 6121 पेटकोपदेस पाळी | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-१ 6203 धम्मपद अट्ठकथा-२ 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-१ 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-२ 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-१ 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-२ 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-१ 6214 अपदान अट्ठकथा-२ 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-१ 6218 जातक अट्ठकथा-२ 6219 जातक अट्ठकथा-३ 6220 जातक अट्ठकथा-४ 6221 जातक अट्ठकथा-५ 6222 जातक अट्ठकथा-६ 6223 जातक अट्ठकथा-७ 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-१ 6227 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-२ 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसंगणी पाळी 7102 विभंग पाळी 7103 धातुकथा पाळी 7104 पुग्गलपंयत्ति पाळी 7105 कथावत्थु पाळी 7106 यमक पाळी-१ 7107 यमक पाळी-२ 7108 यमक पाळी-३ 7109 पट्ठान पाळी-१ 7110 पट्ठान पाळी-२ 7111 पट्ठान पाळी-३ 7112 पट्ठान पाळी-४ 7113 पट्ठान पाळी-५ | 7201 धम्मसंगणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पंचपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसंगणी-मूलटीका 7302 विभंग-मूलटीका 7303 पंचपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसंगणी-अनुटीका 7305 पंचपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसंगहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळी | |
Namo tassa bhagavato arahato sammāsambuddhassa त्या भगवंत, अर्हत, सम्यक्संबुद्धांना नमस्कार असो. Kaccāyanabyākaraṇaṃ कच्चायन व्याकरण 1. Sandhi १. संधी 1, 1. Attho [Pg.1] akkharasaññāto. १, १. अर्थ अक्षरांद्वारे समजला जातो. 2, 2. Akkharāpādayo ekacattālisaṃ. २, २. 'अ' इत्यादी अक्षरे एकेचाळीस आहेत. 3, 3 Tatthodantā sarā aṭṭha. ३, ३ त्यांपैकी 'ओ' पर्यंतचे आठ स्वर आहेत. 4, 4. Lahumattā tayo rassā. ४, ४. कमी उच्चार काळ असलेले तीन स्वर र्हस्व आहेत. 5, 5. Aññe dīghā. ५, ५. इतर स्वर दीर्घ आहेत. 6, 8. Sesā byañjanā. ६, ८. उरलेली व्यंजने आहेत. 7, 9. Vaggā pañcapañcaso mantā. ७, ९. 'म' पर्यंतची व्यंजने पाच-पाचच्या गटात वर्ग म्हटली जातात. 8, 10. Aṃiti niggahitaṃ. ८, १०. 'अं' या बिंदूला निग्गहीत म्हणतात. 9, 11. Parasamaññā payoge. ९, ११. आवश्यकतेनुसार इतर संज्ञा देखील वापरल्या जातात. 10, 12. Pubbamadhoṭhitamassaraṃ sarena viyojaye. १०, १२. मागील स्वररहित व्यंजनाला खाली ठेवून स्वरापासून वेगळे करावे. 11, 14. Naye paraṃ yutte. ११, १४. योग्य ठिकाणी मागील व्यंजनाला पुढील अक्षराशी जोडावे. Iti sandhikappe paṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी प्रकरणातील पहिला खंड समाप्त झाला. 12, 13. Sarā [Pg.2] sare lopaṃ. १२, १३. पुढील स्वर समोर असताना मागील स्वरांचा लोप होतो. 13, 15. Vā paro asarūpo. १३, १५. किंवा पुढील विजातीय स्वर देखील लोप पावतो. 14, 16. Kvacāsavaṇṇaṃ lutte. १४, १६. मागील स्वराचा लोप झाल्यावर, पुढील स्वर काही ठिकाणी विजातीय स्वरात बदलतो. 15, 17. Dīghaṃ. १५, १७. मागील स्वराचा लोप झाल्यावर, पुढील स्वर काही ठिकाणी दीर्घ होतो. 16, 18. Pubbo ca. १६, १८. आणि पुढील स्वराचा लोप झाल्यावर, मागील स्वर देखील काही ठिकाणी दीर्घ होतो. 17, 19. Yamedantassādeso. १७, १९. पुढील स्वर समोर असताना, पदाच्या शेवटी असलेल्या 'ए' चा 'य' होतो. 18, 20. Vamodudantānaṃ. १८, २०. पुढील स्वर समोर असताना, पदाच्या शेवटी असलेल्या 'ओ' आणि 'उ' चा 'व' होतो. 19. 22. Sabbo caṃ ti. १९. २२. पुढील स्वर समोर असताना, 'ति' चा संपूर्ण 'च' होतो. 20, 27. Do dhassa ca. २०, २७. आणि पुढील स्वर समोर असताना, 'ध' चा 'द' होतो. 21, 22. Ivaṇṇo yaṃ navā. २१, २२. विजातीय स्वर समोर असताना, 'इ' आणि 'ई' चा काही ठिकाणी 'य' होतो. 22, 28. Evādissa ri pubbo ca rasso. २२, २८. 'एव' च्या 'ए' चा 'रि' होतो आणि मागील स्वर र्हस्व होतो. Iti sandhikappe dutiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी प्रकरणातील दुसरा खंड समाप्त झाला. 23, 36. Sarā pakati byañjane. २३, ३६. व्यंजन समोर असताना, स्वर मूळ रूपात राहतात. 24, 35. Sare kvaci. २४, ३५. स्वर समोर असताना देखील काही ठिकाणी स्वर मूळ रूपात राहतात. 25, 37. Dīghaṃ. २५, ३७. व्यंजन समोर असताना, स्वर काही ठिकाणी दीर्घ होतो. 26, 38. Rassaṃ. २६, ३८. व्यंजन समोर असताना, स्वर काही ठिकाणी र्हस्व होतो. 27, 39. Lopañca tatrākāro. २७, ३९. व्यंजन समोर असताना, स्वराचा काही ठिकाणी लोप होतो आणि त्या ठिकाणी 'अ' येतो. 28, 40. Para dvebhāvo ṭhāne. २८, ४०. योग्य ठिकाणी पुढील व्यंजनाचे द्वित्व होते. 29, 42. Vagge ghosāghosānaṃ tatiyapaṭhamā. २९, ४२. वर्गामध्ये, घोष आणि अघोष अक्षरांच्या जागी अनुक्रमे तिसरे आणि पहिले अक्षर द्वित्व होते. Iti sandhikappe tatiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी प्रकरणातील तिसरा खंड समाप्त झाला. 30, 58. Aṃ [Pg.3] byañjane niggahitaṃ. ३०, ५८. व्यंजन समोर असताना, निग्गहीतचा 'अं' होतो. 31. 49. Vaggantaṃ vā vagge. ३१. ४९. वर्गातील व्यंजन समोर असताना, निग्गहीतचा वैकल्पिकरित्या वर्गान्त होतो. 32, 50. Ehe ñaṃ. ३२, ५०. 'ए' आणि 'ह' समोर असताना, निग्गहीतचा 'ञ' होतो. 33. 51. Sa ye ca. ३३. ५१. आणि 'य' समोर असताना, 'य' सह निग्गहीतचा 'ञ' होतो. 34, 52. Madā sare. ३४, ५२. स्वर समोर असताना, निग्गहीतचा 'म' आणि 'द' होतो. 35, 34. Ya va ma da na ta ra lā cāgamā. ३५, ३४. स्वर पुढे असताना, 'य', 'व', 'म', 'द', 'न', 'त', 'र' आणि 'ल' हे वर्ण आगम म्हणून येतात. 36, 47. Kvaci o byañjane. ३६, ४७. व्यंजन पुढे असताना, काही ठिकाणी (पूर्व स्वराचा) 'ओ' होतो. 37, 57. Niggahitañca. ३७, ५७. स्वर किंवा व्यंजन पुढे असताना, 'निग्गहीत' (अनुस्वार) देखील आगम म्हणून येतो. 38, 53. Kvaci lopaṃ. ३८, ५३. स्वर पुढे असताना, काही ठिकाणी 'निग्गहीत'चा लोप होतो. 39, 54. Byañjane ca. ३९, ५४. आणि व्यंजन पुढे असतानाही, काही ठिकाणी 'निग्गहीत'चा लोप होतो. 40, 55. Paro vā saro. ४०, ५५. निग्गहीतनंतर येणारा स्वर वैकल्पिकरित्या लोप पावतो. 41, 56. Byañjano ca visaññogo. ४१, ५६. निग्गहीतनंतरचा स्वर लोप पावल्यावर, संयुक्त व्यंजन असंयुक्त (एकटे) होते. Iti sandhikappe catuttho kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी कल्पामधील चौथा खंड समाप्त झाला. 42, 32. Gosare puthassāgamo kvaci. ४२, ३२. स्वर पुढे असताना, काही ठिकाणी 'पुथ' या निपाताच्या शेवटी 'ग' चा आगम होतो. 43, 33. Pāssa canto rasso. ४३, ३३. स्वर पुढे असताना, 'पा' या निपाताच्या शेवटी 'ग' चा आगम होतो आणि 'पा' चा अंत्य स्वर र्हस्व होतो. 44, 24 Abbho abhi. ४४, २४ स्वर पुढे असताना, 'अभि' उपसर्गाचा 'अब्भ' होतो. 45, 25. Ajjho adhi. ४५, २५. स्वर पुढे असताना, 'अधि' उपसर्गाचा 'अज्झ' होतो. 46, 26. Te na vā ivaṇṇe. ४६, २६. परंतु 'इ' किंवा 'ई' (इ-वर्ण) पुढे असताना, हे बदल (अब्भ आणि अज्झ) वैकल्पिकरित्या होत नाहीत. 47, 23. Atissa cantassa. ४७, २३. 'इ' किंवा 'ई' (इ-वर्ण) पुढे असताना, 'अति' उपसर्गाच्या अंत्य भागाचा (ति चा) 'च' होत नाही. 48, 43. Kvaci [Pg.4] paṭi patissa. ४८, ४३. स्वर किंवा व्यंजन पुढे असताना, काही ठिकाणी 'पति' उपसर्गाचा 'पटि' होतो. 49, 44. Puthassu byañjane. ४९, ४४. व्यंजन पुढे असताना, 'पुथ' शब्दाचा अंत्य स्वर 'उ' होतो. 50, 45. O avassa. ५०, ४५. 'अव' उपसर्गाचा 'ओ' होतो. 51, 59. Anupadiṭṭhānaṃ vuttayogato. ५१, ५९. ज्या रूपांचे नियम स्पष्टपणे सांगितले नाहीत, ती रूपे आधी सांगितलेल्या नियमांच्या आधारे सिद्ध करावीत. Iti sandhikappe pañcamo kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी कल्पामधील पाचवा खंड समाप्त झाला. Sandhisuttaṃ niṭṭhitaṃ. संधी सूत्रे समाप्त झाली. 2. Nāma २. नाम 52, 60. Jinavacanayuttaṃ hi. ५२, ६०. सर्व नियम बुद्धवचनांशी (जिनवचनांशी) सुसंगत असावेत. 53, 61. Liṅgañca nippajjate. ५३, ६१. आणि प्रातिपदिक (लिंग/मूळ शब्द) सिद्ध केले जाते. 54, 62. Tato ca vibhattiyo. ५४, ६२. आणि त्यानंतर विभक्ती प्रत्यय लागतात. 55, 63. Si yo aṃ yo nā hi sa naṃ smā hi sanaṃ smiṃ su. ५५, ६३. सि, यो, अं, यो, ना, हि, स, नं, स्मा, हि, स, नं, स्मिं, सु (हे चौदा विभक्ती प्रत्यय आहेत). 56, 64. Tadanuparodhena. ५६, ६४. बुद्धवचनांशी (पाठाशी) विसंगती न आणता (रूपे सिद्ध करावीत). 57, 71. Ālapane si gasañño. ५७, ७१. संबोधनात (आलपने) 'सि' प्रत्ययाला 'ग' अशी संज्ञा दिली जाते. 58, 29. Ivaṇṇuvaṇṇā jhalā. ५८, २९. 'इ-वर्ण' (इ, ई) आणि 'उ-वर्ण' (उ, ऊ) यांना अनुक्रमे 'झ' आणि 'ल' अशी संज्ञा दिली जाते. 59, 182. Te itthidhyā po. ५९, १८२. स्त्रीलिंगात तेच ('इ-वर्ण' आणि 'उ-वर्ण') 'प' संज्ञक होतात. 60, 177. Ā gho. ६०, १७७. स्त्रीलिंगातील 'आ' स्वराला 'घ' अशी संज्ञा दिली जाते. 61, 86. Sāgamo se. ६१, ८६. 'स' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना, 'स' चा आगम होतो. 62, 206. Saṃsāsvekavacanesu ca. ६२, २०६. आणि एकवचनातील 'सं' आणि 'सा' प्रत्यय पुढे असतानाही 'स' चा आगम होतो. 63, 217. Etimāsami[Pg.5]. ६३, २१७. एकवचनातील 'सं' आणि 'सा' प्रत्यय पुढे असताना, 'एता' आणि 'इमा' शब्दांच्या अंत्य 'आ' चा 'इ' होतो. 64, 216. Tassā vā. ६४, २१६. एकवचनातील 'सं' आणि 'सा' प्रत्यय पुढे असताना, 'ता' शब्दाच्या अंत्य 'आ' चा वैकल्पिकरित्या 'इ' होतो. 65, 215. Tato sassa ssāya. ६५, २१५. त्यानंतर (ता, एता, इमा यांच्यानंतर) 'स' विभक्ती प्रत्ययाचा वैकल्पिकरित्या 'स्साय' होतो. 66, 205. Gho rassaṃ. ६६, २०५. एकवचनातील 'सं' आणि 'सा' प्रत्यय पुढे असताना, 'घ' संज्ञक (आ) स्वर र्हस्व होतो. 67, 229. No ca dvādito naṃmhi. ६७, २२९. 'नं' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना, 'द्वि' इत्यादी संख्यावाचक शब्दांनंतर 'न' चा आगम होतो. 68, 184. Amā pato smiṃsmānaṃ vā. ६८, १८४. 'प' संज्ञक शब्दांनंतर येणाऱ्या 'स्मिं' आणि 'स्मा' विभक्ती प्रत्ययांचे अनुक्रमे 'अं' आणि 'आ' हे आदेश वैकल्पिकरित्या होतात. 69, 186. Ādito o ca. ६९, १८६. 'आदि' शब्दानंतर येणाऱ्या 'स्मिं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'अं' आणि 'ओ' देखील होतो. 70, 30. Jhalānamiyuvā sare vā. ७०, ३०. स्वर पुढे असताना, 'झ' (इ, ई) आणि 'ल' (उ, ऊ) संज्ञक स्वरांचे अनुक्रमे 'इय' आणि 'उव' हे आदेश वैकल्पिकरित्या होतात. 71, 489. Yavakārā ca. ७१, ४८९. स्वर पुढे असताना 'य' आणि 'व' हे आदेश होतात. 72, 185. Pasaññassa ca. ७२, १८५. विभक्ती प्रत्ययांचे 'ओ', 'आ' आणि 'अं' पुढे असताना 'प' संज्ञक इ-वर्णाचा 'य्' होतो. 73, 174. Gāva se. ७३, १७४. 'स' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना 'गो' शब्दातील 'ओ' चा 'आव' होतो. 74, 169. Yosu ca. ७४, १६९. 'यो' विभक्ती प्रत्यय पुढे असतानाही ('गो' शब्दातील 'ओ' चा 'आव' होतो). 75, 170. Avaṃmhi ca. ७५, १७०. 'अं' विभक्ती प्रत्यय पुढे असतानाही ('गो' शब्दातील 'ओ' चा) 'अव' आणि 'आव' होतो. 76, 171. Āvassu vā. ७६, १७१. 'अं' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना 'आव' आदेशातील 'अ' चा पर्यायाने 'उ' होतो. 77, 175, Tato namaṃ patimhālutte ca samāse. ७७, १७५, अलुत्त समासात 'पति' शब्द पुढे असताना, 'गो' शब्दापुढील 'नं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'अं' होतो आणि 'गो' च्या 'ओ' चा 'अव' होतो. 78, 31. O sare ca. ७८, ३१. समासात स्वर पुढे असताना 'गो' शब्दातील 'ओ' चा 'अव' होतो. 79, 46. Tabbiparītūpapade byañjane ca. ७९, ४६. व्यंजन पुढे असताना आणि त्याच्या विरुद्ध अर्थी उपपद असताना ('अव' चा 'उ' होतो). 80, 173. Goṇa naṃmhi vā. ८०, १७३. 'नं' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना 'गो' शब्दाचा पर्यायाने 'गोण' होतो. 81, 172. Suhināsu ca. ८१, १७२. 'सु', 'हि' आणि 'ना' विभक्ती प्रत्यय पुढे असतानाही ('गो' शब्दाचा 'गोण' होतो). 82, 149. Aṃmo [Pg.6] niggahitaṃ jhalapehi. ८२, १४९. 'झ', 'ल' आणि 'प' संज्ञक स्वरांनंतर 'अं' विभक्ती प्रत्ययातील 'म्' चा निग्गहीत (अनुस्वार) होतो. 83, 67. Saralopo mādesapaccayādimhi saralope tu pakati. ८३, ६७. आदेश किंवा प्रत्ययाच्या सुरुवातीचा स्वर पुढे असताना पूर्व स्वराचा लोप होतो, आणि स्वराचा लोप झाल्यावर उर्वरित स्वर मूळ रूपात (प्रकृतीभावात) राहतो. 84, 144. Agho rassamekavacanayosvapi ca. ८४, १४४. एकवचन आणि 'यो' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना 'अ-घ' संज्ञक दीर्घ स्वरांचा र्हस्व होतो. 85, 150. Na sismimanapuṃsakāni. ८५, १५०. 'सि' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना नपुंसकलिंगी नसलेले (पुल्लिंगी व स्त्रीलिंगी) शब्द र्हस्व होत नाहीत. 86, 227. Ubhādito naminnaṃ. ८६, २२७. 'उभ' इत्यादी संख्यावाचक शब्दांनंतर येणाऱ्या 'नं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'इन्नं' होतो. 87, 231. Iṇṇamiṇṇannaṃ tīhi saṅkhyāhi. ८७, २३१. 'ति' (तीन) या संख्यावाचक शब्दांनंतर येणाऱ्या 'नं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'इण्णं' किंवा 'इण्णन्नं' होतो. 88, 147. Yāsu katanikāralopesu dīghaṃ. ८८, १४७. 'यो' विभक्ती प्रत्ययाचा 'नि' आदेश झाला असता किंवा त्याचा लोप झाला असता, पूर्व स्वराचा दीर्घ होतो. 89, 87. Sunaṃhisu ca. ८९, ८७. 'सु', 'नं' आणि 'हि' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना स्वरांचा दीर्घ होतो (आणि काही वेळा होत नाही). 90, 252. Pañcādīnamattaṃ. ९०, २५२. 'सु', 'नं' आणि 'हि' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना 'पञ्च' इत्यादी संख्यावाचक शब्दांच्या शेवटी असणाऱ्या 'अ' चा 'अ' च राहतो. 91, 194. Patissinīmhi. ९१, १९४. 'इनी' प्रत्यय पुढे असताना 'पति' शब्दाच्या शेवटी असणाऱ्या 'इ' चा 'अ' होतो. 92, 100. Ntussanto yosu ca. ९२, १००. 'यो' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना (तसेच 'सु', 'हि', 'नं' इत्यादी पुढे असताना) 'न्तु' प्रत्ययाच्या शेवटी असणाऱ्या 'उ' चा 'अ' होतो. 93, 106. Sabbassa vā aṃsesu. ९३, १०६. 'अं' आणि 'स' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचा पर्यायाने 'अ' होतो. 94, 105. Simhi vā. ९४, १०५. 'सि' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना 'न्तु' प्रत्ययाच्या शेवटी असणाऱ्या 'उ' चा पर्यायाने 'अ' होतो. 95, 145. Aggissini. ९५, १४५. 'सि' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना 'अग्गि' शब्दाच्या शेवटी असणाऱ्या 'इ' चा पर्यायाने 'इनि' होतो. 96, 148. Yosvakatarasso jho. ९६, १४८. 'यो' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना मूळचा र्हस्व असलेला 'झ' संज्ञक 'इ' स्वर 'अ' होतो. 97, 156. Vevosu lo ca. ९७, १५६. 'वे' आणि 'वो' आदेश पुढे असताना मूळचा र्हस्व असलेला 'ल' संज्ञक 'उ' स्वरही 'अ' होतो. 98, 189. Mātulādīnamānattamīkāre. ९८, १८९. 'ई' प्रत्यय पुढे असताना 'मातुल' इत्यादी अ-कारान्त शब्दांच्या शेवटी असणाऱ्या 'अ' चा 'आन' होतो. 99, 81. Smāhismiṃnaṃ mhābhimhi vā. ९९, ८१. सर्व प्रातिपदिकांनंतर येणाऱ्या 'स्मा', 'हि' आणि 'स्मिं' विभक्ती प्रत्ययांचे पर्यायाने अनुक्रमे 'म्हा', 'भि' आणि 'म्हि' हे आदेश होतात. 100, 214. Na timehi katākārehi. १००, २१४. 'अ' कारात परिवर्तित झालेल्या 'त' आणि 'इम' शब्दांनंतर येणाऱ्या 'स्मा' आणि 'स्मिं' विभक्ती प्रत्ययांचे 'म्हा' आणि 'म्हि' हे आदेश होत नाहीत. 101, 80. Suhisvakāro [Pg.7] e. १०१, ८०. 'सु' आणि 'हि' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना अ-कारान्त शब्दाच्या शेवटी असणाऱ्या 'अ' चा 'ए' होतो. 102, 202. Sabbanāmānaṃ naṃmhi ca. १०२, २०२. 'नं' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना सर्वनामांच्या शेवटी असणाऱ्या 'अ' चाही 'ए' होतो. 103, 79. Ato nena. १०३, ७९. अ-कारान्त शब्दानंतर येणाऱ्या 'ना' विभक्ती प्रत्ययाचा 'एन' होतो. 104, 66. So. १०४, ६६. अ-कारान्त शब्दानंतर 'ना' विभक्ती प्रत्ययाचा 'सो' होतो. 105, 0. So vā. १०५, ०. अ-कारान्त शब्दानंतर येणाऱ्या 'ना' विभक्ती प्रत्ययाचा पर्यायाने 'सो' होतो. 106, 302. Dīghorehi. १०६, ३०२. 'दीघ' आणि 'ओर' शब्दांनंतर येणाऱ्या 'स्मा' विभक्ती प्रत्ययाचा पर्यायाने 'सो' होतो. 107, 69. Sabbayonīnamāe. १०७, ६९. अ-कारान्त शब्दानंतर येणाऱ्या सर्व 'यो' (प्रथमा आणि द्वितीया बहुवचन) विभक्ती प्रत्ययांचे अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' हे आदेश होतात. 108, 90. Smāsmiṃnaṃ vā. १०८, ९०. अ-कारान्त शब्दानंतर येणाऱ्या 'स्मा' आणि 'स्मिं' विभक्ती प्रत्ययांचे पर्यायाने अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' हे आदेश होतात. 109, 295. Āya catutthekavacanassa tu. १०९, २९५. अ-कारान्त शब्दानंतर येणाऱ्या चतुर्थी एकवचनाच्या 'स' विभक्ती प्रत्ययाचा 'आय' होतो. 110, 201. Tayo neva ca sabbanāmehi. ११०, २०१. अ-कारान्त सर्वनामांनंतर येणाऱ्या 'स्मा', 'स्मिं' आणि 'स' विभक्ती प्रत्ययांचे ते तीन आदेश ('आ', 'ए', 'आय') मुळीच होत नाहीत. 111, 179. Ghato nādīnaṃ. १११, १७९. 'घ' संज्ञक 'आ' कारानंतर येणाऱ्या 'ना' इत्यादी पाच एकवचनी विभक्ती प्रत्ययांचा 'आय' (āya) आदेश होतो. 112, 173. Pato yā. ११२, १७३. 'प' संज्ञक 'इ-वर्ण' आणि 'उ-वर्णा'नंतर येणाऱ्या 'ना' इत्यादी पाच एकवचनी विभक्ती प्रत्ययांचा 'या' (yā) आदेश होतो. 113, 132. Sakhato gasse vā. ११३, १३२. 'सख' शब्दाच्या पुढे असणाऱ्या 'ग' संज्ञक 'सि' विभक्ती प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'ए' (e) आदेश होतो. 114, 178. Ghate ca. ११४, १७८. 'घ' संज्ञक 'आ' कारानंतर येणाऱ्या 'ग' संज्ञक 'सि' विभक्ती प्रत्ययाचा 'ए' (e) आदेश होतो. 115, 181. Na ammādito. ११५, १८१. 'अम्मा' इत्यादी शब्दांच्या पुढे असणाऱ्या 'ग' संज्ञक 'सि' विभक्ती प्रत्ययाचा 'ए' (e) आदेश होत नाही. 116, 157. Akatarassā lato yvālapanassavevo. ११६, १५७. मूळचेच र्हस्व असणाऱ्या 'ल' संज्ञक 'उ' कारानंतर येणाऱ्या संबोधन 'यो' विभक्ती प्रत्ययाचा 'वे' (ve) आणि 'वो' (vo) आदेश होतो. 117, 124. Jhalato sassa no vā. ११७, १२४. 'झ' आणि 'ल' संज्ञकांनंतर येणाऱ्या 'स' विभक्ती प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'नो' (no) आदेश होतो. 118, 146. Ghapato ca yonaṃ lopo. ११८, १४६. 'घ' व 'प' संज्ञकांनंतर आणि 'झ' व 'ल' संज्ञकांनंतर येणाऱ्या 'यो' विभक्ती प्रत्ययांचा विकल्पेकरून लोप होतो. 119, 115. Lato vokāro ca. ११९, ११५. 'ल' संज्ञक 'उ-वर्णा'नंतर येणाऱ्या 'यो' विभक्ती प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'वो' (vo) आदेश देखील होतो. Iti nāmakappe paṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम कल्पामधील (नाम प्रकरणामधील) पहिला खंड समाप्त झाला. 120, 243. Amhassa [Pg.8] mamaṃ savibhattissa se. १२०, २४३. 'स' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'अम्ह' शब्दाचा 'ममं' (mamaṃ) आदेश होतो. 121, 233. Mayaṃ yomhi paṭhame. १२१, २३३. प्रथमा विभक्तीचा 'यो' प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'अम्ह' शब्दाचा 'मयं' (mayaṃ) आदेश होतो. 122, 99. Ntussa nto. १२२, ९९. प्रथमा विभक्तीचा 'यो' प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'न्तु' (ntu) प्रत्ययाचा 'न्तो' (nto) आदेश होतो. 123, 103. Ntassa se vā. १२३, १०३. 'स' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'न्तु' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'न्तस्स' (ntassa) आदेश होतो. 124, 98. Ā simhi. १२४, ९८. 'सि' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'न्तु' प्रत्ययाचा 'आ' (ā) आदेश होतो. 125, 198. Aṃ napuṃsake. १२५, १९८. नपुंसकलिंगात 'सि' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'न्तु' प्रत्ययाचा 'अं' (aṃ) आदेश होतो. 126, 101. Avaṇṇā ca ge. १२६, १०१. 'ग' संज्ञक 'सि' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'न्तु' प्रत्ययाचा 'अ-वर्ण' (अ किंवा आ) आणि 'अं' (aṃ) आदेश होतो. 127, 102. To titā sasmiṃnāsu. १२७, १०२. 'स', 'स्मिं' आणि 'ना' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'न्तु' प्रत्ययाचा अनुक्रमे 'तो' (to), 'ति' (ti) आणि 'ता' (tā) आदेश होतो. 128, 104. Naṃmhi taṃ vā. १२८, १०४. 'नं' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'न्तु' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'तं' (taṃ) आदेश होतो. 129, 222. Imassidamaṃsisu napuṃsake. १२९, २२२. नपुंसकलिंगात 'अं' आणि 'सि' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'इम' शब्दाचा 'इदं' (idaṃ) आदेश होतो. 130, 225. Amussāduṃ. १३०, २२५. नपुंसकलिंगात 'अं' आणि 'सि' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'अमु' शब्दाचा 'अदुं' (aduṃ) आदेश होतो. 131, 0. Itthipumanapuṃsakasaṅkhyaṃ. १३१, ०. 'इत्थिपुमनपुंसकसंख्यं' हे अधिकार सूत्र आहे. 132, 228. Yosu dvinnaṃ dve ca. १३२, २२८. 'यो' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, तिन्ही लिंगांतील 'द्वि' (दोन) या संख्यावाचक शब्दाचा विभक्ती प्रत्ययासह 'द्वे' (dve) आणि 'दुवे' (duve) आदेश होतो. 133, 230. Ticatunnaṃ tisso catasso tayocattāro tīṇi cattāri. १३३, २३०. 'यो' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, 'ति' (तीन) आणि 'चतु' (चार) या संख्यावाचक शब्दांचा विभक्ती प्रत्ययासह स्त्रीलिंगात अनुक्रमे 'तिस्सो' (tisso) व 'चतस्सो' (catasso), पुल्लिंगात 'तयो' (tayo) व 'चत्तारो' (cattāro), आणि नपुंसकलिंगात 'तीणि' (tīṇi) व 'चत्तारि' (cattāri) आदेश होतो. 134, 251. Pañcādīnamakāro. १३४, २५१. 'पञ्च' (पाच) इत्यादी संख्यावाचक शब्दांच्या अंत्य स्वराचा 'अ' (a) कार होतो. 135, 118. Rājassā rañño rājino se. १३५, ११८. 'स' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'राज' शब्दाचा 'रञ्ञो' (rañño) आणि 'राजिनो' (rājino) आदेश होतो. 136, 119. Raññaṃ naṃmhi vā. १३६, ११९. 'नं' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'राज' शब्दाचा विकल्पेकरून 'रञ्ञं' (raññaṃ) आदेश होतो. 137, 116. Nāmhi raññā vā. १३७, ११६. 'ना' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'राज' शब्दाचा विकल्पेकरून 'रञ्ञा' (raññā) आदेश होतो. 138, 121. Smiṃmhi raññe rājini. १३८, १२१. 'स्मिं' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'राज' शब्दाचा 'रञ्ञे' (raññe) आणि 'राजिनि' (rājini) आदेश होतो. 139, 245. Tumhamhākaṃ [Pg.9] tayi mayi. १३९, २४५. 'स्मिं' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'तयि' (tayi) आणि 'मयि' (mayi) आदेश होतो. 140, 232. Tvamahaṃ simhi ca. १४०, २३२. 'सि' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'त्वं' (tvaṃ) [किंवा 'तुवं' (tuvaṃ)] आणि 'अहं' (ahaṃ) आदेश होतो. 141, 241. Tava mama se. १४१, २४१. 'स' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'तव' (tava) आणि 'मम' (mama) आदेश होतो. 142, 242. Tuyhaṃ mayhañca. १४२, २४२. 'स' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'तुय्हं' (tuyhaṃ) आणि 'मय्हं' (mayhaṃ) आदेश देखील होतो. 143, 235. Taṃmamaṃmhi. १४३, २३५. 'अं' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'तं' (taṃ) आणि 'मं' (maṃ) आदेश होतो. 144, 234. Tavaṃmamañca na vā. १४४, २३४. 'अं' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'तवं' (tavaṃ) आणि 'ममं' (mamaṃ) आदेश देखील विकल्पेकरून होतो. 145, 238. Nāmhi tayā mayā. १४५, २३८. 'ना' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'तया' (tayā) आणि 'मया' (mayā) आदेश होतो. 146, 236. Tumhassa tuvaṃtvamamhi. १४६, २३६. 'अं' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' शब्दाचा 'तुवं' (tuvaṃ) आणि 'त्वं' (tvaṃ) आदेश होतो. 147, 246. Padato dutiyācatutthīchaṭṭhīsu vo no. १४७, २४६. दुसऱ्या पदाच्या पुढे असणाऱ्या, द्वितीया, चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीच्या बहुवचनी प्रत्ययांच्या जागी विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'वो' (vo) आणि 'नो' (no) आदेश होतो. 148, 247. Hemekavacanesu ca. १४८, २४७. दुसऱ्या पदाच्या पुढे असणाऱ्या, चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तीच्या एकवचनी प्रत्ययांच्या जागी विभक्ती प्रत्ययासह 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचा अनुक्रमे 'ते' (te) आणि 'मे' (me) आदेश होतो. 149, 248. Na aṃmhi. १४९, २४८. 'अं' विभक्ती प्रत्यय पर असताना, 'ते' (te) आणि 'मे' (me) आदेश होत नाहीत. 150, 249. Vā tatiye ca. १५०, २४९. तृतीया विभक्तीमध्येही विकल्पेकरून (ते आणि मे हे आदेश होतात). 151, 250. Bahuvacanesu vo no. १५१, २५०. बहुवचनांमध्ये (तृतीया इत्यादी विभक्तींच्या मागे) 'vo' (वो) आणि 'no' (नो) हे आदेश होतात. 152, 136. Pumantassā simhi. १५२, १३६. 'सि' प्रत्यय (प्रथमा एकवचन) असताना 'पुम' शब्दाच्या अंताला 'आ' आदेश होतो. 153, 138. Amālapanekavacane. १५३, १३८. संबोधन एकवचनामध्ये ('पुम' शब्दाच्या अंताला) 'अं' आदेश होतो. 154, 0. Samāse ca vibhāsā. १५४, ०. आणि समासामध्ये देखील (संबोधन एकवचनात 'अं' आदेश) विकल्पेकरून होतो. 155, 137. Yosvāno. १५५, १३७. 'यो' प्रत्यय (प्रथमा व द्वितीया बहुवचन) असताना ('पुम' शब्दाच्या अंताला) 'आनो' आदेश होतो. 156, 142. Āne smiṃmhi vā. १५६, १४२. 'स्मिं' प्रत्यय (सप्तमी एकवचन) असताना विकल्पेकरून 'आने' आदेश होतो. 157, 140. Hivibhatthimhi ca. १५७, १४०. आणि 'हि' विभक्ती प्रत्यय असताना देखील ('पुम' शब्दाच्या अंताला 'आने' आदेश होतो). 151, 143. Susmimā [Pg.10] vā. १५१, १४३. 'सु' प्रत्यय (सप्तमी बहुवचन) असताना विकल्पेकरून 'आ' आदेश होतो. 159, 139. U nāmhi ca. १५९, १३९. आणि 'ना' प्रत्यय (तृतीया एकवचन) असताना ('पुम' शब्दाच्या अंताला) 'उ' आणि 'आ' आदेश होतात. 160, 197. Akammantassa ca. १६०, १९७. आणि 'ना' प्रत्यय असताना 'कम्म' शब्दाच्या अंताला 'अ' आणि 'उ' आदेश होतात. Iti nāmakappe dutiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम कल्पामधील (नाम प्रकरण) दुसरा खंड समाप्त झाला. 161, 244. Tumhamhehi namākaṃ. १६१, २४४. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांनंतर 'नं' प्रत्ययाचा 'आकं' आदेश होतो. 162, 237. Vā yvappaṭhamo. १६२, २३७. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांनंतर प्रथमेव्यतिरिक्त असलेला 'यो' प्रत्यय (द्वितीया बहुवचन) विकल्पेकरून 'आकं' होतो. 163, 240. Sassaṃ. १६३, २४०. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांनंतर 'स' प्रत्ययाचा 'अं' आदेश होतो. 164, 200. Sabbanāmakārate paṭhamo. १६४, २००. 'अ' कारान्त सर्वनामांनंतर प्रथमेचा 'यो' प्रत्यय 'ए' होतो. 165, 208. Dvandaṭṭhā vā. १६५, २०८. द्वंद्व समासात असलेल्या (सर्वनामांनंतर प्रथमेचा 'यो' प्रत्यय) विकल्पेकरून 'ए' होतो. 166, 209. Nāññaṃ sabbanāmikaṃ. १६६, २०९. (द्वंद्व समासातील सर्वनामांच्या बाबतीत) इतर कोणतेही सर्वनाम-कार्य होत नाही. 167, 210. Bahubbīhimhi ca. १६७, २१०. आणि बहुव्रीहि समासामध्ये देखील (सर्वनाम-कार्य होत नाही). 168, 203. Sabbato naṃ saṃsānaṃ. १६८, २०३. सर्व सर्वनामांनंतर 'नं' प्रत्ययाचे 'सं' आणि 'सानं' हे आदेश होतात. 169, 117. Rājassa rāju sunaṃ hisu ca. १६९, ११७. आणि 'सु', 'नं' व 'हि' प्रत्यय असताना 'राज' शब्दाचा 'राजु' आदेश होतो (आणि विकल्पेकरून होत नाही). 170, 220. Sabbassimasse vā. १७०, २२०. ('सु', 'नं' आणि 'हि' प्रत्यय असताना) 'इम' या संपूर्ण शब्दाचा विकल्पेकरून 'ए' आदेश होतो. 171, 219. Animi nāmhi ca. १७१, २१९. आणि 'ना' प्रत्यय असताना 'इम' शब्दाचे 'अन' आणि 'इमि' हे आदेश होतात. 172, 218. Anapuṃsakassā yaṃ simhi. १७२, २१८. 'सि' प्रत्यय असताना नपुंसकलिंग सोडून इतर लिंगांतील 'इम' शब्दाचा 'अयं' आदेश होतो. 173, 223. Amussa mo saṃ. १७३, २२३. ('सि' प्रत्यय असताना नपुंसकलिंग सोडून इतर लिंगांतील) 'अमु' शब्दातील 'म' काराचा विकल्पेकरून 'स' कार होतो. 174, 211. Etatesaṃ to. १७४, २११. ('सि' प्रत्यय असताना नपुंसकलिंग सोडून इतर लिंगांतील) 'एत' आणि 'त' शब्दांमधील 'त' काराचा 'स' कार होतो. 175, 212. Tassa vā nattaṃ sabbattha. १७५, २१२. सर्व लिंगांमध्ये 'त' शब्दाचा विकल्पेकरून 'न' होतो. 176, 213. Sasmāsmiṃsaṃsāsvattaṃ 0.0011. १७६, २१३. 'स', 'स्मा', 'स्मिं' प्रत्यय आणि 'सं', 'सा' आदेश असताना सर्व लिंगांमध्ये 'त' शब्दाचा विकल्पेकरून 'अ' होतो. 177, 221. Imasaddassa ca. १७७, २२१. आणि (त्याच प्रत्ययांच्या मागे) 'इम' शब्दाचा देखील विकल्पेकरून 'अ' होतो. 178, 224. Sabbato ko. १७८, २२४. सर्व शब्दांनंतर विकल्पेकरून 'क' प्रत्यय येतो. 179, 204. Ghapato smiṃ sānaṃ saṃsā. १७९, २०४. 'घ' आणि 'प' संज्ञा असलेल्या सर्वनामांनंतर 'स्मिं' आणि 'स' प्रत्ययांचे अनुक्रमे विकल्पेकरून 'सं' आणि 'सा' हे आदेश होतात. 180, 207. Netāhi smimāyayā. १८०, २०७. या ('घ' आणि 'प' संज्ञा असलेल्या सर्वनामांनंतर) 'स्मिं' प्रत्ययाचे 'आय' आणि 'या' हे आदेश होत नाहीत. 181, 95. Manogaṇādito smiṃnānamiā. १८१, ९५. 'मनोगण' इत्यादी गणातील शब्दांनंतर 'स्मिं' आणि 'ना' प्रत्ययांचे अनुक्रमे 'इ' आणि 'आ' हे आदेश होतात. 182, 97. Sassa co. १८२, ९७. आणि ('मनोगण' इत्यादी गणातील शब्दांनंतर) 'स' प्रत्ययाचा 'ओ' आदेश होतो. 183, 48. Etesamo lope. १८३, ४८. विभक्ती प्रत्ययाचा लोप झाला असता या ('मनोगण' इत्यादी) शब्दांच्या अंताला 'ओ' आदेश होतो. 184, 96. Sa sare vāgamo. १८४, ९६. स्वर पुढे असताना 'मनोगण' इत्यादी शब्दांनंतर विकल्पेकरून 'स' चा आगम होतो. 185, 112. Santasaddassā so bhe bo cante. १८५, ११२. 'भ' प्रत्यय पुढे असताना 'सन्त' शब्दाचा 'स' आदेश होतो आणि त्याच्या अंताला 'ब' चा आगम होतो. 186, 107. Simhi gacchantādīnaṃ ntasaddo aṃ. १८६, १०७. 'सि' प्रत्यय असताना 'गच्छन्त' इत्यादी शब्दांमधील 'न्त' भागाचा 'अं' आदेश होतो. 187, 108. Sesesu ntuva. १८७, १०८. इतर विभक्ती प्रत्ययांच्या मागे ('गच्छन्त' इत्यादी शब्दांमधील 'न्त' भाग) 'न्तु' प्रमाणेच मानला जातो. 188, 155. Brahmatta sakha rājādito amānaṃ. १८८, १५५. 'ब्रह्म', 'अत्त', 'सख', 'राज' इत्यादी शब्दांनंतर 'अं' प्रत्ययाचा 'आनं' आदेश होतो. 189, 113. Syā ca. १८९, ११३. 'ब्रह्म', 'अत्त', 'सख', 'राज' इत्यादी शब्दांनंतर येणाऱ्या 'सि' विभक्तीचा 'आ' आदेश होतो. 190, 114. Yonamāno. १९०, ११४. 'ब्रह्म', 'अत्त', 'सख', 'राज' इत्यादी शब्दांनंतर येणाऱ्या 'यो' विभक्तीचा 'आनो' आदेश होतो. 191, 130. Sakhato cāyo no. १९१, १३०. 'सख' शब्दाच्या पुढे येणाऱ्या 'यो' विभक्तीचे 'आयो' आणि 'नो' हे आदेश होतात. 192, 135. Smime. १९२, १३५. 'सख' शब्दाच्या पुढे येणाऱ्या 'स्मिं' विभक्तीचा 'ए' आदेश होतो. 193, 122. Brahmato vassa ca. १९३, १२२. 'ब्रह्म' शब्दाच्या पुढे येणाऱ्या 'ग' संज्ञक 'सि' विभक्तीचा 'ए' आदेश होतो. 194, 131. Sakhantassi nonānaṃsesu. १९४, १३१. 'नो' आदेश, 'ना' विभक्ती, 'नं' विभक्ती आणि 'स' विभक्ती पुढे असताना, 'सख' शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'अ' चा 'इ' होतो. 195, 134. Āro [Pg.12] himhi vā. १९५, १३४. 'हि' विभक्ती पुढे असताना, 'सख' शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'अ' चा 'आर' आदेश विकल्पाने होतो. 196, 133. Sunamaṃsu vā. १९६, १३३. 'सु', 'नं' आणि 'अं' विभक्ती पुढे असताना, 'सख' शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'अ' चा 'आर' आदेश विकल्पाने होतो. 197, 125. Brahmato tu smiṃni. १९७, १२५. 'ब्रह्म' शब्दाच्या पुढे येणाऱ्या 'स्मिं' विभक्तीचा 'नि' आदेश होतो. 198, 123. Uttaṃ sanāsu. १९८, १२३. 'स' आणि 'ना' विभक्ती पुढे असताना, 'ब्रह्म' शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'अ' चा 'उ' होतो. 199, 158. Satthupitādīnamā sismiṃ silopo ca. १९९, १५८. 'सि' विभक्ती पुढे असताना, 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी असलेल्या 'उ' चा 'आ' होतो आणि 'सि' विभक्तीचा लोपही होतो. 200, 196. Aññesvārattaṃ. २००, १९६. 'सि' विभक्तीव्यतिरिक्त इतर विभक्ती पुढे असताना, 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी असलेल्या 'उ' चा 'आर' आदेश होतो. 201, 163. Vā naṃmhi. २०१, १६३. 'नं' विभक्ती पुढे असताना, 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी असलेल्या 'उ' चा 'आर' आदेश विकल्पाने होतो. 202. 164. Satthunattañca. २०२. १६४. 'नं' विभक्ती पुढे असताना, 'सत्थु' आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी असलेल्या 'उ' चा 'अ' होतो. 203, 162. U sasmiṃ salopo ca. २०३, १६२. 'स' विभक्ती पुढे असताना, 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी असलेल्या 'उ' चा विकल्पाने 'उ' आदेश होतो आणि 'स' विभक्तीचा लोपही होतो. 204, 167. Sakkamandhātādīnañca. २०४, १६७. 'सक', 'मन्धातु' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी असलेल्या 'उ' चा 'उ' आदेश होतो आणि 'स' विभक्तीचा लोपही होतो. 205, 160. Tato yonamo tu. २०५, १६०. त्या 'आर' आदेशानंतर येणाऱ्या 'यो' विभक्तीचा 'ओ' आदेश होतो. 206, 165. Tato smimi. २०६, १६५. त्या 'आर' आदेशानंतर येणाऱ्या 'स्मिं' विभक्तीचा 'इ' आदेश होतो. 207, 161. Nā ā. २०७, १६१. त्या 'आर' आदेशानंतर येणाऱ्या 'ना' विभक्तीचा 'आ' आदेश होतो. 208, 166. Āro rassamikāre. २०८, १६६. 'इ' स्वराच्या प्रभावाने 'आर' आदेशातील 'आ' चा र्हस्व 'अ' होतो. 209, 168. Pitādīnamasimhi. २०९, १६८. 'सि' विभक्तीव्यतिरिक्त इतर विभक्ती पुढे असताना, 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या 'आर' आदेशातील 'आ' चा र्हस्व 'अ' होतो. 210, 239. Tayātayinaṃ takāro tvattaṃ vā. २१०, २३९. 'तया' आणि 'तयि' या आदेशांमधील 'त' अक्षराचा विकल्पाने 'त्व' होतो. Iti nāmakappe tatiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम कल्पामधील तिसरा खंड समाप्त झाला. 211, 126. Attanto hismimanattaṃ. २११, १२६. 'हि' आणि 'स्मिं' विभक्ती पुढे असताना, 'अत्त' शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'अ' चा 'अन' आदेश होतो. 212, 129. Tato smiṃ ni. २१२, १२९. त्या 'अत्त' शब्दानंतर येणाऱ्या 'स्मिं' विभक्तीचा 'नि' आदेश होतो. 213, 127. Sassano. २१३, १२७. त्या 'अत्त' शब्दानंतर येणाऱ्या 'स' विभक्तीचा 'नो' आदेश होतो. 214, 128. Smā [Pg.13] nā. २१४, १२८. त्या 'अत्त' शब्दानंतर येणाऱ्या 'स्मा' विभक्तीचा 'ना' आदेश होतो. 215, 141. Jhalato ca. २१५, १४१. 'झ' आणि 'ल' संज्ञक शब्दानंतर येणाऱ्या 'स्मा' विभक्तीचा 'ना' आदेश होतो. 216, 180. Ghapato smiṃyaṃ vā. २१६, १८०. 'घ' आणि 'प' संज्ञक शब्दानंतर येणाऱ्या 'स्मिं' विभक्तीचा 'यं' आदेश विकल्पाने होतो. 217, 199. Yonaṃ ni napuṃsakehi. २१७, १९९. नपुंसकलिंगी शब्दानंतर येणाऱ्या 'यो' विभक्तीचा 'नि' आदेश विकल्पाने होतो. 218, 196. Ato niccaṃ. २१८, १९६. नपुंसकलिंगी 'अ' कारान्त शब्दानंतर येणाऱ्या 'यो' विभक्तीचा 'नि' आदेश नित्य होतो. 219, 195. Siṃ. २१९, १९५. नपुंसकलिंगी 'अ' कारान्त शब्दानंतर येणाऱ्या 'सि' विभक्तीचा 'अं' आदेश होतो. 220, 74. Sesato lopaṃ gasipi. २२०, ७४. इतर सूत्रांनी कार्य न केलेल्या उर्वरित प्रातिपदिकांनंतर येणाऱ्या 'ग' संज्ञक 'सि' विभक्तीचा आणि प्रथमेच्या 'सि' विभक्तीचा लोप होतो. 221, 282. Sabbāsamāvusopasagganipātādīhi ca. २२१, २८२. 'आवुसो' हे संबोधन, उपसर्ग, निपात इत्यादींच्या पुढे येणाऱ्या सर्व विभक्तींचा लोप होतो. 222, 327. Pumassa liṅgādīsu samāsesu. २२२, ३२७. समासामध्ये 'लिङ्ग' इत्यादी शब्द पुढे असताना, 'पुम' शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'अ' चा लोप होतो. 223, 188. Aṃ yamīto pasaññato. २२३, १८८. 'प' संज्ञक 'ई' कारानंतर येणाऱ्या 'अं' विभक्तीचा 'यं' आदेश होतो. 224, 153. Naṃ jhato katarassā. २२४, १५३. र्हस्व केलेल्या 'झ' संज्ञक 'इ' स्वरानंतर येणाऱ्या 'अं' विभक्तीचा 'नं' आदेश होतो. 225, 151. Yonaṃ no. २२५, १५१. र्हस्व केलेल्या 'झ' संज्ञक 'इ' स्वरानंतर येणाऱ्या 'यो' विभक्तीचा 'नो' आदेश होतो. 226, 154. Smiṃni. २२६, १५४. र्हस्व केलेल्या 'झ' संज्ञक 'इ' स्वरानंतर येणाऱ्या 'स्मिं' विभक्तीचा 'नि' आदेश होतो. 227, 270. Kissa ka ve ca. २२७, २७०. 'व' प्रत्यय पुढे असताना, 'किं' शब्दाचा 'क' आदेश होतो. 228, 272. Ku hiṃ haṃsu ca. २२८, २७२. 'hiṃ' आणि 'haṃ' प्रत्यय परे असताना 'kiṃ' शब्दाच्या जागी 'ku' आदेश होतो. 229, 226. Sesesu ca. २२९, २२६. 'va' प्रत्ययाव्यतिरिक्त इतर प्रत्यय किंवा विभक्ती परे असताना 'kiṃ' शब्दाच्या जागी 'ka' आदेश होतो. 230, 262. Tra to thesu ca. २३०, २६२. 'tra', 'to' आणि 'tha' प्रत्यय परे असताना 'kiṃ' शब्दाच्या जागी 'ku' आदेश होतो. 231, 263. Sabbassetassākāro vā. २३१, २६३. 'to' आणि 'tha' प्रत्यय परे असताना संपूर्ण 'eta' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'a' (अकार) आदेश होतो. 232, 267. Tre niccaṃ. २३२, २६७. 'tra' प्रत्यय परे असताना संपूर्ण 'eta' शब्दाच्या जागी नित्य 'a' (अकार) आदेश होतो. 233, 264. E tothesu ca. २३३, २६४. 'to' आणि 'tha' प्रत्यय परे असताना संपूर्ण 'eta' शब्दाच्या जागी 'e' (एकार) आदेश होतो. 234, 265. Imassi [Pg.14] thaṃ dāni ha to dhesu ca. २३४, २६५. 'thaṃ', 'dāni', 'ha', 'to' आणि 'dha' प्रत्यय परे असताना संपूर्ण 'ima' शब्दाच्या जागी 'i' (इकार) आदेश होतो. 235, 281. A dhunāmhi ca. २३५, २८१. 'dhunā' प्रत्यय परे असताना संपूर्ण 'ima' शब्दाच्या जागी 'a' (अकार) आदेश होतो. 236, 280. Eta rahimhi. २३६, २८०. 'rahi' प्रत्यय परे असताना संपूर्ण 'ima' शब्दाच्या जागी 'eta' आदेश होतो. 237, 176. Itthiyamato āpaccayo. २३७, १७६. स्त्रीलिंगात, अकारान्त शब्दाच्या पुढे 'ā' (आ) प्रत्यय होतो. 238, 187. Nadādito vā ī. २३८, १८७. स्त्रीलिंगात, 'nada' इत्यादी अकारान्त शब्दांच्या पुढे किंवा 'nada' इत्यादी नसलेल्या 'u' आणि 'o' कारान्त शब्दांच्या पुढे विकल्पेकरून 'ī' (ई) प्रत्यय होतो. 239, 190. Ṇava ṇika ṇeyya ṇantuhi. २३९, १९०. स्त्रीलिंगात, 'ṇava', 'ṇika', 'ṇeyya', 'ṇa' आणि 'vantu/mantu' (णन्तु) प्रत्ययांच्या पुढे 'ī' (ई) प्रत्यय होतो. 240, 193. Patibhikkhurājīkārantehi inī. २४०, १९३. 'pati', 'bhikkhu', 'rāja' आणि इकारान्त शब्दांच्या पुढे स्त्रीलिंगात 'inī' (इनी) प्रत्यय होतो. 241, 191. Ntussa tadhīkāre. २४१, १९१. 'ī' (ई) प्रत्यय परे असताना 'ntu' प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'ta' आदेश होतो. 242, 192. Bhavato bhoto. २४२, १९२. 'ī' (ई) प्रत्यय परे असताना 'bhavanta' शब्दाच्या जागी 'bhota' आदेश होतो. 243, 110. Bho ge tu. २४३, ११०. 'ga' संज्ञक 'si' विभक्ती (संबोधन एकवचन) परे असताना 'bhavanta' शब्दाच्या जागी 'bho' आदेश होतो. 244, 72. Akārapitādyantānamā. २४४, ७२. 'ga' संज्ञक 'si' विभक्ती परे असताना अकारान्त शब्द आणि 'pitu' इत्यादी शब्दांच्या अंत्य स्वराच्या जागी 'ā' (आकार) आदेश होतो. 245, 152. Jhalapā rassaṃ. २४५, १५२. 'ga' संज्ञक 'si' विभक्ती परे असताना 'jha', 'la' आणि 'pa' संज्ञा असलेल्या 'ī' आणि 'ū' स्वरांना र्हस्व होतो. 246, 73. Ākāro vā. २४६, ७३. 'ga' संज्ञक 'si' विभक्ती परे असताना 'ā' (आकार) स्वराला विकल्पेकरून र्हस्व होतो. Iti nāmakappe catuttho kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम-कल्प मधील चौथा खंड समाप्त झाला. 247, 261. Tvādayo vibhattisaññāyo. २४७, २६१. 'to' इत्यादी प्रत्ययांना 'विभक्ती' संज्ञा प्राप्त होते. 248, 260. Kvaci to pañcamyatthe. २४८, २६०. पंचमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये काही ठिकाणी 'to' प्रत्यय होतो. 249, 266. Tratha sattamiyā sabbanāmehi. २४९, २६६. सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये सर्वनामांच्या पुढे 'tra' आणि 'tha' प्रत्यय होतात. 250, 268. Sabbato dhi. २५०, २६८. सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये 'sabba' शब्दाच्या पुढे 'dhi' प्रत्यय होतो. 251, 269. Kiṃsmā vo. २५१, २६९. सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये 'kiṃ' शब्दाच्या पुढे 'va' (व) प्रत्यय होतो. 252, 271. Hiṃhaṃhiñcanaṃ २५२, २७१. सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये 'hiṃ', 'haṃ' आणि 'hiñcanaṃ' प्रत्यय होतात. 253, 273. Tamhā [Pg.15] ca. २५३, २७३. सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये 'ta' शब्दाच्या पुढे 'hiṃ' आणि 'haṃ' प्रत्यय होतात. 254, 274. Imasmā hadhā ca. २५४, २७४. सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये 'ima' शब्दाच्या पुढे 'ha' आणि 'dha' प्रत्यय होतात. 255, 275. Yato hiṃ. २५५, २७५. सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये 'ya' शब्दाच्या पुढे 'hiṃ' प्रत्यय होतो. 256, 0. Kāle. २५६, ०. 'kāle' (काळ/वेळ या अर्थी) हा अधिकार सूत्र आहे. 257, 276. Kiṃsabbaññekayakuhi dādācanaṃ. २५७, २७६. काळ (वेळ) या अर्थी 'kiṃ', 'sabba', 'añña', 'eka', 'ya' आणि 'ku' शब्दांच्या पुढे 'dā' आणि 'dācanaṃ' प्रत्यय होतात. 258, 278. Tamhā dāni ca. २५८, २७८. काळ (वेळ) या अर्थी 'ta' शब्दाच्या पुढे 'dāni' आणि 'dā' प्रत्यय होतात. 259, 279. Imasmā rahidhunādāni ca. २५९, २७९. काळ (वेळ) या अर्थी 'ima' शब्दाच्या पुढे 'rahi', 'dhunā' आणि 'dāni' प्रत्यय होतात. 260, 277. Sabbassa so dāmhi vā. २६०, २७७. 'dā' प्रत्यय परे असताना 'sabba' शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून 'sa' आदेश होतो. 261, 369. Avaṇṇo ye lopañca. २६१, ३६९. 'ya' प्रत्यय परे असताना अकार आणि आकार (अवण्ण) यांचा लोप होतो. 262, 391. Vuḍḍhassa jo iyiṭṭhesu. २६२, ३९१. 'iya' आणि 'iṭṭha' प्रत्यय परे असताना 'vuḍḍha' शब्दाच्या जागी 'ja' आदेश होतो. 263, 392. Pasatthassa so ca. २६३, ३९२. 'iya' आणि 'iṭṭha' प्रत्यय परे असताना 'pasattha' शब्दाच्या जागी 'sa' आणि 'ja' आदेश होतात. 264, 393. Antikassa nedo. २६४, ३९३. 'iya' आणि 'iṭṭha' प्रत्यय परे असताना 'antika' शब्दाच्या जागी 'neda' आदेश होतो. 265, 394. Bāḷhassa sādho. २६५, ३९४. 'iya' आणि 'iṭṭha' प्रत्यय परे असताना 'bāḷha' शब्दाच्या जागी 'sādha' आदेश होतो. 266, 395. Appassa kaṇa. २६६, ३९५. 'iya' आणि 'iṭṭha' प्रत्यय परे असताना 'appa' शब्दाच्या जागी 'kaṇa' आदेश होतो. 267, 396. Yuvānañca. २६७, ३९६. आणि 'युव' शब्दाच्या जागी 'कण' आदेश होतो. 268, 397. Vantumantuvīnañca lopo. २६८, ३९७. आणि 'वन्तु', 'मन्तु' आणि 'वी' प्रत्ययांचा लोप होतो. 269, 41. Yavataṃ talaṇadakārānaṃ byañjanāni calañajakārattaṃ. २६९, ४१. 'यव' आणि 'तलणद' कारांच्या व्यंजनांचे अनुक्रमे 'चलञज' कारत्व होते. 270, 120. Amha tumha ntu rāja brahmatta sakha satthu– pitādīhi smā nāva. २७०, १२०. 'अम्ह', 'तुम्ह', 'न्तु', 'राज', 'ब्रह्म', 'अत्त', 'सख', 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांनंतर येणाऱ्या 'स्मा' विभक्तीला 'ना' विभक्तीप्रमाणे मानावे. Iti nāmakappe pañcamo kaṇḍo. अशा प्रकारे नामकल्पामधील पाचवे कांड समाप्त झाले. Nāmasuttaṃ niṭṭhitaṃ. नामसुत्त समाप्त झाले. 3. Kāraka ३. कारक 271, 88. Yasmā [Pg.16] dapetiṃ bhayamādatte vā tadapādānaṃ. (308) २७१, ८८. ज्या कारकापासून दूर जाणे, भय वाटणे किंवा ग्रहण करणे होते, त्याला 'अपादान' कारक म्हणतात. 272, 309. Dhātunāmānamupasaggayogādīsvapi ca. २७२, ३०९. धातू, नाम, उपसर्ग इत्यादींच्या योगात देखील (अपादान कारक होते). 273, 310. Rakkhaṇatthānamicchitaṃ. २७३, ३१०. रक्षण करणे या अर्थाच्या धातूंच्या योगात, जे इष्ट असते, त्याला 'अपादान' कारक म्हणतात. 274, 311. Yena vā dassanaṃ २७४, ३११. किंवा ज्याच्यापासून स्वतःला लपवून अदृश्य होण्याची इच्छा असते, त्याला 'अपादान' कारक म्हणतात. 275, 312. Dūrantikaddhakāla nimmāna tvālopa disā yoga vibhattārappayoga suddhappamocanahetu vivittappamāṇapubbayoga bandhanaguṇavacana pañhakathana thokātattūsu ca. २७५, ३१२. दूर, जवळ, मार्ग, काळ, मोजमाप, 'त्वा' प्रत्ययाचा लोप, दिशा-योग, विभाग, अराति (टाळणे), शुद्ध मुक्ती, हेतू, विविक्त (वेगळेपण), प्रमाण, पूर्वयोग, बंधन, गुणवचन, प्रश्न विचारणे आणि अल्पता इत्यादी अर्थांमध्ये देखील (अपादान कारक होते). 276, 302. Yassa dātukāmo rocate dhārayate pā taṃ sampadānaṃ. २७६, ३०२. ज्याला देण्याची इच्छा असते, ज्याला आवडते, किंवा ज्याच्यासाठी धारण केले जाते, त्याला 'संप्रदान' कारक म्हणतात. 277, 303. Silāgha hanu ṭhā sapa dhāra piha kudha duhisso ssūya rādhikkha paccāsuṇa anupatigiṇa pubbakattārocanattha tadattha tumatthālamattha maññānādarappāṇini gatyatthakammaniāsisatthasammutibhiyyasattamyatthesu ca. २७७, ३०३. श्लाघ्, ह्नु, ठा, सप्, धार, पिह्, कुध्, दुह्, इस्सु, उसूय, राध्, इक्ख्, पच्चासुण, अनुपतिगिण, मूळ कर्त्याला कळवणे, तदर्थ, तुमर्थ, अलमर्थ, अप्राणीवाचक अनादरयुक्त तुलना, गत्यर्थक धातूंचे कर्म, आशिष, संमती, अतिशय आणि सप्तमीच्या अर्थात देखील (संप्रदान कारक होते). 278, 320. Yodhāro tamokāsaṃ. २७८, ३२०. जो आधार असतो, त्याला 'ओकास' (अधिकरण) कारक म्हणतात. 279, 292. Yena vā kayirate taṃ karaṇaṃ. २७९, २९२. किंवा ज्या कारकाद्वारे क्रिया केली जाते, त्याला 'करण' कारक म्हणतात. 280, 285, Yaṃ karoti taṃ kammaṃ. २८०, २८५, जे केले जाते, त्याला 'कर्म' कारक म्हणतात. 281, 294. Yo karoti sa kattā. २८१, २९४. जो क्रिया करतो, त्याला 'कर्ता' कारक म्हणतात. 282, 295. Yo kārehi sa hetu. २८२, २९५. जो दुसऱ्याकडून क्रिया करून घेतो, त्याला 'हेतू' (प्रयोजक कर्ता) म्हणतात. 283, 316. Yassa [Pg.17] vā pariggaho taṃ sāmī. २८३, ३१६. किंवा ज्याच्या मालकीची वस्तू असते, त्याला 'सामी' (स्वामी) म्हणतात. 284, 283. Liṅgatthe paṭhamā. २८४, २८३. केवळ प्रातिपदिकार्थात प्रथमा विभक्ती होते. 285, 70. Ālapane ca. २८५, ७०. आणि संबोधन अर्थात देखील (प्रथमा विभक्ती होते). 286, 291. Karaṇe tatiyā. २८६, २९१. करण कारकाच्या अर्थात तृतीया विभक्ती होते. 287, 296, Sahādiyoge ca. २८७, २९६, आणि 'सह' इत्यादी शब्दांच्या योगात देखील (तृतीया विभक्ती होते). 288, 293. Kattari ca. २८८, २९३. आणि (अनुक्त) कर्त्याच्या अर्थात देखील तृतीया विभक्ती होते. 289, 297. Hetvatthe ca. २८९, २९७. आणि हेतू अर्थात देखील तृतीया विभक्ती होते. 290, 298. Sattamyatthe ca. २९०, २९८. आणि सप्तमी विभक्तीच्या अर्थात देखील तृतीया विभक्ती होते. 291, 299. Yenaṅgavikāro. २९१, २९९. ज्या अंगामुळे शरीराचा विकार दिसून येतो, त्या अंगाच्या वाचक शब्दाहून (तृतीया विभक्ती होते). 292, 300. Visesane ca. २९२, ३००. आणि विशेषण अर्थात देखील तृतीया विभक्ती होते. 293, 301. Sampadāne catutthī. २९३, ३०१. संप्रदान कारकाच्या अर्थात चतुर्थी विभक्ती होते. 294, 305. Namoyogādīsvapi ca. २९४, ३०५. आणि 'नमो' इत्यादी शब्दांच्या योगात देखील चतुर्थी विभक्ती होते. 295, 307. Apādāne pañcamī. २९५, ३०७. अपादान कारकाच्या अर्थात पंचमी विभक्ती होते. 296, 314. Kāraṇatthe ca. २९६, ३१४. आणि कारण अर्थात देखील पंचमी विभक्ती होते. 297, 284. Kammatthe dutiyā. २९७, २८४. कर्म कारकाच्या अर्थात द्वितीया विभक्ती होते. 298. 287. Kāladdhānamaccantasaṃyoge. २९८. २८७. काळ आणि अंतर यांच्या निरंतर संयोगात द्वितीया विभक्ती होते. 299, 288. Kammappavacanīyayutte. २९९, २८८. कर्मप्रवचनीय शब्दांच्या योगात द्वितीया विभक्ती होते. 300, 286. Gati buddhi bhuja paṭha hara kara sayādīnaṃkā rite vā. ३००, २८६. गती, बुद्धी, भुज, पठ, हर, कर, शय इत्यादी धातूंच्या प्रयोजक रूपात कर्माच्या अर्थात पर्यायाने द्वितीया विभक्ती होते. 301, 315. Sāmismiṃ chaṭṭhī ३०१, ३१५. स्वामी अर्थात षष्ठी विभक्ती होते. 302, 319. Okāse [Pg.18] sattamī. ३०२, ३१९. ओकास (अधिकरण) कारकाच्या अर्थात सप्तमी विभक्ती होते. 303, 321. Sāmissarādhipati dāyāda sakkhī pathibhū pasuta kusalehi ca. ३०३, ३२१. आणि स्वामी, ईश्वर, अधिपति, दायाद, साक्षी, प्रतिभू, पसुत आणि कुशल या शब्दांच्या योगात देखील षष्ठी किंवा सप्तमी विभक्ती होते. 304, 322. Niddhāraṇe ca. ३०४, ३२२. 'निर्धारण' (विशिष्ट समूहातून वेगळे करणे) या अर्थी देखील (षष्ठी आणि सप्तमी विभक्ती होतात). 305, 323. Anādare ca. ३०५, ३२३. 'अनादर' (उपेक्षा किंवा दुर्लक्ष) दर्शविताना देखील (षष्ठी आणि सप्तमी विभक्ती होतात). 306, 289. Kvaci dutiyā chaṭṭhīnamatthe. ३०६, २८९. काही ठिकाणी षष्ठी विभक्तीच्या अर्थामध्ये द्वितीया विभक्ती होते. 307, 290. Tatiyāsattamīnañca. ३०७, २९०. आणि तृतीया व सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये देखील (काही ठिकाणी द्वितीया विभक्ती होते). 308, 317. Chaṭṭhī ca. ३०८, ३१७. आणि तृतीया व सप्तमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये षष्ठी विभक्ती देखील होते. 309, 318. Dutiyāpañcamīnañca. ३०९, ३१८. आणि द्वितीया व पंचमी विभक्तीच्या अर्थामध्ये देखील (काही ठिकाणी षष्ठी विभक्ती होते). 310, 324. Kammakaraṇanimittatthesu sattamī. ३१०, ३२४. कर्म, करण (साधन) आणि निमित्त (कारण) या अर्थांमध्ये सप्तमी विभक्ती होते. 311, 325. Sampadāne ca. ३११, ३२५. आणि संप्रदान अर्थामध्ये देखील सप्तमी विभक्ती होते. 312, 326. Pañcamyatthe ca. ३१२, ३२६. आणि पंचमीच्या (अपादान) अर्थामध्ये देखील सप्तमी विभक्ती होते. 313, 327. Kālabhāvesu ca. ३१३, ३२७. आणि काल (वेळ) व भाव (क्रिया-लक्षण) या अर्थांमध्ये देखील सप्तमी विभक्ती होते. 314, 328. Upa’dhyādhikissaravacane. ३१४, ३२८. 'उप' आणि 'अधि' या शब्दांच्या योगाने अधिकता (जास्त असणे) आणि स्वामित्व (मालकी किंवा अधिकार) दर्शविताना सप्तमी विभक्ती होते. 315, 329. Maṇḍitussukkesu tatiyā ca. ३१५, ३२९. सुशोभित (मंडित) आणि उत्सुकता (उत्सुक) या अर्थांमध्ये तृतीया विभक्ती देखील होते. Iti nāmakappe kārakakappo chaṭṭho kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम-कल्पामध्ये (व्याकरणात) 'कारक-कल्प' नावाचा सहावा विभाग समाप्त झाला. Kārakasuttaṃ niṭṭhitaṃ. कारक-सूत्रे समाप्त झाली. 4. Samāsa ४. समास 316, 331. Nāmāna samāso yuttattho. ३१६, ३३१. परस्पर संबंध असलेल्या अर्थांच्या नामांच्या एकत्रीकरणाला 'समास' म्हणतात. 317, 332. Tesaṃ vibhattiyo lopā ca. ३१७, ३३२. आणि त्या (समास झालेल्या नामांच्या) विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होतो. 318, 333. Pakati cassa sarantassa. ३१८, ३३३. आणि स्वर शेवटी असलेल्या नामाचे मूळ रूप (प्रकृती) तसेच राहते. 319, 330. Upasagganipātapubbako [Pg.19] abyayībhāvo. ३१९, ३३०. ज्या समासाच्या सुरुवातीला उपसर्ग किंवा निपात असतो, त्याला 'अव्ययीभाव' समास म्हणतात. 320, 335. So napuṃsakaliṅgo. ३२०, ३३५. तो (अव्ययीभाव समास) नपुंसकलिंगी समजावा. 321. 349. Digussekattaṃ. ३२१. ३४९. द्विगु समासामध्ये एकवचन (आणि नपुंसकलिंग) होते. 322, 359. Tathā dvande pāṇi tūriye yogga senaṅga khuddajantuka vividha viruddha visabhāgatthādīnañca. ३२२, ३५९. त्याचप्रमाणे द्वंद्व समासात शरीराचे अवयव (पाणि), वाद्ये (तूर्य), वाहनाचे भाग (योग्य), सैन्याचे अंग (सेनांग), लहान जीव (क्षुद्रजंतुक), परस्परांचे नैसर्गिक शत्रू असलेले प्राणी (विविध विरुद्ध) आणि भिन्न स्वभाव असूनही एकाच कार्यात एकत्र येणारे (विसभागार्थ) इत्यादी अर्थांच्या शब्दांचे एकवचन (आणि नपुंसकलिंग) होते. 323, 360. Vibhāsā rukkha tiṇa pasu dhana dhañña janapadā dīnañca. ३२३, ३६०. द्वंद्व समासामध्ये वृक्ष, तृण (गवत), पशू, धन, धान्य, जनपद (देश) इत्यादी अर्थांच्या शब्दांचे एकवचन (आणि नपुंसकलिंग) पर्यायाने (विकल्पाने) होते. 324, 339. Dvipade tulyādhikaraṇe kammadhārayo. ३२४, ३३९. समान विभक्तीत (तुल्याधिकरण) असलेल्या दोन पदांच्या समासाला 'कर्मधारय' समास म्हणतात. 325, 348. Saṅkhyāpubbo digu. ३२५, ३४८. ज्या समासाच्या सुरुवातीला संख्यावाचक शब्द असतो, त्याला 'द्विगु' समास म्हणतात. 326, 341. Ubhe tappurisā. ३२६, ३४१. हे दोन्ही (कर्मधारय आणि द्विगु) 'तत्पुरुष' समास देखील मानले जातात. 327, 351. Amādayo parapadebhi. ३२७, ३५१. 'अं' (द्वितीया विभक्ती प्रत्यय) इत्यादी अंत असणारी पदे पुढील पदांशी जोडली जाऊन तत्पुरुष समास बनतो. 328, 352. Aññapadatthesu bahubbīhi. ३२८, ३५२. जब समासातील पदे सोडून इतर पदाच्या अर्थाला (अन्यपदार्थ) प्राधान्य असते, तेव्हा त्याला 'बहुव्रीहि' समास म्हणतात. 329, 357. Nāmānaṃ samuccayo dvando. ३२९, ३५७. समान विभक्ती असलेल्या नामांच्या एकत्र येण्याला (समुच्चयाला) 'द्वंद्व' समास म्हणतात. 330, 340. Mahataṃ mahā tulyādhikaraṇe pade. ३३०, ३४०. समान विभक्तीतील (तुल्याधिकरण) पद पुढे असताना 'महन्त' शब्दाचा 'महा' असा आदेश होतो. 331, 353. Itthiyaṃ bhāsitapumitthī pumāva ce. ३३१, ३५३. स्त्रीलिंगी शब्दाच्या मागे असलेला आणि पूर्वी पुल्लिंगात वापरला गेलेला स्त्रीलिंगी शब्द, समान विभक्तीतील स्त्रीलिंगी पद पुढे असताना पुल्लिंगाप्रमाणे होतो. 332, 343. Kammadhārayasaññe ca. ३३२, ३४३. आणि कर्मधारय संज्ञक समासामध्ये देखील (हाच नियम लागू होतो). 333, 344. Attaṃ nassa tappurise. ३३३, ३४४. तत्पुरुष समासामध्ये 'न' (निपात) या शब्दाचा 'अ' असा आदेश होतो. 334, 345. Sare ana. ३३४, ३४५. स्वर पुढे असताना 'न' चा 'अन्' असा आदेश होतो. 335, 346. Kadi kussa. ३३५, ३४६. स्वर पुढे असताना 'कु' (निपात) चा 'कद्' असा आदेश होतो. 336, 347. Kā’ppatthesu ca. ३३६, ३४७. आणि 'अल्प' (थोडके) या अर्थी 'कु' चा 'का' असा आदेश होतो. 337, 350. Kvaci [Pg.20] samāsanta gatānamakāranto. ३३७, ३५०. काही ठिकाणी समासाच्या शेवटी असलेल्या शब्दांचा अंत 'अ'कारान्त होतो. 338, 356. Nadimhā ca. ३३८, ३५६. आणि 'नदी' इत्यादी शब्दांनंतर देखील (समासाच्या शेवटी 'क' प्रत्यय लागतो). 339, 358. Jāyāya tudaṃ jāni patimhi. ३३९, ३५८. 'पति' शब्द पुढे असताना 'जाया' शब्दाचा 'दं' किंवा 'जानि' (तसेच 'जं') असा आदेश होतो. 340, 355. Dhanumhā ca. ३४०, ३५५. आणि 'धनु' शब्दानंतर देखील समासाच्या शेवटी 'आ' प्रत्यय लागतो. 341, 336. Aṃvibhattīnamakārantā abyāyitāvā. ३४१, ३३६. अ-कारान्त अव्ययीभाव समासाच्या पुढील विभक्ती प्रत्ययांचा 'अं' आदेश होतो. 342, 337. Saro rasso napuṃsake. ३४२, ३३७. नपुंसकलिंगी समासाचा अंत्य स्वर र्हस्व होतो. 343, 338. Aññasmā lopo ca. ३४३, ३३८. अ-कारान्त अव्ययीभाव समासाव्यतिरिक्त इतर अव्ययीभाव समासांच्या पुढील विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होतो. Iti nāmakappe samāsakappo sattamo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम-कल्पामधील 'समास-कल्प' नावाचा सातवा विभाग समाप्त झाला. Samāsasutthaṃ niṭṭhitaṃ. समास-प्रकरण समाप्त झाले. 5. Taddhita ५. तद्धित 244, 361. Vā ṇā’pacce. २४४, ३६१. अपत्य अर्थी 'ण' प्रत्यय विकल्पाने होतो. 345, 366. Ṇāyana ṇāna vacchādito. ३४५, ३६६. अपत्य अर्थी, 'वच्छ' (वत्स) इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'णायन' आणि 'णान' हे प्रत्यय विकल्पाने होतात. 346, 367. Ṇeyyo kattiyādīhi. ३४६, ३६७. अपत्य अर्थी, 'कत्तिका' (कृत्तिका) इत्यादी स्त्रीलिंगी शब्दांच्या पुढे 'णेय्य' प्रत्यय होतो. 347, 368. Ato ṇi vā. ३४७, ३६८. अपत्य अर्थी, अ-कारान्त शब्दांच्या पुढे 'णि' प्रत्यय विकल्पाने होतो. 348, 371. Ṇavopakvādīhi. ३४८, ३७१. अपत्य अर्थी, 'उपकु' इत्यादी उ-कारान्त शब्दांच्या पुढे 'णवु' प्रत्यय होतो. 349, 372. Ṇera vidhavādito. ३४९, ३७२. अपत्य अर्थी, 'विधवा' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'णेर' प्रत्यय होतो. 350, 373. Yena vā saṃsaṭṭhaṃ tarati carati vahati ṇiko. ३५०, ३७३. ज्याच्याद्वारे संसर्ग केला जातो, पार केले जाते, फिरले जाते किंवा वाहून नेले जाते, त्या अर्थी 'णिक' प्रत्यय होतो. 351, 374. Tamadhīte tenakatādhi sannidhānaniyoga sippa bhaṇḍa jīvikatthesu ca. ३५१, ३७४. ते शिकणारा किंवा अभ्यास करणारा, त्याने केलेले, तसेच सन्निधान, नियोग, शिल्प, भांड आणि जीविका या अर्थांमध्येही 'णिक' प्रत्यय होतो. 352, 376. Ṇa [Pg.21] rāgā tassedamaññatthesu ca. ३५२, ३७६. रंगवलेले, हे त्याचे आहे या अर्थी आणि इतर अर्थांमध्येही 'ण' प्रत्यय होतो. 353, 378. Jātādīnamimiyā ca. ३५३, ३७८. तेथे जन्मलेला इत्यादी अर्थांमध्ये 'इम' आणि 'इय' हे प्रत्यय देखील होतात. 354, 379. Samūhatthe kaṇa ṇā. ३५४, ३७९. समूह अर्थी 'कण' आणि 'ण' हे प्रत्यय होतात. 355, 380. Gāma jana bandhu sahāyādīhi tā. ३५५, ३८०. गाम (ग्राम), जन, बन्धु, सहाय इत्यादी शब्दांच्या पुढे समूह अर्थी 'ता' प्रत्यय होतो. 356, 381. Tadassa ṭhānamiyo ca. ३५६, ३८१. ते त्याचे स्थान आहे या अर्थी 'इय' प्रत्यय देखील होतो. 357, 382. Upamatthāyitattaṃ. ३५७, ३८२. उपमा (सादृश्य) या अर्थी 'आयितत्त' प्रत्यय होतो. 358, 383. Tannissitatthe lo. ३५८, ३८३. त्याच्यावर आश्रित या अर्थी आणि ते त्याचे स्थान आहे या अर्थी 'ल' प्रत्यय होतो. 359, 384. Ālu tabbahule. ३५९, ३८४. त्याची प्रचुरता (अधिकता) असणे या अर्थी 'आलु' प्रत्यय होतो. 360, 387. Ṇuttatā bhāve tu. ३६०, ३८७. भाव (अवस्था) या अर्थी 'णु', 'त्त' आणि 'ता' हे प्रत्यय होतात. 361, 388. Ṇa visamādīhi. ३६१, ३८८. भाव अर्थी, 'विसम' (विषम) इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'ण' प्रत्यय होतो. 362, 389. Ramaṇīyādito kaṇa ३६२, ३८९. भाव अर्थी, 'रमणीय' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'कण' प्रत्यय होतो. 363, 390. Visese taratamisikiyiṭṭhā. ३६३, ३९०. विशेष (अतिशयता) दर्शवण्यासाठी 'तर', 'तम', 'इसिक', 'इय' आणि 'इट्ठ' हे प्रत्यय होतात. 364, 398. Tadassatthīti vī ca. ३६४, ३९८. ते त्याच्याकडे आहे या अर्थी 'वी' प्रत्यय देखील होतो. 365, 399. Tapādito sī. ३६५, ३९९. 'तप' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'सी' प्रत्यय होतो. 366, 400. Daṇḍādito ika ī. ३६६, ४००. 'दण्ड' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'इक' आणि 'ई' हे प्रत्यय होतात. 367, 401. Madhvādito ro. ३६७, ४०१. 'मधु' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'र' प्रत्यय होतो. 368, 402. Guṇādito vantu. ३६८, ४०२. 'गुण' इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'वन्तु' प्रत्यय होतो. 369, 403. Satyādīhi mantu. ३६९, ४०३. 'सति' (स्मृती) इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'मन्तु' प्रत्यय होतो. 370, 405. Saddhādito ṇa. ३७०, ४०५. 'सद्धा' (श्रद्धा) इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'ण' प्रत्यय होतो. 371, 404. Āyussukārāsa mantumhi. ३७१, ४०४. 'मन्तु' प्रत्यय पुढे असताना 'आयु' शब्दाच्या अंत्य स्वराचा 'अ' होतो आणि 'स' चा आगम होतो. 372, 385. Tappakativacane [Pg.22] mayo. ३७२, ३८५. त्याच्यापासून बनवलेले या अर्थी 'मय' प्रत्यय होतो. 373, 406. Saṅkhyāpūraṇe mo. ३७३, ४०६. संख्या पूर्ण करणे (क्रमवाचक संख्या दर्शवणे) या अर्थी 'म' प्रत्यय होतो. 374, 408. Sa chassa vā. ३७४, ४०८. 'छ' (सहा) या संख्येचा विकल्पाने 'स' होतो. 375, 412. Ekādito dasassī. ३७५, ४१२. 'एकादस' (अकरा) इत्यादी संख्यांच्या पुढे 'दस' शब्दाला 'ई' प्रत्यय होतो. 376, 257. Dase so niccañca. ३७६, २५७. 'दस' शब्द पुढे असताना 'छ' (सहा) या संख्येचा नेहमी 'सो' होतो. 377, 0. Ante niggahitañca. ३७७, ०. संख्यावाचक शब्दांच्या शेवटी निग्गहीत (अनुस्वार) देखील येतो. 378, 414. Ti ca. ३७८, ४१४. संख्यावाचक शब्दांच्या शेवटी 'ति' (प्रत्यय/अक्षर) देखील येतो. 379, 258. La da rānaṃ. ३७९, २५८. 'द' आणि 'र' यांच्या जागी 'ल' (किंवा 'ळ') आदेश होतो. 380, 255. Vīsati dasesu bā dvissa tu. ३८०, २५५. 'वीसति' आणि 'दस' शब्द पुढे असताना 'द्वि' शब्दाच्या जागी 'बा' आदेश होतो. 381, 254. Ekādito dassa ra saṅkhyāne. ३८१, २५४. संख्या मोजताना 'एक' इत्यादी शब्दांच्या पुढे असलेल्या 'दस' शब्दातील 'द' च्या जागी 'र' आदेश होतो. 382, 259. Aṭṭhādito ca. ३८२, २५९. आणि 'अट्ठ' इत्यादी शब्दांच्या पुढे असलेल्या 'दस' च्या 'द' च्या जागी देखील 'र' आदेश होतो. 383, 353. Dvekaṭṭhānamākāro vā. ३८३, ३५३. संख्यावाचक शब्द पुढे असताना 'द्वि', 'एक' आणि 'अट्ठ' यांच्या अंतिम स्वराच्या जागी विकल्प करून 'आ' कार होतो. 384, 407. Catucche hi tha ṭhā. ३८४, ४०७. पूरण (क्रमवाचक) अर्थामध्ये 'चतु' आणि 'छ' या शब्दांना अनुक्रमे 'थ' आणि 'ठ' प्रत्यय लागतात. 385, 409. Dvitīhi tiyo. ३८५, ४०९. पूरण (क्रमवाचक) अर्थामध्ये 'द्वि' आणि 'ति' या शब्दांना 'तिय' प्रत्यय लागतो. 386, 410. Tiye dutāpi ca. ३८६, ४१०. 'तिय' प्रत्यय पुढे असताना 'द्वि' आणि 'ति' यांच्या जागी अनुक्रमे 'दु' आणि 'त' आदेश देखील होतात. 387, 411. Tesamaḍḍhūpapadena aḍḍhuḍḍhadivaḍḍha diyaḍḍha’ ḍḍhatiyā. ३८७, ४११. 'अड्ढ' हा पूर्वपद असताना, या (क्रमवाचक शब्दांच्या) जागी 'अड्ढुड्ढ' (साडेतीन), 'दिवड्ढ' किंवा 'दियड्ढ' (दीड), आणि 'अड्ढतिय' (अडीच) हे शब्द सिद्ध होतात. 388, 68. Sarūpāna mekasesvasakiṃ. ३८८, ६८. समान रूप असलेल्या शब्दांपैकी (एकशेष समासात) केवळ एकच शब्द शिल्लक राहतो. 389, 413. Gaṇanedasassa dvi ti catu pañca cha satta aṭṭhanavakānaṃ vī ti cattāra paññā cha sattāsanavā yosu yonañcīsamāsaṃṭhiritītuti. ३८९, ४१३. संख्या मोजताना, 'दस' (दहा) च्या दोन, तीन, चार, पाच, सहा, सात, आठ आणि नऊ पटींच्या जागी अनुक्रमे 'वी', 'ति', 'चत्तार', 'पञ्ञा', 'छ', 'सत्ता' इत्यादी आदेश होतात आणि 'यो' विभक्तीच्या जागी 'ईस', 'सं' इत्यादी आदेश होऊन वीसं (२०), तिंसं (३०), चत्तालीसं (४०), पञ्ञासं (५०), सट्ठि (६०), सत्तति (७०) इत्यादी रूपे सिद्ध होतात. 390, 256. Catūpapadassa [Pg.23] lopo tu’ttarapadādicassa cu copi navā. ३९०, २५६. 'दस' पुढे असताना 'चतु' मधील 'तु' चा लोप होतो आणि उत्तरपदाच्या (दस च्या) सुरुवातीच्या 'द' च्या जागी विकल्प करून 'चु' किंवा 'चो' आदेश होतो. 391, 423. Yadanupapannā nipātanā sijjhanti. ३९१, ४२३. जे शब्द नियमांनी सिद्ध होत नाहीत, ते निपातनाने (परंपरेने चालत आलेल्या प्रयोगाने) सिद्ध मानले जातात. 392, 418. Dvādito ko’nekatthe ca. ३९२, ४१८. 'द्वि' इत्यादी शब्दांच्या पुढे अनेक अर्थांमध्ये 'क' प्रत्यय येतो. 393, 415. Dasadasakaṃ sataṃ dasakānaṃ sataṃ sahassañca yomhi. ३९३, ४१५. 'यो' विभक्ती पुढे असताना, दहाच्या दहा पटीला 'सत' (शंभर) आणि शंभराच्या दहा पटीला 'सहस्स' (हजार) म्हणतात. 394, 416. Yāva taduttari dasaguṇitañca. ३९४, ४१६. त्यापुढील सर्व संख्या (असंख्येय पर्यंत) मागील संख्येला दहाने गुणून (दशगुणीत करून) सिद्ध कराव्यात. 395, 417. Sakanāmehi. ३९५, ४१७. ज्या संख्यांचे स्पष्टीकरण दिलेले नाही, त्या आपापल्या नावांनीच सिद्ध होतात. 396, 363. Tesaṃ ṇo lopaṃ. ३९६, ३६३. त्या (तद्धित) प्रत्ययांच्या 'ण' या अनुबंधाचा लोप होतो. 397, 420. Vibhāge dhā ca. ३९७, ४२०. विभाग (भाग किंवा हिस्सा) या अर्थामध्ये 'धा' प्रत्यय देखील येतो. 398, 421. Sabbanāmehi pakāravacane tu thā. ३९८, ४२१. सर्वनामांच्या पुढे प्रकार (पद्धत/रीती) दर्शवणाऱ्या अर्थामध्ये 'था' प्रत्यय येतो. 399, 422. Kimimehi thaṃ. ३९९, ४२२. 'किं' आणि 'इम' या शब्दांच्या पुढे प्रकार दर्शवणाऱ्या अर्थामध्ये 'थं' प्रत्यय येतो. 400, 364. Vuddhādisarassa vā’saṃyogantassa saṇe ca. ४००, ३६४. 'ण' अनुबंध असलेला प्रत्यय पुढे असताना, संयुक्त व्यंजन शेवटी नसलेल्या शब्दाच्या पहिल्या स्वराची विकल्प करून वृद्धी होते. 401, 375. Māyūnamāgamo ṭhāne. ४०१, ३७५. योग्य स्थानी, 'ण' अनुबंध असलेला प्रत्यय पुढे असताना, संयुक्त व्यंजन शेवटी नसलेल्या 'इ' आणि 'उ' स्वरांची वृद्धी होत नाही; तर त्यांच्या जागी अनुक्रमे 'ए' आणि 'ओ' चा आगम होतो. 402. 377. Āttañca. ४०२. ३७७. आणि (काही ठिकाणी पहिल्या स्वराच्या जागी) 'आ' कार देखील होतो. 403, 354. Kvacādimajjhuttarānaṃ dīgharassa paccayesu ca. ४०३, ३५४. प्रत्यय पुढे असताना किंवा नसताना देखील, काही ठिकाणी शब्दाच्या सुरुवातीचा, मधला किंवा शेवटचा स्वर दीर्घ किंवा र्हस्व होतो. 404, 370. Tesu vuddhi lopāgama vikāra viparitādesā ca. ४०४, ३७०. त्या प्रत्ययांमध्ये वृद्धी, लोप, आगम, विकार (बदल), विपरीत (उलटपालट) आणि आदेश देखील होतात. 405, 365. Ayuvaṇṇānañcāyo vuddhi. ४०५, ३६५. 'अ' वर्ण, 'इ' वर्ण आणि 'उ' वर्ण यांची वृद्धी अनुक्रमे 'आ', 'ए' आणि 'ओ' अशी होते. Iti nāmakappe taddhitakappo aṭṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे, नाम कल्पामधील 'तद्धित कल्प' नावाचा आठवा खंड समाप्त झाला. Taddhitasuttaṃ niṭṭhitaṃ. तद्धित सूत्रे समाप्त झाली. 6. Ākhyāti ६. आख्यात (क्रियापद प्रकरण). 406, 429. Atha [Pg.24] pubbāni-vibhattīnaṃ cha parassapadāni. ४०६, ४२९. आता, पुढे सांगितल्या जाणाऱ्या (आख्यात) विभक्तींपैकी पहिली सहा पदे 'परस्सपद' (परस्मैपद) संज्ञक असतात. 407, 439. Parāṇuttanopadāni. ४०७, ४३९. नंतरची सहा पदे 'अत्तनोपद' (आत्मनेपद) संज्ञक असतात. 408, 430. Dve dve paṭhamamajjhimuttamapurisā. ४०८, ४३०. दोन-दोन पदे (एकवचन आणि बहुवचन) अनुक्रमे 'प्रथम पुरुष', 'मध्यम पुरुष' आणि 'उत्तम पुरुष' संज्ञक असतात. 409, 441. Sabbesamekābhidhāne paro puriso. ४०९, ४४१. जब सर्व पुरुषांचा एकाच वेळी निर्देश करायचा असतो, तेव्हा नंतरचा (पर) पुरुष वापरला जातो. 410, 432. Nāmamhi payujjamānepi tulyādhikaraṇe paṭhamo. ४१०, ४३२. समान अधिकरण (समान अर्थाचा आधार) असलेला 'नाम' शब्द प्रत्यक्ष वापरला असो वा नसो, 'प्रथम पुरुष' (तृतीय पुरुष) होतो. 411, 436. Tumhe majjhimo. ४११, ४३६. 'तुम्ह' (तू/तुम्ही) शब्द समान अधिकरण असताना, तो प्रत्यक्ष वापरला असो वा नसो, 'मध्यम पुरुष' होतो. 412, 437. Amhe uttamo. ४१२, ४३७. 'अम्ह' (मी/आम्ही) शब्द समान अधिकरण असताना, तो प्रत्यक्ष वापरला असो वा नसो, 'उत्तम पुरुष' होतो. 413, 426. Kāle. ४१३, ४२६. 'काळ' (वेळ) हा अधिकार सूत्र आहे (जे पुढील सूत्रांमध्ये लागू होते). 414, 428. Vattamānā paccuppanne. ४१४, ४२८. वर्तमानकाळ दर्शवण्यासाठी 'वत्तमाना' (वर्तमानकाळ) विभक्तीचे प्रत्यय येतात. 415, 451. Āṇātyāsiṭṭhe’nuttakāle pañcamī. ४१५, ४५१. आज्ञा (आणत्ति) आणि आशीर्वाद/इच्छा (आसिट्ठ) या अर्थांमध्ये, सामान्य काळात (जो भूत, वर्तमान किंवा भविष्य काळ म्हणून निर्दिष्ट नाही अशा काळात) 'पञ्चमी' विभक्ती प्रत्यय होतो. 416, 454. Anumatiparikappetthesu sattamī. ४१६, ४५४. अनुमती (परवानगी) आणि परिकल्प (तर्क/विचार) या अर्थांमध्ये, सामान्य काळात 'सत्तमी' विभक्ती प्रत्यय होतो. 417, 460. Apaccakkhe parokkhā’tīte. ४१७, ४६०. परोक्ष (प्रत्यक्ष न पाहिलेल्या) भूतकाळात 'परोक्खा' विभक्ती प्रत्यय होतो. 418, 456. Hiyyopabhuti paccakkhe hiyyattanī. ४१८, ४५६. कालपासून (कालच्या दिवसापासून) सुरू होणाऱ्या प्रत्यक्ष किंवा परोक्ष भूतकाळात 'हिय्यत्तनी' विभक्ती प्रत्यय होतो. 419, 469. Samīpe’jjatanī. ४१९, ४६९. वर्तमान काळाच्या जवळ असलेल्या (आजपासून सुरू होणाऱ्या) प्रत्यक्ष किंवा परोक्ष भूतकाळात 'अज्जतनी' विभक्ती प्रत्यय होतो. 420, 471. Māyoge sabbakāle ca. ४२०, ४७१. 'मा' (निषेधार्थक अव्यय) च्या योगात सर्व काळात (हिय्यत्तनी आणि अज्जतनी विभक्ती प्रत्यय) होतात. 421, 473. Anāgate bhavissantī. ४२१, ४७३. भविष्यकाळात 'भविस्सन्ती' विभक्ती प्रत्यय होतो. 422, 475. Kriyātipanne’tīte kālātipatti. ४२२, ४७५. क्रिया निष्फळ ठरली असता (क्रिया घडू शकली नाही अशा) भूतकाळात 'कालातिपत्ती' विभक्ती प्रत्यय होतो. 423, 426. Vattamānā tī anti, si tha, mi ma te ante, sevhe, e mhe. ४२३, ४२६. 'ति, अन्ति, सि, थ, मि, म' आणि 'ते, अन्ते, सेव्हे, ए, म्हे' हे बारा प्रत्यय 'वत्तमाना' (वर्तमानकाळ) संज्ञक आहेत. 424, 450. Pañcamī [Pg.25] tu antu, hi tha, mi ma, taṃ antaṃ, ssu vho, e āmase. ४२४, ४५०. 'तु, अन्तु, हि, थ, मि, म' आणि 'तं, अन्तं, स्सु, व्हो, ए, आमसे' हे बारा प्रत्यय 'पञ्चमी' संज्ञक आहेत. 425, 453. Sattamī eyya eyyuṃ, eyyāsi eyyātha, eyyāmi eyyāma, etha eraṃ, etho eyyāvho, eyyaṃ eyyāmhe. ४२५, ४५३. 'एय्य, एय्युं, एय्यासि, एय्याथ, एय्यामि, एय्याम' आणि 'एथ, एरं, एथो, एय्याव्हो, एय्यं, एय्याम्हे' हे बारा प्रत्यय 'सत्तमी' संज्ञक आहेत. 426, 459. Parokkhā a u, e ttha, aṃ mha, ttha re, ttho vho, iṃ mhe. ४२६, ४५९. 'अ, उ, ए, त्थ, अं, म्ह' आणि 'त्थ, रे, त्तो, व्हो, इं, म्हे' हे बारा प्रत्यय 'परोक्खा' संज्ञक आहेत. 427, 455. Hiyyattanī ā ū, o ttha, aṃ mhā, ttha tthuṃ, sevhaṃ, iṃ mhase. ४२७, ४५५. 'आ, ऊ, ओ, त्थ, अं, म्हा' आणि 'त्थ, त्थुं, से, व्हं, इं, म्हासे' हे बारा प्रत्यय 'हिय्यत्तनी' संज्ञक आहेत. 428, 468. Ajjatanī īñaṃ ottha, iṃ mhā, ā ū, se vhaṃ, aṃ mhe. ४२८, ४६८. 'ई, अंसु (उं), ओ, त्थ, इं, म्हा' आणि 'आ, ऊ, से, व्हं, अं, म्हे' हे बारा प्रत्यय 'अज्जतनी' संज्ञक आहेत. 429, 472. Ssavissantī ssati ssanti, ssasi ssatha, ssāmi ssāma, ssate ssante, ssase ssavhe, ssaṃ ssāmhe. ४२९, ४७२. 'स्सति, स्सन्ति, स्ससि, स्सथ, स्सामि, स्साम' आणि 'स्सते, स्सन्ते, स्ससे, स्सव्हे, स्सं, स्साम्हे' हे बारा प्रत्यय 'भविस्सन्ती' (किंवा स्सविस्सन्ती) संज्ञक आहेत. 430, 474. Kālātipatti ssā ssaṃsu, sse ssatha, ssaṃ ssāmā, ssatha ssisu, ssase ssavhe, ssiṃ ssāmhase. ४३०, ४७४. 'स्सा, स्संसु, स्से, स्सथ, स्सं, स्सामा' आणि 'स्सथ, स्सिंंसु, स्ससे, स्सव्हे, स्सिं, स्साम्हसे' हे बारा प्रत्यय 'कालातिपत्ती' संज्ञक आहेत. 431, 428. Hiyyattanī sattamī pañcamī vattamānā sabbadhātukaṃ. ४३१, ४२८. हिय्यत्तनी, सत्तमी, पञ्चमी आणि वत्तमाना हे प्रत्यय 'सब्बधातुक्क' (सार्वधातुक) संज्ञक आहेत. Iti ākhyātakappe paṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे आख्यात कल्पामधील (क्रियापद प्रकरणामधील) पहिला विभाग समाप्त झाला. 432, 362. Dhātuliṅgehi parā paccayā. ४३२, ३६२. धातू आणि प्रातिपदिक (लिंग) यांच्यानंतर येणारे प्रत्यय 'पच्चय' (प्रत्यय) म्हणून जाणावेत. 433, 528. Tijagupakitamānehi khachasā vā. ४३३, ५२८. 'तिज', 'गुप', 'कित' आणि 'मान' या धातूंनंतर 'ख', 'छ' आणि 'स' हे प्रत्यय पर्यायाने (विकल्पाने) होतात. 434, 534. Bhujaghasaharasupādīhitumicchatthesu. ४३४, ५३४. 'भुज', 'घस', 'हर', 'सु', 'पा' इत्यादी धातूंनंतर 'तुं' प्रत्ययाच्या (हेतू) आणि 'इच्छा' या अर्थांमध्ये ('ख', 'छ', 'स' हे प्रत्यय) होतात. 435, 536. Āya [Pg.26] nāmato kattūpamānādācāre. ४३५, ५३६. कर्त्याची उपमा असलेल्या नामाच्या पुढे 'आचरण करणे' (आचार) या अर्थात 'आय' प्रत्यय होतो. 436, 537. Īyū’pamānā ca. ४३६, ५३७. कर्माची उपमा असलेल्या नामाच्या पुढे 'आचरण करणे' या अर्थात 'ईय' प्रत्यय होतो. 437, 538. Nāmamhā’tticchatthe. ४३७, ५३८. स्वतःसाठी इच्छा करणे (अत्तिच्छत्थ) या अर्थात नामाच्या पुढे ('ईय' प्रत्यय) होतो. 438, 540. Dhātūhi ṇe ṇaya ṇāpe ṇāpayā kāritāni hetvatthe. ४३८, ५४०. धातूंनंतर येणारे 'णे', 'णय', 'णापे' आणि 'णापय' हे प्रत्यय 'कारित' (प्रयोजक) संज्ञक असून ते 'हेत्वर्थ' (प्रयोजक अर्थ) मध्ये होतात. 439, 539. Dhāturūpe nāmasmā ṇa yo ca. ४३९, ५३९. धातूसारखे रूप बनवण्यासाठी नामाच्या पुढे 'णय' (आणि 'णे') प्रत्यय देखील होतो. 440, 445. Bhāvakammesu yo. ४४०, ४४५. भाव (अवस्था) आणि कर्म (कर्मवाच्य) या अर्थांमध्ये 'य' प्रत्यय होतो. 441, 447. Tassa cavaggayakāravakārattaṃ sadhātvantassa. ४४१, ४४७. त्या 'य' प्रत्ययाचा धातूच्या अंतिम व्यंजनासह च-वर्ग (तालव्य), 'य' किंवा 'व' कार होतो. 442, 448. Ivaṇṇāgamo vā. ४४२, ४४८. 'य' प्रत्यय असताना 'इ-वर्ण' (इ किंवा ई) चा आगम विकल्पाने होतो. 443, 449. Pubbarūpañca. ४४३, ४४९. आणि (त्या 'य' प्रत्ययाचे) पूर्वरूप (मागील व्यंजनासारखे रूप) होते. 444, 511. Tathā kattari ca. ४४४, ५११. त्याचप्रमाणे कर्तरि प्रयोगात देखील (हा 'य' प्रत्यय आणि त्याचे कार्य) होते. 445, 433. Bhūvādito a. ४४५, ४३३. 'भू' इत्यादी (भ्वादि) गणाच्या धातूंनंतर 'अ' प्रत्यय होतो. 446, 509. Rudhādito niggahitapubbañca. ४४६, ५०९. 'रुध्' इत्यादी (रुधादि) गणाच्या धातूंनंतर ('अ' प्रत्यय होतो) आणि धातूच्या अंतिम स्वराच्या पुढे निग्गहीत (अनुस्वार) चा आगम होतो. 447, 510. Divādito yo. ४४७, ५१०. 'दिव्' इत्यादी (दिवादि) गणाच्या धातूंनंतर 'य' प्रत्यय होतो. 448, 512. Svādito ṇuṇā uṇā ca. ४४८, ५१२. 'सु' इत्यादी (स्वादि) गणाच्या धातूंनंतर 'णु', 'णा' आणि 'उणा' हे प्रत्यय होतात. 449, 513. Kiyādito nā. ४४९, ५१३. 'की' इत्यादी (क्र्यादि) गणाच्या धातूंनंतर 'ना' प्रत्यय होतो. 450, 517. Gahādito ppaṇhā. ४५०, ५१७. 'गह' इत्यादी (ग्रहादि) गणाच्या धातूंनंतर 'प्प' आणि 'ण्हा' हे प्रत्यय होतात. 451, 520. Tanādito oyirā. ४५१, ५२०. 'तनु' इत्यादी (तनादि) गणाच्या धातूंनंतर 'ओ' आणि 'यिर' हे प्रत्यय होतात. 452, 525. Curādito ṇe ṇayā. ४५२, ५२५. 'चुर' इत्यादी (चुरादि) गणाच्या धातूंनंतर 'णे' आणि 'णय' हे प्रत्यय होतात. 453, 444. Attanopadāni bhāve ca kammani. ४५३, ४४४. 'अत्तनोपद' प्रत्यय भाव (अवस्था) आणि कर्म (कर्मवाच्य) या अर्थांमध्ये होतात. 454, 440. Kattari ca. ४५४, ४४०. आणि कर्ता अर्थामध्ये. 455, 530. Dhātuppaccayehi [Pg.27] vibhattiyo. ४५५, ५३०. धातू प्रत्ययांनंतर विभक्ती प्रत्यय येतात. 456, 420. Kattari parassapadaṃ. ४५६, ४२०. कर्ता अर्थामध्ये परस्मैपद विभक्ती प्रत्यय येतात. 457, 424. Bhūvādayo dhātavo. ४५७, ४२४. ‘भू’ इत्यादी शब्दांना धातू म्हणतात. Iti ākhyātakappe dutiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे आख्यात कल्पामधील दुसरा खंड समाप्त झाला. 458, 461. Kvacādivaṇṇānamekassarānaṃ dvebhāvo. ४५८, ४६१. कधीकधी एका स्वरायुक्त पहिल्या अक्षराचे द्वित्व होते. 459, 462. Pubbo’ bbhāso. ४५९, ४६२. पहिल्या (द्वित्व झालेल्या) अक्षराला ‘अभ्यास’ संज्ञा दिली जाते. 460, 506. Rasso. ४६०, ५०६. अभ्यासामधील स्वराचा र्हस्व होतो. 461, 464. Dutiyacatutthānaṃ paṭhamatatiyā. ४६१, ४६४. दुसऱ्या आणि चौथ्या वर्णांच्या जागी अनुक्रमे पहिला आणि तिसरा वर्ण होतो. 462, 467. Kavaggassa cavaggo. ४६२, ४६७. क-वर्गाच्या वर्णांच्या जागी च-वर्गाचे वर्ण होतात. 463, 532. Mānakitānaṃ va tattaṃ vā. ४६३, ५३२. ‘मान’ आणि ‘कित’ धातूंच्या अभ्यासामध्ये वैकल्पिकरित्या ‘व’ आणि ‘त’ आदेश होतात. 464, 504. Hassa jo. ४६४, ५०४. अभ्यासामधील ‘ह’ च्या जागी ‘ज’ होतो. 465, 463. Antassivaṇṇākāro vā. ४६५, ४६३. अभ्यासाच्या शेवटी वैकल्पिकरित्या ‘इ’ किंवा ‘अ’ कार होतो. 466, 489. Niggahitañca. ४६६, ४८९. आणि अभ्यासाच्या शेवटी निग्गहीत (अनुस्वार) येतो. 467, 533. Tato pāmānānaṃ vāmaṃ sesu. ४६७, ५३३. त्यानंतर, ‘स’ प्रत्यय पुढे असताना ‘पा’ आणि ‘मान’ धातूंच्या जागी अनुक्रमे ‘वा’ आणि ‘मं’ आदेश होतात. 468, 492. Ṭhā tiṭṭho. ४६८, ४९२. ‘ठा’ धातूच्या जागी ‘तिट्ठ’ आदेश होतो. 469, 494. Pā pivo. ४६९, ४९४. ‘पा’ धातूच्या जागी ‘पिव’ आदेश होतो. 470, 514. Ñāssa jājaṃnā. ४७०, ५१४. ‘ना’ प्रत्यय पुढे असताना ‘ञा’ धातूच्या जागी ‘जा’ किंवा ‘जं’ होतो. 471, 483. Disassa passa dissa dakkhā vā. ४७१, ४८३. ‘दिस’ धातूच्या जागी वैकल्पिकरित्या ‘पस्स’, ‘दिस्स’ किंवा ‘दक्ख’ आदेश होतात. 472, 531. Byañjanantassa co chappaccayesu ca. ४७२, ५३१. आणि ‘छ’ प्रत्यय पुढे असताना धातूच्या अंतिम व्यंजनाच्या जागी ‘च’ होतो. 473, 529. Ko khe ca. ४७३, ५२९. आणि ‘ख’ प्रत्यय पुढे असताना अंतिम व्यंजनाच्या जागी ‘क’ होतो. 474, 535. Harassa gī se. ४७४, ५३५. ‘स’ प्रत्यय पुढे असताना ‘हर’ धातूच्या जागी ‘गी’ होतो. 475, 465. Brūbhūnamāhabhūvā [Pg.28] parokkhāyaṃ. ४७५, ४६५. परोक्षा विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना ‘ब्रू’ आणि ‘भू’ धातूंच्या जागी अनुक्रमे ‘आह’ आणि ‘भुव’ आदेश होतात. 476, 442. Gamissanto ccho vā sabbāsu. ४७६, ४४२. सर्व विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना ‘गमु’ धातूचा अंतिम वर्ण वैकल्पिकरित्या ‘च्छ’ होतो. 477, 479. Vacassa’jjatanimhi makārā o. ४७७, ४७९. अज्जतनी विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना ‘वच’ धातूच्या ‘अ’ काराचा ‘ओ’ होतो. 478, 438. Akāro dīghaṃ himimesu. ४७८, ४३८. ‘हि’, ‘मि’ आणि ‘म’ प्रत्यय पुढे असताना ‘अ’ काराचा दीर्घ होतो. 479, 452. Hi lopaṃ vā. ४७९, ४५२. ‘हि’ विभक्ती प्रत्ययाचा वैकल्पिकरित्या लोप होतो. 480, 490. Hotissare’ ho’he bhavissantimhi ssassa ca. ४८०, ४९०. भविष्यकाळात स्वर पुढे असताना ‘हू’ धातूच्या जागी ‘हो’ किंवा ‘हे’ होतो आणि ‘स्स’ चा लोप होतो. 481, 524. Karassa sappaccayassa kāho. ४८१, ५२४. प्रत्ययासह ‘कर’ धातूच्या जागी ‘काह’ आदेश होतो. Iti ākhyātakappe tatiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे आख्यात कल्पामधील तिसरा खंड समाप्त झाला. 482, 508. Dādantassaṃ mimesu. ४८२, ५०८. ‘मि’ आणि ‘म’ प्रत्यय पुढे असताना ‘दा’ धातूच्या अंतिम स्वराचा ‘अं’ होतो. 483, 527. Asaṃyogantassa vuddhi kārite. ४८३, ५२७. कारित प्रत्यय पुढे असताना असंयोगान्त धातूच्या स्वराची वृद्धी होते. 484, 542. Ghaṭādīnaṃ vā. ४८४, ५४२. ‘घट’ इत्यादी धातूंच्या स्वराची वृद्धी वैकल्पिकरित्या होते. 485, 434. Aññesu ca. ४८५, ४३४. आणि इतर प्रत्यय पुढे असतानाही वृद्धी होते. 486, 543. Guhadusānaṃ dīghaṃ. ४८६, ५४३. ‘गुह’ आणि ‘दुस’ धातूंच्या स्वराचा दीर्घ होतो. 487, 478. Vaca vasa vahādīnamukāro vassaye. ४८७, ४७८. ‘य’ प्रत्यय पुढे असताना ‘वच’, ‘वस’, ‘वह’ इत्यादी धातूंच्या ‘व’ काराचा ‘उ’ कार होतो. 488, 481. Ha vipariyayo lo vā. ४८८, ४८१. ‘ह’ आणि ‘य’ यांचा परस्पर स्थानबदल होतो आणि वैकल्पिकरित्या ‘य’ चा ‘ल’ होतो. 489, 519. Gahassa ghe ppe. ४८९, ५१९. ‘प्प’ प्रत्यय पुढे असताना ‘गह’ धातूच्या जागी ‘घे’ होतो. 490, 518. Halopo ṇhāmhi. ४९०, ५१८. ‘ण्हा’ प्रत्यय पुढे असताना ‘ह’ चा लोप होतो. 491, 523. Karassa kāsattamajjatanimhi. ४९१, ५२३. अज्जतनी विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना ‘कर’ धातूच्या जागी ‘कास’ होतो. 492, 499. Asasmā mimānaṃ mimhā’ntalopo ca. ४९२, ४९९. 'अस' (अस्तित्व असणे) धातूच्या पुढे असलेल्या 'मि' आणि 'म' या प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'म्हि' आणि 'म्ह' आदेश होतो आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा (स् चा) लोप होतो. 493, 498. Thassa tthatthaṃ. ४९३, ४९८. 'अस' धातूच्या पुढील 'थ' प्रत्ययाचा 'त्थ' होतो (आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो). 494, 495. Tissa [Pg.29] tissa tthitthaṃ. ४९४, ४९५. 'अस' धातूच्या पुढील 'ति' प्रत्ययाचा 'त्थि' होतो. 495, 500. Tussa tthuttaṃ. ४९५, ५००. 'अस' धातूच्या पुढील 'तु' प्रत्ययाचा 'त्थु' होतो आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. 496, 497. Simhi ca. ४९६, ४९७. 'सि' प्रत्यय पर असताना देखील 'अस' धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. 497, 477. Labhasmā īaṃnaṃ tthattaṃ. ४९७, ४७७. 'लभ्' (प्राप्त करणे) धातूच्या पुढील 'ई' आणि 'अं' या प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'त्थ' आणि 'त्थं' आदेश होतो (आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो). 498, 480. Kusasmā dī cchi. ४९८, ४८०. 'कुस्' (निंदा करणे) धातूच्या पुढील 'ई' प्रत्ययाचा 'च्छि' होतो आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. 499, 480. Dā dhātussa dajjaṃ. ४९९, ४८०. 'दा' (दान देणे) धातूचा 'दज्ज' असा आदेश होतो. 500, 486. Vadassa vajjaṃ. ५००, ४८६. 'वद्' (बोलणे) धातूचा 'वज्ज' असा आदेश होतो. 501, 443. Gamissa ghammaṃ. ५०१, ४४३. 'गमु' (जाणे) धातूचा 'घम्म' असा आदेश होतो. 502, 493. Yamhi dā dhā mā ṭhā hā pā maha mathādīnamī. ५०२, ४९३. 'य' प्रत्यय पर असताना 'दा', 'धा', 'मा', 'ठा', 'हा', 'पा', 'मह', 'मथ' इत्यादी धातूंच्या अंतिम स्वराचा 'ई' होतो. 503, 485. Yajassādissi. ५०३, ४८५. 'यज्' (पूजा/यज्ञ करणे) धातूच्या सुरुवातीच्या 'य' चा 'इ' होतो. 504, 470. Sabbato uṃ iṃsu. ५०४, ४७०. सर्व धातूंच्या पुढील 'उं' प्रत्ययाचा 'इंसु' होतो. 505, 482. Jaramarānaṃ jīra jīyya mīyyā vā. ५०५, ४८२. 'जर' (वृद्ध होणे) आणि 'मर' (मरणे) या धातूंच्या जागी विकल्पेकरून अनुक्रमे 'जीर', 'जीय्य' आणि 'मीय्य' हे आदेश होतात. 506, 496. Sabbatthā’sassādilopo ca. ५०६, ४९६. सर्व ठिकाणी 'अस' धातूच्या सुरुवातीच्या 'अ' चा लोप होतो. 507, 501. Asabbadhātuke ñā. ५०७, ५०१. असार्वधातुक (असार्वधातुक) प्रत्यय पर असताना 'ञा' (जाणणे) धातूच्या... 508, 515. Yeyyassa ñāto iyā ñā. ५०८, ५१५. 'ञा' (जाणणे) धातूच्या पुढील 'एय्य' प्रत्ययाचा 'इया' किंवा 'ञा' होतो. 509, 516. Nāssa lopo yakārattaṃ. ५०९, ५१६. 'ना' प्रत्ययाचा लोप होतो आणि त्याच्या जागी 'य' कार होतो. 510, 487. Lopañcettamakāro. ५१०, ४८७. 'अ' प्रत्ययाचा लोप होतो आणि त्याचा 'ए' होतो. 511, 521. Uttamokāro. ५११, ५२१. उत्तम पुरुष प्रत्यय पर असताना 'ओ' प्रत्ययाचा 'उ' होतो. 512, 522. Karassākāro ca. ५१२, ५२२. आणि 'कर' (करणे) धातूच्या 'अ' चा 'उ' होतो. 513, 435. O ava sare. ५१३, ४३५. स्वर पर असताना 'ओ' चा 'अव' होतो. 514, 491. E aya. ५१४, ४९१. स्वर पर असताना 'ए' चा 'अय' होतो. 515, 541. Te [Pg.30] āvāyā kārite. ५१५, ५४१. कारित (प्रयोजक) प्रत्यय पर असताना 'ओ' आणि 'ए' चे अनुक्रमे 'आव' आणि 'आय' होतात. 516, 466. Ikārāgamo asabbadhātukamhi. ५१६, ४६६. असार्वधातुक प्रत्यय पर असताना 'इ' काराचा आगम होतो. 517, 488. Kvaci dhātuvibhattippaccayānaṃ dīghaviparītādesa lopāgamā ca. ५१७, ४८८. काही ठिकाणी धातू, विभक्ती प्रत्यय आणि प्रत्यय यांच्या स्वरांचे दीर्घीकरण, र्हस्वीकरण (विपरीत), आदेश, लोप आणि आगम देखील होतात. 518, 446. Attanopadāni parassapadattaṃ. ५१८, ४४६. काही ठिकाणी आत्मनेपद प्रत्ययांचे परस्मैपद प्रत्ययांमध्ये रूपांतर होते. 519, 457. Akārāgamo hiyyatthanīajjatanīkālātipattīsu. ५१९, ४५७. हिय्यत्तनी (ह्यस्तनी भूतकाळ), अज्जतनी (अद्यतनी भूतकाळ) आणि कालातिपत्ती प्रत्यय पर असताना काही ठिकाणी धातूच्या सुरुवातीला 'अ' काराचा आगम होतो. 520, 502. Brūto ī timhi. ५२०, ५०२. 'ब्रू' (बोलणे) धातूच्या पुढे 'ति' प्रत्यय असताना 'ई' चा आगम होतो. 521, 425. Dhātussanto lopo’ nekasarassa. ५२१, ४२५. अनेक स्वर असलेल्या (अनेकाच्) धातूच्या अंतिम स्वराचा काही ठिकाणी लोप होतो. 522, 476. Isuyamūnamanto ccho vā. ५२२, ४७६. 'इसु' (इच्छिणे) आणि 'यमु' (नियमन करणे) या धातूंच्या अंतिम वर्णाच्या जागी विकल्पेकरून 'च्छ' आदेश होतो. 523, 526. Kāritānaṃ ṇo lopaṃ. ५२३, ५२६. कारित (प्रयोजक) प्रत्ययांमधील 'ण्' या अनुबंधाचा लोप होतो. Iti ākhyātakappe catuttho kaṇḍo. अशा प्रकारे आख्यात कल्पामधील (क्रियापद प्रकरण) चौथा खंड समाप्त झाला. Ākhyātasuttaṃ niṭṭhitaṃ. आख्यात सूत्रे समाप्त झाली. 7. Kibbidhāna ७. कृदन्त विधान (कृत् प्रत्यय प्रकरण). 524, 561. Dhātuyā kammādimhi ṇo. ५२४, ५६१. कर्म इत्यादी उपपद असताना धातूच्या पुढे 'ण' प्रत्यय होतो. 525, 565. Saññāyama nu. ५२५, ५६५. संज्ञा (नाव) दर्शवायची असल्यास, 'दमु' धातूच्या पूर्वी असलेल्या कर्म पदाच्या शेवटी 'नु' (अनुस्वार) चा आगम होतो. 526, 567. Pure dadā ca iṃ. ५२६, ५६७. 'पुर' उपपद असताना 'दा' धातूच्या पुढे 'अ' प्रत्यय होतो आणि 'पुर' च्या अंतिम स्वराचा 'इं' होतो. 527, 568. Sabbato ṇvutvā’vī vā. ५२७, ५६८. सर्व धातूंच्या पुढे विकल्पेकरून 'ण्वु', 'तु' आणि 'आवी' हे प्रत्यय होतात. 528, 577. Visa ruja padādito ṇa. ५२८, ५७७. 'विस', 'रुज', 'पद' इत्यादी धातूंच्या पुढे 'ण' प्रत्यय होतो. 529, 580. Bhāve ca. ५२९, ५८०. भाव (क्रिया किंवा अवस्था) या अर्थी देखील (प्रत्यय होतात). 530, 584. Kvi ca. ५३०, ५८४. तसेच 'क्वि' प्रत्यय देखील होतो. 531, 589. Dharādīhi [Pg.31] rammo. ५३१, ५८९. 'धर' इत्यादी धातूंहून 'रम्म' प्रत्यय होतो. 532, 590. Tassīlādīsu ṇī tvā vī ca. ५३२, ५९०. तच्छील (तसा स्वभाव असणे) इत्यादी अर्थांमध्ये 'णी', 'तु' आणि 'आवी' प्रत्यय होतात. 533, 591. Sadda kudha cala maṇḍattha rucādīhi yu. ५३३, ५९१. 'सद्द' (ध्वनी करणे), 'कुध' (क्रोध करणे), 'चल' (कंप पावणे), 'मण्डत्थ' (सुशोभित करणे) आणि 'रुच' (शोभणे) इत्यादी धातूंहून 'यु' प्रत्यय होतो. 534, 592. Pārādigamimhā rū. ५३४, ५९२. 'पार' इत्यादी उपपदांच्या पुढे असलेल्या 'गमु' (जाणे) धातूहून 'रू' प्रत्यय होतो. 535, 593. Bhikkhādito ca. ५३५, ५९३. 'भिक्ख' इत्यादी धातूंहून देखील ('रू' प्रत्यय होतो). 536, 594. Hanatyādīnaṃ ṇuko. ५३६, ५९४. 'हन' (मारणे) इत्यादी धातूंहून 'णुक' प्रत्यय होतो. 537, 566. Nu niggahitaṃ padante. ५३७, ५६६. पदाच्या शेवटी असलेल्या 'नु' चे निग्गहीत (अनुस्वार) होते. 538, 595. Saṃhanā’ññāya vā ro gho. ५३८, ५९५. 'सं' उपसर्गपूर्वक 'हन' धातूहून संज्ञा नसलेल्या अर्थी विकल्पेकरून 'र' प्रत्यय होतो आणि 'हन' धातूचा 'घ' होतो. 539, 558. Ramhi ranto rādino. ५३९, ५५८. 'र' प्रत्यय पर असताना, 'र' अनुबंधासह धातूच्या शेवटच्या वर्णाचा लोप होतो. 540, 545. Bhāvakammesu tabbā’nīyā. ५४०, ५४५. भाव आणि कर्म या अर्थांमध्ये 'तब्ब' आणि 'अनीय' प्रत्यय होतात. 541, 552. Ṇyo ca. ५४१, ५५२. तसेच 'ण्य' प्रत्यय देखील होतो. 542, 557. Karamhā ricca. ५४२, ५५७. 'कर' धातूहून 'रिच्च' प्रत्यय होतो. 543, 555. Bhūto’bba. ५४३, ५५५. 'भू' धातूहून 'ण्य' प्रत्यय झाल्यावर धातूच्या 'ऊ' आणि 'ण्य' प्रत्ययाच्या जागी 'ब्ब' होतो. 544, 556. Vada mada gamu yuja garahākārādīhi jja mmaggayheyyāvāro vā. ५४४, ५५६. 'वद', 'मद', 'गमु', 'युज', 'गरह' आणि 'आकारान्त' इत्यादी धातूंहून 'ण्य' प्रत्यय पर असताना, अनुक्रमे 'ज्ज', 'म्म', 'ग्ग', 'य्ह', 'एय्य' आणि 'आर' हे आदेश विकल्पेकरून होतात. 545, 548. Te kiccā. ५४५, ५४८. ते (तब्ब, अनीय, ण्य, तेय्य, रिच्च हे पाच प्रत्यय) 'किच्च' संज्ञक असतात. 546, 562. Aññe kita. ५४६, ५६२. इतर (किच्च प्रत्ययांशिवाय इतर प्रत्यय) 'कित' संज्ञक असतात. 547, 596. Nandādīhi yu. ५४७, ५९६. 'नन्द' इत्यादी धातूंहून 'यु' प्रत्यय होतो. 548, 597. Kattukaraṇapadesesu ca. ५४८, ५९७. कर्ता, करण आणि प्रदेश (अधिकरण) या अर्थांमध्ये देखील ('यु' प्रत्यय होतो). 549, 550. Rahādito ṇa. ५४९, ५५०. 'र' आणि 'ह' इत्यादींच्या पुढील 'न' चा 'ण' होतो. Iti kibbidhānakappe paṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे कृदंत विधानामधील (किब्बिधानकप्प) पहिला खंड समाप्त झाला. 550, 549. Ṇādayo [Pg.32] tekālikā. ५५०, ५४९. 'ण' इत्यादी (पहिल्या खंडातील) प्रत्यय तिन्ही काळांमध्ये (भूत, वर्तमान, भविष्य) होतात. 551, 598. Saññāyaṃ dādhāto i. ५५१, ५९८. संज्ञा (नाव) दर्शविताना 'दा' धातूहून 'इ' प्रत्यय होतो. 552, 609. Ti kiccā’siṭṭhe. ५५२, ६०९. आशिष (इच्छा किंवा प्रार्थना) या अर्थी संज्ञा दर्शविताना 'ति' आणि 'कित' (कृत्) प्रत्यय होतात. 553, 599. Itthiyamatiyavo vā. ५५३, ५९९. स्त्रीलिंगात 'अ', 'ति', 'यु' आणि 'अव' प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. 554, 601. Karato ririya. ५५४, ६०१. 'कर' धातूहून 'रिरिय' प्रत्यय होतो. 555, 612. Atīte ta tavantu tāvī. ५५५, ६१२. भूतकाळात 'त', 'तवन्तु' आणि 'तावी' प्रत्यय होतात. 556, 622. Bhāvakammesu ta. ५५६, ६२२. भाव आणि कर्म या अर्थांमध्ये 'त' प्रत्यय होतो. 557, 606. Budhagamāditthe kattari. ५५७, ६०६. 'बुध', 'गमु' इत्यादी धातूंचा अर्थ समजला जात असताना, कर्ता या अर्थी ('त' प्रत्यय होतो). 558, 602. Jito ina sabbattha. ५५८, ६०२. 'जि' धातूहून सर्व अर्थांमध्ये 'इन' प्रत्यय होतो. 559, 603. Supato ca. ५५९, ६०३. तसेच 'सुप' (झोपणे) धातूहून देखील ('इन' प्रत्यय होतो). 560, 604. Īsaṃdusūhi kha. ५६०, ६०४. 'ईसं' (किंचित्), 'दु' (कठीण) आणि 'सु' (सुलभ) हे उपपद असताना धातूहून 'ख' प्रत्यय होतो. 561, 636. Icchatthesu samānakattukesu tave tuṃ vā. ५६१, ६३६. समान कर्ता असलेल्या आणि इच्छा दर्शविणाऱ्या क्रियापदांच्या संदर्भात धातूहून 'तवे' आणि 'तुं' प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. 562, 638. Arahasakkādīsu ca. ५६२, ६३८. 'अरह' (योग्य असणे), 'सक्क' (समर्थ असणे) इत्यादी अर्थांमध्ये देखील ('तवे' आणि 'तुं' प्रत्यय होतात). 563, 639. Pattavacane alamatthesu ca. ५६३, ६३९. प्राप्त काळ दर्शविताना आणि 'अलम्' (पुरेसे असणे) या अर्थी देखील ('तवे' आणि 'तुं' प्रत्यय होतात). 564, 640. Pubbakāle’kakattukānaṃ tuna tvāna tvā vā. ५६४, ६४०. समान कर्ता असलेल्या क्रियापदांमध्ये, पूर्वकाळात (पहिले घडलेल्या क्रियेसाठी) 'तुन', 'त्वान' आणि 'त्वा' प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. 565, 646. Vattamāne māna’ntā. ५६५, ६४६. वर्तमानकाळात 'मान' आणि 'अन्त' प्रत्यय होतात. 566, 574. Sāsādīhi ratthu. ५६६, ५७४. 'सास' (शासन करणे/शिकवणे) इत्यादी धातूंहून 'रत्थु' प्रत्यय होतो. 567, 575. Pātito ritu. ५६७, ५७५. 'पा' (रक्षण करणे) इत्यादी धातूंहून 'रितु' प्रत्यय होतो. 568, 576. Mānādīhi [Pg.33] rātu. ५६८, ५७६. 'मान' इत्यादी धातूंहून 'रातु' (rātu) प्रत्यय होतो. 569, 610. Āgamā tuko. ५६९, ६१०. 'आ' उपसर्गपूर्वक 'गमु' धातूहून 'तुक' (tuka) प्रत्यय होतो. 570, 611. Bhabbe ika. ५७०, ६११. 'योग्य असणे' (भव्य) या अर्थी 'इक' (ika) प्रत्यय होतो. Iti kibbidhānakappe dutiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे कृत्-विधान कल्पामधील (कृदंत प्रकरणातील) दुसरा खंड समाप्त झाला. 571, 624. Paccayādaniṭṭhā nipātanā sijjhanti. ५७१, ६२४. प्रत्यय इत्यादी अनिष्ट रूपे निपातनाने (अपवादात्मक नियमाने) सिद्ध होतात. 572, 625. Sāsadisato tassa riṭṭho ca. ५७२, ६२५. 'सास्' (शास्) आणि 'दिस्' (दृश्) धातूंहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा 'रिट्ठ' (riṭṭha) आदेश होतो. 573, 626. Sādisanta puccha bhanja hantādīhi ṭṭho. ५७३, ६२६. 'स' अंत असणारे धातू, तसेच 'पुच्छ', 'भंज', 'हंत' इत्यादी धातूंहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा 'ट्ठ' (ṭṭha) आदेश होतो. 574, 613. Vasato uttha. ५७४, ६१३. 'वस' धातूहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा धातूच्या अंतिम वर्णासह 'उट्ठ' (uṭṭha) आदेश होतो. 575, 614. Vasa vāvu. ५७५, ६१४. 'वस' धातूच्या 'व' चा 'उ' किंवा 'वु' होतो. 576, 607. Dha ḍha bha he hi dhaḍḍhā ca. ५७६, ६०७. 'ध', 'ढ', 'भ' आणि 'ह' अंत असणाऱ्या धातूंहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा 'ध' आणि 'ढ' आदेश होतो. 577, 628. Bhanjato ggo ca. ५७७, ६२८. 'भंज' धातूहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा 'ग्ग' (gga) आदेश होतो. 578, 560. Bhujādīnamanto no dvi ca. ५७८, ५६०. 'भुज' इत्यादी धातूंच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो आणि 'त' प्रत्ययाचे द्वित्व होते. 579, 629. Vaca vā vu. ५७९, ६२९. 'वच' धातूच्या 'व' चा 'उ' किंवा 'वु' होतो. 580, 630. Gupādīnañca. ५८०, ६३०. 'गुप' इत्यादी धातूंच्या अंतिम वर्णाचाही लोप होतो आणि 'त' प्रत्ययाचे द्वित्व होते. 581, 616. Tarādīhi iṇṇo. ५८१, ६१६. 'तर' इत्यादी धातूंहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा 'इण्ण' (iṇṇa) आदेश होतो. 582, 631. Bhidādito inna anna īṇā vā. ५८२, ६३१. 'भिद' इत्यादी धातूंहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'इन्न', 'अन्न' किंवा 'ईण' आदेश होतो. 583, 617. Susa paca sakato kkha kkā ca. ५८३, ६१७. 'सुस', 'पच' आणि 'सक' धातूंहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा 'क्ख' (kkha) किंवा 'क्क' (kka) आदेश होतो. 584, 618. Pakkamādīhi nto ca. ५८४, ६१८. 'पक्कम' इत्यादी धातूंहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा 'न्त' (nta) आदेश होतो. 585, 619. Janādīna mā timhi ca. ५८५, ६१९. 'त' किंवा 'ति' प्रत्यय पर असताना 'जन' इत्यादी धातूंच्या अंतिम वर्णाचा 'आ' होतो. 586, 600. Gama khana hana ramādīnamanto. ५८६, ६००. 'गम', 'खन', 'हन', 'रम' इत्यादी धातूंच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. 587, 632. Rakāro ca. ५८७, ६३२. आणि अंतिम 'र' काराचाही लोप होतो. 588, Ṭhāpānamiī [Pg.34] ca. ५८८, 'ठा' (स्था) आणि 'पा' धातूंच्या अंतिम स्वराचा 'इ' किंवा 'ई' होतो. 589, 621. Hantehi ho hassa ḷo vā adahanahānaṃ. ५८९, ६२१. 'ह' अंत असणाऱ्या धातूंहून पर असलेल्या 'त' प्रत्ययाचा 'ह' होतो, आणि 'दह' व 'नह' व्यतिरिक्त धातूंच्या 'ह' चा विकल्पेकरून 'ळ' होतो. Iti kibbidhānakappe tatiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे कृत्-विधान कल्पामधील (कृदंत प्रकरणातील) तिसरा खंड समाप्त झाला. 590, 579. Ṇamhi ranjassa jo bhāvakaraṇesu. ५९०, ५७९. भाव आणि करण अर्थी 'ण' प्रत्यय पर असताना 'रंज' धातूच्या 'ंज' चा 'ज' होतो. 591, 544. Hanassa ghāto. ५९१, ५४४. 'ण' प्रत्यय पर असताना 'हन' धातूचा 'घात' (ghāta) आदेश होतो. 592, 503. Vadho vā sabbattha. ५९२, ५०३. सर्व प्रत्यय किंवा विभक्ती पर असताना 'हन' धातूचा विकल्पेकरून 'वध' (vadha) आदेश होतो. 593, 564. Ākārantānamāyo. ५९३, ५६४. 'आ' कारान्त धातूंहून पर असलेल्या 'ण' प्रत्ययाचा 'आय' (āya) आदेश होतो. 594, 582. Purasamupaparīhi karotissa kha kharā vā tappaccayesu ca. ५९४, ५८२. 'पुर', 'सम्', 'उप' आणि 'परि' उपसर्गांनंतर 'कर' धातूच्या 'कर' चा 'त' प्रत्यय पर असताना विकल्पेकरून 'ख' किंवा 'खर' आदेश होतो. 595, 637. Tavetunādīsu kā. ५९५, ६३७. 'तवे', 'तुं' इत्यादी प्रत्यय पर असताना 'कर' धातूचा 'का' (kā) आदेश होतो. 596, 551. Gamakhanahanādīnaṃ tuṃtabbādīsu na. ५९६, ५५१. 'तुं', 'तब्ब' इत्यादी प्रत्यय पर असताना 'गम', 'खन', 'हन' इत्यादी धातूंच्या अंतिम वर्णाचा 'न' होतो. 597, 641. Sabbehi tunādīnaṃ yo. ५९७, ६४१. सर्व धातूंहून पर असलेल्या 'तुन' (त्वा) इत्यादी प्रत्ययांचा 'य' (ya) आदेश होतो. 598, 643. Canantehi raccaṃ. ५९८, ६४३. 'च' आणि 'न' अंत असणाऱ्या धातूंहून पर असलेल्या 'तुन' प्रत्ययाचा 'रच्च' (racca) आदेश होतो. 599, 644. Disā svānasvantalopo ca. ५९९, ६४४. 'दिस' धातूंहून पर असलेल्या 'तुन' प्रत्ययाचा 'स्वान' (svāna) किंवा 'स्व' (sva) आदेश होतो आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. 600, 645. Mahadabhehi mma yha jja bbha ddhā ca. ६००, ६४५. 'म', 'ह', 'द' आणि 'भ' अंत असणाऱ्या धातूंहून पर असलेल्या 'तुन' प्रत्ययाचा अनुक्रमे 'म्म', 'य्ह', 'ज्ज', 'ब्भ' आणि 'द्धा' आदेश होतो. 601, 334. Taddhitasamāsakitakā nāmaṃ vā’tavetunādīsu ca. ६०१, ३३४. तद्धित, समास आणि कृदंत यांना 'नाम' ही संज्ञा प्राप्त होते, तसेच 'तवे', 'तुं' इत्यादी प्रत्ययांच्या बाबतीतही हे लागू होते. 602, 6. Dumhi garu. ६०२, ६. दोन व्यंजनांचा संयोग पुढे असताना पूर्व रस्व स्वर 'गुरु' मानला जातो. 603, 7. Dīgho [Pg.35] ca. ६०३, ७. आणि दीर्घ स्वर देखील 'गुरु' मानला जातो. 604, 684. Akkharehi kāra. ६०४, ६८४. वर्णांच्या (अक्षरांच्या) नावापुढे 'कार' (kāra) प्रत्यय लागतो. 605, 547. Yathāgamamikāro. ६०५, ५४७. परंपरेनुसार (किंवा आवश्यकतेनुसार) धातूच्या पुढे 'इ' (i) काराचा आगम होतो. 606, 642. Dadhantato yo kvaci. ६०६, ६४२. दकार आणि धकार अंत असणाऱ्या धातूंहून 'य' चा आदेश काही वेळा होतो. Iti kibbidhānakappe catuttho kaṇḍo. अशा प्रकारे कृदंत-विधान कल्पामधील चौथा खंड समाप्त झाला. 607, 578. Niggahita saṃyogādi no. ६०७, ५७८. संयोगाच्या सुरुवातीला असलेल्या निग्गहीताचा (अनुस्वाराचा) 'न' होतो. 608, 623. Sabbattha ge hī. ६०८, ६२३. सर्व ठिकाणी 'गे' धातूचा 'गी' होतो. 609, 484. Sadassa sīdatthaṃ. ६०९, ४८४. 'सद' धातूच्या जागी 'सीद' असा आदेश होतो. 610, 627. Yajassa sarassi ṭṭhe. ६१०, ६२७. 'ट्ठ' प्रत्यय परे असताना 'यज' धातूच्या स्वराचा 'इ' होतो. 611, 608. Hacatutthānamantānaṃ do dhe. ६११, ६०८. हकार आणि चतुर्थ वर्णांच्या जागी अनुक्रमे 'द' आणि 'ध' होतो. 612, 615. Ḍho ḍhakāre. ६१२, ६१५. ढकार परे असताना 'ड' होतो. 613, 583. Gahassa ghara ṇe vā. ६१३, ५८३. 'णे' प्रत्यय परे असताना 'गह' धातूच्या जागी विकल्पेकरून 'घर' असा आदेश होतो. 614, 581. Dahassa do ḷaṃ. ६१४, ५८१. 'दह' धातूच्या 'द' काराचा 'ळ' होतो. 615, 586. Dhātvantassa lopo kvimhi. ६१५, ५८६. 'क्वि' प्रत्यय परे असताना धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. 616, 587. Vidante ū. ६१६, ५८७. 'विद' धातूच्या शेवटी 'ऊ' कार येतो. 617, 633. Na ma ka rānamantānaṃ niyuttatamhi. ६१७, ६३३. न, म, क, र अंत असणाऱ्या धातूंच्या अंतिम वर्णाचा लोप 'त' प्रत्यय जोडला असताना होत नाही. 618, 571. Na ka vatthaṃ ca jā ṇvumhi. ६१८, ५७१. 'ण्वु' प्रत्यय परे असताना 'च' आणि 'ज' चे 'क' आणि 'ग' मध्ये परिवर्तन होत नाही. 619, 573. Karassa ca tattaṃ thusmiṃ. ६१९, ५७३. 'तु' प्रत्यय परे असताना 'कर' धातूच्या अंतिम वर्णाचा 'त' होतो. 620, 549. Tuṃtunatabbesu vā. ६२०, ५४९. 'तुं', 'तुन' आणि 'तब्ब' प्रत्यय परे असताना विकल्पेकरून 'त' होतो. 621, 553. Kāritaṃ [Pg.36] viya ṇānubandho. ६२१, ५५३. ज्या प्रत्ययांमध्ये 'ण' चा अनुबंध असतो, ते कारित प्रत्ययाप्रमाणे मानले जातात. 622, 570. Anakā yu ṇvūnaṃ. ६२२, ५७०. 'यु' आणि 'ण्वु' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'अन' आणि 'अक' आदेश होतात. 623, 554. Ka gā ca jānaṃ. ६२३, ५५४. 'च' आणि 'ज' च्या जागी अनुक्रमे 'क' आणि 'ग' हे आदेश होतात. Iti kibbidhānakappe pañcamo kaṇḍo. अशा प्रकारे कृदंत-विधान कल्पामधील पाचवा खंड समाप्त झाला. Kibbidhānasuttaṃ niṭṭhitaṃ. कृदंत-विधान सूत्रे समाप्त झाली. 8. Uṇādikappa ८. उणादि कल्प 624, 563. Kattari kitta. ६२४, ५६३. कृत् प्रत्यय कर्तृवाचकात होतात. 625, 605. Bhāvakammesu kiccattakkhatthā. ६२५, ६०५. भाव आणि कर्म अर्थांमध्ये कृत्य, क्त आणि ख प्रत्यय होतात. 626, 634. Kammani dutiyāya tto. ६२६, ६३४. कर्म अर्थात द्वितीया विभक्ती असताना 'त' प्रत्यय होतो. 627, 652. Khyādīhi mana ma ca to vā. ६२७, ६५२. 'ख्या' इत्यादी धातूंहून 'मन' आणि 'म' प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. 628, 653. Samādīhi thamā. ६२८, ६५३. 'सम' इत्यादी धातूंहून 'थ' आणि 'म' प्रत्यय होतात. 629, 569. Gahassu’padhasse vā. ६२९, ५६९. 'गह' धातूच्या उपधेचा विकल्पेकरून 'ए' होतो. 630, 654. Masussa sussa ccharaccherā. ६३०, ६५४. 'मसु' धातूच्या 'सु' च्या जागी 'च्छर' आणि 'च्छेर' हे आदेश होतात. 631, 655. Āpubbacarassa ca. ६३१, ६५५. 'आ' उपसर्ग पूर्व असलेल्या 'चर' धातूचा देखील (च्छर आदेश होतो). 632, 656. Ala kala salehi la yā. ६३२, ६५६. 'अल', 'कल' आणि 'सल' धातूंहून 'ल' आणि 'य' प्रत्यय होतात. 633, 657. Yāṇa lāṇā. ६३३, ६५७. 'याण' आणि 'लाण' प्रत्यय होतात. 634, 658. Mathissa thassa lo ca. ६३४, ६५८. 'मथ' धातूच्या 'थ' चा 'ल' होतो. 635, 559. Pesātisaggapattakālesu kiccā. ६३५, ५५९. प्रेषण, अतिसर्ग आणि प्राप्तकाल या अर्थांमध्ये कृत्य (किच्च) प्रत्यय होतात. 636, 659. Avassakādhamiṇesu ṇī ca. ६३६, ६५९. अवश्यकता आणि अधमर्ण या अर्थांमध्ये 'णी' प्रत्यय देखील होतो. 637, 0. Arahasakkādīhi tuṃ. ६३७, ०. 'अरह' आणि 'सक्क' इत्यादी धातूंहून 'तुं' प्रत्यय होतो. 638, 668. Vajādīhi pabbajjādayo nippajjante. ६३८, ६६८. 'वज' इत्यादी धातूंहून 'पब्बज्जा' इत्यादी रूपे निपातनाने सिद्ध होतात. 639, 585. Kvilopo [Pg.37] ca. ६३९, ५८५. आणि 'क्वि' प्रत्ययाचा लोप होतो. 640, 0. Sacajānaṃ ka gā ṇānubandhe. ६४०, ०. 'ण' चा अनुबंध परे असताना 'स', 'च' आणि 'ज' च्या जागी अनुक्रमे 'क' आणि 'ग' होतो. 641, 572. Nudādīhi yu ṇvūna manā na nā kā na na kā sakāritehi ca. ६४१, ५७२. 'नुद' इत्यादी धातूंहून 'यु' आणि 'ण्वु' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'अन', 'आन', 'अक', 'आनक' हे आदेश होतात, आणि कारित प्रत्यय परे असताना देखील. 642, 588. I ya ta ma kiṃ esānamantassaro dīghaṃ kvaci dusassa guṇaṃ doraṃ sa kkhī ca. ६४२, ५८८. इ, य, त, म, किम्, एसा यांच्या अंत्य स्वराचा काही ठिकाणी दीर्घ होतो, 'दिस' धातूचा गुण (विशेषण) होतो, 'द' चा 'र' होतो आणि 'स' चा 'क्खी' होतो. 643, 635. Bhyādīhi mati budhi pūjādīhi ca tto. ६४३, ६३५. भी इत्यादी धातूंहून आणि मति, बुद्धि, पूजा इत्यादी अर्थांच्या धातूंहून 'क्त' प्रत्यय होतो. 644, 661. Vepu sī dava vamu ku dā bhūtvādīhi thuttima ṇimā nibbatte. ६४४, ६६१. वेपु, सी, दव, वमु, कु, दा, भू इत्यादी धातूंहून 'उत्पन्न होणे' या अर्थात 'थु', 'त्तिम', 'णिम' प्रत्यय होतात. 645, 662. Akkose namhāni. ६४५, ६६२. आक्रोश (निंदा) अर्थात 'नम्' धातूहून 'आनि' प्रत्यय होतो. 646, 419. Ekādito sakissa kkhattuṃ. ६४६, ४१९. एक इत्यादी शब्दांनंतर 'सकिं' शब्दाचा 'क्खत्तुं' असा आदेश होतो. 647, 663. Sunassunasso ṇa vānuvānūnanakhunānā. ६४७, ६६३. 'सुन' या प्रातिपदिकाच्या 'उन' या भागाचे अनुक्रमे 'ओण', 'वान', 'उवान', 'ऊन', 'उनख', 'उण', 'आ', 'आन' असे आदेश होतात. 648, 664. Taruṇassa susu ca. ६४८, ६६४. 'तरुण' या प्रातिपदिकाचा 'सुसु' असा आदेश देखील होतो. 649, 665. Yuvassuvassuvuvānanūnā. ६४९, ६६५. 'युव' या प्रातिपदिकाच्या 'उव' या भागाचे अनुक्रमे 'उव', 'उवान', 'उन', 'ऊन' असे आदेश होतात. 650, 651. Kāle vattamānātīte ṇvādayo. ६५०, ६५१. वर्तमान आणि भूतकाळात 'ण्वु' इत्यादी प्रत्यय होतात. 651, 647. Bhavissati gamādīhi ṇī ghiṇa. ६५१, ६४७. भविष्यकाळात 'गमु' इत्यादी धातूंहून 'णी' आणि 'घिण' प्रत्यय होतात. 652, 648. Kriyāyaṃ ṇvu tavo. ६५२, ६४८. क्रिया दर्शवण्यासाठी 'ण्वु' आणि 'तवे' प्रत्यय होतात. 653, 307. Bhāvavācimhi catutthī. ६५३, ३०७. भविष्यकाळातील भाववाचक अर्थ व्यक्त करताना चतुर्थी विभक्ती होते. 654, 649. Kammani ṇo. ६५४, ६४९. कर्म उपपद असताना धातूहून 'ण' प्रत्यय होतो. 655, 650. Sese ssaṃ ntu mānānā. ६५५, ६५०. उर्वरित अर्थांमध्ये 'स्सं', 'न्तु', 'मान' आणि 'आन' प्रत्यय होतात. 656, 666. Chadādīhi ta traṇa. ६५६, ६६६. 'छद' इत्यादी धातूंहून 'त' आणि 'त्रण' प्रत्यय होतात. 657, 667. Vadādīhi ṇitto gaṇe. ६५७, ६६७. 'वद' इत्यादी धातूंहून समूह अर्थात 'णित्त' प्रत्यय होतो. 658, 668. Midādīhi tti tiyo. ६५८, ६६८. 'मिद' इत्यादी धातूंहून 'त्ति' आणि 'ति' प्रत्यय होतात. 659, 669. Usuranjadasānaṃ [Pg.38] daṃsassa daḍḍho ḍhaṭhā ca. ६५९, ६६९. 'उसु', 'रंज' आणि 'दंस' धातूंच्या जागी अनुक्रमे 'ढ', 'ठ' प्रत्यय होतात आणि 'दंस' चा 'दड्ढ' असा आदेश होतो. 660, 670. Sūvusānamūvusānamato tho ca. ६६०, ६७०. 'सू' आणि 'वु' धातूंच्या 'ऊ' आणि 'उ' या स्वरांचा 'अ' होतो आणि 'थ' प्रत्यय होतो. 661, 671. Ranjudādīhi dhadiddakirā kvaci jadalopo ca. ६६१, ६७१. 'रंज', 'उदि' इत्यादी धातूंहून 'ध', 'इद्द', 'किर' प्रत्यय होतात आणि काही ठिकाणी ज-कार व द-काराचा लोप होतो. 662, 672. Paṭito hissa heraṇa hīraṇa. ६६२, ६७२. 'पति' उपपद असताना 'हि' धातूचा 'हेरण' आणि 'हीरण' असा आदेश होतो. 663, 673. Kaḍhādīhi ko. ६६३, ६७३. 'कढ' इत्यादी धातूंहून 'क' प्रत्यय होतो. 664, 674. Khādāmagamānaṃ khandhandhagandhā. ६६४, ६७४. 'खाद', 'अम' आणि 'गम' धातूंचे अनुक्रमे 'खन्ध', 'अन्ध' आणि 'गन्ध' असे आदेश होतात. 665, 675. Paṭādīlyalaṃ. ६६५, ६७५. 'पट' इत्यादी धातूंहून 'अल' प्रत्यय होतो. 666, 676. Puthassa puthu pathā mo vā. ६६६, ६७६. 'पुथ' धातूचा 'पुथु' किंवा 'पथ' असा आदेश होतो आणि 'म' प्रत्यय विकल्पेकरून होतो. 667, 677. Sasvādīhi tu davo. ६६७, ६७७. 'ससु' इत्यादी धातूंहून 'तु' आणि 'दु' प्रत्यय होतात. 668, 678. Cyādīhi īvaro. ६६८, ६७८. 'चि' इत्यादी धातूंहून 'ईवर' प्रत्यय होतो. 669, 679. Munādīhi ci. ६६९, ६७९. 'मुन' इत्यादी धातूंहून 'इ' प्रत्यय होतो. 670, 680. Vidādīlyūro. ६७०, ६८०. 'विद' इत्यादी धातूंहून 'ऊर' प्रत्यय होतो. 671, 681. Hanādīhi nu ṇu tavo. ६७१, ६८१. 'हन' इत्यादी धातूंहून 'नु', 'णु' आणि 'तवे' प्रत्यय होतात. 672, 682. Kuṭādīhi ṭho. ६७२, ६८२. 'कुट' इत्यादी धातूंहून 'ठ' प्रत्यय होतो. 673, 683. Manupūrasuṇādīhi ussanusisā. ६७३, ६८३. 'मनु', 'पूर', 'सुण' इत्यादी धातूंहून अनुक्रमे 'उस्स', 'नु', 'सिसा' प्रत्यय होतात. Iti kibbidhānakappe uṇādikappo chaṭṭho kaṇḍo. अशा प्रकारे कृत्-विधान कल्पामधील 'उणादि कल्प' हा सहावा खंड समाप्त झाला. Uṇādisuttaṃ niṭṭhitaṃ. उणादि सूत्रे समाप्त झाली. Mahākaccāyanasaddāpāṭha महाकच्चायन शब्दापाठ 1. Sandhikappa १. संधिकल्प Paṭhamakaṇḍa प्रथम खंड (Ka) (क) Seṭṭhaṃ [Pg.39] tilokamahitaṃ abhivandiyaggaṃ,Buddhañca dhammamamalaṃ gaṇamuttamañca; Satthussa tassa vacanatthavaraṃ subuddhuṃ,Vakkhāmi suttahitamettha susandhikappaṃ. त्रिलोकामध्ये पूजित, सर्वश्रेष्ठ अशा बुद्ध भगवंतांना, त्यांच्या निर्मळ धम्माला आणि उत्तम संघाला वंदन करून, शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) वचनांचा श्रेष्ठ अर्थ चांगल्या प्रकारे समजून घेण्यासाठी, मी येथे सूत्रांच्या आधारे उत्तम 'संधिकल्प' सांगतो. (Kha) (ख) Seyyaṃ jineritanayena budhā labhanti,Tañcāpi tassa vacanatthasubodhanena; Atthañca akkharapadesu amohabhāvā,Seyyatthiko padamato vividhaṃ suṇeyyaṃ. ज्ञानी लोक जिनांनी (बुद्धांनी) उपदेशिलेल्या मार्गाने कल्याण प्राप्त करतात, त्यांच्या वचनाचा अर्थ चांगल्या प्रकारे समजून घेतल्याने आणि अक्षरे व शब्दांमधील अर्थाचा संभ्रम न ठेवल्याने. म्हणून, ज्याला स्वतःचे कल्याण साधायचे आहे त्याने विविध शब्दांचे श्रवण करावे. 1, 1. Attho akkharasaññāto. १, १. अर्थ अक्षरांद्वारे ओळखला जातो. Sabbavacanānamattho akkhareheva saññāyate. Akkharavipattiyaṃ hi atthassa dunnayathā hoti, tasmā akkharakosallaṃ bahūpakāraṃ suttantesu. सर्व वचनांचा अर्थ अक्षरांद्वारेच ओळखला जातो. कारण अक्षरांच्या त्रुटीमुळे चुकीचा अर्थ निघतो, म्हणून सूत्तांमध्ये (प्रवचनांमध्ये) अक्षरांचे कौशल्य अत्यंत उपयुक्त आहे. 2, 2. Akkharāpādayo [Pg.40] ekacattālīsaṃ. २, २. 'अ' पासून सुरू होणारी एकेचाळीस अक्षरे आहेत. Te ca kho akkharā api akārādayo ekacattā līsa suttantesu sopakārā. आणि 'अ' पासून सुरू होणारी ती एकेचाळीस अक्षरे सूत्तांमध्ये (प्रवचनांमध्ये) अत्यंत उपयुक्त आहेत. Taṃ yathā? A ā i ī u ū e o, ka kha ga gha ṅa, ca cha ja jha ña, ṭa ṭha ḍa ḍha ṇa, ta tha da dha na, pa pha ba bha ma, ya ra la va sa ha ḷa aṃ, iti akkharā nāma. ते कोणते? अ आ इ ई उ ऊ ए ओ, क ख ग घ ङ, च छ ज झ ञ, ट ठ ड ढ ण, त थ द ध न, प फ ब भ म, य र ल व स ह ळ अं. यांना 'अक्षरे' (अक्खरा) असे म्हणतात. Tena kvattho? Attho akkharasaññāto. त्याचे काय प्रयोजन आहे? 'अर्थ अक्षरांद्वारे ओळखला जातो' (हे सांगण्यासाठी). 3, 3. Tatthodantā sarā aṭṭha. ३, ३. त्या अक्षरांमध्ये, 'ओ' पर्यंतचे आठ स्वर आहेत. Tattha akkharesu akārādīsu odantā aṭṭha akkharā sarā nāma honti. त्या अक्षरांमध्ये, 'अ' पासून सुरू होऊन 'ओ' पर्यंत संपणारी आठ अक्षरे 'स्वर' (सरा) म्हणून ओळखली जातात. Taṃ yathā? A ā i ī u ū e o, iti sarā nāma. ते कोणते? अ आ इ ई उ ऊ ए ओ. यांना 'स्वर' (सरा) असे म्हणतात. Tena kvattho? Sarā sare lopaṃ. त्याचे काय प्रयोजन आहे? 'स्वराच्या पुढे स्वर आल्यास स्वराचा लोप होतो' (हे सांगण्यासाठी). 4, 4. Lahumattā tayo rassā. ४, ४. लघु मात्रा असलेले तीन स्वर 'ह्रस्व' आहेत. Tattha aṭṭhasu saresu lahumattā tayo sarā rassā nāma honti. त्या आठ स्वरांमध्ये, लघु मात्रा असलेले तीन स्वर 'ह्रस्व' (रस्सा) म्हणून ओळखले जातात. Taṃ yathā? A i u, iti rassā nāma. ते कोणते? अ इ उ. यांना 'ह्रस्व' (रस्सा) असे म्हणतात. Tena kvattho? Rassaṃ. त्याचे काय प्रयोजन आहे? 'ह्रस्व करणे' (हे सांगण्यासाठी). 5, 5. Aññe [Pg.41] dīghā. ५, ५. इतर स्वर 'दीर्घ' आहेत. Tattha aṭṭhasu saresu rassehi aññe pañca sarā dīghā nāma honti. त्या आठ स्वरांमध्ये, ह्रस्व स्वरांव्यतिरिक्त इतर पाच स्वर 'दीर्घ' (दीघा) म्हणून ओळखले जातात. Taṃ yathā? Ā ī ū e o, iti dīghā nāma. ते कोणते? आ ई ऊ ए ओ. यांना 'दीर्घ' (दीघा) असे म्हणतात. Tena kvattho? Dīghaṃ. त्याचे काय प्रयोजन आहे? 'दीर्घ करणे' (हे सांगण्यासाठी). 6, 8. Sesā byañjanā. ६, ८. उर्वरित अक्षरे 'व्यंजने' आहेत. Ṭhapetvā aṭṭha sare sesā akkharā kakārādayo niggahitantā byañjanā nāma honti. आठ स्वर वगळता, 'क' पासून सुरू होणारी आणि निग्गहीत ('अं') वर संपणारी उर्वरित अक्षरे 'व्यंजने' (ब्यंजना) म्हणून ओळखली जातात. Taṃ yathā? Ka kha ga gha ṅa, ca cha ja jha ña, ṭa ṭha ḍa ḍha ṇa, ta tha da dha na, pa pha ba bha ma, ya ra la va sa ha ḷa aṃ, iti byañjanā nāma. ते कोणते? क ख ग घ ङ, च छ ज झ ञ, ट ठ ड ढ ण, त थ द ध न, प फ ब भ म, य र ल व स ह ळ अं. यांना 'व्यंजने' (ब्यंजना) असे म्हणतात. Tena kvattho? Sarā pakati byañjane. त्याचे काय प्रयोजन आहे? 'व्यंजन पुढे असताना स्वर मूळ रूपात (अपरिवर्तित) राहतात' (हे सांगण्यासाठी). 7, 9. Vaggā pañcapañcaso mantā. ७, ९. 'म' पर्यंतचे पाच-पाच अक्षरांचे गट 'वर्ग' आहेत. Tesaṃ kho byañjanānaṃ kakārādayo makārantā pañcapañcaso akkharavanto vaggā nāma honti. त्या व्यंजनांमध्ये, 'क' पासून सुरू होणारी आणि 'म' वर संपणारी पाच-पाच अक्षरांची कुळे 'वर्ग' (वग्गा) म्हणून ओळखली जातात. Taṃ yathā? Ka kha ga gha ṅa, ca cha ja jha ña, ṭa ṭha ḍa ḍha ṇa, ta tha da dha na, pa pha ba bha ma, iti vaggā nāma. ते कोणते? क ख ग घ ङ, च छ ज झ ञ, ट ठ ड ढ ण, त थ द ध न, प फ ब भ म. यांना 'वर्ग' (वग्गा) असे म्हणतात. Tena kvattho? Vaggantaṃ vā vagge. त्याचे काय प्रयोजन आहे? 'वर्ग पुढे असताना (निग्गहीत) पर्यायाने वर्गाचा शेवटचा वर्ण होतो' (हे सांगण्यासाठी). 8, 10. Aṃ [Pg.42] iti niggahitaṃ. ८, १०. 'अं' याला 'निग्गहीत' म्हणतात. Aṃ iti niggahitaṃ nāma hoti. 'अं' याला 'निग्गहीत' (नित्गहीत) असे म्हणतात. Tena kvattho? Aṃ byañjane niggahitaṃ. त्याचे काय प्रयोजन आहे? 'व्यंजन पुढे असताना 'अं' हे निग्गहीत होते' (हे सांगण्यासाठी). 9, 11. Parasamaññā payoge. ९, ११. इतर व्याकरण ग्रंथांमधील संज्ञा प्रयोगात वापरल्या जातात. Yā ca pana paresu sakkataganthesu samaññā ghosāti vā aghosāti vā, tā payoge sati etthāpi yujjante. आणि इतर संस्कृत ग्रंथांमध्ये ज्या 'घोष' (voiced) किंवा 'अघोष' (voiceless) अशा संज्ञा आहेत, त्या आवश्यकतेनुसार येथेही प्रयोगात वापरल्या जातात. Tattha ghosā nāma-ga gha ṅa, ja jha ña, ḍa ḍha ṇa, da dha na, ba bha ma, ya ra la va ha ḷa, iti ghosā nāma. Aghosā nāma-ka kha, ca cha, ṭa ṭha, ta tha, pa pha, sa, iti aghosā nāma. त्यापैकी, घोष वर्ण म्हणजे: ग घ ङ, ज झ ञ, ड ढ ण, द ध न, ब भ म, य र ल व ह ळ. यांना 'घोष' (घोसा) म्हणतात. अघोष वर्ण म्हणजे: क ख, च छ, ट ठ, त थ, प फ, स. यांना 'अघोष' (अघोसा) म्हणतात. Tena kvattho? Vagge ghosāghosānaṃ tatiyapaṭhamā. त्याचे काय प्रयोजन आहे? 'वर्गामध्ये घोष आणि अघोष वर्णांच्या जागी अनुक्रमे तिसरा आणि पहिला वर्ण होतो' (हे सांगण्यासाठी). 10, 12. Pubbamadhoṭhita massaraṃ sarena viyojaye. १०, १२. मागील स्वररहित व्यंजनाला पुढील स्वरापासून वेगळे करावे. Tattha sandhiṃ kattukāmo pubbabyañjanaṃ adhoṭhitaṃ assaraṃ katvā sarañca upari katvā sarena viyojaye. त्यामध्ये, संधी करू इच्छिणाऱ्याने मागील व्यंजनाला स्वररहित (खाली स्थित) करून आणि स्वराला पुढील (वर स्थित) करून, व्यंजनाला स्वरापासून वेगळे करावे. Tatrāyamādi. येथे हे उदाहरण आहे: 'तत्रायमादि' (तत्र + अयम् + आदि). 11, 14. Naye [Pg.43] paraṃ yutte. ११, १४. योग्य असल्यास, स्वररहित व्यंजनाला पुढील अक्षराशी जोडावे. Assaraṃ kho byañjanaṃ adhoṭhataṃ parakkharaṃ naye yutte. Tatrābhiratimiccheyya. स्वररहित आणि खाली असलेल्या व्यंजनाला योग्य असल्यास पुढील अक्षराशी जोडावे. उदाहरणार्थ: 'तत्राभिरतिमिच्छेय्य' (तत्र + अभिरतिम् + इच्छेय्य). Yuttetikasmā? Akkocchi maṃ avadhi maṃ, ajini maṃ ahāsi me. Ettha pana yuttaṃ na hoti. 'युत्ते' (योग्य असल्यास) असे का म्हटले आहे? 'अक्कोच्छि मं अवधि मं, अजिनि मं अहासि मे' (त्याने मला शिवीगाळ केली, मला मारले, मला हरवले, माझे लुटले) या उदाहरणात व्यंजन पुढील स्वराशी जोडणे योग्य नाही, हे दर्शवण्यासाठी सूत्तात 'युत्ते' हा शब्द वापरला आहे. येथे संधी करणे योग्य नाही. Iti sandhikappe paṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी कल्पामधील पहिला खंड समाप्त झाला. Dutiyakaṇḍa दुसरा खंड 12, 13. Sarā sare lopaṃ. १२, १३. स्वरांच्या पुढे स्वर आल्यास स्वरांचा लोप होतो. Sarā kho sare pare lopaṃ papponti. स्वर पुढे असताना स्वरांचा लोप होतो. Yassindriyāni samathaṅgatāni. No hetaṃ bhante sametāyasmā saṅghena. यस्सिन्द्रियानि समथङ्गतानि (यस्स + इन्द्रियानि). नो हेतं भन्ते (नो हि + एतं). समेतायस्मा सङ्घेन (समेतु + आयस्मा). 13, 15. Vā paro asarūpā. १३, १५. भिन्न स्वर पुढे असताना, पुढील स्वराचा वैकल्पिकरित्या लोप होतो. Saramhā asarūpā paro saro lopaṃ pappoti vā. स्वराच्या पुढे भिन्न स्वर आल्यास, पुढील स्वराचा वैकल्पिकरित्या लोप होतो. Cattāro’me bhikkhave dhammā, kinnu’ māvasamaṇiyo. Vāti kasmā? Pañcindriyāni, tayassu dhammā jahitā bhavanti. चत्तारोमे भिक्खवे धम्मा (चत्तारो + इमे), किन्नुमाव समणियो (किन्नु + इमा + इव). 'वा' (वैकल्पिकरित्या) असे का म्हटले आहे? पञ्चिन्द्रियानि (पञ्च + इन्द्रियानि), तयस्सु धम्मा जहिता भवन्ति (तयो + अस्सु). 14, 16. Kvacāsacaṇṇaṃ [Pg.44] lutte. १४, १६. लोप झाला असता, कधीकधी पुढील स्वर असवर्ण (भिन्न) होतो. Saro kho paro pubbasare lutte kvaci asavaṇṇaṃ pappoti. पूर्व स्वराचा लोप झाला असता, पुढील स्वर कधीकधी असवर्ण (भिन्न) रूप धारण करतो. Saṅkhyaṃ nopeti vedagū, bandhusseva samāgamo. सङ्ख्यं नोपेति वेदगू (न + उपेति), बन्धुस्सेव समागमो (बन्धुस्स + इव). Kvacīti kasmā? Yassindriyāni, tathūpamaṃ dhammavaraṃ adesayi. 'क्वचि' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? यस्सिन्द्रियानि (यस्स + इन्द्रियानि), तथूपमं धम्मवरं अदेसयि (तथा + उपमं). 15, 17. Dīghaṃ. १५, १७. दीर्घ होतो. Saro kho paro pubbasare lutte kvaci dīghaṃ pappoti. Saddhīdha vittaṃ purisassa seṭṭhaṃ, anāgārehi cūbhayaṃ. पूर्व स्वराचा लोप झाला असता, पुढील स्वर कधीकधी दीर्घ होतो. सद्धीध वित्तं पुरिसस्स सेट्ठं (सद्धा + इध), अनागारेहि चूभयं (च + उभयं). Kvacīti kasmā? Pañcahupāli aṅgehi samannāgato. Natthaññaṃ kiñci. 'क्वचि' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? पञ्चहुपालि अङ्गेहि समन्नागतो (पञ्चहि + उपालि), नत्थञ्ञं किञ्चि (नत्थि + अञ्ञं). 16, 18. Pubbo ca. १६, १८. आणि पूर्व स्वर सुद्धा. Pubbo ca saro parasaralope kate kvaci dīghaṃ pappoti. आणि पुढील स्वराचा लोप केला असता, पूर्व स्वर कधीकधी दीर्घ होतो. Kiṃsūdha vittaṃ purisassa seṭṭhaṃ, sādhūti paṭissuṇitvā, kvacīti kasmā? Itissa muhuttampi. किंसूध वित्तं पुरिसस्स सेट्ठं (किंसु + इध), साधूति पटिस्सुणित्वा (साधु + इति). 'क्वचि' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? इतिस्स मुहुत्तम्पि (इति + अस्स). 17, 19. Yamedantassādeso[Pg.45]. १७, १९. अंत्य 'ए' काराच्या जागी 'य्' आदेश होतो. Ekārassa antabhūtassa sare pare kvaci yakārādeso hoti. स्वर पुढे असताना, शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'ए' काराच्या जागी कधीकधी 'य्' (यकार) आदेश होतो. Adhigato kho myāyaṃ dhammo, tyāhaṃ evaṃ vadeyyaṃ, tyāssa pahīnā honti. अधिगतो खो म्यायं धम्मो (मे + अयं), त्याहं एवं वदेय्यं (ते + अहं), त्यास्स पहीना होन्ति (ते + अस्स). Kvacīti kasmā? Ne’nāgatā, iti nettha. 'क्वचि' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? नेनागता (ने + अनागता), इति नेत्थ (ने + एत्थ). 18, 20. Vamodudantānaṃ. १८, २०. अंत्य 'ओ' आणि 'उ' काराच्या जागी 'व्' आदेश होतो. Okārukārānaṃ antabhūtānaṃ sare pare kvaci vakārādeso hoti. स्वर पुढे असताना, शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'ओ' आणि 'उ' काराच्या जागी कधीकधी 'व्' (वकार) आदेश होतो. Atha khvassa, svassa hoti, bahvābādho, vatthvettha vihitaṃ niccaṃ cakkhāpāthamāgacchati. अथ ख्वस्स (को + अस्स), स्वस्स होति (सो + अस्स), बह्वाबाधो (बहु + आबाधो), वत्थ्वेत्थ विहितं निच्चं (वत्थु + एत्थ), चक्खापाथमागच्छति (चक्खु + आपाथं). Kvacītikasmā? Cattāro’me bhikkhave dhammā, kinnumāva samaṇiyo. 'क्वचि' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? चत्तारोमे भिक्खवे धम्मा (चत्तारो + इमे), किन्नुमाव समणियो (किन्नु + इमा + इव). 19, 22. Sabbo caṃti. १९, २२. संपूर्ण 'ति' शब्दाचा 'च्' होतो. Sabbo icceso tisaddo byañjano sare pare kvaci cakāraṃ pappoti. स्वर पुढे असताना, संपूर्ण 'ति' हा व्यंजनयुक्त शब्द कधीकधी 'च्' (चकार) रूप धारण करतो. Iccetaṃ [Pg.46] kusalaṃ, iccassa vacanīyaṃ, paccuttaritvā, paccāharati. इच्चेतं कुसलं (इति + एतं), इच्चस्स वचनीयं (इति + अस्स), पच्चुत्तरित्वा (पति + उत्तरित्वा), पच्चाहरति (पति + आहरति). Kvacīti kasmā? Itissa muhuttampi. 'क्वचि' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? इतिस्स मुहुत्तम्पि (इति + अस्स). 20, 27. Do dhassa ca. २०, २७. आणि 'ध' च्या जागी 'द' होतो. Dhaiccetassa sare pare kvaci dakārādeso hoti. स्वर पुढे असताना, 'ध' या अक्षराच्या जागी कधीकधी 'द' (दकार) आदेश होतो. Ekamidāhaṃ bhikkhave samayaṃ. एकमिदाहं भिक्खवे समयं (इध + अहं). Kvacīti kasmā? Idheva maraṇaṃ bhavissati. 'क्वचि' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? इधेव मरणं भविस्सति (इध + एव). Vaggahaṇena dhakārassa hakārādeso hoti sāhu dassana mariyānaṃ. 'व' च्या ग्रहणाने 'ध' काराच्या जागी 'ह' कार आदेश होतो; जसे की - साहु दस्सन मरियानं (साधु + दस्सनं). Suttavibhāgena bahudhā siyā- सूत्रांच्या विभागाने (विश्लेषणाने) अनेक प्रकारचे बदल होतात - To dassa, yathā? Sugato. 'द' च्या जागी 'त' होतो, जसे की - सुगतो (सुगदो -> सुगतो). Ṭo tassa, yathā? Dukkaṭaṃ. 'त' च्या जागी 'ट' होतो, जसे की - दुक्कटं (दुक्कतं -> दुक्कटं). Dho tassa, yathā? Gandhabbo. 'त' च्या जागी 'ध' होतो, जसे की - गन्धब्बो (गन्तब्बो -> गन्धब्बो). Tro ttassa, yathā? Atrajo. 'त्त' च्या जागी 'त्र' होतो, जसे की - अत्रजो (अत्तजो -> अत्रजो). Ko gassa, yathā? Kulūpako. ‘ग’ चा ‘क’ होतो, जसे की? कुलूपको. Lo [Pg.47] rassa, yathā? Mahāsālo. ‘र’ चा ‘ल’ होतो, जसे की? महासालो. Jo yassa, yathā? Gavajo. ‘य’ चा ‘ज’ होतो, जसे की? गवजो. Bbo vassa, yathā? Kubbato. ‘व’ चा ‘ब्ब’ होतो, जसे की? कुब्बतो. Ko yassa, yathā? Sake. ‘य’ चा ‘क’ होतो, जसे की? सके. Yo jassa, yathā? Niyaṃputtaṃ. ‘ज’ चा ‘य’ होतो, जसे की? नियंपुत्तं. Ko tassa, yathā? Niyako. ‘त’ चा ‘क’ होतो, जसे की? नियको. Cco ttassa, yathā bhacco. ‘त्त’ चा ‘च्च’ होतो, जसे की? भच्चो. Pho passa, yathā? Nipphatti. ‘प’ चा ‘फ’ होतो, जसे की? निप्फत्ति. Kho kassa, yathā? Nikkhamati. Iccevamādī yojetabbā. ‘क’ चा ‘ख’ होतो, जसे की? निक्खमति. अशा प्रकारे इतरही रूपे बनवावीत. 21, 21. Ivaṇṇo yaṃ navā. २१, २१. स्वर पुढे असताना, मागील 'इ' वर्णाचा (इ किंवा ई चा) कधीकधी 'य' होतो. Pubbo ivaṇṇo sare pare yakāraṃ pappoti navā. Paṭisunthāravutyassa, sabbā vityānubhūyate. स्वर पुढे असताना, मागील 'इ' वर्ण (इ किंवा ई) कधीकधी य-कारात बदलतो. उदा. पटिसन्थारवुत्यस्स, सब्बा वित्यानुभूयते. Navāti kasmā? Pañcahaṅgehi samannāgato, muttacāgī anuddhato. ‘कधीकधी’ असे का म्हटले आहे? पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी: पञ्चहङ्गेहि समन्नागतो, मुत्तचागी अनुद्धतो. 22, 28. Evādissa ri pubbo ca rasso. २२, २८. ‘एव’ च्या सुरुवातीच्या ‘ए’ च्या जागी ‘रि’ होतो आणि मागील स्वर कधीकधी र्हस्व होतो. Saramhā parassa evassa ekārassa ādissa rikāro hoti, pubbo ca saro rasso hoti navā. स्वराच्या पुढे असलेल्या ‘एव’ मधील पहिल्या ‘ए’ काराच्या जागी ‘रि’ कार होतो आणि मागील स्वर कधीकधी र्हस्व होतो. Yathariva [Pg.48] vasudhātalañca sabbaṃ, tathariva guṇavā supūjaniyo. उदा. यथरिव वसुधातळञ्च सब्बं, तथारिव गुणवा सुपूजनियो. Navāti kasmā? Yathā eva, tathā eva. ‘कधीकधी’ असे का म्हटले आहे? पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी: यथा एव, तथा एव. Iti sandhikappe dutiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी कल्पामधील दुसरा खंड समाप्त झाला. Tatiyakaṇḍa तिसरा खंड 23, 26. Sarā pakati byañjane. २३, २६. व्यंजन पुढे असताना स्वर मूळ रूपात राहतात. Sarā kho byañjane pare pakatirūpāni honti. व्यंजन पुढे असताना स्वर खरोखरच आपल्या मूळ रूपात राहतात. Manopubbaṅgamā dhammā, pamādo maccuno padaṃ, tiṇṇo pāraṅgato ahu. उदा. मनोपुब्बङ्गमा धम्मा, पमादो मच्चुनो पदं, तिण्णो पारङ्गतो अहु. 24, 35. Sare kvaci. २४, ३५. स्वर पुढे असताना स्वर कधीकधी मूळ रूपात राहतात. Sarā kho sare pare kvaci pakatirūpāni honti. स्वर पुढे असताना स्वर खरोखरच कधीकधी आपल्या मूळ रूपात राहतात. Ko imaṃ pathaviṃ vicessati. उदा. को इमं पठविं विचेस्सति. Kvacīti kasmā? Appassutāyaṃ puriso. ‘कधीकधी’ असे का म्हटले आहे? पुढील उदाहरणात हा नियम लागू न होण्यासाठी: अप्पस्सुतायं पुरिसो. 25, 37. Dīghaṃ. २५, ३७. दीर्घ होणे. Sarā kho byañjane pare kvaci dīghaṃ papponti. व्यंजन पुढे असताना स्वर कधीकधी दीर्घ होतात. Sammā [Pg.49] dhammaṃ vipassato, evaṃ gāme munī care, khantī paramaṃ tapo titikkhā. उदा. सम्मा धम्मं विपस्सतो, एवं गामे मुनी चरे, खन्ती परमं तपो तितिक्खा. Kvacīti kasmā? Idha modati pecca modati, patilīyati, paṭihaññati. ‘कधीकधी’ असे का म्हटले आहे? पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी: इध मोदति पेच्च मोदति, पतिलीयति, पटिहञ्ञति. 26, 38. Rassaṃ. २६, ३८. र्हस्व होणे. Sarā kho byañjane pare kvaci rassaṃ papponti. व्यंजन पुढे असताना स्वर कधीकधी र्हस्व होतात. Bhovādināma so hoti, yathābhāvi guṇena so. उदा. भोवादिनाम सो होति, यथाभावि गुणेन सो. Kvacīti kasmā? Sammāsamādhi, sāvittī chandaso mukhaṃ, upanīyati jīvitamappamāyu. ‘कधीकधी’ असे का म्हटले आहे? पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी: सम्मासमाधि, सावित्ती छन्दसो मुखं, उपनीयति जीवितमप्पमायु. 27, 39. Lopañca tatrākāro. २७, ३९. लोप होणे आणि त्या जागी ‘अ’ कार येणे. Sarā kho byañjane pare kvaci lopaṃ papponti. Tatra ca lope kate akārāgamo hoti. व्यंजन पुढे असताना स्वर कधीकधी लोप पावतात आणि लोप झालेल्या त्या जागी ‘अ’ काराचा आगम होतो. Sa sīlavā. Sa paññavā esa dhammo sanantano, sa ve kasāvamarahati, sa mānakāmopi bhaveyya, sa ve muni jātibhayaṃ adassi. उदा. स सीलवा. स पञ्ञवा एस धम्मो सनन्तनो, स वे कसावमरहति, स मानकामोपि भवेय्य, स वे मुनि जातिभयं अदस्सि. Kvacīti [Pg.50] kasmā? So muni, eso dhammo padissati, na so kāsāvamarahati. ‘कधीकधी’ असे का म्हटले आहे? पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी: सो मुनि, एसो धम्मो पदिस्सति, न सो कासावमरहति. 28, 40. Para dvebhāvo ṭhāne. २८, ४०. योग्य ठिकाणी स्वराच्या पुढील व्यंजनाचे द्वित्व होते. Saramhā parassa byañjanassa dvebhāvo hoti ṭhāne. योग्य ठिकाणी स्वराच्या पुढे असलेल्या व्यंजनाचे द्वित्व होते. Idhappamādo, purisassa jantuno, pabbajjaṃ kittayissāmi, cātuddasi, pañcaddasi, abhikkantataro cando. इधप्पमादो (येथे आळस/प्रमाद), पुरिसस्स जन्तुनो (मनुष्याचा), पब्बज्जं कित्तयिस्सामि (मी प्रव्रज्येचे वर्णन करीन), चातुद्दसि (चतुर्दशी), पञ्चद्दसि (पंचदशी), अभिक्कन्ततरो चन्दो (अतिशय देदीप्यमान चंद्र). Ṭhāneti kasmā? Idha modati pecca modati. 'काही ठिकाणी' (ठाने) असे का म्हटले आहे? 'इध मोदति पेच्च मोदति' (येथे आनंदित होतो, परलोकात आनंदित होतो) यासाठी. 29, 42. Vagge ghosāghosānaṃ tatiyapaṭhamā. २९, ४२. वर्गातील घोष आणि अघोष व्यंजनांच्या जागी अनुक्रमे तिसरा आणि पहिला वर्ण (द्वित्व) होतो. Vagge kho pubbesaṃ byañjanānaṃ ghosāghosabhūtānaṃ saramhā yathāsaṅkhyaṃ tatiyapaṭhamakkharā dvebhāvaṃ gacchanti ṭhāne. स्वराच्या पुढे असलेल्या वर्गातील घोष आणि अघोष व्यंजनांच्या जागी, काही ठिकाणी अनुक्रमे तिसरा आणि पहिला वर्ण द्वित्वाला प्राप्त होतो. Eseva cajjhānapphalo, yatraṭṭhitaṃ nappasaheyya maccu, sele yathā pabbatamuddhaniṭṭhito, cattāriṭṭhānāni naro pamatto. एसेव चज्झानप्फलो (हाच ध्यानाचा फायदा आहे), यत्रट्ठितं नप्पसहेय्य मच्चु (जिथे उभे राहिल्यावर मृत्यू पराभूत करू शकत नाही), सेले यथा पब्बतमुद्धनिट्ठितो (जसा पर्वताच्या शिखरावर उभा असलेला), चत्तारिट्ठानानि नरो पमत्तो (प्रमत्त मनुष्याला चार स्थाने प्राप्त होतात). Ṭhāneti kasmā? Idha cetaso daḷhaṃ gaṇhāti thāmasā. 'काही ठिकाणी' (ठाने) असे का म्हटले आहे? 'इध चेतसो दळ्हं गण्हाति थामसा' (येथे मनाला दृढतेने आणि शक्तीने ग्रहण करतो) यासाठी. Iti sandhikappe tatiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी कल्पामधील तिसरा खंड समाप्त झाला. Catutthakaṇḍa चौथा खंड 30, 58. Aṃ [Pg.51] byañjane niggahitaṃ. ३०, ५८. व्यंजन पुढे असताना निग्गहीत (अं) होते. Niggahitaṃ kho byañjane pare aṃ iti hoti. व्यंजन पुढे असताना निग्गहीत हे 'अं' (ं) असेच राहते. Evaṃ vutte, taṃ sādhūti paṭissuṇitvā. एवं वुत्ते (असे म्हटले असता), तं साधूति पटिस्सुणित्वा (ते 'साधू' म्हणून स्वीकारून). 31, 49. Vaggantaṃ vā vagge. ३१, ४९. वर्गातील व्यंजन पुढे असताना निग्गहीताच्या जागी पर्यायाने त्याच वर्गाचा शेवटचा वर्ण (अनुनासिक) होतो. Vaggabhūte byañjane pare niggahitaṃ kho vaggantaṃ vā pappoti. वर्गातील व्यंजन पुढे असताना निग्गहीत पर्यायाने त्याच वर्गाच्या शेवटच्या वर्णाला (अनुनासिकाला) प्राप्त होते. Tanniccutaṃ, dhammañcare sucaritaṃ, cirappavāsiṃ purisaṃ. Santantassa manaṃ hoti, taṅkāruṇikaṃ, evaṅkho bhikkhave sikkhitabbaṃ. तन्निचुत्तं (ते नृत्य), धम्मञ्चरे सुचरितं (धर्माचे उत्तम आचरण करावे), chirappavāsiṃ purisaṃ (दीर्घकाळ प्रवासात असलेला मनुष्य), सन्तन्तस्स मनं होति (त्याचे मन शांत असते), तङ्कारुणिकं (त्या कारुणिकाला), एवङ्खो भिक्खवे सिक्खितब्बं (हे भिक्खूंनो, तुम्ही असेच शिकले पाहिजे). Vāggahaṇenaniggahitaṃ kho lakārādeso hoti. Puggalaṃ. 'वा' च्या ग्रहणाने निग्गहीताच्या जागी 'ल' कार आदेश होतो. जसे - पुग्गलं. Vāti kasmā? Na taṃ kammaṃ kataṃ sādhu. 'वा' असे का म्हटले आहे? 'न तं कम्मं कतं साधु' (ते केलेले कर्म चांगले नाही) यासाठी. 32, 50. Ehe uṃ. ३२, ५०. ए आणि ह पुढे असताना निग्गहीताच्या जागी 'ञ' होतो. Ekārahakāre pare niggahitaṃ kho ñakāraṃ pappoti vā. एकार आणि हकार पुढे असताना निग्गहीत पर्यायाने 'ञ' कार प्राप्त होते. Paccattaññeva parinibbāyissāmi, taññevettha paṭipucchissāmi, evañhi vo bhikkhave sikkhitabbaṃ. Tañhi tassa musā hoti. पच्चत्तञ्ञेव परिनिब्बायिस्सामि (मी स्वतःच परिनिर्वाण प्राप्त करीन), तञ्ञेवेत्थ पटिपुच्छिस्सामि (त्याचविषयी येथे पुन्हा विचारणार), एवञ्हि वो भिक्खवे सिक्खितब्बं (हे भिक्खूंनो, तुम्ही खरोखर असेच शिकले पाहिजे), तञ्हि तस्स मुसा होति (कारण ते त्याचे असत्य असते). Vāti [Pg.52] kasmā? Evametaṃ abhiññāya, evaṃ hoti subhāsitaṃ. 'वा' असे का म्हटले आहे? 'एवमेतं अभिञ्ञाय' (अशा प्रकारे हे जाणून घेऊन), 'एवं होति सुभासितं' (असे सुभाषित असते) यासाठी. 33, 50. Saye ca. ३३, ५०. य पुढे असताना देखील (निग्गहीताच्या जागी 'ञ' होतो). Niggahitaṃ kho yakāre pare saha yakārena ñakāraṃ pappoti vā. यकार पुढे असताना निग्गहीत यकारासह पर्यायाने 'ञ' कार प्राप्त होते. Saññogo, saññuttaṃ. सञ्ञोगो (संयोग), सञ्ञुत्तं (संयुक्त). Vāti kasmā? Saṃyogo, saṃyuttaṃ. 'वा' असे का म्हटले आहे? 'संयोगो', 'संयुत्तं' यासाठी. 34, 52. Madā sare. ३४, ५२. स्वर पुढे असताना निग्गहीताच्या जागी पर्यायाने 'म' आणि 'द' होतात. Niggahitassa kho sare pare makāradakārādesā honti vā. स्वर पुढे असताना निग्गहीताच्या जागी पर्यायाने मकार आणि दकार आदेश होतात. Tamahaṃ brūmi brāhmaṇaṃ, etadavoca satthā. तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं (त्याला मी ब्राह्मण म्हणतो), एतदवोच सत्था (शास्त्यांनी असे म्हटले). Vāti kasmā? Akkocchi maṃ avadhi maṃ, ajini maṃ ahāsi me. 'वा' असे का म्हटले आहे? 'अक्कोच्छि मं अवधि मं, अजिनि मं अहासि मे' (मला शिवीगाळ केली, मला मारले, मला हरवले, माझे लुटले) यासाठी. 35, 34. Ya va ma da na ta ra lā cāgamā. ३५, ३४. स्वर पुढे असताना य, व, म, द, न, त, र, ल हे आगम होतात. Sare pare yakāro vakāro makāro dakāro nakāro takāro rakāro lakāro ime āgamā honti vā. स्वर पुढे असताना यकार, वकार, मकार, दकार, नकार, तकार, रकार, लकार हे आगम पर्यायाने होतात. Nayimassa vijjā, yathayidaṃ cittaṃ. Migī bhantā vudikkhati, sittā te lahu messati, asittā te garu messati. Asso [Pg.53] bhadro kasāmiva, sammadaññā vimuttānaṃ. Manasādaññā vimuttānaṃ, attadatthamabhiññāya. Ciraṃnāyati, ito nāyati. Yasmātiha bhikkhave, tasmātiha bhikkhave, ajjatagge pāṇupetaṃ. Sabbhireva samāsetha, āraggeriva sāsapo, sāsaporiva āraggā. Chaḷabhiññā, saḷāyatanaṃ. नयिमस्स विज्जा (याच्याकडे विद्या नाही), यथयिदं चित्तं (जसे हे चित्त). मिगी भन्ता वुदिक्खति (घाबरलेली हरिणी पाहते), सित्ता ते लहु मेस्सति (सिंचन केलेली नाव तुला हलकी वाटेल), असित्ता ते गरु मेस्सति (सिंचन न केलेली नाव तुला जड वाटेल). अस्सो भद्रो कसामिव (चांगला घोडा चाबकाच्या इशाऱ्याने चालतो तसा), सम्मदञ्ञा विमुत्तानं (सम्यक ज्ञानाने विमुक्त झालेल्यांचे). मनसादञ्ञा विमुत्तानं (मनाने सम्यक ज्ञान मिळवून विमुक्त झालेल्यांचे), अत्तदत्थमभिञ्ञाय (स्वतःचे कल्याण जाणून). चिरंन्नायति (दीर्घकाळ येत नाही), इतो नायति (येथून येत नाही). यस्मातिह भिक्खवे (ज्या अर्थी येथे, हे भिक्खूंनो), तस्मातिह भिक्खवे (त्या अर्थी येथे, हे भिक्खूंनो), अज्जतग्गे पाणुपेतं (आजपासून प्राणांत असेपर्यंत). सब्भिरेव समासेथ (सज्जनांसोबतच राहावे), आरग्गेरिव सासपो (आरच्या टोकावर मोहरीचा दाणा जसा), सासपोरिव आरग्गा (मोहरीचा दाणा जसा आरच्या टोकावर). चळभिञ्ञा (सहा अभिज्ञा), सळायतनं (सहा आयतने). Vāti kasmā? Evaṃ mahiddhiyā esā, akkocchi maṃ avadhi maṃ, ajini maṃ ahāsi me, ajeyyo anugāmiko. 'वा' असे का म्हटले आहे? 'एवं महिद्धिया एसा' (अशी ही महान ऋद्धियुक्त आहे), 'अक्कोच्छि मं अवधि मं, अजिनि मं अहासि मे' (मला शिवीगाळ केली, मला मारले, मला हरवले, माझे लुटले), 'अजेय्यो अनुगामिको' (अजेय आणि सोबत जाणारा) यासाठी. Caggahaṇena idheva makārassa pakāro hoti. Cirappavāsiṃ purisaṃ. येथे 'च' च्या ग्रहणाने मकाराच्या जागी पकार होतो. जसे - चिरप्पवासिं पुरिसं (दीर्घकाळ प्रवासात असलेला मनुष्य). Kakārassa ca dakāro hoti. Sadatthapasuto siyā. आणि ककाराच्या जागी दकार होतो. जसे - सदत्थपसुतो सिया (स्वतःच्या कल्याणात मग्न असावे). Dakārassa ca takāro hoti, sugato. आणि दकाराच्या जागी तकार होतो. जसे - सुगतो. 36, 47. Kvaci o byañjane. ३६, ४७. व्यंजन पुढे असताना काही वेळा 'ओ' कार होतो. Byañjane pare kvaci okārāgamo hoti. व्यंजन पुढे असताना काही वेळा ओकार आगम होतो. Atippago kho tāva sāvatthiyaṃ piṇḍāya carituṃ. Parosahassaṃ. अतिप्पगो खो ताव सावत्थियं पिण्डाय चरितुं (श्रावस्तीमध्ये पिंडपातासाठी जाण्यास अजून खूप सकाळ आहे), परोसहस्सं (हजाराहून अधिक). Kvacīki [Pg.54] kasmā? Etha passathimaṃ lokaṃ, andhībhūto ayaṃ loko. 'क्वचि' (काही वेळा) असे का म्हटले आहे? 'एथ पस्सथिमं लोकं' (या, हा लोक पहा!), 'अन्धीभूतो अयं लोको' (हा लोक आंधळा झाला आहे) यासाठी. 37, 57. Niggahitañca. ३७, ५७. आणि निग्गहीत देखील. Niggahitañcāgamo hoti sare vā byañjane vā pare kvaci. स्वर किंवा व्यंजन पुढे असताना, कधीकधी निग्गहीताचा (अनुस्वाराचा) आगम होतो. Cakkhuṃudapādi, avaṃsiro, yāvañcidha bhikkhave purimaṃ jātiṃ sarāmi, aṇuṃthūlāni sabbaso, manopubbaṅgamā dhammā. उदाहरणे: चक्खुं उदपादि (cakkhuṃ udapādi), अवंसिरो (avaṃsiro), यावंचिध भिक्खवे पुरिमं जातिं सरामि (yāvañcidha bhikkhave purimaṃ jātiṃ sarāmi), अणुंथूलानि सब्बसो (aṇuṃthūlāni sabbaso), मनोपुब्बङ्गमा धम्मा (manopubbaṅgamā dhammā). Kvacīti kasmā? Idheva naṃ pasaṃsanti, pecca sagge pamodati, na hi etehi yānehi, gaccheyya agataṃ disaṃ. 'कधीकधी' (क्वचि) असे का म्हटले आहे? (प्रत्युदाहरणे:) इधेव नं पसंसन्ति (idheva naṃ pasaṃsanti), पेच्च सग्गे पमोदति (pecca sagge pamodati), न हि एतेहि यानेहि, गच्छेय्य अगतं दिसं (na hi etehi yānehi, gaccheyya agataṃ disaṃ). Caggahaṇena visaddassa ca pakāro hoti. Pacessati, vicessati vā. 'च' च्या ग्रहणाने 'वि' च्या जागी 'प' कार होतो. उदा. पचेस्सति (pacessati), किंवा विचेस्सति (vicessati). 38, 53. Kvaci lopaṃ. ३८, ५३. कधीकधी लोप होतो. Niggahitaṃ kho sare pare kvaci lopaṃ pappoti. स्वर पुढे असताना, कधीकधी निग्गहीताचा लोप होतो. Tāsāhaṃ santike, vidūnaggamiti. उदाहरणे: तासाहं सन्तिके (tāsāhaṃ santike), विदूनग्गमिति (vidūnaggamiti). Kvacīti kasmā? Ahameva nūna bālo etamatthaṃ viditvāna. 'कधीकधी' (क्वचि) असे का म्हटले आहे? (पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी:) अहमेव नून बालो एतमत्थं विदित्वान (ahameva nūna bālo etamatthaṃ viditvāna). 39, 54. Byañjane [Pg.55] ca. ३९, ५४. आणि व्यंजन पुढे असताना. Niggahitaṃ kho byañjane pare kvaci lopaṃ pappoti. व्यंजन पुढे असताना, कधीकधी निग्गहीताचा लोप होतो. Ariyasaccānadassanaṃ, etaṃ buddhānasāsanaṃ. उदाहरणे: अरियसच्चानदस्सनं (ariyasaccānadassanaṃ), एतं बुद्धानसासनं (etaṃ buddhānasāsanaṃ). Kvacīti kasmā? Etaṃ maṅgalamuttamaṃ, taṃ vo vadāmi bhaddante. 'कधीकधी' (क्वचि) असे का म्हटले आहे? (पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी:) एतं मङ्गलमुत्तमं (etaṃ maṅgalamuttamaṃ), तं वो वदामि भद्दन्ते (taṃ vo vadāmi bhaddante). 40, 55. Paro vāsaro. ४०, ५५. पुढील स्वर पर्यायाने (लोप पावतो). Niggahitamhā paro saro lopaṃ pappoti vā. निग्गहीतानंतर येणारा स्वर पर्यायाने लोप पावतो. Bhāsitaṃ abhinandunti, uttattaṃva, yathābījaṃva, yathādhaññaṃva. उदाहरणे: भासितं अभिनन्दुन्ति (bhāsitaṃ abhinandunti), उत्तत्तंव (uttattaṃva), यथाबीजंव (yathābījaṃva), यथाधञ्ञंव (yathādhaññaṃva). Vāti kasmā? Ahameva nūna bālo, etadahosi. 'पर्यायाने' (वा) असे का म्हटले आहे? (पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी:) अहमेव नून बालो (ahameva nūna bālo), एतदहोसि (etadahosi). 41, 56. Byañjano ca visaññogo. ४१, ५६. आणि व्यंजन असंयुक्त (एकटे) होते. Niggahitamhā parasmiṃ sare lutte yadi byañjano sasaññogo visaññogo hoti. निग्गहीतानंतरचा स्वर लोप पावल्यास, जर व्यंजन संयुक्त असेल तर ते असंयुक्त (एकटे) होते. Evaṃsa te āsavo, pupphaṃsā uppajji. उदाहरणे: एवंस ते आसवो (evaṃsa te āsavo), पुप्फंसा उप्पज्जि (pupphaṃsā uppajji). Lutteti kasmā? Evamassa vidūnaggamiti. 'लोप पावल्यास' (लुत्ते) असे का म्हटले आहे? (पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी:) एवमस्स (evamassa), विदूनग्गमिति (vidūnaggamiti). Caggahaṇena [Pg.56] tiṇṇaṃ byañjanānamantare ye sarūpā, tesampi lopo hoti. Agyāgāraṃ, paṭisanthāravutyassa. 'च' च्या ग्रहणाने, तीन व्यंजनांच्या मध्ये जे समान (सारखे) वर्ण असतात, त्यांचाही लोप होतो. उदाहरणे: अग्यागारं (agyāgāraṃ), पटिसन्थारवुत्यस्स (paṭisanthāravutyassa). Iti sandhikappe catuttho kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी कल्पामधील चौथा खंड समाप्त झाला. Pañcamakaṇḍa पाचवा खंड 42, 32. Gosare puthassāgamo kvaci. ४२, ३२. स्वर पुढे असताना 'पुथ' च्या शेवटी कधीकधी 'ग' चा आगम होतो. Puthaiccetassa ante sare pare kvaci gakārāgamo hoti. 'पुथ' या शब्दाच्या शेवटी स्वर पुढे असताना कधीकधी 'ग' (गकार) चा आगम होतो. Puthage va. उदाहरण: पुथगेव (puthageva). 43, 33. Pāssa canto rasso. ४३, ३३. 'पा' चा अंत्य स्वर र्हस्व होतो (आणि 'ग' चा आगम होतो). Pāiccetassa ante sare pare kvaci gakārāgamo hoti, anto ca saro rasso hoti. 'पा' या शब्दाच्या शेवटी स्वर पुढे असताना कधीकधी 'ग' (गकार) चा आगम होतो आणि अंत्य स्वर र्हस्व होतो. Pageva vutyassa. उदाहरण: पगेव वुत्यस्स (pageva vutyassa). Kvacīti kasmā? Pā eva vutyassa. 'कधीकधी' (क्वचि) असे का म्हटले आहे? (पुढील उदाहरणामध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी:) पा एव वुत्यस्स (pā eva vutyassa). 44, 24. Abbho abhi. ४४, २४. 'अभि' च्या जागी 'अब्भ' होतो. Abhiiccetassa sare pare abbhādeso hoti. Abbhudīritaṃ, abbhuggacchati. 'अभि' या शब्दाच्या पुढे स्वर असताना 'अब्भ' असा आदेश होतो. उदाहरणे: अब्भुदीरितं (abbhudīritaṃ), अब्भुग्गच्छति (abbhuggacchati). 45, 25. Ajjho [Pg.57] adhi. ४५, २५. 'अधि' च्या जागी 'अज्झ' होतो. Adhiiccetassa sare pare ajjhādeso hoti. 'अधि' या शब्दाच्या पुढे स्वर असताना 'अज्झ' असा आदेश होतो. Ajjhokāse, ajjhāgamā. उदाहरणे: अज्झोकासे (ajjhokāse), अज्झागमा (ajjhāgamā). 46, 26. Te na vā ivaṇṇe. ४६, २६. 'इ' वर्णीय स्वर पुढे असताना ते पर्यायाने (अब्भ आणि अज्झ) होत नाहीत. Te ca kho abhiadhiiccete ivaṇṇe pare abbho ajjhoitivuttarūpā naṃ honti vā. 'इ' वर्णीय स्वर (इ, ई) पुढे असताना, 'अभि' आणि 'अधि' यांचे अनुक्रमे 'अब्भ' आणि 'अज्झ' हे रूप पर्यायाने होत नाही. Abhicchitaṃ, adhīritaṃ. उदाहरणे: अभिच्छितं (abhicchitaṃ), अधीरितं (adhīritaṃ). Vāti kasmā? Abbhīritaṃ, ajjhiṇamutto. 'पर्यायाने' (वा) असे का म्हटले आहे? (पुढील उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होण्यासाठी:) अब्भीरितं (abbhīritaṃ), अज्झिणमुत्तो (ajjhiṇamutto). 47, 23. Atissa cantassa. ४७, २३. 'अति' च्या अंत्य स्वराचा देखील. Atiiccetassa antabhūtassa tisaddassa ivaṇṇe pare ‘‘sabbo caṃ tī’’ti vuttarūpaṃ na hoti. "अति" या शब्दाच्या शेवटी असलेल्या "ति" या अक्षराच्या पुढे "इ" किंवा "ई" (इवर्ण) आल्यास, पूर्वी सांगितलेले "सब्बो चं ति" (सुत्त १९) हे रूप लागू होत नाही. Atīsigaṇo, atīritaṃ. उदाहरणे: अतीसिगणो (अति + इसिगणो), अतीरितं (अति + ईरितं). Ivaṇṇeti kasmā? Accantaṃ. "इवर्ण" (इ आणि ई) असे का म्हटले आहे? (प्रत्युदाहरण:) अच्चन्तं (अति + अन्तं). 48, 43. Kvaci paṭi patissa. ४८, ४३. कधीकधी "पति" च्या जागी "पटि" आदेश होतो. Patiiccetassa sare vā byañjane vā pare kvaci paṭiādeso hoti. "पति" या शब्दाच्या पुढे स्वर किंवा व्यंजन आल्यास, कधीकधी "पटि" असा आदेश होतो. Paṭaggi dātabbo, paṭihaññati. उदाहरणे: पटग्गि दातब्बो (पति + अग्गि), पटिhञ्ञति (पति + हञ्ञति). Kvacīti [Pg.58] kasmā? Paccantimesu janapadesu, patilīyati, patirūpadesavāso ca. "कधीकधी" (क्वचि) असे का म्हटले आहे? (प्रत्युदाहरणे:) पच्चन्तिमेसु जनपदेसु (पति + अन्तिमेसु), पतिलीयति (पति + लीयति), आणि पतिरूपदेसवासो (पति + रूपदेसवासो). 49, 44. Puthassu byañjane. ४९, ४४. व्यंजन पुढे असताना "पुथ" च्या अंतिम स्वराचा "उ" होतो. Puthaiccetassa anto saro byañjane pare ukāro hoti. "पुथ" या शब्दाच्या पुढे व्यंजन आल्यास, त्याच्या अंतिम स्वराचा "उकार" (उ) होतो. Puthujjano, puthubhūtaṃ. उदाहरणे: पुथुज्जनो (पुथ + जनो), पुथुभूतं (पुथ + भूतं). Antaggahaṇena aputhassāpi sare pare antassa ukāro hoti, manuññaṃ. (सुत्तात) "अन्त" ग्रहण केल्यामुळे, "पुथ" व्यतिरिक्त इतर शब्दांच्या पुढे स्वर आल्यास त्यांच्या अंतिम स्वराचा देखील "उकार" होतो; जसे की - मनुञ्ञं (मनो + अञ्ञं). 50, 45. O avassa. ५०, ४५. "अव" च्या जागी "ओ" होतो. Avaiccetassa byañjane pare kvaci okāro hoti. "अव" या शब्दाच्या पुढे व्यंजन आल्यास, कधीकधी "ओकार" (ओ) होतो. Andhakārena onaddhā. उदाहरण: अन्धकारेण ओनद्धा (अव + नद्धा). Kvacīti kasmā? Avasussatu me sarīre maṃsalohitaṃ. "कधीकधी" (क्वचि) असे का म्हटले आहे? (प्रत्युदाहरण:) अवसुस्सतु मे सरीरे मंसलोहितं (येथे "अव" चे "ओ" मध्ये रूपांतर होत नाही). 51, 59. Anupadiṭṭhānaṃ vuttayogato. ५१, ५९. ज्यांचे नियम स्पष्टपणे सांगितले नाहीत, त्यांचे रूप पूर्वी सांगितलेल्या नियमांनुसार सिद्ध करावे. Anupadiṭṭhānaṃ upasagganipātānaṃ sarasandhīhi byañjanasandhīhi vuttasandhīhi ca yathāyogaṃ yojetabbaṃ. ज्या उपसर्ग आणि निपातांचे नियम स्पष्टपणे सांगितले नाहीत, त्यांची रूपे स्वरसंधी, व्यंजनसंधी आणि वृत्तसंधीच्या नियमांनुसार योग्यतेनुसार जुळवून घ्यावीत. Pāpanaṃ[Pg.59], parāyaṇaṃ, upāyanaṃ, upāhanaṃ, nyāyogo, nigupadhi, anubodho, duvūpasantaṃ, suvūpasantaṃ, dvālayo, svālayo, durākhyātaṃ, svākhyāto, udīritaṃ, samuddiṭṭhaṃ, viyaggaṃ, vijjhaggaṃ, byaggaṃ, avayāgamanaṃ, anveti, anupaghāto, anacchariyaṃ, pariyesanā, parāmāso, evaṃ sare ca honti. उदाहरणे (स्वर पुढे असताना): पापनं, परायणं, उपायनं, उपाहनं, न्यायोगो, निरुपधि, अनुबोधो, दुवूपसन्तं, सुवूपसन्तं, द्वालयो, स्वालयो, दुराख्यातं, स्वाख्यातो, उदीरितं, समुद्दिट्ठं, वियग्गं, विज्झग्गं, ब्यग्गं, अवयागमनं, अन्वेति, अनुपघातो, अनच्छरियं, परियेसना, परामासो; अशा प्रकारे स्वरांच्या बाबतीत संधी होतात. Pariggaho, paggaho, pakkamo, parakkamo, nikkamo, nikkasāvo, nillayanaṃ, dullayanaṃ, dumbhikkhaṃ, dubbuttaṃ, sandiṭṭhaṃ, duggaho, viggaho, niggato, abhikkamo, paṭikkamo, evaṃ byañjane ca. Sesā sabbe yojetabbā. उदाहरणे (व्यंजन पुढे असताना): परिग्गहो, पग्गहो, पक्कमो, परक्कमो, निक्कमो, निक्कसावो, निल्लयनं, दुल्लयनं, दुब्भिक्खं, दुब्बुत्तं, संदिट्ठं, दुग्गहो, विग्गहो, निग्गतो, अभिक्कमो, पटिक्कमो; अशा प्रकारे व्यंजनांच्या बाबतीत संधी होतात. उर्वरित सर्व रूपे याचप्रमाणे सिद्ध करावीत. Iti sandhikappe pañcamo kaṇḍo. अशा प्रकारे संधी कल्पामधील पाचवा कांड (विभाग) समाप्त झाला. Sandhikappo niṭṭhito. संधी कल्प समाप्त. 2. Nāmakappa २. नाम कल्प (नाम प्रकरण) Paṭhamakaṇḍa प्रथम कांड (पहिला विभाग) 52, 60. Jinavacanayuttaṃ [Pg.60] hi. ५२, ६०. जिनवचनाशी (बुद्धवचनाशी) सुसंगत असणारेच. ‘‘Jinavacanayuttaṃ hi’’ iccetaṃ adhikāratthaṃ veditabbaṃ. "जिनवचनयुत्तं हि" (जिनवचनाशी सुसंगत असणारेच) हा अधिकार नियम (अधिकार सूत्र) म्हणून समजला पाहिजे (जो पुढील व मागील सर्व सूत्रांना लागू होतो). 53, 61. Liṅgañca nippajjate. ५३, ६१. आणि प्रातिपदिक (लिंग) देखील सिद्ध होते. Yathā yathā jinavacanayuttaṃ hi liṅgaṃ, tathā tathā idha liṅgañca nippajjate. ज्या ज्या प्रकारे प्रातिपदिक (लिंग) जिनवचनाशी (बुद्धवचनाशी) सुसंगत असेल, त्या त्या प्रकारे येथे प्रातिपदिक सिद्ध केले जाते. Taṃ yathā? Eso no satthā, brahmā attā, sakhā, rājā. ते कसे? जसे की - एसो नो सत्था (हा आमचा शास्ता/गुरु), ब्रह्मा, अत्ता (आत्मा/स्वतः), सखा (मित्र), राजा. 54, 62. Tato ca vibhattiyo. ५४, ६२. आणि त्यानंतर विभक्ती प्रत्यय लागतात. Tato jinavacanayuttehi liṅgehi vibhattiyo parā honti. त्यानंतर, जिनवचनाशी सुसंगत असलेल्या प्रातिपदिकांच्या (लिंगांच्या) पुढे विभक्ती प्रत्यय लागतात. 55, 63. Si yo, aṃ yo, nā hi, sa naṃ, smā hi, sa naṃ, smiṃ su. ५५, ६३. सि, यो (प्रथमा); अं, यो (द्वितीया); ना, हि (तृतीया); स, नं (चतुर्थी); स्मा, हि (पंचमी); स, नं (षष्ठी); स्मिं, सु (सप्तमी). Kā ca pana tāyo vibhattiyo? Si, yo iti paṭhamā, aṃ, yoiti dutiyā, nā hi iti tatiyā, sa, naṃiti catutthī, smā, hi iti pañcamī, sa, naṃ iti chaṭṭhī, smiṃ, su iti sattamī. आणि त्या विभक्त्या कोणत्या आहेत? "सि, यो" ही प्रथमा; "अं, यो" ही द्वितीया; "ना, हि" ही तृतीया; "स, नं" ही चतुर्थी; "स्मा, हि" ही पंचमी; "स, नं" ही षष्ठी; "स्मिं, सु" ही सप्तमी होय. Vibhattiiccanena [Pg.61] kvattho? Amhassa mamaṃ savibhattissa se. "विभक्ती" असे म्हणण्याचा काय उपयोग? याचा उपयोग "अम्हस्स ममं सविभत्तिस्स से" इत्यादी सूत्रांमध्ये होतो (उदा. "स" पुढे असताना विभक्तीसह "अम्ह" च्या जागी "ममं" असा आदेश होतो). 56, 64. Tadanuparodhena. ५६, ६४. त्याच्या (जिनवचनाच्या) अविरोधाने (बाधा न आणता). Yathā yathā tesaṃ jinavacanānaṃ anuparodho. Tathā tathā idha liṅgañca nippajjate. ज्या ज्या प्रकारे त्या जिनवचनांना बाधा येत नाही, त्या त्या प्रकारे येथे प्रातिपदिक (लिंग) सिद्ध केले जाते. 57, 71. Ālapane si ga sañño. ५७, ७१. संबोधन अर्थी "सि" प्रत्ययाला "ग" संज्ञा होते. Ālapanatthe si gasañño hoti. संबोधनाच्या अर्थामध्ये "सि" प्रत्ययाला "ग-संज्ञा" प्राप्त होते. Bhoti ayye, bhoti kaññe, bhoti kharādiye. उदाहरणे: भोति अय्ये (हे आदरणीय स्त्री!), भोति कञ्ञे (हे मुली!), भोति खरादिये (हे खरादिया!). Ālapaneti kimatthaṃ? Sā ayyā. "संबोधन" असे का म्हटले आहे? (इतर विभक्तींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की:) "सा अय्या" (ती आदरणीय स्त्री - येथे प्रथमा विभक्ती आहे, संबोधन नाही). Sīti kimatthaṃ? Bhotiyo ayyāyo. "सि" असे का म्हटले आहे? (इतर प्रत्ययांच्या बाबतीत हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की:) "भोतियो अय्यायो" (येथे "यो" प्रत्यय आहे, "सि" नाही). Gaiccanena kvattho? Ghate ca. 'ग' असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 'घटे च' (या सूत्रात 'ग' संज्ञेचा उपयोग करण्यासाठी). 58, 29. Ivaṇṇuvaṇṇā jhalā. ५८, २९. इ-वर्ण आणि उ-वर्ण यांना 'झ' आणि 'ल' संज्ञा आहेत. Ivaṇṇuvaṇṇāiccete jhalasaññā honti yathāsaṅkhyaṃ. इ-वर्ण (इ, ई) आणि उ-वर्ण (उ, ऊ) यांना यथासंख्य (अनुक्रमे) 'झ' आणि 'ल' संज्ञा होतात. Isino[Pg.62], aggino, gahapatino, daṇḍino. Setuno, ketuno, bhikkhuno. Sayambhuno, abhibhuno. इसिनो (isino), अग्गिनो (aggino), गहपतिनो (gahapatino), दण्डिनो (daṇḍino). सेतुनो (setuno), केतुनो (ketuno), भिक्खुनो (bhikkhuno). सयम्भुनो (sayambhuno), अभिभुनो (abhibhuno). Jhalaiccanena kvattho? Jhalato sassa no vā. 'झ' आणि 'ल' असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 'झलतो सस्स नो वा' (या सूत्रात 'झ' आणि 'ल' संज्ञेचा उपयोग करण्यासाठी). 59, 182. Te itthikhyā po. ५९, १८२. ते स्त्रीलिंगी असताना त्यांना 'प' संज्ञा होते. Te ivaṇṇuvaṇṇā yadā itthikhyā, tadā pasaññā honti. ते इ-वर्ण आणि उ-वर्ण जेव्हा स्त्रीलिंगी असतात, तेव्हा त्यांना 'प' संज्ञा होते. Rattiyā, itthiyā, dhenuyā, vadhuyā. रत्तिया (rattiyā), इत्थिया (itthiyā), धेनुया (dhenuyā), वधुया (vadhuyā). Itthikhyāti kimatthaṃ? Isinā, bhikkhunā. 'इत्थिख्या' (स्त्रीलिंगी) असे का म्हटले आहे? इसिना (isinā), भिक्खुना (bhikkhunā) (या पुल्लिंगी उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Saiccanena [Pg.63] kvattho? Pato yā. 'प' असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 'पतो या' (या सूत्रात 'प' संज्ञेचा उपयोग करण्यासाठी). 60, 177. Ā gho. ६०, १७७. 'आ' ला 'घ' संज्ञा होते. Ākāro yadā itthikhyo, tadā ghasañño hoti. आकार (आ) जेव्हा स्त्रीलिंगी असतो, तेव्हा त्याला 'घ' संज्ञा होते. Saddhāya, kaññāya, vīṇāya, gaṅgāya, disāya sālāya, mālāya, tulāya, dolāya, pabhāya, sobhāya, paññāya, karuṇāya nāvāya, kapālikāya. सद्धाय (saddhāya), कञ्ञाय (kaññāya), वीणाय (vīṇāya), गङ्गाय (gaṅgāya), दिसाय (disāya), सालाय (sālāya), मालाय (mālāya), तुलाय (tulāya), दोलाय (dolāya), पभाय (pabhāya), सोभाय (sobhāya), पञ्ञाय (paññāya), करुणाय (karuṇāya), नावाय (nāvāya), कपालिकाय (kapālikāya). Āti kimatthaṃ? Rattiyā, itthiyā. 'आ' असे का म्हटले आहे? रत्तिया (rattiyā), इत्थिया (itthiyā) (या उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, कारण येथे 'इ' किंवा 'ई' आहे, 'आ' नाही). Itthikhyoti kimatthaṃ? Satthārā desito ayaṃ dhammo. 'इत्थिख्यो' (स्त्रीलिंगी) असे का म्हटले आहे? 'सत्थारा देसितो अयं धम्मो' (शास्त्याने हा धम्म देशिला आहे) इत्यादी उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, कारण हा शब्द पुल्लिंगी आहे. Ghaiccanena kvattho? Ghato nādīnaṃ. 'घ' असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 'घतो नादीनं' इत्यादी सूत्रांमध्ये 'घ' संज्ञेचा उपयोग करण्यासाठी. 61, 86. Sāgamo se. ६१, ८६. 'से' (स) विभक्ती असताना 'स्' चा आगम होतो. Sakārāgamo hoti se vibhattimhi. 'से' (स) विभक्ती असताना स-काराचा (स् चा) आगम होतो. Purisassa, aggissa, isissa, daṇḍissa, bhikkhussa, sayambhussa, abhibhussa. पुरिसस्स (purisassa), अग्गिस्स (aggissa), इसिस्स (isissa), दण्डिस्स (daṇḍissa), भिक्खुस्स (bhikkhussa), सयम्भुस्स (sayambhussa), अभिभुस्स (abhibhussa). Seti kimattaṃ? Purisasmiṃ. 'से' असे का म्हटले आहे? पुरिसस्मिं (purisasmiṃ) (या उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, कारण येथे 'स' विभक्ती नाही). 62, 206. Saṃsāsvekavacanesu ca. ६२, २०६. 'सं' आणि 'सा' या एकवचनी विभक्ती आदेशांमध्ये देखील (स् चा आगम होतो). Saṃsāsu ekavacanesu vibhattādesesu sakārāgamo hoti. 'सं' आणि 'सा' या एकवचनी विभक्ती आदेशांमध्ये स-काराचा (स् चा) आगम होतो. Etissaṃ, etissā imissaṃ, imissā, tissaṃ, tissā, एतिस्सं (etissaṃ), एतिस्सा (etissā), इमिस्सं (imissaṃ), इमिस्सा (imissā), तिस्सं (tissaṃ), तिस्सा (tissā), Tassaṃ tassā, yassaṃ, yassā, amussaṃ, amussā. तस्सं (tassaṃ), तस्सा (tassā), यस्सं (yassaṃ), यस्सा (yassā), अमुस्सं (amussaṃ), अमुस्सा (amussā). Saṃsāsvīti kimatthaṃ? Agginā, pāṇinā. 'सं-सासु' असे का म्हटले आहे? अग्गिना (agginā), पाणिना (pāṇinā) (या शब्दांमध्ये 'सं' किंवा 'सा' नसल्यामुळे 'स्' चा आगम होऊ नये म्हणून). Ekavacanesvīti kimatthaṃ? Tāsaṃ, sabbāsaṃ. 'एकवचनेसु' असे का म्हटले आहे? तासं (tāsaṃ), सब्बासं (sabbāsaṃ) (या बहुवचनी रूपांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, कारण ती एकवचनी नाहीत). Vibhattādesesvīti kimatthaṃ? Manasā, vacasā, thāmasā. 'विभत्तादेसेसु' (विभक्ती आदेशांमध्ये) असे का म्हटले आहे? मनसा (manasā), वचसा (vacasā), थामसा (thāmasā) (या शब्दांमध्ये विभक्तीचा आदेश झालेला नसल्यामुळे 'स्' चा आगम होऊ नये म्हणून). 63, 217. Etimāsami. ६३, २१७. 'एता' आणि 'इमा' यांच्या शेवटी 'इ' होतो. Etāimāiccetesamanto saro ikāro hoti saṃsāsu ekavacanesu vibhattādesesu. 'एता' आणि 'इमा' यांच्या शेवटी असलेला स्वर 'सं' आणि 'सा' हे एकवचनी विभक्ती आदेश असताना 'इ' कार होतो. Etissaṃ, etissā, imissaṃ, imissā. एतिस्सं (etissaṃ), एतिस्सा (etissā), इमिस्सं (imissaṃ), इमिस्सा (imissā). Saṃsāsvīti [Pg.64] kimatthaṃ? Etāya, imāya. 'सं-सासु' असे का म्हटले आहे? एताय (etāya), इमाय (imāya) (या शब्दांमध्ये 'सं' किंवा 'सा' नसल्यामुळे 'इ' कार होऊ नये म्हणून). Ekavacanesvīti kimatthaṃ? Etāsaṃ, imāsaṃ. 'एकवचनेसु' असे का म्हटले आहे? एतासं (etāsaṃ), इमासं (imāsaṃ) (या बहुवचनी रूपांमध्ये 'इ' कार होऊ नये म्हणून, कारण ती एकवचनी नाहीत). 64, 216. Tassā vā. ६४, २१६. 'ता' च्या शेवटी पर्यायाने (इ होतो). Tassā itthiyaṃ vattamānassa antassa ākārassa ikāro hoti vā saṃsāsu ekavacanesu vibhattādesesu. स्त्रीलिंगात असलेल्या 'ता' या शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'आ' काराचा 'सं' आणि 'सा' हे एकवचनी विभक्ती आदेश असताना पर्यायाने 'इ' कार होतो. Tissaṃ, tissā, tassaṃ, tassā. तिस्सं (tissaṃ), तिस्सा (tissā), तस्सं (tassaṃ), तस्सा (tassā). 65, 215. Tato sassa ssāya. ६५, २१५. त्यानंतर 'स' विभक्तीचा 'स्साय' होतो. Tato tā etā imāto sassa vibhattissa ssāyādeso hoti vā. त्यानंतर 'ता', 'एता' आणि 'इमा' या शब्दांनंतर येणाऱ्या 'स' विभक्तीचा पर्यायाने 'स्साय' (ssāya) असा आदेश होतो. Tissāya, etissāya, imissāya. तिस्साय (tissāya), एतिस्साय (etissāya), इमिस्साय (imissāya). Vāti kimatthaṃ? Tissā, etissā, imissā. 'वा' (पर्यायाने) असे का म्हटले आहे? तिस्सा (tissā), एतिस्सा (etissā), इमिस्सा (imissā) (हे पर्यायी रूप देखील सिद्ध व्हावे म्हणून). 66, 205. Gho rassaṃ. ६६, २०५. 'घ' चा ऱ्हस्व होतो. Gho rassamāpajjate saṃsāsu ekavacanesu vibhattādesesu. 'सं' आणि 'सा' हे एकवचनी विभक्ती आदेश असताना 'घ' (संज्ञा असलेला स्वर) ऱ्हस्व होतो. Tassaṃ, tassā, yassaṃ, yassā, sabbassaṃ, sabbassā. तस्सं (tassaṃ), तस्सा (tassā), यस्सं (yassaṃ), यस्सा (yassā), सब्बस्सं (sabbassaṃ), सब्बस्सा (sabbassā). Saṃsāsvīti kimatthaṃ? Tāya, sabbāya. 'सं-सासु' असे का म्हटले आहे? ताय (tāya), सब्बाय (sabbāya) (या शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Ekavacanesvīti kimatthaṃ? Tāsaṃ, sabbāsaṃ. 'एकवचनेसु' असे का म्हटले आहे? तासं (tāsaṃ), सब्बासं (sabbāsaṃ) (या बहुवचनी रूपांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). 67, 229. No [Pg.65] ca dvādito naṃmhi. ६७, २२९. 'द्वि' इत्यादी शब्दांनंतर 'नं' विभक्ती असताना 'न्' चा आगम होतो. Dviiccevamādito saṅkhyāto nakārāgamo hoti naṃmhi vibhattimhi. 'द्वि' इत्यादी संख्यावाचक शब्दांनंतर 'नं' विभक्ती असताना न-काराचा (न् चा) आगम होतो. Dvinnaṃ, tinnaṃ, catunnaṃ, pañcannaṃ, channaṃ, sattannaṃ, aṭṭhannaṃ, navannaṃ, dasannaṃ. द्विन्नं (dvinnaṃ), तिन्नं (tinnaṃ), चतुन्नं (catunnaṃ), पञ्चन्नं (pañcannaṃ), छन्नं (channaṃ), सत्तन्नं (sattannaṃ), अट्ठन्नं (aṭṭhannaṃ), नवन्नं (navannaṃ), dasannaṃ (दसन्नं). Dvāditoti kimatthaṃ? Sahassānaṃ. 'द्वादितो' ('द्वि' इत्यादी) असे का म्हटले आहे? सहस्सानं (sahassānaṃ) (या उदाहरणात 'न्' चा आगम होऊ नये म्हणून). Naṃmhīti kimatthaṃ? Dvīsu, tīsu. 'नंम्हि' ('नं' विभक्ती असताना) असे का म्हटले आहे? द्वीसु (dvīsu), तीसु (tīsu) (या उदाहरणांमध्ये 'न्' चा आगम होऊ नये म्हणून). Caggahaṇenassañcāgamo hoti. Catassannaṃ itthīnaṃ tissannaṃ vedanānaṃ. 'च' च्या ग्रहणाने 'स्सं' चा देखील आगम होतो. जसे की, चतस्सन्नं इत्थीनं (catassannaṃ itthīnaṃ - चार स्त्रियांचे), तिस्सन्नं वेदनानं (tissannaṃ vedanānaṃ - तीन वेदनांचे). 68, 184. Amā pato smiṃsmānaṃ vā. ६८, १८४. 'प' संज्ञक अंगानंतर 'स्मिं' आणि 'स्मा' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'अं' आणि 'आ' हे आदेश पर्यायाने (वा) होतात. Paiccetasmā smiṃsmāiccetesaṃ aṃāādesā honti vā yathāsaṅkhyaṃ. 'प' संज्ञक अंगानंतर 'स्मिं' आणि 'स्मा' यांच्या जागी अनुक्रमे 'अं' आणि 'आ' हे आदेश पर्यायाने (वा) होतात. Matyaṃ, matiyaṃ, matyā, matiyā, nikatyaṃ. Nikatiyaṃ, nikatyā, nikatiyā, vikatyaṃ, vikatiyaṃ, vikatyā, vikatiyā, viratyaṃ, viratiyaṃ, viratyā, viratiyā, ratyaṃ, ratiyaṃ, ratyā, ratiyā, puthabyaṃ, puthaviyaṃ, puthabyā, puthaviyā, pavatyaṃ, pavatyā, pavattiyaṃ, pavattiyā. मत्यं, मतियं, मत्या, मतिया, निकत्यं, निकतियं, निकत्या, निकतिया, विकत्यं, विकतियं, विकत्या, विकतिया, विरत्यं, विरतियं, विरत्या, विरतिया, रत्यं, रतियं, रत्या, रतिया, पुथब्यं, पुथवियं, पुथब्या, पुथविया, पवत्यं, पवत्या, पवत्तियं, पवत्तिया. 69, 186. Ādito o ca. ६९, १८६. 'आदि' शब्दाच्या पुढे 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'ओ' देखील (आणि 'अं' देखील पर्यायाने) होतो. Ādiiccetasmā smiṃvacanassa aṃoādesā honti vā. 'आदि' शब्दाच्या पुढे 'स्मिं' प्रत्ययाच्या जागी 'अं' आणि 'ओ' हे आदेश पर्यायाने (वा) होतात. Ādīṃ[Pg.66], ādo. आदीं, आदो. Vāti kimatthaṃ? Ādismiṃ, ādimhi nāthaṃ namassitvāna, 'वा' (पर्यायाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'आदिस्मिं', 'आदिम्हि' (नाथं नमस्सित्वान - नाथाला नमस्कार करून) इत्यादी रूपांमध्ये हा बदल रोखण्यासाठी. Caggahaṇena aññasmāpi smiṃ vacanassa ā o aṃādesā honti. Divā ca ratto ca haranti ye bali. Bārāṇasiṃ ahu rājā. 'च' च्या ग्रहणाने इतर शब्दांच्या पुढे देखील 'स्मिं' प्रत्ययाच्या जागी 'आ', 'ओ' आणि 'अं' हे आदेश होतात. जसे की - 'दिवा च रत्तो च हरन्ति ये बलि' (जे दिवसा आणि रात्री बळी/कर हरण करतात). 'बाराणसिं अहु राजा' (वाराणसीमध्ये राजा होता). 70, 30. Jhalānamiyuvā sare vā. ७०, ३०. स्वर पुढे असताना 'झ' आणि 'ल' संज्ञक स्वरांच्या जागी अनुक्रमे 'इय' आणि 'उव' हे आदेश पर्यायाने (वा) होतात. Jhalaiccetesaṃ iya uvaiccete ādesā honti vā sare pare yathāsaṅkhyaṃ. स्वर पुढे असताना 'झ' आणि 'ल' यांच्या जागी अनुक्रमे 'इय' आणि 'उव' हे आदेश पर्यायाने (वा) होतात. Tiyantaṃ pacchiyāgāre, aggiyāgāre, bhikkhuvāsane nisīdati, vuthuvāsane nisīdati. तियन्तं, पच्छियागारे, अग्गियागारे, भिक्खुवासने निसीदति, वुथुवासने निसीदति. Sareti kimatthaṃ? Timalaṃ, tiphalaṃ, ticatukkaṃ, tidaṇḍaṃ, tilokaṃ, tinayanaṃ, tipāsaṃ, tihaṃsaṃ, tibhavaṃ, tikhandhaṃ, tipiṭakaṃ, tivedanaṃ, catuddisaṃ, puthubhūtaṃ. 'सरे' (स्वर पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? स्वर पुढे नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - तिमलं, तिफलं, तिचतुक्कं, तिदण्डं, तिलोकं, तिनयनं, तिपासं, तिहंसं, तिभवं, तिखन्धं, तिपिटकं, तिवेदनं, चतुद्दिसं, पुथुभूतं. Vāti kimatthaṃ? Pañcahaṅgehi tīhākārehi. Cakkhāyatanaṃ. 'वा' (पर्यायाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'पञ्चहङ्गेहि' (पंचहंगेहि), 'तीहाकारेहि' आणि 'चक्खायतनं' यांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Vāti vikappanatthaṃ, ikārassa ayādeso hoti, vatthuttayaṃ. 'वा' हा शब्द विकल्पाच्या (पर्यायाच्या) अर्थासाठी आहे, (त्यामुळे) 'इ' काराच्या जागी 'अय' आदेश होतो; जसे की - वत्थुत्तयं. 71, 505. Yavakārā ca. ७१, ५०५. स्वर पुढे असताना 'झ' आणि 'ल' च्या जागी 'य' आणि 'व' हे आदेश देखील होतात. Jhalānaṃ yakāra vakārādesā honti sare pare yathāsaṅkhyaṃ. स्वर पुढे असताना 'झ' आणि 'ल' यांच्या जागी अनुक्रमे 'य' आणि 'व' हे आदेश होतात. Agyāgāraṃ[Pg.67], pakkhāyatanaṃ, svāgataṃ, te mahāvīra. अग्यागारं, पक्खायतनं, स्वागतं, ते महावीर. Caggahaṇaṃ sampiṇḍanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण हे समुच्चयार्थी (एकत्र जोडण्यासाठी) आहे. 72, 185. Pasaññassa ca. ७२, १८५. 'प' संज्ञक स्वराचा देखील (यकार आदेश होतो). Pasaññassa ca ivaṇṇassa vibhattādese sare pare yakārādeso hoti. विभक्तीच्या आदेशरूप स्वर पुढे असताना, 'प' संज्ञक 'इ' वर्णाचा (इ आणि ई चा) 'य' कार आदेश होतो. Puthabyā, ratyā, matyā. पुथब्या, रत्या, मत्या. Sareti kimatthaṃ? Puthaviyaṃ. 'सरे' (स्वर पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? स्वर पुढे नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - पुथवियं. 73, 174. Gāva se. ७३, १७४. 'स' (चतुर्थी/षष्ठी एकवचन) प्रत्यय पुढे असताना 'गो' शब्दाच्या 'ओ' काराचा 'आव' आदेश होतो. Goiccetassa okārassa āvādeso hoti se vibhattimhi. 'से' (स) विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना 'गो' या शब्दाच्या 'ओ' काराचा 'आव' आदेश होतो. Gāvassa. गावस्स. 74, 169. Yosu ca. ७४, १६९. 'यो' प्रत्यय पुढे असताना देखील (गो शब्दाच्या ओ काराचा आव आदेश होतो). Goiccetassa okārassa āvādeso hoti yoiccetesu paresu. 'यो' प्रत्यय पुढे असताना 'गो' या शब्दाच्या 'ओ' काराचा 'आव' आदेश होतो. Gāvo gacchanti, gāvo passanti, gāvī gacchanti, gāvī passanti. गावो गच्छन्ति, गावो पस्सन्ति, गावी गच्छन्ति, गावी पस्सन्ति. Caggahaṇaṃ kimatthaṃ? Nāsmāsmiṃsu vacanesu āvā deso hoti. 'च' चे ग्रहण कशासाठी केले आहे? 'ना', 'स्मा', 'स्मिं' आणि 'सु' हे प्रत्यय पुढे असताना देखील 'आव' आदेश व्हावा म्हणून. Gāvena, gāvā, gāve, gāvesu. गावेन, गावा, गावे, गावेsu. 75, 170. Avamhi [Pg.68] ca. ७५, १७०. आणि 'अं' (aṃ) प्रत्यय पुढे असताना. Goiccetassa okārassa āvaavaiccete ādesā honti aṃmhi vibhattimhi. जेव्हा 'अं' (aṃ) विभक्ती प्रत्यय येतो, तेव्हा 'गो' (go) मधील 'ओ' (o) चे 'आव' (āva) आणि 'अव' (ava) असे आदेश होतात. Gāvaṃ, gavaṃ. गावं (gāvaṃ), गवं (gavaṃ). Caggahaṇena sādisesesu pubbuttavacanesu goiccetassa okārassa avādeso hoti. सूत्रातील 'च' (ca) च्या ग्रहणाने, मागील सूत्रांमध्ये उल्लेखिलेल्या 'स' (sa) इत्यादी उर्वरित विभक्ती प्रत्ययांच्या पूर्वी, 'गो' (go) मधील 'ओ' (o) चा 'अव' (ava) असा आदेश होतो. Gavassa, gavo, gavena, gavā, gave, gavesu. गवस्स (gavassa), गावो (gavo), गवेन (gavena), गवा (gavā), गवे (gave), गवेसु (gavesu). 76, 171. Āvassu vā. ७६, १७१. विकल्पेकरून 'आव' (āva) च्या अंतिम स्वराचा 'उ' (u) होतो. Āvaiccetassa gāvādesassa anta sarassa ukārādeso hoti vā aṃmhi vibhattimhi. जेव्हा 'अं' (aṃ) विभक्ती प्रत्यय येतो, तेव्हा 'गो' चा आदेश असलेल्या 'आव' (āva) मधील अंतिम स्वराचा विकल्पेकरून 'उ' (u) असा आदेश होतो. Gāvuṃ, gāvaṃ. गावुं (gāvuṃ), गावं (gāvaṃ). Āvasseti kimatthaṃ? Gāvo tiṭṭhanti. 'आवस्स' (āvassa) असे का म्हटले आहे? 'गावो तिट्ठन्ति' (gāvo tiṭṭhanti) [या उदाहरणासाठी, जेथे 'अं' प्रत्यय नसल्याने हा नियम लागू होत नाही]. 77, 175. Tato namaṃ patimhā lutte ca samāse. ७७, १७५. त्यानंतर, 'नम्' (naṃ) प्रत्ययाचा 'अं' (aṃ) होतो, आणि 'पति' (pati) शब्द पुढे असताना अलुप्त समासात ('गो' चा 'अव' होतो). Tato gosaddato naṃvacanassa aṃādeso hoti, goiccetassa okārassa avādeso hoti patimhi pare alutte ca samāse. त्या 'गो' (go) शब्दानंतर येणाऱ्या 'नम्' (naṃ) विभक्ती प्रत्ययाचा 'अं' (aṃ) असा आदेश होतो, आणि 'पति' (pati) शब्द पुढे असताना अलुप्त-समासात 'गो' मधील 'ओ' (o) चा 'अव' (ava) असा आदेश होतो. Gavapati. गवपति (gavapati). Alutteti [Pg.69] kimatthaṃ? Gopati. 'अलुत्त' (alutta - अलुप्त) असे का म्हटले आहे? 'गोपति' (gopati) [या उदाहरणासाठी, जेथे विभक्तीचा लोप झाल्यामुळे हा नियम लागू होत नाही]. Caggahaṇena asamāsepi naṃvacanassa aṃādeso hoti, goiccetassa okārassa avādeso hoti. सूत्रातील 'च' (ca) च्या ग्रहणाने, समास नसतानाही 'नम्' (naṃ) प्रत्ययाचा 'अं' (aṃ) असा आदेश होतो, आणि 'गो' (go) मधील 'ओ' (o) चा 'अव' (ava) असा आदेश होतो. Gavaṃ. गवं (gavaṃ). 78, 3. Osare ca. ७८, ३. आणि समासात स्वर पुढे असताना ('गो' चा 'अव' होतो). Goiccetassa okārassa avādeso hoti samāse ca sare pare. समासामध्ये स्वर पुढे असताना, 'गो' (go) मधील 'ओ' (o) चा 'अव' (ava) असा आदेश होतो. Gavassakaṃ, gaveḷakaṃ, gavājinaṃ. गवस्सकं (gavassakaṃ), गवेळकं (gaveḷakaṃ), गवाजिनं (gavājinaṃ). Caggahaṇena uvaṇṇaiccevamantānaṃ liṅgānaṃ uvaavaurādesā honti smiṃyoiccetesu kvaci. सूत्रातील 'च' (ca) च्या ग्रहणाने, 'उ' आणि 'ऊ' अंत असणाऱ्या नामांच्या पुढे 'स्मिं' (smiṃ) आणि 'यो' (yo) प्रत्यय असताना, काही ठिकाणी विकल्पेकरून 'उव' (uva), 'अव' (ava) आणि 'उर' (ura) असे आदेश होतात. Bhuvi, pasavo, guravo, caturo. भुवि (bhuvi), पसवो (pasavo), गुरवो (guravo), चतुरो (caturo). Sareti kimatthaṃ? Godhano, govindo. 'सरे' (sare - स्वर पुढे असताना) असे का म्हटले आहे? 'गोधनो' (godhano), 'गोविन्दो' (govindo) [या उदाहरणांसाठी, जेथे स्वर पुढे नसल्याने हा नियम लागू होत नाही]. 79, 46. Tabbiparītūpapade byañjane ca. ७९, ४६. आणि व्यंजन पुढे असताना, उपपदातील त्याच्या विपरीत ('उ' होतो). Tassa avasaddassa yadā upapade tiṭṭhamānassa tassa okārassa viparīto hoti byañjane pare. व्यंजन पुढे असताना, उपपदामध्ये असलेल्या त्या 'अव' (ava) शब्दाचा 'ओ' (o) च्या विपरीत (म्हणजेच 'उ' - u) असा आदेश होतो. Uggate sūriye, uggacchati, uggahetvā. उग्गते सूरिये (uggate sūriye), उग्गच्छति (uggacchati), उग्गहेत्वा (uggahetvā). Caggahaṇamavadhāraṇatthaṃ. Avasāne, avakiraṇe, avakirati. सूत्रातील 'च' (ca) चे ग्रहण हा नियम मर्यादित करण्यासाठी (अवधारणार्थ) आहे. जेणेकरून 'अवसाने' (avasāne), 'अवकिरणे' (avakiraṇe), 'अवकिरति' (avakirati) [इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होणार नाही]. 80, 173. Goṇa [Pg.70] naṃmhi vā. ८०, १७३. जेव्हा 'नम्' (naṃ) प्रत्यय येतो, तेव्हा विकल्पेकरून 'गोण' (goṇa) होतो. Sabbasseva gosaddassa goṇādeso hoti vā naṃmhi vibhattimhi. जेव्हा 'नम्' (naṃ) विभक्ती प्रत्यय येतो, तेव्हा संपूर्ण 'गो' (go) शब्दाचा विकल्पेकरून 'गोण' (goṇa) असा आदेश होतो. Goṇānaṃ sattannaṃ. गोणानं सत्तन्नं (goṇānaṃ sattannaṃ). Vāti kimatthaṃ? 'वा' (vā - विकल्पेकरून) असे का म्हटले आहे? Gonañce taramānānaṃ, ujuṃ gacchati puṅgavo. 'गोनं चे तरमानानं, उजुं गच्छति पुङ्गवो' (gonañce taramānānaṃ, ujuṃ gacchati puṅgavo) [या गाथेत हा नियम लागू होऊ नये म्हणून]. Sabbā gāvī ujuṃ yanti, nette ujuṃ gate sati. 'सब्बा गावी उजुं यन्ति, नेत्ते उजुं गते सति' (sabbā gāvī ujuṃ yanti, nette ujuṃ gate sati). Yogavibhāgena aññatrāpi goṇādeso hoti. Goṇabhūtānaṃ. सूत्र-विभागाद्वारे (योगविभाग) इतर ठिकाणीही 'गोण' (goṇa) असा आदेश होतो; जसे की 'गोणभूतानं' (goṇabhūtānaṃ). 81, 172. Suhināsu ca. ८१, १७२. आणि 'सु', 'हि', 'ना' प्रत्यय पुढे असताना (विकल्पेकरून 'गोण' होतो). Suhināiccetesu sabbassa gosaddassa goṇādeso hoti vā. जेव्हा 'सु' (su), 'हि' (hi) आणि 'ना' (nā) हे प्रत्यय पुढे असतात, तेव्हा संपूर्ण 'गो' (go) शब्दाचा विकल्पेकरून 'गोण' (goṇa) असा आदेश होतो. Goṇesu, goṇehi, goṇebhi, goṇena. गोणेसु (goṇesu), गोणेहि (goṇehi), गोणेभि (goṇebhi), गोणेन (goṇena). Vāti kimatthaṃ? Gosu, gohi, gobhi, gavena. 'वा' (vā - विकल्पेकरून) असे का म्हटले आहे? 'गोसु' (gosu), 'गोहि' (gohi), 'गोभि' (gobhi), 'गवेन' (gavena) [या रूपांसाठी, जेथे हा नियम लागू होत नाही]. Caggahaṇena syādisesesu pubbuttaravacanesupi goṇa gu gavayādesā honti. Goṇo, goṇā, goṇaṃ, goṇe, goṇassa, goṇamhā. Goṇamhi, gunnaṃ, gavayehi, gavayebhi. सूत्रातील 'च' (ca) च्या ग्रहणाने, 'सि' (si) इत्यादी उर्वरित पूर्व आणि पर विभक्ती प्रत्यय पुढे असतानाही 'गोण' (goṇa), 'गु' (gu) आणि 'गवय' (gavaya) असे आदेश होतात. उदा. गोणो (goṇo), गोणा (goṇā), गोणं (goṇaṃ), गोणे (goṇe), गोणस्स (goṇassa), गोणम्हा (goṇamhā), गोणम्हि (goṇamhi), गुन्नं (gunnaṃ), गवयेहि (gavayehi), गवयेभि (gavayebhi). 82, 149. Aṃmo [Pg.71] niggahitaṃ jhalapehi. ८२, १४९. झ, ळ आणि प संज्ञक वर्णानंतर 'अं' आणि 'म' चा निग्गहीत (अनुस्वार) होतो. Aṃvacanassa makārassa ca jhalapaiccetehi niggahitaṃ hoti 'झ' (jha), 'ळ' (ḷa) आणि 'प' (pa) संज्ञक वर्णानंतर येणाऱ्या 'अं' (aṃ) प्रत्ययाचा आणि 'म' (ma) काराचा 'निग्गहीत' (niggahita - अनुस्वार) होतो. Aggiṃ, isiṃ, gahapatiṃ, daṇḍiṃ, mahesiṃ, bhikkhuṃ, paṭuṃ, sayambhuṃ, abhibhuṃ, rattiṃ, itthiṃ, vadhuṃ, pulliṅgaṃ, pumbhāvo, puṅkokilo. अग्गिं (aggiṃ), इसिं (isiṃ), gahपतिं (gahapatiṃ), दण्डिं (daṇḍiṃ), महेसिं (mahesiṃ), भिक्खुं (bhikkhuṃ), पटुं (paṭuṃ), सयम्भुं (sayambhuṃ), अभिभुं (abhibhuṃ), रत्तिं (rattiṃ), इत्थिं (itthiṃ), वधुं (vadhuṃ), पुल्लिङ्गं (pulliṅgaṃ), पुम्भावो (pumbhāvo), पुङ्कोकिलो (puṅkokilo). Aṃmoti kimatthaṃ? Agginā, pāṇinā, bhikkhunā, rattiyā, itthiyā, vadhuyā. ‘अं-म’ (aṃ-ma) असे कशासाठी म्हटले आहे? ‘अग्गिना’ (agginā) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Jhalapehīti kimatthaṃ? Sukhaṃ, dukkhaṃ. ‘झ, ल आणि प यांच्यानंतर’ (jha-la-pehi) असे कशासाठी म्हटले आहे? ‘सुखं’ (sukhaṃ), ‘दुक्खं’ (dukkhaṃ) इत्यादींमध्ये ‘झ’, ‘ल’ किंवा ‘प’ नसल्यामुळे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Punārambha haṇaṃ vibhāsānivattanatthaṃ. Aggiṃ, paṭuṃ, buddhiṃ, vadhuṃ. पुन्हा ‘झ-ल-पेहि’ ग्रहण करणे हे येथे ‘वा’ (विकल्प) चे अनुवर्तन रोखण्यासाठी आहे. उदा. अग्गिं (aggiṃ), पटुं (paṭuṃ), बुद्धिं (buddhiṃ), वधुं (vadhuṃ). 83, 67. Saralopo’ mādesa paccayādimhi saralope tu pakati. ८३, ६७. विभक्ती प्रत्यय ‘अं’ (aṃ), आदेश, प्रत्यय इत्यादी नंतर आले असता स्वराचा लोप होतो; आणि स्वराचा लोप झाला असता, तो स्वर मूळ रूपात (प्रकृती रूपात) राहतो. Saralopo hoti amādesapaccayādimhi sara lope tu pakati hoti. विभक्ती प्रत्यय ‘अं’, आदेश, प्रत्यय इत्यादी नंतर आले असता स्वराचा लोप होतो आणि स्वराचा लोप झाला असता तो स्वर मूळ रूपात (प्रकृती रूपात) राहतो. Purisaṃ, purise, pāpaṃ, pāpe, pāpiyo, pāpiṭṭho. उदाहरणे: पुरिसं (purisaṃ), पुरिसे (purise), पापं (pāpaṃ), पापे (pāpe), पापियो (pāpiyo), पापिट्ठो (pāpiṭṭho). Amādesapaccayādimhīti ki tthaṃ? Appamādo amataṃ padaṃ. ‘विभक्ती प्रत्यय ‘अं’, आदेश, प्रत्यय इत्यादी नंतर आले असता’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे तसे घडत नाही, जसे की ‘अप्पमादो अमतं पदं’ (appamādo amataṃ padaṃ) मध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. येथे ‘अमतं’ मधील ‘अ’ हा विभक्ती प्रत्यय ‘अं’ नाही, आदेश नाही आणि प्रत्ययही नाही, म्हणून येथे हा नियम लागू होत नाही. Saralopeti kimatthaṃ? Purisassa, daṇḍinaṃ. ‘स्वराचा लोप होतो’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे स्वर नसतो, जसे की ‘पुरिसस्स’ (purisassa), ‘दण्डिनं’ (daṇḍinaṃ) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Tuggahaṇamavadhāraṇatthaṃ. Bhikkhunī, gahapatānī. ‘तु’ (tu) चे ग्रहण हे ‘भिक्खुनी’ (bhikkhunī), ‘गहपतानी’ (gahapatānī) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होण्यापासून रोखण्यासाठी आहे. Pakatiggahaṇasāmatthena [Pg.72] puna sandhibhāvo ca hoti. Seyyo, seṭṭho, jeyyo, jeṭṭho. पुन्हा ‘पकति’ (प्रकृती) ग्रहण करण्याच्या सामर्थ्यामुळे तेथे संधी देखील होते, जसे की ‘सेय्यो’ (seyyo), ‘सेट्ठो’ (seṭṭho), ‘जेय्यो’ (jeyyo), ‘जेट्ठो’ (jeṭṭho) इत्यादींमध्ये. 84, 144. Aghorassamekavacanayosvapi ca. ८४, १४४. एकवचन विभक्ती प्रत्यय आणि ‘यो’ (yo) नंतर आले असता, ‘घ’ (gha) नसलेला स्वर र्हस्व होतो. Agho saro rassamāpajjate ekavacanayoiccetesu. एकवचन विभक्ती प्रत्यय आणि ‘यो’ नंतर आले असता, ‘घ’ नसलेला स्वर र्हस्व होतो. Itthiṃ, itthiyo, itthiyā. Vadhuṃ, vadhuyo, vadhuyā. Daṇḍiṃ, daṇḍino, daṇḍinā. Sayambhuṃ, sayambhuvo, sayambhunā. उदाहरणे: इत्थिं (itthiṃ), इत्थियो (itthiyo), इत्थिया (itthiyā). वधुं (vadhuṃ), वधुयो (vadhuyo), वधुया (vadhuyā). दण्डिं (daṇḍiṃ), दण्डिनो (daṇḍino), दण्डिना (daṇḍinā). सयम्भुं (sayambhuṃ), सयम्भुवो (sayambhuvo), सयम्भुना (sayambhunā). Aghoti kimatthaṃ? Kaññaṃ, kaññāyo, kaññāya. ‘घ नसलेला’ (agho) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे ‘घ’ संज्ञा असते, जसे की ‘कञ्ञं’ (kaññaṃ), ‘कञ्ञायो’ (kaññāyo), ‘कञ्ञाय’ (kaññāya) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Ekavacanayosvīti kimatthaṃ? Itthīhi, sayambhūhi. ‘एकवचन विभक्ती प्रत्यय आणि यो नंतर आले असता’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे अशी स्थिती नसते, जसे की ‘इत्थीहि’ (itthīhi), ‘सयम्भूहि’ (sayambhūhi) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Caggahaṇamavadhāraṇatthaṃ. Nadiṃ, nadiyo, nadiyā. ‘च’ (ca) चे ग्रहण हे अवधारण (निश्चय) करण्यासाठी आहे. उदा. नदिं (nadiṃ), नदियो (nadiyo), नदिया (nadiyā). Apiggahaṇena na rassamāpajjate. Itthī, bhikkhunī. ‘अपि’ (api) च्या ग्रहणाने र्हस्व होत नाही. उदा. इत्थी (itthī), भिक्खुनी (bhikkhunī). 85, 150. Na sismimanapuṃsakāni. ८५, १५०. ‘सि’ (si) प्रत्यय नंतर आला असता, नपुंसकलिंगी नसलेले शब्द र्हस्व होत नाहीत. Sismiṃ anapuṃsakāni liṅgāni na rassamāpajjante. Itthī, bhikkhunī, vadhū, daṇḍī, sayambhū. ‘सि’ प्रत्यय नंतर आला असता, नपुंसकलिंगी नसलेली प्रातिपदिके (लिंगे) र्हस्व होत नाहीत. उदा. इत्थी (itthī), भिक्खुनी (bhikkhunī), वधू (vadhū), दण्डी (daṇḍī), सयम्भू (sayambhū). Sismiṃnti kimatthaṃ? Bhoti itthi, bhoti vadhu, bho daṇḍi, bho sayambhu. ‘सि प्रत्यय नंतर आला असता’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे ‘सि’ प्रत्यय नंतर येत नाही, जसे की ‘भोति इत्थि’ (bhoti itthi), ‘भोति वधु’ (bhoti vadhu), ‘भो दण्डि’ (bho daṇḍi), ‘भो सयम्भु’ (bho sayambhu) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Anapuṃsakānīti [Pg.73] kimatthaṃ? Sukhakāri dānaṃ, sukhakāri sīlaṃ, sīghayāyi cittaṃ. ‘नपुंसकलिंगी नसलेले’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे ते नपुंसकलिंगी असतात, जसे की ‘सुखकारि दानं’ (sukhakāri dānaṃ), ‘सुखकारि सीलं’ (sukhakāri sīlaṃ), ‘सीघयायि चित्तं’ (sīghayāyi cittaṃ) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 86, 227. Ubhādito naminnaṃ. ८६, २२७. ‘उभ’ (ubha) इत्यादी संख्यावाचक शब्दांनंतर ‘नं’ (naṃ) विभक्ती प्रत्ययाचा ‘इन्नं’ (innaṃ) होतो. Ubhaiccevamādito saṅkhyāto naṃvacanassa innaṃ hoti. ‘उभ’ इत्यादी संख्यावाचक शब्दांनंतर ‘नं’ विभक्ती प्रत्ययाचा ‘इन्नं’ होतो. Ubhinnaṃ, duvinnaṃ. उदाहरणे: उभिन्नं (ubhinnaṃ), दुविन्नं (duvinnaṃ). Ubhāditoti kimatthaṃ? Ubhayesaṃ. ‘उभ इत्यादींनंतर’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे ‘उभ’ इत्यादी शब्द नसतात, जसे की ‘उभयेसं’ (ubhayesaṃ) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 87, 231. Iṇṇamiṇṇannaṃ tīhi saṅkhyāhi. ८७, २३१. ‘ति’ (ti) या संख्यावाचक शब्दानंतर ‘नं’ (naṃ) विभक्ती प्रत्ययाचे ‘इण्णं’ (iṇṇaṃ) आणि ‘इण्णन्नं’ (iṇṇannaṃ) हे आदेश होतात. Naṃvacanassa iṇṇaṃ iṇṇannaṃ iccete ādesā honti tīhi saṅkhyāhi. ‘ति’ या संख्यावाचक शब्दानंतर ‘नं’ विभक्ती प्रत्ययाचे ‘इण्णं’ आणि ‘इण्णन्नं’ हे आदेश होतात. Tiṇṇaṃ, tiṇṇannaṃ. उदाहरणे: तिण्णं (tiṇṇaṃ), तिण्णन्नं (tiṇṇannaṃ). Tīhīti kimatthaṃ? Dvinnaṃ. ‘ति या संख्यावाचक शब्दानंतर’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे ‘ति’ हा शब्द नसतो, जसे की ‘दुविन्नं’ (dvinnaṃ) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 88, 147. Yosu katanikāralopesu dīghaṃ. ८८, १४७. ‘यो’ (yo) प्रत्ययाचा लोप झाला असता किंवा त्याचा ‘नि’ (ni) आदेश झाला असता, सर्व स्वर दीर्घ होतात. Sabbe sarā yosu katanikāralopesu dīghamāpajjante. ‘यो’ प्रत्ययाचा लोप झाला असता किंवा त्याचा ‘नि’ आदेश झाला असता, सर्व स्वर दीर्घ होतात. Aggī, bhikkhū, rattī, yāgū, aṭṭhī, aṭṭhīni, āyū, āyūni, sabbāni, yāni, tāni, kāni, katamāni, etāni, apūni, imāni. उदाहरणे: अग्गी (aggī), भिक्खू (bhikkhū), रत्ती (rattī), यागू (yāgū), अट्ठी (aṭṭhī), अट्ठीनि (aṭṭhīni), आयू (āyū), आयूनि (āyūni), सब्बानि (sabbāni), यानि (yāni), तानि (tāni), कानि (kāni), कतमानि (katamāni), एतानि (etāni), apūni (apūni), इमानि (imāni). Yosvīti [Pg.74] kimatthaṃ? Aggi, bhikkhu, ratti, yāgu, sabbo, yo, so, ko, amuko. ‘यो प्रत्यय नंतर आला असता’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे ‘यो’ प्रत्यय नसतो, जसे की ‘अग्गि’ (aggi), ‘भिक्खु’ (bhikkhu), ‘रत्ति’ (ratti), ‘यागु’ (yāgu), ‘सब्बो’ (sabbo), ‘यो’ (yo), ‘सो’ (so), ‘को’ (ko), ‘अमुको’ (amuko) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Katanikāralopesvīti kimatthaṃ? Itthiyo, vadhuyo, sayambhuvo. ‘लोप किंवा नि-आदेश झाला असता’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे लोप किंवा ‘नि’ आदेश होत नाही, जसे की ‘इत्थियो’ (itthiyo), ‘वधुयो’ (vadhuyo), ‘सयम्भुवो’ (sayambhuvo) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Punārambhaggahaṇaṃ kimatthaṃ? Niccadīpanatthaṃ. Aggī, bhikkhū, rattī, yāni, tāni, katamāni. पुन्हा ग्रहण कशासाठी केले आहे? नित्यत्व दर्शवण्यासाठी (हा नियम नेहमी लागू व्हावा म्हणून). उदा. अग्गी (aggī), भिक्खू (bhikkhū), रत्ती (rattī), यानि (yāni), तानि (tāni), कतमानि (katamāni). 89, 87. Sunaṃhisu ca. ८९, ८७. ‘सु’ (su), ‘नं’ (naṃ) आणि ‘हि’ (hi) प्रत्यय नंतर आले असता, सर्व स्वर दीर्घ होतात. Sunaṃhiiccetesu sabbe sarā dīghamāpajjante. ‘सु’, ‘नं’ आणि ‘हि’ प्रत्यय नंतर आले असता, सर्व स्वर दीर्घ होतात. Aggīsu, aggīnaṃ, aggīhi, rattīsu, rattīnaṃ, rattīhi. Bhikkhūsu, bhikkhūnaṃ, bhikkhūhi. Purisānaṃ. उदाहरणे: अग्गीसु (aggīsu), अग्गीनं (aggīnaṃ), अग्गीहि (aggīhi), रत्तीसु (rattīsu), रत्तीनं (rattīnaṃ), रत्तीहि (rattīhi). भिक्खूसु (bhikkhūsu), भिक्खूनं (bhikkhūnaṃ), भिक्खूहि (bhikkhūhi). पुरिसानं (purisānaṃ). Etesvītī kimatthaṃ? Agginā, pāṇinā, daṇḍinā. ‘हे प्रत्यय नंतर आले असता’ असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे ‘सु’, ‘नं’ आणि ‘हि’ प्रत्यय नंतर येत नाहीत, जसे की ‘अग्गिना’ (agginā), ‘पाणिना’ (pāṇinā), ‘दण्डिना’ (daṇḍinā) इत्यादींमध्ये, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Caggahaṇamavadhāraṇatthaṃ. Sukhettesu brahmacārisu, dhammamakkhāsi bhagavā bhikkhunaṃ datvā sakehi pāṇibhi. ‘च’ (ca) चे ग्रहण हे नियम रोखण्यासाठी (अपवाद दर्शवण्यासाठी) आहे. उदा. ‘सुखेत्तेसु ब्रह्मचारिसु, धम्ममक्खासि भगवा भिक्खुनं दत्वा सकेहि पाणिभि’ (येथे ‘ब्रह्मचारिसु’ मध्ये ‘इ’ दीर्घ होत नाही, ‘भिक्खुनं’ मध्ये ‘उ’ दीर्घ होत नाही आणि ‘पाणिभि’ मध्ये ‘इ’ दीर्घ होत नाही). 90, 252. Pañcādīnamattaṃ. ९०, २५२. पञ्चादीनमत्तं। (सूत्र) Pañcādīnaṃ saṅkhyānaṃ anto attamāpajjate sunaṃhiiccetesu. जेव्हा 'सु', 'नं' आणि 'हि' हे प्रत्यय मागे येतात, तेव्हा 'पञ्च' इत्यादी संख्यावाचक शब्दांच्या शेवटच्या स्वराचा 'अ' होतो. Pañcasu, pañcannaṃ, pañcahi, chasu, channaṃ, chahi, sattasu, sattannaṃ, sattahi, aṭṭhasu, aṭṭhannaṃ, aṭṭhahi, navasu, navannaṃ, navahi, dasasu, dasannaṃ, dasahi. उदा. पञ्चसु, पञ्चन्नं, पञ्चहि, छसु, छन्नं, छहि, सत्तसु, सत्तन्नं, सत्तहि, अट्ठसु, अट्ठन्नं, अट्ठहि, नवसु, नवन्नं, नवहि, दससु, दसन्नं, दसहि. Pañcādīnamīti kimatthaṃ? Dvīsu, dvinnaṃ, dvīhi. 'पञ्च इत्यादींच्या' असे का म्हटले आहे? 'द्वीसु', 'द्विन्नं', 'द्वीहि' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Attamitibhāvaniddeso [Pg.75] ubhayassāgamanatthaṃ, anto ukāro attamāpajjate. Catassannaṃ itthīnaṃ. Tissannaṃ vedanānaṃ. 'अत्तं' (अ-भाव) हा भावनिर्देश दोन्ही 'स्स' आगम करण्यासाठी आहे, आणि शेवटचा 'उ' कार 'अ' मध्ये बदलतो. उदा. चतस्सन्नं इत्थीनं (चार स्त्रियांचे), तिस्सन्नं वेदनानं (तीन वेदनांचे). 91, 194. Patissinīmhi. ९१, १९४. पतिस्सिनीम्हि। (सूत्र) Patissanto attamāpajjate inīmhi paccaye pare. जेव्हा 'इनी' हा प्रत्यय मागे येतो, तेव्हा 'पति' शब्दाचा शेवटचा स्वर 'अ' मध्ये बदलतो. Gahapatānī. उदा. गहपतानी। Inīmhīti kimatthaṃ? Gahapati. 'इनी प्रत्यय मागे असताना' असे का म्हटले आहे? 'गहपति' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 92, 100. Ntussanto yosuca. ९२, १००. न्तुस्सन्तो योसु च। (सूत्र) Ntupaccayassa anto attamāpajjate sunaṃhiyoiccetesu paresu. जेव्हा 'सु', 'नं', 'हि' आणि 'यो' हे प्रत्यय मागे येतात, तेव्हा 'न्तु' प्रत्ययाचा शेवटचा स्वर 'अ' मध्ये बदलतो. Guṇavantesu, guṇavantānaṃ, guṇavantehi, guṇavantā, guṇavante. उदा. गुणवन्तेसु, गुणवन्तानं, गुणवन्तेहि, गुणवन्ता, गुणवन्ते. Ntusseti kimatthaṃ? Isīnaṃ. 'न्तु प्रत्ययाचा' असे का म्हटले आहे? 'इसीनं' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Etesvīti kimatthaṃ? Guṇavā. 'सु, नं, हि आणि यो मागे असताना' असे का म्हटले आहे? 'गुणवा' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Caggahaṇena aññesu vacanesu attañca hoti. Guṇavantasmiṃ, guṇavantena. 'च' च्या ग्रहणाने इतर वचनांमध्येही 'अ' होतो. उदा. गुणवन्तस्मिं, गुणवन्तेन. Antaggahaṇena ntupaccayassa anto attamāpajjate, yonañca ikāro hoti. Guṇavanti. 'अन्त' च्या ग्रहणाने 'न्तु' प्रत्ययाचा शेवटचा स्वर 'अ' मध्ये बदलतो आणि 'यो' चा 'इ' कार होतो. उदा. गुणवन्ति. 93, 106. Sabbassa [Pg.76] vā aṃsesu. ९३, १०६. सब्बस्स वा अंसेसु। (सूत्र) Sabbasseva ntupaccayassa attaṃ hoti vā aṃsaiccetesu. जेव्हा 'अं' आणि 'स' हे प्रत्यय मागे येतात, तेव्हा संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचा पर्यायाने 'अ' होतो. Satimaṃ bhikkhu, satimantaṃ bhikkhuṃ vā, bandhumaṃ rājānaṃ, bandhumantaṃ rājānaṃ vā, satimassa bhikkhuno, satimato bhikkhuno vā, bandhumassa rañño suṅkaṃ, bandhumato rañño vā suṅkaṃ deti. उदा. सतिमं भिक्खु किंवा सतिमन्तं भिक्खुं, बन्धुमं राजानं किंवा बन्धुमन्तं राजानं, सतिमस्स भिक्खुनो किंवा सतिमतो भिक्खुनो, बन्धुमस्स रञ्ञो सुङ्कं किंवा बन्धुमतो रञ्ञो वा सुङ्कं देति (देतो). Etesvīti kimatthaṃ? Satimā bhikkhu, bandhumā rājā. 'अं आणि स मागे असताना' असे का म्हटले आहे? 'सतिमा भिक्खु', 'बन्धुमा राजा' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 94, 105. Simhi vā. ९४, १०५. सिम्हि वा। (सूत्र) Ntupaccayassa antassa attaṃ hoti vā simhi vibhattimhi. जेव्हा 'सि' विभक्ती मागे येते, तेव्हा 'न्तु' प्रत्ययाच्या शेवटच्या स्वराचा पर्यायाने 'अ' होतो. Himavanto pabbato. उदा. हिमवन्तो पब्बतो. Vāti kimatthaṃ? Himavā pabbato. 'पर्यायाने' (वा) असे का म्हटले आहे? काही वेळा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की 'हिमवा पब्बतो'. 95, 145. Aggissini[Pg.77]. ९५, १४५. अग्गिस्सिनि। (सूत्र) Aggissantassa ini hoti vā simhi vibhattimhi. जेव्हा 'सि' विभक्ती मागे येते, तेव्हा 'अग्गि' च्या शेवटच्या स्वराचा पर्यायाने 'इनि' होतो. Purato aggini, pacchato aggini, dakkhiṇato aggini, vāmato aggini. उदा. पुरतो अग्गिनि, पच्छतो अग्गिनि, दक्खिणतो अग्गिनि, वामतो अग्गिनि. Vāti kimatthaṃ? Aggi. 'पर्यायाने' (वा) असे का म्हटले आहे? काही वेळा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की 'अग्गि'. 96, 148. Yosvakatarasso jho. ९६, १४८. योस्वकतरस्सो झो। (सूत्र) Yosu akatarasso jho attamāpajjate. जेव्हा 'यो' प्रत्यय मागे येतो, तेव्हा र्हस्व न झालेला 'झ' (संज्ञा असलेला स्वर) 'अ' मध्ये बदलतो. Aggayo munayo, isayo, gahapatayo. उदा. अग्गयो मुनयो, इसयो, gahapatayo (गहपतयो). Yosvīti kimatthaṃ? Aggīsu. 'यो मागे असताना' असे का म्हटले आहे? 'अग्गीसु' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Akatarassoti kimatthaṃ? Daṇḍino. 'र्हस्व न झालेला' असे का म्हटले आहे? ज्याचा र्हस्व झाला आहे अशा 'दण्डिनो' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Jhoti kimatthaṃ? Rattiyo. 'झ' असे का म्हटले आहे? 'रत्तियो' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 97, 156. Vevosu lo ca. ९७, १५६. वेवोसू लो च। (सूत्र) Vevoiccetesu akatarasso lo attamāpajjate. जेव्हा 'वे' आणि 'वो' हे प्रत्यय मागे येतात, तेव्हा र्हस्व न झालेला 'ल' (संज्ञा असलेला स्वर) 'अ' मध्ये बदलतो. Bhikkhave, bhikkhavo, hetave, hetavo. उदा. भिक्खवे, भिक्खवो, हेतवे, हेतवो. Akatarassoti kimatthaṃ? Sayambhuvo, vessabhuvo, parābhibhuvo. 'र्हस्व न झालेला' असे का म्हटले आहे? ज्याचा र्हस्व झाला आहे अशा 'सयम्भुवो', 'वेस्सभुवो', 'पराभिभुवो' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Vevosvīti kimatthaṃ? Hetunā, ketunā, setunā. 'वे आणि वो मागे असताना' असे का म्हटले आहे? 'हेतुना', 'केतुना', 'सेतुना' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण (मागील सूत्रातून 'अत्तं' हा शब्द) पुढे ओढण्यासाठी (अनुवृत्तीसाठी) आहे. 98, 186. Mātulādīnamānattamīkāre. ९८, १८६. 'ई' (ī) प्रत्यय मागे असताना 'मातुल' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी 'आन' (āna) आदेश होतो. Mātulaiccevamādīnaṃ anto ānattamāpajjate īkāre paccaye pare. 'ई' (ī) प्रत्यय परे (मागे) असताना 'मातुल' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी 'आन' (āna) भाव प्राप्त होतो. Mātulānī[Pg.78], ayyakānī, varuṇānī. मातुलानी (mātulānī), अय्यकानी (ayyakānī), वरुणानी (varuṇānī). Īkāreti kimatthaṃ? Bhikkhunī, rājinī, jālinī, gahapatānī. 'ईकारे' (ई-कार असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? भिक्खुनी (bhikkhunī), राजिनी (rājinī), जालिनी (jālinī), गहपतानी (gahapatānī) यांच्या सिद्धीसाठी. Ānattaggahaṇena nadīiccetassa dīsaddassa jjojjā ādesā honti saha vibhattiyā yonāsaiccetesu. Najjo sandanti, najjā kataṃ taraṅgaṃ, najjā nerañjarāya tīre. 'आन' ग्रहणाने 'नदी' या शब्दातील 'दी' (dī) या अक्षराच्या जागी 'यो', 'ना' आणि 'स' विभक्ती प्रत्यय परे असताना विभक्तीसह 'ज्जो' (jjo) आणि 'ज्जा' (jjā) हे आदेश होतात. उदा. नज्जो संदन्ति (नद्या वाहतात), नज्जा कतं तरङ्गं (नदीने लाट निर्माण केली), नज्जा नेरञ्जराय तीरे (नेरंजरा नदीच्या तीरावर). 99, 81. Smāhismiṃnaṃmhābhimhivā. ९९, ८१. 'स्मा', 'हि' आणि 'स्मिं' यांच्या जागी अनुक्रमे 'म्हा', 'भि' आणि 'म्हि' हे आदेश विकल्पेकरून होतात. Sabbato liṅgato smāhismiṃ iccetesaṃ mhābhimhiiccete ādesā honti vā yathāsaṅkhyaṃ. सर्व प्रातिपदिकानंतर (लिंगानंतर) 'स्मा', 'हि' आणि 'स्मिं' यांच्या जागी अनुक्रमे 'म्हा', 'भि' आणि 'म्हि' हे आदेश विकल्पेकरून (वा) होतात. Purisamhā, purisasmā, purisebhi, purisehi, purisamhi, purisasmiṃ. पुरिसम्हा (purisamhā), पुरिसस्मा (purisasmā), पुरिसेभि (purisebhi), पुरिसेहि (purisehi), पुरिसम्हि (purisamhi), पुरिसस्मिं (purisasmiṃ). Smāhismiṃnamiti kimatthaṃ? Vaṇṇavantaṃ agandhakaṃ viruḷhapupphaṃ, mahantaṃ chattaṃ mahāchattaṃ, mahantaṃ dhajaṃ mahādhajaṃ. 'स्मा-हि-स्मिं' असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे 'स्मा', 'हि' आणि 'स्मिं' प्रत्यय नसतील तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - वण्णवन्तं अगन्धकं विरुळ्हपुप्फं (सुंदर पण सुगंध नसलेले उमललेले फूल), महन्तं छत्तं महाछत्तं (मोठे छत्र), महन्तं धजं महाधजं (मोठा ध्वज). 100, 214. Na timehi katākārehi. १००, २१४. 'त' आणि 'इम' यांचे 'अ' कारात रूपांतर झाले असता (हा नियम लागू होत नाही). Ta imaiccetehi katākārehi smāsmiṃ naṃmhāmhiiccete ādesā neva honti. 'त' आणि 'इम' या शब्दांचे 'अ' कारात रूपांतर झाले असता, 'स्मा' आणि 'स्मिं' यांच्या जागी 'म्हा' आणि 'म्हि' हे आदेश मुळीच होत नाहीत. Asmā ṭhānā bhayaṃ uppajjati, asmiṃ ṭhāne bhayaṃ tiṭṭhati, asmā, asmiṃ. अस्मा ठाना भयं उप्पज्जति (या स्थानावरून भय उत्पन्न होते), अस्मिं ठाने भयं तिट्ठति (या स्थानावर भय राहते), अस्मा (asmā), अस्मिं (asmiṃ). Katākārehīti [Pg.79] kimatthaṃ? Tamhā, tamhi, imamhā, imamhi. 'कताकारेहि' (अ-कारात रूपांतर झाले असता) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे 'त' आणि 'इम' यांचे 'अ' कारात रूपांतर होत नाही तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - तम्हा (tamhā), तम्हि (tamhi), इमम्हा (imamhā), इमम्हि (imamhi). 101, 80. Suhisvakāro e. १०१, ८०. 'सु' आणि 'हि' प्रत्यय परे असताना 'अ' काराचा 'ए' होतो. Suhiiccetesu akāro ettamāpajjate. 'सु' आणि 'हि' हे प्रत्यय मागे असताना 'अ' कार 'ए' भावाला प्राप्त होतो. Sabbesu, yesu, tesu, kesu, purisesu, imesu, kusalesu, tumhesu, amhesu, sabbehi, yehi, tehi, kehi, purisehi, imehi, kusalehi, tumhehi, amhehi. सब्बेसु (sabbesu), येसु (yesu), तेसु (tesu), केसु (kesu), पुरिसेसु (purisesu), इमेसु (imesu), कुसलेसु (kusalesu), तुम्हेसु (tumhesu), अम्हेसु (amhesu), सब्बेहि (sabbehi), yehi (येहि), तेहि (tehi), केहि (kehi), पुरिसेहि (purisehi), इमेहि (imehi), कुसलेहि (kusalehi), तुम्हेहि (tumhehi), अम्हेहि (amhehi). 102, 202. Sabbanāmānaṃ naṃmhi ca. १०२, २०२. आणि सर्वनामांच्या शेवटी असणाऱ्या 'अ' काराचा 'नं' (naṃ) विभक्ती प्रत्यय परे असताना 'ए' होतो. Sabbesaṃ sabbanāmānaṃ anto akāro ettamāpajjate naṃmhi vibhattimhi. 'नं' (naṃ) विभक्ती प्रत्यय परे असताना सर्व सर्वनामांच्या शेवटी असणारा 'अ' कार 'ए' भावाला प्राप्त होतो. Sabbesaṃ, sabbesānaṃ, yesaṃ, yesānaṃ, tesaṃ, tesānaṃ, imesaṃ, imesānaṃ, kesaṃ, kesānaṃ, itaresaṃ, itaresānaṃ, katamesaṃ, katamesānaṃ. Sabbanāmānamiti kimatthaṃ? Buddhānaṃ bhagavantānaṃ āciṇṇasamāciṇṇo. सब्बेसं (sabbesaṃ), सब्बेसानं (sabbesānaṃ), येसं (yesaṃ), येसानं (yesānaṃ), तेसं (tesaṃ), तेसानं (tesānaṃ), इमेसं (imesaṃ), इमेसानं (imesānaṃ), केसं (kesaṃ), केसानं (kesānaṃ), इतरेसं (itaresaṃ), इतरेसानं (itaresānaṃ), कतमेसं (katamesaṃ), कतमेसानं (katamesānaṃ). 'सब्बनामां' (सर्वनामांच्या) असे कशासाठी म्हटले आहे? जे सर्वनाम नाहीत त्यांच्या बाबतीत हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - बुद्धानं भगवन्तानं आचिण्णसमाचिण्णो (बुद्धांचे, भगवंतांचे आचरण केलेले). Akāroti kimatthaṃ? Amūsaṃ, amūsānaṃ. 'अकारो' ('अ' कार) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे शेवटी 'अ' कार नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - अमूसं (amūsaṃ), अमूसानं (amūsānaṃ). Naṃmhīti kimatthaṃ? Sabbe, ime. 'नंम्हि' ('नं' प्रत्यय परे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे 'नं' प्रत्यय परे नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - सब्बे (sabbe), इमे (ime). Caggahaṇa manukaḍḍhanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण (मागील सूत्रातून 'ए' कार) अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 103, 79. Ato [Pg.80] nena. १०३, ७९. 'अ' कारानंतर 'ना' विभक्ती प्रत्ययाचा 'एन' (ena) आदेश होतो. Tasmā akārato nāvacanassa enādeso hoti. त्या 'अ' कारानंतर 'ना' या विभक्ती प्रत्ययाच्या जागी 'एन' (ena) आदेश होतो. Sabbena, yena, tena, kena, anena, purisena, rūpena. सब्बेन (sabbena), येन (yena), तेन (tena), केन (kena), अनेन (anena), पुरिसेन (purisena), रूपेन (rūpena). Atoti kimatthaṃ? Muninā, amunā, bhikkhunā. 'अतो' ('अ' कारानंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे शेवटी 'अ' कार नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - मुनिना (muninā), अमुना (amunā), भिक्खुना (bhikkhunā). Nāti kimatthaṃ? Tasmā. 'ना' असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे 'ना' प्रत्यय नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - तस्मा (tasmā). 104, 66. So. १०४, ६६. 'सो' (si चे o होणे). Tasmā akārato sivacanassa okārādeso hoti. त्या 'अ' कारानंतर 'सि' या विभक्ती प्रत्ययाच्या जागी 'ओ' (o) कार आदेश होतो. Sabbo, yo, so, ko, amuko, puriso. सब्बो (sabbo), यो (yo), सो (so), को (ko), अमुको (amuko), पुरिसो (puriso). Sīti kimatthaṃ? Purisānaṃ. 'सि' असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे 'सि' प्रत्यय नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - पुरिसानं (purisānaṃ). Atoti kimatthaṃ? Sayambhū. 'अतो' ('अ' कारानंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे शेवटी 'अ' कार नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - सयम्भू (sayambhū). 105, 0. So vā. १०५, ०. 'सो' (so) आदेश विकल्पेकरून (वा) होतो. Tasmā akārato nāvacanassa soādeso hoti vā. त्या 'अ' कारानंतर 'ना' या विभक्ती प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'सो' (so) आदेश होतो. Atthaso dhammaṃ jānāti, byañjanaso atthaṃ jānāti, akkharaso, suttaso, padaso, yasaso. Upāyaso, sabbaso, thāmaso, ṭhānaso. अत्थसो धम्मं जानाति (अर्थशः धर्म जाणतो), ब्यञ्जनसो अत्थं जानाति (व्यंजनशः अर्थ जाणतो), अक्खरसो (akkharaso), सुत्तसो (suttaso), पदसो (padaso), यससो (yasaso), उपायसो (upāyaso), सब्बसो (sabbaso), थामसो (thāmaso), ठानसो (ṭhānaso). Vāti [Pg.81] kimatthaṃ? Pādena vā pādārahena vā atirekapādena vā yo bhikkhu theyyacittena parassa bhaṇḍaṃ gaṇhāti, so bhikkhu pārājiko hoti asaṃvāso. 'वा' (विकल्पेकरून) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे हा नियम लागू होत नाही अशा अपवादांसाठी; जसे की - पादेन वा पादारहेन वा अतिरेकपादेन वा यो भिक्खु थेय्यचित्तेन परस्स भण्डं गण्हाति, सो भिक्खु पाराजिको होति असंवासो (जो भिक्खू चोरीच्या उद्देशाने दुसऱ्याची पाद किंवा पाद-मूल्याची किंवा त्याहून अधिक मूल्याची वस्तू घेतो, तो भिक्खू पाराजिक होतो आणि संघात राहण्यास अपात्र ठरतो). 106, 313. Dīghorehi. १०६, ३१३. 'दीघ' आणि 'ओर' या शब्दांनंतर (स्मा प्रत्ययाचा सो होतो). Dīghaoraiccetehi smāvacanassa soādeso hoti vā. 'दीघ' आणि 'ओर' या शब्दांनंतर 'स्मा' या विभक्ती प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'सो' (so) आदेश होतो. Dīghaso, oraso, dīghamhā, oramhā. दीघसो (dīghaso), ओरसो (oraso), दीघम्हा (dīghamhā), ओरम्हा (oramhā). Dīghorehiti kimatthaṃ? Saramhā, vacanamhā. 'दीघोरेहि' ('दीघ' आणि 'ओर' या शब्दांनंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे 'दीघ' आणि 'ओर' हे शब्द नसतील तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - सरम्हा (saramhā), वचनम्हा (vacanamhā). 107, 69. Sabbayonīnamāe. १०७, ६९. 'अ' कारानंतर सर्व 'यो' आणि 'नी' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' हे आदेश होतात. Tasmā akārato sabbesaṃ yonīnaṃāe ādesā honti vā yathāsaṅkhyaṃ. त्या 'अ' कारानंतर सर्व 'यो' आणि 'नी' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' हे आदेश पर्यायाने (वा) होतात. Purisā, purise, rūpā, rūpe. पुरिसा, पुरिसे, रूपा, रूपे. Vāti kimatthaṃ? Aggayo, munayo, isayo. 'वा' (पर्यायाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'अग्गयो', 'मुनयो', 'इसयो' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू न होऊ देण्यासाठी. Yonīnanti kimatthaṃ? Purisassa, rūpassa. 'योनीनं' (यो आणि नी प्रत्ययांचे) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'पुरिसस्स', 'रूपस्स' इत्यादींमध्ये (जिथे यो किंवा नी प्रत्यय नाही) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Akāratoti kimatthaṃ? Daṇḍino, aṭṭhīni, aggī pajjalanti, munī caranti. 'अकारतो' ('अ' कारानंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'अ' कार नसलेल्या शब्दांच्या पुढे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - दण्डिनो, अट्ठीनि, अग्गी पज्जलन्ति, मुनी चरन्ति. 108, 90. Smāsmiṃnaṃvā. १०८, ९०. 'अ' कारानंतर 'स्मा' आणि 'स्मिं' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' हे आदेश पर्यायाने (वा) होतात. Tasmā akārato sabbesaṃ smāsmiṃiccetesaṃ ā e ādesā honti vā yathāsaṅkhyaṃ. त्या 'अ' कारानंतर सर्व 'स्मा' आणि 'स्मिं' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'आ' आणि 'ए' हे आदेश पर्यायाने (वा) होतात. Purisā[Pg.82], purisasmā, purise, purisasmiṃ. पुरिसा, पुरिसस्मा, पुरिसे, पुरिसस्मिं. Akāratoti kimatthaṃ? Daṇḍinā, daṇḍismiṃ, bhikkhunā, bhikkhusmiṃ. 'अकारतो' ('अ' कारानंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'अ' कार नसलेल्या शब्दांच्या पुढे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - दण्डिना, दण्डिस्मिं, भिक्खुना, भिक्खुस्मिं. 109, 304. Āya catutthekavacanassatu. १०९, ३०४. 'अ' कारानंतर चतुर्थी विभक्तीच्या एकवचन प्रत्ययाच्या जागी 'आय' आदेश होतो. Tasmā akārato catutthekavacanassa āyādeso hoti vā. त्या 'अ' कारानंतर चतुर्थी विभक्तीच्या एकवचन प्रत्ययाच्या जागी 'आय' आदेश पर्यायाने (वा) होतो. Atthāya hitāya sukhāya devamanussānaṃ buddho loke uppajjati. 'अत्थाय हिताय सुखाय देवमनुस्सानं बुद्धो लोके उप्पज्जति' (देव आणि मनुष्यांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी बुद्ध जगात उत्पन्न होतात). Atoti kimatthaṃ? Isissa. 'अतो' ('अ' कारानंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'अ' कार नसलेल्या शब्दांच्या पुढे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - इसिस्स. Catutthīti kimatthaṃ? Purisassa mukhaṃ. 'चतुत्थी' (चतुर्थी विभक्ती) असे कशासाठी म्हटले आहे? चतुर्थी विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - पुरिसस्स मुखं (पुरुषाचे मुख). Ekavacanasseti kimatthaṃ? Purisānaṃ dadāti. 'एकवचनस्स' (एकवचनाचा) असे कशासाठी म्हटले आहे? एकवचन नसताना (बहुवचन असताना) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - पुरिसानं ददाति (पुरुषांना देतो). Vāti kimatthaṃ? Dātā hoti samaṇassa vā brāhmaṇassa vā. 'वा' (पर्यायाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'दाता होति समणस्स वा ब्राह्मणस्स वा' (श्रमणाला किंवा ब्राह्मणाला दान देणारा होतो) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू न होऊ देण्यासाठी. Tuggahaṇenatthañca hoti. Atthatthaṃ, hitatthaṃ, sukhatthaṃ. 'तु' च्या ग्रहणाने 'अत्थं' आदेश देखील होतो; जसे की - अत्थत्थं, हितत्थं, सुखत्थं. 110, 201. Tayo neva ca sabbanāmehi. ११०, २०१. सर्वनामांच्या पुढे (अ-कारान्त सर्वनामांच्या पुढे) 'स्मा', 'स्मिं' आणि 'स' (एकवचन) या प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'आ', 'ए' आणि 'आय' हे तीन आदेश मुळीच होत नाहीत. Tehi sabbanāmehi akārantehi smāsmiṃ saiccetesaṃ tayo ā e āyādesā neva honti. त्या अ-कारान्त सर्वनामांच्या पुढे 'स्मा', 'स्मिं' आणि 'स' यांच्या जागी अनुक्रमे 'आ', 'ए' आणि 'आय' हे तीन आदेश मुळीच होत नाहीत. Sabbasmā[Pg.83], sabbasmiṃ, sabbassa. Yasmā, yasmiṃ, yassa. Tasmā, tasmiṃ, tassa. Kasmā, kasmiṃ, kassa. Imasmā, imasmiṃ, imassa. सब्बस्मा, सब्बस्मिं, सब्बस्स। यस्मा, यस्मिं, यस्स। तस्मा, तस्मिं, तस्स। कस्मा, कस्मिं, कस्स। इमस्मा, इमस्मिं, इमस्स। Sabbanāmehīti kimatthaṃ? Pāpā, pāpe, pāpāya. 'सब्बनामेहि' (सर्वनामांनंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? पापा, पापे, पापाय (यांसारख्या सर्वनाम नसलेल्या शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण (मागील सूत्रातून 'अतो' चे) अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 111, 179. Ghato nādīnaṃ. १११, १७९. 'घ' संज्ञक अंगानंतर 'ना' इत्यादींचा (आदेश होतो). Tasmā ghato nādīnamekavacanānaṃ vibhattigaṇānaṃ āyādeso hoti. त्यामुळे, 'घ' संज्ञक अंगानंतर 'ना' ने सुरू होणाऱ्या एकवचनी विभक्ती प्रत्ययांच्या समूहाचा 'आय' (āya) असा आदेश होतो. Kaññāya kataṃ kammaṃ, kaññāya dīyate, kaññāya nissaṭaṃ vatthaṃ. Kaññāya pariggaho, kaññāya patiṭṭhitaṃ sīlaṃ. कञ्ञाय कतं कम्मं (कन्येने केलेले कर्म), कञ्ञाय दीयते (कन्येला दिले जाते), कञ्ञाय निस्सटं वत्थं (कन्येपासून वस्त्र दूर केले). कञ्ञाय परिग्गहो (कन्येचा स्वीकार), कञ्ञाय पतिट्ठितं सीलं (कन्येमध्ये प्रतिष्ठित असलेले शील). Ghatoti kimatthaṃ? Rattiyā, itthiyā, dhenuyā, vadhuyā. 'घतो' ('घ' संज्ञक अंगानंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? रत्तिया, इत्थिया, धेनुया, वधुया (यांसारख्या 'घ' संज्ञा नसलेल्या शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Nādīnamiti kimatthaṃ? Kaññaṃ passati, vijjaṃ, vīṇaṃ, gaṅgaṃ. 'नादीनं' ('ना' इत्यादी) असे कशासाठी म्हटले आहे? कञ्ञं पस्सति (कन्येला पाहतो), विज्जं (विद्येला), वीणं (विणेला), गङ्गं (गंगेला) (यांसारख्या 'ना' इत्यादी प्रत्यय नसलेल्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Ekavacanānamiti kimatthaṃ? Sabbāsu, yāsu, tāsu, kāsu, imāsu, pabhāsu. 'एकवचनानं' (एकवचनी) असे कशासाठी म्हटले आहे? सब्बासु, यासु, तासु, कासु, इमासु, पभासु (यांसारख्या अनेकवचनी रूपांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). 112, 183. Pato yā. ११२, १८३. 'प' संज्ञक अंगानंतर 'या' आदेश होतो. Tasmā pato nādīnamekavacanānaṃ vibhattigaṇānaṃ yāādeso hoti. त्यामुळे, 'प' संज्ञक अंगानंतर 'ना' ने सुरू होणाऱ्या एकवचनी विभक्ती प्रत्ययांच्या समूहाचा 'या' (yā) असा आदेश होतो. Rattiyā[Pg.84], itthiyā, deviyā, dhenuyā, yāguyā, vadhuyā. रत्तिया, इत्थिया, देविया, धेनुया, यागुया, वधुया. Nādīnamiti kimatthaṃ? Rattī, rattiṃ, itthī, itthiṃ. 'नादीनं' असे कशासाठी म्हटले आहे? रत्ती, रत्तिं, इत्थी, इत्थिं (यांसारख्या 'ना' इत्यादी प्रत्यय नसलेल्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Patoti kimatthaṃ? Kaññāya, vīṇāya, gaṅgāya, pabhāya, sobhāya. 'पतो' ('प' संज्ञक अंगानंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? कञ्ञाय, वीणाय, गङ्गाय, पभाय, सोभाय (यांसारख्या 'प' संज्ञा नसलेल्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Ekavacanānamiti kimatthaṃ? Rattīnaṃ, itthīnaṃ. 'एकवचनानं' असे कशासाठी म्हटले आहे? रत्तीनं, इत्थीनं (यांसारख्या अनेकवचनी रूपांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). 113, 132. Sakhato gasse vā. ११३, १३२. 'सख' शब्दानंतर 'ग' संज्ञक प्रत्ययाचा विकल्पे करून (अ, आ, इ, ई, ए असा आदेश होतो). Tasmā sakhato gassa akāra ākāra ikāra īkāra ekārādesā honti vā. त्यामुळे, 'सख' शब्दानंतर 'ग' संज्ञक प्रत्ययाचा विकल्पे करून अ-कार, आ-कार, इ-कार, ई-कार आणि ए-कार असा आदेश होतो. Bho sakha, bho sakhā, bho sakhi, bho sakhī, bho sakhe. भो सख, भो सखा, भो सखि, भो सखी, भो सखे. 114, 178. Ghate ca. ११४, १७८. 'घ' संज्ञक अंगानंतर देखील (ग-प्रत्ययाचा 'ए' आदेश होतो). Tasmā ghato gassa ekārādeso hoti. त्यामुळे, 'घ' संज्ञक अंगानंतर 'ग' संज्ञक प्रत्ययाचा 'ए' (ekāra) असा आदेश होतो. Bhoti ayye, bhoti kaññe, bhoti kharādiye. भोती अय्ये, भोती कञ्ञे, भोती खरादिये। Caggahaṇamavadhāraṇatthaṃ, sanniṭṭhānaṃ. 'च' चे ग्रहण हे अवधारण (निश्चिती) किंवा संनिठ्ठान (निश्चय) करण्यासाठी आहे। 115, 181. Na ammādito. ११५, १८१. 'अम्मा' इत्यादींच्या पुढे (हा बदल) होत नाही। Tato ammādito gassa ekārattaṃ na hoti. त्या 'अम्मा' इत्यादी शब्दांच्या पुढे असलेल्या 'ग' (संबोधन एकवचन 'सि') प्रत्ययाचे 'ए' कारात रूपांतर होत नाही। Bhoti [Pg.85] ammā, bhoti annā, bhoti ambā, bhoti tātā. भोती अम्मा, भोती अन्ना, भोती अम्बा, भोती ताता। Ammāditoti kimatthaṃ? Bhoti kaññe. 'अम्मादितो' (अम्मा इत्यादींच्या पुढे) असे का म्हटले आहे? 'भोती कञ्ञे' (येथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून)। 116, 157. Akatarassā lato yvālapanassa vevo. ११६, १५७. ऱ्हस्व न केलेल्या 'ल' संज्ञक स्वराच्या पुढे, संबोधनाच्या 'यो' प्रत्ययाचे 'वे' आणि 'वो' होतात। Tasmā akatarassā lato yvālapanassa vevoādesā honti. त्यामुळे, ऱ्हस्व न केलेल्या 'ल' संज्ञक स्वराच्या पुढे, संबोधनाच्या 'यो' प्रत्ययाचे 'वे' आणि 'वो' हे आदेश होतात। Bhikkhave, bhikkhavo, hetave, hetavo. भिक्खवे, भिक्खवो, हेतवे, हेतवो। Akatarassāti kimatthaṃ? Sayambhuvo. 'अकतरस्सा' (ऱ्हस्व न केलेल्या) असे का म्हटले आहे? 'सयम्भुवो' (येथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, कारण येथे 'ऊ' चा 'उ' असा ऱ्हस्व झाला आहे)। Latoti kimatthaṃ? Nāgiyo, dhenuyo, yāguyo. 'लतो' ('ल' संज्ञक स्वराच्या पुढे) असे का म्हटले आहे? 'नागियो', 'धेनुयो', 'यागुयो' (येथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून)। Ālapanasseti kimatthaṃ? Te hetavo, te bhikkhavo. 'आलपनस्स' (संबोधनाच्या) असे का म्हटले आहे? 'ते हेतवो', 'ते भिक्खवो' (येथे संबोधन नसून प्रथमा बहुवचन आहे, म्हणून येथे हा नियम लागू होऊ नये)। 117, 124. Jhalato sassano vā. ११७, १२४. 'झ' आणि 'ल' संज्ञक स्वरांच्या पुढे, 'स' प्रत्ययाचा 'नो' हा आदेश पर्यायाने (वा) होतो। Tasmā jhalato sassa vibhattissa no ādeso hoti vā. त्यामुळे, 'झ' आणि 'ल' संज्ञक स्वरांच्या पुढे, 'स' विभक्ती प्रत्ययाचा 'नो' हा आदेश पर्यायाने होतो। Aggino, aggissa, sakhino, sakhissa, daṇḍino, daṇḍissa, bhikkhuno, bhikkhussa, sayambhuno, sayambhussa. अग्गिनो, अग्गिस्स, सखिनो, सखिस्स, दण्डिनो, दण्डिस्स, भिक्खुनो, भिक्खुस्स, सयम्भुनो, सयम्भुस्स। Sasseti kimatthaṃ? Isinā, bhikkhunā. 'सस्स' ('स' प्रत्ययाचा) असे का म्हटले आहे? 'इसिना', 'भिक्खुना' (येथे 'स' प्रत्यय नसून 'ना' प्रत्यय आहे, म्हणून येथे हा नियम लागू होऊ नये)। Jhalatoti kimatthaṃ? Purisassa. 'झलतो' ('झ' आणि 'ल' च्या पुढे) असे का म्हटले आहे? 'पुरिसस्स' (येथे 'झ' किंवा 'ल' संज्ञक स्वर नाही, म्हणून येथे हा नियम लागू होऊ नये)। 118, 146. Ghapato [Pg.86] ca yonaṃ lopo. ११८, १४६. 'घ' आणि 'प' (तसेच 'झ' आणि 'ल') संज्ञक स्वरांच्या पुढे, 'यो' प्रत्ययाचा लोप होतो। Tehi ghapajhalaiccetehi yonaṃ lopo hoti vā. त्या 'घ', 'प', 'झ' आणि 'ल' या स्वरांच्या पुढे, 'यो' प्रत्ययाचा लोप पर्यायाने होतो। Kaññā, kaññāyo. Rattī, rattiyo, itthī, itthiyo, yāgū, yāguyo, vadhū, vadhuyo. Aggī, aggayo. Bhikkhū, bhikkhavo. Sayambhū, sayambhuvo. Aṭṭhī, aṭṭhīni, āyū, āyūni. कञ्ञा, कञ्ञायो। रत्ती, रत्तियो, इत्थी, इत्थियो, यागू, यागुयो, वधू, वधुयो। अग्गी, अग्गयो। भिक्खू, भिक्खवो। सयम्भू, सयम्भुवो। अट्ठी, अट्ठीनि, आयू, आयूनि। Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण (सूत्रातील 'च' शब्द) हे (मागील सूत्रांमधून 'झ' आणि 'ल' चे) अनुकर्षण (ओढून आणणे) करण्यासाठी आहे। 119, 155. Lato vokāro ca. ११९, १५५. 'ल' संज्ञक स्वराच्या पुढे, 'यो' प्रत्ययाचा 'वो' आदेश देखील होतो। Tasmā lato yonaṃ vokāro hoti vā. त्यामुळे, 'ल' संज्ञक स्वराच्या पुढे, 'यो' प्रत्ययाचा 'वो' हा आदेश पर्यायाने होतो। Bhikkhavo, bhikkhū, sayambhuvo, sayambhū. भिक्खवो, भिक्खू, सयम्भुवो, सयम्भू। Kāraggahaṇaṃ kimatthaṃ? Yonaṃ no ca hoti. Jantuno. (सूत्रात) 'कार' ग्रहण कशासाठी आहे? 'यो' प्रत्ययाचा 'नो' आदेश देखील होतो, जसे की 'जन्तुनो' इत्यादींमध्ये। Caggahaṇamavadhāraṇatthaṃ, amū purisā tiṭṭhanti, amū purise passatha. 'च' चे ग्रहण हे अवधारण (नियमन/प्रतिबंध) करण्यासाठी आहे, जसे की 'अमू पुरिसा तिट्ठन्ति' (ते पुरुष उभे आहेत), 'अमू पुरिसे पस्सथ' (त्या पुरुषांना पहा)। Iti nāmakappe paṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम कल्पामधील (व्याकरणाच्या नाम विभागातील) पहिला खंड समाप्त झाला। Dutiyakaṇḍa दुसरा खंड 120, 243. Amhassa mamaṃ sapibhattissa se. १२०, २४३. 'स' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना, 'अम्ह' या सर्वनामाचा विभक्ती प्रत्ययासह संपूर्णपणे 'ममं' असा आदेश होतो। Sabbasseva amhasaddassa savibhattissa mamaṃ ādeso hoti se vibhattimhi. 'स' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना, विभक्ती प्रत्ययासह संपूर्ण 'अम्ह' शब्दाचा 'ममं' असा आदेश होतो। Mamaṃ [Pg.87] dīyate purisena, mamaṃ pariggaho. ममं दीयते पुरिसेन (पुरुषाद्वारे मला दिले जाते), ममं परिग्गहो (माझा स्वीकार/माझी मालमत्ता)। 121, 233. Mayaṃ yomhi paṭhame. १२१, २३३. प्रथमेचा 'यो' प्रत्यय पुढे असताना, (विभक्ती प्रत्ययासह संपूर्ण 'अम्ह' शब्दाचा) 'मयं' असा आदेश होतो। Sabbasseva amhasaddassa savibhattissa mayaṃādeso hoti yomhi paṭhame. प्रथमेचा 'यो' प्रत्यय पुढे असताना, विभक्ती प्रत्ययासह संपूर्ण 'अम्ह' शब्दाचा 'मयं' असा आदेश होतो। Mayaṃ gacchāma, mayaṃ dema. मयं गच्छाम (आम्ही जातो), मयं देम (आम्ही देतो)। Amhasseti kimatthaṃ? Purisā tiṭṭhanti. 'अम्हस्स' ('अम्ह' शब्दाचा) असे का म्हटले आहे? 'पुरिसा तिट्ठन्ति' (येथे 'अम्ह' शब्द नाही, म्हणून हा नियम लागू होऊ नये)। Yomhīti kimatthaṃ? Ahaṃ gacchāmi. 'योम्हि' ('यो' प्रत्यय पुढे असताना) असे का म्हटले आहे? 'अहं गच्छामि' (येथे 'यो' प्रत्यय पुढे नाही, म्हणून हा नियम लागू होऊ नये)। Paṭhameti kimatthaṃ? Amhākaṃ passasi tvaṃ. 'पटमे' (प्रथमेचा प्रत्यय असताना) असे का म्हटले आहे? 'अम्हाकं पस्ससि त्वं' (येथे 'यो' हा प्रथमेचा प्रत्यय नाही, तर द्वितीयेचा आहे, म्हणून येथे हा नियम लागू होऊ नये)। 122, 99. Ntussa nto. १२२, ९९. प्रथमेचा 'यो' प्रत्यय पुढे असताना, 'न्तु' प्रत्ययाचा (विभक्ती प्रत्ययासह) 'न्तो' असा आदेश होतो। Sabbasseva ntupaccayassa savibhattissa ntoādeso hoti yomhi paṭhame. प्रथमेचा 'यो' प्रत्यय पुढे असताना, विभक्ती प्रत्ययासह संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचा 'न्तो' असा आदेश होतो। Guṇavanto tiṭṭhanti. गुणवन्तो तिट्ठन्ति (गुणवान लोक उभे आहेत)। Ntusseti kimatthaṃ? Sabbe sattā gacchanti. "न्तुस्सेति" (न्तु चा) असे कशासाठी म्हटले आहे? "सब्बे सत्ता गच्छन्ति" (सर्व प्राणी जातात) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Paṭhameti kimatthaṃ? Guṇavante passanti janā. "पठमेति" (प्रथमा विभक्ती असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? "गुणवन्ते पस्सन्ति जना" (लोक गुणवानांना पाहतात) इत्यादींमध्ये प्रथमा विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 123, 103. Ntassa se vā. १२३, १०३. 'से' (स) विभक्ती असताना 'न्तु' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'न्तस्स' असा आदेश होतो. Sabbasseva ntupaccayassa savibhattissa ntassādeso hoti vā se vibhattimhi. 'से' (स) विभक्ती असताना, विभक्तीसह संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'न्तस्स' असा आदेश होतो. Sīlavantassa jhāyino, sīlavato jhāyino vā. "सीलवन्तस्स झायिनो" (शीलवान ध्यान करणाऱ्याचे) किंवा "सीलवतो झायिनो". Seti kimatthaṃ? Sīlavā tiṭṭhati. "सेति" ('स' विभक्ती असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? "सीलवा तिट्ठति" (शीलवान उभा राहतो) इत्यादींमध्ये 'स' विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 124, 98. Ā [Pg.88] simhi. १२४, ९८. 'सि' विभक्ती असताना 'आ' आदेश होतो. Sabbassevantupaccayassa savibhattissa āādeso hoti simhi vibhattimhi. 'सि' विभक्ती असताना, विभक्तीसह संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचा 'आ' असा आदेश होतो. Guṇavā, paññavā, sīlavā, balavā, dhanavā, matimā, satimā, dhitimā. गुणवा, पञ्ञवा, सीलवा, बलवा, धनवा, मतिमा, सतिमा, धितिमा. Ntusseti kimatthaṃ? Puriso tiṭṭhati. "न्तुस्सेति" (न्तु चा) असे कशासाठी म्हटले आहे? "पुरिसो तिट्ठति" (पुरुष उभा राहतो) इत्यादींमध्ये 'न्तु' प्रत्यय नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Simhīti kimatthaṃ? Sīlavanto tiṭṭhanti. "सिम्हीति" ('सि' विभक्ती असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? "सीलवन्तो तिट्ठन्ति" (शीलवान उभे राहतात) इत्यादींमध्ये 'सि' विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 125, 198. Aṃ napuṃsake. १२५, १९८. नपुंसकलिंगात 'अं' आदेश होतो. Sabbasseva ntupaccayassa savibhattissa aṃādeso hoti simhi vibhattimhi napuṃsake vattamānassa. नपुंसकलिंगात वर्तमान असलेल्या, विभक्तीसह संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचा 'सि' विभक्ती असताना 'अं' असा आदेश होतो. Guṇavaṃ cittaṃ tiṭṭhati, rucimaṃ pupphaṃ virocati. "गुणवं चित्तं तिट्ठति" (गुणवान चित्त राहते), "रुचिमं पुप्फं विरोचति" (सुंदर फूल शोभून दिसते). Simhiti kimatthaṃ? Vaṇṇavantaṃ agandhakaṃ virūḷhapupphaṃ passasi tvaṃ. "सिम्हिति" ('सि' विभक्ती असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? "वण्णवन्तं अगन्धकं विरूळ्हपुप्फं पस्ससि त्वं" (तू सुंदर पण सुगंध नसलेले उमललेले फूल पाहत आहेस) इत्यादींमध्ये 'सि' विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 126, 101. Avaṇṇā ca ge. १२६, १०१. 'गे' (संबोधन) असताना 'अं' आणि 'अ' व 'आ' (अवण्ण) आदेश होतात. Sabbasseva ntupaccayassa savibhattissa aṃ avaṇṇā ca honti ge pare. 'गे' (संबोधन) नंतर असताना, विभक्तीसह संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचे 'अं' आणि 'अ' व 'आ' (अवण्ण) हे आदेश होतात. Bho guṇavaṃ, bho guṇava, bho guṇavā. "भो गुणवं", "भो गुणव", "भो गुणवा" (हे गुणवान!). Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण अनुकर्षण करण्यासाठी (मागील पदाचा संबंध जोडण्यासाठी) आहे. 127, 102. To [Pg.89] ti tā sa smiṃ nāsu. १२७, १०२. 'स', 'स्मिं' आणि 'ना' विभक्ती असताना अनुक्रमे 'तो', 'ति' आणि 'ता' आदेश होतात. Sabbasseva ntupaccayassa savibhattissa totitāādesā honti vā sasmiṃ nāiccetesu yathāsaṅkhyaṃ. 'स', 'स्मिं' आणि 'ना' या विभक्ती असताना, विभक्तीसह संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचे अनुक्रमे 'तो', 'ति' आणि 'ता' हे आदेश विकल्पे करून होतात. Guṇavato, guṇavantassa, guṇavati, guṇavantasmiṃ, guṇavatā, guṇavantena, satimato, satimantassa, satimati, satimantasmiṃ, satimatā, satimantena. गुणवतो, गुणवन्तस्स, गुणवति, गुणवन्तस्मिं, गुणवता, गुणवन्तेन, सतिमतो, सतिमन्तस्स, सतिमति, सतिमन्तस्मिं, सतिमता, सतिमन्तेन. Etesvīti kimatthaṃ? Guṇavā. Satimā. "एतेस्वीति" (या विभक्ती असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? "गुणवा", "सतिमा" इत्यादींमध्ये या विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 128, 104. Naṃmhi taṃ vā. १२८, १०४. 'नं' विभक्ती असताना विकल्पे करून 'तं' आदेश होतो. Sabbasseva ntupaccayassa savibhattissa taṃādeso hoti vā naṃmhi vibhattimhi. 'नं' विभक्ती असताना, विभक्तीसह संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'तं' असा आदेश होतो. Guṇavataṃ, guṇavantānaṃ, satimataṃ, satimantānaṃ. गुणवतं, गुणवन्तानं, सतिमतं, सतिमन्तानं. Naṃmhīti kimatthaṃ? Guṇavanto tiṭṭhanti, satimanto tiṭṭhanti. "नंम्हीति" ('नं' विभक्ती असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? "गुणवन्तो तिट्ठन्ति" (गुणवान उभे राहतात), "सतिमन्तो तिट्ठन्ति" (स्मृतिमान उभे राहतात) इत्यादींमध्ये 'नं' विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 129, 222. Imassidamaṃsisu napuṃsake. १२९, २२२. नपुंसकलिंगात 'अं' आणि 'सि' विभक्ती असताना 'इम' शब्दाचा 'इदं' असा आदेश होतो. Sabbasseva imasaddassa savibhattissa idaṃādeso hoti vā aṃsisu napuṃsake vattamānassa. नपुंसकलिंगात वर्तमान असलेल्या, विभक्तीसह संपूर्ण 'इम' शब्दाचा 'अं' आणि 'सि' विभक्ती असताना विकल्पे करून 'इदं' असा आदेश होतो. Idaṃ cittaṃ passasi, idaṃ cittaṃ tiṭṭhati, imaṃ cittaṃ passasi. Imaṃ cittaṃ tiṭṭhati. "इदं चित्तं पस्ससि" (तू हे चित्त पाहतोस), "इदं चित्तं तिट्ठति" (हे चित्त राहते), "इमं चित्तं पस्ससि", "इमं चित्तं तिट्ठति". Nathuṃsaketi [Pg.90] kimatthaṃ? Imaṃ purisaṃ passasi. Ayaṃ puriso tiṭṭhati. "नपुंसकेति" (नपुंसकलिंगात) असे कशासाठी म्हटले आहे? "इमं पुरिसं पस्ससि" (तू या पुरुषाला पाहतोस), "अयं पुरिसो तिट्ठति" (हा पुरुष उभा राहतो) इत्यादींमध्ये नपुंसकलिंग नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 138, 225. Amussāduṃ. १३८, २२५. 'अमु' शब्दाचा 'अदुं' आदेश होतो. Sabbasseva amusaddassa savibhattissa aduṃādeso hoti aṃsisu napuṃsake vattamānassa. नपुंसकलिंगात वर्तमान असलेल्या, विभक्तीसह संपूर्ण 'अमु' शब्दाचा 'अं' आणि 'सि' विभक्ती असताना 'अदुं' असा आदेश होतो. Aduṃ pupphaṃ passasi, aduṃ pupphaṃ virocati. "अदुं पुप्फं पस्ससि" (तू ते फूल पाहतोस), "अदुं पुप्फं विरोचति" (ते फूल शोभून दिसते). Napuṃsaketi kimatthaṃ? Amuṃ rājānaṃ passasi, asu rājā tiṭṭhati. "नपुंसकेति" (नपुंसकलिंगात) असे कशासाठी म्हटले आहे? "अमुं राजानं पस्ससि" (तू त्या राजाला पाहतोस), "असु राजा तिट्ठति" (तो राजा उभा राहतो) इत्यादींमध्ये नपुंसकलिंग नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 131, 0. Itthipumanapuṃsakasaṅkhyaṃ. १३१, ०. स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगातील संख्या. ‘‘Itthipumanapuṃsakasaṅkhyaṃ’’ iccetaṃ adhikāratthaṃ veditabbaṃ. "इत्थिपुमनपुंसकसंख्यं" हा अधिकार (पुढील सूत्रांमध्ये अनुवृत्तीसाठी) समजला पाहिजे. 132, 228. Yosu dvinnaṃ dve ca. १३२, २२८. 'यो' विभक्ती असताना 'द्वि' संख्येचा 'द्वे' असा आदेश होतो. Dvinnaṃ saṅkhyānaṃ itthipumanapuṃsake vattamānānaṃ savibhattīnaṃ dve hoti yoiccetesu. स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगात वर्तमान असलेल्या, विभक्तीसह 'द्वि' या संख्येचा 'यो' विभक्ती असताना 'द्वे' असा आदेश होतो. Dve itthiyo, dve dhammā. Dve rūpāni. "द्वे इत्थियो" (दोन स्त्रिया), "द्वे धम्मा" (दोन धर्म), "द्वे रूपाणि" (दोन रूपे). Yosvīti kimatthaṃ? Dvīsu. 'यो' प्रत्यय असताना (yosvīti) असे का म्हटले आहे? 'द्वीसु' (dvīsu) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Caggahaṇena duve dvaya ubha ubhaya duvi ca honti yonāanamiccetesu. Duve samaṇā. Duve brāhmaṇā[Pg.91], duve janā, dvayena, dvayaṃ, ubhinnaṃ, ubhayesaṃ duvinnaṃ. 'च' च्या ग्रहणाने (स्वीकाराने), 'यो', 'ना', 'अं' आणि 'नं' प्रत्यय असताना 'दुवे', 'द्वय', 'उभ', 'उभय' आणि 'दुवि' हे आदेश देखील होतात. उदा. दुवे समणा (दोन श्रमण), दुवे ब्राह्मणा (दोन ब्राह्मण), दुवे जना (दोन लोक), द्वयेन, द्वयं, उभिन्नं, उभयेसं, दुविन्नं. 133, 230. Ti catunnaṃ tisso catasso tayo cattāro tīṇi cattāri. १३३, २३०. 'ति' आणि 'चतु' या संख्यांचे 'तिस्सो', 'चतस्सो', 'तयो', 'चत्तारो', 'तीणि', 'चत्तारि' हे आदेश होतात. Ticatunnaṃ saṅkhyānaṃ itthipumanapuṃsake vattamānānaṃ savibhattīnaṃ tisso catasso tayo cattāro tīṇi cattāriiccete ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ yoiccetesu. 'यो' प्रत्यय असताना, स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगात असलेल्या 'ति' आणि 'चतु' या संख्यांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे 'तिस्सो', 'चतस्सो', 'तयो', 'चत्तारो', 'तीणि', 'चत्तारि' हे आदेश होतात. Tisso vedanā catasso disā, tayo janā, jane, cattāro purisā, purise, tīṇi āyatanāni, cattāri ariyasaccāni. उदा. तिस्सो वेदना (तीन वेदना), चतस्सो दिसा (चार दिशा), तयो जना (तीन लोक), जने, चत्तारो पुरिसा (चार पुरुष), पुरिसे, तीणि आयतनानि (तीन आयतने), चत्तारि अरियसच्चानि (चार आर्यसत्ये). Yosvīti kimatthaṃ? Tīsu, catūsu. 'यो' प्रत्यय असताना असे का म्हटले आहे? 'तीसु' (tīsu), 'चतूसु' (catūsu) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 134, 251. Pañcādīnamakāro. १३४, २५१. 'पञ्च' इत्यादी संख्यांच्या शेवटी 'अ'कार होतो. Pañcādīnaṃ saṅkhyānaṃ itthipumanapuṃsake vattamānānaṃ savibhattissa antassa sarassa akāro hoti yoiccetesu. 'यो' प्रत्यय असताना, स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगात असलेल्या 'पञ्च' इत्यादी संख्यांच्या विभक्ती प्रत्ययासह अंतिम स्वराचा 'अ'कार (अ) होतो. Pañca, pañca, cha, cha, satta, satta, aṭṭha, aṭṭha, nava, nava, dasa, dasa. उदा. पञ्च, पञ्च, छ, छ, सत्त, सत्त, अट्ठ, अट्ठ, नव, नव, dasa, dasa. Pañcādīnamiti kimatthaṃ? Dve, tayo. 'पञ्च' इत्यादींचे असे का म्हटले आहे? 'द्वे', 'तयो' इत्यादींमध्ये (जिथे 'पञ्च' इत्यादी संख्या नाहीत) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 135, 118. Rājassa [Pg.92] rañño rājino se. १३५, ११८. 'स' प्रत्यय असताना 'राज' शब्दाचे 'रञ्ञो' आणि 'राजिनो' हे आदेश होतात. Sabbasseva rājasaddassa savibhattissa rañño rājinoiccete ādesā honti se vibhattimhi. 'स' विभक्ती प्रत्यय असताना, संपूर्ण 'राज' शब्दाचा त्याच्या विभक्ती प्रत्ययासह 'रञ्ञो' आणि 'राजिनो' हे आदेश होतात. Rañño, rājino. उदा. रञ्ञो, राजिनो. Seti kimatthaṃ? Raññā. 'स' प्रत्यय असताना असे का म्हटले आहे? 'रञ्ञा' (raññā) इत्यादींमध्ये (जिथे 'स' प्रत्यय नाही) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 136, 119. Raññaṃ naṃmhi vā. १३६, ११९. 'नं' प्रत्यय असताना पर्यायाने 'रञ्ञं' असा आदेश होतो. Sabbasseva rājasaddassa savibhattissa raññaṃādeso hoti vā naṃmhi vibhattimhi. 'नं' विभक्ती प्रत्यय असताना, संपूर्ण 'राज' शब्दाचा त्याच्या विभक्ती प्रत्ययासह पर्यायाने 'रञ्ञं' असा आदेश होतो. Raññaṃ, rājūnaṃ idaṃ raṭṭhaṃ. उदा. रञ्ञं, राजूनां इदं रट्ठं (हे राज्य राजांचे आहे). 137, 116. Nāmhiraññā vā. १३७, ११६. 'ना' प्रत्यय असताना पर्यायाने 'रञ्ञा' असा आदेश होतो. Sabbasseva rājasaddassa savibhattissa raññāādeso hoti vā nāmhi vibhattimhi. 'ना' विभक्ती प्रत्यय असताना, संपूर्ण 'राज' शब्दाचा त्याच्या विभक्ती प्रत्ययासह पर्यायाने 'रञ्ञा' असा आदेश होतो. Tena raññā kataṃ. Rājena vā kataṃ. उदा. तेन रञ्ञा कतं (त्या राजाने केले) किंवा राजेन वा कतं. Nāmhīti kimatthaṃ? Rañño santakaṃ. 'ना' प्रत्यय असताना असे का म्हटले आहे? 'रञ्ञो संतकं' (rañño santakaṃ) इत्यादींमध्ये (जिथे 'ना' प्रत्यय नाही) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 138, 121. Smiṃmhi raññe rājini. १३८, १२१. 'स्मिं' प्रत्यय असताना 'रञ्ञे' आणि 'राजिनि' हे आदेश होतात. Sabbasseva rājasaddassa savibhattissa raññerājiniiccete ādesā honti smiṃmhivibhattimhi. 'स्मिं' विभक्ती प्रत्यय असताना, संपूर्ण 'राज' शब्दाचा त्याच्या विभक्ती प्रत्ययासह 'रञ्ञे' आणि 'राजिनि' हे आदेश होतात. Raññe, rājini sīlaṃ tiṭṭhati. उदा. रञ्ञे, राजिनि सीलं तिट्ठति (राजामध्ये शील राहते). 139, 245. Tumhākaṃ [Pg.93] tayimayi. १३९, २४५. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' शब्दांचे 'तयि' आणि 'मयि' हे आदेश होतात. Sabbesaṃ tumha amha saddānaṃ savibhattīnaṃ tayi mayiiccete ādeso honti yathāsaṅkhyaṃ smiṃmhi vibhattimhi. 'स्मिं' विभक्ती प्रत्यय असताना, संपूर्ण 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' या शब्दांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे 'तयि' आणि 'मयि' हे आदेश होतात. Tayi, mayi. उदा. तयि (तुझ्यात), मयि (माझ्यात). Smiṃmhīti kimatthaṃ? Tvaṃ bhavasi, ahaṃ bhavāmi. 'स्मिं' प्रत्यय असताना असे का म्हटले आहे? 'त्वं भवसि' (तू आहेस), 'अहं भवामि' (मी आहे) इत्यादींमध्ये (जिथे 'स्मिं' प्रत्यय नाही) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 140, 232. Tvamahaṃ simhi ca. १४०, २३२. 'सि' प्रत्यय असताना 'त्वं' आणि 'अहं' हे आदेश देखील होतात. Sabbesaṃ tumha amhasaddānaṃ savibhattīnaṃ tvaṃ ahaṃiccete ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ simhi vibhattimhi. 'सि' विभक्ती प्रत्यय असताना, संपूर्ण 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' या शब्दांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे 'त्वं' आणि 'अहं' हे आदेश होतात. Tvaṃ, ahaṃ. उदा. त्वं (तू), अहं (मी). Simhiti kimatthaṃ? Tayi, mayi. 'सि' प्रत्यय असताना असे का म्हटले आहे? 'तयि', 'मयि' इत्यादींमध्ये (जिथे 'सि' प्रत्यय नाही) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Caggahaṇena tuvaṃ ca hoti. Tuvaṃ satthā. 'च' च्या ग्रहणाने 'तुवं' हा आदेश देखील होतो. उदा. तुवं सत्था (तू शास्ता/गुरु आहेस). 141, 241. Tava mamase. १४१, २४१. 'स' प्रत्यय असताना 'तव' आणि 'मम' हे आदेश होतात. Sabbesaṃ tumha amhasaddānaṃ savibhattīnaṃ tavamamaiccete ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ se vibhattimhi. 'स' विभक्ती प्रत्यय असताना, संपूर्ण 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' या शब्दांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे 'तव' आणि 'मम' हे आदेश होतात. Tava, mama. उदा. तव (तुझे), मम (माझे). Seti kimatthaṃ? Tayi, mayi. 'स' प्रत्यय असताना असे का म्हटले आहे? 'तयि', 'मयि' इत्यादींमध्ये (जिथे 'स' प्रत्यय नाही) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 142, 242. Tuyhaṃ [Pg.94] mayhañca. १४२, २४२. 'तुय्हं' आणि 'मय्हं' हे आदेश देखील होतात. Sabbesaṃ tumha amhasaddānaṃ savibhattīnaṃ tuyhaṃ mayhaṃiccete ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ se vibhattimhi. 'स' विभक्ती प्रत्यय असताना, संपूर्ण 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' या शब्दांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे 'तुय्हं' आणि 'मय्हं' हे आदेश होतात. Tuyhaṃ, mayhaṃ dhanaṃ dīyate. उदा. तुय्हं, मय्हं धनं दीयते (तुला, मला धन दिले जाते). Seti kimatthaṃ? Tayā, mayā. "से" (विभक्ती प्रत्यय) असताना असे कशासाठी म्हटले आहे? "तया" (tayā), "मया" (mayā) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 143, 235. Taṃ mamaṃmhi. १४३, २३५. तं ममंम्हि। Sabbesaṃ tumha amhasaddānaṃ savibhattīnaṃ taṃ maiccete ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ aṃmhi vibhattimhi. जेव्हा "अं" (aṃ) विभक्ती प्रत्यय येतो, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) आणि "अम्ह" (amha) या सर्व प्रातिपदिकांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे "तं" (taṃ) आणि "मं" (maṃ) असे आदेश होतात. Taṃ, maṃ. तं, मं। Aṃmhīti kimatthaṃ? Tayā mayā. "अं" विभक्ती प्रत्यय असताना असे कशासाठी म्हटले आहे? "तया", "मया" इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 144, 234. Tavaṃ mamañca navā. १४४, २३४. तवं ममञ्च नवा। Sabbesaṃ tumha amhasaddānaṃ savibhattīnaṃ tavaṃ mamaṃiccete ādesā honti navā yathāsaṅkhyaṃ aṃmhi vibhattimhi. जेव्हा "अं" (aṃ) विभक्ती प्रत्यय येतो, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) आणि "अम्ह" (amha) या सर्व प्रातिपदिकांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे "तवं" (tavaṃ) आणि "ममं" (mamaṃ) असे आदेश पर्यायाने होतात. Tavaṃ, mamaṃ passati. तवं, ममं पस्सति (तुला पाहतो, मला पाहतो). Navāti kimatthaṃ? Taṃ, maṃ passati. "नवा" (पर्यायाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? "तं, मं पस्सति" इत्यादींमध्ये हा नियम लागू न होता इतर रूपे व्हावीत म्हणून. Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. "च" चे ग्रहण मागील सूत्रातील घटकांचे अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 145, 238. Nāmhī tayā mayā. १४५, २३८. नाम्ही तया मया। Sabbesaṃ tumha amhasaddānaṃ savibhattīnaṃ tayā mayāiccete ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ nāmhi vibhattimhi. जेव्हा "ना" (nā) विभक्ती प्रत्यय येतो, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) आणि "अम्ह" (amha) या सर्व प्रातिपदिकांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे "तया" (tayā) आणि "मया" (mayā) असे आदेश होतात. Tayā[Pg.95], mayā kataṃ. तया, मया कतं (तुझ्याद्वारे केले गेले, माझ्याद्वारे केले गेले). Nāmhiti kimatthaṃ? Tumhehi, amhehi. "ना" विभक्ती प्रत्यय असताना असे कशासाठी म्हटले आहे? "तुम्हेहि", "अम्हेहि" इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 146, 236. Tumhassa tuvaṃ tvamaṃmhi. १४६, २३६. तुम्हस्स तुवं त्वमंम्हि। Sabbassa tumhasaddassa savibhattissa tuvaṃ tvaṃ iccete ādesā honti aṃmhi vibhattimhi. जेव्हा "अं" (aṃ) विभक्ती प्रत्यय येतो, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) या संपूर्ण प्रातिपदिकाचे त्याच्या विभक्ती प्रत्ययासह "तुवं" (tuvaṃ) आणि "त्वं" (tvaṃ) असे आदेश होतात. Kaliṅgarassa tuvaṃ maññe, kaṭṭhassa tvaṃ maññe. कलिङ्गरस्स तुवं मञ्ञे (मी तुला लाकडाचा ओंडका समजतो), कट्ठस्स त्वं मञ्ञे (मी तुला लाकूड समजतो). 147, 246. Padato dutiyā catutthī chaṭṭhīsu vono. १४७, २४६. पदतो दुतिया चतुत्थी छट्ठीसु वोनो। Sabbesaṃ tumhaamhasaddānaṃ savibhattīnaṃ yadā padasmā paresaṃ vo noādesā honti navā yathāsaṅkhyaṃ dutiyā catutthīchaṭṭhīiccetesu bahuvacanesu. जेव्हा पदाच्या पुढे द्वितीया, चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तींचे अनेकवचनी प्रत्यय येतात, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) आणि "अम्ह" (amha) या सर्व प्रातिपदिकांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे "वो" (vo) आणि "नो" (no) असे आदेश पर्यायाने होतात. Pahāya vo bhikkhave gamissāmi, mā no ajja vikantiṃsu, rañño sūdā mahānase, evaṃ dutiyatthe. ‘पहाय वो भिक्खवे गमिस्सामि’ (हे भिक्खूंनो, मी तुम्हांला सोडून जाईन), ‘मा नो अज्ज विकन्तिंसु’ (आज त्यांनी आम्हांला कापून काढू नये), ‘रञ्ञो सूदा महानसे’ (राजाचे आचारी स्वयंपाकघरात आहेत) - हे द्वितीयेच्या अर्थातील उदाहरणे आहेत. Dhammaṃ vo bhikkhave desessāmi, saṃvibhajetha no rajjena, evaṃ catutthyatthe. ‘धम्मं वो भिक्खवे देसेस्सामि’ (हे भिक्खूंनो, मी तुम्हांला धम्म उपदेश करीन), ‘संविभजेथ नो रज्जेन’ (आम्हांला राज्याचा वाटा द्या) - हे चतुर्थीच्या अर्थातील उदाहरणे आहेत. Tuṭṭhosmi vo bhikkhave pakatiyā, satthā no bhagavā anuppatto, evaṃ chaṭṭhyatthe. ‘तुट्ठोस्मि वो भिक्खवे पकतिया’ (हे भिक्खूंनो, मी तुमच्यावर स्वभावानेच प्रसन्न आहे), ‘सत्था नो भगवा अनुप्पत्तो’ (आमचे शास्ता भगवान येथे आले आहेत) - हे षष्ठीच्या अर्थातील उदाहरणे आहेत. Navāti [Pg.96] kimatthaṃ? Eso amhākaṃ satthā. "नवा" (पर्यायाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? "एसो अम्हाकं सत्था" (हे आमचे शास्ता आहेत) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू न होता इतर रूपे व्हावीत म्हणून. Tumhamhākamiti kimatthaṃ? Ete isayo passasi. "तुम्ह-अम्ह" असे कशासाठी म्हटले आहे? "एते इसयो पस्ससि" (तू या ऋषींना पाहतोस) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Padatoti kimatthaṃ? Tumhākaṃ satthā. "पदतो" (पदाच्या पुढे) असे कशासाठी म्हटले आहे? "तुम्हाकं सत्था" (तुमचे शास्ता) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Etesvīti kimatthaṃ? Gacchatha tumhe. "या विभक्तींमध्ये" (द्वितीया, चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्ती असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? "गच्छथ तुम्हे" (तुम्ही जा) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 148, 247. Temekavacanesu ca. १४८, २४७. तेमेकवचनेसु च। Sabbesaṃ tumha amhasaddānaṃ savibhattīnaṃ yadā padasmā paresaṃ te me ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ catutthīchaṭṭhīiccetesu ekavacanesu. जेव्हा पदाच्या पुढे चतुर्थी आणि षष्ठी विभक्तींचे एकवचनी प्रत्यय येतात, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) आणि "अम्ह" (amha) या सर्व प्रातिपदिकांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे "ते" (te) आणि "मे" (me) असे आदेश होतात. Dadāmi te gāmavarāni pañca, dadāhi me gāmavaraṃ, idaṃ te raṭṭhaṃ, ayaṃ me putto. ‘ददामि ते गामवरानि पञ्च’ (मी तुला पाच उत्तम गावे देतो), ‘ददाहि मे गामवरं’ (मला एक उत्तम गाव दे), ‘इदं ते रट्ठं’ (हे तुझे राष्ट्र आहे), ‘अयं मे पुत्तो’ (हा माझा मुलगा आहे). Padatoti kimatthaṃ? Tava ñāti, mama ñāti. "पदतो" (पदाच्या पुढे) असे कशासाठी म्हटले आहे? "तव ञाति" (तुझा नातेवाईक), "मम ञाति" (माझा नातेवाईक) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 149, 148. Na aṃmhi. १४९, १४८. न अंम्हि। Sabbesaṃ tumha amhasaddānaṃ savibhattīnaṃ yadā padasmā paresaṃ te meādesā na honti aṃmhi vibhattimhi. जेव्हा पदाच्या पुढे "अं" (aṃ) विभक्ती प्रत्यय येतो, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) आणि "अम्ह" (amha) या सर्व प्रातिपदिकांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह "ते" (te) आणि "मे" (me) असे आदेश होत नाहीत. Passeyya taṃ vassasataṃ arogaṃ, so maṃ bravīti. ‘पस्सेय्य तं वस्ससतं अरोगं’ (तो तुला शंभर वर्षे निरोगी पाहो), ‘सो मं ब्रवीति’ (तो मला सांगतो). 150, 249. Vā [Pg.97] tatiye ca. १५०, २४९. वा ततिये च। Sabbesaṃ tumhaamhasaddānaṃ savibhattīnaṃ yadā padasmā paresaṃ temeādesā honti vā yathāsaṅkhyaṃ tatiyekavacane pare. जेव्हा पदाच्या पुढे तृतीया विभक्तीचे एकवचनी प्रत्यय येतात, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) आणि "अम्ह" (amha) या सर्व प्रातिपदिकांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे "ते" (te) आणि "मे" (me) असे आदेश पर्यायाने होतात. Kataṃ te pāpaṃ, kataṃ me pāpaṃ, kataṃ tayā pāpaṃ, kataṃ mayā pāpaṃ. ‘कतं ते पापं’ (तू पाप केले आहेस), ‘कतं मे पापं’ (मी पाप केले आहे), ‘कतं तया पापं’ (तुझ्याद्वारे पाप केले गेले), ‘कतं मया पापं’ (माझ्याद्वारे पाप केले गेले). Padatoti kimatthaṃ? Tayā kataṃ, mayā kataṃ. "पदतो" (पदाच्या पुढे) असे कशासाठी म्हटले आहे? "तया कतं" (तुझ्याद्वारे केले गेले), "मया कतं" (माझ्याद्वारे केले गेले) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 151, 250. Bahuvacanesu vono. १५१, २५०. बहुवचनेसु वोनो। Sabbesaṃ tumhaamhasaddānaṃ savibhattīnaṃ yadā padasmā paresaṃ vonoādesā honti yathāsaṅkhyaṃ tatiyābahuvacanesu paresu. जेव्हा पदाच्या पुढे तृतीया विभक्तीचे अनेकवचनी प्रत्यय येतात, तेव्हा "तुम्ह" (tumha) आणि "अम्ह" (amha) या सर्व प्रातिपदिकांचे त्यांच्या विभक्ती प्रत्ययांसह अनुक्रमे "वो" (vo) आणि "नो" (no) असे आदेश होतात. Kataṃ vo kammaṃ, kataṃ no kammaṃ. ‘कतं वो कम्मं’ (तुमच्याद्वारे कर्म केले गेले), ‘कतं नो कम्मं’ (आमच्याद्वारे कर्म केले गेले). Padatoti kimatthaṃ? Tumhehi kataṃ, amhehi kataṃ. "पदतो" (शब्दानंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? "तुम्हेहि कतं" (तुम्ही केले), "अम्हेहि कतं" (आम्ही केले) इत्यादींमध्ये (शब्दानंतर नसताना) हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Bahuvacanaggahaṇena yomhi paṭhame vo noādesā honti. Gāmaṃ vo gaccheyyātha, gāmaṃ no gaccheyyāma. "बहुवचन" च्या ग्रहणाने, पहिली विभक्ती "यो" पर असताना "वो" आणि "नो" हे आदेश होतात. उदा. "गामं वो गच्छेय्याथ" (तुम्ही गावाकडे जावे), "गामं नो गच्छेय्याम" (आम्ही गावाकडे जावे). 152, 236. Pumantassā simhi. १५२, २३६. पुमन्तस्सा सिम्हि। Pumaiccevamantassa savibhattissa āādeso hoti simhi vibhattimhi. 'पुम' अशा अन्ताच्या शब्दाला विभक्तीसह 'सि' विभक्ती पर असताना 'आ' आदेश होतो. Pumā [Pg.98] tiṭṭhati. पुमा तिट्ठति (पुरुष उभा राहतो). Simhīti kimatthaṃ? Pumāno tiṭṭhanti. "सिम्हि" (सि विभक्ती पर असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेव्हा 'सि' पर नसेल, जसे की "पुमानो तिट्ठन्ति" (पुरुष उभे राहतात) इत्यादींमध्ये, हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Antaggahaṇena maghava yuvaiccevamādīnamantassasavibhattissa āādeso hoti. Maghavā, yuvā. "अन्त" च्या ग्रहणाने 'मघव', 'युव' इत्यादींच्या अन्ताला विभक्तीसह 'आ' आदेश होतो. उदा. मघवा, युवा. 153, 138. Amālapanekavacane. १५३, १३८. अमालपनेकवचने। Pumaiccevamantassa savibhattissa aṃādeso hoti ālapanekavacane pare. 'पुम' अशा अन्ताच्या शब्दाला विभक्तीसह संबोधन एकवचन पर असताना 'अं' आदेश होतो. He pumaṃ. हे पुमं (हे पुरुषा!). Ālapaneti kimatthaṃ? Pumā. "आलपने" (संबोधन पर असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेव्हा संबोधन पर नसेल, जसे की "पुमा" इत्यादींमध्ये, हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Ekavacaneti kimatthaṃ? He pumāno. "एकवचने" (एकवचन पर असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेव्हा एकवचन पर नसेल, जसे की "हे पुमानो" (हे पुरुषांनो!) इत्यादींमध्ये, हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 154, 0. Samāse ca vibhāsā. १५४, ०. समासे च विभासा। Pumaiccevamantassa samāse ca aṃādeso hoti vibhāsā samāse kate. 'पुम' अशा अन्ताच्या शब्दाला समास केल्यावर विकल्पेकरून 'अं' आदेश होतो. Itthī ca pumā ca napuṃsakaṃ ca itthipumanapuṃsakāni. Itthipumanapuṃsakānaṃ samūho itthipumanapuṃsakasamūho. स्त्री, पुरुष आणि नपुंसक म्हणजे 'इत्थिपुमनपुंसकानि'. स्त्री, पुरुष आणि नपुंसकांचा समूह म्हणजे 'इत्थिपुमनपुंसकसमूहो'. Vibhāsāti kimatthaṃ? Itthipumanapuṃsakāni. "विभासा" (विकल्पेकरून) असे कशासाठी म्हटले आहे? "इत्थिपुमनपुंसकानि" यासारख्या ठिकाणी या नियमाला अपवाद असावा म्हणून. 155, 137. Yosvāno[Pg.99]. १५५, १३७. योस्वानो। Pumaiccevamantassa savibhattissa ānoādeso hoti yosu vibhattīsu. 'पुम' अशा अन्ताच्या शब्दाला विभक्तीसह 'यो' विभक्ती पर असताना 'आनो' आदेश होतो. Pumāno, he pumāno. पुमानो (पुरुष - अनेकवचन), हे पुमानो (हे पुरुषांनो!). Yosvīti kimatthaṃ? Pumā. "योसु" ('यो' विभक्ती पर असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेव्हा 'यो' पर नसेल, जसे की "पुमा" इत्यादींमध्ये, हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 156, 142. Āne smiṃmhi vā. १५६, १४२. आने स्मिंम्हि वा। Pumaiccevamantassa savibhattissa āne ādeso hoti vā smiṃmhi vibhattimhi. 'पुम' अशा अन्ताच्या शब्दाला विभक्तीसह 'स्मिं' विभक्ती पर असताना विकल्पेकरून 'आने' आदेश होतो. Pumāne, pume vā. पुमाने, किंवा पुमे. 157, 140. Hivibhattimhi ca. १५७, १४०. हिविभत्तिम्हि च। Pumaiccevamantassa hivibhattimhi ca āneādeso hoti. 'पुम' अशा अन्ताच्या शब्दाला 'हि' विभक्ती पर असताना देखील 'आने' आदेश होतो. Pumānehi, pumānebhi. पुमानेहि, पुमानेभि. Puna vibhattiggahaṇaṃ kimatthaṃ? Savibhattiggahaṇanivattanatthaṃ. Pumānehi. पुन्हा "विभत्ति" चे ग्रहण कशासाठी केले आहे? "सविभत्ति" (विभक्तीसह) च्या अनुवृत्तीची निवृत्ती करण्यासाठी, जसे की "पुमानेहि" मध्ये. Caggahaṇena maghava yuvaiccevamādīnamantassa ānaādeso hoti si yo aṃyo iccetesu vibhattīsu, pumakammathāmantassa cukāro hoti sasmā su vibhattīsu. Maghavāno, maghavānā. Maghavānaṃ, maghavāne[Pg.100]. Yuvāno, yuvānā, yuvānaṃ, yuvāne, pumuno, pumunā. Kammuno, kammunā, thāmuno, thāmunā. "च" च्या ग्रहणाने 'मघव', 'युव' इत्यादींच्या अन्ताला 'सि', 'यो', 'अं', 'यो' या विभक्तींमध्ये 'आन' आदेश होतो; आणि 'पुम', 'कम्म' व 'थाम' यांच्या अन्ताला 'स', 'स्मा' आणि 'सु' विभक्तींमध्ये 'उ' कार होतो. उदा. मघवानो, मघवाना, मघवानं, मघवाने; युवानो, युवाना, युवानं, युवाने; पुमुनो, पुमुना; कम्मुनो, कम्मुना; थामुनो, थामुना. 158, 143. Susmimā vā. १५८, १४३. सुस्मिमा वा। Pumaiccevamantassa suiccetasmiṃvibhattimhi āādeso hoti vā. 'पुम' अशा अन्ताच्या शब्दाला 'सु' या विभक्तीमध्ये विकल्पेकरून 'आ' आदेश होतो. Pumāsu, pumesu vā. पुमासु, किंवा पुमेसु. 156, 139. Unāmhi ca. १५६, १३९. उनाम्हि च। Pumaiccevamantassa āuādesā honti vā nāmhi vibhattimhi. 'पुम' अशा अन्ताच्या शब्दाला 'ना' विभक्ती पर असताना विकल्पेकरून 'आ' आणि 'उ' हे आदेश होतात. Pumānā, pumunā, pumena vā. पुमाना, पुमुना, किंवा पुमेन. Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. "च" चे ग्रहण (मागील सूत्रातील 'आ' कार) अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 160, 167. A kammantassa ca. १६०, १६७. अ कम्मन्तस्स च। Kammaiccevamantassa ca ua ādesā honti vā nāmhi vibhattimhi. 'कम्म' अशा अन्ताच्या शब्दाला देखील 'ना' विभक्ती पर असताना विकल्पेकरून 'उ' आणि 'अ' हे आदेश होतात. Kammunā, kammanā, kammena vā. कम्मुना, कम्मना, किंवा कम्मेन. Caggahaṇena maghavayuvaiccevamantassa āāde so hoti kvaci nāsuiccetesu vibhattīsu. Maghavānā, maghavāsu, maghavesu, maghavena vā. Yuvānā, yuvāsu, yuvesu, yuvena vā. "च" च्या ग्रहणाने 'मघव', 'युव' इत्यादींच्या अन्ताला 'ना' आणि 'सु' या विभक्तींमध्ये काही ठिकाणी 'आ' आदेश होतो. उदा. मघवाना, मघवासु, मघवेसु, किंवा मघवेन; युवाना, युवासु, युवेसु, किंवा युवेन. Iti nāmakappe dutiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम-कल्प मधील हा दुसरा काण्ड समाप्त झाला. Tatiyakaṇḍa तृतीय काण्ड 161, 244. Tumha’mhehi [Pg.101] namākaṃ. १६१, २४४. 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' यांच्यानंतर 'नं' प्रत्ययाचा 'आकं' होतो. Tehi tumhaamhehi naṃvacanassa ākaṃ hoti. त्या 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' या प्रातिपदिकांनंतर 'नं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'आकं' असा आदेश होतो. Tumhākaṃ, amhākaṃ. तुम्हाकं, अम्हाकं. Namiti kimatthaṃ? Tumhehi, amhehi. 'नं' (असे) कशासाठी म्हटले आहे? 'तुम्हेहि', 'अम्हेहि' (येथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). 162, 237. Vā yvappaṭhamo. १६२, २३७. प्रथमेव्यतिरिक्त असलेल्या 'यो' प्रत्ययाचा पर्याय करून 'आकं' होतो. Tehi tumhaamhehi yo appaṭhamo ākaṃhoti vā. त्या 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' यांच्यानंतर प्रथमेव्यतिरिक्त असलेला 'यो' प्रत्यय पर्याय करून 'आकं' होतो. Tumhākaṃ passāmi, tumhe passāmi vā. Amhākaṃ passasi, amhe passasi vā. तुम्हाकं पस्सामि (मी तुम्हा सर्वांना पाहतो), किंवा तुम्हे पस्सामि. अम्हाकं पस्ससि (तू आम्हा सर्वांना पाहतोस), किंवा अम्हे पस्ससि. Yoti kimatthaṃ? Tumhehi, amhehi. 'यो' (असे) कशासाठी म्हटले आहे? 'तुम्हेहि', 'अम्हेहि' (येथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Appaṭhamoti kimatthaṃ? Gacchatha tumhe, gacchāma mayaṃ. 'प्रथमेतर' (अप्पठमो - जो पहिली विभक्ती नाही) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'गच्छथ तुम्हे' (तुम्ही जा), 'गच्छाम मयं' (आम्ही जातो) (येथे प्रथमेचा 'यो' असल्याने हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Vātivikappanatthena yonaṃ aṃ ānaṃ honti. Tumhaṃ tumhānaṃ. Amhaṃ, amhānaṃ. 'वा' या वैकल्पिक अर्थ दर्शवणाऱ्या शब्दाने 'यो' प्रत्ययाचे 'अं' किंवा 'आनं' होतात. उदा. तुम्हं, तुम्हानं; अम्हं, अम्हानं. 163, 240. Sassaṃ. १६३, २४०. 'स' प्रत्ययाचा 'अं' होतो. Tehi humhaamhehi sassa vibhattissa aṃ ādeso hoti vā. त्या 'तुम्ह' आणि 'अम्ह' यांच्यानंतर 'स' विभक्ती प्रत्ययाचा पर्याय करून 'अं' आदेश होतो. Tumhaṃ dīyate, tava dīyate. Tumhaṃ pariggaho, tava pariggaho. Amhaṃ dīyate, mama dīyate. Amhaṃ pariggaho, mama pariggaho. तुम्हं दीयते (तुला दिले जाते), तव दीयते. तुम्हं परिग्गहो (तुझा स्वीकार), तव परिग्गहो. अम्हं दीयते (मला दिले जाते), मम दीयते. अम्हं परिग्गहो (माझा स्वीकार), मम परिग्गहो. Sasseti [Pg.102] kimatthaṃ? Tumhesu, amhesu. 'स' (असे) कशासाठी म्हटले आहे? 'तुम्हेसु', 'अम्हेसु' (येथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). 164, 200. Sabbanāma’kārate paṭhamo. १६४, २००. सर्वनामांच्या 'अ' कारानंतर येणाऱ्या पहिल्या 'यो' प्रत्ययाचा 'ए' होतो. Sabbesaṃ sabbanāmānaṃ akārato yo paṭhamo ettamāpajjate. सर्व सर्वनामांच्या 'अ' कारानंतर येणाऱ्या पहिल्या 'यो' (प्रथमेचा बहुवचन प्रत्यय) चे 'ए' कारात रूपांतर होते. Sabbe, ye, te, ke, tumhe, amhe, ime. सब्बे, ye, ते, के, तुम्हे, अम्हे, इमे. Sabbanāmāti kimatthaṃ? Devā, asurā, nāgā, gandhabbā, manussā. 'सर्वनाम' (असे) कशासाठी म्हटले आहे? 'देवा', 'असुरा', 'नागा', 'गन्धब्बा', 'मनुस्सा' (येथे सर्वनाम नसल्याने हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Akāratoti kimatthaṃ? Amū purisā tiṭṭhanti. 'अ' कारानंतर (अकारतो) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'अमू पुरिसा तिट्ठन्ति' (येथे 'अमू' च्या शेवटी 'अ' नसल्याने हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Yoti kimatthaṃ? Sabbo, yo, so, ko, ayaṃ. 'यो' (असे) कशासाठी म्हटले आहे? 'सब्बो', 'यो', 'सो', 'को', 'अयं' (येथे 'यो' प्रत्यय नसल्याने हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Paṭhamaggahaṇaṃ uttarasuttatthaṃ. 'पठम' (पहिली विभक्ती) चे ग्रहण पुढील सूत्रात अनुवृत्तीसाठी आहे. 165, 208. Dvandaṭṭhā vā. १६५, २०८. द्वंद्व समासात पर्याय करून (पहिल्या 'यो' चा 'ए' होतो). Tasmā sabbanāma’kārato dvandaṭṭhā yo paṭhamo ettamāpajjate vā. त्यामुळे, सर्वनामांच्या 'अ' कारानंतर द्वंद्व समासात असलेल्या पहिल्या 'यो' चे पर्याय करून 'ए' कारात रूपांतर होते. Katarakatame, katarakatamā vā. कतरकतमे, किंवा कतरकतमा. Sabbanāmāti kimatthaṃ? Devāsuranāga gandhabbamanussā. 'सर्वनाम' (असे) कशासाठी म्हटले आहे? 'देवासुरनागगन्धब्बमनुस्सा' (येथे सर्वनाम नसल्याने हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Dvandaṭṭhāti kimatthaṃ te, sabbe. 'द्वंद्व समासात' (द्वन्दट्ठा) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'ते', 'सब्बे' (येथे द्वंद्व समास नसल्याने हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). 166, 209. Nāññaṃ [Pg.103] sabbanāmikaṃ. १६६, २०९. द्वंद्व समासात इतर कोणतेही सर्वनामिक कार्य होत नाही. Sabbanāmikānaṃ dvandaṭṭhe nāññaṃ kāriyaṃ hoti, सर्वनामांच्या द्वंद्व समासात (प्रथमेच्या 'यो' च्या 'ए' आदेशाव्यतिरिक्त) इतर कोणतेही सर्वनामिक कार्य होत नाही. Pubbāparānaṃ, pubbuttarānaṃ, adharuttarānaṃ. पुब्बापरानं, पुब्बुत्तरानं, अधरुत्तरानं. 167, 210. Bahubbīhimhi ca. १६७, २१०. आणि बहुव्रीहि समासात देखील (इतर सर्वनामिक कार्य होत नाही). Bahubbīhimhi ca samāse sabbanāmavidhānañca nāññaṃ kāriyaṃ hoti. आणि बहुव्रीहि समासात देखील (प्रथमेच्या 'यो' च्या 'ए' आदेशाव्यतिरिक्त) इतर सर्वनामिक कार्य होत नाही. Piyapubbāya, piyapubbānaṃ, piyapubbe, piyapubbassa. पियपुब्बाय, पियपुब्बानं, पियपुब्बे, पियपुब्बस्स. Ceti kimatthaṃ? Sabbanāmavidhānaṃ hoti, dakkhiṇa pubbassaṃ, dakkhiṇapubbassā, uttarapubbassaṃ, uttarapubbassā. 'च' (आणि) असे कशासाठी म्हटले आहे? (काही ठिकाणी) सर्वनामिक कार्य होतेच, जसे की - दक्खिणपुब्बस्सं, दक्खिणपुब्बस्सा, उत्तरपुब्बस्सं, उत्तरपुब्बस्सा. 168, 203. Sabbato naṃ saṃ sānaṃ. १६८, २०३. सर्व सर्वनामांनंतर 'नं' प्रत्ययाचे 'सं' आणि 'सानं' होतात. Sabbato sabbanāmato naṃvacanassa saṃsānaṃiccete ādesā honti. सर्व सर्वनामांनंतर 'नं' विभक्ती प्रत्ययाचे 'सं' आणि 'सानं' हे आदेश होतात. Sabbesaṃ, sabbesānaṃ, sabbāsaṃ, sabbāsānaṃ. Yesaṃ, yesānaṃ, yāsaṃ, yāsānaṃ. Tesaṃ, tesānaṃ, tāsaṃ, tāsānaṃ. Kesaṃ, kesānaṃ, kāsaṃ, kāsānaṃ. Imesaṃ, imesānaṃ, imāsaṃ, imāsānaṃ. Amūsaṃ, amūsānaṃ. सब्बेसं, सब्बेसानं, सब्बासं, सब्बासानं। येसं, येसानं, यासं, यासानं। तेसं, तेसानं, तासं, तासानं। केसं, केसानं, कासं, कासानं। इमेसं, इमेसानं, इमासं, इमासानं। अमूसं, अमूसानं। Namiti kimatthaṃ? Sabbassa, yassa, tassa, kassa. Evaṃ sabbattha. 'नं' (असे) कशासाठी म्हटले आहे? 'सब्बस्स', 'यस्स', 'तस्स', 'कस्स' (येथे 'नं' प्रत्यय नसल्याने हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). सर्वत्र याचप्रमाणे समजावे. 169, 117. Rājassa [Pg.104] rāju sunaṃhisu ca. १६९, ११७. 'सु', 'नं' आणि 'हि' प्रत्यय मागे असताना 'राज' शब्दाचा 'राजु' होतो. Sabbasseva rājasaddassa rājuādeso hoti sunaṃhiiccetesu. 'सु', 'नं' आणि 'हि' हे प्रत्यय मागे असताना संपूर्ण 'राज' शब्दाचा 'राजु' असा आदेश होतो. Rājūsu, rājūnaṃ, rājūhi, rājūbhi. राजू सु, राजू नं, राजू हि, राजू भि. Sunaṃhisūti kimatthaṃ? Rājā. 'सु, नं, हि' (प्रत्यय) नंतर असताना असे का म्हटले आहे? 'राजा' (या रूपात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Caggahaṇamavadhāraṇatthaṃ. Rājesu, rājānaṃ, rājehi rājebhi. 'च' चे ग्रहण हे अवधारण (नियमन) करण्यासाठी आहे. (पर्यायी रूपे:) राजेसु, राजानं, राजेहि, राजेभि. 170, 220. Sabbassimasse vā. १७०, २२०. सर्व 'इम' प्रातिपदिकाचा 'ए' होतो, (सु, नं, हि प्रत्यय नंतर असताना) पर्यायाने. Sabbasseva imasaddassa ekāro hoti vā sunaṃhiiccetesu. सु, नं, हि हे प्रत्यय नंतर असताना, संपूर्ण 'इम' या शब्दाचा (प्रातिपदिकाचा) विकल्पे 'ए' कार होतो. Esu, imesu, esaṃ, imesaṃ, ehi, ebhi, imehi, imebhi. ए सु, इमे सु, ए सं, इमे सं, ए हि, ए भि, इमे हि, इमे भि. Imasseti kimatthaṃ? Etesu, etesaṃ, etehi, etebhi. 'इम' चे असे का म्हटले आहे? 'एतेसु', 'एतेसं', 'एतेहि', 'एतेभि' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 171, 219. Animi nāmhi ca. १७१, २१९. 'ना' प्रत्यय नंतर असताना, 'इम' चा 'अन' आणि 'इमि' होतो. Imasaddassa sabbasseva ana imiiccete ādesā honti nāmhi vibhattimhi. 'ना' विभक्ती प्रत्यय नंतर असताना, संपूर्ण 'इम' या शब्दाचे 'अन' आणि 'इमि' हे आदेश होतात. Anena dhammadānena. Sukhitā hotu sā pajā. अनेन धम्मदामेन। सुखिता होतु सा पजा। (या धम्मदानाने ती प्रजा सुखी होवो.) Iminā buddhapūjena, patvāna amataṃ padaṃ. इमिना बुद्धपूजेन, पत्वान अमतं पदं। (या बुद्धपूजेने अमृत पदाला [निर्वाणाला] प्राप्त करून.) Nāmhīti kimatthaṃ? Imesu, imesaṃ, imehi, imebhi. 'ना' प्रत्यय नंतर असताना असे का म्हटले आहे? 'इमेसु', 'इमेसं', 'इमेहि', 'इमेभि' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 172, 218. Anapuṃsakassā [Pg.105] yaṃ simhi. १७२, २१८. नपुंसकलिंगी नसलेल्या 'इम' शब्दाचा 'सि' प्रत्यय नंतर असताना 'अयं' होतो. Imasaddassa sabbasseva anapuṃsakassa ayaṃādeso hoti simhi vibhattimhi. 'सि' विभक्ती प्रत्यय नंतर असताना, नपुंसकलिंगी नसलेल्या संपूर्ण 'इम' शब्दाचा 'अयं' हा आदेश होतो. Ayaṃ puriso, ayaṃ itthī. अयं पुरिसो (हा पुरुष), अयं इत्थी (ही स्त्री). Anapuṃsakasseti kimatthaṃ? Idaṃ cittaṃ tiṭṭhati. 'नपुंसकलिंगी नसलेल्या' असे का म्हटले आहे? 'इदं चित्तं तिट्ठति' (हे चित्त राहते) या नपुंसकलिंगी उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Simhiti kimatthaṃ? Imaṃ purisaṃ passasi tvaṃ. 'सि' प्रत्यय नंतर असताना असे का म्हटले आहे? 'इमं पुरिसं पस्ससि त्वं' (तू या पुरुषाला पाहतोस) या उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 173, 223. Amussa mo saṃ. १७३, २२३. नपुंसकलिंगी नसलेल्या 'अमु' शब्दाच्या 'म' चा 'स' होतो, 'सि' प्रत्यय नंतर असताना. Amusaddassa anapuṃsakassa makāro sakāramāpajjate vā simhi vibhattimhi. 'सि' विभक्ती प्रत्यय नंतर असताना, नपुंसकलिंगी नसलेल्या 'अमु' शब्दातील 'म' काराचा विकल्पे 'स' कार होतो. Asu rājā, asu itthī, amuko rājā, amukā itthī. असु राजा, असु इत्थी, अमुको राजा, अमुका इत्थी. Anapuṃsakasseti kimatthaṃ? Aduṃ pupphaṃ virocati. 'नपुंसकलिंगी नसलेल्या' असे का म्हटले आहे? 'अदुं पुप्फं विरोचति' (ते फूल शोभते) या नपुंसकलिंगी उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Amusseti kimatthaṃ? Ayaṃ puriso tiṭṭhati. 'अमु' चे असे का म्हटले आहे? 'अयं पुरिसो तिट्ठति' (हा पुरुष उभा आहे) या उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Simhiti kimatthaṃ? Amhaṃ purisaṃ passasi. 'सि' प्रत्यय नंतर असताना असे का म्हटले आहे? 'अम्हं पुरिसं पस्ससि' (तू आमच्या पुरुषाला पाहतोस) या उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 174, 211. Etatesaṃ to. १७४, २११. 'एत' आणि 'त' यांच्या 'त' चा 'स' होतो, 'सि' प्रत्यय नंतर असताना. Eta taiccetesaṃ anapuṃsakānaṃ takāro sakāramāpajjate simhi vibhattimhi. 'सि' विभक्ती प्रत्यय नंतर असताना, नपुंसकलिंगी नसलेल्या 'एत' आणि 'त' या शब्दांमधील 'त' काराचा 'स' कार होतो. Eso puriso, esā itthī, so puriso, sā itthī. एसो पुरिसो (तो पुरुष), एसा इत्थी (ती स्त्री), सो पुरिसो (तो पुरुष), सा इत्थी (ती स्त्री). Etatesamiti [Pg.106] kimatthaṃ? Itaro puriso, itarā itthī. 'एत आणि त' यांचे असे का म्हटले आहे? 'इतरो पुरिसो' (इतर पुरुष), 'इतरा इत्थी' (इतर स्त्री) इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Anapuṃsakānamiti kimatthaṃ? Etaṃ cittaṃ, etaṃ rūpaṃ. Taṃ cittaṃ, taṃ rūpaṃ. 'नपुंसकलिंगी नसलेल्या' असे का म्हटले आहे? 'एतं चित्तं' (ते चित्त), 'एतं रूपं' (ते रूप), 'तं चित्तं', 'तं रूपं' या नपुंसकलिंगी उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 157, 212. Tassa vā nattaṃ sabbattha. १५७, २१२. सर्व लिंगांमध्ये, 'त' सर्वनामाच्या 'त' काराचा विकल्पे 'न' कार होतो. Tassa sabbanāmassa takārassa nattaṃ hoti vā sabbattha liṅgesu. सर्व लिंगांमध्ये, 'त' या सर्वनामाच्या 'त' काराचा विकल्पे 'न' कार होतो. Nāya, tāya, naṃ, taṃ, ne, te, nesu, tesu, namhi, tamhi, nāhi, tāhi, nābhi, tābhi. नाय, ताय, नं, तं, ने, ते, नेसु, तेसु, नम्हि, तम्हि, नाहि, ताहि, नाभि, ताभि. 176, 213. Sasmāsmiṃsaṃsāsvattaṃ. १७६, २१३. स, स्मा, स्मिं, सं, सा हे प्रत्यय नंतर असताना, 'त' सर्वनामाचा विकल्पे 'अ' होतो. Tassa sabbanāmassa takārassa sabbasseva attaṃ hoti vā sasmāsmiṃ saṃsāiccetesu sabbattha liṅgesu. सर्व लिंगांमध्ये, स, स्मा, स्मिं, सं, सा हे प्रत्यय नंतर असताना, 'त' या सर्वनामाच्या संपूर्ण 'त' काराचा विकल्पे 'अ' कार होतो. Assa, tassa, asmā, tasmā, asmiṃ, tasmiṃ, assaṃ, tassaṃ, assā, tassā. अस्स, तस्स, अस्मा, तस्मा, अस्मिं, तस्मिं, अस्सं, तस्सं, अस्सा, तस्सा. Takārasseti kimatthaṃ? Amussaṃ, amussā. 'त' काराचा असे का म्हटले आहे? 'अमुस्सं' आणि 'अमुस्सा' या उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Etesvīti kimatthaṃ? Nesu, tesu. हे प्रत्यय नंतर असताना असे का म्हटले आहे? 'नेसु' आणि 'तेसु' या उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 177, 221. Imasaddassa ca. १७७, २२१. आणि 'इम' शब्दाचाही. Imasaddassa ca sabbasseva attaṃ hoti vā sasmāsmiṃ saṃ sāiccetesu sabbattha liṅgesu. सर्व लिंगांमध्ये, स, स्मा, स्मिं, सं, सा हे प्रत्यय नंतर असताना, 'इम' या शब्दाचा संपूर्ण विकल्पे 'अ' कार होतो. Assa[Pg.107], imassa, asmā, imasmā, asmiṃ, imasmiṃ, assaṃ, imissaṃ, assā, imissā. अस्स, इमस्स, अस्मा, इमस्मा, अस्मिं, इमस्मिं, अस्सं, इमिस्सं, अस्सा, इमिस्सा. Imasaddasseti kimatthaṃ? Etissaṃ, etissā. 'इम' शब्दाचे असे का म्हटले आहे? 'एतिस्सं' आणि 'एतिस्सा' या उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 178, 22. Sabbato ko. १७८, २२. सर्वनामांनंतर 'क' चा आगम होतो. Sabbato sabbanāmato kakārāgamo hoti vā simhi vibhattimhi. सर्व सर्वनामांनंतर 'सि' विभक्ती प्रत्यय असताना विकल्पे करून 'क' (kakāra) वर्णाचा आगम होतो. Sabbako, yako, sako, amuko, asuko. सब्बको, yako, sako, amuko, asuko. Vāti kimatthaṃ? Sabbo, yo, so, ko. 'वा' (विकल्पे करून) असे कशासाठी म्हटले आहे? सब्बो, यो, सो, को (यांसारखी रूपे देखील सिद्ध व्हावीत म्हणून). Sabbanāmatoti kimatthaṃ? Puriso. 'सब्बनामतो' (सर्वनामांनंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? पुरिसो (यांसारख्या सर्वनाम नसलेल्या शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Puna sabbatoggahaṇena aññasmāpi kakārāgamo hoti, hīnako, potako. पुन्हा 'सब्बतो' चे ग्रहण केल्यामुळे इतर शब्दांनंतरही 'क' वर्णाचा आगम होतो; जसे की - हीनको, पोतको. 179, 204. Yapato smiṃsānaṃ saṃsā. १७९, २०४. 'य' आणि 'प' संज्ञक अंगानंतर 'स्मिं' आणि 'स' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'सं' आणि 'सा' आदेश होतात. Sabbato sabbanāmato ghapasaññato smiṃsaiccetesaṃ saṃsā ādesā honti vā yathāsaṅkhyaṃ. सर्व सर्वनामांनंतर, ज्यांना 'घ' आणि 'प' संज्ञा आहे, 'स्मिं' आणि 'स' या प्रत्ययांच्या जागी विकल्पे करून अनुक्रमे 'सं' आणि 'सा' हे आदेश होतात. Sabbassaṃ, sabbassā, sabbāyaṃ, sabbāya, imissaṃ, imissā, imāyaṃ, imāya, amussaṃ, amussā, amuyaṃ, amuyā. सब्बस्सं, सब्बस्सा, सब्बायं, सब्बाय, इमिस्सं, इमिस्सा, इमायं, इमाय, अमुस्सं, अमुस्सा, अमुयं, अमुया. Sabbanāmatoti kimatthaṃ? Itthiyaṃ, itthiyā. 'सब्बनामतो' (सर्वनामांनंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? इत्थियं, इत्थिया (यांसारख्या सर्वनाम नसलेल्या शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Smiṃsānamiti kimatthaṃ? Amuyo. 'स्मिंसानां' ('स्मिं' आणि 'स' प्रत्ययांचे) असे कशासाठी म्हटले आहे? अमुयो (यांसारख्या 'स्मिं' आणि 'स' प्रत्यय नसलेल्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). 180, 207. Netāhi [Pg.108] smimāya yā. १८०, २०७. या सर्वनामांनंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'आय' किंवा 'या' आदेश होत नाही. Etehi sabbanāmehi ghapasaññehi smiṃvacanassa neva āya yāādesā honti. या 'घ' आणि 'प' संज्ञा असलेल्या सर्वनामांनंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचे 'आय' किंवा 'या' हे आदेश मुळीच होत नाहीत. Etissaṃ, etāyaṃ, imissaṃ, imāyaṃ, amussaṃ, amuyaṃ. एतिस्सं, एतायं, इमिस्सं, इमायं, अमुस्सं, अमुयं. Smiṃnti kimatthaṃ? Tāya itthiyā mukhaṃ. 'स्मिं' असे कशासाठी म्हटले आहे? ताय इत्थिया मुखं (त्या स्त्रीचे मुख - येथे 'स्मिं' प्रत्यय नसल्यामुळे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Etāhīti kimatthaṃ? Kaññāya, vīṇāya, gaṅgāya, kapālikāya. 'एताहि' (या सर्वनामांनंतर) असे कशासाठी म्हटले आहे? कञ्ञाय, वीणाय, गङ्गाय, कपालिकाय (यांसारख्या सर्वनाम नसलेल्या शब्दांनंतर हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). 181, 95. Manogaṇādito smiṃnānamiā. १८१, ९५. 'मनो' इत्यादी गणातील शब्दांनंतर 'स्मिं' आणि 'ना' प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'इ' आणि 'आ' आदेश होतात. Tasmā manogaṇādito smiṃnāiccetesaṃ ikāraākārādesā honti vā yathāsaṅkhyaṃ. त्यामुळे, 'मनो' इत्यादी गणातील शब्दांनंतर 'स्मिं' आणि 'ना' या प्रत्ययांच्या जागी विकल्पे करून अनुक्रमे इ-कार आणि आ-कार हे आदेश होतात. Manasi, manusmiṃ, sirasi, sirasmiṃ, manasā, manena, vacasā, vacena, sirasā, sirena, sarasā, sarena, tapasā, tapena, vayasā, vayena, yasasā, yasena, tejasā, tejena, urasā, urena, thāmasā, thāmena. मनसि, मनुस्मिं, सिरसि, sirasmiṃ, मनसा, मनेन, वचसा, वचेन, सिरसा, सिरेण, सरसा, सरेण, तपसा, तपेन, वयसा, वयेन, यससा, यसेन, तेजसा, तेजेन, उरसा, उरेण, थामसा, थामेन. Smiṃnānamiti kimatthaṃ? Mano, siro, tamo, tapo, tejo. 'स्मिंनानं' ('स्मिं' आणि 'ना' प्रत्ययांचे) असे कशासाठी म्हटले आहे? मनो, सिरो, तमो, तपो, तेजो (यांसारख्या 'स्मिं' आणि 'ना' प्रत्यय नसलेल्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Ādiggahaṇena aññāsmāpi smiṃnānaṃ ikāraākārādesā honti, bilasi, bilasā, padasi, padasā. 'आदि' चे ग्रहण केल्यामुळे इतर शब्दांनंतरही 'स्मिं' आणि 'ना' प्रत्ययांचे 'इ' आणि 'आ' हे आदेश होतात; जसे की - बिलसि, बिलसा, पदसि, पदसा. 182, 97. Sassa [Pg.109] co. १८२, ९७. आणि 'स' प्रत्ययाचा 'ओ' आदेश देखील होतो. Tasmā manogaṇādito sassa ca okāro hoti. त्यामुळे, 'मनो' इत्यादी गणातील शब्दांनंतर 'स' प्रत्ययाचा 'ओ' (okāra) आदेश होतो. Manaso, thāmaso, tapaso. मनसो, थामसो, तपसो. 183, 48. Etesamo lope. १८३, ४८. विभक्ती प्रत्ययाचा लोप झाल्यावर या ('मनो' इत्यादी) शब्दांच्या अंत्य स्वराचा 'ओ' होतो. Etesaṃ manogaṇādīnaṃ anto ottamāpajjate vibhattilope kate. विभक्ती प्रत्ययाचा लोप केला असता, या 'मनो' इत्यादी गणातील शब्दांचा अंत्य स्वर 'ओ' (ottama) भावाला प्राप्त होतो. Manomayaṃ, ayomayaṃ, tejosamena, tapoguṇena, siroruhena. मनोमयं, अयोमयं, तेजोसमेन, तपगुणेन, सिरोरुहेन. Ādiggahaṇaṃkimatthaṃ? Aññesamanto ottamāpajjate. Āposamena, vāyosamena. 'आदि' चे ग्रहण कशासाठी आहे? इतर शब्दांचा अंत्य स्वरही 'ओ' भावाला प्राप्त व्हावा म्हणून; जसे की - आपोसमेन, वायोसमेन. Lopeti kimatthaṃ? Padayā, tapasā, yasasā, vacasā, manasā, evamaññepi yojetabbā. 'लोपे' (लोप झाल्यावर) असे कशासाठी म्हटले आहे? पदया, तपसा, यससा, वचसा, मनसा (यांसारख्या विभक्ती प्रत्ययाचा लोप न झालेल्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून); इतर ठिकाणीही याचप्रमाणे योजना करावी. 184, 96. Sa sare vāgamo. १८४, ९६. स्वर पुढे असताना 'स' चा विकल्पे करून आगम होतो. Eteheva manogaṇādīhi vibhattādese sare pare sakārāgamo hoti vā. या 'मनो' इत्यादी गणांनंतर विभक्तीच्या आदेशरूप स्वर पुढे असताना, 'स्' चा आगम विकल्पेकरून होतो. Manasā, vacasā, manasi, vacasi. मनसा, वचसा, मनसि, वचसि. Vāti kimatthaṃ? Manena, tejena, vasena, 'वा' (विकल्पेकरून) असे कशासाठी म्हटले आहे? मनेन, तेजेन, वसेन (इत्यादी रूपांच्या सिद्धीसाठी). Sareti [Pg.110] kimatthaṃ? Mano, tejo, yaso. 'सरे' (स्वर पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? मनो, तेजो, यसो (इत्यादींमध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी). Puna ādiggahaṇena aññasmimpi paccaye pare sakārāgamo hoti. Mānasikaṃ, vācasikaṃ. पुन्हा 'आदि' शब्दाच्या ग्रहणाने, इतर प्रत्यय पुढे असतानाही 'स्' चा आगम होतो. जसे की - मानसिकं, वाचसिकं. 185, 112. Santasaddassa so te bo cante. १८५, ११२. 'सन्त' शब्दाचा 'स' होतो, आणि 'त' च्या जागी 'भ' पुढे असताना शेवटी 'ब' चा आगम होतो. Sabbassa santasaddassa sakārādeso hoti bhakāre pare, ante ca bakārāgamo hoti. 'भ' कार पुढे असताना संपूर्ण 'सन्त' शब्दाच्या जागी 'स' हा आदेश होतो, आणि शेवटी 'ब' चा आगम होतो. Sabbhireva samāsetha, सब्भिरेव समासेथ, Sabbhikubbetha santhavaṃ. सब्भिकुब्बेथ सन्थवं। Sataṃ saddhammamaññāya, सत्पुरुषांचा सद्धम्म जाणून, Seyyo hoti na pāpiyo. कल्याणकारी (श्रेष्ठ) होते, वाईट नाही. Jīranti ve rājarathā sucittā. सुशोभित केलेले राजांचे रथ नक्कीच जीर्ण होतात. Atho sarīrampi jaraṃ upeti. तसेच हे शरीर देखील वृद्धत्वाप्रत (जरेप्रत) जाते. Satañca dhammo na jaraṃ upeti, परंतु सत्पुरुषांचा धम्म कधीही जीर्ण होत नाही (वृद्धत्वाप्रत जात नाही), Santo have sabbhi pavedayanti. सत्पुरुष नक्कीच सज्जनांना (या धम्माचा) उपदेश करतात. Sabbhūto, sabbhāvo. सब्भूतो, सब्भावो. Bheti kimatthaṃ? Santehi pūjito bhagavā. ‘भि’ (प्रत्यय) असताना असे का म्हटले आहे? ‘सन्तेहि पूजितो भगवा’ (सज्जनांद्वारे पूजिलेले भगवान) इत्यादी ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Caggahaṇaṃ kvaci sakārasseva pasiddhatthaṃ. Sakkāro, sakkato. ‘च’ चे ग्रहण काही ठिकाणी केवळ ‘स’ कार सिद्ध करण्यासाठी आहे, ‘ब’ साठी नाही. उदा. सक्कारो, सक्कतो. 196, 107. Simhigacchantādīnaṃ [Pg.111] ntasaddo aṃ. १९६, १०७. ‘सि’ प्रत्यय असताना ‘गच्छन्त’ इत्यादींच्या ‘न्त’ शब्दाचा ‘अं’ होतो. Simhi gacchantādīnaṃ ntasaddo amāpajjate vā. ‘सि’ प्रत्यय असताना ‘गच्छन्त’ इत्यादींच्या ‘न्त’ शब्दाचा विकल्पेकरून ‘अं’ होतो. Gacchaṃ, gacchanto, mahaṃ, mahanto, caraṃ, caranto, khādaṃ, khādanto. गच्छं, गच्छन्तो, महं, महान्तो, चरं, चरन्तो, खादं, खादन्तो. Gacchantādīnamiti kimatthaṃ? Anto, danto, vanto, santo. ‘गच्छन्त’ इत्यादींचे असे का म्हटले आहे? ‘अन्तो’, ‘दन्तो’, ‘वन्तो’, ‘सन्तो’ इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 187, 108. Sesesu ntuva. १८७, १०८. इतर प्रत्ययांमध्ये ‘न्तु’ प्रमाणे होते. Gacchantādīnaṃntasaddontuppaccayova daṭṭhabbo sesesu vibhattippaccayesu. इतर विभक्ती प्रत्यय मागे असताना ‘गच्छन्त’ इत्यादींच्या ‘न्त’ शब्दाला ‘न्तु’ प्रत्ययाप्रमाणेच मानले पाहिजे. Gacchato, mahato, gacchati, mahati, gacchatā, mahatā. गच्छतो, महतो, गच्छति, महति, गच्छता, महता. Sesesūti kimatthaṃ? Gacchaṃ, mahaṃ, caraṃ, khādaṃ. ‘इतर प्रत्ययांमध्ये’ असे का म्हटले आहे? ‘गच्छं’, ‘महं’, ‘चरं’, ‘खादं’ इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 188, 115. Brahmatta sakha rājādito amānaṃ. १८८, ११५. ‘ब्रह्म’, ‘अत्त’, ‘सख’, ‘राज’ इत्यादींनंतर ‘अं’ चा ‘आनं’ होतो. Brahma atta sakha rājaiccevamādito aṃvacanassa ānaṃ hoti vā. ‘ब्रह्म’, ‘अत्त’, ‘सख’, ‘राज’ इत्यादींनंतर ‘अं’ या विभक्ती प्रत्ययाचा विकल्पेकरून ‘आनं’ होतो. Brahmānaṃ, brahmaṃ, attānaṃ, attaṃ, sakhānaṃ, sakhaṃ, rājānaṃ, rājaṃ. ब्रह्मानं, ब्रह्मं, अत्तानं, अत्तं, सखानं, सखं, राजानं, राजं. Amiti kimatthaṃ? Rājā. ‘अं’ असे का म्हटले आहे? ‘राजा’ इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 189, 113. Syā [Pg.112] ca. १८९, ११३. आणि ‘सि’ चा ‘आ’ होतो. Brahma atta sakha rājaiccevamādito sivacanassa ā ca hoti. ‘ब्रह्म’, ‘अत्त’, ‘सख’, ‘राज’ इत्यादींनंतर ‘सि’ या विभक्ती प्रत्ययाचा ‘आ’ देखील होतो. Brahmā, attā, sakhā, rājā, ātumā. ब्रह्मा, अत्ता, सखा, राजा, आतुमा. 190, 114. Yonamāno. १९०, ११४. ‘यो’ चा ‘आनो’ होतो. Brahmaatta sakha rājaiccevamādito yonaṃ ānoādeso hoti. ‘ब्रह्म’, ‘अत्त’, ‘सख’, ‘राज’ इत्यादींनंतर ‘यो’ प्रत्ययाचा ‘आनो’ हा आदेश होतो. Brahmāno, attāno, sakhāno, rājāno, ātumāno. ब्रह्मानो, अत्तानो, सखानो, राजानो, आतुमानो. 191, 130. Sakhato cāyo no. १९१, १३०. आणि ‘सख’ नंतर ‘यो’ चा ‘आयो’ आणि ‘नो’ होतो. Tasmā sakhato ca yonaṃ āyo no ādesā honti. त्यामुळे, ‘सख’ शब्दानंतर ‘यो’ प्रत्ययाचे ‘आयो’ आणि ‘नो’ हे आदेश होतात. Sakhāyo, sakhino. सखायो, सखिनो. Yonamiti kimatthaṃ? Sakhā. ‘यो’ चे असे का म्हटले आहे? ‘सखा’ इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 192, 135. Smime. १९२, १३५. ‘स्मिं’ चा ‘ए’ होतो. Tasmā sakhato smiṃvacanassa ekāro hoti. Sakhe. त्यामुळे, ‘सख’ शब्दानंतर ‘स्मिं’ या विभक्ती प्रत्ययाचा ‘ए’ कार होतो. उदा. सखे. 193, 122. Brahmato [Pg.113] gassa ca. १९३, १२२. आणि ‘ब्रह्म’ नंतर ‘ग’ चा ‘ए’ होतो. Tasmā brahmato gassa ca ekāro hoti. He brahme. त्यामुळे, ‘ब्रह्म’ शब्दानंतर ‘ग’ (संबोधन ‘सि’) प्रत्ययाचा ‘ए’ कार होतो. उदा. हे ब्रह्मे. 194, 131. Sakhantassi no nā naṃ sesu. १९४, १३१. ‘नो’, ‘ना’, ‘नं’ आणि ‘स’ प्रत्यय मागे असताना ‘सख’ च्या अन्त्य स्वराचा ‘इ’ होतो. Tassa sakhantassa ikāro hoti nonānaṃsaiccetesu. ‘नो’, ‘ना’, ‘नं’ आणि ‘स’ हे प्रत्यय मागे असताना त्या ‘सख’ च्या अन्त्य स्वराचा ‘इ’ कार होतो. Sakhino, sakhinā, sakhīnaṃ, sakhissa. सखिनो, सखिना, सखीनं, सखिस्स. Etesvīti kimatthaṃ? Sakhārehi. ‘या प्रत्ययांमध्ये’ असे का म्हटले आहे? ‘सखारेहि’ इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 195, 134. Āro himhi vā. १९५, १३४. ‘हि’ प्रत्यय असताना विकल्पेकरून ‘आर’ होतो. Tassa sakhantassa āro hoti vā himhi vibhattimhi. Sakhārehi, sakhehi. ‘हि’ विभक्ती प्रत्यय मागे असताना त्या ‘सख’ च्या अन्त्य स्वराचा विकल्पेकरून ‘आर’ होतो. उदा. सखारेहि, सखेहि. 196, 133. Sunamaṃsu vā. १९६, १३३. 'सु', 'नम्' आणि 'अं' पुढे असताना (सख शब्दाच्या अंत्य स्वराचा 'आर' होतो विकल्पेकरून). Tassa sakhantassa āro hoti vā sunaṃ aṃiccetesu. त्या 'सख' शब्दाच्या अंत्य स्वराचा 'सु', 'नम्' आणि 'अं' हे प्रत्यय पुढे असताना विकल्पेकरून 'आर' होतो. Sakhāresu, sakhesu, sakhārānaṃ, sakhīnaṃ, sakhāraṃ, sakhaṃ. sakhāresu, sakhesu, sakhārānaṃ, sakhīnaṃ, sakhāraṃ, sakhaṃ. 197, 125. Brahmato tu smiṃ ni. १९७, १२५. 'ब्रह्म' शब्दानंतर 'स्मिं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'नि' होतो. Tasmā brahmato smiṃvacanassa niādeso hoti. Brahmani. त्यामुळे, 'ब्रह्म' शब्दानंतर 'स्मिं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'नि' हा आदेश होतो. जसे की - ब्रह्मनि. Tuggahaṇena [Pg.114] abrahmatopi smiṃ vacanassa ni hoti. Kammani, cammani, muddhani. 'तु' च्या ग्रहणाने, 'ब्रह्म' व्यतिरिक्त इतर शब्दांनंतरही 'स्मिं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'नि' होतो. जसे की - कम्मनि, चम्मनि, मुद्धनि. 198, 123. Uttaṃ sanāsu. १९८, १२३. 'स' आणि 'ना' पुढे असताना (ब्रह्म शब्दाच्या अंत्य स्वराचा 'उ' होतो). Tassa brahmasaddassa anto uttamāpajjate sanāiccetesu. त्या 'ब्रह्म' शब्दाचा अंत्य स्वर 'स' आणि 'ना' हे प्रत्यय पुढे असताना 'उ' कारत्व प्राप्त करतो (म्हणजेच 'उ' होतो). Brahmuno, brahmunā. ब्रह्मुनो, ब्रह्मुना. Sanāsūti kimatthaṃ? Brahmā. 'सनासु' (स आणि ना पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? ब्रह्मा (यामध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी). 199, 158. Satthupitādīnamā sismiṃsilopoca. १९९, १५८. 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या अंत्य स्वराचा 'सि' प्रत्यय पुढे असताना 'आ' होतो आणि 'सि' चा लोपही होतो. Satthupituādīnamanto attamāpajjate sismiṃ, silopo ca hoti. 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांचा अंत्य स्वर 'सि' प्रत्यय पुढे असताना 'आ' कारत्व प्राप्त करतो (म्हणजेच 'आ' होतो) आणि 'सि' चा लोपही होतो. Satthā, pitā, mātā, bhātā, kattā. सत्था, पिता, माता, भाता, कत्ता. Sisminti kimatthaṃ? Satthussa, pitussa, mātussa, bhātussa, kattussa. 'सिस्मिं' (सि पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? सत्थुस्स, पितुस्स, मातुस्स, भातुस्स, कत्तुस्स (यामध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी). 200, 159. Aññesvārattaṃ. २००, १५९. इतर विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना (सत्थु, पितु इत्यादींच्या अंत्य स्वराचा) 'आर' होतो. Satthupituādīnamanto aññesu vacanesu ārattamāpajjate. इतर विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना, 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांचा अंत्य स्वर 'आर' कारत्व प्राप्त करतो (म्हणजेच 'आर' होतो). Satthāraṃ, pitaraṃ, mātaraṃ, bhātaraṃ, kattāraṃ, satthārehi, pitarehi, mātarehi, bhātarehi, kattārehi. सत्थारं, पितरं, मातरं, भातरं, कत्तारं, सत्थारेहि, पितरेहि, मातरेहि, भातरेहि, कत्तारेहि. Aññesvīti [Pg.115] kimatthaṃ? Satthā, pitā, mātā, bhātā, kattā. 'अञ्ञेsu' (इतर प्रत्यय पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? सत्था, पिता, माता, भाता, कत्ता (यामध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी). 201, 163. Vā naṃmhi. २०१, १६३. 'णं' प्रत्यय पुढे असताना विकल्पेकरून (सत्थु, पितु इत्यादींच्या अंत्य स्वराचा 'आर' होतो). Satthupituādīnamanto ārattamāpajjate vā naṃmhi vibhattimhi. 'णं' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना, 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांचा अंत्य स्वर विकल्पेकरून 'आर' कारत्व प्राप्त करतो (म्हणजेच 'आर' होतो). Satthārānaṃ, pitarānaṃ, mātarānaṃ, bhātarānaṃ. सत्थारानं, पितरानं, मातारानं, भातारानं. Vāti kimatthaṃ? Satthānaṃ, pitūnaṃ, mātūnaṃ, bhātūnaṃ. 'वा' (विकल्पेकरून) असे कशासाठी म्हटले आहे? सत्थानं, पितूनं, मातूंन, भातूनं (यामध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी). 202, 164. Satthunattañca. २०२, १६४. आणि 'सत्थु' शब्दाच्या अंत्य स्वराचा 'अ' होतो (विकल्पेकरून, 'णं' प्रत्यय पुढे असताना). Tassa satthusaddassa anto attamāpajjate vā naṃmhi vibhattimhi. त्या 'सत्थु' शब्दाचा अंत्य स्वर 'णं' विभक्ती प्रत्यय पुढे असताना विकल्पेकरून 'अ' कारत्व प्राप्त करतो (म्हणजेच 'अ' होतो). Satthānaṃ, pitānaṃ, mātānaṃ, bhātānaṃ, kattānaṃ. सत्थानं, पितानं, मातानं, भातानं, कत्तानं. Vāti kimatthaṃ? Satthārānaṃ, pitarānaṃ, mātarānaṃ, bhātarānaṃ, dhītarānaṃ. 'वा' (विकल्पेकरून) असे कशासाठी म्हटले आहे? सत्थारानं, पितरानं, मातारानं, bhātarānaṃ, धीतारानं (यामध्ये हा नियम लागू न होण्यासाठी). Caggahaṇaṃ aññesampi saṅgahaṇatthaṃ. 'च' चे ग्रहण इतर शब्दांचाही समावेश करण्यासाठी आहे. 203, 162. Usasmiṃ salopo ca. २०३, १६२. 'स' प्रत्यय पुढे असताना (सत्थु, पितु इत्यादींच्या अंत्य स्वराचा) 'उ' होतो आणि 'स' चा लोपही होतो. Satthupituiccevamādīnamantassa uttaṃ hoti vā sasmiṃ, salopo ca. 'स' प्रत्यय पुढे असताना, 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या अंत्य स्वराचा विकल्पेकरून 'उ' होतो आणि 'स' चा लोपही होतो. Satthu[Pg.116], satthussa, satthuno dīyate, pariggaho vā. Pitu, pitussa, pituno dīyate, pariggaho vā. Bhātu, bhātussa, bhātuno dīyate, pariggaho vā. सत्थु, सत्थुस्स, सत्थुनो दीयते, परिग्गहो वा. पितु, पितुस्स, पितुनो दीयते, परिग्गहो वा. भातु, भातुस्स, भातुनो दीयते, परिग्गहो वा. Caggahaṇaṃ dutiyasampiṇḍanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण दुसऱ्या अर्थाच्या (म्हणजेच 'स' च्या लोपाच्या) जोडणीसाठी आहे. 204, 167. Sakkamandhātādīnañca. २०४, १६७. आणि 'सक्कमन्धातु' इत्यादी शब्दांच्या बाबतीतही (हाच नियम लागू होतो). Sakkamandhātuiccevamādīnamanto uttamāpajjate sasmiṃ, salopo ca hoti. 'स' प्रत्यय पुढे असताना, 'सक्कमन्धातु' इत्यादी शब्दांचा अंत्य स्वर 'उ' कारत्व प्राप्त करतो (म्हणजेच 'उ' होतो) आणि 'स' चा लोपही होतो. Sakkamandhātu iva assa rājino vibhavo. Evaṃ kattu, gantu, dātu iccevamādī. सक्कमन्धातु (sakkamandhātu) - या राजाचे वैभव सक्कमन्धातुसारखे आहे. याचप्रमाणे कत्तु, गन्तु, दातु इत्यादी रूपे होतात. Punārambhaggahaṇaṃ kimatthaṃ? Niccadīpanatthaṃ. Sakkamandhātu. पुन्हा नवीन सूत्र सुरू करण्याचे प्रयोजन काय? नित्यत्व दर्शवण्यासाठी (हा नियम नेहमी लागू होतो हे दाखवण्यासाठी). जसे की - सक्कमन्धातु. Caggahaṇaṃ dutiyasampiṇḍanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण दुसऱ्या अर्थाच्या (म्हणजेच 'स' च्या लोपाच्या) जोडणीसाठी आहे. 205, 160. Tato yonamo tu. २०५, १६०. त्यानंतर (म्हणजेच 'आर' आदेशानंतर) 'यो' प्रत्ययाचा 'ओ' होतो. Tato ārādesato sabbesaṃ yo naṃ okārādeso hoti. त्या 'आर' आदेशानंतर सर्व 'यो' प्रत्ययांच्या जागी 'ओ' हा आदेश होतो. Satthāro, pitaro, mātaro, bhātaro, kattāro, vattāro. सत्थारो, पितरो, मातरो, भातरो, कत्तारो, वत्तारो. Tuggahaṇena aññasmāpi yonaṃ okāro hoti. Caturo janā, gāvo, ubho purisā. 'तु' च्या ग्रहणाने, इतर शब्दांनंतरही 'यो' प्रत्ययाचा 'ओ' होतो. जसे की - चतुरो जना, गावो, उभो पुरिसा. 206, 165. Tato [Pg.117] smimi. २०६, १६५. त्यानंतर 'स्मिं' चा 'इ' होतो. Tato ārādesato smiṃvacanassa ikārādeso hoti. त्या 'आर' आदेशानंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'इ' कार आदेश होतो. Satthari, pitari, mātari, dhītari, bhātari, kattari, vattari. सत्थरि, पितरि, मातरि, धीतरि, भातरि, कत्तरि, वत्तरि. Puna tatogahaṇena aññasmāpi smiṃvacanassa ikāro hoti. Bhuvi. पुन्हा 'ततो' च्या ग्रहणाने इतर शब्दांनंतरही 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'इ' होतो. जसे की, 'भुवि'. 207, 161. Nā ā. २०७, १६१. 'ना' चा 'आ' होतो. Tato ārādesato nāvacanassa āādeso hoti. त्या 'आर' आदेशानंतर 'ना' प्रत्ययाचा 'आ' आदेश होतो. Satthārā, pitarā, mātarā, bhātarā, dhītarā, kattārā, vattārā. सत्थारा, पितरा, मातरा, भातरा, धीतरा, कत्तारा, वत्तारा. 208, 166. Āro rassamikāre. २०८, १६६. 'इ' कार नंतर असताना 'आर' चा र्हस्व होतो. Ārādeso rassamāpajjate ikāre pare. 'इ' कार नंतर असताना 'आर' आदेश र्हस्व होतो. Satthari, pitari, mātari, dhītari, kattari, vattari. सत्थरि, पितरि, मातरि, धीतरि, कत्तरि, वत्तरि. 209, 168. Pitādīnamasimhi. २०९, १६८. 'सि' शिवाय इतर प्रत्यय नंतर असताना 'पितु' इत्यादींचा (आर आदेश) र्हस्व होतो. Pitādīna mārādeso rassamāpajjate asimhi vibhattimhi. 'सि' विभक्ती व्यतिरिक्त इतर विभक्ती नंतर असताना 'पितु' इत्यादींचा 'आर' आदेश र्हस्व होतो. Pitarā, mātarā, bhātarā, mītarā pitaro, mātaro, bhātaro, dhītaro. पितरा, मातरा, भातरा, मीतरा, पितरो, मातरो, भातरो, धीतरो. Asimhiggahaṇaṃ [Pg.118] tomhi pare ikārādesañāpanatthaṃ. Mātito, pitito, bhātito, duhitito. 'असिं' (सि व्यतिरिक्त) चे ग्रहण 'तो' प्रत्यय नंतर असताना 'इ' कार आदेश दर्शवण्यासाठी आहे. जसे की, मातितो, पितितो, भातितो, दुहितितो. 210, 239. Tayātayīnaṃ takāro tvattaṃ vā. २१०, २३९. 'तया' आणि 'तयि' मधील 'त' काराचा विकल्पे करून 'त्व' होतो. Tayātayi iccetesaṃ takāro tvattamāpajjate vā. 'तया' आणि 'तयि' यांच्या 'त' काराचा विकल्पे करून 'त्व' भाव होतो. Tvayā, tayā, tvayi, tayi. त्वया, तया, त्वयि, तयि. Etesamiti kimatthaṃ? Tuvaṃ, tavaṃ. 'यांच्या' (तया आणि तयि यांच्या) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'तुवं', 'तवं' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Iti nādhakappe tatiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम कल्पामधील तिसरा खंड समाप्त झाला. Catutthakaṇḍa चौथा खंड 211, 126. Attanto hismi’manattaṃ. २११, १२६. 'हि' प्रत्यय नंतर असताना 'अत्त' च्या अंताचा 'अन' होतो. Tassa attano anto anattamāpajjate himhi vibhattimhi. त्या 'अत्त' शब्दाचा अंत 'हि' विभक्ती नंतर असताना 'अन' भावाला प्राप्त होतो. Attanehi, attanebhi. अत्तनेहि, अत्तनेभि. Attantoti kimatthaṃ? Rājehi, rājebhi. 'अत्त चा अंत' असे कशासाठी म्हटले आहे? 'राजेहि', 'राजेभि' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Hisminti kimatthaṃ? Attano. 'हि' प्रत्यय नंतर असताना असे कशासाठी म्हटले आहे? 'अत्तनो' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Anattamitibhāvaniddesena attasaddassa sakādeso hoti sabbāsu vibhattīsu. Sako, sakā, sakaṃ, sake. 'अनत्त' या भावाच्या निर्देशामुळे सर्व विभक्तींमध्ये 'अत्त' शब्दाचा 'सक' आदेश होतो. जसे की, सको, सका, सकं, सके. 212, 329. Tato [Pg.119] smiṃni. २१२, ३२९. त्यानंतर 'स्मिं' चा 'नि' होतो. Tato attato smiṃvacanassa ni hoti. Attani. त्या 'अत्त' शब्दांनंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचा 'नि' होतो. जसे की, अत्तनि. 213, 127. Sassa no. २१३, १२७. 'स' चा 'नो' होतो. Tatoattato sassa vibhattissa no hoti, attano. त्या 'अत्त' शब्दांनंतर 'स' विभक्तीचा 'नो' होतो. जसे की, अत्तनो. 214, 128. Smā nā. २१४, १२८. 'स्मा' चा 'ना' होतो. Tato attato smā vacanassa nā hoti. Attanā. त्या 'अत्त' शब्दांनंतर 'स्मा' प्रत्ययाचा 'ना' होतो. जसे की, अत्तना. Puna tatogahaṇena tassa attano takārasseva rakāro hoti sabbesu vacanesu. Atrajo, atrajaṃ. पुन्हा 'ततो' च्या ग्रहणाने सर्व वचनांमध्ये त्या 'अत्त' च्या 'त' काराचाच 'र' कार होतो. जसे की, अत्रजो, अत्रजं. 215, 141. Jhalato ca. २१५, १४१. आणि 'झ' व 'ल' नंतरही ('स्मा' चा 'ना' होतो). Jhalaiccetehi smāvacanassa nā hoti. 'झ' आणि 'ल' यांच्यानंतर 'स्मा' प्रत्ययाचा 'ना' होतो. Agginā, daṇḍinā, bhikkhunā, sayambhunā. अग्गिना, दण्डिना, भिक्खुना, सयम्भुना. Smāti kimatthaṃ? Aggayo, munayo, isayo. 'स्मा' असे कशासाठी म्हटले आहे? 'अग्गयो', 'मुनयो', 'इसयो' इत्यादींमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 216, 180. Ghapato smiṃ yaṃ vā. २१६, १८०. 'घ' आणि 'प' नंतर 'स्मिं' चा विकल्पे करून 'यं' होतो. Tasmā ghapato smiṃ vacanassa yaṃ hoti vā. त्या 'घ' आणि 'प' नंतर 'स्मिं' प्रत्ययाचा विकल्पे करून 'यं' होतो. Kaññāyaṃ[Pg.120], kaññāya. Rattiyaṃ, rattiyā. Itthiyaṃ, itthiyā. Yāguyaṃ, yāguyā. Vakhuyaṃ, vadhuyā. कञ्ञायं, कञ्ञाय. रत्तियं, रत्तिया. इत्थियं, इत्थिया. यागुयं, यागुया. वधुयं, वधुया. 217, 199. Yonaṃ ni napuṃsakehi. २१७, १९९. नपुंसकलिंगी नामांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा 'नि' होतो. Sabbesaṃ yonaṃ ni hoti vā napuṃsakehi liṅgehi. नपुंसकलिंगी नामांनंतर सर्व 'यो' प्रत्ययांचा विकल्पेकरून (पर्यायी स्वरूपात) 'नि' होतो. Aṭṭhīni, aṭṭhī, āyūni, āyū. उदाहरणे: अठ्ठीनि (aṭṭhīni), अठ्ठी (aṭṭhī), आयूनि (āyūni), आयू (āyū). Napuṃsakehīti kimatthaṃ? Itthiyo. "नपुंसकलिंगी नामांनंतर" असे का म्हटले आहे? 'इत्थियो' (itthiyo) सारख्या नपुंसकलिंगी नसलेल्या नामांच्या बाबतीत हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 218, 196. Ato niccaṃ. २१८, १९६. 'अ' कारानंतर नेहमीच (नित्य). Akārantehi napuṃsakaliṅgehi yonaṃ ni hoti niccaṃ. 'अ' कारान्त नपुंसकलिंगी नामांनंतर 'यो' प्रत्ययाचा नेहमीच 'नि' होतो. Yāni, yāni. Tāni, tāni. Kāni, kāni. Bhayāni, bhayāni. Rūpāni, rūpāni. उदाहरणे: यानि यानि, तानि तानि, कानि कानि, भयानि भयानि, रूपानि रूपानि. 219, 196. Siṃ. २१९, १९६. 'सि' प्रत्ययाचा 'अं' होतो. Akārantehi napuṃsakaliṅgehi sivacanassa aṃ hoti niccaṃ. 'अ' कारान्त नपुंसकलिंगी नामांनंतर 'सि' विभक्ती प्रत्ययाचा नेहमीच 'अं' होतो. Sabbaṃ, yaṃ, taṃ, kaṃ, rūpaṃ. उदाहरणे: सब्बं (sabbaṃ), यं (yaṃ), तं (taṃ), कं (kaṃ), रूपं (rūpaṃ). 220, 74. Sesato lopaṃ pasipi. २२०, ७४. उर्वरित नामांनंतर 'ग' आणि 'सि' चा लोप होतो. Tato niddiṭṭhehi ligehi sesakhatā gasiiccete lopamāpajjante. त्या निर्दिष्ट लिंगांनंतर उर्वरित नामांमधील 'ग' आणि 'सि' या प्रत्ययांचा लोप होतो. Bhoti [Pg.121] itthi, sā itthī. Bho daṇḍi, so daṇḍī. Bho sattha, so satthā. Bho rāja, so rājā. Sesatoti kimatthaṃ? Puriso gacchati. उदाहरणे: भोति इत्थि (bhoti itthi), सा इत्थी (sā itthī); भो दण्डि (bho daṇḍi), सो दण्डी (so daṇḍī); भो सत्थ (bho sattha), सो सत्था (so satthā); भो राज (bho rāja), सो राजा (so rājā). "उर्वरित नामांनंतर" असे का म्हटले आहे? 'पुरिसो गच्छति' (puriso gacchati) सारख्या उर्वरित नसलेल्या नामांच्या बाबतीत हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Gasīti kimatthaṃ? Itthiyā, satthussa. "'ग' आणि 'सि'" असे का म्हटले आहे? 'इत्थिया' (itthiyā), 'सत्थुस्स' (satthussa) इत्यादींमध्ये जेथे 'ग' आणि 'सि' प्रत्यय नसतात, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 221, 282. Sabbāsamāvuso pasagganipātādīhi ca. २२१, २८२. 'आवुसो', उपसर्ग आणि निपात इत्यादींनंतर सर्व विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होतो. Sabbāsaṃ vibhattīnaṃ ekavacanabahuvacanānaṃ paṭhamā dutiyātatiyā catutthī pañcamī chaṭṭhī sattamīnaṃ lopo hoti, āvuso upasagga nipātaiccevamādīhi ca, 'आवुसो', उपसर्ग, निपात इत्यादींनंतर प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी आणि सप्तमी या सर्व एकवचनी व बहुवचनी विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होतो. Tvaṃ panāvuso, tumhe panāvuso, padaso dhammaṃ vāceyya, vihāraṃ sve upagaccheyya. उदाहरणे: त्वं पनावुसो (tvaṃ panāvuso), तुम्हे पनावुसो (tumhe panāvuso), पदसो धम्मं वाचेय्य (padaso dhammaṃ vāceyya), विहारं स्वे उपगच्छेय्य (vihāraṃ sve upagaccheyya). Pa, parā, ni, nī, u, du, saṃ, vi, ava, anu, pari, adhi, abhi, pati, su, ā, ati, api, apa, upa, pahāro, parābhavo, nihāro, nīhāro, uhāro, duhāro, saṃhāro, vihāro, avahāro, anuhāro, parihāro, adhihāro, abhihāro, patihāro, suhāro, āhāro, atihāro, apihāro, apahāro, upahāro, evaṃ vīsati upasaggehi ca. प (pa), परा (parā), नि (ni), नी (nī), उ (u), दु (du), सं (saṃ), वि (vi), अव (ava), अनु (anu), परि (pari), अधि (adhi), अभि (abhi), पति (pati), सु (su), आ (ā), अति (ati), अपि (api), अप (apa), उप (upa) - उदा. पहारो (pahāro), पराभवो (parābhavo), निहारो (nihāro), नीहारो (nīhāro), उहारो (uhāro), दुहारो (duhāro), संहारो (saṃhāro), विहारो (vihāro), अवहारो (avahāro), अनुहारो (anuhāro), परिहारो (parihāro), अधिहारो (adhihāro), अभिहारो (abhihāro), पतिहारो (patihāro), सुहारो (suhāro), आहारो (āhāro), अतिहारो (atihāro), अपिहारो (apihāro), अपहारो (apahāro), उपहारो (upahāro) - याप्रमाणे वीस उपसर्गांनंतर देखील (हा नियम लागू होतो). Yathā, tathā, evaṃ, khalu, kho, tatra, atho, atha, hi, tu ca, vā, vo, haṃ, abhaṃ, alaṃ, eva, ho aho, he[Pg.122], ahe, re, are, evamādīhi nipātehi ca yojetabbāni. यथा (yathā), तथा (tathā), एवं (evaṃ), खलु (khalu), खो (kho), तत्र (tatra), अथो (atho), अथ (atha), हि (hi), तु (tu), च (ca), वा (vā), वो (vo), हं (haṃ), अभं (abhaṃ), अलं (alaṃ), एव (eva), हो (ho), अहो (aho), हे (he), अहे (ahe), रे (re), अरे (are) इत्यादी निपातांसोबत देखील हे जोडले जावे. Caggahaṇama vadhāraṇatthaṃ. 'च' चा स्वीकार हा अवधारणार्थ (निश्चय किंवा भर देण्यासाठी) आहे. 222, 342. Pumassa liṅgādīsu samāsesu. २२२, ३४२. समासामध्ये 'लिंग' इत्यादी उत्तरपद असताना 'पुम' शब्दाच्या अन्त्य स्वराचा लोप होतो. Pumaiccetassa anto lopamāpajjate liṅgādīsu parapadesu samāsesu. समासामध्ये 'लिंग' इत्यादी उत्तरपदे असताना 'पुम' या शब्दाच्या अन्त्य स्वराचा लोप होतो. Pulliṅgaṃ, pumbhāvo, puṅkokilo. उदाहरणे: पुल्लिंगं (pulliṅgaṃ), पुम्भावो (pumbhāvo), पुंकोकिलो (puṅkokilo). Pumasseti kimatthaṃ? Itthiliṅgaṃ, napuṃsakaliṅgaṃ. "'पुम' शब्दाचा" असे का म्हटले आहे? 'इत्थिलिंगं' (itthiliṅgaṃ), 'नपुंसकलिंगं' (napuṃsakaliṅgaṃ) इत्यादींमध्ये जेथे 'पुम' शब्द नसतो, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Liṅgādīsūti kimatthaṃ? Pumitthī. "'लिंग' इत्यादी उत्तरपद असताना" असे का म्हटले आहे? 'पुमित्थी' (pumitthī) सारख्या शब्दांमध्ये जेथे 'लिंग' इत्यादी उत्तरपदे नसतात, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Samāsesūti kimatthaṃ? Pumassa liṅgaṃ. "समासामध्ये" असे का म्हटले आहे? 'पुमस्स लिंगं' (pumassa liṅgaṃ) सारख्या जेथे समास नसतो, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 223, 188. Aṃ yamīto pasaññato. २२३, १८८. 'प' संज्ञा असलेल्या 'ई' कारानंतर 'अं' प्रत्ययाचा 'यं' होतो. Aṃ vacanassa yaṃ hoti vā īto pasaññato. 'प' संज्ञा असलेल्या 'ई' कारानंतर 'अं' विभक्ती प्रत्ययाचा विकल्पेकरून 'यं' होतो. Itthiyaṃ, itthiṃ. उदाहरणे: इत्थियं (itthiyaṃ), इत्थिं (itthiṃ). Pasaññatoti kimatthaṃ? Daṇḍinaṃ, bhoginaṃ. "'प' संज्ञा असलेल्या" असे का म्हटले आहे? 'दण्डिनं' (daṇḍinaṃ), 'भोगिनं' (bhoginaṃ) इत्यादींमध्ये जेथे 'प' संज्ञा नसते, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Amiti kimatthaṃ? Itthīhi. "'अं' प्रत्ययाचा" असे का म्हटले आहे? 'इत्थीहि' (itthīhi) सारख्या जेथे 'अं' प्रत्यय नसतो, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 224, 153. Naṃ jhato katarassā. २२४, १५३. ऱ्हस्व केलेल्या 'झ' संज्ञक स्वरानंतर 'अं' प्रत्ययाचा 'नं' होतो. Tasmā jhato katarassā aṃ vacanassa naṃ hoti. म्हणून, ऱ्हस्व केलेल्या 'झ' संज्ञक स्वरानंतर 'अं' विभक्ती प्रत्ययाचा 'नं' होतो. Daṇḍinaṃ[Pg.123], bhoginaṃ. उदाहरणे: दण्डिनं (daṇḍinaṃ), भोगिनं (bhoginaṃ). Jhatoti kimatthaṃ? Vessabhuṃ. "'झ' संज्ञक स्वरानंतर" असे का म्हटले आहे? 'वेस्सभुं' (vessabhuṃ) सारख्या जेथे 'झ' संज्ञा नसते, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Katarassāti kimatthaṃ? Kucchiṃ. "ऱ्हस्व केलेल्या" असे का म्हटले आहे? 'कुच्छिं' (kucchiṃ) सारख्या जेथे ऱ्हस्व केलेला नसतो, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 225, 151. Yonaṃ no. २२५, १५१. 'यो' प्रत्ययाचा 'नो' होतो. Sabbesaṃ yonaṃ jhato katarassā no hoti. ऱ्हस्व केलेल्या 'झ' संज्ञक स्वरानंतर सर्व 'यो' प्रत्ययांचा 'नो' होतो. Daṇḍino bhogino, he daṇḍino, he bhogino. उदाहरणे: दण्डिनो (daṇḍino), भोगिनो (bhogino); हे दण्डिनो (he daṇḍino), हे भोगिनो (he bhogino). Katarassāti kimatthaṃ? Aggayo, munayo, isayo. "ऱ्हस्व केलेल्या" असे का म्हटले आहे? 'अग्गयो' (aggayo), 'मुनयो' (munayo), 'इसयो' (isayo) इत्यादींमध्ये जेथे ऱ्हस्व केलेला नसतो, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Jhatoti kimatthaṃ? Sayambhuno. ‘झ’ नंतर (झतो) असे का म्हटले आहे? ‘सयम्भुनो’ या उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Yonanti kimatthaṃ? Daṇḍinā, bhoginā. ‘यो’ चे (योनं) असे का म्हटले आहे? ‘दण्डिना’, ‘भोगिना’ इत्यादी उदाहरणांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 226, 154. Smiṃni. २२६, १५४. ‘स्मिं’ चा ‘नि’ होतो. Tasmā jhato katarassā smiṃvacanassa niāde so hoti. त्यामुळे, र्हस्व केलेल्या ‘झ’ संज्ञक वर्णानंतर ‘स्मिं’ विभक्ती प्रत्ययाचा ‘नि’ असा आदेश होतो. Daṇḍini, bhogini. दण्डिनि, भोगिनि. Katarassāti kimatthaṃ? Byādhimhi. ‘र्हस्व केलेल्या’ (कतरस्स) असे का म्हटले आहे? जेथे र्हस्व केलेला नाही अशा ‘ब्याधिम्हि’ या उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 227, 270. Kissa kaveca. २२७, २७०. ‘किं’ शब्दाचा ‘क’ होतो, ‘व’ प्रत्यय असताना आणि. Kimiccetassa ko ca hoti vapaccaye pare. ‘किं’ या शब्दाच्या जागी ‘क’ होतो, जेव्हा ‘व’ प्रत्यय पुढे असतो. Kva [Pg.124] gatosi tvaṃ devānaṃ piyatissa. ‘क्व गतोसि त्वं देवानं पियतिस्स’ (हे देवानंप्रिय तिस्स, तू कोठे गेला आहेस?) Caggahaṇena avapaccaye parepi ko ca hoti. Ko taṃninditu marahati, kathaṃ bodhayituṃ dhammaṃ. ‘च’ च्या ग्रहणाने, ‘व’ व्यतिरिक्त इतर प्रत्यय पुढे असतानाही ‘क’ होतो. उदा. ‘को तं निन्दितु मरहति, कथं बोधयितुं धम्मं’ (त्याची निंदा कोण करू शकतो? धर्माचे आकलन कसे करून द्यावे?) Veti kimatthaṃ? Kuto āgatosi tvaṃ. ‘व’ (वे) असे का म्हटले आहे? जेव्हा ‘व’ प्रत्यय पुढे नसतो, जसे की ‘कुतो आगतोसि त्वं’ (तू कोठून आला आहेस?) या उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 228, 272. Kuhiṃ haṃ su ca. २२८, २७२. कुहिं हं सु च. Kimiccetassa ku hoti hiṃ haṃiccetesu ca. Kuhiṃ gacchasi, kulaṃ gacchasi. ‘किं’ या शब्दाच्या जागी ‘कु’ होतो, जेव्हा ‘हिं’ आणि ‘हं’ हे प्रत्यय पुढे असतात. उदा. ‘कुहिं गच्छसि’ (तू कोठे जात आहेस?), ‘कुलं गच्छसि’. Caggahaṇena hiñcanaṃdācanaṃ paccayesu paresu aññatthāpi ku hoti. Kuhiñcanaṃ, kudācanaṃ. ‘च’ च्या ग्रहणाने, ‘हिञ्चनं’ आणि ‘दाचनं’ हे प्रत्यय पुढे असताना आणि इतर ठिकाणीही ‘कु’ आदेश होतो. उदा. ‘कुहिञ्चनं’, ‘कुदाचनं’. 229, 226. Sesesu ca. २२९, २२६. इतर प्रत्ययांच्या बाबतीतही (सेसेसु च). Kimiccetassa ko hoti sesesu vibhattipaccayesu paresu. उर्वरित विभक्ती आणि प्रत्यय पुढे असताना ‘किं’ या शब्दाच्या जागी ‘क’ होतो. Ko pakāro kathaṃ, kaṃ pakāraṃ kathaṃ. उदा. ‘को पकारो कथं’ (कोणता प्रकार, कसा), ‘कं पकारं कथं’ (कोणत्या प्रकाराला, कसे). Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. ‘च’ चे ग्रहण (मागील सूत्रातील ‘क’ चे) अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 230, 262. Trabhothesu ca. २३०, २६२. ‘त्र’, ‘तो’ आणि ‘थ’ प्रत्यय पुढे असतानाही (त्रभोथेसु च). Kimiccetassa ku hoti tratotha iccetesu ca. ‘किं’ या शब्दाच्या जागी ‘कु’ होतो, जेव्हा ‘त्र’, ‘तो’ आणि ‘थ’ हे प्रत्यय पुढे असतात. Kutra, kuto, kuttha. कुत्र, kuतो, कुत्थ. Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ, ‘च’ चे ग्रहण (मागील सूत्रातील ‘किस्स’ आणि ‘कु’ चे) अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 231, 263. Sabbassetassa[Pg.125], kāro vā. २३१, २६३. ‘एत’ या संपूर्ण शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून ‘अ’ होतो. Sabbassa etasaddassa akāro hoti vā tothaiccetesu. जेव्हा ‘तो’ आणि ‘थ’ हे प्रत्यय पुढे असतात, तेव्हा ‘एत’ या संपूर्ण शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून ‘अ’ (अकार) होतो. Ato, attha, etto, ettha. अतो, अत्थ, एत्तो, एत्थ. 232, 267. Tre niccaṃ. २३२, २६७. ‘त्र’ प्रत्यय पुढे असताना नित्य (त्रे निच्चं). Sabbassa etasaddassa akāro hoti niccaṃ trapaccaye pare. जेव्हा ‘त्र’ प्रत्यय पुढे असतो, तेव्हा ‘एत’ या संपूर्ण शब्दाच्या जागी नेहमी (नित्य) ‘अ’ (अकार) होतो. Atra. अत्र. 233, 264. E tothesu ca. २३३, २६४. ‘तो’ आणि ‘थ’ प्रत्यय पुढे असताना ‘ए’ होतो आणि (ए तोथेसु च). Sabbassa etasaddassa ekāro hoti vā tothaiccetesu. जेव्हा ‘तो’ आणि ‘थ’ हे प्रत्यय पुढे असतात, तेव्हा ‘एत’ या संपूर्ण शब्दाच्या जागी विकल्पेकरून ‘ए’ (एकार) होतो. Etto, ato, ettha, attha. एत्तो, अतो, एत्थ, अत्थ. 234, 265. Imassi thaṃ dāni ha to dhesu ca. २३४, २६५. ‘इम’ शब्दाच्या जागी ‘थं’, ‘दानि’, ‘ह’, ‘तो’ आणि ‘ध’ प्रत्यय पुढे असताना (इमस्सि थं दानि ह तो धेसु च). Imasaddassa sabbasseva ikāro hoti thaṃ dānihato dhaiccetesu. जेव्हा ‘थं’, ‘दानि’, ‘ह’, ‘तो’ आणि ‘ध’ हे प्रत्यय पुढे असतात, तेव्हा ‘इम’ या संपूर्ण शब्दाच्या जागी ‘इ’ (इकार) होतो. Itthaṃ, idāni, iha, ito, idha. इत्थं, इदानि, इह, इतो, इध. 235, 281. Adhunāmhi [Pg.126] ca. २३५, २८१. ‘धुना’ प्रत्यय पुढे असतानाही (अधुनाम्हि च). Imasaddassa sabbasseva akāro hoti dhunāmhi paccaye pare. जेव्हा ‘धुना’ प्रत्यय पुढे असतो, तेव्हा ‘इम’ या संपूर्ण शब्दाच्या जागी ‘अ’ (अकार) होतो. Adhunā. अधुना. Caggahaṇamavadhāraṇatthaṃ. ‘च’ चे ग्रहण अवधारणार्थ (निश्चय किंवा भर देण्यासाठी) आहे. 236, 280. Eta rahimhi. २३६, २८०. ‘रहि’ प्रत्यय पुढे असताना ‘एत’ होतो (एत रहिम्हि). Sabbasseva imasaddassa etādeso hoti rahimhi paccaye pare. जेव्हा ‘रहि’ प्रत्यय पुढे असतो, तेव्हा ‘इम’ या संपूर्ण शब्दाच्या जागी ‘एत’ असा आदेश होतो. Etarahi. एतरहि (या वेळी). 237, 176. Itthiyamato āpaccayo. २३७, १७६. स्त्रीलिंगात 'अ' कारानंतर 'आ' प्रत्यय होतो. Itthiyaṃ vattamānāya akārato āpaccayo hoti. स्त्रीलिंग दर्शविताना 'अ' कारानंतर 'आ' प्रत्यय होतो. Sabbā, yā, sā, kā. Katarā. सब्बा, या, सा, का, कतरा. 238, 187. Nadādito vā ī. २३८, १८७. 'नद' इत्यादी शब्दांनंतर विकल्पेकरून 'ई' प्रत्यय होतो. Nadādito vāanadāditovā itthiyaṃ vattamānāya īpaccayo hoti. 'नद' इत्यादी शब्दांनंतर किंवा 'नद' व्यतिरिक्त इतर शब्दांनंतर स्त्रीलिंग दर्शविताना 'ई' प्रत्यय होतो. Nadī, mahī, kumārī, taruṇī, sakhī, itthī. नदी, मही, कुमारी, तरुणी, सखी, इत्थी. 239, 190. Ṇava [Pg.127] ṇika ṇeyya ṇa ntuhi. २३९, १९०. 'णव', 'णिक', 'णेय्य', 'ण' आणि 'न्तु' प्रत्ययान्तानंतर (स्त्रीलिंगात 'ई' प्रत्यय होतो). Ṇava ṇika ṇeyya ṇa ntuiccetehi itthiyaṃ vattamānehi īpaccayo hoti. 'णव', 'णिक', 'णेय्य', 'ण' आणि 'न्तु' या प्रत्ययांनी युक्त शब्दांनंतर स्त्रीलिंग दर्शविताना 'ई' प्रत्यय होतो. Māṇavī, paṇḍavī, nāvikī, venateyyī, kunteyyī, gotamī, guṇavatī, sāmāvatī. माणवी, पंडवी, नाविकी, वेनतेय्यी, कुन्तेय्यी, गोतमी, गुणवती, सामावती. 240, 193. Pati bhikkhurājīkārantehi inī. २४०, १९३. 'पति', 'भिक्खु', 'राज' आणि 'ई' कारान्त शब्दांनंतर 'इनी' प्रत्यय होतो. Pati bhikkhu rājīkārantehi itthiyaṃ vattamānehi inīpaccayo hoti. 'पति', 'भिक्खु', 'राज' आणि 'ई' कारान्त शब्दांनंतर स्त्रीलिंग दर्शविताना 'इनी' प्रत्यय होतो. Gahapatānī, bhikkhunī, rājinī, hatthinī, daṇḍinī, medhāvinī, tapassinī. गहपतानी, भिक्खुनी, राजिनी, हत्थिनी, दण्डिनी, मेधाविनी, तपस्सिनी. 241, 191. Ntussa tamīkāre. २४१, १९१. 'ई' कार पुढे असताना 'न्तु' प्रत्ययाच्या जागी 'त' होतो. Sabbasseva ntupaccayassa takāro hoti vā īkāre pare. 'ई' कार पुढे असताना संपूर्ण 'न्तु' प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'त' कार होतो. Guṇavatī, guṇavantī, kulavatī, kulavantī, satimatī. Satimantī, mahatī, mahantī, gottamatī, gottamantī. गुणवती, गुणवन्ती, कुलवती, कुलवन्ती, सतिमती, सतिमन्ती, महती, महन्ती, गोत्तमती, गोत्तमन्ती. 242, 192. Bhavato bhoto. २४२, १९२. 'ई' कार पुढे असताना 'भवन्त' शब्दाच्या जागी 'भोत' होतो. Sabbasseva bhavantasaddassa bhotādeso hoti īkāre itthigate pare. स्त्रीलिंगात 'ई' कार पुढे असताना संपूर्ण 'भवन्त' शब्दाच्या जागी 'भोत' असा आदेश होतो. Bhoti ayye, bhoti kaññe, bhoti kharādiye. भोति अय्ये, भोति कञ्ञे, भोति खरादिये. 243, 110. Bhoge [Pg.128] tu. २४३, ११०. 'ग' पुढे असताना 'भवन्त' शब्दाच्या जागी 'भो' होतो. Sabbasseva bhavantasaddassa bhoādeso hoti ge pare. 'ग' पुढे असताना संपूर्ण 'भवन्त' शब्दाच्या जागी 'भो' असा आदेश होतो. Bho purisa, bho aggi, bho rāja, bho sattha, bho daṇḍi, bho sayambhu. भो पुरिस, भो अग्गि, भो राज, भो सत्थ, भो दण्डि, भो सयम्भू. Geti kimatthaṃ? Bhavatā, bhavaṃ. 'गे' (ग पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'भवता', 'भवं' (इत्यादी ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Tuggahaṇena aññasmimpi vacane sabbassa bhavantasaddassa bhonta bhante bhonto bhadde bhotā bho toiccete ādesā honti. 'तु' च्या ग्रहणाने इतर वचनांमध्येही संपूर्ण 'भवन्त' शब्दाच्या जागी 'भोन्त', 'भन्ते', 'भोन्तो', 'भद्दे', 'भोता', 'भोतो' हे आदेश होतात. Bhonta, bhante, bhonto, bhadde, bhotā, bhoto. भोन्त, भन्ते, भोन्तो, भद्दे, भोता, भोतो. 244, 72. Akārapitādyantānamā. २४४, ७२. 'ग' पुढे असताना 'अ' कार आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांच्या अन्त्य स्वराच्या जागी 'आ' होतो. Akāro ca pitādīnamanto ca attamāpajjate ge pare. 'ग' पुढे असताना 'अ' कार आणि 'पितु' इत्यादी शब्दांचा अन्त्य स्वर 'आ' कारत्व प्राप्त करतो. Bho purisā, bho rājā, bho pitā, bho mātā, bho satthā. भो पुरिसा, भो राजा, भो पिता, भो माता, भो सत्था. 245, 152. Jhalapā rassaṃ. २४५, १५२. 'ग' पुढे असताना 'झ', 'ल' आणि 'प' र्हस्व होतात. Jhalapaiccete rassamāpajjante ge pare. 'ग' पुढे असताना 'झ', 'ल' आणि 'प' हे र्हस्वत्व प्राप्त करतात. Bho daṇḍi, bho sayambhu, bhoti itthi, bhotivadhu, भो दण्डि, भो सयम्भु, भोति इत्थि, भोति वधु. 246, 73. Ākāro [Pg.129] vā. २४६, ७३. 'ग' पुढे असताना 'आ' कार विकल्पेकरून र्हस्व होतो. Ākāro rassamāpajjate vā ge pare. 'ग' पुढे असताना 'आ' कार विकल्पेकरून र्हस्वत्व प्राप्त करतो. Bho rāja, bho rājā, bho atta, bho attā, bho sakha, bho sakhā, bho sattha, bho satthā. भो राज, भो राजा, भो अत्त, भो अत्ता, भो सख, भो सखा, भो सत्थ, भो सत्था. Iti nāmakappe catuttho kaṇḍo. अशा प्रकारे नामकल्पामधील चौथा काण्ड समाप्त झाला. Pañcamakaṇḍa पाचवा काण्ड. 247, 261. Tvādayo vibhattisaññāyo. २४७, २६१. 'त्वादि' (तो इत्यादी) प्रत्ययांना विभक्ती संज्ञा दिली जाते. Toādi yesaṃ paccayānaṃ, te honti tvādayo. Te paccayā tvādayo vibhattisaññāva daṭṭhabbā. ज्या प्रत्ययांच्या सुरुवातीला 'तो' इत्यादी असतात, त्यांना 'त्वादि' म्हणतात. त्या 'त्वादि' प्रत्ययांना विभक्ती संज्ञकच मानले पाहिजे. Sabbato, yato, tato, kuto, ato, ito, sabbadā, yadā, tadā, kadā, idha, idāni. सब्बतो, यतो, ततो, कुतो, अतो, इतो, सब्बदा, यदा, तदा, कदा, इध, इदानि. 248, 260. Kvaci to pañcamyatthe. २४८, २६०. पंचमी विभक्तीच्या अर्थात काही ठिकाणी 'तो' प्रत्यय होतो. Kvaci topaccayo hoti pañcamyatthe. पंचमीच्या अर्थात विकल्पाने 'तो' प्रत्यय होतो. Sabbato, yato, tato, kuto, ato, ito. सब्बतो, यतो, ततो, कुतो, अतो, इतो. Kvacīti kimatthaṃ? Sabbasmā, imasmā. 'विकल्पाने' (क्वचि) असे कशासाठी म्हटले आहे? सब्बस्मा, इमस्मा (यांसारखी रूपे सिद्ध करण्यासाठी). 249, 266. Tra [Pg.130] tha sattamiyā sabbanāmehi. २४९, २६६. सर्वनामांनंतर सप्तमीच्या अर्थात 'त्र' आणि 'थ' (प्रत्यय होतात). Trathaiccete paccayā honti sattamyatthe sabba nāmehi. सर्वनामांनंतर सप्तमीच्या अर्थात 'त्र' आणि 'थ' हे प्रत्यय होतात. Sabbatra, sabbattha, yatra, yattha, tatra, tattha. सब्बत्र, sabbattha, यत्र, यत्थ, तत्र, तत्थ. 250, 268. Sabbato dhi. २५०, २६८. 'सब्ब' शब्दाहून 'धि' (प्रत्यय होतो). Sabbaiccetasmā dhipaccayo hoti kvaci sattamyatthe. Sabbadhi, sabbasmiṃ. 'सब्ब' या शब्दाहून सप्तमीच्या अर्थात विकल्पाने 'धि' प्रत्यय होतो. उदा. सब्बधि, सब्बस्मिं. 251, 269. Kiṃ smā vo. २५१, २६९. 'किं' शब्दाहून 'व' (प्रत्यय होतो). Kimiccetasmā vapaccayo hoti sattamyatthe. 'किं' या शब्दाहून सप्तमीच्या अर्थात 'व' प्रत्यय होतो. Kva gatosi tva devānaṃpiyatissa. "हे देवानामप्रियतिस्स, तू कुठे गेला आहेस?" 252, 271. Hiṃ haṃ hiñcanaṃ. २५२, २७१. 'हिं', 'हं' आणि 'हिंचनं' (प्रत्यय होतात). Kimiccetasmā hiṃhaṃhiñcanaṃiccete paccayā honti sattamyatthe. 'किं' या शब्दाहून सप्तमीच्या अर्थात 'हिं', 'हं' आणि 'हिंचनं' हे प्रत्यय होतात. Kuhiṃ, kulaṃ, kuhiñcanaṃ. कुहिं, कुलं, कुहिंचनं. 253, 273. Tamhā ca. २५३, २७३. आणि 'त' शब्दाहून (हे प्रत्यय होतात). Tamhā ca hi haṃiccete paccayā honti sattamyatthe. Tahiṃ, tahaṃ. आणि 'त' शब्दाहून सप्तमीच्या अर्थात 'हिं' आणि 'हं' हे प्रत्यय होतात. उदा. तहिं, तहं. Caggahaṇaṃ [Pg.131] hiñcanaggahaṇanivattanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण 'हिंचन' प्रत्ययाची अनुवृत्ती रोखण्यासाठी आहे. 254, 274. Imasmā ha dhā ca. २५४, २७४. 'इम' शब्दाहून 'ह' आणि 'ध' (प्रत्यय होतात). Imasmā hadhaiccete paccayā honti sattamyatthe. Iha, idha. 'इम' या शब्दाहून सप्तमीच्या अर्थात 'ह' आणि 'ध' हे प्रत्यय होतात. उदा. इह, इध. Caggahaṇamavadhāraṇatthaṃ. 'च' चे ग्रहण अवधारण करण्यासाठी (इतर शब्दांचा निषेध करण्यासाठी) आहे. 255, 275. Yato hiṃ. २५५, २७५. 'य' शब्दाहून 'हिं' (प्रत्यय होतो). Tasmā yato hiṃpaccayo hoti sattamyatthe. Yahiṃ. त्या 'य' शब्दाहून सप्तमीच्या अर्थात 'हिं' प्रत्यय होतो. उदा. यहिं. 256, 0. Kāle. २५६, ०. काळ/वेळ या अर्थी. ‘‘Kāle’’iccetaṃ adhikāratthaṃ veditabbaṃ. 'काले' हा अधिकार (पुढील सूत्रांवर अधिकार गाजवणारा शब्द) समजावा. 257, 279. Kiṃsabbaññekayakuhidādācanaṃ. २५७, २७९. 'किं', 'सब्ब', 'अञ्ञ', 'एक', 'य' आणि 'कु' या शब्दांनंतर 'दा' आणि 'दाचनं' (प्रत्यय होतात). Kiṃ sabbaañña eka ya kuiccetehi dā dācanaṃiccete paccayā honti kāle sattamyatthe. काळ/वेळ दर्शवणाऱ्या सप्तमीच्या अर्थात 'किं', 'सब्ब', 'अञ्ञ', 'एक', 'य' आणि 'कु' या शब्दांनंतर 'दा' आणि 'दाचनं' हे प्रत्यय होतात. Kadā, sabbadā, aññadā, ekadā, yadā, kudācanaṃ. कदा, सब्बदा, अञ्ञदा, एकदा, यदा, कुदाचनं. 258, 278. Tamhā dāni ca. २५८, २७८. आणि 'त' शब्दाहून 'दानि' (आणि 'दा' प्रत्यय होतात). Taiccetasmā dāni dāiccete paccayā honti, kāle sattamyatthe. 'त' या शब्दाहून काळ/वेळ दर्शवणाऱ्या सप्तमीच्या अर्थात 'दानि' आणि 'दा' हे प्रत्यय होतात. Tadāni[Pg.132], tadā. तदानि, तदा. Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण (मागील सूत्रातील 'दा' प्रत्ययाचे) अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 259, 279. Imasmā rahi dhunā dāni ca. २५९, २७९. आणि 'इम' शब्दाहून 'रहि', 'धुना' आणि 'दानि' (प्रत्यय होतात). Imasmā rahi dhunā dāniiccete paccayā honti kāle sattamyatthe. 'इम' या शब्दाहून काळ/वेळ दर्शवणाऱ्या सप्तमीच्या अर्थात 'रहि', 'धुना' आणि 'दानि' हे प्रत्यय होतात. Terahi, adhunā, idāni. तेरहि, अधुना, इदानि. Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण (मागील सूत्रातील 'दानि' प्रत्ययाचे) अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 260, 277. Sabbassa so dāmhi vā. २६०, २७७. 'दा' प्रत्यय पर असताना 'सब्ब' च्या जागी विकल्पाने 'स' (आदेश होतो). Sabbaiccetassa sakārādeso hoti vā dāmhi paccaye pare. 'दा' प्रत्यय पर असताना 'सब्ब' या शब्दाच्या जागी विकल्पाने 'स' असा आदेश होतो. Sadā, sabbadā. सदा, सब्बदा. 261, 369. Avaṇṇo ye lopañca. २६१, ३६९. 'य' प्रत्यय पर असताना अ-वर्णाचा लोप होतो. Avaṇṇo ye paccaye pare lopamāpajjate. 'य' प्रत्यय पर असताना अ-वर्णाचा (अ आणि आ चा) लोप होतो. Bāhussaccaṃ, paṇḍiccaṃ, vepullaṃ, kāruññaṃ, kosallaṃ, sāmaññaṃ, sohajjaṃ. बाहुस्सच्चं, पण्डिच्चं, वेपुल्लं, कारुञ्ञं, कोसल्लं, सामञ्ञं, सोहज्जं. 262, 391. Vuḍḍhassa jo iyiṭṭhesu. २६२, ३९१. 'इय' आणि 'इट्ठ' प्रत्यय मागे असताना, 'वुड्ढ' शब्दाच्या जागी 'जो' आदेश होतो. Sabbasseva vuḍḍhasaddassa joādeso hoti iya iṭṭhaiccetesu paccayesu. 'इय' आणि 'इट्ठ' हे प्रत्यय मागे असताना, संपूर्ण 'वुड्ढ' शब्दाच्या जागी 'जो' हा आदेश होतो. Jeyyo[Pg.133], jeṭṭho. जेय्यो, जेट्ठो. 263, 392. Pasatthassa so ca. २६३, ३९२. 'पसत्थ' शब्दाच्या जागी 'सो' देखील आदेश होतो. Sabbasseva pasatthasaddassa soādeso hoti, jādeso ca iyaiṭṭhaiccetesu paccayesu. 'इय' आणि 'इट्ठ' हे प्रत्यय मागे असताना, संपूर्ण 'पसत्थ' शब्दाच्या जागी 'सो' हा आदेश होतो आणि 'जा' हा देखील आदेश होतो. Seyyo, seṭṭho, jeyyo, jeṭṭho. सेय्यो, सेट्ठो, जेय्यो, जेट्ठो. 264, 393. Antikassa nedo. २६४, ३९३. 'अन्तिक' शब्दाच्या जागी 'नेद' आदेश होतो. Sabbassa antikasaddassa nedādeso hoti iya iṭṭhaiccetesu paccayesu. 'इय' आणि 'इट्ठ' हे प्रत्यय मागे असताना, संपूर्ण 'अन्तिक' शब्दाच्या जागी 'नेद' हा आदेश होतो. Nediyo, nediṭṭho. नेदियो, नेदिट्ठो. 265, 394. Bāḷhassa sādho. २६५, ३९४. 'बाळ्ह' शब्दाच्या जागी 'साध' आदेश होतो. Sabbassa bāḷhasaddassa sādhādeso hoti iya iṭṭhaiccetesu paccayesu. 'इय' आणि 'इट्ठ' हे प्रत्यय मागे असताना, संपूर्ण 'बाळ्ह' शब्दाच्या जागी 'साध' हा आदेश होतो. Sādhiyo, sādhiṭṭho. साधियो, साधिठ्ठो. 266, 395. Appassa kaṇa. २६६, ३९५. 'अप्प' शब्दाच्या जागी 'कण' आदेश होतो. Sabbassa appasaddassa kaṇa ādeso hoti iya iṭṭhaiccetesu paccayesu. 'इय' आणि 'इट्ठ' हे प्रत्यय मागे असताना, संपूर्ण 'अप्प' शब्दाच्या जागी 'कण' हा आदेश होतो. Kaṇiyo, kaṇiṭṭho. कणियो, कणिठ्ठो. 267, 396. Yuvānañca[Pg.134]. २६७, ३९६. आणि 'युव' शब्दाच्या जागी देखील (कण आदेश होतो). Sabbassa yuvasaddassa kaṇa ādeso hoti iya iṭṭhaiccetesu paccayesu. 'इय' आणि 'इट्ठ' हे प्रत्यय मागे असताना, संपूर्ण 'युव' शब्दाच्या जागी 'कण' हा आदेश होतो. Kaniyo, kaniṭṭho. कनियो, कनिठ्ठो. Caggahaṇamanukaḍḍhanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण (मागील सूत्रातील) 'कण' शब्दाचे अनुकर्षण करण्यासाठी आहे. 268, 397. Vantumantu vīnañca lopo. २६८, ३९७. 'वन्तु', 'मन्तु' आणि 'वी' प्रत्ययांचा लोप होतो. Vantumantuvīiccetesaṃ paccayānaṃ lopo hoti iyaiṭṭhaiccetesu paccayesu. 'इय' आणि 'इट्ठ' हे प्रत्यय मागे असताना, 'वन्तु', 'मन्तु' आणि 'वी' या प्रत्ययांचा लोप होतो. Guṇiyo, guṇiṭṭho, satiyo, satiṭṭho, medhiyo, medhiṭṭho. गुणियो, गुणिठ्ठो, सतियो, सतिठ्ठो, मेधियो, मेधिठ्ठो. 269, 401. Yavataṃ ta la ṇa dakārānaṃ byañjanāni ca la ña jakārattaṃ. २६९, ४०१. 'य' कार जोडलेल्या 'त', 'ल', 'ण' आणि 'द' या व्यंजनांच्या जागी अनुक्रमे 'च', 'ल', 'ञ' आणि 'ज' वर्ण होतात. Yakāravantānaṃ ta la ṇa dakārānaṃ byañjanāni ca la ña jakārattamāpajjante yathāsaṅkhyaṃ. 'य' कार जोडलेल्या 'त', 'ल', 'ण' आणि 'द' या व्यंजनांच्या जागी अनुक्रमे 'च', 'ल', 'ञ' आणि 'ज' हे वर्ण प्राप्त होतात. Bāhussaccaṃ, paṇḍiccaṃ, vepullaṃ, kāruññaṃ, kosallaṃ, nepuññaṃ, sāmaññaṃ, sohajjaṃ. बाहुस्सच्चं, पण्डिच्चं, वेपुल्लं, कारुञ्ञं, कोसल्लं, नेपुञ्ञं, सामञ्ञं, सोहज्जं. Ya va tamiti kimatthaṃ? Tiṇadalaṃ. 'य' कार जोडलेले (यवन्तं) असे का म्हटले आहे? 'तिणदलं' (सारख्या शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Ta la ṇa dakārānamiti kimatthaṃ? Ālasyaṃ, ārogyaṃ. 'त', 'ल', 'ण' आणि 'द' असे का म्हटले आहे? 'आलस्यं', 'आरोग्यं' इत्यादी शब्दांमध्ये (हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Byañjanānamiti [Pg.135] kimatthaṃ? Maccunā. 'व्यंजनांचे' असे का म्हटले आहे? 'मच्चुना' (सारख्या शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Kāraggahaṇaṃ kimatthaṃ? Yakārassa makārādesañāpanatthaṃ. Opammaṃ. 'कार' चे ग्रहण कशासाठी केले आहे? 'य' काराच्या जागी 'म' कार आदेश होतो हे ज्ञापित करण्यासाठी (उदा. 'ओपम्मं'). 270, 120. Amha tumhanturāja brahmatta sakhasatthu pitādīhismā nāva. २७०, १२०. 'अम्ह', 'तुम्ह', 'न्तु', 'राज', 'ब्रह्म', 'अत्त', 'सख', 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांनंतर येणाऱ्या 'स्मा' विभक्ती प्रत्ययाच्या जागी 'ना' आदेश होतो. Amha tumhanturāja brahma atta sakha satthu pituiccevamādīhi smāvacanaṃ nāva daṭṭhabbaṃ. 'अम्ह', 'तुम्ह', 'न्तु', 'राज', 'ब्रह्म', 'अत्त', 'सख', 'सत्थु', 'पितु' इत्यादी शब्दांनंतर येणारा 'स्मा' हा विभक्ती प्रत्यय 'ना' म्हणून समजावा. Mayā, tayā, guṇavatā, raññā, brahmunā, attanā, sakhinā, satthārā, pitarā, mātarā, bhātarā, dhītarā, kattārā, vattārā. मया, तया, गुणवता, रञ्ञा, ब्रह्मुना, अत्तना, सखिना, सत्थारा, पितरा, मातरा, भातरा, धीतरा, कत्तारा, वत्तारा. Etehīti kimatthaṃ? Purisā. 'यांच्याहून' (एतेहि) असे का म्हटले आहे? 'पुरिसा' (सारख्या शब्दांमध्ये हा नियम लागू होऊ नये म्हणून). Iti nāmakappe pañcamo kaṇḍo अशा प्रकारे नाम कल्पामधील पाचवे कांड (समाप्त झाले). Nāmakappo niṭṭhito. नाम कल्प समाप्त झाला. 3. Kārakakappa ३. कारक कल्प Chaṭṭhakaṇḍa सहावे कांड 271, 88, 308. Yasmā [Pg.136] dapeti bhayamādatte vā tadapādānaṃ. २७१, ८८, ३०८. ज्याच्यापासून दूर जातो, किंवा भय वाटते, किंवा ग्रहण करतो, त्याला 'अपादान' म्हणतात. Yasmā vā apeti, yasmā vā bhayaṃ jāyate, yasmā vā ādatte, taṃ kārakaṃ apādānasaññaṃ hoti. ज्याच्यापासून दूर जातो, किंवा ज्याच्यापासून भय निर्माण होते, किंवा ज्याच्यापासून ग्रहण करतो, त्या कारकाला 'अपादान' संज्ञा प्राप्त होते. Taṃ yathā? Gāmā apenti munayo, nagarā niggato rājā, corā bhayaṃ jāyate, ācariyupajjhāyehi sikkhaṃ gaṇhāti sisso. ते कसे? मुनी गावापासून दूर जातात; राजा नगरातून बाहेर पडतो; चोरापासून भय निर्माण होते; शिष्य आचार्य आणि उपाध्यायांकडून शिक्षण ग्रहण करतो. Apādānamiccanena kvattho? Apādāne pañcamī. 'अपादान' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? 'अपादाने पंचमी' (या सूत्रात अपादान संज्ञेचा वापर करण्यासाठी). 272, 309. Dhātunā mānamupasaggayogādvīsvapi ca. २७२, ३०९. धातू आणि नाम यांच्या योगात, तसेच उपसर्ग इत्यादींच्या योगातही (त्या कारकाला अपादान संज्ञा प्राप्त होते). Dhātunāmānaṃ payoge ca upasaggayogādīsvapi ca taṃ kārakaṃ apādānasaññaṃ hoti. धातू आणि नाम यांच्या प्रयोगात, तसेच उपसर्ग इत्यादींच्या योगातही ते कारक 'अपादान' संज्ञक होते. Dhātūnaṃ payoge tāva jiiccetassa dhātussa parāpubbassa payoge yo asaho, so apādānasañño hoti. धातूंच्या प्रयोगात सर्वप्रथम, 'परा' उपसर्ग पूर्व असलेल्या 'जि' धातूच्या प्रयोगात जो असह्य (पराभूत होणारा) असतो, त्याला 'अपादान' संज्ञा प्राप्त होते. Taṃ yathā? Buddhasmā parājenti aññatitthiyā. ते कसे? बुद्ध भगवंतांकडून अन्यतीर्थीय पराभूत होतात. Bhūiccetassa [Pg.137] dhātussa papubbassa payoge yato acchinnappabhavo, so apādānasañño hoti. 'प' उपसर्ग पूर्व असलेल्या 'भू' धातूच्या प्रयोगात ज्याच्यापासून अखंड प्रवाह (उत्पत्ती) होतो, त्याला 'अपादान' संज्ञा प्राप्त होते. Taṃ yathā? Himavatā pabhavanti pañca mahānadiyo, anavatattamhā pabhavanti mahāsarā, aciravatiyā pabhavanti kunnadiyo. ते कसे? हिमालयापासून पाच महानद्या उगम पावतात; अनवतप्त सरोवरापासून मोठे तलाव उगम पावतात; अचिरवती नदीपासून लहान नद्या उगम पावतात. Nāmappayogepi taṃ kārakaṃ apādānasaññaṃ hoti. नामाच्या प्रयोगातही ते कारक 'अपादान' संज्ञक होते. Taṃ yathā? Urasmā jāto putto, bhūmito niggato raso, ubhato sujāto putto mātito ca pitito ca. ते कसे? छातीपासून जन्मलेला पुत्र; भूमीतून बाहेर पडलेला रस; माता आणि पिता या दोघांकडूनही उत्तम प्रकारे जन्मलेला पुत्र. Upasaggayoge taṃ kārakaṃ apādānasaññaṃ hoti. उपसर्गाच्या योगाने त्या कारकाला 'अपादान' संज्ञा प्राप्त होते. Taṃ yathā? Apasālāya āyanti vāṇijā, ābrahmalokā saddo abbhuggacchati upari pabbatā devo vassati, buddhasmā pati sāriputto dhammadesanāya bhikkhū ālapati temāsaṃ, ghatamassa telasmā pati dadāti, uppalamassa padumasmā pati dadāti, kanakamassa hiraññasmā pati dadāti. ते कसे? जसे की—शाळेपासून दूर व्यापारी येतात; ब्रह्मलोकापर्यंत शब्द (आवाज) वर जातो; पर्वताच्या वर पाऊस पडतो; बुद्धांच्या वतीने सारिपुत्त तीन महिने धम्मदेशनेसाठी भिक्खूंना संबोधित करतात; तेलाच्या बदल्यात तूप देतो; कमळाच्या बदल्यात नीलकमळ देतो; चांदीच्या बदल्यात सोने देतो. Ādiggahaṇena kārakamajjhepi pañcamīvibhatti hoti. Ito pakkhasmā vijjhati migaṃ luddako, kosā vijjhati kuñjaraṃ, māsasmā bhuñjati bhojanaṃ. 'आदि' शब्दाच्या ग्रहणाने कारकांच्या मध्यभागी देखील पंचमी विभक्ती होते. जसे की—शिकारी आजपासून पंधरवड्याने हरणाचा वेध घेतो; येथून एका कोसावर हत्तीचा वेध घेतो; आजपासून एका महिन्याने भोजन करतो. Apiggahaṇena nipātapayogepi pañcamīvibhatti hoti dutiyā ca tatiyā ca. Rahitā mātujā puññaṃ katvā [Pg.138] dānaṃ deti, rahitā mātujaṃ, rahitā mātujena vā. Rite saddhammā kuto sukhaṃ labhati, rite saddhammaṃ, rite saddhammena vā. Te bhikkhū nānā kulā pabbajitā, vinā saddhammā natthañño koci nātho loke vijjati, vinā saddhammaṃ, vinā saddhammena vā. Vinā buddhasmā, vinā buddhaṃ, vinā buddhena vā. 'अपि' शब्दाच्या ग्रहणाने निपातांच्या प्रयोगात देखील पंचमी विभक्ती होते, तसेच द्वितीया आणि तृतीया विभक्ती देखील होते. जसे की—पुत्राशिवाय, पुण्य करून दान देतो (रहिता मातुजा, रहिता मातुजं, किंवा रहिता मातुजेन). सद्धम्माशिवाय सुख कोठून मिळणार? (रिते सद्धम्मा, रिते सद्धम्मं, किंवा रिते सद्धम्मेन). ते भिक्खू वेगवेगळ्या कुळांतून प्रव्रजित झाले आहेत; सद्धम्माशिवाय जगात दुसरा कोणताही त्राता अस्तित्वात नाही (विना सद्धम्मा, विना सद्धम्मं, किंवा विना सद्धम्मेन). बुद्धांशिवाय (विना बुद्धस्मा, विना व बुद्धं, किंवा विना बुद्धेन). Caggahaṇena aññatthāpi pañcamīvibhatti hoti. Yatohaṃ bhagini ariyāya jātiyā jāto. Yato sarāmi attānaṃ, yato pattosmi viññutaṃ, yatvādhikaraṇamenaṃ cakkhundriyaṃ asaṃvutaṃ viharantaṃ abhijjhādomanassā pāpakā akusalā dhammā anvāsaveyyuṃ. 'च' शब्दाच्या ग्रहणाने इतर अर्थांमध्ये देखील पंचमी विभक्ती होते. जसे की—'भगिनी, जेव्हापासून मी आर्य जन्माने जन्मलो आहे...'; 'जबव्हापासून मी स्वतःला स्मरतो...'; 'जेव्हापासून मी समजूतदार झालो आहे...'; 'ज्या कारणाने, चक्षुइंद्रिय असंयत ठेवून विहरणाऱ्या व्यक्तीमध्ये अभिज्झा (लोभ) आणि दोमनस्स (दुःख) हे पापी अकुशल धम्म उत्पन्न होतात.' 273, 310. Rakkhaṇatthānamicchitaṃ. २७३, ३१०. रक्षणाच्या अर्थातील (धातूंच्या प्रयोगात) जे इष्ट (इच्छित) असते. Rakkhaṇatthānaṃ dhātūnaṃ payoge yaṃ icchitaṃ, taṃ kārakaṃ apādānasaññaṃ hoti. रक्षणाचा अर्थ असलेल्या धातूंच्या प्रयोगात जे इष्ट (रक्षण करावयाचे) असते, त्या कारकाला 'अपादान' संज्ञा प्राप्त होते. Kāke rakkhanti taṇḍulā, yavā paṭisedhenti gāvo. तांदळापासून कावळ्यांचे रक्षण करतात (कावळ्यांना तांदळापासून दूर ठेवतात); यवांपासून (सातूपासून) गाईंना रोखतात. 274, 311. Yena vā’ dassanaṃ. २७४, ३११. किंवा ज्याच्याकडून न दिसणे (अदर्शन) इच्छित असते. Yena vā adassanamicchitaṃ, taṃ kārakaṃ apādānasaññaṃ hoti. किंवा ज्याच्याकडून स्वतःचे न दिसणे (अदर्शन) इच्छित असते, त्या कारकाला 'अपादान' संज्ञा प्राप्त होते. Upajjhāyā antaradhāyati sisso, mātarā ca pitarā ca antaradhāyati putto. उपाध्याय (गुरू) पासून शिष्य लपतो; माता आणि पित्यापासून पुत्र लपतो. Vāti [Pg.139] kimatthaṃ? Sattamīvibhatyattaṃ. Jetavane antaradhāyati bhagavā. 'वा' (किंवा) असे कशासाठी म्हटले आहे? सप्तमी विभक्तीच्या अर्थासाठी. जसे की—भगवान जेतवनात अंतर्धान पावले. 275, 312. Dūranti kaddha kāla nimmāna tvālopa disāyogavibhattārappayoga suddhappamocana hetu vivittappamāṇa pubbayogabandhana guṇavacana pañha kathana thokākattūsu ca. २७५, ३१२. दूर, जवळ, अंतराचे मोजमाप, काळाचे मोजमाप, 'त्वा' प्रत्ययाचा लोप, दिशेचा योग, विभाग (तुलना), अलिप्तता (परित्याग), शुद्धता, मुक्ती, हेतू (कारण), विविक्त (एकांत), प्रमाण, पूर्वयोग (पूर्वीचा काळ), बंधन, गुणवाचक, प्रश्न, कथन, थोडे आणि अकर्ता या अर्थांमध्ये देखील (पंचमी विभक्ती होते). Dūratthe, antikatthe, addhanimmāne, kālanimmāne, tvālope, disāyoge, vibhatte, ārappayoge, suddhe, pamocane, hetvatthe, vivittatthe, pamāṇe, pubbayoge, bandhanatthe, guṇavacane, pañhe, kathane, thoke, akattari ca iccetesvatthesu, payogesu ca, taṃ kārakaṃ apādānasaññaṃ hoti. दूर अर्थात, जवळ अर्थात, अंतराच्या मोजमापात, काळाच्या मोजमापात, 'त्वा' प्रत्ययाच्या लोपात, दिशेच्या योगात, विभागात (तुलनेत), अलिप्ततेच्या प्रयोगात, शुद्धतेत, मुक्तीत, हेतूच्या अर्थात, विविक्त (एकांत) अर्थात, प्रमाणात, पूर्वयोगात, बंधनाच्या अर्थात, गुणवाचक शब्दात, प्रश्नात, कथनात, थोड्या अर्थात आणि अकर्त्याच्या अर्थात—या सर्व अर्थांमध्ये आणि प्रयोगांमध्ये त्या कारकाला 'अपादान' संज्ञा प्राप्त होते. Dūratthetāva – kīva dūro ito naḷakāragāmo, dūrato vā gamma, ārakā te moghapurisā imasmā dhammavinayā. Dutiyā ca tatiyā ca, dūraṃ gāmaṃ āvato, dūrena gāmena vā āgato. Ārakā imaṃ dhammavinayaṃ, anena dhammavinayena vā iccevamādi. प्रथम, दूर अर्थात—'येथून नळकार (विणकरांचे) गाव किती दूर आहे?'; 'दूरवरून आलेला'; 'ते मोघपुरुष (मूर्ख लोक) या धम्म-विनयापासून खूप दूर आहेत'. द्वितीया आणि तृतीया विभक्तीमध्ये देखील—'दूरच्या गावाला गेला' (दूर्ं गामं आवतो), किंवा 'दूरच्या गावावरून आला' (दूरेन गामेन वा आगतो). 'या धम्म-विनयापासून दूर' (आरका इमं धम्मविनयं, किंवा अनेन धम्मविनयेन वा) इत्यादी. Antikatthe – antikaṃ gāmā, āsannaṃ gāmā, samīpaṃ gāmā, samīpaṃ saddhammā. Dutiyā ca tatiyā ca, antikaṃ gāmaṃ, antikaṃ gāmena vā. Āsannaṃ gāmaṃ, āsannaṃ gāmena vā. Samīpaṃ gāmaṃ. Samīpaṃ gāmena vā. Samīpaṃ saddhammaṃ, samīpaṃ saddhammena vā iccevamādi. जवळ अर्थात—'गावाच्या जवळ' (अंतिकं गामा, आसन्नं गामा, समीपं गामा), 'सद्धम्माच्या जवळ' (समीपं सद्धम्मा). द्वितीया आणि तृतीया विभक्तीमध्ये देखील—'गावाच्या जवळ' (अंतिकं गामं, अंतिकं गामेन वा; आसन्नं गामं, आसन्नं गामेन वा; समीपं गामं, समीपं गामेन वा), 'सद्धम्माच्या जवळ' (समीपं सद्धम्मं, समीपं सद्धम्मेन वा) इत्यादी. Addhanimmāne [Pg.140] – ito mathurāya catūsu yojanesu saṅkassaṃ nāma nagaraṃ atthi, tattha bahū janā vasanti iccevamādi. अंतराच्या मोजमापात—'येथून (किंवा मथुरेपासून) चार योजनांवर संकस्स नावाचे नगर आहे, तिथे अनेक लोक राहतात' इत्यादी. Kālanimmāne – ito bhikkhave ekanavutikappe vipassī nāma bhagavā loke udapādi, ito tiṇṇaṃ māsānaṃ accayena parinibbāyissati iccevamādi. काळाच्या मोजमापात—'भिक्खूंनो, आजपासून एक्याण्णव कल्प मागे विपस्सी नावाचे भगवान जगात उत्पन्न झाले'; 'आजपासून तीन महिन्यांच्या समाप्तीनंतर (भगवान) परिनिर्वाणाला प्राप्त होतील' इत्यादी. Tvālope kammādhikaraṇesu – pāsādā saṅkameyya, pāsādaṃ abhiruhitvā vā. Pabbatā saṅkameyya, pabbataṃ abhiruhitvā vā. Hatthikkhandhā saṅkameyya, hatthikkhandhaṃ abhiruhitvā vā. Āsanā vuṭṭhaheyya. Āsane nisīditvā vā iccevamādi. कर्म आणि अधिकरण कारकांमध्ये 'त्वा' प्रत्ययाचा लोप झाल्यावर—'प्रासादावरून (महालावरून) जावे' किंवा 'प्रासादावर चढून जावे'; 'पर्वतावरून जावे' किंवा 'पर्वतावर चढून जावे'; 'हत्तीच्या पाठीवरून उतरावे' किंवा 'हत्तीच्या पाठीवर चढून उतरावे'; 'आसनावरून उठावे' किंवा 'आसनावर बसून उठावे' इत्यादी. Disāyoge – avicito yāva uparibhavaggamantare bahū sattanikāyā vasanti, yato khemaṃ tato bhayaṃ, puratthimato, dakkhiṇato, pacchimato, uttarato aggī pajjalanti, yato assosuṃ bhagavantaṃ, uddhaṃ pādatalā adho kesamatthakā iccevamādi. दिशेच्या योगात—'अवीची (नरक) पासून वर भवग्ग (अस्तित्वाचे शिखर) पर्यंतच्या दरम्यान अनेक प्राणी राहतात'; 'जिथून सुरक्षा असते, तिथूनच भय निर्माण होते'; 'पूर्वेकडून, दक्षिणेकडून, पश्चिमेकडून, उत्तरेकडून अग्नी प्रज्वलित होतात'; 'तिथून त्यांनी भगवंतांचे (उपदेश) ऐकले'; 'पायाच्या तळव्यापासून वर आणि केसांच्या शिखरापासून (डोक्यापासून) खाली' इत्यादी. Vibhatte – yato paṇītataro vā visiṭṭhataro vā natthi. Chaṭṭhī ca, channavutīnaṃ pāsaṇḍānaṃ, dhammānaṃ pavaraṃ yadidaṃ sugatavinayo iccevamādi. विभागात (तुलनेत)—'ज्यापेक्षा अधिक श्रेष्ठ किंवा अधिक विशिष्ट काहीही नाही'. षष्ठी विभक्तीमध्ये देखील—'शहाण्णव पाखंडी (पंथीय) धम्मांमध्ये जो श्रेष्ठ आहे, तो हा सुगत-विनय (बुद्धांचा विनय) होय' इत्यादी. Ārappayoge – [Pg.141] gāmadhammā vasaladhammā asaddhammā ārati virati paṭivirati, pāṇātipātā veramaṇī iccevamādi. अलिप्ततेच्या (परित्यागाच्या) प्रयोगात—'ग्रामधर्मापासून (ग्राम्य वृत्तीपासून), वसलधर्मापासून (हीन वृत्तीपासून), असद्धम्मापासून अलिप्त राहणे, विरत राहणे, पूर्णपणे दूर राहणे'; 'प्राणातिपातापासून (जीवहिंसेपासून) विरती' इत्यादी. Suddhe – lobhaniyehi dhammehi suddho asaṃsaṭṭho, mātito ca pitito ca suddho asaṃsaṭṭho anupakuddho agarahito iccevamādi. शुद्धतेत—'लोभ उत्पन्न करणाऱ्या धम्मांपासून शुद्ध, अलिप्त'; 'मातृपक्षाकडून आणि पितृपक्षाकडून शुद्ध, निष्कलंक, दोषरहित, अनिंदित' इत्यादी. Pamocane – parimutto dukkhasmāti vadāmi, muttosmi mārabandhanā, na te muccanti maccunā iccevamādi. मुक्तीत—'मी दुःखापासून मुक्त (परिमुक्त) आहे असे सांगतो'; 'मी मारबंधनातून मुक्त आहे'; 'ते मृत्यूपासून मुक्त होत नाहीत' इत्यादी. Hetvatthe – kasmā hetunā, kena hetunā, kissa hetunā, kasmā nu tumhaṃ daharā na mīyare, kasmā idheva maraṇaṃ bhavissati iccevamādi. हेतूच्या (कारणाच्या) अर्थात—'कोणत्या कारणाने?'; 'कोणत्या हेतूने?'; 'कशाच्या हेतूने?'; 'तुमचे तरुण (मुले) का बरे मरत नाहीत?'; 'येथेच मृत्यू का होईल?' इत्यादी. Vivittatthe – vivitto pāpakā dhammā, vivicceva kāmehi vivicca akusalehi dhammehi iccevamādi. विविक्त (एकांत/अलिप्तता) अर्थात—'पापी धम्मांपासून अलिप्त'; 'कामांपासून (वासनांपासून) अलिप्त होऊन, अकुशल धम्मांपासून अलिप्त होऊन' इत्यादी. Pamāṇe – dīghaso navavidatthiyo sugatavidatthiyā pamāṇikā kāretabbā, majjhimassa purisassa aḍḍha teḷasahatthā iccevamādi. प्रमाणात—'लांबीने सुगतांच्या (बुद्धांच्या) वितस्तीनुसार नऊ वितस्ती प्रमाणाची (चिवर किंवा कुटी) बनवली जावी, जी मध्यम मनुष्याच्या साडेबारा हात एवढी असते' इत्यादी. Pubbayoge – pubbeva sammodhā iccevamādi. पूर्वयोग (पूर्वीच्या काळात)—'एकत्र येण्यापूर्वीच' इत्यादी. Bandhanatthe – satasmā bandho naro. Tatiyā ca, satena bandho naro raññā iṇatthena iccevamādi. बंधनाच्या अर्थात—'शंभर (मुद्रेच्या कर्जामुळे) मनुष्य बांधला गेला (बंदी बनवला गेला)'. तृतीया विभक्तीमध्ये देखील—'राजाकडून शंभर मुद्रेच्या कर्जापोटी मनुष्य बंदी बनवला गेला' इत्यादी. Guṇavacane [Pg.142] – puññāya sugatiṃ yanti, cāgāya vipulaṃ dhanaṃ, paññāya vimuttimano, issariyāya janaṃ rakkhati rājā iccevamādi. गुणवाचक शब्दात—'पुण्यामुळे सुगतीला (स्वर्गाला) जातात'; 'त्यागामुळे (दानामुळे) विपुल धन मिळते'; 'प्रज्ञेमुळे मन विमुक्त होते'; 'ऐश्वर्यामुळे (सत्तेमुळे) राजा प्रजेचे रक्षण करतो' इत्यादी. Pañhe tvālope kammādhikaraṇesu – abhidhammā pucchanti, abhidhammaṃ sutvā, abhidhamme ṭhatvā vā. Vinayā pucchanti, vinayaṃ sutvā, vinaye ṭhatvā vā. Dutiyā ca tatiyā ca, abhidhammaṃ, abhidhammena vā. Vinayaṃ, vinayena vā. Eva suttā, geyyā, gāthāya, veyyākaraṇā, udānā, itivuttakā, jātakā, abbhutadhammā, vedallā iccevamādi. प्रश्न विचारताना कर्म आणि अधिकरण कारकांमध्ये 'त्वा' प्रत्ययाचा लोप झाल्यावर—'अभिधम्माविषयी विचारतात' (म्हणजेच अभिधम्म ऐकून किंवा अभिधम्मावर स्थित राहून विचारतात); 'विनयाविषयी विचारतात' (म्हणजेच विनय ऐकून किंवा विनयावर स्थित राहून विचारतात). द्वितीया आणि तृतीया विभक्तीमध्ये देखील—'अभिधम्माला' (अभिधम्मं), किंवा 'अभिधम्माद्वारे' (अभिधम्मेन वा); 'विनयाला' (विनयं), किंवा 'विनयाद्वारे' (विनयेन वा). याचप्रमाणे सुत्त, गेय्य, गाथा, वेय्याकरण, उदान, इतिवृत्तक, जातक, अब्भुतधम्म, वेदल्ल इत्यादी. Kathane tvālope kammādhikaraṇesu – abhidhammā kathayanti, abhidhammaṃ sutvā, abhidhamme ṭhatvā vā. Vinayā kathayanti, vinayaṃ sutvā, vinaye ṭhatvā vā. Dutiyā ca tatiyā ca, abhidhammaṃ, abhidhammena vā. Vinayaṃ vinayena vā. Evaṃ suttā, geyyā, gāthāya, veyyākaraṇā, udānā, itivuttakā, jātakā, abbhutadhammā, vedallā iccevamādi. संभाषणात जेव्हा द्वितीया (कर्म) आणि सप्तमी (अधिकरण) विभक्तीमध्ये 'त्वा' (प्रत्ययाचा) लोप होतो: ते अभिधम्माविषयी बोलतात; अभिधम्म ऐकून किंवा अभिधम्मावर अधिष्ठित होऊन (त्यात स्थित राहून) ते बोलतात. ते विनयाविषयी बोलतात; विनय ऐकून किंवा विनयावर अधिष्ठित होऊन ते बोलतात. येथे द्वितीया आणि तृतीया विभक्ती देखील होते, जसे की 'अभिधम्मं' (अभिधम्माला) किंवा 'अभिधम्मेन' (अभिधम्माद्वारे), 'विनयं' (विनयाला) किंवा 'विनयेन' (विनयाद्वारे). याचप्रमाणे सुत्त, गेय्य, गाथा, वेय्याकरण, उदान, इतिवुत्तक, जातक, अब्भुतधम्म, वेदल्ल इत्यादींच्या बाबतीतही समजावे. Thoke – thokā muccanti. Appamattakā muccanti, kicchā muccanti. Tatiyā ca. Thokena, appamattakena, kicchena vā iccevamādi. अल्प अर्थामध्ये: ते थोड्या (प्रयत्नाने) मुक्त होतात; ते फारशा नसलेल्या (प्रयत्नाने) मुक्त होतात; ते कष्टाने मुक्त होतात. येथे तृतीया विभक्ती देखील होते, जसे की 'थोकेण' (थोड्या प्रयत्नाने), 'अप्पमत्तकेन' (अल्प प्रयत्नाने) किंवा 'किच्छेन' (कष्टाने) इत्यादी. Akattarica – kammassa katattā upacitattā ussannattā vipulattā cakkhuviññāṇaṃ uppannaṃ hoti iccevamādi. अकर्तरी (प्रयोजक कर्ता नसताना) देखील – कर्माच्या केलेल्या असण्यामुळे, संचित असण्यामुळे, विपुल असण्यामुळे, विस्तृत असण्यामुळे चक्षुविज्ञान उत्पन्न होते, इत्यादी. Caggahaṇena [Pg.143] sesesupi ye mayā nopadiṭṭhā apādānapayogikā, te payogavicakkhaṇehi yathāyogaṃ yojetabbā. 'च' शब्दाच्या ग्रहणाने, अपादानाच्या इतर प्रयोगांमध्ये जे माझ्याद्वारे दर्शविले गेले नाहीत, ते उदाहरणे योजण्यात कुशल असलेल्यांनी योग्यतेनुसार योजावेत. 276, 302. Yassa dātukāmo rocate dhārayate vā taṃ sampadānaṃ. २७६, ३०२. ज्याला देण्याची इच्छा असते, ज्याला (काही) आवडते किंवा ज्याच्यासाठी (काही) धारण केले जाते, त्याला 'संप्रदान' म्हणतात. Yassa vā dātukāmo yassa vārocate, yassa vā dhārayate, taṃ kārakaṃ sampadānasaññaṃ hoti. ज्याला देण्याची इच्छा असते, ज्याला आवडते किंवा ज्याच्यासाठी धारण केले जाते, त्या कारकाला 'संप्रदान' संज्ञा प्राप्त होते. Samaṇassa cīvaraṃ dadāti, samaṇassa rocate saccaṃ, devadattassa suvaṇṇacchattaṃ dhārayate yaññadatto. तो श्रमणाला चीवर देतो; श्रमणाला सत्य आवडते; यज्ञदत्त देवदत्तासाठी सुवर्णछत्र धारण करतो. Sampadānamiccanena kvattho? Sampadāne catutthī. 'संप्रदान' असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 'संपदाने चतुत्थी' (२९३) या सुत्तात 'संप्रदान' या संज्ञेचा वापर करण्यासाठी. Vāti vikappanatthaṃ, dhātunāmānaṃ payoge vā upasaggappayoge vā nipātappayoge vā sati atthavikappanatthaṃ vāti padaṃ payujjati. 'वा' हा शब्द विकल्पासाठी (अधिक अर्थ ग्रहण करण्यासाठी) आहे. धातू आणि नाम यांच्या प्रयोगात, किंवा उपसर्गाच्या प्रयोगात, किंवा निपाताच्या प्रयोगात अधिक अर्थांचा विचार करण्यासाठी 'वा' हा शब्द वापरला जातो. 277, 303. Silāgha hanu ṭhā sapa dhāra piha kudha duhissosūya rādhikkha paccāsuṇa anupatigiṇa pubbakattārocanattha tadattha tumatthālamattha maññānādarappāṇini, gatyatthakammani, āsīsattha sammuti bhiyya sattamyatthesu ca. २७७, ३०३. 'सिलाघ' (स्तुती करणे), 'हनु' (लपवणे/नाकारणे), 'ठा' (उपस्थित राहणे/सेवा करणे), 'सप' (शपथ घेणे), 'धार' (ऋणी असणे), 'पिह' (इच्छा करणे/आवडणे), 'कुध' (क्रोध करणे), 'दुह' (द्रोह करणे), 'इस्स' (ईर्ष्या करणे) या धातूंच्या प्रयोगात; 'उसूय' (दोषारोप करणे) या अर्थाच्या धातूंच्या प्रयोगात; 'राध' (आराधना करणे) आणि 'इक्ख' (पाहणे) यांच्या प्रयोगात; 'पति' आणि 'आ' पूर्व असलेल्या 'सु' (ऐकणे) धातूच्या आणि 'अनु' व 'पति' पूर्व असलेल्या 'गि' (स्वर काढणे/स्वीकारणे) धातूच्या पूर्वकर्त्याच्या बाबतीत; सांगण्याच्या (निवेदन करण्याच्या) अर्थात; त्या प्रयोजनासाठी (तदर्थ); 'तुं' प्रत्ययाच्या अर्थात; 'अलं' च्या अर्थात; अनादर दर्शविताना आणि अचेतन (निर्जीव) वस्तूच्या बाबतीत 'मञ्ञ' (मानणे) धातूच्या प्रयोगात; गमनार्थक धातूंच्या कर्माच्या बाबतीत; आशीर्वादाच्या अर्थात; 'सम्मुति' आणि 'भिय्य' यांच्या प्रयोगात; आणि सप्तमीच्या अर्थात – त्या कारकाला 'संप्रदान' संज्ञा प्राप्त होते. Silāgha hanu ṭhā sapa dhāra piha kudha duha issaiccetesaṃ dhātūnaṃ payoge, usūyatthānañca payoge, rādhikkhappayoge, paccāsuṇaanupatigiṇānaṃ pubbakattari, ārocanatthe[Pg.144], tadatthe, tumatthe, alamatthe, maññatippayoge anādare appāṇini, gatyatthānaṃ dhātūnaṃ kammani, āsīsatthe ca sammuti bhiyya sattamyatthesu ca, taṃ kārakaṃ sampadānasaññaṃ hoti. 'सिलाघ', 'हनु', 'ठा', 'सप', 'धार', 'पिह', 'कुध', 'दुह', 'इस्स' या धातूंच्या प्रयोगात, आणि 'उसूय' अर्थाच्या धातूंच्या प्रयोगात, 'राध' व 'इक्ख' च्या प्रयोगात, 'पच्चासुण' (प्रति-आ-सु) आणि 'अनुपतिगिण' (अनु-पति-गि) यांच्या पूर्वकर्त्याच्या बाबतीत, सांगण्याच्या अर्थात, तदर्थात, 'तुं' च्या अर्थात, 'अलं' च्या अर्थात, अनादर आणि अचेतन वस्तूच्या बाबतीत 'मञ्ञति' च्या प्रयोगात, गमनार्थक धातूंच्या कर्माच्या बाबतीत, आशीर्वादाच्या अर्थात, आणि 'सम्मुति', 'भिय्य' व सप्तमीच्या अर्थात – त्या कारकाला 'संप्रदान' संज्ञा प्राप्त होते. Silāghappayoge tāva – buddhassa silāghate, dhammassa silāghate, saṅghassa silāghate, sakaṃupajjhāyassa silāghate, tava silāghate mama silāghate iccevamādi. सर्वप्रथम, 'सिलाघ' (स्तुती करणे) च्या प्रयोगात – बुद्धांची स्तुती करतो, धम्माची स्तुती करतो, संघाची स्तुती करतो; स्वतःच्या उपाध्यायांची स्तुती करतो; तुझी स्तुती करतो, माझी स्तुती करतो, इत्यादी. Hanuppayoge – hanute tuyhameva, hanute mayhameva iccevamādi. 'हनु' (लपवणे/नाकारणे) च्या प्रयोगात – तो तुझ्यापासूनच लपवतो, तो माझ्यापासूनच लपवतो, इत्यादी. Ṭhāpayoge – upatiṭṭheyya sakyaputtānaṃ vaḍḍhakī, bhikkhussa bhuñjantassa pānīyena vā vidhūpanena vā upatiṭṭheyya bhikkhunī iccevamādi. 'ठा' (सेवा करणे/उपस्थित राहणे) च्या प्रयोगात – सुताराने शाक्यपुत्रांची सेवा करावी (त्यांच्यासाठी उपस्थित राहावे); भोजन करत असलेल्या भिक्खूची भिक्खुणीने पाण्याने किंवा पंख्याने सेवा करावी, इत्यादी. Sapappayoge – tuyhaṃ sapate, mayhaṃ sapate iccevamādi. 'सप' (शपथ घेणे) च्या प्रयोगात – तो तुझ्यासमोर शपथ घेतो, तो माझ्यासमोर शपथ घेतो, इत्यादी. Dhārappayoge – suvaṇṇaṃ te dhārayate iccevamādi. 'धार' (ऋणी असणे) च्या प्रयोगात – तो तुझ्यासुवर्णाचा ऋणी आहे (त्याच्यावर तुझे सुवर्ण देणे आहे), इत्यादी. Pihappayoge – buddhassa aññatitthiyā pihayanti, devā dassanakāmā te, yato icchāmi bhaddantassa, samiddhānaṃ pihayanti daliddā iccevamādi. 'पिह' (इच्छा करणे/आवडणे) च्या प्रयोगात – अन्यतीर्थीय बुद्धांची आकांक्षा करतात (त्यांना बुद्ध आवडतात); देव तुझ्या दर्शनाची इच्छा करतात; कारण मी भदन्तांची (पूजनीय भिक्खूंची) इच्छा करतो; दरिद्री लोक समृद्ध लोकांची (त्यांच्या संपत्तीची) आकांक्षा करतात, इत्यादी. Kudhaduhaissausūyappayoge – kodhayati deva dattassa, tassa kujjha mahāvīra, mā raṭṭhaṃ vinassa idaṃ. Duhayati [Pg.145] disānaṃ megho, titthiyā samaṇānaṃ issayanti guṇagiddhena, titthiyā samaṇānaṃ issayanti lābhagiddhena, dujjanā guṇavantānaṃ usūyanti guṇagiddhena, kā usūyā vijānataṃ iccevamādi. 'कुध' (क्रोध करणे), 'दुह' (द्रोह करणे), 'इस्स' (ईर्ष्या करणे) आणि 'उसूय' (दोषारोप करणे) यांच्या प्रयोगात – तो देवदत्तावर क्रोध करतो; हे महावीरा, त्याच्यावर क्रोध करा, हे राष्ट्र नष्ट होऊ देऊ नका. वादळ दिशांचा (देशांचा) द्रोह करते (नाश करते). गुणांच्या लोभामुळे अन्यतीर्थीय श्रमणांचा हेवा करतात; लाभाच्या लोभामुळे अन्यतीर्थीय श्रमणांचा हेवा करतात; दुर्जन लोक गुणांच्या लोभामुळे गुणवंतांवर दोषारोप करतात; जाणणाऱ्यांची काय निंदा असणार? इत्यादी. Rādha ikkha iccetesaṃ dhātūnaṃ payoge yassa akathitassa pucchanaṃ kammavikkhyāpanatthañca, taṃ kārakaṃ sampadānasaññaṃ hoti, dutiyā ca. 'राध' आणि 'इक्ख' या धातूंच्या प्रयोगात, ज्या अकथित (अप्रत्यक्ष) व्यक्तीला विचारले जाते आणि कर्माचे प्रकटीकरण करण्यासाठी, त्या कारकाला 'संप्रदान' संज्ञा प्राप्त होते, आणि द्वितीया विभक्ती देखील होते. Ārādhohaṃ rañño, ārādhohaṃ rājānaṃ, kyāhaṃ ayyānaṃ aparajjhāmi, kyāhaṃ ayye aparajjhāmi, cakkhuṃ janassa dassanāya taṃ viya maññe, āyasmato upālittherassa upasampadāpekkho upatisso, āyasmantaṃ vā iccevamādi. मी राजाला संतुष्ट करतो (राज्ञो/राजानं); मी आर्यांचा (पूजनीयांचा) काय अपराध केला आहे? मी लोकांना पाहण्यासाठी तुला डोळ्यासारखे मानतो; आयुष्यमान उपतिस्स हे आयुष्यमान उपालि थेरांकडून उपसंपदेची आकांक्षा करतात (आयुष्यमंतं वा), इत्यादी. Paccāsuṇa anupatigiṇānaṃ pubbakattari suṇotissa paccāyoge yassa kammuno pubbassa yo kattā, so sampadānasañño hoti. 'पच्चासुण' (प्रति-आ-सु) आणि 'अनुपतिगिण' (अनु-पति-गि) यांच्या पूर्वकर्त्याच्या बाबतीत: 'सु' (ऐकणे) धातूच्या प्रति-योगात, ज्या कर्माचा पूर्वी जो कर्ता होता, त्याला 'संप्रदान' संज्ञा प्राप्त होते. Taṃ yathā? Bhagavā bhikkhū etadavoca. ते कसे? भगवंतांनी भिक्खूंना हे सांगितले. Bhikkhūti akathīta kammaṃ, etanti kathitakammaṃ. Yassa kammuno pubbassa yo kattā, so‘bhagavā’ti ‘‘yo karoti sa kattā’’ti suttavacanena kattusañño. Evaṃ yassa [Pg.146] kammuno pubbassa yo kattā, so sampadānasañño hoti. येथे 'भिक्खू' हे अकथित (अप्रत्यक्ष) कर्म आहे आणि 'एतं' हे कथित (प्रत्यक्ष) कर्म आहे. ज्या कर्माचा पूर्वी जो कर्ता होता, तो 'भगवा' हा Taṃ yathā? Te bhikkhū bhagavato paccassosuṃ, āsuṇanti buddhassa bhikkhū. ते कसे? त्या भिक्खूंनी भगवंतांचे ऐकले, भिक्खू बुद्धांचे ऐकतात. Giṇassa anupatiyoge yassa kammuno pubbassa yo kattā, so sampadānasañño hoti. 'गि' धातूच्या संबंधात 'अनु' आणि 'पति' उपसर्ग असताना, पूर्व कर्माचा जो कर्ता असतो, त्याला 'संप्रदान' संज्ञा प्राप्त होते. Taṃ yathā? Bhikkhu janaṃ dhammaṃ sāveti, tassa bhikkhuno jano anugiṇāti, tassa bhikkhuno jano patigiṇāti. ते कसे? भिक्खू लोकांना धम्म ऐकवतो, लोक त्या भिक्खूचे अनुमोदन करतात, लोक त्या भिक्खूला प्रतिसाद देतात. Yo vadeti sa‘kattā’ti,Vuttaṃ ‘kamma’nti vuccati; Yo paṭiggāhako tassa,‘Sampadānaṃ’ vijāniyā. जो बोलतो तो 'कर्ता' होय, जे बोलले जाते त्याला 'कर्म' म्हणतात; आणि जो त्याचा स्वीकार करणारा असतो, त्याला 'संप्रदान' समजावे. Iccevamādi. इत्यादी. Ārocanatthe – ārocayāmi vo bhikkhave, āmantayāmi vo bhikkhave, paṭivedayāmi vo bhikkhave, ārocayāmi te mahārāja, āmantayāmi te mahārāja, paṭivedayāmi te mahārāja iccevamādi. निवेदन करण्याच्या अर्थात – 'हे भिक्खूंनो, मी तुम्हाला निवेदन करतो; हे भिक्खूंनो, मी तुम्हाला आमंत्रित करतो; हे भिक्खूंनो, मी तुम्हाला अवगत करतो; हे महाराजा, मी तुम्हाला निवेदन करतो; हे महाराजा, मी तुम्हाला आमंत्रित करतो; हे महाराजा, मी तुम्हाला अवगत करतो' इत्यादी. Tadatthe – ūnassa pāripūriyā taṃ cīvaraṃ nikkhipitabbaṃ. Buddhassa atthāya, dhammassa atthāya, saṅghassa atthāya, jīvitaṃ pariccajāmi iccevamādi. त्याच्या उद्देशाच्या अर्थात – 'कमतरता पूर्ण करण्यासाठी ते चीवर बाजूला ठेवून दिले पाहिजे. बुद्धांच्या कल्याणासाठी, धम्माच्या कल्याणासाठी, संघाच्या कल्याणासाठी मी प्राणांचा त्याग करतो' इत्यादी. Tumatthe [Pg.147] -lokānukampāya atthāya hitāya sukhāya devamanussānaṃ buddho loke uppajjati. Bhikkhūnaṃ phāsuvihārāya vinayo paññatto iccevamādi. 'तुं' प्रत्ययाच्या अर्थात – 'जगावरील अनुकंपेपोटी, देव आणि मनुष्यांच्या हितासाठी, कल्याणासाठी आणि सुखासाठी बुद्ध जगात उत्पन्न होतात. भिक्खूंच्या सुखावह विहारासाठी विनय प्रज्ञप्त केला गेला आहे' इत्यादी. Alamatthappayoge-alamiti arahati paṭikkhittesu. Alaṃ me buddho, alaṃ me rajjaṃ, alaṃ bhikkhu pattassa, alaṃ mallo mallassa, arahati mallo mallassa. Paṭikkhitte alaṃ te rūpaṃ karaṇīyaṃ, alaṃ me hiraññasuvaṇṇena iccevamādi. 'अलम्' अर्थाच्या प्रयोगात – 'अलम्' म्हणजे योग्य आणि नकार. 'माझ्यासाठी बुद्ध पुरेसे आहेत, माझ्यासाठी राज्य पुरेसे आहे, भिक्खू पात्रासाठी योग्य आहे, एक मल्ल दुसऱ्या मल्लासाठी पुरेसा आहे, एक मल्ल दुसऱ्या मल्लासाठी योग्य आहे.' नकार दर्शवताना: 'तुला रूप सजवण्याची काही गरज नाही, मला सोने-चांदी नको आहे' इत्यादी. Maññatippayoge anādare appāṇini-kaṭṭhassa tuvaṃ maññe, kaliṅgarassa tuvaṃ maññe. 'मञ्ञ्' धातूच्या प्रयोगात, अनादर दाखवताना आणि निर्जीव वस्तूच्या बाबतीत – 'मी तुला लाकडाचा ओंडका मानतो, मी तुला कुजलेले लाकूड मानतो'. Anādareti kimatthaṃ? Suvaṇṇaṃ viya taṃ maññe. 'अनादर' असे का म्हटले आहे? जेथे अनादर नसेल तेथे हा प्रयोग टाळण्यासाठी, जसे की – 'मी तुला सोन्यासारखे मानतो'. Appāṇinīti kimatthaṃ? Gadrabhaṃ tuvaṃ maññe iccevamādi. 'अपाणिनी' (निर्जीव) असे का म्हटले आहे? सजीव प्राण्याच्या बाबतीत हा प्रयोग टाळण्यासाठी, जसे की – 'मी तुला गाढव मानतो' इत्यादी. Gatyatthakammani-gāmassa pādena gato, nagarassa pādena gato, appo saggāya gacchati, saggassa gamanena vā, mūlāya paṭikasseyya saṅgho. Dutiyā ca, gāmaṃ pādena gato, nagaraṃ pādena gato, appo saggaṃ gacchati, saggaṃ gamanena vā, mūlaṃ paṭikasseyya saṅgho iccevamādi. "गमन" (जाणे) या अर्थाच्या धातूंच्या कर्माच्या संबंधात: पायाने गावात गेला (गावाचा पायाने गेला); पायाने नगरात गेला (नगराचा पायाने गेला); थोडेच स्वर्गाप्रत जातात (स्वर्गासाठी जातात); किंवा स्वर्गाला जाण्याने; संघाने मुळाकडे (सुरुवातीकडे) परत खेचावे. आणि द्वितीया विभक्तीमध्येही (तीच उदाहरणे होतात): पायाने गावात गेला, पायाने नगरात गेला, थोडेच स्वर्गात जातात, किंवा स्वर्गाला जाण्याने, संघाने मुळाकडे परत खेचावे, इत्यादी. Āsīsatthe-āyasmato dīghāyuko hotu, bhaddaṃ bhavato hotu, kusalaṃ bhavato hotu, anāmayaṃ [Pg.148] bhavato hotu, sukhaṃ bhavato hotu, svāgataṃ bhavato hotu, attho bhavato hotu, hitaṃ bhavato hotu iccevamādi. आशीर्वाद देण्याच्या अर्थात: आयुष्यमान (पूज्य) यांना दीर्घायुष्य लाभो; आपले कल्याण होवो; आपले कुशल होवो; आपण निरोगी (आरोग्यसंपन्न) व्हावे; आपल्याला सुख लाभो; आपले स्वागत असो; आपले कल्याण होवो; आपले हित होवो, इत्यादी. Sammutippayoge– aññatra saṅghasammutiyā bhikkhussa vippavatthuṃ na vaṭṭati, sādhu sammuti me tassa bhagavato dassanāya iccevamādi. "संमती" (अनुमती) च्या प्रयोगात: संघाच्या संमतीशिवाय भिक्खूने (चीवरापासून) दूर राहणे योग्य नाही; त्या भगवंतांच्या दर्शनासाठी मला संमती देणे उत्तम आहे, इत्यादी. Bhiyyappayoge – bhiyyoso mattāyaṃ iccevamādi. "भिय्यो" (अधिक) च्या प्रयोगात: प्रमाणापेक्षा अधिक, इत्यादी. Sattamyatthe – tuyhañcassa āvi karomi, tassa me sakko pāturahosi iccevamādi. सप्तमी विभक्तीच्या अर्थात: मी ते तुमच्यासमोर प्रकट करतो; त्या माझ्यासमोर शक्र (इंद्र) प्रकट झाले, इत्यादी. Atthaggahaṇena bahūsu akkharappayogesu dissati. "अत्थ" (अर्थ) हा शब्द घेतल्याने अनेक अक्षरांच्या प्रयोगांमध्ये (उदाहरणे) दिसून येतात. Taṃ yathā? Upamaṃ mata karissāmi, dhammaṃ vo desessāmi. ते कसे? जसे की, मी तुम्हाला एक उपमा देईन; मी तुम्हास धम्म उपदेश करीन. Sāratthe ca – desetu bhante bhagavā dhammaṃ bhikkhūnaṃ. Tassa phāsu vihārāya hoti, etassa pahiṇeyya, yathā no bhagavā byākareyya, tathāpi tesaṃ byākarissāma[Pg.149], kappati samaṇānaṃ āyogo, amhākaṃ maṇinā attho, kimattho me buddhena, seyyo me attho, bahūpakārā bhante mahāpajā patigotamī bhagavato, bahūpakārā bhikkhave mātāpitaro puttānaṃ iccevamādi. आणि 'सार' (गती किंवा चिंता/हित) च्या अर्थात: "भंते, भगवंतांनी भिक्खूंना धम्म उपदेश करावा." त्याच्या सुखावह विहारासाठी (राहण्यासाठी) ते होते; त्याला ते पाठवले जावे; ज्याप्रमाणे भगवंतांनी आम्हाला स्पष्ट केले, त्याचप्रमाणे आम्ही त्यांना ते स्पष्ट करू; श्रमणांना 'आयोग' (प्रयत्न/अभ्यास) कल्पतो (योग्य आहे); आम्हाला मण्यांची (रत्नांची) गरज आहे; मला बुद्धांपासून काय लाभ (प्रयोजन)? माझ्यासाठी हित हेच सर्वश्रेष्ठ आहे; भंते, महाप्रजापती गोतमी भगवंतांसाठी अत्यंत उपकारक ठरल्या आहेत; भिक्खूंनो, माता-पिता पुत्रांसाठी अत्यंत उपकारक असतात, इत्यादी. Sesesu akkharappayogesupi aññepi payogā payogavicakkhaṇehi yojetabbā. उर्वरित शब्दांच्या प्रयोगांमध्येही, प्रयोगांमध्ये कुशल असलेल्यांनी इतर उदाहरणे तयार करावीत. Caggahaṇaṃ vikappanatthavāggahaṇānukaḍḍhanatthaṃ. Ye keci saddā sampadānappayogikā mayā nopadiṭṭhā, tesaṃ gahaṇatthaṃ idha vikappīyati vāsaddo. "च" चे ग्रहण हे विकल्प अर्थ असलेल्या "वा" शब्दाला ओढण्यासाठी आहे. येथे "वा" हा शब्द माझ्याद्वारे न दर्शविलेल्या संप्रदान कारकातील इतर कोणत्याही शब्दांच्या ग्रहणासाठी विकल्प म्हणून वापरला आहे. Taṃ yathā? Bhikkhusaṅghassa pabhū ayaṃ bhagavā, desassa pabhū ayaṃ rājā. Khettassa pabhū ayaṃ gahapati, araññassa pabhū ayaṃ luddako iccevamādi. Kvaci dutiyā tatiyā pañcamī chaṭṭhī sattamyatthesu ca. ते कसे? जसे की, हे भगवंत भिक्खू संघाचे स्वामी आहेत; हा राजा देशाचा स्वामी आहे; हा गृहपती शेताचा मालक आहे; हा शिकारी जंगलाचा स्वामी आहे, इत्यादी. काही ठिकाणी द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी आणि सप्तमी विभक्तीच्या अर्थांमध्येही (हे होते). 178, 320. Yodhāro tamokāsaṃ. १७८, ३२०. जो आधार (पात्र/स्थान) आहे, त्याला "ओकास" (अवकाश/स्थान) अशी संज्ञा दिली जाते. Yo ādhāro, taṃ okāsasaññaṃ hoti. Svādhāro catubbidho byāpiko, opasilesiko, vesayiko sāmīpiko cāti. जो आधार आहे, त्याला 'ओकास' संज्ञा प्राप्त होते. तो आधार चार प्रकारचा असतो: (१) व्यापक (व्यापिक), (२) निकट संपर्क (ओपसिलेसिक), (३) विषय किंवा क्षेत्र (वेसयिक) आणि (४) समीपता (सामीपिक). Tattha [Pg.150] byāpiko tāva–jalesu khīraṃ tiṭṭhati, tilesu telaṃ, ucchūsu raso. त्यापैकी व्यापक आधार म्हणजे: पाण्यात दूध असते (किंवा दुधात पाणी असते), तिळामध्ये तेल असते, उसात रस असतो. Opasilesiko–pariyaṅke rājā seti, āsane upaviṭṭho saṅgho. निकट संपर्क (ओपसिलेसिक): राजा पलंगावर झोपतो; संघ आसनावर बसला आहे. Vesayiko–bhūmīsu manussā caranti, antalikkhe vāyū vāyanti. Ākāse sakuṇā pakkhandanti. विषय किंवा क्षेत्र (वेसयिक): मनुष्य पृथ्वीवर चालतात; अंतराळात वारा वाहतो; आकाशात पक्षी उडतात. Sāmīpiko–vane hatthino caranti, gaṅgāyaṃ ghoso tiṭṭhati, vaje gāvo duhanti, sāvatthiyaṃ viharati jetavane. समीपता (सामीपिक): जंगलाजवळ हत्ती फिरतात; गंगेच्या काठावर (जवळ) गवळ्यांची वस्ती आहे; गोठ्याजवळ गाईंचे दूध काढतात; (भगवंत) सावत्थीजवळ जेतवनात विहार करतात. Okāsamiccanena kvattho? Okāse sattamī. "ओकास" असे म्हणण्याचे काय प्रयोजन आहे? "ओकासे सत्तमी" (सप्तमी विभक्ती ओकास अर्थात होते) या सूत्रात उपयोगासाठी. 279, 292. Yena vā kayirate taṃ karaṇaṃ. २७९, २९२. ज्याच्याद्वारे (क्रिया) केली जाते, ते "करण" होय. Yena vā kayirate, yena vā passati, yena vā suṇāti, taṃ kārakaṃ karaṇasaññaṃ hoti. ज्याच्याद्वारे मनुष्य करतो, ज्याच्याद्वारे पाहतो, किंवा ज्याच्याद्वारे ऐकतो, त्या कारकाला "करण" संज्ञा प्राप्त होते. Dattena vihiṃ lunāti, vāsiyā kaṭṭhaṃ tacchati, pharasunā rukkhaṃ chindati, kudālena pathaviṃ khaṇati, satthena kammaṃ karoti. Cakkhunā rūpaṃ passati. तो विळ्याने भात (धान्य) कापतो; वाश्याने (तासणीने) लाकूड तासतो; कुऱ्हाडीने झाड तोडतो; कुदळीने जमीन खणतो; शस्त्राने (सुरीने) काम करतो; डोळ्याने रूप पाहतो. Karaṇamiccanena kvattho? Karaṇe tatiyā. "करण" असे म्हणण्याचे काय प्रयोजन आहे? "करणे ततिया" (करण कारकात तृतीया विभक्ती होते) या सूत्रात 'करण' संज्ञेच्या उपयोगासाठी. 280, 285. Yaṃ [Pg.151] karoti taṃ kammaṃ. २८०, २८५. मनुष्य जे करतो, ते "कर्म" होय. Yaṃ vā karoti, yaṃ vā passati, yaṃ vā suṇāti, taṃ kārakaṃ kammasaññaṃ hoti. मनुष्य जे करतो, जे पाहतो, किंवा जे ऐकतो, त्या कारकाला "कर्म" संज्ञा प्राप्त होते. Chattaṃ karoti, rathaṃ karoti, rūpaṃ passati, saddaṃ suṇāti, kaṇṭakaṃ maddati, visaṃ gilati. तो छत्री बनवतो; रथ बनवतो; रूप पाहतो; शब्द ऐकतो; काट्यावर पाय देतो (काटा तुडवतो); विष गिळतो. Kammamiccanena kvattho? Kammatthe dutiyā. "कर्म" असे म्हणण्याचे काय प्रयोजन आहे? "कम्मत्थे दुतिया" (कर्म अर्थात द्वितीया विभक्ती होते) या सूत्रात 'कर्म' संज्ञेच्या उपयोगासाठी. 281, 294. Yo karoti sa kattā. २८१, २९४. जो करतो, तो "कर्ता" (कत्तू) होय. Yo karoti, so kattusañño hoti. जो करतो, त्याला "कर्ता" संज्ञा प्राप्त होते. Ahinā daṭṭho naro, garuḷena hato nāgo. Buddhena jito māro, upaguttena māro bandho. माणसाला सापाने दंश केला आहे; गरुडाने नागाला मारले; बुद्धांनी माराचा पराभव केला; उपगुप्ताने माराला बांधले. Kattuiccanena kvattho? Kattari ca. "कर्ता" असे म्हणण्याचे काय प्रयोजन आहे? "कत्तरि च" (कर्त्यामध्ये तृतीया विभक्ती होते) या सूत्रात 'कर्ता' संज्ञेच्या उपयोगासाठी. 282, 295. Yo kāreti sa hetu. २८२, २९५. जो करवून घेतो (प्रेरणा देतो), तो "हेतू" होय. Yo kattāraṃ kāreti, so hetusañño hoti, kattā ca. जो कर्त्याकडून काम करवून घेतो, त्याला "हेतू" आणि "कर्ता" ही संज्ञा प्राप्त होते. So puriso taṃ purisaṃ kammaṃ kāreti so puriso tena purisena kammaṃ kāreti, so puriso tassa purisassa kammaṃ kāreti. Evaṃ hāreti pāṭheti pāceti, dhāreti. तो माणूस त्या माणसाकडून काम करवून घेतो (किंवा तो माणूस त्या माणसाद्वारे काम करवून घेतो, किंवा तो माणूस त्या माणसाचे काम करवून घेतो). याचप्रमाणे 'हारेति' (आणायला लावतो), 'पाठेति' (वाचायला लावतो), 'पाचेति' (शिजवायला लावतो), 'धारेति' (धारण करायला लावतो) हे रूपे होतात. Hetuiccanena kvattho? Dhātūhi ṇe ṇaya ṇāpe ṇāpayā kāritāni hetvatthe. "हेतू" असे म्हणण्याचे काय प्रयोजन आहे? "धातूहि णे णय णापे णापया कारितानि हेत्वत्थे" या सूत्रात 'हेतू' संज्ञेच्या उपयोगासाठी. 283, 316. Yassa [Pg.152] vā pariggaho taṃ sāmī. २८३, ३१६. ज्याचा ताबा असतो, तो 'सामी' (स्वामी) होय. Yassa vā pariggaho, taṃ sāmīsaññaṃ hoti. ज्याचा ताबा असतो, त्याला 'सामी' (स्वामी) ही संज्ञा प्राप्त होते. Tassa bhikkhuno paṭivīso, tassa bhikkhuno patto, tassa bhikkhuno cīvaraṃ, attano mukhaṃ. त्या भिक्खूचा वाटा, त्या भिक्खूचे पात्र, त्या भिक्खूचे चीवर, स्वतःचा चेहरा. Sāmīiccanena kvattho? Sāmismiṃ chaṭṭhī. 'सामी' असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 'सामिस्मिं छट्ठी' या सूत्रात 'सामी' या संज्ञेचा वापर करण्यासाठी. 284, 283. Liṅgatthe paṭhamā. २८४, २८३. प्रातिपदिकार्थात (शब्दाच्या मूळ अर्थात) प्रथमा विभक्ती होते. Liṅgatthābhidhānamatte paṭhamāvibhatti hoti. केवळ प्रातिपदिकार्थाचा निर्देश करण्यासाठी प्रथमा विभक्ती होते. Puriso, purisā, eko, dve, ca, vā, he, ahe, re, are. पुरुष, पुरुष (अनेकवचन), एक, दोन, आणि, किंवा, हे, अहे, रे, अरे. 285, 70. Ālapane ca. २८५, ७०. संबोधनात सुद्धा (प्रथमा विभक्ती होते). Ālapanatthā dhike liṅgatthābhidhānamatte ca paṭhamāvibhatti hoti. जेव्हा केवळ प्रातिपदिकार्थाच्या निर्देशाहून अधिक संबोधनाचा अर्थ व्यक्त करायचा असतो, तेव्हाही प्रथमा विभक्ती होते. Bho purisa, bhavanto purisā, bho rāja, bhavanto rājāno, he sakhe, he sakhino. हे माणसा, हे माणसांनो; हे राजा, हे राजांनो; हे मित्रा, हे मित्रांनो. 286, 291. Karaṇe tatiyā. २८६, २९१. करण कारकात तृतीया विभक्ती होते. Karaṇakārake tatiyāvibhatti hoti. करण कारकात तृतीया विभक्ती होते. Agginā kuṭiṃ jhāpeti, manasā ce paduṭṭhena, manasā ce pasannena, kāyena kammaṃ karoti. तो अग्नीने कुटी जाळतो; जर दूषित मनाने; जर प्रसन्न मनाने; तो शरीराने कर्म करतो. 287, 299. Sahādiyoge [Pg.153] ca. २८७, २९९. 'सह' इत्यादींच्या योगात सुद्धा (तृतीया विभक्ती होते). Sahādiyogatthe ca tatiyāvibhatti hoti. 'सह' इत्यादींच्या योगात आणि त्या अर्थी सुद्धा तृतीया विभक्ती होते. Sahāpi gaggena saṅgho uposathaṃ kareyya, vināpi gaggena, mahatā bhikkhusaṅghena saddhiṃ, sahassena samaṃ mitā. संघाने गग्गसह किंवा गग्गशिवाय उपोसथ करावा; मोठ्या भिक्खूसंघासोबत; एक हजाराच्या बरोबरीने मोजलेले. 288, 293. Kattari ca. २८८, २९३. कर्ता कारकात सुद्धा (तृतीया विभक्ती होते). Kattari ca tatiyāvibhatti hoti. कर्ता कारकात सुद्धा तृतीया विभक्ती होते. Raññā hato poso, yakkhena dinno varo, ahinā daṭṭho naro. राजाद्वारे मनुष्य मारला गेला; यक्षाद्वारे वर दिला गेला; सर्पाद्वारे मनुष्य दंशित झाला. 289, 297. Hetvatthe ca. २८९, २९७. हेतू अर्थी सुद्धा (तृतीया विभक्ती होते). Hetvatthe ca tatiyāvibhatti hoti. हेतू अर्थी सुद्धा तृतीया विभक्ती होते. Annena vasati, dhammena vasati, vijjāya vasati, sakkārena vasati. तो अन्नामुळे राहतो; तो धम्मामुळे राहतो; तो विद्येमुळे राहतो; तो सत्कारासाठी राहतो. 290, 298. Sattamyatthe ca. २९०, २९८. सप्तमीच्या अर्थी सुद्धा (तृतीया विभक्ती होते). Sattamyatthe ca tatiyāvibhatti hoti. सप्तमीच्या अर्थी सुद्धा तृतीया विभक्ती होते. Tena [Pg.154] kālena, tena samayena. (Yena kālena, yena samayena,) tena kho pana samayena. त्या काळात, त्या वेळी. खरोखर, त्याच वेळी. 291, 299. Yenaṅgavikāro. २९१, २९९. ज्या अवयवामुळे विकार दर्शवला जातो. Yena byādhimatā aṅgena aṅgino vikāro lakkhīyate. Tattha tatiyāvibhatti hoti. ज्या रोगग्रस्त अवयवामुळे शरीराचा विकार दिसून येतो, त्या अवयवाच्या वाचक शब्दात तृतीया विभक्ती होते. Akkhinā kāṇo, hatthena kuṇī, kāṇaṃ passati nettena, pādena khañjo, piṭṭhiyā khujjo. डोळ्याने काणा; हाताने लुळा; तो डोळ्याने काण्या असलेल्या माणसाला पाहतो; पायाने लंगडा; पाठीने कुबडा. 292, 300. Visesane ca. २९२, ३००. विशेषण अर्थी सुद्धा (तृतीया विभक्ती होते). Visesanatthe ca tatiyāvibhatti hoti. विशेषण अर्थी सुद्धा तृतीया विभक्ती होते. Gottena gotamo nātho, suvaṇṇena abhirūpo, tapasā uttamo. गोत्राने गोतम असलेले नाथ; सुवर्ण रंगाने देखणे; तपश्चर्येने उत्तम. 293, 301. Sampadāne catutthī. २९३, ३०१. संप्रदान कारकात चतुर्थी विभक्ती होते. Sampadānakārake catutthīvibhatti hoti. संप्रदान कारकात चतुर्थी विभक्ती होते. Buddhassa vā dhammassa vā saṅghassa vā dānaṃ deti, dātā hoti samaṇassa vā brāhmaṇassa vā. तो बुद्धांना, धम्माला किंवा संघाला दान देतो; श्रमणाला किंवा ब्राह्मणाला दान देणारा होतो. 294, 305. Namoyogādīsvapi ca. २९४, ३०५. 'नमो' इत्यादींच्या योगात सुद्धा (चतुर्थी विभक्ती होते). Namoyogādīsvapi ca catutthīvibhatti hoti. 'नमो' इत्यादींच्या योगात सुद्धा चतुर्थी विभक्ती होते. Namo [Pg.155] te buddha vīratthu, sotthi pajānaṃ, namo karohi nāgassa, svāgataṃ te mahārāja. हे वीर बुद्ध! आपल्याला नमस्कार असो; प्रजेचे कल्याण असो; नागाला नमस्कार कर; हे महाराज, आपले स्वागत असो. 295, 307. Apādāne pañcamī. २९५, ३०७. अपादान कारकात पंचमी विभक्ती होते. Apādānakārake pañcamīvibhatti hoti. अपादान कारकात पंचमी विभक्ती होते. Pāpā cittaṃ nivāraye, abbhā muttova candimā, bhayā muccati so naro. पापापासून मनाचे निवारण करावे; ढगांतून मुक्त झालेल्या चंद्राप्रमाणे; तो मनुष्य भयापासून मुक्त होतो. 296, 314. Kāraṇatthe ḍha. २९६, ३१४. कारणाच्या अर्थातही. Kāraṇatthe ca pañcamīvibhatti hoti. कारणाच्या अर्थात पंचमी विभक्ती देखील होते. Ananubodhā appaṭivedhā catunnaṃ ariyasaccānaṃ yathābhūtaṃ adassanā. (चार आर्यसत्यांचे) आकलन न झाल्यामुळे, (त्यांचा) वेध न घेतल्यामुळे, चार आर्यसत्यांचे यथार्थ दर्शन न झाल्यामुळे. 297, 284. Kammatthe dutiyā. २९७, २८४. कर्माच्या अर्थात द्वितीया (विभक्ती होते). Kammatthe dutiyāvibhatti hoti. कर्माच्या अर्थात द्वितीया विभक्ती होते. Gāvaṃ hanati, vīhayo lunāti, satthaṃ karoti, ghaṭaṃ karoti, rathaṃ karoti, dhammaṃ suṇāti, buddhaṃ pūjeti, vācaṃ bhāsatī, taṇḍulaṃ vacati, coraṃ ghāteti. तो गाय मारतो; तो भात (धान्य) कापतो; तो शस्त्र (किंवा ग्रंथ) बनवतो; तो घडा बनवतो; तो रथ बनवतो; तो धम्म ऐकतो; तो बुद्धांची पूजा करतो; तो शब्द बोलतो; तो तांदूळ शिजवतो; तो चोराला मारतो. 298, 287. Kāladdhānamaccantasaṃyoge. २९८, २८७. काळ आणि मार्ग यांच्या अत्यंत संयोगात (सतत संबंधात). Kāladdhānaṃ accantasaṃyoge dutiyāvibhatti hoti. काळ आणि मार्ग यांच्या अत्यंत संयोगात द्वितीया विभक्ती होते. Māsaṃ [Pg.156] maṃsodanaṃ bhuñjati, saradaṃ ramaṇīyā nadī, māsaṃ sajjhāyati, yojanaṃ vanarāji, yojanaṃ dīgho pabbato, kosaṃ sajjhāyati. तो महिनाभर मांस-भात खातो; शरद ऋतूत नदी रमणीय असते; तो महिनाभर सज्झाय (पाठ) करतो. वनराजी (जंगलाची रांग) एक योजन लांब आहे; पर्वत एक योजन लांब आहे; तो एक कोसभर सज्झाय करतो. Accantasaṃyogeti kimatthaṃ? Saṃvacchare bhojanaṃ bhuñjati. "अत्यंतसंयोगे" (अत्यंत संयोग असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? वर्षातून एकदा भोजन करतो (येथे अत्यंत संयोग नाही). 299, 288. Kammappavadhanīyayutte. २९९, २८८. कर्मप्रवचनीय शब्दांच्या योगात. Kammappavacanīyayutte dutiyāvibhatti hoti. कर्मप्रवचनीय शब्दांच्या योगात द्वितीया विभक्ती होते. Taṃ kho pana bhavantaṃ gotamaṃ evaṃ kalyāṇo kittisaddo abbhuggato, pabbajitamanupabbajiṃsu. त्या आदरणीय गोतमांची अशी कल्याणकारी कीर्ती पसरली आहे; त्यांच्या अनुसरणाने त्यांनी प्रवज्जा घेतली. 300, 286. Gati buddhi bhuja paṭha hara kara sayādīnaṃ kārite vā. ३००, २८६. किंवा 'गती' (जाणे), 'बुद्धी' (जाणणे), 'भुज' (खाणे), 'पठ' (वाचणे), 'हर' (नेणे), 'कर' (करणे), 'सय' (झोपणे) इत्यादी धातूंच्या प्रयोजक (कारित) रूपात. Gati buddhi bhuja paṭha hara kara sayādīnaṃ payoge kārite dutiyāvibhatti hoti vā. 'गती' (जाणे), 'बुद्धी' (जाणणे), 'भुज' (खाणे), 'पठ' (वाचणे), 'हर' (नेणे), 'कर' (करणे), 'सय' (झोपणे) इत्यादी धातूंच्या प्रयोजक प्रयोगात विकल्पे द्वितीया विभक्ती होते. Puriso purisaṃ (gāmaṃ) gāmayati, puriso purisena vā, puriso purisassa vā. Evaṃ bodhayati, bhojayati, pāṭhayati, hārayati, kārayati, sayāpayati. Evaṃ sabbattha kārite. माणूस माणसाला गावात पाठवतो (जाण्यास प्रवृत्त करतो), किंवा 'माणसाद्वारे' (तृतीया) किंवा 'माणसाला' (षष्ठी). याचप्रमाणे बोधयति (जाणवून देतो), भोजयति (जेऊ घालतो), पाठयति (शिकवतो), हारयति (वाहून नेण्यास लावतो), कारयति (करवून घेतो), सयापयति (झोपवतो). अशा प्रकारे सर्व प्रयोजक प्रयोगात होते. 301, 215. Sāmismiṃ chaṭṭhī. ३०१, २१५. स्वामी (मालक किंवा संबंध) अर्थात षष्ठी (विभक्ती होते). Sāmismiṃ chaṭṭhīvibhatti hoti. स्वामी (मालक किंवा संबंध) अर्थात षष्ठी विभक्ती होते. Tassa [Pg.157] bhikkhuno paṭivīso, tassa bhikkhuno patto, tassa bhikkhuno cīvaraṃ, attano mukhaṃ. त्या भिक्खूचा वाटा, त्या भिक्खूचे पात्र, त्या भिक्खूचे चीवर, स्वतःचे मुख. 302, 319. Okāse sattamī. ३०२, ३१९. अधिकरण (स्थान) अर्थात सप्तमी (विभक्ती होते). Okāsakārake sattamīvibhatti hoti. अधिकरण कारकात सप्तमी विभक्ती होते. Gambhīre odakantike, pāpasmiṃ ramati mano, bhagavati brahmacariyaṃ vussati kulaputto. खोल पाण्याच्या तळाशी; मन पापात रमते; कुलपुत्र भगवंतांच्या शासनात ब्रह्मचर्य पाळतो. 303, 321. Sāmissarādhipati dāyāda sakkhīpatibhū pasutakusalehi ca. ३०३, ३२१. तसेच 'सामी' (मालक), 'इस्सर' (स्वामी), 'अधिपती' (नायक), 'दायाद' (वारसदार), 'सक्खी' (साक्षीदार), 'पतिभू' (जामीनदार), 'पसुत' (मग्न असलेला) आणि 'कुसल' (कुशल) यांच्या योगातही. Sāmī issara adhipati dāyāda sakkhīpatibhū pasutakusala iccetehi payoge chaṭṭhīvibhatti hoti, sattamī ca. 'सामी' (मालक), 'इस्सर' (स्वामी), 'अधिपती' (नायक), 'दायाद' (वारसदार), 'सक्खी' (साक्षीदार), 'पतिभू' (जामीनदार), 'पसुत' (मग्न असलेला) आणि 'कुसल' (कुशल) यांच्या योगात षष्ठी आणि सप्तमी विभक्ती होते. Goṇānaṃ sāmī, goṇesu sāmī, goṇānaṃ issaro, goṇesu issaro. Goṇānaṃ adhipati, goṇesu adhipati. Goṇānaṃ dāyādo, goṇesu dāyādo. Goṇānaṃ sakkhī, goṇesu sakkhī, goṇānaṃ patibhū, goṇesu patibhū. Goṇānaṃ pasuto, goṇesu pasuto. Goṇānaṃ kusalo, goṇesu kusalo. बैलांचा मालक, बैलांमध्ये मालक; बैलांचा स्वामी, बैलांमध्ये स्वामी; बैलांचा अधिपती, बैलांमध्ये अधिपती; बैलांचा वारसदार, बैलांमध्ये वारसदार; बैलांचा साक्षीदार, बैलांमध्ये साक्षीदार; बैलांचा जामीनदार, बैलांमध्ये जामीनदार; बैलांमध्ये मग्न असलेला; बैलांच्या कामात कुशल. 304, 322. Niddhāraṇe ca. ३०४, ३२२. निर्धारण (समूहातून वेगळे करणे) अर्थातही. Niddhāraṇatthe ca chaṭṭhīvibhatti hoti, sattamī ca. निर्धारण अर्थात षष्ठी आणि सप्तमी विभक्ती होते. Kaṇhā [Pg.158] gāvīnaṃ sampannakhīratamā, kaṇhā gāvīsu sampannakhīratamā. Sāmā nārīnaṃ dassanīyatamā, sāmā nārīsu dassanīyatamā. Manussānaṃ khattiyo sūratamo, manussesu khattiyo sūratamo. Pathikānaṃ dhāvanto sīghatamo, pathikesu dhāvanto sīghatamo. गाईंमध्ये काळी गाय सर्वाधिक दूध देणारी असते; स्त्रियांमध्ये श्यामवर्णीय (किंवा सुवर्णवर्णीय) स्त्री सर्वात सुंदर असते; मनुष्यांमध्ये क्षत्रिय सर्वात शूर असतो; प्रवाशांमध्ये धावणारा सर्वात वेगवान असतो. 305, 323. Anādare ca. ३०५, ३२३. अनादर (उपेक्षा) अर्थातही. Anādare chaṭṭhīvibhatti hoti, sattamī ca. अनादर अर्थात षष्ठी आणि सप्तमी विभक्ती होते. Rudato dārakassa pabbaji, rudantasmiṃ dārake pabbaji. रडणाऱ्या मुलाची उपेक्षा करून तो प्रवज्जित झाला (भिक्खू झाला). 306, 289. Kvaci dutiyā chaṭṭhīnamatthe. ३०६, २८९. कधीकधी षष्ठीच्या अर्थात द्वितीया विभक्ती होते. Chaṭṭhīnamatthe kvaci dutiyāvibhatti hoti. षष्ठीच्या अर्थात कधीकधी द्वितीया विभक्ती होते. Apissu maṃ aggivessana tisso upamā paṭibhaṃsu. हे अग्निवेश्न! खरोखर मला तीन उपमा सुचल्या. 307, 290. Tatiyāsattamīnañca. ३०७, २९०. आणि तृतीया व सप्तमीच्या अर्थातही. Tatiyāsattamīnaṃ atthe ca kvaci dutiyāvibhatti hoti. आणि तृतीया व सप्तमीच्या अर्थात कधीकधी द्वितीया विभक्ती होते. Sace maṃ samaṇo gotamo ālapissati, tvañca maṃ nābhibhāsasi. Evaṃ tatiyatthe. जर श्रमण गोतम माझ्याशी बोलतील; आणि तू माझ्याशी बोलत नाहीस. अशा प्रकारे तृतीयेच्या अर्थात. Pubbaṇhasamayaṃ nivāsetvā, ekaṃ samayaṃ bhagavā. Evaṃ sattamyatthe. सकाळच्या वेळी (चीवर) परिधान करून; एका समयी भगवान. अशा प्रकारे सप्तमीच्या अर्थात. 308, 317. Chaṭṭhī [Pg.159] ca. ३०८, ३१७. आणि षष्ठी विभक्ती देखील. Tatiyāsattamīnaṃ atthe ca kvaci chaṭṭhīvibhatti hoti. तृतीया आणि सप्तमीच्या अर्थात कधीकधी षष्ठी विभक्ती देखील होते. Kato me kalyāṇo, kataṃ me pāpaṃ. Evaṃ tatiyatthe. माझ्याद्वारे कल्याण (चांगले कर्म) केले गेले, माझ्याद्वारे पाप केले गेले. अशा प्रकारे तृतीयेच्या अर्थात. Kusalā naccagītassa sikkhitā cāturitthiyo, kusalo tvaṃ rathassa aṅgapaccaṅgānaṃ. Evaṃ sattamyatthe. नृत्य आणि गायनात कुशल व प्रशिक्षित अशा चतुर स्त्रिया; तू रथाच्या अंग-प्रत्यंगांमध्ये कुशल आहेस का? अशा प्रकारे सप्तमीच्या अर्थात. Kvacīti kimatthaṃ? Yo vo ānanda mayā dhammo ca vinayo ca desito paññatto, ānando atthesu vicakkhaṇo. 'क्वचि' (कधीकधी) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'हे आनंदा, माझ्याद्वारे जो धम्म आणि विनय उपदेशिला व प्रज्ञप्त केला गेला आहे', 'आनंद अर्थांमध्ये चतुर आहे'. 309, 318. Dutiyāpañcamīnañca. ३०९, ३१८. द्वितीया आणि पंचमीच्या अर्थातही. Dutiyāpañcamīnañca atthe kvaci chaṭṭhīvibhatti hoti. द्वितीया आणि पंचमीच्या अर्थातही कधीकधी षष्ठी विभक्ती होते. Tassa bhavanti vattāro, sahasā kammassa kattāro, evaṃ dutiyatthe. त्याला बोलणारे असतात, अचानक कर्माचे कर्ते असतात. अशा प्रकारे द्वितीयेच्या अर्थात. Assavanatā dhammassa parihāyanti, kinnu kho ahaṃ tassa sukhassa bhāyāmi, sabbe tasanti daṇḍassa, sabbe bhāyanti maccuno, bhīto catunnaṃ āsīvisānaṃ ghoravisānaṃ, bhāyāmi ghoravisassa nāgassa. Evaṃ pañcamyatthe. धम्म न ऐकल्यामुळे ते धम्मापासून भ्रष्ट होतात. मी त्या सुखाला का बरे भ्यावे? सर्व जण दंडाला (शिक्षेला) घाबरतात, सर्व जण मृत्यूला घाबरतात. चार अत्यंत विषारी सापांना घाबरलेला, मी अत्यंत विषारी नागाला घाबरतो. अशा प्रकारे पंचमीच्या अर्थात. 310, 324. Kamma [Pg.160] karaṇa nimittatthesu sattamī. ३१०, ३२४. कर्म, करण आणि निमित्त यांच्या अर्थात सप्तमी. Kammakaraṇanimittatthesu sattamīvibhatti hoti. कर्म, करण आणि निमित्त यांच्या अर्थात सप्तमी विभक्ती होते. Sundarāvuso ime ājīvakā bhikkhūsu abhivādenti. Evaṃ kammatthe. हे मित्रा, हे आजीवक भिक्खूंना अभिवादन करतात. अशा प्रकारे कर्माच्या अर्थात. Hatthesu piṇḍāya caranti, pattesu piṇḍāya caranti, pathesu gacchanti. Evaṃ karaṇatthe. ते हातांनी भिक्षेसाठी फिरतात, पात्रांनी भिक्षेसाठी फिरतात, मार्गांनी जातात. अशा प्रकारे करणाच्या अर्थात. Dīpi cammesu haññate, kuñjaro dantesu haññate, evaṃ nimittatthe. चित्ता त्याच्या कातडीसाठी मारला जातो, हत्ती त्याच्या दातांसाठी मारला जातो. अशा प्रकारे निमित्ताच्या अर्थात. 311, 325. Sampadāne ca. ३११, ३२५. संप्रदानाच्या अर्थातही. Sampadāne ca sattamīvibhatti hoti. संप्रदानाच्या अर्थातही सप्तमी विभक्ती होते. Saṅghe dinnaṃ mahapphala, saṅghe gotamī dehi, saṅghe te dinne ahañceva pūjito bhavissāmi. संघात दिलेले दान महाफळ देणारे असते; हे गोतमी, संघात दान दे; तुझ्याद्वारे संघात दान दिले असता मी देखील पूजला जाईन. 312, 326. Pañcamyatthe ca. ३१२, ३२६. पंचमीच्या अर्थातही. Pañcamyatthe ca sattamīvibhatti hoti. पंचमीच्या अर्थातही सप्तमी विभक्ती होते. Kadalīsu gaje rakkhanti. ते केळीच्या झाडांपासून हत्तींचे रक्षण करतात (हत्तींना दूर ठेवतात). 313, 327. Kālabhāvesu ca. ३१३, ३२७. काळ आणि भावाच्या अर्थातही. Kālabhāvesu ca kattari payujjamāne sattamīvibhatti hoti. काळ आणि भावाच्या अर्थात कर्ता वापरला जात असताना सप्तमी विभक्ती होते. Pubbaṇhasamaye [Pg.161] gato, sāyanhasamaye āgato. Bhikkhūsu bhojīyamānesu gato, bhuttesu āgato. Gosuduyhamānesu gato, duddhāsu āgato. सकाळच्या वेळी गेला, संध्याकाळच्या वेळी आला. भिक्खूंना भोजन दिले जात असताना गेला, त्यांनी भोजन केल्यावर आला. गाईंचे दूध काढले जात असताना गेला, दूध काढून झाल्यावर आला. 314, 328. Upa’jhādhikissaravacane. ३१४, ३२८. 'उप' आणि 'अधि' यांच्या योगात अधिक आणि ईश्वर (अधिकार) या अर्थी. Upaadhiiccetesaṃ payoge adhikaissaravacane sattamīvibhatti hoti. 'उप' आणि 'अधि' यांच्या प्रयोगात अधिक आणि ईश्वर (अधिकार) या अर्थी सप्तमी विभक्ती होते. Upa khāriyaṃ doṇo, upa nikkhe kahāpaṇaṃ. Adhi brahmadatte pañcālā, adhi naccesu gotamī, adhi devesu buddho. खारीपेक्षा एक दोण अधिक, निक्खापेक्षा एक कहापण अधिक. ब्रह्मदत्ताच्या अधिकाराखाली पांचाल देश आहे, नर्तकींमध्ये गोतमी श्रेष्ठ आहे, देवांमध्ये बुद्ध श्रेष्ठ आहेत. 315, 329. Maṇḍitu’ssukkesu tatiyā. ३१५, ३२९. 'मंडित' आणि 'उत्सुक' यांच्या योगात तृतीया विभक्ती होते. Maṇḍitaussukkaiccetesvatthesu tatiyāvibhatti hoti, sattamī ca. 'मंडित' आणि 'उत्सुक' या अर्थांमध्ये तृतीया विभक्ती होते आणि सप्तमी देखील होते. Ñāṇena pasīdito, ñāṇasmiṃ vā pasīdito, ñāṇena ussukko, ñāṇasmiṃ vā ussukko tathāgato vā tathāgatagotto vā. ज्ञानाने शोभिवंत किंवा ज्ञानात शोभिवंत; ज्ञानाने उत्सुक किंवा ज्ञानात उत्सुक असलेला तथागत किंवा तथागत गोत्रातील व्यक्ती. Iti nāmakappe kārakakappo chaṭṭho kaṇḍo. अशा प्रकारे नामकल्पामध्ये कारककल्पाचा हा सहावा विभाग समाप्त झाला. Kārakakappo niṭṭhito. कारककल्प समाप्त झाला. 4. Samāsakappa ४. समासकल्प Sattamakaṇḍa सातवा विभाग 316, 331. Nāmānaṃ [Pg.162] samāso yuttattho. ३१६, ३३१. नामांचा परस्पर संबंध असलेला अर्थ म्हणजे समास होय. Tesaṃ nāmānaṃ payujjamānapadatthānaṃ yo yuttattho, so samāsasañño hoti. वापरल्या जाणाऱ्या पदांचे अर्थ परस्पर संबंध असलेले असतात, त्या नामांच्या अर्थाला 'समास' ही संज्ञा प्राप्त होते. Kathinadussaṃ, āgantukabhattaṃ, jīvitindriyaṃ, samaṇabrāhmaṇā, sāriputtamoggallānā, brāhmaṇa gahapatikā. कठिन वस्त्र, पाहुण्यांचे भोजन, जीवितेंद्रिय, श्रमण आणि ब्राह्मण, सारिपुत्त आणि मोग्गल्लान, ब्राह्मण आणि गृहपती. Nāmānamiti kimatthaṃ? Devadatto pacati, yaññadatto pacati. 'नामांचे' असे कशासाठी म्हटले आहे? 'देवदत्त शिजवतो', 'यज्ञदत्त शिजवतो'. Yuttatthoti kimatthaṃ? Bhato rañño putto devadattassa. 'परस्पर संबंध असलेला अर्थ' असे कशासाठी म्हटले आहे? 'राजाचा सेवक', 'देवदत्ताचा मुलगा'. Samāsaiccanena kvattho? Kvaci samāsantagatānamakāranto. 'समास' या संज्ञेचा काय उपयोग आहे? 'क्वचि समासंतगतानामकारंतो' या सूत्रात उपयोग होण्यासाठी. 317, 332. Tesaṃ vibhattiyo lopā ca. ३१७, ३३२. त्यांच्या विभक्तींचा लोप होतो. Tesaṃ yuttatthānaṃ samāsānaṃ vibhattiyo lopā ca honti. त्या परस्पर संबंध असलेल्या अर्थाच्या समासांमधील विभक्तींचा लोप होतो. Kathinadussaṃ[Pg.163], āgantukabhattaṃ. कठिन वस्त्र, पाहुण्यांचे भोजन. Tesaṃgahaṇena samāsataddhitākhyātakitakānaṃ vibhattipaccayapadakkharāgamā ca lopā honti. Vāsiṭṭho, venateyyo. "तेसं" (त्यांचे) हे ग्रहण केल्याने समास, तद्धित, आख्यात (क्रियापद) आणि कृदंत (कितक) यांच्या विभक्ती, प्रत्यय, पद, अक्षरे आणि आगम यांचाही लोप होतो. जसे की, वासिठ्ठो (वसिष्ठाचा पुत्र), वेनतेय्यो (विनतेचा पुत्र). Caggahaṇa mavadhāraṇatthaṃ, pabhaṅkaro, amataddado, medhaṅkaro, dīpaṅkaro. "च" चे ग्रहण हे अवधारण (नियमन/मर्यादा) करण्यासाठी आहे. जसे की, पभंकरो (प्रकाश निर्माण करणारा - सूर्य), अमतद्ददो (अमृत देणारा), मेधंकरो (मेधंकर बुद्ध), दीपंकरो (दीपंकर बुद्ध). 318, 333. Pakati cassa sarantassa. ३१८, ३३३. आणि स्वरांत (स्वराने शेवट होणाऱ्या) शब्दांचे मूळ रूप (प्रकृती) कायम राहते. Luttāsu vibhattīsu assa sarantassa liṅgassa pakatirūpāni honti. विभक्तींचा लोप झाला असता, त्या स्वरांत प्रातिपदिक (लिंग) शब्दांची मूळ रूपे कायम राहतात. Cakkhusotaṃ, mukhanāsikaṃ, rājaputto, rājapuriso. चक्षु आणि श्रोत्र (डोळा आणि कान); मुख आणि नासिका (तोंड आणि नाक); राजपुत्र (राजाचा मुलगा); राजपुरुष (राजाचा माणूस). 319, 330. Upasagganipātapubbako abyayībhāvo. ३१९, ३३०. ज्या समासाच्या सुरुवातीला उपसर्ग किंवा निपात असतो, त्याला "अव्ययीभाव" (अव्ययीभाव समास) म्हणतात. Upasagganipātapubbako samāso abyayībhāvasañño hoti. उपसर्ग किंवा निपात पूर्वपदी असलेल्या समासाला 'अव्ययीभाव' संज्ञा प्राप्त होते. Nagarassa [Pg.164] samīpe pavattati kathā iti upanagaraṃ, darathānaṃ abhāvo niddarathaṃ, makasānaṃ abhāvo nimmakasaṃ, vuḍḍhānaṃ paṭipāṭi yathāvuḍḍhaṃ, ye ye vuḍḍhā vā yathāvuḍḍhaṃ, jīvassa yattako paricchedo yāvajīvaṃ, cittamadhikicca pavattanti te dhammāti adhicittaṃ, pabbatassa tiro tiropabbataṃ, sotassa pati pavattati nāvā iti patisotaṃ, pāsādassa anto antopāsādaṃ. नगराच्या जवळ जी चर्चा चालते ते 'उपनगरं'; दराथांचा (क्लेश/थकवा) अभाव म्हणजे 'निद्दरथं'; डासांचा अभाव म्हणजे 'निम्मकसं'; वृद्धांच्या (ज्येष्ठांच्या) अनुक्रमानुसार म्हणजे 'यथावुड्ढं'; जितके आयुष्य आहे तितके म्हणजे 'यावजीवं'; चित्ताला अनुसरून जे धर्म प्रवृत्त होतात ते 'अधिचित्तं'; पर्वताच्या पलीकडे म्हणजे 'तिरोपब्बतं'; प्रवाहाच्या विरुद्ध जाणारी नौका म्हणजे 'पतिसोतं'; प्रासादाच्या (राजवाड्याच्या) आत म्हणजे 'अन्तोपासादं'. Abyayībhāvamiccanena kvattho? Aṃvibhattīna makārantā abyayībhāvā. "अव्ययीभाव" असे म्हणण्याचे काय प्रयोजन आहे? "अंविभत्तीनं अकारंता अव्ययीभावा" या सूत्रात 'अव्ययीभाव' संज्ञेच्या उपयोगासाठी. 320, 335. So napuṃsakaliṅgo. ३२०, ३३५. तो नपुंसकलिंगी असतो. So abyayībhāvasamāso napuṃsakaliṅgova daṭṭhabbo. तो अव्ययीभाव समास नपुंसकलिंगीच मानला पाहिजे. Kumārīsu adhikicca pavattati kathā iti adhikumāri, vadhuyā samīpe pavattati kathā iti upavadhu, gaṅgāya samīpe pavattati kathā iti upagaṅgaṃ, maṇikāya samīpe pavattati kathā iti upamaṇikaṃ. कुमारींविषयी (मुलींविषयी) जी चर्चा चालते ती 'अधिकुमारि'; सुनेच्या जवळ जी चर्चा चालते ती 'उपवधु'; गंगेच्या जवळ जी चर्चा चालते ते 'उपगंगं'; मोठ्या भांड्यापाशी (मण्यापाशी) जी चर्चा चालते ते 'उपमणिकं'. 321, 349. Digussekattaṃ. ३२१, ३४९. द्विगु समासात एकवचन (एकत्व) असते. Digussa samāsassa ekattaṃ hoti, napuṃsakaliṅgattañca. द्विगु समासाचे एकवचन होते आणि नपुंसकलिंगत्वही होते. Tayo [Pg.165] lokā tilokaṃ, tayo daṇḍā tidaṇḍaṃ, tīṇi nayanāni tinayanaṃ, tayo siṅgā tisiṅgaṃ. Catasso disā catuddisaṃ, pañca indriyāni pañcindriyaṃ. तीन लोक म्हणजे 'तिलोकं'; तीन दंड म्हणजे 'तिदंडं'; तीन नेत्र म्हणजे 'तिनयनं'; तीन शिंगे म्हणजे 'तिसिंगं'; चार दिशा म्हणजे 'चतुद्दिसं'; पाच इंद्रिये म्हणजे 'पञ्चiन्द्रियं'. 322, 359. Tathā dvande pāṇi tūriya yoggasenaṅgakhuddajantuka vividhaviruddha visabhāgatthādīnañca. ३२२, ३५९. त्याचप्रमाणे, प्राण्यांचे अवयव (पाणि-अंग), वाद्यांचे अवयव (तूरिय-अंग), वाहनांचे अवयव (योग्ग-अंग), सैन्याचे अवयव (सेनांग), लहान जीवजंतू (खुद्दजंतुक), परस्परांचे नैसर्गिक शत्रू (विविधविरुद्ध), विरुद्ध अर्थाचे शब्द (विसभागत्य) इत्यादींच्या द्वंद्व समासातही (एकवचन आणि नपुंसकलिंग होते). Tathā dvande samāse pāṇi tūriya yogga senaṅgakhuddajantuka vividhaviruddha visabhāgatthaiccevamādīnaṃ ekattaṃ hoti, napuṃsakaliṅgattañca. त्याचप्रमाणे, द्वंद्व समासामध्ये प्राण्यांचे अवयव, वाद्ये, वाहनाचे अवयव, सैन्याचे अवयव, लहान जीव, विविध प्रकारचे शत्रू आणि परस्परविरोधी अर्थ असणारे शब्द इत्यादींचे एकवचन आणि नपुंसकलिंग होते. Taṃ yathā? Cakkhu ca sotañca cakkhusotaṃ, mukhañca nāsikā ca mukhanāsikaṃ, chavi ca maṃsañca lohitañca chavimaṃsalohitaṃ. Evaṃ pāṇyaṅgatthe. ते कसे? 'चक्खुसोतं' (डोळा आणि कान); 'मुखनासिकं' (तोंड आणि नाक); 'छविमंसलोहितं' (त्वचा, मांस आणि रक्त). अशा प्रकारे प्राण्यांच्या अवयवांच्या अर्थामध्ये. Saṅkho ca paṇavo ca saṅkhapaṇavaṃ, gītañca vāditañca gītavāditaṃ, daddari ca ḍiṇḍimo ca daddariḍiṇḍimaṃ. Evaṃ tūriyaṅgatthe. 'संखपणवं' (शंख आणि ढोल); 'गीतवादितं' (गायन आणि वादन); 'दद्दरिडिंडिमं' (दद्दरि आणि डिंडिम - वाद्यांचे प्रकार). अशा प्रकारे वाद्यांच्या अर्थामध्ये. Phālo ca pācanañca phālapācanaṃ, yugañca naṅgalañca yuganaṅgalaṃ. Evaṃ yoggaṅgatthe. 'फालपाचनं' (नांगराचा फाळ आणि आरणी); 'युगनंगलं' (जू आणि नांगर). अशा प्रकारे वाहनाच्या अवयवांच्या अर्थामध्ये. Asi ca cammañca asicammaṃ, dhanu ca kalāpo ca dhanukalāpaṃ, hatthī ca asso ca hatthiassaṃ, ratho ca pattiko ca rathapattikaṃ. Evaṃ senaṅgatthe. 'असिचम्मं' (तलवार आणि ढाल); 'धनुक्लापं' (धनुष्य आणि बाणाचा भाता); 'हत्थिअस्सं' (हत्ती आणि घोडा); 'रथपत्तिकं' (रथ आणि पायदळ सैनिक). अशा प्रकारे सैन्याच्या अवयवांच्या अर्थामध्ये. Ḍaṃsā [Pg.166] ca makasā ca ḍaṃsamakasaṃ, kuntho ca kipilliko ca kunthakipillikaṃ, kīṭo ca sarīsapo ca kīṭasarīsapaṃ. Evaṃ khuddajantukatthe. 'दंसमकसं' (डास आणि माशी); 'कुन्थकिपिल्लिकं' (लहान मुंगी आणि लाल मुंगी); 'कीटसरीसपं' (कीटक आणि सरपटणारे प्राणी). अशा प्रकारे लहान जीवांच्या अर्थामध्ये. Ahi ca nakulo ca ahinakulaṃ, biḷāro ca mūsiko ca biḷāramūsikaṃ, kāko ca ulūko ca kākolūkaṃ. Evaṃ vividhaviruddhatthe. 'अहिनकुलं' (साप आणि मुंगूस); 'बिळारमूसिकं' (मांजर आणि उंदीर); 'काकोलूकं' (कावळा आणि घुबड). अशा प्रकारे स्वाभाविक शत्रूंच्या (परस्पर विरोधी जीवांच्या) अर्थामध्ये. Sīlañca paññāṇañca sīlapaññāṇaṃ, samatho ca vipassanā ca samathavipassanaṃ, vijjā ca caraṇañca vijjācaraṇaṃ. Evaṃ visabhāgatthe. 'सीलपञ्ञाणं' (शील आणि प्रज्ञा); 'समथविपस्सनं' (शमथ आणि विपश्यना); 'विज्जाचरणं' (विद्या आणि आचरण). अशा प्रकारे भिन्न स्वभाव किंवा परस्परविरोधी अर्थांच्या बाबतीत. Ādiggahaṇaṃ kimatthaṃ? Dāsī ca dāso ca dāsidāsaṃ, itthī ca pumā ca itthipumaṃ, patto ca cīvarañca pattacīvaraṃ, chattañca upāhanā ca chattupāhanaṃ, tikañca catukkañca tikacatukkaṃ, veno ca rathakāro ca venarathakāraṃ, sākuṇiko ca māgaviko ca savakuṇikamāgavikaṃ, dīgho ca majjhimo ca dīghamajjhimaṃ iccevamādi. 'आदि' (इत्यादी) हा शब्द घेण्याचा उद्देश काय? खालील शब्दांचा समावेश करण्यासाठी: 'दासीदासं' (दासी आणि दास); 'इत्थिपुमं' (स्त्री आणि पुरुष); 'पत्तचीवरं' (पात्र आणि चीवर); 'छत्तुपाहनं' (छत्री आणि पादत्राणे); 'तिकचतुक्कं' (त्रिक आणि चतुष्क); 'वेणरथकारं' (वेणू विणणारा आणि रथ बनवणारा); 'साकुणिकमागविकं' (पक्षी पकडणारा आणि शिकारी); 'दीघमज्झिमं' (दीर्घ आणि मध्यम) इत्यादी. 323, 360. Vibhāsā rukkha tiṇa pasukha na dhañña janapadādīnañca. ३२३, ३६०. वृक्ष (झाड), तृण (गवत), पशू (प्राणी), धन (संपत्ती), धान्य, जनपद (देश/प्रदेश) इत्यादींच्या बाबतीत हा नियम वैकल्पिकरित्या लागू होतो. Rukkhatiṇa pasu dhana dhañña janapadaiccevamādīnaṃ vibhāsā ekattaṃ hoti, napuṃsakaliṅgattañca dvande samāse. Assattho [Pg.167] ca kapītano ca assatthakapītanaṃ, assatthakapītanā vā. Usīrañca bīraṇañca usīrabīraṇaṃ, usīrabīraṇā vā. Ajo ca eḷako ca ajeḷakaṃ, ajeḷakā vā. Hiraññañca suvaṇṇañca hiraññasuvaṇṇaṃ, hiraññasuvaṇṇā vā. Sāli ca yavo ca sāliyavaṃ, sāliyavā vā. Kāsī ca kosalā ca kāsikosalaṃ, kāsikosalā vā. द्वंद्व समासामध्ये वृक्ष, तृण, पशू, धन, धान्य, जनपद इत्यादी शब्दांचे वैकल्पिकरित्या एकवचन आणि नपुंसकलिंग होते. जसे की, 'अस्सत्थकपीतनं' किंवा 'अस्सत्थकपीतना' (पिंपळ आणि पायर); 'उसीरबीरणं' किंवा 'उसीरबीरणं' (वाळा आणि खसखस); 'अजेळकं' किंवा 'अजेळका' (बकरा आणि मेंढी); 'हिरञ्ञसुवण्णं' किंवा 'हिरञ्ञसुवण्णा' (चांदी आणि सोने); 'साळियवं' किंवा 'साळियवा' (तांदूळ आणि जव); 'कासिकोसलं' किंवा 'कासिकोसला' (काशी आणि कोसल). Ādiggahaṇaṃ kimatthaṃ? Sāvajjañca anavajjañca sāvajjānavajjaṃ, sāvajjā navajjā vā. Hīnañca paṇītañca hīnapaṇītaṃ. Hīnapaṇītā vā. Kaṇho ca sukko ca kaṇhasukkaṃ, kaṇhasukkā vā. 'आदि' (इत्यादी) हा शब्द घेण्याचा उद्देश काय? इतर उदाहरणांमध्येही हा नियम लागू करण्यासाठी. जसे की, 'सावज्जानवज्जं' किंवा 'सावज्जानवज्जा' (दोषयुक्त आणि दोषरहित); 'हीनपणीतं' किंवा 'हीनपणीता' (हीन आणि श्रेष्ठ); 'कण्हसुक्कं' किंवा 'कण्हसुक्का' (काळा आणि पांढरा). 324, 339. Dvipade tulyādhikaraṇe kammadhārayo. ३२४, ३३९. जेव्हा समान अधिकरण (एकाच गोष्टीचा निर्देश करणारे) असलेले दोन शब्द एकत्र येतात, तेव्हा 'कर्मधारय' समास होतो. Dve padāni tulyādhikaraṇāni yadā samasyante, tadā so samāso kammadhārayasañño hoti. जेव्हा समान अधिकरण असलेले दोन शब्द एकत्र जोडले जातात, तेव्हा त्या समासाला 'कर्मधारय समास' असे नाव दिले जाते. Mahanto [Pg.168] ca so puriso cāti mahāpuriso, kaṇho ca so sappo cāti kaṇhasappo, nīlañca taṃ uppalañcāti nīluppalaṃ, lohitañca taṃ candanañcāti lohitacandanaṃ, brāhmaṇī ca sā dārikā cāti brāhmaṇadārikā, khattiyā ca sā kaññā cāti khattiyakaññā. जो महान आहे असा पुरुष म्हणजे 'महापुरिसो' (महापुरुष); जो काळा आहे असा साप म्हणजे 'कण्हसप्पो' (काळा साप); जे निळे आहे असे कमळ म्हणजे 'नीलुप्पलं' (निळे कमळ); जे तांबडे आहे असे चंदन म्हणजे 'लोहितचंदनं' (तांबडे चंदन); जी ब्राह्मण आहे अशी मुलगी म्हणजे 'ब्राह्मणदारिका' (ब्राह्मण मुलगी); जी क्षत्रिय आहे अशी कन्या म्हणजे 'खत्तियकञ्ञा' (क्षत्रिय कन्या). Kammadhārayaiccanena kvattho? Kammadhārayasaññe ca. 'कर्मधारय' असे का म्हटले आहे? 'कम्मधारयसञ्ञे च' (सूत्र ३३२) या सूत्रात 'कर्मधारय' या संज्ञेचा वापर करण्यासाठी. 325, 348. Saṅkhyāpubbo digu. ३२५, ३४८. ज्या कर्मधारय समासाचे पहिले पद संख्यावाचक असते, त्याला 'द्विगु' समास म्हणतात. Saṅkhyāpubbo kammadhārayasamāso digusañño hoti. ज्या कर्मधारय समासाचे पहिले पद संख्यावाचक असते, त्या समासाला 'द्विगु समास' ही संज्ञा प्राप्त होते. Tīṇi malāni timalaṃ, tīṇi phalāni tiphalaṃ, tayo lokā tilokaṃ, tayo daṇḍā tidaṇḍaṃ, catasso disā catuddisaṃ, pañca indriyāni pañcindriyaṃ, satta godāvariyo sattagodāvaraṃ. तीन मळ म्हणजे 'तिमलं' (त्रिमल); तीन फळे म्हणजे 'तिफलं' (त्रिफळा); तीन लोक म्हणजे 'तिलोकं' (त्रिलोक); तीन दंड म्हणजे 'तिदण्डं' (त्रिदंड); चार दिशा म्हणजे 'चतुद्दिसं' (चतुर्दिशा); पाच इंद्रिये म्हणजे 'पञ्चiन्द्रियं' (पंचेंद्रिय); सात गोदावरी नद्या म्हणजे 'सत्तगोदावरं' (सप्तगोदावरी). Diguiccanena kvattho? Digusse kattaṃ. 'द्विगु' असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 'दिगुस्सेकत्तं' (सूत्र ३२१) या सूत्रात 'द्विगु' या संज्ञेचा वापर करण्यासाठी. 326, 341. Ubhe tappurisā. ३२६, ३४१. हे दोन्ही 'तत्पुरुष' समास आहेत. Ubhe digukammadhārayasamāsā tappurisasaññā honti. द्विगु आणि कर्मधारय हे दोन्ही समास 'तत्पुरुष' संज्ञक असतात. Na brāhmaṇo abrāhmaṇo, na vasalo avasalo, na bhikkhu abhikkhu, na pañcavassaṃ apañcavassaṃ, na [Pg.169] pañcapūlī apañcapūlī, na sattagodāvaraṃasattagodāvaraṃ, na dasagavaṃ adasagavaṃ, na pañcagavaṃ apañcagavaṃ. जो ब्राह्मण नाही तो 'अब्राह्मणो' (अब्राह्मण); जो वृषल (हीन कुळातील) नाही तो 'अवसलो' (अवृषल); जो भिक्खू नाही तो 'अभिक्खु' (अभिक्खू); जे पाच वर्षांचे नाही ते 'अपञ्चवस्सं'; ज्या पाच पेंड्या नाहीत त्या 'अपञ्चपुली'; ज्या सात गोदावरी नद्या नाहीत त्या 'असत्तगोदावरं'; ज्या दहा गाई नाहीत त्या 'अदसगवं'; ज्या पाच गाई नाहीत त्या 'अपञ्चगवं'. Tappurisaiccanena kvattho? Attaṃ nassa tappurise. 'तत्पुरुष' असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 'अत्तं नस्स तत्पुरिसे' (तत्पुरुष समासात 'न' च्या जागी 'अ' होणे) या नियमासाठी. 327, 351. Amādayo parapadebhi. ३२७, ३५१. "अं" इत्यादी (विभक्ती प्रत्यय) पुढील पदांसोबत (समास पावतात). Tā amādayo nāmehi parapadebhi yadā samasyante, tadā so samāso tappurisasañño hoti. जेव्हा ते "अं" इत्यादी (विभक्ती प्रत्यय) पुढील नामांसोबत एकत्र येतात (समास पावतात), तेव्हा त्या समासाला "तत्पुरुष" (तप्पुरिस) संज्ञा प्राप्त होते. Bhūmiṃ gato bhūmigato, sabbarattiṃ sobhaṇo sabbarattisobhaṇo. Apāyaṃ gato apāyagato, issarena kataṃ issarakataṃ, sallena viddho sallaviddho, kathinassa dussaṃ kathinadussaṃ, āgantukassa bhattaṃ āgantukabhattaṃ, methunā apeto methunāpeto, corā bhayaṃ corabhayaṃ, rañño putto rājaputto, dhaññānaṃ rāsi dhaññarāsi, rūpe saññā rūpasaññā, saṃsāre dukkhaṃ saṃsāradukkhaṃ. "भूमिं गतो = भूमिगतो" (भूमीला गेलेला); "सब्बरत्तिं सोभणो = सब्बरत्तिसोभणो" (संपूर्ण रात्र सुंदर असणारा); "अपायं गतो = apāyagato" (नरकात/अपायात गेलेला); "इस्सरेण कतं = इस्सरकतं" (ईश्वराने/निर्मात्याने केलेले); "सल्लेण विद्धो = सल्लविद्धो" (बाणाने विंधलेला); "कठिनस्स दुस्सं = कठिनदुस्सं" (कठिन संस्कारासाठीचे वस्त्र); "आगन्तुकस्स भत्तं = आगन्तुकभत्तं" (पाहुण्यासाठीचे भोजन); "मेथुना अपेतो = मेथुनापेतो" (मैथुनापासून दूर गेलेला); "चोरा भयं = चोरभयं" (चोरांचे भय); "रञ्ञो पुत्तो = राजपुत्तो" (राजाचा पुत्र); "धञ्ञानं रासि = धञ्ञरासि" (धान्याची रास); "रूपे सञ्ञा = रूपसञ्ञा" (रूपाविषयीची संज्ञा); "संसारे दुक्खं = संसारदुक्खं" (संसारातील दुःख). 328, 352. Aññapadatthesu bahubbīhi. ३२८, ३५२. इतर शब्दांच्या अर्थामध्ये "बहुव्रीहि" (बहुब्बीहि) समास होतो. Aññesaṃ padānaṃ atthesu dve nāmāni bahūni nāmāni yadā samasyante, tadā so samāso bahubbīhi sañño hoti. जेव्हा इतर शब्दांच्या अर्थामध्ये दोन किंवा अनेक नामे एकत्र येतात (समास पावतात), तेव्हा त्या समासाला "बहुव्रीहि" (बहुब्बीहि) संज्ञा प्राप्त होते. Āgatā [Pg.170] samaṇā imaṃ saṅghārāmaṃ soyaṃ āgatasamaṇo, saṅghārāmo. Jitāni indriyāni anena samaṇena soyaṃ jitindriyo, samaṇo. Dinno suṅko yassa rañño soyaṃ dinnasuṅko, rājā. Niggatā janā asmā gāmā soyaṃ niggatajano, gāmo. Chinno hatto yassa purisassa soyaṃ chinnahattho, puriso. Sampannāni sassāni yasmiṃ janapade soyaṃ sampannasasso, janapado. "आगता समणा इमं संघारामं सोऽयं आगतसमणो, संघारामों" - या संघारामात (इमं संघारामं) श्रमण आले आहेत (आगता समणा), तो हा (सो अयं) 'आगतश्रमण' संघाराम होय. "जितानि इन्द्रियानि अनेन समणेन सोऽयं जितिन्द्रियो, समणो" - या श्रमणाने (अनेन समणेन) इंद्रिये जिंकली आहेत (जितानि इन्द्रियानि), तो हा (सो अयं) 'जितेन्द्रिय' श्रमण होय. "दिन्नो सुङ्को यस्स रञ्ञो सोऽयं दिन्नसुङ्को, राजा" - ज्या राजाला (यस्स रञ्ञो) कर दिला गेला आहे (दिन्नो सुङ्को), तो हा (सो अयं) 'दत्तकर' राजा होय. "निग्गता जना अस्मा गामा सोऽयं निग्गतजनो, गामो" - या गावातून (अस्मा गामा) लोक निघून गेले आहेत (निग्गता जना), तो हा (सो अयं) 'निर्जन' गाव होय. "छिन्नो हत्तो यस्स पुरिसस्स सोऽयं छिन्नहत्थो, पुरिसो" - ज्या माणसाचा (यस्स पुरिसस्स) हात कापला गेला आहे (छिन्नो हत्तो), तो हा (सो अयं) 'छिन्नहस्त' (हात कापलेला) माणूस होय. "सम्पन्नानि सस्सानि यस्मिं जनपदे सोऽयं सम्पन्नसस्सो, जनपदो" - ज्या जनपदात (यस्मिं जनपदे) धान्य समृद्ध आहे (सम्पन्नानि सस्सानि), तो हा (सो अयं) 'सम्पन्नसस्य' (धान्यसमृद्ध) जनपद होय. Nigrodhassa parimaṇḍalo nigrodhaparimaṇḍalo, nigrodhaparimaṇḍalo iva parimaṇḍalo yo rājakumāro soyaṃ nigrodhaparimaṇḍalo. Atha vā nigrodhaparimaṇḍalo iva parimaṇḍalo yassa rājakumārassa soyaṃ nigrodhaparimaṇḍalo, rājakumāro. "निग्रोधस्स परिमण्डलो = निग्रोधपरिमण्डलो" - वडाच्या झाडाचा (निग्रोधस्स) वेढा/घेर (परिमण्डलो) म्हणजे 'निग्रोधपरिमण्डल'. "निग्रोधपरिमण्डलो इव परिमण्डलो यो राजकुमारो सोऽयं निग्रोधपरिमण्डलो" - ज्या राजकुमाराचा (यो राजकुमारो) वेढा/शारीरिक प्रमाण (परिमण्डलो) वडाच्या वेढ्यासारखा (निग्रोधपरिमण्डलो इव) आहे, तो हा (सो अयं) 'निग्रोधपरिमण्डल' (वडासारखा सुप्रमाण शरीर असलेला) होय. "अथ वा निग्रोधपरिमण्डलो इव परिमण्डलो यस्स राजकुमारस्स सोऽयं निग्रोधपरिमण्डलो, राजकुमारो" - अथवा, ज्या राजकुमाराचे (यस्स राजकुमारस्स) शारीरिक प्रमाण वडाच्या वेढ्यासारखे आहे, तो हा 'निग्रोधपरिमण्डल' राजकुमार होय. Cakkhuno bhūto cakkhubhūto, cakkhubhūto iva bhūto yo bhagavā soyaṃ cakkhubhūto, bhagavā. "चक्खुनो भूतो = चक्खुभूतो" - डोळा झालेला (चक्खुभूतो). "चक्खुभूतो इव भूतो यो भगवा सोऽयं चक्खुभूतो, भगवा" - जे भगवान (यो भगवा) डोळ्यासारखे (ज्ञानचक्षूसारखे) झाले आहेत (चक्खुभूतो इव भूतो), ते हे (सो अयं) 'चक्षुभूत' (ज्ञानस्वरूप) भगवान होत. Suvaṇṇassa vaṇṇo suvaṇṇavaṇṇo, suvaṇṇavaṇṇo viya vaṇṇo yassa bhagavato soyaṃ suvaṇṇavaṇṇo, bhagavā. "सुवण्णस्स वण्णो = सुवण्णवण्णो" - सोन्याचा (सुवण्णस्स) वर्ण (वण्णो) म्हणजे 'सुवर्णवर्ण'. "सुवण्णवण्णो विय वण्णो यस्स भगवतो सोऽयं सुवण्णवण्णो, भगवा" - ज्या भगवंतांचा (यस्स भगवतो) वर्ण सोन्याच्या वर्णासारखा (सुवण्णवण्णो विय) आहे, ते हे (सो अयं) 'सुवर्णवर्ण' भगवान होत. Brahmuno saro brahmassaro, brahmassaro viya saro yassa bhagavato soyaṃ brahmassaro, bhagavā. "ब्रह्मुनो सरो = ब्रह्मस्सरो" - ब्रह्माचा (ब्रह्मुनो) स्वर/आवाज (सरो) म्हणजे 'ब्रह्मस्वर'. "ब्रह्मस्सरो विय सरो यस्स भगवतो सोऽयं ब्रह्मस्सरो, भगवा" - ज्या भगवंतांचा (यस्स भगवतो) स्वर ब्रह्माच्या स्वरासारखा (ब्रह्मस्सरो विय) आहे, ते हे (सो अयं) 'ब्रह्मस्वर' भगवान होत. Sayaṃ [Pg.171] patita paṇṇa pupphaphalavāyutoyāhārāti paṇṇañca pupphañca phalañca paṇṇapupphaphalāni, sayameva patitāni sayaṃpatitāni, sayaṃpatitāni ca tāni paṇṇapupphaphalāni ceti sayaṃpatitapaṇṇapupphaphalāni vāyu ca toyañca vāyutoyāni, sayaṃpatitapaṇṇapupphaphalāni ca vāyutoyāni ca sayaṃpatitapaṇṇapupphaphalavāyutoyāni. Sayaṃpatitapaṇṇapupphaphalavāyutoyāni āhārā yesaṃ te sayaṃpatitapaṇṇapupphaphalavāyutoyāhārā, isayo. Yamettha vattabbaṃ, taṃ heṭṭhā vuttameva. Ayaṃ pana dvandakammadhārayagabbho tulyādhikaraṇapahubbīhi. "सयं पतित पण्ण पुप्फफलवायुतोयाहारा" म्हणजे - पान (पण्णञ्च), फूल (पुप्फञ्च) आणि फळ (फलञ्च) हे 'पण्णपुप्फफलानि' (पाने, फुले व फळे) [द्वंद्व समास]. स्वतःहूनच (सयमेव) गळून पडलेली (पतितानि) ती 'सयं पतितानि' (स्वतः गळून पडलेली) [कर्मधारय समास]. स्वतः गळून पडलेली (सयं पतितानि) आणि ती पाने, फुले व फळे (तानि पण्णपुप्फफलानि च) मिळून 'सयं पतितपण्णपुप्फफलानि' (स्वतः गळून पडलेली पाने, फुले व फळे) [कर्मधारय समास]. वायू (वायु च) आणि पाणी (तोयञ्च) मिळून 'वायुतोयानि' (वायू आणि पाणी) [द्वंद्व समास]. स्वतः गळून पडलेली पाने, फुले व फळे (सयं पतितपण्णपुप्फफलानि च) आणि वायू व पाणी (वायुतोयानि च) मिळून 'सयं पतितपण्णपुप्फफलवायुतोयानि' [द्वंद्व समास]. स्वतः गळून पडलेली पाने, फुले व फळे आणि वायू व पाणी हाच ज्यांचा आहार आहे (आहारा येसं), ते 'सयं पतितपण्णपुप्फफलवायुतोयाहारा' ऋषी (इसयो) होत. याविषयी जे काही सांगायचे आहे (यं एत्थ वत्तब्बं), ते खालीच (खरे तर वरच) सांगितले आहे (तं हेट्ठा वृत्तमेव). हा द्वंद्व आणि कर्मधारय गर्भ असलेला समानाधिकरण बहुव्रीहि (तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Atha vā – sayaṃpatitapaṇṇapupphaphalavāyutoyehi āhārā yesaṃ te sayaṃpatitapaṇṇapupphaphalavāyutoyāhārā. Ayaṃ pana bhinnādhikaraṇabahubbīhi. अथवा - स्वतः गळून पडलेली पाने, फुले व फळे आणि वायू व पाणी यांच्याद्वारे ज्यांचा आहार आहे (आहारा येसं), ते 'सयं पतितपण्णपुप्फफलवायुतोयाहारा' होत. हा व्यधिकरण बहुव्रीहि (भिन्नाधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Nānā dumapatita pupphavāsita sānūti nānāpakārā dumā nānādumā, nānādumehi patitāni nānādumapati tāni, nānādumapatitāni ca tāni pupphāni ceti nānādumapatitapupphāni, nānādumapatitapupphehi vāsitā nānādumapatitapupphavāsitā, nānādumapatitapupphavāsitā sānū yassa pabbatarājassa soyaṃ nānādumapatitapupphavāsitasānu, pabbatarājā. Ayaṃ pana kammadhārayatappurisagabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "नाना दुमपतित पुप्फवासित सानू" म्हणजे - नाना प्रकारचे (नानापकारा) वृक्ष (दुमा) म्हणजे 'नानादुमा' [कर्मधारय समास]. नाना वृक्षांवरून गळून पडलेली (नानादुमेहि पतितानि) ती 'नानादुमपतितानि' [तत्पुरुष समास]. नाना वृक्षांवरून गळून पडलेली आणि ती फुले (नानादुमपतितानि च तानि पुप्फानि च) मिळून 'नानादुमपतितपुप्फानि' [कर्मधारय समास]. नाना वृक्षांवरून गळून पडलेल्या फुलांनी सुवासित झालेली (नानादुमपतितपुप्फेहि वासिता) ती 'नानादुमपतितपुप्फवासिता' [तत्पुरुष समास]. ज्या पर्वतराजच्या (यस्स पब्बतराजस्स) दऱ्या/शिखरे (सानू) नाना वृक्षांवरून गळून पडलेल्या फुलांनी सुवासित आहेत, तो हा 'नानादुमपतितपुप्फवासितसानु' पर्वतराज (पब्बतराजा) होय. हा कर्मधारय आणि तत्पुरुष गर्भ असलेला समानाधिकरण बहुव्रीहि (तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Atha [Pg.172] vā – vāsitā sānū vāsitasānu, sāpekkhatte satipi gamakattā samāso. Nānādumapatitapupphehi vāsitasānū yassa pabbatarājassa soyaṃ nānādumapatitapupphavāsitasānu, pabbatarājā. Ayaṃ pana bhinnādhikaraṇabahubbīhi. अथवा - सुवासित दऱ्या (वासिता सानू) म्हणजे 'वासितसानु' [कर्मधारय समास]. जरी ते इतर शब्दांवर अवलंबून असले (सापेक्खत्ते सतिपि), तरी अर्थ स्पष्ट करत असल्यामुळे (गमकत्ता) तो समास (समासो) होतो. ज्या पर्वतराजच्या (यस्स पब्बतराजस्स) दऱ्या नाना वृक्षांवरून गळून पडलेल्या फुलांनी सुवासित आहेत, तो हा 'नानादुमपतितपुप्फवासितसानु' पर्वतराज होय. हा व्यधिकरण बहुव्रीहि (भिन्नाधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Byālambambudharabinducumbitakūṭoti ambuṃ dhāretīti ambudharo, ko so? Pajjunno. Vividhā ālambo byālambo, byālambo ca so ambudharo cāti byālambambudharo, byālambambudharassa bindū byālambambudharabindū, byālambambudharabindūhi cumbito byālambambudharabinducumbito, byālambamburebinducumbito kūṭo yassa pabbatarājassa soyaṃ byālambambudharabinducumbitakūṭo. Ayaṃ pana kammadhārayatappurisagabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "ब्याळम्बम्बुधरबिन्दुचुम्बितकूटो" म्हणजे - पाणी धारण करतो (अम्बुं धारेति) तो 'अम्बुधरो' (जलधर/मेघ). तो कोण? (को सो?) पर्जन्य (पज्जुन्नो). विविध प्रकारे लोंबकळणारा (विविधा आलम्बो) तो 'ब्याळम्बो' [कर्मधारय समास]. विविध प्रकारे लोंबकळणारा आणि तो मेघ (ब्याळम्बो च सो अम्बुधरो चाति) मिळून 'ब्याळम्बम्बुधरो' [कर्मधारय समास]. विविध प्रकारे लोंबकळणाऱ्या मेघाचे थेंब (ब्याळम्बम्बुधरस्स बिन्दू) म्हणजे 'ब्याळम्बम्बुधरबिन्दू' [तत्पुरुष समास]. विविध प्रकारे लोंबकळणाऱ्या मेघाच्या थेंबांनी स्पर्शलेले/चुंबलेले (ब्याळम्बम्बुधरबिन्दूहि चुम्बितो) ते 'ब्याळम्बम्बुधरबिन्दुचुम्बितो' [तत्पुरुष समास]. ज्या पर्वतराजचे (यस्स पब्बतराजस्स) शिखर (कूटो) विविध प्रकारे लोंबकळणाऱ्या मेघाच्या थेंबांनी स्पर्शलेले आहे, तो हा 'ब्याळम्बम्बुधरबिन्दुचुम्बितकूटो' पर्वतराज होय. हा कर्मधारय आणि तत्पुरुष गर्भ असलेला समानाधिकरण बहुव्रीहि (तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Atha vā – cumbito kūṭo cumbitakūṭo, sāpekkhatte satipi gamakattā samāso. Byālambambudharabindūhi cumbitakūṭo yassa pabbatarājassa soyaṃ byālambambudharabinducumbitakūṭo. Ayaṃ pana bhinnādhikaraṇabahubbīhi. अथवा - स्पर्शलेले शिखर (चुम्बितो कूटो) म्हणजे 'चुम्बितकूटो' [कर्मधारय समास]. जरी ते इतर शब्दांवर अवलंबून असले, तरी अर्थ स्पष्ट करत असल्यामुळे तो समास होतो. ज्या पर्वतराजचे शिखर विविध प्रकारे लोंबकळणाऱ्या मेघाच्या थेंबांनी स्पर्शलेले आहे, तो हा 'ब्याळम्बम्बुधरबिन्दुचुम्बितकूटो' पर्वतराज होय. हा व्यधिकरण बहुव्रीहि (भिन्नाधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Amita bala parakkamajutīti na mitā amitā, balañca parakkamo ca juti ca balaparakkamajutiyo, amitā balaparakkamajutiyo yassa soyaṃ amitabalaparakkamajuti, ayaṃ pana kammadhārayadvandagabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "अमित बल परक्कमजुती" म्हणजे - जे मोजता येत नाही (न मिता) ते 'अमिता' (अमित/अमर्याद) [कर्मधारय समास]. बल (बलञ्च), पराक्रम (परक्कमो च) आणि तेज (जुति च) मिळून 'बलपरक्कमजुतियो' [द्वंद्व समास]. ज्याचे (यस्स) बल, पराक्रम आणि तेज अमित आहे, तो हा 'अमितबलपरक्कमजुती' होय. हा कर्मधारय आणि द्वंद्व गर्भ असलेला समानाधिकरण बहुव्रीहि (तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Pīṇorakkhaṃsa [Pg.173] bāhūti uro ca akkhañca aṃso ca bāhu ca urakkhaṃsabāhavo, pīṇā urakkhaṃsabāhavo yassa bhagavato soyaṃ pīṇorakkhaṃsabāhu. Ayaṃ pana dvandavabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "पीणोरक्खंस बाहू" म्हणजे - छाती (उरो च), गळपट्टीचे हाड (अक्खञ्च), खांदा (अंसो च) आणि बाहू (बाहू च) मिळून 'उरक्खंसबाहवो' [द्वंद्व समास]. ज्या भगवंतांची (यस्स भगवतो) छाती, गळपट्टीचे हाड, खांदा आणि बाहू पुष्ट (पीणा) आहेत, ते हे (सो अयं) 'पीणोरक्खंसबाहू' भगवान होत. हा द्वंद्व गर्भ असलेला समानाधिकरण बहुव्रीहि (तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Pīṇa gaṇḍa vadana thanūrujaghanāti gaṇḍo ca vadanañca thano ca ūru ca jaghanañca gaṇḍavadanathanūrujaghanā, pīṇā gaṇḍavadanathanūrujaghanā yassā sāyaṃ pīṇagaṇḍavadanathanūrujaghanā. Ayampi dvandagabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "पीण गण्ड वदन थनूरुजघना" म्हणजे - गाल (गण्ढो च), मुख (वदनञ्च), स्तन (थनो च), मांडी (ऊरु च) आणि नितंब (जघनञ्च) मिळून 'गण्ढवदनथनूरुजघना' [द्वंद्व समास]. जिचे (यस्सा) गाल, मुख, स्तन, मांडी आणि नितंब पुष्ट (पीणा) आहेत, ती ही (सा अयं) 'पीणगण्ढवदनथनूरुजघना' होय. हा देखील द्वंद्व गर्भ असलेला समानाधिकरण बहुव्रीहि (तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) समास आहे. Vavara surāsura garuḍa manuja bhujaga gandhabba makuṭa kūṭa cumbita selasaṅghaṭṭita caraṇoti surā ca asurā ca garuḍā ca manujā ca bhujagā ca gandhabbā ca surāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbā, pavarā ca te surāsuragaruḍamanujabhujaga gandhabbā ceti pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbā, pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbānaṃ makuṭāni pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭāni, pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭānaṃ kūṭāni pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭāni, pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭesu cumbitā pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭacumbitā, pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭacumbitā ca te selā cāti pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭacumbitaselā, pavarasurāsura garuḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭacumbitaselehi saṅghaṭṭitā pavarasurāsura garuḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭacumbitaselasaṅghaṭṭitā, pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭacumbitaselasaṅghaṭṭitā caraṇā yassa tathāgatassa soyaṃ [Pg.174] pavarasurāsuragaruḍamanujabhujagagandhabbamakuṭakūṭacumbitaselasaṅghaṭṭitacaraṇo, tathāgato, ayaṃ pana dvandakammadhārayatappurisagabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बितसेलसङ्घट्टितचरणो" म्हणजे: देव (सुरा च), असुर (असुरा च), गरुड (गरुडा च), मनुष्य (मनुजा च), नाग (भुजगा च) आणि गंधर्व (गन्धब्बा च) हे 'सुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बा' (देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व) होत. [द्वंद्व समास] श्रेष्ठ (पवरा च) आणि ते देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग व गंधर्व (ते सुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बा च) म्हणजे 'पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बा' (श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व) होत. [कर्मधारय समास] श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांचे मुकुट (पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बानं मकुटानि) म्हणजे 'पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटानि' होत. [तत्पुरुष समास] श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांच्या मुकुटांची शिखरे (पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटानं कूटानि) म्हणजे 'पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटानि' होत. [तत्पुरुष समास] श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांच्या मुकुटांच्या शिखरांनी स्पर्श केलेले (पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटेसु चुम्बिता) म्हणजे 'पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बिता' होत. [तत्पुरुष समास] श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांच्या मुकुटांच्या शिखरांनी स्पर्श केलेले आणि ते पाषाण/शिळा (पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बिता च ते सेला चाति) म्हणजे 'पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बितसेला' (श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांच्या मुकुटांच्या शिखरांनी स्पर्श केलेल्या शिळा) होत. [कर्मधारय समास] श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांच्या मुकुटांच्या शिखरांनी स्पर्श केलेल्या शिळांशी संघट्टित झालेले (पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बितसेलेहि सङ्घट्टिता) म्हणजे 'पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बितसेलसङ्घट्टिता' होत. [तत्पुरुष समास] ज्या तथागतांचे (यस्स तथागतस्स) चरण श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांच्या मुकुटांच्या शिखरांनी स्पर्श केलेल्या शिळांशी संघट्टित झालेले आहेत (पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बितसेलसङ्घट्टिता चरणा), ते हे (सो अयं) 'पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बितसेलसङ्घट्टितचरणो' (ज्यांचे चरण श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांच्या मुकुटांच्या शिखरांनी स्पर्श केलेल्या शिळांशी संघट्टित झाले आहेत असे) तथागत होत. हा (अयं पन) द्वंद्व, कर्मधारय आणि तत्पुरुष गर्भ असलेला तुल्याधिकरण बहुव्रीहि समास (द्वन्दकम्मधारयतप्पुरिसगब्भो तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) आहे। Atha vā–saṅghaṭṭitā caraṇā saṅghaṭṭitacaraṇā, sāpekkhatte satipi gamakattā samāso. Pavarasurāsura garuḍamanujabhujaga gandhabbamakuṭakūṭacumbitaselehi saṅghaṭṭitacaraṇā yassa tathāgatassa soyaṃ pavarasurāsuragaruḍa manujabhujaga gandhabbamakuṭakūṭacumbitaselasaṅghaṭṭita caraṇo. Ayaṃ pana bhinnādhikaraṇabahubbīhi. अथवा – संघट्टित झालेले चरण (सङ्घट्टिता चरणा) म्हणजे 'सङ्घट्टितचरणा' [कर्मधारय समास]. जरी ते अन्य पदावर अवलंबून असले (सापेक्खत्ते सतिपि), तरी अर्थ स्पष्ट करत असल्यामुळे (गमकत्ता) तो समास (समासो) आहे. ज्या तथागतांचे (यस्स तथागतस्स) चरण श्रेष्ठ देव, असुर, गरुड, मनुष्य, नाग आणि गंधर्व यांच्या मुकुटांच्या शिखरांनी स्पर्श केलेल्या शिळांशी संघट्टित झालेले आहेत (पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बितसेलेहि सङ्घट्टितचरणा), ते हे (सो अयं) 'पवरसुरासुरगरुडमनुजभुजगगन्धब्बमकुटकूटचुम्बितसेलसङ्घट्टितचरणो' तथागत होत. हा (अयं पन) व्यधिकरण बहुव्रीहि समास (भिन्नाधिकरणबहुब्बीहि) आहे। Catuddisoti catasso disā yassa soyaṃ catuddiso, bhagavā. "चतुद्दिसो" म्हणजे ज्यांच्या (यस्स) चार दिशा (चतस्सो दिसा) आहेत, ते हे (सो अयं) 'चतुद्दिसो' (चार दिशा असणारे) भगवान होत. Pañcacakkhūti pañca cakkhūni yassa tathāgatassa soyaṃ pañcacakkhu, tathāgato. "पञ्चचक्खु" म्हणजे ज्या तथागतांचे (यस्स तथागतस्स) पाच चक्षू (पञ्च चक्खूनि) आहेत, ते हे (सो अयं) 'पञ्चचक्खु' (पाच चक्षू असणारे) तथागत होत. Dasabaloti dasa balāni yassa soyaṃ dasabalo, bhagavā. "दसबलो" म्हणजे ज्यांचे (यस्स) दहा बल (दस बलानि) आहेत, ते हे (सो अयं) 'दसबलो' (दहा बल असणारे) भगवान होत. Anantañāṇoti nassa anto anantaṃ, anantaṃ ñāṇaṃ yassa tathāgatassa soyaṃ anantañāṇo, tathāgato. "अनन्तञाणो" म्हणजे ज्याचा अंत नाही (नस्स अन्तो) ते 'अनन्तं' [कर्मधारय समास]. ज्या तथागतांचे (यस्स तथागतस्स) ज्ञान अनंत आहे (अनन्तं ञाणं), ते हे (सो अयं) 'अनन्तञाणो' (अनंत ज्ञान असणारे) तथागत होत. Amita ghana sarīroti na mitaṃ amitaṃ, ghanaṃ eva sarīraṃ ghanasarīraṃ, amitaṃ ghanasarīraṃ yassa tathāgatassa soyaṃ amitaghanasarīro, tathāgato. "अमितघनसरीरो" म्हणजे जे मोजता येत नाही (न मितं) ते 'अमितं' [कर्मधारय समास]. केवळ सुदृढ/घट्ट शरीर (घनं एव सरीरं) म्हणजे 'घनसरीरं' [कर्मधारय समास]. ज्या तथागतांचे (यस्स तथागतस्स) शरीर अमित आणि सुदृढ आहे (अमितं घनसरीरं), ते हे (सो अयं) 'अमितघनसरीरो' (अमित सुदृढ शरीर असणारे) तथागत होत. Amita bala parakkama pattoti na mitā amitā, balañca parakkamo ca balaparakkamā, amitā eva balaparakkamā amitabalaparakkamā[Pg.175], amitabalaparakkamā pattā yena soyaṃ amitabalaparakkamapatto, bhagavā. Ayaṃ pana kammadhārayadvandagabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "अमितबलपरक्कमपत्तो" म्हणजे जे मोजता येत नाही (न मिता) ते 'अमिता' [कर्मधारय समास]. बल (बलञ्च) आणि पराक्रम (परक्कमो च) म्हणजे 'बलपरक्कमा' [द्वंद्व समास]. केवळ अमित बल आणि पराक्रम (अमिता एव बलपरक्कमा) म्हणजे 'अमितबलपरक्कमा' [कर्मधारय समास]. ज्यांच्याद्वारे (येन) अमित बल आणि पराक्रम प्राप्त केला गेला आहे (अमितबलपरक्कमा पत्ता), ते हे (सो अयं) 'अमितबलपरक्कमपत्तो' (अमित बल आणि पराक्रम प्राप्त केलेले) भगवान होत. हा (अयं पन) कर्मधारय आणि द्वंद्व गर्भ असलेला तुल्याधिकरण बहुव्रीहि समास (कम्मधारयद्वन्दगब्भो तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) आहे. Matta bhamara gaṇa cumbita vikasitapupphavallināgarukkho pasobhita kandaroti mattā eva bhamarā mattabhamarā, mattabhamarānaṃ gaṇā mattabhamaragaṇā, mattabhamaragaṇehi cumbitāni mattabhamaraṇacumbitāni, vikasitāni eva pupphāni vikasitapupphāni, mattabhamaragaṇacumbitāni vikasitapupphāni yesaṃ tehi mattabhamaragaṇacumbitavikasitapupphā, valli ca nāgarukkho ca mallināgarukkhā, mattabhamaragaṇacumbitavikasitapupphā ca te vallināgarukkhā ceti mattabhamaragaṇacumbitavikasitapupphavallināgarukkhā, mattabhamaragaṇacumbitavikasitapupphavallināgarukkhehi upasobhitāni mattabhamaragaṇacumbitavikasitapupphavallināgarukkho pasobhitāni, mattabhamaragaṇacumbitavikasitapupphavallināgarukkho pasobhitāni kandarāni yassa pabbatarājassa soyaṃ mattabhamaragaṇacumbitavikasitapuppha vallināgarukkho paso bhitakandaro, pabbatarājā. Ayaṃ pana dvandakammadhārayatappurisagabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फवल्लीनागरुक्खोपसोभितकन्दरो" म्हणजे: केवळ मदोन्मत्त (मत्ता एव) भ्रमर (भमरा) म्हणजे 'मत्तभमरा' (मदोन्मत्त भ्रमर) होत. [कर्मधारय समास] मदोन्मत्त भ्रमरांचे समूह (मत्तभमरानं गणा) म्हणजे 'मत्तभमरगणा' (मदोन्मत्त भ्रमरांचे समूह) होत. [तत्पुरुष समास] मदोन्मत्त भ्रमरांच्या समूहांद्वारे स्पर्श केलेले/चुंबन घेतलेले (मत्तभमरगणेहि चुम्बितानि) म्हणजे 'मत्तभमरगणचुम्बितानि' होत. [तत्पुरुष समास] केवळ उमललेली (विकसितानि एव) फुले (पुप्फानि) म्हणजे 'विकसितपुप्फानि' (उमललेली फुले) होत. [कर्मधारय समास] ज्यांच्यावर मदोन्मत्त भ्रमरांच्या समूहांद्वारे स्पर्श केलेली उमललेली फुले आहेत (मत्तभमरगणचुम्बितानि विकसितपुप्फानि येसं तेहि), ते 'मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फा' होत. [बहुव्रीहि समास] वेल (वल्ली च) आणि नागवृक्ष (नागरुक्खो च) म्हणजे 'वल्लीनागरुक्खा' (वेली आणि नागवृक्ष) होत. मदोन्मत्त भ्रमरांच्या समूहांद्वारे स्पर्श केलेली उमललेली फुले असणारे आणि ते वेली व नागवृक्ष आहेत (मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फा च ते वल्लीनागरुक्खा चेति), म्हणून त्यांना 'मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फवल्लीनागरुक्खा' (मदोन्मत्त भ्रमरांच्या समूहांद्वारे स्पर्श केलेली उमललेली फुले असणाऱ्या वेली आणि नागवृक्ष) असे म्हणतात. [कर्मधारय समास] मदोन्मत्त भ्रमरांच्या समूहांद्वारे स्पर्श केलेली उमललेली फुले असणाऱ्या वेली आणि नागवृक्षांनी सुशोभित झालेले (मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फवल्लीनागरुक्खेहि उपसोभितानि) म्हणजे 'मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फवल्लीनागरुक्खोपसोभितानि' होत. [तत्पुरुष समास] ज्या पर्वतराजच्या (यस्स पब्बतराजस्स) गुहा मदोन्मत्त भ्रमरांच्या समूहांद्वारे स्पर्श केलेली उमललेली फुले असणाऱ्या वेली आणि नागवृक्षांनी सुशोभित आहेत (मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फवल्लीनागरुक्खोपसोभितानि कन्दरानि), तो हा (सो अयं) 'मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फवल्लीनागरुक्खोपसोभितकन्दरो' (मदोन्मत्त भ्रमरांच्या समूहांद्वारे स्पर्श केलेली उमललेली फुले असणाऱ्या वेली आणि नागवृक्षांनी सुशोभित गुहा असणारा) पर्वतराज होय. हा (अयं पन) द्वंद्व, कर्मधारय आणि तत्पुरुष गर्भ असलेला तुल्याधिकरण बहुव्रीहि समास (द्वन्दकम्मधारयतप्पुरिसगब्भो तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) आहे. Atha vā–upasobhitāni kandarāni upasobhitakandarāni, sāpekkhatte satipi gamakattā samāso. Mattabhamaragaṇacumbitavikasitapupphavallināgarukkhehi upasobhitakandarāni yassa pabbatarājassa soyaṃ mattabhamaragaṇacumbitavikasitapupphavallināgarukkho pasobhitakandaro, pabbatarājā. Ayaṃ pana bhinnādhikaraṇabahubbīhi. अथवा – सुशोभित गुहा (उपसोभितानि कन्दरानि) म्हणजे 'उपसोभितकन्दरानि' [कर्मधारय समास]. जरी ते अन्य पदावर अवलंबून असले (सापेक्खत्ते सतिपि), तरी अर्थ स्पष्ट करत असल्यामुळे (गमकत्ता) तो समास (समासो) आहे. ज्या पर्वतराजच्या (यस्स पब्बतराजस्स) गुहा मदोन्मत्त भ्रमरांच्या समूहांद्वारे स्पर्श केलेली उमललेली फुले असणाऱ्या वेली आणि नागवृक्षांनी सुशोभित आहेत (मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फवल्लीनागरुक्खेहि उपसोभितकन्दरानि), तो हा (सो अयं) 'मत्तभमरगणचुम्बितविकसितपुप्फवल्लीनागरुक्खोपसोभितकन्दरो' पर्वतराज होय. हा (अयं पन) व्यधिकरण बहुव्रीहि समास (भिन्नाधिकरणबहुब्बीहि) आहे. Nānā [Pg.176] rukkha tiṇa patita pupphopasobhita kandaroti rukkho ca tiṇañca rukkhatiṇāni, nānā pakārāni eva rukkhatiṇāni nānārukkhatiṇāni, nānārukkhatiṇehi patitāni nānārukkhatiṇapatitāni, nānārukkhatiṇapatitāni ca tāni pupphāni ceti nānārukkhatiṇapatitapupphāni, nānārukkhatiṇapatitapupphehi upasobhitāni nānārukkhatiṇapatita pupphopasobhitāni, nānārukkhatiṇapatitapupphopasobhitāni kandarāni yassa pabbatarājassa soyaṃ nānārukkhatiṇapatitapupphopasobhitakandaro, pabbatarājā. Ayaṃ pana dvandakammadhārayatappurisagabbho tulyādhikaraṇabahubbīhi. "नानारुक्खतिणपतितपुप्फोपसोभितकन्दरो" म्हणजे: वृक्ष (रुक्खो च) आणि तृण/गवत (तिणञ्च) म्हणजे 'रुक्खतिणानि' (वृक्ष आणि तृण) होत. [द्वंद्व समास] नाना (नाना) म्हणजे विविध प्रकारचेच (पकारानि एव) वृक्ष आणि तृण म्हणजे 'नानारुक्खतिणानि' (विविध प्रकारचे वृक्ष आणि तृण) होत. [कर्मधारय समास] विविध प्रकारच्या वृक्ष आणि तृणांवरून गळून पडलेले (नानारुक्खतिणेहि पतितानि) म्हणजे 'नानारुक्खतिणपतितानि' होत. [तत्पुरुष समास] विविध प्रकारच्या वृक्ष आणि तृणांवरून गळून पडलेली आणि ती फुले आहेत (नानारुक्खतिणपतितानि च तानि पुप्फानि चेति), म्हणून त्यांना 'नानारुक्खतिणपतितपुप्फानि' (विविध प्रकारच्या वृक्ष आणि तृणांवरून गळून पडलेली फुले) असे म्हणतात. [कर्मधारय समास] विविध प्रकारच्या वृक्ष आणि तृणांवरून गळून पडलेल्या फुलांनी सुशोभित झालेले (नानारुक्खतिणपतितपुप्फेहि उपसोभितानि) म्हणजे 'नानारुक्खतिणपतितपुप्फोपसोभितानि' होत. [तत्पुरुष समास] ज्या पर्वतराजच्या (यस्स पब्बतराजस्स) गुहा विविध प्रकारच्या वृक्ष आणि तृणांवरून गळून पडलेल्या फुलांनी सुशोभित आहेत (नानारुक्खतिणपतितपुप्फोपसोभितानि कन्दरानि), तो हा (सो अयं) 'नानारुक्खतिणपतितपुप्फोपसोभितकन्दरो' (विविध प्रकारच्या वृक्ष आणि तृणांवरून गळून पडलेल्या फुलांनी सुशोभित गुहा असणारा) पर्वतराज होय. हा (अयं पन) द्वंद्व, कर्मधारय आणि तत्पुरुष गर्भ असलेला तुल्याधिकरण बहुव्रीहि समास (द्वन्दकम्मधारयतप्पुरिसगब्भो तुल्याधिकरणबहुब्बीहि) आहे. Atha vā–upasobhitāni eva kandarāni upasobhitakandarāni, (sāpekkhatte satipi gamakattā samāso.) Nānārukkhatiṇapatitapupphehi upasobhitakandarāni yassa pabbatarājassa soyaṃ nānārukkhatiṇapatitapupphopasobhitakandaro, pabbatarājā. Ayaṃ pana bhinnādhikaraṇabahubbīhi. अथवा – केवळ सुशोभित गुहा (उपसोभितानि एव कन्दरानि) म्हणजे 'उपसोभितकन्दरानि' [कर्मधारय समास]. (जरी ते अन्य पदावर अवलंबून असले, तरी अर्थ स्पष्ट करत असल्यामुळे तो समास आहे.) ज्या पर्वतराजच्या (यस्स पब्बतराजस्स) गुहा विविध प्रकारच्या वृक्ष आणि तृणांवरून गळून पडलेल्या फुलांनी सुशोभित आहेत (नानारुक्खतिणपतितपुप्फेहि उपसोभितकन्दरानि), तो हा (सो अयं) 'नानारुक्खतिणपतितपुप्फोपसोभितकन्दरो' पर्वतराज होय. हा (अयं पन) व्यधिकरण बहुव्रीहि समास (भिन्नाधिकरणबहुब्बीहि) आहे. Nānā musala phāla pabbata taru kaliṅgara sara dhanugadāsi tomarahatthāti musalo ca phālo ca pabbato ca taru ca kaliṅgaro ca saro ca dhanu ca gadā caasi ca tomaro, ca musalaphālapabbatatarukaliṅgarasaradhanugadāsitomarā, nānā pakārā eva musalaphālapabbatatarukaliṅgarasaradhanugadāsitomarā nānāmusalaphālapabbatatarukaliṅgarasaradhanugadāsitomarā, nānāmusalaphālapabbatatarukaliṅgarasaradhanugadāsitomarā hatthesu [Pg.177] yesaṃ te nānāmusalaphālapabbatatarukaliṅgara saradhanugadāsitomarahatthā. Ayaṃ pana dvandakammadhārayagabbho bhinnādhikaraṇabahubbīhi. "नाना मुसल-फाल-पब्बत-तरु-कलिङ्गर-सर-धनु-गदासि-तोमरहत्था" म्हणजे - मुसल (मुसळ) आणि फाल (फाळ) आणि पब्बत (पर्वत) आणि तरु (झाड) आणि कलिङ्गर (लाकडाचा तुकडा) आणि सर (बाण) आणि धनु (धनुष्य) आणि गदा आणि असि (तलवार) आणि तोमर (भाला) हे 'मुसलफालपब्बततरुकलिङ्गरसरधनुगदासितोमरा' आहेत. विविध प्रकारचेच मुसल, फाल, पब्बत, तरु, कलिङ्गर, सर, धनु, गदा, असि आणि तोमर हे 'नानामुसलफालपब्बततरुकलिङ्गरसरधनुगदासितोमरा' आहेत. ज्यांच्या हातामध्ये विविध प्रकारचे मुसल, فाल, पब्बत, तरु, कलिङ्गर, सर, धनु, गदा, असि आणि तोमर आहेत, ते 'नानामुसलफालपब्बततरुकलिङ्गरसरधनुगदासितोमरहत्था' (विविध शस्त्रे हातात घेतलेले) होत. हा तर एक भिन्न-अधिकरण बहुव्रीहि समास (bhinnādhikaraṇabahubbīhi) आहे, ज्याच्यामध्ये द्वंद्व आणि कर्मधारय समास समाविष्ट आहेत (dvandakammadhārayagabbho). Bahubbīhi iccanena kvattho? Bahubbīhimhi ca. "बहुव्रीहि" (bahubbīhi) असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? 329, 357. Nāmānaṃ samuccayo dvando. ३२९, ३५७. नामांच्या समूहाला (एकत्रीकरणाला) द्वंद्व समास (dvanda) म्हणतात. Nāmānaṃ ekavibhattikānaṃ yo samuccayo, so dvandasañño hoti. समान विभक्ती असलेल्या नामांच्या समूहाला 'द्वंद्व' संज्ञा प्राप्त होते. Candimā ca sūriyo ca candimasūriyā, samaṇo ca brāhmaṇo ca samaṇabrāhmaṇā, sāriputto ca moggallāno ca sāriputtamoggallānā, brāhmaṇo ca gahapatiko ca brāhmaṇagahapatikā, yamo ca varuṇo ca yamavaruṇā, kuvero ca vāsavo ca kuveravāsavā. "चन्दिमा च सूरियो च" (चंद्र आणि सूर्य) मिळून 'चन्दिमसरिया' (candimasūriyā); "समणो च ब्राह्मणो च" (श्रमण आणि ब्राह्मण) मिळून 'समणब्राह्मणा' (samaṇabrāhmaṇā); "सारिपुत्तो च मोग्गल्लानो च" (सारिपुत्त आणि मोग्गल्लान) मिळून 'सारिपुत्तमोग्गल्लाना' (sāriputtamoggallānā); "ब्राह्मणो च गहपतिको च" (ब्राह्मण आणि गृहपती) मिळून 'ब्राह्मणगहपतिका' (brāhmaṇagahapatika); "यमो च वरुणो च" (यम आणि वरुण) मिळून 'यमवरुणा' (yamavaruṇā); "कुवेरो च वासवो च" (कुवेर आणि वासव) मिळून 'कुवेरवासवा' (kuveravāsavā). Dvandaiccanena kvattho? Dvandaṭṭhā vā. "द्वंद्व" (dvanda) असे म्हणण्याचा काय उद्देश आहे? "द्वन्दट्ठा वा" (dvandaṭṭhā vā) या सूत्रात 'द्वंद्व' या संज्ञेचा वापर करण्यासाठी. 330, 340. Mahataṃ mahā tulyādhikaraṇe pade. ३३०, ३४०. समान अधिकरण (समान विभक्ती) असलेला शब्द पुढे असताना, "महत" (mahata) शब्दाचा "महा" (mahā) असा आदेश होतो. Tesaṃ mahantasaddānaṃ mahāādeso hoti tulyādhikaraṇe pade. समान अधिकरण असलेला शब्द पुढे असताना, त्या "महन्त" (mahanta) शब्दाचा "महा" (mahā) असा आदेश होतो. Mahanto [Pg.178] ca so puriso cāti mahāpuriso, mahantī ca sā devī cāti mahādevī, mahantañca taṃ balañcāti mahābalaṃ, mahanto ca so nāgo cāti mahānāgo, mahanto ca so yaso cāti mahāyaso, mahantañca taṃ padumavanañcāti mahāpadumavanaṃ, mahantī ca sā nadī cāti mahānadī, mahanto ca so maṇi cāti mahāmaṇi, mahanto ca so gahapatiko cāti mahāgahapatiko, mahantañca taṃ dhanañcāti mahādhanaṃ, mahanto ca so puñño cāti mahāpuñño. "महन्तो च सो पुरिसो चाति" (महान आणि तो पुरुष) मिळून 'महापुरिसो' (mahāpuriso - महापुरुष); "महन्ती च सा देवी चाति" (महान आणि ती देवी) मिळून 'महादेवी' (mahādevī); "महन्तञ्च तं बलञ्चाति" (महान आणि ते बल) मिळून 'महाबलं' (mahābalaṃ - महाबल); "महन्तो च सो नागो चाति" (महान आणि तो नाग) मिळून 'महानागो' (mahānāgo - महानाग); "महन्तो च सो यसो चाति" (महान आणि तो यश/कीर्ती) मिळून 'महायसो' (mahāyaso - महायश); "महन्तञ्च तं पदुमवनञ्चाति" (महान आणि ते कमळवन) मिळून 'महापदुमवनं' (mahāpadumavanaṃ); "महन्ती च सा नदी चाति" (महान आणि ती नदी) मिळून 'महानदी' (mahānadī); "महन्तो च सो मणी चाति" (महान आणि तो मणी) मिळून 'महामणी' (mahāmaṇi); "महन्तो च सो gahapatiko चाति" (महान आणि तो गृहपती) मिळून 'महागहपतिको' (mahāgahapatiko); "महन्तञ्च तं धनञ्चाति" (महान आणि ते धन) मिळून 'महाधनं' (mahādhanaṃ); "महन्तो च सो पुञ्ञो चाति" (महान आणि तो पुण्यवान पुरुष) मिळून 'महापुञ्ञो' (mahāpuñño - महापुण्यवान). Bahuvacanaggahaṇena kvaci mahanta saddassa mahādeso hoti. Mahantañca taṃ phalañcāti mahapphalaṃ, mahabbalaṃ, evaṃ mahaddhanaṃ, mahabbhayaṃ. बहुवचन ग्रहणामुळे काही ठिकाणी "महन्त" शब्दाचा "महा" असा आदेश होतो. "महन्तञ्च तं फलञ्चाति" (महान आणि ते फळ) मिळून 'महप्फलं' (mahapphalaṃ - मोठे फळ); 'महब्बलं' (mahabbalaṃ - मोठे बल); याचप्रमाणे 'महद्धनं' (mahaddhanaṃ - मोठे धन); 'महब्भयं' (mahabbhayaṃ - मोठे भय/संकट). 331, 353. Itthiyaṃ bhāsitapumitthī pumāva ce. ३३१, ३५३. स्त्रीलिंगात, पूर्वी पुल्लिंगी अर्थ व्यक्त करणारा स्त्रीलिंगी शब्द (समान अधिकरण असताना) पुल्लिंगाप्रमाणेच मानला जावा. Itthiyaṃ tulyādhikaraṇe pade ce bhāsitapumitthī pumāva daṭṭhabbā. स्त्रीलिंगात समान अधिकरण असलेला शब्द पुढे असताना, जर तो पूर्वी पुल्लिंगी अर्थ व्यक्त करणारा स्त्रीलिंगी शब्द असेल, तर तो पुल्लिंगाप्रमाणेच मानला जावा. Dīghā jaṅghā yassa soyaṃ dīghajaṅgho, kalyāṇabhariyo, pahūtapañño. "दीघा जङ्घा यस्स सोयं" (ज्याचे पाय लांब आहेत तो) मिळून 'दीघजङ्घो' (dīghajaṅgho); 'कल्याणभरियो' (kalyāṇabhariyo - जिची पत्नी कल्याणकारी आहे असा); 'पहूतपञ्ञो' (pahūtapañño - ज्याची प्रज्ञा विपुल आहे असा). Bhāsitapupeti [Pg.179] kimatthaṃ? Brāhmaṇabandhu ca sā bhariyā cātibrāhmaṇabandhubhariyā. "भासितपुम" (पूर्वी पुल्लिंगी अर्थ व्यक्त करणारा) असे का म्हटले आहे? पूर्वी पुल्लिंगी अर्थ व्यक्त न करणाऱ्या शब्दांच्या बाबतीत हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. "ब्राह्मणबन्धु च सा भरिया चाति" (ब्राह्मणाची नातेवाईक आणि ती पत्नी) मिळून 'ब्राह्मणबन्धुभरिया' (brāhmaṇabandhubhariyā - ब्राह्मणाची नातेवाईक असलेली पत्नी). 332, 343. Kammadhārayasaññe ca. ३३२, ३४३. कर्मधारय संज्ञक समासात सुद्धा. Kammadhārayasaññe ca samāse itthiyaṃ tulyādhikaraṇe pade pubbe bhāsitapumitthī ce, pumāva daṭṭhabbā. Brāhmaṇadārikā, khattiyakaññā, khattiyakumārikā. कर्मधारय संज्ञक समासात सुद्धा, स्त्रीलिंगात समान अधिकरण असलेला शब्द पुढे असताना, जर पूर्वपद पूर्वी पुल्लिंगी अर्थ व्यक्त करणारा स्त्रीलिंगी शब्द असेल, तर तो पुल्लिंगाप्रमाणेच मानला जावा. जसे की - 'ब्राह्मणदारिका' (brāhmaṇadārikā - ब्राह्मण मुलगी), 'खत्तियकञ्ञा' (khattiyakaññā - क्षत्रिय कन्या), 'खत्तियकुमारिका' (khattiyakumārikā - क्षत्रिय कुमारी). Bhāsitapumeti kimatthaṃ? Khattiyabandhudārikā, brāhmaṇabandhudārikā. "भासितपुम" (पूर्वी पुल्लिंगी अर्थ व्यक्त करणारा) असे का म्हटले आहे? पूर्वी पुल्लिंगी अर्थ व्यक्त न करणाऱ्या शब्दांच्या बाबतीत हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की - 'खत्तियबन्धुदारिका' (khattiyabandhudārikā - क्षत्रियाची नातेवाईक असलेली मुलगी), 'ब्राह्मणबन्धुदारिका' (brāhmaṇabandhudārikā - ब्राह्मणाची नातेवाईक असलेली मुलगी). 333, 344. Attaṃ nassa tappurise. ३३३, ३४४. तत्पुरुष समासात 'न' (na) या शब्दाचा 'अ' (a) होतो. Nassa padassa tappurise uttarapade attaṃ hoti. तत्पुरुष समासात उत्तरपद (पुढील शब्द) असताना, 'न' (na) या पदाचा 'अ' (a) असा आदेश होतो. Nabrāhmaṇo abrāhmaṇo, avasalo, abhikkhu, apañcavassaṃ, apañcagavaṃ. "न ब्राह्मणो" (जो ब्राह्मण नाही तो) मिळून 'अब्राह्मणो' (abrāhmaṇo); "न वसलो" (जो चांडाल/हीन कुळातील नाही तो) मिळून 'अवसलो' (avasalo); "न भिक्खु" (जो भिक्खू नाही तो) मिळून 'अभिक्खु' (abhikkhu); "न पञ्चवस्सं" (पाच वर्षे नसलेले) मिळून 'अपञ्चवस्सं' (apañcavassaṃ); "न पञ्चगवं" (पाच गाई नसलेल्या) मिळून 'अपञ्चगवं' (apañcagavaṃ). 334, 345. Sare ana. ३३४, ३४५. स्वर पुढे असताना 'अन्' (an) होतो. Nassa padassa tappurise ana ādeso hoti sare pare. तत्पुरुष समासात स्वर पुढे असताना, 'न' (na) या पदाचा 'अन्' (an) असा आदेश होतो. Na asso anasso, anissaro, anariyo. "न अस्सो" (जो घोडा नाही तो, म्हणजे खेचर) मिळून 'अनस्सो' (anasso); "न इस्सरो" (जो ईश्वर/स्वामी नाही तो) मिळून 'अनिस्सरो' (anissaro); "न अरियो" (जो आर्य/श्रेष्ठ नाही तो) मिळून 'अनरियो' (anariyo). 335, 346. Kada [Pg.180] kussa. ३३५, ३४६. 'कु' (ku) या शब्दाचा 'कद्' (kad) होतो. Kuiccetassa kada hoti sare pare. स्वर पुढे असताना, 'कु' (ku) या शब्दाचा 'कद्' (kad) असा आदेश होतो. Kucchitaṃ annaṃ kadannaṃ, kucchitaṃ asanaṃ kadassanaṃ. "कुच्छितं अन्नं" (वाईट अन्न) मिळून 'कदन्नं' (kadannaṃ); "कुच्छितं असनं" (वाईट भोजन/आहार) मिळून 'कदसनं' (kadasanaṃ). Sareti kimatthaṃ? Kucchitā dārā yesaṃ (apuññakārānaṃ) te hontīti kudārā, kujanā. Evaṃ kuputtā, kugehā, kuvatthā, kudāsā. "'सरे' (स्वर पुढे असताना) असे का म्हटले आहे? स्वर पुढे नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की पुढील उदाहरणांमध्ये - 'कुच्छिता दारा येसं (अपुञ्ञकारानं) ते होन्तीति' (ज्या पाप करणाऱ्यांचे वाईट दारे/पत्नी आहेत ते) मिळून 'कुदारा' (kudārā); 'कुच्छितो जनो' (वाईट माणूस) मिळून 'कुजना' (kujanā). याचप्रमाणे 'कुपुत्ता' (वाईट पुत्र), 'कुगेहा' (वाईट घरे), 'कुवत्था' (वाईट वस्त्रे), 'कुदासा' (वाईट दास). 336, 347. Kā’ppatthesu ca. ३३६, ३४७. अल्प (कमी) अर्थामध्ये सुद्धा 'का' (kā) होतो. Kuiccetassa kā hoti appatthesu ca. अल्प अर्थामध्ये सुद्धा 'कु' (ku) या शब्दाचा 'का' (kā) असा आदेश होतो. Kālavaṇaṃ, kāpupphaṃ. 'कालवणं' (kālavaṇaṃ - थोडे मीठ), 'कापुप्फं' (kāpupphaṃ - थोडे फूल). Bahuvacanaggahaṇaṃ kimatthaṃ? Kuiccetassa anappatatthesupi kvaci kā hoti, kāpurisā. बहुवचन ग्रहण (सूत्रात बहुवचनाचा वापर) कशासाठी केला आहे? अल्प अर्थाव्यतिरिक्त इतर अर्थांमध्येही काही ठिकाणी 'कु' चा 'का' होतो; जसे की - 'कुच्छिता पुरिसा' (वाईट पुरुष) मिळून 'कापुरिसा' (kāpurisā - भित्रे किंवा वाईट लोक). 337, 350. Kvaci samāsantagatānamakāranto. ३३७, ३५०. समासाच्या शेवटी असलेल्या नामांचा अंत्य स्वर काही ठिकाणी 'अ' (akāra) होतो. Samāsantagatānaṃ nāmānamanto saro kvaci akāro hoti. समासाच्या शेवटी आलेल्या नामांचा अंत्य स्वर काही ठिकाणी 'अ' (akāra) होतो. Devānaṃ rājā devarājo, devarājā, devānaṃ sakhā devasakho, devasakhā, pañca ahāni pañcāhaṃ, sattāhaṃ, pañcagavaṃ, chattupāhanaṃ, upasaradaṃ, visālakkho, vimukho. 'देवाणं राजा' (देवांचा राजा) मिळून 'देवराजो' (devarājo) किंवा 'देवराजा' (devarājā); 'देवाणं सखा' (देवांचा मित्र) मिळून 'देवसखो' (devasakho) किंवा 'देवसखा' (devasakhā); 'पञ्च अहानि' (पाच दिवस) मिळून 'पञ्चाहं' (pañcāhaṃ); 'सप्ताहं' (sattāhaṃ - सात दिवस); 'पञ्चगवं' (pañcagavaṃ - पाच गाई); 'छत्तुपाहनं' (chattupāhanaṃ - छत्री आणि जोडे); 'उपसरदं' (upasaradaṃ - शरद ऋतूच्या जवळ); 'विसालक्खो' (visālakkho - विशाल डोळे असलेला); 'विमुखो' (vimukho - विन्मुख). Kāraggahaṇaṃ [Pg.181] kimatthaṃ? Ākāranta ikārantā ca honti, paccakkhā dhammā yassa soyanti paccakkhadhammā, surabhino gandho surabhigandhi, sundaro gandho sugandhi, pūtino gandho pūtigandhi, kucchito gandho kugandhi, duṭṭhu gandho yassa soyanti dugandhi, pūti eva gandho pūtigandhi. 'कार' ग्रहण (सूत्रात 'अकारान्त' असे म्हणणे) कशासाठी आहे? जेणेकरून 'आ' (ā) आणि 'इ' (i) कारान्त देखील होऊ शकतील. 'पच्चक्खा धम्मा यस्स सोयं' (ज्याला धम्म प्रत्यक्ष झाला आहे तो) मिळून 'पच्चक्खधम्मा' (paccakkhadhammā); 'सुरभिनो गन्धो' (सुगंधी फुलाचा गंध) मिळून 'सुरभिगन्धि' (surabhigandhi); 'सुन्दरो गन्धो' (चांगला वास) मिळून 'सुगन्धि' (sugandhi); 'पूतिनो गन्धो' (कुजलेला वास) मिळून 'पूतिगन्धि' (pūtigandhi); 'कुच्छितो गन्धो' (वाईट वास) मिळून 'कुगन्धि' (kugandhi); 'दुट्ठु गन्धो यस्स सोयं' (ज्याला दुर्गंधी येते तो) मिळून 'दुग्गन्धि' (duggandhi); 'पूति एव गन्धो' (कुजलेलाच वास) मिळून 'पूतिगन्धि' (pūtigandhi). Nadīantā ca kattuantā ca kapaccayo hoti samāsante. समासाच्या शेवटी 'नदी' (nadī) अन्त असणाऱ्या आणि 'कत्तु' (kattu) अन्त असणाऱ्या शब्दांनंतर 'क' (ka) प्रत्यय लागतो. Bahū nadiyo yasmiṃ soyaṃ bahunadiko, janapado. Bahavo kattāro yassa soyaṃ bahukattuko, puriso. 'बहू नदियो यस्मिं सोयं' (ज्या प्रदेशात अनेक नद्या आहेत तो) मिळून 'बहुनदिको' (bahunadiko - अनेक नद्या असलेला प्रदेश); 'बहवो कत्तारो यस्स सोयं' (ज्याला अनेक मदतनीस/कर्ते आहेत तो) मिळून 'बहुकत्तुको' (bahukattuko - अनेक कर्ते असलेला पुरुष). 338, 356. Nadimhā ca. ३३८, ३५६. 'नदी' संज्ञक शब्दांनंतर सुद्धा (म्हणजे स्त्रीलिंगातील 'ई' आणि 'ऊ' कारान्त शब्दांनंतर सुद्धा). Nadimhā ca kapaccayo hoti samāsante. समासाच्या शेवटी 'नदी' संज्ञक शब्दांनंतर सुद्धा 'क' (ka) प्रत्यय लागतो. Bahū nadiyo yasmiṃ soyanti bahunadiko. Bahū kantiyo yassa soyanti bahukantiko. Bahunāriko. 'बहू नदियो यस्मिं सोयं' (ज्या प्रदेशात अनेक नद्या आहेत तो) मिळून 'बहुनदिको' (bahunadiko); 'बहू कन्तियो यस्स सोयं' (ज्याला अनेक शोभा/कांती आहेत तो) मिळून 'बहुकन्तिको' (bahukantiko); याचप्रमाणे 'बहुनारिको' (bahunāriko - ज्याला अनेक स्त्रिया आहेत तो). 339, 358. Jāyāya tudaṃ jāni patimhi. ३३९, ३५८. जेव्हा 'पति' शब्द नंतर येतो, तेव्हा 'जाया' शब्दाच्या जागी 'तुदं' आणि 'जानि' हे आदेश होतात. Jāyāiccetāya tudaṃ jāniiccete ādesā honti patimhi pare. जेव्हा 'पति' शब्द नंतर येतो, तेव्हा 'जाया' या शब्दाच्या जागी 'तुदं' आणि 'जानि' हे आदेश होतात. Tudaṃpatī, jānipatī. 'तुदंपती' (पत्नी आणि पती), 'जानिपती' (पत्नी आणि पती). 340, 355. Dhanumhā ca. ३४०, ३५५. आणि 'धनु' शब्दाच्या पुढे 'आ' प्रत्यय लागतो. Dhanumhā ca āpaccayo hoti samāsante. समासाच्या शेवटी 'धनु' शब्दाच्या पुढे 'आ' प्रत्यय होतो. Gāṇḍīvo [Pg.182] dhanu yassa soyaṃ gāṇḍīvadhanvā. गांडीव हे ज्याचे धनुष्य आहे तो 'गाण्डीवधन्वा' (गांडीवधारी) होय. 341, 336. Aṃ vibhattīnamakārantā abyayībhāvā. ३४१, ३३६. अ-कारान्त अव्ययीभाव समासाच्या पुढे येणाऱ्या विभक्ती प्रत्ययांच्या जागी 'अं' होतो. Tasmā akārantā abyayībhāvasamāsā parāsaṃ vibhattīnaṃ kvaci aṃ hoti. त्या अ-कारान्त अव्ययीभाव समासाच्या पुढे येणाऱ्या विभक्ती प्रत्ययांच्या जागी काही वेळा 'अं' होतो. Adhicittaṃ, yathāvuḍḍhaṃ, upakumbhaṃ, yāvajīvaṃ, tiropabbataṃ, tiropākāraṃ, tirokuṭṭaṃ, antopāsādaṃ. 'अधिचित्तं' (चित्ताविषयी/उच्च चित्त); 'यथावुड्ढं' (ज्येष्ठतेनुसार); 'उपकुम्भं' (घड्याच्या जवळ); 'यावजीवं' (आयुष्यभर); 'तिरोपब्बतं' (पर्वताच्या पलीकडे); 'तिरोपाकारं' (भिंतीच्या पलीकडे); 'तिरोकुट्टं' (कुड्याच्या/भिंतीच्या पलीकडे); 'अन्तोपासादं' (महालाच्या आत). Kvacīti kimatthaṃ? Adhicittassa bhikkhuno. 'क्वचि' (काही वेळा) असे का म्हटले आहे? या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की: 'अधिचित्तस्स भिक्खुनो' (भिक्खूच्या उच्च चित्ताचे). 342, 337. Saro rasso napuṃsake. ३४२, ३३७. नपुंसकलिंगामध्ये स्वर र्हस्व होतो. Napuṃsake vattamānassa abyayībhāvasamāsassa liṅgassa saro rasso hoti. नपुंसकलिंगात असणाऱ्या अव्ययीभाव समासाच्या प्रातिपदिक स्वराचा र्हस्व होतो. Kumārīsu adhikicca pavattati kathā iti adhikumāri. Upavadhu, upagaṅgaṃ, upamaṇikaṃ. कुमारींविषयी (मुलींविषयी) जी चर्चा चालते ती 'अधिकुमारि' (कुमारींविषयीची चर्चा). 'उपवधु' (सूनेच्या जवळ); 'उपगङ्गं' (गंगेच्या जवळ); 'उपमणिकं' (मोठ्या मातीच्या भांड्याजवळ). 343, 338. Aññasmā lopo ca. ३४३, ३३८. इतर शब्दांच्या पुढे लोपही होतो. Aññasmā abyayībhāvasamāsā anakārantā parāsaṃ vibhattīnaṃ lopo ca hoti. अ-कारान्त नसलेल्या इतर अव्ययीभाव समासांच्या पुढे येणाऱ्या विभक्ती प्रत्ययांचा लोप होतो. Adhitthi, adhikumāri, upavadhu. 'अधित्थि' (स्त्रीविषयी); 'अधिकुमारि' (कुमारींविषयी); 'उपवधु' (सूनेच्या जवळ). Iti nāmakappe samāsakappo sattamo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम कल्पामधील 'समास कल्प' नावाचा सातवा विभाग समाप्त झाला. Samāsakappo niṭṭhito. समास कल्प समाप्त. 5. Taddhitakappa ५. तद्धित कल्प Aṭṭhamakaṇḍa आठवा विभाग 344, 361. Vāṇa’pacce[Pg.183]. ३४४, ३६१. अपत्य (संतान) या अर्थामध्ये 'ण' प्रत्यय होतो. Ṇapaccayo hoti vā ‘‘tassāpacca’’ miccetasmiṃ atthe. 'त्याचे अपत्य' या अर्थामध्ये वैकल्पिकरित्या 'ण' प्रत्यय होतो. Vasiṭṭhassa apaccaṃ vāsiṭṭho, vasiṭṭhassa apaccaṃ vā, vasiṭṭhassa apaccaṃ vāsiṭṭhī, vasiṭṭhassa apaccaṃ vāsiṭṭhaṃ. Evaṃ bhāradvājo, bhāradvājī, bhāradvājaṃ. Gotamo, gotamī, gotamaṃ. Vāsudevo, vāsudevī, vāsudevaṃ. Bāladevo, bāladevī, bāladevaṃ. Vesāmitto, vesāmittī vesāmittaṃ. वसिष्ठाचे अपत्य म्हणजे 'वासिट्ठो', 'वासिट्ठी' किंवा 'वासिट्ठं'. त्याचप्रमाणे, भरद्वाजाचे अपत्य म्हणजे 'भारद्वाजो', 'भारद्वाजी' किंवा 'भारद्वाजं'. गोतमाचे अपत्य म्हणजे 'गोतमो', 'गोतमी' किंवा 'गोतमं'. वसुदेवाचे अपत्य म्हणजे 'वासुदेवो', 'वासुदेवी' किंवा 'वासुदेवं'. बलदेवाचे अपत्य म्हणजे 'बालदेवो', 'बालदेवी' किंवा 'बालदेवं'. विश्वामित्राचे अपत्य म्हणजे 'वेसामित्तो', 'वेसामित्ती' किंवा 'वेसामित्तं'. 345, 366. Ṇāyana ṇāna vacchādito. ३४५, ३६६. 'वच्छ' (वत्स) इत्यादी शब्दांच्या पुढे 'णायन' आणि 'णान' प्रत्यय होतात. Tasmā vacchādito gottagaṇato ṇāyanaṇānapaccayā honti vā ‘‘tassāpacca’’miccetasmiṃ atthe. त्या 'वच्छ' इत्यादी गोत्रवाचक शब्दांच्या पुढे 'त्याचे अपत्य' या अर्थामध्ये वैकल्पिकरित्या 'णायन' आणि 'णान' प्रत्यय होतात. Vacchassa apaccaṃvacchāyano, vacchāno, vacchassa apaccaṃ vā, vacchassa apaccaṃ vacchāyanī, vacchānī, vacchassa apaccaṃ vacchāyanaṃ, vacchānaṃ. Sakaṭassa apaccaṃ sākaṭāyano, sākaṭāno[Pg.184], sakaṭassa apaccaṃ vā, sākaṭāyanī, sā kaṭānī, sākaṭāyanaṃ, sākaṭānaṃ. Evaṃ kaṇhāyano, kaṇhāno, kaṇhassa apaccaṃ vā. Kaṇhāyanī, kaṇhānī, kaṇhāyanaṃ, kaṇhānaṃ. Aggivessāyano, aggivessāno, aggivessāyanī, aggivessānī, aggivessāyanaṃ, aggivessānaṃ. Gacchāyano, gacchāno, gacchāyanī, gacchānī, gacchāyanaṃ, gacchānaṃ. Kappāyano, kappāno, kappāyanī, kappānī, kappāyanaṃ, kappānaṃ. Moggallāyano, moggallāno, moggallāyanī, moggallānī, moggallāyanaṃ, moggallānaṃ. Muñcāyano, muñcāno, muñcāyanī, muñcānī, muñcāyanaṃ, muñcānaṃ. Saṅghāyano, saṅghāno, saṅghāyanī, saṅghānī, saṅghāyanaṃ, saṅghānaṃ. Lomāyano, lomāno, lomāyanī, lomānī, lomāyanaṃ, lomānaṃ, sākamāyano, sākamāno, sākamāyanī, sākamānī, sākamāyanaṃ, sākamānaṃ. Nārāyano, nārāno, nārāyanī, nārānī, nārāyanaṃ, nārānaṃ. Corāyanocorāno, corāyanī, corānī, corāyanaṃ, corānaṃ, āvasālāyano, āvasālāno, āvasālāyanī, āvasālānī, āvasālāyanaṃ, āvasālānaṃ. Dvepāyano, dvepāno, dvepāyanī, dvepānī, dvepāyanaṃ, dvepānaṃ. Kuñcāyano, kuñcāno, kuñcāyanī, kuñcānī, kuñcāyanaṃ, kuñcānaṃ. Kaccāyano, kaccāno, kaccāyanī, kaccānī, kaccāyanaṃ, kaccānaṃ. वच्छचे अपत्य (संतती) म्हणजे वच्छायनो, वच्छानो, किंवा वच्छायनी, वच्छानी, वच्छायनं, वच्छानं होय. सकटचे अपत्य म्हणजे साकटायनो, साकटानो, किंवा साकटायनी, साकटानी, साकटायनं, साकटानं होय. याचप्रमाणे कण्हायनो, कण्हानो, किंवा कण्हायनी, कण्हानी, कण्हायनं, कण्हानं (हे कण्हचे अपत्य होय). अग्गिवेसचे अपत्य म्हणजे अग्गिवेस्सायनो, अग्गिवेस्सानो, अग्गिवेस्सायनी, अग्गिवेस्सानी, अग्गिवेस्सायनं, अग्गिवेस्सानं होय. गच्छचे अपत्य म्हणजे गच्छायनो, गच्छानो, गच्छायनी, गच्छानी, गच्छायनं, गच्छानं होय. कप्पचे अपत्य म्हणजे कप्पायनो, कप्पानो, कप्पायनी, कप्पानी, कप्पायनं, कप्पानं होय. मोग्गल्लचे अपत्य म्हणजे मोग्गल्लायनो, मोग्गल्लानो, मोग्गल्लायनी, मोग्गल्लानी, मोग्गल्लायनं, मोग्गल्लानं होय. मुंचायनो, मुंचानो, मुंचायनी, मुंचानी, मुंचायनं, मुंचानं. संघायनो, संघानो, संघायनी, संघानी, संघायनं, संघानं. लोमायनो, लोमानो, लोमायनी, लोमानी, लोमायनं, लोमानं. साकमायनो, साकमानो, साकमायनी, साकमानी, साकमायनं, साकमानं. नारायणो, नाराणो, नारायनी, नाराणी, नारायणं, नाराणं. चोरायनो, चोरानो, चोरायनी, चोरानी, चोरायनं, चोरानं. आवसालायनो, आवसालानो, आवसालायनी, आवसालानी, आवसालायनं, आवसालानं. द्विपचे अपत्य म्हणजे द्वेपायनो, द्वेपानो, द्वेपायनी, द्वेपानी, द्वेपायनं, द्वेपानं होय. कुंचायनो, कुंचानो, कुंचायनी, कुंचानी, कुंचायनं, कुंचानं. कच्चायनो, कच्चानो, कच्चायनी, कच्चानी, कच्चायनं, कच्चानं होय. 346, 367. Ṇeyyo [Pg.185] kattikādīhi. ३४६, ३६७. कत्तिका इत्यादी शब्दांनंतर 'णेय्य' प्रत्यय लागतो. Tehi gottagaṇehi kattikādīhi ṇeyyapaccayo hoti vā ‘‘tassāpacca’’miccetasmiṃ atthe. त्या कत्तिका इत्यादी कुळसमूहांनंतर 'त्याचे अपत्य' या अर्थी 'णेय्य' प्रत्यय लागतो. Kattikāya apaccaṃ kattikeyyo, kattikāya apaccaṃ vā. Evaṃ venateyyo, rohiṇeyyo, gaṅgeyyo, kaddameyyo, nādeyyo, āleyyo, āheyo, kāmeyyo, suciyā apaccaṃ soceyyo, sāleyyo, bāleyyo, māleyyo, kāleyyo. कत्तिकाचे अपत्य म्हणजे कत्तिकेय्यो होय. याचप्रमाणे विनताचे अपत्य वेनतेय्यो, रोहिणीचे अपत्य रोहिणेय्यो, गंगेचे अपत्य गंगेय्यो, कद्दमाचे अपत्य कद्दमेय्यो, नदीचे अपत्य नादेय्यो, आलीचे अपत्य आलेय्यो, आहीचे अपत्य आहेय्यो, कमीचे अपत्य कामेय्यो, सुचीचे अपत्य सोचेय्यो, सलाचे अपत्य सालेय्यो, बलाचे अपत्य बालेय्यो, मलाचे अपत्य मालेय्यो, कलाचे अपत्य कालेय्यो होय. 347, 368. Ato ṇi vā. ३४७, ३६८. कधीकधी 'अ' कारानंतर 'णि' प्रत्यय लागतो. Tasmā akārato ṇipaccayo hoti vā ‘‘tassāpacca’’miccetasmiṃ atthe. त्या अ-कारानंतर 'त्याचे अपत्य' या अर्थी विकल्पेकरून 'णि' प्रत्यय लागतो. Dakkhassa apaccaṃ dakkhi, dakkhassa apaccaṃ vā. Duṇassa apaccaṃ doṇi, duṇassa apaccaṃ vā, evaṃ vāsavi, sakyaputti, nāṭaputti, dāsaputti, dāsavi, vāruṇi, gaṇḍi, bāladevi, pāvaki, jenadatti, buddhi, dhammi, saṅghi, kappi, anuruddhi. दक्खचे अपत्य म्हणजे दक्खि होय. दुणचे अपत्य म्हणजे दोणि होय. याचप्रमाणे वासवचे अपत्य वासवि, सक्यपुत्तचे अपत्य सक्यपुत्ति, नटपुत्तचे अपत्य नाटपुत्ति, दसपुत्तचे अपत्य दासपुत्ति, दसवचे अपत्य दासवि, वरुणचे अपत्य वारुणि, गंडचे अपत्य गंडि, बलदेवचे अपत्य बालदेवि, पावकचे अपत्य पावकि, जिनदत्तचे अपत्य जेनदत्ति, बुद्धचे अपत्य बुद्धि, धम्मचे अपत्य धम्मि, संघचे अपत्य संघि, कप्पचे अपत्य कप्पि, अनुरुद्धचे अपत्य अनुरुद्धि होय. Vāti vikappanatthena ṇikapaccayo hoti ‘‘tassāpacca’’miccetasmiṃ atthe. Sakyaputtassa apaccaṃ sakyaputtiko. Evaṃ nāṭaputtiko, jenadattiko. 'वा' हा शब्द विकल्पाच्या अर्थी आहे; म्हणून 'त्याचे अपत्य' या अर्थी 'णिक' प्रत्यय लागतो. सक्यपुत्तचे अपत्य म्हणजे सक्यपुत्तिको होय. याचप्रमाणे नाटपुत्तिको, जेनदत्तिको होय. 148, 371. Ṇavo’ [Pg.186] pakvādīhi. १४८, ३७१. उपकु इत्यादी शब्दांनंतर विकल्पेकरून 'णव' प्रत्यय लागतो. Upakuiccevamādīhi ṇavapaccayo hoti vā ‘‘tassāpacca’’miccetasmiṃ atthe. उपकु इत्यादी शब्दांनंतर 'त्याचे अपत्य' या अर्थी विकल्पेकरून 'णव' प्रत्यय लागतो. Upakussa apaccaṃ opakavo, upakussa apaccaṃ vā. Manuno apaccaṃ mānavo, manuno apaccaṃ vā. Bhaggussa apaccaṃ bhaggavo, bhaggussa apaccaṃ vā, paṇḍussa apaccaṃ paṇḍavo, paṇḍussa apaccaṃ vā, bahussa apaccaṃ bāhavo, bahussa apaccaṃ vā. उपकुचे अपत्य म्हणजे ओपकवो होय. मनुचे अपत्य म्हणजे मानवो होय. भग्गुचे अपत्य म्हणजे भग्गवो होय, पंडुचे अपत्य म्हणजे पांडवो होय, बहुचे अपत्य म्हणजे बाहवो होय. 349, 372. Ṇera vidhavādito. ३४९, ३७२. विधवा इत्यादी शब्दांनंतर 'णेर' प्रत्यय लागतो. Tasmā vidhavādito ṇerapaccayo hoti vā ‘‘tassāpacca’’miccetasmiṃ atthe. त्या विधवा इत्यादी शब्दांनंतर 'त्याचे अपत्य' या अर्थी विकल्पेकरून 'णेर' प्रत्यय लागतो. Vidhavāya apaccaṃ vedhavero, vidhavāya apaccaṃ vā. Bandhukiyā apaccaṃ bandhukero, bandhukiyā apaccaṃ vā. Samaṇassa apaccaṃ sāmaṇero, samaṇassa apaccaṃ vā. Evaṃ sāmaṇerī, sāmaṇeraṃ, nāḷikero, nāḷikerī, nāḷikeraṃ. विधवेचे अपत्य म्हणजे वेधवेरो (विधवेचा मुलगा) होय. प्रेयसीकडे जाणाऱ्या स्त्रीचे (किंवा स्वैरिणीचे) अपत्य म्हणजे बंधुकेरो होय. श्रमणाचे अपत्य म्हणजे सामणेरो (श्रामणेर) होय. याचप्रमाणे सामणेरी, सामणेरं, नाळिकेरो, नाळिकेरी, नाळिकेरं होय. 350, 373. Yena vā saṃsaṭṭhaṃ tarati carati vahati ṇiko. ३५०, ३७३. ज्याने मिश्रित केलेले, ज्याच्याद्वारे तो पार करतो, ज्याच्याद्वारे तो प्रवास करतो, किंवा ज्याच्याद्वारे तो वाहून नेतो, या अर्थांमध्ये 'णिक' प्रत्यय लागतो. Yena vā saṃsaṭṭhaṃ, yena vā tarati, yena vā carati, yena vā vahati iccetesvatthesu ṇikapaccayo hoti vā. "ज्याने मिश्रित केलेले", "ज्याने तो पार करतो", "ज्याने तो प्रवास करतो", "ज्याने तो वाहून नेतो" या अर्थांमध्ये 'णिक' (ṇika) प्रत्यय विकल्पेकरून लागतो. Tilena [Pg.187] saṃsaṭṭhaṃ bhojanaṃ telikaṃ, tilena saṃsaṭṭhaṃ vā. Evaṃ goḷikaṃ, ghātikaṃ. तिळाने मिश्रित केलेले भोजन ते 'तेलिकं' (telikaṃ) किंवा तिळाने मिश्रित केलेले. याचप्रमाणे 'गोळिकं' (goḷikaṃ - गुळाने मिश्रित केलेले), 'घातिकं' (ghātikaṃ - तुपाने मिश्रित केलेले). Nāvāya taratīti nāviko, nāvāya tarati vā. Evaṃ oḷumpiko. जो नावेने पार करतो तो 'नाविको' (nāviko) किंवा जो नावेने पार करतो. याचप्रमाणे 'ओळुम्पिको' (oḷumpiko - तराफ्याने पार करणारा). Sakaṭena caratīti sākaṭiko, sakaṭena carati vā. Evaṃ pattiko, daṇḍiko, dhammiko, pādiko. जो गाडीने प्रवास करतो तो 'साकटिको' (sākaṭiko) किंवा जो गाडीने प्रवास करतो. याचप्रमाणे 'पत्तिको' (pattiko - पायी चालणारा), 'दण्डिको' (daṇḍiko - काठी घेऊन चालणारा), 'धम्मिको' (dhammiko - धम्माने चालणारा), 'पादिको' (pādiko - पायी चालणारा). Sīsena vahatīti sīsiko, sīsena vahati vā. Aṃsena vahatīti aṃsiko, aṃsena vahati vā. Evaṃ khandhiko, aṅguliko. जो डोक्याने वाहून नेतो तो 'सीसिको' (sīsiko) किंवा जो डोक्याने वाहून नेतो. जो खांद्याने वाहून नेतो तो 'अंसिको' (aṃsiko) किंवा जो खांद्याने वाहून नेतो. याचप्रमाणे 'खन्धिको' (khandhiko - खांद्यावरून वाहून नेणारा), 'अङ्गुलिको' (aṅguliko - बोटांनी वाहून नेणारा). Vāti vikappanatthena aññesupi ṇikapaccayo hoti. Rājagahe vasatīti rājagahiko, rājagahe vasati vā. Rājagahe jāto rājagahiko, rājagahe jāto vā. Evaṃ māgadhiko, sāvatthiko, kāpila vatthiko, pāṭaliputtiko, vesāliko. 'वा' हा शब्द विकल्प दर्शवण्यासाठी आहे, इतर अर्थांमध्येही 'णिक' प्रत्यय लागतो. जो राजगृहात राहतो तो 'राजगहिको' (rājagahiko) किंवा जो राजगृहात राहतो. राजगृहात जन्मलेला तो 'राजगहिको' किंवा जो राजगृहात जन्मला आहे. याचप्रमाणे 'मागधिको' (māgadhiko), 'सावत्थिको' (sāvatthiko), 'कापिलवत्थिको' (kāpilavatthiko), 'पाटिलिपुत्तिको' (pāṭaliputtiko), 'वेसालिको' (vesāliko). 351, 374. Tamadhīte tenakatādi sannidhāna niyoga sippa bhaṇḍa jīvikatthesu ca. ३५१, ३७४. तसेच, "तो ते शिकतो", "त्याने बनवलेले" इत्यादी अर्थांमध्ये आणि "तिथे राहणारा", "तिथे नियुक्त असलेला", "ते त्याचे कौशल्य आहे", "ते त्याचे उत्पादन आहे", "ती त्याची उपजीविका आहे" या अर्थांमध्येही (णिक प्रत्यय लागतो). Tamadhīte, tenakatādiatthe, tamhi sannidhānā, tattha niyutto, tamassa sippaṃ, tamassa bhaṇḍaṃ, tamassa jīvikaṃ iccetesvatthesu ca ṇikapaccayo hoti vā. "तो ते शिकतो", "त्याने बनवलेले" इत्यादी अर्थांमध्ये, "तिथे राहणारा", "तिथे नियुक्त असलेला", "ते त्याचे कौशल्य आहे", "ते त्याचे उत्पादन आहे", "ती त्याची उपजीविका आहे" या अर्थांमध्ये 'णिक' प्रत्यय विकल्पेकरून लागतो. Vinayamadhīte [Pg.188] venayiko, vinayamadhīte vā. Evaṃ suttantiko, ābhidhammiko, veyyākaraṇiko. जो विनय शिकतो तो 'वेनयिको' (venayiko) किंवा जो विनय शिकतो. याचप्रमाणे 'सुत्तन्तिको' (suttantiko), 'आभिधम्मिको' (ābhidhammiko), 'वेय्याकरणिको' (veyyākaraṇiko). Kāyena kataṃ kammaṃ kāyikaṃ, kāyena kataṃ kammaṃ vā. Evaṃ vācasikaṃ, mānasikaṃ. शरीराने केलेले कर्म ते 'कायिकं' (kāyikaṃ) किंवा शरीराने केलेले कर्म. याचप्रमाणे 'वाचसिकं' (vācasikaṃ), 'मानसिकं' (mānasikaṃ). Sarīre sannidhānā vedanā sārīrikā, sarīre sannidhānā vā, evaṃ mānasikā. शरीरात स्थित असलेली वेदना ती 'शारीरिका' (sārīrikā) किंवा शरीरात स्थित असलेली वेदना. याचप्रमाणे 'मानसिका' (mānasikā). Dvāre niyutto dovāriko, dvāre niyutto vā. Evaṃ bhaṇḍāgāriko, nāgariko, nāvakammiko. जो दारावर नियुक्त आहे तो 'दोवारिको' (dovāriko) किंवा जो दारावर नियुक्त आहे. याचप्रमाणे 'भण्डागारिको' (bhaṇḍāgāriko), 'नागरिको' (nāgariko), 'नावकम्मिको' (nāvakammiko). Vīṇā assa sippaṃ veṇiko, vīṇā assa sippaṃ vā. Evaṃ pāṇaviko, modiṅgiko, vaṃsiko. वीणा वाजवणे हे ज्याचे कौशल्य आहे तो 'वेणिको' (veṇiko) किंवा वीणा हे ज्याचे कौशल्य आहे. याचप्रमाणे 'पाणvिको' (pāṇaviko), 'मोदिङ्गिको' (modiṅgiko), 'वंसिको' (vaṃsiko). Gandho assa bhaṇḍaṃ gandhiko, gandho assa bhaṇḍaṃ vā. Evaṃ teliko, goḷiko. सुगंध हे ज्याचे उत्पादन आहे तो 'गन्धिको' (gandhiko) किंवा सुगंध हे ज्याचे उत्पादन आहे. याचप्रमाणे 'तेलिको' (teliko), 'गोळिको' (goḷiko). Urabbhaṃ hantvā jīvatīti orabbhiko, urabbhaṃ hantvā jīvati vā. Magaṃ hantvā jīvatīti māgaviko, magaṃ hantvā jīvati vā. Evaṃ sokariko, sākuṇiko. जो मेंढ्या मारून जगतो तो 'ओरब्भिको' (orabbhiko) किंवा जो मेंढ्या मारून जगतो. जो जंगली प्राण्यांना मारून जगतो तो 'मागविको' (māgaviko) किंवा जो प्राण्यांना मारून जगतो. याचप्रमाणे 'सोकरिको' (sokariko), 'साकुणिको' (sākuṇiko). Ādiggahaṇena aññatthāpi ṇika paccayo yojetabbo. Jālena hato jāliko, jālena hato vā. 'आदि' (इत्यादी) च्या ग्रहणाने इतर अर्थांमध्येही 'णिक' प्रत्यय जोडला जावा. जाळ्याने मारलेला तो 'जालिको' (jāliko) किंवा जो जाळ्याने मारला गेला आहे. Suttena bandho suttiko, suttena bandho vā. दोऱ्याने बांधलेला तो 'सुत्तिको' (suttiko) किंवा जो दोऱ्याने बांधला गेला आहे. Cāpo [Pg.189] assa āvudho cāpiko, cāpo assa āvudho vā. Evaṃ tomariko, muggariko, mosaliko. धनुष्य हे ज्याचे शस्त्र आहे तो 'चापिको' (cāpiko) किंवा धनुष्य हे ज्याचे शस्त्र आहे. याचप्रमाणे 'तोमरिको' (tomariko), 'मुग्गरिको' (muggariko), 'मोसलिको' (mosaliko). Vāto assa ābādho vātiko, vāto assa ābādho vā. Evaṃ semhiko, pittiko. वात हा ज्याचा आजार आहे तो 'वातिको' (vātiko) किंवा वात हा ज्याचा आजार आहे. याचप्रमाणे 'सेम्हिको' (semhiko), 'पित्तिको' (pittiko). Buddhe pasanno buddhiko, buddhe pasanno vā. Evaṃ dhammiko, saṅghiko. बुद्धांवर प्रसन्न (श्रद्धा असलेले) ते 'बुद्धिको' (buddhiko) या नावाने ओळखले जातात किंवा जे बुद्धांवर श्रद्धा ठेवतात. याचप्रमाणे 'धम्मिको' (dhammiko), 'सङ्घिको' (saṅghiko). Buddhassa santakaṃ buddhikaṃ, buddhassa santakaṃ vā. Evaṃ dhammikaṃ, saṅghikaṃ. बुद्धांच्या मालकीचे ते 'बुद्धिकं' (buddhikaṃ) किंवा जे बुद्धांचे आहे. याचप्रमाणे 'धम्मिकं' (dhammikaṃ), 'सङ्घिकं' (saṅghikaṃ). Vatthena kītaṃ bhaṇḍaṃ vatthikaṃ, vatthena kītaṃ bhaṇḍaṃ vā. Evaṃ kumbhikaṃ, phālikaṃ, kiṃ kaṇikaṃ, sovaṇṇikaṃ. कापडाने खरेदी केलेले साहित्य ते 'वत्थिकं' (vatthikaṃ) किंवा कापडाने खरेदी केलेले साहित्य. याचप्रमाणे 'कुम्भिकं' (kumbhikaṃ), 'फालिकं' (phālikaṃ), 'किङ्कणिकं' (kiṅkaṇikaṃ), 'सोवण्णिकं' (sovaṇṇikaṃ). Kumbho assa parimāṇaṃ kumbhikaṃ, kumbho assa parimāṇaṃ vā. कुंभ हे ज्याचे माप आहे ते 'कुम्भिकं' (kumbhikaṃ) किंवा कुंभ हे ज्याचे माप आहे. Kumbhassa rāsi kumbhikaṃ, kumbhassa rāsi vā. कुंभांची रास ती 'कुम्भिकं' (kumbhikaṃ) किंवा कुंभांची रास. Kumbhaṃ arahatīti kumbhiko, kumbhaṃ arahati vā. जे कुंभाच्या योग्यतेचे आहे ते 'कुम्भिकं' (kumbhikaṃ) किंवा जे कुंभाच्या योग्यतेचे आहे. Akkhena dibbatīti akkhiko, akkhena dibbati vā. Evaṃ sālākiko, tindukiko, ambaphaliko. Kapiṭṭhaphaliko, nāḷikeriko iccevamādi. जो फाशांनी खेळतो तो 'अक्खिको' (akkhiko) किंवा जो फाशांनी खेळतो. याचप्रमाणे 'सालाकिको' (sālākiko), 'तिन्दुकिको' (tindukiko), 'अम्बफलिको' (ambaphaliko), 'कपित्ठफलिको' (kapiṭṭhaphaliko), 'नाळिकेरिको' (nāḷikeriko) इत्यादी. 352, 376. Ṇa rāgā tasse damaññatthesu ca. ३५२, ३७६. 'राग' (रंगवणे), 'त्याचे हे' आणि इतर अर्थांमध्ये 'ण' प्रत्यय लागतो. Ṇapaccayo hoti vā rāgamhā ‘‘tena rattaṃ’’ iccetasmiṃ atthe, ‘‘tassedaṃ’’ aññatthesu ca. रंगवण्याच्या अर्थातील शब्दांनंतर 'त्याने रंगवलेले' या अर्थात, तसेच 'त्याचे हे' आणि इतर अर्थांमध्ये 'ण' प्रत्यय विकल्पेकरून लागतो. Kasāvena [Pg.190] rattaṃ vatthaṃ kāsāvaṃ, kasāvena rattaṃ vatthaṃ vā. Evaṃ kosumbhaṃ, hāliddaṃ, pāṭaṅgaṃ, rattaṅga, mañjiṭṭhaṃ, kuṅkumaṃ. काषाय रंगाने रंगवलेले वस्त्र ते 'कासावं' (kāsāvaṃ) किंवा काषाय रंगाने रंगवलेले वस्त्र. याचप्रमाणे 'कोसुम्भं' (kosumbhaṃ), 'हालिद्दं' (hāliddaṃ), 'पाटङ्गं' (pāṭaṅgaṃ), 'रत्तङ्गं' (rattaṅgaṃ), 'मञ्जिट्ठं' (mañjiṭṭhaṃ), 'कुङ्कुमं' (kuṅkumaṃ). Sūkarassa idaṃ maṃsaṃ sokaraṃ, sūkarassa idaṃ maṃsaṃ vā. Evaṃ māhisaṃ. हे डुकराचे मांस ते 'सोकरं' (sokaraṃ) किंवा हे डुकराचे मांस. याचप्रमाणे 'माहिसं' (māhisaṃ). Udumbarassa avidūre pavattaṃ vimānaṃ odumbaraṃ, udumbarassa avidūre pavattaṃ vimānaṃ vā. उंबराच्या झाडाच्या जवळ असलेले विमान ते 'ओदुम्बरं' (odumbaraṃ) किंवा उंबराच्या झाडाजवळ असलेले विमान. Vidisāya avidūre nivāso vediso, vidisāya avidūre nivāso vā. उपदिशेच्या जवळ असलेले निवासस्थान ते 'वेदिसो' (vediso) किंवा उपदिशेच्या जवळ असलेले निवासस्थान. Mathurāya jāto māthuro, mathurāya jāto vā. मथुरेत जन्मलेला तो 'माथुरो' (māthuro) किंवा जो मथुरेत जन्मला आहे. Mathurāya āgato māthuro, mathurāya āgato vā. मथुरेहून आलेला तो 'माथुरो' (māthuro) किंवा जो मथुरेहून आला आहे. Kattikāya niyutto māso kattiko, kattikāya niyutto māso vā. Evaṃ māgasiro, phusso, māgho, phagguno, citto, vesākho, jeṭṭho, āsaḷho, sāvaṇo, bhaddo, assayujo. कृत्तिका नक्षत्राशी युक्त असलेला महिना तो 'कत्तिको' (kattiko) किंवा कृत्तिका नक्षत्राशी युक्त असलेला महिना. याचप्रमाणे 'मागसिरो' (māgasiro), 'फुस्सो' (phusso), 'माघो' (māgho), 'फग्गुनो' (phagguno), 'चित्तो' (citto), 'वेसाखो' (vesākho), 'जेट्ठो' (jeṭṭho), 'आसळ्हो' (āsaḷho), 'सावणो' (sāvaṇo), 'भद्दो' (bhaddo), 'अस्सयुजो' (assayujo). Na vuddhi nīlapītādo, paccaye saṇakārake. 'ण' अनुबंध असलेल्या प्रत्ययामध्ये, 'नील', 'पीत' इत्यादी शब्दांच्या स्वराची वृद्धी होत नाही. Phakāro phussasaddassa, ‘‘siro’’ti sirasaṃ vade. 'फुस्स' शब्दातील 'फु' मधील 'उ' ची वृद्धी होत नाही, आणि 'सिरो' च्या जागी 'सिरसं' असे म्हणू नये. Sikkhānaṃ [Pg.191] samūho sikkho, bhikkhānaṃ samūho bhikkho. Evaṃ kāpoto, māyūro, kokilo. शिक्षणांचा समूह तो 'सिक्खो' (sikkho), भिक्षेचा समूह तो 'भिक्खो' (bhikkho). याचप्रमाणे कबुतरांचा समूह तो 'कापोतो' (kāpoto), मोरांचा समूह तो 'मायूरो' (māyūro), कोकिळांचा समूह तो 'कोकिलो' (kokilo). Buddhe, assa devatā buddho. Evaṃ bhaddo, māro, māhindo, vessavaṇo, yāmo, somo, nārāyaṇo. बुद्ध हे ज्यांचे आराध्य दैवत आहेत ते 'बुद्धो' (buddho). याचप्रमाणे 'भद्दो' (bhaddo), 'मारो' (māro), 'माहिन्दो' (māhindo), 'वेस्सवणो' (vessavaṇo), 'यामो' (yāmo), 'सोमो' (somo), 'नारायणो' (nārāyaṇo) हे ज्यांचे आराध्य दैवत आहेत ते. Saṃvaccharamadhīte saṃvaccharo. Evaṃ mohutto, nemitto, aṅgavijjo, veyyākaraṇo, chando, bhāsso, cando. जो एका वर्षासाठी अभ्यास करतो तो 'संवच्छरो' (saṃvaccharo). याचप्रमाणे 'मोहुत्तो' (mohutto), 'नेमित्तो' (nemitto), 'अङ्गविज्जो' (aṅgavijjo), 'वेय्याकरणो' (veyyākaraṇo), 'छन्दो' (chando), 'भास्सो' (bhāsso), 'चन्दो' (cando). Vasādānaṃ visayo deso vāsādo. Evaṃ kumbho, sākunto, ātisāro. सिंहांचे (vasādānaṃ) जे क्षेत्र/निवासस्थान (visayo) असलेला प्रदेश (deso), त्याला सिंहांचे क्षेत्र असलेला प्रदेश (vāsādo) असे म्हणतात. याचप्रमाणे कुंभ (kumbho), शाकुंत (sākunto), अतिसार (ātisāro) हे शब्द समजावेत. Udumbarā asmiṃ padese santīti odumbaro. Sāgarehi nibbatto sāgaro. Sāgalamassa nivāso sāgalo. Mathurā assa nivāso māthuro. Mathurāya issaro māthuro. Iccevamādayo yojetabbā. या प्रदेशात (asmiṃ padese) उंबराची झाडे (udumbarā) आहेत (santi), म्हणून (iti) त्याला उंबराची झाडे असलेला प्रदेश (odumbaro) म्हणतात. सगरपुत्रांद्वारे (sāgarehi) निर्माण केलेला (nibbatto) तो सागर (sāgaro). सागल (Sāgalaṃ) हे ज्याचे (assa) निवासस्थान (nivāso) आहे, तो सागल रहिवासी (Sāgalo). मथूरा (Mathurā) हे ज्याचे (assa) निवासस्थान (nivāso) आहे, तो मथूरा रहिवासी (Māthuro). मथुरेचा (Mathurāya) जो स्वामी (issaro), तो मथुरेचा स्वामी (Māthuro). अशा प्रकारे इतरही उदाहरणे योजावीत. 353, 378. Jātādīnamimiyā ca. ३५३, ३७८. 'जात' (जन्मलेला) इत्यादी अर्थांमध्ये 'इम' (ima) आणि 'इय' (iya) हे प्रत्यय देखील होतात. Jātaiccevamādīnamatthe imaiyapaccayā honti. 'जात' (जन्मलेला) इत्यादी अर्थांमध्ये 'इम' (ima) आणि 'इय' (iya) हे प्रत्यय होतात. Pacchā jāto pacchimo. Evaṃ antimo, majjhimo, purimo, uparimo, heṭṭhimo, gopphimo. Bodhisattajātiyā jāto bodhisattajātiyo, evaṃ [Pg.192] assajātiyo, hatthijātiyo, manussajātiyo. नंतर (pacchā) जन्मलेला (jāto) तो 'पश्चिम' (pacchimo). याचप्रमाणे अंतिम (antimo - शेवटी जन्मलेला), मध्यम (majjhimo - मध्ये जन्मलेला), पुरिम (purimo - पूर्वी जन्मलेला), उपरीम (uparimo - वर जन्मलेला), हेट्ठिम (heṭṭhimo - खाली जन्मलेला), गोप्फिम (gopphimo - घोट्यामध्ये उत्पन्न झालेला). बोधिसत्त्वांच्या कुळात (bodhisattajātiyā) जन्मलेला (jāto) तो 'बोधिसत्तजातिय' (bodhisattajātiyo). याचप्रमाणे घोड्यांच्या जातीत जन्मलेला 'अस्सजातिय' (assajātiyo); हत्तींच्या जातीत जन्मलेला 'हत्थिजातिय' (hatthijātiyo); मनुष्यांच्या जातीत जन्मलेला 'मनुस्सजातिय' (manussajātiyo). Ādiggahaṇena niyuttatthāditopi tadassatthāditopi ima iya ika iccete paccayā honti. Anto niyutto antimo. Evaṃ antiyo, antiko. 'आदि' (इत्यादी) शब्द ग्रहणाने 'नियुक्त' (गुंतलेला) इत्यादी अर्थांमध्ये आणि 'हे त्याचे आहे' इत्यादी अर्थांमध्ये देखील 'इम' (ima), 'इय' (iya) आणि 'इक' (ika) हे प्रत्यय होतात. शेवटी (ante) नियुक्त असलेला (niyutto) तो 'अन्तिम' (antimo). याचप्रमाणे 'अन्तिय' (antiyo), 'अन्तिक' (antiko). Putto assa atthi, tasmiṃ vā vijjatīti puttimo. Evaṃ puttiyeva, puttiko, kappimo, kappiyo, kappiko. त्याला (assa) मुलगा आहे (putto atthi) किंवा (vā) त्याच्यामध्ये मुलगा विद्यमान आहे (tasmiṃ vijjati), म्हणून तो 'पुत्तिम' (puttimo). याचप्रमाणे 'पुत्तिय' (puttiyo), 'पुत्तिक' (puttiko), 'कप्पिम' (kappimo), 'कप्पिय' (kappiyo), 'कप्पिक' (kappiko) हे शब्द होतात. Caggahaṇena kiyapaccayo hoti niyuttatthe. Jātiyaṃ niyutto jātikiyo, andhe niyutto andhakiyo, jātiyā andho jaccandho, jaccandhe niyutto jaccandhakiyo. 'च' च्या ग्रहणाने 'नियुक्त' (गुंतलेला) या अर्थी 'किय' (kiya) प्रत्यय होतो. जन्मामध्ये (jātiyaṃ) नियुक्त असलेला (niyutto) तो 'जातिकिय' (jātikiyo); अंधारात (andhe) नियुक्त असलेला (niyutto) तो 'अंधकिय' (andhakiyo); जन्मापासून (jātiyā) आंधळा (andho) तो 'जच्चंध' (jaccandho); जन्मांधतेमध्ये (jaccandhe) नियुक्त असलेला (niyutto) तो 'जच्चंधकिय' (jaccandhakiyo). 354, 379. Samūhatthe kaṇa ṇā. ३५४, ३७९. समूह अर्थामध्ये 'कण्' (kaṇ) आणि 'ण' (ṇa) हे प्रत्यय होतात. Samūhatthe kaṇa ṇaiccete paccayā honti. समूह अर्थामध्ये 'कण्' (kaṇ) आणि 'ण' (ṇa) हे प्रत्यय होतात. Rājaputtānaṃ samūho rājaputtako. Evaṃ rājaputto, mānussako, mānusso, māyūrako, māyūro, māhiṃsako, māhiṃso. राजपुत्रांचा (rājaputtānaṃ) समूह (samūho) तो 'राजपुत्तक' (rājaputtako). याचप्रमाणे 'राजपुत्त' (rājaputto), मनुष्यांचा समूह 'मानुस्सक' (mānussako) किंवा 'मानुस्स' (mānusso), मोरांचा समूह 'मायूरक' (māyūrako) किंवा 'मायूर' (māyūro), म्हशींचा समूह 'माहिंसक' (māhiṃsako) किंवा 'माहिंस' (māhiṃso). 355, 380. Gāma jana bandhu sahāyādīhitā. ३५५, ३८०. 'गाम' (गाव), 'जन' (लोक), 'बंधु' (नातेवाईक), 'सहाय' (मित्र) इत्यादी शब्दांनंतर 'ता' (tā) प्रत्यय देखील होतो. Gāma jana bandhu sahāyaiccevamādīhi tāpaccayo hoti samūhatthe. समूह अर्थामध्ये 'गाम' (गाव), 'जन' (लोक), 'बंधु' (नातेवाईक), 'सहाय' (मित्र) इत्यादी शब्दांनंतर 'ता' (tā) प्रत्यय होतो. Gāmānaṃ [Pg.193] samūho gāmatā. Evaṃ janatā, bandhutā, sahāyatā, nagaratā. गावांचा (gāmānaṃ) समूह (samūho) तो 'गामता' (gāmatā). याचप्रमाणे लोकांचा समूह 'जनता' (janatā), नातेवाईकांचा समूह 'बंधुता' (bandhutā), मित्रांचा समूह 'सहायता' (sahāyatā), नगरांचा समूह 'नगरता' (nagaratā). 356, 381. Tadassa ṭhānamiyo ca. ३५६, ३८१. 'हे त्याचे कारण/स्थान आहे' या अर्थी 'इय' (iya) प्रत्यय देखील होतो. ‘‘Tadassa ṭhāna’’ miccetasmiṃ atthe iyapaccayo hoti. “हे त्याचे कारण/स्थान आहे” (tadassa ṭhānaṃ) या अर्थी 'इय' (iya) प्रत्यय होतो. Madanassa ṭhānaṃ madaniyaṃ, bandhanassa ṭhānaṃ bandhaniyaṃ, mucchanassa ṭhānaṃ mucchaniyaṃ, evaṃ rajaniyaṃ, kamaniyaṃ, gamaniyaṃ, dussaniyaṃ, dassaniyaṃ. मदाचे (madanassa) कारण/स्थान (ṭhānaṃ) ते 'मदनीय' (madaniyaṃ - उदा. मद्य); बंधनाचे (bandhanassa) कारण/स्थान (ṭhānaṃ) ते 'बंधनीय' (bandhaniyaṃ); मूर्च्छेचे (mucchanassa) कारण/स्थान (ṭhānaṃ) ते 'मूर्च्छनीय' (mucchaniyaṃ). याचप्रमाणे रागाचे/आसक्तीचे कारण 'रजनीय' (rajaniyaṃ); इच्छेचे/आवडण्याचे कारण 'कमनीय' (kamaniyaṃ); गमनाचे कारण 'गमनीय' (gamaniyaṃ); दूषित होण्याचे कारण 'दुस्सनीय' (dussaniyaṃ); दर्शनाचे कारण 'दस्सनीय' (dassaniyaṃ). 357, 382. Upamatthāyitattaṃ. ३५७, ३८२. उपमा (तुलना) अर्थामध्ये 'आयितत्त' (āyitatta) प्रत्यय होतो. Upamatthe āyitattapaccayo hoti. उपमा (तुलना) अर्थामध्ये 'आयितत्त' (āyitatta) प्रत्यय होतो. Dhūmo viya dissati aduṃ vanaṃ tadidaṃ dhūmāyitattaṃ, timiraṃ viya dissati aduṃ vanaṃ tadidaṃ timirāyitattaṃ. ते जंगल (aduṃ vanaṃ) धुरासारखे (dhūmo viya) दिसते (dissati), म्हणून ते 'धूमायितत्त' (dhūmāyitattaṃ); ते जंगल (aduṃ vanaṃ) अंधकारासारखे (timiraṃ viya) दिसते (dissati), म्हणून ते 'तिमिरायितत्त' (timirāyitattaṃ). 358, 383. Tannissitatthe lo. ३५८, ३८३. 'त्याच्यावर आश्रित असणे' या अर्थी 'ल' (la) प्रत्यय होतो. ‘‘Tannissitatthe, tadassa ṭhāna’’miccetasmiṃ atthe ca lapaccayo hoti. “त्याच्यावर आश्रित असणे” आणि “हे त्याचे कारण/स्थान आहे” या अर्थी 'ल' (la) प्रत्यय होतो. Duṭṭhu [Pg.194] nissitaṃ duṭṭhullaṃ, vedaṃ nissitaṃ vedallaṃ, duṭṭhu ṭhānaṃ duṭṭhullaṃ, vedassa ṭhānaṃ vedallaṃ. वाईटावर (duṭṭhu) आश्रित असलेले (nissitaṃ) ते 'दुट्ठुल्ल' (duṭṭhullaṃ); वेदावर/ज्ञानावर (vedaṃ) आश्रित असलेले (nissitaṃ) ते 'वेदल्ल' (vedallaṃ); वाईट (duṭṭhu) स्थान (ṭhānaṃ) ते 'दुट्ठुल्ल' (duṭṭhullaṃ); वेदाचे/ज्ञानाचे (vedassa) स्थान (ṭhānaṃ) ते 'वेदल्ल' (vedallaṃ). 359, 384. Ālu tabbahule. ३५९, ३८४. विपुलता/प्रचुरता या अर्थी 'आलु' (ālu) प्रत्यय होतो. Ālupaccayo hoti tabbahulatthe. विपुलता/प्रचुरता या अर्थी 'आलु' (ālu) प्रत्यय होतो. Abhijjhā assa pakati abhijjhālu, abhijjhā assa bahulā vā abhijjhālu. Evaṃ sītālu, dhajālu, dayālu. लोभ/अभिज्झा (abhijjhā) हा ज्याचा (assa) स्वभाव (pakati) आहे तो 'अभिज्झालु' (abhijjhālu) किंवा (vā) ज्याच्यामध्ये लोभ/अभिज्झा (abhijjhā) विपुल प्रमाणात (bahulā) आहे तो 'अभिज्झालु' (abhijjhālu). याचप्रमाणे अतिशय थंड वाटणारा तो 'सीतालु' (sītālu); अनेक ध्वज असलेला तो 'धजालु' (dhajālu); अत्यंत दयाळू असलेला तो 'दयालु' (dayālu). 360, 387. Ṇya tta tā bhāve tu. ३६०, ३८७. भाव (अवस्था/स्थिती) अर्थामध्ये 'ण्य' (ṇya), 'त्त' (tta) आणि 'ता' (tā) हे प्रत्यय होतात. Ṇyattatāiccete paccayā honti bhāvatthe. भाव (अवस्था/स्थिती) अर्थामध्ये 'ण्य' (ṇya), 'त्त' (tta) आणि 'ता' (tā) हे प्रत्यय होतात. Alasassa bhāvo ālasyaṃ, arogassa bhāvo ārogyaṃ. Paṃsukūlikassa bhāvo paṃsukūlikattaṃ, anodarikassa bhāvo anodarikattaṃ. Saṅgaṇikārāmassa bhāvo saṅgaṇikārāmatā, niddārāmassa bhāvo niddārāmatā. आळशी माणसाचा (alasassa) भाव/अवस्था (bhāvo) ते 'आलस्य' (ālasyaṃ); निरोगी माणसाचा (arogassa) भाव/अवस्था (bhāvo) ते 'आरोग्य' (ārogyaṃ). पांसुकूलिक (फाटकी वस्त्रे परिधान करणाऱ्या) व्यक्तीचा (paṃsukūlikassa) भाव/अवस्था (bhāvo) ते 'पांसुकूलिकत्त' (paṃsukūlikattaṃ); खादाड नसलेल्या व्यक्तीचा (anodarikassa) भाव/अवस्था (bhāvo) ते 'अनोदरिकत्त' (anodarikattaṃ). समूहात रमणाऱ्या व्यक्तीचा (saṅgaṇikārāmassa) भाव/अवस्था (bhāvo) ते 'संगणिकारामता' (saṅgaṇikārāmatā); झोपेत रमणाऱ्या व्यक्तीचा (niddārāmassa) भाव/अवस्था (bhāvo) ते 'निद्दारामता' (niddārāmatā). Tuggahaṇena ttanapaccayo hoti. Puthujjanattanaṃ, vedanattanaṃ. 'तु' च्या ग्रहणाने 'त्तन' (ttana) प्रत्यय होतो. जसे की, पृथग्जनाची (puthujjanassa) अवस्था (bhāvo) ती 'पुथुज्जनत्तन' (puthujjanattanaṃ); वेदनेची (vedanāya) अवस्था (bhāvo) ती 'वेदनात्तन' (vedanattanaṃ). 361, 388. Ṇa [Pg.195] visamādīhi. ३६१, ३८८. 'विसम' (विषम) इत्यादी शब्दांनंतर 'ण' (ṇa) प्रत्यय होतो. Ṇapaccayo hoti visamādīhi ‘‘tassa bhāvo’’iccetasmiṃ atthe. 'विसम' (विषम) इत्यादी शब्दांनंतर "त्याची अवस्था/भाव" (tassa bhāvo) या अर्थी 'ण' (ṇa) प्रत्यय होतो. Visamassa bhāvo vesamaṃ, sucissa bhāvo socaṃ. विषमाची (visamassa) अवस्था (bhāvo) ती 'वेसम' (vesamaṃ); शुचीची/पवित्राची (sucissa) अवस्था (bhāvo) ती 'सोच' (socaṃ). 362, 389. Ramaṇīyādito kaṇa. ३६२, ३८९. 'रमणीय' इत्यादी शब्दांनंतर 'कण्' (kaṇ) प्रत्यय होतो. Ramaṇīyaiccevamādito kaṇa paccayo hoti ‘‘tassa bhāvo’’iccetasmiṃ atthe. 'रमणीय' इत्यादी शब्दांनंतर "त्याची अवस्था/भाव" (tassa bhāvo) या अर्थी 'कण्' (kaṇ) प्रत्यय होतो. Ramaṇīyassa bhāvo rāmaṇīyakaṃ, manuññassa bhāvo mānuññakaṃ. रमणीयाची (ramaṇīyassa) अवस्था (bhāvo) ती 'रामणीयकत' (rāmaṇīyakaṃ); मनोज्ञाची (manuññassa) अवस्था (bhāvo) ती 'मानुञ्ञक' (mānuññakaṃ). 363, 390. Visese taratamisikiyiṭṭhā. ३६३, ३९०. विशेष (भेद/श्रेष्ठता) अर्थामध्ये 'तर' (tara), 'तम' (tama), 'इसिक' (isika), 'इय' (iya) आणि 'इट्ठ' (iṭṭha) हे प्रत्यय होतात. Visesatthe tara tama isika iya iṭṭhaiccete paccayā honti. विशेष (भेद/श्रेष्ठता) अर्थामध्ये 'तर' (tara), 'तम' (tama), 'इसिक' (isika), 'इय' (iya) आणि 'इट्ठ' (iṭṭha) हे प्रत्यय होतात. Sabbe ime pāpā, ayamimesaṃ visesena pāpoti pāpataro. Evaṃ pāpatamo, pāpisiko, pāpiyo, pāpiṭṭho. हे सर्व (sabbe ime) पापी (pāpā) आहेत, त्यांच्यामध्ये (imesaṃ) हा विशेष रूपाने (visesena) पापी (pāpo) आहे, म्हणून (iti) त्याला 'पापतर' (pāpataro) म्हणतात. याचप्रमाणे 'पापतम' (pāpatamo), 'पापिसिक' (pāpisiko), 'पापिय' (pāpiyo), 'पापिट्ठ' (pāpiṭṭho) हे शब्द होतात. 364, 398. Tadassatthīti vī ca. ३६४, ३९८. “हे त्याचे आहे” (tadassa atthi) या अर्थी 'वी' (vī) प्रत्यय देखील होतो. ‘‘Tadassatthi’’iccetasmiṃ atthe vīpaccayo hoti. 'ते त्याचे आहे' किंवा 'ते त्याच्यामध्ये अस्तित्वात आहे' या अर्थी 'वी' प्रत्यय लागतो. Medhā [Pg.196] yassa atthi, tasmiṃ vā vijjatītimedhāvī. Evaṃ māyāvī. बुद्धी (मेधा) ज्याची आहे किंवा ज्याच्यामध्ये ती विद्यमान आहे, त्याला 'मेधावी' (बुद्धिमान) असे म्हणतात. याचप्रमाणे 'मायावी' (कपटी मनुष्य) होय. Caggahaṇena sopaccayo hoti. Sumedhā yassa atthi, tasmiṃ vā vijjatīti sumedhaso. 'च' च्या ग्रहणाने 'सो' प्रत्यय लागतो. उत्तम बुद्धी (सुमेधा) ज्याची आहे किंवा ज्याच्यामध्ये ती विद्यमान आहे, त्याला 'सुमेधसो' (बुद्धिमान व्यक्ती) असे म्हणतात. 365, 399. Tapādito sī. ३६५, ३९९. तप इत्यादी शब्दांनंतर 'सी' प्रत्यय लागतो. Tapādito sīpaccayo hoti ‘‘tadassatthi’’iccetasmiṃ atthe. तप इत्यादी शब्दांनंतर 'ते त्याचे आहे' या अर्थी 'सी' प्रत्यय लागतो. Tapo yassa atthi tasmiṃ vā vijjatīti tapassī. Evaṃ yasassī, tejassī. तप ज्याचे आहे किंवा ज्याच्यामध्ये ते विद्यमान आहे, त्याला 'तपस्सी' (तपस्वी) असे म्हणतात. याचप्रमाणे 'यशस्सी' (यशस्वी/कीर्तिमान), 'तेजस्सी' (तेजस्वी) होय. 266, 400. Daṇḍādito ikaī. २६६, ४००. दंड (काठी) इत्यादी शब्दांनंतर 'इक' आणि 'ई' प्रत्यय लागतात. Daṇḍādito ika īiccete paccayā honti ‘‘tadassatthi’’iccetasmiṃ atthe. दंड इत्यादी शब्दांनंतर 'ते त्याचे आहे' या अर्थी 'इक' आणि 'ई' हे प्रत्यय लागतात. Daṇḍo yassa atthi, tasmiṃ vā vijjatīti daṇḍiko, daṇḍī. Evaṃ māliko, mālī. दंड (काठी) ज्याच्याकडे आहे किंवा ज्याच्यामध्ये तो विद्यमान आहे, त्याला 'दंडिको' किंवा 'दंडी' (दंडधारी) असे म्हणतात. याचप्रमाणे 'मालिको' किंवा 'माली' (मालाधारी) होय. 367, 401. Madhvādito ro. ३६७, ४०१. मधु (मध/गोड) इत्यादी शब्दांनंतर 'र' प्रत्यय लागतो. Madhuiccevamādito rapaccayo hoti ‘‘tadassatthi’’iccetasmiṃ atthe. मधु इत्यादी शब्दांनंतर 'ते त्याचे आहे' या अर्थी 'र' प्रत्यय लागतो. Madhu [Pg.197] yassa atthi, tasmiṃ vā vijjatīti madhuro. Evaṃ kuñjaro, muggaro, mukharo, susiro, (sīsaro, sukaro, suṅkaro), subharo, suciro, ruciro. मधु (गोडवा) ज्याच्यामध्ये आहे किंवा विद्यमान आहे, त्याला 'मधुरो' (मधुर/गोड) असे म्हणतात. याचप्रमाणे कुंजरो, मुग्गरो, मुखरो, सुसिरो, (सीसरो, सुकरो, सुंकरो), सुभरो, सुचिरो, रुचिरो होय. 368, 402. Guṇādito vantu. ३६८, ४०२. गुण इत्यादी शब्दांनंतर 'वन्तु' प्रत्यय लागतो. Guṇaiccevamādito vantupaccayo hoti ‘‘tadassatthi’’iccetasmiṃ atthe. गुण इत्यादी शब्दांनंतर 'ते त्याचे आहे' या अर्थी 'वन्तु' प्रत्यय लागतो. Guṇo yassa atthi, tasmiṃ vā vijjatīti guṇavā. Evaṃ yasavā, dhanavā, paññavā, balavā, bhagavā. गुण ज्याचे आहेत किंवा ज्याच्यामध्ये ते विद्यमान आहेत, त्याला 'गुणवा' (गुणवान) असे म्हणतात. याचप्रमाणे यसवा (यशस्वी), धनवा (धनवान), पण्ञवा (प्रज्ञावान/बुद्धिमान), बलवा (बलवान), भगवा (भगवान/भाग्यवान) होय. 369, 403. Satyādīhi mantu. ३६९, ४०३. सति (स्मृती) इत्यादी शब्दांनंतर 'मन्तु' प्रत्यय लागतो. Satiiccevamādīhi mantupaccayohoti ‘‘tadassatthi’’ iccetasmiṃ atthe. सति इत्यादी शब्दांनंतर 'ते त्याचे आहे' या अर्थी 'मन्तु' प्रत्यय लागतो. Sati yassa atthi, tasmiṃ vā vijjatīti satimā, evaṃ jutimā, rucimā, thutimā, dhitimā, matimā, bhāṇumā. सति (स्मृती) ज्याची आहे किंवा ज्याच्यामध्ये ती विद्यमान आहे, त्याला 'सतिमा' (स्मृतिमान) असे म्हणतात. याचप्रमाणे जुतिमा (तेजस्वी), रुचिमा (कांतिमान), थुतिमा (स्तुतिमान), धितिमा (धैर्यवान), मतिमा (बुद्धिमान), भाणुमा (सूर्य/प्रकाशमान) होय. 370, 405. Saddhāditoṇa. ३७०, ४०५. सद्धा (श्रद्धा) इत्यादी शब्दांनंतर 'ण' प्रत्यय लागतो. Saddhāiccevamādito ṇa paccayo hoti ‘‘tadassatthi’’iccetasmiṃ atthe. सद्धा इत्यादी शब्दांनंतर 'ते त्याचे आहे' या अर्थी 'ण' प्रत्यय लागतो. Saddhā [Pg.198] yassa atthi, tasmiṃ vā vijjatībhi saddho, evaṃ pañño, amaccharo. श्रद्धा (सद्धा) ज्याची आहे किंवा ज्याच्यामध्ये ती विद्यमान आहे, त्याला 'सद्धो' (श्रद्धाळू) असे म्हणतात. याचप्रमाणे पण्ञो (प्रज्ञावान), अमच्छरो (मत्सर नसलेला/उदार) होय. 371, 404. Āyussukārāsa mantumhi. ३७१, ४०४. 'मन्तु' प्रत्यय पुढे असताना 'आयु' मधील 'उ' काराचा 'अस' असा आदेश होतो. Āyussa anto ukāro asādeso hotimantumhi paccaye pare. 'मन्तु' प्रत्यय पुढे असताना 'आयु' शब्दाच्या शेवटी असलेल्या 'उ' काराचा 'अस' असा आदेश होतो. Āyu assa atthi, tasmiṃ vā vijjatīti āyasmā. आयुष्य (आयु) ज्याचे आहे किंवा ज्याच्यामध्ये ते विद्यमान आहे, त्याला 'आयस्मा' (आयुष्यमान) असे म्हणतात. 372, 385. Tappakativacane mayo. ३७२, ३८५. त्याच्याद्वारे बनविलेले या अर्थाच्या अभिव्यक्तीमध्ये 'मय' प्रत्यय लागतो. Tappakativacanatthe mayapaccayo hoti. त्याच्याद्वारे बनविलेले (विकार किंवा प्रकृती) या अर्थी 'मय' प्रत्यय लागतो. Suvaṇṇena pakataṃ kammaṃ sovaṇṇamayaṃ. Evaṃ rūpiyamayaṃ jatumayaṃ, rajatamayaṃ, iṭṭhakamayaṃ, ayomayaṃ, mattikā mayaṃ, dārumayaṃ, gomayaṃ. सोन्याने बनविलेले कार्य म्हणजे 'सोवण्णमयं' (सुवर्णमय) होय. याचप्रमाणे रुपियाने (चांदीने) बनविलेले 'रुपियमयं', जतूने (लाखेने) बनविलेले 'जतुमयं', रजताने (चांदीने) बनविलेले 'रजतमयं', विटांनी बनविलेले 'इट्ठकमयं', लोहाने बनविलेले 'अयोमयं', मातीने बनविलेले 'मत्तिकामयं', लाकडाने बनविलेले 'दारुमयं', गाईपासून बनविलेले (शेण) 'गोमयं' होय. 373, 406. Saṅkhyāpūraṇe mo. ३७३, ४०६. संख्या पूर्ण करण्याच्या (क्रमवाचक संख्या) अर्थी 'म' प्रत्यय लागतो. Saṅkhyāpūraṇatthe mapaccayo hoti. संख्या पूर्ण करण्याच्या अर्थी (क्रमवाचक संख्या बनवण्यासाठी) 'म' प्रत्यय लागतो. Pañcannaṃ pūraṇo pañcamo, evaṃ sattamo, aṭṭhamo, navamo, dasamo. पाच पूर्ण करणारा तो 'पंचमो' (पाचवा) होय. याचप्रमाणे सत्तमो (सातवा), अट्ठमो (आठवा), navamo (नववा), दसमो (दहावा) होय. 374, 408. Sa [Pg.199] chassavā. ३७४, ४०८. विकल्पेकरून 'छ' चा 'स' होतो. Chassa sakārādeso hoti vā saṅkhyāpūraṇatthe. संख्या पूर्ण करण्याच्या अर्थी विकल्पेकरून 'छ' चा 'स' असा आदेश होतो. Channaṃ pūraṇo saṭṭho, chaṭṭho vā. सहा पूर्ण करणारा तो 'सट्ठो' किंवा 'छट्ठो' (सहावा) होय. 375, 412. Ekādito dasassī. ३७५, ४१२. एक इत्यादी शब्दांनंतर 'दस' (दहा) च्या शेवटी 'ई' प्रत्यय लागतो. Ekādito dasassa ante īpaccayo hoti vā saṅkhyāpūraṇatthe. संख्या पूर्ण करण्याच्या अर्थी विकल्पेकरून एक इत्यादी शब्दांनंतर 'दस' च्या शेवटी 'ई' प्रत्यय लागतो. Eko ca dasa ca ekādasa, ekādasannaṃ pūraṇī ekādasī. Pañcaca dasa ca pañcadasa, pañcadasannaṃ pūraṇī pañcadasī. Cattāro ca dasa ca catuddasa, catuddasannaṃ pūraṇī cātuddasī. एक आणि (eko ca) दहा (dasa ca), (याला म्हणतात) अकरा (ekādasa); अकरांची पूरणी (pūraṇī - पूर्ण करणारी संख्या) (याला म्हणतात) अकरावी (ekādasī). पाच आणि (pañca ca) दहा (dasa ca), (याला म्हणतात) पंधरा (pañcadasa); पंधराची पूरणी (याला म्हणतात) पंधरावी (pañcadasī). चार आणि (cattāro) दहा (dasa ca), (याला म्हणतात) चौदा (catuddasa); चौदाची पूरणी (याला म्हणतात) चौदावी (cātuddasī). Pūraṇeti kimatthaṃ? Ekādasa, pañcadasa. 'पूरणी' (pūraṇī) असे का म्हटले आहे? जेव्हा पूरण (क्रमवाचक संख्या) नसेल, तेव्हा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की पुढील उदाहरणांमध्ये: अकरा (ekādasa), पंधरा (pañcadasa). 376, 257. Dase so niccañca. ३७६, २५७. जेव्हा 'दह' (dasa - दहा) असेल, तेव्हा 'छ' (cha - सहा) चा नेहमी 'सो' (so) होतो. Dasasadde pare niccaṃ chassa so hoti. जेव्हा 'दह' (dasa) हा शब्द पुढे असतो, तेव्हा 'छ' (cha) चा नेहमी 'सो' (so) होतो. Soḷasa. सोळा (soḷasa). 377, 0. Ante niggahitañca. ३७७, ०. शेवटी निग्गहीत (अनुस्वार - ṃ) होतो. Tāsaṃ saṅkhyānaṃ ante niggahitāgamo hoti. या संख्यांच्या शेवटी निग्गहीताचा (nigghitāgama) आगम होतो. Pañcadasi, cātuddasi. पंधरावी (pañcadasiṃ), चौदावी (cātuddasiṃ). 378, 414. Ti [Pg.200] ca. ३७८, ४१४. आणि 'ति' (ti). Tāsaṃ saṅkhyānaṃ ante tikārāgamo hoti. Vīsati, tiṃsati. या संख्यांच्या शेवटी 'ति' (ti) काराचा आगम होतो. जसे की: वीस (vīsati), तीस (tiṃsati). 379, 258. La darānaṃ. ३७९, २५८. 'द' (da) आणि 'र' (ra) च्या जागी 'ळ' (la/ḷa) होतो. Dakāra rakārānaṃ saṅkhyānaṃ lakārādeso hoti. Soḷasa, cattālīsaṃ. संख्यांमध्ये 'द' (da) आणि 'र' (ra) काराच्या जागी 'ळ' (la/ḷa) चा आदेश होतो. जसे की: सोळा (soḷasa), चाळीस (cattālīsaṃ). 380, 255. Vīsati dasesu bā dvissa tu. ३८०, २५५. जेव्हा 'वीसति' (vīsati) आणि 'दह' (dasa) पुढे असतात, तेव्हा 'द्वि' (dvi) चा 'बा' (bā) होतो. Vīsati dasaiccetesu dvissa bā hoti. 'वीसति' (vīsati) आणि 'दह' (dasa) हे पुढे असताना 'द्वि' (dvi) चा 'बा' (bā) होतो. Bāvīsatindriyāni, bārasa manussā. बावीस इंद्रिये (bāvīsatindriyāni), बारा मनुष्य (bārasa manussā). Tuggahaṇena dvissa du di do ādesā ca honti. Durattaṃ, dirattaṃ, diguṇaṃ, dohaḷinī. 'तु' (tu) च्या ग्रहणाने 'द्वि' (dvi) च्या जागी 'दु' (du), 'दि' (di) आणि 'दो' (do) हे आदेश देखील होतात. जसे की: दोन रात्री (durattaṃ, dirattaṃ); दुहेरी/दोन पदरी (diguṇaṃ), डोहळे लागलेली गरोदर स्त्री (dohaḷinī). 381, 254. Ekādito dassa ra saṅkhyāne. ३८१, २५४. संख्यांमध्ये, 'एक' (eka) इत्यादींच्या पुढे 'द' (da) चा 'र' (ra) होतो. Ekādito dasassa dakārassa rakāro hoti vā saṅkhyāne. संख्यांमध्ये, 'एक' (eka) इत्यादींच्या पुढे 'दह' (dasa) मधील 'द' (da) काराचा विकल्पाने 'र' (ra) होतो. Ekārasa, ekādasa, bārasa, dvādasa. अकरा (ekārasa, ekādasa), बारा (bārasa, dvādasa). Saṅkhyāneti kimatthaṃ? Dvādasāyatanāni. 'संख्यांमध्ये' (saṅkhyāne) असे का म्हटले आहे? जेव्हा ती केवळ शुद्ध संख्या नसेल, तेव्हा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की 'बारा आयतने' (dvādasāyatanāni) या समासात. 382, 259. Aṭṭhādito [Pg.201] ca. ३८२, २५९. आणि 'अठ्ठ' (aṭṭha) इत्यादींच्या पुढेही. Aṭṭhaiccevamādito ca dasasaddassa dakārassa rakārādeso hoti vā saṅkhyāne. संख्यांमध्ये, 'अठ्ठ' (aṭṭha) इत्यादींच्या पुढे 'दह' (dasa) शब्दातील 'द' (da) काराचा विकल्पाने 'र' (ra) आदेश होतो. Aṭṭhārasa, aṭṭhadasa. अठरा (aṭṭhārasa, aṭṭhadasa). Aṭṭhāditoti kimatthaṃ? Pañcadasa, soḷasa. 'अठ्ठ' इत्यादींच्या पुढे (aṭṭhādito) असे का म्हटले आहे? जेव्हा ते आठ इत्यादींच्या पुढे नसेल, तेव्हा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की पुढील उदाहरणांमध्ये: पंधरा (pañcadasa), सोळा (soḷasa). Saṅkhyāneti kimatthaṃ? Aṭṭhadasiko. 'संख्यांमध्ये' (saṅkhyāne) असे का म्हटले आहे? जेव्हा ती केवळ शुद्ध संख्या नसेल, तेव्हा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की: अठरा खांब असलेले घर (aṭṭhadasiko). 383, 253. Dvekaṭṭhānamākāro vā. ३८३, २५३. विकल्पाने 'द्वि' (dvi), 'एक' (eka) आणि 'अठ्ठ' (aṭṭha) यांच्या शेवटी 'आ' (ā) होतो. Dvi eka aṭṭhaiccetesamanto ākāro hoti vā saṅkhyāne. संख्यांमध्ये, 'द्वि' (dvi), 'एक' (eka) आणि 'अठ्ठ' (aṭṭha) यांच्या अंत्य स्वराचा विकल्पाने 'आ' (ā) होतो. Dvādasa, ekādasa, aṭṭhārasa. बारा (dvādasa), अकरा (ekādasa), अठरा (aṭṭhārasa). Saṅkhyāneti kimatthaṃ? Dvidanto, ekadanto, ekacchanno, aṭṭhatthambho. 'संख्यांमध्ये' (saṅkhyāne) असे का म्हटले आहे? जेव्हा ती केवळ शुद्ध संख्या नसेल, तेव्हा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की पुढील उदाहरणांमध्ये: दोन सुळे असलेला (dvidanto), एक सुळा असलेला (ekadanto), एक छप्पर असलेला (ekacchanno), आठ खांब असलेला (aṭṭhatthambho). 384, 407. Catucchehī tha ṭhā. ३८४, ४०७. 'चतु' (catu) आणि 'छ' (cha) यांच्या पुढे 'थ' (tha) आणि 'ठ' (ṭha) प्रत्यय होतात. Catu chaiccetehi tha ṭhaiccete paccayā honti saṅkhyāpūraṇatthe. क्रमवाचक संख्यांच्या अर्थामध्ये, 'चतु' (catu) आणि 'छ' (cha) यांच्या पुढे 'थ' (tha) आणि 'ठ' (ṭha) हे प्रत्यय होतात. Catuttho, chaṭṭho. चौथा (catuttho), सहावा (chaṭṭho). 385, 409. Dvitīhi [Pg.202] tiyo. ३८५, ४०९. 'द्वि' (dvi) आणि 'ति' (ti) यांच्या पुढे 'तिय' (tiya) प्रत्यय होतो. Dvi tiiccetehi tiyapaccayo hoti saṅkhyāpūraṇatthe. क्रमवाचक संख्यांच्या अर्थामध्ये, 'द्वि' (dvi) आणि 'ति' (ti) यांच्या पुढे 'तिय' (tiya) प्रत्यय होतो. Dutiyo, tatiyo. दुसरा (dutiyo), तिसरा (tatiyo). 386, 410. Tiye dutāpi ca. ३८६, ४१०. तसेच, 'तिय' (tiya) प्रत्यय पुढे असताना 'दु' (du) आणि 'त' (ta) हे आदेश होतात. Dvi tiiccetesaṃ du taiccete ādesā honti tiyapaccaye pare. 'तिय' (tiya) प्रत्यय पुढे असताना, 'द्वि' (dvi) आणि 'ति' (ti) यांच्या जागी अनुक्रमे 'दु' (du) आणि 'त' (ta) हे आदेश होतात. Dutiyo, tatiyo. दुसरा (dutiyo), तिसरा (tatiyo). Apiggahaṇena aññesupi dviiccetassa duādeso hoti. Durattaṃ. 'अपि' (api) च्या ग्रहणाने इतर ठिकाणीही 'द्वि' (dvi) च्या जागी 'दु' (du) आदेश होतो. जसे की: दोन रात्री (durattaṃ). Caggahaṇena dviiccetassa dikāro hoti. Dirattaṃ, diguṇaṃ saṅghāṭiṃ pārupetvā. 'च' (ca) च्या ग्रहणाने 'द्वि' (dvi) चा 'दि' (di) होतो. जसे की: दोन रात्री (dirattaṃ), दुहेरी संघात (दोन पदरी संघात) पांघरून (diguṇaṃ saṅghāṭiṃ pārupetvā). 387, 411. Tesamaḍḍhūpapadena aḍḍhuḍḍha divaḍḍha diyaḍḍhaḍḍhatiyā. ३८७, ४११. ज्यांच्या मागे 'अड्ढ' (aḍḍha - अर्धा) हा शब्द जोडलेला असतो, त्या (क्रमवाचक संख्यांच्या) जागी 'अड्ढुड्ढ' (aḍḍhuḍḍha), 'दिवड्ढ' (divaḍḍha), 'दियड्ढ' (diyaḍḍha) आणि 'अड्ढतिय' (aḍḍhatiya) हे आदेश होतात. Tesaṃ [Pg.203] catuttha dutiya tatiyānaṃ aḍḍhūpapadānaṃ aḍḍhaḍḍhudivaḍḍha diyaḍḍha aḍḍhatiyādesā honti, aḍḍhūpapadena sahanippajjante. ज्यांच्या मागे 'अड्ढ' (aḍḍha - अर्धा) हा शब्द जोडलेला असतो, अशा 'चतुत्थ' (catuttha - चौथा), 'दुतिय' (dutiya - दुसरा) आणि 'ततिय' (tatiya - तिसरा) यांच्या जागी अनुक्रमे 'अड्ढुड्ढ' (aḍḍhuḍḍha), 'दिवड्ढ' (divaḍḍha), 'दियड्ढ' (diyaḍḍha) आणि 'अड्ढतिय' (aḍḍhatiya) हे आदेश होतात; हे आदेश 'अड्ढ' शब्दासह सिद्ध होतात. Aḍḍhena catuttho aḍḍhuḍḍho, aḍḍhena dutiyo divaḍḍho, aḍḍhena dutiyo diyaḍḍho, aḍḍhena tatiyo aḍḍhatiyo. अर्ध्याने चौथा (म्हणजे साडेतीन) तो 'अड्ढुड्ढ' (aḍḍhuḍḍho), अर्ध्याने दुसरा (म्हणजे दीड) तो 'दिवड्ढ' (divaḍḍho), अर्ध्याने दुसरा तो 'दियड्ढ' (diyaḍḍho), अर्ध्याने तिसरा (म्हणजे अडीच) तो 'अड्ढतिय' (aḍḍhatiyo). 388, 68. Sarūpānamekasesvasakiṃ. ३८८, ६८. एकदाच नसून अनेकदा (पुनरावृत्ती) असताना, समान रूप असलेल्या शब्दांपैकी एकच शब्द शिल्लक राहतो (एकशेष होतो). Sarūpānaṃ padabyañjanānaṃ ekaseso hoti asakiṃ. Puriso ca puriso ca purisā. समान रूप असलेल्या शब्दांचा (padabyañjanānaṃ) एकदाच नसून अनेकदा असताना एकशेष होतो. जसे की: पुरुष आणि (puriso ca) पुरुष (puriso ca), (यांना म्हणतात) पुरुष (purisā - अनेक पुरुष). Sarūpānamiti kimatthaṃ? Hatthī ca asso ca ratho ca pattiko ca hatthiassarathapattikā, 'समान रूप असलेल्यांचे' (sarūpānaṃ) असे का म्हटले आहे? जेव्हा शब्दांचे रूप समान नसेल, तेव्हा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की: हत्ती आणि (hatthī ca) घोडा आणि (asso ca) रथ आणि (ratho ca) पायदळ सैनिक (pattiko ca), (यांना म्हणतात) हत्ती-घोडे-रथ-पायदळ सैनिक (hatthiassarathapattikā). Asakinti kimatthaṃ? Puriso. 'एकदाच नसून' (asakiṃ) असे का म्हटले आहे? जेव्हा ते एकदाच असेल, तेव्हा हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की: पुरुष (puriso). 389, 413. Gaṇane dasassa dviticatupañcachasattaaṭṭhanavakānaṃ vī ti cattāra paññā cha sattāsanavā yosu, yonañcīsamāsaṃ ṭhi ri tī tuti. ३८९, ४१३. मोजणी करताना, जेव्हा 'यो' (yo) प्रत्यय असतो, तेव्हा अनुक्रमे दोन-दहा (वीस), तीन-दहा (तीस), चार-दहा (चाळीस), पाच-दहा (पन्नास), सहा-दहा (साठ), सात-दहा (सत्तर), आठ-दहा (ऐंशी) आणि नऊ-दहा (नव्वद) यांच्या जागी 'वी' (vī), 'ति' (ti), 'चत्तार' (cattāra), 'पञ्ञा' (paññā), 'छ' (cha), 'सत्त' (satta), 'अस' (asa), 'नव' (nava) हे आदेश होतात, आणि 'यो' (yo) च्या जागी अनुक्रमे 'ईसं' (īsaṃ), 'आसं' (āsaṃ), 'ठि' (ṭhi), 'रि' (ri), 'ति' (ti), 'ईति' (īti), 'उति' (uti) हे आदेश होतात. Gaṇane dasassa dvika tika catukka pañcaka chakka sattakaaṭṭhaka navakānaṃ sarūpānaṃ katekasesānaṃ yathāsaṅkhyaṃ vī ti cattāra paññā cha satta asa navaiccādesā honti asakiṃ yosu, yonañca īsaṃ āsaṃ ṭhi ri ti īti utiiccādesā honti. Pacchā puna nippajjante. मोजणी करताना, जेव्हा 'यो' (yo) प्रत्यय पुढे असतो, तेव्हा एकदाच नसून अनेकदा असताना, समान रूप असलेल्या शब्दांचा एकशेष केल्यानंतर, अनुक्रमे दोन-दहाचा समूह, तीन-दहाचा समूह, चार-दहाचा समूह, पाच-दहाचा समूह, सहा-दहाचा समूह, सात-दहाचा समूह, आठ-दहाचा समूह, नऊ-दहाचा समूह यांच्या जागी 'वी' (vī), 'ति' (ti), 'चत्तार' (cattāra), 'पञ्ञा' (paññā), 'छ' (cha), 'सत्त' (satta), 'अस' (asa), 'नव' (nava) हे आदेश होतात; आणि 'यो' (yo) च्या जागी अनुक्रमे 'ईसं' (īsaṃ), 'आसं' (āsaṃ), 'ठि' (ṭhi), 'रि' (ri), 'ति' (ti), 'ईति' (īti), 'उति' (uti) हे आदेश होतात. त्यानंतर ते पुन्हा सिद्ध होतात. Vīsaṃ[Pg.204], tiṃsaṃ, cattālīsaṃ, paññāsaṃ, saṭṭhi, sattari, sattati, asīti, navuti. वीस (vīsaṃ), तीस (tiṃsaṃ), चाळीस (cattālīsaṃ), पन्नास (paññāsaṃ), साठ (saṭṭhi), सत्तर (sattari, sattati), ऐंशी (asīti), नव्वद (navuti). Asakinti kimatthaṃ? Dasa. 'असकिं' (एकदाच नव्हे) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'दस' (दहा) या उदाहरणासारखे एकदाच असताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Gaṇaneti kimatthaṃ? Dasadasakā purisā. 'गणने' (मोजणीत) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'दसदसका पुरिसा' (दहा-दहाचे गट असलेले पुरुष). 390, 256. Catūpapadassa lopo tuttarapadādicassa cucopi navā. ३९०, २५६. पूर्वपद 'चतु' मधील 'तु' चा लोप होतो; तसेच पुढील पदाच्या सुरुवातीला असलेल्या 'च' च्या जागी 'चु' आणि 'चो' हे आदेश पर्यायाने (विकल्पाने) होतात. Catūpapadassa gaṇane pariyāpannassa tukārassa lopo hoti, uttarapadādicakārassa cucopi ādesā honti navā. मोजणीच्या संदर्भात, पूर्वपद 'चतु' मधील 'तु' या अक्षराचा लोप होतो आणि उत्तरपदाच्या सुरुवातीला असलेल्या 'च' काराच्या जागी 'चु' आणि 'चो' हे आदेश विकल्पाने होतात. Cuddasa, coddasa, catuddasa. चौदा (चुद्दस, चोद्दस, चतुद्दस). Apiggahaṇena anupapadassāpi padādicakārassa. Lopohoti navā, cassa cucopi honti. Tālīsaṃ, cattālīsaṃ, cuttālīsaṃ, cottālīsaṃ. 'अपि' च्या ग्रहणाने, पूर्वपद नसतानाही पदाच्या सुरुवातीच्या 'च' चा विकल्पाने लोप होतो; तसेच 'च' च्या जागी 'चु' आणि 'चो' देखील होतात. चाळीस (तालीसं, चत्तालीसं, चुत्तालीसं, चोत्तालीसं). 391, 423. Yadanupapannā nipātanā sijjhanti. ३९१, ४२३. जे शब्द इतर सूत्रांनी सिद्ध होत नाहीत, ते निपातनाने (या सूत्राद्वारे) सिद्ध होतात. Ye saddā aniddiṭṭhalakkhaṇā, akkharapadabyañjanato, itthipumanapuṃsakaliṅgato[Pg.205], nāmupasagganipātato, abyayībhāvasamāsataddhitākhyātato, gaṇanasaṅkhyākālakārakappayogasaññāto, sandhipakativuddhilopāgamavikāraviparitato, vibhattivibhajanato ca, te nipātanā sijjhanti. ज्या शब्दांचे नियम अक्षर, पद आणि व्यंजनांच्या द्वारे; स्त्रीलिंग, पुल्लिंग आणि नपुंसकलिंगाच्या द्वारे; नाम, उपसर्ग आणि निपातांच्या द्वारे; अव्ययीभाव समास, तद्धित आणि आख्यात (क्रियापद) यांच्या द्वारे; गणना, संख्या, काळ, कारक, प्रयोग आणि संज्ञा यांच्या द्वारे; तसेच संधी, प्रकृती (मूळ रूप), वृद्धी, लोप, आगम, विकार (बदल), विपरीत (उलट होणे) आणि विभक्तीच्या विभाजनाच्या द्वारे दर्शविलेले नसतात, ते शब्द निपातनाने सिद्ध होतात. 392, 418. Dvādito ko’nekattheca. ३९२, ४१८. तसेच अनेकत्वाच्या अर्थात 'द्वि' इत्यादींच्या पुढे 'क' प्रत्यय होतो. Dviiccevamādito kapaccayo hoti anekatthe ca, nipātanā sijjhanti. 'द्वि' इत्यादींच्या पुढे अनेकत्वाच्या अर्थात 'क' प्रत्यय होतो आणि ते निपातनाने सिद्ध होतात. Satassa dvikaṃ dvisataṃ, satassa tikaṃ tisataṃ, satassa catukkaṃ catusataṃ, satassa pañcakaṃ pañcasataṃ, satassa chakkaṃ chasataṃ, satassa sattakaṃ sattasataṃ, satassa aṭṭhakaṃ aṭṭhasataṃ, satassa navakaṃ navasataṃ, satassa dasakaṃ dasasataṃ, sahassaṃ hoti. शंभरचे दोनचे गट (द्विकं) म्हणजे दोनशे (द्विसतं); शंभरचे तीनचे गट (तिकं) म्हणजे तीनशे (तिसतं); शंभरचे चारचे गट (चतुक्कं) म्हणजे चारशे (चतुसतं); शंभरचे पाचचे गट (पंचकं) म्हणजे पाचशे (पंचसतं); शंभरचे सहाचे गट (छक्कं) म्हणजे सहाशे (छसतं); शंभरचे सातचे गट (सत्तकं) म्हणजे सातशे (सत्तसतं); शंभरचे आठचे गट (अट्ठकं) म्हणजे आठशे (अट्ठसतं); शंभरचे नऊचे गट (नवकं) म्हणजे नऊशे (नवसतं); शंभरचे दहाचे गट (दसकं) म्हणजे दहाशे (दससतं) म्हणजेच एक हजार (सहस्सं) होते. 393, 415. Dasadasakaṃ sataṃ dasakānaṃ sataṃ sahassañca yomhi. ३९३, ४१५. 'यो' प्रत्यय पुढे असताना, दहाचे दहा गट म्हणजे 'सतं' (शंभर) होते आणि दहाचे शंभर गट म्हणजे 'सहस्सं' (एक हजार) होते. Gaṇane pariyāpannassa dasadasakassa sataṃ hoti, satadasakassa sahassaṃ hoti yomhi pare. मोजणीत समाविष्ट असलेल्या दहाच्या दहा गटांचे 'सतं' (शंभर) होते आणि शंभरच्या दहा गटांचे 'सहस्सं' (एक हजार) होते, जेव्हा 'यो' प्रत्यय पुढे असतो. Sataṃ, sahassaṃ. शंभर (सतं), एक हजार (सहस्सं). Dvikādīnaṃ taduttarapadānañca nippajjante yathāsaṅkhyaṃ. Satassa dvikaṃ (tadidaṃ hoti) dvisataṃ, evaṃ tisataṃ, catusataṃ[Pg.206], pañcasataṃ, chasataṃ, sattasataṃ, aṭṭhasataṃ, navasataṃ, dasasataṃ, sahassaṃ hoti. 'द्विक' (दोनचा गट) इत्यादींचे आणि 'सतं' (शंभर) व 'सहस्सं' (एक हजार) यांच्यानंतर येणाऱ्या उत्तरपदांचे शब्द यथाक्रम निपातनाने सिद्ध होतात. शंभरचे दोनचे गट (द्विकं) म्हणजेच दोनशे (द्विसतं) होते. याचप्रमाणे तीनशे (तिसतं), चारशे (चतुसतं), पाचशे (पंचसतं), सहाशे (छसतं), सातशे (सत्तसतं), आठशे (अट्ठसतं), नऊशे (नवसतं), दहाशे (दससतं) म्हणजेच एक हजार (सहस्सं) होते. 394, 416. Yāva taduttari dasaguṇitañca. ३९४, ४१६. मोजणीच्या बाबतीत, त्यांच्या पलीकडे (शंभर आणि हजारच्या पुढे) ते दहा पटीने गुणले जाते. Yāva tāsaṃ saṅkhyānaṃ uttari dasaguṇitañca kātabbaṃ. त्या संख्यांच्या पलीकडे जितकी मोजणी जाईल, तितकी ती दहा पटीने गुणली पाहिजे. Taṃ yathā? Dasassa gaṇanassa dasaguṇitaṃ katvā sataṃ hoti, satassa dasaguṇitaṃ katvā sahassaṃ hoti, sahassassa dasaguṇitaṃ katvā dasasahassaṃ hoti, dasasahassassa dasaguṇitaṃ katvāsatasahassaṃ hoti, satasahassassa dasaguṇitaṃ katvādasasatasahassaṃ hoti, dasasatasahassassadasaguṇitaṃ katvā koṭi hoti, koṭisatasahassassa sataguṇitaṃ katvā pakoṭi hoti. Evaṃ sesāpi yojetabbā. ते कसे? दहा या संख्येला दहाने गुणल्यास शंभर (सतं) होते; शंभरला दहाने गुणल्यास एक हजार (सहस्सं) होते; एक हजारला दहाने गुणल्यास दहा हजार (दससहस्सं) होते; दहा हजारला दहाने गुणल्यास एक लाख (सतसहस्सं) होते; एक लाखला दहाने गुणल्यास दहा लाख (दससतसहस्सं) होते; दहा लाखला दहाने गुणल्यास एक कोटी (कोटी) होते; कोटीला शंभरने गुणल्यास पकोटी (पकोटी) होते. याचप्रमाणे उर्वरित संख्या देखील जोडल्या पाहिजेत. Caggahaṇaṃ visesanatthaṃ. 'च' चे ग्रहण विशेष अर्थासाठी (वर्गीकरणासाठी) आहे. 395, 417. Sakanāmehi. ३९५, ४१७. स्वतःच्या नावांनी. Yāsaṃ pana saṅkhyānaṃ aniddiṭṭhanāmadheyyānaṃ sakehi sakehi nāmehi nippajjante. परंतु ज्या संख्यांची नावे दर्शविलेली नाहीत, त्या आपापल्या स्वतःच्या नावांनी सिद्ध होतात. Satasahassānaṃ sataṃ koṭi, koṭisatasahassānaṃ sataṃ pakoṭi, pakoṭisatasahassānaṃ sataṃ koṭipakoṭi[Pg.207], koṭipakoṭisatasahassānaṃ sataṃ nahutaṃ, nahutasatasahassānaṃ sataṃ ninnahutaṃ, ninnahutasatasahassānaṃ sataṃ akkhobhiṇī. Tathā bindu, abbudaṃ, nirabbudaṃ, ahahaṃ, ababaṃ, aṭaṭaṃ, sogandhikaṃ, uppalaṃ, kumudaṃ, padumaṃ, puṇḍarikaṃ, kathānaṃ, mahākathānaṃ, asaṅkhyeyyaṃ. एक लाख शंभर वेळा म्हणजे कोटी; एक लाख कोटी शंभर वेळा म्हणजे पकोटी; एक लाख पकोटी शंभर वेळा म्हणजे कोटीपकोटी; एक लाख कोटीपकोटी शंभर वेळा म्हणजे नहुतं; एक लाख नहुतं शंभर वेळा म्हणजे निन्नहुतं; एक लाख निन्नहुतं शंभर वेळा म्हणजे अक्खोभिणी. तसेच बिंदु, अब्बुदं, निरब्बुदं, अहहं, अबबं, अटटं, सोगंधिकं, उप्पलं, कुमुदं, पदुमं, पुंडरिकं, कथानं, महाकथानं, असंख्येय्यं. 396, 363. Tesaṃ ṇo lopaṃ. ३९६, ३६३. त्यांच्या 'ण' चा लोप होतो. Tesaṃ paccayānaṃ ṇo lopamāpajjate. त्या प्रत्ययांच्या 'ण' चा लोप होतो. Gotamassa apaccaṃ gotamo. Evaṃ vāsiṭṭho. Venateyyo, ālasyaṃ, ārogyaṃ. गोतमाचे अपत्य (अपच्चं) म्हणजे गोतमो. याचप्रमाणे वासिठ्ठो (वसिष्ठाचे अपत्य); वेनतेय्यो (विनतेचे अपत्य); आळशी माणसाचा भाव म्हणजे आळस (आलस्यं); निरोगी माणसाचा भाव म्हणजे आरोग्य (आरोग्यं). 397, 420. Vibhāge dhā ca. ३९७, ४२०. विभागाच्या (विभाजनाच्या) अर्थात 'धा' प्रत्यय देखील होतो. Vibhāgatthe ca dhāpaccayo hoti. विभागाच्या अर्थात 'धा' प्रत्यय होतो. Ekena vibhāgena ekadhā. Evaṃ dvidhā, tidhā, catudhā, pañcadhā, chadhā. एका भागाने विभागणे म्हणजे 'एकधा'. याचप्रमाणे 'द्विधा' (दोन भागाने), 'त्रिधा' (तीन भागाने), 'चतुधा' (चार भागाने), 'पंचधा' (पाच भागाने), 'छधा' (सहा भागाने). Ceti kimatthaṃ? Sopaccayo hoti. Suttaso, byañjanaso, padaso. 'च' असे कशासाठी म्हटले आहे? 'सो' प्रत्यय देखील होतो. सूत्राने (सुत्तसो), व्यंजनाने (ब्यंजनसो), पदाने (पदसो). 398, 421. Sabbanāmehi [Pg.208] pakāravacane tu thā. ३९८, ४२१. सर्वनामांच्या पुढे प्रकार (पद्धत) सांगताना 'था' प्रत्यय होतो. Sabbanāmehi pakāravacanatthe thāpaccayo hoti. सर्वनामांच्या पुढे प्रकार सांगण्याच्या अर्थात 'था' प्रत्यय होतो. So pakāro tathā, taṃ pakāraṃ tathā, tena pakārena tathā, tassa pakārassa tathā, tasmā pakārā tathā, tassa pakārassa tathā, tasmiṃ pakāre tathā. Evaṃ yathā, sabbathā, aññathā, itarathā. तो प्रकार म्हणजे 'तथा'; त्या प्रकाराला म्हणजे 'तथा'; त्या प्रकाराने म्हणजे 'तथा'; त्या प्रकारासाठी म्हणजे 'तथा'; त्या प्रकारापासून म्हणजे 'तथा'; त्या प्रकाराचा म्हणजे 'तथा'; त्या प्रकारात म्हणजे 'तथा'. याचप्रमाणे 'यथा' (ज्या प्रकारे), 'सब्बथा' (सर्व प्रकारे), 'अञ्ञथा' (इतर प्रकारे), 'इतरथा' (दुसऱ्या प्रकारे). Tuggahaṇaṃ kimatthaṃ? Tatthāpaccayo hoti. So pakāro tathatthā. Evaṃ yathatthā. Sabbathatthā, aññathatthā, itarathatthā. 'तु' चे ग्रहण कशासाठी आहे? 'तत्था' प्रत्यय होतो. तो प्रकार म्हणजे 'तथत्था'. याचप्रमाणे 'यथत्था', 'सब्बथत्था', 'अञ्ञथत्था', 'इतरथत्था'. 399, 422. Kimimehi thaṃ. ३९९, ४२२. 'किं' आणि 'इम' यांच्या पुढे 'थं' प्रत्यय होतो. Kiṃ imaiccetehi thaṃpaccayo hoti pakāravacanatthe. प्रकार सांगण्याच्या अर्थात 'किं' आणि 'इम' यांच्या पुढे 'थं' प्रत्यय होतो. Ko pakāro kathaṃ, kaṃ pakāraṃ kathaṃ, kena pakārena kathaṃ, kassa pakārassa kathaṃ, kasmā pakārā kathaṃ. Kassa pakārassa kathaṃ, kasmiṃ pakāre kathaṃ, ayaṃ pakāro itthaṃ, imaṃ pakāraṃ itthaṃ, iminā pakārena itthaṃ, imassa pakārassa itthaṃ, imasmā pakārā itthaṃ, imassa pakārassa itthaṃ, imasmiṃ pakāre itthaṃ. कोणता प्रकार? (को पकारो), त्याला 'कथं' (कसे) असे म्हणतात; कोणत्या प्रकाराला? (कं पकारं), त्याला 'कथं' म्हणतात; कोणत्या प्रकाराने? (केण पकारेण), त्याला 'कथं' म्हणतात; कोणत्या प्रकारासाठी? (कस्स पकारस्स), त्याला 'कथं' म्हणतात; कोणत्या प्रकारापासून? (कस्मा पकारा), त्याला 'कथं' म्हणतात; कोणत्या प्रकाराचा? (कस्स पकारस्स), त्याला 'कथं' म्हणतात; कोणत्या प्रकारात? (कस्मिं पकारे), त्याला 'कथं' म्हणतात. हा प्रकार (अयं पकारो), त्याला 'इत्थं' (अशा प्रकारे) असे म्हणतात; या प्रकाराला (इमं पकारं), त्याला 'इत्थं' म्हणतात; या प्रकाराने (इमिना पकारेण), त्याला 'इत्थं' म्हणतात; या प्रकारासाठी (इमस्स पकारस्स), त्याला 'इत्थं' म्हणतात; या प्रकारापासून (इमस्मा पकारा), त्याला 'इत्थं' म्हणतात; या प्रकाराचा (इमस्स पकारस्स), त्याला 'इत्थं' म्हणतात; या प्रकारात (इमस्मिं पकारे), त्याला 'इत्थं' म्हणतात. 400, 364. Vuddhādisarassa [Pg.209] vā’saṃyogantassa saṇe ca. ४००, ३६४. जेव्हा 'ण' अनुबंध असलेला प्रत्यय पर असतो, तेव्हा संयुक्त व्यंजन शेवटी नसलेल्या शब्दाच्या पहिल्या स्वराची वृद्धी होते. Ādisarassa vā asaṃyogantassa ādibyañjanassa vā sarassa vuddhi hoti saṇakārake paccaye pare. ण-कारकाचा प्रत्यय परे असताना, संयुक्त व्यंजन शेवटी नसलेल्या शब्दाच्या पहिल्या स्वराची किंवा पहिल्या व्यंजनातील स्वराची वृद्धी होते. Ābhidhammiko, venateyyo, vāsiṭṭho, ālasyaṃ, ārogyaṃ. जो अभिधम्माचा अभ्यास करतो (अधीते अभिधम्मं), त्याला 'आभिधम्मिको' म्हणतात; विनतेचे (विनताय) अपत्य (अपच्चं), त्याला 'वेनतेय्यो' म्हणतात; वसिष्ठाचे (वसिट्ठस्स) अपत्य (अपच्चं), त्याला 'वासिट्ठो' म्हणतात; आळशी माणसाची (अलसस्स) अवस्था (भावो), त्याला 'आलस्यं' (आळस) म्हणतात; निरोगी माणसाची (अरोगस्स) अवस्था (भावो), त्याला 'आरोग्यं' (आरोग्य) म्हणतात. Asaṃyogantasseti kimatthaṃ? Bhaggavo, manteyyo, kunteyyo. 'असंयोगन्तस्स' (संयुक्त व्यंजन शेवटी नसलेल्या) असे का म्हटले आहे? (उदा. संयुक्त व्यंजन शेवटी असल्यास वृद्धी होत नाही, जसे की) भग्गवो, मन्तेय्यो, कुन्तेय्यो. 401, 375. Māyūnamāgamo ṭhāne. ४०१, ३७५. योग्य स्थानी 'इ' आणि 'उ' ची वृद्धी होत नाही. Iuiccetesaṃ ādibhūtānaṃ mā vuddhi hoti. Tesu ca e o vuddhāgamo hoti ṭhāne. आरंभी असलेल्या 'इ' आणि 'उ' ची वृद्धी होत नाही. आणि त्या ठिकाणी योग्य प्रसंगी 'ए' आणि 'ओ' ही वृद्धी होते. Byākaraṇamadhīte veyyākaraṇiko, nyāyamadhīte neyyāyiko, byāvacchassa apaccaṃ veyyāvaccho, dvāre niyutto dovāriko. जो व्याकरणाचा अभ्यास करतो (व्याकरणं अधीते), त्याला 'वेय्याकरणिको' (वैयाकरण) म्हणतात; जो न्यायाचा/तर्काचा अभ्यास करतो (न्यायं अधीते), त्याला 'नेय्यायिको' (नैयायिक) म्हणतात; ब्यावच्छाचे (ब्यावच्छस्स) अपत्य (अपच्चं), त्याला 'वेय्यावच्चो' म्हणतात; दारावर (द्वारे) नियुक्त असलेला (नियुत्तो), त्याला 'दोवारिको' (द्वारपाल) म्हणतात. 402, 377. Āttañca[Pg.210]. ४०२, ३७७. तसेच 'आ' देखील होतो. Iuiccetesaṃ āttañca hoti, rikārāgamo ca ṭhāne. तसेच 'इ' आणि 'उ' चा 'आ' होतो आणि योग्य स्थानी 'रि' चा आगम होतो. Isissa bhāvo ārisyaṃ, iṇassa bhāvo āṇyaṃ, usabhassa bhāvo āsabhaṃ, ujuno bhāvo ajjavaṃ, iccevamādī yojetabbā. ऋषीची (इसिस्स) अवस्था (भावो), त्याला 'आरिस्यं' म्हणतात; कर्जाची (इणस्स) अवस्था (भावो), त्याला 'आण्यं' म्हणतात; बैलाची (उसभस्स) अवस्था (भावो), त्याला 'आसभं' म्हणतात; सरळपणाची (उजुनो) अवस्था (भावो), त्याला 'अज्जवं' म्हणतात; अशा प्रकारे इतर रूपे सिद्ध करावीत. Yūnamiti kimatthaṃ? Apāyesu jāto āpāyi ko. 'यूनं' (इ आणि उ चे) असे का म्हटले आहे? जेथे 'इ' आणि 'उ' नसतील तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की: अपायांमध्ये/नरकात (अपायेषु) जन्मलेला (जातो), त्याला 'आपायिको' म्हणतात. Ṭhāneti kimatthaṃ? Vematiko, opanayiko, opamāyiko, opāyiko. 'ठाने' (योग्य स्थानी) असे का म्हटले आहे? योग्य स्थान नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की: संशयात (विमतिया) गुंतलेला (नियुत्तो), त्याला 'वेमतिको' म्हणतात; उपनयात (उपनये) गुंतलेला (नियुत्तो), त्याला 'ओपनयिको' म्हणतात; उपमेत (उपमाय) गुंतलेला (नियुत्तो), त्याला 'ओपमायिको' म्हणतात; उपायात (उपाये) गुंतलेला (नियुत्तो), त्याला 'ओपायिको' म्हणतात. 403, 354. Kvacādimajjhuttarānaṃ dīgharassā paccayesu ca. ४०३, ३५४. प्रत्यय परे असताना, कधीकधी शब्दाच्या सुरुवातीचे, मधले आणि शेवटचे वर्ण दीर्घ किंवा र्हस्व होतात. Kvaci ādimajjhauttaraiccetesaṃ dīgharassā honti paccayesu ca apaccayesu ca. प्रत्यय परे असताना किंवा नसतानाही, कधीकधी सुरुवातीचे, मधले किंवा शेवटचे वर्ण दीर्घ किंवा र्हस्व होतात. Ādidīgho tāva – pākāro, nīvāro, pāsādo, pākaṭo, pātimokkho, pāṭikaṅkho iccevamādi. प्रथम, सुरुवातीचा वर्ण दीर्घ होतो, जसे की – पाकारो (कोट/भिंत), नीवारो (एक प्रकारचे धान्य), पासादो (प्रासाद/महाल), पाकटो (प्रसिद्ध), पातिमोक्खो (प्रातिमोक्ष), पाटिकङ्खो (अपेक्षित) इत्यादी. Majjhedīgho [Pg.211] tāva – aṅgamāgadhiko, orabbhamāgavīko iccevamādi. मधला वर्ण दीर्घ होतो, जसे की – अङ्गमगाधिको (अंग आणि मगध देशाशी संबंधित), ओरब्भमागविको (मेंढ्यांची शिकार करणारा) इत्यादी. Uttaradīgho tāva – khantī paramaṃ tapo titikkhā, añjanā giri, koṭarā vanaṃ, aṅgulī iccevamādi. शेवटचा वर्ण दीर्घ होतो, जसे की – खन्ती परमं तपो तितिक्खा (सहनशीलता हाच परम तप आहे), अञ्जना गिरि (अंजन पर्वत), कोटरा वनं (कोटरा अरण्य), अङ्गुली (बोट) इत्यादी. Ādirasso tāva – pageva iccevamādi. सुरुवातीचा वर्ण र्हस्व होतो, जसे की – पगेव (अधिक काय सांगावे) इत्यादी. Majjherasso tāva – sumedhaso suvaṇṇadharehi iccevamādi. मधला वर्ण र्हस्व होतो, जसे की – सुमेधसो (बुद्धिमान), सुवण्णधरेहि (सोन्याच्या धारेने) इत्यादी. Uttararasso tāva – bhovādi nāma so hoti, yathābhāvi guṇena so iccevamādi. Aññepi yathājinavacanānuparodhena yojetabbā. शेवटचा वर्ण र्हस्व होतो, जसे की – भोवादि नाम सो होति (तो नावाने भोवादी आहे), यथाभावि गुणेन सो (तो गुणाने यथाभावी आहे) इत्यादी. इतर रूपे देखील बुद्धवचनाचा विरोध न करता सिद्ध करावीत. Caggahaṇena apaccayesu cāti atthaṃ samucceti, 'च' च्या ग्रहणाने 'अपच्चयेसु च' (प्रत्यय नसतानाही) हा अर्थ एकत्रित केला जातो. 404, 370. Tesu vuddhilopāgamavikāraviparītādesā ca. ४०४, ३७०. त्यांच्यामध्ये (सुरुवातीला, मध्ये आणि शेवटी) कधी वृद्धी, कधी लोप, कधी आगम, कधी विकार, कधी विपरीत आणि कधी आदेश होतो. Tesu ādimajjhuttaresu yathājinavacanānuparodhena kvaci vuddhi hoti, kvaci lopo hoti, kvaci āgamo hoti, kvaci vikāro hoti, kvaci viparīto hoti, kvaci ādeso hoti. त्यांच्यामध्ये (सुरुवातीला, मध्ये आणि शेवटी) बुद्धवचनाचा विरोध न करता, कधी वृद्धी होते, कधी लोप होतो, कधी आगम होतो, कधी विकार होतो, कधी विपरीत होतो, तर कधी आदेश होतो. Ādivuddhi tāva – ābhidhammiko, venateyyo iccevamādi. प्रथम, सुरुवातीला वृद्धी होते, जसे की – आभिधम्मिको, वेनतेय्यो इत्यादी. Majjhevuddhi [Pg.212] tāva – sukhaseyyaṃ, sukhakāri dānaṃ, sukhakāri sīlaṃ iccevamādi. मधल्या वर्णाची वृद्धी होते, जसे की – सुखसेय्यं (सुखाची झोप), सुखकारि दानं (सुख देणारे दान), सुखकारि सीलं (सुख देणारे शील) इत्यादी. Uttaravuddhi tāva – kāliṅgo, māgadhiko, paccakkhadhammā iccevamādi. शेवटच्या वर्णाची वृद्धी होते, जसे की – कालिङ्गो, मागधिको (मगध देशाचा), पच्चक्खधम्मा (ज्याने धम्माचा प्रत्यक्ष अनुभव घेतला आहे) इत्यादी. Ādilopo tāva – tālīsaṃ iccevamādi. सुरुवातीचा लोप होतो, जसे की – तालीसं (चाळीस) इत्यादी. Majjhelopo tāva – kattukāmo, kumbhakāraputto, vedallaṃ iccevamādi. मधल्या वर्णाचा लोप होतो, जसे की – कत्तुकामो (करण्याची इच्छा असलेला), कुम्भकारपुत्तो (कुंभाराचा मुलगा), वेदल्लं इत्यादी. Uttaralopo tāva – bhikkhu, bhikkhunī iccevamādi. शेवटच्या वर्णाचा लोप होतो, जसे की – भिक्खु, भिक्खुनी इत्यादी. Ādiāgamo tāva – vutto bhagavatā iccevamādi. सुरुवातीला आगम होतो, जसे की – वुत्तो भगवता (भगवंतांनी सांगितले) इत्यादी. Majjheāgamo tāva – sasīlavā, sapaññavāiccevamādi. मध्ये आगम होतो, जसे की – ससीलवा (तो शीलवान आहे), सपञ्ञवा (तो प्रज्ञावान आहे) इत्यादी. Uttaraāgamo tāva – vedallaṃ iccevamādi. शेवटी आगम होतो, जसे की – वेदल्लं इत्यादी. Ādivikāro tāva – ārisyaṃ, āṇyaṃ, āsabhaṃ, ajjavaṃ iccevamādi. सुरुवातीला विकार होतो, जसे की – आरिस्यं, आण्यं, आसभं, अज्जवं इत्यादी. Majjhevikāro tāva – varārisyaṃ, parārisyaṃ iccevamādi. मध्ये विकार होतो, जसे की – वरारिस्यं (उत्कृष्ट ऋषित्व), परारिस्यं (इतर ऋषित्व) इत्यादी. Uttaravikāro tāva – yāni, tāni, sukhāni iccevamādi. शेवटी विकार होतो, जसे की – यानि (जे), तानि (ते), सुखानि (सुखे) इत्यादी. Ādiviparīto [Pg.213] tāva – uggate sūriye uggacchati iccevamādi. सुरुवातीला विपरीत होतो, जसे की – उग्गते सूरिये (सूर्य उगवल्यावर), उग्गच्छति (तो उगवतो) इत्यादी. Majjheviparīto tāva – samuggacchati, samuggate sūriye iccevamādi. मध्ये विपरीत होतो, जसे की – समुग्गच्छति (चांगल्या प्रकारे उगवतो), समुग्गते सूरिये (सूर्य चांगल्या प्रकारे उगवल्यावर) इत्यादी. Uttaraviparīto tāva – digu, diguṇaṃ iccevamādi. शेवटी विपरीत होतो, जसे की – दिगु (दोन गायी), दिगुणं (दुप्पट) इत्यादी. Ādiādeso tāva – yūnaṃ iccevamādi. सुरुवातीला आदेश होतो, जसे की – यूनं (इ आणि उ चे) इत्यादी. Majjheādeso tāva – nyāyogā iccevamādi. मध्यभागी आदेश असा आहे – 'न्यायोगा' (नेहमी प्रयत्न करणे) इत्यादी. Uttaraādeso tāva – sabbaseyyo, sabbaseṭṭho, cittaṃ iccevamādi. Evaṃ yathājinavacanānuparodhena sabbattha yojetabbā. उत्तरभागी (शेवटच्या भागात) आदेश असा आहे – 'सब्बसेय्यो', 'सब्बसेट्ठो', 'चित्तं' इत्यादी. अशा प्रकारे जिनांच्या (बुद्धांच्या) वचनाचा विरोध न करता सर्व ठिकाणी योजना करावी. 405, 365. Ayuvaṇṇānañcāyo vuddhi. ४०५, ३६५. 'आ', 'ए' आणि 'ओ' ही 'अ', 'इ', 'ई' आणि 'उ', 'ऊ' यांची 'वृद्धी' (सक्षमीकरण) आहे. A iti akāro, i īiti ivaṇṇo, u ūiti uvaṇṇo, tesaṃ akāraivaṇṇuvaṇṇānaṃ ā e ovuddhiyo honti yathāsaṅkhyaṃ, ā ī ūvuddhi ca. 'अ' म्हणजे 'अकार' (अ-वर्ण), 'इ, ई' म्हणजे 'इवर्ण' (इ-वर्ण), 'उ, ऊ' म्हणजे 'उवर्ण' (उ-वर्ण); त्या अकार, इवर्ण आणि उवर्णांची अनुक्रमे 'आ', 'ए' आणि 'ओ' ही वृद्धी होते; तसेच 'आ', 'ई' आणि 'ऊ' ही देखील वृद्धी आहे. Ābhidhammiko, venateyyo, oḷumpiko. आभिधम्मिको, वेनतेय्यो, ओळुम्पिको. Puna vuddhiggahaṇaṃ kimatthaṃ? Uttarapadavuddhibhāvatthaṃ, aṅgamagadhehi āgatāti aṅgamāgadhikā. Nigamajanapadesu jātāti [Pg.214] negamajānapadā. Purimajanapadesu jātāti porimajānapadā. Sattāhe niyuttoti sattāhikā, catuvijje niyuttoti cātuvijjikā. Iccevamādī yojetabbā. पुन्हा 'वृद्धी' ग्रहण कशासाठी? शब्दाच्या उत्तरभागाची (शेवटच्या भागाची) वृद्धी करण्यासाठी. अंग-मगध देशातून आलेले (अंगमगदेहि आगता) ते 'अंगमागधिका' (अंग-मगध देशातून आलेले). निगम-जनपदांमध्ये (व्यापारी नगराच्या जिल्ह्यात) जन्मलेले (निगमजनपदेसु जाता) ते 'नेगमजानपदा' (व्यापारी नगराच्या जिल्ह्यात जन्मलेले). पूर्व जनपदांमध्ये (पूर्व जिल्ह्यात) जन्मलेले (पुरिमजनपदेसु जाता) ते 'पोरिमजानपदा' (पूर्व जिल्ह्यात जन्मलेले). सात दिवसांसाठी नियुक्त केलेले (सत्ताहे नियुत्तो) ते 'सत्ताहिका' (सात दिवसांसाठी नियुक्त केलेले). चार प्रकारच्या विद्यांमध्ये नियुक्त केलेले (चतुविज्जे नियुत्तो) ते 'चातुविज्जिका' (चार प्रकारच्या विद्यांमध्ये नियुक्त केलेले). अशा प्रकारे योजना करावी. Vuddhiiccanena kvattho? Vuddhādisarassa vā’saṃyogantassa saṇe ca. 'वृद्धी' या शब्दाचा काय उपयोग आहे? 'वृद्धादिसरस्स वाऽसंयोगन्तस्स सणे च' या सुत्तात 'वृद्धी' शब्दाचा वापर करण्यासाठी. Iti nāmakappe taddhitakappo aṭṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे नाम कल्पामधील तद्धित कल्प हा आठवा खंड समाप्त झाला. Taddhitakappo niṭṭhito. तद्धित कल्प समाप्त. 6. Ākhyātakappa ६. आख्यात कल्प (क्रियापद प्रकरण) Paṭhamakaṇḍa पहिला खंड (Ka) (क) Ākhyātasāgaramathajjatanītaraṅgaṃ[Pg.215],Dhātujjalaṃ vikaraṇāgamakālamīnaṃ; Lopānubandhariyamatthavibhāgatīraṃ,Dhīrā taranti kavino puthubuddhināvā. ज्या आख्यात-सागरामध्ये विभक्ती प्रत्यय हे लाटा आहेत, धातू हे पाणी आहे, विकरण, आगम आणि काळ हे मासे आहेत, लोप आणि अनुबंध हा वेग आहे आणि अर्थाचे विभाजन हा किनारा आहे; असा हा सागर बुद्धिमान कवी महाज्ञानाच्या नौकेने पार करतात. (Kha) (ख) Vicittasaṅkhāraparikkhitaṃ imaṃ,Ākhyātasaddaṃ vipulaṃ asesato; Paṇamya sambuddhamanantagocaraṃ,Sugocaraṃ yaṃ vadato suṇātha me. विविध रूपांनी वेढलेल्या या विशाल आख्यात-शब्दांचे (क्रियापदांचे) व्याकरण पूर्णपणे सांगण्यासाठी, अनंत ज्ञानक्षेत्र असलेल्या आणि उत्तम ध्येय (निर्वाण) प्राप्त केलेल्या सम्यक् संबुद्धांना वंदन करून, मी जे सांगत आहे ते तुम्ही लक्षपूर्वक ऐका. (Ga) (ग) Adhikāre maṅgale ceva, nipphanne cāvadhāraṇe; Anantare ca pādāne, athasaddo pavattati. 'अथ' हा शब्द (१) अधिकार (पुढील संदर्भ), (२) मंगल (आशीर्वाद), (३) निष्पन्न (पूर्णता), (४) अवधारण (मर्यादा), (५) अनंतर (लगेचच/अंतर नसणे) आणि (६) अपादान (वियोग) या अर्थांमध्ये वापरला जातो. 416, 429. Atha pubbāni vibhattīnaṃ cha parassapadāni. ४१६, ४२९. आता, विभक्ती प्रत्ययांपैकी पहिले सहा प्रत्यय 'परस्सपद' (दुसऱ्यासाठीचे पद) म्हणून ओळखले जातात. Atha sabbāsaṃ vibhattīnaṃ yāni yāni pubbakāni cha padāni, tāni tāni parassapadasaññāni honti. सर्व विभक्ती प्रत्ययांपैकी जे जे पहिले सहा प्रत्यय आहेत, त्यांना 'परस्सपद' अशी संज्ञा दिली जाते. Taṃ yathā? Ti anti, si tha, mi ma. ते कोणते? ति, अन्ति, सि, थ, मि, म. Parassapadamiccanena kvattho? Kattari parassapadaṃ. 'परस्सपद' या संज्ञेचा काय उपयोग आहे? 'कत्तरि परस्सपदं' या सुत्तात 'परस्सपद' शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 407, 439. Parāṇyattanopadāni[Pg.216]. ४०७, ४३९. त्यानंतरचे (सहा प्रत्यय) 'अत्तनोपद' (स्वतःसाठीचे पद) म्हणून ओळखले जातात. Sabbāsaṃ vibhattīnaṃ yāni yāni parāni cha padāni. Tāni tāni attanopadasaññāni honti. सर्व विभक्ती प्रत्ययांपैकी जे जे नंतरचे सहा प्रत्यय आहेत, त्यांना 'अत्तनोपद' अशी संज्ञा दिली जाते. Taṃ yathā? Te ante, se vhe, e mhe. ते कोणते? ते, अन्ते, से, व्हे, ए, म्हे. Attanopadamiccanena kvattho? Attanopadāni bhāve ca kammani. 'अत्तनोपद' या संज्ञेचा काय उपयोग आहे? 'अत्तनोपदानि भावे च कम्मनि' या सुत्तात 'अत्तनोपद' शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 408, 431. Dve dve paṭhama majjhimuttamapurisā. ४०८, ४३१. दोन-दोन प्रत्यय हे अनुक्रमे प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष आणि उत्तम पुरुष असतात. Tāsaṃ sabbāsaṃ vibhattīnaṃ parassapadānaṃ, attanopadānañca dve dve padāni paṭhamamajjhimuttamapurisasaññāni honti. त्या सर्व विभक्ती प्रत्ययांच्या 'परस्सपद' आणि 'अत्तनोपद' मधील दोन-दोन प्रत्ययांना अनुक्रमे प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष आणि उत्तम पुरुष अशी संज्ञा दिली जाते. Taṃ yathā? Ti anti iti paṭhamapurisā, si tha iti majjhimapurisā, mi ma iti uttamapurisā. Attanopadānampi te ante iti paṭhamapurisā, se vhe iti majjhimapurisā, e mhe iti uttamapurisā. Evaṃ sabbattha. ते कोणते? 'ति, अन्ति' हे प्रथम पुरुष; 'सि, थ' हे मध्यम पुरुष; 'मि, म' हे उत्तम पुरुष आहेत. तसेच 'अत्तनोपद' मध्येही 'ते, अन्ते' हे प्रथम पुरुष; 'से, व्हे' हे मध्यम पुरुष; आणि 'ए, म्हे' हे उत्तम पुरुष आहेत. सर्व ठिकाणी याचप्रमाणे समजावे. Paṭhamamajjhimuttamapurisamiccanena kvattho? Nāmamhi payujjamānepi tulyādhikaraṇe paṭhamo, tumhe majjhimo, amhe uttamo. 'प्रथम, मध्यम आणि उत्तम पुरुष' या संज्ञांचा काय उपयोग आहे? 'नामम्हि पयुज्जमानेपि तुल्याधिकरणे पठमो, तुम्हे मज्झिmo, अम्हे उत्तमो' या सुत्तात या शब्दांचा वापर करण्यासाठी. 409, 441. Sabbesamekābhidhāne paro puriso. ४०९, ४४१. जेव्हा सर्वांचा एकत्र उल्लेख केला जातो, तेव्हा नंतरचा पुरुष (प्रत्यय) घेतला पाहिजे. Sabbesaṃ tiṇṇaṃ paṭhamamajjhimuttama purisānaṃ ekābhidhāne paro puriso gahetabbo. जेव्हा प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष आणि उत्तम पुरुष या तिन्हींचा एकत्र उल्लेख केला जातो, तेव्हा नंतरचा पुरुष घेतला पाहिजे. So [Pg.217] ca paṭhati, tvañca paṭhasi, tumhe paṭhatha. So ca pacati, tvañca pacasi. Tumhe pacatha. Evaṃ sesāsu vibhattīsu paro puriso yojetabbo. तो वाचतो (सो च पठति) आणि तू वाचतोस (त्वञ्च पठसि); जेव्हा दोन्ही पुरुष एकत्र येतात: तुम्ही वाचता (तुम्हे पठथ). तो शिजवतो (सो च पचति) आणि तू शिजवतोस (त्वञ्च पचसि); जेव्हा दोन्ही पुरुष एकत्र येतात: तुम्ही शिजवता (तुम्हे पचथ). अशा प्रकारे उर्वरित विभक्तींमध्ये नंतरचा पुरुष योजला पाहिजे. 410, 432. Nāmamhi payujjamānepi tulyādhikaraṇe paṭhamo. ४१०, ४३२. समान अधिकरण (समान स्थान) असलेल्या नामाचा प्रयोग केला असता (किंवा न केला असता), प्रथम पुरुष होतो. Nāmamhi payujjamānepi appayujjamānepi tulyādhikaraṇe paṭhamapuriso hoti. समान अधिकरण असलेल्या नामाचा प्रयोग केला असता किंवा न केला असताही, प्रथम पुरुष होतो. So gacchati, te gacchanti. तो जातो (सो गच्छति), ते जातात (ते गच्छन्ति). Appayujjamānepi – gacchati, gacchanti. नामाचा प्रयोग न केला असताही – जातो (गच्छति), जातात (गच्छन्ति). Tulyādhikaraṇeti kimatthaṃ? Tena haññase tvaṃ devadattena. 'तुल्याधिकरणे' (समान अधिकरण असलेले) असे का म्हटले आहे? जेथे समान अधिकरण नसेल, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की: 'तेन हञ्ञसे त्वं देवदत्तेन' (त्या देवदत्ताकडून तू मारला जातोस). 411, 436. Tumhe majjhimo. ४११, ४३६. 'तुम्ह' (तुम्ही) शब्दाचा प्रयोग केला असता किंवा न केला असता, मध्यम पुरुष होतो. Tumhe payujjamānepi appayujjamānepi tulyādhikaraṇe majjhimapuriso hoti. समान अधिकरण असलेल्या 'तुम्ह' शब्दाचा प्रयोग केला असता किंवा न केला असताही, मध्यम पुरुष होतो. Tvaṃ yāsi, tumhe yātha. तू जातोस (त्वं यासि), तुम्ही जाता (तुम्हे याथ). Appayujjamānepi – yāsi, yātha. अप्रयुज्यमान असतानाही (वापरले नसतानाही) – यासि (तू जातोस), याथ (तुम्ही जाता). Tulyādhikaraṇeti kimatthaṃ? Tayā paccate odano. “तुल्याधिकरण” (समान अधिकरण असलेले) असे कशासाठी म्हटले आहे? तुझ्याद्वारे (tayā) भात (odano) शिजवला जातो (paccate) या उदाहरणासारखे जेथे समान अधिकरण नसेल, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 412, 437. Amhe [Pg.218] uttamo. ४१२, ४३७. “अम्ह” (amha) शब्द असताना उत्तम पुरुष होतो. Amhe payujjamānepi appayujjamānepi tulyādhikaraṇe uttamapuriso hoti. समान अधिकरण असलेला “अम्ह” शब्द वापरला असताना किंवा वापरला नसतानाही उत्तम पुरुष होतो. Ahaṃ yajāmi, mayaṃ yajāma. मी (ahaṃ) यजन करतो (yajāmi), आम्ही (mayaṃ) यजन करतो (yajāma). Appayujjamānepi – yajāmi, yajāma. वापरला नसतानाही – यजन करतो (yajāmi), यजन करतो (yajāma). Tulyādhikaraṇeti kimatthaṃ? Mayā ijjate buddho. “तुल्याधिकरण” असे कशासाठी म्हटले आहे? माझ्याद्वारे (mayā) बुद्धांची (buddho) पूजा केली जाते (ijjate) या उदाहरणासारखे जेथे समान अधिकरण नसेल, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 413, 427. Kāle. ४१३, ४२७. काळात. ‘‘Kāle’’ iccetaṃ adhikāratthaṃ veditabbaṃ. “काले” (काळात) हे अधिकार सूत्रासाठी (पुढील अनुवृत्तीसाठी) आहे असे समजावे. 414, 428. Vattamānā paccuppanne. ४१४, ४२८. वर्तमानकाळात “वर्तमाना” विभक्ती होते. Paccuppanne kāle vattamānāvibhatti hoti. वर्तमानकाळात “वर्तमाना” विभक्ती प्रत्यय होतो. Pāṭaliputtaṃ gacchati, sāvatthiṃ pavisati. पाटलिपुत्राला जातो, श्रावस्तीमध्ये प्रवेश करतो. 415, 451. Āṇatyā siṭṭhe’nuttakāle pañcamī. ४१५, ४५१. आज्ञा, आशीर्वाद आणि अनिर्दिष्ट काळात “पंचमी” विभक्ती होते. Āṇatyatthe ca āsīsatthe ca anuttakāle pañcamī vibhatti hoti. आज्ञेच्या अर्थात, आशीर्वादाच्या अर्थात आणि अनिर्दिष्ट काळात “पंचमी” विभक्ती प्रत्यय होतो. Karotu kusalaṃ, sukhaṃ te hotu. तो कुशल (पुण्य) करो, तुला सुख लाभो. 416, 454. Anumatiparikappatthesu sattamī. ४१६, ४५४. अनुमती आणि परिकल्पना यांच्या अर्थात “सप्तमी” विभक्ती होते. Anumatyatthe ca parikappatthe ca anuttakāle sattamī vibhatti hoti. अनुमतीच्या अर्थात, परिकल्पनेच्या अर्थात आणि अनिर्दिष्ट काळात “सप्तमी” विभक्ती प्रत्यय होतो. Tvaṃ [Pg.219] gaccheyyāsi, kimahaṃ kareyyāmi. तू जाऊ शकतोस, मी काय करू? 417, 460. Apaccakkhe parokkhātīte. ४१७, ४६०. प्रत्यक्ष न पाहिलेल्या (परोक्ष) भूतकाळात “परोक्खा” विभक्ती होते. Apaccakkhe atīte kāle parokkhāvibhatti hoti. प्रत्यक्ष न पाहिलेल्या भूतकाळात “परोक्खा” विभक्ती प्रत्यय होतो. Supine kilamāha, evaṃ kila porāṇāhu. असे म्हटले जाते की त्याने स्वप्नात म्हटले, अशा प्रकारे प्राचीन लोकांनी म्हटले असे ऐकिवात आहे. 418, 456. Hiyyopabhuti paccakkhe hiyyattanī. ४१८, ४५६. कालपासून सुरू होणाऱ्या प्रत्यक्ष पाहिलेल्या भूतकाळात “हिय्यत्तनी” विभक्ती होते. Hiyyopabhuti atīte kāle paccakkhe vā apaccakkhe vā hiyyattanī vibhatti hoti. कालपासून सुरू होणाऱ्या भूतकाळात, प्रत्यक्ष असो वा अप्रत्यक्ष, “हिय्यत्तनी” विभक्ती प्रत्यय होतो. So agamā maggaṃ, te agamū maggaṃ. तो मार्गाने गेला, ते मार्गाने गेले. 419, 469. Samīpe’jjatanī. ४१९, ४६९. समीप भूतकाळात “अज्जतनी” विभक्ती होते. Ajjappabhuti atīte kāle paccakkhe vā apaccakkhe vā samīpe ajjatanīvibhatti hoti. आजपासून सुरू होणाऱ्या भूतकाळात, प्रत्यक्ष असो वा अप्रत्यक्ष, समीप काळात “अज्जतनी” विभक्ती प्रत्यय होतो. So maggaṃ agamī, te maggaṃ agamuṃ. तो मार्गाने गेला, ते मार्गाने गेले. 420, 471. Māyoge sabbakāle ca. ४२०, ४७१. “मा” च्या योगात आणि सर्व काळातही (या विभक्ती होतात). Hiyyattanīajjatanīiccetā vibhattiyo yadā māyogā, tadā sabbakāle ca honti. जेव्हा “हिय्यत्तनी” आणि “अज्जतनी” या विभक्तींचा “मा” शब्दाशी योग येतो, तेव्हा त्या सर्व काळातही होतात. Mā gamā, mā vacā, mā gamī, mā vacī. जाऊ नकोस, बोलू नकोस; जाऊ नकोस, बोलू नकोस. Caggahaṇena [Pg.220] pañcamīvibhattipi hoti. Mā gacchāhi. “च” च्या ग्रहणाने “पंचमी” विभक्ती देखील होते. जसे की, जाऊ नकोस. 421, 473. Anāgate bhavissantī. ४२१, ४७३. भविष्यकाळात “भविस्सती” विभक्ती होते. Anāgate kāle bhavissantī vibhatti hoti. भविष्यकाळात “भविस्सती” विभक्ती प्रत्यय होतो. So gacchissati, karissati. Te gacchissanti, karissanti. तो जाईल, करेल. ते जातील, करतील. 422, 475. Kriyātipanne’tīte kālātipatti. ४२२, ४७५. भूतकाळात क्रिया पूर्ण न होता टळून गेली असता “कालातिपत्ती” विभक्ती होते. Kriyātipannamatte atīte kāle kālātipatti vibhatti hoti. भूतकाळात केवळ क्रिया न घडता टळून गेली असता “कालातिपत्ती” विभक्ती प्रत्यय होतो. So ce taṃ yānaṃ alabhissā, agacchissā. Te ce taṃ yānaṃ alabhissaṃsu, agacchissaṃsu. जर त्याला ते वाहन मिळाले असते, तर तो गेला असता. जर त्यांना ते वाहन मिळाले असते, तर ते गेले असते. 423, 426. Vattamānā ti anti, si tha, mi ma, te ante, se vhe, e mhe. ४२३, ४२६. ति अन्ति, सि थ, मि म; ते अन्ते, से व्हे, ए म्हे हे “वर्तमाना” प्रत्यय आहेत. Vattamānā iccesā saññā hoti ti anti, si tha, mi ma, te ante, se vhe, e mhe iccetesaṃ dvādasannaṃ padānaṃ. ति अन्ति, सि थ, मि म; ते अन्ते, से व्हे, ए म्हे या बारा पदांना “वर्तमाना” अशी संज्ञा आहे. Vattamānā iccanena kvattho? Vattamānā paccuppanne. “वर्तमाना” या संज्ञेचे काय प्रयोजन आहे? “वर्तमाना पच्चुप्पन्ने” (सुत्त ४१४) या सूत्रात वापर करण्यासाठी. 424, 450. Pañcamī tu antu, hitha, mima, taṃ antaṃ, ssu vho, e āmase. ४२४, ४५०. 'तु, अन्तु, हि, थ, मि, म; तं, अन्तं, स्सु, व्हो, ए, आमसे' हे 'पञ्चमी' (विभक्तीचे प्रत्यय) आहेत. Pañcamīiccesā [Pg.221] saññā hoti tu antu, hi tha, mima, taṃ antaṃ, ssu vho, e āmase iccetesaṃ dvādasannaṃ padānaṃ. 'तु, अन्तु, हि, थ, मि, म; तं, अन्तं, स्सु, व्हो, ए, आमसे' या बारा पदांना 'पञ्चमी' अशी संज्ञा आहे. Pañcamīiccanena kvattho? Āṇatyāsiṭṭhe, nuttakāle pañcamī. 'पञ्चमी' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? "आणत्यासिट्ठेऽनुत्तकाले पञ्चमी" (सुत्त ४१५) या सूत्रात 'पञ्चमी' या शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 425, 453. Sattamī eyya eyyuṃ, eyyā si eyyā tha, eyyāmi eyyāma, etha eraṃ, etho eyyāvho, eyyaṃ eyyāmhe. ४२५, ४५३. 'एय्य, एय्युं, एय्यासि, एय्याथ, एय्यामि, एय्याम; एथ, एरं, एथो, एय्याव्हो, एय्यं, एय्याम्हे' हे 'सत्तमी' (विभक्तीचे प्रत्यय) आहेत. Sattamī iccesā saññā hoti eyya eyyuṃ, eyyāsi eyyātha, eyyāmi eyyāma, etha eraṃ, etho, eyyāvho, eyyaṃ eyyāmhe iccetesaṃ dvādasannaṃ padānaṃ. 'एय्य, एय्युं, एय्यासि, एय्याथ, एय्यामि, एय्याम; एथ, एरं, एथो, एय्याव्हो, एय्यं, एय्याम्हे' या बारा पदांना 'सत्तमी' अशी संज्ञा आहे. Sattamī iccanena kvattho? Anumatiparikappatthesu sattamī. 'सत्तमी' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? "अनुमतिपरिकप्पत्थेसु सत्तमी" (सुत्त ४१६) या सूत्रात 'सत्तमी' या शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 426, 459. Parokkhā au ettha, aṃmha, tthare, ttho vho, iṃ mhe. ४२६, ४५९. 'अ, उ, एत्थ, अं, म्ह; त्थ, रे, त्त्हो, व्हो, इं, म्हे' हे 'परोक्खा' (विभक्तीचे प्रत्यय) आहेत. Parokkhā iccesā saññā hoti a u, ettha, aṃ mha, ttha re ttho vho, iṃ mhe iccetesaṃ dvādasannaṃ padānaṃ. 'अ, उ, एत्थ, अं, म्ह; त्थ, रे, त्त्हो, व्हो, इं, म्हे' या बारा पदांना 'परोक्खा' अशी संज्ञा आहे. Parokkhā iccanena kvattho? Apaccakkhe parokkhātīte. 'परोक्खा' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? "अपच्चक्खे परोक्खातीते" (सुत्त ४१७) या सूत्रात 'परोक्खा' या शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 427, 455. Hiyyattanī [Pg.222] āū, ottha, aṃmhā, tthatthuṃ, se vhaṃ, iṃ mhase. ४२७, ४५५. 'आ, ऊ, ओ, त्थ, अं, म्हा; त्थ, त्थुं, से, व्हं, इं, म्हासे' हे 'हिय्यत्तनी' (विभक्तीचे प्रत्यय) आहेत. Hiyyattanī iccesā saññā hoti ā ū, o ttha, aṃ mhā, ttha tthuṃ, se vhaṃ, iṃ mhase iccetesaṃ dvādasannaṃ padānaṃ. 'आ, ऊ, ओ, त्थ, अं, म्हा; त्थ, त्थुं, से, व्हं, इं, म्हासे' या बारा पदांना 'हिय्यत्तनी' अशी संज्ञा आहे. Hiyyattanī iccanena kvattho? Hiyyopabhuti paccakkhe hiyyattanī. 'हिय्यत्तनी' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? "हिय्योपभुति पच्चक्खे hिय्यत्तनी" (सुत्त ४१८) या सूत्रात 'हिय्यत्तनी' या शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 428, 468. Ajjatanī ī uṃ, o ttha, iṃ mhā, ā ū, se vhaṃ, aṃ mhe. ४२८, ४६८. 'ई, उं, ओ, त्थ, इं, म्हा; आ, ऊ, से, व्हं, अं, म्हे' हे 'अज्जतनी' (विभक्तीचे प्रत्यय) आहेत. Ajjatanī iccesā saññā hoti ī uṃ, o ttha, iṃmhā, ā ū, sevhaṃ, aṃ mhe iccetesaṃ dvādasannaṃ padānaṃ. 'ई, उं, ओ, त्थ, इं, म्हा; आ, ऊ, से, व्हं, अं, म्हे' या बारा पदांना 'अज्जतनी' अशी संज्ञा आहे. Ajjatanī iccanena kvattho? Samīpejjatanī. 'अज्जतनी' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? "समीपेज्जतनी" (सुत्त ४१९) या सूत्रात 'अज्जतनी' या शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 429, 472. Bhavissantī ssati ssanti, ssasi ssatha, ssāmi ssāma, ssate ssante, ssase ssavhe, ssaṃ ssāmhe. ४२९, ४७२. 'स्सति, स्सन्ति, स्ससि, स्सथ, स्सामि, स्साम; स्सते, स्सन्ते, स्ससे, स्सव्हे, स्सं, स्साम्हे' हे 'भविस्सती' (विभक्तीचे प्रत्यय) आहेत. Bhavissantī iccesā saññā hoti ssati ssanti, ssasi ssatha, ssāmi ssāma, ssate ssante, ssase ssavhe, ssaṃ ssāmhe iccetesaṃ dvādasannaṃ padānaṃ. 'स्सति, स्सन्ति, स्ससि, स्सथ, स्सामि, स्साम; स्सते, स्सन्ते, स्ससे, स्सव्हे, स्सं, स्साम्हे' या बारा पदांना 'भविस्सती' अशी संज्ञा आहे. Bhavissantī iccanena kvattho? Anāgate bhavissantī. 'भविस्सती' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? "अनागते भविस्सती" (सुत्त ४२१) या सूत्रात 'भविस्सती' या शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 430, 373. Kālātipatti [Pg.223] ssā ssaṃsu, sse ssatha, ssaṃ ssāmhā, ssatha sissu, ssase ssavhe, ssiṃ ssāmhase. ४३०, ३७३. 'स्सा, स्संसु, स्से, स्सथ, स्सं, स्साम्हा; स्सथ, स्सिस्सु, स्ससे, स्सव्हे, स्सिं, स्साम्हसे' हे 'कालातिपत्ती' (विभक्तीचे प्रत्यय) आहेत. Kālātipatti iccesā saññā hoti ssā ssaṃsu, sse ssatha, ssaṃ ssāmhā, ssatha ssisu, ssase ssavhe, ssiṃ ssāmhase iccetesaṃ dvādasannaṃ padānaṃ. 'स्सा, स्संसु, स्से, स्सथ, स्सं, स्साम्हा; स्सथ, स्सिस्सु, स्ससे, स्सव्हे, स्सिं, स्साम्हसे' या बारा पदांना 'कालातिपत्ती' अशी संज्ञा आहे. Kālātipatti iccanena kvattho? Kriyātipanne’ tīte kālātipatti. 'कालातिपत्ती' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? "क्रियातिपन्नेऽतीते कालातिपत्ती" (सुत्त ४२२) या सूत्रात 'कालातिपत्ती' या शब्दाचा वापर करण्यासाठी. 431, 458. Hiyyattanī sattamī pañcamī vattamānā sabbadhātukaṃ. ४३१, ४५८. 'हिय्यत्तनी', 'सत्तमी', 'पञ्चमी' आणि 'वत्तमाना' या 'सब्बधातुका' (सार्वधातुक) आहेत. Hiyyattanādayo catasso vibhattiyo sabbadhātuka saññā honti. हिय्यत्तनी इत्यादी चार विभक्तींना 'सब्बधातुक' अशी संज्ञा आहे. Agamā, gaccheyya, gacchatu, gacchati. तो आला (अगम), त्याने जावे (गच्छेय्य), जा (गच्छतु), तो जातो (गच्छति). Sabbadhātuka iccanena kvattho? Ikārāgamo asabbadhātukamhi. 'सब्बधातुक' या संज्ञेचे प्रयोजन काय? "इकारागमो असब्बधातुम्हि" (सुत्त ५१६) या सूत्रात 'असब्बधातुक' या शब्दाचा वापर करण्यासाठी. Iti ākhyātakappe paṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे आख्यात कल्पामधील (क्रियापद प्रकरण) पहिला खंड समाप्त झाला. Dutiyakaṇḍa दुसरा खंड. 432, 362. Dhātuliṅgehi [Pg.224] parā paccayā. ४३२, ३६२. धातू आणि प्रातिपदिक (लिंग) यांच्यानंतर प्रत्यय लागतात. Dhātuliṅgaiccetehi parā paccayā honti. धातू आणि प्रातिपदिक (लिंग) यांच्यानंतर प्रत्यय लागतात. Karoti, gacchati. Yo koci karoti, taṃ añño ‘‘karohi karohi’’ iccevaṃ bravīti, atha vā karontaṃ payojayati = kāreti. Saṅgho pabbatamiva attānamācarati = pabbatāyati. Taḷākaṃ samuddamiva attānamācarati = samuddāyati, saddo cicciṭamiva attānamācarati = cicciṭāyati, vasiṭṭhassa apaccaṃ vāsiṭṭho. Evamaññepi yojetabbā. तो करतो (करोति), तो जातो (गच्छति). जो कोणी करतो, त्याला दुसरा "कर, कर" असे सांगतो, किंवा करणाऱ्याला प्रवृत्त करतो = कारेति (करवून घेतो). संघ स्वतः पर्वतासारखा आचरण करतो = पब्बतायति. तलाव स्वतः समुद्रासारखा आचरण करतो = समुद्दायति. आवाज स्वतः 'चिच्चिट' (तडतड) सारखा आचरण करतो = चिच्चिटायति. वसिष्ठाचे अपत्य = वासिठ्ठो. अशाच प्रकारे इतरांचेही रूप बनवावे. 433, 528. Tija gupa kita māne hi kha cha sā vā. ४३३, ५२८. 'तिज', 'गुप', 'कित' आणि 'मान' या धातूंनंतर कधीकधी 'ख', 'छ' आणि 'स' प्रत्यय लागतात. Tija gupa kita mānu iccetehi dhātūhi kha cha sa iccete paccayā honti vā. 'तिज' (सहन करणे), 'गुप' (निंदा करणे/जुगुप्सा), 'कित' (उपचार करणे/निवारण करणे) आणि 'मान' (विचार करणे/तपासणे) या धातूंनंतर कधीकधी 'ख', 'छ' आणि 'स' हे प्रत्यय लागतात. Titikkhati, jigucchati, tikicchati, vīmaṃsati. तितिक्खति (सहन करतो), जिगुच्छति (तिरस्कार करतो), तिकिच्छति (उपचार करतो), वीमंसति (विचार करतो/तपासतो). Vāti kimatthaṃ? Tejati, gopati, māneti. 'वा' (कधीकधी/विकल्पाने) असे का म्हटले आहे? तेजति, गोपति, मानेति (या रूपांच्या सिद्धीसाठी, जेथे हे प्रत्यय लागत नाहीत). 434, 534. Bhuja ghasa hara su pādīhi tumicchatthesu. ४३४, ५३४. 'भुज', 'घस', 'हर', 'सु', 'पा' इत्यादी धातूंनंतर 'तुं' (हेत्वर्थक कृदंत) आणि 'इच्छा' (इच्छार्थक) या अर्थांमध्ये (कधीकधी 'ख', 'छ', 'स' प्रत्यय लागतात). Bhuja [Pg.225] ghasa hara su pāiccevamādīhi dhātūhi tumicchatthesu kha cha saiccete paccayā honti vā. 'भुज' (खाणे), 'घस' (खाणे), 'हर' (हरण करणे/नेणे), 'सु' (ऐकणे), 'पा' (पिणे) इत्यादी धातूंनंतर 'तुं' आणि 'इच्छा' या अर्थांमध्ये कधीकधी 'ख', 'छ' आणि 'स' हे प्रत्यय लागतात. Bhottumicchati=bubhukkhati, ghasitumicchati=jighacchati, haritumicchati=jigīsati, sotumicchati=sussusati, pātumicchati=pivāsati. खाण्याची इच्छा करतो (भोत्तुं इच्छति) = बुभुक्खति (खाण्याची इच्छा करतो), खाण्याची इच्छा करतो (घसितुं इच्छति) = जिघच्छति, नेण्याची इच्छा करतो (हरितुं इच्छति) = जिगीसति, ऐकण्याची इच्छा करतो (सोतुं इच्छति) = सुस्सूसति, पिण्याची इच्छा करतो (पातुं इच्छति) = पिवासति. Vāti kimatthaṃ? Bhottumicchati. 'वा' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? भोत्तुं इच्छति (या रूपाच्या सिद्धीसाठी, जेथे प्रत्यय लागत नाही). Tumicchatthesūti kimatthaṃ? Bhuñjati. 'तुमिच्छत्थेसु' (इच्छार्थक आणि हेत्वर्थक अर्थांमध्ये) असे का म्हटले आहे? जेथे इच्छेचा अर्थ नसेल तेथे हा नियम लागू न होण्यासाठी, जसे की: भुञ्जति (तो खातो). 435, 536. Āya nāmato kattūpamānādācāre. ४३५, ५३६. कर्त्याशी तुलना करताना आणि आचरणाच्या अर्थात नामांनंतर 'आय' प्रत्यय लागतो. Nāmato kattūpamānā ācāratthe āyapaccayo hoti. नामांनंतर कर्ता-उपमा आणि आचार अर्थी 'आय' प्रत्यय होतो. Saṅgho pabbatamiva attānamācarati = pabbatāyati, taḷākaṃ samuddamiva attānamācarati = samuddāyati, saddo cicciṭamiva attānamācarati = cicciṭāyati. Evamaññepi yojetabbā. संघ स्वतःला पर्वतासारखा आचरतो = पर्वतासारखा आचरतो (पब्बतायति). तलाव स्वतःला समुद्रासारखा आचरतो = समुद्रासारखा आचरतो (समुद्दायति). आवाज स्वतःला 'चि-चि' सारखा आचरतो = 'चि-चि' सारखा आचरतो (चिच्चिटायति). याचप्रमाणे इतरही रूपे बनवावीत. 436, 537. Īyūpamānā ca. ४३६, ५३७. उपमेमध्ये 'ईय' प्रत्यय देखील होतो. Nāmato upamānā ācāratthe ca īyapaccayo hoti. नामांनंतर उपमेमध्ये आचार अर्थी 'ईय' प्रत्यय देखील होतो. Achattaṃ [Pg.226] chattamiva ācarati =chattīyati, aputtaṃ puttamiva ācarati=puttīyati. जो छत्री नाही त्याला छत्रीसारखे आचरतो = छत्रीसारखे वागवतो (छत्तीयति). जो मुलगा नाही त्याला मुलासारखे आचरतो = मुलासारखे वागवतो (पुत्तीयति). Upamānāti kimatthaṃ? Dhammaṃ ācarati. “उपमान” (उपमा) असे का म्हटले आहे? (तो) धर्माचे आचरण करतो (धम्मं आचरति). Ācāreti kimatthaṃ? Achattaṃ chattamiva rakkhati. Evamaññepi yojetabbā. “आचार” (वर्तन) असे का म्हटले आहे? जेथे आचार (वर्तन) अर्थ नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की: जो छत्री नाही त्याचे छत्रीसारखे रक्षण करतो (रक्खति). याचप्रमाणे इतरही रूपे बनवावीत. 437, 538. Nāmamhā’tticchatthe. ४३७, ५३८. नामांनंतर स्वतःच्या इच्छेच्या अर्थी (प्रत्यय होतो). Nāmamhā attano icchatthe īyapaccayo hoti. नामांनंतर स्वतःच्या इच्छेच्या अर्थी 'ईय' प्रत्यय होतो. Attano pattamicchati = pattīyati. Evaṃ vatthīyati, parikkhārīyati, cīvarīyati, dhanīyati, ghaṭīyati. स्वतःसाठी पात्राची इच्छा करतो = स्वतःसाठी पात्राची इच्छा करतो (पत्तीियति). याचप्रमाणे वत्थीयति, परिक्खारीयति, चीवरीयति, धनीयति, घटीयति. Atticchattheti kimatthaṃ? Aññassa pattamicchati. Evamaññepi yojetabbā. “अत्तिच्छत्थे” (स्वतःच्या इच्छेच्या अर्थी) असे का म्हटले आहे? स्वतःच्या इच्छेचा अर्थ नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की: दुसऱ्यासाठी पात्राची इच्छा करतो (अञ्ञस्स पत्तं इच्छति). याचप्रमाणे इतरही रूपे बनवावीत. 438, 540. Dhātūhi ṇe ṇaya ṇāpe ṇāpayā kāritāni hetvatthe. ४३८, ५४०. धातूंनंतर, हेतू (कारण) अर्थी 'णे', 'णय', 'णापे', 'णापय' हे प्रत्यय होतात, ज्यांना 'कारित' म्हटले जाते. Sabbehi dhātūhi ṇeṇaya ṇāpe ṇāpayaiccete paccayā honti kāritasaññā ca hetvatthe. सर्व धातूंनंतर, हेतू अर्थी 'णे', 'णय', 'णापे', 'णापय' हे प्रत्यय होतात आणि त्यांना 'कारित' संज्ञा दिली जाते. Yo koci karoti, taṃ añño ‘‘karohi karohi’’ iccevaṃ bravīti, atha vā karontaṃ payojayati [Pg.227] = kāreti, kārayati, kārāpeti, kārā payati. Ye keci karonti, te aññe ‘‘karotha karotha’’ iccevaṃ bruvanti = kārenti, kārayanti, kārāpenti, kārāpayanti. Yo koci pacati, taṃ añño ‘‘pacāhi pacāhi’’iccevaṃ bravīti, atha vā pacantaṃ payojayati = pāceti, pācayati, pācāpeti, pācāpayati. Ye keci pacanti, te aññe ‘‘pacatha pacatha’’ iccevaṃ bruvanti = pācenti, pācayanti, pācāpenti. Pācāpayanti. Evaṃ bhaṇeti, bhaṇayati, bhaṇāpeti, bhaṇāpayati. Bhaṇenti, bhaṇayanti, bhaṇāpenti, bhaṇāpayanti. Tathariva aññepi yojetabbā. जो कोणी करतो, त्याला दुसरा “कर, कर” असे सांगतो किंवा करणाऱ्याला प्रवृत्त करतो = करवितो (कारेति, कारयति, कारापेति, कारापयति). जे कोणी करतात, त्यांना दुसरे “करा, करा” असे सांगतात = करवितात (कारेंति, कारयंति, कारापेंति, कारापयंति). जो कोणी शिजवतो, त्याला दुसरा “शिजव, शिजव” असे सांगतो किंवा शिजवणाऱ्याला प्रवृत्त करतो = शिजवितो (पाचेति, पाचयति, पाचापेति, पाचापयति). जे कोणी शिजवतात, त्यांना दुसरे “शिजवा, शिजवा” असे सांगतात = शिजवितात (पाचेंति, पाचयंति, पाचापेंति, पाचापयंति). याचप्रमाणे भणेति, भणयति, भणापेति, भणापयति; भणेंति, भणयंति, भणापेंति, भणापयंति. याचप्रमाणे इतरही रूपे बनवावीत. Hetvattheti kimatthaṃ? Karoti, pacati. “हेत्वत्थे” (हेतू अर्थी) असे का म्हटले आहे? हेतूचा अर्थ नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की: करतो (करोति), शिजवतो (पचति). Atthaggahaṇena alapaccayo hoti, jotalati. 'अत्थ' (अर्थ) ग्रहणाने 'अल' प्रत्यय देखील होतो, जसे की: प्रकाशवितो (जोतलति). 439, 539. Dhāturūpe nāmasmā ṇayo ca. ४३९, ५३९. धातूचे रूप असताना नामांनंतर 'णय' प्रत्यय देखील होतो. Tasmā nāmasmā ṇayapaccayo hoti kāritasañño ca dhāturūpe sati. धातूचे रूप असताना, त्या नामांनंतर 'णय' प्रत्यय होतो आणि त्याला 'कारित' संज्ञा दिली जाते. Hatthinā atikkamati maggaṃ = atihatthayati, vīṇāya upagāyati gītaṃ = upavīṇayati, daḷhaṃ karoti vīriyaṃ [Pg.228] = daḷhayati, visuddhā hoti ratti = visuddhayati. हत्तीने रस्ता पार करतो = हत्तीने रस्ता पार करतो (अतिहत्थयति). विणेने गाणे गातो = विणेने गातो (उपवीणयति). वीर्य (प्रयत्न) दृढ करतो = दृढ करतो (दळ्हयति). रात्र शुद्ध होते = शुद्ध होते (विसुद्धयति). Caggahaṇena āra ālaiccete paccayā honti. Santaṃ karoti = santārati, upakkamaṃ karoti = upakkamālati. 'च' ग्रहणाने 'आर' आणि 'आल' हे प्रत्यय देखील होतात. शांत करतो = संतारति, उपक्रम करतो = उपक्कमलति. 440, 445. Bhāvakammesu yo. ४४०, ४४५. भाव आणि कर्म अर्थी 'य' प्रत्यय होतो. Sabbehi dhātūhi bhāvakammesu yapaccayo hoti. सर्व धातूंनंतर भाव आणि कर्म अर्थी 'य' प्रत्यय होतो. Ṭhīyate, bujjhate, paccate, labbhate, karīyate, yujjate, uccate. ठीयते, बुज्झते, पच्चते, लब्भते, करीयते, युज्जते, उच्चते. Bhāvakammesūti kimatthaṃ? Karoti, pacati, paṭhati. “भावकम्मेसु” (भाव आणि कर्म अर्थी) असे का म्हटले आहे? भाव किंवा कर्म अर्थ नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की: करतो (करोति), शिजवतो (पचति), वाचतो (पठति). 441, 447. Tassa cavaggayakāravakārattaṃ sadhātvantassa. ४४१, ४४७. धातूच्या अंतिम वर्णासह त्या 'य' प्रत्ययाचे च-वर्ग, 'य' आणि 'व' रूप होते. Tassa yapaccayassa cavaggayakāravakārattaṃ hoti dhātūnaṃ antena saha yathāsambhavaṃ. धातूंच्या अंतिम वर्णासह त्या 'य' प्रत्ययाचे यथासंभव च-वर्ग, 'य' आणि 'व' रूप होते. Vuccate, vuccante, uccate, uccante, paccate, paccante. Majjate, majjante, yujjate, yujjante. Bujjhate, bujjhante, kujjhate, kujjhante, ujjhate, ujjhante. Haññate, haññante. Kayyate, kayyante. Dibbate, dibbante. म्हटले जाते (वुच्चते, उच्चते), म्हटले जातात (वुच्चंते, उच्चंते); शिजवले जाते (पच्चते), शिजवले जातात (पच्चंते). घासले जाते (मज्जते), घासले जातात (मज्जंते); जोडले जाते (युज्जते), जोडले जातात (युज्जंते). जाणले जाते (बुज्झते), जाणले जातात (बुज्झंते); रागवला जातो (कुज्झते), रागवले जातात (कुज्झंते); सोडले जाते (उज्झते), सोडले जातात (उज्झंते). मारले जाते (हञ्ञते), मारले जातात (हञ्ञंते). केले जाते (कय्यते), केले जातात (कय्यंते). खेळले जाते (दिब्बते), खेळले जातात (दिब्बंते). 442, 448. Ivaṇṇāgamo [Pg.229] vā. ४४२, ४४८. कधीकधी 'इ' किंवा 'ई' (इ-वर्ण) चा आगम होतो. Sabbehi dhātūhi yamhi paccaye, pare ivaṇṇāgamo hoti vā. सर्व धातूंनंतर 'य' प्रत्यय परे असताना, कधीकधी 'इ' किंवा 'ई' चा आगम होतो. Karīyate, karīyati, gacchīyate, gacchīyati. केले जाते (करीयते, करीयति); गेले जाते (गच्छीयते, गच्छीयति). Vāti kimatthaṃ? Kayyate. “वा” (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की: केले जाते (कय्यते). 443, 449. Pubbarūpañca. ४४३, ४४९. आणि पूर्वरूप (होते). Sabbehi dhātūhi yapaccayo pubbarūpamāpajjate vā. सर्व धातूंनंतर 'य' प्रत्यय कधीकधी पूर्वरूपास प्राप्त होतो. Vuḍḍhate, phallate, dammate, sakkate, labbhate, dissate. वाढते (वुड्ढते), फलद्रूप होते (फल्लते), दमन केले जाते (दम्मते), शक्य होते (सक्कते), मिळवले जाते (लब्भते), दिसते (दिस्सते). 444, 501. Tathā kattari ca. ४४४, ५०१. त्याचप्रमाणे कर्ता अर्थी देखील. Yathā heṭṭhā bhāvakammesu yapaccayassa ādeso hoti tathā kattaripi yapaccayassa ādeso kātabbo. ज्याप्रमाणे खाली भाव आणि कर्म अर्थी 'य' प्रत्ययाचा आदेश होतो, त्याचप्रमाणे कर्ता अर्थी देखील 'य' प्रत्ययाचा आदेश करावा. Bujjhati, vijjhati, maññati, sibbati. जाणतो (बुज्झति), विंधतो (विज्झति), मानतो (मञ्ञति), शिवतो (सिब्बति). 445, 433. Bhūvādito a. ४४५, ४३३. 'भू' इत्यादी धातूंनंतर 'अ' (प्रत्यय होतो). Bhūiccevamādito dhātugaṇato apaccayo hoti kattari. 'भू' इत्यादींनी सुरू होणाऱ्या धातूंच्या गणांनंतर कर्ता अर्थी 'अ' प्रत्यय होतो. Bhavati[Pg.230], paṭhati, pacati, jayati. होतो (भवति), वाचतो (पठति), शिजवतो (पचति), जिंकतो (जयति). 446, 509. Rudhādito niggahitapubbañca. ४४६, ५०९. 'रुध्' इत्यादी धातूंनंतर (धातूच्या पूर्व स्वरावर) 'निग्गहीत' (अनुस्वार) देखील होतो. Rudhaiccevamādito dhātugaṇato apaccayo hoti kattari, pubbe niggahitāgamo hoti. 'रुध्' इत्यादी धातूंच्या गणांनंतर कर्तरि प्रयोगात 'अ' प्रत्यय होतो आणि पूर्व स्वरावर 'निग्गहीत' (अनुस्वार) आगम होतो. Rundhati, chindati, bhindati. रुन्धति, छिन्दति, भिन्दति. Caggahaṇena i ī e oiccete paccayā honti niggahitapubbañca. (सूत्रातील) 'च' च्या ग्रहणाने 'इ', 'ई', 'ए', 'ओ' हे प्रत्यय देखील होतात आणि पूर्व स्वरावर 'निग्गहीत' (अनुस्वार) होतो. Rundhiti, rundhīti, rundheti, rundhoti, sumbhoti, parisumbhoti. रुन्धिति, रुन्धीति, रुन्धेति, रुन्धोति, सुम्भोति, परिसुम्भोति. 447, 510. Divādito yo. ४४७, ५१०. 'दिवु' इत्यादी धातूंनंतर 'य' (यो) प्रत्यय होतो. Divuiccevamādito dhātugaṇato yapaccayo hoti kattari. 'दिवु' इत्यादी धातूंच्या गणांनंतर कर्तरि प्रयोगात 'य' प्रत्यय होतो. Dibbati, thibbati, yujjhati, vijjhati, bujjhati. दिब्बति, थिब्बति, युज्झति, विज्झति, बुज्झति. 448, 512. Svādito ṇu ṇā uṇā ca. ४४८, ५१२. 'सु' इत्यादी धातूंनंतर 'णु', 'णा' आणि 'उणा' हे प्रत्यय देखील होतात. Suiccevamādito dhātugaṇato ṇu ṇā u ṇāiccete paccayā honti kattari. 'सु' इत्यादी धातूंच्या गणांनंतर कर्तरि प्रयोगात 'णु', 'णा' आणि 'उणा' हे प्रत्यय होतात. Abhisuṇoti[Pg.231], abhisuṇāti, saṃvuṇoti, saṃvuṇāti, āvuṇoti, āvuṇāti, pāpuṇoti, pāpuṇāti. अभिसुणोति, अभिसुणाति, संवुणोति, संवुणाति, आवुणोति, आवुणाति, पापुणोति, पापुणाति. 449, 513. Kiyādito nā. ४४९, ५१३. 'की' इत्यादी धातूंनंतर 'ना' प्रत्यय होतो. Kīiccevamādito dhātugaṇato nāpaccayo hoti kattari. 'की' इत्यादी धातूंच्या गणांनंतर कर्तरि प्रयोगात 'ना' प्रत्यय होतो. Kiṇāti, jināti, dhunāti, munāti, lunāti, punāti. किणाति, जिनाति, धुनाति, मुनाति, लुनाति, पुनाति. 450, 517. Gahādito ppa ṇhā. ४५०, ५१७. 'गह' इत्यादी धातूंनंतर 'प्प' आणि 'ण्हा' प्रत्यय होतात. Gahaiccevamādito dhātugaṇato ppaṇhāiccete paccayā honti kattari. 'गह' इत्यादी धातूंच्या गणांनंतर कर्तरि प्रयोगात 'प्प' आणि 'ण्हा' हे प्रत्यय होतात. Gheppati, gaṇhāti. घेप्पति, गण्हाति. 451, 520. Tanādito oyirā. ४५१, ५२०. 'तनु' इत्यादी धातूंनंतर 'ओ' आणि 'यिर' प्रत्यय होतात. Tanuiccevamādito dhātugaṇato o yiraiccete paccayā honti kattari. 'तनु' इत्यादी धातूंच्या गणांनंतर कर्तरि प्रयोगात 'ओ' आणि 'यिर' हे प्रत्यय होतात. Tanoti[Pg.232], tanohi, karoti, karohi, kayi rati, kayirāhi. तनोति, tanohi, करोति, karohi, कयिरति, कयिराहि. 452, 525. Curādito, ṇe ṇayā. ४५२, ५२५. 'चुर' इत्यादी धातूंनंतर 'णे' आणि 'णय' प्रत्यय होतात. Curaiccevamādito dhātugaṇato ṇe ṇayaiccete paccayā honti kattari, kāritasaññā ca. 'चुर' इत्यादी धातूंच्या गणांनंतर कर्तरि प्रयोगात 'णे' आणि 'णय' हे प्रत्यय होतात, आणि त्यांना 'कारित' संज्ञा देखील प्राप्त होते. Coreti, corayati, cinteti, cintayati, manteti, mantayati. चोरेति, चोरयति, चिन्तेति, चिन्तयति, मन्तेति, मन्तयति. 453, 444. Attanopadāni bhāve ca kammani. ४५३, ४४४. भाव आणि कर्म प्रयोगात देखील 'अत्तनोपद' (आत्मनेपद) प्रत्यय होतात. Bhāve ca kammani ca attanopadāni honti. भाव आणि कर्म प्रयोगात 'अत्तनोपद' (आत्मनेपद) प्रत्यय होतात. Uccate, uccante, majjate, majjante, yujjate, yujjante, kujjhate, kujjhante, labbhate, labbhante, kayyate, kayyante. उच्चते, उच्चन्ते, मज्जते, मज्जन्ते, युज्जते, युज्जन्ते, कुज्झते, कुज्झन्ते, लब्भते, लब्भन्ते, कय्यते, कय्यन्ते. 454, 440. Kattari ca. ४५४, ४४०. कर्तरि प्रयोगात देखील. Kattari ca attanopadāni honti. कर्तरि प्रयोगात देखील 'अत्तनोपद' (आत्मनेपद) प्रत्यय होतात. Maññate, rocate, socate, bujjhate, jāyate. मञ्ञते, रोचते, सोचते, बुज्झते, जायते. 455, 530. Dhātuppaccayehi vibhattiyo. ४५५, ५३०. धातूंच्या प्रत्ययांवरून विभक्ती प्रत्यय होतात. Dhātuniddiṭṭhehi paccayehi khādikāritantehi vibhattiyo honti. 'ख' पासून सुरू होणाऱ्या आणि 'कारित' वर संपणाऱ्या प्रत्ययांनी युक्त धातूंनंतर विभक्ती प्रत्यय होतात. Titikkhati[Pg.233], jigucchati, vīmaṃsati, samuddāyati, puttīyati, kāreti, pāceti. तितिक्खति, जिगुच्छति, वीमंसति, समुद्दायति, पुत्तीयति, कारेति, पाचेति. 456, 430. Kattari parassapadaṃ. ४५६, ४३०. कर्तरि प्रयोगात 'परस्सपद' (परस्मैपद) प्रत्यय होतो. Kattari parassapadaṃ hoti. कर्तरि प्रयोगात 'परस्सपद' (परस्मैपद) प्रत्यय होतो. Karoti, pacati, paṭhati, gacchati. करोति, पचति, पठति, गच्छति. 457, 424. Bhūvādayo dhātavo. ४५७, ४२४. 'भू' इत्यादींना धातू म्हणतात. Bhūiccevamādayo ye saddagaṇā, te dhātusaññā honti. 'भू' इत्यादी जे शब्दसमूह आहेत, त्यांना 'धातू' ही संज्ञा प्राप्त होते. Bhavati, bhavanti, carati, caranti, pacati, pacanti, cintayati, cintayanti, hoti, honti, gacchati, gacchanti. भवति, भवन्ति, चरति, चरन्ति, पचति, पचन्ति, चिन्तयति, चिन्तयन्ति, होति, होन्ति, गच्छति, गच्छन्ति. Iti ākhyātakappe dutiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे आख्यात कल्पामधील (क्रियापद प्रकरण) दुसरा खंड समाप्त झाला. Tatiyakaṇḍa तिसरा खंड 458, 461. Kvacādivaṇṇānamekassarānaṃ dvebhāvo. ४५८, ४६१. कधीकधी एका स्वराचा समावेश असलेल्या सुरुवातीच्या वर्णांचे द्वित्व (द्विभाव) होते. Ādibhūtānaṃ vaṇṇānaṃ ekassarānaṃ kvaci dvebhāvo hoti. सुरुवातीला असलेल्या एका स्वरायुक्त वर्णांचे कधीकधी द्वित्व होते. Titikkhati[Pg.234], jigucchati, tikicchati, vīmaṃsati, bubhukkhati, pivāsati, daddallati, dadāti, jahāti, caṅkamati. सहन करतो (तितिक्खति), तिरस्कार करतो (जिगुच्छति), बरे करतो (तिकिच्छति), तपासतो (वीमंसति), खाण्याची इच्छा करतो (बुभुक्खति), पिण्याची इच्छा करतो (पिवासति), प्रखरतेने चमकतो (दद्दल्लति), देतो (ददाति), त्याग करतो (जहाति), चंक्रमण करतो (चंकमति). Kvacīti kimatthaṃ? Kampati, calati. 'क्वचि' (कधीकधी) असे कशासाठी म्हटले आहे? जेथे हा नियम लागू होत नाही अशा अपवादांसाठी, जसे की: थरथरतो (कंपति), हलतो (चलति). 459, 462. Pubbo’bbhāso. ४५९, ४६२. पूर्वीचा (अक्षरसमूह) 'अभ्भास' (अभ्यास) संज्ञक असतो. Dvebhūtassa dhātussa yo pubbo, so abbhāsasañño hoti. द्वित्व झालेल्या धातूचा जो पूर्व भाग असतो, त्याला 'अभ्भास' (अभ्यास) संज्ञा दिली जाते. Dadhāti, dadāti, babhūva. धारण करतो (दधाति), देतो (ददाति), झाला (बभूव). 460, 506. Rasso. ४६०, ५०६. ह्रस्व. Abbhāse vattamānassa sarassa rasso hoti. Dadhāti, jahāti. अभ्भास (अभ्यास) मध्ये असलेल्या स्वराचा ह्रस्व होतो. जसे की: धारण करतो (दधाति), त्याग करतो (जहाति). 461, 464. Dutiyacatutthānaṃ paṭhamatatiyā. ४६१, ४६४. दुसऱ्या आणि चौथ्या वर्णांच्या जागी अनुक्रमे पहिला आणि तिसरा वर्ण होतो. Abbhāsagatānaṃ dutiyacatutthānaṃ paṭhamatatiyā honti. अभ्भास (अभ्यास) मध्ये आलेल्या दुसऱ्या आणि चौथ्या वर्णांच्या जागी अनुक्रमे पहिला आणि तिसरा वर्ण होतो. Ciccheda, bubhukkhati, babhūva, dadhāti. कापले (चिच्छेद), खाण्याची इच्छा करतो (बुभुक्खति), झाला (बभूव), धारण करतो (दधाति). 462, 476. Kavaggassa cavaggo. ४६२, ४७६. क-वर्गाच्या जागी च-वर्ग होतो. Abbhāse vattamānassa kavaggassa ca vaggo hoti. अभ्भास (अभ्यास) मध्ये असलेल्या क-वर्गाच्या जागी च-वर्ग होतो. Cikicchati[Pg.235], jigucchati, jighacchati, jigīsati, jaṅgamati, caṅkamati. वैद्यकीय उपचार करतो (चिकिच्छति), तिरस्कार करतो (जिगुच्छति), खाण्याची तीव्र इच्छा करतो (जिघच्छति), जिंकण्याची इच्छा करतो (जिगीसति), वारंवार चालतो (जंगमति), येरझऱ्या घालतो (चंकमति). 463, 532. Mānakitānaṃ vatattaṃ vā. ४६३, ५३२. कधीकधी 'मान' आणि 'कित' चे 'व' आणि 'त' होतात. Mānakitaiccetesaṃ dhātūnaṃ abbhāsagatānaṃ vakāra takārattaṃ hoti vā yathāsaṅkhyaṃ. 'मान' आणि 'कित' या धातूंच्या 'अभ्यास' (abbhāsa) च्या ठिकाणी अनुक्रमे 'व' आणि 'त' हे वर्ण कधीकधी होतात. Vīmaṃsati, tikicchati. (तो) विचार करतो (वीमंसति), (तो) उपचार करतो (तिकिच्छति). Vāti kimatthaṃ? Cikicchati. 'वा' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की पुढील उदाहरणात: (तो) उपचार करतो (चिकिच्छति). 464, 504. Hassa jo. ४६४, ५०४. 'ह' चा 'ज' होतो. Abbhāse vattamānassa hakārassa jo hoti. 'अभ्यास' (द्वित्व झालेल्या अक्षरांपैकी पहिले अक्षर) मध्ये असलेल्या 'ह' या वर्णाचा 'ज' होतो. Jahāti, juhvati, juhoti, jahāra. (तो) त्याग करतो (जहाति), (तो) यज्ञ करतो/अर्पण करतो (जुह्वति, जुहोति), (त्याने) वाहून नेले (जहार). 465, 463. Antassivaṇṇākāro vā. ४६५, ४६३. कधीकधी अंतामध्ये 'इ', 'ई' आणि 'अ' होतात. Abbhāsassa antassa ivaṇṇo hoti, akāro vā. कधीकधी 'अभ्यास' च्या अंतामध्ये 'इ' वर्ण (इ, ई) किंवा 'अ' कार होतो. Jigucchati, pivāsati, vīmaṃsati, jighacchati, babhūva, dadhāti. (तो) निंदा करतो (जिगुच्छति), (त्याला) पिण्याची इच्छा होते (पिवासति), (तो) विचार करतो (वीमंसति), (त्याला) खाण्याची इच्छा होते (जिघच्छति), (तो) झाला (बभूव), (तो) धारण करतो (दधाति). Vāti kimatthaṃ? Bubhukkhati. 'वा' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की पुढील उदाहरणात: (त्याला) खाण्याची इच्छा होते (बुभुक्खति). 466, 489. Niggahitañca[Pg.236]. ४६६, ४८९. आणि कधीकधी 'निग्गहीत' (अनुस्वार) होतो. Abbhāsassa ante niggahitāgamo hoti vā. कधीकधी 'अभ्यास' च्या शेवटी 'निग्गहीत' चा आगम होतो. Caṅkamati, cañcalati, jaṅgamati. (तो) चंक्रमण करतो/येरझऱ्या घालतो (चंकमति), (तो) हलतो/कंप पावतो (चंचलति), (तो) फिरतो (जंगमति). Vāti kimatthaṃ? Pivāsati, daddallati. 'वा' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की पुढील उदाहरणात: (त्याला) पिण्याची इच्छा होते (पिवासति), (तो) प्रखरतेने चमकतो (दद्दल्लति). 467, 533. Tato pāmānānaṃ vā maṃ sesu. ४६७, ५३३. त्यानंतर (अभ्यास नंतर) 'स' प्रत्यय मागे असताना 'पा' आणि 'मान' चे अनुक्रमे 'वा' आणि 'मं' होतात. Tato abbhāsato pāmānaiccetesaṃ dhātūnaṃ vāmaṃiccete ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ sapaccaye pare. त्या 'अभ्यास' नंतर, 'स' प्रत्यय मागे असताना 'पा' आणि 'मान' या धातूंच्या ठिकाणी अनुक्रमे 'वा' आणि 'मं' हे आदेश होतात. Pivāsati, vīmaṃsati. (त्याला) पिण्याची इच्छा होते (पिवासति), (तो) विचार करतो (वीमंसति). 468, 462. Ṭhā tiṭṭho. ४६८, ४६२. 'ठा' (ṭhā) चा 'तिट्ठ' (tiṭṭha) होतो. Ṭhāiccetassa dhātussa tiṭṭhādeso hoti vā. कधीकधी 'ठा' या धातूच्या ठिकाणी 'तिट्ठ' हा आदेश होतो. Tiṭṭhati, tiṭṭhatu, tiṭṭheyya, tiṭṭheyyuṃ. (तो) उभा राहतो (तिट्ठति), (तो) उभा राहो (तिट्ठतु), (तो) उभा राहावा (तिट्ठेय्य), (ते) उभे राहावेत (तिट्ठेय्युं). Vāti kimatthaṃ? Ṭhāti. 'वा' (कधीकधी) असे का म्हटले आहे? या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की पुढील उदाहरणात: (तो) उभा राहतो (ठाति). 469, 494. Pā pivo. ४६९, ४९४. 'पा' चा 'पिव' होतो. Pāiccetassa dhātussa pivādeso hoti vā. कधीकधी 'पा' या धातूच्या ठिकाणी 'पिव' हा आदेश होतो. Pivati, pivatu, piveyya, piveyyuṃ. (तो) पितो (पिवति), (तो) पिओ (पिवतु), (तो) प्यावा (पिवेय्य), (ते) प्यावेत (पिवेय्युं). Vāti kimatthaṃ? Pāti. "वा" (कधीकधी) असे कशासाठी म्हटले आहे? या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की पुढील उदाहरणात: (तो) पितो (पाति). 470, 514. Ñāssa [Pg.237] jā jaṃ nā. ४७०, ५१४. 'ञा' (ñā) धातूचे 'जा' (jā), 'जं' (jaṃ) आणि 'ना' (nā) हे आदेश होतात. Ñāiccetassa dhātussa jā jaṃ nāādesā honti vā. 'ञा' या धातूचे 'जा', 'जं' आणि 'ना' हे आदेश वैकल्पिकरित्या (कधीकधी) होतात. Jānāti, jāneyya, jāniyā, jaññā, nāyati. जानाति, जानेय्य, जानिया, जञ्ञा, नायति. 471, 483. Disassa passa dissa dakkhā vā. ४७१, ४८३. 'दिस' (disa) धातूचे कधीकधी 'पस्स' (passa), 'दिस्स' (dissa) आणि 'दक्ख' (dakkha) हे आदेश होतात. Disaiccetassa dhātussa passa dissa dakkhaiccete ādesā honti vā. 'दिस' या धातूचे 'पस्स', 'दिस्स' आणि 'दक्ख' हे आदेश वैकल्पिकरित्या (कधीकधी) होतात. Passati, dissati, dakkhati, adakkha. पस्सति, दिस्सति, दक्खति, अदक्ख. Vāti kimatthaṃ? Addasa. "वा" (कधीकधी) असे कशासाठी म्हटले आहे? या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की पुढील उदाहरणात: (त्याने) पाहिले (अद्दस). 472, 531. Byañjanantassa co chapaccayesu ca. ४७२, ५३१. 'छ' (cha) प्रत्यय मागे असताना, धातूच्या अंतिम व्यंजनाचा 'च' (ca) होतो. Byañjanantassa dhātussa co hoti chapaccayesu paresu. 'छ' प्रत्यय मागे असताना, व्यंजन-अंत असलेल्या धातूच्या अंतिम व्यंजनाचा 'च' होतो. Jigucchati, tikicchati, jighacchati. जिगुच्छति (तो तिरस्कार करतो), तिकिच्छति (तो उपचार करतो), जिघच्छति (त्याला खाण्याची इच्छा आहे). 473, 529. Ko khe ca. ४७३, ५२९. आणि 'ख' (kha) प्रत्यय मागे असताना 'क' (ka) होतो. Byañjanantassa dhātussa ko hoti khapaccaye pare. 'ख' प्रत्यय मागे असताना, व्यंजन-अंत असलेल्या धातूच्या अंतिम व्यंजनाचा 'क' होतो. Titikkhati[Pg.238], bubhukkhati. तितिक्खति (तो सहन करतो), बुभुक्खति (त्याला खाण्याची इच्छा आहे). 474, 535. Harassa gīse. ४७४, ५३५. 'स' (sa) प्रत्यय मागे असताना 'हर' (hara) धातूचा 'गी' (gī) होतो. Haraiccetassa dhātussa sabbasseva gīādeso hoti sapaccaye pare. 'स' प्रत्यय मागे असताना, संपूर्ण 'हर' या धातूचा 'गी' हा आदेश होतो. Jigīsati. जिगीसति. 475, 565. Brūbhūnamāhabhūvā parokkhāyaṃ. ४७५, ५६५. 'परोक्खा' (parokkhā) विभक्ती असताना, 'ब्रू' (brū) आणि 'भू' (bhū) धातूंचे अनुक्रमे 'आह' (āha) आणि 'भूव' (bhūva) हे आदेश होतात. Brūbhūiccetesaṃ dhātūnaṃ āhabhūvaiccete ādesā honti yathāsaṅkhyaṃ parokkhāyaṃ vibhattiyaṃ. 'परोक्खा' विभक्ती असताना, 'ब्रू' आणि 'भू' या धातूंचे अनुक्रमे 'आह' आणि 'भूव' हे आदेश होतात. Āha, āhu, babhūva, babhūvu. आह (तो म्हणाला), आहु (ते म्हणाले); बभूव (तो झाला/होता), बभूवु (ते झाले/होते). Parokkhāyamiti kimatthaṃ? Abracuṃ. "परोक्खा" असे कशासाठी म्हटले आहे? 'परोक्खा' विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की पुढील उदाहरणात: (ते) म्हणाले (अब्रवुं). 476, 442. Gamissanto ccho vā sabbāsu. ४७६, ४४२. सर्व विभक्ती किंवा प्रत्यय मागे असताना, 'गमु' (gamu) धातूचा अंत्य भाग कधीकधी 'च्छ' (ccha) होतो. Gamuiccetassa dhātussa anto makāro ccho hoti vā sabbāsu paccayavibhattīsu. सर्व प्रत्यय आणि विभक्ती मागे असताना, 'गमु' (जाणे) या धातूचा अंतिम 'म' कार वैकल्पिकरित्या (कधीकधी) 'च्छ' होतो. Gacchamāno, gacchanto. Gacchati, gameti. Gacchatu, gametu. Gaccheyya. Gameyya. Agacchā, agamā. Agacchī, agamī. Gacchissati, gamissati. Agacchissā, agamissā. गच्छमानो, गच्छन्तो (जाणारा). गच्छति, गमेति (तो जातो). गच्छतु, गमेतु (तो जावो). गच्छेय्य, गमेय्य (त्याने जावे). अगच्छा, अगमा (तो गेला). अगच्छी, अगमी (तो गेला). गच्छिस्सति, गमिस्सति (तो जाईल). अगच्छिस्सा, अगमिस्सा (जर तो गेला असता). Gamisseti [Pg.239] kimatthaṃ? Icchati. "गमिस्स" असे कशासाठी म्हटले आहे? 'गमु' धातू नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की पुढील उदाहरणात: (तो) इच्छा करतो (इच्छति). 477, 479. Vacassajjatanimhi makāro o. ४७७, ४७९. 'अज्जतनी' (ajjatanī) विभक्ती असताना, 'वच' (vaca) धातूच्या 'अ' चा 'ओ' होतो. Vacaiccetassa dhātussa akāro ottamāpajjate ajjatanimhi vibhattimhi. 'अज्जतनी' विभक्ती असताना, 'वच' या धातूचा 'अ' कार 'ओ' कारात बदलतो. Avoca. Avocuṃ. अवोच (तो म्हणाला), अवोचुं (ते म्हणाले). Ajjatanimhīti kimatthaṃ? Avaca, avacū. "अज्जतनी" असे कशासाठी म्हटले आहे? 'अज्जतनी' विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की पुढील उदाहरणात: अवच (तो म्हणाला), अवचू (ते म्हणाले). 478, 438. Akāro dīghaṃ hi mi mesu. ४७८, ४३८. 'हि' (hi), 'मि' (mi) आणि 'म' (ma) विभक्ती असताना, 'अ' कार दीर्घ होतो. Akāro dīghamāpajjate himimaiccetesu vibhattīsu. 'हि', 'मि' आणि 'म' या विभक्ती मागे असताना, 'अ' कार दीर्घ होतो. Gacchāhi, gacchāmi, gacchāma, gacchāmhe. गच्छाही (तू जा), गच्छामि (मी जातो), गच्छामा, गच्छाम्हे (आम्ही जातो). Mikāraggahaṇena hivibhattimhi akāro kvaci na dīghamāpajjate. Gacchahi. 'मि' कार ग्रहण केल्यामुळे, 'हि' विभक्ती असताना 'अ' कार कधीकधी दीर्घ होत नाही. जसे की: गच्छहि (तू जा). 479, 452. Ha lopaṃ vā. ४७९, ४५२. 'हि' चा कधीकधी लोप होतो. Hivibhatti lopamāpajjate vā. 'हि' विभक्तीचा वैकल्पिकरित्या (कधीकधी) लोप होतो. Gaccha, gacchāhi, gama, gamāhi, gamaya, gamayāhi. गच्छ, गच्छाही, गम, गमाही (तू जा); गमय, गमयाही (तू पाठव/जाण्यास लाव). Hīti kimatthaṃ? Gacchati, gamayati. "हि" असे कशासाठी म्हटले आहे? 'हि' विभक्ती नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की पुढील उदाहरणात: गच्छति (तो जातो), गमयति (तो जाण्यास लावतो). 480, 490. Hotissarehohe bhavissantimhissassa ca. ४८०, ४९०. 'भविस्सती' (bhavissantī - भविष्यकाळ) असताना 'हू' (hū) धातूच्या स्वराचा 'एह' (eha), 'ओह' (oha) आणि 'ए' (e) होतो, आणि 'स्स' (ssa) चा कधीकधी लोप होतो. Hūiccetassa [Pg.240] dhātussa saro e ha oha ettamāpajja te bhavissantimhi, ssassa ca lopo hoti vā. 'भविस्सती' असताना 'हू' या धातूच्या स्वराचा 'एह', 'ओह' आणि 'ए' होतो, आणि 'स्स' चा वैकल्पिकरित्या (कधीकधी) लोप होतो. Hehiti, hehinti, hohiti, hohinti, heti, henti, hehissati, hehissanti, hohissati, hohissanti, hessati, hessanti. हेहिति, हेहिन्ति, होहिति, होहिन्ति, हेति, हेन्ति, हेहिस्सति, हेहिस्सन्ति, hoहिस्सति, hoहिस्सन्ति, हेस्सति, हेस्सन्ति. Hūti kimatthaṃ? Bhavissati, bhavissanti. "हू" असे कशासाठी म्हटले आहे? (जेथे 'हू' धातू नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की) 'भविस्सति' (तो होईल), 'भविस्सन्ति' (ते होतील). Bhavissantimhīti kimatthaṃ? Hoti. "भविस्सन्तिम्हि" (भविष्यकाळात) असे कशासाठी म्हटले आहे? (जेथे 'भविस्सती' विभक्ती नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की) 'होति' (तो आहे). 481, 524. Karassa sapaccayassa kāho. ४८१, ५२४. प्रत्ययासह 'कर' धातूच्या जागी 'काह' असा आदेश होतो. Karaiccetassa dhātussa sapaccayassa kāhādeso hoti vā bhavissantimhi vibhattimhi, sassa ca niccaṃ lopo hoti. 'भविस्सती' विभक्ती पर असताना, प्रत्ययासह 'कर' या धातूच्या जागी विकल्पे करून 'काह' असा आदेश होतो आणि 'स्स' चा नेहमी लोप होतो. Kāhati, kāhiti, kāhasi, kāhisi, kāhāmi, kāhāma. काहति (तो करील), काहिति (तो करील); काहसि (तू करशील), काहिसि (तू करशील); काहामि (मी करीन), काहाम (आम्ही करू). Vāti kimatthaṃ? Karissati, karissanti. "वा" (विकल्पे करून) असे कशासाठी म्हटले आहे? (या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की) 'करिस्सति' (तो करील), 'करिस्सन्ति' (ते करतील). Sapaccayaggahaṇena aññehipi bhavissantiyā vibhattiyā khāmi khāma chāmi chāmaiccādayo ādesā honti. Vakkhāmi, vakkhāma, vacchāmi, vacchāma. 'सप्रत्यय' (प्रत्ययासह) असे ग्रहण केल्यामुळे, इतर धातूंनंतरही 'भविस्सती' विभक्तीचे 'खामि', 'खाम', 'छामि', 'छाम' इत्यादी आदेश होतात. जसे की - वक्खामि (मी सांगेन), वक्खाम (आम्ही सांगू); वच्छामि (मी राहीन), वच्छाम (आम्ही राहू). Iti ākhyātakappe tatiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे आख्यात कल्पामधील (क्रियापद प्रकरणातील) तिसरा खंड समाप्त झाला. Catutthakaṇḍa चौथा खंड 482, 508. Dādantassaṃ [Pg.241] mi mesu. ४८२, ५०८. 'मि' आणि 'म' पर असताना, 'दा' धातूच्या अंताचा 'अं' होतो. Dāiccetassa dhātussa antassa aṃ hoti mimaiccetesu. 'मि' आणि 'म' पर असताना, 'दा' या धातूच्या अंत्य स्वराचा 'अं' होतो. Dammi, damma. दम्मि (मी देतो), damma (आम्ही देतो). 483, 527. Asaṃyogantassa vuddhi kārite. ४८३, ५२७. कारित (प्रयोजक) प्रत्यय पर असताना, संयुक्त व्यंजनाने अंत न होणाऱ्या धातूच्या स्वराची वृद्धी होते. Asaṃyogantassa dhātussa kārite vuddhi hoti. कारित प्रत्यय पर असताना, संयुक्त व्यंजनाने अंत न होणाऱ्या धातूच्या स्वराची वृद्धी होते. Kāreti, kārenti, kārayati, kārayanti, kārāpeti, kārāpenti, kārāpayati, kārāpayanti. कारेति, कारयति, कारापेति, कारापयति (तो करवितो); कारेन्ति, कारयन्ति, कारापेन्ति, कारापयन्ति (ते करवितात). Asaṃyogantasseti kimatthaṃ? Cintayati, mantayati. "असंयोगन्तस्स" (संयुक्त व्यंजनाने अंत न होणाऱ्या) असे कशासाठी म्हटले आहे? (संयुक्त व्यंजनाने अंत होणाऱ्या धातूंच्या बाबतीत हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की) चिन्तयति (तो विचार करतो), मन्तयति (तो सल्लामसलत करतो). 484, 542. Ghaṭādīnaṃ vā. ४८४, ५४२. 'घट' इत्यादी धातूंच्या बाबतीत विकल्पे करून (वृद्धी होते). Ghaṭādīnaṃ dhātūnaṃ asaṃyogantānaṃ vuddhi hoti vā kārite. कारित प्रत्यय पर असताना, संयुक्त व्यंजनाने अंत न होणाऱ्या 'घट' इत्यादी धातूंच्या स्वराची विकल्पे करून वृद्धी होते. Ghāṭeti, ghaṭeti, ghāṭayati, ghaṭayati, ghāṭāpeti, ghaṭāpeti, ghāṭāpayati, ghaṭāpayati, gāmeti, gameti, gāmayati, gamayati, gāmāpeti, gamāpeti. Gāmāpayati, gamāpayati. घाटेति, घटेति, घाटयति, घटयति, घाटापेति, घटापेति, घाटापयति, घटापयति (तो प्रयत्न करवितो); गामेति, गमेति, गामयति, गमयति, गामापेति, गमापेति, गामापयति, गमापयति (तो पाठवितो/जाण्यास लावतो). Ghaṭādīnamiti kimatthaṃ? Kāreti. "घटादीनं" ('घट' इत्यादींचा) असे कशासाठी म्हटले आहे? (जेथे 'घट' इत्यादी धातू नसतील तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून, जसे की) कारेति (तो करवितो). 485, 434. Aññesu [Pg.242] ca. ४८५, ४३४. आणि इतर प्रत्ययांच्या बाबतीतही. Aññesu ca paccayesu sabbesaṃ dhātūnaṃ asaṃyogantānaṃ vuddhi hoti. आणि इतर (कारित व्यतिरिक्त) प्रत्यय पर असतानाही, संयुक्त व्यंजनाने अंत न होणाऱ्या सर्व धातूंच्या स्वराची वृद्धी होते. Jayati, hoti, bhavati. जयति (तो जिंकतो), होति (तो होतो/आहे), भवति (तो होतो/आहे). Caggahaṇena ṇupaccayassāpi vuddhi hoti. Abhisuṇoti. 'च' चे ग्रहण केल्यामुळे 'णु' प्रत्ययाची देखील वृद्धी होते. जसे की - अभिसुणोति (तो ऐकतो). 486, 543. Guha dusānaṃ dīghaṃ. ४८६, ५४३. 'गुह' आणि 'दुस' धातूंच्या स्वराचा दीर्घ होतो. Guha dusaiccetesaṃ dhātūnaṃ saro dīghamāpajjate kārite. कारित प्रत्यय पर असताना, 'गुह' आणि 'दुस' या धातूंच्या स्वराला दीर्घत्व प्राप्त होते. Gūhayati, dūsayati. गूहयति (तो लपवितो/रक्षण करवितो), दूसयति (तो दूषित करतो/नष्ट करतो). 487, 478. Vaca vasa vahādīnamukāro vassa ye. ४८७, ४७८. 'य' प्रत्यय पर असताना, 'वच', 'वस', 'वह' इत्यादी धातूंच्या 'व' चा 'उ' होतो. Vaca vasa vahaiccevamādīnaṃ dhātūnaṃ vakārassa ukāro hoti yapaccaye pare. 'य' प्रत्यय पर असताना, 'वच', 'वस', 'वह' इत्यादी धातूंच्या 'व' काराचा 'उ' कार होतो. Uccate, vuccati, gussati, vuyhati. उच्चते, वुच्चति (म्हटले जाते), गुस्सति (राहिले जाते), वुय्हति (वाहून नेले जाते). 488, 481. Ha vipariyayo lo vā. ४८८, ४८१. 'ह' चा विपर्यास (स्थानबदल) होतो आणि विकल्पे करून 'ल' होतो. Hakārassa vipariyayo hoti yapaccaye pare, yapaccayassa ca lo hoti vā. 'य' प्रत्यय पर असताना, 'ह' काराचा विपर्यास (स्थानबदल) होतो आणि विकल्पे करून 'य' प्रत्ययाचा 'ल' होतो. Vulhati, vuyhati. वुळ्हति, वुय्हति. 489, 519. Gahassa [Pg.243] ghe ppe. ४८९, ५१९. 'प्प' प्रत्यय पर असताना, 'गह' धातूच्या जागी 'घे' होतो. Gahaiccetassa dhātussa sabbassa ghekāro hoti ppapaccaye pare. 'प्प' प्रत्यय पर असताना, संपूर्ण 'गह' या धातूच्या जागी 'घे' कार होतो. Gheppati. घेप्पति (तो ग्रहण करतो/घेतो). 490, 518. Halo po ṇhāmhi. ४९०, ५१८. 'ण्हा' प्रत्यय पर असताना, 'ह' चा लोप होतो. Gahaiccetassa dhātussa hakārassa lopo hoti ṇhāmhi paccaye pare. 'ण्हा' प्रत्यय पर असताना, 'गह' या धातूच्या 'ह' काराचा लोप होतो. Gaṇhāti. गण्हाति (तो ग्रहण करतो/घेतो). 491, 523. Karassa kāsattamajjatanimhi. ४९१, ५२३. 'अज्जतनी' (भूतकाळ) विभक्ती पर असताना, 'कर' धातूच्या जागी 'कास' आदेश होतो. Karaiccetassa dhātussa sabbassa kāsattaṃ hoti vā ajjatanimhi vibhattimhi. 'अज्जतनी' (ajjatanī) प्रत्यय मागे असताना, काही वेळा संपूर्ण 'कर' (kara) धातूचा 'कास' (kāsa) असा आदेश होतो. Akāsi, akāsuṃ. Akari, akaruṃ. (त्याने) केले (अकासि), (त्यांनी) केले (अकासुं). (त्याने) केले (अकरि), (त्यांनी) केले (अकरुं). Kāsattamitibhāvaniddesena aññatthāpi sāgamo hoti. Ahosi, adāsi. 'कासत्त' (kāsatta) असा भाव दर्शविल्यामुळे, इतर ठिकाणीही 'स्' (s) चा आगम होतो. (तो) झाला (अहोसि), (त्याने) दिले (अदासि). 492, 499. Asasmā mimānaṃ mhimhā’ ntalopo ca. ४९२, ४९९. 'अस' (asa) धातूनंतर 'मि' (mi) आणि 'म' (ma) प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'म्हि' (mhi) आणि 'म्ह' (mha) आदेश होतात, आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. Asaiccetāya dhātuyā mimaiccetesaṃ vibhattīnaṃ mhimhādesā honti vā, dhātvantassa lopo ca. काही वेळा 'अस' (asa) या धातूच्या 'मि' (mi) आणि 'म' (ma) या प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'म्हि' (mhi) आणि 'म्ह' (mha) हे आदेश होतात, आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. Amhi[Pg.244], amha, asmi, asma. (मी) आहे (अम्हि, अस्मि), (आम्ही) आहोत (अम्ह, अस्म). 493, 498. Thassa tthattaṃ. ४९३, ४९८. 'थ' (tha) प्रत्ययाच्या जागी 'त्थ' (ttha) आदेश होतो. Asaiccetāya dhātuyā thassa vibhattissa tthattaṃ hoti, dhātvantassa lopo ca. 'अस' (asa) या धातूच्या 'थ' (tha) या प्रत्ययाच्या जागी 'त्थ' (ttha) आदेश होतो, आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. Attha. (तुम्ही) आहात (अत्थ). 494, 495. Tissa tthittaṃ. ४९४, ४९५. 'ति' (ti) प्रत्ययाच्या जागी 'त्थि' (tthi) आदेश होतो. Asaiccetāya dhātuyā tissa vibhattissa tthittaṃ hoti, dhātvantassa lopo ca. 'अस' (asa) या धातूच्या 'ति' (ti) या प्रत्ययाच्या जागी 'त्थि' (tthi) आदेश होतो, आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. Atthi. (तो) आहे (अत्थि). 495, 500. Tussa tthuttaṃ. ४९५, ५००. 'तु' (tu) प्रत्ययाच्या जागी 'त्थु' (tthu) आदेश होतो. Asaiccetāya dhātuyā tussa vibhattissa tthuttaṃ hoti, dhātvantassa lopo ca. 'अस' (asa) या धातूच्या 'तु' (tu) या प्रत्ययाच्या जागी 'त्थु' (tthu) आदेश होतो, आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. Atthu. (ते) असो (अत्थु). 496, 497. Simhi ca. ४९६, ४९७. आणि 'सि' (si) प्रत्यय मागे असताना. Asasseva dhātussa simhi vibhattimhi antassa lopo ca hoti. 'सि' (si) प्रत्यय मागे असताना, 'अस' (asa) या धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. Ko nu tvamasi mārisa. हे महाशय, आपण कोण आहात? (को नु त्वमसि मारिस). 497, 477. Labhasmā [Pg.245] ī iṃnaṃ ttha tthaṃ. ४९७, ४७७. 'लभ' (labha) धातूनंतर 'ई' (ī) आणि 'इं' (iṃ) प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'त्थ' (ttha) आणि 'त्थं' (tthaṃ) आदेश होतात. Labhaiccetāya dhātuyā ī iṃnaṃ vibhattīnaṃ ttha tthaṃādesā honti, dhātvantassa lopo ca. 'लभ' (labha) या धातूच्या 'ई' (ī) आणि 'इं' (iṃ) या प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'त्थ' (ttha) आणि 'त्थं' (tthaṃ) हे आदेश होतात, आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. Alattha, alatthaṃ. (त्याला) मिळाले (अलत्थ), (मला) मिळाले (अलत्थं). 498, 480. Kusasmā dī cchi. ४९८, ४८०. 'कुस' (kusa) धातूनंतर 'ई' (ī) प्रत्ययाच्या जागी 'च्छि' (cchi) आदेश होतो. Kusaiccetāya dhātuyā īvibhattissa cchihoti, dhātvantassa lopo ca. 'कुस' (kusa) या धातूच्या 'ई' (ī) या प्रत्ययाच्या जागी 'च्छि' (cchi) आदेश होतो, आणि धातूच्या अंतिम वर्णाचा लोप होतो. Akkocchi. (त्याने) शिवीगाळ केली (अक्कोच्छि). 499, 507. Dādhātussa dajjaṃ. ४९९, ५०७. 'दा' (dā) धातूच्या जागी 'दज्ज' (dajja) आदेश होतो. Dāiccetassa dhātussa sabbassa dajjādeso hoti vā. काही वेळा संपूर्ण 'दा' (dā) धातूच्या जागी 'दज्ज' (dajja) असा आदेश होतो. Dajjāmi, dajjeyya, dadāmi, dadeyya. (मी) देतो (दज्जामि, ददामि), (त्याने) द्यावे (दज्जेय्य, ददेय्य). 500, 486. Vadassa vajjaṃ. ५००, ४८६. 'वद' (vada) धातूच्या जागी 'वज्ज' (vajja) आदेश होतो. Vadaiccetassa dhātussa sabbassa vajjādeso hoti vā. काही वेळा संपूर्ण 'वद' (vada) धातूच्या जागी 'वज्ज' (vajja) असा आदेश होतो. Vajjāmi, vajjeyya, vadāmi, vadeyya. (मी) बोलतो (वज्जामि, वदामि), (मी) बोलावे (वज्जेय्य, वदेय्य). 501, 443. Gamissa [Pg.246] ghammaṃ. ५०१, ४४३. 'गमु' (gamu) धातूच्या जागी 'घम्म' (ghamma) आदेश होतो. Gamuiccetassa dhātussa sabbassa ghammādeso hoti vā. काही वेळा संपूर्ण 'गमु' (gamu) धातूच्या जागी 'घम्म' (ghamma) असा आदेश होतो. Ghammatu. Ghammāhi, ghammāmi. (तो) जावो (घम्मतु), (तू) जा (घम्माहि), (मी) जातो (घम्मामि). Vāti kimatthaṃ? Gacchatu, gacchāhi, gacchāmi. 'वा' (काही वेळा) असे का म्हटले आहे? या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की पुढील उदाहरणात: (तो) जावो (गच्छतु), (तू) जा (गच्छाहि), (मी) जातो (गच्छामि). 502, 493. Yamhi dā dhā mā ṭhā hā pā mahamathādīnamī. ५०२, ४९३. 'य' (ya) प्रत्यय मागे असताना, 'दा' (dā), 'धा' (dhā), 'मा' (mā), 'ठा' (ṭhā), 'हा' (hā), 'पा' (pā), 'मह' (maha), 'मथ' (matha) इत्यादी धातूंच्या अंतिम स्वराचा 'ई' (ī) होतो. Yamhi paccaye pare dā dhā mā ṭhā hā pā maha matha iccevamādīnaṃ dhātūnaṃ anto īkāramāpajjate. 'य' (ya) प्रत्यय मागे असताना, 'दा' (dā), 'धा' (dhā), 'मा' (mā), 'ठा' (ṭhā), 'हा' (hā), 'पा' (pā), 'मह' (maha), 'मथ' (matha) इत्यादी धातूंचा अंत्य स्वर 'ई' (ī) कारामध्ये बदलतो. Dīyati, dhīyati, mīyati, ṭhīyati, hīyati, pīyati, mahīyati, mathīyati. (ते) दिले जाते (दीयति), (ते) धारण केले जाते (धीयति), (ते) मोजले जाते (मीयति), उभे राहणे (ठीयति), (ते) सोडले जाते (हीयति), (ते) प्यायले जाते (पीयति), (त्याचा) सत्कार केला जातो (महीयति), (ते) घुसळले जाते (मथीयति). 503, 485. Yajassādissi. ५०३, ४८५. 'यज' (yaja) धातूच्या सुरुवातीच्या वर्णाचा 'इ' (i) होतो. Yajaiccetassa dhātussa ādissa ikārādeso hoti yapaccaye pare. 'य' (ya) प्रत्यय मागे असताना, 'यज' (yaja) या धातूच्या सुरुवातीच्या वर्णाच्या जागी 'इ' (i) कार असा आदेश होतो. Ijjate mayā buddho. माझ्याकडून (मया) बुद्धांची (बुद्धो) पूजा केली जाते (इज्जते). 504, 470. Sabbato uṃ iṃsu. ५०४, ४७०. सर्व (धातूंच्या) नंतर 'उं' च्या जागी 'इंसु' होतो. Sabbehi dhātūhi uṃvibhattissa iṃsuādeso hoti. सर्व धातूंनंतर 'उं' विभक्तीच्या जागी 'इंसु' आदेश होतो. Upasaṅkamiṃsu[Pg.247], nisīdiṃsu. (ते) जवळ गेले (उपसङ्कमिंसु), (ते) बसले (निसीदिंसु). 505, 482. Jara marānaṃ jīra jiyya miyyā vā. ५०५, ४८२. 'जर' आणि 'मर' धातूंच्या जागी कधीकधी 'जीर', 'जिय्य' आणि 'मिय्य' आदेश होतात. Jara mara iccetesaṃ dhātūnaṃ jīra jiyya miyyādesā honti vā. 'जर' आणि 'मर' या धातूंच्या जागी विकल्पेकरून 'जीर', 'जिय्य' आणि 'मिय्य' आदेश होतात. Jīrati, jīranti, jiyyati, jiyyanti, miyyati, miyyanti, marati, maranti. (तो) वृद्ध होतो (जीरति, जिय्यति), (ते) वृद्ध होतात (जीरन्ति, जिय्यन्ति); (तो) मरतो (मिय्यति, मरति), (ते) मरतात (मिय्यन्ति, मरन्ति). 506, 496. Sabbatthā’ sassādilopo ca. ५०६, ४९६. सर्व ठिकाणी 'अस्' च्या सुरुवातीचा लोप होतो. Sabbattha vibhattipaccayesu asaiccetassa dhātussa ādissa lopo hoti vā. सर्व विभक्ती आणि प्रत्यय पुढे असताना, 'अस्' या धातूच्या सुरुवातीच्या वर्णाचा विकल्पेकरून लोप होतो. Siyā, santi, sante, samāno. (ते) असावे (सिया), (ते) आहेत (सन्ति, सन्ते), असलेला (समानो). Vāti kimatthaṃ? Asi. 'वा' असे का म्हटले आहे? जेणेकरून या नियमाचा अपवाद व्हावा, जसे की: (तू) आहेस (असि). 507, 501. Asabbadhātuke bhū. ५०७, ५०१. 'असर्वधातुक' प्रत्यय पुढे असताना 'भू' होतो. Asasseva dhātussa bhūhoti vā asabbadhātuke. 'असर्वधातुक' प्रत्यय पुढे असताना 'अस्' या धातूच्या जागी विकल्पेकरून 'भू' होतो. Bhavissati. Bhavissanti. (तो) होईल (भविस्सति), (ते) होतील (भविस्सन्ति). Vāti kimatthaṃ? Āsuṃ. 'वा' असे का म्हटले आहे? जेणेकरून या नियमाचा अपवाद व्हावा, जसे की: (ते) होते (आसुं). 508, 515. Eyyassa [Pg.248] ñāto iyā ñā. ५०८, ५१५. 'ञा' धातूनंतर 'एय्य' च्या जागी 'इया' आणि 'ञा' होतात. Eyyassa vibhattissa ñāiccetāya dhātuyā parassa iyā ñāādesā honti vā. 'ञा' या धातूनंतर येणाऱ्या 'एय्य' विभक्तीच्या जागी विकल्पेकरून 'इया' आणि 'ञा' हे आदेश होतात. Jāniyā, jaññā. (त्याने) जाणावे (जानिया, जञ्ञा). Vāti kimatthaṃ? Jāneyya. 'वा' असे का म्हटले आहे? जेणेकरून या नियमाचा अपवाद व्हावा, जसे की: (त्याने) जाणावे (जानेय्य). 509, 516. Nāssa lopo yakārattaṃ. ५०९, ५१६. 'ना' चा लोप आणि 'य' कार होतो. Ñāiccetāya dhātuyā parassa nāpaccayassa lopo hoti vā, yakārattañca. 'ञा' या धातूनंतर येणाऱ्या 'ना' प्रत्ययाचा विकल्पेकरून लोप होतो आणि 'य' कार देखील होतो. Jaññā, nāyati. (त्याने) जाणावे (जञ्ञा), (तो) जाणतो (नायति). Vāti kimatthaṃ? Jānāti. 'वा' असे का म्हटले आहे? जेणेकरून या नियमाचा अपवाद व्हावा, जसे की: (तो) जाणतो (जानाति). 510, 487. Lopañcettamakāro. ५१०, ४८७. 'अ' कारचा लोप आणि 'ए' कार होतो. Akārapaccayo lopamāpajjate, ettañca hoti vā. 'अ' कार प्रत्ययाचा विकल्पेकरून लोप होतो आणि 'ए' कार देखील होतो. Vajjemi, vademi, vajjāmi, vadāmi. (मी) बोलतो (वज्जेमि, वदेमि, वज्जामि, वदामि). 511, 521. Uttamokāro. ५११, ५२१. 'ओ' कारच्या जागी 'उ' कार होतो. Okārapaccayo uttamāpajjate vā. 'ओ' कार प्रत्ययाच्या जागी विकल्पेकरून 'उ' कार होतो. Kurute, karoti. (तो) करतो (कुरुते, करोति). Okāroti [Pg.249] kimatthaṃ? Hoti. 'ओकारो' असे का म्हटले आहे? जेणेकरून जेथे 'ओ' कार नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये, जसे की: (तो) होतो (होति). 512, 522. Karassākāro ca. ५१२, ५२२. आणि 'कर' च्या 'अ' कारच्या जागी (उ कार होतो). Karaiccetassa dhātussa akāro uttamāpajjate vā. 'कर' या धातूच्या 'अ' कारच्या जागी विकल्पेकरून 'उ' कार होतो. Kurute, taroti, tubbanti, kayirati. (तो) करतो (कुरुते, तरोति), (ते) करतात (तुब्बन्ति), (तो) करतो (कयिरति). Karasseti kimatthaṃ? Sarati, marati. 'करस्स' असे का म्हटले आहे? जेणेकरून जेथे 'कर' धातू नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये, जसे की: (तो) स्मरण करतो (सरति), (तो) मरतो (मरति). 513, 435. O ava sare. ५१३, ४३५. स्वर पुढे असताना 'ओ' च्या जागी 'अव' होतो. Okārassa dhātvantassa sare pare avādeso hoti. धातूच्या शेवटी असलेल्या 'ओ' कारच्या पुढे स्वर आल्यास, त्याच्या जागी 'अव' आदेश होतो. Cavati. Bhavati. (तो) च्युत होतो (चवति), (तो) होतो (भवति). Oti kimatthaṃ? Jayati. 'ओ' असे का म्हटले आहे? जेणेकरून जेथे 'ओ' कार नसेल तेथे हा नियम लागू होऊ नये, जसे की: (तो) जिंकतो (जयति). 514, 491. E aya. ५१४, ४९१. 'ए' च्या जागी 'अय' होतो. Ekārassa dhātvantassa sare pare ayādeso hoti. धातूच्या शेवटी असलेल्या 'ए' कारच्या पुढे स्वर आल्यास, त्याच्या जागी 'अय' आदेश होतो. Nayati, jayati. (तो) नेतो (नयति), (तो) जिंकतो (जयति). 515, 541. Te [Pg.250] āvāyā kārite. ५१५, ५४१. प्रयोजक (कारित) प्रत्यय असताना, ते ('ए' आणि 'ओ') 'आव' आणि 'आय' होतात. Te o eiccete āva āyādese pāpuṇanti kārite. प्रयोजक प्रत्यय असताना, ते 'ओ' आणि 'ए' अनुक्रमे 'आव' आणि 'आय' या आदेशांना प्राप्त होतात. Lāveti, nāyeti. लावेति (तो कापायला लावतो), नायेति (तो नेण्यास लावतो). Yogavibhāgena aññasmimpi ekārassa āyādeso hoti. Gāyati, gāyanti. सूत्राच्या विभागाने (योगविभागाने), इतर ठिकाणीही 'ए' काराचा 'आय' असा आदेश होतो. गायति (तो गातो), गायन्ति (ते गातात). 516, 466. Ikārāgamo asabbadhātukamhi. ५१६, ४६६. असब्बधातुक (प्रत्यय) असताना 'इ' काराचा आगम होतो. Sabbasmiṃ asabbadhātukamhi ikārāgamo hoti. सर्व असब्बधातुक प्रत्यय असताना 'इ' काराचा आगम होतो. Gamissati, karissati, labhissati, pacissati. गमिस्सति (तो जाईल), करिस्सति (तो करेल), लभिस्सति (तो मिळवेल), पचिस्सति (तो शिजवेल). Asabbadhātukamhīti kimatthaṃ? Gacchati, karoti, labhati, pacati. 'असब्बधातुकम्हि' (असब्बधातुक असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? गच्छति (तो जातो), करोति (तो करतो), लभति (तो मिळवतो), पचति (तो शिजवतो) यांसारख्या असब्बधातुक नसलेल्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 517, 488. Kvaci dhātuvibhattipaccayānaṃ dīgha viparītādesalopāgamā ca. ५१७, ४८८. काही वेळा धातू, विभक्ती आणि प्रत्यय यांचे दीर्घीकरण, विपरीतीकरण (व्यत्यय), आदेश, लोप आणि आगम होतात. Idha ākhyāte aniddiṭṭhesu sādhanesu kvaci dhātuvibhattipaccayānaṃ dīghaviparītādesalopāgamaiccetāni kāriyāni jinavacanānurūpāni kātabbāni. येथे आख्यात (क्रियापद) प्रकरणात, न दर्शविलेल्या उदाहरणांमध्ये (साधनांमध्ये), काही वेळा धातू, विभक्ती आणि प्रत्यय यांचे दीर्घीकरण, विपरीतीकरण, आदेश, लोप आणि आगम ही कार्ये जिनवचनानुसार (बुद्धांच्या वचनानुसार) केली पाहिजेत. Jāyati[Pg.251], kareyya, jāniyā, siyā, kare, gacche, jaññā, vakkhetha, dakkhetha, dicchati, agacchi, agacchuṃ, ahosi, ahesuṃ iccevamādīni aññānipi sādhanāni yojetabbāni. जायति (तो उत्पन्न होतो), करेय्य (त्याने करावे), जानिया (त्याने जाणावे), सिया (तो असावा), करे (त्याने करावे), गच्छे (त्याने जावे), जञ्ञा (त्याने जाणावे), वक्खेथ (तुम्ही बोलावे), दक्खेथ (तुम्ही पाहावे), दिच्छति (तो पाहतो), अगच्छि (तो गेला/आला), गच्छुं (ते गेले/आले), अहोसि (तो होता), अहेसुं (ते होते) इत्यादी इतर उदाहरणेही (साधने) योजली पाहिजेत. 518, 446. Attanopadāni parassapadattaṃ. ५१८, ४४६. अत्तनोपद (विभक्ती प्रत्यय) परस्सपद होतात. Attanopadāni kvaci parassapadattamāpajjante. काही वेळा अत्तनोपद (विभक्ती प्रत्यय) परस्सपदत्वाला प्राप्त होतात. Vuccati, labbhati, paccati. वुच्चति (म्हटले जाते), लब्भति (मिळवले जाते), पच्चति (शिजवले जाते). Kvacīti kimatthaṃ? Karīyate, labbhate, paccate. 'क्वचि' (काही वेळा) असे कशासाठी म्हटले आहे? करीयते (ते केले जाते), लब्भते (ते मिळवले जाते), पच्चते (ते शिजवले जाते) यांसारख्या ठिकाणी या नियमाचा अपवाद दर्शवण्यासाठी. 519, 457. Akārāgamo hiyyattanīajjatanīkālātipattīsu. ५१९, ४५७. हिय्यत्तनी, अज्जतनी आणि कालातिपत्ती विभक्तींमध्ये 'अ' काराचा आगम होतो. Kvaci akārāgamo hoti hiyyattanī ajjatanīkālātipattiiccetāsu vibhattīsu. काही वेळा हिय्यत्तनी, अज्जतनी आणि कालातिपत्ती या विभक्ती प्रत्ययांमध्ये 'अ' काराचा आगम होतो. Agamā, agamī, agamissā. अगमा, अगमी (तो गेला), अगमिस्सा (तो गेला असता). Kvacīti kimatthaṃ? Gamā, gamī, gamissā. 'क्वचि' (काही वेळा) असे कशासाठी म्हटले आहे? गमा, गमी (तो गेला), गमिस्सा (तो गेला असता) यांसारख्या ठिकाणी या नियमाचा अपवाद दर्शवण्यासाठी. 520, 502. Brūto ī timhi. ५२०, ५०२. 'ब्रू' धातूनंतर 'ति' प्रत्यय असताना 'ई' होतो. Brūiccetāya dhātuyā īkārāgamo hoti timhi vibhattimhi. 'ब्रू' या धातूनंतर 'ति' विभक्ती प्रत्यय असताना 'ई' काराचा आगम होतो. Bravīti. ब्रवीति (तो बोलतो). 521, 425. Dhātussanto [Pg.252] lopo’nekasarassa. ५२१, ४२५. अनेक स्वर असलेल्या धातूच्या शेवटी असलेल्या वर्णाचा लोप होतो. Dhātussa anto kvaci lopo hoti anekasarassa. काही वेळा अनेक स्वर असलेल्या धातूच्या शेवटी असलेल्या वर्णाचा लोप होतो. Gacchati, sarati, marati. गच्छति (तो जातो), सरति (तो स्मरण करतो), मरति (तो मरतो). Anekasarasseti kimatthaṃ? Pāti, yāti, vāti. 'अनेकसरस्स' (अनेक स्वर असलेल्या) असे कशासाठी म्हटले आहे? पाति (तो रक्षण करतो), याति (तो जातो), वाति (तो वाहतो) यांसारख्या एकाच स्वर असलेल्या ठिकाणी हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Kvacīti kimatthaṃ? Mahīyati, mathīyati. 'क्वचि' (काही वेळा) असे कशासाठी म्हटले आहे? महीयति, मथीयति (या उदाहरणांमध्ये धातूच्या शेवटच्या स्वराचा लोप न होता तो 'ई' कारात बदलतो, हे दर्शवण्यासाठी). 522, 476. Isuyamūnamanto ccho vā. ५२२, ४७६. 'इषु' आणि 'यमु' धातूंच्या शेवटी काही वेळा 'च्छ' होतो. Isu yamu iccetesaṃ dhātūnaṃ anto ccho hoti vā. Icchati, niyacchati. 'इषु' आणि 'यमु' या धातूंच्या शेवटी काही वेळा 'च्छ' होतो. इच्छति (तो इच्छा करतो), नियच्छति (तो नियमन करतो). Vāti kimatthaṃ? Esati, niyamati. 'वा' (काही वेळा/विकल्पाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? एसति (तो शोधतो), नियमति (तो नियमन करतो) यांसारख्या ठिकाणी या नियमाचा अपवाद दर्शवण्यासाठी. 523, 526. Kāritānaṃ ṇo lopaṃ. ५२३, ५२६. प्रयोजक (कारित) प्रत्ययांच्या 'ण्' चा लोप होतो. Kāritaiccetesaṃ paccayānaṃ ṇo lopamāpajjate. 'कारित' या प्रत्ययांच्या 'ण्' चा लोप होतो. Kāreti, kārayati, kārāpeti, kārāpayati. कारेति, कारयति, कारापेति, कारापयति (तो करवून घेतो). Sāsanatthaṃ samuddiṭṭhaṃ, mayākhyātaṃ samāsato; Sakaṃ buddhivisesena, cintayantu vicakkhaṇā. शासनाच्या (बुद्ध शासनाच्या) कल्याणासाठी माझ्याद्वारे हे आख्यात (क्रियापद) प्रकरण संक्षेपात सांगितले गेले आहे. विद्वानांनी आपापल्या विशेष बुद्धीने यावर पुन्हा पुन्हा विचार करावा. Iti ākhyātakappe catuttho kaṇḍo. अशा प्रकारे आख्यात कल्पामधील (क्रियापद प्रकरणातील) चौथा खंड समाप्त झाला. Ākhyātakappo niṭṭhito. आख्यात कल्प (क्रियापद प्रकरण) समाप्त झाले. 7. Kibbidhānakappa ७. किब्बिधान कप्प (कृदंत विधान प्रकरण). Paṭhamakaṇḍa प्रथम खंड. (Ka) (क). Buddhaṃ [Pg.253] ñāṇasamuddaṃ, sabbaññuṃ lokahetu’khīṇamatiṃ; Vanditvā pubbamahaṃ, vakkhāmi sasādhanaṃ hi kitakappaṃ. ज्ञानाचे सागर असलेल्या, सर्वज्ञ असलेल्या, जगाच्या कल्याणासाठी क्षीण न होणारी (अक्षय) बुद्धी असलेल्या बुद्धांना सर्वप्रथम वंदन करून, मी साधनांसह 'कित-कप्प' (कृदंत प्रकरण) सांगेन. (Kha) (ख) Sādhanamūlaṃ hi payogaṃ,Āhu payogamūlamatthañca; Atthesu visāradamatayo,Sāsanassudharā jinassa matā. अर्थांचे सखोल ज्ञान असलेले आणि जिनाच्या (विजेत्याच्या) शासनाचे रक्षण करणारे ज्ञानी लोक असे म्हणतात की, प्रयोग (उदाहरण) हे 'साधना'वर आधारित असते आणि अर्थ हा प्रयोगावर आधारित असतो. (Ga) (ग) Andho desakavikalo,Ghatamadhutelāni bhājanena vinā; Naṭṭho naṭṭhāni yathā,Payogavikalo tathā attho. ज्याप्रमाणे मार्ग दाखवणाऱ्या व्यक्तीशिवाय आंधळा माणूस भरकटतो, आणि ज्याप्रमाणे पात्राशिवाय तूप, मध आणि तेल नष्ट होते, त्याचप्रमाणे प्रयोगाशिवाय (उदाहरणाशिवाय) अर्थ नष्ट होतो. (Gha) (घ) Tasmā saṃrakkhaṇatthaṃ, munivacanatthassa dullabhassāhaṃ; Vakkhāmi sissakahitaṃ, kitakappaṃ sādhanena yutaṃ. म्हणून, मुनींच्या (बुद्धांच्या) दुर्मिळ वचनांच्या अर्थाचे रक्षण करण्यासाठी, मी विद्यार्थ्यांच्या कल्याणासाठी 'साधना'सह कृदंत प्रकरण (कित-कप्प) सांगेन. 524, 561. Dhātuyā kammādimhi ṇo. ५२४, ५६१. जबव्हा धातूच्या आधी कर्म इत्यादी उपपद असते, तेव्हा धातूच्या पुढे 'ण' प्रत्यय लागतो. Dhātuyā kammādimhi ṇapaccayo hoti. जबव्हा धातूच्या आधी कर्म इत्यादी उपपद असते, तेव्हा धातूच्या पुढे 'ण' प्रत्यय होतो. Kammaṃ karotīti kammakāro, evaṃ kumbhakāro, mālākāro, kaṭṭhakāro, rathakāro, rajatakāro[Pg.254], suvaṇṇakāro, pattaggāho, tantavāyo, dhaññamāyo, dhammakāmo, dhammacāro. जो काम (कम्मं) करतो (करोति), तो कामगार (कम्मकारो). याचप्रमाणे कुंभार (कुंभकारो), माळी (मालाकारो), लाकूडकाम करणारा (कट्ठकारो), सुतार/रथ बनवणारा (रथकारो), चांदीचे काम करणारा (रजतकारो), सोनार (सुवण्णकारो), भिक्षापात्र धरणारा (पत्तग्गाहो), विणकर (तंतवायो), धान्य मोजणारा (धञ्ञमायो), धम्माची इच्छा बाळगणारा (धम्मकामो), धम्माचे आचरण करणारा (धम्मचारो). 525, 565. Saññāyama nu. ५२५, ५६५. संज्ञेमध्ये (नावामध्ये) 'अ' प्रत्यय आणि 'नु' चा आगम होतो. Saññāyamabhidheyyāyaṃ dhātuyā kammādimhi akārapaccayo hoti, nāmamhi ca nukārāgamo hoti. जेव्हा एखादी संज्ञा (नाव) सांगायची असते आणि धातूच्या आधी कर्म उपपद असते, तेव्हा धातूच्या पुढे 'अ' प्रत्यय होतो आणि नामामध्ये (कर्माच्या पुढे) 'नु' चा आगम होतो. Ariṃ dametīti arindamo, rājā. Vessaṃ taratīti vessantaro, rājā. Taṇhaṃ karotīti taṇhaṅkaro, bhagavā. Medhaṃ karotīti medhaṅkaro, bhagavā. Saraṇaṃ karotīti saraṇaṅkaro, bhagavā. Dīpaṃ karotīti dīpaṅkaro, bhagavā. जो शत्रूचे (अरिं) दमन करतो, तो अरिंदम (अरिंदमो) राजा. जो विश्वाचा (वेस्सं) उद्धार करतो, तो वेस्संतरा (वेस्संतरो) राजा. जे तृष्णेचा (तण्हं) नाश करतात, ते तण्हंकर (तण्हंकरो) भगवान. जे प्रज्ञेचा (मेधं) उदय करतात, ते मेधंकर (मेधंकरो) भगवान. जे शरण (सरणं) देतात, ते शरणंकर (सरणंकरो) भगवान. जे दीप (दीपं) प्रज्वलित करतात, ते दीपंकर (दीपंकरो) भगवान. 526, 567. Pure dadā ca iṃ. ५२६, ५६७. जेव्हा 'पुर' (pure) उपपद असते, तेव्हा 'दद' धातूच्या पुढे 'अ' प्रत्यय होतो आणि 'पुर' शब्दाचा 'इं' होतो. Purasadde ādimhi dadaiccetāya dhātuyā akārapaccayo hoti, purasaddassa akārassa ca iṃ hoti. जेव्हा सुरुवातीला 'पुर' हा शब्द असतो, तेव्हा 'दद' या धातूच्या पुढे 'अ' प्रत्यय होतो आणि 'पुर' शब्दातील 'अ' काराचा 'इं' होतो. Pure dānaṃ adāsīti purindado devarājā. ज्याने पूर्वी (पुरे) दान (दानं) दिले (अदासि), तो देवांचा राजा पुरिंदद (पुरिंददो देवराजा). 527, 568. Sabbato ṇvu tvāvī vā. ५२७, ५६८. कधीकधी सर्व धातूंच्या पुढे 'ण्वु', 'तु' आणि 'आवी' प्रत्यय होतात. Sabbato dhātuto kammādimhi vā akammādimhi vā akāra ṇvu tu āvīiccete paccayā honti. कधीकधी सर्व धातूंच्या पुढे, कर्म उपपद असताना किंवा नसतानाही, 'अ', 'ण्वु', 'तु' आणि 'आवी' हे प्रत्यय होतात. Taṃ [Pg.255] karotīti takkaro, hitaṃ karotīti hitakaro, vineti ettha, etenāti vā vinayo nissāya naṃ vasatīti nissayo. जो ते (तं) करतो (करोति), तो तक्कर (तक्करो); जो हित (हितं) करतो (करोति), तो हितकर (हितकरो); ज्यामध्ये किंवा ज्याच्याद्वारे विनय (शिस्त) शिकवला जातो (विनेति), तो विनय (विनयो); ज्याचा आश्रय घेऊन (निस्साय) मनुष्य राहतो (वसति), तो आश्रय/निश्रय (निस्सयो). Ṇvumhi – rathaṃ karotīti rathakārako, annaṃ, dadātīti annadāyako, vineti satteti vināyako, karotīti kārako, dadātīti dāyako, netīti nāyako. 'ण्वु' प्रत्यय असताना – जो रथ (रथं) बनवतो (करोति), तो रथ बनवणारा (रथकारो); जो अन्न (अन्नं) देतो (ददाति), तो अन्न देणारा (अन्नदायको); जो प्राण्यांना सन्मार्गावर आणतो (विनेति सत्ते), तो मार्गदर्शक/विनायक (विनायको); जो करतो (करोति), तो करणारा (कारको); जो देतो (ददाति), तो देणारा (दायको); जो नेतो (नेति), तो नेता/नायक (नायको). Tumhi – taṃ karotīti takkattā, tassa kattāti vā takkattā. Bhojanaṃ dadātīti bhojanadātā, bhojanassa dātāti vā bhojanadātā. Karotīti kattā. Saratīti saritā. 'तु' प्रत्यय असताना – जो ते (तं) करतो (करोति), तो तक्कर्ता (तक्कत्ता), किंवा त्याचा (तस्स) कर्ता (कत्ता), तो तक्कर्ता (तक्कत्ता); जो भोजन (भोजनं) देतो (ददाति), तो भोजनदाता (भोजनदाता), किंवा भोजनाचा (भोजनस्स) दाता (दाता), तो भोजनदाता (भोजनदाता); जो करतो (करोति), तो कर्ता (कत्ता); जो स्मरण करतो (सरति), तो स्मरण करणारा (सरिता). Āvīmhi – bhayaṃ passatīti bhayadassāvī iccevamādi. 'आवी' प्रत्यय असताना – जो भय (भयं) पाहतो (पस्सति), तो भय पाहणारा (भयदस्सावी) इत्यादी. 528, 577. Visa ruja padādito ṇa. ५२८, ५७७. 'विस', 'रुज', 'पद' इत्यादी धातूंच्या पुढे 'ण' प्रत्यय होतो. Visa ruja padaiccevamādīhi dhātūhi ṇa paccayo hoti. 'विस', 'रुज', 'पद' इत्यादी धातूंच्या पुढे 'ण' प्रत्यय होतो. Pavisatīti paveso, rujatīti rogo, uppajjatīti uppādo, phusatīti phasso, ucatīti oko, bhavatīti bhāvo, ayatīti āyo, sammā bujjhatīti sambodho, viharatīti vihāro. जो प्रवेश करतो (पविसति), तो प्रवेश (पवेसो); जे दुःख देते/पीडा देते (रुजति), तो रोग (रोगो); जे उत्पन्न होते (उप्पज्जति), तो उत्पाद (उप्पादो); जे स्पर्श करते (फुसति), तो स्पर्श (फस्सो); जे एकत्र केले जाते (उचति), ते घर/निवास (ओको); जे अस्तित्वात येते/होते (भवति), तो भाव (भावो); जे प्राप्त होते/येते (अयति), तो आय/उत्पन्न (आयो); जो सम्यक प्रकारे जाणतो (सम्मा बुज्झति), तो संबोधी/संबोध (संबोधो); जो विहार करतो/राहतो (विहरति), तो विहार (विहारो). 529, 580. Bhāve [Pg.256] ca. ५२९, ५८०. आणि भावसाधनामध्ये (भाव-साधनात) सुद्धा. Bhāvatthābhidheyye sabbadhātūhi ṇapaccayo hoti. भावार्थाचे (भाववाचक नामाचे) प्रतिपादन करायचे असता, सर्व धातूंनंतर 'ण' प्रत्यय लागतो. Paccate, pacanaṃ vā pāto, cajate, cajanaṃ vā cāgo, evaṃ yāgo, yogo, bhāgo, paridāho. शिजवले जाते (पच्चते) ते शिजवणे (पाको) किंवा शिजवण्याची क्रिया (पचनं) म्हणजे शिजवणे (पाको); त्याग केला जातो (चजते) तो त्याग (चागो) किंवा त्याग करण्याची क्रिया (चजनं) म्हणजे त्याग (चागो). याचप्रमाणे यागो (यज्ञ करणे), योगो (जोडणे), भागो (विभागणे), परिदाहो (दाह/जळजळ). 530, 584. Kvi ca. ५३०, ५८४. आणि 'क्वि' प्रत्यय सुद्धा होतो. Sabbadhātūhi kvipaccayo hoti. सर्व धातूंनंतर 'क्वि' प्रत्यय लागतो. Sambhavatīti sambhū, visesena bhavatīti vibhū, bhujena gacchatīti bhujago, saṃ attānaṃ khanati, saṃ saṭṭhu khanatīti vā saṅkho. जो चांगल्या प्रकारे उत्पन्न होतो (सम्भवति) तो 'सम्भु' (उत्पन्न होणारा); जो विशेष रूपाने अस्तित्वात असतो (विसेसेन भवति) तो 'विभू'; जो वळणावळणाने/कुशीने चालतो (भुजेन गच्छति) तो 'भुजगो' (सर्प); जो स्वतःला खणतो (सं अत्तानं खनति) किंवा जो चांगल्या प्रकारे खणतो (सं सुट्ठु खनति) तो 'सङ्खो' (शंख). 531, 589. Dharādīhi rammo. ५३१, ५८९. 'धर' इत्यादी धातूंनंतर 'रम्म' प्रत्यय लागतो. Dharaiccevamādīhi dhātūhi rammapaccayo hoti. 'धर' इत्यादी धातूंनंतर 'रम्म' प्रत्यय लागतो. Dharati tenāti dhammo, karīyate tanti kammaṃ. ज्याद्वारे धारण केले जाते (धरति तेन) तो 'धम्मो' (धम्म); जे केले जाते (करीयते तं) ते 'कम्मं' (कर्म). 532, 590. Tassīlādīsu ṇītvāvī ca. ५३२, ५९०. आणि 'तच्छील' (त्याचा स्वभाव) इत्यादी अर्थांमध्ये 'णी', 'तु' आणि 'आवी' प्रत्यय लागतात. Sabbehi dhātūhi tassīlādīsvatthesu ṇī tu āvī iccete paccayā honti. सर्व धातूंनंतर 'तच्छील' (त्याचा स्वभाव) इत्यादी अर्थांमध्ये 'णी', 'तु' आणि 'आवी' हे प्रत्यय लागतात. Piyaṃ pasaṃsituṃ sīlaṃ yassa rañño, so hoti rājā piyapasaṃsī, brahmaṃ carituṃ sīlaṃ yassa puggalassa so [Pg.257] hoti puggalo brahmacārī, pasayha pavattituṃ sīlaṃ yassa rañño, so hoti rājā pasayhapavatthā, bhayaṃ passituṃ sīlaṃ yassa samaṇassa, so hoti samaṇo bhayadassāvī iccevamādi. ज्या राजाचा स्वभाव प्रिय गोष्टींची प्रशंसा करण्याचा (पियं पसंसितुं सीलं) असतो, तो राजा 'पियपसंसी' (प्रियप्रशंसा करणारा) होतो; ज्या व्यक्तीचा स्वभाव ब्रह्मचर्य पाळण्याचा (ब्रह्मं चरितुं सीलं) असतो, ती व्यक्ती 'ब्रह्मचारी' होते; ज्या राजाचा स्वभाव बळजबरीने राज्य चालवण्याचा (पसह्य पवत्तितुं सीलं) असतो, तो राजा 'पसह्यपवत्ता' (बळजबरीने राज्य चालवणारा) होतो; ज्या श्रमणाचा स्वभाव भय पाहण्याचा (भयं पस्सितुं सीलं) असतो, तो श्रमण 'भयदस्सावी' (भय पाहणारा) होतो, इत्यादी. 533, 591. Sadda ku dha cala maṇḍattharudhādīhiyu. ५३३, ५९१. 'सद्द' (शब्द करणे), 'कुध' (क्रोध करणे), 'चल' (कंप पावणे), 'मण्ड' (सुशोभित करणे) आणि 'रुच' (शोभून दिसणे) इत्यादी अर्थांच्या धातूंनंतर 'यु' प्रत्यय लागतो. Sadda kudha cala maṇḍatthehi ca rucādīhi ca dhātūhi yupaccayo hoti tassīlādīsvatthesu. 'सद्द' (शब्द करणे), 'कुध' (क्रोध करणे), 'चल' (कंप पावणे), 'मण्ड' (सुशोभित करणे) या अर्थांच्या धातूंनंतर आणि 'रुच' (शोभून दिसणे) इत्यादी धातूंनंतर 'तच्छील' (त्याचा स्वभाव) इत्यादी अर्थांमध्ये 'यु' प्रत्यय लागतो. Ghosanasīlo ghosano, bhāsanasīlo bhāsano. Evaṃ viggaho kātabbo. Kodhano, dosano, calano, kampano, phandano, maṇḍano, vibhūsano, rocano, jotano, vaḍḍhano. घोषणा (आवाज) करण्याचा स्वभाव असलेला तो 'घोसणो' (घोषणा करणारा), बोलण्याचा स्वभाव असलेला तो 'भासणो' (बोलणारा). या प्रकारे विग्रह करावा. कोधनो (क्रोध करणारा), दोसनो (द्वेष करणारा), चलनो (कंप पावणारा), कम्पनो (थरथरणारा), फन्दनो (तडफडणारा), मण्डनो (सुशोभित करणारा), विभूसनो (विभूषित करणारा), रोचनो (शोभणारा), जोतनो (प्रकाशणारा), वड्ढनो (वाढवणारा). 534, 562. Pārādigamimhā rū. ५३४, ५६२. पूर्वपदाच्या ठिकाणी 'पार' इत्यादी शब्द असताना 'गमु' धातूनंतर 'रू' प्रत्यय लागतो. Gamuiccetamhā dhātumhā pārasaddādimhā rūpaccayo hoti tassīlādīsvatthesu. 'गमु' या धातूच्या आधी 'पार' इत्यादी शब्द असताना, 'तच्छील' (त्याचा स्वभाव) इत्यादी अर्थांमध्ये 'रू' प्रत्यय लागतो. Bhavassa pāraṃ bhavapāraṃ, bhavapāraṃ gantuṃ sīlaṃ yassa purisassa, so hoti puriso bhavapāragū. अस्तित्वाचा (भवाचा) पलीकडचा तीर म्हणजे 'भवपार'. ज्या पुरुषाचा स्वभाव भवाच्या पलीकडच्या तीरावर जाण्याचा आहे, तो पुरुष 'भवपारगू' (भवपार जाणारा) होतो. Tassīlādīsvīti kimatthaṃ? Pāraṅgato. 'तच्छीलादींमध्ये' असे का म्हटले आहे? जेथे 'तच्छील' (त्याचा स्वभाव) इत्यादी अर्थ नसतात, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की पुढील उदाहरणात: 'पारङ्गतो' (पलीकडे गेलेला). Pārādigamimhāti kimatthaṃ? Anugāmī. 'पारादिगमिम्हा' ('पार' इत्यादी आधी असलेल्या 'गमु' धातूनंतर) असे का म्हटले आहे? जेथे सुरुवातीला 'पार' इत्यादी शब्द नसतात, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की पुढील उदाहरणात: 'अनुगामी' (मागोमाग जाणारा). 535, 593. Bhikkhādito [Pg.258] ca. ५३५, ५९३. आणि 'भिक्ख' इत्यादी धातूंनंतरही. Bhikkhaiccevamādīhi dhātūhi rūpaccayo hoti tassīlādīsvatthesu. 'भिक्ख' इत्यादी धातूंनंतर 'तच्छील' (त्याचा स्वभाव) इत्यादी अर्थांमध्ये 'रू' प्रत्यय लागतो. Bhikkhanasīlo yācanasīlo bhikkhu, vijānanasīlo viññū. भिक्षा मागण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'भिक्खू', याचना करण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'भिक्खू'; आणि विशेष जाणण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'विञ्ञू' (सुज्ञ/ज्ञानी). 536, 594. Tanatyādīnaṃ ṇuko. ५३६, ५९४. 'तन्' इत्यादी धातूंनंतर 'णुक' प्रत्यय होतो. Hanatyādīnaṃ dhātūnaṃ ante ṇukapaccayo hoti tassīlādīsvatthesu. 'हन्' इत्यादी धातूंच्या शेवटी 'तच्छील' (त्याचा स्वभाव) इत्यादी अर्थांमध्ये 'णुक' प्रत्यय लागतो. Āhananasīlo āghātuko, karaṇasīlo kāruko. प्रहार करण्याचा (मारण्याचा) ज्याचा स्वभाव आहे तो 'आघातुको'; कार्य करण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'कारुको'. 537, 566. Nu niggahitaṃ padante. ५३७, ५६६. पदाच्या शेवटी 'नु' चा 'निग्गहीत' (अनुस्वार) होतो. Padante nukārāgamo niggahitamāpajjate. पदाच्या शेवटी आलेला 'नु' हा आगम 'निग्गहीत' (अनुस्वार) बनतो. Ariṃ dametīti arindamo, rājā. Vessaṃ taratīti vessantaro, rājā. Pabhaṃ karotīti pabhaṅkaro, bhagavā. शत्रूचे दमन करतो तो 'अरिंदमो' राजा. प्रजेचे तारण करतो तो 'वेस्संतरो' राजा. प्रकाश निर्माण करतात ते 'पभङ्करो' भगवान. 538, 595. Saṃhanāññāya vā ro gho. ५३८, ५९५. काही वेळा 'सं' उपसर्ग असलेल्या 'हन्' धातूनंतर आणि इतर धातूंनंतर 'र' प्रत्यय लागतो, आणि 'हन्' च्या जागी 'घ' होतो. Saṃpubbāya hanaiccetāya dhātuyā, aññāya vā dhātuyā rapaccayo, hanassa ca gho hoti. काही वेळा, सुरुवातीला 'सं' उपसर्ग असलेल्या 'हन्' धातूनंतर आणि इतर धातूंनंतर 'र' प्रत्यय लागतो, आणि 'हन्' च्या जागी 'घ' आदेश होतो. Samaggaṃ [Pg.259] kammaṃ samupagacchatīti saṅgho, samantato nagarassa māhire khaññatīti parikhā, antaṃ karotīti antako. जे समग्र (एकत्रित) कर्माप्रत जातात तो 'संघो' (संघ); नगराच्या सभोवताली बाहेर जे खणले जाते ती 'परिखा' (खंदक); आणि जो अंत करतो तो 'अंतको' (मृत्यू). Saṃiti kimatthaṃ? Upahananaṃ upaghāto. 'सं' असे का म्हटले आहे? जेथे 'सं' उपसर्ग नसतो तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की पुढील उदाहरणात: 'उपहननं' (इजा करणे), 'उपघातो' (आघात). 539, 558. Ramhi ranto rādino. ५३९, ५५८. 'र' प्रत्यय असताना, 'र' आदिसहित धातूच्या शेवटी लोप होतो. Ramhi paccaye pare sabbo dhātvanto rakārādi lopo hoti. 'र' प्रत्यय नंतर येत असताना, र-कारासह धातूच्या शेवटच्या भागाचा पूर्णपणे लोप होतो. Antako, pāragū, satthā, diṭṭho iccevamādi. 'अंतको' (अंत करणारा), 'पारगू' (पलीकडे गेलेला), 'सत्था' (शास्ता/गुरु), 'दिट्ठो' (पाहिलेला) इत्यादी. 540, 545. Bhāvakammesu tabbānīyā. ५४०, ५४५. भाववाचक नाम (भाव) आणि कर्मवाच्य (कर्म) यामध्ये 'तब्ब' आणि 'अनीय' प्रत्यय लागतात. Bhāvakammaiccetesvatthesu tabba anīyaiccete paccayā honti sabbadhātūhi. सर्व धातूंनंतर भाव (भाववाचक) आणि कर्म (कर्मवाच्य) या अर्थांमध्ये 'तब्ब' आणि 'अनीय' हे प्रत्यय लागतात. Bhavitabbaṃ, bhavanīyaṃ, āsitabbaṃ, āsanīyaṃ, pajjitabbaṃ, pajjanīyaṃ, kattabbaṃ, karaṇīyaṃ, gantabbaṃ, gamanīyaṃ. असणे किंवा असावे (भवितब्बं, भवनीयं); बसणे किंवा बसावे (आसितब्बं, आसनीयं); जाणे किंवा जावे (पज्जितब्बं, पज्जनीयं); करणे किंवा करावे (कत्तब्बं, करणीयं); जाणे किंवा जावे (गंतब्बं, गमनीयं). 541, 552. Ṇyo ca. ५४१, ५५२. आणि 'ण्य' प्रत्यय देखील लागतो. Bhāvakammesu sabbadhātūhi ṇyapaccayo hoti. भाव आणि कर्म यामध्ये सर्व धातूंनंतर 'ण्य' प्रत्यय लागतो. Kattabbaṃ kāriyaṃ, jetabbaṃ jeyyaṃ, netabbaṃ neyyaṃ, iccevamādi. करणे किंवा करावे (कत्तब्बं, कारियं); जिंकणे किंवा जिंकावे (जेतब्बं, जेय्यं); नेणे किंवा न्यावे (नेतब्बं, नेय्यं) इत्यादी. Caggahaṇena [Pg.260] teyyapaccayo hoti. Ñātabbaṃ ñāteyyaṃ, daṭṭheyyaṃ, patteyyaṃ iccevamādi. 'च' च्या ग्रहणाने 'तेय्य' प्रत्यय लागतो; जसे की: जाणणे किंवा जाणावे (ञातब्बं, ञातेय्यं); पाहणे किंवा पाहावे (दिट्ठेय्यं); प्राप्त करणे किंवा प्राप्त करावे (पत्तेय्यं) इत्यादी. 542, 557. Karamhā ricca. ५४२, ५५७. 'कर' धातूनंतर 'रिच्च' प्रत्यय लागतो. Karaiccetamhā dhātumhā riccapaccayo hoti bhāvakammesu. 'कर' या धातूनंतर भाव आणि कर्म यामध्ये 'रिच्च' प्रत्यय लागतो. Kattabbaṃ kiccaṃ. करणे किंवा जे केले पाहिजे (कत्तब्बं, किच्चं). 543, 555. Bhūto’bba. ५४३, ५५५. 'भू' धातूनंतर 'अब्ब' प्रत्यय लागतो. Bhūiccetāya dhātuyā ṇyapaccayassa ūkārena saha abbādeso hoti bhāvakammesu. 'भू' या धातूच्या 'ऊ' कारासह 'ण्य' प्रत्ययाचा भाव आणि कर्म यामध्ये 'अब्ब' असा आदेश होतो. Bhavitabbo bhabbo, bhavitabbaṃ bhabbaṃ. जे व्हावे किंवा योग्य असावे (भवितब्बो, भब्बो); असणे किंवा होणे (भवितब्बं, भब्बं). 544, 556. Vada mada gamu yuja garahākārādīhi jja mma gga yheyyā gāro vā. ५४४, ५५६. काही वेळा 'वद', 'मद', 'गमु', 'युज', 'गरह' आणि 'आ' कारान्त इत्यादी धातूंच्या जागी अनुक्रमे 'ज्ज', 'म्म', 'ग्ग', 'य्ह' आणि 'एय्य' आदेश होतात, आणि 'गर' च्या जागी 'गार' होतो. Vada mada gamu yuja garahākārantaiccevamādīhi dhātūhi ṇyapaccayassa yathāsaṅkhyaṃ jja mma gga yha eyyādesā honti vā dhātvantena saha, garassaṃ ca gāro hoti bhāvakammesu. काही वेळा, भाव आणि कर्म यामध्ये 'वद', 'मद', 'गमु', 'युज', 'गरह' आणि 'आ' कारान्त इत्यादी धातूंच्या शेवटी 'ण्य' प्रत्यय लागताना धातूच्या शेवटच्या अक्षरासह अनुक्रमे 'ज्ज', 'म्म', 'ग्ग', 'य्ह' आणि 'एय्य' असे आदेश होतात, आणि 'गर' च्या जागी 'गार' होतो. Vattabbaṃ vajjaṃ, madanīyaṃ majjaṃ, gamanīyaṃ gammaṃ, yojanīyaṃ yoggaṃ, garahitabbaṃ gārayhaṃ, dātabbaṃ deyyaṃ, pātabbaṃ peyyaṃ, hātabbaṃ [Pg.261] heyyaṃ, mātabbaṃ meyyaṃ, ñātabbaṃ ñeyyaṃ, iccevamādi. बोलणे किंवा जे बोलले पाहिजे (वत्तब्बं, वज्जं); उन्मत्त करणारे (मदनीयं, मज्जं); जाणे किंवा जेथे गेले पाहिजे (गमनीयं, गम्मं); जोडणे किंवा जे जोडले पाहिजे (योजनीयं, योग्गं); निंदा करणे किंवा जे निंदनीय आहे (गरहितब्बं, गारय्हं); देणे किंवा जे दिले पाहिजे (दातब्बं, देय्यं); पिणे किंवा जे प्यायले पाहिजे (पातब्बं, पेय्यं); त्यागणे किंवा जे त्यागले पाहिजे (हातब्बं, हेय्यं); मोजणे किंवा जे मोजले पाहिजे (मातब्बं, मेय्यं); जाणणे किंवा जे जाणले पाहिजे (ञातब्बं, ञेय्यं) इत्यादी. 545, 548. Te kiccā. ५४५, ५४८. ते 'किच्च' प्रत्यय आहेत. Ye paccayā tabbādayo riccantā, te kiccasaññāti veditabbā. 'तब्ब' पासून सुरू होऊन 'रिच्च' पर्यंत संपणारे जे प्रत्यय आहेत, त्यांना 'किच्च' संज्ञक समजावे. Kiccasaññāya kiṃpayojanaṃ? Bhāvakammesu kiccattakhatthā. 'किच्च' संज्ञेचे काय प्रयोजन आहे? "भावकम्मेसु किच्चत्तखत्था" (६२५) या सूत्रात त्याचा उपयोग करण्यासाठी. 546, 562. Aññe kita. ५४६, ५६२. इतर प्रत्ययांना 'कित' संज्ञक समजावे. Aññe paccayā kita eva saññā honti. इतर प्रत्ययांना 'कित्' (kit) अशी संज्ञा दिली जाते. Kita saññāya kiṃpayojanaṃ? Kattari kita. 'कित्' या संज्ञेचे काय प्रयोजन आहे? 'कत्तरि कित्' (Kattari kit) या सूत्रात उपयोगासाठी. 547, 596. Nandādīhi yu. ५४७, ५९६. 'नन्द' इत्यादी धातूंनंतर 'यु' (yu) प्रत्यय लागतो. Nandādīhi dhātūhi yupaccayo hoti bhāvakammesu. 'नन्द' इत्यादी धातूंनंतर भाव (bhāva) आणि कर्म (kamma) अर्थांमध्ये 'यु' प्रत्यय होतो. Nandīyate nandanaṃ, ninditabbaṃ vā nandanaṃ, gahaṇīyaṃ gahaṇaṃ, caritabbaṃ caraṇaṃ, evaṃ sabbattha yojetabbā. आनंद घेणे (नन्दीयते, नन्दितब्बं, नन्दनं); ग्रहण करणे (गहणीयं, गहणं); फिरणे/आचरण करणे (चरितब्बं, चरणं). अशा प्रकारे सर्वत्र रूपे बनवावीत. 548, 597. Kattukaraṇapadesesu ca. ५४८, ५९७. तसेच कर्ता (kattu), करण (karaṇa) आणि स्थान/अधिकरण (padesa) या अर्थांमध्येही. Kattukaraṇapadesaiccetesvatthesu ca yupaccayo hoti. कर्ता, करण आणि स्थान या अर्थांमध्येही 'यु' प्रत्यय होतो. Kattari [Pg.262] tāva – rajaṃ haratīti rajoharaṇaṃ toyaṃ. प्रथम कर्ता अर्थात: जो धूळ (रजं) हरण करतो (हरति), म्हणून (ति) त्याला 'रजोहरण' (धूळ दूर करणारे) म्हणतात, ते पाणी (तोयं) होय. Karaṇe tāva – karoti tenāti karaṇaṃ. करण अर्थात: ज्याच्याद्वारे (तेन) करतो (करोति), म्हणून (ति) त्याला 'करण' (साधन) म्हणतात. Padese tāva – tiṭṭhanti tasminti ṭhānaṃ. Evaṃ sabbattha yojetabbā. स्थान अर्थात: जेथे (तस्मिं) ते उभे राहतात (तिट्ठन्ति), म्हणून (ति) त्याला 'ठाण' (स्थान) म्हणतात. अशा प्रकारे सर्वत्र रूपे बनवावीत. 549, 550. Rahādito ṇa. ५४९, ५५०. 'र', 'ह' इत्यादींनंतर 'ण' (ṇa) होतो. Rakārahakārādyantehi dhātūhi anādesassa nassa ṇo hoti. 'र' आणि 'ह' इत्यादी शेवटी असणाऱ्या धातूंनंतर 'अन' आदेशाच्या 'न' चा 'ण' होतो. Karoti tenāti karaṇaṃ, pūreti tenāti pūraṇaṃ. Gahaṇīyaṃ tenāti gahaṇaṃ. Evamaññepi yojetabbā. ज्याच्याद्वारे (तेन) करतो (करोति), म्हणून (ति) 'करण'; ज्याच्याद्वारे (तेन) पूर्ण करतो (पूरेति), म्हणून (ति) 'पूरण'; ज्याच्याद्वारे (तेन) ग्रहण केले जाते (गहणीयं), म्हणून (ति) 'गहण' (ग्रहण). अशा प्रकारे इतरही रूपे बनवावीत. Iti kibbidhānakappe paṭhamo kaṇḍo. अशा प्रकारे कृदन्त प्रकरणात (किब्बिधानकप्प) पहिला खंड समाप्त झाला. Dutiyakaṇḍa दुसरा खंड 550, 546. Ṇādayo tekālikā. ५५०, ५४६. 'ण' इत्यादी प्रत्यय त्रिकाळदर्शक (tekālikā) असतात. Ṇādayo paccayā yupaccayantā tekālikāti veditabbā. 'ण' पासून सुरू होणारे आणि 'यु' प्रत्ययापर्यंतचे प्रत्यय त्रिकाळदर्शक (tekālika) आहेत असे समजावे. Kumbhaṃ karoti akāsi karissatīti kumbhakāro, karoti akāsi karissati tenāti karaṇaṃ. Evamaññepi yojetabbā. जो घट (कुम्भं) बनवतो (करोति), बनवला (अकासि) किंवा बनवेल (करिस्सति), म्हणून (ति) त्याला 'कुंभकार' (कुंभार) म्हणतात; ज्याच्याद्वारे (तेन) करतो (करोति), केले (अकासि) किंवा करेल (करिस्सति), म्हणून (ति) 'करण'. अशा प्रकारे इतरही रूपे बनवावीत. 551, 598. Saññāyaṃ [Pg.263] dā dhāto i. ५५१, ५९८. संज्ञा (नाव) दर्शवायची असल्यास, 'दा' आणि 'धा' धातूंनंतर 'इ' (i) प्रत्यय लागतो. Saññāyamabhidheyyāyaṃ dā dhāto ipaccayo hoti. जबव्हा संज्ञा (नाव) अभिप्रेत असते, तेव्हा 'दा' आणि 'धा' धातूंनंतर 'इ' प्रत्यय होतो. Paṭhamaṃ ādīyatīti ādi, udakaṃ dadhātīti udami, mahodakāni dadhātīti mahodadhi, vālāni dadhāti tasminti vāladhi, sammā dhīyatīti sandhi. जे प्रथम (पठमं) ग्रहण केले जाते (आदीयति), म्हणून (ति) 'आदि' (सुरुवात); जे पाणी (उदकं) धारण करते (दधाति), म्हणून (ति) 'उदधि' (समुद्र); जे विपुल पाणी (महोदकानि) धारण करते, म्हणून 'महोदधि' (महासागर); जे केस (वालानि) धारण करते, म्हणून 'वालधि' (शेपूट); जे योग्य प्रकारे (सम्मा) जोडले जाते (धीयति), म्हणून 'संधि'. 552, 609. Ti kita cāsiṭṭhe. ५५२, ६०९. आशीर्वाद देण्याच्या अर्थात 'ति' (ti) आणि 'कित्' (kit) प्रत्ययही होतात. Saññāyamabhidheyyāyaṃ sabbadhātūhi tipaccayo hoti, kita ca āsiṭṭhe. आशीर्वादाच्या अर्थात जेव्हा संज्ञा अभिप्रेत असते, तेव्हा सर्व धातूंनंतर 'ति' आणि 'कित्' प्रत्यय होतात. Jino janaṃ bujjhatūti jinabuddhi, dhanaṃ assa bhavatūti dhanabhūti, bhavatūti bhūto, bhavatūti bhāvo, dhammo janaṃ dadātūti dhammadinno, vaḍḍhatūti vaḍḍhamāno. Evamaññepi yojetabbā. जिन (बुद्ध) लोकांना जाणोत (जिनो जनं बुज्झतु), म्हणून (ति) 'जिनबुद्धि'; त्याला धन लाभो (धनं अस्स भवतु), म्हणून 'धनभूति'; तो असो/होवो (भवतु), म्हणून 'भूतो' किंवा 'भावो'; धम्म लोकांना देवो (धम्मो जनं ददातु), म्हणून 'धम्मदिन्न'; त्याची वृद्धी होवो (वड्ढतु), म्हणून 'वड्ढमानो'. अशा प्रकारे इतरही रूपे बनवावीत. 553, 599. Itthiyamatiyavo vā. ५५३, ५९९. स्त्रीलिंगी अर्थात कधीकधी 'अ' (a), 'ति' (ti) आणि 'यु' (yu) प्रत्यय होतात. Itthiyamabhidheyyāyaṃ sabbadhātūhi akāra ti yu iccete paccayā honti vā. जेव्हा स्त्रीलिंग अभिप्रेत असते, तेव्हा सर्व धातूंनंतर 'अ' कार, 'ति' आणि 'यु' हे प्रत्यय विकल्प करून (कधीकधी) होतात. Jīratītī jarā, maññatīti mati, cetayatīti cetanā, vedayatīti vedanā. Evamaññepi yojetabbā. जे जीर्ण होते/वृद्ध होते (जीरति), म्हणून (ति) 'जरा' (वृद्धावस्था); जे विचार करते/जाणते (मञ्ञति), म्हणून 'मति' (बुद्धी); जे चेतना निर्माण करते (चेतयति), म्हणून 'चेतना'; ज्याची जाणीव/अनुभूती होते (वेदयति), म्हणून 'वेदना'. अशा प्रकारे इतरही रूपे बनवावीत. 554, 601. Karato [Pg.264] ririya. ५५४, ६०१. 'कर' (kara) धातूनंतर 'रिरिय' (ririya) प्रत्यय होतो. Karato itthiyamanitthiyaṃ vā abhikheyyāyaṃ rirīyapaccayo hoti vā. 'कर' धातूनंतर स्त्रीलिंग किंवा अ-स्त्रीलिंग (पुल्लिंग/नपुंसकलिंग) अभिप्रेत असताना विकल्प करून 'रिरिय' प्रत्यय होतो. Kattabbā kiriyā, karaṇīyaṃ kiriyaṃ. [स्त्रीलिंगात] जे केले पाहिजे (कत्तब्बा), ती 'क्रिया' (किरिया); [नपुंसकलिंगात] जे केले पाहिजे (करणीयं), ते 'क्रियं' (किरियं). 555, 612. Atīte tatavantutāvī. ५५५, ६१२. भूतकाळात 'त' (ta), 'तवन्तु' (tavantu) आणि 'तावी' (tāvī) प्रत्यय होतात. Atīte kāle sabbadhātūhi tatavantutāvīiccete paccayā honti. भूतकाळात सर्व धातूंनंतर 'त', 'तवन्तु' आणि 'तावी' हे प्रत्यय होतात. Huto, hutavā, hutāvī. Vusito, vusitavā, vusitāvī. Bhutto, bhuttavā, bhuttāvī. यज्ञ केला/अर्पण केले (हुतो, हुतवा, हुतावी); राहिले/वास्तव्य केले (वुसितो, वुसितवा, वुसितावी); भोजन केले/खाल्ले (भुत्तो, भुत्तवा, भुत्तावी). 556, 622. Bhāvakammesu ta. ५५६, ६२२. भाव (bhāva) आणि कर्म (kamma) अर्थांमध्ये 'त' (ta) प्रत्यय होतो. Bhāvakammesu atīte kāle tapaccayo hoti sabbadhātūhi. भूतकाळात, भाव आणि कर्म अर्थांमध्ये सर्व धातूंनंतर 'त' प्रत्यय होतो. Bhāve tāva – tassa gītaṃ, naccaṃ, naṭṭaṃ, hasitaṃ. प्रथम भाव अर्थात: त्याचे (तस्स) गायन (गीतं); त्याचे नृत्य (नच्चं, नट्टं); त्याचे हसणे (हसितं). Kammani tāva – tena bhāsitaṃ, desitaṃ. कर्म अर्थात: त्याच्याद्वारे (तेन) बोलले गेले (भासितं); त्याच्याद्वारे उपदेश केला गेला (देसितं). 557, 606. Budhagamāditthe kattari. ५५७, ६०६. 'बुध', 'गमु' इत्यादी धातूंच्या अर्थात कर्ता अर्थामध्ये. Budhagamuiccevamādīhi dhātūhi tadatthe gamyamāne tapaccayo hoti kattari sabbakāle. 'बुध', 'गमु' इत्यादी धातूंचा तो अर्थ अभिप्रेत असताना, कर्ता अर्थात सर्व काळांमध्ये 'त' प्रत्यय होतो. Sabbe [Pg.265] saṅkhatāsaṅkhate dhamme bujjhati abujjhi bujjhissatīti buddho, saraṇaṅgato, samathaṅgato, amathaṅgato, jānāti ajāni jānissatīti ñāto, iccevamādi. जे सर्व संस्कृत आणि असंस्कृत धम्मांना (सब्बे सङ्खतासङ्खते धम्मे) जाणतात (बुज्झति), जाणले (अबुज्झि) किंवा जाणतील (बुज्झिस्सति), म्हणून (ति) त्यांना 'बुद्ध' (बुद्धो) म्हणतात; जे शरणागत झाले आहेत/जातात/जातील (सरणङ्गतो); जे शमथाप्रत (एकाग्रतेप्रत) गेले आहेत/जातात/जातील (समथङ्गतो); जे अमृतापदाप्रत (निर्वाणाप्रत) गेले आहेत/जातात/जातील (अमतङ्गतो); जे जाणतात (जानाति), जाणले (अजानि) किंवा जाणतील (जानिस्सति), म्हणून त्यांना 'ज्ञात' (ञातो) म्हणतात; इत्यादी. 558, 602. Jito ina sabbattha. ५५८, ६०२. सर्वत्र 'जि' धातूच्या पुढे 'इन' प्रत्यय होतो. Jiiccetāya dhātuyā inapaccayo hoti sabbakāle kattari. सर्व काळात कर्त्याच्या अर्थी 'जि' या धातूच्या पुढे 'इन' प्रत्यय होतो. Pāpake akusale dhamme jināti ajini jinissatīti jino. जो पापकारक अकुशल धर्मांवर विजय मिळवतो (जिनाति), विजय मिळवला (अजिनि), किंवा विजय मिळवेल (जिनिस्सति), तो 'जिन' (विजेता) होय. 559, 603. Supato ca. ५५९, ६०३. 'सुप्' धातूच्या पुढेही [हा प्रत्यय होतो]. Supaiccetāya dhātuyā inapaccayo hoti kattari, bhāve ca. कर्त्याच्या आणि भावाच्या अर्थी 'सुप्' या धातूच्या पुढे 'इन' प्रत्यय होतो. Supatīti supinaṃ, supīyate supinaṃ. जो झोपतो ते 'सुपिनं' (स्वप्न/झोप), किंवा ज्याच्याद्वारे झोपले जाते ते 'सुपिनं'. 560, 604. Īsaṃdusūhi kha. ५६०, ६०४. 'ईसं', 'दु' आणि 'सु' यांच्यापुढे 'ख' प्रत्यय होतो. Īsaṃdususaddādīhi sabbadhātūhi khapaccayo hoti. 'ईसं', 'दु' आणि 'सु' या शब्दांनी युक्त असलेल्या सर्व धातूंच्या पुढे 'ख' प्रत्यय होतो. Īsassayo, dussayo, sussayo bhavatā, īsakkaraṃ, dukkaraṃ, sukaraṃ, bhavatā. आपल्याद्वारे थोडे कठीण निजणे ते 'ईसस्सयो'; कठीण निजणे ते 'दुस्सयो'; सुखद निजणे ते 'सुस्सयो'. आपल्याद्वारे थोडे कठीण करणे ते 'ईसक्करं'; कठीण करणे ते 'दुक्करं'; सुलभ करणे ते 'सुकरं'. 561, 636. Icchatthesu [Pg.266] samānakattukesu tave tuṃ vā. ५६१, ६३६. समान कर्ता असलेल्या इच्छेच्या अर्थी 'तवे' आणि 'तुं' हे प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. Icchatthesu samānakattukesu sabbadhātūhitavetuṃiccete paccayā honti sabbakāle kattari. समान कर्ता असलेल्या इच्छेच्या अर्थी सर्व काळात कर्त्यामध्ये सर्व धातूंच्या पुढे 'तवे' आणि 'तुं' हे प्रत्यय होतात. Puññāni kātave, saddhammaṃ sotu micchati. तो पुण्ये करण्यास (कातवे) इच्छितो; तो सद्धम्म ऐकण्यास (सोतुं) इच्छितो. 562, 638. Arahasakkādīsu ca. ५६२, ६३८. 'अरह', 'सक्क' इत्यादींच्या अर्थी सुद्धा [हा प्रत्यय होतो]. Arahasakkādīsu ca atthesu sabbadhātūhi tuṃpaccayo hoti. 'अरह' (योग्य असणे), 'सक्क' (समर्थ असणे) इत्यादी अर्थांमध्ये सर्व धातूंच्या पुढे 'तुं' प्रत्यय होतो. Ko taṃ ninditumarahati, sakkā jetuṃ dhanena vā. Evamaññepi yojetabbā. त्याची निंदा करण्यास कोण योग्य आहे? किंवा धनाने जिंकणे शक्य आहे. याचप्रमाणे इतरही रूपे बनवावीत. 563, 639. Pattavacane alamatthesu ca. ५६३, ६३९. प्राप्तीचे वचन आणि 'अलं' (पुरेसे/योग्य) च्या अर्थी सुद्धा [हा प्रत्यय होतो]. Pattavacane alamatthesu sabbadhātūhi tuṃpaccayo hoti. प्राप्तीचे वचन आणि 'अलं' च्या अर्थी सर्व धातूंच्या पुढे 'तुं' प्रत्यय होतो. Alameva dānāni dātuṃ, alameva puññāni kātuṃ. दान देण्यासाठी हीच योग्य वेळ आहे; पुण्ये करण्यासाठी हीच योग्य वेळ आहे. 564, 640. Pubbakāle’ kakattukānaṃ tuna tvāna tvāvā. ५६४, ६४०. पूर्वकाळात समान कर्ता असलेल्या क्रियांच्या बाबतीत 'तुन', 'त्वान' आणि 'त्वा' हे प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. Pubbakāle ekakattukānaṃ dhātūnaṃ tunatvāna tvāiccete paccayā honti vā. पूर्वकाळात समान कर्ता असलेल्या धातूंच्या पुढे 'तुन', 'त्वान' आणि 'त्वा' हे प्रत्यय विकल्पेकरून होतात. Kātuna [Pg.267] kammaṃ gacchati, akātuna puññaṃ kilissati, sattā sutvāna dhammaṃ modanti, ripuṃ jitvāna vasati, dhammaṃ sutvāna’ssa etadahosi, ito sutvāna amutra kathayanti, sutvā jānissāma. Evaṃ sabbattha yojetabbā. कर्म करून (कातुन) तो जातो; पुण्य न करून (अकातुन) तो क्लेश पावतो; प्राणी धम्म ऐकून (सुत्वान) आनंदित होतात; शत्रूला जिंकून (जित्वान) तो राहतो; धम्म ऐकल्यामुळे त्याला असा विचार आला; येथून ऐकून ते तिथे सांगतात; ऐकून आम्ही जाणू. याप्रमाणे सर्वत्र रूपे बनवावीत. 565, 646. Vattamāne mānantā. ५६५, ६४६. वर्तमानकाळात 'मान' आणि 'अन्त' प्रत्यय होतात. Vattamāne kāle sabbadhātūhi mānaantaiccete paccayā honti. वर्तमानकाळात सर्व धातूंच्या पुढे 'मान' आणि 'अन्त' हे प्रत्यय होतात. Saramāno rodati. Gacchanto gaṇhāti. स्मरण करत (सरमानो) तो रडतो. जात असताना (गच्छन्तो) तो ग्रहण करतो. 566, 574. Sāsādīhi ratthu. ५६६, ५७४. 'सास' इत्यादी धातूंच्या पुढे 'रत्थु' प्रत्यय होतो. Sāsaiccevamādīhi dhātūhi ratthupaccayo hoti. 'सास' इत्यादी धातूंच्या पुढे 'रत्थु' प्रत्यय होतो. Sāsatīti satthā, sāsati hiṃsatīti vā satthā. जो उपदेश करतो (सासति) तो 'सत्था' (शास्ता/गुरु); किंवा जो उपदेश करतो आणि क्लेशांचा नाश करतो (हिंसति) तो 'सत्था'. 567, 575. Pātitoritu. ५६७, ५७५. 'पा' इत्यादी धातूंच्या पुढे 'रितु' प्रत्यय होतो. Pāiccetāya dhātuyā ritupaccayo hoti. 'पा' या धातूच्या पुढे 'रितु' प्रत्यय होतो. Pāti puttanti pitā. जो पुत्राचे रक्षण करतो (पाति) तो 'पिता' (वडील). 568, 576. Mānādīhi [Pg.268] rātu. ५६८, ५७६. 'मान' इत्यादी धातूंच्या पुढे 'रातु' प्रत्यय होतो. Mānaiccevamādīhi dhātūhi rātupaccayo hoti, ritu paccayo ca. 'मान' इत्यादी धातूंच्या पुढे 'रातु' प्रत्यय आणि 'रितु' प्रत्यय देखील होतो. Dhammena puttaṃ mānetīti mātā, pubbe bhāsatīti bhātā, mātāpitūhi dhārīyatīti dhītā. जी धर्माने पुत्राचा सन्मान करते (मानेति) ती 'माता'; जो आधी बोलतो (भासति) तो 'भाता' (भाऊ); जी माता-पित्यांद्वारे सांभाळली जाते (धारीयति) ती 'धीता' (कन्या/मुलगी). 569, 610. Āgamā tuko. ५६९, ६१०. 'आ' उपसर्गपूर्वक 'गमु' धातूच्या पुढे 'तुक' प्रत्यय होतो. Āiccādimhā gamito tukapaccayo hoti. 'आ' आधी असलेल्या 'गमु' धातूच्या पुढे 'तुक' प्रत्यय होतो. Āgacchatīti āgantuko, bhikkhu. जो येतो तो 'आगन्तुको' (पाहुणा) भिक्खू. 570, 611. Bhabbe ika. ५७०, ६११. योग्यतेच्या (समर्थतेच्या) अर्थी 'इक' प्रत्यय होतो. Gamuiccetamhā dhātumhā ikapaccayo hoti bhabbe. Gamissati gantuṃ bhabboti gamiko, bhikkhu. योग्यतेच्या अर्थी 'गमु' या धातूच्या पुढे 'इक' प्रत्यय होतो. जो जाण्यास योग्य आहे तो 'गमिको' भिक्खू. Iti kibbidhānakappe dutiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे कृदन्त कल्पामधील दुसरे कांड समाप्त झाले. Tatiyakaṇḍa तिसरे कांड 571, 624. Paccayādaniṭṭhā nipātanā sijjhanti, ५७१, ६२४. प्रत्ययांद्वारे जे सिद्ध होत नाहीत, ते निपातनाने (विशेष नियमांशिवाय) सिद्ध होतात. Saṅkhyānāmasamāsataddhitākhyātakitakappamhi sappaccayā ye saddā aniṭṭhaṅgatā, te sādhanena nirakkhitvā sakehi sakehi nāmehi nipātanā sijjhanti. संख्या, नाम, समास, तद्धित, आख्यात (क्रियापद) आणि कृदंत (कितक) या प्रकरणांमध्ये प्रत्ययांसह असलेले जे शब्द (नियमित नियमांनी) सिद्ध होत नाहीत, त्यांचे साधनाद्वारे (व्युत्पत्तीद्वारे) निरीक्षण करून, आपापल्या नावांनी ते निपातनाने सिद्ध होतात. Saṅkhyāyaṃ [Pg.269] tāva – ekassa etā hoti, dasassa ca dakārassa rakārādeso hoti. Eko ca dasa ca ekārasa. संख्यांमध्ये सर्वप्रथम – 'एक' च्या जागी 'एका' होतो, आणि 'दस' मधील 'द' च्या जागी 'र' हा आदेश होतो. एक (एको) आणि (च) दहा (दस), अकरा (एकारस). Dvissa bā hoti, dasassa ca dakārassa rakārādeso hoti, dve ca dasa ca bārasa. 'द्वि' च्या जागी 'बा' होतो, आणि 'दस' मधील 'द' च्या जागी 'र' हा आदेश होतो. दोन (द्वे) आणि (च) दहा (दस), बारा (बारस). Dvissa bā hoti, dasassa ca vīsaṃ hoti. Dve ca vīsañca bāvīsaṃ. 'द्वि' च्या जागी 'बा' होतो, आणि 'दस' च्या जागी 'वीस' होतो. दोन (द्वे) आणि (च) वीस (वीस), बावीस (बावीस). Chassa so hoti, dasassa ca dakārassa ḷo hoti, cha ca dasa ca soḷasa. 'छ' च्या जागी 'सो' होतो, आणि 'दस' मधील 'द' च्या जागी 'ळ' होतो. सहा (छ) आणि (च) दहा (दस), सोळा (सोळस). Chaāyatanamhi chassa saḷo hoti, saḷāyatanaṃ. Evaṃ sesā saṅkhyā kātabbā. 'छ-आयतन' मध्ये 'छ' च्या जागी 'सळ' होतो, जसे की 'सळायतन' (सहा आयतने). याप्रमाणेच उर्वरित संख्यांचे रूप बनवावे. Nāmike tāva-ima samāna aparaiccetehi jjajju paccayā honti, ima samānasaddānañca akārasakārādesā honti. Imasmiṃ kāle ajja, ajju, samāne kāle sajja, sajju, aparasmiṃ kāle aparajja, aparajju. नामांमध्ये सर्वप्रथम – 'इम', 'समान' आणि 'अपर' या शब्दांनंतर 'ज्ज' आणि 'ज्जु' हे प्रत्यय लागतात, आणि 'इम' व 'समान' या शब्दांच्या जागी अनुक्रमे 'अ' आणि 'स' हे आदेश होतात. त्या (इमस्मिं) काळात (काले) - आज (अज्ज, अज्जु); त्याच (समाने) काळात (काले) - त्याच वेळी (सज्ज, सज्जु); दुसऱ्या (अपरस्मिं) काळात (काले) - दुसऱ्या दिवशी/वेळी (अपरज्ज, अपरज्जु). Samāse tāva – bhūmigato, apāyagato, issarakataṃ. Sallaviddho, kathinadussaṃ, corabhayaṃ, dhaññarāsi, saṃsāradukkhaṃ, pubbāparaṃ. समासामध्ये सर्वप्रथम – भूमीवर गेलेला (भूमिगतो), अपायाला (दुर्गतीला) गेलेला (अपायगतो), ईश्वराने (निर्मात्याने) केलेले (इस्सरकतं), बाणाने विंधलेला (सल्लविद्धो), कठीण वस्त्र (कठिनदुस्सं), चोरांचे भय (चोरभयं), धान्याची रास (धञ्ञरासि), संसारातील दुःख (संसारदुक्खं), आधी आणि नंतर (पुब्बापरं). Taddhite [Pg.270] tāva – vāsiṭṭho, bhāradvājo, bhaggavo, paṇḍavo, kāleyyo. तद्धित प्रत्ययांमध्ये सर्वप्रथम – वासिठ्ठो (वासिष्ठ), भारद्वाजो (भारद्वाज), भग्गवो (भार्गव), पंडवो (पांडव), कालेय्यो (कालेय). Ākhyāte tāva – ‘‘asa bhāve’’ti dhātuto vattamānesu ekavacanabahuvacanesu ekavacanassa tissa sso hoti antena saha, bahuvacanassa antissa ssu hoti antena saha. Evamassa vacanīyo, evamassu vacanīyā. आख्यातामध्ये (क्रियापदांमध्ये) सर्वप्रथम – 'अस भावे' (अस् धातू असण्याच्या अर्थी) या धातूपासून वर्तमानकाळातील एकवचन आणि बहुवचनामध्ये, एकवचनाच्या 'ति' प्रत्ययाचा अंत्य स्वरासह 'स्सो' होतो, आणि बहुवचनाच्या 'अन्ति' प्रत्ययाचा अंत्य स्वरासह 'स्सु' होतो. 'असे (एवं अस्स) म्हणावे (वचनीयो)', 'असे (एवं अस्सु) म्हणावे (वचनीया)'. Āṇattiyaṃ hissa ssu hoti vā, gacchassu, gacchāhi. आज्ञार्थामध्ये (पंचमी विभक्तीत) 'हि' प्रत्ययाच्या जागी कधीकधी 'स्सु' होतो; जसे की - तू जा (गच्छस्सु, गच्छाहि). Kitake tāva – vada hanaiccevamādīhi dhātūhi kapaccayo hoti, vadassa ca vādo hoti, hanassa ca ghāto hoti. Vādako, ghātako. कृदंतामध्ये (कितक) सर्वप्रथम – 'वद', 'हन' इत्यादी धातूंनंतर 'क' प्रत्यय लागू होतो, आणि 'वद' चा 'वाद' होतो, तर 'हन' चा 'घात' होतो. जसे की - बोलणारा (वादको), मारणारा (घातको). Naṭadhātuto tapañcayassa cca ṭṭādesā honti antena saha. Naccaṃ, naṭṭaṃ. Iccevamādayo nipātanā sijjhanti. 'नट' धातूपासून 'त' प्रत्ययाचा अंत्य व्यंजनासह 'च्च' आणि 'ट्ठ' असा आदेश होतो. जसे की - नृत्य (नच्चं, नट्टं). अशा प्रकारे हे रूप निपातनाने सिद्ध होतात. 572, 625. Sāsa disato tassa riṭṭho ca. ५७२, ६२५. 'सास' आणि 'दिस' धातूंनंतर 'त' प्रत्ययाच्या जागी 'रिट्ठ' देखील होतो. Sāsa disaiccevamādīhi dhātūhi tapaccayassa riṭṭhādeso hoti ṭhāne. 'सास', 'दिस' इत्यादी धातूंनंतर योग्य ठिकाणी 'त' प्रत्ययाच्या जागी 'रिट्ठ' हा आदेश होतो. Anusiṭṭho so mayā, diṭṭhaṃ me rūpaṃ. माझ्याद्वारे (मया) तो उपदेशित/अनुशासित केला गेला (अनुसिट्ठो सो); माझ्याद्वारे (मे) रूप पाहिले गेले (दिट्ठं रूपं). Caggahaṇena [Pg.271] kiccatakārassa ca tuṃ paccayassa ca raṭṭharaṭṭhuṃādesā honti. Dassanīyaṃ daṭṭhabbaṃ. Daṭṭhuṃ vihāraṃ gacchanti samaṇānaṃ. 'च' च्या ग्रहणाने कृत्य प्रत्ययातील 'त' च्या जागी 'रट्ठ' आणि 'तुं' प्रत्ययाच्या जागी 'रट्ठुं' हे आदेश होतात. जसे की - पाहण्यायोग्य (दस्सनीयं, दट्ठब्बं); श्रमणांच्या (समणानां) विहाराला (विहारं) पाहण्यासाठी (दट्ठुं) जातात (गच्छन्ति). 573, 626. Sādisanta puccha bhanja hansādīhiṭṭho. ५७३, ६२६. 'स' अंत असणारे धातू आणि 'पुच्छ', 'भंज', 'हंस' इत्यादी धातूंनंतर 'ट्ठ' होतो. Sakāranta puccha bhanja hansa iccevamādīhi dhātūhi tapaccayassa sahādibyañjanena ṭṭhādeso hoti ṭhāne. 'स' कार अंत असणारे आणि 'पुच्छ', 'भंज', 'हंस' इत्यादी धातूंनंतर योग्य ठिकाणी 'त' प्रत्ययाचा त्याच्या आदि व्यंजनासह 'ट्ठ' असा आदेश होतो. Tuṭṭho, ahinā daṭṭho naro, mayā puṭṭho, bhaṭṭho, pabhaṭṭho, haṭṭho, pahaṭṭho, yiṭṭho. Evamaññepi dhātavo sabbattha yojetabbā. संतुष्ट (तुट्ठो); सर्पाने (अहिना) डसलेला मनुष्य (दट्ठो नरो); माझ्याद्वारे (मया) विचारलेला (पुट्ठो); पडलेला/भ्रष्ट झालेला (भट्ठो); नष्ट झालेला (पभट्ठो); हर्षित (हट्ठो); प्रफुल्लित (पहट्ठो); यज्ञ केलेला (यिट्ठो). याप्रमाणेच इतर धातूंचे रूप देखील सर्वत्र योजावे. 574, 613. Vasato uṭṭha. ५७४, ६१३. 'वस' धातूच्या जागी 'उट्ठ' होतो. Vasaiccetamhā dhātumhā takārapaccayassa sahādibyañjanena uṭṭhādeso hoti ṭhāne. 'वस' या धातूपासून योग्य ठिकाणी 'त' प्रत्ययाचा त्याच्या आदि व्यंजनासह 'उट्ठ' असा आदेश होतो. Vassaṃvuṭṭho. वर्षावास पूर्ण केलेला (वस्संवुट्ठो). 575, 614. Vassa vā vu. ५७५, ६१४. 'वस' धातूच्या जागी विकल्प करून 'वु' किंवा 'उ' होतो. Vasasseva dhātussa tapaccaye pare vakārassa ukārādeso hoti vā. 'त' प्रत्यय पर असताना 'वस' धातूच्या 'व' कारचा विकल्प करून 'उ' कार आदेश होतो. Vusitaṃ brahmacariyaṃ, uṭṭho. Vuṭho vā. ब्रह्मचर्य पाळले (वुसितं ब्रह्मचरियं); राहिलेला (उट्ठो किंवा वुट्ठो). 576, 607. Dha [Pg.272] ḍha bha ye hi dha ḍhā ca. ५७६, ६०७. 'ध', 'ढ', 'भ' आणि 'ह' यांच्यानंतर 'ध' आणि 'ढ' देखील होतात. Dha ḍha bha haiccevamantehi dhātūhi takārapaccayassa yathākkamaṃ dha ḍhādesā honti. 'ध', 'ढ', 'भ' आणि 'ह' अंत असणाऱ्या धातूंनंतर 'त' प्रत्ययाचा यथाक्रम 'ध' आणि 'ढ' असा आदेश होतो. Yathā? Buddho bhagavā, vaḍḍho bhikkhu, laddhaṃ me patthacīvaraṃ, agginā daḍḍhaṃ vanaṃ. जसे की - बुद्ध (बुद्धो) भगवान (भगवा); वृद्ध/मोठा झालेला (वड्ढो) भिक्खू (भिक्खु); माझ्याद्वारे (मे) प्राप्त केलेले (लद्धं) पात्र-चीवर (पत्तचीवरं); अग्नीने (अग्गिना) जळलेले (दड्ढं) वन (वनं). 577, 628. Bhanjato gvo ca. ५७७, ६२८. 'भंज' धातूनंतर 'ग्ग' देखील होतो. Bhanjato dhātumhā takārapaccayassa ggo ādeso hoti sahādibyañjanena. 'भंज' धातूपासून 'त' प्रत्ययाचा त्याच्या आदि व्यंजनासह 'ग्गो' असा आदेश होतो. Bhaggo. मोडलेला/भंगलेला (भग्गो). 578, 560. Bhujādīnamanto no dvi ca. ५७८, ५६०. 'भुज' इत्यादी धातूंचा अंत्य लोप होतो आणि 'त' प्रत्ययाचे द्वित्व होते. Bhujaiccevamādīnaṃ dhātūnaṃ anto no hoti, tapaccayassa ca dvitāvo hoti. 'भुज' इत्यादी धातूंचा अंत्य लोप होतो, आणि 'त' प्रत्ययाचे द्वित्व होते. Bhutto, bhuttāvī, catto, satto, ratto, yutto, vivitto. जेवलेला (भुत्तो, भुत्तावी); त्याग केलेला (चत्तो); आसक्त झालेला (सत्तो); रंगलेला/अनुरक्त (रत्तो); जोडलेला/युक्त (युत्तो); विविक्त/एकांतात असलेला (विवित्तो). 579, 629. Vaca vāvu. ५७९, ६२९. 'वच' धातूच्या जागी विकल्प करून 'उ' होतो. Vacaiccetassa [Pg.273] dhātvassa vakārassa ukārādeso hoti anto cakāro no hoti, tapaccayassa ca dvebhāvo hoti vā. 'वच' या धातूच्या 'व' कारचा 'उ' कार आदेश होतो, अंत्य 'च' कारचा लोप होतो, आणि 'त' प्रत्ययाचे विकल्प करून द्वित्व होते. Vuttaṃ bhagavatā, uttaṃ vā. भगवंतांनी (भगवता) म्हटले (वुत्तं किंवा उत्तं). 580, 630. Gupādīnañca. ५८०, ६३०. आणि 'गुप' इत्यादी धातूंचे देखील (अशाच प्रकारे रूप होते). Gupaiccevamādīnaṃ dhātūnaṃ anto ca byañjano no hoti, tapaccayassa ca dvebhāvo hoti. गुप् (gupa) इत्यादी धातूंच्या शेवटी असलेला व्यंजन लुप्त होतो आणि 'त' (ta) प्रत्ययाचे द्वित्व होते. Sugutto, catto, litto, santatto, utto, vivitto, sitto. Evamaññepi yojetabbā. सुगुत्तो (सुरक्षित), चत्तो (त्यागलेला), लित्तो (माखलेला), संतत्तो (तप्त झालेला), उत्तो (म्हटलेला), विवित्तो (एकांतवासी), सित्तो (सिंचन केलेला). याचप्रमाणे इतरही रूपे बनवावीत. 581, 616. Tarādīhi iṇṇo. ५८१, ६१६. 'तर' (tara) इत्यादी धातूंनंतर 'इण्ण' (iṇṇa) प्रत्यय होतो. Taraiccevamādīhi dhātūhi tapaccayassa iṇṇādeso hoti, anto ca byañjano no hoti. 'तर' (tara) इत्यादी धातूंनंतर 'त' (ta) प्रत्ययाचा 'इण्ण' (iṇṇa) असा आदेश होतो आणि धातूचा अंतिम व्यंजन लुप्त होतो. Taratīti tiṇṇo, uttaratīti uttiṇṇo, saṃpūratīti sampuṇṇo, turatīti tuṇṇo, parijīratīti parijiṇṇo, ākiratīti ākiṇṇo. जो पार करतो तो 'तिण्णो' (पार झालेला); जो वर चढतो/पार करतो तो 'उत्तिण्णो'; जो पूर्ण भरतो तो 'सम्पुण्णो'; जो घाई करतो तो 'तुण्णो'; जो पूर्णपणे जीर्ण होतो तो 'परिजिण्णो'; जो विखुरतो तो 'आकिण्णो'. 582, 631. Bhidādito [Pg.274] inna anna īṇāvā. ५८२, ६३१. कधीकधी 'भिदि' (bhidi) इत्यादी धातूंनंतर 'इन्न' (inna), 'अन्न' (anna) आणि 'ईण' (īṇa) हे प्रत्यय होतात. Bhidiiccevamādīhi dhātūhi tapaccayassa inna anna īṇādesā honti vā, anto ca byañjano no hoti. 'भिदि' (bhidi) इत्यादी धातूंनंतर 'त' (ta) प्रत्ययाचे 'इन्न' (inna), 'अन्न' (anna) आणि 'ईण' (īṇa) हे आदेश विकल्पेकरून (कधीकधी) होतात आणि धातूचा अंतिम व्यंजन लुप्त होतो. Bhinditabboti bhinno, chindīyatīti chinno, ucchindīyitthāti ucchinno, dīyatīti dinno, nisīdatīti nisinno, suṭṭhu chādīyatīti suchanno, khidatīti khinno, rodatīti runno, khīṇā jāti. जे तोडले जावे (भिन्दितब्बो) ते 'भिण्णो' (तुकडे झालेले/भिन्न); जे कापले जाते (छिन्दीयति) ते 'छिण्णो' (कापलेले); जे समूळ नष्ट केले गेले (उच्छिन्दीयित्थ) ते 'उच्छिण्णो' (उच्छिन्न झालेले); जे दिले जाते (दीयति) ते 'दिण्णो' (दिलेले); जो बसतो (निसीदति) तो 'निसिण्णो' (बसलेला); जे चांगल्या प्रकारे झाकले जाते (सुट्ठु छादीयति) ते 'सुछण्णो' (चांगले झाकलेले); जो खिन्न/थकलेला असतो (खिदति) तो 'खिण्णो' (खिन्न); जो रडतो (रोदति) तो 'रुण्णो' (रडलेला); नष्ट झालेली (खीणा) उत्पत्ती/जन्म (जाति). Vāti kimatthaṃ? Bhijjatīti bhitti. 'वा' (विकल्पेकरून/कधीकधी) असे का म्हटले आहे? या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की: जे तुटते/भिदते (भिज्जति) ती 'भित्ति' (भिंत). 583, 617. Susa paca sakato kkha kkā ca. ५८३, ६१७. तसेच 'सुस' (susa), 'पच' (paca) आणि 'सक' (saka) या धातूंनंतर 'क्ख' (kkha) आणि 'क्क' (kka) हे आदेश होतात. Susa paca sakaiccevamādīhi dhātūhi tapaccayassa kkhakkādesā honti, anto ca byañjano no hoti. 'सुस' (susa), 'पच' (paca), 'सक' (saka) इत्यादी धातूंनंतर 'त' (ta) प्रत्ययाचे 'क्ख' (kkha) आणि 'क्क' (kka) हे आदेश होतात आणि धातूचा अंतिम व्यंजन लुप्त होतो. Sussatīti sukkhaṃ, kaṭṭhaṃ, paccatīti pakkaṃ, phalaṃ. Sakati samattheti, pūjetīti vā sakko, sujampati. जे सुकते (सुस्सति) ते 'सुक्खं' (सुके), जसे की लाकूड (कट्ठं); जे शिजते/पिकते (पच्चति) ते 'पक्कं' (पिकलेले), जसे की फळ (फलं). जो समर्थ आहे (सकति, समत्थेति) तो 'सक्को' (शक्र/इंद्र), किंवा (वा) ज्याची पूजा केली जाते (पूजेति) तो 'सक्को' (सुजम्पति - सुजाचा पती). 584, 618. Pakkamādīhi nto ca. ५८४, ६१८. तसेच 'पक्कम' (pakkama) इत्यादी धातूंनंतर 'न्त' (nta) आदेश होतो. Pakkamaiccevamādīhi dhātūhi tapaccayassa ntoādeso hoti, anto ca no hoti. 'पक्कम' (pakkama) इत्यादी धातूंनंतर 'त' (ta) प्रत्ययाचा 'न्त' (nta) असा आदेश होतो आणि धातूचा अंतिम व्यंजन लुप्त होतो. Pakkamatīti [Pg.275] pakkanto, vibbhamatīti vibbhanto, saṅkanto, khanto, santo, danto, vanto. जो निघून जातो (पक्कमति) तो 'पक्कन्तो' (प्रस्थान केलेला); जो (गृहस्थ जीवनात) परत फिरतो (विब्भमति) तो 'विब्भन्तो' (भ्रमित झालेला/परतलेला); 'सङ्कन्तो' (संक्रांत झालेला/पार गेलेला); 'खन्तो' (क्षमाशील); 'सन्तो' (शांत झालेला); 'दन्तो' (दमन केलेला/संयमित); 'वन्तो' (ओकलेला किंवा ओकणारा). Caggahaṇaṃ kimatthaṃ? Teheva dhātūhi tapaccayassanti hoti. Anto ca no hoti. Kanti, khanti. Evaṃ sabbattha. 'च' (ca) ग्रहण कशासाठी आहे? त्याच धातूंनंतर 'त' (ta) प्रत्ययाचा 'न्ति' (nti) असा आदेश होतो आणि अंतिम व्यंजन लुप्त होतो. जसे की: कन्ति (इच्छा/प्रीती), खन्ति (क्षमा/सहनशीलता). याचप्रमाणे सर्वत्र समजावे. 585, 619. Janādīnamā timhi ca. ५८५, ६१९. 'जन' (jana) इत्यादी धातूंच्या अंतिम स्वराचा/व्यंजनाचा 'आ' (ā) होतो, 'ति' (ti) प्रत्यय असतानाही. Janaiccevamādīnaṃ dhātūnaṃ antassa byañjanassa āttaṃ hoti tapaccaye pare, timhi ca. 'त' (ta) किंवा 'ति' (ti) प्रत्यय नंतर आला असता, 'जन' (jana) इत्यादी धातूंच्या अंतिम व्यंजनाचा 'आ' (ā) होतो. Ajanīti jāto, jananaṃ jāti. जो जन्मला (अजनी) तो 'जातो' (जन्मलेला); जन्म घेण्याची क्रिया (जननं) म्हणजे 'जाति' (जन्म). Timhīti kimatthaṃ? Aññasmimpi paccaye pare ākāranivattanatthaṃ. Janitvā, janitā, janituṃ, janitabbaṃ iccevamādi. 'तिम्हि' ('ति' प्रत्यय असताना) असे का म्हटले आहे? इतर प्रत्यय नंतर आले असता 'आ' (ā) कार होण्यास प्रतिबंध करण्यासाठी. जसे की: जनित्वा (जन्म घेऊन), जनिता (जन्म देणारा), जनितुं (जन्म घेण्यासाठी), जनितब्बं (जन्म घ्यावा) इत्यादी. 586, 600. Gama khana hana ramādīnamanto. ५८६, ६००. 'गम' (gama), 'खन' (khana), 'हन' (hana) आणि 'रमु' (ramu) इत्यादी धातूंचा अंत. Gama khana hana ramuiccevamādīnaṃ dhātūnaṃ anto byañjano no hoti vā tapaccaye pare timhi ca. 'त' (ta) किंवा 'ति' (ti) प्रत्यय नंतर आला असता, 'गम' (gama), 'खन' (khana), 'हन' (hana) आणि 'रमु' (ramu) इत्यादी धातूंचा अंतिम व्यंजन कधीकधी (विकल्पेकरून) लुप्त होतो. Sundaraṃ nibbānaṃ gacchatīti sugato. Sundaraṃ nibbānaṃ gacchatīti sugati, khataṃ, khati. Upahataṃ, upahati. Rato, rati, mato, mati. जो सुंदर (कल्याणकारी) निर्वाणाप्रत जातो तो 'सुगतो' (सुगत); सुंदर निर्वाणाप्रत जाणे म्हणजे 'सुगति'; खणलेले ते 'खतं', खणण्याची क्रिया ती 'खति'; उपद्रव दिलेला तो 'उपहतं', उपद्रव देणे ती 'उपहति'; जो रममाण झाला तो 'रतो', रममाण होण्याची क्रिया ती 'रति'; जो मानला गेला तो 'मतो', मानण्याची क्रिया ती 'मति'. Vāti [Pg.276] kimatthaṃ? Ramato, ramati. 'वा' (विकल्पेकरून) असे का म्हटले आहे? या नियमाला अपवाद दर्शवण्यासाठी, जसे की: रमतो (रममाण झालेला), रमति (रममाण होण्याची क्रिया). 587, 632. Rakāro ca. ५८७, ६३२. तसेच 'र' (ra) कार देखील. Rakāro ca dhātūnamantabhūto no hoti tapaccaye, pare timhi ca. 'त' (ta) किंवा 'ति' (ti) प्रत्यय नंतर आला असता, धातूच्या शेवटी असलेला 'र' (ra) कार लुप्त होतो. Pakārena karīyatīti pakato, paṭhamaṃ karīyatīti pakati, visarīyatīti visato, visati. जे विशिष्ट प्रकारे केले जाते (प्रकारेण करीयति) ते 'पकतो' (प्रकृत); जे प्रथम केले जाते (पठमं करीयति) ती 'पकति' (प्रकृती); जे पसरवले जाते (विसरीयति) ते 'विसतो' (विस्तृत), पसरवण्याची क्रिया ती 'विसति'. 588, 620. Ṭhāpānami ī ca. ५८८, ६२०. 'ठा' (ṭhā) आणि 'पा' (pā) या धातूंच्या जागी 'इ' (i) आणि 'ई' (ī) होतात. Ṭhā pāiccetesaṃ dhātūnaṃ antassa ākārassa ikāra īkārādesā honti yathāsaṅkhyaṃ tapaccaye pare, timhi ca. 'त' (ta) किंवा 'ति' (ti) प्रत्यय नंतर आला असता, 'ठा' (ṭhā) आणि 'पा' (pā) या धातूंच्या शेवटी असलेल्या 'आ' (ā) काराच्या जागी यथाक्रम 'इ' (i) आणि 'ई' (ī) हे आदेश होतात. Yatra ṭhito, ṭhiti, pīto, pīti. जेथे उभा राहिला तो 'ठितो' (स्थित), उभे राहण्याची क्रिया ती 'ठिति' (स्थिती); ज्याने प्राशन केले तो 'पीतो' (पिलेला), प्राशन करण्याची क्रिया ती 'पीति' (प्रीती/पेय). 589, 621. Hantehi ho hassa ḷo vā adahanahānaṃ. ५८९, ६२१. 'दह' (daha) आणि 'नह' (naha) सोडून, 'ह' (ha) अंत असणाऱ्या धातूंनंतर 'त' प्रत्ययाचा 'ह' होतो आणि धातूच्या अंतिम 'ह' चा 'ळ' (ḷa) होतो. Hakārantehi dhātūhi tapaccayassa hakārādeso hoti, hakārassa dhātvantassa ḷo hoti vā adahanahānaṃ. 'दह' (daha) आणि 'नह' (naha) सोडून, 'ह' (ha) कार अंत असणाऱ्या धातूंनंतर 'त' (ta) प्रत्ययाचा 'ह' (ha) असा आदेश होतो आणि धातूच्या शेवटी असलेल्या 'ह' (ha) काराचा कधीकधी 'ळ' (ḷa) होतो. Āruhitthāti āruḷho. Gāḷho, bāḷho. Mūḷo. जो वर चढला (आरुहित्थ) तो 'आरुळ्हो' (आरूढ झालेला); 'गाळ्हो' (गहन/घट्ट); 'बाळ्हो' (तीव्र/प्रबळ); 'मूळ्हो' (मोहित/भ्रमित झालेला). Adahanahānamiti [Pg.277] kimatthaṃ? Dayhatīti daḍḍho, saṃsuṭṭhu nayhatīti sannaddho. 'अदहनहानं' (दह आणि नह सोडून) असे का म्हटले आहे? 'दह' आणि 'नह' धातू असताना हा नियम लागू न होण्यासाठी, जसे की: जे जळते (दय्हति) ते 'दड्ढो' (दग्ध झालेले); जे चांगल्या प्रकारे बांधले जाते (सं सुट्ठु नय्हति) ते 'सन्नद्धो' (सज्ज/चांगले बांधलेले). Iti kibbidhānakappe tatiyo kaṇḍo. अशा प्रकारे कृदंत प्रकरणातील (किब्बिधानकप्प) तिसरा खंड समाप्त झाला. Catutthakaṇḍa चौथा खंड 590, 579. Ṇamhiranjassa jo bhāvakaraṇesu. ५९०, ५७९. भाववाचक आणि करणवाचक नामांमध्ये, 'ण' (ṇa) प्रत्यय नंतर आला असता, 'रंज' (ranja) धातूच्या जागी 'ज' (ja) होतो. Ṇamhi paccaye pare ranjaiccetassa dhātussa antabhūtassa njakārassa joādeso hoti bhāvakaraṇesu. भाववाचक आणि करणवाचक नामांमध्ये, 'ण' (ṇa) प्रत्यय नंतर आला असता, 'रंज' (ranja) या धातूच्या शेवटी असलेल्या 'ञ्ज' (ñja) काराचा 'ज' (ja) असा आदेश होतो. Rañjanaṃ rāgo, ranjanti etenāti rāgo. रंगण्याची क्रिया म्हणजे 'रागो' (राग/आसक्ती), किंवा ज्याच्याद्वारे लोक रंगतात (आसक्त होतात) तो 'रागो'. Bhāvakaraṇesūti kimatthaṃ? Ranjatīti raṅgo. 'भावकरणेसु' (भाववाचक आणि करणवाचक नामांमध्ये) असे का म्हटले आहे? भाव आणि करण अर्थ नसताना हा नियम लागू न होण्यासाठी, जसे की: जो रंगवतो (रंजति) तो 'रङ्गो' (रंग/मंच). 591, 544. Hanassa ghāto. ५९१, ५४४. 'हन' धातूच्या जागी 'घात' आदेश होतो. Hanaiccetassa dhātussa sabbassa ghātādeso hoti ṇamhi paccaye pare. 'ण' प्रत्यय नंतर आला असता, संपूर्ण 'हन' धातूच्या जागी 'घात' असा आदेश होतो. Upahanatīti upaghāto, gāvo hanatīti goghātako. जो नाश करतो (उपहनति) तो 'उपघातो' (नाश करणारा); जो गाईंना मारतो (गावो हनति) तो 'गोघातको' (कसाई/गोघातक). 592, 503. Vadho [Pg.278] vā sabbattha. ५९२, ५०३. सर्व ठिकाणी 'वध' असा आदेश विकल्प करून होतो. Hanaiccetassa dhātussa vadhādeso hoti vā sabbattha ṭhānesu. 'हन' या धातूच्या जागी सर्व ठिकाणी विकल्प करून 'वध' असा आदेश होतो. Hanatīti vadho, vadhako, avadhi, ahani vā. जो मारतो (हनति) तो 'वधो' किंवा 'वधको' (वध करणारा); त्याने मारले (अवधि किंवा अहनि). 593, 564. Ākārantānamāyo. ५९३, ५६४. आ-कारान्त (शेवटी 'आ' असणाऱ्या) धातूंच्या जागी 'आय' आदेश होतो. Ākārantānaṃ dhātūnaṃ antassa ākārassa āyādeso hoti ṇamhi paccaye pare. 'ण' प्रत्यय नंतर आला असता, आ-कारान्त धातूंच्या शेवटी असणाऱ्या 'आ' स्वराच्या जागी 'आय' असा आदेश होतो. Dadātīti dāyako, dānaṃ dātuṃ sīlaṃ yassāti dānadāyī, majjaṃ dātuṃ sīlaṃ yassāti majjadāyī, nagaraṃ yātuṃ sīlaṃ yassāti nagarayāyī. जो देतो (ददाति) तो 'दायको' (दाता); दान देण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'दानदायी'; मद्य देण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'मज्जदायी'; नगरात जाण्याचा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'नगरयायी'. 594, 582. Pura samupa parīhi karotissa kha kharā vā tappaccayesuca. ५९४, ५८२. 'पुर', 'सं', 'उप' आणि 'परि' हे उपसर्ग पूर्वपदी असताना, 'करोति' (कृ) धातूच्या जागी 'ख' आणि 'खर' हे आदेश विकल्प करून होतात, 'त' प्रत्यय आणि 'ण' प्रत्यय नंतर आले असता. Pura saṃ upa pariiccetehi karotissa dhātussa kha kharādesā honti vā tapaccaye pare, ṇamhi ca. 'पुर', 'सं', 'उप' आणि 'परि' हे उपसर्ग पूर्वपदी असताना, 'करोति' (कृ) धातूच्या जागी 'त' प्रत्यय आणि 'ण' प्रत्यय नंतर आले असता विकल्प करून 'ख' आणि 'खर' हे आदेश होतात. Pure karīyatīti purakkhato, sammā karīyatīti saṅkhato, upagantvā karīyatīti upakkhato, parisamantato karotīti parikkhāro, saṃkarīyatīti saṅkhāro. ज्याला पुढे केले जाते (पुरे करीयति) तो 'पुरक्खतो' (पुरस्कृत/सन्मानित); जे चांगल्या प्रकारे केले जाते (सम्मा करीयति) ते 'सङ्खतो' (संस्कृत/संस्कारित); जवळ जाऊन जे केले जाते (उपगन्त्वा करीयति) ते 'उपक्खतो' (तयार केलेले); जे सभोवताली केले जाते (परिसमन्ततो करोति) ते 'परिक्खारो' (परिष्कार/साधन); जे चांगल्या प्रकारे संस्कारित केले जाते (संकरीयति) ते 'सङ्खारो' (संस्कार). Vāti kimatthaṃ? Upagantvā karotīti upakāro. 'वा' (विकल्प करून) असे का म्हटले आहे? जेणेकरून या नियमाला अपवाद असावा, जसे की: जवळ जाऊन जे केले जाते ते 'उपकारो' (उपकार). 595, 637. Tave [Pg.279] tunādīsu kā. ५९५, ६३७. 'तवे', 'तुन' इत्यादी प्रत्यय नंतर आले असता 'का' आदेश होतो. Tave tunaiccevamādīsu paccayesu karotissa dhātussa kāādeso hoti vā. 'तवे', 'तुन' इत्यादी प्रत्यय नंतर आले असता, 'करोति' (कृ) धातूच्या जागी विकल्प करून 'का' असा आदेश होतो. Kātave, kātuṃ, kattuṃ vā, kātuna, kattuna vā. करण्यासाठी (कातवे, कातुं किंवा कत्तुं); करून (कातुन किंवा कत्तुन). 596, 551. Gama khana hanādīnaṃ tuṃ tabbādīsu na. ५९६, ५५१. 'तुं', 'तब्ब' इत्यादी प्रत्यय नंतर आले असता, 'गमु', 'खनु', 'हनु' इत्यादी धातूंच्या शेवटी 'न' होतो. Gama khana hanaiccevamādīnaṃ dhātūnaṃ antassa nakāro hoti vā tuṃ tabbādīsu paccayesu. 'तुं', 'तब्ब' इत्यादी प्रत्यय नंतर आले असता, 'गमु', 'खनु', 'हनु' इत्यादी धातूंच्या शेवटी विकल्प करून 'न'कार होतो. Gantuṃ, gamituṃ, gantabbaṃ, gamitabbaṃ. Khantuṃ. Khanituṃ, khantabbaṃ, khanitabbaṃ. Hantuṃ, hanituṃ, hantabbaṃ. Hanitabbaṃ. Mantuṃ, manituṃ, mantabbaṃ, manitabbaṃ. जाण्यासाठी (गन्तुं, गमितुं), जावे (गन्तब्बं, गमितब्बं). खणण्यासाठी (खन्तुं, खनितुं), खणावे (खन्तब्बं, खनितब्बं). मारण्यासाठी (हन्तुं, हनितुं), मारावे (हन्तब्बं, hनितब्बं). जाणण्यासाठी (मन्तुं, मनितुं), जाणावे (मन्तब्बं, मनितब्बं). Ādiggahaṇaṃ kimatthaṃ? Tunaggahaṇatthaṃ. Gantuna, khantuna, hantuna, mantuna. 'आदि' (इत्यादी) ग्रहण कशासाठी आहे? 'तुन' प्रत्यय ग्रहण करण्यासाठी. जाऊन (गन्तुन), खणून (खन्तुन), मारून (हन्तुन), जाणून (मन्तुन). 597, 641. Sabbehi tunādīnaṃ yo. ५९७, ६४१. सर्व धातूंनंतर 'तुन' इत्यादी प्रत्ययांच्या जागी 'य' (यो) आदेश होतो. Sabbehi dhātūhi tunādīnaṃ paccayānaṃ yakārādeso hoti vā. सर्व धातूंनंतर 'तुन' इत्यादी प्रत्ययांच्या जागी विकल्प करून 'य'कार असा आदेश होतो. Abhivandiya, abhivanditvā, ohāya, ohitvā, upanīya, upanetvā, passiya, passitvā, uddissa, uddisitvā, ādāya, ādiyitvā. अभिवादन करून (अभिवन्दिय, अभिवन्दित्वा); त्याग करून (ओहाय, ओहित्वा); आणून (उपनीय, उपनेत्वा); पाहून (पस्सिय, pस्सित्वा); उद्देशून (उद्दिस्स, उद्दिसित्वा); घेऊन (आदाय, आदियित्वा). 598, 643. Canantehi [Pg.280] raccaṃ. ५९८, ६४३. 'च' आणि 'न' शेवटी असणाऱ्या धातूंनंतर 'रच्च' आदेश होतो. Cakāranakārantehi dhātūhi tunādīnaṃ paccayānaṃ raccādeso hoti vā. 'च'कार आणि 'न'कार शेवटी असणाऱ्या धातूंनंतर 'तुन' इत्यादी प्रत्ययांच्या जागी विकल्प करून 'रच्च' असा आदेश होतो. Vivicca, āhacca, uhacca. विविक्त होऊन/वेगळे होऊन (विविच्च), आघात करून (आहच्च), उपटून/काढून (उहच्च). Vāti kimatthaṃ? Hantvā. 'वा' (विकल्प करून) असे का म्हटले आहे? जेणेकरून या नियमाला अपवाद असावा, जसे की: मारून (हन्त्वा). 599, 644. Disā svāna svāntalopo ca. ५९९, ६४४. 'दिस' धातूनंतर 'स्वान' आणि 'स्वा' आदेश होतात आणि धातूच्या शेवटच्या वर्णाचा लोप होतो. Disaiccetāya dhātuyā tunādīnaṃ paccayānaṃ svānasvādesā honti, antalopo ca. 'दिस' या धातूनंतर 'तुन' इत्यादी प्रत्ययांच्या जागी 'स्वान' आणि 'स्वा' हे आदेश होतात आणि धातूच्या शेवटच्या वर्णाचा लोप होतो. Disvāna, disvā. पाहून (दिस्वान, दिस्वा). 600, 645. Ma ha da bhehi mma yha jja bbha ddhā ca. ६००, ६४५. 'म', 'ह', 'द', 'भ' शेवटी असणाऱ्या धातूंनंतर 'म्म', 'य्ह', 'ज्ज', 'ब्भ', 'द्ध' हे आदेश सुद्धा होतात. Ma ha da bha iccevamantehi dhātūhi tunādīnaṃ paccayānaṃ mma yha jja bbha ddhā ādesā honti vā antalopo ca. 'म', 'ह', 'द', 'भ' शेवटी असणाऱ्या धातूंनंतर 'तुन' इत्यादी प्रत्ययांच्या जागी विकल्प करून 'म्म', 'य्ह', 'ज्ज', 'ब्भ', 'द्ध' हे आदेश होतात आणि धातूच्या शेवटच्या वर्णाचा लोप होतो. Āgamma, āgamitvā, okkamma. Okkamitvā, paggayha, paggaṇhitvā, uppajja, uppajjitvā, ārabbha, ārabhitvā, āraddha, ārabhitvā. येऊन (आगम्म, आगमित्वा); प्रवेश करून/बाजूला होऊन (ओक्कम्म, ओक्कमित्वा); उंचावून/ग्रहण करून (पग्गय्ह, पग्गण्हित्वा); उत्पन्न होऊन (उप्पज्ज, उप्पज्जित्वा); आरंभ करून (आरब्भ, आरभित्वा); आरंभ करून/प्राप्त करून (आरद्ध, आरभित्वा). 601, 334. Taddhitasamāsakitakā [Pg.281] nāmaṃ vā’ tave tunādīsu ca. ६०१, ३३४. 'तद्धित', 'समास' आणि 'कृदन्त' (कितक) हे नाम मानले जावे, परंतु 'तवे', 'तुन' इत्यादी प्रत्ययांनी संपणारे शब्द वगळून. Taddhitasamāsakitakaiccevamantā saddānāmaṃva daṭṭhabbā tave tuna tvāna tvādipaccayante vajjetvā. 'तद्धित', 'समास' आणि 'कृदन्त' (कितक) यांनी संपणारे शब्द नाम म्हणूनच समजले जावे, फक्त 'तवे', 'तुन', 'त्वान', 'त्वा' इत्यादी प्रत्ययांनी संपणारे शब्द वगळून. Vāsiṭṭho, pattadhammo, kumbhakāro iccevamādi. वासिट्ठो (वासिष्ठ), जिने धम्म प्राप्त केला आहे असा (पत्तधम्मो), कुंभार (कुंभकारो) इत्यादी. 602, 6. Dumhi garu. ६०२, ६. दोन (अक्षरे) असताना, (पूर्वीचे अक्षर) 'गरु' (गुरु) असते. Dumhi akkhare yo pubbo akkharo, so garukova daṭṭhabbo. जेव्हा दोन अक्षरे असतात, तेव्हा त्यापूर्वीचे अक्षर 'गरु' (गुरु) मानले पाहिजे. Bhitvā, chitvā, datvā, hutvā. भित्वा (तोडून), छित्वा (कापून), दत्वा (देऊन), हुत्वा (होऊन). 603, 7. Dīgho ca. ६०३, ७. दीर्घ सुद्धा. Dīgho ca saro garukova daṭṭhabbo. दीर्घ स्वर देखील 'गरु' (गुरु) मानला पाहिजे. Āhāro, nadī, vadhū, te dhammā, opanayiko. आहारो (अन्न), नदी, वधू, ते धम्मा (ते धम्म), ओपनयिको (जवळ नेणारे). 604, 684. Akkharehi kāra. ६०४, ६८४. अक्षरांच्या अर्थानंतर 'कार' प्रत्यय लागतो. Akkharatthehi akkharābhidheyyehi kārapaccayo hoti payoge sati. अक्षरांचा अर्थ व्यक्त करणाऱ्या शब्दांनंतर, प्रयोगात असताना 'कार' प्रत्यय होतो. A eva akāro, ā eva ākāro, ya eva yakāro. 'अ' हाच 'अकार', 'आ' हाच 'आकार', 'य' हाच 'यकार' होय. 605, 647. Yathāgamamikāro[Pg.282]. ६०५, ६४७. बुद्धांच्या वचनानुसार 'इ' कार होतो. Yathāgamaṃ sabbadhātūhi sabbapaccayesu ikārāgamo hoti. बुद्धांच्या वचनानुसार, सर्व धातूंनंतर सर्व प्रत्यय असताना 'इ' काराचा आगम होतो. Kāriyaṃ, bhavitabbaṃ, janitabbaṃ, viditabbaṃ, karitvā, icchitaṃ. कारियं (केले पाहिजे), भवितब्बं (असावे), जनितब्बं (उत्पन्न केले पाहिजे), विदितब्बं (जाणले पाहिजे), करित्वा (करून), इच्छितं (इच्छिलेले). 606, 642. Dadhantato yo kvaci. ६०६, ६४२. ज्या धातूंचा अंत 'द' आणि 'ध' ने होतो, त्यांच्यापुढे कधीकधी 'य' होतो. Dakāradhakārantāya dhātuyā yathāgamaṃ yakārāgamo hoti kvaci tunādīsu paccayesu. कधीकधी 'तुन' इत्यादी प्रत्यय असताना, 'द' आणि 'ध' अंत असणाऱ्या धातूंनंतर बुद्धांच्या वचनानुसार 'य' काराचा आगम होतो. Buddho loke uppajjitvā, dhammaṃ bujjhitvā. बुद्ध जगात उत्पन्न होऊन (बुद्धो लोके उप्पज्जित्वा), धम्म जाणून घेऊन (धम्मं बुज्झित्वा). Dadhantatoti kimatthaṃ? Labhitvā. 'दधन्ततो' (द आणि ध अंत असणारे) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'लभित्वा' (मिळवून) या उदाहरणात हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. Kvacīti kimatthaṃ? Uppādetvā. 'क्वचि' (कधीकधी) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'उप्पादेत्वा' (उत्पन्न करून) यासाठी. Iti kibbidhānakappe catuttho kaṇḍo. अशा प्रकारे कृदंत विधानामधील (किब्बिधानकप्प) चौथा खंड समाप्त झाला. Pañcamakaṇḍa पाचवा खंड 607, 578. Niggahita saṃyogādino. ६०७, ५७८. संयोगाच्या सुरुवातीला निग्गहीत (अनुस्वार) होतो. Saṃyogādibhūto nakāro niggahitamāpajjate. संयोगाच्या सुरुवातीला असणारा 'न' कार निग्गहीत (अनुस्वार) बनतो. Raṅgo, bhaṅgo, saṅgo. रङ्गो (रंगमंच), भङ्गो (नाश/भंग), सङ्गो (आसक्ती). 608, 623. Sabbattha [Pg.283] ge gī. ६०८, ६२३. सर्वत्र 'गे' च्या जागी 'गी' होतो. Geiccetassa dhātussa gīādeso hoti sabbattha ṭhāne. 'गे' या धातूच्या जागी सर्व ठिकाणी 'गी' असा आदेश होतो. Gītaṃ gāyati. गीत गातो. 609, 484. Sadassa sīdattaṃ. ६०९, ४८४. 'सद' धातूच्या जागी 'सीद' भाव होतो. Sadaiccetassa dhātussa sīdādeso hoti sabbattha ṭhāne. 'सद' या धातूच्या जागी सर्व ठिकाणी 'सीद' असा आदेश होतो. Nisinno, nisīdati. निसिन्नो (बसलेला), निसीदति (बसतो). 610, 627. Yajassa sarassi ṭṭhe. ६१०, ६२७. जेव्हा 'ट्ठ' पुढे असतो, तेव्हा 'यज' च्या स्वराचा 'इ' होतो. Yajaiccetassa dhātussa sarassa ikārādeso hoti ṭṭhe pare. जेव्हा 'ट्ठ' पुढे असतो, तेव्हा 'यज' या धातूच्या स्वराच्या जागी 'इ' कार असा आदेश होतो. Yiṭṭho, yiṭṭhā. यिट्ठो, यिट्ठा (यज्ञ केला/अर्पण केले). Ṭṭheti kimatthaṃ? Yajanaṃ. 'ट्ठे' (ट्ठ पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'यजनं' (यज्ञ करणे) या उदाहरणासारख्या ठिकाणी जेथे 'ट्ठ' पुढे नाही, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 611, 608. Hacatutthānamantānaṃ do dhe. ६११, ६०८. जेव्हा 'ध' पुढे असतो, तेव्हा धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'ह' आणि चौथ्या वर्णाच्या जागी 'द' होतो. Hacatutthānaṃ dhātvantānaṃ do ādeso hoti dhe pare. जेव्हा 'ध' पुढे असतो, तेव्हा धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'ह' आणि चौथ्या वर्णाच्या जागी 'द' असा आदेश होतो. Sannaddho, kuddho, yuddho, siddho, laddho, āraddho. सन्नद्धो (सज्ज झालेला), कुद्धो (क्रोधित झालेला), युद्धो (लढलेला), सिद्धो (सिद्ध झालेला), लद्धो (मिळालेला), आरद्धो (सुरू केलेला). 612, 615. Ḍo [Pg.284] ḍhakāre. ६१२, ६१५. जेव्हा 'ढ' पुढे असतो, तेव्हा 'ड' होतो. Hacatutthānaṃ dhātvantānaṃ ḍo ādeso hoti ḍhakāre pare. जेव्हा 'ढ' पुढे असतो, तेव्हा धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'ह' आणि चौथ्या वर्णाच्या जागी 'ड' असा आदेश होतो. Dayhatīti daḍḍho, vaḍḍhatīti vuḍḍho. जळतो म्हणून तो 'दड्ढो' (जळलेला), वाढतो म्हणून तो 'वुड्ढो' (वृद्ध/मोठा). Ḍhakāreti kimatthaṃ? Dāho. 'ढकारे' (ढ पुढे असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'दाहो' (दाह/जळणे) या उदाहरणासारख्या ठिकाणी जेथे 'ढ' पुढे नाही, तेथे हा नियम लागू होऊ नये म्हणून. 613, 583. Gahassa ghara ṇe vā. ६१३, ५८३. कधीकधी 'ण' प्रत्यय पुढे असताना 'गह' धातूच्या जागी 'घर' होतो. Gahaiccetassa dhātussa sabbassa gharādeso hoti vā ṇapaccaye pare. कधीकधी 'ण' प्रत्यय पुढे असताना संपूर्ण 'गह' या धातूच्या जागी 'घर' असा आदेश होतो. Gharaṃ, gharāni. घरं (घर), घराणि (घरे). Vāti kimatthaṃ? Gāho. 'वा' (कधीकधी) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'गाहो' (पकडणे/ग्रहण) यासाठी. 614, 581. Dahassa do ḷaṃ. ६१४, ५८१. 'दह' धातूच्या 'द' च्या जागी 'ळ' होतो. Dahaiccetassa dhātussa dakāro ḷattamāpajjate vā ṇapaccaye pare. 'दह' या धातूच्या 'द' काराचा 'ळ' कार होतो (पर्यायाने), जेव्हा 'ण' प्रत्यय पुढे असतो. Paridahanaṃ pariḷāho. परिदहनं, परिळाहो (दाह/जळणे). Vāti kimatthaṃ? Paridāho. 'वा' (पर्यायाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? परिदाहो (या उदाहरणात हा नियम लागू न होण्यासाठी). 615, 586. Dhātvantassa lopo kvimhi. ६१५, ५८६. 'क्वि' प्रत्यय पुढे असताना धातूच्या अंताचा लोप होतो. Dhātvantassa byañjanassa lopo hoti kvimhi paccaye pare. 'क्वि' प्रत्यय पुढे असताना धातूच्या शेवटी असणाऱ्या व्यंजनाचा लोप होतो. Bhujena [Pg.285] gacchatīti, bhujago. Urena gacchatīti urago, turago, saṅkho. 'भुजेन गच्छतीति' (जो वळणावळणाने जातो तो) 'भुजगो' (सर्प); 'उरेन गच्छतीति' (जो छातीने सरपटत जातो तो) 'उरगो' (सर्प), 'तुरगो' (घोडा), 'सङ्खो' (शंख). 616, 587. Vidante ū. ६१६, ५८७. 'विद' च्या शेवटी 'ऊ' होतो. Vidaiccetassa dhātussa ante ūkārāgamo hoti kvimhi paccaye pare. 'क्वि' प्रत्यय पुढे असताना 'विद' या धातूच्या शेवटी 'ऊ' काराचा आगम होतो. Lokaṃ vidati jānātīti lokavidū. 'लोकं विदति जानातीति' (जो जगाला जाणतो तो) 'लोकविदू' (लोकविद्/जगाला जाणणारा). 617, 633. Na ma ka rānamantānaṃ niyuttatamhi. ६१७, ६३३. 'इ' युक्त 'त' प्रत्यय पुढे असताना 'न', 'म', 'क' आणि 'र' अंत असणाऱ्या धातूंच्या अंताचा लोप होत नाही. Nakāra makāra kakāra rakārānaṃ dhātvantānaṃ lopo na hoti ikārayutte tapaccaye pare. 'इ' कारयुक्त 'त' प्रत्यय पुढे असताना धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'न' कार, 'म' कार, 'क' कार आणि 'र' कार यांचा लोप होत नाही. Hanibhuṃ, gamito, ramito, sakito, sarito, karitvā. हनितुं (मारण्यासाठी), गमितो (गेलेला), रमितो (रमलाला/आनंदित), सकितो (आदर केलेला), सरितो (स्मरण केलेला), करित्वा (करून). Iyuttatamhīti kimatthaṃ? Gato, sato. 'इयुत्ततम्हि' ('इ' युक्त 'त' प्रत्यय असताना) असे कशासाठी म्हटले आहे? 'इ' युक्त 'त' प्रत्यय नसताना हा नियम लागू होऊ नये म्हणून; जसे की: गतो (गेलेला), सतो (स्मरण असलेला/स्मृतिमान). 618, 571. Na ka gattaṃ ca jāṇvumhi. ६१८, ५७१. 'ण्वु' प्रत्यय पुढे असताना 'च' आणि 'ज' चे 'क' आणि 'ग' होत नाही. Cakāra jakārā kakāra gakārattaṃ nāpajjante ṇvumhi paccaye pare. 'ण्वु' प्रत्यय पुढे असताना 'च' कार आणि 'ज' कार यांचे अनुक्रमे 'क' कार आणि 'ग' कार होत नाहीत. Pacatīti pācako, yajatīti yājako. 'पचतीति' (जो शिजवतो तो) 'पाचको' (स्वयंपाकी); 'यजतीति' (जो यज्ञ करतो तो) 'याजको' (याजक). 619, 573. Karassa [Pg.286] ca tattaṃ tusmiṃ. ६१९, ५७३. 'तु' प्रत्यय पुढे असताना 'कर' च्या (र-काराचा) 'त' कार होतो. Karaiccetassa dhātussa antassa rakārassa takārattaṃ hoti tupaccaye pare. 'तु' प्रत्यय पुढे असताना 'कर' या धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'र' काराचा 'त' कार होतो. Karotīti kattā, karontīti kattāro. 'करोतीति' (जो करतो तो) 'कत्ता' (कर्ता), 'करोन्तीति' (जे करतात ते) 'कत्तारो' (कर्ते). 620, 549. Tuṃ tuna tabbesu vā. ६२०, ५४९. 'तुं', 'तुन' आणि 'तब्ब' प्रत्यय पुढे असताना कधीकधी (हा नियम लागू होतो). Karaiccetassa dhātussa antassa rakārassa takārattaṃ hoti vā tuṃ tuna tabbaiccetesu paccayesu. 'तुं', 'तुन' आणि 'तब्ब' हे प्रत्यय पुढे असताना 'कर' या धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'र' काराचा पर्यायाने (कधीकधी) 'त' कार होतो. Kattuṃ, kātuṃ, kattuna. Kātuna, kattabbaṃ, kātabbaṃ. कत्तुं, कातुं (करण्यासाठी); कत्तुन, कातुन (करून); कत्तब्बं, कातब्बं (करावे असे/कर्तव्य). 621, 553. Kāritaṃ viya ṇānubandho. ६२१, ५५३. 'ण' हा अनुबंध (इत्-संज्ञक वर्ण) 'कारित' प्रमाणे समजावा. Ṇakārānubandho paccayo kāritaṃ viya daṭṭhabbo vā. 'ण' कार अनुबंध असलेला प्रत्यय 'कारित' प्रमाणे समजावा. Dāho, deho, vāho, bāho, cāgo, vāro, cāro, parikkhāro, dāyako, nāyako, lāvako, bhāvako, kārī, ghātī, dāyī. दाहो, देहो, वाहो, बाहो, चागो, वारो, चारो, परिक्खारो, दायको, नायको, लावको, भावको, कारी, घाती, दायी. Vāti kimatthaṃ? Upakkharo. 'वा' (पर्यायाने) असे कशासाठी म्हटले आहे? उपक्खरो (सहाय्यक - या उदाहरणात हा नियम लागू न होण्यासाठी). 622, 570. Anakā [Pg.287] yu ṇvūnaṃ. ६२२, ५७०. 'यु' आणि 'ण्वु' चे अनुक्रमे 'अन' आणि 'अक' होतात. Yuṇvuiccetesaṃ paccayānaṃ ana akaiccete ādesā honti. 'यु' आणि 'ण्वु' या प्रत्ययांचे अनुक्रमे 'अन' आणि 'अक' हे आदेश होतात. Nandanaṃ, kārako. नन्दनं (आनंद देणे/नंदन), कारको (करणारा/कारक). 623, 554. Ka gā ca jānaṃ. ६२३, ५५४. 'च' आणि 'ज' चे 'क' आणि 'ग' होतात. Ca jaiccetesaṃ dhātvantānaṃ kakāragakārādesā honti ṇānubandhe paccaye pare. 'ण' अनुबंध असलेला प्रत्यय पुढे असताना धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'च' आणि 'ज' चे अनुक्रमे 'क' कार आणि 'ग' कार हे आदेश होतात. Pāko, yogo. पाको (पाक/शिजवणे), योगो (योग/संबंध). Iti kibbidhānakappe pañcamo kaṇḍo. अशा प्रकारे कृदंत प्रकरणातील (किब्बिधान कप्प) पाचवा खंड समाप्त झाला. Kitakappo niṭṭhito. कृदंत प्रकरण (कितकप्प) समाप्त झाले. 8. Uṇādikappa ८. उणादि प्रकरण (उणादिकप्प). Chaṭṭhakaṇḍa सहावा खंड (छठ्ठकंड). 624, 563. Kattari [Pg.288] kita. ६२४, ५६३. कर्ता या अर्थी 'कित' प्रत्यय होतात. Kattuiccetasmiṃ atthe kita paccayā honti. कर्ता (कत्तु) या अर्थी 'कित' प्रत्यय होतात. Kāru, kāruko, kārako, pācako, kattā, janitā, pacitā, netā. कारु (कारागीर), कारुको, कारको (करणारा), पाचको (शिजवणारा), कत्ता (कर्ता), जनिता (जन्म देणारा), पचिता (शिजवणारा), नेता (नेता/मार्गदर्शक). 625, 605. Bhāvakammesu kiccatta khatthā. ६२५, ६०५. भाव (क्रिया) आणि कर्म या अर्थी 'किच्च' आणि 'ख' अर्थाचे प्रत्यय होतात. Bhāvakammaiccetesvatthesu kicca tta khatthaiccete paccayā honti. 'भाव' (क्रिया) आणि 'कर्म' या अर्थांमध्ये 'किच्च' (kicca), 'त्त' (tta) आणि 'खत्थ' (khattha) हे प्रत्यय होतात. Upasampādetabbaṃ upasampādanīyaṃ bhavatā, sayitabbaṃ bhavatā, kattabbaṃ bhavatā, bhottabbo odano bhavatā, asitabbaṃ bhojanaṃ bhavatā, asitaṃ bhavatā, sayitaṃ bhavatā, pacitaṃ bhavatā, asitaṃ asanaṃ bhavatā, sayitaṃ sayanaṃ bhavatā, pacito odano bhavatā, kiñcissayo, īsassayo, dussayo, sussayo bhavatā. आपल्याद्वारे उपसंपदा दिली जावी (किंवा उपसंपन्न केले जावे), आपल्याद्वारे निजले जावे, आपल्याद्वारे केले जावे, आपल्याद्वारे भात खाल्ला जावा, आपल्याद्वारे भोजन केले जावे, आपल्याद्वारे खाल्ले गेले, आपल्याद्वारे निजले गेले, आपल्याद्वारे शिजवले गेले, आपल्याद्वारे भोजन केले गेले, आपल्याद्वारे शयन केले गेले, आपल्याद्वारे भात शिजवला गेला, आपल्याद्वारे थोडे आश्रय घेण्याजोगे, ईषत् आश्रय घेण्याजोगे, कठीणतेने आश्रय घेण्याजोगे, सहजतेने आश्रय घेण्याजोगे व्हावे. 626, 634. Kammani [Pg.289] dutiyāya tto. ६२६, ६३४. कर्म अर्थामध्ये द्वितीया विभक्ती असताना 'त्त' (tto) प्रत्यय होतो. Kammani iccetasmiṃ atthe dutiyāyaṃ vibhattiyaṃ kattari ttapaccayo hoti. 'कर्म' या अर्थामध्ये, द्वितीया विभक्ती असताना, कर्ता अर्थात 'त्त' (tta) प्रत्यय होतो. Dānaṃ dinno devadatto, sīlaṃ rakkhito devadatto, bhattaṃ bhutto devadatto, garuṃ upāsito devadatto. दान देणारा देवदत्त, शील राखणारा देवदत्त, भात जेवणारा देवदत्त, गुरूंची सेवा करणारा देवदत्त. 627, 652. Khyādīhi māna ma ca to vā. ६२७, ६५२. 'खी' इत्यादी धातूंहून 'मान' आणि 'म' प्रत्यय होतात, आणि 'म' च्या जागी विकल्पेकरून 'त' होतो. Khi bhī su ru hu vā dhū hi lū pī adaiccevamādīhi dhātūhi mana paccayo hoti, massa ca to hoti vā. 'खी', 'भी', 'सु', 'रु', 'हु', 'वा', 'धू', 'हि', 'लू', 'पी', 'अद्' इत्यादी धातूंहून 'मन' प्रत्यय होतो, आणि 'म' च्या जागी विकल्पेकरून 'त' होतो. Khīyanti upaddavā etthāti khemo, bhāyitabboti bhemo, bhāyanti etasmāti vā bhemo, raṃsiyo abhissavetīti somo, ravati gacchatīti romo, huvati juhvati etenāti homo, paṭilomavasena vāti gacchatīti vāmo, lāmakavasena vāti gacchati pavattatīti vā vāmo, dhunāti kampatīti dhūmo, seṭṭhabhāvena hinoti pavattati cittaṃ etasminti hemo, lunitabboti lomo, maṃsacammāni lunāti chindatīti vā lomo, piyanaṃ pemo, piyāyitabboti vā pemo, sukhadukkhaṃ adati bhakkhatīti attā, jātijarāmaraṇādīhi adīyate bhakkhīyateti vā attā, ātumā. जेथे उपद्रव नष्ट होतात ते 'खेम' (क्षेम), ज्याच्यापासून भ्यावे असा तो 'भेम', किंवा ज्याच्यापासून लोक भ्यातात तो 'भेम', जो किरणे पसरवतो तो 'सोम', जो शब्द करतो किंवा जातो तो 'रोम', ज्याच्याद्वारे हवन केले जाते तो 'होम', प्रतिलोम रूपाने (प्रतिकूलतेने) जो वाहतो किंवा जातो तो 'वाम', किंवा कनिष्ठतेने जो वाहतो किंवा प्रवृत्त होतो तो 'वाम', जो कंपित करतो तो 'धूम', श्रेष्ठत्वामुळे ज्याच्यामध्ये चित्त प्रवृत्त होते ते 'हेम' (सुवर्ण), जे कापले जावे ते 'लोम', किंवा जे मांस आणि त्वचेला छेदते ते 'लोम', प्रिय असणे म्हणजे 'पेम' (प्रेम), किंवा ज्याच्यावर प्रेम केले जावे ते 'पेम', जो सुख-दुःखाचा उपभोग घेतो तो 'अत्ता' (आत्मा), किंवा जो जन्म, जरा, मरण इत्यादींद्वारे खाल्ला जातो तो 'अत्ता' किंवा 'आतुमा'. 628, 653. Samādīhi [Pg.290] tha mā. ६२८, ६५३. 'सम' इत्यादी धातूंहून 'थ' आणि 'म' प्रत्यय होतात. Samu damu dara raha du hi si bhī dā yā sā ṭhābhasaiccevamādīhi dhātūhi tha ma paccayā honti. 'समु', 'दमु', 'दर', 'रह', 'दु', 'हि', 'सि', 'भी', 'दा', 'या', 'सा', 'ठा', 'भस' इत्यादी धातूंहून 'थ' आणि 'म' प्रत्यय होतात. Sametīti samatho, damatīti damatho, damanaṃ vā damatho, damitabboti vā damatho, daratīti daratho, jiṇṇabhāvaṃ rahissati gaṇhissatīti ratho, dabbasambhāre rahati gaṇhātīti vā ratho, davati gacchatīti dumo, davati vuddhi viruḷhi gacchati pavattatīti uddhaṃ vā dumo, pathavīpabbatādīsu gacchati patatīti himo, kammavācāya bandhati etthāti sīmā. Bandhitabbāti vā sīmā. Bhāyanti etasmāti bhīmo, satte avakhaṇḍenti nivārenti etenāti dāmo, mūsikādīhi khādīyati avakhaṇḍīyatīti vā dāmo, yāti gacchatīti yāmo, paresaṃ cittaṃ gaṇhituṃ samatthetīti sāmo, tiṭṭhanti etenāti thāmo, bhasati bhasmīkarīyatīti bhasmā. जो शांत करतो तो 'समथ' (शमथ), जो दमन करतो तो 'दमथ', किंवा दमन करणे म्हणजे 'दमथ', किंवा ज्याचे दमन केले जावे तो 'दमथ', जो पीडा देतो तो 'दरथ', जो जीर्ण भाव प्राप्त करतो तो 'रथ', किंवा जो लाकूड इत्यादी सामग्री ग्रहण करतो तो 'रथ', जो वेगाने वाढतो तो 'दुम' (वृक्ष), किंवा जो वरच्या दिशेने वृद्धी आणि प्रगती प्राप्त करतो तो 'दुम', जो पृथ्वी, पर्वत इत्यादींवर पडतो तो 'हिम', जेथे संघ कर्माच्या वाचनाने सीमा निश्चित केली जाते ती 'सीमा', किंवा जी बांधली जावी ती 'सीमा', ज्याच्यापासून लोक भ्यातात तो 'भीम', ज्याच्याद्वारे प्राण्यांना रोखले जाते तो 'दाम', किंवा जो उंदीर इत्यादींद्वारे कुरतडला जातो तो 'दाम', जो जातो तो 'याम', जो इतरांचे चित्त जिंकण्यास समर्थ करतो तो 'साम', ज्याच्याद्वारे स्थिर राहतात ते 'थाम' (सामर्थ्य), जे जळते किंवा भस्म केले जाते ते 'भस्मा' (भस्म). 629, 569. Gahassu’padhasse vā. ६२९, ५६९. 'गह' या धातूच्या उपधेतील 'अ' च्या जागी विकल्पेकरून 'ए' होतो. Gahaiccetassa dhātussa upadhassa akārassa etta hoti vā. 'गह' या धातूच्या उपधेतील 'अ' काराच्या जागी विकल्पेकरून 'ए' कार होतो. Dabbasambhāra gaṇhātīti gehaṃ, gahaṃ. जे लाकूड इत्यादी सामग्री ग्रहण करते (धारण करते) ते 'गेह' किंवा 'गह' (घर). 630, 654. Masussa [Pg.291] sussa cchara ccherā. ६३०, ६५४. 'मसु' या प्रातिपदिकाच्या 'सु' च्या जागी 'च्छर' आणि 'च्छेर' हे आदेश होतात. Masuiccetassa pāṭipadikassa sussa ccharaccherādesā honti. 'मसु' या प्रातिपदिकाच्या 'सु' च्या जागी 'च्छर' आणि 'च्छेर' हे आदेश होतात. Maccharatīti maccharo, evaṃ macchero. जो मत्सर (कंजूषपणा) करतो तो 'मच्छर' (मत्सर), याचप्रमाणे 'मच्छेर' होतो. 631, 655. Āpubbacarassa ca. ६३१, ६५५. 'आ' पूर्वपद असलेल्या 'चर' धातूच्या जागी 'च्छरिय', 'च्छर' आणि 'च्छेर' हे आदेश होतात, आणि 'आ' चा र्हस्व होतो. Āpubbassa caraiccetassa dhātussa cchariyaccharaccherā desā honti, āpubbassa ca rasso hoti. 'आ' पूर्वपद असलेल्या 'चर' या धातूच्या जागी 'च्छरिय', 'च्छर' आणि 'च्छेर' हे आदेश होतात, आणि 'आ' चा र्हस्व होतो. Ābhuso caritabbanti acchariyaṃ. Evaṃ accharaṃ, accheraṃ. जे वारंवार आचरले जावे ते 'अच्छरिय' (आश्चर्य). याचप्रमाणे 'अच्छर' आणि 'अच्छेर' होतात. Caggahaṇena masussa sussāpi cchariyādeso hoti, macchariyaṃ. 'च' च्या ग्रहणाने 'मसु' च्या 'सु' च्या जागी देखील 'च्छरिय' आदेश होतो, जसे - 'मच्छरिय' (मत्सर). 632, 656. Ala kala salehi layā. ६३२, ६५६. 'अल', 'कल' आणि 'सल' या धातूंहून 'ल' आणि 'य' प्रत्यय होतात. Ala kala salaiccetehi dhātūhi la yapaccayā honti. 'अल', 'कल' आणि 'सल' या धातूंहून 'ल' आणि 'य' प्रत्यय होतात. Alati samatthetīti allaṃ, kalitabbaṃ saṅkhyātabbanti kallaṃ, salati gacchati pavisatīti sallaṃ. Evaṃ alyaṃ, kalyaṃ, salyaṃ. जे समर्थ करते ते 'अल्ल', जे मोजले जावे किंवा जाणले जावे ते 'कल्ल' (योग्य/कुशल), जे टोचते किंवा प्रवेश करते ते 'sallaṃ' (शल्य). याचप्रमाणे 'अल्य', 'कल्य' आणि 'सल्य' होतात. 633, 657. Yāṇa [Pg.292] lāṇā. ६३३, ६५७. 'याण' आणि 'लाण' हे प्रत्यय होतात. Tehi kala salaiccetehi dhātūhi yāṇa lāṇapaccayā honti. त्या 'कल' आणि 'सल' या धातूंहून 'याण' आणि 'लाण' प्रत्यय होतात. Kalitabbaṃ saṅkhyātabbanti kalyāṇaṃ, gaṇato paṭikkamitvā salanti etthāti paṭisalyāṇaṃ. Evaṃ sallāṇo, paṭisallāṇo. जे मोजले जावे किंवा प्रशंसनीय असावे ते 'कल्याण', समूहापासून दूर जाऊन जेथे प्रवेश केला जातो ते 'पटिसल्याण' (प्रतिसंलयन/एकांतवास). याचप्रमाणे 'सल्लाण' आणि 'पटिसल्लाण' होतात. 634, 658. Mathissa thassa lo ca. ६३४, ६५८. 'मथ' या धातूच्या 'थ' च्या जागी 'ल' होतो आणि 'च' च्या ग्रहणाने द्वित्व होते. Mathaiccetassa dhātussa thassa lādesohoti. Aññamaññaṃ mathati viloḷatīti mallo, mallaṃ. 'मथ' या धातूच्या 'थ' च्या जागी 'ल' आदेश होतो. जे परस्परांना मथित (मंथन) किंवा विलोडित करते तो 'मल्ल' किंवा 'मल्ल' (भांडे). Caggahaṇena lato ko ca āgamo hoti. Mallako, mallakaṃ. 'च' च्या ग्रहणाने 'ल' नंतर 'क' चा आगम देखील होतो, जसे - 'मल्लक' (mallako), 'मल्लक' (mallakaṃ). 635, 559. Pesātisaggapattakālesukiccā. ६३५, ५५९. 'प्रेषण' (पाठवणे), 'अनुमती' (अतिसर्ग) आणि 'योग्य वेळ' (प्राप्तकाल) या अर्थांमध्ये 'किच्च' प्रत्यय होतात. Pesa atisagga pattakālaiccetesvatthesu kiccapaccayā honti. 'प्रेषण', 'अनुमती' आणि 'योग्य वेळ' या अर्थांमध्ये 'किच्च' प्रत्यय होतात. Kattabbaṃ kammaṃ bhavatā, karaṇīyaṃ kiccaṃ bhavatā, bhottabbaṃ bhojanaṃ bhavatā, bhojanīyaṃ bhojanaṃ bhavatā, ajjhayitabbaṃ ajjheyyaṃ bhavatā, ajjhayanīyaṃ ajjheyyaṃ bhavatā. आपल्याद्वारे कर्म केले जावे, आपल्याद्वारे कर्तव्य केले जावे, आपल्याद्वारे भोजन केले जावे, आपल्याद्वारे भोजन केले जावे, आपल्याद्वारे अध्ययन केले जावे, आपल्याद्वारे अध्ययन केले जावे. 636, 659. Avassakā’dhamiṇesu [Pg.293] ṇī ca. ६३६, ६५९. 'अनिवार्यता' (अवश्यक) आणि 'ऋण' (कर्जदार) या अर्थांमध्ये 'णी' प्रत्यय होतो, आणि 'किच्च' प्रत्यय देखील होतात. Avassaka adhamiṇaiccetesvatthesu ṇīpaccayo hoti, kiccā ca. 'अनिवार्यता' आणि 'ऋण' या अर्थांमध्ये 'णी' प्रत्यय होतो, आणि 'किच्च' प्रत्यय देखील होतात. Avassate tāva – kārīsi me kammaṃ avassaṃ hārīsi me bhāraṃ avassaṃ. प्रथम अनिवार्यतेच्या अर्थात – 'तू माझे काम नक्कीच करशील', 'तू माझा भार नक्कीच वाहशील'. Adhamiṇe – dāyīsi me sataṃ iṇaṃ, dhārīsi me sahassaṃ iṇaṃ. ऋणाच्या अर्थात – 'तू मला शंभर कर्ज देणे आहेस', 'तू मला हजार कर्ज देणे आहेस'. Kiccā ca – dātabbaṃ me bhavatā sataṃ iṇaṃ. Dhārayitabbaṃ me bhavatā sahassaṃ iṇaṃ, kattabbaṃ me bhavatā gehaṃ, karaṇīyaṃ me bhavatā kiccaṃ, kāriyaṃ me bhavatā sayanaṃ. आणि 'किच्च' प्रत्ययांच्या बाबतीत – 'आपल्याद्वारे मला शंभर कर्ज दिले जावे', 'आपल्याद्वारे मला हजार कर्ज दिले जावे', 'आपल्याद्वारे घर बनवले जावे', 'आपल्याद्वारे कर्तव्य केले जावे', 'आपल्याद्वारे शयन (बिछाना) तयार केले जावे'. 637, 0. Arahasakkādīhi tuṃ. ६३७, ०. 'अरह', 'सक्क' इत्यादी शब्दांच्या योगात सर्व धातूंहून 'तुं' प्रत्यय होतो. Araha sakka bhabbaiccevamādīhi payoge sati sabbadhātūhi tuṃpaccayo hoti. 'अरह', 'सक्क', 'भब्ब' इत्यादी शब्दांचा प्रयोग असताना सर्व धातूंहून 'तुं' प्रत्यय होतो. Arahā bhavaṃ vattuṃ, arahā bhavaṃ kattuṃ, sakkā bhavaṃ hantuṃ, sakkā bhavaṃ janetuṃ, janituṃ, bhavituṃ, sakkā bhavaṃ dātuṃ, sakkā bhavaṃ gantuṃ, tabbo bhavaṃ janetuṃ iccevamādi. आपण बोलण्यास योग्य आहात, आपण करण्यास योग्य आहात, आपण मारण्यास समर्थ आहात, आपण उत्पन्न करण्यास, होण्यास समर्थ आहात, आपण देण्यास समर्थ आहात, आपण जाण्यास समर्थ आहात, आपण उत्पन्न करण्यास योग्य आहात इत्यादी. 638, 660. Vajādīhipabbajjādayo [Pg.294] nippajjante. ६३८, ६६०. 'वज' इत्यादी धातूंपासून 'पब्बज्जा' (प्रव्रज्या/दीक्षा) इत्यादी शब्द सिद्ध होतात. Vajaiccevamādīhi dhātūhi, upasaggapaccayādīhi ca pabbajjādayo saddā nippajjante. 'वज' इत्यादी धातूंपासून आणि उपसर्ग, प्रत्यय इत्यादींपासून 'पब्बज्जा' इत्यादी शब्द सिद्ध होतात. Paṭhamameva vajitabbāti pabbajjā, iñjanaṃ ejjā, samajjanaṃ samajjā, nisīdanaṃ nisajjā, vijānanaṃ vijjā visajjanaṃ visajjā, padanaṃ pajjā, hananaṃ vajjhā, esanaṃ icchā, atiesanaṃ aticchā, sadanaṃ sajjā, sayanti etthāti seyyā, sammā cittaṃ nidheti etāyāti saddhā, caritabbā cariyā, karaṇaṃ kiriyā, rujanaṃ rucchā, padanaṃ pacchā, riñcanaṃ ricchā, tikicchanaṃ titicchā, saṃkocanaṃ saṃkucchā, madanaṃ macchā, labhanaṃ lacchā, radihabbāti racchā, radanaṃ vilekhanaṃ vāracchā, adho bhāgena gacchatīti tiracchā, tiracchāno, ajanaṃ acchā, titikkhatīti titikkhā, saha āgamanaṃ sāgacchā, duṭṭhu bhakkhanaṃ dobhacchā, duṭṭhu rosanaṃ durucchā, pucchanaṃ pucchā, muhanaṃ mucchā, vasanaṃ vacchā, kacanaṃ kacchā, saha kathanaṃ sākacchā, tudanaṃ tucchā, visanaṃ vicchā, pisanaṃ picchillā, sukhadukkhaṃ mudati bhakkhatīti maccho[Pg.295], sattānaṃ pāṇaṃ museti cajetīti maccu, satanaṃ saccaṃ, uddhaṃ dhunāti kampatīti uddhaccaṃ, naṭanaṃ naccaṃ, nitanaṃ niccaṃ, tathanaṃ tacchaṃ iccevamādi. प्रथमच जाणे योग्य आहे म्हणून 'पब्बज्जा' (प्रव्रज्या), कंप पावणे म्हणजे 'एज्जा', एकत्र येणे म्हणजे 'समज्जा', बसणे म्हणजे 'निसज्जा', विशेष जाणणे म्हणजे 'विज्जा' (विद्या), विसर्जन करणे म्हणजे 'विसज्जा', गमन करणे म्हणजे 'पज्जा', वध करणे म्हणजे 'वज्झा', इच्छा करणे म्हणजे 'इच्छा', अति-इच्छा करणे म्हणजे 'अतिच्छा', बसणे म्हणजे 'सज्जा', येथे झोपतात म्हणून 'सेय्या' (शय्या), जिच्याद्वारे चित्त चांगल्या प्रकारे प्रस्थापित केले जाते ती 'सद्धा' (श्रद्धा), आचरण करण्यास योग्य ती 'चरिया' (चर्या), करणे म्हणजे 'किरिया' (क्रिया), पीडा होणे म्हणजे 'रुच्छा', गमन करणे म्हणजे 'पच्छा', रिक्त करणे म्हणजे 'रिच्छा', चिकित्सा करणे म्हणजे 'तितिच्छा' (तितिक्षा), संकोच करणे म्हणजे 'संकुच्छा', मद होणे म्हणजे 'मच्छा', लाभ होणे म्हणजे 'लच्छा', खोदण्यास योग्य ती 'रच्छा', खोदणे किंवा खरवडणे म्हणजे 'आरच्छा', आडव्या भागाने जातो तो 'तिरच्छा' किंवा 'तिरच्छानो' (तिर्यक/प्राणी), गमन करणे म्हणजे 'अच्छा', सहन करतो ती 'तितिक्खा' (तितिक्षा), एकत्र येणे म्हणजे 'सागच्छा', वाईट रीतीने खाणे म्हणजे 'दोभच्छा', वाईट रीतीने रागवणे म्हणजे 'दुरुच्छा', विचारणे म्हणजे 'पुच्छा', मोहित होणे म्हणजे 'मुच्छा' (मूर्च्छा), राहणे म्हणजे 'वच्छा', बांधणे म्हणजे 'कच्छा', एकत्र बोलणे म्हणजे 'साकच्छा' (साकच्छ/चर्चा), टोचणे म्हणजे 'तुच्छा', प्रवेश करणे म्हणजे 'विच्छा', पिष्ट करणे म्हणजे 'पिच्छिल्ला', सुख-दुःखात आनंद मानतो तो 'मच्छो' (मासा), प्राण्यांचे प्राण हरण करतो तो 'मच्चु' (मृत्यू), सत्य असणे म्हणजे 'सच्चं' (सत्य), वरच्या दिशेने चंचल होतो ते 'उद्धच्चं' (उद्धत्य), नृत्य करणे म्हणजे 'नच्चं' (नृत्य), नित्य असणे म्हणजे 'निच्चं' (नित्य), तथ्य असणे म्हणजे 'तच्छं' (तथ्य) इत्यादी. 639, 585. Kvilopo ca. ६३९, ५८५. आणि 'क्वि' चा लोप होतो. Kvilopo hoti, puna ca nippajjante. 'क्वि' प्रत्ययाचा लोप होतो, आणि पुन्हा ते (शब्द) सिद्ध होतात. Vividhehi sīlādiguṇehi bhavatīti vibhū, visesena vā bhavatīti vibhū, sayaṃ attanā bhavatīti sayambhū, abhivitvā bhavatīti abhibhū, saṃ suṭṭhu dhunāti kampatīti sandhū, visesena bhāti dibbatīti vibhā, nissesena bhāti dibbatīti nibhā, pakārena bhāti dibbatīti pabhā, saha bhāsanti etthāti sabhā, ābhuso bhāti dibbatīti ābhā, bhujena kuṭilena gacchatīti bhujago, turitaturito gacchatīti turago, saṃ suṭṭhu pathaviṃ khanatīti saṅkho, visesena yamati uparamatīti viyo, suṭṭhu manati jānātīti sumo, pari samantato tanoti vitthāretīti parito iccevamādi. विविध शील इत्यादी गुणांनी युक्त असतो म्हणून 'विभू', किंवा विशेष रूपाने अस्तित्वात असतो म्हणून 'विभू'; स्वतःहून (स्वतःच्या बळावर) उत्पन्न होतो म्हणून 'सयंभू' (स्वयंभू); सर्वांवर मात करून राहतो म्हणून 'अभिभू'; चांगल्या प्रकारे कंपित करतो म्हणून 'सन्धू'; विशेष रूपाने चमकते म्हणून 'विभा'; पूर्णपणे चमकते म्हणून 'निभा'; प्रकर्षाने चमकते म्हणून 'पभा' (प्रभा); जेथे एकत्र येऊन बोलतात ती 'सभा'; सर्व बाजूंनी चमकते म्हणून 'आभा'; वक्र गतीने चालतो म्हणून 'भुजगो' (भुजंग); वेगाने धावतो म्हणून 'तुरगो' (घोडा); चांगल्या प्रकारे पृथ्वी खणतो म्हणून 'संखो' (शंख); विशेष रूपाने शांत होतो म्हणून 'वियो'; चांगल्या प्रकारे जाणतो म्हणून 'सुमो'; चहूबाजूंनी विस्तार करतो म्हणून 'परितो' इत्यादी शब्द सिद्ध होतात. 640, 0. Sacajānaṃ kagā ṇānubandhe. ६४०, ०. 'ण' अनुबंध (इत्-संज्ञा) असलेला प्रत्यय पर असताना, 'च' आणि 'ज' अंत असणाऱ्या धातूंच्या 'च' आणि 'ज' च्या जागी अनुक्रमे 'क' आणि 'ग' हे आदेश होतात. Saca jānaṃ dhātūnamantānaṃ cajānaṃ kagādesā honti yathāsaṅkhyaṃ ṇānubandhe paccaye pare. 'ण' अनुबंध असलेला प्रत्यय नंतर आला असता, 'च' आणि 'ज' अंत असणाऱ्या धातूंच्या शेवटी असणाऱ्या 'च' आणि 'ज' च्या जागी अनुक्रमे 'क' आणि 'ग' हे आदेश होतात. Oko[Pg.296], pāko, seko, soko, viveko, cāgo, yogo, bhogo, rogo, rāgo, bhāgo, bhaṅgo, raṅgo, saṅgo. ओको, पाको, सेको, सोको, विवेको, चागो, योगो, भोगो, रोगो, रागो, भागो, भङ्गो, रङ्गो, सङ्गो. 641, 572. Nudādīhi yuṇvūnamanānanākānanakā sakāritehi ca. ६४१, ५७२. 'नुद' इत्यादी धातूंहून आणि प्रयोजक (कारित) प्रत्ययान्त धातूंहून 'यु' आणि 'ण्वु' या प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'अन', 'आनन', 'अक' आणि 'आननक' हे आदेश होतात. Nuda sūda jana su lū hu pu bhū ñā a sa samuiccevamādīhi dhātūhi, phanda citi āṇa iccevamādīhi sakāritehi ca yuṇvūnaṃ paccayānaṃ ana ānana aka ānanakādesā honti yathāsaṅkhyaṃ kattari, bhāvakaraṇesu ca. 'नुद', 'सूद', 'जन', 'सु', 'लू', 'हु', 'पु', 'भू', 'ञा' (ज्ञा), 'अस', 'समु' इत्यादी धातूंहून आणि 'फन्द', 'चिति', 'आण' इत्यादी प्रयोजक (कारित) धातूंहून 'यु' आणि 'ण्वु' या प्रत्ययांच्या जागी अनुक्रमे 'अन', 'आनन', 'अक' आणि 'आननक' हे आदेश कर्ता, भाव आणि करण अर्थांमध्ये होतात. Kattari tāva – panudatīti panūdano. Evaṃ sūdano, janano, savaṇo, lavano, havano, pavano, bhavano, ñāṇo, asano, samaṇo. प्रथम कर्ता अर्थात – 'पनुदतीति पनूदनो' (जो दूर करतो तो पनूदनो). याचप्रमाणे – सूदनो, जननो, सवणो, लवनो, हवनो, पवनो, भवनो, ञाणो (ज्ञान), असनो, समणो (श्रमण). Bhāve ca – panudate panūdanaṃ. Evaṃ sūdanaṃ, jananaṃ, savaṇaṃ, lavanaṃ, havanaṃ, pavanaṃ, bhavanaṃ, ñāṇaṃ, asanaṃ, samaṇaṃ, sañjānanaṃ, kuyate kānanaṃ. आणि भाव अर्थात – 'पनुदते पनूदनं' (दूर करणे म्हणजे पनूदनं). याचप्रमाणे – सूदनं, जननं, सवणं, लवनं, हवनं, पवनं, भवनं, ञाणं (ज्ञान), असनं, समणं, सञ्जाननं, 'कुयते काननं' (करणे म्हणजे काननं). Kārite ca – phandāpīyate phandāpanaṃ, cetāpīyate cetāpanaṃ, āṇāpīyate āṇāpanaṃ. आणि प्रयोजक (कारित) अर्थात – 'फन्दापीयते फन्दापनं' (कंपित करवणे म्हणजे फन्दापनं), 'चेतापीयते चेतापनं' (चेतनावान करवणे म्हणजे चेतापनं), 'आणापीयते आणापनं' (आज्ञा देववणे म्हणजे आणापनं). Karaṇe – nudanti anenāti nūdanaṃ, evaṃ sūdanaṃ, jananaṃ, savaṇaṃ, lavaṇaṃ, havanaṃ, pavanaṃ, bhaganaṃ, ñāṇaṃ, asanaṃ, savaṇaṃ. करण अर्थात – 'नुदन्ति अनेनाति नूदनं' (ज्याद्वारे दूर करतात ते नूदनं). याचप्रमाणे – सूदनं, जननं, सवणं, लवणं, हवनं, पवनं, भगनं, ञाणं (ज्ञान), असनं, सवणं. Puna [Pg.297] kattari – nudatīti nūdako, sūdatīti sūdadhakā, janetīti janako, suṇotīti sāvako, lunātīti lāvako, juhotīti hāvako, punātīti pāvako, bhavatīti bhāvako, jānātīti jānako, asatīti asako, upāsatīti upāsako, sametīti samako. पुन्हा कर्ता अर्थात – 'नुदतीति नूदको' (जो दूर करतो तो नूदको), 'सूदतीति सूदधका' (जो शिजवतो/नाश करतो तो सूदधका), 'जनेतीति जनको' (जो जन्म देतो तो जनको), 'सुणोतीति सावको' (जो ऐकतो तो सावको - श्रावक), 'लुनातीति लावको' (जो कापतो तो लावको), 'जुहोतीति हावको' (जो हवन करतो तो हावको), 'पुनातीति पावको' (जो पवित्र करतो तो पावको), 'भवतीति भावको' (जो अस्तित्वात येतो तो भावको), 'जानातीति जानको' (जो जाणतो तो जानको), 'असतीति असको' (जो उपभोग घेतो तो असको), 'उपासतीति उपासको' (जो सेवा करतो तो उपासको), 'समेतीति समको' (जो शांत करतो तो समको). Kārite tu – phandāpayatīti phandāpayako. Evaṃ āṇāpayako, cetāpayako, sañjānanako. प्रयोजक (कारित) अर्थात तर – 'फन्दापयतीति फन्दापयको' (जो कंपित करवतो तो फन्दापयको). याचप्रमाणे – आणापयको, चेतापयको, सञ्जाननको. 642, 588. I ya ta ma ki e sāna’mantassaro dīghaṃ kvaci du sa ssa guṇaṃ do raṃ sakkhī ca. ६४२, ५८८. 'इ', 'य', 'त', 'म', 'कि', 'ए', 'स' या सर्वनामांच्या शेवटी असणारा स्वर काही वेळा दीर्घ होतो; काही वेळा 'दु' आणि 'स' या धातूंच्या 'उ' काराला गुण होतो, 'द' काराचा 'र' कार होतो, आणि धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'स' च्या जागी अनुक्रमे 'स', 'क्ख', 'ई' हे आदेश होतात. Iya ta ma ki e saiccetesaṃ sabbanāmānamanto saro dīghamāpajjate, kvaci dusaiccetassa dhātussa ukāro guṇamāpajjate, dakāro rakāramāpajjate, dhātvantassa sassa ca sa kkha īiccete ādesā honti yathāsambhavaṃ. Ete saddā sakena sakena nāmena yathānuparodhena buddhasāsane pacchā puna nippajjante. 'इय', 'त', 'म', 'कि', 'ए', 'स' या सर्वनामांच्या शेवटी असणारा स्वर दीर्घ होतो; काही वेळा 'दु' या धातूच्या 'उ' काराला गुण होतो, 'द' काराचा 'र' कार होतो, आणि धातूच्या शेवटी असणाऱ्या 'स' च्या जागी यथासंभव 'स', 'क्ख', 'ई' हे आदेश होतात. हे शब्द आपापल्या नावाने बुद्धशासनात (बुद्धांच्या उपदेशात) नंतर कोणत्याही विरोधाशिवाय पुन्हा सिद्ध होतात. Imamiva naṃ passatīti īdiso, yamiva naṃ passatīti yādiso, tamiva naṃ passatīti tādiso, mamiva naṃ passatīti mādiso, kimiva naṃ passatīti kīdiso, etamiva naṃ passatīti ediso, samānamiva naṃ passatīti sādiso[Pg.298]. Imamiva naṃ passatīti īriso, yamiva naṃ passatīti yāriso, tamiva naṃ passatīti tāriso, mamiva naṃ passatīti māriso, kimiva naṃ passatīti kīriso, etamiva naṃ passatīti eriso, samānamiva naṃ passatīti sāriso. Imamiva naṃ passatīti īdikkho, yamiva naṃ passatīti yādikkho, tamiva naṃ passatīti tādikkho, evaṃ mādikkho, kīdikkho, edikkho, sādikkho. Īdī, yādī, tādī, mādī, kīdī, edī, sādī. याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'ईदिसो', ज्याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'यादिसो', त्याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'तादिसो', माझ्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'मादिसो', कोणासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'कीदिसो', याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'एदिसो', समान पाहतो म्हणून 'सादिसो'. याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'ईरिसो', ज्याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'यारिसो', त्याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'तारिसो', माझ्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'मारिसो', कोणासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'कीरिसो', याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'एरिसो', समान पाहतो म्हणून 'सारिसो'. याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'ईदिक्खो', ज्याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'यादिक्खो', त्याच्यासारखा त्याला पाहतो म्हणून 'तादिक्खो'; याचप्रमाणे मादिक्खो, कीदिक्खो, एदिक्खो, सादिक्खो. तसेच ईदी, यादी, तादी, मादी, कीदी, एदी, सादी हे शब्द सिद्ध होतात. Caggahaṇena tesameva saddānaṃ iyaiccevamādīnamanto ca saro kvaci dīghatthamāhu. Īdikkho, yādikkho, tādikkho, mādikkho, kīdikkho, edikkho, sādikkho. Idiso, sadiso, sariso, sarikkho. 'च' च्या ग्रहणाने त्याच 'इय' इत्यादी शब्दांच्या शेवटी असणारा स्वर काही वेळा दीर्घ होतो असे म्हणतात. जसे की – ईदिक्खो, यादिक्खो, तादिक्खो, मादिक्खो, कीदिक्खो, एदिक्खो, सादिक्खो. तसेच – इदिसो, सदिसो, सरिसो, सरिक्खो. 643, 635. Bhyādīhi mati budhi pūjādīhi ca tto. ६४३, ६३५. 'भी' इत्यादी धातूंहून आणि 'मति', 'बुधि', 'पूजा' इत्यादींहून 'त्त' (त) प्रत्यय होतो. Bhīiccevamādīhi dhātūhi, mati. Budhi pūjādito ca tta paccayo hoti. 'भी' इत्यादी धातूंहून आणि 'मति', 'बुधि', 'पूजा' इत्यादींहून 'त्त' प्रत्यय होतो. Bhāyitabboti bhīto, supitabboti sutto, mijjitabbo sinehetabboti mitto, sammannitabboti sammato, saṃ suṭṭhu mānitabbo pūjetabboti sammato, sammānīyitthāti sammato, saṃkappīyateti saṅkappito[Pg.299], saṃkappīyitthāti saṅkappito, sampādīyateti sampādito, sampādīyitthāti sampādito, avadhārīyateti avadhārito, avadhārīyitthāti avadhārito, bujjhitabbo ñātabboti buddho, ajjhayitabboti ito, etabbo gantabboti ito, viditabbo ñātabboti vidito, takkīyateti takkito, pūjīyateti pūjito, pūjīyitthāti pūjito, apacāyitabboti apacāyito, mānitabbo pūjetabboti mānito, apacīyateti apacito, vandīyateti vandito, vandīyitthāti vandito, sakkarīyateti sakkārito, sakkarīyitthāti sakkārito. भीती बाळगावी असा तो 'भीतो'; निजावे असा तो 'सुत्तो'; स्नेह करावा असा तो 'मित्तो'; संमती द्यावी असा तो 'सम्मतो'; चांगल्या प्रकारे मान द्यावा किंवा पूजा करावी असा तो 'सम्मतो'; ज्याचा सन्मान केला गेला तो 'सम्मतो'; ज्याचा संकल्प केला जातो तो 'सङ्कप्पितो'; ज्याचा संकल्प केला गेला तो 'सङ्कप्पितो'; जे संपादन केले जाते ते 'सम्पादितो'; जे संपादन केले गेले ते 'सम्पादितो'; जे निश्चित केले जाते ते 'अवधारितो'; जे निश्चित केले गेले ते 'अवधारितो'; जे जाणावे किंवा समजून घ्यावे तो 'बुद्धो'; अध्ययन करावे असा तो 'इतो'; जावे असा तो 'इतो'; जाणावे असा तो 'विदितो'; ज्याचा तर्क केला जातो तो 'तक्कितो'; ज्याची पूजा केली जाते तो 'पूजितो'; ज्याची पूजा केली गेली तो 'पूजितो'; आदर करावा असा तो 'अपचायितो'; मान द्यावा किंवा पूजा करावी असा तो 'मानितो'; ज्याचा आदर केला जातो तो 'अपचितो'; ज्याला वंदन केले जाते तो 'वन्दितो'; ज्याला वंदन केले गेले तो 'वन्दितो'; ज्याचा सत्कार केला जातो तो 'सक्कारितो'; ज्याचा सत्कार केला गेला तो 'सक्कारितो' हे शब्द सिद्ध होतात. 644, 661. Vepu sī dava vamu ku dā bhū hvādīhi thu ttima ṇimā nibbatte. ६४४, ६६१. 'वेपु', 'सी', 'दव', 'वमु', 'कु', 'दा', 'भू', 'ह्वे' इत्यादी धातूंहून 'उत्पन्न झालेला' (निर्वृत्त) या अर्थात यथासंभव 'थु', 'त्तिम' आणि 'णिम' हे प्रत्यय होतात. Vepu sī dava vamu ku dā bhū huiccevamādīhi dhātūhi yathāsambhavaṃ thu ttima ṇimapaccayā honti nibbattatthe. 'वेपु', 'सी', 'दव', 'वमु', 'कु', 'दा', 'भू', 'हु' इत्यादी धातूंहून 'उत्पन्न झालेला' या अर्थात यथासंभव 'थु', 'त्तिम' आणि 'णिम' हे प्रत्यय होतात. Vepanaṃ vepo, tena nibbatto vepathu, sayanaṃ sayo, tena nibbatto sayathu, davanaṃ davo, tena nibbatto davathu. Vamanaṃ vamo, tena nibbatto vamathu. Kutti karaṇaṃ, tena nibbattaṃ kuttimaṃ. Dāti dānaṃ, tena nibbattaṃ dattimaṃ. Bhūti bhavanaṃ, tena nibbattaṃ bhottimaṃ. Avahuti avahanaṃ, tena nibbattaṃ ohāvimaṃ. कापणे म्हणजे 'वेपो', त्याने उत्पन्न झालेला तो 'वेपथु' (कंप); निजणे म्हणजे 'सयो', त्याने उत्पन्न झालेला तो 'सयथु'; धावणे म्हणजे 'दवो', त्याने उत्पन्न झालेला तो 'दवथु' (दाह); ओकणे म्हणजे 'वमो', त्याने उत्पन्न झालेला तो 'वमथु'; कृती म्हणजे करणे, त्याने उत्पन्न झालेले ते 'कुत्तिमं' (कृत्रिम); देणे म्हणजे दान, त्याने उत्पन्न झालेले ते 'दत्तिमं'; असणे म्हणजे भवन, त्याने उत्पन्न झालेले ते 'भोत्तिमं'; वाहून नेणे म्हणजे अवहन, त्याने उत्पन्न झालेले ते 'ओहाविमं' हे शब्द सिद्ध होतात. 645, 662. Akkose [Pg.300] namhāni. ६४५, ६६२. शिवीगाळ किंवा निंदा (आक्कोस) या अर्थात, 'न' (निषेध) युक्त धातूंहून 'आनि' प्रत्यय होतो. Akkosaiccetasmiṃ atthe namhi paṭisedhayutte ānipaccayo hoti dhātūhi. निंदा (आक्कोस) या अर्थात, 'न' या निषेधवाचक शब्दाशी युक्त असणाऱ्या धातूंहून 'आनि' प्रत्यय होतो. Na gamitabbaṃ agamāni te jamma desaṃ, na kattabbaṃ akarāṇi te jamma kammaṃ. 'तुझ्यासारख्या नीच माणसाने त्या देशात जाऊ नये' (अगमानी ते जम्म देसं), 'तुझ्यासारख्या नीच माणसाने ते कर्म करू नये' (अकराणि ते जम्म कम्मं). Namhīti kimatthaṃ? Vipatti te jamma, vikati te jamma. 'न' युक्त असतानाच असे का म्हटले आहे? (कारण 'न' नसताना असे रूप होत नाही, जसे की) – 'विपत्ति ते जम्म' (तुझी आपत्ती, हे नीचा!), 'विकति ते जम्म' (तुझा विकार, हे नीचा!). Akkoseti kimatthaṃ? Na gantabbā agati te. 'निंदा अर्थात' असे का म्हटले आहे? (कारण निंदा नसताना हा प्रत्यय होत नाही, जसे की) – 'न गन्तब्बा अगति ते' (तुझी दुर्गती जाऊ नये अशी आहे). 646, 419. Ekādito sakissa kkhattuṃ. ६४६, ४१९. 'एक' इत्यादी शब्दांहून आणि 'सकिं' (एकदा) शब्दाहून 'क्खत्तुं' प्रत्यय होतो. Ekādito sakissa kkhattuṃ hoti. 'एक' इत्यादी शब्दांहून आणि 'सकिं' शब्दाहून 'क्खत्तुं' प्रत्यय होतो. Ekassa padatthassa sakiṃ vāraṃ ekakkhattuṃ, dvinnaṃ padatthānaṃ sakiṃ vāraṃ dvikkhattuṃ, tiṇṇaṃ padatthānaṃ sakiṃ vāraṃ tikkhattuṃ, evaṃ catukkhattuṃ, pañcakkhattuṃ, chakkhattuṃ, sattakkhattuṃ, aṭṭhakkhattuṃ, navakkhattuṃ, dasakkhattuṃ. Iccevamādayo saddā yojetabbā. एका पदाच्या अर्थाची एक वेळ म्हणजे 'एकक्खत्तुं' (एकदा), दोन पदांच्या अर्थांची एक वेळ म्हणजे 'द्विक्खत्तुं' (दोनदा), तीन पदांच्या अर्थांची एक वेळ म्हणजे 'तिक्खत्तुं' (तीनदा), याचप्रमाणे 'चतुक्खत्तुं' (चारदा), 'पञ्चक्खत्तुं' (पाचदा), 'छक्खत्तुं' (सहादा), 'सत्तक्खत्तुं' (सातदा), 'अट्ठक्खत्तुं' (आठदा), 'नवक्खत्तुं' (नऊदा), 'दसक्खत्तुं' (दहादा). अशा प्रकारे इतर शब्दांची योजना करावी. 647, 663. Sunassunassoṇa vānuvānūnunakhunānā. ६४७, ६६३. 'सुनस्सुनस्सोण वानुवानूनुनखुनॉना' (हे सूत्र आहे). Sunaiccetassa pāṭipadikassa unassa oṇa vāna uvāna ūna unakha una ā ānādesā honti. 'सुन' या प्रातिपदिकाच्या 'उन' या भागाचे 'ओण', 'वान', 'उवान', 'ऊन', 'उनख', 'उन', 'आ' आणि 'आन' असे आदेश होतात. Sāmikassa [Pg.301] saddaṃ suṇātīti soṇo, sāmikassa saddaṃ suṇātīti svāno, evaṃ suvāno, sūno, sunakho, suno, sā, sāno. जो मालकाचा आवाज ऐकतो तो 'सोणो' (कुत्रा), जो मालकाचा आवाज ऐकतो तो 'स्वानो', याचप्रमाणे 'सुवानो', 'सूनो', 'सुनखो', 'सुनो', 'सा', 'सानो' (असे शब्द बनतात). 648, 664. Taruṇassa susu ca. ६४८, ६६४. 'तरुण' या शब्दासाठी 'सुसु' हा आदेश देखील होतो. Taruṇaiccetassa pāṭipadikassa susu ādeso hoti. 'तरुण' या प्रातिपदिकाचा 'सुसु' असा आदेश होतो. Susu kāḷakeso. 'सुसु काळकेसो' (काळे केस असलेला तरुण). 649, 665. Yuvassuvassuvuvānunūnā. ६४९, ६६५. 'युवस्सुवस्सुवुवानुनूना' (हे सूत्र आहे). Yuvaiccetassa pāṭipadikassa uvassa uvauvāna unaūnādesā honti. 'युव' या प्रातिपदिकाच्या 'उव' या भागाचे 'उव', 'उवान', 'उन' आणि 'ऊन' असे आदेश होतात. Yuvā, yuvāno, yuno, yūno. 'युवा', 'युवानो', 'युनो', 'यूनो' (अशी रूपे होतात). 650, 651. Kāle vattamānātīte ṇvādayo. ६५०, ६५१. वर्तमानकाळ आणि भूतकाळ या अर्थांमध्ये 'ण्वु' इत्यादी प्रत्यय होतात. Kāle vattamānatthe ca atītatthe ca ṇu yu tapaccayā honti. वर्तमानकाळ आणि भूतकाळ या अर्थांमध्ये 'णु', 'यु' आणि 'त' हे प्रत्यय होतात. Akāsi, karotīti kāru, agacchi, gacchatīti, vāyu, abhavi, bhavatīti bhūtaṃ. ज्याने केले किंवा जो करतो तो 'कारु' (शिल्पी); जो गेला किंवा जो जातो तो 'वायु'; जे झाले किंवा जे होते ते 'भूतं' (अस्तित्वात आलेले). 651, 647. Tavissati [Pg.302] gamādīhi ṇī ghiṇa. ६५१, ६४७. भविष्यकाळात 'गमु' इत्यादी धातूंहून 'णी' आणि 'घिण' हे प्रत्यय होतात. Bhavissatikālatthe gamu bhaja su ṭhāiccevamādīhi dhātūhi ṇī ghiṇa paccayā honti. भविष्यकाळात 'गमु' (जाणे), 'भज' (भजणे/सेवन करणे), 'सु' (ऐकणे), 'ठा' (उभे राहणे) इत्यादी धातूंहून 'णी' आणि 'घिण' हे प्रत्यय होतात. Āyatiṃ gamituṃ sīlaṃ yassa, so hotīti gāmī, āyatiṃ bhajituṃ sīlaṃ yassa, so hotīti bhājī, āyatiṃ passāpituṃ sīlaṃ yassa, so hotīti passāvi, āyatiṃ paṭṭhāyituṃ sīlaṃ yassa, so hotīti paṭṭhāyi. भविष्यात जाणे हा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'गामी' होतो; भविष्यात सेवन करणे हा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'भाजी' होतो; भविष्यात पाझरणे हा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'पस्सावी' होतो; भविष्यात प्रस्थान करणे हा ज्याचा स्वभाव आहे तो 'पट्ठायी' होतो. 652, 648. Kriyāyaṃ ṇvu tavo. ६५२, ६४८. क्रियेच्या अर्थामध्ये 'ण्वु' आणि 'तु' हे प्रत्यय होतात. Kriyāyamatthe ṇvu tuiccete paccayā honti bhavissatikāle. भविष्यकाळात क्रियेच्या अर्थामध्ये 'ण्वु' आणि 'तु' हे प्रत्यय होतात. ‘‘Karissa’’nti kārako vajati, ‘‘bhuñjissa’’nti bhottā vajati. "मी करीन" असे म्हणून कर्ता (कारको) जातो; "मी जेवीन" असे म्हणून भोक्ता (भोत्ता) जातो. 653, 306. Bhāvavācimhi catutthī. ६५३, ३०६. भाववाचक अर्थामध्ये चतुर्थी विभक्ती होते. Bhāvavācimhi catutthīvibhatti hoti bhavissatikāle, भविष्यकाळात भाववाचक अर्थामध्ये चतुर्थी विभक्ती होते, Pacissate, pacanaṃ vā pāko, pākāya vajati. Bhuñjissate, bhojanaṃ vā bhogo, bhogāya vajati. Naccissate, naccanaṃ vā naccaṃ, naccāya vajati. तो शिजवील, किंवा शिजवणे म्हणजे 'पाको' (पाक), तो शिजवण्यासाठी जातो (पाकाय वजति). तो जेवील, किंवा जेवणे म्हणजे 'भोगो' (भोग), तो जेवण्यासाठी जातो (भोगाय वजति). तो नाचेल, किंवा नाचणे म्हणजे 'नच्चं' (नृत्य), तो नाचण्यासाठी जातो (नच्चाय वजति). 654, 649. Kammani [Pg.303] ṇo. ६५४, ६४९. कर्म उपपद असताना 'ण' प्रत्यय होतो. Kammani upapade ṇapaccayo hoti bhavissatikāle. भविष्यकाळात कर्म उपपद असताना 'ण' प्रत्यय होतो. Nagaraṃ karissati nagarakāro vajati, sāliṃ lāvissati sālilāvo vajati, dhaññaṃ vapissati dhaññavāpo vajati, bhogaṃ dadissati bhogadāyo vajati, sindhuṃ pivissati sindhupāyo vajati. जो नगर निर्माण करील तो नगरनिर्माता (नगरकारो) जातो; जो शाली (भात) कापेल तो शालीकापणारा (शालिलावो) जातो; जो धान्य पेरेल तो धान्यपेरणारा (धञ्ञवापो) जातो; जो भोग (संपत्ती) देईल तो भोग देणारा (भोगदायो) जातो; जो सिंधू (नदीचे पाणी) पिईल तो सिंधू पिणारा (सिन्धुपायो) जातो. 655, 650. Sese ssaṃ ntumānānā. ६५५, ६५०. उर्वरित अर्थांमध्ये 'स्सं', 'न्तु', 'मान' आणि 'आन' हे प्रत्यय होतात. Sesaiccetasmiṃ atthe ssaṃ ntu māna āna iccete paccayā honti bhavissatikāle kammūpapade. भविष्यकाळात कर्म उपपद असताना उर्वरित अर्थांमध्ये 'स्सं', 'न्तु', 'मान' आणि 'आन' हे प्रत्यय होतात. Kammaṃ karissati kammaṃ karissaṃ, evaṃ kammaṃ karonto, kammaṃ kurumāno, kammaṃ karāno vajati. Bhojanaṃ bhuñjissati bhojanaṃ bhuñjissaṃ, evaṃ bhojanaṃ bhuñjanto, bhojanaṃ bhuñjamāno, bhojanaṃ bhuñjāno vajati. Khādanaṃ khādissati khādanaṃ khādissaṃ, evaṃ khādanaṃ khādanto, khādanaṃ khādamāno, khādanaṃ khādāno vajati. Maggaṃ carissati maggaṃ carissaṃ, evaṃ maggaṃ caranto, maggaṃ caramāno, maggaṃ carāno vajati. Bhikkhaṃ bhikkhissati bhikkhaṃ bhikkhissaṃ, evaṃ bhikkhaṃ bhikkhanto, bhikkhaṃ bhikkhamāno, bhikkhaṃ bhikkhāno vajati. तो कर्म करील म्हणून कर्म करणारा (कम्मं करिस्सं), याचप्रमाणे कर्म करणारा (कम्मं करन्तो), कर्म करणारा (कम्मं कुरुमानो), कर्म करणारा (कम्मं करानो) जातो. तो भोजन करील म्हणून भोजन करणारा (भोजनं भुञ्जिस्सं), याचप्रमाणे भोजन करणारा (भोजनं भुञ्जन्तो), भोजन करणारा (भोजनं भुञ्जमानो), भोजन करणारा (भोजनं भुञ्जानो) जातो. तो खाद्य खाईल म्हणून खाद्य खाणारा (खादनं खादिस्सं), याचप्रमाणे खाद्य खाणारा (खादनं खादन्तो), खाद्य खाणारा (खादनं खादमानो), खाद्य खाणारा (खादनं खादानो) जातो. तो मार्गावर चालेल म्हणून मार्गावर चालणारा (मग्गं चरिस्सं), याचप्रमाणे मार्गावर चालणारा (मग्गं चरन्तो), मार्गावर चालणारा (मग्गं चरमानो), मार्गावर चालणारा (मग्गं चरानो) जातो. तो भिक्षा मागेल म्हणून भिक्षा मागणारा (भिक्खं भिक्खिस्सं), याचप्रमाणे भिक्षा मागणारा (भिक्खं भिक्खन्तो), भिक्षा मागणारा (भिक्खं भिक्खमानो), भिक्षा मागणारा (भिक्खं भिक्खानो) जातो. 656, 666. Chavādīti [Pg.304] tatraṇa. ६५६, ६६६. 'छवादीति तत्रण' (हे सूत्र आहे). Cha da ci ti su nī vi da pada tanu yata ada mada yuja vatumida mā pu ka la vara ve pu gupa dā iccevamādīhi dhātūhi tatraṇa iccete paccayā honti yathāsambhavaṃ. छ, द, चि, ति, सु, नी, वि, द, पद, तनु, यत, अद, मद, युज, वतु, मिद, मा, पु, क, ल, वर, वे, पु, गुप, दा इत्यादी धातूंपासून 'तत्रण' (त, त्र, ण इत्यादी) हे प्रत्यय यथासंभव (योग्यतेनुसार) होतात. Ātapaṃ chādetīti chattaṃ, chatraṃ. Ārammaṇaṃ cintetīti cittaṃ, citraṃ. Cintenti sampayuttadhammā ethenāti vā cittaṃ, citraṃ. Atthe abhissavetīti suttaṃ, sutraṃ. Atthe sūcetīti vā suttaṃ, sutraṃ. Satte netīti nettaṃ, netraṃ. Satte icchitaṭṭhānaṃ nenti etenāti vā nettaṃ, netraṃ. Pakārena vidatīti pavittaṃ, pavitraṃ. Vividhena ākārena maṅga pāpaṃ punāti, sodhetīti pavittaṃ, pavitraṃ. Sucibhāvaṃ vā pāpuṇātīti pavittaṃ, pavitraṃ. Padati pāpuṇātīti patto, patro. Āhārā patanti ettha bhājaneti pattaṃ, patraṃ. Padati pavattatīti vā pattaṃ, patraṃ. Tanoti vitthāretīti tantaṃ, tantraṃ, tanitabbaṃ vitthāretabbanti vā tantaṃ, tantra. Yatatīti yattaṃ, yatraṃ. Yatati vīriyaṃ karoti etenāti vā yattaṃ, yatraṃ. Yatanaṃ vā yattaṃ, yatraṃ. Sukhadukkhaṃ adati bhakkhatīti attā, atrā. Madatīti mattaṃ, matraṃ. Vatthuṃ yujjanti etenāti yottaṃ, yotraṃ. Vattatīti vattaṃ, vatraṃ. Midati [Pg.305] sinehaṃ karotīti mittaṃ. Mitraṃ. Midati sinehati etāyāti mettā, metrā. Pari samanta to sabbākārena minanti etāyāti mattā, matrā. Mānanaṃ vā mattaṃ, matraṃ. Attano kulaṃ punāti sodhetīti putto, putro. Kalitabbaṃ saṅkhyātabbanti kalattaṃ, kalatraṃ. Saṃsuṭṭhu vāreti etenāti varattaṃ, varatraṃ. Vepati kampatīti vettaṃ, vetraṃ. Gopitabbaṃ rakkhitabbanti guttaṃ. Gutraṃ, gottaṃ, gotraṃ. Dāti avakhaṇḍati etenāti dāttaṃ, dātraṃ iccevamādi. उन्हाचे (आतप) रक्षण करते (झाकते) ते 'छत्तं' (छत्र). जे आलंबनाचा (विषयाचा) विचार करते ते 'चित्तं' (चित्त/चित्र). किंवा ज्याच्याद्वारे संप्रयुक्त धर्म विचार करतात ते 'चित्तं' (चित्त/चित्र). जे अर्थांना प्रवाहित करते ते 'सुत्तं' (सूत्र). किंवा जे अर्थांचे सूचन करते ते 'सुत्तं' (सूत्र). जे प्राण्यांना नेते ते 'नेत्तं' (नेत्र). किंवा ज्याच्याद्वारे प्राणी इच्छित स्थानी जातात ते 'नेत्तं' (नेत्र). जे प्रकर्षाने जाणते ते 'पवित्तं' (पवित्र). जे विविध प्रकारे पापाचे शोधन करते (स्वच्छ करते) ते 'पवित्तं' (पवित्र). किंवा जे शुचिभावाला (पवित्रतेला) प्राप्त होते ते 'पवित्तं' (पवित्र). जो प्राप्त करतो तो 'पत्तो' (पात्र). ज्या पात्रात आहार पडतो ते 'पत्तं' (पात्र/पान). किंवा जे गमन करते ते 'पत्तं' (पत्र/पान). जे विस्तार करते ते 'तन्तं' (तंत्र), किंवा ज्याचा विस्तार केला पाहिजे ते 'तन्तं' (तंत्र). जे प्रयत्न करते ते 'यत्तं' (यंत्र). किंवा ज्याच्याद्वारे प्रयत्न (वीर्य) केला जातो ते 'यत्तं' (यंत्र). किंवा प्रयत्न म्हणजे 'यत्तं' (यंत्र). जे सुख-दुःखाचा उपभोग घेते (खाते) तो 'अत्ता' (आत्मा). जे हर्षित करते ते 'मत्तं' (मात्र/मत्त). ज्याच्याद्वारे वस्तू जोडली जाते ते 'योत्तं' (जोत). जे वर्तते (कार्य करते) ते 'वत्तं' (व्रत/वृत्त). जो स्नेह करतो तो 'मित्तं' (मित्र). ज्याच्याद्वारे स्नेह केला जातो ती 'मेत्ता' (मैत्री). ज्याच्याद्वारे चहूबाजूंनी सर्व प्रकारे मोजले जाते ती 'मत्ता' (मात्रा). किंवा मोजणे म्हणजे 'मत्तं' (मात्रा). जो स्वतःच्या कुळाचे शोधन करतो (पवित्र करतो) तो 'पुत्तो' (पुत्र). जिचे आकलन (गणना) केले पाहिजे ती 'कलत्तं' (पत्नी). ज्याच्याद्वारे चांगल्या प्रकारे बांधले जाते ती 'वरत्तं' (चामड्याची वादी). जे कंप पावते (थरथरते) ते 'वेत्तं' (वेत). ज्याचे रक्षण केले पाहिजे ते 'गुत्तं' (गोत्र). ज्याच्याद्वारे कापले जाते ते 'दात्तं' (विळा) इत्यादी. 657, 667. Vadādīhi ṇitto gaṇe. ६५७, ६६७. समूहाच्या (गण) अर्थात 'वद' इत्यादी धातूंपासून 'णित्त' प्रत्यय होतो. Vada cara varaiccevamādīhi dhātūhi ṇittapaccayo hoti gaṇatthe. समूहाच्या अर्थात 'वद', 'चर', 'वर' इत्यादी धातूंपासून 'णित्त' प्रत्यय होतो. Vāditānaṃ gaṇo vādittaṃ. Evaṃ cārittaṃ, vārittaṃ, iccevamādi. वाद्यांचा समूह म्हणजे 'वादित्तं' (वाद्यवृंद). याचप्रमाणे 'चारित्तं' (चारित्र्य), 'वारित्तं' (वर्जन) इत्यादी शब्द सिद्ध होतात. 658, 668. Midādīhi ttitiyo. ६५८, ६६८. 'मिद' इत्यादी धातूंपासून 'त्ति' आणि 'ति' हे प्रत्यय होतात. Mida pada ranja tanu dhāiccevamādīhi dhātūhi tti ti iccete paccayā honti. 'मिद', 'पद', 'रंज', 'तनु', 'धा' इत्यादी धातूंपासून 'त्ति' आणि 'ति' हे प्रत्यय होतात. Midati sinehatīti metti, padati gacchatīti patti, ranjati etthāti ratti, tanoti vitthāretīti tanti, attano [Pg.306] kulaṃ tanoti vitthāretīti vā tanti, paresaṃ itthīnaṃ puttaṃ dhāretīti dhāti, khīraṃ dhāretīti vā dhāti, attano sabhāvaṃ dhāretīti vā dhāti iccevamādi. जो स्नेह करतो ती 'मेत्ति' (मैत्री), जो गमन करतो तो 'पत्ति' (पायदळ सैनिक), ज्यामध्ये प्राणी रममाण होतात ती 'रत्ति' (रात्र), जी विस्तार करते ती 'तन्ति' (तंतू), किंवा जी स्वतःच्या कुळाचा विस्तार करते ती 'तन्ति', जी दुसऱ्या स्त्रियांच्या पुत्राला सांभाळते (धारण करते) ती 'धाति' (धाय/दाई), किंवा जी दूध धारण करते ती 'धाति' (धाय), किंवा जी स्वतःचा स्वभाव धारण करते ती 'धाति' इत्यादी. 659, 669. Usu ranja daṃsānaṃ daṃsassa daḍḍhoḍha ṭhā ca. ६५९, ६६९. 'उसु', 'रंज' आणि 'दंस' या धातूंच्या बाबतीत, 'दंस' धातूचा 'दड्ढ' असा आदेश होतो आणि 'ढ' व 'ठ' हे प्रत्यय होतात. Usu ranja daṃsaiccetesaṃ dhātūnaṃ daṃsassa daḍḍhādeso hoti, ḍha ṭhapaccayā ca honti. 'उसु', 'रंज' आणि 'दंस' या धातूंच्या बाबतीत, 'दंस' धातूचा 'दड्ढ' असा आदेश होतो आणि 'ढ' व 'ठ' हे प्रत्यय देखील होतात. Usīyate uḍḍho, ranjanti etthāti raṭṭhaṃ, daṃsīyateti daḍḍho. ज्याची इच्छा केली जाते तो 'उड्ढो' (वृद्ध), ज्यामध्ये लोक रमतात ते 'रट्ठं' (राष्ट्र), आणि ज्याचा दंश केला जातो (किंवा जे जळते) तो 'दड्ढो' (दग्ध). 660, 670. Sūvusānamūvusānamatothoca. ६६०, ६७०. 'सू', 'वु' आणि 'अस' या धातूंच्या 'ऊ', 'उ' आणि 'अस्' यांच्या जागी 'अत' असा आदेश होतो आणि 'थ' प्रत्यय होतो. Sūvu asaiccetesaṃ dhātūnaṃ ūuasānaṃ atādeso hoti, thapaccayo ca. 'सू', 'वु' आणि 'अस' या धातूंच्या 'ऊ', 'उ' आणि 'अस्' यांच्या जागी 'अत' असा आदेश होतो आणि 'थ' प्रत्यय देखील होतो. Savati hiṃsati etenāti satthaṃ, hirottappaṃ saṃvarati etenātivatthaṃ, saddānurūpaṃ asatibhavatīti attho, ज्याच्याद्वारे हिंसेपासून रक्षण केले जाते किंवा जे हिंसेचे साधन आहे ते 'सत्थं' (शस्त्र/शास्त्र), ज्याच्याद्वारे ह्री (लाज) आणि ओत्तप्प (भय) यांचे संवरण (रक्षण) केले जाते ते 'वत्थं' (वस्त्र), आणि शब्दाच्या अनुरूप जे अस्तित्वात असते असा याचा अर्थ आहे. 661, 671. Ranjudādīhi [Pg.307] dha didda kirā kvaci jadalopoca. ६६१, ६७१. 'रंज', 'उद' इत्यादी धातूंपासून 'ध', 'दिद्द', 'किर' इत्यादी प्रत्यय होतात आणि काही ठिकाणी 'ज' व 'द' यांचा लोप देखील होतो. Ranja uda idi cadi madi khuda chidi rudi dala susa suca vaca vaja iccevamādīhi dhātūhi dha da idda ka iraiccete paccayā honti, kvaci ja da lopo ca, puna nippajjante. 'रंज', 'उद', 'इदि', 'चदि', 'मदि', 'खुद', 'छिदि', 'रुदि', 'दल', 'सुस', 'सुच', 'वच', 'वज' इत्यादी धातूंपासून 'ध', 'द', 'इद्द', 'क', 'इर' हे प्रत्यय होतात, काही ठिकाणी 'ज' व 'द' यांचा लोप होतो आणि पुन्हा शब्द सिद्ध होतात. Rañjitabbanti randhaṃ, ranjayitthāti vā randhaṃ, attani sannissitānaṃ macchamakarānaṃ pītisomanassaṃ undati pasavati janetīti samuddo, indati paramissariyaṃ karotīti indo, indattaṃ adhipatibhāvaṃ karotīti vā indo, canditabbo icchitabboti cando, mandati hāsetīti mando, maditabbo hāsetabboti vā mando, khudati pipāsetīti khuddo, chinditabboti chiddo, rudati hiṃsatīti ruddo, dalati duggatabhāvaṃ gacchatīti daliddo, sussatīti sukkaṃ, sucatītisoko, vacitabbanti vakkaṃ, appaṭihato hutvā vajati gacchatīti vajiraṃ iccevamādi. ज्याचा शोध घेतला पाहिजे ते 'रन्धं' (छिद्र/दोष), किंवा जे रंजित करते ते 'रन्धं'; जो स्वतःच्या आश्रयाला असलेल्या मासे व मगरींना प्रीती आणि सोमनस्य (आनंद) देतो तो 'समुद्दो' (समुद्र); जो परम ऐश्वर्य उपभोगतो तो 'इन्दो' (इंद्र), किंवा जो अधिपती असणे धारण करतो तो 'इन्दो'; जो आल्हाददायक आहे आणि ज्याची इच्छा केली जाते तो 'चन्दो' (चंद्र); जो हसवतो तो 'मन्दो' (मंद), किंवा जो आनंदित होण्यास योग्य आहे तो 'मन्दो'; जो भुकेलेला किंवा लहान आहे तो 'खुद्दो' (क्षुद्र); जे छेदले जाण्यास योग्य आहे ते 'छिद्दो' (छिद्र); जो हिंसा करतो तो 'रुद्दो' (रुद्र); जो दुर्गत भावाला प्राप्त होतो तो 'दलिद्दो' (दरिद्री); जे सुकते ते 'सुक्कं' (शुष्क); जो शोक करतो तो 'सोको' (शोक); जे बोलले पाहिजे ते 'वक्कं'; आणि जे न अडखळता गमन करते ते 'वजिरं' (वज्र) इत्यादी. 662, 672. Paṭito hissa heraṇa hīraṇa. ६६२, ६७२. 'पटि' या उपसर्गापुढे 'हि' धातूचे 'हेरण' आणि 'हीरण' असे आदेश होतात. Paṭiiccetasmā hissa dhātussa heraṇa hīraṇa ādesā honti. 'पटि' या उपसर्गापुढे 'हि' धातूचे 'हेरण' आणि 'हीरण' असे आदेश होतात. Paṭipakkhemadditvāgacchati pavattatīti pāṭiheraṃ, pāṭihīraṃ. जे विरोधकांचे (प्रतिपक्षाचे) मर्दन करून प्रकट होते किंवा चालते ते 'पाटिहेरं' (प्रातिहार्य/चमत्कार) किंवा 'पाटिहीरं' होय. 663, 673. Kaḍyādīhi [Pg.308] ko. ६६३, ६७३. 'कडि' इत्यादी धातूंपासून 'क' प्रत्यय होतो. Kaḍi ghaḍi vaḍi karaḍi maḍi saḍi kuṭhi bhaḍi paḍi daḍi raḍi taḍi isiḍi caḍi gaḍi aḍi laḍi meḍi eraḍi khaḍi iccevamādīhi dhātūhi kapaccayo hoti saha paccayena ca nippajjante yathāsambhavaṃ. 'कडि', 'घडि', 'वडि', 'करडि', 'मडि', 'सडि', 'कुठि', 'भडि', 'पडि', 'दडि', 'रडि', 'तडि', 'इसिडि', 'चडि', 'गडि', 'अडि', 'लडि', 'मेडि', 'एरडि', 'खडि' इत्यादी धातूंपासून 'क' प्रत्यय होतो आणि प्रत्ययांसह ते यथासंभव सिद्ध होतात. Kaṇḍitabbo chinditabboti kaṇḍo, ghaṇḍitabbo ghaṭetabboti ghaṇḍo, vaṇḍanti etthāti vaṇḍo, karaṇḍitabbo bhājetabboti karaṇḍo, maṇḍīyate vibhūsīyate etenāti maṇḍo, saṇḍanti gumbanti etthāti saṇḍo, aṅgamaṅgāni kuṇṭhati chindatīti kuṭṭhaṃ, bhaṇḍitabbanti bhaṇḍaṃ, paṇḍati liṅgavekallabhāvaṃ gacchatīti paṇḍako. Daṇḍati āṇaṃ karoti etenāti daṇḍo, raṇḍati hiṃsatīti raṇḍo, visesena taṇḍati cāleti paresaṃ viññūnaṃ hadayaṃ kampetīti vitaṇḍo, isiṇḍati paresaṃ maddatīti isiṇḍo, caṇḍati caṇḍikkabhāvaṃ karotīti caṇḍo, gaṇḍati sannicayati samūhaṃ karoti etthāti gaṇḍo, aṇḍīyati nibbattīyatīti aṇḍo, laṇḍitabbo jigucchitabboti laṇḍo, meṇḍati [Pg.309] kuṭilabhāvaṃ gacchatīti meṇḍo, eraṇḍati rogaṃ hiṃsatīti eraṇḍo, khaṇḍitabbo chinditabboti khaṇḍo iccevamādi. ज्याचे तुकडे केले पाहिजेत तो 'कण्डो' (तुकडा); ज्याचा घट केला पाहिजे ती 'घण्डो' (घंटा); ज्यामध्ये लोक एकत्र येतात तो 'वण्डो'; ज्यामध्ये विभागणी केली पाहिजे तो 'करण्डो' (करंडा); ज्याच्याद्वारे सुशोभित केले जाते तो 'मण्डो' (सजावट); जेथे झाडे एकत्र वाढतात तो 'सण्डो' (झाडी); जे अवयवांना विकृत करते ते 'कुट्ठं' (कुष्ठरोग); जे साठवले जाते ते 'भण्डं' (भांडे/वस्तू); जो नपुंसकत्वाला प्राप्त होतो तो 'पण्डको' (नपुंसक); ज्याच्याद्वारे शिक्षा केली जाते तो 'दण्डो' (दंड); जो हिंसा करतो तो 'रण्डो'; जो विशेष रूपाने विद्वानांच्या हृदयाला कंपित करतो तो 'वितण्डो' (वितंड); जो इतरांचे मर्दन करतो तो 'इसिण्डो'; जो क्रोधाला प्राप्त होतो तो 'चण्डो' (क्रोधी); जेथे संचय होतो तो 'गण्डो' (गाठ); जे उत्पन्न होते ते 'अण्डो' (अंडे); जे घृणास्पद आहे ते 'लण्डो' (विष्ठा); जो कुटिल भावाला प्राप्त होतो तो 'मेण्डो' (मेंढा); जो रोगाचा नाश करतो तो 'एरण्डो' (एरंड); आणि ज्याचे तुकडे केले पाहिजेत तो 'खण्डो' (तुकडा) इत्यादी. 664, 674. Khādāmagamānaṃ kha ndha’ndha gandhā. ६६४, ६७४. 'खाद', 'अम' आणि 'गमु' या धातूंच्या जागी अनुक्रमे 'खन्ध', 'अन्ध' आणि 'गन्ध' असे आदेश होतात. Khāda ama gamuiccetesaṃ dhātūnaṃ khandha andha gandhādesā honti, kapaccayo ca hoti. 'खाद', 'अम' आणि 'गमु' या धातूंच्या जागी अनुक्रमे 'खन्ध', 'अन्ध' आणि 'गन्ध' असे आदेश होतात आणि 'क' प्रत्यय देखील होतो. Jātijarāmaraṇādīhi saṃsāradukkhehi khāditabboti khandho, amati aṅgamaṅgassa rujjanabhāvaṃ gacchatīti andho, cakkhunā amati rujjatīti vā andho, taṃ taṃ ṭhānaṃ vātena gacchatīti gandho. Evaṃ khandhako, andhako, gandhako. जो जन्म, जरा, मरण इत्यादी संसारदुःखांनी पीडित होतो (खाल्ला जातो) तो 'खन्धो' (स्कंध); जो अवयवांच्या वेदनेला प्राप्त होतो तो 'अन्धो' (अंध), किंवा जो डोळ्यांच्या रोगाने पीडित होतो तो 'अन्धो'; जो वाऱ्याच्या साहाय्याने त्या त्या ठिकाणी पोहोचतो तो 'गन्धो' (गंध). याचप्रमाणे 'खन्धको' (स्कंधक), 'अन्धको' (अंधक), 'गन्धको' (गंधक) हे शब्द सिद्ध होतात. 665, 675. Paṭādīhyalaṃ. ६६५, ६७५. 'पटादीह्यलं' (हे सूत्र आहे). Paṭa kala kusa kada bhaganda mekha vakka takka palla sadda mūla bila vida caḍaṃ pañca vā vasa paci maca musa gotthu puthu bahu maṅga baha kamba samba aggaiccevamādīhi dhātūhi pāṭi padikehi ca uttarapadesu alapaccayo hoti, pacchā puna nippajjante. 'पट', 'कल', 'कुस', 'कद', 'भगन्द', 'मेख', 'वक्क', 'तक्क', 'पल्ल', 'सद्द', 'मूल', 'बिल', 'विद', 'चड', 'पञ्च', 'वा', 'वस', 'पचि', 'मच', 'मुस', 'गोत्थु', 'पुथु', 'बहु', 'मङ्ग', 'बह', 'कम्ब', 'सम्ब', 'अग्ग' इत्यादी धातूंहून आणि प्रातिपदिकांहून उत्तरपदांमध्ये 'अल' प्रत्यय होतो आणि नंतर ते सिद्ध होतात. Paṭe alanti paṭalaṃ, kale alanti kalalaṃ, pāpake akusale dhamme kusati chindatīti kusalaṃ, kusabhūte yathāsabhāvadhamme alanti vā kusalaṃ, kuse uddissa dāne alanti vā kusalaṃ, kuse sañcaye dhammasamudāye alanti [Pg.310] vā kusalaṃ, kadde madde alanti kadalaṃ, bhagande secane alanti bhagandalaṃ, bhagande muttakarīsaharaṇe alanti vā bhagandalaṃ, mekhe kaṭivicitte alanti mekhalaṃ, vakke rukkhatace alanti vakkalaṃ, takke rukkhasilese alanti takkalaṃ, palle ninnaṭṭhāne alanti pallalaṃ, sadde harite alanti saddalaṃ, mūle patiṭṭhāne alanti mulālaṃ, biḷe nissaye alanti bilālaṃ, vide vijjamāne alanti vidalaṃ, caṇḍe alanti caṇḍālo, pañcannaṃ rājūnaṃ alanti pañcālo, vā gatigandhanesu alanti vālaṃ, vā padagamane alanti vā vāḷo, vase acchādane alanti vasalo, pace vitthāre alanti pacalo, mace corakamme alanti macalo, muse theyye, muse pāṇacāge vā alanti musalo, gotte vaṃse siṅgālajātiyaṃ alanti gotthulo, puthumhi vitthāre alanti puthulo, bahumhi saṅkhyāne alanti bahulo, bahumhi vuddhimhi alanti vā bahulo, maṅgamhi gamane alanti maṅgalaṃ, bahumhi vuddhimhi alanti bahalaṃ, kambamhi sañcalane alanti [Pg.311] kambalaṃ. Sambamhi maṇḍale alanti sambalaṃ, agge gatikoṭille alanti aggaḷaṃ. Iccevamādayo aññepi saddā bhavanti. 'पट' मध्ये 'अल' मिळून 'पटलम्' (पटल/आवरण) बनते; 'कल' मध्ये 'अल' मिळून 'कललम्' (चिखल) बनते; जे पापी, अकुशल धर्मांना कापते (नष्ट करते) ते 'कुसलम्' (कुशल) होय; किंवा जे कुसभूत (यथास्वभाव) धर्मांमध्ये समर्थ आहे ते 'कुसलम्' होय; किंवा कुस (दर्भ) उद्देशून दिलेल्या दानात जे समर्थ आहे ते 'कुसलम्' होय; किंवा कुस (संचय) म्हणजे धर्मसमुदायात जे समर्थ आहे ते 'कुसलम्' होय; 'कद्द' (चिखल) तुडवण्यात जे समर्थ आहे ते 'कदलम्' (केळीचे झाड) होय; 'भगन्द' (सिंचन) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'भगन्दलम्' (भगंदर) होय; किंवा मलमूत्र विसर्जनाच्या जागी जे समर्थ आहे ते 'भगन्दलम्' होय; 'मेख' (कमरेचा दागिना) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'मेखलम्' (मेखला/कमरपट्टा) होय; 'वक्क' (झाडाची साल) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'वक्कलम्' (वल्कल) होय; 'तक्क' (झाडाचा डिंक) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'तक्कलम्' होय; 'पल्ल' (सखल जागा) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'पल्ललम्' (तळे) होय; 'सद्द' (हिरवळ) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'सद्दलम्' (हिरवे गवत) होय; 'मूल' (प्रतिष्ठा/आधार) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'मुलालम्' (कमळाचा दांडा) होय; 'बिळ' (आश्रय) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'बिलालम्' (मांजर) होय; 'विद' (विद्यमान) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'विदलम्' (डाळ/तुकडा) होय; 'चण्ड' (उग्र) मध्ये जे समर्थ आहे तो 'चण्डालो' (चांडाल) होय; पाच राजांच्या बाबतीत जे समर्थ आहे ते 'पञ्चालो' (पांचाळ देश) होय; 'वा' (गती आणि गंध) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'वालम्' (केस/शेपूट) होय; किंवा 'वा' (पाऊल टाकणे) मध्ये जे समर्थ आहे तो 'वाळो' (हिंस्र श्वापद) होय; 'वस' (आच्छादन) मध्ये जे समर्थ आहे तो 'वसलो' (वृषल/हीन मनुष्य) होय; 'पच' (विस्तार) मध्ये जे समर्थ आहे तो 'पचलो' (थरथरणारा) होय; 'मच' (चोरीचे काम) मध्ये जे समर्थ आहे तो 'मचलो' होय; 'मुस' (चोरी) किंवा 'मुस' (प्राणत्याग) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'मुसलम्' (मुसळ) होय; 'गोत्त' (वंश/कोल्हा जात) मध्ये जे समर्थ आहे तो 'गोत्थुलो' (कोल्हा) होय; 'पुथु' (विस्तार) मध्ये जे समर्थ आहे तो 'पुथुलो' (विस्तीर्ण) होय; 'बहु' (संख्या) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'बहुलो' (पुष्कळ) होय; किंवा 'बहु' (वृद्धी) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'बहुलो' होय; 'मङ्ग' (गमन/कल्याण) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'मङ्गलम्' (मंगल) होय; 'बहु' (वृद्धी) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'बहलम्' (दाट/जाड) होय; 'कम्ब' (कंपन) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'कम्बलम्' (घोंगडी/कंबल) होय; 'सम्ब' (मंडळ) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'सम्बलम्' (शिदोरी) होय; 'अग्ग' (कुटिल गती) मध्ये जे समर्थ आहे ते 'अग्गळम्' (कडी/आडसर) होय. अशा प्रकारे इतरही शब्द होतात. 666, 676. Puthassa puthu pathā mo vā. ६६६, ६७६. 'पुथ' या शब्दासाठी 'पुथु' आणि 'पथा' हे आदेश होतात आणि काही ठिकाणी 'म' प्रत्यय होतो. Puthaiccetassa pāṭipadikassa puthu pathādesā honti, kvaci amapaccayo hoti. 'पुथ' या प्रातिपदिकाचे 'पुथु' आणि 'पथा' असे आदेश होतात आणि काही ठिकाणी 'अम' प्रत्यय होतो. Putha hutvā jātanti puthavī pathame jāto pathamo, pathavī, paṭhamo vā, puthu kilese janetīti puthujjano, puthu hutvā jātanti pathavī, pathavī vā. विस्तीर्ण होऊन जी उत्पन्न झाली ती 'पुथवी' (पृथ्वी); जो प्रथम जन्मला तो 'पथमो' (प्रथम), 'पथवी' किंवा 'पठमो'; जो अनेक क्लेशांना जन्म देतो तो 'पुथुज्जनो' (पृथग्जन/सामान्य माणूस); विस्तीर्ण होऊन जी उत्पन्न झाली ती 'पथवी' किंवा 'पथवी' होय. 667, 677. Sasvādīhi tu davo. ६६७, ६७७. 'ससु' इत्यादी धातूंहून 'तु' आणि 'दु' हे प्रत्यय होतात. Sasu dada ada madaiccevamādīhi dhātūhi tu duiccete paccayā honti. 'ससु', 'दद', 'अद', 'मद' इत्यादी धातूंहून 'तु' आणि 'दु' हे प्रत्यय होतात. Aññe satte sasati hiṃsatīti sattu, dukkhaṃ dadātīti daddu, dukkhena adati bhakkhati etthāti addu, dukkhaṃ adati anubhavati jano etenāti vā addu, dukkhaṃ bhājanaṃ [Pg.312] ādhāraṃ bhāvatīti vā addu, madati ummattaṃ karotīti maddu, madati maddabhāvaṃ karotīti vā maddu. जो इतर प्राण्यांना त्रास देतो किंवा हिंसेला प्रवृत्त करतो तो 'सत्tu' (शत्रू); जे दुःख देते ते 'दद्दु' (गजकर्ण/त्वचारोग); ज्यामध्ये माणूस दुःखाने खातो ते 'अद्दु'; किंवा ज्याच्याद्वारे माणूस दुःख भोगतो ते 'अद्दु'; किंवा जे दुःखाचे भांडे (आधार) बनते ते 'अद्दु'; जे उन्मत्त करते ते 'मद्दु'; किंवा जे मृदू (किंवा चूर्ण) करते ते 'मद्दु' होय. 668, 678. Jhādīhi īvaro. ६६८, ६७८. 'झा' इत्यादी धातूंहून 'ईवर' प्रत्यय होतो. Ci pā dhāiccevamādīhi dhātūhi īvarapaccayohoti. 'चि', 'पा', 'धा' इत्यादी धातूंहून 'ईवर' प्रत्यय होतो. Cīyatīti cīvaraṃ, pivatīti pīvaro, pātabbaṃ rakkhitabbanti vā pīvaraṃ. Dhāreti dhāretvā jīvitaṃ kappetīti dhīvaro, dhīvaraṃ. जे गोळा केले जाते (संचित केले जाते) ते 'चीवर' होय. जो पितो तो 'पीवर' होय, किंवा ज्याचे रक्षण केले पाहिजे ते 'पीवर' होय. जो धारण करतो आणि धारण करून जीवन जगतो तो 'धीवर' (किंवा धीवरम्) होय. 669, 679. Munādīhi ci. ६६९, ६७९. 'मुन' इत्यादी धातूंहून 'इ' प्रत्यय होतो. Muna yata agga pata kava suca ruca mahāla bhaddāla manaiiccevamādīhi dhātūhi, pāṭipadikehi ca ipaccayo hoti. 'मुन', 'यत', 'अग्ग', 'पत', 'कव', 'सुच', 'रुच', 'महाल', 'भद्दाल', 'मन' इत्यादी धातूंहून आणि प्रातिपदिकांहून 'इ' प्रत्यय होतो. Atthānatthaṃ munāti, ñeyyadhammaṃ lakkhaṇādivasena vā jānātīti muni, yatati vīriyaṃ karotīti yati, aggati kuṭilabhāvaṃ gacchatīti aggi, patati seṭṭho hutvā purato gacchatīti pati, kabyaṃ bandhatīti kavi, kantaṃ manāpavacanaṃ vadatīti vā kavi. Sucati parisuddhaṃ bhavatīti suci, rucati dibbatīti ruci, mahantaṃ vibhāvaṃ bhogakkhandhaṃ lātīti mahāli, bhaddaṃ yasaṃ lātīti bhaddāli, manaṃ tattha ratane nayatīti maṇi. जो अर्थ आणि अनर्थ जाणतो, किंवा लक्षण इत्यादींद्वारे ज्ञेय धर्म जाणतो तो 'मुनि' होय. जो प्रयत्न करतो (वीर्य करतो) तो 'यति' होय. जो कुटिल भावाला प्राप्त होतो तो 'अग्गि' (अग्नी) होय. जो श्रेष्ठ होऊन पुढे जातो तो 'पति' होय. जो काव्य रचतो तो 'कवि' होय, किंवा जो प्रिय व मनपसंत वचन बोलतो तो 'कवि' होय. जो शुद्ध होतो तो 'सुचि' होय. जो प्रकाशतो ती 'रुचि' होय. जो महान वैभव आणि भोगसमूह प्राप्त करतो तो 'महालि' होय. जो कल्याणकारी यश प्राप्त करतो तो 'भद्दालि' होय. जे मनाला त्या रत्नाकडे आकर्षित करते तो 'मणि' होय. 670, 680. Vidādīhyūro[Pg.313]. ६७०, ६८०. 'विद' इत्यादी धातूंहून 'ऊर' प्रत्यय होतो. Vida valla masa sida dukukapu maya udi khajja kuraiccevamādīhi dhātūhi, pāṭipadikehi ca ūrapaccayohoti. 'विद', 'वल्ल', 'मस', 'सिद', 'दु', 'कु', 'कपु', 'मय', 'उदि', 'खज्ज', 'कुर' इत्यादी धातूंहून आणि प्रातिपदिकांहून 'ऊर' प्रत्यय होतो. Vidituṃ alanti vidūro, vidūraṭṭhāne jāto vedūro, vallati vallabhāvena bhavatīti vallūro, vallati aññamaññaṃ bandhatīti vā vallūro, āmasitabboti masūro, sindati siṅgārabhāvaṃ gacchatīti sindūro, sindati virocatīti vā sindūro, gamituṃ alaṃ anāsannattāti dūro, kuti saddaṃ karotīti kūro, attano gandhena aññaṃ gandhaṃ kapati hanati hiṃsatīti kappūro, kappati rogāpanayane samatthetīti vā kappūro, mahiyaṃ ravatīti mayūro, mahiyaṃ yāti gacchatīti mayūro, paṃsuṃ undati pasavatīti undūro, khajjitabbo khāditabboti khajjūro, kurati akkosatīti kurūro. जो जाणण्यास समर्थ आहे तो 'विदूर' होय. जो दूरच्या ठिकाणी उत्पन्न झाला आहे तो 'वेदूर' (वैडूर्य) होय. जो प्रिय भावाने राहतो तो 'वल्लूर' होय, किंवा जो एकमेकांना बांधतो तो 'वल्लूर' होय. जो स्पर्श करण्यास योग्य आहे तो 'मसूर' होय. जो शृंगार भावाला प्राप्त होतो तो 'सिंदूर' होय, किंवा जो विशेष शोभतो तो 'सिंदूर' होय. जवळ नसल्यामुळे जेथे जाणे कठीण आहे ते 'दूर' होय. जो क्रूर आवाज करतो तो 'कूर' होय. जो आपल्या सुगंधाने इतर सुगंधाचा नाश करतो तो 'कप्पुर' (कापूर) होय, किंवा जो रोग दूर करण्यास समर्थ आहे तो 'कप्पुर' होय. जो पृथ्वीवर ओरडतो तो 'मयूर' (मोर) होय, किंवा जो पृथ्वीवर चालतो तो 'मयूर' होय. जो माती उकरतो तो 'उंदूर' (उंदीर) होय. जो खाण्यायोग्य आहे तो 'खज्जूर' (खजूर) होय. जो आक्रोश करतो तो 'कुरूर' होय. 671, 681. Hanādīhi nu ṇutavo. ६७१, ६८१. 'हन' इत्यादी धातूंहून 'नु', 'णु' आणि 'तव' प्रत्यय होतात. Hana jana bhāri khanu ama ve vedhā siki hi iccevamādīhi dhātūhi nu ṇu kuiccete paccayā honti. 'हन', 'जन', 'भारि', 'खनु', 'अम', 'वे', 'वेधा', 'सिकि', 'हि' इत्यादी धातूंहून 'नु', 'णु', 'कु' हे प्रत्यय होतात. Bhojanaṃ [Pg.314] hanati hiṃsati etenāti haṇu, hanu vā. Gamanaṃ janetītī jāṇu, bhāṇu dibbatīti bhāṇu, nivāte riti gacchatītī reṇu, khaṇitabbo avadāritabboti khāṇu. Aṅgamaṅgassa rujjanabhāvaṃ vijjhanabhāvaṃ amati gacchatīti aṇu, veṇu, veti tantasantāne bhavatītī veṇu, bahisārealantivāveṇu vacchaṃ, pāyetītī dhenu, atthaṃ dhāretītī dhātu, gamanapacanādikaṃ kriyaṃ dhāretītī vā dhātu, sīyatī bandhīyatītī setu, uddhaṃ gacchati pavattatītī ketu, attano phalaṃ hinoti pavattatītī hetu. ज्याच्याद्वारे भोजन चावले (नष्ट केले) जाते ती 'हणु' किंवा 'हनु' होय. जे चालण्याची क्रिया उत्पन्न करते ते 'जाणु' (गुडघा) होय. जो प्रकाशतो तो 'भाणु' (सूर्य) होय. जे वाऱ्याशिवायही उडते ते 'रेणु' (धूलिकण) होय. जे खणले किंवा तोडले जाते तो 'खाणु' (खोड) होय. जो अवयवांच्या वेदनेला किंवा वेधण्याला प्राप्त होतो तो 'अणु' होय. जो तंतूंच्या विस्तारात असतो तो 'वेणु' (बांबू) होय. जी वासराला दूध पाजते ती 'धेनु' (गाय) होय. जो अर्थ धारण करतो तो 'धातु' होय, किंवा जो जाणे, शिजवणे इत्यादी क्रिया धारण करतो तो 'धातु' होय. जो बांधला जातो तो 'सेतु' (पूल) होय. जो वर जातो किंवा पसरतो तो 'केतु' (ध्वज) होय. जो आपले फळ देतो किंवा प्रवृत्त करतो तो 'हेतु' होय. 672, 682. Kuṭādīhi ṭho. ६७२, ६८२. 'कुट' इत्यादी धातूंहून 'ठ' प्रत्यय होतो. Kuṭa kusa kaṭaiccevamādīhi dhātūhi, pāṭipadikehi ca ṭhapaccayo hotī. 'कुट', 'कुस', 'कट' इत्यादी धातूंहून आणि प्रातिपदिकांहून 'ठ' प्रत्यय होतो. Aṅgamaṅgaṃ kuṭati chindatītī kuṭṭhaṃ, dhaññena chādetabbo pūretabbotī koṭṭho, kaṭitabbaṃ madditabbanti, kaṭṭhaṃ. जो अवयवांना छिन्नभिन्न करतो तो 'कुट्ठ' (कुष्ठरोग) होय. जो धान्याने झाकला किंवा भरला पाहिजे तो 'कोट्ठ' (कोठार) होय. जे कापले किंवा मळले पाहिजे ते 'कट्ठ' (लाकूड) होय. 673, 683. Manu pūra suṇādīhi ussa nusisā. ६७३, ६८३. 'मनु', 'पूर', 'सुण' इत्यादी धातूंहून 'उस्स', 'नुस' आणि 'इसा' प्रत्यय होतात. Manu pūra suṇa kusu ila ala maha si ki iccevamādīhi dhātūhi, pāṭipadikehi ca usa nusa isaiccete paccayā honti, puna nippajjante. 'मनु', 'पूर', 'सुण', 'कुसु', 'इल', 'अल', 'मह', 'सि', 'कि' इत्यादी धातूंहून आणि प्रातिपदिकांहून 'उस', 'नुस', 'इस' हे प्रत्यय होतात आणि पुन्हा ते सिद्ध होतात. Kusalākusale [Pg.315] dhamme manati jānātīti manusso, mānuso. Kāraṇā kāraṇaṃ manati jānātīti vā manusso, mānusso. Atthānatthaṃ manati jānātīti vā manusso, mānusso. Mātāpitūnaṃ hadayaṃ pūretīti puriso, attano manorathaṃ pūretīti vā puriso, pūretīti vā poso, sasurehi suṇitabbā hiṃsitabbāti suṇisā, dvinnaṃ jānānaṃ kulasantānaṃ karotīti vā suṇisā, kucchitabbanti karīsaṃ, gabbhaṃ vimocetīti suriso, tamandhakāravidhamanena sattānaṃ bhayaṃ surati hiṃsatīti sūriyo, rogaṃ hiṃsatīti sirīso, ilati kampatīti illiso, taṇhāya dubbalo hutvā ilati kampatīti vā illigho, pāpakaraṇe alati samatthetīti alaso, mahitabbo pūjetabboti mahiso, sīyati bandhīyatīti sīsaṃ, kitabbaṃ hiṃsitabbanti kisaṃ, iccevamādi. जो कुशल आणि अकुशल धर्म जाणतो तो 'मनुस्स' (मनुष्य) किंवा 'मानुस' होय. किंवा जो कारण आणि अकारण जाणतो तो 'मनुस्स' किंवा 'मानुस्स' होय. किंवा जो अर्थ आणि अनर्थ जाणतो तो 'मनुस्स' किंवा 'मानुस्स' होय. जो माता-पित्यांचे हृदय आनंदित करतो तो 'puris' (पुरुष) होय, किंवा जो स्वतःचा मनोरथ पूर्ण करतो तो 'पुरिस' होय, किंवा जो पोषण करतो तो 'पोस' होय. जिचे सासऱ्याने ऐकले पाहिजे ती 'सुणिसा' (सून) होय, किंवा जी दोन कुळांचे संतान जोडते ती 'सुणिसा' होय. जे निंदनीय आहे ते 'करीस' (विष्ठा) होय. जो गर्भाला मुक्त करतो तो 'सुरिस' होय. जो अंधकाराचा नाश करून प्राण्यांचे भय नष्ट करतो तो 'सूरिय' (सूर्य) होय. जो रोगाचा नाश करतो तो 'सिरीस' होय. जो थरथर कापतो तो 'इल्लिस' होय. किंवा जो तृष्णेमुळे दुर्बळ होऊन थरथर कापतो तो 'इल्लिघ' होय. जो पाप करण्यात समर्थ आहे (किंवा आळशी आहे) तो 'अलस' होय. जो पूजनीय आहे तो 'महिस' (म्हैस) होय. जे बांधले जाते ते 'सीस' (डोके) होय. जे नष्ट केले पाहिजे ते 'किस' (कृश) होय, इत्यादी. Iti kibbidhānakappe uṇādikappo chaṭṭho kaṇḍo. अशा प्रकारे कृत्-विधान कल्पामध्ये उणादि-कल्प हा सहावा खंड समाप्त झाला. Uṇādikappo niṭṭhito. उणादि-कल्प समाप्त झाला. Kaccāyanapakaraṇaṃ niṭṭhitaṃ. कच्चायन-प्रकरण समाप्त झाले. | |||
| မြန်မာ | |||
| ပါဠိတော် | အဋ္ဌကထာ | ဋီကာ | အခြား |
| 1101 ပါရာဇိက ပါဠိ 1102 ပါစိတ္တိယ ပါဠိ 1103 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဝိနယ) 1104 စူဠဝဂ္ဂ ပါဠိ 1105 ပရိဝါရ ပါဠိ | 1201 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၁ 1202 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၂ 1203 ပါစိတ္တိယ အဋ္ဌကထာ 1204 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဝိနယ) 1205 စူဠဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 1206 ပရိဝါရ အဋ္ဌကထာ | 1301 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၁ 1302 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၂ 1303 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၃ | 1401 ဒွေမာတိကာပါဠိ 1402 ဝိနယသင်္ဂဟ အဋ္ဌကထာ 1403 ဝဇိရဗုဒ္ဓိ ဋီကာ 1404 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၁ 1405 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၂ 1406 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၁ 1407 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၂ 1408 ကင်္ခာဝိတရဏီပုရာဏ ဋီကာ 1409 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ-ဥတ္တရဝိနိစ္ဆယ 1410 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၁ 1411 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၂ 1412 ပါစိတျာဒိယောဇနာပါဠိ 1413 ခုဒ္ဒသိက္ခာ-မူလသိက္ခာ 8401 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၁ 8402 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၂ 8403 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၁ 8404 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၂ 8405 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ နိဒါနကထာ 8406 ဒီဃနိကာယ (ပု-ဝိ) 8407 မဇ္ဈိမနိကာယ (ပု-ဝိ) 8408 သံယုတ္တနိကာယ (ပု-ဝိ) 8409 အင်္ဂုတ္တရနိကာယ (ပု-ဝိ) 8410 ဝိနယပိဋက (ပု-ဝိ) 8411 အဘိဓမ္မပိဋက (ပု-ဝိ) 8412 အဋ္ဌကထာ (ပု-ဝိ) 8413 နိရုတ္တိဒီပနီ 8414 ပရမတ္ထဒီပနီ သင်္ဂဟမဟာဋီကာပါဌ 8415 အနုဒီပနီပါဌ 8416 ပဋ္ဌာနုဒ္ဒေသ ဒီပနီပါဌ 8417 နမက္ကာရဋီကာ 8418 မဟာပဏာမပါဌ 8419 လက္ခဏာတော ဗုဒ္ဓထောမနာဂါထာ 8420 သုတဝန္ဒနာ 8421 ကမလာဉ္ဇလိ 8422 ဇိနာလင်္ကာရ 8423 ပဇ္ဇမဓု 8424 ဗုဒ္ဓဂုဏဂါထာဝလီ 8425 စူဠဂန္ထဝံသ 8427 သာသနဝံသ 8426 မဟာဝံသ 8429 မောဂ္ဂလ္လာနဗျာကရဏံ 8428 ကစ္စာယနဗျာကရဏံ 8430 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) 8431 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ဓါတုမာလာ) 8432 ပဒရူပသိဒ္ဓိ 8433 မောဂလ္လာနပဉ္စိကာ 8434 ပယောဂသိဒ္ဓိပါဌ 8435 ဝုတ္တောဒယပါဌ 8436 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာပါဌ 8437 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာဋီကာ 8438 သုဗောဓါလင်္ကာရပါဌ 8439 သုဗောဓါလင်္ကာရဋီကာ 8440 ဗာလာဝတာရ ဂဏ္ဌိပဒတ္ထဝိနိစ္ဆယသာရ 8446 ကဝိဒပ္ပဏနီတိ 8447 နီတိမဉ္ဇရီ 8445 ဓမ္မနီတိ 8444 မဟာရဟနီတိ 8441 လောကနီတိ 8442 သုတ္တန္တနီတိ 8443 သူရဿတိနီတိ 8450 စာဏကျနီတိ 8448 နရဒက္ခဒီပနီ 8449 စတုရာရက္ခဒီပနီ 8451 ရသဝါဟိနီ 8452 သီမဝိသောဓနီပါဌ 8453 ဝေဿန္တရဂီတိ 8454 မောဂ္ဂလ္လာန ဝုတ္တိဝိဝရဏပဉ္စိကာ 8455 ထူပဝံသ 8456 ဒါဌာဝံသ 8457 ဓါတုပါဌဝိလာသိနိယာ 8458 ဓါတုဝံသ 8459 ဟတ္ထဝနဂလ္လဝိဟာရဝံသ 8460 ဇိနစရိတယ 8461 ဇိနဝံသဒီပံ 8462 တေလကဋာဟဂါထာ 8463 မိလိဒဋီကာ 8464 ပဒမဉ္ဇရီ 8465 ပဒသာဓနံ 8466 သဒ္ဒဗိန္ဒုပကရဏံ 8467 ကစ္စာယနဓါတုမဉ္ဇုသာ 8468 သာမန္တကူဋဝဏ္ဏနာ |
| 2101 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 2102 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဒီဃ) 2103 ပါထိကဝဂ္ဂ ပါဠိ | 2201 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 2202 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဒီဃ) 2203 ပါထိကဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ | 2301 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 2302 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (ဒီဃ) 2303 ပါထိကဝဂ္ဂ ဋီကာ 2304 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၁ 2305 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၂ | |
| 3101 မူလပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3102 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3103 ဥပရိပဏ္ဏာသ ပါဠိ | 3201 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၁ 3202 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၂ 3203 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ 3204 ဥပရိပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ | 3301 မူလပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3302 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3303 ဥပရိပဏ္ဏာသ ဋီကာ | |
| 4101 သဂါထာဝဂ္ဂ ပါဠိ 4102 နိဒါနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4103 ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 4104 သဠာယတနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4105 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (သံယုတ္တ) | 4201 သဂါထာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4202 နိဒါနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4203 ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4204 သဠာယတနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4205 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (သံယုတ္တ) | 4301 သဂါထာဝဂ္ဂ ဋီကာ 4302 နိဒါနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4303 ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 4304 သဠာယတနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4305 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (သံယုတ္တ) | |
| 5101 ဧကကနိပါတ ပါဠိ 5102 ဒုကနိပါတ ပါဠိ 5103 တိကနိပါတ ပါဠိ 5104 စတုက္ကနိပါတ ပါဠိ 5105 ပဉ္စကနိပါတ ပါဠိ 5106 ဆက္ကနိပါတ ပါဠိ 5107 သတ္တကနိပါတ ပါဠိ 5108 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ပါဠိ 5109 နဝကနိပါတ ပါဠိ 5110 ဒသကနိပါတ ပါဠိ 5111 ဧကာဒသကနိပါတ ပါဠိ | 5201 ဧကကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5202 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5203 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5204 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ အဋ္ဌကထာ | 5301 ဧကကနိပါတ ဋီကာ 5302 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ ဋီကာ 5303 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ ဋီကာ 5304 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ဋီကာ | |
| 6101 ခုဒ္ဒကပါဌ ပါဠိ 6102 ဓမ္မပဒ ပါဠိ 6103 ဥဒါန ပါဠိ 6104 ဣတိဝုတ္တက ပါဠိ 6105 သုတ္တနိပါတ ပါဠိ 6106 ဝိမာနဝတ္ထု ပါဠိ 6107 ပေတဝတ္ထု ပါဠိ 6108 ထေရဂါထာ ပါဠိ 6109 ထေရီဂါထာ ပါဠိ 6110 အပဒါန ပါဠိ-၁ 6111 အပဒါန ပါဠိ-၂ 6112 ဗုဒ္ဓဝံသ ပါဠိ 6113 စရိယာပိဋက ပါဠိ 6114 ဇာတက ပါဠိ-၁ 6115 ဇာတက ပါဠိ-၂ 6116 မဟာနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6117 စူဠနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6118 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ ပါဠိ 6119 နေတ္တိပ္ပကရဏ ပါဠိ 6120 မိလိန္ဒပဉှ ပါဠိ 6121 ပေဋကောပဒေသ ပါဠိ | 6201 ခုဒ္ဒကပါဌ အဋ္ဌကထာ 6202 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၁ 6203 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၂ 6204 ဥဒါန အဋ္ဌကထာ 6205 ဣတိဝုတ္တက အဋ္ဌကထာ 6206 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၁ 6207 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၂ 6208 ဝိမာနဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6209 ပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6210 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၁ 6211 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၂ 6212 ထေရီဂါထာ အဋ္ဌကထာ 6213 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၁ 6214 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၂ 6215 ဗုဒ္ဓဝံသ အဋ္ဌကထာ 6216 စရိယာပိဋက အဋ္ဌကထာ 6217 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၁ 6218 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၂ 6219 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၃ 6220 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၄ 6221 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၅ 6222 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၆ 6223 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၇ 6224 မဟာနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6225 စူဠနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6226 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၁ 6227 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၂ 6228 နေတ္တိပ္ပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 6301 နေတ္တိပ္ပကရဏ ဋီကာ 6302 နေတ္တိဝိဘာဝိနီ | |
| 7101 ဓမ္မသင်္ဂဏီ ပါဠိ 7102 ဝိဘင်္ဂ ပါဠိ 7103 ဓါတုကထာ ပါဠိ 7104 ပုဂ္ဂလပညတ္တိ ပါဠိ 7105 ကထာဝတ္ထု ပါဠိ 7106 ယမက ပါဠိ-၁ 7107 ယမက ပါဠိ-၂ 7108 ယမက ပါဠိ-၃ 7109 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၁ 7110 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၂ 7111 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၃ 7112 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၄ 7113 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၅ | 7201 ဓမ္မသင်္ဂဏိ အဋ္ဌကထာ 7202 သမ္မောဟဝိနောဒနီ အဋ္ဌကထာ 7203 ပဉ္စပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 7301 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-မူလဋီကာ 7302 ဝိဘင်္ဂ-မူလဋီကာ 7303 ပဉ္စပကရဏ-မူလဋီကာ 7304 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-အနုဋီကာ 7305 ပဉ္စပကရဏ-အနုဋီကာ 7306 အဘိဓမ္မာဝတာရော-နာမရူပပရိစ္ဆေဒေါ 7307 အဘိဓမ္မတ္ထသင်္ဂဟော 7308 အဘိဓမ္မာဝတာရ-ပုရာဏဋီကာ 7309 အဘိဓမ္မမာတိကာပါဠိ | |
| português | |||
| Páli | Aṭṭhakathā | Ṭīkā | Outro |
| 1101 Ofensas Graves (Pārājika) 1102 Ofensas Leves (Pācittiya) 1103 Grande Seção do Vīnaya (Mahāvagga) 1104 Pequena Seção do Vīnaya (Cūḷavagga) 1105 Apêndice do Vīnaya (Parivāra) | 1201 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 1 1202 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 2 1203 Comentário das Ofensas Leves 1204 Comentário da Grande Seção do Vīnaya 1205 Comentário da Pequena Seção do Vīnaya 1206 Comentário do Apêndice do Vīnaya | 1301 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 1 1302 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 2 1303 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 3 | 1401 Texto das Duas Matrizes 1402 Comentário do Compêndio do Vīnaya 1403 Subcomentário de Vajirabuddhi 1404 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 1 1405 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 2 1406 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 1 1407 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 2 1408 Antigo Subcomentário que Supera Dúvidas 1409 Decisão sobre o Vīnaya e Decisão Superior 1410 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 1 1411 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 2 1412 Texto da Aplicação das Regras 1413 Pequeno Treinamento e Treinamento Fundamental 8401 Caminho da Purificação - Vol. 1 8402 Caminho da Purificação - Vol. 2 8403 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 1 8404 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 2 8405 História da Origem do Caminho da Purificação 8406 Coleção dos Longos Discursos (índice Pāli-Vietnamita) 8407 Coleção dos Discursos Médios (índice Pāli-Vietnamita) 8408 Coleção dos Discursos Agrupados (índice Pāli-Vietnamita) 8409 Coleção dos Discursos Numerados (índice Pāli-Vietnamita) 8410 Cesto da Disciplina (índice Pāli-Vietnamita) 8411 Cesto do Abhidhamma (índice Pāli-Vietnamita) 8412 Comentários (índice Pāli-Vietnamita) 8413 Elucidação da Etimologia 8414 Grande Subcomentário do Compêndio que Elucida o Sentido Supremo 8415 Texto do Subcomentário Elucidativo 8416 Texto Elucidativo sobre a Exposição das Condições 8417 Subcomentário da Saudação 8418 Grande Texto de Saudação 8419 Versos de Louvor a Buda pelos Sinais 8420 Saudação com Recitação 8421 Oferenda de Lótus 8422 Ornamento dos Vencedores 8423 Mel dos Versos 8424 Coleção de Versos sobre as Qualidades de Buda 8425 Pequena Crônica dos Livros 8427 Crônica do Ensinamento 8426 Grande Crônica 8429 Gramática de Moggallāna 8428 Gramática de Kaccāyana 8430 Tratado sobre a Gramática - Série de Palavras 8431 Tratado sobre a Gramática - Série de Raízes 8432 Realização das Formas das Palavras 8433 Comentário de Moggallāna 8434 Texto sobre a Realização da Aplicação 8435 Texto sobre a Origem dos Versos 8436 Texto do Dicionário Iluminado 8437 Subcomentário do Dicionário Iluminado 8438 Texto sobre o Ornamento da Boa Compreensão 8439 Subcomentário do Ornamento da Boa Compreensão 8440 Essência da Decisão sobre os Termos do Glossário de Bālāvatāra 8446 Ética do Poeta 8447 Coleção de Ética 8445 Ética do Dhamma 8444 Grande Ética Secreta 8441 Ética do Mundo 8442 Ética dos Suttas 8443 Ética do Herói 8450 Ética de Cāṇakya 8448 Elucidação sobre os Perigos para os Homens 8449 Elucidação sobre as Quatro Proteções 8451 O Fluxo do Sabor - Histórias Edificantes 8452 Texto sobre a Purificação dos Limites 8453 Canto de Vessantara 8454 Explicação do Comentário de Moggallāna 8455 Crônica das Estupas 8456 Crônica da Relíquia do Dente 8457 O Esplendor da Leitura dos Elementos 8458 Crônica das Relíquias 8459 Crônica do Mosteiro de Hatthavanagalla 8460 História do Vencedor 8461 Ilha da Linhagem dos Vencedores 8462 Versos da Panela de Óleo 8463 Subcomentário de Milinda 8464 Cacho de Flores de Palavras 8465 Realização das Palavras 8466 Tratado sobre os Pontos da Gramática 8467 Coleção de Raízes de Kaccāyana 8468 Descrição do Pico de Sāmantakūṭa |
| 2101 Seção da Moralidade - Dīgha 2102 Grande Seção - Dīgha 2103 Seção de Pāthika - Dīgha | 2201 Comentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2202 Comentário da Grande Seção - Dīgha 2203 Comentário da Seção de Pāthika - Dīgha | 2301 Subcomentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2302 Subcomentário da Grande Seção - Dīgha 2303 Subcomentário da Seção de Pāthika - Dīgha 2304 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 1 2305 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 2 | |
| 3101 Cinquenta Discursos Fundamentais - Majjhima 3102 Cinquenta Discursos Médios - Majjhima 3103 Cinquenta Discursos Superiores - Majjhima | 3201 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 1 3202 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 2 3203 Comentário dos Cinquenta Médios 3204 Comentário dos Cinquenta Superiores | 3301 Subcomentário dos Cinquenta Fundamentais 3302 Subcomentário dos Cinquenta Médios 3303 Subcomentário dos Cinquenta Superiores | |
| 4101 Seção com Versos - Saṃyutta 4102 Seção das Causas - Saṃyutta 4103 Seção dos Agregados - Saṃyutta 4104 Seção das Seis Bases dos Sentidos - Saṃyutta 4105 Grande Seção - Saṃyutta | 4201 Comentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4202 Comentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4203 Comentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4204 Comentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4205 Comentário da Grande Seção - Saṃyutta | 4301 Subcomentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4302 Subcomentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4303 Subcomentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4304 Subcomentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4305 Subcomentário da Grande Seção - Saṃyutta | |
| 5101 Grupos de Um - Aṅguttara 5102 Grupos de Dois - Aṅguttara 5103 Grupos de Três - Aṅguttara 5104 Grupos de Quatro - Aṅguttara 5105 Grupos de Cinco - Aṅguttara 5106 Grupos de Seis - Aṅguttara 5107 Grupos de Sete - Aṅguttara 5108 Grupos de Oito, etc. - Aṅguttara 5109 Grupos de Nove - Aṅguttara 5110 Grupos de Dez - Aṅguttara 5111 Grupos de Onze - Aṅguttara | 5201 Comentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5202 Comentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5203 Comentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5204 Comentário dos Grupos de Oito, etc. | 5301 Subcomentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5302 Subcomentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5303 Subcomentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5304 Subcomentário dos Grupos de Oito, etc. | |
| 6101 Pequena Leitura (Khuddakapāṭha) 6102 Versos do Dhamma (Dhammapada) 6103 Exclamações Inspiradas (Udāna) 6104 Assim Foi Dito (Itivuttaka) 6105 Coleção de Discursos (Suttanipāta) 6106 Histórias das Mansões Celestiais 6107 Histórias dos Fantasmas 6108 Versos dos Monges Anciãos 6109 Versos das Monjas Anciãs 6110 Histórias Passadas - Vol. 1 6111 Histórias Passadas - Vol. 2 6112 História dos Budas (Buddhavaṃsa) 6113 Cesto das Condutas (Cariyāpiṭaka) 6114 Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6115 Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6116 Grande Exposição (Mahāniddesa) 6117 Pequena Exposição (Cūḷaniddesa) 6118 Caminho da Discriminação Analítica 6119 O Guia (Nettippakaraṇa) 6120 As Perguntas de Milinda 6121 Instrução do Cesto (Peṭakopadesa) | 6201 Comentário da Pequena Leitura 6202 Comentário do Dhammapada - Vol. 1 6203 Comentário do Dhammapada - Vol. 2 6204 Comentário do Udāna 6205 Comentário do Itivuttaka 6206 Comentário do Suttanipāta - Vol. 1 6207 Comentário do Suttanipāta - Vol. 2 6208 Comentário das Histórias das Mansões 6209 Comentário das Histórias dos Fantasmas 6210 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 1 6211 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 2 6212 Comentário dos Versos das Monjas 6213 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 1 6214 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 2 6215 Comentário da História dos Budas 6216 Comentário do Cesto das Condutas 6217 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6218 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6219 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 3 6220 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 4 6221 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 5 6222 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 6 6223 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 7 6224 Comentário da Grande Exposição 6225 Comentário da Pequena Exposição 6226 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 1 6227 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 2 6228 Comentário do Guia | 6301 Subcomentário do Guia 6302 Elucidação do Guia | |
| 7101 Enumeração dos Fenômenos (Dhammasaṅgaṇī) 7102 Análise (Vibhaṅga) 7103 Discurso sobre os Elementos (Dhātukathā) 7104 Designação das Pessoas (Puggalapaññatti) 7105 Pontos da Discussão (Kathāvatthu) 7106 O Livro dos Pares - Vol. 1 7107 O Livro dos Pares - Vol. 2 7108 O Livro dos Pares - Vol. 3 7109 Condições de Originação - Vol. 1 7110 Condições de Originação - Vol. 2 7111 Condições de Originação - Vol. 3 7112 Condições de Originação - Vol. 4 7113 Condições de Originação - Vol. 5 | 7201 Comentário da Enumeração dos Fenômenos 7202 Comentário que Dissipa a Confusão 7203 Comentário dos Cinco Tratados | 7301 Subcomentário Principal da Enumeração dos Fenômenos 7302 Subcomentário Principal da Análise 7303 Subcomentário Principal dos Cinco Tratados 7304 Subcomentário Secundário da Enumeração dos Fenômenos 7305 Subcomentário Secundário dos Cinco Tratados 7306 Introdução ao Abhidhamma - Análise de Nome e Forma 7307 Compêndio do Abhidhamma 7308 Antigo Subcomentário da Introdução ao Abhidhamma 7309 Matriz do Abhidhamma | |
| русский | |||
| Палийский канон | Комментарии | Субкомментарии | Другое |
| 1101 Параджика-пали 1102 Пачиттия-пали 1103 Махавагга-пали (Виная) 1104 Чулавагга-пали 1105 Паривара-пали | 1201 Параджиканда-аттхакатха-1 1202 Параджиканда-аттхакатха-2 1203 Пачиттия-аттхакатха 1204 Махавагга-аттхакатха (Виная) 1205 Чулавагга-аттхакатха 1206 Паривара-аттхакатха | 1301 Сараттхадипани-тика-1 1302 Сараттхадипани-тика-2 1303 Сараттхадипани-тика-3 | 1401 Двематика-пали 1402 Винаясангаха-аттхакатха 1403 Ваджирабуддхи-тика 1404 Вимативинодани-тика-1 1405 Вимативинодани-тика-2 1406 Винаяланкара-тика-1 1407 Винаяланкара-тика-2 1408 Канкхавитаранипурана-тика 1409 Винаявиниччая-уттаравиниччая 1410 Винаявиниччая-тика-1 1411 Винаявиниччая-тика-2 1412 Пачиттиядийоджана-пали 1413 Кхуддасиккха-муласиккха 8401 Висуддхимагга-1 8402 Висуддхимагга-2 8403 Висуддхимагга-махатика-1 8404 Висуддхимагга-махатика-2 8405 Висуддхимагга-ниданакатха 8406 Дигханикая (пу-ви) 8407 Мадджхиманикая (пу-ви) 8408 Самъюттаникая (пу-ви) 8409 Ангуттараникая (пу-ви) 8410 Винаяпитака (пу-ви) 8411 Абхидхаммапитака (пу-ви) 8412 Аттхакатха (пу-ви) 8413 Нируттидипани 8414 Параматтхадипани Сангахамахатикапатха 8415 Анудипанипатха 8416 Паттхануддеса дипанипатха 8417 Намаккаратика 8418 Махапанамапатха 8419 Лаккханато буддхатхоманагатха 8420 Сутавандана 8421 Камаланджали 8422 Джиналанкара 8423 Паджамадху 8424 Буддхагунагатхавали 8425 Чулагантхавамса 8427 Сасанавамса 8426 Махавамса 8429 Моггалланабьякарана 8428 Каччаянабьякарана 8430 Садданитиппакарана (падамала) 8431 Садданитиппакарана (дхатумала) 8432 Падарупасиддхи 8433 Могалланапанчика 8434 Пайогасиддхипатха 8435 Вуттодаяпатха 8436 Абхидханаппадипикапатха 8437 Абхидханаппадипикатика 8438 Субодхаланкарапатха 8439 Субодхаланкаратика 8440 Балаватара гантхипадаттхавиниччаясара 8446 Кавидаппананити 8447 Нитиманджари 8445 Дхамманити 8444 Махараханити 8441 Локанити 8442 Суттантанити 8443 Сурассатинити 8450 Чанакьянити 8448 Нарадаккхадипани 8449 Чатурараккхадипани 8451 Расавахини 8452 Симависодханипатха 8453 Вессантарагити 8454 Моггаллана вуттививаранапанчика 8455 Тхупавамса 8456 Датхавамса 8457 Дхатупатхавиласиния 8458 Дхатувамса 8459 Хаттхаванагаллавихаравамса 8460 Джиначаритая 8461 Джинавамсадипа 8462 Телакатахагатха 8463 Милидатика 8464 Падаманджари 8465 Падасадхана 8466 Саддабиндупакарана 8467 Каччаянадхатуманджуса 8468 Самантакутаваннана |
| 2101 Силаккхандхавагга-пали 2102 Махавагга-пали (Дигха) 2103 Патхикавагга-пали | 2201 Силаккхандхавагга-аттхакатха 2202 Махавагга-аттхакатха (Дигха) 2203 Патхикавагга-аттхакатха | 2301 Силаккхандхавагга-тика 2302 Махавагга-тика (Дигха) 2303 Патхикавагга-тика 2304 Силаккхандхавагга-абхинаватика-1 2305 Силаккхандхавагга-абхинаватика-2 | |
| 3101 Мулапаннаса-пали 3102 Мадджхимапаннаса-пали 3103 Упарипаннаса-пали | 3201 Мулапаннаса-аттхакатха-1 3202 Мулапаннаса-аттхакатха-2 3203 Мадджхимапаннаса-аттхакатха 3204 Упарипаннаса-аттхакатха | 3301 Мулапаннаса-тика 3302 Мадджхимапаннаса-тика 3303 Упарипаннаса-тика | |
| 4101 Сагатхавагга-пали 4102 Ниданавагга-пали 4103 Кхандхавагга-пали 4104 Салаятанавагга-пали 4105 Махавагга-пали (Самъютта) | 4201 Сагатхавагга-аттхакатха 4202 Ниданавагга-аттхакатха 4203 Кхандхавагга-аттхакатха 4204 Салаятанавагга-аттхакатха 4205 Махавагга-аттхакатха (Самъютта) | 4301 Сагатхавагга-тика 4302 Ниданавагга-тика 4303 Кхандхавагга-тика 4304 Салаятанавагга-тика 4305 Махавагга-тика (Самъютта) | |
| 5101 Экаканипата-пали 5102 Дуканипата-пали 5103 Тиканипата-пали 5104 Чатукканипата-пали 5105 Панчаканипата-пали 5106 Чхакканипата-пали 5107 Саттаканипата-пали 5108 Аттхакадинипата-пали 5109 Наваканипата-пали 5110 Дасаканипата-пали 5111 Экадасаканипата-пали | 5201 Экаканипата-аттхакатха 5202 Дука-тика-чатукканипата-аттхакатха 5203 Панчака-чхакка-саттаканипата-аттхакатха 5204 Аттхакадинипата-аттхакатха | 5301 Экаканипата-тика 5302 Дука-тика-чатукканипата-тика 5303 Панчака-чхакка-саттаканипата-тика 5304 Аттхакадинипата-тика | |
| 6101 Кхуддакапатха-пали 6102 Дхаммапада-пали 6103 Удана-пали 6104 Итивуттака-пали 6105 Суттанипата-пали 6106 Виманаваттху-пали 6107 Петаваттху-пали 6108 Тхерагатха-пали 6109 Тхеригатха-пали 6110 Ападана-пали-1 6111 Ападана-пали-2 6112 Буддхавамса-пали 6113 Чарияпитака-пали 6114 Джатака-пали-1 6115 Джатака-пали-2 6116 Маханиддеса-пали 6117 Чуланиддеса-пали 6118 Патисамбхидамагга-пали 6119 Неттиппакарана-пали 6120 Милиндапаньха-пали 6121 Петакопадеса-пали | 6201 Кхуддакапатха-аттхакатха 6202 Дхаммапада-аттхакатха-1 6203 Дхаммапада-аттхакатха-2 6204 Удана-аттхакатха 6205 Итивуттака-аттхакатха 6206 Суттанипата-аттхакатха-1 6207 Суттанипата-аттхакатха-2 6208 Виманаваттху-аттхакатха 6209 Петаваттху-аттхакатха 6210 Тхерагатха-аттхакатха-1 6211 Тхерагатха-аттхакатха-2 6212 Тхеригатха-аттхакатха 6213 Ападана-аттхакатха-1 6214 Ападана-аттхакатха-2 6215 Буддхавамса-аттхакатха 6216 Чарияпитака-аттхакатха 6217 Джатака-аттхакатха-1 6218 Джатака-аттхакатха-2 6219 Джатака-аттхакатха-3 6220 Джатака-аттхакатха-4 6221 Джатака-аттхакатха-5 6222 Джатака-аттхакатха-6 6223 Джатака-аттхакатха-7 6224 Маханиддеса-аттхакатха 6225 Чуланиддеса-аттхакатха 6226 Патисамбхидамагга-аттхакатха-1 6227 Патисамбхидамагга-аттхакатха-2 6228 Неттиппакарана-аттхакатха | 6301 Неттиппакарана-тика 6302 Неттивибхавини | |
| 7101 Дхаммасангани-пали 7102 Вибханга-пали 7103 Дхатукатха-пали 7104 Пуггалапаннятти-пали 7105 Катхаваттху-пали 7106 Ямака-пали-1 7107 Ямака-пали-2 7108 Ямака-пали-3 7109 Паттхана-пали-1 7110 Паттхана-пали-2 7111 Паттхана-пали-3 7112 Паттхана-пали-4 7113 Паттхана-пали-5 | 7201 Дхаммасангани-аттхакатха 7202 Саммохивинодани-аттхакатха 7203 Панчапакарана-аттхакатха | 7301 Дхаммасангани-мулатика 7302 Вибханга-мулатика 7303 Панчапакарана-мулатика 7304 Дхаммасангани-анутика 7305 Панчапакарана-анутика 7306 Абхидхаммаватаро-намарупапариччхедо 7307 Абхидхамматтхасангахо 7308 Абхидхаммаватара-пуранатика 7309 Абхидхаммаматика-пали | |
| සිංහල | |||
| පාලි කැනනය | විවරණ | අටුවා | වෙනත් |
| 1101 පාරාජික පාළි 1102 පාචිත්තිය පාළි 1103 මහාවග්ග පාළි (විනය) 1104 චූළවග්ග පාළි 1105 පරිවාර පාළි | 1201 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-1 1202 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-2 1203 පාචිත්තිය අට්ඨකථා 1204 මහාවග්ග අට්ඨකථා (විනය) 1205 චූළවග්ග අට්ඨකථා 1206 පරිවාර අට්ඨකථා | 1301 සාරත්ථදීපනී ටීකා-1 1302 සාරත්ථදීපනී ටීකා-2 1303 සාරත්ථදීපනී ටීකා-3 | 1401 ද්වෙමාතිකාපාළි 1402 විනයසංගහ අට්ඨකථා 1403 වජිරබුද්ධි ටීකා 1404 විමතිවිනෝදනී ටීකා-1 1405 විමතිවිනෝදනී ටීකා-2 1406 විනයාලංකාර ටීකා-1 1407 විනයාලංකාර ටීකා-2 1408 කඞ්ඛාවිතරණීපුරාණ ටීකා 1409 විනයවිනිච්ඡය-උත්තරවිනිච්ඡය 1410 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-1 1411 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-2 1412 පාචිත්යාදියෝජනාපාළි 1413 ඛුද්දසික්ඛා-මූලසික්ඛා 8401 විසුද්ධිමග්ග-1 8402 විසුද්ධිමග්ග-2 8403 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-1 8404 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-2 8405 විසුද්ධිමග්ග නිදානකථා 8406 දීඝනිකාය (පු-වි) 8407 මජ්ඣිමනිකාය (පු-වි) 8408 සංයුත්තනිකාය (පු-වි) 8409 අඞ්ගුත්තරනිකාය (පු-වි) 8410 විනයපිටක (පු-වි) 8411 අභිධම්මපිටක (පු-වි) 8412 අට්ඨකථා (පු-වි) 8413 නිරුත්තිදීපනී 8414 පරමත්ථදීපනී සඞ්ගහමහාටීකාපාඨ 8415 අනුදීපනීපාඨ 8416 පට්ඨානුද්දේස දීපනීපාඨ 8417 නමක්කාරටීකා 8418 මහාපණාමපාඨ 8419 ලක්ඛණාතෝ බුද්ධථෝමනාගාථා 8420 සුතවන්දනා 8421 කමලාඤ්ජලි 8422 ජිනාලඞ්කාර 8423 පජ්ජමධු 8424 බුද්ධගුණගාථාවලී 8425 චූළගන්ථවංස 8427 සාසනවංස 8426 මහාවංස 8429 මොග්ගල්ලානබ්යාකරණං 8428 කච්චායනබ්යාකරණං 8430 සද්දනීතිප්පකරණං (පදමාලා) 8431 සද්දනීතිප්පකරණං (ධාතුමාලා) 8432 පදරූපසිද්ධි 8433 මොග්ගල්ලානපඤ්චිකා 8434 පයෝගසිද්ධිපාඨ 8435 වුත්තෝදයපාඨ 8436 අභිධානප්පදීපිකාපාඨ 8437 අභිධානප්පදීපිකාටීකා 8438 සුබෝධාලඞ්කාරපාඨ 8439 සුබෝධාලඞ්කාරටීකා 8440 බාලාවතාර ගණ්ඨිපදත්ථවිනිච්ඡයසාර 8446 කවිදප්පණනීති 8447 නීතිමඤ්ජරී 8445 ධම්මනීති 8444 මහාරහනීති 8441 ලෝකනීති 8442 සුත්තන්තනීති 8443 සූරස්සතිනීති 8450 චාණක්යනීති 8448 නරදක්ඛදීපනී 8449 චතුරාරක්ඛදීපනී 8451 රසවාහිනී 8452 සීමවිසෝධනීපාඨ 8453 වෙස්සන්තරගීති 8454 මොග්ගල්ලාන වුත්තිවිවරණපඤ්චිකා 8455 ථූපවංස 8456 දාඨාවංස 8457 ධාතුපාඨවිලාසිනියා 8458 ධාතුවංස 8459 හත්ථවනගල්ලවිහාරවංස 8460 ජිනචරිතය 8461 ජිනවංසදීපං 8462 තේලකටාහගාථා 8463 මිලිදටීකා 8464 පදමඤ්ජරී 8465 පදසාධනං 8466 සද්දබින්දුපකරණං 8467 කච්චායනධාතුමඤ්ජුසා 8468 සාමන්තකූටවණ්ණනා |
| 2101 සීලක්ඛන්ධවග්ග පාළි 2102 මහාවග්ග පාළි (දීඝ) 2103 පාථිකවග්ග පාළි | 2201 සීලක්ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 2202 මහාවග්ග අට්ඨකථා (දීඝ) 2203 පාථිකවග්ග අට්ඨකථා | 2301 සීලක්ඛන්ධවග්ග ටීකා 2302 මහාවග්ග ටීකා (දීඝ) 2303 පාථිකවග්ග ටීකා 2304 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-1 2305 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-2 | |
| 3101 මූලපණ්ණාස පාළි 3102 මජ්ඣිමපණ්ණාස පාළි 3103 උපරිපණ්ණාස පාළි | 3201 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-1 3202 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-2 3203 මජ්ඣිමපණ්ණාස අට්ඨකථා 3204 උපරිපණ්ණාස අට්ඨකථා | 3301 මූලපණ්ණාස ටීකා 3302 මජ්ඣිමපණ්ණාස ටීකා 3303 උපරිපණ්ණාස ටීකා | |
| 4101 සගාථාවග්ග පාළි 4102 නිදානවග්ග පාළි 4103 ඛන්ධවග්ග පාළි 4104 සළායතනවග්ග පාළි 4105 මහාවග්ග පාළි (සංයුත්ත) | 4201 සගාථාවග්ග අට්ඨකථා 4202 නිදානවග්ග අට්ඨකථා 4203 ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 4204 සළායතනවග්ග අට්ඨකථා 4205 මහාවග්ග අට්ඨකථා (සංයුත්ත) | 4301 සගාථාවග්ග ටීකා 4302 නිදානවග්ග ටීකා 4303 ඛන්ධවග්ග ටීකා 4304 සළායතනවග්ග ටීකා 4305 මහාවග්ග ටීකා (සංයුත්ත) | |
| 5101 එකකනිපාත පාළි 5102 දුකනිපාත පාළි 5103 තිකනිපාත පාළි 5104 චතුක්කනිපාත පාළි 5105 පඤ්චකනිපාත පාළි 5106 ඡක්කනිපාත පාළි 5107 සත්තකනිපාත පාළි 5108 අට්ඨකාදිනිපාත පාළි 5109 නවකනිපාත පාළි 5110 දසකනිපාත පාළි 5111 එකාදසකනිපාත පාළි | 5201 එකකනිපාත අට්ඨකථා 5202 දුක-තික-චතුක්කනිපාත අට්ඨකථා 5203 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත අට්ඨකථා 5204 අට්ඨකාදිනිපාත අට්ඨකථා | 5301 එකකනිපාත ටීකා 5302 දුක-තික-චතුක්කනිපාත ටීකා 5303 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත ටීකා 5304 අට්ඨකාදිනිපාත ටීකා | |
| 6101 ඛුද්දකපාඨ පාළි 6102 ධම්මපද පාළි 6103 උදාන පාළි 6104 ඉතිවුත්තක පාළි 6105 සුත්තනිපාත පාළි 6106 විමානවත්ථු පාළි 6107 පේතවත්ථු පාළි 6108 ථේරගාථා පාළි 6109 ථේරීගාථා පාළි 6110 අපදාන පාළි-1 6111 අපදාන පාළි-2 6112 බුද්ධවංස පාළි 6113 චරියාපිටක පාළි 6114 ජාතක පාළි-1 6115 ජාතක පාළි-2 6116 මහානිද්දේස පාළි 6117 චූළනිද්දේස පාළි 6118 පටිසම්භිදාමග්ග පාළි 6119 නෙත්තිප්පකරණ පාළි 6120 මිලින්දපඤ්හ පාළි 6121 පේටකෝපදේස පාළි | 6201 ඛුද්දකපාඨ අට්ඨකථා 6202 ධම්මපද අට්ඨකථා-1 6203 ධම්මපද අට්ඨකථා-2 6204 උදාන අට්ඨකථා 6205 ඉතිවුත්තක අට්ඨකථා 6206 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-1 6207 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-2 6208 විමානවත්ථු අට්ඨකථා 6209 පේතවත්ථු අට්ඨකථා 6210 ථේරගාථා අට්ඨකථා-1 6211 ථේරගාථා අට්ඨකථා-2 6212 ථේරීගාථා අට්ඨකථා 6213 අපදාන අට්ඨකථා-1 6214 අපදාන අට්ඨකථා-2 6215 බුද්ධවංස අට්ඨකථා 6216 චරියාපිටක අට්ඨකථා 6217 ජාතක අට්ඨකථා-1 6218 ජාතක අට්ඨකථා-2 6219 ජාතක අට්ඨකථා-3 6220 ජාතක අට්ඨකථා-4 6221 ජාතක අට්ඨකථා-5 6222 ජාතක අට්ඨකථා-6 6223 ජාතක අට්ඨකථා-7 6224 මහානිද්දේස අට්ඨකථා 6225 චූළනිද්දේස අට්ඨකථා 6226 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-1 6227 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-2 6228 නෙත්තිප්පකරණ අට්ඨකථා | 6301 නෙත්තිප්පකරණ ටීකා 6302 නෙත්තිවිභාවිනී | |
| 7101 ධම්මසංගණී පාළි 7102 විභඞ්ග පාළි 7103 ධාතුකථා පාළි 7104 පුග්ගලපඤ්ඤත්ති පාළි 7105 කථාවත්ථු පාළි 7106 යමක පාළි-1 7107 යමක පාළි-2 7108 යමක පාළි-3 7109 පට්ඨාන පාළි-1 7110 පට්ඨාන පාළි-2 7111 පට්ඨාන පාළි-3 7112 පට්ඨාන පාළි-4 7113 පට්ඨාන පාළි-5 | 7201 ධම්මසංගණි අට්ඨකථා 7202 සම්මෝහවිනෝදනී අට්ඨකථා 7203 පඤ්චපකරණ අට්ඨකථා | 7301 ධම්මසංගණී-මූලටීකා 7302 විභඞ්ග-මූලටීකා 7303 පඤ්චපකරණ-මූලටීකා 7304 ධම්මසංගණී-අනුටීකා 7305 පඤ්චපකරණ-අනුටීකා 7306 අභිධම්මාවතාරෝ-නාමරූපපරිච්ඡේදෝ 7307 අභිධම්මත්ථසංගහෝ 7308 අභිධම්මාවතාර-පුරාණටීකා 7309 අභිධම්මමාතිකාපාළි | |
| Español | |||
| El Canon Pali | Los Comentarios | Los Subcomentarios | Otros |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| แบบไทย | |||
| บาลีแคน | ข้อคิดเห็น | คำอธิบายย่อย | อื่น |
| 1101 ปาราชิกปาฬิ 1102 ปาจิตติยปาฬิ 1103 มหาวคฺคปาฬิ (วินัย) 1104 จูฬวคฺคปาฬิ 1105 ปริวารปาฬิ | 1201 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๑ 1202 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๒ 1203 ปาจิตฺติยอฏฺฐกถา 1204 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (วินัย) 1205 จูฬวคฺคอฏฺฐกถา 1206 ปริวารอฏฺฐกถา | 1301 สารตฺถทีปนีฏีกา-๑ 1302 สารตฺถทีปนีฏีกา-๒ 1303 สารตฺถทีปนีฏีกา-๓ | 1401 ทเวมาติกาปาฬิ 1402 วินยสํคหอฏฺฐกถา 1403 วชิรพุทฺธิฏีกา 1404 วิมติวิโนทนีฏีกา-๑ 1405 วิมติวิโนทนีฏีกา-๒ 1406 วินยาลงฺการฏีกา-๑ 1407 วินยาลงฺการฏีกา-๒ 1408 กงฺขาวิตรณีปุราณฏีกา 1409 วินยวินิจฉย-อุตฺตรวินิจฉย 1410 วินยวินิจฉยฏีกา-๑ 1411 วินยวินิจฉยฏีกา-๒ 1412 ปาจิตฺยาทิโยชนาปาฬิ 1413 ขุทฺทสิกฺขา-มูลสิกฺขา 8401 วิสุทฺธิมคฺค-๑ 8402 วิสุทฺธิมคฺค-๒ 8403 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๑ 8404 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๒ 8405 วิสุทฺธิมคฺค-นิทานกถา 8406 ทีฆนิกาย (ปุ-วิ) 8407 มชฺฌิมนิกาย (ปุ-วิ) 8408 สํยุตฺตนิกาย (ปุ-วิ) 8409 องฺคุตฺตรนิกาย (ปุ-วิ) 8410 วินยปิฎก (ปุ-วิ) 8411 อภิธมฺมปิฎก (ปุ-วิ) 8412 อฏฺฐกถา (ปุ-วิ) 8413 นิรุตฺติทีปนี 8414 ปรมตฺถทีปนี สงฺคหมหาฏีกาปาฐ 8415 อนุทีปนีปาฐ 8416 ปฎฺฐานุทฺเทสทีปนีปาฐ 8417 นมกฺการฏีกา 8418 มหาปณามปาฐ 8419 ลกฺขณาโต พุทฺธโถมนาคาถา 8420 สุตวทน 8421 กมลาญฺชลิ 8422 ชินาลงฺการ 8423 ปชฺชมธุ 8424 พุทฺธคุณคาถาวลี 8425 จูฬคนฺถวํส 8427 สาสนวํส 8426 มหาวํส 8429 โมคฺคลฺลานพฺยากรณํ 8428 กจฺจายนพฺยากรณํ 8430 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ปทมาลา) 8431 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ธาตุมาลา) 8432 ปทรูปสิทฺธิ 8433 โมคคฺลานปญฺจิกา 8434 ปโยคสิทฺธิปาฐ 8435 วุตฺโตทยปาฐ 8436 อภิธานปฺปทีปิกาปาฐ 8437 อภิธานปฺปทีปิกาฏีกา 8438 สุโพธาลงฺการปาฐ 8439 สุโพธาลงฺการฏีกา 8440 พาลาวตาร คณฺฐิปทตฺถวินิจฺฉยสาร 8446 กวิทปฺปณนีติ 8447 นีติมญฺชรี 8445 ธมฺมนีติ 8444 มหารหนีติ 8441 โลกนีติ 8442 สุตฺตนฺตนีติ 8443 สูรสฺสตินีติ 8450 จาณกฺยนีติ 8448 นรทกฺขทีปนี 8449 จตุราวรกฺขทีปนี 8451 รสวาหินี 8452 สีมวิโสธนีปาฐ 8453 เวสฺสนฺตรคีติ 8454 โมคฺคลฺลาน วุตฺติวิวรณปญฺจิกา 8455 ถูปวํส 8456 ทาฐาวํส 8457 ธาตุปาฐวิลาสินิยา 8458 ธาตุวํส 8459 หตฺถวนคัลลวิหารวํส 8460 ชนจริตย 8461 ชนวํสทีปํ 8462 เตลกฏาหคาถา 8463 มิลิทฏีกา 8464 ปทมญฺชรี 8465 ปทสาธนํ 8466 สทฺทพินฺทุปกรณํ 8467 กจฺจายนธาตุมญฺชุสา 8468 สามนฺตกูฏวณฺณนา |
| 2101 สีลกฺขนฺธวคฺคปาฬิ 2102 มหาวคฺคปาฬิ (ทีฆ) 2103 ปาถิกวคฺคปาฬิ | 2201 สีลกฺขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 2202 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (ทีฆ) 2203 ปาถิกวคฺคอฏฺฐกถา | 2301 สีลกฺขนฺธวคฺคฏีกา 2302 มหาวคฺคฏีกา (ทีฆ) 2303 ปาถิกวคฺคฏีกา 2304 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๑ 2305 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๒ | |
| 3101 มูลปณฺณาสปาฬิ 3102 มชฺฌิมปณฺณาสปาฬิ 3103 อุปริปณฺณาสปาฬิ | 3201 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๑ 3202 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๒ 3203 มชฺฌิมปณฺณาสอฏฺฐกถา 3204 อุปริปณฺณาสอฏฺฐกถา | 3301 มูลปณฺณาสฏีกา 3302 มชฺฌิมปณฺณาสฏีกา 3303 อุปริปณฺณาสฏีกา | |
| 4101 สคาถาวคฺคปาฬิ 4102 นิทานวคฺคปาฬิ 4103 ขนฺธวคฺคปาฬิ 4104 สฬายตนวคฺคปาฬิ 4105 มหาวคฺคปาฬิ (สํยุตฺต) | 4201 สคาถาวคฺคอฏฺฐกถา 4202 นิทานวคฺคอฏฺฐกถา 4203 ขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 4204 สฬายตนวคฺคอฏฺฐกถา 4205 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (สํยุตฺต) | 4301 สคาถาวคฺคฏีกา 4302 นิทานวคฺคฏีกา 4303 ขนฺธวคฺคฏีกา 4304 สฬายตนวคฺคฏีกา 4305 มหาวคฺคฏีกา (สํยุตฺต) | |
| 5101 เอกกนิปาตปาฬิ 5102 ทุกนิปาตปาฬิ 5103 ติกนิปาตปาฬิ 5104 จตุกฺกนิปาตปาฬิ 5105 ปญฺจกนิปาตปาฬิ 5106 ฉกฺกนิปาตปาฬิ 5107 สตฺตกนิปาตปาฬิ 5108 อฏฺฐกาทินิปาตปาฬิ 5109 นวกนิปาตปาฬิ 5110 ทสกนิปาตปาฬิ 5111 เอกาทสกนิปาตปาฬิ | 5201 เอกกนิปาตอฏฺฐกถา 5202 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตอฏฺฐกถา 5203 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตอฏฺฐกถา 5204 อฏฺฐกาทินิปาตอฏฺฐกถา | 5301 เอกกนิปาตฏีกา 5302 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตฏีกา 5303 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตฏีกา 5304 อฏฺฐกาทินิปาตฏีกา | |
| 6101 ขุทฺทกปาฐปาฬิ 6102 ธมฺมปทปาฬิ 6103 อุทานปาฬิ 6104 อิติวุตฺตกปาฬิ 6105 สุตฺตนิบาตปาฬิ 6106 วิมานวตฺถุปาฬิ 6107 เปตวตฺถุปาฬิ 6108 เถรคาถาปาฬิ 6109 เถรีคาถาปาฬิ 6110 อปทานปาฬิ-๑ 6111 อปทานปาฬิ-๒ 6112 พุทธวงฺสปาฬิ 6113 จริยาปิฏกปาฬิ 6114 ชาตกปาฬิ-๑ 6115 ชาตกปาฬิ-๒ 6116 มหานิทฺเทสปาฬิ 6117 จูฬนิทฺเทสปาฬิ 6118 ปฏิสมฺภิทามคฺคปาฬิ 6119 เนตฺติปฺปกฺรณปาฬิ 6120 มิลินฺทปญฺหาปาฬิ 6121 เปฏโกปเทสปาฬิ | 6201 ขุทฺทกปาฐอฏฺฐกถา 6202 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๑ 6203 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๒ 6204 อุทานอฏฺฐกถา 6205 อิติวุตฺตกอฏฺฐกถา 6206 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๑ 6207 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๒ 6208 วิมานวตฺถุอฏฺฐกถา 6209 เปตวตฺถุอฏฺฐกถา 6210 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๑ 6211 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๒ 6212 เถรีคาถาอฏฺฐกถา 6213 อปทานอฏฺฐกถา-๑ 6214 อปทานอฏฺฐกถา-๒ 6215 พุทธวงฺสอฏฺฐกถา 6216 จริยาปิฏกอฏฺฐกถา 6217 ชาตกอฏฺฐกถา-๑ 6218 ชาตกอฏฺฐกถา-๒ 6219 ชาตกอฏฺฐกถา-๓ 6220 ชาตกอฏฺฐกถา-๔ 6221 ชาตกอฏฺฐกถา-๕ 6222 ชาตกอฏฺฐกถา-๖ 6223 ชาตกอฏฺฐกถา-๗ 6224 มหานิทฺเทสอฏฺฐกถา 6225 จูฬนิทฺเทสอฏฺฐกถา 6226 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๑ 6227 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๒ 6228 เนตฺติปฺปกฺรณอฏฺฐกถา | 6301 เนตฺติปฺปกฺรณฏีกา 6302 เนตฺติวิภาวินี | |
| 7101 ธมฺมสงฺคณีปาฬิ 7102 วิภงฺคปาฬิ 7103 ธาตุกถาปาฬิ 7104 ปุคฺคลปญฺญตฺติปาฬิ 7105 กถาวตฺถุปาฬิ 7106 ยมกปาฬิ-๑ 7107 ยมกปาฬิ-๒ 7108 ยมกปาฬิ-๓ 7109 ปฎฺฐานปาฬิ-๑ 7110 ปฎฺฐานปาฬิ-๒ 7111 ปฎฺฐานปาฬิ-๓ 7112 ปฎฺฐานปาฬิ-๔ 7113 ปฎฺฐานปาฬิ-๕ | 7201 ธมฺมสงฺคณิอฏฺฐกถา 7202 สมฺโมหวินิทนีอฏฺฐกถา 7203 ปญฺจปกรณอฏฺฐกถา | 7301 ธมฺมสงฺคณีมูลฏีกา 7302 วิภงฺคมูลฏีกา 7303 ปญฺจปกรณมูลฏีกา 7304 ธมฺมสงฺคณีอนุฏีกา 7305 ปญฺจปกรณอนุฏีกา 7306 อภิธมฺมาวตาโร-นามรูปปริจฺเฉโท 7307 อภิธมฺมตฺถสงฺคโห 7308 อภิธมฺมาวตาร-ปุราณฏีกา 7309 อภิธมฺมมาติกาปาฬิ | |
| བོད་མི | |||
| པཱ་ལི་གསུང་རབ། | འགྲེལ་བཤད། | འགྲེལ་བཤད་ཕྲན། | གཞན། |
| 1101 ཕ་ར་ཇི་ཀ་པཱ་ལི། 1102 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་པཱ་ལི། 1103 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (ཝི་ན་ཡ) 1104 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 1105 པ་རི་ཝཱ་ར་པཱ་ལི། | 1201 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 1202 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 1203 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1204 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (ཝི་ན་ཡ) 1205 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1206 པ་རི་ཝཱ་ར་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 1301 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1302 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1303 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༣ | 1401 དྭེ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། 1402 ཝི་ན་ཡ་སངྒ་ཧ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1403 ཝ་ཇི་ར་བུད་དྷི་ཊཱི་ཀཱ། 1404 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1405 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1406 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1407 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1408 ཀངྑཱ་ཝི་ཏ་ར་ཎཱི་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 1409 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཨུ་ཏྟ་ར་ཝི་ནི་ཙ་ཡ། 1410 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1411 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1412 པཱ་ཙི་ཏྱཱ་དི་ཡོ་ཇ་ནཱ་པཱ་ལི། 1413 ཁུད་ད་སིཀྑཱ་མཱུ་ལ་སིཀྑཱ། 8401 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༡ 8402 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༢ 8403 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 8404 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 8405 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་ནི་དཱ་ན་ཀ་ཐཱ། 8406 དཱི་གྷ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8407 མཛྷི་མ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8408 སཾ་ཡུཏྟ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8409 ཨངྒུ་ཏྟ་ར་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8410 ཝི་ན་ཡ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8411 ཨ་བྷི་དྷམྨ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8412 ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (པུ་ཝི) 8413 ནི་རུཏྟི་དཱི་པ་ནཱི། 8414 པ་ར་མཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་སངྒ་ཧ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8415 ཨ་ནུ་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8416 པཊྛཱ་ནུདྡེ་ས་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8417 ན་མཀྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8418 མ་ཧཱ་པ་ཎཱ་མ་པཱ་ཋ། 8419 ལཀྑ་ཎཱ་ཏོ་བུདྡྷ་ཐོ་མ་ནཱ་གཱ་ཐཱ། 8420 སུ་ཏ་ཝནྡ་ནཱ། 8421 ཀ་མ་ལཱཉྫ་ལི། 8422 ཇི་ནཱ་ལངྐཱ་ར། 8423 པཛྫ་མ་དྷུ། 8424 བུདྡྷ་གུ་ཎ་གཱ་ཐཱ་ཝ་ལཱི། 8425 ཙཱུ་ལ་གནྠ་ཝཾ་ས། 8427 སཱ་ས་ན་ཝཾ་ས། 8426 མ་ཧཱ་ཝཾ་ས། 8429 མོགྒ་ལླཱ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8428 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8430 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (པ་ད་མཱ་ལཱ) 8431 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (དྷཱ་ཏུ་མཱ་ལཱ) 8432 པ་ད་རཱུ་པ་སིད་དྷི། 8433 མོ་ག་ལླཱ་ན་པཉྩ་ཀཱ། 8434 པ་ཡོ་ག་སིད་དྷི་པཱ་ཋ། 8435 བུཏྟོ་ད་ཡ་པཱ་ཋ། 8436 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8437 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་ཊཱི་ཀཱ། 8438 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་པཱ་ཋ། 8439 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8440 བཱ་ལཱ་ཝ་ཏཱ་ར་གཎྛི་པ་དཏྠ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་སཱ་ར། 8446 ཀ་ཝི་དཔྤ་ཎ་ནཱི་ཏི། 8447 ནཱི་ཏི་མཉྫ་རཱི། 8445 དྷམྨ་ནཱི་ཏི། 8444 མ་ཧཱ་ར་ཧ་ནཱི་ཏི། 8441 ལོ་ཀ་ནཱི་ཏི། 8442 སུཏྟནྟ་ནཱ་ཏི། 8443 སཱུ་རསྶ་ཏི་ནཱི་ཏི། 8450 ཙཱ་ཎཀྱ་ནཱི་ཏི། 8448 ན་ར་དཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8449 ཙ་ཏུ་རཱ་རཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8451 ར་ས་ཝཱ་ཧི་ནཱི། 8452 སཱི་མ་ཝི་སོ་ད་ནཱི་པཱ་ཋ། 8453 ཝེསྶནྟ་ར་གཱི་ཏི། 8454 མོགྒ་ལླཱ་ན་བུཏྟི་ཝི་ཝ་ར་ཎ་པཉྩ་ཀཱ། 8455 ཐཱུ་པ་ཝཾ་ས། 8456 དཱ་ཊྷཱ་ཝཾ་ས། 8457 དྷཱ་ཏུ་པཱ་ཋ་ཝི་ལཱ་སི་ནི་ཡཱ། 8458 དྷཱ་ཏུ་ཝཾ་ས། 8459 ཧཏྠ་ཝ་ན་གལླ་ཝི་ཧཱ་ར་ཝཾ་ས། 8460 ཇི་ན་ཙ་རི་ཏ་ཡ། 8461 ཇི་ན་ཝཾ་ས་དཱི་པཾ། 8462 ཏེ་ལ་ཀ་ཊཱ་ཧ་གཱ་ཐཱ། 8463 མི་ལི་ད་ཊཱི་ཀཱ། 8464 པ་ད་མཉྫ་རཱི། 8465 པ་ད་སཱ་ད་ནཾ། 8466 སདྡ་བིནྡུ་པ་ཀ་ར་ཎཾ། 8467 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་དྷཱ་ཏུ་མཉྫུ་སཱ། 8468 སཱ་མནྟ་ཀཱུ་ཊ་ཝཎྞ་ནཱ། |
| 2101 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 2102 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (དཱི་གྷ) 2103 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་པཱ་ལི། | 2201 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 2202 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (དཱི་གྷ) 2203 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 2301 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2302 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (དཱི་གྷ) 2303 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2304 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 2305 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༢ | |
| 3101 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3102 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3103 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། | 3201 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 3202 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 3203 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 3204 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 3301 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3302 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3303 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 4101 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4102 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4103 ཁནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4104 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4105 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4201 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4202 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4203 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4204 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4205 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4301 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4302 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4303 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4304 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4305 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | |
| 5101 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5102 དུ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5103 ཏི་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5104 ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5105 པཉྩ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5106 ཆཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5107 སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5108 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5109 ན་ཝ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5110 ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5111 ཨེ་ཀཱ་ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། | 5201 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5202 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5203 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5204 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 5301 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5302 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5303 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5304 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 6101 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་པཱ་ལི། 6102 དྷམྨ་པ་ད་པཱ་ལི། 6103 ཨུ་དཱ་ན་པཱ་ལི། 6104 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་པཱ་ལི། 6105 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 6106 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6107 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6108 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6109 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6110 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 6111 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 6112 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་པཱ་ལི། 6113 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་པཱ་ལི། 6114 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 6115 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 6116 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6117 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6118 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་པཱ་ལི། 6119 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་པཱ་ལི། 6120 མི་ལིནྡ་པཉྷ་པཱ་ལི། 6121 པེ་ཊ་ཀོ་པ་དེ་ས་པཱ་ལི། | 6201 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6202 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6203 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6204 ཨུ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6205 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6206 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6207 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6208 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6209 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6210 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6211 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6212 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6213 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6214 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6215 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6216 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6217 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6218 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6219 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༣ 6220 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༤ 6221 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༥ 6222 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༦ 6223 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༧ 6224 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6225 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6226 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6227 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6228 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 6301 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 6302 ནེཏྟི་ཝི་བྷཱི་ནཱི། | |
| 7101 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་པཱ་ལི། 7102 ཝི་བྷངྒ་པཱ་ལི། 7103 དྷཱ་ཏུ་ཀ་ཐཱ་པཱ་ལི། 7104 པུགྒ་ལ་པཉྙཏྟི་པཱ་ལི། 7105 ཀ་ཐཱ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 7106 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 7107 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 7108 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༣ 7109 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 7110 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 7111 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༣ 7112 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༤ 7113 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༥ | 7201 དྷམྨ་སངྒ་ཎི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7202 སམྨོ་ཧ་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7203 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 7301 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7302 ཝི་བྷངྒ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7303 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7304 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7305 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7306 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་རོ་ནཱ་མ་རཱུ་པ་པ་རི་ཙྪེ་དོ། 7307 ཨ་བྷི་དྷམྨཏྠ་སངྒ་ཧོ། 7308 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་ར་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 7309 ཨ་བྷི་དྷམྨ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། | |
| Tiếng Việt | |||
| Kinh điển Pali | Chú giải | Phụ chú giải | Khác |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Tạng Luật) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 1 1202 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 2 1203 Chú Giải Pācittiya 1204 Chú Giải Mahāvagga (Tạng Luật) 1205 Chú Giải Cūḷavagga 1206 Chú Giải Parivāra | 1301 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 1 1302 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 2 1303 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Chú Giải Vinayasaṅgaha 1403 Phụ Chú Giải Vajirabuddhi 1404 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 1 1405 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 2 1406 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 1 1407 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 2 1408 Phụ Chú Giải Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 1 1411 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Thanh Tịnh Đạo - 1 8402 Thanh Tịnh Đạo - 2 8403 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 1 8404 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 2 8405 Lời Tựa Thanh Tịnh Đạo 8406 Trường Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8407 Trung Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8408 Tương Ưng Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8409 Tăng Chi Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8410 Tạng Luật (Vấn Đáp) 8411 Tạng Vi Diệu Pháp (Vấn Đáp) 8412 Chú Giải (Vấn Đáp) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Phụ Chú Giải Namakkāra 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Phụ Chú Giải Abhidhānappadīpikā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Phụ Chú Giải Subodhālaṅkāra 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8444 Mahārahanīti 8445 Dhammanīti 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8450 Cāṇakyanīti 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Phụ Chú Giải Milinda 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Trường Bộ) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2202 Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2203 Chú Giải Pāthikavagga | 2301 Phụ Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2302 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2303 Phụ Chú Giải Pāthikavagga 2304 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 1 2305 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 1 3202 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 2 3203 Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3204 Chú Giải Uparipaṇṇāsa | 3301 Phụ Chú Giải Mūlapaṇṇāsa 3302 Phụ Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3303 Phụ Chú Giải Uparipaṇṇāsa | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Tương Ưng Bộ) | 4201 Chú Giải Sagāthāvagga 4202 Chú Giải Nidānavagga 4203 Chú Giải Khandhavagga 4204 Chú Giải Saḷāyatanavagga 4205 Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | 4301 Phụ Chú Giải Sagāthāvagga 4302 Phụ Chú Giải Nidānavagga 4303 Phụ Chú Giải Khandhavagga 4304 Phụ Chú Giải Saḷāyatanavagga 4305 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Chú Giải Ekakanipāta 5202 Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5203 Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5204 Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | 5301 Phụ Chú Giải Ekakanipāta 5302 Phụ Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5303 Phụ Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5304 Phụ Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi - 1 6111 Apadāna Pāḷi - 2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi - 1 6115 Jātaka Pāḷi - 2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Chú Giải Khuddakapāṭha 6202 Chú Giải Dhammapada - 1 6203 Chú Giải Dhammapada - 2 6204 Chú Giải Udāna 6205 Chú Giải Itivuttaka 6206 Chú Giải Suttanipāta - 1 6207 Chú Giải Suttanipāta - 2 6208 Chú Giải Vimānavatthu 6209 Chú Giải Petavatthu 6210 Chú Giải Theragāthā - 1 6211 Chú Giải Theragāthā - 2 6212 Chú Giải Therīgāthā 6213 Chú Giải Apadāna - 1 6214 Chú Giải Apadāna - 2 6215 Chú Giải Buddhavaṃsa 6216 Chú Giải Cariyāpiṭaka 6217 Chú Giải Jātaka - 1 6218 Chú Giải Jātaka - 2 6219 Chú Giải Jātaka - 3 6220 Chú Giải Jātaka - 4 6221 Chú Giải Jātaka - 5 6222 Chú Giải Jātaka - 6 6223 Chú Giải Jātaka - 7 6224 Chú Giải Mahāniddesa 6225 Chú Giải Cūḷaniddesa 6226 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 1 6227 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 2 6228 Chú Giải Nettippakaraṇa | 6301 Phụ Chú Giải Nettippakaraṇa 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi - 1 7107 Yamaka Pāḷi - 2 7108 Yamaka Pāḷi - 3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi - 1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi - 2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi - 3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi - 4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi - 5 | 7201 Chú Giải Dhammasaṅgaṇi 7202 Chú Giải Sammohavinodanī 7203 Chú Giải Pañcapakaraṇa | 7301 Phụ Chú Giải Gốc Dhammasaṅgaṇī 7302 Phụ Chú Giải Gốc Vibhaṅga 7303 Phụ Chú Giải Gốc Pañcapakaraṇa 7304 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Dhammasaṅgaṇī 7305 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Pañcapakaraṇa 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Phụ Chú Giải Cổ Điển Abhidhammāvatāra 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |