Namo tassa bhagavato arahato sammāsambuddhassa
उन भगवन्, अर्हत्, सम्यक्सम्बुद्ध को नमस्कार।
Suttavandanā
सुत्त-वन्दना (सूत्र वन्दना)
1.
१.
Dhammattha [Pg.13] desanā vedha,Catugambhīra duddasaṃ;
Dhammaṃ lokassa desentaṃ,Dhammarājaṃ namāmahaṃ;
जो धर्म के अर्थ और देशना की गहराई वाले हैं, जो चार प्रकार से गम्भीर और दुर्दर्श हैं; संसार को धर्म का उपदेश देने वाले उन धर्मराज को मैं नमस्कार करता हूँ।
2.
२.
Buddho [Pg.14] paccekabuddho ca,Arahā cakkavattīti;
Thūpāthūpārahaṃ vande,Catuthūpārahesu taṃ;
बुद्ध, प्रत्येकबुद्ध, अर्हत् और चक्रवर्ती—इन चार स्तूप के योग्य पुरुषों में, मैं उन (बुद्ध) की वन्दना करता हूँ।
3.
३.
Petaseyyo [Pg.15] kāmabhogī,Sīhaseyyo tathāgato;
Sayantaṃ catuseyyesu,Catutthena name jinaṃ;
प्रेत-शैया, कामभोगी-शैया, सिंह-शैया और तथागत-शैया—इन चार शैयाओं में, चौथी (तथागत) शैया में शयन करने वाले उन जिन (बुद्ध) को मैं नमस्कार करता हूँ।
4.
४.
Aṇḍajā jalābujā ca;
Saṃsedajo papātikā;
Catuyoni pariccheda,Ñāṇavantaṃ name jinaṃ;
अण्डज, जरायुज, संस्वेदज और औपपातिक—इन चार योनियों के विभाग को जानने वाले ज्ञानवान् जिन को मैं नमस्कार करता हूँ।
5.
५.
Sutabuddhonubuddho [Pg.16] ca,Pacceko jinabuddhoti;
Catutthaṃ catubuddhesu,Vandāmi lokanāyakaṃ;
श्रुतबुद्ध, अनुबुद्ध, प्रत्येकबुद्ध और जिनबुद्ध—इन चार बुद्धों में, चौथे (जिनबुद्ध) लोकनायक की मैं वन्दना करता हूँ।
6.
६.
Rāhuggaṃ [Pg.17] attabhāgīnaṃ,Mandhātā kāmabhogīnaṃ;
Māro adhipateyyānaṃ,Buddho loke sadevake;
Catuagga paññattīnaṃ,Aggapattaṃ name jinaṃ.
शरीरधारियों में राहु श्रेष्ठ है, कामभोगियों में मान्धाता, अधिपतियों में मार और देवों सहित लोक में बुद्ध श्रेष्ठ हैं; इन चार श्रेष्ठ प्रज्ञप्तियों में अग्र पद प्राप्त उन जिन को मैं नमस्कार करता हूँ।
7.
७.
Dānaṃ [Pg.18] piyakathā attha,Cariyā sadisattatā;
Catusaṅgaha vatthūhi,Asaṅkhiyesu jātisu;
Lokassa saṅgahetāraṃ,Vandāmi lokanāyakaṃ;
दान, प्रियवचन, अर्थचर्या और समानार्थता—इन चार संग्रह-वस्तुओं के द्वारा असंख्य जन्मों में लोक का कल्याण करने वाले लोकनायक की मैं वन्दना करता हूँ।
8.
८.
Lobho doso ca mohoti,Anto paccatthike tayo;
Dujjaye [Pg.19] sabbaverīhi,Sañjitaṃpi sudhiṃ name;
लोभ, द्वेष और मोह—ये तीन आन्तरिक शत्रु हैं; सभी शत्रुओं द्वारा जिन्हें जीतना कठिन है, उन पर विजय प्राप्त करने वाले सुधी (बुद्ध) को मैं नमस्कार करता हूँ।
9.
९.
Jāti puñña mahattāni,Guṇamahattamuttamaṃ;
Timahatthehi sampannaṃ,Vandāmi lokanāyakaṃ;
जाति-महत्त्व, पुण्य-महत्त्व और उत्तम गुण-महत्त्व—इन तीन महत्त्वों से सम्पन्न लोकनायक की मैं वन्दना करता हूँ।
10.
१०.
Hetu [Pg.20] phala sampadāyo,Sattupakārasampadā;
Tisampadāhi sampannaṃ,Vandāmi lokanāyakaṃ.
हेतु-सम्पदा, फल-सम्पदा और सत्त्वोपकार-सम्पदा—इन तीन सम्पदाओं से सम्पन्न लोकनायक की मैं वन्दना करता हूँ।
11.
११.
Ñāṇappahānānubhāva,Surūpakārasampadā;
Catuphala sampadāhi,Taṃ sampannaṃ name jinaṃ.
ज्ञान, प्रहाण, अनुभाव और सुरूपकाय-सम्पदा—इन चार फल-सम्पदाओं से सम्पन्न उन जिन को मैं नमस्कार करता हूँ।
12.
१२.
Āsayo [Pg.21] ca payogoti,Sattupakāra sampadā;
Duvidhā yassa sampannā,Sammā maṃ pātu so jino.
आशय और प्रयोग—ये दो प्रकार की सत्त्वोपकार-सम्पदा जिनसे सम्पन्न है, वे जिन मेरी भली-भाँति रक्षा करें।
13.
१३.
Mahosadhe vessantare,Pacchimabhavike tathā;
Tijātīsu name vācaṃ,Bhāsentaṃ jāyanakkhaṇe.
महौषध, वेस्सन्तर और अन्तिम जन्म में—इन तीन जन्मों में जन्म के क्षण में ही वाणी बोलने वाले (बुद्ध) को मैं नमस्कार करता हूँ।
14.
१४.
Nemimhi [Pg.22] sādhine ceva,Mandhātari ca guttile;
Catūsu manujattena,Devalokaṃ gataṃ name.
नेमि, साधिन, मान्धाता और गुत्तिल—इन चार जन्मों में मनुष्य रूप में देवलोक जाने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
15.
१५.
Saṅkhāro rūpavikāro,Lakkhaṇaṃ vānanissaṭaṃ;
Nibbānaṃ [Pg.23] paññatticeti,Pañca ñeyyantaguṃ name.
संस्कार, रूपविकार, लक्षण, निर्वाण और प्रज्ञप्ति—इन पाँच ज्ञेय (जानने योग्य) विषयों के पारगामी को मैं नमस्कार करता हूँ।
16.
१६.
Putta dāra pariccāgā,Rajjaṅgaṃ jīva cāgīti;
Pañca mahāpariccāge,Karaṃ sudukkare name.
पुत्र-त्याग, पत्नी-त्याग, राज्य-त्याग, अंग-त्याग और जीवन-त्याग—इन पाँच महात्यागों जैसे सुदुष्कर कार्य करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
17.
१७.
Rūpañca [Pg.24] vedanā saññā,Saṅkhārā viññāṇantime;
Pañcakkhandhe parijānaṃ,Tipariññāhi taṃ name.
रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार और विज्ञान—इन पाँच स्कन्धों को तीन परिज्ञाओं द्वारा पूर्णतः जानने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
18.
१८.
Manussa deva gatiyo,Peto ca nirayo tathā;
Tiracchānoti pañcetā,Chindantaṃ gatiyo name;
मनुष्य, देव, प्रेत, नरक और तिर्यक् (पशु)—इन पाँच गतियों का उच्छेद करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
19.
१९.
Devaputto [Pg.25] kileso ca,Abhisaṅkhāra mārako;
Khandho maccūti pañcete,Māre vijitavaṃ name.
देवपुत्र मार, क्लेश मार, अभिसंस्कार मार, स्कन्ध मार और मृत्यु मार—इन पाँचों मारों को जीतने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
20.
२०.
Purebhattaṃ pacchābhattaṃ,Purimañceva majjhimaṃ;
Pacchimanti sadā pañca,Buddhakiccaṃ karaṃ name.
पूर्वाह्न, अपराह्न, प्रथम याम, मध्यम याम और पश्चिम याम—इन पाँच बुद्ध-कृत्यों को सदा करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
21.
२१.
Rūpā [Pg.26] saddā gandhā rasā,Phoṭṭhabbā ca manoramā;
Pañca kāmaguṇe hitvā,Kheḷaṃva niggataṃ name.
रूप, शब्द, गन्ध, रस और मनोरम स्पर्श—इन पाँच कामगुणों को थूक के समान त्याग देने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
22.
२२.
Rāgasallaṃ [Pg.27] dosasallaṃ,Mohā māno ca diṭṭhīti;
Vande vajjātivajjantaṃ,Pañcasallapanūdanaṃ.
राग-शल्य, द्वेष-शल्य, मोह, मान और दृष्टि—इन पाँच शल्यों को दूर करने वाले और दोषों से रहित (बुद्ध) की मैं वन्दना करता हूँ।
23.
२३.
Dīgho majjhima saṃyuttā,Aṅguttaro ca khuddako;
Iti pañca nikāyehi,Suvinentaṃ pajaṃ name.
दीघ, मज्झिम, संयुत्त, अंगुत्तर और खुद्दक—इन पाँच निकायों के द्वारा प्रजा को सुशिक्षित करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
24.
२४.
Issariyaṃ [Pg.28] yaso dhammo,Kāmo sirī payattīti;
Bhagyehi chahi sampannaṃ,Vandāmi lokanāyakaṃ.
ऐश्वर्य, यश, धर्म, काम, श्री और प्रयत्न—इन छह ऐश्वर्यों से सम्पन्न लोकनायक की मैं वन्दना करता हूँ।
25.
२५.
Piyāpiyaṃ [Pg.29] bhūtābhūtaṃ,Atthānatthaṃ yathārahaṃ;
Missā chasu suvācaṃva,Bhāsantaṃ atthakaṃ name.
प्रिय-अप्रिय, सत्य-असत्य, सार्थक-निरर्थक—इन छह प्रकार के वचनों में से यथायोग्य केवल सार्थक और सुवचनों को बोलने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
26.
२६.
Alaso ca pamādo ca,Anuṭṭhānaṃ asaṃyamo;
Niddā tantīti chiddehi,Chahi muttaṃ sadā name.
आलस्य, प्रमाद, निरुद्यम, असंयम, निद्रा और तन्द्रा—इन छह दोषों से सदा मुक्त रहने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
27.
२७.
Mahākaruṇāsamāpatti[Pg.30],Yamakappāṭihāriyaṃ;
Āsayānusaye ñāṇaṃ,Indriyāna paropare;
Sabbaññutā nāvaraṇaṃ,Chā sādhāraṇikaṃ name.
महाकरुणासमापत्ति, यमक-प्रातिहार्य, आशयानुशय ज्ञान, इन्द्रिय-परोपरियत्त ज्ञान, सर्वज्ञता ज्ञान और अनावरण ज्ञान—इन छह असाधारण ज्ञानों वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
28.
२८.
Kāmacchando [Pg.31] ca byāpādo,Thinamiddhañca saṃsayo;
Avijjuddhacca kukkuccaṃ,Chavinīvaraṇaṃ name.
कामच्छन्द, व्यापाद, स्त्यान-मिद्ध, संशय, अविद्या और औद्धत्य-कौकृत्य—इन छह नीवरणों (बाधाओं) को दूर करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
29.
२९.
Iddhividhaṃ dibbasotaṃ,Paracitta vijānanā;
Pubbenivāsānussati[Pg.32],Dibbacakkhāsavakkhayo;
Chaḷabhiññāhi sampannaṃ,Vandāmi purisuttamaṃ.
ऋद्धिविध, दिव्यश्रोत्र, परचित्त-विजानन, पूर्वनिवासानुस्मृति, दिव्यचक्षु और आस्रवक्षय—इन छह अभिज्ञाओं से सम्पन्न पुरुषोत्तम को मैं वंदन करता हूँ।
30.
३०.
Nīla pītā ca odātā,Mañjiṭṭhā ca pabhassarā;
Lohitāti cha raṃsīhī,Vijjotantaṃ sadā name.
नीली, पीली, श्वेत, मजीठ, प्रभास्वर और लोहित—इन छह रश्मियों से सदा देदीप्यमान (बुद्ध) को मैं नमस्कार करता हूँ।
31.
३१.
Assādādīnavo [Pg.33] ceva,Nissaraṇaphalaṃ tathā;
Upāyāṇattīti chadhā,Saddhammadesakaṃ name.
आस्वाद, आदीनव, निस्सरण, फल, उपाय और आज्ञप्ति—इन छह प्रकारों से सद्धर्म का उपदेश देने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
32.
३२.
Rāgo [Pg.34] doso ca moho ca,Vitakkacariyā tathā;
Saddhā buddhīti bhājentaṃ,Tā chaḷecariyā name.
राग, द्वेष, मोह, वितर्क-चर्या, श्रद्धा-चर्या और बुद्धि-चर्या—इन छह चर्याओं का विश्लेषण करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
33.
३३.
Rajataṃ kanakaṃ muttā,Maṇi veḷuriyāni ca;
Vajirañca pavāḷanti,Seṭṭhi sattadhano viya.
रजत (चाँदी), कनक (सोना), मुक्ता (मोती), मणि, वैदूर्य, वज्र (हीरा) और प्रवाल—जैसे किसी श्रेष्ठी के ये सात धन हों।
34.
३४.
Saddhāsīlaṃ sutaṃcāgo,Hirī ottappiyaṃ dhanaṃ,Paññādhananti sambuddhaṃ,Vande sattamahādhanaṃ.
श्रद्धा, शील, श्रुत, त्याग, ह्री (लज्जा), ओत्तप्प (भय) और प्रज्ञा रूपी धन—इन सात महाधनों से युक्त सम्बुद्ध को मैं वंदन करता हूँ।
35.
३५.
Cakkaṃ [Pg.35] hatthi asso maṇi,Gahapatitthiyo tathā;
Supariṇāyakocāti,Sattaratano cakkavattīva.
चक्र, हस्ती, अश्व, मणि, गृहपति, स्त्री और परिणायक—इन सात रत्नों से युक्त चक्रवर्ती राजा के समान।
36.
३६.
Sati dhammavicayo ca,Tatheva vīriyaṃ pīti;
Passaddhi [Pg.36] samādhupekkhā,Saddhamma cakkavattikaṃ;
Satta bojjhaṅgaratanaṃ,Namāmi purisuttamaṃ.
स्मृति, धर्मविचय, वीर्य, प्रीति, प्रश्रब्धि, समाधि और उपेक्षा—इन सात बोध्यंग रूपी रत्नों वाले सद्धर्म-चक्रवर्ती पुरुषोत्तम को मैं नमस्कार करता हूँ।
37.
३७.
Yugandharo [Pg.37] īsadharo,Karavīko sudassano;
Nemindharo vinatako,Assakaṇṇo mahānage;
Sattete hattharūpaṃva,Sampassantaṃ jinaṃ name.
युगन्धर, ईसधर, करवीक, सुदर्शन, नेमिन्धर, विनतक और अश्वकर्ण—इन सात महापर्वतों को हाथ की रेखाओं के समान स्पष्ट देखने वाले जिन को मैं नमस्कार करता हूँ।
38.
३८.
Kaṇṇamuṇḍo anotatto,Kuṇālo rathakārako;
Sīhappapāta chaddantā,Mandākinī mahāsare;
Sattete [Pg.38] sabbathā passaṃ,Diṭṭheva pātikaṃ name.
कण्णमुण्ड, अनवतप्त, कुणाल, रथकार, सिंहप्रपात, षड्दन्त और मन्दाकिनी—इन सातों महासरोवरों को साक्षात् देखने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
39.
३९.
Manussattaṃ liṅgasampatti,Hetu satthāradassanaṃ;
Pabbajjā guṇasampatti,Adhikāro ca chandatā;
Aṭṭhadhamma samodhānā,Bhinīhārantaguṃ name.
मनुष्यत्व, लिंग-सम्पत्ति, हेतु, शास्ता का दर्शन, प्रव्रज्या, गुण-सम्पत्ति, अधिकार और छन्दता—इन आठ धर्मों के मिलन से (बुद्धत्व का) संकल्प करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
40.
४०.
Visaṭṭhaṃ [Pg.39] mañju viññeyyaṃ,Savanīyāvisāriṇā;
Gambhīro binduninnādo,Aṭṭhaṅgikasaraṃ name.
स्पष्ट, मधुर, बोधगम्य, श्रवणीय, अविस्तारी, गम्भीर और गूँजने वाला—इस अष्टांगिक स्वर वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
41.
४१.
Cattāri [Pg.40] rūpajhānāni,Tathevārūpajhānāni;
Tā samāpattiyo aṭṭha,Sevantaṃ ruciyā name.
चार रूप-ध्यान और वैसे ही चार अरूप-ध्यान—इन आठ समापत्तियों का रुचिपूर्वक सेवन करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
42.
४२.
Aṇimā laṅghimā kammaṃ,Mahimā pattimā tathā;
Īsitā [Pg.41] vasitā ceva,Yatthakāmāvasāyitā;
Aṭṭhissariya puṇṇattā,Issarātissaraṃ name.
अणिमा, लघिमा, कर्म (प्राप्ति), महिमा, प्राप्ति, ईशिता, वशिता और यत्रकामावसायिता—इन आठ ऐश्वर्यों से पूर्ण होने के कारण ईश्वरों के भी ईश्वर को मैं नमस्कार करता हूँ।
43.
४३.
Manomayiddhiñāṇañca[Pg.42],Chaḷabhiññā vipassanā;
Aṭṭhavijjāhi sampannaṃ,Vande tilokaketukaṃ.
मनोमय ऋद्धि ज्ञान, छह अभिज्ञाएँ और विपश्यना—इन आठ विद्याओं से सम्पन्न, तीनों लोकों के केतु (ध्वज) स्वरूप को मैं वंदन करता हूँ।
44.
४४.
Jāti jarā rujā kālo,Caturāpāyadukkhāti;
Aṭṭha saṃvegavatthūni,Bhāsantaṃ vividhaṃ name.
जाति, जरा, रोग, मृत्यु और चार अपायों के दुःख—इन आठ संवेग-वस्तुओं का विविध प्रकार से वर्णन करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
45.
४५.
Suttaṅgaṃ [Pg.43] veyyākaraṇaṃ,Geyyaṃ gāthā ca jātakaṃ;
Abbhūtadhamma vedallā,Udānamiti vuttakaṃ;
Navaṅgaṃ sabbalokassa,Dadantaṃ sāsanaṃ name.
सूत्र, व्याकरण, गेय, गाथा, जातक, अद्भुतधर्म, वेदल्ल, उदान और इतिवृत्तक—सम्पूर्ण लोक को इस नवांग शासन को देने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
46.
४६.
Yā [Pg.44] samāpattiyo aṭṭha,Nirodho cāti te nava,Anupubbavihāre taṃ,Sevantaṃ ruciyā name.
आठ समापत्तियाँ और नौवाँ निरोध—इन नौ अनुक्रमिक विहारों का रुचिपूर्वक सेवन करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
47.
४७.
Ekattañceva nānattaṃ,Kāyasaññīhi yogato,Cattāro tathāruppā ca,Asaññīcāti te nava,Sattavāse vibhajitvā,Pakāsentaṃ name jinaṃ.
एकत्व, नानात्व, काय-संज्ञा के योग से, चार अरूप और असंज्ञी—इन नौ सत्त्वावासों का विभाजन कर प्रकाशित करने वाले जिन को मैं नमस्कार करता हूँ।
48.
४८.
Seyyassa [Pg.45] sadiso seyyo,Hīnoti tividho vidho,Tathā sadisahīnānaṃ,Navavidhe nudaṃ name.
श्रेष्ठ से श्रेष्ठ, समान या हीन—इस प्रकार के तीन भेद, और वैसे ही समान तथा हीन के साथ (कुल नौ प्रकार के मान)—इन नौ प्रकार के मानों को दूर करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
49.
४९.
Anatthaṃ [Pg.46] me carati ca,Tathā cari carissati,Mittassa arinotvatthaṃ,Navāghāte jahaṃ name.
'उसने मेरा अनर्थ किया, कर रहा है, करेगा', तथा मित्र और शत्रु के विषय में भी इसी प्रकार—इन नौ आघात-वस्तुओं को त्यागने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
50.
५०.
Dānaṃ sīlañca nikkhamaṃ,Paññā vīriyapañcamaṃ,Khantī [Pg.47] saccamadhiṭṭhānaṃ,Mettupekkhāti tādasa,Pūretvā pāramī vande,Sammāsambodhimajjhavaṃ;
दान, शील, निष्क्रमण, प्रज्ञा, पाँचवाँ वीर्य, क्षान्ति, सत्य, अधिष्ठान, मैत्री और उपेक्षा—इन दस पारमिताओं को पूर्ण कर सम्यक-सम्बोधित्व प्राप्त करने वाले को मैं वंदन करता हूँ।
51.
५१.
Kāḷāvakañca gaṅgeyyaṃ,Paṇḍaraṃ tamba piṅgalaṃ,Gandha maṅgala hemañca,Uposatha chaddantime.
कालवक, गांगेय, पाण्डर, ताम्ब, पिंगल, गन्ध, मंगल, हेम, उपोसथ और षड्दन्त—ये (हाथियों के दस कुल) हैं।
52.
५२.
Dhāreti dasaposānaṃ,Nāgo kāḷāvako balaṃ;
Sahassakoṭiposānaṃ[Pg.48];
Chaddantovāranuttamo.
कालवक हाथी दस पुरुषों का बल धारण करता है, और उत्तम षड्दन्त हाथी हजार करोड़ पुरुषों का बल धारण करता है।
53.
५३.
Dasa sahassakoṭīnaṃ,Posānaṃ baladhāraṇaṃ;
Chaddantānaṃ dasannañca,Dasakāyabalaṃ name.
दस हजार करोड़ पुरुषों का बल धारण करने वाले दस षड्दन्त हाथियों के समान (तथागत के) दस काय-बल को मैं नमस्कार करता हूँ।
54.
५४.
Ṭhānāṭhāne [Pg.49] vipāke ca,Magge sabbatthagāminaṃ;
Nānādhātūsu lokesu,Adhimuttimhi pāṇinaṃ;
स्थान-अस्थान, कर्म-विपाक, सर्वत्रगामिनी प्रतिपदा, लोक में नाना धातुओं और प्राणियों की नाना अधिमुक्तियों के विषय में;
55.
५५.
Paropariyatte ñāṇaṃ,Indriyānañca pāṇinaṃ;
Jhānādīsu ñāṇaṃ pubbe,Nivāse dibbacakkhu ca;
Āsavakkhayañāṇanti,Dasabalañāṇaṃ name.
प्राणियों की इन्द्रियों की श्रेष्ठता-अश्रेष्ठता का ज्ञान, ध्यान आदि का ज्ञान, पूर्वनिवास, दिव्यचक्षु और आस्रवक्षय ज्ञान—इन दस बल-ज्ञानों को मैं नमस्कार करता हूँ।
56.
५६.
Mūlagandho [Pg.50] sāro pheggu,Taco papaṭiko raso;
Pattaṃ pupphaṃ phalañceva,Gandhagandhoti saṃvaraṃ;
Sugandhaṃ dasagandhehi,Vilimpantaṃ sadā name.
मूल-गन्ध, सार, फेग्गु, त्वचा, पपड़िका, रस, पत्र, पुष्प, फल और गन्धों की गन्ध—इन दस गन्धों के सुगन्ध से सदा विलेपित रहने वाले संवरशील (बुद्ध) को मैं नमस्कार करता हूँ।
57.
५७.
Samādhi [Pg.51] ñāṇavipphārā,Adhiṭṭhānaṃ vikubbanā;
Manomayāriyā iddhi,Tathā kammavipākajā.
समाधि-विस्फार, ज्ञान-विस्फार, अधिष्ठान, विकुर्वणा, मनोमयी, आर्या ऋद्धि और कर्मविपाकज ऋद्धि;
58.
५८.
Vijjāmayā puññavato;
Payoga paccayiddhiti;
Aggapatta dasiddhīnaṃ,Pāṭiheraṃ karaṃ name.
विद्यामयी, पुण्यवानों की ऋद्धि और प्रयोग-प्रत्यय ऋद्धि—इन दस ऋद्धियों की पराकाष्ठा को प्राप्त प्रातिहार्य करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
59.
५९.
Muttā [Pg.52] maṇi veḷuriyaṃ,Saṅkho sallo pavāḷakaṃ;
Suvaṇṇaṃ rajataṃ lohi,Taṅko masāragallanti;
Dasadhā [Pg.53] ratanehiggaṃ,Bhogiṃ paññāmaṇiṃ name.
मोती, मणि, वैदूर्य, शंख, स्फटिक, मूँगा, सुवर्ण, रजत, लोहितक और मसारगल्ल—इन दस प्रकार के रत्नों में श्रेष्ठ, प्रज्ञा-मणि रूपी ऐश्वर्य के स्वामी को मैं नमस्कार करता हूँ।
60.
६०.
Sithilaṃ dhanitaṃ dīghaṃ,Rassañca garukaṃ lahu;
Niggahitaṃ vimuttañca,Sambandhañca vavatthitaṃ;
Vivarantaṃ name dhammaṃ,Dasabyañjanabheditaṃ.
शिथिल, धनित, दीर्घ, ह्रस्व, गुरु, लघु, निगृहीत, विमुक्त, सम्बद्ध और व्यवस्थित—इन दस प्रकार के व्यंजनों (उच्चारणों) से विभक्त धर्म को प्रकाशित करने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
61.
६१.
Pasādojo [Pg.54] madhuratā,Samatā sukhumālatā;
Silesodāratā kanti,Atthabyatti samādhayo;
Dasa saddaguṇopetaṃ,Dhammaṃ pātu karaṃ name.
प्रसाद, ओज, मधुरता, समता, सुकुमारता, श्लेष, उदारता, कान्ति, अर्थव्यक्ति और समाधि—इन दस शब्द-गुणों से युक्त, रक्षा करने वाले धर्म को मैं नमस्कार करता हूँ।
62.
६२.
Lobho [Pg.55] doso moho māno,Uddhaccaṃ diṭṭhi saṃsayo;
Ahirikamanottappaṃ,Thinanti sabba dāhake;
Kilese dasa te saddhiṃ,Vāsanāya jahaṃ name.
लोभ, द्वेष, मोह, मान, उद्धत्य, दृष्टि, संशय, अहीरिक, अनोत्तप्प और स्त्यान—इन दसों दाहक क्लेशों को उनकी वासनाओं (संस्कारों) के साथ त्याग देने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
63.
६३.
Saterā [Pg.56] daṇḍamaṇikā,Macchavilolagaggarā;
Sukkhāsani kapisisā,Vicakkā sañña kukkuṭā;
Navāsanīhi phālentaṃ,Tibbaṃ paññāsaniṃ name.
सतेरा, दण्डमणिका, मत्स्यविलोल, गग्गरा, शुष्काशनि, कपिशीर्ष, विचक्र, संज्ञा और कुक्कुट—इन नौ प्रकार की अशनियों (बिजलियों) के समान विदीर्ण करने वाली, उस तीव्र प्रज्ञा-अशनि को मैं नमस्कार करता हूँ।
64.
६४.
Rodanā [Pg.57] kodhāvudho ca,Ujjhantissariyaṃ tathā;
Paṭisaṅkhānaṃ,Khanti aṭṭhabalesu taṃ;
Pathavīsadisaṃ vande,Aṭṭhamena vināyakaṃ.
रोदन (बालकों का बल), क्रोध (मूर्खों का बल), ईर्ष्या, ऐश्वर्य (राजाओं का बल), प्रतिसंख्यान (पण्डितों का बल) और क्षान्ति (श्रमणों का बल)—इन आठ बलों में पृथ्वी के समान अडिग, आठवें (क्षान्ति बल) से युक्त विनायक को मैं वन्दना करता हूँ।
65.
६५.
Kāmarogo [Pg.58] ca paṭigho,Māno diṭṭhi ca saṃsayo;
Bhavarāgo avijjāti,Sattānusayinaṃ name.
कामराग, प्रतिघ, मान, दृष्टि, संशय, भवराग और अविद्या—इन सात अनुशयों को जीतने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
66.
६६.
Titthiyāpakatimahāsāvakā,Aggasāvakā paccekabuddhasambuddhā;
Visiṭṭhaṃ [Pg.59] sabbathā chasu,Pubbe nivāsa viññūsu;
Tilokamakuṭaṃ name.
तीर्थंकर, सामान्य महाश्रावक, अग्रश्रावक, प्रत्येकबुद्ध और सम्यक्सम्बुद्ध—इन छह प्रकार के पूर्व-निवास जानने वालों में सर्वथा विशिष्ट, तीनों लोकों के मुकुट स्वरूप बुद्ध को मैं नमस्कार करता हूँ।
67.
६७.
Buddhacakkhu samantā ca,Ñāṇaṃ yaṃ dibbacakkhu ca;
Dhammoti pañca cakkhūhi,Dassāviṃ mārajiṃ name.
बुद्ध-चक्षु, समन्त-चक्षु, ज्ञान-चक्षु, दिव्य-चक्षु और धर्म-चक्षु—इन पाँच चक्षुओं से देखने वाले मारविजयी बुद्ध को मैं नमस्कार करता हूँ।
68.
६८.
Khuddakā [Pg.60] khaṇikā okkantikā ca,Pharaṇā tathā ubbegā;
Pañca pītīhi pinentaṃ,Ruciyā ca namāmahaṃ.
क्षुद्रका, क्षणिका, अवक्रान्तिका, स्फुरणा और उद्वेगा—इन पाँच प्रकार की प्रीतियों से तृप्त, उस रुचिकर (बुद्ध) को मैं नमस्कार करता हूँ।
69.
६९.
Dukkhaṃ samudayasaccaṃ,Nirodho maggasaccakaṃ;
Catusaccamabhijānaṃ[Pg.61],Catukiccehi taṃ name.
दुःख, समुदय सत्य, निरोध और मार्ग सत्य—इन चार सत्यों को उनके चार कृत्यों (कार्यों) के साथ जानने वाले को मैं नमस्कार करता हूँ।
70.
७०.
Pīḷanā saṅkhatattho ca,Tapo vipariṇāmanā;
Dukkhasaccaṃ catukkehi,Vibhattāviṃ muniṃ name.
पीड़ा, संस्कृत, ताप और विपरिणाम—इन चार विशेषताओं के माध्यम से दुःख सत्य का विभाग करने वाले मुनि को मैं नमस्कार करता हूँ।
71.
७१.
Āyūhanaṃ [Pg.62] nidānañca,Saṃyogo palibodhanaṃ;
Catukkehi samudayaṃ,Vibhattāviṃ muniṃ name.
आयूहण (संचय), निदान, संयोग और परिबोध—इन चार विशेषताओं के माध्यम से समुदय सत्य का विभाग करने वाले मुनि को मैं नमस्कार करता हूँ।
72.
७२.
Nissaraṇañca viveko,Asaṅkhatāmataṃ tathā;
Nirodhañca catukkehi,Vibhattāviṃ muniṃ name.
निस्सरण, विवेक, असंस्कृत और अमृत—इन चार विशेषताओं के माध्यम से निरोध सत्य का विभाग करने वाले मुनि को मैं नमस्कार करता हूँ।
73.
७३.
Niyyāniko [Pg.63] ca hetvattho,Dassanādhipateyyakaṃ;
Maggasaccaṃ catukkehi,Vibhattāviṃ muniṃ name.
नैर्याणिक, हेतु, दर्शन और आधिपत्य—इन चार विशेषताओं के माध्यम से मार्ग सत्य का विभाग करने वाले मुनि को मैं नमस्कार करता हूँ।
74.
७४.
Satthako [Pg.64] ca asammoho,Sappāyo ceva gocaro;
Catusampajaññā vinā,Bhāviṃ name tathāgataṃ.
सार्थकता, असम्मोह, साप्राय (उपयुक्तता) और गोचर—इन चार सम्प्रजन्यों की भावना करने वाले तथागत को मैं नमस्कार करता हूँ।
75.
७५.
Pahinākhila dukkhāhaṃ,Bhavasāgara pāraguṃ;
Vande sāraguṇopetaṃ,Tenamhi bhavapārago.
समस्त दुखों को त्यागने वाले, भव-सागर के पार जाने वाले, सार-गुणों से युक्त (बुद्ध) की मैं वन्दना करता हूँ, जिससे मैं भी भव-सागर से पार हो जाऊँ।
76.
७६.
Rūpārūpavilāsagga[Pg.65],Rūpācinteyya saṃyuttaṃ;
Vande sāraguṇopetaṃ,Tenamhātularūpavā.
रूप और अरूप के श्रेष्ठ विलास से युक्त, अचिन्त्य रूप वाले, सार-गुणों से सम्पन्न (बुद्ध) की मैं वन्दना करता हूँ, जिससे मैं अतुलनीय रूपवान बनूँ।
77.
७७.
Iddhi [Pg.66] iddhi vilāsagga,Iddhi cinteyya saṃyuttaṃ;
Vande sāraguṇepetaṃ,Tenamhā tulaiddhimā.
ऋद्धि के श्रेष्ठ विलास से युक्त, अचिन्त्य ऋद्धि से सम्पन्न, सार-गुणों से युक्त (बुद्ध) की मैं वन्दना करता हूँ, जिससे मैं अतुलनीय ऋद्धिमान बनूँ।
78.
७८.
Vācā vācā vilāsagga,Vācā cinteyya saṃyuttaṃ;
Vande sāraguṇopetaṃ,Tenamhā tulavācako.
वाणी के श्रेष्ठ विलास से युक्त, अचिन्त्य वाणी से सम्पन्न, सार-गुणों से युक्त (बुद्ध) की मैं वन्दना करता हूँ, जिससे मैं अतुलनीय वक्ता बनूँ।
79.
७९.
Ñāṇa [Pg.67] ñāṇa vilāsagga,Ñāṇācinteyya saṃyuttaṃ;
Vande sāraguṇopetaṃ,Tenamhā tulañāṇavā.
ज्ञान के श्रेष्ठ विलास से युक्त, अचिन्त्य ज्ञान से सम्पन्न, सार-गुणों से युक्त (बुद्ध) की मैं वन्दना करता हूँ, जिससे मैं अतुलनीय ज्ञानवान बनूँ।
80.
८०.
Sajjhaṃ hemañca ratanaṃ,Gehaṃ vatthañca bhojanaṃ;
Tadaññepi [Pg.68] yathācittaṃ,Māpeyyāhaṃ name jinaṃ.
रजत, स्वर्ण, रत्न, गृह, वस्त्र, भोजन और अन्य वस्तुएँ भी अपनी इच्छानुसार निर्माण कर सकूँ, ऐसे (सामर्थ्य वाले) जिन (बुद्ध) को मैं नमस्कार करता हूँ।
81.
८१.
Sajjhaṃ hemañca ratanaṃ,Gehaṃ vatthañca bhojanaṃ;
Tadaññepi yathācittaṃ,Māpeyyaṃ kammajiddhiyā.
रजत, स्वर्ण, रत्न, गृह, वस्त्र, भोजन और अन्य वस्तुएँ भी अपनी इच्छानुसार कर्मज-ऋद्धि (कर्म की शक्ति) से मैं निर्माण करूँ।
82.
८२.
Sattabojjhaṅga [Pg.69] ratano,Saddhādiratano muni;
Satippabhutiratano,Vande taṃ purisuttamaṃ.
सात बोध्यंग रूपी रत्नों वाले, श्रद्धा आदि रत्नों वाले और स्मृति आदि रत्नों वाले उन पुरुषोत्तम मुनि की मैं वन्दना करता हूँ।
83.
८३.
Cakkādisattaratanaṃ,Muttādiratanaṃ subhaṃ;
Vatthappabhutiratanaṃ,Chandakkhaṇe labhāmahaṃ.
चक्र आदि सात रत्न, मोती आदि शुभ रत्न और वस्त्र आदि रत्न मैं अपनी इच्छा के क्षण में ही प्राप्त करूँ।
84.
८४.
Sampuṇṇacittasaṅkappo[Pg.70],Yathākaṅkhitamāpako,Kenacinabhibhūto yo,Sabbābhibhū name jinaṃ.
पूर्ण चित्त-संकल्प वाले, इच्छानुसार प्राप्त करने वाले, किसी से भी पराजित न होने वाले और सबको जीतने वाले जिन (बुद्ध) को मैं नमस्कार करता हूँ।
85.
८५.
Sampuṇṇacittasaṅkappo[Pg.71],Yathākaṅkhitamāpako,Kenacinabhibhūtamhi,Sabbābhibhū bhave bhave.
मैं जन्म-जन्मान्तर में पूर्ण चित्त-संकल्प वाला, इच्छानुसार प्राप्त करने वाला, किसी से पराजित न होने वाला और सबको जीतने वाला बनूँ।
86.
८६.
Dasa chaddantarājāva,Dasa kāyabalo muni;
Dasa ñāṇabbalotulyo,Vande taṃ samaṇuttamaṃ.
दस छद्दन्त हाथी राजाओं के समान दस काय-बल वाले और दस ज्ञान-बल वाले उन श्रेष्ठ श्रमण मुनि की मैं वन्दना करता हूँ।
87.
८७.
Atikāyajavo [Pg.72] buddho,Raññājavanahaṃsato;
Kā kathā ñāṇavegassa,Vande taṃ samaṇuttamaṃ.
राजा के वेगवान हंस से भी अधिक शारीरिक वेग वाले बुद्ध के ज्ञान के वेग की तो बात ही क्या! उन श्रेष्ठ श्रमण को मैं वन्दना करता हूँ।
88.
८८.
Chaddantanāgarājāva,Bhave bhave mahabbalo;
Rājājavanahaṃsova,Paramaggajavo bhave.
मैं जन्म-जन्मान्तर में छद्दन्त हाथी राजा के समान महाबली बनूँ और राजा के वेगवान हंस के समान परम श्रेष्ठ वेग वाला बनूँ।
89.
८९.
Udakā [Pg.73] kāsacārī ca,Mahinimujjako jino;
Māpako ca yathā cittaṃ,Vande taṃ ñeyyapāraguṃ.
जल और आकाश में विचरने वाले, पृथ्वी में गोता लगाने वाले, मन के अनुसार निर्माण करने वाले, उन ज्ञेय के पारगामी (बुद्ध) को मैं वन्दन करता हूँ।
90.
९०.
Udakā kāsacārī ca,Mahinimujjako bhave;
Māpako ca yathācittaṃ,Bhavaso kammajiddhiyā.
मैं जल और आकाश में विचरने वाला, पृथ्वी में गोता लगाने वाला और कर्म की ऋद्धि से जन्म-जन्मान्तर में मन के अनुसार निर्माण करने वाला होऊँ।
91.
९१.
Gāme [Pg.74] vane ca sabbattha,Devehi manussehi ca;
Ābhatānantalābhassa,Sadā yassa mahesino;
Pattalābhaggataṃ lokaṃ,Taṃ vande munipuṅgavaṃ.
गाँव में, वन में और सर्वत्र, देवों और मनुष्यों द्वारा लाए गए अनन्त लाभ वाले, उन महर्षि को, जिन्होंने लोक में सर्वश्रेष्ठ लाभ प्राप्त किया है, उन मुनिपुङ्गव को मैं वन्दन करता हूँ।
92.
९२.
Gāme [Pg.75] vane ca sabbattha,Devehi manussehi ca;
Ābhatā nantalābho me,Sadā hotu bhavābhave.
गाँव में, वन में और सर्वत्र, देवों और मनुष्यों द्वारा लाया गया अनन्त लाभ मुझे जन्म-जन्मान्तर में सदा प्राप्त होता रहे।
93.
९३.
Puññassimassa tejena,Yathā cittaṃ samijjhatu;
Sabbicchā [Pg.76] sabbacintā ca,Khippaṃ me jātijātiyaṃ.
इस पुण्य के तेज से, मेरी सभी इच्छाएँ और सभी विचार जन्म-जन्मान्तर में मन के अनुसार शीघ्र सिद्ध हों।
94.
९४.
Natthīti vacanaṃ dukkhaṃ,Dehīti vacanaṃ tathā;
Tasmā natthīti dehīti,Mā me hotu bhavābhave.
'नहीं है' यह वचन दुःखद है, और 'दो' यह वचन भी वैसा ही है; इसलिए 'नहीं है' और 'दो'—ये शब्द मुझे जन्म-जन्मान्तर में कभी न कहने पड़ें।
95.
९५.
Sabbaṃ [Pg.77] paravasaṃ dukkhaṃ,Sabbamissariyaṃ sukhaṃ;
Sabbaṃ paravasamatthu,Sabbamissariyaṃ bhave.
दूसरों के वश में होना सब दुःख है, अपना आधिपत्य होना सब सुख है; पराधीनता का सर्वथा नाश हो और मुझे सर्वत्र ऐश्वर्य (स्वाधीनता) प्राप्त हो।
96.
९६.
Vitakkento bhajjakāyo,Sabbāvudha vāraṇo ca;
Chaddanta vāraṇabalo,Bhaveyyaṃ jātijā tiyaṃ.
मैं जन्म-जन्मान्तर में विचारशील, वज्र के समान शरीर वाला, सभी आयुधों को रोकने वाला और षड्दन्त हाथी के समान बलशाली होऊँ।
97.
९७.
Subhalakkhaṇasampanno[Pg.78],Suvaṇṇavaṇṇavā bhave;
Brahmassaro karavika,Bhāṇī ca jātijātiyaṃ.
मैं जन्म-जन्मान्तर में शुभ लक्षणों से सम्पन्न, सुवर्ण के समान वर्ण वाला, ब्रह्म के समान स्वर वाला और कलविङ्क पक्षी के समान मधुर बोलने वाला होऊँ।
98.
९८.
Bhūrimapañño sippānaṃ,Sabbesaṃ kusalo bhave;
Visajjetuṃ samatthova,Sabbapucchānaṃ ṭhānaso.
मैं महान प्रज्ञा वाला, सभी शिल्पों में कुशल और सभी प्रश्नों का तत्काल उत्तर देने में समर्थ होऊँ।
99.
९९.
Verādhaṃsīya [Pg.79] bhogā ca,Anantākhīṇa bhogavā;
Anantābhajja pariso,Bhavaso pāpuṇe sivaṃ.
शत्रुओं का नाश करने वाला, अनन्त और अक्षय भोगों वाला, अनन्त और अभेद्य परिषद् वाला होकर मैं जन्म-जन्मान्तर में कल्याण (निर्वाण) को प्राप्त करूँ।
100.
१००.
Mā [Pg.80] nasseyyaṃ pasayheyyaṃ,Ussukkehi pyahaṃ saha;
Pañcaverehi koṭīhi,Bhaṇḍaṃ vā akātukāmitaṃ.
मेरा विनाश न हो, मैं दूसरों के द्वारा दबाया न जाऊँ, और पाँच प्रकार के शत्रुओं द्वारा करोड़ों की सम्पत्ति या मेरी अनिच्छा से कुछ भी न छीना जाए।
101.
१०१.
Meghaṃ vātañca ratanaṃ,Dhaññaṃ vatthañca bhojanaṃ;
Sabbicchitaṃ tadaññampi,Māpeyyaṃ kammajiddhiyā.
मैं मेघ, वायु, रत्न, धान्य, वस्त्र, भोजन और अन्य सभी इच्छित वस्तुओं को अपनी कर्म-ऋद्धि से निर्मित कर सकूँ।
102.
१०२.
Puññenetena [Pg.81] nibbānaṃ,Santaṃ pappomi tāvatā;
Bhaveyyaṃ sabbajātīsu,Catusampattiyā sadā;
Catucakkena sampanno,Saddhammehi ca sattahi.
इस पुण्य से मैं शान्त निर्वाण को प्राप्त करूँ; तब तक मैं सभी जन्मों में सदा चार सम्पत्तियों से युक्त, चार चक्रों से सम्पन्न और सात सद्धर्मों से युक्त होऊँ।
103.
१०३.
Sammādiṭṭhi [Pg.82] vasupete,Kulamhi seṭṭhasammate,Sabbasakkata saṃsuddhe;
Bhave tihetusandhiko.
मैं सम्यक्-दृष्टि से युक्त, श्रेष्ठ माने जाने वाले, सर्व-सत्कृत और शुद्ध कुल में 'तिहेतुक' प्रतिसन्धि वाला होकर जन्म लूँ।
104.
१०४.
Ghāsacchādanaṃ bhogañca,Neva hatthena kātuna,Bhuñjeyyamiddhiyātveva,Māpetvā yāvadatthakaṃ.
भोजन, वस्त्र और भोग की वस्तुओं को हाथों से (परिश्रम) न करते हुए, मैं ऋद्धि के बल से अपनी आवश्यकतानुसार निर्माण कर उनका उपभोग करूँ।
105.
१०५.
Manussānaṃ [Pg.83] atikkamma,Devānaṃ viya bhojanaṃ,Vatthaṃ bhogo ca me hontu,Parivārātisundarā.
मनुष्यों से बढ़कर, देवताओं के समान मेरा भोजन, वस्त्र और भोग हो, तथा मेरा परिवार अत्यन्त सुन्दर हो।
106.
१०६.
Dasāsuttaṃpi me bhogaṃ,Pañcaverā bhave bhave;
Māgaṇheyyuñca nasseyyuṃ,Asoko bhogahetume.
जन्म-जन्मान्तर में पाँच प्रकार के शत्रु मेरे भोगों का एक तन्तु (धागा) भी न ले सकें और न ही वे नष्ट हों; भोगों के कारण मुझे कभी शोक न हो।
107.
१०७.
Sabbaṅgasubha [Pg.84] sampanno,Siṅgīnikkha savaṇṇa vā;
Bāttiṃsa lakkhaṇūpeto,Atappana rūpa vā bhave.
मैं सभी अंगों में शुभ लक्षणों से सम्पन्न, सुवर्ण के समान वर्ण वाला, बत्तीस महापुरुष लक्षणों से युक्त और अतृप्त (अत्यन्त सुन्दर) रूप वाला होऊँ।
108.
१०८.
Kāyo candanagandho ca,Mukhaṃ uppalagandhikaṃ;
Aṭṭhaṅgiko [Pg.85] karavika,Mañjūghoso ca me hotu.
मेरे शरीर से चन्दन की गन्ध और मुख से उत्पल (कमल) की गन्ध आए; मेरा स्वर आठ अंगों से युक्त और कलविङ्क पक्षी के समान मधुर हो।
109.
१०९.
Tikkha gambhīra pañño ca,Hāsātijavapaññavā,Bhūri nibbedha pañño ca;
Sabbapañhavisajjano.
मैं तीक्ष्ण और गम्भीर प्रज्ञा वाला, हास्ययुक्त और अति तीव्र प्रज्ञा वाला, तथा विस्तृत और भेदन करने वाली प्रज्ञा वाला होकर सभी प्रश्नों का उत्तर देने वाला होऊँ।
111.
१११.
Anto [Pg.86] soḷasavassassa,Tipeṭakadharo bhave;
Sabbakammesu sippesu,Vijjāṭhānesu pāragū.
मैं सोलह वर्ष की आयु के भीतर ही त्रिपिटक-धारी बनूँ और सभी कर्मों, शिल्पों तथा विद्या-स्थानों में पारंगत होऊँ।