| বাংলা | |||
| পালি | অট্ঠকথা | টীকা | অন্ন |
| 1101 পারাজিক পালি 1102 পাচিত্তিয় পালি 1103 মহাবগ্গ পালি (বিনয়) 1104 চূলবগ্গ পালি 1105 পরিবার পালি | 1201 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-১ 1202 পারাজিককণ্ড অট্ঠকথা-২ 1203 পাচিত্তিয় অট্ঠকথা 1204 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (বিনয়) 1205 চূলবগ্গ অট্ঠকথা 1206 পরিবার অট্ঠকথা | 1301 সারত্থদীপনী টীকা-১ 1302 সারত্থদীপনী টীকা-২ 1303 সারত্থদীপনী টীকা-৩ | 1401 দ্বেমাতিকাপালি 1402 বিনয়সংগহ অট্ঠকথা 1403 বজিরবুদ্ধি টীকা 1404 বিমতিবিনোদনী টীকা-১ 1405 বিমতিবিনোদনী টীকা-২ 1406 বিনয়ালংকার টীকা-১ 1407 বিনয়ালংকার টীকা-২ 1408 কঙ্খাবিতরণীপুরাণ টীকা 1409 বিনয়বিনিচ্ছয়-উত্তরবিনিচ্ছয় 1410 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-১ 1411 বিনয়বিনিচ্ছয় টীকা-২ 1412 পাচিত্যাদিযোজনাপালি 1413 খুদ্ধসিক্খা-মূলসিক্খা 8401 বিসুদ্ধিমগ্গ-১ 8402 বিসুদ্ধিমগ্গ-২ 8403 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-১ 8404 বিসুদ্ধিমগ্গ-মহাটীকা-২ 8405 বিসুদ্ধিমগ্গ নিদানকথা 8406 দীঘনিকায় (পু-বি) 8407 মজ্ঝিমনিকায় (পু-বি) 8408 সংযুত্তনিকায় (পু-বি) 8409 অঙ্গুত্তরনিকায় (পু-বি) 8410 বিনয়পিটক (পু-বি) 8411 অভিধম্মপিটক (পু-বি) 8412 অট্ঠকথা (পু-বি) 8413 নিরুত্তিদীপনী 8414 পরমত্থদীপনী সংগহমহাটীকাপাঠ 8415 অনুদীপনীপাঠ 8416 পট্ঠানুদ্দেস দীপনীপাঠ 8417 নমক্কারটীকা 8418 মহাপণামপাঠ 8419 লক্খণাতো বুদ্ধথোমনাগাথা 8420 সুতবন্দনা 8421 কমলাঞ্জলি 8422 জিনালংকার 8423 পজ্জমধু 8424 বুদ্ধগুণগাথাবলী 8425 চূলগন্থবংস 8426 মহাবংস 8427 সাসনবংস 8428 কচ্চায়নব্যাকরণং 8429 মোগ্গল্লানব্যাকরণং 8430 সদ্দনীতিপ্পকরণং (পদমালা) 8431 সদ্দনীতিপ্পকরণং (ধাতুমালা) 8432 পদরূপসিদ্ধি 8433 মোগ্গল্লানপঞ্চিকা 8434 পযোগসিদ্ধিপাঠ 8435 বুত্তোদয়পাঠ 8436 অভিধানপ্পদীপিকাপাঠ 8437 অভিধানপ্পদীপিকাটীকা 8438 সুবোধালংকারপাঠ 8439 সুবোধালংকারটীকা 8440 বালাবতার গণ্ঠিপদত্থবিনিচ্ছয়সার 8441 লোকনীতি 8442 সুত্তন্তনীতি 8443 সূরস্সতীনীতি 8444 মহারহনীতি 8445 ধম্মনীতি 8446 কবিদপ্পণনীতি 8447 নীতিমঞ্জরী 8448 নরদক্খদীপনী 8449 চতুরারক্খদীপনী 8450 চাণক্যনীতি 8451 রসবাহিনী 8452 সীমাবিসোধনীপাঠ 8453 বেস্সন্তরগীতি 8454 মোগ্গল্লান বুত্তিবিবরণপঞ্চিকা 8455 থূপবংস 8456 দাঠাবংস 8457 ধাতুপাঠবিলাসিনিয়া 8458 ধাতুবংস 8459 হত্থবনগল্লবিহারবংস 8460 জিনচরিতয় 8461 জিনবংসদীপং 8462 তেলকটাহগাথা 8463 মিলিদটীকা 8464 পদমঞ্জরী 8465 পদসাধনং 8466 সদ্দবিন্দুপকরণং 8467 কচ্চায়নধাতুমঞ্জুসা 8468 সামন্তকূটবণ্ণনা |
| 2101 সীলক্খন্ধবগ্গ পালি 2102 মহাবগ্গ পালি (দীঘ) 2103 পাথিকবগ্গ পালি | 2201 সীলক্খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 2202 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (দীঘ) 2203 পাথিকবগ্গ অট্ঠকথা | 2301 সীলক্খন্ধবগ্গ টীকা 2302 মহাবগ্গ টীকা (দীঘ) 2303 পাথিকবগ্গ টীকা 2304 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-১ 2305 সীলক্খন্ধবগ্গ-অভিনবটীকা-২ | |
| 3101 মূলপণ্ণাস পালি 3102 মজ্ঝিমপণ্ণাস পালি 3103 উপরিপণ্ণাস পালি | 3201 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-১ 3202 মূলপণ্ণাস অট্ঠকথা-২ 3203 মজ্ঝিমপণ্ণাস অট্ঠকথা 3204 উপরিপণ্ণাস অট্ঠকথা | 3301 মূলপণ্ণাস টীকা 3302 মজ্ঝিমপণ্ণাস টীকা 3303 উপরিপণ্ণাস টীকা | |
| 4101 সগাথাবগ্গ পালি 4102 নিদানবগ্গ পালি 4103 খন্ধবগ্গ পালি 4104 সলায়তনবগ্গ পালি 4105 মহাবগ্গ পালি (সংযুত্ত) | 4201 সগাথাবগ্গ অট্ঠকথা 4202 নিদানবগ্গ অট্ঠকথা 4203 খন্ধবগ্গ অট্ঠকথা 4204 সলায়তনবগ্গ অট্ঠকথা 4205 মহাবগ্গ অট্ঠকথা (সংযুত্ত) | 4301 সগাথাবগ্গ টীকা 4302 নিদানবগ্গ টীকা 4303 খন্ধবগ্গ টীকা 4304 সলায়তনবগ্গ টীকা 4305 মহাবগ্গ টীকা (সংযুত্ত) | |
| 5101 এককনিপাত পালি 5102 দুকনিপাত পালি 5103 তিকনিপাত পালি 5104 চতুক্কনিপাত পালি 5105 পঞ্চকনিপাত পালি 5106 ছক্কনিপাত পালি 5107 সত্তকনিপাত পালি 5108 অট্ঠকাদিনিপাত পালি 5109 নবকনিপাত পালি 5110 দশকনিপাত পালি 5111 একাদশকনিপাত পালি | 5201 এককনিপাত অট্ঠকথা 5202 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত অট্ঠকথা 5203 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত অট্ঠকথা 5204 অট্ঠকাদিনিপাত অট্ঠকথা | 5301 এককনিপাত টীকা 5302 দুক-তিক-চতুক্কনিপাত টীকা 5303 পঞ্চক-ছক্ক-সত্তকনিপাত টীকা 5304 অট্ঠকাদিনিপাত টীকা | |
| 6101 খুদ্ধকপাঠ পালি 6102 ধম্মপদ পালি 6103 উদান পালি 6104 ইতিবুত্তক পালি 6105 সুত্তনিপাত পালি 6106 বিমানবত্থু পালি 6107 পেতবত্থু পালি 6108 থেরগাথা পালি 6109 থেরীগাথা পালি 6110 অপদান পালি-১ 6111 অপদান পালি-২ 6112 বুদ্ধবংস পালি 6113 চরিয়াপিটক পালি 6114 জাতক পালি-১ 6115 জাতক পালি-২ 6116 মহানিদ্দেস পালি 6117 চূলনিদ্দেস পালি 6118 পটিসম্ভিদামগ্গ পালি 6119 নেত্তিপ্পকরণ পালি 6120 মিলিন্দপঞ্হ পালি 6121 পেটকোপদেস পালি | 6201 খুদ্ধকপাঠ অট্ঠকথা 6202 ধম্মপদ অট্ঠকথা-১ 6203 ধম্মপদ অট্ঠকথা-২ 6204 উদান অট্ঠকথা 6205 ইতিবুত্তক অট্ঠকথা 6206 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-১ 6207 সুত্তনিপাত অট্ঠকথা-২ 6208 বিমানবত্থু অট্ঠকথা 6209 পেতবত্থু অট্ঠকথা 6210 থেরগাথা অট্ঠকথা-১ 6211 থেরগাথা অট্ঠকথা-২ 6212 থেরীগাথা অট্ঠকথা 6213 অপদান অট্ঠকথা-১ 6214 অপদান অট্ঠকথা-২ 6215 বুদ্ধবংস অট্ঠকথা 6216 চরিয়াপিটক অট্ঠকথা 6217 জাতক অট্ঠকথা-১ 6218 জাতক অট্ঠকথা-২ 6219 জাতক অট্ঠকথা-৩ 6220 জাতক অট্ঠকথা-৪ 6221 জাতক অট্ঠকথা-৫ 6222 জাতক অট্ঠকথা-৬ 6223 জাতক অট্ঠকথা-৭ 6224 মহানিদ্দেস অট্ঠকথা 6225 চূলনিদ্দেস অট্ঠকথা 6226 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-১ 6227 পটিসম্ভিদামগ্গ অট্ঠকথা-২ 6228 নেত্তিপ্পকরণ অট্ঠকথা | 6301 নেত্তিপ্পকরণ টীকা 6302 নেত্তিবিভাবিনী | |
| 7101 ধম্মসংগণী পালি 7102 বিভঙ্গ পালি 7103 ধাতুকথা পালি 7104 পুগ্গলপঞ্ঞাত্তি পালি 7105 কথাবত্থু পালি 7106 যমক পালি-১ 7107 যমক পালি-২ 7108 যমক পালি-৩ 7109 পট্ঠান পালি-১ 7110 পট্ঠান পালি-২ 7111 পট্ঠান পালি-৩ 7112 পট্ঠান পালি-৪ 7113 পট্ঠান পালি-৫ | 7201 ধম্মসংগণি অট্ঠকথা 7202 সম্মোহবিনোদনী অট্ঠকথা 7203 পঞ্চপকরণ অট্ঠকথা | 7301 ধম্মসংগণী-মূলটীকা 7302 বিভঙ্গ-মূলটীকা 7303 পঞ্চপকরণ-মূলটীকা 7304 ধম্মসংগণী-অনুটীকা 7305 পঞ্চপকরণ-অনুটীকা 7306 অভিধম্মাবতারো-নামরূপপরিচ্ছেদো 7307 অভিধম্মত্থসংগহো 7308 অভিধম্মাবতার-পুরাণটীকা 7309 অভিধম্মমাতিকাপালি | |
| 中文 | |||
| 巴利 | 義註 | 複註 | 藏外典籍 |
| 1101 巴拉基咖(波羅夷) 1102 巴吉帝亞(波逸提) 1103 大品(律藏) 1104 小品 1105 附隨 | 1201 巴拉基咖(波羅夷)義註-1 1202 巴拉基咖(波羅夷)義註-2 1203 巴吉帝亞(波逸提)義註 1204 大品義註(律藏) 1205 小品義註 1206 附隨義註 | 1301 心義燈-1 1302 心義燈-2 1303 心義燈-3 | 1401 疑惑度脫 1402 律攝註釋 1403 金剛智疏 1404 疑難解除疏-1 1405 疑難解除疏-2 1406 律莊嚴疏-1 1407 律莊嚴疏-2 1408 古老解惑疏 1409 律抉擇-上抉擇 1410 律抉擇疏-1 1411 律抉擇疏-2 1412 巴吉帝亞等啟請經 1413 小戒學-根本戒學 8401 清淨道論-1 8402 清淨道論-2 8403 清淨道大複註-1 8404 清淨道大複註-2 8405 清淨道論導論 8406 長部問答 8407 中部問答 8408 相應部問答 8409 增支部問答 8410 律藏問答 8411 論藏問答 8412 義注問答 8413 語言學詮釋手冊 8414 勝義顯揚 8415 隨燈論誦 8416 發趣論燈論 8417 禮敬文 8418 大禮敬文 8419 依相讚佛偈 8420 經讚 8421 蓮花供 8422 勝者莊嚴 8423 語蜜 8424 佛德偈集 8425 小史 8427 佛教史 8426 大史 8429 目犍連文法 8428 迦旃延文法 8430 文法寶鑑(詞幹篇) 8431 文法寶鑑(詞根篇) 8432 詞形成論 8433 目犍連五章 8434 應用成就讀本 8435 音韻論讀本 8436 阿毗曇燈讀本 8437 阿毗曇燈疏 8438 妙莊嚴論讀本 8439 妙莊嚴論疏 8440 初學入門義抉擇精要 8446 詩王智論 8447 智論花鬘 8445 法智論 8444 大羅漢智論 8441 世間智論 8442 經典智論 8443 勇士百智論 8450 考底利耶智論 8448 人眼燈 8449 四護衛燈 8451 妙味之流 8452 界清淨 8453 韋桑達拉頌 8454 目犍連語釋五章 8455 塔史 8456 佛牙史 8457 詞根讀本注釋 8458 舍利史 8459 象頭山寺史 8460 勝者行傳 8461 勝者宗燈 8462 油鍋偈 8463 彌蘭王問疏 8464 詞花鬘 8465 詞成就論 8466 正理滴論 8467 迦旃延詞根注 8468 邊境山注釋 |
| 2101 戒蘊品 2102 大品(長部) 2103 波梨品 | 2201 戒蘊品註義註 2202 大品義註(長部) 2203 波梨品義註 | 2301 戒蘊品疏 2302 大品複註(長部) 2303 波梨品複註 2304 戒蘊品新複註-1 2305 戒蘊品新複註-2 | |
| 3101 根本五十經 3102 中五十經 3103 後五十經 | 3201 根本五十義註-1 3202 根本五十義註-2 3203 中五十義註 3204 後五十義註 | 3301 根本五十經複註 3302 中五十經複註 3303 後五十經複註 | |
| 4101 有偈品 4102 因緣品 4103 蘊品 4104 六處品 4105 大品(相應部) | 4201 有偈品義注 4202 因緣品義注 4203 蘊品義注 4204 六處品義注 4205 大品義注(相應部) | 4301 有偈品複註 4302 因緣品註 4303 蘊品複註 4304 六處品複註 4305 大品複註(相應部) | |
| 5101 一集經 5102 二集經 5103 三集經 5104 四集經 5105 五集經 5106 六集經 5107 七集經 5108 八集等經 5109 九集經 5110 十集經 5111 十一集經 | 5201 一集義註 5202 二、三、四集義註 5203 五、六、七集義註 5204 八、九、十、十一集義註 | 5301 一集複註 5302 二、三、四集複註 5303 五、六、七集複註 5304 八集等複註 | |
| 6101 小誦 6102 法句經 6103 自說 6104 如是語 6105 經集 6106 天宮事 6107 餓鬼事 6108 長老偈 6109 長老尼偈 6110 譬喻-1 6111 譬喻-2 6112 諸佛史 6113 所行藏 6114 本生-1 6115 本生-2 6116 大義釋 6117 小義釋 6118 無礙解道 6119 導論 6120 彌蘭王問 6121 藏釋 | 6201 小誦義注 6202 法句義注-1 6203 法句義注-2 6204 自說義注 6205 如是語義註 6206 經集義注-1 6207 經集義注-2 6208 天宮事義注 6209 餓鬼事義注 6210 長老偈義注-1 6211 長老偈義注-2 6212 長老尼義注 6213 譬喻義注-1 6214 譬喻義注-2 6215 諸佛史義注 6216 所行藏義注 6217 本生義注-1 6218 本生義注-2 6219 本生義注-3 6220 本生義注-4 6221 本生義注-5 6222 本生義注-6 6223 本生義注-7 6224 大義釋義注 6225 小義釋義注 6226 無礙解道義注-1 6227 無礙解道義注-2 6228 導論義注 | 6301 導論複註 6302 導論明解 | |
| 7101 法集論 7102 分別論 7103 界論 7104 人施設論 7105 論事 7106 雙論-1 7107 雙論-2 7108 雙論-3 7109 發趣論-1 7110 發趣論-2 7111 發趣論-3 7112 發趣論-4 7113 發趣論-5 | 7201 法集論義註 7202 分別論義註(迷惑冰消) 7203 五部論義註 | 7301 法集論根本複註 7302 分別論根本複註 7303 五論根本複註 7304 法集論複註 7305 五論複註 7306 阿毘達摩入門 7307 攝阿毘達磨義論 7308 阿毘達摩入門古複註 7309 阿毘達摩論母 | |
| English | |||
| Pali Canon | Commentaries | Sub-commentaries | Other |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
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| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
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| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| हिंदी | |||
| पाली कैनन | कमेंट्री | उप-टिप्पणियाँ | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळि 1102 पाचित्तिय पाळि 1103 महावग्ग पाळि (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळि 1105 परिवार पाळि | 1201 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-1 1202 पाराजिककण्ड अट्ठकथा-2 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-1 1302 सारत्थदीपनी टीका-2 1303 सारत्थदीपनी टीका-3 | 1401 द्वेमातिकापाळि 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-1 1405 विमतिविनोदनी टीका-2 1406 विनयालंकार टीका-1 1407 विनयालंकार टीका-2 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-1 1411 विनयविनिच्छय टीका-2 1412 पाचित्यादियोजनापाळि 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-1 8402 विसुद्धिमग्ग-2 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-1 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-2 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अङ्गुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी सङ्गहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवन्दना 8421 कमलाञ्जलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगन्थवंस 8427 सासनवंस 8426 महावंस 8429 मोग्गल्लानब्याकरणं 8428 कच्चायनब्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपञ्चिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गण्ठिपदत्थविनिच्छयसार 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमञ्जरी 8445 धम्मनीति 8444 महारहनीति 8441 लोकनीति 8442 सुत्तन्तनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8450 चाणक्यनीति 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8451 रसवाहिनी 8452 सीमविसोधनीपाठ 8453 वेस्सन्तरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपञ्चिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमञ्जरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिन्दुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमञ्जुसा 8468 सामन्तकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खन्धवग्ग पाळि 2102 महावग्ग पाळि (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळि | 2201 सीलक्खन्धवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खन्धवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-1 2305 सीलक्खन्धवग्ग-अभिनवटीका-2 | |
| 3101 मूलपण्णास पाळि 3102 मज्झिमपण्णास पाळि 3103 उपरिपण्णास पाळि | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-1 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-2 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळि 4102 निदानवग्ग पाळि 4103 खन्धवग्ग पाळि 4104 सळायतनवग्ग पाळि 4105 महावग्ग पाळि (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खन्धवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खन्धवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळि 5102 दुकनिपात पाळि 5103 तिकनिपात पाळि 5104 चतुक्कनिपात पाळि 5105 पञ्चकनिपात पाळि 5106 छक्कनिपात पाळि 5107 सत्तकनिपात पाळि 5108 अट्ठकादिनिपात पाळि 5109 नवकनिपात पाळि 5110 दसकनिपात पाळि 5111 एकादसकनिपात पाळि | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पञ्चक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळि 6102 धम्मपद पाळि 6103 उदान पाळि 6104 इतिवुत्तक पाळि 6105 सुत्तनिपात पाळि 6106 विमानवत्थु पाळि 6107 पेतवत्थु पाळि 6108 थेरगाथा पाळि 6109 थेरीगाथा पाळि 6110 अपदान पाळि-1 6111 अपदान पाळि-2 6112 बुद्धवंस पाळि 6113 चरियापिटक पाळि 6114 जातक पाळि-1 6115 जातक पाळि-2 6116 महानिद्देस पाळि 6117 चूळनिद्देस पाळि 6118 पटिसम्भिदामग्ग पाळि 6119 नेत्तिप्पकरण पाळि 6120 मिलिन्दपञ्ह पाळि 6121 पेटकोपदेस पाळि | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-1 6203 धम्मपद अट्ठकथा-2 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-1 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-2 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-1 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-2 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-1 6214 अपदान अट्ठकथा-2 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-1 6218 जातक अट्ठकथा-2 6219 जातक अट्ठकथा-3 6220 जातक अट्ठकथा-4 6221 जातक अट्ठकथा-5 6222 जातक अट्ठकथा-6 6223 जातक अट्ठकथा-7 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-1 6227 पटिसम्भिदामग्ग अट्ठकथा-2 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसङ्गणी पाळि 7102 विभङ्ग पाळि 7103 धातुकथा पाळि 7104 पुग्गलपञ्ञत्ति पाळि 7105 कथावत्थु पाळि 7106 यमक पाळि-1 7107 यमक पाळि-2 7108 यमक पाळि-3 7109 पट्ठान पाळि-1 7110 पट्ठान पाळि-2 7111 पट्ठान पाळि-3 7112 पट्ठान पाळि-4 7113 पट्ठान पाळि-5 | 7201 धम्मसङ्गणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पञ्चपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसङ्गणी-मूलटीका 7302 विभङ्ग-मूलटीका 7303 पञ्चपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसङ्गणी-अनुटीका 7305 पञ्चपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसङ्गहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळि | |
| Indonesia | |||
| Kanon Pali | Komentar | Sub-komentar | Lainnya |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| 日文 | |||
| パーリ仏典 | 註釈書 | 副註釈書 | その他 |
| 1101 パーラージカ・パーリ 1102 パーチッティヤ・パーリ 1103 マハーヴァッガ・パーリ(ヴィナヤ) 1104 チューラヴァッガ・パーリ 1105 パリヴァーラ・パーリ | 1201 パーラージカカンダ・アッタカター-1 1202 パーラージカカンダ・アッタカター-2 1203 パーチッティヤ・アッタカター 1204 マハーヴァッガ・アッタカター(ヴィナヤ) 1205 チューラヴァッガ・アッタカター 1206 パリヴァーラ・アッタカター | 1301 サーラッタディーパニー・ティーカー-1 1302 サーラッタディーパニー・ティーカー-2 1303 サーラッタディーパニー・ティーカー-3 | 1401 ドヴェマーティカー・パーリ 1402 ヴィナヤサンガハ・アッタカター 1403 ヴァジラブッディ・ティーカー 1404 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-1 1405 ヴィマティヴィノーダニー・ティーカー-2 1406 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-1 1407 ヴィナヤーランカーラ・ティーカー-2 1408 カンカーウィタラニープラーナ・ティーカー 1409 ヴィナヤヴィニッチャヤ-ウッタラヴィニッチャヤ 1410 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-1 1411 ヴィナヤヴィニッチャヤ・ティーカー-2 1412 パーチッティヤーディヨージャナー・パーリ 1413 クッダシッカー-ムーラシッカー 8401 ヴィスッディマッガ-1 8402 ヴィスッディマッガ-2 8403 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-1 8404 ヴィスッディマッガ・マハーティーカー-2 8405 ヴィスッディマッガ・ニダーナカター 8406 ディーガニカーヤ(プ・ヴィ) 8407 マッジマニカーヤ(プ・ヴィ) 8408 サンユッタニカーヤ(プ・ヴィ) 8409 アングッタラニカーヤ(プ・ヴィ) 8410 ヴィナヤピタカ(プ・ヴィ) 8411 アビダンマピタカ(プ・ヴィ) 8412 アッタカター(プ・ヴィ) 8413 ニルッティディーパニー 8414 パラマッタディーパニー・サンガハマハーティカーパータ 8415 アヌディーパニーパータ 8416 パッターヌッデーサ・ディーパニーパータ 8417 ナマッカラ・ティーカー 8418 マハーパナーマ・パータ 8419 ラッカナート・ブッダトーマナーガーター 8420 スタヴァンダナー 8421 カマラーニャジャリ 8422 ジナランカーラ 8423 パッジャマドゥ 8424 ブッダグナガーター・ヴァリー 8425 チューラガンタヴァンサ 8427 サーサナヴァンサ 8426 マハーヴァンサ 8429 モッガラーナ・ビャーカラナン 8428 カッチャーヤナ・ビャーカラナン 8430 サッダニーティッパカラナン(パダマーラー) 8431 サッダニーティッパカラナン(ダートゥマーラー) 8432 パダルーパシッディ 8433 モッガラーナ・パンチカー 8434 パヨーガシッディ・パータ 8435 ヴットーダヤ・パータ 8436 アビダーナッパディーピカー・パータ 8437 アビダーナッパディーピカー・ティーカー 8438 スボーダーランカーラ・パータ 8439 スボーダーランカーラ・ティーカー 8440 バーラーヴァターラ・ガンティパダッタヴィニッチャヤサーラ 8446 カヴィダッパナニーティ 8447 ニーティマンジャリー 8445 ダンマニーティ 8444 マハーラハニーティ 8441 ローカニーティ 8442 スタンタニーティ 8443 スーラッサティニーティ 8450 チャーナキャニーティ 8448 ナラダッカディーパニー 8449 チャトゥラーラッカディーパニー 8451 ラサヴァーヒニー 8452 シーマヴィソーダニー・パータ 8453 ヴェッサンタラ・ギーティ 8454 モッガラーナ・ヴッティヴィヴァラナパンチカー 8455 トゥーパヴァンサ 8456 ダーターヴァンサ 8457 ダートゥパータヴィラーヴィシニヤー 8458 ダートゥヴァンサ 8459 ハッタヴァナッガラヴィハーラヴァンサ 8460 ジナチャリタヤ 8461 ジナヴァンサディーパン 8462 テーラカターガーター 8463 ミリダ・ティーカー 8464 パダマンジャリー 8465 パダサーダナン 8466 サッダビンドゥパカラナン 8467 カッチャーヤナ・ダートゥマンジューサー 8468 サーマンタクータ・ヴァンナナー |
| 2101 シーラッカンダワッガ・パーリ 2102 マハーワッガ・パーリ(ディーガ) 2103 パーティカワッガ・パーリ | 2201 シーラッカンダワッガ・アッタカター 2202 マハーワッガ・アッタカター(ディーガ) 2203 パーティカワッガ・アッタカター | 2301 シーラッカンダワッガ・ティーカー 2302 マハーワッガ・ティーカー(ディーガ) 2303 パーティカワッガ・ティーカー 2304 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-1 2305 シーラッカンダワッガ・アビナワティーカー-2 | |
| 3101 ムーラパンナーサ・パーリ 3102 マッジマパンナーサ・パーリ 3103 ウパリパンナーサ・パーリ | 3201 ムーラパンナーサ・アッタカター-1 3202 ムーラパンナーサ・アッタカター-2 3203 マッジマパンナーサ・アッタカター 3204 ウパリパンナーサ・アッタカター | 3301 ムーラパンナーサ・ティーカー 3302 マッジマパンナーサ・ティーカー 3303 ウパリパンナーサ・ティーカー | |
| 4101 サガーター・ワッガ・パーリ 4102 ニダーナ・ワッガ・パーリ 4103 カンダ・ワッガ・パーリ 4104 サラーヤタナ・ワッガ・パーリ 4105 マハーワッガ・パーリ(サンユッタ) | 4201 サガーター・ワッガ・アッタカター 4202 ニダーナ・ワッガ・アッタカター 4203 カンダ・ワッガ・アッタカター 4204 サラーヤタナ・ワッガ・アッタカター 4205 マハーワッガ・アッタカター(サンユッタ) | 4301 サガーター・ワッガ・ティーカー 4302 ニダーナ・ワッガ・ティーカー 4303 カンダ・ワッガ・ティーカー 4304 サラーヤタナ・ワッガ・ティーカー 4305 マハーワッガ・ティーカー(サンユッタ) | |
| 5101 エーカカニパータ・パーリ 5102 ドゥカニパータ・パーリ 5103 ティカニパータ・パーリ 5104 チャトゥッカニパータ・パーリ 5105 パンチャカニパータ・パーリ 5106 チャッカニパータ・パーリ 5107 サッタカニパータ・パーリ 5108 アッタカーディニパータ・パーリ 5109 ナヴァカニパータ・パーリ 5110 ダサカニパータ・パーリ 5111 エーカーダサカニパータ・パーリ | 5201 エーカカニパータ・アッタカター 5202 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・アッタカター 5203 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・アッタカター 5204 アッタカーディニパータ・アッタカター | 5301 エーカカニパータ・ティーカー 5302 ドゥカ・ティカ・チャトゥッカニパータ・ティーカー 5303 パンチャカ・チャッカ・サッタカニパータ・ティーカー 5304 アッタカーディニパータ・ティーカー | |
| 6101 クッダカパータ・パーリ 6102 ダンマパダ・パーリ 6103 ウダーナ・パーリ 6104 イティヴッタカ・パーリ 6105 スッタニパータ・パーリ 6106 ヴィマーナヴァットゥ・パーリ 6107 ペーヴァットゥ・パーリ 6108 テーラガーター・パーリ 6109 テーリーガーター・パーリ 6110 アパダーナ・パーリ-1 6111 アパダーナ・パーリ-2 6112 ブッダヴァンサ・パーリ 6113 チャリヤーピタカ・パーリ 6114 ジャータカ・パーリ-1 6115 ジャータカ・パーリ-2 6116 マハーニッデーサ・パーリ 6117 チューラニッデーサ・パーリ 6118 パティサンビダーマッガ・パーリ 6119 ネッティッパカラナ・パーリ 6120 ミリンダパンハ・パーリ 6121 ペータコーパデーサ・パーリ | 6201 クッダカパータ・アッタカター 6202 ダンマパダ・アッタカター-1 6203 ダンマパダ・アッタカター-2 6204 ウダーナ・アッタカター 6205 イティヴッタカ・アッタカター 6206 スッタニパータ・アッタカター-1 6207 スッタニパータ・アッタカター-2 6208 ヴィマーナヴァットゥ・アッタカター 6209 ペータヴァットゥ・アッタカター 6210 テーラガーター・アッタカター-1 6211 テーラガーター・アッタカター-2 6212 テーリーガーター・アッタカター 6213 アパダーナ・アッタカター-1 6214 アパダーナ・アッタカター-2 6215 ブッダヴァンサ・アッタカター 6216 チャリヤーピタカ・アッタカター 6217 ジャータカ・アッタカター-1 6218 ジャータカ・アッタカター-2 6219 ジャータカ・アッタカター-3 6220 ジャータカ・アッタカター-4 6221 ジャータカ・アッタカター-5 6222 ジャータカ・アッタカター-6 6223 ジャータカ・アッタカター-7 6224 マハーニッデーサ・アッタカター 6225 チューラニッデーサ・アッタカター 6226 パティサンビダーマッガ・アッタカター-1 6227 パティサンビダーマッガ・アッタカター-2 6228 ネッティッパカラナ・アッタカター | 6301 ネッティッパカラナ・ティーカー 6302 ネッティヴィバーヴィニー | |
| 7101 ダンマサンガニー・パーリ 7102 ヴィバンガ・パーリ 7103 ダートゥカター・パーリ 7104 プッガラパンニャッティ・パーリ 7105 カター・ヴァットゥ・パーリ 7106 ヤマカ・パーリ-1 7107 ヤマカ・パーリ-2 7108 ヤマカ・パーリ-3 7109 パッターナ・パーリ-1 7110 パッターナ・パーリ-2 7111 パッターナ・パーリ-3 7112 パッターナ・パーリ-4 7113 パッターナ・パーリ-5 | 7201 ダンマサンガニ・アッタカター 7202 サンモーハヴィノーダニー・アッタカター 7203 パンチャパカラナ・アッタカター | 7301 ダンマサンガニー・ムーラティーカー 7302 ヴィバンガ・ムーラティーカー 7303 パンチャパカラナ・ムーラティーカー 7304 ダンマサンガニー・アヌティーカー 7305 パンチャパカラナ・アヌティーカー 7306 アビダンマーヴァターロ・ナーマルーパパリッチェード 7307 アビダンマッタ・サンガホ 7308 アビダンマーヴァターラ・プラーナティーカー 7309 アビダンマ・マーティカーパーリ | |
| ខ្មែរ | |||
| ព្រះត្រៃបិដកបាលី | អដ្ឋកថា | ដីកា | ផ្សេងទៀត |
| 1101 បារាជិកបាឡិ 1102 បាចិត្តិយបាឡិ 1103 មហាវគ្គបាឡិ (វិន័យ) 1104 ចូឡវគ្គបាឡិ 1105 បរិវារបាឡិ | 1201 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-១ 1202 បារាជិកកណ្ឌអដ្ឋកថា-២ 1203 បាចិត្តិយអដ្ឋកថា 1204 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (វិន័យ) 1205 ចូឡវគ្គអដ្ឋកថា 1206 បរិវារអដ្ឋកថា | 1301 សារត្ថទីបនីដីកា-១ 1302 សារត្ថទីបនីដីកា-២ 1303 សារត្ថទីបនីដីកា-៣ | 1401 ទ្វេមាតិកាបាឡិ 1402 វិនយសង្គហអដ្ឋកថា 1403 វជិរពុទ្ធិដីកា 1404 វិមតិវិនោទនីដីកា-១ 1405 វិមតិវិនោទនីដីកា-២ 1406 វិនយាលង្ការដីកា-១ 1407 វិនយាលង្ការដីកា-២ 1408 កង្ខាវិតរណីបុរាណដីកា 1409 វិនយវិនិច្ឆយ-ឧត្តរវិនិច្ឆយ 1410 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-១ 1411 វិនយវិនិច្ឆយដីកា-២ 1412 បាចិត្យាទិយោជនាបាឡិ 1413 ខុទ្ទសិក្ខា-មូលសិក្ខា 8401 វិសុទ្ធិមគ្គ-១ 8402 វិសុទ្ធិមគ្គ-២ 8403 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-១ 8404 វិសុទ្ធិមគ្គ-មហាដីកា-២ 8405 វិសុទ្ធិមគ្គ និទានកថា 8406 ទីឃនិកាយ (បុ-វិ) 8407 មជ្ឈិមនិកាយ (បុ-វិ) 8408 សំយុត្តនិកាយ (បុ-វិ) 8409 អង្គុត្តរនិកាយ (បុ-វិ) 8410 វិនយបិដក (បុ-វិ) 8411 អភិធម្មបិដក (បុ-វិ) 8412 អដ្ឋកថា (បុ-វិ) 8413 និរុត្តិទីបនី 8414 បរមត្ថទីបនី សង្គហមហាដីកាបាឋ 8415 អនុទីបនីបាឋ 8416 បដ្ឋានុទ្ទេស ទីបនីបាឋ 8417 នមក្ការដីកា 8418 មហាបណាមបាឋ 8419 លក្ខណាតោ ពុទ្ធថោមនាគាថា 8420 សុតវន្ទនា 8421 កមលាញ្ជលិ 8422 ជិនាលង្ការ 8423 បជ្ជមធុ 8424 ពុទ្ធគុណគាថាវលី 8425 ចូឡគន្ថវង្ស 8427 សាសនវង្ស 8426 មហាវង្ស 8429 មោគ្គល្លានព្យាករណំ 8428 កច្ចាយនព្យាករណំ 8430 សទ្ទនីតិប្បករណំ (បទមាលា) 8431 សទ្ទនីតិប្បករណំ (ធាតុមាលា) 8432 បទរូបសិទ្ធិ 8433 មោគ្គល្លានបញ្ចិកា 8434 បយោគសិទ្ធិបាឋ 8435 វុត្តោទយបាឋ 8436 អភិធានប្បទីបិកាបាឋ 8437 អភិធានប្បទីបិកាដីកា 8438 សុពោធាលង្ការបាឋ 8439 សុពោធាលង្ការដីកា 8440 បាលាវតារ គណ្ឋិបទត្ថវិនិច្ឆយសារ 8446 កវិទប្បណនីតិ 8447 នីតិមញ្ជរី 8445 ធម្មនីតិ 8444 មហារហនីតិ 8441 លោកនីតិ 8442 សុត្តន្តនីតិ 8443 សូរស្សតិនីតិ 8450 ចាណក្យនីតិ 8448 នរទក្ខទីបនី 8449 ចតុរារក្ខទីបនី 8451 រសវាហិនី 8452 សីមវិសោធនីបាឋ 8453 វេស្សន្តរគីតិ 8454 មោគ្គល្លាន វុត្តិវិវរណបញ្ចិកា 8455 ថូបវង្ស 8456 ទាឋាវង្ស 8457 ធាតុបាឋវិលាសិនិយា 8458 ធាតុវង្ស 8459 ហត្ថវនគល្លវិហារវង្ស 8460 ជិនចរិតយ 8461 ជិនវង្សទីបំ 8462 តេលកដាហគាថា 8463 មិលិទដីកា 8464 បទមញ្ជរី 8465 បទសាធនំ 8466 សទ្ទពិន្ទុបករណំ 8467 កច្ចាយនធាតុមញ្ជុសា 8468 សាមន្តកូដវណ្ណនា |
| 2101 សីលក្ខន្ធវគ្គបាឡិ 2102 មហាវគ្គបាឡិ (ទីឃ) 2103 បាថិកវគ្គបាឡិ | 2201 សីលក្ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 2202 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (ទីឃ) 2203 បាថិកវគ្គអដ្ឋកថា | 2301 សីលក្ខន្ធវគ្គដីកា 2302 មហាវគ្គដីកា (ទីឃ) 2303 បាថិកវគ្គដីកា 2304 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-១ 2305 សីលក្ខន្ធវគ្គ-អភិនវដីកា-២ | |
| 3101 មូលបណ្ណាសបាឡិ 3102 មជ្ឈិមបណ្ណាសបាឡិ 3103 ឧបរិបណ្ណាសបាឡិ | 3201 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-១ 3202 មូលបណ្ណាសអដ្ឋកថា-២ 3203 មជ្ឈិមបណ្ណាសអដ្ឋកថា 3204 ឧបរិបណ្ណាសអដ្ឋកថា | 3301 មូលបណ្ណាសដីកា 3302 មជ្ឈិមបណ្ណាសដីកា 3303 ឧបរិបណ្ណាសដីកា | |
| 4101 សគាថាវគ្គបាឡិ 4102 និទានវគ្គបាឡិ 4103 ខន្ធវគ្គបាឡិ 4104 សឡាយតនវគ្គបាឡិ 4105 មហាវគ្គបាឡិ (សំយុត្ត) | 4201 សគាថាវគ្គអដ្ឋកថា 4202 និទានវគ្គអដ្ឋកថា 4203 ខន្ធវគ្គអដ្ឋកថា 4204 សឡាយតនវគ្គអដ្ឋកថា 4205 មហាវគ្គអដ្ឋកថា (សំយុត្ត) | 4301 សគាថាវគ្គដីកា 4302 និទានវគ្គដីកា 4303 ខន្ធវគ្គដីកា 4304 សឡាយតនវគ្គដីកា 4305 មហាវគ្គដីកា (សំយុត្ត) | |
| 5101 ឯកកនិបាតបាឡិ 5102 ទុកនិបាតបាឡិ 5103 តិកនិបាតបាឡិ 5104 ចតុក្កនិបាតបាឡិ 5105 បញ្ចកនិបាតបាឡិ 5106 ឆក្កនិបាតបាឡិ 5107 សត្តកនិបាតបាឡិ 5108 អដ្ឋកាទិនិបាតបាឡិ 5109 នវកនិបាតបាឡិ 5110 ទសកនិបាតបាឡិ 5111 ឯកាទសកនិបាតបាឡិ | 5201 ឯកកនិបាតអដ្ឋកថា 5202 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតអដ្ឋកថា 5203 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតអដ្ឋកថា 5204 អដ្ឋកាទិនិបាតអដ្ឋកថា | 5301 ឯកកនិបាតដីកា 5302 ទុក-តិក-ចតុក្កនិបាតដីកា 5303 បញ្ចក-ឆក្ក-សត្តកនិបាតដីកា 5304 អដ្ឋកាទិនិបាតដីកា | |
| 6101 ខុទ្ទកបាឋបាឡិ 6102 ធម្មបទបាឡិ 6103 ឧទានបាឡិ 6104 ឥតិវុត្តកបាឡិ 6105 សុត្តនិបាតបាឡិ 6106 វិមានវត្ថុបាឡិ 6107 បេតវត្ថុបាឡិ 6108 ថេរគាថាបាឡិ 6109 ថេរីគាថាបាឡិ 6110 អបទានបាឡិ-១ 6111 អបទានបាឡិ-២ 6112 ពុទ្ធវង្សបាឡិ 6113 ចរិយាបិដកបាឡិ 6114 ជាតកបាឡិ-១ 6115 ជាតកបាឡិ-២ 6116 មហានិទ្ទេសបាឡិ 6117 ចូឡនិទ្ទេសបាឡិ 6118 បដិសម្ភិទាមគ្គបាឡិ 6119 នេត្តិប្បករណបាឡិ 6120 មិលិន្ទបញ្ហាបាឡិ 6121 បេដកោបទេសបាឡិ | 6201 ខុទ្ទកបាឋអដ្ឋកថា 6202 ធម្មបទអដ្ឋកថា-១ 6203 ធម្មបទអដ្ឋកថា-២ 6204 ឧទានអដ្ឋកថា 6205 ឥតិវុត្តកអដ្ឋកថា 6206 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-១ 6207 សុត្តនិបាតអដ្ឋកថា-២ 6208 វិមានវត្ថុអដ្ឋកថា 6209 បេតវត្ថុអដ្ឋកថា 6210 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-១ 6211 ថេរគាថាអដ្ឋកថា-២ 6212 ថេរីគាថាអដ្ឋកថា 6213 អបទានអដ្ឋកថា-១ 6214 អបទានអដ្ឋកថា-២ 6215 ពុទ្ធវង្សអដ្ឋកថា 6216 ចរិយាបិដកអដ្ឋកថា 6217 ជាតកអដ្ឋកថា-១ 6218 ជាតកអដ្ឋកថា-២ 6219 ជាតកអដ្ឋកថា-៣ 6220 ជាតកអដ្ឋកថា-៤ 6221 ជាតកអដ្ឋកថា-៥ 6222 ជាតកអដ្ឋកថា-៦ 6223 ជាតកអដ្ឋកថា-៧ 6224 មហានិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6225 ចូឡនិទ្ទេសអដ្ឋកថា 6226 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-១ 6227 បដិសម្ភិទាមគ្គអដ្ឋកថា-២ 6228 នេត្តិប្បករណអដ្ឋកថា | 6301 នេត្តិប្បករណដីកា 6302 នេត្តិវិភាវិនី | |
| 7101 ធម្មសង្គណីបាឡិ 7102 វិភង្គបាឡិ 7103 ធាតុកថាបាឡិ 7104 បុគ្គលបញ្ញត្តិបាឡិ 7105 កថាវត្ថុបាឡិ 7106 យមកបាឡិ-១ 7107 យមកបាឡិ-២ 7108 យមកបាឡិ-៣ 7109 បដ្ឋានបាឡិ-១ 7110 បដ្ឋានបាឡិ-២ 7111 បដ្ឋានបាឡិ-៣ 7112 បដ្ឋានបាឡិ-៤ 7113 បដ្ឋានបាឡិ-៥ | 7201 ធម្មសង្គណិអដ្ឋកថា 7202 សម្មោហវិនោទនីអដ្ឋកថា 7203 បញ្ចបករណអដ្ឋកថា | 7301 ធម្មសង្គណី-មូលដីកា 7302 វិភង្គ-មូលដីកា 7303 បញ្ចបករណ-មូលដីកា 7304 ធម្មសង្គណី-អនុដីកា 7305 បញ្ចបករណ-អនុដីកា 7306 អភិធម្មាវតារោ-នាមរូបបរិច្ឆេទោ 7307 អភិធម្មត្ថសង្គហោ 7308 អភិធម្មាវតារ-បុរាណដីកា 7309 អភិធម្មមាតិកាបាឡិ | |
| 한국인 | |||
| 팔리 대장경 | 주석서 | 부주석서 | 기타 |
| 1101 빠라지카 빨리 1102 빠찟띠야 빨리 1103 마하왁가 빨리 (비나야) 1104 출라왁가 빨리 1105 빠리와라 빨리 | 1201 빠라지까깐다 앗타카타-1 1202 빠라지까깐다 앗타카타-2 1203 빠찟띠야 앗타카타 1204 마하왁가 앗타카타 (비나야) 1205 출라왁가 앗타카타 1206 빠리와라 앗타카타 | 1301 사랏타디빠니 띠까-1 1302 사랏타디빠니 띠까-2 1303 사랏타디빠니 띠까-3 | 1401 드베마띠까빨리 1402 위나야상가하 앗타카타 1403 와지라붓디 띠까 1404 위마띠위노다니 띠까-1 1405 위마띠위노다니 띠까-2 1406 위나야랑까라 띠까-1 1407 위나야랑까라 띠까-2 1408 깡카위따라니뿌라나 띠까 1409 위나야위닛차야-웃따라위닛차야 1410 위나야위닛차야 띠까-1 1411 위나야위닛차야 띠까-2 1412 빠찟땨디요자나빨리 1413 쿳닷시카-물라시카 8401 위숟디막가-1 8402 위숟디막가-2 8403 위숟디막가-마하띠까-1 8404 위숟디막가-마하띠까-2 8405 위숟디막가 니다나까타 8406 디가니까야 (뿌-위) 8407 맛지마니까야 (뿌-위) 8408 삼윳따니까야 (뿌-위) 8409 앙굳따라니까야 (뿌-위) 8410 위나야삐따까 (뿌-위) 8411 아비담마삐따까 (뿌-위) 8412 앗타카타 (뿌-위) 8413 니룻띠디빠니 8414 빠라맛타디빠니 상가하마하띠까빠타 8415 아누디빠니빠타 8416 빳타누ㄸ데사 디빠니빠타 8417 나막까라띠까 8418 마하빠나마빠타 8419 락카나또 붓다토마나가타 8420 수타완다나 8421 까말란자리 8422 지나랑까라 8423 빳자마두 8424 붓다구나가타왈리 8425 출라간타왕사 8427 사사나왕사 8426 마하왕사 8429 목갈라나뱌까라낭 8428 깟차야나뱌까라낭 8430 삿다니띠빠까라낭 (빠다말라) 8431 삿다니띠빠까라낭 (다두말라) 8432 빠다루빠싣디 8433 목갈라나빤찌까 8434 빠요가싣디빠타 8435 붇또다야빠타 8436 아비다나빠디피까빠타 8437 아비다나빠디피까띠까 8438 수보다랑까라빠타 8439 수보다랑까라띠까 8440 발라와따라 간티빠닷타위닛차야사라 8446 까위닷빠나니띠 8447 니띠만자리 8445 담마니띠 8444 마하라하니띠 8441 로까니띠 8442 숫딴따니띠 8443 수랏사띠니띠 8450 짜낙야니띠 8448 나라닥카디빠니 8449 짜뚜라락카디빠니 8451 라사와히니 8452 시마위소다니빠타 8453 웨산따라기띠 8454 목갈라나 붇띠위와라나빤찌까 8455 투빠왕사 8456 다타왕사 8457 다두빠타윌라시니야 8458 다두왕사 8459 핟타와나갈라위하라왕사 8460 지나짜리따야 8461 지나왕사디빵 8462 떼라까타하가타 8463 밀리다띠까 8464 빠다만자리 8465 빠다사다낭 8466 삿다빈두빠까라낭 8467 깟차야나다두만주사 8468 사만따꿋타완나나 |
| 2101 실락칸다왁가 빨리 2102 마하왁가 빨리 (디가) 2103 빠티까왁가 빨리 | 2201 실락칸다왁가 앗타카타 2202 마하왁가 앗타카타 (디가) 2203 빠티까왁가 앗타카타 | 2301 실락칸다왁가 띠까 2302 마하왁가 띠까 (디가) 2303 빠티까왁가 띠까 2304 실락칸다왁가-아비나와띠까-1 2305 실락칸다왁가-아비나와띠까-2 | |
| 3101 물라빤나사 빨리 3102 맛지마빤나사 빨리 3103 우빠리빤나사 빨리 | 3201 물라빤나사 앗타카타-1 3202 물라빤나사 앗타카타-2 3203 맛지마빤나사 앗타카타 3204 우빠리빤나사 앗타카타 | 3301 물라빤나사 띠까 3302 맛지마빤나사 띠까 3303 우빠리빤나사 띠까 | |
| 4101 사가타왁가 빨리 4102 니다나왁가 빨리 4103 칸다왁가 빨리 4104 살라야따나왁가 빨리 4105 마하왁가 빨리 (삼윳따) | 4201 사가타왁가 앗타카타 4202 니다나왁가 앗타카타 4203 칸다왁가 앗타카타 4204 살라야따나왁가 앗타카타 4205 마하왁가 앗타카타 (삼윳따) | 4301 사가타왁가 띠까 4302 니다나왁가 띠까 4303 칸다왁가 띠까 4304 살라야따나왁가 띠까 4305 마하왁가 띠까 (삼윳따) | |
| 5101 에까까니빠따 빨리 5102 두까니빠따 빨리 5103 띠까니빠따 빨리 5104 짜뚝까니빠따 빨리 5105 빤짜까니빠따 빨리 5106 착까니빠따 빨리 5107 삿따까니빠따 빨리 5108 앗타까디니빠따 빨리 5109 나와까니빠따 빨리 5110 다사까니빠따 빨리 5111 에까다사까니빠따 빨리 | 5201 에까까니빠따 앗타카타 5202 두까-띠까-짜뚝까니빠따 앗타카타 5203 빤짜까-착까-삿따까니빠따 앗타카타 5204 앗타까디니빠따 앗타카타 | 5301 에까까니빠따 띠까 5302 두까-띠까-짜뚝까니빠따 띠까 5303 빤짜까-착까-삿따까니빠따 띠까 5304 앗타까디니빠따 띠까 | |
| 6101 쿳닥까빠타 빨리 6102 담마빠다 빨리 6103 우다나 빨리 6104 이띠웃따까 빨리 6105 숫따니빠따 빨리 6106 위마나왓투 빨리 6107 베따왓투 빨리 6108 테라가타 빨리 6109 테리가타 빨리 6110 아빠다나 빨리-1 6111 아빠다나 빨리-2 6112 붓다왕사 빨리 6113 짜리야삐따까 빨리 6114 자따까 빨리-1 6115 자따까 빨리-2 6116 마하닷데사 빨리 6117 출라닷데사 빨리 6118 빠티삼비다막가 빨리 6119 넷띠빠까라나 빨리 6120 밀린다빤하 빨리 6121 뻬따꼬빠데사 빨리 | 6201 쿳닥까빠타 앗타카타 6202 담마빠다 앗타카타-1 6203 담마빠다 앗타카타-2 6204 우다나 앗타카타 6205 이띠웃따까 앗타카타 6206 숫따니빠따 앗타카타-1 6207 숫따니빠따 앗타카타-2 6208 위마나왓투 앗타카타 6209 베따왓투 앗타카타 6210 테라가타 앗타카타-1 6211 테라가타 앗타카타-2 6212 테리가타 앗타카타 6213 아빠다나 앗타카타-1 6214 아빠다나 앗타카타-2 6215 붓다왕사 앗타카타 6216 짜리야삐따까 앗타카타 6217 자따까 앗타카타-1 6218 자따까 앗타카타-2 6219 자따까 앗타카타-3 6220 자따까 앗타카타-4 6221 자따까 앗타카타-5 6222 자따까 앗타카타-6 6223 자따까 앗타카타-7 6224 마하닷데사 앗타카타 6225 출라닷데사 앗타카타 6226 빠티삼비다막가 앗타카타-1 6227 빠티삼비다막가 앗타카타-2 6228 넷띠빠까라나 앗타카타 | 6301 넷띠빠까라나 띠까 6302 넷띠위바비니 | |
| 7101 담마상가니 빨리 7102 위방가 빨리 7103 다뚜까타 빨리 7104 뿍갈라빤냣띠 빨리 7105 까타왓투 빨리 7106 야마까 빨리-1 7107 야마까 빨리-2 7108 야마까 빨리-3 7109 빳타나 빨리-1 7110 빳타나 빨리-2 7111 빳타나 빨리-3 7112 빳타나 빨리-4 7113 빳타나 빨리-5 | 7201 담마상가니 앗타카타 7202 삼모하위노다니 앗타카타 7203 빤짜빠까라나 앗타카타 | 7301 담마상가니-물라띠까 7302 위방가-물라띠까 7303 빤짜빠까라나-물라띠까 7304 담마상가니-아누띠까 7305 빤짜빠까라나-아누띠까 7306 아비담마와따로-나마루빠빠릳체도 7307 아비담맛타상가호 7308 아비담마와따라-뿌라나띠까 7309 아비담마마띠까빨리 | |
| ອັກສອນລາວ | |||
| ປາລີ | ອັດຖະກະຖາ | ຏີກາ | ອັນຍາ |
| 1101 ປາຣາຊິກະ ປາລີ 1102 ປາຈິດຕິຍະ ປາລີ 1103 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ວິໄນ) 1104 ຈູລະວັກຄະ ປາລີ 1105 ປະລິວາລະ ປາລີ | 1201 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-1 1202 ປາຣາຊິກະກັນທະ ອັດຖະກະຖາ-2 1203 ປາຈິດຕິຍະ ອັດຖະກະຖາ 1204 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ວິໄນ) 1205 ຈູລະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 1206 ປະລິວາລະ ອັດຖະກະຖາ | 1301 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-1 1302 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-2 1303 ສາຣັດຖະທີປະນີ ຏີກາ-3 | 1401 ທເວມາຕິກາປາລີ 1402 ວິນະຍະສັງຄະຫະ ອັດຖະກະຖາ 1403 ວະຊິລະພຸດທິ ຏີກາ 1404 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-1 1405 ວິມະຕິວິໂນທະນີ ຏີກາ-2 1406 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-1 1407 ວິນະຍາລັງກາລະ ຏີກາ-2 1408 ກັງຂາວິຕະຣະນີປຸຣານະ ຏີກາ 1409 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ-ອຸຕຕະຣະວິນິດສະຍະ 1410 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-1 1411 ວິນະຍະວິນິດສະຍະ ຏີກາ-2 1412 ປາຈິຕະຍາທິໂຍຊະນາປາລີ 1413 ຂຸທະທະສິກຂາ-ມູລະສິກຂາ 8401 ວິສຸດທິມັກຄະ-1 8402 ວິສຸດທິມັກຄະ-2 8403 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-1 8404 ວິສຸດທິມັກຄະ-ມະຫາຏີກາ-2 8405 ວິສຸດທິມັກຄະ ນິທານະກະຖາ 8406 ທີຆະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8407 ມັດຊິມະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8408 ສັງຍຸຕຕະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8409 ອັງຄຸຕຕະລະນິກາຍະ (ປຸ-ວິ) 8410 ວິນະຍະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8411 ອະພິທັມມະປິຕະກະ (ປຸ-ວິ) 8412 ອັດຖະກະຖາ (ປຸ-ວິ) 8413 ນິລຸຕຕິທີປະນີ 8414 ປະຣະມັດຖະທີປະນີ ສັງຄະຫະມະຫາຏີກາປາຖະ 8415 ອະນຸທີປະນີປາຖະ 8416 ປັດຖານຸທເທສະ ທີປະນີປາຖະ 8417 ນະມັກກາລະຏີກາ 8418 ມະຫາປະຖາມະປາຖະ 8419 ລັກຂະນາໂຕ ພຸດທະຖະມະນາຄາຖາ 8420 ສຸຕະວັນທະນາ 8421 ກະມະລາຍຈະລິ 8422 ຊິນາລັງກາລະ 8423 ປັດຊະມະທຸ 8424 ພຸດທະຄຸນະຄາຖາວະລີ 8425 ຈູລະຄັນຖະວັງສະ 8426 ມະຫາວັງສະ 8427 ສາສະນະວັງສະ 8428 ກັດຈາຍະນະພະຍາກະລະນັງ 8429 ມົກຄັນທານະພະຍາກະລະນັງ 8430 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ປະທະມາລາ) 8431 ສັດທະນີຕິປະກະລະນັງ (ຘາຕຸມາລາ) 8432 ປະທະຣູປະສິດທິ 8433 ໂມຄັນທານະປັນຈິກາ 8434 ປະໂຍຄະສິດທິປາຖະ 8435 ວຸຕະໂທຍະປາຖະ 8436 ອະພິທານະປະປະທີປິກາປາຖະ 8437 ອະພິທານະປະປະທີປິກາຏີກາ 8438 ສຸໂພທາລັງກາລະປາຖະ 8439 ສຸໂພທາລັງກາລະຏີກາ 8440 ພາລາວະຕາລະ ຄັນຖິປະທັດຖະວິນິດສະຍະສາລະ 8441 ໂລກະນີຕິ 8442 ສຸດຕັນຕະນີຕິ 8443 ສູລັດສະຕິນີຕິ 8444 ມະຫາລະຫະນີຕິ 8445 ທັມມະນີຕິ 8446 ກະວິທັບປະຖານີຕິ 8447 ນີຕິມັນຊະລີ 8448 ນະລະທັກຂະທີປະນີ 8449 ຈະຕຸຣາລັກຂະທີປະນີ 8450 ຈານັກຍະນີຕິ 8451 ລະສະວາຫິນີ 8452 ສີມາວິໂສທະນີປາຖະ 8453 ເວສສັນຕະລະຄີຕິ 8454 ໂມຄັນທານະ ວຸຕຕິວິວະລະນະປັນຈິກາ 8455 ຖູປະວັງສະ 8456 ທາຐາວັງສະ 8457 ຘາຕຸປາຖະວິລາສິນີຍາ 8458 ຘາຕຸວັງສະ 8459 ຫັດຖະວະນະຄັນລະວິຫາລະວັງສະ 8460 ຊິນະຈະລິຕະຍະ 8461 ຊິນະວັງສະທີປັງ 8462 ເຕລະກະຕາຫາຄາຖາ 8463 ມິລິທະຏີກາ 8464 ປະທະມັນຊະລີ 8465 ປະທະສາຘະນັງ 8466 ສັດທະພິນທຸປະກະລະນັງ 8467 ກັດຈາຍະນະຘາຕຸມັນຊຸສາ 8468 ສາມັນຕະກູຏະວັນນະນາ |
| 2101 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 2102 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ທີຆະ) 2103 ປາຖິກະວັກຄະ ປາລີ | 2201 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 2202 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ທີຆະ) 2203 ປາຖິກະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ | 2301 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 2302 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ທີຆະ) 2303 ປາຖິກະວັກຄະ ຏີກາ 2304 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-1 2305 ສີລັກຂັນທະວັກຄະ-ອະພິນະວະຏີກາ-2 | |
| 3101 ມູລະປັນຍາສະ ປາລີ 3102 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ປາລີ 3103 ອຸປະລິປັນຍາສະ ປາລີ | 3201 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-1 3202 ມູລະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ-2 3203 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ 3204 ອຸປະລິປັນຍາສະ ອັດຖະກະຖາ | 3301 ມູລະປັນຍາສະ ຏີກາ 3302 ມັດຊິມະປັນຍາສະ ຏີກາ 3303 ອຸປະລິປັນຍາສະ ຏີກາ | |
| 4101 ສະຄາຖາວັກຄະ ປາລີ 4102 ນິທານະວັກຄະ ປາລີ 4103 ຂັນທະວັກຄະ ປາລີ 4104 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ປາລີ 4105 ມະຫາວັກຄະ ປາລີ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4201 ສະຄາຖາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4202 ນິທານະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4203 ຂັນທະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4204 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ 4205 ມະຫາວັກຄະ ອັດຖະກະຖາ (ສັງຍຸຕຕະ) | 4301 ສະຄາຖາວັກຄະ ຏີກາ 4302 ນິທານະວັກຄະ ຏີກາ 4303 ຂັນທະວັກຄະ ຏີກາ 4304 ສະຫຼາຍາຕະນະວັກຄະ ຏີກາ 4305 ມະຫາວັກຄະ ຏີກາ (ສັງຍຸຕຕະ) | |
| 5101 ເອກະກະນິປາຕະ ປາລີ 5102 ທຸກະນິປາຕະ ປາລີ 5103 ຕິກະນິປາຕະ ປາລີ 5104 ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ປາລີ 5105 ປັຈຈະກະນິປາຕະ ປາລີ 5106 ຉັກກະນິປາຕະ ປາລີ 5107 ສັດຕະກະນິປາຕະ ປາລີ 5108 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ປາລີ 5109 ນະວະກະນິປາຕະ ປາລີ 5110 ທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ 5111 ເອກາທະສະກະນິປາຕະ ປາລີ | 5201 ເອກະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5202 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5203 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ 5204 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ | 5301 ເອກະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5302 ທຸກະ-ຕິກະ-ຈະຕຸກກະນິປາຕະ ຏີກາ 5303 ປັຈຈະກະ-ຉັກກະ-ສັດຕະກະນິປາຕະ ຏີກາ 5304 ອັດຖະກາທິນິປາຕະ ຏີກາ | |
| 6101 ຂຸທະທະກະປາຖະ ປາລີ 6102 ທຳມະປະທະ ປາລີ 6103 ອຸທານະ ປາລີ 6104 ອິຕິວຸຕຕະກະ ປາລີ 6105 ສຸດຕະນິປາຕະ ປາລີ 6106 ວິມານະວັດຖຸ ປາລີ 6107 ເປຕະວັດຖຸ ປາລີ 6108 ເຖລະຄາຖາ ປາລີ 6109 ເຖລີຄາຖາ ປາລີ 6110 ອະປະທານະ ປາລີ-1 6111 ອະປະທານະ ປາລີ-2 6112 ພຸດທະວັງສະ ປາລີ 6113 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ປາລີ 6114 ຊາຕະກະ ປາລີ-1 6115 ຊາຕະກະ ປາລີ-2 6116 ມະຫານິທເທສະ ປາລີ 6117 ຈູລະນິທເທສະ ປາລີ 6118 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ປາລີ 6119 ເນຕຕິປະກະລະນະ ປາລີ 6120 ມິລິນທະປັນຫາ ປາລີ 6121 ເປຏະກົປເທສະ ປາລີ | 6201 ຂຸທະທະກະປາຖະ ອັດຖະກະຖາ 6202 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-1 6203 ທຳມະປະທະ ອັດຖະກະຖາ-2 6204 ອຸທານະ ອັດຖະກະຖາ 6205 ອິຕິວຸຕຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6206 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-1 6207 ສຸດຕະນິປາຕະ ອັດຖະກະຖາ-2 6208 ວິມານະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6209 ເປຕະວັດຖຸ ອັດຖະກະຖາ 6210 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-1 6211 ເຖລະຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ-2 6212 ເຖລີຄາຖາ ອັດຖະກະຖາ 6213 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-1 6214 ອະປະທານະ ອັດຖະກະຖາ-2 6215 ພຸດທະວັງສະ ອັດຖະກະຖາ 6216 ຈະຣິຍາປິຕະກະ ອັດຖະກະຖາ 6217 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-1 6218 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-2 6219 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-3 6220 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-4 6221 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-5 6222 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-6 6223 ຊາຕະກະ ອັດຖະກະຖາ-7 6224 ມະຫານິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6225 ຈູລະນິທເທສະ ອັດຖະກະຖາ 6226 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-1 6227 ປະຕິສັມພິທາມັກຄະ ອັດຖະກະຖາ-2 6228 ເນຕຕິປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 6301 ເນຕຕິປະກະລະນະ ຏີກາ 6302 ເນຕຕິວິພາວິນີ | |
| 7101 ທຳມະສັງຄະນີ ປາລີ 7102 ວິພັງຄະ ປາລີ 7103 ຘາຕຸກະຖາ ປາລີ 7104 ປຸກຄະລະປັນຍັດຕິ ປາລີ 7105 ກະຖາວັດຖຸ ປາລີ 7106 ຍະມະກະ ປາລີ-1 7107 ຍະມະກະ ປາລີ-2 7108 ຍະມະກະ ປາລີ-3 7109 ປັດຖານະ ປາລີ-1 7110 ປັດຖານະ ປາລີ-2 7111 ປັດຖານະ ປາລີ-3 7112 ປັດຖານະ ປາລີ-4 7113 ປັດຖານະ ປາລີ-5 | 7201 ທຳມະສັງຄະນິ ອັດຖະກະຖາ 7202 ສັມໂມຫະວິໂນທະນີ ອັດຖະກະຖາ 7203 ປັຈຈະປະກະລະນະ ອັດຖະກະຖາ | 7301 ທຳມະສັງຄະນີ-ມູລະຏີກາ 7302 ວິພັງຄະ-ມູລະຏີກາ 7303 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ມູລະຏີກາ 7304 ທຳມະສັງຄະນີ-ອະນຸຏີກາ 7305 ປັຈຈະປະກະລະນະ-ອະນຸຏີກາ 7306 ອະພິທັມມາວະຕາໂຣ-ນາມະຣູປະປະຣິຈເທໂທ 7307 ອະພິທັມມັດຖະສັງຄະໂຫ 7308 ອະພິທັມມາວະຕາລະ-ປຸຣານະຏີກາ 7309 ອະພິທັມມາມາຕິກາປາລີ | |
| मराठी | |||
| पाळी | अट्ठकथा | टीका | अन्य |
| 1101 पाराजिक पाळी 1102 पाचित्तिय पाळी 1103 महावग्ग पाळी (विनय) 1104 चूळवग्ग पाळी 1105 परिवार पाळी | 1201 पाराजिककंड अट्ठकथा-१ 1202 पाराजिककंड अट्ठकथा-२ 1203 पाचित्तिय अट्ठकथा 1204 महावग्ग अट्ठकथा (विनय) 1205 चूळवग्ग अट्ठकथा 1206 परिवार अट्ठकथा | 1301 सारत्थदीपनी टीका-१ 1302 सारत्थदीपनी टीका-२ 1303 सारत्थदीपनी टीका-३ | 1401 द्वेमातिकापाळी 1402 विनयसंगह अट्ठकथा 1403 वजिरबुद्धि टीका 1404 विमतिविनोदनी टीका-१ 1405 विमतिविनोदनी टीका-२ 1406 विनयालंकार टीका-१ 1407 विनयालंकार टीका-२ 1408 कंखावितरणीपुराण टीका 1409 विनयविनिच्छय-उत्तरविनिच्छय 1410 विनयविनिच्छय टीका-१ 1411 विनयविनिच्छय टीका-२ 1412 पाचित्यादियोजनापाळी 1413 खुद्दसिक्खा-मूलसिक्खा 8401 विसुद्धिमग्ग-१ 8402 विसुद्धिमग्ग-२ 8403 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-१ 8404 विसुद्धिमग्ग-महाटीका-२ 8405 विसुद्धिमग्ग निदानकथा 8406 दीघनिकाय (पु-वि) 8407 मज्झिमनिकाय (पु-वि) 8408 संयुत्तनिकाय (पु-वि) 8409 अंगुत्तरनिकाय (पु-वि) 8410 विनयपिटक (पु-वि) 8411 अभिधम्मपिटक (पु-वि) 8412 अट्ठकथा (पु-वि) 8413 निरुत्तिदीपनी 8414 परमत्थदीपनी संगहमहाटीकापाठ 8415 अनुदीपनीपाठ 8416 पट्ठानुद्देस दीपनीपाठ 8417 नमक्कारटीका 8418 महापणामपाठ 8419 लक्खणातो बुद्धथोमनागाथा 8420 सुतवंदना 8421 कमलांजलि 8422 जिनालंकार 8423 पज्जमधु 8424 बुद्धगुणगाथावली 8425 चूळगंथवंस 8426 महावंस 8427 सासनवंस 8428 कच्चायनव्याकरणं 8429 मोग्गल्लानव्याकरणं 8430 सद्दनीतिप्पकरणं (पदमाला) 8431 सद्दनीतिप्पकरणं (धातुमाला) 8432 पदरूपसिद्धि 8433 मोग्गल्लानपंचिका 8434 पयोगसिद्धिपाठ 8435 वुत्तोदयपाठ 8436 अभिधानप्पदीपिकापाठ 8437 अभिधानप्पदीपिकाटीका 8438 सुबोधालंकारपाठ 8439 सुबोधालंकारटीका 8440 बालावतार गंठिपदत्थविनिच्छयसार 8441 लोकनीति 8442 सुत्तंतनीति 8443 सूरस्सतीनीति 8444 महारहनीति 8445 धम्मनीति 8446 कविदप्पणनीति 8447 नीतिमंजरी 8448 नरदक्खदीपनी 8449 चतुरारक्खदीपनी 8450 चाणक्यनीति 8451 रसवाहिनी 8452 सीमाविसोधनीपाठ 8453 वेस्संतरगीति 8454 मोग्गल्लान वुत्तिविवरणपंचिका 8455 थूपवंस 8456 दाठावंस 8457 धातुपाठविलासिनिया 8458 धातुवंस 8459 हत्थवनगल्लविहारवंस 8460 जिनचरितय 8461 जिनवंसदीपं 8462 तेलकटाहगाथा 8463 मिलिदटीका 8464 पदमंजरी 8465 पदसाधनं 8466 सद्दबिंदुपकरणं 8467 कच्चायनधातुमंजुसा 8468 सामंतकूटवण्णना |
| 2101 सीलक्खंधवग्ग पाळी 2102 महावग्ग पाळी (दीघ) 2103 पाथिकवग्ग पाळी | 2201 सीलक्खंधवग्ग अट्ठकथा 2202 महावग्ग अट्ठकथा (दीघ) 2203 पाथिकवग्ग अट्ठकथा | 2301 सीलक्खंधवग्ग टीका 2302 महावग्ग टीका (दीघ) 2303 पाथिकवग्ग टीका 2304 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-१ 2305 सीलक्खंधवग्ग-अभिनवटीका-२ | |
| 3101 मूलपण्णास पाळी 3102 मज्झिमपण्णास पाळी 3103 उपरिपण्णास पाळी | 3201 मूलपण्णास अट्ठकथा-१ 3202 मूलपण्णास अट्ठकथा-२ 3203 मज्झिमपण्णास अट्ठकथा 3204 उपरिपण्णास अट्ठकथा | 3301 मूलपण्णास टीका 3302 मज्झिमपण्णास टीका 3303 उपरिपण्णास टीका | |
| 4101 सगाथावग्ग पाळी 4102 निदानवग्ग पाळी 4103 खंधवग्ग पाळी 4104 सळायतनवग्ग पाळी 4105 महावग्ग पाळी (संयुत्त) | 4201 सगाथावग्ग अट्ठकथा 4202 निदानवग्ग अट्ठकथा 4203 खंधवग्ग अट्ठकथा 4204 सळायतनवग्ग अट्ठकथा 4205 महावग्ग अट्ठकथा (संयुत्त) | 4301 सगाथावग्ग टीका 4302 निदानवग्ग टीका 4303 खंधवग्ग टीका 4304 सळायतनवग्ग टीका 4305 महावग्ग टीका (संयुत्त) | |
| 5101 एककनिपात पाळी 5102 दुकनिपात पाळी 5103 तिकनिपात पाळी 5104 चतुक्कनिपात पाळी 5105 पंचकनिपात पाळी 5106 छक्कनिपात पाळी 5107 सत्तकनिपात पाळी 5108 अट्ठकादिनिपात पाळी 5109 नवकनिपात पाळी 5110 दसकनिपात पाळी 5111 एकादसकनिपात पाळी | 5201 एककनिपात अट्ठकथा 5202 दुक-तिक-चतुक्कनिपात अट्ठकथा 5203 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात अट्ठकथा 5204 अट्ठकादिनिपात अट्ठकथा | 5301 एककनिपात टीका 5302 दुक-तिक-चतुक्कनिपात टीका 5303 पंचक-छक्क-सत्तकनिपात टीका 5304 अट्ठकादिनिपात टीका | |
| 6101 खुद्दकपाठ पाळी 6102 धम्मपद पाळी 6103 उदान पाळी 6104 इतिवुत्तक पाळी 6105 सुत्तनिपात पाळी 6106 विमानवत्थु पाळी 6107 पेतवत्थु पाळी 6108 थेरगाथा पाळी 6109 थेरीगाथा पाळी 6110 अपदान पाळी-१ 6111 अपदान पाळी-२ 6112 बुद्धवंस पाळी 6113 चरियापिटक पाळी 6114 जातक पाळी-१ 6115 जातक पाळी-२ 6116 महानिद्देस पाळी 6117 चूळनिद्देस पाळी 6118 पटिसंभिदामग्ग पाळी 6119 नेत्तिप्पकरण पाळी 6120 मिलिंदपंह पाळी 6121 पेटकोपदेस पाळी | 6201 खुद्दकपाठ अट्ठकथा 6202 धम्मपद अट्ठकथा-१ 6203 धम्मपद अट्ठकथा-२ 6204 उदान अट्ठकथा 6205 इतिवुत्तक अट्ठकथा 6206 सुत्तनिपात अट्ठकथा-१ 6207 सुत्तनिपात अट्ठकथा-२ 6208 विमानवत्थु अट्ठकथा 6209 पेतवत्थु अट्ठकथा 6210 थेरगाथा अट्ठकथा-१ 6211 थेरगाथा अट्ठकथा-२ 6212 थेरीगाथा अट्ठकथा 6213 अपदान अट्ठकथा-१ 6214 अपदान अट्ठकथा-२ 6215 बुद्धवंस अट्ठकथा 6216 चरियापिटक अट्ठकथा 6217 जातक अट्ठकथा-१ 6218 जातक अट्ठकथा-२ 6219 जातक अट्ठकथा-३ 6220 जातक अट्ठकथा-४ 6221 जातक अट्ठकथा-५ 6222 जातक अट्ठकथा-६ 6223 जातक अट्ठकथा-७ 6224 महानिद्देस अट्ठकथा 6225 चूळनिद्देस अट्ठकथा 6226 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-१ 6227 पटिसंभिदामग्ग अट्ठकथा-२ 6228 नेत्तिप्पकरण अट्ठकथा | 6301 नेत्तिप्पकरण टीका 6302 नेत्तिविभाविनी | |
| 7101 धम्मसंगणी पाळी 7102 विभंग पाळी 7103 धातुकथा पाळी 7104 पुग्गलपंयत्ति पाळी 7105 कथावत्थु पाळी 7106 यमक पाळी-१ 7107 यमक पाळी-२ 7108 यमक पाळी-३ 7109 पट्ठान पाळी-१ 7110 पट्ठान पाळी-२ 7111 पट्ठान पाळी-३ 7112 पट्ठान पाळी-४ 7113 पट्ठान पाळी-५ | 7201 धम्मसंगणि अट्ठकथा 7202 सम्मोहविनोदनी अट्ठकथा 7203 पंचपकरण अट्ठकथा | 7301 धम्मसंगणी-मूलटीका 7302 विभंग-मूलटीका 7303 पंचपकरण-मूलटीका 7304 धम्मसंगणी-अनुटीका 7305 पंचपकरण-अनुटीका 7306 अभिधम्मावतारो-नामरूपपरिच्छेदो 7307 अभिधम्मत्थसंगहो 7308 अभिधम्मावतार-पुराणटीका 7309 अभिधम्ममातिकापाळी | |
1 . နမော တဿ ဘဂဝတော အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. . त्या भगवंत, अर्हत, सम्यक्संबुद्धाला माझा नमस्कार असो. အင်္ဂုတ္တရနိကာယော अंगुत्तरनिकाय အဋ္ဌကနိပါတပါဠိ अट्ठकनिपातपाळी ၁. ပဌမပဏ္ဏာသကံ १. प्रथम पण्णासक ၁. မေတ္တာဝဂ္ဂေါ १. मेत्तावग्ग (मैत्री वर्ग) ၁. မေတ္တာသုတ္တံ १. मेत्तासुत्त (मैत्री सुत्त) ၁. ဧဝံ [Pg.1] မေ သုတံ – ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ ဇေတဝနေ အနာထပိဏ္ဍိကဿ အာရာမေ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘ဘိက္ခဝေါ’’တိ. ‘‘ဘဒန္တေ’’တိ တေ ဘိက္ခူ ဘဂဝတော ပစ္စဿောသုံ. ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – १. असे मी ऐकले आहे – एका वेळी भगवान श्रावस्तीमध्ये अनाथपिंडिकाच्या जेतवन आरामात विहार करत होते. तेथे भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले – “भिक्खूंनो!” ते भिक्खू भगवंतांना प्रत्युत्तर देत म्हणाले – “भदंत!” भगवंतांनी हे सांगितले – ‘‘မေတ္တာယ, ဘိက္ခဝေ, စေတောဝိမုတ္တိယာ အာသေဝိတာယ ဘာဝိတာယ ဗဟုလီကတာယ ယာနီကတာယ ဝတ္ထုကတာယ အနုဋ္ဌိတာယ ပရိစိတာယ သုသမာရဒ္ဓါယ အဋ္ဌာနိသံသာ ပါဋိကင်္ခါ. ကတမေ အဋ္ဌ? သုခံ သုပတိ, သုခံ ပဋိဗုဇ္ဈတိ, န ပါပကံ သုပိနံ ပဿတိ, မနုဿာနံ ပိယော ဟောတိ, အမနုဿာနံ ပိယော ဟောတိ, ဒေဝတာ ရက္ခန္တိ, နာဿ အဂ္ဂိ ဝါ ဝိသံ ဝါ သတ္ထံ ဝါ ကမတိ, ဥတ္တရိံ အပ္ပဋိဝိဇ္ဈန္တော ဗြဟ္မလောကူပဂေါ ဟောတိ. မေတ္တာယ, ဘိက္ခဝေ, စေတောဝိမုတ္တိယာ အာသေဝိတာယ ဘာဝိတာယ ဗဟုလီကတာယ ယာနီကတာယ ဝတ္ထုကတာယ အနုဋ္ဌိတာယ ပရိစိတာယ သုသမာရဒ္ဓါယ ဣမေ အဋ္ဌာနိသံသာ ပါဋိကင်္ခါ’’တိ. “भिक्खूंनो, मेत्ता (मैत्री) चेतोविमुत्तीचा अभ्यास केला असता, ती विकसित केली असता, वारंवार सराव केला असता, तिला वाहन बनवले असता, आधार बनवले असता, दृढपणे प्रस्थापित केले असता, तिचा संचय केला असता आणि चांगल्या प्रकारे आरंभ केला असता, आठ प्रकारच्या फायद्यांची अपेक्षा बाळगता येते. कोणते आठ? (१) माणूस सुखाने झोपतो, (२) सुखाने जागा होतो, (३) वाईट स्वप्ने पाहत नाही, (४) मनुष्यांना प्रिय होतो, (५) अमनुष्यांना (अमानवी जीवांना) प्रिय होतो, (६) देवता त्याचे रक्षण करतात, (७) त्याला अग्नी, विष किंवा शस्त्र इजा करू शकत नाही, आणि (८) जर त्याने पुढील (उच्चतर) अवस्था प्राप्त केली नाही, तर तो ब्रह्मलोकात जातो. भिक्खूंनो, मेत्ता चेतोविमुत्तीचा अभ्यास केला असता, ती विकसित केली असता, वारंवार सराव केला असता, तिला वाहन बनवले असता, आधार बनवले असता, दृढपणे प्रस्थापित केले असता, तिचा संचय केला असता आणि चांगल्या प्रकारे आरंभ केला असता, या आठ फायद्यांची अपेक्षा बाळगता येते.” ‘‘ယော [Pg.2] စ မေတ္တံ ဘာဝယတိ, အပ္ပမာဏံ ပဋိဿတော ; တနူ သံယောဇနာ ဟောန္တိ, ပဿတော ဥပဓိက္ခယံ. “जो मनुष्य जागरूक राहून अमर्याद मेत्ता (मैत्री) भावना विकसित करतो, आणि उपाधींचा (क्लेशांचा) क्षय पाहतो, त्याची बंधने (संयोजने) क्षीण होतात.” ‘‘ဧကမ္ပိ စေ ပါဏမဒုဋ္ဌစိတ္တော,မေတ္တာယတိ ကုသလီ တေန ဟောတိ; သဗ္ဗေ စ ပါဏေ မနသာနုကမ္ပီ,ပဟူတမရိယော ပကရောတိ ပုညံ. “जर एखादा मनुष्य द्वेषरहित चित्ताने केवळ एका जरी प्राण्यावर मेत्ता (मैत्री) करतो, तर तो त्यामुळे कुशल (पुण्यवान) बनतो; आणि सर्व प्राण्यांविषयी मनात अनुकंपा बाळगणारा तो आर्य मुबलक पुण्याचा संचय करतो.” ‘‘ယေ သတ္တသဏ္ဍံ ပထဝိံ ဝိဇေတွာ,ရာဇိသယော ယဇမာနာ အနုပရိယဂါ; အဿမေဓံ ပုရိသမေဓံ,သမ္မာပါသံ ဝါဇပေယျံ နိရဂ္ဂဠံ. “ज्या राजर्षींनी प्राण्यांनी भरलेल्या या पृथ्वीवर विजय मिळवला आणि यज्ञ करत सर्वत्र संचार केला – जसे की अस्समेध, पुरिसमेध, सम्मापास, वाजपेय्य आणि निरग्गळ.” ‘‘မေတ္တဿ စိတ္တဿ သုဘာဝိတဿ,ကလမ္ပိ တေ နာနုဘဝန္တိ သောဠသိံ; စန္ဒပ္ပဘာ တာရဂဏာဝ သဗ္ဗေ,ယထာ န အဂ္ဃန္တိ ကလမ္ပိ သောဠသိံ. “हे सर्व यज्ञ चांगल्या प्रकारे विकसित केलेल्या मेत्ता-चित्ताच्या सोळाव्या भागाचीही बरोबरी करू शकत नाहीत, ज्याप्रमाणे सर्व ताऱ्यांचा प्रकाश चंद्राच्या प्रकाशाच्या सोळाव्या भागाचीही बरोबरी करू शकत नाही.” ‘‘ယော န ဟန္တိ န ဃာတေတိ, န ဇိနာတိ န ဇာပယေ; မေတ္တံသော သဗ္ဗဘူတာနံ, ဝေရံ တဿ န ကေနစီ’’တိ. ပဌမံ; “जो स्वतः कोणाची हत्या करत नाही, इतरांकडून हत्या करवत नाही, स्वतः कोणाला जिंकत नाही, इतरांकडून पराभूत करवत नाही; सर्व प्राण्यांविषयी मेत्ता बाळगणाऱ्या अशा व्यक्तीचे कोणाशीही वैर नसते.” पहिले सुत्त समाप्त. ၂. ပညာသုတ္တံ २. पञ्ञासुत्त (प्रज्ञा सुत्त) ၂. ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, ဟေတူ အဋ္ဌ ပစ္စယာ အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တန္တိ. ကတမေ အဋ္ဌ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သတ္ထာရံ ဥပနိဿာယ ဝိဟရတိ အညတရံ ဝါ ဂရုဋ္ဌာနိယံ သဗြဟ္မစာရိံ, ယတ္ထဿ တိဗ္ဗံ ဟိရောတ္တပ္ပံ ပစ္စုပဋ္ဌိတံ ဟောတိ ပေမဉ္စ ဂါရဝေါ စ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ပဌမော ဟေတု ပဌမော ပစ္စယော အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တတိ. २. “भिक्खूंनो, हे आठ हेतू आणि आठ प्रत्यय (कारण व अटी) आहेत, जे ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असणारी प्रज्ञा (पञ्ञा) प्राप्त झाली नसताना ती प्राप्त करून देण्यास, आणि प्राप्त झाली असल्यास तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतात. कोणते आठ? येथे, भिक्खूंनो, भिक्खू शास्त्यांच्या (गुरूंच्या) किंवा अशा एखाद्या आदरणीय सब्रह्मचारी (सहकारी भिक्खू) च्या आश्रयाने राहतो, ज्याच्याविषयी त्याच्या मनात तीव्र ह्री आणि ओत्तप्प (पापाची लाज आणि भय), प्रेम आणि आदर प्रस्थापित झालेला असतो. भिक्खूंनो, हा पहिला हेतू आणि पहिला प्रत्यय आहे जो ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असणारी प्रज्ञा प्राप्त झाली नसताना ती प्राप्त करून देण्यास, आणि प्राप्त झाली असल्यास तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘သော တံ သတ္ထာရံ ဥပနိဿာယ ဝိဟရန္တော အညတရံ ဝါ ဂရုဋ္ဌာနိယံ သဗြဟ္မစာရိံ, ယတ္ထဿ တိဗ္ဗံ ဟိရောတ္တပ္ပံ ပစ္စုပဋ္ဌိတံ ဟောတိ ပေမံ ဂါရဝေါ [Pg.3] စ, တေ ကာလေန ကာလံ ဥပသင်္ကမိတွာ ပရိပုစ္ဆတိ ပရိပဉှတိ – ‘ဣဒံ, ဘန္တေ, ကထံ; ဣမဿ ကော အတ္ထော’တိ? တဿ တေ အာယသ္မန္တော အဝိဝဋဉ္စေဝ ဝိဝရန္တိ, အနုတ္တာနီကတဉ္စ ဥတ္တာနီ ကရောန္တိ, အနေကဝိဟိတေသု စ ကင်္ခါဌာနိယေသု ဓမ္မေသု ကင်္ခံ ပဋိဝိနောဒေန္တိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဒုတိယော ဟေတု ဒုတိယော ပစ္စယော အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တတိ. “तो त्या शास्त्यांच्या किंवा आदरणीय सब्रह्मचारीच्या आश्रयाने राहत असताना, ज्याच्याविषयी त्याच्या मनात तीव्र ह्री-ओत्तप्प, प्रेम आणि आदर प्रस्थापित झालेला असतो, वेळोवेळी त्यांच्याकडे जाऊन विचारपूस करतो आणि प्रश्न विचारतो – ‘भंते, हे कसे आहे? याचा अर्थ काय आहे?’ ते आयुष्यमान भिक्खू त्याच्यासाठी जे उघड केले गेले नाही ते उघड करतात, जे स्पष्ट केले गेले नाही ते स्पष्ट करतात, आणि अनेक प्रकारच्या शंकास्पद गोष्टींविषयी त्याच्या शंकांचे निरसन करतात. भिक्खूंनो, हा दुसरा हेतू आणि दुसरा प्रत्यय आहे जो ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असणारी प्रज्ञा प्राप्त झाली नसताना ती प्राप्त करून देण्यास, आणि प्राप्त झाली असल्यास तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘သော တံ ဓမ္မံ သုတွာ ဒွယေန ဝူပကာသေန သမ္ပာဒေတိ – ကာယဝူပကာသေန စ စိတ္တဝူပကာသေန စ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, တတိယော ဟေတု တတိယော ပစ္စယော အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တတိ. “तो तो धम्म ऐकून दोन प्रकारच्या एकांताने (विवेक किंवा अलिप्ततेने) स्वतःला परिपूर्ण करतो – काय-विवेक (शारीरिक एकांत) आणि चित्त-विवेक (मानसिक एकांत). भिक्खूंनो, हा तिसरा हेतू आणि तिसरा प्रत्यय आहे जो ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असणारी प्रज्ञा प्राप्त झाली नसताना ती प्राप्त करून देण्यास, आणि प्राप्त झाली असल्यास तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘သီလဝါ ဟောတိ, ပါတိမောက္ခသံဝရသံဝုတော ဝိဟရတိ အာစာရဂေါစရသမ္ပန္နော အဏုမတ္တေသု ဝဇ္ဇေသု ဘယဒဿာဝီ, သမာဒါယ သိက္ခတိ သိက္ခာပဒေသု. အယံ, ဘိက္ခဝေ, စတုတ္ထော ဟေတု စတုတ္ထော ပစ္စယော အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တတိ. “तो शीलवान असतो; पातिमोक्ख संवराने सुरक्षित राहून विहार करतो; आचार आणि गोचर (योग्य वर्तन व संपर्क) यांनी युक्त असतो; अगदी लहान दोषांमध्येही भय पाहणारा असतो; आणि शिक्षापदांचे ग्रहण करून त्यांनुसार स्वतःला प्रशिक्षित करतो. भिक्खूंनो, हा चौथा हेतू आणि चौथा प्रत्यय आहे जो ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असणारी प्रज्ञा प्राप्त झाली नसताना ती प्राप्त करून देण्यास, आणि प्राप्त झाली असल्यास तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘ဗဟုဿုတော ဟောတိ သုတဓရော သုတသန္နိစယော. ယေ တေ ဓမ္မာ အာဒိကလျာဏာ မဇ္ဈေကလျာဏာ ပရိယောသာနကလျာဏာ သာတ္ထံ သဗျဉ္ဇနံ ကေဝလပရိပုဏ္ဏံ ပရိသုဒ္ဓံ ဗြဟ္မစရိယံ အဘိဝဒန္တိ, တထာရူပါဿ ဓမ္မာ ဗဟုဿုတာ ဟောန္တိ ဓာတာ ဝစသာ ပရိစိတာ မနသာနုပေက္ခိတာ ဒိဋ္ဌိယာ သုပ္ပဋိဝိဒ္ဓါ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ပဉ္စမော ဟေတု ပဉ္စမော ပစ္စယော အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တတိ. “तो बहुश्रुत असतो, श्रुत (धम्मज्ञान) धारण करणारा आणि श्रुताचा संचय करणारा असतो. जे धम्म सुरुवातीला कल्याणकारी, मध्ये कल्याणकारी आणि शेवटी कल्याणकारी आहेत, जे अर्थ आणि व्यंजनासह (शब्दांसह) परिपूर्ण आणि अत्यंत शुद्ध ब्रह्मचर्य प्रकट करतात, अशा धम्मांचे त्याने विपुल श्रवण केलेले असते, ते मनात धारण केलेले असतात, वाणीने त्यांचा सराव केलेला असतो, मनाने त्यांचे चिंतन केलेले असते आणि प्रज्ञेने (दृष्टीने) त्यांचे चांगल्या प्रकारे आकलन केलेले असते. भिक्खूंनो, हा पाचवा हेतू आणि पाचवा प्रत्यय आहे जो ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असणारी प्रज्ञा प्राप्त झाली नसताना ती प्राप्त करून देण्यास, आणि प्राप्त झाली असल्यास तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘အာရဒ္ဓဝီရိယော ဝိဟရတိ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ပဟာနာယ, ကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဥပသမ္ပဒါယ, ထာမဝါ ဒဠှပရက္ကမော အနိက္ခိတ္တဓုရော ကုသလေသု ဓမ္မေသု. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဆဋ္ဌော ဟေတု ဆဋ္ဌော ပစ္စယော အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တတိ. “तो अकुशल धम्मांचा त्याग करण्यासाठी आणि कुशल धम्मांचे संपादन करण्यासाठी दृढ प्रयत्नशील राहून विहार करतो; तो बलवान, पराक्रमी आणि कुशल धम्मांच्या बाबतीत आपली जबाबदारी न सोडणारा असतो. भिक्खूंनो, हा सहावा हेतू आणि सहावा प्रत्यय आहे जो ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असणारी प्रज्ञा प्राप्त झाली नसताना ती प्राप्त करून देण्यास, आणि प्राप्त झाली असल्यास तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘သံဃဂတော [Pg.4] ခေါ ပန အနာနာကထိကော ဟောတိ အတိရစ္ဆာနကထိကော. သာမံ ဝါ ဓမ္မံ ဘာသတိ ပရံ ဝါ အဇ္ဈေသတိ အရိယံ ဝါ တုဏှီဘာဝံ နာတိမညတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တမော ဟေတု သတ္တမော ပစ္စယော အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တတိ. “तसेच, संघात असताना तो निरर्थक गप्पा मारत नाही किंवा तिरच्छानकथा (धम्माच्या विरुद्ध असणाऱ्या निरर्थक गोष्टी) बोलत नाही. तो स्वतः धम्म उपदेश करतो किंवा इतरांना उपदेश करण्याची विनंती करतो, अथवा आर्य मौनाचा (मनाच्या एकाग्रतेचा) अनादर करत नाही. भिक्खूंनो, हा सातवा हेतू आणि सातवा प्रत्यय आहे जो ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असणारी प्रज्ञा प्राप्त झाली नसताना ती प्राप्त करून देण्यास, आणि प्राप्त झाली असल्यास तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘ပဉ္စသု ခေါ ပန ဥပါဒါနက္ခန္ဓေသု ဥဒယဗ္ဗယာနုပဿီ ဝိဟရတိ – ‘ဣတိ ရူပံ, ဣတိ ရူပဿ သမုဒယော, ဣတိ ရူပဿ အတ္ထင်္ဂမော; ဣတိ ဝေဒနာ, ဣတိ ဝေဒနာယ သမုဒယော, ဣတိ ဝေဒနာယ အတ္ထင်္ဂမော; ဣတိ သညာ…ပေ… ဣတိ သင်္ခါရာ…ပေ… ဣတိ ဝိညာဏံ, ဣတိ ဝိညာဏဿ သမုဒယော, ဣတိ ဝိညာဏဿ အတ္ထင်္ဂမော’တိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌမော ဟေတု အဋ္ဌမော ပစ္စယော အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တတိ. शिवाय, तो पाच उपादानस्कंधांमध्ये उदय आणि अस्त यांचे सतत अनुदर्शन करत विहरतो – 'असे रूप आहे, असा रूपाचा उदय आहे, असा रूपाचा अस्त आहे; अशी वेदना आहे, असा वेदनेचा उदय आहे, असा वेदनेचा अस्त आहे; अशी संज्ञा आहे... असे संस्कार आहेत... असे विज्ञान आहे, असा विज्ञानाचा उदय आहे, असा विज्ञानाचा अस्त आहे.' भिक्खूहो, हा आठवा हेतू आणि आठवा प्रत्यय आहे, जो ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असलेल्या प्रज्ञेच्या, जी अद्याप प्राप्त झाली नाही तिच्या प्राप्तीसाठी, आणि जी प्राप्त झाली आहे तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘တမေနံ သဗြဟ္မစာရီ ဧဝံ သမ္ဘာဝေန္တိ – ‘အယံ ခေါ အာယသ္မာ သတ္ထာရံ ဥပနိဿာယ ဝိဟရတိ အညတရံ ဝါ ဂရုဋ္ဌာနိယံ သဗြဟ္မစာရိံ, ယတ္ထဿ တိဗ္ဗံ ဟိရောတ္တပ္ပံ ပစ္စုပဋ္ဌိတံ ဟောတိ ပေမဉ္စ ဂါရဝေါ စ. အဒ္ဓါ အယမာယသ္မာ ဇာနံ ဇာနာတိ ပဿံ ပဿတီ’တိ! အယမ္ပိ ဓမ္မော ပိယတ္တာယ ဂရုတ္တာယ ဘာဝနာယ သာမညာယ ဧကီဘာဝါယ သံဝတ္တတိ. त्या भिक्खूची त्याचे सब्रह्मचारी अशी प्रशंसा करतात – 'हे आयुष्यमान शास्त्यांच्या किंवा आदरणीय स्थानी असलेल्या एखाद्या सब्रह्मचाऱ्याच्या आश्रयाने विहरतात, ज्यांच्याविषयी त्यांच्या मनात तीव्र ह्री आणि ओत्तप्प, प्रेम आणि आदर प्रस्थापित झालेला आहे. निश्चितच हे आयुष्यमान जाणत असून जाणतात आणि पाहत असून पाहतात!' हा धर्म देखील प्रियतेसाठी, आदरणीयतेसाठी, भावनेसाठी, श्रामण्यभावासाठी आणि ऐक्यासाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘‘တံ ခေါ ပနာယမာယသ္မာ သတ္ထာရံ ဥပနိဿာယ ဝိဟရန္တော အညတရံ ဝါ ဂရုဋ္ဌာနိယံ သဗြဟ္မစာရိံ, ယတ္ထဿ တိဗ္ဗံ ဟိရောတ္တပ္ပံ ပစ္စုပဋ္ဌိတံ ဟောတိ ပေမဉ္စ ဂါရဝေါ စ, တေ ကာလေန ကာလံ ဥပသင်္ကမိတွာ ပရိပုစ္ဆတိ ပရိပဉှတိ – ဣဒံ, ဘန္တေ, ကထံ; ဣမဿ ကော အတ္ထောတိ? တဿ တေ အာယသ္မန္တော အဝိဝဋဉ္စေဝ ဝိဝရန္တိ, အနုတ္တာနီကတဉ္စ ဥတ္တာနီ ကရောန္တိ, အနေကဝိဟိတေသု စ ကင်္ခါဌာနိယေသု ဓမ္မေသု ကင်္ခံ ပဋိဝိနောဒေန္တိ. အဒ္ဓါ အယမာယသ္မာ ဇာနံ ဇာနာတိ ပဿံ ပဿတီ’တိ! အယမ္ပိ ဓမ္မော ပိယတ္တာယ ဂရုတ္တာယ ဘာဝနာယ သာမညာယ ဧကီဘာဝါယ သံဝတ္တတိ. ‘ते आयुष्यमान शास्त्यांच्या किंवा आदरणीय स्थानी असलेल्या एखाद्या सब्रह्मचाऱ्याच्या आश्रयाने विहरत असताना, ज्यांच्याविषयी त्यांच्या मनात तीव्र ह्री आणि ओत्तप्प, प्रेम आणि आदर प्रस्थापित झालेला आहे, त्यांच्याकडे वेळोवेळी जाऊन विचारपूस करतात, प्रश्न विचारतात – "भंते, हे कसे आहे? याचा अर्थ काय आहे?" त्यावर ते आयुष्यमान त्यांच्यासाठी न उघडलेल्या गोष्टी स्पष्ट करतात, ज्या गोष्टी स्पष्ट झाल्या नव्हत्या त्या स्पष्ट करून सांगतात, आणि अनेक प्रकारच्या शंकास्पद बाबींमधील त्यांच्या शंकांचे निरसन करतात. निश्चितच हे आयुष्यमान जाणत असून जाणतात आणि पाहत असून पाहतात!' हा धर्म देखील प्रियतेसाठी, आदरणीयतेसाठी, भावनेसाठी, श्रामण्यभावासाठी आणि ऐक्यासाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘‘တံ ခေါ ပနာယမာယသ္မာ ဓမ္မံ သုတွာ ဒွယေန ဝူပကာသေန သမ္ပာဒေတိ – ကာယဝူပကာသေန စ စိတ္တဝူပကာသေန စ. အဒ္ဓါ အယမာယသ္မာ ဇာနံ ဇာနာတိ ပဿံ ပဿတီ’တိ! အယမ္ပိ ဓမ္မော ပိယတ္တာယ ဂရုတ္တာယ ဘာဝနာယ သာမညာယ ဧကီဘာဝါယ သံဝတ္တတိ. ‘ते आयुष्यमान तो धम्म ऐकून दोन प्रकारच्या एकांताने स्वतःला संपन्न करतात – कायिक एकांत आणि मानसिक एकांत. निश्चितच हे आयुष्यमान जाणत असून जाणतात आणि पाहत असून पाहतात!' हा धर्म देखील प्रियतेसाठी, आदरणीयतेसाठी, भावनेसाठी, श्रामण्यभावासाठी आणि ऐक्यासाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘‘သီလဝါ [Pg.5] ခေါ ပနာယမာယသ္မာ ပါတိမောက္ခသံဝရသံဝုတော ဝိဟရတိ အာစာရဂေါစရသမ္ပန္နော အဏုမတ္တေသု ဝဇ္ဇေသု ဘယဒဿာဝီ, သမာဒါယ သိက္ခတိ သိက္ခာပဒေသု. အဒ္ဓါ အယမာယသ္မာ ဇာနံ ဇာနာတိ ပဿံ ပဿတီ’တိ! အယမ္ပိ ဓမ္မော ပိယတ္တာယ ဂရုတ္တာယ ဘာဝနာယ သာမညာယ ဧကီဘာဝါယ သံဝတ္တတိ. ‘ते आयुष्यमान शीलवान आहेत, पातिमोक्ख संवराने संवरित होऊन विहरतात, आचार आणि गोचराने संपन्न आहेत, सूक्ष्म दोषांमध्येही भय पाहणारे आहेत आणि शिक्षापदांचे ग्रहण करून त्यांनुसार आचरण करतात. निश्चितच हे आयुष्यमान जाणत असून जाणतात आणि पाहत असून पाहतात!' हा धर्म देखील प्रियतेसाठी, आदरणीयतेसाठी, भावनेसाठी, श्रामण्यभावासाठी आणि ऐक्यासाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘‘ဗဟုဿုတော ခေါ ပနာယမာယသ္မာ သုတဓရော သုတသန္နိစယော. ယေ တေ ဓမ္မာ အာဒိကလျာဏာ မဇ္ဈေကလျာဏာ ပရိယောသာနကလျာဏာ သာတ္ထံ သဗျဉ္ဇနံ ကေဝလပရိပုဏ္ဏံ ပရိသုဒ္ဓံ ဗြဟ္မစရိယံ အဘိဝဒန္တိ, တထာရူပါဿ ဓမ္မာ ဗဟုဿုတာ ဟောန္တိ ဓာတာ ဝစသာ ပရိစိတာ မနသာနုပေက္ခိတာ ဒိဋ္ဌိယာ သုပ္ပဋိဝိဒ္ဓါ. အဒ္ဓါ အယမာယသ္မာ ဇာနံ ဇာနာတိ ပဿံ ပဿတီ’တိ! အယမ္ပိ ဓမ္မော ပိယတ္တာယ ဂရုတ္တာယ ဘာဝနာယ သာမညာယ ဧကီဘာဝါယ သံဝတ္တတိ. ‘ते आयुष्यमान बहुश्रुत आहेत, श्रुत धारण करणारे आणि श्रुताचा संग्रह करणारे आहेत. जे धम्म सुरुवातीला कल्याणकारी, मध्ये कल्याणकारी आणि शेवटी कल्याणकारी आहेत, जे अर्थासह आणि व्यंजनासह परिपूर्ण आणि अत्यंत शुद्ध अशा ब्रह्मचर्याचे प्रतिपादन करतात, अशा प्रकारच्या धम्माचे त्यांनी विपुल श्रवण केले आहे, ते कंठस्थ केले आहे, वाणीने त्याचा सराव केला आहे, मनाने त्याचे चिंतन केले आहे आणि प्रज्ञेने त्याचा चांगला वेध घेतला आहे. निश्चितच हे आयुष्यमान जाणत असून जाणतात आणि पाहत असून पाहतात!' हा धर्म देखील प्रियतेसाठी, आदरणीयतेसाठी, भावनेसाठी, श्रामण्यभावासाठी आणि ऐक्यासाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘‘အာရဒ္ဓဝီရိယော ခေါ ပနာယမာယသ္မာ ဝိဟရတိ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ပဟာနာယ, ကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဥပသမ္ပဒါယ, ထာမဝါ ဒဠှပရက္ကမော အနိက္ခိတ္တဓုရော ကုသလေသု ဓမ္မေသု. အဒ္ဓါ အယမာယသ္မာ ဇာနံ ဇာနာတိ ပဿံ ပဿတီ’တိ! အယမ္ပိ ဓမ္မော ပိယတ္တာယ ဂရုတ္တာယ ဘာဝနာယ သာမညာယ ဧကီဘာဝါယ သံဝတ္တတိ. ‘ते आयुष्यमान अकुशल धर्मांच्या त्यागासाठी आणि कुशल धर्मांच्या प्राप्तीसाठी उद्योगी होऊन विहरतात, ते बलवान, दृढ पराक्रमी आणि कुशल धर्मांच्या बाबतीत आपली धुरा न सोडणारे आहेत. निश्चितच हे आयुष्यमान जाणत असून जाणतात आणि पाहत असून पाहतात!' हा धर्म देखील प्रियतेसाठी, आदरणीयतेसाठी, भावनेसाठी, श्रामण्यभावासाठी आणि ऐक्यासाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘‘သံဃဂတော ခေါ ပနာယမာယသ္မာ အနာနာကထိကော ဟောတိ အတိရစ္ဆာနကထိကော. သာမံ ဝါ ဓမ္မံ ဘာသတိ ပရံ ဝါ အဇ္ဈေသတိ အရိယံ ဝါ တုဏှီဘာဝံ နာတိမညတိ. အဒ္ဓါ အယမာယသ္မာ ဇာနံ ဇာနာတိ ပဿံ ပဿတီ’တိ! အယမ္ပိ ဓမ္မော ပိယတ္တာယ ဂရုတ္တာယ ဘာဝနာယ သာမညာယ ဧကီဘာဝါယ သံဝတ္တတိ. ‘ते आयुष्यमान संघात गेले असता निरर्थक गप्पा मारत नाहीत किंवा अयोग्य चर्चा करत नाहीत. ते स्वतः धम्म उपदेश करतात किंवा इतरांना उपदेश करण्याची विनंती करतात, आणि आर्य मौनाचा अनादर करत नाहीत. निश्चितच हे आयुष्यमान जाणत असून जाणतात आणि पाहत असून पाहतात!' हा धर्म देखील प्रियतेसाठी, आदरणीयतेसाठी, भावनेसाठी, श्रामण्यभावासाठी आणि ऐक्यासाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘‘ပဉ္စသု ခေါ ပနာယမာယသ္မာ ဥပါဒါနက္ခန္ဓေသု ဥဒယဗ္ဗယာနုပဿီ ဝိဟရတိ – ဣတိ ရူပံ, ဣတိ ရူပဿ သမုဒယော, ဣတိ ရူပဿ အတ္ထင်္ဂမော; ဣတိ ဝေဒနာ…ပေ… ဣတိ သညာ…ပေ… ဣတိ သင်္ခါရာ…ပေ… ဣတိ ဝိညာဏံ, ဣတိ ဝိညာဏဿ သမုဒယော, ဣတိ ဝိညာဏဿ အတ္ထင်္ဂမောတိ. အဒ္ဓါ အယမာယသ္မာ ဇာနံ ဇာနာတိ ပဿံ ပဿတီ’တိ! အယမ္ပိ ဓမ္မော ပိယတ္တာယ ဂရုတ္တာယ ဘာဝနာယ သာမညာယ ဧကီဘာဝါယ သံဝတ္တတိ. ‘ते आयुष्यमान पाच उपादानस्कंधांमध्ये उदय आणि अस्त यांचे सतत अनुदर्शन करत विहरतात – असे रूप आहे, असा रूपाचा उदय आहे, असा रूपाचा अस्त आहे; अशी वेदना आहे... अशी संज्ञा आहे... असे संस्कार आहेत... असे विज्ञान आहे, असा विज्ञानाचा उदय आहे, असा विज्ञानाचा अस्त आहे. निश्चितच हे आयुष्यमान जाणत असून जाणतात आणि पाहत असून पाहतात!' हा धर्म देखील प्रियतेसाठी, आदरणीयतेसाठी, भावनेसाठी, श्रामण्यभावासाठी आणि ऐक्यासाठी कारणीभूत ठरतो. ‘‘ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဟေတူ အဋ္ဌ ပစ္စယာ အာဒိဗြဟ္မစရိယိကာယ ပညာယ အပ္ပဋိလဒ္ဓါယ ပဋိလာဘာယ, ပဋိလဒ္ဓါယ ဘိယျောဘာဝါယ ဝေပုလ္လာယ ဘာဝနာယ ပါရိပူရိယာ သံဝတ္တန္တီ’’တိ. ဒုတိယံ. भिक्खूहो, हे आठ हेतू आणि आठ प्रत्यय आहेत, जे ब्रह्मचर्याच्या आरंभासाठी आवश्यक असलेल्या प्रज्ञेच्या, जी अद्याप प्राप्त झाली नाही तिच्या प्राप्तीसाठी, आणि जी प्राप्त झाली आहे तिच्या वृद्धीसाठी, विस्तारासाठी, भावनेसाठी व परिपूर्णतेसाठी कारणीभूत ठरतात. ၃. ပဌမအပ္ပိယသုတ္တံ ३. प्रथम अप्पिय सुत्त ၃. ‘‘အဋ္ဌဟိ[Pg.6], ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သဗြဟ္မစာရီနံ အပ္ပိယော စ ဟောတိ အမနာပေါ စ အဂရု စ အဘာဝနီယော စ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု အပ္ပိယပသံသီ စ ဟောတိ, ပိယဂရဟီ စ, လာဘကာမော စ, သက္ကာရကာမော စ, အဟိရိကော စ, အနောတ္တပ္ပီ စ, ပါပိစ္ဆော စ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိ စ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သဗြဟ္မစာရီနံ အပ္ပိယော စ ဟောတိ အမနာပေါ စ အဂရု စ အဘာဝနီယော စ. ३. भिक्खूहो, आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आपल्या सब्रह्मचाऱ्यांना अप्रिय, अमनाप, अनादरणीय आणि अभावनिय वाटतो. कोणत्या आठ गुणांनी? भिक्खूहो, या धम्म-विनयात भिक्खू अप्रिय व्यक्तींची प्रशंसा करणारा असतो, प्रिय व्यक्तींची निंदा करणारा असतो, लाभाची इच्छा धरणारा असतो, आदराची इच्छा धरणारा असतो, ह्री-रहित असतो, ओत्तप्प-रहित असतो, वाईट इच्छा बाळगणारा असतो आणि मिथ्यादृष्टी असलेला असतो. भिक्खूहो, या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आपल्या सब्रह्मचाऱ्यांना अप्रिय, अमनाप, अनादरणीय आणि अभावनिय वाटतो. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သဗြဟ္မစာရီနံ ပိယော စ ဟောတိ မနာပေါ စ ဂရု စ ဘာဝနီယော စ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု န အပ္ပိယပသံသီ စ ဟောတိ, န ပိယဂရဟီ စ, န လာဘကာမော စ, န သက္ကာရကာမော စ, ဟိရီမာ စ ဟောတိ, ဩတ္တပ္ပီ စ, အပ္ပိစ္ဆော စ, သမ္မာဒိဋ္ဌိ စ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သဗြဟ္မစာရီနံ ပိယော စ ဟောတိ မနာပေါ စ ဂရု စ ဘာဝနီယော စာ’’တိ. တတိယံ. भिक्खूहो, आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आपल्या सब्रह्मचाऱ्यांना प्रिय, मनाप, आदरणीय आणि भावनिय वाटतो. कोणत्या आठ गुणांनी? भिक्खूहो, या धम्म-विनयात भिक्खू अप्रिय व्यक्तींची प्रशंसा करत नाही, प्रिय व्यक्तींची निंदा करत नाही, लाभाची इच्छा धरत नाही, आदराची इच्छा धरत नाही, ह्रीवान असतो, ओत्तप्पी असतो, अल्पेच्छ असतो आणि सम्यक् दृष्टी असलेला असतो. भिक्खूहो, या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आपल्या सब्रह्मचाऱ्यांना प्रिय, मनाप, आदरणीय आणि भावनिय वाटतो. ၄. ဒုတိယအပ္ပိယသုတ္တံ ४. द्वितीय अप्पिय सुत्त ၄. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သဗြဟ္မစာရီနံ အပ္ပိယော စ ဟောတိ အမနာပေါ စ အဂရု စ အဘာဝနီယော စ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု လာဘကာမော စ ဟောတိ, သက္ကာရကာမော စ, အနဝညတ္တိကာမော စ, အကာလညူ စ, အမတ္တညူ စ, အသုစိ စ, ဗဟုဘာဏီ စ, အက္ကောသကပရိဘာသကော စ သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သဗြဟ္မစာရီနံ အပ္ပိယော စ ဟောတိ အမနာပေါ စ အဂရု စ အဘာဝနီယော စ. ४. भिक्षूंनो, आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू आपल्या सहकारी ब्रह्मचाऱ्यांचा अप्रिय, नावडता, अनादरणीय आणि अभावनिय (आदर न वाढवणारा) होतो. कोणत्या आठ गुणांनी? भिक्षूंनो, या शासनात भिक्षू हा लाभाची आकांक्षा बाळगणारा, सत्काराची आकांक्षा बाळगणारा, प्रसिद्धीची (अनादर न होण्याची) आकांक्षा बाळगणारा, अयोग्य वेळ न जाणणारा, प्रमाण न जाणणारा, अशुद्ध आचरणाचा, बडबडा आणि आपल्या सहकारी ब्रह्मचाऱ्यांना शिवीगाळ व निंदा करणारा असतो. भिक्षूंनो, खरोखर या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू आपल्या सहकारी ब्रह्मचाऱ्यांचा अप्रिय, नावडता, अनादरणीय आणि अभावनिय होतो. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သဗြဟ္မစာရီနံ ပိယော စ ဟောတိ မနာပေါ စ ဂရု စ ဘာဝနီယော စ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု န လာဘကာမော စ ဟောတိ, န သက္ကာရကာမော စ, န အနဝညတ္တိကာမော စ, ကာလညူ စ, မတ္တညူ စ, သုစိ စ, န ဗဟုဘာဏီ စ, အနက္ကောသကပရိဘာသကော စ သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သဗြဟ္မစာရီနံ ပိယော စ ဟောတိ မနာပေါ စ ဂရု စ ဘာဝနီယော စာ’’တိ. စတုတ္ထံ. भिक्षूंनो, आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू आपल्या सहकारी ब्रह्मचाऱ्यांचा प्रिय, आवडता, आदरणीय आणि भावनिय (आदर वाढवणारा) होतो. कोणत्या आठ गुणांनी? भिक्षूंनो, या शासनात भिक्षू हा लाभाची आकांक्षा न बाळगणारा, सत्काराची आकांक्षा न बाळगणारा, प्रसिद्धीची (अनादर न होण्याची) आकांक्षा न बाळगणारा, योग्य वेळ जाणणारा, प्रमाण जाणणारा, शुद्ध आचरणाचा, बडबडा नसणारा आणि आपल्या सहकारी ब्रह्मचाऱ्यांना शिवीगाळ व निंदा न करणारा असतो. भिक्षूंनो, खरोखर या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू आपल्या सहकारी ब्रह्मचाऱ्यांचा प्रिय, आवडता, आदरणीय आणि भावनिय होतो. ၅. ပဌမလောကဓမ္မသုတ္တံ ५. प्रथम लोकधम्म सूत्र ၅. ‘‘အဋ္ဌိမေ[Pg.7], ဘိက္ခဝေ, လောကဓမ္မာ လောကံ အနုပရိဝတ္တန္တိ, လောကော စ အဋ္ဌ လောကဓမ္မေ အနုပရိဝတ္တတိ. ကတမေ အဋ္ဌ? လာဘော စ, အလာဘော စ, ယသော စ, အယသော စ, နိန္ဒာ စ, ပသံသာ စ, သုခဉ္စ, ဒုက္ခဉ္စ. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ လောကဓမ္မာ လောကံ အနုပရိဝတ္တန္တိ, လောကော စ ဣမေ အဋ္ဌ လောကဓမ္မေ အနုပရိဝတ္တတီ’’တိ. ५. भिक्षूंनो, हे आठ लोकधर्म जगाच्या मागे चालतात आणि जगही या आठ लोकधर्मांच्या मागे चालते. कोणते आठ? लाभ आणि अलाभ, यश आणि अपयश, निंदा आणि प्रशंसा, सुख आणि दुःख. भिक्षूंनो, खरोखर हे आठ लोकधर्म जगाच्या मागे चालतात आणि जगही या आठ लोकधर्मांच्या मागे चालते. ‘‘လာဘော အလာဘော စ ယသာယသော စ,နိန္ဒာ ပသံသာ စ သုခံ ဒုခဉ္စ; ဧတေ အနိစ္စာ မနုဇေသု ဓမ္မာ,အသဿတာ ဝိပရိဏာမဓမ္မာ. लाभ आणि अलाभ, यश आणि अपयश, निंदा आणि प्रशंसा, सुख आणि दुःख; मानवांमधील हे धर्म अनित्य आहेत, अशाश्वत आहेत आणि बदलणाऱ्या स्वभावाचे आहेत. ‘‘ဧတေ စ ဉတွာ သတိမာ သုမေဓော,အဝေက္ခတိ ဝိပရိဏာမဓမ္မေ; ဣဋ္ဌဿ ဓမ္မာ န မထေန္တိ စိတ္တံ,အနိဋ္ဌတော နော ပဋိဃာတမေတိ. स्मृतिमान आणि सुज्ञ मनुष्य हे जाणून, हे धर्म बदलणाऱ्या स्वभावाचे आहेत असे पाहतो. अनुकूल गोष्टी त्याच्या चित्ताला विचलित करत नाहीत, आणि प्रतिकूल गोष्टींमुळे तो द्वेषाला प्राप्त होत नाही. ‘‘တဿာနုရောဓာ အထ ဝါ ဝိရောဓာ,ဝိဓူပိတာ အတ္ထင်္ဂတာ န သန္တိ; ပဒဉ္စ ဉတွာ ဝိရဇံ အသောကံ,သမ္မပ္ပဇာနာတိ ဘဝဿ ပါရဂူ’’တိ. ပဉ္စမံ; त्याचे अनुकूल किंवा प्रतिकूल भाव नष्ट झाले आहेत, मावळले आहेत आणि आता अस्तित्वात नाहीत. धुलिकणरहित आणि शोकरहित अशा पदाला (निर्वाणाला) जाणून, संसाराच्या पलीकडे गेलेला तो ज्ञानी पुरुष भवसागराच्या पार जाण्याला चांगल्या प्रकारे जाणतो. ၆. ဒုတိယလောကဓမ္မသုတ္တံ ६. द्वितीय लोकधम्म सूत्र ၆. ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, လောကဓမ္မာ လောကံ အနုပရိဝတ္တန္တိ, လောကော စ အဋ္ဌ လောကဓမ္မေ အနုပရိဝတ္တတိ. ကတမေ အဋ္ဌ? လာဘော စ, အလာဘော စ, ယသော စ, အယသော စ, နိန္ဒာ စ, ပသံသာ စ, သုခဉ္စ, ဒုက္ခဉ္စ. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ လောကဓမ္မာ လောကံ အနုပရိဝတ္တန္တိ, လောကော စ ဣမေ အဋ္ဌ လောကဓမ္မေ အနုပရိဝတ္တတိ. ६. भिक्षूंनो, हे आठ लोकधर्म जगाच्या मागे चालतात आणि जगही या आठ लोकधर्मांच्या मागे चालते. कोणते आठ? लाभ आणि अलाभ, यश आणि अपयश, निंदा आणि प्रशंसा, सुख आणि दुःख. भिक्षूंनो, खरोखर हे आठ लोकधर्म जगाच्या मागे चालतात आणि जगही या आठ लोकधर्मांच्या मागे चालते. ‘‘အဿုတဝတော, ဘိက္ခဝေ, ပုထုဇ္ဇနဿ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘောပိ အလာဘောပိ ယသောပိ အယသောပိ နိန္ဒာပိ ပသံသာပိ သုခမ္ပိ ဒုက္ခမ္ပိ. သုတဝတောပိ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကဿ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘောပိ အလာဘောပိ ယသောပိ အယသောပိ နိန္ဒာပိ ပသံသာပိ သုခမ္ပိ ဒုက္ခမ္ပိ. တတြ, ဘိက္ခဝေ, ကော ဝိသေသော ကော [Pg.8] အဓိပ္ပယာသော ကိံ နာနာကရဏံ သုတဝတော အရိယသာဝကဿ အဿုတဝတာ ပုထုဇ္ဇနေနာ’’တိ? ‘‘ဘဂဝံမူလကာ နော, ဘန္တေ, ဓမ္မာ ဘဂဝံနေတ္တိကာ ဘဂဝံပဋိသရဏာ. သာဓု ဝတ, ဘန္တေ, ဘဂဝန္တံယေဝ ပဋိဘာတု ဧတဿ ဘာသိတဿ အတ္ထော. ဘဂဝတော သုတွာ ဘိက္ခူ ဓာရေဿန္တီ’’တိ. भिक्षूंनो, अश्रुतवान सामान्य माणसालाही लाभ आणि अलाभ, यश आणि अपयश, निंदा आणि प्रशंसा, सुख आणि दुःख प्राप्त होते. भिक्षूंनो, श्रुतवान आर्यश्रावकालाही लाभ आणि अलाभ, यश आणि अपयश, निंदा आणि प्रशंसा, सुख आणि दुःख प्राप्त होते. मग भिक्षूंनो, यात श्रुतवान आर्यश्रावक आणि अश्रुतवान सामान्य माणूस यांच्यात काय फरक आहे, काय वैशिष्ट्य आहे, काय भिन्नता आहे? भंते, आमचे धर्म भगवंतांवर आधारित आहेत, भगवंतच आमचे मार्गदर्शक आहेत, भगवंतच आमचे आश्रयस्थान आहेत. भंते, हे फार चांगले होईल जर भगवंतांनीच या वचनाचा अर्थ स्पष्ट करावा. भगवंतांकडून ऐकून भिक्षू ते लक्षात ठेवतील. ‘‘တေန ဟိ, ဘိက္ခဝေ, သုဏာထ, သာဓုကံ မနသိ ကရောထ; ဘာသိဿာမီ’’တိ. ‘‘ဧဝံ, ဘန္တေ’’တိ ခေါ တေ ဘိက္ခူ ဘဂဝတော ပစ္စဿောသုံ. ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဿုတဝတော, ဘိက္ခဝေ, ပုထုဇ္ဇနဿ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘော. သော န ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ဥပ္ပန္နော ခေါ မေ အယံ လာဘော; သော စ ခေါ အနိစ္စော ဒုက္ခော ဝိပရိဏာမဓမ္မော’တိ ယထာဘူတံ နပ္ပဇာနာတိ. ဥပ္ပဇ္ဇတိ အလာဘော…ပေ… ဥပ္ပဇ္ဇတိ ယသော… ဥပ္ပဇ္ဇတိ အယသော… ဥပ္ပဇ္ဇတိ နိန္ဒာ… ဥပ္ပဇ္ဇတိ ပသံသာ… ဥပ္ပဇ္ဇတိ သုခံ… ဥပ္ပဇ္ဇတိ ဒုက္ခံ. သော န ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ဥပ္ပန္နံ ခေါ မေ ဣဒံ ဒုက္ခံ; တဉ္စ ခေါ အနိစ္စံ ဒုက္ခံ ဝိပရိဏာမဓမ္မ’န္တိ ယထာဘူတံ နပ္ပဇာနာတိ’’. तसे असेल तर भिक्षूंनो, ऐका, नीट मनात साठवा; मी सांगेन. होय, भंते, असे म्हणून त्या भिक्षूंनी भगवंतांना प्रतिसाद दिला. भगवंत म्हणाले – भिक्षूंनो, अश्रुतवान सामान्य माणसाला जेव्हा लाभ प्राप्त होतो, तेव्हा तो असा विचार करत नाही – 'मला हा लाभ प्राप्त झाला आहे; परंतु तो अनित्य, दुःखकारक आणि बदलणाऱ्या स्वभावाचा आहे.' तो हे जसे आहे तसे जाणत नाही. जेव्हा त्याला अलाभ प्राप्त होतो... पे... यश प्राप्त होते... अपयश प्राप्त होते... निंदा प्राप्त होते... प्रशंसा प्राप्त होते... सुख प्राप्त होते... दुःख प्राप्त होते, तेव्हा तो असा विचार करत नाही – 'मला हे दुःख प्राप्त झाले आहे; परंतु ते अनित्य, दुःखकारक आणि बदलणाऱ्या स्वभावाचे आहे.' तो हे जसे आहे तसे जाणत नाही. ‘‘တဿ လာဘောပိ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, အလာဘောပိ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, ယသောပိ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, အယသောပိ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, နိန္ဒာပိ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, ပသံသာပိ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, သုခမ္ပိ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, ဒုက္ခမ္ပိ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ. သော ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အနုရုဇ္ဈတိ, အလာဘေ ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ; ဥပ္ပန္နံ ယသံ အနုရုဇ္ဈတိ, အယသေ ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ; ဥပ္ပန္နံ ပသံသံ အနုရုဇ္ဈတိ, နိန္ဒာယ ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ; ဥပ္ပန္နံ သုခံ အနုရုဇ္ဈတိ, ဒုက္ခေ ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ. သော ဧဝံ အနုရောဓဝိရောဓသမာပန္နော န ပရိမုစ္စတိ ဇာတိယာ ဇရာယ မရဏေန သောကေဟိ ပရိဒေဝေဟိ ဒုက္ခေဟိ ဒေါမနဿေဟိ ဥပါယာသေဟိ. ‘န ပရိမုစ္စတိ ဒုက္ခသ္မာ’တိ ဝဒါမိ’’. त्याच्या चित्ताला लाभही व्यापून राहतो, अलाभही व्यापून राहतो, यशही व्यापून राहतो, अपयशही व्यापून राहतो, निंदाही व्यापून राहतो, प्रशंसाही व्यापून राहतो, सुखही व्यापून राहतो, दुःखही व्यापून राहतो. तो प्राप्त झालेल्या लाभाने हर्षित होतो आणि अलाभ झाल्यावर खिन्न होतो; प्राप्त झालेल्या यशाने हर्षित होतो आणि अपयश झाल्यावर खिन्न होतो; प्राप्त झालेल्या प्रशंसेने हर्षित होतो आणि निंदा झाल्यावर खिन्न होतो; प्राप्त झालेल्या सुखाने हर्षित होतो आणि दुःख झाल्यावर खिन्न होतो. अशा प्रकारे अनुकूलता आणि प्रतिकूलतेमध्ये अडकलेला तो जन्म, जरा, मरण, शोक, विलाप, दुःख, नैराश्य आणि त्रासातून मुक्त होत नाही. 'तो दुःखातून मुक्त होत नाही,' असे मी म्हणतो. ‘‘သုတဝတော စ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကဿ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘော. သော ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ဥပ္ပန္နော ခေါ မေ အယံ လာဘော; သော စ ခေါ အနိစ္စော ဒုက္ခော ဝိပရိဏာမဓမ္မော’တိ ယထာဘူတံ ပဇာနာတိ. ဥပ္ပဇ္ဇတိ အလာဘော…ပေ… ဥပ္ပဇ္ဇတိ ယသော… ဥပ္ပဇ္ဇတိ အယသော… ဥပ္ပဇ္ဇတိ နိန္ဒာ… ဥပ္ပဇ္ဇတိ ပသံသာ… ဥပ္ပဇ္ဇတိ သုခံ… ဥပ္ပဇ္ဇတိ ဒုက္ခံ. သော ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ဥပ္ပန္နံ ခေါ မေ ဣဒံ ဒုက္ခံ; တဉ္စ ခေါ အနိစ္စံ ဒုက္ခံ ဝိပရိဏာမဓမ္မ’န္တိ ယထာဘူတံ ပဇာနာတိ’’. परंतु भिक्षूंनो, जेव्हा श्रुतवान आर्यश्रावकाला लाभ प्राप्त होतो, तेव्हा तो असा विचार करतो – 'मला हा लाभ प्राप्त झाला आहे; परंतु तो अनित्य, दुःखकारक आणि बदलणाऱ्या स्वभावाचा आहे.' तो हे जसे आहे तसे जाणतो. जेव्हा त्याला अलाभ प्राप्त होतो... पे... यश प्राप्त होते... अपयश प्राप्त होते... निंदा प्राप्त होते... प्रशंसा प्राप्त होते... सुख प्राप्त होते... दुःख प्राप्त होते, तेव्हा तो असा विचार करतो – 'मला हे दुःख प्राप्त झाले आहे; परंतु ते अनित्य, दुःखकारक आणि बदलणाऱ्या स्वभावाचे आहे.' तो हे जसे आहे तसे जाणतो. ‘‘တဿ [Pg.9] လာဘောပိ စိတ္တံ န ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, အလာဘောပိ စိတ္တံ န ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, ယသောပိ စိတ္တံ န ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, အယသောပိ စိတ္တံ န ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, နိန္ဒာပိ စိတ္တံ န ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, ပသံသာပိ စိတ္တံ န ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, သုခမ္ပိ စိတ္တံ န ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ, ဒုက္ခမ္ပိ စိတ္တံ န ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌတိ. သော ဥပ္ပန္နံ လာဘံ နာနုရုဇ္ဈတိ, အလာဘေ နပ္ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ; ဥပ္ပန္နံ ယသံ နာနုရုဇ္ဈတိ, အယသေ နပ္ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ; ဥပ္ပန္နံ ပသံသံ နာနုရုဇ္ဈတိ, နိန္ဒာယ နပ္ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ; ဥပ္ပန္နံ သုခံ နာနုရုဇ္ဈတိ, ဒုက္ခေ နပ္ပဋိဝိရုဇ္ဈတိ. သော ဧဝံ အနုရောဓဝိရောဓဝိပ္ပဟီနော ပရိမုစ္စတိ ဇာတိယာ ဇရာယ မရဏေန သောကေဟိ ပရိဒေဝေဟိ ဒုက္ခေဟိ ဒေါမနဿေဟိ ဥပါယာသေဟိ. ‘ပရိမုစ္စတိ ဒုက္ခသ္မာ’တိ ဝဒါမိ. အယံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဝိသေသော အယံ အဓိပ္ပယာသော ဣဒံ နာနာကရဏံ သုတဝတော အရိယသာဝကဿ အဿုတဝတာ ပုထုဇ္ဇနေနာ’’တိ. त्या (श्रुतवान आर्यश्रावका)च्या मनाला लाभ देखील व्यापून राहत नाही, अलाभ देखील मनाला व्यापून राहत नाही; यश देखील मनाला व्यापून राहत नाही, अपयश देखील मनाला व्यापून राहत नाही; निंदा देखील मनाला व्यापून राहत नाही, प्रशंसा देखील मनाला व्यापून राहत नाही; सुख देखील मनाला व्यापून राहत नाही, दुःख देखील मनाला व्यापून राहत नाही. तो उत्पन्न झालेल्या लाभाने हर्षित होत नाही आणि अलाभामुळे संतप्त होत नाही; उत्पन्न झालेल्या यशाने हर्षित होत नाही आणि अपयशाने संतप्त होत नाही; उत्पन्न झालेल्या प्रशंसेने हर्षित होत नाही आणि निंदेने संतप्त होत नाही; उत्पन्न झालेल्या सुखाने हर्षित होत नाही आणि दुःखाने संतप्त होत नाही. अशा प्रकारे अनुकूलता आणि प्रतिकूलता यांपासून मुक्त झालेला तो जन्म, जरा, मरण, शोक, परिदेव (रडणे-आक्रोश), दुःख, दौर्मनस्य आणि उपायास (हताशपणा) यांपासून मुक्त होतो. 'तो सर्व दुःखांतून मुक्त होतो,' असे मी सांगतो. भिक्षूंनो, श्रुतवान आर्यश्रावक आणि अश्रुतवान पृथग्जन यांच्यातील हाच तो विशेष, हाच तो फरक आणि हेच ते अंतर होय. ‘‘လာဘော အလာဘော စ ယသာယသော စ,နိန္ဒာ ပသံသာ စ သုခံ ဒုခဉ္စ; ဧတေ အနိစ္စာ မနုဇေသု ဓမ္မာ,အသဿတာ ဝိပရိဏာမဓမ္မာ. लाभ आणि अलाभ, यश आणि अपयश, निंदा आणि प्रशंसा, तसेच सुख आणि दुःख; मानवांमध्ये असणारे हे आठ धर्म अनित्य आहेत, अशाश्वत आहेत आणि परिवर्तनशील स्वभावाचे आहेत. ‘‘ဧတေ စ ဉတွာ သတိမာ သုမေဓော,အဝေက္ခတိ ဝိပရိဏာမဓမ္မေ; ဣဋ္ဌဿ ဓမ္မာ န မထေန္တိ စိတ္တံ,အနိဋ္ဌတော နော ပဋိဃာတမေတိ. स्मृतिमान आणि प्रज्ञावान मनुष्य हे जाणून या परिवर्तनशील धर्मांचे निरीक्षण करतो. इष्ट धर्म त्याच्या मनाला विचलित करत नाहीत आणि अनिष्ट धर्मांमुळे तो प्रतिघाताला (द्वेषाला) प्राप्त होत नाही. ‘‘တဿာနုရောဓာ အထ ဝါ ဝိရောဓာ,ဝိဓူပိတာ အတ္ထင်္ဂတာ န သန္တိ; ပဒဉ္စ ဉတွာ ဝိရဇံ အသောကံ,သမ္မပ္ပဇာနာတိ ဘဝဿ ပါရဂူ’’တိ. ဆဋ္ဌံ; त्याचे अनुकूल भाव किंवा प्रतिकूल भाव नष्ट झाले आहेत, अस्तंगत झाले आहेत, आता ते अस्तित्वात नाहीत. रागरहित आणि शोकरहित अशा पदाला जाणून, संसाराच्या पलीकडच्या तीरावर पोहोचलेला तो योग्य प्रकारे सत्य जाणतो. (सहावे सुत्त समाप्त.) ၇. ဒေဝဒတ္တဝိပတ္တိသုတ္တံ ७. देवदत्तविपत्ती सुत्त ၇. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ရာဇဂဟေ ဝိဟရတိ ဂိဇ္ဈကူဋေ ပဗ္ဗတေ အစိရပက္ကန္တေ ဒေဝဒတ္တေ. တတြ ဘဂဝါ ဒေဝဒတ္တံ အာရဗ္ဘ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘သာဓု, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓု, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓု, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓု[Pg.10], ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အသဒ္ဓမ္မေဟိ အဘိဘူတော ပရိယာဒိန္နစိတ္တော ဒေဝဒတ္တော အာပါယိကော နေရယိကော ကပ္ပဋ္ဌော အတေကိစ္ဆော’’. ७. एकदा भगवान बुद्ध राजगृह येथे गिद्धकूट पर्वतावर विहार करत होते. देवदत्त (संघ सोडून) निघून गेल्याला फार काळ झाला नव्हता. तिथे भगवंतांनी देवदत्ताचा संदर्भ देऊन भिक्षूंना संबोधित केले – “भिक्षूंनो, भिक्षूने वेळोवेळी स्वतःच्या विपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. भिक्षूंनो, भिक्षूने वेळोवेळी इतरांच्या विपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. भिक्षूंनो, भिक्षूने वेळोवेळी स्वतःच्या संपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. भिक्षूंनो, भिक्षूने वेळोवेळी इतरांच्या संपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. भिक्षूंनो, आठ असद्धर्मांनी पराभूत झालेल्या आणि ज्याचे चित्त पूर्णपणे ग्रासले गेले आहे असा देवदत्त अपाय (दुर्गती) आणि नरकात जाण्यास पात्र झाला आहे, तो तिथे एक कल्पभर राहील आणि तो असाध्य झाला आहे.” ‘‘ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? လာဘေန ဟိ, ဘိက္ခဝေ, အဘိဘူတော ပရိယာဒိန္နစိတ္တော ဒေဝဒတ္တော အာပါယိကော နေရယိကော ကပ္ပဋ္ဌော အတေကိစ္ဆော. အလာဘေန, ဘိက္ခဝေ…ပေ… ယသေန, ဘိက္ခဝေ… အယသေန, ဘိက္ခဝေ… သက္ကာရေန, ဘိက္ခဝေ… အသက္ကာရေန, ဘိက္ခဝေ… ပါပိစ္ဆတာယ, ဘိက္ခဝေ… ပါပမိတ္တတာယ, ဘိက္ခဝေ, အဘိဘူတော ပရိယာဒိန္နစိတ္တော ဒေဝဒတ္တော အာပါယိကော နေရယိကော ကပ္ပဋ္ဌော အတေကိစ္ဆော. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ အသဒ္ဓမ္မေဟိ အဘိဘူတော ပရိယာဒိန္နစိတ္တော ဒေဝဒတ္တော အာပါယိကော နေရယိကော ကပ္ပဋ္ဌော အတေကိစ္ဆော. कोणत्या आठ? भिक्षूंनो, लाभाने पराभूत झालेल्या आणि ज्याचे चित्त पूर्णपणे ग्रासले गेले आहे असा देवदत्त अपाय आणि नरकात जाण्यास पात्र झाला आहे, तो तिथे एक कल्पभर राहील आणि तो असाध्य झाला आहे. भिक्षूंनो, अलाभाने... पे... भिक्षूंनो, यशाने... अपयशाने... सत्काराने... असत्काराने... पापिच्छतेने... पापमित्रतेने पराभूत झालेल्या आणि ज्याचे चित्त पूर्णपणे ग्रासले गेले आहे असा देवदत्त अपाय आणि नरकात जाण्यास पात्र झाला आहे, तो तिथे एक कल्पभर राहील आणि तो असाध्य झाला आहे. भिक्षूंनो, खरोखर या आठ असद्धर्मांनी पराभूत झालेल्या आणि ज्याचे चित्त पूर्णपणे ग्रासले गेले आहे असा देवदत्त अपाय आणि नरकात जाण्यास पात्र झाला आहे, तो तिथे एक कल्पभर राहील आणि तो असाध्य झाला आहे. ‘‘သာဓု, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ, ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ … ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ. भिक्षूंनो, भिक्षूने उत्पन्न झालेल्या लाभाला वारंवार पराभूत करून विहार करावा, हे चांगले आहे. उत्पन्न झालेल्या अलाभाला... पे... उत्पन्न झालेल्या यशाला... उत्पन्न झालेल्या अपयशाला... उत्पन्न झालेल्या सत्काराला... उत्पन्न झालेल्या असत्काराला... उत्पन्न झालेल्या पापिच्छतेला... उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेला वारंवार पराभूत करून विहार करावा, हे चांगले आहे. ‘‘ကိဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု အတ္ထဝသံ ပဋိစ္စ ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ, ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ? आणि भिक्षूंनो, कोणत्या विशेष प्रयोजनासाठी भिक्षूने उत्पन्न झालेल्या लाभाला वारंवार पराभूत करून विहार करावा? उत्पन्न झालेल्या अलाभाला... पे... उत्पन्न झालेल्या यशाला... उत्पन्न झालेल्या अपयशाला... उत्पन्न झालेल्या सत्काराला... उत्पन्न झालेल्या असत्काराला... उत्पन्न झालेल्या पापिच्छतेला... उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेला वारंवार पराभूत करून विहार करावा? ‘‘ယံ ဟိဿ, ဘိက္ခဝေ, ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အနဘိဘုယျ ဝိဟရတော ဥပ္ပဇ္ဇေယျုံ အာသဝါ ဝိဃာတပရိဠာဟာ, ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ ဝိဟရတော ဧဝံသ တေ အာသဝါ ဝိဃာတပရိဠာဟာ န ဟောန္တိ. ယံ ဟိဿ, ဘိက္ခဝေ, ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အနဘိဘုယျ ဝိဟရတော ဥပ္ပဇ္ဇေယျုံ အာသဝါ ဝိဃာတပရိဠာဟာ, ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ ဝိဟရတော ဧဝံသ တေ အာသဝါ ဝိဃာတပရိဠာဟာ န ဟောန္တိ. ဣဒံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု အတ္ထဝသံ ပဋိစ္စ ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ, ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ … ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ. कारण भिक्षूंनो, उत्पन्न झालेल्या लाभाला पराभूत न करता विहार करणाऱ्या व्यक्तीमध्ये जे आसव, उपद्रव आणि संताप उत्पन्न होऊ शकतात, ते उत्पन्न झालेल्या लाभाला पराभूत करून विहार करणाऱ्या व्यक्तीमध्ये उत्पन्न होत नाहीत. भिक्षूंनो, उत्पन्न झालेल्या अलाभाला... पे... उत्पन्न झालेल्या यशाला... उत्पन्न झालेल्या अपयशाला... उत्पन्न झालेल्या सत्काराला... उत्पन्न झालेल्या असत्काराला... उत्पन्न झालेल्या पापिच्छतेला... उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेला पराभूत न करता विहार करणाऱ्या व्यक्तीमध्ये जे आसव, उपद्रव आणि संताप उत्पन्न होऊ शकतात, ते उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेला पराभूत करून विहार करणाऱ्या व्यक्तीमध्ये उत्पन्न होत नाहीत. भिक्षूंनो, याच विशेष प्रयोजनासाठी भिक्षूने उत्पन्न झालेल्या लाभाला वारंवार पराभूत करून विहार करावा; उत्पन्न झालेल्या अलाभाला... पे... उत्पन्न झालेल्या यशाला... उत्पन्न झालेल्या अपयशाला... उत्पन्न झालेल्या सत्काराला... उत्पन्न झालेल्या असत्काराला... उत्पन्न झालेल्या पापिच्छतेला... उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेला वारंवार पराभूत करून विहार करावा. ‘‘တသ္မာတိဟ[Pg.11], ဘိက္ခဝေ, ဧဝံ သိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရိဿာမ, ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရိဿာမာ’တိ. ဧဝဉှိ ဝေါ, ဘိက္ခဝေ, သိက္ခိတဗ္ဗ’’န္တိ. သတ္တမံ. म्हणूनच, भिक्षूंनो, तुम्ही असे शिकले पाहिजे – 'आम्ही उत्पन्न झालेल्या लाभाला वारंवार पराभूत करून विहार करू; उत्पन्न झालेल्या अलाभाला... पे... उत्पन्न झालेल्या यशाला... उत्पन्न झालेल्या अपयशाला... उत्पन्न झालेल्या सत्काराला... उत्पन्न झालेल्या असत्काराला... उत्पन्न झालेल्या पापिच्छतेला... उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेला वारंवार पराभूत करून विहार करू.' भिक्षूंनो, तुम्ही असेच स्वतःला प्रशिक्षित केले पाहिजे. (सातवे सुत्त समाप्त.) ၈. ဥတ္တရဝိပတ္တိသုတ္တံ ८. उत्तरविपत्ती सुत्त ၈. ဧကံ သမယံ အာယသ္မာ ဥတ္တရော မဟိသဝတ္ထုသ္မိံ ဝိဟရတိ သင်္ခေယျကေ ပဗ္ဗတေ ဝဋဇာလိကာယံ. တတြ ခေါ အာယသ္မာ ဥတ္တရော ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတီ’’တိ. ८. एकदा आयुष्यमान उत्तर हे महिसवत्थू येथील संखेय्यक पर्वतावरील वटजालिका विहारात विहार करत होते. तिथे आयुष्यमान उत्तरांनी भिक्षूंना संबोधित केले – “मित्रांनो, भिक्षूने वेळोवेळी स्वतःच्या विपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. मित्रांनो, भिक्षूने वेळोवेळी इतरांच्या विपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. मित्रांनो, भिक्षूने वेळोवेळी स्वतःच्या संपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. मित्रांनो, भिक्षूने वेळोवेळी इतरांच्या संपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे.” တေန ခေါ ပန သမယေန ဝေဿဝဏော မဟာရာဇာ ဥတ္တရာယ ဒိသာယ ဒက္ခိဏံ ဒိသံ ဂစ္ဆတိ ကေနစိဒေဝ ကရဏီယေန. အဿောသိ ခေါ ဝေဿဝဏော မဟာရာဇာ အာယသ္မတော ဥတ္တရဿ မဟိသဝတ္ထုသ္မိံ သင်္ခေယျကေ ပဗ္ဗတေ ဝဋဇာလိကာယံ ဘိက္ခူနံ ဧဝံ ဓမ္မံ ဒေသေန္တဿ – ‘‘သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတီ’’တိ. त्या वेळी महाराज वेस्सवण (वैश्रवण) काही एका कामासाठी उत्तर दिशेकडून दक्षिण दिशेकडे जात होते. तेव्हा महाराज वेस्सवण यांनी आयुष्यमान उत्तर यांना महिसवत्थू येथील संखेय्यक पर्वतावरील वटजालिका विहारात भिक्खूंना असा धम्म उपदेश करताना ऐकले – “मित्रांनो, भिक्खूने वेळोवेळी स्वतःच्या विपत्तीचे (त्रुटींचे) निरीक्षण करणे चांगले आहे. मित्रांनो, भिक्खूने वेळोवेळी इतरांच्या विपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. मित्रांनो, भिक्खूने वेळोवेळी स्वतःच्या संपत्तीचे (गुणांचे) निरीक्षण करणे चांगले आहे. मित्रांनो, भिक्खूने वेळोवेळी इतरांच्या संपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे.” အထ ခေါ ဝေဿဝဏ္ဏော မဟာရာဇာ – သေယျထာပိ နာမ ဗလဝါ ပုရိသော သမိဉ္ဇိတံ ဝါ ဗာဟံ ပသာရေယျ, ပသာရိတံ ဝါ ဗာဟံ သမိဉ္ဇေယျ, ဧဝမေဝံ မဟိသဝတ္ထုသ္မိံ သင်္ခေယျကေ ပဗ္ဗတေ ဝဋဇာလိကာယံ အန္တရဟိတော ဒေဝေသု တာဝတိံသေသု ပါတုရဟောသိ. အထ ခေါ ဝေဿဝဏ္ဏော မဟာရာဇာ ယေန သက္ကော ဒေဝါနမိန္ဒော တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ သက္ကံ ဒေဝါနမိန္ဒံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ယဂ္ဃေ မာရိသ, ဇာနေယျာသိ! ဧသော အာယသ္မာ ဥတ္တရော မဟိသဝတ္ထုသ္မိံ သင်္ခေယျကေ ပဗ္ဗတေ ဝဋဇာလိကာယံ ဘိက္ခူနံ ဧဝံ ဓမ္မံ ဒေသေတိ – ‘သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ[Pg.12]. သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရဝိပတ္တိံ…ပေ… အတ္တသမ္ပတ္တိံ… ပရသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတီ’’’တိ. तेव्हा महाराज वेस्सवण – जसे एखाद्या बलवान माणसाने आपला दुमडलेला हात पसरावा किंवा पसरलेला हात दुमडावा, त्याचप्रमाणे महिसवत्थू येथील संखेय्यक पर्वतावरील वटजालिका विहारातून अंतर्धान पावून तावतिंस देवांमध्ये प्रकट झाले. मग महाराज वेस्सवण जेथे देवांचा राजा सक्क होता तेथे गेले; आणि सक्क देवेन्द्राजवळ जाऊन त्यांना असे म्हणाले – “हे पूजनीय महोदय, आपल्याला माहीत असावे! हे आयुष्यमान उत्तर महिसवत्थू येथील संखेय्यक पर्वतावरील वटजालिका विहारात भिक्खूंना असा धम्म उपदेश करत आहेत – ‘मित्रांनो, भिक्खूने वेळोवेळी स्वतःच्या विपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. मित्रांनो, भिक्खूने वेळोवेळी इतरांच्या विपत्तीचे... स्वतःच्या संपत्तीचे... इतरांच्या संपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे.’” အထ ခေါ သက္ကော ဒေဝါနမိန္ဒော သေယျထာပိ နာမ ဗလဝါ ပုရိသော သမိဉ္ဇိတံ ဝါ ဗာဟံ ပသာရေယျ, ပသာရိတံ ဝါ ဗာဟံ သမိဉ္ဇေယျ, ဧဝမေဝံ ဒေဝေသု တာဝတိံသေသု အန္တရဟိတော မဟိသဝတ္ထုသ္မိံ သင်္ခေယျကေ ပဗ္ဗတေ ဝဋဇာလိကာယံ အာယသ္မတော ဥတ္တရဿ သမ္မုခေ ပါတုရဟောသိ. အထ ခေါ သက္ကော ဒေဝါနမိန္ဒော ယေနာယသ္မာ ဥတ္တရော တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ အာယသ္မန္တံ ဥတ္တရံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ အဋ္ဌာသိ. ဧကမန္တံ ဌိတော ခေါ သက္ကော ဒေဝါနမိန္ဒော အာယသ္မန္တံ ဥတ္တရံ ဧတဒဝေါစ – तेव्हा देवांचा राजा सक्क – जसे एखाद्या बलवान माणसाने आपला दुमडलेला हात पसरावा किंवा पसरलेला हात दुमडावा, त्याचप्रमाणे तावतिंस देवांमधून अंतर्धान पावून महिसवत्थू येथील संखेय्यक पर्वतावरील वटजालिका विहारात आयुष्यमान उत्तरांच्या समोर प्रकट झाले. मग सक्क देवेन्द्र जेथे आयुष्यमान उत्तर होते तेथे गेले; आणि आयुष्यमान उत्तरांजवळ जाऊन, त्यांना अभिवादन करून एका बाजूला उभे राहिले. एका बाजूला उभे राहून सक्क देवेन्द्र आयुष्यमान उत्तरांना असे म्हणाले – ‘‘သစ္စံ ကိရ, ဘန္တေ, အာယသ္မာ ဥတ္တရော ဘိက္ခူနံ ဧဝံ ဓမ္မံ ဒေသေသိ – ‘သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ, သာဓာဝုသော, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရဝိပတ္တိံ…ပေ… အတ္တသမ္ပတ္တိံ… ပရသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတီ’’’ တိ? ‘‘ဧဝံ, ဒေဝါနမိန္ဒာ’’တိ. ‘‘ကိံ ပနိဒံ, ဘန္တေ, အာယသ္မတော ဥတ္တရဿ သကံ ပဋိဘာနံ, ဥဒါဟု တဿ ဘဂဝတော ဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿာ’’တိ? ‘‘တေန ဟိ, ဒေဝါနမိန္ဒ, ဥပမံ တေ ကရိဿာမိ. ဥပမာယ မိဓေကစ္စေ ဝိညူ ပုရိသာ ဘာသိတဿ အတ္ထံ အာဇာန’’န္တိ. “भंते, हे खरे आहे का की आयुष्यमान उत्तर भिक्खूंना असा धम्म उपदेश करत होते – ‘मित्रांनो, भिक्खूने वेळोवेळी स्वतःच्या विपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. मित्रांनो, भिक्खूने वेळोवेळी इतरांच्या विपत्तीचे... स्वतःच्या संपत्तीचे... इतरांच्या संपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे’?” “होय, देवेन्द्रा.” “पण भंते, हा उपदेश आयुष्यमान उत्तरांचे स्वतःचे प्रतिभाज्ञान आहे की त्या अर्हत, सम्यक्संबुद्ध भगवंतांचे वचन आहे?” “तर मग, देवेन्द्रा, मी तुला एक उपमा देतो. उपमेच्या द्वारे या जगातील काही बुद्धिमान लोक बोललेल्या गोष्टीचा अर्थ समजून घेतात.” ‘‘သေယျထာပိ, ဒေဝါနမိန္ဒ, ဂါမဿ ဝါ နိဂမဿ ဝါ အဝိဒူရေ မဟာဓညရာသိ. တတော မဟာဇနကာယော ဓညံ အာဟရေယျ – ကာဇေဟိပိ ပိဋကေဟိပိ ဥစ္ဆင်္ဂေဟိပိ အဉ္ဇလီဟိပိ. ယော နု ခေါ, ဒေဝါနမိန္ဒ, တံ မဟာဇနကာယံ ဥပသင်္ကမိတွာ ဧဝံ ပုစ္ဆေယျ – ‘ကုတော ဣမံ ဓညံ အာဟရထာ’တိ, ကထံ ဗျာကရမာနော နု ခေါ, ဒေဝါနမိန္ဒ, သော မဟာဇနကာယော သမ္မာ ဗျာကရမာနော ဗျာကရေယျာ’’တိ? ‘‘‘အမုမှာ မဟာဓညရာသိမှာ အာဟရာမာ’တိ ခေါ, ဘန္တေ, သော မဟာဇနကာယော သမ္မာ ဗျာကရမာနော ဗျာကရေယျာ’’တိ. ‘‘ဧဝမေဝံ ခေါ, ဒေဝါနမိန္ဒ, ယံ ကိဉ္စိ သုဘာသိတံ သဗ္ဗံ တံ တဿ ဘဂဝတော ဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. တတော ဥပါဒါယုပါဒါယ မယံ စညေ စ ဘဏာမာ’’တိ. “समजा, देवेन्द्रा, एखाद्या गावाच्या किंवा नगराच्या जवळ धान्याचा एक मोठा ढीग आहे. तेथून लोकांचा मोठा समूह कावडीने, टोपल्यांनी, ओटीने किंवा ओंजळीने धान्य घेऊन जात आहे. जर कोणी, देवेन्द्रा, त्या लोकांच्या समूहाजवळ जाऊन त्यांना असे विचारले – ‘तुम्ही हे धान्य कोठून आणत आहात?’, तर देवेन्द्रा, त्या लोकांनी काय उत्तर दिले असता ते योग्य उत्तर ठरेल?” “भंते, ‘आम्ही त्या धान्याच्या मोठ्या ढिगाऱ्यातून हे धान्य आणत आहोत’ असे उत्तर दिले असता त्या लोकांचे उत्तर योग्य ठरेल.” “त्याचप्रमाणे, देवेन्द्रा, जे काही सुभाषित (उत्तम प्रकारे बोललेले) आहे, ते सर्व त्या अर्हत, सम्यक्संबुद्ध भगवंतांचेच वचन आहे. त्याचाच आधार घेऊन आम्ही आणि इतर लोक बोलत असतो.” ‘‘အစ္ဆရိယံ, ဘန္တေ, အဗ္ဘုတံ ဘန္တေ! ယာဝ သုဘာသိတံ စိဒံ အာယသ္မတာ ဥတ္တရေန – ‘ယံ ကိဉ္စိ သုဘာသိတံ သဗ္ဗံ တံ တဿ ဘဂဝတော ဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ[Pg.13]. တတော ဥပါဒါယုပါဒါယ မယံ စညေ စ ဘဏာမာ’တိ. ဧကမိဒံ, ဘန္တေ ဥတ္တရ, သမယံ ဘဂဝါ ရာဇဂဟေ ဝိဟရတိ ဂိဇ္ဈကူဋေ ပဗ္ဗတေ အစိရပက္ကန္တေ ဒေဝဒတ္တေ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဒေဝဒတ္တံ အာရဗ္ဘ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – “आश्चर्यकारक आहे, भंते! अद्भुत आहे, भंते! आयुष्यमान उत्तरांनी हे किती सुंदर सांगितले आहे – ‘जे काही सुभाषित आहे, ते सर्व त्या अर्हत, सम्यक्संबुद्ध भगवंतांचेच वचन आहे. त्याचाच आधार घेऊन आम्ही आणि इतर लोक बोलत असतो.’ हे भंते उत्तर, एका वेळी भगवान राजगृह येथे गिज्झकूट पर्वतावर विहार करत होते, देवदत्त संघातून निघून गेल्यानंतर काही काळाने. तेथे भगवंतांनी देवदत्ताचा संदर्भ घेऊन भिक्खूंना संबोधित केले –” ‘‘သာဓု, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ အတ္တဝိပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. သာဓု, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ကာလေန ကာလံ ပရဝိပတ္တိံ…ပေ… အတ္တသမ္ပတ္တိံ… ပရသမ္ပတ္တိံ ပစ္စဝေက္ခိတာ ဟောတိ. အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အသဒ္ဓမ္မေဟိ အဘိဘူတော ပရိယာဒိန္နစိတ္တော ဒေဝဒတ္တော အာပါယိကော နေရယိကော ကပ္ပဋ္ဌော အတေကိစ္ဆော. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? လာဘေန ဟိ, ဘိက္ခဝေ, အဘိဘူတော ပရိယာဒိန္နစိတ္တော ဒေဝဒတ္တော အာပါယိကော နေရယိကော ကပ္ပဋ္ဌော အတေကိစ္ဆော; အလာဘေန, ဘိက္ခဝေ…ပေ… ယသေန, ဘိက္ခဝေ … အယသေန, ဘိက္ခဝေ… သက္ကာရေန, ဘိက္ခဝေ… အသက္ကာရေန, ဘိက္ခဝေ… ပါပိစ္ဆတာယ, ဘိက္ခဝေ… ပါပမိတ္တတာယ, ဘိက္ခဝေ, အဘိဘူတော ပရိယာဒိန္နစိတ္တော ဒေဝဒတ္တော အာပါယိကော နေရယိကော ကပ္ပဋ္ဌော အတေကိစ္ဆော. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ အသဒ္ဓမ္မေဟိ အဘိဘူတော ပရိယာဒိန္နစိတ္တော ဒေဝဒတ္တော အာပါယိကော နေရယိကော ကပ္ပဋ္ဌော အတေကိစ္ဆော. “भिक्खूंनो, भिक्खूने वेळोवेळी स्वतःच्या विपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. भिक्खूंनो, भिक्खूने वेळोवेळी इतरांच्या विपत्तीचे... स्वतःच्या संपत्तीचे... इतरांच्या संपत्तीचे निरीक्षण करणे चांगले आहे. भिक्खूंनो, आठ असद्धम्मांनी (अधर्मांनी) ग्रस्त आणि पराभूत चित्त झालेला देवदत्त दुर्गतीला (अपाय), नरकाला प्राप्त होणारा, एक कल्पभर तेथे राहणारा आणि असाध्य झाला आहे. कोणत्या आठ असद्धम्मांनी? भिक्खूंनो, लाभाने ग्रस्त आणि पराभूत चित्त झालेला देवदत्त दुर्गतीला, नरकाला प्राप्त होणारा, एक कल्पभर तेथे राहणारा आणि असाध्य झाला आहे; भिक्खूंनो, अलाभाने... यशाने... अयशाने... सत्काराने... असत्काराने... पापी इच्छेने... पापी मित्रांच्या संगतीने ग्रस्त आणि पराभूत चित्त झालेला देवदत्त दुर्गतीला, नरकाला प्राप्त होणारा, एक कल्पभर तेथे राहणारा आणि असाध्य झाला आहे. भिक्खूंनो, खरोखर या आठ असद्धम्मांनी ग्रस्त आणि पराभूत चित्त झालेला देवदत्त दुर्गतीला, नरकाला प्राप्त होणारा, एक कल्पभर तेथे राहणारा आणि असाध्य झाला आहे।” ‘‘သာဓု, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ; ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ. “भिक्खूंनो, भिक्खूने उत्पन्न झालेल्या लाभावर वारंवार विजय मिळवून विहार करावा; उत्पन्न झालेल्या अलाभावर... उत्पन्न झालेल्या यशावर... उत्पन्न झालेल्या अयशावर... उत्पन्न झालेल्या सत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या असत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या पापी इच्छेवर... उत्पन्न झालेल्या पापी मित्रांच्या संगतीवर वारंवार विजय मिळवून विहार करणे चांगले आहे।” ‘‘ကိဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု အတ္ထဝသံ ပဋိစ္စ ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ; ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ? “आणि भिक्खूंनो, कोणत्या विशेष कल्याणाचा विचार करून भिक्खूने उत्पन्न झालेल्या लाभावर वारंवार विजय मिळवून विहार करावा; उत्पन्न झालेल्या अलाभावर... उत्पन्न झालेल्या यशावर... उत्पन्न झालेल्या अयशावर... उत्पन्न झालेल्या सत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या असत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या पापी इच्छेवर... उत्पन्न झालेल्या पापी मित्रांच्या संगतीवर वारंवार विजय मिळवून विहार करावा?” ‘‘ယံ ဟိဿ, ဘိက္ခဝေ, ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အနဘိဘုယျ ဝိဟရတော ဥပ္ပဇ္ဇေယျုံ အာသဝါ ဝိဃာတပရိဠာဟာ, ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ ဝိဟရတော ဧဝံသ တေ အာသဝါ ဝိဃာတပရိဠာဟာ န ဟောန္တိ. ယံ ဟိဿ, ဘိက္ခဝေ, ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အနဘိဘုယျ ဝိဟရတော ဥပ္ပဇ္ဇေယျုံ အာသဝါ ဝိဃာတပရိဠာဟာ, ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ ဝိဟရတော ဧဝံသ [Pg.14] တေ အာသဝါ ဝိဃာတပရိဠာဟာ န ဟောန္တိ. ဣဒံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု အတ္ထဝသံ ပဋိစ္စ ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ; ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ … ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရေယျ. "भिक्षूहो, जो भिक्षू उत्पन्न झालेल्या लाभावर नियंत्रण न मिळवता विहरतो, त्याच्यामध्ये क्लेशकारक व संतापजनक आसव उत्पन्न होऊ शकतात. परंतु, जो भिक्षू उत्पन्न झालेल्या लाभावर नियंत्रण मिळवून विहरतो, त्याच्यामध्ये ते क्लेशकारक व संतापजनक आसव उत्पन्न होत नाहीत. भिक्षूहो, जो भिक्षू उत्पन्न झालेल्या अलाभावर...पे... उत्पन्न झालेल्या यशावर... उत्पन्न झालेल्या अपयशावर... उत्पन्न झालेल्या सत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या असत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या पापिच्छतेवर... उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेवर नियंत्रण न मिळवता विहरतो, त्याच्यामध्ये क्लेशकारक व संतापजनक आसव उत्पन्न होऊ शकतात. परंतु, जो भिक्षू उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेवर नियंत्रण मिळवून विहरतो, त्याच्यामध्ये ते क्लेशकारक व संतापजनक आसव उत्पन्न होत नाहीत. भिक्षूहो, याच हितकारक कारणासाठी भिक्षूने उत्पन्न झालेल्या लाभावर वारंवार नियंत्रण मिळवून विहरावे; उत्पन्न झालेल्या अलाभावर...पे... उत्पन्न झालेल्या यशावर... उत्पन्न झालेल्या अपयशावर... उत्पन्न झालेल्या सत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या असत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या पापिच्छतेवर... उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेवर वारंवार नियंत्रण मिळवून विहरावे." ‘‘တသ္မာတိဟ, ဘိက္ခဝေ, ဧဝံ သိက္ခိတဗ္ဗံ – ဥပ္ပန္နံ လာဘံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရိဿာမ, ဥပ္ပန္နံ အလာဘံ…ပေ… ဥပ္ပန္နံ ယသံ… ဥပ္ပန္နံ အယသံ… ဥပ္ပန္နံ သက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ အသက္ကာရံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပိစ္ဆတံ… ဥပ္ပန္နံ ပါပမိတ္တတံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရိဿာမာတိ. ဧဝဉှိ ဝေါ, ဘိက္ခဝေ, သိက္ခိတဗ္ဗ’’န္တိ. "म्हणूनच, भिक्षूहो, तुम्ही असेच शिकले पाहिजे – 'आम्ही उत्पन्न झालेल्या लाभावर वारंवार नियंत्रण मिळवून विहरू, उत्पन्न झालेल्या अलाभावर...पे... उत्पन्न झालेल्या यशावर... उत्पन्न झालेल्या अपयशावर... उत्पन्न झालेल्या सत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या असत्कारावर... उत्पन्न झालेल्या पापिच्छतेवर... उत्पन्न झालेल्या पापमित्रतेवर वारंवार नियंत्रण मिळवून विहरू.' भिक्षूहो, तुम्ही असेच स्वतःला प्रशिक्षित केले पाहिजे." ‘‘ဧတ္တာဝတာ, ဘန္တေ ဥတ္တရ, မနုဿေသု စတဿော ပရိသာ – ဘိက္ခူ, ဘိက္ခုနိယော, ဥပါသကာ, ဥပါသိကာယော. နာယံ ဓမ္မပရိယာယော ကိသ္မိဉ္စိ ဥပဋ္ဌိတော. ဥဂ္ဂဏှတု, ဘန္တေ, အာယသ္မာ ဥတ္တရော ဣမံ ဓမ္မပရိယာယံ. ပရိယာပုဏာတု, ဘန္တေ, အာယသ္မာ ဥတ္တရော ဣမံ ဓမ္မပရိယာယံ. ဓာရေတု, ဘန္တေ, အာယသ္မာ ဥတ္တရော ဣမံ ဓမ္မပရိယာယံ. အတ္ထသံဟိတော အယံ, ဘန္တေ, ဓမ္မပရိယာယော အာဒိဗြဟ္မစရိယကော’’တိ. အဋ္ဌမံ. "भंते उत्तर, मनुष्यांमध्ये भिक्षू, भिक्षुणी, उपासक आणि उपासिका अशा चार परिषदा आहेत. हा धम्मपर्याय अद्याप कोणत्याही परिषदेत प्रस्थापित झालेला नाही. भंते, आयुष्यमान उत्तरांनी हा धम्मपर्याय ग्रहण करावा. भंते, आयुष्यमान उत्तरांनी या धम्मपर्यायाचा अभ्यास करावा. भंते, आयुष्यमान उत्तरांनी हा धम्मपर्याय स्मरणात ठेवावा. भंते, हा धम्मपर्याय अत्यंत कल्याणकारी असून तो ब्रह्मचर्याचा पाया आहे." आठवे सुत्त समाप्त. ၉. နန္ဒသုတ္တံ ९. नंदसुत्त ၉. ‘‘‘ကုလပုတ္တော’တိ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒံ သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ. ‘ဗလဝါ’တိ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒံ သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ. ‘ပါသာဒိကော’တိ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒံ သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ. ‘တိဗ္ဗရာဂေါ’တိ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒံ သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ. ကိမညတြ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒော ဣန္ဒြိယေသု ဂုတ္တဒွါရော, ဘောဇနေ မတ္တညူ, ဇာဂရိယံ အနုယုတ္တော, သတိသမ္ပဇညေန သမန္နာဂတော, ယေဟိ နန္ဒော သက္ကောတိ ပရိပုဏ္ဏံ ပရိသုဒ္ဓံ ဗြဟ္မစရိယံ စရိတုံ! တတြိဒံ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ဣန္ဒြိယေသု ဂုတ္တဒွါရတာယ ဟောတိ. သစေ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ပုရတ္ထိမာ ဒိသာ အာလောကေတဗ္ဗာ ဟောတိ, သဗ္ဗံ စေတသာ သမန္နာဟရိတွာ နန္ဒော ပုရတ္ထိမံ ဒိသံ အာလောကေတိ – ‘ဧဝံ မေ ပုရတ္ထိမံ ဒိသံ အာလောကယတော နာဘိဇ္ဈာဒေါမနဿာ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အနွာဿဝိဿန္တီ’တိ. ဣတိဟ တတ္ထ သမ္ပဇာနော ဟောတိ. ९. "भिक्षूहो, नंदाला 'कुलीन पुत्र' म्हणणे हे योग्यच ठरेल. भिक्षूहो, नंदाला 'बलवान' म्हणणे हे योग्यच ठरेल. भिक्षूहो, नंदाला 'प्रसन्न व्यक्तिमत्त्वाचा' म्हणणे हे योग्यच ठरेल. भिक्षूहो, नंदाला 'तीव्र रागाचा' म्हणणे हे योग्यच ठरेल. भिक्षूहो, जर नंद इंद्रियांवर संयम ठेवणारा, भोजनात प्रमाण जाणणारा, जागृत राहण्यात तत्पर आणि स्मृती व सजगतेने युक्त नसता, तर तो परिपूर्ण व अत्यंत शुद्ध ब्रह्मचर्य पाळण्यास कसा समर्थ झाला असता? भिक्षूहो, नंदाची इंद्रिय-संयम राखण्याची पद्धत अशी आहे: भिक्षूहो, जर नंदाला पूर्व दिशेकडे पाहायचे असेल, तर तो आपल्या मनात पूर्ण विचार करून आणि सजग राहूनच पूर्व दिशेकडे पाहतो – 'मी पूर्व दिशेकडे पाहत असताना माझ्या मनात अभिज्झा आणि दोमनस्स हे पापी, अकुशल धर्म उत्पन्न होणार नाहीत.' अशा प्रकारे तो त्या बाबतीत पूर्णपणे सजग असतो." ‘‘သစေ[Pg.15], ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ပစ္ဆိမာ ဒိသာ အာလောကေတဗ္ဗာ ဟောတိ…ပေ… ဥတ္တရာ ဒိသာ အာလောကေတဗ္ဗာ ဟောတိ… ဒက္ခိဏာ ဒိသာ အာလောကေတဗ္ဗာ ဟောတိ… ဥဒ္ဓံ ဥလ္လောကေတဗ္ဗာ ဟောတိ… အဓော ဩလောကေတဗ္ဗာ ဟောတိ… အနုဒိသာ အနုဝိလောကေတဗ္ဗာ ဟောတိ, သဗ္ဗံ စေတသာ သမန္နာဟရိတွာ နန္ဒော အနုဒိသံ အနုဝိလောကေတိ – ‘ဧဝံ မေ အနုဒိသံ အနုဝိလောကယတော နာဘိဇ္ဈာဒေါမနဿာ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အနွာဿဝိဿန္တီ’တိ. ဣတိဟ တတ္ထ သမ္ပဇာနော ဟောတိ. ဣဒံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ဣန္ဒြိယေသု ဂုတ္တဒွါရတာယ ဟောတိ. "भिक्षूहो, जर नंदाला पश्चिम दिशेकडे पाहायचे असेल...पे... उत्तर दिशेकडे पाहायचे असेल... दक्षिण दिशेकडे पाहायचे असेल... वर पाहायचे असेल... खाली पाहायचे असेल... किंवा उपदिशांकडे पाहायचे असेल, तर तो आपल्या मनात पूर्ण विचार करून आणि सजग राहूनच उपदिशेकडे पाहतो – 'मी उपदिशेकडे पाहत असताना माझ्या मनात अभिज्झा आणि दोमनस्स हे पापी, अकुशल धर्म उत्पन्न होणार नाहीत.' अशा प्रकारे तो त्या बाबतीत पूर्णपणे सजग असतो. भिक्षूहो, हीच नंदाची इंद्रिय-संयम राखण्याची पद्धत आहे." ‘‘တတြိဒံ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ဘောဇနေ မတ္တညုတာယ ဟောတိ. ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒော ပဋိသင်္ခါ ယောနိသော အာဟာရံ အာဟာရေတိ – ‘နေဝ ဒဝါယ န မဒါယ န မဏ္ဍနာယ န ဝိဘူသနာယ, ယာဝဒေဝ ဣမဿ ကာယဿ ဌိတိယာ ယာပနာယ ဝိဟိံသူပရတိယာ ဗြဟ္မစရိယာနုဂ္ဂဟာယ ဣတိ ပုရာဏဉ္စ ဝေဒနံ ပဋိဟင်္ခါမိ, နဝဉ္စ ဝေဒနံ န ဥပ္ပာဒေဿာမိ, ယာတြာ စ မေ ဘဝိဿတိ အနဝဇ္ဇတာ စ ဖာသုဝိဟာရော စာ’တိ. ဣဒံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ဘောဇနေ မတ္တညုတာယ ဟောတိ. "भिक्षूहो, नंदाची भोजनात प्रमाण राखण्याची पद्धत अशी आहे: येथे, भिक्षूहो, नंद योग्य प्रकारे विचार करूनच आहाराचे सेवन करतो – 'हा आहार केवळ मौजमजेसाठी नाही, मदासाठी नाही, शरीराच्या सुशोभीकरणासाठी नाही, किंवा सौंदर्यासाठी नाही; तर केवळ या शरीराच्या स्थितीसाठी, त्याच्या रक्षणासाठी, भुकेची पीडा शांत करण्यासाठी आणि ब्रह्मचर्याला साहाय्य करण्यासाठी आहे. अशा प्रकारे मी जुन्या वेदना नष्ट करीन आणि नवीन वेदना उत्पन्न होऊ देणार नाही. माझी जीवनयात्रा सुकर होईल, मी निर्दोष राहीन आणि सुखाने विहरेन.' भिक्षूहो, हीच नंदाची भोजनात प्रमाण राखण्याची पद्धत आहे." ‘‘တတြိဒံ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ဇာဂရိယာနုယောဂသ္မိံ ဟောတိ. ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒော ဒိဝသံ စင်္ကမေန နိသဇ္ဇာယ အာဝရဏီယေဟိ ဓမ္မေဟိ စိတ္တံ ပရိသောဓေတိ; ရတ္တိယာ ပဌမံ ယာမံ စင်္ကမေန နိသဇ္ဇာယ အာဝရဏီယေဟိ ဓမ္မေဟိ စိတ္တံ ပရိသောဓေတိ; ရတ္တိယာ မဇ္ဈိမံ ယာမံ ဒက္ခိဏေန ပဿေန သီဟသေယျံ ကပ္ပေတိ ပါဒေ ပါဒံ အစ္စာဓာယ သတော သမ္ပဇာနော ဥဋ္ဌာနသညံ မနသိ ကရိတွာ; ရတ္တိယာ ပစ္ဆိမံ ယာမံ ပစ္စုဋ္ဌာယ စင်္ကမေန နိသဇ္ဇာယ အာဝရဏီယေဟိ ဓမ္မေဟိ စိတ္တံ ပရိသောဓေတိ. ဣဒံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ဇာဂရိယာနုယောဂသ္မိံ ဟောတိ. "भिक्षूहो, नंदाची जागृत राहण्याची साधना अशी आहे: येथे, भिक्षूहो, नंद दिवसा चंक्रमण आणि बसून ध्यान करण्याद्वारे अडथळा आणणाऱ्या अकुशल धर्मांपासून आपले चित्त शुद्ध करतो. रात्रीच्या पहिल्या प्रहरात चंक्रमण आणि बसून ध्यान करण्याद्वारे अडथळा आणणाऱ्या धर्मांपासून आपले चित्त शुद्ध करतो. रात्रीच्या मध्य प्रहरात तो उजव्या कुशीवर सिंहशय्या धारण करतो, एका पायावर दुसरा पाय ठेवून, स्मृती व सजगतेने युक्त होऊन, उठण्याची संज्ञा मनात ठेवून झोपतो. रात्रीच्या अंतिम प्रहरात लवकर उठून चंक्रमण आणि बसून ध्यान करण्याद्वारे अडथळा आणणाऱ्या धर्मांपासून आपले चित्त शुद्ध करतो. भिक्षूहो, हीच नंदाची जागृत राहण्याची साधना आहे." ‘‘တတြိဒံ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ သတိသမ္ပဇညသ္မိံ ဟောတိ. ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ ဝိဒိတာ ဝေဒနာ ဥပ္ပဇ္ဇန္တိ, ဝိဒိတာ ဥပဋ္ဌဟန္တိ, ဝိဒိတာ အဗ္ဘတ္ထံ ဂစ္ဆန္တိ; ဝိဒိတာ သညာ…ပေ… ဝိဒိတာ ဝိတက္ကာ…ပေ… အဗ္ဘတ္ထံ ဂစ္ဆန္တိ. ဣဒံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒဿ သတိသမ္ပဇညသ္မိံ ဟောတိ. "भिक्षूहो, नंदाची स्मृती व सजगता अशी आहे: येथे, भिक्षूहो, नंदाला वेदना सजगतेने उत्पन्न होतात, सजगतेने जाणवतात आणि सजगतेने नष्ट होतात; संज्ञा...पे... वितर्क सजगतेने उत्पन्न होतात, सजगतेने जाणवतात आणि सजगतेने नष्ट होतात. भिक्षूहो, हीच नंदाची स्मृती व सजगता आहे." ‘‘ကိမညတြ, ဘိက္ခဝေ, နန္ဒော ဣန္ဒြိယေသု ဂုတ္တဒွါရော, ဘောဇနေ မတ္တညူ, ဇာဂရိယံ အနုယုတ္တော, သတိသမ္ပဇညေန သမန္နာဂတော, ယေဟိ နန္ဒော သက္ကောတိ ပရိပုဏ္ဏံ ပရိသုဒ္ဓံ ဗြဟ္မစရိယံ စရိတု’’န္တိ! နဝမံ. "भिक्षूहो, जर नंद इंद्रियांवर संयम ठेवणारा, भोजनात प्रमाण जाणणारा, जागृत राहण्यात तत्पर आणि स्मृती व सजगतेने युक्त नसता, तर तो परिपूर्ण व अत्यंत शुद्ध ब्रह्मचर्य पाळण्यास कसा समर्थ झाला असता?" नववे सुत्त समाप्त. ၁၀. ကာရဏ္ဍဝသုတ္တံ १०. कारंडवसुत्त ၁၀. ဧကံ [Pg.16] သမယံ ဘဂဝါ စမ္ပာယံ ဝိဟရတိ ဂဂ္ဂရာယ ပေါက္ခရဏိယာ တီရေ. တေန ခေါ ပန သမယေန ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော အညေနာညံ ပဋိစရတိ, ဗဟိဒ္ဓါ ကထံ အပနာမေတိ, ကောပဉ္စ ဒေါသဉ္စ အပ္ပစ္စယဉ္စ ပါတုကရောတိ. १०. एकदा भगवान चंपानगरीत गग्गरा पुष्करणीच्या तीरावर विहरत होते. त्या वेळी भिक्षूंनी एका भिक्षूवर आपत्तीचा आरोप केला. भिक्षूंनी आरोप केला असता, तो भिक्षू मूळ विषयाला बगल देऊन भलत्याच गोष्टी बोलू लागला, विषयांतर करू लागला आणि आपला राग, द्वेष व असंतोष प्रकट करू लागला। အထ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘နိဒ္ဓမထေတံ, ဘိက္ခဝေ, ပုဂ္ဂလံ; နိဒ္ဓမထေတံ, ဘိက္ခဝေ, ပုဂ္ဂလံ. အပနေယျေသော, ဘိက္ခဝေ, ပုဂ္ဂလော. ကိံ ဝေါ တေန ပရပုတ္တေန ဝိသောဓိတေန ! ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ပုဂ္ဂလဿ တာဒိသံယေဝ ဟောတိ အဘိက္ကန္တံ ပဋိက္ကန္တံ အာလောကိတံ ဝိလောကိတံ သမိဉ္ဇိတံ ပသာရိတံ သံဃာဋိပတ္တစီဝရဓာရဏံ, သေယျထာပိ အညေသံ ဘဒ္ဒကာနံ ဘိက္ခူနံ – ယာဝဿ ဘိက္ခူ အာပတ္တိံ န ပဿန္တိ. ယတော စ ခွဿ ဘိက္ခူ အာပတ္တိံ ပဿန္တိ, တမေနံ ဧဝံ ဇာနန္တိ – ‘သမဏဒူသီဝါယံ သမဏပလာပေါ သမဏကာရဏ္ဍဝေါ’တိ. တမေနံ ဣတိ ဝိဒိတွာ ဗဟိဒ္ဓါ နာသေန္တိ. တံ ကိဿ ဟေတု? မာ အညေ ဘဒ္ဒကေ ဘိက္ခူ ဒူသေသီ’’တိ! तेव्हा भगवान भिक्खूंना उद्देशून म्हणाले – "भिक्खूंनो, या व्यक्तीला (संघातून) हाकलून द्या! भिक्खूंनो, या व्यक्तीला हाकलून द्या! भिक्खूंनो, ही व्यक्ती बाहेर काढून टाकण्यास योग्य आहे. त्या परक्याच्या मुलाला (दुःशीलाला) शुद्ध करण्याचा प्रयत्न करून तुम्हाला काय लाभ होणार? भिक्खूंनो, या जगात जोपर्यंत भिक्खू एखाद्या व्यक्तीचा अपराध (आपत्ती) पाहत नाहीत, तोपर्यंत त्याचे पुढे जाणे, मागे येणे, समोर पाहणे, बाजूला पाहणे, हात-पाय आखडणे, पसरवणे आणि संघात, पात्र व चीवर धारण करणे हे इतर चांगल्या भिक्खूंसारखेच असते. परंतु, जेव्हा भिक्खू त्याचा अपराध पाहतात, तेव्हा ते त्याला ओळखतात की – 'हा श्रमणांना दूषित करणारा, श्रमणरूपी भुसा आणि श्रमणरूपी कचरा आहे.' असे जाणून ते त्याला बाहेर काढून टाकतात. ते कशासाठी? इतर चांगल्या भिक्खूंना त्याने दूषित करू नये म्हणून!" ‘‘သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, သမ္ပန္နေ ယဝကရဏေ ယဝဒူသီ ဇာယေထ ယဝပလာပေါ ယဝကာရဏ္ဍဝေါတိ. တဿ တာဒိသံယေဝ မူလံ ဟောတိ, သေယျထာပိ အညေသံ ဘဒ္ဒကာနံ ယဝါနံ; တာဒိသံယေဝ နာဠံ ဟောတိ, သေယျထာပိ အညေသံ ဘဒ္ဒကာနံ ယဝါနံ; တာဒိသံယေဝ ပတ္တံ ဟောတိ, သေယျထာပိ အညေသံ ဘဒ္ဒကာနံ ယဝါနံ – ယာဝဿ သီသံ န နိဗ္ဗတ္တတိ. ယတော စ ခွဿ သီသံ နိဗ္ဗတ္တတိ, တမေနံ ဧဝံ ဇာနန္တိ – ‘ယဝဒူသီဝါယံ ယဝပလာပေါ ယဝကာရဏ္ဍဝေါ’တိ. တမေနံ ဣတိ ဝိဒိတွာ သမူလံ ဥပ္ပာဋေတွာ ဗဟိဒ္ဓါ ယဝကရဏဿ ဆဍ္ဍေန္တိ. တံ ကိဿ ဟေတု? မာ အညေ ဘဒ္ဒကေ ယဝေ ဒူသေသီတိ! "भिक्खूंनो, ज्याप्रमाणे सातूच्या (यवाच्या) समृद्ध शेतात सातूला दूषित करणारे, सातूचे भुसे किंवा सातूचा कचरा असलेले तण उगवते. जोपर्यंत त्याला कणीस (शिर) येत नाही, तोपर्यंत त्याचे मूळ इतर चांगल्या सातूंसारखेच असते; त्याचे खोड इतर चांगल्या सातूंसारखेच असते; त्याचे पान इतर चांगल्या सातूंसारखेच असते. परंतु, जेव्हा त्याला कणीस येते, तेव्हा लोक त्याला ओळखतात की – 'हे सातूला दूषित करणारे, सातूचे भुसे आणि सातूचा कचरा आहे.' असे जाणून ते त्याला मुळासकट उपटून सातूच्या शेताबाहेर फेकून देतात. ते कशासाठी? इतर चांगल्या सातूला त्याने दूषित करू नये म्हणून!" ‘‘ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စဿ ပုဂ္ဂလဿ တာဒိသံယေဝ ဟောတိ အဘိက္ကန္တံ ပဋိက္ကန္တံ အာလောကိတံ ဝိလောကိတံ သမိဉ္ဇိတံ ပသာရိတံ သံဃာဋိပတ္တစီဝရဓာရဏံ, သေယျထာပိ အညေသံ ဘဒ္ဒကာနံ ဘိက္ခူနံ – ယာဝဿ [Pg.17] ဘိက္ခူ အာပတ္တိံ န ပဿန္တိ. ယတော စ ခွဿ ဘိက္ခူ အာပတ္တိံ ပဿန္တိ, တမေနံ ဧဝံ ဇာနန္တိ – ‘သမဏဒူသီဝါယံ သမဏပလာပေါ သမဏကာရဏ္ဍဝေါ’တိ. တမေနံ ဣတိ ဝိဒိတွာ ဗဟိဒ္ဓါ နာသေန္တိ. တံ ကိဿ ဟေတု? မာ အညေ ဘဒ္ဒကေ ဘိက္ခူ ဒူသေသီတိ. "भिक्खूंनो, त्याचप्रमाणे या शासनात जोपर्यंत भिक्खू एखाद्या व्यक्तीचा अपराध पाहत नाहीत, तोपर्यंत त्याचे पुढे जाणे, मागे येणे, समोर पाहणे, बाजूला पाहणे, हात-पाय आखडणे, पसरवणे आणि संघात, पात्र व चीवर धारण करणे हे इतर चांगल्या भिक्खूंसारखेच असते. परंतु, जेव्हा भिक्खू त्याचा अपराध पाहतात, तेव्हा ते त्याला ओळखतात की – 'हा श्रमणांना दूषित करणारा, श्रमणरूपी भुसा आणि श्रमणरूपी कचरा आहे.' असे जाणून ते त्याला बाहेर काढून टाकतात. ते कशासाठी? इतर चांगल्या भिक्खूंना त्याने दूषित करू नये म्हणून." ‘‘သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, မဟတော ဓညရာသိဿ ဖုဏမာနဿ တတ္ထ ယာနိ တာနိ ဓညာနိ ဒဠှာနိ သာရဝန္တာနိ တာနိ ဧကမန္တံ ပုဉ္ဇံ ဟောတိ, ယာနိ ပန တာနိ ဓညာနိ ဒုဗ္ဗလာနိ ပလာပါနိ တာနိ ဝါတော ဧကမန္တံ အပဝဟတိ. တမေနံ သာမိကာ သမ္မဇ္ဇနိံ ဂဟေတွာ ဘိယျောသောမတ္တာယ အပသမ္မဇ္ဇန္တိ. တံ ကိဿ ဟေတု? မာ အညေ ဘဒ္ဒကေ ဓညေ ဒူသေသီတိ! ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စဿ ပုဂ္ဂလဿ တာဒိသံယေဝ ဟောတိ အဘိက္ကန္တံ ပဋိက္ကန္တံ အာလောကိတံ ဝိလောကိတံ သမိဉ္ဇိတံ ပသာရိတံ သံဃာဋိပတ္တစီဝရဓာရဏံ, သေယျထာပိ အညေသံ ဘဒ္ဒကာနံ ဘိက္ခူနံ – ယာဝဿ ဘိက္ခူ အာပတ္တိံ န ပဿန္တိ. ယတော စ ခွဿ ဘိက္ခူ အာပတ္တိံ ပဿန္တိ, တမေနံ ဧဝံ ဇာနန္တိ – ‘သမဏဒူသီဝါယံ သမဏပလာပေါ သမဏကာရဏ္ဍဝေါ’တိ. တမေနံ ဣတိ ဝိဒိတွာ ဗဟိဒ္ဓါ နာသေန္တိ. တံ ကိဿ ဟေတု? မာ အညေ ဘဒ္ဒကေ ဘိက္ခူ ဒူသေသီတိ. "भिक्खूंनो, ज्याप्रमाणे धान्याच्या मोठ्या राशीला पाखडले असता, जे धान्य मजबूत आणि कसदार असते, ते एका बाजूला गोळा होते; परंतु जे धान्य कमकुवत आणि भुसा असते, त्याला वारा दुसऱ्या बाजूला उडवून नेतो. मग धान्याचे मालक झाडू घेऊन तो कचरा आणखी दूर झाडून टाकतात. ते कशासाठी? इतर चांगल्या धान्याला त्याने दूषित करू नये म्हणून! भिक्खूंनो, त्याचप्रमाणे या शासनात जोपर्यंत भिक्खू एखाद्या व्यक्तीचा अपराध पाहत नाहीत, तोपर्यंत त्याचे पुढे जाणे, मागे येणे, समोर पाहणे, बाजूला पाहणे, हात-पाय आखडणे, पसरवणे आणि संघात, पात्र व चीवर धारण करणे हे इतर चांगल्या भिक्खूंसारखेच असते. परंतु, जेव्हा भिक्खू त्याचा अपराध पाहतात, तेव्हा ते त्याला ओळखतात की – 'हा श्रमणांना दूषित करणारा, श्रमणरूपी भुसा आणि श्रमणरूपी कचरा आहे.' असे जाणून ते त्याला बाहेर काढून टाकतात. ते कशासाठी? इतर चांगल्या भिक्खूंना त्याने दूषित करू नये म्हणून." ‘‘သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဥဒပါနပနာဠိယတ္ထိကော တိဏှံ ကုဌာရိံ အာဒါယ ဝနံ ပဝိသေယျ. သော ယံ ယဒေဝ ရုက္ခံ ကုဌာရိပါသေန အာကောဋေယျ တတ္ထ ယာနိ တာနိ ရုက္ခာနိ ဒဠှာနိ သာရဝန္တာနိ တာနိ ကုဌာရိပါသေန အာကောဋိတာနိ ကက္ခဠံ ပဋိနဒန္တိ; ယာနိ ပန တာနိ ရုက္ခာနိ အန္တောပူတီနိ အဝဿုတာနိ ကသမ္ဗုဇာတာနိ တာနိ ကုဌာရိပါသေန အာကောဋိတာနိ ဒဒ္ဒရံ ပဋိနဒန္တိ. တမေနံ မူလေ ဆိန္ဒတိ, မူလေ ဆိန္ဒိတွာ အဂ္ဂေ ဆိန္ဒတိ, အဂ္ဂေ ဆိန္ဒိတွာ အန္တော သုဝိသောဓိတံ ဝိသောဓေတိ, အန္တော သုဝိသောဓိတံ ဝိသောဓေတွာ ဥဒပါနပနာဠိံ ယောဇေတိ. ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စဿ ပုဂ္ဂလဿ တာဒိသံယေဝ ဟောတိ အဘိက္ကန္တံ ပဋိက္ကန္တံ အာလောကိတံ ဝိလောကိတံ သမိဉ္ဇိတံ ပသာရိတံ သံဃာဋိပတ္တစီဝရဓာရဏံ, သေယျထာပိ အညေသံ ဘဒ္ဒကာနံ ဘိက္ခူနံ – ယာဝဿ ဘိက္ခူ အာပတ္တိံ န ပဿန္တိ. ယတော စ ခွဿ ဘိက္ခူ အာပတ္တိံ ပဿန္တိ, တမေနံ ဧဝံ [Pg.18] ဇာနန္တိ – ‘သမဏဒူသီဝါယံ သမဏပလာပေါ သမဏကာရဏ္ဍဝေါ’တိ. တမေနံ ဣတိ ဝိဒိတွာ ဗဟိဒ္ဓါ နာသေန္တိ. တံ ကိဿ ဟေတု? မာ အညေ ဘဒ္ဒကေ ဘိက္ခူ ဒူသေသီ’’တိ. "भिक्खूंनो, ज्याप्रमाणे विहिरीसाठी पाण्याचा पन्हाळा बनवू इच्छिणारा एखादा माणूस धारदार कुऱ्हाड घेऊन जंगलात प्रवेश करतो. तो ज्या ज्या झाडावर कुऱ्हाडीच्या पाठीने प्रहार करतो, त्यातील जी झाडे मजबूत आणि कसदार असतात, ती कुऱ्हाडीच्या प्रहाराने कडकड असा आवाज करतात. परंतु, जी झाडे आतून सडलेली, कुजलेली आणि पोकळ असतात, ती कुऱ्हाडीच्या प्रहाराने डब-डब असा पोकळ आवाज करतात. मग तो माणूस त्या झाडाला मुळापासून कापतो, मुळापासून कापून त्याचे शेंडे कापतो, शेंडे कापून त्याला आतून चांगल्या प्रकारे साफ करतो आणि स्वच्छ करून विहिरीचा पन्हाळा म्हणून वापरतो. भिक्खूंनो, त्याचप्रमाणे या शासनात जोपर्यंत भिक्खू एखाद्या व्यक्तीचा अपराध पाहत नाहीत, तोपर्यंत त्याचे पुढे जाणे, मागे येणे, समोर पाहणे, बाजूला पाहणे, हात-पाय आखडणे, पसरवणे आणि संघात, पात्र व चीवर धारण करणे हे इतर चांगल्या भिक्खूंसारखेच असते. परंतु, जेव्हा भिक्खू त्याचा अपराध पाहतात, तेव्हा ते त्याला ओळखतात की – 'हा श्रमणांना दूषित करणारा, श्रमणरूपी भुसा आणि श्रमणरूपी कचरा आहे.' असे जाणून ते त्याला बाहेर काढून टाकतात. ते कशासाठी? इतर चांगल्या भिक्खूंना त्याने दूषित करू नये म्हणून." ‘‘သံဝါသာယံ ဝိဇာနာထ, ပါပိစ္ဆော ကောဓနော ဣတိ; မက္ခီ ထမ္ဘီ ပဠာသီ စ, ဣဿုကီ မစ္ဆရီ သဌော. "एकत्र राहिल्याने त्याला ओळखा – तो वाईट इच्छा बाळगणारा, क्रोधी, इतरांचे गुण खोडून काढणारा, ताठर, मत्सरी, हेवा करणारा, कंजूष आणि कपटी आहे." ‘‘သန္တဝါစော ဇနဝတိ, သမဏော ဝိယ ဘာသတိ; ရဟော ကရောတိ ကရဏံ, ပါပဒိဋ္ဌိ အနာဒရော. "लोकांमध्ये तो शांत व गोड बोलतो, एखाद्या खऱ्या श्रमणासारखा बोलतो; परंतु गुप्तपणे वाईट कृत्ये करतो, तो पापी दृष्टी असलेला आणि आदर नसलेला असतो." ‘‘သံသပ္ပီ စ မုသာဝါဒီ, တံ ဝိဒိတွာ ယထာတထံ; သဗ္ဗေ သမဂ္ဂါ ဟုတွာန, အဘိနိဗ္ဗဇ္ဇယာထ နံ. "तो कुटिल आणि खोटे बोलणारा आहे, हे यथातथ्य जाणून, सर्व भिक्खूंनी एकत्र येऊन त्याला बाहेर हाकलून द्यावे." ‘‘ကာရဏ္ဍဝံ နိဒ္ဓမထ, ကသမ္ဗုံ အပကဿထ ; တတော ပလာပေ ဝါဟေထ, အဿမဏေ သမဏမာနိနေ. "त्या कचऱ्याला बाहेर फेकून द्या, त्या कुजलेल्या घाणीला ओढून बाहेर काढा! त्यानंतर त्या भुशाला वाहून घालवा, जे श्रमण नसतानाही स्वतःला श्रमण मानतात." ‘‘နိဒ္ဓမိတွာန ပါပိစ္ဆေ, ပါပအာစာရဂေါစရေ; သုဒ္ဓါသုဒ္ဓေဟိ သံဝါသံ, ကပ္ပယဝှော ပတိဿတာ; တတော သမဂ္ဂါ နိပကာ, ဒုက္ခဿန္တံ ကရိဿထာ’’တိ. ဒသမံ; "वाईट इच्छा बाळगणाऱ्या आणि वाईट आचरण व विहार करणाऱ्यांना बाहेर हाकलून देऊन, सजग राहून, शुद्धांनी शुद्धांसोबतच सहवास करावा. त्यानंतर एकसंघ आणि प्रज्ञावान होऊन तुम्ही दुःखाचा अंत कराल." မေတ္တာဝဂ္ဂေါ ပဌမော. "पहिला मेत्तावग्गो (मैत्री वर्ग) समाप्त." တဿုဒ္ဒါနံ – "त्याची अनुक्रमणिका –" မေတ္တံ ပညာ စ ဒွေ ပိယာ, ဒွေ လောကာ ဒွေ ဝိပတ္တိယော; ဒေဝဒတ္တော စ ဥတ္တရော, နန္ဒော ကာရဏ္ဍဝေန စာတိ. "मेत्ता, पञ्ञा, दोन पिया, दोन लोका, दोन विपत्ती, देवदत्त, उत्तर, नंद आणि कारंडव." ၂. မဟာဝဂ္ဂေါ २. "महावग्गो (महावर्ग)" ၁. ဝေရဉ္ဇသုတ္တံ १. "वेरंजसुत्त" ၁၁. ဧဝံ မေ သုတံ – ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝေရဉ္ဇာယံ ဝိဟရတိ နဠေရုပုစိမန္ဒမူလေ. အထ ခေါ ဝေရဉ္ဇော ဗြာဟ္မဏော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝတာ သဒ္ဓိံ သမ္မောဒိ. သမ္မောဒနီယံ ကထံ သာရဏီယံ ဝီတိသာရေတွာ [Pg.19] ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ ဝေရဉ္ဇော ဗြာဟ္မဏော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ११. "असे मी ऐकले आहे – एका वेळी भगवान वेरंज येथे नळेरु नावाच्या कडुनिंबाच्या झाडाखाली विहार करत होते. तेव्हा वेरंज नावाचा ब्राह्मण जेथे भगवान होते तेथे आला; आल्यानंतर त्याने भगवंतांसोबत कुशलक्षेम विचारले. आनंददायी आणि संस्मरणीय संभाषण संपवून तो एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या वेरंज ब्राह्मणाने भगवंतांना असे म्हटले –" ‘‘သုတံ မေတံ, ဘော ဂေါတမ – ‘န သမဏော ဂေါတမော ဗြာဟ္မဏေ ဇိဏ္ဏေ ဝုဍ္ဎေ မဟလ္လကေ အဒ္ဓဂတေ ဝယောအနုပ္ပတ္တေ အဘိဝါဒေတိ ဝါ ပစ္စုဋ္ဌေတိ ဝါ အာသနေန ဝါ နိမန္တေတီ’တိ. တယိဒံ, ဘော ဂေါတမ, တထေဝ. န ဟိ ဘဝံ ဂေါတမော ဗြာဟ္မဏေ ဇိဏ္ဏေ ဝုဍ္ဎေ မဟလ္လကေ အဒ္ဓဂတေ ဝယောအနုပ္ပတ္တေ အဘိဝါဒေတိ ဝါ ပစ္စုဋ္ဌေတိ ဝါ အာသနေန ဝါ နိမန္တေတိ. တယိဒံ, ဘော ဂေါတမ, န သမ္ပန္နမေဝါ’’တိ. ‘‘နာဟံ တံ, ဗြာဟ္မဏ, ပဿာမိ သဒေဝကေ လောကေ သမာရကေ သဗြဟ္မကေ သဿမဏဗြာဟ္မဏိယာ ပဇာယ သဒေဝမနုဿာယ ယမဟံ အဘိဝါဒေယျံ ဝါ ပစ္စုဋ္ဌေယျံ ဝါ အာသနေန ဝါ နိမန္တေယျံ. ယဉှိ, ဗြာဟ္မဏ, တထာဂတော အဘိဝါဒေယျ ဝါ ပစ္စုဋ္ဌေယျ ဝါ အာသနေန ဝါ နိမန္တေယျ, မုဒ္ဓါပိ တဿ ဝိပတေယျာ’’တိ. “हे गौतम, मी असे ऐकले आहे की—'श्रमण गौतम हे वृद्ध, वयोवृद्ध, ज्येष्ठ, वयोमान गाठलेल्या आणि आयुष्याच्या अंतिम टप्प्यावर पोहोचलेल्या ब्राह्मणांना अभिवादन करत नाहीत, त्यांच्या स्वागतासाठी उठून उभे राहत नाहीत किंवा त्यांना आसनावर बसण्यासाठी आमंत्रित करत नाहीत.' हे गौतम, हे खरोखरच तसेच आहे. कारण आपण वृद्ध, वयोवृद्ध, ज्येष्ठ, वयोमान गाठलेल्या आणि आयुष्याच्या अंतिम टप्प्यावर पोहोचलेल्या ब्राह्मणांना अभिवादन करत नाही, त्यांच्या स्वागतासाठी उठून उभे राहत नाही किंवा त्यांना आसनावर बसण्यासाठी आमंत्रित करत नाही. हे गौतम, हे निश्चितच योग्य नाही.” “ब्राह्मणा, देव, मार आणि ब्रह्मासह या लोकात, श्रमण-ब्राह्मण, देव आणि मानवांसह या प्रजेमध्ये मला असा कोणीही दिसत नाही, ज्याला मी अभिवादन करावे, ज्याच्या स्वागतासाठी उठून उभे राहावे किंवा ज्याला आसनावर बसण्यासाठी आमंत्रित करावे. कारण, ब्राह्मणा, तथागतांनी ज्याला अभिवादन केले, ज्याच्या स्वागतासाठी उठून उभे राहिले किंवा ज्याला आसनावर बसण्यासाठी आमंत्रित केले, त्याचे मस्तकही धडावेगळे होऊन गळून पडेल.” ‘‘အရသရူပေါ ဘဝံ ဂေါတမော’’တိ! ‘‘အတ္ထိ ခွေသ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အရသရူပေါ သမဏော ဂေါတမော’တိ. ယေ တေ, ဗြာဟ္မဏ, ရူပရသာ သဒ္ဒရသာ ဂန္ဓရသာ ရသရသာ ဖောဋ္ဌဗ္ဗရသာ, တေ တထာဂတဿ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ. အယံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အရသရူပေါ သမဏော ဂေါတမော’တိ, နော စ ခေါ ယံ တွံ သန္ဓာယ ဝဒေသီ’’တိ. “आपण गौतम अरसरूप (नीरस) आहात!” “ब्राह्मणा, असा एक दृष्टिकोन आहे, ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे अरसरूप आहेत.' कारण, ब्राह्मणा, रूप-रस, शब्द-रस, गंध-रस, रस-रस आणि स्पर्श-रस यांचे जे काही आकर्षण आहेत, ते तथागतांनी पूर्णपणे नष्ट केले आहेत, मुळासकट उपटून टाकले आहेत, ताळाच्या बुंध्यासारखे केले आहेत, नामशेष केले आहेत आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणाऱ्या स्वभावाचे केले आहेत. ब्राह्मणा, हा तो दृष्टिकोन आहे ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे अरसरूप आहेत.' परंतु, तू ज्या उद्देशाने हे बोलला आहेस, त्या उद्देशाने नाही.” ‘‘နိဗ္ဘောဂေါ ဘဝံ ဂေါတမော’’တိ! ‘‘အတ္ထိ ခွေသ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘နိဗ္ဘောဂေါ သမဏော ဂေါတမော’တိ. ယေ တေ, ဗြာဟ္မဏ, ရူပဘောဂါ သဒ္ဒဘောဂါ ဂန္ဓဘောဂါ ရသဘောဂါ ဖောဋ္ဌဗ္ဗဘောဂါ, တေ တထာဂတဿ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ. အယံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘နိဗ္ဘောဂေါ သမဏော ဂေါတမော’တိ, နော စ ခေါ ယံ တွံ သန္ဓာယ ဝဒေသီ’’တိ. “आपण गौतम भोगरहित (निर्भोग) आहात!” “ब्राह्मणा, असा एक दृष्टिकोन आहे, ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे भोगरहित आहेत.' कारण, ब्राह्मणा, रूप-भोग, शब्द-भोग, गंध-भोग, रस-भोग आणि स्पर्श-भोग यांचे जे काही उपभोग आहेत, ते तथागतांनी पूर्णपणे नष्ट केले आहेत, मुळासकट उपटून टाकले आहेत, ताळाच्या बुंध्यासारखे केले आहेत, नामशेष केले आहेत आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणाऱ्या स्वभावाचे केले आहेत. ब्राह्मणा, हा तो दृष्टिकोन आहे ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे भोगरहित आहेत.' परंतु, तू ज्या उद्देशाने हे बोलला आहेस, त्या उद्देशाने नाही.” ‘‘အကိရိယဝါဒေါ [Pg.20] ဘဝံ ဂေါတမော’’တိ! ‘‘အတ္ထိ ခွေသ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော’တိ. အဟဉှိ, ဗြာဟ္မဏ, အကိရိယံ ဝဒါမိ ကာယဒုစ္စရိတဿ ဝစီဒုစ္စရိတဿ မနောဒုစ္စရိတဿ; အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ အကိရိယံ ဝဒါမိ. အယံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော’တိ, နော စ ခေါ ယံ တွံ သန္ဓာယ ဝဒေသီ’’တိ. “आपण गौतम अक्रियावादी आहात!” “ब्राह्मणा, असा एक दृष्टिकोन आहे, ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत.' कारण, ब्राह्मणा, मी शारीरिक दुराचरण, वाचिक दुराचरण आणि मानसिक दुराचरण न करण्याचे (अक्रिया) सांगतो; तसेच अनेक प्रकारच्या पापमय, अकुशल धर्मांचे आचरण न करण्याचे (अक्रिया) सांगतो. ब्राह्मणा, हा तो दृष्टिकोन आहे ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत.' परंतु, तू ज्या उद्देशाने हे बोलला आहेस, त्या उद्देशाने नाही.” ‘‘ဥစ္ဆေဒဝါဒေါ ဘဝံ ဂေါတမော’’တိ! ‘‘အတ္ထိ ခွေသ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဥစ္ဆေဒဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော’တိ. အဟဉှိ, ဗြာဟ္မဏ, ဥစ္ဆေဒံ ဝဒါမိ ရာဂဿ ဒေါသဿ မောဟဿ; အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဥစ္ဆေဒံ ဝဒါမိ. အယံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဥစ္ဆေဒဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော’တိ, နော စ ခေါ ယံ တွံ သန္ဓာယ ဝဒေသီ’’တိ. “आपण गौतम उच्छेदवादी आहात!” “ब्राह्मणा, असा एक दृष्टिकोन आहे, ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे उच्छेदवादी आहेत.' कारण, ब्राह्मणा, मी राग, द्वेष आणि मोह यांच्या उच्छेदाचे (विनाशाचे) समर्थन करतो; तसेच अनेक प्रकारच्या पापमय, अकुशल धर्मांच्या उच्छेदाचे समर्थन करतो. ब्राह्मणा, हा तो दृष्टिकोन आहे ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे उच्छेदवादी आहेत.' परंतु, तू ज्या उद्देशाने हे बोलला आहेस, त्या उद्देशाने नाही.” ‘‘ဇေဂုစ္ဆီ ဘဝံ ဂေါတမော’’တိ! ‘‘အတ္ထိ ခွေသ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဇေဂုစ္ဆီ သမဏော ဂေါတမော’တိ. အဟဉှိ, ဗြာဟ္မဏ, ဇိဂုစ္ဆာမိ ကာယဒုစ္စရိတေန ဝစီဒုစ္စရိတေန မနောဒုစ္စရိတေန; ဇိဂုစ္ဆာမိ အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ သမာပတ္တိယာ. အယံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဇေဂုစ္ဆီ သမဏော ဂေါတမော’တိ, နော စ ခေါ ယံ တွံ သန္ဓာယ ဝဒေသီ’’တိ. “आपण गौतम घृणा करणारे (जुगुप्सा बाळगणारे) आहात!” “ब्राह्मणा, असा एक दृष्टिकोन आहे, ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे घृणा करणारे आहेत.' कारण, ब्राह्मणा, मी शारीरिक दुराचरण, वाचिक दुराचरण आणि मानसिक दुराचरण यांविषयी घृणा बाळगतो; तसेच अनेक प्रकारच्या पापमय, अकुशल धर्मांच्या प्राप्तीविषयी घृणा बाळगतो. ब्राह्मणा, हा तो दृष्टिकोन आहे ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे घृणा करणारे आहेत.' परंतु, तू ज्या उद्देशाने हे बोलला आहेस, त्या उद्देशाने नाही.” ‘‘ဝေနယိကော ဘဝံ ဂေါတမော’’တိ! ‘‘အတ္ထိ ခွေသ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဝေနယိကော သမဏော ဂေါတမော’တိ. အဟဉှိ, ဗြာဟ္မဏ, ဝိနယာယ ဓမ္မံ ဒေသေမိ ရာဂဿ ဒေါသဿ မောဟဿ; အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဝိနယာယ ဓမ္မံ ဒေသေမိ. အယံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဝေနယိကော သမဏော ဂေါတမော’တိ, နော စ ခေါ ယံ တွံ သန္ဓာယ ဝဒေသီ’’တိ. “आपण गौतम विनाशक (वैनायिक) आहात!” “ब्राह्मणा, असा एक दृष्टिकोन आहे, ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे विनाशक आहेत.' कारण, ब्राह्मणा, मी राग, द्वेष आणि मोह यांच्या विनाशासाठी धम्माचा उपदेश करतो; तसेच अनेक प्रकारच्या पापमय, अकुशल धर्मांच्या विनाशासाठी धम्माचा उपदेश करतो. ब्राह्मणा, हा तो दृष्टिकोन आहे ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे विनाशक आहेत.' परंतु, तू ज्या उद्देशाने हे बोलला आहेस, त्या उद्देशाने नाही.” ‘‘တပဿီ ဘဝံ ဂေါတမော’’တိ! ‘‘အတ္ထိ ခွေသ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘တပဿီ သမဏော ဂေါတမော’တိ. တပနီယာဟံ[Pg.21], ဗြာဟ္မဏ, ပါပကေ အကုသလေ ဓမ္မေ ဝဒါမိ ကာယဒုစ္စရိတံ ဝစီဒုစ္စရိတံ မနောဒုစ္စရိတံ. ယဿ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, တပနီယာ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ, တမဟံ ‘တပဿီ’တိ ဝဒါမိ. တထာဂတဿ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, တပနီယာ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ. အယံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘တပဿီ သမဏော ဂေါတမော’တိ, နော စ ခေါ ယံ တွံ သန္ဓာယ ဝဒေသီ’’တိ. “आपण गौतम तपस्वी आहात!” “ब्राह्मणा, असा एक दृष्टिकोन आहे, ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे तपस्वी आहेत.' कारण, ब्राह्मणा, मी शारीरिक दुराचरण, वाचिक दुराचरण आणि मानसिक दुराचरण या पापमय, अकुशल धर्मांना 'तपनीय' (ताप देणारे) म्हणतो. ब्राह्मणा, ज्याचे हे ताप देणारे, पापमय, अकुशल धर्म नष्ट झाले आहेत, मुळासकट उपटून टाकले गेले आहेत, ताळाच्या बुंध्यासारखे केले गेले आहेत, नामशेष केले गेले आहेत आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणाऱ्या स्वभावाचे झाले आहेत, त्याला मी 'तपस्वी' म्हणतो. आणि तथागतांचे हे ताप देणारे, पापमय, अकुशल धर्म नष्ट झाले आहेत, मुळासकट उपटून टाकले गेले आहेत, ताळाच्या बुंध्यासारखे केले गेले आहेत, नामशेष केले गेले आहेत आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणाऱ्या स्वभावाचे झाले आहेत. ब्राह्मणा, हा तो दृष्टिकोन आहे ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे तपस्वी आहेत.' परंतु, तू ज्या उद्देशाने हे बोलला आहेस, त्या उद्देशाने नाही.” ‘‘အပဂဗ္ဘော ဘဝံ ဂေါတမော’’တိ! ‘‘အတ္ထိ ခွေသ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အပဂဗ္ဘော သမဏော ဂေါတမော’တိ. ယဿ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, အာယတိံ ဂဗ္ဘသေယျာ ပုနဗ္ဘဝါဘိနိဗ္ဗတ္တိ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ, တမဟံ ‘အပဂဗ္ဘော’တိ ဝဒါမိ. တထာဂတဿ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, အာယတိံ ဂဗ္ဘသေယျာ ပုနဗ္ဘဝါဘိနိဗ္ဗတ္တိ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ. အယံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အပဂဗ္ဘော သမဏော ဂေါတမော’တိ, နော စ ခေါ ယံ တွံ သန္ဓာယ ဝဒေသိ. “आपण गौतम गर्भरहित (अपगर्भ) आहात!” “ब्राह्मणा, असा एक दृष्टिकोन आहे, ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे गर्भरहित आहेत.' कारण, ब्राह्मणा, ज्याची भविष्यातील गर्भवास आणि पुनर्जन्माची उत्पत्ती नष्ट झाली आहे, मुळासकट उपटून टाकली गेली आहे, ताळाच्या बुंध्यासारखी केली गेली आहे, नामशेष केली गेली आहे आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणाऱ्या स्वभावाची झाली आहे, त्याला मी 'गर्भरहित' म्हणतो. आणि तथागतांची भविष्यातील गर्भवास आणि पुनर्जन्माची उत्पत्ती नष्ट झाली आहे, मुळासकट उपटून टाकली गेली आहे, ताळाच्या बुंध्यासारखी केली गेली आहे, नामशेष केली गेली आहे आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणाऱ्या स्वभावाची झाली आहे. ब्राह्मणा, हा तो दृष्टिकोन आहे ज्याद्वारे माझ्याबद्दल बोलताना कोणी योग्य प्रकारे असे म्हणू शकेल की—'श्रमण गौतम हे गर्भरहित आहेत.' परंतु, तू ज्या उद्देशाने हे बोलला आहेस, त्या उद्देशाने नाही।” ‘‘သေယျထာပိ, ဗြာဟ္မဏ, ကုက္ကုဋိယာ အဏ္ဍာနိ အဋ္ဌ ဝါ ဒသ ဝါ ဒွါဒသ ဝါ. တာနာဿု ကုက္ကုဋိယာ သမ္မာ အဓိသယိတာနိ သမ္မာ ပရိသေဒိတာနိ သမ္မာ ပရိဘာဝိတာနိ. ယော နု ခေါ တေသံ ကုက္ကုဋစ္ဆာပကာနံ ပဌမတရံ ပါဒနခသိခါယ ဝါ မုခတုဏ္ဍကေန ဝါ အဏ္ဍကောသံ ပဒါလေတွာ သောတ္ထိနာ အဘိနိဗ္ဘိဇ္ဇေယျ, ကိန္တိ သွာဿ ဝစနီယော – ‘ဇေဋ္ဌော ဝါ ကနိဋ္ဌော ဝါ’’’တိ? ‘‘ဇေဋ္ဌော တိဿ, ဘော ဂေါတမ, ဝစနီယော. သော ဟိ နေသံ, ဘော ဂေါတမ, ဇေဋ္ဌော ဟောတီ’’တိ. "हे ब्राह्मणा, समजा एखाद्या कोंबडीची आठ, दहा किंवा बारा अंडी आहेत. त्या कोंबडीने त्या अंड्यांवर व्यवस्थित बसून, त्यांना योग्य प्रकारे उबवून आणि सर्व बाजूंनी चांगल्या प्रकारे जोपासले आहे. त्या कोंबडीच्या पिल्लांपैकी ज्या पिल्लाने सर्वात आधी आपल्या पायाच्या नखांच्या टोकाने किंवा चोचीने अंड्याचे कवच फोडून सुखरूपपणे बाहेर प्रवेश केला असेल, त्याला काय म्हटले पाहिजे - 'मोठा' की 'लहान'?" "हे गौतम, त्याला 'मोठा' म्हटले पाहिजे. कारण हे गौतम, तो त्यांच्यामध्ये सर्वात मोठा असतो." ‘‘ဧဝမေဝံ ခေါ အဟံ, ဗြာဟ္မဏ, အဝိဇ္ဇာဂတာယ ပဇာယ အဏ္ဍဘူတာယ ပရိယောနဒ္ဓါယ အဝိဇ္ဇဏ္ဍကောသံ ပဒါလေတွာ ဧကောဝ လောကေ အနုတ္တရံ သမ္မာသမ္ဗောဓိံ အဘိသမ္ဗုဒ္ဓေါ. အဟဉှိ, ဗြာဟ္မဏ, ဇေဋ္ဌော သေဋ္ဌော လောကဿ. အာရဒ္ဓံ ခေါ ပန မေ, ဗြာဟ္မဏ, ဝီရိယံ အဟောသိ အသလ္လီနံ, ဥပဋ္ဌိတာ သတိ အသမ္မုဋ္ဌာ, ပဿဒ္ဓေါ ကာယော အသာရဒ္ဓေါ, သမာဟိတံ စိတ္တံ ဧကဂ္ဂံ. "त्याचप्रमाणे, हे ब्राह्मणा, अविद्याग्रस्त, अंड्यासारख्या (अविद्येच्या) कवचात बंदिस्त असलेल्या आणि अविद्येने वेढलेल्या या प्रजासमुहामध्ये, मी एकट्यानेच अविद्येचे अंडकवच फोडून या जगात अनुत्तर सम्यक्संबोधी प्राप्त केली आहे. हे ब्राह्मणा, मीच या जगामध्ये ज्येष्ठ आणि श्रेष्ठ आहे. हे ब्राह्मणा, मी न खचणारा वीर्य (प्रयत्न) आरंभिला होता, माझी स्मृती जागृत आणि संभ्रमरहित होती, माझे शरीर शांत आणि व्याकुळतारहित होते, आणि माझे चित्त समाहित व एकाग्र झाले होते." ‘‘သော [Pg.22] ခေါ အဟံ, ဗြာဟ္မဏ, ဝိဝိစ္စေဝ ကာမေဟိ ဝိဝိစ္စ အကုသလေဟိ ဓမ္မေဟိ သဝိတက္ကံ သဝိစာရံ ဝိဝေကဇံ ပီတိသုခံ ပဌမံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရာမိ; ဝိတက္ကဝိစာရာနံ ဝူပသမာ အဇ္ဈတ္တံ သမ္ပသာဒနံ စေတသော ဧကောဒိဘာဝံ အဝိတက္ကံ အဝိစာရံ သမာဓိဇံ ပီတိသုခံ ဒုတိယံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရာမိ; ပီတိယာ စ ဝိရာဂါ ဥပေက္ခကော စ ဝိဟရာမိ သတော စ သမ္ပဇာနော သုခဉ္စ ကာယေန ပဋိသံဝေဒေမိ ယံ တံ အရိယာ အာစိက္ခန္တိ – ‘ဥပေက္ခကော သတိမာ သုခဝိဟာရီ’တိ တတိယံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရာမိ; သုခဿ စ ပဟာနာ ဒုက္ခဿ စ ပဟာနာ ပုဗ္ဗေဝ သောမနဿဒေါမနဿာနံ အတ္ထင်္ဂမာ အဒုက္ခမသုခံ ဥပေက္ခာသတိပါရိသုဒ္ဓိံ စတုတ္ထံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရာမိ. "त्यानंतर, हे ब्राह्मणा, मी कामभोगांपासून अलिप्त होऊन, अकुशल धर्मांपासून अलिप्त होऊन, वितर्क आणि विचारांसह असलेल्या, विवेकापासून उत्पन्न झालेल्या आणि प्रीती व सुखाने युक्त असलेल्या प्रथम ध्यानाचा लाभ घेऊन विहरू लागलो. वितर्क आणि विचारांच्या शांत होण्याने, आंतरिक प्रसन्नता देणाऱ्या, चित्ताला एकाग्र करणाऱ्या, वितर्करहित, विचाररहित, समाधीपासून उत्पन्न झालेल्या आणि प्रीती व सुखाने युक्त असलेल्या द्वितीय ध्यानाचा लाभ घेऊन मी विहरू लागलो. प्रीतीचाही विराग झाल्यामुळे मी उपेक्षक (तटस्थ) राहून विहरू लागलो, आणि स्मृती व संप्रजन्य (जागृतता) यांनी युक्त होऊन शरीराने त्या सुखाचा अनुभव घेऊ लागलो, ज्याबद्दल आर्य पुरुष म्हणतात की, 'तो उपेक्षक, स्मृतिमान आणि सुखविहारी आहे'; अशा तृतीय ध्यानाचा लाभ घेऊन मी विहरू लागलो. सुखाचा त्याग केल्यामुळे आणि दुःखाचा त्याग केल्यामुळे, तसेच आधीच सोमनस्य (हर्ष) आणि दोमनस्य (खिन्नता) नष्ट झाल्यामुळे, दुःखही नाही आणि सुखही नाही अशा, उपेक्षेमुळे स्मृती अत्यंत शुद्ध झालेल्या चतुर्थ ध्यानाचा लाभ घेऊन मी विहरू लागलो." ‘‘သော ဧဝံ သမာဟိတေ စိတ္တေ ပရိသုဒ္ဓေ ပရိယောဒါတေ အနင်္ဂဏေ ဝိဂတူပက္ကိလေသေ မုဒုဘူတေ ကမ္မနိယေ ဌိတေ အာနေဉ္ဇပ္ပတ္တေ ပုဗ္ဗေနိဝါသာနုဿတိဉာဏာယ စိတ္တံ အဘိနိန္နာမေသိံ. သော အနေကဝိဟိတံ ပုဗ္ဗေနိဝါသံ အနုဿရာမိ, သေယျထိဒံ – ဧကမ္ပိ ဇာတိံ ဒွေပိ ဇာတိယော တိဿောပိ ဇာတိယော စတဿောပိ ဇာတိယော ပဉ္စပိ ဇာတိယော ဒသပိ ဇာတိယော ဝီသမ္ပိ ဇာတိယော တိံသမ္ပိ ဇာတိယော စတ္တာလီသမ္ပိ ဇာတိယော ပညာသမ္ပိ ဇာတိယော ဇာတိသတမ္ပိ ဇာတိသဟဿမ္ပိ ဇာတိသတသဟဿမ္ပိ အနေကေပိ သံဝဋ္ဋကပ္ပေ အနေကေပိ ဝိဝဋ္ဋကပ္ပေ အနေကေပိ သံဝဋ္ဋဝိဝဋ္ဋကပ္ပေ – ‘အမုတြာသိံ ဧဝံနာမော ဧဝံဂေါတ္တော ဧဝံဝဏ္ဏော ဧဝမာဟာရော ဧဝံသုခဒုက္ခပ္ပဋိသံဝေဒီ ဧဝမာယုပရိယန္တော. သော တတော စုတော အမုတြ ဥဒပါဒိံ; တတြာပါသိံ ဧဝံနာမော ဧဝံဂေါတ္တော ဧဝံဝဏ္ဏော ဧဝမာဟာရော ဧဝံသုခဒုက္ခပ္ပဋိသံဝေဒီ ဧဝမာယုပရိယန္တော. သော တတော စုတော ဣဓူပပန္နော’တိ. ဣတိ သာကာရံ သဥဒ္ဒေသံ အနေကဝိဟိတံ ပုဗ္ဗေနိဝါသံ အနုဿရာမိ. "अशा प्रकारे चित्त समाहित, परिशुद्ध, अत्यंत निर्मळ, दोषरहित, उपक्लेशांपासून मुक्त, मृदू, कर्मक्षम, स्थिर आणि अचल झाले असता, मी पूर्वजन्मांच्या स्मृतीच्या ज्ञानासाठी (पुब्बेनिवासानुस्सतिज्ञाण) चित्त वळवले. मी माझ्या अनेक प्रकारच्या पूर्वजन्मांचे स्मरण करू लागलो, जसे की - एक जन्म, दोन जन्म, तीन जन्म, चार जन्म, पाच जन्म, दहा जन्म, वीस जन्म, तीस जन्म, चाळीस जन्म, पन्नास जन्म, शंभर जन्म, हजार जन्म, लाख जन्म, अनेक संवर्तकल्प (विश्वाचा विनाश काळ), अनेक विवर्तकल्प (विश्वाचा विकास काळ), अनेक संवर्त-विवर्तकल्प - 'त्या जन्मात माझे नाव असे होते, गोत्र असे होते, वर्ण असा होता, आहार असा होता, सुख-दुःखाचा अनुभव असा होता आणि आयुष्याची मर्यादा अशी होती. तिथून च्युत (मृत) होऊन मी अमक्या ठिकाणी जन्माला आलो; तिथेही माझे नाव असे होते, गोत्र असे होते, वर्ण असा होता, आहार असा होता, सुख-दुःखाचा अनुभव असा होता आणि आयुष्याची मर्यादा अशी होती. तिथून च्युत होऊन मी येथे जन्माला आलो.' अशा प्रकारे मी सविस्तर आणि तपशीलांसह माझ्या अनेक प्रकारच्या पूर्वजन्मांचे स्मरण करू लागलो." ‘‘အယံ ခေါ မေ, ဗြာဟ္မဏ, ရတ္တိယာ ပဌမေ ယာမေ ပဌမာ ဝိဇ္ဇာ အဓိဂတာ; အဝိဇ္ဇာ ဝိဟတာ ဝိဇ္ဇာ ဥပ္ပန္နာ; တမော ဝိဟတော အာလောကော ဥပ္ပန္နော, ယထာ တံ အပ္ပမတ္တဿ အာတာပိနော ပဟိတတ္တဿ ဝိဟရတော. အယံ ခေါ မေ, ဗြာဟ္မဏ, ပဌမာ အဘိနိဗ္ဘိဒါ အဟောသိ ကုက္ကုဋစ္ဆာပကဿေဝ အဏ္ဍကောသမှာ. "हे ब्राह्मणा, रात्रीच्या पहिल्या प्रहरात मला ही पहिली विद्या प्राप्त झाली; अविद्या नष्ट झाली आणि विद्या उत्पन्न झाली; अंधकार नष्ट झाला आणि प्रकाश उत्पन्न झाला, जसे की अप्रमत्त (जागृत), उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहरणाऱ्या व्यक्तीच्या बाबतीत घडते. हे ब्राह्मणा, कोंबडीच्या पिल्लाने अंड्याचे कवच फोडून बाहेर पडण्याप्रमाणे, हे माझे पहिले कवच फोडून बाहेर पडणे होते." ‘‘သော ဧဝံ သမာဟိတေ စိတ္တေ ပရိသုဒ္ဓေ ပရိယောဒါတေ အနင်္ဂဏေ ဝိဂတူပက္ကိလေသေ မုဒုဘူတေ ကမ္မနိယေ ဌိတေ အာနေဉ္ဇပ္ပတ္တေ သတ္တာနံ စုတူပပါတဉာဏာယ စိတ္တံ အဘိနိန္နာမေသိံ. သော ဒိဗ္ဗေန စက္ခုနာ ဝိသုဒ္ဓေန အတိက္ကန္တမာနုသကေန သတ္တေ ပဿာမိ စဝမာနေ ဥပပဇ္ဇမာနေ ဟီနေ ပဏီတေ [Pg.23] သုဝဏ္ဏေ ဒုဗ္ဗဏ္ဏေ, သုဂတေ ဒုဂ္ဂတေ ယထာကမ္မူပဂေ သတ္တေ ပဇာနာမိ – ‘ဣမေ ဝတ ဘောန္တော သတ္တာ ကာယဒုစ္စရိတေန သမန္နာဂတာ, ဝစီဒုစ္စရိတေန သမန္နာဂတာ, မနောဒုစ္စရိတေန သမန္နာဂတာ, အရိယာနံ ဥပဝါဒကာ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိကာ, မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိကမ္မသမာဒါနာ. တေ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ အပါယံ ဒုဂ္ဂတိံ ဝိနိပါတံ နိရယံ ဥပပန္နာတိ. ဣမေ ဝါ ပန ဘောန္တော သတ္တာ ကာယသုစရိတေန သမန္နာဂတာ, ဝစီသုစရိတေန သမန္နာဂတာ, မနောသုစရိတေန သမန္နာဂတာ, အရိယာနံ အနုပဝါဒကာ, သမ္မာဒိဋ္ဌိကာ, သမ္မာဒိဋ္ဌိကမ္မသမာဒါနာ. တေ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ သုဂတိံ သဂ္ဂံ လောကံ ဥပပန္နာ’တိ. ဣတိ ဒိဗ္ဗေန စက္ခုနာ ဝိသုဒ္ဓေန အတိက္ကန္တမာနုသကေန သတ္တေ ပဿာမိ စဝမာနေ ဥပပဇ္ဇမာနေ ဟီနေ ပဏီတေ သုဝဏ္ဏေ ဒုဗ္ဗဏ္ဏေ, သုဂတေ ဒုဂ္ဂတေ ယထာကမ္မူပဂေ သတ္တေ ပဇာနာမိ. "अशा प्रकारे चित्त समाहित, परिशुद्ध, अत्यंत निर्मळ, दोषरहित, उपक्लेशांपासून मुक्त, मृदू, कर्मक्षम, स्थिर आणि अचल झाले असता, मी प्राण्यांच्या च्युती (मृत्यू) आणि उत्पत्तीच्या (पुनर्जन्म) ज्ञानासाठी (चुतूपपातज्ञाण) चित्त वळवले. मानवी दृष्टीच्या पलीकडे असलेल्या अत्यंत शुद्ध अशा दिव्य चक्षूंनी मी प्राण्यांना च्युत होताना आणि जन्माला येताना पाहिले; हीन आणि श्रेष्ठ, सुंदर आणि कुरूप, सुगती प्राप्त आणि दुर्गती प्राप्त झालेल्या प्राण्यांना त्यांच्या कर्मानुसार गती मिळताना मी जाणले - 'अरेरे! हे प्राणी कायिक दुश्चरित्राने युक्त होते, वाचिक दुश्चरित्राने युक्त होते, मानसिक दुश्चरित्राने युक्त होते, आर्यांची निंदा करणारे होते, मिथ्यादृष्टी असलेले आणि मिथ्यादृष्टीनुसार कर्मे करणारे होते. ते शरीराच्या विघटनानंतर, मृत्यूनंतर अपाय, दुर्गती, विनिपात आणि नरकात जन्माला आले आहेत. किंवा, हे प्राणी कायिक सुचरित्राने युक्त होते, वाचिक सुचरित्राने युक्त होते, मानसिक सुचरित्राने युक्त होते, आर्यांची निंदा न करणारे होते, सम्यग्दृष्टी असलेले आणि सम्यग्दृष्टीनुसार कर्मे करणारे होते. ते शरीराच्या विघटनानंतर, मृत्यूनंतर सुगती आणि स्वर्गलोकात जन्माला आले आहेत.' अशा प्रकारे मानवी दृष्टीच्या पलीकडे असलेल्या अत्यंत शुद्ध अशा दिव्य चक्षूंनी मी प्राण्यांना च्युत होताना आणि जन्माला येताना पाहिले; हीन आणि श्रेष्ठ, सुंदर आणि कुरूप, सुगती प्राप्त आणि दुर्गती प्राप्त झालेल्या प्राण्यांना त्यांच्या कर्मानुसार गती मिळताना मी जाणले." ‘‘အယံ ခေါ မေ, ဗြာဟ္မဏ, ရတ္တိယာ မဇ္ဈိမေ ယာမေ ဒုတိယာ ဝိဇ္ဇာ အဓိဂတာ; အဝိဇ္ဇာ ဝိဟတာ ဝိဇ္ဇာ ဥပ္ပန္နာ; တမော ဝိဟတော အာလောကော ဥပ္ပန္နော, ယထာ တံ အပ္ပမတ္တဿ အာတာပိနော ပဟိတတ္တဿ ဝိဟရတော. အယံ ခေါ မေ, ဗြာဟ္မဏ, ဒုတိယာ အဘိနိဗ္ဘိဒါ အဟောသိ ကုက္ကုဋစ္ဆာပကဿေဝ အဏ္ဍကောသမှာ. "हे ब्राह्मणा, रात्रीच्या मध्यम प्रहरात मला ही दुसरी विद्या प्राप्त झाली; अविद्या नष्ट झाली आणि विद्या उत्पन्न झाली; अंधकार नष्ट झाला आणि प्रकाश उत्पन्न झाला, जसे की अप्रमत्त (जागृत), उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहरणाऱ्या व्यक्तीच्या बाबतीत घडते. हे ब्राह्मणा, कोंबडीच्या पिल्लाने अंड्याचे कवच फोडून बाहेर पडण्याप्रमाणे, हे माझे दुसरे कवच फोडून बाहेर पडणे होते." ‘‘သော ဧဝံ သမာဟိတေ စိတ္တေ ပရိသုဒ္ဓေ ပရိယောဒါတေ အနင်္ဂဏေ ဝိဂတူပက္ကိလေသေ မုဒုဘူတေ ကမ္မနိယေ ဌိတေ အာနေဉ္ဇပ္ပတ္တေ အာသဝါနံ ခယဉာဏာယ စိတ္တံ အဘိနိန္နာမေသိံ. သော ‘ဣဒံ ဒုက္ခ’န္တိ ယထာဘူတံ အဗ္ဘညာသိံ, ‘အယံ ဒုက္ခသမုဒယော’တိ ယထာဘူတံ အဗ္ဘညာသိံ, ‘အယံ ဒုက္ခနိရောဓော’တိ ယထာဘူတံ အဗ္ဘညာသိံ, ‘အယံ ဒုက္ခနိရောဓဂါမိနီ ပဋိပဒါ’တိ ယထာဘူတံ အဗ္ဘညာသိံ; ‘ဣမေ အာသဝါ’တိ ယထာဘူတံ အဗ္ဘညာသိံ, ‘အယံ အာသဝသမုဒယော’တိ ယထာဘူတံ အဗ္ဘညာသိံ, ‘အယံ အာသဝနိရောဓော’တိ ယထာဘူတံ အဗ္ဘညာသိံ, ‘အယံ အာသဝနိရောဓဂါမိနီ ပဋိပဒါ’တိ ယထာဘူတံ အဗ္ဘညာသိံ. တဿ မေ ဧဝံ ဇာနတော ဧဝံ ပဿတော ကာမာသဝါပိ စိတ္တံ ဝိမုစ္စိတ္ထ, ဘဝါသဝါပိ စိတ္တံ ဝိမုစ္စိတ္ထ, အဝိဇ္ဇာသဝါပိ စိတ္တံ ဝိမုစ္စိတ္ထ. ဝိမုတ္တသ္မိံ ဝိမုတ္တမိတိ ဉာဏံ အဟောသိ. ‘ခီဏာ ဇာတိ, ဝုသိတံ ဗြဟ္မစရိယံ, ကတံ ကရဏီယံ, နာပရံ ဣတ္ထတ္တာယာ’တိ အဗ္ဘညာသိံ. "अशा प्रकारे चित्त समाहित, परिशुद्ध, अत्यंत निर्मळ, दोषरहित, उपक्लेशांपासून मुक्त, मृदू, कर्मक्षम, स्थिर आणि अचल झाले असता, मी आसवांच्या (चित्तमळांच्या) क्षयाच्या ज्ञानासाठी (आसवक्खयज्ञाण) चित्त वळवले. मी 'हे दुःख आहे' हे यथार्थपणे जाणले, 'हा दुःखाचा उदय (समुदय) आहे' हे यथार्थपणे जाणले, 'हा दुःखाचा निरोध आहे' हे यथार्थपणे जाणले, 'ही दुःखाच्या निरोधाकडे नेणारी प्रतिपदा (मार्ग) आहे' हे यथार्थपणे जाणले; 'हे आसव आहेत' हे यथार्थपणे जाणले, 'हा आसवांचा उदय आहे' हे यथार्थपणे जाणले, 'हा आसवांचा निरोध आहे' हे यथार्थपणे जाणले, 'ही आसवांच्या निरोधाकडे नेणारी प्रतिपदा (मार्ग) आहे' हे यथार्थपणे जाणले. अशा प्रकारे जाणणाऱ्या and पाहणाऱ्या माझे चित्त कामासवापासून मुक्त झाले, भवासवापासून मुक्त झाले आणि अविद्यासवापासून मुक्त झाले. चित्त मुक्त झाल्यावर 'ते मुक्त झाले आहे' असे ज्ञान झाले. 'जन्म नष्ट झाला आहे, ब्रह्मचर्य पूर्ण झाले आहे, जे करायचे होते ते केले गेले आहे, आता या स्थितीसाठी काहीही कर्तव्य उरलेले नाही' हे मी यथार्थपणे जाणले." ‘‘အယံ ခေါ မေ, ဗြာဟ္မဏ, ရတ္တိယာ ပစ္ဆိမေ ယာမေ တတိယာ ဝိဇ္ဇာ အဓိဂတာ; အဝိဇ္ဇာ ဝိဟတာ ဝိဇ္ဇာ ဥပ္ပန္နာ; တမော ဝိဟတော အာလောကော ဥပ္ပန္နော[Pg.24], ယထာ တံ အပ္ပမတ္တဿ အာတာပိနော ပဟိတတ္တဿ ဝိဟရတော. အယံ ခေါ မေ, ဗြာဟ္မဏ, တတိယာ အဘိနိဗ္ဘိဒါ အဟောသိ ကုက္ကုဋစ္ဆာပကဿေဝ အဏ္ဍကောသမှာ’’တိ. "हे ब्राह्मणा, रात्रीच्या अंतिम प्रहरात मी ही तिसरी विद्या प्राप्त केली; अविद्या नष्ट झाली आणि विद्या उत्पन्न झाली; अंधकार नष्ट झाला आणि प्रकाश उत्पन्न झाला, जसे की अप्रमत्त, उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहार करणाऱ्याच्या बाबतीत घडते. हे ब्राह्मणा, कोंबडीच्या पिल्लाने अंड्याचे कवच फोडून बाहेर पडण्याप्रमाणेच, हा माझा तिसरा भेद होता." ဧဝံ ဝုတ္တေ ဝေရဉ္ဇော ဗြာဟ္မဏော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ဇေဋ္ဌော ဘဝံ ဂေါတမော, သေဋ္ဌော ဘဝံ ဂေါတမော. အဘိက္ကန္တံ, ဘော ဂေါတမ, အဘိက္ကန္တံ, ဘော ဂေါတမ! သေယျထာပိ, ဘော ဂေါတမ, နိက္ကုဇ္ဇိတံ ဝါ ဥက္ကုဇ္ဇေယျ, ပဋိစ္ဆန္နံ ဝါ ဝိဝရေယျ, မူဠှဿ ဝါ မဂ္ဂံ အာစိက္ခေယျ, အန္ဓကာရေ ဝါ တေလပဇ္ဇောတံ ဓာရေယျ – စက္ခုမန္တော ရူပါနိ ဒက္ခန္တီတိ; ဧဝမေဝံ ဘောတာ ဂေါတမေန အနေကပရိယာယေန ဓမ္မော ပကာသိတော. ဧသာဟံ ဘဝန္တံ ဂေါတမံ သရဏံ ဂစ္ဆာမိ ဓမ္မဉ္စ ဘိက္ခုသံဃဉ္စ. ဥပါသကံ မံ ဘဝံ ဂေါတမော ဓာရေတု အဇ္ဇတဂ္ဂေ ပါဏုပေတံ သရဏံ ဂတ’’န္တိ. ပဌမံ. असे म्हटले असता, वेरंज ब्राह्मणाने भगवंतांना असे म्हटले – "आदरणीय गौतम हेच ज्येष्ठ आहेत, आदरणीय गौतम हेच श्रेष्ठ आहेत. अतिशय सुंदर, हे गौतम! अतिशय सुंदर, हे गौतम! ज्याप्रमाणे, हे गौतम, कोणी पालथे घातलेले भांडे उताणे करावे, किंवा झाकलेले उघडे करावे, किंवा वाट चुकलेल्याला मार्ग दाखवावा, किंवा अंधकारात तेलाचा दिवा धरावा – जेणेकरून डोळे असणाऱ्यांना रूपे दिसू शकतील; त्याचप्रमाणे आदरणीय गौतमांनी अनेक प्रकारे धम्म प्रकाशित केला आहे. मी आदरणीय गौतम, धम्म आणि भिक्खू संघाला शरण जात आहे. आदरणीय गौतमांनी मला आजपासून जन्मभर शरण आलेला उपासक म्हणून स्वीकारावे." पहिले. ၂. သီဟသုတ္တံ २. सीहसुत्त ၁၂. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝေသာလိယံ ဝိဟရတိ မဟာဝနေ ကူဋာဂါရသာလာယံ. တေန ခေါ ပန သမယေန သမ္ဗဟုလာ အဘိညာတာ အဘိညာတာ လိစ္ဆဝီ သန္ထာဂါရေ သန္နိသိန္နာ သန္နိပတိတာ အနေကပရိယာယေန ဗုဒ္ဓဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ, ဓမ္မဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ, သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ. १२. एकदा भगवान वैशाली येथील महावनातील कूटागारशाळेत विहार करत होते. त्या वेळी अनेक सुप्रसिद्ध आणि प्रतिष्ठित लिच्छवी संथागारात एकत्र जमले होते आणि बसले होते. ते अनेक प्रकारे बुद्धांचे गुणगान करत होते, धम्माचे गुणगान करत होते आणि संघाचे गुणगान करत होते. တေန ခေါ ပန သမယေန သီဟော သေနာပတိ နိဂဏ္ဌသာဝကော တဿံ ပရိသာယံ နိသိန္နော ဟောတိ. အထ ခေါ သီဟဿ သေနာပတိဿ ဧတဒဟောသိ – ‘‘နိဿံသယံ ခေါ သော ဘဂဝါ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဘဝိဿတိ, တထာ ဟိမေ သမ္ဗဟုလာ အဘိညာတာ အဘိညာတာ လိစ္ဆဝီ သန္ထာဂါရေ သန္နိသိန္နာ သန္နိပတိတာ အနေကပရိယာယေန ဗုဒ္ဓဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ, ဓမ္မဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ, သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ. ယံနူနာဟံ တံ ဘဂဝန္တံ ဒဿနာယ ဥပသင်္ကမေယျံ အရဟန္တံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓ’’န္တိ. အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ယေန နိဂဏ္ဌော နာဋပုတ္တော တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ နိဂဏ္ဌံ နာဋပုတ္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ဣစ္ဆာမဟံ, ဘန္တေ, သမဏံ ဂေါတမံ ဒဿနာယ ဥပသင်္ကမိတု’’န္တိ. त्या वेळी निगंठांचा श्रावक असलेला सेनापती सीह त्या सभेत बसला होता. तेव्हा सेनापती सीहच्या मनात असा विचार आला – "नक्कीच ते भगवान अर्हत, सम्यक्संबुद्ध असतील, म्हणूनच हे अनेक सुप्रसिद्ध आणि प्रतिष्ठित लिच्छवी संथागारात एकत्र जमून अनेक प्रकारे बुद्धांचे गुणगान करत आहेत, धम्माचे गुणगान करत आहेत आणि संघाचे गुणगान करत आहेत. मी त्या भगवान अर्हत, सम्यक्संबुद्धांच्या दर्शनासाठी त्यांच्याकडे का जाऊ नये?" मग सेनापती सीह जेथे निगंठ नातपुत्त होते तेथे गेला; आणि त्यांच्याजवळ जाऊन निगंठ नातपुत्तांना म्हणाला – "भंते, मला श्रमण गौतमांच्या दर्शनासाठी त्यांच्याकडे जाण्याची इच्छा आहे." ‘‘ကိံ [Pg.25] ပန တွံ, သီဟ, ကိရိယဝါဒေါ သမာနော အကိရိယဝါဒံ သမဏံ ဂေါတမံ ဒဿနာယ ဥပသင်္ကမိဿသိ? သမဏော ဟိ, သီဟ, ဂေါတမော အကိရိယဝါဒေါ, အကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’တိ. အထ ခေါ သီဟဿ သေနာပတိဿ ယော အဟောသိ ဂမိယာဘိသင်္ခါရော ဘဂဝန္တံ ဒဿနာယ, သော ပဋိပ္ပဿမ္ဘိ. "हे सीह, तू स्वतः क्रियावादी असताना, अक्रियावादी श्रमण गौतमांच्या दर्शनासाठी का जात आहेस? कारण, हे सीह, श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत, ते अक्रियेचा धम्म शिकवतात आणि त्याच धम्माने आपल्या श्रावकांना विनीत करतात." तेव्हा सेनापती सीहची भगवंतांच्या दर्शनासाठी जाण्याची जी इच्छा झाली होती, ती शांत झाली. ဒုတိယမ္ပိ ခေါ သမ္ဗဟုလာ အဘိညာတာ အဘိညာတာ လိစ္ဆဝီ သန္ထာဂါရေ သန္နိသိန္နာ သန္နိပတိတာ အနေကပရိယာယေန ဗုဒ္ဓဿ…ပေ… ဓမ္မဿ…ပေ… သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ. ဒုတိယမ္ပိ ခေါ သီဟဿ သေနာပတိဿ ဧတဒဟောသိ – ‘‘နိဿံသယံ ခေါ သော ဘဂဝါ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဘဝိဿတိ, တထာ ဟိမေ သမ္ဗဟုလာ အဘိညာတာ အဘိညာတာ လိစ္ဆဝီ သန္ထာဂါရေ သန္နိသိန္နာ သန္နိပတိတာ အနေကပရိယာယေန ဗုဒ္ဓဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ, ဓမ္မဿ…ပေ… သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ. ယံနူနာဟံ တံ ဘဂဝန္တံ ဒဿနာယ ဥပသင်္ကမေယျံ အရဟန္တံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓ’’န္တိ. အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ယေန နိဂဏ္ဌော နာဋပုတ္တော တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ နိဂဏ္ဌံ နာဋပုတ္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ဣစ္ဆာမဟံ, ဘန္တေ, သမဏံ ဂေါတမံ ဒဿနာယ ဥပသင်္ကမိတု’’န္တိ. दुसऱ्यांदाही अनेक सुप्रसिद्ध आणि प्रतिष्ठित लिच्छवी संथागारात एकत्र जमून अनेक प्रकारे बुद्धांचे... पे... धम्माचे... पे... संघाचे गुणगान करत होते. दुसऱ्यांदाही सेनापती सीहच्या मनात असा विचार आला – "नक्कीच ते भगवान अर्हत, सम्यक्संबुद्ध असतील, म्हणूनच हे अनेक सुप्रसिद्ध आणि प्रतिष्ठित लिच्छवी संथागारात एकत्र जमून अनेक प्रकारे बुद्धांचे गुणगान करत आहेत, धम्माचे... पे... संघाचे गुणगान करत आहेत. मी त्या भगवान अर्हत, सम्यक्संबुद्धांच्या दर्शनासाठी त्यांच्याकडे का जाऊ नये?" मग सेनापती सीह जेथे निगंठ नातपुत्त होते तेथे गेला; आणि त्यांच्याजवळ जाऊन निगंठ नातपुत्तांना म्हणाला – "भंते, मला श्रमण गौतमांच्या दर्शनासाठी त्यांच्याकडे जाण्याची इच्छा आहे." ‘‘ကိံ ပန တွံ, သီဟ, ကိရိယဝါဒေါ သမာနော အကိရိယဝါဒံ သမဏံ ဂေါတမံ ဒဿနာယ ဥပသင်္ကမိဿသိ? သမဏော ဟိ, သီဟ, ဂေါတမော အကိရိယဝါဒေါ အကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’တိ. ဒုတိယမ္ပိ ခေါ သီဟဿ သေနာပတိဿ ယော အဟောသိ ဂမိယာဘိသင်္ခါရော ဘဂဝန္တံ ဒဿနာယ, သော ပဋိပ္ပဿမ္ဘိ. "हे सीह, तू स्वतः क्रियावादी असताना, अक्रियावादी श्रमण गौतमांच्या दर्शनासाठी का जात आहेस? कारण, हे सीह, श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत, ते अक्रियेचा धम्म शिकवतात आणि त्याच धम्माने आपल्या श्रावकांना विनीत करतात." दुसऱ्यांदाही सेनापती सीहची भगवंतांच्या दर्शनासाठी जाण्याची जी इच्छा झाली होती, ती शांत झाली. တတိယမ္ပိ ခေါ သမ္ဗဟုလာ အဘိညာတာ အဘိညာတာ လိစ္ဆဝီ သန္ထာဂါရေ သန္နိသိန္နာ သန္နိပတိတာ အနေကပရိယာယေန ဗုဒ္ဓဿ…ပေ… ဓမ္မဿ…ပေ… သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ. တတိယမ္ပိ ခေါ သီဟဿ သေနာပတိဿ ဧတဒဟောသိ – ‘‘နိဿံသယံ ခေါ သော ဘဂဝါ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဘဝိဿတိ, တထာ ဟိမေ သမ္ဗဟုလာ အဘိညာတာ အဘိညာတာ လိစ္ဆဝီ သန္ထာဂါရေ သန္နိသိန္နာ သန္နိပတိတာ အနေကပရိယာယေန ဗုဒ္ဓဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ, ဓမ္မဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ, သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသန္တိ. ကိံ ဟိမေ ကရိဿန္တိ နိဂဏ္ဌာ [Pg.26] အပလောကိတာ ဝါ အနပလောကိတာ ဝါ? ယံနူနာဟံ အနပလောကေတွာဝ နိဂဏ္ဌေ တံ ဘဂဝန္တံ ဒဿနာယ ဥပသင်္ကမေယျံ အရဟန္တံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓ’’န္တိ. तिसऱ्यांदाही अनेक सुप्रसिद्ध आणि प्रतिष्ठित लिच्छवी संथागारात एकत्र जमून अनेक प्रकारे बुद्धांचे... पे... धम्माचे... पे... संघाचे गुणगान करत होते. तिसऱ्यांदाही सेनापती सीहच्या मनात असा विचार आला – "नक्कीच ते भगवान अर्हत, सम्यक्संबुद्ध असतील, म्हणूनच हे अनेक सुप्रसिद्ध आणि प्रतिष्ठित लिच्छवी संथागारात एकत्र जमून अनेक प्रकारे बुद्धांचे गुणगान करत आहेत, धम्माचे गुणगान करत आहेत आणि संघाचे गुणगान करत आहेत. हे निगंठ माझी परवानगी घेऊन किंवा न घेता माझे काय करू शकणार आहेत? मी निगंठांची परवानगी न घेताच त्या भगवान अर्हत, सम्यक्संबुद्धांच्या दर्शनासाठी त्यांच्याकडे का जाऊ नये?" အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ပဉ္စမတ္တေဟိ ရထသတေဟိ ဒိဝါဒိဝဿ ဝေသာလိယာ နိယျာသိ ဘဂဝန္တံ ဒဿနာယ. ယာဝတိကာ ယာနဿ ဘူမိ, ယာနေန ဂန္တွာ ယာနာ ပစ္စောရောဟိတွာ ပတ္တိကောဝ အဂမာသိ. အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ သီဟော သေနာပတိ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – त्यानंतर सेनापती सीह भरदिवसा सुमारे पाचशे रथांसह भगवंतांच्या दर्शनासाठी वैशालीहून निघाला. जेथपर्यंत रथाने जाणे शक्य होते, तेथपर्यंत रथाने जाऊन, रथातून खाली उतरून तो पायीच पुढे गेला. मग सेनापती सीह जेथे भगवान होते तेथे गेला; आणि त्यांच्याजवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या सेनापती सीहने भगवंतांना असे म्हटले – ‘‘သုတံ မေတံ, ဘန္တေ – ‘အကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, အကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ. ယေ တေ, ဘန္တေ, ဧဝမာဟံသု – ‘အကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, အကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ, ကစ္စိ တေ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော ဝုတ္တဝါဒိနော န စ ဘဂဝန္တံ အဘူတေန အဗ္ဘာစိက္ခန္တိ ဓမ္မဿ စာနုဓမ္မံ ဗျာကရောန္တိ န စ ကောစိ သဟဓမ္မိကော ဝါဒါနုဝါဒေါ ဂါရယှံ ဌာနံ အာဂစ္ဆတိ? အနဗ္ဘက္ခာတုကာမာ ဟိ မယံ, ဘန္တေ, ဘဂဝန္တ’’န္တိ. "भंते, मी असे ऐकले आहे की – ‘श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत, ते अक्रियेचा धम्म शिकवतात आणि त्याच धम्माने आपल्या श्रावकांना विनीत करतात.’ भंते, जे लोक असे म्हणतात की – ‘श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत, ते अक्रियेचा धम्म शिकवतात आणि त्याच धम्माने आपल्या श्रावकांना विनीत करतात,’ ते भगवंतांच्या मूळ शिकवणुकीनुसारच बोलत आहेत ना? ते भगवंतांवर असत्य आरोप तर करत नाहीत ना? ते धम्मानुसारच स्पष्टीकरण देत आहेत ना? आणि त्यांच्या या विधानामुळे धम्माचे पालन करणाऱ्या कोणाही व्यक्तीवर निंदेची किंवा आक्षेपाची वेळ येणार नाही ना? कारण भंते, आमची भगवंतांवर कोणताही असत्य आरोप करण्याची इच्छा नाही." ‘‘အတ္ထိ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, အကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. "हे सीह, असा एक मार्ग आहे, ज्या मार्गाने माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकतो की – ‘श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत, ते अक्रियेचा धम्म शिकवतात आणि त्याच धम्माने आपल्या श्रावकांना विनीत करतात.’" ‘‘အတ္ထိ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, ကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. सीहा, असा एक मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे क्रियावादी आहेत, ते क्रियाशीलतेसाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘အတ္ထိ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဥစ္ဆေဒဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, ဥစ္ဆေဒါယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. सीहा, असा एक मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे उच्छेदवादी आहेत, ते उच्छेदासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘အတ္ထိ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဇေဂုစ္ဆီ သမဏော ဂေါတမော, ဇေဂုစ္ဆိတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. सीहा, असा एक मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे जुगुप्सा बाळगणारे आहेत, ते जुगुप्सेसाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘အတ္ထိ[Pg.27], သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဝေနယိကော သမဏော ဂေါတမော, ဝိနယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. सीहा, असा एक मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे निर्मूलनवादी आहेत, ते निर्मूलनासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘အတ္ထိ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘တပဿီ သမဏော ဂေါတမော, တပဿိတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. सीहा, असा एक मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे तपस्वी आहेत, ते तपासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘အတ္ထိ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အပဂဗ္ဘော သမဏော ဂေါတမော, အပဂဗ္ဘတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. सीहा, असा एक मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे अपगब्भ आहेत, ते गर्भावासापासून मुक्त होण्यासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘အတ္ထိ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အဿာသကော သမဏော ဂေါတမော, အဿာသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. सीहा, असा एक मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे आश्वासक आहेत, ते आश्वासनासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘ကတမော စ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, အကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ? အဟဉှိ, သီဟ, အကိရိယံ ဝဒါမိ ကာယဒုစ္စရိတဿ ဝစီဒုစ္စရိတဿ မနောဒုစ္စရိတဿ; အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ အကိရိယံ ဝဒါမိ. အယံ ခေါ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, အကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. आणि सीहा, असा कोणता मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत, ते अक्रियेसाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात'? कारण, सीहा, मी शारीरिक दुराचार, वाचिक दुराचार आणि मानसिक दुराचार न करण्याची (अक्रिया) शिकवण देतो; मी अनेक प्रकारच्या पापमय, अकुशल धर्मांचे न करणे (अक्रिया) सांगतो. सीहा, हाच तो मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे अक्रियावादी आहेत, ते अक्रियेसाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘ကတမော စ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, ကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ? အဟဉှိ, သီဟ, ကိရိယံ ဝဒါမိ ကာယသုစရိတဿ ဝစီသုစရိတဿ မနောသုစရိတဿ; အနေကဝိဟိတာနံ ကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ကိရိယံ ဝဒါမိ. အယံ ခေါ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ကိရိယဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, ကိရိယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. आणि सीहा, असा कोणता मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे क्रियावादी आहेत, ते क्रियाशीलतेसाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात'? कारण, सीहा, मी शारीरिक सुचरित, वाचिक सुचरित आणि मानसिक सुचरित करण्याची (क्रिया) शिकवण देतो; मी अनेक प्रकारच्या कुशल धर्मांचे करणे (क्रिया) सांगतो. सीहा, हाच तो मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे क्रियावादी आहेत, ते क्रियाशीलतेसाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘ကတမော စ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဥစ္ဆေဒဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, ဥစ္ဆေဒါယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ? အဟဉှိ, သီဟ, ဥစ္ဆေဒံ ဝဒါမိ ရာဂဿ ဒေါသဿ [Pg.28] မောဟဿ; အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဥစ္ဆေဒံ ဝဒါမိ. အယံ ခေါ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဥစ္ဆေဒဝါဒေါ သမဏော ဂေါတမော, ဥစ္ဆေဒါယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. आणि सीहा, असा कोणता मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे उच्छेदवादी आहेत, ते उच्छेदासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात'? कारण, सीहा, मी राग, द्वेष आणि मोह यांच्या उच्छेदाची शिकवण देतो; मी अनेक प्रकारच्या पापमय, अकुशल धर्मांच्या उच्छेदाचे प्रतिपादन करतो. सीहा, हाच तो मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे उच्छेदवादी आहेत, ते उच्छेदासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘ကတမော စ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဇေဂုစ္ဆီ သမဏော ဂေါတမော, ဇေဂုစ္ဆိတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ? အဟဉှိ, သီဟ, ဇိဂုစ္ဆာမိ ကာယဒုစ္စရိတေန ဝစီဒုစ္စရိတေန မနောဒုစ္စရိတေန; ဇိဂုစ္ဆာမိ အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ သမာပတ္တိယာ. အယံ ခေါ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဇေဂုစ္ဆီ သမဏော ဂေါတမော, ဇေဂုစ္ဆိတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. आणि सीहा, असा कोणता मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे जुगुप्सा बाळगणारे आहेत, ते जुगुप्सेसाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात'? कारण, सीहा, मी शारीरिक दुराचार, वाचिक दुराचार आणि मानसिक दुराचाराची जुगुप्सा करतो; मी अनेक प्रकारच्या पापमय, अकुशल धर्मांच्या प्राप्तीची जुगुप्सा करतो. सीहा, हाच तो मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे जुगुप्सा बाळगणारे आहेत, ते जुगुप्सेसाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘ကတမော စ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဝေနယိကော သမဏော ဂေါတမော, ဝိနယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ? အဟဉှိ, သီဟ, ဝိနယာယ ဓမ္မံ ဒေသေမိ ရာဂဿ ဒေါသဿ မောဟဿ; အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဝိနယာယ ဓမ္မံ ဒေသေမိ. အယံ ခေါ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘ဝေနယိကော သမဏော ဂေါတမော, ဝိနယာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. आणि सीहा, असा कोणता मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे निर्मूलनवादी आहेत, ते निर्मूलनासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात'? कारण, सीहा, मी राग, द्वेष आणि मोह यांच्या निर्मूलनासाठी धम्माचा उपदेश करतो; मी अनेक प्रकारच्या पापमय, अकुशल धर्मांच्या निर्मूलनासाठी धम्माचा उपदेश करतो. सीहा, हाच तो मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे निर्मूलनवादी आहेत, ते निर्मूलनासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘ကတမော စ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘တပဿီ သမဏော ဂေါတမော, တပဿိတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ? တပနီယာဟံ, သီဟ, ပါပကေ အကုသလေ ဓမ္မေ ဝဒါမိ ကာယဒုစ္စရိတံ ဝစီဒုစ္စရိတံ မနောဒုစ္စရိတံ. ယဿ ခေါ, သီဟ, တပနီယာ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ, တမဟံ ‘တပဿီ’တိ ဝဒါမိ. တထာဂတဿ ခေါ, သီဟ, တပနီယာ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ. အယံ ခေါ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘တပဿီ သမဏော ဂေါတမော, တပဿိတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. आणि सीहा, असा कोणता मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे तपस्वी आहेत, ते तपासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात'? कारण, सीहा, मी पापमय, अकुशल धर्मांना – शारीरिक दुराचार, वाचिक दुराचार आणि मानसिक दुराचाराला – 'तपनीय' म्हणतो. सीहा, ज्या व्यक्तीचे असे तापदायक, पापमय, अकुशल धर्म नष्ट झाले आहेत, मुळासकट उपटून टाकले गेले आहेत, ताडाच्या बुंध्यासारखे केले गेले आहेत, नामशेष केले गेले आहेत आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणारे झाले आहेत, त्याला मी 'तपस्वी' म्हणतो. सीहा, तथागतांचे असे तापदायक, पापमय, अकुशल धर्म नष्ट झाले आहेत, मुळासकट उपटून टाकले गेले आहेत, ताडाच्या बुंध्यासारखे केले गेले आहेत, नामशेष केले गेले आहेत आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणारे झाले आहेत. सीहा, हाच तो मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे तपस्वी आहेत, ते तपासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘ကတမော [Pg.29] စ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အပဂဗ္ဘော သမဏော ဂေါတမော, အပဂဗ္ဘတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ? ယဿ ခေါ, သီဟ, အာယတိံ ဂဗ္ဘသေယျာ ပုနဗ္ဘဝါဘိနိဗ္ဗတ္တိ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ, တမဟံ ‘အပဂဗ္ဘော’တိ ဝဒါမိ. တထာဂတဿ ခေါ, သီဟ, အာယတိံ ဂဗ္ဘသေယျာ ပုနဗ္ဘဝါဘိနိဗ္ဗတ္တိ ပဟီနာ ဥစ္ဆိန္နမူလာ တာလာဝတ္ထုကတာ အနဘာဝံကတာ အာယတိံ အနုပ္ပာဒဓမ္မာ. အယံ ခေါ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အပဂဗ္ဘော သမဏော ဂေါတမော, အပဂဗ္ဘတာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. आणि सीहा, असा कोणता मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे अपगब्भ आहेत, ते गर्भावासापासून मुक्त होण्यासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात'? कारण, सीहा, ज्या व्यक्तीचा भविष्यातील गर्भावास आणि पुनर्जन्माची उत्पत्ती नष्ट झाली आहे, मुळासकट उपटून टाकली गेली आहे, ताडाच्या बुंध्यासारखी केली गेली आहे, नामशेष केली गेली आहे आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणारी झाली आहे, त्याला मी 'अपगब्भ' म्हणतो. सीहा, तथागतांचा भविष्यातील गर्भावास आणि पुनर्जन्माची उत्पत्ती नष्ट झाली आहे, मुळासकट उपटून टाकली गेली आहे, ताडाच्या बुंध्यासारखी केली गेली आहे, नामशेष केली गेली आहे आणि भविष्यात पुन्हा उत्पन्न न होणारी झाली आहे. सीहा, हाच तो मार्ग आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा मनुष्य असे म्हणू शकेल – 'श्रमण गौतम हे अपगब्भ आहेत, ते गर्भावासापासून मुक्त होण्यासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.' ‘‘ကတမော စ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အဿာသကော သမဏော ဂေါတမော, အဿာသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’တိ? အဟဉှိ, သီဟ, အဿာသကော ပရမေန အဿာသေန, အဿာသာယ ဓမ္မံ ဒေသေမိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေမိ. အယံ ခေါ, သီဟ, ပရိယာယော, ယေန မံ ပရိယာယေန သမ္မာ ဝဒမာနော ဝဒေယျ – ‘အဿာသကော သမဏော ဂေါတမော, အဿာသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, တေန စ သာဝကေ ဝိနေတီ’’’တိ. “आणि हे सीहा, अशी कोणती पद्धत आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा असे म्हणू शकेल की—‘श्रमण गोतम हे आश्वासक आहेत, ते आश्वासनासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात’? कारण, हे सीहा, मी परम आश्वासनाने युक्त असा आश्वासक आहे. मी आश्वासनासाठी धम्माचा उपदेश करतो आणि त्याद्वारे श्रावकांना प्रशिक्षित करतो. हे सीहा, हीच ती पद्धत आहे, ज्याद्वारे माझ्याविषयी योग्य प्रकारे बोलणारा असे म्हणू शकेल की—‘श्रमण गोतम हे आश्वासक आहेत, ते आश्वासनासाठी धम्माचा उपदेश करतात आणि त्याद्वारे आपल्या श्रावकांना प्रशिक्षित करतात.’” ဧဝံ ဝုတ္တေ သီဟော သေနာပတိ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဘိက္ကန္တံ, ဘန္တေ, အဘိက္ကန္တံ, ဘန္တေ…ပေ… ဥပါသကံ မံ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ဓာရေတု အဇ္ဇတဂ္ဂေ ပါဏုပေတံ သရဏံ ဂတ’’န္တိ. असे म्हटले असता, सेनापती सीह भगवंतांना म्हणाले, “अतिशय सुंदर, भंते! अतिशय सुंदर, भंते! ... भंते, भगवंतांनी मला आजपासून प्राण असेपर्यंत शरण आलेला उपासक म्हणून स्वीकारावे.” ‘‘အနုဝိစ္စကာရံ ခေါ, သီဟ, ကရောဟိ. အနုဝိစ္စကာရော တုမှာဒိသာနံ ဉာတမနုဿာနံ သာဓု ဟောတီ’’တိ. ‘‘ဣမိနာပါဟံ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော ဘိယျောသောမတ္တာယ အတ္တမနော အဘိရဒ္ဓေါ, ယံ မံ ဘဂဝါ ဧဝမာဟ – ‘အနုဝိစ္စကာရံ ခေါ, သီဟ, ကရောဟိ. အနုဝိစ္စကာရော တုမှာဒိသာနံ ဉာတမနုဿာနံ သာဓု ဟောတီ’တိ. မဉှိ, ဘန္တေ, အညတိတ္ထိယာ သာဝကံ လဘိတွာ ကေဝလကပ္ပံ ဝေသာလိံ ပဋာကံ ပရိဟရေယျုံ – ‘သီဟော အမှာကံ သေနာပတိ သာဝကတ္တံ ဥပဂတော’တိ. အထ စ ပန ဘဂဝါ ဧဝမာဟ – ‘အနုဝိစ္စကာရံ, သီဟ, ကရောဟိ. အနုဝိစ္စကာရော တုမှာဒိသာနံ ဉာတမနုဿာနံ သာဓု ဟောတီ’တိ. ဧသာဟံ, ဘန္တေ, ဒုတိယမ္ပိ ဘဂဝန္တံ သရဏံ ဂစ္ဆာမိ ဓမ္မဉ္စ ဘိက္ခုသံဃဉ္စ. ဥပါသကံ မံ ဘဂဝါ ဓာရေတု အဇ္ဇတဂ္ဂေ ပါဏုပေတံ သရဏံ ဂတ’’န္တိ. “हे सीहा, नीट विचारपूर्वक चौकशी करूनच निर्णय घे. तुझ्यासारख्या प्रसिद्ध व्यक्तींसाठी विचारपूर्वक कृती करणे योग्य असते.” “भंते, भगवंतांनी मला असे म्हटल्यामुळे मी भगवंतांवर आणखीनच अधिक प्रसन्न आणि संतुष्ट झालो आहे की—‘हे सीहा, नीट विचारपूर्वक चौकशी करूनच निर्णय घे. तुझ्यासारख्या प्रसिद्ध व्यक्तींसाठी विचारपूर्वक कृती करणे योग्य असते.’ कारण, भंते, जर इतर पंथांच्या लोकांना माझ्यासारखा श्रावक मिळाला असता, तर त्यांनी संपूर्ण वेसालीमध्ये ‘सेनापती सीह आमचा श्रावक बनला आहे’ असे घोषित करत विजयाचा ध्वज मिरवला असता. परंतु, तरीही भगवंत मला म्हणतात—‘हे सीहा, नीट विचारपूर्वक चौकशी करूनच निर्णय घे. तुझ्यासारख्या प्रसिद्ध व्यक्तींसाठी विचारपूर्वक कृती करणे योग्य असते.’ म्हणून, भंते, मी दुसऱ्यांदाही भगवंतांना शरण जातो, धम्माला शरण जातो आणि भिक्खू संघाला शरण जातो. भगवंतांनी मला आजपासून प्राण असेपर्यंत शरण आलेला उपासक म्हणून स्वीकारावे.” ‘‘ဒီဃရတ္တံ [Pg.30] ခေါ တေ, သီဟ, နိဂဏ္ဌာနံ ဩပါနဘူတံ ကုလံ, ယေန နေသံ ဥပဂတာနံ ပိဏ္ဍကံ ဒါတဗ္ဗံ မညေယျာသီ’’တိ. ‘‘ဣမိနာပါဟံ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော ဘိယျောသောမတ္တာယ အတ္တမနော အဘိရဒ္ဓေါ, ယံ မံ ဘဂဝါ ဧဝမာဟ – ‘ဒီဃရတ္တံ ခေါ တေ, သီဟ, နိဂဏ္ဌာနံ ဩပါနဘူတံ ကုလံ, ယေန နေသံ ဥပဂတာနံ ပိဏ္ဍကံ ဒါတဗ္ဗံ မညေယျာသီ’တိ. သုတံ မေတံ, ဘန္တေ – ‘သမဏော ဂေါတမော ဧဝမာဟ – မယှမေဝ ဒါနံ ဒါတဗ္ဗံ, မယှမေဝ သာဝကာနံ ဒါတဗ္ဗံ; မယှမေဝ ဒိန္နံ မဟပ္ဖလံ, န အညေသံ ဒိန္နံ မဟပ္ဖလံ; မယှမေဝ သာဝကာနံ ဒိန္နံ မဟပ္ဖလံ, န အညေသံ သာဝကာနံ ဒိန္နံ မဟပ္ဖလ’န္တိ, အထ စ ပန မံ ဘဂဝါ နိဂဏ္ဌေသုပိ ဒါနေ သမာဒပေတိ. အပိ စ, ဘန္တေ, မယမေတ္ထ ကာလံ ဇာနိဿာမ. ဧသာဟံ, ဘန္တေ, တတိယမ္ပိ ဘဂဝန္တံ သရဏံ ဂစ္ဆာမိ ဓမ္မဉ္စ ဘိက္ခုသံဃဉ္စ. ဥပါသကံ မံ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ဓာရေတု အဇ္ဇတဂ္ဂေ ပါဏုပေတံ သရဏံ ဂတ’’န္တိ. “हे सीहा, तुझे घराणे दीर्घकाळापासून निगंठांसाठी पाण्याचे तळे राहिले आहे; त्यामुळे तुझ्याकडे येणाऱ्या त्या निगंठांना तू दान देणे चालू ठेवावेस, असा विचार तू केला पाहिजेस.” “भंते, भगवंतांनी मला असे म्हटल्यामुळे मी भगवंतांवर आणखीनच अधिक प्रसन्न आणि संतुष्ट झालो आहे की—‘हे सीहा, तुझे घराणे दीर्घकाळापासून निगंठांसाठी पाण्याचे तळे राहिले आहे; त्यामुळे तुझ्याकडे येणाऱ्या त्या निगंठांना तू दान देणे चालू ठेवावेस, असा विचार तू केला पाहिजेस.’ कारण, भंते, मी असे ऐकले होते की—‘श्रमण गोतम असे म्हणतात: “केवळ मलाच दान दिले पाहिजे, इतरांना नाही; केवळ माझ्याच श्रावकांना दान दिले पाहिजे, इतरांच्या श्रावकांना नाही. केवळ मला दिलेले दानच महाफळदायी असते, इतरांना दिलेले नाही; केवळ माझ्याच श्रावकांना दिलेले दानच महाफळदायी असते, इतरांच्या श्रावकांना दिलेले नाही.”’ परंतु, तरीही भगवंत मला निगंठांनाही दान देण्यास प्रवृत्त करत आहेत. भंते, आम्ही यासाठी योग्य वेळ कोणती ते जाणू. म्हणून, भंते, मी तिसऱ्यांदाही भगवंतांना शरण जातो, धम्माला शरण जातो आणि भिक्खू संघाला शरण जातो. भगवंतांनी मला आजपासून प्राण असेपर्यंत शरण आलेला उपासक म्हणून स्वीकारावे.” အထ ခေါ ဘဂဝါ သီဟဿ သေနာပတိဿ အနုပုဗ္ဗိံ ကထံ ကထေသိ, သေယျထိဒံ – ဒါနကထံ သီလကထံ သဂ္ဂကထံ, ကာမာနံ အာဒီနဝံ ဩကာရံ သံကိလေသံ နေက္ခမ္မေ အာနိသံသံ ပကာသေသိ. ယဒါ ဘဂဝါ အညာသိ သီဟံ သေနာပတိံ ကလ္လစိတ္တံ မုဒုစိတ္တံ ဝိနီဝရဏစိတ္တံ ဥဒဂ္ဂစိတ္တံ ပသန္နစိတ္တံ, အထ ယာ ဗုဒ္ဓါနံ သာမုက္ကံသိကာ ဓမ္မဒေသနာ တံ ပကာသေသိ – ဒုက္ခံ သမုဒယံ နိရောဓံ မဂ္ဂံ. သေယျထာပိ နာမ သုဒ္ဓံ ဝတ္ထံ အပဂတကာဠကံ သမ္မဒေဝ ရဇနံ ပဋိဂ္ဂဏှေယျ; ဧဝမေဝံ သီဟဿ သေနာပတိဿ တသ္မိံယေဝ အာသနေ ဝိရဇံ ဝီတမလံ ဓမ္မစက္ခုံ ဥဒပါဒိ – ‘‘ယံ ကိဉ္စိ သမုဒယဓမ္မံ, သဗ္ဗံ တံ နိရောဓဓမ္မ’’န္တိ. त्यानंतर भगवंतांनी सेनापती सीहाला अनुक्रमे धम्म उपदेश केला, जसे की—दानकथा, शीलकथा, स्वर्गकथा; त्यांनी कामभोगांचे दुष्परिणाम, हीनता, मलीनता आणि नैष्क्रम्याचे फायदे स्पष्ट केले. जेव्हा भगवंतांना समजले की सेनापती सीहाचे मन अनुकूल, मृदू, नीवरणांपासून मुक्त, प्रफुल्लित आणि प्रसन्न झाले आहे, तेव्हा त्यांनी बुद्धांची स्वतःची विशेष धम्मदेशना स्पष्ट केली, जी म्हणजे—दुःख, दुःखसमुदय, दुःखनिरोध आणि दुःखनिरोधगामिनी प्रतिपदा (मार्ग). ज्याप्रमाणे डाग नसलेले स्वच्छ वस्त्र रंग चांगल्या प्रकारे शोषून घेते; त्याचप्रमाणे सेनापती सीहाला त्याच आसनावर बसलेले असताना, रज विरहित आणि मलरहित असे धम्मचक्षू प्राप्त झाले की—‘जे काही उत्पन्न होण्याच्या स्वभावाचे आहे, ते सर्व नष्ट होण्याच्या स्वभावाचे आहे.’ အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ဒိဋ္ဌဓမ္မော ပတ္တဓမ္မော ဝိဒိတဓမ္မော ပရိယောဂါဠှဓမ္မော တိဏ္ဏဝိစိကိစ္ဆော ဝိဂတကထံကထော ဝေသာရဇ္ဇပ္ပတ္တော အပရပ္ပစ္စယော သတ္ထုသာသနေ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဓိဝါသေတု မေ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ သွာတနာယ ဘတ္တံ သဒ္ဓိံ ဘိက္ခုသံဃေနာ’’တိ. အဓိဝါသေသိ ဘဂဝါ တုဏှီဘာဝေန. त्यानंतर सेनापती सीह—ज्यांनी धम्म पाहिला होता, धम्म प्राप्त केला होता, धम्म जाणला होता, धम्मामध्ये प्रवेश केला होता, ज्यांची शंका दूर झाली होती, ज्यांचे संभ्रम नाहीसे झाले होते, ज्यांनी आत्मविश्वास प्राप्त केला होता आणि जे शास्त्यांच्या शासनात इतरांवर विसंबून न राहणारे बनले होते—भगवंतांना म्हणाले, “भंते, भगवंतांनी उद्याच्या भोजनासाठी भिक्खू संघासह माझे आमंत्रण स्वीकारावे.” भगवंतांनी मौन बाळगून संमती दिली. အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ဘဂဝတော အဓိဝါသနံ ဝိဒိတွာ ဥဋ္ဌာယာသနာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ပဒက္ခိဏံ ကတွာ ပက္ကာမိ. အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ အညတရံ ပုရိသံ အာမန္တေသိ – ‘‘ဂစ္ဆ တွံ, အမ္ဘော ပုရိသ[Pg.31], ပဝတ္တမံသံ ဇာနာဟီ’’တိ. အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ တဿာ ရတ္တိယာ အစ္စယေန သကေ နိဝေသနေ ပဏီတံ ခါဒနီယံ ဘောဇနီယံ ပဋိယာဒါပေတွာ ဘဂဝတော ကာလံ အာရောစာပေသိ – ‘‘ကာလော, ဘန္တေ! နိဋ္ဌိတံ ဘတ္တ’’န္တိ. त्यानंतर सेनापती सीह भगवंतांची संमती जाणून आपल्या आसनावरून उठले, भगवंतांना अभिवादन केले, प्रदक्षिणा घातली आणि तेथून निघून गेले. मग सेनापती सीह एका माणसाला म्हणाले, “अरे माणसा, जा आणि बाजारात विक्रीसाठी उपलब्ध असलेले मांस शोधून आण.” त्यानंतर, ती रात्र संपल्यावर, सेनापती सीह यांनी आपल्या घरी उत्कृष्ट प्रकारचे खाद्यपदार्थ आणि भोजन तयार करवून घेतले, आणि भगवंतांना वेळ झाल्याचा निरोप पाठवला—“भंते, वेळ झाली आहे, भोजन तयार आहे.” အထ ခေါ ဘဂဝါ ပုဗ္ဗဏှသမယံ နိဝါသေတွာ ပတ္တစီဝရမာဒါယ ယေန သီဟဿ သေနာပတိဿ နိဝေသနံ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ပညတ္တေ အာသနေ နိသီဒိ သဒ္ဓိံ ဘိက္ခုသံဃေန. တေန ခေါ ပန သမယေန သမ္ဗဟုလာ နိဂဏ္ဌာ ဝေသာလိယံ ရထိကာယ ရထိကံ သိင်္ဃာဋကေန သိင်္ဃာဋကံ ဗာဟာ ပဂ္ဂယှ ကန္ဒန္တိ – ‘‘အဇ္ဇ သီဟေန သေနာပတိနာ ထူလံ ပသုံ ဝဓိတွာ သမဏဿ ဂေါတမဿ ဘတ္တံ ကတံ. တံ သမဏော ဂေါတမော ဇာနံ ဥဒ္ဒိဿကတံ မံသံ ပရိဘုဉ္ဇတိ ပဋိစ္စကမ္မ’’န္တိ. त्यानंतर भगवंतांनी सकाळी वस्त्र परिधान केले, पात्र आणि चीवर घेऊन ते सेनापती सीहाच्या घराकडे गेले; तेथे पोहोचल्यावर ते भिक्खू संघासह तयार केलेल्या आसनांवर बसले. त्या वेळी अनेक निगंठ वेसालीमध्ये एका रस्त्यावरून दुसऱ्या रस्त्यावर आणि एका चौकातून दुसऱ्या चौकात हात उंचावून ओरडत फिरत होते—“आज सेनापती सीहाने एका धष्टपुष्ट प्राण्याला मारून श्रमण गोतमासाठी भोजन तयार केले आहे. श्रमण गोतम हे जाणूनबुजून स्वतःसाठीच मारलेल्या प्राण्याचे मांस खात आहेत, जे त्यांच्यासाठीच केले गेले आहे.” အထ ခေါ အညတရော ပုရိသော ယေန သီဟော သေနာပတိ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ သီဟဿ သေနာပတိဿ ဥပကဏ္ဏကေ အာရောစေသိ – ‘‘ယဂ္ဃေ, ဘန္တေ, ဇာနေယျာသိ! ဧတေ သမ္ဗဟုလာ နိဂဏ္ဌာ ဝေသာလိယံ ရထိကာယ ရထိကံ သိင်္ဃာဋကေန သိင်္ဃာဋကံ ဗာဟာ ပဂ္ဂယှ ကန္ဒန္တိ – ‘အဇ္ဇ သီဟေန သေနာပတိနာ ထူလံ ပသုံ ဝဓိတွာ သမဏဿ ဂေါတမဿ ဘတ္တံ ကတံ. တံ သမဏော ဂေါတမော ဇာနံ ဥဒ္ဒိဿကတံ မံသံ ပရိဘုဉ္ဇတိ ပဋိစ္စကမ္မ’န္တိ. အလံ အယျော ဒီဃရတ္တဉှိ တေ အာယသ္မန္တော အဝဏ္ဏကာမာ ဗုဒ္ဓဿ အဝဏ္ဏကာမာ ဓမ္မဿ အဝဏ္ဏကာမာ သံဃဿ. န စ ပနေတေ အာယသ္မန္တော ဇိရိဒန္တိ တံ ဘဂဝန္တံ အသတာ တုစ္ဆာ မုသာ အဘူတေန အဗ္ဘာစိက္ခိတုံ; န စ မယံ ဇီဝိတဟေတုပိ သဉ္စိစ္စ ပါဏံ ဇီဝိတာ ဝေါရောပေယျာမာ’’တိ. त्यानंतर एक माणूस सेनापती सीहाजवळ गेला; आणि त्याने सेनापती सीहाच्या कानात हळूच सांगितले, “महाराज, आपल्याला ठाऊक असावे! हे अनेक निगंठ वेसालीमध्ये एका रस्त्यावरून दुसऱ्या रस्त्यावर आणि एका चौकातून दुसऱ्या चौकात हात उंचावून ओरडत फिरत आहेत की—‘आज सेनापती सीहाने एका धष्टपुष्ट प्राण्याला मारून श्रमण गोतमासाठी भोजन तयार केले आहे. श्रमण गोतम हे जाणूनबुजून स्वतःसाठीच मारलेल्या प्राण्याचे मांस खात आहेत, जे त्यांच्यासाठीच केले गेले आहे.’” (सीह म्हणाले,) “अरे माणसा, पुरे झाले! कारण दीर्घकाळापासून ते पूजनीय बुद्धांची निंदा करू इच्छितात, धम्माची निंदा करू इच्छितात आणि संघाची निंदा करू इच्छितात. ते पूजनीय लोक भगवंतांवर असत्य, निरर्थक, खोटे आणि काल्पनिक आरोप करण्याचे कधीही थांबवणार नाहीत; परंतु आम्ही आमच्या स्वतःच्या प्राणाच्या मोबदल्यातही कधीही जाणूनबुजून कोणत्याही प्राण्याचा जीव घेणार नाही.” အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ဗုဒ္ဓပ္ပမုခံ ဘိက္ခုသံဃံ ပဏီတေန ခါဒနီယေန ဘောဇနီယေန သဟတ္ထာ သန္တပ္ပေသိ သမ္ပဝါရေသိ. အထ ခေါ သီဟော သေနာပတိ ဘဂဝန္တံ ဘုတ္တာဝိံ ဩနီတပတ္တပါဏိံ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ သီဟံ သေနာပတိံ ဘဂဝါ ဓမ္မိယာ ကထာယ သန္ဒဿေတွာ သမာဒပေတွာ သမုတ္တေဇေတွာ သမ္ပဟံသေတွာ ဥဋ္ဌာယာသနာ ပက္ကာမီတိ. ဒုတိယံ. त्यानंतर सेनापती सीहाने बुद्धप्रमुख भिक्खू संघाला उत्तम प्रकारच्या खाद्य व भोज्य पदार्थांनी स्वतःच्या हाताने संतृप्त केले व तृप्त केले. त्यानंतर, भोजन करून पात्रातून हात बाजूला केलेल्या भगवंतांच्या जवळ सेनापती सीह एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या सेनापती सीहाला भगवंतांनी धम्मचर्चेने उपदेशित केले, समादृत केले, उत्साहित केले आणि आनंदित केले; आणि त्यानंतर भगवंत आसनावरून उठून निघून गेले. (दुसरे सुत्त समाप्त.) ၃. အဿာဇာနီယသုတ္တံ ३. अस्सआजानीय सुत्त ၁၃. ‘‘အဋ္ဌဟိ[Pg.32], ဘိက္ခဝေ, အင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတော ရညော ဘဒ္ဒေါ အဿာဇာနီယော ရာဇာရဟော ဟောတိ ရာဇဘောဂ္ဂေါ, ရညော အင်္ဂန္တေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ရညော ဘဒ္ဒေါ အဿာဇာနီယော ဥဘတော သုဇာတော ဟောတိ – မာတိတော စ ပိတိတော စ. ယဿံ ဒိသာယံ အညေပိ ဘဒ္ဒါ အဿာဇာနီယာ ဇာယန္တိ, တဿံ ဒိသာယံ ဇာတော ဟောတိ. ယံ ခေါ ပနဿ ဘောဇနံ ဒေန္တိ – အလ္လံ ဝါ သုက္ခံ ဝါ – တံ သက္ကစ္စံယေဝ ပရိဘုဉ္ဇတိ အဝိကိရန္တော. ဇေဂုစ္ဆီ ဟောတိ ဥစ္စာရံ ဝါ ပဿာဝံ ဝါ အဘိနိသီဒိတုံ ဝါ အဘိနိပဇ္ဇိတုံ ဝါ. သောရတော ဟောတိ သုခသံဝါသော, န စ အညေ အဿေ ဥဗ္ဗေဇေတာ. ယာနိ ခေါ ပနဿ ဟောန္တိ သာဌေယျာနိ ကူဋေယျာနိ ဇိမှေယျာနိ ဝင်္ကေယျာနိ, တာနိ ယထာဘူတံ သာရထိဿ အာဝိကတ္တာ ဟောတိ. တေသမဿ သာရထိ အဘိနိမ္မဒနာယ ဝါယမတိ. ဝါဟီ ခေါ ပန ဟောတိ. ‘ကာမညေ အဿာ ဝဟန္တု ဝါ မာ ဝါ, အဟမေတ္ထ ဝဟိဿာမီ’တိ စိတ္တံ ဥပ္ပာဒေတိ. ဂစ္ဆန္တော ခေါ ပန ဥဇုမဂ္ဂေနေဝ ဂစ္ဆတိ. ထာမဝါ ဟောတိ ယာဝ ဇီဝိတမရဏပရိယာဒါနာ ထာမံ ဥပဒံသေတာ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ အင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတော ရညော ဘဒ္ဒေါ အဿာဇာနီယော ရာဇာရဟော ဟောတိ ရာဇဘောဂ္ဂေါ, ရညော အင်္ဂန္တေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆတိ. १३. “भिक्खूंनो, आठ अंगांनी (गुणांनी) युक्त असलेला राजाचा उत्तम आझानीय (थोर वंशाचा) घोडा राजासाठी योग्य असतो, राजाचा उपभोग्य असतो आणि राजाचे एक अंग म्हणून गणला जातो. कोणत्या आठ अंगांनी? येथे, भिक्खूंनो, राजाचा उत्तम आझानीय घोडा दोन्ही बाजूंनी – माता आणि पिता या दोन्ही बाजूंनी – उत्तम कुळात जन्मलेला असतो. ज्या प्रदेशात इतरही उत्तम आझानीय घोडे जन्मतात, त्याच प्रदेशात त्याचा जन्म झालेला असतो. (१) त्याला जे काही अन्न दिले जाते – मग ते ओले असो वा सुके – ते तो न विखरता आदराने व्यवस्थितपणे खातो. (२) मलमूत्राच्या ठिकाणी बसण्यास किंवा झोपण्यास तो अत्यंत संकोच बाळगतो (घृणा करतो). (३) तो शांत स्वभावाचा आणि मिळूनमिसळून राहणारा असतो, आणि इतर घोड्यांना घाबरवत नाही. (४) त्याच्या अंगी जे काही कपट, लबाडी, वक्रता किंवा कुटिलता असते, ती तो आपल्या सारथ्यासमोर जशीच्या तशी प्रकट करतो, जेणेकरून त्याचा सारथी त्या दोषांचे निर्मूलन करण्यासाठी प्रयत्न करू शकेल. (५) तो ओझे वाहणारा असतो. ‘इतर घोडे ओझे वाहो अथवा न वाहो, मी मात्र येथे ओझे वाहीनच,’ असा विचार तो मनात आणतो. (६) चालताना तो सरळ मार्गानेच चालतो. (७) तो बलवान असतो आणि आपल्या आयुष्याच्या शेवटपर्यंत, मृत्यूपर्यंत आपले बळ दाखवत राहतो. (८) भिक्खूंनो, या आठ अंगांनी युक्त असलेला राजाचा उत्तम आझानीय घोडा राजासाठी योग्य असतो, राजाचा उपभोग्य असतो आणि राजाचे एक अंग म्हणून गणला जातो.” ‘‘ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အာဟုနေယျော ဟောတိ…ပေ… အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သီလဝါ ဟောတိ, ပါတိမောက္ခသံဝရသံဝုတော ဝိဟရတိ အာစာရဂေါစရသမ္ပန္နော အဏုမတ္တေသု ဝဇ္ဇေသု ဘယဒဿာဝီ, သမာဒါယ သိက္ခတိ သိက္ခာပဒေသု. ယံ ခေါ ပနဿ ဘောဇနံ ဒေန္တိ – လူခံ ဝါ ပဏီတံ ဝါ – တံ သက္ကစ္စံယေဝ ပရိဘုဉ္ဇတိ အဝိဟညမာနော. ဇေဂုစ္ဆီ ဟောတိ ကာယဒုစ္စရိတေန ဝစီဒုစ္စရိတေန မနောဒုစ္စရိတေန; ဇေဂုစ္ဆီ ဟောတိ အနေကဝိဟိတာနံ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ သမာပတ္တိယာ. သောရတော ဟောတိ သုခသံဝါသော, န အညေ ဘိက္ခူ ဥဗ္ဗေဇေတာ. ယာနိ ခေါ ပနဿ ဟောန္တိ သာဌေယျာနိ ကူဋေယျာနိ ဇိမှေယျာနိ ဝင်္ကေယျာနိ, တာနိ ယထာဘူတံ အာဝိကတ္တာ ဟောတိ သတ္ထရိ ဝါ ဝိညူသု ဝါ သဗြဟ္မစာရီသု. တေသမဿ သတ္ထာ ဝါ ဝိညူ ဝါ သဗြဟ္မစာရီ အဘိနိမ္မဒနာယ ဝါယမတိ. သိက္ခိတာ ခေါ ပန ဟောတိ. ‘ကာမညေ [Pg.33] ဘိက္ခူ သိက္ခန္တု ဝါ မာ ဝါ, အဟမေတ္ထ သိက္ခိဿာမီ’တိ စိတ္တံ ဥပ္ပာဒေတိ. ဂစ္ဆန္တော ခေါ ပန ဥဇုမဂ္ဂေနေဝ ဂစ္ဆတိ; တတြာယံ ဥဇုမဂ္ဂေါ, သေယျထိဒံ – သမ္မာဒိဋ္ဌိ…ပေ… သမ္မာသမာဓိ. အာရဒ္ဓဝီရိယော ဝိဟရတိ – ‘ကာမံ တစော စ နှာရု စ အဋ္ဌိ စ အဝသိဿတု, သရီရေ ဥပသုဿတု မံသလောဟိတံ; ယံ တံ ပုရိသထာမေန ပုရိသဝီရိယေန ပုရိသပရက္ကမေန ပတ္တဗ္ဗံ, န တံ အပါပုဏိတွာ ဝီရိယဿ သဏ္ဌာနံ ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အာဟုနေယျော ဟောတိ…ပေ… အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿာ’’တိ. တတိယံ. “त्याचप्रमाणे, भिक्खूंनो, आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आहुनेय (आदरातिथ्यास योग्य) असतो... तसेच जगासाठी सर्वश्रेष्ठ पुण्यक्षेत्र असतो. कोणत्या आठ गुणांनी? येथे, भिक्खूंनो, भिक्खू शीलवान असतो; तो पातिमोक्ख संवराने सुरक्षित राहतो, सदाचार आणि योग्य आचरणयुक्त असतो, सूक्ष्म दोषांमध्येही भय पाहणारा असतो आणि शिक्षापदांचे ग्रहण करून त्यांनुसार आचरण करतो. (१) त्याला जे काही भोजन दिले जाते – मग ते साधे असो वा उत्तम – ते तो कोणत्याही त्रासाशिवाय आदराने ग्रहण करतो. (२) तो कायिक दुराचार, वाचिक दुराचार आणि मानसिक दुराचाराबद्दल घृणा बाळगतो; तसेच विविध प्रकारच्या पापी, अकुशल धर्मांच्या प्राप्तीबद्दल घृणा बाळगतो. (३) तो शांत स्वभावाचा आणि मिळूनमिसळून राहणारा असतो, आणि इतर भिक्खूंना घाबरवत नाही. (४) त्याच्या अंगी जे काही कपट, लबाडी, वक्रता किंवा कुटिलता असते, ती तो शास्त्यांसमोर (बुद्धांसमोर) किंवा सुज्ञ सब्रह्मचाऱ्यांसमोर जशीच्या तशी प्रकट करतो, जेणेकरून शास्ते किंवा सुज्ञ सब्रह्मचारी त्या दोषांचे निर्मूलन करण्यासाठी प्रयत्न करू शकतील. (५) तो शिकण्यास उत्सुक असतो. ‘इतर भिक्खू शिकोत अथवा न शिकोत, मी मात्र येथे शिकेनच,’ असा विचार तो मनात आणतो. (६) चालताना तो सरळ मार्गानेच चालतो; आणि येथे सरळ मार्ग म्हणजे – सम्यक दृष्टी... सम्यक समाधी हा होय. (७) तो दृढ वीर्याने (प्रयत्नाने) युक्त होऊन राहतो – ‘माझ्या शरीरातील त्वचा, शिरा आणि हाडेच केवळ उरोत, शरीरातील मांस आणि रक्त सुकोत; परंतु मानवी बळाने, मानवी वीर्याने आणि मानवी पराक्रमाने जे प्राप्त करण्याजोगे आहे, ते प्राप्त केल्याशिवाय मी माझे वीर्य (प्रयत्न) शिथिल करणार नाही.’ (८) भिक्खूंनो, या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आहुनेय असतो... आणि जगासाठी सर्वश्रेष्ठ पुण्यक्षेत्र असतो.” (तिसरे सुत्त समाप्त.) ၄. အဿခဠုင်္ကသုတ္တံ ४. अस्सखळुङ्क सुत्त ၁၄. ‘‘အဋ္ဌ စ, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကေ ဒေသေဿာမိ အဋ္ဌ စ အဿဒေါသေ, အဋ္ဌ စ ပုရိသခဠုင်္ကေ အဋ္ဌ စ ပုရိသဒေါသေ. တံ သုဏာထ, သာဓုကံ မနသိ ကရောထ; ဘာသိဿာမီ’’တိ. ‘‘ဧဝံ, ဘန္တေ’’တိ ခေါ တေ ဘိက္ခူ ဘဂဝတော ပစ္စဿောသုံ. ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – १४. “भिक्खूंनो, मी तुम्हाला आठ प्रकारचे खळुंग (दुष्ट) घोडे आणि घोड्यांचे आठ दोष, तसेच आठ प्रकारचे खळुंग (दुष्ट) पुरुष आणि पुरुषांचे आठ दोष सांगेन. ते लक्षपूर्वक ऐका आणि मनात नीट साठवून ठेवा; मी बोलतो.” ‘होय, भंते,’ असे म्हणून त्या भिक्खूंनी भगवंतांना प्रतिसाद दिला. भगवंत म्हणाले – ‘‘ကတမေ စ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ အဿခဠုင်္ကာ အဋ္ဌ စ အဿဒေါသာ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ပစ္ဆတော ပဋိက္ကမတိ, ပိဋ္ဌိတော ရထံ ပဝတ္တေတိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ပဌမော အဿဒေါသော. “भिक्खूंनो, आठ प्रकारचे खळुंग घोडे आणि घोड्यांचे आठ दोष कोणते आहेत? येथे, भिक्खूंनो, एखादा खळुंग घोडा जेव्हा सारथ्याकडून ‘चल, पुढे जा!’ असे सांगितले जातो, आणि चाबकाने मारला व प्रेरित केला जातो, तेव्हा तो मागे सरकतो आणि रथ मागच्या बाजूला फिरवतो. भिक्खूंनो, या जगात असाही एखादा खळुंग घोडा असतो. भिक्खूंनो, हा घोड्याचा पहिला दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ပစ္ဆာ လင်္ဃတိ, ကုဗ္ဗရံ ဟနတိ, တိဒဏ္ဍံ ဘဉ္ဇတိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဒုတိယော အဿဒေါသော. “पुन्हा, भिक्खूंनो, एखादा खळुंग घोडा जेव्हा ‘चल, पुढे जा!’ असे सांगितले जातो, आणि मारला व प्रेरित केला जातो, तेव्हा तो मागच्या पायांनी लाथ मारतो, रथाच्या जुवाला (कूबर) मारतो आणि रथाचे तीन दांडे (त्रिदंड) तोडतो. भिक्खूंनो, या जगात असाही एखादा खळुंग घोडा असतो. भिक्खूंनो, हा घोड्याचा दुसरा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ရထီသာယ သတ္ထိံ ဥဿဇ္ဇိတွာ ရထီသံယေဝ အဇ္ဈောမဒ္ဒတိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, တတိယော အဿဒေါသော. “पुन्हा, भिक्खूंनो, एखादा खळुंग घोडा जेव्हा ‘चल, पुढे जा!’ असे सांगितले जातो, आणि मारला व प्रेरित केला जातो, तेव्हा तो रथाच्या दांड्यावरून आपली मांडी बाजूला करून रथाच्या दांड्यालाच पायांखाली चिरडतो. भिक्खूंनो, या जगात असाही एखादा खळुंग घोडा असतो. भिक्खूंनो, हा घोड्याचा तिसरा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ဥမ္မဂ္ဂံ ဂဏှတိ, ဥဗ္ဗဋုမံ ရထံ ကရောတိ. ဧဝရူပေါပိ[Pg.34], ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, စတုတ္ထော အဿဒေါသော. “पुन्हा, भिक्खूंनो, एखादा खळुंग घोडा जेव्हा ‘चल, पुढे जा!’ असे सांगितले जातो, आणि मारला व प्रेरित केला जातो, तेव्हा तो चुकीचा मार्ग धरतो आणि रथ रस्त्यावरून खाली उतरवतो. भिक्खूंनो, या जगात असाही एखादा खळुंग घोडा असतो. भिक्खूंनो, हा घोड्याचा चौथा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ လင်္ဃတိ ပုရိမကာယံ ပဂ္ဂဏှတိ ပုရိမေ ပါဒေ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ပဉ္စမော အဿဒေါသော. “पुन्हा, भिक्खूंनो, एखादा खळुंग घोडा जेव्हा ‘चल, पुढे जा!’ असे सांगितले जातो, आणि मारला व प्रेरित केला जातो, तेव्हा तो आपल्या शरीराचा पुढचा भाग वर उचलतो आणि पुढचे पाय हवेत उडवतो. भिक्खूंनो, या जगात असाही एखादा खळुंग घोडा असतो. भिक्खूंनो, हा घोड्याचा पाचवा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ အနာဒိယိတွာ သာရထိံ အနာဒိယိတွာ ပတောဒလဋ္ဌိံ ဒန္တေဟိ မုခါဓာနံ ဝိဓံသိတွာ ယေန ကာမံ ပက္ကမတိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဆဋ္ဌော အဿဒေါသော. “पुन्हा, भिक्खूंनो, एखादा खळुंग घोडा जेव्हा ‘चल, पुढे जा!’ असे सांगितले जातो, आणि मारला व प्रेरित केला जातो, तेव्हा तो सारथ्याची पर्वा न करता आणि चाबकाची पर्वा न करता, दातांनी लगाम तोडून टाकतो आणि आपल्या इच्छेनुसार धावू लागतो. भिक्खूंनो, या जगात असाही एखादा खळुंग घोडा असतो. भिक्खूंनो, हा घोड्याचा सहावा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ နေဝ အဘိက္ကမတိ နော ပဋိက္ကမတိ တတ္ထေဝ ခီလဋ္ဌာယီ ဌိတော ဟောတိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တမော အဿဒေါသော. “पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो! या जगात एखादा दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर, पुढेही जात नाही आणि मागेही सरकत नाही, तर तिथेच खांबासारखा अचल उभा राहतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट घोडा असतो. भिक्षूंनो! हा घोड्याचा सातवा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ပုရိမေ စ ပါဒေ သံဟရိတွာ ပစ္ဆိမေ စ ပါဒေ သံဟရိတွာ တတ္ထေဝ စတ္တာရော ပါဒေ အဘိနိသီဒတိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော အဿခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌမော အဿဒေါသော. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ အဿခဠုင်္ကာ အဋ္ဌ စ အဿဒေါသာ. “पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो! या जगात एखादा दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर, आपले पुढचे पाय आखडून आणि मागचे पाय आखडून तिथेच चारही पायांवर बसून राहतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट घोडा असतो. भिक्षूंनो! हा घोड्याचा आठवा दोष आहे. भिक्षूंनो! हेच ते आठ प्रकारचे दुष्ट घोडे आणि घोड्यांचे आठ दोष आहेत.” ‘‘ကတမေ စ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ပုရိသခဠုင်္ကာ အဋ္ဌ စ ပုရိသဒေါသာ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော ‘န သရာမီ’တိ အသတိယာ နိဗ္ဗေဌေတိ. သေယျထာပိ သော, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ပစ္ဆတော ပဋိက္ကမတိ, ပိဋ္ဌိတော ရထံ ဝတ္တေတိ; တထူပမာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမံ ပုဂ္ဂလံ ဝဒါမိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော ပုရိသခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ပဌမော ပုရိသဒေါသော. “आणि भिक्षूंनो! आठ प्रकारचे दुष्ट पुरुष आणि पुरुषांचे आठ दोष कोणते? भिक्षूंनो! या शासनात जेव्हा भिक्षू एखाद्या भिक्षूला आपत्तीबद्दल दोषारोप करतात, तेव्हा तो भिक्षू इतर भिक्षूंद्वारे आपत्तीबद्दल दोषारोप केला जात असताना, ‘मला आठवत नाही’ असे म्हणून विस्मरणामुळे स्वतःचा बचाव करतो. भिक्षूंनो! ज्याप्रमाणे तो दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर मागे सरकतो आणि रथ मागे फिरवतो; भिक्षूंनो! मी या व्यक्तीला त्याचप्रमाणे मानतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट पुरुष असतो. भिक्षूंनो! हा पुरुषाचा पहिला दोष आहे.” ‘‘ပုန [Pg.35] စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော စောဒကံယေဝ ပဋိပ္ဖရတိ – ‘ကိံ နု ခေါ တုယှံ ဗာလဿ အဗျတ္တဿ ဘဏိတေန! တွမ္ပိ နာမ ဘဏိတဗ္ဗံ မညသီ’တိ! သေယျထာပိ သော, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ပစ္ဆာ လင်္ဃတိ, ကုဗ္ဗရံ ဟနတိ, တိဒဏ္ဍံ ဘဉ္ဇတိ; တထူပမာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမံ ပုဂ္ဂလံ ဝဒါမိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော ပုရိသခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဒုတိယော ပုရိသဒေါသော. “पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो! जेव्हा भिक्षू एखाद्या भिक्षूला आपत्तीबद्दल दोषारोप करतात, तेव्हा तो भिक्षू इतर भिक्षूंद्वारे आपत्तीबद्दल दोषारोप केला जात असताना, दोषारोप करणाऱ्यावरच उलटून पडतो – ‘तुझ्यासारख्या मूर्ख आणि अडाणी माणसाच्या बोलण्याने काय होणार! तुला असे वाटते का की तू मला काही सांगावेस?’ भिक्षूंनो! ज्याप्रमाणे तो दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर मागे उडी मारतो, रथाचा जू मोडतो आणि रथाच्या पुढील तीन दांड्या मोडून टाकतो; भिक्षूंनो! मी या व्यक्तीला त्याचप्रमाणे मानतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट पुरुष असतो. भिक्षूंनो! हा पुरुषाचा दुसरा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော စောဒကဿေဝ ပစ္စာရောပေတိ – ‘တွံ ခေါသိ ဣတ္ထန္နာမံ အာပတ္တိံ အာပန္နော, တွံ တာဝ ပဌမံ ပဋိကရောဟီ’တိ. သေယျထာပိ သော, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ရထီသာယ သတ္ထိံ ဥဿဇ္ဇိတွာ ရထီသံယေဝ အဇ္ဈောမဒ္ဒတိ; တထူပမာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမံ ပုဂ္ဂလံ ဝဒါမိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော ပုရိသခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, တတိယော ပုရိသဒေါသော. “पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो! जेव्हा भिक्षू एखाद्या भिक्षूला आपत्तीबद्दल दोषारोप करतात, तेव्हा तो भिक्षू इतर भिक्षूंद्वारे आपत्तीबद्दल दोषारोप केला जात असताना, दोषारोप करणाऱ्यावरच उलट आरोप करतो – ‘तू स्वतःच अमुक-अमुक आपत्तीत पडला आहेस, आधी तू स्वतःचे प्रायश्चित्त कर.’ भिक्षूंनो! ज्याप्रमाणे तो दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर रथाच्या दांड्यावरून आपली मांडी सोडवून रथाच्या दांड्यालाच पायांखाली तुडवतो; भिक्षूंनो! मी या व्यक्तीला त्याचप्रमाणे मानतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट पुरुष असतो. भिक्षूंनो! हा पुरुषाचा तिसरा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော အညေနာညံ ပဋိစရတိ, ဗဟိဒ္ဓါ ကထံ အပနာမေတိ, ကောပဉ္စ ဒေါသဉ္စ အပ္ပစ္စယဉ္စ ပါတုကရောတိ. သေယျထာပိ သော, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ဥမ္မဂ္ဂံ ဂဏှတိ, ဥဗ္ဗဋုမံ ရထံ ကရောတိ; တထူပမာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမံ ပုဂ္ဂလံ ဝဒါမိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော ပုရိသခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, စတုတ္ထော ပုရိသဒေါသော. “पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो! जेव्हा भिक्षू एखाद्या भिक्षूला आपत्तीबद्दल दोषारोप करतात, तेव्हा तो भिक्षू इतर भिक्षूंद्वारे आपत्तीबद्दल दोषारोप केला जात असताना, एका विषयावरून दुसऱ्या विषयावर जातो, संभाषण बाहेरच्या विषयाकडे वळवतो आणि आपला राग, द्वेष व असंतोष प्रकट करतो. भिक्षूंनो! ज्याप्रमाणे तो दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर चुकीचा मार्ग धरतो आणि रथ रस्त्याबाहेर नेतो; भिक्षूंनो! मी या व्यक्तीला त्याचप्रमाणे मानतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट पुरुष असतो. भिक्षूंनो! हा पुरुषाचा चौथा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော သံဃမဇ္ဈေ ဗာဟုဝိက္ခေပံ ကရောတိ. သေယျထာပိ သော, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ လင်္ဃတိ, ပုရိမကာယံ ပဂ္ဂဏှတိ ပုရိမေ ပါဒေ; တထူပမာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမံ ပုဂ္ဂလံ ဝဒါမိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော ပုရိသခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ပဉ္စမော ပုရိသဒေါသော. “पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो! जेव्हा भिक्षू एखाद्या भिक्षूला आपत्तीबद्दल दोषारोप करतात, तेव्हा तो भिक्षू इतर भिक्षूंद्वारे आपत्तीबद्दल दोषारोप केला जात असताना, संघामध्ये हातवारे करतो. भिक्षूंनो! ज्याप्रमाणे तो दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर उडी मारतो, आपले पुढचे शरीर वर उचलतो आणि पुढचे पाय हवेत उडवतो; भिक्षूंनो! मी या व्यक्तीला त्याचप्रमाणे मानतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट पुरुष असतो. भिक्षूंनो! हा पुरुषाचा पाचवा दोष आहे.” ‘‘ပုန [Pg.36] စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော အနာဒိယိတွာ သံဃံ အနာဒိယိတွာ စောဒကံ သာပတ္တိကောဝ ယေန ကာမံ ပက္ကမတိ. သေယျထာပိ သော, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ အနာဒိယိတွာ သာရထိံ အနာဒိယိတွာ ပတောဒလဋ္ဌိံ ဒန္တေဟိ မုခါဓာနံ ဝိဓံသိတွာ ယေန ကာမံ ပက္ကမတိ; တထူပမာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမံ ပုဂ္ဂလံ ဝဒါမိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော ပုရိသခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဆဋ္ဌော ပုရိသဒေါသော. “पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो! जेव्हा भिक्षू एखाद्या भिक्षूला आपत्तीबद्दल दोषारोप करतात, तेव्हा तो भिक्षू इतर भिक्षूंद्वारे आपत्तीबद्दल दोषारोप केला जात असताना, संघाची पर्वा न करता, दोषारोप करणाऱ्याची पर्वा न करता, आपल्या आपत्तीसहच जिथे इच्छा असेल तिथे निघून जातो. भिक्षूंनो! ज्याप्रमाणे तो दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर सारथीची पर्वा न करता, चाबकाच्या काठीची पर्वा न करता, दातांनी लगाम तोडून टाकतो आणि जिथे इच्छा असेल तिथे पळून जातो; भिक्षूंनो! मी या व्यक्तीला त्याचप्रमाणे मानतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट पुरुष असतो. भिक्षूंनो! हा पुरुषाचा सहावा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော ‘နေဝါဟံ အာပန္နောမှိ, န ပနာဟံ အာပန္နောမှီ’တိ သော တုဏှီဘာဝေန သံဃံ ဝိဟေဌေတိ. သေယျထာပိ သော, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ နေဝ အဘိက္ကမတိ နော ပဋိက္ကမတိ တတ္ထေဝ ခီလဋ္ဌာယီ ဌိတော ဟောတိ; တထူပမာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမံ ပုဂ္ဂလံ ဝဒါမိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော ပုရိသခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တမော ပုရိသဒေါသော. “पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो! जेव्हा भिक्षू एखाद्या भिक्षूला आपत्तीबद्दल दोषारोप करतात, तेव्हा तो भिक्षू इतर भिक्षूंद्वारे आपत्तीबद्दल दोषारोप केला जात असताना, ‘मी आपत्तीत पडलो नाही, आणि मी कोणतीही आपत्ती ओढवून घेतली नाही’ असा विचार करून मौन बाळगून संघाला त्रास देतो. भिक्षूंनो! ज्याप्रमाणे तो दुष्ट घोडा ‘चालता हो’ असे म्हटल्यावर आणि सारथीने चाबूक मारून हाकलल्यावर पुढेही जात नाही आणि मागेही सरकत नाही, तर तिथेच खांबासारखा अचल उभा राहतो; भिक्षूंनो! मी या व्यक्तीला त्याचप्रमाणे मानतो. भिक्षूंनो! या जगात अशा प्रकारचा देखील एखादा दुष्ट पुरुष असतो. भिक्षूंनो! हा पुरुषाचा सातवा दोष आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခုံ အာပတ္တိယာ စောဒေန္တိ. သော ဘိက္ခု ဘိက္ခူဟိ အာပတ္တိယာ စောဒိယမာနော ဧဝမာဟ – ‘ကိံ နု ခေါ တုမှေ အာယသ္မန္တော အတိဗာဠှံ မယိ ဗျာဝဋာ ယာဝ ဣဒါနာဟံ သိက္ခံ ပစ္စက္ခာယ ဟီနာယာဝတ္တိဿာမီ’တိ. သော သိက္ခံ ပစ္စက္ခာယ ဟီနာယာဝတ္တိတွာ ဧဝမာဟ – ‘ဣဒါနိ ခေါ တုမှေ အာယသ္မန္တော အတ္တမနာ ဟောထာ’တိ? သေယျထာပိ သော, ဘိက္ခဝေ, အဿခဠုင်္ကော ‘ပေဟီ’တိ ဝုတ္တော, ဝိဒ္ဓေါ သမာနော စောဒိတော သာရထိနာ ပုရိမေ စ ပါဒေ သံဟရိတွာ ပစ္ဆိမေ စ ပါဒေ သံဟရိတွာ တတ္ထေဝ စတ္တာရော ပါဒေ အဘိနိသီဒတိ; တထူပမာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမံ ပုဂ္ဂလံ ဝဒါမိ. ဧဝရူပေါပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣဓေကစ္စော ပုရိသခဠုင်္ကော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌမော ပုရိသဒေါသော. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ပုရိသခဠုင်္ကာ အဋ္ဌ စ ပုရိသဒေါသာ’’တိ. စတုတ္ထံ. पुन्हा आणखी, भिक्षूंनो, भिक्षू एखाद्या भिक्षूवर आपत्तीचा (नियमाच्या उल्लंघनाचा) आरोप करतात. तो भिक्षू इतर भिक्षूंद्वारे आपत्तीचा आरोप केला जात असताना असे म्हणतो – 'आयुष्यमानांनो, तुम्ही माझ्या बाबतीत इतके अतिशय व्यग्र का आहात? आता मी सिक्खाचा (शील नियमांचा) त्याग करून हीन (गृहस्थ) जीवनात परत जाईन.' तो सिक्खाचा त्याग करून हीन जीवनात परत गेल्यावर असे म्हणतो – 'आयुष्यमानांनो, आता तरी तुम्ही संतुष्ट व्हा!' भिक्षूंनो, ज्याप्रमाणे एखादा दुष्ट घोडा (अश्वखळुंग) 'चालता हो' असे म्हटल्यावर, सारथीने चाबूक मारून हाकलले असता, आपले पुढचे पाय आकसून आणि मागचे पाय आकसून तिथेच चारही पायांवर बसून राहतो; भिक्षूंनो, मी या व्यक्तीला त्याचप्रमाणे मानतो. भिक्षूंनो, या जगात असाही एखादा दुष्ट पुरुष (पुरुषखळुंग) असतो. भिक्षूंनो, हा पुरुषाचा आठवा दोष आहे. भिक्षूंनो, हेच ते आठ दुष्ट पुरुष आणि पुरुषांचे आठ दोष आहेत. चौथे. ၅. မလသုတ္တံ ५. मलसुत्त ၁၅. ‘‘အဋ္ဌိမာနိ[Pg.37], ဘိက္ခဝေ, မလာနိ. ကတမာနိ အဋ္ဌ? အသဇ္ဈာယမလာ, ဘိက္ခဝေ, မန္တာ; အနုဋ္ဌာနမလာ, ဘိက္ခဝေ, ဃရာ; မလံ, ဘိက္ခဝေ, ဝဏ္ဏဿ ကောသဇ္ဇံ; ပမာဒေါ, ဘိက္ခဝေ, ရက္ခတော မလံ; မလံ, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထိယာ ဒုစ္စရိတံ; မစ္ဆေရံ, ဘိက္ခဝေ, ဒဒတော မလံ; မလာ, ဘိက္ခဝေ, ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အသ္မိံ လောကေ ပရမှိ စ; တတော, ဘိက္ခဝေ, မလာ မလတရံ အဝိဇ္ဇာ ပရမံ မလံ. ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ မလာနီ’’တိ. १५. भिक्षूंनो, हे आठ मळ (कलंक) आहेत. कोणते आठ? भिक्षूंनो, मंत्रांचा (विद्येचा) मळ म्हणजे अस्वाध्याय (पुनरावृत्ती न करणे) होय; भिक्षूंनो, घरांचा मळ म्हणजे अनुत्थान (उद्योगहीनता) होय; भिक्षूंनो, शरीराच्या सौंदर्याचा मळ म्हणजे आळस होय; भिक्षूंनो, रक्षण करणाऱ्याचा मळ म्हणजे प्रमाद (बेसावधपणा) होय; भिक्षूंनो, स्त्रीचा मळ म्हणजे दुराचार होय; भिक्षूंनो, दात्याचा मळ म्हणजे कंजूषपणा होय; भिक्षूंनो, पापी अकुशल धर्म हे या लोकात आणि परलोकात मळ आहेत; आणि भिक्षूंनो, या सर्व मळांपेक्षा अधिक वाईट मळ म्हणजे अविद्या (अज्ञान) हा परम मळ आहे. भिक्षूंनो, हेच ते आठ मळ आहेत. ‘‘အသဇ္ဈာယမလာ မန္တာ, အနုဋ္ဌာနမလာ ဃရာ; မလံ ဝဏ္ဏဿ ကောသဇ္ဇံ, ပမာဒေါ ရက္ခတော မလံ. मंत्रांचा मळ अस्वाध्याय आहे, घरांचा मळ उद्योगहीनता आहे; शरीराच्या सौंदर्याचा मळ आळस आहे, रक्षण करणाऱ्याचा मळ प्रमाद आहे. ‘‘မလိတ္ထိယာ ဒုစ္စရိတံ, မစ္ဆေရံ ဒဒတော မလံ; မလာ ဝေ ပါပကာ ဓမ္မာ, အသ္မိံ လောကေ ပရမှိ စ; တတော မလာ မလတရံ, အဝိဇ္ဇာ ပရမံ မလ’’န္တိ. ပဉ္စမံ; स्त्रीचा मळ दुराचार आहे, दात्याचा मळ कंजूषपणा आहे; पापी धर्म हे खरोखर या लोकात आणि परलोकात मळ आहेत; या सर्व मळांपेक्षा अधिक वाईट मळ म्हणजे अविद्या हा परम मळ आहे. पाचवे. ၆. ဒူတေယျသုတ္တံ ६. दुतेय्यसुत्त ၁၆. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု ဒူတေယျံ ဂန္တုမရဟတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သောတာ စ ဟောတိ, သာဝေတာ စ, ဥဂ္ဂဟေတာ စ, ဓာရေတာ စ, ဝိညာတာ စ, ဝိညာပေတာ စ, ကုသလော စ သဟိတာသဟိတဿ, နော စ ကလဟကာရကော – ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု ဒူတေယျံ ဂန္တုမရဟတိ. အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော သာရိပုတ္တော ဒူတေယျံ ဂန္တုမရဟတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, သာရိပုတ္တော သောတာ စ ဟောတိ, သာဝေတာ စ, ဥဂ္ဂဟေတာ စ, ဓာရေတာ စ, ဝိညာတာ စ, ဝိညာပေတာ စ, ကုသလော စ သဟိတာသဟိတဿ, နော စ ကလဟကာရကော. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော သာရိပုတ္တော ဒူတေယျံ ဂန္တုမရဟတီ’’တိ. १६. भिक्षूंनो, आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू दूत म्हणून जाण्यास योग्य असतो. कोणत्या आठ गुणांनी? भिक्षूंनो, या शासनात भिक्षू हा ऐकणारा (उत्कृष्ट श्रोता) असतो, इतरांना ऐकवणारा असतो, नीट शिकून घेणारा असतो, लक्षात ठेवणारा (धारण करणारा) असतो, स्वतः समजून घेणारा असतो, इतरांना समजावून सांगणारा असतो, हित आणि अहित या दोन्ही गोष्टींमध्ये कुशल असतो आणि भांडण न करणारा असतो – भिक्षूंनो, या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू दूत म्हणून जाण्यास योग्य असतो. भिक्षूंनो, आठ गुणांनी युक्त असलेले सारिपुत्त दूत म्हणून जाण्यास योग्य आहेत. कोणत्या आठ गुणांनी? भिक्षूंनो, या शासनात सारिपुत्त हे ऐकणारे आहेत, इतरांना ऐकवणारे आहेत, नीट शिकून घेणारे आहेत, लक्षात ठेवणारे आहेत, स्वतः समजून घेणारे आहेत, इतरांना समजावून सांगणारे आहेत, हित आणि अहित या दोन्ही गोष्टींमध्ये कुशल आहेत आणि भांडण न करणारे आहेत. भिक्षूंनो, या आठ गुणांनी युक्त असलेले सारिपुत्त दूत म्हणून जाण्यास योग्य आहेत. ‘‘ယော ဝေ န ဗျထတိ ပတွာ, ပရိသံ ဥဂ္ဂဝါဒိနိံ ; န စ ဟာပေတိ ဝစနံ, န စ ဆာဒေတိ သာသနံ. जो खरोखर उग्रपणे बोलणाऱ्यांच्या सभेत पोहोचूनही डगमगत नाही, आपल्या शब्दांत उणीव भासू देत नाही आणि संदेश लपवत नाही; ‘‘အသန္ဒိဒ္ဓဉ္စ [Pg.38] ဘဏတိ, ပုစ္ဆိတော န စ ကုပ္ပတိ; သ ဝေ တာဒိသကော ဘိက္ခု, ဒူတေယျံ ဂန္တုမရဟတီ’’တိ. ဆဋ္ဌံ; जो संशयरहित बोलतो आणि विचारले असता संतापत नाही; असा तो भिक्षू खरोखरच दूत म्हणून जाण्यास योग्य असतो. सहावे. ၇. ပဌမဗန္ဓနသုတ္တံ ७. प्रथमबंधनसुत्त ၁၇. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အာကာရေဟိ ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ရုဏ္ဏေန, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ; ဟသိတေန, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ; ဘဏိတေန, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ; အာကပ္ပေန, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ; ဝနဘင်္ဂေန, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ; ဂန္ဓေန, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ; ရသေန, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ; ဖဿေန, ဘိက္ခဝေ, ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟာကာရေဟိ ဣတ္ထီ ပုရိသံ ဗန္ဓတိ. တေ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တာ သုဗဒ္ဓါ, ယေ ဖဿေန ဗဒ္ဓါ’’တိ. သတ္တမံ. १७. भिक्षूंनो, आठ प्रकारे स्त्री पुरुषाला बांधून ठेवते. कोणत्या आठ प्रकारे? भिक्षूंनो, स्त्री रडण्याने पुरुषाला बांधते; भिक्षूंनो, स्त्री हसण्याने पुरुषाला बांधते; भिक्षूंनो, स्त्री बोलण्याने पुरुषाला बांधते; भिक्षूंनो, स्त्री हावभावांनी पुरुषाला बांधते; भिक्षूंनो, स्त्री वनातील फुले-फळे इत्यादी भेटींनी पुरुषाला बांधते; भिक्षूंनो, स्त्री सुगंधाने पुरुषाला बांधते; भिक्षूंनो, स्त्री रसाने (चवीने) पुरुषाला बांधते; भिक्षूंनो, स्त्री स्पर्शाने पुरुषाला बांधते. भिक्षूंनो, या आठ प्रकारे स्त्री पुरुषाला बांधून ठेवते. भिक्षूंनो, जे प्राणी स्पर्शाने बांधले गेले आहेत, ते खरोखरच घट्ट बांधले गेले आहेत. सातवे. ၈. ဒုတိယဗန္ဓနသုတ္တံ ८. द्वितीयबंधनसुत्त ၁၈. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အာကာရေဟိ ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ရုဏ္ဏေန, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ; ဟသိတေန, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ; ဘဏိတေန, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ; အာကပ္ပေန, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ; ဝနဘင်္ဂေန, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ; ဂန္ဓေန, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ; ရသေန, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ; ဖဿေန, ဘိက္ခဝေ, ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟာကာရေဟိ ပုရိသော ဣတ္ထိံ ဗန္ဓတိ. တေ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တာ သုဗဒ္ဓါ, ယေ ဖဿေန ဗဒ္ဓါ’’တိ. အဋ္ဌမံ. १८. भिक्षूंनो, आठ प्रकारे पुरुष स्त्रीला बांधून ठेवतो. कोणत्या आठ प्रकारे? भिक्षूंनो, पुरुष रडण्याने स्त्रीला बांधतो; भिक्षूंनो, पुरुष हसण्याने स्त्रीला बांधतो; भिक्षूंनो, पुरुष बोलण्याने स्त्रीला बांधतो; भिक्षूंनो, पुरुष हावभावांनी स्त्रीला बांधतो; भिक्षूंनो, पुरुष वनातील फुले-फळे इत्यादी भेटींनी स्त्रीला बांधतो; भिक्षूंनो, पुरुष सुगंधाने स्त्रीला बांधतो; भिक्षूंनो, पुरुष रसाने स्त्रीला बांधतो; भिक्षूंनो, पुरुष स्पर्शाने स्त्रीला बांधतो. भिक्षूंनो, या आठ प्रकारे पुरुष स्त्रीला बांधून ठेवतो. भिक्षूंनो, जे प्राणी स्पर्शाने बांधले गेले आहेत, ते खरोखरच घट्ट बांधले गेले आहेत. आठवे. ၉. ပဟာရာဒသုတ္တံ ९. पहारादसुत्त ၁၉. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝေရဉ္ဇာယံ ဝိ ဟရတိ နဠေရုပုစိမန္ဒမူလေ. အထ ခေါ ပဟာရာဒေါ အသုရိန္ဒော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ အဋ္ဌာသိ. ဧကမန္တံ ဌိတံ ခေါ ပဟာရာဒံ အသုရိန္ဒံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – १९. एकदा भगवान वेरंजा येथे नळेरु नावाच्या कडुनिंबाच्या झाडाखाली विहार करत होते. तेव्हा पहाराद नावाचा असुरांचा राजा (असुरेंद्र) भगवंतांकडे आला; आल्यानंतर त्याने भगवंतांना आदरपूर्वक अभिवादन केले आणि तो एका बाजूला उभा राहिला. एका बाजूला उभे राहिलेल्या पहाराद असुरेंद्राला भगवान असे म्हणाले – ‘‘အပိ [Pg.39] ပန, ပဟာရာဒ, အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တီ’’တိ? ‘‘အဘိရမန္တိ, ဘန္တေ, အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ’’တိ. ‘‘ကတိ ပန, ပဟာရာဒ, မဟာသမုဒ္ဒေ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တီ’’တိ? ‘‘အဋ္ဌ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. ကတမေ အဋ္ဌ? မဟာသမုဒ္ဒေါ, ဘန္တေ, အနုပုဗ္ဗနိန္နော အနုပုဗ္ဗပေါဏော အနုပုဗ္ဗပဗ္ဘာရော, န အာယတကေနေဝ ပပါတော. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ အနုပုဗ္ဗနိန္နော အနုပုဗ္ဗပေါဏော အနုပုဗ္ဗပဗ္ဘာရော, န အာယတကေနေဝ ပပါတော. အယံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ ပဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. पहाराद, असुर महासागरात रममाण होतात का? होय, भंते, असुर महासागरात रममाण होतात. पण पहाराद, महासागरात असे किती आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण (धर्म) आहेत, जे पाहून असुर महासागरात रममाण होतात? भंते, महासागरात आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहेत, जे पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. कोणते आठ? भंते, महासागर हा हळूहळू खोल होत जाणारा, हळूहळू उतार असणारा आणि हळूहळू झुकणारा आहे, तो सुरुवातीलाच एकदम खोल दरीसारखा नाही. भंते, महासागर जो हळूहळू खोल होत जाणारा, हळूहळू उतार असणारा आणि हळूहळू झुकणारा आहे, सुरुवातीलाच एकदम खोल दरीसारखा नाही; भंते, महासागरातील हा पहिला आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे, जो पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဌိတဓမ္မော ဝေလံ နာတိဝတ္တတိ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဌိတဓမ္မော ဝေလံ နာတိဝတ္တတိ; အယံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ ဒုတိယော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. पुन्हा आणखी, भंते, महासागर हा स्थिर राहणारा आहे, तो आपल्या किनाऱ्याचे (मर्यादेचे) उल्लंघन करत नाही. भंते, महासागर जो स्थिर राहणारा आहे आणि आपल्या किनाऱ्याचे उल्लंघन करत नाही; भंते, महासागरातील हा दुसरा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे, जो पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ န မတေန ကုဏပေန သံဝသတိ. ယံ ဟောတိ မဟာသမုဒ္ဒေ မတံ ကုဏပံ, တံ ခိပ္ပမေဝ တီရံ ဝါဟေတိ, ထလံ ဥဿာရေတိ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ န မတေန ကုဏပေန သံဝသတိ, ယံ ဟောတိ မဟာသမုဒ္ဒေ မတံ ကုဏပံ, တံ ခိပ္ပမေဝ တီရံ ဝါဟေတိ, ထလံ ဥဿာရေတိ; အယံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ တတိယော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. पुन्हा आणखी असे की, भन्ते, महासागर मृत शवाशी संगत करत नाही. महासागरात जे काही मृत शव असते, त्याला तो त्वरित किनाऱ्यावर वाहून आणतो आणि जमिनीवर फेकून देतो. भन्ते, महासागर मृत शवाशी संगत करत नाही आणि महासागरात जे काही मृत शव असते, त्याला तो त्वरित किनाऱ्यावर वाहून आणतो व जमिनीवर फेकून देतो; हा, भन्ते, महासागरातील तिसरा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, ယာ ကာစိ မဟာနဒိယော, သေယျထိဒံ – ဂင်္ဂါ ယမုနာ အစိရဝတီ သရဘူ မဟီ, တာ မဟာသမုဒ္ဒံ ပတွာ ဇဟန္တိ ပုရိမာနိ နာမဂေါတ္တာနိ, ‘မဟာသမုဒ္ဒေါ’ တွေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆန္တိ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, ယာ ကာစိ မဟာနဒိယော, သေယျထိဒံ – ဂင်္ဂါ ယမုနာ အစိရဝတီ သရဘူ မဟီ, တာ မဟာသမုဒ္ဒံ ပတွာ ဇဟန္တိ ပုရိမာနိ နာမဂေါတ္တာနိ, ‘မဟာသမုဒ္ဒေါ’ တွေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆန္တိ; အယံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ စတုတ္ထော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. पुन्हा आणखी असे की, भन्ते, ज्या काही महानद्या आहेत, जसे की – गंगा, यमुना, अचिरवती, सरभू आणि मही; त्या महासागराला मिळाल्यानंतर आपली पूर्वीची नावे आणि गोत्रे सोडून देतात आणि केवळ 'महासागर' याच नावाने ओळखल्या जातात. भन्ते, ज्या काही महानद्या आहेत, जसे की – गंगा, यमुना, अचिरवती, सरभू आणि मही; त्या महासागराला मिळाल्यानंतर आपली पूर्वीची नावे आणि गोत्रे सोडून देतात आणि केवळ 'महासागर' याच नावाने ओळखल्या जातात; हा, भन्ते, महासागरातील चौथा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. ‘‘ပုန [Pg.40] စပရံ, ဘန္တေ, ယာ စ လောကေ သဝန္တိယော မဟာသမုဒ္ဒံ အပ္ပေန္တိ ယာ စ အန္တလိက္ခာ ဓာရာ ပပတန္တိ, န တေန မဟာသမုဒ္ဒဿ ဦနတ္တံ ဝါ ပူရတ္တံ ဝါ ပညာယတိ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, ယာ စ လောကေ သဝန္တိယော မဟာသမုဒ္ဒံ အပ္ပေန္တိ ယာ စ အန္တလိက္ခာ ဓာရာ ပပတန္တိ, န တေန မဟာသမုဒ္ဒဿ ဦနတ္တံ ဝါ ပူရတ္တံ ဝါ ပညာယတိ; အယံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ ပဉ္စမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. पुन्हा आणखी असे की, भन्ते, जगातील ज्या काही नद्या महासागराला मिळतात आणि आकाशातून जे काही पावसाचे प्रवाह पडतात, त्याने महासागराची कमतरता किंवा पूर्णता दिसून येत नाही. भन्ते, जगातील ज्या काही नद्या महासागराला मिळतात आणि आकाशातून जे काही पावसाचे प्रवाह पडतात, त्याने महासागराची कमतरता किंवा पूर्णता दिसून येत नाही; हा, भन्ते, महासागरातील पाचवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဧကရသော လောဏရသော. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဧကရသော လောဏရသော; အယံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ ဆဋ္ဌော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. पुन्हा आणखी असे की, भन्ते, महासागर हा एकच चवीचा आहे, ती म्हणजे मिठाची चव. भन्ते, महासागर हा एकच चवीचा आहे, ती म्हणजे मिठाची चव; हा, भन्ते, महासागरातील सहावा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဗဟုရတနော အနေကရတနော. တတြိမာနိ ရတနာနိ, သေယျထိဒံ – မုတ္တာ မဏိ ဝေဠုရိယော သင်္ခေါ သိလာ ပဝါဠံ ရဇတံ ဇာတရူပံ လောဟိတကော မသာရဂလ္လံ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဗဟုရတနော အနေကရတနော; တတြိမာနိ ရတနာနိ, သေယျထိဒံ – မုတ္တာ မဏိ ဝေဠုရိယော သင်္ခေါ သိလာ ပဝါဠံ ရဇတံ ဇာတရူပံ လောဟိတကော မသာရဂလ္လံ. အယံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ သတ္တမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. पुन्हा आणखी असे की, भन्ते, महासागर हा अनेक रत्नांनी आणि विपुल रत्नांनी समृद्ध आहे. तेथे ही रत्ने आहेत, जसे की – मोती, मणी, वैडूर्य, शंख, शिला, प्रवाळ, चांदी, सोने, लोहितक आणि मसारगल्ल. भन्ते, महासागर हा अनेक रत्नांनी आणि विपुल रत्नांनी समृद्ध आहे; तेथे ही रत्ने आहेत, जसे की – मोती, मणी, वैडूर्य, शंख, शिला, प्रवाळ, चांदी, सोने, लोहितक आणि मसारगल्ल; हा, भन्ते, महासागरातील सातवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော. တတြိမေ ဘူတာ – တိမိ တိမိင်္ဂလော တိမိရပိင်္ဂလော အသုရာ နာဂါ ဂန္ဓဗ္ဗာ. သန္တိ မဟာသမုဒ္ဒေ ယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ, ဒွိယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ, တိယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ, စတုယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ, ပဉ္စယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော; တတြိမေ ဘူတာ – တိမိ တိမိင်္ဂလော တိမိရပိင်္ဂလော အသုရာ နာဂါ ဂန္ဓဗ္ဗာ; သန္တိ မဟာသမုဒ္ဒေ ယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ…ပေ… ဒွိယောဇန… တိယောဇန… စတုယောဇန… ပဉ္စယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ; အယံ, ဘန္တေ, မဟာသမုဒ္ဒေ အဋ္ဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. ဣမေ ခေါ, ဘန္တေ[Pg.41], မဟာသမုဒ္ဒေ အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တီတိ. पुन्हा आणखी असे की, भन्ते, महासागर हा विशाल प्राण्यांचे निवासस्थान आहे. तेथे हे प्राणी राहतात – तिमी, तिमिंगल, तिमिरपिंगल, असुर, नाग आणि गंधर्व. महासागरात शंभर योजन लांबीचे शरीर असणारे जीव आहेत, दोनशे योजन लांबीचे शरीर असणारे जीव आहेत, तीनशे योजन लांबीचे शरीर असणारे जीव आहेत, चारशे योजन लांबीचे शरीर असणारे जीव आहेत आणि पाचशे योजन लांबीचे शरीर असणारे जीव आहेत. भन्ते, महासागर हा विशाल प्राण्यांचे निवासस्थान आहे; तेथे हे प्राणी राहतात – तिमी, तिमिंगल, तिमिरपिंगल, असुर, नाग आणि गंधर्व; महासागरात शंभर योजन लांबीचे शरीर असणारे जीव आहेत...पे... दोनशे... तीनशे... चारशे... पाचशे योजन लांबीचे शरीर असणारे जीव आहेत; हा, भन्ते, महासागरातील आठवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. भन्ते, महासागरातील हेच ते आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहेत, ज्यांना वारंवार पाहून असुर महासागरात रममाण होतात. ‘‘အပိ ပန, ဘန္တေ, ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တီ’’တိ? ‘‘အဘိရမန္တိ, ပဟာရာဒ, ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ’’တိ. ‘‘ကတိ ပန, ဘန္တေ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တီ’’တိ? ‘‘အဋ္ဌ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. ကတမေ အဋ္ဌ? သေယျထာပိ, ပဟာရာဒ, မဟာသမုဒ္ဒေါ အနုပုဗ္ဗနိန္နော အနုပုဗ္ဗပေါဏော အနုပုဗ္ဗပဗ္ဘာရော, န အာယတကေနေဝ ပပါတော; ဧဝမေဝံ ခေါ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အနုပုဗ္ဗသိက္ခာ အနုပုဗ္ဗကိရိယာ အနုပုဗ္ဗပဋိပဒါ, န အာယတကေနေဝ အညာပဋိဝေဓော. ယမ္ပိ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အနုပုဗ္ဗသိက္ခာ အနုပုဗ္ဗကိရိယာ အနုပုဗ္ဗပဋိပဒါ, န အာယတကေနေဝ အညာပဋိဝေဓော. အယံ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ ပဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. परंतु भन्ते, भिक्खू या धम्म-विनयात रममाण होतात का? पहाराद, भिक्खू या धम्म-विनयात नक्कीच रममाण होतात. परंतु भन्ते, या धम्म-विनयात असे किती आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहेत, ज्यांना वारंवार पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात रममाण होतात? पहाराद, या धम्म-विनयात आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहेत, ज्यांना वारंवार पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात रममाण होतात. ते आठ कोणते? पहाराद, ज्याप्रमाणे महासागर हा अनुक्रमे खोल होत जाणारा, अनुक्रमे उतार असणारा आणि अनुक्रमे झुकलेला आहे, एकदमच खोल दरीसारखा नाही; त्याचप्रमाणे, पहाराद, या धम्म-विनयात अनुक्रमे शिक्षण, अनुक्रमे क्रिया आणि अनुक्रमे प्रतिपदा आहे, एकदमच अंतिम ज्ञानाचा वेध होत नाही. पहाराद, या धम्म-विनयात जी अनुक्रमे शिक्षण, अनुक्रमे क्रिया आणि अनुक्रमे प्रतिपदा आहे, आणि एकदमच अंतिम ज्ञानाचा वेध होत नाही; हा, पहाराद, या धम्म-विनयातील पहिला आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात रममाण होतात. ‘‘သေယျထာပိ, ပဟာရာဒ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဌိတဓမ္မော ဝေလံ နာတိဝတ္တတိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ပဟာရာဒ, ယံ မယာ သာဝကာနံ သိက္ခာပဒံ ပညတ္တံ တံ မမ သာဝကာ ဇီဝိတဟေတုပိ နာတိက္ကမန္တိ. ယမ္ပိ, ပဟာရာဒ, မယာ သာဝကာနံ သိက္ခာပဒံ ပညတ္တံ တံ မမ သာဝကာ ဇီဝိတဟေတုပိ နာတိက္ကမန္တိ. အယံ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ ဒုတိယော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. ज्याप्रमाणे, पहाराद, महासागर हा स्थिर राहणारा आहे आणि आपल्या मर्यादेचे उल्लंघन करत नाही; त्याचप्रमाणे, पहाराद, मी माझ्या श्रावकांसाठी जे काही शिक्षापद प्रज्ञप्त केले आहे, त्याचे माझे श्रावक प्राणांच्या मोलानेही उल्लंघन करत नाहीत. पहाराद, मी माझ्या श्रावकांसाठी जे काही शिक्षापद प्रज्ञप्त केले आहे, त्याचे माझे श्रावक प्राणांच्या मोलानेही उल्लंघन करत नाहीत; हा, पहाराद, या धम्म-विनयातील दुसरा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात रममाण होतात. ‘‘သေယျထာပိ, ပဟာရာဒ, မဟာသမုဒ္ဒေါ န မတေန ကုဏပေန သံဝသတိ. ယံ ဟောတိ မဟာသမုဒ္ဒေ မတံ ကုဏပံ, တံ ခိပ္ပမေဝ တီရံ ဝါဟေတိ ထလံ ဥဿာရေတိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ပဟာရာဒ, ယော သော ပုဂ္ဂလော ဒုဿီလော ပါပဓမ္မော အသုစိသင်္ကဿရသမာစာရော ပဋိစ္ဆန္နကမ္မန္တော အဿမဏော သမဏပဋိညော အဗြဟ္မစာရီ ဗြဟ္မစာရိပဋိညော အန္တောပူတိ အဝဿုတော ကသမ္ဗုဇာတော, န တေန သံဃော သံဝသတိ; ခိပ္ပမေဝ နံ သန္နိပတိတွာ ဥက္ခိပတိ. ज्याप्रमाणे, पहाराद, महासागर मृत शवाशी संगत करत नाही, महासागरात जे काही मृत शव असते, त्याला तो त्वरित किनाऱ्यावर वाहून आणतो आणि जमिनीवर फेकून देतो; त्याचप्रमाणे, पहाराद, जो कोणी व्यक्ती दुःशील, पापी स्वभावाचा, अपवित्र, संशयास्पद आचरणाचा, आपली कृत्ये लपवणारा, श्रमण नसताना स्वतःला श्रमण म्हणवणारा, ब्रह्मचारी नसताना स्वतःला ब्रह्मचारी म्हणवणारा, आतून सडलेला, वासनांनी माखलेला आणि कचऱ्यासारखा झालेला असतो; अशा व्यक्तीशी संघ संगत करत नाही, तर त्वरित एकत्र येऊन त्याला संघातून बाहेर काढून टाकतो। ‘‘ကိဉ္စာပိ သော ဟောတိ မဇ္ဈေ ဘိက္ခုသံဃဿ သန္နိသိန္နော, အထ ခေါ သော အာရကာဝ သံဃမှာ သံဃော စ တေန. ယမ္ပိ, ပဟာရာဒ, ယော သော ပုဂ္ဂလော [Pg.42] ဒုဿီလော ပါပဓမ္မော အသုစိသင်္ကဿရသမာစာရော ပဋိစ္ဆန္နကမ္မန္တော အဿမဏော သမဏပဋိညော အဗြဟ္မစာရီ ဗြဟ္မစာရိပဋိညော အန္တောပူတိ အဝဿုတော ကသမ္ဗုဇာတော, န တေန သံဃော သံဝသတိ; ခိပ္ပမေဝ နံ သန္နိပတိတွာ ဥက္ခိပတိ; ကိဉ္စာပိ သော ဟောတိ မဇ္ဈေ ဘိက္ခုသံဃဿ သန္နိသိန္နော, အထ ခေါ သော အာရကာဝ သံဃမှာ သံဃော စ တေန. အယံ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ တတိယော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. जरी तो भिक्खूंच्या संघाच्या मध्यभागी बसलेला असला, तरी तो संघापासून दूरच असतो आणि संघही त्याच्यापासून दूरच असतो. हे पहाराद, जो कोणी व्यक्ती दुःशील (शीलहीन), पापी स्वभावाचा, अपवित्र, संशयास्पद आचरणाचा, आपले कर्म लपवणारा, श्रमण नसतानाही स्वतःला श्रमण म्हणवणारा, ब्रह्मचारी नसतानाही स्वतःला ब्रह्मचारी म्हणवणारा, आतून सडलेला, वासनांनी माखलेला आणि कचऱ्यासारखा घाणेरडा असतो; संघ त्याच्यासोबत राहत नाही. संघ त्वरित एकत्र येऊन त्याला बाहेर काढून टाकतो. जरी तो भिक्खूंच्या संघाच्या मध्यभागी बसलेला असला, तरी तो संघापासून दूरच असतो आणि संघही त्याच्यापासून दूरच असतो. हे पहाराद, या धम्म-विनयातील हे तिसरे आश्चर्यकारक आणि अद्भुत वैशिष्ट्य आहे, जे पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात अत्यंत रममाण होतात. ‘‘သေယျထာပိ, ပဟာရာဒ, ယာ ကာစိ မဟာနဒိယော, သေယျထိဒံ – ဂင်္ဂါ ယမုနာ အစိရဝတီ သရဘူ မဟီ, တာ မဟာသမုဒ္ဒံ ပတွာ ဇဟန္တိ ပုရိမာနိ နာမဂေါတ္တာနိ, ‘မဟာသမုဒ္ဒေါ’ တွေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆန္တိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ပဟာရာဒ, စတ္တာရောမေ ဝဏ္ဏာ – ခတ္တိယာ, ဗြာဟ္မဏာ, ဝေဿာ, သုဒ္ဒါ, တေ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇိတွာ ဇဟန္တိ ပုရိမာနိ နာမဂေါတ္တာနိ, ‘သမဏာ သကျပုတ္တိယာ’ တွေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆန္တိ. ယမ္ပိ, ပဟာရာဒ, စတ္တာရောမေ ဝဏ္ဏာ – ခတ္တိယာ, ဗြာဟ္မဏာ, ဝေဿာ, သုဒ္ဒါ, တေ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇိတွာ ဇဟန္တိ ပုရိမာနိ နာမဂေါတ္တာနိ, ‘သမဏာ သကျပုတ္တိယာ’ တွေဝ သင်္ခံ ဂစ္ဆန္တိ. အယံ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ စတုတ္ထော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. हे पहाराद, ज्याप्रमाणे गंगा, यमुना, अचिरवती, सरभू आणि मही यांसारख्या मोठ्या नद्या महासागराला मिळाल्यानंतर आपली जुनी नावे व गोत्रे सोडून देतात आणि केवळ 'महासागर' म्हणूनच ओळखल्या जातात; त्याचप्रमाणे, हे पहाराद, क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य आणि शूद्र हे चार वर्ण जेव्हा तथागतांनी प्रवेदित केलेल्या धम्म-विनयात गृहत्याग करून अनगारिक (घरदार नसलेले) होऊन प्रवज्जा घेतात, तेव्हा ते आपली जुनी नावे व गोत्रे सोडून देतात आणि केवळ 'शाक्यपुत्रीय श्रमण' म्हणूनच ओळखले जातात. हे पहाराद, क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य आणि शूद्र हे चार वर्ण जेव्हा तथागतांनी प्रवेदित केलेल्या धम्म-विनयात गृहत्याग करून अनगारिक होऊन प्रवज्जा घेतात, तेव्हा ते आपली जुनी नावे व गोत्रे सोडून देतात आणि केवळ 'शाक्यपुत्रीय श्रमण' म्हणूनच ओळखले जातात; हे पहाराद, या धम्म-विनयातील हे चौथे आश्चर्यकारक आणि अद्भुत वैशिष्ट्य आहे, जे पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात अत्यंत रममाण होतात. ‘‘သေယျထာပိ, ပဟာရာဒ, ယာ စ လောကေ သဝန္တိယော မဟာသမုဒ္ဒံ အပ္ပေန္တိ ယာ စ အန္တလိက္ခာ ဓာရာ ပပတန္တိ, န တေန မဟာသမုဒ္ဒဿ ဦနတ္တံ ဝါ ပူရတ္တံ ဝါ ပညာယတိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ပဟာရာဒ, ဗဟူ စေပိ ဘိက္ခူ အနုပါဒိသေသာယ နိဗ္ဗာနဓာတုယာ ပရိနိဗ္ဗာယန္တိ, န တေန နိဗ္ဗာနဓာတုယာ ဦနတ္တံ ဝါ ပူရတ္တံ ဝါ ပညာယတိ. ယမ္ပိ, ပဟာရာဒ, ဗဟူ စေပိ ဘိက္ခူ အနုပါဒိသေသာယ နိဗ္ဗာနဓာတုယာ ပရိနိဗ္ဗာယန္တိ, န တေန နိဗ္ဗာနဓာတုယာ ဦနတ္တံ ဝါ ပူရတ္တံ ဝါ ပညာယတိ. အယံ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ ပဉ္စမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. हे पहाराद, ज्याप्रमाणे जगातील सर्व नद्या महासागराला मिळतात आणि आकाशातून पावसाच्या धारा कोसळतात, तरीही त्यामुळे महासागराची कमतरता किंवा भरती (उणेपणा किंवा पूर्णत्व) दिसून येत नाही; त्याचप्रमाणे, हे पहाराद, जरी अनेक भिक्खू अनुपधिशेष निर्वाणधातूमध्ये परिनिर्वाण पावले, तरीही त्यामुळे निर्वाणधातूची कमतरता किंवा भरती दिसून येत नाही. हे पहाराद, जरी अनेक भिक्खू अनुपधिशेष निर्वाणधातूमध्ये परिनिर्वाण पावले, तरीही त्यामुळे निर्वाणधातूची कमतरता किंवा भरती दिसून येत नाही; हे पहाराद, या धम्म-विनयातील हे पाचवे आश्चर्यकारक आणि अद्भुत वैशिष्ट्य आहे, जे पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात अत्यंत रममाण होतात. ‘‘သေယျထာပိ, ပဟာရာဒ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဧကရသော လောဏရသော; ဧဝမေဝံ ခေါ, ပဟာရာဒ, အယံ ဓမ္မဝိနယော ဧကရသော, ဝိမုတ္တိရသော. ယမ္ပိ ပဟာရာဒ[Pg.43], အယံ ဓမ္မဝိနယော ဧကရသော, ဝိမုတ္တိရသော; အယံ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ ဆဋ္ဌော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. हे पहाराद, ज्याप्रमाणे महासागराला एकच चव असते—मिठाची चव; त्याचप्रमाणे, हे पहाराद, या धम्म-विनयाला एकच चव आहे—विमुक्तीची चव. हे पहाराद, या धम्म-विनयाला एकच चव आहे—विमुक्तीची चव; हे पहाराद, या धम्म-विनयातील हे सहावे आश्चर्यकारक आणि अद्भुत वैशिष्ट्य आहे, जे पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात अत्यंत रममाण होतात. ‘‘သေယျထာပိ, ပဟာရာဒ, မဟာသမုဒ္ဒေါ ဗဟုရတနော အနေကရတနော; တတြိမာနိ ရတနာနိ, သေယျထိဒံ – မုတ္တာ မဏိ ဝေဠုရိယော သင်္ခေါ သိလာ ပဝါဠံ ရဇတံ ဇာတရူပံ လောဟိတကော မသာရဂလ္လံ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ပဟာရာဒ, အယံ ဓမ္မဝိနယော ဗဟုရတနော အနေကရတနော. တတြိမာနိ ရတနာနိ, သေယျထိဒံ – စတ္တာရော သတိပဋ္ဌာနာ, စတ္တာရော သမ္မပ္ပဓာနာ, စတ္တာရော ဣဒ္ဓိပါဒါ, ပဉ္စိန္ဒြိယာနိ, ပဉ္စ ဗလာနိ, သတ္တ ဗောဇ္ဈင်္ဂါ, အရိယော အဋ္ဌင်္ဂိကော မဂ္ဂေါ. ယမ္ပိ, ပဟာရာဒ, အယံ ဓမ္မဝိနယော ဗဟုရတနော အနေကရတနော; တတြိမာနိ ရတနာနိ, သေယျထိဒံ – စတ္တာရော သတိပဋ္ဌာနာ, စတ္တာရော သမ္မပ္ပဓာနာ, စတ္တာရော ဣဒ္ဓိပါဒါ, ပဉ္စိန္ဒြိယာနိ, ပဉ္စ ဗလာနိ, သတ္တ ဗောဇ္ဈင်္ဂါ, အရိယော အဋ္ဌင်္ဂိကော မဂ္ဂေါ; အယံ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ သတ္တမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. हे पहाराद, ज्याप्रमाणे महासागरात अनेक प्रकारची रत्ने असतात, जसे की—मोती, मणी, वैडूर्य, शंख, शिला, प्रवाळ, चांदी, सोने, लाल मणी आणि मसारगल्ल; त्याचप्रमाणे, हे पहाराद, हा धम्म-विनय अनेक रत्नांनी समृद्ध आहे. त्यात ही रत्ने आहेत, जसे की—चार सतिपट्ठान, चार सम्मप्पधान, चार इद्धिपाद, पाच इंद्रिये, पाच बले, सात बोज्झंग आणि आर्य अष्टांगिक मार्ग. हे पहाराद, हा धम्म-विनय अनेक रत्नांनी समृद्ध आहे; त्यात ही रत्ने आहेत, जसे की—चार सतिपट्ठान, चार सम्मप्पधान, चार इद्धिपाद, पाच इंद्रिये, पाच बले, सात बोज्झंग आणि आर्य अष्टांगिक मार्ग; हे पहाराद, या धम्म-विनयातील हे सातवे आश्चर्यकारक आणि अद्भुत वैशिष्ट्य आहे, जे पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात अत्यंत रममाण होतात. ‘‘သေယျထာပိ, ပဟာရာဒ, မဟာသမုဒ္ဒေါ မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော; တတြိမေ ဘူတာ – တိမိ တိမိင်္ဂလော တိမိရပိင်္ဂလော အသုရာ နာဂါ ဂန္ဓဗ္ဗာ; သန္တိ မဟာသမုဒ္ဒေ ယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ, ဒွိယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ, တိယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ, စတုယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ, ပဉ္စယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ပဟာရာဒ, အယံ ဓမ္မဝိနယော မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော; တတြိမေ ဘူတာ – သောတာပန္နော သောတာပတ္တိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, သကဒါဂါမီ သကဒါဂါမိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, အနာဂါမီ အနာဂါမိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, အရဟာ အရဟတ္တာယ ပဋိပန္နော. ယမ္ပိ, ပဟာရာဒ, အယံ ဓမ္မဝိနယော မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော; တတြိမေ ဘူတာ – သောတာပန္နော သောတာပတ္တိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, သကဒါဂါမီ သကဒါဂါမိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, အနာဂါမီ အနာဂါမိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, အရဟာ အရဟတ္တာယ ပဋိပန္နော; အယံ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဋ္ဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. ဣမေ ခေါ, ပဟာရာဒ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဋ္ဌ [Pg.44] အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တီ’’တိ. နဝမံ. हे पहाराद, ज्याप्रमाणे महासागर हा विशाल प्राण्यांचे निवासस्थान आहे; त्यात हे प्राणी राहतात—तिमी, तिमिंगल, तिमिरपिंगल, असुर, नाग आणि गंधर्व; महासागरात शंभर योजन लांबीचे शरीर असलेले, दोनशे योजन लांबीचे शरीर असलेले, तीनशे योजन लांबीचे शरीर असलेले, चारशे योजन लांबीचे शरीर असलेले आणि पाचशे योजन लांबीचे शरीर असलेले प्राणी देखील असतात; त्याचप्रमाणे, हे पहाराद, हा धम्म-विनय महान सत्त्वांचे निवासस्थान आहे; त्यात हे महान सत्त्व आहेत—सोतापन्न आणि सोतापत्ती-फल साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न असलेला; सकदागामी आणि सकदागामी-फल साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न असलेला; अनागामी आणि अनागामी-फल साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न असलेला; अरहंत आणि अरहंतपदासाठी प्रतिपन्न असलेला. हे पहाराद, हा धम्म-विनय महान सत्त्वांचे निवासस्थान आहे; त्यात हे महान सत्त्व आहेत—सोतापन्न आणि सोतापत्ती-फल साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न असलेला; सकदागामी आणि सकदागामी-फल साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न असलेला; अनागामी आणि अनागामी-फल साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न असलेला; अरहंत आणि अरहंतपदासाठी प्रतिपन्न असलेला; हे पहाराद, या धम्म-विनयातील हे आठवे आश्चर्यकारक आणि अद्भुत वैशिष्ट्य आहे, जे पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात अत्यंत रममाण होतात. हे पहाराद, या धम्म-विनयातील हे आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत वैशिष्ट्ये आहेत, जे पाहून भिक्खू या धम्म-विनयात अत्यंत रममाण होतात. ၁၀. ဥပေါသထသုတ္တံ १०. उपोसथ सुत्त ၂၀. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ ပုဗ္ဗာရာမေ မိဂါရမာတုပါသာဒေ. တေန ခေါ ပန သမယေန ဘဂဝါ တဒဟုပေါသထေ ဘိက္ခုသံဃပရိဝုတော နိသိန္နော ဟောတိ. အထ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော အဘိက္ကန္တာယ ရတ္တိယာ, နိက္ခန္တေ ပဌမေ ယာမေ, ဥဋ္ဌာယာသနာ ဧကံသံ ဥတ္တရာသင်္ဂံ ကရိတွာ ယေန ဘဂဝါ တေနဉ္ဇလိံ ပဏာမေတွာ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဘိက္ကန္တာ, ဘန္တေ, ရတ္တိ, နိက္ခန္တော ပဌမော ယာမော, စိရနိသိန္နော ဘိက္ခုသံဃော. ဥဒ္ဒိသတု, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ဘိက္ခူနံ ပါတိမောက္ခ’’န္တိ. २०. एकदा भगवान श्रावस्ती येथे पूर्वाराम नावाच्या मिगारमाता प्रासादात विहार करत होते. त्या वेळी, उपोसथाच्या दिवशी भगवान भिक्खूंच्या संघाने वेढलेले बसले होते. त्यानंतर, रात्र बरीच उलटून गेल्यावर आणि रात्रीचा पहिला प्रहर संपल्यावर, आयुष्यमान आनंद आपल्या आसनावरून उठले, त्यांनी आपले उपरणे एका खांद्यावर घेतले आणि जेथे भगवान होते त्या दिशेने हात जोडून भगवंतांना असे म्हणाले—'भंते, रात्र बरीच उलटली आहे, पहिला प्रहर संपला आहे, भिक्खू संघ बऱ्याच वेळापासून बसलेला आहे. भंते, भगवंतांनी भिक्खूंना पातिमोक्खाचा उपदेश करावा.' ဧဝံ ဝုတ္တေ ဘဂဝါ တုဏှီ အဟောသိ. ဒုတိယမ္ပိ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော အဘိက္ကန္တာယ ရတ္တိယာ, နိက္ခန္တေ မဇ္ဈိမေ ယာမေ, ဥဋ္ဌာယာသနာ ဧကံသံ ဥတ္တရာသင်္ဂံ ကရိတွာ ယေန ဘဂဝါ တေနဉ္ဇလိံ ပဏာမေတွာ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဘိက္ကန္တာ, ဘန္တေ, ရတ္တိ, နိက္ခန္တော မဇ္ဈိမော ယာမော, စိရနိသိန္နော ဘိက္ခုသံဃော. ဥဒ္ဒိသတု, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ဘိက္ခူနံ ပါတိမောက္ခ’’န္တိ. ဒုတိယမ္ပိ ခေါ ဘဂဝါ တုဏှီ အဟောသိ. တတိယမ္ပိ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော အဘိက္ကန္တာယ ရတ္တိယာ, နိက္ခန္တေ ပစ္ဆိမေ ယာမေ, ဥဒ္ဓသ္တေ အရုဏေ, နန္ဒိမုခိယာ ရတ္တိယာ ဥဋ္ဌာယာသနာ ဧကံသံ ဥတ္တရာသင်္ဂံ ကရိတွာ ယေန ဘဂဝါ တေနဉ္ဇလိံ ပဏာမေတွာ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဘိက္ကန္တာ, ဘန္တေ, ရတ္တိ, နိက္ခန္တော ပစ္ဆိမော ယာမော, ဥဒ္ဓသ္တံ အရုဏံ, နန္ဒိမုခီ ရတ္တိ; စိရနိသိန္နော ဘိက္ခုသံဃော. ဥဒ္ဒိသတု, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ဘိက္ခူနံ ပါတိမောက္ခ’’န္တိ. ‘‘အပရိသုဒ္ဓါ, အာနန္ဒ, ပရိသာ’’တိ. असे म्हटले असता भगवान मौन राहिले. दुसऱ्यांदाही रात्रीचा पहिला प्रहर उलटून गेल्यावर, मध्यप्रहर संपत असताना, आयुष्यमान आनंद आपल्या आसनावरून उठले, एका खांद्यावर उत्तरासंग परिधान करून ज्या ठिकाणी भगवान होते त्या दिशेने हात जोडून भगवंतांना असे म्हणाले – “भन्ते, रात्र उलटून गेली आहे, मध्यप्रहरही संपला आहे, भिक्खू संघ खूप वेळापासून बसलेला आहे. भन्ते, भगवंतांनी भिक्खूंना पातिमोक्खाचा उपदेश करावा.” दुसऱ्यांदाही भगवान मौन राहिले. तिसऱ्यांदाही रात्रीचा मध्यप्रहर उलटून गेल्यावर, अंतिम प्रहर संपत असताना, अरुणोदय झाल्यावर आणि रात्रीचा अंधार ओसरून प्रसन्न पहाट होत असताना, आयुष्यमान आनंद आपल्या आसनावरून उठले, एका खांद्यावर उत्तरासंग परिधान करून ज्या ठिकाणी भगवान होते त्या दिशेने हात जोडून भगवंतांना असे म्हणाले – “भन्ते, रात्र उलटून गेली आहे, अंतिम प्रहरही संपला आहे, अरुणोदय झाला आहे, रात्र प्रसन्न झाली आहे; भिक्खू संघ खूप वेळापासून बसलेला आहे. भन्ते, भगवंतांनी भिक्खूंना पातिमोक्खाचा उपदेश करावा.” “आनंद, ही परिषद अपरिशुद्ध आहे.” အထ ခေါ အာယသ္မတော မဟာမောဂ္ဂလ္လာနဿ ဧတဒဟောသိ – ‘‘ကံ နု ခေါ ဘဂဝါ ပုဂ္ဂလံ သန္ဓာယ ဧဝမာဟ – ‘အပရိသုဒ္ဓါ, အာနန္ဒ, ပရိသာ’’’တိ? အထ ခေါ အာယသ္မာ မဟာမောဂ္ဂလ္လာနော သဗ္ဗာဝန္တံ ဘိက္ခုသံဃံ စေတသာ စေတော ပရိစ္စ မနသာကာသိ. အဒ္ဒသာ ခေါ အာယသ္မာ မဟာမောဂ္ဂလ္လာနော တံ ပုဂ္ဂလံ ဒုဿီလံ ပါပဓမ္မံ အသုစိံ သင်္ကဿရသမာစာရံ ပဋိစ္ဆန္နကမ္မန္တံ အဿမဏံ သမဏပဋိညံ အဗြဟ္မစာရိံ ဗြဟ္မစာရိပဋိညံ အန္တောပူတိံ အဝဿုတံ ကသမ္ဗုဇာတံ မဇ္ဈေ ဘိက္ခုသံဃဿ နိသိန္နံ; ဒိသွာန ဥဋ္ဌာယာသနာ ယေန သော ပုဂ္ဂလော တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ တံ ပုဂ္ဂလံ [Pg.45] ဧတဒဝေါစ – ‘‘ဥဋ္ဌေဟာဝုသော, ဒိဋ္ဌောသိ ဘဂဝတာ. နတ္ထိ တေ ဘိက္ခူဟိ သဒ္ဓိံ သံဝါသော’’တိ. तेव्हा आयुष्यमान महामोग्गल्लानांच्या मनात असा विचार आला – “भगवंतांनी कोणत्या व्यक्तीला उद्देशून असे म्हटले आहे की, ‘आनंद, ही परिषद अपरिशुद्ध आहे’?” त्यानंतर आयुष्यमान महामोग्गल्लानांनी आपल्या चित्ताने संपूर्ण भिक्खू संघाच्या चित्ताचा वेध घेत मनन केले. आयुष्यमान महामोग्गल्लानांना भिक्खू संघाच्या मध्यभागी बसलेली एक अशी व्यक्ती दिसली जी दुःशील, पापी स्वभावाची, अपवित्र, संशयास्पद आचरण करणारी, आपले दुष्कृत्य लपवणारी, भिक्खू नसतानाही स्वतःला भिक्खू म्हणवून घेणारी, ब्रह्मचर्य पाळत नसतानाही ब्रह्मचारी असल्याचा दावा करणारी, आतून सडलेली, वासनांनी माखलेली आणि कचऱ्यासारखी मलीन होती. त्याला पाहून ते आपल्या आसनावरून उठले आणि ज्या ठिकाणी ती व्यक्ती होती तिथे गेले. तिथे जाऊन ते त्या व्यक्तीला म्हणाले – “मित्रा, उठ! भगवंतांनी तुला पाहिले आहे. आता तुझा भिक्खूंसोबत राहण्याचा अधिकार नाही.” ဧဝံ ဝုတ္တေ သော ပုဂ္ဂလော တုဏှီ အဟောသိ. ဒုတိယမ္ပိ ခေါ အာယသ္မာ မဟာမောဂ္ဂလ္လာနော တံ ပုဂ္ဂလံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ဥဋ္ဌေဟာဝုသော, ဒိဋ္ဌောသိ ဘဂဝတာ. နတ္ထိ တေ ဘိက္ခူဟိ သဒ္ဓိံ သံဝါသော’’တိ. ဒုတိယမ္ပိ ခေါ သော ပုဂ္ဂလော တုဏှီ အဟောသိ. တတိယမ္ပိ ခေါ အာယသ္မာ မဟာမောဂ္ဂလ္လာနော တံ ပုဂ္ဂလံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ဥဋ္ဌေဟာဝုသော, ဒိဋ္ဌောသိ ဘဂဝတာ. နတ္ထိ တေ ဘိက္ခူဟိ သဒ္ဓိံ သံဝါသော’’တိ. တတိယမ္ပိ ခေါ သော ပုဂ္ဂလော တုဏှီ အဟောသိ. असे म्हटले असता ती व्यक्ती मौन राहिली. दुसऱ्यांदाही आयुष्यमान महामोग्गल्लानांनी त्या व्यक्तीला म्हटले – “मित्रा, उठ! भगवंतांनी तुला पाहिले आहे. आता तुझा भिक्खूंसोबत राहण्याचा अधिकार नाही.” दुसऱ्यांदाही ती व्यक्ती मौन राहिली. तिसऱ्यांदाही आयुष्यमान महामोग्गल्लानांनी त्या व्यक्तीला म्हटले – “मित्रा, उठ! भगवंतांनी तुला पाहिले आहे. आता तुझा भिक्खूंसोबत राहण्याचा अधिकार नाही.” तिसऱ्यांदाही ती व्यक्ती मौन राहिली. အထ ခေါ အာယသ္မာ မဟာမောဂ္ဂလ္လာနော တံ ပုဂ္ဂလံ ဗာဟာယံ ဂဟေတွာ ဗဟိဒွါရကောဋ္ဌကာ နိက္ခာမေတွာ သူစိဃဋိကံ ဒတွာ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘နိက္ခာမိတော သော, ဘန္တေ, ပုဂ္ဂလော မယာ. ပရိသုဒ္ဓါ ပရိသာ. ဥဒ္ဒိသတု, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ဘိက္ခူနံ ပါတိမောက္ခ’’န္တိ. ‘‘အစ္ဆရိယံ, မောဂ္ဂလ္လာန, အဗ္ဘုတံ, မောဂ္ဂလ္လာန! ယာဝ ဗာဟာ ဂဟဏာပိ နာမ သော မောဃပုရိသော အာဂမိဿတီ’’တိ! तेव्हा आयुष्यमान महामोग्गल्लानांनी त्या व्यक्तीचा हात धरला, त्याला मुख्य दरवाजाबाहेर काढले, दरवाजा बंद करून कडी लावली आणि ज्या ठिकाणी भगवान होते तिथे गेले. तिथे जाऊन ते भगवंतांना म्हणाले – “भन्ते, मी त्या व्यक्तीला बाहेर काढले आहे. आता परिषद शुद्ध झाली आहे. भन्ते, भगवंतांनी भिक्खूंना पातिमोक्खाचा उपदेश करावा.” “मोग्गल्लाना, हे आश्चर्यकारक आहे! मोग्गल्लाना, हे अद्भुत आहे! तो मोघपुरुष हात धरून बाहेर काढेपर्यंत वाट पाहत राहिला!” အထ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘တုမှေဝ ဒါနိ, ဘိက္ခဝေ, ဥပေါသထံ ကရေယျာထ, ပါတိမောက္ခံ ဥဒ္ဒိသေယျာထ. န ဒါနာဟံ, ဘိက္ခဝေ, အဇ္ဇတဂ္ဂေ ဥပေါသထံ ကရိဿာမိ, ပါတိမောက္ခံ ဥဒ္ဒိသိဿာမိ. အဋ္ဌာနမေတံ, ဘိက္ခဝေ, အနဝကာသော ယံ တထာဂတော အပရိသုဒ္ဓါယ ပရိသာယ ပါတိမောက္ခံ ဥဒ္ဒိသေယျ’’. त्यानंतर भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले – “भिक्खूंनो, आता तुम्हीच उपोसथ करा आणि पातिमोक्खाचा उपदेश करा. भिक्खूंनो, आजपासून मी उपोसथ करणार नाही आणि पातिमोक्खाचा उपदेश करणार नाही. भिक्खूंनो, हे अशक्य आहे, अशी कोणतीही संधी नाही की तथागतांनी अपरिशुद्ध परिषदेमध्ये पातिमोक्खाचा उपदेश करावा.” ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. ကတမေ အဋ္ဌ? မဟာသမုဒ္ဒေါ, ဘိက္ခဝေ, အနုပုဗ္ဗနိန္နော အနုပုဗ္ဗပေါဏော အနုပုဗ္ဗပဗ္ဘာရော, န အာယတကေနေဝ ပပါတော. ယမ္ပိ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ အနုပုဗ္ဗနိန္နော အနုပုဗ္ဗပေါဏော အနုပုဗ္ဗပဗ္ဘာရော, န အာယတကေနေဝ ပပါတော; အယံ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေ ပဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ…ပေ… (ယထာ ပုရိမေ တထာ ဝိတ္ထာရေတဗ္ဗော). “भिक्खूंनो, महासागरामध्ये हे आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणधर्म आहेत, ज्यांना वारंवार पाहून असुर महासागरामध्ये रममाण होतात. ते आठ कोणते? भिक्खूंनो, महासागर हा हळूहळू खोल होत जाणारा, हळूहळू उतार असणारा आणि हळूहळू उतार वाढत जाणारा आहे; तो एकदम सरळ खोल दरीसारखा कोसळणारा नाही. भिक्खूंनो, महासागर जो हळूहळू खोल होत जाणारा, हळूहळू उतार असणारा आणि हळूहळू उतार वाढत जाणारा आहे, एकदम सरळ खोल कोसळणारा नाही; भिक्खूंनो, महासागरातील हा पहिला आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणधर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून असुर महासागरामध्ये रममाण होतात... (पूर्वीप्रमाणेच सविस्तर समजावून सांगावे).” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော. တတြိမေ ဘူတာ – တိမိ တိမိင်္ဂလော တိမိရပိင်္ဂလော အသုရာ နာဂါ ဂန္ဓဗ္ဗာ. ဝသန္တိ မဟာသမုဒ္ဒေ ယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ…ပေ… ပဉ္စယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ[Pg.46]. ယမ္ပိ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော; တတြိမေ ဘူတာ – တိမိ တိမိင်္ဂလော တိမိရပိင်္ဂလော အသုရာ နာဂါ ဂန္ဓဗ္ဗာ; ဝသန္တိ မဟာသမုဒ္ဒေ ယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ…ပေ… ပဉ္စယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ; အယံ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေ အဋ္ဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေ အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ အသုရာ မဟာသမုဒ္ဒေ အဘိရမန္တိ. “पुन्हा आणखी असे की, भिक्खूंनो, महासागर हा महाकाय प्राण्यांचे निवासस्थान आहे. तिथे हे प्राणी राहतात – तिमी, तिमिंगल, तिमिरपिंगल, असुर, नाग आणि गंधर्व. महासागरामध्ये शंभर योजन आकाराचे शरीर असणारे प्राणी राहतात... पाचशे योजन आकाराचे शरीर असणारे प्राणीही राहतात. भिक्खूंनो, महासागर हा महाकाय प्राण्यांचे निवासस्थान आहे; तिथे हे प्राणी राहतात – तिमी, तिमिंगल, तिमिरपिंगल, असुर, नाग आणि गंधर्व; महासागरामध्ये शंभर योजन आकाराचे शरीर असणारे प्राणी राहतात... पाचशे योजन आकाराचे शरीर असणारे प्राणीही राहतात; भिक्खूंनो, महासागरातील हा आठवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणधर्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून असुर महासागरामध्ये रममाण होतात. भिक्खूंनो, महासागरातील हेच ते आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणधर्म आहेत, ज्यांना वारंवार पाहून असुर महासागरामध्ये रममाण होतात.” ‘‘ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. ကတမေ အဋ္ဌ? သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ အနုပုဗ္ဗနိန္နော အနုပုဗ္ဗပေါဏော အနုပုဗ္ဗပဗ္ဘာရော, န အာယတကေနေဝ ပပါတော; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အနုပုဗ္ဗသိက္ခာ အနုပုဗ္ဗကိရိယာ အနုပုဗ္ဗပဋိပဒါ, န အာယတကေနေဝ အညာပဋိဝေဓော. ယမ္ပိ, ဘိက္ခဝေ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အနုပုဗ္ဗသိက္ခာ အနုပုဗ္ဗကိရိယာ အနုပုဗ္ဗပဋိပဒါ, န အာယတကေနေဝ အညာပဋိဝေဓော; အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ ပဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ…ပေ… သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, မဟာသမုဒ္ဒေါ မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော; တတြိမေ ဘူတာ – တိမိ တိမိင်္ဂလော တိမိရပိင်္ဂလော အသုရာ နာဂါ ဂန္ဓဗ္ဗာ, ဝသန္တိ မဟာသမုဒ္ဒေ ယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ…ပေ… ပဉ္စယောဇနသတိကာပိ အတ္တဘာဝါ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အယံ ဓမ္မဝိနယော မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော. တတြိမေ ဘူတာ – သောတာပန္နော သောတာပတ္တိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော…ပေ… အရဟာ အရဟတ္တာယ ပဋိပန္နော. ယမ္ပိ, ဘိက္ခဝေ, အယံ ဓမ္မဝိနယော မဟတံ ဘူတာနံ အာဝါသော; တတြိမေ ဘူတာ – သောတာပန္နော သောတာပတ္တိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော…ပေ… အရဟာ အရဟတ္တာယ ပဋိပန္နော; အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဋ္ဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော, ယံ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တိ. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေ ဒိသွာ ဒိသွာ ဘိက္ခူ ဣမသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ အဘိရမန္တီ’’တိ. ဒသမံ. भिक्खूहो, त्याचप्रमाणे या धम्म-विनयामध्ये आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गोष्टी (धम्म) आहेत, ज्या वारंवार पाहून भिक्खू या धम्म-विनयामध्ये अत्यंत रममाण होतात. त्या आठ कोणत्या? भिक्खूहो, ज्याप्रमाणे महासागर हा अनुक्रमे खोल होत जाणारा, अनुक्रमे उतार असणारा आणि अनुक्रमे उतार वाढत जाणारा आहे, एकदमच कड्यासारखा खोल नाही; त्याचप्रमाणे भिक्खूहो, या धम्म-विनयामध्ये अनुक्रमे शिक्षण (अनुपुब्बसिक्खा), अनुक्रमे क्रिया (अनुपुब्बकिरिया) आणि अनुक्रमे प्रतिपदा (अनुपुब्बपटिपदा) आहे, एकदमच अंतिम ज्ञानाचा (अर्हत्त्वाचा) साक्षात्कार होत नाही. भिक्खूहो, या धम्म-विनयामध्ये जे अनुक्रमे शिक्षण, अनुक्रमे क्रिया आणि अनुक्रमे प्रतिपदा आहे, एकदमच अंतिम ज्ञानाचा साक्षात्कार होत नाही; हा, भिक्खूहो, या धम्म-विनयातील पहिला आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धम्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून भिक्खू या धम्म-विनयामध्ये रममाण होतात... तसेच... भिक्खूहो, ज्याप्रमाणे महासागर हा विशाल प्राण्यांचे (महाकाय जीवांचे) निवासस्थान आहे; तिथे तिमि, तिमिंगल, तिमिरपिंगल, असुर, नाग आणि गंधर्व हे प्राणी राहतात, महासागरात शंभर योजन शरीराचे (अत्तभाव) प्राणी राहतात... तसेच... पाचशे योजन शरीराचे प्राणी राहतात; त्याचप्रमाणे भिक्खूहो, हा धम्म-विनय विशाल प्राण्यांचे (महान व्यक्तींचे) निवासस्थान आहे. तिथे हे प्राणी (महान व्यक्ती) राहतात – सोतापन्न (स्रोतापन्न), सोतापत्ति-फल साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न (मार्गस्थ)... तसेच... अरहंत आणि अरहत्त्वासाठी प्रतिपन्न. भिक्खूहो, हा धम्म-विनय जो विशाल प्राण्यांचे निवासस्थान आहे; तिथे हे प्राणी राहतात – सोतापन्न, सोतापत्ति-फल साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न... तसेच... अरहंत आणि अरहत्त्वासाठी प्रतिपन्न; हा, भिक्खूहो, या धम्म-विनयातील आठवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धम्म आहे, ज्याला वारंवार पाहून भिक्खू या धम्म-विनयामध्ये रममाण होतात. भिक्खूहो, हेच ते या धम्म-विनयातील आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत धम्म आहेत, ज्यांना वारंवार पाहून भिक्खू या धम्म-विनयामध्ये रममाण होतात. दहावे (सुत्त समाप्त). မဟာဝဂ္ဂေါ ဒုတိယော. दुसरा महावग्ग समाप्त. တဿုဒ္ဒါနံ – त्याची अनुक्रमणिका (उद्दान) – ဝေရဉ္ဇော [Pg.47] သီဟော အာဇညံ, ခဠုင်္ကေန မလာနိ စ; ဒူတေယျံ ဒွေ စ ဗန္ဓနာ, ပဟာရာဒေါ ဥပေါသထောတိ. वेरंज, सीह, आजञ्ञ (आजांनेय), खळुंक आणि मल; दूतेय्य, दोन बंधने, पहाराद आणि उपोसथ. ၃. ဂဟပတိဝဂ္ဂေါ ३. गृहपती वग्ग ၁. ပဌမဥဂ္ဂသုတ္တံ १. प्रथम उग्ग सुत्त ၂၁. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝေသာလိယံ ဝိဟရတိ မဟာဝနေ ကူဋာဂါရသာလာယံ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတံ ဥဂ္ဂံ ဂဟပတိံ ဝေသာလိကံ ဓာရေထာ’’တိ. ဣဒမဝေါစ ဘဂဝါ. ဣဒံ ဝတွာန သုဂတော ဥဋ္ဌာယာသနာ ဝိဟာရံ ပါဝိသိ. २१. एकदा भगवान वैशाली येथील महावनातील कूटागारशाळेत विहार करत होते. तिथे भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले, “भिक्खूहो, वैशालीचा उग्ग गृहपती हा आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी (धम्मांनी) युक्त आहे, असे तुम्ही समजा.” भगवंत असे म्हणाले. हे बोलून सुगत आसनावरून उठले आणि विहारात (आपल्या कुटीत) गेले. အထ ခေါ အညတရော ဘိက္ခု ပုဗ္ဗဏှသမယံ နိဝါသေတွာ ပတ္တစီဝရမာဒါယ ယေန ဥဂ္ဂဿ ဂဟပတိနော ဝေသာလိကဿ နိဝေသနံ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ပညတ္တေ အာသနေ နိသီဒိ. အထ ခေါ ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဝေသာလိကော ယေန သော ဘိက္ခု တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ တံ ဘိက္ခုံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဥဂ္ဂံ ဂဟပတိံ ဝေသာလိကံ သော ဘိက္ခု ဧတဒဝေါစ – त्यानंतर एक भिक्खू पूर्वाह्नसमयी (सकाळी) चिवर परिधान करून, पात्र व चिवर घेऊन वैशालीचा उग्ग गृहपती याच्या घराकडे गेला; तिथे जाऊन तो मांडलेल्या आसनावर बसला. तेव्हा वैशालीचा उग्ग गृहपती ज्या ठिकाणी तो भिक्खू होता, तिथे आला; आल्यानंतर त्याने त्या भिक्खूला अभिवादन केले आणि तो एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या वैशालीच्या उग्ग गृहपतीला तो भिक्खू असे म्हणाला – ‘‘အဋ္ဌဟိ ခေါ တွံ, ဂဟပတိ, အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော. ကတမေ တေ, ဂဟပတိ, အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေဟိ တွံ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော’’တိ? ‘‘န ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဇာနာမိ – ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတောတိ. အပိ စ, ဘန္တေ, ယေ မေ အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ သံဝိဇ္ဇန္တိ, တံ သုဏောဟိ, သာဓုကံ မနသိ ကရောဟိ; ဘာသိဿာမီ’’တိ. ‘‘ဧဝံ, ဂဟပတီ’’တိ ခေါ သော ဘိက္ခု ဥဂ္ဂဿ ဂဟပတိနော ဝေသာလိကဿ ပစ္စဿောသိ. ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဝေသာလိကော ဧတဒဝေါစ – ‘‘ယဒါဟံ, ဘန္တေ, ဘဂဝန္တံ ပဌမံ ဒူရတောဝ အဒ္ဒသံ; သဟ ဒဿနေနေဝ မေ, ဘန္တေ[Pg.48], ဘဂဝတော စိတ္တံ ပသီဒိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, ပဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ’’. “गृहपती, तू आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त आहेस, अशी भगवंतांनी तुझ्याविषयी घोषणा केली आहे. गृहपती, ते आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण कोणते आहेत, ज्यांनी तू युक्त आहेस असे भगवंतांनी घोषित केले आहे?” “भंते, भगवंतांनी मला कोणत्या आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त घोषित केले आहे, हे मला माहित नाही. परंतु, भंते, माझ्यामध्ये जे आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आढळतात, ते आपण ऐकावे, नीट मनात धरावे; मी सांगेन.” “ठीक आहे, गृहपती,” असे म्हणून तो भिक्खू वैशालीच्या उग्ग गृहपतीला म्हणाला. वैशालीचा उग्ग गृहपती म्हणाला – “भंते, जेव्हा मी पहिल्यांदा भगवंतांना दुरूनच पाहिले; तेव्हा पाहताच क्षणी, भंते, माझे चित्त भगवंतांच्या ठायी प्रसन्न झाले. भंते, हा माझ्यामध्ये आढळणारा पहिला आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘သော ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ပသန္နစိတ္တော ဘဂဝန္တံ ပယိရုပါသိံ. တဿ မေ ဘဂဝါ အနုပုဗ္ဗိံ ကထံ ကထေသိ, သေယျထိဒံ – ဒါနကထံ သီလကထံ သဂ္ဂကထံ; ကာမာနံ အာဒီနဝံ ဩကာရံ သံကိလေသံ, နေက္ခမ္မေ အာနိသံသံ ပကာသေသိ. ယဒါ မံ ဘဂဝါ အညာသိ ကလ္လစိတ္တံ မုဒုစိတ္တံ ဝိနီဝရဏစိတ္တံ ဥဒဂ္ဂစိတ္တံ ပသန္နစိတ္တံ, အထ ယာ ဗုဒ္ဓါနံ သာမုက္ကံသိကာ ဓမ္မဒေသနာ တံ ပကာသေသိ – ဒုက္ခံ, သမုဒယံ, နိရောဓံ, မဂ္ဂံ. သေယျထာပိ နာမ သုဒ္ဓံ ဝတ္ထံ အပဂတကာဠကံ သမ္မဒေဝ ရဇနံ ပဋိဂ္ဂဏှေယျ; ဧဝမေဝံ ခေါ မေ တသ္မိံယေဝ အာသနေ ဝိရဇံ ဝီတမလံ ဓမ္မစက္ခုံ ဥဒပါဒိ – ‘ယံ ကိဉ္စိ သမုဒယဓမ္မံ, သဗ္ဗံ တံ နိရောဓဓမ္မ’န္တိ. သော ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဒိဋ္ဌဓမ္မော ပတ္တဓမ္မော ဝိဒိတဓမ္မော ပရိယောဂါဠှဓမ္မော တိဏ္ဏဝိစိကိစ္ဆော ဝိဂတကထံကထော ဝေသာရဇ္ဇပ္ပတ္တော အပရပ္ပစ္စယော သတ္ထုသာသနေ တတ္ထေဝ ဗုဒ္ဓဉ္စ ဓမ္မဉ္စ သံဃဉ္စ သရဏံ အဂမာသိံ, ဗြဟ္မစရိယပဉ္စမာနိ စ သိက္ခာပဒါနိ သမာဒိယိံ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, ဒုတိယော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भंते, प्रसन्न चित्त होऊन मी भगवंतांच्या सेवेत उपस्थित झालो. तेव्हा भगवंतांनी मला अनुक्रमे उपदेश (अनुपुब्बीकथा) केला, जसे की – दानकथा, शीलकथा, स्वर्गकथा; त्यांनी कामभोगांचे दुष्परिणाम, हीनता, संक्लेश (मलीनता) आणि नैष्क्रम्याचे (त्यागाचे) फायदे प्रकट केले. जेव्हा भगवंतांना समजले की माझे चित्त अनुकूल, मृदू, नीवरणमुक्त, प्रफुल्लित आणि प्रसन्न झाले आहे, तेव्हा त्यांनी बुद्धांची जी सर्वोत्कृष्ट (सामुक्कंसिका) धम्मदेशना आहे, ती प्रकट केली – दुःख, समुदय, nirodha (निरोध) आणि मार्ग. ज्याप्रमाणे डाग नसलेले स्वच्छ वस्त्र रंग चांगल्या प्रकारे ग्रहण करते; त्याचप्रमाणे, भंते, त्याच आसनावर बसलेले असताना मला विरज (धूलीरहित) आणि वीतमल (मलरहित) धम्मचक्षू प्राप्त झाले – ‘जे काही उत्पन्न होण्याच्या स्वभावाचे आहे, ते सर्व नष्ट होण्याच्या स्वभावाचे आहे.’ भंते, मी धम्म पाहिला, धम्म प्राप्त केला, धम्म जाणला, धम्मात प्रवेश केला, शंका पार केल्या, संभ्रम दूर केला, आत्मविशवास (वैशारद्य) प्राप्त केला आणि शास्त्यांच्या शासनात परावलंबी न राहता, तिथेच बुद्ध, धम्म आणि संघाला शरण गेलो, आणि ब्रह्मचर्य हे पाचवे असलेले (पंचशील) शील ग्रहण केले. भंते, हा माझ्यामध्ये आढळणारा दुसरा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘တဿ မယှံ, ဘန္တေ, စတဿော ကောမာရိယော ပဇာပတိယော အဟေသုံ. အထ ခွာဟံ, ဘန္တေ, ယေန တာ ပဇာပတိယော တေနုပသင်္ကမိံ; ဥပသင်္ကမိတွာ တာ ပဇာပတိယော ဧတဒဝစံ – ‘မယာ ခေါ, ဘဂိနိယော, ဗြဟ္မစရိယပဉ္စမာနိ သိက္ခာပဒါနိ သမာဒိန္နာနိ. ယာ ဣစ္ဆတိ သာ ဣဓေဝ ဘောဂေ စ ဘုဉ္ဇတု ပုညာနိ စ ကရောတု, သကာနိ ဝါ ဉာတိကုလာနိ ဂစ္ဆတု. ဟောတိ ဝါ ပန ပုရိသာဓိပ္ပာယော, ကဿ ဝေါ ဒမ္မီ’တိ? ဧဝံ ဝုတ္တေ သာ, ဘန္တေ, ဇေဋ္ဌာ ပဇာပတိ မံ ဧတဒဝေါစ – ‘ဣတ္ထန္နာမဿ မံ, အယျပုတ္တ, ပုရိသဿ ဒေဟီ’တိ. အထ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, တံ ပုရိသံ ပက္ကောသာပေတွာ ဝါမေန ဟတ္ထေန ပဇာပတိံ ဂဟေတွာ ဒက္ခိဏေန ဟတ္ထေန ဘိင်္ဂါရံ ဂဟေတွာ တဿ ပုရိသဿ ဩဏောဇေသိံ. ကောမာရိံ ခေါ ပနာဟံ, ဘန္တေ, ဒါရံ ပရိစ္စဇန္တော နာဘိဇာနာမိ စိတ္တဿ အညထတ္တံ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, တတိယော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, मला तरुण वयातील चार पत्नी होत्या. त्यानंतर, भन्ते, मी त्या पत्नींकडे गेलो आणि त्यांना असे म्हटले— ‘भगिनींनो, मी ब्रह्मचर्य हे पाचवे असलेले (ब्रह्मचर्य-पंचम) पाच शील ग्रहण केले आहेत. ज्या स्त्रीची इच्छा असेल तिने याच घरात राहून भोगांचा उपभोग घ्यावा आणि पुण्यकर्मे करावीत, किंवा आपल्या स्वतःच्या नातेवाईकांच्या घरी निघून जावे. किंवा जर दुसऱ्या पुरुषाची इच्छा असेल, तर मी तुम्हाला कोणाला देऊ?’ असे म्हटल्यावर, भन्ते, माझ्या सर्वात मोठ्या पत्नीने मला असे म्हटले— ‘आर्यपुत्र, मला अमुक नावाच्या पुरुषाला देऊन टाका.’ त्यानंतर, भन्ते, मी त्या पुरुषाला बोलावून घेतले आणि डाव्या हाताने माझ्या पत्नीला धरून, उजव्या हाताने पाण्याचे भांडे घेऊन, तिला त्या पुरुषाला सोपवून दिले. परंतु, भन्ते, माझ्या त्या तरुण पत्नीचा त्याग करताना माझ्या मनात कोणताही विकार निर्माण झाल्याचे मला आठवत नाही. माझ्यामध्ये आढळणारा हा तिसरा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘သံဝိဇ္ဇန္တိ ခေါ ပန မေ, ဘန္တေ, ကုလေ ဘောဂါ. တေ စ ခေါ အပ္ပဋိဝိဘတ္တာ သီလဝန္တေဟိ ကလျာဏဓမ္မေဟိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, စတုတ္ထော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, माझ्या घराण्यात विपुल संपत्ती आहे. परंतु ती संपत्ती शीलवान आणि कल्याणकारी स्वभाव असलेल्या व्यक्तींसोबत कोणत्याही भेदभावाशिवाय मुक्तपणे वाटून घेतली जाते. माझ्यामध्ये आढळणारा हा चौथा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘ယံ [Pg.49] ခေါ ပနာဟံ, ဘန္တေ, ဘိက္ခုံ ပယိရုပါသာမိ; သက္ကစ္စံယေဝ ပယိရုပါသာမိ, နော အသက္ကစ္စံ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, ပဉ္စမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, मी ज्या ज्या भिक्खूंची सेवा-उपासना करतो, ती अत्यंत आदरानेच करतो, अनादराने नाही. माझ्यामध्ये आढळणारा हा पाचवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘သော စေ, ဘန္တေ, မေ အာယသ္မာ ဓမ္မံ ဒေသေတိ; သက္ကစ္စံယေဝ သုဏောမိ, နော အသက္ကစ္စံ. နော စေ မေ သော အာယသ္မာ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, အဟမဿ ဓမ္မံ ဒေသေမိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ ဆဋ္ဌော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, जर ते आयुष्यमान मला धम्मदेशना देतात, तर मी ती अत्यंत आदरानेच ऐकतो, अनादराने नाही. आणि जर ते आयुष्यमान मला धम्मदेशना देत नसतील, तर मी त्यांना धम्मदेशना देतो. माझ्यामध्ये आढळणारा हा सहावा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘အနစ္ဆရိယံ ခေါ ပန မံ, ဘန္တေ, ဒေဝတာ ဥပသင်္ကမိတွာ အာရောစေန္တိ – ‘သွာက္ခာတော, ဂဟပတိ, ဘဂဝတာ ဓမ္မော’တိ. ဧဝံ ဝုတ္တေ အဟံ, ဘန္တေ, တာ ဒေဝတာ ဧဝံ ဝဒါမိ – ‘ဝဒေယျာထ ဝါ ဧဝံ ခေါ တုမှေ ဒေဝတာ နော ဝါ ဝဒေယျာထ, အထ ခေါ သွာက္ခာတော ဘဂဝတာ ဓမ္မော’တိ. န ခေါ ပနာဟံ, ဘန္တေ, အဘိဇာနာမိ တတောနိဒါနံ စိတ္တဿ ဥန္နတိံ – ‘မံ ဝါ ဒေဝတာ ဥပသင်္ကမန္တိ, အဟံ ဝါ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သလ္လပါမီ’တိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, သတ္တမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, देवतेने माझ्याकडे येऊन ‘गृहपती, भगवंतांनी धम्म उत्तम प्रकारे सांगितला आहे’ असे सांगणे यात काही आश्चर्य नाही. असे म्हटल्यावर, भन्ते, मी त्या देवतांना असे म्हणतो— ‘तुम्ही देवतांनी असे म्हणावे किंवा न म्हणावे, तरीही भगवंतांनी धम्म उत्तम प्रकारेच सांगितला आहे.’ परंतु, भन्ते, देवता माझ्याकडे येतात किंवा मी देवतांशी संभाषण करतो, या कारणाने माझ्या मनात कधीही अहंकार किंवा अभिमान निर्माण झाल्याचे मला आठवत नाही. माझ्यामध्ये आढळणारा हा सातवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘ယာနိမာနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတာ ဒေသိတာနိ ပဉ္စောရမ္ဘာဂိယာနိ သံယောဇနာနိ, နာဟံ တေသံ ကိဉ္စိ အတ္တနိ အပ္ပဟီနံ သမနုပဿာမိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, အဋ္ဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. ဣမေ ခေါ မေ, ဘန္တေ, အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ သံဝိဇ္ဇန္တိ. န စ ခေါ အဟံ ဇာနာမိ – ကတမေဟိ စာဟံ အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော’’တိ. “भन्ते, भगवंतांनी जी पाच खालच्या पातळीवरील बंधने (पंच-ओरंभागिय संयोजने) सांगितली आहेत, त्यांपैकी कोणतेही बंधन माझ्यामध्ये नष्ट झाले नाही असे मला दिसत नाही. माझ्यामध्ये आढळणारा हा आठवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे. भन्ते, माझ्यामध्ये हे आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आढळतात. परंतु, भगवंतांनी माझ्या कोणत्या आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचा उल्लेख केला आहे, हे मला माहीत नाही.” အထ ခေါ သော ဘိက္ခု ဥဂ္ဂဿ ဂဟပတိနော ဝေသာလိကဿ နိဝေသနေ ပိဏ္ဍပါတံ ဂဟေတွာ ဥဋ္ဌာယာသနာ ပက္ကာမိ. အထ ခေါ သော ဘိက္ခု ပစ္ဆာဘတ္တံ ပိဏ္ဍပါတပဋိက္ကန္တော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ သော ဘိက္ခု ယာဝတကော အဟောသိ ဥဂ္ဂေန ဂဟပတိနာ ဝေသာလိကေန သဒ္ဓိံ ကထာသလ္လာပေါ, တံ သဗ္ဗံ ဘဂဝတော အာရောစေသိ. त्यानंतर तो भिक्खू वैशालीचा गृहपती उग्ग याच्या घरी भिक्षा ग्रहण करून, आसनावरून उठून निघून गेला. मग तो भिक्खू भोजनोत्तर भिक्षेवरून परत आल्यावर जेथे भगवंत होते तेथे गेला; आणि भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या त्या भिक्खूने वैशालीचा गृहपती उग्ग याच्यासोबत झालेला सर्व संवाद भगवंतांना सविस्तर सांगितला. ‘‘သာဓု သာဓု, ဘိက္ခု! ယထာ တံ ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဝေသာလိကော သမ္မာ ဗျာကရမာနော ဗျာကရေယျ, ဣမေဟေဝ ခေါ, ဘိက္ခု, အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ [Pg.50] ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဝေသာလိကော မယာ ဗျာကတော. ဣမေဟိ စ ပန, ဘိက္ခု, အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတံ ဥဂ္ဂံ ဂဟပတိံ ဝေသာလိကံ ဓာရေဟီ’’တိ. ပဌမံ. “साधू! साधू! भिक्खू, वैशालीच्या उग्ग गृहपतीने ज्या प्रकारे योग्य स्पष्टीकरण दिले पाहिजे होते, तसेच त्याने दिले आहे. भिक्खू, वैशालीचा उग्ग गृहपती याच आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचे मी घोषित केले आहे. म्हणून, भिक्खू, तू वैशालीच्या उग्ग गृहपतीला या आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असलेला समज.” पहिले (सुत्त समाप्त). ၂. ဒုတိယဥဂ္ဂသုတ္တံ २. दुसरे उग्ग सुत्त ၂၂. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝဇ္ဇီသု ဝိဟရတိ ဟတ္ထိဂါမေ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတံ ဥဂ္ဂံ ဂဟပတိံ ဟတ္ထိဂါမကံ ဓာရေထာ’’တိ. ဣဒမဝေါစ ဘဂဝါ. ဣဒံ ဝတွာန သုဂတော ဥဋ္ဌာယာသနာ ဝိဟာရံ ပါဝိသိ. २२. एकदा भगवंत वज्जी देशातील हत्थिगाम येथे विहार करत होते. तेथे भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले— “भिक्खूंनो, हत्थिगामचा गृहपती उग्ग हा आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त आहे, असे तुम्ही समजा.” भगवंत असे म्हणाले. हे बोलून सुगत आसनावरून उठले आणि विहारात गेले. အထ ခေါ အညတရော ဘိက္ခု ပုဗ္ဗဏှသမယံ နိဝါသေတွာ ပတ္တစီဝရမာဒါယ ယေန ဥဂ္ဂဿ ဂဟပတိနော ဟတ္ထိဂါမကဿ နိဝေသနံ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ပညတ္တေ အာသနေ နိသီဒိ. အထ ခေါ ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဟတ္ထိဂါမကော ယေန သော ဘိက္ခု တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ တံ ဘိက္ခုံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဥဂ္ဂံ ဂဟပတိံ ဟတ္ထိဂါမကံ သော ဘိက္ခု ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဋ္ဌဟိ ခေါ တွံ, ဂဟပတိ, အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော. ကတမေ တေ, ဂဟပတိ, အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ, ယေဟိ တွံ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော’’တိ? त्यानंतर एक भिक्खू सकाळी वस्त्र परिधान करून, पात्र आणि चीवर घेऊन हत्थिगामचा गृहपती उग्ग याच्या घराकडे गेला; आणि तेथे गेल्यावर मांडलेल्या आसनावर बसला. मग हत्थिगामचा गृहपती उग्ग त्या भिक्खूंकडे गेला; आणि त्यांना अभिवादन करून एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या हत्थिगामच्या उग्ग गृहपतीला तो भिक्खू म्हणाला— “गृहपती, तू आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचे भगवंतांनी घोषित केले आहे. गृहपती, ते आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण कोणते आहेत, ज्यांनी तू युक्त असल्याचे भगवंतांनी सांगितले आहे?” ‘‘န ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဇာနာမိ – ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတောတိ. အပိ စ, ဘန္တေ, ယေ မေ အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ သံဝိဇ္ဇန္တိ, တံ သုဏာဟိ, သာဓုကံ မနသိ ကရောဟိ; ဘာသိဿာမီ’’တိ. ‘‘ဧဝံ, ဂဟပတီ’’တိ ခေါ သော ဘိက္ခု ဥဂ္ဂဿ ဂဟပတိနော ဟတ္ထိဂါမကဿ ပစ္စဿောသိ. ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဟတ္ထိဂါမကော ဧတဒဝေါစ – ‘‘ယဒါဟံ, ဘန္တေ, နာဂဝနေ ပရိစရန္တော ဘဂဝန္တံ ပဌမံ ဒူရတောဝ အဒ္ဒသံ; သဟ ဒဿနေနေဝ မေ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော စိတ္တံ ပသီဒိ, သုရာမဒေါ စ ပဟီယိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, ပဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, भगवंतांनी माझ्या कोणत्या आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचा उल्लेख केला आहे, हे मला माहीत नाही. परंतु, भन्ते, माझ्यामध्ये जे आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आढळतात, ते ऐका, नीट मनात साठवून ठेवा; मी सांगतो.” तो भिक्खू हत्थिगामच्या उग्ग गृहपतीला म्हणाला, “ठीक आहे, गृहपती.” हत्थिगामचा गृहपती उग्ग म्हणाला— “भन्ते, जेव्हा मी नागवनात क्रीडा करत होतो, तेव्हा मी पहिल्यांदा भगवंतांना दुरूनच पाहिले. भन्ते, केवळ दर्शनानेच माझे चित्त भगवंतांच्या ठायी प्रसन्न झाले आणि माझी दारूची नशा उतरली. माझ्यामध्ये आढळणारा हा पहिला आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘သော ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ပသန္နစိတ္တော ဘဂဝန္တံ ပယိရုပါသိံ. တဿ မေ ဘဂဝါ အနုပုဗ္ဗိံ ကထံ ကထေသိ, သေယျထိဒံ – ဒါနကထံ သီလကထံ သဂ္ဂကထံ; ကာမာနံ အာဒီနဝံ ဩကာရံ သံကိလေသံ, နေက္ခမ္မေ အာနိသံသံ ပကာသေသိ. ယဒါ မံ ဘဂဝါ အညာသိ ကလ္လစိတ္တံ မုဒုစိတ္တံ ဝိနီဝရဏစိတ္တံ ဥဒဂ္ဂစိတ္တံ ပသန္နစိတ္တံ, အထ ယာ [Pg.51] ဗုဒ္ဓါနံ သာမုက္ကံသိကာ ဓမ္မဒေသနာ တံ ပကာသေသိ – ဒုက္ခံ, သမုဒယံ, နိရောဓံ, မဂ္ဂံ. သေယျထာပိ နာမ သုဒ္ဓံ ဝတ္ထံ အပဂတကာဠကံ သမ္မဒေဝ ရဇနံ ပဋိဂ္ဂဏှေယျ; ဧဝမေဝံ ခေါ မေ တသ္မိံယေဝ အာသနေ ဝိရဇံ ဝီတမလံ ဓမ္မစက္ခုံ ဥဒပါဒိ – ‘ယံ ကိဉ္စိ သမုဒယဓမ္မံ, သဗ္ဗံ တံ နိရောဓဓမ္မ’န္တိ. သော ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဒိဋ္ဌဓမ္မော ပတ္တဓမ္မော ဝိဒိတဓမ္မော ပရိယောဂါဠှဓမ္မော တိဏ္ဏဝိစိကိစ္ဆော ဝိဂတကထံကထော ဝေသာရဇ္ဇပ္ပတ္တော အပရပ္ပစ္စယော သတ္ထုသာသနေ တတ္ထေဝ ဗုဒ္ဓဉ္စ ဓမ္မဉ္စ သံဃဉ္စ သရဏံ အဂမာသိံ, ဗြဟ္မစရိယပဉ္စမာနိ စ သိက္ခာပဒါနိ သမာဒိယိံ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, ဒုတိယော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, मी प्रसन्न चित्ताने भगवंतांची सेवा-उपासना केली. तेव्हा भगवंतांनी मला अनुक्रमाने धम्म उपदेश (अनुपुब्बी कथा) केला; जसे की – दानकथा, शीलकथा, स्वर्गकथा; कामभोगांचे दुष्परिणाम (आदीनव), हीनत्व व संक्लेश (मळकटपणा) आणि नैष्क्रम्याचे (कामभोगांतून मुक्त होण्याचे) फायदे त्यांनी प्रकट केले. जेव्हा भगवंतांना समजले की माझे चित्त अनुकूल, मृदू, नीवरणमुक्त (अडथळामुक्त), प्रफुल्लित आणि प्रसन्न झाले आहे, तेव्हा त्यांनी बुद्धांचा जो स्वतःचा सर्वश्रेष्ठ धम्म उपदेश (सामुक्कंसिका धम्मदेसना) आहे, तो प्रकट केला – दुःख, समुदय, निरोध आणि मार्ग. ज्याप्रमाणे डाग नसलेले स्वच्छ वस्त्र रंग चांगल्या प्रकारे ग्रहण करते; त्याचप्रमाणे त्याच आसनावर मला विरज (धुलिकणरहित) आणि विमल (मळरहित) धम्मचक्षू प्राप्त झाले की – ‘जे काही उत्पत्तीच्या स्वभावाचे आहे, ते सर्व निरोधाच्या (नष्ट होण्याच्या) स्वभावाचे आहे.’ भन्ते, तो मी धम्म पाहिलेला, धम्माप्रत पोहोचलेला, धम्म जाणलेला, धम्मामध्ये खोलवर उतरलेला, शंकांचे निरसन झालेला, संभ्रम दूर झालेला, आत्मविश्वासाला प्राप्त झालेला आणि शास्त्यांच्या शासनात परावलंबी न राहिलेला (अपरप्रत्यय) होऊन, त्याच ठिकाणी बुद्ध, धम्म आणि संघाला शरण गेलो आणि ब्रह्मचर्य पाचवे असणाऱ्या (पंचशील) शिकवणुकींचे (सिक्खापदांचे) ग्रहण केले. भन्ते, हा माझ्या ठायी असलेला दुसरा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘တဿ မယှံ, ဘန္တေ, စတဿော ကောမာရိယော ပဇာပတိယော အဟေသုံ. အထ ခွာဟံ, ဘန္တေ, ယေန တာ ပဇာပတိယော တေနုပသင်္ကမိံ; ဥပသင်္ကမိတွာ တာ ပဇာပတိယော ဧတဒဝစံ – ‘မယာ ခေါ, ဘဂိနိယော, ဗြဟ္မစရိယပဉ္စမာနိ သိက္ခာပဒါနိ သမာဒိန္နာနိ. ယာ ဣစ္ဆတိ သာ ဣဓေဝ ဘောဂေ စ ဘုဉ္ဇတု ပုညာနိ စ ကရောတု, သကာနိ ဝါ ဉာတိကုလာနိ ဂစ္ဆတု. ဟောတိ ဝါ ပန ပုရိသာဓိပ္ပာယော, ကဿ ဝေါ ဒမ္မီ’တိ? ဧဝံ ဝုတ္တေ သာ, ဘန္တေ, ဇေဋ္ဌာ ပဇာပတိ မံ ဧတဒဝေါစ – ‘ဣတ္ထန္နာမဿ မံ, အယျပုတ္တ, ပုရိသဿ ဒေဟီ’တိ. အထ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, တံ ပုရိသံ ပက္ကောသာပေတွာ ဝါမေန ဟတ္ထေန ပဇာပတိံ ဂဟေတွာ ဒက္ခိဏေန ဟတ္ထေန ဘိင်္ဂါရံ ဂဟေတွာ တဿ ပုရိသဿ ဩဏောဇေသိံ. ကောမာရိံ ခေါ ပနာဟံ, ဘန္တေ, ဒါရံ ပရိစ္စဇန္တော နာဘိဇာနာမိ စိတ္တဿ အညထတ္တံ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, တတိယော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, मला चार तरुण पत्नी होत्या. तेव्हा मी त्या पत्नींकडे गेलो आणि त्यांना म्हणालो – ‘भगिनींनो, मी ब्रह्मचर्य पाचवे असणाऱ्या शिकवणुकींचे (सिक्खापदांचे) ग्रहण केले आहे. तुमच्यापैकी ज्यांची इच्छा असेल त्यांनी याच घरात राहून संपत्तीचा उपभोग घ्यावा आणि पुण्यकर्मे करावीत, किंवा आपल्या नातेवाईकांच्या घरी जावे. अथवा जर दुसऱ्या पुरुषाची इच्छा असेल, तर मी तुम्हाला कोणाला देऊ?’ असे विचारल्यावर, भन्ते, माझ्या ज्येष्ठ पत्नीने मला म्हटले – ‘आर्यपुत्र, मला अमुक नावाच्या पुरुषाला द्या.’ तेव्हा, भन्ते, मी त्या पुरुषाला बोलावून घेतले आणि डाव्या हाताने पत्नीला धरून व उजव्या हाताने पाण्याचे भांडे (भिंगार) घेऊन तिला त्या पुरुषाला दान केले (सोपवून दिले). भन्ते, अशा तरुण पत्नीचा त्याग करताना माझ्या चित्तात कोणताही विकार किंवा बदल झाल्याचे मला आठवत नाही. भन्ते, हा माझ्या ठायी असलेला तिसरा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘သံဝိဇ္ဇန္တိ ခေါ ပန မေ, ဘန္တေ, ကုလေ ဘောဂါ. တေ စ ခေါ အပ္ပဋိဝိဘတ္တာ သီလဝန္တေဟိ ကလျာဏဓမ္မေဟိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, စတုတ္ထော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, माझ्या कुळात विपुल संपत्ती आहे. परंतु ती संपत्ती शीलवान आणि कल्याणकारी स्वभावाच्या लोकांसाठी अमर्याद (विनाभेदभाव सामायिक) आहे. भन्ते, हा माझ्या ठायी असलेला चौथा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘ယံ ခေါ ပနာဟံ, ဘန္တေ, ဘိက္ခုံ ပယိရုပါသာမိ; သက္ကစ္စံယေဝ ပယိရုပါသာမိ, နော အသက္ကစ္စံ. သော စေ မေ အာယသ္မာ ဓမ္မံ ဒေသေတိ; သက္ကစ္စံယေဝ သုဏောမိ, နော အသက္ကစ္စံ. နော စေ မေ သော အာယသ္မာ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, အဟမဿ ဓမ္မံ ဒေသေမိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, ပဉ္စမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, मी जेव्हा कधी एखाद्या भिक्खूंची सेवा-उपासना करतो, तेव्हा ती आदरपूर्वकच करतो, अनादराने नाही. जर ते आयुष्यमान मला धम्म उपदेश करत असतील, तर मी तो आदरपूर्वकच ऐकतो, अनादराने नाही. जर ते आयुष्यमान मला धम्म उपदेश करत नसतील, तर मी त्यांना धम्म उपदेश करतो. भन्ते, हा माझ्या ठायी असलेला पाचवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘အနစ္ဆရိယံ [Pg.52] ခေါ ပန, ဘန္တေ, သံဃေ နိမန္တိတေ ဒေဝတာ ဥပသင်္ကမိတွာ အာရောစေန္တိ – ‘အသုကော, ဂဟပတိ, ဘိက္ခု ဥဘတောဘာဂဝိမုတ္တော အသုကော ပညာဝိမုတ္တော အသုကော ကာယသက္ခီ အသုကော ဒိဋ္ဌိပ္ပတ္တော အသုကော သဒ္ဓါဝိမုတ္တော အသုကော ဓမ္မာနုသာရီ အသုကော သဒ္ဓါနုသာရီ အသုကော သီလဝါ ကလျာဏဓမ္မော အသုကော ဒုဿီလော ပါပဓမ္မော’တိ. သံဃံ ခေါ ပနာဟံ, ဘန္တေ, ပရိဝိသန္တော နာဘိဇာနာမိ ဧဝံ စိတ္တံ ဥပ္ပာဒေန္တော – ‘ဣမဿ ဝါ ထောကံ ဒေမိ ဣမဿ ဝါ ဗဟုက’န္တိ. အထ ခွာဟံ, ဘန္တေ, သမစိတ္တောဝ ဒေမိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, ဆဋ္ဌော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, जेव्हा मी संघाला आमंत्रित करतो, तेव्हा देवता माझ्याकडे येऊन सांगतात – ‘गृहपती, अमुक भिक्खू उभतोभागविमुक्त (दोन्ही बाजूंनी मुक्त) आहेत, अमुक प्रज्ञाविमुक्त आहेत, अमुक कायसाक्षी आहेत, अमुक दृष्टीप्राप्त आहेत, अमुक श्रद्धाविमुक्त आहेत, अमुक धम्मानुसारी आहेत, अमुक श्रद्धानुसारी आहेत, अमुक शीलवान व कल्याणकारी स्वभावाचे आहेत, तर अमुक दुःशील व पापस्वभावाचे आहेत.’ हे काही आश्चर्यकारक नाही. परंतु, भन्ते, संघाला भोजन वाढताना (दान देताना) माझ्या मनात कधीही असा विचार आल्याचे मला आठवत नाही की – ‘यांना थोडे द्यावे आणि त्यांना जास्त द्यावे.’ उलट, भन्ते, मी समभावानेच (समान चित्ताने) दान देतो. भन्ते, हा माझ्या ठायी असलेला सहावा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘အနစ္ဆရိယံ ခေါ ပန မံ, ဘန္တေ, ဒေဝတာ ဥပသင်္ကမိတွာ အာရောစေန္တိ – ‘သွာက္ခာတော, ဂဟပတိ, ဘဂဝတာ ဓမ္မော’တိ. ဧဝံ ဝုတ္တေ အဟံ, ဘန္တေ, တာ ဒေဝတာ ဧဝံ ဝဒေမိ – ‘ဝဒေယျာထ ဝါ ဧဝံ ခေါ တုမှေ ဒေဝတာ နော ဝါ ဝဒေယျာထ, အထ ခေါ သွာက္ခာတော ဘဂဝတာ ဓမ္မော’တိ. န ခေါ ပနာဟံ, ဘန္တေ, အဘိဇာနာမိ တတောနိဒါနံ စိတ္တဿ ဥန္နတိံ – ‘မံ တာ ဒေဝတာ ဥပသင်္ကမန္တိ, အဟံ ဝါ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သလ္လပါမီ’တိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, သတ္တမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. “भन्ते, देवता माझ्याकडे येऊन सांगतात – ‘गृहपती, भगवंतांनी धम्माचे सुंदर रीतीने आख्यान (स्वाख्यात) केले आहे.’ हे काही आश्चर्यकारक नाही. असे म्हटल्यावर, भन्ते, मी त्या देवतांना म्हणतो – ‘तुम्ही देवतांनी असे म्हणावे किंवा न म्हणावे, तरीही भगवंतांनी धम्माचे सुंदर रीतीने आख्यान केलेच आहे.’ परंतु, भन्ते, ‘देवता माझ्याकडे येतात किंवा मी देवतांशी संभाषण करतो’ या कारणाने माझ्या मनात कधीही अभिमान किंवा गर्वाची भावना निर्माण झाल्याचे मला आठवत नाही. भन्ते, हा माझ्या ठायी असलेला सातवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे.” ‘‘သစေ ခေါ ပနာဟံ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော ပဌမတရံ ကာလံ ကရေယျံ, အနစ္ဆရိယံ ခေါ ပနေတံ ယံ မံ ဘဂဝါ ဧဝံ ဗျာကရေယျ – ‘နတ္ထိ တံ သံယောဇနံ ယေန သံယုတ္တော ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဟတ္ထိဂါမကော ပုန ဣမံ လောကံ အာဂစ္ဆေယျာ’တိ. အယံ ခေါ မေ, ဘန္တေ, အဋ္ဌမော အစ္ဆရိယော အဗ္ဘုတော ဓမ္မော သံဝိဇ္ဇတိ. ဣမေ ခေါ မေ, ဘန္တေ, အဋ္ဌ အစ္ဆရိယာ အဗ္ဘုတာ ဓမ္မာ သံဝိဇ္ဇန္တိ. န စ ခေါ အဟံ ဇာနာမိ – ကတမေဟိ စာဟံ အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော’’တိ. “भन्ते, जर मी भगवंतांच्या आधी काळाच्या पडद्याआड गेलो (मृत्यू पावलो), तर भगवंतांनी माझ्याविषयी असे घोषित करणे आश्चर्यकारक ठरणार नाही की – ‘असे कोणतेही संयोजन (बंधन) उरलेले नाही, ज्याने बांधलेला हत्थिगाम येथील उग्ग गृहपती पुन्हा या जगात परतेल.’ भन्ते, हा माझ्या ठायी असलेला आठवा आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण आहे. भन्ते, माझ्या ठायी हे आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुण विद्यमान आहेत. परंतु, भगवंतांनी माझ्या ठायी असलेल्या कोणत्या आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांची घोषणा केली आहे, हे मला ठाऊक नाही.” ‘‘အထ ခေါ သော ဘိက္ခု ဥဂ္ဂဿ ဂဟပတိနော ဟတ္ထိဂါမကဿ နိဝေသနေ ပိဏ္ဍပါတံ ဂဟေတွာ ဥဋ္ဌာယာသနာ ပက္ကာမိ. အထ ခေါ သော ဘိက္ခု ပစ္ဆာဘတ္တံ ပိဏ္ဍပါတပဋိက္ကန္တော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ သော ဘိက္ခု ယာဝတကော အဟောသိ ဥဂ္ဂေန ဂဟပတိနာ ဟတ္ထိဂါမကေန သဒ္ဓိံ ကထာသလ္လာပေါ, တံ သဗ္ဗံ ဘဂဝတော အာရောစေသိ. “त्यानंतर तो भिक्खू हत्थिगाम येथील उग्ग गृहपतीच्या घरी भिक्षा ग्रहण करून आसनावरून उठून निघून गेला. मग तो भिक्खू भोजनोत्तर भिक्षेवरून परत आल्यावर जेथे भगवंत होते तेथे गेला; आणि भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या त्या भिक्खूने हत्थिगाम येथील उग्ग गृहपतीसोबत झालेला सर्व संभाषण भगवंतांना सविस्तर सांगितला.” ‘‘သာဓု [Pg.53] သာဓု, ဘိက္ခု! ယထာ တံ ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဟတ္ထိဂါမကော သမ္မာ ဗျာကရမာနော ဗျာကရေယျ, ဣမေဟေဝ ခေါ ဘိက္ခု, အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဥဂ္ဂေါ ဂဟပတိ ဟတ္ထိဂါမကော မယာ ဗျာကတော. ဣမေဟိ စ ပန, ဘိက္ခု, အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတံ ဥဂ္ဂံ ဂဟပတိံ ဟတ္ထိဂါမကံ ဓာရေဟီ’’တိ. ဒုတိယံ. “साधू! साधू! भिक्खू, ज्याप्रमाणे हत्थिगाम येथील उग्ग गृहपतीने योग्य प्रकारे स्पष्टीकरण दिले आहे, त्याचप्रमाणे मी देखील हत्थिगाम येथील उग्ग गृहपती या आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचे घोषित केले आहे. म्हणून, भिक्खू, तू हत्थिगाम येथील उग्ग गृहपतीला या आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असलेला म्हणून लक्षात ठेव.” दुसरे. ၃. ပဌမဟတ္ထကသုတ္တံ ३. प्रथम हत्थक सुत्त ၂၃. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ အာဠဝိယံ ဝိဟရတိ အဂ္ဂါဠဝေ စေတိယေ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘သတ္တဟိ, ဘိက္ခဝေ, အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတံ ဟတ္ထကံ အာဠဝကံ ဓာရေထ. ကတမေဟိ သတ္တဟိ? သဒ္ဓေါ ဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; သီလဝါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; ဟိရီမာ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; ဩတ္တပ္ပီ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; ဗဟုဿုတော, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; စာဂဝါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; ပညဝါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော – ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတံ ဟတ္ထကံ အာဠဝကံ ဓာရေထာ’’တိ. ဣဒမဝေါစ ဘဂဝါ. ဣဒံ ဝတွာန သုဂတော ဥဋ္ဌာယာသနာ ဝိဟာရံ ပါဝိသိ. २३. एकदा भगवान आळवी येथील अग्गाळव चेतियामध्ये विहार करत होते. तिथे भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले – “भिक्खूंनो, आळवीचा हत्थक हा सात आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त आहे असे तुम्ही समजावे. कोणत्या सात गुणांनी? भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा श्रद्धावान आहे; भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा शीलवान आहे; भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा ह्रीमान (पापाची लाज बाळगणारा) आहे; भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा ओत्तप्पी (पापाची भीती बाळगणारा) आहे; भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा बहुश्रुत आहे; भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा त्यागी आहे; भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा प्रज्ञावान आहे. भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा या सात आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त आहे असे तुम्ही समजावे.” भगवंत असे म्हणाले. हे बोलून सुगत आपल्या आसनावरून उठले आणि विहारात गेले. အထ ခေါ အညတရော ဘိက္ခု ပုဗ္ဗဏှသမယံ နိဝါသေတွာ ပတ္တစီဝရမာဒါယ ယေန ဟတ္ထကဿ အာဠဝကဿ နိဝေသနံ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ပညတ္တေ အာသနေ နိသီဒိ. အထ ခေါ ဟတ္ထကော အာဠဝကော ယေန သော ဘိက္ခု တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ တံ ဘိက္ခုံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဟတ္ထကံ အာဠဝကံ သော ဘိက္ခု ဧတဒဝေါစ – त्यानंतर, एका भिक्खूने सकाळी चीवर परिधान करून, पात्र व चीवर घेऊन जेथे हत्थक आळवकाचे घर होते, तेथे गेले; तिथे जाऊन ते मांडलेल्या आसनावर बसले. त्यानंतर हत्थक आळवक जेथे ते भिक्खू होते तेथे आला; तिथे येऊन त्याने त्या भिक्खूंना अभिवादन केले आणि तो एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या हत्थक आळवकाला ते भिक्खू असे म्हणाले – ‘‘သတ္တဟိ ခေါ တွံ, အာဝုသော, အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော. ကတမေဟိ သတ္တဟိ? ‘သဒ္ဓေါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; သီလဝါ…ပေ… ဟိရိမာ… ဩတ္တပ္ပီ… ဗဟုဿုတော… စာဂဝါ… ပညဝါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော’တိ. ဣမေဟိ ခေါ တွံ, အာဝုသော, သတ္တဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော’’တိ. ‘‘ကစ္စိတ္ထ, ဘန္တေ, န ကောစိ ဂိဟီ အဟောသိ ဩဒါတဝသနော’’တိ? ‘‘န ဟေတ္ထ, အာဝုသော, ကောစိ ဂိဟီ အဟောသိ ဩဒါတဝသနော’’တိ. ‘‘သာဓု, ဘန္တေ, ယဒေတ္ထ န ကောစိ ဂိဟီ အဟောသိ ဩဒါတဝသနော’’တိ. “मित्रा, भगवंतांनी तुला सात आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचे घोषित केले आहे. कोणत्या सात गुणांनी? ‘भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा श्रद्धावान आहे; शीलवान आहे...पे... ह्रीमान आहे... ओत्तप्पी आहे... बहुश्रुत आहे... त्यागी आहे... प्रज्ञावान आहे, भिक्खूंनो, हत्थक आळवक.’ मित्रा, भगवंतांनी तुला या सात आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचे घोषित केले आहे.” “भंते, तिथे पांढरे वस्त्र परिधान केलेला कोणताही गृहस्थ उपस्थित नव्हता ना?” “नाही मित्रा, तिथे पांढरे वस्त्र परिधान केलेला कोणताही गृहस्थ उपस्थित नव्हता.” “भंते, हे खूप चांगले झाले की तिथे पांढरे वस्त्र परिधान केलेला कोणताही गृहस्थ उपस्थित नव्हता.” အထ [Pg.54] ခေါ သော ဘိက္ခု ဟတ္ထကဿ အာဠဝကဿ နိဝေသနေ ပိဏ္ဍပါတံ ဂဟေတွာ ဥဋ္ဌာယာသနာ ပက္ကာမိ. အထ ခေါ သော ဘိက္ခု ပစ္ဆာဘတ္တံ ပိဏ္ဍပါတပဋိက္ကန္တော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ သော ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – त्यानंतर ते भिक्खू हत्थक आळवकाच्या घरातून भिक्षा ग्रहण करून आसनावरून उठून निघून गेले. त्यानंतर ते भिक्खू भोजनोत्तर भिक्षेवरून परत आल्यावर जेथे भगवान होते तेथे गेले; तिथे जाऊन त्यांनी भगवंतांना अभिवादन केले आणि ते एका बाजूला बसले. एका बाजूला बसलेले ते भिक्खू भगवंतांना असे म्हणाले – ‘‘ဣဓာဟံ, ဘန္တေ, ပုဗ္ဗဏှသမယံ နိဝါသေတွာ ပတ္တစီဝရမာဒါယ ယေန ဟတ္ထကဿ အာဠဝကဿ နိဝေသနံ တေနုပသင်္ကမိံ; ဥပသင်္ကမိတွာ ပညတ္တေ အာသနေ နိသီဒိံ. အထ ခေါ, ဘန္တေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော ယေနာဟံ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ မံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဟတ္ထကံ အာဠဝကံ ဧတဒဝစံ – ‘သတ္တဟိ ခေါ တွံ, အာဝုသော, အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော. ကတမေဟိ သတ္တဟိ? သဒ္ဓေါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; သီလဝါ…ပေ… ဟိရိမာ… ဩတ္တပ္ပီ… ဗဟုဿုတော… စာဂဝါ… ပညဝါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကောတိ. ဣမေဟိ ခေါ တွံ, အာဝုသော, သတ္တဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘဂဝတာ ဗျာကတော’တိ. “भंते, आज सकाळी मी चीवर परिधान करून, पात्र व चीवर घेऊन जेथे हत्थक आळवकाचे घर होते, तेथे गेलो; तिथे जाऊन मी मांडलेल्या आसनावर बसलो. त्यानंतर, भंते, हत्थक आळवक जेथे मी होतो तेथे आला; तिथे येऊन त्याने मला अभिवादन केले आणि तो एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या हत्थक आळवकाला, भंते, मी असे म्हणालो – ‘मित्रा, भगवंतांनी तुला सात आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचे घोषित केले आहे. कोणत्या सात गुणांनी? भिक्खूंनो, हत्थक आळवक हा श्रद्धावान आहे; शीलवान आहे...पे... ह्रीमान आहे... ओत्तप्पी आहे... बहुश्रुत आहे... त्यागी आहे... प्रज्ञावान आहे, भिक्खूंनो, हत्थक आळवक. मित्रा, भगवंतांनी तुला या सात आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त असल्याचे घोषित केले आहे.’” ‘‘ဧဝံ ဝုတ္တေ, ဘန္တေ, ဟတ္ထကော မံ ဧတဒဝေါစ – ‘ကစ္စိတ္ထ, ဘန္တေ, န ကောစိ ဂိဟီ အဟောသိ ဩဒါတဝသနော’တိ? ‘န ဟေတ္ထ, အာဝုသော, ကောစိ ဂိဟီ အဟောသိ ဩဒါတဝသနော’တိ. ‘သာဓု, ဘန္တေ, ယဒေတ္ထ န ကောစိ ဂိဟီ အဟောသိ ဩဒါတဝသနော’’’တိ. “असे म्हटल्यावर, भंते, हत्थक मला म्हणाला – ‘भंते, तिथे पांढरे वस्त्र परिधान केलेला कोणताही गृहस्थ उपस्थित नव्हता ना?’ ‘नाही मित्रा, तिथे पांढरे वस्त्र परिधान केलेला कोणताही गृहस्थ उपस्थित नव्हता.’ ‘भंते, हे खूप चांगले झाले की तिथे पांढरे वस्त्र परिधान केलेला कोणताही गृहस्थ उपस्थित नव्हता.’” ‘‘သာဓု သာဓု, ဘိက္ခု! အပ္ပိစ္ဆော သော, ဘိက္ခု, ကုလပုတ္တော. သန္တေယေဝ အတ္တနိ ကုသလဓမ္မေ န ဣစ္ဆတိ ပရေဟိ ဉာယမာနေ. တေန ဟိ တွံ, ဘိက္ခု, ဣမိနာပိ အဋ္ဌမေန အစ္ဆရိယေန အဗ္ဘုတေန ဓမ္မေန သမန္နာဂတံ ဟတ္ထကံ အာဠဝကံ ဓာရေဟိ, ယဒိဒံ အပ္ပိစ္ဆတာယာ’’တိ. တတိယံ. “साधू, साधू, भिक्खू! तो कुलपुत्र अत्यंत अल्पेच्छ (कमी इच्छा असणारा) आहे, भिक्खू. स्वतःमध्ये असलेले कुशल धर्म इतरांना कळावेत अशी त्याची इच्छा नसते. म्हणूनच, भिक्खू, तू हत्थक आळवकाला या आठव्या आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणाने म्हणजेच ‘अल्पेच्छता’ (अल्प-इच्छा असणे) या गुणाने युक्त आहे असे समजावे.” तिसरे सूत्र समाप्त. ၄. ဒုတိယဟတ္ထကသုတ္တံ ४. दुसरे हत्थक सूत्र ၂၄. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ အာဠဝိယံ ဝိဟရတိ အဂ္ဂါဠဝေ စေတိယေ. အထ ခေါ ဟတ္ထကော အာဠဝကော ပဉ္စမတ္တေဟိ ဥပါသကသတေဟိ ပရိဝုတော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဟတ္ထကံ အာဠဝကံ ဘဂဝါ [Pg.55] ဧတဒဝေါစ – ‘‘မဟတီ ခေါ တျာယံ, ဟတ္ထက, ပရိသာ. ကထံ ပန တွံ, ဟတ္ထက, ဣမံ မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဏှာသီ’’တိ? ‘‘ယာနိမာနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတာ ဒေသိတာနိ စတ္တာရိ သင်္ဂဟဝတ္ထူနိ, တေဟာဟံ ဣမံ မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဏှာမိ. အဟံ, ဘန္တေ, ယံ ဇာနာမိ – ‘အယံ ဒါနေန သင်္ဂဟေတဗ္ဗော’တိ, တံ ဒါနေန သင်္ဂဏှာမိ; ယံ ဇာနာမိ – ‘အယံ ပေယျဝဇ္ဇေန သင်္ဂဟေတဗ္ဗော’တိ, တံ ပေယျဝဇ္ဇေန သင်္ဂဏှာမိ; ယံ ဇာနာမိ – ‘အယံ အတ္ထစရိယာယ သင်္ဂဟေတဗ္ဗော’တိ, တံ အတ္ထစရိယာယ သင်္ဂဏှာမိ; ယံ ဇာနာမိ – ‘အယံ သမာနတ္တတာယ သင်္ဂဟေတဗ္ဗော’တိ, တံ သမာနတ္တတာယ သင်္ဂဏှာမိ. သံဝိဇ္ဇန္တိ ခေါ ပန မေ, ဘန္တေ, ကုလေ ဘောဂါ. ဒလိဒ္ဒဿ ခေါ နော တထာ သောတဗ္ဗံ မညန္တီ’’တိ. ‘‘သာဓု သာဓု, ဟတ္ထက! ယောနိ ခေါ တျာယံ, ဟတ္ထက, မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဟေတုံ. ယေ ဟိ ကေစိ, ဟတ္ထက, အတီတမဒ္ဓါနံ မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဟေသုံ, သဗ္ဗေ တေ ဣမေဟေဝ စတူဟိ သင်္ဂဟဝတ္ထူဟိ မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဟေသုံ. ယေပိ ဟိ ကေစိ, ဟတ္ထက, အနာဂတမဒ္ဓါနံ မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဏှိဿန္တိ, သဗ္ဗေ တေ ဣမေဟေဝ စတူဟိ သင်္ဂဟဝတ္ထူဟိ မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဏှိဿန္တိ. ယေပိ ဟိ ကေစိ, ဟတ္ထက, ဧတရဟိ မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဏှန္တိ, သဗ္ဗေ တေ ဣမေဟေဝ စတူဟိ သင်္ဂဟဝတ္ထူဟိ မဟတိံ ပရိသံ သင်္ဂဏှန္တီ’’တိ. २४. एकदा भगवान आळवी येथील अग्गाळव चेतियामध्ये विहार करत होते. तेव्हा हत्थक आळवक सुमारे पाचशे उपासकांसह जेथे भगवान होते तेथे आला; तिथे येऊन त्याने भगवंतांना अभिवादन केले आणि तो एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या हत्थक आळवकाला भगवान असे म्हणाले – “हत्थक, तुझा हा परिवार खरोखर खूप मोठा आहे. हत्थक, तू या मोठ्या परिवाराचा संग्रह कसा करतोस?” “भंते, भगवंतांनी जी चार संग्रहवस्तू उपदेशिली आहेत, त्यांच्याद्वारे मी या मोठ्या परिवाराचा संग्रह करतो. भंते, मला जेव्हा समजते की – ‘या व्यक्तीचा दानाने संग्रह केला पाहिजे’, तेव्हा मी त्याचा दानाने संग्रह करतो; जेव्हा मला समजते की – ‘या व्यक्तीचा प्रियवचनाने संग्रह केला पाहिजे’, तेव्हा मी त्याचा प्रियवचनाने संग्रह करतो; जेव्हा मला समजते की – ‘या व्यक्तीचा अर्थचर्येने संग्रह केला पाहिजे’, तेव्हा मी त्याचा अर्थचर्येने संग्रह करतो; जेव्हा मला समजते की – ‘या व्यक्तीचा समानशीलतेने संग्रह केला पाहिजे’, तेव्हा मी त्याचा समानशीलतेने संग्रह करतो. भंते, माझ्या कुळात संपत्ती उपलब्ध आहे. लोक गरिबाचे बोलणे ऐकण्यासारखे आहे असे मानत नाहीत (पण माझे ऐकतात).” “साधू, साधू, हत्थक! हत्थक, मोठ्या परिवाराचा संग्रह करण्याचा हाच योग्य मार्ग आहे. हत्थक, भूतकाळात ज्यांनी कोणी मोठ्या परिवाराचा संग्रह केला, त्या सर्वांनी याच चार संग्रहवस्तूंद्वारे मोठ्या परिवाराचा संग्रह केला. हत्थक, भविष्यकाळात जे कोणी मोठ्या परिवाराचा संग्रह करतील, ते सर्व याच चार संग्रहवस्तूंद्वारे मोठ्या परिवाराचा संग्रह करतील. हत्थक, वर्तमानकाळात जे कोणी मोठ्या परिवाराचा संग्रह करत आहेत, ते सर्व याच चार संग्रहवस्तूंद्वारे मोठ्या परिवाराचा संग्रह करत आहेत.” အထ ခေါ ဟတ္ထကော အာဠဝကော ဘဂဝတာ ဓမ္မိယာ ကထာယ သန္ဒဿိတော သမာဒပိတော သမုတ္တေဇိတော သမ္ပဟံသိတော ဥဋ္ဌာယာသနာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ပဒက္ခိဏံ ကတွာ ပက္ကာမိ. အထ ခေါ ဘဂဝါ အစိရပက္ကန္တေ ဟတ္ထကေ အာဠဝကေ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတံ ဟတ္ထကံ အာဠဝကံ ဓာရေထ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? သဒ္ဓေါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; သီလဝါ, ဘိက္ခဝေ…ပေ… ဟိရီမာ… ဩတ္တပ္ပီ… ဗဟုဿုတော… စာဂဝါ… ပညဝါ, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော; အပ္ပိစ္ဆော, ဘိက္ခဝေ, ဟတ္ထကော အာဠဝကော. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ အစ္ဆရိယေဟိ အဗ္ဘုတေဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတံ ဟတ္ထကံ အာဠဝကံ ဓာရေထာ’’တိ. စတုတ္ထံ. तेव्हा आळवीचा हत्थक भगवंतांद्वारे धम्म उपदेशाने प्रेरित, उत्साहित, उत्तेजित आणि प्रफुल्लित केला गेल्यानंतर, आपल्या आसनावरून उठला आणि भगवंतांना अभिवादन करून, प्रदक्षिणा करून निघून गेला. त्यानंतर, आळवीचा हत्थक निघून गेल्यावर काही वेळातच भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले – "भिक्खूंनो, आळवीच्या हत्थकला आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त समजावे. कोणत्या आठ गुणांनी? भिक्खूंनो, आळवीचा हत्थक श्रद्धावान आहे; भिक्खूंनो, तो शीलवान आहे... पे... लज्जावान (ह्रीमान) आहे... भय बाळगणारा (ओत्तप्पी) आहे... बहुश्रुत आहे... त्यागी (दानशूर) आहे... भिक्खूंनो, आळवीचा हत्थक प्रज्ञावान आहे; भिक्खूंनो, आळवीचा हत्थक अल्पेच्छ (कमी इच्छा असणारा) आहे. भिक्खूंनो, आळवीच्या हत्थकला या आठ आश्चर्यकारक आणि अद्भुत गुणांनी युक्त समजावे." चौथे (सुत्त समाप्त). ၅. မဟာနာမသုတ္တံ ५. महानामसुत्त ၂၅. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သက္ကေသု ဝိဟရတိ ကပိလဝတ္ထုသ္မိံ နိဂြောဓာရာမေ. အထ ခေါ မဟာနာမော သက္ကော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ [Pg.56] ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ မဟာနာမော သက္ကော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ကိတ္တာဝတာ နု ခေါ, ဘန္တေ, ဥပါသကော ဟောတီ’’တိ? ‘‘ယတော ခေါ, မဟာနာမ, ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ, ဓမ္မံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ, သံဃံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ; ဧတ္တာဝတာ ခေါ, မဟာနာမ, ဥပါသကော ဟောတီ’’တိ. २५. एकदा भगवान शाक्य देशात कपिलवस्तू येथील निग्रोधारामात विहार करत होते. तेव्हा महानाम शाक्य जेथे भगवान होते तेथे गेला; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेला महानाम शाक्य भगवंतांना म्हणाला – "भन्ते, किती कारणांनी मनुष्य उपासक होतो?" "महानाम, जेव्हा मनुष्य बुद्धाला शरण जातो, धम्माला शरण जातो, संघाला शरण जातो; महानाम, एवढ्या कारणाने मनुष्य उपासक होतो." ‘‘ကိတ္တာဝတာ ပန, ဘန္တေ, ဥပါသကော သီလဝါ ဟောတီ’’တိ? ‘‘ယတော ခေါ, မဟာနာမ, ဥပါသကော ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ, အဒိန္နာဒါနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ, ကာမေသုမိစ္ဆာစာရာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ, မုသာဝါဒါ ပဋိဝိရတော ဟောတိ, သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ; ဧတ္တာဝတာ ခေါ, မဟာနာမ, ဥပါသကော သီလဝါ ဟောတီ’’တိ. "पण भन्ते, किती कारणांनी उपासक शीलवान होतो?" "महानाम, जेव्हा उपासक प्राणातिपातापासून (जीवहिंसेपासून) अलिप्त राहतो, अदित्नादानापासून (चोरी करण्यापासून) अलिप्त राहतो, कामेसू मिच्छाचारापासून (व्यभिचारापासून) अलिप्त राहतो, मुसावादापासून (असत्य बोलण्यापासून) अलिप्त राहतो, सुरा-मेरय-मज्ज-पमादट्ठानापासून (मद्य व मादक पदार्थांच्या सेवनापासून) अलिप्त राहतो; महानाम, एवढ्या कारणाने उपासक शीलवान होतो." ‘‘ကိတ္တာဝတာ ပန, ဘန္တေ, ဥပါသကော အတ္တဟိတာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, နော ပရဟိတာယာ’’တိ? ‘‘ယတော ခေါ, မဟာနာမ, ဥပါသကော အတ္တနာဝ သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ, နော ပရံ သဒ္ဓါသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ ; အတ္တနာဝ သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ, နော ပရံ သီလသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာဝ စာဂသမ္ပန္နော ဟောတိ, နော ပရံ စာဂသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာဝ ဘိက္ခူနံ ဒဿနကာမော ဟောတိ, နော ပရံ ဘိက္ခူနံ ဒဿနေ သမာဒပေတိ; အတ္တနာဝ သဒ္ဓမ္မံ သောတုကာမော ဟောတိ, နော ပရံ သဒ္ဓမ္မဿဝနေ သမာဒပေတိ; အတ္တနာဝ သုတာနံ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ, နော ပရံ ဓမ္မဓာရဏာယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာဝ သုတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ, နော ပရံ အတ္ထူပပရိက္ခာယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာဝ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ, နော ပရံ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပတ္တိယာ သမာဒပေတိ. ဧတ္တာဝတာ ခေါ, မဟာနာမ, ဥပါသကော အတ္တဟိတာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, နော ပရဟိတာယာ’’တိ. "पण भन्ते, किती कारणांनी उपासक स्वतःच्या कल्याणासाठी आचरण करणारा असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही?" "महानाम, जेव्हा उपासक स्वतः श्रद्धासंपन्न असतो, पण इतरांना श्रद्धासंपन्न होण्यासाठी प्रवृत्त करत नाही; स्वतः शीलसंपन्न असतो, पण इतरांना शीलसंपन्न होण्यासाठी प्रवृत्त करत नाही; स्वतः त्यागसंपन्न (दानशूर) असतो, पण इतरांना त्यागसंपन्न होण्यासाठी प्रवृत्त करत नाही; स्वतः भिक्खूंचे दर्शन घेण्याची इच्छा बाळगतो, पण इतरांना भिक्खूंच्या दर्शनासाठी प्रवृत्त करत नाही; स्वतः सद्धम्म ऐकण्याची इच्छा बाळगतो, पण इतरांना सद्धम्म ऐकण्यासाठी प्रवृत्त करत नाही; स्वतः ऐकलेला धम्म स्मरणात ठेवणारा असतो, पण इतरांना धम्म स्मरणात ठेवण्यासाठी प्रवृत्त करत नाही; स्वतः ऐकलेल्या धम्माच्या अर्थाची परीक्षा (चिंतन) करणारा असतो, पण इतरांना अर्थाची परीक्षा करण्यासाठी प्रवृत्त करत नाही; स्वतः अर्थ समजून घेऊन आणि धम्म समजून घेऊन धम्मानुकूल आचरण (धम्मानुधम्मपटिपन्न) करतो, पण इतरांना धम्मानुकूल आचरणासाठी प्रवृत्त करत नाही. महानाम, एवढ्या कारणाने उपासक स्वतःच्या कल्याणासाठी आचरण करणारा असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही." ‘‘ကိတ္တာဝတာ ပန, ဘန္တေ, ဥပါသကော အတ္တဟိတာယ စ ပဋိပန္နော ဟောတိ ပရဟိတာယ စာ’’တိ? ‘‘ယတော ခေါ, မဟာနာမ, ဥပါသကော အတ္တနာ စ သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ, ပရဉ္စ သဒ္ဓါသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ, ပရဉ္စ သီလသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ စာဂသမ္ပန္နော ဟောတိ, ပရဉ္စ စာဂသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ ဘိက္ခူနံ ဒဿနကာမော ဟောတိ, ပရဉ္စ ဘိက္ခူနံ ဒဿနေ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ သဒ္ဓမ္မံ [Pg.57] သောတုကာမော ဟောတိ, ပရဉ္စ သဒ္ဓမ္မဿဝနေ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ သုတာနံ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ, ပရဉ္စ ဓမ္မဓာရဏာယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ သုတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ, ပရဉ္စ အတ္ထူပပရိက္ခာယ သမာဒပေတိ, အတ္တနာ စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ, ပရဉ္စ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပတ္တိယာ သမာဒပေတိ. ဧတ္တာဝတာ ခေါ, မဟာနာမ, ဥပါသကော အတ္တဟိတာယ စ ပဋိပန္နော ဟောတိ ပရဟိတာယ စာ’’တိ. ပဉ္စမံ. "पण भन्ते, किती कारणांनी उपासक स्वतःच्या कल्याणासाठी आणि इतरांच्या कल्याणासाठीही आचरण करणारा असतो?" "महानाम, जेव्हा उपासक स्वतः श्रद्धासंपन्न असतो आणि इतरांनाही श्रद्धासंपन्न होण्यासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः शीलसंपन्न असतो आणि इतरांनाही शीलसंपन्न होण्यासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः त्यागसंपन्न असतो आणि इतरांनाही त्यागसंपन्न होण्यासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः भिक्खूंचे दर्शन घेण्याची इच्छा बाळगतो आणि इतरांनाही भिक्खूंच्या दर्शनासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः सद्धम्म ऐकण्याची इच्छा बाळगतो आणि इतरांनाही सद्धम्म ऐकण्यासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः ऐकलेला धम्म स्मरणात ठेवणारा असतो आणि इतरांनाही धम्म स्मरणात ठेवण्यासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः ऐकलेल्या धम्माच्या अर्थाची परीक्षा करणारा असतो आणि इतरांनाही अर्थाची परीक्षा करण्यासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः अर्थ समजून घेऊन आणि धम्म समजून घेऊन धम्मानुकूल आचरण करतो आणि इतरांनाही धम्मानुकूल आचरणासाठी प्रवृत्त करतो. महानाम, एवढ्या कारणाने उपासक स्वतःच्या कल्याणासाठी आणि इतरांच्या कल्याणासाठीही आचरण करणारा असतो." पाचवे (सुत्त समाप्त). ၆. ဇီဝကသုတ္တံ ६. जीवकसुत्त ၂၆. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ရာဇဂဟေ ဝိဟရတိ ဇီဝကမ္ဗဝနေ. အထ ခေါ ဇီဝကော ကောမာရဘစ္စော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ ဇီဝကော ကောမာရဘစ္စော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ကိတ္တာဝတာ နု ခေါ, ဘန္တေ, ဥပါသကော ဟောတီ’’တိ? ‘‘ယတော ခေါ, ဇီဝက, ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ, ဓမ္မံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ, သံဃံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ; ဧတ္တာဝတာ ခေါ ဇီဝက, ဥပါသကော ဟောတီ’’တိ. २६. एकदा भगवान राजगृहात जीवकाच्या आंबराईत (जीवकम्बवनात) विहार करत होते. तेव्हा जीवक कौमारभृत्य जेथे भगवान होते तेथे गेला; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेला जीवक कौमारभृत्य भगवंतांना म्हणाला – "भन्ते, किती कारणांनी मनुष्य उपासक होतो?" "जीवक, जेव्हा मनुष्य बुद्धाला शरण जातो, धम्माला शरण जातो, संघाला शरण जातो; जीवक, एवढ्या कारणाने मनुष्य उपासक होतो." ‘‘ကိတ္တာဝတာ ပန, ဘန္တေ, ဥပါသကော သီလဝါ ဟောတီ’’တိ? ‘‘ယတော ခေါ, ဇီဝက, ဥပါသကော ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ…ပေ… သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ; ဧတ္တာဝတာ ခေါ, ဇီဝက, ဥပါသကော သီလဝါ ဟောတီ’’တိ. "पण भन्ते, किती कारणांनी उपासक शीलवान होतो?" "जीवक, जेव्हा उपासक प्राणातिपातापासून अलिप्त राहतो... पे... सुरा-मेरय-मज्ज-पमादट्ठानापासून अलिप्त राहतो; जीवक, एवढ्या कारणाने उपासक शीलवान होतो." ‘‘ကိတ္တာဝတာ ပန, ဘန္တေ, ဥပါသကော အတ္တဟိတာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, နော ပရဟိတာယာ’’တိ? ‘‘ယတော ခေါ, ဇီဝက, ဥပါသကော အတ္တနာဝ သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ, နော ပရံ သဒ္ဓါသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ…ပေ… အတ္တနာဝ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ, နော ပရံ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပတ္တိယာ သမာဒပေတိ. ဧတ္တာဝတာ ခေါ, ဇီဝက, ဥပါသကော အတ္တဟိတာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, နော ပရဟိတာယာ’’တိ. "पण भन्ते, किती कारणांनी उपासक स्वतःच्या कल्याणासाठी आचरण करणारा असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही?" "जीवक, जेव्हा उपासक स्वतः श्रद्धासंपन्न असतो, पण इतरांना श्रद्धासंपन्न होण्यासाठी प्रवृत्त करत नाही... पे... स्वतः अर्थ समजून घेऊन आणि धम्म समजून घेऊन धम्मानुकूल आचरण करतो, पण इतरांना धम्मानुकूल आचरणासाठी प्रवृत्त करत नाही. जीवक, एवढ्या कारणाने उपासक स्वतःच्या कल्याणासाठी आचरण करणारा असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही." ‘‘ကိတ္တာဝတာ ပန, ဘန္တေ, ဥပါသကော အတ္တဟိတာယ စ ပဋိပန္နော ဟောတိ ပရဟိတာယ စာ’’တိ? ‘‘ယတော ခေါ, ဇီဝက, ဥပါသကော အတ္တနာ စ သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ, ပရဉ္စ သဒ္ဓါသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ, ပရဉ္စ သီလသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ စာဂသမ္ပန္နော [Pg.58] ဟောတိ, ပရဉ္စ စာဂသမ္ပဒါယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ ဘိက္ခူနံ ဒဿနကာမော ဟောတိ, ပရဉ္စ ဘိက္ခူနံ ဒဿနေ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ သဒ္ဓမ္မံ သောတုကာမော ဟောတိ, ပရဉ္စ သဒ္ဓမ္မဿဝနေ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ သုတာနံ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ, ပရဉ္စ ဓမ္မဓာရဏာယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ သုတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ, ပရဉ္စ အတ္ထူပပရိက္ခာယ သမာဒပေတိ; အတ္တနာ စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ, ပရဉ္စ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပတ္တိယာ သမာဒပေတိ. ဧတ္တာဝတာ ခေါ, ဇီဝက, ဥပါသကော အတ္တဟိတာယ စ ပဋိပန္နော ဟောတိ ပရဟိတာယ စာ’’တိ. ဆဋ္ဌံ. “भन्ते, किती प्रमाणात उपासक स्वतःच्या कल्याणासाठी आणि इतरांच्या कल्याणासाठीही प्रतिपन्न (प्रवृत्त) झालेला असतो?” “जीवक, जेव्हा उपासक स्वतः श्रद्धायुक्त असतो आणि इतरांनाही श्रद्धायुक्त होण्यास प्रवृत्त करतो; स्वतः शीलसंपन्न असतो आणि इतरांनाही शीलसंपन्न होण्यास प्रवृत्त करतो; स्वतः त्यागसंपन्न असतो आणि इतरांनाही त्यागसंपन्न होण्यास प्रवृत्त करतो; स्वतः भिक्खूंचे दर्शन घेण्याची इच्छा बाळगतो आणि इतरांनाही भिक्खूंच्या दर्शनासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः सद्धम्म ऐकण्याची इच्छा बाळगतो आणि इतरांनाही सद्धम्म श्रवणासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः ऐकलेला धम्म धारण करण्याच्या स्वभावाचा असतो आणि इतरांनाही धम्म धारण करण्यासाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः ऐकलेल्या धम्माच्या अर्थाची परीक्षा करणारा असतो आणि इतरांनाही अर्थाच्या परीक्षेसाठी प्रवृत्त करतो; स्वतः अर्थ जाणून आणि धम्म जाणून धम्मानुकूल धम्माचे आचरण करणारा असतो आणि इतरांनाही धम्मानुकूल धम्माच्या आचरणासाठी प्रवृत्त करतो. जीवक, एवढ्या कारणांनी उपासक स्वतःच्या कल्याणासाठी आणि इतरांच्या कल्याणासाठीही प्रतिपन्न झालेला असतो.” सहावे. ၇. ပဌမဗလသုတ္တံ ७. प्रथम बल सुत्त ၂၇. ‘‘အဋ္ဌိမာနိ, ဘိက္ခဝေ, ဗလာနိ. ကတမာနိ အဋ္ဌ? ရုဏ္ဏဗလာ, ဘိက္ခဝေ, ဒါရကာ, ကောဓဗလာ မာတုဂါမာ, အာဝုဓဗလာ စောရာ, ဣဿရိယဗလာ ရာဇာနော, ဥဇ္ဈတ္တိဗလာ ဗာလာ, နိဇ္ဈတ္တိဗလာ ပဏ္ဍိတာ, ပဋိသင်္ခါနဗလာ ဗဟုဿုတာ, ခန္တိဗလာ သမဏဗြာဟ္မဏာ – ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဗလာနီ’’တိ. သတ္တမံ. २७. “भिक्खूहो, ही आठ बले आहेत. कोणती आठ? भिक्खूहो, बालकांचे बल रडणे आहे; स्त्रियांचे बल क्रोध आहे; चोरांचे बल शस्त्र आहे; राजांचे बल ऐश्वर्य (सत्ता) आहे; मूर्खांचे बल दोषारोप करणे आहे; पंडितांचे बल तथ्य शोधणे आहे; बहुश्रुतांचे बल चिंतन करणे आहे; आणि श्रमण-ब्राह्मणांचे बल क्षमा (सहनशीलता) आहे. भिक्खूहो, हीच ती आठ बले आहेत.” सातवे. ၈. ဒုတိယဗလသုတ္တံ ८. द्वितीय बल सुत्त ၂၈. အထ ခေါ အာယသ္မာ သာရိပုတ္တော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ အာယသ္မန္တံ သာရိပုတ္တံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ကတိ နု ခေါ, သာရိပုတ္တ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဗလာနိ, ယေဟိ ဗလေဟိ သမန္နာဂတော ခီဏာသဝေါ ဘိက္ခု အာသဝါနံ ခယံ ပဋိဇာနာတိ – ‘ခီဏာ မေ အာသဝါ’’’တိ? ‘‘အဋ္ဌ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဗလာနိ, ယေဟိ ဗလေဟိ သမန္နာဂတော ခီဏာသဝေါ ဘိက္ခု အာသဝါနံ ခယံ ပဋိဇာနာတိ – ‘ခီဏာ မေ အာသဝါ’’’တိ. २८. तेव्हा आयुष्यमान सारिपुत्त जेथे भगवान होते तेथे गेले; जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसले. एका बाजूला बसलेल्या आयुष्यमान सारिपुत्तांना भगवान म्हणाले – “सारिपुत्ता, आसव नष्ट झालेल्या (क्षीणासव) भिक्खूची किती बले आहेत, ज्या बलांनी युक्त होऊन क्षीणासव भिक्खू आपल्या आसवांचा क्षय झाल्याचा दावा करतो की – ‘माझे आसव नष्ट झाले आहेत’?” “भन्ते, क्षीणासव भिक्खूची आठ बले आहेत, ज्या बलांनी युक्त होऊन क्षीणासव भिक्खू आपल्या आसवांचा क्षय झाल्याचा दावा करतो की – ‘माझे आसव नष्ट झाले आहेत’.” ‘‘ကတမာနိ အဋ္ဌ? ဣဓ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော အနိစ္စတော သဗ္ဗေ သင်္ခါရာ ယထာဘူတံ သမ္မပ္ပညာယ သုဒိဋ္ဌာ ဟောန္တိ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော အနိစ္စတော သဗ္ဗေ သင်္ခါရာ ယထာဘူတံ သမ္မပ္ပညာယ သုဒိဋ္ဌာ ဟောန္တိ, ဣဒမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဗလံ ဟောတိ, ယံ ဗလံ အာဂမ္မ ခီဏာသဝေါ ဘိက္ခု အာသဝါနံ ခယံ ပဋိဇာနာတိ – ‘ခီဏာ မေ အာသဝါ’’’တိ. “ती आठ कोणती? भन्ते, येथे क्षीणासव भिक्खूने सर्व संस्कार अनित्य आहेत, असे यथार्थपणे सम्यक प्रज्ञेने स्पष्ट पाहिलेले असते. भन्ते, क्षीणासव भिक्खूने सर्व संस्कार अनित्य आहेत, असे यथार्थपणे सम्यक प्रज्ञेने स्पष्ट पाहिलेले असणे, हे देखील क्षीणासव भिक्खूचे एक बल आहे, ज्या बलाचा आश्रय घेऊन क्षीणासव भिक्खू आपल्या आसवांचा क्षय झाल्याचा दावा करतो की – ‘माझे आसव नष्ट झाले आहेत’.” ‘‘ပုန [Pg.59] စပရံ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော အင်္ဂါရကာသူပမာ ကာမာ ယထာဘူတံ သမ္မပ္ပညာယ သုဒိဋ္ဌာ ဟောန္တိ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော အင်္ဂါရကာသူပမာ ကာမာ ယထာဘူတံ သမ္မပ္ပညာယ သုဒိဋ္ဌာ ဟောန္တိ, ဣဒမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဗလံ ဟောတိ, ယံ ဗလံ အာဂမ္မ ခီဏာသဝေါ ဘိက္ခု အာသဝါနံ ခယံ ပဋိဇာနာတိ – ‘ခီဏာ မေ အာသဝါ’’’တိ. “पुन्हा दुसरे असे की, भन्ते, क्षीणासव भिक्खूने कामभोग हे धगधगत्या कोळशाच्या खाणीसारखे आहेत, असे यथार्थपणे सम्यक प्रज्ञेने स्पष्ट पाहिलेले असते. भन्ते, क्षीणासव भिक्खूने कामभोग हे धगधगत्या कोळशाच्या खाणीसारखे आहेत, असे यथार्थपणे सम्यक प्रज्ञेने स्पष्ट पाहिलेले असणे, हे देखील क्षीणासव भिक्खूचे एक बल आहे, ज्या बलाचा आश्रय घेऊन क्षीणासव भिक्खू आपल्या आसवांचा क्षय झाल्याचा दावा करतो की – ‘माझे आसव नष्ट झाले आहेत’.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဝိဝေကနိန္နံ စိတ္တံ ဟောတိ ဝိဝေကပေါဏံ ဝိဝေကပဗ္ဘာရံ ဝိဝေကဋ္ဌံ နေက္ခမ္မာဘိရတံ ဗျန္တိဘူတံ သဗ္ဗသော အာသဝဋ္ဌာနိယေဟိ ဓမ္မေဟိ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဝိဝေကနိန္နံ စိတ္တံ ဟောတိ ဝိဝေကပေါဏံ ဝိဝေကပဗ္ဘာရံ ဝိဝေကဋ္ဌံ နေက္ခမ္မာဘိရတံ ဗျန္တိဘူတံ သဗ္ဗသော အာသဝဋ္ဌာနိယေဟိ ဓမ္မေဟိ, ဣဒမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဗလံ ဟောတိ, ယံ ဗလံ အာဂမ္မ ခီဏာသဝေါ ဘိက္ခု အာသဝါနံ ခယံ ပဋိဇာနာတိ – ‘ခီဏာ မေ အာသဝါ’’’တိ. “पुन्हा दुसरे असे की, भन्ते, क्षीणासव भिक्खूचे चित्त विवेकाकडे (निर्वाणाकडे) झुकलेले, विवेकाकडे प्रवृत्त झालेले, विवेकाभिमुख झालेले, विवेकातच स्थित असलेले, नैष्क्रम्यात रममाण असणारे आणि आसवांना कारणीभूत असणाऱ्या सर्व गोष्टींपासून पूर्णपणे अलिप्त झालेले असते. भन्ते, क्षीणासव भिक्खूचे चित्त विवेकाकडे झुकलेले, विवेकाकडे प्रवृत्त झालेले, विवेकाभिमुख झालेले, विवेकातच स्थित असलेले, नैष्क्रम्यात रममाण असणारे आणि आसवांना कारणीभूत असणाऱ्या सर्व गोष्टींपासून पूर्णपणे अलिप्त झालेले असणे, हे देखील क्षीणासव भिक्खूचे एक बल आहे, ज्या बलाचा आश्रय घेऊन क्षीणासव भिक्खू आपल्या आसवांचा क्षय झाल्याचा दावा करतो की – ‘माझे आसव नष्ट झाले आहेत’.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော စတ္တာရော သတိပဋ္ဌာနာ ဘာဝိတာ ဟောန္တိ သုဘာဝိတာ. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော စတ္တာရော သတိပဋ္ဌာနာ ဘာဝိတာ ဟောန္တိ သုဘာဝိတာ, ဣဒမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဗလံ ဟောတိ, ယံ ဗလံ အာဂမ္မ ခီဏာသဝေါ ဘိက္ခု အာသဝါနံ ခယံ ပဋိဇာနာတိ – ‘ခီဏာ မေ အာသဝါ’’’တိ. “पुन्हा दुसरे असे की, भन्ते, क्षीणासव भिक्खूने चार स्मृतिप्रस्थान भावनायुक्त आणि सुभावनायुक्त (चांगल्या प्रकारे विकसित) केलेले असतात. भन्ते, क्षीणासव भिक्खूने चार स्मृतिप्रस्थान भावनायुक्त आणि सुभावनायुक्त केलेले असणे, हे देखील क्षीणासव भिक्खूचे एक बल आहे, ज्या बलाचा आश्रय घेऊन क्षीणासव भिक्खू आपल्या आसवांचा क्षय झाल्याचा दावा करतो की – ‘माझे आसव नष्ट झाले आहेत’.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော စတ္တာရော ဣဒ္ဓိပါဒါ ဘာဝိတာ ဟောန္တိ သုဘာဝိတာ…ပေ… ပဉ္စိန္ဒြိယာနိ ဘာဝိတာနိ ဟောန္တိ သုဘာဝိတာနိ…ပေ… သတ္တ ဗောဇ္ဈင်္ဂါ ဘာဝိတာ ဟောန္တိ သုဘာဝိတာ…ပေ… အရိယော အဋ္ဌင်္ဂိကော မဂ္ဂေါ ဘာဝိတော ဟောတိ သုဘာဝိတော. ယမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော အရိယော အဋ္ဌင်္ဂိကော မဂ္ဂေါ ဘာဝိတော ဟောတိ သုဘာဝိတော, ဣဒမ္ပိ, ဘန္တေ, ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဗလံ ဟောတိ, ယံ ဗလံ အာဂမ္မ ခီဏာသဝေါ ဘိက္ခု အာသဝါနံ ခယံ ပဋိဇာနာတိ – ‘ခီဏာ မေ အာသဝါ’’’တိ. “पुन्हा दुसरे असे की, भन्ते, क्षीणासव भिक्खूने चार ऋद्धिपाद भावनायुक्त आणि सुभावनायुक्त केलेले असतात... पे... पाच इंद्रिये भावनायुक्त आणि सुभावनायुक्त केलेली असतात... पे... सात बोध्यंग भावनायुक्त आणि सुभावनायुक्त केलेले असतात... पे... आर्य अष्टांगिक मार्ग भावनायुक्त आणि सुभावनायुक्त केलेला असतो. भन्ते, क्षीणासव भिक्खूने आर्य अष्टांगिक मार्ग भावनायुक्त आणि सुभावनायुक्त केलेला असणे, हे देखील क्षीणासव भिक्खूचे एक बल आहे, ज्या बलाचा आश्रय घेऊन क्षीणासव भिक्खू आपल्या आसवांचा क्षय झाल्याचा दावा करतो की – ‘माझे आसव नष्ट झाले आहेत’.” ‘‘ဣမာနိ ခေါ, ဘန္တေ, အဋ္ဌ ခီဏာသဝဿ ဘိက္ခုနော ဗလာနိ, ယေဟိ ဗလေဟိ သမန္နာဂတော ခီဏာသဝေါ ဘိက္ခု အာသဝါနံ ခယံ ပဋိဇာနာတိ – ‘ခီဏာ မေ အာသဝါ’’’တိ. အဋ္ဌမံ. “भन्ते, हीच ती क्षीणासव भिक्खूची आठ बले आहेत, ज्या बलांनी युक्त होऊन क्षीणासव भिक्खू आपल्या आसवांचा क्षय झाल्याचा दावा करतो की – ‘माझे आसव नष्ट झाले आहेत’.” आठवे. ၉. အက္ခဏသုတ္တံ ९. अक्षण सुत्त ၂၉. ‘‘‘ခဏကိစ္စော [Pg.60] လောကော, ခဏကိစ္စော လောကော’တိ, ဘိက္ခဝေ, အဿုတဝါ ပုထုဇ္ဇနော ဘာသတိ, နော စ ခေါ သော ဇာနာတိ ခဏံ ဝါ အက္ခဏံ ဝါ. အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, အက္ခဏာ အသမယာ ဗြဟ္မစရိယဝါသာယ. ကတမေ အဋ္ဌ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတော စ လောကေ ဥပ္ပန္နော ဟောတိ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဝိဇ္ဇာစရဏသမ္ပန္နော သုဂတော လောကဝိဒူ အနုတ္တရော ပုရိသဒမ္မသာရထိ သတ္ထာ ဒေဝမနုဿာနံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ, ဓမ္မော စ ဒေသိယတိ ဩပသမိကော ပရိနိဗ္ဗာနိကော သမ္ဗောဓဂါမီ သုဂတပ္ပဝေဒိတော; အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော နိရယံ ဥပပန္နော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ပဌမော အက္ခဏော အသမယော ဗြဟ္မစရိယဝါသာယ. २९. “भिक्खूहो, ‘जगाला सुवर्णसंधी लाभली आहे, जगाला सुवर्णसंधी लाभली आहे’ असे अश्रुतवान पृथग्जन बोलतात, परंतु त्यांना संधी (क्षण) काय आहे आणि असंधी (अक्षण) काय आहे, हे खरोखर माहीत नसते. भिक्खूहो, ब्रह्मचर्य आचरण्यासाठी हे आठ अक्षण (अयोग्य काळ) आणि असमय (अयोग्य प्रसंग) आहेत. कोणते आठ? भिक्खूहो, येथे जगात तथागत उत्पन्न झालेले असतात – जे अर्हत, सम्यक सम्बुद्ध, विद्याचरणसंपन्न, सुगत, लोकविदू, अनुत्तर पुरुषदम्यसारथी, देव आणि मनुष्यांचे शास्ता, बुद्ध आणि भगवंत आहेत; आणि शांतता देणारा, परिनिर्वाण देणारा, संबोधीकडे नेणारा, सुगतांनी उपदेशिलेला धम्म देखील देशिला जात असतो; परंतु हा मनुष्य नरकात उत्पन्न झालेला असतो. भिक्खूहो, ब्रह्मचर्य आचरण्यासाठी हा पहिला अक्षण आणि असमय आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတော စ လောကေ ဥပ္ပန္နော ဟောတိ…ပေ… သတ္ထာ ဒေဝမနုဿာနံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ, ဓမ္မော စ ဒေသိယတိ ဩပသမိကော ပရိနိဗ္ဗာနိကော သမ္ဗောဓဂါမီ သုဂတပ္ပဝေဒိတော; အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော တိရစ္ဆာနယောနိံ ဥပပန္နော ဟောတိ…ပေ…. “पुन्हा दुसरे असे की, भिक्खूहो, जगात तथागत उत्पन्न झालेले असतात... पे... देव आणि मनुष्यांचे शास्ता, बुद्ध आणि भगवंत आहेत; आणि शांतता देणारा, परिनिर्वाण देणारा, संबोधीकडे नेणारा, सुगतांनी उपदेशिलेला धम्म देखील देशिला जात असतो; परंतु हा मनुष्य तिर्यक योनीत (प्राणी योनीत) उत्पन्न झालेला असतो... पे...” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ…ပေ… အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော ပေတ္တိဝိသယံ ဥပပန္နော ဟောတိ…ပေ…. "पुन्हा आणखी, भिक्षूहो! ... हा व्यक्ती प्रेतलोकात (पेत्तिविसय) उत्पन्न झालेला असतो. ..." ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ…ပေ… အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော အညတရံ ဒီဃာယုကံ ဒေဝနိကာယံ ဥပပန္နော ဟောတိ…ပေ…. "पुन्हा आणखी, भिक्षूहो! ... हा व्यक्ती दीर्घायुषी देवलोकातील (असंज्ञी देवलोकात) उत्पन्न झालेला असतो. ..." ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ…ပေ… အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော ပစ္စန္တိမေသု ဇနပဒေသု ပစ္စာဇာတော ဟောတိ, သော စ ဟောတိ အဝိညာတာရေသု မိလက္ခေသု, ယတ္ထ နတ္ထိ ဂတိ ဘိက္ခူနံ ဘိက္ခုနီနံ ဥပါသကာနံ ဥပါသိကာနံ…ပေ… ပဉ္စမော အက္ခဏော အသမယော ဗြဟ္မစရိယဝါသာယ. "पुन्हा आणखी, भिक्षूहो! ... हा व्यक्ती सीमावर्ती (प्रत्यंत) जनपदांमध्ये जन्माला आलेला असतो, आणि तो अज्ञानी म्लेंच्छांमध्ये (रानटी लोकांमध्ये) असतो, जेथे भिक्षू, भिक्षुणी, उपासक आणि उपासिका यांचे जाणे-येणे नसते. ... ब्रह्मचर्य वासासाठी हा पाचवा अक्षण (अयोग्य काळ) आणि असमय (अयोग्य वेळ) आहे." ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ…ပေ… အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော မဇ္ဈိမေသု ဇနပဒေသု ပစ္စာဇာတော ဟောတိ, သော စ ဟောတိ မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိကော ဝိပရီတဒဿနော – ‘နတ္ထိ ဒိန္နံ, နတ္ထိ ယိဋ္ဌံ, နတ္ထိ ဟုတံ, နတ္ထိ သုကတဒုက္ကဋာနံ ကမ္မာနံ ဖလံ ဝိပါကော, နတ္ထိ အယံ လောကော, နတ္ထိ ပရော လောကော, နတ္ထိ မာတာ, နတ္ထိ ပိတာ, နတ္ထိ သတ္တာ ဩပပါတိကာ, နတ္ထိ လောကေ သမဏဗြာဟ္မဏာ သမ္မဂ္ဂတာ သမ္မာ ပဋိပန္နာ ယေ ဣမဉ္စ လောကံ ပရဉ္စ လောကံ သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ပဝေဒေန္တီ’တိ…ပေ…. "पुन्हा आणखी, भिक्षूहो! ... हा व्यक्ती मध्यवर्ती जनपदांमध्ये (मध्यदेशात) जन्माला आलेला असतो, परंतु तो मिथ्यादृष्टी (चुकीची धारणा असलेला) आणि विपरीत दृष्टी असलेला असतो – 'दान देण्याला काही अर्थ नाही (फळ नाही), यज्ञाला फळ नाही, पूजेला फळ नाही, चांगल्या-वाईट कर्मांचे काही फळ किंवा विपाक नाही, हा लोक नाही, परलोक नाही, माता नाही, पिता नाही, औपपातिक (स्वयंभू उत्पन्न होणारे) प्राणी नाहीत; या जगात असे कोणी समण-ब्राह्मण नाहीत जे सन्मार्गावर चालणारे, सम्यक प्रतिपन्न आहेत, ज्यांनी स्वतःच्या अभिज्ञेने (उच्च ज्ञानाने) हा लोक आणि परलोक प्रत्यक्ष जाणून घेऊन इतरांना उपदेश केला आहे.' ..." ‘‘ပုန [Pg.61] စပရံ, ဘိက္ခဝေ…ပေ… အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော မဇ္ဈိမေသု ဇနပဒေသု ပစ္စာဇာတော ဟောတိ, သော စ ဟောတိ ဒုပ္ပညော ဇဠော ဧဠမူဂေါ အပ္ပဋိဗလော သုဘာသိတဒုဗ္ဘာသိတဿ အတ္ထမညာတုံ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တမော အက္ခဏော အသမယော ဗြဟ္မစရိယဝါသာယ. "पुन्हा आणखी, भिक्षूहो! ... हा व्यक्ती मध्यवर्ती जनपदांमध्ये जन्माला आलेला असतो, परंतु तो प्रज्ञाहीन (मूर्ख), जड (मतिमंद) आणि एळमूक (मुका-बहिरा) असतो, जो सुभाषित (चांगले बोललेले) आणि दुभाषित (वाईट बोललेले) यांतील अर्थ समजण्यास असमर्थ असतो. भिक्षूहो! ब्रह्मचर्य वासासाठी हा सातवा अक्षण आणि असमय आहे." ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတော စ လောကေ အနုပ္ပန္နော ဟောတိ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ…ပေ… သတ္ထာ ဒေဝမနုဿာနံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ. ဓမ္မော စ န ဒေသိယတိ ဩပသမိကော ပရိနိဗ္ဗာနိကော သမ္ဗောဓဂါမီ သုဂတပ္ပဝေဒိတော. အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော မဇ္ဈိမေသု ဇနပဒေသု ပစ္စာဇာတော ဟောတိ, သော စ ဟောတိ ပညဝါ အဇဠော အနေဠမူဂေါ ပဋိဗလော သုဘာသိတဒုဗ္ဘာသိတဿ အတ္ထမညာတုံ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌမော အက္ခဏော အသမယော ဗြဟ္မစရိယဝါသာယ. ‘ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ အက္ခဏာ အသမယာ ဗြဟ္မစရိယဝါသာယ’’’. "पुन्हा आणखी, भिक्षूहो! जगात तथागतांचा प्रादुर्भाव झालेला नसतो, जे अर्हत, सम्यक्सम्बुद्ध ... देव आणि मनुष्यांचे शास्ता, बुद्ध, भगवान आहेत. आणि उपशम देणारा, परिनिर्वाण देणारा, संबोधीकडे नेणारा, सुगतांनी प्रवेदित केलेला (सांगितलेला) धम्म देशिला (उपदेशिला) जात नाही. परंतु हा व्यक्ती मध्यवर्ती जनपदांमध्ये जन्माला आलेला असतो, आणि तो प्रज्ञावान असतो, जड नसतो, एळमूक नसतो, सुभाषित आणि दुभाषित यांतील अर्थ समजण्यास समर्थ असतो. भिक्षूहो! ब्रह्मचर्य वासासाठी हा आठवा अक्षण आणि असमय आहे. भिक्षूहो! ब्रह्मचर्य वासासाठी हेच ते आठ अक्षण आणि असमय आहेत." ‘‘ဧကောဝ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ခဏော စ သမယော စ ဗြဟ္မစရိယဝါသာယ. ကတမော ဧကော? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတော စ လောကေ ဥပ္ပန္နော ဟောတိ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဝိဇ္ဇာစရဏသမ္ပန္နော သုဂတော လောကဝိဒူ အနုတ္တရော ပုရိသဒမ္မသာရထိ သတ္ထာ ဒေဝမနုဿာနံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ. ဓမ္မော စ ဒေသိယတိ ဩပသမိကော ပရိနိဗ္ဗာနိကော သမ္ဗောဓဂါမီ သုဂတပ္ပဝေဒိတော. အယဉ္စ ပုဂ္ဂလော မဇ္ဈိမေသု ဇနပဒေသု ပစ္စာဇာတော ဟောတိ, သော စ ဟောတိ ပညဝါ အဇဠော အနေဠမူဂေါ ပဋိဗလော သုဘာသိတဒုဗ္ဘာသိတဿ အတ္ထမညာတုံ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဧကောဝ ခဏော စ သမယော စ ဗြဟ္မစရိယဝါသာယာ’’တိ. "भिक्षूहो! ब्रह्मचर्य वासासाठी केवळ एकच क्षण (संधी) आणि समय (योग्य वेळ) आहे. तो एक कोणता? भिक्षूहो! जेव्हा या जगात तथागतांचा प्रादुर्भाव होतो, जे अर्हत, सम्यक्सम्बुद्ध, विद्याचरणसंपन्न, सुगत, लोकविदू, अनुत्तर पुरुषदम्यसारथी, देव आणि मनुष्यांचे शास्ता, बुद्ध, भगवान आहेत. आणि उपशम देणारा, परिनिर्वाण देणारा, संबोधीकडे नेणारा, सुगतांनी प्रवेदित केलेला धम्म देशिला (उपदेशिला) जातो. आणि हा व्यक्ती मध्यवर्ती जनपदांमध्ये जन्माला आलेला असतो, आणि तो प्रज्ञावान असतो, जड नसतो, एळमूक नसतो, सुभाषित आणि दुभाषित यांतील अर्थ समजण्यास समर्थ असतो. भिक्षूहो! ब्रह्मचर्य वासासाठी हाच तो एकमेव क्षण आणि समय आहे." ‘‘မနုဿလာဘံ လဒ္ဓါန, သဒ္ဓမ္မေ သုပ္ပဝေဒိတေ; ယေ ခဏံ နာဓိဂစ္ဆန္တိ, အတိနာမေန္တိ တေ ခဏံ. "ज्यांनी मनुष्यजन्म प्राप्त केला आहे, आणि सद्धम्म उत्तम प्रकारे प्रवेदित (उपदेशिला) केला गेला आहे, तरीही जे त्या क्षणाचा (संधीचा) लाभ घेत नाहीत, ते त्या क्षणाला व्यर्थ घालवतात." ‘‘ဗဟူ ဟိ အက္ခဏာ ဝုတ္တာ, မဂ္ဂဿ အန္တရာယိကာ; ကဒါစိ ကရဟစိ လောကေ, ဥပ္ပဇ္ဇန္တိ တထာဂတာ. "मार्गामध्ये अंतराय (अडथळा) आणणारे अनेक अक्षण (अयोग्य काळ) सांगितले गेले आहेत; कारण या जगात तथागतांचा प्रादुर्भाव कधीतरीच, अत्यंत दुर्मिळतेने होतो." ‘‘တယိဒံ သမ္မုခီဘူတံ, ယံ လောကသ္မိံ သုဒုလ္လဘံ; မနုဿပဋိလာဘော စ, သဒ္ဓမ္မဿ စ ဒေသနာ; အလံ ဝါယမိတုံ တတ္ထ, အတ္တကာမေန ဇန္တုနာ. "या जगात जे अत्यंत दुर्मिळ आहे, ते आज प्रत्यक्ष समोर उपस्थित आहे – मनुष्यजन्माची प्राप्ती आणि सद्धम्माची देशना (उपदेश). म्हणून, स्वतःचे कल्याण इच्छिणाऱ्या मनुष्याने यासाठी उद्योग (प्रयत्न) करणे योग्य आहे." ‘‘ကထံ [Pg.62] ဝိဇညာ သဒ္ဓမ္မံ, ခဏော ဝေ မာ ဥပစ္စဂါ; ခဏာတီတာ ဟိ သောစန္တိ, နိရယမှိ သမပ္ပိတာ. "सद्धम्माला कसे जाणावे? हा क्षण (संधी) व्यर्थ जाऊ देऊ नका. कारण जे या क्षणाला मुकतात, ते नरकात पडून शोक करतात." ‘‘ဣဓ စေ နံ ဝိရာဓေတိ, သဒ္ဓမ္မဿ နိယာမတံ ; ဝါဏိဇောဝ အတီတတ္ထော, စိရတ္တံ အနုတပိဿတိ. "जर कोणी या जन्मात सद्धम्माच्या नियत मार्गाला (आर्यमार्गाला) मुकला, तर तो नफा गमावलेल्या व्यापाऱ्याप्रमाणे दीर्घकाळ पश्चात्ताप करत राहील." ‘‘အဝိဇ္ဇာနိဝုတော ပေါသော, သဒ္ဓမ္မံ အပရာဓိကော; ဇာတိမရဏသံသာရံ, စိရံ ပစ္စနုဘောဿတိ. "अविद्येने वेढलेला आणि सद्धम्मापासून वंचित राहिलेला मनुष्य, जन्म आणि मृत्यूच्या या संसारात दीर्घकाळ भटकत राहील." ‘‘ယေ စ လဒ္ဓါ မနုဿတ္တံ, သဒ္ဓမ္မေ သုပ္ပဝေဒိတေ; အကံသု သတ္ထု ဝစနံ, ကရိဿန္တိ ကရောန္တိ ဝါ. "परंतु ज्यांनी मनुष्यजन्म प्राप्त करून, उत्तम प्रकारे प्रवेदित केलेल्या सद्धम्मामध्ये शास्त्यांच्या (बुद्धांच्या) वचनांचे पालन केले आहे, जे करत आहेत किंवा पुढे करतील," ‘‘ခဏံ ပစ္စဝိဒုံ လောကေ, ဗြဟ္မစရိယံ အနုတ္တရံ; ယေ မဂ္ဂံ ပဋိပဇ္ဇိံသု, တထာဂတပ္ပဝေဒိတံ. "ज्यांनी तथागतांनी प्रवेदित केलेल्या मार्गाचे आचरण केले आहे, त्यांनी या जगात त्या क्षणाचा (संधीचा) वेध घेतला आहे आणि अनुत्तर ब्रह्मचर्य प्राप्त केले आहे." ‘‘ယေ သံဝရာ စက္ခုမတာ, ဒေသိတာဒိစ္စဗန္ဓုနာ; တေသု ဂုတ္တော သဒါ သတော, ဝိဟရေ အနဝဿုတော. "पंचचक्षू संपन्न, आदित्यबंधू (सूर्याचे नातेवाईक) असणाऱ्या बुद्धांनी जे संवर (इंद्रिय संयम) सांगितले आहेत, त्यांमध्ये नेहमी सुरक्षित आणि स्मृतिमान राहून, कर्मांच्या आस्रवांपासून अलिप्त (अनवस्सुत) होऊन विहरत राहावे." ‘‘သဗ္ဗေ အနုသယေ ဆေတွာ, မာရဓေယျပရာနုဂေ; တေ ဝေ ပါရင်္ဂတာ လောကေ, ယေ ပတ္တာ အာသဝက္ခယ’’န္တိ. နဝမံ; "मारलोकात (संसारात) वाहून नेणाऱ्या सर्व अनुशायांना (सुप्त क्लेशांना) तोडून, ज्यांनी आस्रवांचा क्षय (अर्हत पद) प्राप्त केला आहे, तेच या जगात पारंगत झाले आहेत (दुसऱ्या किनाऱ्यावर म्हणजेच निर्वाणाला पोहोचले आहेत). (नववे सुत्त समाप्त)" ၁၀. အနုရုဒ္ဓမဟာဝိတက္ကသုတ္တံ १०. "अनुरुद्धमहावितक्कसुत्त" ၃၀. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဘဂ္ဂေသု ဝိဟရတိ သုံသုမာရဂိရေ ဘေသကဠာဝနေ မိဂဒါယေ. တေန ခေါ ပန သမယေန အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ စေတီသု ဝိဟရတိ ပါစီနဝံသဒါယေ. အထ ခေါ အာယသ္မတော အနုရုဒ္ဓဿ ရဟောဂတဿ ပဋိသလ္လီနဿ ဧဝံ စေတသော ပရိဝိတက္ကော ဥဒပါဒိ – ‘‘အပ္ပိစ္ဆဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မဟိစ္ဆဿ; သန္တုဋ္ဌဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသန္တုဋ္ဌဿ; ပဝိဝိတ္တဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော သင်္ဂဏိကာရာမဿ; အာရဒ္ဓဝီရိယဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ကုသီတဿ; ဥပဋ္ဌိတဿတိဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မုဋ္ဌဿတိဿ ; သမာဟိတဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသမာဟိတဿ; ပညဝတော အယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ဒုပ္ပညဿာ’’တိ. ३०. "एकदा भगवान भग्ग देशात, सुंसुमारगिरी येथील भेसकळावन मृगदायात विहरत होते. त्या वेळी आयुष्यमान अनुरुद्ध चेती देशात, पाचीनवंसदायात (पूर्व बांबूच्या वनात) विहरत होते. तेव्हा एकांतात ध्यानस्थ बसलेल्या आयुष्यमान अनुरुद्धांच्या मनात असा विचार आला – 'हा धम्म अल्पेच्छ (कमी इच्छा असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी आहे, महाइच्छ (अति-इच्छा असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी नाही; हा धम्म संतुष्टासाठी आहे, असंतुष्टासाठी नाही; हा धम्म प्रविविक्त (एकांतप्रिय) व्यक्तीसाठी आहे, गर्दीत/संगतीत रमणाऱ्यासाठी नाही; हा धम्म आरब्धवीर्य (उद्योगी/प्रयत्नशील) व्यक्तीसाठी आहे, आळशासाठी नाही; हा धम्म (जागरूक) व्यक्तीसाठी आहे, विस्मरणशील व्यक्तीसाठी नाही; हा धम्म समाहित (एकाग्र चित्त असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी आहे, असमाहितासाठी नाही; हा धम्म प्रज्ञावानासाठी आहे, प्रज्ञाहीनासाठी नाही.'" အထ [Pg.63] ခေါ ဘဂဝါ အာယသ္မတော အနုရုဒ္ဓဿ စေတသာ စေတောပရိဝိတက္ကမညာယ – သေယျထာပိ နာမ ဗလဝါ ပုရိသော သမိဉ္ဇိတံ ဝါ ဗာဟံ ပသာရေယျ, ပသာရိတံ ဝါ ဗာဟံ သမိဉ္ဇေယျ; ဧဝမေဝံ – ဘဂ္ဂေသု သုံသုမာရဂိရေ ဘေသကဠာဝနေ မိဂဒါယေ အန္တရဟိတော စေတီသု ပါစီနဝံသဒါယေ အာယသ္မတော အနုရုဒ္ဓဿ သမ္မုခေ ပါတုရဟောသိ. နိသီဒိ ဘဂဝါ ပညတ္တေ အာသနေ. အာယသ္မာပိ ခေါ အနုရုဒ္ဓေါ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ "तेव्हा भगवान बुद्धांनी आपल्या चित्ताने आयुष्यमान अनुरुद्धांच्या मनातील विचार जाणून घेतला – ज्याप्रमाणे एखादा बलवान मनुष्य आपला दुमडलेला हात पसरतो किंवा पसरलेला हात दुमडतो; त्याचप्रमाणे भगवान भग्ग देशातील सुंसुमारगिरी येथील भेसकळावन मृगदायातून अंतर्धान पावले आणि चेती देशातील पाचीनवंसदायात आयुष्यमान अनुरुद्धांच्या समोर प्रकट झाले. भगवान तयार केलेल्या आसनावर बसले. आयुष्यमान अनुरुद्धांनीही भगवंतांना अभिवादन केले आणि ते एका बाजूला बसले. एका बाजूला" နိသိန္နံ ခေါ အာယသ္မန္တံ အနုရုဒ္ဓံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – "एका बाजूला बसलेल्या आयुष्यमान अनुरुद्धांना भगवान म्हणाले –" ‘‘သာဓု သာဓု, အနုရုဒ္ဓ! သာဓု ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, (ယံ တံ မဟာပုရိသဝိတက္ကံ) ဝိတက္ကေသိ – ‘အပ္ပိစ္ဆဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မဟိစ္ဆဿ; သန္တုဋ္ဌဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသန္တုဋ္ဌဿ; ပဝိဝိတ္တဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော သင်္ဂဏိကာရာမဿ; အာရဒ္ဓဝီရိယဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ကုသီတဿ; ဥပဋ္ဌိတဿတိဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မုဋ္ဌဿတိဿ; သမာဟိတဿာယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသမာဟိတဿ; ပညဝတော အယံ ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ဒုပ္ပညဿာ’တိ. တေန ဟိ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမမ္ပိ အဋ္ဌမံ မဟာပုရိသဝိတက္ကံ ဝိတက္ကေဟိ – ‘နိပ္ပပဉ္စာရာမဿာယံ ဓမ္မော နိပ္ပပဉ္စရတိနော, နာယံ ဓမ္မော ပပဉ္စာရာမဿ ပပဉ္စရတိနော’’’တိ. “साधु, साधु, अनुरुद्ध! हे अनुरुद्ध, तू महापुरुषाच्या ज्या विचारांचे चिंतन केलेस ते फार उत्तम आहे – ‘हा धम्म अल्पेच्छ (कमी इच्छा असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी आहे, महाइच्छ (खूप इच्छा असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी नाही; हा धम्म संतुष्ट व्यक्तीसाठी आहे, असंतुष्ट व्यक्तीसाठी नाही; हा धम्म एकांतात राहणाऱ्या (प्रविविक्त) व्यक्तीसाठी आहे, गर्दीत रमणाऱ्या (संगणिकाराम) व्यक्तीसाठी नाही; हा धम्म उद्योगी (आरब्धवीर्य) व्यक्तीसाठी आहे, आळशी व्यक्तीसाठी नाही; हा धम्म जागरूक (उपस्थितस्मृती) व्यक्तीसाठी आहे, विस्मृतिशील व्यक्तीसाठी नाही; हा धम्म समाहित (एकाग्र चित्त असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी आहे, असमाहित व्यक्तीसाठी नाही; हा धम्म प्रज्ञावान व्यक्तीसाठी आहे, प्रज्ञाहीन व्यक्तीसाठी नाही.’ म्हणून, हे अनुरुद्ध, तू महापुरुषाच्या या आठव्या विचाराचेही चिंतन कर – ‘हा धम्म निष्प्रपंचात (तण्हा, मान, दिट्ठी यांसारख्या मानसिक विस्तारापासून मुक्त अशा निर्वाणात) रमणाऱ्या व निष्प्रपंचात आनंद मानणाऱ्या व्यक्तीसाठी आहे, प्रपंचात रमणाऱ्या व प्रपंचात आनंद मानणाऱ्या व्यक्तीसाठी नाही.’” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, တတော တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ယာဝဒေဝ အာကင်္ခိဿသိ, ဝိဝိစ္စေဝ ကာမေဟိ ဝိဝိစ္စ အကုသလေဟိ ဓမ္မေဟိ သဝိတက္ကံ သဝိစာရံ ဝိဝေကဇံ ပီတိသုခံ ပဌမံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရိဿသိ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील, तेव्हा तू, हे अनुरुद्ध, तुला पाहिजे तितका वेळ, कामभोगांपासून अलिप्त होऊन, अकुшал धर्मांपासून अलिप्त होऊन, वितर्क आणि विचारांसह असणाऱ्या, विवेकजन्य (अलिप्ततेतून उत्पन्न झालेल्या) प्रीती आणि सुखाने युक्त अशा पहिल्या ध्यानाचा (प्रथम ध्यान) लाभ घेऊन विहरशील.” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, တတော တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ယာဝဒေဝ အာကင်္ခိဿသိ, ဝိတက္ကဝိစာရာနံ ဝူပသမာ အဇ္ဈတ္တံ သမ္ပသာဒနံ စေတသော ဧကောဒိဘာဝံ အဝိတက္ကံ အဝိစာရံ သမာဓိဇံ ပီတိသုခံ ဒုတိယံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရိဿသိ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील, तेव्हा तू, हे अनुरुद्ध, तुला पाहिजे तितका वेळ, वितर्क आणि विचारांच्या शांत होण्याने, अध्यात्मिक प्रसन्नता आणि चित्ताची एकाग्रता असणाऱ्या, वितर्करहित, विचाररहित, समाधीतून उत्पन्न झालेल्या प्रीती आणि सुखाने युक्त अशा दुसऱ्या ध्यानाचा (द्वितीय ध्यान) लाभ घेऊन विहरशील.” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, တတော တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ယာဝဒေဝ အာကင်္ခိဿသိ, ပီတိယာ စ ဝိရာဂါ ဥပေက္ခကော စ ဝိဟရိဿသိ သတော စ သမ္ပဇာနော သုခဉ္စ ကာယေန ပဋိသံဝေဒိဿသိ [Pg.64] ယံ တံ အရိယာ အာစိက္ခန္တိ – ‘ဥပေက္ခကော သတိမာ သုခဝိဟာရီ’တိ တတိယံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရိဿသိ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील, तेव्हा तू, हे अनुरुद्ध, तुला पाहिजे तितका वेळ, प्रीतीचाही विराग झाल्यामुळे उपेक्षक (तटस्थ) राहून, स्मृतिमान व संप्रजन्ययुक्त (जागरूक व सजग) होऊन विहरशील आणि शरीराने त्या सुखाचा अनुभव घेशील, ज्याविषयी आर्य पुरुष म्हणतात – ‘तो उपेक्षक, स्मृतिमान आणि सुखविहारी आहे’, अशा तिसऱ्या ध्यानाचा (तृतीय ध्यान) लाभ घेऊन विहरशील.” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, တတော တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ယာဝဒေဝ အာကင်္ခိဿသိ, သုခဿ စ ပဟာနာ ဒုက္ခဿ စ ပဟာနာ ပုဗ္ဗေဝ သောမနဿဒေါမနဿာနံ အတ္ထင်္ဂမာ အဒုက္ခမသုခံ ဥပေက္ခာသတိပါရိသုဒ္ဓိံ စတုတ္ထံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရိဿသိ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील, तेव्हा तू, हे अनुरुद्ध, तुला पाहिजे तितका वेळ, सुखाचा आणि दुःखाचा त्याग केल्यामुळे, आणि आधीच सोमनस्य (हर्ष) व दोमनस्य (खिन्नता) नष्ट झाल्यामुळे, जे दुःखही नाही आणि सुखही नाही, व जे उपेक्षेमुळे स्मृतीच्या शुद्धतेने युक्त आहे, अशा चौथ्या ध्यानाचा (चतुर्थ ध्यान) लाभ घेऊन विहरशील.” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ စ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, ဣမေသဉ္စ စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဘဝိဿသိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, တတော တုယှံ, အနုရုဒ္ဓ, သေယျထာပိ နာမ ဂဟပတိဿ ဝါ ဂဟပတိပုတ္တဿ ဝါ နာနာရတ္တာနံ ဒုဿာနံ ဒုဿကရဏ္ဍကော ပူရော; ဧဝမေဝံ တေ ပံသုကူလစီဝရံ ခါယိဿတိ သန္တုဋ္ဌဿ ဝိဟရတော ရတိယာ အပရိတဿာယ ဖာသုဝိဟာရာယ ဩက္ကမနာယ နိဗ္ဗာနဿ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील आणि उच्च चित्ताशी संबंधित असणाऱ्या व याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या या चार ध्यानांचा इच्छेनुसार, विनासायास व सहजतेने लाभ मिळवशील, तेव्हा, हे अनुरुद्ध, जसे एखाद्या गृहपतीला किंवा गृहपतीच्या पुत्राला विविध रंगांच्या वस्त्रांनी भरलेला वस्त्रांचा पेटारा अत्यंत प्रिय वाटतो; तसेच, संतुष्ट राहून विहरणाऱ्या तुला तुझे पांसुकूल चीवर (स्मशानातील किंवा कचऱ्यातील चिंध्यांपासून बनवलेले वस्त्र) हे आनंदासाठी, तृष्णारहित राहण्यासाठी, सुखावह विहारासाठी आणि निर्वाणात प्रवेश करण्यासाठी अत्यंत प्रिय वाटेल.” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ စ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, ဣမေသဉ္စ စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဘဝိဿသိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, တတော တုယှံ, အနုရုဒ္ဓ, သေယျထာပိ နာမ ဂဟပတိဿ ဝါ ဂဟပတိပုတ္တဿ ဝါ သာလီနံ ဩဒနော ဝိစိတကာဠကော အနေကသူပေါ အနေကဗျဉ္ဇနော; ဧဝမေဝံ တေ ပိဏ္ဍိယာလောပဘောဇနံ ခါယိဿတိ သန္တုဋ္ဌဿ ဝိဟရတော ရတိယာ အပရိတဿာယ ဖာသုဝိဟာရာယ ဩက္ကမနာယ နိဗ္ဗာနဿ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील आणि उच्च चित्ताशी संबंधित असणाऱ्या व याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या या चार ध्यानांचा इच्छेनुसार, विनासायास व सहजतेने लाभ मिळवशील, तेव्हा, हे अनुरुद्ध, जसे एखाद्या गृहपतीला किंवा गृहपतीच्या पुत्राला काळे दाणे नसलेला, उत्तम प्रकारे निवडलेला आणि अनेक प्रकारच्या आमट्या व भाज्यांनी युक्त असलेला तांदळाचा भात अत्यंत प्रिय वाटतो; तसेच, संतुष्ट राहून विहरणाऱ्या तुला तुझे पिंडपात भोजन (भिक्षेचे अन्न) हे आनंदासाठी, तृष्णारहित राहण्यासाठी, सुखावह विहारासाठी आणि निर्वाणात प्रवेश करण्यासाठी अत्यंत प्रिय वाटेल.” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ စ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, ဣမေသဉ္စ စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဘဝိဿသိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, တတော တုယှံ, အနုရုဒ္ဓ, သေယျထာပိ နာမ ဂဟပတိဿ ဝါ ဂဟပတိပုတ္တဿ ဝါ ကူဋာဂါရံ ဥလ္လိတ္တာဝလိတ္တံ နိဝါတံ ဖုသိတဂ္ဂဠံ ပိဟိတဝါတပါနံ; ဧဝမေဝံ တေ ရုက္ခမူလသေနာသနံ ခါယိဿတိ သန္တုဋ္ဌဿ ဝိဟရတော ရတိယာ အပရိတဿာယ ဖာသုဝိဟာရာယ ဩက္ကမနာယ နိဗ္ဗာနဿ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील आणि उच्च चित्ताशी संबंधित असणाऱ्या व याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या या चार ध्यानांचा इच्छेनुसार, विनासायास व सहजतेने लाभ मिळवशील, तेव्हा, हे अनुरुद्ध, जसे एखाद्या गृहपतीला किंवा गृहपतीच्या पुत्राला आतून व बाहेरून उत्तम प्रकारे लिंपलेले, वाऱ्यापासून सुरक्षित असलेले, घट्ट बसवलेले दरवाजे आणि बंद खिडक्या असलेले शिखरयुक्त घर (कूटागार) अत्यंत प्रिय वाटते; तसेच, संतुष्ट राहून विहरणाऱ्या तुला तुझे वृक्षमूल सेनासन (झाडाच्या मुळाशी राहणे) हे आनंदासाठी, तृष्णारहित राहण्यासाठी, सुखावह विहारासाठी आणि निर्वाणात प्रवेश करण्यासाठी अत्यंत प्रिय वाटेल.” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ စ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, ဣမေသဉ္စ စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဘဝိဿသိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, တတော တုယှံ, အနုရုဒ္ဓ[Pg.65], သေယျထာပိ နာမ ဂဟပတိဿ ဝါ ဂဟပတိပုတ္တဿ ဝါ ပလ္လင်္ကော ဂေါနကတ္ထတော ပဋိကတ္ထတော ပဋလိကတ္ထတော ကဒလိမိဂပဝရပစ္စတ္ထရဏော သဥတ္တရစ္ဆဒေါ ဥဘတောလောဟိတကူပဓာနော; ဧဝမေဝံ တေ တိဏသန္ထာရကသယနာသနံ ခါယိဿတိ သန္တုဋ္ဌဿ ဝိဟရတော ရတိယာ အပရိတဿာယ ဖာသုဝိဟာရာယ ဩက္ကမနာယ နိဗ္ဗာနဿ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील आणि उच्च चित्ताशी संबंधित असणाऱ्या व याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या या चार ध्यानांचा इच्छेनुसार, विनासायास व सहजतेने लाभ मिळवशील, तेव्हा, हे अनुरुद्ध, जसे एखाद्या गृहपतीला किंवा गृहपतीच्या पुत्राला लांब केसांच्या लोकरीच्या चटईने, पांढऱ्या लोकरीच्या चादरीने, फुलांच्या नक्षीकाम केलेल्या चादरीने, उत्कृष्ट काळवीट-कातडीच्या अंथरूणाने युक्त, वर छत (चांदवा) असलेले आणि दोन्ही बाजूंना लाल रंगाच्या उशी असलेले आसन किंवा पलंग अत्यंत प्रिय वाटतो; तसेच, संतुष्ट राहून विहरणाऱ्या तुला तुझे तृणसंस्तारक शयनासन (गवताचे अंथरूण) हे आनंदासाठी, तृष्णारहित राहण्यासाठी, सुखावह विहारासाठी आणि निर्वाणात प्रवेश करण्यासाठी अत्यंत प्रिय वाटेल.” ‘‘ယတော ခေါ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, ဣမေ စ အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဝိတက္ကေဿသိ, ဣမေသဉ္စ စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဘဝိဿသိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, တတော တုယှံ, အနုရုဒ္ဓ, သေယျထာပိ နာမ ဂဟပတိဿ ဝါ ဂဟပတိပုတ္တဿ ဝါ နာနာဘေသဇ္ဇာနိ, သေယျထိဒံ – သပ္ပိ နဝနီတံ တေလံ မဓု ဖာဏိတံ; ဧဝမေဝံ တေ ပူတိမုတ္တဘေသဇ္ဇံ ခါယိဿတိ သန္တုဋ္ဌဿ ဝိဟရတော ရတိယာ အပရိတဿာယ ဖာသုဝိဟာရာယ ဩက္ကမနာယ နိဗ္ဗာနဿ. တေန ဟိ တွံ, အနုရုဒ္ဓ, အာယတိကမ္ပိ ဝဿာဝါသံ ဣဓေဝ စေတီသု ပါစီနဝံသဒါယေ ဝိဟရေယျာသီ’’တိ. ‘‘ဧဝံ, ဘန္တေ’’တိ ခေါ အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ ဘဂဝတော ပစ္စဿောသိ. “हे अनुरुद्ध, जेव्हा तू महापुरुषाच्या या आठ विचारांचे चिंतन करशील आणि उच्च चित्ताशी संबंधित असणाऱ्या व याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या या चार ध्यानांचा इच्छेनुसार, विनासायास व सहजतेने लाभ मिळवशील, तेव्हा, हे अनुरुद्ध, जसे एखाद्या गृहपतीला किंवा गृहपतीच्या पुत्राला तूप, लोणी, तेल, मध आणि गूळ यांसारखी विविध औषधे अत्यंत प्रिय वाटतात; तसेच, संतुष्ट राहून विहरणाऱ्या तुला तुझे पूतीमुक्तभेषज (गोमूत्रापासून बनवलेले औषध) हे आनंदासाठी, तृष्णारहित राहण्यासाठी, सुखावह विहारासाठी आणि निर्वाणात प्रवेश करण्यासाठी अत्यंत प्रिय वाटेल. म्हणून, हे अनुरुद्ध, तू पुढील वर्षावासही येथेच चेती देशातील पाचीनवंसदाय (पूर्व बांबू उद्यान) येथेच व्यतीत कर.” “तसेच असो, भंते,” असे म्हणून आयुष्मान अनुरुद्धांनी भगवंतांच्या वचनाचा आदरपूर्वक स्वीकार केला. အထ ခေါ ဘဂဝါ အာယသ္မန္တံ အနုရုဒ္ဓံ ဣမိနာ ဩဝါဒေန ဩဝဒိတွာ – သေယျထာပိ နာမ ဗလဝါ ပုရိသော သမိဉ္ဇိတံ ဝါ ဗာဟံ ပသာရေယျ, ပသာရိတံ ဝါ ဗာဟံ သမိဉ္ဇေယျ, ဧဝမေဝံ – စေတီသု ပါစီနဝံသဒါယေ အန္တရဟိတော ဘဂ္ဂေသု သုံသုမာရဂိရေ ဘေသကဠာဝနေ မိဂဒါယေ ပါတုရဟောသီတိ. နိသီဒိ ဘဂဝါ ပညတ္တေ အာသနေ. နိသဇ္ဇ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘အဋ္ဌ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မဟာပုရိသဝိတက္ကေ ဒေသေဿာမိ, တံ သုဏာထ…ပေ… ကတမေ စ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ မဟာပုရိသဝိတက္ကာ? အပ္ပိစ္ဆဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မဟိစ္ဆဿ; သန္တုဋ္ဌဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသန္တုဋ္ဌဿ; ပဝိဝိတ္တဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော သင်္ဂဏိကာရာမဿ; အာရဒ္ဓဝီရိယဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ကုသီတဿ; ဥပဋ္ဌိတဿတိဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မုဋ္ဌဿတိဿ; သမာဟိတဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသမာဟိတဿ; ပညဝတော အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ဒုပ္ပညဿ; နိပ္ပပဉ္စာရာမဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော နိပ္ပပဉ္စရတိနော, နာယံ ဓမ္မော ပပဉ္စာရာမဿ ပပဉ္စရတိနော’’. त्यानंतर भगवान आयुष्मान अनुरुद्धांना या उपदेशाने उपदेशित करून – ज्याप्रमाणे एखादा बलवान मनुष्य आपला दुमडलेला हात पसरावा किंवा पसरलेला हात दुमडावा, त्याचप्रमाणे – चेती देशातील पाचीनवंसदायातून अंतर्धान पावले आणि भग्ग देशातील सुंसुमारगिरी येथील भेसकळावनातील मृगदायात प्रकट झाले. भगवान तयार केलेल्या आसनावर विराजमान झाले. बसल्यानंतर भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले – “भिक्खूंनो, मी तुम्हाला महापुरुषांचे आठ विचार (महापुरिसवितक्क) शिकवणार आहे, ते ऐका... आणि भिक्खूंनो, महापुरुषांचे ते आठ विचार कोणते आहेत? भिक्खूंनो, हा धम्म अल्पेच्छ (कमी इच्छा असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी आहे, हा धम्म महाइच्छ (अतिशय इच्छा असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी नाही; भिक्खूंनो, हा धम्म संतुष्ट (समाधानी) व्यक्तीसाठी आहे, हा धम्म असंतुष्ट व्यक्तीसाठी नाही; भिक्खूंनो, हा धम्म एकांतात राहणाऱ्या (प्रविविक्त) व्यक्तीसाठी आहे, हा धम्म समूहात रमणाऱ्या व्यक्तीसाठी नाही; भिक्खूंनो, हा धम्म प्रयत्नशील (आरद्धवीर्य) व्यक्तीसाठी आहे, हा धम्म आळशी व्यक्तीसाठी नाही; भिक्खूंनो, हा धम्म जागृत स्मृती असणाऱ्या (उपट्टितसती) व्यक्तीसाठी आहे, हा धम्म विस्मरणशील व्यक्तीसाठी नाही; भिक्खूंनो, हा धम्म समाहित (एकाग्र चित्त असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी आहे, हा धम्म असमाहित व्यक्तीसाठी नाही; भिक्खूंनो, हा धम्म प्रज्ञावान व्यक्तीसाठी आहे, हा धम्म प्रज्ञाहीन व्यक्तीसाठी नाही; भिक्खूंनो, हा धम्म निष्प्रपंचात (निप्पपञ्च - मानसिक जंजाळाचा निरोध असणाऱ्या निर्वाणात) रमणाऱ्या व आनंद घेणाऱ्या व्यक्तीसाठी आहे, हा धम्म प्रपंचात (मानसिक जंजाळात) रमणाऱ्या व आनंद घेणाऱ्या व्यक्तीसाठी नाही.” ‘‘‘အပ္ပိစ္ဆဿာယံ[Pg.66], ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မဟိစ္ဆဿာ’တိ, ဣတိ ခေါ ပနေတံ ဝုတ္တံ. ကိဉ္စေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု အပ္ပိစ္ဆော သမာနော ‘အပ္ပိစ္ဆောတိ မံ ဇာနေယျု’န္တိ န ဣစ္ဆတိ, သန္တုဋ္ဌော သမာနော ‘သန္တုဋ္ဌောတိ မံ ဇာနေယျု’န္တိ န ဣစ္ဆတိ, ပဝိဝိတ္တော သမာနော ‘ပဝိဝိတ္တောတိ မံ ဇာနေယျု’န္တိ န ဣစ္ဆတိ, အာရဒ္ဓဝီရိယော သမာနော ‘အာရဒ္ဓဝီရိယောတိ မံ ဇာနေယျု’န္တိ န ဣစ္ဆတိ, ဥပဋ္ဌိတဿတိ သမာနော ‘ဥပဋ္ဌိတဿတီတိ မံ ဇာနေယျု’န္တိ န ဣစ္ဆတိ, သမာဟိတော သမာနော ‘သမာဟိတောတိ မံ ဇာနေယျု’န္တိ န ဣစ္ဆတိ, ပညဝါ သမာနော ‘ပညဝါတိ မံ ဇာနေယျု’န္တိ န ဣစ္ဆတိ, နိပ္ပပဉ္စာရာမော သမာနော ‘နိပ္ပပဉ္စာရာမောတိ မံ ဇာနေယျု’န္တိ န ဣစ္ဆတိ. ‘အပ္ပိစ္ဆဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မဟိစ္ဆဿာ’တိ, ဣတိ ယံ တံ ဝုတ္တံ ဣဒမေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ. “‘भिक्खूंनो, हा धम्म अल्पेच्छ व्यक्तीसाठी आहे, महाइच्छ व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते कशाच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे? भिक्खूंनो, येथे एखादा भिक्खू अल्पेच्छ असूनही ‘लोकांनी मला अल्पेच्छ म्हणून ओळखावे’ अशी इच्छा बाळगत नाही; संतुष्ट असूनही ‘लोकांनी मला संतुष्ट म्हणून ओळखावे’ अशी इच्छा बाळगत नाही; एकांतात राहणारा असूनही ‘लोकांनी मला एकांतात राहणारा म्हणून ओळखावे’ अशी इच्छा बाळगत नाही; प्रयत्नशील असूनही ‘लोकांनी मला प्रयत्नशील म्हणून ओळखावे’ अशी इच्छा बाळगत नाही; जागृत स्मृती असणारा असूनही ‘लोकांनी मला जागृत स्मृती असणारा म्हणून ओळखावे’ अशी इच्छा बाळगत नाही; समाहित असूनही ‘लोकांनी मला समाहित म्हणून ओळखावे’ अशी इच्छा बाळगत नाही; प्रज्ञावान असूनही ‘लोकांनी मला प्रज्ञावान म्हणून ओळखावे’ अशी इच्छा बाळगत नाही; निष्प्रपंचात रमणारा असूनही ‘लोकांनी मला निष्प्रपंचात रमणारा म्हणून ओळखावे’ अशी इच्छा बाळगत नाही. ‘भिक्खूंनो, हा धम्म अल्पेच्छ व्यक्तीसाठी आहे, महाइच्छ व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते या संदर्भात म्हटले गेले आहे.” ‘‘‘သန္တုဋ္ဌဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသန္တုဋ္ဌဿာ’တိ, ဣတိ ခေါ ပနေတံ ဝုတ္တံ, ကိဉ္စေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သန္တုဋ္ဌော ဟောတိ ဣတရီတရစီဝရပိဏ္ဍပါတသေနာသနဂိလာနပစ္စယဘေသဇ္ဇပရိက္ခာရေန. ‘သန္တုဋ္ဌဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသန္တုဋ္ဌဿာ’တိ, ဣတိ ယံ တံ ဝုတ္တံ ဣဒမေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ. “‘भिक्खूंनो, हा धम्म संतुष्ट व्यक्तीसाठी आहे, असंतुष्ट व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते कशाच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे? भिक्खूंनो, येथे भिक्खू कोणत्याही प्रकारच्या (मिळेल त्या) चीवर, पिंडपात (भिक्षाटन), सेनासन (निवासस्थान) आणि आजारपणातील औषधोपचाराच्या साधनांनी संतुष्ट असतो. ‘भिक्खूंनो, हा धम्म संतुष्ट व्यक्तीसाठी आहे, असंतुष्ट व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते या संदर्भात म्हटले गेले आहे.” ‘‘‘ပဝိဝိတ္တဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော သင်္ဂဏိကာရာမဿာ’တိ, ဣတိ ခေါ ပနေတံ ဝုတ္တံ, ကိဉ္စေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော ဘဝန္တိ ဥပသင်္ကမိတာရော ဘိက္ခူ ဘိက္ခုနိယော ဥပါသကာ ဥပါသိကာယော ရာဇာနော ရာဇမဟာမတ္တာ တိတ္ထိယာ တိတ္ထိယသာဝကာ. တတြ ဘိက္ခု ဝိဝေကနိန္နေန စိတ္တေန ဝိဝေကပေါဏေန ဝိဝေကပဗ္ဘာရေန ဝိဝေကဋ္ဌေန နေက္ခမ္မာဘိရတေန အညဒတ္ထု ဥယျောဇနိကပဋိသံယုတ္တံယေဝ ကထံ ကတ္တာ ဟောတိ. ‘ပဝိဝိတ္တဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော သင်္ဂဏိကာရာမဿာ’တိ, ဣတိ ယံ တံ ဝုတ္တံ ဣဒမေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ. “‘भिक्खूंनो, हा धम्म एकांतात राहणाऱ्या (प्रविविक्त) व्यक्तीसाठी आहे, समूहात रमणाऱ्या व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते कशाच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे? भिक्खूंनो, येथे एकांतात राहणाऱ्या भिक्खूकडे भिक्खू, भिक्खुणी, उपासक, उपासिका, राजे, राजमहामात्र (राजमंत्री), इतर पंथांचे उपदेशक (तित्थिय) आणि त्यांचे श्रावक (अनुयायी) येतात. अशा वेळी तो भिक्खू केवळ एकांताकडे (विवेक) झुकलेल्या, एकांताकडे प्रवृत्त झालेल्या, एकांताकडे वळलेल्या, एकांतात स्थित असलेल्या आणि नैष्क्रम्यात (गृहत्यागात) रमणाऱ्या चित्ताने त्यांना केवळ निरोप देण्याशी संबंधितच चर्चा करतो. ‘भिक्खूंनो, हा धम्म एकांतात राहणाऱ्या व्यक्तीसाठी आहे, समूहात रमणाऱ्या व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते या संदर्भात म्हटले गेले आहे.” ‘‘‘အာရဒ္ဓဝီရိယဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ကုသီတဿာ’တိ, ဣတိ ခေါ ပနေတံ ဝုတ္တံ, ကိဉ္စေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု အာရဒ္ဓဝီရိယော ဝိဟရတိ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ပဟာနာယ ကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ဥပသမ္ပဒါယ ထာမဝါ ဒဠှပရက္ကမော အနိက္ခိတ္တဓုရော ကုသလေသု ဓမ္မေသု. ‘အာရဒ္ဓဝီရိယဿာယံ[Pg.67], ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ကုသီတဿာ’တိ, ဣတိ ယံ တံ ဝုတ္တံ ဣဒမေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ. “‘भिक्खूंनो, हा धम्म प्रयत्नशील (आरद्धवीर्य) व्यक्तीसाठी आहे, आळशी व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते कशाच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे? भिक्खूंनो, येथे भिक्खू अकुशल धर्मांचा त्याग करण्यासाठी आणि कुशल धर्मांचे संपादन करण्यासाठी दृढ प्रयत्नशील राहतो; तो बलवान, दृढ पराक्रमी आणि कुशल धर्मांच्या बाबतीत आपली जबाबदारी (धुरा) न टाकणारा असतो. ‘भिक्खूंनो, हा धम्म प्रयत्नशील व्यक्तीसाठी आहे, आळशी व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते या संदर्भात म्हटले गेले आहे.” ‘‘‘ဥပဋ္ဌိတဿတိဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော မုဋ္ဌဿတိဿာ’တိ, ဣတိ ခေါ ပနေတံ ဝုတ္တံ. ကိဉ္စေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သတိမာ ဟောတိ ပရမေန သတိနေပက္ကေန သမန္နာဂတော, စိရကတမ္ပိ စိရဘာသိတမ္ပိ သရိတာ အနုဿရိတာ. ‘ဥပဋ္ဌိတဿတိဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော, မုဋ္ဌဿတိဿာ’တိ, ဣတိ ယံ တံ ဝုတ္တံ ဣဒမေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ. “‘भिक्खूंनो, हा धम्म जागृत स्मृती असणाऱ्या (उपट्टितसती) व्यक्तीसाठी आहे, विस्मरणशील व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते कशाच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे? भिक्खूंनो, येथे भिक्खू स्मृतिमान असतो, तो परम स्मृती आणि सजगतेने (सतिनेपक्क) युक्त असतो, खूप पूर्वी केलेले काम किंवा खूप पूर्वी बोललेले देखील तो स्मरण करण्यास आणि पुन्हा पुन्हा आठवण्यास समर्थ असतो. ‘भिक्खूंनो, हा धम्म जागृत स्मृती असणाऱ्या व्यक्तीसाठी आहे, विस्मरणशील व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते या संदर्भात म्हटले गेले आहे.” ‘‘‘သမာဟိတဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသမာဟိတဿာ’တိ, ဣတိ ခေါ ပနေတံ ဝုတ္တံ. ကိဉ္စေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဝိဝိစ္စေဝ ကာမေဟိ…ပေ… စတုတ္ထံ ဈာနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ. ‘သမာဟိတဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော အသမာဟိတဿာ’တိ, ဣတိ ယံ တံ ဝုတ္တံ ဣဒမေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ. “‘भिक्खूंनो, हा धम्म समाहित (एकाग्र चित्त असणाऱ्या) व्यक्तीसाठी आहे, असमाहित व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते कशाच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे? भिक्खूंनो, येथे भिक्खू कामभोगांपासून अलिप्त होऊन... चौथ्या ध्यानाचे संपादन करून विहरतो. ‘भिक्खूंनो, हा धम्म समाहित व्यक्तीसाठी आहे, असमाहित व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते या संदर्भात म्हटले गेले आहे.” ‘‘‘ပညဝတော အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ဒုပ္ပညဿာ’တိ, ဣတိ ခေါ ပနေတံ ဝုတ္တံ. ကိဉ္စေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ပညဝါ ဟောတိ ဥဒယတ္ထဂါမိနိယာ ပညာယ သမန္နာဂတော အရိယာယ နိဗ္ဗေဓိကာယ သမ္မာ ဒုက္ခက္ခယဂါမိနိယာ. ‘ပညဝတော အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နာယံ ဓမ္မော ဒုပ္ပညဿာ’တိ, ဣတိ ယံ တံ ဝုတ္တံ ဣဒမေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ. “‘भिक्खूंनो, हा धम्म प्रज्ञावान व्यक्तीसाठी आहे, प्रज्ञाहीन व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते कशाच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे? भिक्खूंनो, येथे भिक्खू प्रज्ञावान असतो; तो उदय आणि अस्त (उत्पत्ती आणि विनाश) जाणणाऱ्या, आर्य, भेदक (कलेशांचा भेद करणाऱ्या) आणि दुःखाचा पूर्ण क्षय करणाऱ्या प्रज्ञेने युक्त असतो. ‘भिक्खूंनो, हा धम्म प्रज्ञावान व्यक्तीसाठी आहे, प्रज्ञाहीन व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते या संदर्भात म्हटले गेले आहे.” ‘‘‘နိပ္ပပဉ္စာရာမဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော နိပ္ပပဉ္စရတိနော, နာယံ ဓမ္မော ပပဉ္စာရာမဿ ပပဉ္စရတိနော’တိ, ဣတိ ခေါ ပနေတံ ဝုတ္တံ. ကိဉ္စေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တံ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပပဉ္စနိရောဓေ စိတ္တံ ပက္ခန္ဒတိ ပသီဒတိ သန္တိဋ္ဌတိ ဝိမုစ္စတိ. ‘နိပ္ပပဉ္စာရာမဿာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မော, နိပ္ပပဉ္စရတိနော, နာယံ ဓမ္မော ပပဉ္စာရာမဿ ပပဉ္စရတိနော’တိ, ဣတိ ယံ တံ ဝုတ္တံ ဣဒမေတံ ပဋိစ္စ ဝုတ္တ’’န္တိ. “‘भिक्खूंनो, हा धम्म निष्प्रपंचात (निप्पपञ्च - मानसिक जंजाळाचा निरोध असणाऱ्या निर्वाणात) रमणाऱ्या व आनंद घेणाऱ्या व्यक्तीसाठी आहे, प्रपंचात (मानसिक जंजाळात) रमणाऱ्या व आनंद घेणाऱ्या व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते कशाच्या संदर्भात म्हटले गेले आहे? भिक्खूंनो, येथे भिक्खूचे चित्त प्रपंचाच्या निरोधात (निर्वाणात) झेप घेते, प्रसन्न होते, स्थिर होते आणि विमुक्त होते. ‘भिक्खूंनो, हा धम्म निष्प्रपंचात रमणाऱ्या व आनंद घेणाऱ्या व्यक्तीसाठी आहे, प्रपंचात रमणाऱ्या व आनंद घेणाऱ्या व्यक्तीसाठी नाही,’ असे जे म्हटले गेले आहे, ते या संदर्भात म्हटले गेले आहे।” အထ ခေါ အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ အာယတိကမ္ပိ ဝဿာဝါသံ တတ္ထေဝ စေတီသု ပါစီနဝံသဒါယေ ဝိဟာသိ. အထ ခေါ အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ ဧကော ဝူပကဋ္ဌော အပ္ပမတ္တော အာတာပီ ပဟိတတ္တော ဝိဟရန္တော နစိရဿေဝ – ယဿတ္ထာယ ကုလပုတ္တာ သမ္မဒေဝ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇန္တိ, တဒနုတ္တရံ – ဗြဟ္မစရိယပရိယောသာနံ ဒိဋ္ဌေဝ ဓမ္မေ သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟာသိ. ‘‘ခီဏာ ဇာတိ, ဝုသိတံ ဗြဟ္မစရိယံ, ကတံ ကရဏီယံ, နာပရံ ဣတ္ထတ္တာယာ’’တိ အဗ္ဘညာသိ. အညတရော စ ပနာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ အရဟတံ [Pg.68] အဟောသီတိ. အထ ခေါ အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ အရဟတ္တပ္ပတ္တော တာယံ ဝေလာယံ ဣမာ ဂါထာယော အဘာသိ – त्यानंतर आयुष्यमान अनुरुद्ध पुढील वर्षावास देखील तिथेच चेती देशातील प्राचीनवंशदायात (पूर्व बांबूच्या वनात) व्यतीत करते झाले. त्यानंतर आयुष्यमान अनुरुद्ध एकांतात, अप्रमत्त (जागरूक), उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहार करत असताना, फार काळ न लागता – ज्या ध्येयासाठी कुलपुत्र योग्य प्रकारे घरादाराचा त्याग करून अनगारिक (गृहहीन) प्रवज्जा ग्रहण करतात, त्या अनुत्तर ब्रह्मचर्याच्या अंतिम ध्येयाचा (अर्हतपदाचा) याच जन्मात स्वतः अभिज्ञापूर्वक (विशिष्ट ज्ञानाने) साक्षात्कार करून, त्यात प्रतिष्ठित होऊन विहार करू लागले. त्यांनी जाणले: “जन्म नष्ट झाला आहे, ब्रह्मचर्य पूर्ण झाले आहे, जे कर्तव्य होते ते केले गेले आहे, आता या अस्तित्वासाठी काहीही शेष राहिलेले नाही.” आणि आयुष्यमान अनुरुद्ध अर्हतांपैकी एक झाले. अर्हतपद प्राप्त झाल्यावर, त्या प्रसंगी आयुष्यमान अनुरुद्धांनी या गाथा म्हटल्या – ‘‘မမ သင်္ကပ္ပမညာယ, သတ္ထာ လောကေ အနုတ္တရော; မနောမယေန ကာယေန, ဣဒ္ဓိယာ ဥပသင်္ကမိ. “माझा संकल्प जाणून, जगातील अनुत्तर शास्त्यांनी (बुद्धांनी) मनोमय कायेने, ऋद्धीच्या (प्रातिहार्याच्या) बळाने माझ्याकडे आगमन केले. ‘‘ယထာ မေ အဟု သင်္ကပ္ပော, တတော ဥတ္တရိ ဒေသယိ; နိပ္ပပဉ္စရတော ဗုဒ္ဓေါ, နိပ္ပပဉ္စံ အဒေသယိ. “माझा जसा संकल्प होता, त्याहून अधिक त्यांनी मला उपदेश केला. प्रपंचरहित (तृष्णा-मान-दृष्टी विरहित) निर्वाणात रममाण असणाऱ्या बुद्धांनी मला प्रपंचरहित निर्वाणाचाच उपदेश केला. ‘‘တဿာဟံ ဓမ္မမညာယ, ဝိဟာသိံ သာသနေ ရတော; တိဿော ဝိဇ္ဇာ အနုပ္ပတ္တာ, ကတံ ဗုဒ္ဓဿ သာသန’’န္တိ. ဒသမံ; “त्यांचा धम्म जाणून मी त्यांच्या शासनात (शिकवणुकीत) रममाण होऊन विहार केला. मी तिन्ही विद्या (त्रिविद्या) प्राप्त केल्या आहेत आणि बुद्धांचे शासन (आज्ञा) पूर्ण केले आहे.” (दहावे सूत्र समाप्त) ဂဟပတိဝဂ္ဂေါ တတိယော. तिसरा गृहपती वर्ग समाप्त. တဿုဒ္ဒါနံ – त्याची अनुक्रमणिका (उद्दान) – ဒွေ ဥဂ္ဂါ ဒွေ စ ဟတ္ထကာ, မဟာနာမေန ဇီဝကော; ဒွေ ဗလာ အက္ခဏာ ဝုတ္တာ, အနုရုဒ္ဓေန တေ ဒသာတိ. दोन उग्ग सूत्रे, दोन हत्थक सूत्रे, महानाम सूत्र, जीवक सूत्र, दोन बल सूत्रे, अक्षण सूत्र आणि अनुरुद्ध सूत्र – अशी ही दहा सूत्रे आहेत. ၄. ဒါနဝဂ္ဂေါ ४. दान वर्ग ၁. ပဌမဒါနသုတ္တံ १. प्रथम दान सूत्र ၃၁. ‘‘အဋ္ဌိမာနိ, ဘိက္ခဝေ, ဒါနာနိ. ကတမာနိ အဋ္ဌ? အာသဇ္ဇ ဒါနံ ဒေတိ, ဘယာ ဒါနံ ဒေတိ, ‘အဒါသိ မေ’တိ ဒါနံ ဒေတိ, ‘ဒဿတိ မေ’တိ ဒါနံ ဒေတိ, ‘သာဟု ဒါန’န္တိ ဒါနံ ဒေတိ, ‘အဟံ ပစာမိ, ဣမေ န ပစန္တိ; နာရဟာမိ ပစန္တော အပစန္တာနံ ဒါနံ အဒါတု’န္တိ ဒါနံ ဒေတိ, ‘ဣမံ မေ ဒါနံ ဒဒတော ကလျာဏော ကိတ္တိသဒ္ဒေါ အဗ္ဘုဂ္ဂစ္ဆတီ’တိ ဒါနံ ဒေတိ, စိတ္တာလင်္ကာရစိတ္တပရိက္ခာရတ္ထံ ဒါနံ ဒေတိ. ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဒါနာနီ’’တိ. ပဌမံ. ३१. “भिक्षूहो, ही आठ प्रकारची दाने आहेत. कोणती आठ? (१) समोर आलेल्या याचकाला पाहून दान देतो, (२) भयापोटी दान देतो, (३) ‘त्याने मला दिले होते’ असा विचार करून दान देतो, (४) ‘तो मला देईल’ असा विचार करून दान देतो, (५) ‘दान देणे चांगले आहे’ असा विचार करून दान देतो, (६) ‘मी अन्न शिजवतो, हे शिजवत नाहीत; म्हणून शिजवणाऱ्या माझ्यासाठी न शिजवणाऱ्यांना दान न देणे योग्य नाही’ असा विचार करून दान देतो, (७) ‘हे दान दिल्याने माझी चांगली कीर्ती पसरेल’ असा विचार करून दान देतो, (८) चित्ताचे अलंकार आणि चित्ताचे परिकर्म (चित्त सुसंस्कृत करण्यासाठी) म्हणून दान देतो. भिक्षूहो, हीच ती आठ दाने आहेत.” (पहिले सूत्र समाप्त) ၂. ဒုတိယဒါနသုတ္တံ २. द्वितीय दान सूत्र ၃၂. ३२. ‘‘သဒ္ဓါ ဟိရိယံ ကုသလဉ္စ ဒါနံ,ဓမ္မာ ဧတေ သပ္ပုရိသာနုယာတာ; ဧတဉှိ မဂ္ဂံ ဒိဝိယံ ဝဒန္တိ,ဧတေန ဟိ ဂစ္ဆတိ ဒေဝလောက’’န္တိ. ဒုတိယံ; “श्रद्धा, हिरी (पापाची लाज वाटणे) आणि कुशल दान – या गुणांचे सत्पुरुष अनुसरण करतात. यालाच देवलोकाचा मार्ग म्हणतात, ज्याद्वारे मनुष्य देवलोकात जातो.” (दुसरे सूत्र समाप्त) ၃. ဒါနဝတ္ထုသုတ္တံ ३. दानवस्तू सूत्र ၃၃. ‘‘အဋ္ဌိမာနိ[Pg.69], ဘိက္ခဝေ, ဒါနဝတ္ထူနိ. ကတမာနိ အဋ္ဌ? ဆန္ဒာ ဒါနံ ဒေတိ, ဒေါသာ ဒါနံ ဒေတိ, မောဟာ ဒါနံ ဒေတိ, ဘယာ ဒါနံ ဒေတိ, ‘ဒိန္နပုဗ္ဗံ ကတပုဗ္ဗံ ပိတုပိတာမဟေဟိ, နာရဟာမိ ပေါရာဏံ ကုလဝံသံ ဟာပေတု’န္တိ ဒါနံ ဒေတိ, ‘ဣမာဟံ ဒါနံ ဒတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ သုဂတိံ သဂ္ဂံ လောကံ ဥပပဇ္ဇိဿာမီ’တိ ဒါနံ ဒေတိ, ‘ဣမံ မေ ဒါနံ ဒဒတော စိတ္တံ ပသီဒတိ, အတ္တမနတာ သောမနဿံ ဥပဇာယတီ’တိ ဒါနံ ဒေတိ, စိတ္တာလင်္ကာရစိတ္တပရိက္ခာရတ္ထံ ဒါနံ ဒေတိ. ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဒါနဝတ္ထူနီ’’တိ. တတိယံ. ३३. “भिक्षूहो, दानाची ही आठ कारणे (वस्तू) आहेत. कोणती आठ? (१) आवडीने (छंदाने) दान देतो, (२) द्वेषाने दान देतो, (३) मोहाने दान देतो, (४) भयाने दान देतो, (५) ‘माझ्या वडिलांनी आणि पूर्वजांनी पूर्वी दान दिले होते, मी माझ्या प्राचीन कुलपरंपरेचा त्याग करणे योग्य नाही’ असा विचार करून दान देतो, (६) ‘हे दान देऊन, शरीराच्या विघटनानंतर, मृत्यूनंतर मी सुगती असलेल्या स्वर्गलोकात उत्पन्न होईन’ असा विचार करून दान देतो, (७) ‘हे दान देताना माझे चित्त प्रसन्न होते आणि मनात आनंद व सोमनस्य निर्माण होते’ असा विचार करून दान देतो, (८) चित्ताचे अलंकार आणि चित्ताचे परिकर्म म्हणून दान देतो. भिक्षूहो, हीच ती दानाची आठ कारणे आहेत.” (तिसरे सूत्र समाप्त) ၄. ခေတ္တသုတ္တံ ४. क्षेत्र सूत्र ၃၄. ‘‘အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေ, ဘိက္ခဝေ, ခေတ္တေ ဗီဇံ ဝုတ္တံ န မဟပ္ဖလံ ဟောတိ န မဟဿာဒံ န ဖာတိသေယျံ. ကထံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ခေတ္တံ ဥန္နာမနိန္နာမိ စ ဟောတိ, ပါသာဏသက္ခရိကဉ္စ ဟောတိ, ဦသရဉ္စ ဟောတိ, န စ ဂမ္ဘီရသိတံ ဟောတိ, န အာယသမ္ပန္နံ ဟောတိ, န အပါယသမ္ပန္နံ ဟောတိ, န မာတိကာသမ္ပန္နံ ဟောတိ, န မရိယာဒသမ္ပန္နံ ဟောတိ. ဧဝံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေ, ဘိက္ခဝေ, ခေတ္တေ ဗီဇံ ဝုတ္တံ န မဟပ္ဖလံ ဟောတိ န မဟဿာဒံ န ဖာတိသေယျံ. ३४. “भिक्षूहो, आठ दोषांनी युक्त असलेल्या शेतात (क्षेत्रात) पेरलेले बी महाफळ देणारे ठरत नाही, ते चवदार होत नाही आणि त्याची उत्तम वाढही होत नाही. कोणत्या आठ दोषांनी युक्त? भिक्षूहो, इथे शेत (१) उंच-सखल असते, (२) दगड-गोट्यांनी युक्त असते, (३) खारट (उषर) असते, (४) खोल नांगरलेले नसते, (५) पाणी येण्याचा मार्ग नसलेले असते, (६) पाणी वाहून जाण्याचा मार्ग नसलेले असते, (७) पाट नसलेले असते, आणि (८) बांध नसलेले असते. भिक्षूहो, अशा आठ दोषांनी युक्त असलेल्या शेतात पेरलेले बी महाफळ देणारे ठरत नाही, चवदार होत नाही आणि त्याची उत्तम वाढही होत नाही. ‘‘ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေသု သမဏဗြာဟ္မဏေသု ဒါနံ ဒိန္နံ န မဟပ္ဖလံ ဟောတိ န မဟာနိသံသံ န မဟာဇုတိကံ န မဟာဝိပ္ဖာရံ. ကထံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေသု? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, သမဏဗြာဟ္မဏာ မိစ္ဆာဒိဋ္ဌိကာ ဟောန္တိ, မိစ္ဆာသင်္ကပ္ပာ, မိစ္ဆာဝါစာ, မိစ္ဆာကမ္မန္တာ, မိစ္ဆာအာဇီဝါ, မိစ္ဆာဝါယာမာ, မိစ္ဆာသတိနော, မိစ္ဆာသမာဓိနော. ဧဝံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေသု, ဘိက္ခဝေ, သမဏဗြာဟ္မဏေသု ဒါနံ ဒိန္နံ န မဟပ္ဖလံ ဟောတိ န မဟာနိသံသံ န မဟာဇုတိကံ န မဟာဝိပ္ဖာရံ. “त्याचप्रमाणे भिक्षूहो, आठ दोषांनी युक्त असलेल्या श्रमण-ब्राह्मणांना दिलेले दान महाफळ देणारे ठरत नाही, महान फायद्याचे ठरत नाही, महातेजस्वी ठरत नाही आणि व्यापक प्रभाव पाडणारे ठरत नाही. कोणत्या आठ दोषांनी युक्त? भिक्षूहो, इथे श्रमण-ब्राह्मण (१) मिथ्यादृष्टी असतात, (२) मिथ्या संकल्प करणारे, (३) मिथ्या बोलणारे, (४) मिथ्या कर्म करणारे, (५) मिथ्या आजीविका चालवणारे, (६) मिथ्या व्यायाम (प्रयत्न) करणारे, (७) मिथ्या स्मृती असणारे, आणि (८) मिथ्या समाधी असणारे असतात. भिक्षूहो, अशा आठ दोषांनी युक्त असलेल्या श्रमण-ब्राह्मणांना दिलेले दान महाफळ देणारे ठरत नाही, महान फायद्याचे ठरत नाही, महातेजस्वी ठरत नाही आणि व्यापक प्रभाव पाडणारे ठरत नाही. ‘‘အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေ, ဘိက္ခဝေ, ခေတ္တေ ဗီဇံ ဝုတ္တံ မဟပ္ဖလံ ဟောတိ မဟဿာဒံ ဖာတိသေယျံ. ကထံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ခေတ္တံ အနုန္နာမာနိန္နာမိ စ ဟောတိ, အပါသာဏသက္ခရိကဉ္စ ဟောတိ, အနူသရဉ္စ ဟောတိ, ဂမ္ဘီရသိတံ ဟောတိ, အာယသမ္ပန္နံ ဟောတိ, အပါယသမ္ပန္နံ ဟောတိ, မာတိကာသမ္ပန္နံ [Pg.70] ဟောတိ, မရိယာဒသမ္ပန္နံ ဟောတိ. ဧဝံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေ, ဘိက္ခဝေ, ခေတ္တေ ဗီဇံ ဝုတ္တံ မဟပ္ဖလံ ဟောတိ မဟဿာဒံ ဖာတိသေယျံ. “भिक्षूहो, आठ गुणांनी युक्त असलेल्या शेतात पेरलेले बी महाफळ देणारे ठरते, चवदार होते आणि त्याची उत्तम वाढ होते. कोणत्या आठ गुणांनी युक्त? भिक्षूहो, इथे शेत (१) उंच-सखल नसलेले (समतल) असते, (२) दगड-गोटे नसलेले असते, (३) खारट नसलेले असते, (४) खोल नांगरलेले असते, (५) पाणी येण्याचा मार्ग असलेले असते, (६) पाणी वाहून जाण्याचा मार्ग असलेले असते, (७) पाट असलेले असते, आणि (८) बांध असलेले असते. भिक्षूहो, अशा आठ गुणांनी युक्त असलेल्या शेतात पेरलेले बी महाफळ देणारे ठरते, चवदार होते आणि त्याची उत्तम वाढ होते. ‘‘ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေသု သမဏဗြာဟ္မဏေသု ဒါနံ ဒိန္နံ မဟပ္ဖလံ ဟောတိ မဟာနိသံသံ မဟာဇုတိကံ မဟာဝိပ္ဖာရံ. ကထံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေသု? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, သမဏဗြာဟ္မဏာ သမ္မာဒိဋ္ဌိကာ ဟောန္တိ, သမ္မာသင်္ကပ္ပာ, သမ္မာဝါစာ, သမ္မာကမ္မန္တာ, သမ္မာအာဇီဝါ, သမ္မာဝါယာမာ, သမ္မာသတိနော, သမ္မာသမာဓိနော. ဧဝံ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတေသု, ဘိက္ခဝေ, သမဏဗြာဟ္မဏေသု ဒါနံ ဒိန္နံ မဟပ္ဖလံ ဟောတိ မဟာနိသံသံ မဟာဇုတိကံ မဟာဝိပ္ဖာရ’’န္တိ. “त्याचप्रमाणे भिक्षूहो, आठ गुणांनी युक्त असलेल्या श्रमण-ब्राह्मणांना दिलेले दान महाफळ देणारे ठरते, महान फायद्याचे ठरते, महातेजस्वी ठरते आणि व्यापक प्रभाव पाडणारे ठरते. कोणत्या आठ गुणांनी युक्त? भिक्षूहो, इथे श्रमण-ब्राह्मण (१) सम्यक दृष्टी असणारे असतात, (२) सम्यक संकल्प करणारे, (३) सम्यक बोलणारे, (४) सम्यक कर्म करणारे, (५) सम्यक आजीविका चालवणारे, (६) सम्यक व्यायाम (प्रयत्न) करणारे, (७) सम्यक स्मृती असणारे, आणि (८) सम्यक समाधी असणारे असतात. भिक्षूहो, अशा आठ गुणांनी युक्त असलेल्या श्रमण-ब्राह्मणांना दिलेले दान महाफळ देणारे ठरते, महान फायद्याचे ठरते, महातेजस्वी ठरते आणि व्यापक प्रभाव पाडणारे ठरते.” (चौथे सूत्र समाप्त) ‘‘ယထာပိ ခေတ္တေ သမ္ပန္နေ, ပဝုတ္တာ ဗီဇသမ္ပဒါ; ဒေဝေ သမ္ပာဒယန္တမှိ, ဟောတိ ဓညဿ သမ္ပဒါ. “ज्याप्रमाणे उत्तम शेतात पेरलेले उत्तम दर्जाचे बी, योग्य वेळी पाऊस पडल्यास धान्याची समृद्धी घडवून आणते; ‘‘အနီတိသမ္ပဒါ ဟောတိ, ဝိရူဠှီ ဘဝတိ သမ္ပဒါ; ဝေပုလ္လသမ္ပဒါ ဟောတိ, ဖလံ ဝေ ဟောတိ သမ္ပဒါ. “तेव्हा रोगराई नसण्याची समृद्धी होते, पिकाची उत्तम वाढ होते, विपुलता प्राप्त होते आणि फळांची समृद्धी होते; ‘‘ဧဝံ သမ္ပန္နသီလေသု, ဒိန္နာ ဘောဇနသမ္ပဒါ; သမ္ပဒါနံ ဥပနေတိ, သမ္ပန္နံ ဟိဿ တံ ကတံ. “त्याचप्रमाणे शीलसंपन्न व्यक्तींना दिलेले उत्तम भोजन अनेक प्रकारच्या समृद्धीला कारणीभूत ठरते, कारण ते सत्कृत्य अत्यंत श्रेष्ठ दर्जाचे असते. ‘‘တသ္မာ သမ္ပဒမာကင်္ခီ, သမ္ပန္နတ္ထူဓ ပုဂ္ဂလော; သမ္ပန္နပညေ သေဝေထ, ဧဝံ ဣဇ္ဈန္တိ သမ္ပဒါ. “म्हणून ज्या व्यक्तीला समृद्धीची आकांक्षा आहे, त्याने शीलसंपन्न व्हावे आणि प्रज्ञासंपन्न व्यक्तींची सेवा करावी; अशा प्रकारे सर्व समृद्धी प्राप्त होते. ‘‘ဝိဇ္ဇာစရဏသမ္ပန္နေ, လဒ္ဓါ စိတ္တဿ သမ္ပဒံ; ကရောတိ ကမ္မသမ္ပဒံ, လဘတိ စတ္ထသမ္ပဒံ. “विद्या आणि आचरण यांनी संपन्न असलेल्या व्यक्तीच्या ठिकाणी चित्ताची प्रसन्नता प्राप्त करून, मनुष्य कुशल कर्माची समृद्धी करतो आणि कल्याणाची प्राप्ती करून घेतो. ‘‘လောကံ ဉတွာ ယထာဘူတံ, ပပ္ပုယျ ဒိဋ္ဌိသမ္ပဒံ; မဂ္ဂသမ္ပဒမာဂမ္မ, ယာတိ သမ္ပန္နမာနသော. “जगाला यथार्थपणे जाणून, विपश्यना दृष्टीची समृद्धी प्राप्त करून आणि आर्य अष्टांगिक मार्गाच्या समृद्धीचा आश्रय घेऊन, प्रसन्न चित्त असलेला मनुष्य अर्हतपदाला प्राप्त होतो. ‘‘ဩဓုနိတွာ မလံ သဗ္ဗံ, ပတွာ နိဗ္ဗာနသမ္ပဒံ; မုစ္စတိ သဗ္ဗဒုက္ခေဟိ, သာ ဟောတိ သဗ္ဗသမ္ပဒါ’’တိ. စတုတ္ထံ; “सर्व मळ (क्लेश) झटकून टाकून, निर्वाणरूपी समृद्धी प्राप्त करून तो सर्व दुःखांतून मुक्त होतो; हीच खरी सर्वतोपरी समृद्धी होय.” (चौथे सूत्र समाप्त) ၅. ဒါနူပပတ္တိသုတ္တံ ५. दानूपपत्ति सुत्त ၃၅. ‘‘အဋ္ဌိမာ, ဘိက္ခဝေ, ဒါနူပပတ္တိယော. ကတမာ အဋ္ဌ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စော ဒါနံ ဒေတိ သမဏဿ ဝါ ဗြာဟ္မဏဿ ဝါ အန္နံ ပါနံ ဝတ္ထံ ယာနံ [Pg.71] မာလာဂန္ဓဝိလေပနံ သေယျာဝသထပဒီပေယျံ. သော ယံ ဒေတိ တံ ပစ္စာသီသတိ. သော ပဿတိ ခတ္တိယမဟာသာလေ ဝါ ဗြာဟ္မဏမဟာသာလေ ဝါ ဂဟပတိမဟာသာလေ ဝါ ပဉ္စဟိ ကာမဂုဏေဟိ သမပ္ပိတေ သမင်္ဂီဘူတေ ပရိစာရယမာနေ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ခတ္တိယမဟာသာလာနံ ဝါ ဗြာဟ္မဏမဟာသာလာနံ ဝါ ဂဟပတိမဟာသာလာနံ ဝါ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ’န္တိ! သော တံ စိတ္တံ ဒဟတိ, တံ စိတ္တံ အဓိဋ္ဌာတိ, တံ စိတ္တံ ဘာဝေတိ. တဿ တံ စိတ္တံ ဟီနေ ဝိမုတ္တံ, ဥတ္တရိ အဘာဝိတံ, တတြူပပတ္တိယာ သံဝတ္တတိ. ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ခတ္တိယမဟာသာလာနံ ဝါ ဗြာဟ္မဏမဟာသာလာနံ ဝါ ဂဟပတိမဟာသာလာနံ ဝါ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တဉ္စ ခေါ သီလဝတော ဝဒါမိ, နော ဒုဿီလဿ. ဣဇ္ဈတိ, ဘိက္ခဝေ, သီလဝတော စေတောပဏိဓိ ဝိသုဒ္ဓတ္တာ. ३५. “भिक्खूहो, दानामुळे (पुनर्जन्म) प्राप्त होणाऱ्या या आठ गती (उत्पत्ती) आहेत. कोणत्या आठ? येथे, भिक्खूहो, एखादी व्यक्ती श्रमणाला किंवा ब्राह्मणाला दान देते: अन्न, पेय, वस्त्र, वाहन, पुष्पमाला, गंध, विलेपन, शय्या, निवास आणि प्रकाश (दिवे). तो जे काही देतो, त्या बदल्यात काहीतरी मिळण्याची अपेक्षा करतो. तो श्रीमंत क्षत्रियांना, श्रीमंत ब्राह्मणांना किंवा श्रीमंत गृहपतींना पाच प्रकारच्या कामगुणांनी युक्त, समृद्ध आणि विलासात रममाण झालेले पाहतो. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘अहाहा! शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मी श्रीमंत क्षत्रियांच्या, श्रीमंत ब्राह्मणांच्या किंवा श्रीमंत गृहपतींच्या सहवासात जन्माला यावे!’ तो आपले चित्त त्यावरच केंद्रित करतो, त्या चित्ताचाच अधिष्ठान करतो आणि त्या चित्ताचीच भावना करतो. त्याचे ते चित्त हीन गोष्टींमध्येच गुंतलेले असते, त्याहून उच्च गोष्टींसाठी विकसित केलेले नसते, त्यामुळे ते त्याला तिथेच जन्म घेण्यास कारणीभूत ठरते. शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, तो श्रीमंत क्षत्रियांच्या, श्रीमंत ब्राह्मणांच्या किंवा श्रीमंत गृहपतींच्या सहवासात जन्म घेतो. आणि हे मी शीलवानाच्या बाबतीतच सांगतो, दुःशीलाच्या बाबतीत नाही. भिक्खूहो, शीलवानाच्या मनातील संकल्प त्याच्या शुद्धतेमुळे यशस्वी होतो.” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စော ဒါနံ ဒေတိ သမဏဿ ဝါ ဗြာဟ္မဏဿ ဝါ အန္နံ ပါနံ ဝတ္ထံ ယာနံ မာလာဂန္ဓဝိလေပနံ သေယျာဝသထပဒီပေယျံ. သော ယံ ဒေတိ တံ ပစ္စာသီသတိ. တဿ သုတံ ဟောတိ – ‘စာတုမဟာရာဇိကာ ဒေဝါ ဒီဃာယုကာ ဝဏ္ဏဝန္တော သုခဗဟုလာ’တိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ’န္တိ. သော တံ စိတ္တံ ဒဟတိ, တံ စိတ္တံ အဓိဋ္ဌာတိ, တံ စိတ္တံ ဘာဝေတိ. တဿ တံ စိတ္တံ ဟီနေ ဝိမုတ္တံ, ဥတ္တရိ အဘာဝိတံ, တတြူပပတ္တိယာ သံဝတ္တတိ. ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တဉ္စ ခေါ သီလဝတော ဝဒါမိ, နော ဒုဿီလဿ. ဣဇ္ဈတိ, ဘိက္ခဝေ, သီလဝတော စေတောပဏိဓိ ဝိသုဒ္ဓတ္တာ. “पुन्हा, भिक्खूहो, येथे एखादी व्यक्ती श्रमणाला किंवा ब्राह्मणाला दान देते: अन्न, पेय, वस्त्र, वाहन, पुष्पमाला, गंध, विलेपन, शय्या, निवास आणि प्रकाश. तो जे काही देतो, त्या बदल्यात काहीतरी मिळण्याची अपेक्षा करतो. त्याने ऐकलेले असते – ‘चातुमहाराजिक देव दीर्घायुषी, रूपवान आणि अत्यंत सुखी असतात.’ त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘अहाहा! शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मी चातुमहाराजिक देवांच्या सहवासात जन्माला यावे!’ तो आपले चित्त त्यावरच केंद्रित करतो, त्या चित्ताचाच अधिष्ठान करतो आणि त्या चित्ताचीच भावना करतो. त्याचे ते चित्त हीन गोष्टींमध्येच गुंतलेले असते, त्याहून उच्च गोष्टींसाठी विकसित केलेले नसते, त्यामुळे ते त्याला तिथेच जन्म घेण्यास कारणीभूत ठरते. शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, तो चातुमहाराजिक देवांच्या सहवासात जन्म घेतो. आणि हे मी शीलवानाच्या बाबतीतच सांगतो, दुःशीलाच्या बाबतीत नाही. भिक्खूहो, शीलवानाच्या मनातील संकल्प त्याच्या शुद्धतेमुळे यशस्वी होतो.” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စော ဒါနံ ဒေတိ သမဏဿ ဝါ ဗြာဟ္မဏဿ ဝါ အန္နံ ပါနံ ဝတ္ထံ ယာနံ မာလာဂန္ဓဝိလေပနံ သေယျာဝသထပဒီပေယျံ. သော ယံ ဒေတိ တံ ပစ္စာသီသတိ. တဿ သုတံ ဟောတိ – တာဝတိံသာ ဒေဝါ…ပေ… ယာမာ ဒေဝါ… တုသိတာ ဒေဝါ… နိမ္မာနရတီ ဒေဝါ… ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီ ဒေဝါ ဒီဃာယုကာ ဝဏ္ဏဝန္တော သုခဗဟုလာတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ’န္တိ. သော တံ စိတ္တံ ဒဟတိ, တံ စိတ္တံ အဓိဋ္ဌာတိ[Pg.72], တံ စိတ္တံ ဘာဝေတိ. တဿ တံ စိတ္တံ ဟီနေ ဝိမုတ္တံ, ဥတ္တရိ အဘာဝိတံ, တတြူပပတ္တိယာ သံဝတ္တတိ. ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တဉ္စ ခေါ သီလဝတော ဝဒါမိ, နော ဒုဿီလဿ. ဣဇ္ဈတိ, ဘိက္ခဝေ, သီလဝတော စေတောပဏိဓိ ဝိသုဒ္ဓတ္တာ. “पुन्हा, भिक्खूहो, येथे एखादी व्यक्ती श्रमणाला किंवा ब्राह्मणाला दान देते: अन्न, पेय, वस्त्र, वाहन, पुष्पमाला, गंध, विलेपन, शय्या, निवास आणि प्रकाश. तो जे काही देतो, त्या बदल्यात काहीतरी मिळण्याची अपेक्षा करतो. त्याने ऐकलेले असते – ‘तावतींस देव... याम देव... तुसित देव... निम्माणरती देव... परनिम्मितवसवत्ती देव दीर्घायुषी, रूपवान आणि अत्यंत सुखी असतात.’ त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘अहाहा! शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मी परनिम्मितवसवत्ती देवांच्या सहवासात जन्माला यावे!’ तो आपले चित्त त्यावरच केंद्रित करतो, त्या चित्ताचाच अधिष्ठान करतो आणि त्या चित्ताचीच भावना करतो. त्याचे ते चित्त हीन गोष्टींमध्येच गुंतलेले असते, त्याहून उच्च गोष्टींसाठी विकसित केलेले नसते, त्यामुळे ते त्याला तिथेच जन्म घेण्यास कारणीभूत ठरते. शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, तो परनिम्मितवसवत्ती देवांच्या सहवासात जन्म घेतो. आणि हे मी शीलवानाच्या बाबतीतच सांगतो, दुःशीलाच्या बाबतीत नाही. भिक्खूहो, शीलवानाच्या मनातील संकल्प त्याच्या शुद्धतेमुळे यशस्वी होतो.” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စော ဒါနံ ဒေတိ သမဏဿ ဝါ ဗြာဟ္မဏဿ ဝါ အန္နံ ပါနံ ဝတ္ထံ ယာနံ မာလာဂန္ဓဝိလေပနံ သေယျာဝသထပဒီပေယျံ. သော ယံ ဒေတိ တံ ပစ္စာသီသတိ. တဿ သုတံ ဟောတိ – ‘ဗြဟ္မကာယိကာ ဒေဝါ ဒီဃာယုကာ ဝဏ္ဏဝန္တော သုခဗဟုလာ’တိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ဗြဟ္မကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ’န္တိ. သော တံ စိတ္တံ ဒဟတိ, တံ စိတ္တံ အဓိဋ္ဌာတိ, တံ စိတ္တံ ဘာဝေတိ. တဿ တံ စိတ္တံ ဟီနေ ဝိမုတ္တံ, ဥတ္တရိ အဘာဝိတံ, တတြူပပတ္တိယာ သံဝတ္တတိ. ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ဗြဟ္မကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တဉ္စ ခေါ သီလဝတော ဝဒါမိ, နော ဒုဿီလဿ; ဝီတရာဂဿ, နော သရာဂဿ. ဣဇ္ဈတိ, ဘိက္ခဝေ, သီလဝတော စေတောပဏိဓိ ဝီတရာဂတ္တာ. ဣမာ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဒါနူပပတ္တိယော’’တိ. ပဉ္စမံ. “पुन्हा, भिक्खूहो, येथे एखादी व्यक्ती श्रमणाला किंवा ब्राह्मणाला दान देते: अन्न, पेय, वस्त्र, वाहन, पुष्पमाला, गंध, विलेपन, शय्या, निवास आणि प्रकाश. तो जे काही देतो, त्या बदल्यात काहीतरी मिळण्याची अपेक्षा करतो. त्याने ऐकलेले असते – ‘ब्रह्मकायिक देव दीर्घायुषी, रूपवान आणि अत्यंत सुखी असतात.’ त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘अहाहा! शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मी ब्रह्मकायिक देवांच्या सहवासात जन्माला यावे!’ तो आपले चित्त त्यावरच केंद्रित करतो, त्या चित्ताचाच अधिष्ठान करतो आणि त्या चित्ताचीच भावना करतो. त्याचे ते चित्त हीन गोष्टींमध्येच गुंतलेले असते, त्याहून उच्च गोष्टींसाठी विकसित केलेले नसते, त्यामुळे ते त्याला तिथेच जन्म घेण्यास कारणीभूत ठरते. शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, तो ब्रह्मकायिक देवांच्या सहवासात जन्म घेतो. आणि हे मी शीलवानाच्या बाबतीतच सांगतो, दुःशीलाच्या बाबतीत नाही; वीतरागी (रागमुक्त) व्यक्तीच्या बाबतीत सांगतो, सरागी (रागासहित) व्यक्तीच्या बाबतीत नाही. भिक्खूहो, शीलवानाचा मनातील संकल्प त्याच्या वीतरागतेमुळे यशस्वी होतो. भिक्खूहो, या आहेत दानामुळे प्राप्त होणाऱ्या आठ गती.” पाचवे सुत्त समाप्त. ၆. ပုညကိရိယဝတ္ထုသုတ္တံ ६. पुण्यक्रियावस्तू सुत्त ၃၆. ‘‘တီဏိမာနိ, ဘိက္ခဝေ, ပုညကိရိယဝတ္ထူနိ. ကတမာနိ တီဏိ? ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု. ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု ပရိတ္တံ ကတံ ဟောတိ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု ပရိတ္တံ ကတံ ဟောတိ, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ နာဘိသမ္ဘောတိ. သော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနုဿဒေါဘဂျံ ဥပပဇ္ဇတိ. ३६. “भिक्खूहो, ही तीन पुण्यक्रियावस्तू (पुण्य कर्माचे आधार) आहेत. कोणती तीन? दानमय पुण्यक्रियावस्तू, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू आणि भावनामय पुण्यक्रियावस्तू. येथे, भिक्खूहो, एखाद्या व्यक्तीने दानमय पुण्यक्रियावस्तू अगदी थोड्या प्रमाणात केलेली असते, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू अगदी थोड्या प्रमाणात केलेली असते, परंतु भावनामय पुण्यक्रियावस्तूचा अभ्यास केलेला नसतो. तो शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मानवांमध्ये प्रतिकूल (दरिद्री) परिस्थितीत जन्म घेतो.” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု မတ္တသော ကတံ ဟောတိ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု မတ္တသော ကတံ ဟောတိ, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ နာဘိသမ္ဘောတိ. သော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနုဿသောဘဂျံ ဥပပဇ္ဇတိ. “पुन्हा, भिक्खूहो, येथे एखाद्या व्यक्तीने दानमय पुण्यक्रियावस्तू मध्यम प्रमाणात केलेली असते, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू मध्यम प्रमाणात केलेली असते, परंतु भावनामय पुण्यक्रियावस्तूचा अभ्यास केलेला नसतो. तो शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मानवांमध्ये अनुकूल (सुदैवी) परिस्थितीत जन्म घेतो.” ‘‘ဣဓ [Pg.73] ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ နာဘိသမ္ဘောတိ. သော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တတြ, ဘိက္ခဝေ, စတ္တာရော မဟာရာဇာနော ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, စာတုမဟာရာဇိကေ ဒေဝေ ဒသဟိ ဌာနေဟိ အဓိဂဏှန္တိ – ဒိဗ္ဗေန အာယုနာ, ဒိဗ္ဗေန ဝဏ္ဏေန, ဒိဗ္ဗေန သုခေန, ဒိဗ္ဗေန ယသေန, ဒိဗ္ဗေန အာဓိပတေယျေန, ဒိဗ္ဗေဟိ ရူပေဟိ, ဒိဗ္ဗေဟိ သဒ္ဒေဟိ, ဒိဗ္ဗေဟိ ဂန္ဓေဟိ, ဒိဗ္ဗေဟိ ရသေဟိ, ဒိဗ္ဗေဟိ ဖောဋ္ဌဗ္ဗေဟိ. “पुन्हा, भिक्खूहो, येथे एखाद्या व्यक्तीने दानमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, परंतु भावनामय पुण्यक्रियावस्तूचा अभ्यास केलेला नसतो. तो शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, चातुमहाराजिक देवांच्या सहवासात जन्म घेतो. तेथे, भिक्खूहो, चार महाराज (चार लोकपाल देव) दानमय पुण्यक्रियावस्तू आणि शीलमय पुण्यक्रियावस्तू अत्यंत उत्कृष्ट रीतीने केल्यामुळे, चातुमहाराजिक देवांपेक्षा दहा बाबतींत श्रेष्ठ ठरतात – दिव्य आयुष्य, दिव्य वर्ण, दिव्य सुख, दिव्य यश, दिव्य अधिपत्य, दिव्य रूप, दिव्य शब्द, दिव्य गंध, दिव्य रस आणि दिव्य स्पर्श.” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ နာဘိသမ္ဘောတိ. သော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ တာဝတိံသာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တတြ, ဘိက္ခဝေ, သက္ကော ဒေဝါနမိန္ဒော ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ တာဝတိံသေ ဒေဝေ ဒသဟိ ဌာနေဟိ အဓိဂဏှာတိ – ဒိဗ္ဗေန အာယုနာ…ပေ… ဒိဗ္ဗေဟိ ဖောဋ္ဌဗ္ဗေဟိ. “भिक्खूहो, या जगात एखाद्या व्यक्तीने दानमय पुण्यक्रियावस्तू (दानाचा पुण्यकर्म-आधार) विपुल प्रमाणात केलेली असते, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, परंतु भावनामय पुण्यक्रियावस्तू साध्य केलेली नसते. तो शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, तावतिंस देवांच्या सहवासात (लोकात) उत्पन्न होतो. भिक्खूहो, तिथे देवांचा राजा सक्क (शक्र), ज्याने दानमय पुण्यक्रियावस्तू आणि शीलमय पुण्यक्रियावस्तू अतिशय उत्कृष्टपणे आचरलेली असते, तो तावतिंस देवांपेक्षा दहा गोष्टींमध्ये श्रेष्ठ ठरतो—दिव्य आयुष्य...पे... दिव्य स्पर्श.” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ နာဘိသမ္ဘောတိ. သော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ယာမာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တတြ, ဘိက္ခဝေ, သုယာမော ဒေဝပုတ္တော ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, ယာမေ ဒေဝေ ဒသဟိ ဌာနေဟိ အဓိဂဏှာတိ – ဒိဗ္ဗေန အာယုနာ…ပေ… ဒိဗ္ဗေဟိ ဖောဋ္ဌဗ္ဗေဟိ. “भिक्खूहो, या जगात एखाद्या व्यक्तीने दानमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, परंतु भावनामय पुण्यक्रियावस्तू साध्य केलेली नसते. तो शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, याम देवांच्या सहवासात उत्पन्न होतो. भिक्खूहो, तिथे सुयाम देवपुत्र, ज्याने दानमय पुण्यक्रियावस्तू आणि शीलमय पुण्यक्रियावस्तू अतिशय उत्कृष्टपणे आचरलेली असते, तो याम देवांपेक्षा दहा गोष्टींमध्ये श्रेष्ठ ठरतो—दिव्य आयुष्य...पे... दिव्य स्पर्श.” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ နာဘိသမ္ဘောတိ. သော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ တုသိတာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တတြ, ဘိက္ခဝေ, သန္တုသိတော ဒေဝပုတ္တော ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, တုသိတေ ဒေဝေ ဒသဟိ ဌာနေဟိ အဓိဂဏှာတိ – ဒိဗ္ဗေန အာယုနာ…ပေ… ဒိဗ္ဗေဟိ ဖောဋ္ဌဗ္ဗေဟိ. “भिक्खूहो, या जगात एखाद्या व्यक्तीने दानमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, परंतु भावनामय पुण्यक्रियावस्तू साध्य केलेली नसते. तो शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, तुसित देवांच्या सहवासात उत्पन्न होतो. भिक्खूहो, तिथे संतुसित देवपुत्र, ज्याने दानमय पुण्यक्रियावस्तू आणि शीलमय पुण्यक्रियावस्तू अतिशय उत्कृष्टपणे आचरलेली असते, तो तुसित देवांपेक्षा दहा गोष्टींमध्ये श्रेष्ठ ठरतो—दिव्य आयुष्य...पे... दिव्य स्पर्श.” ‘‘ဣဓ [Pg.74] ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ နာဘိသမ္ဘောတိ. သော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ နိမ္မာနရတီနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တတြ, ဘိက္ခဝေ, သုနိမ္မိတော ဒေဝပုတ္တော ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, နိမ္မာနရတီဒေဝေ ဒသဟိ ဌာနေဟိ အဓိဂဏှာတိ – ဒိဗ္ဗေန အာယုနာ…ပေ… ဒိဗ္ဗေဟိ ဖောဋ္ဌဗ္ဗေဟိ. “भिक्खूहो, या जगात एखाद्या व्यक्तीने दानमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, परंतु भावनामय पुण्यक्रियावस्तू साध्य केलेली नसते. तो शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, निम्माणरती देवांच्या सहवासात उत्पन्न होतो. भिक्खूहो, तिथे सुनिम्मित देवपुत्र, ज्याने दानमय पुण्यक्रियावस्तू आणि शीलमय पुण्यक्रियावस्तू अतिशय उत्कृष्टपणे आचरलेली असते, तो निम्माणरती देवांपेक्षा दहा गोष्टींमध्ये श्रेष्ठ ठरतो—दिव्य आयुष्य...पे... दिव्य स्पर्श.” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဧကစ္စဿ ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထု အဓိမတ္တံ ကတံ ဟောတိ, ဘာဝနာမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ နာဘိသမ္ဘောတိ. သော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. တတြ, ဘိက္ခဝေ, ဝသဝတ္တီ ဒေဝပုတ္တော ဒါနမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, သီလမယံ ပုညကိရိယဝတ္ထုံ အတိရေကံ ကရိတွာ, ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီဒေဝေ ဒသဟိ ဌာနေဟိ အဓိဂဏှာတိ – ဒိဗ္ဗေန အာယုနာ, ဒိဗ္ဗေန ဝဏ္ဏေန, ဒိဗ္ဗေန သုခေန, ဒိဗ္ဗေန ယသေန, ဒိဗ္ဗေန အာဓိပတေယျေန, ဒိဗ္ဗေဟိ ရူပေဟိ, ဒိဗ္ဗေဟိ သဒ္ဒေဟိ, ဒိဗ္ဗေဟိ ဂန္ဓေဟိ, ဒိဗ္ဗေဟိ ရသေဟိ, ဒိဗ္ဗေဟိ ဖောဋ္ဌဗ္ဗေဟိ. ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, တီဏိ ပုညကိရိယဝတ္ထူနီ’’တိ. ဆဋ္ဌံ. “भिक्खूहो, या जगात एखाद्या व्यक्तीने दानमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, शीलमय पुण्यक्रियावस्तू विपुल प्रमाणात केलेली असते, परंतु भावनामय पुण्यक्रियावस्तू साध्य केलेली नसते. तो शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, परनिम्मितवसवत्ती देवांच्या सहवासात उत्पन्न होतो. भिक्खूहो, तिथे वसवत्ती देवपुत्र, ज्याने दानमय पुण्यक्रियावस्तू आणि शीलमय पुण्यक्रियावस्तू अतिशय उत्कृष्टपणे आचरलेली असते, तो परनिम्मितवसवत्ती देवांपेक्षा दहा गोष्टींमध्ये श्रेष्ठ ठरतो—दिव्य आयुष्य, दिव्य वर्ण (रूप), दिव्य सुख, दिव्य यश, दिव्य आधिपत्य (अधिकार), दिव्य रूप, दिव्य शब्द, दिव्य गंध, दिव्य रस आणि दिव्य स्पर्श. भिक्खूहो, हीच ती तीन पुण्यक्रियावस्तू होत.” सहावे सूत्र समाप्त. ၇. သပ္ပုရိသဒါနသုတ္တံ ७. सप्पुरिसदान सुत्त (सत्पुरुषाचे दान) ၃၇. ‘‘အဋ္ဌိမာနိ, ဘိက္ခဝေ, သပ္ပုရိသဒါနာနိ. ကတမာနိ အဋ္ဌ? သုစိံ ဒေတိ, ပဏီတံ ဒေတိ, ကာလေန ဒေတိ, ကပ္ပိယံ ဒေတိ, ဝိစေယျ ဒေတိ, အဘိဏှံ ဒေတိ, ဒဒံ စိတ္တံ ပသာဒေတိ, ဒတွာ အတ္တမနော ဟောတိ. ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ သပ္ပုရိသဒါနာနီ’’တိ. ३७. “भिक्खूहो, सत्पुरुषाची ही आठ दाने आहेत. कोणती आठ? तो शुद्ध (स्वच्छ) वस्तू दान करतो, उत्तम (स्वादिष्ट) वस्तू दान करतो, योग्य वेळी दान करतो, कप्पिय (योग्य) वस्तू दान करतो, विचारपूर्वक (निवडून) दान करतो, वारंवार दान करतो, दान देताना चित्त प्रसन्न करतो आणि दान दिल्यानंतर समाधानी (आनंदी) होतो. भिक्खूहो, हीच ती सत्पुरुषाची आठ दाने होत.” ‘‘သုစိံ ပဏီတံ ကာလေန, ကပ္ပိယံ ပါနဘောဇနံ; အဘိဏှံ ဒဒါတိ ဒါနံ, သုခေတ္တေသု ဗြဟ္မစာရိသု. “जो सुपीक शेतासारख्या असणाऱ्या, ब्रह्मचर्य पाळणाऱ्या (उत्तम शीलवंतांना) योग्य वेळी शुद्ध, उत्तम आणि कप्पिय (योग्य) अन्न-पान वारंवार दान करतो. ‘‘နေဝ ဝိပ္ပဋိသာရိဿ, စဇိတွာ အာမိသံ ဗဟုံ; ဧဝံ ဒိန္နာနိ ဒါနာနိ, ဝဏ္ဏယန္တိ ဝိပဿိနော. “पुष्कळ भौतिक वस्तूंचे दान करूनही जो कधी पश्चात्ताप करत नाही; अशा प्रकारे दिलेल्या दानाची विपस्सी (विशेष ज्ञान असणारे ज्ञानी) प्रशंसा करतात. ‘‘ဧဝံ ယဇိတွာ မေဓာဝီ, သဒ္ဓေါ မုတ္တေန စေတသာ; အဗျာဗဇ္ဈံ သုခံ လောကံ, ပဏ္ဍိတော ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ. သတ္တမံ; “अशा प्रकारे, श्रद्धावान, बुद्धिमान आणि प्रज्ञावान मनुष्य मुक्त चित्ताने दान देऊन, दुःखविरहित अशा सुखी लोकात उत्पन्न होतो.” सातवे सूत्र समाप्त. ၈. သပ္ပုရိသသုတ္တံ ८. सप्पुरिस सुत्त (सत्पुरुष सूत्र) ၃၈. ‘‘သပ္ပုရိသော[Pg.75], ဘိက္ခဝေ, ကုလေ ဇာယမာနော ဗဟုနော ဇနဿ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ – မာတာပိတူနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ပုတ္တဒါရဿ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ဒါသကမ္မကရပေါရိသဿ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, မိတ္တာမစ္စာနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ပုဗ္ဗပေတာနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ရညော အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ဒေဝတာနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, သမဏဗြာဟ္မဏာနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ. ३८. “भिक्खूहो, कुळामध्ये जन्मलेला सत्पुरुष अनेक लोकांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो—तो माता-पित्यांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो; पत्नी आणि मुलांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी and सुखासाठी असतो; दास, कामगार आणि सेवकांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो; मित्र आणि सहकाऱ्यांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो; पूर्वजांच्या (मृत नातेवाईकांच्या) कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो; राजाच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो; देवतांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो; आणि श्रमण-ब्राह्मणांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो. ‘‘သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, မဟာမေဃော သဗ္ဗသဿာနိ သမ္ပာဒေန္တော ဗဟုနော ဇနဿ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, သပ္ပုရိသော ကုလေ ဇာယမာနော ဗဟုနော ဇနဿ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ – မာတာပိတူနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ပုတ္တဒါရဿ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ဒါသကမ္မကရပေါရိသဿ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, မိတ္တာမစ္စာနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ပုဗ္ဗပေတာနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ရညော အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, ဒေဝတာနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတိ, သမဏဗြာဟ္မဏာနံ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဟောတီ’’တိ. “भिक्खूहो, ज्याप्रमाणे सर्व पिकांना समृद्ध करणारा मोठा पर्जन्यमेघ (महामेघ) अनेक लोकांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो; त्याचप्रमाणे, भिक्खूहो, कुळामध्ये जन्मलेला सत्पुरुष अनेक लोकांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो—तो माता-पित्यांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो, पत्नी आणि मुलांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो, दास, कामगार आणि सेवकांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो, मित्र आणि सहकाऱ्यांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो, पूर्वजांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो, राजाच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो, देवतांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो, आणि श्रमण-ब्राह्मणांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी असतो.” ‘‘ဗဟူနံ ဝတ အတ္ထာယ, သပ္ပညော ဃရမာဝသံ; မာတရံ ပိတရံ ပုဗ္ဗေ, ရတ္တိန္ဒိဝမတန္ဒိတော. “घरात राहणारा प्रज्ञावान मनुष्य खरोखरच अनेक लोकांच्या कल्याणासाठी जगतो. तो रात्रंदिवस आळस न करता, सर्वप्रथम आपल्या माता आणि पित्याची, ‘‘ပူဇေတိ သဟဓမ္မေန, ပုဗ္ဗေကတမနုဿရံ; အနာဂါရေ ပဗ္ဗဇိတေ, အပစေ ဗြဟ္မစာရယော. “त्यांनी पूर्वी केलेले उपकार आठवून, धर्मानुसार त्यांची सेवा-पूजा करतो. तसेच, घरदार सोडून प्रव्रजित झालेल्या, ब्रह्मचर्य पाळणाऱ्या (श्रमणांचा) आदर करतो. ‘‘နိဝိဋ္ဌသဒ္ဓေါ ပူဇေတိ, ဉတွာ ဓမ္မေ စ ပေသလော ; ရညော ဟိတော ဒေဝဟိတော, ဉာတီနံ သခိနံ ဟိတော. “दृढ श्रद्धा असलेला, धर्माला जाणणारा आणि शीलप्रिय मनुष्य (सत्पुरुषांची) पूजा करतो. तो राजाचे हित करणारा, देवांचे हित करणारा आणि नातेवाईक व मित्रांचे हित करणारा असतो. ‘‘သဗ္ဗေသံ သော ဟိတော ဟောတိ, သဒ္ဓမ္မေ သုပ္ပတိဋ္ဌိတော; ဝိနေယျ မစ္ဆေရမလံ, သ လောကံ ဘဇတေ သိဝ’’န္တိ. အဋ္ဌမံ; “सद्धर्मामध्ये चांगल्या प्रकारे प्रतिष्ठित असलेला तो सर्वांचे हित करणारा असतो. मत्सररूपी मळ (कंजूषपणा) दूर करून, तो कल्याणकारी (सुखी) लोकाप्रत पोहोचतो.” आठवे सूत्र समाप्त. ၉. အဘိသန္ဒသုတ္တံ ९. अभिसंद सुत्त ၃၉. ‘‘အဋ္ဌိမေ[Pg.76], ဘိက္ခဝေ, ပုညာဘိသန္ဒာ ကုသလာဘိသန္ဒာ သုခဿာဟာရာ သောဝဂ္ဂိကာ သုခဝိပါကာ သဂ္ဂသံဝတ္တနိကာ, ဣဋ္ဌာယ ကန္တာယ မနာပါယ ဟိတာယ သုခါယ သံဝတ္တန္တိ. ကတမေ အဋ္ဌ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ပဌမော ပုညာဘိသန္ဒော ကုသလာဘိသန္ဒော သုခဿာဟာရော သောဝဂ္ဂိကော သုခဝိပါကော သဂ္ဂသံဝတ္တနိကော, ဣဋ္ဌာယ ကန္တာယ မနာပါယ ဟိတာယ သုခါယ သံဝတ္တတိ. ३९. “भिक्खूहो, हे आठ पुण्याचे प्रवाह (पुण्याभिसंद), कुशलाचे प्रवाह (कुशलाभिसंद) आहेत, जे सुखाचे वहन करणारे, स्वर्गाला नेणारे, सुखद विपाक देणारे, स्वर्गाप्रत पोहोचवणारे आहेत; जे इष्ट, कांत (प्रिय), मनाजोगते (मनपसंत), हितासाठी आणि सुखासाठी कारणीभूत ठरतात. कोणते आठ? येथे, भिक्खूहो, आर्यश्रावक बुद्धाला शरण गेलेला असतो. भिक्खूहो, हा पहिला पुण्याचा प्रवाह, कुशलाचा प्रवाह, सुखाचे वहन करणारा, स्वर्गाला नेणारा, सुखद विपाक देणारा, स्वर्गाप्रत पोहोचवणारा आहे, जो इष्ट, कांत, मनाजोगता, हितासाठी आणि सुखासाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော ဓမ္မံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, ဒုတိယော ပုညာဘိသန္ဒော…ပေ… သံဝတ္တတိ. “पुन्हा, भिक्खूहो, आर्यश्रावक धम्माला शरण गेलेला असतो. भिक्खूहो, हा दुसरा पुण्याचा प्रवाह...पे... कारणीभूत ठरतो.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော သံဃံ သရဏံ ဂတော ဟောတိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, တတိယော ပုညာဘိသန္ဒော ကုသလာဘိသန္ဒော သုခဿာဟာရော သောဝဂ္ဂိကော သုခဝိပါကော သဂ္ဂသံဝတ္တနိကော, ဣဋ္ဌာယ ကန္တာယ မနာပါယ ဟိတာယ သုခါယ သံဝတ္တတိ. “पुन्हा, भिक्खूहो, आर्यश्रावक संघाला शरण गेलेला असतो. भिक्खूहो, हा तिसरा पुण्याचा प्रवाह, कुशलाचा प्रवाह, सुखाचे वहन करणारा, स्वर्गाला नेणारा, सुखद विपाक देणारा, स्वर्गाप्रत पोहोचवणारा आहे, जो इष्ट, कांत, मनाजोगता, हितासाठी आणि सुखासाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘ပဉ္စိမာနိ, ဘိက္ခဝေ, ဒါနာနိ မဟာဒါနာနိ အဂ္ဂညာနိ ရတ္တညာနိ ဝံသညာနိ ပေါရာဏာနိ အသံကိဏ္ဏာနိ အသံကိဏ္ဏပုဗ္ဗာနိ, န သံကိယန္တိ န သံကိယိဿန္တိ, အပ္ပဋိကုဋ္ဌာနိ သမဏေဟိ ဗြာဟ္မဏေဟိ ဝိညူဟိ. ကတမာနိ ပဉ္စ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ. ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော အပရိမာဏာနံ သတ္တာနံ အဘယံ ဒေတိ, အဝေရံ ဒေတိ, အဗျာဗဇ္ဈံ ဒေတိ. အပရိမာဏာနံ သတ္တာနံ အဘယံ ဒတွာ အဝေရံ ဒတွာ အဗျာဗဇ္ဈံ ဒတွာ အပရိမာဏဿ အဘယဿ အဝေရဿ အဗျာဗဇ္ဈဿ ဘာဂီ ဟောတိ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ပဌမံ ဒါနံ မဟာဒါနံ အဂ္ဂညံ ရတ္တညံ ဝံသညံ ပေါရာဏံ အသံကိဏ္ဏံ အသံကိဏ္ဏပုဗ္ဗံ, န သံကိယတိ န သံကိယိဿတိ, အပ္ပဋိကုဋ္ဌံ သမဏေဟိ ဗြာဟ္မဏေဟိ ဝိညူဟိ. အယံ, ဘိက္ခဝေ, စတုတ္ထော ပုညာဘိသန္ဒော ကုသလာဘိသန္ဒော သုခဿာဟာရော သောဝဂ္ဂိကော သုခဝိပါကော သဂ္ဂသံဝတ္တနိကော, ဣဋ္ဌာယ ကန္တာယ မနာပါယ ဟိတာယ သုခါယ သံဝတ္တတိ. “भिक्खूहो, ही पाच दाने आहेत, जी महादाने आहेत, सर्वश्रेष्ठ (अग्रगण्य) आहेत, दीर्घकालीन आहेत, वंशपरंपरागत आहेत, प्राचीन आहेत, अदूषित (संकीर्ण न झालेली) आहेत, पूर्वी कधीही दूषित न झालेली आहेत, जी आता दूषित केली जात नाहीत आणि भविष्यातही दूषित केली जाणार नाहीत, आणि सुज्ञ श्रमण व ब्राह्मणांद्वारे निंदिली न गेलेली आहेत. कोणती पाच? येथे, भिक्खूहो, आर्यश्रावक प्राणातिपाताचा (जीवहिंसेचा) त्याग करून प्राणातिपातापासून विरत राहतो. भिक्खूहो, प्राणातिपातापासून विरत राहिलेला आर्यश्रावक अपरिमित प्राण्यांना अभय देतो, अद्वेष (अवेर) देतो, अव्याबाधता (अव्यापज्झ) देतो. अपरिमित प्राण्यांना अभय देऊन, अद्वेष देऊन, अव्याबाधता देऊन तो स्वतः अपरिमित अभय, अद्वेष आणि अव्याबाधतेचा वाटेकरी होतो. भिक्खूहो, हे पहिले दान, महादान, सर्वश्रेष्ठ, दीर्घकालीन, वंशपरंपरागत, प्राचीन, अदूषित, पूर्वी कधीही दूषित न झालेले, आता दूषित न केले जाणारे, भविष्यातही दूषित न केले जाणारे, आणि सुज्ञ श्रमण व ब्राह्मणांद्वारे निंदिले न गेलेले आहे. भिक्खूहो, हा चौथा पुण्याचा प्रवाह, कुशलाचा प्रवाह, सुखाचे वहन करणारा, स्वर्गाला नेणारा, सुखद विपाक देणारा, स्वर्गाप्रत पोहोचवणारा आहे, जो इष्ट, कांत, मनाजोगता, हितासाठी आणि सुखासाठी कारणीभूत ठरतो.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော အဒိန္နာဒါနံ ပဟာယ အဒိန္နာဒါနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ…ပေ… ကာမေသုမိစ္ဆာစာရံ ပဟာယ ကာမေသုမိစ္ဆာစာရာ ပဋိဝိရတော [Pg.77] ဟောတိ…ပေ… မုသာဝါဒံ ပဟာယ မုသာဝါဒါ ပဋိဝိရတော ဟောတိ…ပေ… သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနံ ပဟာယ သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ. သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော အပရိမာဏာနံ သတ္တာနံ အဘယံ ဒေတိ အဝေရံ ဒေတိ အဗျာဗဇ္ဈံ ဒေတိ. အပရိမာဏာနံ သတ္တာနံ အဘယံ ဒတွာ အဝေရံ ဒတွာ အဗျာဗဇ္ဈံ ဒတွာ, အပရိမာဏဿ အဘယဿ အဝေရဿ အဗျာဗဇ္ဈဿ ဘာဂီ ဟောတိ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ပဉ္စမံ ဒါနံ မဟာဒါနံ အဂ္ဂညံ ရတ္တညံ ဝံသညံ ပေါရာဏံ အသံကိဏ္ဏံ အသံကိဏ္ဏပုဗ္ဗံ, န သံကိယတိ န သံကိယိဿတိ, အပ္ပဋိကုဋ္ဌံ သမဏေဟိ ဗြာဟ္မဏေဟိ ဝိညူဟိ. အယံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌမော ပုညာဘိသန္ဒော ကုသလာဘိသန္ဒော သုခဿာဟာရော သောဝဂ္ဂိကော သုခဝိပါကော သဂ္ဂသံဝတ္တနိကော, ဣဋ္ဌာယ ကန္တာယ မနာပါယ ဟိတာယ သုခါယ သံဝတ္တတိ. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ပုညာဘိသန္ဒာ ကုသလာဘိသန္ဒာ သုခဿာဟာရာ သောဝဂ္ဂိကာ သုခဝိပါကာ သဂ္ဂသံဝတ္တနိကာ, ဣဋ္ဌာယ ကန္တာယ မနာပါယ ဟိတာယ သုခါယ သံဝတ္တန္တီ’’တိ. နဝမံ. “पुन्हा, भिक्खूहो, आर्यश्रावक अदत्तादानाचा (चोरीचा) त्याग करून अदत्तादानापासून विरत राहतो...पे... कामेसू मिच्छाचाराचा (व्यभिचाराचा) त्याग करून कामेसू मिच्छाचारापासून विरत राहतो...पे... मुसावादाचा (असत्य बोलण्याचा) त्याग करून मुसावादापासून विरत राहतो...पे... सुरा-मेरय-मज्ज-पमादट्ठानाचा (मद्य व मादक पदार्थांच्या सेवनाचा) त्याग करून सुरा-मेरय-मज्ज-पमादट्ठानापासून विरत राहतो. भिक्खूहो, सुरा-मेरय-मज्ज-पमादट्ठानापासून विरत राहिलेला आर्यश्रावक अपरिमित प्राण्यांना अभय देतो, अद्वेष देतो, अव्याबाधता देतो. अपरिमित प्राण्यांना अभय देऊन, अद्वेष देऊन, अव्याबाधता देऊन तो स्वतः अपरिमित अभय, अद्वेष आणि अव्याबाधतेचा वाटेकरी होतो. भिक्खूहो, हे पाचवे दान, महादान, सर्वश्रेष्ठ, दीर्घकालीन, वंशपरंपरागत, प्राचीन, अदूषित, पूर्वी कधीही दूषित न झालेले, आता दूषित न केले जाणारे, भविष्यातही दूषित न केले जाणारे, आणि सुज्ञ श्रमण व ब्राह्मणांद्वारे निंदिले न गेलेले आहे. भिक्खूहो, हा आठवा पुण्याचा प्रवाह, कुशलाचा प्रवाह, सुखाचे वहन करणारा, स्वर्गाला नेणारा, सुखद विपाक देणारा, स्वर्गाप्रत पोहोचवणारा आहे, जो इष्ट, कांत, मनाजोगता, हितासाठी आणि सुखासाठी कारणीभूत ठरतो. भिक्खूहो, हेच ते आठ पुण्याचे प्रवाह, कुशलाचे प्रवाह, सुखाचे वहन करणारे, स्वर्गाला नेणारे, सुखद विपाक देणारे, स्वर्गाप्रत पोहोचवणारे आहेत, जे इष्ट, कांत, मनाजोगते, हितासाठी आणि सुखासाठी कारणीभूत ठरतात.” नववे (सुत्त समाप्त). ၁၀. ဒုစ္စရိတဝိပါကသုတ္တံ १०. दुच्चरितविपाक सुत्त ၄၀. ‘‘ပါဏာတိပါတော, ဘိက္ခဝေ, အာသေဝိတော ဘာဝိတော ဗဟုလီကတော နိရယသံဝတ္တနိကော တိရစ္ဆာနယောနိသံဝတ္တနိကော ပေတ္တိဝိသယသံဝတ္တနိကော. ယော သဗ္ဗလဟုသော ပါဏာတိပါတဿ ဝိပါကော, မနုဿဘူတဿ အပ္ပာယုကသံဝတ္တနိကော ဟောတိ. ४०. “भिक्खूहो, प्राणातिपात (जीवहिंसा) जर आचरला, वाढवला आणि वारंवार केला, तर तो नरकात नेणारा, प्राणि योनीत जन्मास घालणारा आणि प्रेत योनीत नेणारा ठरतो. प्राणातिपाताचा जो सर्वात सौम्य विपाक (परिणाम) असतो, तो मनुष्य म्हणून जन्म घेतलेल्या व्यक्तीला अल्पायुषी बनवतो.” ‘‘အဒိန္နာဒါနံ, ဘိက္ခဝေ, အာသေဝိတံ ဘာဝိတံ ဗဟုလီကတံ နိရယသံဝတ္တနိကံ တိရစ္ဆာနယောနိသံဝတ္တနိကံ ပေတ္တိဝိသယသံဝတ္တနိကံ. ယော သဗ္ဗလဟုသော အဒိန္နာဒါနဿ ဝိပါကော, မနုဿဘူတဿ ဘောဂဗျသနသံဝတ္တနိကော ဟောတိ. “अदत्तादान (चोरी) जर आचरले, वाढवले आणि वारंवार केले, तर ते नरकात नेणारे, प्राणि योनीत जन्मास घालणारे आणि प्रेत योनीत नेणारे ठरते. अदत्तादानाचा जो सर्वात सौम्य विपाक असतो, तो मनुष्य म्हणून जन्म घेतलेल्या व्यक्तीला भोग-नाश (संपत्तीचा नाश) घडवून आणणारा ठरतो.” ‘‘ကာမေသုမိစ္ဆာစာရော, ဘိက္ခဝေ, အာသေဝိတော ဘာဝိတော ဗဟုလီကတော နိရယသံဝတ္တနိကော တိရစ္ဆာနယောနိသံဝတ္တနိကော ပေတ္တိဝိသယသံဝတ္တနိကော. ယော သဗ္ဗလဟုသော ကာမေသုမိစ္ဆာစာရဿ ဝိပါကော, မနုဿဘူတဿ သပတ္တဝေရသံဝတ္တနိကော ဟောတိ. “कामेसू मिच्छाचार (व्यभिचार) जर आचरला, वाढवला आणि वारंवार केला, तर तो नरकात नेणारा, प्राणि योनीत जन्मास घालणारा आणि प्रेत योनीत नेणारा ठरतो. कामेसू मिच्छाचाराचा जो सर्वात सौम्य विपाक असतो, तो मनुष्य म्हणून जन्म घेतलेल्या व्यक्तीला शत्रूंसोबत वैर निर्माण करणारा ठरतो.” ‘‘မုသာဝါဒေါ[Pg.78], ဘိက္ခဝေ, အာသေဝိတော ဘာဝိတော ဗဟုလီကတော နိရယသံဝတ္တနိကော တိရစ္ဆာနယောနိသံဝတ္တနိကော ပေတ္တိဝိသယသံဝတ္တနိကော. ယော သဗ္ဗလဟုသော မုသာဝါဒဿ ဝိပါကော, မနုဿဘူတဿ အဘူတဗ္ဘက္ခာနသံဝတ္တနိကော ဟောတိ. “मुसावाद (असत्य बोलणे) जर आचरला, वाढवला आणि वारंवार केला, तर तो नरकात नेणारा, प्राणि योनीत जन्मास घालणारा आणि प्रेत योनीत नेणारा ठरतो. मुसावादाचा जो सर्वात सौम्य विपाक असतो, तो मनुष्य म्हणून जन्म घेतलेल्या व्यक्तीला खोट्या आरोपांना (अपवादाला) सामोरे जाण्यास कारणीभूत ठरतो.” ‘‘ပိသုဏာ, ဘိက္ခဝေ, ဝါစာ အာသေဝိတာ ဘာဝိတာ ဗဟုလီကတာ နိရယသံဝတ္တနိကာ တိရစ္ဆာနယောနိသံဝတ္တနိကာ ပေတ္တိဝိသယသံဝတ္တနိကာ. ယော သဗ္ဗလဟုသော ပိသုဏာယ ဝါစာယ ဝိပါကော, မနုဿဘူတဿ မိတ္တေဟိ ဘေဒနသံဝတ္တနိကော ဟောတိ. “पिसुणा वाचा (चुगली/चहाडी) जर आचरली, वाढवली आणि वारंवार केली, तर ती नरकात नेणारी, प्राणि योनीत जन्मास घालणारी आणि प्रेत योनीत नेणारी ठरते. पिसुणा वाचेचा जो सर्वात सौम्य विपाक असतो, तो मनुष्य म्हणून जन्म घेतलेल्या व्यक्तीला मित्रांमध्ये फूट पाडण्यास कारणीभूत ठरतो.” ‘‘ဖရုသာ, ဘိက္ခဝေ, ဝါစာ အာသေဝိတာ ဘာဝိတာ ဗဟုလီကတာ နိရယသံဝတ္တနိကာ တိရစ္ဆာနယောနိသံဝတ္တနိကာ ပေတ္တိဝိသယသံဝတ္တနိကာ. ယော သဗ္ဗလဟုသော ဖရုသာယ ဝါစာယ ဝိပါကော, မနုဿဘူတဿ အမနာပသဒ္ဒသံဝတ္တနိကော ဟောတိ. “फरुसा वाचा (कठोर/कडू बोलणे) जर आचरली, वाढवली आणि वारंवार केली, तर ती नरकात नेणारी, प्राणि योनीत जन्मास घालणारी आणि प्रेत योनीत नेणारी ठरते. फरुसा वाचेचा जो सर्वात सौम्य विपाक असतो, तो मनुष्य म्हणून जन्म घेतलेल्या व्यक्तीला अप्रिय शब्द (कटू आवाज) ऐकण्यास कारणीभूत ठरतो.” ‘‘သမ္ဖပ္ပလာပေါ, ဘိက္ခဝေ, အာသေဝိတော ဘာဝိတော ဗဟုလီကတော နိရယသံဝတ္တနိကော တိရစ္ဆာနယောနိသံဝတ္တနိကော ပေတ္တိဝိသယသံဝတ္တနိကော. ယော သဗ္ဗလဟုသော သမ္ဖပ္ပလာပဿ ဝိပါကော, မနုဿဘူတဿ အနာဒေယျဝါစာသံဝတ္တနိကော ဟောတိ. “संफप्पलाप (व्यर्थ बडबड) जर आचरला, वाढवला आणि वारंवार केला, तर तो नरकात नेणारा, प्राणि योनीत जन्मास घालणारा आणि प्रेत योनीत नेणारा ठरतो. संफप्पलापाचा जो सर्वात सौम्य विपाक असतो, तो मनुष्य म्हणून जन्म घेतलेल्या व्यक्तीचे बोलणे इतरांनी न मानण्यास (अविश्वासार्ह ठरण्यास) कारणीभूत ठरतो.” ‘‘သုရာမေရယပါနံ, ဘိက္ခဝေ, အာသေဝိတံ ဘာဝိတံ ဗဟုလီကတံ နိရယသံဝတ္တနိကံ တိရစ္ဆာနယောနိသံဝတ္တနိကံ ပေတ္တိဝိသယသံဝတ္တနိကံ. ယော သဗ္ဗလဟုသော သုရာမေရယပါနဿ ဝိပါကော, မနုဿဘူတဿ ဥမ္မတ္တကသံဝတ္တနိကော ဟောတီ’’တိ. ဒသမံ. “सुरा-मेरय पान (मद्यपान) जर आचरले, वाढवले आणि वारंवार केले, तर ते नरकात नेणारे, प्राणि योनीत जन्मास घालणारे आणि प्रेत योनीत नेणारे ठरते. सुरा-मेरय पानाचा जो सर्वात सौम्य विपाक असतो, तो मनुष्य म्हणून जन्म घेतलेल्या व्यक्तीला वेडेपणा (उन्माद) प्राप्त होण्यास कारणीभूत ठरतो.” दहावे (सुत्त समाप्त). ဒါနဝဂ္ဂေါ စတုတ္ထော. चौथा दानवग्ग समाप्त. တဿုဒ္ဒါနံ – त्याची अनुक्रमणिका (उद्दान) - ဒွေ ဒါနာနိ ဝတ္ထုဉ္စ, ခေတ္တံ ဒါနူပပတ္တိယော; ကိရိယံ ဒွေ သပ္ပုရိသာ, အဘိသန္ဒော ဝိပါကော စာတိ. दोन दाने आणि वस्तू, क्षेत्र, दान-उपपत्ती, क्रिया, दोन सत्पुरुष, प्रवाह (अभिसंद) आणि विपाक. ၅. ဥပေါသထဝဂ္ဂေါ ५. उपोसथवग्ग ၁. သင်္ခိတ္တူပေါသထသုတ္တံ १. संक्षिप्त उपोसथ सुत्त ၄၁. ဧဝံ [Pg.79] မေ သုတံ – ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ ဇေတဝနေ အနာထပိဏ္ဍိကဿ အာရာမေ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘ဘိက္ခဝေါ’’တိ. ‘‘ဘဒန္တေ’’တိ တေ ဘိက္ခူ ဘဂဝတော ပစ္စဿောသုံ. ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ४१. असे मी ऐकले आहे – एका वेळी भगवान श्रावस्तीमध्ये अनाथपिंडिकाच्या जेतवन आरामात विहार करत होते. तेथे भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले – "भिक्खूंनो!" ते भिक्खू भगवंतांना प्रत्युत्तर देत म्हणाले, "भदंत!" भगवंतांनी हे सांगितले – ‘‘အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော, ဘိက္ခဝေ, ဥပေါသထော ဥပဝုတ္ထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော. ကထံ ဥပဝုတ္ထော စ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ဥပေါသထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတာ နိဟိတဒဏ္ဍာ နိဟိတသတ္ထာ လဇ္ဇီ ဒယာပန္နာ, သဗ္ဗပါဏဘူတဟိတာနုကမ္ပိနော ဝိဟရန္တိ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော နိဟိတဒဏ္ဍော နိဟိတသတ္ထော လဇ္ဇီ ဒယာပန္နော, သဗ္ဗပါဏဘူတဟိတာနုကမ္ပီ ဝိဟရာမိ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ ပဌမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. "भिक्खूंनो, आठ अंगांनी युक्त असलेला उपोसथ पाळला असता तो महाफळ देणारा, महाकल्याणकारी, महातेजस्वी आणि महाविस्तृत होतो. आणि भिक्खूंनो, आठ अंगांनी युक्त असलेला उपोसथ कसा पाळला असता तो महाफळ देणारा, महाकल्याणकारी, महातेजस्वी आणि महाविस्तृत होतो? येथे, भिक्खूंनो, आर्यश्रावक असा विचार करतो – 'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते प्राणातिपात (जीवहिंसा) सोडून प्राणातिपातापासून विरत राहतात; त्यांनी दंड आणि शस्त्रे टाकून दिली आहेत, ते लज्जाशील व दयाळू आहेत, आणि सर्व प्राणिमात्रांच्या कल्याणासाठी व दयेसाठी तत्पर राहून विहार करतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी प्राणातिपात सोडून प्राणातिपातापासून विरत राहीन; दंड आणि शस्त्रे टाकून देऊन, लज्जाशील व दयाळू बनून, सर्व प्राणिमात्रांच्या कल्याणासाठी व दयेसाठी तत्पर राहून विहार करीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या पहिल्या अंगाने तो युक्त होतो." ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော အဒိန္နာဒါနံ ပဟာယ အဒိန္နာဒါနာ ပဋိဝိရတာ ဒိန္နာဒါယီ ဒိန္နပါဋိကင်္ခီ, အထေနေန သုစိဘူတေန အတ္တနာ ဝိဟရန္တိ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ အဒိန္နာဒါနံ ပဟာယ အဒိန္နာဒါနာ ပဋိဝိရတော ဒိန္နာဒါယီ ဒိန္နပါဋိကင်္ခီ, အထေနေန သုစိဘူတေန အတ္တနာ ဝိဟရာမိ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ ဒုတိယေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. "'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते अदिन्नादान (चोरी) सोडून अदिन्नादानापासून विरत राहतात; ते दिलेलेच स्वीकारतात, दिलेल्याचीच अपेक्षा ठेवतात आणि चोरी न करता शुद्ध मनाने विहार करतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी अदिन्नादान सोडून अदिन्नादानापासून विरत राहीन; दिलेलेच स्वीकारणारा, दिलेल्याचीच अपेक्षा ठेवणारा आणि चोरी न करता शुद्ध मनाने विहार करीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या दुसऱ्या अंगाने तो युक्त होतो." ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော အဗြဟ္မစရိယံ ပဟာယ ဗြဟ္မစာရိနော အာရာစာရိနော ဝိရတာ မေထုနာ ဂါမဓမ္မာ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ အဗြဟ္မစရိယံ ပဟာယ ဗြဟ္မစာရီ အာရာစာရီ ဝိရတော မေထုနာ ဂါမဓမ္မာ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ တတိယေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. "'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते अब्रह्मचर्य सोडून ब्रह्मचारी राहतात, (अब्रह्मचर्यापासून) दूर राहतात आणि सामान्य लोकांच्या मैथुनधर्मापासून विरत राहतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी अब्रह्मचर्य सोडून ब्रह्मचारी राहीन, दूर राहीन आणि मैथुनधर्मापासून विरत राहीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या तिसऱ्या अंगाने तो युक्त होतो." ‘‘‘ယာဝဇီဝံ [Pg.80] အရဟန္တော မုသာဝါဒံ ပဟာယ မုသာဝါဒါ ပဋိဝိရတာ သစ္စဝါဒိနော သစ္စသန္ဓာ ထေတာ ပစ္စယိကာ အဝိသံဝါဒကော လောကဿ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ မုသာဝါဒံ ပဟာယ မုသာဝါဒါ ပဋိဝိရတော သစ္စဝါဒီ သစ္စသန္ဓော ထေတော ပစ္စယိကော အဝိသံဝါဒကော လောကဿ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ စတုတ္ထေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. "'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते मुसावाद (असत्य भाषण) सोडून मुसावादापासून विरत राहतात; ते सत्य बोलणारे, सत्याला धरून राहणारे, स्थिर, विश्वासू आणि जगाला न फसवणारे असतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी मुसावाद सोडून मुसावादापासून विरत राहीन; सत्य बोलणारा, सत्याला धरून राहणारा, स्थिर, विश्वासू आणि जगाला न फसवणारा होईन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या चौथ्या अंगाने तो युक्त होतो." ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနံ ပဟာယ သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတာ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနံ ပဟာယ သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ ပဉ္စမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. "'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते सुरा, मद्य आणि प्रमादाचे स्थान असलेल्या मादक पदार्थांचे सेवन सोडून त्यापासून विरत राहतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी सुरा, मद्य आणि प्रमादाचे स्थान असलेल्या मादक पदार्थांचे सेवन सोडून त्यापासून विरत राहीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या पाचव्या अंगाने तो युक्त होतो." ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ဧကဘတ္တိကာ ရတ္တူပရတာ ဝိရတာ ဝိကာလဘောဇနာ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ဧကဘတ္တိကော ရတ္တူပရတော ဝိရတော ဝိကာလဘောဇနာ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ ဆဋ္ဌေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. "'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते दिवसातून एकदाच भोजन करणारे, रात्रीच्या भोजनापासून दूर राहणारे आणि विकालभोजनापासून (अवेळी भोजन करण्यापासून) विरत राहतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी दिवसातून एकदाच भोजन करणारा, रात्रीच्या भोजनापासून दूर राहणारा आणि विकालभोजनापासून विरत राहीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या सहाव्या अंगाने तो युक्त होतो." ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော နစ္စဂီတဝါဒိတဝိသူကဒဿနမာလာဂန္ဓဝိလေပနဓာရဏမဏ္ဍနဝိဘူသနဋ္ဌာနံ ပဟာယ နစ္စဂီတဝါဒိတဝိသူကဒဿနမာလာဂန္ဓဝိလေပနဓာရဏမဏ္ဍနဝိဘူသနဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတာ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ နစ္စဂီတဝါဒိတဝိသူကဒဿနမာလာဂန္ဓဝိလေပနဓာရဏမဏ္ဍနဝိဘူသနဋ္ဌာနံ ပဟာယ နစ္စဂီတဝါဒိတဝိသူကဒဿနမာလာဂန္ဓဝိလေပနဓာရဏမဏ္ဍနဝိဘူသနဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ သတ္တမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. "'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते नृत्य, गीत, वादन, तमाशा पाहणे, माळा घालणे, सुगंधी द्रव्ये लावणे, अनुलेपन करणे आणि अलंकार धारण करून स्वतःला सुशोभित करणे या सर्व गोष्टी सोडून त्यापासून विरत राहतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी नृत्य, गीत, वादन, तमाशा पाहणे, माळा घालणे, सुगंधी द्रव्ये लावणे, अनुलेपन करणे आणि अलंकार धारण करून स्वतःला सुशोभित करणे या सर्व गोष्टी सोडून त्यापासून विरत राहीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या सातव्या अंगाने तो युक्त होतो." ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ဥစ္စာသယနမဟာသယနံ ပဟာယ ဥစ္စာသယနမဟာသယနာ ပဋိဝိရတာ နီစသေယျံ ကပ္ပေန္တိ – မဉ္စကေ ဝါ တိဏသန္ထာရကေ ဝါ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ဥစ္စာသယနမဟာသယနံ ပဟာယ ဥစ္စာသယနမဟာသယနာ ပဋိဝိရတော နီစသေယျံ ကပ္ပေမိ – မဉ္စကေ ဝါ တိဏသန္ထာရကေ ဝါ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ အဋ္ဌမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ[Pg.81]. ဧဝံ ဥပဝုတ္ထော ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ဥပေါသထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော’’တိ. ပဌမံ. "'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते उच्च आसन आणि महाआसन सोडून त्यापासून विरत राहतात आणि लहान खाट किंवा गवताच्या बिछान्यासारख्या नीच शय्येचा वापर करतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी उच्च आसन आणि महाआसन सोडून त्यापासून विरत राहीन आणि लहान खाट किंवा गवताच्या बिछान्यासारख्या नीच शय्येचा वापर करीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या आठव्या अंगाने तो युक्त होतो. भिक्खूंनो, अशा प्रकारे आठ अंगांनी युक्त असलेला उपोसथ पाळला असता तो महाफळ देणारा, महाकल्याणकारी, महातेजस्वी आणि महाविस्तृत होतो." पहिले सुत्त समाप्त. ၂. ဝိတ္ထတူပေါသထသုတ္တံ २. विस्तृत उपोसथ सुत्त ၄၂. ‘‘အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော, ဘိက္ခဝေ, ဥပေါသထော ဥပဝုတ္ထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော. ကထံ ဥပဝုတ္ထော စ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ဥပေါသထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, အရိယသာဝကော ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတာ နိဟိတဒဏ္ဍာ နိဟိတသတ္ထာ လဇ္ဇီ ဒယာပန္နာ, သဗ္ဗပါဏဘူတဟိတာနုကမ္ပိနော ဝိဟရန္တိ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော နိဟိတဒဏ္ဍော နိဟိတသတ္ထော လဇ္ဇီ ဒယာပန္နော, သဗ္ဗပါဏဘူတဟိတာနုကမ္ပီ ဝိဟရာမိ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ ပဌမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ…ပေ…. ४२. "भिक्खूंनो, आठ अंगांनी युक्त असलेला उपोसथ पाळला असता तो महाफळ देणारा, महाकल्याणकारी, महातेजस्वी आणि महाविस्तृत होतो. आणि भिक्खूंनो, आठ अंगांनी युक्त असलेला उपोसथ कसा पाळला असता तो महाफळ देणारा, महाकल्याणकारी, महातेजस्वी आणि महाविस्तृत होतो? येथे, भिक्खूंनो, आर्यश्रावक असा विचार करतो – 'अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत ते प्राणातिपात सोडून प्राणातिपातापासून विरत राहतात; त्यांनी दंड आणि शस्त्रे टाकून दिली आहेत, ते लज्जाशील व दयाळू आहेत, आणि सर्व प्राणिमात्रांच्या कल्याणासाठी व दयेसाठी तत्पर राहून विहार करतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी प्राणातिपात सोडून प्राणातिपातापासून विरत राहीन; दंड आणि शस्त्रे टाकून देऊन, लज्जाशील व दयाळू बनून, सर्व प्राणिमात्रांच्या कल्याणासाठी व दयेसाठी तत्पर राहून विहार करीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.' या पहिल्या अंगाने तो युक्त होतो... (तसेच पुढील अंगांचेही चिंतन करतो)..." ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ဥစ္စာသယနမဟာသယနံ ပဟာယ ဥစ္စာသယနမဟာသယနာ ပဋိဝိရတာ နီစသေယျံ ကပ္ပေန္တိ – မဉ္စကေ ဝါ တိဏသန္ထာရကေ ဝါ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ဥစ္စာသယနမဟာသယနံ ပဟာယ ဥစ္စာသယနမဟာသယနာ ပဋိဝိရတော နီစသေယျံ ကပ္ပေမိ – မဉ္စကေ ဝါ တိဏသန္ထာရကေ ဝါ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ အဋ္ဌမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. ဧဝံ ဥပဝုတ္ထော ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ဥပေါသထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော. “‘अर्हत आयुष्यभर उच्च आणि विलासी आसनांचा त्याग करून, उच्च आणि विलासी आसनांपासून विरत राहून, नीच शय्येचा म्हणजेच लहान खाट किंवा गवताच्या अंथरुणाचा स्वीकार करतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवसात उच्च आणि विलासी आसनांचा त्याग करून, उच्च आणि विलासी आसनांपासून विरत राहून, नीच शय्येचा म्हणजेच लहान खाट किंवा गवताच्या अंथरुणाचा स्वीकार करतो. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझ्याकडून उपोसथाचे पालन केले जाईल.’ या आठव्या अंगाने तो युक्त होतो. भिक्षूंनो, अशा प्रकारे आचरलेला, आठ अंगांनी युक्त असलेला उपोसथ महान फळ देणारा, महान लाभ देणारा, अत्यंत तेजस्वी आणि अत्यंत व्यापक असतो.” ‘‘ကီဝမဟပ္ဖလော ဟောတိ ကီဝမဟာနိသံသော ကီဝမဟာဇုတိကော ကီဝမဟာဝိပ္ဖာရော? သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, ယော ဣမေသံ သောဠသန္နံ မဟာဇနပဒါနံ ပဟူတရတ္တရတနာနံ ဣဿရိယာဓိပစ္စံ ရဇ္ဇံ ကာရေယျ, သေယျထိဒံ – အင်္ဂါနံ မဂဓာနံ ကာသီနံ ကောသလာနံ ဝဇ္ဇီနံ မလ္လာနံ စေတီနံ ဝင်္ဂါနံ ကုရူနံ ပဉ္စာလာနံ မစ္ဆာနံ သူရသေနာနံ အဿကာနံ အဝန္တီနံ ဂန္ဓာရာနံ ကမ္ဗောဇာနံ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတဿ [Pg.82] ဥပေါသထဿ ဧတံ ကလံ နာဂ္ဃတိ သောဠသိံ. တံ ကိဿ ဟေတု? ကပဏံ, ဘိက္ခဝေ, မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ. “तो किती महान फळ देणारा, किती महान लाभ देणारा, किती तेजस्वी आणि किती व्यापक असतो? भिक्षूंनो, जसे की जर एखाद्या व्यक्तीने विपुल रत्नांनी समृद्ध असलेल्या या सोळा महाजनपदांवर आधिपत्य आणि सार्वभौम राज्य केले, जसे की - अंग, मगध, काशी, कोसल, वज्जी, मल्ल, चेती, वंग, कुरु, पांचाल, मच्छ, शूरसेन, अस्सक, अवंती, गांधार आणि कंबोज; तरीही हे राज्य आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाच्या सोळाव्या भागाच्या (कलेच्या) बरोबरीचे देखील ठरणार नाही. ते कशामुळे? भिक्षूंनो, दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य अत्यंत क्षुद्र आहे.” ‘‘ယာနိ, ဘိက္ခဝေ, မာနုသကာနိ ပညာသ ဝဿာနိ, စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ ပဉ္စ ဝဿသတာနိ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ’’’. “भिक्षूंनो, मानवी वर्षांमधील पन्नास वर्षे म्हणजे चातुमहाराजिक देवांचा एक दिवस आणि एक रात्र होय. अशा तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनुसार पाचशे दिव्य वर्षे हे चातुमहाराजिक देवांचे आयुष्यमान असते. भिक्षूंनो, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर चातुमहाराजिक देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. भिक्षूंनो, हेच लक्षात घेऊन मी असे म्हटले आहे की - ‘दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य अत्यंत क्षुद्र आहे.’” ‘‘ယာနိ, ဘိက္ခဝေ, မာနုသကာနိ ဝဿသတာနိ, တာဝတိံသာနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗံ ဝဿသဟဿံ တာဝတိံသာနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ တာဝတိံသာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ’’’. “भिक्षूंनो, मानवी वर्षांमधील शंभर वर्षे म्हणजे तावतिंस देवांचा एक दिवस आणि एक रात्र होय. अशा तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनुसार एक हजार दिव्य वर्षे हे तावतिंस देवांचे आयुष्यमान असते. भिक्षूंनो, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर तावतिंस देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. भिक्षूंनो, हेच लक्षात घेऊन मी असे म्हटले आहे की - ‘दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य अत्यंत क्षुद्र आहे.’” ‘‘ယာနိ, ဘိက္ခဝေ, မာနုသကာနိ ဒွေ ဝဿသတာနိ, ယာမာနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ ဒွေ ဝဿသဟဿာနိ ယာမာနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ယာမာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ’’’. “भिक्षूंनो, मानवी वर्षांमधील दोनशे वर्षे म्हणजे याम देवांचा एक दिवस आणि एक रात्र होय. अशा तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनुसार दोन हजार दिव्य वर्षे हे याम देवांचे आयुष्यमान असते. भिक्षूंनो, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर याम देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. भिक्षूंनो, हेच लक्षात घेऊन मी असे म्हटले आहे की - ‘दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य अत्यंत क्षुद्र आहे.’” ‘‘ယာနိ, ဘိက္ခဝေ, မာနုသကာနိ စတ္တာရိ ဝဿသတာနိ, တုသိတာနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ စတ္တာရိ ဝဿသဟဿာနိ [Pg.83] တုသိတာနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ တုသိတာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ’’’. “भिक्षूंनो, मानवी वर्षांमधील चारशे वर्षे म्हणजे तुषित देवांचा एक दिवस आणि एक रात्र होय. अशा तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनुसार चार हजार दिव्य वर्षे हे तुषित देवांचे आयुष्यमान असते. भिक्षूंनो, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर तुषित देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. भिक्षूंनो, हेच लक्षात घेऊन मी असे म्हटले आहे की - ‘दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य अत्यंत क्षुद्र आहे.’” ‘‘ယာနိ, ဘိက္ခဝေ, မာနုသကာနိ အဋ္ဌ ဝဿသတာနိ, နိမ္မာနရတီနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ အဋ္ဌ ဝဿသဟဿာနိ နိမ္မာနရတီနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ နိမ္မာနရတီနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ’’’. “भिक्षूंनो, मानवी वर्षांमधील आठशे वर्षे म्हणजे निम्माणरती देवांचा एक दिवस आणि एक रात्र होय. अशा तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनुसार आठ हजार दिव्य वर्षे हे निम्माणरती देवांचे आयुष्यमान असते. भिक्षूंनो, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर निम्माणरती देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. भिक्षूंनो, हेच लक्षात घेऊन मी असे म्हटले आहे की - ‘दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य अत्यंत क्षुद्र आहे.’” ‘‘ယာနိ, ဘိက္ခဝေ, မာနုသကာနိ သောဠသ ဝဿသတာနိ, ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ သောဠသ ဝဿသဟဿာနိ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဘိက္ခဝေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယာ’’’တိ. “भिक्षूंनो, मानवी वर्षांमधील सोळाशे वर्षे म्हणजे परनिम्मितवसवत्ती देवांचा एक दिवस आणि एक रात्र होय. अशा तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनुसार सोळा हजार दिव्य वर्षे हे परनिम्मितवसवत्ती देवांचे आयुष्यमान असते. भिक्षूंनो, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर परनिम्मितवसवत्ती देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. भिक्षूंनो, हेच लक्षात घेऊन मी असे म्हटले आहे की - ‘दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य अत्यंत क्षुद्र आहे.’” ‘‘ပါဏံ န ဟညေ န စဒိန္နမာဒိယေ,မုသာ န ဘာသေ န စ မဇ္ဇပေါ သိယာ; အဗြဟ္မစရိယာ ဝိရမေယျ မေထုနာ,ရတ္တိံ န ဘုဉ္ဇေယျ ဝိကာလဘောဇနံ. “प्राण्यांची हिंसा करू नये, न दिलेले (चोरीने) घेऊ नये, असत्य बोलू नये आणि मद्यपान करू नये; मैथुनरूप अब्रह्मचर्यापासून विरत राहावे, रात्री आणि विकालभोजन (अवेळी भोजन) करू नये.” ‘‘မာလံ န ဓာရေ န စ ဂန္ဓမာစရေ,မဉ္စေ ဆမာယံ ဝ သယေထ သန္ထတေ; ဧတဉှိ အဋ္ဌင်္ဂိကမာဟုပေါသထံ,ဗုဒ္ဓေန ဒုက္ခန္တဂုနာ ပကာသိတံ. “पुष्पमाला धारण करू नये, सुगंधी द्रव्यांचा वापर करू नये; खाटेवर किंवा जमिनीवर पसरलेल्या अंथरुणावर झोपावे. दुःखाचा अंत करणाऱ्या बुद्धांनी या आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचा उपदेश केला आहे.” ‘‘စန္ဒော [Pg.84] စ သုရိယော စ ဥဘော သုဒဿနာ,ဩဘာသယံ အနုပရိယန္တိ ယာဝတာ; တမောနုဒါ တေ ပန အန္တလိက္ခဂါ,နဘေ ပဘာသန္တိ ဒိသာဝိရောစနာ. चंद्र आणि सूर्य हे दोन्ही पाहण्यास अत्यंत सुंदर आहेत. ते जितक्या प्रदेशापर्यंत प्रकाश पसरवत फिरतात, अंधाराचा नाश करणारे आणि आकाशात विहार करणारे ते चंद्र-सूर्य दिशांना प्रकाशित करत आकाशात तळपतात. ‘‘ဧတသ္မိံ ယံ ဝိဇ္ဇတိ အန္တရေ ဓနံ,မုတ္တာ မဏိ ဝေဠုရိယဉ္စ ဘဒ္ဒကံ; သိင်္ဂီသုဝဏ္ဏံ အထ ဝါပိ ကဉ္စနံ,ယံ ဇာတရူပံ ဟဋကန္တိ ဝုစ္စတိ. या चंद्र-सूर्यांच्या परिभ्रमण क्षेत्राच्या दरम्यान जे काही धन अस्तित्वात आहे—जसे की मोती, मणी, उत्कृष्ट वैडूर्य (लसण्या), शिंगी सुवर्ण (उत्कृष्ट सोने) किंवा कांचन, ज्याला 'जातरूप' किंवा 'हाटक' असे म्हटले जाते— ‘‘အဋ္ဌင်္ဂုပေတဿ ဥပေါသထဿ,ကလမ္ပိ တေ နာနုဘဝန္တိ သောဠသိံ; စန္ဒပ္ပဘာ တာရဂဏာ စ သဗ္ဗေ. ते सर्व धन, चंद्राचा प्रकाश आणि सर्व तारांगण हे अष्टांगयुक्त उपोसथाच्या (आठ अंगांनी युक्त उपवासाच्या) सोळाव्या भागाच्या एका कलेचीही (सोळाव्या हिश्श्याचीही) बरोबरी करू शकत नाहीत. ‘‘တသ္မာ ဟိ နာရီ စ နရော စ သီလဝါ,အဋ္ဌင်္ဂုပေတံ ဥပဝဿုပေါသထံ; ပုညာနိ ကတွာန သုခုဒြယာနိ,အနိန္ဒိတာ သဂ္ဂမုပေန္တိ ဌာန’’န္တိ. ဒုတိယံ; म्हणूनच, शीलवान स्त्री किंवा पुरुषाने अष्टांगयुक्त उपोसथाचे पालन करावे. सुखावह फळ देणारी पुण्यकर्मे करून, ते निंदेला पात्र न ठरता स्वर्गीय सुखाला प्राप्त होतात. ၃. ဝိသာခါသုတ္တံ ३. विशाखा सुत्त ၄၃. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ ပုဗ္ဗာရာမေ မိဂါရမာတုပါသာဒေ. အထ ခေါ ဝိသာခါ မိဂါရမာတာ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဝိသာခံ မိဂါရမာတရံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ခေါ, ဝိသာခေ, ဥပေါသထော ဥပဝုတ္ထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော. ကထံ ဥပဝုတ္ထော စ, ဝိသာခေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ဥပေါသထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော? ဣဓ, ဝိသာခေ, အရိယသာဝကော ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတာ နိဟိတဒဏ္ဍာ နိဟိတသတ္ထာ လဇ္ဇီ ဒယာပန္နာ, သဗ္ဗပါဏဘူတဟိတာနုကမ္ပိနော ဝိဟရန္တိ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော နိဟိတဒဏ္ဍော နိဟိတသတ္ထော လဇ္ဇီ ဒယာပန္နော, သဗ္ဗပါဏဘူတဟိတာနုကမ္ပီ ဝိဟရာမိ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော [Pg.85] စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’’’တိ. ဣမိနာ ပဌမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ…ပေ…. ४३. एकदा भगवान श्रावस्ती येथील पूर्वाराम विहारामध्ये मिगारमाता विशाखेच्या प्रासादात (भवनात) विहार करत होते. तेव्हा मिगारमाता विशाखा भगवंतांकडे आली; आल्यानंतर भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसली. एका बाजूला बसलेल्या मिगारमाता विशाखेला भगवान म्हणाले— 'विशाखे, आठ अंगांनी युक्त (अष्टांगसमन्वागत) पाळलेला उपोसथ हा महाफळ देणारा, महाकल्याणकारी, महातेजस्वी आणि महाप्रभावी असतो. विशाखे, आठ अंगांनी युक्त पाळलेला उपोसथ कसा महाफळ देणारा, महाकल्याणकारी, महातेजस्वी आणि महाप्रभावी असतो? विशाखे, या धम्मात आर्यश्रावक असा विचार करतो— "अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत प्राणातिपात (जीवहिंसा) सोडून प्राणातिपातापासून अलिप्त राहतात; त्यांनी दंड (काठी) टाकून दिला आहे, शस्त्र टाकून दिले आहे, ते लज्जाशील (पापभिरू) व दयाळू आहेत आणि सर्व प्राणिमात्रांच्या कल्याणासाठी व दयेसाठी तत्पर राहून विहार करतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी प्राणातिपात सोडून प्राणातिपातापासून अलिप्त राहीन; दंड टाकून, शस्त्र टाकून, लज्जाशील व दयाळू बनून, सर्व प्राणिमात्रांच्या कल्याणासाठी व दयेसाठी तत्पर राहून विहार करीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल." या पहिल्या अंगाने तो युक्त असतो...' ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ဥစ္စာသယနမဟာသယနံ ပဟာယ ဥစ္စာသယနမဟာသယနာ ပဋိဝိရတာ နီစသေယျံ ကပ္ပေန္တိ – မဉ္စကေ ဝါ တိဏသန္ထာရကေ ဝါ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ဥစ္စာသယနမဟာသယနံ ပဟာယ ဥစ္စာသယနမဟာသယနာ ပဋိဝိရတော နီစသေယျံ ကပ္ပေမိ – မဉ္စကေ ဝါ တိဏသန္ထာရကေ ဝါ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ အဋ္ဌမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. ဧဝံ ဥပဝုတ္ထော ခေါ, ဝိသာခေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ဥပေါသထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော. “अर्हत जोपर्यंत जगतात, तोपर्यंत उच्च शयन आणि महाशयन (उंच व विलासी बिछाने) सोडून, उच्च शयन व महाशयनापासून अलिप्त राहतात; ते खाटेवर किंवा गवताच्या बिछान्यावर अशा नीच शयनावर (साध्या जागेवर) झोपतात. मीसुद्धा आज या रात्री आणि या दिवशी उच्च शयन व महाशयन सोडून, उच्च शयन व महाशयनापासून अलिप्त राहीन; खाटेवर किंवा गवताच्या बिछान्यावर अशा साध्या जागेवर झोपेन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझा उपोसथ पाळला जाईल.” या आठव्या अंगाने तो युक्त असतो. विशाखे, अशा प्रकारे आठ अंगांनी युक्त पाळलेला उपोसथ हा महाफळ देणारा, महाकल्याणकारी, महातेजस्वी आणि महाप्रभावी असतो. ‘‘ကီဝမဟပ္ဖလော ဟောတိ, ကီဝမဟာနိသံသော, ကီဝမဟာဇုတိကော, ကီဝမဟာဝိပ္ဖာရော? သေယျထာပိ, ဝိသာခေ, ယော ဣမေသံ သောဠသန္နံ မဟာဇနပဒါနံ ပဟူတရတ္တရတနာနံ ဣဿရိယာဓိပစ္စံ ရဇ္ဇံ ကာရေယျ, သေယျထိဒံ – အင်္ဂါနံ မဂဓာနံ ကာသီနံ ကောသလာနံ ဝဇ္ဇီနံ မလ္လာနံ စေတီနံ ဝင်္ဂါနံ ကုရူနံ ပဉ္စာလာနံ မစ္ဆာနံ သူရသေနာနံ အဿကာနံ အဝန္တီနံ ဂန္ဓာရာနံ ကမ္ဗောဇာနံ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတဿ ဥပေါသထဿ ဧတံ ကလံ နာဂ္ဃတိ သောဠသိံ. တံ ကိဿ ဟေတု? ကပဏံ, ဝိသာခေ, မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ. तो किती महाफळ देणारा, किती महाकल्याणकारी, किती महातेजस्वी आणि किती महाप्रभावी असतो? विशाखे, जसे की एखाद्या व्यक्तीने विपुल सप्तरत्नांनी समृद्ध असलेल्या या सोळा महाजनपदांवर आधिपत्य व राज्य गाजवावे, जसे की— अंग, मगध, कासी, कोसल, वज्जी, मल्ल, चेती, वंग, कुरु, पांचाल, मच्छ, शूरसेन, अस्सक, अवंती, गांधार आणि कंबोज; तरीही हे राज्य अष्टांगयुक्त उपोसथाच्या सोळाव्या भागाच्या एका कलेचीही बरोबरी करू शकत नाही. त्याचे कारण काय? विशाखे, दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य हे अत्यंत क्षुद्र (दरिद्री) आहे. ‘‘ယာနိ, ဝိသာခေ, မာနုသကာနိ ပညာသ ဝဿာနိ, စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ ပဉ္စ ဝဿသတာနိ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဝိသာခေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဝိသာခေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ’’’. विशाखे, मानवी पन्नास वर्षे म्हणजे चातुमहाराजिक देवांचा एक अहोरात्र (एक दिवस आणि एक रात्र) होय. अशा रात्रींच्या तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा महिन्यांच्या बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनी मोजलेली दिव्य पाचशे वर्षे हे चातुमहाराजिक देवांचे आयुष्यमान असते. विशाखे, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने अष्टांगयुक्त उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर चातुमहाराजिक देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. विशाखे, हेच मनात ठेवून मी असे म्हटले होते की— 'दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य हे अत्यंत क्षुद्र आहे.' ‘‘ယံ, ဝိသာခေ, မာနုသကံ ဝဿသတံ, တာဝတိံသာနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဝဿသဟဿံ တာဝတိံသာနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဝိသာခေ, ဝိဇ္ဇတိ [Pg.86] ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ တာဝတိံသာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဝိသာခေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ’’’. विशाखे, मानवी शंभर वर्षे म्हणजे तावतिंस देवांचा एक अहोरात्र होय. अशा रात्रींच्या तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा महिन्यांच्या बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनी मोजलेले दिव्य एक हजार वर्षे हे तावतिंस देवांचे आयुष्यमान असते. विशाखे, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने अष्टांगयुक्त उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर तावतिंस देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. विशाखे, हेच मनात ठेवून मी असे म्हटले होते की— 'दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य हे अत्यंत क्षुद्र आहे.' ‘‘ယာနိ, ဝိသာခေ, မာနုသကာနိ ဒွေ ဝဿသတာနိ…ပေ… စတ္တာရိ ဝဿသတာနိ…ပေ… အဋ္ဌ ဝဿသတာနိ…ပေ… သောဠသ ဝဿသတာနိ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ သောဠသ ဝဿသဟဿာနိ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဝိသာခေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဝိသာခေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယာ’’’တိ. विशाखे, मानवी दोनशे वर्षे... चारशे वर्षे... आठशे वर्षे... सोळाशे वर्षे म्हणजे परनिर्मितवसवत्ती देवांचा एक अहोरात्र होय. अशा रात्रींच्या तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा महिन्यांच्या बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनी मोजलेली दिव्य सोळा हजार वर्षे हे परनिर्मितवसवत्ती देवांचे आयुष्यमान असते. विशाखे, हे शक्य आहे की, या जगात एखाद्या स्त्रीने किंवा पुरुषाने अष्टांगयुक्त उपोसथाचे पालन करून, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर परनिर्मितवसवत्ती देवांच्या सहवासात जन्म घ्यावा. विशाखे, हेच मनात ठेवून मी असे म्हटले होते की— 'दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य हे अत्यंत क्षुद्र आहे.' ‘‘ပါဏံ န ဟညေ န စဒိန္နမာဒိယေ,မုသာ န ဘာသေ န စ မဇ္ဇပေါ သိယာ; အဗြဟ္မစရိယာ ဝိရမေယျ မေထုနာ,ရတ္တိံ န ဘုဉ္ဇေယျ ဝိကာလဘောဇနံ. प्राणाची हत्या करू नये, न दिलेले (चोरीने) घेऊ नये, असत्य बोलू नये आणि मद्यपान करू नये. मैथुनरूप अब्रह्मचर्यापासून अलिप्त राहावे आणि रात्रीच्या वेळी अकाली भोजन (विकालभोजन) करू नये. ‘‘မာလံ န ဓာရေ န စ ဂန္ဓမာစရေ,မဉ္စေ ဆမာယံ ဝ သယေထ သန္ထတေ; ဧတဉှိ အဋ္ဌင်္ဂိကမာဟုပေါသထံ,ဗုဒ္ဓေန ဒုက္ခန္တဂုနာ ပကာသိတံ. पुष्पमाला धारण करू नये, सुगंधी द्रव्यांचा वापर करू नये. खाटेवर किंवा जमिनीवर पसरलेल्या साध्या बिछान्यावर झोपावे. दुःखाचा अंत करणाऱ्या बुद्धांनी हा अष्टांगयुक्त उपोसथ प्रकाशित केला आहे. ‘‘စန္ဒော စ သုရိယော စ ဥဘော သုဒဿနာ,ဩဘာသယံ အနုပရိယန္တိ ယာဝတာ; တမောနုဒါ တေ ပန အန္တလိက္ခဂါ,နဘေ ပဘာသန္တိ ဒိသာဝိရောစနာ. चंद्र आणि सूर्य हे दोन्ही पाहण्यास अत्यंत सुंदर आहेत. ते जितक्या प्रदेशापर्यंत प्रकाश पसरवत फिरतात, अंधाराचा नाश करणारे आणि आकाशात विहार करणारे ते चंद्र-सूर्य दिशांना प्रकाशित करत आकाशात तळपतात. ‘‘ဧတသ္မိံ ယံ ဝိဇ္ဇတိ အန္တရေ ဓနံ,မုတ္တာ မဏိ ဝေဠုရိယဉ္စ ဘဒ္ဒကံ; သိင်္ဂီသုဝဏ္ဏံ အထ ဝါပိ ကဉ္စနံ,ယံ ဇာတရူပံ ဟဋကန္တိ ဝုစ္စတိ. "या (चंद्र-सूर्यांच्या परिभ्रमणाच्या) क्षेत्रात जे काही धन आहे - जसे की मोती, मणी, वैडूर्य आणि उत्तम सुवर्ण किंवा कांचन, ज्याला 'जातरूप' किंवा 'हाटक' (शुद्ध सोने) म्हटले जाते." ‘‘အဋ္ဌင်္ဂုပေတဿ [Pg.87] ဥပေါသထဿ,ကလမ္ပိ တေ နာနုဘဝန္တိ သောဠသိံ; စန္ဒပ္ပဘာ တာရဂဏာ စ သဗ္ဗေ. "ते सर्व (धन), चंद्राचा प्रकाश आणि सर्व तारागण हे अष्टांगयुक्त उपोसथाच्या सोळाव्या भागाच्या (एक सोळाव्या कलेच्या) बरोबरीचे देखील होऊ शकत नाहीत." ‘‘တသ္မာ ဟိ နာရီ စ နရော စ သီလဝါ,အဋ္ဌင်္ဂုပေတံ ဥပဝဿုပေါသထံ; ပုညာနိ ကတွာန သုခုဒြယာနိ,အနိန္ဒိတာ သဂ္ဂမုပေန္တိ ဌာန’’န္တိ. တတိယံ; "म्हणूनच, शीलवान स्त्री आणि पुरुषाने अष्टांगयुक्त उपोसथाचे पालन करावे. सुख देणारी पुण्यकर्मे करून, ते निंदेला पात्र न ठरता स्वर्गीय स्थानाला प्राप्त होतात." (तिसरे सूत्र समाप्त) ၄. ဝါသေဋ္ဌသုတ္တံ ४. "वासेठ्ठ सुत्त" ၄၄. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝေသာလိယံ ဝိဟရတိ မဟာဝနေ ကူဋာဂါရသာလာယံ. အထ ခေါ ဝါသေဋ္ဌော ဥပါသကော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဝါသေဋ္ဌံ ဥပါသကံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော, ဝါသေဋ္ဌ, ဥပေါသထော ဥပဝုတ္ထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ…ပေ… အနိန္ဒိတာ သဂ္ဂမုပေန္တိ ဌာန’’န္တိ. ४४. "एकदा भगवान वैशाली येथील महावनात कूटागारशाळेत विहार करत होते. तेव्हा वासेठ्ठ उपासक जेथे भगवान होते तेथे गेला; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून तो एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या वासेठ्ठ उपासकाला भगवान म्हणाले – 'वासेठ्ठ, आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करणे हे महाफळ देणारे असते... (पेय्याल)... आणि ते निंदेला पात्र न ठरता स्वर्गीय स्थानाला प्राप्त होतात.'" ဧဝံ ဝုတ္တေ ဝါသေဋ္ဌော ဥပါသကော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ပိယာ မေ, ဘန္တေ, ဉာတိသာလောဟိတာ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသေယျုံ, ပိယာနမ္ပိ မေ အဿ ဉာတိသာလောဟိတာနံ ဒီဃရတ္တံ ဟိတာယ သုခါယ. သဗ္ဗေ စေပိ, ဘန္တေ, ခတ္တိယာ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသေယျုံ, သဗ္ဗေသမ္ပိဿ ခတ္တိယာနံ ဒီဃရတ္တံ ဟိတာယ သုခါယ. သဗ္ဗေ စေပိ, ဘန္တေ, ဗြာဟ္မဏာ…ပေ… ဝေဿာ … သုဒ္ဒါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသေယျုံ, သဗ္ဗေသမ္ပိဿ သုဒ္ဒါနံ ဒီဃရတ္တံ ဟိတာယ သုခါယာ’’တိ. "असे म्हटले असता, वासेठ्ठ उपासक भगवंतांना म्हणाला – 'भंते, जर माझे प्रिय नातेवाईक आणि सगोत्र लोक आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करतील, तर ते माझ्या प्रिय नातेवाईक आणि सगोत्रांच्या दीर्घकालीन हितासाठी व सुखासाठी होईल. भंते, जर सर्व क्षत्रिय आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करतील, तर ते सर्व क्षत्रियांच्या दीर्घकालीन हितासाठी व सुखासाठी होईल. भंते, जर सर्व ब्राह्मण... वैश्य... शूद्र आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करतील, तर ते सर्व शूद्रांच्या दीर्घकालीन हितासाठी व सुखासाठी होईल.'" ‘‘ဧဝမေတံ, ဝါသေဋ္ဌ, ဧဝမေတံ, ဝါသေဋ္ဌ! သဗ္ဗေ စေပိ, ဝါသေဋ္ဌ, ခတ္တိယာ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသေယျုံ, သဗ္ဗေသမ္ပိဿ ခတ္တိယာနံ ဒီဃရတ္တံ ဟိတာယ သုခါယ. သဗ္ဗေ စေပိ, ဝါသေဋ္ဌ, ဗြာဟ္မဏာ…ပေ… ဝေဿာ… သုဒ္ဒါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသေယျုံ, သဗ္ဗေသမ္ပိဿ သုဒ္ဒါနံ ဒီဃရတ္တံ ဟိတာယ သုခါယ. သဒေဝကော စေပိ, ဝါသေဋ္ဌ, လောကော သမာရကော သဗြဟ္မကော သဿမဏဗြာဟ္မဏီ ပဇာ သဒေဝမနုဿာ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသေယျုံ, သဒေဝကဿပိဿ လောကဿ သမာရကဿ [Pg.88] သဗြဟ္မကဿ သဿမဏဗြာဟ္မဏိယာ ပဇာယ သဒေဝမနုဿာယ ဒီဃရတ္တံ ဟိတာယ သုခါယ. ဣမေ စေပိ, ဝါသေဋ္ဌ, မဟာသာလာ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသေယျုံ, ဣမေသမ္ပိဿ မဟာသာလာနံ ဒီဃရတ္တံ ဟိတာယ သုခါယ ( ). ကော ပန ဝါဒေါ မနုဿဘူတဿာ’’တိ! စတုတ္ထံ. "'हे तसेच आहे, वासेठ्ठ! हे तसेच आहे, वासेठ्ठ! जर सर्व क्षत्रिय आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करतील, तर ते सर्व क्षत्रियांच्या दीर्घकालीन हितासाठी व सुखासाठी होईल. जर सर्व ब्राह्मण... वैश्य... शूद्र आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करतील, तर ते सर्व शूद्रांच्या दीर्घकालीन हितासाठी व सुखासाठी होईल. वासेठ्ठ, जर देव, मार आणि ब्रह्मासह असलेला हा लोक, श्रमण-ब्राह्मण, देव आणि मनुष्यांसह असलेली ही प्रजा आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करेल, तर देव, मार आणि ब्रह्मासह असलेल्या या लोकाच्या, श्रमण-ब्राह्मण, देव आणि मनुष्यांसह असलेल्या या प्रजेच्या दीर्घकालीन हितासाठी व सुखासाठी होईल. वासेठ्ठ, जर हे मोठे सालवृक्ष देखील आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करू शकले असते (जर त्यांच्यात चेतना असती), तर ते या मोठ्या सालवृक्षांच्या देखील दीर्घकालीन हितासाठी व सुखासाठी झाले असते. मग मनुष्य असलेल्या व्यक्तीबद्दल काय सांगावे!' (चौथे सूत्र समाप्त)" ၅. ဗောဇ္ဈသုတ္တံ ५. "बोज्झा सुत्त" ၄၅. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ ဇေတဝနေ အနာထပိဏ္ဍိကဿ အာရာမေ. အထ ခေါ ဗောဇ္ဈာ ဥပါသိကာ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဗောဇ္ဈံ ဥပါသိကံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ४५. "एकदा भगवान श्रावस्ती येथील अनाथपिंडिकांच्या जेतवन आरामात विहार करत होते. तेव्हा बोज्झा उपासिका जेथे भगवान होते तेथे गेली; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून ती एका बाजूला बसली. एका बाजूला बसलेल्या बोज्झा उपासिकेला भगवान म्हणाले –" ‘‘အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော, ဗောဇ္ဈေ, ဥပေါသထော ဥပဝုတ္ထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော. ကထံ ဥပဝုတ္ထော စ, ဗောဇ္ဈေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ဥပေါသထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော? ဣဓ, ဗောဇ္ဈေ, အရိယသာဝကော ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတာ နိဟိတဒဏ္ဍာ နိဟိတသတ္ထာ လဇ္ဇီ ဒယာပန္နာ, သဗ္ဗပါဏဘူတဟိတာနုကမ္ပိနော ဝိဟရန္တိ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ပါဏာတိပါတံ ပဟာယ ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော နိဟိတဒဏ္ဍော နိဟိတသတ္ထော လဇ္ဇီ ဒယာပန္နော, သဗ္ဗပါဏဘူတဟိတာနုကမ္ပီ ဝိဟရာမိ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ ပဌမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ…ပေ…. "'बोज्झे, आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करणे हे महाफळ देणारे, मोठे कल्याण करणारे, अत्यंत तेजस्वी आणि व्यापक प्रभाव पाडणारे असते. आणि बोज्झे, आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन कसे केले असता ते महाफळ देणारे, मोठे कल्याण करणारे, अत्यंत तेजस्वी आणि व्यापक प्रभाव पाडणारे होते? येथे, बोज्झे, आर्यश्रावक असा विचार करतो – 'अर्हत हे आयुष्यभर प्राणातिपात (जीवहिंसा) सोडून प्राणातिपातापासून अलिप्त राहतात. त्यांनी दंड (काठी) टाकून दिला आहे, शस्त्र टाकून दिले आहे; ते लज्जाशील (पापाची लाज बाळगणारे), दयाळू आणि सर्व प्राणिमात्रांच्या हितासाठी अनुकंपा बाळगणारे होऊन विहार करतात. मी देखील आज या रात्री आणि या दिवशी प्राणातिपात सोडून प्राणातिपातापासून अलिप्त राहीन, दंड टाकून देईन, शस्त्र टाकून देईन, लज्जाशील, दयाळू आणि सर्व प्राणिमात्रांच्या हितासाठी अनुकंपा बाळगणारा होऊन विहरेन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझ्या उपोसथाचे पालन होईल.' या पहिल्या अंगाने तो युक्त होतो... (पेय्याल)...'" ‘‘‘ယာဝဇီဝံ အရဟန္တော ဥစ္စာသယနမဟာသယနံ ပဟာယ ဥစ္စာသယနမဟာသယနာ ပဋိဝိရတာ နီစသေယျံ ကပ္ပေန္တိ – မဉ္စကေ ဝါ တိဏသန္ထာရကေ ဝါ. အဟံ ပဇ္ဇ ဣမဉ္စ ရတ္တိံ ဣမဉ္စ ဒိဝသံ ဥစ္စာသယနမဟာသယနံ ပဟာယ ဥစ္စာသယနမဟာသယနာ ပဋိဝိရတော နီစသေယျံ ကပ္ပေမိ – မဉ္စကေ ဝါ တိဏသန္ထာရကေ ဝါ. ဣမိနာပင်္ဂေန အရဟတံ အနုကရောမိ, ဥပေါသထော စ မေ ဥပဝုတ္ထော ဘဝိဿတီ’တိ. ဣမိနာ အဋ္ဌမေန အင်္ဂေန သမန္နာဂတော ဟောတိ. ဧဝံ ဥပဝုတ္ထော ခေါ, ဗောဇ္ဈေ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတော ဥပေါသထော မဟပ္ဖလော ဟောတိ မဟာနိသံသော မဟာဇုတိကော မဟာဝိပ္ဖာရော. "'अर्हत हे आयुष्यभर उच्च आसन आणि महाआसन (भव्य बिछाने) सोडून उच्च आसन व महाआसनापासून अलिप्त राहतात; ते खाटेवर किंवा तृणाच्या बिछान्यावर अशा नीच शय्येचा (साध्या बिछान्याचा) स्वीकार करतात. मी देखील आज या रात्री आणि या दिवशी उच्च आसन आणि महाआसन सोडून उच्च आसन व महाआसनापासून अलिप्त राहीन; खाटेवर किंवा तृणाच्या बिछान्यावर अशा नीच शय्येचा स्वीकार करीन. या अंगाने मी अर्हतांचे अनुकरण करीन आणि माझ्या उपोसथाचे पालन होईल.' या आठव्या अंगाने तो युक्त होतो. बोज्झे, अशा प्रकारे पालन केलेला, आठ अंगांनी युक्त असलेला उपोसथ महाफळ देणारा, मोठे कल्याण करणारा, अत्यंत तेजस्वी आणि व्यापक प्रभाव पाडणारा होतो." ‘‘ကီဝမဟပ္ဖလော [Pg.89] ဟောတိ, ကီဝမဟာနိသံသော, ကီဝမဟာဇုတိကော, ကီဝမဟာဝိပ္ဖာရော? သေယျထာပိ, ဗောဇ္ဈေ, ယော ဣမေသံ သောဠသန္နံ မဟာဇနပဒါနံ ပဟူတရတ္တရတနာနံ ဣဿရိယာဓိပစ္စံ ရဇ္ဇံ ကာရေယျ, သေယျထိဒံ – အင်္ဂါနံ မဂဓာနံ ကာသီနံ ကောသလာနံ ဝဇ္ဇီနံ မလ္လာနံ စေတီနံ ဝင်္ဂါနံ ကုရူနံ ပဉ္စာလာနံ မစ္ဆာနံ သူရသေနာနံ အဿကာနံ အဝန္တီနံ ဂန္ဓာရာနံ ကမ္ဗောဇာနံ, အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတဿ ဥပေါသထဿ ဧတံ ကလံ နာဂ္ဃတိ သောဠသိံ. တံ ကိဿ ဟေတု? ကပဏံ, ဗောဇ္ဈေ, မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ. "तो किती महाफळ देणारा, किती मोठे कल्याण करणारा, किती अत्यंत तेजस्वी आणि किती व्यापक प्रभाव पाडणारा होतो? बोज्झे, जसे की एखाद्या व्यक्तीने विपुल रत्नांनी समृद्ध असलेल्या या सोळा महाजनपदांवर आधिपत्य गाजवून राज्य करावे, जसे की – अंग, मगध, काशी, कोसल, वज्जी, मल्ल, चेती, वंग, कुरु, पांचाल, मच्छ, सूरसेन, अस्सक, अवंती, गांधार आणि कंबोज; तरीही ते राज्य आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाच्या सोळाव्या भागाच्या (एक सोळाव्या कलेच्या) बरोबरीचे देखील होऊ शकत नाही. त्याचे कारण काय? बोज्झे, दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य हे अत्यंत क्षुद्र (दरिद्री) आहे." ‘‘ယာနိ, ဗောဇ္ဈေ, မာနုသကာနိ ပညာသ ဝဿာနိ, စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ ပဉ္စ ဝဿသတာနိ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဗောဇ္ဈေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ စာတုမဟာရာဇိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဗောဇ္ဈေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယ’’’. "बोज्झे, मानवी पन्नास वर्षे म्हणजे चातुमहाराजिक देवांचा एक दिवस आणि रात्र होय. अशा रात्रींच्या तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा महिन्यांच्या बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. अशा वर्षांनी मोजल्यास, दिव्य पाचशे वर्षे हे चातुमहाराजिक देवांचे आयुष्यमान असते. बोज्झे, अशी शक्यता नक्कीच आहे की, या जगात एखादी स्त्री किंवा पुरुष आठ अंगांनी युक्त अशा उपोसथाचे पालन करून, काया नष्ट झाल्यानंतर, मृत्यूनंतर चातुमहाराजिक देवांच्या सहवासात (लोकात) जन्माला येईल. बोज्झे, हेच लक्षात घेऊन मी असे म्हटले आहे की – 'दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी राज्य हे अत्यंत क्षुद्र आहे.'" ‘‘ယံ, ဗောဇ္ဈေ, မာနုသကံ ဝဿသတံ…ပေ… တာနိ, ဗောဇ္ဈေ, မာနုသကာနိ ဒွေ ဝဿသတာနိ…ပေ… စတ္တာရိ ဝဿသတာနိ…ပေ… အဋ္ဌ ဝဿသတာနိ…ပေ… သောဠသ ဝဿသတာနိ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ ဧသော ဧကော ရတ္တိန္ဒိဝေါ. တာယ ရတ္တိယာ တိံသရတ္တိယော မာသော. တေန မာသေန ဒွါဒသမာသိယော သံဝစ္ဆရော. တေန သံဝစ္ဆရေန ဒိဗ္ဗာနိ သောဠသ ဝဿသဟဿာနိ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ အာယုပ္ပမာဏံ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ, ဗောဇ္ဈေ, ဝိဇ္ဇတိ ယံ ဣဓေကစ္စော ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ အဋ္ဌင်္ဂသမန္နာဂတံ ဥပေါသထံ ဥပဝသိတွာ ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ ပရနိမ္မိတဝသဝတ္တီနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇေယျ. ဣဒံ ခေါ ပနေတံ, ဗောဇ္ဈေ, သန္ဓာယ ဘာသိတံ – ‘ကပဏံ မာနုသကံ ရဇ္ဇံ ဒိဗ္ဗံ သုခံ ဥပနိဓာယာ’’’တိ. “हे बोझ्झे! मानवी शंभर वर्षे म्हणजे परनिर्मितवसवत्ती देवांचा एक दिवस आणि एक रात्र (अहोरात्र) होय. अशा रात्रींच्या तीस रात्रींचा एक महिना होतो. अशा बारा महिन्यांचे एक वर्ष होते. त्या वर्षाच्या हिशोबाने दिव्य सोळा हजार वर्षे हे परनिर्मितवसवत्ती देवांचे आयुष्यमान असते. हे बोझ्झे! हे शक्य आहे की, या जगात एखादी स्त्री किंवा पुरुष अष्टांगसमन्वित (आठ अंगांनी युक्त) उपोसथाचे पालन करून, काया नष्ट झाल्यानंतर, मृत्यूनंतर परनिर्मितवसवत्ती देवांच्या सहवासात (लोकात) जन्माला येईल. हे बोझ्झे! हेच मनात ठेवून (यालाच उद्देशून) असे म्हटले गेले आहे की— ‘दिव्य सुखाच्या तुलनेत मानवी साम्राज्य अत्यंत क्षुद्र (दरिद्री) आहे.’” ‘‘ပါဏံ န ဟညေ န စဒိန္နမာဒိယေ,မုသာ န ဘာသေ န စ မဇ္ဇပေါ သိယာ; အဗြဟ္မစရိယာ ဝိရမေယျ မေထုနာ,ရတ္တိံ န ဘုဉ္ဇေယျ ဝိကာလဘောဇနံ. “प्राण्यांची हिंसा करू नये, न दिलेले (चोरीने) घेऊ नये, असत्य बोलू नये आणि मद्यपान करू नये; मैथुनरूप अब्रह्मचर्यापासून अलिप्त राहावे, रात्री अवेळी (विकाल) भोजन करू नये. ‘‘မာလံ [Pg.90] န ဓာရေ န စ ဂန္ဓမာစရေ,မဉ္စေ ဆမာယံ ဝ သယေထ သန္ထတေ; ဧတဉှိ အဋ္ဌင်္ဂိကမာဟုပေါသထံ,ဗုဒ္ဓေန ဒုက္ခန္တဂုနာ ပကာသိတံ. पुष्पमाला धारण करू नये, सुगंधी द्रव्यांचा वापर करू नये; मंचकावर किंवा जमिनीवर अंथरलेल्या चटईवर शयन करावे. दुःखाचा अंत करणाऱ्या बुद्धांनी हा अष्टांग उपोसथ प्रकाशित केला आहे. ‘‘စန္ဒော စ သုရိယော စ ဥဘော သုဒဿနာ,ဩဘာသယံ အနုပရိယန္တိ ယာဝတာ; တမောနုဒါ တေ ပန အန္တလိက္ခဂါ,နဘေ ပဘာသန္တိ ဒိသာဝိရောစနာ. चंद्र आणि सूर्य हे दोन्ही दर्शनीय (सुंदर) गोल, जोपर्यंत प्रकाश देत फिरतात; अंधाराचा नाश करणारे, आकाशात विहार करणारे ते सूर्य-चंद्र दिशांना प्रकाशित करत नभांत तळपतात. ‘‘ဧတသ္မိံ ယံ ဝိဇ္ဇတိ အန္တရေ ဓနံ,မုတ္တာ မဏိ ဝေဠုရိယဉ္စ ဘဒ္ဒကံ; သိင်္ဂီသုဝဏ္ဏံ အထ ဝါပိ ကဉ္စနံ,ယံ ဇာတရူပံ ဟဋကန္တိ ဝုစ္စတိ. यांच्या दरम्यान जे काही धन अस्तित्वात आहे—मोती, मणी, उत्तम वैडूर्य, शिंगी सुवर्ण (उत्कृष्ट सोने) याशिवाय इतर सोने, ज्याला जातरूप किंवा हाटक असे म्हटले जाते; ‘‘အဋ္ဌင်္ဂုပေတဿ ဥပေါသထဿ,ကလမ္ပိ တေ နာနုဘဝန္တိ သောဠသိံ; စန္ဒပ္ပဘာ တာရဂဏာ စ သဗ္ဗေ. ते सर्व धन, चंद्राचा प्रकाश आणि सर्व तारांगण, अष्टांगयुक्त उपोसथाच्या सोळाव्या भागाचीही (कलेचीही) बरोबरी करू शकत नाहीत. ‘‘တသ္မာ ဟိ နာရီ စ နရော စ သီလဝါ,အဋ္ဌင်္ဂုပေတံ ဥပဝဿုပေါသထံ; ပုညာနိ ကတွာန သုခုဒြယာနိ,အနိန္ဒိတာ သဂ္ဂမုပေန္တိ ဌာန’’န္တိ. ပဉ္စမံ; म्हणूनच, शीलवान स्त्री आणि पुरुषाने अष्टांगयुक्त उपोसथाचे व्रत करावे. सुखावह पुण्यकर्मे करून, ते निंदारहित होऊन स्वर्गलोकात प्रवेश करतात.” (पाचवे सूत्र समाप्त) ၆. အနုရုဒ္ဓသုတ္တံ ६. अनुरुद्ध सुत्त ၄၆. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ကောသမ္ဗိယံ ဝိဟရတိ ဃောသိတာရာမေ. တေန ခေါ ပန သမယေန အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ ဒိဝါဝိဟာရံ ဂတော ဟောတိ ပဋိသလ္လီနော. အထ ခေါ သမ္ဗဟုလာ မနာပကာယိကာ ဒေဝတာ ယေနာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ တေနုပသင်္ကမိံသု; ဥပသင်္ကမိတွာ အာယသ္မန္တံ အနုရုဒ္ဓံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ အဋ္ဌံသု. ဧကမန္တံ ဌိတာ ခေါ တာ ဒေဝတာ အာယသ္မန္တံ အနုရုဒ္ဓံ ဧတဒဝေါစုံ – ‘‘မယံ, ဘန္တေ အနုရုဒ္ဓ, မနာပကာယိကာ နာမ ဒေဝတာ တီသု ဌာနေသု ဣဿရိယံ ကာရေမ ဝသံ ဝတ္တေမ. မယံ, ဘန္တေ အနုရုဒ္ဓ, ယာဒိသကံ ဝဏ္ဏံ အာကင်္ခါမ တာဒိသကံ ဝဏ္ဏံ ဌာနသော ပဋိလဘာမ; ယာဒိသကံ သရံ အာကင်္ခါမ [Pg.91] တာဒိသကံ သရံ ဌာနသော ပဋိလဘာမ; ယာဒိသကံ သုခံ အာကင်္ခါမ တာဒိသကံ သုခံ ဌာနသော ပဋိလဘာမ. မယံ, ဘန္တေ အနုရုဒ္ဓ, မနာပကာယိကာ နာမ ဒေဝတာ ဣမေသု တီသု ဌာနေသု ဣဿရိယံ ကာရေမ ဝသံ ဝတ္တေမာ’’တိ. ४६. एकदा भगवान कोसंबी येथे घोषिताराम विहारात विहार करत होते. त्या वेळी आयुष्यमान अनुरुद्ध दिवसाच्या विश्रांतीसाठी एकांतात ध्यानस्थ बसले होते. तेव्हा 'मनापकायिका' (मनवेधक रूप धारण करणाऱ्या) नावाच्या अनेक देवकन्या आयुष्यमान अनुरुद्धांकडे आल्या. जवळ येऊन त्यांनी आयुष्यमान अनुरुद्धांना अभिवादन केले आणि त्या एका बाजूला उभ्या राहिल्या. एका बाजूला उभ्या राहिलेल्या त्या देवकन्या आयुष्यमान अनुरुद्धांना म्हणाल्या— “भंते अनुरुद्ध! आम्ही 'मनापकायिका' नावाच्या देवकन्या आहोत. आम्ही तीन गोष्टींवर प्रभुत्व गाजवतो आणि नियंत्रण ठेवतो. भंते अनुरुद्ध! आम्हाला हवा तसा वर्ण (रंग) आम्ही तत्काळ प्राप्त करतो; आम्हाला हवा तसा स्वर (आवाज) आम्ही तत्काळ प्राप्त करतो; आणि आम्हाला हवे तसे सुख आम्ही तत्काळ प्राप्त करतो. भंते अनुरुद्ध! आम्ही मनापकायिका नावाच्या देवकन्या या तीन गोष्टींवर प्रभुत्व गाजवतो आणि नियंत्रण ठेवतो.” အထ ခေါ အာယသ္မတော အနုရုဒ္ဓဿ ဧတဒဟောသိ – ‘‘အဟော ဝတိမာ ဒေဝတာ သဗ္ဗာဝ နီလာ အဿု နီလဝဏ္ဏာ နီလဝတ္ထာ နီလာလင်္ကာရာ’’တိ. အထ ခေါ တာ ဒေဝတာ အာယသ္မတော အနုရုဒ္ဓဿ စိတ္တမညာယ သဗ္ဗာဝ နီလာ အဟေသုံ နီလဝဏ္ဏာ နီလဝတ္ထာ နီလာလင်္ကာရာ. तेव्हा आयुष्यमान अनुरुद्धांच्या मनात विचार आला— “किती बरे होईल जर या सर्व देवकन्या निळ्या रंगाच्या, निळ्या वर्णाच्या, निळी वस्त्रे परिधान केलेल्या आणि निळे अलंकार घातलेल्या असत्या!” तेव्हा त्या देवकन्यांनी आयुष्यमान अनुरुद्धांच्या मनातील विचार ओळखून, त्या सर्व निळ्या रंगाच्या, निळ्या वर्णाच्या, निळी वस्त्रे परिधान केलेल्या आणि निळे अलंकार घातलेल्या झाल्या. အထ ခေါ အာယသ္မတော အနုရုဒ္ဓဿ ဧတဒဟောသိ – ‘‘အဟော ဝတိမာ ဒေဝတာ သဗ္ဗာဝ ပီတာ အဿု…ပေ… သဗ္ဗာဝ လောဟိတကာ အဿု… သဗ္ဗာဝ ဩဒါတာ အဿု ဩဒါတဝဏ္ဏာ ဩဒါတဝတ္ထာ ဩဒါတာလင်္ကာရာ’’တိ. အထ ခေါ တာ ဒေဝတာ အာယသ္မတော အနုရုဒ္ဓဿ စိတ္တမညာယ သဗ္ဗာဝ ဩဒါတာ အဟေသုံ ဩဒါတဝဏ္ဏာ ဩဒါတဝတ္ထာ ဩဒါတာလင်္ကာရာ. त्यानंतर आयुष्यमान अनुरुद्धांच्या मनात विचार आला— “किती बरे होईल जर या सर्व देवकन्या पिवळ्या रंगाच्या... लाल रंगाच्या... पांढऱ्या रंगाच्या, पांढऱ्या वर्णाच्या, पांढरी वस्त्रे परिधान केलेल्या आणि पांढरे अलंकार घातलेल्या असत्या!” तेव्हा त्या देवकन्यांनी आयुष्यमान अनुरुद्धांच्या मनातील विचार ओळखून, त्या सर्व पांढऱ्या रंगाच्या, पांढऱ्या वर्णाच्या, पांढरी वस्त्रे परिधान केलेल्या आणि पांढरे अलंकार घातलेल्या झाल्या. အထ ခေါ တာ ဒေဝတာ ဧကာ စ ဂါယိ ဧကာ စ နစ္စိ ဧကာ စ အစ္ဆရံ ဝါဒေသိ. သေယျထာပိ နာမ ပဉ္စင်္ဂိကဿ တူရိယဿ သုဝိနီတဿ သုပ္ပဋိပတာဠိတဿ ကုသလေဟိ သုသမန္နာဟတဿ သဒ္ဒေါ ဟောတိ ဝဂ္ဂု စ ရဇနီယော စ ကမနီယော စ ပေမနီယော စ မဒနီယော စ; ဧဝမေဝံ တာသံ ဒေဝတာနံ အလင်္ကာရာနံ သဒ္ဒေါ ဟောတိ ဝဂ္ဂု စ ရဇနီယော စ ကမနီယော စ ပေမနီယော စ မဒနီယော စ. အထ ခေါ အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ ဣန္ဒြိယာနိ ဩက္ခိပိ. त्यानंतर त्या देवकन्यांपैकी एकीने गाणे गायले, एकीने नृत्य केले आणि एकीने चुटकी वाजवली (टाळी वाजवली). ज्याप्रमाणे कुशल वादकांनी उत्तम प्रकारे तयार केलेले, योग्य तालावर वाजवलेले पाच अंगांनी युक्त (पंचांगिक) वाद्य वाजवले असता त्याचा आवाज मधुर, मनमोहक, सुंदर, प्रिय आणि धुंद करणारा असतो; त्याचप्रमाणे त्या देवकन्यांच्या अलंकारांचा आवाज मधुर, मनमोहक, सुंदर, प्रिय आणि धुंद करणारा होता. तेव्हा आयुष्यमान अनुरुद्धांनी आपली इंद्रिये आवरती घेतली (खाली झुकवली). အထ ခေါ တာ ဒေဝတာ ‘‘န ခွယျော အနုရုဒ္ဓေါ သာဒိယတီ’’တိ တတ္ထေဝန္တရဓာယိံသု. အထ ခေါ အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ သာယနှသမယံ ပဋိသလ္လာနာ ဝုဋ္ဌိတော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ အာယသ္မာ အနုရုဒ္ဓေါ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – तेव्हा “आर्य अनुरुद्ध यात रस घेत नाहीत (प्रसन्न होत नाहीत)” असे समजून त्या देवकन्या तिथेच अंतर्धान पावल्या. त्यानंतर संध्याकाळच्या वेळी आयुष्यमान अनुरुद्ध ध्यानातून उठून भगवंतांकडे गेले. भगवंतांना अभिवादन करून ते एका बाजूला बसले. एका बाजूला बसलेल्या आयुष्यमान अनुरुद्धांनी भगवंतांना असे म्हटले— ‘‘ဣဓာဟံ, ဘန္တေ, ဒိဝါဝိဟာရံ ဂတော ဟောမိ ပဋိသလ္လီနော. အထ ခေါ, ဘန္တေ, သမ္ဗဟုလာ မနာပကာယိကာ ဒေဝတာ ယေနာဟံ တေနုပသင်္ကမိံသု; ဥပသင်္ကမိတွာ မံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ အဋ္ဌံသု. ဧကမန္တံ ဌိတာ ခေါ, ဘန္တေ, တာ [Pg.92] ဒေဝတာ မံ ဧတဒဝေါစုံ – ‘မယံ, ဘန္တေ အနုရုဒ္ဓ, မနာပကာယိကာ နာမ ဒေဝတာ တီသု ဌာနေသု ဣဿရိယံ ကာရေမ ဝသံ ဝတ္တေမ. မယံ, ဘန္တေ အနုရုဒ္ဓ, ယာဒိသကံ ဝဏ္ဏံ အာကင်္ခါမ တာဒိသကံ ဝဏ္ဏံ ဌာနသော ပဋိလဘာမ; ယာဒိသကံ သရံ အာကင်္ခါမ တာဒိသကံ သရံ ဌာနသော ပဋိလဘာမ; ယာဒိသကံ သုခံ အာကင်္ခါမ တာဒိသကံ သုခံ ဌာနသော ပဋိလဘာမ. မယံ, ဘန္တေ အနုရုဒ္ဓ, မနာပကာယိကာ နာမ ဒေဝတာ ဣမေသု တီသု ဌာနေသု ဣဿရိယံ ကာရေမ ဝသံ ဝတ္တေမာ’တိ. တဿ မယှံ, ဘန္တေ, ဧတဒဟောသိ – ‘အဟော ဝတိမာ ဒေဝတာ သဗ္ဗာဝ နီလာ အဿု နီလဝဏ္ဏာ နီလဝတ္ထာ နီလာလင်္ကာရာ’တိ. အထ ခေါ, ဘန္တေ, တာ ဒေဝတာ မမ စိတ္တမညာယ သဗ္ဗာဝ နီလာ အဟေသုံ နီလဝဏ္ဏာ နီလဝတ္ထာ နီလာလင်္ကာရာ. “भंते! मी येथे दिवसाच्या विश्रांतीसाठी एकांतात ध्यानस्थ बसलो होतो. तेव्हा, भंते! 'मनापकायिका' नावाच्या अनेक देवकन्या माझ्याकडे आल्या. जवळ येऊन त्यांनी मला अभिवादन केले आणि त्या एका बाजूला उभ्या राहिल्या. एका बाजूला उभ्या राहिलेल्या त्या देवकन्या मला म्हणाल्या— ‘भंते अनुरुद्ध! आम्ही मनापकायिका नावाच्या देवकन्या आहोत. आम्ही तीन गोष्टींवर प्रभुत्व गाजवतो आणि नियंत्रण ठेवतो. भंते अनुरुद्ध! आम्हाला हवा तसा वर्ण आम्ही तत्काळ प्राप्त करतो; आम्हाला हवा तसा स्वर आम्ही तत्काळ प्राप्त करतो; आणि आम्हाला हवे तसे सुख आम्ही तत्काळ प्राप्त करतो. भंते अनुरुद्ध! आम्ही मनापकायिका नावाच्या देवकन्या या तीन गोष्टींवर प्रभुत्व गाजवतो आणि नियंत्रण ठेवतो.’ तेव्हा, भंते! माझ्या मनात विचार आला— ‘किती बरे होईल जर या सर्व देवकन्या निळ्या रंगाच्या, निळ्या वर्णाच्या, निळी वस्त्रे परिधान केलेल्या आणि निळे अलंकार घातलेल्या असत्या!’ तेव्हा, भंते! त्या देवकन्यांनी माझ्या मनातील विचार ओळखून, त्या सर्व निळ्या रंगाच्या, निळ्या वर्णाच्या, निळी वस्त्रे परिधान केलेल्या आणि निळे अलंकार घातलेल्या झाल्या. ‘‘တဿ မယှံ, ဘန္တေ, ဧတဒဟောသိ – ‘အဟော ဝတိမာ ဒေဝတာ သဗ္ဗာဝ ပီတာ အဿု…ပေ… သဗ္ဗာဝ လောဟိတကာ အဿု…ပေ… သဗ္ဗာဝ ဩဒါတာ အဿု ဩဒါတဝဏ္ဏာ ဩဒါတဝတ္ထာ ဩဒါတာလင်္ကာရာ’တိ. အထ ခေါ, ဘန္တေ, တာ ဒေဝတာ မမ စိတ္တမညာယ သဗ္ဗာဝ ဩဒါတာ အဟေသုံ ဩဒါတဝဏ္ဏာ ဩဒါတဝတ္ထာ ဩဒါတာလင်္ကာရာ. “त्यानंतर, भंते! माझ्या मनात विचार आला— ‘किती बरे होईल जर या सर्व देवकन्या पिवळ्या रंगाच्या... लाल रंगाच्या... पांढऱ्या रंगाच्या, पांढऱ्या वर्णाच्या, पांढरी वस्त्रे परिधान केलेल्या आणि पांढरे अलंकार घातलेल्या असत्या!’ तेव्हा, भंते! त्या देवकन्यांनी माझ्या मनातील विचार ओळखून, त्या सर्व पांढऱ्या रंगाच्या, पांढऱ्या वर्णाच्या, पांढरी वस्त्रे परिधान केलेल्या आणि पांढरे अलंकार घातलेल्या झाल्या.” ‘‘အထ ခေါ, ဘန္တေ, တာ ဒေဝတာ ဧကာ စ ဂါယိ ဧကာ စ နစ္စိ ဧကာ စ အစ္ဆရံ ဝါဒေသိ. သေယျထာပိ နာမ ပဉ္စင်္ဂိကဿ တူရိယဿ သုဝိနီတဿ သုပ္ပဋိပတာဠိတဿ ကုသလေဟိ သုသမန္နာဟတဿ သဒ္ဒေါ ဟောတိ ဝဂ္ဂု စ ရဇနီယော စ ကမနီယော စ ပေမနီယော စ မဒနီယော စ; ဧဝမေဝံ တာသံ ဒေဝတာနံ အလင်္ကာရာနံ သဒ္ဒေါ ဟောတိ ဝဂ္ဂု စ ရဇနီယော စ ကမနီယော စ ပေမနီယော စ မဒနီယော စ. အထ ခွာဟံ, ဘန္တေ, ဣန္ဒြိယာနိ ဩက္ခိပိံ. भन्ते, त्यानंतर त्या देवकन्यांपैकी एकीने गाणे गायले, एकीने नृत्य केले आणि एकीने टाळ्या वाजवल्या. ज्याप्रमाणे चांगल्या प्रकारे सुसंवादित केलेल्या, चांगल्या प्रकारे ताळबद्ध केलेल्या आणि कुशल वादकांद्वारे उत्तम प्रकारे वाजवलेल्या पंचअंगिक (पाच प्रकारच्या वाद्यांच्या) संगीताचा आवाज मधुर, मनमोहक, आनंददायी, प्रिय आणि धुंद करणारा असतो; त्याचप्रमाणे त्या देवकन्यांच्या अलंकारांचा आवाज मधुर, मनमोहक, आनंददायी, प्रिय आणि धुंद करणारा होता. तेव्हा, भन्ते, मी माझी इंद्रिये खाली वळवली (संयमित केली). ‘‘အထ ခေါ, ဘန္တေ, တာ ဒေဝတာ ‘န ခွယျော အနုရုဒ္ဓေါ သာဒိယတီ’တိ တတ္ထေဝန္တရဓာယိံသု. ကတိဟိ နု ခေါ, ဘန္တေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနာပကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ? भन्ते, त्यानंतर 'आर्य अनुरुद्ध (या नृत्याचा व संगीताचा) आनंद घेत नाहीत' असे समजून त्या देवकन्या तिथेच अंतर्धान पावल्या. भन्ते, किती गुणांनी युक्त असलेली स्त्री शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मनापकायिक देवांच्या सहवासात उत्पन्न होते? ‘‘အဋ္ဌဟိ ခေါ, အနုရုဒ္ဓ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနာပကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, အနုရုဒ္ဓ, မာတုဂါမော ယဿ မာတာပိတရော ဘတ္တုနော ဒေန္တိ အတ္ထကာမာ ဟိတေသိနော အနုကမ္ပကာ အနုကမ္ပံ ဥပါဒါယ တဿ [Pg.93] ဟောတိ ပုဗ္ဗုဋ္ဌာယိနီ ပစ္ဆာနိပါတိနီ ကိင်္ကာရပဋိဿာဝိနီ မနာပစာရိနီ ပိယဝါဒိနီ. अनुरुद्ध, आठ गुणांनी युक्त असलेली स्त्री शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मनापकायिक देवांच्या सहवासात उत्पन्न होते. कोणते आठ? येथे, अनुरुद्ध, तिचे कल्याण इच्छिणारे, हित शोधणारे आणि तिच्यावर अनुकंपा करणारे माता-पिता अनुकंपेपोटी ज्या पतीला तिला देतात; त्या पतीच्या आधी उठणारी, त्याच्यानंतर झोपणारी, 'मी काय करू?' असे आज्ञापालन करणारी, पतीला अनुकूल वागणारी आणि प्रिय बोलणारी ती असते. ‘‘ယေ တေ ဘတ္တု ဂရုနော ဟောန္တိ – မာတာတိ ဝါ ပိတာတိ ဝါ သမဏဗြာဟ္မဏာတိ ဝါ – တေ သက္ကရောတိ, ဂရုံ ကရောတိ, မာနေတိ, ပူဇေတိ, အဗ္ဘာဂတေ စ အာသနောဒကေန ပဋိပူဇေတိ. पतीचे जे कोणी आदरणीय असतात – मग ते आई-वडील असोत किंवा श्रमण-ब्राह्मण असोत – त्यांचा ती सत्कार करते, आदर करते, मान देते, पूजा करते आणि घरी आलेल्या पाहुण्यांचे आसन व पाण्याने आदरातिथ्य करते. ‘‘ယေ တေ ဘတ္တု အဗ္ဘန္တရာ ကမ္မန္တာ – ဥဏ္ဏာတိ ဝါ ကပ္ပာသာတိ ဝါ – တတ္ထ ဒက္ခာ ဟောတိ အနလသာ တတြုပါယာယ ဝီမံသာယ သမန္နာဂတာ အလံ ကာတုံ အလံ သံဝိဓာတုံ. पतीच्या घरातील जे काही उद्योग असतात – जसे की लोकर किंवा कापसाचे काम – त्यामध्ये ती चतुर आणि आळस न करणारी असते. त्या कामाच्या उपायांचा विचार करण्याच्या बुद्धीने युक्त होऊन ती स्वतः काम करण्यास आणि इतरांकडून ते व्यवस्थित करून घेण्यास समर्थ असते. ‘‘ယော သော ဘတ္တု အဗ္ဘန္တရော အန္တောဇနော – ဒါသာတိ ဝါ ပေဿာတိ ဝါ ကမ္မကရာတိ ဝါ – တေသံ ကတဉ္စ ကတတော ဇာနာတိ အကတဉ္စ အကတတော ဇာနာတိ, ဂိလာနကာနဉ္စ ဗလာဗလံ ဇာနာတိ ခါဒနီယံ ဘောဇနီယဉ္စဿ ပစ္စံသေန သံဝိဘဇတိ. पतीच्या घरातील जे नोकरचाकर, सेवक किंवा कामगार असतात – त्यांनी काय केले आहे हे ती जाणून घेते आणि काय केले नाही हेही जाणून घेते; आजारी लोकांच्या बरे-वाईट असण्याची काळजी घेते आणि त्यांना खाण्यापिण्याच्या वस्तू त्यांच्या योग्य हिश्श्यानुसार वाटून देते. ‘‘ယံ ဘတ္တု အာဟရတိ ဓနံ ဝါ ဓညံ ဝါ ဇာတရူပံ ဝါ တံ အာရက္ခေန ဂုတ္တိယာ သမ္ပာဒေတိ, တတ္ထ စ ဟောတိ အဓုတ္တီ အထေနီ အသောဏ္ဍီ အဝိနာသိကာ. पती जे काही धन, धान्य किंवा सुवर्ण आणतो, त्याचे ती रक्षण करून ते सुरक्षित ठेवते; आणि त्या बाबतीत ती उधळपट्टी न करणारी, चोरी न करणारी, व्यसनी नसलेली आणि संपत्तीचा नाश न करणारी असते. ‘‘ဥပါသိကာ ခေါ ပန ဟောတိ ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂတာ ဓမ္မံ သရဏံ ဂတာ သံဃံ သရဏံ ဂတာ. तसेच, ती बुद्ध, धम्म आणि संघ यांना शरण गेलेली उपासिका असते. ‘‘သီလဝတီ ခေါ ပန ဟောတိ – ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတာ, အဒိန္နာဒါနာ ပဋိဝိရတာ, ကာမေသုမိစ္ဆာစာရာ ပဋိဝိရတာ, မုသာဝါဒါ ပဋိဝိရတာ, သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတာ. ती शीलवान असते – प्राणातिपातापासून अलिप्त राहते, अदिन्नादानापासून अलिप्त राहते, कामेसू मिच्छाचारापासून अलिप्त राहते, मुसावादापासून अलिप्त राहते आणि सुरा-मेरय-मज्ज-पमादठ्ठानापासून अलिप्त राहते. ‘‘စာဂဝတီ ခေါ ပန ဟောတိ. ဝိဂတမလမစ္ဆေရေန စေတသာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသတိ မုတ္တစာဂါ ပယတပါဏိနီ ဝေါဿဂ္ဂရတာ ယာစယောဂါ ဒါနသံဝိဘာဂရတာ. ती दानशूर असते. मत्सराचा मळ नसलेल्या चित्ताने ती गृहस्थाश्रम चालवते; मुक्तहस्ते दान देणारी, दान देण्यासाठी हात स्वच्छ ठेवणारी, त्याग करण्यात आनंद मानणारी, याचना करणाऱ्यांना देण्यास योग्य आणि दान व वाटणी करण्यात रस घेणारी असते. ‘‘ဣမေဟိ ခေါ, အနုရုဒ္ဓ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနာပကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ. अनुरुद्ध, या आठ गुणांनी युक्त असलेली स्त्री शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मनापकायिक देवांच्या सहवासात उत्पन्न होते. ‘‘ယော [Pg.94] နံ ဘရတိ သဗ္ဗဒါ, နိစ္စံ အာတာပိ ဥဿုကော; တံ သဗ္ဗကာမဒံ ပေါသံ, ဘတ္တာရံ နာတိမညတိ. जो पती तिचे नेहमी पालनपोषण करतो, सतत उद्योगी आणि प्रयत्नशील राहतो; अशा सर्व इच्छा पूर्ण करणाऱ्या पतीचा ती कधीही अनादर करत नाही. ‘‘န စာပိ သောတ္ထိ ဘတ္တာရံ, ဣဿာဝါဒေန ရောသယေ; ဘတ္တု စ ဂရုနော သဗ္ဗေ, ပဋိပူဇေတိ ပဏ္ဍိတာ. ती सुसंस्कारी स्त्री मत्सराच्या शब्दांनी पतीला त्रास देत नाही; आणि ती सुज्ञ स्त्री पतीच्या सर्व आदरणीय व्यक्तींचा आदर-सत्कार करते. ‘‘ဥဋ္ဌာဟိကာ အနလသာ, သင်္ဂဟိတပရိဇ္ဇနာ; ဘတ္တု မနာပံ စရတိ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. ती उद्योगी व आळस न करणारी असते, नोकरचाकरांची काळजी घेणारी असते; पतीला आवडेल असे वागते आणि पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करते. ‘‘ယာ ဧဝံ ဝတ္တတိ နာရီ, ဘတ္တု ဆန္ဒဝသာနုဂါ; မနာပါ နာမ တေ ဒေဝါ, ယတ္ထ သာ ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ. ဆဋ္ဌံ; जी स्त्री पतीच्या इच्छेनुसार अशा प्रकारे वागते; ती 'मनाप' नावाच्या देवांच्या लोकांमध्ये उत्पन्न होते. (सहावे सूत्र समाप्त) ၇. ဒုတိယဝိသာခါသုတ္တံ ७. दुसरे विशाखा सूत्र ၄၇. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ ပုဗ္ဗာရာမေ မိဂါရမာတုပါသာဒေ. အထ ခေါ ဝိသာခါ မိဂါရမာတာ…ပေ… ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဝိသာခံ မိဂါရမာတရံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ४७. एकदा भगवान श्रावस्ती येथील पूर्वाराम विहारामध्ये मृगारमाता विशाखेच्या प्रासादात विहार करत होते. तेव्हा मृगारमाता विशाखा भगवंतांकडे आली... आणि एका बाजूला बसलेल्या मृगारमाता विशाखेला भगवान म्हणाले – ‘‘အဋ္ဌဟိ ခေါ, ဝိသာခေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနာပကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ယဿ မာတာပိတရော ဘတ္တုနော ဒေန္တိ အတ္ထကာမာ ဟိတေသိနော အနုကမ္ပကာ အနုကမ္ပံ ဥပါဒါယ တဿ ဟောတိ ပုဗ္ဗုဋ္ဌာယိနီ ပစ္ဆာနိပါတိနီ ကိင်္ကာရပဋိဿာဝိနီ မနာပစာရိနီ ပိယဝါဒိနီ…ပေ…. विशाखे, आठ गुणांनी युक्त असलेली स्त्री शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मनापकायिक देवांच्या सहवासात उत्पन्न होते. कोणते आठ? येथे, विशाखे, तिचे कल्याण इच्छिणारे, हित शोधणारे आणि तिच्यावर अनुकंपा करणारे माता-पिता अनुकंपेपोटी ज्या पतीला तिला देतात; त्या पतीच्या आधी उठणारी, त्याच्यानंतर झोपणारी, 'मी काय करू?' असे आज्ञापालन करणारी, पतीला अनुकूल वागणारी आणि प्रिय बोलणारी ती असते... ‘‘စာဂဝတီ ခေါ ပန ဟောတိ. ဝိဂတမလမစ္ဆေရေန စေတသာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသတိ မုတ္တစာဂါ ပယတပါဏိနီ ဝေါဿဂ္ဂရတာ ယာစယောဂါ ဒါနသံဝိဘာဂရတာ. ဣမေဟိ ခေါ, ဝိသာခေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနာပကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ. ती दानशूर असते. मत्सराचा मळ नसलेल्या चित्ताने ती गृहस्थाश्रम चालवते; मुक्तहस्ते दान देणारी, दान देण्यासाठी हात स्वच्छ ठेवणारी, त्याग करण्यात आनंद मानणारी, याचना करणाऱ्यांना देण्यास योग्य आणि दान व वाटणी करण्यात रस घेणारी असते. विशाखे, या आठ गुणांनी युक्त असलेली स्त्री शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मनापकायिक देवांच्या सहवासात उत्पन्न होते. ‘‘ယော နံ ဘရတိ သဗ္ဗဒါ, နိစ္စံ အာတာပိ ဥဿုကော; တံ သဗ္ဗကာမဒံ ပေါသံ, ဘတ္တာရံ နာတိမညတိ. जो पती तिचे नेहमी पालनपोषण करतो, सतत उद्योगी आणि प्रयत्नशील राहतो; अशा सर्व इच्छा पूर्ण करणाऱ्या पतीचा ती कधीही अनादर करत नाही. ‘‘န [Pg.95] စာပိ သောတ္ထိ ဘတ္တာရံ, ဣဿာဝါဒေန ရောသယေ; ဘတ္တု စ ဂရုနော သဗ္ဗေ, ပဋိပူဇေတိ ပဏ္ဍိတာ. ती सुसंस्कारी स्त्री मत्सराच्या शब्दांनी पतीला त्रास देत नाही; आणि ती सुज्ञ स्त्री पतीच्या सर्व आदरणीय व्यक्तींचा आदर-सत्कार करते. ‘‘ဥဋ္ဌာဟိကာ အနလသာ, သင်္ဂဟိတပရိဇ္ဇနာ; ဘတ္တု မနာပံ စရတိ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. ती उद्योगी व आळस न करणारी असते, नोकरचाकरांची काळजी घेणारी असते; पतीला आवडेल असे वागते आणि पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करते. ‘‘ယာ ဧဝံ ဝတ္တတိ နာရီ, ဘတ္တု ဆန္ဒဝသာနုဂါ; မနာပါ နာမ တေ ဒေဝါ, ယတ္ထ သာ ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ. သတ္တမံ; जी स्त्री पतीच्या इच्छेनुसार अशा प्रकारे वागते; ती 'मनाप' नावाच्या देवांच्या लोकांमध्ये उत्पन्न होते. (सातवे सूत्र समाप्त) ၈. နကုလမာတာသုတ္တံ ८. नकुलमाता सूत्र ၄၈. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဘဂ္ဂေသု ဝိဟရတိ သုံသုမာရဂိရေ ဘေသကဠာဝနေ မိဂဒါယေ. အထ ခေါ နကုလမာတာ ဂဟပတာနီ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ…ပေ…. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ နကုလမာတရံ ဂဟပတာနိံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ४८. एकदा भगवान भग्ग देशात सुंसुमारगिरी येथील भेसकळावनातील मृगदायात विहार करत होते. तेव्हा नकुलमाता गृहपती पत्नी भगवंतांकडे आली; आणि वंदन करून एका बाजूला बसली... एका बाजूला बसलेल्या नकुलमाता गृहपती पत्नीला भगवान म्हणाले – ‘‘အဋ္ဌဟိ ခေါ, နကုလမာတေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနာပကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, နကုလမာတေ, မာတုဂါမော ယဿ မာတာပိတရော ဘတ္တုနော ဒေန္တိ အတ္ထကာမာ ဟိတေသိနော အနုကမ္ပကာ အနုကမ္ပံ ဥပါဒါယ တဿ ဟောတိ ပုဗ္ဗုဋ္ဌာယိနီ ပစ္ဆာနိပါတိနီ ကိင်္ကာရပဋိဿာဝိနီ မနာပစာရိနီ ပိယဝါဒိနီ. नकुलमाते, आठ गुणांनी युक्त असलेली स्त्री शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, मनापकायिक देवांच्या सहवासात उत्पन्न होते. कोणते आठ? येथे, नकुलमाते, तिचे कल्याण इच्छिणारे, हित शोधणारे आणि तिच्यावर अनुकंपा करणारे माता-पिता अनुकंपेपोटी ज्या पतीला तिला देतात; त्या पतीच्या आधी उठणारी, त्याच्यानंतर झोपणारी, 'मी काय करू?' असे आज्ञापालन करणारी, पतीला अनुकूल वागणारी आणि प्रिय बोलणारी ती असते. ‘‘ယေ တေ ဘတ္တု ဂရုနော ဟောန္တိ – မာတာတိ ဝါ ပိတာတိ ဝါ သမဏဗြာဟ္မဏာတိ ဝါ – တေ သက္ကရောတိ ဂရုံ ကရောတိ မာနေတိ ပူဇေတိ, အဗ္ဘာဂတေ စ အာသနောဒကေန ပဋိပူဇေတိ. पतीचे जे कोणी आदरणीय असतात – मग ते आई-वडील असोत किंवा श्रमण-ब्राह्मण असोत – त्यांचा ती सत्कार करते, आदर करते, मान देते, पूजा करते आणि घरी आलेल्या पाहुण्यांचे आसन व पाण्याने आदरातिथ्य करते. ‘‘ယေ တေ ဘတ္တု အဗ္ဘန္တရာ ကမ္မန္တာ – ဥဏ္ဏာတိ ဝါ ကပ္ပာသာတိ ဝါ – တတ္ထ ဒက္ခာ ဟောတိ အနလသာ တတြုပါယာယ ဝီမံသာယ သမန္နာဂတာ အလံ ကာတုံ အလံ သံဝိဓာတုံ. पतीचे जे काही घरगुती उद्योग असतात – जसे की लोकर किंवा कापसाचे काम – त्यामध्ये ती कुशल असते, आळस न करणारी असते. त्या कामांच्या उपायांचा शोध घेणाऱ्या (योग्य) बुद्धीने युक्त असते, ती स्वतः ते काम करण्यास समर्थ असते आणि इतरांकडून ते करवून घेण्यास (नियोजन करण्यास) सक्षम असते. ‘‘ယော သော ဘတ္တု အဗ္ဘန္တရော အန္တောဇနော – ဒါသာတိ ဝါ ပေဿာတိ ဝါ ကမ္မကရာတိ ဝါ – တေသံ ကတဉ္စ ကတတော ဇာနာတိ အကတဉ္စ အကတတော ဇာနာတိ, ဂိလာနကာနဉ္စ ဗလာဗလံ ဇာနာတိ ခါဒနီယံ ဘောဇနီယဉ္စဿ ပစ္စံသေန သံဝိဘဇတိ. पतीच्या घरातील जे सेवकवर्ग असतात – मग ते दास असोत, संदेशवाहक असोत किंवा मजूर असोत – त्यांनी काय केले आहे हे ती 'केले आहे' म्हणून जाणते आणि काय केले नाही हे 'केले नाही' म्हणून जाणते. आजारी असलेल्यांची प्रकृती (शारीरिक स्थिती) ती जाणते आणि त्यांना खाण्यापिण्याचे पदार्थ त्यांच्या योग्य वाटणीनुसार विभागून देते. ‘‘ယံ [Pg.96] ဘတ္တာ အာဟရတိ ဓနံ ဝါ ဓညံ ဝါ ရဇတံ ဝါ ဇာတရူပံ ဝါ တံ အာရက္ခေန ဂုတ္တိယာ သမ္ပာဒေတိ, တတ္ထ စ ဟောတိ အဓုတ္တီ အထေနီ အသောဏ္ဍီ အဝိနာသိကာ. पती जे काही धन, धान्य, चांदी किंवा सोने आणतो, त्याचे ती रक्षण करून ते सुरक्षित ठेवते. त्या संपत्तीच्या बाबतीत ती उधळपट्टी न करणारी (व्यसनी नसलेली), चोरी न करणारी, मद्यपी नसलेली आणि तिचा नाश न करणारी असते. ‘‘ဥပါသိကာ ခေါ ပန ဟောတိ ဗုဒ္ဓံ သရဏံ ဂတာ ဓမ္မံ သရဏံ ဂတာ သံဃံ သရဏံ ဂတာ. शिवाय, ती बुद्ध, धम्म आणि संघ यांना शरण गेलेली उपासिका असते. ‘‘သီလဝတီ ခေါ ပန ဟောတိ – ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတာ…ပေ… သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတာ…ပေ…. ती शीलवान असते – प्राणातिपातापासून (जीवहिंसेपासून) अलिप्त राहते... तसेच मद्य, सुरा आणि प्रमादाचे स्थान असलेल्या मादक द्रव्यांच्या सेवनापासून अलिप्त राहते... ‘‘စာဂဝတီ ခေါ ပန ဟောတိ ဝိဂတမလမစ္ဆေရေန စေတသာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသတိ မုတ္တစာဂါ ပယတပါဏိနီ ဝေါဿဂ္ဂရတာ ယာစယောဂါ ဒါနသံဝိဘာဂရတာ. ती दानशूर असते; मत्सराचा मळ नसलेल्या चित्ताने ती गृहस्थाश्रम चालवते. ती मुक्तहस्ताने दान देणारी, (दान देण्यासाठी) हात स्वच्छ ठेवणारी (नेहमी तत्पर असणारी), त्याग करण्यात रमणारी, याचना करणाऱ्यांना देण्यास योग्य आणि दान व वाटणी करण्यात आनंद मानणारी असते. ‘‘ဣမေဟိ ခေါ, နကုလမာတေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ကာယဿ ဘေဒါ ပရံ မရဏာ မနာပကာယိကာနံ ဒေဝါနံ သဟဗျတံ ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ. हे नकुलमाते! या आठ गुणांनी युक्त असलेली स्त्री, शरीराच्या भेदानंतर, मृत्यूनंतर, 'मनापकायिक' नावाच्या देवांच्या सहवासात (देवलोकात) उत्पन्न होते. ‘‘ယော နံ ဘရတိ သဗ္ဗဒါ, နိစ္စံ အာတာပိ ဥဿုကော; တံ သဗ္ဗကာမဒံ ပေါသံ, ဘတ္တာရံ နာတိမညတိ. जो पती नेहमी तिचे पोषण करतो, सतत उद्योगी व प्रयत्नशील राहतो, सर्व इच्छा पूर्ण करणाऱ्या त्या पतीचा ती कधीही अवमान करत नाही. ‘‘န စာပိ သောတ္ထိ ဘတ္တာရံ, ဣဿာဝါဒေန ရောသယေ; ဘတ္တု စ ဂရုနော သဗ္ဗေ, ပဋိပူဇေတိ ပဏ္ဍိတာ. ती सुजाण स्त्री मत्सराच्या शब्दांनी पतीला संतापवत नाही; आणि ती विदुषी स्त्री पतीच्या सर्व आदरणीय व्यक्तींचा (माता-पिता इत्यादींचा) आदर-सत्कार करते. ‘‘ဥဋ္ဌာဟိကာ အနလသာ, သင်္ဂဟိတပရိဇ္ဇနာ; ဘတ္တု မနာပံ စရတိ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. ती उद्योगी व आळस न करणारी असते, घरातील नोकरचाकरांची काळजी घेणारी असते, पतीला आवडेल असे वर्तन करते आणि पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करते. ‘‘ယာ ဧဝံ ဝတ္တတိ နာရီ, ဘတ္တု ဆန္ဒဝသာနုဂါ; မနာပါ နာမ တေ ဒေဝါ, ယတ္ထ သာ ဥပပဇ္ဇတီ’’တိ. အဋ္ဌမံ; जी स्त्री पतीच्या इच्छेनुसार वागून अशा प्रकारे वर्तन करते, ती 'मनापकायिक' नावाच्या देवांच्या लोकात उत्पन्न होते. (आठवे सुत्त समाप्त) ၉. ပဌမဣဓလောကိကသုတ္တံ ९. प्रथम इधलोकिक सुत्त ၄၉. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ သာဝတ္ထိယံ ဝိဟရတိ ပုဗ္ဗာရာမေ မိဂါရမာတုပါသာဒေ. အထ ခေါ ဝိသာခါ မိဂါရမာတာ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ…ပေ…. ဧကမန္တံ နိသိန္နံ ခေါ ဝိသာခံ မိဂါရမာတရံ ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ४९. एकदा भगवान श्रावस्ती येथील पूर्वाराम विहारामध्ये मृगारमाता विशाखेच्या प्रासादात (भवनात) विहार करत होते. तेव्हा मृगारमाता विशाखा जेथे भगवान होते तेथे आली... एका बाजूला बसलेल्या मृगारमाता विशाखेला भगवान म्हणाले – ‘‘စတူဟိ [Pg.97] ခေါ, ဝိသာခေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ဣဓလောကဝိဇယာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, အယံသ လောကော အာရဒ္ဓေါ ဟောတိ. ကတမေဟိ စတူဟိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သုသံဝိဟိတကမ္မန္တော ဟောတိ, သင်္ဂဟိတပရိဇနော, ဘတ္တု မနာပံ စရတိ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. हे विशाखे! चार गुणांनी युक्त असलेली स्त्री या लोकावर (इहलोकावर) विजय मिळवण्यासाठी मार्गस्थ होते, तिचा हा लोक यशस्वी होतो. कोणते चार गुण? हे विशाखे! या जगात स्त्री आपले घरगुती काम उत्तम प्रकारे व्यवस्थापित करणारी असते, नोकरचाकरांचे नीट संगोपन करणारी असते, पतीला आवडेल असे वर्तन करणारी असते आणि पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करणारी असते. ‘‘ကထဉ္စ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သုသံဝိဟိတကမ္မန္တော ဟောတိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ယေ တေ ဘတ္တု အဗ္ဘန္တရာ ကမ္မန္တာ – ဥဏ္ဏာတိ ဝါ ကပ္ပာသာတိ ဝါ – တတ္ထ ဒက္ခာ ဟောတိ အနလသာ တတြုပါယာယ ဝီမံသာယ သမန္နာဂတာ အလံ ကာတုံ အလံ သံဝိဓာတုံ. ဧဝံ ခေါ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သုသံဝိဟိတကမ္မန္တော ဟောတိ. आणि हे विशाखे! स्त्री आपले घरगुती काम उत्तम प्रकारे व्यवस्थापित करणारी कशी होते? हे विशाखे! या जगात पतीचे जे काही घरगुती उद्योग असतात – जसे की लोकर किंवा कापसाचे काम – त्यामध्ये ती कुशल असते, आळस न करणारी असते. त्या कामांच्या उपायांचा शोध घेणाऱ्या (योग्य) बुद्धीने युक्त असते, ती स्वतः ते काम करण्यास समर्थ असते आणि इतरांकडून ते करवून घेण्यास सक्षम असते. अशा प्रकारे, हे विशाखे! स्त्री आपले घरगुती काम उत्तम प्रकारे व्यवस्थापित करणारी होते. ‘‘ကထဉ္စ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သင်္ဂဟိတပရိဇနော ဟောတိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ယော သော ဘတ္တု အဗ္ဘန္တရော အန္တောဇနော – ဒါသာတိ ဝါ ပေဿာတိ ဝါ ကမ္မကရာတိ ဝါ – တေသံ ကတဉ္စ ကတတော ဇာနာတိ အကတဉ္စ အကတတော ဇာနာတိ, ဂိလာနကာနဉ္စ ဗလာဗလံ ဇာနာတိ ခါဒနီယံ ဘောဇနီယဉ္စဿ ပစ္စံသေန သံဝိဘဇတိ. ဧဝံ ခေါ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သင်္ဂဟိတပရိဇနော ဟောတိ. आणि हे विशाखे! स्त्री नोकरचाकरांचे नीट संगोपन करणारी कशी होते? हे विशाखे! या जगात पतीच्या घरातील जे सेवकवर्ग असतात – मग ते दास असोत, संदेशवाहक असोत किंवा मजूर असोत – त्यांनी काय केले आहे हे ती 'केले आहे' म्हणून जाणते आणि काय केले नाही हे 'केले नाही' म्हणून जाणते. आजारी असलेल्यांची प्रकृती ती जाणते आणि त्यांना खाण्यापिण्याचे पदार्थ त्यांच्या योग्य वाटणीनुसार विभागून देते. अशा प्रकारे, हे विशाखे! स्त्री नोकरचाकरांचे नीट संगोपन करणारी होते. ‘‘ကထဉ္စ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ဘတ္တု မနာပံ စရတိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ယံ ဘတ္တု အမနာပသင်္ခါတံ တံ ဇီဝိတဟေတုပိ န အဇ္ဈာစရတိ. ဧဝံ ခေါ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ဘတ္တု မနာပံ စရတိ. आणि हे विशाखे! स्त्री पतीला आवडेल असे वर्तन करणारी कशी होते? हे विशाखे! या जगात पतीला जे नापसंत आहे, असे कोणतेही कृत्य ती स्वतःच्या प्राणांच्या मोबदल्यातही करत नाही. अशा प्रकारे, हे विशाखे! स्त्री पतीला आवडेल असे वर्तन करणारी होते. ‘‘ကထဉ္စ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ယံ ဘတ္တာ အာဟရတိ ဓနံ ဝါ ဓညံ ဝါ ရဇတံ ဝါ ဇာတရူပံ ဝါ တံ အာရက္ခေန ဂုတ္တိယာ သမ္ပာဒေတိ, တတ္ထ စ ဟောတိ အဓုတ္တီ အထေနီ အသောဏ္ဍီ အဝိနာသိကာ. ဧဝံ ခေါ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဝိသာခေ, စတူဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ဣဓလောကဝိဇယာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, အယံသ လောကော အာရဒ္ဓေါ ဟောတိ. आणि हे विशाखे! स्त्री पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करणारी कशी होते? हे विशाखे! या जगात पती जे काही धन, धान्य, चांदी किंवा सोने आणतो, त्याचे ती रक्षण करून ते सुरक्षित ठेवते. त्या संपत्तीच्या बाबतीत ती उधळपट्टी न करणारी, चोरी न करणारी, मद्यपी नसलेली आणि तिचा नाश न करणारी असते. अशा प्रकारे, हे विशाखे! स्त्री पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करणारी होते. हे विशाखे! या चार गुणांनी युक्त असलेली स्त्री या लोकावर (इहलोकावर) विजय मिळवण्यासाठी मार्गस्थ होते, तिचा हा लोक यशस्वी होतो. ‘‘စတူဟိ ခေါ, ဝိသာခေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ပရလောကဝိဇယာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, ပရလောကော အာရဒ္ဓေါ ဟောတိ. ကတမေဟိ စတူဟိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ, သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ, စာဂသမ္ပန္နော ဟောတိ, ပညာသမ္ပန္နော ဟောတိ. हे विशाखे! इतर चार गुणांनी युक्त असलेली स्त्री परलोकावर विजय मिळवण्यासाठी मार्गस्थ होते, तिचा परलोक यशस्वी होतो. कोणते चार गुण? हे विशाखे! या जगात स्त्री श्रद्धासंपन्न (श्रद्धेने युक्त) असते, शीलसंपन्न असते, त्यागसंपन्न (दानशूर) असते आणि प्रज्ञासंपन्न (बुद्धिवान) असते. ‘‘ကထဉ္စ[Pg.98], ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သဒ္ဓေါ ဟောတိ, သဒ္ဒဟတိ တထာဂတဿ ဗောဓိံ – ‘ဣတိပိ သော ဘဂဝါ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဝိဇ္ဇာစရဏသမ္ပန္နော သုဂတော လောကဝိဒူ အနုတ္တရော ပုရိသဒမ္မသာရထိ သတ္ထာ ဒေဝမနုဿာနံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ’တိ. ဧဝံ ခေါ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ. आणि हे विशाखे! स्त्री श्रद्धासंपन्न कशी होते? हे विशाखे! या जगात स्त्री श्रद्धावान असते, ती तथागतांच्या बोधीवर (ज्ञानावर) अशी श्रद्धा ठेवते: 'ते भगवान अर्हत आहेत, सम्यक्संबुद्ध आहेत, विद्याचरणसंपन्न आहेत, सुगत आहेत, लोकविदू आहेत, अनुत्तर पुरुषदम्यसारथी आहेत, देव आणि मनुष्यांचे शास्ता (गुरू) आहेत, बुद्ध आहेत, भगवान आहेत.' अशा प्रकारे, हे विशाखे! स्त्री श्रद्धासंपन्न होते. ‘‘ကထဉ္စ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ…ပေ… သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ. ဧဝံ ခေါ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ. आणि हे विशाखे! स्त्री शीलसंपन्न कशी होते? हे विशाखे! या जगात स्त्री प्राणातिपातापासून (जीवहिंसेपासून) अलिप्त राहते... तसेच मद्य, सुरा आणि प्रमादाचे स्थान असलेल्या मादक द्रव्यांच्या सेवनापासून अलिप्त राहते. अशा प्रकारे, हे विशाखे! स्त्री शीलसंपन्न होते. ‘‘ကထဉ္စ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော စာဂသမ္ပန္နော ဟောတိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ဝိဂတမလမစ္ဆေရေန စေတသာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသတိ မုတ္တစာဂါ ပယတပါဏိနီ ဝေါဿဂ္ဂရတာ ယာစယောဂါ ဒါနသံဝိဘာဂရတာ. ဧဝံ ခေါ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော စာဂသမ္ပန္နော ဟောတိ. आणि हे विशाखे! स्त्री त्यागसंपन्न (दानशूर) कशी होते? हे विशाखे! या जगात स्त्री मत्सराचा मळ नसलेल्या चित्ताने गृहस्थाश्रम चालवते. ती मुक्तहस्ताने दान देणारी, (दान देण्यासाठी) हात स्वच्छ ठेवणारी, त्याग करण्यात रमणारी, याचना करणाऱ्यांना देण्यास योग्य आणि दान व वाटणी करण्यात आनंद मानणारी असते. अशा प्रकारे, हे विशाखे! स्त्री त्यागसंपन्न होते. ‘‘ကထဉ္စ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ပညာသမ္ပန္နော ဟောတိ? ဣဓ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ပညဝါ ဟောတိ…ပေ… ဧဝံ ခေါ, ဝိသာခေ, မာတုဂါမော ပညာသမ္ပန္နော ဟောတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဝိသာခေ, စတူဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ပရလောကဝိဇယာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, ပရလောကော အာရဒ္ဓေါ ဟောတီ’’တိ. आणि हे विशाखे! स्त्री प्रज्ञासंपन्न कशी होते? हे विशाखे! या जगात स्त्री प्रज्ञावान (बुद्धिवान) असते... अशा प्रकारे, हे विशाखे! स्त्री प्रज्ञासंपन्न होते. हे विशाखे! या चार गुणांनी युक्त असलेली स्त्री परलोकावर विजय मिळवण्यासाठी मार्गस्थ होते, तिचा परलोक यशस्वी होतो. ‘‘သုသံဝိဟိတကမ္မန္တာ, သင်္ဂဟိတပရိဇ္ဇနာ; ဘတ္တု မနာပံ စရတိ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. आपले घरगुती काम उत्तम प्रकारे व्यवस्थापित करणारी, नोकरचाकरांचे नीट संगोपन करणारी, पतीला आवडेल असे वर्तन करणारी आणि पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करणारी, ‘‘သဒ္ဓါ သီလေန သမ္ပန္နာ, ဝဒညူ ဝီတမစ္ဆရာ; နိစ္စံ မဂ္ဂံ ဝိသောဓေတိ, သောတ္ထာနံ သမ္ပရာယိကံ. श्रद्धा आणि शीलाने युक्त असलेली, दानशूर, मत्सररहित असलेली स्त्री परलोकातील कल्याणाचा (सुखाचा) मार्ग नेहमी स्वच्छ (सुकर) करते. ‘‘ဣစ္စေတေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ စ, ယဿာ ဝိဇ္ဇန္တိ နာရိယာ; တမ္ပိ သီလဝတိံ အာဟု, ဓမ္မဋ္ဌံ သစ္စဝါဒိနိံ. ज्या स्त्रीमध्ये हे आठ गुण आढळतात, तिलाच शीलवान, धम्मावर आरूढ असणारी आणि सत्य बोलणारी स्त्री म्हणतात. ‘‘သောဠသာကာရသမ္ပန္နာ, အဋ္ဌင်္ဂသုသမာဂတာ; တာဒိသီ သီလဝတီ ဥပါသိကာ; ဥပပဇ္ဇတိ ဒေဝလောကံ မနာပ’’န္တိ. နဝမံ; “सोळा गुणांनी संपन्न, आठ अंगांनी युक्त, अशी ती शीलवान उपासिका मनपसंत देवलोकात उत्पन्न होते.” (नववे सूत्र समाप्त) ၁၀. ဒုတိယဣဓလောကိကသုတ္တံ १०. दुसरे इधलोकिक सुत्त ၅၀. ‘‘စတူဟိ[Pg.99], ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ဣဓလောကဝိဇယာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, အယံသ လောကော အာရဒ္ဓေါ ဟောတိ. ကတမေဟိ စတူဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သုသံဝိဟိတကမ္မန္တော ဟောတိ, သင်္ဂဟိတပရိဇနော, ဘတ္တု မနာပံ စရတိ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. ५०. “भिक्खूहो, चार गुणांनी युक्त असलेली स्त्री या लोकातील विजयासाठी मार्गस्थ होते, तिचा हा लोक यशस्वी होतो. कोणत्या चार? भिक्खूहो, या जगात स्त्री आपल्या कामांचे उत्तम प्रकारे नियोजन करणारी असते, परिजनांचा चांगला सांभाळ करणारी असते, पतीच्या मनासारखे वागणारी असते आणि पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करणारी असते.” ‘‘ကထဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သုသံဝိဟိတကမ္မန္တော ဟောတိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ယေ တေ ဘတ္တု အဗ္ဘန္တရာ ကမ္မန္တာ…ပေ… ဧဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သုသံဝိဟိတကမ္မန္တော ဟောတိ. “आणि भिक्खूहो, स्त्री आपल्या कामांचे उत्तम प्रकारे नियोजन करणारी कशी होते? भिक्खूहो, या जगात स्त्री पतीच्या घरातील जे काही अंतर्गत कामे असतात... (पे)... भिक्खूहो, अशा प्रकारे स्त्री आपल्या कामांचे उत्तम प्रकारे नियोजन करणारी होते.” ‘‘ကထဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သင်္ဂဟိတပရိဇနော ဟောတိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ယော သော ဘတ္တု အဗ္ဘန္တရော အန္တောဇနော…ပေ… ဧဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သင်္ဂဟိတပရိဇနော ဟောတိ. “आणि भिक्खूहो, स्त्री परिजनांचा सांभाळ करणारी कशी होते? भिक्खूहो, या जगात स्त्री पतीच्या घरातील जे अंतर्गत लोक असतात... (पे)... भिक्खूहो, अशा प्रकारे स्त्री परिजनांचा सांभाळ करणारी होते.” ‘‘ကထဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ဘတ္တု မနာပံ စရတိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ယံ ဘတ္တု အမနာပသင်္ခါတံ တံ ဇီဝိတဟေတုပိ န အဇ္ဈာစရတိ. ဧဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ဘတ္တု မနာပံ စရတိ. “आणि भिक्खूहो, स्त्री पतीच्या मनासारखे वागणारी कशी होते? भिक्खूहो, या जगात पतीला जे नापसंत मानले जाते, ते काम स्त्री स्वतःच्या प्राणांच्या मोबदल्यातही कधी करत नाही. भिक्खूहो, अशा प्रकारे स्त्री पतीच्या मनासारखे वागणारी होते.” ‘‘ကထဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ယံ ဘတ္တာ အာဟရတိ…ပေ… ဧဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, စတူဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ဣဓလောကဝိဇယာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, အယံသ လောကော အာရဒ္ဓေါ ဟောတိ. “आणि भिक्खूहो, स्त्री कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करणारी कशी होते? भिक्खूहो, या जगात पती जी काही संपत्ती आणतो... (पे)... भिक्खूहो, अशा प्रकारे स्त्री कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करणारी होते. भिक्खूहो, या चार गुणांनी युक्त असलेली स्त्री या लोकातील विजयासाठी मार्गस्थ होते, तिचा हा लोक यशस्वी होतो.” ‘‘စတူဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ပရလောကဝိဇယာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, ပရလောကော အာရဒ္ဓေါ ဟောတိ. ကတမေဟိ စတူဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ, သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ, စာဂသမ္ပန္နော ဟောတိ, ပညာသမ္ပန္နော ဟောတိ. “भिक्खूहो, चार गुणांनी युक्त असलेली स्त्री परलोकातील विजयासाठी मार्गस्थ होते, तिचा परलोक यशस्वी होतो. कोणत्या चार? भिक्खूहो, या जगात स्त्री श्रद्धा-संपन्न असते, शील-संपन्न असते, त्याग-संपन्न असते आणि प्रज्ञा-संपन्न असते.” ‘‘ကထဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သဒ္ဓေါ ဟောတိ…ပေ… ဧဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သဒ္ဓါသမ္ပန္နော ဟောတိ. “आणि भिक्खूहो, स्त्री श्रद्धा-संपन्न कशी होते? भिक्खूहो, या जगात स्त्री श्रद्धावान असते... (पे)... भिक्खूहो, अशा प्रकारे स्त्री श्रद्धा-संपन्न होते.” ‘‘ကထဉ္စ[Pg.100], ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ…ပေ… သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ. ဧဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော သီလသမ္ပန္နော ဟောတိ. “आणि भिक्खूहो, स्त्री शील-संपन्न कशी होते? भिक्खूहो, या जगात स्त्री प्राणातिपातापासून (जीवहिंसेपासून) अलिप्त राहते... (पे)... सुरा, मेरय आणि मद्य या प्रमादस्थानांपासून अलिप्त राहते. भिक्खूहो, अशा प्रकारे स्त्री शील-संपन्न होते.” ‘‘ကထဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော စာဂသမ္ပန္နော ဟောတိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ဝိဂတမလမစ္ဆေရေန စေတသာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသတိ…ပေ… ဧဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော စာဂသမ္ပန္နော ဟောတိ. “आणि भिक्खूहो, स्त्री त्याग-संपन्न कशी होते? भिक्खूहो, या जगात स्त्री मत्सराचा मळ दूर झालेल्या चित्ताने गृहस्थाश्रमात राहते... (पे)... भिक्खूहो, अशा प्रकारे स्त्री त्याग-संपन्न होते.” ‘‘ကထဉ္စ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ပညာသမ္ပန္နော ဟောတိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ပညဝါ ဟောတိ…ပေ… ဧဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မာတုဂါမော ပညာသမ္ပန္နော ဟောတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, စတူဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော မာတုဂါမော ပရလောကဝိဇယာယ ပဋိပန္နော ဟောတိ, ပရလောကော အာရဒ္ဓေါ ဟောတီ’’တိ. “आणि भिक्खूहो, स्त्री प्रज्ञा-संपन्न कशी होते? भिक्खूहो, या जगात स्त्री प्रज्ञावान असते... (पे)... भिक्खूहो, अशा प्रकारे स्त्री प्रज्ञा-संपन्न होते. भिक्खूहो, या चार गुणांनी युक्त असलेली स्त्री परलोकातील विजयासाठी मार्गस्थ होते, तिचा परलोक यशस्वी होतो.” ‘‘သုသံဝိဟိတကမ္မန္တာ, သင်္ဂဟိတပရိဇ္ဇနာ; ဘတ္တု မနာပံ စရတိ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. “जी आपल्या कामांचे उत्तम प्रकारे नियोजन करते, परिजनांचा चांगला सांभाळ करते, पतीच्या मनासारखे वागते आणि पतीने कमावलेल्या संपत्तीचे रक्षण करते.” ‘‘သဒ္ဓါ သီလေန သမ္ပန္နာ, ဝဒညူ ဝီတမစ္ဆရာ; နိစ္စံ မဂ္ဂံ ဝိသောဓေတိ, သောတ္ထာနံ သမ္ပရာယိကံ. “जी श्रद्धा आणि शीलाने संपन्न आहे, उदार आहे, मत्सरापासून मुक्त आहे, ती परलोकातील कल्याणाचा मार्ग नेहमी स्वच्छ करते.” ‘‘ဣစ္စေတေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ စ, ယဿာ ဝိဇ္ဇန္တိ နာရိယာ; တမ္ပိ သီလဝတိံ အာဟု, ဓမ္မဋ္ဌံ သစ္စဝါဒိနိံ. “ज्या स्त्रीमध्ये हे आठ गुण आढळतात, तिला शीलवान, धर्मावर निष्ठा ठेवणारी आणि सत्य बोलणारी म्हणतात.” ‘‘သောဠသာကာရသမ္ပန္နာ, အဋ္ဌင်္ဂသုသမာဂတာ; တာဒိသီ သီလဝတီ ဥပါသိကာ, ဥပပဇ္ဇတိ ဒေဝလောကံ မနာပ’’န္တိ. ဒသမံ; “सोळा गुणांनी संपन्न, आठ अंगांनी युक्त, अशी ती शीलवान उपासिका मनपसंत देवलोकात उत्पन्न होते.” (दहावे सूत्र समाप्त) ဥပေါသထဝဂ္ဂေါ ပဉ္စမော. पाचवा उपोसथ वर्ग समाप्त. တဿုဒ္ဒါနံ – त्याचा सारांश (उद्दान) - သံခိတ္တေ ဝိတ္ထတေ ဝိသာခေ, ဝါသေဋ္ဌော ဗောဇ္ဈာယ ပဉ္စမံ; အနုရုဒ္ဓံ ပုန ဝိသာခေ, နကုလာ ဣဓလောကိကာ ဒွေတိ. संक्षिप्त, विस्तृत, विशाखा, वासेठ्ठ, बोज्झा हे पाचवे; अनुरुद्ध, पुन्हा विशाखा, नकुला आणि दोन इधलोकिक. ပဌမပဏ္ဏာသကံ သမတ္တံ. पहिले पन्नास सूत्रांचे संकलन (प्रथम पण्णासक) समाप्त. ၂. ဒုတိယပဏ္ဏာသကံ २. दुसरे पण्णासक (द्वितीय पण्णासक) (၆) ၁. ဂေါတမီဝဂ္ဂေါ (६) १. गोतमी वर्ग (गोतमी वग्गो) ၁. ဂေါတမီသုတ္တံ १. गोतमी सूत्र (गोतमी सुत्त) ၅၁. ဧကံ [Pg.101] သမယံ ဘဂဝါ သက္ကေသု ဝိဟရတိ ကပိလဝတ္ထုသ္မိံ နိဂြောဓာရာမေ. အထ ခေါ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ အဋ္ဌာသိ. ဧကမန္တံ ဌိတာ ခေါ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘သာဓု, ဘန္တေ, လဘေယျ မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. ‘‘အလံ, ဂေါတမိ! မာ တေ ရုစ္စိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇာ’’တိ. ५१. एकदा भगवान शाक्य देशात कपिलवस्तू येथील निग्रोधारामात विहार करत होते. तेव्हा महाप्रजापती गोतमी भगवंतांकडे आल्या; आल्यानंतर भगवंतांना अभिवादन करून त्या एका बाजूला उभ्या राहिल्या. एका बाजूला उभ्या राहिलेल्या महाप्रजापती गोतमी भगवंतांना म्हणाल्या – 'भंते! जर तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयात स्त्रियांना घरदार सोडून अनगारिक (गृहहीन) प्रवज्जा मिळाली, तर किती बरे होईल!' 'नको, गोतमी! तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयात स्त्रियांनी घरदार सोडून अनगारिक प्रवज्जा घ्यावी, हे तुला रुचू नये.' ဒုတိယမ္ပိ ခေါ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘သာဓု, ဘန္တေ, လဘေယျ မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. ‘‘အလံ, ဂေါတမိ! မာ တေ ရုစ္စိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇာ’’တိ. ‘‘တတိယမ္ပိ ခေါ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘သာဓု ဘန္တေ, လဘေယျ မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. ‘‘အလံ, ဂေါတမိ! မာ တေ ရုစ္စိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇာ’’တိ. दुसऱ्यांदाही महाप्रजापती गोतमी भगवंतांना म्हणाल्या – 'भंते! जर तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयात स्त्रियांना घरदार सोडून अनगारिक प्रवज्जा मिळाली, तर किती बरे होईल!' 'नको, गोतमी! तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयात स्त्रियांनी घरदार सोडून अनगारिक प्रवज्जा घ्यावी, हे तुला रुचू नये.' तिसऱ्यांदाही महाप्रजापती गोतमी भगवंतांना म्हणाल्या – 'भंते! जर तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयात स्त्रियांना घरदार सोडून अनगारिक प्रवज्जा मिळाली, तर किती बरे होईल!' 'नको, गोतमी! तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयात स्त्रियांनी घरदार सोडून अनगारिक प्रवज्जा घ्यावी, हे तुला रुचू नये.' အထ ခေါ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ‘‘န ဘဂဝါ အနုဇာနာတိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ ဒုက္ခီ ဒုမ္မနာ အဿုမုခီ ရုဒမာနာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ပဒက္ခိဏံ ကတွာ ပက္ကာမိ. तेव्हा 'भगवान तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयात स्त्रियांना घरदार सोडून अनगारिक प्रवज्जा घेण्याची परवानगी देत नाहीत,' असा विचार करून महाप्रजापती गोतमी दुःखी, खिन्न मनाच्या, डोळ्यांत अश्रू आणून रडत भगवंतांना अभिवादन करून, प्रदक्षिणा घालून निघून गेल्या. အထ ခေါ ဘဂဝါ ကပိလဝတ္ထုသ္မိံ ယထာဘိရန္တံ ဝိဟရိတွာ ယေန ဝေသာလီ တေန စာရိကံ ပက္ကာမိ. အနုပုဗ္ဗေန စာရိကံ စရမာနော ယေန ဝေသာလီ တဒဝသရိ. တတြ သုဒံ ဘဂဝါ ဝေသာလိယံ ဝိဟရတိ မဟာဝနေ ကူဋာဂါရသာလာယံ[Pg.102]. အထ ခေါ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ကေသေ ဆေဒါပေတွာ ကာသာယာနိ ဝတ္ထာနိ အစ္ဆာဒေတွာ သမ္ဗဟုလာဟိ သာကိယာနီဟိ သဒ္ဓိံ ယေန ဝေသာလီ တေန ပက္ကာမိ. အနုပုဗ္ဗေန ယေန ဝေသာလီ မဟာဝနံ ကူဋာဂါရသာလာ တေနုပသင်္ကမိ. အထ ခေါ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ သူနေဟိ ပါဒေဟိ ရဇောကိဏ္ဏေန ဂတ္တေန ဒုက္ခီ ဒုမ္မနာ အဿုမုခီ ရုဒမာနာ ဗဟိဒွါရကောဋ္ဌကေ အဋ္ဌာသိ. त्यानंतर भगवान कपिलवस्तू येथे इच्छेनुसार विहार करून वैशालीच्या देशात चारिकेसाठी निघाले. अनुक्रमे चारिका करत ते वैशालीला पोहोचले. तिथे भगवान वैशालीतील महावनातील कुटागारशाळेत विहार करत होते. तेव्हा महाप्रजापती गोतमी यांनी आपले केस कापून, काषाय वस्त्रे परिधान करून, अनेक शाक्य स्त्रियांसह वैशालीच्या दिशेने प्रस्थान केले. अनुक्रमे प्रवास करत त्या वैशालीतील महावनातील कुटागारशाळेजवळ पोहोचल्या. तेव्हा महाप्रजापती गोतमी सुजलेल्या पायांनी, धुळीने माखलेल्या शरीराने, दुःखी, खिन्न मनाच्या, डोळ्यांत अश्रू आणून रडत बाहेरच्या प्रवेशद्वारापाशी उभ्या राहिल्या. အဒ္ဒသာ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော မဟာပဇာပတိံ ဂေါတမိံ သူနေဟိ ပါဒေဟိ ရဇောကိဏ္ဏေန ဂတ္တေန ဒုက္ခိံ ဒုမ္မနံ အဿုမုခိံ ရုဒမာနံ ဗဟိဒွါရကောဋ္ဌကေ ဌိတံ. ဒိသွာန မဟာပဇာပတိံ ဂေါတမိံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ကိံ နု တွံ, ဂေါတမိ, သူနေဟိ ပါဒေဟိ ရဇောကိဏ္ဏေန ဂတ္တေန ဒုက္ခီ ဒုမ္မနာ အဿုမုခီ ရုဒမာနာ ဗဟိဒွါရကောဋ္ဌကေ ဌိတာ’’တိ? ‘‘တထာ ဟိ ပန, ဘန္တေ အာနန္ဒ, န ဘဂဝါ အနုဇာနာတိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. ‘‘တေန ဟိ တွံ, ဂေါတမိ, မုဟုတ္တံ ဣဓေဝ တာဝ ဟောဟိ, ယာဝါဟံ ဘဂဝန္တံ ယာစာမိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. आयुष्यमान आनंदांनी महाप्रजापती गोतमीला सुजलेल्या पायांनी, धुळीने माखलेल्या शरीराने, दुःखी, खिन्न मनाची, डोळ्यात अश्रू आणून रडत, प्रवेशद्वाराच्या बाहेर उभी असलेली पाहिले. महाप्रजापती गोतमीला पाहून ते म्हणाले – "गोतमी, तू सुजलेल्या पायांनी, धुळीने माखलेल्या शरीराने, दुःखी, खिन्न मनाची, डोळ्यात अश्रू आणून रडत प्रवेशद्वाराच्या बाहेर का उभी आहेस?" "भंते आनंद, कारण भगवान तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांना गृहत्याग करून अनगारिक होण्याची अनुमती देत नाहीत." "तर मग गोतमी, तू काही वेळ येथेच थांब, तोपर्यंत मी भगवंतांना स्त्रियांना तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये गृहत्याग करून अनगारिक होण्याची अनुमती देण्याविषयी विनंती करतो." အထ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ဧသာ, ဘန္တေ, မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ သူနေဟိ ပါဒေဟိ ရဇောကိဏ္ဏေန ဂတ္တေန ဒုက္ခီ ဒုမ္မနာ အဿုမုခီ ရုဒမာနာ ဗဟိဒွါရကောဋ္ဌကေ ဌိတာ – ‘န ဘဂဝါ အနုဇာနာတိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’န္တိ. သာဓု, ဘန္တေ, လဘေယျ မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. ‘‘အလံ, အာနန္ဒ! မာ တေ ရုစ္စိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇာ’’တိ. त्यानंतर आयुष्यमान आनंद जेथे भगवान होते तेथे गेले; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसले. एका बाजूला बसलेल्या आयुष्यमान आनंदांनी भगवंतांना असे म्हटले – "भंते, ही महाप्रजापती गोतमी सुजलेल्या पायांनी, धुळीने माखलेल्या शरीराने, दुःखी, खिन्न मनाची, डोळ्यात अश्रू आणून रडत प्रवेशद्वाराच्या बाहेर उभी आहे – 'भगवान तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांना गृहत्याग करून अनगारिक होण्याची अनुमती देत नाहीत.' भंते, हे चांगले होईल जर स्त्रियांना तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये गृहत्याग करून अनगारिक होण्याची अनुमती मिळाली तर." "नको, आनंदा! तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांनी गृहत्याग करून अनगारिक होणे तुला योग्य वाटू नये." ဒုတိယမ္ပိ ခေါ…ပေ… တတိယမ္ပိ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘သာဓု, ဘန္တေ, လဘေယျ မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. ‘‘အလံ, အာနန္ဒ! မာ တေ ရုစ္စိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇာ’’တိ. दुसऱ्यांदाही... आणि तिसऱ्यांदाही आयुष्यमान आनंदांनी भगवंतांना असे म्हटले – "भंते, हे चांगले होईल जर स्त्रियांना तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये गृहत्याग करून अनगारिक होण्याची अनुमती मिळाली तर." "नको, आनंदा! तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांनी गृहत्याग करून अनगारिक होणे तुला योग्य वाटू नये." အထ [Pg.103] ခေါ အာယသ္မတော အာနန္ဒဿ ဧတဒဟောသိ – ‘‘န ဘဂဝါ အနုဇာနာတိ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇံ. ယံနူနာဟံ အညေနပိ ပရိယာယေန ဘဂဝန္တံ ယာစေယျံ မာတုဂါမဿ တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. အထ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ဘဗ္ဗော နု ခေါ, ဘန္တေ, မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇိတွာ သောတာပတ္တိဖလံ ဝါ သကဒါဂါမိဖလံ ဝါ အနာဂါမိဖလံ ဝါ အရဟတ္တဖလံ ဝါ သစ္ဆိကာတု’’န္တိ? ‘‘ဘဗ္ဗော, အာနန္ဒ, မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇိတွာ သောတာပတ္တိဖလမ္ပိ သကဒါဂါမိဖလမ္ပိ အနာဂါမိဖလမ္ပိ အရဟတ္တဖလမ္ပိ သစ္ဆိကာတု’’န္တိ. ‘‘သစေ, ဘန္တေ, ဘဗ္ဗော မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇိတွာ သောတာပတ္တိဖလမ္ပိ…ပေ… အရဟတ္တဖလမ္ပိ သစ္ဆိကာတုံ, ဗဟုကာရာ, ဘန္တေ, မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ဘဂဝတော မာတုစ္ဆာ အာပါဒိကာ ပေါသိကာ ခီရဿ ဒါယိကာ; ဘဂဝန္တံ ဇနေတ္တိယာ ကာလင်္ကတာယ ထညံ ပါယေသိ. သာဓု, ဘန္တေ, လဘေယျ မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇ’’န္တိ. त्यानंतर आयुष्यमान आनंदांच्या मनात असा विचार आला – "भगवान तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांना गृहत्याग करून अनगारिक होण्याची अनुमती देत नाहीत. मग मी इतर मार्गाने भगवंतांना स्त्रियांना तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये गृहत्याग करून अनगारिक होण्याच्या अनुमतीसाठी विनंती का करू नये?" त्यानंतर आयुष्यमान आनंदांनी भगवंतांना विचारले – "भंते, तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये गृहत्याग करून अनगारिक झाल्यावर स्त्रिया सोतापत्ति-फल, सकदागामि-फल, अनागामि-फल किंवा अरहत्त-फल प्राप्त करण्यास सक्षम आहेत का?" "आनंदा, तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये गृहत्याग करून अनगारिक झाल्यावर स्त्रिया सोतापत्ति-फल, सकदागामि-फल, अनागामि-फल आणि अरहत्त-फल प्राप्त करण्यास सक्षम आहेत." "भंते, जर स्त्रिया तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये गृहत्याग करून अनगारिक झाल्यावर सोतापत्ति-फल... अरहत्त-फल प्राप्त करण्यास सक्षम आहेत, तर भंते, महाप्रजापती गोतमी यांनी भगवंतांवर मोठे उपकार केले आहेत. त्या भगवंतांच्या मावशी, पालनकर्त्या, पोषिंद्या आणि दूध पाजणाऱ्या आहेत; भगवंतांच्या जन्मदात्या मातेच्या निधनानंतर त्यांनी भगवंतांना स्वतःचे दूध पाजले. भंते, हे चांगले होईल जर स्त्रियांना तथागतांनी प्रतिपादन केलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये गृहत्याग करून अनगारिक होण्याची अनुमती मिळाली तर." ‘‘သစေ, အာနန္ဒ, မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ အဋ္ဌ ဂရုဓမ္မေ ပဋိဂ္ဂဏှာတိ, သာဝဿာ ဟောတု ဥပသမ္ပဒါ – "आनंदा, जर महाप्रजापती गोतमीने आठ गरुधम्मांचा स्वीकार केला, तर तोच तिचा उपसंपदा मानला जावा –" ‘‘ဝဿသတူပသမ္ပန္နာယ ဘိက္ခုနိယာ တဒဟူပသမ္ပန္နဿ ဘိက္ခုနော အဘိဝါဒနံ ပစ္စုဋ္ဌာနံ အဉ္ဇလိကမ္မံ သာမီစိကမ္မံ ကတ္တဗ္ဗံ. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. "शंभर वर्षे उपसंपदा झालेल्या भिक्खुणीने त्याच दिवशी उपसंपदा झालेल्या भिक्खूला अभिवादन, आदराने उभे राहणे, हात जोडणे आणि योग्य आदर सत्कार केला पाहिजे. हा धम्म देखील आदरपूर्वक, सन्मानपूर्वक, पूज्य मानून आयुष्यभर न ओलांडण्याजोगा आहे." ‘‘န ဘိက္ခုနိယာ အဘိက္ခုကေ အာဝါသေ ဝဿံ ဥပဂန္တဗ္ဗံ. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. "भिक्खुणीने अशा ठिकाणी वर्षावास करू नये जेथे भिक्खू नसतील. हा धम्म देखील आदरपूर्वक, सन्मानपूर्वक, पूज्य मानून आयुष्यभर न ओलांडण्याजोगा आहे." ‘‘အနွဍ္ဎမာသံ ဘိက္ခုနိယာ ဘိက္ခုသံဃတော ဒွေ ဓမ္မာ ပစ္စာသီသိတဗ္ဗာ – ဥပေါသထပုစ္ဆကဉ္စ, ဩဝါဒူပသင်္ကမနဉ္စ. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. "प्रत्येक पंधरवड्याला भिक्खुणीने भिक्खू संघाकडून दोन गोष्टींची अपेक्षा ठेवली पाहिजे – उपोसथाची तिथी विचारणे आणि उपदेश घेण्यासाठी जाणे. हा धम्म देखील आदरपूर्वक, सन्मानपूर्वक, पूज्य मानून आयुष्यभर न ओलांडण्याजोगा आहे." ‘‘ဝဿံဝုဋ္ဌာယ ဘိက္ခုနိယာ ဥဘတောသံဃေ တီဟိ ဌာနေဟိ ပဝါရေတဗ္ဗံ – ဒိဋ္ဌေန ဝါ သုတေန ဝါ ပရိသင်္ကာယ ဝါ. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. "वर्षावास पूर्ण झाल्यावर भिक्खुणीने दोन्ही संघांसमोर तीन गोष्टींच्या आधारे – पाहिलेल्या, ऐकलेल्या किंवा संशय असलेल्या गोष्टींविषयी – स्वतःच्या चुकांची कबुली दिली पाहिजे. हा धम्म देखील आदरपूर्वक, सन्मानपूर्वक, पूज्य मानून आयुष्यभर न ओलांडण्याजोगा आहे." ‘‘ဂရုဓမ္မံ [Pg.104] အဇ္ဈာပန္နာယ ဘိက္ခုနိယာ ဥဘတောသံဃေ ပက္ခမာနတ္တံ စရိတဗ္ဗံ. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. "गंभीर अपराधाचे आचरण करणाऱ्या भिक्खुणीने दोन्ही संघांमध्ये पंधरवड्यापर्यंत मानत्त पाळले पाहिजे. हा धम्म देखील आदरपूर्वक, सन्मानपूर्वक, पूज्य मानून आयुष्यभर न ओलांडण्याजोगा आहे." ‘‘ဒွေ ဝဿာနိ ဆသု ဓမ္မေသု သိက္ခိတသိက္ခာယ သိက္ခမာနာယ ဥဘတောသံဃေ ဥပသမ္ပဒါ ပရိယေသိတဗ္ဗာ. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. "दोन वर्षे सहा नियमांचे प्रशिक्षण पूर्ण केलेल्या सिक्खमानाने दोन्ही संघांकडून उपसंपदा मिळवण्याचा प्रयत्न केला पाहिजे. हा धम्म देखील आदरपूर्वक, सन्मानपूर्वक, पूज्य मानून आयुष्यभर न ओलांडण्याजोगा आहे." ‘‘န ကေနစိ ပရိယာယေန ဘိက္ခုနိယာ ဘိက္ခု အက္ကောသိတဗ္ဗော ပရိဘာသိတဗ္ဗော. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. "भिक्खुणीने कोणत्याही प्रकारे भिक्खूला शिवीगाळ किंवा निंदा करू नये. हा धम्म देखील आदरपूर्वक, सन्मानपूर्वक, पूज्य मानून आयुष्यभर न ओलांडण्याजोगा आहे." ‘‘အဇ္ဇတဂ္ဂေ ဩဝဋော ဘိက္ခုနီနံ ဘိက္ခူသု ဝစနပထော, အနောဝဋော ဘိက္ခူနံ ဘိက္ခုနီသု ဝစနပထော. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. "आजपासून भिक्खुणींना भिक्खूंना उपदेश करण्याचा मार्ग बंद आहे, परंतु भिक्खूंना भिक्खुणींना उपदेश करण्याचा मार्ग खुला आहे. हा धम्म देखील आदरपूर्वक, सन्मानपूर्वक, पूज्य मानून आयुष्यभर न ओलांडण्याजोगा आहे." ‘‘သစေ, အာနန္ဒ, မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ဣမေ အဋ္ဌ ဂရုဓမ္မေ ပဋိဂ္ဂဏှာတိ, သာဝဿာ ဟောတု ဥပသမ္ပဒါ’’တိ. "आनंदा, जर महाप्रजापती गोतमीने या आठ गरुधम्मांचा स्वीकार केला, तर तोच तिचा उपसंपदा मानला जावा." အထ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝတော သန္တိကေ ဣမေ အဋ္ဌ ဂရုဓမ္မေ ဥဂ္ဂဟေတွာ ယေန မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ မဟာပဇာပတိံ ဂေါတမိံ ဧတဒဝေါစ – त्यानंतर आयुष्यमान आनंदांनी भगवंतांच्या सन्निध हे आठ गरुधम्म शिकून घेतले आणि जेथे महाप्रजापती गोतमी होती तेथे गेले; जवळ जाऊन त्यांनी महाप्रजापती गोतमीला असे म्हटले – ‘‘သစေ ခေါ တွံ, ဂေါတမိ, အဋ္ဌ ဂရုဓမ္မေ ပဋိဂ္ဂဏှေယျာသိ, သာဝ တေ ဘဝိဿတိ ဥပသမ္ပဒါ – "गोतमी, जर तू या आठ गरुधम्मांचा स्वीकार केलास, तर तोच तुझा उपसंपदा होईल –" ‘‘ဝဿသတူပသမ္ပန္နာယ ဘိက္ခုနိယာ တဒဟူပသမ္ပန္နဿ ဘိက္ခုနော အဘိဝါဒနံ ပစ္စုဋ္ဌာနံ အဉ္ဇလိကမ္မံ သာမီစိကမ္မံ ကတ္တဗ္ဗံ. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော…ပေ…. शंभर वर्षे उपसंपन्न झालेल्या भिक्खुणीने त्याच दिवशी उपसंपन्न झालेल्या भिक्खूला अभिवादन, प्रत्युत्थान, अंजलिकर्म आणि सामीचिकर्म केले पाहिजे. हा नियम देखील आदर करून, सन्मान करून, मान देऊन आणि पूजून आयुष्यभर कधीही न ओलांडण्याजोगा आहे... ‘‘အဇ္ဇတဂ္ဂေ ဩဝဋော ဘိက္ခုနီနံ ဘိက္ခူသု ဝစနပထော, အနောဝဋော ဘိက္ခူနံ ဘိက္ခုနီသု ဝစနပထော. အယမ္ပိ ဓမ္မော သက္ကတွာ ဂရုံ ကတွာ မာနေတွာ ပူဇေတွာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယော. သစေ ခေါ တွံ, ဂေါတမိ, ဣမေ အဋ္ဌ ဂရုဓမ္မေ ပဋိဂ္ဂဏှေယျာသိ, သာဝ တေ ဘဝိဿတိ ဥပသမ္ပဒါ’’တိ. आजपासून भिक्खुणींना भिक्खूंना उपदेश करण्याचा मार्ग बंद आहे, परंतु भिक्खूंना भिक्खुणींना उपदेश करण्याचा मार्ग बंद नाही. हा नियम देखील आदर करून, सन्मान करून, मान देऊन आणि पूजून आयुष्यभर कधीही न ओलांडण्याजोगा आहे. हे गोतमी, जर तू या आठ गरूधर्मांचा स्वीकार केलास, तर हीच तुझी उपसंपदा होईल. ‘‘သေယျထာပိ[Pg.105], ဘန္တေ အာနန္ဒ, ဣတ္ထီ ဝါ ပုရိသော ဝါ ဒဟရော ယုဝါ မဏ္ဍနကဇာတိကော သီသံနှာတော ဥပ္ပလမာလံ ဝါ ဝဿိကမာလံ ဝါ အဓိမုတ္တကမာလံ ဝါ လဘိတွာ ဥဘောဟိ ဟတ္ထေဟိ ပဋိဂ္ဂဟေတွာ ဥတ္တမင်္ဂေ သိရသ္မိံ ပတိဋ္ဌာပေယျ; ဧဝမေဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ အာနန္ဒ, ဣမေ အဋ္ဌ ဂရုဓမ္မေ ပဋိဂ္ဂဏှာမိ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယေ’’တိ. भन्ते आनंद, ज्याप्रमाणे एखादी तरुण स्त्री किंवा पुरुष, जो नटण्या-थटण्याची आवड असणारा आणि डोक्यावरून स्नान केलेला आहे, त्याने निळ्या कमळांची, चमेलीची किंवा जुईची माळ मिळवून ती दोन्ही हातांनी स्वीकारून आपल्या मस्तकावर धारण करावी; त्याचप्रमाणे, भन्ते आनंद, मी या आठ गरूधर्मांचा स्वीकार करते, जे आयुष्यभर कधीही न ओलांडण्याजोगे आहेत. အထ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ပဋိဂ္ဂဟိတာ, ဘန္တေ, မဟာပဇာပတိယာ ဂေါတမိယာ အဋ္ဌ ဂရုဓမ္မာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယာ’’တိ. त्यानंतर आयुष्यमान आनंद जेथे भगवान होते तेथे गेले; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसले. एका बाजूला बसलेल्या आयुष्यमान आनंदांनी भगवंतांना असे म्हटले – 'भन्ते, महाप्रजापती गोतमीने आयुष्यभर कधीही न ओलांडण्याजोग्या आठ गरूधर्मांचा स्वीकार केला आहे.' ‘‘သစေ, အာနန္ဒ, နာလဘိဿ မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇံ, စိရဋ္ဌိတိကံ, အာနန္ဒ, ဗြဟ္မစရိယံ အဘဝိဿ, ဝဿသဟဿမေဝ သဒ္ဓမ္မော တိဋ္ဌေယျ. ယတော စ ခေါ, အာနန္ဒ, မာတုဂါမော တထာဂတပ္ပဝေဒိတေ ဓမ္မဝိနယေ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇိတော, န ဒါနိ, အာနန္ဒ, ဗြဟ္မစရိယံ စိရဋ္ဌိတိကံ ဘဝိဿတိ. ပဉ္စေဝ ဒါနိ, အာနန္ဒ, ဝဿသတာနိ သဒ္ဓမ္မော ဌဿတိ. आनंदा, जर तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांना घरदार सोडून अनगारिक प्रव्रज्या मिळाली नसती, तर आनंदा, हे ब्रह्मचर्य दीर्घकाळ टिकले असते आणि सद्धम्म एक हजार वर्षे टिकला असता. परंतु आनंदा, जेव्हापासून तथागतांनी प्रवेदिलेल्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांनी घरदार सोडून अनगारिक प्रव्रज्या घेतली आहे, तेव्हापासून आनंदा, हे ब्रह्मचर्य आता दीर्घकाळ टिकणार नाही. आता आनंदा, सद्धम्म केवळ पाचशे वर्षेच टिकेल. ‘‘သေယျထာပိ, အာနန္ဒ, ယာနိ ကာနိစိ ကုလာနိ ဗဟုတ္ထိကာနိ အပ္ပပုရိသကာနိ, တာနိ သုပ္ပဓံသိယာနိ ဟောန္တိ စောရေဟိ ကုမ္ဘတ္ထေနကေဟိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, အာနန္ဒ, ယသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ လဘတိ မာတုဂါမော အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇံ, န တံ ဗြဟ္မစရိယံ စိရဋ္ဌိတိကံ ဟောတိ. आनंदा, ज्याप्रमाणे ज्या कुळांमध्ये स्त्रियांची संख्या जास्त आणि पुरुषांची संख्या कमी असते, ती कुळे मडक्यात दिवा घेऊन चोरी करणाऱ्या चोरांकडून सहज लुटली जातात; त्याचप्रमाणे आनंदा, ज्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांना घरदार सोडून अनगारिक प्रव्रज्या मिळते, ते ब्रह्मचर्य दीर्घकाळ टिकत नाही. ‘‘သေယျထာပိ, အာနန္ဒ, သမ္ပန္နေ သာလိက္ခေတ္တေ သေတဋ္ဌိကာ နာမ ရောဂဇာတိ နိပတတိ, ဧဝံ တံ သာလိက္ခေတ္တံ န စိရဋ္ဌိတိကံ ဟောတိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, အာနန္ဒ, ယသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ လဘတိ မာတုဂါမော အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇံ, န တံ ဗြဟ္မစရိယံ စိရဋ္ဌိတိကံ ဟောတိ. आनंदा, ज्याप्रमाणे पिकलेल्या साळीच्या शेतावर 'श्वेत-अस्थिका' (पांढरी कीड) नावाचा रोग पडतो, तेव्हा ते साळीचे शेत दीर्घकाळ टिकत नाही; त्याचप्रमाणे आनंदा, ज्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांना घरदार सोडून अनगारिक प्रव्रज्या मिळते, ते ब्रह्मचर्य दीर्घकाळ टिकत नाही. ‘‘သေယျထာပိ, အာနန္ဒ, သမ္ပန္နေ ဥစ္ဆုက္ခေတ္တေ မဉ္ဇိဋ္ဌိကာ နာမ ရောဂဇာတိ နိပတတိ, ဧဝံ တံ ဥစ္ဆုက္ခေတ္တံ န စိရဋ္ဌိတိကံ ဟောတိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, အာနန္ဒ, ယသ္မိံ ဓမ္မဝိနယေ လဘတိ မာတုဂါမော အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇ္ဇံ, န တံ ဗြဟ္မစရိယံ စိရဋ္ဌိတိကံ ဟောတိ. आनंदा, ज्याप्रमाणे पिकलेल्या उसाच्या शेतावर 'मंजिष्ठिका' (तांबडी कीड) नावाचा रोग पडतो, तेव्हा ते उसाचे शेत दीर्घकाळ टिकत नाही; त्याचप्रमाणे आनंदा, ज्या धम्म आणि विनयामध्ये स्त्रियांना घरदार सोडून अनगारिक प्रव्रज्या मिळते, ते ब्रह्मचर्य दीर्घकाळ टिकत नाही. ‘‘သေယျထာပိ[Pg.106], အာနန္ဒ, ပုရိသော မဟတော တဠာကဿ ပဋိကစ္စေဝ အာဠိံ ဗန္ဓေယျ ယာဝဒေဝ ဥဒကဿ အနတိက္ကမနာယ; ဧဝမေဝံ ခေါ, အာနန္ဒ, မယာ ပဋိကစ္စေဝ ဘိက္ခုနီနံ အဋ္ဌ ဂရုဓမ္မာ ပညတ္တာ ယာဝဇီဝံ အနတိက္ကမနီယာ’’တိ. ပဌမံ. आनंदा, ज्याप्रमाणे एखादा मनुष्य मोठ्या तलावाचे पाणी बाहेर वाहून जाऊ नये म्हणून आधीच त्याचा बांध घालतो; त्याचप्रमाणे आनंदा, मी भिक्खुणींसाठी आधीच आठ गरूधर्मांची प्रज्ञप्ती केली आहे, जे आयुष्यभर कधीही न ओलांडण्याजोगे आहेत. पहिले. ၂. ဩဝါဒသုတ္တံ २. ओवाद सुत्त ၅၂. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝေသာလိယံ ဝိဟရတိ မဟာဝနေ ကူဋာဂါရသာလာယံ. အထ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ကတိဟိ နု ခေါ, ဘန္တေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု ဘိက္ခုနောဝါဒကော သမ္မန္နိတဗ္ဗော’’တိ? ५२. एकदा भगवान वैशाली येथील महावनातील कूटागारशाळेत विहार करत होते. तेव्हा आयुष्यमान आनंद जेथे भगवान होते तेथे गेले; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसले. एका बाजूला बसलेल्या आयुष्यमान आनंदांनी भगवंतांना असे विचारले – 'भन्ते, किती गुणांनी युक्त असलेल्या भिक्खूला भिक्खुणींना उपदेश करणारा म्हणून नियुक्त केले पाहिजे?' ‘‘အဋ္ဌဟိ ခေါ, အာနန္ဒ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု ဘိက္ခုနောဝါဒကော သမ္မန္နိတဗ္ဗော. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓာနန္ဒ, ဘိက္ခု သီလဝါ ဟောတိ…ပေ… သမာဒါယ သိက္ခတိ သိက္ခာပဒေသု; ဗဟုဿုတော ဟောတိ…ပေ… ဒိဋ္ဌိယာ သုပ္ပဋိဝိဒ္ဓါ; ဥဘယာနိ ခေါ ပနဿ ပါတိမောက္ခာနိ ဝိတ္ထာရေန သွာဂတာနိ ဟောန္တိ သုဝိဘတ္တာနိ သုပ္ပဝတ္တီနိ သုဝိနိစ္ဆိတာနိ သုတ္တသော အနုဗျဉ္ဇနသော; ကလျာဏဝါစော ဟောတိ ကလျာဏဝါက္ကရဏော, ပေါရိယာ ဝါစာယ သမန္နာဂတော ဝိဿဋ္ဌာယ အနေလဂဠာယ အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; ပဋိဗလော ဟောတိ ဘိက္ခုနိသံဃဿ ဓမ္မိယာ ကထာယ သန္ဒဿေတုံ သမာဒပေတုံ သမုတ္တေဇေတုံ သမ္ပဟံသေတုံ; ယေဘုယျေန ဘိက္ခုနီနံ ပိယော ဟောတိ မနာပေါ; န ခေါ ပနေတံ ဘဂဝန္တံ ဥဒ္ဒိဿ ပဗ္ဗဇိတာယ ကာသာယဝတ္ထနိဝသနာယ ဂရုဓမ္မံ အဇ္ဈာပန္နပုဗ္ဗော ဟောတိ; ဝီသတိဝဿော ဝါ ဟောတိ အတိရေကဝီသတိဝဿော ဝါ. ဣမေဟိ ခေါ, အာနန္ဒ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု ဘိက္ခုနောဝါဒကော သမ္မန္နိတဗ္ဗော’’တိ. ဒုတိယံ. आनंदा, आठ गुणांनी युक्त असलेल्या भिक्खूला भिक्खुणींना उपदेश करणारा म्हणून नियुक्त केले पाहिजे. कोणते आठ? येथे, आनंदा, भिक्खू शीलवान असतो... (पे)... शिक्षापदांचे ग्रहण करून त्यात स्वतःला प्रशिक्षित करतो; तो बहुश्रुत असतो... (पे)... दृष्टीने सुप्रतिविद्ध असतो; त्याला दोन्ही प्रातिमोक्ष सविस्तरपणे मुखोद्गत असतात, सुविभक्त असतात, सुप्रवृत्त असतात आणि सूत्रांनुसार व अक्षरांच्या अर्थानुसार सुविनिश्चित असतात; तो कल्याणवचनी असतो, त्याचे उच्चारण स्पष्ट असते, तो सुसंस्कृत, स्पष्ट, दोषरहित आणि अर्थ समजवून देणाऱ्या नागरी भाषेने युक्त असतो; तो भिक्खुणीसंघाला धम्मकथेने उपदेश करण्यास, प्रवृत्त करण्यास, उत्साहित करण्यास आणि आनंदित करण्यास समर्थ असतो; तो बहुतांश भिक्खुणींना प्रिय आणि मनाजोगता असतो; भगवंतांना उद्देशून प्रव्रजित झालेल्या आणि काषायवस्त्र परिधान केलेल्या भिक्खुणीसोबत त्याने कधीही कोणताही गंभीर गुन्हा केलेला नसतो; आणि तो वीस वर्षांचा किंवा त्याहून अधिक वर्षांचा ज्येष्ठ भिक्खू असतो. आनंदा, या आठ गुणांनी युक्त असलेल्या भिक्खूला भिक्खुणींना उपदेश करणारा म्हणून नियुक्त केले पाहिजे. दुसरे. ၃. သံခိတ္တသုတ္တံ ३. संखित्त सुत्त ၅၃. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝေသာလိယံ ဝိဟရတိ မဟာဝနေ ကူဋာဂါရသာလာယံ. အထ ခေါ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ အဋ္ဌာသိ. ဧကမန္တံ ဌိတာ ခေါ သာ မဟာပဇာပတီ ဂေါတမီ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ५३. एकदा भगवान वैशाली येथील महावनातील कूटागारशाळेत विहार करत होते. तेव्हा महाप्रजापती गोतमी जेथे भगवान होते तेथे आली; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला उभी राहिली. एका बाजूला उभी राहिलेली ती महाप्रजापती गोतमी भगवंतांना अशी म्हणाली – ‘‘သာဓု [Pg.107] မေ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ သံခိတ္တေန ဓမ္မံ ဒေသေတု, ယမဟံ ဘဂဝတော ဓမ္မံ သုတွာ ဧကာ ဝူပကဋ္ဌာ အပ္ပမတ္တာ အာတာပိနီ ပဟိတတ္တာ ဝိဟရေယျ’’န္တိ. ‘‘ယေ ခေါ တွံ, ဂေါတမိ, ဓမ္မေ ဇာနေယျာသိ – ‘ဣမေ ဓမ္မာ သရာဂါယ သံဝတ္တန္တိ, နော ဝိရာဂါယ; သံယောဂါယ သံဝတ္တန္တိ, နော ဝိသံယောဂါယ; အာစယာယ သံဝတ္တန္တိ, နော အပစယာယ; မဟိစ္ဆတာယ သံဝတ္တန္တိ, နော အပ္ပိစ္ဆတာယ; အသန္တုဋ္ဌိယာ သံဝတ္တန္တိ, နော သန္တုဋ္ဌိယာ; သင်္ဂဏိကာယ သံဝတ္တန္တိ, နော ပဝိဝေကာယ; ကောသဇ္ဇာယ သံဝတ္တန္တိ, နော ဝီရိယာရမ္ဘာယ; ဒုဗ္ဘရတာယ သံဝတ္တန္တိ, နော သုဘရတာယာ’တိ, ဧကံသေန, ဂေါတမိ, ဓာရေယျာသိ – ‘နေသော ဓမ္မော, နေသော ဝိနယော, နေတံ သတ္ထုသာသန’’’န္တိ. 'भन्ते, बरे होईल जर भगवंतांनी मला संक्षेपाने धम्म उपदेशावा, जेणेकरून भगवंतांकडून धम्म ऐकून मी एकांतात, जनसमुदायापासून दूर, अप्रमत्त, उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहार करू शकेन.' 'गोतमी, ज्या गोष्टींबद्दल तुला असे समजेल की – हे धम्म रागाला कारणीभूत ठरतात, विरागाला नाही; बंधनाला कारणीभूत ठरतात, मुक्तीला नाही; संचयाला कारणीभूत ठरतात, अपचयाला नाही; महाइच्छेला कारणीभूत ठरतात, अल्पइच्छेला नाही; असंतोषाला कारणीभूत ठरतात, संतोषाला नाही; गर्दीत राहण्यास कारणीभूत ठरतात, एकांताला नाही; आळसाला कारणीभूत ठरतात, वीर्य-आरंभाला नाही; पोसण्यास कठीण असण्यास कारणीभूत ठरतात, पोसण्यास सोपे असण्यास नाही; तर गोतमी, तू निश्चितपणे असे समज की – हा धम्म नाही, हा विनय नाही आणि हे शास्त्यांचे शासन नाही.' ‘‘ယေ စ ခေါ တွံ, ဂေါတမိ, ဓမ္မေ ဇာနေယျာသိ – ‘ဣမေ ဓမ္မာ ဝိရာဂါယ သံဝတ္တန္တိ, နော သရာဂါယ; ဝိသံယောဂါယ သံဝတ္တန္တိ, နော သံယောဂါယ; အပစယာယ သံဝတ္တန္တိ, နော အာစယာယ; အပ္ပိစ္ဆတာယ သံဝတ္တန္တိ, နော မဟိစ္ဆတာယ; သန္တုဋ္ဌိယာ သံဝတ္တန္တိ, နော အသန္တုဋ္ဌိယာ; ပဝိဝေကာယ သံဝတ္တန္တိ, နော သင်္ဂဏိကာယ; ဝီရိယာရမ္ဘာယ သံဝတ္တန္တိ, နော ကောသဇ္ဇာယ; သုဘရတာယ သံဝတ္တန္တိ, နော ဒုဗ္ဘရတာယာ’တိ, ဧကံသေန, ဂေါတမိ, ဓာရေယျာသိ – ‘ဧသော ဓမ္မော, ဧသော ဝိနယော, ဧတံ သတ္ထုသာသန’’’န္တိ. တတိယံ. "हे गोतमी! ज्या धर्मांविषयी तुला हे समजेल की – 'हे धर्म विरागासाठी (आसक्ती दूर करण्यासाठी) कारणीभूत ठरतात, सरागासाठी (आसक्ती वाढवण्यासाठी) नाही; विसंयोगासाठी (बंधनातून सुटकेसाठी) कारणीभूत ठरतात, संयोगासाठी (बंधनासाठी) नाही; अपचयासाठी (संसार कमी करण्यासाठी) कारणीभूत ठरतात, आचयासाठी (संसार वाढवण्यासाठी) नाही; अल्पेच्छतेसाठी (कमी इच्छा असण्यासाठी) कारणीभूत ठरतात, महच्छतेसाठी (मोठ्या इच्छांसाठी) नाही; संतुष्टीसाठी कारणीभूत ठरतात, असंतुष्टीसाठी नाही; प्रविवेकासाठी (एकांतवासासाठी) कारणीभूत ठरतात, संगतीसाठी (गर्दीत राहण्यासाठी) नाही; वीर्यारंभासाठी (प्रयत्नशीलतेसाठी) कारणीभूत ठरतात, आळसासाठी नाही; सुभरतेसाठी (सहज पोसले जाण्यासाठी) कारणीभूत ठरतात, दुभरतेसाठी (कठीणतेने पोसले जाण्यासाठी) नाही'; तर गोतमी, तू निश्चितपणे हे लक्षात ठेव की – 'हाच धम्म आहे, हाच विनय आहे आणि हेच शास्त्यांचे (बुद्धांचे) शासन आहे.'" तिसरे (सुत्त समाप्त). ၄. ဒီဃဇာဏုသုတ္တံ ४. दीघजाणू सुत्त ၅၄. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ကောလိယေသု ဝိဟရတိ ကက္ကရပတ္တံ နာမ ကောလိယာနံ နိဂမော. အထ ခေါ ဒီဃဇာဏု ကောလိယပုတ္တော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ ဒီဃဇာဏု ကောလိယပုတ္တော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘မယံ, ဘန္တေ, ဂိဟီ ကာမဘောဂိနော ပုတ္တသမ္ဗာဓသယနံ အဇ္ဈာဝသာမ, ကာသိကစန္ဒနံ ပစ္စနုဘောမ, မာလာဂန္ဓဝိလေပနံ ဓာရယာမ, ဇာတရူပရဇတံ သာဒယာမ. တေသံ နော, ဘန္တေ, ဘဂဝါ အမှာကံ တထာ ဓမ္မံ ဒေသေတု ယေ အမှာကံ အဿု ဓမ္မာ ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတာယ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခါယ, သမ္ပရာယဟိတာယ သမ္ပရာယသုခါယာ’’တိ. ५४. एकदा भगवान कोळिय देशात 'कक्करपत्त' नावाच्या कोळियांच्या नगरात विहरत होते. तेव्हा दीघजाणू नावाचा कोळियपुत्र जेथे भगवान होते तेथे आला; आल्यानंतर भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या दीघजाणू कोळियपुत्राने भगवंतांना असे म्हटले – "भंते, आम्ही गृहस्थ आहोत, कामभोगांचा उपभोग घेणारे आहोत, मुलेबाळांनी गजबजलेल्या घरात राहतो, काश देशचे चंदन वापरतो, पुष्पमाला, सुगंधी द्रव्ये व उटणे धारण करतो, सोने-चांदी स्वीकारतो. भंते, भगवंतांनी आम्हांला अशा प्रकारे धम्माचा उपदेश करावा, जो आम्हांला या जन्मात (इहलोकात) हित व सुखासाठी आणि परलोकात हित व सुखासाठी कारणीभूत ठरेल." ‘‘စတ္တာရောမေ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ဓမ္မာ ကုလပုတ္တဿ ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတာယ သံဝတ္တန္တိ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခါယ. ကတမေ စတ္တာရော? ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ, အာရက္ခသမ္ပဒါ, ကလျာဏမိတ္တတာ, သမဇီဝိတာ. ကတမာ စ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော [Pg.108] ယေန ကမ္မဋ္ဌာနေန ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ – ယဒိ ကသိယာ, ယဒိ ဝဏိဇ္ဇာယ, ယဒိ ဂေါရက္ခေန, ယဒိ ဣဿတ္တေန, ယဒိ ရာဇပေါရိသေန, ယဒိ သိပ္ပညတရေန – တတ္ထ ဒက္ခော ဟောတိ အနလသော, တတြုပါယာယ ဝီမံသာယ သမန္နာဂတော, အလံ ကာတုံ အလံ သံဝိဓာတုံ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ. "व्याग्धपज्ज, कुलपुत्राच्या (सद्गृहस्थाच्या) या जन्मातील (इहलोकातील) हितासाठी आणि सुखासाठी हे चार धर्म कारणीभूत ठरतात. कोणते चार? उत्थानसंपदा (उद्योगशीलता), आरक्खसंपदा (संरक्षणशीलता), कल्याणमित्रता (चांगले मित्र असणे) आणि समजीवित (संतुलित जीवन जगणे). आणि व्याग्धपज्ज, उत्थानसंपदा म्हणजे काय? व्याग्धपज्ज, या जगात कुलपुत्र ज्या कोणत्याही उद्योगाने आपली उपजीविका करतो – मग ती शेती असो, व्यापार असो, गोपालन असो, धनुर्विद्या असो, राजसेवा असो किंवा इतर कोणतीही कला असो – त्या कामात तो कुशल असतो, आळस न करणारा असतो, त्या कामाच्या उपायांचा विचार करणाऱ्या बुद्धीने युक्त असतो, ते काम स्वतः करण्यास आणि इतरांकडून योग्य प्रकारे करून घेण्यास समर्थ असतो. व्याग्धपज्ज, याला 'उत्थानसंपदा' असे म्हणतात." ‘‘ကတမာ စ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, အာရက္ခသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တဿ ဘောဂါ ဟောန္တိ ဥဋ္ဌာနဝီရိယာဓိဂတာ ဗာဟာဗလပရိစိတာ, သေဒါဝက္ခိတ္တာ, ဓမ္မိကာ ဓမ္မလဒ္ဓါ. တေ အာရက္ခေန ဂုတ္တိယာ သမ္ပာဒေတိ – ‘ကိန္တိ မေ ဣမေ ဘောဂေ နေဝ ရာဇာနော ဟရေယျုံ, န စောရာ ဟရေယျုံ, န အဂ္ဂိ ဍဟေယျ, န ဥဒကံ ဝဟေယျ, န အပ္ပိယာ ဒါယာဒါ ဟရေယျု’န္တိ! အယံ ဝုစ္စတိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, အာရက္ခသမ္ပဒါ. "आणि व्याग्धपज्ज, आरक्खसंपदा (संरक्षणशीलता) म्हणजे काय? व्याग्धपज्ज, या जगात कुलपुत्राकडे जी संपत्ती असते, जी त्याने आपल्या उद्योग आणि वीर्याने (प्रयत्नाने) मिळवलेली असते, स्वतःच्या बाहुबलाने गोळा केलेली असते, घामाच्या धारा गाळून कमावलेली असते, जी न्याय्य आणि धर्मसंमत मार्गाने मिळवलेली असते; तो तिचे रक्षण आणि सुरक्षा अशा विचाराने करतो की – 'माझी ही संपत्ती राजाने हिरावून घेऊ नये, चोरांनी चोरून नेऊ नये, अग्नीने जळून खाक होऊ नये, पाण्याने वाहून जाऊ नये आणि अप्रिय वारसदारांनी बळकावू नये!' व्याग्धपज्ज, याला 'आरक्खसंपदा' असे म्हणतात." ‘‘ကတမာ စ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကလျာဏမိတ္တတာ? ဣဓ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော ယသ္မိံ ဂါမေ ဝါ နိဂမေ ဝါ ပဋိဝသတိ, တတ္ထ ယေ တေ ဟောန္တိ – ဂဟပတီ ဝါ ဂဟပတိပုတ္တာ ဝါ ဒဟရာ ဝါ ဝုဒ္ဓသီလိနော, ဝုဒ္ဓါ ဝါ ဝုဒ္ဓသီလိနော, သဒ္ဓါသမ္ပန္နာ, သီလသမ္ပန္နာ, စာဂသမ္ပန္နာ, ပညာသမ္ပန္နာ – တေဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌတိ သလ္လပတိ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇတိ; ယထာရူပါနံ သဒ္ဓါသမ္ပန္နာနံ သဒ္ဓါသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ သီလသမ္ပန္နာနံ သီလသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ စာဂသမ္ပန္နာနံ စာဂသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ ပညာသမ္ပန္နာနံ ပညာသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကလျာဏမိတ္တတာ. "आणि व्याग्धपज्ज, कल्याणमित्रता म्हणजे काय? व्याग्धपज्ज, या जगात कुलपुत्र ज्या गावात किंवा नगरात राहतो, तेथील जे गृहपती किंवा गृहपतींचे पुत्र असतात – मग ते तरुण असोत वा वृद्ध, जे सदाचारी, श्रद्धासंपन्न, शीलसंपन्न, त्यागसंपन्न (दानशूर) आणि प्रज्ञासंपन्न असतात – त्यांच्यासोबत तो उठतो-बसतो, त्यांच्याशी संभाषण करतो, त्यांच्याशी चर्चा करतो; ज्यांच्यामध्ये जशी श्रद्धासंपदा असते, तशी श्रद्धा बाळगण्याचे तो शिकतो; ज्यांच्यामध्ये जशी शीलसंपदा असते, तसे शील पाळण्याचे तो शिकतो; ज्यांच्यामध्ये जशी त्यागसंपदा असते, तसा त्याग करण्याचे तो शिकतो; ज्यांच्यामध्ये जशी प्रज्ञासंपदा असते, तशी प्रज्ञा मिळवण्याचे तो शिकतो. व्याग्धपज्ज, याला 'कल्याणमित्रता' असे म्हणतात." ‘‘ကတမာ စ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, သမဇီဝိတာ? ဣဓ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ, ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ, သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ. သေယျထာပိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, တုလာဓာရော ဝါ တုလာဓာရန္တေဝါသီ ဝါ တုလံ ပဂ္ဂဟေတွာ ဇာနာတိ – ‘ဧတ္တကေန ဝါ ဩနတံ, ဧတ္တကေန ဝါ ဥန္နတ’န္တိ ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ, ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ, သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ. သစာယံ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော အပ္ပာယော [Pg.109] သမာနော ဥဠာရံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ, တဿ ဘဝန္တိ ဝတ္တာရော – ‘ဥဒုမ္ဗရခါဒီဝါယံ ကုလပုတ္တော ဘောဂေ ခါဒတီ’တိ. သစေ ပနာယံ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော မဟာယော သမာနော ကသိရံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ, တဿ ဘဝန္တိ ဝတ္တာရော – ‘အဇေဋ္ဌမရဏံဝါယံ ကုလပုတ္တော မရိဿတီ’တိ. ယတော စ ခေါယံ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ, ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ, သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, သမဇီဝိတာ. "आणि व्याग्धपज्ज, समजीवित (संतुलित जीवन) म्हणजे काय? व्याग्धपज्ज, या जगात कुलपुत्र आपल्या संपत्तीचे उत्पन्न (आय) आणि खर्च (व्यय) जाणून घेऊन, अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता संतुलित जीवन जगतो – 'अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च माझ्या उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही.' व्याग्धपज्ज, ज्याप्रमाणे एखादा तराजू धरणारा किंवा त्याचा शिकाऊ मुलगा तराजू हातात धरून जाणतो की – 'इतक्या वजनाने तराजू खाली झुकला आहे, इतक्या वजनाने तो वर गेला आहे'; त्याचप्रमाणे व्याग्धपज्ज, कुलपुत्र आपल्या संपत्तीचे उत्पन्न आणि खर्च जाणून घेऊन, अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता संतुलित जीवन जगतो – 'अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च माझ्या उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही.' व्याग्धपज्ज, जर हा कुलपुत्र कमी उत्पन्न असतानाही अतिशय विलासी जीवन जगत असेल, तर लोक त्याची निंदा करतात की – 'हा कुलपुत्र उंबराची फळे खाणाऱ्यासारखी (उधळपट्टी करून) आपली संपत्ती खात आहे.' पण व्याग्धपज्ज, जर हा कुलपुत्र मोठे उत्पन्न असतानाही अत्यंत गरिबीचे किंवा कष्टाचे जीवन जगत असेल, तर लोक त्याची निंदा करतात की – 'हा कुलपुत्र अनाथ असल्यासारखा (उपाशी) मरेल.' परंतु व्याग्धपज्ज, जेव्हा कुलपुत्र आपल्या संपत्तीचे उत्पन्न आणि खर्च जाणून घेऊन, अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता संतुलित जीवन जगतो – 'अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च माझ्या उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही'; तेव्हा याला 'समजीवित' असे म्हणतात." ‘‘ဧဝံ သမုပ္ပန္နာနံ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ဘောဂါနံ စတ္တာရိ အပါယမုခါနိ ဟောန္တိ – ဣတ္ထိဓုတ္တော, သုရာဓုတ္တော, အက္ခဓုတ္တော, ပါပမိတ္တော ပါပသဟာယော ပါပသမ္ပဝင်္ကော. သေယျထာပိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, မဟတော တဠာကဿ စတ္တာရိ စေဝ အာယမုခါနိ, စတ္တာရိ စ အပါယမုခါနိ. တဿ ပုရိသော ယာနိ စေဝ အာယမုခါနိ တာနိ ပိဒဟေယျ, ယာနိ စ အပါယမုခါနိ တာနိ ဝိဝရေယျ; ဒေဝေါ စ န သမ္မာ ဓာရံ အနုပ္ပဝေစ္ဆေယျ. ဧဝဉှိ တဿ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, မဟတော တဠာကဿ ပရိဟာနိယေဝ ပါဋိကင်္ခါ, နော ဝုဒ္ဓိ; ဧဝမေဝံ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ဧဝံ သမုပ္ပန္နာနံ ဘောဂါနံ စတ္တာရိ အပါယမုခါနိ ဟောန္တိ – ဣတ္ထိဓုတ္တော, သုရာဓုတ္တော, အက္ခဓုတ္တော, ပါပမိတ္တော ပါပသဟာယော ပါပသမ္ပဝင်္ကော. "व्याग्धपज्ज, अशा प्रकारे मिळवलेल्या संपत्तीच्या नाशाचे (हानीचे) चार मार्ग आहेत – स्त्रीलंपटपणा (स्त्रीधुत्त), मद्यपीपणा (सुराधुत्त), जुगारीपणा (अक्खधुत्त) आणि वाईट मित्रांची संगत, वाईट सोबती व वाईट लोकांकडे कल असणे (पापमित्त पापसहाय पापसंपवंक). व्याग्धपज्ज, ज्याप्रमाणे एखाद्या मोठ्या तलावाला चार पाणी येण्याचे मार्ग (आगम मार्ग) आणि चार पाणी बाहेर जाण्याचे मार्ग (निर्गम मार्ग) असावेत; आणि एखाद्या माणसाने त्याचे पाणी येण्याचे मार्ग बंद करावेत व पाणी बाहेर जाण्याचे मार्ग उघडून द्यावेत, तसेच पावसानेही योग्य प्रकारे वृष्टी करू नये. व्याग्धपज्ज, अशा स्थितीत त्या मोठ्या तलावातील पाणी कमीच होणार, त्यात वाढ होण्याची कोणतीही शक्यता नसते; त्याचप्रमाणे व्याग्धपज्ज, अशा प्रकारे मिळवलेल्या संपत्तीच्या नाशाचे हे चार मार्ग आहेत – स्त्रीलंपटपणा, मद्यपीपणा, जुगारीपणा आणि वाईट मित्रांची संगत, वाईट सोबती व वाईट लोकांकडे कल असणे." ‘‘ဧဝံ သမုပ္ပန္နာနံ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ဘောဂါနံ စတ္တာရိ အာယမုခါနိ ဟောန္တိ – န ဣတ္ထိဓုတ္တော, န သုရာဓုတ္တော, န အက္ခဓုတ္တော, ကလျာဏမိတ္တော ကလျာဏသဟာယော ကလျာဏသမ္ပဝင်္ကော. သေယျထာပိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, မဟတော တဠာကဿ စတ္တာရိ စေဝ အာယမုခါနိ, စတ္တာရိ စ အပါယမုခါနိ. တဿ ပုရိသော ယာနိ စေဝ အာယမုခါနိ တာနိ ဝိဝရေယျ, ယာနိ စ အပါယမုခါနိ တာနိ ပိဒဟေယျ; ဒေဝေါ စ သမ္မာ ဓာရံ အနုပ္ပဝေစ္ဆေယျ. ဧဝဉှိ တဿ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, မဟတော တဠာကဿ ဝုဒ္ဓိယေဝ ပါဋိကင်္ခါ, နော ပရိဟာနိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ဧဝံ သမုပ္ပန္နာနံ ဘောဂါနံ စတ္တာရိ အာယမုခါနိ ဟောန္တိ – န ဣတ္ထိဓုတ္တော[Pg.110], န သုရာဓုတ္တော, န အက္ခဓုတ္တော, ကလျာဏမိတ္တော ကလျာဏသဟာယော ကလျာဏသမ္ပဝင်္ကော. ဣမေ ခေါ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, စတ္တာရော ဓမ္မာ ကုလပုတ္တဿ ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတာယ သံဝတ္တန္တိ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခါယ. हे व्याघ्रपज्ज (दीघजाणू), अशा प्रकारे उत्पन्न झालेल्या संपत्तीच्या वृद्धीचे चार मार्ग आहेत - स्त्रीलंपट न होणे, मद्यपी न होणे, जुगारी न होणे आणि कल्याणमित्र, कल्याणसहचर व कल्याण-सहानुगामी असणे. हे व्याघ्रपज्ज, ज्याप्रमाणे एखाद्या मोठ्या तलावाला पाण्याचे आत येण्याचे चार मार्ग आणि पाण्याचे बाहेर जाण्याचे चार मार्ग असावेत. एखाद्या माणसाने त्याचे पाण्याचे आत येण्याचे मार्ग उघडावे आणि बाहेर जाण्याचे मार्ग बंद करावेत; आणि पावसानेही योग्य प्रकारे संततधार पाडावी. हे व्याघ्रपज्ज, अशा वेळी त्या मोठ्या तलावातील पाण्याची वृद्धीच अपेक्षित आहे, घट नव्हे; त्याचप्रमाणे, हे व्याघ्रपज्ज, अशा प्रकारे उत्पन्न झालेल्या संपत्तीच्या वृद्धीचे चार मार्ग आहेत - स्त्रीलंपट न होणे, मद्यपी न होणे, जुगारी न होणे आणि कल्याणमित्र, कल्याणसहचर व कल्याण-सहानुगामी असणे. हे व्याघ्रपज्ज, हे चार धर्म कुलपुत्राच्या इहलोकातील हितासाठी आणि इहलोकातील सुखासाठी कारणीभूत ठरतात. ‘‘စတ္တာရောမေ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ဓမ္မာ ကုလပုတ္တဿ သမ္ပရာယဟိတာယ သံဝတ္တန္တိ သမ္ပရာယသုခါယ. ကတမေ စတ္တာရော? သဒ္ဓါသမ္ပဒါ, သီလသမ္ပဒါ, စာဂသမ္ပဒါ, ပညာသမ္ပဒါ. ကတမာ စ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, သဒ္ဓါသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော သဒ္ဓေါ ဟောတိ, သဒ္ဒဟတိ တထာဂတဿ ဗောဓိံ – ‘ဣတိပိ သော ဘဂဝါ…ပေ… သတ္ထာ ဒေဝမနုဿာနံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ’တိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, သဒ္ဓါသမ္ပဒါ. हे व्याघ्रपज्ज, हे चार धर्म कुलपुत्राच्या परलोकातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी कारणीभूत ठरतात. कोणते चार? श्रद्धासंपदा, शीलसंपदा, त्यागसंपदा आणि प्रज्ञासंपदा. आणि हे व्याघ्रपज्ज, श्रद्धासंपदा म्हणजे काय? हे व्याघ्रपज्ज, येथे कुलपुत्र श्रद्धावान असतो, तो तथागतांच्या बोधीवर श्रद्धा ठेवतो – 'ते भगवान असे आहेत... देव आणि मनुष्यांचे शास्ता, बुद्ध, भगवान आहेत.' हे व्याघ्रपज्ज, याला श्रद्धासंपदा असे म्हणतात. ‘‘ကတမာ စ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, သီလသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ…ပေ… သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, သီလသမ္ပဒါ. आणि हे व्याघ्रपज्ज, शीलसंपदा म्हणजे काय? हे व्याघ्रपज्ज, येथे कुलपुत्र प्राणातिपातापासून अलिप्त राहतो... मद्य, सुरा व इतर मादक पदार्थांच्या प्रमादस्थानापासून अलिप्त राहतो. हे व्याघ्रपज्ज, याला शीलसंपदा असे म्हणतात. ‘‘ကတမာ စ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, စာဂသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော ဝိဂတမလမစ္ဆေရေန စေတသာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသတိ မုတ္တစာဂေါ ပယတပါဏိ ဝေါဿဂ္ဂရတော ယာစယောဂေါ ဒါနသံဝိဘာဂရတော. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, စာဂသမ္ပဒါ. आणि हे व्याघ्रपज्ज, त्यागसंपदा म्हणजे काय? हे व्याघ्रपज्ज, येथे कुलपुत्र मत्सराचा मळ दूर सारून मुक्त मनाने घरात राहतो, मुक्तहस्ते दान देणारा, दान देण्यासाठी सज्ज असलेला, त्यागात रमणारा, याचना करणाऱ्यांना देण्यास योग्य आणि दान व वाटणी करण्यात आनंद मानणारा असतो. हे व्याघ्रपज्ज, याला त्यागसंपदा असे म्हणतात. ‘‘ကတမာ စ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ပညာသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ကုလပုတ္တော ပညဝါ ဟောတိ, ဥဒယတ္ထဂါမိနိယာ ပညာယ သမန္နာဂတော အရိယာယ နိဗ္ဗေဓိကာယ သမ္မာ ဒုက္ခက္ခယဂါမိနိယာ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, ပညာသမ္ပဒါ. ဣမေ ခေါ, ဗျဂ္ဃပဇ္ဇ, စတ္တာရော ဓမ္မာ ကုလပုတ္တဿ သမ္ပရာယဟိတာယ သံဝတ္တန္တိ သမ္ပရာယသုခါယာ’’တိ. आणि हे व्याघ्रपज्ज, प्रज्ञासंपदा म्हणजे काय? हे व्याघ्रपज्ज, येथे कुलपुत्र प्रज्ञावान असतो, तो उदय आणि अस्त जाणणाऱ्या, आर्यांना योग्य असणाऱ्या, क्लेशांचा भेद करणाऱ्या आणि दुःखाचा पूर्ण क्षय करणाऱ्या प्रज्ञेने युक्त असतो. हे व्याघ्रपज्ज, याला प्रज्ञासंपदा असे म्हणतात. हे व्याघ्रपज्ज, हे चार धर्म कुलपुत्राच्या परलोकातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी कारणीभूत ठरतात. ‘‘ဥဋ္ဌာတာ ကမ္မဓေယျေသု, အပ္ပမတ္တော ဝိဓာနဝါ; သမံ ကပ္ပေတိ ဇီဝိကံ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. आपल्या कामांमध्ये तत्पर व उद्योगी असणारा, अप्रमादी आणि योग्य नियोजन करणारा मनुष्य आपले जीवन संतुलितपणे जगतो आणि मिळवलेल्या संपत्तीचे रक्षण करतो. ‘‘သဒ္ဓေါ သီလေန သမ္ပန္နော, ဝဒညူ ဝီတမစ္ဆရော; နိစ္စံ မဂ္ဂံ ဝိသောဓေတိ, သောတ္ထာနံ သမ္ပရာယိကံ. श्रद्धावान, शीलाने संपन्न, दानशूर आणि मत्सररहित मनुष्य परलोकातील कल्याणाचा मार्ग नेहमी स्वच्छ करतो. ‘‘ဣစ္စေတေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ စ, သဒ္ဓဿ ဃရမေသိနော; အက္ခာတာ သစ္စနာမေန, ဥဘယတ္ထ သုခါဝဟာ. अशा प्रकारे, गृहस्थाश्रमात राहणाऱ्या श्रद्धावान व्यक्तीसाठी हे आठ धर्म, सत्यनाम असलेल्या बुद्धांनी दोन्ही लोकात सुख देणारे म्हणून सांगितले आहेत. ‘‘ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတတ္ထာယ, သမ္ပရာယသုခါယ စ; ဧဝမေတံ ဂဟဋ္ဌာနံ, စာဂေါ ပုညံ ပဝဍ္ဎတီ’’တိ. စတုတ္ထံ; इहलोकातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी, गृहस्थांचे अशा प्रकारे दान आणि पुण्य वाढत राहते. ၅. ဥဇ္ဇယသုတ္တံ ५. उज्जय सुत्त ၅၅. အထ [Pg.111] ခေါ ဥဇ္ဇယော ဗြာဟ္မဏော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝတာ သဒ္ဓိံ သမ္မောဒိ. သမ္မောဒနီယံ ကထံ သာရဏီယံ ဝီတိသာရေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ ဥဇ္ဇယော ဗြာဟ္မဏော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘မယံ, ဘော ဂေါတမ, ပဝါသံ ဂန္တုကာမာ. တေသံ နော ဘဝံ ဂေါတမော အမှာကံ တထာ ဓမ္မံ ဒေသေတု – ယေ အမှာကံ အဿု ဓမ္မာ ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတာယ, ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခါယ, သမ္ပရာယဟိတာယ, သမ္ပရာယသုခါယာ’’တိ. ५५. त्यानंतर उज्जय नावाचा ब्राह्मण जेथे भगवान होते तेथे गेला; तिथे जाऊन त्याने भगवंतांसोबत कुशलक्षेम विचारले. आनंददायी आणि स्मरणीय संभाषण संपवून तो एका बाजूला बसला. एका बाजूला बसलेल्या उज्जय ब्राह्मणाने भगवंतांना असे म्हटले – 'हे गौतम, आम्ही परदेशी जाऊ इच्छितो. आपण आम्हाला अशा धर्माचा उपदेश करावा, जो आमच्या इहलोकातील हितासाठी, इहलोकातील सुखासाठी, तसेच परलोकातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी कारणीभूत ठरेल.' ‘‘စတ္တာရောမေ, ဗြာဟ္မဏ, ဓမ္မာ ကုလပုတ္တဿ ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတာယ သံဝတ္တန္တိ, ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခါယ. ကတမေ စတ္တာရော? ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ, အာရက္ခသမ္ပဒါ, ကလျာဏမိတ္တတာ, သမဇီဝိတာ. ကတမာ စ, ဗြာဟ္မဏ, ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော ယေန ကမ္မဋ္ဌာနေန ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ – ယဒိ ကသိယာ, ယဒိ ဝဏိဇ္ဇာယ, ယဒိ ဂေါရက္ခေန, ယဒိ ဣဿတ္တေန, ယဒိ ရာဇပေါရိသေန, ယဒိ သိပ္ပညတရေန – တတ္ထ ဒက္ခော ဟောတိ အနလသော, တတြုပါယာယ ဝီမံသာယ သမန္နာဂတော, အလံ ကာတုံ အလံ သံဝိဓာတုံ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗြာဟ္မဏ, ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ. ब्राह्मणा, हे चार धर्म कुलपुत्राच्या इहलोकातील हितासाठी आणि इहलोकातील सुखासाठी कारणीभूत ठरतात. कोणते चार? उत्थानसंपदा, आरक्षसंपदा, कल्याणमित्रता आणि समजीविका. आणि ब्राह्मणा, उत्थानसंपदा म्हणजे काय? ब्राह्मणा, येथे कुलपुत्र ज्या उद्योगाने आपली उपजीविका करतो – मग ती शेती असो, व्यापार असो, गोरक्षण असो, धनुर्विद्या असो, राजसेवा असो किंवा इतर कोणतीही कला असो – त्या कामात तो कुशल आणि आळस नसलेला असतो. तो त्या कामाच्या उपायांचा विचार करणाऱ्या प्रज्ञेने युक्त असतो, स्वतः काम करण्यास आणि इतरांकडून ते करवून घेण्यास समर्थ असतो. ब्राह्मणा, याला उत्थानसंपदा असे म्हणतात. ‘‘ကတမာ စ, ဗြာဟ္မဏ, အာရက္ခသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တဿ ဘောဂါ ဟောန္တိ ဥဋ္ဌာနဝီရိယာဓိဂတာ, ဗာဟာဗလပရိစိတာ, သေဒါဝက္ခိတ္တာ, ဓမ္မိကာ ဓမ္မလဒ္ဓါ. တေ အာရက္ခေန ဂုတ္တိယာ သမ္ပာဒေတိ – ‘ကိန္တိ မေ ဣမေ ဘောဂေ နေဝ ရာဇာနော ဟရေယျုံ, န စောရာ ဟရေယျုံ, န အဂ္ဂိ ဍဟေယျ, န ဥဒကံ ဝဟေယျ, န အပ္ပိယာ ဒါယာဒါ ဟရေယျု’န္တိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗြာဟ္မဏ, အာရက္ခသမ္ပဒါ. आणि ब्राह्मणा, आरक्षसंपदा म्हणजे काय? ब्राह्मणा, येथे कुलपुत्राकडे जी संपत्ती असते, ती त्याने आपल्या परिश्रमाने व वीर्याने मिळवलेली, बाहुबलाने गोळा केलेली, घामातून निर्माण झालेली, धार्मिक आणि धर्ममार्गाने मिळवलेली असते. तो तिचे रक्षण आणि सुरक्षा करतो – 'माझी ही संपत्ती राजांनी हिरावून घेऊ नये, चोरांनी चोरू नये, अग्नीने जळू नये, पाण्याने वाहून जाऊ नये आणि अप्रिय वारसदारांनी हिरावून घेऊ नये.' ब्राह्मणा, याला आरक्षसंपदा असे म्हणतात. ‘‘ကတမာ စ, ဗြာဟ္မဏ, ကလျာဏမိတ္တတာ? ဣဓ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော ယသ္မိံ ဂါမေ ဝါ နိဂမေ ဝါ ပဋိဝသတိ တတြ ယေ တေ ဟောန္တိ – ဂဟပတီ ဝါ ဂဟပတိပုတ္တာ ဝါ ဒဟရာ ဝါ ဝုဒ္ဓသီလိနော, ဝုဒ္ဓါ ဝါ ဝုဒ္ဓသီလိနော, သဒ္ဓါသမ္ပန္နာ, သီလသမ္ပန္နာ, စာဂသမ္ပန္နာ, ပညာသမ္ပန္နာ – တေဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌတိ သလ္လပတိ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇတိ; ယထာရူပါနံ သဒ္ဓါသမ္ပန္နာနံ သဒ္ဓါသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ သီလသမ္ပန္နာနံ သီလသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ စာဂသမ္ပန္နာနံ စာဂသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ ပညာသမ္ပန္နာနံ ပညာသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗြာဟ္မဏ, ကလျာဏမိတ္တတာ. आणि ब्राह्मणा, कल्याणमित्रता म्हणजे काय? ब्राह्मणा, येथे कुलपुत्र ज्या गावात किंवा नगरात राहतो, तेथील जे गृहपती किंवा गृहपतींचे पुत्र असतात – मग ते तरुण असोत वा वृद्ध, जे शीलवान, श्रद्धासंपन्न, शीलसंपन्न, त्यागसंपन्न आणि प्रज्ञासंपन्न असतात – त्यांच्यासोबत तो राहतो, त्यांच्याशी संभाषण करतो, चर्चा करतो. जशा प्रकारच्या श्रद्धावानांची श्रद्धासंपदा आहे, त्याचे तो अनुकरण करतो; जशा प्रकारच्या शीलवानांची शीलसंपदा आहे, त्याचे तो अनुकरण करतो; जशा प्रकारच्या त्यागवानांची त्यागसंपदा आहे, त्याचे तो अनुकरण करतो; जशा प्रकारच्या प्रज्ञावानांची प्रज्ञासंपदा आहे, त्याचे तो अनुकरण करतो. ब्राह्मणा, याला कल्याणमित्रता असे म्हणतात. ‘‘ကတမာ [Pg.112] စ, ဗြာဟ္မဏ, သမဇီဝိတာ? ဣဓ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ. သေယျထာပိ, ဗြာဟ္မဏ, တုလာဓာရော ဝါ တုလာဓာရန္တေဝါသီ ဝါ တုလံ ပဂ္ဂဟေတွာ ဇာနာတိ – ‘ဧတ္တကေန ဝါ ဩနတံ, ဧတ္တကေန ဝါ ဥန္နတ’န္တိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ. သစာယံ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော အပ္ပာယော သမာနော ဥဠာရံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ, တဿ ဘဝန္တိ ဝတ္တာရော – ‘ဥဒုမ္ဗရခါဒီဝါယံ ကုလပုတ္တော ဘောဂေ ခါဒတီ’တိ. သစေ ပနာယံ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော မဟာယော သမာနော ကသိရံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ, တဿ ဘဝန္တိ ဝတ္တာရော – ‘အဇေဋ္ဌမရဏံဝါယံ ကုလပုတ္တော မရိဿတီ’တိ. ယတော စ ခေါယံ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ, အယံ ဝုစ္စတိ, ဗြာဟ္မဏ, သမဇီဝိတာ. “आणि हे ब्राह्मणा, समजीविका (संतुलित उपजीविका) म्हणजे काय? येथे, हे ब्राह्मणा, एखादा कुलपुत्र (कुलीन तरुण) आपल्या भोगांची (संपत्तीची) प्राप्ती (उत्पन्न) आणि व्यय (खर्च) जाणून घेऊन, अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता संतुलित जीवन जगतो—‘अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च माझ्या उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही.’ हे ब्राह्मणा, ज्याप्रमाणे एखादा तराजू धरणारा (दुकानदार) किंवा त्याचा शिकाऊ मुलगा तराजू हातात धरून जाणतो—‘इतक्या वजनाने तो खाली झुकला आहे, इतक्या वजनाने तो वर गेला आहे’; त्याचप्रमाणे, हे ब्राह्मणा, कुलपुत्र आपल्या संपत्तीचे उत्पन्न आणि खर्च जाणून घेऊन, अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता संतुलित जीवन जगतो—‘अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च माझ्या उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही.’ हे ब्राह्मणा, जर हा कुलपुत्र कमी उत्पन्न असतानाही विलासी जीवन जगत असेल, तर लोक त्याची निंदा करतील—‘हा कुलपुत्र उंबराची फळे खाणाऱ्यासारखा (उधळपट्टीने) संपत्तीचा उपभोग घेत आहे.’ परंतु, हे ब्राह्मणा, जर हा कुलपुत्र मोठे उत्पन्न असतानाही अत्यंत कष्टाचे (कंजूषपणाचे) जीवन जगत असेल, तर लोक त्याची निंदा करतील—‘हा कुलपुत्र अनाथ माणसासारखा (वारसदार नसलेल्यासारखा) मरेल.’ आणि हे ब्राह्मणा, जेव्हा कुलपुत्र आपल्या संपत्तीचे उत्पन्न आणि खर्च जाणून घेऊन, अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता संतुलित जीवन जगतो—‘अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च माझ्या उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही,’ तेव्हा हे ब्राह्मणा, याला ‘समजीविका’ (संतुलित उपजीविका) असे म्हणतात.” ‘‘ဧဝံ သမုပ္ပန္နာနံ, ဗြာဟ္မဏ, ဘောဂါနံ စတ္တာရိ အပါယမုခါနိ ဟောန္တိ – ဣတ္ထိဓုတ္တော, သုရာဓုတ္တော, အက္ခဓုတ္တော, ပါပမိတ္တော ပါပသဟာယော ပါပသမ္ပဝင်္ကော. သေယျထာပိ, ဗြာဟ္မဏ, မဟတော တဠာကဿ စတ္တာရိ စေဝ အာယမုခါနိ, စတ္တာရိ စ အပါယမုခါနိ. တဿ ပုရိသော ယာနိ စေဝ အာယမုခါနိ တာနိ ပိဒဟေယျ, ယာနိ စ အပါယမုခါနိ တာနိ ဝိဝရေယျ; ဒေဝေါ စ န သမ္မာ ဓာရံ အနုပ္ပဝေစ္ဆေယျ. ဧဝဉှိ တဿ ဗြာဟ္မဏ, မဟတော တဠာကဿ ပရိဟာနိယေဝ ပါဋိကင်္ခါ, နော ဝုဒ္ဓိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ဧဝံ သမုပ္ပန္နာနံ ဘောဂါနံ စတ္တာရိ အပါယမုခါနိ ဟောန္တိ – ဣတ္ထိဓုတ္တော, သုရာဓုတ္တော, အက္ခဓုတ္တော, ပါပမိတ္တော ပါပသဟာယော ပါပသမ္ပဝင်္ကော. “हे ब्राह्मणा, अशा प्रकारे प्राप्त झालेल्या संपत्तीच्या नाशाचे चार मार्ग (अपायमुखे) आहेत—स्त्रीलंपटपणा (व्यभिचार), मद्यपान, जुगार आणि पापी मित्र, पापी सोबती व पापी लोकांची संगत असणे. हे ब्राह्मणा, ज्याप्रमाणे एखाद्या मोठ्या तलावाला चार पाण्याचे प्रवेशमार्ग (आगमद्वारे) आणि चार पाण्याचे निर्गममार्ग (निर्गमद्वारे) असावेत. एखाद्या माणसाने त्याचे पाण्याचे प्रवेशमार्ग बंद करावेत आणि पाण्याचे निर्गममार्ग उघडून द्यावेत; आणि पावसानेही योग्य प्रकारे वृष्टी करू नये. हे ब्राह्मणा, अशा स्थितीत त्या मोठ्या तलावाचा ऱ्हासच अपेक्षित आहे, वृद्धी नाही; त्याचप्रमाणे, हे ब्राह्मणा, अशा प्रकारे प्राप्त झालेल्या संपत्तीच्या नाशाचे चार मार्ग आहेत—स्त्रीलंपटपणा, मद्यपान, जुगार आणि पापी मित्र, पापी सोबती व पापी लोकांची संगत असणे.” ‘‘ဧဝံ သမုပ္ပန္နာနံ, ဗြာဟ္မဏ, ဘောဂါနံ စတ္တာရိ အာယမုခါနိ ဟောန္တိ – န ဣတ္ထိဓုတ္တော, န သုရာဓုတ္တော, န အက္ခဓုတ္တော, ကလျာဏမိတ္တော ကလျာဏသဟာယော ကလျာဏသမ္ပဝင်္ကော. သေယျထာပိ, ဗြာဟ္မဏ, မဟတော တဠာကဿ စတ္တာရိ စေဝ အာယမုခါနိ စတ္တာရိ စ အပါယမုခါနိ. တဿ ပုရိသော ယာနိ စေဝ အာယမုခါနိ တာနိ ဝိဝရေယျ, ယာနိ စ အပါယမုခါနိ [Pg.113] တာနိ ပိဒဟေယျ; ဒေဝေါ စ သမ္မာ ဓာရံ အနုပ္ပဝေစ္ဆေယျ. ဧဝဉှိ တဿ, ဗြာဟ္မဏ, မဟတော တဠာကဿ ဝုဒ္ဓိယေဝ ပါဋိကင်္ခါ, နော ပရိဟာနိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, ဧဝံ သမုပ္ပန္နာနံ ဘောဂါနံ စတ္တာရိ အာယမုခါနိ ဟောန္တိ – န ဣတ္ထိဓုတ္တော…ပေ… ကလျာဏသမ္ပဝင်္ကော. ဣမေ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, စတ္တာရော ဓမ္မာ ကုလပုတ္တဿ ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတာယ သံဝတ္တန္တိ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခါယ. “हे ब्राह्मणा, अशा प्रकारे प्राप्त झालेल्या संपत्तीच्या वृद्धीचे चार मार्ग (आयमुखे) आहेत—स्त्रीलंपट न होणे, मद्यपी न होणे, जुगारी न होणे आणि कल्याणमित्र (सज्जन मित्र), कल्याणकारी सोबती व कल्याणकारी लोकांची संगत असणे. हे ब्राह्मणा, ज्याप्रमाणे एखाद्या मोठ्या तलावाला चार पाण्याचे प्रवेशमार्ग आणि चार पाण्याचे निर्गममार्ग असावेत. एखाद्या माणसाने त्याचे पाण्याचे प्रवेशमार्ग उघडावेत आणि पाण्याचे निर्गममार्ग बंद करावेत; आणि पावसानेही योग्य प्रकारे वृष्टी करावी. हे ब्राह्मणा, अशा स्थितीत त्या मोठ्या तलावाची वृद्धीच अपेक्षित आहे, ऱ्हास नाही; त्याचप्रमाणे, हे ब्राह्मणा, अशा प्रकारे प्राप्त झालेल्या संपत्तीच्या वृद्धीचे चार मार्ग आहेत—स्त्रीलंपट न होणे...पे... कल्याणकारी लोकांची संगत असणे. हे ब्राह्मणा, हे चार धर्म कुलपुत्राच्या इहलोकातील हितासाठी आणि इहलोकातील सुखासाठी कारणीभूत ठरतात.” ‘‘စတ္တာရောမေ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တဿ ဓမ္မာ သမ္ပရာယဟိတာယ သံဝတ္တန္တိ သမ္ပရာယသုခါယ. ကတမေ စတ္တာရော? သဒ္ဓါသမ္ပဒါ, သီလသမ္ပဒါ, စာဂသမ္ပဒါ, ပညာသမ္ပဒါ. ကတမာ စ, ဗြာဟ္မဏ, သဒ္ဓါသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော သဒ္ဓေါ ဟောတိ, သဒ္ဒဟတိ တထာဂတဿ ဗောဓိံ – ‘ဣတိပိ သော ဘဂဝါ…ပေ… သတ္ထာ ဒေဝမနုဿာနံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ’တိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗြာဟ္မဏ, သဒ္ဓါသမ္ပဒါ. “हे ब्राह्मणा, हे चार धर्म कुलपुत्राच्या परलोकातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी कारणीभूत ठरतात. कोणते चार? श्रद्धा-संपदा (श्रद्धेची समृद्धी), शील-संपदा (शीलाची समृद्धी), त्याग-संपदा (त्यागाची समृद्धी) आणि प्रज्ञा-संपदा (प्रज्ञेची समृद्धी). आणि हे ब्राह्मणा, श्रद्धा-संपदा म्हणजे काय? येथे, हे ब्राह्मणा, कुलपुत्र श्रद्धावान असतो, तो तथागतांच्या बोधीवर (ज्ञानावर) श्रद्धा ठेवतो—‘ते भगवान असे आहेत...पे... देव आणि मनुष्यांचे शास्ता (गुरू), बुद्ध आणि भगवान आहेत.’ हे ब्राह्मणा, याला श्रद्धा-संपदा असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဗြာဟ္မဏ, သီလသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ…ပေ… သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗြာဟ္မဏ, သီလသမ္ပဒါ. “आणि हे ब्राह्मणा, शील-संपदा म्हणजे काय? येथे, हे ब्राह्मणा, कुलपुत्र प्राणातिपातापासून (जीवहिंसेपासून) अलिप्त राहतो...पे... सुरा, मेरय आणि मद्य या प्रमादस्थानांपासून (नशा आणणाऱ्या पदार्थांच्या सेवनापासून) अलिप्त राहतो. हे ब्राह्मणा, याला शील-संपदा असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဗြာဟ္မဏ, စာဂသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော ဝိဂတမလမစ္ဆေရေန စေတသာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသတိ မုတ္တစာဂေါ ပယတပါဏိ ဝေါဿဂ္ဂရတော ယာစယောဂေါ ဒါနသံဝိဘာဂရတော. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗြာဟ္မဏ, စာဂသမ္ပဒါ. “आणि हे ब्राह्मणा, त्याग-संपदा म्हणजे काय? येथे, हे ब्राह्मणा, कुलपुत्र मत्सराचा (कंजूषपणाचा) मळ दूर झालेल्या चित्ताने गृहस्थाश्रमात राहतो; तो मुक्तहस्त (उदारपणे दान देणारा), दान देण्यासाठी स्वच्छ हात असलेला, त्याग करण्यात रमणारा, याचना करणाऱ्यांना दान देण्यास योग्य आणि दान व वाटणी करण्यात आनंद मानणारा असतो. हे ब्राह्मणा, याला त्याग-संपदा असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဗြာဟ္မဏ, ပညာသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဗြာဟ္မဏ, ကုလပုတ္တော ပညဝါ ဟောတိ…ပေ… သမ္မာ ဒုက္ခက္ခယဂါမိနိယာ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဗြာဟ္မဏ, ပညာသမ္ပဒါ. ဣမေ ခေါ, ဗြာဟ္မဏ, စတ္တာရော ဓမ္မာ ကုလပုတ္တဿ သမ္ပရာယဟိတာယ သံဝတ္တန္တိ သမ္ပရာယသုခါယာ’’တိ. “आणि हे ब्राह्मणा, प्रज्ञा-संपदा म्हणजे काय? येथे, हे ब्राह्मणा, कुलपुत्र प्रज्ञावान (बुद्धिमान) असतो...पे... दुःखाचा पूर्ण क्षय करणाऱ्या मार्गाचे सम्यक ज्ञान असणारा असतो. हे ब्राह्मणा, याला प्रज्ञा-संपदा असे म्हणतात. हे ब्राह्मणा, हे चार धर्म कुलपुत्राच्या परलोकातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी कारणीभूत ठरतात.” ‘‘ဥဋ္ဌာတာ ကမ္မဓေယျေသု, အပ္ပမတ္တော ဝိဓာနဝါ; သမံ ကပ္ပေတိ ဇီဝိကံ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. “आपल्या कर्तव्यांमध्ये तत्पर (उद्योगी), अप्रमादी (सावध) आणि सुव्यवस्थित नियोजन करणारा मनुष्य संतुलित जीवन जगतो आणि साठवलेल्या संपत्तीचे रक्षण करतो.” ‘‘သဒ္ဓေါ သီလေန သမ္ပန္နော, ဝဒညူ ဝီတမစ္ဆရော; နိစ္စံ မဂ္ဂံ ဝိသောဓေတိ, သောတ္ထာနံ သမ္ပရာယိကံ. “श्रद्धावान, शीलाने संपन्न, उदार आणि मत्सररहित (कंजूषपणा नसलेला) असलेला तो मनुष्य परलोकातील कल्याणाचा मार्ग नेहमी स्वच्छ (सुकर) करतो.” ‘‘ဣစ္စေတေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ စ, သဒ္ဓဿ ဃရမေသိနော; အက္ခာတာ သစ္စနာမေန, ဥဘယတ္ထ သုခါဝဟာ. “अशा प्रकारे, गृहस्थाश्रमात राहणाऱ्या श्रद्धावान व्यक्तीचे हे आठ धर्म ‘सच्चनाम’ (सत्यवादी नाव असलेल्या बुद्धांनी) दोन्ही लोकात सुख देणारे म्हणून सांगितले आहेत.” ‘‘ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတတ္ထာယ, သမ္ပရာယသုခါယ စ; ဧဝမေတံ ဂဟဋ္ဌာနံ, စာဂေါ ပုညံ ပဝဍ္ဎတီ’’တိ. ပဉ္စမံ; “इहलोकातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी; अशा प्रकारे गृहस्थाचा त्याग आणि पुण्य वाढत जाते.” (पाचवे सुत्त समाप्त) ၆. ဘယသုတ္တံ ६. भयसुत्त ၅၆. ‘‘‘ဘယ’န္တိ [Pg.114], ဘိက္ခဝေ, ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ‘ဒုက္ခ’န္တိ, ဘိက္ခဝေ, ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ‘ရောဂေါ’တိ, ဘိက္ခဝေ, ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ‘ဂဏ္ဍော’တိ, ဘိက္ခဝေ, ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ‘သလ္လ’န္တိ, ဘိက္ခဝေ, ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ‘သင်္ဂေါ’တိ, ဘိက္ခဝေ, ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ‘ပင်္ကော’တိ, ဘိက္ခဝေ, ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ‘ဂဗ္ဘော’တိ, ဘိက္ခဝေ, ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ကသ္မာ စ, ဘိက္ခဝေ, ‘ဘယ’န္တိ ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ? ယသ္မာ စ ကာမရာဂရတ္တာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဆန္ဒရာဂဝိနိဗဒ္ဓေါ ဒိဋ္ဌဓမ္မိကာပိ ဘယာ န ပရိမုစ္စတိ, သမ္ပရာယိကာပိ ဘယာ န ပရိမုစ္စတိ, တသ္မာ ‘ဘယ’န္တိ ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ. ကသ္မာ စ, ဘိက္ခဝေ, ‘ဒုက္ခ’န္တိ…ပေ… ‘ရောဂေါ’တိ… ‘ဂဏ္ဍော’တိ… ‘သလ္လ’န္တိ… ‘သင်္ဂေါ’တိ… ‘ပင်္ကော’တိ… ‘ဂဗ္ဘော’တိ ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ? ယသ္မာ စ ကာမရာဂရတ္တာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဆန္ဒရာဂဝိနိဗဒ္ဓေါ ဒိဋ္ဌဓမ္မိကာပိ ဂဗ္ဘာ န ပရိမုစ္စတိ, သမ္ပရာယိကာပိ ဂဗ္ဘာ န ပရိမုစ္စတိ, တသ္မာ ‘ဂဗ္ဘော’တိ ကာမာနမေတံ အဓိဝစနံ’’. ५६. भिक्खूहो, 'भय' हे कामभोगांचेच एक नाव (अधिवाचन) आहे. भिक्खूहो, 'दुःख' हे कामभोगांचेच एक नाव आहे. भिक्खूहो, 'रोग' हे कामभोगांचेच एक नाव आहे. भिक्खूहो, 'गंड' (गळू) हे कामभोगांचेच एक नाव आहे. भिक्खूहो, 'शल्य' (बाण) हे कामभोगांचेच एक नाव आहे. भिक्खूहो, 'संग' (आसक्ती) हे कामभोगांचेच एक नाव आहे. भिक्खूहो, 'पंक' (चिखल) हे कामभोगांचेच एक नाव आहे. भिक्खूहो, 'गर्भ' (गर्भाशय) हे कामभोगांचेच एक नाव आहे. आणि भिक्खूहो, 'भय' हे कामभोगांचे नाव का आहे? कारण, भिक्खूहो, कामरागाने प्रभावित झालेला आणि छंदरागाने बांधलेला हा प्राणी इहलोकातील भयापासूनही मुक्त होत नाही आणि परलोकातील भयापासूनही मुक्त होत नाही; म्हणून 'भय' हे कामभोगांचे नाव आहे. आणि भिक्खूहो, 'दुःख' ... 'रोग' ... 'गंड' ... 'शल्य' ... 'संग' ... 'पंक' ... 'गर्भ' हे कामभोगांचे नाव का आहे? कारण, भिक्खूहो, कामरागाने प्रभावित झालेला आणि छंदरागाने बांधलेला हा प्राणी इहलोकातील गर्भावासापासूनही मुक्त होत नाही आणि परलोकातील गर्भावासापासूनही मुक्त होत नाही; म्हणून 'गर्भ' हे कामभोगांचे नाव आहे. ‘‘ဘယံ ဒုက္ခဉ္စ ရောဂေါ စ, ဂဏ္ဍော သလ္လဉ္စ သင်္ဂေါ စ; ပင်္ကော ဂဗ္ဘော စ ဥဘယံ, ဧတေ ကာမာ ပဝုစ္စန္တိ; ယတ္ထ သတ္တော ပုထုဇ္ဇနော. भय, दुःख, रोग, गंड, शल्य, संग, पंक आणि गर्भ - या दोन्ही प्रकारच्या गोष्टींना 'कामभोग' असे म्हटले जाते, ज्यामध्ये सामान्य माणूस (पुथुज्जन) आसक्त असतो. ‘‘ဩတိဏ္ဏော သာတရူပေန, ပုန ဂဗ္ဘာယ ဂစ္ဆတိ; ယတော စ ဘိက္ခု အာတာပီ, သမ္ပဇညံ န ရိစ္စတိ. सुखकारक वाटणाऱ्या कामभोगांमध्ये बुडून तो पुन्हा गर्भावासात (पुनर्जन्मात) जातो. परंतु जेव्हा उद्योगी (आतपी) भिक्खू जागृत राहून संप्रजन्य (स्पष्ट ज्ञान) सोडत नाही, ‘‘သော ဣမံ ပလိပထံ ဒုဂ္ဂံ, အတိက္ကမ္မ တထာဝိဓော; ပဇံ ဇာတိဇရူပေတံ, ဖန္ဒမာနံ အဝေက္ခတီ’’တိ. ဆဋ္ဌံ; तेव्हा तो तसा भिक्खू या दुर्गम संसाराच्या चिखलाला पार करून, जन्म आणि जरेने युक्त असलेल्या व तडफडणाऱ्या या प्रजेकडे (प्राणिमात्रांकडे) पाहतो. ၇. ပဌမအာဟုနေယျသုတ္တံ ७. प्रथम आहुनेय्य सुत्त ၅၇. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အာဟုနေယျော ဟောတိ ပါဟုနေယျော ဒက္ခိဏေယျော အဉ္ဇလိကရဏီယော အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သီလဝါ ဟောတိ …ပေ… သမာဒါယ သိက္ခတိ သိက္ခာပဒေသု; ဗဟုဿုတော ဟောတိ…ပေ… ဒိဋ္ဌိယာ သုပ္ပဋိဝိဒ္ဓါ; ကလျာဏမိတ္တော ဟောတိ ကလျာဏသဟာယော ကလျာဏသမ္ပဝင်္ကော[Pg.115]; သမ္မာဒိဋ္ဌိကော ဟောတိ, သမ္မာဒဿနေန သမန္နာဂတော; စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဟောတိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ; အနေကဝိဟိတံ ပုဗ္ဗေနိဝါသံ အနုဿရတိ, သေယျထိဒံ – ဧကမ္ပိ ဇာတိံ ဒွေပိ ဇာတိယော…ပေ… ဣတိ သာကာရံ သဥဒ္ဒေသံ အနေကဝိဟိတံ ပုဗ္ဗေနိဝါသံ အနုဿရတိ; ဒိဗ္ဗေန စက္ခုနာ ဝိသုဒ္ဓေန အတိက္ကန္တမာနုသကေန…ပေ… ယထာကမ္မူပဂေ သတ္တေ ပဇာနာတိ; အာသဝါနံ ခယာ…ပေ… သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အာဟုနေယျော ဟောတိ…ပေ… အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿာ’’တိ. သတ္တမံ. ५७. भिक्खूहो, आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आहुनेय्य (दूरवरून आणलेले दान स्वीकारण्यास योग्य), पाहुनेय्य (पाहुण्यांसाठी ठेवलेले आदरातिथ्य स्वीकारण्यास योग्य), दक्खिणेय्य (परलोकाच्या श्रद्धेने दिलेले दान स्वीकारण्यास योग्य), अंजलिकरणीय (हात जोडून नमस्कार करण्यास योग्य) आणि जगासाठी सर्वोत्तम पुण्यक्षेत्र असतो. कोणत्या आठ गुणांनी? इथे, भिक्खूहो, भिक्खू शीलवान असतो... शील नियमांचे (शिक्षापदांचे) ग्रहण करून त्यात स्वतःला प्रशिक्षित करतो; बहुश्रुत असतो... प्रज्ञेने (दृष्टीने) सत्याचा चांगला भेद केलेला असतो; कल्याणमित्र, कल्याणसहायी आणि कल्याणाकडे झुकलेला असतो; सम्यक दृष्टी असलेला असतो, सम्यक दर्शनाने युक्त असतो; उच्च चित्ताशी संबंधित आणि याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या चार ध्यानांना सहजपणे, विनासायास व विनात्रास प्राप्त करणारा असतो; आपल्या अनेक प्रकारच्या पूर्वजन्मांचे स्मरण करतो, जसे की - एक जन्म, दोन जन्म... अशा प्रकारे सविस्तर आणि सकारण आपल्या अनेक प्रकारच्या पूर्वजन्मांचे स्मरण करतो; मानवी दृष्टीपेक्षा श्रेष्ठ अशा विशुद्ध दिव्य चक्षूने... प्राण्यांना त्यांच्या कर्मानुसार गती प्राप्त करताना पाहतो; आसवांचा क्षय झाल्यामुळे... स्वतः साक्षात्कृत करून, त्यात प्रस्थापित होऊन विहार करतो. भिक्खूहो, या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आहुनेय्य असतो... आणि जगासाठी सर्वोत्तम पुण्यक्षेत्र असतो. ၈. ဒုတိယအာဟုနေယျသုတ္တံ ८. द्वितीय आहुनेय्य सुत्त ၅၈. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အာဟုနေယျော ဟောတိ…ပေ… အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သီလဝါ ဟောတိ …ပေ… သမာဒါယ သိက္ခတိ သိက္ခာပဒေသု; ဗဟုဿုတော ဟောတိ…ပေ… ဒိဋ္ဌိယာ သုပ္ပဋိဝိဒ္ဓါ; အာရဒ္ဓဝီရိယော ဝိဟရတိ ထာမဝါ ဒဠှပရက္ကမော အနိက္ခိတ္တဓုရော ကုသလေသု ဓမ္မေသု; အာရညိကော ဟောတိ ပန္တသေနာသနော; အရတိရတိသဟော ဟောတိ, ဥပ္ပန္နံ အရတိံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရတိ; ဘယဘေရဝသဟော ဟောတိ, ဥပ္ပန္နံ ဘယဘေရဝံ အဘိဘုယျ အဘိဘုယျ ဝိဟရတိ; စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဟောတိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ; အာသဝါနံ ခယာ…ပေ… သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အာဟုနေယျော…ပေ… အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿာ’’တိ. အဋ္ဌမံ. ५८. भिक्खूहो, आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आहुनेय्य असतो... आणि जगासाठी सर्वोत्तम पुण्यक्षेत्र असतो. कोणत्या आठ गुणांनी? इथे, भिक्खूहो, भिक्खू शीलवान असतो... शील नियमांचे ग्रहण करून त्यात स्वतःला प्रशिक्षित करतो; बहुश्रुत असतो... प्रज्ञेने सत्याचा चांगला भेद केलेला असतो; वीर्यवान (प्रयत्नशील) असतो, बलवान, दृढ पराक्रमी आणि कुशल धर्मांच्या बाबतीत कधीही जबाबदारी न सोडणारा असतो; आरण्यक (अरण्यात राहणारा) असतो, एकांत स्थानी निवास करणारा असतो; अरती (उदासीनता) आणि रती (कामवासना) यांवर विजय मिळवणारा असतो, उत्पन्न झालेल्या अरतीला वारंवार दाबून (पराभूत करून) विहार करतो; भय आणि भीती यांवर विजय मिळवणारा असतो, उत्पन्न झालेल्या भयाला व भीतीला वारंवार पराभूत करून विहार करतो; उच्च चित्ताशी संबंधित आणि याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या चार ध्यानांना सहजपणे, विनासायास व विनात्रास प्राप्त करणारा असतो; आसवांचा क्षय झाल्यामुळे... स्वतः साक्षात्कृत करून, त्यात प्रस्थापित होऊन विहार करतो. भिक्खूहो, या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू आहुनेय्य असतो... आणि जगासाठी सर्वोत्तम पुण्यक्षेत्र असतो. ၉. ပဌမပုဂ္ဂလသုတ္တံ ९. प्रथम पुग्गल सुत्त ၅၉. ‘‘အဋ္ဌိမေ ဘိက္ခဝေ, ပုဂ္ဂလာ အာဟုနေယျာ ပါဟုနေယျာ ဒက္ခိဏေယျာ အဉ္ဇလိကရဏီယာ အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿ? ကတမေ အဋ္ဌ? သောတာပန္နော, သောတာပတ္တိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, သကဒါဂါမီ, သကဒါဂါမိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, အနာဂါမီ, အနာဂါမိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော, အရဟာ, အရဟတ္တာယ ပဋိပန္နော. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ပုဂ္ဂလာ အာဟုနေယျာ…ပေ… အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿာ’’တိ. ५९. भिक्खूहो, हे आठ व्यक्ती (पुग्गल) आहुनेय्य, पाहुनेय्य, दक्खिणेय्य, अंजलिकरणीय आणि जगासाठी सर्वोत्तम पुण्यक्षेत्र आहेत. कोणते आठ? स्रोतापन्न, स्रोतापत्ती-फळ साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न (मार्गस्थ); सकदागामी, सकदागामी-फळ साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न; अनागामी, अनागामी-फळ साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न; अरहंत, अरहंत-फळ साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न. भिक्खूहो, हे आठ व्यक्ती आहुनेय्य असतात... आणि जगासाठी सर्वोत्तम पुण्यक्षेत्र असतात. ‘‘စတ္တာရော [Pg.116] စ ပဋိပန္နာ, စတ္တာရော စ ဖလေ ဌိတာ; ဧသ သံဃော ဥဇုဘူတော, ပညာသီလသမာဟိတော. चार मार्गस्थ आणि चार फळात प्रस्थापित झालेले; हाच तो प्रज्ञा आणि शीलाने युक्त असलेला ऋजू (सरळ) संघ आहे. ‘‘ယဇမာနာနံ မနုဿာနံ, ပုညပေက္ခာန ပါဏိနံ; ကရောတံ ဩပဓိကံ ပုညံ, သံဃေ ဒိန္နံ မဟပ္ဖလ’’န္တိ. နဝမံ; यज्ञ (दान) करणाऱ्या मनुष्यांसाठी, पुण्याची इच्छा करणाऱ्या प्राण्यांसाठी, जे उपधिक (पुनर्जन्माचे फळ देणारे) पुण्य करतात, त्यांनी संघाला दिलेले दान महाफळ देणारे ठरते. ၁၀. ဒုတိယပုဂ္ဂလသုတ္တံ १०. द्वितीय पुग्गल सुत्त ၆၀. ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, ပုဂ္ဂလာ အာဟုနေယျာ…ပေ… အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿ. ကတမေ အဋ္ဌ? သောတာပန္နော, သောတာပတ္တိဖလသစ္ဆိကိရိယာယ ပဋိပန္နော…ပေ… အရဟာ, အရဟတ္တာယ ပဋိပန္နော. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ပုဂ္ဂလာ အာဟုနေယျာ…ပေ… အနုတ္တရံ ပုညက္ခေတ္တံ လောကဿာ’’တိ. ६०. भिक्खूहो, हे आठ व्यक्ती आहुनेय्य असतात... आणि जगासाठी सर्वोत्तम पुण्यक्षेत्र असतात. कोणते आठ? स्रोतापन्न, स्रोतापत्ती-फळ साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न... अरहंत, अरहंत-फळ साक्षात्कारासाठी प्रतिपन्न. भिक्खूहो, हे आठ व्यक्ती आहुनेय्य असतात... आणि जगासाठी सर्वोत्तम पुण्यक्षेत्र असतात. ‘‘စတ္တာရော စ ပဋိပန္နာ, စတ္တာရော စ ဖလေ ဌိတာ; ဧသ သံဃော သမုက္ကဋ္ဌော, သတ္တာနံ အဋ္ဌ ပုဂ္ဂလာ. चार मार्गस्थ आणि चार फळात प्रस्थापित झालेले; प्राण्यांमध्ये हा आठ व्यक्तींचा संघ सर्वश्रेष्ठ आहे. ‘‘ယဇမာနာနံ မနုဿာနံ, ပုညပေက္ခာန ပါဏိနံ; ကရောတံ ဩပဓိကံ ပုညံ, ဧတ္ထ ဒိန္နံ မဟပ္ဖလ’’န္တိ. ဒသမံ; यज्ञ (दान) करणाऱ्या मनुष्यांसाठी, पुण्याची इच्छा करणाऱ्या प्राण्यांसाठी, जे उपधिक पुण्य करतात, त्यांनी येथे (या संघात) दिलेले दान महाफळ देणारे ठरते. ဂေါတမီဝဂ္ဂေါ ပဌမော. प्रथम गोतमी वग्ग समाप्त. တဿုဒ္ဒါနံ – त्याची अनुक्रमणिका (उद्दान) - ဂေါတမီ ဩဝါဒံ သံခိတ္တံ, ဒီဃဇာဏု စ ဥဇ္ဇယော; ဘယာ ဒွေ အာဟုနေယျာ စ, ဒွေ စ အဋ္ဌ ပုဂ္ဂလာတိ. गोतमी, ओवाद (संक्षिप्त), दीघजाणू, उज्जय, भय, दोन आहुनेय्य आणि दोन आठ पुग्गल (व्यक्ती) सुत्ते. (၇) ၂. ဘူမိစာလဝဂ္ဂေါ (७) २. भूमिचाल वग्ग ၁. ဣစ္ဆာသုတ္တံ १. इच्छा सुत्त ၆၁. ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, ပုဂ္ဂလာ သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနာ လောကသ္မိံ. ကတမေ အဋ္ဌ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ ဥဋ္ဌဟတော ဃဋတော ဝါယမတော လာဘာယ လာဘော နုပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန အလာဘေန သောစတိ ကိလမတိ ပရိဒေဝတိ, ဥရတ္တာဠိံ ကန္ဒတိ, သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ – ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ[Pg.117], ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ, န စ လာဘီ, သောစီ စ ပရိဒေဝီ စ, စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. ६१. “भिक्खूहो, जगात हे आठ प्रकारचे व्यक्ती विद्यमान आहेत. कोणते आठ? येथे, भिक्खूहो, एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीने जीवन जगणाऱ्या भिक्खूच्या मनात लाभाची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करतो, धडपड करतो आणि प्रयत्न करतो. लाभासाठी उद्योग करणाऱ्या, धडपड करणाऱ्या आणि प्रयत्न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होत नाही. तो लाभ न मिळाल्यामुळे शोक करतो, कष्टी होतो, विलाप करतो, छाती बडवून रडतो आणि अत्यंत संभ्रमात पडतो. भिक्खूहो, या भिक्खूला असे म्हटले जाते—‘हा भिक्खू लाभाच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी उद्योग करतो, धडपड करतो, प्रयत्न करतो; परंतु त्याला लाभ मिळत नाही, तो शोकाकुल आणि विलाप करणारा असतो, आणि सद्धम्मापासून च्युत होतो.’” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ ဥဋ္ဌဟတော ဃဋတော ဝါယမတော လာဘာယ လာဘော ဥပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန လာဘေန မဇ္ဇတိ ပမဇ္ဇတိ ပမာဒမာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ – ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ, လာဘီ စ မဒီ စ ပမာဒီ စ, စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु येथे, भिक्खूहो, एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीने जीवन जगणाऱ्या भिक्खूच्या मनात लाभाची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करतो, धडपड करतो आणि प्रयत्न करतो. लाभासाठी उद्योग करणाऱ्या, धडपड करणाऱ्या आणि प्रयत्न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होतो. तो त्या लाभाने मदोन्मत्त होतो, गाफील होतो आणि प्रमादाला प्राप्त होतो. भिक्खूहो, या भिक्खूला असे म्हटले जाते—‘हा भिक्खू लाभाच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी उद्योग करतो, धडपड करतो, प्रयत्न करतो; त्याला लाभही मिळतो, पण तो मदोन्मत्त आणि प्रमादी होतो, आणि सद्धम्मापासून च्युत होतो.’” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော န ဥဋ္ဌဟတိ န ဃဋတိ န ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ အနုဋ္ဌဟတော အဃဋတော အဝါယမတော လာဘာယ လာဘော နုပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန အလာဘေန သောစတိ, ကိလမတိ, ပရိဒေဝတိ, ဥရတ္တာဠိံ ကန္ဒတိ, သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ – ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, န ဥဋ္ဌဟတိ န ဃဋတိ န ဝါယမတိ လာဘာယ, န စ လာဘီ, သောစီ စ ပရိဒေဝီ စ, စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु येथे, भिक्खूहो, एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीने जीवन जगणाऱ्या भिक्खूच्या मनात लाभाची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करत नाही, धडपड करत नाही आणि प्रयत्न करत नाही. लाभासाठी उद्योग न करणाऱ्या, धडपड न करणाऱ्या आणि प्रयत्न न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होत नाही. तो लाभ न मिळाल्यामुळे शोक करतो, कष्टी होतो, विलाप करतो, छाती बडवून रडतो आणि अत्यंत संभ्रमात पडतो. भिक्खूहो, या भिक्खूला असे म्हटले जाते—‘हा भिक्खू लाभाच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी उद्योग करत नाही, धडपड करत नाही, प्रयत्न करत नाही; त्याला लाभही मिळत नाही, तो शोकाकुल आणि विलाप करणारा असतो, आणि सद्धम्मापासून च्युत होतो.’” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ အနုဋ္ဌဟတော, အဃဋတော, အဝါယမတော လာဘာယ လာဘော ဥပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန လာဘေန မဇ္ဇတိ, ပမဇ္ဇတိ, ပမာဒမာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ – ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, န ဥဋ္ဌဟတိ န ဃဋတိ န ဝါယမတိ လာဘာယ, လာဘီ စ မဒီ စ, ပမာဒီ စ, စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु येथे, भिक्खूहो, एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीने जीवन जगणाऱ्या भिक्खूच्या मनात लाभाची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करत नाही, धडपड करत नाही आणि प्रयत्न करत नाही. लाभासाठी उद्योग न करणाऱ्या, धडपड न करणाऱ्या आणि प्रयत्न न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होतो. तो त्या लाभाने मदोन्मत्त होतो, गाफील होतो आणि प्रमादाला प्राप्त होतो. भिक्खूहो, या भिक्खूला असे म्हटले जाते—‘हा भिक्खू लाभाच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी उद्योग करत नाही, धडपड करत नाही, प्रयत्न करत नाही; त्याला लाभ मिळतो, पण तो मदोन्मत्त आणि प्रमादी होतो, आणि सद्धम्मापासून च्युत होतो.’” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ ဥဋ္ဌဟတော ဃဋတော ဝါယမတော လာဘာယ လာဘော နုပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန အလာဘေန န သောစတိ န ကိလမတိ န ပရိဒေဝတိ, န ဥရတ္တာဠိံ ကန္ဒတိ, န သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ – ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ, န စ လာဘီ, န စ သောစီ န စ ပရိဒေဝီ, အစ္စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु येथे, भिक्खूहो, एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीने जीवन जगणाऱ्या भिक्खूच्या मनात लाभाची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करतो, धडपड करतो आणि प्रयत्न करतो. लाभासाठी उद्योग करणाऱ्या, धडपड करणाऱ्या आणि प्रयत्न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होत नाही. तो लाभ न मिळाल्यामुळे शोक करत नाही, कष्टी होत नाही, विलाप करत नाही, छाती बडवून रडत नाही आणि अत्यंत संभ्रमात पडत नाही. भिक्खूहो, या भिक्खूला असे म्हटले जाते—‘हा भिक्खू लाभाच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी उद्योग करतो, धडपड करतो, प्रयत्न करतो; त्याला लाभ मिळत नाही, तरीही तो शोक करत नाही, विलाप करत नाही, आणि सद्धम्मापासून च्युत होत नाही.’” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ [Pg.118] ဥဋ္ဌဟတော ဃဋတော ဝါယမတော လာဘာယ လာဘော ဥပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန လာဘေန န မဇ္ဇတိ, န ပမဇ္ဇတိ, န ပမာဒမာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ – ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ, လာဘီ စ, န စ မဒီ န စ ပမာဒီ, အစ္စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु येथे, भिक्खूहो, एकांतात राहणाऱ्या and अनासक्त वृत्तीने जीवन जगणाऱ्या भिक्खूच्या मनात लाभाची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करतो, धडपड करतो आणि प्रयत्न करतो. लाभासाठी उद्योग करणाऱ्या, धडपड करणाऱ्या आणि प्रयत्न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होतो. तो त्या लाभाने मदोन्मत्त होत नाही, गाफील होत नाही आणि प्रमादाला प्राप्त होत नाही. भिक्खूहो, या भिक्खूला असे म्हटले जाते—‘हा भिक्खू लाभाच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी उद्योग करतो, धडपड करतो, प्रयत्न करतो; त्याला लाभ मिळतो, परंतु तो मदोन्मत्त होत नाही, प्रमादी होत नाही, आणि सद्धम्मापासून च्युत होत नाही.’” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ အနုဋ္ဌဟတော, အဃဋတော, အဝါယမတော လာဘာယ လာဘော နုပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန အလာဘေန န သောစတိ, န ကိလမတိ, န ပရိဒေဝတိ, န ဥရတ္တာဠိံ ကန္ဒတိ, န သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ – ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ, န စ လာဘီ, န စ သောစီ န စ ပရိဒေဝီ, အစ္စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु येथे, भिक्खूहो, एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीने जीवन जगणाऱ्या भिक्खूच्या मनात लाभाची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करत नाही, धडपड करत नाही आणि प्रयत्न करत नाही. लाभासाठी उद्योग न करणाऱ्या, धडपड न करणाऱ्या आणि प्रयत्न न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होत नाही. तो लाभ न मिळाल्यामुळे शोक करत नाही, कष्टी होत नाही, विलाप करत नाही, छाती बडवून रडत नाही आणि अत्यंत संभ्रमात पडत नाही. भिक्खूहो, या भिक्खूला असे म्हटले जाते—‘हा भिक्खू लाभाच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी उद्योग करत नाही, धडपड करत नाही, प्रयत्न करत नाही; त्याला लाभ मिळत नाही, तरीही तो शोक करत नाही, विलाप करत नाही, आणि सद्धम्मापासून च्युत होत नाही.’” ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ အနုဋ္ဌဟတော အဃဋတော အဝါယမတော လာဘာယ လာဘော ဥပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန လာဘေန န မဇ္ဇတိ, န ပမဇ္ဇတိ, န ပမာဒမာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ – ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ, လာဘီ စ, န စ မဒီ န စ ပမာဒီ, အစ္စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ ’. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ပုဂ္ဂလာ သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနာ လောကသ္မိ’’န္တိ. ပဌမံ. “परंतु येथे, भिक्खूहो, एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीने जीवन जगणाऱ्या भिक्खूच्या मनात लाभाची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करत नाही, धडपड करत नाही आणि प्रयत्न करत नाही. लाभासाठी उद्योग न करणाऱ्या, धडपड न करणाऱ्या आणि प्रयत्न न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होतो. तो त्या लाभाने मदोन्मत्त होत नाही, गाफील होत नाही आणि प्रमादाला प्राप्त होत नाही. भिक्खूहो, या भिक्खूला असे म्हटले जाते—‘हा भिक्खू लाभाच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी उद्योग करत नाही, धडपड करत नाही, प्रयत्न करत नाही; त्याला लाभ मिळतो, परंतु तो मदोन्मत्त होत नाही, प्रमादी होत नाही, आणि सद्धम्मापासून च्युत होत नाही.’ भिक्खूहो, हेच ते आठ प्रकारचे व्यक्ती जगात विद्यमान आहेत.” पहिले सुत्त समाप्त. ၂. အလံသုတ္တံ २. अलम सुत्त ၆၂. ‘‘ဆဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော အလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ ဆဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ ကလျာဏဝါက္ကရဏော, ပေါရိယာ ဝါစာယ သမန္နာဂတော ဝိဿဋ္ဌာယ အနေလဂဠာယ အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; သန္ဒဿကော စ ဟောတိ သမာဒပကော သမုတ္တေဇကော [Pg.119] သမ္ပဟံသကော သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဆဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော အလံ ပရေသံ. ६२. “भिक्खूहो, सहा गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो आणि इतरांच्या कल्याणासाठीही समर्थ असतो. कोणत्या सहा गुणांनी? येथे, भिक्खूहो, भिक्खू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा असतो; ऐकलेले धर्म स्मरणात ठेवण्याच्या स्वभावाचा असतो; स्मरणात ठेवलेल्या धर्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा असतो; अर्थ जाणून आणि धर्म जाणून धर्मानुकूल आचरण करणारा असतो; त्याची वाणी कल्याणकारी व सुस्पष्ट उच्चाराची असते, तो सुसंस्कृत, स्पष्ट, दोषरहित आणि अर्थ समजवून सांगणाऱ्या नागरी भाषेने युक्त असतो; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना धम्माचे दर्शन घडवणारा, त्यांना धम्मात प्रवृत्त करणारा, उत्साहित करणारा आणि आनंदित करणारा असतो. भिक्खूहो, या सहा गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो आणि इतरांच्या कल्याणासाठीही समर्थ असतो.” ‘‘ပဉ္စဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော အလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ ပဉ္စဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ…ပေ… အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; သန္ဒဿကော စ ဟောတိ သမာဒပကော သမုတ္တေဇကော သမ္ပဟံသကော သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ပဉ္စဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော အလံ ပရေသံ. “भिक्खूूंनो, पाच गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी आणि इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो. कोणते पाच? इथे, भिक्खूूंनो, भिक्खू कुशल धम्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो; परंतु ऐकलेले धम्म लक्षात ठेवण्यास समर्थ असतो; लक्षात ठेवलेल्या धम्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा असतो; अर्थ जाणून आणि धम्म जाणून धम्मानुकूल आचरण करणारा असतो; तो सुवक्ता असतो... अर्थ स्पष्ट करणारी वाणी बोलणारा असतो; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा, धम्मात प्रवृत्त करणारा, उत्साहित करणारा आणि आनंदित करणारा असतो. भिक्खूूंनो, या पाच गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या आणि इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो.” ‘‘စတူဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော နာလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ စတူဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; နော စ ကလျာဏဝါစော ဟောတိ ကလျာဏဝါက္ကရဏော, ပေါရိယာ ဝါစာယ သမန္နာဂတော ဝိဿဋ္ဌာယ အနေလဂဠာယ အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; နော စ သန္ဒဿကော ဟောတိ သမာဒပကော သမုတ္တေဇကော သမ္ပဟံသကော သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, စတူဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော နာလံ ပရေသံ. “भिक्खूूंनो, चार गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही. कोणते चार? इथे, भिक्खूूंनो, भिक्खू कुशल धम्मांचे त्वरित आकलन करणारा असतो; ऐकलेले धम्म लक्षात ठेवण्यास समर्थ असतो; लक्षात ठेवलेल्या धम्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा असतो; अर्थ जाणून आणि धम्म जाणून धम्मानुकूल आचरण करणारा असतो. परंतु, तो सुवक्ता नसतो, त्याची वाणी मधुर नसते, तो अर्थ स्पष्ट करणारी सुसंस्कृत, स्पष्ट आणि निर्दोष वाणी बोलणारा नसतो; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा, धम्मात प्रवृत्त करणारा, उत्साहित करणारा व आनंदित करणारा नसतो. भिक्खूूंनो, या चार गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही.” ‘‘စတူဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ နာလံ အတ္တနော. ကတမေဟိ စတူဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; နော စ ဓာတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; န စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ ကလျာဏဝါက္ကရဏော…ပေ… အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; သန္ဒဿကော စ ဟောတိ…ပေ… သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, စတူဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. “भिक्खूूंनो, चार गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण स्वतःच्या कल्याणासाठी नाही. कोणते चार? इथे, भिक्खूूंनो, भिक्खू कुशल धम्मांचे त्वरित आकलन करणारा असतो; ऐकलेले धम्म लक्षात ठेवण्यास समर्थ असतो. परंतु, तो लक्षात ठेवलेल्या धम्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा नसतो; अर्थ जाणून आणि धम्म जाणून धम्मानुकूल आचरण करणारा नसतो. तरीही, तो सुवक्ता असतो, त्याची वाणी मधुर असते... अर्थ स्पष्ट करणारी वाणी बोलणारा असतो; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा... आनंदित करणारा असतो. भिक्खूूंनो, या चार गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण स्वतःच्या कल्याणासाठी नाही.” ‘‘တီဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော နာလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ တီဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ [Pg.120] ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; နော စ ကလျာဏဝါစော ဟောတိ ကလျာဏဝါက္ကရဏော, ပေါရိယာ ဝါစာယ သမန္နာဂတော ဝိဿဋ္ဌာယ အနေလဂဠာယ အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; နော စ သန္ဒဿကော ဟောတိ သမာဒပကော သမုတ္တေဇကော သမ္ပဟံသကော သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, တီဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. “भिक्खूूंनो, तीन गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही. कोणते तीन? इथे, भिक्खूूंनो, भिक्खू कुशल धम्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो. परंतु, तो ऐकलेले धम्म लक्षात ठेवण्यास समर्थ असतो; लक्षात ठेवलेल्या धम्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा असतो; आणि अर्थ जाणून व धम्म जाणून धम्मानुकूल आचरण करणारा असतो. परंतु, तो सुवक्ता नसतो, उसकी वाणी मधुर नसते, तो अर्थ स्पष्ट करणारी सुसंस्कृत, स्पष्ट आणि निर्दोष वाणी बोलणारा नसतो; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा, धम्मात प्रवृत्त करणारा, उत्साहित करणारा व आनंदित करणारा नसतो. भिक्खूूंनो, या तीन गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही.” ‘‘တီဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. ကတမေဟိ တီဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; နော စ ဓာတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; နော စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ…ပေ… အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; သန္ဒဿကော စ ဟောတိ သမာဒပကော သမုတ္တေဇကော သမ္ပဟံသကော သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, တီဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. “भिक्खूूंनो, तीन गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण स्वतःच्या कल्याणासाठी नाही. कोणते तीन? इथे, भिक्खूूंनो, भिक्खू कुशल धम्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो, परंतु तो ऐकलेले धम्म लक्षात ठेवण्यास समर्थ असतो. मात्र, तो लक्षात ठेवलेल्या धम्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा नसतो; अर्थ जाणून आणि धम्म जाणून धम्मानुकूल आचरण करणारा नसतो. तरीही, तो सुवक्ता असतो... अर्थ स्पष्ट करणारी वाणी बोलणारा असतो; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा, धम्मात प्रवृत्त करणारा, उत्साहित करणारा व आनंदित करणारा असतो. भिक्खूूंनो, या तीन गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण स्वतःच्या कल्याणासाठी नाही.” ‘‘ဒွီဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ ဒွီဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; နော စ သုတာနံ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; နော စ ကလျာဏဝါစော ဟောတိ…ပေ… အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; နော စ သန္ဒဿကော ဟောတိ…ပေ… သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဒွီဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. “भिक्खूूंनो, दोन गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही. कोणते दोन? इथे, भिक्खूूंनो, भिक्खू कुशल धम्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो, आणि ऐकलेले धम्म लक्षात ठेवण्यासही समर्थ नसतो. परंतु, तो लक्षात ठेवलेल्या धम्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा असतो; आणि अर्थ जाणून व धम्म जाणून धम्मानुकूल आचरण करणारा असतो. परंतु, तो सुवक्ता नसतो... अर्थ स्पष्ट करणारी वाणी बोलणारा नसतो; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा... नसतो. भिक्खूूंनो, या दोन गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण इतरांच्या कल्याणासाठी नाही.” ‘‘ဒွီဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. ကတမေဟိ ဒွီဟိ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; နော စ သုတာနံ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; နော စ ဓာတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; နော စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ ကလျာဏဝါက္ကရဏော, ပေါရိယာ ဝါစာယ သမန္နာဂတော ဝိဿဋ္ဌာယ အနေလဂဠာယ အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; သန္ဒဿကော စ ဟောတိ သမာဒပကော သမုတ္တေဇကော သမ္ပဟံသကော သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ[Pg.121], ဒွီဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော’’တိ. ဒုတိယံ. “भिक्खूूंनो, दोन गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण स्वतःच्या कल्याणासाठी नाही. कोणते दोन? इथे, भिक्खूूंनो, भिक्खू कुशल धम्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो; ऐकलेले धम्म लक्षात ठेवण्यास समर्थ नसतो; लक्षात ठेवलेल्या धम्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा नसतो; आणि अर्थ जाणून व धम्म जाणून धम्मानुकूल आचरण करणारा नसतो. परंतु, तो सुवक्ता असतो, त्याची वाणी मधुर असते, तो अर्थ स्पष्ट करणारी सुसंस्कृत, स्पष्ट आणि निर्दोष वाणी बोलणारा असतो; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा, धम्मात प्रवृत्त करणारा, उत्साहित करणारा व आनंदित करणारा असतो. भिक्खूूंनो, या दोन गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, पण स्वतःच्या कल्याणासाठी नाही.” हे दुसरे सुत्त समाप्त. ၃. သံခိတ္တသုတ္တံ ३. संक्खित्तसुत्त (संक्षिप्त सुत्त) ၆၃. အထ ခေါ အညတရော ဘိက္ခု ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ…ပေ… ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ သော ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘သာဓု မေ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ သံခိတ္တေန ဓမ္မံ ဒေသေတု, ယမဟံ ဘဂဝတော ဓမ္မံ သုတွာ ဧကော ဝူပကဋ္ဌော အပ္ပမတ္တော အာတာပီ ပဟိတတ္တော ဝိဟရေယျ’’န္တိ. ‘‘ဧဝမေဝံ ပနိဓေကစ္စေ မောဃပုရိသာ မမညေဝ အဇ္ဈေသန္တိ. ဓမ္မေ စ ဘာသိတေ မမညေဝ အနုဗန္ဓိတဗ္ဗံ မညန္တီ’’တိ. ‘‘ဒေသေတု မေ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ သံခိတ္တေန ဓမ္မံ, ဒေသေတု သုဂတော သံခိတ္တေန ဓမ္မံ. အပ္ပေဝ နာမာဟံ ဘဂဝတော ဘာသိတဿ အတ္ထံ အာဇာနေယျံ, အပ္ပေဝ နာမာဟံ ဘဂဝတော ဘာသိတဿ ဒါယာဒေါ အဿ’’န္တိ. ‘‘တသ္မာတိဟ တေ, ဘိက္ခု ဧဝံ သိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘အဇ္ဈတ္တံ မေ စိတ္တံ ဌိတံ ဘဝိဿတိ သုသဏ္ဌိတံ, န စ ဥပ္ပန္နာ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ ဌဿန္တီ’တိ. ဧဝဉှိ တေ, ဘိက္ခု, သိက္ခိတဗ္ဗံ’’. ६३. त्यानंतर एक भिक्खू जेथे भगवान होते तेथे गेला... एका बाजूला बसल्यावर त्या भिक्खूने भगवानांना असे म्हटले – “भंते, भगवानांनी मला संक्षेपात धम्म उपदेश करावा, जेणेकरून भगवानांकडून धम्म ऐकून मी एकांतात, अप्रमत्त, उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहरेन.” “भिक्खू, येथे काही मोघपुरुष मला केवळ धम्म उपदेश करण्यासाठीच विनंती करतात, परंतु धम्म उपदेश केल्यावर ते केवळ माझ्याच मागे मागे फिरणे योग्य मानतात.” “भंते, भगवानांनी मला संक्षेपात धम्म उपदेश करावा, सुगतांनी संक्षेपात धम्म उपदेश करावा. कदाचित मी भगवानांच्या उपदेशाचा अर्थ समजू शकेन, कदाचित मी भगवानांच्या उपदेशाचा वारसदार बनू शकेन.” “भिक्खू, म्हणून तू या प्रकारे स्वतःला प्रशिक्षित केले पाहिजेस – ‘माझे चित्त अध्यात्मात स्थिर आणि सुप्रतिष्ठित राहील, आणि उत्पन्न होणारे पापी अकुशल धर्म माझ्या चित्ताला व्यापून राहणार नाहीत.’ भिक्खू, तू स्वतःला असेच प्रशिक्षित केले पाहिजेस।” ‘‘ယတော ခေါ တေ, ဘိက္ခု, အဇ္ဈတ္တံ စိတ္တံ ဌိတံ ဟောတိ သုသဏ္ဌိတံ, န စ ဥပ္ပန္နာ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ စိတ္တံ ပရိယာဒါယ တိဋ္ဌန္တိ, တတော တေ, ဘိက္ခု, ဧဝံ သိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘မေတ္တာ မေ စေတောဝိမုတ္တိ ဘာဝိတာ ဘဝိဿတိ ဗဟုလီကတာ ယာနီကတာ ဝတ္ထုကတာ အနုဋ္ဌိတာ ပရိစိတာ သုသမာရဒ္ဓါ’တိ. ဧဝဉှိ တေ, ဘိက္ခု, သိက္ခိတဗ္ဗံ. “भिक्खू, जेव्हा तुझे चित्त अध्यात्मात स्थिर आणि सुप्रतिष्ठित होईल, आणि उत्पन्न होणारे पापी अकुशल धर्म तुझ्या चित्ताला व्यापून राहणार नाहीत, तेव्हा भिक्खू, तू स्वतःला असे प्रशिक्षित केले पाहिजेस – ‘माझी मैत्री चेतोविमुक्ती विकसित केली जाईल, वारंवार अभ्यासली जाईल, वाहन बनवली जाईल, आधार बनवली जाईल, अनुष्ठित केली जाईल, परिचित केली जाईल आणि चांगल्या प्रकारे आरंभली जाईल.’ भिक्खू, तू स्वतःला असेच प्रशिक्षित केले पाहिजेस।” ‘‘ယတော ခေါ တေ, ဘိက္ခု, အယံ သမာဓိ ဧဝံ ဘာဝိတော ဟောတိ ဗဟုလီကတော, တတော တွံ, ဘိက္ခု, ဣမံ သမာဓိံ သဝိတက္ကမ္ပိ သဝိစာရံ ဘာဝေယျာသိ, အဝိတက္ကမ္ပိ ဝိစာရမတ္တံ ဘာဝေယျာသိ, အဝိတက္ကမ္ပိ အဝိစာရံ ဘာဝေယျာသိ, သပ္ပီတိကမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, နိပ္ပီတိကမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, သာတသဟဂတမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, ဥပေက္ခာသဟဂတမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ. “भिक्खू, जेव्हा तुझी ही समाधी अशा प्रकारे विकसित आणि वारंवार अभ्यासली जाईल, तेव्हा भिक्खू, तू या समाधीचा सवितर्क आणि सविचार अभ्यास करावा; अवितर्क आणि केवळ विचारयुक्त अभ्यास करावा; अवितर्क आणि अविचार अभ्यास करावा; सप्रीतिक अभ्यास करावा; निष्प्रीतिक अभ्यास करावा; सातसहगत अभ्यास करावा; आणि उपेक्षासहगत अभ्यास करावा।” ‘‘ယတော ခေါ, တေ ဘိက္ခု, အယံ သမာဓိ ဧဝံ ဘာဝိတော ဟောတိ သုဘာဝိတော, တတော တေ, ဘိက္ခု, ဧဝံ သိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘ကရုဏာ မေ စေတောဝိမုတ္တိ… မုဒိတာ မေ စေတောဝိမုတ္တိ… ဥပေက္ခာ မေ စေတောဝိမုတ္တိ ဘာဝိတာ ဘဝိဿတိ [Pg.122] ဗဟုလီကတာ ယာနီကတာ ဝတ္ထုကတာ အနုဋ္ဌိတာ ပရိစိတာ သုသမာရဒ္ဓါ’တိ. ဧဝဉှိ တေ, ဘိက္ခု, သိက္ခိတဗ္ဗံ. “भिक्खू, जेव्हा तुझी ही समाधी अशा प्रकारे विकसित आणि सुविकसित होईल, तेव्हा भिक्खू, तू स्वतःला असे प्रशिक्षित केले पाहिजेस – ‘माझी करुणा चेतोविमुक्ती... मुदिता चेतोविमुक्ती... उपेक्षा चेतोविमुक्ती विकसित केली जाईल, वारंवार अभ्यासली जाईल, वाहन बनवली जाईल, आधार बनवली जाईल, अनुष्ठित केली जाईल, परिचित केली जाईल आणि चांगल्या प्रकारे आरंभली जाईल.’ भिक्खू, तू स्वतःला असेच प्रशिक्षित केले पाहिजेस।” ‘‘ယတော ခေါ တေ, ဘိက္ခု, အယံ သမာဓိ ဧဝံ ဘာဝိတော ဟောတိ သုဘာဝိတော, တတော တွံ, ဘိက္ခု, ဣမံ သမာဓိံ သဝိတက္ကသဝိစာရမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, အဝိတက္ကဝိစာရမတ္တမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, အဝိတက္ကအဝိစာရမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, သပ္ပီတိကမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, နိပ္ပီတိကမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, သာတသဟဂတမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, ဥပေက္ခာသဟဂတမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ. “भिक्खू, जेव्हा तुझी ही समाधी अशा प्रकारे विकसित आणि सुविकसित होईल, तेव्हा भिक्खू, तू या समाधीचा सवितर्क आणि सविचार अभ्यास करावा; अवितर्क आणि केवळ विचारयुक्त अभ्यास करावा; अवितर्क आणि अविचार अभ्यास करावा; सप्रीतिक अभ्यास करावा; निष्प्रीतिक अभ्यास करावा; सातसहगत अभ्यास करावा; आणि उपेक्षासहगत अभ्यास करावा।” ‘‘ယတော ခေါ တေ, ဘိက္ခု, အယံ သမာဓိ ဧဝံ ဘာဝိတော ဟောတိ သုဘာဝိတော, တတော တေ, ဘိက္ခု, ဧဝံ သိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘ကာယေ ကာယာနုပဿီ ဝိဟရိဿာမိ အာတာပီ သမ္ပဇာနော သတိမာ, ဝိနေယျ လောကေ အဘိဇ္ဈာဒေါမနဿ’န္တိ. ဧဝဉှိ တေ, ဘိက္ခု, သိက္ခိတဗ္ဗံ. “भिक्खू, जेव्हा तुझी ही समाधी अशा प्रकारे विकसित आणि सुविकसित होईल, तेव्हा भिक्खू, तू स्वतःला असे प्रशिक्षित केले पाहिजेस – ‘मी कायेमध्ये कायेचे अनुपश्यी विहरेन – उद्योगी, संप्रजन्ययुक्त आणि स्मृतिमान होऊन, जगातील अभिज्झा आणि डोमनस्स दूर करून.’ भिक्खू, तू स्वतःला असेच प्रशिक्षित केले पाहिजेस।” ‘‘ယတော ခေါ တေ, ဘိက္ခု, အယံ သမာဓိ ဧဝံ ဘာဝိတော ဟောတိ ဗဟုလီကတော, တတော တွံ, ဘိက္ခု, ဣမံ သမာဓိံ သဝိတက္ကသဝိစာရမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, အဝိတက္ကဝိစာရမတ္တမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, အဝိတက္ကအဝိစာရမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, သပ္ပီတိကမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, နိပ္ပီတိကမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, သာတသဟဂတမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, ဥပေက္ခာသဟဂတမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ. “भिक्खू, जेव्हा तुझी ही समाधी अशा प्रकारे विकसित आणि वारंवार अभ्यासली जाईल, तेव्हा भिक्खू, तू या समाधीचा सवितर्क आणि सविचार अभ्यास करावा; अवितर्क आणि केवळ विचारयुक्त अभ्यास करावा; अवितर्क आणि अविचार अभ्यास करावा; सप्रीतिक अभ्यास करावा; निष्प्रीतिक अभ्यास करावा; सातसहगत अभ्यास करावा; आणि उपेक्षासहगत अभ्यास करावा।” ‘‘ယတော ခေါ တေ, ဘိက္ခု, အယံ သမာဓိ ဧဝံ ဘာဝိတော ဟောတိ သုဘာဝိတော, တတော တေ, ဘိက္ခု, ဧဝံ သိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘ဝေဒနာသု ဝေဒနာနုပဿီ ဝိဟရိဿာမိ အာတာပီ သမ္ပဇာနော သတိမာ, ဝိနေယျ လောကေ အဘိဇ္ဈာဒေါမနဿ’န္တိ; စိတ္တေ စိတ္တာနုပဿီ ဝိဟရိဿာမိ အာတာပီ သမ္ပဇာနော သတိမာ, ဝိနေယျ လောကေ အဘိဇ္ဈာဒေါမနဿ’န္တိ; ဓမ္မေသု ဓမ္မာနုပဿီ ဝိဟရိဿာမိ အာတာပီ သမ္ပဇာနော သတိမာ, ဝိနေယျ လောကေ အဘိဇ္ဈာဒေါမနဿ’န္တိ. ဧဝဉှိ တေ, ဘိက္ခု, သိက္ခိတဗ္ဗံ. “भिक्खू, जेव्हा तुझी ही समाधी अशा प्रकारे विकसित आणि सुविकसित होईल, तेव्हा भिक्खू, तू स्वतःला असे प्रशिक्षित केले पाहिजेस – ‘मी वेदनांमध्ये वेदनांचे अनुपश्यी विहरेन – उद्योगी, संप्रजन्ययुक्त आणि स्मृतिमान होऊन, जगातील अभिज्झा आणि डोमनस्स दूर करून’; ‘मी चित्तामध्ये चित्ताचे अनुपश्यी विहरेन – उद्योगी, संप्रजन्ययुक्त आणि स्मृतिमान होऊन, जगातील अभिज्झा आणि डोमनस्स दूर करून’; ‘मी धम्मांमध्ये धम्मांचे अनुपश्यी विहरेन – उद्योगी, संप्रजन्ययुक्त आणि स्मृतिमान होऊन, जगातील अभिज्झा आणि डोमनस्स दूर करून.’ भिक्खू, तू स्वतःला असेच प्रशिक्षित केले पाहिजेस।” ‘‘ယတော ခေါ တေ, ဘိက္ခု, အယံ သမာဓိ ဧဝံ ဘာဝိတော ဟောတိ ဗဟုလီကတော, တတော တွံ, ဘိက္ခု, ဣမံ သမာဓိံ သဝိတက္ကသဝိစာရမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, အဝိတက္ကဝိစာရမတ္တမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, အဝိတက္ကအဝိစာရမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, သပ္ပီတိကမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, နိပ္ပီတိကမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, သာတသဟဂတမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ, ဥပေက္ခာသဟဂတမ္ပိ ဘာဝေယျာသိ. “भिक्खू, जेव्हा तुझी ही समाधी अशा प्रकारे विकसित आणि वारंवार अभ्यासली जाईल, तेव्हा भिक्खू, तू या समाधीचा सवितर्क आणि सविचार अभ्यास करावा; अवितर्क आणि केवळ विचारयुक्त अभ्यास करावा; अवितर्क आणि अविचार अभ्यास करावा; सप्रीतिक अभ्यास करावा; निष्प्रीतिक अभ्यास करावा; सातसहगत अभ्यास करावा; आणि उपेक्षासहगत अभ्यास करावा।” ‘‘ယတော ခေါ တေ, ဘိက္ခု, အယံ သမာဓိ ဧဝံ ဘာဝိတော ဟောတိ သုဘာဝိတော, တတော တွံ, ဘိက္ခု, ယေန ယေနေဝ ဂဂ္ဃသိ ဖာသုံယေဝ ဂဂ္ဃသိ, ယတ္ထ ယတ္ထ ဌဿသိ ဖာသုံယေဝ ဌဿသိ, ယတ္ထ ယတ္ထ နိသီဒိဿသိ ဖာသုံယေဝ နိသီဒိဿသိ, ယတ္ထ ယတ္ထ သေယျံ ကပ္ပေဿသိ ဖာသုံယေဝ သေယျံ ကပ္ပေဿသီ’’တိ. “भिक्खू, जेव्हा तुझी ही समाधी अशा प्रकारे विकसित आणि सुविकसित होईल, तेव्हा भिक्खू, तू जेथे जेथे जाशील तेथे सुखानेच जाशील; जेथे जेथे उभा राहशील तेथे सुखानेच उभा राहशील; जेथे जेथे बसशील तेथे सुखानेच बसशील; जेथे जेथे झोपशील तेथे सुखानेच झोपशील।” အထ [Pg.123] ခေါ သော ဘိက္ခု ဘဂဝတာ ဣမိနာ ဩဝါဒေန ဩဝဒိတော ဥဋ္ဌာယာသနာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ပဒက္ခိဏံ ကတွာ ပက္ကာမိ. အထ ခေါ သော ဘိက္ခု ဧကော ဝူပကဋ္ဌော အပ္ပမတ္တော အာတာပီ ပဟိတတ္တော ဝိဟရန္တော နစိရဿေဝ – ယဿတ္ထာယ ကုလပုတ္တာ သမ္မဒေဝ အဂါရသ္မာ အနဂါရိယံ ပဗ္ဗဇန္တိ, တဒနုတ္တရံ – ဗြဟ္မစရိယပရိယောသာနံ ဒိဋ္ဌေဝ ဓမ္မေ သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟာသိ. ‘‘ခီဏာ ဇာတိ, ဝုသိတံ ဗြဟ္မစရိယံ, ကတံ ကရဏီယံ, နာပရံ ဣတ္ထတ္တာယာ’’တိ အဗ္ဘညာသိ. အညတရော စ ပန သော ဘိက္ခု အရဟတံ အဟောသီတိ. တတိယံ. त्यानंतर भगवानांच्या या उपदेशाने उपदेशित झालेला तो भिक्खू आसनावरून उठला, भगवानांना अभिवादन केले, प्रदक्षिणा केली आणि निघून गेला. त्यानंतर तो भिक्खू एकांतात, अप्रमत्त, उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहरत असताना, फार काळ न लागता – ज्यासाठी कुलपुत्र योग्य प्रकारे घराचा त्याग करून अनगारिक प्रव्रज्या ग्रहण करतात, त्या सर्वश्रेष्ठ ब्रह्मचर्याच्या अंतिम ध्येयाला (अर्हत्त्वाला) याच जन्मात स्वतः अभिज्ञाने साक्षात करून, प्राप्त करून विहरू लागला. “जन्म नष्ट झाला आहे, ब्रह्मचर्य पूर्ण झाले आहे, जे करायचे होते ते केले गेले आहे, आता या जन्मानंतर पुन्हा जन्म नाही,” असे त्याने प्रत्यक्ष जाणले. आणि तो भिक्खू अर्हंतांपैकी एक झाला।” ၄. ဂယာသီသသုတ္တံ ४. गयासीस सुत्त ၆၄. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဂယာယံ ဝိဟရတိ ဂယာသီသေ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ…ပေ… ‘‘ပုဗ္ဗာဟံ, ဘိက္ခဝေ, သမ္ဗောဓာ အနဘိသမ္ဗုဒ္ဓေါ ဗောဓိသတ္တောဝ သမာနော ဩဘာသညေဝ ခေါ သဉ္ဇာနာမိ, နော စ ရူပါနိ ပဿာမိ’’. ६४. एका वेळी भगवान गया येथील गयासीस येथे विहरत होते. तेथे भगवानांनी भिक्खूंना संबोधित केले... “भिक्खूंनो, संबोधी प्राप्त होण्यापूर्वी, मी जेव्हा बुद्धत्व प्राप्त न झालेला केवळ एक बोधिसत्त होतो, तेव्हा मला केवळ प्रकाशच जाणवत असे, परंतु मी रूपे पाहू शकत नव्हतो।” ‘‘တဿ မယှံ, ဘိက္ခဝေ, ဧတဒဟောသိ – ‘သစေ ခေါ အဟံ ဩဘာသဉ္စေဝ သဉ္ဇာနေယျံ ရူပါနိ စ ပဿေယျံ; ဧဝံ မေ ဣဒံ ဉာဏဒဿနံ ပရိသုဒ္ဓတရံ အဿာ’’’တိ. “भिक्खूंनो, तेव्हा माझ्या मनात असा विचार आला – ‘जर मला प्रकाशही जाणवला आणि मी रूपेही पाहू शकलो, तर माझे हे ज्ञानदर्शन अधिक शुद्ध होईल.’” ‘‘သော ခေါ အဟံ, ဘိက္ခဝေ, အပရေန သမယေန အပ္ပမတ္တော အာတာပီ ပဟိတတ္တော ဝိဟရန္တော ဩဘာသဉ္စေဝ သဉ္ဇာနာမိ, ရူပါနိ စ ပဿာမိ; နော စ ခေါ တာဟိ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌာမိ သလ္လပါမိ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇာမိ. भिक्षूंनो, त्यानंतर काही काळाने मी अप्रमत्त, उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहार करत असताना, मला प्रकाश जाणवला आणि रूपेही दिसली; परंतु मी त्या देवतांसोबत एकत्र राहिलो नाही, त्यांच्याशी संभाषण केले नाही किंवा त्यांच्याशी चर्चा केली नाही. ‘‘တဿ မယှံ, ဘိက္ခဝေ, ဧတဒဟောသိ – ‘သစေ ခေါ အဟံ ဩဘာသဉ္စေဝ သဉ္ဇာနေယျံ, ရူပါနိ စ ပဿေယျံ, တာဟိ စ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌေယျံ သလ္လပေယျံ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇေယျံ; ဧဝံ မေ ဣဒံ ဉာဏဒဿနံ ပရိသုဒ္ဓတရံ အဿာ’’’တိ. भिक्षूंनो, माझ्या मनात असा विचार आला – 'जर मी प्रकाश जाणला आणि रूपे पाहिली, तसेच त्या देवतांसोबत एकत्र राहिलो, त्यांच्याशी संभाषण केले आणि त्यांच्याशी चर्चा केली, तर माझे हे ज्ञानदर्शन अधिक शुद्ध होईल.' ‘‘သော ခေါ အဟံ, ဘိက္ခဝေ, အပရေန သမယေန အပ္ပမတ္တော အာတာပီ ပဟိတတ္တော ဝိဟရန္တော ဩဘာသဉ္စေဝ သဉ္ဇာနာမိ, ရူပါနိ စ ပဿာမိ, တာဟိ စ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌာမိ သလ္လပါမိ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇာမိ; နော စ ခေါ တာ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ဣမာ ဒေဝတာ အမုကမှာ ဝါ အမုကမှာ ဝါ ဒေဝနိကာယာတိ. भिक्षूंनो, त्यानंतर काही काळाने मी अप्रमत्त, उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहार करत असताना, मला प्रकाश जाणवला आणि रूपेही दिसली, तसेच मी त्या देवतांसोबत एकत्र राहिलो, त्यांच्याशी संभाषण केले आणि त्यांच्याशी चर्चा केली; परंतु मला त्या देवतांविषयी हे माहीत नव्हते की, 'या देवता अमुक किंवा तमुक देवलोकातील आहेत.' ‘‘တဿ [Pg.124] မယှံ, ဘိက္ခဝေ, ဧတဒဟောသိ – ‘သစေ ခေါ အဟံ ဩဘာသဉ္စေဝ သဉ္ဇာနေယျံ, ရူပါနိ စ ပဿေယျံ, တာဟိ စ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌေယျံ သလ္လပေယျံ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇေယျံ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနေယျံ – ဣမာ ဒေဝတာ အမုကမှာ ဝါ အမုကမှာ ဝါ ဒေဝနိကာယာ’တိ; ဧဝံ မေ ဣဒံ ဉာဏဒဿနံ ပရိသုဒ္ဓတရံ အဿာ’’’တိ. भिक्षूंनो, माझ्या मनात असा विचार आला – 'जर मी प्रकाश जाणला आणि रूपे पाहिली, तसेच त्या देवतांसोबत एकत्र राहिलो, त्यांच्याशी संभाषण केले, त्यांच्याशी चर्चा केली आणि त्या देवतांविषयी हेही जाणले की, 'या देवता अमुक किंवा तमुक देवलोकातील आहेत,' तर माझे हे ज्ञानदर्शन अधिक शुद्ध होईल.' ‘‘သော ခေါ အဟံ, ဘိက္ခဝေ, အပရေန သမယေန အပ္ပမတ္တော အာတာပီ ပဟိတတ္တော ဝိဟရန္တော ဩဘာသဉ္စေဝ သဉ္ဇာနာမိ, ရူပါနိ စ ပဿာမိ, တာဟိ စ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌာမိ သလ္လပါမိ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇာမိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ အမုကမှာ ဝါ အမုကမှာ ဝါ ဒေဝနိကာယာ’တိ; နော စ ခေါ တာ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဣမဿ ကမ္မဿ ဝိပါကေန ဣတော စုတာ တတ္ထ ဥပပန္နာ’တိ…ပေ… တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဣမဿ ကမ္မဿ ဝိပါကေန ဣတော စုတာ တတ္ထ ဥပပန္နာ’တိ; နော စ ခေါ တာ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဣမဿ ကမ္မဿ ဝိပါကေန ဧဝမာဟာရာ ဧဝံသုခဒုက္ခပ္ပဋိသံဝေဒိနိယော’တိ …ပေ… တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဣမဿ ကမ္မဿ ဝိပါကေန ဧဝမာဟာရာ ဧဝံသုခဒုက္ခပ္ပဋိသံဝေဒိနိယော’တိ; နော စ ခေါ တာ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဧဝံဒီဃာယုကာ ဧဝံစိရဋ္ဌိတိကာ’တိ…ပေ… တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဧဝံဒီဃာယုကာ ဧဝံစိရဋ္ဌိတိကာ’တိ; နော စ ခေါ တာ ဒေဝတာ ဇာနာမိ ယဒိ ဝါ မေ ဣမာဟိ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္နိဝုတ္ထပုဗ္ဗံ ယဒိ ဝါ န သန္နိဝုတ္ထပုဗ္ဗန္တိ. भिक्षूंनो, त्यानंतर काही काळाने मी अप्रमत्त, उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहार करत असताना, मला प्रकाश जाणवला आणि रूपेही दिसली, मी त्या देवतांसोबत एकत्र राहिलो, त्यांच्याशी संभाषण केले आणि त्यांच्याशी चर्चा केली, तसेच मला त्या देवतांविषयी हेही समजले की, 'या देवता अमुक किंवा तमुक देवलोकातील आहेत.' परंतु मला त्या देवतांविषयी हे माहीत नव्हते की, 'या देवता या कर्माच्या विपाकामुळे येथून च्युत होऊन तिथे उत्पन्न झाल्या आहेत.' ...पे... मी त्या देवतांविषयी हेही जाणले की, 'या देवता या कर्माच्या विपाकामुळे येथून च्युत होऊन तिथे उत्पन्न झाल्या आहेत.' परंतु मला त्या देवतांविषयी हे माहीत नव्हते की, 'या कर्माच्या विपाकामुळे या देवता असा आहार घेतात आणि अशा सुख-दुःखाचा अनुभव घेतात.' ...पे... मी त्या देवतांविषयी हेही जाणले की, 'या कर्माच्या विपाकामुळे या देवता असा आहार घेतात आणि अशा सुख-दुःखाचा अनुभव घेतात.' परंतु मला त्या देवतांविषयी हे माहीत नव्हते की, 'या देवतांचे आयुष्य एवढे दीर्घ आहे आणि त्या एवढा प्रदीर्घ काळ टिकून राहतात.' ...पे... मी त्या देवतांविषयी हेही जाणले की, 'या देवतांचे आयुष्य एवढे दीर्घ आहे आणि त्या एवढा प्रदीर्घ काळ टिकून राहतात.' परंतु मला हे माहीत नव्हते की, मी पूर्वी कधी या देवतांसोबत एकत्र राहिलो होतो की नाही. ‘‘တဿ မယှံ, ဘိက္ခဝေ, ဧတဒဟောသိ – ‘သစေ ခေါ အဟံ ဩဘာသဉ္စေဝ သဉ္ဇာနေယျံ, ရူပါနိ စ ပဿေယျံ, တာဟိ စ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌေယျံ သလ္လပေယျံ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇေယျံ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနေယျံ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ အမုကမှာ ဝါ အမုကမှာ ဝါ ဒေဝနိကာယာ’တိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနေယျံ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဣမဿ ကမ္မဿ ဝိပါကေန ဣတော စုတာ တတ္ထ ဥပပန္နာ’တိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနေယျံ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဧဝမာဟာရာ ဧဝံသုခဒုက္ခပ္ပဋိသံဝေဒိနိယော’တိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနေယျံ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဧဝံဒီဃာယုကာ ဧဝံစိရဋ္ဌိတိကာ’တိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနေယျံ ယဒိ ဝါ မေ ဣမာဟိ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္နိဝုတ္ထပုဗ္ဗံ ယဒိ ဝါ န သန္နိဝုတ္ထပုဗ္ဗန္တိ; ဧဝံ မေ ဣဒံ ဉာဏဒဿနံ ပရိသုဒ္ဓတရံ အဿာ’’’တိ. भिक्षूंनो, माझ्या मनात असा विचार आला – 'जर मी (१) प्रकाश जाणला आणि (२) रूपे पाहिली; आणि (३) त्या देवतांसोबत एकत्र राहिलो, त्यांच्याशी संभाषण केले व त्यांच्याशी चर्चा केली; आणि (४) त्या देवतांविषयी हे जाणले की, 'या देवता अमुक किंवा तमुक देवलोकातील आहेत'; आणि (५) 'या कर्माच्या विपाकामुळे या देवता येथून च्युत होऊन तिथे उत्पन्न झाल्या आहेत'; आणि (६) 'या कर्माच्या विपाकामुळे या देवता असा आहार घेतात आणि अशा सुख-दुःखाचा अनुभव घेतात'; आणि (७) 'या कर्माच्या विपाकामुळे या देवतांचे आयुष्य एवढे दीर्घ आहे आणि त्या एवढा प्रदीर्घ काळ टिकून राहतात'; आणि (८) मी पूर्वी कधी या देवतांसोबत एकत्र राहिलो होतो की नाही, हेही जर मी जाणले, तर माझे हे ज्ञानदर्शन अधिक शुद्ध होईल.' ‘‘သော [Pg.125] ခေါ အဟံ, ဘိက္ခဝေ, အပရေန သမယေန အပ္ပမတ္တော အာတာပီ ပဟိတတ္တော ဝိဟရန္တော ဩဘာသဉ္စေဝ သဉ္ဇာနာမိ, ရူပါနိ စ ပဿာမိ, တာဟိ စ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌာမိ သလ္လပါမိ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇာမိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ အမုကမှာ ဝါ အမုကမှာ ဝါ ဒေဝနိကာယာ’တိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဣမဿ ကမ္မဿ ဝိပါကေန ဣတော စုတာ တတ္ထ ဥပပန္နာ’တိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဧဝမာဟာရာ ဧဝံသုခဒုက္ခပ္ပဋိသံဝေဒိနိယော’တိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ – ‘ဣမာ ဒေဝတာ ဧဝံဒီဃာယုကာ ဧဝံစိရဋ္ဌိတိကာ’တိ, တာ စ ဒေဝတာ ဇာနာမိ ယဒိ ဝါ မေ ဒေဝတာဟိ သဒ္ဓိံ သန္နိဝုတ္ထပုဗ္ဗံ ယဒိ ဝါ န သန္နိဝုတ္ထပုဗ္ဗန္တိ. भिक्षूंनो, त्यानंतर काही काळाने मी अप्रमत्त, उद्योगी आणि दृढनिश्चयी होऊन विहार करत असताना: (१) मी प्रकाश जाणला आणि (२) रूपे पाहिली; आणि (३) मी त्या देवतांसोबत एकत्र राहिलो, त्यांच्याशी संभाषण केले आणि त्यांच्याशी चर्चा केली; आणि (४) मी त्या देवतांविषयी हेही जाणले की, 'या देवता अमुक किंवा तमुक देवलोकातील आहेत'; आणि (५) 'या कर्माच्या विपाकामुळे या देवता येथून च्युत होऊन तिथे उत्पन्न झाल्या आहेत'; आणि (६) 'या कर्माच्या विपाकामुळे या देवता असा आहार घेतात आणि अशा सुख-दुःखाचा अनुभव घेतात'; आणि (७) 'या कर्माच्या विपाकामुळे या देवतांचे आयुष्य एवढे दीर्घ आहे आणि त्या एवढा प्रदीर्घ काळ टिकून राहतात'; आणि (८) मी पूर्वी कधी या देवतांसोबत एकत्र राहिलो होतो की नाही, हेही मी जाणले. ‘‘ယာဝကီဝဉ္စ မေ, ဘိက္ခဝေ, ဧဝံ အဋ္ဌပရိဝဋ္ဋံ အဓိဒေဝဉာဏဒဿနံ န သုဝိသုဒ္ဓံ အဟောသိ, နေဝ တာဝါဟံ, ဘိက္ခဝေ, ‘သဒေဝကေ လောကေ သမာရကေ သဗြဟ္မကေ သဿမဏဗြာဟ္မဏိယာ ပဇာယ သဒေဝမနုဿာယ အနုတ္တရံ သမ္မာသမ္ဗောဓိံ အဘိသမ္ဗုဒ္ဓေါ’တိ ပစ္စညာသိံ. ယတော စ ခေါ မေ, ဘိက္ခဝေ, ဧဝံ အဋ္ဌပရိဝဋ္ဋံ အဓိဒေဝဉာဏဒဿနံ သုဝိသုဒ္ဓံ အဟောသိ, အထာဟံ, ဘိက္ခဝေ, ‘သဒေဝကေ လောကေ သမာရကေ သဗြဟ္မကေ သဿမဏဗြာဟ္မဏိယာ ပဇာယ သဒေဝမနုဿာယ အနုတ္တရံ သမ္မာသမ္ဗောဓိံ အဘိသမ္ဗုဒ္ဓေါ’တိ ပစ္စညာသိံ; ဉာဏဉ္စ ပန မေ ဒဿနံ ဥဒပါဒိ; အကုပ္ပာ မေ စေတောဝိမုတ္တိ ; အယမန္တိမာ ဇာတိ နတ္ထိ ဒါနိ ပုနဗ္ဘဝေါ’’တိ. စတုတ္ထံ. भिक्षूंनो, जोपर्यंत माझे देवतांविषयीचे हे आठ पैलूंचे ज्ञानदर्शन अत्यंत सुविशुद्ध झाले नव्हते, तोपर्यंत मी देव, मार आणि ब्रह्मासह या लोकात, श्रमण-ब्राह्मण, देव आणि मनुष्यांसह या प्रजेमध्ये 'अनुत्तर सम्यक्संबोधी प्राप्त केली आहे' अशी घोषणा केली नाही. परंतु, भिक्षूंनो, जेव्हा माझे देवतांविषयीचे हे आठ पैलूंचे ज्ञानदर्शन अत्यंत सुविशुद्ध झाले, तेव्हा मी देव, मार आणि ब्रह्मासह या लोकात, श्रमण-ब्राह्मण, देव आणि मनुष्यांसह या प्रजेमध्ये 'अनुत्तर सम्यक्संबोधी प्राप्त केली आहे' अशी घोषणा केली. आणि माझ्यामध्ये हे ज्ञानदर्शन उत्पन्न झाले: 'माझी चेतोविमुक्ती (चित्ताची मुक्ती) अकुप्प (अकंप/अविनाशी) आहे; हा माझा अंतिम जन्म आहे; आता पुन्हा जन्म नाही.' ၅. အဘိဘာယတနသုတ္တံ ५. अभिभायतन सुत्त ၆၅. ‘‘အဋ္ဌိမာနိ, ဘိက္ခဝေ, အဘိဘာယတနာနိ. ကတမာနိ အဋ္ဌ? အဇ္ဈတ္တံ ရူပသညီ ဧကော ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ ပရိတ္တာနိ သုဝဏ္ဏဒုဗ္ဗဏ္ဏာနိ. ‘တာနိ အဘိဘုယျ ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ, ဧဝံသညီ ဟောတိ. ဣဒံ ပဌမံ အဘိဘာယတနံ. ६५. भिक्षूंनो, ही आठ अभिभायतने आहेत. ती आठ कोणती? (१) अंतर्गत रूपाची संज्ञा असलेला एखादा साधक बाहेर मर्यादित, सुंदर किंवा कुरूप रूपे पाहतो. 'त्या रूपांवर मात करून मी त्यांना जाणतो आणि पाहतो,' अशी त्याची संज्ञा असते. हे पहिले अभिभायतन आहे. ‘‘အဇ္ဈတ္တံ ရူပသညီ ဧကော ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ အပ္ပမာဏာနိ သုဝဏ္ဏဒုဗ္ဗဏ္ဏာနိ. ‘တာနိ အဘိဘုယျ ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ, ဧဝံသညီ ဟောတိ. ဣဒံ ဒုတိယံ အဘိဘာယတနံ. (२) अंतर्गत रूपाची संज्ञा असलेला एखादा साधक बाहेर अमर्याद, सुंदर किंवा कुरूप रूपे पाहतो. 'त्या रूपांवर मात करून मी त्यांना जाणतो आणि पाहतो,' अशी त्याची संज्ञा असते. हे दुसरे अभिभायतन आहे. ‘‘အဇ္ဈတ္တံ [Pg.126] အရူပသညီ ဧကော ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ ပရိတ္တာနိ သုဝဏ္ဏဒုဗ္ဗဏ္ဏာနိ. ‘တာနိ အဘိဘုယျ ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ, ဧဝံသညီ ဟောတိ. ဣဒံ တတိယံ အဘိဘာယတနံ. (३) अंतर्गत रूपाची संज्ञा नसलेला एखादा साधक बाहेर मर्यादित, सुंदर किंवा कुरूप रूपे पाहतो. 'त्या रूपांवर मात करून मी त्यांना जाणतो आणि पाहतो,' अशी त्याची संज्ञा असते. हे तिसरे अभिभायतन आहे. ‘‘အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဧကော ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ အပ္ပမာဏာနိ သုဝဏ္ဏဒုဗ္ဗဏ္ဏာနိ. ‘တာနိ အဘိဘုယျ ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ, ဧဝံသညီ ဟောတိ. ဣဒံ စတုတ္ထံ အဘိဘာယတနံ. (४) अंतर्गत रूपाची संज्ञा नसलेला एखादा साधक बाहेर अमर्याद, सुंदर किंवा कुरूप रूपे पाहतो. 'त्या रूपांवर मात करून मी त्यांना जाणतो आणि पाहतो,' अशी त्याची संज्ञा असते. हे चौथे अभिभायतन आहे. ‘‘အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဧကော ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ နီလာနိ နီလဝဏ္ဏာနိ နီလနိဒဿနာနိ နီလနိဘာသာနိ. ‘တာနိ အဘိဘုယျ ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ, ဧဝံသညီ ဟောတိ. ဣဒံ ပဉ္စမံ အဘိဘာယတနံ. स्वतःच्या अंतर्भागात रूपाची संज्ञा नसलेला एखादा साधक बाह्य रूपांना पाहतो, जी निळी, निळ्या रंगाची, निळ्या रंगाचे दर्शन घडवणारी आणि निळी प्रभा असणारी असतात. 'त्या रूपांवर विजय मिळवून मी जाणतो, मी पाहतो,' अशी त्याची संज्ञा असते. हे पाचवे अभिभायतन आहे। ‘‘အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဧကော ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ ပီတာနိ ပီတဝဏ္ဏာနိ ပီတနိဒဿနာနိ ပီတနိဘာသာနိ. ‘တာနိ အဘိဘုယျ ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ, ဧဝံသညီ ဟောတိ. ဣဒံ ဆဋ္ဌံ အဘိဘာယတနံ. स्वतःच्या अंतर्भागात रूपाची संज्ञा नसलेला एखादा साधक बाह्य रूपांना पाहतो, जी पिवळी, पिवळ्या रंगाची, पिवळ्या रंगाचे दर्शन घडवणारी आणि पिवळी प्रभा असणारी असतात. 'त्या रूपांवर विजय मिळवून मी जाणतो, मी पाहतो,' अशी त्याची संज्ञा असते. हे सहावे अभिभायतन आहे। ‘‘အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဧကော ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ လောဟိတကာနိ လောဟိတကဝဏ္ဏာနိ လောဟိတကနိဒဿနာနိ လောဟိတကနိဘာသာနိ. ‘တာနိ အဘိဘုယျ ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ, ဧဝံသညီ ဟောတိ. ဣဒံ သတ္တမံ အဘိဘာယတနံ. स्वतःच्या अंतर्भागात रूपाची संज्ञा नसलेला एखादा साधक बाह्य रूपांना पाहतो, जी लाल, लाल रंगाची, लाल रंगाचे दर्शन घडवणारी आणि लाल प्रभा असणारी असतात. 'त्या रूपांवर विजय मिळवून मी जाणतो, मी पाहतो,' अशी त्याची संज्ञा असते. हे सातवे अभिभायतन आहे। ‘‘အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဧကော ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ ဩဒါတာနိ ဩဒါတဝဏ္ဏာနိ ဩဒါတနိဒဿနာနိ ဩဒါတနိဘာသာနိ. ‘တာနိ အဘိဘုယျ ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ, ဧဝံသညီ ဟောတိ. ဣဒံ အဋ္ဌမံ အဘိဘာယတနံ. ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ အဘိဘာယတနာနီ’’တိ. ပဉ္စမံ. स्वतःच्या अंतर्भागात रूपाची संज्ञा नसलेला एखादा साधक बाह्य रूपांना पाहतो, जी पांढरी, पांढऱ्या रंगाची, पांढऱ्या रंगाचे दर्शन घडवणारी आणि पांढरी प्रभा असणारी असतात. 'त्या रूपांवर विजय मिळवून मी जाणतो, मी पाहतो,' अशी त्याची संज्ञा असते. हे आठवे अभिभायतन आहे. भिक्खूहो, हीच ती आठ अभिभायतने आहेत। ၆. ဝိမောက္ခသုတ္တံ ६. विमोक्खसुत्त (विमोक्ष सुत्त) ၆၆. ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, ဝိမောက္ခာ. ကတမေ အဋ္ဌ? ရူပီ ရူပါနိ ပဿတိ. အယံ ပဌမော ဝိမောက္ခော. ६६. भिक्खूहो, हे आठ विमोक्ख (विमुक्तीचे मार्ग) आहेत. कोणते आठ? रूपी (स्वतःच्या शरीरात रूपाची संज्ञा असलेला) बाह्य रूपांना पाहतो. हा पहिला विमोक्ख आहे। ‘‘အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ, ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ. အယံ ဒုတိယော ဝိမောက္ခော. स्वतःच्या अंतर्भागात रूपाची संज्ञा नसलेला बाह्य रूपांना पाहतो. हा दुसरा विमोक्ख आहे। ‘‘သုဘန္တေဝ အဓိမုတ္တော ဟောတိ. အယံ တတိယော ဝိမောက္ခော. 'हे शुभ (सुंदर) आहे' अशा भावनेने तो अधिमुक्त (एकाग्र) होतो. हा तिसरा विमोक्ख आहे। ‘‘သဗ္ဗသော [Pg.127] ရူပသညာနံ သမတိက္ကမာ ပဋိဃသညာနံ အတ္ထင်္ဂမာ နာနတ္တသညာနံ အမနသိကာရာ ‘အနန္တော အာကာသော’တိ အာကာသာနဉ္စာယတနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ. အယံ စတုတ္ထော ဝိမောက္ခော. सर्व प्रकारे रूपसंज्ञांचे पूर्णपणे उल्लंघन करून, प्रतिघसंज्ञांचा (द्वेषयुक्त विचारांचा) अस्त करून, नानात्वसंज्ञांचा (विविधतेच्या विचारांचा) मनसिकार न करता, 'आकाश अनंत आहे' अशा भावनेने तो आकासानंचायतन (अनंत आकाशायतन) प्राप्त करून विहरतो. हा चौथा विमोक्ख आहे। ‘‘သဗ္ဗသော အာကာသာနဉ္စာယတနံ သမတိက္ကမ္မ ‘အနန္တံ ဝိညာဏ’န္တိ ဝိညာဏဉ္စာယတနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ. အယံ ပဉ္စမော ဝိမောက္ခော. सर्व प्रकारे आकासानंचायतनाचे पूर्णपणे उल्लंघन करून, 'विज्ञान (चेतना) अनंत आहे' अशा भावनेने तो विञ्ञाणञ्चायतन (अनंत विज्ञानायतन) प्राप्त करून विहरतो. हा पाचवा विमोक्ख आहे। ‘‘သဗ္ဗသော ဝိညာဏဉ္စာယတနံ သမတိက္ကမ္မ ‘နတ္ထိ ကိဉ္စီ’တိ အာကိဉ္စညာယတနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ. အယံ ဆဋ္ဌော ဝိမောက္ခော. सर्व प्रकारे विञ्ञाणञ्चायतनाचे पूर्णपणे उल्लंघन करून, 'येथे काहीही नाही' अशा भावनेने तो आकिञ्चञ्ञायतन (अकिंचन्यायतन) प्राप्त करून विहरतो. हा सहावा विमोक्ख आहे। ‘‘သဗ္ဗသော အာကိဉ္စညာယတနံ သမတိက္ကမ္မ နေဝသညာနာသညာယတနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ. အယံ သတ္တမော ဝိမောက္ခော. सर्व प्रकारे आकिञ्चञ्ञायतनाचे पूर्णपणे उल्लंघन करून तो नेवसंञ्ञानासंञ्ञायतन (नैवसंज्ञानासंज्ञायतन) प्राप्त करून विहरतो. हा सातवा विमोक्ख आहे। ‘‘သဗ္ဗသော နေဝသညာနာသညာယတနံ သမတိက္ကမ္မ သညာဝေဒယိတနိရောဓံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ. အယံ အဋ္ဌမော ဝိမောက္ခော. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဝိမောက္ခာ’’တိ. ဆဋ္ဌံ. सर्व प्रकारे नेवसंञ्ञानासंञ्ञायतनाचे पूर्णपणे उल्लंघन करून तो संञ्ञावेदयितनिरोध (संज्ञा आणि वेदनांचा निरोध) प्राप्त करून विहरतो. हा आठवा विमोक्ख आहे. भिक्खूहो, हेच ते आठ विमोक्ख आहेत। ၇. အနရိယဝေါဟာရသုတ္တံ ७. अनरियवोहारसुत्त (अनार्यव्यवहार सुत्त) ၆၇. ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, အနရိယဝေါဟာရာ. ကတမေ အဋ္ဌ? အဒိဋ္ဌေ ဒိဋ္ဌဝါဒိတာ, အသုတေ သုတဝါဒိတာ, အမုတေ မုတဝါဒိတာ, အဝိညာတေ ဝိညာတဝါဒိတာ, ဒိဋ္ဌေ အဒိဋ္ဌဝါဒိတာ, သုတေ အသုတဝါဒိတာ, မုတေ အမုတဝါဒိတာ, ဝိညာတေ အဝိညာတဝါဒိတာ. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ အနရိယဝေါဟာရာ’’တိ. သတ္တမံ. ६७. भिक्खूहो, हे आठ अनरियवोहार (अनार्य किंवा अयोग्य भाषण प्रकार) आहेत. कोणते आठ? जे पाहिले नाही ते 'पाहिले' असे सांगणे, जे ऐकले नाही ते 'ऐकले' असे सांगणे, ज्याचा अनुभव (घ्राण, रस, स्पर्श याद्वारे) घेतला नाही त्याचा 'अनुभव घेतला' असे सांगणे, जे जाणले नाही ते 'जाणले' असे सांगणे, जे पाहिले आहे ते 'पाहिले नाही' असे सांगणे, जे ऐकले आहे ते 'ऐकले नाही' असे सांगणे, ज्याचा अनुभव घेतला आहे त्याचा 'अनुभव घेतला नाही' असे सांगणे, आणि जे जाणले आहे ते 'जाणले नाही' असे सांगणे. भिक्खूहो, हेच ते आठ अनरियवोहार आहेत। ၈. အရိယဝေါဟာရသုတ္တံ ८. अरियवोहारसुत्त (आर्यव्यवहार सुत्त) ၆၈. ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, အရိယဝေါဟာရာ. ကတမေ အဋ္ဌ? အဒိဋ္ဌေ အဒိဋ္ဌဝါဒိတာ, အသုတေ အသုတဝါဒိတာ, အမုတေ အမုတဝါဒိတာ, အဝိညာတေ အဝိညာတဝါဒိတာ, ဒိဋ္ဌေ ဒိဋ္ဌဝါဒိတာ, သုတေ သုတဝါဒိတာ, မုတေ မုတဝါဒိတာ, ဝိညာတေ ဝိညာတဝါဒိတာ. ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ အရိယဝေါဟာရာ’’တိ. အဋ္ဌမံ. ६८. भिक्खूहो, हे आठ अरियवोहार (आर्य किंवा योग्य भाषण प्रकार) आहेत. कोणते आठ? जे पाहिले नाही ते 'पाहिले नाही' असे सांगणे, जे ऐकले नाही ते 'ऐकले नाही' असे सांगणे, ज्याचा अनुभव घेतला नाही त्याचा 'अनुभव घेतला नाही' असे सांगणे, जे जाणले नाही ते 'जाणले नाही' असे सांगणे, जे पाहिले आहे ते 'पाहिले' असे सांगणे, जे ऐकले आहे ते 'ऐकले' असे सांगणे, ज्याचा अनुभव घेतला आहे त्याचा 'अनुभव घेतला' असे सांगणे, आणि जे जाणले आहे ते 'जाणले' असे सांगणे. भिक्खूहो, हेच ते आठ अरियवोहार आहेत। ၉. ပရိသာသုတ္တံ ९. परिसासुत्त (परिषद सुत्त) ၆၉. ‘‘အဋ္ဌိမာ, ဘိက္ခဝေ, ပရိသာ. ကတမာ အဋ္ဌ? ခတ္တိယပရိသာ, ဗြာဟ္မဏပရိသာ, ဂဟပတိပရိသာ, သမဏပရိသာ, စာတုမဟာရာဇိကပရိသာ, တာဝတိံသပရိသာ, မာရပရိသာ, ဗြဟ္မပရိသာ. အဘိဇာနာမိ ခေါ ပနာဟံ, ဘိက္ခဝေ, အနေကသတံ [Pg.128] ခတ္တိယပရိသံ ဥပသင်္ကမိတာ. တတြပိ မယာ သန္နိသိန္နပုဗ္ဗဉ္စေဝ သလ္လပိတပုဗ္ဗဉ္စ သာကစ္ဆာ စ သမာပန္နပုဗ္ဗာ. တတ္ထ ယာဒိသကော တေသံ ဝဏ္ဏော ဟောတိ တာဒိသကော မယှံ ဝဏ္ဏော ဟောတိ, ယာဒိသကော တေသံ သရော ဟောတိ တာဒိသကော မယှံ သရော ဟောတိ. ဓမ္မိယာ စ ကထာယ သန္ဒဿေမိ သမာဒပေမိ သမုတ္တေဇေမိ သမ္ပဟံသေမိ. ဘာသမာနဉ္စ မံ န ဇာနန္တိ – ‘ကော နု ခေါ အယံ ဘာသတိ ဒေဝေါ ဝါ မနုဿော ဝါ’တိ. ဓမ္မိယာ ကထာယ သန္ဒဿေတွာ သမာဒပေတွာ သမုတ္တေဇေတွာ သမ္ပဟံသေတွာ အန္တရဓာယာမိ. အန္တရဟိတဉ္စ မံ န ဇာနန္တိ – ‘ကော နု ခေါ အယံ အန္တရဟိတော ဒေဝေါ ဝါ မနုဿော ဝါ’’’တိ. ६९. भिक्खूहो, या आठ परिसा (सभा किंवा परिषदा) आहेत. कोणत्या आठ? खत्तियपरिसा (क्षत्रिय सभा), ब्राह्मणपरिसा, गहपतिपरिसा (गृहपती सभा), समणपरिसा (श्रमण सभा), चातुमहाराजिकपरिसा (चातुर्महाराजिक देवसभा), तावतिंसपरिसा (तावतिंस देवसभा), मारपरिसा (मार सभा) आणि ब्रह्मपरिसा (ब्रह्म सभा). भिक्खूहो, मला आठवते की मी अनेक शेकडो क्षत्रिय सभांमध्ये गेलो आहे. तिथे मी त्यांच्यासोबत बसलो आहे, त्यांच्याशी संभाषण केले आहे आणि चर्चा केली आहे. तिथे जसा त्यांचा वर्ण (रूप) असायचा, तसाच माझाही वर्ण व्हायचा; जसा त्यांचा स्वर (आवाज) असायचा, तसाच माझाही स्वर व्हायचा. मी त्यांना धम्मकथेने मार्गदर्शन करायचो, प्रोत्साहित करायचो, प्रेरित करायचो आणि आनंदित करायचो. मी बोलत असताना ते मला ओळखू शकत नव्हते आणि विचार करायचे की, 'हा बोलणारा कोण आहे? देव आहे की मनुष्य?' धम्मकथेने त्यांना मार्गदर्शन करून, प्रोत्साहित करून, प्रेरित करून आणि आनंदित करून मी अंतर्धान पावायचो. मी अंतर्धान पावल्यावरही ते मला ओळखू शकत नव्हते आणि विचार करायचे की, 'हा अंतर्धान पावलेला कोण होता? देव होता की मनुष्य?' ‘‘အဘိဇာနာမိ ခေါ ပနာဟံ, ဘိက္ခဝေ, အနေကသတံ ဗြာဟ္မဏပရိသံ…ပေ… ဂဟပတိပရိသံ… သမဏပရိသံ… စာတုမဟာရာဇိကပရိသံ… တာဝတိံသပရိသံ… မာရပရိသံ… ဗြဟ္မပရိသံ ဥပသင်္ကမိတာ. တတြပိ မယာ သန္နိသိန္နပုဗ္ဗဉ္စေဝ သလ္လပိတပုဗ္ဗဉ္စ သာကစ္ဆာ စ သမာပန္နပုဗ္ဗာ. တတ္ထ ယာဒိသကော တေသံ ဝဏ္ဏော ဟောတိ တာဒိသကော မယှံ ဝဏ္ဏော ဟောတိ, ယာဒိသကော တေသံ သရော ဟောတိ တာဒိသကော မယှံ သရော ဟောတိ. ဓမ္မိယာ စ ကထာယ သန္ဒဿေမိ သမာဒပေမိ သမုတ္တေဇေမိ သမ္ပဟံသေမိ. ဘာသမာနဉ္စ မံ န ဇာနန္တိ – ‘ကော နု ခေါ အယံ ဘာသတိ ဒေဝေါ ဝါ မနုဿော ဝါ’တိ. ဓမ္မိယာ ကထာယ သန္ဒဿေတွာ သမာဒပေတွာ သမုတ္တေဇေတွာ သမ္ပဟံသေတွာ အန္တရဓာယာမိ. အန္တရဟိတဉ္စ မံ န ဇာနန္တိ – ‘ကော နု ခေါ အယံ အန္တရဟိတော ဒေဝေါ ဝါ မနုဿော ဝါ’တိ. ဣမာ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ပရိသာ’’တိ. နဝမံ. भिक्खूहो, मला आठवते की मी अनेक शेकडो ब्राह्मण सभांमध्ये... पे... गृहपती सभांमध्ये... श्रमण सभांमध्ये... चातुर्महाराजिक देवसभांमध्ये... तावतिंस देवसभांमध्ये... मार सभांमध्ये... ब्रह्म सभांमध्ये गेलो आहे. तिथे मी त्यांच्यासोबत बसलो आहे, त्यांच्याशी संभाषण केले आहे आणि चर्चा केली आहे. तिथे जसा त्यांचा वर्ण असायचा, तसाच माझाही वर्ण व्हायचा; जसा त्यांचा स्वर असायचा, तसाच माझाही स्वर व्हायचा. मी त्यांना धम्मकथेने मार्गदर्शन करायचो, प्रोत्साहित करायचो, प्रेरित करायचो आणि आनंदित करायचो. मी बोलत असताना ते मला ओळखू शकत नव्हते आणि विचार करायचे की, 'हा बोलणारा कोण आहे? देव आहे की मनुष्य?' धम्मकथेने त्यांना मार्गदर्शन करून, प्रोत्साहित करून, प्रेरित करून आणि आनंदित करून मी अंतर्धान पावायचो. मी अंतर्धान पावल्यावरही ते मला ओळखू शकत नव्हते आणि विचार करायचे की, 'हा अंतर्धान पावलेला कोण होता? देव होता की मनुष्य?' भिक्खूहो, या आहेत त्या आठ सभा। ၁၀. ဘူမိစာလသုတ္တံ १०. भूमिकापसुत्त (भूकंप सुत्त) ၇၀. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ဝေသာလိယံ ဝိဟရတိ မဟာဝနေ ကူဋာဂါရသာလာယံ. အထ ခေါ ဘဂဝါ ပုဗ္ဗဏှသမယံ နိဝါသေတွာ ပတ္တစီဝရမာဒါယ ဝေသာလိံ ပိဏ္ဍာယ ပါဝိသိ. ဝေသာလိယံ ပိဏ္ဍာယ စရိတွာ ပစ္ဆာဘတ္တံ ပိဏ္ဍပါတပဋိက္ကန္တော အာယသ္မန္တံ အာနန္ဒံ အာမန္တေသိ – ‘‘ဂဏှာဟိ, အာနန္ဒ, နိသီဒနံ. ယေန စာပါလံ စေတိယံ တေနုပသင်္ကမိဿာမ ဒိဝါဝိဟာရာယာ’’တိ. ‘‘ဧဝံ, ဘန္တေ’’တိ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝတော ပဋိဿုတွာ နိသီဒနံ အာဒါယ ဘဂဝန္တံ ပိဋ္ဌိတော ပိဋ္ဌိတော အနုဗန္ဓိ. ७०. एकदा भगवान वैशाली येथील महावनातील कूटागारशाळेत विहार करत होते. तेव्हा भगवान सकाळी वस्त्रे परिधान करून, पात्र आणि चीवर घेऊन वैशालीमध्ये भिक्षेसाठी प्रविष्ट झाले. वैशालीमध्ये भिक्षाटन करून, भोजनोत्तर भिक्षेहून परत आल्यावर त्यांनी आयुष्यमान आनंदांना संबोधित केले – 'आनंदा, आसन (बसायचे कापड) घे. आपण दिवसाच्या विहारासाठी (विश्रांतीसाठी) चापाल चेतियाकडे जाऊ या.' आयुष्यमान आनंदांनी 'तसेच असो, भंते' असे म्हणून भगवंतांच्या वचनाचा स्वीकार केला आणि आसन घेऊन ते भगवंतांच्या मागेमागे चालू लागले। အထ [Pg.129] ခေါ ဘဂဝါ ယေန စာပါလံ စေတိယံ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ပညတ္တေ အာသနေ နိသီဒိ. နိသဇ္ဇ ခေါ ဘဂဝါ အာယသ္မန္တံ အာနန္ဒံ အာမန္တေသိ – ‘‘ရမဏီယာ, အာနန္ဒ, ဝေသာလီ, ရမဏီယံ ဥဒေနံ စေတိယံ, ရမဏီယံ ဂေါတမကံ စေတိယံ, ရမဏီယံ သတ္တမ္ဗံ စေတိယံ, ရမဏီယံ ဗဟုပုတ္တကံ စေတိယံ; ရမဏီယံ သာရန္ဒဒံ စေတိယံ, ရမဏီယံ စာပါလံ စေတိယံ. ယဿ ကဿစိ, အာနန္ဒ, စတ္တာရော ဣဒ္ဓိပါဒါ ဘာဝိတာ ဗဟုလီကတာ ယာနီကတာ ဝတ္ထုကတာ အနုဋ္ဌိတာ ပရိစိတာ သုသမာရဒ္ဓါ, အာကင်္ခမာနော သော, အာနန္ဒ, ကပ္ပံ ဝါ တိဋ္ဌေယျ ကပ္ပာဝသေသံ ဝါ. တထာဂတဿ ခေါ, အာနန္ဒ, စတ္တာရော ဣဒ္ဓိပါဒါ ဘာဝိတာ ဗဟုလီကတာ ယာနီကတာ ဝတ္ထုကတာ အနုဋ္ဌိတာ ပရိစိတာ သုသမာရဒ္ဓါ. အာကင်္ခမာနော, အာနန္ဒ, တထာဂတော ကပ္ပံ ဝါ တိဋ္ဌေယျ ကပ္ပာဝသေသံ ဝါ’’တိ. ဧဝမ္ပိ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝတာ ဩဠာရိကေ နိမိတ္တေ ကယိရမာနေ ဩဠာရိကေ ဩဘာသေ ကယိရမာနေ နာသက္ခိ ပဋိဝိဇ္ဈိတုံ; န ဘဂဝန္တံ ယာစိ – ‘‘တိဋ္ဌတု, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ကပ္ပံ, တိဋ္ဌတု သုဂတော ကပ္ပံ ဗဟုဇနဟိတာယ ဗဟုဇနသုခါယ လောကာနုကမ္ပာယ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဒေဝမနုဿာန’’န္တိ, ယထာ တံ မာရေန ပရိယုဋ္ဌိတစိတ္တော. त्यानंतर भगवान जेथे चापाल चैत्य होते, तेथे गेले; आणि तेथे जाऊन मांडलेल्या आसनावर बसले. बसल्यावर भगवान आयुष्यमान आनंदाला म्हणाले – “आनंदा, वैशाली रमणीय आहे; उदेन चैत्य रमणीय आहे, गोतमक चैत्य रमणीय आहे, सत्तंब चैत्य रमणीय आहे, बहुपुत्तक चैत्य रमणीय आहे, सारंदद चैत्य रमणीय आहे, चापाल चैत्य रमणीय आहे. आनंदा, ज्या कोणाकडून चार इद्धिपाद विकसित केले गेले आहेत, वारंवार अभ्यासले गेले आहेत, वाहन बनवले गेले आहेत, आधार बनवले गेले आहेत, दृढ केले गेले आहेत, संचित केले गेले आहेत आणि चांगल्या प्रकारे आरंभ केले गेले आहेत; तो मनुष्य जर इच्छित असेल तर एक कल्प किंवा कल्पाचा उर्वरित भाग जगू शकतो. आनंदा, तथागताने चार इद्धिपाद विकसित केले आहेत, वारंवार अभ्यासले आहेत, वाहन बनवले आहेत, आधार बनवले आहेत, दृढ केले आहेत, संचित केले आहेत आणि चांगल्या प्रकारे आरंभ केले आहेत. आनंदा, तथागत जर इच्छित असतील तर एक कल्प किंवा कल्पाचा उर्वरित भाग जगू शकतात.” परंतु, भगवंतांनी इतका स्पष्ट संकेत दिला असताना, इतका स्पष्ट प्रकाश दाखवला असतानाही आयुष्यमान आनंद तो संकेत समजू शकले नाहीत; त्यांनी भगवंतांना अशी विनंती केली नाही की – “भंते, भगवान बहुजनांच्या हितासाठी, बहुजनांच्या सुखासाठी, जगावर अनुकंपा करण्यासाठी, देव आणि मनुष्यांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी एक कल्पपर्यंत राहावेत; सुगत एक कल्पपर्यंत राहावेत.” कारण त्यांचे चित्त माराने ग्रासले होते. ဒုတိယမ္ပိ ခေါ ဘဂဝါ…ပေ… တတိယမ္ပိ ခေါ ဘဂဝါ အာယသ္မန္တံ အာနန္ဒံ အာမန္တေသိ – ‘‘ရမဏီယာ, အာနန္ဒ, ဝေသာလီ, ရမဏီယံ ဥဒေနံ စေတိယံ, ရမဏီယံ ဂေါတမကံ စေတိယံ, ရမဏီယံ သတ္တမ္ဗံ စေတိယံ, ရမဏီယံ ဗဟုပုတ္တကံ စေတိယံ, ရမဏီယံ သာရန္ဒဒံ စေတိယံ, ရမဏီယံ စာပါလံ စေတိယံ. ယဿ ကဿစိ, အာနန္ဒ, စတ္တာရော ဣဒ္ဓိပါဒါ ဘာဝိတာ ဗဟုလီကတာ ယာနီကတာ ဝတ္ထုကတာ အနုဋ္ဌိတာ ပရိစိတာ သုသမာရဒ္ဓါ, အာကင်္ခမာနော သော, အာနန္ဒ, ကပ္ပံ ဝါ တိဋ္ဌေယျ ကပ္ပာဝသေသံ ဝါ. တထာဂတဿ ခေါ, အာနန္ဒ, စတ္တာရော ဣဒ္ဓိပါဒါ ဘာဝိတာ…ပေ… အာကင်္ခမာနော, အာနန္ဒ, တထာဂတော ကပ္ပံ ဝါ တိဋ္ဌေယျ ကပ္ပာဝသေသံ ဝါ’’တိ. ဧဝမ္ပိ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝတာ ဩဠာရိကေ နိမိတ္တေ ကယိရမာနေ ဩဠာရိကေ ဩဘာသေ ကယိရမာနေ နာသက္ခိ ပဋိဝိဇ္ဈိတုံ; န ဘဂဝန္တံ ယာစိ – ‘‘တိဋ္ဌတု, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ကပ္ပံ, တိဋ္ဌတု သုဂတော ကပ္ပံ ဗဟုဇနဟိတာယ ဗဟုဇနသုခါယ လောကာနုကမ္ပာယ အတ္ထာယ ဟိတာယ သုခါယ ဒေဝမနုဿာန’’န္တိ, ယထာ တံ မာရေန ပရိယုဋ္ဌိတစိတ္တော. दुसऱ्यांदाही भगवंतांनी... तसेच तिसऱ्यांदाही भगवंतांनी आयुष्यमान आनंदाला संबोधित केले – “आनंदा, वैशाली रमणीय आहे; उदेन चैत्य रमणीय आहे, गोतमक चैत्य रमणीय आहे, सत्तंब चैत्य रमणीय आहे, बहुपुत्तक चैत्य रमणीय आहे, सारंदद चैत्य रमणीय आहे, चापाल चैत्य रमणीय आहे. आनंदा, ज्या कोणाकडून चार इद्धिपाद विकसित केले गेले आहेत, वारंवार अभ्यासले गेले आहेत, वाहन बनवले गेले आहेत, आधार बनवले गेले आहेत, दृढ केले गेले आहेत, संचित केले गेले आहेत आणि चांगल्या प्रकारे आरंभ केले गेले आहेत; तो मनुष्य जर इच्छित असेल तर एक कल्प किंवा कल्पाचा उर्वरित भाग जगू शकतो. आनंदा, तथागताने चार इद्धिपाद विकसित केले आहेत... आनंदा, तथागत जर इच्छित असतील तर एक कल्प किंवा कल्पाचा उर्वरित भाग जगू शकतात.” परंतु, भगवंतांनी इतका स्पष्ट संकेत दिला असताना, इतका स्पष्ट प्रकाश दाखवला असतानाही आयुष्यमान आनंद तो संकेत समजू शकले नाहीत; त्यांनी भगवंतांना अशी विनंती केली नाही की – “भंते, भगवान बहुजनांच्या हितासाठी, बहुजनांच्या सुखासाठी, जगावर अनुकंपा करण्यासाठी, देव आणि मनुष्यांच्या कल्याणासाठी, हितासाठी आणि सुखासाठी एक कल्पपर्यंत राहावेत; सुगत एक कल्पपर्यंत राहावेत.” कारण त्यांचे चित्त माराने ग्रासले होते. အထ [Pg.130] ခေါ ဘဂဝါ အာယသ္မန္တံ အာနန္ဒံ အာမန္တေသိ – ‘‘ဂစ္ဆ တွံ, အာနန္ဒ, ယဿ ဒါနိ ကာလံ မညသီ’’တိ. ‘‘ဧဝံ, ဘန္တေ’’တိ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝတော ပဋိဿုတွာ ဥဋ္ဌာယာသနာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ပဒက္ခိဏံ ကတွာ ဘဂဝတော အဝိဒူရေ အညတရသ္မိံ ရုက္ခမူလေ နိသီဒိ. အထ ခေါ မာရော ပါပိမာ အစိရပက္ကန္တေ အာယသ္မန္တေ အာနန္ဒေ ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – त्यानंतर भगवान आयुष्यमान आनंदाला म्हणाले – “आनंदा, तू आता जा, ज्यासाठी तू योग्य वेळ समजतोस.” आयुष्यमान आनंदाने “तसेच असो, भंते” असे म्हणून भगवंतांच्या वचनाचा स्वीकार केला, आणि आपल्या आसनावरून उठून भगवंतांना अभिवादन केले, प्रदक्षिणा घातली आणि भगवंतांपासून काही अंतरावर एका झाडाच्या मुळाशी जाऊन बसले. त्यानंतर, आयुष्यमान आनंद निघून गेल्यावर काही वेळातच पापी मार भगवंतांजवळ आला आणि म्हणाला – ‘‘ပရိနိဗ္ဗာတု ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ, ပရိနိဗ္ဗာတု သုဂတော. ပရိနိဗ္ဗာနကာလော ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော. ဘာသိတာ ခေါ ပနေသာ, ဘန္တေ, ဘဂဝတာ ဝါစာ – ‘န တာဝါဟံ, ပါပိမ, ပရိနိဗ္ဗာယိဿာမိ ယာဝ မေ ဘိက္ခူ န သာဝကာ ဘဝိဿန္တိ ဝိယတ္တာ ဝိနီတာ ဝိသာရဒါ ပတ္တယောဂက္ခေမာ ဗဟုဿုတာ ဓမ္မဓရာ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နာ သာမီစိပ္ပဋိပန္နာ အနုဓမ္မစာရိနော, သကံ အာစရိယကံ ဥဂ္ဂဟေတွာ အာစိက္ခိဿန္တိ ဒေသေဿန္တိ ပညပေဿန္တိ ပဋ္ဌပေဿန္တိ ဝိဝရိဿန္တိ ဝိဘဇိဿန္တိ ဥတ္တာနီကရိဿန္တိ ဥပ္ပန္နံ ပရပ္ပဝါဒံ သဟဓမ္မေန သုနိဂ္ဂဟိတံ နိဂ္ဂဟေတွာ သပ္ပာဋိဟာရိယံ ဓမ္မံ ဒေသေဿန္တီ’တိ. ဧတရဟိ, ဘန္တေ, ဘိက္ခူ ဘဂဝတော သာဝကာ ဝိယတ္တာ ဝိနီတာ ဝိသာရဒါ ပတ္တယောဂက္ခေမာ ဗဟုဿုတာ ဓမ္မဓရာ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နာ သာမီစိပ္ပဋိပန္နာ အနုဓမ္မစာရိနော, သကံ အာစရိယကံ ဥဂ္ဂဟေတွာ အာစိက္ခန္တိ ဒေသေန္တိ ပညပေန္တိ ပဋ္ဌပေန္တိ ဝိဝရန္တိ ဝိဘဇန္တိ ဥတ္တာနီကရောန္တိ ဥပ္ပန္နံ ပရပ္ပဝါဒံ သဟဓမ္မေန သုနိဂ္ဂဟိတံ နိဂ္ဂဟေတွာ သပ္ပာဋိဟာရိယံ ဓမ္မံ ဒေသေန္တိ. “भंते, आता भगवंतांनी परिनिर्वाण प्राप्त करावे, सुगतांनी परिनिर्वाण प्राप्त करावे. भंते, आता भगवंतांच्या परिनिर्वाणाची वेळ आली आहे. भंते, भगवंतांनी पूर्वी हे वचन म्हटले होते – ‘हे पापी मारा, जोपर्यंत माझे भिक्खू शिष्य कुशल, विनीत, विशारद, योगक्षेम प्राप्त केलेले, बहुश्रुत, धम्मधर, धम्मानुधम्म प्रतिपन्न, सामीचीप्रतिपन्न, अनुधम्मचारी होणार नाहीत; आणि जोपर्यंत ते आपल्या आचार्यांच्या सिद्धांताचे अध्ययन करून ते सांगण्यास, शिकवण्यास, प्रस्थापित करण्यास, उघड करण्यास, त्याचे विभाजन करण्यास, ते स्पष्ट करण्यास समर्थ होणार नाहीत; तसेच उद्भवलेल्या परवादाचे सकारण चांगल्या प्रकारे खंडन करून प्रातिहार्ययुक्त धम्माचा उपदेश करण्यास समर्थ होणार नाहीत, तोपर्यंत मी परिनिर्वाण प्राप्त करणार नाही.’ भंते, आता भगवंतांचे भिक्खू शिष्य कुशल, विनीत, विशारद, योगक्षेम प्राप्त केलेले, बहुश्रुत, धम्मधर, धम्मानुधम्म प्रतिपन्न, सामीचीप्रतिपन्न, अनुधम्मचारी झाले आहेत. ते आपल्या आचार्यांच्या सिद्धांताचे अध्ययन करून ते सांगतात, शिकवतात, प्रस्थापित करतात, उघड करतात, त्याचे विभाजन करतात, ते स्पष्ट करतात; तसेच उद्भवलेल्या परवादाचे सकारण चांगल्या प्रकारे खंडन करून प्रातिहार्ययुक्त धम्माचा उपदेश करतात.” ‘‘ပရိနိဗ္ဗာတု ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ, ပရိနိဗ္ဗာတု သုဂတော. ပရိနိဗ္ဗာနကာလော ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော. ဘာသိတာ ခေါ ပနေသာ, ဘန္တေ, ဘဂဝတာ ဝါစာ – ‘န တာဝါဟံ, ပါပိမ, ပရိနိဗ္ဗာယိဿာမိ ယာဝ မေ ဘိက္ခုနိယော န သာဝိကာ ဘဝိဿန္တိ…ပေ… ယာဝ မေ ဥပါသကာ န သာဝကာ ဘဝိဿန္တိ…ပေ… ယာဝ မေ ဥပါသိကာ န သာဝိကာ ဘဝိဿန္တိ ဝိယတ္တာ ဝိနီတာ ဝိသာရဒါ ပတ္တယောဂက္ခေမာ ဗဟုဿုတာ ဓမ္မဓရာ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နာ သာမီစိပ္ပဋိပန္နာ အနုဓမ္မစာရိနိယော, သကံ အာစရိယကံ ဥဂ္ဂဟေတွာ အာစိက္ခိဿန္တိ ဒေသေဿန္တိ ပညပေဿန္တိ ပဋ္ဌပေဿန္တိ ဝိဝရိဿန္တိ ဝိဘဇိဿန္တိ ဥတ္တာနီကရိဿန္တိ, ဥပ္ပန္နံ ပရပ္ပဝါဒံ သဟဓမ္မေန သုနိဂ္ဂဟိတံ နိဂ္ဂဟေတွာ သပ္ပာဋိဟာရိယံ ဓမ္မံ ဒေသေဿန္တီ’တိ. ဧတရဟိ, ဘန္တေ, ဥပါသိကာ ဘဂဝတော သာဝိကာ ဝိယတ္တာ ဝိနီတာ ဝိသာရဒါ ပတ္တယောဂက္ခေမာ ဗဟုဿုတာ [Pg.131] ဓမ္မဓရာ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နာ သာမီစိပ္ပဋိပန္နာ အနုဓမ္မစာရိနိယော, သကံ အာစရိယကံ ဥဂ္ဂဟေတွာ အာစိက္ခန္တိ ဒေသေန္တိ ပညပေန္တိ ပဋ္ဌပေန္တိ ဝိဝရန္တိ ဝိဘဇန္တိ ဥတ္တာနီကရောန္တိ, ဥပ္ပန္နံ ပရပ္ပဝါဒံ သဟဓမ္မေန သုနိဂ္ဂဟိတံ နိဂ္ဂဟေတွာ သပ္ပာဋိဟာရိယံ ဓမ္မံ ဒေသေန္တိ. “भंते, आता भगवंतांनी परिनिर्वाण प्राप्त करावे, सुगतांनी परिनिर्वाण प्राप्त करावे. भंते, आता भगवंतांच्या परिनिर्वाणाची वेळ आली आहे. भंते, भगवंतांनी पूर्वी हे वचन म्हटले होते – ‘हे पापी मारा, जोपर्यंत माझ्या भिक्खुणी शिष्या... जोपर्यंत माझे उपासक शिष्य... जोपर्यंत माझ्या उपासिका शिष्या कुशल, विनीत, विशारद, योगक्षेम प्राप्त केलेल्या, बहुश्रुत, धम्मधरा, धम्मानुधम्म प्रतिपन्न, सामीचीप्रतिपन्न, अनुधम्मचारिणी होणार नाहीत; आणि जोपर्यंत त्या आपल्या आचार्यांच्या सिद्धांताचे अध्ययन करून ते सांगण्यास, शिकवण्यास, प्रस्थापित करण्यास, उघड करण्यास, त्याचे विभाजन करण्यास, ते स्पष्ट करण्यास समर्थ होणार नाहीत; तसेच उद्भवलेल्या परवादाचे सकारण चांगल्या प्रकारे खंडन करून प्रातिहार्ययुक्त धम्माचा उपदेश करण्यास समर्थ होणार नाहीत, तोपर्यंत मी परिनिर्वाण प्राप्त करणार नाही.’ भंते, आता भगवंतांच्या उपासिका शिष्या कुशल, विनीत, विशारद, योगक्षेम प्राप्त केलेल्या, बहुश्रुत, धम्मधरा, धम्मानुधम्म प्रतिपन्न, सामीचीप्रतिपन्न, अनुधम्मचारिणी झाल्या आहेत. त्या आपल्या आचार्यांच्या सिद्धांताचे अध्ययन करून ते सांगतात, शिकवतात, प्रस्थापित करतात, उघड करतात, त्याचे विभाजन करतात, ते स्पष्ट करतात; तसेच उद्भवलेल्या परवादाचे सकारण चांगल्या प्रकारे खंडन करून प्रातिहार्ययुक्त धम्माचा उपदेश करतात.” ‘‘ပရိနိဗ္ဗာတု ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ, ပရိနိဗ္ဗာတု သုဂတော. ပရိနိဗ္ဗာနကာလော ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော. ဘာသိတာ ခေါ ပနေသာ, ဘန္တေ, ဘဂဝတာ ဝါစာ – ‘န တာဝါဟံ, ပါပိမ, ပရိနိဗ္ဗာယိဿာမိ ယာဝ မေ ဣဒံ ဗြဟ္မစရိယံ န ဣဒ္ဓဉ္စေဝ ဘဝိဿတိ ဖီတဉ္စ ဝိတ္ထာရိကံ ဗာဟုဇညံ ပုထုဘူတံ, ယာဝ ဒေဝမနုဿေဟိ သုပ္ပကာသိတ’န္တိ. ဧတရဟိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော ဗြဟ္မစရိယံ ဣဒ္ဓဉ္စေဝ ဖီတဉ္စ ဝိတ္ထာရိကံ ဗာဟုဇညံ ပုထုဘူတံ, ယာဝ ဒေဝမနုဿေဟိ သုပ္ပကာသိတံ. भन्ते, आता भगवंतांनी परिनिर्वाण प्राप्त करावे, सुगतांनी परिनिर्वाण प्राप्त करावे. भन्ते, आता भगवंतांच्या परिनिर्वाणाची वेळ आली आहे. भन्ते, भगवंतांनी हे वचन म्हटले होते की— 'हे पापिष्ठा, जोपर्यंत माझे हे ब्रह्मचर्य समृद्ध, संपन्न, विस्तृत, बहुजनप्रिय, सर्वत्र पसरलेले आणि देव-मनुष्यांमध्ये चांगल्या प्रकारे प्रकाशित होत नाही, तोपर्यंत मी परिनिर्वाण प्राप्त करणार नाही.' भन्ते, आता भगवंतांचे ब्रह्मचर्य समृद्ध, संपन्न, विस्तृत, बहुजनप्रिय, सर्वत्र पसरलेले आणि देव-मनुष्यांमध्ये चांगल्या प्रकारे प्रकाशित झाले आहे. ‘‘ပရိနိဗ္ဗာတု ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ, ပရိနိဗ္ဗာတု သုဂတော. ပရိနိဗ္ဗာနကာလော ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော’’တိ. ‘‘အပ္ပောဿုက္ကော တွံ, ပါပိမ, ဟောဟိ. နစိရံ တထာဂတဿ ပရိနိဗ္ဗာနံ ဘဝိဿတိ. ဣတော တိဏ္ဏံ မာသာနံ အစ္စယေန တထာဂတော ပရိနိဗ္ဗာယိဿတီ’’တိ. भन्ते, आता भगवंतांनी परिनिर्वाण प्राप्त करावे, सुगतांनी परिनिर्वाण प्राप्त करावे. भन्ते, आता भगवंतांच्या परिनिर्वाणाची वेळ आली आहे. हे पापिष्ठा, तू निश्चिंत राहा. लवकरच तथागतांचे परिनिर्वाण होईल. आजपासून तीन महिन्यांनंतर तथागत परिनिर्वाण प्राप्त करतील. အထ ခေါ ဘဂဝါ စာပါလေ စေတိယေ သတော သမ္ပဇာနော အာယုသင်္ခါရံ ဩဿဇိ. ဩဿဋ္ဌေ စ ဘဂဝတာ အာယုသင်္ခါရေ မဟာဘူမိစာလော အဟောသိ ဘိံသနကော သလောမဟံသော, ဒေဝဒုန္ဒုဘိယော စ ဖလိံသု. အထ ခေါ ဘဂဝါ ဧတမတ္ထံ ဝိဒိတွာ တာယံ ဝေလာယံ ဣမံ ဥဒါနံ ဥဒါနေသိ – त्यानंतर भगवंत चापाल चेतियामध्ये स्मृतिमान व संप्रजन्यशील राहून आयुष्यसंस्काराचा त्याग करते झाले. भगवंतांनी आयुष्यसंस्काराचा त्याग केला असता, अंगावर काटा आणणारा आणि अत्यंत भयानक असा मोठा भूकंप झाला आणि आकाशात देवदुंदुभी कडाडल्या. त्यानंतर भगवंतांनी हा अर्थ जाणून त्या वेळी हे उदान काढले— ‘‘တုလမတုလဉ္စ သမ္ဘဝံ, ဘဝသင်္ခါရမဝဿဇိ မုနိ; အဇ္ဈတ္တရတော သမာဟိတော, အဘိန္ဒိ ကဝစမိဝတ္တသမ္ဘဝ’’န္တိ. तुलनीय आणि अतुलनीय अशा दोन्ही प्रकारच्या भव-उत्पत्तीच्या कारणांचा, म्हणजेच भवसंस्कारांचा मुनींनी त्याग केला आहे. अध्यात्मात रममाण आणि समाधिस्थ राहून, त्यांनी स्वतःमध्ये उत्पन्न झालेल्या क्लेशांचे कवच युद्धातील योद्ध्याप्रमाणे भेदून टाकले आहे. အထ ခေါ အာယသ္မတော အာနန္ဒဿ ဧတဒဟောသိ – ‘‘မဟာ ဝတာယံ ဘူမိစာလော; သုမဟာ ဝတာယံ ဘူမိစာလော ဘိံသနကော သလောမဟံသော, ဒေဝဒုန္ဒုဘိယော စ ဖလိံသု. ကော နု ခေါ ဟေတု, ကော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယာ’’တိ? तेव्हा आयुष्यमान आनंदाच्या मनात असा विचार आला— 'हा भूकंप खरोखरच मोठा आहे! हा भूकंप अत्यंत मोठा, भयानक आणि अंगावर काटा आणणारा आहे, आणि आकाशात देवदुंदुभी कडाडल्या आहेत. या मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे कारण काय असावे आणि त्याचा प्रत्यय काय असावे?' အထ ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ အာယသ္မာ အာနန္ဒော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘မဟာ ဝတာယံ, ဘန္တေ, ဘူမိစာလော[Pg.132]; သုမဟာ ဝတာယံ, ဘန္တေ, ဘူမိစာလော ဘိံသနကော သလောမဟံသော, ဒေဝဒုန္ဒုဘိယော စ ဖလိံသု. ကော နု ခေါ, ဘန္တေ, ဟေတု, ကော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယာ’’တိ? त्यानंतर आयुष्यमान आनंद जेथे भगवंत होते तेथे गेले; जवळ जाऊन भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसले. एका बाजूला बसलेल्या आयुष्यमान आनंदाने भगवंतांना असे म्हटले— 'भन्ते, हा भूकंप खरोखरच मोठा आहे! भन्ते, हा भूकंप अत्यंत मोठा, भयानक आणि अंगावर काटा आणणारा आहे, आणि आकाशात देवदुंदुभी कडाडल्या आहेत. भन्ते, या मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे कारण काय आणि त्याचा प्रत्यय काय?' ‘‘အဋ္ဌိမေ, အာနန္ဒ, ဟေတူ, အဋ္ဌ ပစ္စယာ မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. ကတမေ အဋ္ဌ? အယံ, အာနန္ဒ, မဟာပထဝီ ဥဒကေ ပတိဋ္ဌိတာ; ဥဒကံ ဝါတေ ပတိဋ္ဌိတံ; ဝါတော အာကာသဋ္ဌော ဟောတိ. သော, အာနန္ဒ, သမယော ယံ မဟာဝါတာ ဝါယန္တိ; မဟာဝါတာ ဝါယန္တာ ဥဒကံ ကမ္ပေန္တိ; ဥဒကံ ကမ္ပိတံ ပထဝိံ ကမ္ပေတိ. အယံ, အာနန္ဒ, ပဌမော ဟေတု, ပဌမော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. आनंदा, या मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीची आठ कारणे आणि आठ प्रत्यय आहेत. कोणते आठ? आनंदा, ही महापृथ्वी पाण्यावर प्रतिष्ठित आहे; पाणी वायूवर प्रतिष्ठित आहे; वायू आकाशात स्थित आहे. आनंदा, अशी वेळ येते जेव्हा प्रचंड वादळ सुटते; प्रचंड वादळ सुटल्याने पाणी कंपित होते; पाणी कंपित झाल्याने पृथ्वी कंपित होते. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे हे पहिले कारण आणि पहिला प्रत्यय आहे. ‘‘ပုန စပရံ, အာနန္ဒ, သမဏော ဝါ ဗြာဟ္မဏော ဝါ ဣဒ္ဓိမာ စေတောဝသိပ္ပတ္တော ဒေဝတာ ဝါ မဟိဒ္ဓိကာ မဟာနုဘာဝါ. တဿ ပရိတ္တာ ပထဝီသညာ ဘာဝိတာ ဟောတိ, အပ္ပမာဏာ အာပေါသညာ. သော ဣမံ ပထဝိံ ကမ္ပေတိ သင်္ကမ္ပေတိ သမ္ပကမ္ပေတိ သမ္ပဝေဓေတိ. အယံ, အာနန္ဒ, ဒုတိယော ဟေတု, ဒုတိယော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. पुन्हा दुसरे असे की, आनंदा, एखादा ऋद्धीमान, चित्तावर ताबा मिळवलेला श्रमण किंवा ब्राह्मण, अथवा एखादी महान ऋद्धी आणि महान प्रभाव असलेली देवता असते. तिने पृथ्वीची संज्ञा अल्प प्रमाणात आणि पाण्याची संज्ञा अमर्याद प्रमाणात विकसित केलेली असते. ती या पृथ्वीला हलवते, चांगल्या प्रकारे हलवते, तीव्रतेने हलवते आणि थरथर कापवते. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे हे दुसरे कारण आणि दुसरा प्रत्यय आहे. ‘‘ပုန စပရံ, အာနန္ဒ, ယဒါ ဗောဓိသတ္တော တုသိတာ ကာယာ စဝိတွာ သတော သမ္ပဇာနော မာတုကုစ္ဆိံ ဩက္ကမတိ, တဒါယံ ပထဝီ ကမ္ပတိ သင်္ကမ္ပတိ သမ္ပကမ္ပတိ သမ္ပဝေဓတိ. အယံ, အာနန္ဒ, တတိယော ဟေတု; တတိယော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. पुन्हा तिसरे असे की, आनंदा, जेव्हा बोधिसत्व तुषित स्वर्गातून च्युत होऊन स्मृतिमान व संप्रजन्यशील राहून मातेच्या गर्भात प्रवेश करतात, तेव्हा ही पृथ्वी हलते, चांगल्या प्रकारे हलते, तीव्रतेने हलते आणि थरथर कापते. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे हे तिसरे कारण आणि तिसरा प्रत्यय आहे. ‘‘ပုန စပရံ, အာနန္ဒ, ယဒါ ဗောဓိသတ္တော သတော သမ္ပဇာနော မာတုကုစ္ဆိသ္မာ နိက္ခမတိ, တဒါယံ ပထဝီ ကမ္ပတိ သင်္ကမ္ပတိ သမ္ပကမ္ပတိ သမ္ပဝေဓတိ. အယံ, အာနန္ဒ, စတုတ္ထော ဟေတု, စတုတ္ထော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. पुन्हा चौथे असे की, आनंदा, जेव्हा बोधिसत्व स्मृतिमान व संप्रजन्यशील राहून मातेच्या गर्भातून बाहेर पडतात, तेव्हा ही पृथ्वी हलते, चांगल्या प्रकारे हलते, तीव्रतेने हलते आणि थरथर कापते. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे हे चौथे कारण आणि चौथा प्रत्यय आहे. ‘‘ပုန စပရံ, အာနန္ဒ, ယဒါ တထာဂတော အနုတ္တရံ သမ္မာသမ္ဗောဓိံ အဘိသမ္ဗုဇ္ဈတိ, တဒါယံ ပထဝီ ကမ္ပတိ သင်္ကမ္ပတိ သမ္ပကမ္ပတိ သမ္ပဝေဓတိ. အယံ, အာနန္ဒ, ပဉ္စမော ဟေတု, ပဉ္စမော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. पुन्हा पाचवे असे की, आनंदा, जेव्हा तथागत अनुत्तर सम्यक्संबोधी प्राप्त करतात, तेव्हा ही पृथ्वी हलते, चांगल्या प्रकारे हलते, तीव्रतेने हलते आणि थरथर कापते. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे हे पाचवे कारण आणि पाचवा प्रत्यय आहे. ‘‘ပုန စပရံ, အာနန္ဒ, ယဒါ တထာဂတော အနုတ္တရံ ဓမ္မစက္ကံ ပဝတ္တေတိ, တဒါယံ ပထဝီ ကမ္ပတိ သင်္ကမ္ပတိ သမ္ပကမ္ပတိ သမ္ပဝေဓတိ. အယံ, အာနန္ဒ, ဆဋ္ဌော ဟေတု, ဆဋ္ဌော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. पुन्हा सहावे असे की, आनंदा, जेव्हा तथागत अनुत्तर धम्मचक्र प्रवर्तन करतात, तेव्हा ही पृथ्वी हलते, चांगल्या प्रकारे हलते, तीव्रतेने हलते आणि थरथर कापते. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे हे सहावे कारण आणि सहावा प्रत्यय आहे. ‘‘ပုန [Pg.133] စပရံ, အာနန္ဒ, ယဒါ တထာဂတော သတော သမ္ပဇာနော အာယုသင်္ခါရံ ဩဿဇ္ဇတိ, တဒါယံ ပထဝီ ကမ္ပတိ သင်္ကမ္ပတိ သမ္ပကမ္ပတိ သမ္ပဝေဓတိ. အယံ, အာနန္ဒ, သတ္တမော ဟေတု, သတ္တမော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. पुन्हा सातवे असे की, आनंदा, जेव्हा तथागत स्मृतिमान व संप्रजन्यशील राहून आयुष्यसंस्काराचा त्याग करतात, तेव्हा ही पृथ्वी हलते, चांगल्या प्रकारे हलते, तीव्रतेने हलते आणि थरथर कापते. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे हे सातवे कारण आणि सातवा प्रत्यय आहे. ‘‘ပုန စပရံ, အာနန္ဒ, ယဒါ တထာဂတော အနုပါဒိသေသာယ နိဗ္ဗာနဓာတုယာ ပရိနိဗ္ဗာယတိ, တဒါယံ ပထဝီ ကမ္ပတိ သင်္ကမ္ပတိ သမ္ပကမ္ပတိ သမ္ပဝေဓတိ. အယံ, အာနန္ဒ, အဋ္ဌမော ဟေတု, အဋ္ဌမော ပစ္စယော မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယ. ဣမေ ခေါ, အာနန္ဒ, အဋ္ဌ ဟေတူ, အဋ္ဌ ပစ္စယာ မဟတော ဘူမိစာလဿ ပါတုဘာဝါယာ’’တိ. ဒသမံ. पुन्हा आठवे असे की, आनंदा, जेव्हा तथागत अनुपधिशेष निर्वाणधातूने परिनिर्वाण प्राप्त करतात, तेव्हा ही पृथ्वी हलते, चांगल्या प्रकारे हलते, तीव्रतेने हलते आणि थरथर कापते. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीचे हे आठवे कारण आणि आठवा प्रत्यय आहे. आनंदा, मोठ्या भूकंपाच्या उत्पत्तीची हीच ती आठ कारणे आणि आठ प्रत्यय आहेत. दहावे सुत्त समाप्त. ဘူမိစာလဝဂ္ဂေါ ဒုတိယော. भूमिकंप वर्ग दुसरा समाप्त. တဿုဒ္ဒါနံ – त्याची अनुक्रमणिका खालीलप्रमाणे आहे— ဣစ္ဆာ အလဉ္စ သံခိတ္တံ, ဂယာ အဘိဘုနာ သဟ; ဝိမောက္ခော ဒွေ စ ဝေါဟာရာ, ပရိသာ ဘူမိစာလေနာတိ. इच्छा, अलम्, संक्षिप्त, गया, अभिभू यासह; विमोक्ष, दोन वोहार, परिसा आणि भूमिकंप. (၈) ၃. ယမကဝဂ္ဂေါ (८) ३. यमक वर्ग ၁. ပဌမသဒ္ဓါသုတ္တံ १. प्रथम श्रद्धा सुत्त ၇၁. ‘‘သဒ္ဓေါ စ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဟောတိ, နော စ သီလဝါ. ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန အပရိပူရော ဟောတိ. တေန တံ အင်္ဂံ ပရိပူရေတဗ္ဗံ – ‘ကိန္တာဟံ သဒ္ဓေါ စ အဿံ သီလဝါ စာ’တိ. ယတော စ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သဒ္ဓေါ စ ဟောတိ သီလဝါ စ, ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန ပရိပူရော ဟောတိ. ७१. भिक्षूंनो, एखादा भिक्षू श्रद्धावान असतो, पण शीलवान नसतो. अशा प्रकारे तो त्या अंगामुळे अपूर्ण असतो. त्याने ते अंग पूर्ण केले पाहिजे की— 'मी कसा बरं श्रद्धावान आणि शीलवानही होईन?' भिक्षूंनो, जेव्हा भिक्षू श्रद्धावानही असतो आणि शीलवानही असतो, तेव्हा तो त्या अंगामुळे पूर्ण असतो. ‘‘သဒ္ဓေါ စ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဟောတိ သီလဝါ စ, နော စ ဗဟုဿုတော. ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန အပရိပူရော ဟောတိ. တေန တံ အင်္ဂံ ပရိပူရေတဗ္ဗံ – ‘ကိန္တာဟံ သဒ္ဓေါ စ အဿံ, သီလဝါ စ, ဗဟုဿုတော စာ’တိ. ယတော စ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သဒ္ဓေါ စ ဟောတိ သီလဝါ စ ဗဟုဿုတော စ, ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန ပရိပူရော ဟောတိ. भिक्षूंनो, एखादा भिक्षू श्रद्धावान आणि शीलवान असतो, पण बहुश्रुत नसतो. अशा प्रकारे तो त्या अंगामुळे अपूर्ण असतो. त्याने ते अंग पूर्ण केले पाहिजे की— 'मी कसा बरं श्रद्धावान, शीलवान आणि बहुश्रुतही होईन?' भिक्षूंनो, जेव्हा भिक्षू श्रद्धावानही असतो, शीलवानही असतो आणि बहुश्रुतही असतो, तेव्हा तो त्या अंगामुळे पूर्ण असतो. ‘‘သဒ္ဓေါ [Pg.134] စ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဟောတိ သီလဝါ စ ဗဟုဿုတော စ, နော စ ဓမ္မကထိကော…ပေ… ဓမ္မကထိကော စ, နော စ ပရိသာဝစရော…ပေ… ပရိသာဝစရော စ, နော စ ဝိသာရဒေါ ပရိသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ…ပေ… ဝိသာရဒေါ စ ပရိသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, နော စ စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဟောတိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ…ပေ… စတုန္နံ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဟောတိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, နော စ အာသဝါနံ ခယာ အနာသဝံ စေတောဝိမုတ္တိံ ပညာဝိမုတ္တိံ ဒိဋ္ဌေဝ ဓမ္မေ သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ; ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန အပရိပူရော ဟောတိ. တေန တံ အင်္ဂံ ပရိပူရေတဗ္ဗံ – ‘ကိန္တာဟံ သဒ္ဓေါ စ အဿံ, သီလဝါ စ, ဗဟုဿုတော စ, ဓမ္မကထိကော စ, ပရိသာဝစရော စ, ဝိသာရဒေါ စ ပရိသာယ ဓမ္မံ ဒေသေယျံ, စတုန္နဉ္စ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ အဿံ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, အာသဝါနဉ္စ ခယာ အနာသဝံ စေတောဝိမုတ္တိံ ပညာဝိမုတ္တိံ ဒိဋ္ဌေဝ ဓမ္မေ သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရေယျ’’’န္တိ. “भिक्खूंनो, एखादा भिक्खू श्रद्धावान असतो, शीलवान असतो, बहुश्रुत असतो, पण तो धर्मकथिक (धर्माचा उपदेशक) नसतो... (तसेच) तो धर्मकथिक असतो, पण परिषदेमध्ये (सभेत) वावरणारा नसतो... तो परिषदेमध्ये वावरणारा असतो, पण आत्मविश्वासाने परिषदेला धर्मोपदेश करणारा नसतो... तो आत्मविश्वासाने परिषदेला धर्मोपदेश करणारा असतो, पण उच्च चित्ताशी संबंधित आणि याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या चार ध्यानांचा सहजपणे, विनासायास व विनासाधन लाभ घेणारा नसतो... तो चार ध्यानांचा सहजपणे, विनासायास व विनासाधन लाभ घेणारा असतो, पण आसवांच्या (विकारांच्या) क्षयामुळे मिळणारी, आसवरहित अशी चेतोविमुक्ती आणि प्रज्ञाविमुक्ती याच जन्मात स्वतः अभिज्ञेने (उच्च ज्ञानाने) साक्षात्कृत करून, त्यात प्रवेश करून विहरणारा नसतो. अशा प्रकारे तो त्या अंगाने (गुणाने) अपूर्ण असतो. त्याने ते अंग पूर्ण केले पाहिजे – ‘मी कसा श्रद्धावान होईन, शीलवान होईन, बहुश्रुत होईन, धर्मकथिक होईन, परिषदेमध्ये वावरणारा होईन, आत्मविश्वासाने परिषदेला धर्मोपदेश करणारा होईन, उच्च चित्ताशी संबंधित आणि याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या चार ध्यानांचा सहजपणे, विनासायास व विनासाधन लाभ घेणारा होईन, आणि आसवांच्या क्षयामुळे मिळणारी, आसवरहित अशी चेतोविमुक्ती आणि प्रज्ञाविमुक्ती याच जन्मात स्वतः अभिज्ञेने साक्षात्कृत करून, त्यात प्रवेश करून विहरेन?’ असा विचार करून त्याने ते अंग पूर्ण केले पाहिजे.” ‘‘ယတော စ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သဒ္ဓေါ စ ဟောတိ, သီလဝါ စ, ဗဟုဿုတော စ, ဓမ္မကထိကော စ, ပရိသာဝစရော စ, ဝိသာရဒေါ စ ပရိသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, စတုန္နဉ္စ ဈာနာနံ အာဘိစေတသိကာနံ ဒိဋ္ဌဓမ္မသုခဝိဟာရာနံ နိကာမလာဘီ ဟောတိ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, အာသဝါနဉ္စ ခယာ အနာသဝံ စေတောဝိမုတ္တိံ ပညာဝိမုတ္တိံ ဒိဋ္ဌေဝ ဓမ္မေ သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ; ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန ပရိပူရော ဟောတိ. ဣမေဟိ, ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သမန္တပါသာဒိကော စ ဟောတိ သဗ္ဗာကာရပရိပူရော စာ’’တိ. ပဌမံ. “परंतु भिक्खूंनो, जेव्हा भिक्खू श्रद्धावान असतो, शीलवान असतो, बहुश्रुत असतो, धर्मकथिक असतो, परिषदेमध्ये वावरणारा असतो, आत्मविश्वासाने परिषदेला धर्मोपदेश करणारा असतो, उच्च चित्ताशी संबंधित आणि याच जन्मात सुखकारक विहार देणाऱ्या चार ध्यानांचा सहजपणे, विनासायास व विनासाधन लाभ घेणारा असतो, आणि आसवांच्या क्षयामुळे मिळणारी, आसवरहित अशी चेतोविमुक्ती आणि प्रज्ञाविमुक्ती याच जन्मात स्वतः अभिज्ञेने साक्षात्कृत करून, त्यात प्रवेश करून विहरतो; तेव्हा तो त्या अंगाने पूर्ण असतो. भिक्खूंनो, या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू सर्व बाजूंनी प्रसन्नता निर्माण करणारा आणि सर्व प्रकारे परिपूर्ण असतो.” हे पहिले (सुत्त). ၂. ဒုတိယသဒ္ဓါသုတ္တံ २. दुसरे श्रद्धा सुत्त ၇၂. ‘‘သဒ္ဓေါ စ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဟောတိ, နော စ သီလဝါ. ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန အပရိပူရော ဟောတိ. တေန တံ အင်္ဂံ ပရိပူရေတဗ္ဗံ – ‘ကိန္တာဟံ သဒ္ဓေါ စ အဿံ သီလဝါ စာ’တိ. ယတော စ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သဒ္ဓေါ စ ဟောတိ သီလဝါ စ, ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန ပရိပူရော ဟောတိ. ७२. “भिक्खूंनो, एखादा भिक्खू श्रद्धावान असतो, पण शीलवान नसतो. अशा प्रकारे तो त्या अंगाने अपूर्ण असतो. त्याने ते अंग पूर्ण केले पाहिजे – ‘मी कसा श्रद्धावान आणि शीलवान होईन?’ परंतु भिक्खूंनो, जेव्हा भिक्खू श्रद्धावान आणि शीलवानही असतो, तेव्हा तो त्या अंगाने पूर्ण असतो.” ‘‘သဒ္ဓေါ စ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဟောတိ သီလဝါ စ, နော စ ဗဟုဿုတော…ပေ… ဗဟုဿုတော စ, နော စ ဓမ္မကထိကော…ပေ… ဓမ္မကထိကော စ, နော စ ပရိသာဝစရော…ပေ… ပရိသာဝစရော စ, နော စ ဝိသာရဒေါ ပရိသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ [Pg.135] …ပေ… ဝိသာရဒေါ စ ပရိသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ, နော စ ယေ တေ သန္တာ ဝိမောက္ခာ အတိက္ကမ္မ ရူပေ အာရုပ္ပာ တေ ကာယေန ဖုသိတွာ ဝိဟရတိ…ပေ… ယေ တေ သန္တာ ဝိမောက္ခာ အတိက္ကမ္မ ရူပေ အာရုပ္ပာ တေ ကာယေန ဖုသိတွာ ဝိဟရတိ, နော စ အာသဝါနံ ခယာ အနာသဝံ စေတောဝိမုတ္တိံ ပညာဝိမုတ္တိံ ဒိဋ္ဌေဝ ဓမ္မေ သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ; ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန အပရိပူရော ဟောတိ. တေန တံ အင်္ဂံ ပရိပူရေတဗ္ဗံ – ‘ကိန္တာဟံ သဒ္ဓေါ စ အဿံ, သီလဝါ စ, ဗဟုဿုတော စ, ဓမ္မကထိကော စ, ပရိသာဝစရော စ, ဝိသာရဒေါ စ ပရိသာယ ဓမ္မံ ဒေသေယျံ, ယေ တေ သန္တာ ဝိမောက္ခာ အတိက္ကမ္မ ရူပေ အာရုပ္ပာ တေ ကာယေန ဖုသိတွာ ဝိဟရေယျံ, အာသဝါနဉ္စ ခယာ အနာသဝံ စေတောဝိမုတ္တိံ ပညာဝိမုတ္တိံ ဒိဋ္ဌေဝ ဓမ္မေ သယံ အဘိညာ သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရေယျ’’’န္တိ. “भिक्खूंनो, एखादा भिक्खू श्रद्धावान आणि शीलवान असतो, पण बहुश्रुत नसतो... तो बहुश्रुत असतो, पण धर्मकथिक नसतो... तो धर्मकथिक असतो, पण परिषदेमध्ये वावरणारा नसतो... तो परिषदेमध्ये वावरणारा असतो, पण आत्मविश्वासाने परिषदेला धर्मोपदेश करणारा नसतो... तो आत्मविश्वासाने परिषदेला धर्मोपदेश करणारा असतो, पण जे शांत विमोक्ष आहेत, जे रूपाच्या पलीकडचे अरूप ध्यान आहेत, त्यांचा कायेने (प्रत्यक्ष अनुभवाने) स्पर्श करून विहरणारा नसतो... तो रूपाच्या पलीकडचे अरूप ध्यान असलेल्या शांत विमोक्षांचा कायेने स्पर्श करून विहरणारा असतो, पण आसवांच्या क्षयामुळे मिळणारी, आसवरहित अशी चेतोविमुक्ती आणि प्रज्ञाविमुक्ती याच जन्मात स्वतः अभिज्ञेने साक्षात्कृत करून, त्यात प्रवेश करून विहरणारा नसतो. अशा प्रकारे तो त्या अंगाने अपूर्ण असतो. त्याने ते अंग पूर्ण केले पाहिजे – ‘मी कसा श्रद्धावान होईन, शीलवान होईन, बहुश्रुत होईन, धर्मकथिक होईन, परिषदेमध्ये वावरणारा होईन, आत्मविश्वासाने परिषदेला धर्मोपदेश करणारा होईन, रूपाच्या पलीकडचे अरूप ध्यान असलेल्या शांत विमोक्षांचा कायेने स्पर्श करून विहरणारा होईन, आणि आसवांच्या क्षयामुळे मिळणारी, आसवरहित अशी चेतोविमुक्ती आणि प्रज्ञाविमुक्ती याच जन्मात स्वतः अभिज्ञेने साक्षात्कृत करून, त्यात प्रवेश करून विहरेन?’ असा विचार करून त्याने ते अंग पूर्ण केले पाहिजे.” ‘‘ယတော စ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု သဒ္ဓေါ စ ဟောတိ, သီလဝါ စ, ဗဟုဿုတော စ, ဓမ္မကထိကော စ, ပရိသာဝစရော စ, ဝိသာရဒေါ စ ပရိသာယ ဓမ္မံ ဒေသေတိ. ယေ တေ သန္တာ ဝိမောက္ခာ အတိက္ကမ္မ ရူပေ အာရုပ္ပာ တေ စ ကာယေန ဖုသိတွာ ဝိဟရတိ, အာသဝါနဉ္စ ခယာ…ပေ… သစ္ဆိကတွာ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ; ဧဝံ သော တေနင်္ဂေန ပရိပူရော ဟောတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု သမန္တပါသာဒိကော စ ဟောတိ သဗ္ဗာကာရပရိပူရော စာ’’တိ. ဒုတိယံ. “परंतु भिक्खूंनो, जेव्हा भिक्खू श्रद्धावान असतो, शीलवान असतो, बहुश्रुत असतो, धर्मकथिक असतो, परिषदेमध्ये वावरणारा असतो, आत्मविश्वासाने परिषदेला धर्मोपदेश करणारा असतो, रूपाच्या पलीकडचे अरूप ध्यान असलेल्या शांत विमोक्षांचा कायेने स्पर्श करून विहरतो, आणि आसवांच्या क्षयामुळे... साक्षात्कृत करून, त्यात प्रवेश करून विहरतो; तेव्हा तो त्या अंगाने पूर्ण असतो. भिक्खूंनो, या आठ गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू सर्व बाजूंनी प्रसन्नता निर्माण करणारा आणि सर्व प्रकारे परिपूर्ण असतो.” हे दुसरे (सुत्त). ၃. ပဌမမရဏဿတိသုတ္တံ ३. पहिले मरणस्सति सुत्त ၇၃. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ နာတိကေ ဝိဟရတိ ဂိဉ္ဇကာဝသထေ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘ဘိက္ခဝေါ’’တိ. ‘‘ဘဒန္တေ’’တိ တေ ဘိက္ခူ ဘဂဝတော ပစ္စဿောသုံ. ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ‘‘မရဏဿတိ, ဘိက္ခဝေ, ဘာဝိတာ ဗဟုလီကတာ မဟပ္ဖလာ ဟောတိ မဟာနိသံသာ အမတောဂဓာ အမတပရိယောသာနာ. ဘာဝေထ နော တုမှေ, ဘိက္ခဝေ, မရဏဿတိ’’န္တိ. ७३. एका वेळी भगवान नातिक येथे विटांच्या विहारात (गिंजकावसथ येथे) विहरत होते. तेथे भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले – “भिक्खूंनो!” “भंते!” त्या भिक्खूंनी भगवंतांना प्रतिसाद दिला. भगवान म्हणाले – “भिक्खूंनो, मरणस्सतीची (मरणाच्या स्मरणाची) भावना केली असता, तिचा वारंवार सराव केला असता, ती महाफळ देणारी, महाकल्याणकारी, अमृतात (निर्वाणात) विलीन होणारी आणि अमृतातच पर्यवसान पावणारी ठरते. भिक्खूंनो, तुम्ही मरणस्सतीची भावना करता का?” ဧဝံ ဝုတ္တေ အညတရော ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဟံ ခေါ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. ‘‘ယထာ ကထံ ပန တွံ, ဘိက္ခု, ဘာဝေသိ မရဏဿတိ’’န္တိ? ‘‘ဣဓ မယှံ, ဘန္တေ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ရတ္တိန္ဒိဝံ ဇီဝေယျံ[Pg.136], ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ဧဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. असे म्हटले असता, एक भिक्खू भगवंतांना म्हणाला – “भंते, मी मरणस्सतीची भावना करतो.” “पण भिक्खू, तू मरणस्सतीची भावना कशी करतोस?” “भंते, मला असे वाटते – ‘अहो! जर मी एक रात्र आणि एक दिवस जगलो, तर मी भगवंतांच्या शासनाचे (उपदेशाचे) मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच पुष्कळ कार्य केले जाईल.’ भंते, अशा प्रकारे मी मरणस्सतीची भावना करतो.” အညတရောပိ ခေါ ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဟမ္ပိ ခေါ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. ‘‘ယထာ ကထံ ပန တွံ, ဘိက္ခု, ဘာဝေသိ မရဏဿတိ’’န္တိ? ‘‘ဣဓ မယှံ, ဘန္တေ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ဒိဝသံ ဇီဝေယျံ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ဧဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. दुसरा एक भिक्खूही भगवंतांना म्हणाला – “भंते, मीसुद्धा मरणस्सतीची भावना करतो.” “पण भिक्खू, तू मरणस्सतीची भावना कशी करतोस?” “भंते, मला असे वाटते – ‘अहो! जर मी केवळ एक दिवस जगलो, तर मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच पुष्कळ कार्य केले जाईल.’ भंते, अशा प्रकारे मी मरणस्सतीची भावना करतो.” အညတရောပိ ခေါ ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဟမ္ပိ ခေါ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. ‘‘ယထာ ကထံ ပန တွံ, ဘိက္ခု, ဘာဝေသိ မရဏဿတိ’’န္တိ? ‘‘ဣဓ မယှံ, ဘန္တေ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ဥပဍ္ဎဒိဝသံ ဇီဝေယျံ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ဧဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. आणखी एक भिक्खूही भगवंतांना म्हणाला – “भंते, मीसुद्धा मरणस्सतीची भावना करतो.” “पण भिक्खू, तू मरणस्सतीची भावना कशी करतोस?” “भंते, मला असे वाटते – ‘अहो! जर मी केवळ अर्धा दिवस जगलो, तर मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच पुष्कळ कार्य केले जाईल.’ भंते, अशा प्रकारे मी मरणस्सतीची भावना करतो.” အညတရောပိ ခေါ ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဟမ္ပိ ခေါ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. ‘‘ယထာ ကထံ ပန တွံ, ဘိက္ခု, ဘာဝေသိ မရဏဿတိ’’န္တိ? ‘‘ဣဓ မယှံ, ဘန္တေ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ ဧကပိဏ္ဍပါတံ ဘုဉ္ဇာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ဧဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. दुसरा एक भिक्खू भगवंतांना म्हणाला – “भन्ते, मीसुद्धा मरणसतीची भावना करतो.” “पण भिक्खू, तू मरणसतीची भावना कशी करतोस?” “भन्ते, मला असे वाटते – ‘अहो! मी केवळ एका वेळचे भोजन करेपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल.’ भन्ते, अशा प्रकारे मी मरणसतीची भावना करतो.” အညတရောပိ ခေါ ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဟမ္ပိ ခေါ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. ‘‘ယထာ ကထံ ပန တွံ, ဘိက္ခု, ဘာဝေသိ မရဏဿတိ’’န္တိ? ‘‘ဣဓ မယှံ, ဘန္တေ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ ဥပဍ္ဎပိဏ္ဍပါတံ ဘုဉ္ဇာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ဧဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. दुसरा एक भिक्खू भगवंतांना म्हणाला – “भन्ते, मीसुद्धा मरणसतीची भावना करतो.” “पण भिक्खू, तू मरणसतीची भावना कशी करतोस?” “भन्ते, मला असे वाटते – ‘अहो! मी केवळ अर्धे भोजन करेपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल.’ भन्ते, अशा प्रकारे मी मरणसतीची भावना करतो.” အညတရောပိ ခေါ ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဟမ္ပိ ခေါ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. ‘‘ယထာ ကထံ ပန တွံ, ဘိက္ခု, ဘာဝေသိ မရဏဿတိ’’န္တိ? ‘‘ဣဓ မယှံ, ဘန္တေ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ စတ္တာရော ပဉ္စ အာလောပေ သင်္ခါဒိတွာ အဇ္ဈောဟရာမိ, ဘဂဝတော [Pg.137] သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ဧဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. दुसरा एक भिक्खू भगवंतांना म्हणाला – “भन्ते, मीसुद्धा मरणसतीची भावना करतो.” “पण भिक्खू, तू मरणसतीची भावना कशी करतोस?” “भन्ते, मला असे वाटते – ‘अहो! मी केवळ चार-पाच घास चावून गिळेपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल.’ भन्ते, अशा प्रकारे मी मरणसतीची भावना करतो.” အညတရောပိ ခေါ ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဟမ္ပိ ခေါ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. ‘‘ယထာ ကထံ ပန တွံ, ဘိက္ခု, ဘာဝေသိ မရဏဿတိ’’န္တိ? ‘‘ဣဓ မယှံ, ဘန္တေ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ ဧကံ အာလောပံ သင်္ခါဒိတွာ အဇ္ဈောဟရာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ဧဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. दुसरा एक भिक्खू भगवंतांना म्हणाला – “भन्ते, मीसुद्धा मरणसतीची भावना करतो.” “पण भिक्खू, तू मरणसतीची भावना कशी करतोस?” “भन्ते, मला असे वाटते – ‘अहो! मी केवळ एक घास चावून गिळेपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल.’ भन्ते, अशा प्रकारे मी मरणसतीची भावना करतो.” အညတရောပိ ခေါ ဘိက္ခု ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘အဟမ္ပိ ခေါ, ဘန္တေ, ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. ‘‘ယထာ ကထံ ပန တွံ, ဘိက္ခု, ဘာဝေသိ မရဏဿတိ’’န္တိ? ‘‘ဣဓ မယှံ ဘန္တေ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ အဿသိတွာ ဝါ ပဿသာမိ, ပဿသိတွာ ဝါ အဿသာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ဧဝံ ခေါ အဟံ, ဘန္တေ ဘာဝေမိ မရဏဿတိ’’န္တိ. दुसरा एक भिक्खू भगवंतांना म्हणाला – “भन्ते, मीसुद्धा मरणसतीची भावना करतो.” “पण भिक्खू, तू मरणसतीची भावना कशी करतोस?” “भन्ते, मला असे वाटते – ‘अहो! मी केवळ श्वास आत घेऊन बाहेर सोडेपर्यंत किंवा श्वास बाहेर सोडून आत घेईपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल.’ भन्ते, अशा प्रकारे मी मरणसतीची भावना करतो.” ဧဝံ ဝုတ္တေ ဘဂဝါ တေ ဘိက္ခူ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ယွာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဧဝံ မရဏဿတိံ ဘာဝေတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ရတ္တိန္ဒိဝံ ဇီဝေယျံ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ယော စာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဧဝံ မရဏဿတိံ ဘာဝေတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ဒိဝသံ ဇီဝေယျံ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ; ယော စာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဧဝံ မရဏဿတိံ ဘာဝေတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ ဥပဍ္ဎဒိဝသံ ဇီဝေယျံ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ယော စာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဧဝံ မရဏဿတိံ ဘာဝေတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ ဧကပိဏ္ဍပါတံ ဘုဉ္ဇာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ; ယော စာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဧဝံ မရဏဿတိံ ဘာဝေတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ ဥပဍ္ဎပိဏ္ဍပါတံ ဘုဉ္ဇာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ယော စာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဧဝံ မရဏဿတိံ ဘာဝေတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ [Pg.138] ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ စတ္တာရော ပဉ္စ အာလောပေ သင်္ခါဒိတွာ အဇ္ဈောဟရာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ – ဣမေ ဝုစ္စန္တိ, ဘိက္ခဝေ, ‘ဘိက္ခူ ပမတ္တာ ဝိဟရန္တိ, ဒန္ဓံ မရဏဿတိံ ဘာဝေန္တိ အာသဝါနံ ခယာယ’’’. असे म्हटले असता, भगवंतांनी त्या भिक्खूंना असे म्हटले – “भिक्खूंनो, जो भिक्खू अशा प्रकारे मरणसतीची भावना करतो – ‘अहो! मी एक रात्र आणि एक दिवस जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल’; आणि भिक्खूंनो, जो भिक्खू अशा प्रकारे मरणसतीची भावना करतो – ‘अहो! मी एक दिवस जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल’; आणि भिक्खूंनो, जो भिक्खू अशा प्रकारे मरणसतीची भावना करतो – ‘अहो! मी अर्धा दिवस जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल’; आणि भिक्खूंनो, जो भिक्खू अशा प्रकारे मरणसतीची भावना करतो – ‘अहो! मी केवळ एका वेळचे भोजन करेपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल’; आणि भिक्खूंनो, जो भिक्खू अशा प्रकारे मरणसतीची भावना करतो – ‘अहो! मी केवळ अर्धे भोजन करेपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल’; आणि भिक्खूंनो, जो भिक्खू अशा प्रकारे मरणसतीची भावना करतो – ‘अहो! मी केवळ चार-पाच घास चावून गिळेपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल’ – भिक्खूंनो, हे भिक्खू ‘प्रमादी होऊन विहरतात आणि आसवांच्या क्षयासाठी मंद गतीने मरणसतीची भावना करतात’ असे म्हटले जाते.” ‘‘ယော စ ခွာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဧဝံ မရဏဿတိံ ဘာဝေတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ ဧကံ အာလောပံ သင်္ခါဒိတွာ အဇ္ဈောဟရာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ. ယော စာယံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဧဝံ မရဏဿတိံ ဘာဝေတိ – ‘အဟော ဝတာဟံ တဒန္တရံ ဇီဝေယျံ ယဒန္တရံ အဿသိတွာ ဝါ ပဿသာမိ, ပဿသိတွာ ဝါ အဿသာမိ, ဘဂဝတော သာသနံ မနသိ ကရေယျံ, ဗဟု ဝတ မေ ကတံ အဿာ’တိ – ဣမေ ဝုစ္စန္တိ, ဘိက္ခဝေ, ‘ဘိက္ခူ အပ္ပမတ္တာ ဝိဟရန္တိ, တိက္ခံ မရဏဿတိံ ဘာဝေန္တိ အာသဝါနံ ခယာယ’’’. “परंतु भिक्खूंनो, जो भिक्खू अशा प्रकारे मरणसतीची भावना करतो – ‘अहो! मी केवळ एक घास चावून गिळेपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल’; आणि भिक्खूंनो, जो भिक्खू अशा प्रकारे मरणसतीची भावना करतो – ‘अहो! मी केवळ श्वास आत घेऊन बाहेर सोडेपर्यंत किंवा श्वास बाहेर सोडून आत घेईपर्यंत जिवंत राहिलो, तर किती चांगले होईल! मी भगवंतांच्या शासनाचे मनन करू शकेन, माझ्याकडून खरोखरच बरेच काही केले जाईल’ – भिक्खूंनो, हे भिक्खू ‘अप्रमादी होऊन विहरतात आणि आसवांच्या क्षयासाठी तीव्रतेने मरणसतीची भावना करतात’ असे म्हटले जाते.” ‘‘တသ္မာတိဟ, ဘိက္ခဝေ, ဧဝံ သိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘အပ္ပမတ္တာ ဝိဟရိဿာမ, တိက္ခံ မရဏဿတိံ ဘာဝယိဿာမ အာသဝါနံ ခယာယာ’တိ. ဧဝဉှိ ဝေါ, ဘိက္ခဝေ, သိက္ခိတဗ္ဗ’’န္တိ. တတိယံ. “म्हणूनच, भिक्खूंनो, तुम्ही असे शिकले पाहिजे – ‘आम्ही अप्रमादी होऊन विहरू, आसवांच्या क्षयासाठी तीव्रतेने मरणसतीची भावना करू.’ भिक्खूंनो, तुम्ही असेच शिकले पाहिजे.” (तिसरे सूत्त समाप्त.) ၄. ဒုတိယမရဏဿတိသုတ္တံ ४. दुसरे मरणस्सति सुत्त ၇၄. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ နာတိကေ ဝိဟရတိ ဂိဉ္ဇကာဝသထေ. တတြ ခေါ ဘဂဝါ ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ …ပေ… မရဏဿတိ, ဘိက္ခဝေ, ဘာဝိတာ ဗဟုလီကတာ မဟပ္ဖလာ ဟောတိ မဟာနိသံသာ အမတောဂဓာ အမတပရိယောသာနာ. ७४. एकदा भगवान नातिका येथे विटांच्या घरात (गिंजकावसथ येथे) विहरत होते. तेथे भगवंतांनी भिक्खूंना संबोधित केले – ...पे... “भिक्खूंनो, मरणसतीची भावना केली असता, तिचा वारंवार सराव केला असता, ती महाफळ देणारी, महा-अनुशंस देणारी, अमतात (निर्वाणात) विलीन होणारी आणि अमतामध्येच पर्यवसान पावणारी ठरते.” ‘‘ကထံ ဘာဝိတာ စ, ဘိက္ခဝေ, မရဏဿတိ ကထံ ဗဟုလီကတာ မဟပ္ဖလာ ဟောတိ မဟာနိသံသာ အမတောဂဓာ အမတပရိယောသာနာ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဒိဝသေ နိက္ခန္တေ ရတ္တိယာ ပတိဟိတာယ ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ဗဟုကာ ခေါ မေ ပစ္စယာ မရဏဿ – အဟိ ဝါ မံ ဍံသေယျ, ဝိစ္ဆိကော ဝါ မံ ဍံသေယျ, သတပဒီ ဝါ မံ ဍံသေယျ; တေန မေ အဿ ကာလကိရိယာ. သော မမ အဿ အန္တရာယော. ဥပက္ခလိတွာ ဝါ ပပတေယျံ, ဘတ္တံ ဝါ မေ ဘုတ္တံ ဗျာပဇ္ဇေယျ, ပိတ္တံ ဝါ မေ ကုပ္ပေယျ, သေမှံ ဝါ မေ ကုပ္ပေယျ, သတ္ထကာ ဝါ မေ ဝါတာ ကုပ္ပေယျုံ[Pg.139], မနုဿာ ဝါ မံ ဥပက္ကမေယျုံ, အမနုဿာ ဝါ မံ ဥပက္ကမေယျုံ; တေန မေ အဿ ကာလကိရိယာ. သော မမ အဿ အန္တရာယော’တိ. တေန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘အတ္ထိ နု ခေါ မေ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အပ္ပဟီနာ ယေ မေ အဿု ရတ္တိံ ကာလံ ကရောန္တဿ အန္တရာယာယာ’’’တိ. भिक्षूंनो, मरणसती (मरणाची स्मृती) कशा प्रकारे भाविली (विकसित केली) असता आणि कशा प्रकारे वारंवार आचरली असता ती महाफळ देणारी, महा-अनुशंस (मोठे लाभ) देणारी, अमृतात (निर्वाणात) विलीन होणारी आणि अमृतातच पर्यवसान पावणारी ठरते? भिक्षूंनो, या शासनात एखादा भिक्षू दिवस मावळून रात्र सुरू झाली असता असा विचार करतो – 'माझ्या मृत्यूची अनेक कारणे असू शकतात – मला साप चावू शकतो, किंवा विंचू चावू शकतो, किंवा पैसा (शंभर पायांचा कीटक) चावू शकतो; त्यामुळे माझा मृत्यू होऊ शकतो. तो माझ्यासाठी अंतराय (अडथळा) ठरेल. किंवा मी घसरून पडू शकेन, किंवा मी खाल्लेले अन्न अपचन होऊन बिघडू शकेल, किंवा माझे पित्त प्रकुपित होऊ शकेल, किंवा माझा कफ प्रकुपित होऊ शकेल, किंवा शरीरातील तीक्ष्ण वायू (शस्त्रसमान वायू) प्रकुपित होऊ शकतील, किंवा मनुष्य माझ्यावर हल्ला करू शकतील, किंवा अमनुष्य (यक्ष-राक्षस) माझ्यावर हल्ला करू शकतील; त्यामुळे माझा मृत्यू होऊ शकतो. तो माझ्यासाठी अंतराय ठरेल.' भिक्षूंनो, त्या भिक्षूने असा विचार केला पाहिजे – 'माझ्यामध्ये असे काही पापी, अकुशल धर्म (प्रवृत्ती) अजून नष्ट व्हायचे राहिले आहेत का, जे आज रात्री माझा मृत्यू झाल्यास माझ्यासाठी अंतराय (अडथळा) ठरतील?' ‘‘သစေ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ပစ္စဝေက္ခမာနော ဧဝံ ဇာနာတိ – ‘အတ္ထိ မေ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အပ္ပဟီနာ ယေ မေ အဿု ရတ္တိံ ကာလံ ကရောန္တဿ အန္တရာယာယာ’တိ, တေန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ တေသံယေဝ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ပဟာနာယ အဓိမတ္တော ဆန္ဒော စ ဝါယာမော စ ဥဿာဟော စ ဥဿောဠှီ စ အပ္ပဋိဝါနီ စ သတိ စ သမ္ပဇညဉ္စ ကရဏီယံ. भिक्षूंनो, जर आत्मपरीक्षण करताना त्या भिक्षूला असे जाणवले की – 'माझ्यामध्ये असे पापी, अकुशल धर्म अजून नष्ट व्हायचे राहिले आहेत, जे आज रात्री माझा मृत्यू झाल्यास माझ्यासाठी अंतराय ठरतील,' तर भिक्षूंनो, त्या भिक्षूने त्या पापी, अकुशल धर्मांचा प्रहाण (नाश) करण्यासाठी तीव्र छंद (इच्छा), व्यायाम (प्रयत्न), उत्साह, उद्योग, अपराजित वृत्ती (न खचणे), स्मृती (सती) आणि संप्रजन्य (जागृत प्रज्ञा) जागृत केली पाहिजे. ‘‘သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, အာဒိတ္တစေလော ဝါ အာဒိတ္တသီသော ဝါ တဿေဝ စေလဿ ဝါ သီသဿ ဝါ နိဗ္ဗာပနာယ အဓိမတ္တံ ဆန္ဒဉ္စ ဝါယာမဉ္စ ဥဿာဟဉ္စ ဥဿောဠှိဉ္စ အပ္ပဋိဝါနိဉ္စ သတိဉ္စ သမ္ပဇညဉ္စ ကရေယျ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, တေန ဘိက္ခုနာ တေသံယေဝ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ပဟာနာယ အဓိမတ္တော ဆန္ဒော စ ဝါယာမော စ ဥဿာဟော စ ဥဿောဠှီ စ အပ္ပဋိဝါနီ စ သတိ စ သမ္ပဇညဉ္စ ကရဏီယံ. भिक्षूंनो, ज्याप्रमाणे एखाद्याच्या वस्त्राला किंवा डोक्याला आग लागली असता, ती वस्त्राची किंवा डोक्याची आग विझवण्यासाठी तो मनुष्य जसा तीव्र छंद, प्रयत्न, उत्साह, उद्योग, चिकाटी, स्मृती आणि संप्रजन्य उपयोगात आणतो; त्याचप्रमाणे, भिक्षूंनो, त्या भिक्षूने त्या पापी, अकुशल धर्मांचा प्रहाण करण्यासाठी तीव्र छंद, व्यायाम, उत्साह, उद्योग, अपराजित वृत्ती, स्मृती आणि संप्रजन्य जागृत केले पाहिजे. ‘‘သစေ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ပစ္စဝေက္ခမာနော ဧဝံ ဇာနာတိ – ‘နတ္ထိ မေ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အပ္ပဟီနာ ယေ မေ အဿု ရတ္တိံ ကာလံ ကရောန္တဿ အန္တရာယာယာ’တိ, တေန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ တေနေဝ ပီတိပါမောဇ္ဇေန ဝိဟာတဗ္ဗံ အဟောရတ္တာနုသိက္ခိနာ ကုသလေသု ဓမ္မေသု. भिक्षूंनो, जर आत्मपरीक्षण करताना त्या भिक्षूला असे जाणवले की – 'माझ्यामध्ये असे कोणतेही पापी, अकुशल धर्म नष्ट व्हायचे राहिले नाहीत, जे आज रात्री माझा मृत्यू झाल्यास माझ्यासाठी अंतराय ठरतील,' तर भिक्षूंनो, त्या भिक्षूने त्याच प्रीती आणि प्रामोद्याने (आनंदाने) युक्त होऊन, अहोरात्र कुशल धर्मांमध्ये स्वतःला प्रशिक्षित करत विहरावे (राहावे). ‘‘ဣဓ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ရတ္တိယာ နိက္ခန္တာယ ဒိဝသေ ပတိဟိတေ ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခတိ – ‘ဗဟုကာ ခေါ မေ ပစ္စယာ မရဏဿ – အဟိ ဝါ မံ ဍံသေယျ, ဝိစ္ဆိကော ဝါ မံ ဍံသေယျ, သတပဒီ ဝါ မံ ဍံသေယျ; တေန မေ အဿ ကာလကိရိယာ. သော မမ အဿ အန္တရာယော. ဥပက္ခလိတွာ ဝါ ပပတေယျံ, ဘတ္တံ ဝါ မေ ဘုတ္တံ ဗျာပဇ္ဇေယျ, ပိတ္တံ ဝါ မေ ကုပ္ပေယျ, သေမှံ ဝါ မေ ကုပ္ပေယျ, သတ္ထကာ ဝါ မေ ဝါတာ ကုပ္ပေယျုံ, မနုဿာ ဝါ မံ ဥပက္ကမေယျုံ, အမနုဿာ ဝါ မံ ဥပက္ကမေယျုံ; တေန မေ အဿ ကာလကိရိယာ. သော မမ အဿ အန္တရာယော’တိ. တေန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ ဣတိ ပဋိသဉ္စိက္ခိတဗ္ဗံ – ‘အတ္ထိ နု ခေါ မေ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အပ္ပဟီနာ ယေ မေ အဿု ဒိဝါ ကာလံ ကရောန္တဿ အန္တရာယာယာ’’’တိ. तसेच भिक्षूंनो, जेव्हा रात्र संपून दिवस उजाडतो, तेव्हा भिक्षू असा विचार करतो – 'माझ्या मृत्यूची अनेक कारणे असू शकतात – मला साप चावू शकतो, किंवा विंचू चावू शकतो, किंवा पैसा चावू शकतो; त्यामुळे माझा मृत्यू होऊ शकतो. तो माझ्यासाठी अंतराय ठरेल. किंवा मी घसरून पडू शकेन, किंवा मी खाल्लेले अन्न अपचन होऊन बिघडू शकेल, किंवा माझे पित्त प्रकुपित होऊ शकेल, किंवा माझा कफ प्रकुपित होऊ शकेल, किंवा शरीरातील तीक्ष्ण वायू प्रकुपित होऊ शकतील, किंवा मनुष्य माझ्यावर हल्ला करू शकतील, किंवा अमनुष्य माझ्यावर हल्ला करू शकतील; त्यामुळे माझा मृत्यू होऊ शकतो. तो माझ्यासाठी अंतराय ठरेल.' भिक्षूंनो, त्या भिक्षूने असा विचार केला पाहिजे – 'माझ्यामध्ये असे काही पापी, अकुशल धर्म अजून नष्ट व्हायचे राहिले आहेत का, जे आज दिवसा माझा मृत्यू झाल्यास माझ्यासाठी अंतराय ठरतील?' ‘‘သစေ[Pg.140], ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ပစ္စဝေက္ခမာနော ဧဝံ ဇာနာတိ – ‘အတ္ထိ မေ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အပ္ပဟီနာ ယေ မေ အဿု ဒိဝါ ကာလံ ကရောန္တဿ အန္တရာယာယာ’တိ, တေန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ တေသံယေဝ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ပဟာနာယ အဓိမတ္တော ဆန္ဒော စ ဝါယာမော စ ဥဿာဟော စ ဥဿောဠှီ စ အပ္ပဋိဝါနီ စ သတိ စ သမ္ပဇညဉ္စ ကရဏီယံ. भिक्षूंनो, जर आत्मपरीक्षण करताना त्या भिक्षूला असे जाणवले की – 'माझ्यामध्ये असे पापी, अकुशल धर्म अजून नष्ट व्हायचे राहिले आहेत, जे आज दिवसा माझा मृत्यू झाल्यास माझ्यासाठी अंतराय ठरतील,' तर भिक्षूंनो, त्या भिक्षूने त्या पापी, अकुशल धर्मांचा प्रहाण करण्यासाठी तीव्र छंद, व्यायाम, उत्साह, उद्योग, अपराजित वृत्ती, स्मृती आणि संप्रजन्य जागृत केले पाहिजे. ‘‘သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, အာဒိတ္တစေလော ဝါ အာဒိတ္တသီသော ဝါ တဿေဝ စေလဿ ဝါ သီသဿ ဝါ နိဗ္ဗာပနာယ အဓိမတ္တံ ဆန္ဒဉ္စ ဝါယာမဉ္စ ဥဿာဟဉ္စ ဥဿောဠှိဉ္စ အပ္ပဋိဝါနိဉ္စ သတိဉ္စ သမ္ပဇညဉ္စ ကရေယျ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, တေန ဘိက္ခုနာ တေသံယေဝ ပါပကာနံ အကုသလာနံ ဓမ္မာနံ ပဟာနာယ အဓိမတ္တော ဆန္ဒော စ ဝါယာမော စ ဥဿာဟော စ ဥဿောဠှီ စ အပ္ပဋိဝါနီ စ သတိ စ သမ္ပဇညဉ္စ ကရဏီယံ. भिक्षूंनो, ज्याप्रमाणे एखाद्याच्या वस्त्राला किंवा डोक्याला आग लागली असता, ती वस्त्राची किंवा डोक्याची आग विझवण्यासाठी तो मनुष्य जसा तीव्र छंद, प्रयत्न, उत्साह, उद्योग, चिकाटी, स्मृती आणि संप्रजन्य उपयोगात आणतो; त्याचप्रमाणे, भिक्षूंनो, त्या भिक्षूने त्या पापी, अकुशल धर्मांचा प्रहाण करण्यासाठी तीव्र छंद, व्यायाम, उत्साह, उद्योग, अपराजित वृत्ती, स्मृती आणि संप्रजन्य जागृत केले पाहिजे. ‘‘သစေ ပန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ပစ္စဝေက္ခမာနော ဧဝံ ဇာနာတိ – ‘နတ္ထိ မေ ပါပကာ အကုသလာ ဓမ္မာ အပ္ပဟီနာ ယေ မေ အဿု ဒိဝါ ကာလံ ကရောန္တဿ အန္တရာယာယာ’တိ, တေန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ တေနေဝ ပီတိပါမောဇ္ဇေန ဝိဟာတဗ္ဗံ အဟောရတ္တာနုသိက္ခိနာ ကုသလေသု ဓမ္မေသု. ဧဝံ ဘာဝိတာ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, မရဏဿတိ ဧဝံ ဗဟုလီကတာ မဟပ္ဖလာ ဟောတိ မဟာနိသံသာ အမတောဂဓာ အမတပရိယောသာနာ’’တိ. စတုတ္ထံ. परंतु भिक्षूंनो, जर आत्मपरीक्षण करताना त्या भिक्षूला असे जाणवले की – 'माझ्यामध्ये असे कोणतेही पापी, अकुशल धर्म नष्ट व्हायचे राहिले नाहीत, जे आज दिवसा माझा मृत्यू झाल्यास माझ्यासाठी अंतराय ठरतील,' तर भिक्षूंनो, त्या भिक्षूने त्याच प्रीती आणि प्रामोद्याने युक्त होऊन, अहोरात्र कुशल धर्मांमध्ये स्वतःला प्रशिक्षित करत विहरावे. भिक्षूंनो, अशा प्रकारे भाविलेली आणि अशा प्रकारे वारंवार आचरलेली मरणसती महाफळ देणारी, महा-अनुशंस देणारी, अमृतात विलीन होणारी आणि अमृतातच पर्यवसान पावणारी ठरते. (चौथे सूत्त समाप्त.) ၅. ပဌမသမ္ပဒါသုတ္တံ ५. प्रथम संपदा सूत्त ၇၅. ‘‘အဋ္ဌိမာ, ဘိက္ခဝေ, သမ္ပဒါ. ကတမာ အဋ္ဌ? ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ, အာရက္ခသမ္ပဒါ, ကလျာဏမိတ္တတာ, သမဇီဝိတာ, သဒ္ဓါသမ္ပဒါ, သီလသမ္ပဒါ, စာဂသမ္ပဒါ, ပညာသမ္ပဒါ – ဣမာ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ သမ္ပဒါ’’တိ. ७५. भिक्षूंनो, या आठ संपदा (समृद्धी/यशस्वी जीवनाची अंगे) आहेत. कोणत्या आठ? उत्थान-संपदा (उद्योगशीलता), आरक्ष-संपदा (संरक्षण), कल्याणमित्रता (चांगले मित्र असणे), समजीवितता (संतुलित जीवन जगणे), श्रद्धा-संपदा, शील-संपदा, त्याग-संपदा (दानशीलता) आणि प्रज्ञा-संपदा – भिक्षूंनो, या त्या आठ संपदा आहेत. ‘‘ဥဋ္ဌာတာ ကမ္မဓေယျေသု, အပ္ပမတ္တော ဝိဓာနဝါ; သမံ ကပ္ပေတိ ဇီဝိကံ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. जो मनुष्य आपल्या कर्तव्यात उद्योगशील, अप्रमादी (सावध) आणि नियोजनबद्ध असतो; तो आपले जीवन संतुलितपणे जगतो आणि मिळवलेल्या संपत्तीचे रक्षण करतो. ‘‘သဒ္ဓေါ သီလေန သမ္ပန္နော, ဝဒညူ ဝီတမစ္ဆရော; နိစ္စံ မဂ္ဂံ ဝိသောဓေတိ, သောတ္ထာနံ သမ္ပရာယိကံ. जो श्रद्धावान, शीलाने संपन्न, उदार (दान मागणार्यांचे बोलणे समजणारा) आणि मत्सररहित (कंजूष नसलेला) असतो; तो परलोकातील कल्याणाचा मार्ग नेहमी शुद्ध करत असतो. ‘‘ဣစ္စေတေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ စ, သဒ္ဓဿ ဃရမေသိနော; အက္ခာတာ သစ္စနာမေန, ဥဘယတ္ထ သုခါဝဟာ. गृहस्थाश्रमात राहणाऱ्या श्रद्धावान मनुष्यासाठी हे आठ धर्म आहेत, जे या दोन्ही लोकांत (इहलोक आणि परलोक) सुख देणारे आहेत, असे सत्यनाम (यथार्थ नाव असलेल्या) बुद्धांनी सांगितले आहे. ‘‘ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတတ္ထာယ, သမ္ပရာယသုခါယ စ; ဧဝမေတံ ဂဟဋ္ဌာနံ, စာဂေါ ပုညံ ပဝဍ္ဎတီ’’တိ. ပဉ္စမံ; या वर्तमान जीवनातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी, अशा प्रकारे गृहस्थाचा त्याग आणि पुण्य वाढत जाते. (पाचवे सूत्त समाप्त.) ၆. ဒုတိယသမ္ပဒါသုတ္တံ ६. द्वितीय संपदा सूत्त ၇၆. ‘‘အဋ္ဌိမာ[Pg.141], ဘိက္ခဝေ, သမ္ပဒါ. ကတမာ အဋ္ဌ? ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ, အာရက္ခသမ္ပဒါ, ကလျာဏမိတ္တတာ, သမဇီဝိတာ, သဒ္ဓါသမ္ပဒါ, သီလသမ္ပဒါ, စာဂသမ္ပဒါ, ပညာသမ္ပဒါ. ကတမာ စ, ဘိက္ခဝေ, ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော ယေန ကမ္မဋ္ဌာနေန ဇီဝိတံ ကပ္ပေတိ – ယဒိ ကသိယာ ယဒိ ဝဏိဇ္ဇာယ ယဒိ ဂေါရက္ခေန ယဒိ ဣဿတ္တေန ယဒိ ရာဇပေါရိသေန ယဒိ သိပ္ပညတရေန – တတ္ထ ဒက္ခော ဟောတိ အနလသော, တတြုပါယာယ ဝီမံသာယ သမန္နာဂတော, အလံ ကာတုံ အလံ သံဝိဓာတုန္တိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ, ဥဋ္ဌာနသမ္ပဒါ. ७६. “भिक्खूहो, या आठ संपदा आहेत. कोणत्या आठ? उत्थान-संपदा (उद्योगशीलता), आरक्ष-संपदा (संरक्षणशीलता), कल्याणमित्रता (चांगल्या मित्रांची संगत), समजीवित (संतुलित जीवन), श्रद्धा-संपदा, शील-संपदा, त्याग-संपदा (उदारता) आणि प्रज्ञा-संपदा. आणि भिक्खूहो, उत्थान-संपदा कोणती आहे? भिक्खूहो, या जगात कुलपुत्र ज्या कोणत्या उद्योगाने आपली उपजीविका करतो – मग ती शेती असो, व्यापार असो, गोपालन असो, धनुर्विद्या असो, राजसेवा असो किंवा इतर कोणतीही कला असो – त्या कामात तो कुशल असतो, आळस न करणारा असतो. तो त्या कामाच्या उपायांचा विचार करणाऱ्या प्रज्ञेने युक्त असतो, स्वतः काम करण्यास आणि इतरांकडून ते व्यवस्थित करून घेण्यास समर्थ असतो. भिक्खूहो, याला उत्थान-संपदा असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဘိက္ခဝေ, အာရက္ခသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တဿ ဘောဂါ ဟောန္တိ ဥဋ္ဌာနဝီရိယာဓိဂတာ ဗာဟာဗလပရိစိတာ သေဒါဝက္ခိတ္တာ ဓမ္မိကာ ဓမ္မလဒ္ဓါ တေ အာရက္ခေန ဂုတ္တိယာ သမ္ပာဒေတိ – ‘ကိန္တိ မေ ဘောဂေ နေဝ ရာဇာနော ဟရေယျုံ, န စောရာ ဟရေယျုံ, န အဂ္ဂိ ဍဟေယျ, န ဥဒကံ ဝဟေယျ, န အပ္ပိယာ ဒါယာဒါ ဟရေယျု’န္တိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ, အာရက္ခသမ္ပဒါ. “आणि भिक्खूहो, आरक्ष-संपदा कोणती आहे? भिक्खूहो, या जगात कुलपुत्राने आपल्या उद्योग आणि वीर्याने मिळवलेली, स्वतःच्या बाहुबलाने गोळा केलेली, घामाच्या धारा गाळून कमावलेली, धार्मिक आणि धर्ममार्गाने प्राप्त केलेली जी संपत्ती असते, तिचे तो रक्षण आणि सुरक्षितता करतो – ‘माझी ही संपत्ती राजाने हिरावून घेऊ नये, चोरांनी चोरून नेऊ नये, अग्नीने जळू नये, पाण्याने वाहून जाऊ नये आणि अप्रिय वारसदारांनी बळकावू नये.’ भिक्खूहो, याला आरक्ष-संपदा असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဘိက္ခဝေ, ကလျာဏမိတ္တတာ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော ယသ္မိံ ဂါမေ ဝါ နိဂမေ ဝါ ပဋိဝသတိ, တတ္ထ ယေ တေ ဟောန္တိ ဂဟပတီ ဝါ ဂဟပတိပုတ္တာ ဝါ ဒဟရာ ဝါ ဝုဒ္ဓသီလိနော ဝုဒ္ဓါ ဝါ ဝုဒ္ဓသီလိနော သဒ္ဓါသမ္ပန္နာ သီလသမ္ပန္နာ စာဂသမ္ပန္နာ ပညာသမ္ပန္နာ, တေဟိ သဒ္ဓိံ သန္တိဋ္ဌတိ သလ္လပတိ သာကစ္ဆံ သမာပဇ္ဇတိ; ယထာရူပါနံ သဒ္ဓါသမ္ပန္နာနံ သဒ္ဓါသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ သီလသမ္ပန္နာနံ သီလသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ စာဂသမ္ပန္နာနံ စာဂသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ, ယထာရူပါနံ ပညာသမ္ပန္နာနံ ပညာသမ္ပဒံ အနုသိက္ခတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ, ကလျာဏမိတ္တတာ. “आणि भिक्खूहो, कल्याणमित्रता कोणती आहे? भिक्खूहो, या जगात कुलपुत्र ज्या गावात किंवा नगरात राहतो, तेथील जे गृहपती किंवा गृहपतींचे पुत्र असतात – मग ते तरुण असोत वा वृद्ध, जे शीलवान, श्रद्धासंपन्न, शीलसंपन्न, त्यागसंपन्न आणि प्रज्ञासंपन्न असतात – त्यांच्यासोबत तो उठतो-बसतो, संभाषण करतो, चर्चा करतो. जशा प्रकारच्या श्रद्धासंपन्नांची श्रद्धा तो पाहतो, तशा श्रद्धेचे तो अनुकरण करतो; जशा प्रकारच्या शीलसंपन्नांचे शील तो पाहतो, तशा शीलाचे तो अनुकरण करतो; जशा प्रकारच्या त्यागसंपन्नांचा त्याग तो पाहतो, तशा त्यागाचे तो अनुकरण करतो; जशा प्रकारच्या प्रज्ञासंपन्नांची प्रज्ञा तो पाहतो, तशा प्रज्ञेचे तो अनुकरण करतो. भिक्खूहो, याला कल्याणमित्रता असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဘိက္ခဝေ, သမဇီဝိတာ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ. သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, တုလာဓာရော ဝါ တုလာဓာရန္တေဝါသီ ဝါ တုလံ ပဂ္ဂဟေတွာ ဇာနာတိ – ‘ဧတ္တကေန ဝါ ဩနတံ, ဧတ္တကေန ဝါ ဥန္နတ’န္တိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ. သစာယံ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော [Pg.142] အပ္ပာယော သမာနော ဥဠာရံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ, တဿ ဘဝန္တိ ဝတ္တာရော ‘ဥဒုမ္ဗရခါဒီ ဝါယံ ကုလပုတ္တော ဘောဂေ ခါဒတီ’တိ. သစေ ပနာယံ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော မဟာယော သမာနော ကသိရံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ, တဿ ဘဝန္တိ ဝတ္တာရော – ‘အဇေဋ္ဌမရဏံ ဝါယံ ကုလပုတ္တော မရိဿတီ’တိ. ယတော စ ခေါယံ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော အာယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ ဝယဉ္စ ဘောဂါနံ ဝိဒိတွာ သမံ ဇီဝိကံ ကပ္ပေတိ နာစ္စောဂါဠှံ နာတိဟီနံ – ‘ဧဝံ မေ အာယော ဝယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတိ, န စ မေ ဝယော အာယံ ပရိယာဒါယ ဌဿတီ’တိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ, သမဇီဝိတာ. “आणि भिक्खूहो, समजीवित कोणते आहे? भिक्खूहो, या जगात कुलपुत्र आपल्या संपत्तीचे उत्पन्न आणि खर्च जाणून घेऊन आपले जीवन संतुलितपणे जगतो – अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता – ‘अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च माझ्या उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही.’ भिक्खूहो, ज्याप्रमाणे एखादा सराफ किंवा त्याचा शिकाऊ मुलगा तराजू हातात धरून जाणतो की, ‘इतक्या वजनाने तो खाली झुकला आहे आणि इतक्या वजनाने तो वर गेला आहे’; त्याचप्रमाणे भिक्खूहो, कुलपुत्र आपल्या संपत्तीचे उत्पन्न आणि खर्च जाणून घेऊन आपले जीवन संतुलितपणे जगतो – अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता – ‘अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही.’ भिक्खूहो, जर हा कुलपुत्र कमी उत्पन्न असतानाही अतिशय विलासी जीवन जगत असेल, तर लोक त्याची निंदा करतात की, ‘हा कुलपुत्र उंबराची फळे खाणाऱ्याप्रमाणे आपली संपत्ती खात आहे.’ परंतु, भिक्खूहो, जर हा कुलपुत्र मोठे उत्पन्न असतानाही अत्यंत कष्टाचे जीवन जगत असेल, तर लोक त्याची निंदा करतात की, ‘हा कुलपुत्र अनाथ माणसासारखा मरेल.’ परंतु भिक्खूहो, जेव्हा कुलपुत्र आपल्या संपत्तीचे उत्पन्न आणि खर्च जाणून घेऊन आपले जीवन संतुलितपणे जगतो – अतिशय उधळपट्टी न करता आणि अतिशय कंजूषपणा न करता – ‘अशा प्रकारे माझे उत्पन्न माझ्या खर्चापेक्षा अधिक राहील आणि माझा खर्च उत्पन्नापेक्षा अधिक होणार नाही.’ भिक्खूहो, याला समजीवित असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ ဘိက္ခဝေ, သဒ္ဓါသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော သဒ္ဓေါ ဟောတိ, သဒ္ဒဟတိ တထာဂတဿ ဗောဓိံ – ‘ဣတိပိ သော ဘဂဝါ…ပေ… သတ္ထာ ဒေဝမနုဿာနံ ဗုဒ္ဓေါ ဘဂဝါ’တိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ, သဒ္ဓါသမ္ပဒါ. “आणि भिक्खूहो, श्रद्धा-संपदा कोणती आहे? भिक्खूहो, या जगात कुलपुत्र श्रद्धावान असतो, तो तथागतांच्या बोधीवर श्रद्धा ठेवतो – ‘ते भगवान अशा कारणाने अर्हत आहेत... देव आणि मनुष्यांचे शास्ता आहेत, बुद्ध आहेत, भगवान आहेत.’ भिक्खूहो, याला श्रद्धा-संपदा असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဘိက္ခဝေ, သီလသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော ပါဏာတိပါတာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ…ပေ… သုရာမေရယမဇ္ဇပမာဒဋ္ဌာနာ ပဋိဝိရတော ဟောတိ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ, သီလသမ္ပဒါ. “आणि भिक्खूहो, शील-संपदा कोणती आहे? भिक्खूहो, या जगात कुलपुत्र प्राणातिपातापासून अलिप्त राहतो... सुरा, मेरय आणि मद्य या प्रमाद निर्माण करणाऱ्या गोष्टींच्या सेवनापासून अलिप्त राहतो. भिक्खूहो, याला शील-संपदा असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဘိက္ခဝေ, စာဂသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော ဝိဂတမလမစ္ဆေရေန စေတသာ အဂါရံ အဇ္ဈာဝသတိ…ပေ… ယာစယောဂေါ ဒါနသံဝိဘာဂရတော. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ, စာဂသမ္ပဒါ. “आणि भिक्खूहो, त्याग-संपदा कोणती आहे? भिक्खूहो, या जगात कुलपुत्र मत्सराचा मळ दूर झालेल्या चित्ताने गृहस्थाश्रमात राहतो... दान देण्यास तत्पर आणि वाटून घेण्यात आनंद मानणारा असतो. भिक्खूहो, याला त्याग-संपदा असे म्हणतात.” ‘‘ကတမာ စ, ဘိက္ခဝေ, ပညာသမ္ပဒါ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ကုလပုတ္တော ပညဝါ ဟောတိ…ပေ… သမ္မာ ဒုက္ခက္ခယဂါမိနိယာ. အယံ ဝုစ္စတိ, ဘိက္ခဝေ, ပညာသမ္ပဒါ. ဣမာ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ သမ္ပဒါ’’တိ. “आणि भिक्खूहो, प्रज्ञा-संपदा कोणती आहे? भिक्खूहो, या जगात कुलपुत्र प्रज्ञावान असतो... दुःखाचा पूर्ण क्षय करणाऱ्या सम्यक प्रज्ञेने युक्त असतो. भिक्खूहो, याला प्रज्ञा-संपदा असे म्हणतात. भिक्खूहो, या खरोखर आठ संपदा आहेत.” ‘‘ဥဋ္ဌာတာ ကမ္မဓေယျေသု, အပ္ပမတ္တော ဝိဓာနဝါ; သမံ ကပ္ပေတိ ဇီဝိကံ, သမ္ဘတံ အနုရက္ခတိ. “आपल्या कामांमध्ये उद्योगशील असणारा, अप्रमादी आणि योग्य नियोजन करणारा मनुष्य आपले जीवन संतुलितपणे जगतो आणि मिळवलेल्या संपत्तीचे रक्षण करतो.” ‘‘သဒ္ဓေါ သီလေန သမ္ပန္နော, ဝဒညူ ဝီတမစ္ဆရော; နိစ္စံ မဂ္ဂံ ဝိသောဓေတိ, သောတ္ထာနံ သမ္ပရာယိကံ. “श्रद्धावान, शीलाने संपन्न, दानशूर आणि मत्सररहित मनुष्य परलोकातील कल्याणाचा मार्ग नेहमी शुद्ध करतो.” ‘‘ဣစ္စေတေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ စ, သဒ္ဓဿ ဃရမေသိနော; အက္ခာတာ သစ္စနာမေန, ဥဘယတ္ထ သုခါဝဟာ. “अशा प्रकारे, गृहस्थाश्रम शोधणाऱ्या श्रद्धावान व्यक्तीसाठी हे आठ धर्म दोन्ही लोकांत सुख देणारे आहेत, असे सत्यनाम बुद्ध यांनी सांगितले आहे.” ‘‘ဒိဋ္ဌဓမ္မဟိတတ္ထာယ, သမ္ပရာယသုခါယ စ; ဧဝမေတံ ဂဟဋ္ဌာနံ, စာဂေါ ပုညံ ပဝဍ္ဎတီ’’တိ. ဆဋ္ဌံ; “या जन्मातील हितासाठी आणि परलोकातील सुखासाठी, अशा प्रकारे गृहस्थांचे दान आणि पुण्य वाढत राहते.” ၇. ဣစ္ဆာသုတ္တံ ७. “इच्छासुत्त” ၇၇. တတြ [Pg.143] ခေါ အာယသ္မာ သာရိပုတ္တော ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ – ‘‘အာဝုသော ဘိက္ခဝေါ’’တိ! ‘‘အာဝုသော’’တိ ခေါ တေ ဘိက္ခူ အာယသ္မတော သာရိပုတ္တဿ ပစ္စဿောသုံ. အာယသ္မာ သာရိပုတ္တော ဧတဒဝေါစ – ७७. तेथे आयुष्मान सारिपुत्तांनी भिक्खूंना संबोधित केले – “आवुसो भिक्खूहो!” “आवुसो” असे म्हणून त्या भिक्खूंनी आयुष्मान सारिपुत्तांना प्रतिसाद दिला. आयुष्मान सारिपुत्त म्हणाले – ‘‘အဋ္ဌိမေ, အာဝုသော, ပုဂ္ဂလာ သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနာ လောကသ္မိံ. ကတမေ အဋ္ဌ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော ဥဋ္ဌဟတိ, ဃဋတိ, ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ ဥဋ္ဌဟတော, ဃဋတော, ဝါယမတော လာဘာယ လာဘော နုပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန အလာဘေန သောစတိ ကိလမတိ ပရိဒေဝတိ, ဥရတ္တာဠိံ ကန္ဒတိ, သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတာဝုသော, ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, ဥဋ္ဌဟတိ, ဃဋတိ, ဝါယမတိ လာဘာယ, န စ လာဘီ, သောစီ စ ပရိဒေဝီ စ, စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “मित्रांनो, या जगात आठ प्रकारचे व्यक्ती अस्तित्वात आहेत. कोणते आठ? मित्रांनो, या जगात एकांतात राहणाऱ्या आणि कशातही आसक्त नसलेल्या भिक्खूच्या मनात लाभ मिळवण्याची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभासाठी उद्योग करतो, प्रयत्न करतो, परिश्रम करतो. लाभासाठी उद्योग, प्रयत्न आणि परिश्रम करणाऱ्या त्या भिक्खूला लाभ मिळत नाही. तो त्या लाभ न मिळण्यामुळे शोक करतो, थकून जातो, रडतो, छाती बडवून आक्रोश करतो आणि अत्यंत संभ्रमात पडतो. मित्रांनो, अशा भिक्खूला ‘लाभाची इच्छा ठेवून राहणारा, लाभासाठी उद्योग, प्रयत्न आणि परिश्रम करणारा, परंतु लाभ न मिळवणारा, शोक करणारा, आक्रोश करणारा आणि सद्धर्मापासून च्युत झालेला’ असे म्हटले जाते.” ‘‘ဣဓ ပနာဝုသော, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော ဥဋ္ဌဟတိ, ဃဋတိ, ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ ဥဋ္ဌဟတော ဃဋတော ဝါယမတော လာဘာယ လာဘော ဥပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန လာဘေန မဇ္ဇတိ ပမဇ္ဇတိ ပမာဒမာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတာဝုသော, ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ, လာဘီ စ, မဒီ စ ပမာဒီ စ, စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु मित्रांनो, येथे एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीच्या भिक्खूच्या मनात लाभ मिळवण्याची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभ मिळवण्यासाठी प्रयत्न करतो, उद्योग करतो आणि परिश्रम करतो. प्रयत्न करणाऱ्या, उद्योग करणाऱ्या आणि परिश्रम करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होतो. तो त्या लाभाने मदोन्मत्त होतो, प्रमाद करतो आणि निष्काळजीपणाला प्राप्त होतो. मित्रांनो, अशा भिक्खूला असे म्हटले जाते की, ‘हा भिक्खू लाभ मिळवण्याच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी प्रयत्न करतो, उद्योग करतो, परिश्रम करतो; तो लाभ मिळवणाराही आहे, मदोन्मत्त होणाराही आहे, प्रमादीही आहे आणि सद्धम्मापासून च्युत झालेलाही आहे.’” ‘‘ဣဓ ပနာဝုသော, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ အနုဋ္ဌဟတော, အဃဋတော, အဝါယမတော လာဘာယ လာဘော နုပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန အလာဘေန သောစတိ ကိလမတိ ပရိဒေဝတိ, ဥရတ္တာဠိံ ကန္ဒတိ, သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတာဝုသော, ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ, န စ လာဘီ, သောစီ စ ပရိဒေဝီ စ, စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु मित्रांनो, येथे एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीच्या भिक्खूच्या मनात लाभ मिळवण्याची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभ मिळवण्यासाठी प्रयत्न करत नाही, उद्योग करत नाही आणि परिश्रम करत नाही. प्रयत्न न करणाऱ्या, उद्योग न करणाऱ्या आणि परिश्रम न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होत नाही. तो लाभ न मिळाल्यामुळे शोक करतो, क्लेश पावतो, विलाप करतो, छाती बडवून रडतो आणि संमोहाला प्राप्त होतो. मित्रांनो, अशा भिक्खूला असे म्हटले जाते की, ‘हा भिक्खू लाभ मिळवण्याच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी प्रयत्न करत नाही, उद्योग करत नाही, परिश्रम करत नाही; तो लाभ न मिळवणारा आहे, शोक करणारा आहे, विलाप करणारा आहे आणि सद्धम्मापासून च्युत झालेला आहे.’” ‘‘ဣဓ ပနာဝုသော, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ အနုဋ္ဌဟတော, အဃဋတော, အဝါယမတော လာဘာယ လာဘော ဥပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန လာဘေန မဇ္ဇတိ ပမဇ္ဇတိ ပမာဒမာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတာဝုသော, ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, န ဥဋ္ဌဟတိ န [Pg.144] ဃဋတိ န ဝါယမတိ လာဘာယ, လာဘီ စ, မဒီ စ ပမာဒီ စ, စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु मित्रांनो, येथे एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीच्या भिक्खूच्या मनात लाभ मिळवण्याची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभ मिळवण्यासाठी प्रयत्न करत नाही, उद्योग करत नाही आणि परिश्रम करत नाही. प्रयत्न न करणाऱ्या, उद्योग न करणाऱ्या आणि परिश्रम न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होतो. तो त्या लाभाने मदोन्मत्त होतो, प्रमाद करतो आणि निष्काळजीपणाला प्राप्त होतो. मित्रांनो, अशा भिक्खूला असे म्हटले जाते की, ‘हा भिक्खू लाभ मिळवण्याच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी प्रयत्न करत नाही, उद्योग करत नाही, परिश्रम करत नाही; तो लाभ मिळवणारा आहे, मदोन्मत्त होणारा आहे, प्रमादी आहे आणि सद्धम्मापासून च्युत झालेला आहे.’” ‘‘ဣဓ ပနာဝုသော, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော ဥဋ္ဌဟတိ, ဃဋတိ, ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ ဥဋ္ဌဟတော, ဃဋတော, ဝါယမတော လာဘာယ, လာဘော နုပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန အလာဘေန န သောစတိ န ကိလမတိ န ပရိဒေဝတိ, န ဥရတ္တာဠိံ ကန္ဒတိ, န သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတာဝုသော, ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, ဥဋ္ဌဟတိ ဃဋတိ ဝါယမတိ လာဘာယ, န စ လာဘီ, န စ သောစီ န စ ပရိဒေဝီ, အစ္စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु मित्रांनो, येथे एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीच्या भिक्खूच्या मनात लाभ मिळवण्याची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभ मिळवण्यासाठी प्रयत्न करतो, उद्योग करतो आणि परिश्रम करतो. प्रयत्न करणाऱ्या, उद्योग करणाऱ्या आणि परिश्रम करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होत नाही. तो लाभ न मिळाल्यामुळे शोक करत नाही, क्लेश पावत नाही, विलाप करत नाही, छाती बडवून रडत नाही आणि संमोहाला प्राप्त होत नाही. मित्रांनो, अशा भिक्खूला असे म्हटले जाते की, ‘हा भिक्खू लाभ मिळवण्याच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी प्रयत्न करतो, उद्योग करतो, परिश्रम करतो; तो लाभ न मिळवणारा आहे, शोक न करणारा आहे, विलाप न करणारा आहे आणि सद्धम्मापासून च्युत न झालेला आहे.’” ‘‘ဣဓ ပနာဝုသော, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော ဥဋ္ဌဟတိ, ဃဋတိ, ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ ဥဋ္ဌဟတော, ဃဋတော, ဝါယမတော လာဘာယ, လာဘော ဥပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန လာဘေန န မဇ္ဇတိ န ပမဇ္ဇတိ န ပမာဒမာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတာဝုသော, ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, ဥဋ္ဌဟတိ, ဃဋတိ, ဝါယမတိ လာဘာယ, လာဘီ စ, န စ မဒီ န စ ပမာဒီ, အစ္စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु मित्रांनो, येथे एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीच्या भिक्खूच्या मनात लाभ मिळवण्याची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभ मिळवण्यासाठी प्रयत्न करतो, उद्योग करतो आणि परिश्रम करतो. प्रयत्न करणाऱ्या, उद्योग करणाऱ्या आणि परिश्रम करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होतो. तो त्या लाभाने मदोन्मत्त होत नाही, प्रमाद करत नाही आणि निष्काळजीपणाला प्राप्त होत नाही. मित्रांनो, अशा भिक्खूला असे म्हटले जाते की, ‘हा भिक्खू लाभ मिळवण्याच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी प्रयत्न करतो, उद्योग करतो, परिश्रम करतो; तो लाभ मिळवणारा आहे, मदोन्मत्त न होणारा आहे, प्रमादी नसणारा आहे आणि सद्धम्मापासून च्युत न झालेला आहे.’” ‘‘ဣဓ ပနာဝုသော, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ အနုဋ္ဌဟတော, အဃဋတော, အဝါယမတော လာဘာယ, လာဘော နုပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန အလာဘေန န သောစတိ န ကိလမတိ န ပရိဒေဝတိ, န ဥရတ္တာဠိံ ကန္ဒတိ, န သမ္မောဟံ အာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတာဝုသော, ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ, န စ လာဘီ, န စ သောစီ န စ ပရိဒေဝီ, အစ္စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’’’. “परंतु मित्रांनो, येथे एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीच्या भिक्खूच्या मनात लाभ मिळवण्याची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभ मिळवण्यासाठी प्रयत्न करत नाही, उद्योग करत नाही आणि परिश्रम करत नाही. प्रयत्न न करणाऱ्या, उद्योग न करणाऱ्या आणि परिश्रम न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होत नाही. तो लाभ न मिळाल्यामुळे शोक करत नाही, क्लेश पावत नाही, विलाप करत नाही, छाती बडवून रडत नाही आणि संमोहाला प्राप्त होत नाही. मित्रांनो, अशा भिक्खूला असे म्हटले जाते की, ‘हा भिक्खू लाभ मिळवण्याच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी प्रयत्न करत नाही, उद्योग करत नाही, परिश्रम करत नाही; तो लाभ न मिळवणारा आहे, शोक न करणारा आहे, विलाप न करणारा आहे आणि सद्धम्मापासून च्युत न झालेला आहे.’” ‘‘ဣဓ ပနာဝုသော, ဘိက္ခုနော ပဝိဝိတ္တဿ ဝိဟရတော နိရာယတ္တဝုတ္တိနော ဣစ္ဆာ ဥပ္ပဇ္ဇတိ လာဘာယ. သော န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ. တဿ အနုဋ္ဌဟတော, အဃဋတော, အဝါယမတော လာဘာယ, လာဘော ဥပ္ပဇ္ဇတိ. သော တေန လာဘေန န မဇ္ဇတိ န ပမဇ္ဇတိ န ပမာဒမာပဇ္ဇတိ. အယံ ဝုစ္စတာဝုသော, ‘ဘိက္ခု ဣစ္ဆော ဝိဟရတိ လာဘာယ, န ဥဋ္ဌဟတိ, န ဃဋတိ, န ဝါယမတိ လာဘာယ, လာဘီ စ, န စ မဒီ န စ ပမာဒီ, အစ္စုတော စ သဒ္ဓမ္မာ’. ဣမေ ခေါ, အာဝုသော, အဋ္ဌ ပုဂ္ဂလာ သန္တော သံဝိဇ္ဇမာနာ လောကသ္မိ’’န္တိ. သတ္တမံ. “परंतु मित्रांनो, येथे एकांतात राहणाऱ्या आणि अनासक्त वृत्तीच्या भिक्खूच्या मनात लाभ मिळवण्याची इच्छा उत्पन्न होते. तो लाभ मिळवण्यासाठी प्रयत्न करत नाही, उद्योग करत नाही आणि परिश्रम करत नाही. प्रयत्न न करणाऱ्या, उद्योग न करणाऱ्या आणि परिश्रम न करणाऱ्या त्याला लाभ प्राप्त होतो. तो त्या लाभाने मदोन्मत्त होत नाही, प्रमाद करत नाही आणि निष्काळजीपणाला प्राप्त होत नाही. मित्रांनो, अशा भिक्खूला असे म्हटले जाते की, ‘हा भिक्खू लाभ मिळवण्याच्या इच्छेने राहतो, लाभासाठी प्रयत्न करत नाही, उद्योग करत नाही, परिश्रम करत नाही; तो लाभ मिळवणारा आहे, मदोन्मत्त न होणारा आहे, प्रमादी नसणारा आहे आणि सद्धम्मापासून च्युत न झालेला आहे.’ मित्रांनो, हे आठ प्रकारचे व्यक्ती जगात अस्तित्वात आहेत.” सातवे सुत्त समाप्त. ၈. အလံသုတ္တံ ८. अलम सुत्त ၇၈. တတြ [Pg.145] ခေါ အာယသ္မာ သာရိပုတ္တော ဘိက္ခူ အာမန္တေသိ…ပေ… ဆဟာဝုသော, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, အလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ ဆဟိ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခု ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ ကလျာဏဝါက္ကရဏော, ပေါရိယာ ဝါစာယ သမန္နာဂတော ဝိဿဋ္ဌာယ အနေလဂဠာယ အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; သန္ဒဿကော စ ဟောတိ သမာဒပကော သမုတ္တေဇကော သမ္ပဟံသကော သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, အာဝုသော, ဆဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, အလံ ပရေသံ. ७८. तेथे आयुष्यमान सारिपुत्तांनी भिक्खूंना संबोधित केले... पे... “मित्रांनो, सहा गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःचे हित साधण्यास समर्थ असतो आणि इतरांचेही हित साधण्यास समर्थ असतो. कोणत्या सहा गुणांनी? मित्रांनो, येथे भिक्खू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा असतो; ऐकलेले धर्म लक्षात ठेवणारा (धारण करणारा) असतो; धारण केलेल्या धर्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा असतो; अर्थ जाणून आणि धर्म जाणून धर्माला अनुकूल असे आचरण करणारा असतो; कल्याणकारी वाणी असलेला आणि मधुर आवाजाचा असतो, सुसंस्कृत, स्पष्ट, दोषरहित आणि अर्थ स्पष्ट करणाऱ्या वाणीने युक्त असतो; आणि आपल्या सहकाऱ्यांना (सधर्माचाऱ्यांना) उपदेशाने मार्गदर्शन करणारा, प्रेरित करणारा, उत्साहित करणारा आणि आनंदित करणारा असतो. मित्रांनो, या सहा गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःचे हित साधण्यास समर्थ असतो आणि इतरांचेही हित साधण्यास समर्थ असतो.” ‘‘ပဉ္စဟာဝုသော, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, အလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ ပဉ္စဟိ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ…ပေ… သန္ဒဿကော စ ဟောတိ…ပေ… သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, အာဝုသော, ပဉ္စဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, အလံ ပရေသံ. “मित्रांनो, पाच गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःचे हित साधण्यास समर्थ असतो आणि इतरांचेही हित साधण्यास समर्थ असतो. कोणत्या पाच गुणांनी? मित्रांनो, येथे भिक्खू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो; परंतु ऐकलेले धर्म लक्षात ठेवणारा (धारण करणारा) असतो; धारण केलेल्या धर्मांच्या अर्थाचे परीक्षण करणारा असतो; अर्थ जाणून आणि धर्म जाणून धर्माला अनुकूल असे आचरण करणारा असतो; कल्याणकारी वाणी असलेला असतो... पे... मार्गदर्शन करणारा असतो... पे... सधर्माचाऱ्यांना. मित्रांनो, या पाच गुणांनी युक्त असलेला भिक्खू स्वतःचे हित साधण्यास समर्थ असतो आणि इतरांचेही हित साधण्यास समर्थ असतो.” ‘‘စတူဟာဝုသော, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ စတူဟိ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခု ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; နော စ ကလျာဏဝါစော ဟောတိ…ပေ… နော စ သန္ဒဿကော ဟောတိ…ပေ… သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, အာဝုသော, စတူဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. “मित्रांनो, चार गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो. कोणत्या चार गुणांनी? मित्रांनो, येथे भिक्षू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा असतो; ऐकलेले उपदेश लक्षात ठेवणारा असतो; लक्षात ठेवलेल्या उपदेशांच्या अर्थाचे चिंतन करणारा असतो; आणि अर्थ जाणून व उपदेश जाणून धर्मानुकूल आचरण करणारा असतो. परंतु, तो मधुर भाषी नसतो... आणि आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा नसतो. मित्रांनो, या चार गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो.” ‘‘စတူဟာဝုသော, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. ကတမေဟိ စတူဟိ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခု ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; နော စ ဓာတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; နော စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ…ပေ… သန္ဒဿကော [Pg.146] စ ဟောတိ…ပေ… သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, အာဝုသော, စတူဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. “मित्रांनो, चार गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो. कोणत्या चार गुणांनी? मित्रांनो, येथे भिक्षू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा असतो; ऐकलेले उपदेश लक्षात ठेवणारा असतो; परंतु लक्षात ठेवलेल्या उपदेशांच्या अर्थाचे चिंतन करणारा नसतो; आणि अर्थ जाणून व उपदेश जाणून धर्मानुकूल आचरण करणारा नसतो. परंतु, तो मधुर भाषी असतो... आणि आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा असतो. मित्रांनो, या चार गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो.” ‘‘တီဟာဝုသော, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ တီဟိ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; နော စ ကလျာဏဝါစော ဟောတိ…ပေ… နော စ သန္ဒဿကော ဟောတိ…ပေ… သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, အာဝုသော, တီဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. “मित्रांनो, तीन गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो. कोणत्या तीन गुणांनी? मित्रांनो, येथे भिक्षू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो; परंतु ऐकलेले उपदेश लक्षात ठेवणारा असतो; लक्षात ठेवलेल्या उपदेशांच्या अर्थाचे चिंतन करणारा असतो; आणि अर्थ जाणून व उपदेश जाणून धर्मानुकूल आचरण करणारा असतो. परंतु, तो मधुर भाषी नसतो... आणि आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा नसतो. मित्रांनो, या तीन गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो.” ‘‘တီဟာဝုသော, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. ကတမေဟိ တီဟိ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; သုတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; နော စ ဓာတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; နော စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ…ပေ… အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ, သန္ဒဿကော စ ဟောတိ…ပေ… သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, အာဝုသော, တီဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. “मित्रांनो, three गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो. कोणत्या तीन गुणांनी? मित्रांनो, येथे भिक्षू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो; परंतु ऐकलेले उपदेश लक्षात ठेवणारा असतो; परंतु लक्षात ठेवलेल्या उपदेशांच्या अर्थाचे चिंतन करणारा नसतो; आणि अर्थ जाणून व उपदेश जाणून धर्मानुकूल आचरण करणारा नसतो. परंतु, तो मधुर भाषी असतो... अर्थ स्पष्ट करणारी वाणी बोलणारा असतो, आणि आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा असतो. मित्रांनो, या तीन गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो.” ‘‘ဒွီဟာဝုသော, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. ကတမေဟိ ဒွီဟိ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; နော စ သုတာနံ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; နော စ ကလျာဏဝါစော ဟောတိ…ပေ… နော စ သန္ဒဿကော ဟောတိ…ပေ… သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, အာဝုသော, ဒွီဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ အတ္တနော, နာလံ ပရေသံ. “मित्रांनो, दोन गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो. कोणत्या दोन गुणांनी? मित्रांनो, येथे भिक्षू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो; ऐकलेले उपदेश लक्षात ठेवणारा नसतो; परंतु लक्षात ठेवलेल्या उपदेशांच्या अर्थाचे चिंतन करणारा असतो; आणि अर्थ जाणून व उपदेश जाणून धर्मानुकूल आचरण करणारा असतो. परंतु, तो मधुर भाषी नसतो... आणि आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा नसतो. मित्रांनो, या दोन गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो.” ‘‘ဒွီဟာဝုသော, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော. ကတမေဟိ ဒွီဟိ? ဣဓာဝုသော, ဘိက္ခု န ဟေဝ ခေါ ခိပ္ပနိသန္တိ စ ဟောတိ ကုသလေသု ဓမ္မေသု; နော စ သုတာနံ ဓမ္မာနံ ဓာရဏဇာတိကော ဟောတိ; နော စ ဓာတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထူပပရိက္ခိတာ ဟောတိ; နော စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ; ကလျာဏဝါစော စ ဟောတိ ကလျာဏဝါက္ကရဏော[Pg.147], ပေါရိယာ ဝါစာယ သမန္နာဂတော ဝိဿဋ္ဌာယ အနေလဂဠာယ အတ္ထဿ ဝိညာပနိယာ; သန္ဒဿကော စ ဟောတိ သမာဒပကော သမုတ္တေဇကော သမ္ပဟံသကော သဗြဟ္မစာရီနံ. ဣမေဟိ ခေါ, အာဝုသော, ဒွီဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတော ဘိက္ခု အလံ ပရေသံ, နာလံ အတ္တနော’’တိ. အဋ္ဌမံ. “मित्रांनो, दोन गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो. कोणत्या दोन गुणांनी? मित्रांनो, येथे भिक्षू कुशल धर्मांचे त्वरित आकलन करणारा नसतो; ऐकलेले उपदेश लक्षात ठेवणारा नसतो; लक्षात ठेवलेल्या उपदेशांच्या अर्थाचे चिंतन करणारा नसतो; आणि अर्थ जाणून व उपदेश जाणून धर्मानुकूल आचरण करणारा नसतो. परंतु, तो मधुर भाषी असतो, मधुर आवाजाचा असतो, सुसंस्कृत वाणीने युक्त असतो, जी स्पष्ट, निर्दोष आणि अर्थ समजण्यास सुलभ असते; आणि तो आपल्या सहधर्माचाऱ्यांना उपदेश करणारा, त्यांना धर्मात प्रवृत्त करणारा, त्यांना उत्साहित करणारा आणि आनंदित करणारा असतो. मित्रांनो, या दोन गुणांनी युक्त असलेला भिक्षू इतरांच्या कल्याणासाठी समर्थ असतो, परंतु स्वतःच्या कल्याणासाठी समर्थ नसतो.” आठवे सूक्त समाप्त. ၉. ပရိဟာနသုတ္တံ ९. परिहान सुत्त ၇၉. ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မာ သေခဿ ဘိက္ခုနော ပရိဟာနာယ သံဝတ္တန္တိ. ကတမေ အဋ္ဌ? ကမ္မာရာမတာ, ဘဿာရာမတာ, နိဒ္ဒါရာမတာ, သင်္ဂဏိကာရာမတာ, ဣန္ဒြိယေသု အဂုတ္တဒွါရတာ, ဘောဇနေ အမတ္တညုတာ, သံသဂ္ဂါရာမတာ, ပပဉ္စာရာမတာ – ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဓမ္မာ သေခဿ ဘိက္ခုနော ပရိဟာနာယ သံဝတ္တန္တိ. ७९. “भिक्षूंनो, हे आठ धर्म शैक्ष भिक्षूच्या ऱ्हासाला कारणीभूत ठरतात. कोणते आठ? कामात रममाण होणे, गप्पागोष्टींमध्ये रममाण होणे, झोपण्यात रममाण होणे, घोळक्यात रममाण होणे, इंद्रियांचे द्वार असंयत ठेवणे, भोजनात प्रमाण न जाणणे, संसर्गात रममाण होणे, आणि प्रपंचात रममाण होणे – भिक्षूंनो, हे आठ धर्म शैक्ष भिक्षूच्या ऱ्हासाला कारणीभूत ठरतात.” ‘‘အဋ္ဌိမေ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မာ သေခဿ ဘိက္ခုနော အပရိဟာနာယ သံဝတ္တန္တိ. ကတမေ အဋ္ဌ? န ကမ္မာရာမတာ, န ဘဿာရာမတာ, န နိဒ္ဒါရာမတာ, န သင်္ဂဏိကာရာမတာ, ဣန္ဒြိယေသု ဂုတ္တဒွါရတာ, ဘောဇနေ မတ္တညုတာ, အသံသဂ္ဂါရာမတာ, နိပ္ပပဉ္စာရာမတာ – ဣမေ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ဓမ္မာ သေခဿ ဘိက္ခုနော အပရိဟာနာယ သံဝတ္တန္တီ’’တိ. နဝမံ. “भिक्षूंनो, हे आठ धर्म शैक्ष भिक्षूच्या अ-ऱ्हासाला (उन्नतीला) कारणीभूत ठरतात. कोणते आठ? कामात रममाण न होणे, गप्पागोष्टींमध्ये रममाण न होणे, झोपण्यात रममाण न होणे, घोळक्यात रममाण न होणे, इंद्रियांचे द्वार संयत ठेवणे, भोजनात प्रमाण जाणणे, संसर्गात रममाण न होणे, आणि प्रपंचापासून अलिप्त राहणे – भिक्षूंनो, हे आठ धर्म शैक्ष भिक्षूच्या अ-ऱ्हासाला कारणीभूत ठरतात.” नववे सूक्त समाप्त. ၁၀. ကုသီတာရမ္ဘဝတ္ထုသုတ္တံ १०. कुसीत-आरंभवत्थु सुत्त ၈၀. ‘‘အဋ္ဌိမာနိ, ဘိက္ခဝေ, ကုသီတဝတ္ထူနိ. ကတမာနိ အဋ္ဌ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ ကမ္မံ ကတ္တဗ္ဗံ ဟောတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘ကမ္မံ ခေါ မေ ကတ္တဗ္ဗံ ဘဝိဿတိ. ကမ္မံ ခေါ ပန မေ ကရောန္တဿ ကာယော ကိလမိဿတိ. ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’တိ. သော နိပဇ္ဇတိ, န ဝီရိယံ အာရဘတိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ပဌမံ ကုသီတဝတ္ထု. ८०. “भिक्षूंनो, आळसाची ही आठ कारणे आहेत. कोणती आठ? भिक्षूंनो, येथे भिक्षूला काही काम करायचे असते. तेव्हा त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मला काम करायचे आहे. काम करताना माझे शरीर थकून जाईल. चला, मी आता झोपतो.’ तो झोपून राहतो. जे अद्याप प्राप्त झाले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अद्याप साध्य झाले नाही ते साध्य करण्यासाठी, आणि ज्याचा अद्याप साक्षात्कार झाला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी तो वीर्य (प्रयत्न) आरंभत नाही. भिक्षूंनो, हे आळसाचे पहिले कारण आहे.” ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ ကမ္မံ ကတံ ဟောတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟံ ခေါ ကမ္မံ အကာသိံ. ကမ္မံ ခေါ ပန မေ ကရောန္တဿ ကာယော ကိလန္တော. ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’တိ. သော နိပဇ္ဇတိ, န ဝီရိယံ အာရဘတိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ဒုတိယံ ကုသီတဝတ္ထု. “पुन्हा दुसरे म्हणजे, भिक्षूंनो, भिक्षूने काम पूर्ण केलेले असते. तेव्हा त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी काम पूर्ण केले आहे. काम केल्यामुळे माझे शरीर थकले आहे. चला, मी आता झोपतो.’ तो झोपून राहतो. जे अद्याप प्राप्त झाले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अद्याप साध्य झाले नाही ते साध्य करण्यासाठी, आणि ज्याचा अद्याप साक्षात्कार झाला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी तो वीर्य आरंभत नाही. भिक्षूंनो, हे आळसाचे दुसरे कारण आहे.” ‘‘ပုန [Pg.148] စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ မဂ္ဂေါ ဂန္တဗ္ဗော ဟောတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘မဂ္ဂေါ မေ ဂန္တဗ္ဗော ဘဝိဿတိ. မဂ္ဂံ ခေါ ပန မေ ဂစ္ဆန္တဿ ကာယော ကိလမိဿတိ. ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’တိ. သော နိပဇ္ဇတိ, န ဝီရိယံ အာရဘတိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, တတိယံ ကုသီတဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षूला प्रवासाला जायचे असते. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मला प्रवासाला जावे लागेल. प्रवास करताना माझे शरीर थकून जाईल. चला, मी आता झोपतो.’ तो झोपतो; जे प्राप्त झाले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अधिगत झाले नाही ते अधिगत करण्यासाठी, ज्याचा साक्षात्कार झाला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी तो वीर्य आरंभत नाही. भिक्षूंनो, हे तिसरे आळसाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ မဂ္ဂေါ ဂတော ဟောတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟံ ခေါ မဂ္ဂံ အဂမာသိံ. မဂ္ဂံ ခေါ ပန မေ ဂစ္ဆန္တဿ ကာယော ကိလန္တော. ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’တိ. သော နိပဇ္ဇတိ, န ဝီရိယံ အာရဘတိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယ. ဣဒံ ဘိက္ခဝေ, စတုတ္ထံ ကုသီတဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षूने प्रवास केलेला असतो. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी प्रवास केला आहे. प्रवास केल्यामुळे माझे शरीर थकले आहे. चला, मी आता झोपतो.’ तो झोपतो; जे प्राप्त झाले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अधिगत झाले नाही ते अधिगत करण्यासाठी, ज्याचा साक्षात्कार झाला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी तो वीर्य आरंभत नाही. भिक्षूंनो, हे चौथे आळसाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဂါမံ ဝါ နိဂမံ ဝါ ပိဏ္ဍာယ စရန္တော န လဘတိ လူခဿ ဝါ ပဏီတဿ ဝါ ဘောဇနဿ ယာဝဒတ္ထံ ပါရိပူရိံ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟံ ခေါ ဂါမံ ဝါ နိဂမံ ဝါ ပိဏ္ဍာယ စရန္တော နာလတ္ထံ လူခဿ ဝါ ပဏီတဿ ဝါ ဘောဇနဿ ယာဝဒတ္ထံ ပါရိပူရိံ. တဿ မေ ကာယော ကိလန္တော အကမ္မညော. ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’တိ. သော နိပဇ္ဇတိ, န ဝီရိယံ အာရဘတိ…ပေ… ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ပဉ္စမံ ကုသီတဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षू गावामध्ये किंवा नगरामध्ये पिंडपातासाठी फिरत असताना त्याला हवे तितके पोटभर कोरडे किंवा उत्तम भोजन मिळत नाही. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी गावामध्ये किंवा नगरामध्ये पिंडपातासाठी फिरलो, पण मला हवे तितके पोटभर कोरडे किंवा उत्तम भोजन मिळाले नाही. माझे शरीर थकले आहे आणि अकर्मण्य झाले आहे. चला, मी आता झोपतो.’ तो झोपतो आणि वीर्य आरंभत नाही... भिक्षूंनो, हे पाचवे आळसाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဂါမံ ဝါ နိဂမံ ဝါ ပိဏ္ဍာယ စရန္တော လဘတိ လူခဿ ဝါ ပဏီတဿ ဝါ ဘောဇနဿ ယာဝဒတ္ထံ ပါရိပူရိံ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟံ ခေါ ဂါမံ ဝါ နိဂမံ ဝါ ပိဏ္ဍာယ စရန္တော အလတ္ထံ လူခဿ ဝါ ပဏီတဿ ဝါ ဘောဇနဿ ယာဝဒတ္ထံ ပါရိပူရိံ. တဿ မေ ကာယော ဂရုကော အကမ္မညော မာသာစိတံ မညေ. ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’တိ. သော နိပဇ္ဇတိ, န ဝီရိယံ အာရဘတိ…ပေ… ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ဆဋ္ဌံ ကုသီတဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षू गावामध्ये किंवा नगरामध्ये पिंडपातासाठी फिरत असताना त्याला हवे तितके पोटभर कोरडे किंवा उत्तम भोजन मिळते. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी गावामध्ये किंवा नगरामध्ये पिंडपातासाठी फिरलो आणि मला हवे तितके पोटभर कोरडे किंवा उत्तम भोजन मिळाले. माझे शरीर ओल्या उडदाच्या ढिगासारखे जड आणि अकर्मण्य झाले आहे. चला, मी आता झोपतो.’ तो झोपतो आणि वीर्य आरंभत नाही... भिक्षूंनो, हे सहावे आळसाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ဥပ္ပန္နော ဟောတိ အပ္ပမတ္တကော အာဗာဓော. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘ဥပ္ပန္နော ခေါ မေ အယံ အပ္ပမတ္တကော အာဗာဓော အတ္ထိ ကပ္ပော နိပဇ္ဇိတုံ. ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’တိ. သော နိပဇ္ဇတိ, န ဝီရိယံ အာရဘတိ…ပေ… ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တမံ ကုသီတဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षूला थोडासा आजार उद्भवतो. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मला हा थोडासा आजार उद्भवला आहे, झोपून राहणे योग्य आहे. चला, मी आता झोपतो.’ तो झोपतो आणि वीर्य आरंभत नाही... भिक्षूंनो, हे सातवे आळसाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဂိလာနာ ဝုဋ္ဌိတော ဟောတိ အစိရဝုဋ္ဌိတော ဂေလညာ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟံ ခေါ ဂိလာနာ ဝုဋ္ဌိတော အစိရဝုဋ္ဌိတော ဂေလညာ. တဿ မေ ကာယော ဒုဗ္ဗလော အကမ္မညော. ဟန္ဒာဟံ နိပဇ္ဇာမီ’တိ[Pg.149]. သော နိပဇ္ဇတိ, န ဝီရိယံ အာရဘတိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌမံ ကုသီတဝတ္ထု. ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ ကုသီတဝတ္ထူနိ. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षू आजारातून बरा झालेला असतो, आजारातून उठून फार काळ झालेला नसतो. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी आजारातून बरा झालो आहे, आजारातून उठून फार काळ झालेला नाही. माझे शरीर अजूनही दुर्बळ आणि अकर्मण्य आहे. चला, मी आता झोपतो.’ तो झोपतो; जे प्राप्त झाले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अधिगत झाले नाही ते अधिगत करण्यासाठी, ज्याचा साक्षात्कार झाला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी तो वीर्य आरंभत नाही. भिक्षूंनो, हे आठवे आळसाचे कारण आहे. भिक्षूंनो, ही आठ आळसाची कारणे आहेत. ‘‘အဋ္ဌိမာနိ, ဘိက္ခဝေ, အာရမ္ဘဝတ္ထူနိ. ကတမာနိ အဋ္ဌ? ဣဓ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ ကမ္မံ ကတ္တဗ္ဗံ ဟောတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘ကမ္မံ ခေါ မေ ကတ္တဗ္ဗံ ဘဝိဿတိ. ကမ္မံ ခေါ မယာ ကရောန္တေန န သုကရံ ဗုဒ္ဓါနံ သာသနံ မနသိ ကာတုံ. ဟန္ဒာဟံ ပဋိကစ္စေဝ ဝီရိယံ အာရဘာမိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယာ’တိ. သော ဝီရိယံ အာရဘတိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ပဌမံ အာရမ္ဘဝတ္ထု. भिक्षूंनो, ही आठ वीर्य आरंभाची कारणे आहेत. कोणती आठ? येथे, भिक्षूंनो, भिक्षूला काही काम करायचे असते. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मला काम करावे लागणार आहे. काम करत असताना बुद्धांच्या शासनाचे मनन करणे सोपे असणार नाही. चला, मी आधीच वीर्य आरंभतो, जेणेकरून जे प्राप्त झाले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अधिगत झाले नाही ते अधिगत करण्यासाठी, ज्याचा साक्षात्कार झाला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी.’ तो जे प्राप्त झाले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अधिगत झाले नाही ते अधिगत करण्यासाठी, ज्याचा साक्षात्कार झाला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी वीर्य आरंभतो. भिक्षूंनो, हे पहिले वीर्य आरंभाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ ကမ္မံ ကတံ ဟောတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟံ ခေါ ကမ္မံ အကာသိံ. ကမ္မံ ခေါ ပနာဟံ ကရောန္တော နာသက္ခိံ ဗုဒ္ဓါနံ သာသနံ မနသိ ကာတုံ. ဟန္ဒာဟံ ဝီရိယံ အာရဘာမိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယာ’တိ. သော ဝီရိယံ အာရဘတိ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ဒုတိယံ အာရမ္ဘဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षूने काम पूर्ण केलेले असते. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी काम पूर्ण केले आहे. काम करत असताना मला बुद्धांच्या शासनाचे मनन करणे शक्य झाले नाही. चला, मी आता वीर्य आरंभतो, जेणेकरून जे प्राप्त झाले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अधिगत झाले नाही ते अधिगत करण्यासाठी, ज्याचा साक्षात्कार झाला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी.’ तो वीर्य आरंभतो. भिक्षूंनो, हे दुसरे वीर्य आरंभाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ မဂ္ဂေါ ဂန္တဗ္ဗော ဟောတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – မဂ္ဂေါ ခေါ မေ ဂန္တဗ္ဗော ဘဝိဿတိ. မဂ္ဂံ ခေါ ပန မေ ဂစ္ဆန္တေန န သုကရံ ဗုဒ္ဓါနံ သာသနံ မနသိ ကာတုံ. ဟန္ဒာဟံ ဝီရိယံ…ပေ… ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, တတိယံ အာရမ္ဘဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षूला प्रवासाला जायचे असते. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मला प्रवासाला जावे लागणार आहे. प्रवास करत असताना बुद्धांच्या शासनाचे मनन करणे सोपे असणार नाही. चला, मी आता वीर्य आरंभतो... भिक्षूंनो, हे तिसरे वीर्य आरंभाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ မဂ္ဂေါ ဂတော ဟောတိ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – အဟံ ခေါ မဂ္ဂံ အဂမာသိံ. မဂ္ဂံ ခေါ ပနာဟံ ဂစ္ဆန္တော နာသက္ခိံ ဗုဒ္ဓါနံ သာသနံ မနသိ ကာတုံ. ဟန္ဒာဟံ ဝီရိယံ အာရဘာမိ…ပေ… ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, စတုတ္ထံ အာရမ္ဘဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षूने प्रवास केलेला असतो. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी प्रवास केला आहे. प्रवास करत असताना मला बुद्धांच्या शासनाचे मनन करणे शक्य झाले नाही. चला, मी आता वीर्य आरंभतो... भिक्षूंनो, हे चौथे वीर्य आरंभाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဂါမံ ဝါ နိဂမံ ဝါ ပိဏ္ဍာယ စရန္တော န လဘတိ လူခဿ ဝါ ပဏီတဿ ဝါ ဘောဇနဿ ယာဝဒတ္ထံ ပါရိပူရိံ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – အဟံ ခေါ ဂါမံ ဝါ နိဂမံ ဝါ ပိဏ္ဍာယ စရန္တော နာလတ္ထံ လူခဿ ဝါ ပဏီတဿ ဝါ ဘောဇနဿ ယာဝဒတ္ထံ ပါရိပူရိံ. တဿ မေ ကာယော လဟုကော ကမ္မညော. ဟန္ဒာဟံ ဝီရိယံ အာရဘာမိ…ပေ… ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ပဉ္စမံ အာရမ္ဘဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षू गावामध्ये किंवा नगरामध्ये पिंडपातासाठी फिरत असताना त्याला हवे तितके पोटभर कोरडे किंवा उत्तम भोजन मिळत नाही. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी गावामध्ये किंवा नगरामध्ये पिंडपातासाठी फिरलो, पण मला हवे तितके पोटभर कोरडे किंवा उत्तम भोजन मिळाले नाही. परंतु माझे शरीर हलके आणि कर्मण्य आहे. चला, मी आता वीर्य आरंभतो... भिक्षूंनो, हे पाचवे वीर्य आरंभाचे कारण आहे. ‘‘ပုန [Pg.150] စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဂါမံ ဝါ နိဂမံ ဝါ ပိဏ္ဍာယ စရန္တော လဘတိ လူခဿ ဝါ ပဏီတဿ ဝါ ဘောဇနဿ ယာဝဒတ္ထံ ပါရိပူရိံ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – အဟံ ခေါ ဂါမံ ဝါ နိဂမံ ဝါ ပိဏ္ဍာယ စရန္တော အလတ္ထံ လူခဿ ဝါ ပဏီတဿ ဝါ ဘောဇနဿ ယာဝဒတ္ထံ ပါရိပူရိံ. တဿ မေ ကာယော ဗလဝါ ကမ္မညော. ဟန္ဒာဟံ ဝီရိယံ အာရဘာမိ…ပေ… ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, ဆဋ္ဌံ အာရမ္ဘဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षू गावामध्ये किंवा नगरामध्ये पिंडपातासाठी फिरत असताना त्याला हवे तितके पोटभर कोरडे किंवा उत्तम भोजन मिळते. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मी गावामध्ये किंवा नगरामध्ये पिंडपातासाठी फिरलो आणि मला हवे तितके पोटभर कोरडे किंवा उत्तम भोजन मिळाले. माझे शरीर बलवान आणि कर्मण्य आहे. चला, मी आता वीर्य आरंभतो... भिक्षूंनो, हे सहावे वीर्य आरंभाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနော ဥပ္ပန္နော ဟောတိ အပ္ပမတ္တကော အာဗာဓော. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ဥပ္ပန္နော ခေါ မေ အယံ အပ္ပမတ္တကော အာဗာဓော. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ ဝိဇ္ဇတိ ယံ မေ အာဗာဓော ပဝဍ္ဎေယျ. ဟန္ဒာဟံ ပဋိကစ္စေဝ ဝီရိယံ အာရဘာမိ…ပေ… ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, သတ္တမံ အာရမ္ဘဝတ္ထု. पुन्हा दुसरे असे की, भिक्षूंनो, भिक्षूला थोडासा आजार उद्भवतो. त्याच्या मनात असा विचार येतो – ‘मला हा थोडासा आजार उद्भवला आहे. अशी शक्यता आहे की माझा आजार वाढू शकतो. चला, मी आधीच वीर्य आरंभतो... भिक्षूंनो, हे सातवे वीर्य आरंभाचे कारण आहे. ‘‘ပုန စပရံ, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခု ဂိလာနာ ဝုဋ္ဌိတော ဟောတိ အစိရဝုဋ္ဌိတော ဂေလညာ. တဿ ဧဝံ ဟောတိ – ‘အဟံ ခေါ ဂိလာနာ ဝုဋ္ဌိတော အစိရဝုဋ္ဌိတော ဂေလညာ. ဌာနံ ခေါ ပနေတံ ဝိဇ္ဇတိ ယံ မေ အာဗာဓော ပစ္စုဒါဝတ္တေယျ. ဟန္ဒာဟံ ပဋိကစ္စေဝ ဝီရိယံ အာရဘာမိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယာ’တိ. သော ဝီရိယံ အာရဘတိ အပ္ပတ္တဿ ပတ္တိယာ အနဓိဂတဿ အဓိဂမာယ အသစ္ဆိကတဿ သစ္ဆိကိရိယာယ. ဣဒံ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌမံ အာရမ္ဘဝတ္ထု. ဣမာနိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌ အာရမ္ဘဝတ္ထူနီ’’တိ. ဒသမံ. “पुन्हा, भिक्खूूंनो, एखादा भिक्खू आजारातून बरा होतो, आजारातून बरा होऊन त्याला फार काळ झालेला नसतो. त्याला असा विचार येतो – ‘मी आजारातून बरा झालो आहे, आजारातून बरा होऊन मला फार काळ झालेला नाही. अशी शक्यता आहे की माझा आजार पुन्हा उद्भवू शकेल. चला तर मग, मी आधीच (पूर्व तयारी म्हणून) उद्योग (वीर्य) सुरू करतो, जेणेकरून जे अद्याप प्राप्त झालेले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अद्याप अधिगत झालेले नाही ते अधिगत करण्यासाठी, आणि ज्याचा अद्याप साक्षात्कार झालेला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी.’ तो जे अद्याप प्राप्त झालेले नाही ते प्राप्त करण्यासाठी, जे अद्याप अधिगत झालेले नाही ते अधिगत करण्यासाठी, आणि ज्याचा अद्याप साक्षात्कार झालेला नाही त्याचा साक्षात्कार करण्यासाठी वीर्य (उद्योग) सुरू करतो. भिक्खूूंनो, हे आठवे वीर्य-आरंभाचे कारण (आरंभवत्थु) आहे. भिक्खूूंनो, हीच ती आठ वीर्य-आरंभाची कारणे आहेत.” दहावे (सुत्त). ယမကဝဂ္ဂေါ တတိယော. यमकवग्गो (यमक वर्ग) तिसरा समाप्त. တဿုဒ္ဒါနံ – त्याचा सारांश (उद्दान) – ဒွေ သဒ္ဓါ ဒွေ မရဏဿတီ, ဒွေ သမ္ပဒါ အထာပရေ; ဣစ္ဆာ အလံ ပရိဟာနံ, ကုသီတာရမ္ဘဝတ္ထူနီတိ. दोन सद्धा (श्रद्धा) सुत्ते, दोन मरणस्सती सुत्ते, दोन संपदा सुत्ते, आणि त्यानंतर; इच्छा सुत्त, अलं सुत्त, परिहान सुत्त, कुसीतवत्थु (आळसाची कारणे) आणि आरंभवत्थु (वीर्य-आरंभाची कारणे) सुत्ते. (၉) ၄. သတိဝဂ္ဂေါ (९) ४. सतिवग्गो (स्मृती वर्ग) ၁. သတိသမ္ပဇညသုတ္တံ १. सतिसंपजञ्ञसुत्तं (स्मृती व संप्रजन्य सुत्त) ၈၁. ‘‘သတိသမ္ပဇညေ, ဘိက္ခဝေ, အသတိ သတိသမ္ပဇညဝိပန္နဿ ဟတူပနိသံ ဟောတိ ဟိရောတ္တပ္ပံ. ဟိရောတ္တပ္ပေ အသတိ ဟိရောတ္တပ္ပဝိပန္နဿ ဟတူပနိသော ဟောတိ ဣန္ဒြိယသံဝရော. ဣန္ဒြိယသံဝရေ အသတိ ဣန္ဒြိယသံဝရဝိပန္နဿ ဟတူပနိသံ ဟောတိ [Pg.151] သီလံ. သီလေ အသတိ သီလဝိပန္နဿ ဟတူပနိသော ဟောတိ သမ္မာသမာဓိ. သမ္မာသမာဓိမှိ အသတိ သမ္မာသမာဓိဝိပန္နဿ ဟတူပနိသံ ဟောတိ ယထာဘူတဉာဏဒဿနံ. ယထာဘူတဉာဏဒဿနေ အသတိ ယထာဘူတဉာဏဒဿနဝိပန္နဿ ဟတူပနိသော ဟောတိ နိဗ္ဗိဒါဝိရာဂေါ. နိဗ္ဗိဒါဝိရာဂေ အသတိ နိဗ္ဗိဒါဝိရာဂဝိပန္နဿ ဟတူပနိသံ ဟောတိ ဝိမုတ္တိဉာဏဒဿနံ. သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, ရုက္ခော သာခါပလာသဝိပန္နော. တဿ ပပဋိကာပိ န ပါရိပူရိံ ဂစ္ဆတိ, တစောပိ… ဖေဂ္ဂုပိ… သာရောပိ န ပါရိပူရိံ ဂစ္ဆတိ. ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, သတိသမ္ပဇညေ အသတိ သတိသမ္ပဇညဝိပန္နဿ ဟတူပနိသံ ဟောတိ ဟိရောတ္တပ္ပံ; ဟိရောတ္တပ္ပေ အသတိ ဟိရောတ္တပ္ပဝိပန္နဿ ဟတူပနိသော ဟောတိ…ပေ… ဝိမုတ္တိဉာဏဒဿနံ. ८१. “भिक्खूूंनो, सति (स्मृती) आणि संपजञ्ञ (संप्रजन्य) नसताना, सति-संपजञ्ञाचा अभाव असलेल्या व्यक्तीसाठी हिरी (पापभिरूता) आणि ओत्तप्प (पापाची भीती) यांचा निकटचा हेतू (उपनिस) नष्ट होतो. हिरी आणि ओत्तप्प नसताना, हिरी-ओत्तप्पाचा अभाव असलेल्या व्यक्तीसाठी इंद्रिय संवर (इंद्रियांवर ताबा) चा निकटचा हेतू नष्ट होतो. इंद्रिय संवर नसताना, इंद्रिय संवराचा अभाव असलेल्या व्यक्तीसाठी शीलचा निकटचा हेतू नष्ट होतो. शील नसताना, शीलाचा अभाव असलेल्या व्यक्तीसाठी सम्मासमाधी (सम्यक समाधी) चा निकटचा हेतू नष्ट होतो. सम्मासमाधी नसताना, सम्मासमाधीचा अभाव असलेल्या व्यक्तीसाठी यथाभूतज्ञानदस्सन (गोष्टी जशा आहेत तशा पाहण्याचे ज्ञान व दर्शन) चा निकटचा हेतू नष्ट होतो. यथाभूतज्ञानदस्सन नसताना, यथाभूतज्ञानदस्सनाची कमतरता असलेल्या व्यक्तीसाठी निब्बिदा (वैराग्य) आणि विराग (आसक्तीचा अभाव) चा निकटचा हेतू नष्ट होतो. निब्बिदा आणि विराग नसताना, निब्बिदा-विरागाचा अभाव असलेल्या व्यक्तीसाठी विमुत्तीज्ञानदस्सन (मुक्तीचे ज्ञान व दर्शन) चा निकटचा हेतू नष्ट होतो. भिक्खूूंनो, ज्याप्रमाणे एखाद्या वृक्षाच्या फांद्या आणि पाने नष्ट झाली असतील, तर त्याचे कोंब पूर्णत्वास जात नाहीत; तसेच त्याची साल, लाकूड आणि गाभा देखील पूर्णत्वास जात नाहीत. त्याचप्रमाणे, भिक्खूूंनो, सति आणि संपजञ्ञ नसताना, सति-संपजञ्ञाचा अभाव असलेल्या व्यक्तीसाठी हिरी आणि ओत्तप्पाचा निकटचा हेतू नष्ट होतो; हिरी आणि ओत्तप्प नसताना... पे... विमुत्तीज्ञानदस्सनचा निकटचा हेतू नष्ट होतो.” ‘‘သတိသမ္ပဇညေ, ဘိက္ခဝေ, သတိ သတိသမ္ပဇညသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နံ ဟောတိ ဟိရောတ္တပ္ပံ. ဟိရောတ္တပ္ပေ သတိ ဟိရောတ္တပ္ပသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နော ဟောတိ ဣန္ဒြိယသံဝရော. ဣန္ဒြိယသံဝရေ သတိ ဣန္ဒြိယသံဝရသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နံ ဟောတိ သီလံ. သီလေ သတိ သီလသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နော ဟောတိ သမ္မာသမာဓိ. သမ္မာသမာဓိမှိ သတိ သမ္မာသမာဓိသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နံ ဟောတိ ယထာဘူတဉာဏဒဿနံ. ယထာဘူတဉာဏဒဿနေ သတိ ယထာဘူတဉာဏဒဿနသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နော ဟောတိ နိဗ္ဗိဒါဝိရာဂေါ. နိဗ္ဗိဒါဝိရာဂေ သတိ နိဗ္ဗိဒါဝိရာဂသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နံ ဟောတိ ဝိမုတ္တိဉာဏဒဿနံ. သေယျထာပိ, ဘိက္ခဝေ, ရုက္ခော သာခါပလာသသမ္ပန္နော. တဿ ပပဋိကာပိ ပါရိပူရိံ ဂစ္ဆတိ, တစောပိ… ဖေဂ္ဂုပိ… သာရောပိ ပါရိပူရိံ ဂစ္ဆတိ. ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, သတိသမ္ပဇညေ သတိ သတိသမ္ပဇညသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နံ ဟောတိ ဟိရောတ္တပ္ပံ; ဟိရောတ္တပ္ပေ သတိ ဟိရောတ္တပ္ပသမ္ပန္နဿ ဥပနိသသမ္ပန္နော ဟောတိ…ပေ… ဝိမုတ္တိဉာဏဒဿန’’န္တိ. ပဌမံ. “भिक्खूूंनो, सति आणि संपजञ्ञ असताना, सति-संपजञ्ञाने युक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी हिरी आणि ओत्तप्प यांचा निकटचा हेतू (उपनिस) परिपूर्ण होतो. हिरी आणि ओत्तप्प असताना, हिरी-ओत्तप्पाने युक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी इंद्रिय संवरचा निकटचा हेतू परिपूर्ण होतो. इंद्रिय संवर असताना, इंद्रिय संवराने युक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी शीलचा निकटचा हेतू परिपूर्ण होतो. शील असताना, शीलाने युक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी सम्मासमाधीचा निकटचा हेतू परिपूर्ण होतो. सम्मासमाधी असताना, सम्मासमाधीने युक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी यथाभूतज्ञानदस्सनचा निकटचा हेतू परिपूर्ण होतो. यथाभूतज्ञानदस्सन असताना, यथाभूतज्ञानदस्सनाने युक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी निब्बिदा आणि विरागचा निकटचा हेतू परिपूर्ण होतो. निब्बिदा आणि विराग असताना, निब्बिदा-विरागाने युक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी विमुत्तीज्ञानदस्सनचा निकटचा हेतू परिपूर्ण होतो. भिक्खूूंनो, ज्याप्रमाणे एखाद्या वृक्षाच्या फांद्या आणि पाने समृद्ध असतील, तर त्याचे कोंब पूर्णत्वास जातात; तसेच त्याची साल, लाकूड आणि गाभा देखील पूर्णत्वास जातात. त्याचप्रमाणे, भिक्खूूंनो, सति आणि संपजञ्ञ असताना, सति-संपजञ्ञाने युक्त असलेल्या व्यक्तीसाठी हिरी आणि ओत्तप्पाचा निकटचा हेतू परिपूर्ण होतो; हिरी आणि ओत्तप्प असताना... पे... विमुत्तीज्ञानदस्सनचा निकटचा हेतू परिपूर्ण होतो.” पहिले (सुत्त). ၂. ပုဏ္ဏိယသုတ္တံ २. पुण्णियसुत्तं (पुण्णिय सुत्त) ၈၂. အထ ခေါ အာယသ္မာ ပုဏ္ဏိယော ယေန ဘဂဝါ တေနုပသင်္ကမိ; ဥပသင်္ကမိတွာ ဘဂဝန္တံ အဘိဝါဒေတွာ ဧကမန္တံ နိသီဒိ. ဧကမန္တံ နိသိန္နော ခေါ အာယသ္မာ ပုဏ္ဏိယော ဘဂဝန္တံ ဧတဒဝေါစ – ‘‘ကော နု ခေါ, ဘန္တေ, ဟေတု ကော ပစ္စယော ယေန အပ္ပေကဒါ တထာဂတံ ဓမ္မဒေသနာ ပဋိဘာတိ, အပ္ပေကဒါ န ပဋိဘာတီ’’တိ? ‘‘သဒ္ဓေါ စ, ပုဏ္ဏိယ, ဘိက္ခု ဟောတိ, နော စုပသင်္ကမိတာ; နေဝ တထာဂတံ ဓမ္မဒေသနာ ပဋိဘာတိ. ယတော စ ခေါ[Pg.152], ပုဏ္ဏိယ, ဘိက္ခု သဒ္ဓေါ စ ဟောတိ, ဥပသင်္ကမိတာ စ; ဧဝံ တထာဂတံ ဓမ္မဒေသနာ ပဋိဘာတိ. သဒ္ဓေါ စ, ပုဏ္ဏိယ, ဘိက္ခု ဟောတိ, ဥပသင်္ကမိတာ စ, နော စ ပယိရုပါသိတာ…ပေ… ပယိရုပါသိတာ စ, နော စ ပရိပုစ္ဆိတာ… ပရိပုစ္ဆိတာ စ, နော စ ဩဟိတသောတော ဓမ္မံ သုဏာတိ… ဩဟိတသောတော စ ဓမ္မံ သုဏာတိ, နော စ သုတွာ ဓမ္မံ ဓာရေတိ… သုတွာ စ ဓမ္မံ ဓာရေတိ, နော စ ဓာတာနံ ဓမ္မာနံ အတ္ထံ ဥပပရိက္ခတိ… ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထံ ဥပပရိက္ခတိ, နော စ အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော ဟောတိ. နေဝ တာဝ တထာဂတံ ဓမ္မဒေသနာ ပဋိဘာတိ. ८२. तेव्हा आयुष्यमान पुण्णिय भगवंतांकडे गेले; आणि भगवंतांना अभिवादन करून एका बाजूला बसले. एका बाजूला बसलेल्या आयुष्यमान पुण्णियांनी भगवंतांना विचारले – “भंते, असे काय कारण आहे, कोणता हेतू आहे, ज्यामुळे कधी कधी तथागतांना धम्मदेशना देण्याची प्रेरणा होते (धम्मदेशना स्फुरते), तर कधी कधी प्रेरणा होत नाही?” “पुण्णिय, जेव्हा एखादा भिक्खू श्रद्धावान असतो, पण तो जवळ येत नाही; तेव्हा तथागतांना धम्मदेशना देण्याची प्रेरणा होत नाही. परंतु, पुण्णिय, जेव्हा भिक्खू श्रद्धावान असतो आणि जवळही येतो; तेव्हा तथागतांना धम्मदेशना देण्याची प्रेरणा होते. पुण्णिय, जेव्हा भिक्खू श्रद्धावान असतो, जवळ येतो, पण सेवा-उपासना करत नाही... पे... सेवा-उपासना करतो, पण प्रश्न विचारत नाही... प्रश्न विचारतो, पण एकाग्र चित्ताने धम्म ऐकत नाही... एकाग्र चित्ताने धम्म ऐकतो, पण ऐकलेला धम्म मनात धारण करत नाही... ऐकलेला धम्म मनात धारण करतो, पण धारण केलेल्या धम्माच्या अर्थाचे चिंतन करत नाही... धारण केलेल्या धम्माच्या अर्थाचे चिंतन करतो, पण अर्थ आणि धम्म समजून घेऊन धम्मानुकूल आचरण (धम्मानुधम्मपटिपन्नो) करत नाही; तोपर्यंत तथागतांना धम्मदेशना देण्याची प्रेरणा होत नाही. ‘‘ယတော စ ခေါ, ပုဏ္ဏိယ, ဘိက္ခု သဒ္ဓေါ စ ဟောတိ, ဥပသင်္ကမိတာ စ, ပယိရုပါသိတာ စ, ပရိပုစ္ဆိတာ စ, ဩဟိတသောတော စ ဓမ္မံ သုဏာတိ, သုတွာ စ ဓမ္မံ ဓာရေတိ, ဓာတာနဉ္စ ဓမ္မာနံ အတ္ထံ ဥပပရိက္ခတိ, အတ္ထမညာယ ဓမ္မမညာယ ဓမ္မာနုဓမ္မပ္ပဋိပန္နော စ ဟောတိ; ဧဝံ တထာဂတံ ဓမ္မဒေသနာ ပဋိဘာတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ပုဏ္ဏိယ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတာ ဧကန္တပဋိဘာနာ တထာဂတံ ဓမ္မဒေသနာ ဟောတီ’’တိ. ဒုတိယံ. “परंतु, पुण्णिय, जेव्हा भिक्खू श्रद्धावान असतो, जवळ येतो, सेवा-उपासना करतो, प्रश्न विचारतो, एकाग्र चित्ताने धम्म ऐकतो, ऐकलेला धम्म मनात धारण करतो, धारण केलेल्या धम्माच्या अर्थाचे चिंतन करतो, आणि अर्थ व धम्म समजून घेऊन धम्मानुकूल आचरण करतो; तेव्हा तथागतांना धम्मदेशना देण्याची प्रेरणा होते. पुण्णिय, या आठ गुणांनी युक्त असलेल्या भिक्खूसाठी तथागतांना धम्मदेशना देण्याची पूर्णपणे प्रेरणा होते.” दुसरे (सुत्त). ၃. မူလကသုတ္တံ ३. मूलकसुत्तं (मूलक सुत्त) ၈၃. ‘‘သစေ, ဘိက္ခဝေ, အညတိတ္ထိယာ ပရိဗ္ဗာဇကာ ဧဝံ ပုစ္ဆေယျုံ – ‘ကိံမူလကာ, အာဝုသော, သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံသမ္ဘဝါ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံသမုဒယာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံသမောသရဏာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံပမုခါ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံအဓိပတေယျာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံဥတ္တရာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံသာရာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ’တိ, ဧဝံ ပုဋ္ဌာ တုမှေ, ဘိက္ခဝေ, တေသံ အညတိတ္ထိယာနံ ပရိဗ္ဗာဇကာနံ ကိန္တိ ဗျာကရေယျာထာ’’တိ? ‘‘ဘဂဝံမူလကာ နော, ဘန္တေ, ဓမ္မာ, ဘဂဝံနေတ္တိကာ ဘဂဝံပဋိသရဏာ. သာဓု, ဘန္တေ, ဘဂဝန္တံယေဝ ပဋိဘာတု ဧတဿ ဘာသိတဿ အတ္ထော. ဘဂဝတော သုတွာ ဘိက္ခူ ဓာရေဿန္တီ’’တိ. ८३. “भिक्खूूंनो, जर इतर पंथांचे परिव्राजक तुम्हाला असे विचारतील – ‘मित्रांनो, सर्व गोष्टींचे (धम्मांचे) मूळ काय आहे? सर्व गोष्टी कशातून निर्माण होतात? सर्व गोष्टींचा उगम कशातून होतो? सर्व गोष्टी कशामध्ये एकत्रित होतात? सर्व गोष्टींचे नेतृत्व कोण करते? सर्व गोष्टींवर कोणाचे अधिपत्य असते? सर्व गोष्टींमध्ये श्रेष्ठ काय आहे? सर्व गोष्टींचा गाभा (सार) काय आहे?’ भिक्खूूंनो, असे विचारले असता, तुम्ही त्या इतर पंथांच्या परिव्राजकांना काय उत्तर द्याल?” “भंते, आमचे सर्व धम्म भगवंतांवर आधारित (भगवन्मूलक) आहेत, भगवंतांद्वारे मार्गदर्शित (भगवन्नेत्तिक) आहेत आणि भगवंतांच्याच आश्रयाने (भगवन्पटिसरण) आहेत. भंते, हे उत्तम होईल जर भगवंतांनीच या विधानाचा अर्थ स्पष्ट करावा. भगवंतांकडून ऐकून भिक्खू ते मनात धारण करतील.” ‘‘တေန ဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဒေသေဿာမိ. တံ သုဏာထ, သာဓုကံ မနသိ ကရောထ; ဘာသိဿာမီ’’တိ. ‘‘ဧဝံ, ဘန္တေ’’တိ ခေါ တေ ဘိက္ခူ ဘဂဝတော ပစ္စဿောသုံ. ဘဂဝါ ဧတဒဝေါစ – ‘‘သစေ, ဘိက္ခဝေ, အညတိတ္ထိယာ ပရိဗ္ဗာဇကာ ဧဝံ ပုစ္ဆေယျုံ – ‘ကိံမူလကာ, အာဝုသော, သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံသမ္ဘဝါ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံသမုဒယာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံသမောသရဏာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံပမုခါ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ[Pg.153], ကိံအဓိပတေယျာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံဥတ္တရာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ကိံသာရာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ’တိ, ဧဝံ ပုဋ္ဌာ တုမှေ, ဘိက္ခဝေ, တေသံ အညတိတ္ထိယာနံ ပရိဗ္ဗာဇကာနံ ဧဝံ ဗျာကရေယျာထ – ‘ဆန္ဒမူလကာ, အာဝုသော, သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, မနသိကာရသမ္ဘဝါ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ဖဿသမုဒယာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ဝေဒနာသမောသရဏာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, သမာဓိပ္ပမုခါ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, သတာဓိပတေယျာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ပညုတ္တရာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ, ဝိမုတ္တိသာရာ သဗ္ဗေ ဓမ္မာ’တိ, ဧဝံ ပုဋ္ဌာ တုမှေ, ဘိက္ခဝေ, တေသံ အညတိတ္ထိယာနံ ပရိဗ္ဗာဇကာနံ ဧဝံ ဗျာကရေယျာထာ’’တိ. တတိယံ. भगवान म्हणाले, “तर मग, भिक्खून्नों, ऐका, नीट मन लावून ऐका; मी बोलेन.” “होय, भन्ते,” त्या भिक्खूंनी भगवंतांना उत्तर दिले. भगवान म्हणाले – “भिक्खून्नों, जर इतर पंथांचे परिव्राजक तुम्हाला असे विचारतील – ‘मित्रांनो, सर्व धम्मांचे मूळ काय आहे? सर्व धम्म कशातून उत्पन्न होतात? सर्व धम्मांचा उगम कशातून होतो? सर्व धम्म कशामध्ये एकत्र येतात? सर्व धम्मांचे प्रमुख काय आहे? सर्व धम्मांवर कोणाचे अधिपत्य असते? सर्व धम्मांमध्ये श्रेष्ठ काय आहे? सर्व धम्मांचा सार काय आहे?’ भिक्खून्नों, असे विचारले असता, तुम्ही त्या इतर पंथांच्या परिव्राजकांना असे उत्तर दिले पाहिजे – ‘मित्रांनो, सर्व धम्मांचे मूळ छंद (इच्छा) आहे, सर्व धम्म मनसिकारातून (लक्ष देणे) उत्पन्न होतात, सर्व धम्मांचा उगम फस्सापासून (स्पर्श) होतो, सर्व धम्म वेदनेमध्ये एकत्र येतात, सर्व धम्मांचे प्रमुख समाधी आहे, सर्व धम्मांवर सतीचे (स्मृती) अधिपत्य असते, सर्व धम्मांमध्ये प्रज्ञा श्रेष्ठ आहे, सर्व धम्मांचा सार विमुत्ती (मुक्ती) आहे.’ भिक्खून्नों, असे विचारले असता, तुम्ही त्या इतर पंथांच्या परिव्राजकांना असे उत्तर दिले पाहिजे.” तिसरे. ၄. စောရသုတ္တံ ४. चोरसुत्त (चोर सूत्र) ၈၄. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတော မဟာစောရော ခိပ္ပံ ပရိယာပဇ္ဇတိ, န စိရဋ္ဌိတိကော ဟောတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? အပ္ပဟရန္တဿ ပဟရတိ, အနဝသေသံ အာဒိယတိ, ဣတ္ထိံ ဟနတိ, ကုမာရိံ ဒူသေတိ, ပဗ္ဗဇိတံ ဝိလုမ္ပတိ, ရာဇကောသံ ဝိလုမ္ပတိ, အစ္စာသန္နေ ကမ္မံ ကရောတိ, န စ နိဓာနကုသလော ဟောတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတော မဟာစောရော ခိပ္ပံ ပရိယာပဇ္ဇတိ, န စိရဋ္ဌိတိကော ဟောတိ. ८४. “भिक्खून्नों, आठ अंगांनी युक्त असलेला महाचोर लवकरच नाशास प्राप्त होतो, तो दीर्घकाळ टिकून राहत नाही. कोणत्या आठ अंगांनी? जो त्याच्यावर हल्ला करत नाही अशा निरपराध व्यक्तीवर तो हल्ला करतो, तो मागे काहीही न ठेवता सर्व काही लुटून नेतो, तो स्त्रीची हत्या करतो, तो कुमारिकेवर अत्याचार करतो, तो प्रव्रजिताला (भिक्खूला) लुटतो, तो राजकोष लुटतो, तो अगदी जवळच्या परिसरातच चोरी करतो, आणि तो लुटलेले धन लपवून ठेवण्यात कुशल नसतो. भिक्खून्नों, या आठ अंगांनी युक्त असलेला महाचोर लवकरच नाशास प्राप्त होतो, तो दीर्घकाळ टिकून राहत नाही.” ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတော မဟာစောရော န ခိပ္ပံ ပရိယာပဇ္ဇတိ, စိရဋ္ဌိတိကော ဟောတိ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? န အပ္ပဟရန္တဿ ပဟရတိ, န အနဝသေသံ အာဒိယတိ, န ဣတ္ထိံ ဟနတိ, န ကုမာရိံ ဒူသေတိ, န ပဗ္ဗဇိတံ ဝိလုမ္ပတိ, န ရာဇကောသံ ဝိလုမ္ပတိ, န အစ္စာသန္နေ ကမ္မံ ကရောတိ, နိဓာနကုသလော စ ဟောတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတော မဟာစောရော န ခိပ္ပံ ပရိယာပဇ္ဇတိ, စိရဋ္ဌိတိကော ဟောတီ’’တိ. စတုတ္ထံ. “भिक्खून्नों, आठ अंगांनी युक्त असलेला महाचोर लवकर नाशास प्राप्त होत नाही, तो दीर्घकाळ टिकून राहतो. कोणत्या आठ अंगांनी? जो त्याच्यावर हल्ला करत नाही अशा निरपराध व्यक्तीवर तो हल्ला करत नाही, तो मागे काहीही न ठेवता सर्व काही लुटून नेत नाही, तो स्त्रीची हत्या करत नाही, तो कुमारिकेवर अत्याचार करत नाही, तो प्रव्रजिताला लुटत नाही, तो राजकोष लुटत नाही, तो जवळच्या परिसरात चोरी करत नाही, आणि तो लुटलेले धन लपवून ठेवण्यात कुशल असतो. भिक्खून्नों, या आठ अंगांनी युक्त असलेला महाचोर लवकर नाशास प्राप्त होत नाही, तो दीर्घकाळ टिकून राहतो.” चौथे. ၅. သမဏသုတ္တံ ५. समणसुत्त (श्रमण सूत्र) ၈၅. ‘‘‘သမဏော’တိ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. ‘ဗြာဟ္မဏော’တိ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. ‘ဝေဒဂူ’တိ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. ‘ဘိသက္ကော’တိ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. ‘နိမ္မလော’တိ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. ‘ဝိမလော’တိ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. ‘ဉာဏီ’တိ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော [Pg.154] သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿ. ‘ဝိမုတ္တော’တိ, ဘိက္ခဝေ, တထာဂတဿေတံ အဓိဝစနံ အရဟတော သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓဿာ’’တိ. ८५. “भिक्खून्नों, ‘समण’ (श्रमण) हे अर्हत, सम्यक्संबुद्ध अशा तथागतांचेच नाव (अधिवाचन) आहे. ‘ब्राह्मण’ हे अर्हत, सम्यक्संबुद्ध अशा तथागतांचेच नाव आहे. ‘वेदगू’ (ज्ञानाचा पारगामी) हे अर्हत, सम्यक्संबुद्ध अशा तथागतांचेच नाव आहे. ‘भिसक्क’ (वैद्य) हे अर्हत, सम्यक्संबुद्ध अशा तथागतांचेच नाव आहे. ‘निम्मल’ (मलविरहित) हे अर्हत, सम्यक्संबुद्ध अशा तथागतांचेच नाव आहे. ‘विमल’ (निर्मळ) हे अर्हत, सम्यक्संबुद्ध अशा तथागतांचेच नाव आहे. ‘ञाणी’ (ज्ञानी) हे अर्हत, सम्यक्संबुद्ध अशा तथागतांचेच नाव आहे. ‘विमुक्त’ (मुक्त) हे अर्हत, सम्यक्संबुद्ध अशा तथागतांचेच नाव आहे.” ‘‘ယံ သမဏေန ပတ္တဗ္ဗံ, ဗြာဟ္မဏေန ဝုသီမတာ; ယံ ဝေဒဂုနာ ပတ္တဗ္ဗံ, ဘိသက္ကေန အနုတ္တရံ. “श्रमणाने जे प्राप्त करायचे असते, ब्रह्मचर्य जगलेल्या ब्राह्मणाने जे प्राप्त करायचे असते; वेदगूने जे प्राप्त करायचे असते, आणि अनुत्तर वैद्याने जे प्राप्त करायचे असते;” ‘‘ယံ နိမ္မလေန ပတ္တဗ္ဗံ, ဝိမလေန သုစီမတာ; ယံ ဉာဏိနာ စ ပတ္တဗ္ဗံ, ဝိမုတ္တေန အနုတ္တရံ. “मलविरहिताने जे प्राप्त करायचे असते, शुद्ध व निर्मळाने जे प्राप्त करायचे असते; ज्ञान्याने जे प्राप्त करायचे असते, आणि अनुत्तर विमुक्ताने जे प्राप्त करायचे असते;” ‘‘သောဟံ ဝိဇိတသင်္ဂါမော, မုတ္တော မောစေမိ ဗန္ဓနာ; နာဂေါမှိ ပရမဒန္တော, အသေခေါ ပရိနိဗ္ဗုတော’’တိ. ပဉ္စမံ; “तो मी संग्राम जिंकलेला आहे, स्वतः मुक्त होऊन इतरांना बंधनातून मुक्त करतो; मी परम दमित (संयमित) असा नाग (श्रेष्ठ पुरुष) आहे, जो अशेख (पूर्ण ज्ञानी) आणि परिनिर्वृत आहे.” पाचवे. ၆. ယသသုတ္တံ ६. यससुत्त (यश सूत्र) ၈၆. ဧကံ သမယံ ဘဂဝါ ကောသလေသု စာရိကံ စရမာနော မဟတာ ဘိက္ခုသံဃေန သဒ္ဓိံ ယေန ဣစ္ဆာနင်္ဂလံ နာမ ကောသလာနံ ဗြာဟ္မဏဂါမော တဒဝသရိ. တတြ သုဒံ ဘဂဝါ ဣစ္ဆာနင်္ဂလေ ဝိဟရတိ ဣစ္ဆာနင်္ဂလဝနသဏ္ဍေ. အဿောသုံ ခေါ ဣစ္ဆာနင်္ဂလကာ ဗြာဟ္မဏဂဟပတိကာ – ‘‘သမဏော ခလု ဘော ဂေါတမော သကျပုတ္တော သကျကုလာ ပဗ္ဗဇိတော ဣစ္ဆာနင်္ဂလံ အနုပ္ပတ္တော ဣစ္ဆာနင်္ဂလေ ဝိဟရတိ ဣစ္ဆာနင်္ဂလဝနသဏ္ဍေ. တံ ခေါ ပန ဘဝန္တံ ဂေါတမံ ဧဝံ ကလျာဏော ကိတ္တိသဒ္ဒေါ အဗ္ဘုဂ္ဂတော – ‘ဣတိပိ သော ဘဂဝါ အရဟံ သမ္မာသမ္ဗုဒ္ဓေါ…ပေ… သာဓု ခေါ ပန တထာရူပါနံ အရဟတံ ဒဿနံ ဟောတီ’’’တိ. ८६. एकदा भगवान कोसल देशात मोठ्या भिक्खू संघासोबत चारिका (धम्मयात्रा) करत असताना 'इच्छानांगल' नावाच्या कोसलांच्या ब्राह्मण गावात पोहोचले. तिथे भगवान इच्छानांगल येथील 'इच्छानांगल वनखंडात' (अरण्यात) विहार करत होते. इच्छानांगल येथील ब्राह्मण गृहपतींनी ऐकले – “अहो! शाक्यकुळातून प्रव्रजित झालेले शाक्यपुत्र श्रमण गोतम इच्छानांगल येथे आले आहेत आणि इच्छानांगल येथील इच्छानांगल वनखंडात विहार करत आहेत. त्या पूजनीय गोतमांची अशी उत्तम कीर्ती पसरली आहे की – ‘ते भगवान अर्हत आहेत, सम्यक्संबुद्ध आहेत... पे... अशा प्रकारच्या अर्हतांचे दर्शन घेणे खरोखरच कल्याणकारी आहे.’” အထ ခေါ ဣစ္ဆာနင်္ဂလကာ ဗြာဟ္မဏဂဟပတိကာ တဿာ ရတ္တိယာ အစ္စယေန ပဟုတံ ခါဒနီယံ ဘောဇနီယံ အာဒါယ ယေန ဣစ္ဆာနင်္ဂလဝနသဏ္ဍော တေနုပသင်္ကမိံသု; ဥပသင်္ကမိတွာ ဗဟိဒွါရကောဋ္ဌကေ အဋ္ဌံသု ဥစ္စာသဒ္ဒါ မဟာသဒ္ဒါ. တေန ခေါ ပန သမယေန အာယသ္မာ နာဂိတော ဘဂဝတော ဥပဋ္ဌာကော ဟောတိ. အထ ခေါ ဘဂဝါ အာယသ္မန္တံ နာဂိတံ အာမန္တေသိ – ‘‘ကေ ပန တေ, နာဂိတ, ဥစ္စာသဒ္ဒါ မဟာသဒ္ဒါ ကေဝဋ္ဋာ မညေ မစ္ဆဝိလောပေ’’တိ? ‘‘ဧတေ, ဘန္တေ, ဣစ္ဆာနင်္ဂလကာ ဗြာဟ္မဏဂဟပတိကာ ပဟုတံ ခါဒနီယံ ဘောဇနီယံ အာဒါယ ဗဟိဒွါရကောဋ္ဌကေ ဌိတာ ဘဂဝန္တံယေဝ ဥဒ္ဒိဿ ဘိက္ခုသံဃဉ္စာ’’တိ. ‘‘မာဟံ, နာဂိတ, ယသေန သမာဂမံ, မာ စ မယာ ယသော. ယော ခေါ, နာဂိတ, နယိမဿ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘီ အဿ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ. ယဿာဟံ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ [Pg.155] နိကာမလာဘီ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, သော တံ မီဠှသုခံ မိဒ္ဓသုခံ လာဘသက္ကာရသိလောကသုခံ သာဒိယေယျာ’’တိ. त्यानंतर, ती रात्र संपल्यावर, इच्छानांगल येथील ब्राह्मण गृहपतींनी भरपूर प्रमाणात खाद्यान्न व भोजन घेतले आणि ते इच्छानांगल वनखंडाकडे गेले. तिथे पोहोचून ते प्रवेशद्वाराबाहेर मोठा गोंगाट आणि कोलाहल करत उभे राहिले. त्या वेळी आयुष्मान नागित हे भगवंतांचे उपस्थायक (सेवक) होते. तेव्हा भगवंतांनी आयुष्मान नागितांना विचारले – “नागिता, तो मोठा गोंगाट आणि कोलाहल कोणाचा आहे? जणू काही कोळी लोक मासे पकडताना ओरडत आहेत असे वाटते.” “भन्ते, हे इच्छानांगल येथील ब्राह्मण गृहपती आहेत, जे भरपूर खाद्यान्न व भोजन घेऊन प्रवेशद्वाराबाहेर उभे आहेत. ते भगवान आणि भिक्खू संघाला हे अर्पण करू इच्छितात.” “नागिता, मला प्रसिद्धीची (यशाची) हाव नाही आणि प्रसिद्धीनेही माझ्या मागे लागू नये. नागिता, ज्याला माझ्यासारखे सहजपणे, विनासायास लाभणारे हे नेक्खम्म-सुख (प्रव्रज्या सुख), पविवेक-सुख (एकांत सुख), उपसम-सुख (शांती सुख) आणि सम्बोध-सुख (ज्ञान सुख) सहज मिळत नाही, तोच त्या घाणेरड्या सुखाचा (कामसुख), आळसाच्या सुखाचा (तंद्रासुख) आणि लाभ-सत्कार-कीर्तीच्या सुखाचा आस्वाद घेईल.” ‘‘အဓိဝါသေတု ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ. အဓိဝါသေတု သုဂတော. အဓိဝါသနကာလော ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော. ယေန ယေနေဝ ဒါနိ, ဘန္တေ, ဘဂဝါ ဂမိဿတိ တန္နိန္နာဝ ဘဝိဿန္တိ ဗြာဟ္မဏဂဟပတိကာ နေဂမာ စေဝ ဇာနပဒါ စ. သေယျထာပိ, ဘန္တေ, ထုလ္လဖုသိတကေ ဒေဝေ ဝဿန္တေ ယထာနိန္နံ ဥဒကာနိ ပဝတ္တန္တိ; ဧဝမေဝံ ခေါ, ဘန္တေ, ယေန ယေနေဝ ဒါနိ ဘဂဝါ ဂမိဿတိ တန္နိန္နာဝ ဘဝိဿန္တိ ဗြာဟ္မဏဂဟပတိကာ နေဂမာ စေဝ ဇာနပဒါ စ. တံ ကိဿ ဟေတု? တထာ ဟိ, ဘန္တေ, ဘဂဝတော သီလပညာဏ’’န္တိ. “भन्ते, आता भगवंतांनी (आमचे आमंत्रण) स्वीकारावे. सुगतांनी आता स्वीकारावे. भन्ते, आता भगवंतांच्या स्वीकार करण्याचीच वेळ आहे. भन्ते, आता भगवान ज्या ज्या ठिकाणी जातील, त्या त्या ठिकाणी नगरांमधील व जनपदांमधील ब्राह्मण आणि गृहपती आकर्षित होतील. भन्ते, ज्याप्रमाणे मोठ्या थेंबांचा पाऊस पडत असताना पाणी उताराच्या देशाने वाहते; अगदी त्याचप्रमाणे, भन्ते, भगवान ज्या ज्या ठिकाणी जातील, त्या त्या ठिकाणी नगरांमधील व जनपदांमधील ब्राह्मण आणि गृहपती आकर्षित होतील. त्याचे कारण काय? भन्ते, कारण भगवंतांचे शील आणि प्रज्ञा तशीच (महान) आहे.” ‘‘မာဟံ, နာဂိတ, ယသေန သမာဂမံ, မာ စ မယာ ယသော. ယော ခေါ, နာဂိတ, နယိမဿ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘီ အဿ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ. ယဿာဟံ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘီ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ, သော တံ မီဠှသုခံ မိဒ္ဓသုခံ လာဘသက္ကာရသိလောကသုခံ သာဒိယေယျ. “नागिता, माझा यशाशी (कीर्तीशी) संबंध नसो आणि यशाचा माझ्याशी संबंध नसो. नागिता, ज्याला हे नैष्क्रम्यसुख, प्रविवेकसुख, उपशमसुख आणि संबोधीसुख इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास मिळत नाही; तोच त्या विष्ठासमान सुखाचा, आळसाच्या सुखाचा आणि लाभ, सत्कार व कीर्तीच्या सुखाचा स्वीकार करेल, ज्या सुखाचा मी इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास लाभ घेणारा आहे.” ‘‘ဒေဝတာပိ ခေါ, နာဂိတ, ဧကစ္စာ နယိမဿ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘိနိယော အဿု အကိစ္ဆလာဘိနိယော အကသိရလာဘိနိယော, ယဿာဟံ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘီ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ. တုမှာကမ္ပိ ခေါ, နာဂိတ, သင်္ဂမ္မ သမာဂမ္မ သင်္ဂဏိကဝိဟာရံ အနုယုတ္တာနံ ဝိဟရတံ ဧဝံ ဟောတိ – ‘န ဟိ နူနမေ အာယသ္မန္တော ဣမဿ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘိနော အဿု အကိစ္ဆလာဘိနော အကသိရလာဘိနော. ယဿာဟံ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘီ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ. တထာ ဟိ [Pg.156] ပန မေ အာယသ္မန္တော သင်္ဂမ္မ သမာဂမ္မ သင်္ဂဏိကဝိဟာရံ အနုယုတ္တာ ဝိဟရန္တိ’’’. “नागिता, काही देवतांनाही हे नैष्क्रम्यसुख, प्रविवेकसुख, उपशमसुख आणि संबोधीसुख इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास मिळत नाही, ज्या सुखाचा मी इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास लाभ घेणारा आहे. नागिता, जेव्हा तुम्ही सर्व एकत्र येऊन, घोळका करून संगतीमध्ये राहण्यात मग्न असता, तेव्हा माझ्या मनात असा विचार येतो: ‘नक्कीच या आयुष्यमानांना हे नैष्क्रम्यसुख, प्रविवेकसुख, उपशमसुख आणि संबोधीसुख इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास मिळत नसावे, ज्या सुखाचा मी इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास लाभ घेणारा आहे. म्हणूनच हे आयुष्यमान एकत्र येऊन, घोळका करून संगतीमध्ये राहण्यात मग्न आहेत.’” ‘‘ဣဓာဟံ, နာဂိတ, ဘိက္ခူ ပဿာမိ အညမညံ အင်္ဂုလိပတောဒကေန သဉ္ဇဂ္ဃန္တေ သင်္ကီဠန္တေ. တဿ မယှံ, နာဂိတ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘န ဟိ နူနမေ အာယသ္မန္တော ဣမဿ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘိနော အဿု အကိစ္ဆလာဘိနော အကသိရလာဘိနော. ယဿာဟံ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘီ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ. တထာ ဟိ ပန မေ အာယသ္မန္တော အညမညံ အင်္ဂုလိပတောဒကေန သဉ္ဇဂ္ဃန္တိ သင်္ကီဠန္တိ’’’. “नागिता, इथे मी भिक्खूंना एकमेकांना बोटांनी गुदगुल्या करत मोठ्याने हसताना आणि खेळताना पाहतो. नागिता, तेव्हा माझ्या मनात असा विचार येतो: ‘नक्कीच या आयुष्यमानांना हे नैष्क्रम्यसुख, प्रविवेकसुख, उपशमसुख आणि संबोधीसुख इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास मिळत नसावे, ज्या सुखाचा मी इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास लाभ घेणारा आहे. म्हणूनच हे आयुष्यमान एकमेकांना बोटांनी गुदगुल्या करत मोठ्याने हसत आणि खेळत आहेत.’” ‘‘ဣဓ ပနာဟံ, နာဂိတ, ဘိက္ခူ ပဿာမိ ယာဝဒတ္ထံ ဥဒရာဝဒေဟကံ ဘုဉ္ဇိတွာ သေယျသုခံ ပဿသုခံ မိဒ္ဓသုခံ အနုယုတ္တေ ဝိဟရန္တေ. တဿ မယှံ, နာဂိတ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘န ဟိ နူနမေ အာယသ္မန္တော ဣမဿ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘိနော အဿု အကိစ္ဆလာဘိနော အကသိရလာဘိနော. ယဿာဟံ နေက္ခမ္မသုခဿ ပဝိဝေကသုခဿ ဥပသမသုခဿ သမ္ဗောဓသုခဿ နိကာမလာဘီ အကိစ္ဆလာဘီ အကသိရလာဘီ. တထာ ဟိ ပန မေ အာယသ္မန္တော ယာဝဒတ္ထံ ဥဒရာဝဒေဟကံ ဘုဉ္ဇိတွာ သေယျသုခံ ပဿသုခံ မိဒ္ဓသုခံ အနုယုတ္တာ ဝိဟရန္တိ’’’. “नागिता, इथे मी भिक्खूंना पोटभर जेवून झोपण्याच्या सुखात, कुशी बदलण्याच्या सुखात आणि आळसाच्या सुखात मग्न होऊन राहताना पाहतो. नागिता, तेव्हा माझ्या मनात असा विचार येतो: ‘नक्कीच या आयुष्यमानांना हे नैष्क्रम्यसुख, प्रविवेकसुख, उपशमसुख आणि संबोधीसुख इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास मिळत नसावे, ज्या सुखाचा मी इच्छेनुसार, विनासायास व विनात्रास लाभ घेणारा आहे. म्हणूनच हे आयुष्यमान पोटभर जेवून झोपण्याच्या सुखात, कुशी बदलण्याच्या सुखात आणि आळसाच्या सुखात मग्न होऊन राहत आहेत.’” ‘‘ဣဓာဟံ, နာဂိတ, ဘိက္ခုံ ပဿာမိ ဂါမန္တဝိဟာရိံ သမာဟိတံ နိသိန္နံ. တဿ မယှံ, နာဂိတ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘ဣဒါနိ ဣမံ အာယသ္မန္တံ အာရာမိကော ဝါ ဥပဋ္ဌဟိဿတိ သမဏုဒ္ဒေသော ဝါ. တံ တမှာ သမာဓိမှာ စာဝေဿတီ’တိ. တေနာဟံ, နာဂိတ, တဿ ဘိက္ခုနော န အတ္တမနော ဟောမိ ဂါမန္တဝိဟာရေန. “नागिता, इथे मी गावाजवळ राहणाऱ्या एका भिक्खूला समाधी लावून बसलेले पाहतो. नागिता, तेव्हा माझ्या मनात असा विचार येतो: ‘आता एखादा आरामिक (विहाराचा सेवक) किंवा एखादा श्रामणेर या आयुष्यमानाची सेवा करायला येईल आणि त्याला त्या समाधीपासून विचलित करेल.’ नागिता, याच कारणामुळे मी त्या भिक्खूच्या गावाजवळ राहण्याने संतुष्ट होत नाही.” ‘‘ဣဓ ပနာဟံ, နာဂိတ, ဘိက္ခုံ ပဿာမိ အာရညိကံ အရညေ ပစလာယမာနံ နိသိန္နံ. တဿ မယှံ, နာဂိတ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘ဣဒါနိ အယမာယသ္မာ ဣမံ နိဒ္ဒါကိလမထံ ပဋိဝိနောဒေတွာ အရညသညံယေဝ မနသိ ကရိဿတိ ဧကတ္တ’န္တိ. တေနာဟံ[Pg.157], နာဂိတ, တဿ ဘိက္ခုနော အတ္တမနော ဟောမိ အရညဝိဟာရေန. “नागिता, इथे मी जंगलात राहणाऱ्या एका भिक्खूला जंगलात डुलक्या घेत बसलेले पाहतो. नागिता, तेव्हा माझ्या मनात असा विचार येतो: ‘आता हे आयुष्यमान ही झोप आणि थकवा दूर करून केवळ अरण्य-संज्ञेवरच (एकाग्रतेवर) मन केंद्रित करतील.’ नागिता, याच कारणामुळे मी त्या भिक्खूच्या जंगलात राहण्याने संतुष्ट होतो.” ‘‘ဣဓ ပနာဟံ, နာဂိတ, ဘိက္ခုံ ပဿာမိ အာရညိကံ အရညေ အသမာဟိတံ နိသိန္နံ. တဿ မယှံ, နာဂိတ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘ဣဒါနိ အယမာယသ္မာ အသမာဟိတံ ဝါ စိတ္တံ သမာဒဟိဿတိ, သမာဟိတံ ဝါ စိတ္တံ အနုရက္ခိဿတီ’တိ. တေနာဟံ, နာဂိတ, တဿ ဘိက္ခုနော အတ္တမနော ဟောမိ အရညဝိဟာရေန. “नागिता, इथे मी जंगलात राहणाऱ्या एका भिक्खूला जंगलात असमाहित (एकाग्र नसलेल्या) अवस्थेत बसलेले पाहतो. नागिता, तेव्हा माझ्या मनात असा विचार येतो: ‘आता हे आयुष्यमान आपल्या असमाहित चित्ताला समाहित करतील किंवा समाहित चित्ताचे रक्षण करतील.’ नागिता, याच कारणामुळे मी त्या भिक्खूच्या जंगलात राहण्याने संतुष्ट होतो.” ‘‘ဣဓ ပနာဟံ, နာဂိတ, ဘိက္ခုံ ပဿာမိ အာရညိကံ အရညေ သမာဟိတံ နိသိန္နံ. တဿ မယှံ, နာဂိတ, ဧဝံ ဟောတိ – ‘ဣဒါနိ အယမာယသ္မာ အဝိမုတ္တံ ဝါ စိတ္တံ ဝိမုစ္စိဿတိ, ဝိမုတ္တံ ဝါ စိတ္တံ အနုရက္ခိဿတီ’တိ. တေနာဟံ, နာဂိတ, တဿ ဘိက္ခုနော အတ္တမနော ဟောမိ အရညဝိဟာရေန. “नागिता, इथे मी जंगलात राहणाऱ्या एका भिक्खूला जंगलात समाहित (एकाग्र) अवस्थेत बसलेले पाहतो. नागिता, तेव्हा माझ्या मनात असा विचार येतो: ‘आता हे आयुष्यमान आपल्या अमुक्त (मुक्त न झालेल्या) चित्ताला मुक्त करतील किंवा मुक्त चित्ताचे रक्षण करतील.’ नागिता, याच कारणामुळे मी त्या भिक्खूच्या जंगलात राहण्याने संतुष्ट होतो.” ‘‘ဣဓ ပနာဟံ, နာဂိတ, ဘိက္ခုံ ပဿာမိ ဂါမန္တဝိဟာရိံ လာဘိံ စီဝရပိဏ္ဍပါတသေနာသနဂိလာနပစ္စယဘေသဇ္ဇပရိက္ခာရာနံ. သော တံ လာဘသက္ကာရသိလောကံ နိကာမယမာနော ရိဉ္စတိ ပဋိသလ္လာနံ, ရိဉ္စတိ အရညဝနပတ္ထာနိ ပန္တာနိ သေနာသနာနိ; ဂါမနိဂမရာဇဓာနိံ ဩသရိတွာ ဝါသံ ကပ္ပေတိ. တေနာဟံ, နာဂိတ, တဿ ဘိက္ခုနော န အတ္တမနော ဟောမိ ဂါမန္တဝိဟာရေန. “नागिता, इथे मी गावाजवळ राहणाऱ्या एका भिक्खूला चीवर, पिंडपात, शयनासन आणि आजारपणातील औषधोपचार रूपी परिष्कारांचा लाभ मिळवताना पाहतो. तो त्या लाभ, सत्कार आणि कीर्तीची इच्छा धरून एकांतात राहणे सोडून देतो, अरण्यातील निर्जन शयनासने सोडून देतो आणि गाव, नगर किंवा राजधानीत जाऊन वास्तव्य करतो. नागिता, याच कारणामुळे मी त्या भिक्खूच्या गावाजवळ राहण्याने संतुष्ट होत नाही.” ‘‘ဣဓ ပနာဟံ, နာဂိတ, ဘိက္ခုံ ပဿာမိ အာရညိကံ လာဘိံ စီဝရပိဏ္ဍပါတသေနာသနဂိလာနပစ္စယဘေသဇ္ဇပရိက္ခာရာနံ. သော တံ လာဘသက္ကာရသိလောကံ ပဋိပဏာမေတွာ န ရိဉ္စတိ ပဋိသလ္လာနံ, န ရိဉ္စတိ အရညဝနပတ္ထာနိ ပန္တာနိ သေနာသနာနိ. တေနာဟံ, နာဂိတ, တဿ ဘိက္ခုနော အတ္တမနော ဟောမိ အရညဝိဟာရေန. “नागिता, इथे मी जंगलात राहणाऱ्या एका भिक्खूला चीवर, पिंडपात, शयनासन आणि आजारपणातील औषधोपचार रूपी परिष्कारांचा लाभ मिळवताना पाहतो. तो त्या लाभ, सत्कार आणि कीर्तीला दूर सारून एकांतात राहणे सोडत नाही, अरण्यातील निर्जन शयनासने सोडत नाही. नागिता, याच कारणामुळे मी त्या भिक्खूच्या जंगलात राहण्याने संतुष्ट होतो.” ‘‘ယသ္မာဟံ, နာဂိတ, သမယေ အဒ္ဓါနမဂ္ဂပ္ပဋိပန္နော န ကဉ္စိ ပဿာမိ ပုရတော ဝါ ပစ္ဆတော ဝါ, ဖာသု မေ, နာဂိတ, တသ္မိံ သမယေ ဟောတိ အန္တမသော ဥစ္စာရပဿာဝကမ္မာယာ’’တိ. ဆဋ္ဌံ. “नागिता, ज्या वेळी मी लांबच्या प्रवासाला निघालेलो असतो आणि मला माझ्या पुढे किंवा मागे कोणीही दिसत नाही, नागिता, त्या वेळी मला अगदी मल-मूत्र विसर्जन करण्याच्या बाबतीतही अत्यंत सुख (शांतता) लाभते.” हे सहावे (सुत्त). ၇. ပတ္တနိကုဇ္ဇနသုတ္တံ ७. पत्तनिकुज्जन सुत्त ၈၇. ‘‘အဋ္ဌဟိ[Pg.158], ဘိက္ခဝေ, အင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတဿ ဥပါသကဿ အာကင်္ခမာနော သံဃော ပတ္တံ နိက္ကုဇ္ဇေယျ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဘိက္ခူနံ အလာဘာယ ပရိသက္ကတိ, ဘိက္ခူနံ အနတ္ထာယ ပရိသက္ကတိ, ဘိက္ခူနံ အဝါသာယ ပရိသက္ကတိ, ဘိက္ခူ အက္ကောသတိ ပရိဘာသတိ, ဘိက္ခူ ဘိက္ခူဟိ ဘေဒေတိ, ဗုဒ္ဓဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဓမ္မဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, သံဃဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတဿ ဥပါသကဿ အာကင်္ခမာနော သံဃော ပတ္တံ နိက္ကုဇ္ဇေယျ. ८७. “भिक्खूंनो, आठ अंगांनी (गुणांनी) युक्त असलेल्या उपासकावर, जर संघाची इच्छा असेल तर, संघ भिक्षापात्र पालथे घालू शकतो (पत्त-निक्कुज्जन करू शकतो). कोणत्या आठ अंगांनी? (१) तो भिक्खूंच्या लाभाला (अडथळा आणण्याचा) प्रयत्न करतो, (२) तो भिक्खूंच्या अहिताचा प्रयत्न करतो, (३) तो भिक्खूंच्या निवासाला (अडथळा आणण्याचा) प्रयत्न करतो, (४) तो भिक्खूंना शिवीगाळ व निंदा करतो, (५) तो भिक्खूंमध्ये फूट पाडतो, (६) तो बुद्धांची अवहेलना करतो, (७) तो धम्माची अवहेलना करतो, (८) तो संघाची अवहेलना करतो. भिक्खूंनो, या आठ अंगांनी युक्त असलेल्या उपासकावर, जर संघाची इच्छा असेल तर, संघ भिक्षापात्र पालथे घालू शकतो.” ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, အင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတဿ ဥပါသကဿ အာကင်္ခမာနော သံဃော ပတ္တံ ဥက္ကုဇ္ဇေယျ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? န ဘိက္ခူနံ အလာဘာယ ပရိသက္ကတိ, န ဘိက္ခူနံ အနတ္ထာယ ပရိသက္ကတိ, န ဘိက္ခူနံ အဝါသာယ ပရိသက္ကတိ, န ဘိက္ခူ အက္ကောသတိ ပရိဘာသတိ, န ဘိက္ခူ ဘိက္ခူဟိ ဘေဒေတိ, ဗုဒ္ဓဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဓမ္မဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟင်္ဂေဟိ သမန္နာဂတဿ ဥပါသကဿ အာကင်္ခမာနော သံဃော ပတ္တံ ဥက္ကုဇ္ဇေယျာ’’တိ. သတ္တမံ. “भिक्खूंनो, आठ अंगांनी युक्त असलेल्या उपासकाचे, जर संघाची इच्छा असेल तर, संघ भिक्षापात्र सुलट करू शकतो (पत्त-उक्कुज्जन करू शकतो). कोणत्या आठ अंगांनी? (१) तो भिक्खूंच्या लाभाला अडथळा आणण्याचा प्रयत्न करत नाही, (२) तो भिक्खूंच्या अहिताचा प्रयत्न करत नाही, (३) तो भिक्खूंच्या निवासाला अडथळा आणण्याचा प्रयत्न करत नाही, (४) तो भिक्खूंना शिवीगाळ व निंदा करत नाही, (५) तो भिक्खूंमध्ये फूट पाडत नाही, (६) तो बुद्धांचे गुणगान करतो, (७) तो धम्माचे गुणगान करतो, (८) तो संघाचे गुणगान करतो. भिक्खूंनो, या आठ अंगांनी युक्त असलेल्या उपासकाचे, जर संघाची इच्छा असेल तर, संघ भिक्षापात्र सुलट करू शकतो.” सातवे (सुत्त समाप्त). ၈. အပ္ပသာဒပဝေဒနီယသုတ္တံ ८. अप्पसादपवेदनीय सुत्त ၈၈. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတဿ ဘိက္ခုနော အာကင်္ခမာနာ ဥပါသကာ အပ္ပသာဒံ ပဝေဒေယျုံ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဂိဟီနံ အလာဘာယ ပရိသက္ကတိ, ဂိဟီနံ အနတ္ထာယ ပရိသက္ကတိ, ဂိဟီ အက္ကောသတိ ပရိဘာသတိ, ဂိဟီ ဂိဟီဟိ ဘေဒေတိ, ဗုဒ္ဓဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဓမ္မဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, သံဃဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, အဂေါစရေ စ နံ ပဿန္တိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတဿ ဘိက္ခုနော အာကင်္ခမာနာ ဥပါသကာ အပ္ပသာဒံ ပဝေဒေယျုံ. ८८. “भिक्खूंनो, आठ गोष्टींनी युक्त असलेल्या भिक्खूविषयी, जर उपासकांची इच्छा असेल तर, ते आपला अनादर (अश्रद्धा) व्यक्त करू शकतात. कोणत्या आठ गोष्टींनी? (१) तो गृहस्थांच्या लाभाला अडथळा आणण्याचा प्रयत्न करतो, (२) तो गृहस्थांच्या अहिताचा प्रयत्न करतो, (३) तो गृहस्थांना शिवीगाळ व निंदा करतो, (४) तो गृहस्थांमध्ये फूट पाडतो, (५) तो बुद्धांची अवहेलना करतो, (६) तो धम्माची अवहेलना करतो, (७) तो संघाची अवहेलना करतो, (८) आणि ते त्याला अयोग्य ठिकाणी (अगोचर जागी) फिरताना पाहतात. भिक्खूंनो, या आठ गोष्टींनी युक्त असलेल्या भिक्खूविषयी, जर उपासकांची इच्छा असेल तर, ते आपला अनादर व्यक्त करू शकतात.” ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတဿ ဘိက္ခုနော အာကင်္ခမာနာ ဥပါသကာ ပသာဒံ ပဝေဒေယျုံ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? န ဂိဟီနံ အလာဘာယ ပရိသက္ကတိ, န ဂိဟီနံ အနတ္ထာယ ပရိသက္ကတိ, န ဂိဟီ အက္ကောသတိ ပရိဘာသတိ, န ဂိဟီ ဂိဟီဟိ ဘေဒေတိ, ဗုဒ္ဓဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဓမ္မဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဂေါစရေ စ နံ ပဿန္တိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ[Pg.159], အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတဿ ဘိက္ခုနော အာကင်္ခမာနာ ဥပါသကာ ပသာဒံ ပဝေဒေယျု’’န္တိ. အဋ္ဌမံ. “भिक्खूंनो, आठ गोष्टींनी युक्त असलेल्या भिक्खूविषयी, जर उपासकांची इच्छा असेल तर, ते आपला आदर (श्रद्धा) व्यक्त करू शकतात. कोणत्या आठ गोष्टींनी? (१) तो गृहस्थांच्या लाभाला अडथळा आणण्याचा प्रयत्न करत नाही, (२) तो गृहस्थांच्या अहिताचा प्रयत्न करत नाही, (३) तो गृहस्थांना शिवीगाळ व निंदा करत नाही, (४) तो गृहस्थांमध्ये फूट पाडत नाही, (५) तो बुद्धांचे गुणगान करतो, (६) तो धम्माचे गुणगान करतो, (७) तो संघाचे गुणगान करतो, (८) आणि ते त्याला योग्य ठिकाणी (गोचर जागी) फिरताना पाहतात. भिक्खूंनो, या आठ गोष्टींनी युक्त असलेल्या भिक्खूविषयी, जर उपासकांची इच्छा असेल तर, ते आपला आदर व्यक्त करू शकतात.” आठवे (सुत्त समाप्त). ၉. ပဋိသာရဏီယသုတ္တံ ९. पटिसारणीय सुत्त ၈၉. ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတဿ ဘိက္ခုနော အာကင်္ခမာနော သံဃော ပဋိသာရဏီယကမ္မံ ကရေယျ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? ဂိဟီနံ အလာဘာယ ပရိသက္ကတိ, ဂိဟီနံ အနတ္ထာယ ပရိသက္ကတိ, ဂိဟီ အက္ကောသတိ ပရိဘာသတိ, ဂိဟီ ဂိဟီဟိ ဘေဒေတိ, ဗုဒ္ဓဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဓမ္မဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, သံဃဿ အဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဓမ္မိကဉ္စ ဂိဟိပဋိဿဝံ န သစ္စာပေတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတဿ ဘိက္ခုနော အာကင်္ခမာနော သံဃော ပဋိသာရဏီယံ ကမ္မံ ကရေယျ. ८९. “भिक्खूंनो, आठ गोष्टींनी युक्त असलेल्या भिक्खूवर, जर संघाची इच्छा असेल तर, संघ 'पटिसारणीय कम्म' (गृहस्थांची क्षमा मागण्याची शिक्षा) करू शकतो. कोणत्या आठ गोष्टींनी? (१) तो गृहस्थांच्या लाभाला अडथळा आणण्याचा प्रयत्न करतो, (२) तो गृहस्थांच्या अहिताचा प्रयत्न करतो, (३) तो गृहस्थांना शिवीगाळ व निंदा करतो, (४) तो गृहस्थांमध्ये फूट पाडतो, (५) तो बुद्धांची अवहेलना करतो, (६) तो धम्माची अवहेलना करतो, (७) तो संघाची अवहेलना करतो, (८) आणि तो गृहस्थांना दिलेले न्याय्य वचन पूर्ण करत नाही. भिक्खूंनो, या आठ गोष्टींनी युक्त असलेल्या भिक्खूवर, जर संघाची इच्छा असेल तर, संघ 'पटिसारणीय कम्म' करू शकतो.” ‘‘အဋ္ဌဟိ, ဘိက္ခဝေ, ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတဿ ဘိက္ခုနော အာကင်္ခမာနော သံဃော ပဋိသာရဏီယကမ္မံ ပဋိပ္ပဿမ္ဘေယျ. ကတမေဟိ အဋ္ဌဟိ? န ဂိဟီနံ အလာဘာယ ပရိသက္ကတိ, န ဂိဟီနံ အနတ္ထာယ ပရိသက္ကတိ, န ဂိဟီ အက္ကောသတိ ပရိဘာသတိ, န ဂိဟီ ဂိဟီဟိ ဘေဒေတိ, ဗုဒ္ဓဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဓမ္မဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, သံဃဿ ဝဏ္ဏံ ဘာသတိ, ဓမ္မိကဉ္စ ဂိဟိပဋိဿဝံ သစ္စာပေတိ. ဣမေဟိ ခေါ, ဘိက္ခဝေ, အဋ္ဌဟိ ဓမ္မေဟိ သမန္နာဂတဿ ဘိက္ခုနော အာကင်္ခမာနော သံဃော ပဋိသာရဏီယကမ္မံ ပဋိပ္ပဿမ္ဘေယျာ’’တိ. နဝမံ. “भिक्खूंनो, आठ गोष्टींनी युक्त असलेल्या भिक्खूचे, जर संघाची इच्छा असेल तर, संघ 'पटिसारणीय कम्म' मागे घेऊ शकतो (नष्ट करू शकतो). कोणत्या आठ गोष्टींनी? (१) तो गृहस्थांच्या लाभाला अडथळा आणण्याचा प्रयत्न करत नाही, (२) तो गृहस्थांच्या अहिताचा प्रयत्न करत नाही, (३) तो गृहस्थांना शिवीगाळ व निंदा करत नाही, (४) तो गृहस्थांमध्ये फूट पाडत नाही, (५) तो बुद्धांचे गुणगान करतो, (६) तो धम्माचे गुणगान करतो, (७) तो संघाचे गुणगान करतो, (८) आणि तो गृहस्थांना दिलेले न्याय्य वचन पूर्ण करतो. भिक्खूंनो, या आठ गोष्टींनी युक्त असलेल्या भिक्खूचे, जर संघाची इच्छा असेल तर, संघ 'पटिसारणीय कम्म' मागे घेऊ शकतो.” नववे (सुत्त समाप्त). ၁၀. သမ္မာဝတ္တနသုတ္တံ १०. सम्मावत्तन सुत्त ၉၀. ‘‘တဿပါပိယသိကကမ္မကတေန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ အဋ္ဌသု ဓမ္မေသု သမ္မာ ဝတ္တိတဗ္ဗံ – န ဥပသမ္ပာဒေတဗ္ဗော, န နိဿယော ဒါတဗ္ဗော, န သာမဏေရော ဥပဋ္ဌာပေတဗ္ဗော, န ဘိက္ခုနောဝါဒကသမ္မုတိ သာဒိတဗ္ဗာ, သမ္မတေနပိ ဘိက္ခုနိယော န ဩဝဒိတဗ္ဗာ, န ကာစိ သံဃသမ္မုတိ သာဒိတဗ္ဗာ, န ကိသ္မိဉ္စိ ပစ္စေကဋ္ဌာနေ ဌပေတဗ္ဗော, န စ တေန မူလေန ဝုဋ္ဌာပေတဗ္ဗော. တဿပါပိယသိကကမ္မကတေန, ဘိက္ခဝေ, ဘိက္ခုနာ ဣမေသု အဋ္ဌသု ဓမ္မေသု သမ္မာ ဝတ္တိတဗ္ဗ’’န္တိ. ဒသမံ. ९०. “भिक्खूंनो, ज्या भिक्खूवर 'तस्सपापियसिक कम्म' (गंभीर गैरवर्तनाबद्दलची कारवाई) करण्यात आलेली आहे, त्याने आठ गोष्टींमध्ये योग्य प्रकारे वर्तन केले पाहिजे: (१) त्याने कोणाला उपसंपदा (दीक्षा) देऊ नये, (२) त्याने कोणाला निश्रय (आश्रय) देऊ नये, (३) त्याने स्वतःच्या सेवेसाठी सामणेर ठेवू नये, (४) त्याने भिक्खुणींना उपदेश करण्याची संमती स्वीकारू नये, (५) संमती मिळालेली असली तरी त्याने भिक्खुणींना उपदेश करू नये, (६) त्याने संघाची कोणतीही संमती (अधिकारपद) स्वीकारू नये, (७) त्याला कोणत्याही मुख्य पदावर नियुक्त केले जाऊ नये, (८) आणि त्या मूळ कारणावरून त्याला (आपत्तीतून) मुक्त केले जाऊ नये. भिक्खूंनो, ज्या भिक्खूवर 'तस्सपापियसिक कम्म' करण्यात आलेली आहे, त्याने या आठ गोष्टींमध्ये योग्य प्रकारे वर्तन केले पाहिजे.” दहावे (सुत्त समाप्त). သတိဝဂ္ဂေါ စတုတ္ထော. चौथा सतिवग्ग समाप्त. တဿုဒ္ဒါနံ – त्याचा सारांश (उद्दान) खालीलप्रमाणे आहे – သတိပုဏ္ဏိယမူလေန[Pg.160], စောရသမဏေန ပဉ္စမံ; ယသော ပတ္တပ္ပသာဒေန, ပဋိသာရဏီယဉ္စ ဝတ္တနန္တိ. सति (स्मृती), पुण्णिय, मूल, चोर आणि पाचवे समण; यसो, पत्त (पात्र पालथे घालणे), प्पसाद (आदर-अनादर), पटिसारणीय आणि वत्तन (वर्तन). (၁၀) ၅. သာမညဝဂ္ဂေါ (१०) ५. सामञ्ञवग्ग ၉၁-၁၁၆. အထ ခေါ ဗောဇ္ဈာ ဥပါသိကာ, သိရီမာ, ပဒုမာ, သုတနာ, မနုဇာ, ဥတ္တရာ, မုတ္တာ, ခေမာ, ရုစီ, စုန္ဒီ, ဗိမ္ဗီ, သုမနာ, မလ္လိကာ, တိဿာ, တိဿမာတာ, သောဏာ, သောဏာယ မာတာ, ကာဏာ, ကာဏမာတာ, ဥတ္တရာ နန္ဒမာတာ, ဝိသာခါ မိဂါရမာတာ, ခုဇ္ဇုတ္တရာ ဥပါသိကာ, သာမာဝတီ ဥပါသိကာ, သုပ္ပဝါသာ ကောလိယဓီတာ, သုပ္ပိယာ ဥပါသိကာ, နကုလမာတာ ဂဟပတာနီ. ९१-११६. त्यानंतर बोज्झा उपासिका, सिरीमा, पदुमा, सुतना, मनुजा, उत्तरा, मुत्ता, खेमा, रुची, राजकुमारी चुंदी, बिम्बी उपासिका, राजकुमारी सुमना, राणी मल्लिका, तिस्सा उपासिका, तिस्साची माता, सोणा उपासिका, सोणाची माता, काणा, काणाची माता, उत्तरा नंदमाता, विशाखा मिगारमाता, खुज्जुत्तरा उपासिका, सामावती उपासिका, कोलीय कन्या सुप्पवासा, सुप्पिया उपासिका आणि गृहपतीची पत्नी नकुलमाता (या सर्व उपासिकांना भगवंतांनी आठ अंगांनी युक्त असलेल्या उपोसथाचाच उपदेश केला). သာမညဝဂ္ဂေါ ပဉ္စမော. पाचवा सामञ्ञवग्ग समाप्त. ဒုတိယပဏ္ဏာသကံ သမတ္တံ. दुसरे पण्णासक (पन्नास सुत्तांचा समूह) समाप्त. (၁၁). ရာဂပေယျာလံ (११). रागपेय्याल ၁၁၇. ‘‘ရာဂဿ[Pg.161], ဘိက္ခဝေ, အဘိညာယ အဋ္ဌ ဓမ္မာ ဘာဝေတဗ္ဗာ. ကတမေ အဋ္ဌ? သမ္မာဒိဋ္ဌိ, သမ္မာသင်္ကပ္ပော, သမ္မာဝါစာ, သမ္မာကမ္မန္တော, သမ္မာအာဇီဝေါ, သမ္မာဝါယာမော, သမ္မာသတိ, သမ္မာသမာဓိ – ရာဂဿ, ဘိက္ခဝေ, အဘိညာယ ဣမေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ ဘာဝေတဗ္ဗာ’’တိ. ११७. “भिक्खूंनो, रागाचे (आसक्तीचे) विशेष ज्ञान होण्यासाठी आठ गोष्टींची भावना (विकास) केली पाहिजे. कोणत्या आठ गोष्टी? सम्यक दृष्टी, सम्यक संकल्प, सम्यक वाचा, सम्यक कर्मान्त, सम्यक आजीव, सम्यक व्यायाम, सम्यक सती (स्मृती) आणि सम्यक समाधी. भिक्खूंनो, रागाचे विशेष ज्ञान होण्यासाठी या आठ गोष्टींची भावना केली पाहिजे.” ၁၁၈. ‘‘ရာဂဿ, ဘိက္ခဝေ, အဘိညာယ အဋ္ဌ ဓမ္မာ ဘာဝေတဗ္ဗာ. ကတမေ အဋ္ဌ? အဇ္ဈတ္တံ ရူပသညီ ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ ပရိတ္တာနိ သုဝဏ္ဏဒုဗ္ဗဏ္ဏာနိ, တာနိ အဘိဘုယျ ‘ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ ဧဝံသညီ ဟောတိ. အဇ္ဈတ္တံ ရူပသညီ ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ အပ္ပမာဏာနိ သုဝဏ္ဏဒုဗ္ဗဏ္ဏာနိ, တာနိ အဘိဘုယျ ‘ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ ဧဝံသညီ ဟောတိ. အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ ပရိတ္တာနိ သုဝဏ္ဏဒုဗ္ဗဏ္ဏာနိ, တာနိ အဘိဘုယျ ‘ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ ဧဝံသညီ ဟောတိ. အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ အပ္ပမာဏာနိ သုဝဏ္ဏဒုဗ္ဗဏ္ဏာနိ, တာနိ အဘိဘုယျ ‘ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ ဧဝံသညီ ဟောတိ. အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ နီလာနိ နီလဝဏ္ဏာနိ နီလနိဒဿနာနိ နီလနိဘာသာနိ ပီတာနိ ပီတဝဏ္ဏာနိ…ပေ… လောဟိတကာနိ လောဟိတကဝဏ္ဏာနိ…ပေ… ဩဒါတာနိ ဩဒါတဝဏ္ဏာနိ…ပေ… ဩဒါတနိဘာသာနိ, တာနိ အဘိဘုယျ ‘ဇာနာမိ ပဿာမီ’တိ ဧဝံသညီ ဟောတိ – ရာဂဿ, ဘိက္ခဝေ, အဘိညာယ ဣမေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ ဘာဝေတဗ္ဗာ’’. ११८. “भिक्खूहो, रागाच्या अभिज्ञेसाठी (विशेष ज्ञानासाठी) आठ धम्मांची भावना केली पाहिजे. कोणत्या आठ? (१) अध्यात्म रूपाची संज्ञा असलेला व्यक्ती बाहेरील मर्यादित, सुंदर किंवा कुरूप रूपे पाहतो. त्यांच्यावर मात करून तो अशी संज्ञा बाळगतो की, 'मी जाणतो, मी पाहतो.' (२) अध्यात्म रूपाची संज्ञा असलेला व्यक्ती बाहेरील अमर्याद, सुंदर किंवा कुरूप रूपे पाहतो. त्यांच्यावर मात करून तो अशी संज्ञा बाळगतो की, 'मी जाणतो, मी पाहतो.' (३) अध्यात्म रूपाची संज्ञा नसलेला व्यक्ती बाहेरील मर्यादित, सुंदर किंवा कुरूप रूपे पाहतो. त्यांच्यावर मात करून तो अशी संज्ञा बाळगतो की, 'मी जाणतो, मी पाहतो.' (४) अध्यात्म रूपाची संज्ञा नसलेला व्यक्ती बाहेरील अमर्याद, सुंदर किंवा कुरूप रूपे पाहतो. त्यांच्यावर मात करून तो अशी संज्ञा बाळगतो की, 'मी जाणतो, मी पाहतो.' (५) अध्यात्म रूपाची संज्ञा नसलेला व्यक्ती बाहेरील निळी, निळ्या रंगाची, निळ्या स्वरूपाची, निळी चमक असणारी रूपे पाहतो... (६) ...पिवळी, पिवळ्या रंगाची... (७) ...लाल, लाल रंगाची... (८) ...पांढरी, पांढऱ्या रंगाची, पांढऱ्या स्वरूपाची, पांढरी चमक असणारी रूपे पाहतो. त्यांच्यावर मात करून तो अशी संज्ञा बाळगतो की, 'मी जाणतो, मी पाहतो.' भिक्खूहो, रागाच्या अभिज्ञेसाठी या आठ धम्मांची भावना केली पाहिजे.” ၁၁၉. ‘‘ရာဂဿ, ဘိက္ခဝေ, အဘိညာယ အဋ္ဌ ဓမ္မာ ဘာဝေတဗ္ဗာ. ကတမေ အဋ္ဌ? ရူပီ ရူပါနိ ပဿတိ, အဇ္ဈတ္တံ အရူပသညီ ဗဟိဒ္ဓါ ရူပါနိ ပဿတိ, သုဘန္တေဝ အဓိမုတ္တော ဟောတိ, သဗ္ဗသော ရူပသညာနံ သမတိက္ကမာ ပဋိဃသညာနံ အတ္ထင်္ဂမာ နာနတ္တသညာနံ အမနသိကာရာ ‘အနန္တော အာကာသော’တိ အာကာသာနဉ္စာယတနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ, သဗ္ဗသော အာကာသာနဉ္စာယတနံ သမတိက္ကမ္မ ‘အနန္တံ ဝိညာဏ’န္တိ ဝိညာဏဉ္စာယတနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ, သဗ္ဗသော ဝိညာဏဉ္စာယတနံ သမတိက္ကမ္မ ‘နတ္ထိ ကိဉ္စီ’တိ အာကိဉ္စညာယတနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ, သဗ္ဗသော အာကိဉ္စညာယတနံ သမတိက္ကမ္မ နေဝသညာနာသညာယတနံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ, သဗ္ဗသော နေဝသညာနာသညာယတနံ သမတိက္ကမ္မ သညာဝေဒယိတနိရောဓံ ဥပသမ္ပဇ္ဇ ဝိဟရတိ – ရာဂဿ, ဘိက္ခဝေ, အဘိညာယ ဣမေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ ဘာဝေတဗ္ဗာ’’. ११९. “भिक्खूहो, रागाच्या अभिज्ञेसाठी आठ धम्मांची भावना केली पाहिजे. कोणत्या आठ? (१) रूपी (रूपवान) व्यक्ती रूपे पाहतो. (२) अध्यात्म रूपाची संज्ञा नसलेला व्यक्ती बाहेरील रूपे पाहतो. (३) तो केवळ 'शुभ' (सुंदर) यावरच अधिमुक्त (एकाग्र) असतो. (४) सर्व प्रकारे रूपसंज्ञांचे अतिक्रमण करून, प्रतिघसंज्ञांचा अस्त झाल्यामुळे, नानात्वसंज्ञांकडे मनसिकार न केल्यामुळे, 'आकाश अनंत आहे' अशा भावनेने आकासानंचायतन समाधी प्राप्त करून विहरतो. (५) सर्व प्रकारे आकासानंचायतनाचे अतिक्रमण करून, 'विज्ञान अनंत आहे' अशा भावनेने विज्ञाणंचायतन समाधी प्राप्त करून विहरतो. (६) सर्व प्रकारे विज्ञाणंचायतनाचे अतिक्रमण करून, 'काहीही नाही' अशा भावनेने आकिंचन्यायतन समाधी प्राप्त करून विहरतो. (७) सर्व प्रकारे आकिंचन्यायतनाचे अतिक्रमण करून नेवसंज्ञानासंज्ञायतन समाधी प्राप्त करून विहरतो. (८) सर्व प्रकारे नेवसंज्ञानासंज्ञायतनाचे अतिक्रमण करून संज्ञावेदयितनिरोध (संज्ञा आणि वेदनांचा निरोध) प्राप्त करून विहरतो. भिक्खूहो, रागाच्या अभिज्ञेसाठी या आठ धम्मांची भावना केली पाहिजे.” ၁၂၀-၁၄၆. ‘‘ရာဂဿ[Pg.162], ဘိက္ခဝေ, ပရိညာယ…ပေ… ပရိက္ခယာယ… ပဟာနာယ… ခယာယ… ဝယာယ… ဝိရာဂါယ… နိရောဓာယ… စာဂါယ… ပဋိနိဿဂ္ဂါယ…ပေ… ဣမေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ ဘာဝေတဗ္ဗာ’’. १२०-१४६. “भिक्खूहो, रागाच्या परिज्ञेसाठी (पूर्ण आकलनासाठी)...पे०... परिक्षयासाठी (पूर्ण नाशासाठी)... प्रहाणासाठी (त्यागासाठी)... क्षयासाठी... व्ययासाठी (नाशासाठी)... विरागासाठी... निरोधासाठी... त्यागासाठी... प्रतिनिसर्गासाठी (पूर्णपणे सोडून देण्यासाठी)...पे०... या आठ धम्मांची भावना केली पाहिजे.” ၁၄၇-၆၂၆. ‘‘ဒေါသဿ…ပေ… မောဟဿ… ကောဓဿ… ဥပနာဟဿ… မက္ခဿ… ပဠာသဿ… ဣဿာယ… မစ္ဆရိယဿ … မာယာယ… သာဌေယျဿ… ထမ္ဘဿ… သာရမ္ဘဿ… မာနဿ… အတိမာနဿ… မဒဿ… ပမာဒဿ အဘိညာယ…ပေ… ပရိညာယ… ပရိက္ခယာယ… ပဟာနာယ… ခယာယ… ဝယာယ… ဝိရာဂါယ… နိရောဓာယ… စာဂါယ… ပဋိနိဿဂ္ဂါယ…ပေ… ဣမေ အဋ္ဌ ဓမ္မာ ဘာဝေတဗ္ဗာ’’တိ. १४७-६२६. “द्वेषाच्या (दोसाच्या)...पे०... मोहाच्या... क्रोधाच्या... उपनाहाच्या (वैरभावाच्या)... मक्खाच्या (गुण नाकारण्याच्या वृत्तीच्या)... पळासाच्या (अहंकारयुक्त विरोधाच्या)... इस्सेच्या (असूयेच्या)... मच्छरियाच्या (कंजूषपणाच्या)... मायेच्या (कपटीपणाच्या)... साठय्यतेच्या (धूर्ततेच्या)... थंभाच्या (ताठरतेच्या)... सारंभाच्या (उग्रतेच्या)... मानाच्या (अहंकाराच्या)... अतिमानाच्या (अति-अहंकाराच्या)... मदाच्या (गर्वाच्या)... प्रमादाच्या (बेसावधपणाच्या) अभिज्ञेसाठी...पे०... परिज्ञेसाठी... परिक्षयासाठी... प्रहाणासाठी... क्षयासाठी... व्ययासाठी... विरागासाठी... निरोधासाठी... त्यागासाठी... प्रतिनिसर्गासाठी...पे०... या आठ धम्मांची भावना केली पाहिजे.” असे भगवान म्हणाले. ရာဂပေယျာလံ နိဋ္ဌိတံ. रागपेय्याल समाप्त झाले. အဋ္ဌကနိပါတပါဠိ နိဋ္ဌိတာ. अट्ठकनिपातपाळि समाप्त झाली. | |||
| မြန်မာ | |||
| ပါဠိတော် | အဋ္ဌကထာ | ဋီကာ | အခြား |
| 1101 ပါရာဇိက ပါဠိ 1102 ပါစိတ္တိယ ပါဠိ 1103 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဝိနယ) 1104 စူဠဝဂ္ဂ ပါဠိ 1105 ပရိဝါရ ပါဠိ | 1201 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၁ 1202 ပါရာဇိကကဏ္ဍ အဋ္ဌကထာ-၂ 1203 ပါစိတ္တိယ အဋ္ဌကထာ 1204 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဝိနယ) 1205 စူဠဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 1206 ပရိဝါရ အဋ္ဌကထာ | 1301 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၁ 1302 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၂ 1303 သာရတ္ထဒီပနီ ဋီကာ-၃ | 1401 ဒွေမာတိကာပါဠိ 1402 ဝိနယသင်္ဂဟ အဋ္ဌကထာ 1403 ဝဇိရဗုဒ္ဓိ ဋီကာ 1404 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၁ 1405 ဝိမတိဝိနောဒနီ ဋီကာ-၂ 1406 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၁ 1407 ဝိနယာလင်္ကာရ ဋီကာ-၂ 1408 ကင်္ခာဝိတရဏီပုရာဏ ဋီကာ 1409 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ-ဥတ္တရဝိနိစ္ဆယ 1410 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၁ 1411 ဝိနယဝိနိစ္ဆယ ဋီကာ-၂ 1412 ပါစိတျာဒိယောဇနာပါဠိ 1413 ခုဒ္ဒသိက္ခာ-မူလသိက္ခာ 8401 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၁ 8402 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-၂ 8403 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၁ 8404 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ-မဟာဋီကာ-၂ 8405 ဝိသုဒ္ဓိမဂ္ဂ နိဒါနကထာ 8406 ဒီဃနိကာယ (ပု-ဝိ) 8407 မဇ္ဈိမနိကာယ (ပု-ဝိ) 8408 သံယုတ္တနိကာယ (ပု-ဝိ) 8409 အင်္ဂုတ္တရနိကာယ (ပု-ဝိ) 8410 ဝိနယပိဋက (ပု-ဝိ) 8411 အဘိဓမ္မပိဋက (ပု-ဝိ) 8412 အဋ္ဌကထာ (ပု-ဝိ) 8413 နိရုတ္တိဒီပနီ 8414 ပရမတ္ထဒီပနီ သင်္ဂဟမဟာဋီကာပါဌ 8415 အနုဒီပနီပါဌ 8416 ပဋ္ဌာနုဒ္ဒေသ ဒီပနီပါဌ 8417 နမက္ကာရဋီကာ 8418 မဟာပဏာမပါဌ 8419 လက္ခဏာတော ဗုဒ္ဓထောမနာဂါထာ 8420 သုတဝန္ဒနာ 8421 ကမလာဉ္ဇလိ 8422 ဇိနာလင်္ကာရ 8423 ပဇ္ဇမဓု 8424 ဗုဒ္ဓဂုဏဂါထာဝလီ 8425 စူဠဂန္ထဝံသ 8427 သာသနဝံသ 8426 မဟာဝံသ 8429 မောဂ္ဂလ္လာနဗျာကရဏံ 8428 ကစ္စာယနဗျာကရဏံ 8430 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ပဒမာလာ) 8431 သဒ္ဒနီတိပ္ပကရဏံ (ဓါတုမာလာ) 8432 ပဒရူပသိဒ္ဓိ 8433 မောဂလ္လာနပဉ္စိကာ 8434 ပယောဂသိဒ္ဓိပါဌ 8435 ဝုတ္တောဒယပါဌ 8436 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာပါဌ 8437 အဘိဓါနပ္ပဒီပိကာဋီကာ 8438 သုဗောဓါလင်္ကာရပါဌ 8439 သုဗောဓါလင်္ကာရဋီကာ 8440 ဗာလာဝတာရ ဂဏ္ဌိပဒတ္ထဝိနိစ္ဆယသာရ 8446 ကဝိဒပ္ပဏနီတိ 8447 နီတိမဉ္ဇရီ 8445 ဓမ္မနီတိ 8444 မဟာရဟနီတိ 8441 လောကနီတိ 8442 သုတ္တန္တနီတိ 8443 သူရဿတိနီတိ 8450 စာဏကျနီတိ 8448 နရဒက္ခဒီပနီ 8449 စတုရာရက္ခဒီပနီ 8451 ရသဝါဟိနီ 8452 သီမဝိသောဓနီပါဌ 8453 ဝေဿန္တရဂီတိ 8454 မောဂ္ဂလ္လာန ဝုတ္တိဝိဝရဏပဉ္စိကာ 8455 ထူပဝံသ 8456 ဒါဌာဝံသ 8457 ဓါတုပါဌဝိလာသိနိယာ 8458 ဓါတုဝံသ 8459 ဟတ္ထဝနဂလ္လဝိဟာရဝံသ 8460 ဇိနစရိတယ 8461 ဇိနဝံသဒီပံ 8462 တေလကဋာဟဂါထာ 8463 မိလိဒဋီကာ 8464 ပဒမဉ္ဇရီ 8465 ပဒသာဓနံ 8466 သဒ္ဒဗိန္ဒုပကရဏံ 8467 ကစ္စာယနဓါတုမဉ္ဇုသာ 8468 သာမန္တကူဋဝဏ္ဏနာ |
| 2101 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 2102 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (ဒီဃ) 2103 ပါထိကဝဂ္ဂ ပါဠိ | 2201 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 2202 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (ဒီဃ) 2203 ပါထိကဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ | 2301 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 2302 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (ဒီဃ) 2303 ပါထိကဝဂ္ဂ ဋီကာ 2304 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၁ 2305 သီလက္ခန္ဓဝဂ္ဂ-အဘိနဝဋီကာ-၂ | |
| 3101 မူလပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3102 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ပါဠိ 3103 ဥပရိပဏ္ဏာသ ပါဠိ | 3201 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၁ 3202 မူလပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ-၂ 3203 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ 3204 ဥပရိပဏ္ဏာသ အဋ္ဌကထာ | 3301 မူလပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3302 မဇ္ဈိမပဏ္ဏာသ ဋီကာ 3303 ဥပရိပဏ္ဏာသ ဋီကာ | |
| 4101 သဂါထာဝဂ္ဂ ပါဠိ 4102 နိဒါနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4103 ခန္ဓဝဂ္ဂ ပါဠိ 4104 သဠာယတနဝဂ္ဂ ပါဠိ 4105 မဟာဝဂ္ဂ ပါဠိ (သံယုတ္တ) | 4201 သဂါထာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4202 နိဒါနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4203 ခန္ဓဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4204 သဠာယတနဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ 4205 မဟာဝဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ (သံယုတ္တ) | 4301 သဂါထာဝဂ္ဂ ဋီကာ 4302 နိဒါနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4303 ခန္ဓဝဂ္ဂ ဋီကာ 4304 သဠာယတနဝဂ္ဂ ဋီကာ 4305 မဟာဝဂ္ဂ ဋီကာ (သံယုတ္တ) | |
| 5101 ဧကကနိပါတ ပါဠိ 5102 ဒုကနိပါတ ပါဠိ 5103 တိကနိပါတ ပါဠိ 5104 စတုက္ကနိပါတ ပါဠိ 5105 ပဉ္စကနိပါတ ပါဠိ 5106 ဆက္ကနိပါတ ပါဠိ 5107 သတ္တကနိပါတ ပါဠိ 5108 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ပါဠိ 5109 နဝကနိပါတ ပါဠိ 5110 ဒသကနိပါတ ပါဠိ 5111 ဧကာဒသကနိပါတ ပါဠိ | 5201 ဧကကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5202 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5203 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ အဋ္ဌကထာ 5204 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ အဋ္ဌကထာ | 5301 ဧကကနိပါတ ဋီကာ 5302 ဒုက-တိက-စတုက္ကနိပါတ ဋီကာ 5303 ပဉ္စက-ဆက္က-သတ္တကနိပါတ ဋီကာ 5304 အဋ္ဌကာဒိနိပါတ ဋီကာ | |
| 6101 ခုဒ္ဒကပါဌ ပါဠိ 6102 ဓမ္မပဒ ပါဠိ 6103 ဥဒါန ပါဠိ 6104 ဣတိဝုတ္တက ပါဠိ 6105 သုတ္တနိပါတ ပါဠိ 6106 ဝိမာနဝတ္ထု ပါဠိ 6107 ပေတဝတ္ထု ပါဠိ 6108 ထေရဂါထာ ပါဠိ 6109 ထေရီဂါထာ ပါဠိ 6110 အပဒါန ပါဠိ-၁ 6111 အပဒါန ပါဠိ-၂ 6112 ဗုဒ္ဓဝံသ ပါဠိ 6113 စရိယာပိဋက ပါဠိ 6114 ဇာတက ပါဠိ-၁ 6115 ဇာတက ပါဠိ-၂ 6116 မဟာနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6117 စူဠနိဒ္ဒေသ ပါဠိ 6118 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ ပါဠိ 6119 နေတ္တိပ္ပကရဏ ပါဠိ 6120 မိလိန္ဒပဉှ ပါဠိ 6121 ပေဋကောပဒေသ ပါဠိ | 6201 ခုဒ္ဒကပါဌ အဋ္ဌကထာ 6202 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၁ 6203 ဓမ္မပဒ အဋ္ဌကထာ-၂ 6204 ဥဒါန အဋ္ဌကထာ 6205 ဣတိဝုတ္တက အဋ္ဌကထာ 6206 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၁ 6207 သုတ္တနိပါတ အဋ္ဌကထာ-၂ 6208 ဝိမာနဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6209 ပေတဝတ္ထု အဋ္ဌကထာ 6210 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၁ 6211 ထေရဂါထာ အဋ္ဌကထာ-၂ 6212 ထေရီဂါထာ အဋ္ဌကထာ 6213 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၁ 6214 အပဒါန အဋ္ဌကထာ-၂ 6215 ဗုဒ္ဓဝံသ အဋ္ဌကထာ 6216 စရိယာပိဋက အဋ္ဌကထာ 6217 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၁ 6218 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၂ 6219 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၃ 6220 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၄ 6221 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၅ 6222 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၆ 6223 ဇာတက အဋ္ဌကထာ-၇ 6224 မဟာနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6225 စူဠနိဒ္ဒေသ အဋ္ဌကထာ 6226 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၁ 6227 ပဋိသမ္ဘိဒါမဂ္ဂ အဋ္ဌကထာ-၂ 6228 နေတ္တိပ္ပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 6301 နေတ္တိပ္ပကရဏ ဋီကာ 6302 နေတ္တိဝိဘာဝိနီ | |
| 7101 ဓမ္မသင်္ဂဏီ ပါဠိ 7102 ဝိဘင်္ဂ ပါဠိ 7103 ဓါတုကထာ ပါဠိ 7104 ပုဂ္ဂလပညတ္တိ ပါဠိ 7105 ကထာဝတ္ထု ပါဠိ 7106 ယမက ပါဠိ-၁ 7107 ယမက ပါဠိ-၂ 7108 ယမက ပါဠိ-၃ 7109 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၁ 7110 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၂ 7111 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၃ 7112 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၄ 7113 ပဋ္ဌာန ပါဠိ-၅ | 7201 ဓမ္မသင်္ဂဏိ အဋ္ဌကထာ 7202 သမ္မောဟဝိနောဒနီ အဋ္ဌကထာ 7203 ပဉ္စပကရဏ အဋ္ဌကထာ | 7301 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-မူလဋီကာ 7302 ဝိဘင်္ဂ-မူလဋီကာ 7303 ပဉ္စပကရဏ-မူလဋီကာ 7304 ဓမ္မသင်္ဂဏီ-အနုဋီကာ 7305 ပဉ္စပကရဏ-အနုဋီကာ 7306 အဘိဓမ္မာဝတာရော-နာမရူပပရိစ္ဆေဒေါ 7307 အဘိဓမ္မတ္ထသင်္ဂဟော 7308 အဘိဓမ္မာဝတာရ-ပုရာဏဋီကာ 7309 အဘိဓမ္မမာတိကာပါဠိ | |
| português | |||
| Páli | Aṭṭhakathā | Ṭīkā | Outro |
| 1101 Ofensas Graves (Pārājika) 1102 Ofensas Leves (Pācittiya) 1103 Grande Seção do Vīnaya (Mahāvagga) 1104 Pequena Seção do Vīnaya (Cūḷavagga) 1105 Apêndice do Vīnaya (Parivāra) | 1201 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 1 1202 Comentário das Ofensas Graves - Vol. 2 1203 Comentário das Ofensas Leves 1204 Comentário da Grande Seção do Vīnaya 1205 Comentário da Pequena Seção do Vīnaya 1206 Comentário do Apêndice do Vīnaya | 1301 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 1 1302 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 2 1303 Subcomentário que Elucida o Sentido Essencial - Vol. 3 | 1401 Texto das Duas Matrizes 1402 Comentário do Compêndio do Vīnaya 1403 Subcomentário de Vajirabuddhi 1404 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 1 1405 Subcomentário que Dissipa Dúvidas - Vol. 2 1406 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 1 1407 Subcomentário do Ornamento do Vīnaya - Vol. 2 1408 Antigo Subcomentário que Supera Dúvidas 1409 Decisão sobre o Vīnaya e Decisão Superior 1410 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 1 1411 Subcomentário da Decisão sobre o Vīnaya - Vol. 2 1412 Texto da Aplicação das Regras 1413 Pequeno Treinamento e Treinamento Fundamental 8401 Caminho da Purificação - Vol. 1 8402 Caminho da Purificação - Vol. 2 8403 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 1 8404 Grande Subcomentário do Caminho da Purificação - Vol. 2 8405 História da Origem do Caminho da Purificação 8406 Coleção dos Longos Discursos (índice Pāli-Vietnamita) 8407 Coleção dos Discursos Médios (índice Pāli-Vietnamita) 8408 Coleção dos Discursos Agrupados (índice Pāli-Vietnamita) 8409 Coleção dos Discursos Numerados (índice Pāli-Vietnamita) 8410 Cesto da Disciplina (índice Pāli-Vietnamita) 8411 Cesto do Abhidhamma (índice Pāli-Vietnamita) 8412 Comentários (índice Pāli-Vietnamita) 8413 Elucidação da Etimologia 8414 Grande Subcomentário do Compêndio que Elucida o Sentido Supremo 8415 Texto do Subcomentário Elucidativo 8416 Texto Elucidativo sobre a Exposição das Condições 8417 Subcomentário da Saudação 8418 Grande Texto de Saudação 8419 Versos de Louvor a Buda pelos Sinais 8420 Saudação com Recitação 8421 Oferenda de Lótus 8422 Ornamento dos Vencedores 8423 Mel dos Versos 8424 Coleção de Versos sobre as Qualidades de Buda 8425 Pequena Crônica dos Livros 8427 Crônica do Ensinamento 8426 Grande Crônica 8429 Gramática de Moggallāna 8428 Gramática de Kaccāyana 8430 Tratado sobre a Gramática - Série de Palavras 8431 Tratado sobre a Gramática - Série de Raízes 8432 Realização das Formas das Palavras 8433 Comentário de Moggallāna 8434 Texto sobre a Realização da Aplicação 8435 Texto sobre a Origem dos Versos 8436 Texto do Dicionário Iluminado 8437 Subcomentário do Dicionário Iluminado 8438 Texto sobre o Ornamento da Boa Compreensão 8439 Subcomentário do Ornamento da Boa Compreensão 8440 Essência da Decisão sobre os Termos do Glossário de Bālāvatāra 8446 Ética do Poeta 8447 Coleção de Ética 8445 Ética do Dhamma 8444 Grande Ética Secreta 8441 Ética do Mundo 8442 Ética dos Suttas 8443 Ética do Herói 8450 Ética de Cāṇakya 8448 Elucidação sobre os Perigos para os Homens 8449 Elucidação sobre as Quatro Proteções 8451 O Fluxo do Sabor - Histórias Edificantes 8452 Texto sobre a Purificação dos Limites 8453 Canto de Vessantara 8454 Explicação do Comentário de Moggallāna 8455 Crônica das Estupas 8456 Crônica da Relíquia do Dente 8457 O Esplendor da Leitura dos Elementos 8458 Crônica das Relíquias 8459 Crônica do Mosteiro de Hatthavanagalla 8460 História do Vencedor 8461 Ilha da Linhagem dos Vencedores 8462 Versos da Panela de Óleo 8463 Subcomentário de Milinda 8464 Cacho de Flores de Palavras 8465 Realização das Palavras 8466 Tratado sobre os Pontos da Gramática 8467 Coleção de Raízes de Kaccāyana 8468 Descrição do Pico de Sāmantakūṭa |
| 2101 Seção da Moralidade - Dīgha 2102 Grande Seção - Dīgha 2103 Seção de Pāthika - Dīgha | 2201 Comentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2202 Comentário da Grande Seção - Dīgha 2203 Comentário da Seção de Pāthika - Dīgha | 2301 Subcomentário da Seção da Moralidade - Dīgha 2302 Subcomentário da Grande Seção - Dīgha 2303 Subcomentário da Seção de Pāthika - Dīgha 2304 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 1 2305 Novo Subcomentário da Seção da Moralidade - Vol. 2 | |
| 3101 Cinquenta Discursos Fundamentais - Majjhima 3102 Cinquenta Discursos Médios - Majjhima 3103 Cinquenta Discursos Superiores - Majjhima | 3201 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 1 3202 Comentário dos Cinquenta Fundamentais - Vol. 2 3203 Comentário dos Cinquenta Médios 3204 Comentário dos Cinquenta Superiores | 3301 Subcomentário dos Cinquenta Fundamentais 3302 Subcomentário dos Cinquenta Médios 3303 Subcomentário dos Cinquenta Superiores | |
| 4101 Seção com Versos - Saṃyutta 4102 Seção das Causas - Saṃyutta 4103 Seção dos Agregados - Saṃyutta 4104 Seção das Seis Bases dos Sentidos - Saṃyutta 4105 Grande Seção - Saṃyutta | 4201 Comentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4202 Comentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4203 Comentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4204 Comentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4205 Comentário da Grande Seção - Saṃyutta | 4301 Subcomentário da Seção com Versos - Saṃyutta 4302 Subcomentário da Seção das Causas - Saṃyutta 4303 Subcomentário da Seção dos Agregados - Saṃyutta 4304 Subcomentário da Seção das Seis Bases - Saṃyutta 4305 Subcomentário da Grande Seção - Saṃyutta | |
| 5101 Grupos de Um - Aṅguttara 5102 Grupos de Dois - Aṅguttara 5103 Grupos de Três - Aṅguttara 5104 Grupos de Quatro - Aṅguttara 5105 Grupos de Cinco - Aṅguttara 5106 Grupos de Seis - Aṅguttara 5107 Grupos de Sete - Aṅguttara 5108 Grupos de Oito, etc. - Aṅguttara 5109 Grupos de Nove - Aṅguttara 5110 Grupos de Dez - Aṅguttara 5111 Grupos de Onze - Aṅguttara | 5201 Comentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5202 Comentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5203 Comentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5204 Comentário dos Grupos de Oito, etc. | 5301 Subcomentário dos Grupos de Um - Aṅguttara 5302 Subcomentário dos Grupos de Dois, Três e Quatro 5303 Subcomentário dos Grupos de Cinco, Seis e Sete 5304 Subcomentário dos Grupos de Oito, etc. | |
| 6101 Pequena Leitura (Khuddakapāṭha) 6102 Versos do Dhamma (Dhammapada) 6103 Exclamações Inspiradas (Udāna) 6104 Assim Foi Dito (Itivuttaka) 6105 Coleção de Discursos (Suttanipāta) 6106 Histórias das Mansões Celestiais 6107 Histórias dos Fantasmas 6108 Versos dos Monges Anciãos 6109 Versos das Monjas Anciãs 6110 Histórias Passadas - Vol. 1 6111 Histórias Passadas - Vol. 2 6112 História dos Budas (Buddhavaṃsa) 6113 Cesto das Condutas (Cariyāpiṭaka) 6114 Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6115 Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6116 Grande Exposição (Mahāniddesa) 6117 Pequena Exposição (Cūḷaniddesa) 6118 Caminho da Discriminação Analítica 6119 O Guia (Nettippakaraṇa) 6120 As Perguntas de Milinda 6121 Instrução do Cesto (Peṭakopadesa) | 6201 Comentário da Pequena Leitura 6202 Comentário do Dhammapada - Vol. 1 6203 Comentário do Dhammapada - Vol. 2 6204 Comentário do Udāna 6205 Comentário do Itivuttaka 6206 Comentário do Suttanipāta - Vol. 1 6207 Comentário do Suttanipāta - Vol. 2 6208 Comentário das Histórias das Mansões 6209 Comentário das Histórias dos Fantasmas 6210 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 1 6211 Comentário dos Versos dos Monges - Vol. 2 6212 Comentário dos Versos das Monjas 6213 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 1 6214 Comentário das Histórias Passadas - Vol. 2 6215 Comentário da História dos Budas 6216 Comentário do Cesto das Condutas 6217 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 1 6218 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 2 6219 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 3 6220 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 4 6221 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 5 6222 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 6 6223 Comentário das Histórias de Nascimentos - Vol. 7 6224 Comentário da Grande Exposição 6225 Comentário da Pequena Exposição 6226 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 1 6227 Comentário do Caminho da Discriminação - Vol. 2 6228 Comentário do Guia | 6301 Subcomentário do Guia 6302 Elucidação do Guia | |
| 7101 Enumeração dos Fenômenos (Dhammasaṅgaṇī) 7102 Análise (Vibhaṅga) 7103 Discurso sobre os Elementos (Dhātukathā) 7104 Designação das Pessoas (Puggalapaññatti) 7105 Pontos da Discussão (Kathāvatthu) 7106 O Livro dos Pares - Vol. 1 7107 O Livro dos Pares - Vol. 2 7108 O Livro dos Pares - Vol. 3 7109 Condições de Originação - Vol. 1 7110 Condições de Originação - Vol. 2 7111 Condições de Originação - Vol. 3 7112 Condições de Originação - Vol. 4 7113 Condições de Originação - Vol. 5 | 7201 Comentário da Enumeração dos Fenômenos 7202 Comentário que Dissipa a Confusão 7203 Comentário dos Cinco Tratados | 7301 Subcomentário Principal da Enumeração dos Fenômenos 7302 Subcomentário Principal da Análise 7303 Subcomentário Principal dos Cinco Tratados 7304 Subcomentário Secundário da Enumeração dos Fenômenos 7305 Subcomentário Secundário dos Cinco Tratados 7306 Introdução ao Abhidhamma - Análise de Nome e Forma 7307 Compêndio do Abhidhamma 7308 Antigo Subcomentário da Introdução ao Abhidhamma 7309 Matriz do Abhidhamma | |
| русский | |||
| Палийский канон | Комментарии | Субкомментарии | Другое |
| 1101 Параджика-пали 1102 Пачиттия-пали 1103 Махавагга-пали (Виная) 1104 Чулавагга-пали 1105 Паривара-пали | 1201 Параджиканда-аттхакатха-1 1202 Параджиканда-аттхакатха-2 1203 Пачиттия-аттхакатха 1204 Махавагга-аттхакатха (Виная) 1205 Чулавагга-аттхакатха 1206 Паривара-аттхакатха | 1301 Сараттхадипани-тика-1 1302 Сараттхадипани-тика-2 1303 Сараттхадипани-тика-3 | 1401 Двематика-пали 1402 Винаясангаха-аттхакатха 1403 Ваджирабуддхи-тика 1404 Вимативинодани-тика-1 1405 Вимативинодани-тика-2 1406 Винаяланкара-тика-1 1407 Винаяланкара-тика-2 1408 Канкхавитаранипурана-тика 1409 Винаявиниччая-уттаравиниччая 1410 Винаявиниччая-тика-1 1411 Винаявиниччая-тика-2 1412 Пачиттиядийоджана-пали 1413 Кхуддасиккха-муласиккха 8401 Висуддхимагга-1 8402 Висуддхимагга-2 8403 Висуддхимагга-махатика-1 8404 Висуддхимагга-махатика-2 8405 Висуддхимагга-ниданакатха 8406 Дигханикая (пу-ви) 8407 Мадджхиманикая (пу-ви) 8408 Самъюттаникая (пу-ви) 8409 Ангуттараникая (пу-ви) 8410 Винаяпитака (пу-ви) 8411 Абхидхаммапитака (пу-ви) 8412 Аттхакатха (пу-ви) 8413 Нируттидипани 8414 Параматтхадипани Сангахамахатикапатха 8415 Анудипанипатха 8416 Паттхануддеса дипанипатха 8417 Намаккаратика 8418 Махапанамапатха 8419 Лаккханато буддхатхоманагатха 8420 Сутавандана 8421 Камаланджали 8422 Джиналанкара 8423 Паджамадху 8424 Буддхагунагатхавали 8425 Чулагантхавамса 8427 Сасанавамса 8426 Махавамса 8429 Моггалланабьякарана 8428 Каччаянабьякарана 8430 Садданитиппакарана (падамала) 8431 Садданитиппакарана (дхатумала) 8432 Падарупасиддхи 8433 Могалланапанчика 8434 Пайогасиддхипатха 8435 Вуттодаяпатха 8436 Абхидханаппадипикапатха 8437 Абхидханаппадипикатика 8438 Субодхаланкарапатха 8439 Субодхаланкаратика 8440 Балаватара гантхипадаттхавиниччаясара 8446 Кавидаппананити 8447 Нитиманджари 8445 Дхамманити 8444 Махараханити 8441 Локанити 8442 Суттантанити 8443 Сурассатинити 8450 Чанакьянити 8448 Нарадаккхадипани 8449 Чатурараккхадипани 8451 Расавахини 8452 Симависодханипатха 8453 Вессантарагити 8454 Моггаллана вуттививаранапанчика 8455 Тхупавамса 8456 Датхавамса 8457 Дхатупатхавиласиния 8458 Дхатувамса 8459 Хаттхаванагаллавихаравамса 8460 Джиначаритая 8461 Джинавамсадипа 8462 Телакатахагатха 8463 Милидатика 8464 Падаманджари 8465 Падасадхана 8466 Саддабиндупакарана 8467 Каччаянадхатуманджуса 8468 Самантакутаваннана |
| 2101 Силаккхандхавагга-пали 2102 Махавагга-пали (Дигха) 2103 Патхикавагга-пали | 2201 Силаккхандхавагга-аттхакатха 2202 Махавагга-аттхакатха (Дигха) 2203 Патхикавагга-аттхакатха | 2301 Силаккхандхавагга-тика 2302 Махавагга-тика (Дигха) 2303 Патхикавагга-тика 2304 Силаккхандхавагга-абхинаватика-1 2305 Силаккхандхавагга-абхинаватика-2 | |
| 3101 Мулапаннаса-пали 3102 Мадджхимапаннаса-пали 3103 Упарипаннаса-пали | 3201 Мулапаннаса-аттхакатха-1 3202 Мулапаннаса-аттхакатха-2 3203 Мадджхимапаннаса-аттхакатха 3204 Упарипаннаса-аттхакатха | 3301 Мулапаннаса-тика 3302 Мадджхимапаннаса-тика 3303 Упарипаннаса-тика | |
| 4101 Сагатхавагга-пали 4102 Ниданавагга-пали 4103 Кхандхавагга-пали 4104 Салаятанавагга-пали 4105 Махавагга-пали (Самъютта) | 4201 Сагатхавагга-аттхакатха 4202 Ниданавагга-аттхакатха 4203 Кхандхавагга-аттхакатха 4204 Салаятанавагга-аттхакатха 4205 Махавагга-аттхакатха (Самъютта) | 4301 Сагатхавагга-тика 4302 Ниданавагга-тика 4303 Кхандхавагга-тика 4304 Салаятанавагга-тика 4305 Махавагга-тика (Самъютта) | |
| 5101 Экаканипата-пали 5102 Дуканипата-пали 5103 Тиканипата-пали 5104 Чатукканипата-пали 5105 Панчаканипата-пали 5106 Чхакканипата-пали 5107 Саттаканипата-пали 5108 Аттхакадинипата-пали 5109 Наваканипата-пали 5110 Дасаканипата-пали 5111 Экадасаканипата-пали | 5201 Экаканипата-аттхакатха 5202 Дука-тика-чатукканипата-аттхакатха 5203 Панчака-чхакка-саттаканипата-аттхакатха 5204 Аттхакадинипата-аттхакатха | 5301 Экаканипата-тика 5302 Дука-тика-чатукканипата-тика 5303 Панчака-чхакка-саттаканипата-тика 5304 Аттхакадинипата-тика | |
| 6101 Кхуддакапатха-пали 6102 Дхаммапада-пали 6103 Удана-пали 6104 Итивуттака-пали 6105 Суттанипата-пали 6106 Виманаваттху-пали 6107 Петаваттху-пали 6108 Тхерагатха-пали 6109 Тхеригатха-пали 6110 Ападана-пали-1 6111 Ападана-пали-2 6112 Буддхавамса-пали 6113 Чарияпитака-пали 6114 Джатака-пали-1 6115 Джатака-пали-2 6116 Маханиддеса-пали 6117 Чуланиддеса-пали 6118 Патисамбхидамагга-пали 6119 Неттиппакарана-пали 6120 Милиндапаньха-пали 6121 Петакопадеса-пали | 6201 Кхуддакапатха-аттхакатха 6202 Дхаммапада-аттхакатха-1 6203 Дхаммапада-аттхакатха-2 6204 Удана-аттхакатха 6205 Итивуттака-аттхакатха 6206 Суттанипата-аттхакатха-1 6207 Суттанипата-аттхакатха-2 6208 Виманаваттху-аттхакатха 6209 Петаваттху-аттхакатха 6210 Тхерагатха-аттхакатха-1 6211 Тхерагатха-аттхакатха-2 6212 Тхеригатха-аттхакатха 6213 Ападана-аттхакатха-1 6214 Ападана-аттхакатха-2 6215 Буддхавамса-аттхакатха 6216 Чарияпитака-аттхакатха 6217 Джатака-аттхакатха-1 6218 Джатака-аттхакатха-2 6219 Джатака-аттхакатха-3 6220 Джатака-аттхакатха-4 6221 Джатака-аттхакатха-5 6222 Джатака-аттхакатха-6 6223 Джатака-аттхакатха-7 6224 Маханиддеса-аттхакатха 6225 Чуланиддеса-аттхакатха 6226 Патисамбхидамагга-аттхакатха-1 6227 Патисамбхидамагга-аттхакатха-2 6228 Неттиппакарана-аттхакатха | 6301 Неттиппакарана-тика 6302 Неттивибхавини | |
| 7101 Дхаммасангани-пали 7102 Вибханга-пали 7103 Дхатукатха-пали 7104 Пуггалапаннятти-пали 7105 Катхаваттху-пали 7106 Ямака-пали-1 7107 Ямака-пали-2 7108 Ямака-пали-3 7109 Паттхана-пали-1 7110 Паттхана-пали-2 7111 Паттхана-пали-3 7112 Паттхана-пали-4 7113 Паттхана-пали-5 | 7201 Дхаммасангани-аттхакатха 7202 Саммохивинодани-аттхакатха 7203 Панчапакарана-аттхакатха | 7301 Дхаммасангани-мулатика 7302 Вибханга-мулатика 7303 Панчапакарана-мулатика 7304 Дхаммасангани-анутика 7305 Панчапакарана-анутика 7306 Абхидхаммаватаро-намарупапариччхедо 7307 Абхидхамматтхасангахо 7308 Абхидхаммаватара-пуранатика 7309 Абхидхаммаматика-пали | |
| සිංහල | |||
| පාලි කැනනය | විවරණ | අටුවා | වෙනත් |
| 1101 පාරාජික පාළි 1102 පාචිත්තිය පාළි 1103 මහාවග්ග පාළි (විනය) 1104 චූළවග්ග පාළි 1105 පරිවාර පාළි | 1201 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-1 1202 පාරාජිකකණ්ඩ අට්ඨකථා-2 1203 පාචිත්තිය අට්ඨකථා 1204 මහාවග්ග අට්ඨකථා (විනය) 1205 චූළවග්ග අට්ඨකථා 1206 පරිවාර අට්ඨකථා | 1301 සාරත්ථදීපනී ටීකා-1 1302 සාරත්ථදීපනී ටීකා-2 1303 සාරත්ථදීපනී ටීකා-3 | 1401 ද්වෙමාතිකාපාළි 1402 විනයසංගහ අට්ඨකථා 1403 වජිරබුද්ධි ටීකා 1404 විමතිවිනෝදනී ටීකා-1 1405 විමතිවිනෝදනී ටීකා-2 1406 විනයාලංකාර ටීකා-1 1407 විනයාලංකාර ටීකා-2 1408 කඞ්ඛාවිතරණීපුරාණ ටීකා 1409 විනයවිනිච්ඡය-උත්තරවිනිච්ඡය 1410 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-1 1411 විනයවිනිච්ඡය ටීකා-2 1412 පාචිත්යාදියෝජනාපාළි 1413 ඛුද්දසික්ඛා-මූලසික්ඛා 8401 විසුද්ධිමග්ග-1 8402 විසුද්ධිමග්ග-2 8403 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-1 8404 විසුද්ධිමග්ග-මහාටීකා-2 8405 විසුද්ධිමග්ග නිදානකථා 8406 දීඝනිකාය (පු-වි) 8407 මජ්ඣිමනිකාය (පු-වි) 8408 සංයුත්තනිකාය (පු-වි) 8409 අඞ්ගුත්තරනිකාය (පු-වි) 8410 විනයපිටක (පු-වි) 8411 අභිධම්මපිටක (පු-වි) 8412 අට්ඨකථා (පු-වි) 8413 නිරුත්තිදීපනී 8414 පරමත්ථදීපනී සඞ්ගහමහාටීකාපාඨ 8415 අනුදීපනීපාඨ 8416 පට්ඨානුද්දේස දීපනීපාඨ 8417 නමක්කාරටීකා 8418 මහාපණාමපාඨ 8419 ලක්ඛණාතෝ බුද්ධථෝමනාගාථා 8420 සුතවන්දනා 8421 කමලාඤ්ජලි 8422 ජිනාලඞ්කාර 8423 පජ්ජමධු 8424 බුද්ධගුණගාථාවලී 8425 චූළගන්ථවංස 8427 සාසනවංස 8426 මහාවංස 8429 මොග්ගල්ලානබ්යාකරණං 8428 කච්චායනබ්යාකරණං 8430 සද්දනීතිප්පකරණං (පදමාලා) 8431 සද්දනීතිප්පකරණං (ධාතුමාලා) 8432 පදරූපසිද්ධි 8433 මොග්ගල්ලානපඤ්චිකා 8434 පයෝගසිද්ධිපාඨ 8435 වුත්තෝදයපාඨ 8436 අභිධානප්පදීපිකාපාඨ 8437 අභිධානප්පදීපිකාටීකා 8438 සුබෝධාලඞ්කාරපාඨ 8439 සුබෝධාලඞ්කාරටීකා 8440 බාලාවතාර ගණ්ඨිපදත්ථවිනිච්ඡයසාර 8446 කවිදප්පණනීති 8447 නීතිමඤ්ජරී 8445 ධම්මනීති 8444 මහාරහනීති 8441 ලෝකනීති 8442 සුත්තන්තනීති 8443 සූරස්සතිනීති 8450 චාණක්යනීති 8448 නරදක්ඛදීපනී 8449 චතුරාරක්ඛදීපනී 8451 රසවාහිනී 8452 සීමවිසෝධනීපාඨ 8453 වෙස්සන්තරගීති 8454 මොග්ගල්ලාන වුත්තිවිවරණපඤ්චිකා 8455 ථූපවංස 8456 දාඨාවංස 8457 ධාතුපාඨවිලාසිනියා 8458 ධාතුවංස 8459 හත්ථවනගල්ලවිහාරවංස 8460 ජිනචරිතය 8461 ජිනවංසදීපං 8462 තේලකටාහගාථා 8463 මිලිදටීකා 8464 පදමඤ්ජරී 8465 පදසාධනං 8466 සද්දබින්දුපකරණං 8467 කච්චායනධාතුමඤ්ජුසා 8468 සාමන්තකූටවණ්ණනා |
| 2101 සීලක්ඛන්ධවග්ග පාළි 2102 මහාවග්ග පාළි (දීඝ) 2103 පාථිකවග්ග පාළි | 2201 සීලක්ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 2202 මහාවග්ග අට්ඨකථා (දීඝ) 2203 පාථිකවග්ග අට්ඨකථා | 2301 සීලක්ඛන්ධවග්ග ටීකා 2302 මහාවග්ග ටීකා (දීඝ) 2303 පාථිකවග්ග ටීකා 2304 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-1 2305 සීලක්ඛන්ධවග්ග-අභිනවටීකා-2 | |
| 3101 මූලපණ්ණාස පාළි 3102 මජ්ඣිමපණ්ණාස පාළි 3103 උපරිපණ්ණාස පාළි | 3201 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-1 3202 මූලපණ්ණාස අට්ඨකථා-2 3203 මජ්ඣිමපණ්ණාස අට්ඨකථා 3204 උපරිපණ්ණාස අට්ඨකථා | 3301 මූලපණ්ණාස ටීකා 3302 මජ්ඣිමපණ්ණාස ටීකා 3303 උපරිපණ්ණාස ටීකා | |
| 4101 සගාථාවග්ග පාළි 4102 නිදානවග්ග පාළි 4103 ඛන්ධවග්ග පාළි 4104 සළායතනවග්ග පාළි 4105 මහාවග්ග පාළි (සංයුත්ත) | 4201 සගාථාවග්ග අට්ඨකථා 4202 නිදානවග්ග අට්ඨකථා 4203 ඛන්ධවග්ග අට්ඨකථා 4204 සළායතනවග්ග අට්ඨකථා 4205 මහාවග්ග අට්ඨකථා (සංයුත්ත) | 4301 සගාථාවග්ග ටීකා 4302 නිදානවග්ග ටීකා 4303 ඛන්ධවග්ග ටීකා 4304 සළායතනවග්ග ටීකා 4305 මහාවග්ග ටීකා (සංයුත්ත) | |
| 5101 එකකනිපාත පාළි 5102 දුකනිපාත පාළි 5103 තිකනිපාත පාළි 5104 චතුක්කනිපාත පාළි 5105 පඤ්චකනිපාත පාළි 5106 ඡක්කනිපාත පාළි 5107 සත්තකනිපාත පාළි 5108 අට්ඨකාදිනිපාත පාළි 5109 නවකනිපාත පාළි 5110 දසකනිපාත පාළි 5111 එකාදසකනිපාත පාළි | 5201 එකකනිපාත අට්ඨකථා 5202 දුක-තික-චතුක්කනිපාත අට්ඨකථා 5203 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත අට්ඨකථා 5204 අට්ඨකාදිනිපාත අට්ඨකථා | 5301 එකකනිපාත ටීකා 5302 දුක-තික-චතුක්කනිපාත ටීකා 5303 පඤ්චක-ඡක්ක-සත්තකනිපාත ටීකා 5304 අට්ඨකාදිනිපාත ටීකා | |
| 6101 ඛුද්දකපාඨ පාළි 6102 ධම්මපද පාළි 6103 උදාන පාළි 6104 ඉතිවුත්තක පාළි 6105 සුත්තනිපාත පාළි 6106 විමානවත්ථු පාළි 6107 පේතවත්ථු පාළි 6108 ථේරගාථා පාළි 6109 ථේරීගාථා පාළි 6110 අපදාන පාළි-1 6111 අපදාන පාළි-2 6112 බුද්ධවංස පාළි 6113 චරියාපිටක පාළි 6114 ජාතක පාළි-1 6115 ජාතක පාළි-2 6116 මහානිද්දේස පාළි 6117 චූළනිද්දේස පාළි 6118 පටිසම්භිදාමග්ග පාළි 6119 නෙත්තිප්පකරණ පාළි 6120 මිලින්දපඤ්හ පාළි 6121 පේටකෝපදේස පාළි | 6201 ඛුද්දකපාඨ අට්ඨකථා 6202 ධම්මපද අට්ඨකථා-1 6203 ධම්මපද අට්ඨකථා-2 6204 උදාන අට්ඨකථා 6205 ඉතිවුත්තක අට්ඨකථා 6206 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-1 6207 සුත්තනිපාත අට්ඨකථා-2 6208 විමානවත්ථු අට්ඨකථා 6209 පේතවත්ථු අට්ඨකථා 6210 ථේරගාථා අට්ඨකථා-1 6211 ථේරගාථා අට්ඨකථා-2 6212 ථේරීගාථා අට්ඨකථා 6213 අපදාන අට්ඨකථා-1 6214 අපදාන අට්ඨකථා-2 6215 බුද්ධවංස අට්ඨකථා 6216 චරියාපිටක අට්ඨකථා 6217 ජාතක අට්ඨකථා-1 6218 ජාතක අට්ඨකථා-2 6219 ජාතක අට්ඨකථා-3 6220 ජාතක අට්ඨකථා-4 6221 ජාතක අට්ඨකථා-5 6222 ජාතක අට්ඨකථා-6 6223 ජාතක අට්ඨකථා-7 6224 මහානිද්දේස අට්ඨකථා 6225 චූළනිද්දේස අට්ඨකථා 6226 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-1 6227 පටිසම්භිදාමග්ග අට්ඨකථා-2 6228 නෙත්තිප්පකරණ අට්ඨකථා | 6301 නෙත්තිප්පකරණ ටීකා 6302 නෙත්තිවිභාවිනී | |
| 7101 ධම්මසංගණී පාළි 7102 විභඞ්ග පාළි 7103 ධාතුකථා පාළි 7104 පුග්ගලපඤ්ඤත්ති පාළි 7105 කථාවත්ථු පාළි 7106 යමක පාළි-1 7107 යමක පාළි-2 7108 යමක පාළි-3 7109 පට්ඨාන පාළි-1 7110 පට්ඨාන පාළි-2 7111 පට්ඨාන පාළි-3 7112 පට්ඨාන පාළි-4 7113 පට්ඨාන පාළි-5 | 7201 ධම්මසංගණි අට්ඨකථා 7202 සම්මෝහවිනෝදනී අට්ඨකථා 7203 පඤ්චපකරණ අට්ඨකථා | 7301 ධම්මසංගණී-මූලටීකා 7302 විභඞ්ග-මූලටීකා 7303 පඤ්චපකරණ-මූලටීකා 7304 ධම්මසංගණී-අනුටීකා 7305 පඤ්චපකරණ-අනුටීකා 7306 අභිධම්මාවතාරෝ-නාමරූපපරිච්ඡේදෝ 7307 අභිධම්මත්ථසංගහෝ 7308 අභිධම්මාවතාර-පුරාණටීකා 7309 අභිධම්මමාතිකාපාළි | |
| Español | |||
| El Canon Pali | Los Comentarios | Los Subcomentarios | Otros |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Vinaya) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-1 1202 Pārājikakaṇḍa Aṭṭhakathā-2 1203 Pācittiya Aṭṭhakathā 1204 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Vinaya) 1205 Cūḷavagga Aṭṭhakathā 1206 Parivāra Aṭṭhakathā | 1301 Sāratthadīpanī Ṭīkā-1 1302 Sāratthadīpanī Ṭīkā-2 1303 Sāratthadīpanī Ṭīkā-3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Vinayasaṅgaha Aṭṭhakathā 1403 Vajirabuddhi Ṭīkā 1404 Vimativinodanī Ṭīkā-1 1405 Vimativinodanī Ṭīkā-2 1406 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-1 1407 Vinayālaṅkāra Ṭīkā-2 1408 Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa Ṭīkā 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Vinayavinicchaya Ṭīkā-1 1411 Vinayavinicchaya Ṭīkā-2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Visuddhimagga-1 8402 Visuddhimagga-2 8403 Visuddhimagga-mahāṭīkā-1 8404 Visuddhimagga-mahāṭīkā-2 8405 Visuddhimagga nidānakathā 8406 Dīghanikāya (pu-vi) 8407 Majjhimanikāya (pu-vi) 8408 Saṃyuttanikāya (pu-vi) 8409 Aṅguttaranikāya (pu-vi) 8410 Vinayapiṭaka (pu-vi) 8411 Abhidhammapiṭaka (pu-vi) 8412 Aṭṭhakathā (pu-vi) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Namakkāraṭīkā 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Abhidhānappadīpikāṭīkā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Subodhālaṅkāraṭīkā 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8445 Dhammanīti 8444 Mahārahanīti 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8450 Cāṇakyanīti 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Milidaṭīkā 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Dīgha) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Sīlakkhandhavagga Aṭṭhakathā 2202 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Dīgha) 2203 Pāthikavagga Aṭṭhakathā | 2301 Sīlakkhandhavagga Ṭīkā 2302 Mahāvagga Ṭīkā (Dīgha) 2303 Pāthikavagga Ṭīkā 2304 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-1 2305 Sīlakkhandhavagga-abhinavaṭīkā-2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-1 3202 Mūlapaṇṇāsa Aṭṭhakathā-2 3203 Majjhimapaṇṇāsa Aṭṭhakathā 3204 Uparipaṇṇāsa Aṭṭhakathā | 3301 Mūlapaṇṇāsa Ṭīkā 3302 Majjhimapaṇṇāsa Ṭīkā 3303 Uparipaṇṇāsa Ṭīkā | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Saṃyutta) | 4201 Sagāthāvagga Aṭṭhakathā 4202 Nidānavagga Aṭṭhakathā 4203 Khandhavagga Aṭṭhakathā 4204 Saḷāyatanavagga Aṭṭhakathā 4205 Mahāvagga Aṭṭhakathā (Saṃyutta) | 4301 Sagāthāvagga Ṭīkā 4302 Nidānavagga Ṭīkā 4303 Khandhavagga Ṭīkā 4304 Saḷāyatanavagga Ṭīkā 4305 Mahāvagga Ṭīkā (Saṃyutta) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Ekakanipāta Aṭṭhakathā 5202 Duka-tika-catukkanipāta Aṭṭhakathā 5203 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Aṭṭhakathā 5204 Aṭṭhakādinipāta Aṭṭhakathā | 5301 Ekakanipāta Ṭīkā 5302 Duka-tika-catukkanipāta Ṭīkā 5303 Pañcaka-chakka-sattakanipāta Ṭīkā 5304 Aṭṭhakādinipāta Ṭīkā | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi-1 6111 Apadāna Pāḷi-2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi-1 6115 Jātaka Pāḷi-2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Khuddakapāṭha Aṭṭhakathā 6202 Dhammapada Aṭṭhakathā-1 6203 Dhammapada Aṭṭhakathā-2 6204 Udāna Aṭṭhakathā 6205 Itivuttaka Aṭṭhakathā 6206 Suttanipāta Aṭṭhakathā-1 6207 Suttanipāta Aṭṭhakathā-2 6208 Vimānavatthu Aṭṭhakathā 6209 Petavatthu Aṭṭhakathā 6210 Theragāthā Aṭṭhakathā-1 6211 Theragāthā Aṭṭhakathā-2 6212 Therīgāthā Aṭṭhakathā 6213 Apadāna Aṭṭhakathā-1 6214 Apadāna Aṭṭhakathā-2 6215 Buddhavaṃsa Aṭṭhakathā 6216 Cariyāpiṭaka Aṭṭhakathā 6217 Jātaka Aṭṭhakathā-1 6218 Jātaka Aṭṭhakathā-2 6219 Jātaka Aṭṭhakathā-3 6220 Jātaka Aṭṭhakathā-4 6221 Jātaka Aṭṭhakathā-5 6222 Jātaka Aṭṭhakathā-6 6223 Jātaka Aṭṭhakathā-7 6224 Mahāniddesa Aṭṭhakathā 6225 Cūḷaniddesa Aṭṭhakathā 6226 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-1 6227 Paṭisambhidāmagga Aṭṭhakathā-2 6228 Nettippakaraṇa Aṭṭhakathā | 6301 Nettippakaraṇa Ṭīkā 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi-1 7107 Yamaka Pāḷi-2 7108 Yamaka Pāḷi-3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi-1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi-2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi-3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi-4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi-5 | 7201 Dhammasaṅgaṇi Aṭṭhakathā 7202 Sammohavinodanī Aṭṭhakathā 7203 Pañcapakaraṇa Aṭṭhakathā | 7301 Dhammasaṅgaṇī-mūlaṭīkā 7302 Vibhaṅga-mūlaṭīkā 7303 Pañcapakaraṇa-mūlaṭīkā 7304 Dhammasaṅgaṇī-anuṭīkā 7305 Pañcapakaraṇa-anuṭīkā 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Abhidhammāvatāra-purāṇaṭīkā 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |
| แบบไทย | |||
| บาลีแคน | ข้อคิดเห็น | คำอธิบายย่อย | อื่น |
| 1101 ปาราชิกปาฬิ 1102 ปาจิตติยปาฬิ 1103 มหาวคฺคปาฬิ (วินัย) 1104 จูฬวคฺคปาฬิ 1105 ปริวารปาฬิ | 1201 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๑ 1202 ปาราชิกกณฺฑอฏฺฐกถา-๒ 1203 ปาจิตฺติยอฏฺฐกถา 1204 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (วินัย) 1205 จูฬวคฺคอฏฺฐกถา 1206 ปริวารอฏฺฐกถา | 1301 สารตฺถทีปนีฏีกา-๑ 1302 สารตฺถทีปนีฏีกา-๒ 1303 สารตฺถทีปนีฏีกา-๓ | 1401 ทเวมาติกาปาฬิ 1402 วินยสํคหอฏฺฐกถา 1403 วชิรพุทฺธิฏีกา 1404 วิมติวิโนทนีฏีกา-๑ 1405 วิมติวิโนทนีฏีกา-๒ 1406 วินยาลงฺการฏีกา-๑ 1407 วินยาลงฺการฏีกา-๒ 1408 กงฺขาวิตรณีปุราณฏีกา 1409 วินยวินิจฉย-อุตฺตรวินิจฉย 1410 วินยวินิจฉยฏีกา-๑ 1411 วินยวินิจฉยฏีกา-๒ 1412 ปาจิตฺยาทิโยชนาปาฬิ 1413 ขุทฺทสิกฺขา-มูลสิกฺขา 8401 วิสุทฺธิมคฺค-๑ 8402 วิสุทฺธิมคฺค-๒ 8403 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๑ 8404 วิสุทฺธิมคฺค-มหาฏีกา-๒ 8405 วิสุทฺธิมคฺค-นิทานกถา 8406 ทีฆนิกาย (ปุ-วิ) 8407 มชฺฌิมนิกาย (ปุ-วิ) 8408 สํยุตฺตนิกาย (ปุ-วิ) 8409 องฺคุตฺตรนิกาย (ปุ-วิ) 8410 วินยปิฎก (ปุ-วิ) 8411 อภิธมฺมปิฎก (ปุ-วิ) 8412 อฏฺฐกถา (ปุ-วิ) 8413 นิรุตฺติทีปนี 8414 ปรมตฺถทีปนี สงฺคหมหาฏีกาปาฐ 8415 อนุทีปนีปาฐ 8416 ปฎฺฐานุทฺเทสทีปนีปาฐ 8417 นมกฺการฏีกา 8418 มหาปณามปาฐ 8419 ลกฺขณาโต พุทฺธโถมนาคาถา 8420 สุตวทน 8421 กมลาญฺชลิ 8422 ชินาลงฺการ 8423 ปชฺชมธุ 8424 พุทฺธคุณคาถาวลี 8425 จูฬคนฺถวํส 8427 สาสนวํส 8426 มหาวํส 8429 โมคฺคลฺลานพฺยากรณํ 8428 กจฺจายนพฺยากรณํ 8430 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ปทมาลา) 8431 สทฺทานีติปฺปกรณํ (ธาตุมาลา) 8432 ปทรูปสิทฺธิ 8433 โมคคฺลานปญฺจิกา 8434 ปโยคสิทฺธิปาฐ 8435 วุตฺโตทยปาฐ 8436 อภิธานปฺปทีปิกาปาฐ 8437 อภิธานปฺปทีปิกาฏีกา 8438 สุโพธาลงฺการปาฐ 8439 สุโพธาลงฺการฏีกา 8440 พาลาวตาร คณฺฐิปทตฺถวินิจฺฉยสาร 8446 กวิทปฺปณนีติ 8447 นีติมญฺชรี 8445 ธมฺมนีติ 8444 มหารหนีติ 8441 โลกนีติ 8442 สุตฺตนฺตนีติ 8443 สูรสฺสตินีติ 8450 จาณกฺยนีติ 8448 นรทกฺขทีปนี 8449 จตุราวรกฺขทีปนี 8451 รสวาหินี 8452 สีมวิโสธนีปาฐ 8453 เวสฺสนฺตรคีติ 8454 โมคฺคลฺลาน วุตฺติวิวรณปญฺจิกา 8455 ถูปวํส 8456 ทาฐาวํส 8457 ธาตุปาฐวิลาสินิยา 8458 ธาตุวํส 8459 หตฺถวนคัลลวิหารวํส 8460 ชนจริตย 8461 ชนวํสทีปํ 8462 เตลกฏาหคาถา 8463 มิลิทฏีกา 8464 ปทมญฺชรี 8465 ปทสาธนํ 8466 สทฺทพินฺทุปกรณํ 8467 กจฺจายนธาตุมญฺชุสา 8468 สามนฺตกูฏวณฺณนา |
| 2101 สีลกฺขนฺธวคฺคปาฬิ 2102 มหาวคฺคปาฬิ (ทีฆ) 2103 ปาถิกวคฺคปาฬิ | 2201 สีลกฺขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 2202 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (ทีฆ) 2203 ปาถิกวคฺคอฏฺฐกถา | 2301 สีลกฺขนฺธวคฺคฏีกา 2302 มหาวคฺคฏีกา (ทีฆ) 2303 ปาถิกวคฺคฏีกา 2304 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๑ 2305 สีลกฺขนฺธวคฺค-อภินวฏีกา-๒ | |
| 3101 มูลปณฺณาสปาฬิ 3102 มชฺฌิมปณฺณาสปาฬิ 3103 อุปริปณฺณาสปาฬิ | 3201 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๑ 3202 มูลปณฺณาสอฏฺฐกถา-๒ 3203 มชฺฌิมปณฺณาสอฏฺฐกถา 3204 อุปริปณฺณาสอฏฺฐกถา | 3301 มูลปณฺณาสฏีกา 3302 มชฺฌิมปณฺณาสฏีกา 3303 อุปริปณฺณาสฏีกา | |
| 4101 สคาถาวคฺคปาฬิ 4102 นิทานวคฺคปาฬิ 4103 ขนฺธวคฺคปาฬิ 4104 สฬายตนวคฺคปาฬิ 4105 มหาวคฺคปาฬิ (สํยุตฺต) | 4201 สคาถาวคฺคอฏฺฐกถา 4202 นิทานวคฺคอฏฺฐกถา 4203 ขนฺธวคฺคอฏฺฐกถา 4204 สฬายตนวคฺคอฏฺฐกถา 4205 มหาวคฺคอฏฺฐกถา (สํยุตฺต) | 4301 สคาถาวคฺคฏีกา 4302 นิทานวคฺคฏีกา 4303 ขนฺธวคฺคฏีกา 4304 สฬายตนวคฺคฏีกา 4305 มหาวคฺคฏีกา (สํยุตฺต) | |
| 5101 เอกกนิปาตปาฬิ 5102 ทุกนิปาตปาฬิ 5103 ติกนิปาตปาฬิ 5104 จตุกฺกนิปาตปาฬิ 5105 ปญฺจกนิปาตปาฬิ 5106 ฉกฺกนิปาตปาฬิ 5107 สตฺตกนิปาตปาฬิ 5108 อฏฺฐกาทินิปาตปาฬิ 5109 นวกนิปาตปาฬิ 5110 ทสกนิปาตปาฬิ 5111 เอกาทสกนิปาตปาฬิ | 5201 เอกกนิปาตอฏฺฐกถา 5202 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตอฏฺฐกถา 5203 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตอฏฺฐกถา 5204 อฏฺฐกาทินิปาตอฏฺฐกถา | 5301 เอกกนิปาตฏีกา 5302 ทุก-ติก-จตุกฺกนิปาตฏีกา 5303 ปญฺจก-ฉกฺก-สตฺตกนิปาตฏีกา 5304 อฏฺฐกาทินิปาตฏีกา | |
| 6101 ขุทฺทกปาฐปาฬิ 6102 ธมฺมปทปาฬิ 6103 อุทานปาฬิ 6104 อิติวุตฺตกปาฬิ 6105 สุตฺตนิบาตปาฬิ 6106 วิมานวตฺถุปาฬิ 6107 เปตวตฺถุปาฬิ 6108 เถรคาถาปาฬิ 6109 เถรีคาถาปาฬิ 6110 อปทานปาฬิ-๑ 6111 อปทานปาฬิ-๒ 6112 พุทธวงฺสปาฬิ 6113 จริยาปิฏกปาฬิ 6114 ชาตกปาฬิ-๑ 6115 ชาตกปาฬิ-๒ 6116 มหานิทฺเทสปาฬิ 6117 จูฬนิทฺเทสปาฬิ 6118 ปฏิสมฺภิทามคฺคปาฬิ 6119 เนตฺติปฺปกฺรณปาฬิ 6120 มิลินฺทปญฺหาปาฬิ 6121 เปฏโกปเทสปาฬิ | 6201 ขุทฺทกปาฐอฏฺฐกถา 6202 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๑ 6203 ธมฺมปทอฏฺฐกถา-๒ 6204 อุทานอฏฺฐกถา 6205 อิติวุตฺตกอฏฺฐกถา 6206 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๑ 6207 สุตฺตนิบาตอฏฺฐกถา-๒ 6208 วิมานวตฺถุอฏฺฐกถา 6209 เปตวตฺถุอฏฺฐกถา 6210 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๑ 6211 เถรคาถาอฏฺฐกถา-๒ 6212 เถรีคาถาอฏฺฐกถา 6213 อปทานอฏฺฐกถา-๑ 6214 อปทานอฏฺฐกถา-๒ 6215 พุทธวงฺสอฏฺฐกถา 6216 จริยาปิฏกอฏฺฐกถา 6217 ชาตกอฏฺฐกถา-๑ 6218 ชาตกอฏฺฐกถา-๒ 6219 ชาตกอฏฺฐกถา-๓ 6220 ชาตกอฏฺฐกถา-๔ 6221 ชาตกอฏฺฐกถา-๕ 6222 ชาตกอฏฺฐกถา-๖ 6223 ชาตกอฏฺฐกถา-๗ 6224 มหานิทฺเทสอฏฺฐกถา 6225 จูฬนิทฺเทสอฏฺฐกถา 6226 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๑ 6227 ปฏิสมฺภิทามคฺคอฏฺฐกถา-๒ 6228 เนตฺติปฺปกฺรณอฏฺฐกถา | 6301 เนตฺติปฺปกฺรณฏีกา 6302 เนตฺติวิภาวินี | |
| 7101 ธมฺมสงฺคณีปาฬิ 7102 วิภงฺคปาฬิ 7103 ธาตุกถาปาฬิ 7104 ปุคฺคลปญฺญตฺติปาฬิ 7105 กถาวตฺถุปาฬิ 7106 ยมกปาฬิ-๑ 7107 ยมกปาฬิ-๒ 7108 ยมกปาฬิ-๓ 7109 ปฎฺฐานปาฬิ-๑ 7110 ปฎฺฐานปาฬิ-๒ 7111 ปฎฺฐานปาฬิ-๓ 7112 ปฎฺฐานปาฬิ-๔ 7113 ปฎฺฐานปาฬิ-๕ | 7201 ธมฺมสงฺคณิอฏฺฐกถา 7202 สมฺโมหวินิทนีอฏฺฐกถา 7203 ปญฺจปกรณอฏฺฐกถา | 7301 ธมฺมสงฺคณีมูลฏีกา 7302 วิภงฺคมูลฏีกา 7303 ปญฺจปกรณมูลฏีกา 7304 ธมฺมสงฺคณีอนุฏีกา 7305 ปญฺจปกรณอนุฏีกา 7306 อภิธมฺมาวตาโร-นามรูปปริจฺเฉโท 7307 อภิธมฺมตฺถสงฺคโห 7308 อภิธมฺมาวตาร-ปุราณฏีกา 7309 อภิธมฺมมาติกาปาฬิ | |
| བོད་མི | |||
| པཱ་ལི་གསུང་རབ། | འགྲེལ་བཤད། | འགྲེལ་བཤད་ཕྲན། | གཞན། |
| 1101 ཕ་ར་ཇི་ཀ་པཱ་ལི། 1102 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་པཱ་ལི། 1103 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (ཝི་ན་ཡ) 1104 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 1105 པ་རི་ཝཱ་ར་པཱ་ལི། | 1201 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 1202 ཕ་ར་ཇི་ཀ་ཀཎྜ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 1203 པཱ་ཙི་ཏི་ཡ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1204 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (ཝི་ན་ཡ) 1205 ཙཱུ་ལ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1206 པ་རི་ཝཱ་ར་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 1301 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1302 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1303 སཱ་རཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༣ | 1401 དྭེ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། 1402 ཝི་ན་ཡ་སངྒ་ཧ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 1403 ཝ་ཇི་ར་བུད་དྷི་ཊཱི་ཀཱ། 1404 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1405 ཝི་མ་ཏི་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1406 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1407 ཝི་ན་ཡཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1408 ཀངྑཱ་ཝི་ཏ་ར་ཎཱི་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 1409 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཨུ་ཏྟ་ར་ཝི་ནི་ཙ་ཡ། 1410 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 1411 ཝི་ན་ཡ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 1412 པཱ་ཙི་ཏྱཱ་དི་ཡོ་ཇ་ནཱ་པཱ་ལི། 1413 ཁུད་ད་སིཀྑཱ་མཱུ་ལ་སིཀྑཱ། 8401 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༡ 8402 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ-༢ 8403 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 8404 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ-༢ 8405 ཝི་སུད་དྷི་མགྒ་ནི་དཱ་ན་ཀ་ཐཱ། 8406 དཱི་གྷ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8407 མཛྷི་མ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8408 སཾ་ཡུཏྟ་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8409 ཨངྒུ་ཏྟ་ར་ནི་ཀཱ་ཡ། (པུ་ཝི) 8410 ཝི་ན་ཡ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8411 ཨ་བྷི་དྷམྨ་པི་ཊ་ཀ། (པུ་ཝི) 8412 ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (པུ་ཝི) 8413 ནི་རུཏྟི་དཱི་པ་ནཱི། 8414 པ་ར་མཏྠ་དཱི་པ་ནཱི་སངྒ་ཧ་མ་ཧཱ་ཊཱི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8415 ཨ་ནུ་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8416 པཊྛཱ་ནུདྡེ་ས་དཱི་པ་ནཱི་པཱ་ཋ། 8417 ན་མཀྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8418 མ་ཧཱ་པ་ཎཱ་མ་པཱ་ཋ། 8419 ལཀྑ་ཎཱ་ཏོ་བུདྡྷ་ཐོ་མ་ནཱ་གཱ་ཐཱ། 8420 སུ་ཏ་ཝནྡ་ནཱ། 8421 ཀ་མ་ལཱཉྫ་ལི། 8422 ཇི་ནཱ་ལངྐཱ་ར། 8423 པཛྫ་མ་དྷུ། 8424 བུདྡྷ་གུ་ཎ་གཱ་ཐཱ་ཝ་ལཱི། 8425 ཙཱུ་ལ་གནྠ་ཝཾ་ས། 8427 སཱ་ས་ན་ཝཾ་ས། 8426 མ་ཧཱ་ཝཾ་ས། 8429 མོགྒ་ལླཱ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8428 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་བྱཱ་ཀ་ར་ཎཾ། 8430 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (པ་ད་མཱ་ལཱ) 8431 སདྡ་ནཱི་ཏི་པྤ་ཀ་ར་ཎཾ། (དྷཱ་ཏུ་མཱ་ལཱ) 8432 པ་ད་རཱུ་པ་སིད་དྷི། 8433 མོ་ག་ལླཱ་ན་པཉྩ་ཀཱ། 8434 པ་ཡོ་ག་སིད་དྷི་པཱ་ཋ། 8435 བུཏྟོ་ད་ཡ་པཱ་ཋ། 8436 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་པཱ་ཋ། 8437 ཨ་བྷི་དྷཱ་ན་པྤ་དཱི་པི་ཀཱ་ཊཱི་ཀཱ། 8438 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་པཱ་ཋ། 8439 སུ་བོ་དྷཱ་ལངྐཱ་ར་ཊཱི་ཀཱ། 8440 བཱ་ལཱ་ཝ་ཏཱ་ར་གཎྛི་པ་དཏྠ་ཝི་ནི་ཙ་ཡ་སཱ་ར། 8446 ཀ་ཝི་དཔྤ་ཎ་ནཱི་ཏི། 8447 ནཱི་ཏི་མཉྫ་རཱི། 8445 དྷམྨ་ནཱི་ཏི། 8444 མ་ཧཱ་ར་ཧ་ནཱི་ཏི། 8441 ལོ་ཀ་ནཱི་ཏི། 8442 སུཏྟནྟ་ནཱ་ཏི། 8443 སཱུ་རསྶ་ཏི་ནཱི་ཏི། 8450 ཙཱ་ཎཀྱ་ནཱི་ཏི། 8448 ན་ར་དཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8449 ཙ་ཏུ་རཱ་རཀྑ་དཱི་པ་ནཱི། 8451 ར་ས་ཝཱ་ཧི་ནཱི། 8452 སཱི་མ་ཝི་སོ་ད་ནཱི་པཱ་ཋ། 8453 ཝེསྶནྟ་ར་གཱི་ཏི། 8454 མོགྒ་ལླཱ་ན་བུཏྟི་ཝི་ཝ་ར་ཎ་པཉྩ་ཀཱ། 8455 ཐཱུ་པ་ཝཾ་ས། 8456 དཱ་ཊྷཱ་ཝཾ་ས། 8457 དྷཱ་ཏུ་པཱ་ཋ་ཝི་ལཱ་སི་ནི་ཡཱ། 8458 དྷཱ་ཏུ་ཝཾ་ས། 8459 ཧཏྠ་ཝ་ན་གལླ་ཝི་ཧཱ་ར་ཝཾ་ས། 8460 ཇི་ན་ཙ་རི་ཏ་ཡ། 8461 ཇི་ན་ཝཾ་ས་དཱི་པཾ། 8462 ཏེ་ལ་ཀ་ཊཱ་ཧ་གཱ་ཐཱ། 8463 མི་ལི་ད་ཊཱི་ཀཱ། 8464 པ་ད་མཉྫ་རཱི། 8465 པ་ད་སཱ་ད་ནཾ། 8466 སདྡ་བིནྡུ་པ་ཀ་ར་ཎཾ། 8467 ཀཙྩཱ་ཡ་ན་དྷཱ་ཏུ་མཉྫུ་སཱ། 8468 སཱ་མནྟ་ཀཱུ་ཊ་ཝཎྞ་ནཱ། |
| 2101 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 2102 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (དཱི་གྷ) 2103 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་པཱ་ལི། | 2201 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 2202 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (དཱི་གྷ) 2203 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 2301 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2302 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (དཱི་གྷ) 2303 པཱ་ཐི་ཀ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 2304 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༡ 2305 སཱི་ལཀྑནྡྷ་ཝག་ག་ཨ་བྷི་ན་ཝ་ཊཱི་ཀཱ-༢ | |
| 3101 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3102 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། 3103 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་པཱ་ལི། | 3201 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 3202 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 3203 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 3204 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 3301 མཱུ་ལ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3302 མཛྷི་མ་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། 3303 ཨུ་པ་རི་པཎྞཱ་ས་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 4101 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4102 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4103 ཁནྡྷ་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4104 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་པཱ་ལི། 4105 མ་ཧཱ་ཝག་ག་པཱ་ལི། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4201 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4202 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4203 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4204 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 4205 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | 4301 ས་གཱ་ཐཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4302 ནི་དཱ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4303 ཁནྡྷ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4304 ས་ལཱ་ཡ་ཏ་ན་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། 4305 མ་ཧཱ་ཝག་ག་ཊཱི་ཀཱ། (སཾ་ཡུཏྟ) | |
| 5101 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5102 དུ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5103 ཏི་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5104 ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5105 པཉྩ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5106 ཆཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5107 སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5108 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5109 ན་ཝ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5110 ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 5111 ཨེ་ཀཱ་ད་ས་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། | 5201 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5202 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5203 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 5204 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 5301 ཨེ་ཀ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5302 དུ་ཀ་ཏི་ཀ་ཙ་ཏུཀྐ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5303 པཉྩ་ཀ་ཆཀྐ་སཏྟ་ཀ་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། 5304 ཨཊྛ་ཀཱ་དི་ནི་པཱ་ཏ་ཊཱི་ཀཱ། | |
| 6101 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་པཱ་ལི། 6102 དྷམྨ་པ་ད་པཱ་ལི། 6103 ཨུ་དཱ་ན་པཱ་ལི། 6104 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་པཱ་ལི། 6105 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་པཱ་ལི། 6106 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6107 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 6108 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6109 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་པཱ་ལི། 6110 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 6111 ཨ་པ་དཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 6112 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་པཱ་ལི། 6113 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་པཱ་ལི། 6114 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 6115 ཛཱ་ཏ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 6116 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6117 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་པཱ་ལི། 6118 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་པཱ་ལི། 6119 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་པཱ་ལི། 6120 མི་ལིནྡ་པཉྷ་པཱ་ལི། 6121 པེ་ཊ་ཀོ་པ་དེ་ས་པཱ་ལི། | 6201 ཁུད་ད་ཀ་པཱ་ཋ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6202 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6203 དྷམྨ་པ་ད་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6204 ཨུ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6205 ཨི་ཏི་ཝུཏྟ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6206 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6207 སུཏྟ་ནི་པཱ་ཏ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6208 ཝི་མཱ་ན་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6209 པེ་ཏ་ཝཏྠུ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6210 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6211 ཐེ་ར་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6212 ཐེ་རཱི་གཱ་ཐཱ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6213 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6214 ཨ་པ་དཱ་ན་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6215 བུདྡྷ་ཝཾ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6216 ཙ་རི་ཡཱ་པི་ཊ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6217 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6218 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6219 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༣ 6220 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༤ 6221 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༥ 6222 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༦ 6223 ཛཱ་ཏ་ཀ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༧ 6224 མ་ཧཱ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6225 ཙཱུ་ལ་ནི་དྡེ་ས་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 6226 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༡ 6227 པ་ཊི་སམ་བྷི་དཱ་མགྒ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ-༢ 6228 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 6301 ནེཏྟི་པྤ་ཀ་ར་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 6302 ནེཏྟི་ཝི་བྷཱི་ནཱི། | |
| 7101 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་པཱ་ལི། 7102 ཝི་བྷངྒ་པཱ་ལི། 7103 དྷཱ་ཏུ་ཀ་ཐཱ་པཱ་ལི། 7104 པུགྒ་ལ་པཉྙཏྟི་པཱ་ལི། 7105 ཀ་ཐཱ་ཝཏྠུ་པཱ་ལི། 7106 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༡ 7107 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༢ 7108 ཡ་མ་ཀ་པཱ་ལི-༣ 7109 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༡ 7110 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༢ 7111 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༣ 7112 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༤ 7113 པཊྛཱ་ན་པཱ་ལི-༥ | 7201 དྷམྨ་སངྒ་ཎི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7202 སམྨོ་ཧ་ཝི་ནོ་ད་ནཱི་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། 7203 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨཊྛ་ཀ་ཐཱ། | 7301 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7302 ཝི་བྷངྒ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7303 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་མཱུ་ལ་ཊཱི་ཀཱ། 7304 དྷམྨ་སངྒ་ཎཱི་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7305 པཉྩ་པ་ཀ་ར་ཎ་ཨ་ནུ་ཊཱི་ཀཱ། 7306 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་རོ་ནཱ་མ་རཱུ་པ་པ་རི་ཙྪེ་དོ། 7307 ཨ་བྷི་དྷམྨཏྠ་སངྒ་ཧོ། 7308 ཨ་བྷི་དྷམྨཱ་ཝ་ཏཱ་ར་པུ་རཱ་ཎ་ཊཱི་ཀཱ། 7309 ཨ་བྷི་དྷམྨ་མཱ་ཏི་ཀཱ་པཱ་ལི། | |
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| Kinh điển Pali | Chú giải | Phụ chú giải | Khác |
| 1101 Pārājika Pāḷi 1102 Pācittiya Pāḷi 1103 Mahāvagga Pāḷi (Tạng Luật) 1104 Cūḷavagga Pāḷi 1105 Parivāra Pāḷi | 1201 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 1 1202 Chú Giải Pārājikakaṇḍa - 2 1203 Chú Giải Pācittiya 1204 Chú Giải Mahāvagga (Tạng Luật) 1205 Chú Giải Cūḷavagga 1206 Chú Giải Parivāra | 1301 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 1 1302 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 2 1303 Phụ Chú Giải Sāratthadīpanī - 3 | 1401 Dvemātikāpāḷi 1402 Chú Giải Vinayasaṅgaha 1403 Phụ Chú Giải Vajirabuddhi 1404 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 1 1405 Phụ Chú Giải Vimativinodanī - 2 1406 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 1 1407 Phụ Chú Giải Vinayālaṅkāra - 2 1408 Phụ Chú Giải Kaṅkhāvitaraṇīpurāṇa 1409 Vinayavinicchaya-uttaravinicchaya 1410 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 1 1411 Phụ Chú Giải Vinayavinicchaya - 2 1412 Pācityādiyojanāpāḷi 1413 Khuddasikkhā-mūlasikkhā 8401 Thanh Tịnh Đạo - 1 8402 Thanh Tịnh Đạo - 2 8403 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 1 8404 Đại Phụ Chú Giải Thanh Tịnh Đạo - 2 8405 Lời Tựa Thanh Tịnh Đạo 8406 Trường Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8407 Trung Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8408 Tương Ưng Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8409 Tăng Chi Bộ Kinh (Vấn Đáp) 8410 Tạng Luật (Vấn Đáp) 8411 Tạng Vi Diệu Pháp (Vấn Đáp) 8412 Chú Giải (Vấn Đáp) 8413 Niruttidīpanī 8414 Paramatthadīpanī Saṅgahamahāṭīkāpāṭha 8415 Anudīpanīpāṭha 8416 Paṭṭhānuddesa dīpanīpāṭha 8417 Phụ Chú Giải Namakkāra 8418 Mahāpaṇāmapāṭha 8419 Lakkhaṇāto buddhathomanāgāthā 8420 Sutavandanā 8421 Kamalāñjali 8422 Jinālaṅkāra 8423 Pajjamadhu 8424 Buddhaguṇagāthāvalī 8425 Cūḷaganthavaṃsa 8426 Mahāvaṃsa 8427 Sāsanavaṃsa 8428 Kaccāyanabyākaraṇaṃ 8429 Moggallānabyākaraṇaṃ 8430 Saddanītippakaraṇaṃ (padamālā) 8431 Saddanītippakaraṇaṃ (dhātumālā) 8432 Padarūpasiddhi 8433 Mogallānapañcikā 8434 Payogasiddhipāṭha 8435 Vuttodayapāṭha 8436 Abhidhānappadīpikāpāṭha 8437 Phụ Chú Giải Abhidhānappadīpikā 8438 Subodhālaṅkārapāṭha 8439 Phụ Chú Giải Subodhālaṅkāra 8440 Bālāvatāra gaṇṭhipadatthavinicchayasāra 8441 Lokanīti 8442 Suttantanīti 8443 Sūrassatinīti 8444 Mahārahanīti 8445 Dhammanīti 8446 Kavidappaṇanīti 8447 Nītimañjarī 8448 Naradakkhadīpanī 8449 Caturārakkhadīpanī 8450 Cāṇakyanīti 8451 Rasavāhinī 8452 Sīmavisodhanīpāṭha 8453 Vessantaragīti 8454 Moggallāna vuttivivaraṇapañcikā 8455 Thūpavaṃsa 8456 Dāṭhāvaṃsa 8457 Dhātupāṭhavilāsiniyā 8458 Dhātuvaṃsa 8459 Hatthavanagallavihāravaṃsa 8460 Jinacaritaya 8461 Jinavaṃsadīpaṃ 8462 Telakaṭāhagāthā 8463 Phụ Chú Giải Milinda 8464 Padamañjarī 8465 Padasādhanaṃ 8466 Saddabindupakaraṇaṃ 8467 Kaccāyanadhātumañjusā 8468 Sāmantakūṭavaṇṇanā |
| 2101 Sīlakkhandhavagga Pāḷi 2102 Mahāvagga Pāḷi (Trường Bộ) 2103 Pāthikavagga Pāḷi | 2201 Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2202 Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2203 Chú Giải Pāthikavagga | 2301 Phụ Chú Giải Sīlakkhandhavagga 2302 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Trường Bộ) 2303 Phụ Chú Giải Pāthikavagga 2304 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 1 2305 Phụ Chú Giải Mới Sīlakkhandhavagga - 2 | |
| 3101 Mūlapaṇṇāsa Pāḷi 3102 Majjhimapaṇṇāsa Pāḷi 3103 Uparipaṇṇāsa Pāḷi | 3201 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 1 3202 Chú Giải Mūlapaṇṇāsa - 2 3203 Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3204 Chú Giải Uparipaṇṇāsa | 3301 Phụ Chú Giải Mūlapaṇṇāsa 3302 Phụ Chú Giải Majjhimapaṇṇāsa 3303 Phụ Chú Giải Uparipaṇṇāsa | |
| 4101 Sagāthāvagga Pāḷi 4102 Nidānavagga Pāḷi 4103 Khandhavagga Pāḷi 4104 Saḷāyatanavagga Pāḷi 4105 Mahāvagga Pāḷi (Tương Ưng Bộ) | 4201 Chú Giải Sagāthāvagga 4202 Chú Giải Nidānavagga 4203 Chú Giải Khandhavagga 4204 Chú Giải Saḷāyatanavagga 4205 Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | 4301 Phụ Chú Giải Sagāthāvagga 4302 Phụ Chú Giải Nidānavagga 4303 Phụ Chú Giải Khandhavagga 4304 Phụ Chú Giải Saḷāyatanavagga 4305 Phụ Chú Giải Mahāvagga (Tương Ưng Bộ) | |
| 5101 Ekakanipāta Pāḷi 5102 Dukanipāta Pāḷi 5103 Tikanipāta Pāḷi 5104 Catukkanipāta Pāḷi 5105 Pañcakanipāta Pāḷi 5106 Chakkanipāta Pāḷi 5107 Sattakanipāta Pāḷi 5108 Aṭṭhakādinipāta Pāḷi 5109 Navakanipāta Pāḷi 5110 Dasakanipāta Pāḷi 5111 Ekādasakanipāta Pāḷi | 5201 Chú Giải Ekakanipāta 5202 Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5203 Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5204 Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | 5301 Phụ Chú Giải Ekakanipāta 5302 Phụ Chú Giải Duka-tika-catukkanipāta 5303 Phụ Chú Giải Pañcaka-chakka-sattakanipāta 5304 Phụ Chú Giải Aṭṭhakādinipāta | |
| 6101 Khuddakapāṭha Pāḷi 6102 Dhammapada Pāḷi 6103 Udāna Pāḷi 6104 Itivuttaka Pāḷi 6105 Suttanipāta Pāḷi 6106 Vimānavatthu Pāḷi 6107 Petavatthu Pāḷi 6108 Theragāthā Pāḷi 6109 Therīgāthā Pāḷi 6110 Apadāna Pāḷi - 1 6111 Apadāna Pāḷi - 2 6112 Buddhavaṃsa Pāḷi 6113 Cariyāpiṭaka Pāḷi 6114 Jātaka Pāḷi - 1 6115 Jātaka Pāḷi - 2 6116 Mahāniddesa Pāḷi 6117 Cūḷaniddesa Pāḷi 6118 Paṭisambhidāmagga Pāḷi 6119 Nettippakaraṇa Pāḷi 6120 Milindapañha Pāḷi 6121 Peṭakopadesa Pāḷi | 6201 Chú Giải Khuddakapāṭha 6202 Chú Giải Dhammapada - 1 6203 Chú Giải Dhammapada - 2 6204 Chú Giải Udāna 6205 Chú Giải Itivuttaka 6206 Chú Giải Suttanipāta - 1 6207 Chú Giải Suttanipāta - 2 6208 Chú Giải Vimānavatthu 6209 Chú Giải Petavatthu 6210 Chú Giải Theragāthā - 1 6211 Chú Giải Theragāthā - 2 6212 Chú Giải Therīgāthā 6213 Chú Giải Apadāna - 1 6214 Chú Giải Apadāna - 2 6215 Chú Giải Buddhavaṃsa 6216 Chú Giải Cariyāpiṭaka 6217 Chú Giải Jātaka - 1 6218 Chú Giải Jātaka - 2 6219 Chú Giải Jātaka - 3 6220 Chú Giải Jātaka - 4 6221 Chú Giải Jātaka - 5 6222 Chú Giải Jātaka - 6 6223 Chú Giải Jātaka - 7 6224 Chú Giải Mahāniddesa 6225 Chú Giải Cūḷaniddesa 6226 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 1 6227 Chú Giải Paṭisambhidāmagga - 2 6228 Chú Giải Nettippakaraṇa | 6301 Phụ Chú Giải Nettippakaraṇa 6302 Nettivibhāvinī | |
| 7101 Dhammasaṅgaṇī Pāḷi 7102 Vibhaṅga Pāḷi 7103 Dhātukathā Pāḷi 7104 Puggalapaññatti Pāḷi 7105 Kathāvatthu Pāḷi 7106 Yamaka Pāḷi - 1 7107 Yamaka Pāḷi - 2 7108 Yamaka Pāḷi - 3 7109 Paṭṭhāna Pāḷi - 1 7110 Paṭṭhāna Pāḷi - 2 7111 Paṭṭhāna Pāḷi - 3 7112 Paṭṭhāna Pāḷi - 4 7113 Paṭṭhāna Pāḷi - 5 | 7201 Chú Giải Dhammasaṅgaṇi 7202 Chú Giải Sammohavinodanī 7203 Chú Giải Pañcapakaraṇa | 7301 Phụ Chú Giải Gốc Dhammasaṅgaṇī 7302 Phụ Chú Giải Gốc Vibhaṅga 7303 Phụ Chú Giải Gốc Pañcapakaraṇa 7304 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Dhammasaṅgaṇī 7305 Phụ Chú Giải Tiếp Theo Pañcapakaraṇa 7306 Abhidhammāvatāro-nāmarūpaparicchedo 7307 Abhidhammatthasaṅgaho 7308 Phụ Chú Giải Cổ Điển Abhidhammāvatāra 7309 Abhidhammamātikāpāḷi | |